Class 12

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए –
(i) केंद्रीय प्रवृत्ति का जो माप चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है वह है ?
(क) माध्य
(ख) माध्य तथा बहुलक
(ग) बहुलक
(घ) माध्यिका
उत्तर:
(क) माध्य।

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(ii) केंद्रीय प्रवृत्ति का वह माप जो किसी वितरण के उभरे भाग से हमेशा संपाती होगा वह है –
(क) माध्यिका
(ग) माध्य
(ख) माध्य तथा बहुलक
(घ) बहुलक।
उत्तर:’
(ख) माध्य तथा बहुलक।

(iii) ऋणात्मक सहसंबंध वाले प्रकीर्ण अंकन में अंकित मानी के वितरण की दिशा होगी –
(क) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ
(ख) नीचे बाएँ से ऊपर दाएँ
(ग) बाएँ से दाएँ
(घ) ऊपर दाएँ से नीचे बाएँ।
उत्तर:
(क) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) माध्य को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
माध्य इसे औसत मान भी कहा जाता है। यह एक औसत कई मात्राओं के योग का निरूपक होता है। यह एक ऐसी संख्या होती है जो न्यूनाधिक रूप में संख्याओं की श्रृंखला को निरूपित या प्रदर्शित करती हैं। अतः औसत को कुल जनसंख्या के एक मध्यवर्ती मान या प्रवृत्ति के रूप में लिया जा सकता है इसका मूल्य अधिकतम तथा न्यूनतम मूल्य के बीच होता है।

(ii) बहुलक के उपयोग के क्या लाभ हैं? उत्तर – बहुलक के उपयोग के लाभ इस प्रकार हैं –
1. बहुलक की गणना सरलता से निरीक्षण विधि द्वारा की जा सकती है।
2. बहुलक पर श्रृंखला के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता।
3. किसी श्रृंखला में सबसे अधिक बार आने के कारण, यह उसका सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
4. अंकों के प्रभाव की हालत में भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता
5. बहुलक की व्यावहारिक उपयोगिता अधिक है किसी वस्तु की अधिक मात्रा के कारण उसका उत्पादन अधिक होता है।
6. बहुलक को रेखाचित्र द्वारा भी प्रदर्शित करके इसे सरल रूप दिया जा सकता है।

(iii) अपकिरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
अपकिरण केंद्रीय प्रवृत्तियों के अंकों के बिखराव के मापन से संबंधित है अपरिकण किसी हदों के मापन के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है जो किसी व्यक्तिगत विषय तथा संख्यात्मक आंकड़ों की प्रवृत्ति के बदलाव अथवा औसत मूल्य के फैलाव से संबंधित है। इसलिए हम कह सकते हैं कि अपकिरण एक डिग्री है। जो फैलाव या प्रकीर्ण अथवा केंद्रीय मानक मापन के फेरबदल से संबंधित है।

(iv) सहसंबंध किसे कहते हैं?
उत्तर:
सहसंबंध (Correlation ) –
दो भिन्न प्रकार के चरों के एक बंटन को दविचरीय वितरण कहते हैं, ये दोनों चर उस अवस्था में आपस में सह-संबंधित कहलाते हैं जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर में संगती परिवर्तन उत्पन्न होता है। प्रथम चर जिसके कारण दूसरे चर में परिवर्तन होता है स्वतंत्र (x) कहलाता है जबकि दूसरा चर आश्रित चर (v) के रूप में जाना जाता है। दो चरों के मध्य साहचर्य की मात्रा तथा दिशा का आंकलन सरल अथवा द्विचर सह संबंध कहलाता है सह संबंध की माप का सर्वाधिक प्रचलित स्वरूप पियर्सन का गुणन आघूर्ण सह संबंध गुणांक (r) है। का मूल्य +1 से 1 के बीच प्रसारित होता है।

(v) पूर्ण सहसंबंध किसे कहते हैं?
उत्तर:
पूर्ण सहसंबंध दो चरों के मध्य विशिष्ट साहचार्य को दर्शाने के लिए प्रयोग होता है यह दो मानों के बिखराव अथवा प्रकीर्णन दर्शाते हैं। इसे प्रकीर्ण आरेख अथवा प्रकीर्ण अंकन भी कहते हैं जब एक सरल रेखा प्रकीर्ण आरेख के निचले बाएँ से ऊपरी दाएँ भाग की ओर जाती है तो वह पूर्ण धनात्मक सहसंबंध कहलाता है। सहसंबंध को अधिकतम सीमाएँ 1 (एक) होती है। यह 1 से ज्यादा कभी भी नहीं हो सकती। सहसंबंध 1 को पूर्ण सहसंबंध कहते हैं।

(vi) सहसंबंध की अधिकतम सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सहसंबंध की अधिकतम सीमाएँ (एक) होती है। यह 1 से ज्यादा कभी भी नहीं हो सकती।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए –
(i) आरेखों की सहायता से सामान्य तथा विषम वितरणों में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की सापेक्षिक स्थितियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
केन्द्रीय प्रवृत्ति के तीनों मापों की तुलना सामान्य वितरण वक्र की सहायता से आसानी से की जा सकती है। यह इस प्रकार है –
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सामान्य वितरण की एक विशेषता होती है। इसमें माध्य, माध्यिका तथा बहुलक का मान समान होता है क्योंकि वितरण सामान्य सममित होता है। ज्यादातर इकाइयाँ वितरण के माध्य में अथवा माध्य के निकट होती है। ज्यादा उच्च तथा ज्यादा निम्न मूल्यों की बारंबारता अधिक नहीं होता तथा विरले ही होते हैं। अगर आंकड़े किसी प्रकार विषम और विकृत हो तो माध्य, माध्यिका और बहुलक संपाती नहीं होंगे और विषम आंकड़ों के प्रभाव पर विचार करने की जरूरत है।
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(ii) माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
माध्य, माध्यिका तथा बहुलक काफी उपयोगी हैं इनकी विशेषता इस प्रकार है-

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माध्य –
1. सरलता – समांतर माध्य सभी केंद्रीय प्रवृत्तियों में से उत्तम है जिसे समझना सरल है।
2. प्रतिनिधि मूल्य- माध्य सभी मूल्यों का प्रतिनिधि मूल्य है।
3. निश्चित मूल्य – समांतर माध्य सदा एक ही रहता है जिसका निश्चित मूल्य होता है।
4. स्थिर मूल्य- माध्यम का स्थिर मूल्य होता है। किसी श्रेणी के निर्देशन में परिवर्तन से प्रभाव नहीं पड़ता। यह संतुलित मूल्य है।

माध्यिका –
1. माध्यिका ज्ञात करना एक सरल विधि है।
2. माध्यिका चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती है।
3. अपूर्ण आँकड़ों के बावजूद इसकी गणना की जा सकती है।4. खुले सिरे वाली श्रृंखला में माध्यिका का मूल्य सुगमता से प्राप्त हो जाता है।
5. माध्यिका का मूल्य ग्राफ की सहायता से भी ज्ञात किया जा सकता है।
6. माध्यिका का मूल्य सदैव निश्चित होता है।

बहुलक –
1. बहुलक की गणना सरलता से निरीक्षण विधि द्वारा की जा सकती है।
2. बहुलक पर श्रृंखला के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता।
3. किसी शृंखला में सबसे अधिक बार आने के कारण, यह उसका सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
4. अंकों के अभाव की हालत में भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।
5. बहुलक की व्यावहारिक उपयोगिता अधिक है। किसी वस्तु की अधिक मात्रा के कारण उसका उत्पादन अधिक होता है।

(iii) एक काल्पनिक उदाहरण की सहायता से मानक विचलन के गणना की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
विचलन के माप की दूसरी विधि, जो औसत माध्य का प्रयोग कर प्राप्त की जाती है मानक विचलन कहलाती है। इसे वर्ग माध्य-मूल विचलन भी कहते हैं। मानक विचलन किसी श्रेणी के | विभिन्न मूल्यों के समांतर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है। इसे ग्रीक भाषा के अक्षर (σ) सिगमा से प्रकट किया जाता है।

(σ) सिगमा
मानक विचलन की गणना की प्रक्रिया। निम्नलिखित उदाहरण की सहायता से मानक विचलन की गणना की जाती है –
(सिगमा) σ = \(\sqrt{\frac{\sum(x-\bar{x})^2}{N}}\) यहाँ σ = मानक विचलक (S.D)
\(\sum(x-\bar{x})^2\) = Sum total of squares of Deviation
N = Numbers of items.
उपरोक्त विधि अधिक उबाऊ बन जाती है अगर x की कीमत दशमलव पाइंट में तथा प्रेक्षणों की संख्या बहुत बड़ी हो। इस हालात में हम निम्नलिखित shortcut method का प्रयोग कर सकते हैं-
\(\sqrt{\frac{\sum x^2}{N}-\left(\frac{\sum \bar{x}}{N}\right)^2}\)

उदाहरण:
निम्नलिखित तालिका हमें वर्षा के पिछले दस सालों के आंकड़े पेश करता है। मानक विचलक की गणना –
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(iv) प्रकीर्णक का कौन-सा माप सबसे अधिक अस्थिर है तथा क्यों ?
उत्तर:
यह देखा जाता है कि माध्य दो आंकड़ों के समूहों से प्राप्त किया जाता है। जैसे कि इन तालिकाओं में दिखाया गया है –
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इन तालिकाओं में माध्य एकसमान है जो 50 है। तालिका में उच्चतम व निम्नतम मान क्रमशः 55 तथा 45 हैं। तालिका में दिए गए वितरण में ये अधिकतम तथा न्यूनतम मान क्रमश: 98 तथा 00 हैं। यहां पर दोनों ही वितरणों का माध्य एकसमान है। तथा द्वितीय वितरण जो कि अधिक अस्थिर तथा विषम है कि अपेक्षा प्रथम वितरण स्थिर और समरूप हैं। इससे हमें वितरण या श्रेणी के संघटन की प्रकृति का ज्ञान होता है तथा इसकी सहायता से दिए हुए वितरण की तुलना स्थिरता अथवा समरूपता के आधार पर हो जाती है।

(v) सहसंबंध की गहनता पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जब सहसंबंध की दिशा ऋणात्मक तथा धनात्मक के विषय में संदर्भ आ जाता है तो स्वाभाविक तौर पर यह जानने के लिए जिज्ञासा जागृत होती है कि दोनों चरों में अनुरूपता तथा साहचर्य की गहनता की मात्रा कितनी है। इस साहचर्य की गहनता की मात्रा गणितीय दृष्टि से अधिकतम 1 (एक) तक होती हैं। इस मात्रा में सहसंबंध की दिशा का पहलू जोड़ने पर इसका अधिकतम विस्तार – 1 से शून्य की ओर होते हुए +1 तक होता है। इसका मान किसी भी स्थिति में एक से ज्यादा नहीं हो सकता।

(vi) कोटि सहसंबंध की गणना से विभिन्न चरण कौन-से हैं ?
उत्तर:
निम्नलिखित चरणों के द्वारा कोटि सहसंबंध की गणना की जा सकती है –
(1) आंकड़े के अनुकरण से संबंधित X-Y परिवर्ती या जो कि अभ्यास में दी गयी है अथवा उनकी पहले तथा दूसरे कॉलम में रखकर तालिका बना ली।
(2) दोनों परिवर्तीयों की अलग-अलग दर्जों में दो-दो । X – दर्जी की परिवर्ती को तीसरे चरण में रिकार्ड कर XR (Rank dx ) शीर्षक दिया जाए। इसी प्रकार रैंक Y- परिवर्ती (YR) को चौथे चरण में रखा जाए।
(3) अब दोनों XR अथवा YR को प्राप्त करने के बाद दोनों ही सैटों के रैंक का रिकार्ड करके पांचवें चरण में रखा जाए।
(4) इस प्रकार के हर मतभेद के चौकोर और अन्य कॉलमों को प्राप्त किया जाए और इनके मान को छठवें कॉलम में लिखा जाए।
(5) इसके बाद रैंक सहसंबंध की संगणना की जाए, निम्नलिखित समता का प्रयोग करके –
\(\mathrm{P}=1-\frac{6 \sum \mathrm{D}^2}{\mathrm{~N}\left(\mathrm{~N}^2-1\right)}\) यहाँ पर P = Rank Correlation
ED2 = Sura of the squares of the difference between two sets of Ranks
N = The number of pairs of X-Y.

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अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
केंद्रीय प्रवृत्तियों के माप से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
केंद्रीय प्रवृत्तियों के माप – ‘केंद्रीय प्रवृत्ति के माप’ सांख्यिकी विश्लेषण की एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है। कई बार संपूर्ण आँकड़ों के लिए एक प्रतिनिधि मान को प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। यह मान विभिन्न आँकड़ों के बीच तुलना करने में सहायक होते हैं। यह माप सभी आँकड़ों के मध्य या केंद्र में होता है, इसलिए इसे केंद्रीय प्रवृत्ति के माप कहते हैं। ऐसे सारांश मान जो विभिन्न बंटन – निरूपकों को दर्शाते हैं, उनको केंद्रीय प्रवृत्ति के मापक कहते हैं। (The summary values that are representative of the various distributions are known as measures of central tendency.) इन मापों में प्रमुख निम्नलिखित माप हैं –
(i) माध्य अथवा औसत (Average or Mean)
(2) माध्यिका (Median)
(3) बहुलक (Mode)

प्रश्न 2.
माध्य किसे कहते हैं ? इसके प्रकार बताओ।
उत्तर:
माध्य (Mean ):
इसे औसत मान भी कहा जाता है। माध्य या औसत कई मात्राओं के योग का निरूपक होता है। यह एक ऐसी संख्या होती है जो न्यूनाधिक रूप में संख्याओं की श्रृंखला को निरूपित या प्रदर्शित करती है। अतः औसत को कुल जनसंख्या के एक मध्यवर्ती मान या प्रवृत्ति के रूप में लिया जा सकता है। इसका मूल्य अधिकतम तथा न्यूनतम मूल्य के बीच होता है।

माध्य तीन प्रकार के होते हैं –
(1) अंकगणितीय माध्य
(2) ज्यामितीय माध्य
(3) हरात्मक (हारमोनिक) माध्य।

प्रश्न 3.
अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean) से क्या अभिप्राय है ? यह किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर;
अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean ):
केंद्रीय प्रवृत्ति के माप का सबसे सरल रूप माध्य है, सभी भिन्न-भिन्न मानों के योग की कुल संख्या से भाग देने पर माध्य ज्ञात होता है।
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उदाहरण – किसी गांव के पांच विभिन्न परिवारों की मासिक आय ₹100, ₹80, ₹120, ₹90 और ₹60 हैं तो इन परिवारों की माध्य आय =
(1) यह एक सरल विधि है।
(2) श्रेणी के सभी मदों को जोड़ कर ज्ञात करें।
(3) सभी मदों की गिनती ज्ञात करें।
\(\bar{X}=\frac{100+80+120+90+60}{5}=\frac{450}{5}=₹ 90\)
माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\sum x}{n}\)

1. अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए (For Ungrouped Data) –
किसी भी क्षेत्र में कृषक परिवारों की संख्या तथा X1, X2, X3,………… Xn क्रमश: पहले, दूसरे, तीसरे और वें किसान परिवार की आय को प्रकट करें तो माध्य
\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\mathrm{X}_1+\mathrm{X}_2+\mathrm{X}_3 \ldots \ldots \ldots \mathrm{X}_n}{n}\) = \(\frac{\Sigma X}{n}\)
(जबकि \(\overline{\mathrm{x}}\) = माध्य ∑X = प्रेक्षणों का योग n = संख्या)

2. वर्गीकृत आँकड़ों के लिए (For Grouped Data):
इस अवस्था में माध्य निकालने की दो विधियां हैं –
(1) प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
(2) लघु विधि (Short-cut Method)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों के आधार पर माध्य निकालो-
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उत्तर:
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method):
(1) यह एक सरल विधि है। इसमें मदों के साथ आवृत्ति (x) भी दी जाती है।
(2) प्रत्येक मद का मध्यमान (x) ज्ञात करो। इसे आवृत्ति (f) से गुणा करके f (x) ज्ञात करो।
(3) सभी मदों के f (x) का योग ज्ञात करो तथा इसे मदों की संख्या से भाग दें।
\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\sum f(x)}{n}\)
माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f x}{n}=\frac{390}{30}\) = 13 acres.

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2. लघु विधि (Short-cut Method):
(1) प्रत्येक मद (वर्ग) का माध्य मूल्य (x) ज्ञात करो।
(2) एक मद को कल्पित माध्य (अस्थायी माध्य) मान लो (A)
(3) प्रत्येक माध्य मूल्य (x) से कल्पित मूल्य (A) घटा कर विचलन (dx) ज्ञात करो ।
(4) प्रत्येक मद की आवृत्ति (f) को विचलन से गुणा करो तथा इनका योग ∑f (dx) ज्ञात करें।
\(\overline{\mathrm{X}}=\mathrm{A}+\frac{\Sigma f d \overline{\mathrm{X}}}{n}\)

अस्थायी माध्य A =12.5 acres
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\(\overline{\mathrm{X}}=\mathrm{A}+\frac{\Sigma f d x}{n}\) = 12.5 + \(\frac {15}{30}\) = 13acres

प्रश्न 5.
निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों का माध्य निकालो।
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उत्तर:
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method):
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\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f x}{n}=\frac{3000}{100}\) = 30 Marks

2. लघु विधि (Short-cut Method) –
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माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\mathrm{A}+\frac{\sum f d x}{n}\) = 25 + \(\frac {500}{100}\) = 30 marks.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित तालिका में किसी स्थान की वर्षा के आँकड़े दिए गए हैं। माध्य ज्ञात करो ।
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उत्तर:
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
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माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f \cdot x}{n}=\frac{4595}{90}\) = 51.06m.m

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2. अप्रत्यक्ष विधि (Indirect method):
अस्थायी (कल्पित) माध्य = A = 50
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माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f \cdot x}{n}=\frac{4595}{90}\)
= 50 + \(\frac {95}{90}\)
= 50 + 1.06 = 51.06 m. m

प्रश्न 7.
50 छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों का प्रतिशत निम्नलिखित है। माध्य ज्ञात करो।
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उत्तर:
अंकगणितीय माध्यम की गणना निम्न चरणों में की जाएगी –
चरण (Step):
1. न्यूनतम मान (L) और अधिकतम मान (H) की प्राप्ति।
(यहां L = 46 तथा H = 96)

चरण (Step) 2.
परिसर की गणना करने के लिए अधिकतम से न्यूनतम को घटाएं।
परिसर R = अधिकतम न्यूनतम (R =H – L) = 96 – 46 = 50

चरण (Step) 3.
परिसर को इच्छित संख्या के वर्गों (N) से विभाजित कर वर्ग अंतराल (C. I.) निर्धारित करें।
वर्ग अंतराल C. I. = \(\frac {परिसर}{वर्ग N}\)
5 वर्ग (N) लेने पर अंतराल = \(\frac {50}{5}\) = 10
वर्गों की यह संख्या न तो बहुत अधिक होनी चाहिए और नही बहुत कम।

चरण (Step) 4.
वर्ग सीमा का निर्धारण करें। (निचली तथा ऊपरी सीमा) इसके लिए वर्ग अंतराल को न्यूनतम मान (L) के साथ उतनी बार जोड़ें जब तक कि अधिकतम मान (H) प्राप्त न हो जाए।
इस प्रकार न्यूनतम सीमा अगली सीमा अगली सीमा
इस प्रकार न्यूनतम सीमा = 46 (निम्नतम मान L )
अगली सीमा = 46 + (10 × 1 ) = 56
अगली सीमा = 46 + (10 × 2) = 66
अगली सीमा = 46 + (10 × 3 ) = 76
अगली सीमा = 46 + (10 × 4 ) = 86
और अधिकतम सीमा = 46 + (10 × 5 ) = 96 (अधिकतम मान H )
अतः
प्रथम I वर्ग होगा – 46 से 56
II वर्ग होगा – 56 से 66
III वर्ग होगा – 66 से 76
IV वर्ग होगा – 76 से 86
वर्ग होगा – 86 से 96

चरण (Step) 5.
आँकड़ों को बारंबारता सारणी में 5 वर्गों सहित मिलान चिह्नों की सहायता से व्यवस्थित करें।
सारणी-अंकों का बारंबारता बंटन
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चरण (Step) 6.
अब बारंबारता को उनके संगत मानों से गुणा करें, उन्हें जोड़कर प्राप्त करते हैं। ∑fxm

चरण (Step) 7.
अंकगणितीय माध्य की गणना सूत्र का प्रयोग करें,
\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f x m}{\Sigma f}\) = \(\frac{3750}{50}\) = 75
नोट – बारंबारता की संकल्पना का प्रयोग अन्य प्रकार के औसतों/ माध्यों की गणना से भी किया जाता है।

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प्रश्न 8.
समांतर माध्य के गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
समांतर माध्य (Arithmatic Mean) के गुण (Merits) –
1. सरल (Simple)-समांतर माध्य सभी केंद्रीय प्रवृत्तियों में से सरल है जिसे समझना बहुत सरल है।
2. प्रतिनिधि मूल्य (Representative Value )-माध्य सभी मूल्यों का प्रतिनिधि मूल्य है।
3. निश्चित मूल्य (Certain Value )-समांतर माध्य सदा एक ही रहता है जिसका निश्चित मूल्य होता है।
4. स्थिर मूल्य (Stable Value )-माध्यम का स्थिर मूल्य होता है। किसी श्रेणी के निर्देशन ( Sample) में परिवर्तन से प्रभाव नहीं पड़ता। यह संतुलित मूल्य है।
5. समूह की तुलना (Comparison )-माध्य की सहायता से अंकों के समूहों की तुलना करना आसान है।
n = 90 ∑f.dx = 95

दोष (Demerits) –
1. चरम मूल्यों का माध्य पर प्रभाव (Effect of Extreme Values)-बहुत बड़ी या बहुत छोटी संख्या माध्य पर प्रभाव डालती है।
उदाहरण:
एक कम्पनी के मैनेजर का मासिक वेतन ₹50,000 है तथा अन्य तीन क्लर्कों का वेतन ₹3,500, 1,500, 1,000 है।
औसत वेतन = \(\frac{50,000+3,500+1,500+1,000}{4}\) = ₹14,000 यह वेतन प्रतिनिधि मूल्य नहीं है।
2. अप्रतिनिधि तथा अवास्तविक – समांतर माध्य श्रेणी में उपस्थित नहीं होता।
3. हास्यप्रद परिणाम – समांतर माध्य से कई बार हास्यप्रद तथा असंगत परिणाम निकलते हैं।
4. भ्रमात्मक निष्कर्ष कई बार समांतर माध्य की सहायता से प्राप्त निष्कर्ष भ्रमात्मक होते हैं।

प्रश्न 9.
गुणोत्तर माध्य किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean):
n मानों का गुणोत्तर माध्य उदाहरणतः x1,x2,x3,x4, ……………. xn मानों के भागफल के वें वर्गमूल के रूप में परिभाषित किया जाता है। अतः इसे गणितीय रूप में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है –
गुणोत्तर माध्य = \(\left(x_1, x_2, x_3, x_4, \ldots \ldots \ldots x_n\right)^{\frac{1}{n}}\)
= \(\left(x_1 x_2 x_3 \ldots \ldots \ldots x_n\right)^{\frac{1}{n}}\) निम्नलिखित उदाहरण की सहायता से गुणोत्तर माध्य की गणना की जा सकती है।
उदाहरण:
अर्थव्यवस्था में चार वर्षों की वृद्धि दर को क्रमशः 4, 8, 8 तथा 16 प्रतिशत दिया गया है।
अतः गुणोत्तर माध्य = \((4 \times 8 \times 8 \times 16)^{\frac{1}{4}}\)
यहां n = 4 है क्योंकि मदों की संख्या 4 है।
= 4 × 8 × 8 × 16 = 4096
= 4096 का चतुर्थ मूल 8 प्रतिशत।

गुणोत्तर माध्य के उपयोग-गुणोत्तर माध्य अधिक उपयोगी औसत होता है अगर आँकड़े अनुपात के रूप में हों। अगर आँकड़े परिवर्तन के रूप में हो तो असंगत परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 10.
माध्यिका किसे कहते हैं ? इसे किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर:
माध्यिका (Median ) – यह केंद्रीय प्रवृत्ति का एक मुख्य माप है। इसका अर्थ है-मध्य मूल। किसी भी श्रेणी की माध्यिका वह मूल्य है जो श्रेणी को दो बराबर भागों में बांटता है। एक भाग में वे मूल्य होते हैं, जो माध्यिका से अधिक होते हैं तथा दूसरे भाग में वे मूल्य होते हैं, जो माध्यिका से कम होते हैं। उदाहरण के लिए 40, 42, 38, 45, 50, 52, 55 की माध्यिका 45 है। माध्यिका किसी दी हुई श्रृंखला के मानों का औसत होता है। इस पर श्रृंखला की चरम सीमाओं का प्रभाव नहीं पड़ता है।

माध्यिका ज्ञात करना –
अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए (For Ungrouped Data):
(1) माध्यिका प्राप्त करने के लिए हम पहले आँकड़ों को आरोही तथा अवरोही क्रम में रखते हैं।
(2) इस प्रकार श्रृंखला के मध्य में जो मूल्य आता है, वहा माध्य कहलाता है।
(3) जब आँकड़ों की संख्या विषय ( odd ) हो तो माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र –
M = \(\text { Size of }\left(\frac{N+1}{2}\right) \text { th item }\)
M = माध्यिका
N = मदों की संख्या

(4) जब आँकड़ों की संख्या सम (Even) हो तो माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र
M = \(\frac{1}{2}\left(\frac{\mathrm{N}}{2} \text { th Item }+\frac{\mathrm{N}}{2}+1 \text { th item }\right)\)
मान लो किसी श्रेणी में 8 संख्याएं हैं तो \(\frac {N}{2}\) संख्या 4th संख्या होगी तथा \(\frac {N}{2}\) + 1 संख्या 5th संख्या होगी। इस प्रकार चौथी तथा पाँचवीं संख्या का औसत ही माध्यिका होगी।

माध्यिका वह मान है जो श्रृंखला को दो बराबर भागों में इस प्रकार बाँटता है कि माध्यिका के चरों के सही-सही केंद्रीय स्थान या स्थिति वाले मान के रूप में लगभग आधे मान इससे नीचे या कम और शेष आधे इसके ऊपर या अधिक होते हैं।
उदाहरण:
पाँच व्यक्तियों, अ ब स द य जिनकी आयु क्रमश: 20, 21, 19, 23 तथा 22 वर्ष दी गई है, के लिए माध्यिका की गणना कीजिए, माध्यिका की गणना निम्नलिखित चरणों में होगी –

चरण 1.
आँकड़ों को एक आरोही या अवरोही क्रम में सारणीबद्ध कीजिए।
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चरण 2.
मध्यवर्ती संख्या का मान ही माध्यिका है।

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प्रश्न 11.
किसी बस्ती के 12 परिवारों की मासिक आय नीचे दी गई है, इसकी माध्यिका ज्ञात करो –
परिवारों की आय (₹ में)
140, 150, 130, 135, 170, 190, 500, 210, 205, 195, 290, 200
उत्तर:
आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखने पर –
130, 135, 140, 150, 170, 190, 195, 200, 205, 210, 290, 500

आँकड़ों को अवरोही क्रम में लिखो
500, 290, 210, 205, 200, 195, 190, 170, 150, 140, 135, 130
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 22
माध्यिका (M) =
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 20

प्रश्न 12.
निम्नलिखित सारणी में दिल्ली के मासिक तापमान के आँकड़े दिए गए हैं। दिल्ली के तापमान की माध्यिका ज्ञात करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 21
उत्तर:
तापमान के आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम –
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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 23
माध्यिका (M) = \(\frac {N+1}{2}\) वीं मद = \(\frac {12+1}{2}\) = 6.5 वीं मद
6.5 वीं मद का आकार = \(\frac {6वीं मद + 7वीं मद}{2}\) = \(\frac{26+28}{2}=\frac{54}{2}\) = 27°C

प्रश्न 13.
माध्यिका के गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
माध्यिका के गुण (Merits) –
1. सरल विधि-माध्यिका ज्ञात करना एक सरल विधि है।
2. चरम मूल्यों का निम्नतम प्रभाव-माध्यिका चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती है।
3. आँकड़ों के अभाव में प्रयोग-अपूर्ण आँकड़ों के बावजूद इसकी गणना की जा सकती है।
4. खुले सिरे वाली शृंखला में उपयोग-खुले सिरे वाली शृंखला में माध्यिका का मूल्य सुगमता से प्राप्त हो जाता है।
5. ग्राफिक विधि-माध्यिका का मूल्य ग्राफ की सहायता से भी ज्ञात किया जा सकता है।
6. निश्चित मूल्य-माध्यिका का मूल्य सदैव निश्चित होता है।
7. माध्यिका शृंखला के मूल्यों का प्रतिनिधि होता है। यह संपूर्ण बंटन के लिए गुरुत्व का केन्द्र होता है। यह गुणात्मक तथ्यों (सुन्दरता, ईमानदारी आदि) का अध्ययन करने के लिए सर्वोत्तम है।

माध्यिका के दोष (Demerits) –
(1) समंकों को आरोही तथा अवरोही क्रम में रखना आवश्यक है जिस पर अधिक समय लगता है।
(2) माध्यिका श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होती। यह केवल अनुमानित तथा स्थिति संबंधी माध्य है।
(3) यह एक उपयुक्त माध्य नहीं है क्योंकि यह चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती।
(4) सम संख्याओं की दशा में यह दो संख्याओं के मध्य एक अनुमानित संख्या होती है।
(5) यह अनियमित आँकड़ों के लिए उपयुक्त विधि नहीं है।
(6) अधिक आँकड़े होने पर माध्यिका ज्ञात करना कठिन होता है।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 14.
बहुलक (Mode) किसे कहते हैं ? इसे किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ? उसके गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
बहुलक (Mode) – आँकड़ों का वह मूल्य है जो सबसे अधिक बार आता है, बहुलक कहलाता है। इस विशेष मान के चारों ओर आँकड़ों का सबसे अधिक संकेंद्रण होता है। यह मूल्य श्रेणी का प्रतिनिधि मूल्य है तथा सबसे अधिक लोकप्रिय होता है। निरीक्षण विधि (Inspection Method) द्वारा बहुलक ज्ञात करने की विधि-इस विधि में यह निश्चित करना पड़ता है कि कौन-सा मद सबसे अधिक बार आ रहा है अर्थात् जिस मूल्य की आवृत्ति सबसे अधिक होती है उसे बहुलक कहते हैं। जब खंडित श्रेणी की आवृत्तियां नियमित रूप से बढ़ती या घटती हैं तो अधिकतम आवृत्ति बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है।

उदाहरण:
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 24
उपर्युक्त श्रृंखला से स्पष्ट है कि ₹ 40 की आवृत्ति 8 है जो सबसे अधिक है। इसलिए बहुलक (Z = ₹ 40) है।
उदाहरण:
निम्नलिखित बंटन से बहुलक ज्ञात करें। 2,10,5,7,9,2,7,11,17,7,8 बहुलक का मान निम्नलिखित चरणों में प्राप्त किया जा सकता है –

चरण 1.
आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करके सारणीबद्ध करो।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 25

चरण 2.
आरोही एवं अवरोही दोनों ही क्रमों में ‘ 7 ‘ का मान सबसे अधिक बार अर्थात् 3 बार आता है।
अत: बहुलक =7
बहुलक के गुण (Merits) –
(1) बहुलक की गणना सरलता से निरीक्षण विधि द्वारा की जा सकती है।
(2) बहुलक पर शृंखला के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता।
(3) किसी शृंखला में सबसे अधिक बार आने के कारण, यह उसका सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
(4) अंकों के अभाव की हालत में भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।
(5) बहुलक की व्यावहारिक उपयोगिता अधिक है। किसी वस्तु की अधिक मात्रा के कारण उसका उत्पादन अधिक होता है।
(6) बहुलक को रेखाचित्र द्वारा भी प्रदर्शित करके इसे सरल रूप दिया जा सकता है।

बहुलक के दोष (Demerits) –
(1) दो से अधिक समंकों की बारंबारता समान होने के कारण, बहुलक एक अनिश्चित व अस्पष्ट माध्य है।
(2) बहुलक सभी मदों पर आधारित नहीं होता।
(3) बहुलक कभी-कभी असत्य और भ्रमात्मक भी हो सकता है।
(4) बहुलक ज्ञात करने में चरम मूल्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
(5) अधिक संख्याएं न होने पर बहुलक एक महत्त्वपूर्ण माप नहीं है।
(6) वर्ग विस्तार बदलने पर बहुलक भी बदल जाता है।

प्रश्न 15.
विचलन की माप क्या है ? इसके प्रकार बताओ।
उत्तर:
विचलन की माप (Measures of Deviation) –
विचलन या विक्षेपण का सामान्य अर्थ चरों का एक केंद्रीय मान से बिखराव या विभिन्नता होता है। विचलन के चार वैकल्पिक मानों को हम लेंगे –
(1) परिसर (Range)
(2) माध्य विचलन (Mean Deviation)
(3) मानक विचलन (Standard Deviation)
(4) चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation)

प्रश्न 16.
परिसर से क्या भाव है ? उदाहरण सहित स्पष्ट करो कि माध्य विचलन कैसे ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर:
परिसर (Range) –
परिवर्तनशीलता का सबसे सरल माप परिसर है। यह माप किसी शृंखला में अधिकतम $(\mathrm{H})$ एवं न्यूनतम $(\mathrm{L})$ मानों में अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
Range = Highest – Lowest

उदाहरण:
निम्नलिखित 5 विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त प्रतिशत अंकों के आधार पर परिसर ज्ञात कीजिए। पांच विद्यार्थियों द्वारा प्राप्तांक क्रमशः $83,96,72,46$ और 68 है। परिसर की गणना निम्नवत् होगी –
चरण 1. (Step 1) –
दिए ग़ए उदाहरण में अधिकतम (H) एवं न्यूनतम (L) को ज्ञात करें।
H = 96
L = 46

चरण 2. (Step 2) –
निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग कर हम परिसर की गणना करेंगे-
R = H – L
R = 96 – 46 = 50%
परिसर विचलन की माप का अपरिष्कृत (Crude) मापन है क्योंकि इसमें परिसर के अंतर्गत मानों के वितरण (बंटन) के स्वरूप की कोई सूचना उपलब्ध नहीं होती। परिसर ज्ञात करना आसान है क्योंकि यह केवल दो चरम अंकों पर आधारित है।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

माध्य विचलन एवं निरपेक्ष वितरण (Mean Deviation) –
माध्य विचलन (MD) माध्य (X) से निरपेक्ष विचलन (उनके चिह्नों ±) पर ध्यान दिए बिना) होता है। गणितीय सूत्र के रूप में माध्य विचलन (MD) को निम्नवत लिखा जा सकता है –
M.D = \(\frac{\sum|x-\bar{x}|}{N}\)
जहां
x = जनसंख्या का कोई मान
\(\bar{x}\) = जनसंख्या का माध्य
N = जनसंख्या की कुल संख्या

माध्य विचलन एक वैज्ञानिक माप है क्योंकि यह समांतर माध्य से विभिन्न मानों के बीच विचलनों का औसत है। उदाहरण-निम्नलिखित जनसंख्या के लिए माध्य विचलन की गणना कीजिए –
6,8,4,12,5
माध्य विचलन की गणना निम्नवत करते हैं –
(1) सभी मदों को (X) मान लो।
(2) समांतर माध्य \(((\overline{\mathrm{X}})\) ज्ञात करो।
(3) प्रत्येक मद में से \(\overline{\mathrm{X}}\) घटाओ। \((\mathrm{X}-\overline{\mathrm{X}}=d)\)
(4) प्रत्येक विचलन को जोड़ कर ∑d ज्ञात करें।
(5) विचलनों के योग को मदों की संख्या (N) से भाग दो।

चरण (Step) 1.
औसत माध्य \(((\overline{\mathrm{X}})\) की गणना कीजिए –
\(((\overline{\mathrm{X}})\) (अंकिक माध्य) = \(\frac{6+8+4+12+5}{5}\) = \(\frac{35}{5}\)= 7

चरण (Step) 2.
सारणी स्वरूप में प्रत्येक चर अंक में से माध्य मान को घटाइए –
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 26
चरण (Step) 3. अत: निरपेक्ष माध्य विचलन होगा
= \(\frac{1}{N} \Sigma|X \pm \bar{X}|=\frac{12}{5}\) = \(\frac{\sum|X-\bar{X}|}{N}=\frac{12}{5}\) = 2.4

प्रश्न 17.
मानक विचलन तथा चतुर्थक विचलन से क्या अभिप्राय है ? इन्हें ज्ञात करने की विधि बताओ।
उत्तर:
मानक विचलन (Standard Deviation) –
विचलन के माप की दूसरी विधि, जो औसत माध्य [(A.M. (7)] का प्रयोग कर प्राप्त की जाती है मानक विचलन (σ) कहलाती है। इसे वर्ग माध्य-मूल विचलन भी कहते हैं। मानक विचलन किसी श्रेणी के विभिन्न मूल्यों के समांतर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है। इसे ग्रीक भाषा के अक्षर (σ) सिग्मा से प्रकट किया जाता है। गणितीय सूत्र में इसे निम्नवत रखा जाता है –
\(\left.\underset{(\text { सिग्मा) }}{\sigma}=\sqrt{\left[\Sigma{ }^{(\mathrm{X}-\overline{\mathrm{X}})^2}\right.}\right]\)

उदाहरण:
निम्नलिखित बंटन का मानक विचलन ज्ञात करें।
6,8,4,2,5
मानक विचलन की गणना निम्न चरणों में होगी –

चरण (Step) 1.
औसत माध्य A.M. \((\overline{\mathrm{X}})\) ज्ञात करें –
\((\overline{\mathrm{X}})\) = \(\frac{6+8+4+2+5}{5}\) = \(\frac{25}{5}\) = 5

चरण (Step) 2.
सारणी स्वरूप में A.M. से वर्ग विचलन का निर्धारण करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 27
इसलिए
σ = \(\sqrt{\frac{20}{5}}\) = \(\sqrt{4}\) = 2
इस प्रकार उपरोक्त बंटन का मानक विचलन σ = 2 होगा।

चतुर्थक विचलन (Q.D.) (Quartile Deviation) –
माध्यिका द्वारा संपूर्ण बंटन दो बराबर भागों में विभक्त होता है किंतु चतुर्थक द्वारा संपूर्ण बंटक चार बराबर भागों में विभक्त करता है। चतुर्थक वह मूल्य है जो किसी श्रेणी को चार समान भागों में बांटता है इसे विभाजन मूल्य (Partition Value) कहते हैं। किसी भी श्रेणी में तीन चतुर्थक होते हैं।
(1) Q1 = पहला चतुर्थक या न्यून चतुर्थक (The Lower Quartile)
(2) Q2 = दूसरा चतुर्थक या मध्य चतुर्थक (The Middle Quartile)
(3) Q3 = तीसरा चतुर्थक या ऊपरी चतुर्थक (The Upper Quartile)

(i) न्यून चतुर्थक (Q1) –
यह कुल बंटन का \(\frac{1}{4}\) या एक चौथाई भाग इससे कम होगा जबकि कुल बंटन का \(\frac{3}{4}\) भाग इसके ऊपर या अधिक होगा।

(ii) मध्य चतुर्थक (Q2) – इस प्रकार कुल बंटन का \(\frac{1}{2}\) होगा जिसमें आधा भाग इसके नीचे व शेष आधा इसके ऊपर या अधिक होगा। इस प्रकार मध्य चतुर्थक (Q2) – कुछ नहीं बल्कि माध्यिका ही होता है।

(iii) ऊपरी चतुर्थक (Q3) – शृंखला को इस प्रकार बांटता है कि \(\frac{3}{4}\) भाग इससे नीचे तथा केवल \(\frac{1}{4}\) भाग इसके ऊपर या अधिक होता है। चतुर्थक विचलन Q.D. को अन्तचतुर्थक का परिसर भी कहा जाता है, जिसे निम्नवत प्रदर्शित करते हैं-
Q.D = \(\frac{\mathrm{Q}_3-\mathrm{Q}_1}{2}\)
उदाहरण:
उदाहरण-निम्नलिखित बंटन के लिए चतुर्थक विचलन का निर्धारण कीजिए –
46,32,25,50,72,35,75,65 तथा 58

चतुर्थक विचलन को निम्नवत निर्धारित किया जाता है –

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

चरण (Step) 1.
बंटन को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें तथा उन्हें क्रमानुसार कोटि प्रदान करें जैसा कि नीचे दिया गया है- 25
32,35,46,50,58,65,72,75
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 28

चरण (Step) 2.
मध्य चतुर्थक (Q2) अथवा माध्यिका (Mc) सही-सही माध्य की संख्या है। जैसे-
\(\frac{n+1}{2}=\frac{9+1}{2}\) = 5वीं (चूंकि n = 9)

चरण (Step) 3.
निम्न चतुर्थक (Q3) निम्न आद्धर्ध (Mc) का आधा होता है, जैसे कि
\(\frac{5}{2}\) = 2.5 वीं संख्या
∴ Q1 = \(\frac{32+35}{2}=\frac{67}{2}\) = 33.5

चरण (Step) 4.
ऊपरी चतुर्थक Q3 उत्तरार्ध का आधा होता है। जैसे कि
\(\frac{7+8}{2}\) = 7.5 वीं संख्या
∴ Q3 = \(\frac{65+72}{2}=\frac{137}{2}\) = 68.5

चरण (Step) 5.
चतुर्थक विचलन की गणना निम्नसूत्र Q.D. द्वारा की जाती है।
Q.D = \(\frac{\mathrm{Q}_3-\mathrm{Q}_1}{2}\) = \(\frac{68.5-33.5}{2}\) = \(\frac{35}{2}\) = 17.5

प्रश्न 18.
सह-संबंध से क्या अभिप्राय है ? सह-संबंध गुणांक की गणना कैसे की जाती है ?
उत्तर:
सहसंबंध (Correlation) –
दो भिन्न प्रकार के चरों के एक बंटन को द्विचरीय वितरण कहते हैं, ये दोनों चर उस अवस्था में आपस में सह-संबंधित कहलाते हैं जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर में संगती परिवर्तन उत्पन्न होता है। प्रथम चर जिसके कारण दूसरे चर में परिवर्तन होता है स्वतंत्र (x) कहलाता है जबकि दूसरा चर आश्रित चर (y) के रूप में जाना जाता है। दो चरों के मध्य साहचर्य की मात्रा तथा दिशा का आंकलन सरल अथवा द्विचर सह-संबंध कहलाता है। सह-संबंध की माप का सर्वाधिक प्रचलित स्वरूप पियर्सन का गुणन आघूर्ण सह-संबंध गुणांक (r) है। r का मूल्य +1 से -1 के बीच प्रसारित होता है।

इस प्रकार जब –
(i) r +1 हो तो सहसंबंध पूर्ण तथा धनात्मक होता है,
(ii) r = 0 हो तो कोई सह-संबंध नहीं या शून्य सहसंबंध, तथा
(iii) r = -1 हो तो सह-संबंध ऋणात्मक होता है।
गुणन आघूर्ण सह-सम्बन्ध गुणांक (r) को गणितीय सूत्र में निम्नवत लिखा जाता है –
r = \(\frac{N \Sigma x y-\Sigma x, \Sigma y}{\sqrt{\left[N \Sigma x^2-(\Sigma x)^2\right]}\left[N \Sigma y^2-(\Sigma y)^2\right]}\)

जिसमें
x = स्वतंत्र चर
y = आश्रित चर
N = बंटन की कुल संख्या है

उदाहरण:
निम्नलिखित आँकड़ों “खखेत का आकार और विक्रय मूल्य” के आधार पर पियर्सन सह-संबंध गुणांक की गणना करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 29

अग्रवत सारणी रूप में पियर्सन के सह-संबंध गुणांक की गणना की जा सकती है।
चरण (Step) 1.
दोनों चरों को अलग-अलग प्रदर्शित करते हुए आँकड़ों को क्रमानुसार व्यवस्थित करें व फिर उन्हें अलग-अलग जोड़ें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 30

चरण (Step) 2.
x को y से गुणा करें व फिर उन्हें जोड़ें, इस प्रकार, ∑x = 95, ∑y = 380, ∑x y = 7895 होगा तथा ∑x-2 = 1985 व ∑y2 = 31700 होगा

चरण (Step) 3.
सूत्र का प्रयोग कर पियर्सन के गुणक आघूर्ण सहसंबंध गुणांक की गणना करते हैं।
r = \(\frac{N \Sigma x y-\Sigma x \Sigma y}{\sqrt{\left[N \Sigma x^2-(\Sigma x)^2\right]\left[N \Sigma y^2-(\Sigma y)^2\right]}}\)
r = \(\frac{5 \times 7895-95 \times 380}{\sqrt{\left[5 \times 1985-(95)^2\right]\left[5 \times 31700-(380)^2\right]}}\)
r = \(\frac{39475-36100}{\sqrt{(9925-9325)(158900-144400)}}\)
= \(\frac{3375}{356230}\) = + 0.95
इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि “भूमि का मूल्य खेत के आकार के सशक्त एवं प्रत्यक्ष रूप से सहसंबंधित हैं।” सारणी स्वरूप में और माध्य से वर्ग विचलन ज्ञात करें-
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 31

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 19.
दिए गए आँकड़ों की सहायता से मानक विचलन की गणना कीजिए।
15,18,20,12,10,12,11
उत्तर:
औसत माध्य \((\overline{\mathrm{X}})\)
ज्ञात करो – \((\overline{\mathrm{X}})\) = \(\frac{\sum x}{N}\)
\((\overline{\mathrm{X}})\) = \(\frac{15+18+20+12+10+12+11}{7}\)= \(\frac{98}{7}\) = 14m
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 33

मानक विचलन
(S.D) (σ) = \(\sqrt{\frac{\Sigma(x-\bar{x})^2}{N}}\) = \(\sqrt{\frac{86}{7}}=\sqrt{12.28}\) = 3.5

प्रश्न 20.
निम्न सारणी में शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के बीच संबंध को दर्शाया गया है। शिक्षकों व विद्यार्थियों के बीच सहसंबंध प्रकृति ज्ञात कीजिए।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 34
उत्तर:
चरण 1-दोनों चरों को अलग-अलग प्रदर्शित करते हुए X को Y से गुणा करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 35
सहसंबंध गुणांक
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 36

मौखिक परीक्षा के प्रश्न (Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
आँकड़ों का प्रयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाता है ?
उत्तर:
मानचित्र, प्रतिवेदन, वैज्ञानिक लेखों तथा पुस्तकें तैयार करने के लिए।

प्रश्न 2.
आँकड़ों के प्रक्रमण के दो महत्त्वपूर्ण घटक बताओ।
उत्तर:
सारणीयन तथा विश्लेषण।

प्रश्न 3.
आँकड़ों के सारणीयन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
सारणीयन आँकड़ों को एक व्यवस्थित तथा क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करने की विधि है।

प्रश्न 4.
एक अच्छी सारणी के क्या गुण होते हैं ?
उत्तर:
सरल, सघन, पूर्ण तथा स्वयं विश्लेषणात्मक होना।

प्रश्न 5.
एक सारणी के प्रमुख क्रियात्मक अंग बताओ।
उत्तर:
सांख्यिकीय सारणी के 8 अंग होते हैं –
(1) संख्या
(2) शीर्षक
(3) शीर्ष-टिप्पणी
(4) प्रतिपर्ण
(5) कक्ष-शीर्ष
(6) मुख्य भाग
(7) पाद-टिप्पणी
(8) स्रोत-टिप्पणी।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 6.
आवृत्ति क्या होती है ?
उत्तर:
किसी शृंखला-श्रेणी में कोई मद कितनी बार आती है, उसे उस पद की आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 7.
वर्ग अंतराल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
आँकड़ों को वर्ग में बांट देने के पश्चात् उनकी ऊपरी तथा निम्न सीमा के अंतर को वर्ग अंतराल कहते हैं-जैसे 30-40 वर्ग में 40-30 =10 वर्ग अंतराल है।

प्रश्न 8.
केंद्रीय प्रवृत्ति के 3 प्रमुख माप बताओ।
उत्तर:
(1) माध्य
(2) माध्यिका
(3) बहुलक।

प्रश्न 9.
समांतर माध्य ज्ञात करने का सूत्र बताओ।
उत्तर:
माध्य \(=\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma \mathrm{x}}{\mathrm{N}}\) जबकि \(\Sigma \mathrm{x}=\) कुल मानों का योग तथा N = मानों की संख्या

प्रश्न 10.
माध्य से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
कई संख्याओं के योग का औसत ही माध्य है।

प्रश्न 11.
माध्यिका से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
माध्यिका वह संख्या है जो किसी शृंखला को दो बराबर भागों में बांटती है।

प्रश्न 12.
माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र बताओ।
उत्तर:
माध्यिका = M = N Size Of \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{2}\right)\) th item जबकि N = मदों की संख्या।

प्रश्न 13.
बहुलक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बहुलक चरों का वह मान होता है जो शृंखला में सबसे अधिक बार आता है।

प्रश्न 14.
माध्य विचलन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
माध्य विचलन माध्य से निरपेक्ष विचलन होता है।

प्रश्न 15.
माध्य विचलन ज्ञात करने का सूत्र बताओ।
उत्तर:
माध्य विचलन = M.D. = \(\frac{\Sigma(\mathrm{x}-\overline{\mathrm{x}})}{\mathrm{N}}\)
X = संख्या
X = माध्य
N = मदों की संख्या।

प्रश्न 16.
मानक विचलन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
विचलनों के वर्गों के माध्य के वर्ग मूल को मानक विचलन कहते हैं।

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन (Q.D.) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
जब संपूर्ण बंटन को चार बराबर भागों में विभक्त करते हैं तो उसे चतुर्थक विचलन कहते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 18.
सहसंबंध से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
विभिन्न चरों के बीच संख्यात्मक संबंध को सहसंबंध कहते हैं।

प्रश्न 19.
सह-संबंध के दो प्रकार बताओ।
उत्तर:
धनात्मक तथा ऋणात्मक।

प्रश्न 20.
सहसंबंध ज्ञात करने की विधि किस वैज्ञानिक ने बनाई ?
उत्तर:
कार्ल पियर्सन ने।

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रेरित वि.वा. बल की दिशा ज्ञात की जाती है:
(अ) ऐम्पियर के नियम द्वारा
(ब) फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम से
(स) फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम से
(द) लेन्ज के नियम से
उत्तर:
(द) लेन्ज के नियम से

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 2.
लेन्ज का नियम देता है:
(अ) प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण
(ब) प्रेरित धारा की दिशा
(स) प्रेरित धारा का परिमाण व दिशा दोनों
(द) प्रेरित धारा का परिमाण
उत्तर:
(ब) प्रेरित धारा की दिशा

प्रश्न 3.
लेन्ज का नियम जिस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित होता है, वह है:
(अ) आवेश
(ब) संवेग
(स) द्रव्यमान
(द) ऊर्जा
उत्तर:
(द) ऊर्जा

प्रश्न 4.
एक क्षेत्रीय रेखाचित्र में प्रदर्शित है। यह क्षेत्र प्रदर्शित नहीं करता:
(अ) चुम्बकीय क्षेत्र
(ब) स्थिर-वैद्युत क्षेत्र
(स) प्रेरित विद्युत क्षेत्र
(द) गुरुत्वीय क्षेत्र
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 1
(संकेत-स्थिर-वैद्युत तथा गुरुत्वीय क्षेत्र बन्द लूप नहीं बनाते।)
उत्तर:
(ब) स्थिर-वैद्युत क्षेत्र

प्रश्न 5.
किसी क्षण ‘ t’ पर एक कुण्डली से सम्बन्धित फ्लक्स दिया गया है ¢ = 10t2 – 50t + 250 तो t= 3 ऊपर प्रेरित वि. वा. बल
(अ) 190 V
(ब) -190 V
(स) 10V
(द) 10V
उत्तर:
(स) 10V

प्रश्न 6.
ताँबे के तार की कुण्डली व एक तार AB चित्रानुसार तार में प्रवाहित धारा I का कागज के तल में स्थित है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 2
मान यदि बढ़ रहा हो तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा होगी:
(अ) वामावर्त
(ब) दक्षिणावर्त
(स) प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) दक्षिणावर्त

प्रश्न 7.
संलग्न चित्र में चालक छड़ AB को धारावाही तार MN के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय में धारा के समान्तर दिशा में चलाया जा रहा है। छड़ AB में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा होगी:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 3
(अ) A → B
(ब) B → A
(स) प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) A → B

प्रश्न 8.
संलग्न चित्र में जब कुंजी k को बन्द किया जाता है तो कुण्डली B में प्रेरित धारा की दिशा होगी:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 4
(अ) वामावर्त तथा क्षणिक
(ब) दक्षिणावर्त तथा क्षणिक
(स) वामावर्त तथा लगातार
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) वामावर्त तथा क्षणिक

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसके द्वारा अधिकतम वि.वा. बल उत्पन्न होगा:
(अ) 50A dc
(ब) 50A 50Hz ac
(स) 50 A 500 Hz ac
(द) 100 A dc.
उत्तर:
(स) 50 A 500 Hz ac

प्रश्न 10.
एक 2 मीटर लम्बा तार 0.5 वेबर/ मी2 के चुम्बकीय क्षेत्र लम्बवत 1 मीटर / से. के वेग से के गतिमान है। उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान होगा:
(अ) 0.5 वोल्ट
(ब) 2 वोल्ट
(स) 0.1 वोल्ट
(द) 1 वोल्ट
उत्तर:
(द) 1 वोल्ट

प्रश्न 11.
L भुजा व R प्रतिरोध का वर्गाकार चालक लूप अपनी एक भुजा के लम्बवत एकसमान वेग से अपने तल में गति कर रहा है, जहाँ चुम्बकीय प्रेरण B है जो आकाश व समय में नियत है तथा लूप के तल के लम्बवत अन्दर की ओर है लूप में प्रेरित धारा है:
(अ) \(\frac{\mathrm{BL} v}{\mathrm{R}}\) दक्षिणावर्त
(ब) \(\frac{\mathrm{BL} v}{\mathrm{R}}\) वामावर्त
(स) \(\frac{2 \mathrm{BL} v}{\mathrm{R}}\) वामावर्त
(द) शून्य
उत्तर:
(द) शून्य

प्रश्न 12.
एक ताँबे की वलय को क्षैतिज रखा जाता है तथा एक छड़ चुम्बक को वलय की अक्ष की दिशा में गिराया जाता है। गिरते हुए चुम्बक का त्वरण होगा:
(अ) गुरुत्वीय त्वरण के बराबर
(ब) गुरुत्वीय त्वरण से कम
(स) गुरुत्वीय त्वरण से अधिक
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) गुरुत्वीय त्वरण से कम

प्रश्न 13.
चित्रानुसार एक चालक छड़ AB नियत वेग v से एकसमान चुम्बकीय नियत वेग क्षेत्र में गतिशील है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 5
(अ) छड़ विद्युत आवेशित हो जायेगी
(ब) छड़ जूल ऊष्मा के कारण गर्म हो जायेगी
(स) छड़ का सिरा A धनावेशित होगा
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) छड़ का सिरा A धनावेशित होगा

प्रश्न 14.
एक चालक लूप को एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखा जाता है कि इसका तल चुम्बकीय क्षेत्र के प्रेरित वि. वा. बल उत्पन्न होगा यदि:
(अ) लूप की क्षेत्र में गति स्थानान्तरीय हो
(ब) लूप अपनी अक्ष पर घूर्णन करे
(स) लूप अपने व्यास के सापेक्ष घूर्णन करे
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) लूप अपने व्यास के सापेक्ष घूर्णन करे

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प्रश्न 15.
चित्रानुसार एक चालक तार AB (लम्बाई l) दो समान्तर पटरियों P तथा Q पर वेग से गतिशील है। पटरियों के तल के लम्बवत् नीचे की ओर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र लगाया लम्बवत् है, लूप में
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 6
गया है। छड़ का वेग नियत बनाये रखने के लिए आवश्यक बल का मान होगा:
(अ) शून्य
(ब) I/B
(स) I/B sin θ
(द) इनमें से
उत्तर:
(अ) शून्य

प्रश्न 16.
निम्न में से किसकी विमा [M1 L2T-3 A-1] नहीं है:
(अ) \(\int \overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{d} l}\)
(ब) VBl
(स) \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{B}}}{\mathrm{dt}}\)
(द) \(\phi_{\mathrm{B}}\)
उत्तर:
(द) \(\phi_{\mathrm{B}}\)

प्रश्न 17.
दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान 2.5 H है। यदि एक कुण्डली में धारा का मान 1 A/s की दर से परिवर्तित होता हो तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान होगा-
(अ) 2.5 mV
(ब) 2.5 V
(स) 2.5 m
(द) शून्य
उत्तर:
(ब) 2.5 V

प्रश्न 18.
संलग्न चित्र में तार AB में एक नियत मान की धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली A में प्रवाहित प्रेरित धारा की दिशा होगी:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 7
(अ) वामावर्त
(ब) दक्षिणावर्त
(स) प्रेरित धारा प्रवाहित नहीं होगी
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) प्रेरित धारा प्रवाहित नहीं होगी

प्रश्न 19.
प्रेरकत्व का कौन-सा मात्रक त्रुटिपूर्ण है:
(अ) \(\frac{\mathrm{Wb}}{\mathrm{A}}\)
(ब) \(\frac{V-s}{A^2}\)
(स) \(\frac{\mathrm{J}}{\mathrm{A}^2}\)
(द) Ω – s
उत्तर:
(ब) \(\frac{V-s}{A^2}\)

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प्रश्न 20.
संलग्न चित्र में एक इलेक्ट्रॉन A से B की ओर गतिशील हो तो लूप में प्रेरित धारा की दिशा होगी-
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(अ) पहले वामावर्त तथा C को पार करने के पश्चात् दक्षिणावर्त
(ब) पहले दक्षिणावर्त तथा C को पार करने के पश्चात् वामावर्त
(स) वामावर्त
(द) दक्षिणावर्त
उत्तर:
(अ) पहले वामावर्त तथा C को पार करने के पश्चात् दक्षिणावर्त

प्रश्न 21.
5 ओम प्रतिरोध वाले बन्द परिपथ से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स का तात्क्षणिक मान निम्न सम्बन्ध से व्यक्त किया जाता है:
¢B = 6t2 – 5t + 1
तो t = 0.25 सेकण्ड पर परिपथ में प्रेरित धारा का मान ऐम्पियर में होगा:
(अ) 2.4
(ब) 1.6
(स) 0.4
(द) 1.2
उत्तर:
(स) 0.4

प्रश्न 22.
दो कुण्डलियों को एक-दूसरे निकट रखा है, तो कुण्डली के युग्म का अन्योन्य प्रेरण गुणांक निर्भर करता है:
(अ) दोनों कुण्डलियों में धारा परिवर्तन की दर
(ब) दोनों कुण्डलियों की आपेक्षिक स्थिति पर
(स) दोनों कुण्डलियों के तारों के पदार्थ पर
(द) दोनों कुण्डलियों में धारा पर
उत्तर:
(ब) दोनों कुण्डलियों की आपेक्षिक स्थिति पर

प्रश्न 23.
l लम्बाई की धातु की छड़ को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत रखकर f आवृत्ति से वृत्ताकार पथ पर घूर्णन कराने पर छड़ के किनारों के बीच विभवान्तर होगा:
(अ) \(\frac{B}{f}\)
(ब) \(\frac{\pi l^2 \mathrm{~B}}{\mathrm{f}}\)
(स) \(\frac{\mathrm{B} l}{\mathrm{f}}\)
(द) πl2Bf
उत्तर:
(द) πl2Bf

प्रश्न 24.
स्वप्रेरण गुणांक की विमा होती है:
(अ) ML2T-3A-2
(ब) M2LT-2A-2
(स) M0L2T-3 A-2
(द) ML2T-2A-2
उत्तर:
(द) ML2T-2A-2

प्रश्न 25.
समीपवर्ती दो कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरकत्व 4.0 H (हेनरी) है। यदि प्राथमिक कुण्डली में धारा 5 ऐम्पियर से 102 सैकण्ड में शून्य हो जाती है, तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान होगा:
(अ) 0.20 वोल्ट
(ब) – 2000 वोल्ट
(स) 2000 वोल्ट
(द) -0.20 वोल्ट
उत्तर:
(ब) – 2000 वोल्ट

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प्रश्न 26.
l भुजा का एक वर्गाकार लूप समरूप चुम्बकीय क्षेत्र B के लम्बवत् नियत वेग से चलाया जाता है। प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान होगा:
(अ) VBI
(ब) \(\frac{\mathrm{B} l}{\mathrm{v}}\)
(स) \(\frac{\mathrm{v} l}{\mathrm{B}}\)
(द) शून्य
उत्तर:
(अ) VBI

प्रश्न 27.
चुम्बकीय ध्रुवों के बीच एक आयताकार कुण्डली समान कोणीय वेग से घूर्णन गति कर रही है, तो कुण्डली में से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स व प्रेरित विद्युत वाहक बल (e) का समय (t) के साथ परिवर्तन का सही ग्राफ है:
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उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 10

प्रश्न 28.
भँवर धाराओं का प्रयोग निम्नलिखित में से किसमें नहीं होता है:
(अ) चल कुण्डल धारामापी
(ब) विद्युत ब्रेक
(स) प्रेरण मोटर
(द) डायनामो
उत्तर:
(द) डायनामो

प्रश्न 29.
विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है
(अ) विद्युत मोटर से
(ब) विद्युत इस्तरी से
(स) विद्युत जनित्र से
(द) सीसा संचायक सेल से
उत्तर:
(अ) विद्युत मोटर से

प्रश्न 30.
लम्बाई L की एक तांबे की छड़ एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में कोणीय वेग से घुमाई जाती है। घूर्णन अक्ष B के समानान्तर व छड़ के एक सिरे से पारित है। छड़ के सिरों के मध्य उत्पन्न वि. वा. बल होगा:
(अ) BπL2
(ब) 1⁄2- BoL2
(स) 1⁄2-BOL
(द) शून्य
उत्तर:
(ब) 1⁄2- BoL2

प्रश्न 31.
दो कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरकत्व M है। यदि पहली कुण्डली मेंt समय में धारा के मान में परिवर्तन I हो तो दूसरी कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल होगा:
(अ) MIt
(ब) \(\frac{\mathrm{MI}}{\mathrm{t}}\)
(स) \(\frac{\mathrm{Mt}}{\mathrm{I}}\)
(द) \(\frac{\mathrm{i}}{\mathrm{MIt}}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{\mathrm{MI}}{\mathrm{t}}\)

प्रश्न 32.
एक प्रेरण कुण्डली में जब धारा 1 मिली. सेकण्ड में 3 ऐम्पियर से 2 ऐम्पियर तक परिवर्तित होती है तो उसमें 5 वोल्ट का विद्युत वाष्प है। कुण्डली का स्व-प्रेरकत्व होगा:
(अ) शून्य
(ब) 5 मिली. हेनरी
(स) 5 किलो हेनरी
(द) 5 हेनरी
उत्तर:
(ब) 5 मिली. हेनरी

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प्रश्न 33.
किसी कुण्डली का स्व-प्रेरकत्व कम होगा, जबकि:
(अ) कुण्डली में प्रवाहित धारा कम हो
(ब) चुम्बकीय क्षेत्र बहुत दुर्बल हो
(स) कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश हो
(द) कुण्डली को प्रतिचुम्बकीय पदार्थ पर लपेटा जाये
उत्तर:
(द) कुण्डली को प्रतिचुम्बकीय पदार्थ पर लपेटा जाये

प्रश्न 34.
ट्रान्सफॉर्मर किस सिद्धान्त पर आधारित है:
(अ) चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर
(ब) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर
(स) स्वप्रेरण के सिद्धान्त पर
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

प्रश्न 35.
यदि एक कुण्डली में तात्कालिक चुम्बकीय फ्लक्स का मान BA cosωt हो, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान होगा:
(अ) sinωt
(ब) B ω/A sinωt
(स) BA sin ωt
(द) BA cos ωt
उत्तर:
(स) BA sin ωt

प्रश्न 36.
किसी पदार्थ में भँवर धारायें उत्पन्न होती हैं जब उसे:
(अ) गर्म किया जाता है
(ब) विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है
(स) एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है
(द) समय के साथ परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है।
उत्तर:
(द) समय के साथ परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
जब किसी कुण्डली से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो क्या सदैव प्रेरित (i) विद्युत वाहक बल (ii) धारा उत्पन्न होती है?
उत्तर:
प्रेरित विद्युत वाहक बल सदैव उत्पन्न होता है, लेकिन प्रेरित विद्युत धारा तब ही उत्पन्न होती है जब कुण्डली का परिपथ बन्द होगा।

प्रश्न 2.
चुम्बकीय फ्लक्स का SI मात्रक और विमा सूत्र लिखिये।
उत्तर:
SI मात्रक वेबर और विमा सूत्र = ML2T-2A-1

प्रश्न 3.
किसी कुण्डली में प्रेरित धारा किन-किन बातों पर निर्भर करती है?
उत्तर:
यह निम्न बातों पर निर्भर करती है:
(i) कुण्डली में फेरों की संख्या,
(ii) कुण्डली का प्रतिरोध,
(iii) कुण्डली में फ्लक्स परिवर्तन की दर।

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प्रश्न 4.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखी किसी कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
जब कोई कुण्डली किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखी जाती है, तो उससे संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-
∵ ΦB = NBA cos θ
(i) कुण्ड के तल के क्षेत्रफल A पर
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B पर
(iii) कुण्डली की अक्ष द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से बनाये गये कोण 6 पर
(iv) N फेरों की संख्या।

प्रश्न 5.
यदि किसी लूप का तल चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर रखा गया हो तो लूप से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स का मान क्या होगा?
उत्तर:
शून्य चूँकि ΦB = BdA cos 90° = 0

प्रश्न 6.
किसी कुण्डली में संग्रहित ऊर्जा का क्या रूप होता है?
उत्तर:
चुम्बकीय ऊर्जा।

प्रश्न 7.
क्या किसी कुण्डली में प्रेरित वि.वा. बल का मान परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर करता है?
उत्तर:
नहीं। (चूँकि प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान सिर्फ चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। )

प्रश्न 8.
लेंज का नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित होता है?
उत्तर:
ऊर्जा संरक्षण

प्रश्न 9.
प्रेरित वि. वा. बल की दिशा किस नियम से ज्ञात की जाती है?
उत्तर:
लेंज के नियम से।

प्रश्न 10.
किसी धातु को परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्या भँवर धारायें उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
हाँ, भँवर धारायें उत्पन्न होंगी।

प्रश्न 11.
किसी कुण्डली का स्वप्रेरकत्व या स्वप्रेरण गुणांक 1 H है। इससे आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ε = -Ldl/dt
यहाँ पर L = 1 है।
∵ ε = -Ldl/dt
अर्थात् 1 ऐम्पियर / से की दर से धारा परिवर्तन होने पर । वोल्ट का विद्युत वाहक बल प्रेरित होगा।

प्रश्न 12.
दो एकसमान समाक्षीय वृत्ताकार कुण्डलियों में समान धारायें एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। यदि दोनों कुण्डलियों को एक-दूसरे की ओर लाया जाये तो धाराओं में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
प्रत्येक कुण्डली में धारा घटेगी (लेंज के नियम से)।

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प्रश्न 13.
एक धातु का सिक्का तथा एक अधातु का सिक्का एक ही ऊँचाई से पृथ्वी तल के समीप छोड़े गये हैं। कौन-सा पहले पृथ्वी पर पहुँचेगा?
उत्तर:
गिरते हुए धातु के सिक्के में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न भंवर धारायें टुकड़े की गति का विरोध करती हैं। अतः धातु का टुकड़ा (गुरुत्वीय त्वरण के सापेक्ष) कम त्वरण से गिरता है. परन्तु अधातु के टुकड़े में भँवर धारायें नहीं होंगी, अतः वह गुरुत्वीय त्वरण से गिरता है अतः अधातु का सिक्का पृथ्वी पर पहले पहुँचेगा।

प्रश्न 14.
एक ऋजुरेखीय चालक तार में विद्युत वाहक बल के एक स्रोत के कारण एक नियत धारा बायीं से दायीं ओर बह रही है। जब स्रोत का स्विच बन्द कर देते हैं, तो तार में प्रेरित धारा की दिशा होगी-
उत्तर:
बायीं से दायीं ओर (स्विच बन्द करने पर उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल की दिशा वही होती है जिस दिशा में धारा बहती है)।

प्रश्न 15.
प्रतिरोध बॉक्स में प्रयुक्त प्रतिरोध तार दुहरा मोड़ कर कुण्डली के रूप में लगाये जाते हैं क्यों?
उत्तर:
स्वप्रेरण प्रभाव के निराकरण के लिये।

प्रश्न 16.
जब किसी कुण्डली के पास छड़ चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव लाया जाता है तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी ? कारण सहित समझाओ।
उत्तर:
दक्षिणावर्त होगी, क्योंकि इससे कुण्डली के सिरों पर दक्षिण ध्रुव बनेगा जो लेंज के नियम के अनुसार चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव के आगे बढ़ने की गति का विरोध करेगा।

प्रश्न 17.
ट्रान्सफॉर्मर, डायनेमो इत्यादि की क्रोड पटलित क्यों होती है?
उत्तर:
क्रोड में भंवर धाराओं के कारण ऊर्जा का हास कम हो जाता है।

प्रश्न 18.
यदि किसी प्रेरकत्व में धारा का मान दुगुना कर दिया जाता है तो संग्रहित ऊर्जा कितने गुना हो जायेगी?
उत्तर:
हम जानते हैं कि किसी कुण्डली में संग्रहित चुम्बकीय ऊर्जा
U = \(\frac{1}{2}\) LI2θ
यदि धारा का मान दुगुना करने पर
U = \(\frac{1}{2}\) LI2I0 = 4 x \(\frac{1}{2}\) LI2
U’= 4U
अतः संग्रहित ऊर्जा का मान चार गुना होगा।

प्रश्न 19.
धारामापी के क्रोड में भँवर धाराओं के प्रभाव को किस प्रकार कम किया जा सकता है?
उत्तर:
क्रोड को पटलित लेकर।

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प्रश्न 20.
क्या कारण है कि दोलन करती हुई चुम्बकीय सूई के ठीक नीचे ताँबे की प्लेट रखने पर चुम्बकीय सूई शीघ्रता से रुक जाती है, जबकि काँच की प्लेट नीचे रखने पर चुम्बकीय सूई नहीं रुकती है?
उत्तर:
इसका मुख्य कारण यह है कि ताँबे की प्लेट में भँवर धारायें प्रेरित होती हैं जो चुम्बकीय सूई के दोलनों का विरोध करती हैं, जबकि काँच की प्लेट में भँवर धारायें उत्पन्न नहीं होती हैं।

प्रश्न 21.
एक कुण्डली के मध्य में लोहे का क्रोड लगाने की स्थिति में उसके स्वप्रेरकत्व के मान पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
स्वप्रेरकत्व का मान बढ़ जायेगा।

प्रश्न 22.
तीन कारकों (factors) के नाम लिखिये जिन पर किसी कुण्डली का स्व-प्रेरण गुणांक निर्भर करता है।
उत्तर:
(i) कुण्डली की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल,
(ii) कुण्डली में फेरों की संख्या,
(iii) कुण्डली के अन्दर रखी क्रोड की चुम्बकशीलता।

प्रश्न 23.
स्व-प्रेरकत्व पर क्रोड का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
बढ़ जाता है।

प्रश्न 24.
भँवर धाराओं का कोई एक उपयोग लिखिये।
उत्तर:
रुद्ध दोलन (dead beat ) चल कुण्डली धारामापी।

प्रश्न 25.
स्व-प्रेरण को विद्युत का जड़त्व क्यों कहते हैं?
उत्तर:
स्व-प्रेरण किसी कुण्डली का वह गुण है जिसके कारण यह इसके बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स को बनाये रखने के लिए प्रयत्नशील रहती है अर्थात् फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करती है। यह गुण यान्त्रिकी में जड़त्व के अनुरूप है अतः स्व-प्रेरण को विद्युत का जड़त्व कहते हैं।

प्रश्न 26.
दो कुण्डलियों को किस प्रकार लपेटना चाहिये कि प्रेरित वि. वा. बल का मान अधिकतम हो।
उत्तर:
एक कुण्डली के ऊपर दूसरी कुण्डली को लपेट लेना चाहिये जिससे प्रेरित वि.वा. बल अधिकतम हो जायेगा।

प्रश्न 27.
क्या रेलगाड़ी में बैठे व्यक्ति के द्वारा रेलगाड़ी की धुरी में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल का मापन सम्भव है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि यात्री के सापेक्ष गाड़ी स्थिर है। = 0 होने से प्रेरित वि. वा. बल शून्य होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 28.
यदि किसी चालक को चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर गतिशील किया जाये तो क्या इसमें प्रेरित धारा उत्पन्न होगी?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि इस स्थिति में चालक से सम्बन्धित चुम्बकीय फ्लक्स का मान नहीं बदलता है।

प्रश्न 29.
किसी कुण्डली के स्व-प्रेरकत्व गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर:
L = \(\frac{\mu_0 \pi \mathrm{N}^2 \mathrm{R}}{2}\) हेनरी

प्रश्न 30.
वोल्ट सेकण्ड किस भौतिक राशि का मात्रक है? समझाइये
उत्तर:
ε = \(\frac{\Delta \phi}{\Delta t}\)
से ∆Φ = ε x At
चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक = प्रेरित विद्युत वाहक बल ६ का मात्रक x समय का मात्रक = वोल्ट सेकण्ड

प्रश्न 31.
फैराडे का वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम लिखिए।
उत्तर:
फैराडे ने विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की घटना पर आधारित दो महत्त्वपूर्ण नियम दिये:
I. फैराडे का प्रथम नियम – “इस नियम के अनुसार जब किसी कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स के मान में परिवर्तन होता है तो कुण्डली में प्रेरित वि.वा. बल तथा प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।” उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल तब तक ही उत्पन्न होता है जब तक कि चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है।
II. फैराडे का द्वितीय नियम- इस नियम के अनुसार कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल फ्लक्स में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।”

प्रश्न 32.
निम्न चित्र में दो कुंडली AB व CD के बीच एक छड़ चुम्बक NS को तीर की दिशा में चलाने पर किस कुंडली में प्रेरित धारा बायीं ओर से देखने पर वामावर्ती होगी?
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उत्तर:
AB ↑↓ वामावर्त्त।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित कुण्डली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा यदि-
(i) कुण्डली में फेरों की संख्या बढ़ा दी जाये?
(ii) कुण्डली के तल का क्षेत्रफल बढ़ा दिया जाये?
(iii) कुण्डली के चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ा दी जाये?
उत्तर:
(i) चुम्बकीय फ्लक्स पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि चुम्बकीय फ्लक्स फेरों की संख्या पर निर्भर नहीं करता है।
(ii) चुम्बकीय फ्लक्स का मान बढ़ जायेगा क्योंकि
(iii) चुम्बकीय फ्लक्स बढ़ जायेगा
Φ α A
Φ α B

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प्रश्न 2.
किसी कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित आवेश तथा प्रेरित धारा संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तन तेजी पर क्या प्रभाव पड़ेगा जब इससे से किया जाये अथवा धीरे-धीरे किया जाये?
उत्तर:
प्रेरित आवेश
q = \(\frac{\mathrm{N} \Delta \phi_{\mathrm{B}}}{\mathrm{R}}\)
तथा प्रेरित धारा I = \(\frac{N \Delta \phi_B}{\mathrm{R} \Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{N\left(\Delta \phi_{\mathrm{B}} / \Delta t\right)}{\mathrm{R}}\)
इन सूत्रों से स्पष्ट है कि प्रेरित आवेश केवल कुल फ्लक्स- परिवर्तन ∆ΦB पर निर्भर करता है, जबकि प्रेरित धारा फ्लक्स परिवर्तन की दर \(\left(\Delta \phi_{\mathrm{B}} / \Delta \mathrm{t}\right)\) पर निर्भर करती है अतः पलक्स परिवर्तन तेजी से अथवा धीरे से करने पर प्रेरित आवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि धारा बदल जायेगी। फ्लक्स तेजी से करने पर धारा बढ़ेगी तथा धीरे से करने पर धारा घटेगी।

प्रश्न 3.
फैराडे एवं हेनरी के प्रयोग संख्या दो में विचार करके बताइए:
(a) धारामापी में अधिक विक्षेप प्राप्त करने के लिए आप क्या करेंगे?
(b) धारामापी की अनुपस्थिति में आप प्रेरित धारा की उपस्थिति किस प्रकार दर्शाएँगे?
उत्तर:
(a) अधिक विक्षेप प्राप्त करने के लिए निम्न में से एक या अधिक उपाय किए जा सकते हैं-
(i) कुण्डली C2 के अन्दर नर्म लोहे की छड़ का उपयोग करेंगे,
(ii) कुण्डली को एक उच्च शक्ति की बैटरी से जोड़ेंगे,
(iii) परीक्षण कुण्डली C1 की ओर संयोजन को अधिक तेजी से ले जाएंगे।
(b) धारामापी को टॉर्च में उपयोग किए जाने वाले छोटे बल्ब से बदल देंगे। दोनों कुण्डलियों के बीच सापेक्ष गति से बल्ब क्षणिक अवधि के लिए चमकेगा जो प्रेरित धारा के उत्पन्न होने का द्योतक है।

प्रश्न 4.
लेन्ज के नियम में ऋणात्मक चिन्ह का क्या अर्थ है?
उत्तर:
लेन्ज का नियम: “विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की प्रत्येक अवस्था में प्रेरित विद्युत वा बल एवं धारा की दिशा सदैव इस प्रकार होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है, जिससे उसकी उत्पत्ति हुई है।” फैराडे एवं लेंज के नियम से परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा
ε α – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
ε = – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
यहाँ पर K एक समानुपाती स्थिरांक है जिसका मान होता है। ऋण चिन्ह प्रदर्शित करता है कि प्रेरित वि.वा. बल सदैव फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 5.
एक आयताकार लूप तथा एक वृत्ताकार लूप एक समरूप (uniform) चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर की ओर नियत वेग से सामने दिये गये चित्र की भाँति गति कर रहे हैं:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 12
चुम्बकीय क्षेत्र लूपों के तल के लम्बवत् है। समझाइए कि चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर निकलते हुए किस लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल नियत रहेगा?
उत्तर:
आयताकार लूप को चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर नियत वेग v से गति कराते समय इसके क्षेत्रफल परिवर्तन की दर \(\frac{\mathrm{dA}}{\mathrm{dt}}\) नियत
होगी जबकि यह वृत्ताकार लूप के लिये नियत नहीं रहेगी, अतः सूत्र
∈ = – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
= \(\frac{-\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) (BA)
= – B \(\left(\frac{\mathrm{dA}}{\mathrm{dt}}\right)\)
के आधार पर नियत B के लिये आयताकार लूप में प्रेरित विद्युत बल नियत रहेगा।

प्रश्न 6.
एक संधारित्र C के आर-पार जुड़े एक धात्विक लूप की ओर दो दण्ड चुम्बक तेजी से चित्र की भाँति गति कराये जाते हैं। संधारित्र की धुवता बताइए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 13
उत्तर:
लूप का चुम्बक (1) के N ध्रुव की ओर वाला तल N ध्रुव की भाँति तथा चुम्बक (2) के S ध्रुव की ओर वाला तल S ध्रुव की भाँति व्यवहार करना चाहिए जिससे कि लेन्ज के नियमानुसार लूप में प्रेरित धारा चुम्बकों की इसकी ओर गति का विरोध प्रतिकर्षण बल लगाकर कर सके।
अतः चुम्बक (1) की ओर से देखने पर लूप में धारा A से B की ओर (वामावर्त) प्रवाहित होनी चाहिए तथा चुम्बक (2) की ओर से देखने पर धारा दक्षिणावर्त प्रवाहित होगी। अतः संधारित्र C की A प्लेट B प्लेट की अपेक्षा धनात्मक विभव पर होगी। इसलिए A धनात्मक तथा B ऋणात्मक विभव पर होंगे।

प्रश्न 7.
सामने दिये गये चित्र में दो कुण्डलियाँ P Q प्रदर्शित हैं। कुण्डली Q में क्षणिक प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी जबकि (i) स्विच K को बन्द किया जाता है। (ii) स्विच
K को कुछ देर बाद पुनः खोला जाता है।
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उत्तर:
(i) वामावर्त (ii) दक्षिणावर्त।

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प्रश्न 8.
एक साइकिल में लगा लैम्प, डायनेमो से जलता है। साइकिल को तेज चलाने पर लैम्प तेज प्रकाश से जलता है तथा धीरे चलाने पर धीमे प्रकाश से जलता है, क्यों?
उत्तर:
डायनेमो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है। साइकिल को तेज चलाने से डायनेमो में चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर \(\left(\frac{\Delta \phi_{\mathrm{B}}}{\Delta t}\right)\) बढ़ जाती है ε α \(\left(\frac{\Delta \phi_{\mathrm{B}}}{\Delta t}\right)\) जिससे प्रेरित वि. वा. बल का मान बढ़ जाता अतः बल्ब तेज प्रकाश से जलता है।
(डायनेमो में प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र e = (NBAω) sin ωt है। साइकिल तेज चलने से ७ का मान बढ़ता है तथा धीमे चलने से 60 का मान कम होता है ।)

प्रश्न 9.
चित्र त्रिज्या के वृत्ताकार लूप KLMN में प्रेरित धारा का परिमाण क्या होगा यदि सीधे तार PQ में 1 ऐम्पियर परिमाण की स्थायी धारा प्रवाहित की जाती है?
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उत्तर:
शून्य, क्योंकि PQ में धारा स्थायी होने से इसके निकट रखे लूप से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं होगा अतः कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी।

प्रश्न 10.
संलग्न चित्र में वृद्धि हो प्रदर्शित तार xy में x से y की ओर वैद्युत धारा के परिमाण में रही है। तार के समीप रखे लूप में क्या कोई धारा प्रेरित होगी?
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उत्तर:
हाँ, प्रेरित धारा की दिशा दक्षिणावर्त होगी। दायें हाथ के अँगूठे के नियमानुसार तार xy में धारा के कारण लूप से गुजरने वाला चुम्बकीय क्षेत्र लूप के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर होगा और लेंज के नियमानुसार लूप में धारा की दिशा ऐसी होगी जो इस क्षेत्र में धारा को बढ़ने (अर्थात् तार xy में धारा के बढ़ने का विरोध करे।

प्रश्न 11.
चुम्बकीय फ्लक्स Φ तथा वैद्युत धारा I के बीच ग्राफ दो प्रेरकों (Inductors) A तथा B के लिए चित्र में दिये गये हैं। किसके लिए स्व-प्रेरकत्व का मान अधिक होगा?
उत्तर:
चूँकि ¢ = LI⇒ L = ¢/I
तथा ¢ = LI ⇒ ó ∝ I, अतः तथा
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 17
I के बीच ग्राफ सरल रेखा है तथा इसका ढाल 0/1 प्रेरक के स्व- प्रेरकत्व को प्रदर्शित करेगा। चूँकि A के लिए B की अपेक्षा ग्राफ का ढाल अधिक है। अतः A का स्व-प्रेरकत्व अधिक होगा।

प्रश्न 12.
भँवर धाराओं के कोई दो अनुप्रयोग समझाइए।
उत्तर:
भँवर धाराओं के दो अनुप्रयोग:
(1) अवमंदन में भँवर धाराओं के उपयोग से चल कुण्डली धारामापी को रुद्ध दोल बना दिया जाता है। ऐसा करने के लिए चल- कुण्डली धारामापी की कुण्डली को हल्की धातु (जैसे ऐलुमिनियम) की क्रोड पर लपेटा जाता है। जब कुण्डली स्थायी चुम्बक के क्षेत्र में घूमती है तो कुण्डली की क्रोड में भँवर धारायें उत्पन्न होती हैं ये भँवर धारायें लेंज के नियम का पालन करते हुए कुण्डली की घूर्णन गति का विरोध करती हैं जिससे कुण्डली शीघ्र ही विरामावस्था प्राप्त कर लेती है।
(2) प्रेरण भट्टी में प्रेरण भट्टी में जिस धातु को गरम करना या पिघलाना होता है, उसे तीव्र गति से परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र में क्रूसिबल में रख दिया जाता है। यह चुम्बकीय क्षेत्र उच्च आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा से उत्पन्न किया जाता है। इस विधि से जो भँवर धारायें उत्पन्न होती हैं. उनसे धातु इतनी गरम हो जाती है कि वह पिघल जाये। यह विधि अयस्क में से धातु निष्कर्षण के लिए काम में ली जाती है।

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प्रश्न 13.
L1 व L2 स्वप्रेरकत्व वाली कुण्डलियों के मध्य महत्तम अन्योन्य प्रेरकत्व क्या होगा ?
उत्तर:
जब एक कुण्डली पर दूसरी कुण्डली को लपेटा जाता है। तो दोनों कुण्डलियों के पूर्ण रूप से युग्मित होने के कारण अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान अधिकतम होता है। फलस्वरूप प्रेरित वि. वा. बल का मान भी अधिकतम होता है। जब दोनों कुण्डलियों को किसी अन्य प्रकार से लपेटने पर अन्योन्य प्रेरण गुणांक व प्रेरित वि.वा. बल अधिकतम नहीं हो पाते क्योंकि दोनों कुण्डलियों में फ्लक्स की सम्बद्धता पूर्ण रूप से नहीं होती है। दो कुण्डली जिनके प्रेरकत्व L1 तथा L2 हैं और उनका अन्योन्य प्रेरण M है। तब L1, L2 और M में सम्बन्ध
M = = K√L1L2
जहाँ K कुण्डलियों
(परिनालिकाओं) का युग्मन गुणांक है। आदर्श स्थिति में K = 1
इसलिये M का अधिकतम मान \(\sqrt{\mathrm{L}_1 \mathrm{~L}_2}\) होगा।

प्रश्न 14.
दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक किन- किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
दो कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरण गुणांक जिन कारकों पर निर्भर करता है वे हैं:
(i) कुण्डलियों की ज्यामिति पर जैसे आकार, आकृति, उनके फेरों की संख्या, उनके अनुप्रस्थ काट आदि।
(ii) दो कुण्डलियों के बीच की दूरी।
(iii) दो कुण्डलियों की सापेक्ष दिशाओं पर
(iv) दो कुण्डलियों के क्रोडों के पदार्थ पर

प्रश्न 15.
वास्तविक ट्रान्सफॉर्मर में अल्प ऊर्जा क्षय के कोई दो कारण समझाइए।
उत्तर:
ट्रांसफार्मरों में निम्नलिखित कारणों से अल्प मात्रा में ऊर्जा क्षय होता है:
(i) फ्लक्स क्षरण कुछ फ्लक्स हमेशा क्षरित होता ही रहता है। अर्थात् क्रोड के खराब अभिकल्पन या इसमें रही वायु रिक्ति के कारण प्राथमिक कुण्डली का पूरा फ्लक्स द्वितीयक कुण्डली से नहीं गुजरता है। प्राथमिक और द्वितीयक कुण्डलियों को एक-दूसरे के ऊपर लपेटकर फ्लक्स क्षरण को कम किया जाता है।
(ii) कुण्डलनों का प्रतिरोध- कुण्डलियाँ बनाने में लगे हुए तारों का कुछ न कुछ प्रतिरोध होता ही है और इसलिए इन तारों में उत्पन्न ऊष्मा (I2R) के कारण ऊर्जा क्षय होता है। उच्च धारा, निम्न वोल्टता कुण्डलनों में मोटे तार का उपयोग करके इनमें होने वाली ऊर्जा क्षय को कम किया जा सकता है।
(iii) भँवर धाराएँ – प्रत्यावर्ती चुम्बकीय फ्लक्स लौह क्रोड में भँवर धाराएँ प्रेरित करके इसे गर्म कर देता है। स्तरित क्रोड का उपयोग करके इस प्रभाव को कम किया जाता है।
(iv) शैथिल्य क्षय-प्रत्यावर्ती चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा क्रोड का चुम्बकन बार-बार उत्क्रमित होता है। इस प्रक्रिया में व्यय होने वाली ऊर्जा क्रोड में ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है। कम शैथिल्य क्षय वाले पदार्थ का क्रोड में उपयोग करके इस प्रभाव को कम रखा जाता है। (नोट – छात्र यहाँ पर अल्प ऊर्जा क्षय के कोई भी दो कारण दे सकते हैं।)

प्रश्न 16.
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के लेंज नियम का कथन लिखिए। पूर्व से पश्चिम दिशा में स्थित कोई 2 मी. लम्बा सीधा क्षैतिज चालक तार 0.3 x 104 टेसला के पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक के लम्बवत 5 मी/से की चाल से गिर रहा है। तार के सिरों के मध्य प्रेरित विद्युत वाहक बल के तात्क्षणिक मान की गणना कीजिए।
उत्तर:
लेंज का नियम:
“विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की घटना में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल की ध्रुवता इस प्रकार होती है कि इससे उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा द्वारा परिपथ में स्थापित चुम्बकीय फ्लक्स अपने कारण
का विरोध करता है या मूल चुम्बकीय फ्लक्स के उस परिवर्तन का विरोध करता है, जिसके कारण प्रेरित वि.वा. बल उत्पन्न होता है।”
E α – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
या
E = – \(\frac{\mathrm{kd} \phi}{\mathrm{dt}}\)
यहाँ पर k एक समानुपाती स्थिरांक है जिसका मान 1 होता है। ऋण चिन्ह प्रदर्शित करता है कि प्रेरित वि. वा. बल सदैव फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है।
दिया गया है:
l = 2 मी.
BE = 0.3 x 104 टेसला
v = 5 मी/से
माना तार में प्रेरित तात्क्षणिक विद्युत वाहक बल का मान = E
= B/v sin 6 का प्रयोग करने पर
E = BElv sin 90°
मान रखने पर
E= (0.3 × 104) × 2 × 5 × 1
∴ sin 90° = 1
= 3 x 104 वोल्ट उत्तर

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
जब किसी कुण्डली में 2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसमें 40 मिली वेबर का चुम्बकीय फ्लक्स उत्पन्न होता है। कुण्डली का स्व-प्रेरकत्व क्या है?
उत्तर:
L = \(\frac{N \phi}{I}\) = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 17-1
= 20 x 10-3 वेबर प्रति ऐम्पियर
= 20 x 10-3 हेनरी
= 20 मिली. हेनरी

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प्रश्न 2.
यदि किसी परिनालिका में धारा परिवर्तन की दर 4 ऐम्पियर सेकण्ड होने पर उसमें 20 मिली वोल्ट का विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है, तो परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व क्या होगा?
उत्तर:
| ε | = L \(\frac{\Delta \mathrm{I}}{\Delta \mathrm{t}}\)
⇒ L = \(\frac{\frac{|\varepsilon|}{\Delta I}}{\frac{\Delta t}{\Delta t}}\)
L = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 18
= 5 × 10-3
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 19
= 5 x 10-3 हेनरी = 5 मिली. हेनरी

प्रश्न 3.
2 हेनरी की एक चोक कुण्डली से प्रवाहित होने वाली धारा 5 ऐम्पियर प्रति सेकण्ड की दर से घट रही है। कुण्डली के सिरों के बीच उत्पन्न विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
यहाँ कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक L = 2 हेनरी तथा कुण्डली में धारा परिवर्तन की दर (\(\Delta \mathrm{I} / \Delta \mathrm{t}\)) = 5 ऐम्पियर/सेकण्ड (यहाँ. ऋण चिह्न धारा घटने का प्रतीक है)। अतः कुण्डली के सिरों के बीच उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल
ε = – L(\(\Delta \mathrm{I} / \Delta \mathrm{t}\))
= -2 x (-5) वोल्ट
= 10 वोल्ट

प्रश्न 4.
R त्रिज्या की एक बड़ी कुण्डली तथा r त्रिज्या की छोटी कुण्डली एक-दूसरे के निकट रखी हैं। यदि इस युग्म के लिये अन्योन्य प्रेरण गुणांक 1 मिली. हेनरी हो तो बड़ी कुण्डली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स क्या होगा जबकि छोटी कुण्डली में 0.5A की धारा प्रवाहित होती है? जब छोटी कुण्डली में धारा शून्य हो तो बड़ी कुण्डली पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
दिया है:
M = 1 मिली. हेनरी I, = 0.5 A
= 10-3 हेनरी
∴ बड़ी कुण्डली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स
Φ2 = MI1 = 105 x 0.5
= 5.0 x 104 वेबर
जब छोटी कुण्डली में फ्लक्स में कमी के कारण बड़ी उत्पन्न होगा। धारा शून्य हो जाती है तो चुम्बकीय कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल

प्रश्न 5.
किसी कुण्डली के तल से लम्बवत् गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स निम्नलिखित सम्बन्ध के अनुसार समय के साथ बदल रहा है Φ = (5t3 + 4t2 + 2t – 5) वेबर = 2 सेकण्ड पर कुण्डली में प्रेरित धारा का मान ज्ञात कीजिये, जबकि कुण्डली का प्रतिरोध 5 ओम है।
उत्तर:
कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण
ε = \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\) = \(\frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) (5t3 + 4t2 + 2t5)
= 5 × 3t2 + 4 × 2t + 2 × 1 – 0 = ( 15t2 + 8t + 2) वोल्ट
t = 2 सेकण्ड पर ε = 60 + 16 + 2 = 78 वोल्ट
वोल्टकुण्डली का प्रतिरोध R = 52
अतः कुण्डली में प्रेरित धारा I = \(\frac{\varepsilon}{\mathrm{R}}\)
= 15.6 ऐम्पियर

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प्रश्न 6.
ताँबे की एक वृत्ताकार चकती की त्रिज्या 10 सेमी. है। यह इसके केन्द्र से गुजरने वाली तथा इसके तल के लम्बवत् अक्ष के परितः 20 रेडियन/सेकण्ड की दर से घूम रही है। 0.2 टेस्ला का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र चकती के लम्बवत् कार्य कर रहा है। (i) चकती की अक्ष तथा परिधि के बीच उत्पन्न विभवान्तर ज्ञात कीजिए। (ii) यदि चकती का प्रतिरोध 202 हो तो प्रेरितं धारा क्या होगी?
उत्तर:
यहाँ चकती की त्रिज्या R = 10 सेमी
= 0.10 मीटर,
चकती का कोणीय वेग = 20π रे/से,
चुम्बकीय क्षेत्र B = 0.2 टेस्ला, चकती का प्रतिरोध R = 2Ω है।
(i) चकती द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र को काटते हुए एक चक्कर पूरा करने का समय ∆t = 2πω तथा एक चक्कर पूरा करने में तय किया गया क्षेत्रफल ∆A = πr2 होगा अतः इससे बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण इसकी अक्ष तथा परिधि के बीच उत्पन्न विभवान्तर
(गतिक विद्युत वाहक बल)
V= | ε | = \(\frac{\Delta \phi}{\Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{\Delta(\mathbf{B A})}{\Delta \mathrm{t}}\) = B.\(\frac{\Delta(\mathbf{B A})}{\Delta \mathrm{t}}\)
= \(\frac{\mathrm{B} \times \pi r^2}{2 \pi / \omega}\) = 1/2Br2ω
ज्ञात मान रखने पर,
V = 1⁄2(0.2)(0.10)ω x 20 वोल्ट
= 0.1 x (0.10)ω × 20 x 3.14 वोल्ट = 0.0628 वोल्ट

(ii) प्रेरित धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) =
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 20
= 0.0314 ऐम्पियर

प्रश्न 7.
10 सेमी. भुजा का धातु तार का एक वर्गाकार लूप जिसका प्रतिरोध 1 ओम है, एक चुम्बकीय क्षेत्र में नियत वेग Vg 200 वेबर / मीटर2 के एकसमान से चित्र की भाँति चलाया जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर है। यह लूप 362 मान के प्रतिरोधकों के एक नेटवर्क से जुड़ा है तार OS तथा तार PQ के प्रतिरोध नगण्य हैं। लूप में 1 ऐम्पियर की स्थायी धारा प्रवाहित होने के लिए लूप की चाल का मान क्या होना चाहिए? लूप में धारा की दिशा भी बताइए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 21
उत्तर:
चित्र से स्पष्ट है कि प्रतिरोधों का नेटवर्क एक सन्तुलित व्हीटस्टोन सेतु है। अतः AC भुजा (विकर्ण) में लगा 302 प्रतिरोध प्रभावहीन होगा। QA व AS आपस में श्रेणीक्रम में हैं। इसलिये श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध माना R1 है
∴ R1 = 3 + 3 = 62
और QC व CS के श्रेणीक्रम संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R2 (माना) = 3 + 3 = 6Ω
अब R1 व R2 समान्तर क्रम में होंगे जिसका तुल्य प्रतिरोध
R = 3.002
अर्थात् लूप का प्रतिरोध 152 है।
अतः सम्पूर्ण परिपथ (नेटवर्क सहित लूप) का कुल प्रतिरोध R = R’ + 1 = 32 + 12 = 42
चुम्बकीय क्षेत्र में लूप की गति के कारण परिपथ में उत्पन्न
प्रेरित विद्युत वाहक बल ε = Bv0l
अतः
लूप में धारा I = ε/R = \(\frac{\mathrm{B} v_0 l}{\mathrm{R}}\)
∴ लूप की चाल Vo = \(\frac{\mathrm{I} \times \mathrm{R}}{\mathrm{B} \times l}\) …………(1)
यहाँ I = 1 मिली. ऐम्पियर = 10-3 ऐम्पियर, R = 4Ω, B = 2 वेबर/मीटर2 तथा l = 0.1 मीटर
ये सभी मान समीकरण (1) में रखने पर
v = \(\left(\frac{10^{-3} \times 4}{2 \times 0.1}\right)\) मी./से.
= 2.0 x 10-2
= 2 सेमी / से.

प्रश्न 8.
50/π वर्ग सेमी. आकार की 200 फेरों की वर्गाकार कुण्डली 2.0 वेबर / मीटर2 के चुम्बकीय क्षेत्र में 1200 चक्कर प्रति मिनट की दर से घुमायी जा रही है। कुण्डली में प्रेरित अधिकतम वि. वा. बल का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
A = 50\(\frac{50}{\pi}\) वर्ग सेमी.
A = \(\frac{50}{\pi}\) x 104 वर्ग मीटर
N = 200 फेरे
B = 2.0 वेबर/मीटर2
f = \(\frac{1200}{60}\) चक्कर/से.
= 20 चक्कर/से.
अतः ω = 2πf = 2 x π x 20 = 40π रेडियन / से.
वि.वा. बल का अधिकतम मान ε0 = NBAω
∴ ε0 = 200 × 2 × \(\frac{50}{\pi}\) x 104 x 40
= 80 वोल्ट

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक दण्ड चुम्बक उत्तर-दक्षिण दिशा में इस प्रकार रखा जाता है कि उसका उत्तरी ध्रुव उत्तर की ओर है। शून्य चुम्बकीय क्षेत्र के बिन्दुओं की दिशा चुम्बक के केन्द्र से किस ओर होगी
(अ) उत्तर-दक्षिण
(ब) पूर्व-पश्चिम
(स) उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण-पश्चिम
(द) उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण-पूर्व
उत्तर:
(ब) पूर्व-पश्चिम

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 2.
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है:
(अ) चुम्बकीय ध्रुवों पर
(ब) भौगोलिक ध्रुवों पर
(स) प्रत्येक स्थान पर
(द) चुम्बकीय निरक्ष पर
उत्तर:
(द) चुम्बकीय निरक्ष पर

प्रश्न 3.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर रखी चुम्बकीय सूई को 60° घुमाने में W कार्य करना पड़ता है। इस स्थिति में सूई को बनाये रखने के लिये आवश्यक बल आघूर्ण होगा:
(अ) √3W
(ब) W
(स) \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) W
(द) 2W
उत्तर:
(अ) √3W

प्रश्न 4.
एक r त्रिज्या की वृत्ताकार कुण्डली में i धारा बह रही है। इसमें तार के n फेरे हैं। इसका चुम्बकीय आघूर्ण. r के साथ परिवर्तित होता है। जैसे:
(अ) \(\frac{1}{\mathrm{r}^2}\)
(ब) \(\frac{1}{r}\)
(स) r
(द) r2
उत्तर:
(द) r2

प्रश्न 5.
एक चुम्बकीय लोहे के तार की लम्बाई । एवं चुम्बकीय आघूर्ण m है । यदि इसे L आकृति में मोड़ने पर इसकी प्रत्येक भुजा समान लम्बाई की रहती है तो नवीन आकृति का चुम्बकीय आघूर्ण होगा:
(अ) m
(ब) \(\frac{\mathrm{m}}{2}\)
(स) √2m
(द) \(\frac{\mathrm{m}}{\sqrt{2}}\)
उत्तर:
(द) \(\frac{\mathrm{m}}{\sqrt{2}}\)

प्रश्न 6.
एक पतले दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण M है। यदि इसे पहले लम्बाई के लम्बवत् और फिर चौड़ाई के लम्बवत् काटा जाये तो प्राप्त टुकड़े का चुम्बकीय आघूर्ण होगा:
(अ) \(\frac{\mathrm{m}}{2}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{m}}{4}\)
(स) m
(द) 2m
उत्तर:
(ब) \(\frac{\mathrm{m}}{4}\)

प्रश्न 7.
यदि दो एकांक प्रबलता (1-Am) के चुम्बकीय ध्रुव के मध्य की दूरी 1 मीटर है अतः इनके मध्य लगने वाले बल का मान है:
(अ) 4π x 107 N
(ब) \(\frac{4 \pi}{10^{-7}}\) N
(स) 107 N
(द) \(\frac{10^{-7}}{4 \pi}\) N
उत्तर:
(स) 107 N

प्रश्न 8.
एक छोटे चुम्बक के कारण r दूरी पर उसकी अक्षीय एवं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की निरक्षीय स्थिति में स्थित बिन्दुओं तीव्रताओं का अनुपात होगा:
(अ) 1 : 2
(ब) 2 : 1
(स) 1 : 4
(द) 4 : 1
उत्तर:
(ब) 2 : 1

प्रश्न 9.
चुम्बकीय आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\) के एक चुम्बक दण्ड को \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर लगने वाले बल आघूर्ण का मान होगा:
(अ) \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\) × \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\)
(ब) \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) × \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\)
(स) \(\overrightarrow{\mathrm{m}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{B}}\)
(द) \(\frac{\overrightarrow{\mathrm{m}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}}{\sqrt{2}}\)
उत्तर:
(अ) \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\) × \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 10.
नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण मुख्य क्वान्टम संख्या n पर किस प्रकार निर्भर करता है?
(अ) μ α n
(ब) μ α 1/n
(स) μ α n2
(द) μ α \(\frac{1}{\mathrm{n}^2}\)
उत्तर:
(अ) μ α n

प्रश्न 11.
एक वर्गाकार धारावाही लूप एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाया गया, जो इसके तल में कार्यरत है। यदि लूप की एक भुजा पर बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) है, तो शेष तीन भुजाओं पर परिणामी बल होगा:
(अ) 3 \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\)
(ब) \(-\vec{F}\)
(स) \(-3 \vec{F}\)
(द) \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\)
उत्तर:
(ब) \(-\vec{F}\)

प्रश्न 12.
किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर एवं भौगोलिक याम्योत्तर के मध्य कोण कहलाता है:
(अ) नमन कोण
(ब) क्रान्तिक कोण
(स) दिक्पात कोण
(द) नति कोण।
उत्तर:
(स) दिक्पात कोण

प्रश्न 13.
चुम्बकीय ध्रुवों पर नति का कोण होता है:
(अ) 0°
(ब) 30°
(स) 45°
(द) 90°
उत्तर:
(द) 90°

प्रश्न 14.
यदि किसी स्थान पर पृथ्वी के क्षैतिज घटक Bv के मान समान हैं। अतः उस स्थान पर नमन क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर घटक BH एवं कोण का मान है अतः उस स्थान पर नमन कोण का मान है:
(अ) 30°
(ब) 45°
(स) 60°
(द) 90°
उत्तर:
(ब) 45°

प्रश्न 15.
चुम्बकीय सुई सुरक्षित रह सकती है:
(अ) लोहे के बक्से में
(ब) लकड़ी के बक्से में
(स) धातु के बक्से में
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) लोहे के बक्से में

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बक में क्रोड कच्चे इसकी लोहे की बनायी जाती है, क्योंकि इसकी
(अ) प्रवृत्ति तथा धारणशीलता अधिक होती है।
(ब) प्रवृत्ति अधिक तथा धारणशीलता कम होती है।
(स) प्रवृत्ति व धारणशीलता दोनों कम होती हैं।
(द) धारणशीलता अधिक व प्रवृत्ति कम होती है।
उत्तर:
(ब) प्रवृत्ति अधिक तथा धारणशीलता कम होती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 17.
ताँबा कैसा पदार्थ है?
(अ) प्रतिचुम्बकीय
(ब) अनुचुम्बकीय
(स) लौह चुम्बकीय
(द) अचुम्बकीय
उत्तर:
(अ) प्रतिचुम्बकीय

प्रश्न 18.
चुम्बकीय पदार्थों का वह व्यवहार जिसके फलस्वरूप चुम्बकीय प्रेरण B चुम्बकन क्षेत्र H से पीछे रहता है, कहलाता है:
(अ) चुम्बकीय प्रवृत्ति
(ब) चुम्बकीय शैथिल्य
(स) निग्राहिता
(द) धारणशीलता।
उत्तर:
(ब) चुम्बकीय शैथिल्य

प्रश्न 19.
विपरीत दिशा में चुम्बकन क्षेत्र H का यह मान जिस पर चुम्बकीय प्रेरण B का मान शून्य हो जाता है, कहलाता है:
(अ) शैथिल्य हास
(ब) धारणशीलता
(स) निग्राहिता
(द) चुम्बकशीलता
उत्तर:
(स) निग्राहिता

प्रश्न 20.
अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति x एवं परम ताप T में सम्बन्ध है:
(अ) \(\chi \propto \frac{1}{T}\)
(ब) χ α T
(स) χ α \(\frac{1}{T^2}\)
(द) χ α T2
उत्तर:
(अ) \(\chi \propto \frac{1}{T}\)

प्रश्न 21.
अल्प चुम्बकन क्षेत्र (H) के लिए चुम्बकन I किस प्रकार निर्भर करता है:
(अ) I α H
(ब) I α \(1 / \mathrm{H}^2\)
(स) I α \(1 / \mathrm{H}\)
(द) I α H2
उत्तर:
(अ) I α H

प्रश्न 22.
चुम्बकीय प्रवृत्ति तथा चुम्बकनशीलता में सही सम्बन्ध है:
(अ) Xm = 14 – 1
(ब) Xm = 4 + 1
(स) X = +1
(द) Xm
उत्तर:
(अ) Xm = 14 – 1

प्रश्न 23.
पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों तथा विषुवत् पर नमन कोण क्रमशः होते हैं:
(अ) 0° तथा 90°
(ब) 90° तथा 0°
(स) 180° तथा 0°
(द) 0° तथा 180°
उत्तर:
(ब) 90° तथा 0°

प्रश्न 24.
एक विद्युत चुम्बक बना होता है:
(अ) Cu का
(ब) Al का
(स) स्टील का
(द) नरम लोहे का
उत्तर:
(द) नरम लोहे का

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 25.
निम्न में सही संबंध है:
(अ) \(\frac{B}{\mu_0}\) + I = H
(ब) \(\frac{B}{\mu_0}\) – 1 = H
(स) \(\frac{B}{\mu_0}\) + H = I
(द) \(\frac{B}{\mu_0}\) + H = -1
उत्तर:
(ब) \(\frac{B}{\mu_0}\) – 1 = H

प्रश्न 26.
लौह चुम्बकीय पदार्थों के लिये:
(अ) पारगम्यता बहुत अधिक तथा प्रवृत्ति धनात्मक व अधिक होती है।
(ब) पारगम्यता बहुत अधिक तथा प्रवृत्ति ऋणात्मक व कम होती है।
(स) पारगम्यता बहुत कम तथा प्रवृत्ति धनात्मक व अधिक होती है।
(द) पारगम्यता बहुत कम तथा प्रवृत्ति ऋणात्मक व कम होती है।
उत्तर:
(अ) पारगम्यता बहुत अधिक तथा प्रवृत्ति धनात्मक व अधिक होती है।

प्रश्न 27.
पृथ्वी के तल पर क्षैतिज क्षेत्र वाले बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा को कहते हैं:
(अ) चुम्बकीय याम्योत्तर
(ब) चुम्बकीय अक्ष
(स) चुम्बकीय रेखा
(द) चुम्बकीय निरक्ष
उत्तर:
(द) चुम्बकीय निरक्ष

प्रश्न 28.
चुम्बकीय याम्योत्तर और भौगोलिक याम्योत्तर के बीच के कोण को कहते हैं:
(अ) चुम्बकीय नति
(ब) चुम्बकीय दिक्पात
(स) चुम्बकीय आघूर्ण
(द) चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति
उत्तर:
(ब) चुम्बकीय दिक्पात

प्रश्न 29.
निम्न में से कौनसा कथन यथार्थ नहीं है?
(अ) प्रतिचुम्बकत्व सब पदार्थों का गुण है।
(ब) क्यूरी ताप पर लौह-चुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय बन जाते हैं।
(स) वे परमाणु जिनकी आन्तरिक कक्षायें अपूर्ण होती हैं, अनुचुम्बकीय होते हैं।
(द) लौह-चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति X क्यूरी ताप पर शून्य होती है।
उत्तर:
(द) लौह-चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति X क्यूरी ताप पर शून्य होती है।

प्रश्न 30.
आपेक्षिक पारगम्यता की इकाई होती है:
(अ) वेबर/ मी.
(ब) इकाई रहित
(स) हेनरी/मीटर
(द) ऐम्पियर/मीटर
उत्तर:
(ब) इकाई रहित

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 31.
किसी पदार्थ की अनुचुम्बकीय प्रवृत्ति χ का मान 9 है तो आपेक्षिक पारगम्यता μr का मान होगा:
(अ) 10
(ब) 0.1
(स) 9
(द) 11
उत्तर:
(अ) 10

प्रश्न 32.
1 टेसला बराबर होता है:
(अ) 10-7 गाउस
(ब) 10-4 गाउस
(स) 104 गाउस
(द) 10-8 गाउस
उत्तर:
(ब) 10-4 गाउस

प्रश्न 33.
ताप जिससे नीचे चुम्बकीय पदार्थ लौह-चुम्बकीय तथा जिसके ऊपर अनुचुम्बकीय होता है, कहलाता है:
(अ) उत्क्रमण ताप
(ब) केल्विन ताप
(स) क्यूरी ताप
(द) उदासीन ताप
उत्तर:
(स) क्यूरी ताप

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
उस भौतिक राशि का नाम बताइये जिसका मात्रक न्यूटन मीटर टेसला है यह अदिश राशि है अथवा सदिश?
उत्तर:
τmax = mB = m = \(\frac{\tau_{\max }}{\mathrm{B}}\)
इस सूत्र के आधार पर M का SI मात्रक = न्यूटन मीटर टेसला-1
अतः न्यूटन मीटर टेसला-1 चुम्बकीय आघूर्ण का SI मात्रक है। अतः एक सदिश राशि है।

प्रश्न 2.
समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में एक चुम्बकीय द्विध्रुव को किस प्रकार रखा जाये ताकि इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम हो?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र के विसमान्तर अर्थात् इसका चुम्बकीय आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{m}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{B}}\) की दिशा के विपरीत दिशा में हो।
इस स्थिति में
θ = 180° तथा U = mB cosθ
U = -mB cos 180° = -mB x (-1) U = mB

प्रश्न 3.
चुम्बकीय याम्योत्तर किसे कहते हैं?
उत्तर:
दण्ड चुम्बक के चुम्बकीय अक्ष के लम्बवत् गुजरने वाले ऊर्ध्व तल को चुम्बकीय याम्योत्तर कहते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 4.
चुम्बकीय आघूर्ण को परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
किसी चुम्बक की ध्रुव प्राबल्यता एवं प्रभावी लम्बाई के गुणनफल को चुम्बकीय आघूर्ण कहते हैं। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है। इसका मात्रक ऐम्पियर मीटर होता है।

प्रश्न 5.
चुम्बकीय आघूर्ण \(\vec{m}\) के एक छोटे दण्ड चुम्बक से उसके अक्ष पर दूरी पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक लिखिये
उत्तर:
\(\vec{B}\) = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) × \(\frac{2 \overrightarrow{\mathrm{m}}}{\mathrm{r}^3}\)

प्रश्न 6.
चुम्बकीय आघूर्ण \(\vec{M}\) के छोटे दण्ड चुम्बक के निरक्ष पर r दूरी पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
\(\vec{B}\) = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) × \(\left(\frac{-\vec{m}}{r^3}\right)\)

प्रश्न 7.
लघुदण्ड चुम्बक के मध्य बिन्दु से अक्षीय तथा निरक्षीय स्थिति में समान दूरी पर स्थित बिन्दुओं पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रताओं में क्या अनुपात होता है?
उत्तर:
2 : 1
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 1

प्रश्न 8.
‘चुम्बकीय बल रेखायें बन्द वक्र बनाती हैं क्यों?
उत्तर:
चूँकि एकल चुम्बकीय ध्रुव का कोई अस्तित्व नहीं होता है अर्थात् उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव साथ-साथ होते हैं एवं चुम्बकीय बल रेखायें उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं तथा दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं इसलिये ये बन्द वक्र होती हैं।

प्रश्न 9.
उदासीन बिन्दु की परिभाषा दीजिये।
उत्तर:
ऐसे बिन्दु जिन पर चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र तथा पृथ्वी का क्षैतिज चुम्बकीय क्षेत्र का परिणामी क्षेत्र शून्य होता है, उन्हें उदासीन बिन्दु कहते हैं।

प्रश्न 10.
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक HE ऊर्ध्वाधर घटक ZE एवं इस स्थान पर नति कोण I के मध्य सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
tan I = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)

प्रश्न 11.
वर्ष के किस माह में दिक्पात कोण का मान उत्तरी गोलार्द्ध में न्यूनतम एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अधिकतम होता है?
उत्तर:
अगस्त माह में

प्रश्न 12.
दिक्पात कोण किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के कोण को दिक्पात कोण कहते हैं।

प्रश्न 13.
एक छड़ चुम्बक को किस प्रकार रखने पर उदासीन बिन्दु निरक्ष पर एवं अक्ष पर प्राप्त होगा?
उत्तर:
(i) चुम्बकीय याम्योत्तर में चुम्बक का उत्तरी ध्रुव उत्तर की ओर देखने पर उदासीन बिन्दु निरक्ष पर प्राप्त होता है।
(ii) चुम्बकीय याम्योत्तर में चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव उत्तर की ओर रखने पर उदासीन बिन्दु अक्ष पर बनता है।

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प्रश्न 14.
माध्यम की पारगम्यता एवं चुम्बकीय प्रवृत्ति में सम्बन्ध लिखो।
उत्तर:
μ = μ0(1 + x)

प्रश्न 15.
चुम्बकीय क्षेत्र B चुम्बकन क्षेत्र H एवं माध्यम की पारगम्यता μ के बीच सम्बन्ध लिखो।
उत्तर:
μ = \(\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}\)

प्रश्न 16.
पृथ्वी के चुम्बकीय तत्व क्या हैं?
उत्तर:
(1) दिक्पात कोण
(2) नति कोण
(3) क्षैतिज घटक।

प्रश्न 17.
पृथ्वी तल पर किस स्थान पर नति कोण का मान 90° होता है?
उत्तर:
पृथ्वी के ध्रुवों पर

प्रश्न 18.
पृथ्वी तल पर कहाँ पर नति कोण का मान शून्य होता हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय निरक्ष पर।

प्रश्न 19.
पृथ्वी तल के किस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक शून्य होता है तथा क्यों?
उत्तर:
चुम्बकीय निरक्ष पर (ZE = BEsin θ = BE sin 0° = 0]

प्रश्न 20.
चुम्बकीय पदार्थ जो किसी असमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रतिकर्षण बल अनुभव करते हैं, क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ।

प्रश्न 21.
अनुचुम्बकीय पदार्थ लिये कोई दो उदाहरण लिखिये।
उत्तर:
(i) कॉपर, क्लोराइड
(ii) मैंगनीज डाइऑक्साइड

प्रश्न 22.
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के कोई दो उदाहरण लिखिये।
उत्तर:
(i) पानी
(ii) पारा।

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प्रश्न 23.
चुम्बकन तीव्रता की परिभाषा लिखिये।
उत्तर:
पदार्थ के एकांक आयतन में उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण (m) को चुम्बकन की तीव्रता कहते हैं।
\(\overrightarrow{\mathrm{I}}\) = \(\frac{\overrightarrow{\mathrm{m}}}{\mathrm{V}}\)
यह सदिश राशि है इसका मात्रक A/m है।

प्रश्न 24.
चुम्बकीय पारगम्यता की परिभाषा लिखिये।
उत्तर:
पदार्थ के अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण B एवं चुम्बकीय क्षेत्र H के अनुपात को पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता कहते हैं।

प्रश्न 25.
चुम्बकीय प्रेरण B, चुम्बकीय क्षेत्र H एवं चुम्बकन तीव्रता I के मध्य का सम्बन्ध बतलाइये।
एवं
उत्तर:
B = (μ0)(H + I ) यहाँ μ0 = निर्वात् की चुम्बकशीलता।

प्रश्न 26.
आपेक्षिक पारगम्यता μr चुम्बकीय पारगम्यता μ निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता μ0 के मध्य का संबंध लिखिये।
उत्तर:
μr = \(\frac{\mu}{\mu_0}\) या μ = μ0 μr

प्रश्न 27.
धारणशीलता किसे कहते हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र H का मान शून्यं करने पर भी पदार्थ में चुम्बकत्व शेष बने रहने के गुण को धारणशीलता कहते हैं।

प्रश्न 28.
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु का नेट चुम्बकीय आघूर्ण कितना होता है?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 29.
किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकन तीव्रता ताप साथ किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर:
यह परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 30.
विद्युत चुम्बक बनाने के लिये नर्म लोहा क्यों प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
नर्म लोहे की चुम्बकशीलता अधिक तथा धारणशीलता कम होने के कारण।

प्रश्न 31.
जब किसी प्रतिचुम्बकीय पदार्थ को ठण्डा किया जाता है तो इसके चुम्बकत्व (Magnetisation) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकन तीव्रता ताप पर निर्भर नहीं करती। अतः ठण्डा करने का इसके चुम्बकन तीव्रता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 32.
किसी B-H वक्र के लिये शैथिल्य हास ज्ञात करने का सूत्र लिखिये।
उत्तर:
शैथिल्य हास (B-H) वक्र का क्षेत्रफल x पदार्थ की आयतन आवृति।

प्रश्न 33.
स्थायी चुम्बक बनाने के लिये इस्पात का उपयोग करते हैं। क्यों?
उत्तर:
चूँकि इस्पात की निग्राहिता एवं धारणशीलता अधिक है। यही कारण है कि इसका उपयोग स्थाई चुम्बक बनाने में किया जाता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 34.
क्यूरी का नियम क्या है?
उत्तर:
क्यूरी के नियम के अनुसार अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान उसके परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
χ α \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)
या χ = \(\frac{\mathrm{C}}{\mathrm{T}}\)
यहाँ ‘C’ एक नियतांक है जिसे क्यूरी नियतांक कहते हैं।

प्रश्न 35.
क्यूरी वाइस का नियम क्या है ?
उत्तर:
लौह-चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति की ताप पर निर्भरता क्यूरी – वाइस नियम द्वारा व्यक्त की जाती है।
x = \(\frac{C}{T-T_c}\)
यहाँ Tc = क्यूरी ताप है।

प्रश्न 36.
किसी चुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकीय क्षेत्र में एक चक्र पूरा होता है तो उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण B, चुम्बकीय क्षेत्र H से पीछे रहता है। चुम्बकीय प्रेरण के पिछड़ने को क्या कहते हैं?
उत्तर:
शैथिल्यता।

प्रश्न 37.
क्यूरी ताप की परिभाषा दीजिए। लोहे के लिए इसका मान लिखिए।
उत्तर:
क्यूरी ताप – वह ताप जिस पर या जिसके नीचे के ताप पर लौह- चुम्बकीय पदार्थ लौह-चुम्बकीय पदार्थ की तरह व्यवहार करता है तथा उससे ऊपर के ताप पर लौह चुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है, उस ताप को क्यूरी ताप कहते हैं। इसको हम Tc से प्रदर्शित करते हैं।
लोहे के लिए क्यूरी ताप Tc = 770°C (अर्थात 1043K) होता है।

प्रश्न 38.
लोहे का क्यूरी ताप कितना होता है?
उत्तर:
क्यूरी ताप 1043K

प्रश्न 39.
डोमेन सिद्धान्त (Domain Theory) के आधार पर कौनसे चुम्बकीय पदार्थों के चुम्बकत्व की व्याख्या की जाती है?
उत्तर:
लौह-चुम्बकीय पदार्थ।

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प्रश्न 40.
-0.2 चुम्बकीय प्रवृत्ति वाले चुम्बकीय पदार्थ की आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
चुम्बकीय प्रवृत्ति x = 0.2
आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता μr = ?
μr = 1 + x
= 1 – 0.2
= 0.8

प्रश्न 41.
जब किसी छड़ चुम्बक को उसकी अक्ष के लम्बवत् दो बराबर भागों में काटा जाता है, तो छड़ चुम्बक के (i) ध्रुव सामर्थ्य तथा (ii) चुम्बकीय आघूर्ण में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
(i) यदि किसी दण्ड चुम्बक को उसकी लम्बाई के अनुदिश दो समान भागों में काटा जाये तो अनुप्रस्थ काट आधा हो जाने के कारण प्रत्येक टुकड़े के दोनों ध्रुवों की ध्रुव प्राबल्यता आधी हो जायेगी। (ii) ऐसी स्थिति में प्रत्येक टुकड़े का चुम्बकीय आघूर्ण
m = qm x 2l
यहाँ पर
qm= \(\frac{\mathrm{m}}{2}\) अतः
m = \(\frac{\mathrm{q}_{\mathrm{m}}}{2}\) x 2l = qml = \(\frac{\mathrm{m}}{2}\) होगी।
चुम्बकीय आघूर्ण आधा हो जायेगा।

प्रश्न 42.
स्थायी चुम्बक बनाने के लिये प्रयुक्त पदार्थों की निग्राह्यता उच्च क्यों होनी चाहिये?
उत्तर:
इसका कारण है कि उच्च निग्राहयता के कारण ही पदार्थ का चुम्बकत्व ताप परिवर्तन के कारण नष्ट नहीं होता है।

प्रश्न 43.
इस्पात (steel) या एलनिको का प्रयोग स्थायी चुम्बक बनाने के लिये क्यों किया जाता है?
उत्तर:
इनकी निग्राह्यता उच्च होती है।

प्रश्न 44.
एक चुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति 1.9 x 105 है। यह किस प्रकार का पदार्थ है?
उत्तर:
क्योंकि चुम्बकीय प्रवृत्ति कम तथा धनात्मक है। अतः दिया गया पदार्थ अनुचुम्बकीय पदार्थ है।

प्रश्न 45.
एक स्थायी चुम्बक बनाने का सुगम तरीका संक्षेप में लिखिये स्थायी चुम्बक बनाने के लिये चुने गये उचित पदार्थों के दो गुण लिखिये।
उत्तर:
स्थायी चुम्बक बनाने का सबसे सुगम तरीका है कि एक फौलाद की छड़ को लेकर एक चुम्बक से रगड़ा जाये। स्थायी चुम्बक बनाने के लिये चुने गये उचित पदार्थ में निम्नलिखित दो गुण होने चाहिए
(i) उच्च धारणशीलता
(ii) उच्च निग्राहिता।

प्रश्न 46.
यदि चुम्बकीय एकल ध्रुवों का अस्तित्व होता तो चुम्बकत्व सम्बन्धी गाउस का नियम क्या रूप ग्रहण करता?
उत्तर:
किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स इस स्थिति में शून्य न होकर ध्रुव) है।
\(\int_{\mathrm{S}} \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d \mathrm{~S}}\) = μ0qm, जहाँ qm S से घिरा चुम्बकीय आवेश (एकल

प्रश्न 47.
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ किसे कहते हैं ? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जो पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में मामूली रूप से चुम्बकित हो जाते हैं तथा किसी शक्तिशाली चुम्बक के सिरों के पास लाये जाने पर कुछ प्रतिकर्षित होते हैं, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। इन पदार्थों का यह गुण प्रतिचुम्बकत्व कहलाता है।
उदाहरण: जस्ता (Zn). ताँबा (Cu), चाँदी (Ag), सोना (Au), आदि।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक चुम्बक की परिभाषा लिखिये और इसके दिशा निर्देशन व ध्रुव प्राबल्यता का गुण लिखिये।
उत्तर:
वह पदार्थ जो दूसरे चुम्बकीय पदार्थ लोहा आदि को आकर्षित कर सके और जब उसे स्वतन्त्र रूप से लटकाया जाए, तो यह उत्तर-दक्षिण दिशा में विराम कर सके इसके दो समान एवं विपरीत चुम्बकीय ध्रुव कुछ दूरी से विलगित होते हैं।
दिशा निर्देशन गुण: जब किसी छड़ चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक निलम्बित किया जाता है तो यह निश्चित दिशा में स्थिर हो जाता है, इसका एक सिरा उत्तर की ओर और दूसरा सिरा दक्षिण की ओर संरेखित होता है जिन्हें कि क्रमशः उत्तरी ध्रुव (N-Pole) तथा दक्षिणी ध्रुव (S-Pole) कहते हैं छड़ चुम्बक सदैव उत्क्षण (NS) दिशा प्रदर्शित करती है।
ध्रुव प्राबल्यता: चुम्बकीय ध्रुवों की चुम्बकत्व की प्रबलता को ध्रुव प्राबल्यता कहते हैं। छड़ चुम्बक के दोनों ध्रुवों की ध्रुव प्राबल्य समान होती है। यदि छड़ चुम्बक को उसके अक्ष के लम्बवत् दो भागों में विभक्त कर दिया जाये तो प्रत्येक भाग के ध्रुवों की ध्रुव प्राबल्य लगभग पूर्ण समान होगी लेकिन यदि छड़ चुम्बक को उसके अक्ष के अनुदिश दो बराबर भागों में अलग कर दिया जाये तो प्रत्येक भाग की ध्रुव प्राबल्य मूल छड़ चुम्बक की ध्रुव प्राबल्य की आधी होगी।

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प्रश्न 2.
चुम्बकीय बल रेखायें किसकी सहायता से खींची जाती हैं? इनकी चार प्रमुख विशेषतायें लिखिये।
उत्तर:
चुम्बकीय बल रेखायें लोहे के बुरादे अथवा चुम्बकीय सूई की सहायता से खींची जा सकती हैं। इनकी प्रमुख विशेषतायें निम्न हैं
(1) चुम्बकीय क्षेत्र में जिस स्थान पर गुजरने वाली बल रेखाओं की संख्या जितनी अधिक होती है, उतना ही उस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र होगा।
(2) दो बल रेखायें एक-दूसरे को नहीं काटती हैं।
(3) बल रेखा के किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती है।
(4) चुम्बक के बाहर ये चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से चलकर दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं। चुम्बक के भीतर इनका मार्ग दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होता है।

प्रश्न 3.
किसी m चुम्बकीय आघूर्ण वाले चुम्बक को पहले लम्बाई के लम्बवत् एवं फिर चौड़ाई के लम्बवत् n बराबर भागों में विभक्त किया जाये तो प्रत्येक भाग के चुम्बकीय आघूर्ण की गणना करो।
उत्तर:
प्रत्येक भाग का चुम्बकीय आघूर्ण
= \(\frac{\mathrm{m}}{\mathrm{n}}\) x \(\frac{L}{n}\) = \(\frac{\mathrm{mL}}{\mathrm{n}^2}\)

प्रश्न 4.
चुम्बकीय याम्योत्तर से क्या समझते हो?
उत्तर:
किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर वह काल्पनिक ऊर्ध्वाधर तल है जो कि स्वतन्त्रतापूर्वक लटके हुये चुम्बक या कीलकित चुम्बकीय अक्ष में से गुजरता है। यह उस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करता है तथा उसके चुम्बकीय ध्रुवों में से गुजरता है।

प्रश्न 5.
चुम्बकीय क्षेत्र स्थित छड़ चुम्बक के धुवों पर कार्यरत बल का मान व दिशा लिखो।
उत्तर:
जब किसी छड़ चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र में स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाया जाता है या कीलकित किया जाता है तो स्थिर अवस्था में इसके दोनों ध्रुवों पर एक बल कार्य करता है। इसकी दिशा चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर होती है। लेकिन ध्रुव N पर चुम्बकीय क्षेत्र की ओर जबकि ध्रुव S पर चुम्बकीय क्षेत्र के विपरीत दिशा में होती है। इस बल का मान \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = qm \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) होता है। अतः qm का मात्रक न्यूटन /टेसला होगा।

प्रश्न 6.
चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व क्या है? चुम्बकीय फ्लक्स एवं चुम्बकीय प्रेरण के मध्य संबंध स्थापित कीजिये।
उत्तर:
चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व बल रेखाओं लम्बवत् रखे इकाई क्षेत्रफल के पृष्ठ से गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या को चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व कहते हैं। यह एक सदिश राशि है
जिसे \(\vec{B}\) द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसे चुम्बकीय क्षेत्र या चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता या चुम्बकीय प्रेरण भी कहते हैं। चुम्बकीय प्रेरण का मात्रक वेबर/ मीटर2 या टेसला या न्यूटन / ऐम्पियर मीटर है।
यदि \(\vec{B}\) तीव्रता वाले चुम्बकीय क्षेत्र में किसी बिन्दु पर अल्प क्षेत्रफल δS वाला पृष्ठ स्थित है, तो उससे पारित या सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स δ¢B होगा।
δ¢B = \(\vec{B}\).δ\(\overrightarrow{\mathrm{S}}\) = Bδscosθ
तथा कुल सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स ¢B = \(\int_S\) \(\vec{B}\)δ\(\overrightarrow{\mathrm{S}}\)
चुम्बकीय फ्लक्स एक अदिश राशि है जबकि चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व एक सदिश राशि है।

प्रश्न 7.
एक दण्ड चुम्बक किसी एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखी है कि इसका चुम्बकीय आघूर्ण \(\vec{B}\) की दिशा से θ कोण पर है। इस विन्यास में इसकी स्थितिज ऊर्जा के लिये व्यंजक लिखिये यह कब न्यूनतम होगी?
उत्तर:
दण्ड चुम्बक के चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा इसकी अक्ष के अनुदिश होती है तथा यह \(\vec{B}\) से θ कोण बनाये हुये है। अतः इस स्थिति में इसकी स्थितिज ऊर्जा U = -mB cosθ
U के न्यूनतम के लिये θ = 0° तथा Umin = -mB cos 0°
= -mB
अतः जब \(\vec{M}\) तथा \(\vec{B}\) एक-दूसरे के समान्तर होते हैं तब U न्यूनतम होगी।

प्रश्न 8.
एक स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक वहाँ पर ऊर्ध्वाधर घटक के बराबर है उस स्थान पर नति कोण का मान ज्ञात कीजिये। उस स्थान पर क्षैतिज घटक तथा कुल चुम्बकीय क्षेत्र का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
tan I = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\) = \(\frac{Z_E}{Z_E}\)
I = tan 45°
∴ I = tan 45°
\(\frac{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{B}_{\mathrm{E}}}\) = \(\frac{\mathrm{B}_E \cos \theta}{\mathrm{B}_{\mathrm{E}}}\)
= cos θ = cos 45° = \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)[/latex]
∴ HE : BE = 1 : √2

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:
(i) नति कोण का अधिकतम मान क्या है? यह किन-किन स्थानों पर होता है?
(ii) पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक का मान कितना होता है?
उत्तर:
(i) 90°, पृथ्वी के उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवों पर,
(ii) शून्य
∵ HE = BE cosθ
= BE cos90°
= 0

प्रश्न 10.
दो पदार्थों के नाम लिखिये जिनमें एक की चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक तथा दूसरे की ऋणात्मक हो । ऋणात्मक चुम्बकीय प्रवृत्ति क्या प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
अनुचुम्बकीय पदार्थों (जैसे ऐलुमिनियम, कैल्सियम आदि) की चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों (जैसे- कॉपर, लैड आदि) की चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है। ऋणात्मक चुम्बकीय प्रवृत्ति का अर्थ है कि ये पदार्थ बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में चुम्बकित होते हैं।

प्रश्न 11.
भू-चुम्बकीय अवयवों के नाम लिखिए तथा उनमें से किन्हीं दो की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व की जानकारी के लिये जिन राशियों की आवश्यकता होती है, उन्हें उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व के अवयव कहते हैं, जो कि तीन हैं।
(i) दिक्पात का कोण ( Angle of declination)
(ii) नमन कोण (नति कोण) ( Angle of dip)
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के घटक (Components of earth’s magnetic field)
(i) दिक्पात का कोण- किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के न्यून कोण को दिक्पात का कोण कहते हैं। दिक्पात उच्चतर अक्षांशों पर अधिक एवं विषुवत् रेखा के पास कम होता है। भारत में दिक्पात का मान कम है।
(ii) नमन कोण (नति कोण) – यदि कोई चुम्बकीय सुई, एक क्षैतिज अक्ष पर इस प्रकार पूर्ण सन्तुलन में हो कि चुम्बकीय याम्योत्तर के तल में घूम सके तो यह सुई क्षैतिज से एक कोण बनायेगी, यह नमन कोण (नति कोण) कहलाता है। अतः नति कोण वह कोण है जो पृथ्वी का कुल चुम्बकीय क्षेत्र BE पृथ्वी
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र को की सतह से बनता है। घटक – पृथ्वी की सतह पर पूरी तरह निर्दिष्ट करने के लिए हमें तीन राशियों का विवरण देना होता है। ये हैं दिक्पात कोण D, नमन कोण I एवं पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव Hg ये पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के घटक कहलाते हैं।
यहाँ पर ऊर्ध्वाधर घटक ZE = BE sinI ……..(1)
क्षैतिज घटक HE = BE cos I ………(2)
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
tan I = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)
समीकरण (1) तथा (2) का वर्ग करके जोड़ने पर
ZE2 + HE2 = BE 2 (sin2I + cos2I) = BE 2

प्रश्न 12.
विभिन्न चुम्बकीय राशियों B, H, I, χ एवं के परस्पर सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
चुम्बकीय प्रवृत्ति X- किसी अल्प चुम्बकन क्षेत्र में पदार्थ की चुम्बकन तीव्रता (I) का मान चुम्बकन क्षेत्र (H) के समानुपाती होता है, अर्थात् I H
या
I = χH
या
χ = 1/H
यहाँ χ एक नियतांक है जिसे पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति कहते हैं। चुम्बकीय पारगम्यता – किसी माध्यम में चुम्बकीय बल रेखाओं के गुजरने की क्षमता को उस माध्यम की चुम्बकीय पारगम्यता अथवा चुम्बकशीलता कहते हैं। गणितीय दृष्टि से इसका मान पदार्थ ( माध्यम ) के अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण B एवं चुम्बकन क्षेत्र H के अनुपात के तुल्य होता है। इसे द्वारा व्यक्त करते हैं। यह एक अदिश राशि है।
μ = \(\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}\)
समीकरण (1) में (2) का भाग देने पर
\(\frac{\mu}{\chi}\) = \(\frac{\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}}{\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{H}}} .\)

प्रश्न 13.
तीनों प्रकार के चुम्बकीय पदार्थों के लिये I-H आरेखों को प्रदर्शित कीजिये इनसे इनकी प्रवृत्तियों के बारे में क्या निष्कर्ष प्राप्त होते हैं? अनुचुम्बकीय पदार्थ की प्रवृत्ति ताप के साथ किस प्रकार बदलती है?
उत्तर:
लौह-चुम्बकीय, अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिये आरेख को सामने चित्र में दिखाया गया है।
यदि
अर्थात् संख्यात्मक रूप में चुम्बकीय प्रवृत्ति उस पदार्थ में एकांक चुम्बकन क्षेत्र द्वारा प्रेरित चुम्बकन की तीव्रता के बराबर होती है। इसका मान धनात्मक ऋणात्मक होता है। विभिन्न पदार्थों के लिये इसका मान अलग-अलग होता है।
χ = 1/H
H = 1 एकांक हो तो
χ = 1
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 2
प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिये इसका मान अत्यल्प तथा ऋणात्मक होता है।
अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिये अत्यल्प तथा धनात्मक होता है। लौह-चुम्बकीय पदार्थों के लिये अत्यधिक तथा धनात्मक होता है। पदार्थों के लिये प्रवृत्ति (X) का मान ताप पर निर्भर करता है। ताप के बढ़ाने पर x का मान कम हो जाता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 14.
भू-चुम्बकीय अवयवों में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भू-चुम्बकीय अवयवों में परिवर्तन: भू-चुम्बकीय अवयवों के मान पृथ्वी के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न भिन्न ही नहीं होते बल्कि एक ही स्थान पर भी इनके मानों में नियमित एवं अनियमित रूप से परिवर्तन होते रहते हैं। ये परिवर्तन निम्न हैं-
(1) दीर्घकालिक परिवर्तन केल्विन के अनुसार भू-चुम्बकीय अवयवों के मान में समय के साथ-साथ धीरे-धीरे परिवर्तन आता है तथा लगभग हजार वर्ष बाद ये सभी अवयव पुनः अपने प्रारम्भिक मान पर आ जाते हैं। उनके अनुसार इस परिवर्तन का कारण चुम्बकीय ध्रुवों का भौगोलिक ध्रुवों के चारों ओर घूर्णन करना है।
(2) वार्षिक परिवर्तन: इन परिवर्तन चक्रों का चक्र एक वर्ष में पूरा होता है ये परिवर्तन एक विशेष माह में अधिकतम तथा एक अन्य विशेष माह में न्यूनतम होते हैं तथा इनकी प्रकृति उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में परस्पर विपरीत प्रकार की होती है। उदाहरण के लिए, फरवरी माह में दिक्पात के कोण का मान उत्तरी गोलार्द्ध पर अधिकतम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध पर न्यूनतम होता है। इसके विपरीत माह अगस्त में उत्तरी गोलार्द्ध पर न्यूनतम एवं दक्षिणी गोलार्द्ध पर अधिकतम होता है।
(3) दैनिक परिवर्तन: भू-चुम्बकीय अवयवों के मान में प्रतिदिन परिवर्तन होते हैं। दिन में एक विशेष समय पर ये परिवर्तन अधिकतम एवं दूसरे विशेष समय पर न्यूनतम होते हैं। ये समय तीनों अवयवों के लिए भिन्न-भिन्न होते हैं।
(4) अनियमित परिवर्तन: कभी-कभी भू-चुम्बकीय अवयवों के मानों में अचानक परिवर्तन भी होते हैं जिन्हें चुम्बकीय प्रक्षोभ कहते हैं। जब कभी भी सूर्य में उपस्थित काला धब्बा पृथ्वी की ओर होता है तो
भू-चुम्बकीय अवयवों में अचानक परिवर्तन होने लगता है तथा इनके मानों में अनियमित परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

प्रश्न 15.
नमन कोण (आनति कोण) को परिभाषित कीजिए । नमन कोण का मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए किसी बिन्दु पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक एवं ऊर्ध्वाधर घटक बराबर होते हैं।
उत्तर:
नमन कोण (आनति कोण) (Angle of dip): यदि किसी चुम्बकीय सूई को उसके गुरुत्व केन्द्र से स्वतंत्रतापूर्वक इस प्रकार लटका दिया जाये, जिससे कि वह ऊर्ध्वाधर तल में घूम सके तब चुम्बकीय याम्योत्तर में स्थिर होने पर चुम्बकीय सूई क्षैतिज दिशा से कुछ झुक जाती है। सूई की चुम्बकीय अक्ष पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को व्यक्त करती है। इस प्रकार किसी स्थान पर पृथ्वी के परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा तथा क्षैतिज दिशा के मध्य बने कोण को उस स्थान का नमन कोण (Angle of dip) कहते हैं।
ऊर्ध्वाधर घटक क्षैतिज घटक
ZE = BE sin 6
HE = BE Cos 6
tan θ = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)
लेकिन दिया गया है ZE = HE
∴ tan θ = \(\frac{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)
∴ = 1 = tan 45°
θ = 45°

प्रश्न 16.
दिक्पात कोण (चुम्बकीय दिक्पात) को परिभाषित किसी स्थान के चुम्बकीय याम्योत्तर में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव 0.25 गाउस है एवं नमन कोण 60° है। इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिक्पात कोण: किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के न्यून कोण को दिक्पात का कोण कहते हैं। दिक्पात उच्चतर अक्षांशों पर अधिक एवं विषुवत रेखा के पास कम होता है।
दिया गया है:
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव
HE = 0.25 गाउस
HE = 0.25 × 104 T
नमन कोण I = 60°
∴ HE = BE cos 60°
या
BE = \(\frac{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}{\cos 60^{\circ}}\) = \(\frac{0.25 \times 10^{-4}}{1 / 2}\)
= 2 × 0.25 × 10-4
= 0.5 × 10-4T
= 5 × 10-5 T

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
5 cm2 क्षेत्रफल वाली एक कुण्डली 2.5 N/Am के एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखी है। इसमें फेरों की संख्या 100 है। यदि इसमें 0.2 A की धारा प्रवाहित हो रही हो, तो ज्ञात कीजिये:
(अ) चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
(ब) अधिकतम बल आघूर्ण।
उत्तर:
कुण्डली के तल का क्षेत्रफल A = 5 cm2
= 5 × 104 m2
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 2.5 N/A m.
फेरों की संख्या N = 100,
कुण्डली में प्रवाहित धारा I = 0.2A
(अ) चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण m= NIA
m = 100 × 0.2 A × 5 x 104m2
= 0.01 A-m2
(ब) अधिकतम बल-आघूर्ण = τmax = mB
= 0.01 A-m2 x 2.5 N/A-m
= 0.025 N-m.

प्रश्न 2.
(अ) एक इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन परमाणु में नाभिक के चारों ओर 0.51A° त्रिज्या की कक्षा में 2 x 102m/s की चाल से गति करता है। इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
(ब) इलेक्ट्रॉन की कक्षीय गति के कारण तुल्य वैद्युत धारा
(स) नाभिक के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र।
उत्तर:
(अ) यहाँ पर त्रिज्या r = 0.51A°
= 0.51 x 10-10m चाल
v = 2 x 105 m/s
∴ चुम्बकीय आघूर्ण m = \(\frac{\mathrm{e} v \mathrm{r}}{2}\)
मान रखने पर
m = \(\frac{\left(1.6 \times 10^{-19}\right)\left(2 \times 10^5\right)\left(0.51 \times 10^{-10}\right)}{2}\)
= 8.16 × 10-25 Am2

(ब) तुल्य वैद्युत धारा
I = q/t
यहाँ
q = इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण
= 1.6 × 10-19 C
तथा एक चक्कर में इस आवेश के प्रवाहित होने में लगा समय
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 3

(स) वृत्ताकार कक्षा के केन्द्र (अर्थात् नाभिक के केन्द्र) पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 4
= 1.23A-m

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प्रश्न 3.
25 फेरों वाली एक 200 cm2 क्षेत्रफल वाली कुण्डली में 0.5 A की धारा प्रवाहित हो रही है। 10 cm लम्बाई के उस दण्ड चुम्बक की ध्रुव प्राबल्यता क्या होगी, जिसका चुम्बकीय आघूर्ण इस कुण्डली के चुम्बकीय आघूर्ण के बराबर है।
उत्तर:
दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण = कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण
∴ qm × 2l = NIA
अतः ध्रुव प्राबल्यता (qm) = \(\frac{\text { NIA }}{2 l}\)
मान रखने पर, = \(\frac{25 \times 0.5 \times\left(200 \times 10^{-4}\right)}{10 \times 10^{-2}}\)A-m
= 2.5 Am.

प्रश्न 4.
एक लघु दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण 0.24 न्यूटन मीटर टेसला है। सेमी. की दूरी पर स्थित चुम्बक की अक्ष पर इसके केन्द्र से 10 बिन्दु पर चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कीजिये।
उत्तर:
दिया है:
m = 0.24 न्यूटन मीटर टेसला1
r = 10 सेमी = 0.10 मीटर
∴ अक्षीय स्थिति में
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 5

प्रश्न 5.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक 0.4 x 104 वेबर/मी2 है तथा नति कोण 30° है। पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक तथा सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया गया है:
Hg = 0.4 x 10-4 वेबर/मीटर2
I = 30°
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक
ZE = HE tan I
= 0.4 x 10-4 tan 30°
= 0.4 × 10-4 x \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)
= \(\frac{0.4 \times 10^{-4}}{1.732}\)
= 0.231 × 10-4 वेबर/मी2
सम्पूर्ण तीव्रता BE = \(\sqrt{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}^2+\mathrm{H}_{\mathrm{E}}^2}\)
= \(\sqrt{\left(\frac{0.4 \times 10^{-4}}{\sqrt{3}}\right)+\left(0.4 \times 10^{-4}\right)^2}\)
= 0.4 x 10-4 \(\sqrt{\frac{1}{3}+1}\)
= 0.4 x 10-4 \(\sqrt{\frac{4}{3}}\)
= \(\frac{0.8}{1.732}\) x 10-4 वेबर/मी2
= 0.462 × 10-4 वेबर/मी2

प्रश्न 6.
किसी स्थान पर नमन कोण 40.6° है तथा भू-चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वघटक की तीव्रता 6 x 10-5T है उस स्थान पर भू-चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता की गणना कीजिये।
(tan 40.6° = 0.8571)
उत्तर:
ZE = HE tan I
HE =
HE =
HE = 7 × 105 T
इसलिये भू-चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 6

प्रश्न 7.
यदि एक धारावाही वृत्ताकार कुण्डली की त्रिज्या दुगुनी एवं बहने वाली धारा की सामर्थ्य आधी कर दी जाये तो इसके चुम्बकीय आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
यदि किसी धारावाही कुण्डली का क्षेत्रफल A मी2 और उसमें प्रवाहित धारा ऐम्पियर तब कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण
m1 = A x i ऐम्पियर x मीटर2
यदि कुण्डली की प्रारम्भिक त्रिज्या r मी. और उसमें i ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है तब उसका चुम्बकीय आघूर्ण
m1 = A x i = πr2 x i
m1 = πr2i ………..(1)
अब कुण्डली की त्रिज्या दुगुनी यानी 21 मी. करने पर उसका क्षेत्रफल
= π(2r)2 = 4πr2 मी2
कुण्डली में प्रवाहित धारा का आधा करने पर
वि. धारा = i/2 ऐम्पियर
∴ अब कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण
m2 = A x i
m2 = 4πr2 x i⁄2 ऐम्पियर × मी2
m2 = 2πr2 x i = 2πr2i ………..(2)
∴ \(\frac{m_2}{m_1}\) = \(\frac{2 \pi r^2 \mathrm{i}}{\pi r^2 \mathrm{i}}\) = \(\frac{2}{1}\)
अतः दिये हुए अनुसार कुण्डली की त्रिज्या और वि. धारा बदलने पर कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण पहले के सापेक्ष दुगुना हो जायेगा।

प्रश्न 8.
एक दण्ड चुम्बक, जिसकी अनुप्रस्थ काट 0.25 सेमी2 है, को 5000 ऐम्पियर/मीटर तीव्रता के चुम्बकन क्षेत्र में रखा जाता है। यदि दण्ड से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स का मान 2.5 x 105 वेबर है तो दण्ड के लिए गणना करो:
(अ) चुम्बकीय प्रेरण, (ब) चुम्बकीय प्रवृत्ति (स) चुम्बकन की तीव्रता
उत्तर:
(अ) दण्ड का अनुप्रस्थ काट
A = 0.25 सेमी5
A = 0.25 x 10-4 मीटर2
A = 25 x 106 मी2
छड़ के अनुप्रस्थ काट से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स
ΦB = 2.5 x 105 वेबर
∴ चुम्बकीय प्रेरण B = \(\frac{\phi_B}{A}\) = \(\frac{2.5 \times 10^{-5}}{2.5 \times 10^{-6}}\)
= 1 वेबर/मी2

(ब) चुम्बकीय प्रेरण B = μH …..(1)
यहाँ B चुम्बकीय प्रेरण, H चुम्बकन क्षेत्र की तीव्रता जिसका मान 5000 ऐ. x मीटर दिया हुआ है।
μ छड़ के पदार्थ की पारगम्यता है।
∴ समी (1) से
μ = \(\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}\)

μ = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 7
= 0.0002 वेबर/ऐ. x मी.
= 2 × 10-4 A-m
μ = μo (1 + χm)
χm = \(\frac{\mu}{\mu_0}-1\)
= \(\frac{0.0002}{4 \pi \times 10^{-7}}-1\)
= 159.23-1
= 158.23

(स) चुम्बकन की तीव्रता m = χm x H
m = 158.23 x 5000
= 7.91 × 105 ऐम्पियर/मी.

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

बहुविकल्पीय प्रश्न :

1. गैल्वेनिक सेल के लिए कौनसा कथन सत्य नहीं है?
(अ) ऐनोड ऋणावेशित होता है।
(ब) कैथोड धनावेशित होता है।
(स) ऐनोड पर अपचयन होता है।
(द) कैथोड पर अपचयन होता है।
उत्तर:
(स) ऐनोड पर अपचयन होता है।

2. इलेक्ट्रॉड अभिक्रिया, \(\mathbf{M}_{(\mathrm{aq})}^{\mathrm{n}+}+\mathrm{ne}^{-} \rightarrow \mathbf{M}_{(\mathrm{s})}\) के लिये नेन्ंस्ट अभिक्रिया है-
(अ) E = E° + \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\frac{1}{\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]}\)
(ब) E = E° + \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)
(स) E = E° + RT ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)
(द) \(\frac{E}{E^{\circ}}\) = \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)
उत्तर:
(ब) E = E° + \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)

3. विशिष्ट चालकत्व की इकाई है-
(अ) S cm2 mol-1
(ब) Scm2
(स) S m-1
(द) cm-1
उत्तर:
(स) S m-1

4. लैड संचायक सेल को आवेशित करने पर-
(अ) PbO2 घुलता है।
(ब) लैड इलेक्ट्रोड पर PbSO4 जमता है।
(स) H2SO4 पुनः बनता है
(द) H2SO4 की मात्रा कम होती है।
उत्तर:
(स) H2SO4 पुनः बनता है

5. चार पृथक् पृथक् परखनलियों में भिन्न-भिन्न लवणों के रंगहीन विलयन उपस्थित हैं। इनमें कॉपर की छड़ डुबोने पर कौनसे विलयन का रंग नीला हो जाएगा-
(अ) Pb(NO3)2
(ब) AgNO3
(स) Zn(NO3)2
(द) Cd (NO3)2
उत्तर:
(ब) AgNO3

6. \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}\left|\mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{+2} \| \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}\right| \mathrm{Cu}\) में दो खड़ी समानान्तर रेखाएँ (||) किसको दर्शाती हैं?
(अ) कैथोड
(ब) ऐनोड
(स) लवण सेतु
(द) विद्युत अपघट्य
उत्तर:
(स) लवण सेतु

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

7. कॉपर को अम्लीय CuSO4 तथा क्षारीय Cu(CN)2 से निक्षेपित किया जा सकता है। यदि समान विद्युत धारा समान समय के लिए इनके विलयन में प्रवाहित की जाए तो निम्नलिखित में से कौनसा कथन सत्य है?
(अ) क्षारीय कॉपर सायनाइड (Cu(CN)2) से निक्षेपित कॉपर की मात्रा अम्लीय CuSO4 की तुलना में दुगुनी होगी।
(ब) क्षारीय कॉपर सायनाइड से निक्षेपित कॉपर की मात्रा अम्लीय CuSO4 की तुलना में आधी होगी।
(स) दोनों विलयनों से कॉपर की समान मात्रा निक्षेपित होगी।
(द) उपरोक्त सभी कथन गलत हैं।
उत्तर:
(स) दोनों विलयनों से कॉपर की समान मात्रा निक्षेपित होगी।

8. निम्नलिखित में से किसके जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसका विघटन होगा?
(अ) ग्लूकोस
(ब) यूरिया
(स) शर्करा
(द) सिल्वर नाइट्रेट
उत्तर:
(द) सिल्वर नाइट्रेट

9. गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद हैं-
(अ) NaOH, H2 तथा Cl2
(ब) Na तथा Cl2
(स) Na, NaOH तथा Cl2
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ब) Na तथा Cl2

10. Zn2+ | Zn (E° = – 0.76 V) तथा Cu2+ | Cu(E° = +0.34) से बने एक गैल्वेनिक सेल का EMF है-
(अ) 0.42 V
(ब) 1.10 V
(स) – 0.10 V
(द) – 0.42 V
उत्तर:
(ब) 1.10 V

11. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव होता है-
(अ) 1.0 V
(ब) 0.0 v
(स) 1.10 V
(द) 0.20 V
उत्तर:
(ब) 0.0 v

12. धात्विक चालक में आवेश के वाहक होते हैं-
(अ) इलेक्ट्रॉन
(ब) आयन
(स) प्रोटोन
(द) लवण
उत्तर:
(अ) इलेक्ट्रॉन

13. Cu2+ आयन पर आवेश (कूलाम में ) है-
(अ) 96500
(ब) 57900
(स) 1.6 × 10-19
(द) 3.2 × 10-19
उत्तर:
(द) 3.2 × 10-19

14. लोहे पर जंग लगने से रोकने का सर्वोत्तम उपाय है-
(अ) लवणयुक्त जल में रखकर
(ब) कैथोडिक रक्षण
(स) टिन की परत चढ़ाकर
(द) साधारण जल में रखकर
उत्तर:
(ब) कैथोडिक रक्षण

15. \(\mathrm{MnO}_4^{-}\) के 1 मोल का MnO2 में अपचयन करने के लिए आवश्यक आवेश है-
(अ) 1F
(ब) 3F
(स) 5F
(द) 7F
उत्तर:
(ब) 3F

16. Na2SO4 के तनु जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन करने पर ऐनोड तथा कैथोड पर प्राप्त उत्पाद क्या होंगे? यदि Pt इलेक्ट्रॉड प्रयुक्त किया गया है-
(अ) O2, Na
(ब) H2. NaOH
(स) O2. H2
(द) \(\mathrm{S}_2 \mathrm{O}_8^{-2}, \mathrm{H}_2\)
उत्तर:
(स) O2. H2

17. निम्नलिखित में से किस अवस्था में विलयन की मोलर चालकता बढ़ती है?
(अ) सान्द्रता बढ़ाने पर
(ब) ताप कम करने पर
(स) तनुता बढ़ाने पर
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) तनुता बढ़ाने पर

18. डेनियल सेल में प्रयुक्त उपापचयी अभिक्रिया है-
(अ) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}\)
(ब) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e}^{-}\)
(स) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
(द) \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}\)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

19. प्रतिरोध का व्युत्क्रम होता है-
(अ) प्रतिरोधकता
(ब) चालकत्व
(स) सेल नियतांक
(द) चालकता
उत्तर:
(ब) चालकत्व

20. निम्नलिखित में से किसकी चालकता सर्वाधिक होती है?
(अ) सोडियम
(ब) सिल्वर
(स) गोल्ड
(द) कॉपर
उत्तर:
(ब) सिल्वर

21. इलेक्ट्रॉनिक चालकत्व निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करता है-
(अ) धातु की प्रकृति एवं संरचना
(ब) ताप
(स) प्रति परमाणु संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

22. किसी विलयन की चालकता का सूत्र है-
(अ) k = \(\frac { G }{ R }\)
(ब) k = \(\frac { l }{ A }\)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 1
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 2

23. लैड संचायक सेल में ऐनोड पर होने वाली अभिक्रिया है-
(अ) PbO2(s) → PbSO4(s)
(ब) PbSO4(s) → PbO2(s)
(स) \(\mathrm{Pb}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{SO}_{4(\mathrm{aq})}^{2-} \rightarrow \mathrm{PbSO}_{4(\mathrm{~s})}+2 \mathrm{e}^{-}\)
(द) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(aq) + 2H2O(l)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{Pb}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{SO}_{4(\mathrm{aq})}^{2-} \rightarrow \mathrm{PbSO}_{4(\mathrm{~s})}+2 \mathrm{e}^{-}\)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

24. H2 व O2 से बने ईंधन सेल में कैथोड पर होने वाली अभिक्रिया है-
(अ) \(2 \mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}+4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-} \rightarrow 4 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-}\)
(ब) \(2 \mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}+\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})} \rightarrow 2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}\)
(स) \(\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-} \rightarrow 4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-}\)
(द) \(4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-} \rightarrow \mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-}\)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-} \rightarrow 4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-}\)

25. सेल स्थिरांक किस पदार्थ के जलीय विलयन की चालकता मापकर ज्ञात करते हैं?
(अ) NaCl
(ब) CaCl2
(स) KCl
(द) MgCl2
उत्तर:
(स) KCl

26. किसी सेल अभिक्रिया की साम्यावस्था पर सेल का विद्युत वाहक बल (EMF) होता है-
(अ) धनात्मक
(ब) शून्य
(स) ऋणात्मक
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) शून्य

27. किसी स्वतः प्रवर्तित अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक E°सेल तथा △G क्रमशः होंगे-
(अ) <1, +ve, -ve
(ब) >1, +ve, -ve
(स) = 1, +ve, +ve
(द) = 1, – ve, -ve
उत्तर:
(ब) >1, +ve, -ve

28. लवण सेतु में KNO का संतृप्त विलयन प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि-
(अ) KNO3 की जल में विलेयता उच्च है।
(ब) K+ तथा \(\mathrm{NO}_3^{-}\) की गति लगभग समान होती है।
(स) K+ की गति \(\mathrm{NO}_3^{-}\) से अधिक होती है।
(द) K+ की गति \(\mathrm{NO}_3^{-}\) से कम होती है।
उत्तर:
(ब) K+ तथा \(\mathrm{NO}_3^{-}\) की गति लगभग समान होती है।

29. यदि सेल अभिक्रिया स्वतः परिवर्तित है, तो-
(अ) E° = -ve
(ब) E° = + ve
(स) emf = + ve
(द) (△G + E°) = + ve
उत्तर:
(स) emf = + ve

30. Zn – Cu सेल के लिए E° = 1.10 V है। यदि \(\mathrm{Cu}^{2+}{ }_{(\mathrm{aq})} / \mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\) युग्म का अपचयन विभव 0.34 V हो तो \(\mathrm{Zn}^{2+}(\mathrm{aq}) / \mathrm{nn}_{(\mathrm{s})}\) युग्म का अपचयन विभाग होगा-
(अ) – 0.76 V
(ब) 0.76 V
(स) 7.6 V
(द) 0.38 V
उत्तर:
(अ) – 0.76 V

31. 25°C पर, Zn + Cu2+ → Cu + Zn2+ का मानक विद्युत वाहक बल 1.10 है तो इस सेल में 0.1 M Cu2+ तथा 0.1 M Zn2+ विलयन का प्रयोग करने पर सेल के विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा?
(अ) 1.10 V
(ब) + 0.110 V
(स) – 1.10 V
(द) – 0.11 V
उत्तर:
(अ) 1.10 V

32. तीन धात्विक धनायनों X, Y, Z के मानक अपचयन विभव मान क्रमश: 0.52 – 3.03 तथा – 1.18 V है | संगत धातुओं की अपचायक क्षमता का क्रम है-
(अ) Y > Z > X
(ब) X > Y > Z
(स) Z> Y> X
(द) Z > x > Y
उत्तर:
(अ) Y > Z > X

33. अभिक्रिया IMG गैलवेनिक सेल में होती है। इसका सही निरूपण है-
(अ) Ag/AgCl(s)/KCl(aq)//AgNO3(aq)/Ag
(ब) Pt, H2(g)/HCl(aq)//AgNO3(qa)/Ag
(स) Pt, H2(g)/HCl(aq)//AgCl(aq)/ Ag(s)
(द) Pt, H2(g)/KCl(aq)//AgCl(s)/Ag
उत्तर:
(स) Pt, H2(g)/HCl(aq)//AgCl(aq)/ Ag(s)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
जब CuSO4 के जलीय विलयन में जिंक धातु की छड़ को डुबोते हैं तो विलयन का नीला रंग गायब हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
Zn+2 का मानक अपचयन विभव, Cu+2 के मानक अपचयन विभव से कम होने के कारण Zn Cu+2 को इलेक्ट्रॉन देकर उसे अपचयित कर देता है। अतः विलयन का नीला रंग गायब हो जाता है क्योंकि विलयन का नीला रंग Cu+2 आयनों के कारण होता है।

प्रश्न 2. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड (SHE) में प्लैटिनम का कार्य बताइए।
उत्तर:
SHE में प्लैटिनम, उत्प्रेरक तथा धात्विक सम्पर्क हेतु अक्रिय धातु का कार्य करता है।

प्रश्न 3.
साम्यावस्था स्थिरांक Kc. E°(सेल) से सम्बन्धित होता है, न कि Eसेल से क्यों?
उत्तर:
Kc का सम्बन्ध E°(सेल) से होता है क्योंकि साम्य पर Eसेल का मान शून्य होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रिया होगी या नहीं-
ZnSO4(aq) + 2Ag(s) → Ag2SO4(aq) + Zn(s)
उत्तर:
यह अभिक्रिया नहीं होगी क्योंकि Ag की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति Zn की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति से कम होती है।

प्रश्न 5.
Zn+2 की सान्द्रता बढ़ाने पर Zn इलेक्ट्रॉड के इलेक्ट्रॉड विभव के मान पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
Zn+2 की सान्द्रता बढ़ाने पर Zn इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव बढ़ता है।

प्रश्न 6.
विलयन की pH तथा हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड विभव में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 3

प्रश्न 7.
कॉपर सल्फेट (CuSO4) के जलीय विलयन को आयरन के पात्र में रखा जा सकता है या नहीं?
उत्तर:
CuSO4 के जलीय विलयन को आयरन के पात्र में नहीं रख सकते क्योंकि इसकी क्रियाशीलता Cu से अधिक है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 16 अतः Fe, Cu+2 को Cu में अपचयित कर देता है जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
\(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{+2}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

प्रश्न 8.
तनु H2SO4 से H2 को विस्थापित नहीं करने वाली धातुएँ बताइए।
उत्तर:
Cu, Ag. Au, Pt

प्रश्न 9.
Na, Al तथा Zn की क्रियाशीलता का अवरोही क्रम लिखिए।
उत्तर:
Na > Al > Zn

प्रश्न 10.
गैल्वेनी सेल में लवण सेतु में प्रयुक्त एक लवण का नाम बताइए।
उत्तर:
पोटेशियम क्लोराइड (KCl)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 11.
निम्नलिखित सेल अभिक्रिया का सेल आरेख लिखिए-
\(2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})}+3 \mathrm{Cd}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow 2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{+3}+3 \mathrm{Cd}_{(\mathrm{s})}\)
उत्तर:
उपर्युक्त सेल अभिक्रिया का सेल आरेख निम्न प्रकार होगा- एनोड-
एनोड \({ }^{-} \mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})}\left|\mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{+3} \| \mathrm{Cd}_{(\mathrm{aq})}^{2+}\right| \mathrm{Cd}_{(\mathrm{s})}{ }^{+}\) कैथोड

प्रश्न 12.
डेनियल सेल में धारा तथा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा बताइए |
उत्तर:
डेनियल सेल में धारा का प्रवाह Cu से Zn इलेक्ट्रॉड की तरफ तथा इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह Zn से Cu इलेक्ट्रॉड की तरफ होता है अर्थात् धारा तथा इलेक्ट्रॉनों का प्रभाव एक-दूसरे से विपरीत दिशा में होता है।

प्रश्न 13.
सेल का ऋणात्मक मान क्या दर्शाता है?
उत्तर:
सेल के ऋणात्मक होने का अर्थ है, △G = +ve तथा इस स्थिति में सेल में कार्य नहीं होगा।

प्रश्न 14.
सेल अभिक्रिया \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}+2 \mathrm{Ag}_{(\mathrm{aq})}^{+} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{Ag}_{(\mathrm{s})}\) के लिए EMF का मान बताइए जब \(\mathrm{E}_{\mathrm{Cu}^{+2 / \mathrm{Cu}}}^{\mathrm{o}}=0.34 \mathrm{~V}\) तथा \(\mathrm{E}_{\mathrm{Ag}^{+} / \mathrm{Ag}}^{\mathrm{o}}=0.80 \mathrm{~V}\)
उत्तर:
सेल = ER – EL
= 0.80 – (0.34)
सेल = 0.46 V

प्रश्न 15.
प्लैटिनम इलेक्ट्रॉड प्रयुक्त करके CuSO4 के विलयन का विद्युत अपघटन करने पर प्राप्त उत्पाद बताइए ।
उत्तर:
CuSO4 के विलयन का विद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर कॉपर तथा एनोड पर ऑक्सीजन प्राप्त होती है।

प्रश्न 16.
Al3+ से एक मोल AI प्राप्त करने के लिए कितने कूलॉम आवेश चाहिए?
उत्तर:
Al3+ + 3e →Al
अभिक्रिया के अनुसार 1 मोल Al प्राप्त करने के लिए 3F= 3 × 96500 = 289500 कूलॉम आवेश आवश्यक होगा।

प्रश्न 17.
NaCl के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाहित करने पर विलयन की pH में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
NaCl के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाहित करने पर विलयन की pH बढ़ जाती है (pH > 7) क्योंकि इसमें प्रबल क्षार (NaOH) बनता है।

प्रश्न 18.
विशिष्ट चालकत्व (K) तथा सेल स्थिरांक में सम्बन्ध बताइए |
उत्तर:
K = \(\frac { 1 }{ R }\) × \(\frac { 1 }{ A }\) (\(\frac { 1 }{ A }\) = सेल स्थिरांक)

प्रश्न 19.
मोलर चालकता ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
मोलर चालकता, \(\Lambda_{\mathrm{m}}=\frac{K \times 1000}{\mathrm{M}}\) (M = मोलरता)

प्रश्न 20.
मोलर चालकता तथा तुल्यांकी चालकता में क्या सम्बन्ध होता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 4

प्रश्न 21.
अधिविभव किसे कहते हैं?
उत्तर:
कुछ वैद्युत रासायनिक प्रक्रम सम्भव होते हैं लेकिन उनकी गति इतनी कम होती है कि वे निम्न विभव पर आसानी से नहीं होते। इस स्थिति में प्रक्रम को करवाने के लिए अतिरिक्त विभव लगाना पड़ता है, उसे अधिविभव कहते हैं।

प्रश्न 22.
गलित PhBr2 का विद्युत अपघटन करने पर प्राप्त उत्पाद क्या होंगे? यदि अक्रिय इलेक्ट्रॉड लिया गया है।
उत्तर:
गलित PhBr2 का विद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर Pb तथा एनोड पर Br2 प्राप्त होती है।

प्रश्न 23.
डिबाई हकल-आंनसेगर समीकरण क्या होता है?
उत्तर:
\(\Lambda_m=\Lambda_m^{\circ}-A \sqrt{C}\)
\(\Lambda_{\mathrm{m}}\) मोलर चालकता, \(\Lambda_{\mathrm{m}}^{\circ}\) = सीमान्त मोलर चालकता, A = स्थिरांक तथा C = सान्द्रता

प्रश्न 24.
विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Z) किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी विद्युत अपघट्य के विलयन में एक ऐम्पियर की धारा एक सेकण्ड (एक कूलॉम आवेश ) तक प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रॉड पर निक्षेपित पदार्थ की मात्रा को उसका विद्युत रासायनिक तुल्यांक कहते हैं।

प्रश्न 25.
वैद्युत अपघटन से Na, Mg तथा Al कैसे प्राप्त की जाती है?
उत्तर:
सोडियम तथा मैग्नीशियम को उनके गलित क्लोराइडों के वैद्युत अपघटन द्वारा तथा ऐलुमिनियम को क्रायोलाइट (Na3AlF6) की उपस्थिति में ऐलुमिनियम ऑक्साइड के वैद्युत अपघटन से प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 26.
Al के लवणों के विद्युत अपघटन से Al धातु प्राप्त नहीं होती, क्यों?
उत्तर:
Al के लवणों के विद्युत अपघटन से Al धातु प्राप्त नहीं होती क्योंकि यह जल से क्रिया करके Al2O3 बना लेता है।

प्रश्न 27.
सीसा संचायक सेल को लगातार प्रयोग में लेने पर उसमें उपस्थित H2SO4 पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
सीसा संचायक सेल को लगातार प्रयोग में लेने पर उसमें उपस्थित H2SO4, का घनत्व कम हो जाता है क्योंकि अभिक्रिया होने पर सल्फेट (\(\mathrm{SO}_4^{2-}\)) आयन, Pb+2 से क्रिया करके PbSO4 बना देते हैं।

प्रश्न 28.
शुष्क सेल में जिंक क्लोराइड (ZnC12) का क्या कार्य है ?
उत्तर:
ZnCl2 से प्राप्त Zn2+, अभिक्रिया में उत्पन्न NH3 से क्रिया करके [Zn(NH3)4] 22+ संकुल आयन बना लेता है जिससे दाब उत्पन्न नहीं होता है तथा सील के टूटने की सम्भावना नहीं रहती ।

प्रश्न 29.
मर्क्यूरी सेल में सम्पूर्ण कार्य अवधि में विभव स्थिर रहता है, क्यों?
उत्तर:
मयूरी सेल की सम्पूर्ण सेल अभिक्रिया में कोई ऐसा आयन नहीं है, जिसकी सान्द्रता विलयन में होने के कारण बदलती हो ।

प्रश्न 30.
शुष्क सेल को काफी समय तक प्रयोग में नहीं लेने पर वह नष्ट हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
शुष्क सेल को काफी समय तक प्रयोग में नहीं लेने पर इसमें उपस्थित अमोनियम क्लोराइड, उसके जिंक से बने पात्र को संक्षारित करके उसे नष्ट कर देता है।

प्रश्न 31.
लवणीय जल में जंग जल्दी लगती है, क्यों?
उत्तर:
लवण (NaCl), H2O के आयनन को बढ़ा देता है जिससे H+ की सान्द्रता बढ़ जाती है जो कि जंग लगने में सहायक है।

प्रश्न 32.
(i) 100 मिली विलयन में एक मोल NaCl तथा (ii) 250 मिली विलयन में एक मोल NaCl में से किसकी मोलर चालकता अधिक होगी तथा क्यों?
उत्तर:
विलयन (ii) की मोलर चालकता अधिक होगी क्योंकि \(\Lambda_{\mathrm{m}}=\kappa \times \mathrm{V}\) अर्थात् आयतन बढ़ने पर मोलर चालकता बढ़ती है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
कॉपर की HCl तथा HNO3 से अभिक्रिया कराने पर क्या होता है?
उत्तर:
कॉपर की HCl से कोई अभिक्रिया नहीं होती क्योंकि H+ आयन, Cu को ऑक्सीकृत नहीं कर सकता अर्थात् Cu, H+ को इलेक्ट्रॉन नहीं दे सकता क्योंकि कॉपर, हाइड्रोजन से कम क्रियाशील होता है। लेकिन Cu की HNO3 से क्रिया करवाने पर यह H+ से क्रिया न करके \(\mathrm{NO}_3^{-}\) आयनों द्वारा ऑक्सीकृत होता है।

प्रश्न 2.
गैल्वेनिक सेल में लवण सेतु की बनावट तथा कार्य बताइए ।
उत्तर:
गैल्वैनी सेल एक वैद्युत रासायनिक सेल है। इसमें स्वतः उपापचयी अभिक्रिया की गिब्ज ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा (वैद्युत कार्य ) में परिवर्तित होती है, जिससे मोटर, पंखा, गीजर, हीटर इत्यादि चलाए जाते हैं।

डेनियल सेल, गैल्वैनी सेल का एक उदाहरण है जिसमें Zn का ऐनोड तथा Cu का कैथोड लिया जाता है। इस सेल के दोनों इलेक्ट्रॉंडों को अर्ध सेल कहते हैं तथा इन पर होने वाली अभिक्रियाओं को अर्ध सेल अभिक्रिया कहते हैं। दोनों इलेक्ट्रॉडों को लवण सेतु से जोड़ा जाता है। डेनियल सेल में होने वाली अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
यह अभिक्रिया निम्नलिखित दो अभिक्रियाओं का योग है-

(i) कैथोड पर Cu2+ + 2e → Cu(s) (अपचयन अर्ध अभिक्रिया)
(ii) ऐनोड पर Zu(s) → Zn2+ + 2e (ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया )

Z के ऑक्सीकरण से प्राप्त इलेक्ट्रॉन धातु के तार की सहायता से Cu की छड़ पर चले जाते हैं तथा CuSO4 विलयन से Cu2+ आयन, कॉपर की छड़ की ओर गमन करते हैं। ऐनोड (Zn छड़ ) पर इलेक्ट्रॉन निकलने के कारण इसे ऋण ध्रुव (-ve) कहते हैं तथा कैथोड (Cu छड़) पर Cu2+ आयन एकत्रित होने के कारण इसे धन ध्रुव (+ve) कहते हैं। बाहरी परिपथ में इलेक्ट्रॉन -ve इलेक्ट्रॉड से +ve इलेक्ट्रॉड की ओर जाते हैं। उपर्युक्त अभिक्रियाएँ डेनियल सेल के दो अलग-अलग भागों में होती हैं। अपचयन अर्ध अभिक्रिया कॉपर इलेक्ट्रॉड पर जबकि ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया ज़िंक इलेक्ट्रॉड पर होती है। डेन्यल सेल के ये भाग, अर्ध सेल या रेडॉक्स युग्म कहलाते हैं। कॉपर इलेक्ट्रॉड को अपचयन अर्ध सेल एवं ज़िंक इलेक्ट्रॉड को ऑक्सीकरण अर्ध सेल कहते हैं।

प्रश्न 3.
सान्द्रता सेल की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
वह सेल जिसमें दो समान इलेक्ट्रॉड अपने आयनों की भिन्न-भिन्न सान्द्रता के विलयनों में डूबे होते हैं। इस कारण इन इलेक्ट्रॉडों के विभव भी भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः सेल में विभवान्तर उत्पन्न होता है। इसके लिए 298 K पर सेल विभव
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 5

प्रश्न 4.
किसी एक इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव ज्ञात करना सम्भव नहीं है। क्यों?
उत्तर:
किसी एक इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव इसलिए ज्ञात नहीं किया जा सकता क्योंकि विद्युत वाहक बल (EMF) उसी स्थिति में माप सकते हैं जब परिपथ पूर्ण हो तथा एक इलेक्ट्रॉड से परिपथ पूर्ण नहीं होता ।

प्रश्न 5.
Fe2+ → Fe3+ (E° = – 0.77V)
तथा Cu → Cu2+ (E° = – 0.34V)
इन मानों के आधार पर ज्ञात कीजिए कि Cu+ आयन, Fe2+ आयन से अपचयित हो सकता है या नहीं।
उत्तर:
दिए गए मान ऑक्सीकरण विभव के हैं, अतः अपचयन विभव के मान Fe+3 → Fe2+ के लिए 0.77 V तथा Cu+2 → Cu के लिए 0.34 V होंगे। चूँकि Fe+3 का अपचयन विभव Cu2+ के अपचयन विभव से अधिक है। अतः Cu2+ आयन, Fe2+ आयन से अपचयित नहीं हो सकता।

प्रश्न 6.
अपचयन विभव तथा ऑक्सीकरण विभव क्या होते हैं?
उत्तर:
उपापचयी अभिक्रिया में अपचयन अर्ध- अभिक्रिया के विभव को अपचयन विभव तथा ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया के विभव को ऑक्सीकरण विभव कहते हैं। किसी अर्ध-अभिक्रिया के लिए ऑक्सीकरण विभव तथा अपचयन विभव के मान समान होते हैं लेकिन उनके चिह्न विपरीत होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 7.
सेल \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}\left|\mathbf{Z n}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \| \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+2}\right| \mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\) के लिए सेल विभव का मान धनात्मक है। इससे क्या निष्कर्ष प्राप्त होता है?
उत्तर:
यह गैल्वेनिक सेल है तथा इसके लिए नेंस्ट समीकरण निम्न प्रकार लिखा जाता है-
\(\mathrm{E}_{\text {सेल }}=\mathrm{E}_{\text {सेल }}^0-\frac{0.059}{2} \log \frac{\left[\mathrm{Zn}^{2+}\right]}{\left[\mathrm{Cu}^{2+}\right]}\)
इस समीकरण से सिद्ध होता है कि Cu2+ की सान्द्रता अधिक होने पर ही Eसेल का मान धनात्मक होना सम्भव है। इस स्थिति में Zn ऑक्सीकृत होकर Zn2+ देता है तथा Cu2+ आयन का अपचयन होकर Cu प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.
एक मोल इलेक्ट्रॉनों के आवेश की गणना कीजिए ।
उत्तर:
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6021 × 10-19C (कूलॉम)
1 मोल इलेक्ट्रॉन = आवोगाद्रो संख्या (NA) = 6.022 × 1023
अतः एक मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश
= एक इलेक्ट्रॉन का आवेश × NA
= 1.6021 × 10-19 C × 6.022 × 1023 mol-1
= 96478 C mol-1 ≈ 96500 C mol-1 = 1 फैराडे (IF)

प्रश्न 9.
किसी विद्युत अपघट्य के विलयन के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद किन कारकों पर निर्भर करते हैं?
उत्तर:
वैद्युत अपघटन के उत्पाद: किसी पदार्थ (विद्युत अपघट्य) के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद (i) पदार्थ की अवस्था, (ii) प्रयुक्त किए गए इलेक्ट्रॉडों की प्रकृति तथा (iii) ओंक्सीकारक व अपचायक स्पीशीज एवं उनके मानक इलेक्ट्रोंड विभव पर निभर करते हैं। सक्रिय धातुओं के इलेक्ट्रॉडड लेने पर वे अभिक्रिया में भाग लेते हैं लेकिन अक्रिय धातुओं जैसे प्लैटिम इत्यादि के इलेक्ट्रॉड बनाने पर ये अभिक्रिया में भाग नहीं लेते तथा केवल इलेक्ट्रॉनों के स्रोत का कार्य करते हैं।

गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से कैथोड पर Na तथा ऐनोड पर Cl2 प्राप्त होती है क्योंकि द्रव अवस्था में केवल एक ही प्रकार के धनायन Na+ तथा ऋणायन (Cl हैं, जिनका क्रमशः अपचयन तथा ऑंक्सीकरण होता है-
कैथोड पर- Na+ + e → Na
ऐनोड पर- Cl → \(\frac { 1 }{ 2 }\)Cl2 + e

जब विद्युत अपघट्य का जलीय विलयन लिया जाता है तो विलयन में एक से अधिक प्रकार के धनायन तथा ऋणायन होते हैं क्योंकि कुछ मात्रा में H2O के आयनन से H+ तथा \(\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}\) आयन भी प्राप्त होते हैं। इस स्थिति में किसी इलेक्ट्रोंड पर कौनसा आयन विसर्जित होगा, इसे चयनात्मक विसर्ज्जन सिद्धान्त (Preferential Discharge Theory) के आधार पर समझाया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार, जब विलयन में एक ही प्रकार (धनायन या ऋणायन) के एक से अधिक आयन होते हैं तो इलेक्ट्रॉंड पर वह आयन पहले विसर्जित (Discharge) होगा, जिसका विसर्जन विभव (Discharge Potential) कम हो अर्थात् जिसके विसर्जन हेतु कम ऊर्जा की आवश्यकता हो।

प्रश्न 10.
सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पादों को इलेक्ट्रॉड विभव मानों के आधार पर समझाइए |
उत्तर:
वैद्युत अपघटन के उत्पाद: किसी पदार्थ (विद्युत अपघट्य) के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद (i) पदार्थ की अवस्था, (ii) प्रयुक्त किए गए इलेक्ट्रॉडों की प्रकृति तथा (iii) ओंक्सीकारक व अपचायक स्पीशीज एवं उनके मानक इलेक्ट्रोंड विभव पर निभर करते हैं। सक्रिय धातुओं के इलेक्ट्रॉडड लेने पर वे अभिक्रिया में भाग लेते हैं लेकिन अक्रिय धातुओं जैसे प्लैटिम इत्यादि के इलेक्ट्रॉड बनाने पर ये अभिक्रिया में भाग नहीं लेते तथा केवल इलेक्ट्रॉनों के स्रोत का कार्य करते हैं।

गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से कैथोड पर Na तथा ऐनोड पर Cl2 प्राप्त होती है क्योंकि द्रव अवस्था में केवल एक ही प्रकार के धनायन Na+ तथा ऋणायन (Cl हैं, जिनका क्रमशः अपचयन तथा ऑंक्सीकरण होता है-
कैथोड पर- Na+ + e → Na
ऐनोड पर- Cl → \(\frac { 1 }{ 2 }\)Cl2 + e

जब विद्युत अपघट्य का जलीय विलयन लिया जाता है तो विलयन में एक से अधिक प्रकार के धनायन तथा ऋणायन होते हैं क्योंकि कुछ मात्रा में H2O के आयनन से H+ तथा \(\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}\) आयन भी प्राप्त होते हैं। इस स्थिति में किसी इलेक्ट्रोंड पर कौनसा आयन विसर्जित होगा, इसे चयनात्मक विसर्ज्जन सिद्धान्त (Preferential Discharge Theory) के आधार पर समझाया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार, जब विलयन में एक ही प्रकार (धनायन या ऋणायन) के एक से अधिक आयन होते हैं तो इलेक्ट्रॉंड पर वह आयन पहले विसर्जित (Discharge) होगा, जिसका विसर्जन विभव (Discharge Potential) कम हो अर्थात् जिसके विसर्जन हेतु कम ऊर्जा की आवश्यकता हो।

किसी आयन का विसर्जन विभव निम्न कारको पर निर्भर करता है-
(i) विद्युत रासायनिक श्रेणी में आयन का स्थान,
(ii) आयन की सान्द्रता तथा
(iii) इलेक्ट्रॉंड की प्रकृति।
इस आधार पर विभिन आयनों के विसर्जित होने का क्रम निम्न प्रकार होता है-
धनायन – Li+ < K+ <Na+ < Ca2+ < Mg2+ < Al3+ < Zn2+ < Fe2+ < Co2+ < Ni2+ < Sn2+ < H+ < Cu2+ < Hg2+ < Ag2+ < Au3+

ॠणायन – \(\mathrm{SO}_4^{2-}<\mathrm{NO}_3^{-}<\mathrm{OH}^{-}<\mathrm{Cl}^{-}<\mathrm{Br}^{-}<\mathrm{I}^{-}\)

(i) सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन-सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन के वैद्युत अपघटन से NaOH, Cl2 गैस तथा H2 गैस बनती है। इसमें Na+ एवं Cl के साथ H+ एवं OH आयन तथा विलायक के अणु (H2O) भी होते है। कैथोड पर निम्नलिखित दो अभिक्रियाएँ हो सकती है-

Na+(aq) + e → Na(s); E°सेल = – 2.71 V …(1)
H+(aq) + e → \(\frac { 1 }{ 2 }\)H2(g); E°सेल = 0.00 V …(2)

लेकिन कैथोड पर वह अभिक्रिया होती है जिसके लिए E° का मान अधिक हो, अतः कैथोड पर अभिक्रिया (2) होगी। \(\mathrm{H}_{(\mathrm{aq})}^{+}\), H2O के वियोजन से प्राप्त होता है, अतः कैथोड पर होने वाली अभिक्रिया को निम्न प्रकार लिखा जाता है-

\(\mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \frac{1}{2} \mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}+\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}_{(a q)}\)

ऐनोड पर होने वाली संभावित अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

Cl(aq) → \(\frac { 1 }{ 2 }\) Cl2(g) + e; E°सेल = 1.36 V …(1)
2H2O(l) → O2(g) + 4H+(aq)+4e; E°सेल = 1.23 V …(2)

ऐनोड़ पर कम E° मान वाली अभिक्रिया पहले होती है अतः ऐनोड पर अभिक्रिया (2) होनी चाहिए लेकिन ऑक्सीजन के अधिविभव (Over Potential) के कारण अभिक्रिया (1) ही सम्पन्न होती है। अतः सम्पूर्ण अभिक्रिया को निम्न प्रकार से लिखा जाता है-

NaCl(aq) + H2O(l) →Na+ (aq) + OH(aq)+\(\frac { 1 }{ 2 }\)H2 (g)+\(\frac { 1 }{ 2 }\)Cl2(g)

नोट-इस विद्युत अपघटन में अक्रिय इलेक्ट्रोंड (Pt) प्रयुक्त किया जाता है लेकिन मर्करी का इलेक्ट्रॉंड प्रयुक्त करने पर कैथोड पर H+ का विसर्जन, Na+ की तुलना में मुश्किल से होता है। अतः कैथोड पर H2 के स्थान पर Na प्राप्त होता है तथा सोडियम अमलगम (Na/Hg) बन जाता है।

(ii) H2SO4 का वैद्युत अपघटन (Pt इलेक्ट्रॉड) – H2SO4 के वैद्युत अपघटन उत्पाद सान्द्रता पर निर्भर करते हैं अतः इसमें इलेक्ट्रॉड विभव के स्थान पर नेर्न्स्ट.समीकरण से प्राप्त इलेक्ट्रॉड विभव काम में लेते हैं।

(i) तनु H2SO4 के वैद्युत अपघटन पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
2H2O(l)→O2(g) + 4H+(aq) + 4e; E°सेल = +1.23 V

(ii) सांद्र H2SO4 लेने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
\(2 \mathrm{SO}_4^{2-}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{S}_2 \mathrm{O}_8^{2-}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{e}^{-} ; \mathrm{E}_{\text {(सेल) }}^{\circ}=+1.96 \mathrm{~V}\)

(iii) K2SO4 के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन (Pt इलेक्ट्रॉड) –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 17
K+ की तुलना में H+ अधिक क्रियाशील है अतः कैथोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
2H+ + 2e → H2(g)

तथा \(\mathrm{SO}_4^{2-}\) की तुलना में OH अधिक क्रियाशील है अतः ऐनोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-

2OH → [O] + H2O + 2e
या 4OH → O2 + 2H2O + 4e

प्रश्न 11.
गलित NaCl का वैद्युत अपघटन किस प्रकार होता
उत्तर:
गलित NaCl में केवल Na+ तथा Cl आयन होते हैं अतः कैथोड पर Na+ अपचयित होकर Na बनाते हैं तथा ऐनोड पर Cl ऑक्सीकृत होकर Cl2 बनाते हैं।
कैथोड पर – 2Na+ + 2e → 2Na(s)
ऐनोड पर – 2Cl – 2e → Cl2(g)

प्रश्न 12.
तनु तथा सान्द्र H2SO4 के वैद्युत अपघटन में होने वाली अभिक्रियाएँ लिखिए ।
उत्तर:
तनु H2SO4 के वैद्युत अपघटन पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
2H2O(/) → O2(g) + 4H+ (aq) + 4e, \(E_{\text {(सेल) }}^{\circ}\) = +1.23V तथा सांद्र H2SO4 लेने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
\(2 \mathrm{SO}_4^{2-}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{S}_2 \mathrm{O}_8^{2-}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{e}^{-}, \mathrm{E}_{\text {(बेल) }}^{\circ}=+1.96 \mathrm{~V}\)

प्रश्न 13.
अनन्त तनुता पर किसी दुर्बल वैद्युत अपघट्य की मोलर चालकता को किस प्रकार ज्ञात किया जाता है?
उत्तर:
दुर्बल वैद्युत अपघट्यों की मोलर चालकता पर सान्द्रता या तनुता का प्रभाव-दुर्बल वैद्युत अपघट्यों में प्रारम्भ में सान्द्रता अधिक होने पर वियोजन कम होता है लेकिन इनकी तनुता बढ़ाने पर, वियोजन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे एक मोल वैद्युत अपघट्य युक्त विलयन में आयनों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे मोलर चालकता (\(\Lambda_m\)) का मान बढ़ जाता है। अतः निम्न सान्द्रता के समीप तनुता बढ़ाने पर \(\Lambda_m\) का मान तेजी से बढ़ता है। (ग्राफ) उदाहरण-ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) |

प्रश्न 14.
किसी अल्प विलेय लवण की विलेयता को चालकता मापन द्वारा किस प्रकार ज्ञात किया जाता है?
उत्तर:
अल्प विलेय लवणों जैसे BaSO की जल में विलेयता, बहुत ही कम होती है अतः इसके विलयन में आयनों की सान्द्रता बहुत ही कम होगी। इसलिए इसके विलयन को अनन्त तनु मान सकते हैं तथा इसके संतृप्त विलयन की सान्द्रता ही इसकी विलेयता होगी। इस विलयन की मोलर चालकता तथा विशिष्ट चालकत्व ज्ञात करके विलेयता की गणना निम्नलिखित सूत्र द्वारा की जा सकती है-
S = \(\frac{\kappa \times 1000}{\Lambda_{\mathrm{m}}^{\circ}}\)

प्रश्न 15.
विद्युत अपघटनी चालन तथा धात्विक चालन में अन्तर बताइए ।
उत्तर:

  • विद्युत अपघटनी चालन आयनों द्वारा होता है जबकि धात्विक चालन इलेक्ट्रॉनों द्वारा होता है।
  • विद्युत अपघटन चालन में विद्युत प्रवाहित करने पर आयन क्रिया में भाग लेते हैं अर्थात् वैद्युत अपघटन होता है जबकि धात्विक चालकों पर कोई प्रभाव नहीं होता।
  • विद्युत अपघटन चालकों का ताप बढ़ाने पर चालकता बढ़ती है जबकि ताप बढ़ाने पर धात्विक चालकों की चालकता कम हो जाती है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित युग्मों में से किसमें अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होगी तथा क्यों ?
(a) 25°C पर KCl विलयन तथा 50°C पर KCl विलयन
(b) 0.2M CH3COOH क्लियन तथा 2M CH3COOH विलयन
(c) 25°C पर NH4OH विलयन तथा 75°C पर NH4OH विलयन
(d) 25°C पर AI का तार तथा 50°C पर Al का तार ।
उत्तर:
(a) 50°C पर KCl विलयन, क्योंकि ताप बढ़ाने पर आयनों की गति बढ़ती है।
(b) 0.2M CH3COOH विलयन, क्योंकि तनु विलयन में दुर्बल वैद्युत अपघट्य का आयनन अधिक होता है।
(c) 75°C पर NH4OH विलयन, क्योंकि ताप बढ़ाने पर दुर्बल वैद्युत अपघट्य का आयनन अधिक होता है।
(d) 25°C पर Al का तार क्योंकि ताप बढ़ाने पर धातुओं की चालकता कम होती है।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन में 3 घण्टे में 1.5 ग्राम कॉपर प्राप्त करने के लिए कितनी विद्युत धारा प्रवाहित करनी होगी ? [Cu का परमाणु भार = 63.5]
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 18
कॉपर का तुल्यांकी भार = \(\frac { 63.5 }{ 2 }\) = 31.75
क्योंकि Cu2+ से Cu बनता है जिसके लिए 2 इलेक्ट्रॉन आवश्यक है।
अतः \(Z=\frac{31.75}{96500}=3.29 \times 10^{-4}\)

फैराडे के प्रथम नियम से
W = ZIt
I = \(\frac { W }{ Zt }\)
W = 1.5 ग्राम, Z = 3.29 × 10-4, t = 3 × 60 × 60 सेकण्ड
अतः I = \(\frac{1.5}{3 \times 60 \times 60 \times 3.29 \times 10^{-4}}\)
I = 0.422 ऐम्पियर

प्रश्न 2.
गलित NaCl में 50 एम्पियर की धारा 2 घण्टे तक प्रवाहित करने पर
(a) ऐनोड पर कितने ग्राम क्लोरीन गैस प्राप्त होगी?
(b) प्राप्त क्लोरीन गैस का मानक ताप तथा दाब (NTP) पर आयतन कितना होगा?
उत्तर:
गलित NaCl में विद्युत प्रवाहित करने पर ऐनोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
(a) 2C → Cl2 + 2e
Cl2 का अणुभार = 35.5 × 2 = 71 ग्राम
आवेश Q = It
1 = 50 ऐम्पियर तथा t = 2 × 60 × 60 सेकण्ड = 7200 सेकण्ड
अतः Q = 50 × 7200 = 360000 C समीकरण के अनुसार,
2 × 96500 कूलॉम, Cl2 = 71 ग्राम Cl2 (1 मोल )
360000 कूलॉम Cl2 = \(\frac{360000}{2 \times 96500}\) × 71 = 132.4 ग्राम क्लोरीन

(b) 2 × 96500 कूलॉम Cl2 = 1 मोल Cl2
अतः 36,000 कूलॉम Cl2 = \(\frac{3,60,000}{2 \times 96500}\) = 1.8652 मोल क्लोरीन
NTP पर एक मोल Cl2 = 22.4 लीटर
अत: 1.8652 मोल Cl2 = 22.4 × 1.8652 = 41.78 लीटर क्लोरीन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 3.
कॉपर धातु की सतह जिसका क्षेत्रफल 60 cm2 है पर 0.004 मिलीमीटर मोटी Ag की परत के लेपन के लिए AgNO3 के विलयन में 5.0 ऐम्पियर की धारा कितने सेकण्ड तक प्रवाहित करनी आवश्यक होगी?
(सिल्वर का घनत्व 10.5 ग्राम सेमी तथा Ag का परमाणु भार = 108)
उत्तर:
कॉपर पर लेपित Ag की मात्रा (W)
= आयतन × घनत्व
= सतह का क्षेत्रफल × सतह की मोटाई × घनत्व
= 60 × 0.004 × 10.5
W = 2.52 ग्राम
फैराडे के प्रथम नियम से
W = Zlt
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 18

अभिक्रिया \(\mathrm{Ag}_{(\mathrm{aq})}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Ag}_{(\mathrm{s})}\) में एक इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त हो रहा
है अतः Ag का तुल्यांकी भार
= \(\frac { 108 }{ 1 }\) = 108
अतः Z = \(\frac { 108 }{ 96500 }\)
समय t = \(\frac { W }{ ZI }\) = \(\frac{2.52 \times 96500}{108 \times 5}\)
t = 450.3 सेकण्ड

प्रश्न 4.
श्रेणीक्रम में जुड़े हुए दो विद्युत अपघटनी सेलों में क्रमशः अम्लीकृत जल तथा CuSO4 के विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर 200 ml H2 (NTP पर ) तथा 0.60 ग्राम Cu प्राप्त हुए, तो Cu का तुल्यांकी भार कितना होगा?
उत्तर:
H2 का अणुभार = 2 तथा तुल्यांकी भार = 1
NTP पर 22.4 लीटर (22400 ml) H2 ग्राम
अतः 200ml H2 = \(\frac{2 \times 200}{22400}\) = 0.01785 ग्राम
प्राप्त Cu का भार = 0.60 ग्राम
फैराडे के द्वितीय नियम से-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 6

प्रश्न 5.
AlCl3 के विलयन में 0.1 फैराडे विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर कितने ग्राम AI धातु प्राप्त होगी ? (Al का परमाणु भार = 27)
उत्तर:
कैथोड पर होने वाली अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Al}_{(\mathrm{aq})}^{3+}+3 \mathrm{e} \rightarrow \mathrm{Al}_{(\mathrm{s})}\)
फैराडे के प्रथम नियम से-
W = ZQ
Z = \(\frac { M }{ nF }\)
अतः W = \(\frac{M}{n F} Q\)
Al के लिए M = 27, n = 3, F = 96500 कूलॉम
Q = 0.1. फैराडे = 9650 कूलॉम
W = \(\frac{27 \times 9650}{3 \times 96500}\) = 0.9 ग्राम

प्रश्न 6.
किसी आयन से परमाणु बनने पर होने वाले अपचयन में 6 × 1020 इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त होते हैं तो आयन के तुल्यांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(\mathrm{X}^{\mathrm{n}+}+\mathrm{ne}^{-} \rightarrow \mathrm{X}\)
n = 6 × 1023 = 0.001 मोल
क्योंकि 6 × 1023 = 1 मोल
चूँकि एक तुल्यांक आयन 1 मोल इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। अतः 0.001 मोल इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाले आयन के तुल्यांक = 0.001

प्रश्न 7.
गलित AlCl3, CuSO4 के जलीय विलयन तथा गलित NaCl से भरे विभिन्न विद्युत अपघटनी सेलों में 3 फैराडे विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर प्राप्त Al, Cu तथा Na की मात्राओं का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर:
(i) \(\mathrm{Al}_{(\mathrm{aq})}^{3+}+3 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Al}_{(\mathrm{s})}\) (कैथोडिक अभिक्रिया)
3 × 96500 कूलॉम विद्युत = 3
तुल्यांक Al = 1 मोल Al

(ii) \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
3 × 96500 कूलॉम विद्युत = 3
तुल्यांक Cu = 1.5 मोल Cu

(iii) \(\mathrm{Na}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Na}_{(\mathrm{s})}\)
3 × 96500 कूलॉम विद्युत = 3
तुल्यांक Na = 3 मोल Na
अतः Al, Cu तथा Na की मात्राओं का अनुपात
= 1 : 1.5 : 3
=2 : 3 : 6

प्रश्न 8.
Mg2+ आयन के विलयन से 1 ग्राम Mg प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की कीमत 5.00 रुपए है तो Al3+ से 10 ग्राम Al प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की कीमत ज्ञात कीजिए। (AI का परमाणु भार = 27 तथा Mg का परमाणु भार = 24 ) हल – फैराडे के प्रथम नियम से-
Al के लिए- W = ZQ
Z = \(\frac { E }{ F }\) = \(\frac { M }{ nF }\)
अतः W = \(\frac{M}{n F} Q\)
W = 10 ग्राम तथा n 3 क्योंकि Al3+ से Al बनता है।
अतः Q = \(\frac { WnF }{ M }\) = \(\frac{10 \times 3 \times 96500}{27}\) = 107222 कूलाम
इसी प्रकार Mg के लिए, Q = \(\frac { WnF }{ M }\)
(W= 1 ग्राम तथा n = 2 क्योंकि Mg2+ से Mg बनता है।)
= \(\frac{1 \times 2 \times 96500}{24}\) = 8041 कूलाम
प्रश्नानुसार, 8041 कूलाम विद्युत = 5.00 रुपए तो
107222 कूलाम विद्युत = \(\frac { 5 }{ 8041 }\) × 107222 = 66.67 रुपए

प्रश्न 9.
HCl से अम्लीकृत किए गए जल में 1 ऐम्पियर की धारा 3000 सेकण्ड तक प्रवाहित करने पर कैथोड पर मुक्त H2 की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विद्युत धारा की मात्रा Q = It
I = 1 ऐम्पियर, t = 3000 सेकण्ड
Q = 1 × 3000 = 3000 कूलॉम
कैथोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
\(\mathrm{H}_{(\mathrm{aq})}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \frac{1}{2} \mathrm{H}_2\)
अतः इस अभिक्रिया के अनुसार \(\frac { 1 }{ 2 }\) मोल H2 (1g H2) प्राप्त होने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा = 96500 कूलॉम = (1 मोल इलेक्ट्रॉन)
चूँकि 96,500 कूलॉम से प्राप्त
H2 = 1 ग्राम
अतः 3000 कूलॉम से प्राप्त
H2 = \(\frac { 1 }{ 96500 }\) × 3000 = 0.0310 ग्राम

प्रश्न 10.
H+ आयन के विलयन के विद्युत अपघटन से 6 मोल H2 गैस प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा कूलॉम में ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(2 \mathrm{H}^{+}+2 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{H}_2\)
समीकरण के अनुसार 1 मोल H2 प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा = 2 फैराडे

अतः 6 मोल H2 प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा = 2 × 6 = 12 फैराडे
12F = 12 × 96500 कूलॉम
=1158000 कूलॉम
=11.58 × 105 कूलॉम

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
सीमान्त मोलर चालकता क्या होती है ?
उत्तर:
किसी विलयन की अनन्त तनुता (लगभग शून्य सान्द्रता ) पर मोलर चालकता को सीमान्त मोलर चालकता कहते हैं। इसे \(\Lambda_{\mathrm{m}}^{\mathrm{o}}\) से दर्शाते हैं।

प्रश्न 2.
सेल स्थिरांक, सेल में विलयन का प्रतिरोध और विलयन की चालकता के बीच जो सम्बन्ध होता है, उसे स्पष्ट कीजिए। किस प्रकार विलयन की चालकता उसकी मोलर चालकता से सम्बन्धित होती है?
उत्तर:
(i) G = \(\frac { 1 }{ R }\) = \(\frac { A }{ pl }\) = k\(\frac { A }{ l }\)
यहाँ G = चालकत्व, k= चालकता (विशिष्ट चालकत्व)
\(\frac { l }{ A }\) = सेल स्थिरांक
R = विलयन का प्रतिरोध, p = प्रतिरोधकता

(ii) मोलर चालकता \(\Lambda_{\mathrm{m}}\) = \(\frac { k × 1000 }{ M }\)
K = चालकता, M = मोलरता

प्रश्न 3.
कुछ धातुओं के मानक इलेक्ट्रॉड विभव (E°) दिए गए हैं-
K+/K = – 2.93 V, Ag+/Ag = 0.80 V, Cu2+/Cu = 0.34 V, Mg2+/Mg = – 2.37 V, Cr2+ / Cr = – 0.74 V, Fe2+/ Fe = – 0.44 V.
इन धातुओं को उनके बढ़ते अपचायी सामर्थ्य के क्रम में पुनः व्यवस्थित कीजिए।
अथवा
एक विद्युत रासायनिक सेल की दो अर्ध-अभिक्रियाएँ नीचे दी गई हैं-
\(\mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+8 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+5 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Mn}^{2+}(\mathrm{aq})+4 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l), \mathrm{E}^{\circ}=+1.51 \mathrm{~V}\)

\(\mathrm{Sn}^{2+}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{Sn}^{4+}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{e}^{-}, \mathrm{E}^{\circ}=+0.15 \mathrm{~V}\)
इन दो अर्ध- अभिक्रियाओं के आधार पर रेडॉक्स (अपचयोपचय) अभिक्रिया का समीकरण लिखिए और मानक इलेक्ट्रॉड विभवों से सेल विभव परिकलित कीजिए और प्रागुक्ति कीजिए कि अभिक्रिया अभिकारक अनुकूली होगी अथवा उत्पाद अनुकूल होगी।
उत्तर:
मानक इलेक्ट्रॉड विभव के आधार पर इन धातुओं की बढ़ती अपचायी सामर्थ्य का क्रम निम्नलिखित है-
Ag < Cu < Fe < Cr < Mg < K [मानक इलेक्ट्रॉड विभव (अपचयन विभव) का घटता क्रम ]
अथवा
मानक इलेक्ट्रॉड विभव के आधार पर अभिक्रिया का संतुलित समीकरण निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 7
अधिक क्रियाशील धातु (Mn) का एनोड होगा अतः
\(\mathrm{E}_{\mathrm{R}}^{\circ}=1.51 \mathrm{~V} \mathrm{E}_{\mathrm{L}}^{\circ}=-0.15 \mathrm{~V}\) (क्योंकि ऑक्सीकरण विभव दिया गया है अतः इसका विपरीत अपचयन विभव होगा)
सेल = 1.51 – (- 0.15 V)
सेल = 1.66 V
सेल का मान धनात्मक है अतः उपरोक्त अभिक्रिया सम्पन्न होगी, अर्थात् अभिक्रिया उत्पाद अनुकूली है।

प्रश्न 4.
(a) सीसा संचायक बैटरी किस प्रकार की बैटरी है? सीसा संचायक बैटरी के काम करने पर जो एनोड और कैथोड पर अभिक्रियाएँ होती हैं और कुल मिलाकर जो सेल अभिक्रिया होती है, उन्हें लिखिए।
(b) 0.10 M K2Cr2O7 (aq), 0.20 M Cr3+ (aq) और 1.0 × 10-4 M H+ (aq) वाले अर्ध-सेल का विभव परिकलित कीजिए । अर्ध- सेल अभिक्रिया इस प्रकार दी जाती है-
\(\begin{array}{r}\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+14 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+6 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \\2 \mathrm{Cr}^{3+}(\mathrm{aq})+7 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l)\end{array}\)
इसके लिए मानक इलेक्ट्रॉड विभव दिया गया है, E° = 1.33V.
उत्तर:
(a) सीसा संचायक बैटरी (सेल) एक द्वितीयक सेल है। सीसा संचायक बैटरी के काम करने पर होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 8

प्रश्न 5.
एक विद्युत अपघट्य के 1.5 M विलयन की मोलर चालकता 138.9 S mol-1 पाई जाती है। इस विलयन की चालकता परिकलित कीजिए ।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 9

प्रश्न 6.
1 cm व्यास और 50 cm लम्बाई वाले 0.05 M NaOH विलयन के कॉलम का विद्युतीय प्रतिरोध 5.55 × 103 ohm है। इसकी प्रतिरोधकता, चालकता और मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
r = 1/2 = 0.5 cm
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
A = πr2 = 3.14 × 0.52 cm2 = 0.785cm2 = 0.785 × 10-4m2
l = 50 cm 0.5 m
प्रतिरोध R = \(\frac { pl }{ A }\)
या p = \(\frac { RA }{ l }\) = \(\frac{5.55 \times 10^3 \Omega \times 0.785 \mathrm{~cm}^2}{50 \mathrm{~cm}}\)
प्रतिरोधकता (p) = 87.135 Ω cm
चालकता \(\kappa=\frac{1}{\rho}=\left(\frac{1}{87.135}\right) \mathrm{S} \mathrm{cm}^{-1}\)
\(\mathcal{K}\) = 0.011476 s cm-1
\(\mathcal{K}\) = 0.01148 s cm-1
मोलर चालकता,
\(\Lambda_{\mathrm{m}}=\frac{\kappa \times 1000}{\mathrm{c}} \mathrm{cm}^3 \mathrm{~L}^{-1}\)
c = 0.05 mol L-1
\(\Lambda_{\mathrm{m}}=\frac{0.01148 \mathrm{~S} \mathrm{~cm}^{-1} \times 1000 \mathrm{~cm}^3 \mathrm{~L}^{-1}}{0.05 \mathrm{~mol} \mathrm{~L}^{-1}}\)
\(\Lambda_{\mathrm{m}}=229.6 \mathrm{~S} \mathrm{~cm}{ }^2 \mathrm{~mol}^{-1}\)
जब cm के स्थान पर m के पदों में गणना करें तो-
p = \(\frac { RA }{ l }\) = \(\frac{5.55 \times 10^3 \Omega \times 0.785 \times 10^{-4} \mathrm{~m}^2}{0.5 \mathrm{~m}}\)
= 87.135 × 10-2 Ω m
\(\mathcal{K}\) = \(\frac { l }{ p}\) = \(\frac { 100 }{ 87.135 }\)Ω cm
= 1.148 S m-1
तथा \(\Lambda_{\mathrm{m}}\) = \(\frac{\mathrm{K}}{\mathrm{c}}\) = \(\frac{1.148 \mathrm{~S} \mathrm{~m}^{-1}}{50 \mathrm{~mol} \mathrm{~m}^{-3}}\)
= 229.6 × 10-4 S m2 mol-1

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 7.
AgNO3 के विलयन को 2.0 ऐम्पियर की धारा से 30 मिनट तक वैद्युत अपघटित किया गया। कैथोड पर निक्षेपित चाँदी का द्रव्यमान क्या होगा?
(Ag का मोलर द्रव्यमान 108 ग्राम मोल-1, F = 96500 कूलाम मोल-1)
उत्तर:
समय (t) = 30 मिनट = 30 × 60 = 1800 sec.
I = 2 ऐम्पियर
आवेश = धारा × समय
Q = It = 2 × 1800 कूलाम
= 3600 amp sec. = 3600 कूलाम
\(\mathrm{Ag}_{(\mathrm{aq})}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Ag}_{(\mathrm{s})}\) के अनुसार, एक मोल (108 g) Ag को निक्षेपित करने के लिए IF या 96500 कूलाम आवेश की आवश्यकता होती है।
अतः 3600 कूलाम आवेश द्वारा निक्षेपित Ag का द्रव्यमान
= \(\frac{108 \times 3600}{96500}\) = 4.029 = 4.03 ग्राम

प्रश्न 8.
KCl, HCl एवं CH3COOK के लिए \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) के मान क्रमशः 149.8 S Cm2 mol-1, 425.9 S cm2 mol-1 एवं 114.4 S Cm2 mol-1 हैं | CH3COOH के लिए \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (CH3COOH) = \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (CH3COOK) + \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (HCl) – \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (KCl)
= 114.4 + 425.9 – 149,8
= 540.3 – 149.8
= 390.5 S cm2 mol-1

प्रश्न 9.
विद्युत चालन के आधार पर अचालक एवं अर्धचालक को समझाइए |
उत्तर:
अचालक या विद्युतरोधी – वे ठोस जिनकी चालकता बहुत कम (10-20 से 10-10 ohm-1 m-1 ) होती है, उन्हें अचालक कहते हैं। इनमें स्वतंत्र आयन या स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन नहीं होते अतः ये विद्युत का चालन नहीं करते हैं। इनमें संयोजी बैंड पूर्ण भरा होता है तथा संयोजी बैण्ड एवं चालन बैंड के मध्य ऊर्जा अन्तराल अधिक होता है। उदाहरण- यूरिया तथा शर्करा ।

अर्धचालक – वे ठोस जिनकी चालकता, चालक तथा अचालक के मध्य (10-6 से 104 ohm-1 m-1 ) होती है, उन्हें अर्धचालक कहते हैं। अर्धचालकों में संयोजी बैंड तथा चालक बैंड के मध्य ऊर्जा अन्तराल बहुत कम होता है अतः ये अल्प चालकता दर्शाते हैं। उदाहरण- सिलिकन एवं जर्मेनियम ।

प्रश्न 10.
साम्य अवस्था पर डेन्यल सेल के लिए नेन्ंस्ट समीकरण लिखिए एवं E°(सेल) तथा साम्य स्थिरांक (Kc) में सम्बन्ध व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
डेनियल सेल में प्रयुक्त अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 10
अतः T = 298 K पर R तथा F का मान रखने पर, उपर्युक्त समीकरण को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है-
सेल = \(\frac { 0.059V }{ 2 }\)log KC
डेन्यल सेल के लिए E°सेल =1.1 V
1.1 V = \(\frac { 0.059V }{ 2 }\)log Kc
log Kc = \(\frac{(1.1 \mathrm{~V} \times 2)}{0.059 \mathrm{~V}}\) = 37.288
Kc = Antilog 37.288 = 1.941 × 1037
Kc = 2 × 1037 (297 K परं)
अतः सामान्य रूप में,
सेल = \(\frac{2.303 \mathrm{RT}}{\mathrm{nF}}\)log Kc या E°सेल = \(\frac{0.059 \mathrm{~V}}{\mathrm{nF}}\) log Kc
यह समीकरण सेल के मानक विभव (E°सेल) तथा साम्य स्थिरांक (Kc) के मध्य सम्बन्ध है।

प्रश्न 11.
(अ) डेनियल सेल का नामांकित चित्र बनाइए ।
(ब) इलेक्ट्रॉडों पर होने वाली ऑक्सीकरण एवं अपचयन की अर्ध अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
(अ) डेनियल सेल को निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जाता हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 11
डेनियल सेल जिसमें जिंक एवं कॉपर इलेक्ट्रॉड अपने लवणों के विलयनों में उपस्थित हैं।
(ब) डेन्यल सेल में इलेक्ट्रॉडों पर होने वाली अर्ध अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

कैथोड पर-

(i) \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Cu}(\mathrm{s})\) (अपचयन अर्ध अभिक्रिया)
ऐनोड पर –
(ii) \(\mathrm{Zn}(\mathrm{s}) \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e}^{-}\) (ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया) तथा सम्पूर्ण अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

प्रश्न 12.
डेनियल सेल का मानक इलेक्ट्रॉड विभव E° = + 1.1V है तो अभिक्रिया \(\mathbf{Z n}_{(\mathrm{s})}+\mathbf{C u}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathbf{Z n}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathbf{C u}_{(\mathrm{s})}\) के लिए △G° का परिकलन कीजिए। (F = 96500C mol-1)
उत्तर:
उपरोक्त अभिक्रिया के लिए n = 2
△G° = – nFE°सेल
= – 2 × 96500 × 1.1
= – 212,300
= – 212,300 जूल मोल-1
= 212.30 किलो जूल मोल-1

प्रश्न 13.
(i) 298 K पर निम्नलिखित सेल के विद्युत वाहक बल का परिकलन कीजिए-
Mg(s) | Mg2+ (0.1M) || Cu2+(0.01M) | Cu(s)
दिया गया है-
सेल = + 2.71V तथा 1F = 96500 C mol-1

(ii) अपोलो अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए विद्युत शक्ति उपलब्ध कराने के लिए प्रयुक्त सेल के प्रकार का नाम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 12

प्रश्न 14.
(अ) क्या हम CuSO4 के विलयन को लोहे के पात्र में भण्डारण कर सकते हैं? समझाइए ।
(ब) कॉलराउश का नियम लिखिए एवं एक अनुप्रयोग बताइए ।
उत्तर:
(अ) CuSO4 के विलयन का लोहे के पात्र में भण्डारण नहीं किया जा सकता क्योंकि लोहा, कॉपर से अधिक क्रियाशील होता है। अर्थात् आयरन (लोहा) कॉपर की तुलना में प्रबल अपचायक है। अतः यह CuSO4 के विलयन से कॉपर को अवक्षेपित कर देता है।
\(\mathrm{CuSO}_{4(\mathrm{aq})}+\mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{FeSO}_{4(\mathrm{aq})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

(ब) कोलराडश के अनुसार वैद्युत अपघट्यों के वे युग्म जिनमें धनायन या ऋणायन समान हों, उनकी अनन्त तनुता पर मोलर चालकताओं (A) का अन्तर निश्चित होता है।
\(\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{KCl})}^{\circ}-\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{NaCl})}^{\circ}=\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{KBr})}^{\circ}-\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{NaBr})}^{\circ}\)

अतः अनन्त तनुता पर किसी विद्युत अपघट्य का प्रत्येक आयन मोलर चालकता (\(\Lambda_{\mathrm{m}}\)) में एक निश्चित योगदान देता है तथा यह दूसरे आयन पर निर्भर नहीं करता। इस आधार पर कोलराडश ने आयनों के स्वतंत्र अभिगमन का नियम दिया जिसे कोलराडश का नियम कहते हैं। इसके अनुसार किसी वैद्युत अपघट्य की सीमान्त मोलर चालकता, उसके धनायन तथा ऋणायन की सीमान्त मोलर चालकता का योग होती है।
उदाहरण – KCl के लिए
\(\Lambda_{\mathrm{m}}^{\circ} \mathrm{KCl}=\lambda_{\mathrm{K}^{+}}^{\circ}+\lambda_{\mathrm{Cl}^{-}}^{\circ}\) \(\lambda_{\mathrm{K}^{+}}^{\circ}\)

\(\lambda_{\mathrm{K}^{+}}^{\circ}\) व \(\lambda_{\mathrm{Cl}^{-}}^{\circ}\) क्रमश: K+ तथा Cl की सीमान्त मोलर चालकता है। कोलराडश के नियम से किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य की सीमान्त मोलर चालकता (अनन्त तनुता पर मोलर चालकता) ज्ञात की जा सकती है।
उदाहरण – CH3COOH (HAc) के लिए
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 13

प्रश्न 15.
(अ) लोहे के जंग लगने की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
(ब) डेन्यल सेल की सम्पूर्ण अभिक्रिया दीजिए एवं इस सेल के लिए नेर्नूस्ट समीकरण का गणितीय रूप लिखिए।
उत्तर:
(अ) लोहे के जंग लगने की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+4 \stackrel{+}{\mathrm{H}}_{(\mathrm{aq})} \rightarrow 2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(/)}\)
इसके पश्चात् वायुमण्डलीय ऑक्सीजन के द्वारा Fe2+ आयन पुनः ऑक्सीकृत होकर Fe3+ बनाते हैं। ये आयन जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3. x H2O) बना लेते हैं। यही जंग का रासायनिक संघटन है।

(ब) डेनियल सेल की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
इसके लिए नेर्नूस्ट समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है-
E(सेल) = E°सेल – \(\frac{\mathrm{RT}}{2 \mathrm{~F}} \ln \frac{\left[\mathrm{Zn}^{2+}\right]}{\left[\mathrm{Cu}^{2+}\right]}\)
सेल = मानक सेल विभव
समीकरण में प्राकृतिक लघुगणक को 10 के आधार में बदलने तथा R, F एवं T के मान रखने पर
E(सेल) = E°सेल – \(\frac{0.059}{2} \log \frac{\left[\mathrm{Zn}^{2+}\right]}{\left[\mathrm{Cu}^{2+}\right]}\)

प्रश्न 16.
प्रतिरोधकता का SI मात्रक लिखिये ।
उत्तर:
प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम मीटर (Ωm) होता है।

प्रश्न 17.
Mg2+ व Cl आयनों की सीमान्त मोलर चालकता क्रमश: 106.0 s.cm2.mol-1 तथा 76.3 s.cm2.mol-1 है। MgCl2 की सीमान्त मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
MgCl2 की सीमान्त मोलर चालकता
\(\Lambda_{\mathrm{m}}^0\left(\mathrm{MgCl}_2\right)=\lambda^{\circ}\left(\mathrm{Mg}^{2+}\right)+2 \lambda^{\circ}\left(\mathrm{Cl}^{-}\right)\)
= 106.0 s.cm.mol-1 + 2( 76.3 s. cm2.mol-1) = 258.6 s.cm2.mol-1

प्रश्न 18.
(अ) फैराडे के विद्युत अपघटन के द्वितीय नियम को लिखिए।
(ब) मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(अ) फैराडे के विद्युत अपघटन का द्वितीय नियम – विभिन्न वैद्युत अपघट्यों के विलयनों में विद्युत की समान मात्रा समान समय तक प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रॉडों पर प्राप्त विभिन्न पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों के समानुपाती होती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 14

प्रश्न 19.
जब 1.5 A की विद्युत धारा AgNO3 के विलयन में से प्रवाहित की जाती है तो कैथोड पर सिल्वर का 1.5 g जमा होने में जो समय लगता है, उसका परिकलन कीजिए ।
(Ag का मोलर द्रव्यमान = 108 g mol-1, 1 F = 96500 C mol-1)
उत्तर:
1 मोल (108g) Ag के निक्षेपित होने के लिए आवश्यक आवेश = 96500 कूलाम
अतः 1.5 g Ag के निक्षेपित होने के लिए प्रयुक्त आवेश
= \(\frac { 96500 }{ 108 }\) × 1.5 = 1340.3 कूलाम
आवेश Q = I × t
अतः समय (t) = \(\frac { Q }{ I }\) = \(\frac { 1340.3 }{ 1.5 }\) = 893.5 सेकण्ड
इसलिए 1.5 g सिल्वर के जमा होने में लगा समय = 893.5 सेकण्ड

प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए E°सेल और △rG° को 25°C पर परिकलित कीजिए-
A2+ + B+ → A3+ + B
दिया गया है – Kc = 1010, 1 F = 96500 C mol-1
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 15

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.1.
निम्न अभिक्रियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए-
(i) 3NO (g) → N2O(g); वेग = k[NO]2
(ii) H2O2 (aq) + 3I (aq) + 2H+ → 2H2O(I) + I3; वेग = k[H2O2][I]
(iii) CH3CHO (g) → CH4 (g) + CO(g); वेग = k[H2CHO]3/2
(iv) C2H5Cl (g) → C2H4 (g) + HCl(g); वेग = k[C2H5Cl]
उत्तर:
(i) वेग = k[NO]2
अतः अभिक्रिया की कोटि = 2
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 1
अतः k की इकाई = L mol-1 s-1

(ii) वेग = k[H2O2][I]
अभिक्रिया की कोटि = 1 + 1 = 2
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 2
अतः K की इकाई = L mol-1 s-1

(iii) वेग = k [CH3CHO]3/2
अभिक्रिया की कोटि = 1.5
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 3

(iv) अभिक्रिया की कोटि = 1
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 4

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.2.
अभिक्रिया 2A + B → A2B के लिए वेग = k[A][B]2 यहाँ k का मान 2.0 × 10-6 mol-2 L2s-1 है। प्रारंभिक वेग की गणना कीजिए; जब [A] = 0.1 mol L-1 एवं [B] = 0.2 mol L-1 हो तथा अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए; जब [A] घटकर 0.06mol L -1 रह जाए।
उत्तर:
अभिक्रिया 2A + B A2B के लिए प्रारंभिक वेग = k[A][B]2
k = 2.0 × 10-6 mol-2L2s-1,
दिया है – [A] = 0.1 mol L-1 तथा [B] = 0.2 mol L-1
अतः प्रारंभिक वेग = 2.0 × 10-6 × 0.1 × (0.2)2
= 2 × 10-6 × 0.1 × 0.04
= 8 × 10-9 mol L-1s-1
जब A की सांद्रता घटकर 0.06 mol L-1 रह जाती है अर्थात् 0.1 मोल A में से 0.04 मोल क्रिया करता है तो अभिक्रिया की रससमीकरणमिति के अनुसार, 2A + B → A2B
प्रारम्भिक सांद्रता 0.1 0.2
t समय पर सांद्रता (0.1 0.04) (0.2 – 9.02)
अतः [A] = 0.06M तथा [B] = 0.18 M
इस स्थिति में अभिक्रिया का वेग = k[A] [B]2
= 2 × 10-6 × 0.06 × (0.18)2
वेग = 3.888 × 109 = 3.89 × 10-9 mol L-1s-1

प्रश्न 4.3.
प्लैटिनम सतह पर NH3 का अपघटन शून्य कोटि की अभिक्रिया है । N2 एवं H2 के उत्पादन की दर क्या होगी जब k का मान 2.5 × 10-4 mol L-1s-1 हो?
उत्तर:
अमोनिया के विघटन की अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है- 2NH3 → N2 + 3H2
अभिक्रिया का वेग = \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = k [सांद्रता]°
क्योंकि अभिक्रिया की कोटि = शून्य
अतः = \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = 2.5 × 10-4 mol L-1s-1 × 1
अतः N2 के बनने की दर
= \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = 2.5 × 10-4 mol L-1s-1
तथा H2 के बनने की दर
= \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{H}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = 3 × \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\)
=3 × 2.5 × 10-4 mol L-1s-1
= 7.5 × 10-4 mol L-1s-1

प्रश्न 4.4.
डाइमेथिल ईथर के अपघटन से CH4, H2 तथा CO बनते हैं। इस अभिक्रिया का वेग निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है-
वेग= k[CH3OCH3]3/2
अभिक्रिया के वेग का अनुगमन बंद पात्र से बढ़ते दाब द्वारा किया जाता है, अतः वेग समीकरण को डाइमेथिल ईथर के आंशिक दाब के पद में भी दिया जा सकता है। अतः
वेग = \(\left(\mathrm{p}_{\mathrm{CH}_3 \mathrm{OCH}_3}\right)^{3 / 2}\) यदि दाब को bar में तथा समय को मिनट में मापा जाये तो अभिक्रिया के वेग एवं वेग स्थिरांक की इकाइयाँ क्या होंगी?
उत्तर:
डाइमेथिल ईथर के अपघटन की अभिक्रिया निम्न प्रकार होगी-
CH3 – O – CH3 → CH4 + H2 + CO
अभिक्रिया का वेग k = \(\left(\mathrm{p}_{\mathrm{CH}_3 \mathrm{O}-\mathrm{CH}_3}\right)^{3 / 2}\)
अतः वेग की इकाई = bar min-1 या = bar s-1
वेग स्थिरांक, HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 5
अतः वेग स्थिरांक की इकाई bar-1/2 s-1 होगी।

प्रश्न 4.5.
रासायनिक अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव डालने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं-
(i) अभिकारकों की प्रकृति
(ii) अभिकारकों की सांद्रता (गैसों के संदर्भ में दाब )
(iii) ताप
(iv) उत्प्रेरक ।

(i) अभिकारकों की सान्द्रता – द्रव्यअनुपाती क्रिया के नियम के अनुसार अभिकारकों की सान्द्रता बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है। अभिक्रिया वेग को अभिकारकों की सान्द्रता के पदों में व्यक्त करना वेग नियम (Rate Law) या वेग व्यंजक या वेग समीकरण कहलाता है। गैसीय अभिक्रियाओं में दाब बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग उस दिशा में बढ़ता है जिस तरफ गैसीय अणुओं की संख्या कम होती है।

(ii) अभिकारकों की सांद्रता – अभिक्रिया मिश्रण का विलोडन करने पर अणुओं के मध्य समागम बढ़ता है जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ता है।

(iii) ताप – सामान्यतः ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है क्योंकि ताप बढ़ाने पर क्रियाकारकों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है जिसके कारण ऊर्जित अणुओं की सान्द्रता बढ़ती है अतः प्रति सेकण्ड प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ती है। प्रयोगों से ज्ञात हुआ है कि 10°C ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग 2 से 3 गुना हो जाता है। अभिक्रिया वेग पर ताप के प्रभाव की व्याख्या आरेनियस के सिद्धान्त से की जाती है, जिसका विस्तृत अध्ययन आगे खण्ड 4.5 में करेंगे।

(iv) उत्प्रेरक – उत्प्रेरक वे पदार्थ होते हैं जिनमें स्वयं में कोई स्थायी रासायनिक परिवर्तन के बिना, अभिक्रिया वेग को बढ़ाते हैं । वह पदार्थ जो अभिक्रिया के वेग को बढ़ा देता है लेकिन वह स्वतः रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहता है उसे उत्प्रेरक कहते हैं तथा इस क्रिया को उत्प्रेरण कहते हैं ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 30
वे पदार्थ जो अभिक्रिया के वेग को कम करते हैं उन्हें निरोधक (Inhibitor) कहते हैं।

प्रश्न 4.6
किसी अभिक्रियक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा; यदि अभिक्रियक की सांद्रता-
(i) दुगुनी कर दी जाए
(ii) आधी कर दी जाए।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया के लिए कोटि 2 है अतः अभिक्रिया का वेग = k [सांद्रता]2
(i) अभिक्रियक की सांद्रता दुगुनी करने पर,
वेग = k [2 सांद्रता]2
वेग = 4k [सांद्रता]2
अतः अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है।

(ii) अभिक्रियक (Reactant) की सांद्रता आधी कर दी जाए तो
वेग = k[\(\frac { 1 }{ 2 }\) – सांद्रता]2
वेग = \(\frac { 1 }{ 4 }\) [सांद्रता]2
अतः अभिक्रिया का वेग एक चौथाई अर्थात् \(\frac { 1 }{ 4 }\) गुना हो जाता है।

प्रश्न 4.7.
वेग स्थिरांक पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? ताप के इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप से कैसे प्रदर्शित कर सकते हैं?
उत्तर:
सामान्यतः ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है। अभिक्रिया का वेग, वेग स्थिरांक के रूप में व्यक्त किया जाता है। अतः ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान बढ़ जाता है।
किसी रासायनिक अभिक्रिया के ताप में 10°C की वृद्धि करने पर वेग स्थिरांक लगभग दुगुना हो जाता है।
अतः ताप गुणांक = \(\frac{k_{(t+10)}}{k_t} \approx 2\)
अभिक्रिया के वेग की ताप पर निर्भरता को आर्रेनिअस समीकरण से समझा सकते हैं।
k = Ae-Ea/RT
यहाँ A आर्रेनिअस गुणक अथवा आवृत्ति गुणक है, इसे पूर्व – चरघातांकी गुणक भी कहते हैं। यह किसी विशिष्ट अभिक्रिया के लिए स्थिरांक होता है। यहाँ R गैस स्थिरांक है तथा Ea सक्रियण ऊर्जा है जिसे J mol-1 में व्यक्त करते हैं।
अभिकारक तथा उत्पाद के मध्य सक्रियित संकुल बनता है जिसके बनने के लिए आवश्यक ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा (Ea) कहते हैं।

प्रश्न 4.8.
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 6
30 से 60 सेकंड समय अंतराल में औसत वेग की गणना कीजिए ।
उत्तर:
औसत वेग = (rav) = – \(\frac{\Delta[\mathrm{R}]}{\Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{c_2-c_1}{\Delta t}\)
= – \(\frac{(0.17-0.31)}{60-30}\) = – \(\frac{(-0.14)}{30}\)
= 4.666 × 10-3
= 4.67 × 10-3 mol L-1 s-1

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.9.
एक अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है
(i) अवकल वेग समीकरण लिखिए।
(ii) B की सांद्रता तीन गुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(iii) A तथा B दोनों की सांद्रता दुगुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
यह अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है अतः
(i) अवकल वेग समीकरण-
वेग = k [A]1 [B]2
अतः अभिक्रिया की कुल कोटि = 1 + 2 = 3

(ii) B की सांद्रता तीन गुनी करने पर –
वेग = k[A]1 [3B]2
|वेग = 9k[A]1 [B]2
अतः अभिक्रिया का वेग 9 गुना हो जाता है।

(iii) A तथा B दोनों की सांद्रता दुगुनी करने पर –
वेग = k[A]1 [B]2
वेग = k[2A]1 [2B]2
वेग = 8k [A]1 [B]2
अतः अभिक्रिया का वेग 8 गुना हो जाता है।

प्रश्न 4.10.
A और B के मध्य अभिक्रिया में A और B की विभिन्न प्रारंभिक सांद्रताओं के लिए प्रारंभिक वेग (r0) नीचे दिए गए हैं।
A और B के प्रति अभिक्रिया की कोटि क्या है?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 7
उत्तर:
माना कि A के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि = a तथा B के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि = b
अतः वेग = k[A]a[B]b
पाठ्यांक (Reading) (1) तथा (2) से
5.07 × 10-5 = k [0.20]a [0.30]b …..(1)
5.07 × 10-5 = k [0.20]a [0.10]b …..(2)
समीकरण (2) में समीकरण (1) का भाग देने पर,
\(\frac{5.07 \times 10^{-5}}{5.07 \times 10^{-5}}\) = \(\frac{\mathrm{k}[0.20]^a[0.10]^b}{\mathrm{k}[0.20]^{\mathrm{a}}[0.30]^{\mathrm{b}}}\)
या 1 = \(\left(\frac{0.10}{0.30}\right)^b\) या b = 0

पाठ्यांक (2) से,
वेग = 5.07 × 10-5 = k [0.20]a [0.10]b
5.07 × 10-5 = k [0.20]a × 1 ….(3)
(∵ b = 0)

पाठ्यांक (3) से,
वेग = 1.43 × 10-4 = k[0.40]a [0.05]b ….(4)
= k[0.40]a × 1

समीकरण (4) को समीकरण (3) से भाग देने पर,
\(\frac{1.43 \times 10^{-4}}{5.07 \times 10^{-5}}\) = \(\frac{k[0.40]^a}{k[0.20]^a}\) = \(\left[\frac{0.4}{0.2}\right]^{\mathrm{a}}\) = (2)a
(2)a = 2.820
a log 2 = log 2.820
a = \(\frac{\log 2.820}{\log 2}\) = \(\frac{0.4490}{0.3010}\)
a = 1.49 = 1.5
अतः A के लिए अभिक्रिया की कोटि, 1.5 तथा B के लिए अभिक्रिया की कोटि शून्य है।

प्रश्न 4.11.
2A + B → C + D अभिक्रिया की बलगतिकी अध्ययन करने पर निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए। अभिक्रिया के लिए वेग नियम तथा वेग स्थिरांक ज्ञात कीजिए ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 8
उत्तर:
अभिक्रिया 2A + B → C + D के लिए वेग व्यंजक-
वेग k[A]a[B]b
यहाँ a तथा b, A व B के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि है।
प्रयोग I तथा IV से-
वेग = 6.0 × 10-3 = k[0.1]a [0.1]b ….(1)
2.4 × 10-2 = k[0.4]a [0.1]b ….(2)
समीकरण ( 2 ) में समीकरण (1) का भाग देने पर,

\(\frac{2.4 \times 10^{-2}}{6.0 \times 10^{-3}}\) = \(\left(\frac{0.4}{0.1}\right)^{\mathrm{a}}\)
4 = 4a अतः a = 1
प्रयोग II तथा III से-
वेग 7.2 × 10-2 = k(0.3)a (0.2)b ….(3)
2.88 × 10-1 = k(0.3)a (0.4)b ….(4)

समीकरण (4) में समीकरण (3) का भाग देने पर,
\(\frac{2.88 \times 10^{-1}}{7.2 \times 10^{-2}}\) = \(\frac{k(0.3)^l(0.4)^b}{k(0.3)^l(0.2)^b}\)
4 = (2)b अतः b = 2
अतः a तथा b के मान से इस अभिक्रिया के लिए वेग नियम इस प्रकार लिखा जा सकता है-
a = 1 तथा b = 2

वेग नियम = k[A]1[B]2
अतः अभिक्रिया की कोटि = 1 + 2 = 3
प्रयोग I के अनुसार,
वेग = 6 × 10-3 = k[0.1]a[0.1]b, (a = 1, b = 2)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 9
अतः वेग स्थिरांक k = 6.0 M-2 min-1

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प्रश्न 4.12.
A तथा B के मध्य अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति शून्य कोटि की है निम्न तालिका में रिक्त स्थान भरिए ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 10
उत्तर:
A तथा B के मध्य अभिक्रिया में A के संदर्भ में अभिक्रिया प्रथम कोटि तथा B के संदर्भ में अभिक्रिया शून्य कोटि की है।
अतः इसके लिए वेग समीकरण
= k[A]1 [B]0
= k[A]
(i) प्रयोग से.
वेग = 2.0 × 10-2 = k[0.1]
अतः वेग नियतांक, k = \(\frac{2.0 \times 10^{-2}}{0.1}\) = 0.2 min-1

(ii) प्रयोग II से,
वेग = k[A]
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 11

(iii) प्रयोग III से,
वेग = k[A]
= 0.2 × 0.4
= 0.08 M min-1
= 8.0 × 10-2 2M min-1

(iv) प्रयोग IV से,
वेग = K[A]
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 12

अतः रिक्त स्थानों की पूर्ति के पश्चात् सम्पूर्ण तालिका निम्न प्रकार होगी-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 13

प्रश्न 4.13.
नीचे दी गई प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के ar स्थिरांक से अर्धायु की गणना कीजिए-
(i) 200 s-1
(ii) 2 min-1
(iii) 4 year-1
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए-
अर्धायु, t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)

(i) वेग नियतांक, k = 200s-1
अतः t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ 200 }\) = 0.003465
= 3.465 × 10-3 s
= 3.47 × 10-3 s

(ii) k = 2 min-1 तो t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ 2 }\)
= 0.3465 min
= 0.35 min

(iii) k = 4 year-1 तो t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ 4 }\) = 0.1732 year
t1/2 = 0.173 year

प्रश्न 4.14.
14C रेडियोएक्टिव क्षय की अर्धायु 5730 वर्ष है। एक पुरातत्व कलाकृति की लकड़ी में, जीवित वृक्ष की लकड़ी की तुलना में 80% 14C की मात्रा है। नमूने की आयु का परिकलन कीजिए ।
उत्तर:
अर्धायु, t1/2 = 5730 वर्ष
अतः वेग नियतांक (क्षयांक), k या λ = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
k = \(\frac{0.693}{5730}\)
k = 1.209 × 10-4 वर्ष-1
चूँकि रेडियोएक्टिव विघटन की अभिक्रिया प्रथम कोटि की होती है
अतः वेग नियतांक या क्षयांक
k = \(\frac{2.303}{t}\) log \(\frac{\left[R_0\right]}{[R]}\)
चूँकि 20% विघटन हो रहा है अतः t पर 14C है = 80%
[R0] = 100 तथा [R] = 80
अतः t = \(\frac{2.303}{k}\) log \(\frac { 100 }{ 80 }\)
t = \(\frac{2.303}{1.209 \times 10^{-4}}\) log 1.25
t = \(\frac{2.303}{1.209 \times 10^{-4}}\) × (0.0969)
= 0.1845 × 104 = 1845 वर्ष

प्रश्न 4.15.
गैस प्रावस्था में 318K पर N2O5 के अपघटन की [2N2O5 → 4NO2+O2] अभिक्रिया के आँकड़े आगे दिए गए हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 14
(i) [N2O5] एवं t के मध्य आलेख खींचिए ।
(ii) अभिक्रिया के लिए अर्धायु की गणना कीजिए ।
(iii) log [N2O5] एवं t के मध्य ग्राफ खींचिए ।
(iv) अभिक्रिया के लिए वेग नियम क्या है?
(v) वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
(vi) k की सहायता से अर्धायु की गणना कीजिए तथा इसकी तुलना (ii) से कीजिए ।
उत्तर:
(i) N2O5 की सांद्रता [N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ खींचने पर निम्न प्रकार का ग्राफ प्राप्त होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 15
(ii) इस अभिक्रिया के लिए अर्धायु वह समय है जब N2O5 की सांद्रता 1.63 × 10-2 M से आधी अर्थात् 0.815 × 10-2 M हो जाए ग्राफ से 1420 वर्ष आता है अतः इस अभिक्रिया की अर्धायु 1420 वर्ष है।

(iii) log[N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ खींचने के लिए पहले N2O5 के विभिन्न मानों का log लेते हैं जो निम्न प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 16
फिर, समय (t) तथा log [N2O5] के मध्य ग्राफ खींचते हैं जो निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 17

(iv) log [N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ एक सीधी रेखा है अतः अभिक्रिया प्रथम कोटि की है इसलिए वेग नियम K[N2O5]

(v) ढाल = – \(\frac { k }{ 2.303 }\) = \(\frac { -0.295 }{ 1420s }\)
अतः वेग स्थिरांक, k = \(\frac{0.295 \times 2.303}{1420 \mathrm{~s}}\)
k = 4.784 × 10-4s-1
k =4.8×10-4s-1

(vi) अर्धायु, t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\) = \(\frac{0.693}{4.8 \times 10^{-4}}\)
t1/2 = 0.1443 x 104 = 1443 s
यह अर्धायु, (ii) से प्राप्त अर्धायु के लगभग समान है।

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प्रश्न 4.16.
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक 60 s-1 है। अभिक्रियक को अपनी प्रारंभिक सांद्रता से 1/16 वाँ भाग रह जाने में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
अभिक्रिया का वेग स्थिरांक = 60 s-1
अभिकारक प्रारंभिक सांद्रता का 1/16 वाँ भाग रह रहा है अर्थात् इसका 5/16 भाग क्रिया कर रहा है।
प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग स्थिरांक,
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
माना, [R0] = 1 तो [R] = \(\frac { 1 }{ 16 }\)
अतः t = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\) log\(\frac { 1 }{ 1/16 }\)
t = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\) log\(\frac { 16 }{ 1 }\)
t = 0.03838 (1.2041)
t = 0.046s = 4.6 × 10-2 सेकंड

प्रश्न 4.17.
नाभिकीय विस्फोट का 28.1 वर्ष अर्धायु वाला एक उत्पाद 90Sr होता है। यदि कैल्सियम के स्थान पर 1 pg. Sr नवजात शिशु की अस्थियों में अवशोषित हो जाए और उपापचयन से ह्रास न हो तो इसकी 10 वर्ष एवं 60 वर्ष पश्चात् कितनी मात्रा रह जाएगी ?
उत्तर:
यहाँ नाभिकीय विखण्डन हो रहा है तथा नाभिकीय विखण्डन की सभी अभिक्रियाएँ प्रथम कोटि की होती हैं अतः
क्षयांक या वेग स्थिरांक, λ या k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
k = \(\frac { 0.693 }{ 28.1 }\) = 0.02466 = 0.02467 वर्ष-1

(i) 10 वर्ष बाद 90Sr की बची हुई मात्रा –
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
दिया गया है – [R]0 = प्रारंभिक पदार्थ है- 1 μg = 1 × 10-6 g
0.02467 = \(\frac { 2.303 }{ 10 }\) log\(\frac{\left[1 \times 10^{-6}\right]}{[\mathrm{R}]}\)
log \(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = \(\frac{10 \times 0.02467}{2.303}\)
log \(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = \(\frac{0.2467}{2.303}\) = 0.10707 = 0.1071
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = Antilog 0.1071 = 1.279
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[R]}\) = 1.279
अतः [R] = \(\frac{1 \times 10^{-6}}{1.279}\) = 0.7818 × 10-6 g
[R] = 0.7818 μg

(ii) 60 वर्ष पश्चात् 90Sr की बची हुई मात्रा
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
0.02467 = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\) log\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\)
log\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = \(\frac{0.02467 \times 60}{2.303}\) = 0.6427
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = Antilog 0.6427
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = 4.392
[R] = \(\frac{1 \times 10^{-6}}{4.392}\) = 0.227 × 10-6 g = 0.227 μg
अतः 10 वर्ष के बाद 90Sr, 0.7818 μg बचेगा तथा 60 वर्ष के 0.227 μg बचेगा।

प्रश्न 4.18.
दर्शाइए कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाले समय से दुगुना होता है।
उत्तर:
किसी प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए समय,
t = \(\frac { 2.303 }{ 2 }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t समय बाद, R = 0.01 [R0] क्योंकि 99% अभिक्रिया हो रही है। 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय-
t0.99 = \(\frac { 2.303 }{ k }\) = log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{0.01[\mathrm{R}]_0}\) = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log 102
90% अभिक्रिया पूर्ण होने पर, [R] = 0.1 [R0]
अतः 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय
t0.90 = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{0.1[\mathrm{R}]_0}\) = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log 10
अतः \(\frac{\mathrm{t}_{0.99}}{\mathrm{t}_{0.90}}\) = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log 102 × \(\frac { k }{ 2.303 }\) × \(\frac { l }{ log 10 }\)
\(\frac{\mathrm{t}_{0.99}}{\mathrm{t}_{0.90}}\) = \(\frac{\log 10^2}{\log 10}\) = \(\frac { 2 }{ 1 }\)
\(\frac{\mathrm{t}_{0.99}}{\mathrm{t}_{0.90}}\) = \(\frac { 2 }{ 1 }\)
इससे सिद्ध होता है कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय, 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाले समय से दुगुना होता है।

प्रश्न 4.19.
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया 30% में वियोजन होने में 40 मिनट लगते हैं। t1/2 की गणना कीजिए ।
उत्तर:
अभिक्रिया 30% हो रही है। अतः [R]0 = 1 मानने पर,
[R] = 1 – 0.3 = 0.7 तथा t = 40 मिनट
अतः वेग स्थिरांक, k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
k = \(\frac { 2.303 }{ 40 }\) log\(\frac { 1 }{ 0.7 }\)
k = 0.05757 log\(\frac { 10 }{ 7 }\)
k = 0.05757 (log 10 – log 7)
k = 0.05757 (1 – 0.8451)
k = 0.05757 × (0.1549)
k = 8.917 × 10-3 मिनट-1
k = 8.92 × 10-3 मिनट-1
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\) = \(\frac{0.693}{8.92 \times 10^{-3}}\)
t1/2 = 07769 × 103 मिनट
t1/2 = 77.7 मिनट

प्रश्न 4.20.
543K ताप पर एजो आइसोप्रोपेन के हेक्सेन तथा नाइट्रोजन में विघटन के निम्न आँकड़े प्राप्त हुए। वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 18
उत्तर:
एजोआइसोप्रोपेन का विघटन निम्न प्रकार होता है-
A → B + C
(CH3)2 CH – N = N – CH (CH3)2 N2 + C6H14
माना t = 0 पर प्रारंभिक दाब = Pi
तथा t समय पर दाब में कमी = x atm
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 19
कुल दाब = Pt
अतः t समय पर कुल दाब Pt = ( Pi – x) + x + x
Pt = Pi + x या x = Pt – Pi
यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः
वेग स्थिरांक, k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
k = \(\frac{2.303}{t}\) log\(\frac{P_i}{P_i-x}\)
k = \(\frac{2.303}{t}\) log\(\frac{P_i}{P_i-\left(P_t-P_i\right)}\)
k = \(\frac{2.303}{t}\) log\(\frac{P_i}{2 P_i-P_t}\)
Pi = 35 mm Hg Pt = 54.0 mm Hg (t = 360 s पर)

मान रखने पर,
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 0.5 }{ 0.4 }\)
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 35 }{ 16 }\)
k = 0.006397 (log 2.1875)
k = 0.006397 × 0.3399
k = 2.17 × 10-3 = 2.20 × 10-3 s-1

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प्रश्न 4.21.
स्थिर आयतन पर SO2Cl2 के प्रथम कोटि के ताप अपघटन पर निम्न आँकड़े प्राप्त हुए-
SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl2(g)
अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए जब कुल दाब 0.65 atm हो ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 20
उत्तर:
अभिक्रिया SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl(g) माना प्रारंभिक दाब = Pi तथा t समय पर दाब में कमी x atm प्रश्नानुसार-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 21
कुल दाब, Pt = 0.5 – x + x + x = 0.5 + x atm
t समय पर कुल दाब = 0.6 atm.
अतः 0.6 = 0.5 + x, x = 0.1 atm
इसलिए t समय (100 s) पर, SO2Cl2 का दाब
= 0.5 – x = 0.5 – 0.1 = 0.4 atm
यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\) के अनुसार
वेग स्थिरांक, HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 22
मान रखने पर,
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 0.5 }{ 0.4 }\)
k = 0.02303 log 1.25
k = 0.02303 × 0.0969
k = 2.23 × 10-3 s-1
कुल दाब = 0.65 atm पर अभिक्रिया का वेग-
कुल दाब 0.65 atm पर SO2Cl2 का आंशिक दाब, = 0.5 – x
चूँकि कुल दाब = 0.5 + x
अतः 0.65 = 0.5 + x
x = 0.65 – 0.5 = 0.15
अतः 0.5 – x 0.5 – 0.15 = 0.35
वेग = k (PSO2Cl2)
वेग = 2.23 × 10-3 × 0.35
वेग = 7.8 × 10-4 atm s-1

प्रश्न 4.22.
विभिन्न तापों पर N2O5 के अपघटन के लिए वेग स्थिरांक नीचे दिए गये हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 23
In k एवं 1/T के मध्य ग्राफ खींचिए तथा A एवं Ea की गणना कीजिए। 30°C तथा 50°C पर वेग स्थिरांक को प्रागुक्त (Predict) कीजिए।
उत्तर:
ln k तथा 1/T के मध्य ग्राफ बनाने के लिए सर्वप्रथम दिए गए मानों से निम्न प्रकार सारणी तैयार करते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 24
फिर log k तथा 1/T के मध्य ग्राफ खींचने पर निम्नलिखित प्रकार का ग्राफ प्राप्त होता है जो कि एक सीधी रेखा है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 25
समीकरण, In k = – \(\frac{E_a}{\mathrm{RT}}\) + In A
या log k = – \(\frac{E_a}{\mathrm{2.303RT}}\) + log A के अनुसार इस ग्राफ काढाल
= – \(\frac{E_a}{\mathrm{2.303R}}\) होगा तथा अन्तःखण्ड = log A होगा।
ग्राफ से ढाल = –\(\frac { 2.4 }{ 0.00047 }\) = –\(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{2.303 \mathrm{R}}\)
अतः सक्रियण ऊर्जा, Ea = \(\frac{2.4 \times 2.303 \times R}{0.00047}\)
Ea = \(\frac{2.4 \times 2.303 \times 8.314}{0.00047}\)
= 97772.64 J mol-1
Ea = 97.772 kJ mol-1
ग्राफ से अंतःखण्ड ज्ञात करके log A ज्ञात कर लेते हैं जिसका Antilog लेने पर A प्राप्त हो जाएगा जो कि लगभग 1.585 × 106 टक्कर आता है।

ग्राफ से 30°C (303K) तथा 50°C (323K ) पर log K पर ज्ञात करके, Antilog लेने पर K के मान प्राप्त हो जाते हैं जो कि लगभग 6.31 × 10-5 s-1 (303K पर ) तथा 1.585 x 10-3 s-1 (323K पर) है।

प्रश्न 4.23
546 K ताप पर हाइड्रोकार्बन के अपघटन में वेग स्थिरांक 2.418 × 10-5 s-1 है। यदि सक्रियण ऊर्जा 179.9 kJ/mol हो तो पूर्व- घातांकी गुणन का मान क्या होगा?
उत्तर:
In k = –\(\frac{E_a}{R T}\) + In A
In A = In k + \(\frac{E_a}{R T}\)
दिया है : log A = log k + \(\frac{E_a}{2.303 \mathrm{RT}}\)
Ea = 179.9 kj/mol
= 179900 J mol-1
k = 2.418 × 10-5 s-1
R = 8.314 Jk-1 तथा T = 546k
मान रखने पर,
log A = log 2.418 × 10-5 + \(\frac{179900}{2.303 \times 8.314 \times 546}\)
log A = log 10-5 + log 2.418 + \(\frac { 179900 }{ 10,454.339 }\)
log A = – 5 log10 + 0.3834) + 17.208
log A = – 5 + 0.3834 + 17.21
log A = – 4.6166 + 17.21
log A = 12.5934
A = Antilog 12.5934
A = 3.921 × 1012
अतः पूर्व घातांकी गुणन, A = 3.9 × 1012 s-1

प्रश्न 4.24.
किसी अभिक्रिया A → उत्पाद के लिए k = 2.0 × 10-2 s-1 है। यदि A की प्रारंभिक सांद्रता 1.0 mol L-1 हो तो 100s के पश्चात् इसकी सांद्रता क्या रह जाएगी ?
उत्तर:
दिए गए समीकरण के अनुसार अभिक्रिया प्रथम कोटि की है
अतः k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
k = 2.0 × 10-2 s-1, t = 100s,
[R]0 = 1.0 mol L-1, [R] = ?
मान रखने पर,
2.0 × 10-2 = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 1 }{ [R] }\)
log\(\frac { 1 }{ [R] }\) = \(\frac{2 \times 10^{-2} \times 100}{2.303}\)
log\(\frac { 1 }{ [R] }\) = \(\frac { 2 }{ 2.303 }\) = 0.8684
\(\frac { 1 }{ [R] }\) = Antilog 0.8684
\(\frac { 1 }{ [R] }\) = 7.386
[R] = 7.386
[R] = \(\frac { 1 }{ 7.386 }\) = 0.135 M
अतः 100s के पश्चात् A की सांद्रता, 0.135M रह जायेगी ।

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प्रश्न 4.25.
अम्लीय माध्यम में सूक्रोस का ग्लूकोस एवं फ्रक्टोज़ में विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है । इस अभिक्रिया की अर्धायु 3.0 घंटे है। 8 घंटे बाद नमूने में सूक्रोस का कितना अंश बचेगा ?
उत्तर:
C12H12O11 + H2O → C6H12O6 + C6H12O6
सूक्रोस (आधिक्य में) ग्लूकोस फ्रक्टोस
यह प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः इसके लिए अर्धायु
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\) = \(\frac{0.693}{3.0 \mathrm{hr}}\)
k = 0.231 hr-1
माना सूक्रोस की प्रारंभिक सांद्रता [R]0 = 1 mol
t = 8hr तथा k = 0.231 hr-1
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
0.231 = \(\frac { 2.303 }{ 8 }\) log\(\frac { 1}{ [R] }\)
log\(\frac { 1}{ [R] }\) = \(\frac{0.231 \times 8}{2.303}\) = \(\frac { 1.848 }{ 2.303 }\)
log\(\frac { 1}{ [R] }\) = 0.8024
log\(\frac { 1}{ [R] }\) = Antilog 0.8024
\(\frac { 1}{ [R] }\) = 6.345
R = \(\frac { 1}{ 6.345 }\) = 0.1576M
अतः 8 घंटे के बाद सूक्रोस का बचा अंश = 0.158 M

प्रश्न 4.26.
हाइड्रोकार्बन का विघटन निम्न समीकरण के अनुसार होता है। Ea की गणना कीजिए ।
k = (4.5 × 1011 s-1)e-28000K/T
उत्तर:
आर्रेनिअस समीकरण के अनुसार
k = A·e ̄Ea / RT ….(1)
दिया गया है, k = (4.5 × 10-11s-1)e-28000K/T ….(2)
समीकरण (1) तथा (2) की तुलना करने पर,
– \(\frac{E_a}{R T}\) = \(\frac{-28000 K}{T}\)
या \(\frac{E_a}{R}\) = 28000K
Ea = R × 28000 K
Ea = 8.314 JK-1 mol-1 × 28,000 K
Ea = 232792 J mol-1
अतः सक्रियण ऊर्जा Ea = 232.79 kJ mol-1

प्रश्न 4.27.
H2O2 के प्रथम कोटि के विघटन को निम्न समीकरण द्वारा लिख सकते हैं-
log k = 14.34 – 1.25 × 104 K/T
इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए कितने ताप पर इस अभिक्रिया की अर्धायु 256 मिनट होगी?
उत्तर:
आरेंनिअस समीकरण के अनुसार-
k = Ae -Ea/RT
log लेने पर, log k = log A – \(\frac{E_a}{2.303 R T}\) ….(1)
दिया गया है- log k = 14.34 – 1.25 × 104 K/T ….(2)
समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर,
\(\frac{E_a}{2.303 R}\) = 1.25 × 104

Ea = 2.303 × R × 1.25 × 104
Ea = 2.303 × 8.314 × 1.25 × 104
Ea = 23.9339 × 104 J mol-1
Ea = 23.9339 J mol-1
अतः सक्रियण ऊर्जा, Ea = 23.9339 kJ mol-1
H2O2 का विघटन प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः
अर्घायु, t1/2 = \(\frac{0.693}{k}\)
t1/2 = 256 min = 256 × 60 s
k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\) = \(\frac{0.693}{256 \times 60}\)
वेग स्थिरांक k = 4.51 × 10-5 s-1
दिया गया है : log k = 14.34 – 1.25 × 104 K/T
मान रखने पर,
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 26
अतः 668.8K ताप पर अभिक्रिया की अर्धायु 256 मिनट होगी ।

प्रश्न 4.28.
10°C ताप पर A के उत्पाद में विघटन के लिए k का मान 4.5 × 103s-1 तथा सक्रियण ऊर्जा 60kJ mol-1 है, किस ताप पर k का मान 1.5 × 104s-1 होगा?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 27

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.29.
298K ताप पर प्रथम कोटि की अभिक्रिया के 10% पूर्ण होने का समय 308K ताप पर 25% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगे समय के बराबर है। यदि A का मान 4 × 1010 s-1 हो तो 318K ताप पर k तथा Ea की गणना कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 28

प्रश्न 4.30.
ताप में 293K से 313K तक वृद्धि करने पर किसी अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है । इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिवर्तित नहीं होता ।
उत्तर:
आर्रेनिअस समीकरण से,
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 29

HBSE 12th Class Chemistry रासायनिक बलगतिकी Intext Questions

प्रश्न 4.1.
R → P, अभिक्रिया के लिए अभिकारक की सांद्रता 0.03M से 25 मिनट में परिवर्तित होकर 0.02M हो जाती है। औसत वेग की गणना सेकण्ड तथा मिनट दोनों इकाइयों में कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया का औसत वेग = \(\frac{-\Delta[\mathrm{R}]}{\Delta \mathrm{t}}\)
∆R = [R2] – [R1] = 0.02M – 0.03M – 0.01M (a) ∆t = 25 मिनट
अतः औसत वेग = \(\frac{-(-0.01)}{25}=\frac{0.01}{25}\)
= 0.0004 M min-1

(b) ∆t = 25 x 60 = 1500 सेकण्ड
अतः औसत वेग = \(\frac { 0.01 }{ 1500 }\) = 6.66 x 10-6 ms-1
= 6.66 x 10-6 mol L-1 s-1

प्रश्न 4.2.
2A → उत्पाद, अभिक्रिया में A की सांद्रता 10 मिनट में 0.5mol L-1 से घट कर 0.4mol L-1 रह जाती है। इस समयांतराल के लिए अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए।
उत्तर:
2A → उत्पाद के लिए
अभिक्रिया का वेग = – \(\frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{2 \mathrm{dt}}\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी 1
A की सांद्रता में परिवर्तन = 0.4 – 0.5mol L-1
d[A] = – 0.1mol L -1
dt = 10 मिनट
अतः अभिक्रिया का वेग = \(\frac{-(-0.1)}{2 \times 10}=\frac{0.1}{20}\)
अभिक्रिया का वेग = A के विलुप्त होने की दर
= 0.005 mol L-1 min-1

प्रश्न 4.3.
एक अभिक्रिया A + B → उत्पाद, के लिए वेग नियम r = k[A]1/2[B]² से दिया गया है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
उत्तर:
वेग नियम r = k[A]1/2[B]² के अनुसार अभिक्रिया की कोटि 2.5 है, क्योंकि अभिक्रिया के वेग नियम व्यंजक में सांद्रता के घातांकों का योग 2.5 है जो कि अभिक्रिया की कोटि होती है।

प्रश्न 4.4.
अणु X का Y में रूपांतरण द्वितीय कोटि की बलगतिकी के अनुरूप होता है। यदि X की सांद्रता तीन गुनी कर दी जाए तो Y के निर्माण होने के वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रश्नानुसार अभिक्रिया X → Y के लिए
अभिक्रिया का वेग = k [X]² … (1)
अतः अभिक्रिया की कोटि = 2
X की सांद्रता को तीन गुनी कर देने पर
अभिक्रिया का वेग = k [3X] ²
= k = 9[X]² … (2)
अतः अभिक्रिया का वेग 9 गुना हो जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.5.
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 1.15 x 10-3s-1 है। इस अभिक्रिया में अभिकारक की 5g मात्रा को घटकर 3g होने में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए
वेग स्थिरांक k = \(\frac{2.303}{\mathrm{t}} \log \frac{\left[\mathrm{R}_0\right]}{[\mathrm{R}]}\)
t = \(\frac{2.303}{k} \log \frac{\left[R_0\right]}{[\mathrm{R}]}\)
t = समय, k = वेग स्थिरांक = 1.15 x 10-3s-1
[Ro] = अभिकारक की प्रारंभिक सान्द्रता = 5 g
[R] = अभिकारक की t समय पर सांद्रता = 3 g
अतः t = \(\frac{2.303}{1.15 \times 10^{-3}} \log \frac{5}{3}\)
t = 2 × 10³ (log 5 – log 3 )
t = 2 × 10³ (0.6990 – 0.4771)
t = 2 × 10³ (0.2219)
t = 443.8
t = 444 s

प्रश्न 4.6.
SO2Cl2 को अपनी प्रारंभिक मात्रा से मात्रा में वियोजित होने में 60 मिनट का समय लगता है। यदि अभिक्रिया प्रथम कोटि की हो तो वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया में प्रारंभिक मात्रा से आधी मात्रा वियोजित हो रही है-
अतः t = 60 मिनट = अर्ध आयुकाल
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
वेग स्थिरांक,
K = \(\frac{0.693}{\mathrm{t}_{1 / 2}}\)
t1/2 = 60 x 60 = 3600 s
k = \(\frac { 0.693 }{ 3600 }\)
= 1.925 x 10-4 s-1

प्रश्न 4.7.
ताप का वेग स्थिरांक पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
सामान्यतः ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान बढ़ता है। यह पाया गया है कि किसी रासायनिक अभिक्रिया में 10°C ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक लगभग दुगुना हो जाता है। लेकिन ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान कम हो जाता है। ताप बढ़ाने पर अणुओं के मध्य प्रभावी टक्करें बढ़ती हैं जिससे अभिक्रिया का वेग भी बढ़ जाता है।

प्रश्न 4.8.
परमताप, 298 K में 10 K की वृद्धि होने पर रासायनिक अभिक्रिया का वेग दुगुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 4.9.
581K ताप पर अभिक्रिया 2HI(g) → H2(g) + I2(g) के लिए सक्रियण ऊर्जा का मान 209.5 kJ mol-1 है। अणुओं के उस अंश की गणना कीजिए जिसकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर अथवा इससे अधिक है।
उत्तर:
अणुओं का वह अंश (x) जिसकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर अथवा इससे अधिक है = \(\mathrm{e}^{-\mathrm{E}_2 / R T}\) लोग (लघुगणक) लेने पर,
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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें


वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का मुख्य स्रोत है:
(अ) स्थिर आवेश
(ब) एक समान वेग से चलता आवेश
(स) त्वरित आवेश
(द) उपर्युक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(स) त्वरित आवेश

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में कौनसी किरण विद्युत चुम्बकीय है:
(अ) धन किरणें
(ब) α-किरणें
(स) β-किरणें
(द) γ -किरणें तरंगदैर्घ्य होती है
उत्तर:
(द) γ -किरणें तरंगदैर्घ्य होती है

प्रश्न 3.
दृश्य प्रकाश की
(अ) 7800 Å से 1500 Å
(ब) 1 Å से 100 Å
(स) 4000 Å से 8000 Å
(द) 5000 Å से 1200 Å
उत्तर:
(स) 4000 Å से 8000 Å

प्रश्न 4.
सूर्य की निम्नलिखित तरंगों में से कौनसी तरंग अन्ततः विद्युत ऊर्जा के रूप में प्रयुक्त की जाती है:
(अ) रेडियो तरंगें
(ब) अवरक्त किरणें
(स) दृश्य प्रकाश
(द) माइक्रो तरंगें
उत्तर:
(ब) अवरक्त किरणें

प्रश्न 5.
I ( वाट/मी.2) तीव्रता की विद्युत चुम्बकीय तरंग द्वारा एक परावर्तक तल पर आरोपित दाब है:
(अ) Ic
(ब) Ic2
(स) I/c
(द) I/c2
उत्तर:
(स) I/c

प्रश्न 6.
क्रिस्टल संरचना का अध्ययन किया जाता है:
(अ) पराबैंगनी किरणों द्वारा
(ब) X – किरणों द्वारा
(स) अवरक्त विकिरणों द्वारा
(द) सूक्ष्म तरंगों द्वारा
उत्तर:
(ब) X – किरणों द्वारा

प्रश्न 7.
यदि λv,λx तथा λm क्रमशः दृश्य प्रकाश, X- किरणों तथा माइक्रो तरंगों की तरंगदैर्घ्य को व्यक्त करती है, तो
(ब) λm > λv > λx
(ब) λv > λm > λx
(स)) λm > λx > Av
(द) λv> λx > λm
उत्तर:
(ब) λv > λm > λx

प्रश्न 8.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की प्रकृति होती है:
(अ) अनुदैर्घ्य
(ब) अनुप्रस्थ
(स) यांत्रिक
(द) अनुप्रस्थ व अनुदैर्ध्य
उत्तर:
(ब) अनुप्रस्थ

प्रश्न 9.
विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में निम्न में से कौनसे घटक की तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होती है?
(अ) गामा किरणों की
(ब) X-किरणों की
(स) रेडियो तरंगों की
(द) सूक्ष्म तरंगों की
उत्तर:
(अ) गामा किरणों की

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 10.
निम्न में से किस रंग के प्रकाश का तरंगदैर्घ्य, पीले रंग के प्रकाश के तरंगदैर्ध्य से अधिक होता है?
(अ) हरा
(ब) नीला
(स) लाल
(द) बैंगनी
उत्तर:
(स) लाल

प्रश्न 11.
निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वेग होता है:
(अ) 3 x 108 मीटर/सेकण्ड
(ब) 3 x 107 मीटर/सेकण्ड
(स) 3 x 106 मीटर/सेकण्ड
(द) 3 x 1010 मीटर/सेकण्ड
उत्तर:
(अ) 3 x 108 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 12.
वायुमण्डल में स्थित ओजोन परत सूर्य से आने वाले किन हानिकारक विकिरणों से हमारी रक्षा करती है?
(अ) X-किरणों से
(ब) गामा किरणों से
(स) पराबैंगनी किरणों से
(द) सूक्ष्म किरणों से
उत्तर:
(स) पराबैंगनी किरणों से

प्रश्न 13.
निम्न में से किस आवृत्ति की तरंगें आयनमण्डल को भेदित कर सकती हैं:
(अ) 5 हर्ट्ज से अधिक
(ब) 10 मेगा हर्ट्ज से अधिक
(स) 20 मेगा हर्ट्ज से अधिक
(द) 15 मेगा हर्ट्ज से अधिक
उत्तर:
(स) 20 मेगा हर्ट्ज से अधिक

प्रश्न 14.
निम्न में से कौनसी तरंगें विद्युतचुम्बकीय तरंगें नहीं हैं:
(अ) रेडियो तरंगें
(ब) ध्वनि तरंगें
(स) अवरक्त तरंगें
(द) सूक्ष्म तरंगें
उत्तर:
(ब) ध्वनि तरंगें

प्रश्न 15.
विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम का वह घटक जिसका उपयोग क्रिस्टल संरचना के अध्ययन के लिये किया जाता है, निम्न में से है:
(अ) सूक्ष्म तरंगें
(ब) रेडियो तरंगें
(स) X -किरणें
(द) अवरक्त तरंगें
उत्तर:
(स) X -किरणें

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व का सिद्धान्त दिया था:
(अ) न्यूटन ने
(ब) मैक्सवेल ने
(स) हर्ट्ज ने
(द) हाइगेन ने
उत्तर:
(ब) मैक्सवेल ने

प्रश्न 17.
प्रकाश तरंगें होती हैं:
(अ) अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगें
(ब) अनुप्रस्थ प्रत्यास्थ तरंगें
(स) अनुदैर्ध्य प्रत्यास्थ तरंगें
(द) अनुप्रस्थ विद्युत चुम्बकीय तरंगे
उत्तर:
(द) अनुप्रस्थ विद्युत चुम्बकीय तरंगे

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 18.
यदि μ0 तथा eo क्रमशः निर्वात की पारगम्यता तथा विद्युत- शीलता हो तो निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वेग होगा:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 1
उत्तर:
\(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\)

प्रश्न 19.
किसी माध्यम के लिये अपवर्तनांक का मान होता है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 2
उत्तर:
\(\sqrt{u_r \epsilon_r}\)

प्रश्न 20.
विद्युत चुम्बकीय तरंग प्रकृति प्रदर्शित करेगी:
(अ) प्रकाश एवं ध्वनि
(ब) प्रकाश एवं एक्स-किरणें
(स) एक्स-किरणें व इलेक्ट्रॉन
(द) प्रकाश एवं फोटोन
उत्तर:
(ब) प्रकाश एवं एक्स-किरणें

प्रश्न 21.
विद्युत चुम्बकीय तरंगें:
(अ) अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन करती हैं।
(ब) अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन नहीं करती हैं।
(स) केवल अध्यारोपण दर्शाती हैं।
(द) केवल व्यतिकरण दर्शाती हैं।
उत्तर:
(अ) अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन करती हैं।

प्रश्न 22.
E ऊर्जा का विकिरण एक पूर्णतः परावर्तक तल पर आपतित होता है। तल का स्थानान्तरित संवेग है:
(अ) E/c
(ब) 2E/c
(स) Ec
(द) E/c2
उत्तर:
(ब) 2E/c

प्रश्न 23.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है?
(अ) वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र वेक्टर दोनों एक ही स्थान पर एक ही क्षण अधिकतम तथा न्यूनतम मान को प्राप्त होते हैं।
(ब) विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ऊर्जा वैद्युत तथा चुम्बकीय वेक्टरों में बराबर-बराबर बँट जाती है।
(स) वैद्युत तथा चुम्बकीय वेक्टर दोनों एक-दूसरे के समान्तर होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं।
(द) इन तरंगों के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
उत्तर:
(स) वैद्युत तथा चुम्बकीय वेक्टर दोनों एक-दूसरे के समान्तर होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं।

प्रश्न 24.
X- किरणों की तरंगदैर्ध्य का परास कौनसा है?
(अ) 10-4m से 10-8 m
(ब) 10-8m से 10-13m
(स) 108m से 1013m
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) 10-8m से 10-13m

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प्रश्न 25.
निम्न में से किसकी आवृत्ति निम्नतम है:
(अ) अवरक्त किरणें
(ब) X-किरणें
(द) y-किरणें
(स) UV-किरणें
उत्तर:
(अ) अवरक्त किरणें

प्रश्न 26.
निम्न में से कौनसी तरंग दूरसंचार में उपयुक्त होती है:
(अ) दृश्य प्रकाश
(ब) सूक्ष्म तरंगें
(स) पराबैंगनी प्रकाश
(द) अवरक्त
उत्तर:
(ब) सूक्ष्म तरंगें

प्रश्न 27.
विस्थापन धारा उतनी होती है जितनी-
(अ) r.m.s. धारा
(ब) चालन धारा
(स) शीर्ष धारा
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) चालन धारा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
विस्थापन धारा की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र अथवा विद्युत अभिवाह परिवर्तन से उत्पन्न धारा को विस्थापन धारा कहते हैं।

प्रश्न 2.
विस्थापन धारा किसके कारण उत्पन्न होती है?
उत्तर:
विस्थापन धारा विद्युत क्षेत्र में समय के साथ परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है और इसे इस प्रकार लिखते हैं
Id = ∈\(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 3.
मैक्सवेल के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
मैक्सवेल के समीकरण:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 3

प्रश्न 4.
संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच परिवर्ती विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
उत्तर:
विस्थापन धारा, चुम्बकीय क्षेत्र।

प्रश्न 5.
……………उसी प्रकार चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है जैसे चालन धारा।
उत्तर:
विस्थापन धारा।

प्रश्न 6.
क्या विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 7.
विद्युत चुम्बकीय तरंगें निर्वात में किस वेग से गमन करती है?
उत्तर:
प्रकाश के वेग से।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 8.
विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस घटक का उपयोग क्रिस्टल संरचना के अध्ययन के लिये किया जाता है?
उत्तर:
एक्स किरणों का।

प्रश्न 9.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व की प्रायोगिक पुष्टि सर्वप्रथम किसने की थी?
उत्तर:
हर्ट्ज ने।

प्रश्न 10.
विद्युत चुम्बकीय स्पैक्ट्रम में किसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है?
उत्तर:
गामा किरणें।

प्रश्न 11.
विद्युत चुम्बकीय तरंग में निर्वात में कुल ऊर्जा घनत्व कितना होता है?
उत्तर:
∈0 E2
जहाँ ∈0 पर निर्वात की विद्युतशीलता तथा E विद्युत क्षेत्र की तीव्रता।

प्रश्न 12.
क्या प्रकाश तरंगें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं? उत्तर की पुष्टि कारण बतलाकर कीजिए।
उत्तर:
चूँकि प्रकाश तरंगें विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं, जिन्हें परिगमन हेतु किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय तरंगों का नाम बतलाइए जो:
(a) माँसपेशियों के खिंचाव को दूर करने में सहायक हैं।
(b) वायुमण्डल में ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर ली जाती
उत्तर:
(a) अवरक्त तरंगें / अवरक्त क्षेत्र
(b) पराबैंगनी तरंगें / पराबैंगनी क्षेत्र।

प्रश्न 14.
विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के मूल स्रोत क्या हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) के समय के साथ परिवर्तन से विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) उत्पन्न होता है तथा विद्युत क्षेत्र के समय के साथ परिवर्तन से चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) उत्पन्न होता है। इस प्रकार इन क्षेत्र सदिशों का समय के साथ परिवर्तन एक-दूसरे के लिए स्रोत का कार्य करता है। अतः चुम्बकीय तरंगों के मूल स्रोत चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) और विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 15.
एक समतल विद्युत चुम्बकीय तरंग निर्वात में Z-अक्ष के अनुदिश संचरित होती है। आप वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र सदिशों के विषय में क्या कह सकते हैं?
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) विद्युत चुम्बकीय तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् तथा परस्पर भी लम्बवत् होती है। चूँकि यहाँ पर तरंग संचरण की दिशा Z-अक्ष के अनुदिश है । अतः \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) सदिश X Y तल में परस्पर लम्बवत् दिशाओं में होंगी।

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बकीय तरंग के संचरण वेग की वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के शिखर मानों के पदों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
c = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\mathrm{~B}_0}\)

प्रश्न 17.
किसी विद्युत चुम्बकीय तरंग के वैद्युत क्षेत्र सदिश के कम्पन की आवृत्ति 5 x 1014 Hz है। संगत चुम्बकीय क्षेत्र सदिश के कम्पन की आवृत्ति क्या होगी? यह विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस भाग से सम्बन्धित होगी?
उत्तर:
5 x 1014 Hz, दृश्य भाग।

प्रश्न 18.
विद्युत चुम्बकीय रेडियो तरंगों का उत्पादन किससे होता है?
उत्तर:
विद्युत दोलित्रों से।

प्रश्न 19.
दूर संचार में कौनसी तरंगें प्रयुक्त होती हैं? इनकी तरंग परास लिखिये।
उत्तर:
रेडियो तरंगें 1 से 10 मीटर

प्रश्न 20.
निम्नलिखित विकिरणों को तरंगदैर्घ्य के घटते हुये क्रम में लिखिये-
एक्स किरणें, रेडियो किरणें पराबैंगनी तरंगें, गामा किरणें।
उत्तर:
रेडियो किरणें, पराबैंगनी तरंगें एक्स किरणें, गामा किरणें।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित विकिरणों में किसकी आवृत्ति सबसे कम है? गामा किरणें अवरक्त विकिरण, X-किरणें, नीला प्रकाश।
उत्तर:
अवरक्त विकिरण।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 22.
सूक्ष्म तरंगों की लगभग तरंगदैर्ध्य परास बताइये।
उत्तर:
1 मिमी. से 30 सेमी.

प्रश्न 23.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का उत्पादन हर्ट्ज ने किसके द्वारा किया?
उत्तर:
स्फुर्लिंग विसर्जन द्वारा।

प्रश्न 24.
किसी माध्यम में विद्युत चुम्बकीय तरंगों के वेग का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
V = \(\frac{1}{\sqrt{\mu \epsilon}}\)

प्रश्न 25.
हर्ट्ज के प्रयोग से उत्पादित तरंगें कौनसी विद्युत- चुम्बकीय तरंगें होती हैं तथा इनकी तरंगदैर्ध्य किस कोटि की थीं?
उत्तर:
हर्ट्ज के प्रयोग से उत्पादित तरंगें लघु रेडियो तरंगें (Short radio waves) होती हैं। इन तरंगों की तरंगदैर्घ्य 1 मीटर की कोटि की थीं।

प्रश्न 26.
विद्युत चुम्बकीय तरंग के किस गुण के कारण यह माना जाता है कि प्रकाश तरंगें विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं?
उत्तर:
प्रकाश तरंगों का वेग, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के वेग के बराबर होता है।

प्रश्न 27.
किसी धातु के लक्ष्य पर उच्च ऊर्जा के इलेक्ट्रॉनों के टकराने से विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों का नाम बताइए।
उत्तर:
X – किरणें।

प्रश्न 28.
ठोस की क्रिस्टल संरचना का अध्ययन करने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली विद्युत चुम्बकीय तरंग का नाम लिखिए।
उत्तर:
X – किरणें ( 1016 से 1020 Hz)

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प्रश्न 29.
उस विद्युत चुम्बकीय विकिरण का नाम लिखिए जिसकी तरंगदैर्ध्य 102 की परास में है। विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के इस भाग का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
माइक्रो तरंगें (दूरसंचार में)।

प्रश्न 30.
सूर्य के प्रकाश से विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का कौनसा भाग ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है?
उत्तर:
पराबैंगनी किरणें।

प्रश्न 31.
सबसे अधिक वेधन क्षमता वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण का नाम लिखिए।
उत्तर:
गामा किरणें।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से किसकी तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होगी- माइक्रो तरंगें, पराबैंगनी विकिरण तथा X – किरणें।
उत्तर:
X – किरणें।

प्रश्न 33.
निम्न को तरंगदैर्घ्य के घटते क्रम में लिखिए- X-किरणें, रेडियो तरंगें, आसमानी प्रकाश, अवरक्त प्रकाश।
उत्तर:
रेडियो तरंगें, माइक्रो तरंगें, पराबैंगनी तरंगें X – किरणें।

प्रश्न 34.
विद्युत चुम्बकीय तरंग के लिये किसी माध्यम की प्रतिबाधा Z, चुम्बकशीलता एवं विद्युतशीलता है, तो इनमें सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
Z = \(\sqrt{\frac{\mu}{\epsilon}}\) ओम

प्रश्न 35.
विद्युत चुम्बकीय तरंग की कोई चार विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
(i) विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संचरण के लिये माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
(ii) विद्युत चुम्बकीय तरंगें सरल रेखा में संचरण करती हैं।
(iii) विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं।
(iv) जिस माध्यम में विद्युत चुम्बकीय तरंगें संचरित होती हैं, उसके गुण अपरिवर्तित रहते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 36.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के स्पेक्ट्रम का कौनसा भाग उपग्रह संचार में प्रयुक्त होता है?
उत्तर:
सूक्ष्म तरंगें।

प्रश्न 37.
लम्बे परास (रेडियो तरंगों के ) प्रसारण में संकेतों की सूक्ष्म तरंगें रेडियो तरंगों की अपेक्षा क्यों अच्छी वाहक हैं?
उत्तर:
रेडियो तरंगों की अपेक्षा लम्बे प्रसारण में सूक्ष्म तरंगें अधिक अच्छी वाहक होती हैं क्योंकि रेडियो तरंगों की अपेक्षा इनका तरंगदैर्घ्य बहुत कम होता है। इस प्रकार वे अवरोध के कारण न्यूनतम विचलन प्राप्त करती हैं और निशाने पर सीधे भेजी जा सकती हैं।

प्रश्न 38.
तरंगदैर्ध्य 5000 Å और 8000 Å वाली प्रकाश तरंगों का निर्वात में वेग अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अनुपात 1 है क्योंकि निर्वात में प्रकाश का वेग तरंगदैर्ध्य से स्वतन्त्र होता है।

प्रश्न 39.
वैद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का कौनसा भाग राडार को चलाने के काम आता है?
उत्तर:
वैद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के अति सूक्ष्म तरंग क्षेत्र में राडार को चलाया जाता है। इसका तरंगदैर्घ्य 10-3 m से 0.3m तक है।

प्रश्न 40.
दोलित्र वैद्युत परिपथों से उत्पन्न वैद्युत चुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति क्या है ?
उत्तर:
रेडियो तरंगें (3 x 109 Hz 3 x 104 Hz)

प्रश्न 41.
विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के उस भाग का नाम लिखिए जिसकी तरंगदैर्घ्य 10-2 मी. है तथा इसका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
माइक्रो तरंग – इसका प्रयोग माइक्रोवेव ओवन में तथा संचार निकाय में होता है।

प्रश्न 42.
(a) चुम्बकत्व के लिए गाऊस नियम को मैक्सवेल समीकरण के रूप में लिखिए।
(b) \(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\) का मान लिखिए।
उत्तर:
(a) \(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d \mathrm{~A}}\) = 0
(b) c या 3 x 108 m/s.

प्रश्न 43.
‘ऐम्पियर मैक्सवेल के नियम का गणितीय समीकरण लिखिए।
उत्तर:
\(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d \mathrm{~l}}\) = μo (lC + Id)
जहाँ विस्थापन धारा imm
तथा I. = चालन धारा

प्रश्न 44.
निर्वात नलिका मेग्नेट्रॉन द्वारा उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंग का नाम लिखिए।
उत्तर:
सूक्ष्म तरंगें (Micro Waves)

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
सिद्ध कीजिए कि h = od (he) जबकि चिन्हों के सामान्य अर्थ हैं।
उत्तर:
हम जानते हैं:
ID = 1 …..(1)
और
I = dq/dt ……(2)
गाउस के नियमानुसार
E = \(\frac{q}{\epsilon_0 A}\)
या
q = E ∈0A
समीकरण (2) में मान रखने पर
I = d/DT(E ∈0A)
समीकरण (1) से
I = ID
= \(\epsilon_0 \mathrm{~A} \frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}(\mathrm{E})\)
= \(\epsilon_0 \mathrm{~A} \frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) \(\frac{\phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{A}}\)
= \(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~A}} \frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)
या
ID = \(\epsilon_0 \frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) (ΦE) इतिसिद्धम्

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प्रश्न 2.
आप विस्थापन धारा और चालन धारा के विषय में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर:
(1) विस्थापन धारा और चालन धारा अलग-अलग असतत हैं, लेकिन एक साथ दोनों धाराएँ बन्द मार्ग पर सतत होती हैं।
(2) विस्थापन धारा चालन धारा की तरह चुम्बकीय क्षेत्र का एक स्रोत है।
(3) दोनों धाराएँ सदैव एक-दूसरे के बराबर होती हैं।
(4) विस्थापन धारा सदैव संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत अभिवाह अथवा विद्युत क्षेत्र के परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है।
(5) I धारा संधारित्र की प्लेटों के बीच स्थित होती है जबकि IE (चालन धारा) प्लेटों को जोड़ने वाले तार और वि.वा. बल के स्रोत में होती है।

प्रश्न 3.
चालन धारा को मैक्सवेल ने विस्थापन धारा की परिभाषित करते हुए समझाइए कि संकल्पना क्यों की?
उत्तर:
चालन धारा- किसी परिपथ में जोड़ने वाले तारों द्वारा परिपथ में प्रवाहित धारा को चालन धारा कहते हैं। एक बैटरी द्वारा धारा से एक संधारित्र को आवेशित हुआ लेते हैं। चित्र से यह स्पष्ट है कि आवेशन के समय चालन धारा संधारित्र की प्लेटों के बाहर चित्रानुसार बाएं ओर से दाईं ओर प्रवाहित हो रही है और संधारित्र की प्लेटों के बीच कोई चालन धारा प्रवाहित नहीं है।
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इस विरोधाभास को दूर करने के लिए मैक्सवेल ने एक नई संकल्पना विस्थापन धारा (ID) को लगाया और इसका उद्गम संधारित्र की पट्टिकाओं अर्थात् प्लेटों के बीच परिवर्ती विद्युत क्षेत्र को बताया। इसको यह दिखाने के लिए लगाया गया है कि संधारित्र के बाहर प्रवाहित धारा (IC) सदैव संधारित्र में से प्रवाहित धारा ID के तुल्य होती है। मैक्सवेल की शर्त के अनुसार चालन धारा IC संधारित्र की बायीं प्लेट में प्रवाहित होती है और विस्थापन धारा (ID) दाहिनी प्लेट की ओर प्रवाहित होती है।
संधारित्र के भीतर

प्रश्न 4.
कब एक आवेश विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है? विद्युत चुम्बकीय तरंगों में वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर तथा तरंग संचरण की दिशा से किस प्रकार सम्बन्धित होते हैं? वह कौन-सी भौतिक राशि है जो विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के सभी भागों की तरंगों के लिए समान हो?
उत्तर:
त्वरित वैद्युत आवेश ही विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है विद्युत चुम्बकीय तरंगों में वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत् होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के भी लम्बवत् होते हैं। विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की तरंगों का वायु या निर्वात में वेग सभी के लिए एकसमान c = 3 x 108 मी./से होता है।

प्रश्न 5.
मैक्सवेल द्वारा ऐम्पियर सर्किटल नियम को कैसे संशोधित किया गया? समझाइए।
उत्तर:
ऐम्पियर सर्किटल नियम में विवाद इसलिए उत्पन्न हुआ कि संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच धारा असतत होने की परिकल्पना की गई है। मैक्सवेल ने विस्थापन धारा की संकल्पना ID दी जिसके अनुसार कोई चालन धारा IC प्रवाहित नहीं होती, केवल ID ही प्रवाहित है। जैसे संधारित्र आवेशित होता है, यह संधारित्र की प्लेटों के बीच विस्थापन धारा प्रवाह को जन्म देता है क्योंकि संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र बढ़ जाता है। इस प्रकार ऐम्पियर सर्किटल नियम
(\(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{di}}\) = μIC) संशोधित रूप में \(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{di}}\) = μ (IC + ID) के रूप में लिखा गया।

प्रश्न 6.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की क्या प्रकृति होती है?
उत्तर:
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की प्रकृति “यह एक त्रिविमीय तरंग है जो कि दोलित विद्युत परिपथ से उत्सर्जित होती है। उसमें विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत् दोलित होते हैं।” इन तरंगों के संचरण के लिये किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है तथा ये निर्वात में भी गति कर सकती हैं अतः ये यांत्रिक तरंगों से भिन्न होती हैं। इनका वेग निर्वात में सर्वाधिक तथा प्रकाश के वेग के बराबर होता है ये तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं एवं ये जिस माध्यम से संचरित होती हैं उसके गुण अपरिवर्तित रहते हैं।

प्रश्न 7.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों को उत्पन्न करने का सिद्धान्त लिखिए
उत्तर:
त्वरित आवेश विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो समय और स्थान दोनों में बदलते हैं ये परिवर्तनशील चुम्बकीय एवं वैद्युत क्षेत्र, वैद्युत चुम्बकीय तरंगों को जन्म देते हैं।

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प्रश्न 8.
वैद्युत चुम्बकीय तरंगों के कुछ गुण लिखिए।
उत्तर:
वैद्युत चुम्बकीय तरंगों के निम्नलिखित गुण होते हैं:
(i) ये प्रकृति में अनुप्रस्थ होती हैं।
(ii) ये तरंगें निर्वात में प्रकाश की चाल c = 3 x 108 m/s के बराबर चलती हैं।
(iii) इनके गमन के लिए किसी द्रव्य माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
(iv) ये त्वरित अथवा कम्पनशील आवेश द्वारा उत्पन्न होती हैं।
(v) ये आपस में लम्बवत् परिवर्तनशील वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्रों की होती हैं।
(vi) विद्युत चुम्बकीय तरंगों की ऊर्जा वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र सदिशों में समान रूप में बँटी हुई होती है।
(vii) तरंगें अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन करती हैं।
(viii) दोनों E और B अधिकतम एवं न्यूनतम मान एक ही स्थान और एक ही समय में प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न तरंगों का एक-एक उपयोग बताइये:
(i) सूक्ष्म तरंगें
(ii) अवरक्त तरंगें
(iii) पराबैंगनी तरंगें
(iv) रेडियो तरंगें।
उत्तर:
(i) सूक्ष्म तरंगें टेलीविजन या रेडियो प्रसारण के लिये वाहक तरंगों के रूप में।
(ii) अवरक्त तरंगें-उपग्रहों को सौलर सेल द्वारा विद्युत ऊर्जा प्रदान करना।
(iii) पराबैंगनी तरंगें इन तरंगों की सहायता से दूसरे के हस्ताक्षर बनाने तथा लिखावट को पहचानने में सहायता मिलती है। इन तरंगों से मनुष्यों की त्वचा में विटामिन D का निर्माण होता है।
(iv) रेडियो तरंगें इन तरंगों का उपयोग टेलीविजन तथा रेडियो संकेतों के प्रसारण में किया जाता है।

प्रश्न 10.
किसी आवृत्ति से कम्पन करता हुआ कोई आवेश किस प्रकार विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न करता है? Z-अक्ष के
अनुदिश संचरित विद्युत चुम्बकीय तरंग के लिए वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र दर्शाते हुए एक व्यवस्थित आरेख (schematic diagram) बनाइए।
उत्तर:
जब कोई आवेश किसी आवृत्ति से कम्पन करता है तो यह दिक् स्थान से दोलन करते हुए वैद्युत क्षेत्र को उत्पन्न करता है। यह क्षेत्र दोलन करता हुआ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। दोलन करता हुआ
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चुम्बकीय क्षेत्र दोलन करते हुए वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करने का स्रोत बन जाता है। इस प्रकार से यह बारी-बारी से क्रम चलता रहता है। इस प्रकार एक- दूसरे को बार-बार उत्पादित करने वाले वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र वेक्टर परस्पर लम्बवत् दिशाओं में तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं। Z-अक्ष के अनुदिश संचरित विद्युत चुम्बकीय तरंग के व्यवस्थित आरेख को ऊपर दर्शाया गया है।

प्रश्न 11.
एक समतल विद्युत-चुम्बकीय तरंग निर्वात में Y-दिशा में संचरित हो रही है। विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के (i) परिमाण का अनुपात, (ii) दिशाओं के विषय में लिखिए।
उत्तर:
(i) E/B = c; जहाँ E = |\( \overrightarrow{\mathrm{E}}\) | B = | \( \overrightarrow{\mathrm{B}}\) | तथा c = प्रकाश की चाल।
(ii) वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा \( \overrightarrow{\mathrm{B}}\) क्रमशः Z- अक्ष तथा X- अक्ष के अनुदिश होंगे। ये विद्युत चुम्बकीय तरंग संचरण दिशा के लम्बवत् होंगे।

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प्रश्न 12.
निर्वात में 4 x 109 हर्ट्ज आवृत्ति की विद्युत-चुम्बकीय तरंग की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए इसके दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 6
= 0.075 मीटर।
यह तरंगदैर्घ्य माइक्रो तरंगों की है। अतः इनके दो उपयोग निम्नलिखित हैं
(i) राडार निकाय में
(ii) माइक्रोवेव ओवेन में।

प्रश्न 13.
भू-तरंग एवं आकाश तरंगों को समझाइये।
उत्तर:
भू-तरंग – ये तरंगें कम आवृत्ति की रेडियो तरंगें होती हैं। जो पृथ्वी की सतह के सहारे चलकर पृथ्वी की सतह के एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक पहुँचती हैं लेकिन ये ज्यादा दूरी तक नहीं जा पाती हैं। इनके सहारे ही रेडियो के कार्यक्रम जो एक सीमित क्षेत्र में ही प्रसारित किये जाते हैं, उनके लिये इन तरंगों का उपयोग किया जाता है और इनको भू-तरंग कहा जाता है।
आकाश तरंगें – रेडियो तरंगें सीधी रेखा में चलती हैं। इसलिये जहाँ से ये प्रसारित की जाती हैं (जैसे- रेडियो स्टेशन से प्रेषित तरंगें ) वहाँ से पृथ्वी की गोलाई के कारण ज्यादा दूर तक नहीं जा पाती हैं। यदि कम आवृत्ति की तरंगें हैं तो ये पृथ्वी की सतह के सहारे चलती हैं लेकिन आवृत्ति अधिक होने पर दूर तक नहीं जा पाती हैं। ज्यादा आवृत्ति वाली तरंगें प्रकाश की ओर जाकर आयनमण्डल की निचली सतह से टकराकर पृथ्वी की ओर लौटकर दूर स्थान तक पहुँच जाती हैं। चूँकि ये आकाश से लौटकर किसी स्थान पर पहुँचती हैं, इसलिये इनको आकाश तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 14
विद्युत चुम्बकीय तरंगें कौनसी तरंगें होती हैं ? इनका उत्पादन किन किन कारणों से संभव होता है?
उत्तर:
विद्युत चुम्बकीय तरंग की परिभाषा – “यह एक त्रिविमीय तरंग है जो कि दोलित विद्युत परिपथ से उत्सर्जित होती है। उसमें विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत् दोलित होते हैं।” इन तरंगों के संचरण के लिये किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
उत्पादन के कारण:
(1) दोलित विद्युत परिपथ में दोलन करने वाले आवेश की यांत्रिक ऊर्जा विद्युत चुम्बकीय तरंगों में परिवर्तित हो जाती है।
(2) आवेश के दोलन से आवेश की गतिज ऊर्जा विद्युत- चुम्बकीय तरंगों में बदल जाती है।

प्रश्न 15
X किरणों के उपयोग बताइये।
उत्तर:
उपयोग:
(1) रेडियो एस्ट्रोनोमी में ऐन्टेना से प्राप्त अत्यन्त क्षीण सूक्ष्म तरंग संकेतों को मेसर द्वारा प्रवर्धित करते हैं।
(2) अंतरिक्ष संचार, अधिक दूरियों के लिये रेडियो संचार आदि में प्रवर्धक के रूप में इनका उपयोग करते हैं।
(3) औषध विज्ञान चिकित्सा विज्ञान, सूक्ष्म सर्जरी में इनका अत्यधिक उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बकीय तरंग स्पैक्ट्रम को आवृत्ति एवं तरंगदैर्घ्य के रूप में बताइये।
उत्तर:
विद्युत चुम्बकीय स्पैक्ट्रम रेडियो तरंगें, सूक्ष्म तरंगें, अवरक्त दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी, X- किरणें, गामा किरणें आदि सभी
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तरंगों के गुण विद्युत चुम्बकीय तरंगों के गुणों जैसे ही होने के कारण मूलतः ये सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं अन्तर केवल इतना है कि इनकी तरंगदैर्घ्य भिन्न-भिन्न होती है। स्पष्ट है कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों की तरंगदैर्ध्य का विस्तार काफी अधिक होता है इसलिये उपर्युक्त सभी तरंगों को तरंगदैर्घ्य के आधार पर एक क्रम में रखा जा सकता है, जिसे विद्युत चुम्बकीय स्पैक्ट्रम या वर्णक्रम कहते हैं।

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प्रश्न 17.
निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय विकिरणों को उनकी आवृत्ति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। इनमें से किसी एक के उपयोग लिखिए- माइक्रो तरंगें, रेडियो तरंगें, X-किरणें, गामा किरणें।
उत्तर:
रेडियो तरंगें, माइक्रो तरंगें X – किरणें गामा किरणें।
उपयोग – माइक्रो तरंगें- रेडार में उपग्रहों तथा लम्बी दूरी वाले बेतार संचार में माइक्रोवेव ओवन में।
रेडियो तरंगें – रेडियो तथा टी.वी. के संचारण में।
X – किरणें- चिकित्सा निदान व उपचार में।
गामा किरणें – नाभिकीय संरचना की जानकारी, चिकित्सा उपचार आदि।

प्रश्न 18.
(a) निम्नलिखित में से कौन विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है? कारण दीजिए।
(i) नियत वेग से गतिमान आवेश,
(ii) वृत्तीय गति करता हुआ आवेश,
(iii) स्थिर आवेश।
(b) विद्युत-चुम्बकीय वर्णक्रम का वह भाग बताइए जिससे
(i) 1020 Hz,
(ii) 109 Hz आवृत्ति की तरंगें सम्बन्धित हों।
उत्तर:
(a) (i) नियत वेग से गतिमान आवेश में कोई भी त्वरण नहीं होता है। अतः यह विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत नहीं हो सकता है।
(ii) वृत्तीय गति करते हुए आवेश की गति त्वरित गति होगी. अतः यह विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है।
(iii) स्थिर आवेश में भी त्वरण नहीं होता है अतः यह भी विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत नहीं हो सकता है।
(b) (i) y-किरणें (ii) माइक्रो तरंगें।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित तरंगदैर्घ्य की विद्युत चुम्बकीय तरंगें:
(a) λ1: माँसपेशीय तनाव उपचार में प्रयुक्त की जाती है।
(b) λ2 : रेडियो ब्रॉडकास्टिंग में प्रयुक्त की जाती है।
(c) λ3 : हड्डियों के टूटने का पता लगाने में प्रयुक्त की जाती है।
(d) λ4: वायुमण्डल की ओजोन पर्त द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।
विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के उप भाग का नाम ये सम्बन्धित हैं। इनको तरंगदैर्घ्य के घटते क्रम में
उत्तर:
(a) λ1 → अवरक्त विकिरण
(b) λ2 → रेडियो तरंगें
(c) λ3 → X किरणें
(d) λ4 → पराबैंगनी विकिरण
λ2 > λ1 > λ4 > λ3
लिखिए जिससे लिखिए।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय विकिरणों की आवृत्ति परास लिखकर प्रत्येक का एक उपयोग लिखिए:
(i) माइक्रो तरंग,
(ii) पराबैंगनी विकिरण,
(iii) गामा किरणें।
उत्तर:
(i) 1 x 109 Hz से 3 x 1011 Hz ( राडार में):
(ii) 8 x 1014 Hz से 1 x 1116 Hz (खाद्य संरक्षण) में;
(iii) 3 x 1018 Hz से 3 x 1022 Hz (रेडियो थैरेपी चिकित्सा में)।

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प्रश्न 21
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उन विकिरणों के नाम लिखिए जो:
(i) उपग्रह संचार में प्रयुक्त होती हैं।
(ii) क्रिस्टल संरचना ज्ञात करने में प्रयुक्त होती हैं।
(iii) जो रेडियोऐक्टिव नाभिक के क्षय में उत्पन्न होती हैं।
(iv) जिनकी तरंगदैर्ध्य 350 nm तथा 770 nm के बीच होती है।
(v) सूर्य के प्रकाश से ओजोन पर्त द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं।
(vi) तीव्र ऊष्मीय प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
उत्तर:
(i) माइक्रो तरंगें
(ii) X – किरणें
(iii) y-किरणें,
(iv) दृश्य प्रकाश,
(v) पराबैंगनी विकिरण,
(vi) अवरक्त विकिरण।

प्रश्न 22.
(a) दिक्काल (मुक्त आकाश) में किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र सदिश (E) का परिमाण 9.3 V/m है। इस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र सदिश (B) का परिमाण ज्ञात कीजिए।
(b) पराबैंगनी, अवरक्त तथा X-किरणों में से किसकी तरंगदैर्ध्य अधिकतम होती है?
उत्तर:
(a) c = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\mathrm{~B}_0}\)
या B0 = \(\frac{\mathbf{E}_0}{\mathrm{c}}\)
B0 = \(\frac{9.3}{3 \times 10^8}\)
= 3.1 × 108 T

(b) अवरक्त।

प्रश्न 23.
एक रेखीय धुवित विद्युतचुम्बकीय तरंग का संचरण चित्र बनाइये तथा विद्युत चुम्बकीय तरंग के कोई दो गुण लिखिए। निर्वात में एक वैद्युतचुम्बकीय तरंग से सम्बद्ध चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम B0 = 50 x 108 टेसला है। तरंग से सम्बद्ध वैद्युत क्षेत्र के आयाम का मान वोल्ट / मीटर में लिखिए।
उत्तर:
रेखीय धुवित विद्युतचुम्बकीय तरंग का संचरण चित्र-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 8
विद्युत चुम्बकीय तरंग के गुण:
(1) यह एक प्रकाश तरंग है जिसकी प्रकृति अनुप्रस्थ होती है।
(2) विद्युतचुम्बकीय तरंगें निर्वात में प्रकाश के वेग C से गमन करती हैं। जहाँ
C = \(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\)
= 3 × 108m/s
नोट: छात्र और भी गुण लिख सकते हैं।
दिया गया है:
निर्वात में चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम
B0 = 50 x 10-8 टेसला
निर्वात में तरंग का वेग C = 3 x 108 मी/से.
निर्वात में तरंग के विद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम = E0 = ?
हम जानते हैं कि वैद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिये
C = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\mathrm{~B}_0}\)
या
Eg = C Bo
मान रखने पर
Eg = 3 x 108 × 50 x 108
= 150 वोल्ट / मीटर

प्रश्न 24.
विद्युत् चुम्बकीय तरंगें किस प्रकार उत्पन्न होती हैं? संचरण करने वाली किसी विद्युत् चुम्बकीय तरंग द्वारा वहन की जाने वाली ऊर्जा का स्रोत क्या होता है?
(i) घरेलू इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों के सुदूर स्विचों में
(ii) चिकित्सा में नैदानिक साधन के रूप में।
उत्तर:
त्वरित आवेश विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो समय और स्थान दोनों में बदलते हैं। ये परिवर्तनशील चुम्बकीय एवं वैद्युत क्षेत्र, वैद्युत चुम्बकीय तरंगों को जन्म देते हैं। वृत्तीय गति करते हुए आवेश की गति त्वरित गति होगी, अतः यह विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है।
विद्युत चुम्बकीय विकिरणों का उपयोग होता है।
(i) Infrared विकिरणों में
(ii) X-किरणों में।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक समतल e.m. तरंग में विद्युत क्षेत्र 2 x 1010 s-1 आवृत्ति और 40 Vm-1 आयाम से दोलन करता है। (a) तरंग का तरंगदैर्घ्य (b) विद्युत क्षेत्र से सन्नद्ध ऊर्जा घनत्व का आकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
आवृत्ति v = 2 x 1010 s-l
यह E की दोलन आवृत्ति है।
C = प्रकाश की चाल = 3 x 108 m/s
E0 = विद्युत क्षेत्र का आयाम = 40V/m.
∴ Emax = \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}}\)
= \(\frac{E_0}{\sqrt{2}}\)
= \(\frac{\sqrt{2} \times 40}{2}\)
= 20√2 V/m.
(a) तरंग का तरंगदैर्ध्य = λ = ?
λ = c/v = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 9
= \(\frac{3 \times 10^8}{2 \times 10^{10}}\)
= 1.50 × 102 m.

(b) विद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व = UE = ?
UE = \(\frac{1}{2}\) ∈0 E2r.m.s
= \(\frac{1}{2}\) × 8.85 × 10-12 × (20√2)2
= \(\frac{1}{2}\) × 8.85 × 10-12 × 400 × 2
= 35.416 × 10-10 jm-3
= 3.54 × 10-9jm-3
= 3.54 n Jm-3

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प्रश्न 2.
संधारित्र की प्लेटों के बीच क्षेत्र में विद्युत क्षेत्र परिवर्तन की दर 1.5 x 1012 Vm-1 s-1 है। यदि संधारित्र की वृत्तीय प्लेट की त्रिज्या 55 mm है, विस्थापन धारा कितनी होगी?
उत्तर:
दिया गया है:
r = 55 mm = 55 x 10-3 m
= 5.5 × 10-2 m
A = πr2 = \(\frac{22}{7}\) x (5.5 × 10-2)2
= \(\frac{22}{7}\) × 5.5 × 5.5 × 10-4
= 95.07 × 10-4 m-2
और
\(\frac{dE}{dt}\) = 1.5 x 1012 Vm-1s-1
विस्थापन धारा Id = ?
हम जानते हैं
विस्थापन धारा Id = ∈0 \(\frac{dE}{dt}\) (ΦE)
लेकिन
ΦE = EA
∴ Id = ∈0 \(\frac{dE}{dt}\)(EA)
= ∈0 \(\frac{dE}{dt}\)
मान रखने पर
= 8.85 × 10-12 × 95.07 × 10-4 × 1.5 x 1012
= 8.85 × 95.07 x 1.5 x 10-4
= 1262.05 × 10-4
= 126.205 × 10-3 A
= 126 mA

प्रश्न 3.
x- अक्ष के अनुदिश प्रगामी एक प्रकाश पुंज को विद्युत क्षेत्र Ey = 600 Vm-1 sin ω(t – x/c) से व्यक्त करते हैं y-अक्ष के अनुदिश 3.0 x 107 ms-1 चाल से प्रगामी एक आवेश q = 2e पर वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्रों के अधिकतम बल का आकलन कीजिए जहाँ e = 1.6 x 10-19 C है।
उत्तर:
दिया गया है:
E = 600Vm-1 sinω(1 – x/c)
Eg = 600Vm-1
q = 2e
= 2 × 1.6 × 10-19 C
प्रकाश की चाल = 3 x 108 m/s
v = 3.0 × 107 m/s
B0 = E0/c = \(\frac{600}{3 \times 10^8}\)
= 2 × 10-6 T
जो z-अक्ष के अनुदिश कार्य करता है।
इस प्रकार अधिकतम वैद्युत बल
Fo = qEo
= 2e E0
= 2 × 1.6 × 10-19 x 600
= 1.92 × 10-16 N से दिया जाता है।
अधिकतम चुम्बकीय बल
Fmax
= qvBo = 2evBo
= 2 × 1.6 × 10-19 x 3 x 107 x 2 x 10-6 N
= 1.92 x 10-17 N

प्रश्न 4.
एक संधारित्र की पट्टिकाओं पर आवेषण धारा 0.5 A है। इसकी प्लेटों पर विस्थापन धारा का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
I = 0.5 A
Id = ?
हम जानते हैं:
Id = ∈0 \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)
लेकिन
\(\phi_E\) = EA
∴ Id = ∈0 \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\) (EA)
= ∈0 A \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)
लेकिन
E = \(\frac{q}{\epsilon_0 A}\)
Id = ∈0 A \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)\(\frac{q}{\epsilon_0 A}\)
= \(\frac{\epsilon_0 A}{\epsilon_0 A}\) \(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\) =
\(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\)
= 0.5 A (\(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\) = 1 = 0.5A)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 5.
6 μF धारिता आप 6 A की विस्थापन धारा के संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच कैसे स्थापित करेंगे?
उत्तर:
दिया गया है:
C = 6 μF = 6 × 106F
ld = 6 A
हम जानते हैं
ld = ∈0 A \(\frac{\mathrm{dE}}{\mathrm{dt}}\)
= ∈0 A \(\frac{\mathrm{dE}}{\mathrm{dt}}\) \(\left(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{d}}\right)\)
∴ E = \(\frac{V}{d}\)
= \(\frac{\epsilon_0 A}{d}\) \(\frac{\mathrm{dV}}{\mathrm{dt}}\)
ld = C. \(\frac{\mathrm{dV}}{\mathrm{dt}}\)
∴ \(\frac{\mathrm{dV}}{\mathrm{dt}}\) = \(\frac{I_d}{\mathrm{C}}\) = \(\frac{6}{6 \times 10^{-6}}\)
106 Vs-1
अतः संधारित्र की पट्टिकाओं पर विभवान्तर को 106 Vs-1 की दर से परिवर्तित करके उसकी पट्टिकाओं पर 6A की विस्थापन धारा स्थापित की जा सकती है।

प्रश्न 6.
निर्वात के लिये \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\) तथा \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) के मान क्रमशः 9 x 109 न्यूटन / मी. 2 तथा 10-7वेबर / ऐम्पियर भी होते हैं। निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंग का वेग ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
प्रश्नानुसार = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\)
= 9 x 109
= \(\frac{1}{4 \pi \times 9 \times 10^9}\) = \(\frac{1}{36 \pi \times 10^9}\)
तथा
\(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) = 10-7
= 4 x 10-7
किसी माध्यम में विद्युत चुम्बकीय तरंग का वेग V = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\)
निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंग के वेग के लिये V = C,
μ = μo तथा ∈ = ∈o
C = \(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\) = \(\frac{1}{\sqrt{4 \pi \times 10^{-7} \times \frac{1}{36 \pi \times 10^9}}}\)
या
C = √9 x 1016 = 3 x 108 मी./से.

प्रश्न 7.
एक समान्तर बद्ध संधारित्र की प्लेटों का क्षेत्रफल A तथा इनके बीच की दूरी d है। इसको स्थिर धारा I द्वारा आवेशित किया गया है। एक A/2 क्षेत्रफल का कोई तत्व इसकी प्लेटों के ठीक बीच में समरूपता से प्लेटों के समान्तर रखा गया है। इस क्षेत्रफल से प्रवाहित धारा क्या होगी?
उत्तर:
माना किसी क्षण t पर प्लेटों पर आवेश q है। प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र
E = \(\frac{\sigma}{\epsilon_0}\) = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0 A}\)
प्लेटों के बीच स्थित क्षेत्रफल A/2 से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स
= E × \(\frac{A}{2}\) = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0 A}\) × \(\frac{A}{2}\)
= \(\frac{\mathrm{q}}{2 \epsilon_0}\)
इस तल से गुजरने वाली विस्थापन धारा
Id = ∈0 \(\frac{d}{d t}\) (ΦE)
= ∈0 \(\frac{d}{d t}\) \(\frac{\mathrm{q}}{2 \epsilon_0}\)
= \(\frac{1}{2}\) \(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\)
= \(\frac{1}{2}\)

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.1.
विलयन को परिभाषित कीजिए। कितने प्रकार के विभिन्न विलयन संभव हैं? प्रत्येक प्रकार के विलयन के संबंध में एक उदाहरण देकर संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
विलयन (Solution) – दो या दो से अधिक पदार्थों (अवयवों) का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।
समांगी मिश्रण का अर्थ है कि मिश्रण के सभी भागों का संघटन (composition) तथा गुण समान हैं। विलायक की भौतिक अवस्था के आधार पर विलयन मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं-
(1) गैसीय विलयन
(2) द्रव विलयन
(3) ठोस विलयन |
इन्हें पुनः वर्गीकृत किया जा सकता है जो कि विलेय की भौतिक अवस्था के आधार पर होता है। अतः विलयन वास्तव में 9 प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 1

प्रश्न 2.2.
एक ऐसे ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए जिसमें विलेय कोई गैस हो ।
उत्तर:
हाइड्रोजन का पैलेडियम में विलयन ।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.3.
निम्न पदों को परिभाषित कीजिए-
(i) मोल – अंश
(ii) मोललता
(iii) मोलरता
(iv) द्रव्यमान प्रतिशत ।
उत्तर:
(i) मोल अंश (Mole fraction ) (x) – एक मिश्रण में उपस्थित किसी अवयव का मोल अंश उस अवयव के मोल तथा मिश्रण में उपस्थित सभी अवयवों के कुल मोलों का अनुपात होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 2

(ii) मोललता (Molality) (m) – 1000 g (1 kg) विलायक में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोललता कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 3

(iii) मोलरता (Molarity) (M) – एक लीटर (1 क्यूबिक डेसीमीटर) विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता कहते हैं।

(iv) द्रव्यमान प्रतिशत ( Mass Percentage ) – किसी विलेय के भार भागों की वह संख्या जो विलयन के 100 भार भागों में उपस्थित होती है, उसे द्रव्यमान प्रतिशत कहते हैं।
विलयन में किसी अवयव का द्रव्यमान %

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 4

प्रश्न 2.4.
प्रयोगशाला कार्य के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला सांद्र नाइट्रिक अम्ल द्रव्यमान की दृष्टि से नाइट्रिक अम्ल का 68% जलीय विलयन है। यदि इस विलयन का घनत्व 1.504 gmL-1 हो तो अम्ल के इस नमूने की मोलरता क्या होगी ?
उत्तर:
68% (द्रव्यमान) HNO3 का अर्थ है 68g HNO3, 100 g विलयन में उपस्थित है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 6

विलेय ( HNO3) का भार = 68g HNO3, विलेय का मोलर द्रव्यमान = 1 + 14 + 48 = 63
विलयन का आयतन = 66.49 ml
∴ M = \(\frac{68 \times 1000}{63 \times 66.49}\)
M = 16.23
अतः HNO3 के इस नमूने की मोलरता = 16.23 M इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा भी ज्ञात किया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 7

प्रश्न 2.5.
ग्लूकोस का एक जलीय विलयन 10% (w/w) है । विलयन की मोललता तथा विलयन में प्रत्येक घटक का मोल- अंश क्या है? यदि विलयन का घनत्व 1.2 gmL-1 हो तो विलयन की मोलरता क्या होगी ?
उत्तर:
10% (w/ w) ग्लूकोस विलयन का अर्थ है कि 10g ग्लूकोस 100g विलयन में उपस्थित है जिसमें 90 ग्राम जल है।
(1) अतः विलयन की मोललता (m)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 8
m = \(\frac{10}{180 \times 90 \times 10^{-3}}\)
मोललता: = 0.617m
यहाँ ग्लूकोस का मोलर द्रव्यमान ( C6H12O6) = 180
विलायक की द्रव्यमान = 90g = 90 × 10-3 kg

(2) ग्लूकोस के मोल = 10/180
जल के मोल = \(\frac { 90 }{ 18 }\) = 5
अतः ग्लूकोस का मोल अंश = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 9
ग्लूकोस का मोल अंश = \(\frac { 0.055 }{ 5.055 }\) = 0.01
अतः जल का मोल अंश = 1 – 0.01 = 0.99
(3) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 10

प्रश्न 2.6.
यदि 1 g मिश्रण में Na2CO3 एवं NaHCO3 के मोलों की संख्या समान हो तो इस मिश्रण से पूर्णतः क्रिया करने के लिए 0.1 M HCl के कितने mL की आवश्यकता होगी ?
उत्तर:
माना 1 g मिश्रण में Na2CO3 का द्रव्यमान = x g
Na2CO3 का मोलर द्रव्यमान = (2 × 23 ) + 12 + (3 × 16 ) = 106
अतः Na2CO3 के मोल (n1) = \(\frac { x }{ 106 }\) mol
अतः मिश्रण में NaHCO3 का द्रव्यमान = (1 – x)g
NaHCO3 का मोलर द्रव्यमान = 23 + 1 + 12 + 48 = 84
अतः NaHCO3 के मोल (n2) = \(\frac{1-x}{84}\) mol
Na2CO3 तथा NaHCO3 की HCl से क्रिया के संतुलित समीकरण निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 15
चूंकि दिए गए मिश्रण में Na2CO3 तथा NaHCO3 के मोलों की संख्या समान है अतः
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 16
Na2CO3 तथा NaHCO3 दोनों से क्रिया के लिए आवश्यक HCl के मोल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 17
यदि आवश्यक HCl का आयतन V है तो
मोलरता × आयतन (L) = मोल
0.1 × V(L) = 0.01578
V (लीटर) = 0.1578 L
अतः HCl का आवश्यक आयतन = 157.8mL

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.7.
द्रव्यमान की दृष्टि से 25% विलयन के 300g एवं 40% के 400g को आपस में मिलाने पर प्राप्त मिश्रण का द्रव्यमान प्रतिशत सांद्रण निकालिए ।
उत्तर:
25% (w/w), 300 g विलयन में विलेय का भार = (25 × 3) 75g
40% (w/w), 400g विलयन में विलेय का भार = (40 × 4) = 160 g
दोनों विलयनों को मिलाने पर विलेय का कुल भार = 75 + 160 = 235 g
तथा विलयन का कुल भार= 300 + 400 = 700 g
अतः मिश्रण में विलेय का द्रव्यमान
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 18

प्रश्न 2.8.
222.6g एथिलीन ग्लाइकॉल, C2H4(OH)2 तथा 200g जल को मिलाकर प्रतिहिम मिश्रण बनाया गया । विलयन की मोललता की गणना कीजिए। यदि विलयन का घनत्व 1.072 g mL-1 हो तो विलयन की मोलरता निकालिए।
उत्तर:
(i) मोललता (m) =HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 19
एथिलीन ग्लाइकॉल (विलेय) का द्रव्यमान = 222.6 g
एथिलीन ग्लाइकॉल [C2H4(OH)2] का मोलर द्रव्यमान = 62
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 200g = 0.2 kg
अतः m = \(\frac{222.6}{62 \times 0.2}\) = 17.95 mol Kg-1

(ii) विलयन की मोलरता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 11
विलयन का कुल द्रव्यमान = 200 + 222.6 = 422.6
विलयन का घनत्व = 1.072 g mL-1
अतः विलयन का आयतन (V) = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 12
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 20

प्रश्न 2.9.
एक पेय जल (drinking water) का नमूना क्लोरोफॉर्म (CHCl3) से, कैंसरजन्य समझे जाने की सीमा तक बहुत अधिक संदूषित (Contaminated) है। इसमें संदूषण की सीमा 15 ppm (द्रव्यमान में ) है –
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशत में व्यक्त कीजिए ।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
(i) 15 ppm CHCl3 का अर्थ है कि 106 भाग विलयन में 15 भाग CHCl3 है।
अतः विलेय का द्रव्यमान (भार) = 15 g
विलयन का द्रव्यमान = 106 g
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 21
द्रव्यमान % = \(\frac{15 \times 100}{10^6}\) = 15 × 10-4 = 1.5 × 10-3%

(ii) विलायक का द्रव्यमान = विलयन का द्रव्यमान – विलेय का द्रव्यमान
= 106 – 15 = 999985g
= 9.99985 × 105
विलयन की मोललता (m)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 23
CHCl3 का मोलर द्रव्यमान = 12 + 1 + (3 × 35.5)
= 119.5 g mol-1
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 24
m = 0.0125 × 10-2
m = 1.25 x 10-4
अतः जल के नमूने में CHCl3 की मोललता = 1.25 x 10-4 m

प्रश्न 2.10.
ऐल्कोहॉल एवं जल के एक विलयन में आण्विक अन्योन्य क्रिया (Molecular Interaction) की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ऐल्कोहॉल एवं जल का विलयन धनात्मक विचलन दर्शाता है। क्योंकि ऐल्कोहॉल तथा जल दोनों में अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध होते हैं। लेकिन दोनों को मिलाने पर ऐल्कोहॉल तथा जल के मध्य बना हाइड्रोजन बन्ध, शुद्ध जल के हाइड्रोजन बन्ध की तुलना में दुर्बल होता है।
अतः इस विलयन के लिए △H(मिश्रण) = +ve तथा △V (मिश्रण) = +ve होंगे। अतः मिश्रण का वाष्प दाब अधिक होगा तथा क्वथनांक कम होगा। इसलिए यह राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन का उदाहरण है।

प्रश्न 2.11.
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में, हमेशा कमी आने की प्रवृत्ति क्यों होती है ?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता कम होती है क्योंकि घोले जाने पर गैसों के अणु द्रव प्रावस्था में विलीन होकर उसमें उपस्थित होते हैं अतः यह संघनन अभिक्रिया के समान है तथा इस प्रकिया में ऊष्मा उत्सर्जित (ऊष्माक्षेपी प्रक्रम) होती है। गैसों की द्रव में विलेयता गतिक साम्य है अतः ले – शातैलिए के नियम के अनुसार ताप बढ़ने पर विलेयता घटेगी अर्थात् साम्य पश्च दिशा में जाएगा।

प्रश्न 2.12.
हेनरी का नियम तथा इसके कुछ महत्वपूर्ण अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर:
हेनरी का नियम-
(i) स्थिर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता, उस गैस के दाब के समानुपाती होती है। किसी द्रवीय विलयन में गैस की विलेयता गैस के आंशिक द पर निर्भर करती है तथा विलयन में गैस की विलेयता को मोल अंश में व्यक्त किया जाता है।

(ii) किसी विलयन में गैस का मोल अंश, उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है ।

(iii) किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब (p), उस विलयन में गैस के मोल अंश (x) के समानुपाती होता है।
p = KHX जहाँ KH = हेनरी स्थिरांक
हेनरी के नियम के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग — इसके लिए पाठ्यपुस्तक का भाग संख्या 2.3.2 देखें।

प्रश्न 2.13.
6.56 × 10-3 g एथेन युक्त एक संतृप्त विलयन में एथेन का आंशिक दाब 1 bar है। यदि विलयन में 5.00 × 10-2 g एथेन हो तो गैस का आंशिक दाब क्या होगा ?
उत्तर:
हेनरी के नियम के अनुसार p = KH x
गैस का मोल अंश उसके द्रव्यमान (m) के समानुपाती होता है।
अतः m ∝ x
अतः हेनरी के नियम का वैकल्पिक रूप
m = KHP
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 25

प्रश्न 2.14.
राउल्ट के नियम से धनात्मक एवं ऋणात्मक विचलन का क्या अर्थ है तथा △मिश्रण H के चिह्न इन विचलनों से कैसे सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
जब कोई विलयन सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन नहीं करता तो वह अनादर्श विलयन (Non Ideal Solution) कहलाता है। इन विलयनों का वाष्पदाब राउल्ट के नियम द्वारा परिकलित किए गए वाष्प दाब से या तो अधिक होता है या कम । यदि यह अधिक होता है तो राउल्ट नियम से धनात्मक विचलन प्रदर्शित करता है और यदि यह कम होता है तो ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 26

प्रश्न 2.15.
विलायक के सामान्य क्वथनांक पर एक अवाष्पशील विलेय के 2% जलीय विलयन का 1.004 bar वाष्प है । विलेय का मोलर द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
शुद्ध जल का वाष्प दाब (p10) = 1.013 bar होता है।
विलयन का वाष्प दाब (p1) = 1.004 bar
विलेय का 2% जलीय विलयन है अतः
W2 = 2 gm तथा (W1+ W2) = 100g.
W1 = 98g
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 27

प्रश्न 2.16.
हेप्टेन एवं ऑक्टेन एक आदर्श विलयन बनाते हैं। 373 K पर दोनों द्रव घटकों के वाष्प दाब क्रमश: 105.2 kPa तथा 46.8 kPa हैं। 26.0g हेप्टेन एवं 35.0g ऑक्टेन के मिश्रण का वाष्प दाब क्या होगा ?
उत्तर:
हेप्टेन (C7H16) का मोलर द्रव्यमान = (7 × 12) + 16 = 100
ऑक्टेन का मोलर द्रव्यमान ( C8H18 ) = (8 × 12 ) +18 = 114
हेप्टेन के मोल (n1) = \(\frac { 26 }{ 100 }\) = 0.26
ऑक्टेन के मोल (n2) = \(\frac { 35 }{ 114 }\) = 0.307
हेप्टेन की मोल भिन्न (x1) = \(\frac{0.26}{0.26+0.307}\)
x1 = \(\frac{0.26}{0.567}\) = 0.458

ऑक्टेन की मोल भिन्न (x2) = 1 – x1
= 1 – 458 = 0.542
विलयन में हेप्टेन का वाष्प दाब (P1) = P10x1
= 105.2 × 0.458 (P10 = 105.2k Pa) = 48.18 kPa

विलयन में ऑक्टेन का वाष्प दाब (P2) = P20x2
P2 = 46.8 × 0.542 = 25.36kPa (p) (P02 = 46.8k Pa)

मिश्रण का कुल वाष्प दाब (p) = P1 + P2
p = 48.18 + 25.36
p = 73.54 kPa

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.17.
300K पर जल का वाष्प दाब 12.3 kPa है। इसमें बने अवाष्पशील विलेय के एक मोलल विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
शुद्ध जल का वाष्प दाब p10 (H2O) = 12.3kPa
चूंकि 1 मोलल विलयन है अतः विलेय के मोल (n2) = 1 मोल
विलायक (H2O) के मोल (n1) = \(\frac { 1000 }{ 18 }\) = 55.5
जल की मोल भिन्न (x1) = \(\frac { 55.5 }{ 55.5 + 1 }\) = 0.982
विलयन का वाष्प दाब (P1) = x1 × P10
P1 = 0.982 × 12.3
P1 = 12.08 k Pa
अतः विलयन का वाष्प दाब = 12.08 pk Pa

प्रश्न 2.18
114 g ऑक्टेन में किसी अवाष्पशील विलेय (मोलर द्रव्यमान 40 g mol-1) की कितनी मात्रा घोली जाए कि ऑक्टेन का वाष्प दाब घट कर मूल का 80% रह जाए ?
उत्तर:
विलयन का वाष्प दाब (P1) = P10 का 80% है।
अतः P1 = P10 × 0.8
माना विलेय का द्रव्यमान = w g,
मोलर द्रव्यमान = 40g mol-1
विलेय के मोल = \(\frac { w }{ 40 }\)
ऑक्टेन (C8H18) का मोलर द्रव्यमान = 114 g mol-1
विलेय का द्रव्यमान = 114 g
ऑक्टेन (विलायक) के मोल = \(\frac { 114 }{ 114 }\) = 1 mol
विलेय की मोल भिन्न (x2)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 28

प्रश्न 2.19.
एक विलयन जिसे एक अवाष्पशील ठोस के 30g को 90g जल में विलीन करके बनाया गया है। उसका 298K पर वाष्प दाब 2.8 kPa है । विलयन में 18 g जल और मिलाया जाता है जिससे नया वाष्प दाब 298K पर 2.9 kPa हो जाता है। निम्नलिखित की गणना कीजिए-
(i) विलेय का मोलर द्रव्यमान
(ii) 298 K पर जल का वाष्प दाब।
उत्तर:
(i) विलेय का द्रव्यमान = 30g तथा माना विलेय का मोलर द्रव्यमान = M
अतः विलेय के मोल (n2) = \(\frac { 30 }{ M }\)
विलायक (H2O) का द्रव्यमान = 90 g,
मोलर द्रव्यमान: = 18 g mol-1
अतः विलायक के मोल = \(\frac { 90 }{ 18 }\) = 5
\(\frac{5}{5+(\tilde{3} 0 / \mathrm{M})}\) = \(\frac{5 \mathrm{M}}{5 \mathrm{M}+30}\)
x1 = \(\frac{M}{6+M}\)
विलयन का आंशिक दाब, P1 = P10x1
2.8 = P10 × \(\frac{M}{6+M}\) …..(1)

विलयन में 18 g (1 मोल) जल और मिलाया जाता है
तब जल के मोल = 5 + 1 = 6
इस स्थिति में विलायक (H2O) की मोल भिन्न
x1 = \(\frac{6}{6+(30 / \mathrm{M})}\) = \(\frac{M}{5+M}\)
विलयन का आंशिक दाब, (P11) = P01x11
2.9 = P10 × \(\frac{M}{5+M}\) …..(2)
समीकरण (2) में समीकरण (1) का भाग देने पर,
\(\frac { 2.8 }{ 2.9 }\) = \(\frac { 5 + M }{ 6 + M }\)
2.8 (6 + M) = 2.9 (5 + M)
16.8 + 2.8 M = 14.5 + 2.9 M
0.1M = 2.3
M = 23 g mol-1
अतः विलेय का मोलर द्रव्यमान = 23g mol-1

(ii) समीकरण (2) में M का मान रखने पर
2.9 = P10 × \(\frac { 23 }{ 5 + 23 }\)
2.9 = \(\frac{p_1^0 \times 23}{28}\)
23P10 = 2.9 × 28
23P10 = 81.2
P10 = 81.2/23 = 3.53KPa
अतः 298 K पर जल का वाष्प दाब = 3.53 kPa

प्रश्न 2.20
शक्कर के 5% (द्रव्यमान) जलीय विलयन का हिमांक 271K है। यदि शुद्ध जल का हिमांक 273.15K है तो ग्लूकोस के 5% जलीय विलयन के हिमांक की गणना कीजिए ।
उत्तर:
हिमांक अवनमन (△Tf) = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
शक्कर के 5% (द्रव्यमान) विलयन का अर्थ है 5 g शक्कर + 95g H2O
△Tf = 273.15 – 271 = 2.15
शक्कर का द्रव्यमान (W2) =5g
W1 = 95 g.
M2 = शक्कर का (C12H22O11) मोलर द्रव्यमान = 342
Kf = ?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 29

प्रश्न 2.21.
दो तत्व A एवं B मिलकर AB2 एवं AB4 सूत्र वाले दो यौगिक बनाते हैं। 20g बेन्जीन में घोलने पर 1 g AB2 हिमांक को 2.3K अवनमित ( कम ) करता है। जबकि 1.0g AB4 से 1.3K का अवनमन होता है। बेन्जीन के लिए मोलर अवनमन स्थिरांक 5.1 K kg mol-1 है । A एवं B के परमाण्वीय द्रव्यमान की गणना कीजिए ।
उत्तर:
हिमांक अवनमन-
△Tf = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
मोलर द्रव्यमान, M2 = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\Delta \mathrm{T}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_1}\)
M2 = MAB2 = AB2 का मोलर द्रव्यमान = ?
Kf = 5.1 K kg mol-1
w2 = 1g, w1 = 20g, △Tf = 2.3K
MAB2 = \(\frac{5.1 \times 1 \times 1000}{2.3 \times 20}\) = 110.869
MAB2 = 110.87g mol-1
इसी प्रकार AB4 का मोलर द्रव्यमान –
MAB4 = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\Delta \mathrm{T}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_1}\)
△Tf = 1.3K
MAB4 = \(\frac{5.1 \times 1 \times 1000}{1.3 \times 20}\) = 196.15
MAB4 = 196.15 g mol-1
माना x तथा y, A तथा B के परमाणु द्रव्यमान हैं।
तो MAB2 = x + 2y
110.87 = x +2y …………..(1)
MAB4 = x + 4y
196.15 = x + 4y
समीकरण ( 2 ) में से समीकरण (1) घटाने पर,
196.15 – 110.87 = 2y
85.28 = 2y
У = 42.64 u

y का मान समीकरण (1) में रखने पर,
110.87 = x + 2 × 42.64
110.87 = x + 85.28
x = 110.87 – 85.28
x = 25.59 u
अतः A का परमाणु द्रव्यमान = 25.59 u तथा
B का परमाणु द्रव्यमान = 42.64 u

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.22.
300K पर 36 g प्रति लीटर सांद्रता वाले ग्लूकोस के विलयन का परासरण दाब 4.98 bar है। यदि इसी ताप पर विलयन का परासरण दाब 1.52 bar हो तो उसकी सांद्रता क्या होगी ?
उत्तर:
परासरण दाब (Π) = CRT
चूंकि R तथा T नियत हैं अतः
Π ∝ C
अतः किसी पदार्थ के दो विभिन्न सान्द्रता वाले विलयनों के लिए
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 30

ग्लूकोस (C6H12O6) का मोलर द्रव्यमान = 180
C1 = \(\frac{36}{180 \times 1}\) = 0.2mol L-1
अब Π1 = 4.98bar, Π2 = 1.52bar
C1 = 0.2 mol L-1, C2 = ?

उपर्युक्त सूत्र में Π1, Π2 तथा C2 का मान रखने पर
\(\frac{4.98}{1.52}\) = \(\frac{0.2}{C_2}\)
C2 = \(\frac{1.52 \times 0.2}{4.98}\) = 0.061mol L-1
अतः द्वितीय स्थिति में विलयन की सान्द्रता = 0.061 mol L-1

प्रश्न 2.23.
निम्नलिखित युग्मों में उपस्थित सबसे महत्वपूर्ण अतंरआण्विक आकर्षण बलों का सुझाव दीजिए-
(i) n – हेक्सेन तथा n – ऑक्टेन
(ii) I2 तथा CCl4
(iii) NaClO4 तथा H2O
(iv) मेथेनॉल तथा ऐसीटोन
(v) ऐसीटोनाइट्राइल (CH3CN) तथा ऐसीटोन (C3H6O)
उत्तर:
(i) n – हेक्सेन व n ऑक्टेन- ये दोनों ही अध्रुवीय अणु हैं। अतः इनके मध्य वान्डरवाल बल होता है जो कि प्रकीर्णन बल (Dispersion force) या लण्डन बल है। इसे तात्कालिक द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव आकर्षण बल भी कहते हैं।

(ii) I2 तथा CCl4 के मध्य भी उपर्युक्त प्रकार का वान्डरवाल बल ही पाया जाता है।

(iii) NaClO4 तथा H2O के मध्य आयन- द्विध्रुव आकर्षण बल होता है। क्योंकि NaClO4, Na+ तथा CIO4 में वियोजित हो जाता है।

(iv) मेथेनॉल तथा ऐसीटोन के मध्य द्विध्रुव- द्विध्रुव आकर्षण बल पाया जाता है तथा इनमें कुछ मात्रा में हाइड्रोजन बन्ध भी होता है।

(v) ऐसीटोनाइट्राइल (CH3CN) तथा ऐसीटोन (CH3COCH3) के मध्य भी द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल होता है।

प्रश्न 2.24.
विलेय-विलायक आकर्षण के आधार पर निम्नलिखित को n ऑक्टेन में विलेयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए – KCI, CH3OH, CH3CN, साइक्लोहेक्सेन ।
उत्तर:
n- ऑक्टेन, अध्रुवीय विलायक है अतः विलेयता के सामान्य सिद्धान्त “समान, समान को घोलता है,” के अनुसार जब विलेय की ध्रुवता कम होगी तो n – ऑक्टेन में उसकी विलेयता बढ़ेगी। अतः उपर्युक्त यौगिकों की n – ऑक्टेन में विलेयता का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होगा-
KCI < CH3OH < CH3CN < साइक्लोहेक्सेन

प्रश्न 2.25.
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिकों में से कौनसे जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं-
(i) फीनॉल
(ii) टॉलूईन
(iii) फार्मिक अम्ल
(iv) एथिलीन ग्लाइकॉल
(v) क्लोरोफॉर्म
(vi) पेन्टेनॉल
उत्तर:
जल, एक ध्रुवीय विलायक है जिसमें अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है।
(a) (ii) टॉलूईन तथा (v) क्लोरोफॉर्म जल में अविलेय हैं क्योंकि ये. सहसंयोजी यौगिक हैं, अतः ये जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाते।

(b) (i) फीनॉल तथा (vi) पेन्टेनॉल जल में आंशिक रूप से विलेय हैं क्योंकि इन यौगिकों में ध्रुवता होती है लेकिन इनका अध्रुवीय भाग बड़ा है। अतः ये जल के साथ बहुत दुर्बल हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं।

(c) (iii) फार्मिक अम्ल तथा (iv) एथिलीन ग्लाइकॉल जल में अत्यधिक विलेय हैं क्योंकि ये जल के साथ प्रबल हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं।

प्रश्न 2.26.
यदि किसी झील के जल का घनत्व 1.25 g mL-1 है तथा उसमें 92 g Na+ आयन प्रति किलोग्राम जल में उपस्थित हैं, तो झील में Na+ आयन की मोललता ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 31
= \(\frac { 92 }{ 23 }\) = 4
अतः m = \(\frac { 4 }{ 1 }\) = 4
अतः Na+ आयन की मोललता = 4 m.

प्रश्न 2.27.
अगर CuS का विलेयता गुणनफल 6 × 10-16 है तो जलीय विलयन में उसकी अधिकतम मोलरता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
CuS का विलेयता गुणनफल (ksp) = [Cu2+][s2-] Cus की अधिकतम मोलरता = CuS की विलेयता
CuS का ksp = 6 × 10-16
तथा इसके लिए (Ksp) = S2
S = mol L-1 में विलेयता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 32
अतः जलीय विलयन में CuS की अधिकतम विलेयता = 2.45 × 10-8 M

प्रश्न 2.28.
जब 6.5g, ऐस्पिरीन (C9H8O4) को 450 g ऐसिटोनाइट्राइल (CH3CN) में घोला जाए तो ऐस्पिरीन का ऐसीटोनाइट्राल में भार प्रतिशत (द्रव्यमान प्रतिशत) ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
भार प्रतिशत = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 33 × 100
अवयव (ऐस्पिरीन) का भार = 6.5 g
विलायक का भार = 450 g
विलयन का कुल भार = 450 + 6.5 g = 456.5 g
अतः ऐस्पिरीन का भार % = \(\frac { 6.5 }{ 456.5 }\) × 100 = 1.4238 = 1.424%

प्रश्न 2.29.
नैलॉफ़न (C19H21NO3) जो कि मॉर्फीन जैसी होती है, का उपयोग स्वापक उपभोक्ताओं (narcotic users) द्वारा स्वापक छोड़ने से उत्पन्न लक्षणों को दूर करने में किया जाता है। सामान्यतया नैलॉफ़न की 1.5 mg खुराक दी जाती है। उपर्युक्त खुराक के लिए 1.5 × 10-3 m जलीय विलयन का कितना द्रव्यमान आवश्यक होगा?
उत्तर:
मोललता (m)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 34
विलेय का भार = 1.5 mg =1.5 × 10-3(g)
विलेय (C19H21NO3) का मोलर द्रव्यमान
=(12×19)+(1×21) +14+ (3×16) =228 +21+14 + 48 =311
m = 1.5 × 10-3, विलायक का द्रव्यमान = ?
मान रखने पर,
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 35
विलायक का द्रव्यमान = 3.215 g
विलयन का द्रव्यमान = 3.215(g) + 1.5 × 10-3 (g)
= 3.215 + 0.0015
= 3.2165 = 3.217(g)

प्रश्न 2.30.
बेन्जोइक अम्ल का मेथेनॉल में 250 mL, 0.15 M विलयन बनाने के लिए आवश्यक मात्रा की गणना कीजिए।
उत्तर:
मोलरता (M) = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 36
विलेय का द्रव्यमान = ?
विलेय [बेन्जोइक अम्ल (C6H5COOH)] का मोलर द्रव्यमान
=(6 × 12) + 5 + 12 + 16 + 16 + 1 = 122
M = 0.15
अतः 1.15 = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 37
विलेय का द्रव्यमान = \(\frac{0.15 \times 250 \times 122}{1000}\)
विलेय का द्रव्यमान = 4.575 g

प्रश्न 2.31.
ऐसीटिक अम्ल, ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल एवं ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल की समान मात्रा से जल के हिमांक में अवनमन इनके उपर्युक्त दिए गए क्रम में बढ़ता है। संक्षेप में समझाइए |
उत्तर:
हिमांक अवनमन कणसंख्यक अणुसंख्यक गुण है अर्थात् कणों की संख्या बढ़ने पर हिमांक अवनमन भी बढ़ेगा।

ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH), ट्राइक्लो रो ऐसीटिक अम्ल (CCl3COOH) एवं ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल (CF3COOH) का यह क्रम अम्लीय गुण का बढ़ता क्रम है अर्थात् वियोजन का भी बढ़ता क्रम है अतः कणों की संख्या बढ़ेगी। इसलिए उपर्युक्त क्रम ही हिमांक में अवनमन का बढ़ता क्रम है।

प्रश्न 2.32.
CH3 – CH2 – CHCl – COOH के 10g को 250 g जल में मिलाने से होने वाले हिमांक का अवनमन परिकलित कीजिए। ( Ka = 1.4 × 10-3, Kf = 1.86K kg mol-1 तथा विलयन का घनत्व = 0.904g mL-1 )
उत्तर:
विलयन की मोलरता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 38
विलयन का द्रव्यमान = 250 + 10 = 260 g

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 39
(V) = 287.6 mL
CH3 – CH2 – CHCl – COOH (C4H7O2Cl) का मोलर
द्रव्यमान = 36 +7 32 + 35.5 = 122.5
∴ M = \(\frac{10 \times 1000}{122.5 \times 287.6 \mathrm{~mL}}\)
M = 0.2838 = 0.284mol L-1
वान्ट हॉफ गुणांक (i) ज्ञात करना-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 40

प्रश्न 2.33.
CH2FCOOH के 19.5 g को 500g H2O में घोलने पर जल के हिमांक में 1.0°C का अवनमन देखा गया। फ्लुओरोऐसीटिक अम्ल का वान्ट हॉफ गुणक तथा वियोजन स्थिरांक परिकलित कीजिए, यदि Kf = 1.86 K kg mol-1 तथा विलयन का घनत्व = 1.124 g mL-1
उत्तर:
(i) विलयन की मोललता = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 41
विलेय का भार = 19.5g
CH2FCOOH का मोलर द्रव्यमान = 12 + 2 + 19 + 12 + 16 + 16 + 1 = 78
विलायक का द्रव्यमान = 500 g
अतः m = \(\frac{19.5 \times 1000}{78 \times 500}\) = 0.5
हिमांक अवनमन △Tf = 1.0°

(ii) △Tf = i × Kf × m
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 42
वान्ट हॉफ गुणक (i) = 1.0753

(iii) अम्ल की वियोजन की मात्रा α = \(\frac{i-1}{n-1}\)
α = \(\frac{1.0753 – 1}{2 – 1}\) = 0.0753

(iv) वियोजन की मात्रा (α) = \(\sqrt{\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{C}}}\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 43

प्रश्न 2.34.
293 K पर जल का वाष्प दाब 17.535 mm Hg है। यदि 25 g ग्लूकोस को 450 g जल में घोलें तो 293 K पर जल का वाष्प दाब परिकलित कीजिए।
उत्तर:
जल का वाष्प दाब p10 = 17.535mm Hg
माना विलयन का वाष्प दाब = P1
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन = \(\frac{p_1^0-p_1}{p_1^0}\) = x2
n1 = विलायक (जल) के मोल = \(\frac{450}{18}\)
ग्लूकोस (C6H12O6) का मोलर द्रव्यमान = 180
n2 = विलेय के मोल = \(\frac{25}{180}\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 44

प्रश्न 2.35.
298K पर मेथेन की बेन्जीन में मोललता का हेनरी स्थिरांक 4.27 × 105 mm Hg है । 298K तथा 760 mm Hg दाब पर मेथेन की बेन्जीन में विलेयता परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया हुआ है KH = 4.27 × 105 mm Hg,
p = 760mm Hg
हेनरी के नियम के अनुसार p = KH.x
मेथेन की मोल भिन्न (x) = \(\frac{\mathrm{p}}{\mathrm{K}_{\mathrm{H}}}\)
x = \(\frac{760}{4.27 \times 10^5}\)
x = 177.9 × 10-5
x = 178 × 10-5
अतः मेथेन की बेन्जीन में विलेयता (मोल भिन्न के रूप में) = 178 × 10-5

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.36.
100g द्रव A (मोलर द्रव्यमान 140 gmol-1) को 1000 g द्रव B ( मोलर द्रव्यमान 180gmol- 1 ) में घोला गया। शुद्ध द्रव B का वाष्प दाब 500 Torr पाया गया। शुद्ध द्रव A का वाष्प दाब तथा विलयन में उसका वाष्प दाब परिकलित कीजिए यदि विलयन का कुल वाष्प दाब 475 Torr हो ।
उत्तर:
माना द्रव A का शुद्ध अवस्था में वाष्प दाब = PA0 तथा शुद्ध
अवस्था में द्रव B का वाष्प दाब PB0 = 500 Torr
द्रव A के मोल
(nA) = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 45 = \(\frac { 100 }{ 140 }\) = 0.714
द्रव B के मोल
(nB) = \(\frac { 1000 }{ 180 }\) = 5.55
द्रव A की मोल भिन्न
(xA) = \(\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{n}_{\mathrm{A}}+\mathrm{n}_{\mathrm{B}}}\)
xA = \(\frac{0.714}{0.714+5.55}\)
xA = \(\frac { 0.714 }{ 6.264 }\) = 0.1139 = 0.114

द्रव B की मोल भिन्न
(XB) = (1 − xA) = (1 − 0.114) = 0.886
डाल्टन के आंशिक दाब के नियम से
कुल दाब (p) = PA + PB
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 46

प्रश्न 2.37.
328 K पर शुद्ध ऐसीटोन एवं क्लोरोफॉर्म के वाष्प दाब क्रमशः 741.8 mm Hg तथा 632.8 mm Hg हैं। यह मानते हुए कि संघटन के सम्पूर्ण परास में ये आदर्श विलयन बनाते Pकुल’ Pक्लोरोफॉर्म, तथा Pऐसीटोन को X ऐसीटोन के फलन के रूप में
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 47
उपर्युक्त आंकड़ों को भी उसी ग्राफ में आलेखित कीजिए और इंगित कीजिए कि क्या इसमें आदर्श विलयन से धनात्मक अथवा ऋणात्मक विचलन है?
उत्तर:
दिए गए आंकड़ों से कुल दाब ज्ञात करके विभिन्न आंकड़ों के लिए प्राप्त सारणी निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 48
यहाँ कुल दाब (Pकुल) = Pऐसीटो + PCHCl3
इन आंकड़ों से xऐसीटोन के फलन के रूप में (x अक्ष पर), Pकुल, Pक्लोरोफॉर्म तथा Pऐसीटोन (y अक्ष पर) को आलेखित करने पर प्राप्त ग्राफ निम्नलिखित प्रकार का होता है। (ग्राफ बनाते समय, दोनों अक्षों के लिए भिन्न-भिन्न पैमाना माना जाता है)-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 49
ग्राफ से यह ज्ञात होता है कि सभी संघटनों पर विलयन का कुल दाब, आदर्श विलयन के वाष्प दाब से कम है अतः इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि विलयन ऋणात्मक विचलन दर्शाता है। जिसके लिए
ΔΗमिश्रण = -ve तथा △Vमिश्रण = -ve

प्रश्न 2.38.
संघटनों के सम्पूर्ण परास (Range) में बेन्जीन तथा टॉलूईन आदर्श विलयन बनाते हैं। 300 K पर शुद्ध बेन्जीन तथा टॉलूईन का वाष्प दाब क्रमश: 50.71 mm Hg तथा 32.06 mm Hg है। यदि 80g बेन्जीन को 100g टॉलूईन में मिलाया जाये तो वाष्प अवस्था में उपस्थित बेन्जीन के मोल-अंश परिकलित कीजिए ।
उत्तर:
माना वाष्प अवस्था में बेन्जीन का मोल अंश = Y2 तो
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 50
टॉलूईन (C7H8) का मोलर द्रव्यमान = 92
अतः टॉलूईन के मोल (n1) = \(\frac { 100 }{ 92 }\) = 1.086
विलयन में बेन्जीन का मोल अंश
x2 = \(\frac{n_2}{n_1+n_2}\) = \(\frac{1.025}{1.086+1.025}\)
x2 = \(\frac{1.025}{2.111}\) = 0.485
टॉलूईन का मोल अंश (x1) = 1 – x2
x1 = 1 – 0.485
x1 = 0.515
वाष्प अवस्था में बेन्जीन का मोल अंश
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 51
अतः वाष्प अवस्था में बेन्जीन का मोल अंश
(y2) = 0.60
तथा वाष्प अवस्था में टॉलूईन का मोल अंश
(y1) = 1 – y2 = 1 – 0.60 = 0.40

प्रश्न 2.39.
वायु अनेक गैसों की मिश्रण है। 298 K पर आयतन में मुख्य घटक ऑक्सीजन और नाइट्रोजन लगभग 20% एवं 79% के अनुपात में हैं। 10 वायुमंडल दाब पर जल वायु के साथ साम्य में है। 298 K पर यदि ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन के हेनरी स्थिरांक क्रमश: 3.30 × 107 mm तथा 6.51 × 107 mm है, तो जल में इन गैसों का संघटन ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
माना 1 मोल वायु का 10 वायुमण्डल दाब ( atm P) पर आयतन = V
वायु में 20% O2 (आयतन से) है,
अतः O2 का आयतन = \(\frac{V \times 20}{100}\) = 0.2V
N2 का वायु में प्रतिशत (आयतन से) = 79%
अतः N2 का आयतन = \(\frac{\mathrm{V} \times 79}{100}\) = 0.79V
किसी गैस का आंशिक दाब = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 52 × कुल दाब
O2 का आंशिक दाब, PO2 = \(\frac{0.2 \mathrm{~V}}{\mathrm{~V}}\) × 10 = 2atm
N2 का आंशिक दाब, PN2 = \(\frac{0.79 \mathrm{~V}}{\mathrm{~V}}\) × 10 = 7.9atm
अतः विलयन में O2 की विलेयता (मोल अंश के रूप में)
हेनरी के नियम से :
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 53
अतः जल में O2 की विलेयता ( मोल भिन्न) = 4.606 × 10-5
तथा N2 की विलेयता (मोल भिन्न) = 9.22 × 10-5

प्रश्न 2.40.
यदि जल का परासरण दाब 27° C पर 0.75 वायुमण्डल हो तो 2.5 लीटर जल में घुले CaCl2 (i= 2.47 ) की मात्रा परिकलित कीजिए।
उत्तर:
परासरण दाब (Π) = iCRT
Π = 0.75atm. i = 2.47
C=?, R = 0.0821 L atm mol-1 K-1
T = 27°C = 27°C + 273.15 = 300.15K
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 54
विलेय के मोल = मोलरता (सान्द्रता ) × आयतन (L)
= 0.0123 × 2.5L = 0.030
अतः 2.5 लीटर जल में घुले CaCl2 की मात्रा = 0.030 मोल

प्रश्न 2.41.
2 लीटर जल में 25°C पर K2SO4 के 25 mg, को घोलने पर बनने वाले विलयन का परासरण दाब, यह मानते हुए ज्ञात कीजिए कि K2SO4 पूर्णतः वियोजित हो गया है।
उत्तर:
K2SO4 का पूर्ण वियोजन माना गया है अतः
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 55
अतः आयनन से प्राप्त आयनों की संख्या (i) = 3
परासरण दाब (π) = iCRT
R = 0.0821 L atm mol-1 K-1
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 56

HBSE 12th Class Chemistry विलयन Intext Questions

प्रश्न 2.1.
यदि 22 g बेन्जीन 122g कार्बनटेट्राक्लोराइड में घुली हो तो बेन्जीन एवं कार्बन टेट्राक्लोराइड के द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
उत्तर:
किसी अवयव का द्रव्यमान
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 57
विलयन में बेन्जीन का द्रव्यमान = 22 g
कार्बन टेट्राक्लोराइड का द्रव्यमान = 122 g
(i) अतः बेन्जीन का द्रव्यमान प्रतिशत = \(\frac { 22 }{ 122+22 }\) x 100
= \(\frac { 22 }{ 144 }\) × 100
= 15.277%
= 15.28%

(ii) कार्बनटेट्राक्लोराइड का द्रव्यमान प्रतिशत = \(\frac { 122 }{ 144 }\) x 100
= 84.72%
अतः बेन्जीन का द्रव्यमान %= 15.28% तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड का द्रव्यमान % = 84.72% है।

प्रश्न 2.2.
एक विलयन में बेन्जीन का 30% द्रव्यमान कार्बन टेट्राक्लोराइड में घुला हुआ हो तो बेन्जीन के मोल- अंश की गणना कीजिए।
उत्तर:
विलयन में किसी अवयव का मोल अंश (Mole fraction) (x)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 58
बेन्जीन का 30% द्रव्यमान कार्बन टेट्राक्लोराइड में घुला हुआ है। जिसका अर्थ है कि 30 g बेन्जीन (C6H6), 70g कार्बनटेट्राक्लोराइड (CC14) में घुली हुई है।
किसी पदार्थ के मोलों की संख्या
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 59
(i) C6H6 का मोलर द्रव्यमान
= 78gmol-1 (C = 12,H = 1)
CCl4 का मोलर द्रव्यमान
= 154 g mol<sup<-1 (Cl = 35.5)
C6H6 के मोल (nb = \(\frac { 30 }{ 78 }\) = 0.3846 mol
C4H4 के मोल (nc = \(\frac { 70 }{ 154 }\) = 0.4545 mol
कुल मोल = nb + nc = 0.3846 + 0.4545 = 0.8391

(ii) बेन्जीन का मोल अंश (xb) = \(\frac{n_b}{n_b+n_c}\)
xb = \(\frac{0.3846}{0.8391}\) = 0.459
कार्बनटेट्राक्लोराइड का मोल अंश
(xc) = \(\frac{0.4545}{0.8391}\)
= 0.54165
= 0.541
अतः C6H6 का मोल अंश = 0.459
CCl4 का मोल अंश = 0.541

प्रश्न 2.3.
निम्नलिखित प्रत्येक विलयन की मोलरता की गणना कीजिए-
(क) 30 g, Co (NO3)2.6H2O 4.3 लीटर विलयन में घुला हुआ हो
(ख) 30mL 0.5M H2SO4 को 500 ml तक तनु करने पर।
उत्तर:
(क) किसी विलयन की मोलरता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 60
Co(NO3)2.6H2O का द्रव्यमान 30 g
तथा इसका मोलर द्रव्यमान = 297 g mol-1 होता है।
अतः Co(NO3)2.6H2O के मोल = \(\frac{30 \mathrm{~g}}{297 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}\)
विलयन का आयतन = 4.3 लीटर
अतः Co(NO3)2.6H2O की मोलरत
(M) = \(\frac{30 \mathrm{~g}}{297 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1} \times 4.3 \mathrm{~L}}\)
M = 0.02349 = 0.0235 = 0.024
अतः विलयन की मोलरता = 0.024 M.

(ख) किसी विलयन को तनु करने पर उसकी परिणामी मोलरता निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात कर सकते हैं-
M1V1 = M2V2
30ml 0.5 H2SO को 500ml तक त किया गया है अतः
M1 = 0.5. V1 = 30ml, V2 = 500mL, M2 = ?
\(\frac{\mathrm{M}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{~V}_2}=\frac{0.5 \times 30}{500}\) = 0.03
अतः H2SO4 के विलयन की परिणामी मोलरता 0.03M

प्रश्न 2.4
यूरिया (NH2CONH2) के 0.25 मोलर, 2.5 kg जलीय विलयन को बनाने के लिए आवश्यक यूरिया के द्रव्यमान की गणना कीजिए।
उत्तर:
जल का घनत्व \(\simeq\) 1 g cm-3
अतः 2.5 kg जलीय विलयन = 2500 g विलयन
= 2500 mL विलयन = 2.5 L विलयन
चूंकि विलयन अति है (0.25) अतः विलयन का घनत्व, जल के घनत्व के समान मान सकते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 60a

प्रश्न 2.5.
20% ( w / w ) जलीय KI का घनत्व 1202 gm-1 हो तो KI विलयन की (क) मोललता, (ख) मोलरता, (ग) मोल अंश की गणना कीजिए।
उत्तर:
(क) विलयन की मोललता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 61
20% w/w जलीय KI विलयन का अर्थ है कि 20 g KI, 80 g जल में विलेय है
KI का मोलर द्रव्यमान = 39 + 127 = 166
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 62
20% w/w जलीय KI विलयन का अर्थ है कि 20 g KI, 80 g जल में विलेय है
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 63

प्रश्न 2.6.
सड़े हुए अंडे जैसी गंध वाली विषैली गैस H2 गुणात्मक विश्लेषण में उपयोग की जाती है। यदि H2S गैस की जल में STP पर विलेयता 0.195 M हो तो हेनरी स्थिरांक की गणना कीजिए।
उत्तर:
हेनरी के नियमानुसार p = KH.x
KH = हेनरी स्थिरांक
p = दाब = 1bar (STP)
x = विलेय की मोल भिन्न
H2S के मोल = 0.195M
तथा जल का मोल = 55.5 होता है।
अतः
xH2s = \(\frac{0.195}{0.195+55.5}\)
= \(\frac{0.195}{55.695}\) = 0.0035 = 3.5 x 10-3
हेनरी स्थिरांक KH = \(\frac { P }{ x }\)
= \(\frac{1 \text { bar }}{3.5 \times 10^{-3}}\) = 285.7 bar
अतः H2S के लिए हेनरी स्थिरांक (KH) = 285.7 bar

प्रश्न 2.7.
298K पर CO2 गैस की जल में विलेयता के लिए हेनरी स्थिरांक का मान 1.67 x 108 Pa है। 500mL सोडा जल 2.5 atm दाब पर बंद किया गया। 298K ताप पर घुली हुई CO2 की मात्रा की गणना कीजिए।
उत्तर:
हेनरी के नियम के अनुसार
X = \(\frac{\mathrm{p}}{\mathrm{K}_{\mathrm{H}}}\)
p = 2.5 atm, KH = 1.67 × 108 Pa
CO2 की मोल भिन्न (x) = \(\frac{2.5 \mathrm{~atm}}{1.67 \times 10^8 \mathrm{~Pa}}\)
चूंकि 1 atm = 101325 Pa
अतः XCO2 = \(\frac{2.5 \times 101325 \mathrm{~Pa}}{1.67 \times 10^8 \mathrm{~Pa}}\)
= 1.516 x 10-3
XCO2= 1.516 x 10-3
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 65
हेनरी का नियम अति तनु विलयन पर ही लागू होता है अतः nCO2 << nH2O
इस प्रकार
XCO2 = \(\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{CO}_2}}{\mathrm{n}_{\mathrm{H}_2 \mathrm{O}}}\)
चूंकि जल का मोल = 55.5 होता है
तथा XCO2 = 1.516 × 10-3
1.516 × 10-3 = \(\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{CO}_2}}{55.5}\)
nCO2 = 1.516 x 10-3 x 55.5
= 84.13 x 10-3 L-1
चूंकि विलयन का आयतन = 500mL
अतः CO2 के 500mL विलयन (0.5L) में उपस्थित मोल = \(\frac{84.13 \times 10^{-3}}{2}\)
= 42.06 x 10-3
CO2 का द्रव्यमान = मोल x मोलर द्रव्यमान
CO2 का मोलर द्रव्यमान 12 + (2 x 16) = 44
अतः CO2 का द्रव्यमान = 42.06 x 10-3 x 44
CO2 का द्रव्यमान = 1.85 g

प्रश्न 2.8.
350 K पर शुद्ध द्रवों A एवं B के वाष्पदाब क्रमश: 450 एवं 750mm Hg हैं। यदि कुल वाष्पदाब 600 mm Hg हो तो द्रव मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए। साथ ही वाष्प प्रावस्था का संघटन भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
मिश्रण का कुल वाष्प दाब = Pकुल = PA + PB
PA = xAA, PB = xBB
अतः Pकुल = xAA + xBB
Pकुल = 600mm Hg, p°A = 450mm Hg
तथा p°B = 750 mm Hg.
अतः Pकुल= 450xA + 700xB (xB =1 – xA)
600 = 450xA + 700 (1 – xA)
600 = 450xA + 700 – 700xA
200xA= 100
xA = \(\frac { 100 }{ 250 }\) = 0.4
xA + xB = 1
अतः xB = 1 – 0.4 = 0.6
अतः द्रव मिश्रण का संघटन = xA = 0.4, xB = 0.6
वाष्प अवस्था में
PA = yAPकुल
yA = \(\frac{\mathrm{p}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{y}_{\text {कुल }}}=\frac{\mathrm{x}_{\mathrm{A}} \mathrm{p}_{\mathrm{A}}^{\mathrm{o}}}{\mathrm{p}_{\text {कुल }}}=\frac{450 \times 0.4}{600}\)
yA = 0.3
yB = 1 – yA = 1 – 0.3 = 0.7
अतः वाष्प अवस्था में मिश्रण का संघटन
= YA = 0.3, yB = 0.7

प्रश्न 2.9.
298 K पर शुद्ध जल का वाष्पदाब 23.8 mm H है। 850g जल में 50g यूरिया (NH2CONH2) घोला जाता है। इस विलयन के लिए जल के वाष्पदाब एवं इसके आपेक्षिक अवनमन का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन विलेय की मोल अंश के बराबर होता है।
\(\frac{\mathrm{p}_1^0-\mathrm{p}_1}{\mathrm{p}_1^0}=\frac{\mathrm{n}_2}{\mathrm{n}_1+\mathrm{n}_2}\)
n2 = विलेय के मोल
= \(\frac { 50g }{ 60 }\)(यूरिया का मोलर द्रव्यमान = 60)
n1 = विलायक के मोल = \(\frac { 850 g }{ 18 }\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 66
शुद्ध जल का वाष्प दाब p°1 = 23.8mm Hg
अतः p1 = 23.8 x 0.983 = 23.39mm Hg
अतः
इस विलयन के लिए जल का वाष्प दाब
= 23.39 mm Hg
= 23.4 mm Hg
तथा वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन = 0.017

प्रश्न 2.10
750 mm Hg दाब पर जल का क्वथनांक 99.63°C है। 500 g जल में कितना सुक्रोस मिलाया जाए कि इसका 100° C पर क्वथन हो जाए।
उत्तर:
क्वथनांक उन्नयन ∆Tb = 100 – 99.63 = 0.37°
क्वथनांक उन्नयन ∆Tb = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{b}} \times 1000 \times \mathrm{w}_2}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
Kb = क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक ( मोलल उन्नयन स्थिरांक)
= 0.52 kg mol-1
M2 = विलेय का मोलर द्रव्यमान = 342 (सुक्रोस) C12H22O11
w2 = विलेय का भार = ?
w1 = विलायक का भार = 5000 g
∆Tb = 0.37 = \(\frac{0.52 \times 1000 \times \mathrm{w}_2}{342 \times 500}\)
w2 = \(\frac{0.37 \times 342 \times 500}{0.52 \times 1000}\)
w2 = 121.67 g
अतः 121.67g सुक्रोस मिलाना पड़ेगा।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.11.
ऐस्कार्बिक अम्ल (विटामिन C, C6H8O6) के उस द्रव्यमान का परिकलन कीजिए, जिसे 75g ऐसीटिक अम्ल में घोलने पर उसके हिमांक में 1.5°C की कमी हो जाए। Kf = 3.9 K kg mol-1
उत्तर:
हिमांक अवनमन, ∆Tf = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 100}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
∆Tf = 1.5°C, Kf = 3.9 K kg mol-1 w2 = ?
w1 = 75g, M2 = 176 (C6H8O6)
1.5 = \(\frac{3.9 \times w_2 \times 1000}{176 \times 75}\)
w2 = \(\frac{1.5 \times 176 \times 75}{3.9 \times 1000}\)
w2 = 5.0769 g
अतः ऐस्कॉर्बिक अम्ल का द्रव्यमान 5.077g

प्रश्न 2.12.
185,000 मोलर द्रव्यमान वाले एक बहुलक के 1.0 g को 37°C पर 450 mL जल में घोलने से उत्पन्न विलयन के परासरण दाब का पास्कल में परिकलन कीजिए।
उत्तर:
परासरण दाब II = CRT
II = \(\frac{\mathbf{n}_2}{\mathrm{~V}}\)RT
II = परासरण दाब
n2 = पदार्थ के मोल = 1.0 g/185000
R = 0.083 L bar mol-1K-1
T = 37°C + 273.15 = 310.15
V = 450mL = 0.45L
परासरण दाब (II) = \(\frac{1.0 \times 0.083 \times 310.15}{0.450 \times 185,000}\) = 3.09 x 10-4
= 3.09 × 10-4 x 101325 Pa
= 31.309 Pa

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

1. एक वस्तु को ऋणावेशित किया जा सकता है-
(अ) इसे अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन देकर
(ब) इसमें से कुछ इलेक्ट्रॉन निकालकर
(स) इसे कुछ प्रोटॉन देकर
(द) इसमें से कुछ न्यूट्रॉन निकालकर
उत्तर:
(अ) इसे अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन देकर

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

2. साबुन के बुलबुले को ऋणावेशित करने पर उसकी त्रिज्या-
(अ) घट जायेगी
(ब) बढ़ जायेगी
(स) अपरिवर्तित रहेगी
(द) प्रारम्भ में घटेगी फिर बढ़ेगी और बुलबुला फूट जायेगा
उत्तर:
(ब) बढ़ जायेगी

3. एक चालक गोले पर 50e आवेश है तथा दूसरे समान गोले पर + 20e आवेश है। यदि दोनों गोलों को स्पर्श करवाकर अलग कर दिया जाये, तो प्रत्येक पर आवेश होगा-
(अ) – 15e
(स) 10e
(ब) + 15e
(द) 25e
उत्तर:
(अ) – 15e

4. यदि काँच की छड़ को सिल्क से रगड़ते हैं, तो यह धनावेश उत्पन्न करती है, क्योंकि-
(अ) प्रोटॉन इससे जुड़े होते हैं।
(ब) प्रोटॉन इससे अलग हो जाते हैं।
(स) इलेक्ट्रॉन इससे जुड़े रहते हैं।
(द) इलेक्ट्रॉन इससे अलग हो जाते हैं।
उत्तर:
(द) इलेक्ट्रॉन इससे अलग हो जाते हैं।

5. विजातीय आवेशों के
(अ) गुरुत्वीय बल
(ब) चुम्बकीय बल
(स) नाभिकीय आकर्षण
(द) कूलॉम का आकर्षण
उत्तर:
(द) कूलॉम का आकर्षण

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

6. एक कूलॉम आवेश में कितने
(अ) 5.46 × 1029
(ब) 6.25 × 1018
(स) 1.6 × 1019
(द) 9 × 1011
उत्तर:
(ब) 6.25 × 1018

7. स्थिर विद्युतिकी से सम्बन्धित निम्न में से कौनसा कथन यथार्थ नहीं होता है–
(अ) आवेश संरक्षित होता है
(ब) आवेश क्वान्टीकृत होता है
(स) बल रेखा क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती है।
(द) घर्षण से इलेक्ट्रॉन का उत्पादन होता है
उत्तर:
(द) घर्षण से इलेक्ट्रॉन का उत्पादन होता है

8. विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक है-
(अ) वोल्ट मीटर
(ब) न्यूटन प्रति कूलॉम
(स) न्यूटन कूलॉम
(द) न्यूटन प्रति वोल्ट
उत्तर:
(ब) न्यूटन प्रति कूलॉम

9. आवेशित करने की परोक्ष विधि है-
(अ) प्रेरण द्वारा आवेशित करना
(ब) भौतिक सम्पर्क से आवेशित करना
(स) घर्षण द्वारा आवेशित करना
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) प्रेरण द्वारा आवेशित करना

10. दो इलेक्ट्रॉनों के वैद्युत बलों की तुलना में दो प्रोटॉनों के बीच
(अ) अधिक
(ब) कम
(स) शून्य
(द) वही है
उत्तर:
(द) वही है

11. आवेशों के मध्य बल F है। यदि उनके मध्य दूरी को तीन गुणा करने पर इन आवेशों के मध्य विद्युत बल होगा-
(अ) F
(ब) [/latex]\frac{1}{3}[/latex] F
(स) \(\frac{1}{9}\) F
(द) \(\frac{1}{27}\) F
उत्तर:
(स) \(\frac{1}{9}\) F

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

12. निर्वात में रखे बिन्दुवत् आवेशों के मध्य बल 18 न्यूटन है। 6 परावैद्युतांक की एक काँच की पट्टिका इन आवेशों के मध्य रख दी जाये तो बल का मान होगा-
(अ) 108 न्यूटन
(ब) 18 न्यूटन
(स) 3 न्यूटन
(द) शून्य
उत्तर:
(स) 3 न्यूटन

13. दो आवेश + 2μC व + 8μC के एक मीटर दूरी पर स्थित हैं। उनको मिलाने वाली रेखा पर 2μC आवेश से कितनी दूरी पर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा?
(अ) \(\frac{1}{8}\) मीटर
(ब) \(\frac{1}{4}\) मीटर
(स) \(\frac{1}{3}\) मीटर
(द) \(\frac{1}{2}\) मीटर
उत्तर:
(स) \(\frac{1}{3}\) मीटर

14. R1 व R2 त्रिज्या के दो आवेशित गोलों को एक तार द्वारा जोड़ा जाता है। गोलों के विद्युत क्षेत्रों का अनुपात है-
(अ) \(\mathrm{R}_2^2 / \mathrm{R}_1^2\)
(ब) \(\mathrm{R}_1^2 / \mathrm{R}_2^2\)
(स) \(\mathrm{R}_2 / \mathrm{R}_1\)
(द) \(\mathrm{R}_1 / \mathrm{R}_2\)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{R}_2 / \mathrm{R}_1\)

15. किसी वर्ग के एक विकर्ण के दोनों कोनों पर + 10 कूलॉम आवेश वाले व अन्य दोनों कोनों पर तो वर्ग के केन्द्र पर-
(अ) E = 0, V = 0
(ब) E = 0, किन्तु V ≠ 0
(स) E ≠ 0, V ≠ 0
(द) E ≠ 0, V = 0
उत्तर:
(अ) E = 0, V = 0

16. विद्युत द्विध्रुव के कारण किसी बिन्दु पर उत्पन्न क्षेत्र की तीव्रता का मान अनुक्रमानुपाती है-
(अ) r2
(ब) r-2
(स) r-3
(द) r3
उत्तर:
(स) r-3

17. द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक है-
(अ) वोल्ट
(ब) जूल
(स) कूलॉम / मीटर
(द) कूलॉम – मीटर
उत्तर:
(द) कूलॉम – मीटर

18. विद्युत द्विध्रुव के कारण बल आघूर्ण का सूत्र है-
(अ) \(\vec{\tau}=\overrightarrow{\mathrm{p}} \times \overrightarrow{\mathrm{E}}\)
(ब) \(\vec{\tau}=\overrightarrow{\mathrm{E}} \times \overrightarrow{\mathrm{p}}\)
(स) \(\vec{\tau}=\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \overrightarrow{\mathrm{p}} \times \overrightarrow{\mathrm{E}}\)
(द) \(\vec{\tau}=\vec{p} \cdot \vec{E}\)
उत्तर:
(अ) \(\vec{\tau}=\overrightarrow{\mathrm{p}} \times \overrightarrow{\mathrm{E}}\)

19. HCI अणु में H तथा CI के बीच की दूरी 1.28 A° है तो इस अणु के विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण का मान होगा – ( कूलॉम – मीटर में)
(अ) 1.6 × 10-29
(ब) 1.28 × 10-29
(स) 2.05 × 10-19
(द) 2.05 × 10-29
उत्तर:
(द) 2.05 × 10-29

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

20. एक विद्युत द्विध्रुव को किसी विद्युत क्षेत्र में रखा गया है तो उस पर लगने वाले बल आघूर्ण का मान होगा-
(अ) PE cos θ
(ब) PE sine θ
(स) pE (1 – cos θ)
(द) शून्य
उत्तर:
(ब) PE sine θ

21. एकसमान विद्युत क्षेत्र में रखा हुआ विद्युत द्विध्रुव अनुभव करता है-
(अ) केवल आघूर्ण
(ब) केवल एक बल
(स) बल व आघूर्ण
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) केवल आघूर्ण

22. यदि एक बन्द घन के अन्दर ±q आवेशों वाले दो द्विध्रुव एक-दूसरे के लम्बवत् रखे हों तो घन से निर्गत कुल विद्युत फ्लक्स होगी-
(अ) \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
(ब) \(\frac{2 \mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
(स) \(\frac{\dot{4 q}}{\epsilon_0}\)
(द) शून्य
उत्तर:
(द) शून्य

23. गाउस का नियम किन क्षेत्रों के लिए यथार्थ होता है-
(अ) एकसमान क्षेत्रों के लिए
(ब) सभी क्षेत्रों के लिए
(स) व्युत्क्रम वर्ग के नियम का पालन करने वाले क्षेत्रों के लिए
(द) नियम का क्षेत्र से कोई सम्बन्ध नहीं होता है।
उत्तर:
(स) व्युत्क्रम वर्ग के नियम का पालन करने वाले क्षेत्रों के लिए

24. एक द्विध्रुव के कारण उसकी अक्षीय रेखा पर r दूरी पर क्षेत्र एवं उसके लम्ब अर्धक (निरक्षीय रेखा) पर r दूरी पर क्षेत्र की निष्पत्ति होगी-
(अ) 4 : 1
(ब) 1 : 4
(स) 2 : 1
(द) 1 : 2
उत्तर:
(स) 2 : 1

25. परावैद्युत माध्यम (∈r) में गाउस का नियम होता है-
(अ) \(\oint \epsilon_{\mathrm{r}} \mathrm{E} \cdot \mathrm{ds}=\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
(ब) \(\oint \mathrm{E} \cdot \mathrm{ds}=\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
(स) \(\oint \frac{E . d s}{\epsilon_r}=\frac{q}{\epsilon_0}\)
(द) \(\oint \mathrm{E} \cdot \mathrm{ds}=0\)
उत्तर:
(अ) \(\oint \epsilon_{\mathrm{r}} \mathrm{E} \cdot \mathrm{ds}=\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)

26. यदि आवेश Q घन के केन्द्र पर स्थित है, तो धन की एक फलक से निकलने वाला विद्युत फ्लक्स होगा-
(अ) \(\frac{\mathrm{Q}}{\epsilon_0}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{Q}}{2 \epsilon_0}\)
(स) \(\frac{\mathrm{Q}}{4 \epsilon_0}\)
(द) \(\frac{Q}{6 \epsilon_0}\)
उत्तर:
(द) \(\frac{Q}{6 \epsilon_0}\)

27. एक आवेशित चालक गोला विद्युत क्षेत्र उत्पन्न नहीं करता-
(अ) किसी आन्तरिक बिन्दु पर
(ब) किसी बाहरी बिन्दु पर
(स) 2 मीटर से अधिक दूरी पर
(द) 10 मीटर से अधिक दूरी पर
उत्तर:
(अ) किसी आन्तरिक बिन्दु पर

28. एक बन्द करने वाले पृष्ठ के अन्दर आवेश की स्थिति इस प्रकार से बदली जाती है कि कुल आवेश स्थिर रहता है, बन्द पृष्ठ से विद्युत पलक्स का अभिवाह-
(अ) बढ़ता है
(ब) कम होता है।
(स) अव्यवस्थित रूप से बदलता है।
(द) अपरिवर्तित रहता है
उत्तर:
(द) अपरिवर्तित रहता है

29. एक विद्युत द्विध्रुव को असमान विद्युत क्षेत्र में रखा जाये तो-
(अ) उस पर केवल बल आघूर्ण लगेगा।
(ब) उस पर कोई बल आघूर्ण नहीं लगेगा।
(स) उस पर परिणामी बल व बल आघूर्ण लगेगा।
(द) उस पर सिर्फ एक बल लगेगा।
उत्तर:
(स) उस पर परिणामी बल व बल आघूर्ण लगेगा।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
किसी वस्तु के धनात्मक एवं ऋणात्मक आवेशित होने का क्या अर्थ है?
उत्तर:
सामान्य अवस्था की तुलना में किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉन की कमी उसके धनावेशित होने को तथा इलेक्ट्रॉन की अधिकता उसके ऋणावेशित होने को प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 2.
सिल्क से रगड़ी गई काँच की छड़ पर आवेश किस तरह का होता है और फर से रगड़ी गई रबड़ की छड़ पर आवेश किस तरह का होता है?
उत्तर:
क्रमशः धनात्मक आवेश एवं ऋणात्मक आवेश ।

प्रश्न 3.
q1 और q2 इस प्रकार के बिन्दु आवेश हैं कि q1 × q2 > 0 दोनों आवेशों के बीच बल की क्या प्रकृति है ?
उत्तर:
यहाँ पर q1 q2 > 0 है। इसका तात्पर्य है कि q1 > 0 और q2 > 0 या फिर q1, 92 < 0 जब दोनों 91 और 92 2 धनात्मक हों अथवा ऋणात्मक हों। इस प्रकार 91 एवं 92 के बीच बल प्रतिकर्षण का होगा।

प्रश्न 4.
q1 + q2 = 0 स्थिर वैद्युतिकी में क्या दर्शाता है?
उत्तर:
q1 + q2 = 0 ⇒ q1 = – q2 अर्थात् q1 तथा q2 परस्पर परिणाम में बराबर तथा प्रकृति में विपरीत हैं। स्थिर वैद्युतिकी में यह वास्तव में आवेश संरक्षण को दर्शाता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 5.
विद्युत आवेश का संरक्षण नियम लिखो ।
उत्तर:
किसी भी विलगित निकाय में आवेशों का कुल बीजीय योग अपरिवर्तित रहता है। गणितीय रूप में q = q+ q = नियत अर्थात् आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। बल्कि उन्हें एक वस्तु से दूसरी वस्तु में स्थानान्तरित किया जा सकता है।

प्रश्न 6. आवेश संरक्षण नियम कौन-कौनसी क्रियाओं में होता है?
उत्तर:
(i) नाभिकीय अभिक्रियाओं में
(ii) युग्म उत्पादन प्रक्रिया में
(iii) घर्षण प्रक्रिया में।

प्रश्न 7.
आवेश का क्वांटीकरण क्या है?
उत्तर:
किसी भी आवेशित वस्तु पर आवेश की उत्पत्ति का कारण चाहे कुछ भी क्यों न हो, आवेश सदैव इलेक्ट्रॉन के आवेश का पूर्ण गुणक होता है, अंश गुणक नहीं होता है। गणितीय रूप q = ±ne जहाँ पर n = पूर्ण गुणक संख्या अर्थात् n = 0, 1, 2, 3 ….

प्रश्न 8.
एक स्थिर आवेश कौन-कौनसे बल क्षेत्र उत्पन्न करता है? यदि आवेश एकसमान वेग से गतिमान हो तब ?
उत्तर:
स्थिर आवेश केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। एकसमान वेग से गतिमान आवेश विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों उत्पन्न करता है।

प्रश्न 9.
आवेशन का कारण क्या है?
उत्तर:
एक वस्तु से दूसरी वस्तु पर इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण ।

प्रश्न 10.
वैद्युत आवेश का न्यूनतम सम्भव मान क्या है ?
उत्तर:
e = (±) 1.6 × 10-19 कूलॉम

प्रश्न 11.
वैद्युत आवेश के SI मात्रक (कूलॉम) की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
एक कूलॉम आवेश वह आवेश है जो अपने समान आवेश को वायु या निर्वात् में अपने से 1 मीटर की दूरी पर रखने पर उसे 9 × 109 न्यूटन बल से प्रतिकर्षित करे।

प्रश्न 12.
क्या एक आवेशित पिण्ड समीपवर्ती अनावेशित पिण्ड को आकर्षित करेगा?
उत्तर;
हाँ, आवेशित पिण्ड प्रेरण द्वारा अनावेशित पिण्ड के समीपवर्ती पृष्ठ पर विपरीत प्रकृति तथा दूरस्थ पृष्ठ पर समान प्रकृति का आवेश उत्पन्न करता है जिससे इसके बीच नेट आकर्षण बल लगने लगता है।

प्रश्न 13.
एक कूलॉम आवेश कितने इलेक्ट्रॉनों के बराबर होता है।
उत्तर:
n = \(\frac{\mathrm{q}}{\mathrm{e}}=\frac{1}{1.6 \times 10^{-19}}\) = 6.25 × 10-18

प्रश्न 14.
निर्वात या वायु में कूलॉम के नियम का सूत्र लिखो ।
उत्तर:
\(\overrightarrow{F_{12}}=\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{\mathrm{q}_1 \mathrm{q}_2}{\mathrm{r}_{12}^2} \mathrm{r}_{12}^{\wedge}\)
जहाँ पर \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\) = 9 × 109

प्रश्न 15.
कूलॉम का नियम लिखो ।
उत्तर:
दो बिन्दु आवेशों के मध्य आकर्षण या प्रतिकर्षण बल (F) आवेशों के परिमाण q1 तथा q2 के गुणनफल के समानुपाती होता है, तथा आवेशों के मध्य दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती \(\left(1 / r^2\right)\) होता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 1

प्रश्न 16.
दो बिन्दु आवेशों के मध्य बल किस प्रकार परिवर्तित होगा ? यदि उन्हें जिस माध्यम में रखा जाता है उसका परावैद्युतांक बढ़ जाए?
उत्तर:
यदि किसी एक माध्यम का परावैद्युतांक बढ़ता है, तो बिन्दु आवेशों के बीच में बल घट जाएगा।

प्रश्न 17.
दो वैद्युत आवेश q1 तथा q2 इस प्रकार के आवेश हैं कि (i) q1q2 > 0, (ii) q1q2 < 0 तो उनके बीच वैद्युत बल की प्रकृति क्या होगी?
उत्तर:

  1. प्रतिकर्षणात्मक (चूँकि इस दशा में दोनों आवेश समान प्रकृति के होंगे)
  2. आकर्षणात्मक (चूँकि इस दशा में दोनों आवेश विपरीत प्रकृति के होंगे)।

प्रश्न 18.
किसी माध्यम में दो वैद्युत आवेशों के बीच वैद्युत बल F है उनके बीच की दूरी d है इनको परस्पर कितनी दूरी पर रखा जाये ताकि वैद्युत बल (i) 3F (ii) \(\frac{F}{4}\) हो जाये?
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 2

प्रश्न 19.
किसी माध्यम के परावैद्युतांक की परिभाषा दीजिए। उत्तर – किसी माध्यम की निरपेक्ष विद्युतशीलता तथा वायु या निर्वात की विद्युतशीलता का अनुपात माध्यम का परावैद्युतांक (सापेक्ष विद्युतशीलता) कहलाता है।
अतः ∈ = \(\frac{\epsilon}{\epsilon_0}\) या ∈ = ∈0r है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 20.
समान आवेश से युक्त दो बिन्दु आवेश परस्पर 1 मीटर दूरी पर रखे होने पर 8N बल का अनुभव करते हैं। यदि ये आवेश इतनी ही दूरी पर जल में रख दिये जायें तो उनके बीच कितना बल अनुभव होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं-
\(\mathrm{F}_{\mathrm{m}}=\frac{\mathrm{F}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{m}}=\frac{8 \mathrm{~N}}{80}=0.1 \mathrm{~N}\)

प्रश्न 21. धातुओं के परावैद्युतांक का मान कितना होता है ?
उत्तर:
अनन्त ।

प्रश्न 22.
आवेशों के अध्यारोपण का सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:
इस सिद्धान्त के अनुसार आवेशों q1, q2, ….. qn के किसी निकाय में आवेश q1 पर q2 द्वारा लगा बल कूलॉम नियम द्वारा लगे बल के समान होता है अर्थात् यह अन्य आवेशों q3, q4, ……. qn की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होता। आवेश q1 पर सभी आवेशों द्वारा लगा कुल बल \(\vec{F}_1\) में तब
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 3

प्रश्न 23.
किसी बिन्दु \(\overrightarrow{\mathbf{r}}\) पर आवेश Q द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र का मान कितना होता है?
उत्तर:
\( \overrightarrow{\mathrm{E}}=\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{Q}{\mathrm{r}^2} \hat{\mathrm{r}}\)

प्रश्न 24.
विद्युत क्षेत्र E में रखे आवेश Q पर कार्यरत बल कितना होता है?
उत्तर:
बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}=\overrightarrow{\mathrm{QE}}\)

प्रश्न 25.
क्या वैद्युत क्षेत्र तीव्रता एक अदिश या एक सदिश राशि है ?
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र तीव्रता एक सदिश राशि है ।

प्रश्न 26.
उस भौतिक राशि को बताओ जिसका मात्रक न्यूटन / कूलॉम है।
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ।

प्रश्न 27.
किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु पर एकांक परीक्षण धनावेश पर कार्य करने वाला वैद्युत बल उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कहलाता है ।
E = \(\lim _{q_0 \rightarrow 0}\left(\frac{F}{q_0}\right)\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 28.
दो विद्युत बल रेखाएँ आपस में एक-दूसरे को क्यों नहीं काट सकती हैं?
उत्तर:
बल रेखायें परस्पर एक-दूसरे को नहीं काटती हैं, क्योंकि यदि वे परस्पर काटेंगी तो कटान बिन्दु पर दो स्पर्श रेखायें दो परिणामी क्षेत्र को व्यक्त करेंगी जो कि असम्भव है।

प्रश्न 29
बिन्दु आवेशों के कारण बल रेखाएँ खींचिए जब (i) q < 0 तथा (ii) q > 0
उत्तर:
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प्रश्न 30.
चित्र में रेखाओं द्वारा प्रदर्शित विद्युत क्षेत्र किस प्रकार का होता है?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 5
उत्तर:
विद्युत क्षेत्र का परिमाण तथा दिशा दोनों ही परिवर्ती हैं। अतः विद्युत क्षेत्र असमान (non-uniform ) है ।

प्रश्न 31.
वैद्युत फ्लक्स को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी क्षेत्रफल अवयव \(\overrightarrow{\Delta S}\) से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स ∆Φ की परिभाषा इस प्रकार करते हैं-
∆Φ = \(\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \overrightarrow{\Delta \mathrm{S}}\) = E ∆S cos θ
यहाँ पर θ क्षेत्र अवयव \(\overrightarrow{\Delta \mathrm{S}}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) के बीच का कोण है।

प्रश्न 32.
एकसमान विद्युत क्षेत्र में विद्युत बल रेखाओं की प्रकृति
उत्तर:
एकसमान विद्युत क्षेत्र में बल रेखाएँ सरल रेखीय समानान्तर और समान दूरी पर होती हैं। जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है-
प्रश्न 30 का भी अवलोकन करें। वह असमान विद्युत क्षेत्र है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 6

प्रश्न 33.
वैद्युत द्विध्रुव को परिभाषित कीजिए। इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
दो परिमाण में समान तथा प्रकृति में विपरीत बिन्दु आवेशों के अति निकट स्थित युग्म को विद्युत द्विध्रुव कहते हैं। इसका मात्रक कूलॉम मीटर होता है।

प्रश्न 34.
किस विन्यास में एक वैद्युत द्विध्रुव किसी एकसमान वैद्युत क्षेत्र के अन्तर्गत रखा होने पर
(i) स्थायी तथा
(ii) अस्थायी सन्तुलन में होगा ?
उत्तर:
(i) जब वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{P}}\) तथा वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) की दिशा एक ही हो।
(ii) जब \(\overrightarrow{\mathrm{P}}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) परस्पर विपरीत दिशा में हों।

प्रश्न 35.
\(\overrightarrow{\mathrm{P}}\) द्विध्रुव आघूर्ण का एक द्विध्रुव एकसमान वैद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में रखा है। \(\overrightarrow{\mathrm{P}}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) के बीच के कोण का वह मान लिखिए जिसके लिए द्विध्रुव द्वारा अनुभव किया गया बल आघूर्ण न्यूनतम हो ।
उत्तर:
θ = 0°
( ∵ τ = PE sin θ तथा τ minके लिए sin θ = 0 ⇒ θ = 0°)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 36.
विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण सदिश राशि की दिशा क्या होती है?
उत्तर:
ऋणात्मक से धनात्मक आवेश की ओर।

प्रश्न 37.
किसी समरूप विद्युत क्षेत्र में रखे विद्युत द्विध्रुव पर परिणामी बल कितना होता है?
उत्तर:
शून्य ।

प्रश्न 38. एक छोटे विद्युत द्विध्रुव के कारण इसके अक्ष तथा निरक्ष पर वैद्युत क्षेत्र तीव्रताओं में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
Eअबीय– = 2E निरक्षीय

प्रश्न 39.
जब एक वैद्युत द्विध्रुव को असमान विद्युत क्षेत्र में रखते हैं, तो क्या यह एक बल का अनुभव करता है?
उत्तर:
हाँ, यह असमान विद्युत क्षेत्र में बल का अनुभव करता है।

प्रश्न 40.
बल आघूर्ण का परिमाण का मान कितना होता है और इसकी दिशा भी बताइए ।
उत्तर:
बल आघूर्ण का परिमाण = qE . 2a sin θ
= 2qaE sin θ
इसकी दिशा \(\overrightarrow{\mathrm{P}}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) के तल के अभिलम्बवत् दायें हाथ के पेच के नियम से दी जाती है। लेकिन
p = 2ap
∴ बल आघूर्ण का परिमाण = pE sin θ

प्रश्न 41.
गाउस का नियम क्या है?
अथवा
गाउस नियम का कथन लिखिये।
उत्तर:
मुक्त आकाश में किसी बन्द पृष्ठ में से गुजरने वाले कुल विद्युत फ्लक्स का मान पृष्ठ द्वारा घेरे गए आवेश का \( \frac{1}{\epsilon_0}\)
किसी बन्द पृष्ठ S से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स
Φ = \( \frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
यहाँ q, पृष्ठ S द्वारा परिबद्ध कुल आवेश है।

प्रश्न 42.
गाउसियन पृष्ठ क्या है?
उत्तर:
किसी आवेश चारों ओर का वह गाउसियन पृष्ठ है जिसके सभी बिन्दुओं पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता समान हो और विद्युत फ्लक्स सदैव पृष्ठ के लम्बवत् हो ।

प्रश्न 43.
गाउसियन पृष्ठ का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
गाउसियन पृष्ठ के सिद्धान्त से सममित आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 44.
क्या विद्युत फ्लक्स का मान गाउसीय पृष्ठ की आकृति पर निर्भर करता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 45.
क्या एक खोखले गोले की अपेक्षा समान त्रिज्या के ठोस चालक गोले को अधिक आवेशित किया जा सकता है? कारण भी बताइए।
उत्तर:
नहीं, क्योंकि आवेशित चालक का सम्पूर्ण आवेश सदैव चालक के बाह्य पृष्ठ पर होता है।

प्रश्न 46.
किसी बन्द पृष्ठ में से विद्युत फ्लक्स का मान शून्य है। इसका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
इसका तात्पर्य है कि अन्दर की ओर विद्युत फ्लक्स का मान बाहर की ओर विद्युत फ्लक्स के बराबर है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 47.
किसी गोले के पृष्ठ में से इसके बाहर स्थित बिन्दु आवेश के कारण विद्युत फ्लक्स का मान लिखो ।
उत्तर:
गाउस प्रमेय से
Φ = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
∵ q = 0, इसलिए Φ = 0

प्रश्न 48.
किसी गाउसियन पृष्ठ में है। पृष्ठ में से परिणामी विद्युत फ्लक्स की गणना कीजिए।
उत्तर:
गाउसियन पृष्ठ द्वारा घेरा गया कुल आवेश
= -q + 3q – 2q = 0
अब Φ = \(\frac{q}{\epsilon_0}\) = 0
∵ q = 0

प्रश्न 49.
7.0 सेमी त्रिज्या के एक गुब्बारे में अन्दर की और फ्लक्स 2.0 × 103 NmC-1 है। यदि गुब्बारे की त्रिज्या दोगुनी कर दी जाए, तो फ्लक्स का मान कितना होगा?
उत्तर:
यह मान अपरिवर्तित रहेगा क्योंकि गाउसियन पृष्ठ द्वारा घेरा गया आवेश समान रहता है।

प्रश्न 50.
बिन्दु आवेश तथा रेखीय आवेश के कारण वैद्युत क्षेत्र दूरी के साथ कैसे परिवर्तित होता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 7

प्रश्न 51.
एकसमान आवेशित अनन्त समतल चादर के कारण विद्युत क्षेत्र का मान ज्ञात करने का सूत्र लिखो ।
उत्तर:
\(\overrightarrow{\mathrm{E}}=\frac{\sigma}{2 \epsilon_0} \hat{n}\)
यहाँ तल के अभिलम्बवत् इससे दूर जाता हुआ इकाई सदिश है।

प्रश्न 52.
एकसमान आवेशित पतले गोलीय खोल के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान ज्ञात करने का सूत्र लिखो ।
उत्तर:
(i) खोल के बाहर विद्युत क्षेत्र
E = \(\frac{q}{4 \pi \epsilon_0 r^2}\)
यहाँ पर q = 4πR2σ गोलीय खोल पर कुल आवेश है।
सदिश रूप \(\vec{E}=\frac{q}{4 \pi \epsilon_0 r^2} \hat{r}\)

(ii) खोल के भीतर विद्युत क्षेत्र एकसमान आवेशित पतले गोलीय खोल के कारण उसके भीतर स्थित सभी बिन्दुओं पर विद्युत क्षेत्र शून्य है।

प्रश्न 53.
क्या एक मीटर त्रिज्या के धातु के गोले को 1 कूलॉम आवेश दिया जा सकता है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि गोले के पृष्ठ पर E = \(\frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{R}^2}\)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 8

यह मान वायु में विद्युत क्षेत्र के 3 x 106 वोल्ट / मीटर से अधिक हो जाने पर वायु आयनित हो जायेगी जिससे हो जायेगा।

प्रश्न 54.
विद्युत क्षेत्र रेखाओं के कोई दो गुण लिखिए।
उत्तर:
(i) विद्युत बल रेखा के किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर परिणामी विद्युत क्षेत्र की दिशा व्यक्त करती है।
(ii) विद्युत बल रेखायें धन आवेश चलकर ऋण आवेश पर समाप्त हो जाती हैं।
नोट – छात्र विद्युत क्षेत्र रेखाओं के अन्य गुण भी लिख सकते हैं।

प्रश्न 55.
01 सेमी त्रिज्या के गोलाकार गाउसीय पृष्ठ के अन्दर ± 1 µC आवेश का विद्युत द्विध्रुव स्थित है । गाउसीय पृष्ठ से निर्गत विद्युत फ्लक्स का मान लिखिए ।
उत्तर:
गाउसीय पृष्ठ से निर्गत विद्युत फ्लक्स
Φ = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\)
यहाँ पर ∈0 वायु या निर्वात की विद्युतशीलता है। दिये गये प्रश्न में आवेशों का बीजगणितीय योग शून्य है। इसलिये गाउसीय पृष्ठ से निर्गत विद्युत फ्लक्स का मान शून्य होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 56.
10 सेमी त्रिज्या के आवेशित गोलीय कोश की सतह पर 10 V विभव है। इसके केन्द्र से 5 सेमी दूर विभव का मान लिखिए।
उत्तर:
गोलीय पृष्ठ के भीतर सभी बिन्दुओं पर विभव एक समान होता है और इसका मान वही होता है जो कि गोलीय आवेश के पृष्ठ पर होता है अर्थात् इसके केन्द्र से 5 सेमी दूर विभव का मान 10 वोल्ट होगा।

लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से d दूरी पर रखे हैं। इनके कारण किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य है। परन्तु बिन्दु इन आवेशों के बीच में नहीं है बल्कि उनको जोड़ने वाली रेखा पर है, ऐसा होने के लिए दो आवश्यक शर्तें लिखिए।
उत्तर:
(i) दोनों आवेश विपरीत प्रकृति के होने चाहिए।
(ii) बिन्दु के निकट स्थित आवेश का परिमाण कम तथा दूसरे आवेश का परिमाण अधिक होना चाहिए।

प्रश्न 2.
जब कागज़ के टुकड़े को किसी आवेशित वस्तु के पास ले जाया जाता है, तो यह उस वस्तु की ओर आकर्षित होता है, परन्तु वस्तु से स्पर्श करने के पश्चात् यह नीचे गिर जाता है। ऐसा क्यों होता है ?
उत्तर:
जब कागज के टुकड़े को आवेशित वस्तु के पास ले जाया जाता है, तो इसके परमाणु आवेश के द्वारा धुवित ( Polarised) हो जाते हैं, जिससे परिणामी आकर्षण बल उत्पन्न होता है, जैसे ही कागज आवेशित वस्तु से स्पर्श करता है, इसका ध्रुवण समाप्त हो जाता है। इस प्रकार आकर्षण बल की अनुपस्थिति में कागज का टुकड़ा गिर जाता है।

प्रश्न 3.
हाथ में ली हुई एबोनाइट छड़ को फ्लालेन से रगड़कर इसको आवेशित किया जा सकता है परन्तु ताँबे की छड़ इस तरह आवेशित नहीं की जा सकती, क्यों?
उत्तर:
ताँबे की छड़ और मानव शरीर दोनों ही विद्युत के सुचालक हैं अतः इनको रगड़ने पर इस पर उत्पन्न प्रेरित आवेश मानव शरीर से होता हुआ पृथ्वी में चला जाता है इसलिए इसको आवेशित नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत ऐबोनाइट की छड़ विद्युत की कुचालक है अतः इस पर प्रेरित आवेश इसी पर ठहरा रहता है। इसलिए इसको आवेशित किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
यदि हम कुछ समय तक नंगे पैर नायलॉन चटाई पर चलकर दरवाजे में लगे धातु के हत्थे (handle) को छू लें, तो हमें बिजली का सा झटका लगता है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
चलते समय हमारे पैर चटाई पर रगड़ खाते हैं, जिससे हमारा शरीर आवेशित हो जाता है। हत्थे को छूने पर हमारे शरीर से आवेश उसमें प्रवाहित होता है जिससे हमें झटका लगता है।

प्रश्न 5.
आपको रेशमी कपड़े से रगड़ी हुई काँच की छड़ दी गई है तथा कुचालक स्टैण्डों पर रखे हुए दो अनावेशित गोले भी दिए गए हैं। आप इन गोलों को बराबर तथा विपरीत आवेशों से किस प्रकार आवेशित करेंगे?
उत्तर:
जब काँच की छड़ को रेशमी कपड़े के टुकड़े से रगड़ा जाता है, तो यह धनात्मक आवेशित हो जाता है। हम गोलों को सम्पर्क में रखकर तथा इनके निकट चित्र (a) में दर्शाए अनुसार काँच की छड़ को ले जाते हैं। गोले A का निकटवर्ती भाग ऋणात्मक आवेशित तथा गोले B का दूरवर्ती भाग धनात्मक आवेशित हो जाता है। गोलों को थोड़ा- सा दूर किया जाता है तथा अन्य में छड़ को पूर्णतया हटा लिया जाता है। चित्र (b) में दर्शाए अनुसार गोले पर बराबर और विपरीत आवेश प्राप्त हो जाते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 9

प्रश्न 6.
यदि एक कंघा सूखे बालों से गुजारा जाये तो यह कागज के सूक्ष्म टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करता है। क्यों? यदि बाल भीगे हों या बरसात हो रही हो तो क्या होगा?
उत्तर:
जब कंधे को सूखे बालों से गुजारते हैं तो घर्षण के कारण यह आवेशित हो जाता है। जब बाल भीगे हों या बरसात हो रही है तो घर्षण बहुत कम हो जाता है अतः कंघा आवेशित नहीं हो पाता है। इस कारण यह कागज के छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाता।

प्रश्न 7.
क्या दो धनात्मक आवेशित गेंदें एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं?
उत्तर:
हाँ, जब पहली वाली गेंद पर आवेश दूसरी वाली गेंद की तुलना में अधिक है तो प्रेरण के कारण दूसरी गेंद पर विपरीत प्रकृति का कुछ आवेश प्रेरित हो जाता है। अतः दूसरी गेंद, पहली गेंद की ओर आकर्षण बल अनुभव करेगी।

प्रश्न 8.
किसी वैद्युत क्षेत्र में कोई इलेक्ट्रॉन रखा है। यदि इसके स्थान पर एक प्रोटॉन रख दिया जाये तो इनके द्वारा अनुभव किये बलों में क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर:
चूँकि F = qE तथा इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन प्रत्येक पर आवेश का परिमाण बराबर होता है तथा प्रकृति विपरीत होती है अतः प्रत्येक पर लगे बलों के परिमाण तो बराबर होंगे परन्तु दिशायें परस्पर विपरीत होंगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 9.
ठीक बराबर द्रव्यमान के सर्वसम धातु के दो गोले लिए गए हैं। एक को q ऋणावेश तथा दूसरे को उतने ही धनावेश से आवेशित किया गया है क्या दोनों गोलों के द्रव्यमान में कोई अन्तर आयेगा? यदि हाँ तो क्यों ?
उत्तर:
जिस गोले को धनावेश से आवेशित किया गया है, उससे कुछ इलेक्ट्रॉन निकाल लिए गए होंगे तथा जिस गोले को ऋणावेश से आवेशित किया गया है, उसको कुछ अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन बाहर से दे दिये गये होंगे अतः इसका अर्थ यह है कि गोलों के द्रव्यमानों में अन्तर आयेगा अर्थात् धनावेशित गोले का द्रव्यमान कम हो जायेगा और ऋणावेशित गोले का द्रव्यमान बढ़ जायेगा। चूँकि दोनों गोले समान परिमाण q के आवेश से आवेशित किये गये हैं तथा q = ne (जहाँ पर n= निकाले गये अथवा दिये गये इलेक्ट्रॉनों की संख्या है और e = इलेक्ट्रॉन के तुल्य आवेश = 1.6 × 10-19 कूलॉम) अतः धनावेशित गोले के द्रव्यमान में जितनी कमी आयेगी, ऋणावेशित गोले के द्रव्यमान में उतनी ही वृद्धि हो जायेगी।

प्रश्न 10.
दो आवेश वायु में कुछ दूरी पर रख दिये गये हैं-
(अ) यदि उनके बीच एक काँच की स्लेब जिसका परावैद्युतांक 8 है रख दी जाये तो उनके बीच कार्य करने वाले बल के परिमाण में क्या परिवर्तन होगा?
(ब) यदि पीतल का टुकड़ा रख दिया जाये तो क्या होगा ?
उत्तर:
एक-दूसरे सेr दूरी पर वायु में स्थित q1 व q2 परिमाण के आवेशों के बीच वैद्युत-बल क्रमशः होंगे-
Img-1
(अ) अतः आवेशों के बीच ∈r = 8 परावैद्युतांक की काँच की स्लेब
रखने पर बल प्रारम्भिक बल का \(\frac{1}{8}\) रह जायेगा।
(ब) पीतल के टुकड़े के लिए ६० अतः इस दशा में शून्य होगा।

प्रश्न 11.
दो प्रोटॉन व दो इलेक्ट्रॉन स्वतन्त्रतापूर्वक समान दूरियों पर लटके हुए हैं। प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन के बीच में प्रतिकर्षण बल की तुलना कीजिए ।
उत्तर:
दो प्रोटॉनों व दो इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण बल समान होंगे क्योंकि आवेश का परिमाण प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन पर समान होता है और साथ में दोनों के बीच की दूरियाँ भी समान हैं।

प्रश्न 12.
ज्वलनशील पदार्थ ले जाने वाले वाहन सामान्यतया धातु के रस्सों से इस प्रकार बंधे रहते हैं कि रस्सी पृथ्वी को स्पर्श करती है। क्यों?
उत्तर:
गति करते हुए वाहन हवा के घर्षण के कारण कुछ आवेशित हो जाते हैं। साथ ही टायर सड़क के घर्षण के कारण आवेशित हो जाते हैं। यह पृथ्वी के स्पर्श करते धातु के रस्से उत्पन्न आवेश को पृथ्वी को विसर्जित करते रहते हैं अन्यथा पदार्थ में आग लगने का भय रहता है।

प्रश्न 13.
क्या किसी आवेशित वस्तु ‘A’ का सम्पूर्ण आवेश अन्य किसी वस्तु ‘B’ को स्थानान्तरित किया जा सकता है? यदि हाँ तो कैसे सम्भव होगा, यदि नहीं तो क्यों ?
उत्तर:
हाँ, किसी वस्तु A का कुल आवेश अन्य किसी चालक वस्तु B को स्थानान्तरित किया जा सकता है जब वस्तु A को वस्तु B पूर्ण रूप से ढक तथा इसको किसी तार द्वारा सम्बन्धित कर दिया जाये। यह आवेश की मूल प्रकृति के कारण सम्भव है क्योंकि आवेश सदैव चालक की बाहरी सतह पर स्थिर रहता है।

प्रश्न 14.
साधारण रबर विद्युत की कुचालक होती है जबकि वायुयान के पहियों के टायर एक विशेष प्रकार की रबर के बने सूक्ष्म मात्रा में चालक होते हैं। ऐसा करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वायुयान के टायरों को विशेष चालक रबर का बनाना इसलिए आवश्यक है कि टायर और पृथ्वी की सतह के मध्य घर्षण के कारण उत्पन्न विद्युत पृथ्वी में चली जाये। टायर सुरक्षित रहें।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 15.
आवेश और द्रव्यमान में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:
(i) आवेश शून्य, धनात्मक तथा ऋणात्मक कोई भी हो सकता है परन्तु द्रव्यमान सदैव धनात्मक होता है।
(ii) वैद्युत आवेश कण की गति के जबकि द्रव्यमान कण की गति के वेग परवेग पर निर्भर नहीं करता है। भी निर्भर करता है।

प्रश्न 16.
यदि लघु वैद्युत द्विध्रुव के केन्द्रीय बिन्दु से प्रेक्षण बिन्दु की दूरी आधी कर दी जाये तो वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता कितनी गुना हो जायेगी?
उत्तर:
लघु वैद्युत द्विध्रुव के अक्षीय तथा निरक्षीय दोनों स्थितियों में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 10

प्रश्न 17.
एक वैद्युत द्विध्रुव के अक्ष पर रखे एक बिन्दुवत आवेश पर F बल लगता है। यदि बिन्दुवत आवेश की द्विध्रुव से दूरी दुगुनी कर दी जाये तो उस पर क्या बल लगेगा? कारण भी स्पष्ट करें।
उत्तर:
विद्युत द्विध्रुव के कारण इससे r दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) का परिमाण E होगा ।
इसका मान E = \(\left(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\right) \cdot\left(\frac{2 p}{r^3}\right)\)
इसलिए इस बिन्दु पर रखे बिन्दु आवेश पर बल का परिमाण \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) का परिमाण F = qE
अतः =\(\left(\frac{1}{4 \pi \in_0}\right) \cdot\left(\frac{2 \mathrm{pq}}{\mathrm{r}^3}\right) \Rightarrow F \propto \frac{1}{\mathrm{r}^3}\)
अतः दूरी r को दुगुनी करने पर \(\frac{1}{8}\) गुना हो जायेगा अर्थात् \(\frac{F}{8}\)

प्रश्न 18.
कूलॉम बल (F) का (r) के साथ विचरण का ग्राफ खीचिये । जहाँ प्रत्येक आवेश युग्म (1μC, 2μC) तथा (2μC, -3μC) के दोनों आवेशों के बीच की दूरी है। प्राप्त ग्राफ की विवेचना कीजिए।
हल – आवेश युग्म (1μC तथा 2μC) के आवेशों के बीच वैद्युत बल F प्रतिकर्षणात्मक होगा और आवेश युग्म (2μC, -3μC) के आवेशों के बीच वैद्युत बल F आकर्षणात्मक होगा।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 11

प्रश्न 19.
दो वैद्युत आवेश +Q तथा -Q(x – y) तल में क्रमशः बिन्दुओं (-x2, 0) तथा (x1, 0) पर रखे हैं। मूल बिन्दु (0,0) पर परिणामी वैद्युत क्षेत्र का परिमाण तथा दिशा ज्ञात कीजिए।
हल – दी गई आवेशों की स्थितियों को चित्र में दिखाया गया है। बिन्दु A पर + Q आवेश के कारण मूल बिन्दु O पर वैद्युत क्षेत्र की
तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}_1}\) का परिमाण,
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 12

प्रश्न 20.
एक बन्द पृष्ठ के अन्दर एक वैद्युत द्विध्रुव रखा है, जिसका द्विध्रुव आघूर्ण 20 × 10 -6 कूलॉम मीटर है इस पृष्ठ से निकलने वाला वैद्युत फ्लक्स कितना होगा?
उत्तर:
वैद्युत द्विध्रुव के सिरों पर समान परिमाण तथा विपरीत प्रकृति के आवेश होते हैं। अतः बन्द पृष्ठ के अन्दर कुल आवेश q शून्य होगा। इसलिए गाउस प्रमेय के अनुसार इस पृष्ठ से निकलने वाला वैद्युत फ्लक्स
Φ = \(\frac{q}{\epsilon_0}\)
Φ = शून्य

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

प्रश्न 21.
धातु का एक छोटा गोला जिस पर +Q आवेश है, एक बड़े अनावेशित धातु के गोले की गुहिका (cavity) में रखा है।
जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। बिन्दुओं P1 तथा P2 पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता का मान गाउस के नियम से ज्ञात कीजिए ।
हल – P1 बिन्दु से गुजरते हुए एक गौसियन पृष्ठ की कल्पना करने पर इससे गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 14
चूँकि बिन्दु P2 धातु के गोले के अन्दर स्थित है तथा किसी चालक धातु के अन्दर प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होती है। अतः P2 पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता = शून्य

प्रश्न 22.
त्रिज्या r तथा लम्बाई l के एक बेलनाकार पृष्ठ आवेश घनत्व तथा अनन्त लम्बाई का पतला, सीधा चालक तार परिबद्ध है। बेलनाकार पृष्ठ की अक्ष तार की लम्बाई से संपाती है। बेलनाकार पृष्ठ से विद्युत फ्लक्स के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
अनन्त रेखीय आवेश के कारण उससे दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 15
बेलनाकार पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र उसके लम्बवत् होगा।
अतः क्षेत्रफल सदिश व विद्युत क्षेत्र समान दिशा में होंगे।
अतः बेलनाकार पृष्ठ से निर्गत विद्युत फलक्स

प्रश्न 23.
1 KV से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन 5 किमी. दूरी से एक अनन्त विस्तार की चालक प्लेट की ओर लम्बवत दिशा में गतिशील है। चालक प्लेट पर न्यूनतम पृष्ठ आवेश घनत्व की गणना कीजिए ताकि इलेक्ट्रॉन प्लेट से न टकरा सके।
उत्तर:
आवेशित चालक प्लेट के कारण विद्युत क्षेत्र
इलेक्ट्रॉन पर बल F = (e)E = \(\frac{\mathrm{e} \sigma}{\epsilon_0}\)

1 KV से त्वरित होने पर इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = 1 Kev
= 1000 × 1.6 × 10-19 जूल
= 1.6 × 10-16 जूल
अतः Fd = 1.6 × 10-16जूल
चूँकि किया गया कार्य ही ऊर्जा होती है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 16

प्रश्न 24.
चित्र में प्रदर्शित गोले S1 तथा S2 से गुजरने वाले वैद्युत फ्लक्स की गणना कीजिए । चित्र में दिखाए गए तार AB के आवेश का रेखीय घनत्व λ = Kx है जहाँ x = तार के सिरे A से इसकी लम्बाई के अनुदिश मापी गई दूरी है।
उत्तर:
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प्रश्न 25.
L मीटर भुजा का वर्गाकार पृष्ठ कागज के तल में रखा हुआ है एक समान वैद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{E}}\) भी कागज के तल में ही है तथा यह चित्रानुसार पृष्ठ के निचले आधे भाग तक ही सीमित है। तल से बद्ध वैद्युत फ्लक्स कितना होगा?

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उत्तर:
हम जानते हैं किसी तल से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स
Φ = \(\oint \overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{d} s}\)
यहाँ पर वर्गाकार पृष्ठ के ऊपरी तल में कोई विद्युत क्षेत्र नहीं है। अतः E= O होने से इस भाग से कोई वैद्युत फ्लक्स नहीं गुजरेगा। वर्गाकार पृष्ठ के नीचे के आधे तल में क्षेत्रफल सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{ds}}\) वैद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) के लम्बवत होगा। अतः
\(\overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{ds}}\) = Eds cos 90° = 0
इसलिए वर्गाकार पृष्ठ के निचले तल से भी कोई वैद्युत फ्लक्स नहीं गुजरेगा अर्थात् वैद्युत फ्लक्स शून्य होगा। इसलिए सम्पूर्ण वर्गाकार पृष्ठ से बद्ध वैद्युत फ्लक्स शून्य होगा ।

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प्रश्न 26.
निम्नलिखित के कारण समविभव पृष्ठों का चित्रण कीजिए:
(i) कोई विद्युत् द्विध्रुव
(ii) किसी दूरी के पृथकन पर स्थित दो सर्वसम धनावेश ।
उत्तर:
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आंकिक प्रश्न-

प्रश्न 1.
(अ) 12.5 × 108 इलेक्ट्रॉन पर कितना आवेश होगा ?
(ब) 1 कूलॉम आवेश तथा 1 इलेक्ट्रॉन आवेश में कौन बड़ा है? 1 कूलॉम आवेश में कितने इलेक्ट्रॉनिक आवेश होंगे?
हल- (अ) 1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 × 10-19 कूलॉम अतः n = 12.5 × 108 इलेक्ट्रॉनों पर आवेश
q = ne
= (12.5 × 108) × (1.6 × 10-19) कूलॉम
= 20.00 × 10-11 कूलॉम
= 2.0 × 10-10 कूलॉम (ऋणात्मक)
(ब) 1 इलेक्ट्रॉन के आवेश से 1 कूलॉम आवेश बड़ा होता है। q = 1 कूलॉम आवेश में यदि n इलेक्ट्रॉनिक आवेश हो तो
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प्रश्न 2.
दो बिन्दु आवेश + 3μC तथा -3μC एक-दूसरे से 20 सेमी. दूरी पर निर्वात में रखे हैं। (i) दोनों आवेशों को जोड़ने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र क्या होगा ? (ii) यदि इस मध्य-बिन्दु पर एक 1.5 × 10 -9C का आवेश रखा जाये तो इस आवेश पर कितना बल लगेगा?
हल-
(i) q1 = 3μC
= 3 × 10-6 C आवेश से AB के मध्य बिन्दु
पर M पर उत्पन्न वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता है \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) जहाँ पर r = AM = 10 सेमी. = 0.10 मीटर का परिमाण
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\(\overrightarrow{\mathrm{E}_1}\) की दिशा धन आवेश से दूर अर्थात् M से B की ओर होगी। इसी प्रकार q2 – 3μC = -3 × 106C आवेश के कारण
वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}_2}\) का परिमाण 2.7 × 106 न्यूटन/कूलॉम ही होगी तथा E2 की दिशा (ऋणात्मक की ओर) अर्थात् M से B की ओर होगी।
बिन्दु M पर \(\overrightarrow{\mathrm{E}_1}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{E}_2}\) दोनों एक ही दिशा में हैं। अतः M
पर परिणामी तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}_1}\) का परिमाण \(\overrightarrow{\mathrm{E}_1}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{E}_2}\) के परिमाणों के योग के बराबर होगा तथा इसकी दिशा भी M से B की ओर होगी।
इसलिए E = E1 + E2
= 2.7 × 106 + 2.7 × 106
= 5.4 × 106 न्यूटन/कूलॉम

(ii) बिन्दु M पर स्थित आवेश q = 1.5 × 10-9 कूलॉम
आवेश द्वारा अनुभव किये गये बल का परिमाण
F = qE से ज्ञात किया जा सकता है।
F = qE = 1.5 × 10-9 × 5.4 × 106
= 8.10 × 10-3 न्यूटन
चूँकि q धनावेश है, अतः इस पर बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) की दिशा भी \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) की दिशा में होगी
अर्थात् M से B की ओर होगी।

प्रश्न 3.
समान आवेश वाले दो धनायन एक-दूसरे को 3.7 × 10-9 न्यूटन बल से प्रतिकर्षित करते हैं जबकि उनके बीच की दूरी 5A है। प्रत्येक आयन में सामान्य अवस्था की तुलना में कितने इलेक्ट्रॉन कम हैं?
हल-माना प्रत्येक आयन पर धनावेश का परिमाण = q कूलॉम
उनके बीच प्रतिकर्षण बल F = 3.7 × 10-9 न्यूटन
उनके बीच की दूरी r = 5Å
= 5 × 10-10 मीटर
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प्रश्न 4.
दो विद्युतरोधी आवेशित ताँबे के गोले ‘A’ एवं ‘B’ जो आकार में सर्वसम हैं, के केन्द्रों के बीच की दूरी 50 सेमी. तथा दोनों पर पृथक्-पृथक् आवेश 6.5 × 107 C है। इसी आकार का एक तीसरा अनावेशित गोला ‘C’ सर्वप्रथम पहले गोले ‘A’ के सम्पर्क में तत्पश्चात् दूसरे गोले ‘B’ के सम्पर्क में लाकर अन्ततः दोनों से ही हटा लिया जाता है, तब ‘A’ व ‘B’ गोलों के मध्य लगने वाले प्रतिकर्षण बल का मान ज्ञात करो।
हल-माना गोला A पर सम्पर्क से पहले कुल आवेश = Q है। गोला C, जब A के सम्पर्क में आता है तब यह आवेश Q दोनों में बराबर-बराबर बँट जायेगा ।
अतः A पर सम्पर्क के पश्चात् आवेश = \(\frac{Q}{2}\)
गोला B व C सम्पर्क में आने पर दोनों पर कुल आवेश = \(Q+\frac{1}{2} Q=\frac{3}{2} Q\)
यह आवेश B व C पर बराबर-बराबर बँट जायेगा ।
अत: सम्पर्क के पश्चात् B पर आवेश का मान = \(\frac{1}{2}\left(\frac{3}{2} Q\right)\) = \(\frac{3}{4}\)Q
अन्ततय: गोले A व B के मध्य प्रतिकर्षण बल
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प्रश्न 5.
दो परमाणुओं को आयन बनाने के लिए उनमें प्रत्येक से 2 इलेक्ट्रॉन निकाले गये हैं। इन आयनों को निर्वात में रखने पर ये एक-दूसरे को 3.7 × 10-9 न्यूटन बल से प्रतिकर्षित करते हैं। उनके बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल-दिया गया है-
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प्रश्न 6.
दो बिन्दु आवेश +9e तथा +e एक-दूसरे से 16 सेमी. की दूरी पर स्थित हैं। इनके बीच एक आवेश q को कहाँ रखा जाये कि उस पर बल न लगे?
हल-आवेश +9e और q के बीच लगने वाला बल
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अतः आवेश (+9e) से 12 सेमी. की दूरी पर आवेश q को रखा जाये तब वह आवेश सन्तुलन की स्थिति में होगा।

प्रश्न 7.
हीलियम नाभिक के कारण उससे 1Å दूरी पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की गणना करो।
हल-हीलियम के नाभिक पर आवेश (q) = 2 प्रोटॉन का आवेश
= 2 × 1.6 × 10-19 = 3.2 × 10-19कूलॉम
∴ नाभिक से 1Å या 10-10 मीटर पर विद्युत क्षेत्र
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 1 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र 26

प्रश्न 8.
समान प्रकृति के दो q आवेश परस्पर d दूरी पर स्थित हैं, इनको मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर तीसरा आवेश Q कूलॉम का रखा है। Q के किस मान के लिए निकाय संतुलन में होगा?
हल-समान प्रकृति के दो आवेश d दूरी पर रखे हुए हैं।
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इनके मध्य बिन्दु पर एक तीसरा आवेश Q रखा हुआ है, जिसकी q आवेश से दूरी \(\frac{\mathrm{d}}{2}\) होगी। कूलॉम नियम से आवेश q और Q के बीच लगने वाला बल
F1 = \(\frac{\text { k.Q.q }}{(\mathrm{d} / 2)^2}\) (यहाँ k = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\))  ……….. (1)

आवेश q और q के बीच लगने वाला बल
F2 = \(\frac{\text { k.q.q }}{(\text { d })^2}\)  ………….. (2)

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प्रश्न 9.
एक 10 सेमी. व्यास के गोले को आवेशित किया जाता है जिससे इसके पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता 5 × 106 वोल्ट प्रति मीटर हो जाती है। गोले के केन्द्र से 25 सेमी. दूरी पर स्थित 5 × 106इक्रो कूलॉम आवेश पर कितना बल लगेगा?
उत्तर:
हल-दिया गया है।
2r = 10 सेमी. = 0.1 मीटर
r = 0. 05 मीटर
E = 5 × 106 वोल्ट/मीटर
गोले के केन्द्र से 25 सेमी. दूरी पर स्थित 5 × 10-2 µC आवेश पर कितना बल होगा = ?
गोले के पृष्ठ पर आवेश का मान माना = q कूलॉम है। गोले के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
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प्रश्न 10.
किसी गोले के केन्द्र से 20 सेमी. दूर स्थित एक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता 10 वोल्ट/मीटर है। उस गोले के केन्द्र से 8 सेमी. दूरी पर स्थित बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिये। गोले की त्रिज्या 5 सेमी. है।
उत्तर:
हल-दिया गया है।
E20 = 10 न्यूटन/कूलॉम
E8 = ?, r = 20 सेमी. = 0.2 मीटर यहाँ E8 का मान ज्ञात करना है।
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प्रश्न 11.
a मीटर भुजा वाले वर्ग के चारों कोनों पर क्रमशः
q, 2q, 3q व 4q कूलॉम आवेश स्थित हैं। सिद्ध कीजिए कि उसके केन्द्र पर विद्युत क्षेत्र \(4\sqrt{2} \frac{k q}{a^2}\) न्यूटन/कूलॉम होगा।
उत्तर:
हल-यहाँ पर a मीटर भुजा वाले वर्ग के चारों कोनों पर क्रमश: q, 2q, 3q व 4q आवेश रखे हैं।
यहाँ AC और BD वर्ग के विकर्ण है जो कि O पर काटते हैं जो कि वर्ग का केन्द्र है। विद्युत क्षेत्र
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प्रश्न 12.
+ 3.2 × 10-19कूलॉम तथा -3.2 × 10-19 कूलॉम के दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से 2.4 × 10 -10 मीटर की दूरी पर रखे हैं। यह द्विध्रुव 3 × 104 न्यूटन/कूलॉम तीव्रता के क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा से 30° कोण पर रखा है। इस पर कार्य करने वाले बल-युग्म के आघूर्ण का मान ज्ञात कीजिए। इस आघूर्ण का अधिकतम मान क्या होगा?
उत्तर:
हल-दिया गया है
q = 3.2 × 10-19कूलॉम
2a = 2.4 × 10-10 मीटर, E = 3 × 104 न्यूटन/कूलॉम
तथा θ = 30°
अतः वैद्युत द्विध्रुव का द्विध्रुव आघूर्ण p = 2aq
p = 2.4 × 10-10 × 3.2 × 10-19
= 7. 68 × 10-29 कूलॉम मीटर
इसलिए बल-युग्म का आघूर्ण
τ = pE sin θ
= (7. 68 × 10-29) × (3 × 104) × sin 30° न्यूटन मीटर
= 7. 68 × 3 × 10-25 × \(\frac{1}{2}\) न्यूटन मीटर
= 1. 152 × 10-24 न्यूटन मीटर
τ का अधिकतम मान
τmax = pE sin 90° = pE
= 7.68 × 10-29 × 3 × 104 न्यूटन मीटर
= 2. 304 × 10-24 न्यूटन मीटर

प्रश्न 13.
दो बिन्दु आवेश 5µC तथा -5µC एक-दूसरे से 1 सेमी. की दूरी पर रखे हैं। इनके मध्य बिन्दु से 0.30 मीटर की दूरी पर
(i) अक्षीय स्थिति में,
(ii) निरक्षीय स्थिति में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता की गणना कीजिए।
हल-यहों पर दिया है-
उत्तर:
q = 5 µC = 5 × 10-6 कूलॉम
2a = 1 सेमी. = 10-2मीटर
तथा r = 0.30 मीटर
द्विध्रुव आघूर्ण p = 2aq
= 10-2 × 5 × 10-6
= 5 × 10-8 कूलॉम मीटर यहाँ पर r >> 2a
अत: द्विध्रुव लघु वैद्युत द्विध्रुव है। इसलिए
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प्रश्न 14.
2 सेमी. लम्बाई का एक वैद्युत द्विध्रुव 105 न्यूटन/कूलॉम तीव्रता के वैद्युत क्षेत्र में इस प्रकार रखा है कि इसकी अक्ष क्षेत्र की दिशा से 30° कोण बनाती है। इस पर 10√3 न्यूटन मीटर का बल आघूर्ण कार्य करता है।
वैद्युत द्विधुव पर आवेश का परिमाण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हल-यहाँ दिया गया है
τ = 10√3 न्यूटन मीटर,
θ = 30° तथा E = 105 न्यूटन/कूलॉम
इसलिए बल आघूर्ण τ = pE sin θ
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प्रश्न 15.
किस्सी बन्द पृष्ठ से प्रवेशित्त फ्लक्स 2 × 103 न्यूटनमीटर2 कूलॉम तथा निर्गत फ्लक्स 8 × 103 न्यूटन-मीटर2 कूलॉम है। पृष्ठ में बन्द आवेश का मान झ्ञात करो।
उत्तर:
हल-प्रवेशित फ्लक्स = 2 × 103 न्यूटनमीटर2/ कूलॉम
तथा निर्गत फलक्स = 8 × 103 न्यूटनमीटर2/ कूलॉम
∴ कुल निर्गत फ्लक्स = 8 × 103 -2 × 103
= 6 × 10 3न्यूटनमीटर2/ कूलॉम
यदि बन्द पृष्ठ में आवेश q हो तब
\(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}\) = Φ
∴ q = ∈0 × Φ
⇒ q = 8.85 × 10-12 × 6 × 103
या q = 53. 1 × 10-9 कूलॉम
= 53.1 × 10-9 nC

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प्रश्न 16.
एक गोलीय गाउसीय पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश 8.85 × 10-8 कूलॉम है। गणना कीजिए (a) गाउसीय पृष्ठ से निकलने वाला वैद्युत फ्लक्स, (b) यदि गाउसीय पृष्ठ की त्रिज्या दोगुनी कर दी जाये तो वैद्युत फ्लक्स में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
हल-यहाँ
परिबद्ध आवेश का मान q = 8.85 × 10-8 कूलॉम
(a) Φ = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0}=\frac{8.85 \times 10^{-8}}{8.85 \times 10^{-12}}\)
= 104 न्यूटन मी2कूलॉम
(b) चूँकि वैद्युत फ्लक्स Φ केवल गाउसीय पृष्ठ द्वारा परिबद्ध आवेश पर निर्भर करता है उसकी त्रिज्या पर नहीं अतः वैद्युत फलक्स में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 17.
एक बिन्दु आवेश q, एक a मीटर भुजा वाले घन
(i) की एक कोर के मध्य बिन्दु पर
(ii) के एक तल पर केन्द्रतः रखा है घन से सम्बद्ध कुल फ्लक्स की गणना कीजिये। यह भी ज्ञात कीजिए कि सम्बद्ध कुल फ्लक्स घन के कितने पृष्ठों से गुजरेगा ?
उत्तर:
(i) धन के कोर के जिस बिन्दु पर बिन्दु आवेश है उसे केन्द्र मानकर एक खोखले गोले की कल्पना करो जो घन की कोर को दो बिन्दुओं पर काटे। घन का वह आयतन जो ऐसे गोले के अन्दर पड़ेगा वह खोखले गोले के कुल आयतन का एक-चौथाई होगा, इसलिये बिन्दु आवेश पर घन के द्वारा बना ठोस कोण \(\left(\frac{360^{\circ}}{4}=90^{\circ}\right)\) बनेगा। यदि बिन्दु आवेश का मान q हो तब बिन्दु आवेश के कारण घन से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स
Φ = \(\frac{q}{4 \epsilon_0}\)
धन के दो फलक जिनकी कोर पर बिन्दु आवेश है उनसे कोई विद्युत फ्लक्स नहीं गुजरेगा क्योंकि विद्युत फ्लक्स की दिशा उन पर उनके समान्तर है और घम से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स बाकी अन्य 4 फलकों से गुजरेगा।

(ii) घन के जिस फलक पर बिन्दु आवेश रखा है उस बिन्दु को केन्द्र मानकर एक ऐसे खोखले गोले की कल्पना करो जो उसे एक पूर्ण वृत्त में काटे । खोखले गोले का आयतन जो घन के अन्दर होगा वह खोखले गोले के कुल आयतन का आधा होगा और वह बिन्दु आवेश पर 180° का ठोस कोण बनायेगा। यदि बिन्दु आवेश का मान q हो तब घन से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स q आवेश से निकलने वाले विद्युत फलक्स का आधा होगा।
इसलिये धन से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स
Φ = \(\frac{q}{2 \epsilon_0}\)
पुनः चूँकि जिस घन के फलक पर बिन्दु आवेश है उस पर विद्युत फ्लक्स की दिशा फलक के समान्तर है इसलिये उस पर विद्युत फ्लक्स का मान शून्य होगा और विद्युत फ्लक्स शेष अन्य फलकों से समान रूप से निकलेगा ।
इसलिये विद्युत फ्लक्स पाँच फलकों से गुजरता है।

प्रश्न 18.
एक इलेक्ट्रॉन एक अनन्त धनात्मक रेखीय आवेश के चारों ओर 0.5 मीटर त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाता है। यदि रेखीय आवेश घनत्व 18.2 × 10-10 कूलाम/मीटर है, तो इलेक्ट्रॉन की चाल (मीटर/सेकण्ड में) ज्ञात कीजिए।
(इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9.1 × 10-31 kg)
उत्तर:
हल-हम जानते हैं-अनन्त लम्बाई के समान रूप से आवेशित सीधे तार के कारण वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E = \(\frac{\lambda}{2 \pi \epsilon_0 r}\)
और F = qE
∴ F = \(\frac{q \lambda}{2 \pi \epsilon_0 r}\) (E का मान रखने पर)
इस बल का मान \(\frac{\mathrm{mv}^2}{\mathrm{r}}\) के बराबर होगा।
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प्रश्न 19.
एक 17.7 × 10-4 कूलॉम का वैद्युत आवेश 200 मीटर2 क्षेत्रफल की बड़ी पतली चादर पर समान रूप से फैला हुआ है। इससे 20 सेमी. की दूरी पर वायु में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हल-दिया गया है-
q = 17.7 × 10-4 कूलॉम
और चादर का क्षेत्रफल S = 200 मीटर2
इसलिए चादर पर आवेश का पृष्ठ घनत्व
σ = \(\frac{\mathrm{q}}{\mathrm{S}}=\frac{17.7 \times 10^{-4}}{200}\)
σ = 8.85 × 10-6 कूलॉम/मीटर2
इससे 20 सेमी. दूरी पर इसके निकट वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
= \(\frac{\sigma}{2 \epsilon_0}=\frac{8.85 \times 10^{-6}}{2 \times 8.85 \times 10^{-12}}\)
= 5.0 × 105 न्यूटन/कूलॉम

प्रश्न 20.
धातु के एक पतले खोखले गोले (गोलीय कोश) की त्रिज्या 30 सेमी. तथा उस गोलीय कोश पर 500 µC का आवेश है। कोश के केन्द्र से
(i) 1 मीटर की दूरी पर,
(ii) 30 सेमी. दूरी पर,
(iii) 10 सेमी. दूरी पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हल-दिया है R = 30 सेमी = 0.30 मीटर
आवेश q = 500 µC = 500 × 10-6 = 5 × 10-4 कूलॉम
(i) यहाँ r = 1 मीटर > R, अत: प्रेक्षण बिन्दु कोश से बाहर है।
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प्रश्न 21.
12 सेमी. त्रिज्य बाले एक गोलीय वात्सक के पृष्ठ पर 1.6 × 10-7 C का आवेश एकसभम्न रूप से धित्रिस्ल है-
(a) गोले के अन्दर
(b) गोले के ठीक बाहर
(c) गोले के केन्द्र से 18 सेमी. पर अवस्थित किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र क्या हीगा?
उत्तर:
हल- (a) जब बिन्दु गोलीय चालक के भीतर हो, तो r त्रिज्या (r < R) के एक गाउसीय पृष्ठ की कल्पना करते हैं। इस पृष्ठ के अन्दर आवेश शून्य है।
अतः इस पृष्ठ के लिए गाउस नियम से इस पृष्ठ से निर्गत फ्लक्स
Φ = \(\oint \overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \overrightarrow{\Delta \mathrm{S}}=\frac{\Sigma \mathrm{q}}{\epsilon_0}=\frac{0}{\epsilon_0}\)
(b) गोलीय चालक के ठीक बाहर या पृष्ठ पर
E = \(\frac{\mathrm{kQ}}{\mathrm{R}^2}\)
मान रखने पर
यहाँ
K = 9 × 109 Nm2C-2
Q = 1.6 × 10-7C
R = 12 cm = 12 × 10-2m
r = 18 cm = 18 × 10-2m
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प्रश्न 22.
दो एकसमान आवेशित समान्तर अनन्त समतल चादरों ‘1’ व ‘2’ के आवेश घनत्य क्रमशः +σ और -2σ हैं।
(i) इन दोनों चादरों के बीच किसी बिन्दु पर तथा
(ii) इन दोनों चादरों के बाहर परन्तु चादर ‘1’ के निकट किसी बिन्दु पर नेट विद्युत्क्षेत्र का परिमाण और दिशा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. क्लोन शब्द का अर्थ है-
(अ) संतति जनक के एकदम समान हो
(ब) आनुवंशिक रूप से एकसमान हो
(स) आकारिकीय दृष्टि से एकसमान हो
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

2. प्रोटिस्टा तथा मोनेरा में जनन का प्रकार है-
(अ) कलिका
(ब) कोशिका विभाजन
(स) द्विखंडन
(द) कलिकाएँ
उत्तर:
(ब) कोशिका विभाजन

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

3. अमीबा तथा पैरामीशियम में जनन विधि है-
(अ) द्विखंडन
(ब) कोशिका विभाजन
(स) जैम्यूल
(द) कोनिडिया
उत्तर:
(अ) द्विखंडन

4. निम्न में से अलैंगिक जननीय संरचनाएँ हैं-
(अ) कोनिडिया
(ब) कलिका
(स) जैम्यूल
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

5. बंगाल का आतंक ( Terror of Bengal) किसे कहते हैं ?
(अ) स्पंज
(ब) पैरामीशियम
(स) वाटर हायसिंथ
(द) ब्रायोफिल्लम
उत्तर:
(स) वाटर हायसिंथ

6. कायिक प्रवर्धन में पादपकों (Plantlcts) का उत्पत्ति स्थल होता है-
(अ) पर्वसंधि
(ब) पर्व
(स) कक्ष
(द) शीर्ष
उत्तर:
(अ) पर्वसंधि

7. वह पर्ण जिसके फलककोर से अपस्थानिक कलिकाएँ उत्पन्न होती हैं, वह है-
(अ) डहलिया
(ब) बोगेनविलिया
(स) ब्रायोफिल्लम
(द) ब्रायोफाइटा
उत्तर:
(स) ब्रायोफिल्लम

8. वह पादप जो जीवन अवधि में केवल एक बार पुष्प उत्पन्न करता है-
(अ) नारियल
(ब) वाटर हायसिंथ
(स) कटहल
(द) स्ट्रोबिलैन्थस कुन्थिआना
उत्तर:
(द) स्ट्रोबिलैन्थस कुन्थिआना

9. प्राइमेटों में जनन के दौरान चक्र होता है-
(अ) मद चक्र
(ब) स्राव चक्र
(स) ऋतुस्राव चक्र
(द) मौसमी चक्र
उत्तर:
(स) ऋतुस्राव चक्र

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

10. निम्न में से एकलिंगी प्राणी है-
(अ) केंचुआ
(ब) जोंक
(स) टेपवर्म
(द) तिलचट्टा
उत्तर:
(द) तिलचट्टा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
जीवन अवधि से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
प्रत्येक जीव के जन्म से उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक का काल, उस जीव की जीवन अवधि होती है।

प्रश्न 2.
नारियल का वृक्ष उभयलिंगाश्रयी होता है जबकि खजूर का वृक्ष एकलिंगाश्रयी होता है। उन्हें ऐसा क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
नारियल के वृक्ष में नर व मादा पुष्प एक ही पौधे पर पाये जाते हैं, इसलिये उन्हें उभयलिंगाश्रयी कहते हैं परन्तु खजूर के वृक्ष में नर पुष्प व मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर पाये जाने से, उन्हें एकलिंगाश्रयी कहा जाता है।

प्रश्न 3.
प्रोटिस्टा तथा मोनेरा में किस प्रकार से जनन होता है?
उत्तर:
इनमें अलैंगिक जनन होता है। इन जीवों में जनक कोशिका दो भागों में विभक्त होकर नए जीवों को जन्म देती है। अतः इनमें कोशिका विभाजन एक प्रकार से जनन की क्रियाविधि है।

प्रश्न 4.
दो जनन लक्षण लिखिए जो सरीसृपों को उभयचरों की अपेक्षा अधिक सफल बनाते हैं।
उत्तर;
सरीसृप उभयचरों की अपेक्षा अधिक सफल है, क्योंकि-

  • सरीसृप भूमि पर अण्डे देते हैं।
  • सरीसृपों के अण्डों पर कवच होता है जो अण्डों को सूर्य के .. प्रकाश से सूखने से बचाता है।

प्रश्न 5.
कायिक प्रवर्धन करने वाले कुछ पौधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कायिक प्रवर्धन भी एक प्रकार का अलैंगिक जनन है। अनेक पौधे कायिक प्रवर्धन से विकसित होते हैं; जैसे-आलू, अदरक, अगैव, जलकुंभी ( वाटर हायसिंथ), प्याज, शकरकन्द, गन्ना, केला, डहलिया आदि ।

प्रश्न 6.
ऐसे दो पौधों को बताइए जो अपने जीवन काल में केवल एक बार पुष्प उत्पन्न करते हैं। इनमें क्या विशेषता देखी जाती है?
उत्तर:
कुछ पौधे अपने जीवन काल में केवल एक बार ही पुष्प उत्पन्न करते हैं। जैसे बांस में प्रायः 50-100 वर्षों के बाद तथा स्ट्रोबिलैन्थस कुन्थिआना (Strobilanthus Kunthiana ) में 12 वर्षों में एक बार पुष्प उत्पन्न होते हैं। इनमें अधिक संख्या में पुष्प व फल बनकर नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
वृद्धावस्था का क्या मापदंड है?
उत्तर:
प्रजनन आयु की समाप्ति को जीर्णता या वृद्धावस्था के मापदंड के रूप में माना जाता है।

प्रश्न 8.
उभयचरों तथा सरीसृपों में संयुग्मन (Syngamy) कहाँ होती है?
उत्तर:
उभयचरों में बाह्य निषेचन होता है, अतः संयुग्मन की क्रिया जल में होगी, जबकि सरीसृपों में निषेचन आन्तरिक होता है अतः संयुग्मन शरीर के अन्दर होगी।

प्रश्न 9.
एक मॉस ( Moss) का पौधा नर युग्मकों (antherogoids) का निर्माण बड़ी संख्या में करता है परन्तु उसकी तुलना में अण्ड कोशिकाओं की संख्या बहुत कम होती है। क्यों ?
उत्तर:
मॉस में नर युग्मक चल होते हैं जो अचल मादा युग्मक के साथ निषेचित होते हैं। इस प्रक्रिया में नर युग्मक के स्थानान्तरण में अनेक नर युग्मक नष्ट हो जाते हैं, इस कारण इनकी संख्या अधिक होती है ।

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प्रश्न 10.
समयुग्मकी लक्षण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
लैंगिक जनन क्रिया में नर व मादा युग्मक बनते हैं। जब किसी जीव में जैसे कुछ शैवालों में दोनों युग्मक देखने में एक-दूसरे के समान दिखाई देते हैं, तब ऐसे युग्मकों को समयुग्मकी ( Isogametes or Homogametes) कहते हैं।

प्रश्न 11.
अधिकतर लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आकारिकी दृष्टि से किस प्रकार के युग्मक पाये जाते हैं?
उत्तर:
अधिकांश लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आकारिकी दृष्टि से स्पष्ट रूप से दो विभिन्न आकार के युग्मक पाये जाते हैं, इन्हें विषमयुग्मक (Heterogametes) कहते हैं। ऐसे जीवों में नर युग्मकों को पुमणु या शुक्राणु (Antherozoid or Sperms) कहते हैं; जबकि मादा युग्मकों को अंड या डिंब (Egg or Ovum) कहते हैं।

प्रश्न 12.
किन्हीं दो उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) पादपों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कुकरबिट एवं नारियल वृक्ष उभयलिंगाश्रयी के उदाहरण हैं।

प्रश्न 13.
उभयलिंगी या द्विलिंगी प्राणी से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित बताइये ।
उत्तर:
जब किसी प्राणी में नर तथा मादा दोनों जनन अंग एक ही प्राणी में पाये जाते हैं तो उसे उभयलिंगी या द्विलिंगी (Hermaphrodite ) कहते हैं। उदाहरण – स्पंज (Sponge), टेपवर्म (Tapeworm), जोंक (Leech) व केंचुआ (Earthworm) ।

प्रश्न 14.
मानव, चूहा, आलू व प्याज में युग्मकों में पायी जाने वाली गुणसूत्रों की संख्या को बताइये ।
उत्तर:
युग्मकों (Gametes ) से तात्पर्य है कि वे अगुणित (n) होते हैं, अतः इनमें गुणसूत्रों की संख्या निम्न प्रकार से होती है-

जीव का नामयुग्मकों में अगुणित (n) गुणसूत्रों की संख्या
मानव23
चूहा21
आलू24
प्याज16

प्रश्न 15.
युग्मकों के बनने में निहित कोशिका विभाजन विभिन्न जीवों में एक ही समान प्रकार का नहीं होता। ऐसा कहना किस प्रकार न्यायोचित है? बताइए।
उत्तर:
युग्मकों के बनने में निहित कोशिका विभाजन विभिन्न जीवों में विभिन्न प्रकार का होता है। अगुणित जीवों (n) में युग्मकों के बनने में समसूत्री विभाजन होता है क्योंकि पैतृक जीव अगुणित होते हैं और बनने वाले युग्मक भी अगुणित होते हैं। इन जीवों में युग्मनज में अर्द्धसूत्री विभाजन होता है। द्विगुणित (2n ) जीवों में युग्मकों के निर्माण में अर्द्धसूत्री कोशिका विभाजन होता है जिसमें इसके युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या पैतृक जीव के गुणसूत्रों से आधी रह जाती है व निषेचन पश्चात् फिर से गुणसूत्रों की संख्या द्विगुणित हो जाती है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) को समझाइये।
उत्तर:
युग्मनज (Zygote) से भ्रूण (Embryo) के विकास की प्रक्रिया को भ्रूणोद्भव कहते हैं। इस प्रक्रिया में युग्मनज में समसूत्रण (Mitosis) के द्वारा कोशिका विभाजन होता है तथा उसी के साथ कोशिका विभेदीकरण (Cell Differentiation) भी होता है। भ्रूण के विकास के दौरान कोशिका विभाजन के फलस्वरूप कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है, उसी के साथ-साथ कोशिका विभेदीकरण होने से कोशिकाओं के समूह एक निश्चित रूपांतरणों से गुजरकर विशेषीकृत ऊतकों एवं अंगों की रचना करते हैं। इन प्रक्रियाओं के फलस्वरूप जीव का निर्माण होता है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

प्रश्न 2.
अंडप्रजक (Oviparous ) तथा सजीवप्रजक (Viviparous ) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर:
प्राणियों को दो श्रेणी अंडप्रजक तथा सजीवप्रजक में विभक्त किया गया है। यह विभक्तीकरण इस आधार पर किया गया है कि युग्मनज का विकास मादा जनक के शरीर के अन्दर हुआ है या बाहर। अंडप्रजक प्राणियों जैसे कि सरीसृप वर्ग ( Reptiles ) तथा पक्षी आदि के द्वारा निषेचित अंडे पर्यावरण के सुरक्षित स्थानों पर दिये जाते हैं तथा ये कठोर कैल्सियमयुक्त कवच से ढके रहते हैं।

ये अण्डे एक निश्चित निवेशन अवधि (Incubation Period) के पश्चात् स्फुटन द्वारा नये शिशु को जन्म देते हैं। सजीवप्रजक प्राणियों में (अधिकांश स्तनधारी जिसमें मानव भी शामिल है) युग्मनज का विकास मादा जीव के भीतर होकर शिशु का विकास करता है। इस शिशु का निश्चित अवधि तथा विकास के चरणों के पूरा होने के पश्चात् मादा जीव के शरीर से प्रसव के द्वारा बाहर आता है। इस विधि में भ्रूण का सही विकास व संरक्षण होता है, इसी कारण सजीवप्रजक जीवों की उत्तरजीविता के अच्छे अवसर होते हैं।

प्रश्न 3.
पुष्पीय पादपों में निषेचन क्रिया के पश्चात् क्या प्रभाव होता है तथा युग्मनज कहाँ बनता है?
उत्तर:
पुष्पीय पादपों में युग्मनज का निर्माण बीजाण्ड के अंदर होता है। निषेचन के बाद पुष्प के बाह्य दल, पंखुड़ी तथा पुंकेसर मुरझा कर झड़ जाते हैं। युग्मनज से भ्रूण बनता है तथा बीजाण्ड बीज में विकसित हो जाता है। अंडाशय (Ovary) फल में परिवर्तित हो जाता है। अंडाशय की भित्ति से फलभित्ति (Pericarp) बनती है, यह फल को सुरक्षा प्रदान करती है। चित्र में मटर की फली में बीज हैं जो पूर्व में बीजाण्ड थे व बाद में विकसित होकर बीज बन गये हैं। सरसों व टमाटर के अनुप्रस्थ काट में भी यही रचना दिखाई दे रही हैं। बीज फलभित्ति के अन्दर रहते हैं ।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन 1

प्रश्न 4.
समयुग्मक तथा विषमयुग्मक को सउदाहरण व चित्रों की सहायता से समझाइये।
उत्तर:
लैंगिक जनन की प्रक्रिया में युग्मकजनन होता है जिसमें दो प्रकार के नर व मादा युग्मकों का निर्माण होता है। कुछ शैवालों में दोनों प्रकार के युग्मक आकारिकीय दृष्टि से एकसमान दिखाई देते हैं। एकसमान होने से इन्हें नर व मादा में विभक्त नहीं किया जा सकता है, ऐसे युग्मकों को समयुग्मक (Isogametes) कहते हैं। उदाहरण- क्लैडोफोरा शैवाल।

अधिकांश जीवों में आकारिकीय दृष्टि से विभिन्न आकृति के नर व मादा युग्मक बनते हैं। नर युग्मक छोटे, चल (Motile) होते हैं तथा मादा बड़े व अचल (Non-motile) होते हैं। इनमें नर युग्मकों को पुमणु (Antherozoid) या शुक्राणु (Sperms) कहते हैं तथा मादा युग्मकों को अंड (Egg) या डिंब (Ovum) कहते हैं। विभिन्न आकृति के युग्मकों को विषमयुग्मक (Heterogametes) कहते हैं। उदाहरण- फ्यूकस (शैवाल)।

प्रश्न 5.
जीवों में पायी जाने वाली लैंगिकता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
लैंगिकता को स्पष्ट करने हेतु यहाँ पादपों के उदाहरण दिये जा रहे हैं। पादप में नर तथा मादा दोनों जनन संरचनाएँ पाई जाती हैं जब एक ही पौधे में दोनों नर तथा मादा जनन संरचनाएँ हों तो उसे द्विलिंगी (Bisexual) (चित्र अ व ब ) अथवा जब जनन संरचनाएँ भिन्न पादपों पर हों तो एकलिंगी (Unisexual) (चित्र-स) कहते हैं अनेक कवकों में द्विलिंगी अवस्था को दर्शाने के लिए उभयलिंगाश्रयी या समथैलसी (Monoccious or Homothallic) शब्द का प्रयोग करते हैं।

एकलिंगता को दर्शाने के लिये एकलिंगाश्रयी या विषमथैलसी (Dioecious or Heterothallic) शब्द का उपयोग करते हैं। प्रायः पुष्पों में दोनों लिंग (पुंकेसर व स्त्रीकेसर) होते हैं। कुछ पुष्पीय पादपों में अकेला पादप उभयलिंगाश्रयी (नर तथा मादा दोनों लिंगी) हो सकता है और इसमें पैदा होने वाले पुष्प एकलिंगी तथा द्विलिंगी दोनों हो सकते हैं। कुकरबिटा व नारियल वृक्ष उभयलिंगाश्रयी पादपों के उदाहरण हैं। पपीता व खजूर एकलिंगाश्रयी के उदाहरण हैं।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन 2प्राणियों में एकलिंगी व द्विलिंगी अवस्था होती है। केंचुए (Earthworm), स्पंज, टेपवर्म तथा जोंक (Leech) द्विलिंगी प्राणियों के उदाहरण हैं; इनमें दोनों प्रकार के जनन अंग एक ही प्राणी में मिलते हैं। तिलचट्टा (Cockroach) एकलिंगी प्राणी है।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन 3

प्रश्न 6.
निषेचन के प्रकार पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
निषेचन से तात्पर्य है कि नर व मादा का संलयन। यह संलयन जीव के बाहर तथा उसके अन्दर हो सकता है। निषेचन दो प्रकार का होता है – बाह्य निषेचन (External Fertilization) तथा आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) अधिकांश जलीय जीवों (शैवाल तथा मछलियाँ) व जल-स्थल चर प्राणियों में युग्मक संलयन बाहरी माध्यम (जल) में होता है अर्थात् जीव के शरीर के बाहर सम्पन्न होता है इस प्रकार के युग्मक संलयन को बाह्य निषेचन कहते हैं।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

जिन जीवों में बाह्य निषेचन होता है उनके दो लिंगों में व्यापक समकालिता होती है तथा संलयन के अवसर को बढ़ाने के लिये अधिक संख्या में युग्मक निर्मुक्त होते हैं। उदाहरण मेंढक तथा ‘बौनी फिश’ (Bony Fishes ) । इससे बहुत अधिक संख्या में संतानें उत्पन्न होती हैं परन्तु इनका शिकार होते रहने से कम ही संतानें जीवित रहती हैं।

अनेक स्थलीय जीवों जैसे फंजाई, उच्च श्रेणी के प्राणी जैसे- सरीसृप ( Reptiles ), पक्षी तथा स्तनधारी एवं अधिकांश पादप (ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म एवं एंजिओस्पर्म) में युग्मक संलयन जीव शरीर के अंदर सम्पन्न होता है। इस प्रक्रिया को आंतरिक निषेचन कहते हैं।

इन सभी में अंडे की रचना मादा के शरीर के भीतर होती है ऐसे जीवों में नर युग्मक चलनशील होते हैं जो अंडे तक पहुँचते हैं। नर युग्मक के रूप में विशाल संख्या में शुक्राणु बनते हैं। मादा युग्मक अचल अण्ड होते हैं जो कम संख्या में बनते हैं। यद्यपि बीजीय पौधों में नर युग्मक अचल बनते हैं जो परागनली की सहायता से मादा युग्मक तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 7.
क्लोन (Clone) शब्द से आप क्या समझते हैं? कुछ साधारण श्रेणी के जीवों में पाये जाने वाले अलैंगिक जनन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन में जीव संतति उत्पन्न करते हैं। वह उत्पन्न संतति अपने जनक के एकदम समान होती है। आकारिकीय व आनुवंशिक रूप से समान होती है। अतः आकारिकीय तथा आनुवंशिक रूप से एकसमान जीवों के लिये क्लोन शब्द का उपयोग किया जाता है। अलैंगिक जनन सामान्य रूप से एकल जीव, पादप तथा जीव (साधारण जीव) आदि में पाया जाता है प्रोटेस्टा तथा मोनेरा (Protists and Monerans ) में जनक कोशिका दो भागों में विभक्त होकर नये जीवों को जन्म देती है।

अतः इन जीवों में कोशिका विभाजन एक प्रकार से जनन की क्रियाविधि है (अमीबा, पैरामीशियम) अन्य एकल कोशिका जीव द्विखण्डन (Binary Fission) से उत्पन्न होते हैं। यीस्ट में छोटी कलिकाएँ (Buds) उत्पन्न होती हैं जो आरम्भ में तो जनक कोशिका से जुड़ी रहती हैं तथा बाद में पृथक् होकर नये यीस्ट जीव में परिपक्व हो जाती हैं कवक जगत के सदस्य तथा साधारण पादप जैसे शैवाल में विशेष अलैंगिक जनन संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें अलैंगिक चलबीजाणु ( Zoospores) कहते हैं ये रचनाएँ चलनशील होती हैं। अन्य अलैंगिक संरचनाओं में कोनिडियम (पैनीसीलियम), कलिका (हाइड्रा ) तथा जैम्यूल (स्पंज ) होते हैं।

प्रश्न 8.
वाटर हायासिंथ को बंगाल के आतंक के नाम से क्यों जाना जाता है? कारण सहित समझाइये।
उत्तर:
वाटर हायासिंध को बंगाल के आतंक के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह ठहरे जल में सर्वाधिक वृद्धि करने वाला खरपतवार है। यह जल से 0 खींच लेता है जिसके परिणामस्वरूप मछलियाँ मर जाती हैं। इसमें कायिक प्रवर्धन द्रुतगति से होती है और अल्प समय में ही सम्पूर्ण जलाशय में फैल जाता है और अपने आप से जलाशय को ढक लेता है और इससे छुटकारा पाना बहुत ही कठिन होता है। उक्त कारणों के कारण इसे बंगाल के आतंक के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 9.
सजीव प्रजक जीवों में संतानों की उत्तरजीविता की अधिक सम्भावनाएँ हैं। कारण सहित समझाइये।
अथवा
“सजीव प्रजक प्राणियों की संतानों की उत्तरजीविता अधिक जोखिमपूर्ण नहीं होता है।” दो कारण बताते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
अथवा
अण्डप्रजक की तुलना में सजीवप्रजक प्राणियों से शिशु की उत्तरजीविता के सुअवसर क्यों बढ़ जाते हैं? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सजीव प्रजक प्राणियों में (अधिकांश स्तनधारी जिसमें मानव भी शामिल हैं) युग्मनज का विकास मादा जीव के भीतर होकर शिशु का विकास करता है। इस शिशु का निश्चित अवधि तथा विकास के चरणों के पूरा होने के पश्चात् मादा जीव के शरीर से प्रसव के द्वारा बाहर आता है। इस विधि में भ्रूण का सही विकास व संरक्षण होता है, इसी कारण सजीव प्रजक जीवों की उत्तरजीविता के अच्छे अवसर होते हैं।

प्रश्न 10.
“अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति को क्लोन कहना अधिक उपयुक्त है।” दो कारण बताते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन द्वारा जो संतति उत्पन्न होती है वह केवल एक-दूसरे के समरूप ही नहीं बल्कि अपने जनक के एकदम समान होती हैं। आकारिकीय तथा आनुवंशिक रूप से एकसमान होती है। अतः आकारिकीय व आनुवंशिक रूप से एकसमान जीवों के लिए क्लोन शब्द की रचना की गई है।

प्रश्न 11.
बाह्य निषेचन एवं आंतर निषेचन में कोई चार अन्तर लिखिए ।
उत्तर:

बाह्य निषेचन (External fertilization)आन्तरिक निषेचन (Internal fertilization)
इसमें युग्मकसंलयन बाह्य माध्यम में होता है।आन्तरिक माध्यम में होता है।
इस प्रकार के निषेचन में दोनों प्रकार के युग्मक माध्यम में छोड़ दिये जाते हैं।इसमें केवल नर युग्मक ही माध्यम में छोड़े जाते हैं।
बाह्य निषेचन के द्वारा उत्पन्न हुए जीवों की संख्या अधिक होती है।जीवों की संख्या कम होती है ।
इस प्रकार के निषेचन में दोनों प्रकार के युग्मक अधिक संख्या में उत्पन्न किये जाते हैं।इसमें मादा युग्मक कम संख्या में परन्तु नर युग्मक अधिक संख्या में उत्पन्न किये जाते हैं।

प्रश्न 12.
लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में कोई दो अन्तर लिखिए। ” कायिक जनन अलैंगिक जनन ही होता है।” समझाइये।
उत्तर:

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
प्रजनन में दो विपरीत लिंग वाले जनक भाग लेते हैं।इसमें एकल जीव संतति उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।
इसमें युग्मक संलयन होता है।युग्मक संलयन नहीं होता है।

कायिक जनन में दो जनक भाग नहीं लेते हैं। इसमें पादप शरीर का कोई भी कायिक भाग उसके शरीर से पृथक् होकर, अनुकूल परिस्थितियों में नये पौधे का निर्माण करता है । अतः कायिक जनन, अलैंगिक जनन की एक विधि है ।

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निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
लैंगिक जनन को विस्तार से समझाते हुये, इसमें होने वाली विभिन्न घटनाओं का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
लैंगिक जनन में नर तथा मादा युग्मक ( Gametes) का निर्माण होता है तथा ये युग्मक आपस में संलयित होकर द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण कर नये जीव का विकास करते हैं । यह क्रिया एक जटिल विस्तृत एवं धीमी प्रक्रिया है। इसके परिणामस्वरूप जो संतति उत्पन्न होती है, वह अपने जनकों के अथवा आपस में भी समरूप नहीं होती है।

प्रत्येक जीव परिपक्वता अवस्था प्राप्त करने के बाद लैंगिक जनन करता है। यद्यपि लैंगिक जनन से संबद्ध संरचनाएँ जीवों में एकदम भिन्न होती हैं तथा यह क्रिया विस्तृत व जटिल होने के बावजूद भी जीवों में लैंगिक जनन की घटनाएँ एक नियमित क्रम का अनुपालन करती हैं। इन घटनाओं को तीन भिन्न-भिन्न अवस्थाओं निषेचन पूर्व, निषेचन तथा निषेचन – पश्चात् में विभक्त किया जा सकता है।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन 4

(अ) निषेचन पूर्व घटनाएँ (Pre-fertilization Events) – इसके अन्तर्गत युग्मकों के निषेचन पूर्व दो मुख्य घटनाएँ युग्मकजनन तथा युग्मक स्थानांतरण होती हैं।
(i) युग्मकजनन (Gamctogenesis) – युग्मकों के निर्माण को युग्मकजनन कहते हैं। युग्मक अगुणित होते हैं क्योंकि इनके निर्माण के समय अर्धसूत्री विभाजन होता है कुछ शैवालों में दोनों प्रकार ( नर व मादा) के युग्मक एकसमान दिखाई देते हैं तो उन्हें समयुग्मक (Isogametes) कहते हैं।

अधिकांश लैंगिक जनन करने वाले जीवों में दोनों युग्मक आकारिकी दृष्टि से भिन्न होते हैं, इन्हें विषमयुग्मक (Heterogametes) कहते हैं नर युग्मकों को पुमणु या शुक्राणु (Antherozoid or Sperms) तथा मादा युग्मकों को अंड या डिंब (Egg or Ovum) कहते हैं। लैंगिक जनन अंगों को धारण करने के आधार पर जीवों को उभयलिंगाश्रयी (Monoccious) अथवा एकलिंगाश्रयी (Dioecious ) कहते हैं।

(ii) युग्मक स्थानांतरण ( Gamete Transfer) – निषेचन क्रिया सम्पन्न होने के लिए दोनों युग्मक एक-दूसरे के पास आते हैं। प्रायः जीवों में नर युग्मक चलनशील तथा मादा अचल व स्थानबद्ध होते हैं। यद्यपि कुछ कवकों व शैवालों में दो प्रकार के युग्मक चलनशील होते हैं। इन्हें एक माध्यम की आवश्यकता होती है, जिसमें होकर नर युग्मक गति करता है ।

प्रायः साधारण पादपों जैसे शैवाल, ब्रायोफाइट्स तथा टैरिडोफाइट्स में जल माध्यम की आवश्यकता होती है नर युग्मक गति करके मादा युग्मक के पास जाता है। नर युग्मक संख्या में अधिक तथा मादा युग्मक तुलनात्मक कम बनते हैं। बीजीय पादपों में परागकण (Pollen Grain) नर युग्मकों के वाहक होते हैं तथा मादा युग्मक अर्थात् अंड, अण्डप के अन्दर होते हैं।

परागकण परागण (Pollination) क्रिया द्वारा पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) पर स्थानांतरित हो जाते हैं। परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर परागनली बनाते हैं। परागनली नर युग्मकों को अपने साथ लेती हुई अंडप के अन्दर प्रवेश कर जाती है तथा नर युग्मकों को छोड़ देती है। एकलिंगाश्रयी प्राणियों में युग्मकों के स्थानांतरण हेतु विशेष प्रकार की क्रियाविधि विकसित करनी पड़ती है।

(ब) निषेचन ( Fertilization) – दो युग्मकों के संलयन (Fusion) की क्रिया को निषेचन कहते हैं। कुछ जीवों में बिना निषेचन के ही मादा युग्मक नये जीव में विकसित हो जाता है। उदाहरण- रोटीफर्स (Rotifers ), मधुमक्खियाँ, कुछ छिपकलियाँ तथा पक्षी (टर्की) आदि । इस प्रकार की घटना को अनिषेकजनन (Parthenogenesis) कहते हैं।

कुछ जीवों जैसे शैवाल व मछलियों में युग्मक संलयन बाहरी माध्यम (जल) अर्थात् जीव के शरीर के बाहर होता है, इसे बाह्य निषेचन (External Fertilization) कहते हैं । स्थलीय जीवों, उच्च श्रेणी के प्राणी, अधिकांश पादपों में यह संलयन जीव के शरीर के भीतर होता है, अतः इसे आंतरिक निषेचन कहते हैं।

(स) निषेचन – पश्च घटनाएँ (Post-fertilization Events) – निषेचन पश्चात् द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है। बाह्य निषेचन करने वाले सभी जीवों में युग्मनज का निर्माण बाहरी माध्यम में होता है जबकि आंतरिक निषेचन वालों में उनके शरीर के भीतर युग्मनज बनता है। युग्मनज के अंगों का विकास जीव के अपने जीवन-चक्र तथा वहाँ के पर्यावरण पर निर्भर करता है।

युग्मनज अपने चारों ओर एक मोटी भित्ति स्रावित करता है जिससे उसकी शुष्कन व क्षति से रक्षा होती है। युग्मनज के अंकुरण पूर्व कुछ विश्रांति समय भी होता है । द्विगुणित जीवन- -चक्र वाले जीवों में युग्मनज अर्धसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर अगुणित अंडाणु का निर्माण करता है जिससे अगुणित जीव बनता है। इस प्रकार युग्मनज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के जीव के बीच की महत्त्वपूर्ण कड़ी है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) – युग्मनज से भ्रूण के विकास को भ्रूणोद्भव कहते हैं। इस दौरान युग्मनज में कोशिका विभाजन तथा कोशिका विभेदन (Cell Differentiation) होता है। कोशिका विभाजन से कोशिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो कोशिका विभेदीकरण से कोशिकाओं के समूह एक निश्चित रूपांतरणों से गुजरकर विशेषीकृत ऊतकों एवं अंगों की रचना करते हैं।

इसके फलस्वरूप जीव का निर्माण होता है। प्राणियों को युग्मनज के विकास आधार पर अंडप्रजक (Oviparous) तथा सजीवप्रजक (Viviparous ) में विभक्त किया गया है । यदि युग्मनज का विकास मादा जनक के शरीर से बाहर होता है तो उसे अंड प्रजक कहते हैं, उदाहरण सरीसृप वर्ग तथा पक्षी ।

सजीवप्रजक में युग्मनज का विकास जीव के शरीर के भीतर होता है। सजीवप्रजक में भ्रूण की सही देखभाल तथा संरक्षण होता है जिससे यह विधि जीवों के उत्तरजीविता हेतु उत्तरदायी है। पुष्पीय पौधों में भी युग्मनज का निर्माण बीजांड के अंदर होता है। इन पौधों में युग्मनज भ्रूण में तथा बीजाण्ड बीज में विकसित होता है एवं अंडाशय फल के रूप में बनता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. कुछ पादपों में मादा युग्मक बिना निषेचन के भ्रूण में परिवर्तित हो जाता है। इस घटना को क्या कहा जाता है ? ( NEET-2019 )
(अ) अनिषेकजनन
(ब) स्वयुग्मन
(स) अनिषेक फलन
(द) युग्मक संलयन
उत्तर:
(अ) अनिषेकजनन

2. ‘ऑफसेटस’ किसके द्वारा उत्पादित होते हैं ? ( NEET 2018)
(अ) अनिषेक फलन द्वारा
(ब) सूत्री विभाजन द्वारा
(स) अर्धसूत्री विभाजन द्वारा
(द) अनिषेकजनन द्वारा
उत्तर:
(ब) सूत्री विभाजन द्वारा

3. निम्नलिखित में से किसमें उसके जीवन काल में केवल एक बार ही पुष्पन होता है? (NEET-2018)
(अ) आम
(ब) कटहल
(स) बाँस स्पेशीज
(द) पपीता
उत्तर:
(स) बाँस स्पेशीज

4. निम्नलिखित में से कौनसा विभिन्नता वाले नये आनुवंशिक संयोजन के उत्पन्न करता है? (NEET-2016)
(अ) लैंगिक जनन
(ब) बीजाण्डकायिक बहुभ्रूणता
(स) कायिक जनन
(द) अनिषेकजनन
उत्तर:
(अ) लैंगिक जनन

5. कॉलम – I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गये कूट का प्रयोग कर सही विकल्प को चुनिए । (NEET-2016)

कॉलम – Iकॉलम-II
1. आपस में जुड़े स्त्रीकेसर(i) युग्मकजनन
2. युग्मकों का बनना(ii) स्त्रीकेसर
3. उपचार ऐस्कोमाइसिटीज के कवक तन्तु(iii) मुक्ताण्डपी
4. एकलिंगी मादा पुष्प(iv) द्विकेन्द्रकी

उत्तर:

4. एकलिंगी मादा पुष्प(iv) द्विकेन्द्रकी

6. निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही नहीं है? (NEET-2016)
(अ) आलू, केला और अदरक में पादयक रूपान्तरिक तने में उपस्थित पर्वों से उत्पन्न होते हैं।
(ब) रुके हुए जल में उगती हुई जल हायसिन्थ जल से ऑक्सीजन खींच लेती है जिससे मछलियों की मृत्यु हो जाती है।
(स) अलैंगिक प्रजनन द्वारा उत्पन्न संतानों को क्लोन कहा जाता है ।
(द) सूक्ष्मदर्शीय, चल अलैंगिक प्रजनन संरचनायें, जल बीजाणु कहलाती हैं।
उत्तर:
(अ) आलू, केला और अदरक में पादयक रूपान्तरिक तने में उपस्थित पर्वों से उत्पन्न होते हैं।

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7. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही रूप से नहीं मिलाया गया है ? (NEET-2015)

जनन का प्रकारउदाहरण
(अ) द्विखण्डनसारगेसम
(ब) कोनिडियापेलीसिलियम
(स) भूस्तारिका (ऑफसेट)वाटर हायसिन्थ
(द) राइजोमकेला

उत्तर:

(अ) द्विखण्डनसारगेसम

9. सामान्यतः लैंगिक जनन का उत्पाद क्या बनाता है? (NEET-2013)
(अ) बीज की लम्बी जीवन क्षमता
(ब) प्रवृद्धि सुसु
(स) नये आनुवंशिक संयोग जो विभिन्नता की ओर अग्रसर होते हैं।
(द) विशाल जीव संहिता
उत्तर:
(द) विशाल जीव संहिता

10. अर्धसूत्री विभाजन कहाँ होता है? (NEET-2013)
(अ) अर्धसूत्री कोशिका
(स) जेम्यूल
(ब) कोनिडिया
(द) गुरुबीजाणु
उत्तर:
(अ) अर्धसूत्री कोशिका

11. निम्नलिखित में से किस एक को सही मिलाया गया है? (NEET-2012)
(अ) प्याज- बल्ब
(ब) अदरक- अन्तः भूस्तारी
(स) क्लेमाइडोमोनास – कोनिडिया
(द) भीस्ट – चल बीजाणु
उत्तर:
(अ) प्याज- बल्ब

12. आले के कंद में जिन संरचनाओं को “आँखें” कहते हैं। वे क्या होती हैं? (NEET-2011)
(अ) मूल कलिकाएँ
(ब) पुष्प कलिकाएँ
(स) प्ररोह कलिकाएँ
(द) कक्षीय कलिकाएँ
उत्तर:
(द) कक्षीय कलिकाएँ

13. निम्न में से कौनसा पुष्पीय भाग निषेचन के बाद फल भित्ति (Pericarp) बनाता है। (MPPMT-2009 ORISSA JEE-2011)
(अ) भ्रूणपोष
(ब) बाह्य अध्यावरण
(स) अण्डाशय भित्ति
(द) अन्त: अध्यावरण
उत्तर:
(स) अण्डाशय भित्ति

14. जलकुम्भी में कायिक प्रवर्धन होता है- (MP PMT-2010)
(अ) तनों द्वारा
(ब) जड़ों द्वारा
(स) पत्तियों द्वारा
(द) जननांगों द्वारा
उत्तर:
(अ) तनों द्वारा

15. क्लोन, स्वयं का समूह है जिसे प्राप्त किया जाता है- (DPMT-2010)
(अ) स्वपरागण द्वारा
(ब) संकरण द्वारा
(स) कायिक जनन द्वारा
(द) परपरागण द्वारा
उत्तर:
(स) कायिक जनन द्वारा

16. पिस्टियों में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है? (NEET 2010, CBSE PMT (Main) 2010)
(अ) भूस्तारिका
(ब) अपरिभूस्तारी
(स) अंत: भूस्तारी
(द) भूस्तारी
उत्तर:
(अ) भूस्तारिका

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17. पुदीने में कायिक प्रवर्धन किससे होता है? (CBSE, PMT-2009, NEET-2009)
(अ) अंत: भूस्तारी
(ब) उपरिभूस्तारी
(स) भूस्तारिका
(द) प्रमंद
उत्तर:
(अ) अंत: भूस्तारी

18. केला बीज रहित फल है यह उत्पन्न होता है- (BIHAR CECE-2006, WBJEE-2009)
(अ) अलैंगिक जनन के द्वारा
(ब) अनेषक जनन के द्वारा (पार्थिनोमार्पिक के द्वारा)
(स) त्रिगुणित के द्वारा
(द) परपरागण द्वारा
उत्तर:
(ब) अनेषक जनन के द्वारा (पार्थिनोमार्पिक के द्वारा)

19. बिना निषेचन से प्राप्त फल को कहते हैं या अण्डाशय बिना निषेचन के फल (Haryana PMT-2005, RPMT-2006, CPMT-2009)
(अ) अनिषेक फल
(ब) अनिषेकजनन
(स) बहुभ्रूणीयता
(द) पॉलीगेजी
उत्तर:
(अ) अनिषेक फल

20. निषेचन के बाद अण्डाशय परिवर्तित हो जाता है- (J&K CET-2008)
(अ) भ्रूण में
(ब) एण्डोरचर्म में
(स) फल में
(द) बीज में
उत्तर:
(स) फल में

21. निम्न युग्म के दोनों पौधे पत्ती द्वारा कायिक जनन करते हैं- (CBSE PMT 2005 NEET 2005)
(अ) ब्रायोफिल्लम और कालेनचोई
(ब) क्राइसेन्थियम और एगेव
(स) एगेव और कालेनचोई
(द) एस्पेरेगस और ब्रायोफिल्लम
उत्तर:
(अ) ब्रायोफिल्लम और कालेनचोई

22. अण्डयुग्मकों में निषेचन प्रक्रिया के दौरान ( NEET 2004)
(अ) गतिविहीन, एक छोटा मादा युग्मक और एक गतिशील नर युग्मक ।
(ब) एक बड़ा, गतिहीन मादा युग्मक और एक छोटा गतिशील नर युग्मक ।
(स) एक बड़ा, गतिविहीन मादा युग्मक और एक छोटा गतिविहीन नर युग्मक।
(द) एक बड़ा, गतिशील मादा युग्मक और एक छोटा गतिविहीन नर-युग्मक ।
उत्तर:
(अ) गतिविहीन, एक छोटा मादा युग्मक और एक गतिशील नर युग्मक ।

23. निम्न में से किस एक पौधे का उपयोग ‘पर्ण अपस्थानिक कलिका’ के रूप में कायिक प्रवर्धन के लिए किया जाता है- (AIEEE-2004)
(अ) केला
(ब) अदरक
(स) ब्रायोफिल्लम
(द) कोलोकेशिया
उत्तर:
(स) ब्रायोफिल्लम

24. पुनरुद्भवन के दौरान, एक अंग का दूसरे अंग में रूपान्तरण क्या कहलाता है? (NEET-2001)
(अ) सारफोजेनिसिस
(ब) एपिमार्फोसिस
(स) मार्फेलैम्सिस
(द) एक्रीएशनरी वृद्धि
उत्तर:
(ब) एपिमार्फोसिस

25. नर केन्द्रक के मादा केन्द्रक के साथ मिलने की क्रिया को कहा जाता है- (MP PMT-1995)
(अ) युग्मक संलयन (Syngamy)
(ब) त्रिसंयोजन (Triple-fusion )
(स) द्विनिषेचन (Double-fertilization)
(द) संयुग्मन (Conjugation)
उत्तर:
(अ) युग्मक संलयन (Syngamy)

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26. परागण की सही परिभाषा है- (AFMC-1994)
(अ) एन्थर से स्टिगमा तक परागकणों का स्थानान्तरण
(ब) परागकण का अंकुरण
(स) बीजाण्ड में परागनली की वृद्धि
(द) कीटों का पुष्पों पर आना
उत्तर:
(अ) एन्थर से स्टिगमा तक परागकणों का स्थानान्तरण

27. प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले अनिषेक फल (Parthino Carpic Fruit) है- (CPMT-1988)
(अ) अमरूद
(ब) आम
(स) केला
(द) सेब
उत्तर:
(स) केला

28. क्लोन, स्वयं का समूह है जिसे प्राप्त किया जाता है- (DPMT-1986)
(अ) स्वपरागण द्वारा
(ब) संकरण द्वारा
(स) कायिक प्रवर्धन द्वारा
(द) परपरागण द्वारा
उत्तर:
(स) कायिक प्रवर्धन द्वारा

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