Class 11

HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है?
(i) किसी तैराक द्वारा नदी के एक तट से दूसरे तट तक जाना और अपनी एक वापसी यात्रा पूरी करना।
(ii) किसी स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाए गए दण्ड चुम्बक को उसकी N-S दिशा से विस्थापित कर छोड़ देना।
(iii) अपने द्रव्यमान केन्द्र के परितः घूर्णी गति करता कोई हाइड्रोजन परमाणु ।
(iv) किसी कमान से छोड़ा गया तीर
उत्तर :
(i) तैराक को नदी के एक तट से दूसरे तट तक प्रत्येक बार जाने-आने पर लगे समय अलग-अलग होंगे अतः यह आवर्ती गति नहीं होगी।
(ii) यह आवर्ती गति होगी। चूँकि स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाया गया चुम्बक एक बार NS दिशा से विस्थापित करने के पश्चात् माध्य स्थिति के दोनों ओर दोलन करता है। अतः सरल आवर्त गति भी है। (iii) यह एक आवर्ती गति है क्योंकि गति स्वयं दोहराती है।
(iv) तीर कमान से छेड़ने के पश्चात् वह वापस प्रारम्भिक स्थिति में नहीं लौटता, अतः यह आवर्ती गति नहीं है।

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प्रश्न 2.
नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन (लगभग) सरल आवर्त गति को तथा कौन आवर्ती परन्तु सरल आवर्त गति निरूपित नहीं करते हैं?
(i) पृथ्वी की अपने अक्ष के परितः घूर्णन गति ।
(ii) किसी नली में दोलायमान पारे के स्तम्भ की गति ।
(iii) किसी चिकने वक्रीय कटोरे के भीतर एक बॉल बेयरिंग की गति जब उसे निम्नतम बिन्दु से कुछ ऊपर के बिन्दु से युक्त रूप से छोड़ा जाए।
(iv) किसी बहुपरमाणुक अणु की अपनी साम्यावस्था की स्थिति के परितः व्यापक कम्पन।
उत्तर :
(i) पृथ्वी की अपनी अक्ष के परितः गति आवर्त गति है, परन्तु सरल आवर्त नहीं।
(ii) U-नली में दोलायमान पारे के स्तम्भ की गति रेखीय सरल आवर्त गति है।
(iii) किसी चिकने चक्रीय कटोरे के भीतर बॉल बेयरिंग की गति सरल आवर्त गति है।
(iv) यह आवर्ती परन्तु सरल आवर्त गति को निरूपित नहीं करता है। किसी बहुपरमाणुक अणु की कई प्राकृतिक आवृत्तियाँ होती हैं। अतः व्यापक रूप में, इसका कम्पन विभिन्न आवृत्तियों की कई सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण होता है। यह अध्यारोपण आवर्ती तो होता है परन्तु सरल आवर्त गति से नहीं होता ।

प्रश्न 3.
चित्र में किसी कण की रैखिक गति के लिए चार xv आरेख दिए गए हैं। इनमें से कौन-सा आरेख आवर्ती गति का निरूपण करता है? उस गति का आवर्तकाल क्या है? (आवर्ती गति वाली गति का) ।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 1
उत्तर :
(a) ग्राफ में कण अपनी गति की पुनरावृत्ति नहीं करता है, अतः यह गति आवर्त गति नहीं है। किसी गति के लिए आवर्ती होने के लिए केवल किसी एक स्थिति की पुनरावृत्ति होना ही पर्याप्त नहीं होता। एक आवर्तकाल की समस्त गति की क्रमागत पुनरावृत्ति होनी चाहिए।
(b) इसमें कण प्रत्येक 2 सेकण्ड के पश्चात् अपनी गति की पुनरावृत्ति करता है, अतः यह गति एक आवर्ती गति है, जिसका आवर्तकाल 25 है।
(c) इसमें कण पूरी गति को नहीं दोहराता, यह केवल एक स्थिति में ही (शून्य विस्थापन) अपनी गति को दोहराता है, जो आवर्ती गति के लिए पर्याप्त नहीं है, अतः यह एक आवर्ती गति नहीं है।
(d) कण प्रत्येक 2 सेकण्ड के पश्चात् अपनी प्रारम्भिक स्थिति को दोहराता है, अतः यह गति एक आवर्ती गति है।

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए समय के फलनों में कौन (a) सरल आवर्त गति (b) आवर्ती परन्तु सरल आवर्त गति नहीं तथा (c) अनावर्ती गति का निरूपण करते हैं। प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए – (ω कोई धनात्मक अचर है।)
(a) sin ωt – cos ωt
(b) sin³ ωt
(c) 3 cos(\(\frac{π}{2}\) – 2ωt)
(d) cos ωt + cos 3 ωt + cos 5 ωf
(e) exp (- ω²t³)
(f) 1 + ωt + ω²t²
उत्तर :
सरल आवर्त गति हेतु त्वरण ∝ – विस्थापन
a ∝ -x
(a) दिया गया फलन
x = sin ωt – cos ωt
= √2(\(\sin ωt \cdot \frac{1}{\sqrt{2}}-\cos ωt \cdot \frac{1}{\sqrt{2}}\))
= √2(\(\sin ωt \cos \frac{\pi}{4}-\cos ωt \sin \frac{\pi}{4}\))
x = √2 sin(ωt – \(\frac{\pi}{4}\))
इससे स्पष्ट है कि यह फलन आयाम की सरल आवर्त गति को निरूपित करता है जिसका आवर्तकाल T = \(\frac{2π}{ω}\) है।

(b) फलन sin³ ωt आवर्त गति को निरूपित करता है इसका
आवर्तकाल T = \(\frac{2π}{ω}\) है, परन्तु यह सरल आवर्त गति निरूपित नहीं करता
( क्योंकि \(\overrightarrow{a}\) ≠ ω²x)

(c) 3 cos(\(\frac{π}{2}\) – 2ωt)
वेग v = \(\frac{dx}{dt}\) = 6ω sin(\(\frac{\pi}{4}\) – 2ωt)
तथा त्वरण a = \(\frac{dv}{dt}\)
= 12 ω² cos(\(\frac{\pi}{4}\) – 2ωt)
= -4ω²x
a = -(2ω)²x
अर्थात् a ∝ -x अतः यह एक सरल आवर्त गति है, इसका
आवर्तकाल T = \(\frac{2π}{2ω}=\frac{π}{ω}\)

(d) यह फलन भी आवर्त गति को निरूपित करता है जो कि सरल आवर्त गति नहीं है।
फलन cos ωt का आवर्तकाल T1 = \(\frac{2π}{ω}\)
फलन cos 3ωt का आवर्तकाल T2 = \(\frac{2π}{3ω}\)
फलन cos 5ωt का आवर्तकाल T3 = \(\frac{2π}{5ω}\)
यहाँ T1 = 3 T2 तथा T1 = 5 T3
अर्थात् जहाँ T1 समय पश्चात् प्रथम फलन की एक बार दूसरे की तीन बार तथा तीसरे की पाँच बार पुनरावृत्ति हो जाएगी।
अतः दिए गए फलन का आवर्तकाल T = T1 = \(\frac{2π}{ω}\)

(e) फलन exp (- ω²t³), आवर्ती फलन नहीं है।

(f) 1 + ωt + ω²t² जब t → ∞ तब फलन f(t) → ∞
अतः यह आवर्ती फलन नहीं है।

प्रश्न 5.
कोई कण एक-दूसरे से 10 cm दूरी पर स्थित दो बिन्दुओं A तथा B के बीच रैखिक सरल आवर्त गति कर रहा है। A से B की ओर की दिशा को धनात्मक मानकर वेग, त्वरण तथा कण पर लगे बल के चिह्न ज्ञात कीजिए जबकि यह कण-
(a) A सिरे पर है,
(b) B सिरे पर है,
(c) A की ओर जाते हुए AB के मध्य बिन्दु पर है,
(d) A की ओर जाते हुए B से 2 cm दूर है,
(e) B की ओर जाते हुए A से 3 cm दूर है, तथा
(f) A की ओर जाते हुए B से 4 cm दूर है।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 2
उत्तर :
स्पष्ट है कि बिन्दु A तथा B अधिकतम विस्थापन की स्थितियाँ हैं तथा इनका मध्य- बिन्दु 0 सरल आवर्त गति का केन्द्र है।
(a) A सिरे पर वेग शून्य है, त्वरण तथा बल दोनों धनात्मक हैं (दिशा A से O) अत:
उत्तर : 0, +, +
(b) B सिरे पर वेग शून्य हैं, त्वरण तथा बल दोनों ऋणात्मक हैं। (B से O की ओर)। अतः
उत्तर : 0, -, –
(c) AB के मध्य बिन्दु O पर A की ओर जाते हुए वेग (अधिकतम) ऋणात्मक है, त्वरण तथा बल शून्य है। अतः
उत्तर : -, 0, 0
(d) B से 2 cm दूर C बिन्दु पर, A की ओर जाते हुए वेग, त्वरण तथा बल सभी ऋणात्मक है। अतः
उत्तर : -, -, –
(e) A से 3 cm दूर D बिन्दु पर, B की ओर जाते हुए वेग, त्वरण तथा बल सभी धनात्मक हैं। अतः
उत्तर : +, +, +
(f) B से 4 cm दूर बिन्दु E पर, A की ओर जाते हुए, वेग, त्वरण तथा बल सभी ऋणात्मक है। अतः
उत्तर : -, -, –

प्रश्न 6.
किसी कण के त्वरण a और विस्थापन x के बीच निम्नलिखित में से किस संबंध में सरल आवर्त गति होती है?
(a) a = 0.7x
(b) a = – 200 x²
(c) a = – 10x
(d) a = 100 x³
उत्तर :
उपर्युक्त में से केवल सम्बन्ध (c) में a = – 10x, त्वरण विस्थापन के अनुक्रमानुपाती है तथा विस्थापन के विपरीत दिशाएँ हैं, अतः केवल यही सम्बन्ध सरल आवर्त गति को निरूपित करता है।

प्रश्न 7.
सरल आवर्त गति करते किसी कण की गति का वर्णन नीचे दिए गए विस्थापन फलन द्वारा किया जाता है,
x (t) = A cos (ωt + ϕ)
यदि कण की आरंभिक (0) स्थिति 1 cm तथा उसका आरंभिक वेग x cm s-1 है, तो कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या है ? कण की कोणीय आवृत्ति πs-1 है। यदि सरल आवर्त गति का वर्णन करने के लिए कोज्या (cos) फलन के स्थान पर हम ज्या (sin) फलन चुनें, x = B sin (ωt+ α), तो उपर्युक्त आरंभिक प्रतिबन्धों में कण का आयाम तथा आरंभिक कला कोण क्या होगा ?
उत्तर ;
दिए गए समीकरण में
x (t) = A cos (ωt + ϕ) ………..(1)
वेग v (t) = \(\frac{dx(t)}{dt}\) = Aω sin (ωt + ϕ) ………(2)
प्रश्नानुसार, t = 0, x = 1 cm तथा v= π cm s-1 तथा ω = π s-1
समीकरण (l) में रखने पर, A cos ϕ = 1 ………….(3)
अब समीकरण (2) मैं t = 0 पर v = π cm s-1, ω = π s-1 रखने पर,
π = – A π sin ϕ
A sin ϕ = -1 ……….(4)
समी (4) को समी (3) से भाग देने पर,
tan ϕ = -1
ϕ = tan-1(-1)
= \(\left(2 \pi-\frac{\pi}{4}\right)=\frac{7 \pi}{4}\)
समी (4) से, A = \(\frac{1}{\cos \phi}=\frac{1}{\cos \frac{7 \pi}{4}}\)
√2 = 1.41 cm
अत: आयाम = √2 cm तथा प्रारम्भिक कला = \(\frac{7 \pi}{4}\)
यदि सरल आवर्त गति का समीकरण
x=B sin (ωt + α) हो ………..(5)
तब वेग v = \(\frac{d x}{d t}=\mathrm{B} \omega \cos (\omega t+\alpha)\) ………….(6)
समीकरण (5) में t = 0 पर x = 1 cm रखने पर,
\(1=\mathrm{B} \sin \alpha \text { या } \mathrm{B}=\frac{1}{\sin \alpha}\) ………..(7)
समी (6) में t = 0 पर v = π cm s-1, ω = π s-1 रखने पर,
π = B π cos α ⇒ B cos α = 1
⇒ B = \(\frac{1}{cos α}\) ………….(8)
समीकरण (7) व (8) की तुलना करने पर,
\(\frac{1}{\sin \alpha}=\frac{1}{\cos \alpha}\)
या \(\sin \alpha=\cos \alpha \Rightarrow \alpha=\frac{\pi}{4}=45^{\circ}\)
∴ \(\mathrm{B}=\frac{1}{\sin \alpha}=\frac{1}{\sin 45^{\circ}}=\sqrt{2}\) cm
अतः आयाम = √2 cm तथा प्रारम्भिक कला कोण
=\(\frac{\pi}{4}\) = 45°

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प्रश्न 8.
किसी कमानीदार तुला का पैमाना 0 से 50 kg तक अंकित है और पैमाने की लम्बाई 20 cm है। इस तुला से लटकाया गया कोई पिण्ड, जब विस्थापित करके मुक्त किया जाता है, 0.65 के आवर्तकाल से दोलन करता है। पिण्ड का भार कितना है?
हल :
दिया है, यदि m = 50 kg तब कमानी की लम्बाई में वृद्धि l = 20 cm
∴ mg = kl सूत्र से,
k = \(\frac{\mathrm{mg}}{0.2}=\frac{50 \times 9.8}{0.2} \mathrm{Nm}^{-1}\) = 2450 Nm-1
यदि दोलन करने वाले पिण्ड का द्रव्यमान W’ है, तब
\(\mathrm{T}=2 \pi \sqrt{\frac{m^{\prime}}{k}} \Rightarrow m^{\prime}=\frac{k \mathrm{~T}^2}{4 \pi^2}\)
\(m^{\prime} =\frac{2450 \times(6 \cdot 0)^2}{4 \times(3 \cdot 14)^2}=22.36 \mathrm{~kg}\)
∴ पिण्ड का भार m’g = 22.36 98 = 219 N

प्रश्न 9.
1200 Nm कमानी स्थिरांक की कोई कमानी चित्र में दर्शाए अनुसार किसी क्षैतिज मेज से जुड़ी है। कमानी के मुक्त सिरे से 3 kg द्रव्यमान का कोई पिण्ड जुड़ा है। इस पिण्ड को एक ओर 2.0 दूरी तक खींच कर मुक्त किया जाता है,
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 3
(i) पिण्ड के दोलन की आवृत्ति,
(ii) पिण्ड का अधिकतम त्वरण तथा
(iii) पिण्ड की अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है, बल नियतांक k = 1200 Nm-1, m = 3 kg
∵ पिण्ड को 2 cm तक खींचकर छोड़ा गया है
अतः पिण्ड के दोलनों का आयाम
a = 2 cm = 0.02m होगा
(i) दोलन आवृत्ति v = \(\frac{1}{2}\)
v = \(\frac{1}{T}=\frac{1}{2 \pi} \sqrt{\frac{k}{m}}\)
v = \(\frac{1}{2 \times 3.14} \sqrt{\frac{1200}{3}}\)
\(\frac{20}{6.28}\) = 3.18 ≈ 3.2 s-1

(ii) सरल आवर्त गति का कोणीय वेग
ω = 2πv
= 2 π × 3.2
= 20 rad s-1
अधिकतम त्वरण α = ω²a = (20)² × 0.02
= 8 ms²

(iii) पिण्ड की अधिकतम चाल
umax = aω = 0.02 × 20 = 0.4 ms-1

प्रश्न 10.
प्रश्न 9 में मान लीजिए जब कमानी अतानित अवस्था में है, तब पिण्ड की स्थिति है तथा बाएँ से दाएँ की दिशा अक्ष की धनात्मक दिशा है। दोलन करते पिण्ड के विस्थापन x को समय के फलन के रूप में दर्शाइए, जबकि विराम घड़ी को आरम्भ (४0) करते समय पिण्ड,
(a) अपनी माध्य स्थिति,
(b) अधिकतम तानित स्थिति, तथा
(c) अधिकतम सम्पीडन की स्थिति पर है।
सरल आवर्त गति के लिए ये फलन एक-दूसरे से आवृत्ति में, आयाम में अथवा आरंभिक कला में किस रूप में भिन्न हैं?
हल :
(a) माना कण का विस्थापन समीकरण
x = a cos (ωt – ϕ) ……….(1)
t = 0, x = 0 व a = 2.0 cm रखने पर,
0 = 2.0 cos ϕ
⇒ cos ϕ = 0 = cos \(\frac{π}{2}\)
⇒ ϕ = cos \(\frac{π}{2}\)
अतः x = 2 cos (ωt – \(\frac{π}{2}\))
= 2.0 sin ωt
परन्तु प्रश्न 9 से, ω = 20 rad s-1
अत : x = 2 sin 20 t

(b) अधिकतम तानित स्थिति में t = 0 पर x = 2 cm (अधिकतम)
अत: t = 0, x = 2 cm तथा a = cm समीकरण (1) में रखने पर,
2 = 2 cos ϕ
⇒ cos ϕ =1
cos ϕ =cos θ = 1
⇒ ϕ = θ
अतः अभीष्ट समीकरण x = 2 cos ωt
x = 2 cos 20 t
(ω = 20 rad s-1)

(c) अधिकतम सम्पीडन की स्थिति में
x = -a = -2.0 cm होगा
∴ t = 0, x = 2 cm तथा a = 2 cm समी. (i) में रखने पर,
– 2 = 2 cos ϕ
⇒ cos ϕ = -1
∴ ϕ = π
अतः अभीष्ट समीकरण x = 2 cos (ωt – π)
x = -2 cos ωt
∴ x = 2 cos 20 t
यहाँ x cm में है। इन फलनों के न तो आयाम में कोई अन्तर है और न ही आवृत्ति में कोई अन्तर है इनकी प्रारंभिक कलाओं में अन्तर है।

प्रश्न 11.
चित्र में दिए गए दो आरेख दो वर्तुल गतियों के तदनुरूपी हैं। प्रत्येक आरेख पर वृत्त की त्रिज्या, परिक्रमण काल, आरंभिक स्थिति और परिक्रमण की दिशा दर्शायी गई है। प्रत्येक प्रकरण में, परिक्रमण करते कण के त्रिज्य सदिश के अक्ष पर प्रक्षेप की तदनुरूपी सरल आवर्त गति ज्ञात कीजिए।
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हल :
त्रिज्य सदिश के x- अक्ष पर प्रक्षेप के लिए समीकरण निम्नवत् है-
x = a cos (ωt + ϕ) ………….(1)
(a) यहाँ a → त्रिज्य सदिश का अधिकतम प्रक्षेप 3 cm,
आवर्तकाल T = 2 sec
तथा कोणीय आवृत्ति ω = \(\frac{2 \pi}{\mathrm{T}}=\frac{2 \pi}{2}=\pi \mathrm{rad} \mathrm{s}^{-1}\)
∵ कण दक्षिणावर्त (clockwise) चल रहा है अत: प्रारम्भिक कला
ϕ = +\(\frac{π}{2}\)
∴ समीकरण (1) से,
x = 3 cos(πt + \(\frac{π}{2}\))
या x = sin πt (x cm)

(b) यहाँ a = 2m, T = 4 sec
कोणीय आवृत्ति, ω = \(\frac{2 \pi}{\mathrm{T}}=\frac{2 \pi}{2}=\frac{\pi}{2} \mathrm{rad} \mathrm{s}^{-1}\)
∵ कण वामावर्त (anticlockwise) चल रहा है, 10 पर x प्रक्षेप बायीं ओर किनारे पर है,
ϕ = +π
समी (1) से x = 2 cos (\(\frac{π}{2}\)t – π)
या x = 2 cos \(\frac{π}{2}\)t (x मीटर में है)

प्रश्न 12.
नीचे दी गई प्रत्येक सरल आवर्त गति के लिए तदनुरूपी निर्देश वृत्त का आरेख खींचिए घूर्णी कण की आरंभिक (20) स्थिति, वृत्त की त्रिज्या तथा कोणीय कला दर्शाइए। सुगमता के लिए प्रत्येक प्रकार में परिक्रमण की दिशा वामावर्त लीजिए। (x को cm में तथा को में लीजिए ।)
(a) x = – 2 sin (3t + π /3)
(b) x = cos (π /6 – t)
(c) x = 3 sin (2πt + π /4)
(d) x = 2 cos π t.
हल :
(a)
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(b)
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(c)
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 7
(d) x = 2 cos π t.
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 8
इसकी तुलना समीकरण x = a cos (ωt + ϕ) से करने पर,
a = 2 cm, ω = π rad s-1 ,ϕ = 0

प्रश्न 13.
चित्र (a) में बल स्थिरांक की किसी कमानी के एक सिरे को किसी दृढ़ आधार से जकड़ा तथा दूसरे मुक्त सिरे से एक द्रव्यमान 1 जुड़ा दर्शाया गया है कमानी के मुक्त सिरे पर बल आरोपित करने से कमानी तन जाती है। चित्र (b) में उसी कमानी के दोनों मुक्त सिरों से द्रव्यमान 18 जुड़ा दर्शाया गया है। कमानी के दोनों सिरों को चित्र में समान बल द्वारा तानित किया गया है।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 9
(i) दोनों प्रकरणों में कमानी का अधिकतम विस्तार क्या है?
(ii) यदि (a) तथा (b) के सभी द्रव्यमानों को मुक्त छोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक प्रकरण में दोलन का आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
हल :
(i) माना कमानी का अधिकतम विस्तार xmax है, तब चित्र (a)
में, F = k xmax
∴ अधिकतम विस्तार xmax = \(\frac{F}{k}\)
तथा चित्र (b) में कमानी किसी स्थिर वस्तु से सम्बद्ध नहीं है अतः दूसरे पिण्ड पर लगे बल का कार्य केवल कमानी को स्थिर रखना है, अतः विस्तार अभी भी मात्र एक ही बल के कारण होगा।
∴ F = -k xmax से,
अधिकतम विस्थापन xmax = \(\frac{F}{k}\)

(ii) चित्र (a) में –
माना कि पिण्ड को खींचकर छोड़ने पर वापसी की गति करता पिण्ड किसी क्षण साम्यावस्था से दूरी पर है, तब कमानी में प्रत्यानयन बल F = -kx होगा।
यदि पिण्ड का त्वरण a है, तो F = ma
∴ ma = – kxmax
=> a = -(\(\frac{k}{m}\)) x
स्पष्ट है कि पिण्ड की गति सरल आवर्त गति है।
इस समीकरण से, \(\frac{x}{a}=\frac{m}{k}\)
∴ पिण्ड के दोलनों का आवर्तकाल
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चित्र (b) में –
जब दोनों द्रव्यमानों को छोड़ दिया जाता है तो द्रव्यमान केन्द्र की प्रमेय से प्रत्येक (समान) द्रव्यमान उसी मात्रा में विपरीत दिशा में विस्थापित हो जाता है, अतः कमानी का कुल विस्तार = 2x
प्रत्येक द्रव्यमान पर प्रत्यानयन बल F = -k.2x
प्रत्येक द्रव्यमान की गति का समीकरण है-
ma = k. (2x)
या a = -(\(\frac{2k}{m}\))x
∴ पिण्ड की गति सरल आवर्त गति है।
\(\frac{x}{a}=\frac{m}{2k}\) (आंकिक रूप से)
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प्रश्न 14.
किसी रेलगाड़ी के इंजन के सिलेण्डर हेड में पिस्टन का स्ट्रोक (आयाम का दो गुना) 1.0m का है। यदि पिस्टन 200 rad/min की कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति करता है, तो उसकी अधिकतम चाल कितनी है?
हल :
दिया है, स्ट्रोक की लम्बाई = 1.0m
यदि सरल आवर्त गति का आयाम R है, तब
2A = 1.0
या A = 0.5 मीटर
तथा कोणीय आवृत्ति ω = 200 rad/min
= \(\frac{200}{60}\) rad s-1
∴ ω = \(\frac{10}{3}\) rad s-1
अतः पिस्टन की अधिकतम चाल
umax = Aω
= 0.5 × \(\frac{10}{3}\)
= \(\frac{5}{3}\) m/s

प्रश्न 15.
चन्द्रमा के पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण 1.7 ms है। यदि किसी सरल लोलक का पृथ्वी के पृष्ठ पर आवर्तकाल 3.55 है, तो उसका चन्द्रमा के पृष्ठ पर आवर्तकाल कितना होगा?
(पृथ्वी के पृष्ठ पर g = 9.8ms-2)
हल :
सरल लोलक का आवर्तकाल T = 2π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\)
l के निश्चित मान के लिए T ∝ \(\frac{1}{\sqrt{g}}\)
यदि चन्द्रमा तथा पृथ्वी के पृष्ठ पर गुरुत्वीय त्वरण gm तथा ge हाँ तथा संगत आवर्तकाल क्रमश: Tm व Te हों, तो
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प्रश्न 16.
नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(a) किसी कण की सरल आवर्त गति के आवर्तकाल का मान उस कण के द्रव्यमान तथा बल- स्थिरांक पर निर्भर करता है : T = 2π\(\sqrt{\frac{m}{k}}\) । कोई सरल लोलक सन्निकट सरल आवर्त गति करता है, तब फिर किसी लोलक का आवर्तकाल लोलक के द्रव्यमान पर निर्भर क्यों नहीं करता ?
(b) किसी सरल लोलक की गति छोटे कोण के सभी दोलनों के लिए सन्निकट सरल आवर्त गति होती है। बड़े कोण के दोलनों के लिए एक अधिक गूढ़ विश्लेषण यह दर्शाता है कि T का मान 2π\(\sqrt{\frac{m}{k}}\) से अधिक होता है। इस परिणाम को समझने के लिए किसी गुणात्मक कारण का चिन्तन कीजिए।
(c) कोई व्यक्ति कलाई घड़ी बाँधे किसी मीनार की चोटी से गिरता है। क्या मुक्त रूप से गिरते समय उसकी घड़ी यथार्थ समय बताती है?
(d) गुरुत्व बल के अन्तर्गत मुक्त रूप से गिरते किसी केबिन में लगे सरल लोलक के दोलन की आवृत्ति क्या होती है?
उत्तर :
(a) सरल लोलक के लिए
F = \(-\frac{mg}{l}\) y = -ky
∴ k = \(\frac{mg}{l}\)
सरल लोलक का आवर्तकाल
T = \(2 \pi \sqrt{\frac{m}{k}}=2 \pi \sqrt{\frac{m}{\left(\frac{m g}{\dot{l}}\right)}}=2 \pi \sqrt{\left(\frac{l}{g}\right)}\)
इसलिए किसी लोलक का आवर्तकाल, लोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

(b) सरल लोलक के लिए प्रत्यानयन बल
F = -mg sin θ
यदि छोटा है, तो sin θ ≈ θ ≈ \(\frac{x}{l}\)
∴ F = -(\(\frac{mg}{l}\))x
या F ∝ -x
अर्थात् यह गति सरल आवर्त होगी तथा आवर्तकाल T = 2π\(\sqrt{\frac{l}{g}}\) होगा। यदि θ छोटा नहीं है तो हम sin θ ≈ θ नहीं ले पाएँगे तब गति सरल आवर्त गति नहीं रहेगी। अतः आवर्तकाल T = 2π\(\sqrt{\frac{l}{g}}\) से बड़ा होगा।
θ के बड़े कोणों के लिए, हम F = -mg sin θ लेंगे, जो कि निश्चय ही mg होता है क्योंकि 6 के बड़े मानों के लिए sin θ < θ होता है। इसलिए बड़े 8 के लिए 8 का प्रभावित मान g sin θ हो जाता है। स्पष्टत: g sine<g.

(c) कलाई घड़ी की कार्यविधि स्प्रिंग क्रिया पर आधारित है, अतः आवर्तकाल T = 2π\(\sqrt{\frac{m}{k}}\) के मान पर निर्भर नहीं करता, अत: मुक्त रूप से गिरते समय कलाई घड़ी यथार्थ समय बताती है।

(d) मुक्त रूप से गिरते केबिन में गुरुत्वीय त्वरण का प्रभावी मान शून्य होता है अतः उसमें लगे सरल लोलक की आवृत्ति
f = \(\frac{1}{\mathrm{~T}}=\frac{1}{2 \pi} \sqrt{\frac{g}{l}}\) शून्य है।

प्रश्न 17.
किसी कार की छत से / लम्बाई का कोई सरल लोलक, जिसके लोलक का द्रव्यमान है, लटकाया गया है। कार R त्रिज्या की वृत्तीय पथ पर एकसमान चाल से गतिमान है। यदि लोलक त्रिज्य दिशा में अपनी साम्यावस्था की स्थिति के इधर-उधर छोटे दोलन करता है तो इसका आवर्तकाल क्या होगा ?
उत्तर :
कार के मोड़ पर मुड़ते समय उसकी गति में \(\frac{v^2}{R}\) अभिकेन्द्रीय त्वरण होता है। इस प्रकार कार एक अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र है।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 13
गोलक पर एक छद्म बल \(\frac{mv^2}{R}\) वृत्तीय पथ के बाहर की ओर लगेगा जिसके कारण लोलक ऊर्ध्वाधर रहने के स्थान पर थोड़ा तिरछा हो जाएगा। इस समय गोलक पर दो बल क्रमशः भार mg तथा अपकेन्द्रीय बल \(\frac{mv^2}{R}\)

यदि गोलक के लिए 8 का प्रभावी मान है तो गोलक पर प्रभावी g बल mg होगा जो कि उक्त दो बलों का परिणामी है।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 14

प्रश्न 18.
आधार क्षेत्रफल A तथा ऊँचाई के एक कॉर्क का बेलनाकार टुकड़ा 1 घनत्व के किसी द्रव में तैर रहा है। कॉर्क को थोड़ा नीचे दबाकर स्वतन्त्र छोड़ देते हैं। यह दर्शाइए कि कॉर्क ऊपर-नीचे सरल आवर्त दोलन करता है जिसका आवर्तकाल \(2 \pi \sqrt{h \rho / \rho_1 g}\) है।
यहाँ कॉर्क का घनत्व है (द्रव की श्यानता के कारण अवमन्दन को नगण्य मानिए)।
उत्तर :
माना कॉर्क के टुकड़े का द्रव्यमान है। माना साम्यावस्था मैं इसकी l लम्बाई द्रव में डूबी है। अतः तैरने के सिद्धान्त से, कॉर्क के डूबे भाग द्वारा हटाए गए द्रव का भार कॉर्क के भार के बराबर होगा,
अतः Vρ1.g = mg [∵ द्रव्यमान आयतन × घनत्व ]
जहाँ V डूबे भाग द्वारा हटाए गए द्रव का आयतन है।
यदि कॉर्क का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है, तो V = Al
∴ (A) ρ1.g = mg अथवा Aρ1.l = m
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 15
माना किसी क्षण कॉर्क को द्रव में नीचे दबाने पर किसी क्षण साम्यावस्था से नीचे की और विस्थापन है, इस स्थिति में, इसकी लम्बाई के द्वारा हटाए गए द्रव का उत्क्षेप बेलनाकार बर्तन को प्रत्यानयन बल F प्रदान करेगा।
अतः F =- Ay ρ1g
∴ a = \(\frac{\mathrm{F}}{m}=\frac{-\mathrm{Ay} \rho_1 g}{m}\) ………..(1)
कॉर्क के टुकड़े की ऊँचाई 1⁄2 व घनत्व है अतः
m = Aρh
अतः त्वरण a = \(\frac{-\mathrm{Ay} \rho_1 g}{Aρh}\) = \(-\left(\frac{\rho_1 g}{h \rho}\right) y\) …………..(2)
∵ \(\frac{\rho_1 g}{h \rho}\) एक नियतांक है अतः a ∝ -y
इस प्रकार कॉर्क के टुकड़े का त्वरण a. विस्थापन के अनुक्रमानुपाती एवं विपरीत दिशा में है, अत: कॉर्क के टुकड़े की गति सरल आवर्त गति है।
समीकरण (2) से,
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 16

HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 19.
पारे से भरी किसी नली का एक सिरा किसी चूषण पम्प से जुड़ा है, तथा दूसरा सिरा वायुमण्डल में खुला छोड़ दिया गया है। दोनों स्तम्भों में कुछ दाबान्तर बनाए रखा जाता है। यह बताइए कि जब चूषण पम्प को हटा देते हैं, तब नली में पारे का स्तम्भ सरल आवर्त गति करता है।
उत्तर :
चूषण पम्प के न जुड़ा होने पर समान होंगे। यह साम्यावस्था की स्थिति है वाली नली में पारे का तल ऊपर उठ जाता दोनों नलियों में पारे के तल चूषण पम्प लगाने पर पम्प है तथा पम्प हटाते ही पारा साम्यावस्था को प्राप्त करने का प्रयास करता है।
माना पम्प हटाने पर किसी क्षण दूसरी नली में पारे का तल साम्यावस्था से y दूरी नीचे है तो दूसरी ओर यह y दूरी ऊपर होगा।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 17
यदि नली की एकांक लम्बाई में भरे पारे का द्रव्यमान in है तो पम्प वाली नली में चढ़े अतिरिक्त पारे के स्तम्भ का भार 2 mg होगा, यह भार ही द्रव को दूसरी ओर धकेलता है।
अतः प्रत्यानयन बल F = -2mgy
ऋण चिह्न बताता है कि यह बल विस्थापन y के विपरीत दिशा में है ।
माना साम्यावस्था में दोनों नलियों में पारे के स्तम्भ की ऊँचाई है, तब नलियों में भरे पारे का कुल द्रव्यमान M = 2mh होगा।
यदि पारे के स्तम्भ का त्वरण हो, तब F = Ma
– 2mgy = 2hma
त्वरण a = -(\(\frac{g}{h}\)) y
अत: a ∝ -y
अतः पारे के स्तम्भ की गति सरल आवर्त गति है।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 18

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 20.
चित्र में दर्शाए अनुसार v आयतन के किसी वायु कक्ष की ग्रीवा (गर्दन) की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A है। इस ग्रीवा में द्रव्यमान की कोई गोली बिना किसी घर्षण के ऊपर-नीचे गति कर सकती है। यह दर्शाइए कि जब गोली को थोड़ा नीचे दबाकर मुक्त छोड़ देते हैं, तो वह सरल आवर्त गति करती है। दाब आयतन विचरण को समतापी मानकर दोलनों के आवर्तकाल का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 19
उत्तर :
जब गोली को थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ते हैं तो गोली अपनी साम्यावस्था के ऊपर-नीचे सरल रेखीय दोलन करने लगती है।
माना किसी क्षण गोली का साम्यावस्था से नीचे की ओर विस्थापन x है। माना इस स्थिति में कक्ष में भरी वायु का आयतन V घटकर (V – ∆V) हो जाता है तथा दाब P से बढ़कर (P – ∆P) हो जाता है। समतापी परिवर्तन में, बॉयल के नियम से,
PV = (P+ ∆P) (V- ∆V)
या PV = PV + ∆PV – P∆V – ∆P∆V
∆P∆V अत्यन्त सूक्ष्म राशि है, अतः इसे नगण्य मानने पर,
∆PV = P∆V
∴ P = \(\frac{∆P}{∆V/V}\)
∵ ET = P = वायु की समतापी प्रत्यास्थता
ET = \(\frac{∆P}{∆V/V}\) ⇒ ∆P = ET\(\frac{∆V}{V}\)
या अभिलम्ब प्रतिबल = \(\frac{F}{A}\) = ET\(\frac{∆V}{V}\)
जहाँ F वायु द्वारा गोली पर आरोपित बल है तथा A ग्रीवा का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल है।
ग्रीवा में गोली का नीचे की ओर विस्थापन है अतः वायु x आयतन में कमी ∆V = Ax होगी।
अतः \(\frac{F}{A}\) = ET\(\frac{∆V}{V}\)
या F = (\(\frac{E_T A^2}{V}\)) x
गोली पर वायु द्वारा लगाया गया यह बल बाहर की ओर (साम्यावस्था की ओर) लगता है, अतः यह बल गोली में विस्थापन के विपरीत है अर्थात् यह एक प्रत्यानयन बल है।
यदि गोली का त्वरण a है तो F = ma से,
ma = (\(\frac{E_T A^2}{V}\)) x
a = (\(\frac{E_T A^2}{Vm}\)) x
ऋण चिह्न प्रदर्शित करता है कि त्वरण विस्थापन के विपरीत है।
अतः त्वरण ∝ विस्थापन (-x)
अतः गोली की गति सरल आवर्त गति है।
HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 14 दोलन - 20

प्रश्न 21.
आप किसी 3000 kg द्रव्यमान के स्वचालित वाहन पर सवार हैं। यह मानिए कि आप इस वाहन की निलम्बन प्रणाली के दोलनी अभिलक्षणों का परीक्षण कर रहे हैं जब समस्त वाहन इस पर रखा जाता है, तब निलम्बन 15 cm अतानित होता है। साथ ही एक पूर्ण दोलन की अवधि में दोलन के आयाम में 50% घटोत्तरी हो जाती है। निम्नलिखित के मानों का आकलन कीजिए-
(a) कमानी स्थिरांक, तथा
(b) कमानी तथा एक पहिए के प्रघात अवशोषक तन्त्र के लिए अवमन्दन स्थिरांक 61
यह मानिए कि प्रत्येक पहिया 750 kg द्रव्यमान वहन करता है।
हल :
चारों कमानियों द्वारा साधित कुल भार = Mg
अतः l कमानी द्वारा साधित भार = \(\frac{Mg}{4}\)
यदि स्प्रिंग नियतांक तथा झुकाव x हो, तो
\(\frac{Mg}{4}\) = kx
तब k = \(\frac{Mg}{4x}\) = \(\frac{3000 × 10}{4 × 0.15}\)
= 5 × 104 Nm-1

(b) माना प्रारम्भ में दोलनों का आयाम A है, तब समय बाद अवमन्दन के कारण नया आयाम At = A0e-bt/2m होगा।
प्रश्नानुसार, एक दोलन में t = T तथा At = \(\frac{A_0}{2}\)

प्रश्न 22.
यह दर्शाइए कि रैखिक सरल आवर्त गति करते किसी कण के लिए दोलन की किसी अवधि की औसत गतिज ऊर्जा उसी अवधि की औसत स्थितिज ऊर्जा के समान होती है।
उत्तर :
माना द्रव्यमान का कोई कण कोणीय आवृत्ति से सरल आवर्त गति कर रहा है, जिसका आयाम A हैं।
माना गति अधिकतम विस्थापन की स्थिति से प्रारम्भ होती है तब t समय में कण का विस्थापन
x= A cos ωt
इस स्थिति में कण की गतिज ऊर्जा K = \(\frac{1}{2}\) mu²

प्रश्न 23.
10 kg द्रव्यमान की कोई वृत्तीय चक्रिका अपने केन्द्र से जुड़े किसी तार से लटकी है। चक्रिका को घूर्णन देकर तार में ऐंठन उत्पन्न करके मुक्त कर दिया जाता है। मरोड़ी दोलन का आवर्तकाल 1.5s है। चक्रिका की त्रिज्या 15 cm है। तार का मरोड़ी कमानी नियतांक ज्ञात कीजिए। मरोड़ी कमानी नियतांक α सम्बन्ध J = -αθ द्वारा परिभाषित किया जाता है, यहाँ प्रत्यानयन बल युग्म है तथा θ ऐंठन कोण है।
उत्तर :
चक्रिका का अपने केन्द्र से गुजरने वाले तथा तल के लम्बवत् अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण

प्रश्न 24.
कोई वस्तु 5 cm के आयाम तथा 0.2 सेकण्ड की आवृत्ति से सरल आवर्त गति करती है। वस्तु का त्वरण तथा वेग ज्ञात कीजिए जब कि वस्तु का विस्थापन (a) 5 cm (b) 3 cm (c) 0cm हो।
उत्तर :
दिया है: A = 5 cm = 0.05m. T = 0.25
∴ ω = \($\frac{2 \pi}{T}=\frac{2 \pi}{0.2}$\) = 10 π rad s-1

(a) जब विस्थापन = 5 cm = a अर्थात् अधिकतम विस्थापन है, तब
त्वरण
a = -ω²x = -(10π)² × 0.05m = 5π² ms-2
तथा इस क्षण वेग u = ω\(\sqrt{R^2 – x^2}\) = 0

(b) जब विस्थापन x = 3 cm = 0.03m, तब
त्वरण a = -ω²x = -(10π)² × 0.03 = -3π² ms-2
तथा वेग u = ω\(\sqrt{R^2 – x^2}\)
∴ u = 10π \(\sqrt{(0.05)^2 – (0.03)^2}\)
= 10π × 0.04 = 0.4π ms-1

(c) जब विस्थापन x = 0 है, तो
त्वरण a = -ω²x = 0
तथा वेग u = ω\(\sqrt{R^2 – x^2}\)
= 10π \(\sqrt{(0.05)^2 – 0^2}\)
∴ u = 0.5π ms-1

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प्रश्न 25.
किसी कमानी से लटका एक पिण्ड एक क्षैतिज तल में कोणीय वेग से घर्षण या अवमंदन रहित दोलन कर सकता है। इसे जब दूरी तक खींचते हैं और खींचकर छोड़ देते हैं तो यह सन्तुलन केन्द्र से समय t = 0 पर, v0 वेग से गुजरता है। प्राचल ω, x0 तथा v0 के पदों में परिणामी दोलन का आयाम ज्ञात करिए।
(संकेत: समीकरण x = a cos (ωt + θ) से प्रारम्भ कीजिए। ध्यान रहे कि प्रारंभिक वेग ऋणात्मक है।)
उत्तर :
माना सरल आवर्त गति का समीकरण
x = R cos (ωt + θ) …(1)
तब वेग u = \(\frac{d x}{d t}\)
⇒ u = \(-\omega \mathrm{R} \sin (\omega t+\theta)\) ………….(2)
∴ समय t = 0 पर x = x0 अतः समी (1) से,
x0 = R cos
तथा t = 0 पर v = v0 अतः समी (2) से,
\(\frac{-v_0}{\omega}=\mathrm{R} \sin \theta\)
समी (3) व (4) के वर्गों का योग करने पर,
\(x_0^2+\frac{v_0^2}{\omega^2}=\mathrm{R}^2\left(\cos ^2 \theta+\sin ^2 \theta\right)=\mathrm{R}^2\)
अतः आयाम \(\mathrm{R}=\sqrt{x_0^2+\frac{v_0^2}{\theta^2}}\)

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HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

प्रश्न 1.
एक शब्द या एक पंक्ति में उत्तर दीजिए-
(i) पेरिप्लेनेटा अमेरिकाना का सामान्य नाम लिखिए।
(ii) केंचुए में कितनी शुक्रधानियाँ पायी जाती हैं ?
(iii) तिलचट्टे में अण्डाशय की स्थिति क्या है ?
(iv) तिलचट्टे के उदर में कितने खण्ड होते हैं ?
(v) मैलपीघी नलिकाएँ कहाँ पायी जाती हैं ?
उत्तर:
(i) पेरिप्लेनेटा अमेरिकाना (Periplanata americana) का सामान्य नाम कॉकरोच या तिलचट्टा (cockroach)
(ii) केंचुए में चार जोड़ी शुक्रधानियाँ ( spermathec) पायी जाती हैं।
(iii) तिलचट्टे में अण्डाशय उदर के 4, 5 व 6वें खण्ड में स्थित होते हैं।
(iv) तिलचट्टे के उदर में 10 खण्ड होते हैं।
(v) मैलपीघी नलिकाएँ कीटों की आहार नाल के मध्यान्त्र तथा पश्चात्र (hindgut) के मध्य स्थित होती हैं ।

HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

प्रश्न 2.
निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) वृक्कक का क्या कार्य है ?
(ii) अपनी स्थिति के अनुसार केंचुए में कितने प्रकार के वृक्कक पाये जाते हैं ?
उत्तर:
(i) वृक्कक (नेफ्रीडिया – Nephridia) का कार्य-संघ एनेलिडा के प्राणियों में उत्सर्जन के लिए विशेष प्रकार की कुण्डलित रचनाएँ पायी जाती हैं, जिन्हें वृक्कक (नेफ्रीडिया) कहते हैं। ये जल सन्तुलन करने का कार्य भी करती हैं।
(ii) वृक्कक के प्रकार – स्थिति के अनुसार तीन प्रकार के होते हैं-
(1) पटीय वृक्कक (Septal nephridia),
(2) अध्यावरणी वृक्कक ( Integumentary nephridia),
(3) प्रसनीय वृक्कक (Pharyngeal nephridia)।

प्रश्न 3.
केंचुए के जननांगों का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
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प्रश्न 4.
तिलचट्टे की आहारनाल का नामांकित बनाइए ।
उत्तर:
HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन 2

प्रश्न 5.
निम्न में विभेद करें-
(अ) पुरोमुख एवं परितुण्ड,
(ख) पटीय (Septal) वृक्कक और प्रसनीय वृक्कक ।
उत्तर:
(अ) परोमुख एवं परितुण्ड में अन्तर (Differences betwene Prostomiun and Peristomium) –

परोमुख (Prostomium)परितुण्ड (Peristomium)
1. केंचुए के प्रथम खण्ड परितुण्ड (Peristomium) से एक मांसल पिण्ड मुख के आगे लटका रहता है जिसे मुखाग्र या परोमुख (prostomium) कहते हैं।1. केंचुए के अगले सिरे पर स्थित प्रथम खण्ड को परितुण्ड (peristomium) कहते हैं ।
2. परोमुख के ऊपर प्रकाशप्राही अंग पाये जाते हैं जिससे केंचुए को प्रकाश व अन्धकार का ज्ञान हो जाता है। यह भाग सुरंग बनाने में भी सहायक होता है।2. परितुण्ड में आगे की ओर अधर तल पर मुखद्वार स्थित होता है। यह भोजन ग्रहण करने तथा प्रचलन में सहायक होता है।

(ब) पटीय एवं प्रसनीय वृक्कक में अन्तर (Differences between Septal and Pharyngeal nephrldia).

पटीय वृक्कक (Septal nephridia)ग्रसनीय वृक्कक (Pharyngeal nephridia)
1. ये वृक्कक केंचुए के 15वें खण्ड के बाद वाले सभी खण्डों में प्रत्येक पट की दोनों सतहों पर स्थित होते हैं।1. ये वृक्कक 4 वें, 5वें तथा 6वें खण्डों में आहार नाल के इधर-उधर युग्मित गुच्छों के रूप में स्थित होते हैं।
2. प्रत्येक वृक्कक (nephron ) के चार भाग होते हैं – वृक्कक मुख (nephrostome), ग्रीवा, वृक्कक काय तथा अन्तस्थ वाहिनी ।2. प्रसनीय वृक्कक (pharyngeal nephrom) में वृक्कक मुखिका तथा ग्रीवा नहीं होती है। केवल वृक्कक काय तथा अन्तस्थ वाहिनी पायी जाती है ।
3. वृक्कक काय के दो भाग होते हैं-सीधी पालि तथा कुण्डलित लूप । कुण्डलित लूप की लम्बाई सीधी पालि से लगभग दुगुनी होती है।3. वृक्कक काय की सीधी पालि तथा कुण्डलित लूप की लम्बाई बराबर होती है ।
4. अन्तस्थ नलिका आन्त्र में खुलती है।4. अन्तस्थ नलिका प्रसनी (pharynx) तथा प्रसिका में खुलती है।

HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

प्रश्न 6.
रुधिर के कणिकीय अवयव क्या हैं ?
उत्तर:
रुधिर के कणिकीय अवयव (Cellular Components of Blood) – रुधिर एक तरल संयोजी (liquid connective tissue) ऊतक है। यह हल्के या गहरे लाल रंग, अपारदर्शी, गाढ़ा, क्षारीय व स्वाद में नमकीन होता है। रुधिर के दो मुख्य घटक होते हैं-
(क) प्लाज्मा (Plasma) – यह निर्जीव तरल मैट्रिक्स होता है।
(ख) रुधिर कणिकाएँ (Blood carpuscles) – यह रुधिर का कणिकीय भाग है।
रुधिर कणिकाएँ रुधिर का लगभग 45% भाग बनाती हैं। ये तीन प्रकार की होती हैं-लाल रुधिर कणिकाएँ, श्वेत रुधिर कणिकाएँ तथा रुधिर प्लेटलैट्स ।

(1) लाल रुधिर कणिकाएँ या इरीथ्रोसाइट (Red Blood Corpuscles – R. B.Cs.) – R. B. Cs. सभी कशेरुकी (Vertebrates) जन्तुओं में पायी जाती हैं तथा 99% रुधिर कणिकाएँ लाल रंग की होती हैं। मनुष्य के R.B.Cs. छोटे, चपटे, गोल तथा दोनों ओर बीच में दबे हुए होते हैं। इनमें केन्द्रक ( nucleus) नहीं होता है । 1 घन मिमी. में इनकी संख्या लगभग 55 लाख होती है। इनका व्यास 8.0 तथा मोटाई 1-24 होती है। इनका जीवनकाल 120 दिन होता है ।

इनका निर्माण अस्थियों की लाल मज्जा (Red bone mauow) में होता है। इनमें हीमोग्लोबिन नामक पदार्थ पाया जाता है, जिससे रक्त लाल रंग का दिखायी देता है। इनका प्रमुख कार्य ऑक्सीजन का परिवहन करना है। इसके अतिरिक्त ये शरीर के अन्तः वातावरण में अम्लीयता एवं क्षारीयता का नियन्त्रण करके हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) इसके pH को उपयुक्त दशा में बनाये रखने का महत्वपूर्ण कार्य भी करता है। R. B.Cs. ऊतकों से फेफड़ों तक CO, के परिवहन का भी कार्य करते हैं।

(2) श्वेत रुधिर कणिकाएँ या ल्यूकोसाइट (White Blood Corpuscles – W.B.Cs.) – ये लाल रुधिर कणिकाओं (R.B.C.) से बड़ी किन्तु संख्या में कम, अनियमित आकार की केन्द्रक युक्त होती हैं, मनुष्य के 1 घन मिमी रुधिर में इनकी संख्या लगभग 7.500 (6,000 से 10,000) तक होती है। इनमें हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) नहीं होता है, इसलिए ये सफेद या रंगहीन होती हैं। इनका निर्माण प्लीहा में होता है। ये मुख्यतः हानिकारक जीवाणुओं एवं रोगाणुओं का भक्षण करती हैं। इनका जीवनकाल 4-7 दिन का होता है। ये दो प्रकार की होती हैं-

(A) कणिकामय श्वेत रुधिर कणिकाएँ (Granuloaytes),
(B) कणिकारहित श्वेत रुधिर कणिकाएँ (एमेन्यूलोसाइट्स, Agranulocytes) ।
(A) कणिकामय श्वेत रुधिर कणिकाएँ (Agranulocytes) – इनका कोशिकाद्रव्य कणिकामय तथा केन्द्रक स्पष्ट तथा 2 से 5 पिण्डों में बँटा हुआ व

HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन 1

असममिति आकृति का होता है। ये तीन प्रकार की होती हैं- न्यूट्रोफिल, बेसोफिल तथा इओसिनोफिल ।
(i) न्यूट्रोफिल्स (neutrophils ) – श्वेत रुधिर कणिकाओं में इनकी संख्या सबसे अधिक (लगभग 60-65 प्रतिशत) होती है। ये सबसे अधिक सक्रिय W.B.C. हैं। ये भक्षक कोशिकाएँ होती हैं जो शरीर के अन्दर प्रवेश करने वाले बाह्य जीवों को समाप्त करती हैं। इस प्रकार ये शरीर की रोगों से रक्षा करती हैं।

(ii) बेसोफिल्स (Basophils) – इनकी संख्या सबसे कम (लगभग 0.5 से 1 प्रतिशत) होती है। ये हिपैरिन, हिस्टैमिन तथा सीरोटोनिन का स्राव करती हैं तथा शोधकारी क्रियाओं में सम्मिलित होती हैं।

(iii) इओसिनोफिल्स (Eosinophils) ये श्वेत रुधिर कणिकाओं का 2-3% भाग बनाती हैं। ये संक्रमण (infection) से बचाव करती हैं तथा एलर्जी प्रतिक्रिया में सम्मिलित रहती हैं। परजीवी कृमियों के संक्रमण के कारण व्यक्ति के रुधिर में इनकी संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है तब इस रोग को ‘इओसिनोफीलिया’ कहते हैं।

HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 7 प्राणियों में संरचनात्मक संगठन

(B) कणिकारहित श्वेत रुधिर कणिकाएँ (एप्रेन्यूलोसाइट्स) – इनका कोशिकाद्रव्य कणिकारहित तथा केन्द्रकयुक्त होता है। ये दो प्रकार की होती – लिम्फोसाइट्स तथा मोनोसाइट्स ।
(i) लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) – ये छोटे आकार की श्वेत रुधिर कणिकाएँ (while blood corpuscles) हैं। इनका प्रमुख कार्य शरीर में प्रतिरक्षी प्रोटीन्स (एण्टीबॉडीज) का निर्माण करना है, जो शरीर की सुरक्षा करती हैं। इनका जीवनकाल केवल कुछ दिन का होता है।
(ii) मोनोसाइट्स (Monocyts) – ये बड़े आकार की W.B.Cs. हैं। ये शरीर में आये हुए हानिकारक जीवाणुओं एवं रोगाणुओं का तेजी से भक्षण करके शरीर की सुरक्षा करती हैं।

(3) रुधिर प्लेटलेट्स या थ्रॉम्बोसाइट्स (Blood Platelets or Thrombocytes) ये अतिसूक्ष्म, केन्द्रकविहीन, संकुचनशील, गोल या अण्डाकार, उभयोत्तल (biconcave) एवं प्लेट के आकार की होती हैं। इनका निर्माण अस्थिमज्जा (bone marrow) में होता है। इनकी संख्या 1.5 से 3.5 लाख प्रति घन मिमी एवं जीवनकाल 5-8 दिन का होता है। इनका कार्य आहत भाग से बहते हुए रुधिर का थक्का (clot) जमाना है। थक्का जमने से उस स्थान से रुधिर का बहना बन्द हो जाता है।

प्रश्न 7.
निम्न क्या हैं तथा प्राणियों के शरीर में कहाँ मिलते हैं ?
(अ) उपास्थि अणु (कोंड्रोसाइट ),
(ब) तन्त्रिकाक्ष (ऐक्सोन)
(स) पक्ष्माभ उपकला ।
उत्तर:
(अ) उपास्थि अणु या कोंड्रोसाइट्स (Chondrocytes) – उपास्थि या कार्टिलेज (Cartilage) के मैट्रिक्स (Matrix ) में स्थित कोशिकाओं को कॉण्ड्रोसाइट्स (chondrocytes) कहते हैं। ये गोल या अण्डाकार गर्तिकाओं (लैकुनी – Lacunae) में स्थित होती हैं। प्रत्येक गर्तिका में एक से दो या चार कॉन्ड्रोसाइट्स (chondrocytes) होती हैं। विभाजन के फलस्वरूप कॉन्ड्रोसाइट्स (chondrocytes) की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ उपास्थि ( Cartilage) में भी वृद्धि होती है। कॉन्ड्रोसाइट्स (chondrocytes) द्वारा ही उपास्थि (cartilage) का मैट्रिक्स स्त्रावित होता है। यह कॉन्ड्रिन प्रोटीन (chondrin protein) होता है। उपास्थियाँ प्रायः अस्थियों के सन्धि स्थल पर पायी जाती हैं।

(ब) तन्त्रिकाक्ष या ऐक्सोन (Axon ) – तन्त्रिका कोशिका या न्यूरॉन तन्त्रिका तन्त्र का निर्माण करती हैं। प्रत्येक तन्त्रिका (neuron) कोशिका के तीन भाग होते हैं –
(1) कोशिकाकाय या साइटोन (cyton)
(2) डेन्ड्रॉन्स (dendrons )
(3) तन्त्रिकाक्ष या ऐक्सोन (axon ) ।
साइटोन से निकले कई प्रवर्धी में से एक प्रवर्ध अपेक्षाकृत लम्बा, मोटा एवं बेलनाकार होता है। यह प्रवर्ध ऐक्सोन (Axon) कहलाता है। इसकी मोटाई 1-2014 तक होती है। ऐक्सोन के अन्तिम छोर पर घुण्डी के समान रचनाएँ दिखाई देती हैं, जिन्हें साइनेप्टिक घुण्डियाँ (Synaptic knobs) कहते हैं। ये घुण्डियाँ (बटन्स) दूसरी तन्त्रिका कोशिका के डेन्ड्रोन्स से कार्यकारी सम्बन्ध बनाती हैं जिन्हें सिनैप्स कहते हैं। ऐक्सोन में उपस्थित कोशिकाद्रव्य एक्सोप्लाज्म (exoplasm) कहलाता है। ऐक्सोन (axon) का बाहरी आवरण न्यूरोलीमा (Nurilemma) कहलाता है न्यूरोलीमा ( nurilemma) के अन्दर वसा की एक परत होती है जिसे मैडुलरी शीथ (medullary sheath) कहते हैं।

(स) पक्ष्माथ उपकरण (Ciliated Epithelium)- इस उपकला की कोशिकाएँ स्तम्भाकार (Columnar) या घनाकार (Cuboidal) होती हैं। कोशिकाओं के बाहरी सिरों पर पक्ष्माथ या सीलिया (cilia) होते हैं। प्रत्येक पक्ष्माभ के आधार पर एक आधार कण होता है। पक्ष्माभों की गति द्वारा श्लेष्म व अन्य पदार्थ आगे की ओर धकेल दिये जाते हैं। पक्ष्माभ उपकला (cilited epithelium) श्वासनाल, श्वसनियाँ (branchioles) अण्डवाहिनी (oviduct) तथा मूत्रवाहिनी आदि की भीतरी सतह पर पायी जाती है।

प्रश्न 8.
रेखांकित चित्र की सहायता से विभिन्न उपकला ऊतकों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
स्थिति (Position)-यह ऊतक प्राणियों के शरीर की बाह्य सतह तथा विभिन्न अंगों एवं गुहाओं के भीतरी एवं बाहरी आवरण बनाता है। इसमें रुधिर कोशिकाओं का अभाव होता है। पोषक पदार्थों का स्थानान्तरण इनमें विसरण (diffusion) की क्रिया द्वारा लसिका (lymph) के माध्यम से होता है।
विशेष्ताएँ (Characteristics)
1. कोशिका एक-दूसरे से सटी रहती हैं। इनके बीच कोशिका बाह्य पदार्थ (extracellular material) बहुत कम होता है।
2. ये कोशिकाएँ पतली आधार कला (basement membrane) पर स्थित होती हैं।
3. आधार कला में दो स्तर होते हैं-उपकला की ओर आधारी लेमिना (basal lamina) तथा नीचे के संयोजी ऊतक की ओर रेटिकुलर लेमिना (reticular lamina) 1
4. कोशिकाओं के बीच अन्तरकोशिकीय (interacellular spaces) स्थान अनुपस्थित होते हैं।
5. आधार कला म्यूकोपॉलीसैकेराइड (mucopolysaccharide) तथा कोलेजन तन्तुओं की बनी होती है।
6. कोशिकाएँ इन्टरडिजिटेशन (interdigitation), टाइट जंक्शन (tight junctions), डेस्मोसोम (desmosomes) तथा हेमीडेस्मोसोम्स (hemidesmosomes) अर्थात् कोशिका बंधों द्वारा एक-दूसरे से कसकर जुड़ी होती हैं।
7. उपकला ऊतक (epithelial tissue) में महीन तंत्रिकाएँ होती हैं किन्तु पोषक पदार्थ पहुँचाने हेतु रुधिर वाहिकाओं का अभाव होता है। यह नीचे स्थित संयोजी ऊतक (connective tissue) से पोषक पदार्थ प्राप्त करता है।
8. इसकी कोशिकाएँ एक या अधिक स्तरों के रूप में अंगों को बाहर व अन्दर से ढकती हैं।
9. इन कोशिकाओं में विभाजन की अत्यधिक क्षमता होती है।
10. गुहाओं को आच्छादित करने वाले उपकला ऊसक (epithelial tissue) की कोशिकाओं की स्वतम्त्र सतह पर रसांकुर (microvilli), स्टीरियोसिलिया, सिलिया या कशाभ (flagella) आदि पाए जाते हैं।
11. ऐसी नलिकाएँ या गुहाएँ जिनका बाहरी वातावरण से सम्पर्क होता है, उनकी उपकला में श्लेष्मा स्रावी कोशिकाएँ (mucilogenous cells) पायी जाती हैं। सामान्यतः इसके नीचे संयोजी ऊतक पाया जाता है, जिसे लैमिना प्रोप्रिया (lamina propria) कहते हैं। श्लेष्मा स्रावी उपकला ऊतक एवं लैमिना प्रोप्रिया को संयुक्त रूप से श्लेष्मिक कला कहते हैं। इस प्रकार की श्लेष्मिक कला आहार नाल, श्वसन नली एवं मूत्रजनन नलिकाओं में पायी जाती हैं।
12. नलिकाएँ व गुहाएँ जिनका बाहरी वातावरण के साथ सम्बन्ध नहीं होता है तो उनमें उपकला ऊतक व नीचे के संयोजी ऊतक को संयुक्त रूप से सीरस कला (serous membrane) कहते हैं। जैसे-हुदयावरण व फुफ्सावरण।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में विभेद कीजिये-
(अ) सरल उपकला तथा संयुक्त उपकला ऊतक
(स) सघन नियमित एवं सघन अनियमित संयोजी ऊतक
(य) सामान्य तथा संयुक्त ग्रन्थि ।
(ब) हृदय पेशी तथा रेखित पेशी
(द) वसामय तथा रुधिर ऊतक
उत्तर:
(अ) सरल उपकला तथा संयुक्त उपकला में अन्तर (Differences between Simple Epithelium and Compound Epithelium)

सरल उपकला (Simple Epithelium)संयुक्त उपकला (Compound Epithelium)
1. इसकी कोशिकाएँ आधार झिल्ली पर एक परत के रूप में लगी होती हैं।1. इसकी कोशिकाएँ आधार झिल्ली पर एक से अधिक परतों में लगी रहती हैं।
2. यह उपकला मुख रूप से स्त्रावी और अवशोषण सतहों पर पायी जाती । जैसे- रुधिरवाहिनी, स्वर यन्त्र, प्रसनी मन्थियों की बाहरी सतह पर ।2. यह उन स्थानों पर पायी जाती हैं जहाँ पर रासायनिक व यान्त्रिक रगड़ होती रहती है। जैसे- त्वचा, मुखगुहा, प्रासनाल, कॉर्निया आदि में।

(ब) हृदयपेशी तथा रेखितपेशी में अन्तर (Differences between Cardiac Muscles and Striped Muscles) –

हृदयपेशी (Cardiac Muscles)रेखितपेशी (Striped Muscles)
1. ये पेशियाँ केवल हृदय (heart) में पायी जाती हैं।1. ये पेशियाँ अस्थियों से जुड़ी रहती हैं और कंकाल पेशी ( skeletal muscle ) भी कहलाती हैं।
2. ये जीवनपर्यन्त निरन्तर कार्य करती रहती हैं, फिर भी थकान का अनुभव नहीं होता है।2. क्रियाशील रहने पर इनमें थकान का अनुभव होता है। अतः आराम आवश्यक है।
3. ये निश्चित क्रम में स्वतः फैलती व सिकुड़ती हैं और इच्छा पर निर्भर नहीं करती हैं।3. ये जन्तु की इच्छा से सिकुड़ती व फैलती हैं। अतः ये ऐच्छिक होती हैं।
4. इनके पेशीतन्तु लम्बे, बेलनाकार तथा शाखामय होते हैं। ये सिरों पर जाल के रूप में जुड़े होते हैं। इन तन्तुओं में अनुप्रस्थ पट्टियाँ होती हैं।4. इनके पेशी तन्तु लम्बे, बेलनाकार व शाखाहीन होते हैं। इन तन्तुओं में हल्के और गहरे रंग की पट्टियाँ होती हैं।
5. पेशी तन्तु के कोशिका द्रव्य में एक केन्द्रक होता है।5. पेशी तन्तु के कोशिकाद्रव्य ( cytoplasm) में अनेक केन्द्रक होते हैं।

(स) सघन नियमित तथा सघन अनियमित संयोजी ऊतक में अन्तर (Differences between Dense Regular and Dense Irregular Connective Tissues)

Dense Regular:
सघन नियमित संयोजी ऊतक में कोलेजन तन्सुओं के गुच्छे नियमित रूप से समानान्तर बण्डलों में पाये जाते हैं।
कण्डरा ( tendon) तथा स्नायु ( ligaments) में भी कोलेजन तन्तुओं के समानान्तर गच्छे होते हैं।

Dense Irregular:
सघन अनियमित संयोजी ऊतक में कोलेजन तन्तु फाइब्रोब्लास्ट, पीले इलास्टिन (elastin) तन्तु आदि मैट्रिक्स (matrix ) में अनियमित रूप से पाये जाते हैं। इस तरह के ऊतक त्वचा की डर्मिस (dermis ) में पाये जाते हैं।

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(द) वसामय ऊतक तथा रुधिर ऊतक में अन्तर (Differences between Adipose Tissue and Blood Tissue).

वसामय ऊतक (Adipose Tissues)रुधिर ऊतक (Blood Tissues )
1. यह एक सामान्य और ढीला संयोजी ऊतक ( loose connective issue) है।1. यह एक तरल संयोजी (liquid) ऊतक है।
2. इस ऊतक का मैट्रिक्स (matrix ) जेली जैसा, पारदर्शी एवं चिपचिपा होता है।2. इसका मैट्रिक्स (matrix) गाढ़ा, जलीय और अल्पपारदर्शी होता है।
3. इसके मैट्रिक्स (matrix ) में वसा कोशिकाएं, रुधिर वाहिनियाँ, श्वेत कोलेजन तन्तु तथा पीले इलास्टिन तन्तु उपस्थित होते हैं।3. इसके मैट्रिक्स में लाल रुधिर कणिकाएँ (RBCs), श्वेत रुधिर कणिकाएँ (WBCs) तथा रुधिर प्लेटलेट्स होती हैं।
4. यह ऊतक वसा का संचय करता है, तापरोधक स्तर बनाता है व शरीर को सुडौल बनाता है। आन्तरंगों को अत्यधिक दबाव, खिंचाव एवं धक्कों से बचाता है।4. रुधिर गैसों – O<sub>2</sub> व CO<sub>2</sub> का, भोजन, उत्सर्जी पदार्थों एवं हॉर्मोन्स आदि का संवहन करता है। शरीर के ताप को एक जैसा बनाये रखता है तथा शरीर की प्रतिरक्षा में भाग लेता है।

(य) सामान्य तथा संयुक्त ग्रन्थि में अन्तर (Differences between Simple Glands and Compound Glands)

सामान्य ग्रन्थि (Simple Glands )संयुक्त प्रन्थि (Compound Glands )
1. ये प्रन्थियाँ सरल, अशाखित वाहिकाओं वाली होती हैं। इनकी गुहा पर उपकला कोशिकाओं (epithelial cells) का स्तर होता है।1. ये प्रन्थियाँ शाखामय वाहिकाओं वाली होती हैं। इनमें नालवत् कूपिकाओं अथवा दोनों ही आकृति की शाखामय स्रावी रचनाएँ होती
2. सामान्य ग्रन्थि में एक ही अशाखित वाहिनी स्त्रावित पदार्थ को सम्बन्धित स्थल पर पहुंचाती है।2. इसकी शाखामय वाहिनियाँ आपस में मिलकर एक संयुक्त वाहिनी द्वारा स्त्रावित पदार्थ को सम्बन्धित स्थल पर पहुंचाती हैं।

प्रश्न 10.
निम्न श्रृंखलाओं में सुमेलित न होने वाले अंशों को इंगित कीजिये-
(अ) एरिओलर ऊतक, रुधिर, तन्त्रिका कोशिका (न्यूरॉन), कंडरा (टेंडन)
(ब) लाल रुधिर कणिकाएँ, सफेद रुधिर कणिकाएँ, प्लेटलेट्स, उपास्थि
(स) बाह्य स्रावी, अन्तःस्रावी, लार ग्रन्दि, स्नायु (लिगामेंट)
(द) मैक्सिला, मैडिवल, लेब्रम, श्रृंगिका (एंटिना)
(य) प्रोटोनीमा मध्यवक्ष पश्चवक्ष तथा कक्षांग (कॉक्स) ।
उत्तर:
सुमेलित न होने वाले अंश-
(अ) तन्त्रिका कोशिका (न्यूरॉन),
(ब) उपास्थि (कार्टीलेज),
(स) स्नायु (लिगामेंट),
(द) श्रृंगिका (एंटिना),
(य) प्रोटोनीमा ।

प्रश्न 11.
स्तम्भ -1 और स्तम्भ -II को सुमेलित कीजिए-

स्तम्भ-Iस्तम्भ- 11
(क) संयुक्त कला(i) आहारनाल
(ख) संयुक्त नेत्र(ii) तिलचट्टे
(ग) पट्टीय वृक्कक(iii) त्वचा
(घ) खुला परिसंचण तन्त्र(iv) किर्मीर दृष्टि
(ङ) आत्र वलन(v) केंचुआ
(च) अस्थि अणु(vi) शिश्न खण्ड
(छ) जननेन्द्रिय(vii) अस्थि ।

उत्तर:

(क) संयुक्त कलास्तम्भ- 11
(ख) संयुक्त नेत्र(iv) किर्मीर दृष्टि
(ग) पट्टीय वृक्कक(v) केंचुआ
(घ) खुला परिसंचरण तन्त्र(ii) तिलचट्टे
(ङ) आन्त्र वलन(i) आहारनाल
(च) अस्थिअणु(vii) अस्थि
(छ) जननेन्द्रिय(vi) शिश्नखण्ड
(क) संयुक्त कला(iii) त्वचा

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प्रश्न 12.
केंचुए के परिसंचरण तन्त्र का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कॉकरोच का परिसंचरण तन्त्र (Circulatory System of Cockroach)
अन्य कीटों की भाँति कॉकरोच में रुधिर परिसंचरण खुले(Open) प्रकार का होता है। अर्थात् रुधिर नलिकाओं (Vessels) में न बहकर देहगुहा (Coelom) में भरा रहता है। रुधिर परिसंचरण तंत्र को तीन प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है-
1. हीमोसील,
2. हृदय, तथा
3 . रुधिर।
1. हीमोसील (Haemocoel)-कॉकरोच की देहगुहा हीमोसील (haemocoel) कहलाती है। यह आन्तरिक मीजोडर्म के उपकला द्वारा आच्छादित नहीं होती अतः यह अवास्तविक देहगुहा (pseudocoelome) कहलाती है। हीमोसील दो पेशीय कलाओं द्वारा तीन कोष्ठकों में विभाजित रहती है। ये कोष्ठक हैं-पृष्ठकोटर (dorsal sinus) अथवा हृदयावरणी हीमोसील (perivisceral sinus), मध्यकोटर या परिअंतरंग हीमोसील तथा अधर कोटर या अधरक हीमोसील। मध्य कोटर अन्य दोनों कोटरों की अपेक्षा अधिक बड़ा होता है तथा तीनों कोटरों का रुधिर आपस में मिल जुल सकता है।

2. हृदय (Heart) -हुदय पृष्ठकोटर में स्थित रहता है। यह एक लम्बी पेशीय क्रमांकुचनी संरचना है जो कि वक्ष (thorax) तथा उदर के पृष्ठ भाग में टर्गम के ठीक नीचे मध्य रेखा में व्यवस्थित रहती है। कॉकरोच का हृदय कुल 13 खण्डों का बना है जिसमें 3 खण्ड वक्ष में तथा शेष 10 खण्ड उदर भाग में रहते हैं। हृदय (heart) का पश्च सिरा बन्द रहता है, जबकि इसका अग्र सिरा महाधमनी (aorata) के रूप में आगे बढ़ता है।

हुदय (Heart) के पश्चखण्ड को छोड़कर अन्य सभी खण्डों में पाश्श स्थिति में एक एक जोड़ी छोटे-छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें ऑस्टिया (ostea) कहते हैं। प्रत्येक खण्ड में कपाट (valves) होते हैं जो रुधिर को हुदय के अन्दर जाने देते हैं किन्तु वापस नहीं आने देते। हुदय के प्रत्येक प्रकोष्ठ (sinus) के पार्श्व में एलेरी पेशियाँ (alary muscles) पायी जाती हैं जिनके संकुचन से परिहृदय कोटर (perichordial sinus) की गुहा का आयतन बढ़ जाता है तथा शिथिलन से वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है। कॉकरोच का हृदय न्यूरोजेनिक (nurogenic) होता है अर्थात् इसकी क्रिया प्रणाली हृदय से नियंत्रित होती है। रुधिर पश्च सिरे से अम्र सिरे की ओर बहता है।

3. रुधिर लसीका या हीमोलिम्फ (Haemolymph)-कॉकरोच का रुधिर लसीका (blood lymph) रंगहीन होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन या अन्य कोई श्वसन वर्णक (respiratory pigment) नहीं पाया जाता है। इसके दो भाग होते हैं-प्लाज्मा (plasma) तथा श्वेत रुधिराणु (white blood carpuscles) ।
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प्लाउ्मा रंगहीन क्षारीय (alkaline) द्रव है इसमें 70%तक जल होता है। इसमें Na,K,Ca, Mg PO4 आदि अकार्बनिक लवण (inorganic salts) भी होते हैं। कार्बनिक पदारों के रूप में इसमें अमीनो अम्ल, यूरिक अम्ल, वसा, प्रोटीन आदि पदार्थ होते हैं। श्वेत रुधिरणु दो प्रकार के होते हैं-भक्षणु (phagocytes) तथा प्रोल्यूकोसाइट (proleucocytes)। रुधि लसीका विभिन्न पदार्थों, लवणों, जल आदि का संवहन करती है। इसमें श्वसन वर्णकों (resipratory pigments) के अभाव के कारण यह वायु का संवहन नहीं करता है।

प्रश्न 13.
मेंढक के पाचन तन्त्र का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित के कार्य बताइए-
(अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी,
(ब) मैलपीघी नलिका
(स) केंचुए की देहभित्ति ।
उत्तर:
(अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी (Ureter of Frog ) नर मेंढक में वृक्क (गुर्दे) से मूत्रवाहिनी निकलकर अवस्कर (Cloaca) में खुलती है। यह मूत्र जनन नलिका का कार्य करती है। मादा मेंढक में मूत्रवाहिनी (uretor) एवं अण्डवाहिनी अवस्कर में अलग-अलग खुलती हैं। मूत्रवाहिनी वृक्क से मूत्र को -अवस्कर (cloaca) तक पहुँचाने का कार्य करती है।

(ख) मैलपीघी नलिका (Malpighian Tubes) ये कीटों में मध्यान्त्र एवं पश्चान्त्र के सन्धि तल पर पायी जाने वाली पीले रंग की धागे सदृश उत्सर्जी रचनाएँ होती हैं। ये उत्सर्जी पदार्थों को हीमोसील (haemocoel) से ग्रहण करके आहारनाल में पहुँचाने का कार्य करती हैं।

(स) केंचुए की देहभित्ति (Body wall of Earthworm) केंचुए की देहभित्ति नम तथा चिकनी होती है। यह श्वसन के लिए गैस विनिमय में सहायक होती है। देहभित्ति का श्लेष्म केंचुए के बिलों या सुरंगों की सतह को चिकना एवं सुदृढ़ बनाता है।

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HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Solutions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 1.
ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर इनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए। ऑक्सीजन के एक अणु का व्यास 3 लीजिए।
उत्तर:
STP पर 1 mol गैस का आयतन
V1 = 22.4 लीटर = 22.4 × 10-3 m3
जबकि 1 mol गैस में अणुओं की संख्या = NA = 6.02 × 1023
तथा 1 अणु की त्रिज्या r = \(\frac{3}{2}\) A = 1.5 x 10-10 m
∴ इन अणुओं का आयतन
V2 = एक अणु का आयतन × NA
= \(\frac{4}{3}\)πr2 x NA
= \(\frac{4}{3}\) x 3.14 × (1.5 × 10-10)3 x 6.02 x 1023 m3
= 8.51 x 10-6 m3
∴ \(\frac{V_2}{V_1}\) = \(\frac{8.51 \times 10^{-6}}{22.4 \times 10^{-3}}\)
= 3.79 × 10-4 = 3.8 × 10-4
अतः अणुओं के आयतन तथा उनके द्वारा घेरे गए आयतन का अनुपात 3.8 x 10-4 है।

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प्रश्न 2.
मोलर आयतन STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है। (STP 1 atm दाब, 0°C)। दर्शाइए कि यह 22.4 लीटर है।
उत्तर:
STP पर 1 atm दाब = 1.013 x 105 N/m2
तथा R = 8.31 Jmol-1 K-1 तथा T = 0 + 273 = 273K
∵ आदर्श गैस समीकरण से, PV = RT
∴ V = \(\frac{\mathrm{RT}}{\mathrm{P}}=\frac{8.31 \mathrm{~J} \mathrm{~mol}^{-1} \mathrm{~K}^{-1} \times 273 \mathrm{~K}}{1.013 \times 10^5 \mathrm{Nm}^{-2}}\)
= 0.02239 m-3 = 22.4 x 10-3 m3 = 22.4 लीटर
अतः STP पर 1 मोल आदर्श गैस का आयतन 22.4 लीटर होता है।

प्रश्न 3.
चित्र में ऑक्सीजन के 1.00 x 10-3 kg द्रव्यमान के लिए \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) एवं P में दो अलग-अलग तापों पर ग्राफ दर्शाए गए हैं।
(a) बिन्दुकित रेखा क्या दर्शाती है?
(b) क्या सत्य है: T1 > T2 अथवा T1 < T2 ?
(c) y- अक्ष पर जहाँ वक्र मिलते हैं वहाँ \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) का मान क्या है?

(d) यदि हम ऐसे ही ग्राफ 1.00 x 10-3 kg हाइड्रोजन के लिए बनाएँ तो भी क्या उस बिन्दु पर जहाँ वक्र -अक्ष से मिलते हैं। \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) का मान यही होगा? यदि नहीं, तो हाइड्रोजन के कितने द्रव्यमान के \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) लिए का मान कम दाब और उच्च ताप के क्षेत्र के लिए वही होगा ?
(H2 का अणु द्रव्यमान 2.02 g, O2 का अणु द्रव्यमान = 32.0g, R = 8.31 Jmol-1 K-1)
उत्तर:
(a) बिन्दुकित रेखा \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) का नियत होना दर्शाती है, जो कि आदर्श गैस के लिए सत्य है अतः बिन्दुकित रेखा आदर्श गैस का ग्राफ है।
(b) ताप T2 पर ग्राफ की तुलना में ताप T1 पर गैस का ग्राफ आदर्श गैस के ग्राफ के अधिक समीप है, अर्थात् ताप T2 पर ऑक्सीजन गैस के व्यवहार से विचलन अधिक है।
∵ वास्तविक गैसें निम्न ताप पर आदर्श गैस के व्यवहार से अधिक विचलन प्रदर्शित करती हैं, अतः
T1 > T2
(c) y-अक्ष पर वक्र के मिलने के स्थान पर से आदर्श गैस का ग्राफ भी गुजरता है, अत: इस बिन्दु के लिए
PV = μRT
⇒ \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) = μR
∵ गैस का द्रव्यमान m = 10-3 kg
गैस का अणुभार M = 32 g = 32 × 10-3 kg
∴ μ = \(\frac{m}{\mathrm{M}}=\frac{10^{-3} \mathrm{~kg}}{32 \times 10^{-3} \mathrm{~kg}}=\frac{1}{32}\)
अतः
\(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) = \(\frac{1}{32}\) mol x 8.31 J/mol K = 0.26 JK-1
(d) यदि हम 1.00 × 10-3 kg हाइड्रोजन के लिए समान वक्र खींचें तो वहाँ पर \(\frac{\mathbf{P V}}{\mathrm{T}}\) का मान ऑक्सीजन के लिए खींचे वक्र से अलग प्राप्त
होता है, जहाँ वे वक्र Y अक्ष पर मिलते हैं। यह इसलिए क्योंकि हाइड्रोजन के अणु का द्रव्यमान ऑक्सीजन के अणु द्रव्यमान से भिन्न होता है।
का समान मान प्राप्त करने के लिए यदि हाइड्रोजन द्रव्यमान m ग्राम हो तो,
\(\frac{\mathrm{PV}}{\mathrm{T}}\) = μR = \(\frac{m}{2 \cdot 02}\) × 8.31
या
0.26 = \(\frac{m \times 8.31}{2.02}\)
m = \(\frac{2 \cdot 02 \times 0.26}{8.31}\)
= 6.32 × 10-2g
= 6.32 × 10-5 kg

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प्रश्न 4.
एक ऑक्सीजन सिलेण्डर जिसका आयतन 30 लीटर है, में ऑक्सीजन का आरम्भिक दाब 15 atm एवं ताप 27°C है। इसमें से कुछ गैस निकाल लेने के बाद प्रमापी (गेज) दाब गिर कर 11 atm एवं ताप गिरकर 17°C हो जाता है। ज्ञात कीजिए कि सिलेण्डर से ऑक्सीजन की कितनी मात्रा निकाली गई है? (R = 8.31J mol-1 K-1, ऑक्सीजन का अणु द्रव्यमान O2 = 32 g)
उत्तर:
समीकरण PV = μRT से,
P1V1 = μ1R1T1
⇒ μ1 = \(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{RT}_1}\)
दिया है,
P1 = 15 atm = 15 × 1.01 × 10-5 Nm-2
V1 = 30 लीटर 30 × 10-3 m3
T1 = 27 + 273 = 300 K
\(\mu_1=\frac{P_1 V_1}{R T_1}\)
= \(\frac{\left(15 \times 1.01 \times 10^5 \mathrm{Nm}^{-2}\right) \times\left(30 \times 10^{-3} \mathrm{~m}^3\right)}{\left(8.315 \mathrm{~mol}^{-1} \mathrm{~K}^{-1}\right) \times 300}\)
= 18.23 mol
अतः सिलेण्डर में उपस्थित गैस का द्रव्यमान
m1 = μ1 M = 18.23 × 32g = 583g = 0.583kg
अन्तिम स्थिति में,
P2 = 12 atm = 12 × 1.01 × 105 Nm2
V2 = 30 लीटर = 30 x 10-3m3
T2 = 17 + 273 = 290K
∴\(\mu_2=\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}{\mathrm{RT}_2}\)
∴ \(\mu_2=\frac{\left(12 \times 1.01 \times 10^5 \mathrm{Nm}^{-2}\right) \times\left(30 \times 10^{-3} \mathrm{~m}^3\right)}{8.31 \mathrm{~J} \mathrm{~mol}^{-1} \mathrm{~K}^{-1} \times 290}\)
= 13.83 mol
∴ सिलेण्डर में उपस्थित गैस का द्रव्यमान
m2 = μ2M = 13.83 x 32 g
= 442.56 g = 0.443 kg
∴ निकाला गया द्रव्यमान
∆m = m1 – m2
= 0.583 – 0.443 = 0.14kg

प्रश्न 5.
वायु का एक बुलबुला जिसका आयतन 1.0cm है, 40m गहरी झील की तली से जहाँ ताप 12°C है, उठकर ऊपर पृष्ठ पर आता है जहाँ ताप 35°C है। अब इसका आयतन क्या होगा?
उत्तर:
दिया है:
बुलबुले का आयतन V1 = 1.0 cm3 = 10-6 m3, V2 =?
T1 = 12 + 273 = 285K
T2 = 35 + 273 = 308 K
जल का घनत्व p = 103 kg m-3, h = 40 m, g = 10ms-2
झील की तली में बुलबुले पर दाब
P1 = hpg + वायुमण्डलीय दाब
= 40 x 103 x 10 + 1.01 × 105
= 4 × 105 + 1.01 × 105
= 5.01 x 105 Nm2
तथा झील के ऊपरी पृष्ठ पर दाब
P2 = 1.01 × 105 Nm2
∴ \( \frac{P_1 V_1}{T_1}=\frac{P_2 V_2}{T_2}\) सूत्र से,
\(V_2=\frac{P_1 V_1 T_2}{P_2 T_1}\)
\(=\frac{5.01 \times 10^5 \times 10^{-6} \times 308}{1.01 \times 10^5 \times 285}\)
= 5.36 x 10-6 m3

प्रश्न 6.
एक कमरे में जिसकी धारिता 25.0m है, 27°C ताप और 1atm दाब पर, वायु के कुल अणुओं (जिनमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, जल वाष्प और अन्य सभी अवयवों के कण सम्मिलित हैं) की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
V = 25m3,
T = 27 + 273 = 300 K
P = 1 atm = 1.01 × 105 Nm-2
कुल अणुओं की संख्या = ?
∵ PV = RT
∴ μ = \(\frac{\mathrm{PV}}{\mathrm{RT}}\)
या
\(\mu=\frac{\left(1.01 \times 10^5 \mathrm{Nm}^{-2}\right) \times\left(25 \mathrm{~m}^3\right)}{\left(8.31 \mathrm{Jmol} \mathrm{K}^2 \mathrm{~K}^{-1}\right) \times 300 \mathrm{~K}}\)
= 1013 ग्राम अणु
1 ग्राम अणु में NA = 6.02 × 1023 अणु
कमरे में कुल अणुओं की संख्या N = μ NA
= 1013 × 6.02 × 1023
= 6.1 x 1026 अणु

प्रश्न 7.
हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा का आकलन कीजिए:
(i) कमरे के ताप (27°C) पर,
(ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (6000K) पर,
(iii) 100 लाख केल्विन ताप (तारे के क्रोड का प्रारूपिक ताप) पर।
उत्तर:
किसी गैस के अणु की औसत तापीय ऊर्जा (गतिज ऊर्जा)
E = \(\frac{3}{2}\) kgT,
यहाँ kB = 1.38 × 10-23 JK-1
(i) यहाँ T 27 + 273 = 300 K
∴ औसत तापीय ऊर्जा
E = \(\frac{3}{2}\) × 1.38 × 10-23 JK-1 x 300K
E = 6.21 × 10-21 J

(ii) यहाँ T = 6000 K
∴ औसत तापीय ऊर्जा
E = \(\frac{3}{2}\) × 10-23 JK-1 × 6000K
= 1.24 × 10-19 J

(iii) यहाँ T 100 लाख K = 100 x 105 K = 107 K
∴ औसत तापीय ऊर्जा
E = \(\frac{3}{2}\) ×1.38 × 10-23 JK-1 × 107 K
= 2.1 × 10-16 J

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प्रश्न 8.
समान धारिता के तीन बर्तनों में एक ही ताप और दाब पर गैसें भरी हैं। पहले बर्तन में निऑन (एकपरमाणुक) गैस है, दूसरी में क्लोरीन (द्विपरमाणुक) गैस है और तीसरे में यूरेनियम हेक्सा फ्लोराइड (बहु-परमाणुक) गैस है। क्या तीनों बर्तनों में गैसों के संगत अणुओं की संख्या समान है? क्या तीनों प्रकरणों में अणुओं की Crms (वर्ग- माध्य-मूल चाल) समान है?
उत्तर:
(i) हाँ, आवोगाद्रो परिकल्पना के अनुसार समान परिस्थितियों में गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है।
(ii) नहीं, Crms = \(\sqrt{\frac{3 R T}{M}}\) से, Crms ∝ \(\frac{1}{\sqrt{\mathrm{M}}}\)
∵ तीनों गैसों के ग्राम अणुभार अलग-अलग हैं अतः अणुओं की वर्ग- माध्य-मूल चाल भी अलग-अलग होगी।

प्रश्न 9.
किस ताप पर आर्गन गैस सिलेण्डर में अणुओं की Crms – 20°C पर हीलियम गैस परमाणुओं की Crms के बराबर होगी। (Ar का परमाणु द्रव्यमान = 39.9u एवं हीलियम का परमाणु
द्रव्यमान = 4.0u)
उत्तर:
आर्गन के लिए M1 = 39.9u, T = ?
M2 = 4 0u, T2 = 20 + 273 = 253 K

प्रश्न 10.
नाइट्रोजन गैस के एक सिलिण्डर में 2.0 atm दाब एवं 17°C ताप पर नाइट्रोजन अणुओं के लिए माध्य मुक्त पथ एवं संघट्ट आवृत्ति का आकलन कीजिए। नाइट्रोजन अणु की त्रिज्या लगभग 1.0A° लीजिए। संघट्ट काल की तुलना अणुओं द्वारा दो संघट्टों के बीच स्वतन्त्रतापूर्वक चलने में लगे समय से कीजिए। ( नाइट्रोजन का आण्विक द्रव्यमान = 28.0g)
उत्तर:
दिया है,
P = 2.0 atm = 2 × 1.01 × 105 Nm2,
T = 17 + 273 = 290K
d = 2 × 10 A° = 2 × 10-10 m
M = 28.0g = 28 × 10-3 kg,
kg = 1.38 × 10-23 JK-1
(1 atm = 1.01 × 105 Nm2)
∴ औसत मुक्त पथ l = \(\frac{1}{\sqrt{2} n \pi d^2}\)
∵ \(n=\frac{\mathrm{P}}{k_{\mathrm{B}} \mathrm{T}}\)
अतः
\(l=\frac{k_{\mathrm{B}} \mathrm{T}}{\sqrt{2} \pi \mathrm{P} d^2}\)
= \(\frac{1.38 \times 10^{-23} \times 290}{1.414 \times 3.14 \times 2.0 \times 1.01 \times 10^5 \times\left(2 \times 10^{-10}\right)^2}\)
l = 11.5 × 10-8 m = 1.1 x 107m
हम जानते हैं
\(\mathrm{C}_{r m s}=\sqrt{\frac{3 R T}{M}}\)
दिया है कि M = 28 x 10-3 kg और T = 17 + 273 = 290K
मान रखने पर
\(C_{t m s}=\sqrt{\frac{3 \times 8.31 \times 290}{28 \times 10^{-3}}}\)
Cms = 5.08 × 102 m/s
∴ संघट्ट आवृत्ति \(v=\frac{\mathrm{C}_{r m s}}{\lambda}\)
= \(\frac{5 \cdot 08 \times 10^2}{1 \cdot 0 \times 10^{-7}}\)
= 5.1 × 109 प्रति सेकण्ड
माना दो क्रमिक संघट्टों के बीच का समयान्तराल T’ है।
\(\mathrm{T}^{\prime}=\frac{\lambda}{c_{r m s}}=\frac{1 \cdot 0 \times 10^{-7}}{5 \cdot 1 \times 10^2}\)
T = 2.0 x 10-10 सेकण्ड ……..(1)
माना संघट्ट का समय t है
\(t=\frac{d}{C_{r m s}}=\frac{2 \times 10^{-10}}{5.1 \times 10^2}\)
t = 4 x 10-13 सेकण्ड
समी (1) में समी (2) का भाग देने पर
\(\frac{\mathrm{T}^{\prime}}{t}=\frac{2.0 \times 10^{-10}}{4 \times 10^{-13}}\) = 500
T = 500t
अर्थात् क्रमागत संघट्टों के लिये लिया गया समय एक संघट्ट में लगे समय का 500 गुना है। इससे सिद्ध होता है कि गैस में अणु अधिकांश समय तक स्वतन्त्र रूप से गति करता है।

अतिरिक्त अभ्यास:

प्रश्न 11.
मीटर लम्बी सँकरी (और एक सिरे पर बन्द) नली क्षैतिज रखी गई है। इसमें 70 cm लम्बाई भरा पारद सूत्र, वायु के 15 cm स्तम्भ को नली में रोककर रखता है। क्या होगा यदि खुला सिरा नीचे की ओर रखते हुए नली को ऊर्ध्वाधर कर दिया जाए?
उत्तर:
जब नली को क्षैतिज अवस्था में रखा जाता है तो पारे का 76 cm का सूत्र 15 cm लम्बाई की वायु को फँसा लेता है। खुले सिरे पर नली की 9 cm लम्बाई छोड़ दी जायेगी। नली में बन्द वायु का दाब वायुमण्डलीय दाब होगा।
माना नली की अनुप्रस्थ काट 1 सेमी2 है।
P1 = 76 cm, V1 = 15 cm3
जब नली को ऊर्ध्वाधर रखा जाता है तो वायु को 15 cm के अतिरिक्त 9cm वायु के मिल जाते हैं।

माना कि पारे के h cm वायुमण्डलीय दाब को सन्तुलित रखने के लिए बाहर प्रवाहित हो जाते हैं।
उस स्थिति में वायु स्तम्भ और पारे के स्तम्भ की ऊँचाइयाँ क्रमशः (24 + h) सेमी और (76 – h) सेमी. है। तब वायु का दाब 76 – (76 – h) पारे के सेमी = h
आयतन V2 = (24 + 1) cm, P2 = hcm
माना कि ताप स्थिर रहता है।
P1V1 = P2V2
या
76 × 15 = h × (24+h)
या
76 × 15 = 24h + h2
h2 + 24h – 76 x 15 =0

h = 23.8cm या – 47.8cm
चूँकि / ऋणात्मक नहीं हो सकता है अतः
h = 23.8 24 cm
वायु स्तम्भ की लम्बाई 24 + h = 24 + 24
= 48 cm
पारे के स्तम्भ की लम्बाई = 76 – h = 76 – 24 = 52 सेमी

प्रश्न 12.
किसी उपकरण से हाइड्रोजन गैस 28.7cms-1 की दर से विसरित हो रही है। उन्हीं स्थितियों में कोई दूसरी गैस 7.2cm3s-1 की दर से विसरित होती है। इस दूसरी गैस को पहचानिए।
उत्तर:
दिया है हाइड्रोजन गैस की विसरण दर r1 = 28.7 cm3 / s-1, ग्राम अणु भार M1 = 2.02g
अन्य गैस की विसरण दर r2 = 7.2cm
s-1
ग्राहम के विसरण नियम से \(\frac{r_1}{r_2}=\sqrt{\frac{\mathrm{M}_2}{\mathrm{M}_1}}\)
∴ \(\left(\frac{r_1}{r_2}\right)^2=\frac{\mathrm{M}_2}{\mathrm{M}_1}\)
अत: M2 = M1\(\left(\frac{r_{\mathrm{i}}}{r_2}\right)^2\)
= 2.02g\(\left(\frac{28.7 \mathrm{~cm}^3 \mathrm{~s}^{-1}}{7.2 \mathrm{~cm}^3 \mathrm{~s}^{-1}}\right)^2\)
∴ M2 = 2.02 × (3.98)2 g = 31.99g = 32 g
स्पष्ट है कि दूसरी गैस ऑक्सीजन है।

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प्रश्न 13.
साम्यावस्था में किसी गैस का घनत्व और दाब अपने सम्पूर्ण आयतन में एक समान हैं। यह पूर्णतः सत्य केवल तभी है जब कोई भी बाह्य प्रभाव न हो। उदाहरण के लिए, गुरुत्व से प्रभावित किसी गैस स्तम्भ का घनत्व (और दाब) एकसमान नहीं होता है। जैसा कि आप आशा करेंगे इसका घनत्व ऊँचाई के साथ घटता है। परिशुद्ध निर्भरता ‘वातावरण के नियम’
n2 = n1exp \(\left[-\frac{m g}{k_{\mathrm{B}} \mathrm{T}}\left(h_2-h_1\right)\right]\) से दी जाती है, यहाँ n1, n2 क्रमशः h1 h2, ऊँचाइयों पर संख्यात्मक घनत्व को प्रदर्शित करते हैं। इस सम्बन्ध का उपयोग द्रव स्तम्भ में निलम्बित किसी कण के अवसादन साम्य के लिए समीकरण n2 = n1 exp \(\left[-\frac{m g N_A}{\rho \mathbf{R T}}\left(\rho-\rho^{\prime}\right)\left(h_2-h_1\right)\right]\) को व्युत्पन्न करने के लिए कीजिए, यहाँ निलम्बित कण का घनत्व तथा p’ चारों तरफ के माध्यम का घनत्व है। Na आवोगाद्रो संख्या तथा R सार्वत्रिक गैस नियतांक है।
उत्तर:
वातावरण के नियमानुसार,
n2 = n1exp \(\left[-\frac{m g}{k_{\mathrm{B}} \mathrm{T}}\left(h_2-h_1\right)\right]\)
जबकि m द्रव्यमान को कण वायु में साम्यावस्था में तैर रहा है। यदि कण वाले किसी द्रव में छोड़ा गया है तो इस कण पर द्रव के कारण उत्क्षेप भी कार्य करेगा, इस स्थिति में हमें उक्त सूत्र में mg के स्थान पर कण का आभासी भार रखना होगा:
माना कण का आयतन V तथा घनत्व है, तब
कण का आभासी भार = mg – उत्क्षेप
= Vpg – Vpg
= Vg (p – p’)
= mg (1 – \(\frac{\rho^{\prime}}{\rho}\)) = \(\frac{m g\left(\rho-\rho^\gamma\right)}{\rho}\)
समी. (1) में mg के स्थान पर \(\frac{m g\left(\rho-\rho^\gamma\right)}{\rho}\) तथा kg के स्थान पर \( \frac{\mathrm{R}}{\mathrm{N}_{\mathrm{A}}}\) रखने पर,

प्रश्न 14.
नीचे कुछ ठोसों व द्रवों के घनत्वं दिए गए हैं। उनके परमाणुओं की आमापों का आकलन (लगभग) कीजिए।
[संकेत मान लीजिए कि परमाणु ठोस अथवा द्रव प्रावस्था में ‘दृढ़ता से बँधे हैं, तथा आवोगाद्रो संख्या के ज्ञान का उपयोग कीजिए। फिर भी आपको विभिन्न परमाण्वीय आकारों के लिए अपने द्वारा प्राप्त वास्तविक संख्याओं का बिल्कुल अक्षरशः प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि दृढ़ संवेष्टन सन्निकटन की रूक्षता के परमाण्वीय आकार कुछ A के परास में हैं।]
उत्तर:
परमाणु का द्रव्यमान आयंतन घनत्व
= \(\frac{4}{3}\) πr3 × p
जहाँ r परमाणु की त्रिज्या है।
∵ 1 मोल परमाणु में NA परमाणु होते हैं तथा NA परमाणुओं का
द्रव्यमान = NA × \(\frac{4}{3}\) πr3p
∴ ग्राम परमाणु भार,
M = NA × \(\frac{4}{3}\) πr3p
∴ r3 = \(\frac{3 \mathrm{M}}{4 \pi N_A \rho}\)
(i) कार्बन (हीरा) के लिए,
M = 12.01g
= 12.01 × 103 kg
p = 2.22 x 103 kg/m3
तथा NA = 6.02 x 1023
∴ कार्बन परमाणु की त्रिज्या
r = \(\left[\frac{3 \times 12.01 \times 10^{-3}}{4 \times 3.14 \times 6.02 \times 10^{23} \times 2.22 \times 10^3}\right]^{1 / 3} \mathrm{~m}\)
या
r – (0.2147 × 10-29 ) 1/3
r = (2.147 × 10-30 )1/3
∴ r = 1.29 × 10-10 m = 1.29

(ii) गोल्ड के लिए,
M = 197.00g
= 197 x 10-3 kg:
p = 19.32 × 103 kg/m3
∴ गोल्ड के एक परमाणु की त्रिज्या
r = \(\left[\frac{3 \times 197 \times 10^{-3}}{4 \times 3.14 \times 6.02 \times 10^{23} \times 19.32 \times 10^3}\right]^{1 / 3}\)
या
P = (4.05 × 10-30)1/3
= 1.59 x 10-10 m
∴ r = 1.59Å

(iii) द्रव नाइट्रोजन के लिए,
M = 14.01 × 10-3 kg.p = 103 kg/m3
∴ नाइट्रोजन परमाणु की त्रिज्या
r = \(\left[\frac{3 \times 14.01 \times 10^{-3}}{4 \times 3.14 \times 6.02 \times 10^{23} \times 10^3}\right]^{1 / 3}\)
या
r = [5.56 × 10-30]1/3
∴ r = 1.77 × 1010m = 1.77A

(iv) लीथियम के लिए.
M = 6.94 × 10-3 kg
p = 0.53 x 103 kgm-3
एक परमाणु की त्रिज्या
r = \(\left[\frac{3 \times 6.94 \times 10^{-3}}{4 \times 3.14 \times 6.02 \times 10^{23} \times 0.53 \times 10^3}\right]^{1 / 3}\)
r = (5.195 × 10-30)1/3
या
r = 1.73 × 10-10 m
या
r = 1.73Å

(v) द्रव फ्लुओरीन के लिए.
M = 19 × 10-3 kg. p = 1.14 × 103 kg/m3
∴ एक परमाणु की त्रिज्या
r = \(\left[\frac{3 \times 19 \times 10^{-3}}{4 \times 3.14 \times 6.02 \times 10^{23} \times 1.14 \times 10^3}\right]^{1 / 3}\)
r = (6.613× 10-30)1/3
या
r = 1.88 × 10-10 m
या
∴ r = 1.88A

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HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 12 ऊष्मागतिकी Textbook Exercise Questions and Answers.

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प्रश्न 1.
कोई गीजर 3.0 लीटर प्रति मिनट की दर से बहते हुए जल को 27°C से 77°C तक गर्म करता है। यदि गीजर का परिचालन गैस बर्नर द्वारा किया जाए तो ईंधन के व्यय की क्या दर होगी? बर्नर के ईंधन की दहन ऊष्मा 4.0 x 102 Jg है।
उत्तर:
दिया है:
प्रति मिनट प्रवाहित जल की मात्रा = 3.0 ली
∴ जल का द्रव्यमान m = 3 किग्रा = 3 × 103 g
T = 27°C; T2 = 77°C
जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता S = 4.18 J/g°C
∴ व्यय ऊष्मा की दर Q = ms∆T प्रति मिनट
= 3 × 103 × 4.18 × (77 – 27)
= 3 × 50 × 4.18 × 103
ईंधन के व्यय की दर = \(\frac{3 \times 50 \times 4 \cdot 18 \times 10^3}{4 \times 10^4}\)
= 16g/min

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प्रश्न 2.
स्थिर दाब पर 2.0 × 10-2 kg नाइट्रोजन (कमरे के ताप पर) के ताप में 45°C वृद्धि करने के लिए कितनी ऊष्मा की आपूर्ति की जानी चाहिए?
(N2 का अणुभार 28; R = 8.3Jmol-1 K-1)
उत्तर:
दिया है:
नाइट्रोजन की मात्रा
m = 2.0 × 10-2 kg
= 20 gm
N2 का अणुभार = 28
T1 = 25° (कमरे का ताप)
T2 = 45°C
R = 8.3Jmol-1 K-1
मोलों की संख्या
μ = \(\frac{m}{\mathrm{M}} = \frac{20}{28}\)
= \(\frac{5}{7}\)
N2 का नियत दाब पर विशिष्ट ऊष्मा Cp = \(\frac{7}{2}R\)
= \(\frac{7}{2}R\) × 8.3
व्यय कुल ऊष्मा की मात्रा
∆Q = nCP∆T
= \(\frac{5}{2}R\) × \(\frac{7}{2}R\) × 8.3 × 45
∆Q = 933.38 J

प्रश्न 3.
व्याख्या कीजिए कि ऐसा क्यों होता है?
(a) भिन्न-भिन्न तापों T1 व T2 के दो पिण्डों को यदि ऊष्मीय सम्पर्क में लाया जाए तो यह आवश्यक नहीं कि उनका अन्तिम ताप \(\frac{\mathrm{T}_1+\mathrm{T}_2}{2}\) ही हो।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयन्त्रों में शीतलक (अर्थात् द्रव के संयन्त्र के भिन्न-भिन्न भागों को अधिक गर्म होने से रोकता है) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होनी चाहिए।
(c) कार को चलाते चलाते उसके टायरों में वायुदाब बढ़ जाता है।
(d) किसी बन्दरगाह के समीप के शहर की जलवायु समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है।
उत्तर:
(a) जब T1 व T2 ताप की वस्तुओं को ऊष्मीय सम्पर्क में लाया जाता है तो ऊष्मा उच्च ताप के निकाय से निम्न ताप के निकाय को स्थानान्तरित होती है और दोनों निकायों के ताप समान हो जाते हैं। जब दोनों निकार्यों की ऊष्मा धारिता समान होती है तो उनके समान ताप \(\frac{\mathrm{T}_1+\mathrm{T}_2}{2}\) के ‘तुल्य होगा।
(b) रासायनिक या नाभिकीय संयन्त्रों में शीतलक उच्च विशिष्ट ऊष्मा के होते हैं। शीतलक के उच्च विशिष्ट ऊष्मा के होने के कारण, इनकी उच्च ऊष्मा अवशोषकता होती है। इस प्रकार जो द्रव उच्च विशिष्ट ऊष्मा का होता है उसका उपयोग नाभिकीय संयन्त्रों में शीतलक के रूप में किया जाता है। यह संयन्त्रों के किसी भी भाग को ज्यादा गर्म होने से रोकते हैं।
(c) जब कार गतिशील होती है तो वायु के अणुओं की गति के कारण टायरों में भरी हवा का ताप बढ़ जाता है चार्ल्स के नियमानुसार दाब ताप के समानुपाती होता है। अर्थात् P α T1 इस प्रकार यदि टायर के अन्दर ताप में वृद्धि होती है तब टायर के अन्दर वायुदाब भी बढ़ जाता है।
(d) किसी बन्दरगाह के समीप के शहर की जलवायु समान अक्षांश के किसी रेगिस्तानी शहर की जलवायु से अधिक शीतोष्ण होती है। इसका कारण यह है कि बन्दरगाह के समीप के शहर की आर्द्रता रेगिस्तानी शहर की तुलना में अधिक होती है।

प्रश्न 4.
गतिशील पिस्टन लगे किसी सिलेण्डर में मानक ताप व दाब पर 3 मोल हाइड्रोजन भरी है। सिलेण्डर की दीवारे ऊष्मारोधी पदार्थ की बनी हैं तथा पिस्टन को उस पर बालू की परत लगाकर ऊष्मारोधी बनाया गया है। यदि गैस को उसके आरम्भिक आयतन के आधे आयतन तक संपीडित किया जाये तो गैस का दाब कितना बढ़ेगा?
उत्तर:
सिलेण्डर अपने परिवेश के पूर्णतः विलगित है। इस कारण निकाय और परिवेश के मध्य ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता। इस प्रकार प्रक्रम रुद्धोष्म है।
सिलेण्डर के अन्दर प्रारम्भिक दाब P1
सिलेण्डर के अन्दर अन्तिम दाब = p2
सिलेण्डर में प्रारम्भिक आयतन = V1
अन्तिम आयतन V2 = \(\mathrm{V} / 2\)
विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात γ = 1.4
रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए
P1V1γ = P2V2γ
P1V1γ = P2 \(\mathrm{V} / 2\) γ
\(\frac{P_2}{P_1}\) = 2γ
=21.4
लघुगुणक लेने पर
10g10 \(\frac{P_2}{P_1}\) = 1.4 log102
= 1.4 × 0.3010
10g10 \(\frac{P_2}{P_1}\) = 0.4214
प्रतिलघुगुणक लेने पर
\(\frac{P_2}{P_1}\) = 2.639

प्रश्न 5.
रुद्धोष्म विधि द्वारा किसी गैस की अवस्था परिवर्तन करते समय उसकी एक साम्यावस्था A से दूसरी साम्यावस्था B तक ले जाने में निकाय पर 22.3J कार्य किया जाता है। यदि गैस को दूसरी प्रक्रिया द्वारा अवस्था A से अवस्था B में लाने में निकाय द्वारा अवशोषित नेट ऊष्मा 9.35 cal है तो बाद के प्रकरण में निकाय द्वारा किया गया नेट कार्य कितना है? (1 cal = 4.19 J)
उत्तर:
निकाय द्वारा किया गया कार्य (W) 22.3 जूल है जब गैस अवस्था A से अवस्था B में परिवर्तन करती है। यह एक रुद्धोष्म प्रक्रम है। इस प्रकार, ऊष्मा में परिवर्तन शून्य होगी।
∴ ∆Q = 0
∆W = -22.3J (निकाय द्वारा किया गया कार्य)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,
∆Q = ∆U + ∆W
∆U = गैस की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन
∴ ∆U = ∆Q – ∆W = – (22.3J)
∆U = + 22.3J
जब गैस अवस्था A से अवस्था B में संक्रमण करती है तो निकाय द्वारा अवशोषित कुल ऊष्मा
∆Q = 9.35 cal = 9.35 × 4.19
= 39.1765 J
अवशोषित ऊष्मा ∆Q = ∆U + ∆W
∆W = ∆Q – ∆U
= 39.1765 – 22.3 = 16.8765 J

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प्रश्न 6.
समान धारिता वाले दो सिलेण्डर A तथा B एक-दूसरे से स्टॉप कॉक के द्वारा जुड़े हैं A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी है जबकि B पूर्णतः निर्वातित है। स्टॉप कॉक यकायक खोल दी जाती है। निम्नलिखित का उत्तर दीजिए:
(a) सिलेण्डर A तथा B में अन्तिम दाब क्या होगा?
(b) गैस के आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
(c) गैस के ताप में क्या परिवर्तन होगा ?
(d) क्या निकाय की माध्यमिक अवस्थाएँ (अन्तिम साम्यावस्था प्राप्त करने के पूर्व इसके PVT पृष्ठ पर होगी?
उत्तर:
(a) जब स्टॉप कॉक को अचानक खोला जाता है, तो गैस का आयतन एक वायुमण्डलीय पर दो गुना हो जायेगा। जैसाकि आयतन दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है, दाब मूल मान आधा हो जायेगा। गैस का प्रारम्भिक दाब यदि वायुमण्डलीय दाब है तो प्रत्येक सिलेण्डर में दाब 0.5 वायुमण्डलीय दाब होगा।
(b) गैस की आन्तरिक ऊर्जा केवल तभी परिवर्तित हो सकती है, जब गैस द्वारा कार्य किया जाता या गैस पर कार्य किया जाता है। इस . आन्तरिक ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
(c) गैस के प्रसार के समय गैस द्वारा कोई कार्य नहीं होता है अतः गैस के ताप में कोई परिवर्तन नहीं होगा।
(d) नहीं, क्योंकि प्रक्रम मुक्त प्रसार कहलाता है, जो त्वरित होता है। और नियन्त्रित नहीं किया जा सकता है। माध्यमिक अवस्थाएँ साम्य में नहीं होती है और गैस समीकरण का पालन नहीं करती है। इस कारण गैस एक साम्यावस्था में लौट आती है।

प्रश्न 7.
एक वाष्प इंजन अपने बॉयलर से प्रति मिनट 3.6 × 109 J ऊर्जा प्रदान करता है जो प्रति मिनट 5.4 × 108 J कार्य देता है। इंजन की दक्षता कितनी है ? प्रति मिनट कितनी ऊष्मा अपशिष्ट होगी?
उत्तर:
भाप के इंजन द्वारा प्रति मिनट कृत कार्य
W = 5.4 × 108 J
बॉयलर से आपूर्ति ऊष्मा H = 3.6 × 109 J
इंजन की दक्षता =
\(\eta=\frac{W}{H}=\frac{5.4 \times 10^8}{3.6 \times 10^9}\) = 0.15
इस प्रकार, इंजन की प्रतिशत दक्षता 15% होगी।
अपशिष्ट की मात्रा = 3.6 × 109 – 5.4 × 108
= 30.6 × 108
= 3.06 × 109 J
इस प्रकार प्रति मिनट अपशिष्ट ऊष्मा 3.06 × 109 J होगी।

प्रश्न 8.
एक हीटर किसी निकाय को 100W की दर से ऊष्मा प्रदान करता है। यदि निकाय 75 Js-1 की दर से कार्य करता है, तो आन्तरिक ऊर्जा की वृद्धि किस दर से होगी?
उत्तर:
निकाय को दी गई ऊष्मा ∆Q = 100W
कार्य ∆W = 75W
आन्तरिक ऊर्जा ∆U = ∆Q – ∆W
= 100 – 75 = 25W

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प्रश्न 9.
किसी ऊष्मागतिकीय निकाय को मूल अवस्था से मध्यवर्ती अवस्था तक चित्र में दर्शाए अनुसार एक रेखीय प्रक्रम द्वारा ले जाया गया है।

एक समदाबी प्रक्रम द्वारा इसके आयतन को E से F तक ले जाकर मूल मान तक कम कर देते हैं। गैस द्वारा D से E तथा वहाँ से F तक कुल किए गए कार्य का आकलन कीजिए।
होगा।
उत्तर:
D से E तथा E सेF के मध्य कुल कार्य ADEF का क्षेत्रफल
∆DEF का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) DE × EF
जहाँ DE दाब में परिवर्तन
= 600 N-m2 – 300 N-m2
= 300 N-m2
FE = आयतन में परिवर्तन
= 5.0m3 – 20m3
= 3.0m3
∆DEF का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) × 300 × 3
= \(\frac{1}{2}\) × 900J = 450J
अत: D से E से F के मध्य गैस द्वारा किया गया कुल कार्य 450 जूल

प्रश्न 10.
खाद्य पदार्थ को एक प्रशीतक के अन्दर रखने पर वह उसे 9°C पर बनाए रखता है। यदि कमरे का ताप 36°C है तो प्रशीतक के निष्पादन गुणांक का आकलन कीजिए।
उत्तर:
रेफ्रीजरेटर का ताप T1 = 9°C = 273 + 9 = 282K
कमरे का ताप T2 = 36°C = 273 + 36 = 309K
निष्पादन गुणांक
= \(\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_2-\mathrm{T}_1}\)
= \(\frac{282}{309-282}\)
= \(\frac{282}{27}\)
= 10.48

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HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 1.
Ne तथा CO2 के त्रिक बिन्दु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
केल्विन का सेल्सियस पैमाने में निम्नलिखित सम्बन्ध है:
tc = TK – 273.15
तथा
∴ tNe = 24.57 – 273.15 = -248.58°C
tCO2 = 216.55 – 273.1 = – 556.6°C
फारनेहाइट तथा सेल्सियस पैमाने में निम्नलिखित सम्बन्ध होता है:
\(\frac{t_{\mathrm{F}}-32}{9}=\frac{t_{\mathrm{C}}}{5}\)
∴ \(t_{\mathrm{F}}=\frac{9}{5} t_{\mathrm{C}}+32\)
अतः
tF(Ne) = \(\frac{9}{5}\) × (-248.58) 32
= -447.44 + 32 = -415.44°F
तथा
tF(CO2) = \(\frac{9}{5}\) × (-56.6) + 32
= 101.88 + 32 = -69.88°F

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प्रश्न 2.
दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिन्दु को 200 A तथा 300 B द्वारा परिभाषित किया गया है। TA तथा TB में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
यदि T त्रिक बिन्दु है, TA व TB परम स्केलों पर ताप हों,

प्रश्न 3.
किसी तापमापी का ओम में विद्युत् प्रतिरोध ताप के साथ सन्निकट नियम के अनुसार परिवर्तित होता है:
R = R0 [ 1 + α (T – To))]
यदि तापमापी के जल के त्रिक बिन्दु 273.16 K पर प्रतिरोध 101.65Ω तथा लैड के सामान्य संगलन बिन्दु (600.5 K) पर प्रतिरोध 165.55Ω है तो वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर तापमापी का प्रतिरोध 123.45Ω है।
उत्तर:
दिया है R = R0 [ 1 + α (T – To))]
उपर्युक्त समीकरण से,
R1 = R0 [ 1 + α (T1 – T0))] ……..(1)
तथा
R2 = R0 [ 1 + α (T2 – T0)) ……….(2)
समी० (2) में से (1) को घटाने पर,
R2 – R1 = Roα(T2 – T1) ………….(3)
इसी प्रकार
R3 – R1 = Roα(T3 – T1) ………….(4)
समी० (4) में समी. (3) से भाग देने पर,
\(\frac{R_3-R_1}{R_2-R_1}=\frac{T_3-T_1}{T_2-T_1}\)
दिया है,
T1 = 273.16K
T2 = 600.5K.
R1 = 101.60Ω
R2 = 165.5Ω
R3 = 123.45Ω
T3 = ?
अत: समी० (5) में उपर्युक्त मान रखने पर,
\(\frac{123 \cdot 4-101 \cdot 6}{165 \cdot 5-101 \cdot 6}=\frac{T_3-273 \cdot 16}{600 \cdot 5-273 \cdot 16}\)
या
\(\frac{21 \cdot 8}{63 \cdot 9}=\frac{T_3-273 \cdot 16}{327.34}\)
या
111.67 = T3 – 273.16
∴ T3 = 384.83 = 384.8K

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिन्दु मानक नियत बिन्दु है, क्यों? हिम के गलनांक तथा जल के क्वथनांक को मानक नियत बिन्दु मानने में (जैसा कि मूल सेल्सियस मापक्रम में किया गया था) क्या दोष है?
(b) जैसा कि ऊपर वर्णन किया जा चुका है कि मूल सेल्सियस मापक्रम में दो नियत बिन्दु थे जिनको क्रमश: 0°C तथा 100°C संख्याएँ निर्धारित की गई थीं। परम ताप मापक्रम पर दो में से एक नियत बिन्दु जल का त्रिक बिन्दु लिया गया है जिसे केल्विन परम ताप मापक्रम पर संख्या 273.16 K निर्धारित की गई है। इस मापक्रम (केल्विन परम ताप) पर अन्य नियत बिन्दु क्या है?
(c) परम ताप (केल्विन मापक्रम) T तथा सेल्सियस मापक्रमं पर ताप tc में सम्बन्ध इस प्रकार है
tc = T – 273.15
इस सम्बन्ध में हमने 273.15 लिखा है 273.16 क्यों नहीं लिखा?
(d) उस परम ताप मापक्रम पर, जिसके एकांक अन्तराल का आमाप फारेनहाइट के एकांक अन्तराल के बराबर है, जल के त्रिक बिन्दु का ताप क्या होगा?
उत्तर:
(a) क्योंकि जल का त्रिक बिन्दु 273.16K एक अद्वितीय बिन्दु हैं जिसे आसानी से प्राप्त किया जा सकता है इसे तापमिति में मानक ताप के रूप में उपयोग करते हैं तथा जिसके दाब 0.46 मिमी (पारा) निश्चित है, जबकि हिम का गलनांक व जल का क्वथनांक व आयतन दाब बदलने पर बदल जाते हैं। हिमांक तथा पानी के क्वथनांक को प्राप्त करना कठिन होता है क्योंकि ये पानी की अशुद्धियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
(b) केल्विन ताप पर अन्य नियत बिन्दु परम शून्य ताप है जिस पर सभी गैसों का आयतन व दाब शून्य हो जाता है।
(c) सम्बन्ध । रूपान्तरण समीकरण है tc = T – 273.15; सेल्सियस व केल्विन पैमानों का 273.15 केल्विन स्केल पर सेल्सियस पैमाने के 0°C के संगत ताप हैं जबकि 273,16K जल का त्रिक बिन्दु है जो सेल्सियस पैमाने पर 0.01°C (°C) के बराबर है।
(d) हम जानते हैं:
\(\frac{T_F-32}{180}=\frac{T_K-273}{100}\) ………..(1)
किसी अन्य ताप पर
\(\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{F}}^{\prime}-32}{180}=\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{K}}^{\prime}-32}{180}\) ………(2)
समी० (2) में से समी० (1) को घटाने पर
\(\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{F}}^{\prime}-\mathrm{T}_{\mathrm{F}}}{180}=\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{K}}^{\prime}-\mathrm{T}_{\mathrm{K}}}{100}\)
TF – TF = \(\frac{180}{100}\) (TK – TK)
TF – TF = \(\frac{9}{5}\) (TK – TK)
यदि
TF – TF = 1K
TF – TF = \(\frac{9}{5}\)
त्रिक बिन्दु तापक्रम 273.16 के लिए
नये पैमाने का तापक्रम – 273.16 × \(\frac{9}{5}\) =491.69

प्रश्न 5.
दो आदर्श गैस तापमापियों A तथा B में क्रमश: ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। इनके प्रेक्षण निम्नलिखित हैं

तापतापमापी A में दाबतापमापी B में दाब
जल का त्रिक बिन्दु1.250 × 105 Pa1.797 × 105 Pa
सल्फर का सामान्य0.200 × 105 Pa0.287 × 105 Pa

(a) तापमापियों A तथा B के द्वारा लिए गए पाठ्यांकों के अनुसार सल्फर के सामान्य गलनांक के परमताप क्या हैं?
(b) आपके विचार से तापमापियों A तथा B के उत्तरों में थोड़ा अन्तर होने का क्या कारण है? (दोनों तापमापियों में कोई दोष नहीं है।) दो पाठयांकों के बीच की विसंगति को कम करने के लिए इस प्रयोग में और क्या प्रावधान आवश्यक हैं?
उत्तर:
तापमापी A के लिए,
तथा
त्रिक बिन्दु पर Ptr = 1.250 x 105 Pa
Ttr = 273.16K
सल्फर के लिए P = 1.797 × 105 Pa, T = ?
∵ गैस तापमापी द्वारा ताप मापन नियत आयतन पर किया जाता है,
अतः तापमापी A के लिए,
\(\frac{P}{T}\) = नियतांक या \(\frac{\mathrm{P}_{t r}}{\mathrm{~T}_{t r}}\) = \(\frac{P}{T}\)
∴ सल्फर का गलनांक
T = Ttr × \(\frac{\mathrm{P}_{t r}}{\mathrm{~T}_{t r}}\)
= 273.16 × \(\frac{1.797 \times 10^5}{1.250 \times 10^5}\)
= 392.69 K
जबकि इसी प्रकार तापमापी B द्वारा मापा गया सल्फर का गलनांक
T = \(\frac{\mathrm{P}}{\mathrm{P}_{t r}}\) x Tr
= \(\frac{0.287 \times 10^5}{0.200 \times 10^5}\) × 243.16
= 391.18K
(b) दोनों तापमापियों के पाठयांकों में अन्तर इसलिए है क्योंकि प्रयोग की जाने वाली गैसें आदर्श गैस नहीं है। विसंगति को दूर करने के लिए पाठ्यांक कम दाब पर लेने चाहिए, जिससे कि गैसें आदर्श गैस की तरह व्यवहार करें।

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प्रश्न 6.
किसी 1m लम्बे स्टील के फीते का यथार्थ अंशांकन 27°C पर किया गया है। किसी तप्त दिन जब ताप 45°C था तब इस फीते से किसी स्टील की छड़ की लम्बाई 63 cm मानी गई। उस दिन स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई क्या थी? जिस दिन ताप 27°C होगा। उस दिन इसी छड़ की लम्बाई क्या होगी?
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक 1.20 x 105 K-1
उत्तर:
t1 = 27°C, l1 = 63 cm t2 = 45°C, l2 = ?
α = 1.20 × 105 K-1
l2 = l1 [l + α(t2 – t1)]
= 63 [1 + 1.20 × 10-5(45 – 27)]
=63[1 + 21.6 × 10-5]
= 63.013608
= 63 cm
अतः 27°C वाले दिन छड़ की लम्बाई = 63.cm
t2 = 45° पर फीते की लम्बाई = 100cm
स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक α = 1.2 × 10-5K-1
45°C पर फीते की लम्बाई में वृद्धि
∆L = Lα∆t
∆L = 100 × 1.2 × 10-5 x (45 – 27)
= 0.0216cm.
∵ 100 cm लम्बाई में वृद्धि = 0.0216am
∴ 1 cm लम्बाई में वृद्धि = \(\frac{0.0216}{100}\)
∴ 63 cm लम्बाई में वृद्धि = \(\frac{0.0216}{100}\) × 0.63
= 0.0136 cm
अत : 45°C पर स्टील की छड़ की वास्तविक लम्बाई
= 63cm + 0.0136cm
= 63.0136cm = 63 cm
जिस दिन ताप 27°C पर होगा, तब 1 सेमी० फीते का साइज स्टील के फीते पर ठीक 1 cm पर होगा क्योंकि स्टील के फीते का अंशांकन 27° पर हुआ है।

प्रश्न 7.
किसी बड़े स्टील के पहिए को उसी पदार्थ की किसी धुरी पर ठीक बैठाना है। 27°C पर धुरी का बाहरी व्यास 8.7 cm तथा पहिये के केन्द्रीय छिद्र का व्यास 8.69 cm है। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठण्डा किया गया है धुरी के किस ताप पर पहिया धुरी पर चढ़ेगा? यह मानिए कि आवश्यक ताप परिसर में स्टील का रेखीय प्रसार गुणांक नियत रहता है।
αस्टील = 1.2 × 10-5K-1
उत्तर:
दिया है:
D27 = 8.7cm, Dt = 8.69cm,
Dt = D0(1 + α∆t)
8.69 = 8.70 (1 + α∆t)
∆t = \(\frac{8.69-8.70}{8.70 \times 1.2 \times 10^{-5}}\)
= -95.8°
t2 – t1 = 95.80
t2 = t1 – 95.8°
= 27 – 95.8°
= -68.8°C
= -69°C
अतः पहिए को धुरी पर चढ़ाने के लिए धुरी को -69°C तक ठण्डा करना होगा।

प्रश्न 8.
ताँबे की चादर में एक छिद्र किया गया है। 27°C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। इस धातु की चादर को 227°C तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में क्या परिवर्तन होगा? ताँबे का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.7 × 105 K-1
उत्तर:
तापान्तर ∆t = 227 – 27 = 200°C. ∆T = 200K
व्यास में परिवर्तन ∆D = D.α.∆T
= 4.24 × 1.7 x 10-5 × 200
= 0.0144 cm
= 1.44 ×102 cm ( वृद्धि )

प्रश्न 9.
27°C पर 1.8 cm लम्बे किसी ताँबे के तार को दो दृढ़ टेंकों के बीच अल्प तनाव रखकर थोड़ा कसा गया है। यदि तार को -39°C ताप तक शीतित करें तो तार में कितना तनाव उत्पन्न हो जाएगा? तार का व्यास 2.0mm है। पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक = 2 × 10-5 K-1, पीतल का यंग प्रत्यास्थता गुणांक = 0.91 x 1011 Pa
उत्तर:
दिया है:
Y = 0.91 × 1011 Pa
तार की त्रिज्या
= \(\frac{2}{2}\)
= 1mm = 103m
क्षेत्रफल A = πr2 = 3.14 × (103)2
= 3.14 × 10-6m2
तथा ताप में कमी ∆t = t1 – t2 = 27 – (-39 ) = 66°C
ठण्डा करने पर तार में उत्पन्न बल
F = YAα∆t
= 0.91 × 1011 × 3.14× 10-6 × 2 × 10-5 × 66
= 377N
= 3.8 × 102N

प्रश्न 10.
50 cm लम्बी तथा 3 mm व्यास की किसी पीतल की छड़ को उसी लम्बाई तथा व्यास की किसी स्टील की छड़ से जोड़ा गया है। यदि ये मूल लम्बाईयाँ 40°C पर हैं तो 250°C पर संयुक्त छड़
की लम्बाई में क्या परिवर्तन होगा ? क्या संधि पर कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न होगा? छड़ के सिरों को प्रसार के लिए मुक्त रखा गया है। (ताँबे तथा स्टील के रेखीय प्रसार गुणांक क्रमशः 2 x 105 K-1 तथा 1.2 × 10-5 K-1)
उत्तर:
तापान्तर ∆t = t2 – t1 = 250 – 40
= 210°C,
dT = dt = 210K
पीतल की छड़ की लम्बाई में वृद्धि
∆L1 = L1α1∆T
= 50 × 2 × 10-5 × 210
= 0.21 Cm
तथा स्टील की छड़ की लम्बाई में वृद्धि
∆L2 = L2α2∆T
= 50 × 1.2 × 105 ×210
= 0.126am – 0.13 cm
अतः संयुक्त छड़ की लम्बाई में वृद्धि
= ∆L1 + ∆L2
= 0.21 + 0.13
= 0.34cm.
छड़ के सिरे प्रसार के लिए मुक्त हैं अतः संधि पर कोई तापी प्रतिबल उत्पन्न नहीं होगा।

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प्रश्न 11.
ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 49 x 10-3 K-1 है। ताप में 30°C का वृद्धि होने पर इसके घनत्व में क्या आंशिक परिवर्तन होगा?
उत्तर:
माना ग्लिसरीन का द्रव्यमान m तथा आयतन V है।
∴ घनत्व p = \(\frac{m}{\mathrm{~V}}\)
यहाँ आयतन प्रसार गुणांक γ = 49 × 10-5K-1
ताप वृद्धि ∆t = 30°C तथा ∆T = 30K
आयतन में वृद्धि ∆V = Vγ. ∆T = V × 49 × 10-5 × 30
∆V = 0.0147V या \(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\mathrm{V}}\) = 0.0147
नया आयतन V + ∆V होगा अतः नया घनत्व
\(\rho^{\prime}=\frac{m}{V+\Delta V}\)
अतः
\(\frac{\rho^{\prime}}{\rho}=\frac{V}{V+\Delta V}=\frac{1}{1+\frac{\Delta V}{V}}\)
= \(-\left(1+\frac{\Delta V}{V}\right)^{-1}\)
या
\(\frac{\rho^{\prime}}{\rho}\) = (1 + 0.0147)-1 = 1 – 0.0147 ( द्विपद प्रमेय से)
या
1 – \(\frac{\rho^{\prime}}{\rho}\) = 0.0147
या
= 0.0147

प्रश्न 12.
8kg द्रव्यमान के किसी ऐलुमिनियम के छोटे ब्लॉक में छिद्र करने के लिए किसी 10kW की बरमी का उपयोग किया गया है। 2.5 मिनट में ब्लॉक के ताप में कितनी वृद्धि हो जाएगी? यह मानिए कि 50% शक्ति तो स्वयं बरमी गर्म करने में खर्च हो जाती है अथवा परिवेश में लुप्त हो जाती हैं ऐलुमिनियम की विशिष्ट ऊष्मा धारिता = 0.91 Jg-1 K-1 है।
उत्तर:
दिया है:
P = 10 kW = 104w,
t = 2.5min = 150s ऐलुमिनियम ब्लॉक का द्रव्यमान = 8 kg
विशिष्ट ऊष्मा
s = 0.91 Jg-1 K-1
= 9.1 × 102 Jkg-1 K-1
बरमी द्वारा ली गई कुल ऊर्जा
Wकुल = Pt = 104 × 150
= 1.5 × 106 जूल
गुटके को दी गई ऊर्जा W = \(\frac{50}{100}\) Wजूल
= 0.5 × 1.5 × 106 जूल
यदि ताप वृद्धि ∆Q हो, तो W = ms ∆Q
∆Q = \(\frac{\mathrm{W}}{\mathrm{ms}}\)
= \(\frac{0.5 \times 1.5 \times 10^6}{8 \times 9.1 \times 10^2}\)
= 103.02 °C

प्रश्न 13.
2.5kg द्रव्यमान के ताँबे के गुटके को किसी भट्टी में 500°C तक तप्त करने के पश्चात् किसी बड़े हिम- ब्लॉक पर दिया जाता है। गलित हो सकने वाली हिम की अधिकतम मात्रा क्या है? ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा धारिता 0.39 Jg-1K-1; बर्फ की संगलन ऊष्मा = 335 Jg-1
उत्तर:
दिया है:
m = 2.5 kgs = 0.39 Jg-1 K-1
= 3.9 × 102 Jkg-1 K-1
∆t = (500 – 0 ) = 500°C (∵ ∆t = ∆T)
∴ ∆T = 500, K, L = 335Jg-1 = 335 × 103 Jkg-1
ऊष्मामिति के सिद्धान्त से,
गुटके द्वारा दी गई ऊष्मा = बर्फ द्वारा ली गई ऊष्मा
ms∆T = mबर्फL

= 1.45 kg = 1.5 kg
धातु

प्रश्न 14.
किसी की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के प्रयोग में 0.20 kg के धातु के गुटके को 150°C पर तप्त करके किसी ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक 0.025 kg), जिसमें 27°C का 150 cm जल भरा है, में गिराया जाता है। अंतिम ताप 40°C है। धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता परिकलित कीजिए। यदि परिवेश में क्षय ऊष्मा उपेक्षणीय न मानकर परिकलन किया जाता है, तब क्या आपका उत्तर धातु की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के वास्तविक मान से अधिक मान दर्शाएगा अथवा कम?
उत्तर:
दिया है:
Vजल = 150 cm3 = 150 × 10-6 m3
Mजल = Vजल × P जल
= 150 × 10-6 × 103 = 0.15kg
Mधातु = 0.2kg
Sजान = 1 किलो कैलोरी / किग्रा K
ऊष्मामिति के सिद्धान्त से,
धातु द्वारा दी गई ऊष्मा = (ऊष्मामापी + जल) द्वारा ली गई ऊष्मा
Mधातु × Sधातु × ∆t1) = (Mजल × Sजल + W ) x ∆t2

= \(\frac{(0.15 \times 1+0.025) \times(40-27)}{0.20(150-40)}\)
= \(\frac{0.175 \times 13}{0.20 \times 110}\)
= 0.103kcal kg-1
= 0.103 × 4.2 × 103 Jkg-1 K-1
(∵ ∆t = ∆T)
= 0.43 × 103 Jkg-1 K-1
= 0.43 Jg-1 K-1
यदि परिवेश में ऊष्मा क्षय को नगण्य न मानकर परिकलित किया जाए तो उपर्युक्त उत्तर वास्तविक विशिष्ट ऊष्मा धारिता से कम मान दर्शाएगा।

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प्रश्न 15.
कुछ सामान्य गैसों के कक्ष ताप पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं के प्रेक्षण नीचे दिए गए हैं:

गैसमोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता (C) (cal mol2 K2)
हाइड्रोजन4.87
नाइट्रोजन4.97
ऑक्सीजन5.02
नाइट्रिक ऑक्साइड4.99
कार्बन मोनोक्साइड5.01
क्लोरीन6.17

इन गैसों की मापी गई मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताएँ एक परमाणुक गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिताओं से सुस्पष्ट रूप से भिन्न हैं। प्रतीकात्मक रूप से किसी एक परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता 2.92 cal/molK होती है। इस अन्तर का स्पष्टीकरण कीजिए क्लोरीन के लिए कुछ अधिक मान (शेष की अपेक्षा) होने से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
एक परमाणुक गैसों के अणुओं में केवल स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है जबकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं में स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा के साथ-साथ घूर्णीय गतिज ऊर्जा भी सन्निहित होती है। किसी गैस को ऊष्मा देने पर यह ऊष्मा अणुओं की सभी प्रकार की ऊर्जाओं की समान वृद्धियाँ करती है। अब चूँकि द्विपरमाणुक गैसों के अणुओं की ऊर्जा के प्रकार अधिक होते हैं। अत: इनकी मोलर विशिष्ट धारिताएँ भी अधिक होती हैं। क्लोरीन की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता का अधिक होना यह प्रदर्शित करता है कि इसके अणु स्थानान्तरीय, घूर्णीय गतिज ऊर्जा के अतिरिक्त कम्पनिक गतिज ऊर्जा भी रखते हैं।

प्रश्न 16.
101°F ताप ज्वर से पीड़ित किसी बच्चे को एन्टीपायरिन (ज्वर कम करने की दवा) दी गई जिसके कारण उसके शरीर से पसीने के वाष्पन की दर में वृद्धि हो गई। यदि 20 मिनट में ज्वर 98°F तक गिर जाता है तो दवा द्वारा होने वाले अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर क्या है? यह मानिए कि ऊष्मा ह्रास का एकमात्र उपाय वाष्पन ही है। बच्चे का द्रव्यमान 30 kg है। मानव शरीर की विशिष्ट ऊष्माधारिता जल की विशिष्ट ऊष्माधारिता के लगभग बराबर है तथा उस ताप पर जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 580 cal g है।
उत्तर:
बच्चे का द्रव्यमान M = 30kg
ताप में कमी = 101° F – 98° F = 3°
F = 3 × \(\frac{5}{9}\) °c = 3°c
शरीर की विशिष्ट ऊष्माधारिता
s = जल की विशिष्ट ऊष्माधारिता = 103 cal kg-1 °C-1
बच्चे के शरीर से ऊष्मा ह्रास
Q = Ms 40 = 30 × 103 × 3
= 50 × 103 cal
यदि t = 20 मिनट में वाष्पित जल का द्रव्यमान 1 हो, तो
m = \(\frac{Q}{\mathrm{I}}=\frac{50 \times 10^3}{580 \times 10^3}=\frac{5}{58} \mathrm{~kg}\)
अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर
= \(\frac{m}{t}\) = \(\frac{(5 / 58) \mathrm{kg}}{20 \mathrm{~min}}\)
= \(\frac{5 \times 1000}{58 \times 20}\)gmin-1
= 4.31gmin-1

प्रश्न 17.
थर्मोकोल का बना ‘हिम बॉक्स’ विशेषकर गर्मियों में कम मात्रा के पके भोजन के भण्डारण का सस्ता तथा दक्ष साधन है। 30 cm भुजा के किसी हिम बॉक्स की मोटाई 5.0 cm है। यदि इस बॉक्स में 4.0 kg हिम रखा है तो 6h के पश्चात् बचे हिम की मात्रा का आकलन कीजिए। बाहरी ताप 45° C है तथा थर्मोकोल की ऊष्मा चालकता 0.01 Js-1 m-1 K-1 है।
(हिम की संगलन ऊष्मा 335 × 103 Jkg-1)
उत्तर:
बॉक्स की प्रत्येक भुजा की लम्बाई
a = 30 cm = 0.30m
घन के 6 पृष्ठ हैं; प्रत्येक का क्षेत्रफल a2 है अतः घन का पृष्ठीय
क्षेत्रफल = 6a2 = 6 × (0.3)2 = 0.54m2
बॉक्स की मोटाई 5 cm = 5 × 10-2m = 0.05m
समय अन्तराल t = 6h = 6 × 3600s
हिम बॉक्स में प्रवेश करने वाली कुल ऊष्मा
\(\mathrm{Q}=\frac{\mathrm{KA}\left(\theta_1-\theta_2\right) t}{d}\)
= \(\frac{0.01 \times 0.54 \times(45-0) \times(6 \times 3600)}{005}\)
= 1.05 × 105 J
माना t समय अन्तराल में पिघली हिम का द्रव्यमान m kg है।
सूत्र Q = mL से, m = \(\frac{\mathrm{Q}}{\mathrm{L}}=\frac{1.05 \times 10^5}{335 \times 10^3}\)
= 0.3kg
बॉक्स में हिम की प्रारंभिक मात्रा अतः 6 घण्टे पश्चात् बॉक्स में शेष हिम = 4 kg
= M – m
= 4.0 – 0.3
= 3.7 kg

प्रश्न 18.
किसी पीतल के बॉयलर की पेंदी का क्षेत्रफल 0.15 m2 तथा मोटाई 1.0 cm है। किसी गैस स्टोव पर रखने पर इसमें 6.0 kg/ min की दर से जल उबलता है। बॉयलर के सम्पर्क की ज्वाला के भाग का ताप आकलित कीजिए। पीतल की ऊष्मा चालकता = 109 Js-1 m-1 K-1; जल की वाष्पन ऊष्मा 2256 × 103 kg-1 है।
उत्तर:
पेंदी का क्षेत्रफल A = 0.15m2,
मोटाई l = 1 cm = 10-2 m
पीतल की ऊष्मा चालकता K = 109Js-1 m-1 K-1
जल के उबलने की दर = 6 kg/min
= \(\frac{6}{60}\) Kg/s
= 0.1 kgs-1
जल की वाष्पन ऊष्मा L = 2256 × 103 kg-1
बॉयलर के आधार से बॉयलर में प्रवाहित ऊष्मा कीदर
\(\mathrm{H}=\frac{\mathrm{KA}\left(\theta_1-\theta_2\right)}{l}\)
\(\frac{\mathrm{Q}}{t}=\frac{\mathrm{KA}\left(\theta_1-\theta_2\right)}{l}\)
यदि बॉयलर में kg जल वाष्प में बदलता है, तो
Q = mL
अतः
\(\frac{m \mathrm{~L}}{t}=\frac{\mathrm{KA}\left(\theta_1-\theta_2\right)}{l}\)
0.1 × 2256 × 103 = \(\frac{109 \times 0.15\left(\theta_1-100\right)}{10^{-2}}\)
अतः
θ1 – 100 = 138 (138)
या
θ1 = 138 + 100 = 238°C

HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 19.
स्पष्ट कीजिए कि क्यों:
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिण्ड अल्प उत्सर्जक होते हैं।
(b) कंपकपी वाले दिन लकड़ी की ट्रे की अपेक्षा पीतल का गिलास कहीं अधिक शीतल प्रतीत होता है।
(c) कोई प्रकाशिक उत्तापमापी (उच्च तापों को मापने की युक्ति), जिसका अंशांकन किसी आदर्श कृष्णिका के विकिरणों के लिए किया गया है, खुले में रखे किसी लाल तप्त लोहे के टुकड़े का ताप काफी कम मापता है, परन्तु जब उसी लोहे के टुकड़े को भट्ठी में रखते हैं, तो वह ताप का सही मान मापता है।
(d) बिना वातावरण के पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।
(e) भाप के परिचालन पर आधारित तापन निकाय तप्त जल के परिचालन पर आधारित निकायों की अपेक्षा भवनों को उष्ण बनाने में अधिक दक्ष होते हैं।
उत्तर:
(a) अधिक परावर्तकता वाले पिण्ड अपने ऊपर गिरने वाले अधिकांश विकिरण को परावर्तित कर देते हैं अर्थात् वे अल्प अवशोषक होते हैं। इस कारण वे अल्प उत्सर्जक भी होते हैं।

(b) लकड़ी की ट्रे ऊष्मा की कुचालक होती है, जबकि पीतल का गिलास ऊष्मा का सुचालक है। पीतल की चालकता अत्यधिक होने के कारण जब ठण्ड के दिनों पीतल के गिलास को स्पर्श करते हैं तो हमारे हाथ से ऊष्मा गिलास में चली जाती है अतः पीतल का गिलास अत्यधिक ठण्डा प्रतीत होता है। लकड़ी की ऊष्मा चालकता बहुत कम होने के कारण यदि हम लकड़ी की ट्रे को छूते हैं, तो हमारे शरीर से लकड़ी में ऊष्मा का प्रवाह नगण्य होता है, अतः हमें ठण्डक का आभास नहीं होता।

(c) खुले में रखे तप्त लोहे से वातावरण में ऊष्मा चारों ओर फैलती है जिसके कारण उत्तापमापी को पर्याप्त विकिरण नहीं मिल पाता है। इसके विपरीत भट्ठी में रखने पर गोले का ताप स्थिर बना रहता है और वह नियत दर से विकिरण उत्सर्जित करता रहता है तथा विकिरण का अधिकांश भाग उत्तापमापी तक पहुँचता है तथा उत्तापमापी ताप का सही मान पढ़ता है।

(d) पृथ्वी के चारों ओर का वायुमण्डल पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरणों को वापस पृथ्वी की ओर परावर्तित कर देता है। वायुमण्डल की अनुपस्थिति में पृथ्वी से उत्सर्जित होने वाले ऊष्मीय विकिरण सीधे ही अन्तरिक्ष में चले जाएँगे तथा पृथ्वी अशरणीय शीतल हो जाएगी।

(e) जल वाष्प में उबलते जल की अपेक्षा ऊष्मा की मात्रा बहुत अधिक होती है; इससे जल वाष्प आधारित तापन निकाय, तप्त जल आधारित तापन निकाय से अधिक दक्ष है।

प्रश्न 20.
किसी पिण्ड का ताप 5 मिनट में 80° C से 50°C हो जाता है। यदि परिवेश का ताप 20° C हो, तो उस समय का परिकलन कीजिए जिसमें उसका ताप 60°C से 30°C हो जाएगा।
उत्तर:
समीकरण = K × (तापान्तर) से,
80° C तथा 50° C का माध्य 65°C है अतः परिवेश ताप से अन्तर (65 – 20) = 45°C होगा
प्रथम स्थिति में,
\(\frac{(80-50)^{\circ} \mathrm{C}}{5}\)
= K (45°C)
या 6°C /min = K (45″C) ……..(1)
द्वितीय स्थिति में, 60° C व 30°C का माध्य 45°C है जिसका परिवेश
ताप से अन्तर (45 – 20)°C = 25°C है।
\(\frac{(60-30)^{\circ} \mathrm{C}}{t_{\min }}\) = K (25°C) ……..(2)
समी (1) में समी (2) से भाग देने पर,
6°C/min × \(\frac{t}{30^{\circ} \mathrm{C}}=\frac{\mathrm{K}\left(45^{\circ} \mathrm{C}\right)}{\mathrm{K}\left(25^{\circ} \mathrm{C}\right)}\)
t = \(\frac{45}{25} \times \frac{30}{6}\) =9 min
अत: 60°C से 30°C तक ठण्डा होने में 9 min का समय लगेगा।

अतिरिक्त अभ्यास:

प्रश्न 21.
CO2 के P-T प्रावस्था आरेख पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(a) किस ताप व दाब पर CO2 की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ साम्य में सहवर्ती हो सकती हैं?
(b) CO2 के गलनांक तथा क्वथनांक पर दाब में कमी का क्या प्रभाव पड़ता है?
(c) CO2 के लिए क्रांतिक ताप तथा दाब क्या हैं? इनका क्या महत्त्व है ?
(d) (i) – 70°C ताप व 1 atm दाब, (ii) 60°C ताप व 10 atm दाब, (iii) 15°C ताप व 56 atm दाब पर CO2 ठोस, द्रव अथवा गैस में से किस अवस्था में होती है?
उत्तर:
(a) CO2 की ठोस, द्रव तथा वाष्प प्रावस्थाएँ साम्य में सहवर्ती त्रिक बिन्दु पर हो सकती हैं जिनके संगत
त्रिक बिन्दु पर ताप
तथा
= – 56.6″C
दाब = 5.11 atm
(b) वाष्पन वक्र (1) तथा गलन वक्र (II) के द्वारा दाब घटने पर CO2 का क्वथनांक तथा गलनांक दोनों घट जाते हैं।
(c) CO2 के क्रान्तिक ताप एवं दाब क्रमश: 31.1°C तथा 73.0 atm हैं। इससे उच्च ताप पर CO2 द्रवित नहीं होगी, चाहे उस पर कितना भी अधिक दाब आरोपित किया जाए।
(d) (i) – 70°C तथा 1atm दाब पर CO2 वाष्प होगी क्योंकि यह बिन्दु वाष्प क्षेत्र में हैं।
(ii) -60°C तथा 10 atm दाब पर CO2 ठोस होगी क्योंकि यह बिन्दु ठोस क्षेत्र में है।
(iii) 15°C ताप व 56 atm दाब पर CO2 द्रव होगी क्योंकि यह बिन्दु द्रव क्षेत्र में है।

प्रश्न 22.
CO2 के P-T प्रावस्था आरेख (प्रश्न 16 के चित्र ) पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) 1 atm दाब तथा 60°C ताप पर CO2 का समतापी संम्पीडन किया जाता है? क्या यह द्रव प्रावस्था में जाएगी?
(b) क्या होता है जब 4 atm दाब पर CO2 का दाब नियत रखकर कक्ष ताप पर शीतलन किया जाता है?
(c) 10 atm दाब तथा 65°C ताप पर किसी दिए गए द्रव्यमान की ठोस CO2 को दाब नियत रखकर कक्ष ताप तक तप्त करते समय होने वाले गुणात्मक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
(d) CO2 को 70°C तक तप्त तथा समपाती सम्पीडित किया जाता है। आप प्रेक्षण के लिए इसके किन गुणों में अन्तर की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर:
(a) 1 atm दाब तथा 60°C ताप पर CO2 वाष्प है। यदि इसका समतापी संपीडन किया जाता है तो यह द्रव अवस्था में नहीं जायेगी, बल्कि वाष्प सीधे ही ठोस में संघनित हो जायेगा।
(b) यदि हम 4 atm दाब पर ताप अक्ष के समान्तर रेखा खींचते हैं तो यह रेखा वाष्प क्षेत्र से सीधे ठोस क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है।
(c) ठोस CO2 को 10 वायुमंडलीय दाब पर गर्म करने पर पहले वह द्रव अवस्था में फिर वाष्प अवस्था में बदल जाती है। 10 वायुमण्डलीय दाब पर ताप अक्ष के समान्तर खींची गई रेखा गलन वक्र को Q तथा वाष्प वक्र को R पर काटती है। Q व R के संगत ताप क्रमश: CO2 के गलनांक तथा क्वथनांक हैं।
(d) 70°C ताप CO2 के क्रांतिक ताप (31.1°C) से अधिक है, अत: 70°C ताप पर CO2 गैसीय अवस्था में है, यह द्रव अवस्था में नहीं बदलेगी भले ही दाब कितना भी अधिक कर दिया जाए।

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HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 3 वनस्पति जगत Textbook Exercise Questions and Answers.

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प्रश्न 1.
शैवाल के वर्गीकरण का क्या आधार है ?
उत्तर:
शैवालों (Algae) को मुख्य रूप से प्रकाशसंश्लेषी वर्णक ( photosynthetic pigments), संचित खाद्य पदार्थ ( reserved food material), कोशिकाभित्ति की संरचना तथा कशाभिकाओं की उपस्थिति, अनुपस्थिति तथा संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। शैवालों को तीन प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है- क्लोरोफाइसी (Chlorophyceae) फिओफाइसी (Phacophyceae), तथा रोडोफाइसी ( Rhodophyceae)

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प्रश्न 2.
लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म के जीवन चक्र में कहाँ और कब निम्नीकरण विभाजन होता है ?
उत्तर:
(i) लिवरवर्ट (Liverwort ) – ये ब्रायोफाइटा समूह के पौधे हैं। इनमें बीजाणुद्भिद (Sporophyte) के संपुट (capsule) में बीजाणु मातृ कोशिकाओं (spore mother cells) में निम्नीकरण विभाजन ( reduction division ) से बीजाणु बनते हैं।

(ii) मॉस (Moss) – ये उच्च ब्रायोफाइट हैं इनमे बीजाणुद्भिद् (sporophyte ) के सम्पुट में बीजाणु मातृ कोशिकाओं में निम्नीकरण विभाजन (meiosis) होता है जिससे अगुणित बीजाणु बनते हैं।

(iii) फर्न (Fern) – ये टेरिडोफाइट सनूह के पौधे हैं। इनमें स्पोरोफाइट की बीजाणुधानी के अन्दर बीजाणु मातृ कोशिकाओं में निम्नीकरण विभाजन ( meiosis) होता है।

(iv) जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) – लघुबीजाणुधानी (microsporangium) में परागकण बनते समय लघुबीजाणु मातृ कोशिका में निम्नीकरण विभाजन होता है। बीजाण्ड (ovule) के बीजाण्डकाय (nucellus) की गुरुबीजाणु मातृ कोशिका में निम्नीकरण विभाजन होता है। इससे अगुणित गुरुबीजाणु बनते हैं । एक गुरुबीजाणु वृद्धि करके मादा युग्मकोद्भिद् अथवा भ्रूणपोष बनाता है ।

(v) एन्जियोस्पर्म (Angiosperms) – परागकोष (Anther) की पराग मातृ कोशिकाओं (pollen mother cells) में निम्नीकरण विभाजन से परागकणों (Pollen grains) का निर्माण होता है। बीजाण्डकाय (nucellus) की गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (megaspore mother cell) में निम्नीकरण विभाजन ( reduction division or meiosis) होता है जिसके फलस्वरूप चार अगुणित गुरुबीजाणु केन्द्रक बनते हैं जिनमें से तीन नष्ट हो जाते हैं केवल एक सक्रिय रहता है। यह अगुणित भ्रूणकोष बनाता है।

प्रश्न 3.
पौधे के तीन वर्गों के नाम लिखिए, जिनमें स्त्रीधानी होती है। इनमें से किसी एक के जीवन चक्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा तथा जिम्नोस्पर्म वर्ग के पौधों में स्त्रीधानी ( archegonium) पायी जाती है।

मॉस (ब्रायोफाइट पादप) का जीवन चक्र
(Life-cycle of Moss: A Bryophyte)

मॉस (फ्यूनेरिया) में युग्मकोद्भिद् तथा बीजाणुद्भिद् ( gametophyte and sporophyte ) दो स्पष्ट अवस्थाएँ पायी जाती हैं। युग्मकोद्भिद् (gametophyte ) अवस्था पादप की प्रमुख अवस्था है जो एक पर्णिल प्ररोह (foliage shoot) के रूप में होता है। यह स्वतन्त्र स्वपोषी होती है। इसके जननांग अलग-अलग शाखाओं के शिखानों पर पत्तियों से घिरे हुए होते हैं। मॉस का पौधा पूर्वी (protandrous) होता है।

मॉस में नर युग्मक पुंधानी (antheridium) तथा मादा युग्मक स्त्रीधानी (archegonium) में बनते हैं। नर युग्मक पुमणु (antherozoids) तथा मादा युग्मक अण्ड (egg) कहलाते हैं । निषेचन के लिए बाह्य जल आवश्यक होता है। नर तथा मादा युग्मकों के संलयन (fusion) से द्विगुणित ( diploid, 2n) युग्मनज (zygote) बनता है।

इससे बीजाणुद्भिद् पीढ़ी का आरम्भ होता है। युग्मनज (zygote) विभाजित होकर बहुकोशिकीय भ्रूण ( embryo) बनाता है। यह आंशिक परजीवी बीजाणुद्भिद् (sporophyte) में विकसित हो जाता है जो फुट, सीटा व कैप्सूल में विभाजित होता है। इसके सम्पुटिका वाले भाग में बीजाणु मातृ कोशिकाएँ होती हैं जो अर्द्धसूत्री विभाजन करके अगुणित (haploid) बीजाणु बनाती है। अगुणित बीजाणु अंकुरण द्वारा तन्तुवत प्रोटोनीमा (protonema) बनाते हैं। यह बाद में पार्णिल प्ररोह अर्थात् युग्मकोद्भिद को जन्म देते हैं।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित की सूत्रगुणता बताइए –
(i) मॉस की प्रथम तन्तु कोशिका
(ii) द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केन्द्रक,
(iii) मॉस की पत्तियों की कोशिका,
(iv) फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएँ,
(v) मारकेंशिया की जेमा कोशिका,
(vi) एकबीजपत्री की मैरिस्टैम कोशिका,
(vii) लिवरवर्ट के अण्डाशय तथा
(viii) फर्न के युग्मनज 1
उत्तर:
(i) मॉस की प्रथम तन्तु कोशिका (Protonemal cell of moss ) – इनका निर्माण सम्पुट ( capsule) की बीजाणु मातृकोशिकाओं (spore mother cell) में अर्द्धसूत्री विभाजन ( meiosis) से बने बीजाणुओं (spores) से होता है। अतः ये अगुणित (haploid; n) होती है।

(ii) द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केन्द्रक (Primary endosperm nucleus of dicots ) – द्विबीजपत्रियों में भ्रूणपोष (End… perm) का निर्माण, दो ध्रुवीय केन्द्रकों तथा एक नरयुग्मक के संलयन से होता है। अतः यह त्रिगुणित ( triploid; 3n) होता है ।

(ii) मॉस की पत्तियों की कोशिका (Leaf cell of moss) – मॉस की प्रमुख अवस्था युग्मकोद्भिद ( gametophyte ) होती है जो अगुणित (n) होती है। पत्तियाँ इसी अवस्था में होती है। अतः इनकी सूत्रगुणता, अगुणित (n) होती है।

(iv) फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएँ (Prothallus cells of a Fern ) – फर्न का प्रोथैलस अगुणित बीजाणुओं के अंकुरण से बनता है । अतः इसकी कोशिकाओं की सूत्रगुणिता अगुणित (n) होती है।

(v) मारकेंशिया की जैमा कोशिका (Gemma cell of Marchantia) – मार्केन्शिया में जैमा युग्मकोद्भिद् अवस्था पर होते हैं। अतः जैमा की कोशिका की सूत्रगुणता अगुणित (x) होती है।

(vi) एकबीजपत्री की मैरिस्टेम कोशिका (Meristem cell of monocot) – एकबीजपत्री का मुख्य पौधा बीजाणुद्भिद् (2n) होता है। मैरिस्टेम बीजाणुद्भिद का ही एक वर्षी ऊतक ( somatic tissue) है। अतः मैरिस्टेम कोशिका की सूत्रगुणता द्विगुणित ( diploid; 2n) होती है।

(vii) लिवरवर्ट के अण्डाशय (Ovum of Liverwort ) – लिवरवर्ट में अण्डप युग्मकोद्भिद् ( gametophyte ) पर बनता है । अतः इसकी सूत्रगुणता अगुणित (n) होती है।

(viii) फर्न का युग्मनज (Zygote of Fern) – फर्न में युग्मनज का निर्माण दो अगुणित युग्मकों के संलयन से होता है। अतः इसकी सूत्रगुणता द्विगुणित (2n) है।

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प्रश्न 5.
शैवाल तथा जिम्नोस्पर्म के आर्थिक महत्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
शैवाल का आर्थिक महत्व (Economic importance of algae)
शैवाल वातावरण में अमूल्य ऑक्सीजन मुक्त कर महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिक सेवा प्रदान करते हैं।
1. शैवाल खाद्य के रूप में (Algae as Food) – शैवालों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। विटामिन A, C, D, E आदि मुख्य रूप से होते हैं। अल्वा (Utva), फ्यूकस (Fucus), पोरफाइरा (Porphyra), अलेरिया (Alaria), लैमिनेरिया (Laminaria), सरगासम (Sargassum) आदि को खाद्य पदार्थ व पशु खाद्य (animal feed) प्राप्त करने में उपयोग किया जाता है। क्लोरेला (Chlorella) नामक शैवाल में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसे भविष्य के भोजन के रूप में पहचाना जा रहा है। इसे एकल कोशिका प्रोटीन (single cell protein) कहा जाता है।

2. शैवाल उद्योगों में (Algae in industry ) – भूरे तथा लाल शैवाल व्यवसाय की दृष्टि से बहुत उपयोगी सिद्ध हुए हैं। समुद्री घास (kelp) की राख से आयोडीन तथा पोटैशियम निकाला जाता है। कुछ लाल शैवालों जैसे- जिलीडियम (Gelidium), प्रेसीलेरिया (Gracilaria) से एक श्लेष्मीय पदार्थ अगर (Agar) निकलता है इसका प्रयोग प्रयोगशाला तथा कॉस्मेटिक उद्योगों में किया जाता है।

अलेरिया, लैमिनेरिया नामक शैवालों से एल्जिन (algin) नामक पदार्थ निकाला जाता है जिसका प्रयोग अज्वलनशील फिल्मों तथा कृत्रिम रेशे बनाने में किया जाता है। कोन्ड्रस (Chondnis) तथा यूक्यिमा (Eucheuma) से कैराजीनिन (carrageenin) नामक पदार्थ प्राप्त होता है। इसका प्रयोग सौन्दर्य प्रसाधनों में किया जाता है। डायटम्स (Diatoms) की मृत्यु होने पर अपघटन द्वारा डायटमी मृदा बनती है जिसका प्रयोग अग्निसह ईंटें (fire bricks) बनाने में किया जाता है।

3. शैवाल का औषधीय महत्व (Medicinal use of algae ) क्लोरेला (Chlorella) नामक शैवाल से क्लोरेलिन नामक प्रतिजैविक पदार्थ प्राप्त होता है। जिम्नोस्पर्म का आर्थिक महत्व (Economic Importance of Gymnosperms

(i) सजावटी पौधे (Ornamental Plants) – साइकस (Cycas), पाइनस (Pinus ), ऐरोकेरिया (Araucaria), गिन्गो (Ginkgo), थूजा (Thuja), क्रिप्टोमेरिया (Cryptomeria) आदि जिम्नोस्पर्म्स को उद्यानों एवं घरों में सजावट के लिया लगाया जाता है।

(ii) भोज्य पदार्थों के लिए (For Food) – साइकस रिवोल्यूटा तथा जैमिया पिग्मिया से साबूदाना (sago ) प्राप्त होता है। पाइनस जिरार्डियाना (Pinus girardiana) से चिलगोजा प्राप्त होता है। नीटम (Gnetum), गिन्गो (Ginkgo) व साइकस के बीजों को भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता हैं।

(iii) टिम्बर (Timber) – चीड़ (Pinus ), देवदार (Cedrus) कैल (Pinus walichiana), फर (Abies) आदि से प्राप्त लकड़ी का प्रयोग फर्नीचर निर्माण में किया जाता है।

(iv) औषधियों के लिए (For medicines) – साइकस के बीज, छाल व गुरुबीजाणुपणों को पीसकर, पुल्टिस बनायी जाती हैं। एफिड्रा से एफिड्रीन औषधि बनाई जाती है। टेक्सस ब्रेबफोलिया से टैक्सॉल औषधि प्राप्त होती है। थूजा (Thuja) की पत्तियों का काढ़ा खाँसी, बुखार एवं गठिया में लाभदायक है।

(v) एवीज बालसेमिया से कनाडा बालसम, जूनीपेरस से सिडर वुड आयल तथा चीड़ (Pinus) से तारपीन का तेल प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 6.
जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म दोनों में बीज होते हैं फिर भी इनका वर्गीकरण अलग-अलग क्यों है ?
उत्तर:
अनावृत्तबीजी या जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) ऐसे पौधों का समूह है, जिनमें बीजों का निर्माण तो होता है किन्तु ये बीज किसी आवरण द्वारा ढके नहीं होते हैं अर्थात् बीजाण्ड अथवा उनसे विकसित बीज नग्न रूप से पौधों पर लगे होते हैं। जिम्नोस्पर्म (Gr. Gymno = naked, Sperma Seeds) में अण्डाशय और फल का अभाव होता है।

आवृत्तबीजी या एन्जियोस्पर्म (Angiosperms) ऐसे विकसित पौधों का समूह है जिनमें बीज फलावरण के अन्दर स्थित होते हैं। बीजाण्ड अण्डाशय में स्थित होते हैं। निषेचन (fertilization) के पश्चात् अण्डाशय (ovary) से फलावरण (fruit wall) अर्थात पेरीकार्प (pericarp) तथा बीजाण्ड (ovule) से बीज बनता है। फलावरण तथा बीज मिलकर फल (fruit) बनाते हैं। यही कारण है कि जिम्नोस्पर्म एवं एन्जियोस्पर्म को अलग-अलग समूहों में रखा जाता है।

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प्रश्न 7.
विषम बीजाणुकता क्या है ? इसकी सार्थकता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें। इसके दो उदाहरण दो ।
उत्तर:
विषम बीजाणुकता (Heterospory) – टेरीडोफाइटा समूह के ऐसे पौधे जिनमें केवल एक ही प्रकार के बीजाणु उत्पन्न होते हैं, समबीजाणुक (homosporous) कहलाते हैं और यह दशा समबीजाणुकता (homospory) कहलाती है। परन्तु कुछ जातियों में एक ही पौधे में दो प्रकार के बीजाणु बनते हैं जो एक-दूसरे से आमाप (size) में भिन्न होते हैं।

छोटे आमाप के बीजाणु लघु बीजाणु (Microspores) कहलाते हैं तथा जिन बीजाणुधानियों (sporangia) में ये उत्पन्न होते हैं उन्हें लघुवीजाणु धानियाँ (microsporangia) कहते हैं। दूसरे प्रकार के बीजाणु जिनका आमाप लघु बीजाणुओं की तुलना में बड़ा होता है. गुरुबीजाणु (Megaspores) कहलाते हैं और इन्हें उत्पन्न करने वाली बीजाणुधानी, गुरुबीजाणुधानी ( megasporangium) कहलाती है।

उपरोक्त दोनों प्रकार के बीजाणुओं के कार्य भिन्न होते हैं। लघुबीजाणुओं के अंकुरण से नर युग्मकोद्भिद् तथा गुरुबीजाणुओं के अंकुरण से मादा युग्मकोद्भिद का निर्माण होता है। अतः पौधों में दो भिन्न आमाप, संरचना तथा कार्य वाले बीजाणुओं का बनना विषम बीजाणुकता कहलाता है। मादा युग्मकोद्भिद् अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बीजाणुद्भिद (sporophyte ) से जुड़ा रहता है।

मादा युग्मकोद्भिद से ही युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है जो बाद में भ्रूण ( embryo) के रूप में विकसित होता है। यह घटना विकासीय (evolutionary) दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण समझी जाती है। इससे धीरे-धीरे निषेचन हेतु बाह्य जल की आवश्यकता समाप्त हो जाती है जो कि स्थलीय पौधों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

इसी से बीजी प्रवृत्ति (seed habit) का विकास होता है। विषमबीजाणुकता टेरिडोफाइटा से सिलैजिनेला आइसोटीज, साल्वीनिया आदि में पायी जाती है। साबूदाना मुख्यतः कसाना या टेपिओका नामक पौधे से प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 8.
उदाहरण सहित निम्न शब्दावली का संक्षिप्त वर्णन कीजिए-
(i) प्रथम तन्तु
(ii) पुंधानी,
(iii) स्त्रीधानी,
(iv) द्विगुणितक,
(v) बीजाणुपर्ण,
(vi) समयुग्मकी।
उत्तर:
(i) प्रथम तन्तु (Protonema) – यह मॉस के युग्मकोद्भिद की प्राथमिक अवस्था है। बीजाणु (spore) अंकुरित होकर शाखामय, तन्तुरूपी हरे रंग की स्वपोषी रचना प्रथम तन्तु बनाते हैं। प्रथम तन्तुओं पर कलिकाएँ विकसित होकर पत्तीमय अवस्था में विकसित हो जाती हैं। इनके द्वारा वर्धी प्रजनन भी होता है।

(ii) पुंघानी (Antheridium)- ब्रायोफाइट्स तथा टैरिडोफाइट्स में नर जननांग पुंधानी कहलाते हैं। ये युग्मकोदुभिद् पर विकसित होती हैं। ये नाशपाती के आकार की या गोलाकार संरचनाएँ होती हैं। इनके चारों ओर एक स्तरीय बन्ध्य (sterile) जैकेट (jacket) पाया जाता है। पुंधानी के अन्दर पुमणु मातृकोशिकाओं (antherozoid mother cells) से माइटोसिस द्वारा पुमणुओं (antherozoids) का विकास होता है। ये नर युग्मक (male gametes) कहलाते हैं। मॉस के पुमणु द्विकशाभिक तथा फर्न के पुमणु बहुकशाभिक होते हैं।

(iii) स्त्रीधानी (Archegonium ) – यह ब्रायोफाइट तथा टेरिडोफाइट का स्त्री जननांग (Female reproductive part) है। यह फ्लास्क सदृश संरचना है। इसका आधारीय चौड़ा भाग अण्डधा (Venter) तथा ऊपरी संकरा भाग ग्रीवा (Neck) कहलाता हैं। अण्डधा में एक अण्डाणु (egg cell) बनता है। स्त्रीधानियों का निर्माण युग्मकोद्भिद पर होता है। जिम्नोस्पर्म में भी स्त्रीधानी पायी जाती है।

(iv) द्विगुणितक (Diplontic) – पौधों में युग्मकोदभिद अवस्था अगुणित (n) तथा बीजाणुदभिद् अवस्था द्विगुणित (2n) होती है । जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्मस में द्विगुणित अवस्था प्रभावी होती है। इस अवस्था का विकास नर युग्मक तथा मादा युग्मक के संलयन से बने युग्मनज (zygote) से होता है ।

युग्मनज (zygote) विकसित होकर लम्बी बीजाणुद्भिद अवस्था को जन्म देता है। बीजाणुद्भिद से अर्धसूत्री विभाजन के बाद अगुणित युग्मको द्भिद् अवस्था बनती है जो अल्पकालीन व बीजाणुद्भिद पर निर्भर होती है। इससे बने युग्मक संलयित होकर युग्मनज बनाते हैं। ऐसे जीवन चक्र को द्विगुणितक ( diplontic) कहते हैं।

(v) बीजाणुपर्ण (Sporophyll) बीजाणुद्भिद अवस्था जैसे फर्न में, जड़, तना तथा पत्तियों में विभेदित होती है। इनकी परिपक्व पत्तियों पर बीजाणुधानियों (sporangia) का निर्माण होता है जिनमें बीजाणु बनते हैं, बीजाणुधानियों के समूह को सोराई (Sori), एकवचन सोरस (sorus) कहते हैं।

बीजाणुधानियाँ (sporangia) धारण करने वाली पत्तियों को बीजाणुपर्ण (sporophylls) कहते हैं। जिम्नोस्पर्म में ये लघु बीजाणुपर्ण तथा गुरुबीजाणुपर्ण (microsporophylls and megasporophylls) कहलाते हैं। आवृत्तबीजियों में पुंकेसर रूपान्तरित लघुबीजाणु पर्ण तथा अण्डप (carpel) रूपान्तरित गुरुबीजाणुपर्ण ही है।

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(vi) समयुग्मन (Isogamy) – यह एक प्रकार का संलयन है जिसमें भाग लेने वाले युग्मक आकार एवं आकृति में समान होते हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में अन्तर कीजिए-
(i) लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल
(ii) लिवरवर्ट तथा मॉस
(iii) विषम बीजाणुक तथा सम बीजाणुक टैरीडोफाइट
(iv) युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन।
उत्तर:
(i) लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल में अन्तर (Differences between Red algae and Brown algae)

लाल शैवाल (Red algae)भूरे शैवाल (Brown algae)
1. ये सूक्ष्म, एककोशिकीय, कुछ बड़े एवं जटिल संरचना वाले शैवाल हैं।1. ये सरल तन्तुरूपी, सघन, शाखित व अपेक्षाकृत बड़े शैवाल हैं।
2. इनमें क्लोरोफिल ‘a’ तथा ‘d’ पाया जाता है।2. इनमें क्लोरोफिल ‘a’ व क्लोरोफिल c’ पाया जाता है।
3. ये आर-फाइकोएरिथ्रिन (r-phycoerythrin ) वर्णक की उपस्थिति के कारण लाल होते हैं।3. जैन्थोफिल, फ्यूकोजैन्वन के कारण भूरे रंग के होते हैं।
4. संचित भोजन फ्लोरिडियन स्टार्च (floridian starch) होता है।4. संचित भोजन लैमिनेरिन या मैनीटॉल होता है।
5. चल कोशिकाओं (motile cells) का अभाव होता है।5. युग्मक चल बीजाणु आदि कोशिकाओं में कशाभिका उपस्थित होते हैं।
उदाहरण: पोरफाइरा, जिलीडियम, मेसीलेरिया ।उदाहरण: सरगासम, फ्यूकस, लैमिनेरिया ।

(ii) लिवरवर्ट तथा मॉस में अन्तर (Differences between Liverwort and Moss)

लिवरवर्ट (Liverwort)मॉस (Moss)
1. पादपकाय पृष्ठाधर चपटा सूकाय (thallus ) होता है।1. पादपकाय ऊर्ध्व, मूलाभास, तना तथा पत्ती सदृश रचनाओं में विभेदित होता है।
2. मूलाभास (rhizoids) अशाखित तथा एककोशिकीय होते हैं।2. मूलाभास बहुकोशिकीय तथा शाखित होते हैं।
3. थैलस की अधर सतह पर शल्क (scales) पाये जाते हैं।3. शल्क (scales) अनुपस्थित होते हैं।
4. बीजाणुद्भिद्, युग्मकोद्भिद् पर पूर्ण आश्रित होता है।4. बीजाणुद्भिद्, युग्मकोद्भिद पर आंशिक रूप से आश्रित होता है।
5. इलेटर्स (elaters) बीजाणुओं के प्रकीर्णन में भाग लेते हैं।5. परिमुखदन्त (peristomial teeth) बीजाणुओं के प्रकीर्णन में भाग लेते हैं ।
6. कैप्सूल में स्तम्भिका (collumella) अनुपस्थित होता है।6. कैप्सूल में कॉल्यूमेला (collumella) पाया जाता है।
7. बीजाणु अंकुरित होकर युग्मकोद्भिद ( gametophyte) बनाते हैं।7. बीजाणु पहले प्रोटोनीमा बनाते हैं, बाद में युग्मकोद्भिद् बनता

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(iii) विषम बीजाणुक तथा सम बीजाणुक टेरिडोफाइट्स में अन्तर (Differences between Homosporous and Heterosporous Pteridophytes )

सम बीजाणुक (Homosporous)विषम बीजाणुक (Heterosporous)
1. ऐसे टेरीडोफाइट जिनमें सभी बीजाणु एक ही प्रकार के होते हैं, सम बीजाणुक (homosporous) कहलाते हैं।1. ऐसे टेरीडोफाइट जिनमें एक पौधे में दो प्रकार के बीजाणु बनते हैं विषम | बीजाणुक (heterosporous) कहलाते हैं।
2. समबीजाणु (homosporous) से विकसित युग्मकोद्भिद् उभयलिंगी होता है।2. इनमें लघु बीजाणु तथा गुरुबीजाणु बनते हैं। जो क्रमशः नर युग्मकोदभिद तथा मादा युग्मकोद्भिद का निर्माण करते हैं।
उदाहरण : ड्रायोप्टेरिस, टेरिस, लाइकोपोडियम आदि ।उदाहरण: मासीलिया, सिलैजिनेला, साल्वीनिया आदि ।

(iv) युग्मक संलयन तथा त्रिसंलयन में अन्तर (Differences between Syngamy and Triple fusion )

युग्मक संलयन (Syngamy)त्रिसंलयन (Triple fusion )
1. युग्मक संलयन की क्रिया में अगुणित नर तथा मादा युग्मकों (पुमणु तथा अण्डाणु) का परस्पर मिलन होता है, फलस्वरूप द्विगुणित युग्मनज (zygote) बनता है।1. इसमें एक नर युग्मक दो ध्रुवीय केन्द्रकों के संयुजन से बने द्वितीयक केन्द्रक से मिलता है जिससे त्रिगुणित भ्रूणपोष बनता है। इस क्रिया को त्रिगुणिन (triple fusion) कहते हैं।
2. यह क्रिया सभी श्रेणी के पौधों में पायी जाती है।2. यह केवल आवृत्तबीजी में पाया जाता

प्रश्न 10
एकबीजपत्री को द्विबीजपत्री से किस प्रकार विमेदित करोगे ?
उत्तर:
एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में विभिन्नताएँ (Differences between Monocots and Dicots)
एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री को अग्र लक्षणों के आधार पर विभेदित किया जा सकता है-

लक्षणएकबीजपत्री (Monocotyledons)द्विबीजपत्री (Dicotyledons )
1. जड़ का प्रकारइनमें अपस्थानिक जड़ें पायी जाती हैं।इनमें प्रायः मूसला जड़ें पायी जाती हैं।
2. तनाप्रायः शाकीय तथा कोमल होता है।शाकीय या काष्ठीय होता है।
3. पत्तियों में शिरा-विन्याससमानान्तर शिरा विन्यास (parallel venation) पाया जाता है।जालिकावत् शिरा विन्यास ( reticulate venation) पाया जाता है।
4. संवहन पूल (Vascular Bundle)अवर्षी (closed) होते हैं। तने में संयुक्त (conjoint) समपार्श्व (collateral) पूल छितरे हुए (scattered) होते हैं।वर्षी (open) होते हैं। तने में एक वलय के रूप में व्यवस्थित रहते हैं।
5. पुष्प (Flowers)त्रिअरीय (trimerous )।प्रायः पंचतयी ( pentamerous) या चतुष्तयी (Tetramerous )।
6. बीज (Seeds)भ्रूणपोषी (endospermic)अभ्रूण पोषी या भ्रूणपोषी (non- endospermic or endospermic)।
7. बीजपत्र (Cotyledons)एक अप्रस्थ बीजपत्र (cotyledons)दो पाश्र्वय बीजपत्र (cotyledons)

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प्रश्न 11.
स्तम्भ में दिये गये पादपों का स्तम्भ II में दिये गये पादप वर्गों से मिलान कीजिए-

स्तम्भ Iस्तम्भ II
(अ) क्लेमाइडोमोनास(i) मॉस
(ब) साइकस(ii) टेरिडोफाइटा
(स) सिलेजिनेला(iii) शैवाल
(द) स्फैगनम(iv) जिम्नोस्पर्म

उत्तर:

स्तम्भ Iस्तम्भ II
(अ) क्लेमाइडोमोनास(iii) शैवाल
(ब) साइकस(iv) जिम्नोस्पर्म
(स) सिलेजिनेला(ii) टेरिडोफाइटा
(द) स्फैगनम(i) मॉस

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प्रश्न 12.
जिम्नोस्पर्म के महत्वपूर्ण अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जिम्नोस्पर्म के विभेदक लक्षण (Distinguishing Features of Gymnosperms)

  1. अण्डाशय की अनुपस्थिति के कारण फल नहीं बनते। अतः इनमें बीज अनावृत होते हैं। इसीलिए इन्हें नग्नबीजी या अनावृत्तबीजी कहा जाता है।
  2. जिम्नोस्पर्म मुख्यतः बहुवर्षीय, काष्ठीय (Woody) तथा सदाहरित (Evergreen) वृक्ष या झाड़ियाँ (Shrubs) होते हैं।
  3. पादपकाय बीजाणुद्भिद होता है जो जड़, तना तथा पत्तियों में विभेदित होता है
  4. जड़ें मूसला तथा डाई आर्क से पॉलीआर्क होती हैं।
  5. पत्तियाँ प्रायः दो प्रकार की होती हैं, सत्य-पत्र (Foliage leaves) हरे रंग की तथा शल्क पत्र (Scale leaves) भूरे रंग की होती हैं।
  6. तने में संवहन पूल कन्जोइन्ट (Conjoint), कोलेट्रल (Collateral), खुले (Open) तथा एण्डार्क (endarch) होते हैं।
  7. जाइलम में प्रायः वाहिनकाएँ (Vessels) तथा फ्लोएम में सखि कोशिकाओं (Companian cells) का अभाव होता है।
  8. पुष्प नहीं होते हैं, जननांग धारण करने वाली संरचनाओं को शंकु (Cone) कहते हैं। नर तथा मादा शंकु अलग-अलग होते हैं।
  9. नर शंकुओं का निर्माण लघुबीजाणुपण (Microsporophylls) पर तथा मादा शंकुओं का निर्माण गुरुबीजाणुपणों (Megasporophylls) से होता है।
  10. नर युग्मकोद्भिद् (Male gametophyte ) अत्यन्त हासित होता है। परागनलिका (Pollen tube) बनती है।
  11. मादा युग्मकोद्भिद एक गुरुबीजाणु (Megaspore) से बनता है। यह बहुकोशिकीय होता है। यह पोषण के लिए पूर्णतः बीजाणुद्भिद पर आश्रित होता है।
  12. परागण वायु द्वारा होता है। द्विनिषेचन का अभाव होता है तथा अगुणित भूणपोष का निर्माण निषेचन से पूर्व होता है।
  13. प्रायः बहुभ्रूणता (Polyembryony) पायी जाती है।
  14. भूणपोष अगुणित होता है।
  15. स्पष्ट पीढ़ी एकान्तरण पाया जाता है।

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HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

प्रश्न 1.
स्पष्ट कीजिए क्यों
(a) मस्तिष्क की अपेक्षा मानव का पैरों पर रक्त चाप अधिक होता है।
(b) 6 km ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब का लगभग आधा हो जाता है, यद्यपि वायुमण्डल का विस्तार 100 km से भी अधिक ऊँचाई तक है।
(c) यद्यपि दाब, प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल होता है तथापि द्रवस्थैतिक दाब एक अदिश राशि है।
उत्तर:
(a) द्रव स्तम्भ द्वारा आरोपित दाब P = hpg होता है जो गहराई पर निर्भर करता है। मनुष्य में रक्त के स्तम्भ की ऊँचाई मस्तिष्क की अपेक्षा पैरों पर अधिक होती है, इस कारण मनुष्य के पैरों पर रक्त दाब मस्तिष्क की अपेक्षा अधिक होता है।
(b) हम जानते हैं कि वायुमण्डल दाब पृथ्वी के पृष्ठ के निकट अधिकतम होता है, जो ऊँचाई के साथ-साथ तीव्रता से कम होता है और 6km की ऊँचाई पर इसका मान समुद्रतल के मान से आधा हो जाता है। वायु का घनत्व 6 km ऊँचाई के बाद बहुत धीरे-धीरे कम होता है। इस कारण से 6km ऊँचाई पर वायुमण्डलीय दाब इसके समुद्रतल पर मान का आधा हो जाता है।
(c) द्रव पर बल लगने के कारण पास्कल के नियम से दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचारित होता है। इस प्रकार से द्रव में दाब के लिए कोई निश्चित दिशा नहीं है। अतः द्रव स्थैतिक दाब एक अदिश राशि है।

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प्रश्न 2.
स्पष्ट कीजिए, क्यों?
(a) पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है।
(b) काँच के स्वच्छ समतल पृष्ठ पर जल फैलने का प्रयास करता है जबकि पारा उसी पृष्ठ पर बूँदें बनाने का प्रयास करता है। (दूसरे शब्दों में जल काँच को गीला कर देता है जबकि पारा ऐसा नहीं करता है ।)
(c) किसी द्रव का पृष्ठ तनाव पृष्ठ के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है।
(d) जल में घुले अपमार्जकों के स्पर्श कोणों का मान कम होना चाहिए।
(e) यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो, तो द्रव बूँद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।
उत्तर:
(a) जब काँच पर द्रव जाता है तो द्रव वायु, ठोस – वायु और ठोस – द्रव में अन्तरापृष्ठ बन जाता है। इन तीनों अंतरापृष्ठों के संगत पृष्ठ तनाव अर्थात् Tla Tsa और Tsl क्रमश: द्रव का ठोस के साथ सम्पर्क कोण
से सम्बन्ध
cos θ = \(\frac{{T}_{s a}-{T}_{s l}}{{~T}_{l a}}\)
पारे और काँच की स्थिति Tsa < Tsl
∴ cos θ का मान ऋणात्मक होगा अर्थात् θ > 90° होगा।
∴ cos θ का मान धनात्मक होगा अर्थात् θ < 90° होगा।

(b) पारे और काँच के लिए सम्पर्क कोण अधिक कोण है अर्थात् θ > 90° । सम्पर्क कोण का मान अधिक कोण हो इसके लिए पारा बूँद का रूप धारण करने का प्रयत्न करता है परन्तु पानी-काँच के सन्दर्भ में सम्पर्क कोण न्यून कोण है अर्थात् θ < 90° इस कारण पानी फैलने का प्रयत्न करता है और काँच को गीला कर देता है।
(c) चूँकि बल द्रव पृष्ठ के क्षेत्रफल से स्वतन्त्र है, अतः पृष्ठ तनाव भी द्रव पृष्ठ के क्षेत्रफल से स्वतन्त्र है।
(d) कपड़ों में महीन कोशिकाओं के रूप में छोटे-छोटे स्थान होते हैं। जिससे स्पर्श कोण θ का मान बहुत अल्प होगा तो cosθ का मान बड़ा होगा और अपमार्जक कपड़े में छोटे-छोटे स्थानों से अधिक ऊपर उठेगा। चूँकि अपमार्जक का सम्पर्क कोण छोटा होता है, इसलिए वह कपड़ों में आसानी से प्रवेश करके मैल को बाहर निकाल देगा।
(e) बाह्य बलों की अनुपस्थिति में बूँद की आकृति केवल पृष्ठ तनाव द्वारा ही निर्धारित होती है। पृष्ठ तनाव के गुण के कारण बूँद न्यूनतम मुक्त क्षेत्रफल की आकृति में होना चाहती है। चूँकि किसी दिए गए आयतन के लिए गोले का मुक्त पृष्ठ न्यूनतम होता है, अत: बूँद की आकृति पूर्ण गोलाकार हो जाती है।

प्रश्न 3.
प्रत्येक प्रकथन के साथ संलग्न सूची में से उपयुक्त शब्द. छाँटकर उस प्रकथन के रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए:
(a) व्यापक रूप में द्रवों का पृष्ठ तनाव ताप बढ़ने पर ……………. है। (बढ़ता / घटता)
(b) गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर ……………….. है, जबकि दवों की श्यानता ताप बढ़ने पर ……………. है। (बढ़ती / घटती)
(c) दृढ़ता प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल …………….. के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह ………………….. के अनुक्रमानुपाती होता है। (अपरूपण विकृति / अपरूपण विकृति की दर )
(d) किसी तरल के अपरिवर्ती प्रवाह में आए किसी संकीर्णन पर प्रवाह की चाल में वृद्धि में ……………….. का अनुसरण होता है। ( संहति का संरक्षण / बरनौली सिद्धान्त)
(e) किसी वायु सुरंग में किसी वायुयान के मॉडल में प्रक्षोभ की चाल वास्तविक वायुयान के प्रक्षोभ के लिए क्रान्तिक चाल की तुलना में …………………. होती है।(अधिक / कम)
उत्तर:
(a) घटता,
(b) बढ़ती घटती,
(c) अपरूपण विकृति, अपरूपण विकृति की दर
(d) संहति का संरक्षण,
(e) अधिक।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए:
(a) किसी कागज की पट्टी को क्षैतिज रखने के लिए आपको उस कागज पर ऊपर की ओर हवा फूँकनी चाहिए, नीचे की ओर नहीं।
(b) जब हम किसी जल टोंटी को अपनी उँगलियों द्वारा बन्द करने का प्रयास करते हैं तो उँगलियों के बीच की खाली जगह से तीव्र जल धाराएँ फूट निकलती हैं।
(c) इंजेक्शन लगाते समय डॉक्टर के अँगूठे द्वारा आरोपित दाब की अपेक्षा सुई का आकार दवाई की बहिः प्रवाही धारा को अधिक अच्छा नियंत्रित करता है।
(d) किसी पात्र के बारीक छिद्र से निकलने वाला तरल उस पर पीछे की ओर प्रणोद आरोपित करता है।
(e) कोई प्रचक्रमान क्रिकेट की गेंद वायु में परवलीय पथ का अनुसरण नहीं करती।
उत्तर:
(b) अविरतता के सिद्धान्त से जहाँ पर अनुप्रस्थ क्षेत्रफल कम होता है, वहाँ जल का वेग बढ़ जाता है। टोंटी को अंगुलियों से बन्द करने पर जल अंगुलियों के बीच खाली जगह जिसका कि क्षेत्रफल अत्यन्त कम है, तीव्र वेग से निकलने लगता है जिससे वहाँ से तीव्र जल धाराएँ फूट उठती हैं।
(c) बरनौली के प्रमेय के अनुसार इंजेक्शन की सुई में बहने वाली दवाई की कुल ऊर्जा वेग पर अधिक निर्भर करती है।
∵ P + \(\frac{1}{2}\) pv 2 = नियतांक
अतः डॉक्टर दवाई के प्रवाह की दर को अंगूठे द्वारा अधिक दाब आरोपित करने की अपेक्षा सुई के उचित परिच्छेद क्षेत्रफल का चयन करके नियंत्रित करता है।
(d) तरल बारीक छिद्र से बाहर आने पर उच्च बहिःस्राव वेग अर्जित कर लेता है जिससे आगे की दिशा में संवेग उत्पन्न होता है। बाह्य बल की अनुपस्थिति में पात्र व तरल दोनों का संयुक्त संवेग संरक्षित रहता है अतः पात्र विपरीत दिशा में संवेग प्राप्त करता है जिससे बाहर निकलता हुआ द्रव पात्र पर विपरीत दिशा में प्रणोद आरोपित करता है।
(e) घूमती हुई गेंद के ऊपर तथा नीचे की वायु के वेग में अन्तर आ जाता है जिससे दाबों में भी अन्तर होता है। इसके कारण गेंद पर भार के अतिरिक्त एक अन्य बल भी लगने लगता है तथा गेंद परवलयाकार पथ से विचलित हो जाती है। इसे मैगनस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 5.
ऊची एड़ी के जूते पहने 50kg संहति की कोई बालिका अपने शरीर को 1.0cm व्यास की एक ही वृत्ताकार एड़ी पर सन्तुलित किए हुए है। क्षैतिज फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
बालिका का द्रव्यमान m = 50kg
एड़ी की त्रिज्या = 0.5cm = 0.5 × 10-2m
∵ फर्श पर एड़ी द्वारा आरोपित दाब

\( =\frac{50 \times 9.8}{3.14 \times\left(0.5 \times 10^{-2}\right)^2}\)
∴ p = 6.24 × 106Nm-2

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प्रश्न 6.
टॉरिसेली के वायुदाबमापी में पारे का उपयोग किया गया था। पास्कल ने ऐसा ही वायु दाबमापी 984kg m-3 घनत्व की फ्रेंच शराब का उपयोग करके बनाया। सामान्य वायुमण्डलीय दाब के लिए शराब स्तम्भ की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
P = 1.013 × 105 Pa,
ρ = 984 kg m-3
g = 9.8 ms2,
h = ?
दाब P = hρg सूत्र से,
\(h=\frac{\mathrm{P}}{\rho g}=\frac{1.013 \times 10^5}{984 \times 9.8}\)
= 1.05

प्रश्न 7.
समुद्र तट से दूर कोई ऊर्ध्वाधर संरचना 109Pa के अधिकतम प्रतिबल को सहन करने के लिए बनाई गई है। क्या यह संरचना किसी महासागर के भीतर किसी तेल कूप के शिखर पर रखे जाने के लिए उपयुक्त है ? महासागर की गहराई लगभग 3km है। समुद्री धाराओं की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
सागर की गहराई h = 3 km = 3000m
जल का घनत्व p = 1.03 × 103 kg m-3
अतः महासागर में अधिकतम दाब सागर की तली में होगा। सागर की तली में दाब
Pmax = Pa + hpg
= 1.01 × 105 + 3000 × 1.03 × 103 × 9.8
= 1.01 × 105 + 3.02 × 107
= 303.01 × 105 Pa
∵ महासागर में महत्तम दाब संरचना अधिकतम प्रतिबल 109 Pa से कम है, अत: यह संरचना महासागर के भीतर तेल कूप के शिखर पर रखी जा सकती है।

प्रश्न 8.
किसी द्रवचालित ऑटोमोबाइल लिफ्ट की संरचना अधिकतम 3000 kg संहति की कारों को उठाने के लिए की गई है। बोझ को उठाने वाले पिस्टन की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 425 cm है। छोटे पिस्टन को कितना अधिकतम दाब सहन करना होगा?
उत्तर:
पास्कल के नियमानुसार दाब बिना हानि के पूरे द्रव में संचरित होता है।
अतः छोटे पिस्टन पर दाब बड़े पिस्टन पर दाब
= \(\frac{\mathrm{F}}{\mathrm{A}}=\frac{m g}{\mathrm{~A}}=\frac{3000 \times 9.8}{0.0425}\)
= 6.92 × 105 Pa

प्रश्न 9.
किसी नली की दोनों भुजाओं में भरे जल तथा मेथेलेटिड स्पिरिट को पारा एक-दूसरे से पृथक् करता है। जब जल तथा पारे के स्तम्भ क्रमश: 10cm तथा 12.5cm ऊँचे हैं, तो दोनों भुजाओं में पारे का स्तर समान है। स्पिरिट का आपेक्षिक घनत्व ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
∵ दोनों भुजाओं में पारे के तल समान हैं अतः इस तल पर दोनों भुजाओं में खड़े स्तम्भों के दाब समान होंगे।
अतः
P1 = P2
या
huPwg = hspsg
(w’ जल के लिए वs स्पिरिट के लिए प्रयुक्त किया गया है।)
या स्पिरिट का आपेक्षिक घनत्व
\(\frac{\rho_s}{\rho_w}=\frac{h_w}{h_s}\)
= \(\frac{10.0}{12.5}\)
= 0.8

प्रश्न 10.
यदि प्रश्न 9 की समस्या में, U-नली की दोनों भुजाओं में इन्हीं दोनों द्रवों को और उड़ेल कर दोनों द्रवों के स्तम्भों की ऊंचाई 15 cm और बढ़ा दी जाए, तो दोनों भुजाओं में पारे के स्तरों में क्या अन्तर होगा ? (पारे का आपेक्षिक घनत्व 13.6)।
उत्तर:
U-नली के तल पर दोनों भुजाओं में द्रव स्तम्भों के दाब बराबर होंगे। तली पर
P1 = P2
∴ (15 + 10) ρwg + h1ρHg
= (15 + 12.5)ρsg + h2ρHg

= 1.838 – 1.617 = 0.22 सेमी

प्रश्न 11.
क्या बरनौली समीकरण का उपयोग किसी नदी की किसी क्षिप्रिका के जल प्रवाह का विवरण देने के लिए किया जा सकता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नहीं, क्योंकि नदी की क्षिप्रिका का जल-प्रवाह विक्षुब्ध होता है जबकि बरनौली का समीकरण धारा रेखीय प्रवाह के लिए ही लागू होता है।

प्रश्न 12.
बरनौली समीकरण के अनुप्रयोग में यदि निरपेक्ष दाब के स्थान पर प्रमापी दाब (गेज दाब) का प्रयोग करें तो क्या इससे कोई अन्तर पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बरनौली समीकरण से,
p1 + \(\frac{1}{2}\) pv12 = p2 + \(\frac{1}{2}\) pv22
या
p1 – p2 = \(\frac{1}{2}\) p(v22 – v12)
इससे स्पष्ट है कि बरनौली समीकरण में नली के दो सिरों का दावान्तर है।
∵ गेज दाब, निरपेक्ष दाब एवं वायुमण्डलीय दाब का अन्तर होता है अतः
(P1)गेज = P1 – Pa तथा (P2)गेज = P2 – Pa
∴ (P1)गेज – (P2) गेज = P1 – P2
अतः दाबान्तर इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि हम गेज दावान्तर लें या निरपेक्ष दाबान्तर, परन्तु दोनों बिन्दुओं पर वायुमण्डलीय दाब समान होना चाहिए।

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प्रश्न 13.
किसी 1.5 m लम्बी 1.0 cm त्रिज्या की क्षैतिज नली से ग्लिसरीन का अपरिवर्ती प्रवाहहो रहा है। यदि नली के एक सिरे पर प्रति सेकण्ड एकत्र होने वाली ग्लिसरीन का परिमाण 4-0 x 10-3 kgs है, तो नली के दोनों सिरों के बीच दाबान्तर ज्ञात कीजिए। (ग्लिसरीन का घनत्व = 1.3 x 10 kg m तथा ग्लिसरीन की श्यानता = 0.83 Pas) [ आप यह भी जाँच करना चाहेंगे कि क्या इस नली में स्तरीय प्रवाह की परिकल्पना सही है।]
उत्तर:
धारा रेखीय प्रवाह मानते हुए प्वाइजली के सूत्र से नली में प्रवाह की दर V = \(\frac{\pi p r^4}{8 \eta l}\)
यदि 1 सेकण्ड में प्रवाहित द्रव का द्रव्यमान M तथा घनत्व हो, तो
∴ दाबान्तर p = \(\frac{8 \eta / \mathrm{M}}{\pi r^4 \rho}\)
यहाँ M = 4 × 10-3 kgs-1 l = 1.5m, r = 1 cm = 10-2m
∴ \(p=\frac{8 \times 0.83 \times 1.5 \times 4 \times 10^{-3}}{3.14 \times\left(10^{-2}\right)^4 \times 1.3 \times 10^3}\)
= 9.76 × 102 Pa
धारा रेखीय प्रवाह की जाँच:
क्रान्तिक वेग \(v_c=\frac{\mathrm{R}_e \eta}{\rho \mathrm{D}}\)
यदि V प्रति सेकण्ड बहने वाले द्रव का आयतन हो तब
\(\frac{\mathrm{V}}{\pi r^2}=\frac{\mathrm{R}_e \eta}{\rho \mathrm{D}}\)
या रेनॉल्ड संख्या
\(\mathrm{R}_e=\frac{\mathrm{V} \rho \mathrm{D}}{\pi r^2 \eta}=\frac{\mathrm{V} \rho(2 r)}{\pi r^2 \eta}\)
या
\(\mathrm{R}_e=\frac{2 \mathrm{~V} \rho}{\pi r \eta}=\frac{2 \mathrm{M}}{\pi r \eta}=\frac{2 \times 4 \times 10^{-3}}{3.14 \times 10^{-2} \times 0.83}\)
∴ Re = 0.3
यह संख्या धारा रेखीय प्रवाह के लिए रेनॉल्ड संख्या 2000 से अत्यन्त कम है अतः नली में प्रवाह धारा रेखीय है।

प्रश्न 14.
किसी आदर्श वायुयान के परीक्षण प्रयोग में वायु- सुरंग के भीतर पंखों के ऊपर और नीचे के पृष्ठों पर वायु प्रवाह की गतियाँ क्रमश: 70 ms-1 तथा 63 ms-1 हैं। यदि पंखे का क्षेत्रफल 2.5m-2 है, तो उस पर आरोपित उत्थापक बल परिकलित कीजिए। वायु का घनत्व 1.3 kg m-3 लीजिए।
उत्तर:
बरनौली की प्रमेय से,
p1 + \(\frac{1}{2}\)pv12= p2 + \(\frac{1}{2}\)pv22
दाबान्तर
p2 – p1 = \(\frac{1}{2}\)p(v12 – v22)
उत्थापक बल
F = (p2 – p1)A = \(\frac{1}{2}\)P(V12 – V22)
= \(\frac{1}{2}\) × 1.3 [(70)2 – (63)2] × 2.5
उत्थापक बल F = 1.5 × 103 N

प्रश्न 15.
चित्र में (a) तथा (b) किसी द्रव (श्यानताहीन) का अपरिवर्ती प्रवाह दर्शाते हैं। इन दोनों चित्रों में से कौन सही नहीं है ? कारण स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर:
चित्र (a) सही नहीं है क्योंकि अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल कम होने पर वहाँ द्रव का वेग अधिक होगा तथा द्रव का वेग जहाँ अधिक होता है वहाँ पर दाब कम होना चाहिए जबकि (a) में जल का दाब संकरे स्थान पर अधिक दर्शाया गया है।

प्रश्न 16.
किसी स्प्रे पम्प की बेलनाकार नली की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 8.0 cm2 है। इस नली के एक सिरे पर 1.0mm व्यास के 40 सूक्ष्म छिद्र हैं। यदि इस नली के भीतर द्रव के प्रवाहित होने की दर 1.5mmin-1 है, तो छिद्रों से होकर जाने वाले द्रव की निष्कासन चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
gy %दिया है: A1 = 8 cm2 = 8 × 104 m2
प्रत्येक छिद्र की त्रिज्या r2 = 0.5mm = 0.5 × 10-3 m
छिद्रों का कुल क्षेत्रफल A2 = 40 × 3.14 × (0.5 × 10-3)2
= 3.14 x 102m2
तथा v1 = 1.5 m min-1 = \(\frac{1.5}{60}\)
= 0.025 ms-1, v2 = ?
अविरतता के समीकरण से, A2v2 = A1v1
अतः
\(v_2=\frac{\mathrm{A}_1}{\mathrm{~A}_2} v_1=\frac{8 \times 10^{-4}}{3.14 \times 10^{-5}} \times 0 \cdot 025\)
= 0.64ms-1
छिद्रों से होकर द्रव की निष्कासन चाल 0.64 ms-1 है।

प्रश्न 17.
U-आकार के किसी तार को साबुन के विलयन में डुबो कर बाहर निकाला गया जिससे उस पर एक पतली साबुन की फिल्म बन गई। इस तार के दूसरे सिरे पर फिल्म के सम्पर्क में एक फिसलने वाला हल्का तार लगा है जो 1.5 x 102N भार (जिसमें इसका अपना भार भी सम्मिलित है) सँभालता है। फिसलने वाले तार की लम्बाई 30 cm है। साबुन की फिल्म का पृष्ठ तनाव कितना है?
उत्तर:
दिया है तार की लम्बाई
l = 30 cm = 0.3m
तार पर लटका भार W = 1.5 x 10-2 N
∵ फिल्म में दो पृष्ठ होते हैं अतः
F = 2F1 = 2(T × l)
यह बल भार को सन्तुलित करता है अतः
2Tl = W
या पृष्ठ तनाव
T = \(\frac{\mathrm{W}}{2 l}=\frac{1.5 \times 10^{-2}}{2 \times 0 \cdot 3}\)
= 2.5 x 10-2 Nm-1

प्रश्न 18.
निम्नांकित चित्र (a) में किसी पतली द्रव फिल्म को 4-5 x 10-2N का छोटा भार सँभाले दर्शाया गया है। चित्र (b) तथा (c) में बनी इसी द्रव की फिल्में इसी ताप पर कितना भार सँभाल सकती हैं? अपने उत्तर को प्राकृतिक नियमों के अनुसार स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
(a), (b) व (c) प्रत्येक में फिल्म के निचले किनारे की लम्बाई. 40 cm (एकसमान है। इस किनारे पर फिल्म के पृष्ठ तनाव के कारण समान बल F = Tx 2l लगेगा।
यही बल लटके हुए भार को सन्तुलित करता है।
चूँकि साधने वाला बल प्रत्येक दशा में समान है अतः चित्र (b) व (c) में भी वही भार 4.5 x 10-2N सन्तुलित किया जा सकता है।

HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

प्रश्न 19.
3 mm त्रिज्या की किसी पारे की बूँद के भीतर कमरे के ताप पर दाब क्या है? 20°C ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 4.65 x 10-1 Nm-1 है। यदि वायुमण्डलीय दाब 1.01 x 105 Pa है, तो पारे की बूँद के भीतर दाब आधिक्य भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है त्रिज्या r = 3mm = 3 x 10-3 m
Pa = 1.01 × 105 Pa
20°C पर पृष्ठ तनाव T = 4.65 × 10-1 Nm-1
∴ पारे की बूँद के भीतर आधिक्य दाब
P आधिक्य = \(\frac{2 \mathrm{~T}}{r}=\frac{2 \times 4.65 \times 10^{-1}}{3 \times 10^{-3}}\)
= 3.1 x 102pa
अतः बूँद के भीतर दाब
P = Pa + Pआधिक्य
= 1.01 × 105 + 3.1 × 102 = 1.013 x 105 Pa

प्रश्न 20.
5mm त्रिज्या के किसी साबुन के विलयन के बुलबुले के भीतर दाब आधिक्य क्या है? 20°C ताप पर साबुन के विलयन का पृष्ठ तनाव 2.5 x 10-2 Nm है। यदि इसी विमा का कोई वायु का बुलबुला 1.2 आपेक्षिक घनत्व के साबुन के विलयन से भरे किसी पात्र में 40.0 cm गहराई पर बनता, तो इस बुलबुले के भीतर क्या दाब होता, ज्ञात कीजिए। (1 वायुमण्डलीय दाब 1.01 × 105 Pa)
उत्तर:
दिया है:
बुलबुले की त्रिज्या r = 5mm = 5 × 10-3m
विलयन का पृष्ठ तनाव T = 2.5 × 10-2 Nm-1
∵ बुलबुले के भीतर आधिक्य दाब
P आधिक्य = \(\frac{4 \mathrm{~T}}{r}\)
= \(\frac{4 \times 2 \cdot 5 \times 10^{-2}}{5 \times 10^{-3}}\)
विलयन का आपेक्षिक घनत्व = 1.2
विलयन का घनत्व ρ = 1.20 × 103 kg m3
तथा बुलबुले की विलयन के मुक्त तल से गहराई
h = 40 cm = 0.40m
अब बुलबुले का केवल एक तल होगा अतः इसके अन्दर दाब
आधिक्य P आधिक्य = \(\frac{2 \mathrm{~T}}{r}\) = 10 Pa
जबकि बुलबुले की गहराई पर, उसके बाहर दाब Po = वायुमण्डलीय दाब द्रव + स्तम्भ का दाव
= P0 + hpg
= 1.01 × 105 + 0.4 × 1.2 x 103 x 9.8
= 1.01 x 105 + 0.047 x 105
= 1.057 × 105
= 1.06 x 105
अतः बुलबुले के भीतर दाब
Pi = Po + P आधिक्य
= (1.06 × 105 + 10)
= 1.06 x 105

अतिरिक्त अभ्यास:

प्रश्न 21.
1 ml क्षेत्रफल के वर्गाकार आधार वाले किसी टैंक को बीच में ऊर्ध्वाधर विभाजक दीवार द्वारा दो भागों में बाँटा गया है। विभाजक दीवार में नीचे 20 cm क्षेत्रफल का कब्जेदार दरवाजा है। टैंक का एक भाग जल से भरा है तथा दूसरा भाग 1.7 आपेक्षिक घनत्व के अम्ल से भरा है। दोनों भाग 4.0 m ऊँचाई तक भरे गए. हैं। दरवाजे को बन्द रखने के लिए आवश्यक बल परिकलित कीजिए।
उत्तर:
आवश्यक बल F = दोनों ओर का दाबान्तर x क्षेत्रफल
= (Pअम्ल – Pजल) A
= (Hρअम्ल g – Hρजल g) A
= HgA (ρअम्ल – जल )
F = HgAρ

∵ दिया है:
H = 4 मी,
= 1.7.
ρजल = 103 kgm3,
A = 20 cm2 = 20 × 10-4 m2
g = 9.8ms-2
∴ F = 4 × 9.8 × 20 × 10-4 × 103 (1.7 – 1)
= 5.5 N

प्रश्न 22.
चित्र (a) में दर्शाए अनुसार कोई मैनोमीटर किसी बर्तन में भरी गैस के दाब का पाठ्यांक लेता है। पम्प द्वारा कुछ गैस बाहर निकालने के पश्चात् मैनोमीटर चित्र (b) में दर्शाए अनुसार पाठ्यांक लेता है। मैनोमीटर में पारा भरा है तथा वायुमण्डलीय दाब का मान 76 cm (Hg) है।

(i) प्रकरणों (a) तथा (b) में बर्तन में भरी गैस के निरपेक्ष दाब तथा प्रमापी दाब cm (Hg) के मात्रक में लिखिए।
(ii) यदि मैनोमीटर की दाहिनी भुजा में 13.6cm ऊँचाई तक जल (पारे के साथ अमिश्रणीय) उड़ेल दिया जाए तो प्रकरण (b) में स्तर में क्या परिवर्तन होगा ? (गैस के आयतन में हुए थोड़े परिवर्तन की उपेक्षा कीजिए।)
उत्तर:
वायुमण्डलीय दाब P0 = 76 cm (Hg)
(i) चित्र (a) में दाब शीर्ष = 20 cm (Hg)
निरपेक्ष दाब
P = Po + 20 cm (Hg)
= 76 + 20 = 96 cm (Hg)
गेज दाब = P – Po = 20 cm (Hg)
चित्र (b) मैं दाब शीर्ष
= – 18 cm (Hg)
∴ निरपेक्ष दाब P2
= Po – 18 cm (Hg)
= 76 – 18 = 58cm (Hg)
गेज दाब P2 – Po = – 18 cm (Hg)
गैस का दाब वायुमण्डलीय दाब से कम होने के कारण ऋणात्मक चिह्न आ रहा है।
(ii) 13.6 cm जल दाहिनी भुजा में डालने पर दाहिनी भुजा में पारा नीचे गिरता है एवं बायीं भुजा में ऊपर उठता है ताकि नली में दोनों ओर के दाब समान हो जाएँ।
यदि दाहिनी भुजा से बायीं भुजा में पारे का विस्थापनxcm है, दोनों भुजाओं में पारे के स्तम्भ का अन्तर 2x cm होगा।
अत: (2x)ρHg = 13.6ρW × g
2x(13.6pw) g = 13.6ρWg
∴ x = 0.5 cm
∴ दोनों भुजाओं में पारे के तलों का अन्तर
= 18 + 2x
= 18 + 2 × 0.5
= 19 cm ( दाहिनी भुजा में नीचा)

प्रश्न 23.
दो पात्रों के आधारों के क्षेत्रफल समान हैं परन्तु आकृतियाँ भिन्न-भिन्न हैं। पहले पात्र को दूसरे पात्र की अपेक्षा किसी ..ऊँचाई तक भरने पर दो गुना जल आता है। क्या दोनों प्रकरणों में पात्रों के आधारों पर आरोपित बल समान हैं। यदि ऐसा है तो भार मापने की मशीन पर रखे एक ही ऊँचाई तक जल से भरे दोनों पात्रों के पाठ्यांक भिन्न-भिन्न क्यों होते हैं?
उत्तर:
माना दोनों पात्रों में जल स्तम्भ की ऊँचाई h तथा आधार का क्षेत्रफल A है, तब
आधार पर बल = जल स्तम्भ का दाब × A
F = hpg × A = Ahpg ………(i)
उपर्युक्त समीकरण में A व h अचर राशियाँ हैं अतः दोनों पात्रों के दोनों के लिए समान हैं तथा वg आधारों पर समान बल आरोपित होंगे।

भार मापने वाली मशीन, पात्र के आधार पर आरोपित बल को मापने की बजाय पात्र व जल का भार मापती है।
∵ एक पात्र में दूसरे की अपेक्षा दो गुना जल है अतः भार मापने की मशीन के पाठ्यांक भिन्न-भिन्न होंगे।

प्रश्न 24.
रुधिर – आधान के समय किसी शिरा में, जहाँ दाब 2000 Pa है, एक सुई धँसाई जाती है। रुधिर के पात्र को किस ऊँचाई पर रखा जाना चाहिए ताकि शिरा में रक्त ठीक-ठीक प्रवेश कर सके। (सम्पूर्ण रुधिर का घनत्व = 1.06 x 103 kg m3)
उत्तर:
H ऊँचाई के द्रव स्तम्भ द्वारा तली पर आरोपित दाब
P = Hpg अत:
H = \(\frac{\mathrm{P}}{\rho g}\)
दिया है : P = 2000 P = 1.06 × 103kgm-3,
g = 9.8ms-2
H = \(\frac{2000}{1 \cdot 06 \times 10^3 \times 9 \cdot 8}\)
= 0.19m = 0.2m

HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

प्रश्न 25.
बरनौली समीकरण व्युत्पन्न करने में हमने नली में भरे तरल पर किए गए कार्य को तरल की गतिज तथा स्थितिज ऊर्जाओं में परिवर्तन के बराबर माना था।
(a) यदि क्षयकारी बल उपस्थित है, तब नली के अनुदिश तरल में गति करने पर दाब में परिवर्तन किस प्रकार होता है?
(b) क्या तरल का वेग बढ़ने पर क्षयकारी बल अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं? गुणात्मक रूप में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
(a) क्षयकारी बलों के उपस्थित होने पर द्रव दाब तरल की गति की दिशा में अधिक तेजी से घटता है, इसका कारण यह है कि नली में उपस्थित द्रव को प्रवाहित कराने के लिए दाब ऊर्जा को क्षयकारी बलों के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।
(b) हाँ, क्योंकि प्रायः क्षयकारी बल प्रवाह के वेग के अनुक्रमानुपाती होते हैं, अतः क्षयकारी बल (श्यान बल) बढ़ जाते हैं।
जैसा कि न्यूटन के नियम से स्पष्ट है
F = -ηA dv/dx

प्रश्न 26.
(a) यदि किसी धमनी में रुधिर का प्रवाह पटलीय प्रवाह ही बनाए रखना है तो 2 x 10-3 m त्रिज्या की किसी धमनी में रुधिर – प्रवाह की अधिकतम चाल क्या होनी चाहिए? (b) तद्नुरूपी प्रवाह दर क्या है? (रुधिर की श्यानता 2.084 x 10-2 Pas s लीजिए, रक्त का घनत्व = 1.06 × 10-3 kgm-3)
उत्तर:
(b) क्रान्तिक वेग vc = \frac{\mathrm{R}_e \eta}{\rho \mathrm{D}}
जिसमें रेनॉल्ड संख्या Re = 2000
(धारा रेखीय प्रवाह का अधिकतम मान )
p = 1.06 × 103 kg m3
व्यास D = 2r = 2 × 2 × 103 m = 4 × 10-3m
Ve = \(\frac{2000 \times 2 \cdot 084 \times 10^{-3}}{1 \cdot 06 \times 10^3 \times 4 \times 10^{-3}}\)
= 0.98 ms-1

(b) प्रवाह दर V = Av
= (πr2).v
= 3.14 × (2 × 10-3)2 × 0.98
= 1.23 x 10-5 m3 s-1

प्रश्न 27.
कोई वायुयान किसी निश्चित ऊंचाई पर किसी नियत चाल से आकाश में उड़ रहा है तथा उसके दोनों पंखों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल 25 m2 है। यदि वायु की चाल पंख के निचले पृष्ठ पर 180 kmh-1 तथा ऊपरी पृष्ठ पर 234 km h-1 है, तो वायुयान की संहति ज्ञात कीजिए। (वायु का घनत्व 1kg m-3 लीजिए)
उत्तर:
दिया है: पंख के निचले पृष्ठ पर वायु की चाल
v1 = 180 km h-1 = 180 x \(\frac{5}{18}\)
पंख के ऊपरी पृष्ठ पर वायु की चाल
V2 = 234 km h-1
= 234 × \(\frac{5}{18}\) = 65ms-1
∴ A = 2 × 25 = 50 m2 (दोनों पंखों के लिए)
वायु का घनत्व = 1 kg m-3 g = 9.81 ms-2
बरनौली प्रमेय से,
p1 + \(\frac{1}{2}\)ρv12 = p2 + \(\frac{1}{2}\)ρv22
या P1 – P2 = \(\frac{1}{2}\)ρ(v22 – v12) ………(1)
∵ आकाश में उड़ रहे वायुयान के साम्य के लिए
Mg = (P1 – P2)A ………(2)
समी (1) व (2) से,
Mg = \(\frac{1}{2}\)ρ(v22 – v12) A
∴ M = \(\frac{\rho\left(v_2^2-v_1^2\right) \mathrm{A}}{2 g}\)
= \(\frac{1 \times\left\{(65)^2-(50)^2\right\} \times 50}{2 \times 9.8}\)
= 4400.5 kg

प्रश्न 28.
मिलिकन तेल बूँद प्रयोग में 2.0 x 10-5 m त्रिज्या तथा 1.2 × 103 kg m-3 घनत्व की किसी बूंद की सीमान्त चाल क्या है? प्रयोग के ताप पर वायु की श्यानता 1.8 x 105 Pas लीजिए। इस चाल पर बूँद पर श्यान बल कितना है? (वायु के कारण बूंद पर उत्प्लावन बल की उपेक्षा कीजिए।)
उत्तर:
दिया है: बूँद की त्रिज्या r = 2 x 10-5 m,
p = 1.2 x 103 kg m-3
वायु की श्यानता n = 1.8 × 10-5 Pas; σ = 0
∴ वायु में गिरती त्रिज्या की बूँद का सीमान्त वेग
v = \(\frac{2(\rho-\sigma) r^2 g}{9 \eta}\)
= \(\frac{2\left(1 \cdot 2 \times 10^3-0\right) \times\left(2 \times 10^{-5}\right)^{2 \times 9 \cdot 8}}{9 \times 1 \cdot 8 \times 10^{-5}}\)
= 0.058ms = 5·8 cms-1
तथा बूँद पर श्यान बल F = 6myv.
F = 6 × 3.14 × 1.8 × 105 × 2 × 105 × 0.058
= 3.9 × 10-10 N

प्रश्न 29.
सोडा काँच के साथ पारे का स्पर्श कोण 140° है। यदि पारे से भरी द्रोणिका में 100 mm त्रिज्या की काँच की किसी नली का एक सिरा डुबोया जाता है, तो पारे के बाहरी पृष्ठ के स्तर की तुलना में नली के भीतर पारे का स्तर कितना नीचे चला जाता है? (पारे का घनत्व = 13.6 x 103 kg m-3)
उत्तर:
दिया है: केशनली की त्रिज्या
r = 1mm = 10-3 m
स्पर्श कोण θ = 140°
पारे का घनत्व p = 13.6 x 103 kgm-3
पृष्ठ तनाव T = 0.4355 Nm-1
माना पारे का स्तर केशनली में / ऊँचाई ऊपर उठता है, तो
h = \(\frac{2 \mathrm{~T} \cos \theta}{r \rho g}\)
= \(\frac{2 \times 0.4355 \cos 140^{\circ}}{10^{-3} \times 13.6 \times 10^3 \times 9.8}\)
∴ h = \(\frac{0.871 \times(-0.77)}{133.28}\)
= – 0.00534m
= – 5.34mm
अतः केशनली में पारे का स्तर 5.34 mm नीचे गिरेगा।

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प्रश्न 30.
3.0 mm तथा 6.0 mm व्यास की दो संकीर्ण नलियों को एक साथ जोड़कर दोनों सिरों से खुली एक U-आकार की नली बनाई जाती है। यदि इस नली में जल भरा है तो इस नली की दोनों भुजाओं में भरे जल के स्तरों में क्या अन्तर है? प्रयोग के ताप पर जल का पृष्ठ तनाव 7.3 × 102 Nm-1 है। स्पर्श कोण शून्य लीजिए तथा जल का घनत्व 1.0 × 103 kg m-3 लीजिए। (g = 98ms-2)
उत्तर:
माना पृष्ठ तनाव के कारण जल दोनों ओर क्रमश: h1 व h2 ऊँचाई तक चढ़ता है, तो
दोनों नलिकाओं में जल के तल का अन्तर
h1 – h2 = \(\frac{2 \mathrm{~T} \cos 0^{\circ}}{r_1 \rho g}-\frac{2 \mathrm{~T} \cos 0^{\circ}}{r_2 \rho g}\)
या
h1 – h2 = \(\frac{2 \mathrm{~T}}{\rho g}\)
दिया है:
r1 = 1.5 x 10-3 m r2 = 3 x 10-3 m,
T = 7.3 × 10-2 Nm-1
p = 103 kgm-3 g = 9.8ms-2

मान रखने पर,
∴ h1 – h2

= 0.496m × 10-2m = 4.96mm
परिकलित्र / कम्प्यूटर आधारित प्रश्न

प्रश्न 31.
(a) यह ज्ञात है कि वायु का घनत्व ρ ऊँचाई y (मीटर में) के साथ इस सम्बन्ध के अनुसार घटता है:
P = ρ0e-y/yo
यहाँ समुद्र तल पर वायु का घनत्व ρ0 = 1.25kgm-3 तथा एक नियतांक है। घनत्व में इस परिवर्तन को वायुमण्डल का नियम कहते हैं। यह संकल्पना करते हुए कि वायुमण्डल का ताप नियत रहता है (समतापी अवस्था) इस नियम को प्राप्त कीजिए। यह भी मानिए कि g का मान नियत रहता है।
(b) 1425 m-3 आयतन का हीलियम से भरा कोई बड़ा गुब्बारा 400 kg के किसी पेलोड को उठाने के काम में लाया जाता है। यह मानते हुए कि ऊपर उठते समय गुब्बारे की त्रिज्या नियत रहती है, गुब्बारा कितनी अधिकतम ऊंचाई तक ऊपर उठेगा?
[y0 = 8000 m तथा ρHe = 0.18 kg m-3 लीजिए।
उत्तर:
(a) समुद्र तल से ऊँचाई पर वायु के एक काल्पनिक बेलन पर विचार करते हैं, माना इसकी ऊँचाई dy है तथा अनुप्रस्थ क्षेत्रफल A है। बेलन के निचले तथा ऊपर वाले सिरों पर वायु दाब क्रमश: P तथा P + dP है।
माना इस स्थान पर वायु का ρ घनत्व है।
तब बेलन का भारद्रव्यमान x g
= A x dy x ρ x g
बेलन के सन्तुलन की स्थिति में,
PA = A x dy x ρ x g + (P + dP)A
या
– AdP = Aρgdy
-dP = pgdy

वातावरण का ताप स्थिर रहने पर यह एक समतापी प्रक्रम है जिसके लिए गैसें बॉयल के नियम का पालन करती हैं अतः
PV = नियतांक
या
\(p\mathrm{P} \frac{m}{\rho}\) = K1
[∵ v = \(\frac{m}{\rho}\) ]
अतः
\(\frac{\mathrm{P}}{\rho}\) = k
या
P = Kop ∵ dP = Kdp ……..(2)
समी. (1) व (2) से,
-Kdp = p.g.dy या \(\frac{-d \rho}{\rho}=\frac{g}{\mathrm{~K}}\) d y
समाकलन करने पर – logp = \(\frac{g}{\mathrm{~K}}\) y + c
c के मान के लिए समुद्र तल पर y = 0, p = p0
अतः
– log p0 = \(\frac{g}{\mathrm{~K}}\) 0 + c c = – log p0
c का मान समी. (3) में रखने पर
log p – log A = – \(\frac{g}{\mathrm{~K}}\) ylm
या
\(\log \left(\frac{\rho}{\rho_0}\right)=-\frac{y}{(\mathrm{~K} / g)}\)
रखने पर \(\log \left(\frac{\rho}{\rho_0}\right)=-\frac{y}{y_0}\)
या
\(\frac{\rho}{\rho_0}=e^{-y / y_0}\)
अतः
p = p = p0e-y/y0

(b) दिया है गुब्बारे का आयतन 1425m ; हीलियम का घनत्व pHe = 0.18 kgm-3, y0 = 8000 m पेलोड का द्रव्यमान = 400 kg, समुद्र तल पर p0 = 1.25 kg m-3
यदि गुब्बारा y ऊँचाई तक ऊपर उठे, तब
y ऊँचाई पर वायु का उत्क्षेप = गुब्बारे का भार + पेलोड का भार
pVg = pHe Vg + 400 g
या
p = PHe + 400/V = 0.18 + \(\frac{400}{1425}\)
= 0.46 kg m-3
अतः Y ऊँचाई पर वायु का घनत्व = 0.46 kg m-3
सूत्र
P = Poe-y/y0
0.46 = 1.25 e-y/800
अतः
e-y/800 = \(\frac{0 \cdot 46}{1 \cdot 25}\)
= 0.368
दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक लेने पर,
loge-y/800 = loge(0.368)
⇒ \(\frac{-y}{8000}\) = 0.997
⇒ y = 0.997 × 8000m
∴ y = 7976 m
अतः गुब्बारा 7976m की अधिकतम ऊँचाई तक ऊपर उठेगा।

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HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 2 जीव जगत का वर्गीकरण

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 2 जीव जगत का वर्गीकरण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Solutions Chapter 2 जीव जगत का वर्गीकरण

प्रश्न 1.
वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आये परिवर्तनों की व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
अरस्तू (Aristotle) ने जीवधारियों को जन्तु तथा पादप में वर्गीकृत किया। इन्होंने जन्तुओं को पुनः इनैइमा (Enaima) तथा ऐनैइमा ( Anaima) में तथा पादपों को शाक, झाड़ी एवं वृक्ष में विभाजित किया। लीनियस ने अपनी पुस्तक सिस्टेमा नेचुरी में जीवधारियों को दो जगतों प्लांटी तथा एनीमेलिया में बाँटा । इनकी इस प्रणाली को द्विजगत प्रणाली कहते हैं। इनके द्वारा प्रतिपादित जन्तु जगत में एककोशिकीय प्रोटोजोआ एवं बहुकोशिकीय जन्तुओं को सम्मिलित किया गया। पादप जगत में सभी हरे पौधे मॉस, समुद्री घास, मशरूम, लाइकेन, कवक तथा जीवाणु को रखा गया है।

द्विजगत पद्धति में प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक जीवों को एक साथ रखा गया है। इसमें हरे पादपों एवं कवकों को एककोशिकीय तथा बहुकोशिकीय जीवों को तथा प्रकाशसंश्लेषी एवं अप्रकाशसंश्लेषी जीवों को एक साथ रखा गया। युग्लीना, माइकोप्लाज्मा आदि को कुछ वैज्ञानिक जन्तु जगत में और कुछ पादप जगत में मानते हैं। इसलिए जीव वैज्ञानिक हैकल (Hacckel; 1886) ने एक तीसरे जगत प्रोटिस्टा की स्थापना की। इसमें जीवाणु कवक, शैवाल तथा प्रोटोजोआ को रखा गया। आर. एच. डीटेकर (R. H. Whittaker) ने दो जगत एवं तीन जगत पद्धतियों को दोषमुक्त करने के लिये पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली स्थापित की। इन्होंने जीवधारियों को पाँच जगतों –
(i) मोनेरा
(ii) प्रोटिस्टा
(ii) फंजाई
(iv) प्लान्टी तथा
(v) एनीमेलिया में वर्गीकृत किया। यह वर्गीकरण कोशिका के प्रकार, कोशिकीय या शारीरिक संगठन, पोषण, पारिस्थितिक भूमिका (coological role ) एवं जातिवृत्तीय सम्बन्धों पर आधारित है।

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rRNA के क्रमों (sequences) में समानता के आधार पर कार्ल वीज (Corl Woese) ने तीन डोमेन वर्गीकरण दिया है जिसमें सभी जीवों को डोमेन वैक्टीरिया, डोमेन आर्किया तथा डोमेन यूकैरिया में विभाजित किया है। पाँच जगत वर्गीकरण के जगत् प्रोटिस्टा, फंजाई प्लाण्टी व एनीमेलिया जगत से बड़े संवर्ग डोमेन में सम्मिलित किए गए हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के बारे में आर्थिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण उपयोगों को लिखिए-
(क) परपोषी बैक्टीरिया (Heterotrophic bacteria)
(ख) आद्य बैक्टीरिया (Archebacteria)
उत्तर:
(क) परपोषी बैक्टीरिया (Heterotrophic Bacteria) – इसके आर्थिक उपयोग निम्नलिखित हैं-
(i) लैक्टोबेसीलस दूध से दही बनाने में तथा अन्य दुग्ध उत्पाद बनाने में प्रयुक्त होते हैं स्ट्रेप्टोमाइसिस से एंटीबायोटिक्स बनती हैं।
(ii) बेसीलस यूरिन्जिएंसिस से प्राप्त जीन को कीटनाशक प्रतिरोधकता हेतु प्रयोग किया जाता है।

(ख) आद्य बैक्टीरिया (Archebacteria) ये विशिष्ट प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं। मीथेनोजन जुगाली करने वाले पशुओं (जैसे- गाय, भैंस) की आन्त्र में पाये जाते हैं, तथा
(i) मेथेन गैस (बायोगैस का उत्पादन होता है।
(ii) वाहितमल उपचार (sewage treatment) में प्रयोग किए जाते हैं।

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प्रश्न 3.
डाएटम की कोशिका भित्ति के क्या लक्षण हैं ?
उत्तर:
डाएटम्स (Diatoms) एककोशिकीय प्रकाश संश्लेषी प्रोटिस्ट होते हैं। इनमें कोशिका भित्ति (cell wall) साबुनदानी की भाँति दो अतिछादित कवच (overlapped shell) बनाती है। कोशिका भिति में सेल्यूलोस के साथ अत्यधिक मात्रा में सिलिका कण पाये जाते हैं सिलिका की उपस्थिति के कारण इनका अपघटन आसानी से नहीं होता है। इस प्रकार मृत डाएटम्स अपने वातावरण में कोशिका भित्तियों के अवशेष बड़ी संख्या में छोड़ जाते हैं। लाखों वर्षों में जमा हुए इस अवशेष को डाएटमी भृदा कहते हैं। इस मृदा का प्रयोग अग्निसह ईंटें (fire resistant bricks) तथा सौन्दर्य प्रसाधन, पॉलीशिंग बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 4.
‘शैवाल पुष्पन’ (Algal bloom) तथा ‘लाल तरंगें’ (Red-tides) क्या दर्शाती हैं ?
उत्तर:
शैवाल पुष्पन (Algal blooms) जलाशयों एवं पोखरों में जब पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है तो इन पर आश्रित शैवालों की संख्या में भी अपार वृद्धि होती है, इसे शैवाल पुष्पन (algal bloom) कहते हैं। यह शैवाल जल की सतह पर तैरते हैं। इनकी मृत्यु व इनके कार्बनिक पदार्थों पर जीवाणुओं की वृद्धि से जल दुर्गन्धयुक्त हो जाता है तथा यह स्थिति जलाशय के सुपोषीकरण (eutrophication) को जन्म देती है। इससे मछलियों की मृत्यु हो जाती है तथा यह जलाशय में जहरीले पदार्थ भी मुक्त करते हैं 1

लाल तरंगें (Red-tides) – प्रोटिस्ट डाएनोफ्लैजेलेट की संख्या में कभी इतनी वृद्धि होती है कि इन एककोशिकीय जीवों की संख्या एक मिमी. में 30000 तक हो जाती है। ऐसे ही डाएनोफ्लैजेलेट, गोनी आलेक्स (Goryantax) तथा जिम्नोडिनियम ब्रेक्सि (Gymnodinium brevis) के घनत्व में वृद्धि के कारण समुद्र के पानी का रंग लाल हो जाता है, जिसे रेड टाइड (Red tide) कहते हैं। यह एक न्यूरो ऑक्सिन भी बनाता है जिससे मछलियाँ मर जाती हैं।

प्रश्न 5.
वाइरस से वाइरॉइड किस प्रकार भिन्न होते हैं ?
उत्तर:
वाइरस तथा वाइरॉइड में अन्तर (Differences between virus and viroids) –

‘विषाणु (Virus)
1. वाइरस नाभिकीय अम्ल व प्रोटीन कोट के बने होते हैं।
2. इनमें आनुवंशिक पदार्थ DNA या RNA होता है।

वाइरॉइड (Viroid)
ये वाइरस से छोटे होते हैं। इनमें प्रोटीन कोट नहीं होता ।
इनमें आनुवंशिक पदार्थ RNA होता है।

प्रश्न 6.
प्रोटोजोआ के चार प्रमुख समूहों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रोटोजोआ (Protozoans ) –
ये जगत प्रोटिस्टा (Kingdom Protista) के अन्तर्गत आने वाले सुकेन्द्रकीय (eukaryotic), सूक्ष्मदर्शीय, एककोशिकीय, परपोषी तथा सरलतम जन्तुओं का समूह है। इनके चार समूह निम्न प्रकार हैं-

1. अमीबीय प्रोटोजोआ (Amoebic Protozoa) – ये स्वच्छजलीय या समुद्री प्रोटोजोअन्स हैं। इसके कुछ सदस्य गीली मृदा में भी पाये जाते हैं। समुद्री या लवणीय प्रोटोजोअन्स की सतह पर सिलिका का कवच पाया जाता है। प्रचलन कूटपादों (pseudopodia) की सहायता से होता है। एन्टअमीबा हिस्टोलाइटिका (Entamoeba histolytica) परजीवी प्रोटोजोआ है जो अमीबिक पेचिश (amoebic dysentery) रोग उत्पन्न करता है। उदाहरण- अमीबा (Amoeba) ।

2. कशाभी प्रोटोजोआ (Flagellate या Zooflagellates ) – इस समूह के सदस्य प्रायः परजीवी होते हैं। प्रचलन कशाभिकाओं (flagella) द्वारा होता है। ट्रिपेनोसोमा (Trypanosoma), कशाभी प्रोटोजोआ परजीवी होता है और अफ्रीकी निद्रालु रोग (african sleeping sickness) उत्पन्न करता है। लीशमानिया (Leishmania) से काला अजार रोग होता है।

3. पक्ष्माभी प्रोटोजोआ (Ciliate protozoans ) – इस समूह के सदस्य जलीय होते हैं। इनके सम्पूर्ण शरीर पर पक्ष्माभ (cilia) पाये जाते हैं। शरीर पर प्रोटीन का बना एक दृढ़ मगर लचीला आवरण होता है जिसे पेलिकल कहते हैं। पक्ष्माभों की तालबद्ध ( rythmic) गति के कारण भोजन कोशिका मुख में पहुँचता है। उदाहरण- पैरामीशियम (Paramecium)

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4. स्पोरोजोआ प्रोटोजोआ (Sporozoa Protozoa)- ये अन्तःपरजीवी होते हैं जो अन्य जीवों की कोशिका या ऊतकों में पाये जाते हैं। इनमें प्रचलन अंगों का अभाव होता है। इनका जीवन वृत्त जटिल अलैंगिक जनन बहुविभाजन द्वारा होता है। इनमें प्रायः बीजाणु जनन होता है। मलेरिया परजीवी प्लाज्मोडियम (Plasmodium) इस समूह का प्रमुख सदस्य है जो मलेरिया (malaria) रोग उत्पन्न करता है।

प्रश्न 7.
पादप स्वपोषी हैं। क्या आप ऐसे कुछ पादपों को बता सकते हैं जो आंशिक रूप से परपोषित हैं ?
उत्तर:
परजीवी पौधे (Parasitic plants) – ये पौधे पूर्ण या आंशिक परजीवी होते हैं जो दूसरे पौधों से भोजन प्राप्त करते हैं। अमरबेल (Cuscata), रैपलीशिया (Rafflesia), गठवा (Orobanche) पूर्ण परजीवी पौधे हैं। चन्दन (Santalum ), विस्कम (Viscum), अपूर्ण या आंशिक परजीवी हैं। निओशिया (Neotia), मोनोट्रोपा (Monotropa) मृतोपजीवी पौधे हैं। नेपेन्थीज (Nepenthes), ड्रासेरा (Drosera), यूटीकुलेरिया (Utricularia) कीटाहारी पौधे हैं।

प्रश्न 8.
शैवालांश तथा कवकांश शब्दों से क्या पता चलता है ?
उत्तर:
शैवालांश ( Phycobionts) तथा कवकांश (Mycobionts), लाइकेन्स (Lichens) के दो जैविक घटक हैं। शैवाल तथा कवक दोनों घटक मिलकर एक सहजीवी संरचना लाइकेन बनाते हैं। लाइकेन का शैवालांश या शैवाल घटक, प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण करता है और स्वपोषी भाग कहलाता है। कवकोश, शैवाल घटक को सुरक्षा प्रदान करता है तथा खनिज एवं जल अवशोषण करके शैवाल को उपलब्ध कराता है।

प्रश्न 9.
कवक (फंजाई) जगत के वर्गों का तुलनात्मक विवरण निम्नलिखित बिन्दुओं पर कीजिए-
(क) पोषण की विधि,
(ख) जनन की विधि
उत्तर:
कवक (फंजाई) जगत के प्रमुख वर्गों का तुलनात्मक विवरण –

फाइकोमाइसिटी (Phycomycetes) वर्गएस्कोमाइसिटीज (Ascomycetes) वर्गबेसीडियोमाइसिटीज (Basidiomycetes) वर्ग 

ड्यूटेरोमाइसिटीज (Deuteromycetes) वर्ग

(क) पोषण विधि के आधार पर
1. इस वर्ग के सदस्य उच्च पादपों पर अविकल्पी परजीवी (obligate parasite) होते हैं। उदाहरण मृतजीवी- राइजोपस परजीवी – एल्ब्यूगोइस वर्ग के सदस्य मृतजीवी, अपघटक, परजीवी या शमलरागी (coprophilous) होते हैं। उदाहरण मृतजीवी- मौर्केला, परजीवी क्लेवीसेप्स परप्युरियाइस वर्ग के सभी सदस्य मृतजीवी (Saprabiotic) या (Parasitic ) होते हैं। उदाहरण मृतजीवी – एगेरिकस परजीवी-सक्सीनिआइस वर्ग के सदस्य भी मृतजीवी या परजीवी होते हैं।

उदाहरण परजीवी – अल्टरनेरिया

(ख) जनन की विधि के आधार पर
2. इनमें अलैंगिक जनन चल बीजाणुओं (zoospores) द्वारा होता है। ये बीजाणुधानी में अन्तर्जातीय उत्पन्न होते हैं।इनमें अलैंगिक जनन कोनीडिया (conidia) द्वारा होता है।इनमें लैंगिक बीजाणुओं का निर्माण प्रायः नहीं होता है।इनमें कोनिडिया द्वारा केवल अलैंगिक जनन होता है।
3. लैंगिक जनन (plasmogamy) समयुग्मकी असमयुग्मकी अथवा विषमयुग्मकी हो सकता है।लैंगिक अवस्था के बीजाणु एस्कोस्पोर कहलाते हैं जो एस्कस में अन्तर्जात (endogenously) रुप से बनते हैं। n +n अवस्था पाई जाती है।लैंगिक जनन के बीजाणु बैसिडियोस्पोर कहलाते हैं जो बैसीडियम पर बहिर्जात ( exogenously) रुप से बनते हैं। अवस्था (द्विकेन्द्रक प्रावस्था) n + n पाई जाती है।लैंगिक जनन ज्ञात नहीं है।
4. युग्मक संलयन करके युग्माणु बनाते हैं।‘ऐस्कोकार्प (फलनकाय) बनते हैं।इसके फलनकाय को बैसीडियोकार्प कहते हैं।इनमें फलनकाय का निर्माण नहीं होता है।

प्रश्न 10.
युग्लीनॉइड के विशिष्ट चारित्रिक लक्षण कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
युग्लीनॉइड के चारित्रिक लक्षण (Characteristic Features of Euglenoids) –
1. इनके अधिकांश सदस्य स्वच्छ तथा स्थिर जल ( stagnant water) में पाये जाते हैं।
2. इनमें कोशिका भित्ति नहीं पायी जाती किन्तु शरीर पर लचीला, प्रोटीनयुक्त रक्षात्मक आवरण पेलीकल (pellicle) पाया जाता है।
3. इनमें एक चाबुक के समान कशाभ पाया जाता है।
4. उच्च पादपों के समान प्रकाश संश्लेषी वर्णक (pigments) पाये जाते हैं।
5. ये स्वपोषी या जन्तु समभोजी होते हैं। यह इनका एक अनूठा व विशिष्ट गुण है। अतः इन्हें जन्तु एवं पादप के बीच एक कड़ी के रूप में माना जाता है।
उदाहरण: युग्लीना (Euglena)

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प्रश्न 11.
संरचना तथा आनुवंशिक पदार्थ की प्रकृति के सन्दर्भ में वाइरस का संक्षिप्त विवरण दीजिये। वाइरस से होने वाले चार रोगों के नाम भी लिखिए।
उत्तर:
विषाणु (Virus):
ये अतिसूक्ष्म जीवित कण हैं, जो केवल नाभिकीय अम्ल तथा प्रोटीन के बने होते हैं। प्रत्येक वाइरल कण में DNA या RNA का बना एक केन्द्रीय कोर (Core) होता है जो प्रोटीन के एक खोल कैप्सिड (capsid) द्वारा घिरा होता है। किसी भी वाइरस में DNA तथा RNA दोनों एक साथ नहीं पाये जाते हैं। प्रोटीन आवरण छोटी-छोटी उप इकाइयों से बना होता है जिन्हें कैप्सोमीअर कहते हैं। यह गोल, बहुभुजी, छड़ाकार, टैडपोल के आकार के हो सकते हैं।

सभी पादप विषाणुओं में एकरज्जुकी (single stranded ) RNA तथा सभी जन्तु विषाणुओं में एक अथवा द्विरज्जुकी RNA अथवा DNA होता है। जीवाणुभोजी (Bacteriophage) में द्विरज्जुकी (double stranded) DNA होता है। विषाणुओं से होने वाले रोग (Disease caused by virus) – मनुष्य में विषाणुओं द्वारा – एड्स (AIDS), इन्फ्लुएंजा (influenza), मम्प्स (mumps ), हिपेटाइटिस (hepatitis) आदि तथा पादपों में पौधों का मोजैक टमाटर का पूर्ण वेलन, केला का बन्ची टॉप पर्ण कुंचन आदि रोग होते हैं।

विषाणुओं से होने वाले रोग (Disease caused by virus) – मनुष्य में विषाणुओं द्वारा – एड्स (AIDS), इन्फ्लुएंजा (influenza ), मम्प्स (mumps), हिपेटाइटिस ( hepatitis) आदि तथा पादपों में पौधों का मोजैक टमाटर का पर्ण वेलन, केला का बन्ची टॉप, पर्ण कुंचन आदि रोग होते हैं।

प्रश्न 12.
अपनी कक्षा में इस शीर्षक ‘क्या वाइरस सजीव है अथवा निर्जीव पर चर्चा करें।
उत्तर:
विषाणुओं को सजीव तथा निर्जीव के बीच की कड़ी माना जाता है। निर्जीव पदार्थ की तरह क्रिस्टलीकृत किए जा सकने योग्य विषाणुओं में जीवाधारियों के विभेदक लक्षण जैसे – कोशिकीय संरचना, उपापचय आदि नहीं पाये जाते हैं। अतः इस दृष्टि से यह जीवों की श्रेणी में सम्मिलित नहीं किए जा सकते हैं लेकिन चूंकि इनमें पोषक कोशिकीओं के अन्दर गुणन (Multiplication) प्रजनन की क्षमता होती है अतः इन्हें जीव मानना उचित प्रतीत होता है। कुछ वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि विषाणु अत्यधिक विकसित जीव हैं जिनमें अनेक जैविक गुणों का ह्रास हो गया है। यह पोषक कोशिका के आनुवंशिक पदार्थ पर नियन्त्रण कर उसके उपापचय को अपने हित में प्रयोग करते हैं।

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HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Solutions Chapter 1 जीव जगत Textbook Exercise Questions and Answers.

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प्रश्न 1.
जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं ?
उत्तर:
हमारी पृथ्वी पर जीवधारियों की 17 से 18 लाख जातियाँ ज्ञात हैं। अनेक नयी जीव जातियों की खोज प्रतिवर्ष कर ली जाती है। जीवधारियों की इस विशाल संख्या का व्यक्तिगत रूप से अध्ययन करना असम्भव है। इसलिए हमें इनकी समानताओं, असमानताओं एवं लक्षणों के आधार पर छोटे-छोटे समूहों दिया जाता है। किसी भी समूह के एक सदस्य का अध्ययन उस समूह के सम्पूर्ण सदस्यों का प्रतिनिधिक अध्ययन होता है।
अतः वर्गीकरण जीवधारियों की पहचान व उनके सुव्यवस्थित अध्ययन के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 2.
वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं ?
उत्तर:
विज्ञान के क्षेत्र में हुई उन्नति से जीवधारियों से सम्बन्धित नये तथ्यों की खोज होती है जिससे उनके बीच के सम्बन्धों को पुनः परिभाषित किया जाता है। नये जीव व जीवाश्मों की खोज से भी नई जानकारी प्राप्त होती है। कोशिका की परारचना के ज्ञान के बाद ही प्रोकैरियोटिक नील हरित शैवाल (साएनोबैक्टीरिया) को शैवालों से अलग वर्गीकृत किया गया। वर्गीकरण का आधार अब अधिक व्यापक व वैज्ञानिक है।

प्रश्न 3.
जिन लोगों से आप प्राय मिलते रहते हैं आप उनको किस आधार पर वर्गीकृत करना पसन्द करेंगे ?
(संकेत ड्रेस मातृभाषा, प्रदेश जिसमें वे रहते हैं, आर्थिक स्तर आदि)
उत्तर:
यह वर्गीकरण वैज्ञानिक आधार वाला नहीं होगा। फिर भी आस-पास के व्यक्तियों को उनकी मातृभाषा के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है, क्योंकि पहनावा तथा आर्थिक स्तर बदला जा सकता है। चूंकि प्रश्न में आस-पास के लोगों की बात कही गयी है अतः सभी उसी प्रदेश के होंगे। दूसरे शब्दों में हम अपने आस-पास के लोगों का वर्गीकरण प्रश्न में दिये गये लक्षणों के आधार पर कर सकते हैं हमारे देश के विभिन्न राज्यों की वेशभूषा में काफी अन्तर देखने को मिलता है जैसे कश्मीरी लिबास, बंगाली लिबास आदि विभिन्न राज्यों एवं सूबों में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती है जैसे-बंगाली, पंजाबी, मराठी आदि प्रदेशों के आधार पर भी लोगों को वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे-पहाड़ी क्षेत्र के लोग, मैदानी क्षेत्र के लोग आर्थिक स्तर पर लोगों का वर्गीकरण धनी, मध्यम एवं निर्धन के रूप में किया जा सकता है। यदि लोगों को उपरोक्त लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत करना पड़े तो इन्हें प्रदेश के आधार पर वर्गीकृत करना अधिक उचित होगा, क्योंकि ड्रेस, भाषाएँ एवं आर्थिक स्तर प्रवसन (migration) होने पर बदल सकते हैं।

प्रश्न 4.
व्यट्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?
उत्तर:
व्यष्टि (Individual) तथा समष्टि (poulation)- जीवधारियों का वह समूह जो प्रकृति में परस्पर जनन करके प्रजनन सक्षम सन्तान उत्पन्न कर सकते हैं, प्रजाति (Species) कहलाता है। जब एक ही जाति के सदस्य विभिन्न भौगोलिक आवासों तथा पर्यावरण में रहते हैं तो इनके रंग, रूप, आकार एवं व्यवहार में बदलाव आ जाते हैं, ऐसे समूह को समष्टि या आबादी (population) कहते हैं। व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें उस प्रजाति विशेष के लक्षणों के अध्ययन का अवसर मिलता है।

प्रश्न 5.
आम का वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित है ? इसमें से कौन-सा सही है ?
(i) मैजीफेरा इंडिका (Mangifera Indica )
(ii) मैजीफेरा इंडिका (Mangifera indica)
उत्तर:
आम का सही वैज्ञानिक नाम मैजीफेरा इंडिका (Mangifera indica) है। वंश का प्रथमाक्षर अंग्रेजी वर्णमाला के बड़े अक्षर (Capital letter) तथा जाति का प्रथमाक्षर अंग्रेजी वर्णमाला के छोटे तथा शेष सभी अधर वर्णमाला के छोटे अक्षरों (Small letters) में लिखे जाते हैं। दोनों ही शब्दों को टेड़ा छापा जाता है।

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प्रश्न 6.
टैक्सान की परिभाषा दीजिए। विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वर्गक (Taxon) वर्गीकरण की श्रेणियों (categories) अर्थात् संवर्गों जैसे- वंश, कुल वर्ग आदि से प्रत्यक्ष जीव का ज्ञान नहीं होता, लेकिन वर्गक (Taxon) किसी जीव जीव समूह का प्रत्यक्ष प्रदर्शन करते हैं। यह किसी भी श्रेणी या संवर्ग के हो सकते हैं। जैसे-बिल्ली (cat) एक वर्गक (Taxon) है व इसका स्तर कुल हैं। यह किसी श्रेणी या संवर्ग के हो सकते हैं। जैसे-बिल्ली (cat) एक वर्गक (Taxon) है व इसका कुल है। इसी प्रकार स्तनधारी (Mammal) एक वर्ग श्रेणी का वर्गक है। अर्थात् एक वर्गक जीवों का एक समूह है जो किसी श्रेणी या संवर्ग में पाया जाता है उसे भरता है।

प्रश्न 7.
क्या आप वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम पहचान सकते हैं ?
(अ) जाति (स्पीशीज) → गण (आर्डर) → संघ (फाइलम) → जगत (किंगडम)
(ब) वंश (जीनस) → गण → जागत
(स) जाति →वंश गण → संघ
उत्तर:
सही वर्गिकी संवर्ग है-
जाति (Species) वंश (Genus) कुल (Family) गण (Order) वर्ग (Class) संघ (Phylum) (Kingdom)।
चूंकि वैज्ञानिक नाम में प्रजाति तथा वंश दोनों का नाम शामिल होना जरुरी है अतः उपर्युक्त विकल्पों में से ‘स’ को सही माना जा सकता है। ‘अ’ विकल्प में वंश का नाम नहीं दिया है।

प्रश्न 8.
जाति शब्द के सभी मानवीय वर्तमान कालिक अर्थों को एकत्र कीजिये क्या आप अपने शिक्षक से उच्चकोटि के पौधों तथा प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ जानने के लिए चर्चा कर सकते हैं ?
उत्तर:
जाति की अवधारणा (Concept of Species) जीवधारियों के लिए जाति (Species) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम जॉन रे (John Ray) ने किया। जाति वर्गीकरण एवं जैव विकास दोनों की ही मूलभूत इकाई (basic unit) है अतः जाति ऐसे जीवों का समूह है जिनकी संरचना एवं कार्यों में अत्यधिक समानता होती है। जाति के सदस्य आपस में प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने में सफल होते हैं तथा इनका विकास एक ही पूर्वज (ancestor) से होता है। मायर (Mayr 1942) के अनुसार, “जाति आपस में प्रजनन करने वाले एक समान जीवों का समूह

प्रश्न 9.
निम्नलिखित शब्दों को समझिए तथा परिभाषित कीजिये-
(i) संघ
(ii) वर्ग
(iii) कुल
(iv) गण
(v) वंश
उत्तर:
(i) संघ (Phylum) आपस में सम्बन्धित विभिन्न वर्गों का समूह संघ कहलाता है। जैसे—मत्स्य उभयचर, सरीसृप, पक्षी तथा स्तनधारी वर्ग को उच्च संवर्ग संघ-कोटा (Phylum chordata) में रखते हैं।

(ii) वर्ग (Class) अनेक आपस में सम्बन्ध रखने वाले गण (Orders) का समूह वर्ग (Class) कहलाता है। उदाहरणार्थ कृन्तक जन्तुओं का गण रोडेशिया (Rodentia), समुद्री स्तनधारियों का गण सिटेसिया (Cetacea), उड़ने वाले स्तनधारियों का गण काइरोप्टेरा (Chiroptera), माँसाहारी शक्तिशाली स्तनधारियों का गण कार्निवोरा (Carnivora) बुद्धिमान स्तनधारियों का गम प्राइमेट्स (Primates) आदि सभी वर्ग स्तनधारी (Class-mammalia) में सम्मिलित हैं।

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(iii) कुल (Family) – यह अनेक सम्बन्धित वंशों (Genera) का समूह है। उदाहरणार्थ, सोलेनम (Solanum), पिटूनिया (Petunia) तथा क्रा (Datura) वंशों को कुल सोलेनेसी (Solanaceae) में सम्मिलित किया गया है।

(iv) गण (Order) आपस में कुछ समानताएँ रखने वाले विभिन्न कुलों के सदस्यों को एक गण ( Order) में सम्मिलित किया जाता है अर्थात गण समानता प्रदर्शित करने वाले अनेक कुलों का समूह है। जैसे—कार्नियोरा (Carnivora) गण में फैलिडी (Felidae) तथा कैनिडी (Canidae) कुलों को रखा गया है। गण, कुल की अपेक्षा कम समानता दर्शाते हैं।

(v) वंश (Genus) – यह सम्बन्धित जातियों का संवर्ग (Category) है। उदाहरणार्थ- बैंगन, आलू, मकोय आदि अलग-अलग जातियाँ हैं किन्तु इन सभी को एक ही वंश सोलेनम (Solanum) में रखा गया है।

प्रश्न 10.
जीव के वर्गीकरण तथा पहचान में कुंजी किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर:
कुंजी (key) वर्गिकी सहायता साधनों में एक अन्य साधन सामग्री है। इसका प्रयोग समानताओं तथा असमानताओं पर आधारित होकर पौधों तथा जन्तुओं की पहचान में किया जाता है यह तुलनात्मक लक्षणों पर आधारित होती है वर्गिकी संवर्ग प्रत्येक श्रेणी, जैसे—जाति, वंश, कुल, गण, वर्ग, संघ के लिए अलग-अलग कुंजियों का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
पौधों व प्राणियों के उचित उदाहरण देते हुए वर्गिकी पदानुक्रम का चित्रण कीजिए।
उत्तर:
वनस्पति जगत का उदाहरण
तुलसी (Holy basil)
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HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Solutions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 1.
4.7m लम्बे व 3.0 x 10-5 m2 अनुप्रस्थ काट के स्टील के तार तथा 3.5 m लम्बे व 4.0 x 10-5 m2 अनुप्रस्थ काट के ताँबे के तार पर दिए गए समान परिमाण के भारों को लटकाने पर उनकी लम्बाइयों में समान वृद्धि होती है। स्टील तथा ताँबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों में क्या अनुपात है?
उत्तर:
यंग प्रत्यास्थता गुणांक
Y = \(\frac{\mathrm{F} / \mathrm{A}}{\Delta \mathrm{L} / \mathrm{L}}=\frac{\mathrm{FL}}{\mathrm{A} \Delta \mathrm{L}}\)
समान भार F तथा समान वृद्धि (∆L) के लिए
Y α \(\frac{\mathrm{L}}{\mathrm{A}}\)
अतः
\(\frac{\mathrm{Y}_s}{\mathrm{Y}_c}=\frac{\mathrm{L}_s}{\mathrm{~L}_c} \times \frac{\mathrm{A}_c}{\mathrm{~A}_s}\)
∵ L, = 4.7m, A = 3.0 x 10-5 m2
L = 3.5m,
Ac = 4.0 x 10-5 m2
∴ \(\frac{Y_s}{Y_c}=\frac{4 \cdot 7}{3 \cdot 5} \times \frac{4 \cdot 0 \times 10^{-5}}{3.0 \times 10^{-5}}=1.8\)
अत:
Ys : Yc = 1.8 : 1

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प्रश्न 2.
चित्र में किसी दिए गए पदार्थ के लिए प्रतिबल विकृति वक्र दर्शाया गया है। इस पदार्थ के लिए (a) यंग प्रत्यास्थता गुणांक, तथा (b) सन्निकट पराभव सामर्थ्य क्या है?

उत्तर:
(a) ग्राफ पर स्थित बिन्दु A पर,
i cy a = 150 x 106 Nm2
तथा
विकृति e = 0.002
∴ यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y = \(\frac{\sigma}{\varepsilon}\)
= \(\frac{150 \times 10^6 \mathrm{Nm}^{-2}}{0.002}\)
= 7.5 x 10 1010 Nm2

(b) पराभव सामर्थ्य = ग्राफ के उच्चतम बिन्दु के संगत
प्रतिबल = 300 × 106 Nm2 लगभग

प्रश्न 3.
दो पदार्थों A और B के लिए प्रतिबल – विकृति ग्राफ चित्र 9.20 में दर्शाए गए हैं।

इन ग्राफों को एक ही पैमाना मानकर खींचा गया है।
(a) किस पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है?
(b) दोनों पदार्थों में कौन अधिक मजबूत है?
उत्तर:
(a) ग्राफ A के सरल रेखीय भाग का ढाल, B की अपेक्षा अधिक है। चूँकि सरल रेखीय भाग का ढाल प्रतिबल/विकृति = Y को प्रकट करता है। अतः A का यंग प्रत्यास्थता गुणांक, B की अपेक्षा अधिक है।
(b) पदार्थ A अधिक मजबूत है क्योंकि इसका प्रत्यास्थता गुणांक पदार्थ B से अधिक है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित दो कथनों को ध्यान से पढ़िए और कारण सहित बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य:
(a) इस्पात की अपेक्षा रबर का यंग प्रत्यास्थता गुणांक अधिक है;
(b) किसी कुण्डली का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।
उत्तर:
(a) माना स्टील व रबर के दो तार समान लम्बाई L व समान त्रिज्या r के हैं। माना इन पर Mg भार लटकाने से स्टील के तार में वृद्धि
ls व रबर की डोरी की लम्बाई में वृद्धि lR है। यदि स्टील व रबर के यंग प्रत्यास्थता गुणांक क्रमश: Ys व Ypहैं, तो
\(\mathrm{Y}_{\mathrm{S}}=\frac{\mathrm{MgL}}{\pi r^2 l_{\mathrm{S}}}\)
तथा
\(\mathrm{Y}_{\mathrm{R}}=\frac{\mathrm{MgL}}{\pi r^2 l_{\mathrm{R}}}\)
\(\frac{\mathrm{Y}_{\mathrm{R}}}{\mathrm{Y}_{\mathrm{S}}}=\frac{\mathrm{MgL} / \pi r^2 l_{\mathrm{R}}}{\mathrm{MgL} / \pi r^2 l_{\mathrm{S}}}=\frac{l_{\mathrm{S}}}{l_{\mathrm{R}}}\)
चूँकि रबर की डोरी स्टील के तार के तुलना में समान भार के लिए लम्बाई में अधिक खिंचता है अर्थात् lR > ls अतः स्पष्ट है Ys > YR अर्थात् रबर की अपेक्षा स्टील अधिक प्रत्यास्थ है अतः यह कथन असत्य है।
(b) सत्य; क्योंकि कुण्डली का तनन करने पर न तो लम्बाई में वृद्धि होती है और न ही आयतन में परिवर्तन होता है। चूँकि कुण्डली की आकृति में परिवर्तन होता है।

प्रश्न 5.
0.25cm व्यास के दो तार, जिनमें एक इस्पात का तथा दूसरा पीतल का है चित्र 9.21 के अनुसार भारित हैं। बिना भार लटकाये इस्पात तथा पीतल के तारों की लम्बाइयाँ क्रमश: 1.5m तथा 1.0m हैं। यदि इस्पात तथा पीतल के यंग प्रत्यास्थता गुणांक क्रमशः 2.0 x 1011 Pa तथा 0.91 ×1011 Pa हों, तो इस्पात तथा पीतल के तारों में विस्तार की गणना कीजिए।
उत्तर:
∴ इस्पात के तार के लिए
E = 1.5m,
M = (4.0 + 6.0)
= 10.0kg
r = \(\frac{0 \cdot 25}{2}\) Cm
= 0.125 × 10-2m,
Y1 = 2.0 × 10-2 Pa
\(\mathrm{Y}=\frac{\mathrm{MgL}}{\pi r^2 \Delta \mathrm{L}}\)
\(\Delta \mathrm{L}_1=\frac{10.0 \times 9.8 \times 1.5}{3.14 \times\left(0.125 \times 10^{-2}\right)^2 \times 2.0 \times 10^{11}}\)
= 1.5 x 10-4m
तथा पीतल के तार के लिए,
L = 10m, M = 6.0 kg,
Y2 = 0.91 × 1011Pa

= 1.3 × 10-4 m

प्रश्न 6.
ऐलुमिनियम के किसी घन के किनारे 10 cm लम्बे हैं। इसकी एक फलक किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से कसकर जुड़ी हुई है। इस के सम्मुख फलक से 100 kg का एक द्रव्यमान जोड़ दिया गया है। ऐलुमिनियम का अपरूपण गुणांक 25 GPa है। इस फलक का ऊर्ध्वाधर विस्थापन कितना होगा?
उत्तर:
दिया है : अपरूपण गुणांक η = 25 GPa
= 25 × 109 Nm-2
आरोपित बल का क्षेत्रफल
A = 10 cm x 10 cm
= 100 cm2 = 100 × 10-4m2
आरोपित बल F = 100 kg x 9.8N/kg = 980 N

माना फलक का ऊर्ध्वं विस्थापन = ∆x
जबकि L = 10cm = 0.1m
∴ सूत्र η = \(\frac{(\mathrm{F} / \mathrm{A})}{(\Delta x / \mathrm{L})}\)
फलक का विस्थापन
\(\Delta x=\frac{\mathrm{FL}}{\eta \mathrm{A}}\)
= \(\frac{980 \times 0.1}{25 \times 10^9 \times 100 \times 10^{-4}}\)
= 3.92 × 10-7m
= 4 x 10-7 m

प्रश्न 7.
मृदु इस्पात के चार समरूप खोखले बेलनाकार स्तम्भ 50000 kg द्रव्यमान के किसी बड़े ढाँचे को आधार दिये हुए हैं। प्रत्येक स्तम्भ की भीतरी तथा बाहरी त्रिज्याएँ क्रमशः 30 तथा 60 cm हैं। भार वितरण को एकसमान मानते हुए प्रत्येक स्तम्भ की सम्पीडन विकृति की गणना कीजिए।
उत्तर:
ढाँचे का कुल भार F = 50000 kg x 9.8Nkg-1
= 4.9 x 105N
∵ ढाँचे का भार चारों स्तम्भों पर एकसमान पड़ता है अतः प्रत्येक
स्तम्भ पर पड़ने वाला भार
F1 = \( \frac{F}{4}\)
= \(\frac{4.9 \times 10^5}{4}\)
= 1-225 × 105 N
तथा प्रत्येक स्तम्भ का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल
A = π
= 3.14[(0.6)2 – (0.3)2]
= 0.8478 m2 = 0.85m2
सूत्र \(\mathrm{Y}=\frac{\mathrm{FL}}{\mathrm{A \Delta L}}\) से,
सम्पीडन विकृति (% में) \(\frac{\Delta \mathrm{L}}{\mathrm{L}} \times 100=\frac{\mathrm{F}_1}{\mathrm{AY}} \times 100\)
= \(\frac{1.225 \times 10^5}{0.85 \times 2 \times 10^{11}} \times 100\)
[ ∵ Y = 2 × 1011 Nm2]
सम्पीडन विकृति % = 7.2 x 10-5 x 4
अतः सभी स्तंभों की संपीडन विकृति %
= 7.2 x 10-5 x 4
= 2.88 x 10-5 %

प्रश्न 8.
ताँबे का एक टुकड़ा, जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद 15.2 mm x 19.1 mm का है, 44500 N बल के तनाव से खींचा जाता है, जिससे केवल प्रत्यास्थ विरूपण उत्पन्न हो । उत्पन्न विकृति की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है F = 44500N,
A = 15.2mm x 19.1mm
= 15.2 × 10-3m × 19.1 × 10-3 m
= 2.90 × 10-4 m2
ताँबे के लिए Y = 1.1 × 1011 Nm-2,
विकृति = ?
सूत्र \(Y=\frac{(F / A)}{(\Delta L / L)}\)
∴ विकृति
= \(\frac{44500}{2.9 \times 10^{-4} \times 1 \cdot 1 \times 10^{11}}\)
= 0.00139
प्रतिशत विकृति \(\frac{\Delta \mathrm{L}}{\mathrm{L}}\) x 100
= 0.00139 x 100 = 0.139%

प्रश्न 9.
1.5 cm त्रिज्या का एक इस्पात का केबिल भार उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि इस्पात के लिए अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल 108 Nm-2 है तो उस अधिकतम भार की गणना कीजिए जिसे केबिल उठा सकता है।
उत्तर:
दिया है
अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल = 108 Nm-2
त्रिज्या r = 1.5 cm
= 1.5 x 10-2 m
लटकाया गया अधिकतम भार= ?
अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल =
= अनुज्ञेय प्रतिबल x A
∴ अधिकतम भार (Mg)
= 108 x πr2
= 108 × 3.14 × (1-5 × 10-2)2
= 7.07 × 104 N

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प्रश्न 10.
15 kg द्रव्यमान की एक दृढ़ पट्टी को तीन तारों, जिनमें प्रत्येक की लम्बाई 2 m है, से सममित लटकाया गया है। सिरों के दोनों तार ताँबे के हैं तथा बीच वाला लोहे का है। तारों के व्यासों के अनुपात निकालिए, प्रत्येक पर तनाव उतना ही रहना चाहिए।
उत्तर:
पट्टी, तारों से सममिति से लटकी है अतः प्रत्येक पट्टी के भार का एक तिहाई भार का वहन करेगा।
माना एक तार का व्यास D है, तब त्रिज्या r = \(\frac{\mathrm{D}}{2}\)

प्रश्न 11.
एक मीटर अतानित लम्बाई के इस्पात के तार के एक सिरे से 14.5 kg का द्रव्यमान बाँधकर उसे एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है, वृत्त की तली पर उसका कोणीय वेग 2 rev/s है। तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल 0.065 cm2 है। तार में विस्तार की गणना कीजिए जब द्रव्यमान अपने पथ के निम्नतम बिन्दु पर है।
उत्तर:
दिया है
M = 14.5 kg, L = 1 m
A = 0.065 cm2 = 6.5 x 10-6 m2
वृत्त की त्रिज्या R = 1m, AL = ?
ω = 2π x 2 = 4π rad/s; Y = 2 x 1011 Nm-2

माना वृत्त के निम्नतम बिन्दु पर तनाव T है, तब
T – Mg = MRω2
या
T = M(g + Rω2)
परन्तु
\(\mathrm{Y}=\frac{\mathrm{T} / \mathrm{A}}{\Delta \mathrm{L} / \mathrm{L}}\) से,
तार में विस्तार

= 1.86 x 10-3 मी = 0.186 सेमी

प्रश्न 12.
नीचे दिए गए आँकड़ों से जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए:
प्रारम्भिक आयतन 100.00 लीटर, दाब में वृद्धि 100.0atm (1 atm = 1.013 × 105 Pa) अन्तिम आयतन 100.5 लीटर। नियत ताप पर जल तथा वायु के आयतन प्रत्यास्थता गुणांकों की तुलना कीजिए। सरल शब्दों में समझाइए कि यह अनुपात इतना अधिक क्यों है?
उत्तर:
दिया है:
∆P = 100 वायुमण्डलीय दाब
= 100 × 1.013 × 105 Pa
= 1.013 × 107 Pa
V1 = 100 लीटर,
V2 = 100.5 लीटर

आयतन में परिवर्तन ∆V = V2 – V1
= 100.5 – 100 = 0.5 लीटर
= 0.5 × 10-3 m3
∴ जल का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक
= \(\frac{\Delta \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{V} / \mathrm{V}}=\frac{\mathrm{V} \Delta \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{V}}\)
Bजल =
B. = 2.206 × 109 Pa
तथा वायु का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक
Bवायु = 1.0 × 105 Nm2

इतना अधिक अनुपात होने का कारण यह है कि गैसों में अन्तराष्विक बल, द्रवों की तुलना में नगण्य होते हैं।

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प्रश्न 13.
जल का घनत्व उस गहराई पर जहाँ दाब 80.0 atm हो, कितना होगा? दिया गया है कि पृष्ठ पर जल का घनत्व 1.03 x 103 kg m-3, जल की सम्पीड्यता 45.8 x 10-11 Pa-1 (1 Pa = 1 Nm-2)
उत्तर:
आयतन प्रत्यास्थता गुणांक B =
∴ B = 2.18 x 109 Pa
माना जल का द्रव्यमान M, आयतन V तथा घनत्व p है, तब
द्रव्यमान = आयतन घनत्व
M= Vp = नियत
अवकलित करने पर, V∆p + p∆v = 0
अतः आयतन विकृति \(\frac{\Delta V}{V}=-\frac{\Delta \rho}{\rho}\) ….(1)
तथा आयतन प्रत्यास्थता गुणांक
\(\mathrm{B}=-\frac{\Delta \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{V} / \mathrm{V}}\)
= \(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\mathrm{V}}=-\frac{\Delta \mathrm{P}}{\mathrm{B}}\) ……….(2)
समी (1) व (2) से,
\(\frac{\Delta \rho}{\rho}=\frac{\Delta P}{B}\)
या
\(\Delta \rho=\frac{\Delta P \rho}{B}\)
∴ ∆p = दाब में परिवर्तन
= गहराई में दाब – सतह पर दाब
= 80 – 1
∆p = 79 वायुमण्डल
= 79 × 1.013 × 105 Nm2
अतः
\(\Delta \rho=\frac{\left(79 \times 1.013 \times 10^5\right) \times 1.03 \times 10^3}{2.18 \times 10^9}\)
∆p = 4kgm-3
= 0.004 x 103 kg m-3
∴ गहराई पर जल का घनत्व
p = p + ∆p
= 1.03 × 103 + 0.004 × 103
= 1.034 x 103 kg m-3

प्रश्न 14.
काँच के स्लैब पर 10 atm का जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन के भिन्नात्मक अन्तर की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है
∆p = 10 atm = 10 x 105 Pa
काँच की आयतन प्रत्यास्थता B = 37 x 109 Nm-2
आयतन प्रत्यास्थता B = \(\frac{-\Delta \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{V} / \mathrm{V}}\)
अतः
∴ स्लैब के आयतन में भिन्नात्मक अन्तर
\(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\mathrm{V}}=\frac{10 \times 10^5}{37 \times 10^9}\) = 2.70 × 10-5
अथवा
\(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\mathrm{V}}\) × 100 = 2.7 × 105 × 100%
= 0.0027%

प्रश्न 15.
ताँबे के एक ठोस घन का एक किनारा 10 cm का है। इस पर 7.0 x 106 Pa का जलीय दाब लगाने पर इसके आयतन में संकुचन निकालिए।
उत्तर:
दिया है घन की भुजा a = 10 cm = 0.1m
∴ घन का आयतन V = a = (0.1)3 = 103 m3
जलीय दाब P = 7 x 106 Pa
तथा
ताँबे के लिए B = 140 x 109 Pa
सूत्र
B = \(\frac{{ }^{\prime} \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{V} / \mathrm{V}}\) से,
आयतन में संकुचन
∆v = \(\frac{\Delta \mathrm{PV}}{\mathrm{B}}=\frac{7 \times 10^6 \mathrm{~Pa} \times 10^{-3} \mathrm{~m}^3}{140 \times 10^9 \mathrm{~Pa}}\)
= 5 × 108 m3
= 0.05 cm3

प्रश्न 16.
1 लीटर जल पर दाब में कितना अन्तर किया जाए कि वह 0.10% से सम्पीडित हो जाए?
उत्तर:
दिया है:
V = 1 लीटर,
B = 2.2 x 109 Nm-2
\(\frac{\Delta \mathrm{V}}{\mathrm{V}}\) x 100 = 0.10 या ∆V = \(\frac{0 \cdot 10}{100}\) × 1
= \(\frac{1}{1000}\) लीटर
∵ \(B=\frac{\Delta P}{\Delta V / V}\)
∴ \(\Delta P=B \frac{\Delta V}{V}\)
= 2.2 × 109 × \(\frac{1}{1000}\)
∆P = 2.2 × 106 Pa

अतिरिक्त अभ्यास

प्रश्न 17.
हीरे के एकल क्रिस्टलों से बनी निहाइयों जिनकी आकृति चित्र 9.24 में दिखाई गई है, का उपयोग अति उच्च दाब के अन्तर्गत द्रव्यों के व्यवहार की जाँच के लिए किया जाता है। निहाई के संकीर्ण सिरों पर सपाट फलकों का व्यास 0.50mm है। यदि निहाई के चौड़े सिरों पर 50000 N का बल लगाया गया हो तो उसकी नोंक पर दाब ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
सपाट फलक की त्रिज्या
R = \(\frac{D}{2}=\frac{0.50}{2}\) = 0.25 mm
= 2.5 × 10-4 m
∴ नोंक पर दाब P = \(\frac{F}{A}=\frac{F}{πr^2}=\frac{50000 \mathrm{~N}}{3.14 \times\left(2.5 \times 10^{-4}\right)^2}\)
= 2.55 × 1011 Pa

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प्रश्न 18.
1.05m लम्बाई तथा नगण्य द्रव्यमान की एक छड़ को बराबर लम्बाई के दो तारों, एक इस्पात का (तार A) तथा दूसरा ऐल्युमिनियम का तार (तार B) द्वारा सिरों से लटका दिया गया है, जैसा कि निम्न चित्र में दिखाया गया है। A तथा B के तारों के अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षेत्रफल क्रमश: 1.0 mm और 2.0 mm हैं। छड़ के किस बिन्दु से एक द्रव्यमान m को लटका दिया जाए ताकि इस्पात तथा ऐलुमिनियम के तारों में
(a) समान प्रतिबल तथा
(b) समान विकृति उत्पन्न हो।

उत्तर:
तारों के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल
AA = 1.0 mm2 , AB = 2.0 mm2
तथा YA = 2 × 1011 Nm-2,
YB = 0.7 × 1011 Nm-2
माना द्रव्यमान को तार A वाले सिरे से, x दूरी पर बिन्दु P से लटकाया गया है तब इसकी दूसरे सिरे से दूरी (1.05 – x ) m होगी।
माना इस भार के कारण तारों में T तथा T तनाव उत्पन्न होते हैं। तब P के परितः बलों के आघूर्णी का बीजीय योग साम्यावस्था में शून्य होना चाहिए, अतः
TA . x = TB(1.05 – x) …………(1)
\(\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{T}_{\mathrm{B}}}=\frac{1 \cdot 05-x}{x}\)

(a) तारों में समान प्रतिबल है अतः
\(\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{A}}}=\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{B}}}\)
\(\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{T}_{\mathrm{B}}}=\frac{\mathrm{A}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{B}}}\) …………(2)
समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर
\(\frac{\mathrm{A}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{B}}}=\frac{1 \cdot 05-x}{x}\)
\(\frac{1 \cdot 05-x}{x}=\frac{1 \mathrm{~mm}^2}{2 \mathrm{~mm}^2}\)
x = 2 ( 1.05 – x)
या x = 2.10 – 2x
3x = 2.10
x = 0.70 = 70 cm
अतः द्रव्यमान को तार A वाले सिरे से 70 cm की दूरी पर लटकाना चाहिए।

(b) सूत्र Y = \(\frac {FL}{A∆L}\) से, \(\frac { ∆L }{ L }\) = \(\frac {F}{AY}\)
दोनों तारों में समान विकृति उत्पन्न होती है
अतः
\(\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{A}} \mathrm{Y}_{\mathrm{A}}}=\frac{\mathrm{T}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{B}} \mathrm{Y}_{\mathrm{B}}}\)
समी (1) में समी (3) से भाग देने पर,
AAYA x = (1.05 – x ) ABYB
या \(\frac{x}{1 \cdot 05-x}=\frac{\mathrm{A}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{A}_{\mathrm{A}}} \times \frac{\mathrm{Y}_{\mathrm{B}}}{\mathrm{Y}_{\mathrm{A}}}\)
या \(\frac{x}{1.05-x}=\frac{2 \mathrm{~mm}^2}{1 \mathrm{~mm}^2} \times \frac{0.7 \times 10^{11} \mathrm{Nm}^{-2}}{2.0 \times 10^{11} \mathrm{Nm}^{-2}}\)
या \(\frac{x}{1 \cdot 05-x}=\frac{7}{10}\)
या 10x = 1.05 × 7 – 7x
या 17x = 7.35
⇒ x = \(\frac {7.35}{17}\) = 0.43m = 43 cm
अतः द्रव्यमान को तार A वाले सिरे से 43 cm की दूरी पर लटकाना चाहिए।

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प्रश्न 19.
मृदु इस्पात के एक तार, जिसकी लम्बाई 1.0 m तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल 0.50 × 102 cm2 है, को दो खम्बों के बीच क्षैतिज दिशा में प्रत्यास्थ सीमा के अन्दर ही तनित किया जाता है। तार के मध्य बिन्दु से 100g का एक द्रव्यमान लटका दिया जाता है। मध्य- बिन्दु पर अवनमन की गणना कीजिए ।
उत्तर:

दिया है
L = 1m
A = 0.5 × 102 cm2
A = \(0.50 \times 10^{-2} \mathrm{~cm}^2=5 \times 10^{-7} \mathrm{~m}^2\)
m = 100gm = 0.1 kg
Y = 2 × 1011 Nm-2
सन्तुलन की स्थिति में तार के दोनों भागों में तनाव समान होगा, जो कि T है तब,
2T cos θ = mg
(C तार का मध्य- बिन्दु है जो भार लटकाने पर P तक विस्थापित हो जाता है।)
तब
l =AC = BC = \(\frac {1}{2}\) = 0.5 m
माना अवनमन PC है, जो कि अत्यन्त कम है
AP = \(\sqrt{\mathrm{AC}^2+\mathrm{PC}^2}=\sqrt{l^2+x^2}\)
भाग AC की लम्बाई में वृद्धि

= 0.5 × 2.13 × 10-6 m
∴ x = 0.01 m

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प्रश्न 20.
धातु के दो पहियों के सिरों को चार रिवेट से आपस में जोड़ दिया गया है। प्रत्येक रिवेट का व्यास 6 mm है। यदि रिवेट पर अपरूपण प्रतिबल 6.9 x 107 Pa से अधिक नहीं बढ़ना हो तो रिवेट की हुई पट्टी द्वारा आरोपित तनाव का अधिकतम मान कितना होगा? मान लीजिए कि प्रत्येक रिवेट एक चौथाई भार वहन करता है।
उत्तर:
प्रत्येक रिवेट पर अधिकतम प्रतिबल
Smax = 6.9 × 107 Pa
रिवेट का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल
A = πr2
= 3.14 × (3 × 10-3 m)2
= 28.26 × 10-6 m2
. प्रत्येक रिवेट पर अधिकतम तनाव बल
= Smax × अनुप्रस्थ क्षेत्रफल
= 6-9 × 107 × 28.26 × 10-6
= 1.95 × 103 N
तथा रिवेट की गई पट्टी द्वारा आरोपित अधिकतम तनाव
= 4 × 1.95 × 103
= 7.8 × 103 N

प्रश्न 21.
प्रशांत महासागर में स्थित मैरिना खाई एक स्थान पर पानी की सतह से 11 km नीचे चली जाती है और उस खाई में नीचे तक 0.32 m3 आयतन का इस्पात का एक गोला गिराया जाता है तो गोले के आयतन में परिवर्तन की गणना करें। खाई के तल पर जल का दाब 1.1 x 108 Pa है और इस्पात का आयतन गुणांक 160 GPaहै
उत्तर:
दाब में परिवर्तन ∆P तली पर जल का दाब
= 1.1 × 108 Pa
गोले का आयतन V = 0.32m3,
इस्पात के लिए B = 160 GPa
= 160 × 109 Pa
परिभाषा से, \(\mathrm{B}=-\frac{\Delta \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{V} / \mathrm{V}}\)
अतः आयतन में कमी
\(\Delta V=\frac{\Delta P V}{B}\)
= \(\frac{1.1 \times 10^8 \mathrm{~Pa} \times 0.32 \mathrm{~m}^3}{160 \times 10^9 \mathrm{~Pa}}\)
= 2.2 × 10-4 m3

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HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 8.1.
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) आप किसी आवेश का वैद्युत बलों से परिरक्षण उस आवेश को किसी खोखले चालक के भीतर रखकर कर सकते हैं। क्या आप किसी पिण्ड का परिरक्षण निकट में रखे पदार्थ के गुरुत्वीय प्रभाव से, उसे खोखले गोले में रखकर अथवा किसी अन्य साधनों के द्वारा कर सकते हैं।
(b) पृथ्वी के परित: परिक्रमण करने वाले छोटे अन्तरिक्षयान में बैठा कोई अन्तरिक्ष यात्री गुरुत्व बल का संसूचन नहीं कर सकता। यदि पृथ्वी के परितः परिक्रमण करने वाला अन्तरिक्ष स्टेशन आकार में बड़ा है, तब क्या वह गुरुत्व बल के संसूचन की आशा कर सकता है।
(c) यदि आप पृथ्वी पर सूर्य के कारण गुरुत्वीय बल की तुलना पृथ्वी पर चन्द्रमा के कारण गुरुत्व बल से करें। तो आप यह पायेंगे कि
सूर्य का खिंचाव चन्द्रमा के खिंचाव की तुलना में अधिक है (इसकी जाँच आप स्वयं आगामी अभ्यासों में दिये गये आँकड़ों की सहायता से कर सकते हैं।) तथापि चन्द्रमा के खिंचाव का ज्वारीय प्रभाव सूर्य के ज्वारीय प्रभाव से अधिक है। क्यों?
उत्तर:
(a) नहीं, वस्तु का गुरुत्वीय प्रभाव से परिरक्षण नहीं किया जा सकता क्योंकि गुरुत्वीय बल पर मध्यवर्ती माध्यम का कोई प्रभाव नहीं होता है।
(b) हाँ, यदि अन्तरिक्षयान पर्याप्त रूप से बड़ा है तो यात्री उस स्टेशन के कारण गुरुत्व बल का अनुभव करेगा।
(c) किसी ग्रह के कारण ज्वारीय प्रभाव दूरी के घन के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अतः सूर्य की पृथ्वी से दूरी की तुलना में, चन्द्रमा की पृथ्वी से दूरी कम है। अतः चन्द्रमा के कारण ज्वारीय प्रभाव अधिक होता है।

HBSE 11th Class Physics Solutions Chapter 8 गुरुत्वाकर्षण

प्रश्न 8.2.
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) बढ़ती तुंगता के साथ गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(b) बढ़ती गहराई के साथ (पृथ्वी को एकसमान घनत्व का गोला मानकर) गुरुत्वीय त्वरण बढ़ता/घटता है।
(c) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी के द्रव्यमान/पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
(d) पृथ्वी के केन्द्र r2 से r1 तथा स्थितिज ऊर्जा अन्तर के लिए GMm(\(1 / r_2-1 / r_1\)) सूत्र mg(r2 – r2) से अधिक/कम यथार्थ है।
दूरियों के दो बिन्दुओं के बीच GMm (r2 – r1) सूत्र
उत्तर:
(a) घटता है,
(b) घटता है।
(c) g का मान पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता, जबकि पृथ्वी के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
(d) सूत्र \(G M m\left[\frac{1}{r_2}-\frac{1}{r_1}\right]\) अधिक यथार्थ है।

प्रश्न 8.3.
मान लीजिए एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के परितः पृथ्वी की तुलना में दो गुनी चाल से गति करता है, तब पृथ्वी की कक्षा की तुलना में इसका कक्षीय आमाप क्या है?
उत्तर:
माना पृथ्वी का परिक्रमण काल Te
∴ ग्रह का परिक्रमण काल Tp
[∵ ग्रह की चाल पृथ्वी से दो गुनी है।]
∵ केप्लर के नियम से,
T2 α R3
\(\frac{R_p^3}{R_e^3}=\frac{T_p^2}{T_e^2}\)
या
\(R_p=R_e\left[\frac{T_p}{T_e}\right]^{2 / 3}\)
= \(R_e\left[\frac{T_e / 2}{T_e}\right]^{2 / 3}\)
या
\(R_p=\left[\frac{1}{2}\right]^{2 / 3}\)
Re = 0.63Re
अतः ग्रह की आमाप पृथ्वी से 0.63 गुना छोटी है।

प्रश्न 8.4.
बृहस्पति के एक उपग्रह आयो (I0) की कक्षीय अवधि 1.769 दिन तथा कक्षा की त्रिज्या 4.22 x 106 m है। यह दर्शाइए कि बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग \(\frac{1}{1000}\) गुना है।
उत्तर:
∵ \(T^2=\frac{4 \pi^2}{G M} \cdot R^3\)
पृथ्वी का सूर्य के परितः परिक्रमण काल T2 = 365 दिन
∴ \(T_e^2=\frac{4 \pi^2 R_1^3}{G M_s}\) ………(1)
यहाँ पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या R1 = 1AU
त्रिज्या R = 1.5 x 1011 m
उपग्रह (I0) के लिए
\(T_{I_o}^2=\frac{4 \pi^2}{G m_i} R_2^3\)
R2 = उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या
= 4.22 × 108 m
∴ समीकरण (1) व (2) से,
\(\frac{T_e^2}{T_{I_o}^2}=\left(\frac{T_1}{R_2}\right)^3 \times \frac{M_i}{M_s}\)
\(\left(\frac{365}{1769}\right)=\left(\frac{15 \times 10^{11}}{4.22 \times 10^8}\right) \times \frac{M_j}{M_e}\)
∴ \(M_j=\left(\frac{1}{1000}\right) M_e\)
अतः बृहस्पति का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का लगभग \(\frac{1}{1000}\) गुना है।

प्रश्न 8. 5.
मान लीजिए कि हमारी आकाश गंगा में एक सौर द्रव्यमान के 2.5 x 1011 तारे है। मन्दाकिनीय केन्द्र से 50000/y दूरी पर स्थित कोई तारा अपनी एक परिक्रमा पूरी करने में कितना समय लेगा? आकाश गंगा का व्यास 105ly लीजिए।
उत्तर:
∵ \( T^2=\frac{4 \pi^2}{G M} R^3\)
∴ R = 50,0001y
T = \(2 \pi \sqrt{\frac{R^2}{G M}}\)
∵ 11y = 9.46 x 1011 m ( प्रकाश वर्ष )
R = 50,000 x 9.46 x 1011m
= 4.75 x 1020m
∵ 1 सौर द्रव्यमान = 2 x 1020 kg
∴ M = 25 x 1011 × 2 × 1030
= 5 x 1041 kg
∴ T = 2 x 3.14, \(\sqrt[4]{\frac{\left(4.75 \times 10^{20}\right)^3}{6.67 \times 10^{-11} \times 5 \times 10^{41}}}\)
= 1.12 × 1016 s

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प्रश्न 8.6
सही विकल्प का चयन कीजिए:
(a) यदि स्थितिज ऊर्जा का शून्य अनन्त पर है तो कक्षा में परिक्रमा करते किसी उपग्रह की कुल ऊर्जा इसकी गतिज/स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक है।
(b) कक्षा में परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा समान ऊँचाई (जितनी उपग्रह की है) के किसी स्थिर पिण्ड को पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा से अधिक / कम होती है।
उत्तर:
(a) गतिज ऊर्जा [ ∵ कुल ऊर्जा = \(\frac{1}{2} \frac{G M m}{r}\)]
गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2} \frac{G M m}{r}\)

(b) कम [∵ कक्षा में परिक्रमा करने वाले उपग्रह को मुक्त करने के लिए आवश्यक ऊर्जा = \(\frac{1}{2} \frac{G M m}{r}\)
जबकि पृथ्वी के प्रभाव से बाहर प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक = \(\frac{G M m}{r}\)

प्रश्न 8.7.
क्या किसी पिण्ड की पृथ्वी से पलायन चाल
(a) पिण्ड के द्रव्यमान
(b) प्रक्षेपण बिन्दु की अवस्थिति
(c) प्रक्षेपण की दिशा
(d) पिण्ड के प्रमोचन की अवस्थिति की ऊँचाई पर निर्भर करती ना है।
उत्तर:
(a) नहीं, (b) नहीं, (c) नहीं, (d) हाँ, ऊँचाई बढ़ाने से. पलायन चाल घटती है।

प्रश्न 8.8.
कोई धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा अत्यधिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में कर रहा है। क्या अपनी कक्षा में धूमकेतु की शुरू से अन्त तक (a) रैखिक चाल, (b) कोणीय चाल, (2) कोणीय संवेग, (d) गतिज ऊर्जा, (e) स्थितिज ऊर्जा (1) कुल ऊर्जा, नियत रहती है? सूर्य के अति निकट आने पर धूमकेतु के द्रव्यमान में ह्रास को नगण्य मानिए।
उत्तर:
(a) नहीं, (b) नहीं, (c) हाँ, कोणीय संवेग संरक्षित रहता है। (d) नहीं, (e) नहीं, (f) हाँ, ऊर्जा नियत रहती है।

प्रश्न 8.9.
निम्नलिखित में से कौन-से लक्षण अन्तरिक्ष में अन्तरिक्ष यात्री के लिए दुखदायी हो सकते हैं?
(a) पैरों में सूजन, (b) चेहरे पर सूजन, (c) सिर दर्द, (d) दिक्विन्यास समस्या।
उत्तर:
(a) पैरो में सूजन गुरुत्कार्षण बल के कारण उत्पन्न होती है। अन्तरिक्ष में भारहीनता के कारण पैरों में सूजन की समस्या नहीं होती है।
(b), (c), (d) ये सभी समस्याएँ सम्भव हैं क्योंकि भारहीनता के कारण मस्तिष्क में अधिक खून की आपूर्ति होती है, तनाव से सिरदर्द हो सकता है। भारहीनता के कारण ही ऊर्ध्वाधर दिशा का ज्ञान नहीं होता है, अतः दिविन्यास की समस्या उत्पन्न होती है।

प्रश्न 8.10.
एकसमान द्रव्यमान घनत्व की अर्द्ध गोलीय खोलों द्वारा परिभाषित ढोल के पृष्ठ के केन्द्र पर गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा चित्रानुसार (i) a, (ii) b, (iii) c (iv) o, में किस तीर द्वारा दर्शाई जायेगी।

उत्तर:
गुरुत्वीय तीव्रता की दिशा g की दिशा में ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर होगी। अतः (iii) C

प्रश्न 8.11.
उपर्युक्त समस्या में किसी यादृच्छिक बिन्दु पर गुरुत्वीय तीव्रता किस तीर (i) d, (ii) e, (iii) f (iv) g द्वारा व्यक्त की जायेगी।
उत्तर:
(ii) e दिशा में।

प्रश्न 8.12.
पृथ्वी से किसी रॉकेट को सूर्य की ओर दागा गया है। पृथ्वी के केन्द्र से किस दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है? सूर्य का द्रव्यमान = 2 × 1030 किग्रा, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 x 1024 किग्रा । अन्य ग्रहों आदि के प्रभावों की उपेक्षा कीजिए। (कक्षीय त्रिज्या = 1.5 × 1011 मी)।
उत्तर:
माना, रॉकेट का द्रव्यमान M है तथा पृथ्वी के केन्द्र से सूर्य की ओर x दूरी पर रॉकेट पर गुरुत्वाकर्षण बल शून्य है। इस क्षण रॉकेट. की सूर्य से दूरी (x) मी रॉकेट = (r – x) भी

जहाँ r = सूर्य तथा पृथ्वी के बीच की दूरी अर्थात् पृथ्वी की कक्षीय त्रिज्या = 15 x 1011 मी यह तब भी सम्भव है जबकि
पृथ्वी द्वारा रकिट पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल = सूर्य द्वारा किट
पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल
अर्थात् \(\frac{G M_e m}{x^2}=\frac{G M_s m}{(r-x)^2}\)
जहाँ m = रॉकेट का द्रव्यमान Mc = पृथ्वी का द्रव्यमान = 6 x 1024 किग्रा
तथा
Ms = सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 किग्रा
अत:
\(\left(\frac{r-x}{x}\right)^2=\frac{M_s}{M_e}=\frac{2 \times 10^{24}}{6 \times 10^{24}}=\frac{1}{3} \times 10^6\)
∴ \(\left(\frac{r-x}{x}\right)=\sqrt{\frac{1}{3} \times 10^6}=\frac{10^3}{\sqrt{3}}=\frac{10^3}{1732}\)
अथवा
r = x = 57737x
या 57837x = r
∴ x = \(\left(\frac{r}{578.37}\right)=\frac{1.5 \times 10^{11}}{578.37}\) मी
= 2593 × 108 मी = 26 x 108 मी

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प्रश्न 8.13.
आप सूर्य को कैसे तोलेंगे, अर्थात् उसके द्रव्यमान का आकलन कैसे करेंगे? सूर्य के परितः पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या 1.5 x 108 किमी है।
उत्तर:
पृथ्वी के परित: उपग्रह के परिक्रमण काल सूत्र \(T=2 \pi \sqrt{\frac{r^3}{G M_e}}\) के अनुरूप सूर्य के परितः पृथ्वी का परिक्रमण काल
\(T=2 \pi \sqrt{\frac{r^3}{G M_e}}\)
जहाँ Me = सूर्य का द्रव्यमान
∴ \(T^2=\frac{4 \pi^2 r^3}{G M_s}\)
अतः सूर्य का द्रव्यमान Ms = \(\frac{4 \pi^2 r^3}{T^2 G}\) ……(1)
यहाँ, पृथ्वी की कक्षा की त्रिज्या r = 15 x 108 किमी = 15 x 1011
पृथ्वी का सूर्य के परितः परिक्रमण काल T = 1 वर्ष = 3.15 x 107
सेकण्ड
∴ \(M_s=\left[\frac{4 \times(3.14)^2\left(1.5 \times 10^{11}\right)^3}{\left(3.15 \times 10^7\right)^2\left(6.67 \times 10^{-11}\right)}\right]\)
= 20 x 1030 किग्रा

प्रश्न 8.14.
एक शनि – वर्ष एक पृथ्वी वर्ष का 29.5 गुना है। यदि पृथ्वी सूर्य से 1.5 x 108 किग्रा दूरी पर है, तो शनि सूर्य से कितनी दूरी पर है?
उत्तर:
पृथ्वी की सूर्य से दूरी RSE = 1.5 x 108
किमी माना पृथ्वी का परिक्रमण काल = TE
तब शनि का परिक्रमण काल Ts = 29.5TE
शनि की सूर्य से दूरी Rss = ?
परिक्रमण कालों के नियम से,

= 1.5 ×108 x (29.5)2/3 किमी
= 1.5 x 108 x 9.55 किमी
= 1.43 x 109 किमी
अतः शनि की सूर्य से दूरी 1.43 x 109 किमी है।

प्रश्न 8.15.
पृथ्वी के पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 63 N है। पृथ्वी की त्रिज्या की आधी ऊँचाई पर पृथ्वी के कारण इस वस्तु पर गुरुत्वीय बल कितना है?
उत्तर:
यदि पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण g हो, तो पृथ्वी तल से ऊँचाई पर गुरुत्वीय त्वरण
\(g^I=g\left(1+\frac{h}{R_e}\right)^2\)
यदि वस्तु का द्रव्यमान हो तो दोनों पक्षों में m से गुणा करने पर,
\(m g^I=\frac{m g}{\left(1+\frac{h}{R_e}\right)^2}\)
(जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या )
यहाँ mg = पृथ्वी के पृष्ठ पर वस्तु का भार = 63N
mg’ पृथ्वी तल से ऊँचाई पर वस्तु का भार अर्थात् पृथ्वी के कारण वस्तु पर गुरुत्वीय बल Fg तथा \(h=\frac{R_e}{2}\)
∴ \(F_g=\frac{63 \mathrm{~N}}{\left(1+\frac{R_e / 2}{R_e}\right)^2}\)
\(=\frac{63 N}{\left(\frac{9}{4}\right)}=\left(\frac{63 \times 4}{9}\right) N\)
N = 28 N

प्रश्न 8.16.
यह मानते हुए कि पृथ्वी एकसमान घनत्व का एक गोला है तथा इसके पृष्ठ पर किसी वस्तु का भार 250 N है, यह ज्ञात कीजिये कि पृथ्वी के केन्द्र की ओर आधी दूरी पर इस वस्तु का भार क्या होगा?
उत्तर:
पृथ्वी तल से h गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण
\(g^I=g\left(1-\frac{h}{R_e}\right)\) (जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या)
अथवा
\(m g^{\prime}=m g\left(1+\frac{h}{R_e}\right)\)
यहाँ पृथ्वी के पृष्ठ पर वस्तु का भार mg = 250N
h = \(\frac{R_e}{2}\)
(जहाँ Re = पृथ्वी की त्रिज्या )
mg’ = इस गहराई पर वस्तु का भार w
∴ \(W^I=250 \mathrm{~N}\left(1-\frac{\frac{R_e}{2}}{R_e}\right)=\left(250 \times \frac{1}{2}\right) \mathrm{N}\)
N = 125 N

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प्रश्न 8.17.
पृथ्वी के पृष्ठ से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर कोई रॉकेट 5 kms-1 की चाल से दागा जाता है। पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट पृथ्वी से कितनी दूरी तक जाएगा?
पृथ्वी का द्रव्यमान = 60 × 1024 किग्रा,
पृथ्वी की माध्य त्रिज्या = 64 x 106 मी तथा G = 6.67 x 10-11 न्यूटन मी-2/ किग्रा-2
उत्तर:
माना रॉकेट का द्रव्यमान = m,
पृथ्वी से ऊर्ध्वाधरतः ऊपर की ओर रॉकेट का प्रक्षेप्य वेग = 5
किमी से-1 = 5 x 103 मी से-1
माना रॉकेट पृथ्वी पर वापस लौटने से पूर्व पृथ्वी से अधिकतम दूरी ऊँचाई तक जाता है। अतः इस ऊँचाई पर रॉकेट का वेग शून्य हो जाता है। ऊर्जा संरक्षण सिद्धान्त से पृथ्वी तल से महत्तम ऊंचाई पर पहुँचने पर
वृद्धि
रॉकेट की गतिज ऊर्जा में कमी उसकी गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा में

= 1.6 x 106 मी
= 1600 × 103 मी 1600 किमी
या
\(\frac{1}{2} v^2=h\left(g=\frac{1}{2} \frac{v^2}{R_4}\right)\)
या
\(\frac{1}{2} v^2=h\left[\frac{2 g R_4=\mu^3}{4 \mu_g}\right]\)
या
\(h=\frac{v^3 R_g}{2 g h_g=v^3}\)
∴\(h=\frac{\left(3 \times 10^4\right)^3 \times 6.4 \times 10^6}{\left(2 \times 9.8 \times 6.4 \times 10^8\right)=\left(5 \times 10^3\right)^2}\)
∴ h = 5km /s
= 5 x 103 m/s
H4 = 6.4 x 108 m
पृथ्वी से दूरी h = 1.6 x 106 m
∴ पृथ्वी के केन्द्र से दूरी
= R4 + h = 64 × 108 + 1.6 x 108
= 8.0 × 106 m

प्रश्न 8.18.
पृथ्वी के पृष्ठ पर प्रक्षेप की पलायन चाल 11.2 kmg-1 है। किसी वस्तु को इस चाल पर तीन गुनी चाल से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी से अत्यधिक दूर जाने पर इस वस्तु की चाल क्या होगी? सूर्य तथा अन्य ग्रहों की उपस्थिति की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर:
उदाहरण 3 के अनुसार,
vf = Ve\(\sqrt{n^2-1}\)
vf = 11.2√9-1
= 11.2 × 2√2
= 112 × 2 × 1.41
= 31.6km/s
{n = 3 ve = 11.2km/s)

प्रश्न 8.19.
कोई उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से 400km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इस उपग्रह को पृथ्वी के गुरुत्वीय प्रभाव से बाहर निकालने में कितनी ऊर्जा खर्च होगी? उपग्रह का द्रव्यमान = 200 kg, पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 x 1044 kg पृथ्वी की त्रिज्या = 6.4 x 106 m, तथा G = 6.67 x 10-11 Nm82 kg-1
उत्तर:
हम जानतें हैं कि उपग्रह की कुल ऊर्जा
= \(-\frac{1}{2} \frac{G M_e^m}{\left(R_e+h\right)}\)
उपग्रह को मुक्त करने के लिए बन्धन ऊर्जा
= \(+\frac{1}{2} \frac{G M_e m}{\left(R_e+h\right)}\)
= \(\frac{1}{2} \times \frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6.0 \times 10^{24} \times 200}{\left(64 \times 10^6+0.4 \times 10^8\right)}\)
= 5.89 × 109 J

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प्रश्न 8.20.
दो तारें जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान (2 x 1030 kg) के बराबर है, एक-दूसरे की ओर सम्मुख टक्कर के लिए आ रहे हैं। जब वे 10 km दूरी पर है तब इनकी चाल उपेक्षणीय है। ये तारे किस चाल से टकराएँगे? प्रत्येक तारे की त्रिज्या 104 km है। यह मानिए कि टकराने से पूर्व तक तारों में कोई विरूपण नहीं होता। G के ज्ञात मान का उपयोग कीजिए।
उत्तर:
तारों का द्रव्यमान m1 = m2
सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 kg
दूरी R = 109 km = 1012 m
प्रारम्भ में निकाय की कुल ऊर्जा E1 = \(\frac{G m_1 m_2}{R_1}\)
माना टकराते समय उनकी चाल v है।
टकराते समय उनके बीच की दूरी = 2 x त्रिज्या
R2 = 2 x 104 km
= 2 x 107 m
अन्तिम ऊर्जा
= \(\frac{G m_1 m_2}{R_2}+\frac{1}{2} m_1 v^2+\frac{1}{2} m_1 v^2+\frac{1}{2} m_2 v^2\)
∵ m1 = m2
∴ E2 = \(\frac{G m_1 m_2}{R_2}+m_1 v^2\)
∴ ऊर्जा संरक्षण के नियम से,
E1 = E2

= 6.67 x 1012
टकराते समय प्रत्येक तारे का वेग
v = \(\sqrt{667 \times 10^{12}}\)
= 2.58 x 106m/s

प्रश्न 8.21.
दो भारी गोले जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 100 kg तथा त्रिज्या 0.10m है। किसी क्षैतिज मेज पर एक-दूसरे से 1.0m दूरी पर स्थित हैं। दोनों गोलों के केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा को मध्य बिन्दु पर गुरुत्वीय बल तथा विभव क्या हैं? क्या इस बिन्दु पर रखा कोई पिण्ड सन्तुलन में होगा? यदि हाँ, तो यह सन्तुलन स्थायी होगा अथवा अस्थायी?
उत्तर:
माना केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा AB X- अक्ष के अनुदिश है तथा इसका मध्य- बिन्दु C मूलबिन्दु के साथ सम्पाती है।
माना बिन्दु C पर एक बिन्दु द्रव्यमान m रखा हैं, तब इस द्रव्यमान
पर गोले B के कारण बल

= -2.7 x 10-8 J/kg
बिन्दु C पर परिणामी बल शून्य है अतः पिण्ड सन्तुलन में रहेगा।
यदि यह पिण्ड किसी दिशा में विस्थापित हो तो पिण्ड वापस उस बिन्दु पर नहीं लौटेगा। अतः यह अस्थायी सन्तुलन अवस्था है।

अतिरिक्त अभ्यास:

प्रश्न 8.22.
जैसा कि आपने इस अध्याय में सीखा है कि कोई तुल्यकाली उपग्रह पृथ्वी के पृष्ठ से लगभग 36000km ऊँचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इस उपग्रह के निर्धारित स्थल पर पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण विभव क्या है? (अनन्त पर स्थितिज ऊर्जा शून्य लीजिए) पृथ्वी का द्रव्यमान = 6.0 x 1024 kg, पृथ्वी की त्रिज्या
उत्तर:
दिया है।
M = 6.0 x 1024kg
Re = 6400km = 64 x 106 m
पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर गुरुत्वीय विभव
\(V=-\frac{G M}{\left(R_e+h\right)}=-\frac{6.67 \times 10^{-11} \times 6 \times 10^{24}}{\left(64 \times 10^6+36 \times 10^6\right)}\)
= -94 × 106 J/kg.

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प्रश्न 8.23.
सूर्य के द्रव्यमान से 2.5 गुने द्रव्यमान का कोई तारा 12 km आमाप से निपात होकर 1.2 परिक्रमण प्रति सेकण्ड से घूर्णन कर रहा है। (इसी प्रकार के सहत तारे को न्यूट्रॉन तारा कहते हैं। कुछ प्रेक्षित तारकीय पिण्ड, जिन्हें पल्सार कहते हैं, इसी श्रेणी में आते हैं।) इसके विषुवत् वृत्त पर रखा कोई पिण्ड, गुरुत्व बल के कारण, क्या इसके पृष्ठ से चिपका रहेगा? (सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030kg)
उत्तर:
ल-तारे का द्रव्यमान M
2.5 x सूर्य का द्रव्यमान
= 25 × 2 ×1030 kg.
तारे की त्रिज्या R = 12km = 12 x 103 m
घूर्णन आवृत्ति n = 1.2 rev/sec
कोणीय वेग ω = 2πn
= 2 x 2.14 x 12
= 7.54 rad/s
तारे के विषुवत् वृत्त पर गुरुत्वीय त्वरण g = \(\frac{G m}{R^2}\)
∴ g = \(\frac{667 \times 10^{-11} \times 2.5 \times 2 \times 10^{30}}{\left(12 \times 10^3\right)^2}\)
= 23 x 1012 ms-2
विषुवत् वृत्त पर चिपके रहने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र
त्वरण a = Rω2 = 12 x 103 x ( 7.54 )2 682 x 105 ms2
∵ g >> a अतः विषुवत् पर रखा पिण्ड, तारे के पृष्ठ से चिपका रहेगा।

प्रश्न 8.24.
कोई अन्तरिक्ष यान मंगल पर ठहरा हुआ है। इस अन्तरिक्षयान पर कितनी ऊर्जा खर्च की जाये कि इसे सौरमण्डल से बाहर धकेला जा सके। अन्तरिक्षयान का द्रव्यमान 1000 kg, सूर्य का द्रव्यमान = 2 x 1030 kg
मंगल का द्रव्यमान = 6.4 x 1023 kg,
मंगल की त्रिज्या = 3395km
मंगल की कक्षा की त्रिज्या = 2.28 x 108 km
तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg-2
उत्तर:
यान का द्रव्यमान m = 1000kg = 103 kg
सूर्य का द्रव्यमान Mx = 2 x 1030 kg
मंगल की कक्षा की त्रिज्या Rm = 2.28 x 1011 m
Mm = 6.4 x 1023 kg
मंगल की त्रिज्या R = 3395km
= 3.395 × 106m
सूर्य के कारण यान की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा
= – \(\frac{G M_5 m}{R m}\)
मंगल के कारण यान की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा
= \(\frac{-G M_m m}{R}\)
यान की कुल ऊर्जा
= \(-G m\left(\frac{M_s}{R_m}+\frac{M_m}{R}\right)\)
∴ मुक्त करने के लिए आवश्यक ऊर्जा
= \(G m\left(\frac{M_s}{R_m}+\frac{M_m}{R}\right)\)
= 667 × 1011 × 103
= 667 × 108 × 1017 (87.72 + 188)
= 5.97 × 1011 J

प्रश्न 8.25.
किसी रॉकेट को मंगल के पृष्ठ से 2 kms-1 की चाल से ऊर्ध्वाधर ऊपर दागा जाता है। यदि मंगल के वातावरणीय प्रतिरोध के कारण इसकी 20% आरम्भिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। तो मंगल के पृष्ठ पर वापस लौटने से पूर्व यह रॉकेट मंगल से कितनी दूरी तक जाएगा? मंगल का द्रव्यमान = 6.4 x 1023 kg, मंगल की त्रिज्या = 3395 m तथा G = 6.67 × 10-11 Nm2 kg
उत्तर:
प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2}\)mv2
स्थितिज ऊर्जा = \(-\frac{G M m}{R}\)
∵ 20% आरंभिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
शेष गतिज ऊर्जा = \(\frac{1}{2} m v^2 \times \frac{80}{100}\)
= 0.4mv2
∴ कुल प्रारम्भिक बची हुई ऊर्जा
E1 = 0.4 mv2 – \(\frac{G M m}{R}\)
h ऊँचाई पर स्थितिज ऊर्जा = \(-\frac{G M m}{R+h}\)
∴ h ऊँचाई पर स्थितिज ऊर्जा E2 = \(-\frac{G M m}{R+h}\)
∵ ऊर्जा संरक्षण के नियम से

= 495 × 103m = 495 km

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