Class 12

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

प्रश्न 16.1.
हमें औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
औषधों (Drugs) का वर्गीकरण विभिन्न प्रकार से किया जाता है क्योंकि औषधों से सम्बन्धित विभिन्न व्यक्तियों के लिए यह उपयोगी होता. है। जैसे भेषजगुणविज्ञानीय (फार्माकोलोजिकल) प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे इन्हें किसी बीमारी से सम्बन्धित सभी औषधों की जानकारी हो जाती है। इसी प्रकार रासायनिक संरचना या लक्ष्य अणुओं (Molecular targets) पर आधारित वर्गीकरण एक केमिस्ट (रसायनज्ञ ) के लिए उपयोगी होता है जो औषध का संश्लेषण करता है।

प्रश्न 16.2.
औषध रसायन के पारिभाषिक शब्द, लक्ष्य- अणु अथवा औषध – लक्ष्य को समझाइए ।
उत्तर:
औषध रसायन में लक्ष्य- अणु या औषध – लक्ष्य (Target Molecule) वे वृहद् अणु (जैव अणु) होते हैं जिनसे औषधि क्रिया करके चिकित्सीय प्रभाव ( therapeutic effect) दर्शाती है, जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड तथा न्यूक्लीक अम्ल ।

प्रश्न 16.3.
उन वृहद अणुओं के नाम लिखिए जिन्हें औषध- लक्ष्य चुना जाता है।
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड तथा न्यूक्लीक अम्ल वे वृहद् अणु हैं जिन्हें औषध-लक्ष्य चुना जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

प्रश्न 16.4.
बिना डॉक्टर से परामर्श लिए दवाइयाँ क्यों नहीं लेनी चाहिए?
उत्तर:
बिना डॉक्टर से परामर्श लिए दवाइयाँ नहीं लेनी चाहिए क्योंकि अनुशंसित (Recommended ) मात्रा से अधिक मात्रा का उपयोग करने पर अधिकांश दवाइयाँ विष की भांति कार्य करती हैं। केवल डॉक्टर ही बीमारी का सही निदान (Diagnosis) करके सही दवा की उचित मात्रा बता सकता है।

प्रश्न 16.5.
‘रसायन चिकित्सा’ शब्द की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
रसायन चिकित्सा वह चिकित्सा है जिसमें रसायनों द्वारा रोगों का इलाज किया जाता है।

प्रश्न 16.6.
एन्जाइम की सतह पर औषध (Drugs) को थामने के लिए कौन से बल कार्य करते हैं?
उत्तर:
एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिए आयनिक बंध, हाइड्रोजन बंध, वान्डरवालस बल या द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल कार्य करते हैं।

प्रश्न 16.7
प्रतिअम्ल एवं प्रति एलर्जी औषध हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं परंतु ये एक-दूसरे के कार्य में बाधक क्यों नहीं होतीं?
उत्तर:
प्रतिअम्ल (antacids) तथा प्रतिएलर्जी औषध (antiallergic drugs) एक-दूसरे के कार्य में बाधक नहीं होतीं क्योंकि ये अलग-अलग ग्राहियों (Receptors) पर कार्य करती हैं। अतः प्रतिहिस्टैमिन (antihistamines) आमाशय के अम्ल स्रवण पर प्रभाव नहीं डालती क्योंकि यह आमाशय की दीवारों में स्थित ग्राहियों से क्रिया नहीं करती।

प्रश्न 16.8.
नॉरऍड्रिनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए किस प्रकार की औषध की आवश्यकता होती है? दो औषधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
नॉरऍड्रिनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए वे औषध लेते हैं जो उस एन्जाइम को संदमित (Inhibit) करती हैं जो नारएड्रिनेलिन के विघटन ( निम्ननीकरण) को उत्प्रेरित करता है। जब यह एन्जाइम संदमित हो जाता है तो इस महत्वपूर्ण तंत्रकीय संचारक (Neurotransmitter) का उपापचयन (Metabolism) धीरे होता है तथा यह अपने ग्राही को लम्बे समय तक सक्रिय रख सकता है। इससे अवसाद (Depression) का असर कम हो जाता है।

इप्रोनाइजिड तथा फिनल्जिन (नारडिल) ऐसी दो औषध हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

प्रश्न 16.9.
वृहद् – स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी शब्द से आप क्या समझते हैं? समझाइए।
उत्तर:
जीवाणु अथवा अन्य सूक्ष्मजीवियों का वह परास (range). जिस पर प्रतिजैविक (Antibiotic) का प्रभाव होता है उसे प्रतिजीवाणु (प्रतिजैविक) का स्पेक्ट्रम कहते हैं। जो प्रतिजीवाणु ग्रैम-ग्राही (ग्रैम पॉजिटिव ) तथा ग्रैम-अग्राही (ग्रैम नेगेटिव) दोनों प्रकार के जीवाणुओं के विस्तृत प का विनाश या निरोध (Inhibition) करके बहुत से संक्रमणों को ठीक कर देते हैं इन्हें वृहद् या विस्तृत स्पेक्ट्रम (ब्रॉड स्पेक्ट्रम) जीवाणुनाशी (प्रतिजीवाणु) कहते हैं। उदाहरण- क्लोरैम्फेनिकॉल, इसे न्यूमोनिया, टाइफाइड, पेचिश, मूत्र. संक्रमण, मेनिनजाइटिस ( मस्तिष्क ज्वर) में प्रयुक्त करते हैं।

प्रश्न 16.10.
पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी (रोगाणुनाशी) किस प्रकार से भिन्न हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पूतिरोधी तथा विसंक्रामी (संक्रमणहारी) ऐसे रसायन होते हैं जो या तो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं।

पूतिरोधियों (Antiseptic) को सजीव ऊतकों, जैसे घाव, चोट तथा अल्सर पर लगाया जाता है। फ़्यूरासिन तथा सोफ्रामाइसिन इसके मुख्य उदाहरण हैं।

संक्रमणहारी (रोगाणुनाशी) ( Disinfectant) भी सूक्ष्मजीवियों को नष्ट करते हैं तथा इनका प्रयोग निर्जीव वस्तुओं जैसे- फ़र्श, नालियाँ तथा यंत्रों को रोगाणुमुक्त करने में प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण- फ़ीनॉल का एक प्रतिशत विलयन।

प्रश्न 16.11.
सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन सोडियम हाइड्रोजन- कार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में श्रेष्ठ प्रतिअम्ल क्यों हैं?
उत्तर:
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के कारण आमाशय क्षारीय हो जाता है जिसके कारण अम्ल का उत्पादन अधिक होता है तथा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड जैसे प्रतिअम्लों से केवल रोग के लक्षण कम होते हैं, कारण नहीं इसलिए सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन को प्रति अम्ल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि ये हिस्टैमिन की क्रिया को रोककर अम्ल के उत्पादन को ही रोक देते हैं। अतः ये श्रेष्ठ प्रतिअम्ल हैं।

प्रश्न 16.12.
एक ऐसे पदार्थ का उदाहरण दीजिए जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी, दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर:
फीनॉल एक ऐसा पदार्थ है जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी, दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। सांद्रता में परिवर्तन से वही पदार्थ पूतिरोधी अथवा विसंक्रामी (संक्रमणहारी) का कार्य कर सकता है। फीनॉल का 0.2 प्रतिशत विलयन पूतिरोधी होता है जबकि इसका एक प्रतिशत विलयन विसंक्रामी ( रोगाणुनाशी) होता है।

प्रश्न 16.13.
डेटॉल के प्रमुख संघटक कौनसे हैं ?
उत्तर:
डेटॉल के प्रमुख संघटक क्लोरोज़ाइलिनॉल तथा टपनिऑल होता है।

प्रश्न 16.14.
आयोडीन का टिंक्चर क्या होता है? इसके क्या उपयोग हैं?
उत्तर:
आयोडीन का ऐल्कोहॉल-जल मिश्रण में 2.3 प्रतिशत विलयन आयोडीन का टिंक्चर कहलाता है। इसे घाव पर लगाते हैं तथा यह पूतिरोधी होता है।

प्रश्न 16.15.
खाद्य पदार्थ परिरक्षक क्या होते हैं?
उत्तर:
खाद्य पदार्थों को पड़ा रखने पर उनमें सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण ये खराब हो जाते हैं। अतः वे पदार्थ जिन्हें खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। उन्हें खाद्य परिरक्षक कहते हैं।

कुछ सामान्य परिरक्षक निम्नलिखित हैं- साधारण नमक, चीनी, वनस्पति तेल, सोडियम बेन्जोएट (C6H5COONa), सॉर्बिक अम्ल तथा प्रोपेनॉइक अम्ल के लवण |

सोडियम बेन्जोएट का प्रयोग सीमित मात्रा में किया जाता है क्योंकि यह शरीर द्वारा उपापचयित हो जाता है।

एक अच्छे खाद्य परिरक्षक में निम्नलिखित गुण होने चाहिये-

  • खाद्य पदार्थों पर इनका लम्बे समय तक असर रहना चाहिए ।
  • ये स्वादहीन होने चाहिए।
  • इन्हें अल्प मात्रा में ही प्रयुक्त किया जाना चाहिए।
  • इनकी खाद्य पदार्थों से कोई क्रिया नहीं होनी चाहिए ।
  • इनके प्रयोग से जलन, अम्लता, एलर्जी, गैस तथा पित्त नहीं होनी चाहिए।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

प्रश्न 16.16.
ऐस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित क्यों है?
उत्तर:
ऐस्पार्टेम एक कृत्रिम मधुरक है जिसका प्रयोग केवल ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक ही सीमित है, क्योंकि इसे खाना बनाने के ताप तक गर्म करने पर यह विघटित हो जाता है।

प्रश्न 16.17.
कृत्रिम मधुरक क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वे पदार्थ जो शर्करा (Sugar) के स्थान पर मधुरक (Sweet- ening agent) के रूप में प्रयोग में लिए जाते हैं लेकिन उनका कोई पोषण मान नहीं होता, उन्हें कृत्रिम मधुरक कहते हैं। सैकरीन (ऑर्थोसल्फोबेन्जीनीमाइड) तथा ऐस्पार्टेम कृत्रिम मधुरकों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 16.18.
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मधुरकों के नाम क्या हैं?
उत्तर:
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला मुख्य मधुरक सैकरीन (ऑर्थोसल्फोबेन्जीनीमाइड) है क्योंकि इसका कोई पोषण मान नहीं होता तथा यह शरीर से अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र द्वारा उत्सर्जित हो जाता है। यह पूर्णतः अक्रिय तथा अहानिकारक होता है। इसके अतिरिक्त सुक्रालोस को भी इसके लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 16.19.
ऐलिटेम को कृत्रिम मधुरक की तरह उपयोग में लाने पर क्या समस्याएँ होती हैं?
उत्तर:
ऐलिटेम एक अधिक प्रबल कृत्रिम मधुरक है जो कि सूक्रोस से 2000 गुना अधिक मीठा होता है। यह स्थायी होता है लेकिन इसके द्वारा- उत्पन्न मिठास को नियंत्रित करना कठिन होता है।

प्रश्न 16.20.
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक किस प्रकार से श्रेष्ठ हैं?
उत्तर:
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक श्रेष्ठ होते हैं क्योंकि ये मृदु एवं कठोर दोनों प्रकार के जल में उपयोग किए जा सकते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी झाग बनाते हैं क्योंकि इनके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण जल में विलेय होते हैं अतः ये अवशेष नहीं बनाते। अपमार्जकों को अम्लीय माध्यम में भी प्रयुक्त किया जा सकता है। साबुनों का विलयन क्षारीय होता है जबकि अपमार्जकों का विलयन उदासीन होता है अतः इन्हें ऊनी, रेशमी जैसे कोमल वस्त्रों को धोने के लिए भी प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 16.21.
निम्नलिखित शब्दों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा समझाइए-
(क) धनात्मक अपमार्जक
(ख) ऋणात्मक अपमार्जक
(ग) अनआयनिक अपमार्जक ।
उत्तर:
संश्लिष्ट अपमार्जक वे शोधन अभिकर्मक (Cleansing Agents ) होते हैं जिनमें साबुन के सभी गुण पाए जाते हैं लेकिन रासायनिक दृष्टि से ये साबुन नहीं होते हैं। अतः इन्हें साबुन रहित साबुन या सिन्डेट्स भी कहा जाता है।

अपमार्जक कठोर जल में भी झाग बनाते हैं अतः इन्हें कठोर तथा मृदु दोनों प्रकार के जल में उपयोग में लिया जा सकता है।

संश्लिष्ट अपमार्जक तीन प्रकार के होते हैं-
(a) धनायनी अपमार्जक
(b) ऋणायनी अपमार्जक
(c) अनआयनिक अपमार्जक ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 1
(a) धनायनी अपमार्जक ( Cationic Detergents ) – धनायनी अपमार्जक एमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड आयनों के साथ बने चतुष्क अमोनियम लवण होते हैं। इनमें धनात्मक भाग में लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला तथा नाइट्रोजन परमाणु पर धन आवेश होता है। अतः इन्हें धनायनी अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण – सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड ।

धनायनी अपमार्जकों को बालों के कन्डीशनरों में प्रयुक्त किया जाता है तथा इनमें जीवाणुनाशक गुण पाया जाता है। महंगे होने के कारण इनका उपयोग सीमित मात्रा में होता है।

(b) ऋणायनी अपमार्जक (Anionic Detergents ) – ऋणायनी अपमार्जक लम्बी श्रृंखलायुक्त सल्फोनीकृत ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सोडियम लवण होते हैं। जैसे- सोडियम p-ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट तथा सोडियम लॉरिल सल्फोनेट या सल्फेट । दीर्घ श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉलों की सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के साथ अभिक्रिया कराने पर पहले ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फेट बनते हैं जिनकी क्रिया क्षार से कराने पर ऋणायनी अपमार्जक बनते हैं। इसी प्रकार ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट, ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनिक अम्लों की क्षार के साथ क्रिया से प्राप्त होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 2
ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेटों के सोडियम लवण महत्त्वपूर्ण ऋणायनी अपमार्जक होते हैं। ऋणायनी अपमार्जकों में इनका ऋणात्मक भाग शोधन (Cleansing) क्रिया में भाग लेता है। ये सामान्यतः घरेलू उपयोग में आते हैं। ऋणायनी अपमार्जक दंतमंजन में भी प्रयुक्त किए जाते हैं।

(c) अनआयनिक अपमार्जक (Non-lonic Detergents) अनायनिक अपमार्जकों में कोई आयन नहीं होता है, अतः इसे अनआयनिक अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण- (i) स्टीऐरिक अम्ल तथा पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल की अभिक्रिया से बना अपमार्जक ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 3

प्रश्न 16.22.
जैव-निम्ननीकृत होने वाले और जैव-निम्ननीकृत न होने वाले अपमार्जक क्या हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जैव निम्ननीकृत तथा जैव अनिम्ननीकृत अपमार्जक (Bio degradable and Non Bio-degradable Detergents) – वे अपमार्जक जो जीवाणुओं द्वारा आसानी से विघटित हो जाते हैं उन्हें जैव निम्ननीकृत अपमार्जक कहते हैं। इनसे प्रदूषण नहीं होता है। उदाहरणअशाखित हाइड्रोकार्बन शृंखलायुक्त अपमार्जक-n-लॉरिल सल्फेट।

वे अपमार्जक जो जीवाणुओं द्वारा आसानी से निम्ननीकृत नहीं होते, उन्हें जैव-अनिम्ननीकृत अपमार्जक कहते हैं। अपमार्जक जिनमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला शाखित होती है, वे जैव अनिम्ननीकृत होते हैं। उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 4
इसका निम्ननीकरण (Degradation) धीमा होने के कारण ये एकत्र होते जाते हैं तथा जल के साथ तालाब, नदी आदि में पहुँच जाते हैं एवं झाग उत्पन्न करते हैं जिससे पानी प्रदूषित हो जाता है।

आजकल हाइड्रोकार्बन शृंखला में शाखन को नियंत्रित करके इसे न्यूनतम रखा जाता है। अशाखित शृंखलाएँ आसानी से जैव निम्ननीकृत हो जाती हैं, अतः प्रदूषण नहीं होता है।

अपमार्जकों का संश्लेषण (Synthesis of Detergents) अपमार्जकों को निम्नलिखित विधियों द्वारा संश्लेषित किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 5
(ii) रीड अभिक्रिया द्वारा (By Reed Reaction)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 6

प्रश्न 16.23.
साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करता?
उत्तर:
दीर्घ शृंखलायुक्त वसा अम्लों के सोडियम तथा पोटैशियम लवणों को साबुन कहते हैं। संतृप्त तथा असंतृप्त मोनोकार्बोक्सिलिक अम्लों को वसा अम्ल (Fatty Acids) कहते हैं। जैसे स्टिऐरिक अम्ल (C17H35COOH), पामिटिक अम्ल (C15H31 COOH ) तथा ओलीक अम्ल (C17H33 COOH)। ये प्रकृति में प्रमुखता से पाये जाते हैं।

वसा अम्लों के सोडियम लवणों को सोडियम साबुन अथवा कठोर साबुन (Hard Soaps) अथवा धावन साबुन (Washing Soaps) कहते हैं, जबकि पोटैशियम साबुन को नहाने के साबुन (Bathing Soaps) अथवा मृदु साबुन (Soft Soaps) कहते हैं।

साबुन बनाना – वसा (वसा अम्लों के ग्लिसरिल एस्टर) को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन के साथ गर्म करने पर साबुन प्राप्त होता है तथा साबुन बनाने की इस प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं । इस अभिक्रिया में वसा अम्लों के एस्टर का जल अपघटन होता है तथा प्राप्त साबुन कोलॉइडी अवस्था में होता है। इसे विलयन में सोडियम क्लोराइड (NaCl) डालकर अवक्षेपित कर लेते हैं। साबुन को पृथक् कर लेने के बाद बचे हुए विलयन में ग्लिसरॉल रह जाता है जिसे प्रभाजी आसवन के द्वारा प्राप्त किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 7
आठ से अठारह कार्बन परमाणु युक्त साबुन की ‘गुणवत्ता अच्छी होती है। अठारह से अधिक कार्बन होने पर इनकी जल में विलेयता कम होती है तथा अठारह से कम कार्बन होने पर इनकी शोधन शक्ति (Cleansing Power) कम हो जाती है। सोडियम तथा पोटेशियम साबुन जल में विलेय होते हैं तथा इन्हें सफाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पोटेशियम साबुन मृदु होते हैं अतः इस प्रकार के साबुन त्वचा के लिए कोमल होते हैं। पोटेशियम साबुन बनाने के लिए NaOH के विलयन के स्थान पर KOH का विलयन लिया जाता है।

प्रश्न 16.24.
क्या आप साबुन तथा संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं?
उत्तर:
साबुन का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए किया जा सकता है क्योंकि मृदु जल, साबुन के साथ तुरन्त झाग देता है जबकि कठोर जल में झाग बनने में बहुत समय लगता है तथा इसमें चिपचिपा अवक्षेप भी बनता है तथा अवक्षेप की मात्रा के अनुसार जल की कठोरता भी अधिक होगी लेकिन संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए नहीं कर सकते क्योंकि ये कठोर तथा मृदु दोनों प्रकार के जल के साथ झाग (Lather) देते हैं।

प्रश्न 16.25.
साबुन की शोधन क्रिया को समझाइए |
उत्तर:
साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action of Soaps):
साबुन की शोधन क्रिया में पायसीकरण (इमल्सीकरण) होता है। इस प्रक्रिया में साबुन, कपड़े पर लगे ग्रीस तथा मिट्टी के कणों का जल के साथ इमल्सन (पायस) बनाने में मदद करता है।

स्पष्टीकरण (Explanation) – साबुन के अणु में अध्रुवीय जल विरोधी तथा ध्रुवीय जलस्नेही भाग होता है। कपड़े की सतह पर मिट्टी के कण, ग्रीस या तेल द्वारा चिपके रहते हैं। ग्रीस या तेल जल में अविलेय होता है अतः मिट्टी के कणों को केवल जल द्वारा नहीं हटाया जा सकता। जब साबुन का प्रयोग किया जाता है तो इसका अध्रुवीय एल्किल समूह तेल की बूँदों में विलेय होता है जबकि ध्रुवीय -COON+a समूह जल में विलेय होता है अतः तेल की प्रत्येक बूँद के चारों ओर ऋणावेश आ जाता है इससे इमल्सन बन जाता है तथा मिट्टी के कण युक्त तेल की बूँदें जल द्वारा साफ हो जाती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 8
साबुन केवल मृदु जल (Soft Water) में ही कार्य करते हैं कठोर जल में नहीं, क्योंकि कठोर जल में Ca2+ तथा Mg2+ आयन होते हैं इसलिए सोडियम अथवा पोटैशियम साबुन को कठोर जल में घोलने पर वह अघुलनशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम साबुन में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 9
ये अघुलनशील साबुन, मलफेन (Scum) की भाँति जल से पृथक् हो जाते हैं तथा शोधन अभिकर्मक के रूप में उपयुक्त नहीं रहते। ये अच्छी धुलाई में रुकावट डालते हैं क्योंकि यह अवक्षेप कपड़ों पर चिपक जाता है। कठोर जल से धुले बाल इसी चिपचिपे पदार्थ के कारण ही चमकदार नहीं होते हैं। कठोर जल और साबुन से धुले कपड़ों में इस चिपचिपे पदार्थ के कारण रंजक भी एकसमान रूप से अवशोषित नहीं होता है।

प्रश्न 16.26.
यदि जल में कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट घुला हो तो आप कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जकों में से किसका प्रयोग करेंगे?
उत्तर:
जब जल में कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट Ca(HCO3)2 घुला हो तो कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जक में से संश्लेषित अपमार्जक का प्रयोग करेंगे क्योंकि अपमार्जकों के कैल्सियम लवण जल में विलेय होते हैं जबकि साबुन Ca+2 आयनों के साथ अवक्षेप बना देते हैं।

प्रश्न 16.27.
निम्नलिखित यौगिकों में जलरागी एवं जलविरागी भाग दर्शाइए-
(क) CH3(CH2)10CH2OS\(\overline{\mathbf{O}}\)3, \(\stackrel{+}{\mathbf{N}} \mathbf{a}\)
(ख) CH3(CH2)15N(CH3)3Br
(ग) CH3(CH2)COO(CH2CH2O)nCH2CH2CH
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों में जलरागी तथा जलविरागी भाग निम्नानुसार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 10

HBSE 12th Class Chemistry दैनिक जीवन में रसायन Intext Questions

प्रश्न 16.1.
अनिद्राग्रस्त रोगियों को चिकित्सक नींद लाने वाली गोलियाँ लेने का परामर्श देते हैं, परततु बिना चिकित्सक से परामर्श लिए इनकी खुराक लेना उचित क्यों नहीं है?
उत्तर:
नींद की गोलियाँ तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं, परन्तु अधिक मात्रा में या बिना आवश्यकता के लेने पर ये शरीर के अंगों पर विपरीत प्रभाव डालती हैं तथा विष का कार्य करती हैं। अतः ये प्राणघातक भी हो सकती हैं। इसलिए चिकित्सक के परामर्श के बिना इन्हें नहीं लेना चाहिए।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

प्रश्न 16.2.
किस वर्गीकरण के आधार पर वक्तव्य (Statement), रैनिटिडिन प्रतिअम्ल है’, दिया गया है?
उत्तर:
यह वक्तव्य भेषजगुणविज्ञानीय प्रभाव (Pharmacological effect) वर्गीकरण के आधार पर दिया गया है, क्योंकि कोई भी औषध जो अम्ल के आधिक्य (excess) का प्रतिकार (Counteract) करती है उसे प्रतिअम्ल कहते हैं। रैनिटिडीन भी अम्ल के प्रभाव को कम करती है। अतः यह एक प्रतिअम्ल है।

प्रश्न 16.3.
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
प्राकृतिक मधुरक जैसे सूक्रोस ग्रहण की गई कैलोरी मान बढ़ाते हैं अतः मधुमेह के रोगी तथा वे व्यक्ति जिन्हें कैलोरी ग्रहण करने पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है, उन्हें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता पड़ती है। क्योंकि कृत्रिम मधुरक अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं तथा ये पूर्णतः अक्रिय होते हैं तथा इनसे कोई हानि नहीं होती एवं इनसे कैलोरी में भी वृद्धि नहीं होती।

प्रश्न 16.4.
ग्लिसरिल ओलिएट तथा ग्लिसरिल पामिटेट से सोडियम साबुन बनाने के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए। इनके संरचनात्मक सूत्र नीचे दिए गए हैं-
(i) (C15H31COO)3C3H5 – ग्लिसरिल पामिटेट
(ii) (C17H33COO)3C3H5 – ग्लिसरिल ओलिएट।
उत्तर:
(i) ग्लिसरिल पामिटेट (C15H31COO)3C3H5 से सोडियम साबुन बनाना-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 12

(ii) ग्लिसरिल ओलिएट (C17H33COO)3C3H5 से सोडियम साबुन बनाना-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 13

प्रश्न 16.5.
निम्न प्रकार के अनायनिक अपमार्जक, द्रव अपमार्जकों, इमल्सीकारकों और क्लेदन कारकों (Wetting agents) में उपस्थित होते हैं। अणु में जलरागी (Hydrophilic ) तथा जलविरागी (Hydrophobic) हिस्सों को दर्शाइए। अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह की पहचान करिए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 14
उत्तर:
उपरोक्त अपमार्जक में बायीं ओर का हिस्सा जलविरागी (जल प्रतिकर्षी) है जबकि दायों ओर का हिस्सा जलरागी (जलस्नेही) है तथा इस अपमार्जक में ईथर तथा ऐल्कोहॉल प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) उपस्थित है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 15

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन Read More »

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 12.1.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए-
(i) सायनोहाइड्रिन
(ii) ऐसीटेल
(iii) सेमीकार्बेजोन
(iv) ऐल्डोल
(v) हेमीऐसीटेल
(vi) ऑक्सिम
(vii) कीटेल
(viii) इमीन
(ix) 2,4-DNP व्युत्पन्न
(x) शिफ क्षारक।
उत्तर:
(i) सायनोहाइड्रिन- कार्बोनिल यौगिकों पर HCN के योग से बने यौगिक सायनोहाइड्रिन कहलाते हैं। इनमें OH तथा -CN समूह उपस्थित होते हैं। जैसे-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 1

(ii) ऐसीटेल ऐल्डिहाइड की दो मोल मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल से क्रिया कराने पर प्राप्त यौगिकों को ऐसीटेल कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 2

(iii) सेमीकार्बेजोन कार्बोनिल यौगिकों की सेमीकार्बेजाइड से अभिक्रिया कराने पर बने यौगिकों को सेमीकार्बेजोन कहते हैं। जैसे-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 3

(iv) ऐल्डोल – a-H युक्त ऐल्डिहाइडों का तनु क्षार की उपस्थिति में संघनन करने से बना उत्पाद ऐल्डोल कहलाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 4

(v) हेमीऐसीटेल – शुष्क HCl की उपस्थिति में ऐल्डिहाइड की मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल के एक मोल के साथ अभिक्रिया कराने पर ऐल्कॉक्सी ऐल्कोहॉल बनते हैं, इन्हें हेमीऐसीटेल कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 5

(vi) ऑक्सिम – कार्बोनिल यौगिकों की हाइड्रॉक्सिल एमीन से क्रिया कराने से बने उत्पाद ऑक्सिम कहलाते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 6

(vii) कीटैल – शुष्क HCl की उपस्थिति में कीटोन, एथिलीन ग्लाइकॉल के साथ अभिक्रिया करके चक्रीय उत्पाद बनाते हैं जिसे एथिलीन ग्लाइकॉल कीटैल कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 7

(viii) इमीन – कार्बोनिल यौगिक NH3 के साथ अभिक्रिया करके इमीन बनाते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 8

(ix) 2,4-DNP व्युत्पन्न – ऐल्डिहाइड तथा कीटोन 2,4-डाई नाइट्रो फेनिल हाइड्रेजीन (2,4-DNP) से क्रिया करके 2,4-डाईनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजोन बनाते हैं, इन्हें 2,4-DNP व्युत्पन्न कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 9

(x) शिफ – क्षारक – कार्बोनिल यौगिकों की प्राथमिक ऐमीन से क्रिया द्वारा बने उत्पाद प्रतिस्थापित इमीन होते हैं, इन्हें शिफ क्षारक कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 10

प्रश्न 12.2.
निम्नलिखित यौगिकों के आईयूपीएसी (IUPAC ) नामपद्धति में नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 11
उत्तर:
इन यौगिकों के IUPAC नाम निम्नलिखित हैं-
(i) 4- मेथिलपेन्टेनैल
(ii) 6- क्लोरो-4 एथिलहेक्सेन 3 ओन
(iii) ब्यूट-2 ईन -1- ऐल
(iv) पेन्टेन-2, 4-डाइओन
(v) 3,3,5 ट्राइमेथिलहेक्सेन-2-ओन
(vi) 3, 3 – डाइमेथिलब्यूटेनॉइक अम्ल
(vii) बेन्जीन-1, 4-डाइकार्बेल्डिहाइड

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 12.3.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए-
(i) 3- मेथिल ब्यूटेनैल
(ii) p- नाइट्रोप्रोपिओफीनोन
(iii) p-मेथिलबेन्जेल्डिहाइड
(iv) 4- मेथिलपेन्ट- 3 – ईन- 2- ओन
(v) 4-क्लोरोपेन्टेन- 2- ऑन
(vi) 3- ब्रोमो-4- फेनिल पेन्टेनॉइक अम्ल
(vii) P,p’-डाइहाइड्रॉक्सीबेन्ज़ोफीनोन
(viii) हेक्स-2 ईन- 4 आइनोइक अम्ल।
उत्तर:
इन यौगिकों की संरचना निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 12

प्रश्न 12.4.
निम्नलिखित ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनों के आईयूपीएसी (IUPAC ) नाम लिखिए और जहाँ संभव हो सके साधारण नाम भी दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 13
(vi) PhCOPh
उत्तर:
इन यौगिकों के IUPAC नाम निम्न प्रकार हैं-
(i) हेप्टेन -2- ओन
(ii) 4- ब्रोमो-2- मेथिलहेक्सेनैल
(iii) हेप्टेनैल
(iv) 3- फ़ेनिलप्रोपीनैल
(v) साइक्लोपेन्टेनकार्बेल्डिहाइड
(vi) डाइफ़ेनिलमेथेनोन
इनके सामान्य (साधारण) नाम निम्न प्रकार होंगे-
(i) मेथिल पेन्टिल कीटोन
(ii) नहीं है
(iii) नहीं है
(iv) सिन्नेमैल्डिहाइड
(v) नहीं है
(vi) बेन्जोफीनॉन

प्रश्न 12.5.
निम्नलिखित व्युत्पन्नों की संरचना बनाइए-
(i) बेन्जेल्डिहाइड का 2, 4- डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रेजोन
(ii) साइक्लोप्रोपेनोन ऑक्सिम
(iii) ऐसीटैल्डिहाइडडाइमेथिलऐसीटैल
(iv) साइक्लोब्यूटेनोन का सेमीकार्बेजोन
(v) हेक्सेन – 3 – ओन का एथिलीन कीटेल
(vi) फॉर्मेल्डिहाइड का मेथिल हेमीऐसीटेल।
उत्तर:
इन व्युत्पन्नों (Derivatives) की संरचना निम्न प्रकार होगी-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 14

प्रश्न 12.6.
साइक्लोहेक्सेनकार्बेल्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए-
(i) PhMgBr एवं तत्पश्चात् H3O+
(ii) टॉलेन अभिकर्मक
(iii) सेमीकार्बेजाइड एवं दुर्बल अम्ल
(iv) एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल
(v) जिंक अमलगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 15

प्रश्न 12.7.
निम्नलिखित में से कौनसे यौगिकों में ऐल्डोल संघनन होगा, किनमें कैनिज़ारो अभिक्रिया होगी और किनमें उपरोक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डोल संघनन तथा कैनिज़ारो अभिक्रिया में संभावित उत्पादों की संरचना लिखिए।
(i) मेथेनैल
(ii) 2- मेथिलपेन्टेनैल
(iii) बेन्ज़ैल्डिहाइड
(iv) बेन्ज़ोफ़ीनॉन
(v) साइक्लोहेक्सेनोन
(vi) 1 – फेनिलप्रोपेनोन
(vii) फेनिलऐसीटैल्डिहाइड
(viii) ब्यूटेन – 1- ऑल
(ix) 2,2 – डाइमेथिलब्यूटेनैल।
उत्तर:
उपर्युक्त में से निम्नलिखित यौगिक ऐल्डोल संघनन देते हैं- (ii), (v), (vi), (vii); निम्नलिखित यौगिक कैनिज़ारो अभिक्रिया दर्शाते हैं- (i), (iii), (ix) तथा निम्नलिखित यौगिक दोनों ही अभिक्रिया नहीं दर्शाते- (iv), (viii).
संभावित उत्पादों की संरचना निम्न प्रकार होगी-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 16

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 12.8.
ऐथेनैल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे?
(i) ब्यूटेन-1, 3-डाई ऑल
(ii) ब्यूट-2-ईनैल
(iii) ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल।
उत्तर:
(i) एथेनैल से ब्यूटेन-1, 3-डाईऑल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 17

(ii) एथेनैल से ब्यूट-2-ईनैल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 18

(iii) एथेनैल से ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 19

प्रश्न 12.9.
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के एल्डोल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए | प्रत्येक में बताइए कि कौन-सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौन – सा इलेक्ट्रॉनरागी होगा ?
उत्तर:
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार उत्पाद निम्नलिखित हैं-
(i) प्रोपेनैल से बना उत्पाद-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 20

(ii) ब्यूटेनैल से बना उत्पाद-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 21

(iii) प्रोपेनैल नाभिकरागी तथा ब्यूटेनैल इलेक्ट्रॉनरागी होने पर बना उत्पाद-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 22

(iv) ब्यूटेनैल नाभिकरागी तथा प्रोपेनैल इलेक्ट्रॉनरागी होने पर बना उत्पाद –
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 23

प्रश्न 12.10.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C9H10O है 2,4 DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचित करता है तथा कैनिज़ारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1, 2 – बेन्ज़ीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
उत्तर:
यह कार्बनिक यौगिक 2,4-DNP व्युत्पन्न बनाता है। अतः यह कार्बोनिल यौगिक ( ऐल्डिहाइड या कीटोन) होगा लेकिन यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचित ( reduced ) कर रहा है। अतः यह ऐल्डिहाइड है तथा यह कैनिज़ारो अभिक्रिया दे रहा है। अतः इसमें a-H अनुपस्थित है। इसके आक्सीकरण से 1, 2 – बेन्जीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 24
ऑक्सीकरण के बाद बने उत्पाद से यह सिद्ध होता है कि इसमें एक बेन्जीन वलय है, एक – COOH समूह -CHO समूह के ऑक्सीकरण से तथा दूसरा – COOH समूह ऐल्किल समूह के ऑक्सीकरण से प्राप्त होगा। अतः अणुसूत्र के अनुसार इसका संरचना सूत्र निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 25

प्रश्न 12.11.
एक कार्बनिक यौगिक ‘क’ (आण्विक सूत्र, C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जल अपघ करने के उपरांत एक कार्बोक्सिलिक अम्ल ‘ख’ एवं एक ऐल्कोहॉल ‘ग’ प्राप्त हुई। ‘ग’ को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर ‘ख’ उत्पन्न होता है। ‘ग’ निर्जलीकरण पर ब्यूट- 1 – ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 26
(ग) के निर्जलीकरण से ब्यूट- 1 -ईन बनता है। इसमें चार कार्बन परमाणु हैं अतः अन्य उत्पाद (ख) में भी चार कार्बन होंगे तथा इसमें अन्तस्थ – COOH होगा। अतः यौगिक- क, ख तथा ग निम्नलिखित है-
(क) CH3 – CH2 – CH2 – COO CH2 – CH2-CH2-CH3 ब्यूटिल ब्यूटेनॉएट (एस्टर)
(ख) CH3-CH2-CH2 – COOH (ब्यूटेनॉइक अम्ल)
(ग) CH3-CH2-CH2 – CH2 – OH ( ब्यूटेन – 1-ऑल )

तथा अभिक्रियाओं के समीकरण निम्न प्रकार होंगे-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 27

प्रश्न 12.12.
निम्नलिखित यौगिकों को उनसे सम्बन्धित (कोष्ठकों में दिए गये) गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए- (i) ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृतीयक ब्यूटिलकीटोन, मेथिलतृतीयक ब्यूटिलकीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता) ।
(ii) CH3CH2CH(Br) COOH, CH3CH(Br)CH2COOH (CH3)2CHCOOH, CH3CH2CH2 COOH (अम्लता के क्रम में ) ।
(iii) बेन्जोइक अम्ल; 4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 3,4- डाईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल 4- मेथॉक्सी बेन्जोइक अम्ल (अम्लता की सामर्थ्य के क्रम में) ।
उत्तर:
(i) ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की नाभिकरागी संकलन के लिए क्रियाशीलता + I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा पर निर्भर करती है। अतः इनकी HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होगा-
डाइ तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < मेथिल तृतीयक ब्यूटिल कोटोन < ऐसीटोन < ऐसिटैल्डिहाइड

(ii) कार्बोक्सिलिक अम्लों का अम्लीय गुण, प्रेरणिक प्रभाव (+I तथा-I) तथा विभिन्न समूहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अतः इनके अम्लीय गुण का क्रम निम्न प्रकार होगा-
(CH3), CHCOOH < CH3CH2CH2COOH < CH3 CH(Br)CH2COOH – CH3CH2CH( Br)COOH

(iii) 4- मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल बेन्जोइक अम्ल <4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल < 3, 4 डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(अम्लता की सामर्थ्य का बढ़ता क्रम )
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 28

प्रश्न 12.13.
निम्नलिखित यौगिक युगलों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए-
(i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन
(ii) ऐसीटोफ़ीनॉन एवं बेन्जोफ़ीनॉन
(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल
(iv) बेन्जोइक अम्ल एवं एथिलबेन्जोएट
(v) पेन्टेन 2 ऑन एवं पेन्टेन 3-ऑन
(vi) बेन्जेल्डिहाइड एवं एसीटोफ़ीनॉन
(vii) एथेनैल एवं प्रोपेनैल।
उत्तर:
(i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन में विभेद – प्रोपेनैल (CH3CH2CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि (CH3COCH3) एक मेथिल कीटोन है। इनमें निम्न परीक्षणों द्वारा विभेद किया सकता है-
(1) आयोडोफॉर्म परीक्षण जलीय NaOH तथा I के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल में कोई क्रिया नहीं होती जबकि प्रोपेनोन द्वारा आयोडोफॉर्म बनने के कारण पीला अवक्षेप आता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29

(2) टॉलेन अभिकर्मक (अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट) के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल रजत दर्पण देता है (रजत दर्पण परीक्षण) जबकि प्रोपेनोन में कोई क्रिया नहीं होती।

(3) फेलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल से लाल अवक्षेप बनता है जबकि प्रोपेनोन से कोई अभिक्रिया नहीं होती।

(ii) ऐसीटोफ़ीनॉन एवं बेन्जोफ़ीनॉन में विभेद – ऐसीटोफ़ीनॉन (CH3COC6H5) एक सेथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्ज़ोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 30 यह परीक्षण नहीं देता।

(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल में विभेद-
(1) फ़ीनॉल NaHCO3 विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं करता जबकि बेन्जोइक अम्ल NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके CO2 गैस देता है।
C6H5COOH + NaHCO3 → C6H5COONa + CO2↑+ H2O

(2) उदासीन FeCl3 विलयन के साथ फ़ीनॉल बैंगनी (Violet) रंग देता है जबकि बेन्जोइक अम्ल के साथ इसकी कोई क्रिया नहीं होती।

(iv) बेन्जोइक अम्ल एवं एथिलबेन्जोएट में विभेद-
(1) बेन्जोइक अम्ल (C6H5COOH) अम्लीय है। अतः यह नीले लिटमस को लाल करता है जबकि एथिल बेन्जोएट (C6H5COOC2H5) ‘एस्टर है अतः यह नीले लिटमस से कोई क्रिया नहीं करता।

(2) बेन्जोइक अम्ल NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके CO2 गैस की बुदबुदाहट देता है जबकि एथिल बेन्जोएट की NaHCO विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं होती।

(v) पेन्टेन 2 ऑन एवं पेन्टेन 3-ऑन में विभेद – पेन्टेन- 2-ऑन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 31 एक मैथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि पेन्टेन 3 ऑन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 32में यह परीक्षण नहीं होता।

(vi) बेन्जेल्डिहाइड एवं ऐसीटोफ़ीनॉन में विभेद-
(1) बेन्जेल्डिहाइड (C6H5CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 33एक मैथिल कीटोन है अतः ऐसीटोफ़ीनॉन, आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्जेल्डिहाइड यह परीक्षण नहीं देता है।

(2) बेन्जेल्डिहाइड टॉलेन अभिकर्मक ऑक्सीकृत हो जाता है, जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन इससे क्रिया नहीं करता।

(vii) ऐथेनैल एवं प्रोपेनैल में विभेद – एथेनैल आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि प्रोपेनैल (CH3CH2 – CHO) यह परीक्षण नहीं देता।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 34

प्रश्न 12.14.
बेन्जीन से निम्नलिखित यौगिकों का विरचन आप किस प्रकार करेंगे? आप कोई भी अकार्बनिक अभिकर्मक एवं कोई भी कार्बनिक अभिकर्मक, जिसमें एक से अधिक कार्बन न हो, का उपयोग कर सकते हैं।
(i) मेथिल बेन्जोएट
(ii) m- नाइट्रोबेन्ज़ोइक अम्ल
(iii) p- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iv) फ़ेनिल ऐसीटिक अम्ल
(v) p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड।
उत्तर:
(i) बेन्जीन से मेथिल बेन्ज़ोएट-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35
(ii) बेन्जीन से m-नाइट्रोबेन्ज़ोइक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35a
(iii) बेन्जीन से p-नाइट्रोबेन्ज़ोइक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35b
(iv) बेन्जीन से फ़ेनिल ऐसीटिक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35c
(v) बेन्जीन से p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35d

प्रश्न 12.15.
आप निम्नलिखित रूपांतरणों को अधिकतम दो चरणों में किस प्रकार से सम्पन्न करेंगे ?
(i) प्रोपेनोन से प्रोपीन
(ii) बेन्जोइक अम्ल से बेन्ज़ैल्डिहाइड
(iii) ऐथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
(iv) बेन्ज़ीन से m – नाइट्रोऐसीटोफ़ीनॉन
(v) बेन्ज़ैल्डिहाइड से बेन्ज़ोफ़ीनॉन
(vi) ब्रोमोबेन्जीन से 1 – फेनिलएथेनॉल
(vii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से 3- फेनिलप्रोपेन- 1 – ऑल
(viii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से – हाइड्रॉक्सीफ़ेनिलऐसीटिक अम्ल
(ix) बेन्जोइक अम्ल से m- नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।
उत्तर:
(i) प्रोपेनोन से प्रोपीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 36

(ii) बेन्जोइक अम्ल से बेन्ज़ैल्डिहाइड
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 37

(iii) ऐथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 38

(iv) बेन्ज़ीन से m – नाइट्रोऐसीटोफ़ीनॉन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 39

(v) बेन्ज़ैल्डिहाइड से बेन्ज़ोफ़ीनॉन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 40

(vi) ब्रोमोबेन्जीन से 1 – फेनिलएथेनॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 41

(vii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से 3- फेनिलप्रोपेन- 1 – ऑल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 42

(viii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से – हाइड्रॉक्सीफ़ेनिलऐसीटिक अम्ल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 43

(ix) बेन्जोइक अम्ल से m- नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 44

प्रश्न 12.16.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) का वर्णन करो-
(i) ऐसीटिलन ( ऐसीटिलीकरण)
(ii) कैनिज़ारो अभिक्रिया
(iii) क्रॉस ऐल्डोल संघनन
(iv) विकार्बोक्सिलन (विकार्बोक्सिलीकरण) ।
उत्तर:
(i) ऐसीटिलन या ऐसीटिलीकरण – निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड (AlCl3) की उपस्थिति में बेन्जीन अथवा प्रतिस्थापित बेन्जीन, अम्ल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कर संगत कीटोन देते हैं। इसे फ्रीडेल- क्राफ्ट्स ऐसीटिलन अभिक्रिया कहते हैं ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 45a
लेकिन सक्रिय H युक्त यौगिक जैसे ऐल्कोहॉल (ROH) फ़ीनॉल (C6H5OH) तथा ऐमीन्स (R – NH2) की क्रिया बिना उत्प्रेरक के CH3COCl से कराने पर H+ के स्थान परHBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 45 आ जाता है। इसे ऐसीटिलन अभिक्रिया कहते हैं।

(ii) कैनिज़ारो अभिक्रिया – वे ऐल्डिहाइड, जिनमें – हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते, सांद्र क्षार (NaOH या KOH) की उपस्थिति में स्वऑक्सीकरण तथा अपचयन (असमानुपातन) दर्शाते हैं। इस अभिक्रिया में ऐल्डिहाइड का एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है जबकि दूसरा अणु कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 46

(iii) क्रॉस ऐल्डोल संघनन – जब दो भिन्न ऐल्डिहाइड या कीटोन के मध्य ऐल्डोल संघनन होता है तो उसे क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं। यदि दोनों यौगिकों में α-हाइड्रोजन हो तो चार उत्पादों का मिश्रण प्राप्त होता है। जैसे एथेनैल व प्रोपेनैल के मिश्रण की ऐल्डोल संघनन अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 47
क्रॉस ऐल्डोल संघनन में कीटोन भी प्रयुक्त हो सकते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 48

(iv) विकार्बोक्सिलन – कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम लवणों को सोडालाइम (NaOH तथा CaO, ( 3:1) का मिश्रण ) के साथ गरम करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है एवं हाइड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं। यह अभिक्रिया विकार्बोक्सिलन या विकार्बोक्सिलीकरण कहलाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 49

प्रश्न 12.17.
निम्नलिखित प्रत्येक संश्लेषण में छूटे हुए प्रारम्भिक पदार्थ, अभिकर्मक अथवा उत्पादों को लिखकर पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 50
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 51

प्रश्न 12.18.
निम्नलिखित के सम्भावित कारण दीजिए-
(i) साइक्लोहेक्सेनोन अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बनाता है। परन्तु 2, 2, 6- ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन ऐसा नहीं करता ।
(ii) सेमीकार्बेज़ाइड में दो – NH2 समूह होते हैं, परन्तु केवल एक – NH2 समूह ही सेमीकार्बेजोन विरचन में प्रयुक्त होता है।
(iii) कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल से, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एस्टर के विरचन के समय जल अथवा एस्टर जैसे ही निर्मित होता है उसको निकाल दिया जाना चाहिए।
उत्तर:
(i) साइक्लोहेक्सेनोन का कार्बोनिल समूह ध्रुवीय होता है। अतः इस पर HCN का नाभिकस्नेही संकलन आसानी से होकर अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बन जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 52
लेकिन 2,2,6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन में उपस्थित तीन मेथिल समूहों के +I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) के कारण कार्बोनिल समूह की ध्रुवता कम हो जाती है तथा इन तीन मेथिल समूहों की त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण नाभिकस्नेही (CN) का आक्रमण मुश्किल होता है। अतः इस पर HCN के योग से प्राप्त सायनोहाइड्रिन की लब्धि बहुत कम होती
है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

(ii) सेमीकार्बोजाइड में उपस्थित दो – NH2 समूह में से केवल एक -NH2 समूह ही सेमीकार्बेजोन बनाने में प्रयुक्त होता है, क्योंकि >C = 0 समूह के पास वाले -NH2 समूह के – N-H बन्ध अनुनाद के कारण प्रबल होते हैं जबकि -NH- के पास वाले – NH2 समूह के -N-H बन्ध दुर्बल होते हैं क्योंकि इनमें अनुनाद नहीं होता अतः ये अभिक्रिया में भाग लेते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 53
कार्बोक्सिलिक अम्ल की ऐल्कोहॉल से क्रिया द्वारा एस्टर बनने की अभिक्रिया उत्क्रमणीय होती है अतः एस्टर बनते ही वह वापस जल से क्रिया करके अम्ल तथा ऐल्कोहॉल बना देता है। अतः अभिकारकों एवं उत्पादों के मध्य साम्य स्थापित हो जाता है इसलिए जल या एस्टर को बनते ही अभिक्रिया मिश्रण से निकाल देने पर साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाता है जिससे एस्टर अधिक मात्रा में बनता है।

प्रश्न 12.19.
एक कार्बनिक यौगिक में 69.77% कार्बन, 11.63% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। यौगिक का आण्विक द्रव्यमान 86 है। यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता परन्तु सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ योगज यौगिक देता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर एथेनॉइक तथा प्रोपेनॉइक अम्ल देता है। यौगिक की संभावित संरचना लिखिए।
उत्तर:
यौगिक में उपस्थित कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन की % मात्रा के आधार पर यौगिक का अणुसूत्र निम्न प्रकार ज्ञात किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 54
अतः यौगिक का अणुसूत्र C5H10O होगा क्योंकि इसका अणुभार 86 है।

प्रश्नानुसार यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता। अतः यह ऐल्डिहाइड नहीं है, लेकिन सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट (NaHSO3) के साथ योगज यौगिक बनाता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह मेथिल कीटोन है इसलिए इसका संरचना सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 55होगा ।

रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होंगी-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 56

आयोडोफॉर्म परीक्षण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 57

ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 58

प्रश्न 12.20
यद्यपि फ़ीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक हैं परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल फ़ीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है। क्यों?
उत्तर:
फ़ीनॉक्साइड आयन में ऋणात्मक आवेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु तथा कम विद्युतऋणी कार्बन पर वितरित होता है, जबकि कार्बोक्सिलेट आयन में ऋणात्मक आवेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित होता है, अतः इसमें ऋणात्मक आवेश का विस्थानीकरण, फ़ीनॉक्साइड आयन में अधिक होता है इसलिए इसका अनुनाद स्थायीकरण अधिक होता है। इसलिए कार्बोक्सिलिक अम्ल, फ़ीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है।

HBSE 12th Class Chemistry ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Intext Questions

प्रश्न 12.1.
निम्न यौगिकों की संरचना लिखिए-
(i) α-मेथॉक्सीप्रोप्रिऑनऐल्डिहाइड
(ii) 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
(iii) 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन कार्बैल्डिहाइड
(iv) 4-ऑक्सोपेन्टेनैल
(v) डाइ-द्वितीयकब्यूटिल कीटोन
(vi) 4-क्लोरोऐसीटोफीनॉन
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 1

प्रश्न 12.2.
निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 2
उत्तर:
उपरोक्त अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना अग्र प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 3

प्रश्न 12.3.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
CH<3CHO, CH3CH2OH, CH3OCH3, CH3CH2CH3
उत्तर:
CH<3-CH<2-CH<3 < CH<3-O-CH<3 < CH<3-CHO < CH<3-CH<2-OH
क्वथनांकों का बढ़ता क्रम

प्रश्न 12.4.
निम्नलिखित योगिका को नाभकरागा योगात्मक (Addition) अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(क) एथेनैल, प्रोपेनैल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
(ख) बेन्जैल्डिहाइ ड, p-टॉॅलू ऐल्डिहाइड, p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड, ऐसीटोफीनोन।
संकेत-त्रिविम प्रभाव व इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव को ध्यान में रखें।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों की नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रियाओं में बढ़ती हुई क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार है-
(क) ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपेनैल < एथेनैल
(ख) ऐसीटोफ़ीनोन <p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्जैल्डिहाइड

प्रश्न 12.5.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 4

प्रश्न 12.6.
निम्नलिखित यौगिकों के आईयूपीएसी नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 5
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों के आईयूपीएसी नाम निम्न प्रकार हैं-
(i) 3-फेनिलप्रोपेनॉइक अम्ल
(ii) 3-मेथिलब्यूट-2-इनोइक अम्ल
(iii) 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल
(iv) 2,4,6-ट्राईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल

प्रश्न 12.7.
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है?
(i) एथिलबेन्जीन
(ii) ऐसीटोफीनोन
(iii) ब्रोमोबेन्जीन
(iv) फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में निम्न प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 6

प्रश्न 12.8.
नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौनस अम्ल अधिक प्रबल है?
(i) CH3CO2H अथवा CH2FCO2H
(ii) CH2FCO2H अथवा CH2CICO2H
(iii) CH2FCH2CH2CO2H
अथवा CH3CHFCH2CO2H
(iv) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 7
उत्तर:
उपर्युक्त युग्मों में से अधिक प्रबल अम्ल निम्नलिखित हैं-
(i) CH2FCOOH
(ii) CH2FCOOH
(iii) CH3CHFCH2COOH
(iv) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 8

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Read More »

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.1.
निम्नलिखित यौगिकों के आई यूपीएसी (IUPAC) नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 1
उत्तर:
(i) 2,2,4-ट्राइमेथिल पेन्टेन-3-ऑल
(ii) 5-एथिल हेप्टेन-2, 4-डाइऑल
(iii) ब्यूटेन-2, 3-डाइऑल
(iv) प्रोपेन-1, 2, 3-ट्राइऑल
(v) 2-मेथिल फीनॉल
(vi) 4-मेथिल फीनॉल
(vii) 2, 5-डाइमेथिल फीनॉल
(viii) 2, 6-डाइमेथिल फीनॉल
(ix) 1-मेथॉक्सी-2-मेथिल प्रोपेन
(x) एथॉक्सी बेन्जीन
(xi) 1-फीनॉक्सी हेप्टेन
(xii) 2-एथॉक्सी ब्यूटेन

प्रश्न 11.2.
निम्नलिखित आईयूपीएसी (IUPAC) नाम वाले यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए-
(i) 2-मेथिल ब्यूटेन-2-ऑल
(ii) 1-फेनिल प्रोपेन-2-ऑल
(iii) 3,5-डाइमेथिल हैक्सेन-1,3,5-ट्राइऑल
(iv) 2,3-डाइएथिलफ़ीनॉल
(v) 1-एथॉक्सीप्रोपेन
(vi) 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन
(vii) साइक्लोहैक्सिलमेथेनॉल
(viii) 3-साइक्लोहैक्सिलपेन्टेन-3-ऑल
(ix) साइक्लोपेन्टेन-3-ईन-1-ऑल
(x) 4-क्लोरो-3-एथिलब्यूटेन-1-ऑल
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 2

प्रश्न 11.3.
(i) C5H12O आण्विक सूत्र वाले ऐल्कोहॉलों के सभी समावयवों की संरचना लिखिए एवं उनके आईयूपीएसी (IUPAC) नाम दीजिए।
(ii) C5H12O के समावयवी ऐल्कोहॉलों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉलों में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 3

प्रश्न 11.4.
समझाइए कि प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक क्यों होता है?
उत्तर:
प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक होता है क्योंकि प्रोपेनॉल में प्रबल अंतरा – आण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जिसे तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जबकि ब्यूटेन में अणुओं के मध्य दुर्बल वान्डरवाल बल पाया जाता है जिसे तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.5.
समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं? इस तथ्य को समझाइए।
उत्तर:
ऐल्कोहॉलों में ध्रुवीय – OH समूह उपस्थित होने के कारण ये जल के साथ आसानी से हाइड्रोजन बन्ध बना लेते हैं जबकि हाइड्रोकार्बन, जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना सकते। अतः समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं।

प्रश्न 11.6.
हाइड्रोबोरॉनन – ऑक्सीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण (Hydroboronation- Oxidation)-डाइबोरेन (B2H6), ऐल्कीनों से अभिक्रिया करके एक
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 4
योगोत्पाद (Addition Product ) ट्राइऐल्किन बोरेन बनाता है जो जलीय NaOH की उपस्थिति में H2O2 द्वारा ऑक्सीकृत होकर ऐल्कोहॉल देता है। इसे हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

इस अभिक्रिया में ऐल्कोहॉलों की लब्धि अधिक होती है तथा इसमें अप्रत्यक्ष विधि से एल्कीन का जलयोजन (मार्कोनीकॉफ के नियम के विपरीत) होता है।

प्रश्न 11.7.
आण्विक सूत्र C7H8O वाले मोनोहाइड्रिक फीनॉलों की संरचनाएँ तथा IUPAC (आईयूपीएसी) नाम लिखिए।
उत्तर:
आण्विक सूत्र C7H8O से तीन मोनोहाइड्रिक फीनॉल संभव हैं जो निम्न प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 5

प्रश्न 11.8.
ऑर्थो तथा पैरा- नाइट्रोफीनॉलों के मिश्रण को भाप – आसवन द्वारा पृथक् करने में भाप – वाष्पशील समावयवी का नाम बताइए। इसका कारण दीजिए।
उत्तर:
o – नाइट्रो फ़ीनॉल अंतः अणुक हाइड्रोजन बन्ध (Intramolecular H – bond) के कारण भाप में वाष्पशील है क्योंकि इसमें अन्तराअणुक बल, p- समावयवी की तुलना में दुर्बल होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 6

प्रश्न 11.9.
क्यूमीन से फीनॉल बनाने की अभिक्रिया का समीकरण दीजिए ।
उत्तर:
क्यूमीन (आइसोप्रोपिल बेन्जीन) को पहले वायु (O2) के द्वारा हाइड्रोपरॉक्साइड में ऑक्सीकृत करते हैं फिर इसकी तनु अम्ल (H2SO4) के साथ क्रिया करवाने पर यह फीनॉल तथा ऐसीटोन में विघटित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 7

प्रश्न 11.10.
क्लोरोबेन्जीन से फीनॉल बनाने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
क्लोरोबेन्जीन को 623 K ताप एवं लगभग 300 वायुमण्डलीय दाब पर NaOH के साथ संगलित करने पर सोडियम फीनॉक्साइड बनता है जिसकी तनु अम्ल के साथ क्रिया कराने पर फीनॉल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 8

प्रश्न 11.
11 एथीन के जलयोजन (Hydration) से एथेनॉल प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
एथीन का जलयोजन – तनु अम्ल (HCl, H2SO4) उपस्थिति में एल्कीन की जल के साथ अभिक्रिया से ऐल्कोहॉल बनता है तथा असममित ऐल्कीनों में योगात्मक अभिक्रिया मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होती है।

एथीन का जलयोजन निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 9
क्रियाविधि – इस अभिक्रिया की क्रियाविधि में निम्नलिखित तीन पद होते हैं-
पद 1-H3O+ के इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण के द्वारा ऐल्कीन के प्रोटोनीकरण (Protonation) से कार्बोकैटायन बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 10
पद 2-कार्बोकैटायन पर जल का नाभिकस्नेही (Nucleophyllic) आक्रमण
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 11
पद 3-विप्रोटोनीकरण (deprotonation) जिससे ऐल्कोहॉल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 12

प्रश्न 11.12.
आपको बेन्जीन, सान्द्र H2SO4 और NaOH दिए गए हैं। इन अभिकर्मकों के उपयोग द्वारा फीनॉल के विरचन की समीकरण लिखिए।
उत्तर:
पहले बेन्जीन का ओलियम ( सधूम H2SO4) द्वारा सल्फोनीकरण किया जाता है तथा इससे प्राप्त बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ संगलित करने से सोडियम फीनॉक्साइड प्राप्त होता है। प्राप्त सोडियम फीनॉक्साइड की तनु अम्ल से क्रिया कराने पर फीनॉल प्राप्त हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 13

प्रश्न 11.13.
आप निम्नलिखित को कैसे संश्लेषित करेंगे ? दर्शाइए।
(i) एक उपयुक्त ऐल्कीन 1- फेनिलएथेनॉल
(ii) SN2 अभिक्रिया द्वारा ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल
(iii) एक उपयुक्त ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से पेन्टेन -1- ऑल।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 14

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.14.
ऐसी दो अभिक्रियाएँ दीजिए जिनसे फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती हो। फीनॉल की अम्लता की तुलना एथेनॉल से कीजिए |
उत्तर:
निम्नलिखित अभिक्रियाओं से फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 15

प्रश्न 11.15.
समझाइए कि ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो- मेथॉक्सी फीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होती है ?
उत्तर:
ऑर्थो – नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो मेथॉक्सी फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय होती है क्योंकि -NO2 समूह का इलेक्ट्रॉन- आकर्षी अनुनाद प्रभाव (-I तथा -M) फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ाता है जबकि -OCH3 (मेथॉक्सी) समूह का इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षी प्रभाव फीनॉक्साइड आयन के स्थायित्व को कम करता है। फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ने से फीनॉल का वियोजन अधिक होता है अतः अम्लीय प्रबलता बढ़ती है।

प्रश्न 11.16.
समझाइए कि बेन्जीन वलय से जुड़ा – OH समूह उसे इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति कैसे सक्रियित करता है?
उत्तर:
ऐरोमैटिक इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन – फीनॉलों में ऐरोमैटिक वलय पर होने वाली अभिक्रियाएँ इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ होती हैं। बेन्ज़ीन वलय से जुड़ा – OH समूह इसे इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया के लिए सक्रियित करता है और आने वाले इलेक्ट्रॉनस्नेही को ऑर्थो एवं पैरा स्थिति पर निर्देशित करता है। क्योंकि – OH समूह के इलेक्ट्रॉन -प्रतिकर्षी (+ M प्रभाव) अनुनाद प्रभाव के कारण o तथा p- स्थितियाँ इलेक्ट्रॉन-धनी हो जाती हैं अतः इलेक्ट्रॉनरागी इन स्थितियों पर आसानी से आक्रमण करता है तथा बेन्जीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण सुगमता से होता है। फीनॉल की अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 16

प्रश्न 11.17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण दीजिए-
(i) प्रोपेन- 1 ऑल का क्षारीय KMnO के साथ ऑक्सीकरण
(ii) ब्रोमीन की CS2 में फीनॉल के साथ अभिक्रिया
(iii) तनु HNO3 की फीनॉल से अभिक्रिया
(iv) फीनॉल की जलीय NaOH की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ अभिक्रिया।
उत्तर:
(i) प्रोपेन – 1- ऑल का क्षारीय KMnO4 ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 17

(ii) ब्रोमीन की CS2 में फीनॉल के साथ अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 18

(iii) तनु HNO3 की फीनॉल से अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 19

(iv) फीनॉल की जलीय NaOH की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 20
इसे राइमर -टीमान अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 11.18.
निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए –
(i) कोल्बे अभिक्रिया
(ii) राइमर – टीमान अभिक्रिया
(iii) विलियम्सन ईथर संश्लेषण
(iv) असममित ईथर।
उत्तर:
(i) कोल्बे अभिक्रिया (Kolbe Reaction) – या कोल्बे शिमट अभिक्रिया-सोडियम फीनॉक्साइड को 130° ताप तथा उच्च दाब (4-7 वायु-दाब) पर CO2 के साथ गर्म करने पर पहले सोडियम फेनिल कार्बोनेट मध्यवर्ती बनता है जिसके पुनर्विन्यास से सोडियम सैलिसिलेट प्राप्त होता है। सोडियम सैलिसिलेट के अम्लीकरण से सैलिसिलिक अम्ल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 21
इस अभिक्रिया में CO2 दुर्बल इलेक्ट्रॉनस्नेही होते हुए भी अभिक्रिया सुगमता से सम्मन्न हो जाती है जिसका कारण फीनॉक्साइड आयन का, फीनॉल की तुलना में अधिक क्रियाशील होना है।

(ii) राइमर – टीमान अभिक्रिया – फीनॉल की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ अभिक्रिया से ऑर्थो स्थिति पर – CHO समूह आ जाता है। इस अभिक्रिया को राइमर-टीमन अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में पहले प्रतिस्थापित बेन्जल क्लोराइड (मध्यवर्ती) बनता है जो क्षार की उपस्थिति में अपघटित होकर सैलिसैल्डिहाइड बनाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 22

(iii) विलियम्सन ईथर संश्लेषण (Williamson’s Ether Synthesis) – ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने से ईथर प्राप्त होते हैं, इसे विलियम्सन ईथर संश्लेषण कहते हैं।
\(\mathrm{RX}+\mathrm{R}^{\prime}-\overline{\mathrm{O}}-\stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{R}-\mathrm{O}-\mathrm{R}^{\prime}+\mathrm{NaX}\)
\(\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{Br}+\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \stackrel{-}{\mathrm{O}} \stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{O} \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5+\mathrm{NaBr}\)
यह सममित तथा असममित ईथर बनाने की महत्त्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है।
इस विधि से द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्किल समूह युक्त ईथर भी बनाए जा सकते हैं तथा इसमें प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड पर ऐल्कॉक्साइड आयन आक्रमण करता है, अतः इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN² होती है।
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 23
द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड लेने पर ईथर तथा एल्कीन ( विलोपन अभिक्रिया) दोनों बनती हैं तथा तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग करने पर एल्कीन ही बनती है क्योंकि RO (ऐल्कॉक्साइड) आयन प्रबल क्षार होता है, अतः विलोपन अभिक्रिया होती है।

उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24a

इस विधि द्वारा फीनॉल से भी ईथर बनाया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24

लेकिन C6H5Br की R\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) से अभिक्रिया द्वारा ईथर नहीं बनता क्योंकि ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति बहुत कम क्रियाशील होते हैं।
C6H5Br + CH3–\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) → कोई अभिक्रिया नहीं

(iv) असममित ईथर – वे ईथर जिनमें दोनों हाइड्रोकार्बन समूह भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें असममित ईथर कहते हैं। जैसे CH3-O-C2 H5 एथिल मेथिल ईथर।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.19.
एथेनॉल के अम्लीय निर्जलन या निर्जलीकरण (Dehydration) से एथीन प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
एथेनॉल को 443 K ताप पर सान्द्र H2SO4 के साथ करने पर इसका निर्जलीकरण होकर एथीन बनती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 25
एथेनॉल के निर्जलीकरण (Dehydration) की क्रियाविधि में निम्नलिखित पद होते हैं-
क्रियाविधि-
I. प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल का बनना-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 26

II. कार्बोकैटायन का बनना (Formation of Carbocation) – यह सबसे धीमा पद है अतः यह वेग निर्धारक पद है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 27

III. विप्रोटोनीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 28
पद 1 में प्रयुक्त अम्ल, पद 3 में स्वतंत्र हो जाता है। इस अभिक्रिया में साम्य को दाईं ओर विस्थापित करने के लिए, एथीन को बनते ही निकाल लिया जाता है।

प्रश्न 11.20.
निम्नलिखित परिवर्तनों को किस प्रकार किया जा सकता है?
(i) प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल
(ii) बेन्जिल क्लोराइड → बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड → प्रोपेन-1-ऑल
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड → 2-मेथिलप्रोपेन-2ऑल।
उत्तर:
(i) प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल (प्रोपीन के जलयोजन से)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 29
(ii) बेन्जिल क्लोराइड → बेन्जिल ऐल्कोहॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 30
(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड → प्रोपेन-1-ऑल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 31
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड → 2-मेथिलप्रोपेन-2ऑल।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 32

प्रश्न 11.21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में प्रयुक्त अभिकर्मकों के नाम बताइए –
(i) प्राथमिक ऐल्कोहॉल का कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकरण
(ii) प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऐल्डिहाइड में ऑक्सीकरण
(iii) फीनॉल का 2, 4, 6 – ट्राइब्रोमोफीनॉल में ब्रोमीनन
(iv) बेन्जिल ऐल्कोहॉल से बेन्जोइक अम्ल
(v) प्रोपेन – 2 – ऑल का प्रोपीन में निर्जलन (vi) ब्यूटेन – 2 – ऑन से ब्यूटेन – 2 – ऑल |
उत्तर:
(i) KMnO4 का अम्लीय विलयन (या अम्लीय K2Cr2O7)
(ii) गर्म अपचयित कॉपर या पिरीडिनियम क्लोरो क्रोमेट (PCC)
(iii) ब्रोमीन का जलीय विलयन
(iv) KMnO4 का अम्लीय विलयन
(v) गर्म तथा सान्द्र H2SO4
(vi) लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड (LiAlH4) या सोडियम बोरोहाइड्राइड (NaBH4)

प्रश्न 11.22.
कारण बताइए कि मेथॉक्सीमेथेन की तुलना में एथेनॉल का क्वथनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर:
एथेनॉल में अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जबकि मेथॉक्सी मेथेन में द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण (वान्डरवाल बल) पाया जाता है। अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बन्ध की प्रबलता, द्विध्रुव- द्विध्रुव आकर्षण से अधिक होती है। अतः एथेनॉल का क्वथनांक, मेथॉक्सी मेथेन की तुलना में उच्च होता है।

प्रश्न 11.23.
निम्नलिखित ईथरों के आईयूपीएसी ( IUPAC ) नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 33
उत्तर:
(i) 1-एथॉक्सी-2 – मेथिलप्रोपेन
(ii) 2 – क्लोरो-1 – मेथॉक्सीएथेन
(iii) 4 – नाइट्रोऐनिसॉल
(iv) 1- मेथॉक्सीप्रोपेन
(v) 1- एथॉक्सी-4, 4- डाइमेथिलसाइक्लोहेक्सेन
(vi) एथॉक्सीबेन्जीन

प्रश्न 11.24.
निम्नलिखित ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मकों के नाम एवं समीकरण लिखिए-(i) 1- प्रोपॉक्सीप्रोपेन (ii) एथॉक्सीबेन्जीन (iii) 2-मेथॉक्सी-2 – मेथिलप्रोपेन (iv) 1 – मेथॉक्सीएथेन।
उत्तर:
उपर्युक्त ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा निम्न प्रकार बनाया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 34

प्रश्न 11.25.
कुछ विशेष प्रकार के ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने की सीमाओं को उदाहरणों से समझाइए।
उत्तर:
विलियम्सन ईथर संश्लेषण (Williamson’s Ether Synthesis) – ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने से ईथर प्राप्त होते हैं, इसे विलियम्सन ईथर संश्लेषण कहते हैं।
\(\mathrm{RX}+\mathrm{R}^{\prime}-\overline{\mathrm{O}}-\stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{R}-\mathrm{O}-\mathrm{R}^{\prime}+\mathrm{NaX}\)
\(\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{Br}+\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \stackrel{-}{\mathrm{O}} \stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{O} \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5+\mathrm{NaBr}\)
यह सममित तथा असममित ईथर बनाने की महत्त्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है।
इस विधि से द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्किल समूह युक्त ईथर भी बनाए जा सकते हैं तथा इसमें प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड पर ऐल्कॉक्साइड आयन आक्रमण करता है, अतः इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN² होती है।
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 23
द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड लेने पर ईथर तथा एल्कीन ( विलोपन अभिक्रिया) दोनों बनती हैं तथा तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग करने पर एल्कीन ही बनती है क्योंकि RO (ऐल्कॉक्साइड) आयन प्रबल क्षार होता है, अतः विलोपन अभिक्रिया होती है।

उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24a

इस विधि द्वारा फीनॉल से भी ईथर बनाया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24

लेकिन C6H5Br की R\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) से अभिक्रिया द्वारा ईथर नहीं बनता क्योंकि ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति बहुत कम क्रियाशील होते हैं।
C6H5Br + CH3–\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) → कोई अभिक्रिया नहीं

प्रश्न 11.26.
प्रोपेन- 1 ऑल से 1 प्रोपॉक्सी प्रोपेन को किस प्रकार बनाया जाता है ? इस अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
प्रोटिक अम्लों (H2SO4, H3PO4) की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल के आधिक्य को लगभग 413 K ताप पर गर्म करने पर ईथर मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 35
ईथर बनाने की यह विधि द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN2) है जिसमें ऐल्कोहॉल का अणु एक प्रोटोनित ऐल्कोहॉल अणु पर आक्रमण करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 36

प्रश्न 11.27.
द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन (निर्जलीकरण) द्वारा ईथरों को बनाने की विधि उपयुक्त नहीं है। कारण बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथर बनाना मुश्किल होता है क्योंकि प्रतिस्थापन तथा विलोपन अभिक्रियाओं के मध्य प्रतिस्पर्धा में विलोपन अभिक्रिया अधिक होने से मुख्य उत्पाद ऐल्कीन बनती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 37

प्रश्न 11.28.
हाइड्रोजन आयोडाइड की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए-
(i) 1 – प्रोपॉक्सीप्रोपेन
(ii) मेथॉक्सीबेन्जीन तथा
(iii) बेन्जिल एथिल ईथर ।
उत्तर:
(i) जब HI कम मात्रा में लिया जाता है तो 1- आयोडोप्रोपेन तथा प्रोपेन- 1 – ऑल बनता है जबकि HI आधिक्य में लेने पर 1-आयोडोप्रोपेन के दो मोल बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 38

प्रश्न 11.29.
ऐरिल ऐल्किल ईथरों में निम्न तथ्यों की व्याख्या कीजिए-
(i) ऐल्कॉक्सी समूह बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रियित करता है, तथा
(ii) यह प्रवेश करने वाले प्रतिस्थापियों को बेन्जीन वलय की ऑर्थो एवं पैरा स्थितियों की ओर निर्दिष्ट करता है।
उत्तर:
(i) ऐरिल ऐल्किल ईथरों में ऐल्कॉक्सी समूह बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति सक्रियित करता है क्योंकि फीनॉल के समान ईथर के ऑक्सीजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद ( + M प्रभाव) करता है जिससे बेन्जीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण आसान हो जाता है।

(ii) अनुनाद के कारण ( + M प्रभाव) ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है (ऋणावेश) अतः आने वाला इलेक्ट्रॉनरागी ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर आक्रमण करता है। इसे निम्न अनुनादी संरचनाओं द्वारा समझा सकते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 39

प्रश्न 11.30.
मेथॉक्सी मेथेन की HI के साथ अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
मेथॉक्सी मेथेन की HI के साथ अभिक्रिया SN² क्रियाविधि द्वारा होती है।
पद I.
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 40
पद II.
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 42
जब HI आधिक्य में होता है तो CH3OH, पुनः HI से क्रिया करके CH3I बना देता है।
पद III.
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 43

प्रश्न 11.31.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए –
(i) फ्रीडेल क्राफ्ट अभिक्रिया – ऐनिसोल का ऐल्किलन (ऐल्किलीकरण)
(ii) ऐनिसोल का नाइट्रीकरण
(iii) एथेनॉइक अम्ल माध्यम में ऐनिसोल का ब्रोमीनन (ब्रोमीनीकरण)
(iv) ऐनिसोल का फ्रीडेल क्राफ्ट ऐसीटिलन (ऐसीटिलीकरण)
उत्तर:
(i) फ्रीडेल- क्राफ्ट अभिक्रिया – ऐनिसोल का ऐल्किलन (Alkylation) –
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 44
यहाँ AICI3 लुइस अम्ल की भाँति कार्य करता है।

(ii) ऐनिसोल का नाइट्रीकरण (Nitration ) – सान्द्र H2SO4 तथा सान्द्र HNO3 के मिश्रण (नाइट्रीकारक मिश्रण) से ऐनिसोल का नाइट्रीकरण कराने पर ऑर्थो तथा पैरानाइट्रो ऐनिसोल का मिश्रण बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 45

(iii) एथेनॉइक अम्ल माध्यम में ऐनिसोल का ब्रोमीनन (ब्रोमीनीकरण) (Bromination)-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 46

(iv) ऐनिसोल का फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐसीटिलन (ऐसीटिलीकरण) (Acetylation) –
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 47

प्रश्न 11.32.
उपयुक्त ऐल्कीनों से आप निम्नलिखित ऐल्कोहॉलों का संश्लेषण कैसे करेंगे?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 48
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 49

प्रश्न 11.33.
3 – मेथिलब्यूटेन – 2 – ऑल को HBr से अभिकृत कराने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 50
इस अभिक्रिया की क्रियाविधि दीजिए।
संकेत – चरण II में प्राप्त द्वितीयक कार्बोकैटायन हाइड्राइड आयन विचलन कारण पुनर्विन्यासित होकर स्थायी तृतीयक कार्बोकैटायन बनाते हैं।
उत्तर:
इस अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्न है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 51

HBSE 12th Class Chemistry ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर Intext Questions

प्रश्न 11.1.
निम्नलिखित को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉल में वर्गीकृत कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 52
उत्तर:
प्राथमिक ऐल्कोहॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 53

द्वितीयक ऐल्कोहॉल (iv) तथा (v)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 54

तृतीयक ऐल्कोहॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 55

प्रश्न 11.2.
उपरोक्त उदाहरणों में से ऐलिलिक ऐल्कोहॉलों को पहचानिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 56

प्रश्न 11.3.
निम्नलिखित यौगिकों के आई यूपीएसी (IUPAC) नामपद्धति से नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 57
उत्तर:
(i) 3-क्लोरोमेथिल-2-आइसोप्रोपिलपेन्टेंन-1-ऑल
(ii) 2, 5-डाइमेथिलहेक्सेन-1, 3-डाइऑल
(iii) 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्सेन-1-ऑल
(iv) हेक्स-1-ईन-3-ऑल
(v) 2-ब्रोमो-3-मथथिलब्यूट-2-ईन-1-ऑल।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.4.
दर्शाइए कि मेथेनैल पर उपयुक्त ग्रीन्यार अभिकर्मक से अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित ऐल्कोहॉल कैसे विरचित किए जाते हैं?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 58
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 59

प्रश्न 11.5.
निम्नलिखित अभिक्रिया के उत्पादों की संरचना लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 60
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 61

प्रश्न 11.6.
यदि निम्नलिखित ऐल्कोहॉल क्रमशः (क) HCl-ZnCl2 (ख) HBr (ग) SOCl2 से अभिक्रिया करें तो आप अपेक्षित उत्पादों की संरचनाएँ दीजिए।
(i) ब्यूटेन -1- ऑल
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल
उत्तर:
(i) ब्यूटेन – 1 – ऑल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 62

प्रश्न 11.7.
(i) 1- मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल और
(ii) ब्यूटेन – 1- ऑल के अम्ल उत्प्रेरित निर्जलन (Dehydration) के मुख्य उत्पादों की प्रागुक्ति कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 63
ब्यूट – 1 – ईन तथा ब्यूट – 2 – ईन का मिश्रण बनता है जिसमें उत्पाद ब्यूट-2-ईन मुख्य उत्पाद होती है क्योंकि पुनर्विन्यास द्वारा अधिक स्थायी 2° – कार्बोनियम आयन (सेकेंड्री कार्बोकैटायन) बनता है।

प्रश्न 11.8.
ऑर्थो तथा पैरा नाइट्रोफीनॉल, फीनॉल से अधिक अम्लीय होती हैं। उनके संगत फीनॉक्साइड आयनों की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।
उत्तर:
फीनॉल में ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर नाइट्रो समूह आने पर अम्लीय गुण बढ़ जाता है जिसे निम्न अनुनादी संरचनाओं से समझा सकते हैं-
(i) आर्थो नाइट्रो फीनॉल के ऋणायन की अनुनादी संरचनाएँ-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 64
(ii) पैरानाइट्रो फीनॉल के ऋणायन की अनुनादी संरचनाएँ
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 65
प्रतिस्थापित फीनॉलों में -NO2 समूह जैसे इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह फीनॉल की अम्लीय प्रबलता को बढ़ा देते हैं तथा ये समूह o तथा p- स्थिति पर होने पर यह प्रभाव अधिक होता है क्योंकि इससे फीनॉक्साइड आयन के ऋणावेश का प्रभावी विस्थापन या विस्थानीकरण होता है जिससे इनका स्थायित्व बढ़ जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.9.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में सम्मिलित समीकरण लिखिए-
(i) राइमर – टीमन अभिक्रिया
(ii) कोल्बे अभिक्रिया।
उत्तर:
(i) राइमर – टीमन अभिक्रिया – फीनॉल की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ अभिक्रिया से ऑर्थो स्थिति पर – CHO समूह आ जाता है। इस अभिक्रिया को राइमर टीमन अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में पहले प्रतिस्थापित बेन्जल क्लोराइड (मध्यवर्ती) बनता है जो क्षार की उपस्थिति में अपघटित होकर सैलिसैल्डिहाइड बनाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 66

(ii) कोल्बे अभिक्रिया – या कोल्बे शिमिट अभिक्रिया-सोडियम फीनॉक्साइड को 130° ताप तथा उच्च दाब (4-7 वायु-दाब) पर CO2 के साथ गर्म करने पर पहले सोडियम फेनिल कार्बोनेट मध्यवर्ती बनता है जिसके पुनर्विन्यास से सोडियम सैलिसिलेट प्राप्त होता है। सोडियम सैलिसिलेट के अम्लीकरण से सैलिसिलिक अम्ल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 67
इस अभिक्रिया में CO2 दुर्बल इलेक्ट्रॉनस्नेही होते हुए भी अभिक्रिया सुगमता से सम्पन्न हो जाती है जिसका कारण फीनॉक्साइड आयन का, फीनॉल की तुलना में अधिक क्रियाशील होना है।

प्रश्न 11.10.
एथेनॉल एवं 3-मेथिलपेन्टेन-2-ऑल से प्रारम्भ कर 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन के विलियम्सन संश्लेषण की अभिक्रिया लिखिए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 68
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 69

प्रश्न 11.11.
1-मेथॉक्सी-4-नाइट्रोबेन्जीन के विरचन के लिए निम्नलिखित अभिकारकों में से कौन-सा युग्म उपयुक्त है और क्यों?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 70
उत्तर:
1-मेथॉक्सी-4-नाइट्रोबेन्जीन के विरचन के लिए युग्म (ii) उपयुक्त है क्योंकि युग्म (i) में बेन्जीन वलय से जुड़े ब्रोमीन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होने के कारण C-Br बन्ध में द्विबन्ध के गुण आ जाते हैं अतः बन्ध प्रबल हो जाता है तथा इसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 71

प्रश्न 11.12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों का अनुमान लगाइए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 72
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 73

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर Read More »

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.1.
कॉपर का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा किया जाता है, परन्तु जिंक का नहीं । व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
कॉपर का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा किया जा सकता है। क्योंकि कॉपर कम क्रियाशील धातु (विद्युत रासायनिक श्रेणी में नीचे ) है, जबकि Zn ( जिंक) अत्यधिक क्रियाशील (विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर) धातु है अतः इसको ZnSO4 विलयन से आसानी से प्रतिस्थापित करना संभव नहीं है इसलिए जिंक का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 6.2.
फेन प्लवन विधि में अवनमक की क्या भूमिका है?
उत्तर:
फेन प्लवन विधि में अवनमक एक घटक (अशुद्धि) के साथ संकुल बना लेता है एवं इसे झाग में आने से रोकता है। उदाहरण- NaCN, ZnS के लिए अवनमक का कार्य करता है। PbS के लिए नहीं। अतः किसी अयस्क में PbS तथा ZnS दोनों उपस्थित हैं केवल PbS ही फेन बनाता है अतः इस विधि से PbS को ZnS से पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 6.3.
अपचयन द्वारा ऑक्साइड अयस्कों की अपेक्षा पाइराइट से ताँबे का निष्कर्षण अधिक कठिन क्यों है?
उत्तर:
कार्बन, सल्फाइड अयस्कों के लिए अच्छा अपचायक नहीं है। जबकि यह ऑक्साइड अयस्कों के लिए अच्छा अपचायक है। अतः अपचयन द्वारा ऑक्साइड अयस्कों की अपेक्षा पाइराइट (सल्फाइड अयस्क) से ताँबे का निष्कर्षण अधिक मुश्किल है तथा अधिकांश सल्फाइडों के विरचन की गिब्ज़ ऊर्जा CS2 के विरचन की गिब्ज ऊर्जा से अधिक होती है। वास्तव में CS2 एक ऊष्माशोषी यौगिक है अतः अपचयन से पहले सल्फाइड अयस्कों का संगत ऑक्साइडों में भर्जन करना उचित रहता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.4.
व्याख्या कीजिए-
(1) मंडल परिष्करण
(2) स्तंभ वर्णलेखिकी।
उत्तर:
1. मंडल परिष्करण या जोन परिष्करण – मंडल परिष्करण द्वारा अतिशुद्ध धातु प्राप्त होती है। यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि अशुद्धियों की विलेयता धातु की ठोस अवस्था की अपेक्षा गलित अवस्था में अधिक होती है। इस विधि में अशुद्ध धातु की छड़ के एक किनारे पर एक वृत्ताकार गतिशील हीटर (तापक) लगा होता है। जो छड़ को हर तरफ से घेरे रहता है। हीटर जैसे ही आगे बढ़ता है, गलित मण्डल भी आगे बढ़ता जाता है और गलित से शुद्ध धातु क्रिस्टलित हो जाती है तथा अशुद्धियाँ पास वाले गलित जोन में चली जाती हैं।

इस प्रक्रिया को कई बार दोहराते हैं तथा हीटर को एक ही दिशा में बार-बार चलाते जाते हैं। अशुद्धियाँ छड़ के एक किनारे पर एकत्रित हो जाती हैं, जिसे काटकर अलग कर लेते हैं। इस विधि से अति शुद्ध अर्धचालकों तथा अन्य शुद्ध धातुओं; जैसे – जर्मेनियम, सिलिकॉन, बोरॉन, गैलियम तथा इंडियम को प्राप्त किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 1

2. वर्णलेखिकी या क्रोमेटोग्रैफी विधि – वर्णलेखिकी (क्रोमेटोग्रफी) किसी मिश्रण के विभिन्न घटकों को पृथक् करने की विधि होती है । वर्णलेखिकी पद ग्रीक भाषा के शब्द क्रोमा अर्थात् रंग से लिया गया है क्योंकि प्रारम्भ में इसे रंगीन पदार्थों को पृथक् करने में प्रयुक्त किया गया था। वर्णलेखिकी, अधिशोषण तथा विभेदी अभिगमन के सिद्धान्त पर आधारित होती है, अर्थात् अधिशोषक पर मिश्रण के विभिन्न घटकों का अधिशोषण भिन्न-भिन्न होता है। मिश्रण को द्रव या गैसीय माध्यम में रखा जाता है जो कि अधिशोषक में से गुजरता है।

स्तम्भ में विभिन्न घटक भिन्न- भिन्न स्तरों पर अधिशोषित हो जाते हैं। इसके पश्चात् अधिशोषित घटक उपयुक्त विलायक (निक्षालक) द्वारा निक्षालित किए जाते हैं। गतिशील माध्यम की भौतिक अवस्था, अधिशोष्य पदार्थ की प्रकृति तथा गतिशील माध्यम के गमन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। वर्णलेखिकी कई प्रकार की होती है- पेपर वर्णलेखिकी, स्तम्भ वर्णलेखिकी, पतली परत वर्णलेखिकी तथा गैस वर्णलेखिकी। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण वर्णलेखिकी स्तम्भ वर्णलेखिकी है।

प्रश्न 6.5.
673K ताप पर C तथा CO में से कौनसा अच्छा अपचायक है ?
उत्तर:
कम ताप जैसे 673K पर △G°( CO, CO2) रेखा, △G°(C, CO2) रेखा के नीचे है, अतः 673K पर C तथा CO में से CO अच्छा अपचायक है।

प्रश्न 6.6.
कॉपर के वैद्युत अपघटनी शोधन में ऐनोड पंक में उपस्थित सामान्य तत्वों के नाम दीजिए। ये वहाँ कैसे उपस्थित होते हैं?
उत्तर:
कॉपर के वैद्युत अपघटनी शोधन में ऐनोड पंक में एन्टीमनी सेलेनियम, टेल्यूरियम, चाँदी, सोना तथा प्लेटिनम इत्यादि धातुएँ उपस्थित होती हैं क्योंकि ये कॉपर की तुलना में कम विद्युत धनी (कम क्रियाशील ) होती हैं अतः इनका ऐनोड पर ऑक्सीकरण नहीं होता तथा ये ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक के रूप में जमा हो जाती हैं।

प्रश्न 6.7.
आयरन (लोहे) के निष्कर्षण के दौरान वात्या भट्टी के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर:
(i) वात्या भट्टी के ऊपरी भाग में जहाँ ताप परिसर 500- 800K होता है, निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं-
3Fe2O3 + CO → 2Fe3O4 + CO2
Fe3O4 + 4CO → 3FeO + CO2
Fe2O3 + CO → 2FeO + CO2

(ii) वात्या भट्टी के मध्य भाग में जहाँ ताप परिसर 900-1500K होता है, निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं-
C + CO2 → 2CO
FeO + CO → Fe + CO2
CaCO3 → CaO + CO2
CaO + SiO2 → CaSiO3

(iii) वात्या भट्टी के नीचे के भाग में जहाँ उच्च ताप होता है, कोक जलकर CO2 बनाता है जो कोक से अपचयित होकर CO बनाता है।
C + O2 → CO2
CO2 + C → 2CO
FeO + C → Fe + CO

प्रश्न 6.8.
जिंक ब्लेंड से जिंक के निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर:
जिंक ब्लेंड (ZnS) से जिंक के निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 2

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.9.
कॉपर के धातुकर्म में सिलिका की भूमिका समझाइए ।
उत्तर:
कॉपर के धातुकर्म में सिलिका (SiO2), गालक (Flux ) की तरह कार्य करता है जो कि कॉपर के साथ उपस्थित FeO की अशुद्धि से क्रिया करके उसे स्लेग (कीट) के रूप में पृथक् कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 3

प्रश्न 6.10.
यदि तत्व सूक्ष्म मात्रा में प्राप्त हुआ हो तो शोधन की कौन-सी तकनीक अधिक उपयोगी होगी?
उत्तर:
जब कोई तत्व सूक्ष्म मात्रा में प्राप्त हुआ है तो शोधन की स्तम्भ वर्णलेखिकी विधि अधिक उपयोगी होगी।

प्रश्न 6.11.
यदि किसी तत्व में उपस्थित अशुद्धियों के गुण तत्व से मिलते जुलते हों तो आय शोधन के लिए किस विधि का सुझाव देंगे ?
उत्तर:
जब किसी तत्व में उपस्थित अशुद्धियों के गुण तत्व से मिलते हों तो शोधन के लिए स्तम्भ वर्ण लेखिकी (कॉलम क्रोमेटोग्राफी) विधि का ही प्रयोग करेंगे।

प्रश्न 6.12.
निकल के शोधन की विधि समझाइए |
उत्तर:
निकल (Ni) का शोधन मॉन्ड की विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में निकल को कार्बन मोनोक्साइड के साथ गरम करने से वाष्पशील निकल टेट्राकार्बोनिल संकुल बन जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 4
इस संकुल को और अधिक ताप पर गरम करते हैं, तो यह विघटित होकर शुद्ध Ni दे देता है तथा CO पृथक् हो जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 5

प्रश्न 6.13.
उदाहरण देते हुए भर्जन व निस्तापन में अंतर बताइए ।
उत्तर:
निस्तापन प्रक्रम में अयस्क ( जलयोजित ऑक्साइड, कार्बोनेट, हाइड्रॉक्साइड आदि) को धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर धीरे- धीरे गर्म करते हैं, जिससे वाष्पशील पदार्थ (CO2, H2O) निकल जाते हैं तथा धातु ऑक्साइड बच जाता है। परन्तु भर्जन में सल्फाइड अयस्कों को वायु (O2) की उपस्थिति में धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर परावर्तनी भट्टी में तेजी से गर्म करते हैं जिससे सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं तथा SO2 गैस निकल जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 6

प्रश्न 6.14.
ढलवाँ लोहा ( Cast Iron) कच्चे लोहे (Pig Iron) से किस प्रकार भिन्न होता है?
उत्तर:
ढलवाँ लोहे में लगभग 3% कार्बन होता है जबकि कच्चे लोहे में लगभग 4% कार्बन होता है। कच्चे लोहे के साथ रद्दी लोहा तथा कोक को गलाकर ढलवाँ लोहा बनाया जाता है।

प्रश्न 6.15.
अयस्कों तथा खनिजों में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
अयस्क ( Ores) – वे खनिज जिनसे धातु का निष्कर्षण आसानी से हो सके तथा आर्थिक रूप से लाभदायक हों उन्हें अयस्क कहते हैं। जैसे कॉपर ग्लांस (Cu2S), क्युपराइट (Cu2O) तथा कॉपर पाइराइटीज (CuFeS2) कॉपर के अयस्क हैं, लेकिन इनमें से कॉपर पाइराइटीज ही कॉपर का अयस्क है।
खनिज (Minerals) – भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक पदार्थ ( यौगिक ) जिन्हें खनन द्वारा प्राप्त किया जाता है उन्हें खनिज कहते हैं।

प्रश्न 6.16.
कॉपर मेट को सिलिका की परत चढ़े हुए परिवर्तक में क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
कॉपर मेट में Cu2S तथा FeS उपस्थित होते हैं। परिवर्तक में FeS, FeO में बदल जाता है। इसे दूर करने में सिलिका सहायक होता है क्योंकि FeO सिलिका से क्रिया द्वारा आयरन सिलिकेट (कीट) बनकर पृथक् हो जाता है, अतः परिवर्तक पर सिलिका की परत चढ़ाते हैं।
2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2
FeO + SiO2 → FeSiO3 आयरन सिलिकेट (कीट)

प्रश्न 6.17.
ऐलुमिनियम के धातु कर्म में क्रायोलाइट की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के धातु कर्म में क्रायोलाइट इसलिए मिलाया जाता है क्योंकि इससे मिश्रण का गलनांक कम हो जाता है तथा विलयन की चालकता बढ़ जाती है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.18.
निम्न कोटि के कॉपर अयस्कों के लिए निक्षालन क्रिया को कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
कॉपर का निक्षालन अम्ल या बैक्टिरिया ( जीवाणु) द्वारा किया जाता है। विलयन में उपस्थित Cu+2 को आयरन या H2 गैस से क्रिया करवाकर पृथक् किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 7

प्रश्न 6.19.
CO का उपयोग करते हुए अपचयन द्वारा जिंक ऑक्साइड से जिंक का निष्कर्षण क्यों नहीं किया जाता ?
उत्तर:
Zn के अपचयन के लिए आवश्यक ताप ( 1673K) पर एलिंघम आलेख में \(\Delta_r G^{\ominus}\)(CO, CO2) रेखा, \(\Delta_r G^{\ominus}\)(Zn, ZnO) की रेखा से ऊपर है। अतः इस अभिक्रिया के लिए \(\Delta_r G^{\ominus}\) का मान धनात्मक होगा।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 8
इसलिए 1673K ताप पर ZnO के लिए CO को अपचायक के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए अत्यधिक उच्च ताप की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 6.20.
Cr2O3 के विरचन के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान – 540 kJmol-1 है तथा Al2O3 के लिए – 827kJ mol-1 है। क्या Cr2 O3 का अपचयन Al से संभव है?
उत्तर:
Al द्वारा Cr2O3 के अपचयन के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान ऋणात्मक होता है अतः Cr2O3 का अपचयन Al द्वारा संभव है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 9
समीकरण ( 2 ) में से समीकरण (1) को घटाने पर,
\(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) = 827 – (-540)
= – 287 kJ mol-1

प्रश्न 6.21.
C व CO में से ZnO के लिए कौन-स अपचायक अच्छा है?
उत्तर:
ZnO के अपचयन के लिए C व CO में से C (कार्बन) अच्छा अपचायक है, क्योंकि एलिंघम आलेख में \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) ( C. CO) रेखा, \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\)(Zn, ZnO) की रेखा से नीचे है अतः इस अभिक्रिया के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान ऋणात्मक होगा।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 10

प्रश्न 6.22.
किसी विशेष स्थिति में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकी कारकों पर आधारित है। आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? अपने मत के समर्थन में दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी विशेष स्थिति में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकी कारकों पर आधारित है, यह कथन सत्य है। किसी अपचायक तथा धातु ऑक्साइड के मध्य अभिक्रिया होने के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान ऋणात्मक होना चाहिए। अतः जिस अपचायक से होने वाली अपचयन अभिक्रिया का \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) ऋणात्मक होगा वह अपचायक उस अभिक्रिया के लिए उपयुक्त होगा।
उदाहरण- (i) 1000K पर Al, Cr2O3 का अपचयन कर सकता है लेकिन MgO का नहीं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 11
अतः यह अभिक्रिया संभव है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 12
अतः यह अभिक्रिया संभव नहीं है।

(ii) 1500K ताप पर कोक (C), ZnO का अपचयन कर सकता है लेकिन CO नहीं ।
ZnO + C → Zn + CO; \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) = -Ve
ZnO + CO → Zn + CO2; \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) = +Ve

प्रश्न 6.23.
उस विधि का नाम लिखिए जिसमें क्लोरीन सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। क्या होगा यदि NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन किया जाए?
उत्तर:
निम्नलिखित विधियों में क्लोरीन सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है-
(i) गलित NaCl का वैद्युत अपघटन (डॉऊ की विधि)
(ii) जलीय NaCl का वैद्युत अपघटन (कॉसनर केलनर विधि)
NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर H2 गैस तथा ऐनोड पर Cl2 गैस प्राप्त होती है तथा विलयन में NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 13

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.24.
ऐलुमिनियम के वैद्युत धातु कर्म में ग्रैफाइट छड़ की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के वैद्युत धातु कर्म में ग्रेफाइट की छड़ ऐनोड की भांति कार्य करती है तथा यह Al2O3 के अपचयन से Al बनाने में सहायक होती है। ग्रेफाइट में उपस्थित कार्बन ऐनोड पर उत्सर्जित O2 से क्रिया द्वारा CO तथा CO2 बनाता है।

प्रश्न 6.25.
उन परिस्थितियों का अनुमान लगाइए जिनमें Al, MgO को अपचयित कर सकता है।
उत्तर:
1350°C (1623K ) से अधिक ताप पर Al, MgO को अपचयित कर सकता है। यह अनुमान \(\Delta \mathrm{rG}^{\Theta}\) तथा T के मध्य आरेख से लगाया जाता है। (पाठ्यनिहित प्रश्न 6.4 का उत्तर भी देखिए )

HBSE 12th Class Chemistry तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम Intext Questions

प्रश्न 6.1.
सारणी 6.1 में दर्शाए गए अयस्कों में से कौन-से चुंबकीय पृथक्करण विधि द्वारा सांद्रित किए जा सकते हैं।
उत्तर:
वे अयस्क जिनमें एक घटक चुंबकीय (अशुद्धि या अयस्क) होता है, उन्हें इस विधि से सांद्रित किया जा सकता है। जैसे लोहयुक्त अयस्क हेमेटाइट (Fe2O3), मैग्नेटाइट (Fe2O3), सिडेराइट (FeCO3) तथा आयरन पाइराइट (FeS2) |

प्रश्न 6.2.
ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन (leaching) का क्या महत्व है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन द्वारा बॉक्साइट अयस्क में उपस्थित SiO2, Fe2O3 आदि की अशुद्धियों को निष्कासित किया जाता है।

प्रश्न 6.3.
अभिक्रिया
Cr2O3 + 2 Al → Al2 O3 + 2 Cr (△G° = – 421 kJ)
के गिब्ज़ ऊर्जा मान से लगता है कि अभिक्रिया ऊष्मागतिकी के अनुसार संभव है, पर यह कक्ष ताप पर संपन्न क्यों नहीं होती?
उत्तर:
अभिक्रिया Cr2O3 + 2 Al → Al2 O3 + 2 Cr के लिए मानक गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा परिवर्तन ऋणात्मक है अतः यह लगता है कि यह अभिक्रिया ऊष्मागतिकी के अनुसार संभव है लेकिन कमरे के ताप पर यह अभिक्रिया नहीं होती क्योंकि इसमें सभी अभिकारक ठोस हैं। अतः इस अभिक्रिया को सम्पन्न होने के लिए निश्चित मात्रा में सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है इसलिए गर्म करना आवश्यक है जिससे अभिकारक पिघल जाते हैं।

प्रश्न 6.4.
क्या यह सत्य है कि कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में मैग्नीशियम, Al2 O3 को अपचित कर सकता है और Al, MgO को भी। वे परिस्थितियाँ कौनसी हैं?
उत्तर:
हाँ यह सत्य है कि विशिष्ट परिस्थितियों में मैग्नीशियम Al2 O3 को अपचित कर सकता है और Al, MgO को भी। △G° के T के मध्य आलेख (एलिंघम आलेख) से ज्ञात होता है कि 1623K से कम ताप पर Mg, Al2 O3 को अपचित कर सकता है तथा 1623K से अधिक ताप पर Al, MgO का अपचयन कर सकता है क्योंकि Al तथा Mg के वक्र 1623K पर एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित कर रहे हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम Read More »

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.1.
वर्नर की अभिधारणाओं के आधार पर उपसहसंयोजन यौगिकों में आबंधन (bonding) को समझाइए।
उत्तर:
सर्वप्रथम वर्नर नामक वैज्ञानिक ने उपसहसंयोजन यौगिकों की संरचना की व्याख्या की। उन्होंने बहुत से उपसहसंयोजन यौगिक बनाकर प्रयोगों द्वारा उनके भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन किया तथा इन यौगिकों की विशेषताओं को बताया। वर्नर के अनुसार धातु आयन की दो प्रकार की संयोजकता

एँ होती हैं प्राथमिक संयोजकता तथा द्वितीयक संयोजकता साधारण यौगिक जैसे PdCl2 तथा CrCl3 में Pd तथा Cr की प्राथमिक संयोजकता क्रमशः 2 तथा 3 है।

वर्नर ने CoCl3 तथा NH3 की क्रिया से विभिन्न यौगिक बनाकर उनका अध्ययन किया तथा यह देखा कि सामान्य ताप पर इनके जलीय विलयन के आधिक्य में AgNO3 विलयन डालने पर कुछ क्लोराइड आयन ही AgCl के रूप में अवक्षेपित होते हैं तथा कुछ क्लोराइड आयन विलयन में ही रहते हैं। सभी यौगिकों के एक-एक मोल लेने पर CoCl3.6NH3(पीला) से 3 मोल AgCl, CoCl3.5NH3 [नीललोहित (बैंगनी)) से 2 मोल AgCl, CoCl3. 4NH3 (हरा) से 1 मोल AgCl तथा CoCl3.4NH3 (बैंगनी ) से 1 मोल AgCl बनता है।

इन प्रेक्षणों से ज्ञात होता है कि ये यौगिक संकुल के रूप में पाए जाते हैं जिनके सूत्र निम्नलिखित प्रकार से लिखे जाते हैं जो कि विलयनों में चालकता मापन के परिणामों से सिद्ध हो जाते हैं। इन संकुलों में बड़े कोष्ठक में उपस्थित परमाणु एकल सत्ता (single entity) के रूप में रहते हैं जिनका वियोजन नहीं होता तथा इनमें कोबाल्ट की द्वितीयक संयोजकता 6 है जो NH3 या Cl या दोनों द्वारा संतुष्ट होती है।

क्र.सं.रंगसूत्रविलयन चालकता संबंध
1.पीला[Co(NH3)6]3+3Cl1: 3 विद्युत अपघट्य
2.बैंगनी[CoCl(NH3)5]2+2Cl1: 2 विद्युत अपघट्य
3.हरा[CoCl2(NH3)4]+Cl1: 1 विद्युत अपघट्य
4.बैंगनी[CoCl2(NH3)4]+Cl1: 1 विद्युत अपघट्य

उपर्युक्त सारणी में यौगिक 3 तथा 4 के मूलानुपाती सूत्र समान होते. हुए भी इनके गुणों में भिन्नता होती है अतः इन्हें एक-दूसरे के समावयवी (Isomers) कहते हैं।

इन प्रेक्षणों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर वर्नर (1898) ने उपसहसंयोजन यौगिकों का सिद्धान्त दिया जिसकी मुख्य अभिधारणाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) उपसहसंयोन यौगिकों में धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएं दर्शाती हैं – प्राथमिक तथा द्वितीयक । प्राथमिक संयोजकता धातु के ऑक्सीकरण अंक के बराबर होती है। इसे मुख्य या आयनिक संयोजकता भी कहते हैं।

(ii) प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्यतः आयननीय (lonisable) होती हैं तथा ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं।

(iii) द्वितीयक संयोजकताएँ अन आयननीय (Non-ionisable) होती हैं। ये उदासीन अणुओं या ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। द्वितीयक संयोजकता धातु की उपसहसंयोजन संख्या (Coordination number) के बराबर होती है। इसे कक्षीय संयोजकता (orbital valance) भी कहते हैं तथा इसका मान किसी धातु के लिए सामान्यतः निश्चित होता है।

(iv) धातु के साथ द्वितीयक संयोजकता से बंधित आयन या समूह विभिन्न उपसहसंयोजन संख्या के अनुसार अन्तराल में (space) विशिष्ट रूप से व्यवस्थित होते हैं।

(v) उपसहसंयोजन यौगिकों में आयनों या समूहों की अन्तराल (त्रिविम) में व्यवस्था को समन्वय बहुफलक (Coordination Polyhedra) कहते हैं।

(vi) बड़े कोष्ठक में लिखी स्पीशीज को संकुल तथा बाहर लिखे आयन को प्रति आयन ( Counter lons) कहते हैं।

(vii) संक्रमण तत्वों के उपसहसंयोजन यौगिकों (Coordination Compounds) में सामान्यतः अष्टफलकीय, चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतलीय ज्यामितियाँ पाई जाती हैं। उदाहरण [Co(NH3)6]3+, [CoCI(NH3)5]2+ तथा (CoCl2(NH3)4]+ की ज्यामिति अष्टफलकीय हैं, जबकि [Ni(CO)4] तथा [PtCl4]2- की ज्यामिति क्रमशः चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतली होती हैं।

वर्नर के सिद्धान्त की कमियाँ-वर्नर सिद्धान्त की सहायता से संकुल यौगिकों के कण संख्यक गुण तथा चालकता की व्याख्या कर सकते हैं लेकिन वर्नर का सिद्धान्त निम्नलिखित तथ्यों को नहीं समझा सका-

  • कुछ ही तत्वों में उपसहसंयोजन यौगिक बनाने का विशिष्ट गुण क्यों होता है?
  • उपसहसंयोजन यौगिकों में उपस्थित बंधों में दिशात्मक गुण क्यों पाए जाते हैं?
  • उपसहसंयोजन यौगिकों में विशिष्ट चुंबकीय तथा ध्रुवण घूर्ण गुण क्यों पाए जाते हैं?
  • इन यौगिकों की ज्यामिति की व्याख्या नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 9.2.
FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1: 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है परन्तु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए क्यों?
उत्तर:
FeSO4 तथा (NH4)2SO4 विलयन के 11 मोलर अनुपात में मिश्रण से द्विक लवण FeSO4(NH4)2SO4.6H2O (मोर लवण) बनता है जो विलयन आयनित होकर Fe2+ आयन देता है अतः यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है लेकिन CuSO4 व जलीय NH3 का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण संकुल लवण [Cu(NH3)4]SO4 बनाता है। इसमें स्थित संकुल आयन [Cu(NH3)4]2+ का आयनन नहीं होता अतः इसमें स्वतंत्र Cu2+ आयन नहीं होते इस कारण यह Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.3.
प्रत्येक के दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए – उपसहसंयोजन सत्ता ( समन्वय सत्ता ), लिगन्ड, उपसहसंयोजन संख्या, उपसहसंयोजन बहुफलक, होमोलेप्टिक तथा हेट्रोलेप्टिक संकुल ।
उत्तर:
(i) उपसहसंयोजन सत्ता या समन्वय सत्ता (Coordination Entity ) – वह स्पीशीज जिसमें केन्द्रीय धातु परमाणु या आयन से एक निश्चित संख्या में आयन अथवा अणु उपसहसंयोजी बन्ध बनाकर जुड़े होते हैं उसे उपसहसंयोजन सत्ता कहते हैं। जैसे [CoCl3(NH3)3] में कोबाल्ट आयन तीन NH3 अणुओं तथा तीन क्लोराइड आयनों से घिरा है। अन्य उदाहरण – [Ni(CO)4) तथा [Co(NH3)6]3+

(ii) लिगन्ड (Ligand)- उपसहसंयोजन सत्ता (संकुल स्पीशीज) में केन्द्रीय धातु परमाणु या आयन से जुड़े अणुओं या आयनों को लिगेन्ड कहते हैं। ये धातु को इलेक्ट्रॉन युग्म का दान करके उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। उदाहरण – Cl, H2O तथा NH3

(iii) उपसहसंयोजन संख्या (Coordination Number) (CN)- किसी संकुल स्पीशीज में धातु से बंधित लिगेन्डों के उन दाता परमाणुओं की संख्या को जो सीधे उससे जुड़े होते हैं, उसे धातु की उपसहसंयोजन संख्या या समन्वयी संख्या कहते हैं। उदाहरण-संकुल आयन [PtCl6]2- में Pt की उपसहसंयोजन संख्या 6 है तथा [Ni(NH3)4]2+ में Ni की उपसहसंयोजन संख्या 4 है।

(iv) उपसहसंयोजन बहुफलक या समन्वयी बहुफलक (Coordination Polyhedra) – किसी संकुल स्पीशीज में केन्द्रीय धातु परमाणु से सीधे जुड़े लिगेन्डों की अन्तराल (space) में विशिष्ट व्यवस्था को उपसहसंयोजन बहुफलक कहते हैं। उदाहरण – [Co(NH3)6]3+ अष्टफलकीय तथा [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय है।

(v) होमोलेप्टिक तथा हेट्रोलेप्टिक संकुल संकुल जिनमें धातु परमाणु केवल एक ही प्रकार के दाता समूहों से जुड़ा होता है उन्हें होमोलेप्टिक संकुल कहते हैं। जैसे- [Co(NH3)6]3+ तथा वे संकुल जिनमें धातु परमाणु एक से अधिक प्रकार के दाता समूहों से जुड़ा होता है उन्हें हेट्रोलेप्टिक संकुल कहते हैं। उदाहरण- [Co(NH3)4Cl2]+

प्रश्न 9.4.
एकदंतुर (Unidentate), द्विदंतुर तथा उभयदंतुर लिगेन्ड से क्या तात्पर्य है? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
एकदंतुर लिगेन्ड (Unidentate Ligand)-वह लिगेन्ड जो धातु आयन से एक दाता परमाणु द्वारा जुड़ा होता है उसे एकदंतुर लिगन्ड कहते हैं। जैसे-Cl H2O तथा NH3

द्विदंतुर लिन्ड (Didentate Ligand) – वह लिगेन्ड जो धातु आयन से दो दाता परमाणुओं द्वारा जुड़ा होता है उसे द्विदंतुर लिगेन्ड कहते हैं। जैसे- C2O2-4 (ऑक्सेलेट) तथा H2N – CH2 – CH2 – NH2 (एथेन-1,2-डाइऐमीन)

उभयदंतुर लिगेन्ड (Ambidentate Ligand) – वह लिगेन्ड जो दो भिन्न-भिन्न परमाणुओं द्वारा धातु से जुड़ सकता है उसे उभयदंतुर लिगेन्ड कहते हैं।

उदाहरण – NO2 तथा SCN आयन। NO2 आयन केन्द्रीय धातु परमाणु से नाइट्रोजन अथवा ऑक्सीजन द्वारा जुड़ सकता है। इसी प्रकार, SCN आयन सल्फर अथवा नाइट्रोजन परमाणु द्वारा जुड़ सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 1

प्रश्न 9.5.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में धातुओं के ऑक्सीकरण संख्या का उल्लेख कीजिए-
(i) (Co(H2O)(CN)(en)2]2+
(ii) [CoBr2(en)2]+
(iii) [PtCl4]2-
(iv) K3[Fe(CN)6]
(v) [Cr(NH3)3Cl3]
उत्तर:
(i) [Co(H2O)(CN)(en)2]2+
x + 0 + (- 1) + 0 = + 2
x = + 3 अतः Co की ऑक्सीकरण संख्या = + 3

(ii) [CoBr2(en)2]+
x – 2 + 0 = + 1
x = + 3 अतः Co की ऑक्सीकरण संख्या +3

(iii) [PtCl4]2-
x – 4 = – 2
x = + 2 अतः Pt की ऑक्सीकरण संख्या = + 2

(iv) K3[Fe(CN)6]
+ 3 + x – 6 = 0
x = + 3 अतः Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3

(v) [Cr(NH3)3Cl3]
x + 0 – 3 = 0
x = + 3 अतः Cr की ऑक्सीकरण संख्या +3

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.6.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के लिये सूत्र लिखिए-
(i) टेट्राहॉइड्राक्सोजिंकेट (II) आयन
(ii) पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
(iii) डाइऐम्मीनडाइक्लोरिडोप्लेटिनम (II)
(iv) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II)
(v) पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो -O- कोबाल्ट (III) आयन
(vi) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) सल्फेट
(vii) पोटैशियम ट्राइ (आक्सेलेटो) क्रोमेट (III)
(viii) हेक्साऐम्मीन प्लैटिनम (IV) आयन
(ix) टेट्राब्रोमिडोक्यूपेट (II) आयन
(x) पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो – N – कोबाल्ट (III) आयन
उत्तर:
(i) [Zn(OH)4]2-
(ii) K2[PdCl4]
(iii) [Pt(NH3)2Cl2]
(iv) K2[Ni(CN)4]
(v) [Co(NH3)5(ONO)]2+
(vi) [Co(NH3)6](SO4)3]
(vii) K3[Cr(C2O4)3]
(viii) [Pt(NH3)6]4+
(ix) [CuBr4]2-
(x) [Co(NH3)5(NO2)2+

प्रश्न 9.7.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के सुव्यवस्थित नाम लिखिए-
(i) [Co(NH3)6]Cl3
(ii) [Pt(NH3)2CI(NH2CH3)]Cl
(iii) [Ti(H2O)6]3+
(iv) [Co(NH3)4Cl(NO2)]Cl
(v) [Mn(H2O)6]2+
(vi) [NiCl4]2-
(vii) [Ni(NH3)6]Cl2
(viii) [Co(en)3]3+
(ix) [Ni(CO)4]
उत्तर:
(i) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) डाइऐम्मीनक्लोरिडो (मेथेन एमीन) प्लेटिनम (II) क्लोराइड
(iii) हेक्साएक्वाटाइटेनियम (III) आयन
(iv) टेट्राऐम्मीनक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(v) हेक्साऐक्वामैंगनीज (II) आयन
(vi) टेट्राक्लोरिडोनिकैलेट (II) आयन
(vii) हेक्साऐम्मीननिकैल (II) क्लोराइड
(viii) ट्रिस (एथेन 1, 2 डाइएमीन) कोबाल्ट (III) आयन
(ix) टेट्राकार्बोनिल निकल (O)।

प्रश्न 9.8.
उपसहसंयोजन यौगिकों के लिए संभावित विभिन्न प्रकार की समावयवताओं को सूचीबद्ध कीजिए तथा प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
समावयवता (Isomerism)-ऐसे दो या दो से अधिक यौगिक जिनके रासायनिक सूत्र (अणु सूत्र) समान होते हैं परन्तु उनमें परमाणुओं की व्यवस्था भिन्न होती है, उन्हें एक-दूसरे के समावयवी कहते हैं तथा इस गुण को समावयवता कहते हैं। परमाणुओं की भिन्न व्यवस्थाओं के कारण इनके एक या अधिक भौतिक या रासायनिक गुणों में भिन्नता पाई जाती है। उपसहसंयोजन यौगिकों में दो प्रमुख प्रकार की समावयवताएँ होती हैं जिनको पुनः कई भागों में वर्गीकृत किया जाता है-

  • संरचनात्मक समावयवता
  • त्रिविम समावयवता

(a) संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism)संरचनात्मक समावयवता में यौगिकों में स्थित बन्धों में भिन्नता पाई जाती है अर्थात् इनके संरचनात्मक सूत्र भिन्न होते हैं। संरचनात्मक समावयवता को पुनः सात प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

  • बंधनी समावयवता
  • उपसहसंयोजन या समन्वयी समावयवता
  • आयनन समावयवता
  • विलायकयोजन समावयवता या हाइड्रेट समावयवता
  • लिगेन्ड समावयवता
  • बहुलकीकरण समावयवता
  • उपसहसंयोजन स्थिति समावयवता।

प्रश्न 9.9.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में कितने ज्यामितीय समावयव संभव हैं?
(क) [Cr(C2O4)3]3-
(ख) [Co(NH3)3Cl3]
उत्तर:
(क) [Cr(C2O4)3]3- में ज्यामितीय समावयवता संभव नहीं है क्योंकि इसकी केवल एक ही प्रकार की व्यवस्था संभव है।

(ख) (Co(NH3)3Cl3] के दो विशेष प्रकार के ज्यामितीय समावयवी संभव हैं- (1) फलकीय (Facial) (Fac) तथा (ii) रेखांशिक (Meridional) (Mer)।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 2

प्रश्न 9.10.
निम्न के प्रकाशिक समावयवों की संरचनाएँ बनाइए-
(i) [Cr(C2O4)3]3-
(ii) [PtCl2(en)2]2+
(iii) [Cr (NH3)2Cl2(en)] +
उत्तर:
(i) [Cr(C2O4)3]3- में C2O2-4 ( ऑक्सेलेट) आयन है जिसका संकेत ox प्रयुक्त किया जाता है। इस संकुल आयन के दो प्रकाशिक समावयवियों की संरचना निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 3

(ii) [PtCl2(en)2]2+ संकुल आयन के प्रकाशिक समावयवी निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 4

(iii) [Cr(NH3)2Cl2(en)]+ के समपक्ष तथा विपक्ष दोनों समावयवी प्रकाशिक समावयवता दर्शाते हैं।
(a) समपक्ष रूप के प्रकाशिक समावयवियों को निम्न प्रकार दर्शाते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 5
(b) विपक्ष रूप के प्रकाशिक समावयवियों को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 6

प्रश्न 9.11.
निम्नलिखित के सभी समावयवियों (ज्यामितीय व ध्रुवण) की संरचनाएँ बनाइए-
(i) [CoCl2(en)2]+
(ii) [Co(NH3)Cl(en)2]2+
(iii) [Co(NH3)2Cl2(en)]+
उत्तर:
(i) [CoCl2(en)2]+ यह संकुल आयन ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है अतः इसके समपक्ष तथा विपक्ष रूप होते हैं। इनमें से समपक्ष रूप असममित है अतः यह प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 7

(ii) [Co(NH3)Cl(en)2]2+ – इस संकुल आयन में ज्यामितीय समावयवता होती है जिसके समपक्ष तथा विपक्ष रूप निम्न प्रकार होते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 8
इसका समपक्ष रूप प्रकाशिक समावयवता भी दर्शाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 9

(iii) [Co(NH3)2Cl2(en)]+ – इस संकुल आयन में ज्यामितीय समावयवता होती है जिसके समपक्ष तथा विपक्ष समावयवी निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 10
इसके समपक्ष तथा विपक्ष दोनों ही समावयवी प्रकाशिक समावयवता दर्शाते हैं जिनकी संरचनाएँ (i) तथा (ii) की तरह ही बना सकते हैं।

प्रश्न 9.12.
[Pt(NH3)(Br)(Cl)(Py)] के सभी ज्यामितीय समावयवी लिखिए। इनमें से कितने ध्रुवण समावयवता दर्शाएंगे?
उत्तर:
संकुल [PI(NH3)(Br)(CI) (Py)] के तीन ज्यामितीय समावयवी संभव हैं जिनमें से दो समपश्च तथा एक विपक्ष समावयवी माना जाता है। इनकी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 11
इस संकुल की वर्गाकार समतलीय ज्यामिति होती है अतः इसमें प्रकाशिक समावयवता (ध्रुवण समावयवता) नहीं होती।

प्रश्न 9.13.
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन (नीले रंग का), निम्नलिखित प्रेक्षण दर्शाता है-
(i) जलीय पोटैशियम फ्लुओराइड (KF) के साथ हरा रंग
(ii) जलीय पोटैशियम क्लोराइड (KCI) के साथ चमकीला हरा रंग
उपर्युक्त प्रायोगिक परिणामों को समझाइए।
उत्तर:
जलीय विलयन में CuSO4,[Cu(H2O)4]SO4 के रूप में पाया जाता है, जिसका नीला रंग (Cu(H2O)4]2+ आयनों के कारण होता है।
(i) इसमें जलीय KF मिलाने पर दुर्बल लिगन्ड H2O F द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं तथा [CuF4]2+ आयन बनता है जो हरा अवक्षेप देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 12

(ii) [Cu(H2O)4]2+ में जलीय KCI मिलाया जाता है, तो Cl लिगेन्ड H2O (दुर्बल लिगन्ड) को प्रतिस्थापित कर [CuCl4]2- आयन बनाता है जिसका रंग चमकीला हरा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 13

प्रश्न 9.14.
कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में जलीय KCN को आधिक्य में मिलाने पर बनने वाली उपसहसंयोजन सत्ता क्या होगी ? इस विलयन में जब HS गैस प्रवाहित की जाती है तो कॉपर सल्फाइड का अवक्षेप क्यों नहीं प्राप्त होता ?
उत्तर:
कॉपर सल्फेट का जलीय विलयन [Cu(H2O)4]2+ के रूप में पाया जाता है तथा इसमें जलीय KCN का आधिक्य मिलाने पर निम्नलिखित संकुल आयन बनता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 14
चूँकि CN एक प्रबल लिगन्ड है, अतः यह Cu2+ आयन के साथ स्थायी संकुल बनाता है। इसमें Cu2+ आयन स्वतंत्र नहीं है। अतः इसमें H2S गैस प्रवाहित करने पर Cus का अवक्षेप नहीं बनता।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.15
संयोजकता आबंध सिद्धान्त के आधार पर निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए-
(क) [Fe(CN)6]4-
(ख) [FeF6]3-
(ग) [Co(C2O43]3-
(घ) [CoF6]3-
उत्तर:
(क) [Fe(CN)6]4- : [Fe(CN)6]4- में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d6
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 15
CN प्रबल लिगन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में 3d में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 16
इस प्रकार दो d कक्षक रिक्त हो जाने के कारण इसमें d²sp³ संकरण होता है। इन d²sp³ संकरित कक्षकों में 6CN इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं।

इस संकुल की ज्यामिति अष्टफलकीय है तथा सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय है। इसे आंतरिक कक्षक संकुल या निम्न चक्रण (Low spin) संकुल या चक्रण युग्मित (Spin paired ) संकुल कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 17

(ख) [FeF6]3- : [FeF6]3- में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Fe+3 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d5
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 18
F दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 19
अतः इसमें sp³d² संकरण होता है। इन sp³d² संकरित कक्षकों में 6F, इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। यह अष्टफलकीय संकुल है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण यह अनुचुंबकीय है। इसे बाह्य कथक संकुल या उच्च चक्रण (High spin) या चक्रण मुक्त (Spin free) संकुल कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 20

(ग) [Co(C2O4)3]3- – [Co(C2O4)3]3- में Co की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d6
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 21
C2O2-4] – (ऑक्सेलेट) प्रबल लिगन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में 3d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 22
दो d कक्षक रिक्त हो जाने के कारण इसमें d²sp³ संकरण होता है। इन संकरित कक्षकों में 3C2O-24इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। इस अष्टफलकीय संकुल में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुंबकीय होता है। इसे आंतरिक कक्षक संकुल कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 23

(घ) [CoF6]3- : [CoF6]3- में Co की ऑक्सीकरण संख्या +3 तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d6
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 24
F दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 25
अतः इसमें sp³d² संकरण होता है। इन संकरित कक्षकों में 6F इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। यह अष्टफलकीय संकुल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय होता है तथा इसे बाह्य कक्षक संकुल कहते हैं।

प्रश्न 9.16.
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d कक्षकों के विपाटन को दर्शाने के लिए चित्र बनाइए।
उत्तर:
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d कक्षकों ‘विपाटन को निम्न प्रकार दर्शाया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 26

प्रश्न 9.17.
स्पेक्ट्रम रासायनिक श्रेणी क्या है? दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड तथा प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत के अनुसार अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन, ∆0 लिंगन्ड तथा धातु आयन पर स्थित आवेश से उत्पन्न क्षेत्र पर निर्भर करता है। कुछ लिगेन्ड प्रबल क्षेत्र उत्पन्न करते हैं तथा इस स्थिति में विपाटन अधिक होता है, इन्हें प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड कहते हैं। अन्य लिगड दुर्बल क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जिसके कारण कक्षकों का विपाटन कम होता है, इन्हें दुर्बल क्षेत्र लिगन्ड कहते हैं। लिगेन्डों को उनके बढ़ती हुई क्षेत्र प्रबलता के क्रम में एक श्रेणी में निम्नानुसार व्यवस्थित किया जाता है-
I < Br < SCN < Cl <S2- <F < OH <C2O2-4 < H2O < NCS < edta4- < NH3 < en < CN < CO
इस श्रेणी को स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी (spectrochemical series) कहते हैं तथा यह विभिन्न लिगन्डों के साथ बने संकुलों द्वारा प्रकाश के अवशोषण के प्रायोगिक मापन से प्राप्त तथ्यों के आधार पर प्राप्त की जाती है

प्रश्न 9.18.
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा क्या है? उपसहसंयोजन सत्ता में d कक्षकों का वास्तविक विन्यास ∆0 के मान के आधार पर कैसे निर्धारित किया जाता है?
उत्तर:
अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन- एक अष्टफलकीय संकुल में धातु परमाणु छः लिगेन्डों द्वारा घिरा होता है। इसमें ad कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों तथा लिगेन्डों के इलेक्ट्रॉनों के मध्य प्रतिकर्षण होता है। जब धातु होते हैं तो प्रतिकर्षण अधिक होता है। dx² – y² तथा d² कक्षक लिगेन्ड की ओर सीधे निर्दिष्ट (directed) की दिशा वाले अक्षों पर होते हैं, अतः इन पर प्रतिकर्षण अधिक होता है जिससे इनकी ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है जबकि dxy, dyz और dxz कक्षक, अक्षों के बीच में स्थित होते हैं, अतः इनकी ऊर्जा गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र की औसत ऊर्जा की तुलना में कम हो जाती है।

इस प्रकार अष्टफलकीय संकुल में लिगन्ड इलेक्ट्रॉन – धातु इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के कारण d कक्षकों की समभ्रंशता समाप्त हो जाती है तथा ये तीन निम्न ऊर्जा वाले, t2g कक्षकों तथा दो उच्च ऊर्जा वाले, eg कक्षकों में विभाजित हो जाते हैं। इस प्रकार समान ऊर्जा वाले कक्षकों का, लिगेन्डों की निश्चित ज्यामिति में उपस्थिति से दो भागों में विपाटन क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन कहलाता है तथा इस ऊर्जा अंतर को ∆0 [यहाँ O = अष्टफलकीय (octahedral)] से दर्शाते हैं। eg कक्षकों की ऊर्जा में (3/5) ∆0 के बराबर वृद्धि होती है तथा t2g कक्षकों की ऊर्जा में (2/5) ∆0 के बराबर कमी होती है। प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में ∆0 का मान अधिक होता है जबकि दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में यह मान कम होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 27
∆ को प्रभावित करने वाले कारक – क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन (∆) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है-

  • धातु की प्रकृति
  • धातु आयन पर आवेश
  • लिगेन्ड की प्रकृति
  • संकुल की ज्यामिति
  • d- इलेक्ट्रॉनों की संख्या

कारक संकुल आयन के रंग को भी प्रभावित करते हैं। धातु आयन पर आवेश बढ़ने से तथा प्रबल क्षेत्र लिगेन्डों की उपस्थिति में विपाटन अधिक होता है।

स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी (Spectrochemical Series) – जब विभिन्न लिगेन्डों को उनकी बढ़ती हुई क्षेत्र प्रबलता के क्रम में रखा जाता है तो प्राप्त श्रेणी को स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी कहते हैं। यह श्रेणी विभिन्न लिडों के साथ बने संकुल यौगिकों द्वारा प्रकाश के अवशोषण के प्रायोगिक मापन से प्राप्त तथ्यों के आधार पर प्राप्त की जाती है। प्रमुख लिगेन्डों के लिए यह श्रेणी निम्नलिखित है-
I < Br < SCN < Cl < S2- < F < OH < C2O42- < H2O < NCS < EDTA4- + < NH3 < en < NO2 < CN < CO
इस श्रेणी में H2O तक के लिगेन्ड दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड (WFL) तथा इससे आगे के लिगेन्ड प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड (SFL) होते हैं।

प्रश्न 9.19.
[Cr(NH3)6)]3+ अनुचुंबकीय है जबकि [Ni(CN)4]2- प्रतिचुंबकीय, समझाइए क्यों?
उत्तर:
[Cr(NH3)6)]3+ में Cr, + 3 ऑक्सीकरण अवस्था में है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d³ है, जिसमें तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 28
संकरण (d²sp) के पश्चात् भी ये अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं क्योंकि रिक्त d कक्षक ही संकरण में प्रयुक्त होते हैं अतः [Cr(NH3)6]3+ अनुचुंबकीय है लेकिन (Ni(CN)4]2- में Ni, Ni2+ अवस्था में है जिसका विन्यास 3d<sup<>8 है। प्रबल लिगेन्ड (\(\overline{C}\)N) के कारण इसके अयुग्मित इलेक्ट्रॉन संकरण के समय युग्मित हो जाते हैं अतः यह प्रतिचुंबकीय है।

प्रश्न 9.20
[Ni(H2O)6]2+ का विलयन हरा है परन्तु [NI(CN)4]2- का विलयन रंगहीन है। समझाइए।
उत्तर:
[Ni(H2O)6]2+ में उपस्थित Ni2+ के 3d8 विन्यास में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। H2O दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसके कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता तथा इसमें sp³d² संकरण है।

अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण इस संकुल में dd संक्रमण आसानी से हो जाता है जिसके कारण यह रंगीन (हरा) है परन्तु [Ni (CN)4]2- में CN प्रबल लिगेन्ड है जिसके कारण Ni2+ के 3d8 विन्यास में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो है अतः इस संकुल में dsp² संकरण के कारण कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है इसलि d – d संक्रमण संभव नहीं है। इस कारण यह रंगहीन है।

प्रश्न 9.21.
[Fe(CN)6]4- तथा [Fe(H2O)6]2+ के तनु विलयनों के रंग भिन्न होते हैं। क्यों?
उत्तर:
Fe (CN)6]4- में CN प्रबल लिगन्ड है तथा इसमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं (d²sp³ संकरण) अतः इसमें d – d संक्रमण नहीं होता है, इस कारण यह संकुल रंगहीन होता है जबकि [Fe(H2O)6]2+ में H2O दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसमें sp³d² संकरण के पश्चात् भी चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन रहते हैं, जिनके कारण d – d संक्रमण आसानी से हो जाता है। इस कारण यह संकुल रंगीन होता है।

भिन्न-भिन्न लिगेन्ड के कारण क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा भी भिन्न- भिन्न होती है जिसके कारण समान धातु आयन होते हुए भी रंगों में भिन्नता होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.22.
धातु कार्बोनिलों में आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
धातु कार्बोनिलों में बंध की प्रकृति को निम्न प्रकार समझा सकते हैं-होमोलेप्टिक कार्बोनिल यौगिक (जिनमें केवल कार्बोनिल लिगेन्ड हों) सामान्यतः संक्रमण धातुओं द्वारा बनाए जाते हैं। इन धातु कार्बोनिलों की संरचनाएँ सरल होती हैं। टेट्राकार्बोनिलनिकल (0), [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय (sp³ संकरण), पेन्टाकार्बोनिल आयरन (O), (Fe(CO)5] त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी (sp³d संकरण) तथा हेक्साकार्बोनिलक्रोमियम (0), [Cr(CO)6] अष्टफलकीय (d²sp³ संकरण ) होता है।

कार्बोनिलडाइ मैंगनीज (0), [Mn2(CO)10] में दो वर्ग पिरैमिडी Mn(CO)5 इकाइयां Mn – Mn बंध द्वारा जुड़ी होती हैं। ऑक्टाकार्बोनिलडाइकोबाल्ट (0), [Co2(CO)8] में Co – Co बन्ध के मध्य दो CO समूह सेतु के रूप में पाए जाते हैं।

इनकी संरचनाएँ निम्न प्रकार दर्शाई जा सकती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 29
धातु कार्बोनिलों में पश्च बन्धन या सहक्रियाशीलता बन्ध (Back Bonding or Synergic Bond in Metal Carbonyls) – धातु कार्बोनिलों के धातु- कार्बन बंध में s तथा p दोनों गुण होते हैं। M-C σ बंध कार्बोनिल (CO) समूह के कार्बन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म धातु के रिक्त कक्षक में दान करने से बनता है तथा M-C π बंध धातु के पूर्ण भरे असंकरित कक्षकों में से एक इलेक्ट्रॉन युग्म को CO के रिक्त विपरीत बन्धी अणुकक्षक (Antibonding M.O) (π*) में दान करने से बनता है।

धातु से लिगेन्ड का बंध एक सहक्रियाशीलता प्रभाव (Synergic effect) उत्पन्न करता है जिसे पश्च बन्धन कहते हैं। इसके कारण धातु पर उपस्थित इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है, जो धातु तथा CO के मध्य उपस्थित बन्ध की प्रबलता को बढ़ाता है, जिससे धातु कार्बोनिल का स्थायित्व बढ़ जाता है। यहाँ C= O (कार्बोनिल) को π एसिड लिगेन्ड कहते हैं क्योंकि इसके π या π* अणुकक्षक में धातु से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 30

प्रश्न 9.23.
निम्न संकुलों में केन्द्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d कक्षकों का अधिग्रहण (Occupation) एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए-
(i) K3[Co(C2O4)3]
(ii) cis – [Cr(en)2Cl2]Cl
(iii) (NH4)2[C0F4]
(iv) [Mn(H2O)6]SO4
उत्तर:
(i) K3[Co(C2O4)3] में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है क्योंकि C2O42- (ऑक्सेलेट) द्विदन्तुर (didentate) प्रबल लिगेन्ड है अतः Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t2g6 e0g होगा (Co+3 = 3d6)

(ii) cis – [Cr(en)2Cl2]Cl में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है। इसमें धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 12 है। (Cr+3 = 3d³)

(iii) (NH4)2[CoF] में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 4 है। इसमें धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2gg है। (Co+2 = 3d7)

(iv) [ Mn (H2O)6]SO4 में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है। इसमें धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2gg होगा। (Mn3+ = 3d5)

प्रश्न 9.24.
निम्न संकुलों के IUPAC नाम लिखिए तथा ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उपसहसंयोजन संख्या दर्शाइए। संकुल का त्रिविम रसायन तथा चुंबकीय आघूर्ण भी बतलाइए-
(i) K [Cr(H2O)2 (C2O4)2].3H2O
(ii) [CrCl3(py)3]
(iii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iv) Cs[FeCl4]
(v) K4[Mn(CN)6]
उत्तर:
(i) K [Cr(H2O)2 (C2O4)2].3H2O : संकुल का IUPAC नाम पोटेशियमडाएएक्वाडाइ – ऑक्सेलेटो क्रोमेट (III) ट्राइहाइड्रेट
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था + 3(3d³)
Cr3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय इस संकुल में ज्यामितीय तथा प्रकाशिक समावयवता होती है।
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = \(\sqrt{n(n+2)}\) B.M.
Cr3+ = 3d³, अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 3
H = \(\sqrt{3(3+2)}\) = \(\sqrt{15}\) B.M. 3.87B.M.

(ii) [CrCl3(py)3]
ट्राइक्लोरिडोट्रिसपिरी डीनक्रोमियम (III)
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था + 3(3d³)
Cr3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय इस संकुल में ज्यामितीय तथा प्रकाशिक समावयवता होती है।
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = \(\sqrt{3(3+2)}\) = \(\sqrt{15}\) B.M. 3.87 B.M. (n = 3)

(iii) [Co(NH3)5Cl]Cl2 : संकुल का IUPAC नाम- पेन्टाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था = + 3(3d6)
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = t62g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = शून्य, क्योंकि इसमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं।

(iv) Cs[FeCl4] : संकुल का IUPAC नाम- सिजियमटेट्राक्लोरिडोफेरेट (III)
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था = +3 (3d5)
Fe3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = e²g t32g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 4
संकुल की ज्यामिति चतुष्फलकीय
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = \(\sqrt{5(5+2)}\)
= \(\sqrt{35}\) = 5.91B.M. (n = 5)

(v) K4 [Mn (CN)6] : संकुल का IUPAC नाम- पोटैशियमहेक्सासायनोमैंगनेट (II)
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था = +2 (3d5)
Mn2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = t52g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय
चुंबकीय आघूर्ण (i) (μ) = \(\sqrt{1(1+2)}\)
= \(\sqrt{3}\) = 1.73 BM (n = 1)

प्रश्न 9.25
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के आधार पर संकुल [Ti(H2O)6]3+ के बैंगनी रंग की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
[Ti(H2O)6]3+ एक अष्टफलकीय संकुल है जिसमें धातु के d कक्षक का इलेक्ट्रॉन संकुल की निम्नतम ऊर्जा अवस्था में t2g कक्षक में है। इस इलेक्ट्रॉन के लिए उपलब्ध इससे अगली उच्च अवस्था eg कक्षक रिक्त संगत प्रकाश का अवशोषण करता
है। यह संकुल पीले हरे क्षेत्र की है जिससे इलेक्ट्रॉन t2g स्तर से eg स्तर में उत्तेजित हो जाता है (t2g1 eg0 → t2g0 eg1) जिसके कारण संकुल बैंगनी रंग का दिखाई देता है। क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के अनुसार यह इलेक्ट्रॉन का ded संक्रमण है। लिगेन्ड की अनुपस्थिति में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन नहीं होता है अतः [Ti(H2O)6]3+ को गरम करने पर इसमें से जल निकल जाने के कारण यह रंगहीन हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 31

प्रश्न 9.26.
कीलेट प्रभाव से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कीलेट प्रभाव – किसी संकुल में जब एक द्विदंतुर अथवा बहुदंतुर लिगेन्ड अपने दो या दो से अधिक दाता परमाणुओं द्वारा एक ही धातु आयन से बन्ध बनाता है, तो इसे कीलेट (chelate) लिगेन्ड कहते हैं तथा बन्ध बनाने वाले परमाणुओं की संख्या को लिगेन्ड की दंतुरता या डेन्टिसिटी (denticity) कहते हैं। बन्ध बनाने की इस प्रक्रिया को कीलेटन कहते हैं तथा ऐसे संकुल, कीलेट संकुल (chelate complexes) कहलाते हैं, ऐसे संकुलों का स्थायित्व अपेक्षाकृत अधिक होता है। कोलेटन (chelaton) द्वारा किसी संकुल ( उपसहसंयोजन यौगिक) के स्थायीकरण को कीलेट प्रभाव कहते हैं। कीलेट संकुल बनते समय एक वलय बनती है, इसे कीलेट वलय कहते हैं तथा इस वलय के बनने के कारण ही संकुल का स्थायित्व बढ़ता है।

उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 32

प्रश्न 9.27.
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित में उपसहसंयोजन यौगिकों की भूमिका की संक्षिप्त विवेचना कीजिए-
(i) जैव प्रणालियाँ
(ii) औषध रसायन
(iii) विश्लेषणात्मक रसायन
(iv) धातुओं का निष्कर्षण / धातु कर्म ।
उत्तर:
(i) जैव प्रणालियाँ-उपसहसंयोजन यौगिक जैव तंत्र में भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक हरा वर्णक क्लोरोफिल, मैग्नीशियम का उपसहसंयोजन यौगिक है, रक्त का लाल वर्णक (pigment) हीमोग्लोबिन, आयरन का एक उपसहसंयोजन यौगिक है, जो कि ऑक्सीजन वाहक होता है। विटामिन B12 (सायनाकोबालेमीन), कोबाल्ट का एक उपसहसंयोजन यौगिक है, जो कि एनिमिया के उपचार में प्रयुक्त होता है। जैविक महत्व के अन्य धातु आयन युक्त उपसहसंयोजन यौगिक कार्बोक्सीपेप्टिडेज-A, कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम (जैव उत्प्रेरक) तथा साइटोक्रोम-C (Fe2+ का संकुल) है।

(ii) औषध रसायन-में-औषध रसायन में कीलेट चिकित्सा का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। उदाहरण-पौधे/जीव-जंतुओं में विषैले अनुपात में उपस्थित धातुओं के द्वारा उत्पन्न समस्याओं का उपचार। इस प्रकार कॉपर तथा आयरन की अधिकता को D-पेनिसिलऐमीन तथा डेसफेरीऑक्सिम B लिगन्डों के साथ उपसहसंयोजन यौगिक बनाकर दूर किया जाता है। EDTA को लेड की विषाक्तता के उपचार हेतु प्रयुक्त किया जाता है। प्लैटिनम के कुछ उपसहसंयोजक यौगिक ट्यूमर की वृद्धि को रोकते हैं। उदाहरण-समपक्ष-प्लेटिन (cis-platin), cis [Pt(NH3)2Cl2] कैंसररोधी (Anticancer) होता है।

(iii) विश्लेषणात्मक रसायन-
(a) गुणात्मक ( qualitative) तथा मात्रात्मक (quantitative) रासायनिक विश्लेषणों में उपसहसंयोजन यौगिक बहुत उपयोगी होते हैं। अनेक रंगीन अभिक्रियाएँ जिनमें धातु आयनों की विभिन्न लिगेन्डों के साथ क्रिया से (विशेषतः कीलेट लिगन्ड) उपसहसंयोजन यौगिक बनते हैं जिनके कारण रंग उत्पन्न होता है। विभिन्न विधियों से धातु आयनों की पहचान व उनका मात्रात्मक आकलन इसी आधार पर किया जाता है। ये अभिकर्मक EDTA, DMG (डाइमेथिल ग्लाई ऑक्सिम ), α – नाइट्रोसो – ß – नेफ्थॉल, क्यूपफेरॉन आदि हैं।

(b) क्षारीय मूलकों का परीक्षण – प्रथम समूह में Ag+ तथा Hg2+2 का पृथक्करण-लवण के मूल विलयन में जब HCI डालते हैं तो पहले AgCl तथा Hg2Cl2 का अवक्षेप बनता है जिसकी NH4OH के साथ क्रिया कराने पर AgCl, विलेय संकुल बनता है जबकि Hg2Cl2 से Hg(NH2)Cl का काला अवक्षेप बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 33
द्वितीय समूह में IIA तथा IIB का पृथक्करण-IIB समूह के धातु सल्फाइड पीले अमोनियम सल्फाइड से क्रिया करके विलेय संकुल बनाते हैं जबकि IIA समूह के सल्फाइड अविलेय रहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 34
Cu2+ का परीक्षण – Cu+2 का परीक्षण NH3 विलयन तथा पोटैशियम फेरोसायनाइड से क्रिया द्वारा किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 35
III समूह में Fe3+ का परीक्षण-III समूह में Fe3+ का परीक्षण पोटैशियम फेरोसायनाइड तथा पोटैशियम थायोसायनेट विलयन द्वारा किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 36
IV समूह में Ni2+ का परीक्षण-यह परीक्षण डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम (DMG) द्वारा किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 37
प्राच्छादक के रूप में (Masking agent)- Cu2+ की उपस्थिति में Cd2+ का आकलन करने के लिए \(\overline{C}\)N आयन मिलाकर Cu2+ का संकुल बना लेते हैं जो कि स्थायी होता है लेकिन Cd2+ का संकुल अस्थायी होता है अतः वियोजित होकर Cd2+ दे देता है जिसकी H2 के साथ क्रिया से Cds का पीला अवक्षेप प्राप्त होता है।

(iv) धातुओं का निष्कर्षण / धातु कर्म – धातुओं का निष्कर्षण-धातुओं की कुछ प्रमुख निष्कर्षण विधियों में जैसे सिल्वर तथा गोल्ड के निष्कर्षण में संकुल के विरचन का उपयोग किया जाता है। उदाहरण-ऑक्सीजन तथा जल की उपस्थिति में Au3+, सायनाइड आयन से संयोजित होकर उपसहसंयोजन आयन, [Au(Ch2)] बनाता है। इस विलयन में जिंक मिलाकर गोल्ड को पृथक् कर लिया जाता है (एकक 6)।

प्रश्न 9.28.
संकुल [Co(NH3)6]Cl2 से विलयन में कितने आयन उत्पन्न होंगे-
(i) 6
(ii) 4
(iii) 3
(ii) 4
(iv) 2
उत्तर:
(iii) इस संकुल का आयनन निम्न प्रकार होता है अतः इसके विलयन में तीन आयन उत्पन्न होंगे।
[Co(NH3)6]Cl2 → [Co(NH3)6]2+ + 2Cl

प्रश्न 9.29.
निम्नलिखित आयनों में से किसके चुंबकीय आघूर्ण का मान सर्वाधिक होगा?
(i) [Cr(H2O)6]3+
(ii) [Fe(H2O)6]2+
(iii) [Zn(H2O)6]2+
उत्तर:
(ii) इन संकुल आयनों में Zn2+, Cr3+ तथा Fe2+ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः 0 3 एवं 4 है अतः संकुल आयन [Fe (H2O)6]2+ का चुम्बकीय आघूर्ण सर्वाधिक होगा।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.30.
K[Co(CO)4] में कोबाल्ट की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +1
(iii) -1
(ii) +3
(iv) -3
उत्तर:
(iii) K [Co(CO)4]
+ 1 + x + = 0
x = – 1

प्रश्न 9.31.
निम्न में सर्वाधिक स्थायी संकुल है-
(i) [Fe(H2O)6]3+
(ii) [Fe(NH3)6]3+
(iii) Fe(C2O4)3]3-
(iv) [FeCl6]3-
उत्तर:
(iii) क्योंकि इसमें C2O2-3 ( ऑक्सेलेट) लिगेन्ड कीटकारी है, जिससे स्थायित्व बढ़ता है।

प्रश्न 9.32.
निम्नलिखित के लिए दृश्य प्रकाश में अवशोषण की तरंगदैर्घ्य का सही क्रम क्या होगा?
[Ni(NO2)6]4-, [Ni(NH3)6]2+, [Ni(H2O)6]2+
उत्तर:
दिए गए संकुलों में प्रयुक्त लिगेन्डों के लिए स्पेक्ट्रमी- रासायनिक श्रेणी में प्रबलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-
H2O < NH3 < NO2
अतः उत्तेजन हेतु अवशोषित प्रकाश (ऊर्जा) का क्रम निम्न होगा-
[Ni(H2O)6]2+ <[Ni(NH3)6]2+ <[Ni (NO2)6]4+
इसलिए अवशोषित तरंगदैर्घ्य का क्रम इसके विपरीत होगा क्योंकि (E = hc/λ)
[Ni(NO2)6]4- < [Ni(NH3)6]2+ < [Ni(H2O)6]2+

HBSE 12th Class Chemistry उपसहसंयोजन यौगिक Intext Questions

प्रश्न 9.1.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए-
(i) टेट्राऐम्मीनडाइएक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेद (II)
(iii) ट्रिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
(iv) ऐम्मीनब्रोमिडोक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II)
आयन
(v) डाइक्लोरोबिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
(vi) आयरन (III) हेक्सासायनोफेरेट (II)।
उत्तर:
(i) [Co(NH3)4(H2O)2]Cl3
(ii) K2[Ni(CN)4]
(iii) [Cr(en3]Cl3
(iv) [Pt(NH3)BrCl}\left(NO2)]
(v) [PtCl2(en)2] (NO3)2
(vi) Fe4[Fe(CN)6]3

प्रश्न 9.2.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
(i) [Co(NH3)6]Cl3
(ii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iii) K3[Fe}(CN)6]
(iv) K3[Fe(C2O4)3]
(v) K2[PdCl4]
(vi) [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl
उत्तर:
(i) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पेन्टाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iii) पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)
(iv) पोटैशियम ट्राइआक्सैलेटोफेरेट (III)
(v) पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
(vi) डाइऐम्मीनक्लोरिडो ( मेथेनेमीन ) प्लैटिनम (II) क्लोराइड।

प्रश्न 9.3.
निम्नलिखित संकुलों द्वारा प्रदर्शित समावयवता का प्रकार बतलाइए तथा इन समावयवों की संरचनाएं बनाइए-
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2]
(ii) [Co(en)3]Cl3
(iii) [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2
(iv) [Pt(NH3)(H2O)Cl2]
उत्तर:
(i) संकुल K[Cr(H2O)2(C2O4)2] ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है अतः इसके दो रूप होते हैं-समपक्ष तथा विपक्ष। समपक्ष समावयवी, प्रकाशिक समावयवता भी दर्शाता है अतः इसके दो ध्रुवण समावयवी ( d तथा l रूप) होंगे। यहाँ C2O4 (ऑक्सेलेट) का संकेत ox दिया गया है। इस संकुल के समपक्ष, विपक्ष तथा प्रकाशिक समावयवियों की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 38
(ii) संकुल [Co(en)3]Cl3 प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है। अतः इसके दो रूप (d तथा l) होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 39
(iii) संकुल [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2 के कुल संभावित समावयवी दस होंगे तथा यह संकुल निम्न प्रकार की समावयवता दर्शाता है-ज्यामितीय, आयनन तथा बंधनी समावयवता।

आयनन समावयवी-
[Co(NH3)5(NO)2] (NO3)2 तथा [Co(NH3)5(NO3)] (NO2) (NO3)

बन्धनी समावयवी-
[Co(NH3)5(NO2)](NO3)2 तथा [Co(NH3)5(ONO)](NO3)2

(iv) संकुल [Pt(NH3)(H2O)Cl2] ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 40

प्रश्न 9.4.
इसका प्रमाण दीजिए कि [Co(NH3)5Cl] SO4 तथा [Co(NH3)5SO4]Cl आयनन समावयवी हैं।
उत्तर:
आयनन समावयवी जल में विलेय होकर भिन्न-भिन्न आयन देते हैं अतः इनकी विभिन्न अभिकर्मकों से अभिक्रिया का प्रकार भिन्न-भिन्न होगा-
[Co(NH3)5Cl]SO4 +BaCl2 विलयन → BaSO4(s) श्वेत अवक्षेप
[Co(NH3)5SO4]Cl + BaCl2 विलयन → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5Cl]SO4 + AgNO3 विलयन → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5SO4]Cl + AgNO3 विलयन → AgCl श्वेत अवक्षेप

प्रश्न 9.5.
संयोजकता आबंध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि वर्ग समतलीय संरचना वाला [Ni(CN)4]2- आयन प्रतिचुंबकीय है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति वाला [NiCl4]2- आयन अनुचुंबकीय है।
उत्तर:
वर्ग समतलीय आयन [Ni(CN)4]2- में Ni पर dsp2 संकरण पाया जाता है। इसमें Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 41
प्रत्येक संकरित कक्षक एक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म प्राप्त करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होने के कारण यह संकुल प्रतिचुंबकीय है। [NiCl4]2- आयन में Ni पर sp3 संकरण पाया जाता है तथा इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है।

इसमें एक s तथा तीन p कक्षकों के संकरण से चार समान sp3 संकर कक्षक बनते हैं। यहाँ निकल +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है तथा इस आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है अतः इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 42
संकरण के पश्चात् भी 3d कक्षकों में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं जिनके कारण यह संकुल आयन अनुचुंबकीय होता है।

प्रश्न 9.6.
[NiCl4]2- अनुचुंबकीय है जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुंबकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं। क्यों?
उत्तर:
[Ni(CO)4] में, Ni की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है जबकि [NiCl4]2- में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। CO की उपस्थिति में, Ni के 3d तथा 4s कक्षकों के इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं क्योंकि CO प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड है परन्तु Cl एक दुर्बल क्षेत्र लिगन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं हो पाता है। इसलिए [NiCl4]2- अनुचुंबकीय है जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुंबकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं तथा दोमों में sp3 संकरण है।

प्रश्न 9.7.
[Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुंबकीय है जबकि [Fe(CN)6]3- दुर्बल अनुचुंबकीय। समझाइए।
उत्तर:
[Fe(CN)6]3- में CN (प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड) की उपस्थिति में, 3d इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं तथा केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन बचता है। इसमें d2sp3 संकरण होता है तथा यह आंतरिक कक्षक संकुल बनाता है अतः यह दुर्बल अनुचुंबकीय है जबकि [Fe(H2O)6]3+ में H2O (दुर्बल लिगेन्ड) की उपस्थिति में, 3d इलेक्ट्रॉन युग्मित नहीं होते अतः इसमें sp3d2 संकरण है तथा यह बाह्यकक्षक संकुल बनाता है जिसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं अतः यह प्रबल अनुचुंबकीय है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.8.
समझाइए कि [Co(NH3)6]3+ एक आंतरिक कक्षक संकुल है जबकि [Ni(NH3)6]2+ एक बाह्य कक्षक संकुल है।
उत्तर:
कुल Co(NH3)6]3+ में NH3 प्रबल लिगेन्ड है जिससे इसमें d2sp संकरण होता है। Co+3 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d6 होता है तथा NH3 की उपस्थिति में ये इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं एवं शेष बचे दो रिक्त d कक्षक d2sp3 संकरण द्वारा आंतरिक कक्षक संकुल बनाते हैं जबकि [Ni(NH3)6]2+ में Ni+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 होने के कारण NH3 जैसे प्रबल लिगेन्ड की उपस्थिति में भी इलेक्ट्रॉनों के युग्मन से दो आन्तरिक d कक्षक रिक्त नहीं हो सकते। अतः इसमें sp3d2 संकरण होता है तथा यह बाह्य कक्षक संकुल बनाता है।

प्रश्न 9.9.
वर्ग समतली [Pt(CN)4]2- आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर:
[Pt(CN)4]2- की वर्ग समतली आकृति के कारण इसमें dsp2 संकरण होता है तथा इस संकुल आयन में Pt,+2 अवस्था में है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 5d8 है तथा प्रबल लिगेन्ड (CN) की उपस्थिति में इन 5d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है तथा शेष बचा एक रिक्त d कक्षक संकरण में भाग लेता है। (dsp2 संकरण ) अतः इसमें एक भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 9.10.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त को प्रयुक्त करते हुए समझाइए कि कैसे हेक्साएक्वा मैंगनीज (II) आयन में पांच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं जबकि हेक्सासायनो मैंगनीज (II) आयन में केवल एक ही अयुगलित (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉन है।
उत्तर:
हेक्साएक्वा मैंगनीज (II) आयन, [Mn(H2O6]2+ में Mn+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d5 है तथा इसमें H2O दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा का मान कम होता है। इसलिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}^3 \mathrm{e}_{\mathrm{g}}^2\) होगा तथा sp3d2 संकरण होने के कारण इसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं क्योंकि इसमें इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता। जबकि हेक्सासायनो मैंगनीज (II) आयन, [Mn(CN)6]-4 में CN प्रबल लिगेन्ड है जिसकी उपस्थित में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा का मान अधिक होने के कारण Mn2+ का इलेक्ट्रॉंनिक विन्यास \(t_{2 \mathrm{~g}}^5 \mathrm{e}_{\mathrm{g}}^0\) (दो रिक्त d कक्षक) होगा जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है तथा इसमें sp3d2 संकरण होगा।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Read More »

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
उपभोक्ता के बजट सेट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उपभोक्ता का बजट सेट उन वस्तुओं के सभी बंडलों का संग्रह है, जिन्हें उपभोक्ता प्रचलित बाजार कीमत पर अपनी आय से खरीद सकता है।

प्रश्न 2.
बजट रेखा क्या है?
उत्तर:
बजट रेखा वह रेखा है जो दो वस्तुओं के ऐसे विभिन्न बंडलों को दिखाती है, जिन्हें उपभोक्ता दी हुई कीमतों और दी। हुई आय पर खरीद सकता है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 3.
बजट रेखा की प्रवणता नीचे की ओर क्यों होती है? समझाइए।
उत्तर:
बजट रेखा दो वस्तुओं की अधिकतम इकाइयाँ दर्शाती है जिन्हें एक उपभोक्ता अपनी दी हुई आय से दोनों वस्तुओं को दी गई कीमतों पर खरीद सकता है। मान लीजिए कि एक उपभोक्ता की आय 1000 रुपए है और दो वस्तुओं x तथा y की कीमतें क्रमशः 2 रुपए और 5 रुपए प्रति इकाई है। इस प्रकार वह अपनी आय से x की अधिकतम 500 इकाइयाँ तथा y की शून्य इकाई खरीद सकेगा अथवा y की 200 इकाइयाँ और x की शून्य इकाई खरीद सकेगा। इस प्रकार x की 500 और y की 200 इकाइयों के अंदर ही एक उपभोक्ता x और की इकाइयाँ खरीदेगा। मान लीजिए, वह x की 200 और y की 120 इकाइयाँ खरीदता है। अगर । वह ) की अधिक इकाइयाँ खरीदना चाहता है, तो उसे x वस्तु की कुछ इकाइयों का त्याग करना पड़ेगा। इस प्रकार दोनों वस्तुओं की इकाइयों में ऋणात्मक (विपरीत) संबंध होता है। इसी संबंध के कारण बजट रेखा की प्रवणता नीचे की ओर होती है

प्रश्न 4.
एक उपभोक्ता दो वस्तुओं का उपभोग करने के लिए इच्छुक है। दोनों वस्तुओं की कीमत क्रमशः 4 रुपए तथा 5 रुपए है। उपभोक्ता की आय 20 रुपए है
(i) बजट रेखा के समीकरण को लिखिए।
(ii) उपभोक्ता यदि अपनी संपूर्ण आय वस्तु 1 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है?
(iii) यदि वह अपनी संपूर्ण आय वस्तु 2 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है?
(iv) बजट रेखा की प्रवणता क्या है?
उत्तर:
(i) बजट रेखा का समीकरण निम्नलिखित होगा
p1x1 + p2x2 = M
4x1 + 5x2 = 20

(ii) बजट रेखा समीकरण
4x1 + 5x2 = 20
चूँकि x2 = 0
इसलिए 4x1 + 5 x 0 = 20
4x1 = 20
x1 = \(\frac { 20 }{ 4 }\) = 5
अतः यदि उपभोक्ता अपनी संपूर्ण आय वस्तु 1 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी 5 इकाइयों का उपभोग कर सकता है।

(iii) बजट रेखा समीकरण-
4x1 + 5x2 = 20
चूँकि x1 = 0
इसलिए 4 x 0 + 5x2 = 20
5x2 = 20
x2 = \(\frac { 20 }{ 5 }\) = 4
अतः यदि उपभोक्ता अपनी संपूर्ण आय वस्तु 2 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी 4 इकाइयों का उपभोग कर सकता है।

(iv) बजट रेखा की प्रवणता = \(\frac{p_{1}}{p_{2}}\)
= \(\frac { 4 }{ 5 }\) = 0.8
नोट-प्रश्न 5, 6 तथा 7 प्रश्न 4 से संबंधित हैं।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 5.
यदि उपभोक्ता की आय बढ़कर 40 रुपए हो जाती है, परंतु कीमत अपरिवर्तित रहती है तो बजट रेखा में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
उपभोक्ता की आय बढ़ने पर बजट रेखा का समीकरण निम्नलिखित प्रकार से बदल जाएगा
4x1 + 5x2 = 40
इस समीकरण के अनुसार-
4x1 + 5 x 0 = 40
4x1 = 40
x1 = \(\frac { 40 }{ 4 }\) = 10
4 x 0 + 5x2 = 40
5x2 = 40
x2 = \(\frac { 40 }{ 5 }\) = 8
इस प्रकार, उपभोक्ता अपनी आय से वस्तु 1 की अधिकतम 10 और वस्तु 2 की 8 इकाइयाँ खरीद सकेगा। बजट रेखा में निम्नलिखित परिवर्तन होगा-
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत 1
रेखाचित्र में AB प्रारंभिक बजट रेखा है। जब उपभोक्ता की आय 20 रुपए से बढ़कर 40 रुपए हो जाती है, तो बजट रेखा AB से बढ़कर A,B, हो जाएगी।

प्रश्न 6.
यदि वस्तु 2 की कीमत में एक रुपए की गिरावट आ जाए परंतु वस्तु 1 की कीमत में तथा उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन न हो, तो बजट रेखा में क्या परिवर्तन आएगा?
उत्तर:
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत 2
पुरानी P2 = 5
नई P2 = 5 – 1 = 4 रुपए
इसलिए नई x2 = 20 = 5 इकाइयाँ
p2 में परिवर्तन से बजट रेखा में निम्नलिखित परिवर्तन आएगा-
रेखाचित्र में AB प्रारंभिक बजट रेखा है, जबकि A1B नई बजट रेखा है।

प्रश्न 7.
अगर कीमतें और उपभोक्ता की आय दोनों दुगुनी हो जाए, तो बजट सेंट कैसा होगा?
उत्तर:
पुरानी M = 20
नई M = 20 x 2 = 40 रुपए
पुरानी P1 = 4
नई P1 = 4 x 2 = 8 रुपए
नई x1 = \(\frac { 40 }{ 8 }\) = 5 इकाइयाँ
पुरानी p2 = 5
नई p2 = 5 x 2 = 10 रुपए
नई x2 = \(\frac { 40 }{ 10 }\) = 4
इकाइयाँ चूँकि बजट रेखा के सभी तत्त्व (x1 और x2) पूर्ववत हैं इसलिए बजट रेखा में कोई भी परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 8.
मान लीजिए कि कोई उपभोक्ता अपनी पूरी आय का व्यय करके वस्तु 1 की 6 इकाइयाँ तथा वस्तु 2 की 8 इकाइयाँ खरीद सकता है। दोनों वस्तुओं की कीमतें क्रमशः 6 रुपए तथा 8 रुपए हैं। उपभोक्ता की आय कितनी है?
उत्तर:
वस्तु 1 की इकाइयाँ (x1) = 6
वस्तु 1 की कीमत (p1) = 6
वस्तु 2 की इकाइयाँ (x2) = 8
वस्तु 2 की कीमत (p2) = 8
बजट रेखा समीकरण के अनुसार
M = p1x1 + p2x2
= 6 x 6 + 8 x 8
= 36 + 64
= 100
रुपए इस प्रकार उपभोक्ता की आय 100 रुपए है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 9.
मान लीजिए, उपभोक्ता दो ऐसी वस्तुओं का उपभोग करना चाहता है जो केवल पूर्णांक इकाइयों में उपलब्ध हैं। दोनों वस्तुओं की कीमत 10 रुपए के बराबर ही है तथा उपभोक्ता की आय 40 रुपए है।
(i) वे सभी बंडल लिखिए, जो उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं।
(ii) जो बंडल उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं, उनमें से वे बंडल कौन-से हैं जिन पर उपभोक्ता के पूरे 40 रुपए व्यय हो जाएँगे?
उत्तर:
(i)
M = 40
p = 10
x1 = \(\frac { 40 }{ 10 }\) = 4 इकाइयाँ
p2 = 10
x2 = \(\frac { 40 }{ 10 }\) = 4 इकाइयाँ
उपभोक्ता के लिए उपलब्ध बंडल निम्नलिखित होंगे
(0,0) (0, 1) (0, 2) (0, 3) (0, 4)
(1,0) (1, 1) (1, 2) (1, 3)
(2, 0) (2, 1) (2, 2)
(3,0) (3, 1)
(4,0)

(ii) वे बंडल जिन पर उपभोक्ता के पूरे 40 रुपए व्यय हो जाएँगे, निम्नलिखित हैं
(0,4) (1,3) (2, 2) (3, 1) (4,0)

प्रश्न 10.
‘एकदिष्ट अधिमान’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
एकदिष्ट अधिमान’ का अर्थ यह है कि एक उपभोक्ता दो वस्तुओं के विभिन्न बंडलों में से उस बंडल को अधिमान देता है, जिसमें इन वस्तुओं में से कम-से-कम एक वस्तु की अधिक मात्रा हो और दूसरे बंडल की तुलना में दूसरी वस्तु की मात्रा भी कम न हो।

प्रश्न 11.
यदि एक उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो क्या वह बंडल (10, 8) और बंडल (8, 6) के बीच तटस्थ हो सकता है?
उत्तर:
यदि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो वह बंडल (10, 8) और बंडल (8, 6) के बीच तटस्थ नहीं हो सकता। वह बंडल (10, 8) का चुनाव करेगा, क्योंकि इस बंडल में दोनों वस्तुओं की इकाइयाँ दूसरे बंडल की दोनों वस्तुओं की इकाइयों से अधिक हैं।

प्रश्न 12.
मान लीजिए कि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं। बंडल (10, 10), (10, 9) तथा (9,9) पर उसके अधिमान श्रेणीकरण के विषय में आप क्या बता सकते हैं?
उत्तर:
यदि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो हम विभिन्न बंडलों को निम्नलिखित प्राथमिकता देंगे-

बंडलप्राथमिकता
(10, 10)I
(10, 9)II
(9, 9)III

प्रश्न 13.
मान लीजिए कि आपका मित्र, बंडल (5, 6) तथा (6, 6) के बीच तटस्थ है। क्या आपके मित्र के अधिमान एकदिष्ट हैं?
उत्तर:
यदि हमारा मित्र बंडल (5, 6) और (6, 6) के बीच तटस्थ है तो उसके अधिमान एकदिष्ट नहीं हैं, क्योंकि बंडल (6,6) से उसे बंडल (5, 6) की तुलना में अधिक संतुष्टि प्राप्त होगी। अधिमान एकदिष्ट के रूप में उसे बंडल (5, 6) की तुलना में बंडल (6,6) को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रश्न 14.
मान लीजिए कि बाज़ार में एक ही वस्तु के लिए दो उपभोक्ता हैं तथा उनके माँग फलन इस प्रकार हैं-
d1 (p) = 20 – p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से कम या बराबर हो तथा
d2 (p) = 0 किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से अधिक हो।
d2 (p) = 30 – 2p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से कम या बराबर हो और
d2 (p) = 0 किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से अधिक हो।
बाज़ार माँग फलन को ज्ञात कीजिए। उत्तर
d1 (p) = 20 – p …..(i)
d2 (p) = 30 – 2p ….(ii)
बाज़ार माँग (d1 + d2) = 50 – 3p इस प्रकार बाज़ार माँग 15 रुपए से कम या बराबर वाली कीमत पर 50-3p होगी और 15 रुपए से अधिक कीमत पर शून्य (0) होगी।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 15.
मान लीजिए, किसी वस्तु के लिए 20 उपभोक्ता हैं तथा उनके माँग फलन एक-जैसे हैं
d (p) = 10 – 3p किसी ऐसी कीमत के लिए जो \(\frac { 10 }{ 3 }\) से कम हो अथवा बराबर हो तथा
d1(p) = 0 किसी ऐसी कीमत पर जो \(\frac { 10 }{ 3 }\) से अधिक है।
बाज़ार माँग फलन क्या है?
उत्तर
उपभोक्ताओं की संख्या = 20
एक उपभोक्ता का माँग फलन = d(p) = 10 – 3p क्योंकि p ≤ \(\frac { 10 }{ 3 }\)
चूँकि सभी 20 उपभोक्ताओं के माँग फलन एक-जैसे हैं, अतः बाज़ार माँग फलन व्यक्तिगत माँग फलन का 20 गुना होगा।
बाज़ार माँग फलन = 20(10 – 3p) क्योंकि p ≤ \(\frac { 10 }{ 3 }\)
= 200 – 60p क्योंकि p ≤ \(\frac { 10 }{ 3 }\)

प्रश्न 16.
एक ऐसे बाज़ार को लीजिए, जहाँ केवल दो उपभोक्ता हैं तथा मान लीजिए, किसी वस्तु के लिए उनकी माँगें इस प्रकार हैं-

pd1d2
1924
2820
3718
4616
5514
6412

वस्तु के लिए बाज़ार माँग की गणना कीजिए।
उत्तर:
वस्तु के लिए बाज़ार माँग तालिका

कीमत रुपए (p)उपभोक्ता (1) द्वारा माँगी गई मात्रा (d1)उपभोक्ता (2) द्वारा  माँगी गई मात्रा (d2)बाज़ार माँग (d1 + d2)
192433
282028
371825
461622
551419
641216

प्रश्न 17.
सामान्य वस्तु से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सामान्य वस्तुएँ वे होती हैं जिनकी माँगी गई मात्रा में वृद्धि होती है। जब उपभोक्ता की आय बढ़ती है तथा वस्तु की मात्रा में कमी आती है, तब उपभोक्ता की आय कम होती है; जैसे गेहूँ, मलाईयुक्त दूध, फल आदि।

प्रश्न 18.
निम्नस्तरीय वस्तुओं को परिभाषित कीजिए तथा कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
निम्नस्तरीय वस्तुएँ ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है जिनके लिए माँग उपभोक्ता की आय के विपरीत दिशा में जाती है। उपभोक्ता की आय बढ़ने पर इनकी माँग घटती है और आय घटने पर इनकी माँग बढ़ती है। उदाहरण के लिए, मोटे अनाज, मोटा कपड़ा, घटिया मार्क वाली वस्तुएँ, टोंड दूध आदि।

प्रश्न 19.
स्थानापन्न को परिभाषित कीजिए। ऐसी दो वस्तुओं के उदाहरण दीजिए जो एक-दूसरे के स्थानापन्न हैं।
उत्तर:
स्थानापन्न वस्तुएँ वे होती हैं जो एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग होती हैं; जैसे चाय-कॉफी, चीनी-गुड़।

प्रश्न 20.
पूरकों को परिभाषित कीजिए। ऐसी दो वस्तुओं के उदाहरण दीजिए जो एक-दूसरे के पूरक हैं।
उत्तर:
जिन वस्तुओं का साथ-साथ उपयोग किया जाता है उन्हें पूरक वस्तुएँ कहा जाता है; जैसे चाय-चीनी, जूते तथा जुराबे, टॉर्च तथा सैल।

प्रश्न 21.
माँग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
माँग की कीमत लोच से हमारा अभिप्राय उस दर से है जिसके अनुसार वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने से वस्तु की माँग में परिवर्तन होता है।
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत 3

प्रश्न 22.
एक वस्तु की माँग पर विचार करें। 4 रुपए की कीमत पर इस वस्तु की 25 इकाइयों की माँग है। मान लीजिए वस्त की कीमत बढ़कर 5 रुपए हो जाती है तथा परिणामस्वरूप वस्तु की माँग घटकर 20 इकाइयाँ हो जाती है। कीमत लोच की गणना कीजिए।
उत्तर:
p0 = 4
q0 = 25
p1 = 5
q0 = 20
कीमत की लोच = \(\frac{\Delta q}{\Delta p} \times \frac{p^{0}}{q^{0}}\)
= \(\frac{25-20}{5-4} \times \frac{4}{25}=\frac{5}{1} \times \frac{4}{25}\)
= \(\frac { 20 }{ 25 }\) = 0.8
इस उदाहरण में माँग की लोच 0.8 या इकाई से कम (eD < 1) या कम लोचदार है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 23.
माँग वक्र D (p) = 10 – 3p को लीजिए। कीमत \(\frac { 5 }{ 3 }\) पर लोच क्या है?
उत्तर:
रैखिक माँग वक्र की दिशा में लोच- (eD) = -b\(\frac { p }{ q }\)
= –\(\frac { bp }{ a-bp }\)
दी हुई माँग वक्र D (p) = 10 – 3p
यहाँ a= 10 और b = – 3
कीमत \(\frac { 5 }{ 3 }\) पर q = 10 – 3(\(\frac { 5 }{ 3 }\)) = 5
माँग की लोच = -b\(\frac { p }{ q }\)
= -3\(\frac{\frac{5}{3}}{5}\)
= – 1
अर्थात् माँग की लोच इकाई के बराबर है।

प्रश्न 24.
मान लीजिए, किसी वस्तु की माँग की कीमत लोच -0.2 है। यदि वस्तु की कीमत में 5% की वृद्धि होती है, तो वस्तु के लिए माँग में कितनी प्रतिशत कमी आएगी?
उत्तर:
eD = – 0.2
% ∆p = 5
eD = \(\frac{\% \Delta q}{\% \Delta p}\)
-0.2 = \(\frac{\% \Delta q}{5}\)
∴ % ∆q = -0.2 x 5 = – 1
इस प्रकार वस्तु की माँग में 1 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।

प्रश्न 25.
मान लीजिए, किसी वस्तु की माँग की कीमत लोच -0.2 है। यदि वस्तु की कीमत में 10% वृद्धि होती है, तो उस पर होने वाला व्यय किस प्रकार प्रभावित होगा?
उत्तर:
eD = – 0.2
% ∆p = 10
eD = \(\frac{\% \Delta q}{\% \Delta p}\)
– 0.2 = \(\frac{\% \Delta q}{10}\)
∴ % ∆q = -0.2 x 10
= – 2

प्रश्न 26.
मान लीजिए कि किसी वस्तु की कीमत में 4% की गिरावट होने के परिणामस्वरूप उस पर होने वाले व्यय में 2% की वृद्धि हो गई। आप माँग की लोच के बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर:
कीमत में % कमी = 4
कुल व्यय में % वृद्धि = 2
चूँकि कीमत में 4% कमी वस्तु पर होने वाले व्यय में 2% वृद्धि से अधिक है, अतः माँग की लोच इकाई से कम या बेलोचदार है।

उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत HBSE 12th Class Economics Notes

→ उपयोगिता-किसी वस्तु की वह क्षमता जो आवश्यकता को संतुष्ट करती है, उपयोगिता कहलाती है।

→ कुल उपयोगिता-किसी वस्तु की सभी इकाइयों से प्राप्त संतुष्टि के कुल जोड़ को कुल उपयोगिता कहते हैं।

→ सीमांत उपयोगिता-सीमांत उपयोगिता (MU) से अभिप्राय वस्तु की एक अधिक इकाई के प्रयोग करने से प्राप्त होने
वाली अतिरिक्त उपयोगिता से है। उदाहरण-
कुल उपयोगिता (TU) जब 10 इकाइयों का उपयोग किया जाता है = 100 यूटिल
कुल उपयोगिता जब 11 इकाइयों का उपयोग किया जाता है = 110 यूटिल
MU11th = TU11 – TU10 = 110 – 100 = 10 यूटिल

→ सीमांत उपयोगिता (MU) और कुल उपयोगिता (TU) में संबंध-सभी इकाइयों की सीमांत उपयोगिता (MU) को जोड़ने पर कुल उपयोगिता (TU) प्राप्त हो जाती है, अतएव TU = ∑MU
सीमांत उपयोगिता (MU) ह्रासमान होती है (ह्रासमान सीमांत उपयोगिता नियम के अनुसार)। यह शून्य या ऋणात्मक हो जाती है। स्पष्ट है कि जब MU = 0 तब TU में कोई वृद्धि नहीं होती। इसलिए जब MU = 0 (शून्य) होती है, तब TU अधिकतम होती है। जब MU ऋणात्मक हो जाती है तब TU घटना शुरू हो जाती है।

→ ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम बतलाता है कि अन्य बातें समान रहने पर जब किसी वस्तु (जैसे चाय का एक प्याला) की अधिक इकाइयों का निरंतर उपभोग किया जाता है तब प्रत्येक अगली इकाई से मिलने वाली अतिरिक्त उपयोगिता (MU) अवश्य ह्रासमान होती है और शून्य या ऋणात्मक भी हो सकती है।

→ उपभोक्ता संतुलन-उपभोक्ता संतुलन एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक उपभोक्ता अपनी सीमित आय को व्यय करके अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है तथा वह अपनी आय को खर्च करने के वर्तमान ढंग में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना पसंद नहीं करता।

→ उपभोक्ता संतुलन का निर्धारण-एक ही वस्तु के लिए उपभोक्ता संतुलन (अधिकतम संतुष्टि) की स्थिति तब प्राप्त करता है जब वस्तु से प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता कीमत के रूप में दी जाने वाली मुद्रा की सीमांत उपयोगिता (MUM ) के बराबर हो जाती है।

→ बजट सेट-बजट सेट उन वस्तुओं के सभी बंडलों का संग्रह है, जिन्हें उपभोक्ता प्रचलित बाज़ार कीमत पर अपनी आय से खरीद सकता है।

→ बजट रेखा बजट रेखा उन सभी बंडलों का प्रतिनिधित्व करती है जिन पर उपभोक्ता की संपूर्ण आय व्यय हो जाती है। बजट रेखा की प्रवणता ऋणात्मक होती है। यदि कीमतों या आय दोनों में से किसी एक में परिवर्तन आता है, तो बजट सेट में परिवर्तन आ जाता है।

→ सुस्पष्ट अधिमान-सभी संभावित बंडलों के संग्रह के विषय में उपभोक्ता के सुस्पष्ट अधिमान हैं। वह उन पर अपनी अधिमानता के अनुसार उनका श्रेणीकरण कर सकता है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

→ अनधिमान वक्र-अनधिमान वक्र सभी बिंदुओं का बिंदुपथ है जो उन बंडलों को प्रदर्शित करते हैं, जिनके बीच उपभोक्ता तटस्थ है।

→ अनधिमान वक्र की प्रवणता-अधिमान की एकदिष्टता से अभिप्राय है कि अनधिमान वक्र की प्रवणता नीचे की ओर है।

→ अनधिमान मानचित्र-उपभोक्ता का अधिमान सामान्यतया अनधिमान मानचित्र द्वारा दर्शाया जा सकता है। उपभोक्ता का अधिमान सामान्यतया उपयोगिता फलन द्वारा भी दर्शाया जा सकता है।

→ उपभोक्ता का चयन-एक विवेकशील उपभोक्ता सदा बजट सेट में से अपने सर्वाधिक अधिमानता बंडल का चयन करता

→ उपभोक्ता का इष्टतम बंडल उपभोक्ता का इष्टतम बंडल बजट रेखा तथा अनधिमान वक्र के बीच स्पर्शिता बिंदु पर स्थित होता है।

→ उपभोक्ता का माँग वक्र-उपभोक्ता का माँग वक्र वस्तु की मात्रा को प्रदर्शित करता है, जिसका चयन उपभोक्ता कीमत के विभिन्न स्तरों पर ऐसी स्थिति में करता है, जब अन्य वस्तुओं की कीमत, उपभोक्ता की आय तथा उनकी रुचियाँ और अधिमान अपरिवर्तित रहते हैं।

→ सामान्य वस्तुओं की माँग-किसी सामान्य वस्तु की माँग में वृद्धि (गिरावट) उपभोक्ता की आय में वृद्धि (गिरावट) के साथ होती है।

→ निम्नस्तरीय वस्तु की माँग-उपभोक्ता की आय में वृद्धि (गिरावट) होने के साथ-साथ निम्नस्तरीय वस्तु की माँग में गिरावट (वृद्धि) होती है।

→ बाज़ार माँग वक्र बाज़ार माँग वक्र बाज़ार में सभी उपभोक्ताओं की माँग को वस्तु की कीमत में विभिन्न स्तरों पर समग्र दृष्टि से देखकर माँग को प्रदर्शित करता है।

→ माँग की कीमत लोच-किसी वस्तु की माँग की कीमत लोच, किसी वस्तु की माँग के प्रतिशत में परिवर्तन को इसकी कीमत के प्रतिशत-परिवर्तन से भाग देकर प्राप्त किया जाता है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत Read More »

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.1.
निम्नलिखित के इलेक्ट्रानिक विन्यास लिखिए –
(i) Cr3+
(ii) Pm3+
(iii) Cu+
(iv) Ce4+
(v) Co2+
(vi) Lu2+
(vii) Mn2+
(viii) Th4+
उत्तर:
इन आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं-
परमाणु क्रमाक Cr= 24, Pm = = 61, Cu 29, Ce = 58, Co 27, Lu = 71, Mn = 25, Th = 90
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 1

प्रश्न 8.2.
+3 ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत होने के संदर्भ में Mn2+ के यौगिक Fe2+ के यौगिकों की तुलना में अधिक स्थायी क्यों हैं ?
उत्तर:
Mn2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d5 होता है जो कि अर्धपूरित उपकोश के कारण अधिक स्थायी होता है अतः Mn+2 आसानी से इलेक्ट्रॉन नहीं देता, अर्थात् इसकी ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति कम होती है। लेकिन Fe+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d6 होता है अतः यह एक इलेक्ट्रॉन देकर 3d5 स्थायी विन्यास बनाता है इसलिए यह आसानी से ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 2

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.3.
संक्षेप में स्पष्ट कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अर्धभाग में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था कैसे अधिक स्थायी होती जाती है ?
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी की (Sc के अलावा) सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +2 है जो कि 4s में से दो इलेक्ट्रॉन निकलने के कारण बनती है। प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अर्धभाग में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती जाती है क्योंकि 3d कक्षकों में प्रत्येक में एक इलेक्ट्रॉन होता है अतः प्रत्येक कक्षक अर्धपूरित है जिनमें अन्तर इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण न्यूनतम होता है तथा नाभिकीय आवेश बढ़ता है। लेकिन श्रेणी के द्वितीय अर्धभाग में 3d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन प्रारम्भ हो जाता है।

प्रश्न 8.4.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस सीमा तक ऑक्सीकरण अवस्थाओं को निर्धारित करते हैं ? उत्तर को उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व काफी सीमा तक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करता है। वे ऑक्सीकरण अवस्थाएँ जिनमें उत्कृष्ट गैस विन्यास होता है या अर्धपूरित (d5) तथा पूर्ण पूरित स्थायी विन्यास (d10) होता है वे अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 3

प्रश्न 8.5.
संक्रमण तत्वों की मूल अवस्था में नीचे दिए गए d इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों में कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्था स्थायी होगी ?
3d3, 3d5, 3d8 तथा 3d4
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की मूल अवस्था में इन d इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों के लिए स्थायी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ निम्न प्रकार होंगी-
3d3 (वैनेडियम) (+ 2), + 3, + 4, + 5, ( + 5 सर्वाधिक स्थायी )
3d5 (क्रोमियम) + 3, 4, + 6, (+3 सर्वाधिक स्थायी )
3d5 (मैंगनीज़) +2, +4, +6, +7, ( + 2 सर्वाधिक स्थायी )
3d8 ( कोबाल्ट ) + 2 + 3 (संकुलों में )
3d4 मूल अवस्था में कोई d4 विन्यास नहीं होता।

प्रश्न 8.6.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के ऑक्सो-धातुऋणायनों का नाम लिखिए; जिसमें धातु संक्रमण श्रेणी की वर्ग संख्या के बराबर ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती है।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के ऑक्सो धातुऋणायन निम्नलिखित हैं जिनमें धातु संक्रमण श्रेणी की वर्ग संख्या के बराबर ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 4

प्रश्न 8.7.
लैन्थेनॉयड आकुंचन ( संकुचन ) क्या है ? लैन्थेनॉयड आकुंचन के परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
लैन्थेनॉयड संकुचन – लैन्थेनॉयडों में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर La से Lu (लैन्थेनम से ल्यूटीशियम) तक परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में समग्र (over all) कमी होती है, इसे लैन्थेनॉयड संकुचन कहते हैं। परमाणु त्रिज्याओं के मानों में यह कमी नियमित नहीं होती है जैसा कि M+3 आयनों में नियमित रूप से कमी होती है। यह संकुचन भी सामान्य संक्रमण श्रेणियों के समान ही है तथा इसका कारण भी समान है अर्थात् एक ही उपकोश में एक इलेक्ट्रॉन का दूसरे इलेक्ट्रॉन द्वारा परिरक्षण प्रभाव अपूर्ण. होता है।

फिर भी श्रेणी में नाभिकीय आवेश बढ़ने पर एक d- इलेक्ट्रॉन पर दूसरे d- इलेक्ट्रॉन के परिरक्षण प्रभाव की तुलना में, एक 4f इलेक्ट्रॉन का दूसरे 41 इलेक्ट्रॉन पर परिरक्षण प्रभाव कम होता है तथा 1-कक्षकों की आकृति भी इसके लिए अनुकूल नहीं है। अतः श्रेणी में बढ़ते हुए नाभिकीय आवेश के कारण परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु आकार में एक नियमित कमी पायी जाती है, लेकिन Eu की परमाणु त्रिज्या अधिक होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 25
लैन्थेनॉयड संकुचन के प्रभाव-

(i) द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार में समानता ( Similarities in the Atomic Size of Second and Third Transition Series Elements) – लैन्धेनॉयड संकुचन का तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इसके कारण तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार दूसरी संक्रमण श्रेणी के संगत तत्वों के परमाणु आकार के लगभग समान होते हैं। Zr (160 pm) तथा Hf ( 159 pm ) के परमाणु आकार का लगभग समान मान लैन्धेनॉयड संकुचन का ही परिणाम है, लेकिन वर्ग 3 में ऐसा नहीं होता।

(ii) लैन्थेनॉयडों का पृथक्करण (Separation of Lanthanoids) – लैन्थेनॉयडों की आयनिक त्रिज्या में अन्तर बहुत कम होता है इसलिए इनके रासायनिक गुणों में काफी समानता होती है, अतः इन तत्वों का पृथक्करण मुश्किल से होता है। लेकिन इनके आकार में कुछ अन्तर होता है जिसके कारण इनकी विलेयता तथा संकुल बनाने की प्रवृत्ति में भिन्नता आ जाती है अतः इनका पृथक्करण आयन विनिमय विधि द्वारा सम्भव हो पाता है।

(iii) हाइड्रॉक्साइडों की क्षरीय प्रबलता (Basic Strength of Hydroxides) – 12 से 1.1 तक इनके हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीय प्रबलता कम होती है क्योंकि इनकी आयनिक त्रिज्याओं में कमी होती है। इसलिए La(OH)2 का क्षारीय गुण अधिकतम तथा Lu (OH)2 का क्षारीय गुण न्यूनतम होता है।

प्रश्न 8.8.
संक्रमण धातुओं के अभिलक्षण क्या हैं? ये संक्रमण धातु क्यों कहलाती हैं ? d-ब्लॉक के तत्वों में कौनसे तत्व संक्रमण श्रेणी के तत्व नहीं कहे जा सकते ?
उत्तर:
संक्रमण धातुओं के सामान्य अभिलक्षण निम्नलिखित हैं-
संक्रमण तत्व प्रारूपिक धात्विक गुण, जैसे- उच्च तनन सामर्थ्य, तन्यता, आघातवर्धनीयता, उच्च तापीय तथा विद्युत् चालकता व धात्विक चमक दर्शाते हैं। Zn, Cd, Hg तथा Mn जैसे अपवादों को छोड़कर सामान्य ताप पर इनकी एक या अधिक प्रारूपिक धात्विक संरचनाएँ होती हैं।

संक्रमण तत्व वे d-ब्लॉक के तत्व होते हैं जिनकी परमाणु या किसी ऑक्सीकरण अवस्था में अपूर्ण d कक्षक होते हैं। वर्ग 12 के तत्व जिंक, कैडमियम तथा मर्क्युरी (Zn, Cd तथा Hg ) में उनकी मूल अवस्था तथा सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में पूर्ण पूरित (d10) विन्यास है अतः इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।

प्रश्न 8.9.
संक्रमण धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस प्रकार असंक्रमण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से भिन्न हैं?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में उपान्त्य कोश में आंशिक भरे d उपकोश होते हैं जबकि असंक्रमण तत्वों में आंशिक भरे d उपकोश नहीं होते, लेकिन इनके आन्तरिक विन्यास में पूर्ण भरे d उपकोश होते हैं। संक्रमण तत्वों में अन्तिम इलेक्ट्रॉन उपान्त्य कोश के d उपकोश में भरा जाता है जबकि असंक्रमण तत्वों में अन्तिम इलेक्ट्रॉन s या p उपकोश में भरा जाता है।

प्रश्न 8.10.
लैन्थेनॉयडों द्वारा कौन-कौनसी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित की जाती हैं ?
उत्तर:
लैन्थेनॉयडों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +3 है लेकिन कुछ लैन्थेनॉयड +2 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करते हैं। जैसे – Eu2+ तथा Ce+4

प्रश्न 8.11.
कारण देते हुए स्पष्ट कीजिए-
(i) संक्रमण धातुएँ तथा उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय हैं।
(ii) संक्रमण धातुओं की कणन एन्थैल्पी (Enthalpy of atomisation) के मान उच्च होते हैं।
(iii) संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती हैं।
(iv) संक्रमण धातुएँ तथा इनके अनेक यौगिक उत्तम उत्प्रेरक का कार्य करते हैं।
उत्तर:
(i) संक्रमण धातुएँ तथा उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय होते हैं, क्योंकि इनमें धातु के पास अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं तथा वे तत्व या यौगिक अनुचुम्बकीय होते हैं जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। जैसे Sc = [Ar] 3d1 4s2, इसके पास एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है अतः यह अनुचुम्बकीय है, इसी प्रकार FeSO4 में Fe+2 के पास चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह भी अनुचुम्बकीय है।

(ii) इस प्रश्न के उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक का उदाहरण 8.2 देखें ।

(iii) संक्रमण धातुओं के यौगिक सामान्यतः रंगीन होते हैं क्योंकि इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जिससे दृश्य प्रकाश द्वारा d-d संक्रमण (t2g से eg) आसानी से हो जाता है। लिगन्ड (जल इत्यादि) की उपस्थिति में d कक्षक दो भागों में विभाजित हो जाते हैं. – t2g तथा eg | इसी कारण इनका रंग जलीय विलयन या जलयोजित अवस्था में ही प्रेक्षित होता है।

(iv) संक्रमण धातुएँ तथा इनके अनेक यौगिक अच्छे उत्प्रेरक होते हैं क्योंकि इनमें परिवर्तनशील संयोजकता ( ऑक्सीकरण अंक) तथा संकुल यौगिक बनाने का गुण पाया जाता है जिसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.12.
अंतराकाशी यौगिक क्या हैं? इस प्रकार के यौगिक संक्रमण धातुओं के लिए भली प्रकार से ज्ञात क्यों हैं ?
उत्तर:
संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालक में परमाणुओं के मध्य बचे रिक्त स्थान (अन्तराकाश) में छोटे आकार वाले परमाणु जैसे H, N, B या C व्यवस्थित हो जाते हैं तो बने यौगिकों को अन्तराकाशी यौगिक कहते हैं। उदाहरण-TiC, Mn4N, Fe3H, VH0.56 तथा TiH1.7 इत्यादि। इन यौगिकों में धातुओं की कोई सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था नहीं होती । संक्रमण तत्वों में रिक्त d कक्षक होते हैं अतः ये अंतराकाशी यौगिक आसानी से बनाते हैं।

प्रश्न 8.13.
संक्रमण धातुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में परिवर्तनशीलता असंक्रमण धातुओं में ऑक्सीकरण अवस्थाओं में परिवर्तनशीलता से किस प्रकार भिन्न है ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तरसंक्रमण तत्वों में ऑक्सीकरण अवस्थाओं में एक का अंतर होता है। जैसे- मैंगनीज, +2, +3, 4, +5, +6, +7 अवस्था दर्शाता है जबकि असंक्रमण तत्वों जैसे p-ब्लॉक के तत्वों में सदैव दो का अंतर होता है, जैसे +2, +4 या +3, +5 या +4, +6 आदि ।

प्रश्न 8.14.
आयरनक्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाने की विधि का वर्णन कीजिए । पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन पर pH बढ़ाने से क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
आयरन क्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाना – आयरन क्रोमाइट [ क्रोमाइट अयस्क (FeCr2O4)] को जब वायु की उपस्थिति में सोडियम कार्बोनेट के साथ संगलित किया जाता है तो सोडियम क्रोमेट प्राप्त होता है। क्रोमाइट की सोडियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है-
4FeCr2O4 + 8Na2CO3 + 7O2 → 8Na2CrO4 + 2Fe2O3 + 8CO2
सोडियम क्रोमेट के विलयन को छानकर इसे सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा अम्लीय बना लेते हैं जिसमें से नारंगी सोडियम डाइक्रोमेट, (Na2Cr2O72H2O) को क्रिस्टलित कर लिया जाता है।
2Na2CrO2 + 2H+ → Na2Cr2O7 + 2Na+ + H2O

सोडियम डाइक्रोमेट की विलेयता, पोटैशियम डाइक्रोमेट से अधिक होती है। अतः सोडियम डाइक्रोमेट के विलयन में पोटैशियम क्लोराइड डालने पर पोटैशियम डाइक्रोमेट प्राप्त होता है।
Na2Cr2O7 + 2KCl → K2Cr2O7 + 2NaCl

विलयन से नारंगी रंग के क्रिस्टल, क्रिस्टलीकृत हो जाते हैं। पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन का pH बढ़ाने पर अर्थात् क्षारीय माध्यम करने पर यह क्रोमेट में बदल जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 5

प्रश्न 8.15.
पोटैशियम डाइक्रोमेट की ऑक्सीकरण क्रिया का उल्लेख कीजिए तथा निम्नलिखित के साथ आयनिक समीकरण लिखिए-
(i) आयोडाइड आयन
(ii) आयरन (II) विलयन
(iii) H2S
उत्तर:
पोटैशियम डाइक्रोमेट प्रबल ऑक्सीकारक होता है। अम्लीय माध्यम में डाइक्रोमेट आयन की ऑक्सीकरण क्रिया को निम्न प्रकार दर्शाया जाता है, इसमें Cr+6, Cr+3 में बदलता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 6

(i) आयोडाइड आयन – K2Cr2O7, आयोडाइड आयन को आयोडीन में ऑक्सीकृत करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 7

(ii) आयरन (II) विलयन – K2Cr2O7, Fe2+ को Fe+3 में ऑक्सीकृत कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 8

(iii) H2S – डाइक्रोमेट, H2S को सल्फर में ऑक्सीकृत करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 9

प्रश्न 8.16.
पोटैशियम परमैंगनेट को बनाने की विधि का वर्णन कीजिए । अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट किस प्रकार – (i) आयरन (II) आयन (ii) SO2 तथा (iii) ऑक्सैलिक अम्ल से अभिक्रिया करता है? अभिक्रियाओं के लिए आयनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
पोटैशियम परमैंगनेट बनाने के लिए MnO2 को KOH या KNO3 जैसे ऑक्सीकारक के साथ संगलित किया जाता है, इससे गाढ़े हरे रंग का पोटैशियम मैंगनेट (K2MnO4) बनता है जो उदासीन या अम्लीय माध्यम में असमानुपातित होकर पोटैशियम परमैंगनेट बनाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 10
प्रयोगशाला में Mn (II) आयन के लवणों को परऑक्सोडाइसल्फेट द्वारा ऑक्सीकृत कराने पर भी परमैंगनेट बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 11

अम्लीय माध्यम में KMnO, की अभिक्रियाएँ —
(i) आयरन (II) आयन से यह आयरन (II) को आयरन (III) में ऑक्सीकृत कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 12

(ii) SO2 से – यह जलीय SO2 को H2SO4 में ऑक्सीकृत करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 13

(iii) ऑक्सैलिक अम्ल से – KMnO4 , के साथ अभिक्रिया से ऑक्सैलिक अम्ल, CO2 में ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 14

प्रश्न 8.17.
M2+ / M तथा M3+ / M2+ निकाय के संदर्भ में कुछ धातुओं के E° के मान नीचे दिए गए हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 15
उपर्युक्त आँकड़ों के आधार पर निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए-
(i) अम्लीय माध्यम में Cr3+ या Mn3+ की तुलना Fe3+ का स्थायित्व |
(ii) समान प्रक्रिया के लिए क्रोमियम अथवा मैंगनीज धातुओं की तुलना में आयरन के ऑक्सीकरण में सुगमता ।
उत्तर:
(i) जब किसी स्पीशीज का अपचयन विभव (इलेक्ट्रोड विभव) अधिक होता है तो इसके अपचयित होने की प्रवृत्ति अधिक होती है। Mn+3 का अपचयन विभव अधिकतम है इसलिए यह आसानी से Mn2+ में अपचयित हो जाता है अतः Mn+3, Fe+3 से कम स्थायी होता है। लेकिन Cr+3, Fe+3 की तुलना में अधिक स्थायी है क्योंकि Cr+3 का अपचयन विभव, Fe+3 के अपचयन विभव से बहुत कम है।

(ii) जब किसी धातु आयन के इलेक्ट्रोड विभव (अपचयन विभव) का मान कम होता है तो उस धातु परमाणु की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होगी, अतः Mn की Mn+2 में ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति सर्वाधिक होगी तथा Fe की Fe+2 मैं ऑक्सीकरण की प्रवृत्ति न्यूनतम होगी। इसलिए इनके ऑक्सीकृत होने का क्रम निम्न प्रकार होगा -Mn > Cr > Fe

प्रश्न 8.18.
निम्नलिखित में कौनसे आयन जलीय विलयन में रंगीन होंगे ?
Ti3+, V3+,Cu+,Sc3+, Mn2+, Fe3+ तथा Co2+ प्रत्येक के लिए कारण बताइए ।
उत्तर:
Sc3+ के अतिरिक्त सभी आयन जलीय विलयन में रंगीन होते हैं क्योंकि इनमें d कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं अतः इनमें d-d संक्रमण आसानी से हो जाता है जो इनके रंग के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रश्न 8.19.
प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं की +2 ऑक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व की तुलना कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं में बाएँ से दाएँ जाने पर +2 ऑक्सीकरण अवस्थाओं का स्थायित्व बढ़ता है तथा बीच में अधिकतम होने के बाद कम होता जाता है क्योंकि प्रारम्भ में d कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जिससे अन्तर इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण न्यूनतम होता है। उसके पश्चात् d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन प्रारम्भ हो जाता है। Zn+2 अपवाद है क्योंकि इसमें पूर्णपूरित (3d10) स्थायी विन्यास होता है।

प्रश्न 8.20.
निम्नलिखित के संदर्भ में, लैन्थेनॉयड एवं ऐक्टिनॉयड के रसायन की तुलना कीजिए-
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) परमाण्वीय एवं आयनिक आकार
(iii) ऑक्सीकरण अवस्था
(iv) रासायनिक अभिक्रियाशीलता ।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – लैन्थेनॉयडों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में सभी तत्वों में 6s2 होता है तथा 4f में इलेक्ट्रॉन भरता जाता है अर्थात् यह परिवर्तनशील है, लेकिन Ln3+ में 4f1 से 4f14 तक विन्यास पाया जाता है। सभी ऐक्टिनॉयडों में 7s2 विन्यास होता है तथा 5f एवं 6d उपकोशों में परिवर्तनशील विन्यास होता है। 5f उपकोश में 14 इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं। Th तक 5f नहीं होता । Pa से प्रारम्भ होकर Lr तक 5f पूर्णरूप से भर जाता है। लैन्थेनॉयडों के समान ऐक्टिनॉयडों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अनियमितताएँ, 5f उपकोश में उपस्थित f0, f7 तथा f14 स्थायी विन्यासों के कारण होती हैं।

(ii) परमाण्वीय एवं आयनिक आकार – लैन्थेनॉयडों में La से Lu तक तत्वों की परमाणु एवं आयनिक त्रिज्या में कमी होती है लेकिन परमाणु त्रिज्या में कमी नियमित नहीं होती। ऐक्टिनॉयडों में भी लैन्थेनॉयडों के समान परमाणु या M3+ आयनों के आकार में क्रमिक कमी होती है, इसे ऐक्टिनॉयड संकुचन कहते हैं। लेकिन आकार में यह कमी एक तत्व से दूसरे तत्व में उत्तरोत्तर बढ़ती जाती है जो कि 51 इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण है।

(iii) ऑक्सीकरण अवस्था – लैन्थेनॉयडों में मुख्य रूप से +3 ऑक्सीकरण अवस्था पायी जाती है लेकिन कुछ तत्व +2 तथा +4 अवस्था भी दर्शाते हैं।
लैन्थेनॉयडों के समान ऐक्टिनॉयड भी +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं, लेकिन इनमें अन्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (+3 से +7 ) भी पायी जाती हैं।
लैन्थेनॉयड तथा ऐक्टिनॉयड दोनों में ही +4 की अपेक्षा +3 अवस्था में अधिक यौगिक बनते हैं तथा + 3 एवं +4 अवस्था वाले आयनों की जल अपघटित होने की प्रवृत्ति होती है।

(iv) रासायनिक अभिक्रियाशीलता (Chemical reactivity)-लैन्थेनॉयडों तथा ऐक्टिनॉयडों में कुछ समानता लेकिन कुछ भिन्नता भी होती है।

  • लैन्थेनॉयडों में लैन्थेनॉयड संकुचन होता है उसी प्रकार ऐक्टिनॉयडों में ऐक्टिनॉयड संकुचन पाया जाता है।
  • लैन्थेनॉयडों के कुछ आयन रंगहीन होते हैं जबकि ऐक्टिनॉयडों के आयन रंगीन होते हैं।
  • लैन्थेनॉयड आसानी से संकुल नहीं बनाते लेकिन ऐक्टिनॉयडों में संकुल बनाने की प्रवृत्ति अधिक होती है।
  • लैन्थेनॉयड ऑक्सो धनायन नहीं बनाते जबकि ऐक्टिनॉयड \(\mathrm{UO}_2^{2+}, \mathrm{PuO}_2^{2+}\) तथा UO+ जैसे ऑक्सो धनायन बनाते हैं।
  • लैन्थेनॉयडों में केवल Pm रेडियोधर्मी है जबकि सभी ऐक्टिनॉयड रेडियोधर्मी होते हैं।
  • लैन्थेनॉयडों के चुंबकीय गुणों की व्याख्या आसान है जबकि ऐक्टिनॉयडों के चुंबकीय गुण इनकी तुलना में जटिल होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.21.
आप निम्नलिखित को किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे-
(i) d4 स्पीशीज में से Cr2+ प्रबल अपचायक है जबकि मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) जलीय विलयन में कोबाल्ट (II) स्थायी है परन्तु संकुलनकारी अभिकर्मकों की उपस्थिति में यह सरलतापूर्वक ऑक्सीकृत हो जाता है।
(iii) आयनों का d1 विन्यास अत्यंत अस्थायी है।
उत्तर:
(i) Cr2+ प्रबल अपचायक है क्योंकि इसमें से एक इलेक्ट्रॉन निकलने पर d4 से d3 में परिवर्तन होता है तथा d3 विन्यास (\(t_{2 g}^3\)) अधिक स्थायी होता है क्योंकि यह अर्धपूरित है। Mn(III) द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Mn (II) में परिवर्तित होने पर 3d4 से 3d5 हो जाता है तथा 3d5 एक अर्धपूरित स्थायी विन्यास है । अतः मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।

(ii) संकुलनकारी अभिकर्मक (लिगण्ड) की उपस्थिति में Co(II) आसानी से ऑक्सीकृत होकर Co(III) बनाता है जिसमें 3d6 विन्यास है। इसका कारण यह है कि संकुल बनने पर प्राप्त क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, (CFSE) Co+3 बनने के लिए आवश्यक तृतीय आयनन ऊर्जा की पूर्ति कर देती है तथा +3 अवस्था में स्थायी अष्टफलकीय संकुल बन जाते हैं जो कि सामान्यतः प्रतिचुम्बकीय होते हैं।

(iii) d1 विन्यास के आयन अत्यंत अस्थायी होते हैं क्योंकि d1 विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक आयनीकरण ऊर्जा की पूर्ति जलयोजन ऊर्जा या जालक ऊर्जा द्वारा आसानी से हो जाती है तथा d1 विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकलने पर प्राप्त विन्यास (d0) स्थायी होता है। कुछ उदाहरणों में असमानुपातन भी होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 16

प्रश्न 8.22.
असमानुपातन से आप क्या समझते हैं ? जलीय विलयन में असमानुपातन अभिक्रियाओं के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
असमानुपातन (Disproportionation) – किसी स्पीशीज में किसी तत्व के लिए जब एक ऑक्सीकरण अवस्था अन्य ऑक्सीकरण अवस्थाओं (कम तथा अधिक) से कम स्थायी होती है तो इस स्पीशीज के एक परमाणु का ऑक्सीकरण तथा दूसरे परमाणु का अपचयन हो जाता है। इस क्रिया को असमानुपातन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 17

प्रश्न 8.23.
प्रथम संक्रमण श्रेणी में कौनसी धातु बहुधा (frequently) तथा क्यों +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है?
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी में Cu बहुधा (+1) स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है, क्योंकि इसके फलस्वरूप 3d10 स्थायी विन्यास प्राप्त होता है। Cu+1 = [Ar] 3d10

प्रश्न 8.24.
निम्नलिखित गैसीय आयनों में अ (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉनों की गणना कीजिए ।
Mn3+, Cr3+, V3+ तथा Ti3+ इनमें से कौनसा जलीय विलयन में अतिस्थायी है ?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 18
इन आयनों में से जलीय विलयन में Cr3+ सबसे अधिक स्थायी होता है। क्योंकि इसमें अर्धपूरित विन्यास (\(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}^3\)) होता है, जो कि स्थायी होता है।

प्रश्न 8.25.
उदाहरण देते हुए संक्रमण धातुओं के रसायन के निम्नलिखित अभिलक्षणों का कारण बताइए –
(i) संक्रमण धातु का निम्नतम ऑक्साइड क्षारकीय है, जबकि उच्चतम ऑक्साइड उभयधर्मी या अम्लीय है।
(ii) संक्रमण धातु की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ऑक्साइडों तथा फ्लुओराइडों में प्रदर्शित होती है।
(iii) धातु के ऑक्सोऋणायनों में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित होती है।
उत्तर:
(i) संक्रमण धातुओं के ऑक्साइड निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था में क्षारकीय तथा उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में उभयधर्मी या अम्लीय होते हैं क्योंकि निम्न ऑक्सीकरण अवस्था में बन्ध बनाने में थोड़े से इलेक्ट्रॉन ही प्रयुक्त होते हैं अतः प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होता है इस कारण ये आसानी से इलेक्ट्रॉन दे सकते हैं इसलिए ये क्षारीय होते हैं लेकिन उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होने के कारण इनमें इलेक्ट्रॉन लेने की प्रवृत्ति अधिक होती है अतः ये मुख्यतः अम्लीय तथा कभी-कभी उभयधर्मी होते हैं। उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 19

(ii) ऑक्सीजन तथा फ्लुओरीन की उच्च विद्युतॠणता तथा छोटे आकार के कारण ये धातुओं को उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत कर देते हैं अतः संक्रमण धातुओं की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ऑक्साइडों तथा फ्लुओराइडों में ही प्रदर्शित होती है।

(iii) संक्रमण धातुओं के ऑक्सोऋणायन इनके उच्च ऑक्सीकरण अवस्था युक्त ऑक्साइडों की अम्ल तथा क्षार से क्रिया करवाने पर ही बनते हैं। अतः ऑक्सोऋणायनों में भी धातु की ऑक्सीकरण अवस्था उच्च होगी तथा इन ऑक्सोऋणायनों में धातु के साथ उच्च विद्युतऋणी ऑक्सीजन जुड़ी होती है।

प्रश्न 8.26.
निम्नलिखित को बनाने के लिए विभिन्न पदों का उल्लेख कीजिए-
(i) क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7
(ii) पाइरोलुसाइट से KMnO4
उत्तर:
(i) क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाना-
क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाने में निम्नलिखित तीन पद होते हैं-(a) क्रोमाइट अयस्क को वायु की उपस्थिति में सोडियम कार्बोनेट के साथ संगलित करना-

4FeCr2O4 + 8Na2CO3 + 7O2 → 8Na2 CrO4 + 2Fe2O3 + 8CO2

(b) Na2CrO4 के विलयन को छानकर सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा अम्लीकृत करना तथा सोडियम डाइक्रोमेट के क्रिस्टल प्राप्त करना-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 20

(ii) पाइरोलुसाइट से KMnO4 बनाना – पाइरोलु साइट (MnO2) से KMnO4 बनाने के लिए पाइरोलुसाइट को KOH के साथ संगलित करके वायु या KNO3 द्वारा ऑक्सीकृत करते हैं, तथा प्राप्त \(\mathrm{MnO}_4^{2-}\) आयन का क्षारीय माध्यम में वैद्युत अपघटनी ऑक्सीकरण किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 21

प्रश्न 8.27.
मिश्र धातुएँ क्या हैं? लैन्थेनॉयड धातुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्र धातु का उल्लेख कीजिए। इसके उपयोग भी बताइए |
उत्तर:
मिश्र धातु – दो या दो से अधिक धातुओं या धातु तथा अधातु का समांगी मिश्रण मिश्र धातु कहलाता है।
लैन्थेनॉयड धातुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्रधातु, मिश धातु है जिसमें ~ 95% एक लैन्थेनॉयड धातु, ~ 5% आयरन तथा थोड़ा-सा S, C, Ca तथा Al होता है। मिश धातु की अत्यधिक मात्रा, मैग्नीशियम आधारित मिश्र धातुओं में प्रयुक्त होती है जिसका उपयोग बंदूक की गोली, कवच या खोल तथा हल्के फ्लिंट के उत्पादन में किया जाता है।

प्रश्न 8.28.
आंतरिक संक्रमण तत्व क्या हैं? बताइए कि निम्नलिखित में कौनसे परमाणु क्रमांक आंतरिक संक्रमण तत्वों के हैं–
29, 59, 74, 95, 102, 104
उत्तर:
आन्तरिक संक्रमण तत्व ( Inner Transition Elements) वे तत्व होते हैं जिनमें परमाणु या किसी ऑक्सीकरण अवस्था में बाह्यतम तीन कोश अपूर्ण होते हैं तथा इनके fकक्षक अपूर्ण होते हैं। ये । खण्ड के तत्व होते हैं। इनकी दो श्रृंखलाएं होती हैं- (i) लैन्थेनॉयड (Z= 58 से 71) तथा (ii) ऐक्टिनॉयड (Z = 90 से 103)। उपर्युक्त में से परमाणु क्रमांक 59, 95 तथा 102 आंतरिक संक्रमण तत्वों के हैं।

प्रश्न 8.29.
ऐक्टिनॉयड तत्वों का रसायन उतना नियमित नहीं है जितना कि लैन्थेनॉयड तत्वों का रसायन । इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं के आधार पर इस कथन का आधार प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर:
ऐक्टिनॉयड तत्वों के रसायन में लैन्थेनॉयडों के रसायन की तुलना में कम नियमितता होती है क्योंकि ऐक्टिनॉयड श्रेणी में ऑक्सीकरण अवस्थाओं की परास अधिक है। इसका कारण 5f, 6d तथा 7s स्तरों की लगभग समान ऊर्जा है।
ऐक्टिनॉयड सामान्यतः +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं। श्रेणी के प्रारंभिक अर्ध-भाग वाले तत्व सामान्यतः उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। जैसे Th में +4, Pa, U तथा Np में क्रमश: +5, +6 तथा +7 ऑक्सीकरण अवस्था होती है परन्तु बाद के तत्वों में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ कम होती जाती हैं अतः प्रारम्भ एवं बाद वाले ऐक्टिनॉयडों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में अधिक अनियमितता होती है।

प्रश्न 8.30.
ऐक्टिनॉयड श्रेणी का अंतिम तत्व कौन-सा है ? इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इस तत्व की संभावित ऑक्सीकरण अवस्थाओं पर टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर:
ऐक्टिनॉयड श्रेणी का अंतिम तत्व लारेंशियम है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित है-
103Lr = [Rn]5f146d17s2
Lr की संभावित ऑक्सीकरण अवस्था +3 है क्योंकि इसमें पूर्ण पूरित स्थायी विन्यास (4f14) पाया जाता है।
Lr3+ = [Rn]4f14

प्रश्न 8.31.
हुंड – नियम के आधार पर Ce3+ आयन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को व्युत्पन्न कीजिए तथा ‘प्रचक्रण मात्र सूत्र’ (spin only formula) के आधार पर इसके चुंबकीय आघूर्ण की गणना कीजिए ।
उत्तर:
Ce का परमाणु क्रमांक 58 है तथा इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ! 54Ce = [Xe]4f1 5d1 6s2 होता है अतः Ce3+ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Xe] 4f1 होगा जिसमें केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित है अतः इसका चुम्बकीय आघूर्ण (µ)
µ = \(\sqrt{n(n+2)}\) B.M.
n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 1
µ = \(\sqrt{1(1+2)}\) = √3 = 1.732 B.M.
अतः Ce3+ का चुम्बकीय आघूर्ण = 1.732 B.M. होगा।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.32.
लैन्थेनॉयड श्रेणी के उन सभी तत्वों का उल्लेख कीजिए जो +4 तथा जो +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाते हैं। इस प्रकार के व्यवहार तथा उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के बीच संबंध स्थापित कीजिए |
उत्तर:
लैन्थेनॉयड श्रेणी में +4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने वाले तत्व निम्नलिखित हैं-
सीरियम (58Ce), प्रैजियोडिमियम (59Pr), नियोडिमियम (60Nd), टर्बियम (65Tb) तथा डिसप्रोसियम (66Dy ) । इसी प्रकार +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने वाले मुख्य लैन्थेनॉयड निम्न हैं- यूरोपियम (63Eu) तथा इटर्बियस (70Yb)।

लैन्थेनॉयडों में +4 तथा +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ रिक्त, अर्धपूरित तथा पूर्णपूरितf उपकोशों के अधिक स्थायित्व के कारण होती हैं। जैसे Ce+4 में उत्कृष्ट गैस विन्यास 4f0 है, इसी प्रकार Tb4+ तथा Eu2+ में 4f7 (अर्धपूरित) तथा Yb+2 में 4f14 (पूर्ण पूरित) विन्यास होता है।

प्रश्न 8.33. निम्नलिखित के संदर्भ में ऐक्टिनॉयड श्रेणी के तत्वों तथा लैन्थेनॉयड श्रेणी के तत्वों के रसायन की तुलना कीजिए । (i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (iii) रासायनिक अभिक्रियाशीलता ।
उत्तर:
इसके लिए पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न संख्या 8.20 का उत्तर देखें।

प्रश्न 8.34.
61, 91, 101 तथा 109 परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 22

प्रश्न 8.35.
प्रथम श्रेणी के संक्रमण तत्वों के अभिलक्षणों की द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के वर्गों के संगत तत्वों से ऊर्ध्वाधर वर्गों में तुलना कीजिए । निम्नलिखित बिन्दुओं पर विशेष महत्व दीजिए-
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
(iii) आयनन एन्थैल्पी तथा
(iv) परमाण्वीय आकार ।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – प्रथम संक्रमण श्रेणी में इलेक्ट्रॉन 3d कक्षकों में भरे जाते हैं जबकि द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी में इलेक्ट्रॉन क्रमशः 4d तथा 5d कक्षकों में भरे जाते हैं तथा सामान्यतः किसी वर्ग के सभी तत्वों का विन्यास समान होता है लेकिन इसके अपवाद भी होते हैं. जो कि संक्रमण तत्वों में भी हैं।

(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ — संक्रमण तत्वों के किसी वर्ग के सभी तत्वों द्वारा सामान्यतः समान ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाई जाती हैं। ये श्रेणी के मध्य में अधिकतम तथा अन्त में न्यूनतम होती हैं।

(iii) आयनन एन्थैल्पी – प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की तुलना में द्वितीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता है लेकिन तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान द्वितीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों से अधिक होता है।

(iv) परमाण्वीय आकार — द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों से अधिक होते हैं। लेकिन लैन्थेनॉयड संकुचन के कारण द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के आकार लगभग समान होते हैं।

प्रश्न 8.36.
निम्नलिखित आयनों में प्रत्येक के लिए 3d इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए-
Ti2+, V2+, Cr3+, Mn2+, Fe2+, Fe3+, Co2+, Ni2+, Cu2+
आप इन जलयोजित आयनों (अष्टफलकीय) में पाँच 3d कक्षकों को किस प्रकार अधिग्रहीत ( occupied ) करेंगे? दर्शाइए |
उत्तर:
जलयोजित आयनों में जल (H2O) लिगेण्ड का कार्य करता है जिसके कारण समान ऊर्जा के पाँच 3d कक्षक दो भागों में विभाजित हो जाते हैं- t2g तथा egl t2g कक्षकों की ऊर्जा eg कक्षकों से कम होती है। t2g तथा eg | t2g कक्षकों के मध्य ऊर्जा अन्तर कम होता है क्योंकि H2O एक दुर्बल लिगेण्ड है। विभिन्न आयनों के इलेक्ट्रॉन इन कक्षकों में निम्न प्रकार भरे जाते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 23

प्रश्न 8.37.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्व भारी संक्रमण तत्वों के अनेक गुणों से भिन्नता प्रदर्शित करते हैं। टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों तथा भारी संक्रमण तत्वों के गुणों में निम्नलिखित भिन्नता होती है-
(i) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्व सामान्यतया +2 तथा +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं जबकि भारी संक्रमण तत्वों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है।
(ii) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में धातु- धातु (M-M) बन्ध नहीं होता जो कि भारी संक्रमण तत्वों में सामान्यतः पाया जाता है। इसी कारण भारी संक्रमण तत्वों के गलनांक प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के गलनांक से अधिक होते हैं।
(iii) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में उच्च समन्वयी संख्या वाले संकुल नहीं बनते, जैसे 7 या 8 जबकि भारी संक्रमण तत्व 7 या 8 समन्वयी संख्या वाले संकुल भी बनाते हैं।
(iv) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में लिगण्ड की प्रकृति (प्रबलता ) आधार पर निम्न चक्रण संकुल तथा उच्च चक्रण संकुल बनते हैं जबकि भारी संक्रमण तत्व हमेशा निम्न चक्रण संकुल ही बनाते हैं।

प्रश्न 8.38.
निम्नलिखित संकुल स्पीशीज के चुंबकीय आघूर्णी के मान से आप क्या निष्कर्ष निकालेंगे ?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 24
उत्तर:
(i) K4[Mn(CN)6] का चुम्बकीय आघूर्ण = 2.2 B.M. दिया गया है। सैद्धान्तिक आधार पर सूत्र, µ = \(\sqrt{n(n+2)}\) BM
के अनुसार n = 1 होने पर µ का मान 1.732 BM आता है जो कि 2.2 के लगभग समान है।

अतः इस संकुल में Mn पर d2 sp3 संकरण होगा क्योंकि \(\overline{\mathrm{C}} \mathrm{N}\) प्रबल लिगण्ड है जिसके कारण Mn2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (t2g)5 होगा, जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है। अतः यह संकुल अनुचुम्बकीय है।

(ii) [Fe (H2O)6]2+ के लिए µ = 5.3BM दिया गया है।

अतः सूत्रानुसार n = 4 लेने पर µ = 4.89BM आता है जो कि 5.3 के लगभग समान है। अतः इस संकुल में Fe पर sp3d2 संकरण होगा क्योंकि H2O दुर्बल लिगण्ड है जिससे Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (t2g)4 (eg)2 होगा, जिसमें चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। अतः यह संकुल भी अनुचुम्बकीय है।

(iii) K2[MnCl4] के लिए µ = 5.9BM दिया है।

अतः सूत्रानुसार n = 5 लेने पर µ = 5.91BM आता है जो कि 5.9 के लगभग समान है। अतः इस संकुल में Mn पर sp3 संकरण होगा तथा Cl दुर्बल लिगण्ड है। जिसकी उपस्थिति में Mn+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (eg)2 (t2g)3 होगा, जिसमें 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। अतः यह संकुल भी अनुचुम्बकीय है।

HBSE 12th Class Chemistry d- एवं f-ब्लॉक के तत्व Intext Questions

प्रश्न 8.1.
सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण भरित d कक्षक (4d10) हैं। आप कैसे कह सकते हैं कि यह एक संक्रमण तत्व है?
उत्तर:
सिल्वर (Z=47),+1 के अलावा + 2 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है, जिसमें इसके 4d कक्षक अपूर्ण हैं अतः यह संक्रमण तत्व है क्योंकि संक्रमण तत्व वे होते हैं जिनमें परमाणु अवस्था या किसी भी ऑक्सीकृत अवस्था में d- कक्षक अपूर्ण होता है।

प्रश्न 8.2.
श्रेणी Sc(Z=21) से Zn(Z=30) में, जिंक की कणन एन्थैल्पी (Enthalpy of atomisation) का मान सबसे कम होता है, अर्थात् 126 kJ mol-1; क्यों?
उत्तर:
जिंक में 3d कक्षकों के इलेक्ट्रॉन धात्विक बन्ध बनाने में प्रयुक्त नहीं होते हैं क्योंकि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d104s2 होता है जबकि 3d श्रेणी के अन्य सभी धातुओं के d कक्षक अपूर्ण भरे होने के कारण ये इलेक्ट्रॉन धात्विक बनाने में प्रयुक्त होते हैं। अतः Zn में धात्विक बन्ध दुर्बल होता है इसलिए इसकी कणन एन्थैल्पी (परमाणुकरण की एन्थैल्पी) सबसे कम होती है।

प्रश्न 8.3.
संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी का कौन-सा तत्व बड़ी संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है एवं क्यों?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी में Mn सबसे अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (+2 से +7) दर्शाता है क्योंकि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d54s2 होने के कारण इसमें सर्वाधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।

प्रश्न 8.4.
कॉपर के लिए E°(M2+/M) का मान धनात्मक (+0.34 V) है। इसके संभावित कारण क्या हैं?
उत्तर:
किसी धातु के लिए E° (M2+/M) (इलेक्ट्रोड विभव) का मान परमाणुकरण की एन्थैल्पी (△aH°), आयनन एन्थैल्पी (△iH) तथा

जलयोजन एन्थैल्पी △hydH° पर निर्भर करता है। Cu(s) से \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{g})}^{+2}\) बनने के लिए आवश्यक उच्च आयनन एन्थैल्पी तथा परमाणुकरण एन्थैल्पी Cu2+ की निम्न जलयोजन एन्थैल्पी द्वारा संतुलित नहीं हो पाती है, अतः Cu2+ के लिए अपचयन विभव का मान धनात्मक होता है।

प्रश्न 8.5.
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में आयनन एन्थैल्पी (प्रथम और द्वितीय) में अनियमित परिवर्तन को आप कैसे समझायेंगे?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में प्रथम और द्वितीय आयनन एन्थैल्पी में अनियमित परिवर्तन विभिन्न 3d विन्यासों के स्थायित्व की क्षमता में भिन्नता के कारण है। उदाहरण d0, d5, d10 विन्यास असामान्य रूप से स्थायी होते हैं। अतः इनकी आयनन एन्थैल्पी उच्च होती है।

प्रश्न 8.6.
कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही क्यों प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
किसी धातु की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही होती है क्योंकि छोटे आकार, उच्च विद्युतऋणता तथा उच्च धनात्मक अपचयन विभव के कारण ऑक्सीजन अथवा फ्लुओरीन, धातु को उसकी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत कर देती है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.7.
Cr2+ और Fe2+ में से कौन प्रबल अपचायक है और क्यों?
उत्तर:
Fe2+ की तुलना में Cr2+ एक प्रबल अपचायक पदार्थ है, क्योंकि Cr2+ से Cr3+ बनने में d4 का d3 में परिवर्तन होता है किन्तु Fe2+ Fe3+बनने में d6 का d5 में परिवर्तन होता है तथा जल जैसे माध्यम में d5 की तुलना में d3 अधिक स्थायी है। इसका कारण \(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}^3}\) विन्यास का अधिक स्थायी होना है तथा इनके E° मानों से भी यह स्पष्ट हो जाता है।

प्रश्न 8.8.
M2+(aq) आयन (Z=27) के लिए ‘प्रचक्रणमात्र’ (spin only) चुंबकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक Z = 27 के तत्व (M) के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar]3d74s2
अतः M2+ के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar]3d7
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 26
इसमें तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (n) हैं-
अतः चुम्बकीय आघूर्ण (µ) = \(\sqrt{n(n+2)}\) B.M.
µ = \(\sqrt{3(3+2)}\) = √15 = 3.87 B.M.

प्रश्न 8.9.
स्पष्ट कीजिए कि Cu2+ आयन जलीय विलयन में स्थायी नहीं है, क्यों? समझाइए।
उत्तर:
\(\mathrm{Cu}_{\text {(aq) }}^{+}\) की तुलना में \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+2}\) अधिक स्थायी होता है। Cu के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान उच्च होता है लेकिन Cu2+ की \(\Delta_{\text {hyd }} \mathrm{H}^{\ominus}\) का मान Cu+ की तुलना में उच्च ऋणात्मक होने के कारण यह द्वितीय आयनन एन्थैल्पी को संतुलित कर देता है अतः जलीय विलयन में Cu+ अस्थायीं होता है अतः यह असमानुपातित होकर Cu2+ बना देता है। इसके लिए \(\mathrm{E}^{\ominus}\) मान भी अनुकूल है।
\(2 \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}(\mathrm{s})\)

प्रश्न 8.10.
लैन्थेनॉयड आकुंचन (संकुचन contraction) की तुलना में एक तत्व से दूसरे तत्व के बीच ऐक्टिनॉयड आकुंचन अधिक होता है। क्यों?
उत्तर:
लैन्थेनॉयड संकुचन की तुलना में एक तत्व से दूसरे तत्व के बीच ऐक्टिनॉयड संकुचन अधिक होता है, क्योंकि 5f इलेक्ट्रॉन नाभिकीय आवेश से प्रभावी रूप से आकर्षित रहते हैं। अर्थात् श्रेणी में एक तत्व से दूसरे तत्व की ओर जाने पर 5f इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव दुर्बल होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व Read More »

HBSE 12th Class Physics Important Questions and Answers

Haryana Board HBSE 12th Class Physics Important Questions and Answers

HBSE 12th Class Physics Important Questions in Hindi Medium

HBSE 12th Class Physics Important Questions in English Medium

HBSE 12th Class Physics Important Questions and Answers Read More »

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन घटित होता है केवल जबकि आपतित प्रकाश निम्न में से किसके न्यूनतम मान से कुछ अधिक मान रखता है:
(अ) शक्ति
(ब) तरंगदैर्ध्य
(स) तीव्रता
(द) आवृत्ति
उत्तर:
(द) आवृत्ति

प्रश्न 2.
एक प्रकाश सुग्राही धातु के लिए देहली आवृत्ति 3.3 × 1014 Hz है। यदि इस धातु पर 8.2 x 1014 Hz आवृत्ति का प्रकाश आपतित होता है तो प्रकाश वैद्युत उत्सर्जन के लिए संस्तम्भ विभव होगा (लगभग)
(अ) 1V
(ब) 2V
(स) 3V
(द) 5V
उत्तर:
(ब) 2V

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 3.
किसी धातु का कार्यफलन निर्भर करता है:
(अ) प्रकाश स्रोत व धातु के मध्य दूरी पर
(ब) आपतित प्रकाश की तीव्रता पर
(स) धातु एवं उसके पृष्ठ की प्रकृति पर
(द) आपतित प्रकाश की तीव्रता पर
उत्तर:
(स) धातु एवं उसके पृष्ठ की प्रकृति पर

प्रश्न 4.
30 ev ऊर्जा का एक फोटॉन धातु के पृष्ठ पर आपतित होता है इसके कारण 27.5 eV गतिज ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन होता है। धातु के पृष्ठ का कार्यफलन होगा:
(अ) 2.5 ev
(ब) 57.5 ev
(स) 5.0 ev
(द) शून्य
उत्तर:
(अ) 2.5 ev

प्रश्न 5.
प्रकाश विद्युत धारा का मान निर्भर करता है:
(अ) केवल प्रकाश की तीव्रता पर
(ब) प्रकाश की आवृत्ति तथा स्रोत व धातु के मध्य दूरी दोनों पर के कार्यफलन पर
(स) धातु कार्यफलन पर
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) प्रकाश की आवृत्ति तथा स्रोत व धातु के मध्य दूरी दोनों पर के कार्यफलन पर

प्रश्न 6.
फोटॉन का संवेग होता है:
(अ) hu
(ब) hc
(स) hv/c
(द) c/hv
उत्तर:
(स) hv/c

प्रश्न 7.
एक धातु से हरे रंग के प्रकाश के आपतन पर इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन प्रारम्भ होता है निम्न रंगों के समूह में से किस समूह के प्रकाश के कारण इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन संभव होगा?
(अ) पीला, नीला, लाल
(ब) बैंगनी, लाल, पीला
(स) बैंगनी, नीला, पीला
(द) बैंगनी, नीला, आसमानी
उत्तर:
(द) बैंगनी, नीला, आसमानी

प्रश्न 8.
प्रकाश स्रोत एवं प्रकाश विद्युत सेल के मध्य दूरी में वृद्धि करने पर निरोधी विभव के मान में:
(अ) वृद्धि होती है।
(ब) कमी होती है।
(स) कोई परिवर्तन नहीं होता है।
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) कोई परिवर्तन नहीं होता है।

प्रश्न 9.
निरोधी विभव से कम विभव होने पर प्रकाश विद्युत धारा का मान:
(अ) शून्य होता है।
(ब) अधिक परन्तु 00 से कम होता है।
(स) कम परन्तु शून्य से अधिक होता है
(द) ∞ होता है।
उत्तर:
(अ) शून्य होता है।

प्रश्न 10.
इलेक्ट्रॉन गन से निर्गत इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध दे – बाग्ली तरंगदैर्ध्य 0.1227 À है। गन पर आरोपित त्वरक वोल्टता का मान होगा:
(अ) 20 kV
(ब) 10 kV
(स) 30kV
(द) 40kv
उत्तर:
(ब) 10 kV

प्रश्न 11.
धातु के पृष्ठ पर आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर:
(अ) प्रकाश विद्युत धारा बढ़ जायेगी।
(ब) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है।
(स) इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा तथा संख्या दोनों में वृद्धि होती है।
(द) प्रकाश विद्युत धारा नियत रहती है।
उत्तर:
(अ) प्रकाश विद्युत धारा बढ़ जायेगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 12.
यदि Φ कार्यफलन है तो देहली तरंगदैर्घ्य का सूत्र होता है:
(अ) hΦ/c
(ब) c/hΦ
(स) Φ/hc
(द) hc/Φ
उत्तर:
(द) hc/Φ

प्रश्न 13.
निरोधी विभव निर्भर होता है:
(अ) केवल आपतित फोटोन की ऊर्जा पर।
(ब) केवल पदार्थ के कार्यफलन पर।
(स) आपतित फोटोन की ऊर्जा और पदार्थ के कार्यफलन के अन्तर पर।
(द) आपतित फोटोन की ऊर्जा और पदार्थ के कार्यफलन के योग पर
उत्तर:
(स) आपतित फोटोन की ऊर्जा और पदार्थ के कार्यफलन के अन्तर पर।

प्रश्न 14.
इलेक्ट्रॉन गन पर आरोपित त्वरक वोल्टता 10,000 वोल्ट हो तो गन से प्राप्त इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध दे-ब्राग्ली तरंगदैर्ध्य होगा:
(अ) 1.27 A
(ब) 12.27 À
(स) 1227 Å
(द) 0.1227 Å
उत्तर:
(द) 0.1227 Å

प्रश्न 15.
जब प्रकाश विद्युत प्रभाव उत्पन्न करने वाली सतह पर गिरने वाले प्रकाश की तीव्रता दुगुनी कर दी जावे तो:
(अ) उत्सर्जित फोटोन की आवृत्ति दुगुनी हो जायेगी
(ब) दुगुने फोटोन निकलेंगे
(स) फोटोन पहले की अपेक्षा चार गुणा अधिक निकलेंगे
(द) कोई प्रभाव नहीं होगा।
उत्तर:
(ब) दुगुने फोटोन निकलेंगे

प्रश्न 16.
धात्विक सतह से निकलने वाले फोटो इलेक्ट्रॉनों की अवस्था हो सकती है:
(अ) विरामावस्था
(ब) समान ऊर्जा अवस्था
(स) इनकी ऊर्जा शून्य से अनन्त तक हो सकती है।
(द) इनकी ऊर्जा शून्य से एक निश्चित मान तक हो सकती है।
उत्तर:
(द) इनकी ऊर्जा शून्य से एक निश्चित मान तक हो सकती है।

प्रश्न 17.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों का वेग निर्भर करता है:
(अ) केवल आपतित फोटोनों की आवृत्ति पर
(ब) केवल आपतित फोटोनों की तीव्रता पर
(स) धातु के कार्यफलन तथा आपतित फोटोनों की तीव्रता पर
(द) आपतित फोटोनों की आवृत्ति तथा धातु के कार्यफलन पर।
उत्तर:
(द) आपतित फोटोनों की आवृत्ति तथा धातु के कार्यफलन पर।

प्रश्न 18.
जब पराबैंगनी किरणें किसी धातु की सतह पर आपतित होती हैं. प्रकाश विद्युत प्रभाव नहीं हो पाता है परन्तु निम्न के आपतित होगा:
(अ) अवरक्त किरणें
(ब) X-किरणें
(स) रेडियो तरंगें
(द) प्रकाश तरंगें
उत्तर:
(ब) X-किरणें

प्रश्न 19.
तीन धातुओं A, B और C के कार्यफलन क्रमानुसार 1.92eV, 2eveV हैं। आइन्सटीन समीकरण के आधार पर 4100 Å तरंगदैर्ध्य विकिरण का प्रयोग करने पर इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होगा:
(अ) किसी धातु से भी नहीं
(ब) केवल A से
(स) केवल A व B से
(द) सभी तीनों धातुओं से
उत्तर:
(स) केवल A व B से

प्रश्न 20.
कार्यफलन कहलाता है:
(अ) आवश्यक ऊर्जा जो इलेक्ट्रॉन को उसकी कक्षा से बाहर निकाल दे।
(ब) एकांक क्षेत्रफल पर आपतित आवश्यक ऊर्जा जो इलेक्ट्रॉन को धातु से बाहर निकाल दे।
(स) प्रति इलेक्ट्रॉन, इलेक्ट्रॉनों को धातु से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा।
(द) इलेक्ट्रॉन को धातु से मुक्त कराने के लिए आपतित ऊर्जा।
उत्तर:
(स) प्रति इलेक्ट्रॉन, इलेक्ट्रॉनों को धातु से बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा।

प्रश्न 21.
फोटो- सेल में प्रकाश-विद्युत धारा का मान निर्भर करता है:
(अ) केवल आपतित विकिरण की तीव्रता पर
(ब) आपतित विकिरण की आवृत्ति तथा तीव्रता पर
(स) केवल ऐनोड तथा कैथोड के बीच विभवान्तर पर
(द) विकिरण की तीव्रता तथा विभवान्तर
उत्तर:
(द) विकिरण की तीव्रता तथा विभवान्तर

प्रश्न 22.
देहली आवृत्ति वह आवृत्ति होती है:
(अ) इससे कम आवृत्ति पर प्रकाश-विद्युत धारा का मान स्थिर रहता है।
(ब) इससे कम आवृत्ति पर प्रकाश-विद्युत धारा विभवान्तर के साथ बढ़ती है।
(स) इससे अधिक आवृत्ति पर प्रकाश-विद्युत धारा संतृप्त हो जाती है।
(द) इससे कम आवृत्ति पर फोटो इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन नहीं होता है।
उत्तर:
(द) इससे कम आवृत्ति पर फोटो इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन नहीं होता है।

प्रश्न 23.
प्रकाश विद्युत सेल:
(अ) विद्युत को प्रकाश में बदलता है।
(ब) प्रकाश को विद्युत में बदलता है।
(स) प्रकाश का संचय करता है
(द) विद्युत का संचय करता है।
उत्तर:
(ब) प्रकाश को विद्युत में बदलता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 24.
जब ho ऊर्जा के फोटॉन ऐलुमिनियम की प्लेट (कार्यफलन = E0) पर आपतित होते हैं तो उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन्स की अधिकतम गतिज ऊर्जा K होती है। यदि विकिरण की आवृत्ति को दुगुना कर दिया जाए तो उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन्स की अधिकतम गतिज ऊर्जा होगी:
(अ) 2K
(ब) K
(स) K + hv
(द) K + E
उत्तर:
(स) K + hv

प्रश्न 25.
फोटो सेल में प्रकाश विद्युत प्रभाव का प्रयोग होता है:
(अ) प्रदीपन तीव्रता में बदलाव को प्रकाश विद्युत धारा में बदलाव में बदलने के लिए
(ब) प्रदीपन तीव्रता में बदलाव को फोटो कैथोड के कार्यफलन में बदलाव में बदलने के लिए
(स) प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव को विद्युत धारा बदलाव में बदलने के लिए
(द) प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव को विद्युत वोल्टता में बदलाव में बदलने के लिए
उत्तर:
(स) प्रकाश की आवृत्ति में बदलाव को विद्युत धारा बदलाव में बदलने के लिए

प्रश्न 26.
डेविसन एवं जरमर के प्रयोग में क्रिस्टल का कार्य क्या है?
(अ) धुवण
(ब) व्यतिकरण
(स) विवर्तन
(द) अपवर्तन
[ संकेत- डेविसन – जरमर प्रयोग में क्रिस्टल एक ग्रेटिंग की भाँति कार्य करता है व इसके द्वारा इलेक्ट्रॉनों का विवर्तन होता है। उत्तर (स) होगा।]
उत्तर:
(स) विवर्तन

प्रश्न 27.
दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य A कण की गतिज ऊर्जा E पर निर्भर करता है:
(अ) λ α E
(ब) λ α √E
(स) λ α 1/E
(द) λ α 1/√E
उत्तर:
(द) λ α 1/√E

प्रश्न 28.
प्रकाश विद्युत प्रभाव की व्याख्या की:
(अ) न्यूटन ने
(ब) आइन्सटाइन ने।
(स) प्लांक ने।
(द) बोर ने।
उत्तर:
(ब) आइन्सटाइन ने।

प्रश्न 29.
प्रकाश – विद्युत प्रभाव सिद्ध करता है कि प्रकाश में:
(अ) अनुप्रस्थीय तरंगें होती हैं
(ब) क्वान्टम प्रकृति होती है
(स) द्वैत प्रकृति होती है
(द) विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं।
उत्तर:
(ब) क्वान्टम प्रकृति होती है

प्रश्न 30.
V वोल्ट से त्वरित प्रोटोन पुंज की डी-ब्रोगली तरंगदैर्घ्य A में होगी:
(अ) \(\frac{12.27}{\sqrt{V}}\)
(ब) \(\frac{0.286}{\sqrt{\mathrm{V}}}\)
(स) \(\frac{0.101}{\sqrt{V}}\)
(द) \(\frac{0.028}{\sqrt{V}}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{0.286}{\sqrt{\mathrm{V}}}\)

प्रश्न 31.
किसी धातु की सतह पर प्रकाश डालने से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं जब आपतित प्रकाश की आवृत्ति:
(अ) देहली आवृत्ति से अधिक होती है।
(ब) देहली आवृत्ति से कम होती है।
(स) की तीव्रता एक निश्चित मान से अधिक होती है।
(द) की तीव्रता एक निश्चित मान से कम होती है।
उत्तर:
(अ) देहली आवृत्ति से अधिक होती है।

प्रश्न 32.
प्रकाश विद्युत प्रभाव के प्रयोग में आवृत्ति एवं निरोधी विभव V का ग्राफ सामने दिया गया है। धातु का कार्यफलन होगा:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 1
(अ) OB
(ब) AB
(स) OA
(द) OA + AB
उत्तर:
(अ) OB

प्रश्न 33.
डी-ब्रॉग्ली के अनुसार किसी कक्षा में इलेक्ट्रॉन के लिए डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य 10-9 मीटर है, तो इलेक्ट्रॉन के लिए मुख्य क्वान्टम संख्या का मान क्या होगा?
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
उत्तर:
(स) 3

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 34.
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 1 तथा प्रोटॉन का द्रव्यमान Mp है, इन्हें समान विभवान्तर से त्वरित करने पर इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन से सम्बन्धित डी-ब्रोगली तरंगदैर्घ्य का अनुपात Ae : Ap होगा:
(अ) 1
(ब) me : mp
(स) \(\sqrt{\frac{m_p}{m_e}}\)
(द) \(\sqrt{\frac{m_e}{m_p}}\)
उत्तर:
(स) \(\sqrt{\frac{m_p}{m_e}}\)

प्रश्न 35.
प्रोटॉन तथा एल्फा कण की डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य समान है। इनके वेगों का अनुपात होगा:
(अ) 12
(ब) 21
(स) 14
(द) 21
उत्तर:
(द) 21

प्रश्न 36.
समान वेग से गतिमान कणों में से डी ब्रोगली तरंगदैर्घ्य अधिकतम होगी:
(अ) इलेक्ट्रॉन की
(ब) प्रोटॉन की
(स) न्यूट्रॉन की
(द) फोटोन की।
उत्तर:
(अ) इलेक्ट्रॉन की

प्रश्न 37.
धातु के कार्यफलन से दुगुनी ऊर्जा वाला एक फोटोन धातु के पृष्ठ पर आपतित होता है। अधिकतम गतिज ऊर्जा का उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉन की मान होगा:
(अ) कार्यफलन का तिगुना
(ब) कार्यफलन का दुगुना
(स) कार्यफलन के बराबर
(द) कार्यफलन का आधा।
उत्तर:
(स) कार्यफलन के बराबर

प्रश्न 38.
अनिश्चितता सिद्धान्त के अनुसार किसी कण की स्थिति का शत-प्रतिशत शुद्धता से मापन कर लिया जाये तो उसके संवेग में अनिश्चितता होगी:
(अ) शून्य
(ब) 0%
(स) 10%
(द) 30%
उत्तर:
(ब) 0%

प्रश्न 39.
इलेक्ट्रॉनों का तरंगों से सम्बद्ध कौनसा गुण डेविसन एवं जरमर के प्रयोग द्वारा प्रदर्शित किया गया:
(अ) अपवर्तन
(ब) ध्रुवण
(स) व्यतिकरण
(द) विवर्तन
उत्तर:
(द) विवर्तन

प्रश्न 40.
जब पराबैंगनी किरणें किसी धातु की सतह पर आपतित होती हैं, तो प्रकाश विद्युत प्रभाव नहीं हो पाता है परन्तु निम्न के आपतित होने से होगा:
(अ) अवरक्त किरणें
(ब) X-किरणें
(स) रेडियो तरंगें
(द) प्रकाश तरंगें
उत्तर:
(ब) X-किरणें

प्रश्न 41.
यदि धातु की सतह पर आपतित फोटोनों की आवृत्ति दुगुनी कर दी जाये तो उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा हो जायेगी:
(अ) दुगुनी
(ब) दुगुनी से कुछ कम
(स) दुगुनी से अधिक
(द) कुछ कह नहीं सकते
उत्तर:
(स) दुगुनी से अधिक

प्रश्न 42.
प्रकाश विद्युत सेल में एनोड तथा कैथोड के बीच विभवान्तर बढ़ाने पर प्रकाश विद्युत धारा का मान:
(अ) कम होता है।
(ब) पहले बढ़ता है फिर कम होता है।
(स) पहले बढ़ता है फिर स्थिर होता है।
(द) अपरिवर्तित रहता है।
उत्तर:
(स) पहले बढ़ता है फिर स्थिर होता है।

प्रश्न 43.
फोटो सेल का उपयोग होता है:
(अ) फैक्ट्री में मजदूरों की संख्या जानने में
(ब) स्वतः संचालित दरवाजों में
(स) गलियों की लाइट में स्वतः स्विचन के लिए
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

प्रश्न 44.
एक आवेशित कण की दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य विभवान्तर से त्वरित किया गया है V में सम्बन्ध है:
(अ) λ α v
(ब) λ α 1/√ v
(स) λ α √ v
(द) λ α 1/v
उत्तर:
(ब) λ α 1/√ v

प्रश्न 45.
समान ऊर्जा के एक प्रोटॉन तथा एक कण से सम्बद्ध दे- ब्रॉग्ली तरंगदैघ्यों का अनुपात होगा:
(अ) 1 : 4
(ब) 1 : 2
(स) 4 : 1
(द) 2 : 1
उत्तर:
(द) 2 : 1

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 46.
अनिश्चितता का सिद्धान्त प्रतिपादित किया-
(अ) प्लांक ने
(ब) आइन्स्टाइन ने
(स) हाइजेनबर्ग ने
(द) दे-ब्रॉग्ली ने
उत्तर:
(स) हाइजेनबर्ग ने

प्रश्न 47.
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी किस सिद्धान्त पर कार्य करता है?
(अ) द्रव्य तरंग सिद्धान्त पर
(ब) कणिका सिद्धान्त पर
(स) अनिश्चितता सिद्धान्त पर
(द) उपरोक्त सभी पर
उत्तर:
(अ) द्रव्य तरंग सिद्धान्त पर

प्रश्न 48.
डेविसन तथा जर्मर के प्रयोग में 54 वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन पुंज निकिल क्रिस्टल से 50° से विवर्तित होता है तथा प्रथम विवर्तन उच्चिष्ठ उत्पन्न करता है। निकिल क्रिस्टल में परमाण्विक दूरी होती है:
(अ) 1 A
(ब) 2 A
(स) 2.15 A
(द) 3.12 A
उत्तर:
(स) 2.15 A

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रकाश विद्युत प्रभाव में आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को कम करने पर उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन के वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन का वेग बढ़ जायेगा।

प्रश्न 2.
कण की तरंग प्रकृति का समर्थन करने वाले प्रयोग का नाम दीजिए।
उत्तर:
डेविसन तथा जर्मर का प्रयोग।

प्रश्न 3.
100 वोल्ट के विभवान्तर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे- ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
त्वरक विभव = 100 वोल्ट
ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λ होगी
हम जानते हैं:
λ = h/p = \(\frac{1.227}{\sqrt{V}}\)
λ = \(\frac{1.227}{\sqrt{100}}\) = \(\frac{1.227}{10}\)
λ = 0.123nm

प्रश्न 4.
किसी आवेशित कण का द्रव्यमान ‘m’ है और इस पर ‘q’ आवेश है। इस कण को यदि V विभवान्तर से त्वरित किया जाये, तो इससे सम्बद्ध दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
V विभवान्तर से त्वरित q आवेश युक्त कण की ऊर्जा
K = qV
कण का संवेग P = √2mK
= √2mqV
दे- ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य λ = h/p
= h/√2mqV

प्रश्न 5.
किसी प्रकाश सुग्राही पदार्थ पर आपतित विकिरण की तरंगदैर्ध्य घटाने से प्रकाश वैद्युत धारा किस प्रकार परिवर्तित होगी?
उत्तर:
प्रकाश वैद्युत धारा आपतित विकिरण की तीव्रता पर निर्भर करती है, उसकी ऊर्जा (तरंगदैर्घ्य) पर नहीं। अतः यह परिवर्तित नहीं होगी।

प्रश्न 6.
प्रकाश विद्युत प्रभाव के प्रयोग में आपतित प्रकाश की आवृत्ति (v) एवं निरोधी विभव के मध्य ग्राफ बनाइये।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 2

प्रश्न 7.
m द्रव्यमान के गतिशील कण की डी ब्रोगली तरंग लम्बाई 2 है तो उसकी गतिज ऊर्जा का मान बताइये।
उत्तर:
K = h2/2mλ2

प्रश्न 8.
एक फोटोन की ऊर्जा E = hv तथा फोटोन का संवेग P = h/λ है, तो फोटोन का वेग होगा।
उत्तर:
फोटोन का वेग v = E/P

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 9.
नियत आवृत्ति पर प्रकाश विद्युत धारा का मान किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
आपतित प्रकाश की तीव्रता पर।

प्रश्न 10.
देहली आवृत्ति तथा कार्यफलन में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
hV0 = Φ0 या v0 = Φ0/h

प्रश्न 11.
आइन्सटीन का प्रकाश विद्युत समीकरण किस संरक्षण नियम पर आधारित होता है?
उत्तर:
ऊर्जा के संरक्षण नियम पर

प्रश्न 12.
पदार्थ के कार्यफलन का मान किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
पदार्थ के कार्यफलन का मान उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 13.
धातुओं में प्रकाश विद्युत प्रभाव किन विकिरणों से उत्पन्न नहीं होता है?
उत्तर:
रेडियो तरंग से।

प्रश्न 14.
किसी धातु का सतह से प्रकाश विद्युत प्रभाव तभी होगा जबकि आपाती प्रकाश की आवृत्ति किस आवृत्ति से अधिक होती है?
उत्तर:
देहली।

प्रश्न 15.
किसी धातु पर आपतित प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने पर उसकी उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 16.
प्रकाशीय ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में रूपान्तरित करने के लिये किस युक्ति का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
फोटो सेल।

प्रश्न 17.
निरोधी विभव का मान किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर।

प्रश्न 18.
1 ev ऊर्जा कितने जूल के तुल्य होती है?
उत्तर:
1.6 x 10-19 जूल।

प्रश्न 19.
सीजियम, जिंक आदि पदार्थों का उपयोग फोटो सेल में किस रूप में किया जाता है?
उत्तर:
प्रकाश सुग्राही पदार्थ के रूप में।

प्रश्न 20.
एक दिये गये प्रकाश सुग्राही पदार्थ तथा नियत आवृत्ति के आपतित विकिरण के एक स्रोत के लिए प्रकाश-विद्युत धारा आपतित प्रकाश की तीव्रता के साथ किस प्रकार विघटित होती है?
उत्तर:
प्रकाश वैद्युत धारा आपतित विकिरण की तीव्रता के बढ़ने के साथ बढ़ती है। इसके ग्राफीय विचरण को चित्र में दर्शाया गया है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 3

प्रश्न 21.
प्रकाश वैद्युत प्रभाव के सन्दर्भ में निरोधी विभव का क्या अर्थ है?
उत्तर:
प्रकाश-वैद्युत प्रभाव में धन प्लेट पर लगाया गया वह न्यूनतम ऋणात्मक विभव जिस पर प्रकाश वैद्युत धारा शून्य हो जाये निरोधी विभव या संस्तब्ध विभव कहलाता है।

प्रश्न 22.
यदि किसी प्रकाश वैद्युत सेल में आपतित विकिरण की तीव्रता बढ़ा दी जाये तो निरोधी विभव किस प्रकार बदलेगा?
उत्तर:
निरोधी विभव आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता है, अतः यह नहीं बदलेगा।

प्रश्न 23.
प्रकाश विद्युत प्रभाव को प्रेक्षित करने के लिये आपतित प्रकाश की आवृत्ति किस आवृत्ति से अधिक होनी चाहिये?
उत्तर:
प्रकाश सुग्राही पदार्थ की देहली आवृत्ति से।

प्रश्न 24.
विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के पैकेट को क्या कहते हैं?
उत्तर:
फोटॉन।

प्रश्न 25.
दे ब्रॉग्ली के अनुसार द्रव्य तरंग के तरंगदैर्घ्य का सूत्र लिखिये।
उत्तर:
λ = h/mv

प्रश्न 26.
किसी धातु का कार्यफलन 2 eV है। इसके मतलब को समझाइये।
उत्तर:
धातु से इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन के लिये उन्हें प्रति इलेक्ट्रॉन न्यूनतम 2ev ऊर्जा देनी होगी।

प्रश्न 27.
किसी धातु की सतह पर एकवर्णीय प्रकाश डालने पर भी उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा भिन्न-भिन्न होती है, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि धातु में स्थित सब मुक्त इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा समान नहीं होती, उनमें असमान ऊर्जा वितरण होता है।

प्रश्न 28.
किसी पदार्थ के लिये निरोधी विभव तथा आपतित प्रकाश की आवृत्ति के बीच ग्राफ कैसा होता है?
उत्तर:
सीधी रेखा में जो मूल बिन्दु से नहीं गुजरता है।

प्रश्न 29.
आइन्सटीन का प्रकाश विद्युत समीकरण लिखिये।
उत्तर:
1/2 mv2 = h (v – Ug) mv2

प्रश्न 30.
दो धातु A तथा B के कार्यफलन क्रमश: 2 ev तथा 4 eV हैं। प्रकाश वैद्युत प्रभाव के लिए किसकी देहली तरंगदैर्ध्य कम होगी?
उत्तर:
Φ0 = hc/λ0 = λ0 = hc/Φ0 = λ0 α 1/ Φ0
Φ0 धातु B के लिए अधिक है। अतः इसके लिए देहली तरंगदैर्ध्य कम होगी।

प्रश्न 31.
दो धातु X तथा Y पर जब उचित आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है तो इनसे प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। X का कार्यफलन Y के कार्यफलन से अधिक है। किस धातु के लिए देहली आवृत्ति अधिक होगी और क्यों?
उत्तर:
Φ0 = hv0
v0 = Φ/p
∵ X का कार्यफलन अधिक है, अतः इसी के लिए देहली आवृत्ति अधिक होगी।

प्रश्न 32.
एक इलेक्ट्रॉन तथा एक प्रोटॉन से बद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य समान है। इनकी गतिज ऊर्जा परस्पर किस प्रकार सम्बन्धित है?
उत्तर:
गतिज ऊर्जा K = \(\frac{\mathrm{h}^2}{2 \mathrm{~m} \lambda^2}\)
k α 1/m ⇒ Kc/Kp = mp/mc
∵ λ समान है )

प्रश्न 33.
कितने वोल्ट तथा कितने कोण पर तीव्रता का मान अधिकतम होता है?
उत्तर:
54 वोल्ट तथा 50° के प्रकीर्णन कोण पर

प्रश्न 34.
प्रकाश सुग्राही पदार्थ कौन-कौनसे हैं?
उत्तर:
सीजियम, लीथियम, सोडियम, पोटेशियम आदि क्षारीय धातुयें।

प्रश्न 35.
प्रकाश-विद्युत सेल में कैथोड को परवलयाकार क्यों बनाया जाता है?
उत्तर:
जिससे अधिक से अधिक इलेक्ट्रॉन ऐनोड पर जा सकें।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 36.
प्रकाश विद्युत सेल में प्रयुक्त कैथोड का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक तथा सीजियम लेपित क्यों होते हैं?
उत्तर:
प्रयुक्त कैथोड का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक इसलिए होता है जिससे कि इलेक्ट्रॉन ज्यादा से ज्यादा निकले और लेपित इसलिए किया जाता है चूँकि यह एक प्रकाश सुग्राही पदार्थ है।

प्रश्न 37.
देहली आवृत्ति को परिभाषित कीजिये धातु के कार्यफलन के साथ यह किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर:
वह न्यूनतम आवृत्ति (v0) जिससे कम आवृत्ति का फोटोन इलेक्ट्रॉन को उत्सर्जित करने में समक्ष नहीं होता है, उसे देहली आवृत्ति कहते हैं। इसको (v0) से प्रदर्शित करते हैं। धातु के कार्यफलन के साथ यह समानुपाती रूप में परिवर्तित होती है।

प्रश्न 38
विभिन्न तीव्रता तथा समान तरंगदैर्घ्य के दो प्रकाश पुंजों के लिए प्रकाश वैद्युत धारा तथा एनोड विभव के बीच ग्राफ खींचिये।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 4

प्रश्न 39.
एक इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन की गतिज ऊर्जा समान है। इन दोनों में से किसकी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य बड़ी होगी? कारण भी दीजिए।
उत्तर:
λ = \(\frac{\mathrm{h}}{\sqrt{2 \mathrm{mK}}}\) ⇒ \(\frac{1}{\sqrt{\mathrm{m}}}\)( h तथा K नियतांक है।)
परन्तु mc < mp अतः इलेक्ट्रॉन से बद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य बड़ी होगी।

प्रश्न 40.
V विभवान्तर पर त्वरित इलेक्ट्रॉन से बद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य है। यदि त्वरक विभव 4V कर दिया जाये तो तरंगदैर्घ्य कितनी होगी?
उत्तर:
डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य
λ = \(\frac{12.27}{\sqrt{V}}\)
⇒ λ α \(\frac{1}{\sqrt{\mathrm{V}}}\) = λ/λ = \(\sqrt{\frac{\mathrm{V}}{4 \mathrm{~V}}}\)
= λ = 1/2v

प्रश्न 41.
एक इलेक्ट्रॉन तथा α-कण की गतिज ऊर्जा समान है। उनसे बद्ध तरंगदैर्घ्य किस प्रकार सम्बन्धित है?
उत्तर:
गतिज ऊर्जा K = P2
K = (h/λ)2/2m = h2/2mλ2
⇒ λ = \(\frac{\mathrm{h}}{\sqrt{2 \mathrm{mK}}}\)
λ α \(\frac{1}{\sqrt{\mathrm{V}}}\)
∴ \(\frac{\lambda_{\mathrm{c}}}{\lambda_\alpha}\) = \(\sqrt{\frac{\mathrm{m}_\alpha}{\mathrm{m}_{\mathrm{e}}}}\)

प्रश्न 42.
किसी एक प्रयोग का नाम लिखिये जिससे दे-ब्रॉग्ली के तरंग सिद्धान्त की पुष्टि होती हो।
उत्तर:
डेविसन एवं जरमर का प्रयोग।

प्रश्न 43.
डेविसन व जर्मर के प्रयोग में आयनीकरण प्रकोष्ठ का क्या कार्य है?
उत्तर:
विवर्तित इलेक्ट्रॉन की तीव्रता नापने के लिये।

प्रश्न 44.
डेविसन जर्मर के प्रयोग में क्रिस्टल का क्या कार्य है?
उत्तर:
विवर्तन ग्रेटिंग।

प्रश्न 45.
डेविसन एवं जरमर के प्रयोग का उद्देश्य बतलाइये।
उत्तर:
डेविसन एवं जरमर के प्रयोग का मुख्य उद्देश्य यह था कि इलेक्ट्रॉनों का विवर्तन सम्भव है। चूँकि विवर्तन तरंगों का गुण है अतः इससे यह सिद्ध होता है कि इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध तरंग होती है अर्थात् दे-ब्रॉग्ली की द्रव्य तरंगों की परिकल्पना सही है।

प्रश्न 46.
कण की स्थिति एवं सम्बन्धित संवेग में अनिश्चितताओं के लिये हाइजनबर्ग का सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
∆x ∆P ≥ h/p

प्रश्न 47.
किसी आवेशित कण का द्रव्यमान ‘m’ है और इस पर ‘q’ आवेश है इस कण को यदि V विभवान्तर से त्वरित किया जाये तो इससे सम्बद्ध दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
V विभवान्तर से त्वरित q आवेश युक्त कण की ऊर्जा
E = qV
कण का संवेग p = √2mE = √2mqV
इसलिए दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य λ = h/p = h/√2mqV

प्रश्न 48.
0.12 किग्रा. द्रव्यमान की गेंद 20 मी/से की चाल से गतिमान है। इसकी दे-ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। (प्लांक नियतांक h = 6.62 x 10-4 जूल. से)
उत्तर:
दिया है
m = 0.12 किग्रा v=20 मी/से λ = ?
h = 6.62 × 10-4 जूल. से
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य λ = h/p = h/mv
मान रखने पर
λ = h/p = h/mv
λ = \(\frac{6.62 \times 10^{-34}}{0.12 \times 20}\)
= 2.758 × 10-34 मीटर

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 49.
दो धातु की प्लेटों P तथा Q के लिए अंतक विभव के बीच वक्र दर्शाए गये हैं। इनमें से किस धातु Vo तथा आवृत्ति v की देहली तरंगदैर्घ्य एवं कार्यफलन अधिक होगा?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 5
उत्तर:
प्लेट P की आवृत्ति कम है। इस कारण से देहली तरंगदैर्घ्य का मान अधिक होगा। चूँकि
λ = c/v
अतः P प्लेट की देहली तरंगदैर्घ्य अधिक होगी।
प्लेट Q की आवृत्ति (v) का मान अधिक है तथा ( कार्यफलन
= h x देहली आवृत्ति )
अतः प्लेट Q का कार्यफलन अधिक होगा

प्रश्न 50.
एक धातु पर 5eV के फोटोन डालने पर उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉन के निरोधी विभव का मान 3.2 वोल्ट है। धातु का कार्यफलन क्या है?
उत्तर:
धातु का कार्यफलन
Φo = 5 ev – 3.2 eV = 1.8 eV

प्रश्न 51.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव के सन्दर्भ में निरोधी विभव (अंतक विभव) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
“निरोधी विभव (V), कैथोड के सापेक्ष एनोड को दिया गया वह ऋणात्मक विभव होता है जिस पर प्रकाश विद्युत धारा का मान शून्य हो जाता है।”

प्रश्न 52.
किसी धातु का कार्यफलन 3.31 × 1.6 × 10-19 जूल है तो उसकी देहली आवृत्ति की गणना हर्ट्ज में कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं:
दिया है
कार्यफल 4g = hvo
4g = 3.31 × 1.6 x 10-19 जूल h = 6.63 × 10-34 जूल सेकण्ड
देहली आवृत्ति V =
\(\frac{3.31 \times 1.6 \times 10^{-19}}{6.63 \times 10^{-34}}\)
Vo = 7.99 × 1014 Hz

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
देहली आवृत्ति एवं अन्तक विभव को परिभाषित कीजिए।
अथवा
प्रकाश विद्युत प्रभाव की घटना में अग्र को परिभाषित कीजिए।
(i) कार्यफलन
(ii) निरोधी विभव (अन्तक विभव)।
उत्तर:
देहली आवृत्ति – वह न्यूनतम आवृत्ति (vo) जिससे कम आवृत्ति का फोटोन इलेक्ट्रॉन को उत्सर्जित करने में सक्षम नहीं होता है, उसे देहली आवृत्ति कहते हैं। इसको 00 से प्रदर्शित करते हैं।
अन्तक विभव आपतित विकिरण की एक निश्चित आवृत्ति के लिए पट्टिका पर दिया गया निम्नतम ऋण (मंदक) विभव Vo जिस पर प्रकाशिक धारा शून्य हो जाती है, अंतक (cut-off) अथवा निरोधी विभव (stopping potential) कहलाता है। इस स्थिति में Kmax = eVo
कार्यफलन – “वह न्यूनतम ऊर्जा जो किसी धातु के प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए आवश्यक होती है, उस धातु का प्रकाश-वैद्युत कार्यफलन ( work function) कहलाती है।” सामान्यतः इसको W या po से व्यक्त करते हैं इसको जूल तथा इलेक्ट्रॉन वोल्ट में व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 2.
डेवीसन तथा जरमर प्रयोग में वे प्रेक्षण बताइए जो:
(i) इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति को प्रदर्शित करते हैं।
(ii) डी- बॉली सम्बन्ध की पुष्टि करते हैं।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनों का विवर्तन जिसमें विवर्तित इलेक्ट्रॉनों की तीव्रता विवर्तन कोण पर निर्भर करती है तथा Φ = 50° एक उभार दिखाता है।
(ii) इस प्रयोग द्वारा ज्ञात की गई डी-बॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र \(\frac{h}{\mathrm{P}}\) = \(\frac{12.27}{\sqrt{\mathrm{V}}}\)द्वारा निकाले गये मान के लगभग बराबर आता है। यही डी-ब्रॉग्ली सम्बन्ध की पुष्टि करता है।

प्रश्न 3.
कोई इलेक्ट्रॉन विरामावस्था से जिस विभवान्तर V तक त्वरित किया गया है, उसके साथ डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य का विचरण ग्राफ द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
λ = \(\frac{\mathrm{h}}{\sqrt{2 \mathrm{meV}}}\)
λ α \(\frac{1}{\sqrt{V}}\)
λ का V के साथ विचरण नीचे चित्र में दर्शाया गया है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 6

प्रश्न 4.
एक प्रकाश-वैद्युत सेल में आपतित विकिरण की आवृत्ति v देहली आवृत्ति v0 से अधिक है। यदि आवृत्ति बढ़ाई जाये, तो दूसरे कारकों को स्थिर रखते हुए निरोधी विभव किस प्रकार परिवर्तित होगा?
उत्तर:
निरोधी विभव
v0 = (hv/e) -(hv0/e)
अतः जब आवृत्ति v बढ़ाई जाती है, तो निरोधी विभव Vo भी बढ़ेगा।

प्रश्न 5.
धातु के पृष्ठ से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन के लिए मुक्त इलेक्ट्रॉनों को न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा किन-किन भौतिक विधि द्वारा दी जाती है? उन्हें लिखिए।
उत्तर:
न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा निम्न किसी भी एक भौतिक विधि के द्वारा दी जा सकती है:
(i) तापायनिक उत्सर्जन
(ii) क्षेत्र उत्सर्जन
(iii) प्रकाश विद्युत उत्सर्जन।
(i) तापायनिक उत्सर्जन: तापायनिक उत्सर्जन के द्वारा मुक्त इलेक्ट्रॉनों को पर्याप्त तापीय ऊर्जा दी जा सकती है, जिससे कि वे धातु से बाहर आ सकें।
(ii) क्षेत्र उत्सर्जन- किसी धातु पर लगाया गया एक प्रबल विद्युत क्षेत्र 108 V/m की कोटि का इलेक्ट्रॉनों को धातु पृष्ठ ला सकता है। जैसा कि किसी स्पार्क प्लग में होता है।
(iii) प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश जब किसी धातु पृष्ठ पर पड़ता है तो इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होता है। ये प्रकाश जनित इलेक्ट्रॉन प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
प्रकाश सुग्राही पदार्थ किसे कहते हैं?
उत्तर:
ऐसा पदार्थ जिस पर एक विशिष्ट आवृत्ति या उससे अधिक आवृत्ति का प्रकाश डाला जाये और उसमें से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन हो सके ऐसा पदार्थ प्रकाश सुग्राही पदार्थ कहलाता है।
X – किरणों के लिये भारी धातु जबकि प्रकाश एवं पराबैंगनी किरणों के लिये क्षारीय धातु प्रकाश सुग्राही होते हैं।

प्रश्न 7.
प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या होता है?
उत्तर:
प्रकाश विद्युत प्रभाव जब किसी धातु की प्लेट पर विशिष्ट तरंगदैर्ध्य (आवृत्ति) का प्रकाश डाला जाता है तो उसमें से इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन होता है। इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन की इस घटना को ‘प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं। प्रकाश द्वारा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन को ‘फोटो इलेक्ट्रॉन’ कहते हैं। फोटो इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के कारण परिपथ में उत्पन्न धारा प्रकाश विद्युत धारा कहलाती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 8.
दो प्रकाश पुंज एक लाल तथा दूसरा नीला समान तीव्रता के हैं जो एक धात्विक पृष्ठ पर आपतित किये जाते हैं। इनमें से कौनसा पुंज अधिक गतिज ऊर्जा के इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करेगा?
उत्तर:
K = ho – Φ चूँकि नीले रंग की आवृत्ति लाल रंग की आवृत्ति से अधिक होती है, अतः नीला प्रकाश अधिक ऊर्जा के प्रकाश- इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करेगा।

प्रश्न 9.
प्रकाश विद्युत प्रभाव के नियम लिखिये।
उत्तर:
वैज्ञानिक लेनार्ड के द्वारा किये गये प्रकाश वैद्युत प्रभाव के प्रयोगों के आधार पर कुछ महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले गये जिन्हें प्रकाश विद्युत प्रभाव के नियम से जाना जाता है। ये निम्न होते हैं
(1) किसी धातु की सतह से प्रकाश इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन की दर धातु की सतह पर आपतित प्रकाश की तीव्रता के अनुक्रमानुपाती होती है।
(2) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा का मान आपतित प्रकाश के आवृत्ति के समानुपाती या तरंगदैर्घ्य के विलोमानुपाती होता है।
(3) धातु की सतह से फोटो इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन आपतित प्रकाश की एक निश्चित न्यूनतम आवृत्ति (अधिकतम तरंगदैर्घ्य ) तक ही सम्भव होता है। इस न्यूनतम आवृत्ति के देहली आवृत्ति तथा संगत तरंगदैर्ध्य को देहली तरंगदैर्ध्य कहते हैं।
(4) देहली आवृत्ति या तरंगदैर्घ्य का मान फोटो सुग्राही पदार्थ की प्रकृति या धातु की सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है।
(5) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गति तथा गजित ऊर्जा का मान आपतित प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर नहीं करता है
(6) आपतित प्रकाश तथा उत्सर्जित होने वाले इलेक्ट्रॉनों के बीच कोई समयान्तराल नहीं होता है।

प्रश्न 10.
किसी धातु का कार्यफलन किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
कार्यफलन का मान ताप पर निर्भर होता है परन्तु यह निर्भरता उपेक्षणीय होने से इसे पदार्थ के लिये नियत माना जा सकता है। कार्यफलन को Wo या Φo से निरूपित किया जाता है। भिन्न पदार्थों के लिये इसका मान भिन्न-भिन्न होता है। टंग्स्टन के लिये इसका मान 4.5 eV के लगभग होता है। क्षारीय धातुओं के लिये इसका मान कम होता है। सोडियम के लिये इसका मान 1.5 ev है।

प्रश्न 11.
प्रकाश विद्युत सेल से प्लांक नियतांक का मान ज्ञात करने का नामांकित चित्र तथा निरोधी विभव एवं आपतित प्रकाश की आवृत्ति के मध्य चक्र बनाइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 7

प्रश्न 12.
प्रकाश के द्वैत-सिद्धांत को संक्षिप्त में लिखिये।
उत्तर:
प्रकाश की द्वैत प्रकृति के आधार पर डी-ब्रोगली ने परिकल्पना प्रस्तुत की। डी ब्रोगली के अनुसार द्रवित अवस्था में द्रव्य- कण जैसे प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन आदि भी तरंग की भाँति व्यवहार करते हैं इन्हें द्रव्य तरंगें या डी ब्रोगली तरंगें कहते हैं। इन द्रव्य तरंगों में जो राशि कम्पित होती है उसे तरंग फलन कहते हैं जिस प्रकार तरंगों के रूप में विकिरण ऊर्जा से कणों के लाक्षणिक गुणों को सम्बद्ध करना आवश्यक होता है, उसी प्रकार गतिशील द्रव्य कणों के साथ तरंगों के लाक्षणिक गुण सम्बद्ध करने चाहिए। अतः द्वैतीकरण प्रकृति न केवल प्रकाश में ही होती है वरन् द्रव्य कणों में भी होती है।

प्रश्न 13.
प्रकाश विद्युत प्रभाव में निरोधी विभव को परिभाषित कीजिये। प्रकाश विद्युत सेल में कैथोड पर लेपित पदार्थ का नाम दीजिये। प्रकाश विद्युत सेल के कोई चार उपयोग भी लिखिये।
उत्तर:
निरोधी विभव – प्लेट P के सापेक्ष प्लेट P2 उस ऋण विभव को जिस पर प्रकाश विद्युत धारा का मान परिपथ में शून्य हो जाता है, उसे निरोधी विभव Vn कहते हैं। फोटो इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा
Kmax = 1/2mwanax = eVo
यहाँ पर
इलेक्ट्रॉन का आवेश है।
प्रकाश विद्युत सेल में कैथोड पर लेपित प्रकाश सुग्राही पदार्थ (K/Cs/Na) में से कोई एक पदार्थ हो सकता है।
प्रकाश विद्युत सेल के उपयोग:
(i) प्रकाश विद्युत सेलों का सबसे महत्त्वपूर्ण उपयोग सिनेमाओं में ध्वनि के पुनरोत्पादन (Reproduction of sound) में टेलीविजन में तथा फोटोटेलीग्राफ में किया जाता है।
(ii) इनसे द्रवों तथा ठोसों की अपारदर्शिता ज्ञात की जाती है।
(iii) इनके द्वारा आकाशीय पिंडों के ताप मापे जाते हैं तथा उनके स्पेक्ट्रम का अध्ययन किया जाता है।
(iv) ये भट्टियों तथा रासायनिक प्रक्रिया ओं में ताप नियंत्रण में काम आती हैं।

प्रश्न 14.
दे ब्रोगली की परिकल्पना के अनुसार वेग से गतिशील, m द्रव्यमान के कण से सम्बद्ध द्रव्य तरंग की तरंगदैर्ध्य A हो तो सिद्ध कीजिये कि-
λ = h/√2mK
उत्तर:
हम जानते हैं कि द्रव्य तरंग की तरंगदैर्ध्य
λ = h/mv = h/P ………….(1)
यदि कण की गतिज ऊर्जा K हो तो
1/2mv2 = 2K
या
या
m2v2 = 2mK
या
mv = √2mK
p = √2mK ….(2)
समी (2) का मान समी (1) में रखने पर
λ = h/√2mK

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 15
समान विभवान्तर से त्वरित कण व प्रोटॉन से सम्बद्ध दे- ब्रोगली तरंगदैर्घ्य का अनुपात ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
हम जानते हैं α-कण के लिये दे ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 11 प्रोटॉन के लिये

प्रश्न 16
सिद्ध कीजिये कि समान विभवान्तर से त्वरित प्रोटॉन एवं α-कण से सम्बद्ध द्रव्य तरंगों के तरंगदैर्घ्य का अनुपात 2√2:1 होता है।
अथवा
डेवीसन तथा जरमर प्रयोग की क्या महत्ता है? एक Q-कण तथा एक प्रोटॉन को समान विभवान्तर √ पर त्वरित किया जाता है। इनसे बद्ध डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य का अनुपात ज्ञात कीजिए।
अथवा
समान विभवान्तर से त्वरित प्रोटोन एवं -कण से सम्बद्ध द्रव्य तरंगों की तरंगदैयों का अनुपात ज्ञात कीजिये।
उत्तर;
डेवीसन तथा जरमर प्रयोग इलेक्ट्रॉन की पदार्थिक तरंगों की उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।
हम जानते हैं:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 10

प्रश्न 17.
प्रोटोन व एल्फा कणों की ऊर्जायें समान हों तो उनकी तरंग का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं कि यदि K ऊर्जा और m द्रव्यमान हो तो
तरंगदैर्घ्य,
λ = h/√2K.m
चूंकि दिया गया है कि ऊर्जायें समान हैं लेकिन द्रव्यमान और तरंगदैर्ध्य अलग-अलग हैं।
प्रोटोन के लिये,
λ = \(\frac{h}{\sqrt{2 \mathrm{~K} m_p}}\) ……(1)
a. कण के लिये
λ = \(\frac{h}{\sqrt{2 \mathrm{~K} m_\alpha}}\) ………….(2)
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
\(\frac{\lambda_p}{\lambda_\alpha}\) = \(\sqrt{\frac{m_\alpha}{m_p}}\)
लेकिन हम जानते हैं:
\(\frac{\lambda_p}{\lambda_\alpha}\) =\(\sqrt{\frac{4 m_p}{m_p}}\)
\(\frac{\lambda_p}{\lambda_\alpha}\) = 2/1
λp : λa = 2 : 1

प्रश्न 18.
यदि एक प्रोटॉन तथा एक कण समान वेग से गतिशील हों, तो उनसे सम्बद्ध दे-ब्रोगली तरंगदैयों का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
λ1 = h/mpvp …….(1)
λ2 = h/mαvα ………(2)
समीकरण (1) में समी (2) का भाग देने पर
\(\frac{\lambda_1}{\lambda_2}\) = \(\frac{h}{m_p v_p}\) × \(\frac{m_\alpha v_\alpha}{h}\)
लेकिन
Vp = Va तथा mα = 4mp
∴λ1/λ2 = mα/mp = 4mp/mp
λ1 : λ2 = 4 : 1

प्रश्न 19.
फोटॉन का विराम द्रव्यमान शून्य होता है। स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
प्लांक ने यह माना कि विकिरण ऊर्जा का उत्सर्जन अथवा अवशोषण संतत अविच्छिन्न नहीं होकर विविक्त (discrete) बण्डलों (bundles ) के रूप में होता है। फोटॉन एक द्रव्य कण नहीं होता है अपितु यह एक विकिरण ऊर्जा से सम्बद्ध कण होता है। इसे ऊर्जा का क्वाण्टम भी कहते हैं। फोटॉन विद्युत उदासीन होते हैं एवं इनका विराम द्रव्यमान शून्य होता है।

प्रश्न 20.
द्रव्य तरंगों की द्वैती प्रकृति से सम्बन्धित दे-ब्रोग्ली की परिकल्पना लिखिये।
अथवा
दे-बोली परिकल्पना लिखिये।
उत्तर:
डी ब्रोग्ली की द्रव्य तरंगों की परिकल्पना- डी ब्रोग्ली ने एक परिकल्पना प्रस्तुत की कि जिस प्रकार तरंगों के रूप में विकिरण ऊर्जा से कणों के लाक्षणिक गुणों का सम्बद्ध होना पाया जाता है, ठीक उसी प्रकार गतिशील द्रव्य कणों के साथ तरंगों के लाक्षणिक गुण सम्बद्ध होने चाहिये अर्थात् गतिशील द्रव्य कणों को तरंगों की भाँति भी व्यवहार करना चाहिये। गतिशील द्रव्य कण से सम्बद्ध तरंगों को द्रव्य तरंगें कहते हैं।
डी-ब्रॉली ने यह माना कि द्रव्य तरंग की तरंगदैर्ध्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है और इसे निम्न सूत्र से दिया जाता है-
λ = h/mv = h/p
यहाँ h प्लांक नियतांक है। m कण का द्रव्यमान v वेग तथा p संवेग है।

प्रश्न 21.
हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
अनिश्चितता सिद्धान्त – इस सिद्धान्त के अनुसार किसी भी एक क्षण (समय) पर एक कण की स्थिति और संवेग दोनों का एक साथ एक ही दिशा में पूर्ण रूप से यथार्थ निर्धारण नहीं किया जा सकता। इनमें से किसी एक के सही नापने के लिये अभिकल्पना की जाये तो दूसरे का निर्धारण पूर्णरूपेण अनिश्चित हो जायेगा। यदि d.kdh fir eav fuf prrkar ∆x तथा संवेग में अनिश्चितता ∆pr हो तो ∆r एवं ∆px का गुणनफल कभी भी से कम नहीं हो सकता। गणितीय रूप से ∆x∆px > h/2
यहाँ h = 2/5 = 1.054 × 10-34 जूल-सेकण्ड होता है।
हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त सूक्ष्म तथा स्थूल दोनों प्रकार के कणों के लिये होता है। वस्तुओं का आकार बड़ा होने के कारण इनकी स्थिति में अनिश्चितता नगण्य होती है। अतः स्थूल कणों में अनिश्चितता का सिद्धान्त प्रेक्षित नहीं होता है।

प्रश्न 22.
दे ब्रोग्ली की परिकल्पना कीजिए। कोई इलेक्ट्रॉन विरामावस्था से विभव V वोल्ट द्वारा त्वरित किया जाता है तो इलेक्ट्रॉन की दे-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य का सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
देब्रोग्ली की परिकल्पना (De Broglie hypothesis) “प्रत्येक गतिशील द्रव्यकण से सम्बद्ध (associated) एक तरंग होती है जिसे द्रव्य तरंग (matter wave) या दे ब्रोग्ली तरंग कहते हैं।”
समीकरण
λ = hc/E = hc/mc2 = h/mc = h/p
के अनुसार प्रकाशीय
फोटॉन का तरंगदैर्ध्य उसके संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इस तथ्य की तुल्यता के आधार पर दे ब्रोग्ली ने यह माना कि द्रव्य तरंग की तरंगदैर्घ्य कण के संवेग के व्युत्क्रमानुपाती होती है एवं इसे निम्न सूत्र से दिया जाता है-
λ = h/mv = h/p
यहाँ b प्लांक नियतांक है। m कण का द्रव्यमान v वेग तथा p संवेग है।
त्वरित इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य की गणना-
हम जानते हैं-
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m. = 9.1 x 10-31 kg
इलेक्ट्रॉन पर आवेश e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
प्लांक स्थिरांक h = 6.63 x 10-31 जूल x सेकण्ड
सूत्र
λc = \(\frac{\mathrm{h}}{\sqrt{2 \mathrm{meV}}}\)
मान रखने पर
\(\frac{6.63 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 1.6 \times 10^{-19} \times \mathrm{V}}}\)
= \(\frac{12.27 \times 10^{-10}}{\sqrt{\mathrm{V}}}\) मीटर
(:. 1A° = 10-10 मीटर)

प्रश्न 23.
हाइड्रोजन परमाणु में अपनी निम्नतम अवस्था में परिक्रमण करने वाला इलेक्ट्रॉन जब तृतीय उत्तेजित अवस्था में गमन करता है, तब इससे सम्बद्ध दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य किस प्रकार प्रभावित होती है?
उत्तर:
हम जानते हैं:
दे ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
λ = h/p = h/mv
∴ p = mv
जबकि
λ α 1/v
v α 1/n होता है।
∴ λ α n
इसलिए दे ब्रॉग्ली तरंग दैर्ध्य का मान बढ़ेगा

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 24.
प्रकाश-विद्युत प्रभाव के सम्बन्ध में ‘निरोधी विभव’ और ‘देहली आवृत्ति’ पदों की परिभाषा लिखिए। आइंस्टीन समीकरण का उपयोग करके इन भौतिक राशियों का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
निरोधी विभव आपतित विकिरण की एक निश्चित आवृत्ति के लिए पट्टिका पर दिया गया निम्नतम ऋण (मंदक) विभव V0 जिस पर प्रकाशिक धारा शून्य हो जाती है, अंतक (cut-off) अथवा निरोधी विभव (stopping potential) कहलाता है। इस स्थिति में K “max = evo
देहली आवृत्ति: वह न्यूनतम आवृत्ति (V) जिससे कम आवृत्ति का फोटोन इलेक्ट्रॉन को उत्सर्जित करने में सक्षम नहीं होता है, उसे देहली आवृत्ति कहते हैं। इसको V से प्रदर्शित करते हैं।
आइंस्टीन समीकरण से
evo = hv – Φ0
दी गई आवृत्ति के लिए v > v0, v0 का मान ज्ञात किया जा सकता है।
निरोधी विभव,
v0 = (h/e)v – Φ/e
Φo = hvo
देहली आवृत्ति
vo = Φo/h

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
20 वाट के बल्ब से 5 x 1014 Hz आवृत्ति का प्रकाश उत्सर्जित हो रहा है। बल्ब से एक सेकण्ड में उत्सर्जित होने वाले फोटॉनों की संख्या ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया गया है:
आवृत्ति v = 5 x 1014 Hz
5 x 1014 Hz आवृत्ति के फोटॉन की ऊर्जा
E = hu
E = 6.62 × 10-34 x 5 × 1014
= 33.1 x 1020 जूल
20 वाट के बल्ब द्वारा 1 सेकण्ड में उत्सर्जित ऊर्जा = 20 जूल बल्ब द्वारा 1 सेकण्ड में उत्सर्जित फोटॉन की संख्या
(N) = \(\frac{20}{33.1 \times 10^{-20}}\)
(N) = 6.04 × 1019
(N) ≈ 6 × 1019

प्रश्न 2.
3.31 À तरंगदैर्घ्य के फोटॉन की ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
λ = 3.31 A
= 3.31 × 10-10
हम जानते हैं-
E = hc/λ
मान रखने पर E = \(\frac{6.63 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{3.31 \times 10^{-10}}\)
= 6 × 10-16 J
= \(\frac{6 \times 10^{-16}}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= 3.75 × 103 eV
= 3.75 KeV

प्रश्न 3.
एक धातु के लिए कार्यफलन 2.2 इलेक्ट्रॉन वोल्ट है। इस पर 5000 ऐंग्स्ट्रम तरंगदैर्ध्य का फोटॉन आपतित है। उत्सर्जित फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा ज्ञात करो प्लांक नियतांक h = 6.63 x 10-14 जूल सेकण्ड एवं प्रकाश का वेग c = 3 x 108 मीटर/सेकण्ड।
उत्तर:
हम जानते हैं आइन्सटीन की प्रकाश विद्युत समीकरण के अनुसार फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा निम्न होती है-
1/2mv2max = h(v – v0)
या 1/2mv2max = hc/λ – Φ0
= \(\frac{6.63 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{5000 \times 10^{-10}}\) – 2.2 × 1.6 × 10-19 J
= 3.52 × 10-19
(3.97 – 3.52) 10-19
= 0.46 × 10-19 J

प्रश्न 4.
किसी धातु से प्रकाश वैद्युत उत्सर्जन करने वाली प्रकाश किरण की देहली तरंगदैर्घ्य 5800 ऐंग्स्ट्रम है। यदि आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 4500 ऐंग्स्ट्रम हो तो प्रकाश इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि आइन्सटीन के प्रकाश विद्युत समीकरण से फोटो इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा निम्न होती है:
Kऊर्जा = hv – Φ0
या Kऊर्जा = hv – hv0
या Kऊर्जा = hc/λ – hc/λ0
या Kऊर्जा = hc(1/λ – 1/λ0)
या Kऊर्जा = hc \(\left(\frac{\lambda_0-\lambda}{\lambda \times \lambda_0}\right)\)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 9

प्रश्न 5.
एक टंग्स्टन से बने कैथोड जिसकी क्रान्तिक तरंगदैर्घ्य 2300 À है, पर पराबैंगनी किरणें जिनकी तरंगदैर्ध्य 1800 À आपतित होती है तदानुसार निम्न गणनाएँ कीजिए:
(i) फोटोइलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा (eV में)
(ii) टंग्स्टन का कार्यफलन (eV में)।
उत्तर:
(i) Kऊर्जा = 1⁄2mv2 = h(v – vo)
जहाँ v आपतित विकिरण की आवृत्ति एवं 0 क्रान्तिक आवृत्ति हैं। यदि λ एवं λ0 इनकी क्रमशः तरंगदैर्घ्य हो तो
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति 8
(ii) टंग्स्टन का कार्यफलन Φo = hv0 = hc/λ0
= 8.608 x 10-19 जूल
= \(\frac{8.608 \times 10^{-19}}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= 5.38eV

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति

प्रश्न 6.
100 V के समान विभवान्तर से त्वरित एक इलेक्ट्रॉन तथा cc-कण से सम्बन्धित दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिये।
उत्तर:
दिया है V = 100 वोल्ट
इलेक्ट्रॉन के लिये
λc = \(\frac{12.27}{\sqrt{V}}\) A°
= \(\frac{12.27}{\sqrt{100}}\) A° = \(\frac{12.27}{10}\) A°
λc = 1.227 A
तथा α-कण के लिये
λα = \(\frac{0.101}{\sqrt{V}}\) A°
λα = \(\frac{0.101}{\sqrt{100}}\) A° = 0.101/10
λα = 0.010 A°

प्रश्न 7.
127°C ताप वाले न्यूट्रॉनों से सम्बद्ध दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
तापीय न्यूट्रॉन के लिये तरंगदैर्घ्य का सूत्र
λm = \(\frac{30.835}{\sqrt{T}}\)A°
λm = \(\frac{30.835}{\sqrt{400}}\)A°
∵ T = 127 + 273 = 400K
∴ λm = \(\frac{30.835}{20}\)A°
= 1.54 A°

प्रश्न 8.
400 विभवान्तर से त्वरित इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है- V = 400 v
हम जानते हैं:
λ = \(\frac{\mathrm{h}}{\sqrt{2 \mathrm{meV}}}\)A° = \(\frac{12.27 \times 10^{-10}}{\sqrt{V}} \mathrm{~m}\)A°
मान रखने पर
λ = \(\frac{12.27 \times 10^{-10} \mathrm{~m}}{\sqrt{400}}\)A° = \(\frac{12.27}{20}\)A°
= 0.61 A°

प्रश्न 9.
6 × 1014 हर्ट्ज आवृत्ति का एकवर्णीय प्रकाश स्रोत प्रति सेकण्ड 2 x 103 जूल / सेकण्ड ऊर्जा उत्सर्जित करता है स्रोत द्वारा प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटानों की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है आवृत्ति V = 6 × 10-14
और एकवर्णीय प्रकाश स्रोत प्रति सेकण्ड 2 x 10-3 जूल / सेकण्ड ऊर्जा उत्सर्जित करता है इसलिये प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा होगी
E = hv
मान रखने पर
E = (6.63 × 10-34) × 6 × 10-14 = 3.978 × 10-19 जूल
यदि स्रोत के द्वारा प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉन की संख्या N है तो किरण पुंज में संचरित क्षमता P प्रति फोटॉन ऊर्जा E के N गुना होगी जिससे कि
P = NE तब
N = P/E
= \(\frac{2.0 \times 10^{-3} \text {}}{3.978 \times 10^{-19}}\)
= 5.03 x 105 फोटॉन प्रति सेकण्ड

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 11 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति Read More »

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
वस्तु का आभासी तथा बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है:
(अ) उत्तल दर्पण में
(ब) अवतल दर्पण में
(स) समतल दर्पण में
(द) इनमें से किसी में नहीं
उत्तर:
(ब) अवतल दर्पण में

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 2.
प्रायः मोटर ड्राइवर की सीट के आगे लगा दर्पण होता है-
(अ) समतल
(ब) उत्तल
(स) अवतल
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) उत्तल

प्रश्न 3.
जब प्रकाश हवा से काँच में प्रवेश करता है तो किस रंग के लिए विचलन कोण अधिकतम है?
(अ) लाल
(ब) पीला
(स) नीला
(द) बैंगनी
उत्तर:
(द) बैंगनी

प्रश्न 4.
प्रकाश का अपवर्तन होता है:
(अ) प्रकाश की चाल में परिवर्तन के कारण
(ब) प्रकाश की चाल में परिवर्तन न होने के कारण
(स) प्रकाश के रंग में परिवर्तन के कारण
(द) इनमें से किसी के भी कारण नहीं
उत्तर:
(अ) प्रकाश की चाल में परिवर्तन के कारण

प्रश्न 5.
एक अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 80 सेमी है, इसकी फोकस दूरी मीटर में होगी:
(अ) 0.40 मीटर
(ब) 0.20 मीटर
(स) 0.80 मीटर
(द) 0.10 मीटर
उत्तर:
(अ) 0.40 मीटर

प्रश्न 6.
सर्चलाइट में निम्न में से कौनसा दर्पण प्रयुक्त करते हैं:
(अ) अवतल
(ब) समतल
(स) उत्तल
(द) बेलनाकार
उत्तर:
(अ) अवतल

प्रश्न 7.
निम्न में से कौनसा दर्पण सदैव आभासी तथा छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है:
(अ) समतल दर्पण
(ब) अवतल दर्पण
(स) समतल व अवतल दर्पण
(द) उत्तल दर्पण
उत्तर:
(द) उत्तल दर्पण

प्रश्न 8.
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 10 सेमी. है। दर्पण के सामने 10 सेमी. पर एक वस्तु रखने पर उसका प्रतिबिम्ब बनेगा:
(अ) अनन्त पर
(स) फोकस पर
(ब) वक्रता त्रिज्या पर
(द) ध्रुव पर
उत्तर:
(अ) अनन्त पर

प्रश्न 9.
गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण में केवल अक्ष समानान्तर किरणें ही प्रयुक्त की जाती हैं; क्योंकि ये
(अ) ज्यामिति को आसान बना देती हैं।
(ब) न्यूनतम विक्षेपण दर्शाती हैं।
(स) अधिकतम तीव्रता दर्शाती हैं।
(द) एक बिन्दु बिम्ब का बिन्दु प्रतिबिम्ब निर्मित करती हैं।
उत्तर:
(द) एक बिन्दु बिम्ब का बिन्दु प्रतिबिम्ब निर्मित करती हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 10.
किसी समतल दर्पण पर प्रकाश की किरण अभिलम्बवत् आपतित होती है तो परावर्तन कोण का मान होता है-
(अ) 90°
(ब) 180°
(स) 0°
(द) 45°
उत्तर:
(स) 0°

प्रश्न 11.
f फोकस दूरी वाला एक अवतल दर्पण यदि किसी वस्तु का m आवर्धन का प्रतिबिम्ब बनाता है तो वस्तु की दर्पण से दूरी है:
(अ) \(\frac{(m-1) f}{m}\)
(ब) \(\frac{(m+1) f}{m}\)
(स) (m – 1)f
(द) (m + 1)f
उत्तर:
(अ) \(\frac{(m-1) f}{m}\)

प्रश्न 12.
किसी माध्यम से निर्वात में पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए क्रान्तिक कोण 30° है। माध्यम में प्रकाश की चाल होगी:
(अ) 3 x 108 m/s
(ब) 1.5 x 108 m/s
(स) 6 × 108 m/s
(द) √3 x 108 m/s
उत्तर:
(ब) 1.5 x 108 m/s

प्रश्न 13.
एक 1 अपवर्तनांक के पारदर्शी माध्यम में चलती हुई प्रकाश किरण एक पृष्ठ पर आपतित होती है, जो इस माध्यम को वायु से पृथक कर रही है। आपतन कोण 45° है। n के किस मान आन्तरिक परावर्तन हो सकता है ?
के लिए इस किरण का पूर्ण
(अ) n = 1.33
(ब) n = 1.40
(स) n = 1.50
(द) n = 1.25
उत्तर:
(स) n = 1.50

प्रश्न 14.
हीरे के चमकने का प्रमुख कारण है:
(अ) परावर्तन
(ब) विवर्तन
(स) पूर्ण आंतरिक परावर्तन
(द) विसरण
उत्तर:
(स) पूर्ण आंतरिक परावर्तन

प्रश्न 15.
यदि ∠i = 60° तथा ∠r = 90° हो तो अपवर्तनांक n2 होगा:
(अ) \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)
(ब) \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)
(स) \(\sqrt{3}\)
(द) \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)
उत्तर:
(अ) \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)

प्रश्न 16.
धुएँ के आर-पार किसी दूर स्थित प्रकाश स्रोत को देखने पर उसके झिलमिल करते हुए दिखाई देने का कारण है:
(अ) परावर्तन
(ब) अपवर्तन
(स) विवर्तन
(द) वर्ण विक्षेपण
उत्तर:
(ब) अपवर्तन

प्रश्न 17.
किसी गोलीय लेन्स के लिए निम्न में से कौनसा सूत्र सही है:
(अ) \(\frac{1}{f}\) = \(\frac{1}{u}\) + \(\frac{1}{v}\)
(ब) \(\frac{1}{f}\) = \(\frac{1}{v}\) – \(\frac{1}{u}\)
(स) \(\frac{1}{u}\) = \(\frac{1}{v}\) + \(\frac{1}{f}\)
(द) f = \(\frac{u v}{u+v}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{1}{f}\) = \(\frac{1}{v}\) – \(\frac{1}{u}\)

प्रश्न 18.
+ 2.50 D और – 3.75 D क्षमता वाले लेन्सों को मिलाकर एक संयुक्त लेन्स निर्मित किया गया है। इसकी फोकस दूरी का मान सेमी. में होगा:
(अ) 40
(ब) 40
(स) 80
(द) 160
उत्तर:
(स) 80

प्रश्न 19.
उत्तल लेन्स की शक्ति होती है:
(अ) ऋणात्मक
(ब) धनात्मक
(स) शून्य
(द) काल्पनिक
उत्तर:
(ब) धनात्मक

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 20.
किसी लेन्स का आधा भाग काले कपड़े में लपटने पर लेन्स द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(अ) प्रतिबिम्ब लुप्त हो जाएगा
(ब) कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
(स) प्रतिबिम्ब पहले से नाप में आधा हो जाएगा
(द) प्रतिबिम्ब की चमक कम हो जाएगी
उत्तर:
(द) प्रतिबिम्ब की चमक कम हो जाएगी

प्रश्न 21.
प्रकाश की एक किरण √2 अपवर्तनांक वाले प्रिज्म से इस प्रकार गुजरती है कि उसका आपतन कोण, अपवर्तन कोण का दो गुना है तथा किरण में न्यूनतम विचलन होता है। प्रिज्म का कोण होगा:
(अ) 45°
(ब) 90°
(स) 0°
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) 90°

प्रश्न 22.
एक उत्तल लेन्स की वक्रता त्रिज्यायें क्रमशः 15 सेमी तथा 30 सेमी हैं। इसका अपवर्तनांक 1.5 है लेन्स की फोकस दूरी होगी:
(अ) 20 सेमी.
(ब) -20 सेमी.
(स) 60 सेमी.
(द) – 60 सेमी.
उत्तर:
(अ) 20 सेमी.

प्रश्न 23.
किसी उत्तल लेन्स की फोकस दूरी 2.5 सेमी है इसकी अधिकतम आवर्धन क्षमता का मान होगा:
(अ) 25
(ब) 52
(स) 11
(द) 1.1
उत्तर:
(स) 11

प्रश्न 24.
एक प्रिज्म का अपवर्तनांक √2 तथा अपवर्तन कोण 60° है तो इसका न्यूनतम विचलन कोण होगा:
(अ) 15°
(ब) 30°
(स) 450
(द) 60°
उत्तर:
(ब) 30°

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 25.
जब 1.47 अपवर्तनांक वाले काँच के उभयोत्तल लेन्स को किसी द्रव में डुबाया जाता है, तब यह एक काँच की समतल शीट की भाँति व्यवहार करता है, इसका तात्पर्य है कि द्रव का अपवर्तनांक है:
(अ) काँच के अपवर्तनांक के बराबर
(ब) एक से कम
(स) काँच के अपवर्तनांक से अधिक
(द) काँच के अपवर्तनांक से कम
उत्तर:
(अ) काँच के अपवर्तनांक के बराबर

प्रश्न 26.
एक दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता M है। यदि अभिनेत्र लेन्स की फोकस दूरी दो गुनी कर दी जाये तब आवर्धन क्षमता होगी:
(अ) 2M
(ब) 1/2M
(स) √2M
(द) 3M
उत्तर:
(ब) 1/2M

प्रश्न 27.
एक सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक और नेत्र लेन्स की फोकस दूरियाँ क्रमशः 4 सेमी और 8 सेमी हैं तथा वस्तु की अभिदृश्यक से दूरी 4.5 सेमी है, तो आवर्धन क्षमता होगी:
(अ) 18
(ब) 32
(स) 64
(द) 20
उत्तर:
(ब) 32

प्रश्न 28.
एक व्यक्ति के चश्मे के लेन्स की क्षमता 2D है। वह निम्न में से किस दोष से पीड़ित है:
(अ) दूर दृष्टिदोष से
(ब) निकट दृष्टिदोष से
(स) वर्णान्धता से
(द) जरा दूर दृष्टिदोष से
उत्तर:
(अ) दूर दृष्टिदोष से

प्रश्न 29.
एक निकट दृष्टिदोष से पीड़ित व्यक्ति स्पष्ट नहीं देख सकता:
(अ) निकट की वस्तुओं को
(ब) दूर की वस्तुओं को
(स) न निकट तथा न ही दूर की वस्तुओं को
(द) क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर रेखाओं को
उत्तर:
(ब) दूर की वस्तुओं को

प्रश्न 30.
एक सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक और नेत्र लेन्स की फोकस दूरियाँ क्रमशः 4 सेमी और 8 सेमी हैं तथा वस्तु की अभिदृश्यक से दूरी 4.5 सेमी है, तो आवर्धन क्षमता होगी:
(अ) 18
(ब) 32
(स) 64
(द) 20
उत्तर:
(ब) 32

प्रश्न 31.
जब किसी सूक्ष्मदर्शी के नलिका की लम्बाई बढ़ाई जाती है तो आवर्धन क्षमता:
(अ) घटती है
(ब) बढ़ती है
(स) अपरिवर्तित रहती है।
(द) कम व अधिक हो सकती है
उत्तर:
(अ) घटती है

प्रश्न 32.
प्रकाश की एक किरण काँच (अपवर्तनांक = 3/2) से पानी (अपवर्तनांक = 4/3) में संचरण करती है। क्रान्तिक कोण का मान होगा:
(अ) sin-1(1/2)
(ब) sin-1\(\left(\sqrt{\frac{8}{9}}\right)\)
(स) sin-1(8/9)
(द) sin-1(5/7)
उत्तर:
(स) sin-1(8/9)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 33.
एक दूरदर्शक के अभिदृश्यक लेन्स तथा अभिनेत्र लेन्स की फोकस दूरियाँ क्रमश: f तथा हैं। इसकी आवर्धन क्षमता लगभग है:
(अ) f0/fc
(ब) fo – fe
(स) fofe
(द) fc + fc/2
उत्तर:
(अ) f0/fc

प्रश्न 34.
एक सूक्ष्मदर्शी में अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी, अभिनेत्रक लेन्स की फोकस दूरी से होती है:
(अ) कम
(ब) अधिक
(स) बराबर
(द) कुछ कहा नहीं जा सकता
उत्तर:
(अ) कम

प्रश्न 35.
परावर्तक दूरदर्शी में अभिदृश्यक के रूप में प्रयोग किया जाता है:
(अ) समतल दर्पण
(ब) अवतल दर्पण
(स) उत्तल लेन्स
(द) प्रिज्म
उत्तर:
(ब) अवतल दर्पण

प्रश्न 36.
दूरस्थ वस्तु को खगोलीय दूरदर्शी द्वारा देखने पर इसका प्रतिबिम्ब होता है:
(अ) सीधा
(ब) उल्टा
(स) विकृत
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) उल्टा

प्रश्न 37.
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में अन्तिम प्रतिबिम्ब बनता है:
(अ) वास्तविक एवं सीधा
(ब) आभासी एवं उल्टा
(स) आभासी एवं सीधा
(द) वास्तविक एवं उल्टा
उत्तर:
(ब) आभासी एवं उल्टा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक प्रकाश किरण समतल दर्पण पर लम्बवत् आपतित होती है। आपतन कोण तथा परावर्तन कोण के मान क्या होंगे?
उत्तर:
आपतन कोण = 90° तथा परावर्तन कोण r = 0°

प्रश्न 2.
समतल दर्पण की फोकस दूरी कितनी होती है?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 3.
उत्तल दर्पण का प्रयोग कारों में पीछे की साइड देखने के दर्पण बनाने में क्यों किया जाता है?
उत्तर:
इसका दृष्टि क्षेत्र विस्तृत होने तथा इसके द्वारा सीधा प्रतिबिम्ब बनने के कारण।

प्रश्न 4.
प्रकाश का परावर्तन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब कोई किरण किसी सतह पर आपतित होकर उसी माध्यम में पुनः वापस लौटती है, तो इस परिघटना को परावर्तन कहते हैं। सघनता से पॉलिश किया हुआ सतह या दर्पण प्रकाश का परावर्तन करता है।

प्रश्न 5
परावर्तन के नियम को लिखिए।
उत्तर:
(i) आपतित किरण परावर्तित किरण तथा अभिलम्ब तीनों एक ही समतल में होते हैं।
(ii) नियमित परावर्तन में आपतन कोण Zi सदैव परावर्तन कोण Zr के बराबर होता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 6.
दर्पण तथा उसके प्रकार लिखिए।
उत्तर:
दर्पण – उच्च पॉलिश की हुई परावर्तक सतह को दर्पण कहते हैं। दर्पण तीन प्रकार के होते हैं:
(i) समतल दर्पण
(ii) अवतल दर्पण
(iii) उत्तल दर्पण|

प्रश्न 7.
अवतल दर्पण तथा उत्तल दर्पण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
अवतल दर्पण-यदि बाहरी भाग को कलई किया जाये और भीतरी भाग से प्रकाश का परावर्तन हो तो उसे अवतल दर्पण कहते हैं।
उत्तल दर्पण – यदि किसी गोलीय दर्पण का आन्तरिक भाग कलई कर दिया जाये और बाहरी भाग से प्रकाश का परावर्तन हो तो उसे उत्तल दर्पण कहते हैं।

प्रश्न 8.
गोलीय दर्पण का सूत्र लिखिए और उसे समझाइए।
उत्तर:
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{u}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{v}}\) जहाँ f, v तथा u क्रमशः फोकस दूरी, प्रतिबिम् की दूरी और वस्तु की दूरी है f, वक्रता त्रिज्या R की आधी होती है। अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक तथा उत्तल दर्पण के लिए f धनात्मक होता है।

प्रश्न 9.
किसी गोलीय दर्पण की आवर्धन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
आवर्धन (m) – प्रतिबिम्ब का आकार (h) और बिम्ब के आकार (h) के अनुपात को गोलीय दर्पण का आवर्धन कहते हैं अर्थात्
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 1

प्रश्न 10.
न्यूनतम विचलन की अवस्था में प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक ज्ञात करने का सूत्र लिखो।
उत्तर:
n2 = \(\frac{\sin \left(\frac{A+D_m}{2}\right)}{\sin \frac{A}{2}}\)
जहाँ n2 = हवा के सापेक्ष प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक
A = प्रिज्म कोण
Dm = न्यूनतम विचलन कोण

प्रश्न 11.
अपवर्तन का मूल कारण क्या है?
उत्तर:
भिन्न-भिन्न माध्यमों में प्रकाश के वेग का भिन्न-भिन्न होना अपवर्तन का मूल कारण है।

प्रश्न 12.
उत्तल दर्पण में आवर्धन (m) का मान वास्तविक प्रतिबिम्ब और आभासी प्रतिबिम्ब के लिए कैसा होता है?
उत्तर:
वास्तविक प्रतिबिम्ब के लिए ऋणात्मक और आभासी प्रतिबिम्ब के लिए धनात्मक होता है।

प्रश्न 13.
अवतल दर्पण में आवर्धन (m) का मान किस पर निर्भर करता है और उत्तल दर्पण में (m) का मान सदैव किस तरह का होता है?
उत्तर:
प्रतिबिम्ब की स्थिति पर निर्भर करता है और आवर्धन (m) उत्तल दर्पण के लिए हमेशा +ve होता है।

प्रश्न 14.
एक समतल दर्पण पर प्रकाश की किरण 45° कोण पर आपतित होती है तो परावर्तित एवं आपतित किरण के मध्य कोण कितना होगा?
उत्तर:
90°।

प्रश्न 15.
प्रकाश का अपवर्तन परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
जब कोई प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो उसका पथ विचलित हो जाता है। इस परिघटना को अपवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 16.
अपवर्तन के नियम लिखिए।
उत्तर:
(i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ पर अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं।
(ii) किन्हीं दो माध्यमों के लिए तथा एक निश्चित रंग (तरंगदैर्ध्य ) के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या की निष्पत्ति एक नियतांक होती है।
यदि आपतन कोण व अपवर्तन कोण है, तो sini/sin r = नियतांक

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 17.
पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
र-पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflection ): जब सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से आगे थोड़ा-सा ही बढ़ाया जाता है, तो सम्पूर्ण आपतित प्रकाश, परावर्तन के नियमों के अनुसार परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आता है। इस घटना को प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।

प्रश्न 18.
क्रान्तिक कोण किसे कहते हैं?
उत्तर:
सघन माध्यम में बना वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में बना अपवर्तन कोण समकोण अर्थात 90° होता है, दोनों माध्यमों के अन्तरापृष्ठ के लिए क्रान्तिक कोण कहलाता है।

प्रश्न 19.
पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए कोई दो शर्तें लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर गतिमान होना चाहिए।
(ii) आपतन कोण का मान दिए गए माध्यम में क्रान्तिक कोण से अधिक होना चाहिए।

प्रश्न 20.
किसी गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर:
n2/v – n1/v = n2 – n1/R

प्रश्न 21.
किसी लेन्स द्वारा अपवर्तन के लिए सूत्र को लिखिए।
उत्तर:
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = n21 – 1 (\(\frac{1}{\mathrm{R1}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{R2}}\))

प्रश्न 22.
लेन्स को परिभाषित करते हुए इसके लिए सूत्र
उत्तर:
दो पृष्ठ से घिरा हुआ कोई पारदर्शी माध्यम, जिसका एक या दोनों पृष्ठ गोलीय हैं, लेन्स कहलाता है लेन्स दो प्रकार के होते हैं:
(1) उत्तल लेन्स
(2) अवतल लेन्स
वस्तु की दूरी, प्रतिबिम्ब की दूरी और लेन्स की फोकस दूरी के मध्य सम्बन्ध लेन्स सूत्र कहलाता है।
अर्थात् –\(\frac{1}{\mathrm{u}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{v}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\)

प्रश्न 23.
उत्तल अथवा अवतल लेन्स द्वारा बने सीधे (तथा आभासी) प्रतिबिम्ब के लिए m का मान कैसा होता है?
उत्तर:
धनात्मक

प्रश्न 24.
उत्तल अथवा अवतल लेन्स द्वारा बने किसी उलटे (तथा वास्तविक) प्रतिबिम्ब के लिए m का मान किस तरह का होता है?
उत्तर:
m का मान ऋणात्मक होता है।

प्रश्न 25.
एक 1.45 अपवर्तनांक वाला काँच का लेन्स जब किसी द्रव में डुबोया जाता है, तो वह दिखाई नहीं देता है। द्रव का अपवर्तनांक क्या होगा?
उत्तर:
लेन्स के पदार्थ (काँच) के अपवर्तनांक के बराबर अर्थात्

प्रश्न 26.
एक अपवर्तनांक वाला एक उत्तल लेन्स एक ऐसे माध्यम में रखा जाता है, जिसका अपवर्तनांक लेन्स के अपवर्तनांक के बराबर है। इस माध्यम में लेन्स की फोकस दूरी क्या होगी?
उत्तर:
इस दशा में लेन्स काँच की समतल प्लेट की भाँति व्यवहार करेगा अतः इसकी फोकस दूरी अनन्त होगी।

प्रश्न 27.
अभिसारी लेन्सों की क्षमता लेन्स की क्षमता होती “होती है और अपसारी है।
उत्तर:
धनात्मक, ऋणात्मक।

प्रश्न 28.
लेन्स की क्षमता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी लेन्स की क्षमता को लेन्स की फोकस दूरी के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है।
अर्थात् P = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) (m)

प्रश्न 29.
यदि f1. f2 f3 …… फोकस दूरियों के बहुत से लेन्स एक-दूसरे के सम्पर्क में रखे हैं, तो इस संयोजन की प्रभावी फोकस दूरी क्या होगी?
उत्तर:
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f1}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{f2}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{f3}}\) + …………..
क्षमता के पदों में P = P1 + P2 + P3 + …………

प्रश्न 30.
किसी दिए हुए प्रिज्म के लिए विचलन कोण का मान किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
किसी दिए हुए प्रिज्म के लिए विचलन कोण का मान प्रिज्म पर आपतित प्रकाश किरण के आपतन कोण पर निर्भर करता है।

प्रश्न 31.
किस रंग के लिए विचलन कोण का मान अधिकतम और न्यूनतम होता है?
उत्तर:
बैंगनी रंग के लिए अधिकतम और लाल रंग के लिए न्यूनतम होता है

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 32.
न्यूनतम विचलन कोण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
एक विशेष आपतन कोण पर विचलन कोण का मान न्यूनतम होता है। उसे न्यूनतम विचलन कोण कहते हैं।

प्रश्न 33.
वर्ण विक्षेपण (Dispersion) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
प्रिज्म के द्वारा श्वेत प्रकाश की किरण का सात रंगों में विभाजित होना वर्ण विक्षेपण कहलाता है

प्रश्न 34.
वर्ण विक्षेपण का क्या कारण है?
उत्तर:
वर्ण विक्षेपण का कारण पारदर्शी माध्यम में भिन्न-भिन्न रंगों के लिए प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होना है।

प्रश्न 35.
वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रिज्म से श्वेत प्रकाश के विक्षेपण के कारण प्राप्त रंगों की पट्टिकाओं (Bands) को वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम कहते हैं। इस स्पेक्ट्रम में रंगों का क्रम VIBGYOR या बैंनी आहपीनाला होता है।

प्रश्न 36.
प्रिज्म की विक्षेपण क्षमता को लिखिए।
उत्तर:
किसी प्रिज्म की वर्ण विक्षेपण क्षमता जितनी अधिक होगी, उस पदार्थ से निर्मित प्रिज्म से प्राप्त स्पेक्ट्रम उतना ही विस्तृत होगा।

प्रश्न 37.
किसी प्रिज्म की वर्ण विक्षेपण क्षमता किस पर निर्भर करती है?
उत्तर:
प्रिज्म की वर्ण विक्षेपण क्षमता उसके पदार्थ पर निर्भर करती है अपवर्तन कोण पर नहीं।

प्रश्न 38.
किसी त्रिभुजाकार प्रिज्म के लिए आपतन कोण (i) तथा विचलन कोण (8) के बीच ग्राफ को खींचिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 2
(i) तथा विचलण कोण (8) के बीच एक ग्राफ।

प्रश्न 39.
एक उत्तल लेन्स जिसका अपवर्तनांक n2. है. को एक तरल जिसका अपवर्तनांक 11 है, में डुबोया जाता है (n2 > n1 )। लेन्स की कार्य- शैली में क्या अन्तर आयेगा ?
उत्तर;
यह लेन्स अवतल लेन्स की भाँति कार्य करेगा।

प्रश्न 40.
एक उत्तल लेन्स (n = 1.5) की फोकस दूरी पर क्या प्रभाव पड़ेगा जब इसको जल में डुबोया जाता है?
उत्तर:
∴ Whg < ang, अतः जल में लेन्स की फोकस दूरी बढ़ जायेगी परन्तु प्रकृति नहीं बदलेगी।

प्रश्न 41.
क्राउन काँच की विक्षेपण क्षमता फ्लिन्ट काँच से कम होती है या अधिक? लिखिए।
उत्तर:
कम होती है।

प्रश्न 42
प्रकाशीय उपकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे उपकरण जो मानव को समीप तथा दूर की वस्तुओं को देखने में सहायता करते हैं, प्रकाशीय उपकरण या यंत्र कहलाते हैं।

प्रश्न 43.
अभिदृश्यक लेन्स की आवर्धन क्षमता को लिखिए।
उत्तर:
अभिदृश्य लेन्स की आवर्धन क्षमता का मान mo =v/u से ज्ञात करते हैं।

प्रश्न 44.
अभिकेन्द्र लेन्स की आवर्धन क्षमता का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
me = D/VC[1 + Ve/fe]

प्रश्न 45.
एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी तथा एक दूरदर्शी की रचना को देखकर आप कैसे भेद करेंगे कि कौन किस प्रकार का प्रकाशिक यन्त्र है?
उत्तर:
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक का द्वारक बहुत छोटा तथा दूरदर्शी लेन्स का द्वारक बहुत बड़ा होता है। अतः अभिदृश्यक के द्वारकों को देखकर दोनों प्रकार के प्रकाशिक यन्त्रों में भेद किया जा सकता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 46.
सामान्य समायोजन में दूरदर्शी की लम्बाई कितनी होती है?
उत्तर:
(fo + fe)

प्रश्न 47.
मोटर वाहनों में पीछे के ट्रैफिक को देखने हेतु चालक किस दर्पण को उपयोग में लेता है और क्यों ?
उत्तर:
चालक उत्तल दर्पण का उपयोग लेता है। चूँकि इससे बनने वाला प्रतिबिम्ब सीधा, आभासी एवं छोटा होता है, जिसके फलस्वरूप पश्च दृश्य क्षेत्र बड़ा हो जाता है।

प्रश्न 48.
दो पतले लेंस, जिनकी क्षमता + 5D एवं 3D है, परस्पर सम्पर्क में रखे हैं। संयोजन की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
प्रश्नानुसार
P1 = + 5D
P2= – 3D
∴ P = P1 + P2
= + 5D – 3D = + 2D
फोकस दूरी
f = \(\frac{1}{\mathrm{p}}\) (मीटर में)
= \(\frac{1}{\mathrm{2}}\) मीटर = \(\frac{1}{\mathrm{2}}\) x 100 = 50 सेमी.

प्रश्न 49.
खगोलीय दूरदर्शी का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 3

प्रश्न 50.
प्राथमिक इन्द्रधनुष तथा द्वितीयक इन्द्रधनुष में बूँद के अन्दर कितनी बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है?
उत्तर:
प्राथमिक इन्द्रधनुष का निर्माण पानी की बूँदों पर सूर्य की किरणों के दो अपवर्तन तथा एक पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से होता है, जबकि द्वितीयक इन्द्रधनुष का निर्माण पानी की बूँदों पर प्रकाश के दो अपवर्तन तथा दो पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से होता है।

प्रश्न 51.
अवतल दर्पण के लिए बिंब दूरी u, प्रतिबिंब दूरी (v) एवं फोकस दूरी (f) में संबंध लिखिए।
उत्तर:
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{u}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{v}}\)

प्रश्न 52.
जब प्रकाश किसी प्रकाशतः सघन माध्यम से विरल माध्यम में गमन करता है, तब आपतन का क्रांतिक कोण प्रकाश के वर्ण (रंग) पर निर्भर क्यों करता है?
उत्तर:
भिन्न-भिन्न रंग की तरंगदैर्ध्य के लिये अपवर्तनांक भिन्न-भिन्न होते हैं। u = a + b/λ2 होता है, इसलिये क्रान्तिक कोण sin ic = 1/μ का मान भी भिन्न-भिन्न रंग के लिये भिन्न-भिन्न होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
सिद्ध कीजिए n12 = 1/n21
उत्तर:
सामने के चित्र में यदि n21 माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक है तब स्नेल नियम से
n21 = sini/sin r1 …..(i)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 4
इसी तरह से यदि n12 माध्यम 1 का माध्यम 2 के सापेक्ष अपवर्तनांक है तब स्नेल नियम से
n12 = sini2/sin r2 ……….. (ii)
समीकरण (i) तथा (ii) का गुणा करने पर
n21 × n12 = \(\frac{\sin i_1}{\sin r_1}\) × \(\frac{\sin i_2}{\sin r_2}\)
चित्र से ∠r1 = ∠i2
और ∠i1 = ∠r2
∴ n1 x n12 = sini/sin r1 x sini2/sin r2
या
n21 x n12 = 1
या
n12 = 1/n21 इतिसिद्धम्

प्रश्न 2.
जब कोई प्रकाश किरण वायुमण्डल (a) से दो माध्यमों जल (b) तथा काँच (c) के संयोजन से होकर जाती है, तो तीन माध्यमों के अपवर्तनांकों में सम्बन्ध ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
बिन्दुओं A, B तथा C पर स्नेल का नियम को लगाने पर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 5

प्रश्न 3.
एक प्रकाश किरण माध्यम (1) से माध्यम (2) में अपवर्तित होती है। इनके अपवर्तनांक क्रमश: n1 तथा n2 हैं तथा n2 < n1 क्रान्तिक आपतन कोण के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
जब आपतन कोण = क्रान्तिक कोण c तो इसके लिए
अपवर्तन कोण r = 90°
परन्तु स्नेल के नियम से n sini = n2 sin r
∴ n1 sin c = n2. sin 90° = n2 x 1 = n2
या sin c = (n2/n1) c = sin-1(n2/n1)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 4.
क्या किसी माध्यम का दूसरे माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक 1 से कम हो सकता है?
उत्तर:
हाँ।
उदाहरणार्थ-काँच के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक
gnw = nw/ng = 4/3/3/2 = 8/9
जो कि एक से कम है।

प्रश्न 5.
सिद्ध कीजिए कि n12 = 1/sin ic जहाँ पर Ic क्रान्तिक कोण है।
उत्तर:
वह आपतन कोण जिसका तदनुरूपी अपवर्तन कोण 90° होता है, वह दिए हुए माध्यमों के युगल के लिए क्रान्तिक कोण ic कहलाता है। स्नेल के नियम n21 = sini/sinr से हम देखते हैं कि यदि आपेक्षिक अपवर्तनांक एक से कम है, तो क्योंकि sinr का अधिकतम मान एक होता है अतः sini के मान की कोई ऊपरी सीमा है जिस तक यह नियम लागू किया जा सकता है। यह है i = ic इस प्रकार
sinic = n21
i के ic से अधिक मानों के स्नेल के अपवर्तन के नियम को लागू नहीं किया जा सकता है अतः कोई अपवर्तन संभव नहीं होता। सघन माध्यम 2 का विरल माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक होगा।
n12 = 1/sinic

प्रश्न 6.
क्या कारण है कि सूर्य वास्तविक सूर्योदय से कुछ पहले दृष्टिगोचर होने लगता है तथा वास्तविक सूर्यास्त के कुछ समय पश्चात् तक दृष्टिगोचर होता है? समझाइए।
उत्तर:
इसका मुख्य कारण प्रकाश का अपवर्तन है। वास्तविक सूर्योदय से हमारा तात्पर्य है क्षितिज से सूर्य का ऊपर उठना चित्र में क्षितिज के सापेक्ष सूर्य की वास्तविक एवं आभासी स्थितियाँ दर्शायी गई हैं। चित्र में इस प्रभाव को समझने की दृष्टि से आवर्धित करके दर्शाया गया है। निर्वात के सापेक्ष वायु का अपवर्तनांक 1.00029 है। इसके कारण सूर्य की दिशा में लगभग आधे डिग्री ( 1/2°) का आभासी विस्थापन होता है जिसका वास्तविक सूर्यास्त तथा आभासी सूर्यास्त में तदनुरूपी अंतर लगभग 2 मिनट है। सूर्यास्त तथा सूर्योदय के समय सूर्य का आभासी चपटापन (अंडाकार आकृति) भी इसी परिघटना के कारण ही है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 6

प्रश्न 7.
किसी उत्तल लेन्स के पदार्थ का अपवर्तनांक 1.5 है तथा इसकी दोनों सतहों की वक्रता त्रिज्यायें बराबर हैं सिद्ध कीजिए कि उसकी फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या के बराबर है।
उत्तर:
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = (n – 1)(\(\frac{1}{\mathrm{R1}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{R2}}\))
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = (1.5 – 1)(\(\frac{1}{\mathrm{R}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{R}}\))
⇒ \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = 0.5 × (\(\frac{2}{\mathrm{R}}\)) = \(\frac{1}{\mathrm{R}}\)
अथवा f = R

प्रश्न 8.
वायु का बुलबुला जल में किस प्रकार के लेन्स की भाँति व्यवहार करेगा?
उत्तर:
वायु के बुलबुले के दोनों पृष्ठ उत्तल होते हैं। अतः यह एक उत्तल लेन्स की भाँति व्यवहार करता है लेकिन जल का अपवर्तनांक वायु के अपवर्तनांक से अधिक होता है। अतः जल की टंकी में स्थित वायु के बुलबुले की प्रकृति बदल जाने के कारण यह अवतल लेन्स की भाँति कार्य करेगा।

प्रश्न 9.
एक उत्तल लेन्स की फोकस दूरी किस प्रकार परिवर्तित होगी यदि बैंगनी प्रकाश के स्थान पर लाल प्रकाश प्रयुक्त किया जाये?
उत्तर:
∵ f α \(\frac{1}{(n-1)}\)
तथा nv > nR, अतः बैंगनी प्रकाश के स्थान पर लाल प्रकाश प्रयुक्त करने से लेन्स की फोकस दूरी बढ़ जायेगी।

प्रश्न 10.
प्रकाशिक तंतुओं के बंडल का उपयोग किस प्रकार से किया जा सकता है? समझाइए
उत्तर:
प्रकाशिक तंतुओं के बंडल (गुच्छ) का कई प्रकार से उपयोग किया जा सकता है। प्रकाशिक तंतुओं का बड़े पैमाने पर वैद्युत संकेतों, जिन्हें उचित ट्रांसड्यूसरों द्वारा प्रकाश में परिवर्तित कर लेते हैं, के प्रेषण तथा अभिग्रहण में उपयोग किया जाता है। स्पष्ट है कि प्रकाशिक तंतुओं का उपयोग प्रकाशिक संकेत प्रेषण के लिए भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, इन्हें आंतरिक अंगों जैसे ग्रसिका आमाशय तथा आंत्रों के दृश्य अवलोकन के लिए ‘लाइट पाइप’ के रूप में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 11.
यदि हम किसी अवतल दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के नीचे का आधा भाग किसी अपारदर्शी (अपरावर्ती) पदार्थ से ढक देते हैं तब दर्पण के सामने स्थित किसी बिंब के दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
आप सोच सकते हैं कि प्रतिबिंब में बिंब का आधा भाग दिखाई देगा। परंतु यह मानते हुए कि परावर्तन के नियम दर्पण के शेष भाग पर भी लागू होते हैं, अतः दर्पण द्वारा बिंब का पूर्ण प्रतिबिंब बनेगा। तथापि, क्योंकि परावर्ती पृष्ठ का क्षेत्रफल कम हो गया है इसलिए प्रतिबिंब की तीव्रता कम हो जाएगी अर्थात् आधी हो जाएगी।

प्रश्न 12.
किसी अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष पर एक मोबाइल फोन रखा है। उचित किरण आरेख द्वारा प्रतिबिंब की रचना दर्शाइए। व्याख्या कीजिए कि आवर्धन एकसमान क्यों नहीं है क्या प्रतिबिंब की विकृति दर्पण के सापेक्ष फोन की स्थिति पर निर्भर करती है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 7
चित्र में फोन के प्रतिबिंब की रचना का प्रकाश-किरण आरेख दर्शाया गया है। मुख्य अक्ष के लंबवत् समतल में स्थित भाग का प्रतिबिंब उसी समतल में होगा। यह उसी साइज का होगा, अर्थात् BC = BC।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 13.
उत्तल लेन्स तथा अवतल लेन्स से गुजरने वाली प्रकाश किरणों का अनुरेखन कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 8

प्रश्न 14.
लेन्स की क्षमता से क्या तात्पर्य है? इसे समझाइए।
उत्तर:
लेन्स की क्षमता किसी लेन्स की क्षमता P को उस कोण की स्पर्शज्या से परिभाषित करते हैं, जिससे यह किसी प्रकाश पुंज को जो प्रकाशिक केंद्र से एकांक दूरी पर आकर गिरता है, अभिसरित या अपसरित करता है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
tanδ = h/f; यदि h = 1 tanδ = 1/f
δ = 1⁄2 (δ के लघु मान के लिए)।
अथवा
अतः
p = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) यहाँ पर f को मीटर में लिया गया है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 9
लेन्स की क्षमता का SI मात्रक डाइऑप्टर (D) = 1D=1m-1 है।
अतः 1m फोकस दूरी के लेन्स की क्षमता एक डाइऑप्टर है। अभिसारी लेसों की क्षमता धनात्मक तथा अपसारी लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। इस प्रकार जब कोई नेत्र चिकित्सक + 2.5 D क्षमता का संशोधक लेन्स निर्धारित करता है, तब + 40 cm फोकस दूरी के उत्तल लेन्स की आवश्यकता होती है। 4.0 D क्षमता के लेन्स से तात्पर्य – 25 cm फोकस दूरी का अवतल लेन्स होता है।

प्रश्न 15.
शुद्ध एवं अशुद्ध स्पैक्ट्रम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
शुद्ध स्पैक्ट्रम – जब श्वेत प्रकाश की किरणें किसी प्रिज्म में से गुजरती हैं तो प्रत्येक किरण पर्दे पर स्पैक्ट्रम बनाती है। यदि स्पैक्ट्रम में प्रत्येक रंग अलग-अलग रूप से दिखाई दे तो इस प्रकार के स्पैक्ट्रम को ‘शुद्ध स्पैक्ट्रम’ कहते हैं शुद्ध स्पैक्ट्रम प्राप्त करने की निम्न शर्तें होती हैं:
(i) रेखा छिद्र संकरा तथा अभिसारी लेन्स के फोकस पर स्थित होना चाहिये।
(ii) प्रिज्म न्यूनतम विचलन की स्थिति में होना चाहिए।
(iii) प्रिज्म से निर्गत एक ही रंग की किरणें अभिसारी लेन्स द्वारा एक ही स्थान पर फोकसित होनी चाहिये।
(iv) आपतित किरणें समान्तर होनी चाहिये।
अशुद्ध स्पैक्ट्रम जब श्वेत प्रकाश की किरणें किसी प्रिज्म में से गुजरती हैं तो प्रत्येक किरण पर्दे पर स्पैक्ट्रम बनाती है। भिन्न-भिन्न रंगों के अतिव्यापन के कारण पर्दे पर ये रंग पृथक् पृथक् दिखाई नहीं देते हैं, इस प्रकार के स्पैक्ट्रम को ‘अशुद्ध स्पैक्ट्रम’ कहते हैं।

प्रश्न 16.
प्रकाश के प्रकीर्णन से क्या अभिप्राय है? इसका दैनिक जीवन में उपयोग बताइये।
उत्तर:
प्रकाश का प्रकीर्णन जब प्रकाश किसी माध्यम में से संचरित होता है तो वह उस माध्यम के कणों के साथ अन्योन्य क्रिया करता है। ये कण आपतित प्रकाश से कुछ ऊर्जा ले लेते हैं तथा उसे पुनः उत्सर्जित कर देते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकीर्णन कहते हैं। प्रकाश के प्रकीर्णन का उपयोग प्रकाश के प्रकीर्णन से हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं। जब प्रकाश की किरणें किसी खुरदरे पृष्ठ पर गिरती हैं तो परावर्तित किरणें विभिन्न दिशाओं में बिखर जाती हैं। इस बिखरे प्रकाश या प्रकीर्णन प्रकाश के कारण ही हमें अपने कमरे में जबकि सूर्य की किरणें प्रत्यक्ष नहीं आती हैं फिर भी सभी वस्तुयें दिखाई देती हैं। आकाश का रंग नीला दिखाई देना, सूर्योदय एवं सूर्यास्त पर सूर्य का लाल दिखाई देना भी प्रकाश प्रकीर्णन की घटना के कारण हैं।

प्रश्न 17.
समान फोकस दूरी का एक अभिसारी लेन्स तथा एक अपसारी लेन्स समाक्षीय रूप से परस्पर सम्पर्क में रखे गये हैं। संयोजन की फोकस दूरी तथा क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
र-संयोजन की फोकस दूरी F हो, तो
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f1}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{f2}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{f}}\)
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = 0
अतः
F = \(\frac{1}{\mathrm{0}}\) = ∞ अर्थात्
F= अनन्त अतः क्षमता P = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\)
P = 1/∞ = 0
अतः संयोजन लेन्स की फोकस दूरी अनन्त होगी और संयोजन लेन्स की क्षमता P = शून्य होगी।

प्रश्न 18.
सरल सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता किस रंग के प्रकाश के लिए अधिकतम तथा किस रंग के प्रकाश के लिए न्यूनतम होगी?
उत्तर:
fv < fgRअतः सूत्र m = (1 + D/f) स्पष्ट है कि बैंगनी रंग के लिए आवर्धन क्षमता अधिकतम तथा लाल रंग के लिए न्यूनतम होगी।

प्रश्न 19.
दूरदर्शी द्वारा अन्तिम प्रतिबिम्ब जब अनन्त पर बन रहा हो तब उसकी नली की लम्बाई कितनी होती है? यदि प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने तब लम्बाई पहले से कम होगी अथवा अधिक?
उत्तर:
जब प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनेगा तो नली की लम्बाई (fo + fe) होगी। यहाँ fo अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी है तथा fe नेत्रिका की फोकस दूरी है परन्तु यदि अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है तब नली की लम्बाई (fo + ue) होगी, जहाँ u अभिदृश्यक लेन्स से बने प्रतिबिम्ब की नेत्रिका से दूरी है। यह लम्बाई (fo + fe) से कम होगी।

प्रश्न 20.
दूरदर्शी का अभिदृश्यक बड़ा और नेत्रिका छोटा है, जबकि सूक्ष्मदर्शी का अभिदृश्यक छोटा तथा नेत्रिका बड़ा होता है। यदि किसी दूरदर्शी को उलट दें, तो क्या वह सूक्ष्मदर्शी की भाँति प्रयुक्त की जा सकती है? क्या इसी प्रकार सूक्ष्मदर्शी को दूरदर्शी की तरह प्रयुक्त कर सकते हैं?
उत्तर:
नहीं। क्योंकि दूरदर्शी के लेन्सों की फोकस – दूरियों में अन्तर सूक्ष्मदर्शी के लेन्सों की फोकस दूरियों में अन्तर की अपेक्षा बहुत अधिक होता है। इस प्रकार दूरदर्शी को उलटकर सूक्ष्मदर्शी की भाँति प्रयुक्त करने पर उसकी आवर्धन क्षमता बहुत कम होगी। इसी तरह सूक्ष्मदर्शी को उलटकर दूरदर्शी की भाँति प्रयुक्त करने पर उसकी आवर्धन क्षमता कम हो जायेगी।

प्रश्न 21.
(a) बहुत दूर स्थित तारे जिन्हें नेत्र द्वारा नहीं देखा जा सकता, वे दूरदर्शी द्वारा देखे जा सकते हैं। क्यों?
(b) दो दूरदर्शियों की आवर्धन क्षमता समान है लेकिन इनके अभिदृश्यक लेन्सों के द्वारक अलग-अलग हैं। इनके द्वारा बनने वाले अंतिम प्रतिबिम्बों में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
(a) नेत्र के लेन्स का द्वारक बहुत छोटा होता है तथा बहुत अधिक दूर स्थित तारे से आने वाला प्रकाश बहुत कम होता है तथा हमारे नेत्र के रेटिना को उत्तेजित करने में असमर्थ होता है परन्तु दूरदर्शी का द्वारक, नेत्र की तुलना में बहुत बड़ा होता है। इस कारण यह दूरस्थ तारे से उचित प्रकाश प्राप्त कर सकता है तथा तारे का चमकीला प्रतिबिम्ब बनाता है, जिसे देखा जा सकता है।
(b) प्रतिबिम्बों की चमक अलग-अलग होगी; क्योंकि यह द्वारक के व्यास पर निर्भर करती है। बड़े द्वारक के अभिदृश्यक लेन्स युक्त दूरदर्शी द्वारा बना प्रतिबिम्ब अधिक चमकीला होगा। साथ ही इस दूरदर्शी की विभेदन क्षमता (1.222) भी छोटे द्वारक के अभिदृश्यक लेन्स युक्त दूरदर्शी की तुलना में अधिक होगी।

प्रश्न 22.
(a) किसी दूरदर्शी को उलटकर अभिदृश्यक की ओर देखने पर बहुत छोटी प्रतीत होती है, क्यों?
(b) सूक्ष्मदर्शी में ऐसा क्यों नहीं होता है?
उत्तर:
(a) दूरदर्शी में अभिदृश्यक लेन्स की फोकस दूरी (f0) नेत्रिका की फोकस दूरी (fc) से कहीं अधिक होती है तथा इसकी आवर्धन क्षमता f0/fc होती है। पलटकर देखने पर आवर्धन क्षमता fc/f0 हो जाएगी क्योंकि fo << fc अतः अब वस्तु बहुत ही छोटी दिखाई देगी।
क्योंकि
(b) संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आर्धन क्षमता का सूत्र v0/u0 × D/fe है; क्योंकि v0 का मान सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक की फोकस दूरी f0 से थोड़ा सा ही अधिक होता है, अतः आवर्धन v0/f0 × D/fe माना जा सकता है; fo तथा दोनों के ही मान कम होते हैं। अतः सूक्ष्मदर्शी को उलटने पर भी vo के मान में कोई विशेष अन्तर न होने से आवर्धन क्षमता लगभग अपरिवर्तित रहती है।

प्रश्न 23.
“सूक्ष्मदर्शी एवं दूरदर्शी में उच्च आवर्धन क्षमता के साथ-साथ पर्याप्त विभेदन क्षमता भी होनी चाहिए।” उपर्युक्त कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आवर्धन क्षमता अधिक होने से वस्तु बड़ी एवं स्पष्ट दिखाई देती है, किन्तु यदि विभेदन क्षमता कम है तो उसकी संरचना को स्पष्ट नहीं देखा जा सकता है।

प्रश्न 24.
सुमेलित कीजिए:

कॉलम Iकॉलम II
A μ  = tanipP स्नैल का नियम
B μ = 1/sinicQ ब्रुस्टर का नियम प्रिज्म
C μ = sini/sinrR पूर्ण
D μ =  \(\frac{\sin \left(\frac{A+D_m}{2}\right)}{\sin \frac{A}{2}}\)S आन्तरिक परावर्तन

उत्तर:

AQ
BS
CP
DR

प्रश्न 25.
निम्न को परिभाषित कीजिए:
(a) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन
(b) प्रकाश का विवर्तन
(c) प्रकाश का अपवर्तन।
उत्तर:
(a) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflection): जब सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से आगे थोड़ा-सा ही बढ़ाया जाता है, तो सम्पूर्ण आपतित प्रकाश, परावर्तन नियमों के अनुसार परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आता है जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 10
पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए आवश्यक शर्तें:
(1) प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
(2) सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से बड़ा होना चाहिए।

(b) प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of light): विवर्तन तरंगों का एक अभिलाक्षणिक गुण है। जब तरंगों के मार्ग में कोई अवरोध आता है अथवा तरंगें किसी सूक्ष्म छिद्र से गुजरती हैं तो वे अवरोध या छिद्र के किनारे पर ‘आंशिक रूप से मुड़ जाती हैं। इस घटना को विवर्तन कहते हैं। विवर्तन की घटना सभी प्रकार की तरंगों, जैसे प्रकाश तरंगें, ध्वनि तरंगें इत्यादि में देखने को मिलती है। तरंगों का विवर्तन होने के लिये अवरोध का आकार तरंगों की तरंगदैर्घ्य की कोटि का होना चाहिये।

(c) प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of light): प्रकाश की किरणें किसी समांगी (homogeneous ) एवं पारदर्शी माध्यम में सीधी रेखाओं में चलती हैं, परन्तु जब प्रकाश की कोई किरण इस प्रकार के एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाती है तो किरण का कुछ भाग माध्यमों के सीमा पृष्ठ (boundary surface) पर परावर्तित होकर पहले माध्यम में ही लौट आता है और शेष भाग दूसरे माध्यम में चला जाता है। दूसरे माध्यम में जाने पर प्रायः किरण की दिशा बदल जाती है अर्थात् प्रकाश की किरण अपने प्रारम्भिक मार्ग से विचलित (deviate) हो जाती है। “प्रकाश किरण का एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाने पर अपने पथ से विचलित हो जाना प्रकाश का अपवर्तन (Refraction) कहलाता है।”

प्रश्न 26.
तरंगाय की परिभाषा लिखिए। हाइगेन्स के सिद्धान्त का उपयोग करके किसी उत्तल लेंस पर आपतित समतल तरंग के अपवर्तित तरंगाय की आकृति खींचिए।
अथवा
(a) जब कोई तरंग किसी विरल माध्यम से किसी सघन माध्यम संचरण करती है, तब उस तरंग का कौन-सा अभिलक्षण परिवर्तित नहीं होता और क्यों?
(b) दो माध्यमों के अपवर्तनांक μ1 और μ2 हैं, उनमें तरंग के वेगों का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
जब किसी माध्यम में स्थित तरंग स्रोत से तरंगें निकलती हैं तो इसके चारों ओर स्थित माध्यम के कण कम्पन करने लगते हैं। माध्यम में वह पृष्ठ जिसमें स्थित सभी कण कम्पन की समान कला में हों, तरंगाग्र कहलाता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 11
(a) आवृत्ति स्थिर रहती है क्योंकि दो माध्यमों में प्रति सेकण्ड प्रवेश करते समय तरंगों की संख्या समान होती है।
(b) भिन्न-भिन्न माध्यमों में वेग का मान इस प्रकार दिया जा सकता है और इस प्रकार से प्रकाश की चाल अपवर्तनांक के माध्यम के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 27.
(a) प्रकाश की एक किरण अपवर्तनांक aμg = 1.5 के काँच के समकोणिक प्रिज्म के फलक AB पर अभिलम्बवत आपतित है। यह प्रिज्म किसी अज्ञात अपवर्तनांक के द्रव में आंशिक डूबा है। द्रव के अपवर्तनांक का मान ज्ञात कीजिए ताकि प्रिज्म से अपवर्तन के पश्चात् प्रकाश की किरण फलक BC के अनुदिश पृष्ठसर्पी हो।

(b) उस प्रकरण में किरण का पथ खींचिये जब यह किरण फलक AC पर अभिलम्बवत आपतन करती है।
उत्तर:
(a) स्नेल के नियम से
aμg sinic = aμ1 sin90°
1.5 × 60° =aμ1
aμ1 = 1.5 × 3/2
= 1.3
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 13

(b) आपतित किरण 30° के कोण पर टकराती है जो कि ic से कम है। इस कारण से प्रकाश किरण अभिलम्ब से दूर हट जाती है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 14

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 36 सेमी. हो तो इसकी वक्रता त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
प्रश्नानुसार
f = 36 सेमी.
हम जानते हैं-फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या में सम्बन्ध
f = 1⁄2R
∴ R = 2f
या
R = 2 × 36 = 72 सेमी.

प्रश्न 2.
3 सेमी. ऊँची एक वस्तु 30 सेमी. फोकस दूरी के उत्तल दर्पण के सम्मुख इससे 60 सेमी. की दूरी पर रखी है। प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
वस्तु की ऊँचाई h = 3 सेमी.
उत्तल दर्पण की फोकस दूरी f = 30 सेमी.
दर्पण से वस्तु की दूरी u = – 60 सेमी.
दर्पण के सूत्र से
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{U}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{V}}\)
या
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{U}}\)
= \(\frac{1}{\mathrm{30}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{-60}}\)
= \(\frac{1}{\mathrm{30}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{60}}\)
⇒ v = 20 सेमी. 20
अतः प्रतिबिम्ब आभासी व सीधा बनेगा अतः दर्पण के पीछे अर्थात्
वस्तु की विपरीत दिशा में दर्पण से 20 सेमी. दूरी पर बनेगा
आवर्धन m = h/n = v/u
h/3 = – (20 सेमी/−60 सेमी) = 1/3
h’ = 1 सेमी.
अतः प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 1 सेमी. होगी।

प्रश्न 3.
एक उत्तल लेन्स द्वारा एक वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब बनता है तथा इसकी लम्बाई वस्तु की लम्बाई की चार गुनी है। यदि लेन्स की फोकस दूरी 20 सेमी. है तो वस्तु के प्रतिबिम्ब की दूरियाँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
f = 20 सेमी. तथा m = 4
∵h’ = 4h दिया
u तथा f के पदों में m का सूत्र
m = f/u+f
⇒ 4 = 20 सेमी/u + 20 सेमी.
4u + 80 = 20
4u = (20 – 80) सेमी.
4u = – 60 सेमी.
लेन्स से वस्तु की दूरी = -15 सेमी.
v तथा f के पदों में m का सूत्र
m = f – v/f
⇒ 4 = 20 सेमी – v/20 सेमी.
80 = 20 – v
v = ( 20 – 80 ) सेमी.
= 60 सेमी.
∴ लेन्स से प्रतिबिम्ब की दूरी v = – 60 सेमी.

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 4.
10 सेमी. फोकस दूरी वाला एक उत्तल लेन्स समाक्षीय रूप से एक 10 सेमी. फोकस दूरी वाले अवतल लेन्स से 5 सेमी. दूरी पर रखा है। यदि एक वस्तु उत्तल लेन्स के सम्मुख 30 सेमी. दूरी पर रखी है तो संयुक्त निकाय द्वारा बने अन्तिम प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
यहाँ पर उत्तल लेन्स के लिए
f= + 10 सेमी. तथा u = – 30 सेमी.
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{U}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) से,
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{U}}\)
= \(\frac{1}{\mathrm{10}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{-30}}\)
= \(\frac{1}{\mathrm{10}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{-30}}\)
= 3-\(\frac{1}{\mathrm{30}}\)
= \(\frac{2}{\mathrm{30}}\)
= \(\frac{1}{\mathrm{15}}\)
v = 15 सेमी.
नीचे चित्र में उत्तल लेन्स द्वारा वस्तु O का बना प्रतिबिम्ब I’ अवतल लेन्स के लिए आभासी वस्तु का कार्य करेगा जिसकी अवतल लेन्स से दूरी u = (15 – 5) सेमी = 10 सेमी.
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 15
इसकी फोकस दूरी f = -10 सेमी.
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{U}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) से
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{U}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{-10}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{10}}\) = 0
अतः संयुक्त निकाय द्वारा बना अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्त पर होगा।

प्रश्न 5.
खगोलीय दूरदर्शक के अभिदृश्यक तथा नेत्रिका लेन्सों की फोकस दूरियाँ क्रमशः 2 मीटर तथा 0.05 मीटर हैं। अन्तिम प्रतिबिम्ब यदि (i) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर (ii) अनन्तता पर बने तो प्रत्येक दशा में दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता तथा लम्बाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(i) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है, तो
आवर्धन क्षमता m = – \(\left[\frac{\mathrm{f}_{\mathrm{o}}}{\mathrm{f}_{\mathrm{e}}}\left(1+\frac{\mathrm{f}_{\mathrm{e}}}{\mathrm{D}}\right)\right]\)
यहाँ अभिदृश्यक की फोकस दूरी f = 2 मीटर = 200 सेमी. तथा नेत्रिका की फोकस दूरी = 0.05 मीटर = 5 सेमी एवं स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D = 25 सेमी.
m = – 200/5(1 + 5/25) = -48
नेत्रिका के लिए fe = 5 सेमी. तथा Ve = 25 सेमी.
∴ \(\frac{1}{\mathrm{fe}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{ve}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{ue}}\)
\(\frac{1}{\mathrm{ue}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{v}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{fe}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{-2.5}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{5}}\)
= \(\frac{-1}{\mathrm{25}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{5}}\) = -(\(\frac{6}{\mathrm{-25}}\))
∴ u = (25/6) सेमी. 4.167 सेमी.
दूरदर्शी की लम्बाई L = fo + ue
= (200 सेमी. + 4.167 सेमी.) = 204.167 सेमी.
(यहाँ ue का मान चिन्ह छोड़कर रखना होता है)

(ii) जब अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनता है, तो
आवर्धन क्षमता m = -(f0/fe) = -(\(\frac{200}{\mathrm{5}}\))
= -40
इस दशा में
दूरदर्शी की लम्बाई L = f0 + fe = (200 + 5) सेमी.
= 205 सेमी.

प्रश्न 6.
एक सरल सूक्ष्मदर्शी में प्रयुक्त लेन्स की फोकस दूरी 5 सेमी है। स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 25 सेमी. है। इसकी आवर्धन क्षमता ज्ञात कीजिए:
(i) जबकि अन्तिम प्रतिबिम्ब अनन्त पर बने,
(ii) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने।
उत्तर:
यहाँ f = 5 सेमी. D = 25 सेमी.
(i) आवर्धन क्षमता m = D/f = 25 सेमी/5 सेमी. = 5

(ii) आवर्धन क्षमता m = 1+ D/f 1 + 25 सेमी/5 सेमी. = 6

प्रश्न 7.
एक यौगिक सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक तथा नेत्रिका की फोकस दूरियाँ क्रमशः 1.0 सेमी. तथा 5.0 सेमी हैं। एक वस्तु अभिदृश्यक से 1.1 सेमी. की दूरी पर रखी जाती है। सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता तथा लम्बाई ज्ञात कीजिए, जबकि अन्तिम प्रतिबिम्ब (i) अनन्त पर बन रहा हो, (ii) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बन रहा हो।
उत्तर:
(i) यहाँ fo = 1.0 सेमी. fe = 5.0 सेमी. तथा g = -1.1 सेमी. D = 25 सेमी.
सूत्र \(\frac{1}{\mathrm{v0}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{u0}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f0}}\) से,
\(\frac{1}{\mathrm{v0}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f0}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{u0}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{1.0}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{-1.1}}\) = 1 – \(\frac{10}{\mathrm{11}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{11}}\)
Vo = 11 सेमी.
अतः आवर्धन क्षमता m
= –\(\left[\frac{v_o}{u_o}\left(1+\frac{D}{f_e}\right)\right]\) = –\(\left[\frac{11}{1.1}\left(1+\frac{25}{5}\right)\right]\) = -60
सूक्ष्मदर्शी की लम्बाई L = Vo + f = (11 + 5) सेमी.
= 16 सेमी

(ii) नेत्रिका के लिए f = 5 सेमी. तथा Ve = -25सेमी.
∴ \(\frac{1}{\mathrm{fe}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{ve}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{ue}}\) से,
\(\frac{1}{\mathrm{ue}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{ve}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{fe}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{-25}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{5}}\) = \(\frac{-6}{\mathrm{5}}\)
अतः आवर्धन क्षमता m =
= \(-\left[\frac{v_0}{u_o}\left(\frac{D}{f_e}\right)\right]\) = \(\left[\frac{11}{1.1}\left(\frac{25}{5}\right)\right]\) = -50
सूक्ष्मदर्शी की लम्बाई L = Vo + ue
= (11 + 4.167) सेमी.
= 15.167 सेमी.

प्रश्न 8.
एक उत्तल लैंस जिसकी वक्रता त्रिज्या R1 = R2 = 24 cm है एवं जिसके पदार्थ का अपवर्तनांक 1.6 है।
(a) वायु में इस लेंस की फोकस दूरी की गणना करो।
(b) यदि इस लैंस को दो समान ऊर्ध्वाधर भागों में बाँट लिया जाये तो प्रत्येक भाग की फोकस दूरी की गणना करिये।
उत्तर:
दिया गया है:
R1 = 24 cm
R2 = – 24 cm
n2 = 1.6, n1 = 1.0
(a) वायु में इस लैंस की फोकस दूरी f का मान निम्न सूत्र से ज्ञात करते हैं
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = (n2 – n1/n1)[\(\frac{1}{\mathrm{R1}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{R2}}\)]
मान रखने पर-
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = (1.6 – 1)/1 [\(\frac{1}{\mathrm{24}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{24}}\)]
= 0.6 × 2/24 = 24 = 240
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{20}}\)
∴ f = 20 cm
(b) n2 = 1.6, n1 = 1.0
मान रखने पर
R1 = 24 cm, R2 = ∞
\(\frac{1}{\mathrm{f1}}\) = (n2 – \(\frac{n1}{\mathrm{n2}}\))[\(\frac{1}{\mathrm{R1}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{R2}}\)]
मान रखने पर
\(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = (1.6 – 1)/1 [\(\frac{1}{\mathrm{24}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{∞}}\)]
= 0.6 × \(\frac{1}{\mathrm{24}}\) = \(\frac{6}{\mathrm{240}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{40}}\)
f1 = 40cm

प्रश्न 9.
निम्न चित्र में दर्शाये लैंस के लिए
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र 16
(i) प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
(ii) प्रतिबिम्ब की स्थिति को लेंस से और दूर करने हेतु एक अन्य लैंस उपर्युक्त लैंस के सम्पर्क में रखा जाता है। इस द्वितीय लैंस की प्रकृति क्या होगी?
उत्तर:
(i) दिया गया है:
f = 10 cm, U = 30 cm, v = ?
सूत्र \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{u}}\) से
मान रखने पर
\(\frac{1}{\mathrm{10}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) – (\(\frac{-1}{\mathrm{30}}\))
⇒ \(\frac{1}{\mathrm{10}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{30}}\)
⇒ \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{10}}\)– \(\frac{1}{\mathrm{30}}\) = \(\frac{2}{\mathrm{30}}\)
या \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{15}}\)
∴ v = 15 cm
अतः प्रतिबिम्ब की स्थिति 15 cm की दूरी पर है।
(ii) प्रतिबिम्ब की स्थिति को लेंस से दूर करने हेतु अवतल

प्रश्न 10.
कोई वस्तु 15 सेमी. वक्रता त्रिज्या के अवतल दर्पण से (i) 10 cm तथा (ii) 5 cm दूरी पर रखी है। प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा आवर्धन परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
वक्रता त्रिज्या = 15 cm.
फोकस दूरी f = 15/2 = -7.5 cm.
(i) बिम्ब की दूरी दर्पण के सूत्र
u = – 10 cm.
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{u}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\)
मान रखने पर
∴ \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{-10}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{-5}}\)
या \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{10}}\) = \(\frac{-10}{\mathrm{75}}\) = \(\frac{-2}{\mathrm{15}}\)
या \(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{-2}{\mathrm{15}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{10}}\) = \(\frac{-4+3}{30}\) = \(\frac{-1}{\mathrm{30}}\)
या v = – 30cm.
प्रतिबिम्ब बिम्ब की दिशा में दर्पण से 30 cm. दूरी पर बनेगा।
आवर्धन m = v/u = \(\frac{-30}{\mathrm{10}}\)
m =-3
प्रतिबिम्ब आवर्धित वास्तविक तथा उल्टा है।
(ii) बिम्ब दूरी u = -5cm. तब दर्पण सूत्र से
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{-5}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{-7.5}}\)
या
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) – \(\frac{1}{\mathrm{5}}\) = \(\frac{-1}{\mathrm{10}}\) = \(\frac{-2}{\mathrm{15}}\)
या
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{-2}{\mathrm{15}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{5}}\)
या
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{-2+3}{15}\) = \(\frac{1}{\mathrm{15}}\)
v = 15 cm.
प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 15 cm दूरी पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब आभासी है।
आवर्धन m = \(\frac{-v}{\mathrm{u}}\) = \(\frac{-15}{\mathrm{5}}\) = 3
यह प्रतिबिम्ब आवर्धित, आभासी तथा सीधा है

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र

प्रश्न 11.
3 सेमी आकार की कोई वस्तु 40 सेमी वक्रता त्रिज्या के किसी अवतल दर्पण से 30 सेमी दूरी पर स्थित है। दर्पण से प्रतिबिम्ब की दूरी व आकार ज्ञात करें एवं प्रतिबिम्ब की प्रकृति बताइए।
उत्तर:
यहाँ पर वस्तु का आकार h = 3 सेमी
अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या R = 40 सेमी
अतः दर्पण की फोकस दूरी f = 1\(\frac{1}{\mathrm{2r}}\)
R = \(\frac{-40}{\mathrm{20}}\)
= – 20 सेमी
दर्पण से वस्तु की दूरी u = – 30 सेमी
अतः दर्पण के सूत्र
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{U}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{F}}\) में ज्ञात मान रखने पर
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{-30}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{-20}}\)
\(\frac{1}{\mathrm{V}}\) = \(\frac{-1}{\mathrm{20}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{30}}\) = \(\frac{-3+2}{60}\) = \(\frac{-1}{\mathrm{60}}\)
v = 60 सेमी
इसलिये दर्पण से वस्तु के प्रतिबिम्ब की दूरी v = – 60 सेमी अतः प्रतिबिम्ब दर्पण से 60 सेमी वस्तु की ओर (अर्थात् दर्पण के सामने) बनेगा।
प्रतिबिम्ब के आवर्धन के लिये m = h/h = -(\(\frac{V}{\mathrm{U}}\))
इसलिये प्रतिबिम्ब का आकार h’ = – (\(\frac{V}{\mathrm{U}}\)) h
= \(-\left[\frac{-60}{-30}\right]\) × 3
h’ = – 6 सेमी
अर्थात् प्रतिबिम्ब उल्टा ( वास्तविक ) तथा 6 सेमी ऊँचा बनेगा, जो कि वस्तु से बड़ा होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 9 किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र Read More »

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
हाइगेंस के सिद्धान्त में समान अवस्था में कम्पन कर रहे कणों का तल कहलाता है:
(अ) तरंगाग्र
(ब) अर्द्धावर्ती कटिबंध
(स) अर्द्ध तरंग कटिबंध
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) तरंगाग्र

प्रश्न 2.
हाइगेंस का सिद्धान्त लागू होता है:
(अ) केवल प्रकाश तरंगों के लिये
(ब) केवल ध्वनि तरंगों के लिये
(स) केवल यांत्रिक तरंगों के लिये
(द) उपर्युक्त सभी तरंगों के लिये।
उत्तर:
(ब) केवल ध्वनि तरंगों के लिये

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 3.
हाइगेंस तरंग सिद्धान्त द्वारा निम्नलिखित में से किस घटना की व्याख्या नहीं हो सकती है:
(अ) अपवर्तन
(ब) डॉप्लर प्रभाव
(स) व्यतिकरण
(द) प्रकाश-विद्युत प्रभाव।
उत्तर:
(ब) डॉप्लर प्रभाव

प्रश्न 4.
हाइगेंस के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त में पीछे की ओर लौटने वाली तरंग की अनुपस्थिति साबित की:
(अ) हाइगेंस ने
(ब) न्यूटन ने
(स) स्टोक ने
(द) फ्रेनल ने।
उत्तर:
(स) स्टोक ने

प्रश्न 5.
जब प्रकाश की किरण ऐसे माध्यम में से गुजरती है जिसमें वेग कम होता है तो उसकी तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति का मान क्रमश:
(अ) बढ़ेगा, बढ़ेगा
(ब) घटेगा, अपरिवर्तित
(स) बढ़ेगा, अपरिवर्तित
(द) घंटेगा, घटेगा
उत्तर:
(ब) घटेगा, अपरिवर्तित

प्रश्न 6.
वायु में संचरित एक प्रकाश किरण की तरंगदैर्ध्य λ, आवृत्ति v, वेग तथा तीव्रता I है । यदि यह किरण जल में प्रवेश कर जाती है, तो इन राशियों के मान क्रमशः λ,v,I तथा I’ हो जाते हैं। निम्नलिखित में से कौनसा सम्बन्ध सही है:
(अ) λ = λ
(ब) v = v’
(स) v = v’
(द) I = I’
उत्तर:
(ब) v = v’

प्रश्न 7.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में एक स्थिर बिन्दु पर जहाँ पथान्तर = λ/6 (λ = प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य) है, तीव्रता I है। यदि I0 अधिकतम तीव्रता होत बराबर है:
(अ) 3/4
(ब) 1/√2
(स) √3/2
(द) 1/2
उत्तर:
(अ) 3/4

प्रश्न 8.
दो तरंगें कला सम्बद्ध कहलाती हैं यदि उनके-
(अ) आयाम समान हों
(ब) केवल तरंग समान हों
(स) आयाम व तरंगदैर्ध्य समान हों
(द) बीच कलान्तर स्थिर रहे तथा तरंगदैर्घ्य समान हो।
उत्तर:
(द) बीच कलान्तर स्थिर रहे तथा तरंगदैर्घ्य समान हो।

प्रश्न 9.
यंग के द्विछिद्र रेखा प्रयोग में श्वेत प्रकाश प्रयुक्त करने पर:
(अ) केवल श्वेत व काली फ्रिंजें प्राप्त होंगी
(ब) श्वेत फ्रिंजें प्राप्त होंगी
(स) केन्द्रीय फ्रिंज श्वेत लेकिन दो-तीन फ्रिंजें रंगीन काली दिखाई देंगी
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) केन्द्रीय फ्रिंज श्वेत लेकिन दो-तीन फ्रिंजें रंगीन काली दिखाई देंगी

प्रश्न 10.
द्विप्रिज्म के प्रयोग में कला सम्बद्ध स्रोत प्राप्त किये जाते हैं:
(अ) परावर्तन द्वारा
(ब) अपवर्तन द्वारा
(स) व्यतिकरण द्वारा
(द) विवर्तन द्वारा
उत्तर:
(ब) अपवर्तन द्वारा

प्रश्न 11.
यह प्रकाश स्रोत से उत्सर्जित दो प्रकाश तरंगों द्वारा P बिन्दु पर विस्थापन क्रमश: Y = 5sinor तथा Y2 = 3cosot है, तो दोनों तरंगें होंगी:
(अ) कला असम्बद्ध
(ब) कला सम्बद्ध
(स) आंशिक कला सम्बद्ध
(द) कुछ नहीं कह सकते हैं।
उत्तर:
(ब) कला सम्बद्ध

प्रश्न 12.
समान आयाम व समान तरंगदैर्घ्य की दो तरंगें विभिन्न कलाओं में अध्यारोपित की जाती हैं परिणामी तरंग का आयाम अधिकतम होगा जब उनके बीच कलान्तर है:
(अ) शून्य
(ब) π/2
(स) π
(द) 3π/2
उत्तर:
(अ) शून्य

प्रश्न 13.
प्रकाश स्रोत कला सम्बद्ध होगा, यदि:
(अ) उनके उद्गम स्थान पर कलान्तर नियत रहता है।
(ब) उनके आयाम समान हों।
(स) उनकी आवृत्ति समान हो।
(द) उपर्युक्त सभी बातें उपस्थित हों।
उत्तर:
(अ) उनके उद्गम स्थान पर कलान्तर नियत रहता है।

प्रश्न 14.
यंग के प्रयोग से यदि d को नियम रखते हुये रेखा छिद्र की चौड़ाई बढ़ाई जाये:
(अ) फ्रिज चौड़ाई बढ़ेगी
(ब) फ्रिज चौड़ाई घटेगी
(स) फ्रिज चौड़ाई अपरिवर्तित रहेगी
(द) धीरे-धीरे फ्रिंजें ही लुप्त हो जायेंगी।
उत्तर:
(द) धीरे-धीरे फ्रिंजें ही लुप्त हो जायेंगी।

प्रश्न 15.
एक व्यतिकरण प्रतिरूप में महत्तम तथा न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात 25 : 1 है। व्यतिकरण उत्पन्न करने वाली तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात है:
(अ) 25 : 1
(ब) 5 : 1
(स) 9 : 4
(द) 625 : 1
उत्तर:
(स) 9 : 4

प्रश्न 16.
प्रकाश के कला सम्बद्ध स्रोत हैं संपोषी व्यतिकरण उत्पन्न करते जबकि उनके मध्य कलान्तर होता है:
(अ) π
(ब) π/2
(स) 3π/2
(द) 2π
उत्तर:
(द) 2π

प्रश्न 17.
श्वेत प्रकाश से उत्पन्न व्यतिकरण प्रतिरूप में प्राप्त केन्द्रीय श्वेत दीप्त फ्रिंज के समीप चमकीली फ्रिंज का रंग होगा:
(अ) लाल
(ब) पीला
(स) हरा
(द) बैंगनी।
उत्तर:
(द) बैंगनी।

प्रश्न 18.
यदि यंग के द्वि-स्लिट व्यतिकरण प्रयोग में स्लिटों के बीच की दूरी तीन गुनी कर दी जाये तो फ्रिजों की चौड़ाई हो जाती है:
(अ) \(\frac{1}{3}\) गुनी
(ब) \(\frac{1}{9}\)गुनी
(स) 3 गुनी
(द) 9 गुनी
उत्तर:
(अ) \(\frac{1}{3}\) गुनी

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 19.
यंग के द्वि- स्लिट प्रयोग में सोडियम लैम्प को नीले प्रकाश लैम्प से बदल दिया जाता है, तब:
(अ) फ्रिंजें चमकीली हो जायेंगी
(ब) फ्रिंजें हल्की पड़ जायेंगी
(स) फ्रिज-चौड़ाई बढ़ जायेगी
(द) फ्रिंज-चौड़ाई कम हो जायेगी।
उत्तर:
(अ) \(\frac{1}{3}\) गुनी

प्रश्न 20.
यंग के प्रयोग को पानी में ले जाकर पूरा किया जाये तो फ्रिज चौड़ाई:
(अ) अपरिवर्तित रहेगी
(ब) घट जायेगी
(द) आँकड़े अपर्याप्त हैं।
(स) बढ़ जायेगी
उत्तर:
(ब) घट जायेगी

प्रश्न 21.
यंग के किसी द्वि-झिरी प्रयोग में से एकवर्णी प्रकाश स्रोत का उपयोग किया जाता है। पर्दे पर बनी व्यतिकरण फ्रिजों की आकृति है:
(अ) सरल रेखा
(ब) परवलय
(स) अतिपरवलय
(द) वृत्त।
उत्तर:
(स) अतिपरवलय

प्रश्न 22.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में दोनों स्लिटों को एकवर्णी प्रकाश से प्रकाशित करके व्यतिकरण प्रारूप पर्दे पर प्राप्त किया गया है। जब व्यतिकारी पुंजों में से किसी एक के मार्ग में एक माइका की पतली पट्टी रख दी जाती है, तो-
(अ) फ्रिज चौड़ाई बढ़ जाती है
(ब) फ्रिज चौड़ाई घट जाती है।
(स) फ्रिज चौड़ाई समान रहती है, परन्तु व्यतिकरण प्रारूप विस्थापित हो जाता है
(द) व्यतिकरण प्रारूप अदृश्य हो जाता है।
उत्तर:
(स) फ्रिज चौड़ाई समान रहती है, परन्तु व्यतिकरण प्रारूप विस्थापित हो जाता है

प्रश्न 23.
यंग के द्विक रेखा – छिद्र प्रयोग में d, D तथा λ क्रमश: स्लिटों के बीच की दूरी, स्लिटों से पर्दे की दूरी तथा प्रकाश तरंगदैर्ध्य को व्यक्त करते हैं। फ्रिज चौड़ाई β के लिये निम्नलिखित में से कौन सत्य है/हैं:
(अ) β α D
(ब) β α d
(स) β α λ
(द) β α \(\frac{1}{d}\)
उत्तर:
(अ) β α D

प्रश्न 24.
साबुन के बुलबुले श्वेत प्रकाश में देखने पर रंगीन दिखाई देते हैं। इस घटना का कारण है:
(अ) प्रकीर्णन
(ब) व्यतिकरण
(स) विक्षेपण
(द) विवर्तन
उत्तर:
(ब) व्यतिकरण

प्रश्न 25.
I तथा 4I तीव्रताओं की दो प्रकाश तरंगें व्यतिकरण द्वारा पर्दे पर फ्रिंजें बनाती हैं पर्दे के बिन्दु A पर तरंगों के बीच कलान्तर तथा बिन्दु B पर है। तब A तथा B पर परिणामी तीव्रताओं के बीच अन्तर है:
(अ) 2I
(ब) 4I
(स) 5I
(द) I
उत्तर:
(ब) 4I

प्रश्न 26.
यंग के द्विरेखा छिद्र प्रयोग में तरंगदैर्ध्य 6000 À है, पर्दा रेखा- छिद्रों से 40 सेमी की दूरी पर है तथा फ्रिंजों की परस्पर दूरी 0.012 सेमी. है। रेखा छिद्रों के बीच अन्तराल है:
(अ) 0.24 मिमी.
(ब) 0.024 मिमी.
(स) 0.2 मिमी.
(द) 2.0 मिमी.।
उत्तर:
(द) 2.0 मिमी.।

प्रश्न 27.
यंग के द्विस्लिट प्रयोग में दो स्लिटों S1 व S2 के बीच की दूरी 1 मिमी. है। प्रत्येक स्लिट की चौड़ाई कितनी हो कि द्विस्लिट का 10वाँ उच्चिष्ठ स्लिट के केन्द्रीय उच्चिष्ठ पर प्राप्त हो?
(अ) 0.1mm
(ब) 0.2mm
(स) 0.3mm
(द) 0.4mm
उत्तर:
(ब) 0.2mm

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 28.
एकल छिद्र के फ्रॉनहॉफर विवर्तन प्रयोग में n कोटि के द्वितीयक उच्चिष्ठ के लिए पथान्तर (4) की शर्त है:
(अ) ∆ = (2n+1)λ/2
(ब) ∆ = n λ
(स) ∆ = (2n + 1)λ
(द) ∆ = n λ/2
उत्तर:
(अ) ∆ = (2n+1)λ/2

प्रश्न 29.
फ्रॉनहॉफर विवर्तन विवर्तन प्रतिरूप का केन्द्र होता है:
(अ) सदैव दीप्त
(ब) सदैव अदीप्त
(स) कभी दीप्त और
(द) उच्च तरंगदैर्घ्य के लिये दीप्त, लघु तरंगदैर्घ्य के लिये अदीप्त।
उत्तर:
(अ) सदैव दीप्त

प्रश्न 30.
फ्रेनल के द्विप्रिज्म से प्राप्त कला सम्बद्ध स्रोतों के बीच की दूरी बढ़ जाने पर:
(अ) फ्रिंज की चौड़ाई बढ़ जाती है।
(ब) फ्रिंजें स्पष्टतः अपरिवर्तित रहती हैं।
(स) फ्रिंज की चौड़ाई कम हो जाती है, फ्रिंज प्रतिरूप अस्पष्ट हो जाता है।
(द) फ्रिजों की चौड़ाई अपरिवर्तित रहती है।
उत्तर:
(स) फ्रिंज की चौड़ाई कम हो जाती है, फ्रिंज प्रतिरूप अस्पष्ट हो जाता है।

प्रश्न 31.
यंग द्वि- स्लिट प्रयोग को तीन बार क्रमशः हरा लाल और नीला प्रकाश प्रयुक्त करके किया गया एक बार में एक ही प्रयोग किया गया है। तीन फ्रिज चौड़ाई क्रमश: βG. βR और βB पाई गई है, तब:
(अ) βG > βB > βR
(स) βR > βB > βa
(ब) βB > βG > βR
(द) βR > βG > βB
उत्तर:
(द) βR > βG > βB

प्रश्न 32.
समान तीव्रता 1 के दो कला सम्बद्ध स्रोत से प्राप्त व्यतिकरण प्रतिरूप में माध्य तीव्रता होगी:
(अ) Io
(ब) 2Io
(स) 4Io
(द) 0
उत्तर:
(स) 4Io

प्रश्न 33.
प्रकाश के विवर्तन के लिये आवश्यक है कि अवरोधक का आकार प्रकाश तरंगों की तरंगदैर्घ्य से होना चाहिये-
(अ) बहुत बड़ा
(ब) लगभग बराबर
(स) बहुत छोटा
(द) किसी भी आकार का
उत्तर:
(ब) लगभग बराबर

प्रश्न 34.
प्रकाश के विवर्तन की व्याख्या निम्न से संभव है:
(अ) प्रकाश की क्वाण्टम प्रकृति
(ब) प्रकाश की तरंग प्रकृति
(स) प्रकाश के लिये न्यूटन का कणिका सिद्धान्त
(द) उपर्युक्त में कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) प्रकाश की तरंग प्रकृति

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 35.
किसी पारदर्शी पदार्थ पर प्रकाश की किरण का आपतन कोण 60° है। परावर्तित किरण पूर्णतया ध्रुवित है। पदार्थ का अपवर्तनांक
(अ) √3
(ब) 1/√3
(स) 1
(द) 1/√2
उत्तर:
(अ) √3

प्रश्न 36.
प्रकाश के ध्रुवण से पुष्टि होती है:
(अ) प्रकाश की अनुदैर्घ्य तरंग प्रकृति की
(ब) प्रकाश की अनुप्रस्थ तरंग प्रकृति की
(स) प्रकाश की कणीय प्रकृति
(द) प्रकाश की क्वांटम प्रकृति की।
उत्तर:
(ब) प्रकाश की अनुप्रस्थ तरंग प्रकृति की

प्रश्न 37.
प्रकाश तरंगों के अनुप्रस्थ होने की पुष्टि करता है:
(अ) परावर्तन
(ब) व्यतिकरण
(स) विवर्तन
(द) ध्रुवण।
उत्तर:
(द) ध्रुवण।

प्रश्न 38.
अधुवित प्रकाश ध्रुवक तथा विश्लेषक जिनके अक्षों के बीच 6 कोण है, से गुजरता है तो पारगमित प्रकाश की तीव्रता अनुक्रमानुपाती होगी:
(अ) sin θ
(ब) cos θ
(स) cos 2 θ
(द) sin 2 θ
उत्तर:
(स) cos 2 θ

प्रश्न 39.
एकल स्लिट के विवर्तन प्रतिरूप में प्राप्त केन्द्रीय फ्रिंज होती है:
(अ) न्यूनतम तीव्रता की
(ब) अधिकतम तीव्रता की
(स) तीव्रता स्लिट की चौड़ाई पर निर्भर करती है
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) अधिकतम तीव्रता की

प्रश्न 40.
स्रोत प्रकाश सफेद होने की दशा में केन्द्रीय अधिकतम के निकटतम व्यतिकरण फ्रिज का रंग क्या है?
(अ) पीला
(ब) लाल
(स) नीला
(द) बैंगनी।
उत्तर:
(द) बैंगनी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 41.
दो कला सम्बद्ध स्रोत जिनकी आवृत्ति का अनुपात 100 1 है, को व्यतिकरण फ्रिंजें उत्पन्न करने के लिये उपयोग किया जाता है। फ्रिजों में अधिकतम व न्यूनतम तीव्रता का अनुपात:
(अ) 100 : 1
(ब) 121 : 81
(स) 1 : 1
(द) 5 : 1
उत्तर:
(ब) 121 : 81

प्रश्न 42.
एक प्रकाशिक यन्त्र में प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य λ1 = 4000À तथा λ2 = 5000Å है। इनके संगत विभेदन क्षमताओं का अनुपात होगा:
(अ) 16 : 25
(ब) 9 : 1
(स) 4 : 5
(द) 5 : 4
उत्तर:
(द) 5 : 4

प्रश्न 43.
किसी पारदर्शी माध्यम में ध्रुवण कोण है तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल है। यदि निर्वात में प्रकाश की चाल c हो तो ip का मान है:
(अ) sin-1 (C/V)
(ब) cos-1 (V/C)
(स) tan-1 (C/V)
(द) cot-1 (V/C)
उत्तर:
(स) tan-1 (C/V)

प्रश्न 44.
प्रकाश के प्रकीर्णन पर विस्तृत अध्ययन के लिये नोबेल पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था:
(अ) हाइगेन्स को
(ब) यंग को
(स) फ्रेनेल
(द) सी.वी. रमन को।
उत्तर:
(द) सी.वी. रमन को।

प्रश्न 45.
जब किसी ध्रुवण शीट पर 1 होता है तो उस प्रकाश की तीव्रता का अध्रुवित प्रकाश आपतित तीव्रता, जो पारगमित नहीं होता है, यह है:
(अ) 1/4I0
(ब) 1/2I0
(स) Io
(द) शून्य।
उत्तर:
(ब) 1/2I0

प्रश्न 46.
वह आपतन कोण जिस पर परावर्तित प्रकाश वायु से काँच ( अपवर्तनांक 1 ) में परावर्तन के लिये पूर्व ध्रुवित हो जाता है,
(अ) sin-1 (n)
(ब) tan-1 (n)
(स) tan-1(1/n)
(द) sin-1(1/n)
उत्तर:
(ब) tan-1 (n)

प्रश्न 47.
रेखीय ध्रुवित प्रकाश की स्थिति में विद्युत क्षेत्र सदिश का परिमाण-
(अ) समय के साथ परिवर्तित नहीं होता है।
(ब) समय के साथ आवर्ती रूप से बदलता है।
(स) समय के साथ रैखिक रूप से बढ़ता या घटता है।
(द) संचरण की दिशा के समान्तर होता है।
उत्तर:
(ब) समय के साथ आवर्ती रूप से बदलता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 48.
किसी पदार्थ का विशिष्ट प्रकाश किरण के लिये क्रांतिक कोण 45° है। इस पदार्थ के लिये ध्रुवण कोण का मान होगा
(अ) tan-1 \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)
(ब) tan-1 \(\sqrt{2}\)
(स) tan-1 \(\frac{1}{2}\)
(द) tan-1(1)
उत्तर:
(ब) tan-1 \(\sqrt{2}\)

प्रश्न 49.
यदि कोई प्रकाश किरण ध्रुवण कोण iB पर किसी अपवर्तनांक n के माध्यम पर आपतित है, तो ब्रस्टर के नियमानसार:
(अ) n = sin iB
(ब) n = tan iB
(स) n = cos iB
(द) n = iB/2
उत्तर:
(ब) n = tan iB

प्रश्न 50.
एक पृष्ठ पर प्रकाश 50° के ध्रुवण कोण पर आधारित होता है, प्रकाश किरण के लिये अपवर्तन कोण होगा:
(अ) 50°
(ब) 40°
(स) 140°
(द) 90°
उत्तर:
(ब) 40°

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
यदि एकल स्लिट विवर्तन प्रयोग में स्लिट की चौड़ाई दो गुनी कर दी जाये तो केन्द्रीय उच्चिष्ठ पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
यदि स्लिट चौड़ाई (a) दोगुनी हो जाये तो केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई (λ/a) आधी रह जायेगी, तीव्रता चार गुनी हो जायेगी क्योंकि क्षेत्रफल (1/4th) रह जायेगा।

प्रश्न 2.
दो तरंगों के आयामों का अनुपात 2 है तो इनकी तीव्रताओं का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं कि
तीव्रता I α [ आयाम (a)]2
अर्थात्
अतः
I α a2
I1: I2 = a12: a22

प्रश्न 3.
तरंगाग्र की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
“किसी एक माध्यम में जिसमें कोई तरंग संचरित हो रही हो, यदि हम कोई ऐसा पृष्ठ (surface) खींचें जिस पर स्थित सभी कण कम्पन की समान कला में हों, तो ऐसे पृष्ठ को ‘तरंगाग्र’ कहते हैं। समांग माध्यम में किसी तरंग का तरंगाग्र सदैव तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होता है।

प्रश्न 4
तरंगाग्र कितने प्रकार के होते हैं? लिखिए।
उत्तर:
तरंगाग्र तीन प्रकार के होते हैं:
(a) गोलीय तरंगाग्र
(b) बेलनाकार तरंगाग्र
(c) समतल तरंगाग्र।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 5.
हाइगेन्स के सिद्धान्त का उपयोग किसको ज्ञात करने में किया जाता है?
उत्तर:
हाइगेन्स के सिद्धान्त का उपयोग किसी माध्यम में संचरित होने वाली समतल रंग के तरंगाग्र की आकृति ज्ञात करने के लिए कर सकते हैं

प्रश्न 6.
हाइगेंस सिद्धान्त का उपयोग करते हुए समतल तरंगों का अपवर्तन सम्बन्धी स्नैल नियम को लिखिए।
उत्तर:
n sin i = n2 sin r
n1 तथा n2 क्रमशः माध्यम 1 तथा माध्यम 2 के अपवर्तनांक हैं।

प्रश्न 7.
डॉप्लर प्रभाव को लिखिए।
उत्तर:
दो उत्तरोत्तर तरंगाओं के प्रेक्षक तक पहुँचने में लगने वाला समय स्रोत तक उनके पहुँचने में लगने वाले समय की अपेक्षा अधिक होता है। अतः जब स्रोत प्रेक्षक से दूर जाता है तो प्रेक्षक द्वारा मापी जाने वाली आवृत्ति में कमी होगी। यह डॉप्लर प्रभाव कहलाता है।

प्रश्न 8.
एक बिन्दु स्रोत से निकले प्रकाश की तरंगाग्र की आकृति क्या होगी?
उत्तर:
गोलीय।

प्रश्न 9.
एक संकीर्ण स्लिट के रूप में प्रकाश स्रोत द्वारा उत्सर्जित तरंगा की आकृति कैसी होगी?
उत्तर:
बेलनाकार

प्रश्न 10.
किसी तरंगाग्र पर स्थित किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच कलान्तर कितना होता है?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 11.
डॉप्लर विस्थापन को व्यक्त करने वाला समीकरण लिखिए।
उत्तर:
-∆v/v = -v/c

प्रश्न 12.
तरंगाग्र के लम्बवत् रेखा किसकी दिशा को व्यक्त करती है?
उत्तर:
तरंग संचरण की दिशा को।

प्रश्न 13.
प्रकाश के परावर्तन का प्रथम नियम बताइये।
उत्तर:
हाइगेन्स के सिद्धान्त के अनुसार प्रकाश के परावर्तन की व्याख्या इस प्रकार की गई है कि-
आपतन कोण Z i = परावर्तन कोण Zr इसमें आपतित तरंगाग्र, परावर्तित तरंगाग्र और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।

प्रश्न 14.
एक्स किरणें ध्वनि तरंगों व रेडियो तरंगों में किन-किन तरंगों का ध्रुवण संभव है?
उत्तर:
X – किरणें व रेडियो तरंगें। X – किरणों का ध्रुवण सम्भव इसलिये होता है, चूँकि ये किरणें अनुप्रस्थ होती हैं जबकि ध्वनि तरंगें अनुदैर्घ्य होने के कारण ध्रुवित नहीं की जा सकती हैं।

प्रश्न 15.
व्यतिकरण में प्रकाश तरंगों की ऊर्जा का क्या होता है?
उत्तर:
व्यतिकरण में ऊर्जा का विनाश नहीं होता है। ऊर्जा का केवल पुनर्वितरण होता है। विनाशी व्यतिकरण के स्थानों पर ऊर्जा जितनी कम हो जाती है तथा संपोषी व्यतिकरण के स्थानों पर उतनी ही ऊर्जा बढ़ जाती है

प्रश्न 16.
ध्रुवित प्रकाश के विश्लेषण में ध्रुवक एवं विश्लेषक की किस व्यवस्था के लिये पारगमित प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम होती है?
उत्तर:
ध्रुवक एवं विश्लेषक के अक्ष परस्पर लम्बवत् होने पर।

प्रश्न 17.
यदि प्रकाश की कला सम्बद्ध तरंगें विनाशी व्यतिकरण उत्पन्न करती हैं, तो उनके मध्य कलान्तर क्या होगा?
उत्तर:
कलान्तर का मान Φ = 1, 2, 3,……..

प्रश्न 18.
यंग के प्रयोग में द्वि-स्लिट को (अ) लाल (ब) नीले पारदर्शी कागज से ढककर प्रयोग किया जाये, तो फ्रिज की चौड़ाई में क्या अंतर दिखाई देगा? कारण बताइये।
उत्तर:
लाल रंग में फ्रिंज की चौड़ाई अधिक तथा नीले रंग में कम होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि लाल रंग के लिए तरंगदैर्ध्य का मान अधिक और नीले रंग के लिए तरंगदैर्घ्य का मान कम होता है।

प्रश्न 19.
कला सम्बद्ध स्रोत क्या है?
उत्तर:
वे दो स्रोत जिनसे समान आवृत्ति या समान तरंगदैर्घ्य की तरंगें उत्सर्जित हों तथा उनके बीच का कलान्तर समय के साथ नियत रहे कला सम्बद्ध स्रोत कहलाता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 20.
विवर्तन की घटना ध्वनि तरंगों में सामान्यतः देखी जाती है, परन्तु प्रकाश तरंगों में सामान्यतः नहीं, क्यों?
उत्तर:
सामान्यतः अवरोधों तथा द्वारकों का आकार ध्वनि तरंगों की तरंगदैर्ध्य की कोटि का होता है, प्रकाश तरंगों की तरंगदैर्घ्य की कोटि का नहीं, इसलिये ध्वनि का विवर्तन सामान्यतः देखा जा सकता है। परन्तु प्रकाश तरंगों का नहीं। प्रकाश के विवर्तन के लिये अन्य व्यवस्था करनी पड़ती है जिसमें अवरोध या रेखा छिद्र या आकार उसकी तरंगदैर्ध्य की कोटि का लिया जाता है।

प्रश्न 21.
6000 À तरंगदैर्घ्य का प्रकाश 24 x 105 सेमी. चौड़ाई की स्लिट पर अभिलम्बवत् आपतित है। केन्द्रीय उच्चिष्ठ से द्वितीय निम्निष्ठ की कोणीय चौड़ाई की गणना कीजिये।
उत्तर:
अतः केन्द्रीय उच्चिष्ठ से द्वितीय निम्निष्ठ की कोणीय चौड़ाई
= \(\frac{6000 \times 10^{-8}}{24 \times 10^{-5}}\) = \(\frac{6}{24}\) = 0.25

प्रश्न 22.
बिल्कुल एकसमान 15 वाट के दो बल्ब परस्पर अति निकट रखे गये हैं। क्या इनसे व्यतिकरण प्रभाव उत्पन्न होगा?
उत्तर:
दो बल्ब पृथक् स्रोत हैं, जो कभी भी कला सम्बद्ध नहीं हो सकते, अतः व्यतिकरण प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं होगा।

प्रश्न 23.
यदि यंग के द्विरेखा छिद्र प्रयोग में रेखा छिद्रों के मध्य दूरी 1 मिमी पर्दे की रेखा छिद्रों से दूरी 1 मी. तथा प्रकाश तरंगदैर्घ्य 5890 A हो तो फ्रिज की चौड़ाई क्या होगी?
उत्तर:
B = λD/d
= \(\frac{5890 \times 10^{-10} \times 1}{10^{-3}}\)
β = 0.589 मिमी.
∵ दिया है:
D = 1 मीटर
d = 1 मिमी.
= 1 x 103 मीटर
= 103 मीटर
λ = 5890À = 5890
x 10-10 मीटर

प्रश्न 24.
जब साधारण प्रकाश पोलेराइड से गुजरता है तो निर्गत ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता पोलेराइड पर आपतित प्रकाश की तीव्रता की आधी होती है, क्यों?
उत्तर:
मैलस के नियम से पोलेराइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता I = Io cos2θ जब आपतित प्रकाश साधारण तथा अध्रुवित होता है तो इसमें विद्युत सदिश प्रकाश के संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में सभी दिशाओं में अनियमित रूप से कम्पन करते हैं, अतः उपर्युक्त समीकरण में cos2θ का औसत मान लेना होगा जो कि 1/2 होता है। अतः I = 20

प्रश्न 25.
साधारण काँच की बजाय पोलेराइड द्वारा निर्मित धूप के चश्मों की क्या विशेषता होती है?
उत्तर:
साधारण रंगीन काँच प्रकाश का अवशोषण कर लेता है। इससे वस्तुएँ धुंधली दिखाई पड़ती हैं। इसके विपरीत पोलेराइड केवल आँखों में चकाचौंध उत्पन्न करने वाले धुवित प्रकाश को ही अवशोषित करता है।

प्रश्न 26.
मैलस का नियम बताओ।
उत्तर:
मैलस का नियम “जब अधुवित प्रकाश ध्रुवक एवं विश्लेषक दोनों से पारगमित होता है, तब निर्गत प्रकाश की तीव्रता ध्रुवक तथा विश्लेषक दोनों से पारगमित होती है, तब निर्गत प्रकाश की तीव्रता ध्रुवक तथा विश्लेषक के अक्षों के बीच के कोण के कोज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।” अर्थात् I α ccos2θ
यहाँ पर
I0 = I 2θ
I0 = आपतित ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता है।

प्रश्न 27.
व्यतिकरण की घटना में जिन स्थानों पर संपोषी तथा विनाशी व्यतिकरण होता है, उन स्थानों पर अध्यारोपित तरंगों के पथान्तर का मान लिखिये।
उत्तर:
संपोषी व्यतिकरण के लिये पथान्तर nλ व विनाशी व्यतिकरण के लिये (2n – 1)λ/d
होता है। यहाँ पर
n = 0, 1, 2, 3……..

प्रश्न 28.
धुवित तथा अधुवित प्रकाश की अलग-अलग पहचान कैसे कर सकते हैं?
उत्तर:
प्रकाश के आगे पोलेराइड या टूरमैलीन क्रिस्टल को रखकर उसे अक्ष के सापेक्ष घुमाकर देखते हैं। यदि निर्गत प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन नहीं होता है तो आपतित प्रकाश अधुवित होगा तथा यदि तीव्रता दो बार न्यूनतम तथा दो बार अधिकतम होती है, तो अधुवित होगा

प्रश्न 29.
आपतित प्रकाश की तीव्रता को आधा करने के लिये ध्रुवक तथा विश्लेषक के मध्य कितना कोण होगा?
उत्तर:
पारगमित प्रकाश की तीव्रता I
= Iqcos2θ
∴ 21⁄2 16 = 1 cos2θ या cos2θ = 1⁄2
या cosθ = – √2
∴ θ = 45°

प्रश्न 30.
प्रकाश के विवर्तन के लिये आवश्यक शर्त क्या है?
उत्तर:
अवरोध या रेखा छिद्र (द्वारक) का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की कोटि का होना चाहिये।

प्रश्न 31.
पोलेराइड के कोई दो प्रयोग लिखिये।
उत्तर:
(1) धूप के चश्मों में (2) रेलगाड़ी तथा वायुयान की खिड़कियों में

प्रश्न 32.
तरंगाग्र तथा किरण में अन्तर बताइये।
उत्तर:
समान कला में कम्पन करने वाले कणों का बिन्दुपथ तरंगाग्र कहलाता है। तरंगाग्र पर खींची गयी लम्बवत् रेखा तरंग संचरण की दिशा व्यक्त करती है। इसी को किरण कहते हैं।

प्रश्न 33.
फ्रेनेल दूरी किसे कहते हैं?
उत्तर:
विवर्तन प्रकाश किरणों की संकल्पना की सीमा निर्धारित करता है। इससे पहले कि विवर्तन के कारण प्रकाश प्रसारित होना प्रारम्भ करे चौड़ाई a2/λ का एक किरण पुंज एक दूरी फ्रेनेल दूरी कहलाती है।

प्रश्न 34.
ध्रुवण की घटना से प्रकाश के किस गुण की पुष्टि होती है?
उत्तर:
ध्रुवण की घटना से प्रकाश की अनुप्रस्थ तरंग प्रकृति की पुष्टि होती है।

प्रश्न 35.
प्रकाश के ध्रुवण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
प्रकाश सम्बन्धी वह घटना जिसमें प्रकाश के वैद्युत सदिश के कम्पन तरंग संचरण की दिशा के में न होकर किसी एक दिशा में लम्बवत् तल में सभी सम्भव दिशाओं सीमित कर दिये जाते हैं, प्रकाश का ध्रुवण कहलाता है तथा प्रकाश ध्रुवित प्रकाश कहलाता है।

प्रश्न 36.
जब अधुवित प्रकाश वायु से किसी पारदर्शी माध्यम में से गुजरता है तो किस दिशा में परावर्तित प्रकाश ध्रुवित होगा?
उत्तर:
जब वायु-पारदर्शी माध्यम अन्तरापृष्ठ पर प्रकाश का आपतन कोण ध्रुवण कोण के बराबर होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 37
व्यतिकरण में श्वेत प्रकाश की फ्रिंजें बन सकती हैं या नहीं ? यदि हाँ, तो किन परिस्थितियों में?
उत्तर:
हाँ, यदि द्विप्रिज्म या यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में एकवर्णीय प्रकाश के स्थान पर श्वेत प्रकाश का प्रयोग किया जाये तो केन्द्रीय फ्रिंजें श्वेत होंगी और शेष फ्रिंजें रंगीन होंगी।

प्रश्न 38.
दो तरंगों के मध्य पथान्तर (x) तथा कलान्तर (p) में सम्बन्ध बताने वाला व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
पथान्तर (x) = λ/2π x (कलान्तर)
या
x = λ/2πΦ

प्रश्न 39.
ब्रूस्टर कोण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब परावर्तित तरंग अपवर्तित तरंग पर परावर्तित तरंग एक पूर्ण ध्रुवित तरंग है इस अवस्था में लंबवत् है तो आपतन कोण को ब्रूस्टर कोण कहते हैं तथा इसे iB से निरूपित करते हैं।

प्रश्न 40.
ब्रूस्टर नियम किसे कहते हैं?
उत्तर:
ब्रूस्टर कोण iB सघन माध्यम के अपवर्तनांक से संबंधित
है क्योंकि iB + r = π/2 है।
स्मैल नियम से
n = \(\frac{\sin \mathrm{i}_B}{\sin r}\) = \(\frac{\sin i_B}{\sin \left(\frac{\pi}{2}-i_B\right)}\)
n = \(\frac{\sin i_B}{\cos i_B}\) = taniB
इसे ब्रूस्टर का नियम कहते हैं।

प्रश्न 41.
विवर्तन प्रभावों के कारण, किरण पुंज लगभग किस मान की त्रिज्या के धब्बे के रूप में फोकसित हो जाती है?
उत्तर:
ro = \(\frac{1.22 \lambda f}{2 a}\) = \(\frac{0.61 \lambda f}{a}\)
की त्रिज्या के धब्बे के रूप में फोकसित हो जाती है, जहाँ पर f लेंस की फोकस दूरी तथा 2a वृत्ताकार द्वारक के व्यास अथवा लेंस के व्यास में जो भी कम हो, वही है।

प्रश्न 42.
क्या कारण है कि एक अच्छे विभेदन के लिए दूरदर्शक के अभिदृश्यक का व्यास अधिक होना चाहिए?
उत्तर:
हम जानते हैं कि ∆θ = 0.612 होता है। इससे स्पष्ट है कि यदि अभिदृश्यक का व्यास अधिक है तो 46 छोटा होगा। इससे पता चलता है कि यदि का मान अधिक है तो दूरदर्शी की विभेदन क्षमता अधिक होगी। यही कारण है कि अच्छे विभेदन के लिए दूरदर्शक के अभिदृश्यक का व्यास अधिक होना चाहिए।

प्रश्न 43.
एकल झिर्री द्वारा उत्पन्न विवर्तन पेटर्न के केन्द्रीय उच्च की चौड़ाई का व्यंजक लिखिए। यह झिरी की चौड़ाई से कैसे सम्बन्धित है?
उत्तर:
केन्द्रीय उच्च की चौड़ाई = 2λD/d
स्पष्टतः यह झिर्री की चौड़ाई d के व्युत्क्रमानुपाती है।

प्रश्न 44.
अनुदैर्घ्य तरंगें ध्रुवित क्यों नहीं की जा सकतीं?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंग में कण के दोलन की दिशा माध्यम में तरंग के गमन की दिशा में होती है, इसलिए संपीडन और विरलन प्रकाश तरंगों के गमन में झिर्री में से निकल जायेंगे।

प्रश्न 45.
यदि किसी द्रव (अपवर्तनांक n = √3) की सतह से परावर्तित प्रकाश पूर्णतया समतल ध्रुवित हो जाता है तो ध्रुवण कोण कितना होगा?
उत्तर:
ब्रूस्टर नियम से
n = tan iB
ध्रुवण कोण iB = tan-1 (n)
iB = tan-1 (√3) = 60°

प्रश्न 46.
किस प्रकार का तरंगाग्र निकलेगा:
(i) बिन्दुवत् प्रकाश स्रोत से
(ii) दूरस्थ प्रकाश स्रोत से।
उत्तर:
(i) बिन्दुवत् प्रकाश स्रोत से गोलाकार तरंगाग्र निकलेगा।
(ii) दूरस्थ प्रकाश स्रोत से समतल तरंगाग्र प्राप्त होगा।

प्रश्न 47.
क्रॉस पोलेराइड की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
जिन दो पोलेराइड के ध्रुवण तल एक-दूसरे के अभिलम्ब होते हैं, उन्हें क्रॉस पोलेराइड कहते हैं।

प्रश्न 48.
प्रकाशिक यंत्र की विभेदन सीमा की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
वह न्यूनतम दूरी है जिससे दो बिन्दु वस्तुएँ पृथक्कीकृत हैं जिससे उनके बिम्बों को केवल अलग-अलग करके प्रकाशिक यंत्र से देख सकें।

प्रश्न 49.
विवर्तन किन-किन घटकों पर निर्भर होता है?
उत्तर:
यह निम्न दो घटकों पर निर्भर होता है:
(i) द्वारक (बिन्दु) के आकार तथा
(ii) तरंगदैर्ध्य।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 50.
आकाशगंगा के स्पेक्ट्रम में लाल विस्थापन क्या इंगित करता है?
उत्तर:
आकाशगंगा के स्पेक्ट्रम में लाल विस्थापन डॉप्लर प्रभाव के अनुसार इस बात को इंगित करता है कि आभासी तरंगदैर्घ्य बढ़ रहा है। इसका कारण यह है कि आकाशगंगा पृथ्वी से दूर जा रही है। अर्थात् ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है।

प्रश्न 51.
एकल झिर्री विवर्तन प्रतिरूप में यदि केन्द्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता I है तो झिर्री की चौड़ाई दोगुनी करने पर तीव्रता का मान कितना होगा?
उत्तर:
झिर्री की चौड़ाई दोगुनी करने पर तीव्रता चार गुनी हो जायेगी।

प्रश्न 52.
एकल स्लिट विवर्तन प्रयोग में फिन्जों के बीच का कोणीय अन्तराल कैसे परिवर्तित होता है जब स्लिट तथा पर्दे के बीच की दूरी को दुगुनी कर दिया जाये?
उत्तर:
केन्द्रीय विवर्तन बैण्ड की कोणीय चौड़ाई β = 2 λD/a
या β α 1/a β α D तथा β α λ
यदि स्लिट तथा पर्दे के बीच दूरी (D) को दुगुना कर दिया जाये तो केन्द्रीय विवर्तन बैण्ड की कोणीय चौड़ाई दोगुनी हो जायेगी।

प्रश्न 53.
एकल स्लिट विवर्तन प्रयोग में स्लिट की चौड़ाई प्रारम्भिक चौड़ाई की दुगुनी कर दी जाये तो केन्द्रीय विवर्तन बैण्ड का आकार तथा तीव्रता कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर:
केन्द्रीय विवर्तन बैण्ड की कोणीय चौड़ाई
β = 2 λD/a
अर्थात्
β α 1/a
जब स्लिट की चौड़ाई (a) को दुगुना कर दिया जाये तो केन्द्रीय बैण्ड की चौड़ाई प्रारम्भिक चौड़ाई की आधी हो जायेगी। चूँकि केन्द्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता 2 के अनुक्रमानुपाती होती है अतः स्लिट चौड़ाई को दुगुना करने पर केन्द्रीय उच्चिष्ठ की तीव्रता पहले की चार गुनी हो जायेगी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
हाइगेंस सिद्धान्त का महत्त्व लिखिए। इस सिद्धान्त की दो धारणाएँ क्या हैं?
उत्तर:
किसी समय दत्त स्थिति से किसी बाद के समय के ज्यामितीय रचना तथा तरंगाग्र की स्थिति के निर्धारण को हाइगेंस सिद्धान्त की महत्ता कहते हैं।
धारणाएँ:
(i) दत्त तरंगा पर जिसे प्रारम्भिक तरंगाग्र कहते हैं, प्रत्येक बिन्दु द्वितीयक तरंगों का स्रोत होता है और सभी सम्भव दिशाओं में एक ही चाल से एक ही प्रकार मूल प्रकाश स्रोत का विक्षोभ प्रसारित करती है।
(ii) किसी समय तरंगाग्र की नई स्थिति उस समय द्वितीयक तरंगिकाओं पर स्पर्शजा खींचने से प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
डॉप्लर प्रभाव को समझाइए और अभिरक्त विस्थापन और नीला विस्थापन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
दो उत्तरोत्तर तरंगाग्रों के प्रेक्षक तक पहुँचने में लगने वाला समय स्रोत तक उनके पहुँचने में लगने वाले समय की अपेक्षा अधिक होता है। अतः जब स्रोत प्रेक्षक से दूर जाता है तो प्रेक्षक द्वारा मापी जाने वाली आवृत्ति में कमी होगी। यह डॉप्लर प्रभाव कहलाता है। खगोलज्ञ, तरंगदैर्घ्य में डॉप्लर प्रभाव के कारण होने वाली इस वृद्धि को अभिरक्त विस्थापन (red shift) कहते हैं, क्योंकि स्पेक्ट्रम के दृश्य क्षेत्र की मध्यवर्ती तरंगदैर्ध्य लाल छोर की ओर खिसक जाती है। जब स्रोत प्रेक्षक की ओर चलता है तो उससे प्राप्त की जाने वाली तरंगों की तरंगदैर्ध्य में आभासी कमी हो जाती है तरंगदैर्ध्य की इस कमी को नीला विस्थापन ( blue shift) कहते हैं।

आवृत्ति में भिन्नात्मक परिवर्तन 40 को जाता है, जहाँ त्रिज्य प्रेक्षक के सापेक्ष स्रोत वेग
Δυ/v = vत्रिज्य/c के द्वारा दिया का प्रेक्षक को स्रोत से जोड़ने वाली रेखा की दिशा में घटक है जब स्रोत प्रेक्षक से दूर जाता है, त्रिज्य को धनात्मक मानते हैं। इस प्रकार डॉप्लर विस्थापन को व्यक्त कर सकते हैं-
Δυ/v = vत्रिज्य/c
उपर्युक्त सूत्र तभी मान्य है जब स्रोत का वेग प्रकाश के वेग की तुलना में कम होता है।

प्रश्न 3.
व्यतिकरण के उच्च तथा न्यून प्रतिबन्ध पथांतर के पदों में लिखिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि
कलान्तर = 2π/λ x पथान्तर
या Φ = 2π/λy ….(i)
हम यह भी जानते हैं कि रचनात्मक व्यतिकरण के लिए
Φ = 2n2π ………(ii
समीकरण (i) तथा (ii) से
2π/λy = 2n2π
या
y = 2n. λ/2
nth उच्च के लिए माना y = Yn
yn = 2n . λ/2
अर्थात् रचनात्मक व्यतिकरण हो इसके लिए पथान्तर λ/2 समगुणज होना चाहिए।
न्यून तीव्रता के लिए
Φ = (2n + 1)π
या
2π/λy = (2n + 1) π
y = (2n + 1)λ/2
nth निम्निष्ठ के लिए
y = Yn
Yn = (2n + 1)λ/2
इस प्रकार विनाशी व्यतिकरण के लिए पथान्तर λ/2 का विषम गुणज होना चाहिए।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 4.
दो समरूप कला सम्बद्ध तरंगें जिनमें प्रत्येक की तीव्रता I0 है, व्यतिकरण प्रारूप उत्पन्न कर रही है। (i) संपोषी व्यतिकरण, (ii) विनाशी व्यतिकरण वाले स्थानों पर परिणामी तीव्रता का मान लिखिये।
उत्तर:
I = I1 + I2 + 2 √I1I2 cos Φ
यहाँ पर I1 = I2 = Io
(i) संपोषी व्यतिकरण वाले स्थान पर
( जहाँ n = 0, 1, 2, …..)
Φ = 2nπ
अतः
cos Φ = 1
1 = Io + Io + 2 √IoIo
= I + Io + 2I0 = 4Io

(ii) विनाशी व्यतिकरण वाले स्थान पर
अतः
Φ = (2n – 1)π
( जहाँ n = 1, 2, ….)
cos Φ = – 1
I = Io + Io + 2 √IoIo(-1)
= 2I0 – 2I0 = 0(शून्य)

प्रश्न 5.
दो प्रकाश तरंगें y1 = a1 sin ωt तथा y2 = a2 cos (ωt + Φ) के मध्य पथान्तर कितना होगा?
उत्तर:
पहली तरंग का समीकरण
y1 = a1 sin ωt
दूसरी तरंग का समीकरण
या
y2 = a2 cos (ωt + Φ)
y2 = a2cos (ωt + Φ + π/2)
पहली तरंग तथा दूसरी तरंग के मध्य कलान्तर
∆Φ = Φ2 – Φ1
(ωt + Φ + π/2) – ωt
या
∆Φ = Φ + π/2
∵ पथान्तर के कारण कलान्तर
∆Φ = 2π/ λ × ∆x
∴ पथान्तर ∆x = \(\frac{\Delta \phi \times \lambda}{2 \pi}\)
दी गई तरंगें पहली तथा दूसरी के मध्य पथान्तर
∴ ∆x = λ/2π ( Φ + π/2)

प्रश्न 6.
व्यतिकरण एवं विवर्तन में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:

व्यतिकरणविवर्तन
  1. दो या दो से अधिक समान आवृत्ति की कला सम्बद्ध तरंगों के अध्यारोपण से व्यतिकरण की घटना होती है।
एक ही तरंगाग्र से उत्सर्जित द्वितीयक तरंगिकाओं के अध्यारोपण से विवर्तन की घटना होती है।
2. व्यतिकरण प्रतिरूप में सभी प्रदीप्त फ्रिंजों की तीव्रता समान होती है।विवर्तन प्रतिरूप में केन्द्रीय प्रदीप्त फ्रिंज की तीव्रता अधिकतम होती है और अन्य प्रदीप्त फ्रिंजों की तीव्रता घटते क्रम में होती है।
3. समान आयाम के तरंगों के व्यतिकरण प्रतिरूप में अदीप्त फ्रिंज की तीव्रता शून्य होती है।विवर्तन प्रतिरूप में अदीप्त फ्रिंजें शून्य तीव्रता की नहीं होती हैं।
4. व्यतिकरण प्रतिरूप में फ्रिंजें सामान्यतः समान चौड़ाई की होती हैं।विवर्तन प्रतिरूप में फ्रिंजें सदैव असमान चौड़ाई की होती हैं।
5. दीप्त या अदीप्त फ्रिंजों के बीच अच्छा विपर्यास (good contrast) होता है।दीप्त या अदीप्त फ्रिंजों में मंद विपर्यास (poor contrast) होता है।

प्रश्न 7.
एकवर्णी प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है, तो इसकी तरंगदैर्घ्य परिवर्तित हो जाती है। परन्तु आवृत्ति नहीं बदलती है, व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
जब एकवर्णी प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करता है तो प्रकाश का वेग बदल जाता है। तरंग उत्पादक स्रोत एक ही रहने के कारण उसकी आवृत्ति 1 नहीं बदलती है। अतः
सूत्र λ = v/u के आधार पर तरंगदैर्ध्य λ परिवर्तित हो जाती है।

प्रश्न 8.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में प्राप्त व्यतिकरण प्रारूप किस प्रकार प्रभावित होगा? जबकि (a) S1 व S2 रेखा- छिद्रों के बीच की दूरी कम कर दी जाये तथा (b) सम्पूर्ण उपकरण जल में डुबो दिया जाये।
उत्तर:
व्यतिकरण प्रारूप में फ्रिंज की चौड़ाई
β = λD/d
(a) जबकि S1 तथा S2 रेखा – छिद्रों के बीच की दूरी d कम कर से फ्रिज की चौड़ाई दी जाये तो उपर्युक्त सूत्र के आधार पर β α 1/d का मान बढ़ जायेगा, अर्थात् व्यतिकरण फ्रिंजें परस्पर फैल जायेंगी।
(b) सम्पूर्ण उपकरण को जल में डुबोने पर सूत्र λω = λ/n के आधार पर तरंगदैर्घ्य 1 का मान बढ़ जायेगा। अतः फ्रिंज की चौड़ाई β का मान घट जायेगा चूँकि उपर्युक्त सूत्र में β α A है, अर्थात् व्यतिकरण फ्रिंजें परस्पर निकट हो जायेंगी।

प्रश्न 9.
फ्रॉनहॉफर एवं फ्रेनेल विवर्तन में मुख्य अन्तर बताइये।
उत्तर:

फ्रॉनहॉफर व्यतिकरणफ्रेनेल विवर्तन
(1) विवर्तन प्रतिरूप का केन्द्र हमेशा दीप्त ही होता है।विवर्तन प्रतिरूप का केन्द्र कभी दीप्त, कभी अदीप्त होता है। स्रोत एवं पर्दा दोनों विवर्तक से सीमित दूरी पर होते हैं।
(2) स्रोत एवं पर्दा दोनों विवर्तक से प्रभावी रूप से या वास्तव में अनन्त दूरी पर स्थित होते हैं।तरंगाग्र गोलीय या बेलनाकार होते हैं।
(3) तरंगाग्र समतल होते हैं।इसमें उत्तल लेंस का उपयोग नहीं करते हैं।
(4) इसमें उत्तल लेंस का उपयोग करते हैं।इसमें केवल एक विवर्तक का विवर्तन प्रभाव होता है।
(5) इसमें एक से अधिक विवर्तकों के विवर्तन का सम्मिलित प्रभाव हो सकता है।इसकी सैद्धान्तिक विवेचना जटिल एवं केवल सन्निकट मान देती है।
(6) इसकी सैद्धान्तिक विवेचना काफी एवं परिशुद्ध गणित की सहायता से होती है।इस विवर्तन में स्रोत एवं पर्दे की विवर्तक से दूरियाँ महत्वपूर्ण होती हैं।
(7) इस प्रकार के विवर्तन में तरंगाग्रों का विवर्तक पर झुकाव महत्वपूर्ण होता है।विवर्तन प्रतिरूप का केन्द्र कभी दीप्त, कभी अदीप्त होता है। स्रोत एवं पर्दा दोनों विवर्तक से सीमित दूरी पर होते हैं।

प्रश्न 10.
यंग के द्विझिरी प्रयोग में झिरियों के बीच द्विगुनित कर दिया जाये और झिरियों तथा पर्दे के बीच दूरी आधी रखी जाये तो फ्रिज चौड़ाई का क्या होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं:
β = λD/d
जहाँ
d = झिरियों के बीच पृथक्कीकरण
D = पर्दे की झिरियों से दूरी
β = फ्रिज की चौड़ाई
अब माना d D’ तथा β’ नई विमा है।
d’ = 2d.
D’ = 1⁄2D
β = λ.D/d
= \(\frac{\lambda \times \frac{D}{2}}{2 d}\)
= \(\frac{1}{4}\) \(\frac{\lambda \mathrm{D}}{\mathrm{d}}\) = \(\frac{1}{4}\) β
फ्रिन्ज चौड़ाई मूल फ्रिन्ज चौड़ाई का हो जाती है।

प्रश्न 11.
एकल झिरी विवर्तन पैटर्न के केन्द्रीय चमकीले उच्चतम की कोणीय चौड़ाई किस प्रकार बदली जाती है, जब (a) झिरी की चौड़ाई कम कर दी जाये (b) झिरी और पर्दे के बीच की दूरी बढ़ा दी जाये (c) कम तरंगदैर्घ्य के प्रकाश का उपयोग किया जाये।
उत्तर:
हम जानते हैं कि केन्द्रीय उच्चिष्ठ θ = 2/d द्वारा दिया जाता है।
(a) जब झिरी की चौड़ाई d कम होगी, θ बढ़ेगा।
(b) सूत्र में झिरी और पर्दे के बीच दूरी नहीं आती, अतः कोणीय चौड़ाई अप्रभावित रहती है।
(c) कोणीय चौड़ाई तरंगदैर्ध्य के अनुक्रमानुपाती है अतः छोटी प्रकाश तरंगदैर्ध्य का उपयोग करने पर कोणीय चौड़ाई घट जायेगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 12.
फ्रेनेल दूरी का व्यंजक निकालिये।
उत्तर:
माना, झिरी की चौड़ाई = a
उपयुक्त प्रकाश का तरंग = λ
द्वितीयक निम्निष्ठ की कोणीय स्थिति जिसे केन्द्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई का आधा कहा जाता है।
θ = λ/a से दिया जाता है।
माना झिरी और पर्दे के बीच दूरी = D तब केन्द्रीय उच्चिष्ठ का रैखिक प्रसार
y = Dθ
= D x λ/a
परिभाषा से जब D = Zf, y1 = a
या
a = Zp x λ/a
ZF = a2

प्रश्न 13.
ध्रुवण तल एवं कम्पन तल में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
ध्रुवण तल-जब किसी प्रकाश स्रोत S प्राप्त प्रकाश को टर्मलीन क्रिस्टल से निकाला जाता है तो क्रिस्टल से निकलने वाला प्रकाश ध्रुवित होता है। अर्थात् इस स्थिति में प्रकाश सदिश के कम्पन एक दिशा में, अर्थात् प्रकाश संचरण की दिशा के अभिलम्ब होते हैं। ध्रुवण तल वह तल है जिसमें प्रकाश सदिश E के कम्पन का घटक शून्य होता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 1
कम्पन तल- समतल ध्रुवित प्रकाश में वह तल जिसमें विद्युत क्षेत्र सदिश तथा तरंग के संचरण की दिशा दोनों स्थित होते हैं, वह कम्पन तल कहलाता है।

प्रश्न 14.
धुवित प्रकाश किन-किन विधियों के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है?
उत्तर:
करने की निम्न विधियाँ हैं:
(i) परावर्तन द्वारा
(ii) अपवर्तन द्वारा
(iii) द्विअपवर्तन द्वारा
(iv) द्विवर्णता द्वारा
(v) प्रकीर्णन द्वारा।

प्रश्न 15.
“प्रकाश तरंगों का ध्रुवण होता है परन्तु ध्वनि तरंगों का नहीं।” उपर्युक्त कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रकाश तरंगें अनुप्रस्थ हैं तथा ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य हैं। तरंग के ध्रुवण का अर्थ है तरंग के चलने की दिशा में लम्बवत् तल में विभिन्न दिशाओं में होने वाले कम्पनों में से किसी एक दिशा में होने वाले कम्पनों को अलग कर देना। अनुदैर्घ्य तरंग में कम्पन तरंग चलने की दिशा में ही होते हैं। अतः ध्वनि तरंगों का ध्रुवण नहीं हो सकता है।

प्रश्न 16.
दो तरंगों के आयामों का अनुपात ay 82 है तो इनकी तीव्रताओं का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं कि
तीव्रता α (आयाम (a)) 2 अर्थात् I (a)2
अतः I1 : I2 = a12 : a22

प्रश्न 17.
पोलेराइड की बनावट को समझाइये
उत्तर:
पोलेराइड की बनावट समतल ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करने के लिये पोलेराइड एक सस्ती व्यापारिक युक्ति है। यह एक विशेष प्रक्रिया से बनी एक फिल्म होती है जिसे दो काँच की प्लेटों के मध्य में रखते हैं। इस फिल्म को बनाने के लिये एक कार्बनिक यौगिक, हरपेथाइट या कुनैन के आयोडोसल्फेट के अति सूक्ष्म आकार के क्रिस्टल नाइट्रोसेलूलोज की पतली चादर पर इस प्रकार फैला दिये जाते हैं कि समस्त क्रिस्टलों के अक्ष अनुदिश हो जायें। ये सूक्ष्म क्रिस्टल उच्च कोटि के द्विवर्णक होते हैं जो द्वि-अपवर्तित किरणों में से एक को पूर्णतया अवशोषित कर लेते हैं।

प्रश्न 18.
पोलेराइड के उपयोग बताइये।
उत्तर:
पोलेराइड के उपयोग:
1. चकाचौंध को दूर करने में पोलेराइड का उपयोग अत्यधिक श्वेत अथवा चमकीले तलों या गीली सड़कों से प्रकाश के परावर्तन द्वारा उत्पन्न चकाचौंध अथवा सूर्य की चिलचिलाती धूप को कम करने में किया जाता है। चकाचौंध में आंशिक धुवित प्रकाश होता है। यदि आँखों पर पोलेराइड का चश्मा लगा लिया जाये तो यह आंशिक धुवित प्रकाश क्षैतिज कम्पनों को काट देगा। अतः चकाचौंध समाप्त हो जायेगी।
2. दुर्घटना को बचाने में मोटरकारों तथा ट्रकों की हैडलाइट से निकला प्रकाश जब दूसरी ओर से आती मोटरकार या ट्रक हुड पर पड़ता है तो परावर्तित प्रकाश आँख में पहुँचकर चकाचौंध उत्पन्न करता है। इससे आँखों को कष्ट तो होता ही है, साथ ही दुर्घटना होने की सम्भावना भी रहती है। इसको दूर करने के लिये हैडलाइट के कवर ग्लास तथा विण्डस्क्रीन पोलेराइड के बनाते हैं।
3. पोलेराइड कैमरा या फोटोग्राफी में पोलेराइड कैमरा के लेन्स के आगे एक पोलेराइड लगाते हैं जिससे उसकी पृष्ठभूमि में आये ध्रुवित प्रकाश को पोलेराइड रोक लेता है।
4. शक्कर की सान्द्रता ज्ञात करने में शक्कर की सांद्रता पोलेरी मीटर द्वारा ज्ञात की जाती है पोलेरी मीटर में समतल ध्रुवित प्रकाश के उत्पादन एवं विश्लेषण के लिये पोलेराइड का प्रयोग करते हैं।
5. धातुओं के प्रकाशीय गुणों के अध्ययन में।
6. प्रतिबलों के प्रभाव का अध्ययन करने में।

प्रश्न 19.
पोलेराइड की समान्तर व क्रॉसित व्यवस्था क्या होती है?
उत्तर:
पोलेराइड की व्यवस्था: जब अधुवित प्रकाश पोलेराइड में से गुजरता है, तब निर्गत प्रकाश ध्रुवित होता है। इसके विश्लेषक के लिये दूसरे पोलेराइड का उपयोग किया जाता है जब दोनों पोलेराइड परस्पर समान्तर होते हैं तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है जैसाकि चित्र (अ) में दिखाया गया है। यदि द्वितीय पोलेराइड को 90° से घुमाकर प्रकाश को देखा जाता है तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता शून्य होती है। पोलेराइडों की इस व्यवस्था को क्रॉसित व्यवस्था कहते हैं। इस व्यवस्था में दोनों पोलेराइडों की अक्ष एक-दूसरे के लम्बवत् रहती है। जैसा चित्र (ब) में दिखाया गया है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 2

प्रश्न 20.
वृत्त और दीर्घवृत्त धुवित प्रकाश क्या होते हैं?
उत्तर:
वृत्तीय ध्रुवित प्रकाश जब दो समतल ध्रुवित प्रकाश किरणें विशेष परिस्थितियों में एक-दूसरे पर इस प्रकार अध्यारोपित हों कि परिणामी प्रकाश सदिश एक निश्चित परिमाण से तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में घूर्णन करने लगे तब प्रकाश सदिश में कम्पन का विस्थापन एक वृत्त के रूप में होता है। ऐसे प्रकाश को वृत्तीय ध्रुवित प्रकाश कहते हैं। इसमें विद्युत सदिश का परिमाण नियत रहता है परन्तु उसकी दिशा नियमित रूप से बदलती रहती है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 3
दीर्घवृत्तीय ध्रुवित प्रकाश- जब दो समतल ध्रुवित प्रकाश किरणें विशेष परिस्थितियों में एक-दूसरे पर इस प्रकार अध्यारोपित हों कि परिणामी प्रकाश सदिश एक परिवर्तित परिमाण से तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में घूर्णन करने लगे तब प्रकाश सदिश में कम्पन का विस्थापन एक दीर्घवृत्त में होता है। ऐसे प्रकाश को दीर्घवृत्तीय ध्रुवित प्रकाश कहते हैं।

प्रश्न 21.
क्या किसी पारदर्शी माध्यम के लिये, ध्रुवण कोण का मान प्रकाश के तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है?
उत्तर:
हाँ, ब्रूस्टर के नियमानुसार n = tan ig होता है, माध्यम का अपवर्तनांक (n) प्रकाश के तरंगदैर्घ्य (A) पर निर्भर करता है। इसलिये ध्रुवण कोण (ig) का मान भी तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है।

प्रश्न 22.
अनुदैर्घ्य तरंग का ध्रुवण क्यों नहीं होता?
उत्तर:
किसी तरंग के ध्रुवण से हमारा तात्पर्य तरंग की चलने की दिशा के लम्बवत् तल में विभिन्न दिशाओं में होने वाले कम्पनों में से किसी एक दिशा में होने वाले कम्पनों को पृथक करने से है। अनुदैर्घ्य तरंग में कम्पन तरंग के चलने की दिशा में ही होते हैं। फलतः ध्रुवण नहीं हो सकता।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 23.
पोलेराइड से ट्रकों या कारों की हैडलाइट बनाना क्यों लाभदायक होता है?
उत्तर:
मोटरकारों तथा ट्रकों की हैडलाइट की चकाचौंध तथा इससे होने वाली दुर्घटना से बचने के लिये इनके हैडलाइट व वातरोधी पद (wind screen ) में पोलेराइडों को (इनकी अक्ष क्षैतिज से 45° का कोण बनाते हुये ) लगा दिया जाता है जिसके कारण किसी भी ड्राइवर को सामने से आने वाले ट्रक या कार की हैडलाइट के प्रकाश की तीव्रता पोलेराइड होने के कारण कम हो जाती है जबकि अन्य वस्तुयें स्पष्ट दिखाई देती हैं।

प्रश्न 24.
किसी पारदर्शी माध्यम पर ध्रुवण कोण पर आपतित प्रकाश किरण के लिये आपतन कोण तथा अपवर्तन कोण में क्या सम्बन्ध होता है?
उत्तर:
र- चूँकि ध्रुवण कोण in पर आपतित प्रकाश किरण के लिये परावर्तित तथा अपवर्तित किरणें परस्पर लम्बवत् होती हैं, अतः आपतन कोण + अपवर्तन कोण = 90° अथवा ig + r = 90°

प्रश्न 25.
रंगीन काँच से बने धूप के चश्मे की तुलना में पोलेराइडों से युक्त काँच के बने धूप के चश्मे क्यों अच्छे होते हैं?
उत्तर:
साधारण रंगीन काँच कुछ प्रकाश अवशोषित कर लेता है जिससे वस्तु धुंधली दिखायी पड़ती है, जबकि पोलेराइड केवल उस ध्रुवित प्रकाश को अवशोषित करता है जो ऑंख में चौंध उत्पन्न करता है, अतः पोलेराइड से बने चश्मे में से वस्तुयें स्पष्ट दिखायी पड़ती हैं।

प्रश्न 26.
A और B दो पोलेराइडों को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया है कि A से निर्गत ध्रुवित प्रकाश B से नहीं गुजर पाता। क्या अन्य पोलेराइड C को इस प्रकार A और B के बीच व्यवस्थित कर सकते हैं कि कुछ प्रकाश B से गुजरने लगे?
उत्तर:
हाँ, A और B परस्पर ‘क्रॉसित’ हैं। अब इनके मध्य पोलेराइड C को रखकर इतना घुमाते हैं कि A से निर्गत प्रकाश का कुछ भाग C से गुजर सके। इस स्थिति में A और C न तो परस्पर क्रॉसित होते हैं और न ही परस्पर समान्तर स्पष्टतः C और B के भी परस्पर क्रॉसित न होने के कारण C से भाग B निर्गत प्रकाश का कुछ में से होकर गुजरने लगेगा।

प्रश्न 27.
प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव क्या है? इसमें लाल विस्थापन तथा नीले विस्थापन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
दो उत्तरोत्तर तरंगाग्रों के प्रेक्षक तक पहुँचने में लगने वाला समय स्रोत तक उनके पहुँचने में लगने वाले समय की अपेक्षा अधिक होता है अतः जब स्रोत प्रेक्षक से दूर जाता है तो प्रेक्षक द्वारा मापी जाने वाली आवृत्ति में कमी होगी। यह डॉप्लर प्रभाव कहलाता है खगोलज्ञ, तरंगदैर्ध्य में डॉप्लर प्रभाव के कारण होने वाली इस वृद्धि को अभिरक्त विस्थापन (red shift ) कहते हैं, क्योंकि स्पेक्ट्रम दृश्य क्षेत्र की मध्यवर्ती तरंगदैर्ध्य लाल छोर की ओर खिसक जाती है जब स्रोत प्रेक्षक की ओर चलता है तो उससे प्राप्त की जाने वाली तरंगों की तरंगदैर्ध्य में आभासी कमी हो जाती है, तरंगदैर्घ्य की इस कमी को नीला विस्थापन (blue shift ) कहते हैं।

प्रश्न 28.
किसी पोलेराइड पर अधुवित प्रकाश आपतित है। इस पोलेराइड को घुमाने पर पारगमित प्रकाश की तीव्रता में किस प्रकार परिवर्तन होगा?
उत्तर:
आपतित अधुवित प्रकाश में विद्युत क्षेत्र वेक्टर संचरण की दिशा के लम्बवत् सभी सम्भव दिशाओं में होते हैं। पोलेराइड से गुजरने पर एक निश्चित दिशा में धुवित प्रकाश प्राप्त होता है, जिसकी तीव्रता आपतित प्रकाश की तीव्रता की आधी होती है. निर्गत ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता पोलेराइड की अक्ष की दिशा पर निर्भर नहीं होती। पोलेराइड को घुमाने पर पारगमित प्रकाश की ध्रुवण की दिशा परिवर्तित होगी लेकिन तीव्रता अपरिवर्तित रहेगी।

प्रश्न 29.
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता को परिभाषित कीजिए। इसका सूत्र लिखिए। यह किस प्रकार प्रभावित होती है, जब:
(a) आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य घटती है?
(b) अभिदृश्यक लेंस का द्वारक घटता है?
उत्तर:
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता-किसी सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा उन दो बिन्दुवत् वस्तुओं के बीच की न्यूनतम दूरी से नापी जाती है जिनके प्रतिबिम्ब सूक्ष्मदर्शी के अभिदृश्यक द्वारा ठीक विभेदित होते हैं।”
सूक्ष्मदर्शी की विभेदन सीमा प्रकाश की तरंगदैर्घ्य 1 के अनुक्रमानुपाती तथा सूक्ष्मदर्शी में प्रवेश करने वाली किरणों के शंकु (Cone) कोण के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
विभेदन सीमा
= 1.22λ/2nsinα
अतः विभेदन क्षमता = 1/विभेदन सीमा = 2nsinα/ 1.22λ
(a) आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य घटती है तो सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता बढ़ जाती है।
(b) अभिदृश्यक लेंस का द्वारक घटने से अर्द्ध-शंकु कोण (a) का मान घटेगा, अतः विभेदन क्षमता भी घटेगी।

प्रश्न 30.
एक प्रकाश किरण पारदर्शी माध्यम पर बूस्टर कोण पर आपतित होती है तो स्नैल नियम का उपयोग करते हुए ब्रूस्टर नियम की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
परावर्तन द्वारा प्रकाश का ध्रुवण बूस्टर का नियम (Polarisation by Reflection: Brewester’s Law)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 4
परावर्तन द्वारा प्रकाश का ध्रुवण- जब अधुवित प्रकाश किसी माध्यम जैसे काँच, पानी इत्यादि के पृष्ठ से परावर्तित होता तो वह आंशिक रूप से समतल ध्रुवित हो जाता है। वैज्ञानिक ब्रूस्टर ने यह देखा कि परावर्तित प्रकाश में ध्रुवण की मात्रा आपतन कोण पर निर्भर करती है परन्तु जब प्रकाश माध्यम के पृष्ठ पर एक विशेष आपतन कोण in पर आपतित होता है तो परावर्तित प्रकाश पूर्णतया धुवित होता है। इस आपतन कोण को ध्रुवण कोण (ig) कहते हैं।
ब्रूस्टर ने यह सिद्ध किया कि जब कोई प्रकाश किरण किसी पारदर्शी माध्यम पर ध्रुवण कोण (ig) पर आपतित होती है तो परावर्तित प्रकाश किरण समतल धुवित होती है और परावर्तित किरण तथा अपवर्तित किरण एक-दूसरे के लम्बवत् होती हैं।
IB + r = 90°
स्नेल के नियम से
n = siniB/sin r
अर्थात्
∴ sin iB = n sin r
sin iB = n sin (90° – iB)
sin iB = n cos iB
∵ IB + r = 90°
sin iB = n cos iB
sin iB/cos iB = n
यही ब्रूस्टर नियम है।’

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
यंग के प्रयोग में स्लिटों के बीच अन्तराल 0.4 मिमी. है। 800 मिली. माइक्रॉन तरंगदैर्घ्य के प्रकाश के लिये व्यतिकरण फ्रिंजें 80 सेमी. दूर पर्दे पर बनती हैं। ज्ञात कीजिये – (i) केन्द्रीय फ्रिज से द्वितीय अदीप्त फ्रिंज की दूरी, तथा तृतीय दीप्त फ्रिंज की दूरी
उत्तर:
दिया गया है:
स्लिटों के बीच का अन्तराल
d = 0.4 मिमी
= 0.4 x 10-3 मीटर
प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य
λ = 800 मिली माइक्रॉन
= 800 × 10-3 माइक्रॉन
= 800 × 10-3 x 10-6 मी.
= 8 × 10-7 मी.
स्लिटों से पर्दे की दूरी
D = 80 सेमी = 0.80 मी.

(i) केन्द्रीय फ्रिंज से n वीं अदीप्त फ्रिंज की दूरी
x = \(\frac{(2 \mathrm{n}-1) \mathrm{D} \lambda}{2 \mathrm{~d}}\)
जहाँ n = 1, 2, 3….
यहाँ द्वितीय अदीप्त फ्रिंज के लिये n = 2
अतः
x = \(\frac{(2 \times 2-1) D \lambda}{2 \mathrm{~d}}\) = 3/2
= 2.4 x 10-3 मी.
= 2.4 मिमी.

(ii) केन्द्रीय फ्रिंज से nवीं दीप्त फ्रिंज की दूरी
x = nDλ/d
जहाँ पर n = 0, 1, 2,
यहाँ पर तृतीय दीप्त फ्रिंज के लिये n = 3
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 4
= 4.8 × 10-3
= 4.8

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 2.
यंग के कोणीय चौड़ाई 1° है। प्रयोग में दूरस्थ पर्दे पर बनी फ्रिजों की प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 6000Å है। स्लिटों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया है:
फ्रिंजों की कोणीय चौड़ाई
θ = 1° = 1 × π/180 रेडियन
θ = 3.14/180 रेडियन
प्रयुक्त प्रकाश का तरंगदैर्ध्य
λ = 6000 A
λ = 6000 x 10-10 मी.
= 6 × 10-7 मी.
परन्तु फ्रिंजों की कोणीय चौड़ाई
θ = λ/d
जहाँ d = स्लिटों के बीच की दूरी
d = \(\frac{\lambda}{\theta}\) = \(\frac{6 \times 10^{-7} \text { }}{3.14 / 180}\)
\(\left(\frac{6 \times 10^{-7} \times 180}{3.14}\right)\)
= 0.03 x 10-3 मी.

प्रश्न 3.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में 0.03 मिमी. दोनों स्लिटों के दूरी 140 सेमी. प्रकाशित किया बीच की दूरी 2 मिमी. तथा इनके तल से पर्दे की है, रेखा छिद्रों को 600 nm तरंगदैर्घ्य के प्रकाश से गया है। पर्दे पर प्राप्त व्यतिकरण प्रारूप में केन्द्रीय दीप्त फ्रिंज से तीसरी दीप्त फ्रिंज की दूरी ज्ञात कीजिये। यदि आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य बदलकर 480 nm कर दी जाये तो केन्द्रीय उच्चिष्ठ से तीसरी दीप्त फ्रिंज की स्थिति में विस्थापन ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया है:
d = 2 मिमी = 2 x 103 मी.. D = 140 सेमी.
λ = 600nm
= 600 x 10-9 मी.
केन्द्रीय उच्चिष्ठ से nवीं दीप्त फ्रिंज की दूरी
X =\(\frac{\mathrm{nD} \lambda}{\mathrm{d}}\)

यहाँ पर तीसरी दीप्त फ्रिज के लिये n = 3
X3 = \(\frac{3 D \lambda}{\mathrm{d}}\)
= \(\frac{3 \times 1.40 \times 600 \times 10^{-9}}{2 \times 10^{-3}}\)
X3 = 1.26 × 10-3 मी.
= 1.26 मिमी.
बाद में
d = 2 × 10-3 मी.
D = 1.40 मी.
λ = 480 x 10-9 मी. तो
= \(\frac{3 \times 1.40 \times 600 \times 10^{-9}}{2 \times 10^{-3}}\)
= 1.01 x 10-3 मी.
= 1.01 मिमी.
अतः तीसरी दीप्त फ्रिज का विस्थापन
= x3 – x3
= (1.26 – 1.01) मिमी.
= 0.25 मिमी. (केन्द्रीय उच्चिष्ठ की ओर)

प्रश्न 4.
यंग के द्विक रेखा छिद्र प्रयोग में स्लिटों से D दूरी पर रखे पर्दे पर व्यतिकरण फ्रिंजें प्राप्त की जाती हैं। यदि पर्दे को स्लिटों की ओर 5 x 10-2 मी. दूरी पर विस्थापित कर दिया जाता है तो फ्रिज चौड़ाई में 3 x 10-5 मी. का परिवर्तन पाया जाता है। यदि स्लिटों के बीच की दूरी 10-3 मी. है, तो प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
प्रारम्भ में फ्रिंज चौड़ाई β = \(\frac{\mathrm{D} \lambda}{\mathrm{d}}\)
तथा बाद में फ्रिज चौड़ाई β = \(\frac{\mathrm{D} \lambda}{\mathrm{d}}\)
β – β = \(\frac{\left(D-D^{\prime}\right) \lambda}{d} \)
\(\frac{\left(\beta-\beta^{\prime}\right) \times d}{\left(D-D^{\prime}\right)}\)
दिया गया है:
D – D’ = 5 × 102 मी.
तथा
β – β = 3 x 105 मी.
d = 10-3 मी.
अतः तरंगदैर्ध्य
= \( \frac{3 \times 10^{-5}}{5 \times 10^{-2}}\) x 103 मी.
= 3/5 x 106 मी.
= \( \frac{30000 \times 10^{-10}}{5}\)
मी. = 6000A

प्रश्न 5.
दो तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात 16 : 9 है। उनके आयामों का अनुपात क्या है? यदि दोनों तरंगें व्यतिकरण करें तो महत्तम तथा न्यूनतम तीव्रताओं का अनुपात भी ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
माना कि तरंगों के आयाम a1 व a2 हैं तथा तीव्रतायें
I1 व I2 हैं।
\(\frac{I_1}{I_2}\) = \(\frac{a_1^2}{a_2^2}\) = \(\frac{16}{9}\)
\(\frac{a_1}{a_2}\) = \(\frac{4}{3}\)
अथवा
a1 : a2 = 4 : 3
चूँकि व्यतिकरण में महत्तम तथा न्यूनतम परिणामी आयाम क्रमश: (a1 + a2) तथा (a1 – a2) होते हैं, अतः
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 6
अथवा Imax : Imin = 49 1

प्रश्न 6.
चित्र में S1 व S2 दो पतले छिद्र हैं, जिनके बीच का मध्य-बिन्दु C है जब इन छिद्रों पर 6000 À का एकवर्णी प्रकाश लम्बवत् आपतित होता है तो पर्दे के बिन्दु P पर द्वितीय अदीप्त फ्रिज बनती है। यदि OP = 0.0036 D हो तो S1 व S2 के बीच दूरी ज्ञात कीजिये।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 7
उत्तर:
माना कि दो रेखाछिद्रों S1 व S2 के बीच की दूरी = d यदि CP और CO के बीच कोण θ है तब रेखाछिद्रों S1 व S2 से P पर पहुँचने वाली प्रकाश तरंगों में पथान्तर = d sin θ = d tan θ
(यहाँ पर θ का मान बहुत छोटा है।)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 8
∴ OP = 0.0036 D और CO = D
∴ tan θ = 0.0036/D = 0.0036
∴ पथान्तर = d x 0.0036 = 0.0036 d
आगे, चूँकि P पर द्वितीय अदीप्त फ्रिज बनती है
∴ पथान्तर = 3/2λ
= 3/2 x 6000 x 10-10 m
( यहाँ पर λ = 6000 x 10-10 भी दिया हुआ है।)

प्रश्न 7.
यंग के प्रयोग में लाल प्रकाश (λ = 6600 Å ) प्रयुक्त करने पर दृष्टि क्षेत्र में 60 फ्रिंजें दिखाई देती हैं बैंगनी प्रकाश (λ = 4400 A ) प्रयुक्त करने पर कितनी फ्रिंजें दिखाई देंगी?
उत्तर:
यंग के प्रयोग में रेखाछिद्रों की दूरी d हो, और रेखाछिद्रों- के तल से पर्दे की दूरी D हो, तब λ1 व λ2 तरंग लम्बाई के प्रकाश के कारण फ्रिजों की चौड़ाई क्रमश: β1 व β2 हो तब
β1 = \(\frac{\mathrm{D} \lambda_1}{\mathrm{~d}}\) …………(1)
β2 = \(\frac{\mathrm{D} \lambda_2}{\mathrm{~d}}\) ………….(2)
λ1 = 6600 À व λ2 = 4400 À हो तब

माना कि जितनी दूरी में 6600 À तरंग लम्बाई के प्रकाश के कारण 60 फ्रिंजें बनती हैं उसकी जगह 4400 A का प्रकाश प्रयुक्त करने पर x फ्रिंजें बनती हैं।
∴ xβ2 = 60β1
या
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 10

प्रश्न 8.
यंग के द्विस्लिट प्रयोग में फ्रिजों की चौड़ाई 1 x 10-4 मीटर है। यदि परदे की स्लिट से दूरी दुगुनी कर दी जाये और स्लिटों का अन्तराल आधा कर दिया जाये तथा तरंगदैर्ध्य 6.4 x 10-7 मीटर से 4 x 10-7 मीटर बदल दी जाये तो फ्रिज की नई चौड़ाई क्या होगी?
उत्तर:
दिया गया है:
λ = 6.4 x 10-7 मीटर, B = 1 x 10-4 मीटर
हम जानते हैं:
β =\(\frac{\lambda \mathrm{D}}{\mathrm{d}}\)
प्रारम्भ में
β = \(\frac{6.4 \times 10^{-7} \mathrm{D}}{\mathrm{d}}\)
…..(1)
बाद में
β = \(\frac{4.0 \times 10^{-7} \times 2 \mathrm{D}}{\mathrm{d} / 2}\) …….(2)
β/β = \(\frac{16 \times 10^{-7}}{6.4 \times 10^{-7}}\)
β = 2.5β
= 2.5 x 1 x 10-4 मीटर
= 2.5 x 10-4 मीटर

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 9.
द्वि- स्लिट प्रयोग में सोडियम प्रकाश (λ = 5890 A) के लिये व्यतिकरण फ्रिजों की कोणीय चौड़ाई 0.20 À है। तरंगदैर्ध्य के किस मान के लिये यह चौड़ाई 10% अधिक होगी?
उत्तर:
हम जानते हैं कि फ्रिंज की चौड़ाई
β = D/dλ
जहाँ D व d, स्लिट के तल से पर्दे की दूरी व दो स्लिटों के बीच की दूरी है।
और λ द्वि-स्लिट के प्रयोग में प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की लम्बाई है।
यदि D व d को स्थिर रखकर प्रकाश की तरंग लम्बाई में परिवर्तन किया जाये तब
β = kλ यहाँ K एक स्थिरांक है।
∴ ∆β/ β = ∆λ/λ
या
∆β/ β × 100 = ∆λ/λ × 100
फ्रिंज की चौड़ाई में 10% वृद्धि के लिये
∆β/ β × 100 = 10
∆λ/λ × 100 = 10
या
∆λ = 10/100λ
∵ λ में परिवर्तन करने से पहले λ = 5890Å
∆λ = 10/100 x 5890 A = 589A
फ्रिंज की चौड़ाई 10% से बढ़ाने के लिये प्रयुक्त प्रकाश की
तरंग लम्बाई
= λ + ∆λ
= 5890+ 589 = 6479 Å

प्रश्न 10.
दो पोलेराइड इस प्रकार रखे हैं कि उनसे निर्गत प्रकाश की तीव्रता महत्तम है। यदि एक पोलेराइड को दूसरे के सापेक्ष 300, 90° से घुमा दिया जाये तो नवीन स्थिति में निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम तीव्रता का कौनसा भाग होगी?
उत्तर:
मैलस के नियम के अनुसार
I = I0 cos2θ
जहाँ पर I निर्गत प्रकाश की अधिकतम तीव्रता है और 6 ध्रुवक तथा विश्लेषक की अक्षों के बीच का कोण है।
लेकिन दिया गया है-
θ = 30°, 90°
I = Io cos230°
= 3/4Io
= 0.75 Io
अतः नवीन स्थिति में निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम का 0.75 भाग होगी।
यदि
θ = 90°
I = Io cos2 90
I = Ig x 0 = 0
: cos 90° = 0
अतः I = 0 न्यूनतम मान (यह क्रॉसित व्यवस्था होगी)

प्रश्न 11.
600nm तरंगदैर्घ्य की एक समान्तर प्रकाश किरण पुंज एक पतली झिरी पर आपतित होती है और परिणामी विवर्तन पैटर्न का 1.2m दूर स्थित पर्दे पर अवलोकन किया जाता है। यह प्रेक्षित किया जाता है कि प्रथम निम्निष्ठ पर्दे के केन्द्र से 3 mm दूरी पर है। झिरी की चौड़ाई का परिकलन कीजिये।
उत्तर:
हल दिया गया है:
λ = 600nm = 600 x 109 मी.
= 6 × 107 मी.
D = 1.2 मी.
x = 3 मिमी. = 3 x 10-3 मी.
चौड़ाई a के एकल रेखाछिद्र से उत्पन्न विवर्तन पैटर्न में केन्द्र से प्रथम निम्निष्ठ की कोणीय स्थिति के लिये
sin θ = λ/a ……….(1)
जब θ अल्प हो, तब
sin θ = tan θ = x/D = 3 x 10-3/1.2
समीकरण (1) में मान रखने पर
= \(\frac{3 \times 10^{-3}}{1.2}\) = \(\frac{6 \times 10^{-7}}{a}\)
= 2.4 x 10-4 मी.
a = 0.24 मिमी.
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 11

प्रश्न 12.
यंग के द्विझिर्री प्रयोग में झिर्रियों के बीच की दूरी 0.28mm तथा पर्दे की दूरी 14m है। यदि केन्द्रीय दीप्त फ्रिंज से चौथी दीप्त फ्रिज की दूरी 1.2 cm हो तो प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है
d = 0.28 मिमी. = 0.28 x 10-3 मी.
D = 1.4 मी.
nवीं दीप्त फ्रिज की केन्द्रीय दीप्त फ्रिंज दूरी
xn = \(\frac{\mathrm{nD} \lambda}{\mathrm{d}}\)
यहाँ n = 4 के लिये = 1.2 सेमी = 1.2 x 10-2 मी.
x4 = \(\frac{4 \times D \lambda}{\mathrm{d}}\) से
तरंगदैर्ध्य  = \(\frac{4 \times D \lambda}{\mathrm{d}}\)
मान रखने पर
= \(\frac{\left(1.2 \times 10^{-2} \text {  }\right) \times\left(0.28 \times 10^{-3} \text {  }\right)}{4 \times 1.4 \text {  }}\)
= 600 x 10-9 मी.
= 6000 A

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी

प्रश्न 13.
यंग के द्विझिर्री प्रयोग में, दो झिरियों के बीच पृथक्कन 1.5 mm और झिर्रियों के तल से पर्दे के बीच की दूरी 1m है। व्यतिकरण फिन्जों को प्राप्त करने के लिए 650nm और 520 nm दो तरंगदैयों से बने प्रकाश पुंज का उपयोग किया गया है।
(a) λ = 520nm के लिए पर्दे पर केन्द्रीय उच्चिष्ठ से तीसरी चमकीली फ्रिज की दूरी ज्ञात कीजिए।
(b) केन्द्रीय उच्चिष्ठ से वह कम से कम दूरी ज्ञात कीजिए जहाँ पर इन दोनों तरंगदैयों के कारण बनी दीप्त फ्रिन्ज एक-दूसरे के संपाती होंगी।
उत्तर:
दिया है
λι = 650 nm = 650 x 10-9 m
λ2 = 520 nm = 520 x 10-9 m
(i) yn = \(\frac{\mathrm{nDy}_1}{\mathrm{~d}}\) = \(\frac{3 \times 1 \times 520 \times 10^{-9}}{1.5 \times 10^{-3}}\)
y3 = 1.04 × 103 m

(ii) केन्द्रीय उच्चिष्ठ से वह कम से कम दूरी ज्ञात करना, जहाँ पर इन दोनों तरंगदैयों के कारण बनी दीप्त फ्रिव्ज एक-दूसरे के संपाती होगी।
यदि
λι > λ2
n1 < n2
n1 = n2
n2 + n + 1
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी 12

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरंग-प्रकाशिकी Read More »