Author name: Prasanna

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.1

प्रश्न 1.
निम्न कथनों को पूरा कीजिए :
(a) दो रेखाखण्ड सर्वांगसम होते हैं, यदि …………।
(b) दो सर्वांगसम कोणों में से एक की माप 70° है, तो दूसरे कोण की माप …………. है।
(c) जब हम ∠A = ∠B लिखते हैं, हमारा वास्तव में अर्थ होता है ………….।
हल :
(a) इनकी लम्बाई समान हो।
(b) 70°.
(c) m∠A = m∠B.

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प्रश्न 2.
वास्तविक जीवन से सम्बन्धित सर्वांगसम आकारों के कोई दो उदाहरण दीजिए।
हल :
(i) एक ताले की दो चाबी।
(ii) 100 रु. के दो नोट।

प्रश्न 3.
यदि सुमेलन ABC ↔ FED के अंतर्गत ΔABC ≅ ΔFED, तो त्रिभुजों के सभी संगत सर्वांगसम भागों को लिखिए।
हल :
ΔABC ≅ ΔFED का मतलब है कि ΔABC, ΔFED को पूर्णतया ढक लेता है तथा ΔABC के शीर्ष क्रमशः ΔFED के शीर्षों पर स्थित होंगे।
A ↔ F, B ↔ E और C ↔ D
संगत भुजाएँ सर्वांगसम होंगी।
\(\overline{A B}\) ↔ \(\overline{F E}\), \(\overline{B C}\) ↔ \(\overline{E D}\), \(\overline{C A}\) ↔ \(\overline{D F}\)
संगत कोण सर्वांगसम होंगे :
∠A ↔ ∠F, ∠B ↔ ∠E , और ∠C ↔ ∠D.

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प्रश्न 4.
यदि ΔDEF ≅ ΔBCA हो, तो ΔBCA के उन भागों को लिखिए, जो निम्न के संगत हों :
(i) ∠E
(ii) \(\overline{E F}\)
(iii) ∠F
(iv) \(\overline{D F}\)
हल :
यदि ΔDEF ≅ ΔBCA, तो
D ↔ B, E ↔ C और F ↔ A
अत: ΔBCA के भाग संगत होंगे।
(i) ∠E ↔ ∠C
(ii) \(\overline{E F}\) ↔ \(\overline{C A}\)
(iii) ∠F ↔ ∠A
(iv) \(\overline{D F}\) ↔ \(\overline{B A}\)

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन

प्रश्न 1.
हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसकी स्थिति को युक्तिसंगत ठहराइए।
उत्तर:
हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 होता है। आवर्त सारणी में इसकी स्थिति अनिश्चित है क्योंक यह क्षार धातुओं तथा हैलोजन दोनों के साथ समानताएँ प्रदर्शित करती है।
क्षार धातु से समानता – हाइड्रोजन तथा क्षार धातुओं दोनों के बाह्यतम कोश में एक s इलेक्ट्रॉन होता है।
H – 1s1
Li – 1s2, 2s1
Na – 1s2, 2s2 2p6, 3s1
K – 1s2, 2s2 2p6, 3s23p6, 4s1
हैलोजन से समानता – अक्रिय गैस की स्थायी संरचना प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन तथा हैलोजन दोनों को ही एक-एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है।
H – 1s1
F – 1s2, 2s2, 2p5
Cl – 1s2, 2s22p6, 3s23p5
निष्कर्ष – इलेक्ट्रॉंनिक विन्यास के आधार पर हम सिद्ध कर सकते हैं कि यह ‘हाइड्रोजन’ क्षार धातुओं तथा हैलोजन दोनों के साथ समानता प्रदर्शित करती है अतः इसे क्षार धातुओं के साथ ‘IA’ ग्रुप में रखना तर्क संगत नहीं है।

प्रश्न 2. हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिखिए तथा बताइए कि इन समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात क्या है ?
उत्तर:
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं।
(i) प्रोटियम (1H1)
(ii) ड्यूटीरियम (1H2)
(iii) ट्राइटियम (1H3)
इन समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात निम्नवत् है।

प्रश्न 3.
सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन एकल परमाण्विक की अपेक्षा द्विपरमाण्विक रूप में क्यों पाया जाता है ?
उत्तर:
एकल परमाण्विक रूप में हाइड्रोजन परमाणु के K-कोश में केवल 1 इलेक्ट्रॉन होता है क्योंकि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (1s1) होता है। जबकि द्विपरमाण्विक रूप में इसका K-कोश पूर्ण रूप से भर जाता है, इसका तात्पर्य H2 के रूप में यह उत्कृष्ट गैस (हीलियम) का विन्यास प्राप्त कर लेती है इसलिए द्विपरमाण्विक रूप स्थायी होता है जबकि एकल परमाण्विक रूप अस्थायी होता है।

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प्रश्न 4.
‘कोल गैसीकरण’ से प्राप्त हाइड्रोजन का उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है ?
उत्तर:
कोल से ‘संश्लेषण गैस’ या ‘सिन्नैस’ का उत्पादन करने की प्रक्रिया को ‘कोलगैसीकरण’ (coalgasification) कहते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 1
सिन्गैस में उपस्थित कार्बन मोनोक्साइड को आयरन क्रोमेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से अभिकृत कराने पर हाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 2
यह भाप-अंगार गैस सृति अभिक्रिया कहलाती है।

प्रश्न 5.
विद्युत-अपघटन विधि द्वारा हाइड्रोजन वृहद् स्तर पर किस प्रकार बनाई जा सकती है ? इस प्रक्रम में विद्युत-अपघट्य की क्या भूमिका है ?
उत्तर:
विद्युत-अपघटन विधि द्वारा हाइड्रोजन का निर्माण (Formation of Dihydrogen by electrolytic process)-सर्वप्रथम शुद्ध जल में अम्ल तथा क्षारक की कुछ बूँदें मिलाकर इसे विद्युत का सुचालक बना लेते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 3
अब इसका विद्युत-अपघटन ( वोल्टामीटर में) करते हैं। जल के विद्युत-अपघटन से ऋणोद (कैथोड) पर हाइड्रोजन और धनोद (ऐनोड) पर ऑक्सीजन (सह-उत्पाद के रूप में) एकत्रित होती है। ऐनोड तथा कैथोड को एक ऐस्बेस्टस डायफ्राम की सहायता से पृथक्कृत कर दिया जाता है जो मुक्त होने वाली हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन को मिश्रित नहीं होने देता।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 4
इस प्रकार प्राप्त डाई-हाइड्रोजन पर्याप्त रूप से शुद्ध होती है। विद्युत-अपघट्य की भूमिका (Role of electrolyte) – शुद्ध जल विद्युत-अपघट्य नहीं होता और न ही विद्युत का चालक होता है। शुद्ध जल में अम्ल या क्षार की कुछ मात्रा मिलाकर इसे विद्युत-अपघट्य बनाया जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित समीकरणों को पूरा कीजिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 5
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 6

प्रश्न 7.
डाइहाइड्रोजन की अभिक्रियाशंलता के पदों में H – H बन्ध की उच्च एन्थैल्पी के परिणामों की विवेचना कीजिए ?
उत्तर:
डाइहाइड्रोजन की अभिक्रियाशीलता के पदों में H – H बन्ध की उच्च एन्थैल्पी के परिणामों की विवेचना निम्न प्रकार की जा सकती है। H – H बन्ध की बन्ध एन्थैल्पी काफी उच्च होती है जो किसी भी तत्व के दो परमाणुओं के एकल बन्ध के लिए अधिकतम है। इस उच्च बन्ध एन्थैल्पी का कारण हाइड्रोजन का लघु परमाण्वीय आकार तथा लघु बन्ध लम्बाई है। इस कारण से हाइड्रोजन का इसके परमाणुओं में वियोजन केवल 2000K के ऊपर लगभग 0.081% ही होता है जो 5000K पर बढ़कर 95.5% तक हो जाता है। अत: उच्च H – H बन्ध एन्थैल्पी के कारण कक्ष ताप पर H2 अपेक्षाकृत निष्क्रिय हैं। यह केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही रासायनिक संयोग करता है।

प्रश्न 8.
हाइड्रोजन के (i) इलेक्ट्रॉन न्यून (ii) इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध तथा (iii) इलेक्ट्रॉन समृद्ध यौगिकों से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण द्वारा समझाइये।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक-ये सह-संयोजक हाइड्राइड का प्रकार है। इस प्रकार के हाइड्राइड में, लुइस संरचना लिखने के लिए इलेक्ट्रॉनों की संख्या अपर्याप्त होती है। ये आवर्त सारणी के 13 वें वर्ग के सभी तत्वों द्वारा बनाये जाते हैं। ये लुइस अम्ल की भाँति कार्य करते है। ये इलेक्ट्रॉन ग्राही होते हैं।
उदाहरण- BH3, AlH3 आदि। ये अधिकतर बहुलक के रूप में पाये जाते हैं। जैसे B2H6, B4 H10, (AlH3)n आदि।

(ii) इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध यौगिक-इस प्रकार के हाइड्राइड में परम्परागत लुइस संरचना के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन की संख्या होती है। आवर्त सारणी के 14 वें वर्ग के सभी तत्व इस प्रकार के यौगिक बनाते हैं। इनकी ज्यामिती चतुष्फलकीय होती है।
उदाहरण- CH4, SiH4, GeH4 आदि ।

(iii) इलेक्ट्रॉन समृद्ध यौगिक-इस प्रकार के हाइड्राइड में इलेक्ट्रॉन आधिक्य एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के रूप में उपस्थित रहते हैं। आवर्त सारणी में 15 वें से 17 वें वर्ग तक के सभी तत्व इस प्रकार के यौगिक बनाते हैं।
उदाहरण-
NH3, PH3, AsH3 एक एकाकी इलेक्ट्रान युग्म होता हैं।
H2O, H2S, H2Se दो एकाकी इलेक्ट्रान युग्म होते हैं।
HF, HCl, HBr, HI तीन एकाकी इलेक्ट्रान युग्म होते हैं।

ये लुइस क्षार की भाँति कार्य करते हैं। ये इलेक्ट्रॉन दाता होते हैं। उच्च विद्युत ऋणात्मकता वाले परमाणु जैसे- N,O तथा F के हाइड्राइड पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण अणुओं में हाइड्रोजन बंध बनता है जिसके कारण अणुओं में संगुणन होता है।

प्रश्न 9.
संरचना एवं रासायनिक अभिक्रियाओं के आधार पर बताइए कि इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड के कौन-कौन से अभिलक्षण होते हैं ?
उत्तर:
(i) वे आण्विक-हाइड्राइड जिनमें केन्द्रीय परमाणु पर अष्टक नहीं होता है, इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड कहलाते हैं। वर्ग 13 के तत्वों के हाइड्राइड; जैसे – B2H6, (AlH3)n आदि, इलेक्ट्रॉन न्यून अणु होते हैं तथा इसलिए किसी दाता अणु; जैसे- NH3, PF3, CO आदि से इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखते हैं तथा योगात्मक यौगिक बनाते हैं। इन योगात्मक यौगिकों के निर्माण में इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड लुइस अम्लों की भाँति तथा दाता अणु लुइस क्षारकों की भाँति व्यवहार करते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 7
(ii) बोरोंन के हाइड्राइड पाना के साथ क्रिया करक हाइड्राजन मुक्त करते हैं।
B2H6 + 6H2O → B(OH)3 + 6H2

(iii) क्योंकि इनमें सामान्यतः सहसंयोजक बन्ध बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं अतः ये संगुणन करते हैं और बहुलक के रूप में पाये जाते हैं। जैसे- B2H6, B4H10, (AlH3)n आदि।

(iv) इलेक्ट्रॉन न्यून होने के कारण इसकी क्रियाशीलता अधिक होती है क्योंकि ये अपनी इलेक्ट्रॉन न्यूनता को दूर करने के लिए जल्द से जल्द अन्य यौगिक के साथ अभिक्रिया कर लेते हैं।
उदाहरण –
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 8

प्रश्न 10.
क्या आप आशा करते हैं कि (CnH2n + 2) कार्बनिक हाइड्राइड लुइस अम्ल या क्षार की भाँति कार्य करेंगे ? अपने उत्तर को युक्ति संगत ठहराइए।
उत्तर:
CnH2n + 2 कार्बनिक हाइड्राइड इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध प्रकार के हाइड्राइड होते हैं अर्थात् इनमें इलेक्ट्रॉन की संख्या उतनी ही होती है जितनी कि इन्हें सह-संयोजक बन्ध बनाने के लिए चाहिए होती है। अतः ये न तो इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करते हैं और न ही उन्हें त्यागते हैं। अर्थात ये न तो लुइस अम्ल की तरह न ही लुइस क्षार की भाँति कार्य करते हैं।

प्रश्न 11.
अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड से आप क्या समझते हैं ? क्या आप क्षारीय धातुओं से ऐसे यौगिकों की आशा करते हैं ? अपने उत्तर को न्याय संगत ठहराइए।
उत्तर:
अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड-संक्रमण तथा अन्त: संक्रमण धातुएँ हाइड्रोजन को अपने जालक के अन्तराकोश में अवशोषित करके इस प्रकार के हाइड्राइड बनाती है। इनमें धातु और हाइड्रोजन का अनुपात समानुपात न होकर भिन्नात्मक होता है। इनका भिन्नात्मक अनुपात ताप तथा दाब के साथ बदलता रहता है।

क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक होती हैं। ये अपने इलेक्ट्रॉन को हाइड्रोजन परमाणु को देकर H आयन बनाती हैं। क्षार धातुओं के हाइड्राइड आयनिक होते हैं। क्योंकि ये क्षार धातुओं से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके उस आयन के साथ आयनिक बन्ध बनाते हैं। अर्थात् क्षार धातुएँ अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड नहीं बनातीं। ये आयनिक हाइड्राइड अर्थात् रससमीकरणमितीय यौगिक बनाती हैं।

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प्रश्न 12.
हाइड्रोजन भण्डारण के लिए धात्विक हाइड्राइड किस प्रकार उपयोगी हैं ? समझाइए।
उत्तर:
हाइड्रोजन के उच्च ज्वलनशील होने के कारण इसका भण्डारण करना एक कठिनाई का विषय है। इस कठिनाई का एक हल यह है कि हाइड्रोजन का भण्डारण इसके मैग्नीशियम, मैग्नीशियम-निकिल तथा आयरन-टाइटेनियम मिश्र-धातु के साथ बने यौगिक के टैंक (tank) के रूप में किया जाए। ये धातु मिश्र-धातु छिद्रों की भाँति हाइड्रोजन की वृहद् मात्रा को अवशोषित कर लेती हैं तथा धात्विक हाइड्राइड बनाती हैं।

धात्विक हाइड्राइड तन्त्र को जलाना अथवा इसका विस्फोट होना सम्भव नहीं होता; अतः इसे हाइड्रोजन भण्डारण की सुरक्षित युक्ति माना जा सकता है। चूँकि हाइड्रोजन इन धातुओं से रासायनिक रूप से जुड़ी रहती है तथा यह धातु में तब तक भण्डारित रहती है जब तक कि इसे अतिरिक्त ऊर्जा न दी जाए। अतः हाइड्रोजन भण्डारण के लिए धात्विक हाइड्राइड अत्यन्त उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 13.
कर्तन और वेल्डिंग में परमाणवीय हाइड्रोजन अथवा ऑक्सी-हाइड्रोजन टॉर्च किस प्रकार कार्य करती है ? समझाइए।
उत्तर:
परमाण्विक हाइड्रोजन या ऑक्सी-हाइड्रोजन टॉर्च का उपयोग कर्तन तथा वेल्डिंग में होता है। परमाण्विक हाइड्रोजन, परमाणु (जो विद्युत आर्क की सहायता से डाइहाइड्रोजन के वियोजन से बनते हैं) का पुनर्संयोग वेल्डिंग की जानी वाली धातुओं की सतह पर लगभग 4000K तक ताप उत्पन्न कर देता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 9
ऑक्सी-हाइड्रोजन टॉर्च की ज्वाला अत्यन्त उच्च ताप (3000K से भी अधिक) उत्पन्न करती है जो वेल्डिंग कार्य में प्रयोग किया जाता है। उपरोक्त कार्य में होने वाली अभिक्रिया निम्न है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 10
उपरोक्त अभिक्रिया से बनने वाली परमाण्विक हाइड्रोजन का जीवन 0.3 sec होता है। अतः यह तुरन्त आण्विक हाइड्रोजन में परिवर्तित हो जाती है और साथ-साथ अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न करती है जो वेल्डिंग तथा कर्तन में प्रयोग होती है।

प्रश्न 14.
NH3, H2O तथा HF में से किसका हाइड्रोजन बन्ध का परिमाण उच्चतम अपेक्षित है और क्यों ?
उत्तर:
उच्च इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता होने के कारण N, O तथा F हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं। HF अणु में हाइड्रोजन बन्ध का परिमाण उच्चतम अपेक्षित है; क्योंकि फ्लुओरीन आवर्त सारणी का सर्वाधिक विद्युत ऋणी तत्व (4.0) है परिणामस्वरूप H-F बन्ध प्रबल ध्रुवीय होने के कारण प्रबल अन्तर-आण्विक हाइड्रोजन बन्ध प्रदर्शित करता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 11

प्रश्न 15.
लवणीय हाइड्राइड जल के साथ प्रबल अभिक्रिया करके आग उत्पन्न करती है क्या इसमें CO2 (जो एक सुपरिचित अगिनशामक है) का उपयोग हम कर सकते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
लवणीय हाइड्राइड जैसे- NaH, CaH2 आदि जल के साथ प्रबल अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन उत्पन्न करते हैं। यह हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है तथा अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है।
NaH(s) + H2O(l) → NaOH(aq) + H2(g) + ऊष्मा
CaH2(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + 2H2(g) + ऊष्मा
इस अभिक्रिया में उत्पन्न आग के लिए हम CO2 को अग्निशामक की तरह प्रयोग नहीं कर सकते हैं। क्योंकि इसमें बने हाइड्रॉक्साइड से CO2 क्रिया करके कार्बोनेट बना लेती है।

2NaOH(aq) + CO2(g) → Na2CO3(aq) + H2O(aq)

इसके साथ-साथ CO2 धातु हाइड्राइड से अभिक्रिया करके अपचयित हो जाती है।

NaH + CO2 → HCOONa

अत: अभिक्रिया में उत्पन्न आग को रेत से बुझाया जा सकता है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित को व्यवस्थित कीजिए-
(i) CaH2, BeH2 तथा TiH2 को उनकी बढ़ती हुई विद्युत्चालकता के क्रम में।
(ii) LiH, NaH तथा CsH को आयनिक गुण के बढ़ते हुए क्रम में।
(iii) H-H, D-D तथा F-F को उनके बन्ध-वियोजन एन्थैल्पी के बढ़ते हुए क्रम में।
(iv) NaH, MgH2 तथा H2O को बढ़ते हुए अपचायक गुण के क्रम में।
उत्तर:
(i) BeH2 <TiH2 < CaH2 : विद्युत् चालकता का बढ़ता क्रम।
(ii) LiH < NaH < CsH : आयनिक गुण का बढ़ता क्रम।
(iii) F-F (iv) H2O < MgH2 < NaH: अपचायक गुण का बढ़ता क्रम।

प्रश्न 17.
H2O तथा H2O2 की संरचनाओं की तुलना कीजिए।
उत्तर:
जल-अणु की संरचना:
गैस-प्रावस्था में जल एक बंकित (bent) अणु है तथा आबन्ध कोण एवं O-H आबन्ध दूरी के मान क्रमशः 104.5° तथा 95.7 pm हैं, जैसा चित्र (क) में प्रदर्शित किया गया है अत्यधिक ध्रुवित अणु चित्र- (ख) में तथा चित्र-(ग) में जल के अणु में ऑर्बिटल अतिव्यापन दर्शाया गया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 12

हाइड्रोजन परॉवसाइड अणु की संरचना:
हाइड्रोजन परॉक्साइड की संरचना असमतलीय (खुली पुस्तक के समान ) होती है। गैसीय प्रावस्था तथा ठोस प्रावस्था में इसकी आण्विक संरचना को निम्न चित्र में दर्शाया गया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 13

प्रश्न 18.
जल के स्वतः प्रोटोनीकरण से आप क्या समझते हैं ? इसका क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
जल का स्वतः प्रोटोनीकरण (Auto-protolysis of water)-एक जल-अणु किसी दूसरे जल-अणु से प्रोटॉन ग्रहण करके H3O+ तथा OH+ बनाता है। यह प्रक्रिया जल का स्वतः प्रोटोनीकरण कहलाती है।

H2O(l) + H2O(l) → H3O+(aq) + OH(aq)

प्रोटॉनीकरण का महत्त्व यह है कि जल अम्ल तथा क्षारक दोनों की भाँति कार्य कर सकता है अर्थात् इसकी प्रवृत्ति उभयधर्मी होती है। उपर्युक्त अभिक्रिया को एक साम्य स्थिरांक, ‘आयनिक गुणनफल’ (Kw) द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका मान निम्नवत् दर्शाया जा सकता है-
Kw = [H3O+] [OH]
298K पर Kw = 1.0 × 10-14 mol2 L-2
अतः जल के स्वतः प्रोटोनीकरण का अम्ल-क्षारक रसायन में अत्यधिक महत्त्व होता है।

प्रश्न 19.
F2 के साथ जल की अभिक्रिया में ऑक्सीकरण तथा अपचयन के पदों पर विचार कीजिए एवं बताइए कि कौन-सी स्पीशीज ऑक्सीकृत/अपचयित होती है ?
उत्तर:
फ्लुओरीन की जल के साथ अभिक्रिया निम्नवत् है
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 14
ऑक्सीकरण संख्या में कमी (अपचयन)
अतः स्पष्ट है कि-
F2 ऑक्सीकारक है तथा H2O अपचायक है।
H2O का ऑक्सीकरण O2 में होता है।
F2 का अपचयन HF में होता है।

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प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
(i) PbS(s) + 4H2O2(aq) →
(ii) 2MnO4(aq) + 3H2O2(aq) →
(iii) CaO(s) + H2O(g) →
(iv) AlCl3(g) + 3H2O(l) →
(v) Ca3N2(s) + 6H2O(l) →
उपर्युक्त को (क) जल-अपघटन, (ख) अपचयोपचय (redox) तथा (ग) जलयोजन अभिक्रियाओं में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
(i) PbS(s) + 4H2O2(aq) → PbSO4(s) + 4H2O(aq) (अपचयोपचय अभिक्रिया)

(ii) 2MnO4(aq) + 3H2O2(aq) → 2MnO2(aq) + 3O2(aq) + 2H2O(l) + 2OH(aq) (अपचयोपचय अभिक्रिया)

(iii) CaO(s) + H2O(g) → Ca(OH)2(s) ( जलयोजन अभिक्रिया)

(iv) AlCl3(g) + 3H2O(l) → Al(OH)3(s) + 3HCl(l) (जल अपघटन अभिक्रिया)

(v) Ca3N2(s) + 6H2O(l) → 3Ca(OH)2(aq) + 2NH3(g) ( जल-अपघटन अभिक्रिया)

प्रश्न 21.
बर्फ के साधारण रूप की संरचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
बर्फ की संरचना
(Structure of Ice)
बर्फ एक अतिव्यवस्थित, त्रिविम, हाइड्रोजन आबन्धित संरचना है जिसे निम्नांकित चित्र में दर्शाया गया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 15
X-किरणों द्वारा परीक्षण से पता चला है कि बर्फ क्रिस्टल में ऑक्सीजन परमाणु चार अन्य हाइड्रोजन परमाणुओं से 276 pm दूरी पर चतुष्फलकीय रूप से घिरा रहता है। हाइड्रोजन आबन्ध बर्फ में वृहद् छिद्र (एक प्रकार की खुली संरचना) बनाते हैं। ये छिद्र उपयुक्त आकार के कुछ दूसरे अणुओं को अन्तराकोश में ग्रहण कर सकते हैं।

उपर्युक्त चित्र में दर्शाई गयी बर्फ की संरचना से स्पष्ट है कि प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं से घिरा हुआ है जिनमें दो प्रबल सहसंयोजी आबन्ध (ठोस रेखा द्वारा प्रदर्शित) से तथा दो दुर्बल हाइड्रोजन आबन्धों (बिन्दुदार रेखा से प्रदशित) से जुड़े हुए हैं। चूँकि हाइड्रोजन बन्ध (177 pm) सहसंयोजी आबन्धों (95.7 pm) से लम्बे हैं; अतः जल-अणु क्रिस्टल जालक में निविड़-संकुलित (closely packed) नहीं होते। यही कारण है कि जल के घनत्व से बर्फ का घनत्व कम होता है तथा यह (बर्फ) जल की सतह पर तैरती है।

प्रश्न 22.
जल की अस्थायी एवं स्थायी कठोरता के क्या कारण हैं ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अस्थायी कठोरता (Temporary hardness) अस्थायी कठोरता जल में कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के हाइड्रोजन कार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है। इसे उबालकर दूर किया जा सकता है।
स्थायी कठोरता (Permanent hardness)-स्थायी कठोरता जल में विलेयशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा सल्फेट के रूप में घुले रहने के कारण होती है। यह उबालने से दूर नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 23.
संश्लेषित आयन विनिमयक विधि द्वारा कठोर जल के मृदुकरण के सिद्धान्त एवं विधि की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
संश्लेषित आयन विनिमयक विधि-यह दो प्रकार की होती है-
1. अकार्बनिक आयन विनिमयक विधि
2. कार्बनिक आयन विनिमयक विधि

1. अकार्बनिक आयन विनिमयक विधि-इसे जियोलाइट या परम्यूटिट विधि भी कहते हैं। यह कठोर जल को मृदु जल में परिवर्तित करती है। इसमें सोडियम जियोलाइट प्रयुक्त होता है जोकि सोडियम ऐल्युमिनियम सिलिकेट होता है जिसका सूत्र Na2Al2Si2O8 या NaAlSiO4. 3H2O होता है। सरलता के लिए इसे Na2Z लिख सकते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 16

परम्यूटिट विधि में हम दोनों प्रकार की कठोरता दूर कर सकते ? क्योंकि सोडियम जियोलाइट में उपस्थित सोडियम लवणों का यह गुण है कि ये अन्य आयनों द्वारा विस्थापित हो जाते हैं। कठोर जल को जियोलाइट की परत के ऊपर से प्रवाहित करने पर जल में उपस्थित कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयन इसमें उपस्थित सोडियम आयनों द्वारा विस्थापित हो जाते हैं और यहं मैग्नीशियम या कैल्सियम जियोलाइट में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 17
अब प्राप्त जल में कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के आयन नहीं होते हैं और वह मृदु जल बन जाता है।

परम्यूटिट का पुन: निर्माण-जब Na2Z पूर्णत: CaZ व MgZ में परिवर्तित हो जाता है तो इसके पुनः निर्माण के लिए इसमें कठोर जल के प्रवेश को रोककर इसके स्थान पर 10% NaCl विलयन प्रवाहित करते हैं तब Ca2+ तथा Mg2+ आयन Na+ आयनों द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं जिससे परम्यूटिट का पुनः निर्माण हो जाता है और उसे हम पुनः प्रयोग कर सकते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 18

2. काबनिके आयन विनिमयक विध या संश्लाषित रीजन विधि-यह अत्यधिक आधुनिक विधि है। परम्यूटिट केवल Ca2+ तथा Mg2+ आयनों को जल से हटाता है जबकि कार्बनिक रेजिन जल में उपस्थित सभी आयनों को (H+ तथा OH को छोड़कर) हटाता है। इस प्रकार इस विधि से प्राप्त जल पूर्णतः आयनों रहित होता है। इस विधि में दो प्रकार के रेजिन प्रयोग में आते हैं।
(i) ऋणायन विनिमयक रेजिन
(ii) धनायन विनिमयक रेजिन

(i) ऋणायन विनिमयक रेजिन-इनमें हाइड्रोकार्बन समूह के साथ क्षारीय समूह -OH अथवा -NH2 जुड़े रहते हैं जिन्हें -OH रेजिन के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। ये जल में उपस्थित ऋणायन जैसे-Cl, HCO3, SO42- आदि का विनिमय OH के साथ करता है। इस प्रकार जल में उपस्थित सभी ऋणायन कठोर जल से मुक्त हो जाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 19
जब ऋणायन विनिमयक रेजिन में से सभी OH आयन ऋणायनों के द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते है तब इस टैंक में NaOH का छिड़काव करते हैं जो कि -OH रेजिन को पुननिर्मित कर देता है।
RNH3+X + NaOH → RNH3+OH + NaX

(ii) धनायन विनिमयक रेजिन – ये हाइड्रोजन समूह ही है जिनके साथ अम्लीय समूह जैसे- COOH या -SO3H समूह जुड़े रहते हैं। इन्हें H रेजन भी कहते हैं। जब जल में उपस्थित सभी ऋणायनों का प्रतिस्थापन हो जाता है तब उस जल को धनायन विनिमयक रेजिन के टैंक में प्रवाहित करते हैं। जहाँ जल में उपस्थित सभी धनायन H+ आयनों के साथ प्रतिस्थापित हो जाते हैं। ये H+ आयन OH के साथ जल का निर्माण करते हैं। इनका पुनर्जनन NaCl/HCl विलयन से होता है।

2 RNa + M2+ → R2M + 2Na+(M = Ca,Mg)
R2M + 2Na+ → 2RNa + M2+ (पुनर्जनन)
या 2RH + M2+ → MR2 + 2H+ (M2+ → Ca2+, Mg2+)
MR2 + 2H+ → 2RH + M2+

अतः इस विधि द्वारा सभी धनायनों तथा ऋणायनों का प्रतिस्थापन क्रमशः H+ तथा OH द्वारा हो जाता है एवं हमें शुद्ध विखनिजित (demineralized) तथा विआयनित (deionised) जल प्राप्त होता है।

प्रश्न 24.
जल के उभयधर्मी स्वभाव को दर्शाने वाले रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
जल की उभयधर्मी प्रकृति (Amphoteric nature of water)—जल अम्ल तथा क्षारक दोनों रूपों में व्यवहार करता है। अतः यह उभयधर्मी है। ब्रॉन्स्टेड अवधारणा के सन्दर्भ में जल NH3 के साथ अम्ल के रूप में तथा H2S के साथ क्षारक के रूप में कार्य करता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 20
जल अपने से प्रबल अम्लों के साथ क्षारक की भाँति व्यवहार करता है; जैसे-उपर्युक्त अभिक्रिया (ii) में दर्शाया गया है। इसमें जल-अणु H2S से एक प्रोटॉन ग्रहण करके H3O+आयन बनाता है। अभिक्रिया (i) में जल-अणु एक प्रोटॉन का त्याग करता है। NH3 अणु इस प्रोटॉन को ग्रहण करके NH4+ आयन बनाता है। यहाँ जल एक अम्ल की भाँति कार्य करता है।

प्रश्न 25.
हाइड्रोजन परॉक्साइड के ऑक्सीकारक एवं अपचायक रूप को अभिक्रियाओं द्वारा समझाइए।
उत्तर:
हाइड्रोजन परॉक्साइड के अपघटन के दौरान ऑक्सीकरण-अवस्था परिवर्तन निम्नवत् दर्शाया जा सकता हैऑक्सीकरण-संख्या में वृद्धि = ऑक्सीकरण
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 21
चूँकि H2O2 में उपस्थित ऑक्सीजन परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि तथा कमी दोनों होती हैं; इसलिए यह अपचायक तथा ऑक्सीकारक दोनों की भाँति कार्य कर सकता है। इसे निम्नलिखित अभिक्रियाओं द्वारा समझा जा सकता है-

(i) अम्लीय माध्यम में H2O2 ऑक्सीकारक के रूप में-

2Fe2+(aq) + 2H+(aq) + H2O2(aq) → 2Fe3+(aq) + 2H2O(l)
PbS(s) + 4H2O2(aq) → PbSO4(s) + 4H2O(l)

(ii) अम्लीय माध्यम में H2O2 अपचायक के रूप में-

2MnO4(aq) + 6H+(aq) + 5H2O2 → 2Mn2+(aq) + 8H2O(l) + 5O2(g)
HOCl + H2O2 → H3O+ + Cl + O2(g)

(iii) क्षारीय माध्यम में H2O2 ऑक्सीकारक के रूप में-
2Fe2+ + H2O2 → 2Fe3+ + 2OH
Mn2+ + H2O2 → Mn4+ + 2OH

(iv) क्षारीय माध्यम में H2O2 अपचायक के रूप में-
I2 + H2O2 + 2OH → 2I + 2H2O + O2
2MnO4 + 3H2O2 → 2MnO2 + 3O2 ↑+ 2H2O + 2OH

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 हाइड्रोजन

प्रश्न 26.
विखनिजित जल से क्या अभिप्राय है ? यह कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?
उत्तर:
वह जल जो सभी विलेयशील खनिज अशुद्धियों से पूर्णतया मुक्त हो, विखनिजित जल (demineralized water) कहलाता है। दूसरे शब्दों में धनायनों (Ca2+, Mg2+ आदि) तथा ऋणायनों (Cl, SO42-, HCO3 आदि) से पूर्णतया विमुक्त जल विखजनित जल कहलाता है। विखनिजित जल को आयन-विनिमयक रेजिन विधि से प्राप्त किया जाता है। इस विधि के अन्तर्गत आयन-विनिमयक रेजिनों द्वारा जल में उपस्थित सभी धनायनों तथा ऋणायनों को हटा दिया जाता है।

इसके लिए सर्वप्रथम कठोर जल को H+ रेजिन के टैंक से प्रवाहित करते हैं। जहाँ Na+, Ca2+, Mg2+ आदि सभी धनायन H+ आयनों से प्रतिस्थापित हो जाते हैं उसके बाद इस जल को -OH रेजिन के टैंक से प्रवाहित करते हैं जहाँ सभी ऋणायन जैसे- Cl, SO42-, HCO3, आदि OH से प्रतिस्थापित हो जाते हैं। इस प्रकार सभी ऋणायन तथा धनायन OH तथा H+ द्वारा प्रतिस्थापित होते हैं और हमें विखनिजित जल प्राप्त होता है।

प्रश्न 27.
क्या विखनिजित या आसुत जल पेय-प्रयोजनों में उपयोगी है यदि नहीं तो इसे उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है ?
उत्तर:
नही, विखनिजित या आसुत जल पेय-प्रयोजनों में उपयोगी नहीं है क्योंकि यह स्वादहीन होता है। यदि कुछ आयन जैसे- Na+, K+, Mg+, Li+ आदि जो हमारे शरीर के लिए उपयोगी होते हैं, को इन विखनिजित जल में डाल दें तो यह पेय-प्रयोजनों में प्रयुक्त हो सकता है। ऐसा करने के लिए हम इसमें लवण जैसे- NaCl, KCl आदि मिला देते हैं ।

प्रश्न 28.
जीवमण्डल एवं जैव-प्रणालियों में जल की उपयोगिता को समझाइए।
उत्तर:
जीवमण्डल एवं जैव-प्रणालियों में जल की उपयोगिता सभी सजीवों का एक वृहद् भाग जल द्वारा निर्मित है। मानव शरीर में लगभग 65 प्रतिशत एवं कुछ पौधों में लगभग 95 प्रतिशत जल होता है। जीवों को जीवित रखने के लिए जल एक महत्वपूर्ण यौगिक है। संघनित प्राबस्था (द्रव तथा टोस अवस्था) में जल के आयामान्य गुणों का कारण तथा अन्य तत्वों के हाइड्राइड H2S तथा H2Se की नुलना में जल का उच्व हिमांक, उच्च क्वधनांक, उच्च वाण्यन कप्मा उच्च संलयन ऊष्मा का कारण इसमें हाहड्रोजन-बन्ध का उपस्थित होनो है अन्य द्रवों की जुलना में जल की विशिष्ट कप्मा, तापीय नालकता. पृष्ठ-तनाव, द्विध्रुव आघर्ण तथा पराविद्युतांक के मान उच्च होते है।

इन्तीं गुणों के कारण जीवमण्डल में जल की महत्वमूण भृमिका है। शरीर तथा जलवायु के सामान्य ताप को बनाए रख्बने के लिए उत्तरदायी है। वनस्पतियों एवं प्राणियों के उपापचय (metabolism) में अणुओं के अभिगमन के लिए जल एक उत्तम विलायक का कार्य करता है। अल ध्रुवीय अणुओं के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाता है जिससे सहसंयोजक यौगिक; जैसे-ऐल्कोहॉल तथा काबॉहाइट्ट्रेट यौगिक जल में चिलेय होते हैं। अतः जैव-प्रणालियों के लिए भी यह आवश्यक होता दै।

प्रश्न 29.
जाल का कौन-सा गुण इसे विलायक के क्रष में उपयोगी बनाता है ? बह किस प्रकार के घौगिक-
(i) घोल सकता है। और
(ii) जल-अपघटन कर सकता हैं ?
उत्तर:
जल के गुण
जल के निम्नलिखित गुण हसे विलायक के रुप में ज्यतिमहत्वपयर्ण बनाते हैं-
(i) इसकी वाष्पन एन्धैल्पी तथा कप्मा-धारिता उच्च होती है।
(ii) यंह ताप की एक दीर्घ परास (0°C से 100°C तक ) के अन्तमंत द्रव-अवस्था में होता है।
(iii) यह ध्रुवी प्रकृति का होता है तथा इसका पराचित्रितांक उक्च (78-39) होता है।
(iv) अन्य यौगिकौं के साथ हाइड्रोजन बन्ध बना सकता है।

जल विलायक के मूप में:
(i) यह हाइड्रोजन बन्ध के कारण श्रुवी पदाधों तथा कछ कर्वंनिक यौगिकों को घोल सकता है। यह आयनिक पदार्थों तथा उन याँगिकों को घोल सकता है जो इसके साथ H-बन्ध बनाते हैं।
(ii) इसमें उपस्थित ऑक्सीजन की अनेक तस्चों से अत्यधिक वन्थूता के कारण यह सहसंयोजी यौगिकों को जल-अपधटित कर देता है। गह ऑक्साइडों, हैलाइडों, फॉस्फाइडों, नाहट्राइड्टों आदि को जल-अप्टित कर देता है।

प्रश्न 30.
H2O एवं D2O के गुणों को जानते हुए क्या आय मानते हैं कि D2O का उपयोग पेय-प्रयोजनों के रूप में किया जा सकता है ?
उत्तर:
D2O का उपयोग हम पेय-प्रयोजनों में नहीं कर सकते हैं। इसके निम्न कारण हैं-
(i) D2O की बन्ध ऊर्जा H2O की अपेक्षा अधिक होती है।
(ii) भारी अणु होने के कारण D2O का आयनन H2O की तुलना में एक तिहाई ही होता है।
(iii) कम पराविद्युतांक के कारण इसमें आयनिक पदार्थ जल की तुलना में कम विलेय होता है।
भारी जल शंरीर में होने वाली अपचयोपचयी अभिक्रियाओं को साधारण जल की तुलना में अति मन्द गति से करता है। जिससे ये असन्तुलित हो जाती है अतः यह जीवन के लिए हानिकारक होता है। यह पेड़-पौधों का विकास रोक देता है, बीजों का अंकुरण रोकता है, जल में रहने वाले जीवों को मार देता है।

प्रश्न 31.
जल-अपघटन तथा जलयोजन पदों में क्या अन्तर है ?
उत्तर:

जल-अपघटनजलयोजन
1. जल अपघटन अभिक्रिया में एक पदार्थ उदासीन, अम्लीय अथवा क्षारीय माध्यमों में जल से अभिक्रिया करता है।

उदाहरण-

AlCl3 + 3H2O → Al(OH)3 + 3HCl

1. किसी रासायनिक पदार्थ का वह गुण जिसमें वह क्रिस्टलन जल के अणु ग्रहण करके जलयोजित हो जाता है, जल योजन कहलाता है।

उदाहरण – निर्जलीय CuSO4 का रंग सफेद होता है तथा H2O के पाँच अणु ग्रहण करके यह CuSO4.5H2O बनाता है जो नीले रंग का होता है।

2. अभिक्रिया के दौरान pH परिवर्तित होता है।2. pH परिवर्तित नहीं होता है।
3. सह-संयोजी यौगिक प्रदर्शित करते हैं।3. आयनिक यौगिक प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 32.
लवणीय हाइड्राइड किस प्रकार कार्बनिक यौगिकों से अति सूक्ष्म जल की मात्रा को हटा सकते हैं ?
उत्तर:
लवणीय हाइड्राइडों में H2O के लिए अत्यधिक बन्धुता होती है। लवणीय हाइड्राइड; जैसे- NaH, H आयनों को मुक्त करता है जो प्रबल ब्रॉ्स्टेड क्षारकों की भाँति कार्य करते हैं (H2O एक दुर्बल ब्रॉन्स्टेड अम्ल होता है) । NaH जल से संयुक्त होकर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है। लवणीय हाइड्राइडों का यह गुण कार्बनिक यौगिकों से अति सूक्ष्म जल की मात्रा को हटाने में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 33.
परमाणु क्रमांक 15,19,23 तथा 44 वाले तत्व यदि डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाते हैं तो उनकी प्रकृति से आप क्या आशा करेंगे ? जल के प्रति इनके व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक 15 वाला तत्व फॉस्फोरस (P) है। इसका हाइड्राइड (PH3) सहसंयोजी होता है।
परमाणु क्रमांक 19 वाला तत्व पोटैशियम (K) है। इसका हाइड्राइड (KH) आयनिक होता है।
परमाणु, क्रमांक 23 वाला तत्व वैनेडियम (V) है इसका हाइड्राइड अन्तराकाशी या धात्विक होगा।
परमाणु क्रमांक 44 वाला तत्व रूथेनियम (Ru) है। इसका हाइड्राइड अन्तराकाशी या धात्विक होगा।

जल के प्रति व्यवहार:
(i) परमाणु क्रमांक 15 वाला तत्व (P) सहसंयोजी हाइड्राइड (PH3) बनाता है जो जल में अल्प-विलेय होता है।
(ii) परमाणु क्रमांक 19 वाला तत्व (K) आयनिक हाइड्राइड (KH) बनाता है जो जल के साथ विस्फोटक रूप से अभिक्रिया करके डाइहाइड्रोजन गैस देता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 22
(iii) परमाणु क्रमांक 23 तथा 44 वाले तत्व V तथा Ru अन्तराकाशी या धात्विक हाइड्राइड बनाते हैं जो जल को संगुणित कर लेते हैं।

प्रश्न 34.
जब ऐलुमिनियम (III) क्लोराइड एवं पोटैशियम क्लोराइड को अलग-अलग (i) सामान्य जल, (ii) अम्लीय जल एवं (iii) क्षारीय जल से अभिकृत कराया जाएगा तो आप किन-किन विभिन्न उत्पादों की आशा करेंगे ? जहाँ आवश्यक हो, वहाँ रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर:
(i) सामान्य जल में-सामान्य जल में ऐलुमिनियम (III) क्लोराइड निम्नवत् जल-अपघटित होगा-
AlCl2 + 3H2O → Al(OH)3 + 3HCl
KCl जल में विलेय होगा तथा इसके आयन जलयोजित हो जायेंगे।
KCl(s) + H2O (आधिक्य) → K+(aq) + Cl(aq)

(ii) अम्लीय जल में-अम्लीय जल में ऐलुमिनियम (III) क्लोराइड जल-अपघटित हो जाएगा, परन्तु समआयन प्रभाव के कारण जल-अपघटन धीमी दर से होगा तथा यह HCl से अभिक्रिया करके AlCl3 बना लेगा जो Al3+ तथा Cl के रूप में उपस्थित होंगे।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 23
पोटैशियम क्लोराइड पर अम्लीय जल का कोई प्रभाव नहीं होगा।

(iii) क्षारीय जल में-क्षारीय जल में AlCl3 तीव्रता से जल-अपघटित होकर विलेय टेट्राहाइड्रॉक्सो-ऐलुमिनेट बनाता है।
AlCl3 + 3NaOH → Al(OH)3 + 3NaCl
Al(OH)3 + OH → [Al(OH4]
पोटैशियम क्लोराइड पर क्षारीय जल का कोई प्रभाव नहीं होगा।

प्रश्न 35.
H2O2 विरंजन कारक के रूप में कैसे व्यवहार करता है ? लिखिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2) निम्नलिखित अभिक्रिया के आधार पर विरंजन कारक के रूप में व्यवहार करता है-
H2O2 → H2O + [O] नवजात ऑक्सीजन
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ ( विरंजित)
दैनिक जीवन में इसका उपयोग बालो, ऊन, सिल्क, हाथा-दात आदि के विरंजन में किया जाता है।

प्रश्न 36.
निम्नलिखित पदों से आप क्या समझते हैं ?
(i) हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था,
(ii) हाइड्रोजनीकरण,
(iii) सिन्नैस,
(iv) भाप अंगार गैस सृति अभिक्रिया तथा
(v) ईंघन सेल।
उत्तर:
(i) हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था:
हम सभी जानते हैं कि कोयला तथा पेट्रोलियम सर्वाधिंक प्रयुक्त होने वाले ईंधन हैं, परन्तु ये संसाधन अत्यन्त तीव्र दर से समाप्त होते जा रहे हैं तथा आगामी भविष्य में उद्योग तथा परिवहन इससे बहुत अधिक प्रभावित हो सकते है। इसके अंतिरिक्त ये संसाधन मानव-स्वास्थ्य के प्रति भी अत्यन्त हानिकारक हैं: क्यौंकि ये वायु प्रदूषण के प्रमुख्य कारक हैं।

इनके दहन के फलस्वरूप उत्पन्न अनेक विपाक्त गैसे-कार्वन मोनोक्साइड, नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड वायुमण्डल में मिल जाते हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए वैकल्पिक हैधनों की ख्रोज सदैव होती रही है। इस सन्दर्भ में भावी विकल्प ‘हाड़्रोजन अर्थव्यवस्था’ है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धान्त ऊर्जा का द्रव हाइड्रोजन अथवा गैसीय हाइड्रोजन के रूप में अभिगमन तथा भण्डारण है।

हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का मुख्य ध्येय तथा लाभ-ऊर्जा का संचरण विद्युत्-ऊर्जा के रूप में न होकर हाइड्रोजन के रूप में होना है। हमारे देश में पहली बार अक्श्बर, 2005 में आरम्भ परियोजना में डाइहाइड्रोजन स्बचालित वाहनों के हैधन के रूप में प्रयुक्त किया गया। प्रारम्भ में चौपढिया बाहन के लिए 5 प्रतिशत हाइहाइड्रोजन मिश्रित CNG का प्रयोग किया गया।

बाद में डाहहाइड्रोजन की प्रतिशतता धरि-धीरे अनुकूलतम स्तर तक बढ़ाई जाएगी। आजकल डाहाइड्रोजन का उपयोग ईद्रन सेलों में विद्युत्-उत्पादन के लिए किया जाता है। ऐसी आशा की जाती है कि आर्थिक रूप से व्यवत्तार्य तथा दाइहाइड्रोजन के सुरक्षित स्रोत का पता आने वाले वष्षों में लग सकेगा तथा उसका उपयोग ऊर्जा के रूप में हो सकेगा।

(ii) हाइड्रोजनीकरण:
असंतृप्त कार्वनिक यौगिक हाइड्रोजन से सीधे संयोग करके संतृप्त यौगिक बनाते हैं, यह अभिक्रिया हाइड्रोजनीकरण कहलाती है। यह अभिक्रिया उत्र्रेरक की उपस्थिति में होती है तथा इन अभिक्रियाओं से अनेक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक हाइड्रोजनीकृत उत्पाद प्राप्त होते हैं। वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation of Vegetable Oils)- 473K पर निकिल उत्त्रेरक की उपस्थिति में वनस्पति तेलों; जैसे – मूँगफली के तेल, बिनौले के तेल में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर तेल ठोस वसाओं, जिन्हें वनस्पति घी कहा जाता है, में

परिवर्तित हो जाते हैं। वास्तव में तेल HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 24 बन्ध की उपस्थिति के कारण असंतृप्त होते हैं। हाइड्रोजनीकरण पर ये बन्ध HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 25 बन्ध में परिवर्तित हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप असंतृप्त तेल संतृप्त वसा में परिवर्तित हो जाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 26
ओलिफिन का हाइड्रोफॉर्मिलीकरण (Hydrofor-mylation of Olefins) – ओलिफिन का हाइड्रोफॉर्मिलीकरण कराने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है, जो ऐल्कोहॉल में अपचयित हो जाता है।
RCH = CH2 + CO + H2 → RCH2CH2CHO
RCH2CH2CHO + H2 → RCH2CH2CH2OH
उपर्युक्त के अतिरिक्त कोयले का हाइड्रोजनीकरण करने पर द्रव हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे आसुत करने पर कृत्रिम पेट्रोल प्राप्त होता है।

(iii) सिन्गैस:
हाइड्रोकार्बन अथवा कोक की उच्च ताप पर एवं उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से अभिक्रिया कराने पर डाइहाइड्रोजन प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 27
CO एवं H2 के मिश्रण को वाटर गैस कहते हैं। CO एवं H2 का यह मिश्रण मेथेनॉल तथा अन्य कई हाइड्रोकार्बनों के संश्लेषण में काम आता है। अतः इसे ‘संश्लेषण गैस’ या ‘सिन्ञैस’ (syngas) भी कहते हैं। आजकल सिन्गैस वाहितमल (sewage waste), अखबार, लकड़ी का बुरादा, लकड़ी की छीलन आदि से प्राप्त की जाती है। कोल से सिन्गैस का उत्पादन करने की प्रक्रिया को ‘कोलगैसीकरण’ (coalgasification) कहते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 28

(iv) भाप-अंगार गैस सृति अभिक्रिया:
सिन्गैस में उपस्थित कार्बन मोनोक्साइड की आयरन क्रोमेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से क्रिया कराने पर हाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 29

यह ‘भाप-अंगार गैस सृति अभिक्रिया’ (water gas shift reaction) कहलाती है। वर्तमान में लगभग 77 प्रतिशत डाइहाइड्रोजन का औद्योगिक उत्पादन शैल रसायनों (petro-chemicals), 18 प्रतिशत कोल, 4 प्रतिशत जलीय विलयनों के विद्युत्-अपघटन तथा 1 प्रतिशत उत्पादन अन्य स्रोतों से होता है।

(v) ईंधन सेल:
वह युक्ति जो ईंधन की रासायनिक ऊर्ग को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करती है, ईंधन सेल कहलाती है। कल डाइहाइड्रोजन का प्रयोग ईंधन सेलों में विद्युत्-उत्पादन के लिए किया जाता है। ये प्राथमिक सेलों की तरह ही होते हैं। इसमें ईंधन का दहन होता है तथा उसमें से उत्पन्न रासायनिक ऊर्जा को विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इन सेलों को इस प्रकार बनाया जाता है कि इनमें ईंधन लगातार भरा जा सके जिससे कि विद्युत् धारा निरन्तर प्राप्त होती रहे।

इस सेल में ईंधन के रूप में H2, CO, CH4, C3H8, C2H5OH आदि को प्रयुक्त करते हैं। सर्वप्रथम बैकोन ने एक सेल बनाया जिसमें उन्होंने ईंधन के रूप में H2-O2 लिया था। इसे बैकोन सैल भी कहते हैं।

इस सेल में कार्बन के सरन्ध्र (Porous) इलेक्ट्रोड होते हैं जो Pt, Ag या CuO आदि के द्वारा संसेचित(impregnated) होते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 9 Img 30
यहाँ विद्युत्- अपघट्य इलेक्ट्रोडों के मध्य भरा होता है। विद्युत् -अपघट्य KOH या NaOH का विलयन होता है। H2 तथा O2 गैसों के सरन्ध्र इलेक्ट्रोडों में से विद्युत्-अपघट्य विलयन में भेजा जाता है।
अभिक्रियाएँ, इलेक्ट्रोडों पर निम्न प्रकार होती हैं-
ऐनोड : 2H2(g) + 4OH(aq) → 4H2O(l) + 4e
कैथोड : O2(g) + 2H2O(l) + 4e → 4OH(aq)
सम्पूर्ण अभिक्रिया-
2H2(g) + O2(g) → 2H2O(l)
नोट – चूँकि अभिक्रिया के दौरान ईंधन खर्च होता रहता है अतः इसे बार-बार भरते रहना चाहिए।

ईंधन सेल की विशेषताएँ-

  • ईंधन की लगातार पूर्ति करने पर लगातार विद्युत् धारा प्राप्त होती है इसलिए सेल की आयु लम्बी होती है।
  • ये सेल प्रदूषण रहित होते हैं।
  • इनकी दक्षता उच्च लगभग 75-80% होती है।

नोट – इस ईंधन सेल का प्रयोग सर्वप्रथम अन्तरिक्ष कार्यक्रम में अपोलो यान को विद्युत् ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया गया था। यहाँ H2 तथा O2 परस्पर द्रव H2O बनाते हैं। इस जल वाष्प को संघनित कर उसका प्रयोग अन्तरिक्ष यात्रियों के पेयजल के रूप में किया जाता है।

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HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions

पृष्ठ सं. 125-126 (प्रयास कीजिए)

प्रश्न 1.
ΔABC के छः अवयवों (तीन भुजाओं तथा तीन कोणों) के नाम लिखिए।
हल :
ΔABC की तीन भुजाएँ AB, BC और CA तथा तीन कोण ∠A, ∠B और ∠C हैं।

प्रश्न 2.
लिखिए :
(i) ΔPQR के शीर्ष Q की सम्मुख भुजा
(ii) ΔLMN की भुजा LM का सम्मुख कोण
(iii) ΔRST की भुजा RT का सम्मुख शीर्ष
हल :
(i) ΔPQR के शीर्ष Q की सम्मुख भुजा RP है।
(ii) ΔLMN की भुजा LM का सम्मुख कोण = ∠N है।
(iii) ΔRST की भुजा RT का सम्मुख शीर्ष s है।

प्रश्न 3.
आकृति देखिए तथा त्रिभुजों में प्रत्येक का वर्गीकरण कीजिए:
(a) भुजाओं के आधार पर
(b) कोणों के आधार पर
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 1
हल :
(a) भुजाओं के आधार पर वर्गीकरण
विषमबाहु त्रिभुज : (ii)
समद्विबाहु त्रिभुज : (i), (iii), (v) तथा (vi)
समबाहु त्रिभुज : (iv)

(b) कोणों के आधार पर वर्गीकरण :
न्यून कोण त्रिभुज : (i) और (iv)
समकोण त्रिभुज : (ii) और (vi)
अधिक कोण त्रिभुज : (iii) और (v)

पृष्ठ सं. 130

प्रश्न 1.
किसी त्रिभुज में एक बाह्य कोण की माप 70° है और उसके अंत: सम्मुख कोणों में से एक की माप 25° है। दूसरे अंत: सम्मुख कोण की माप ज्ञात कीजिए।
इल :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 2
माना ΔABC की भुजा BC को आगे बढ़ाने पर बाह्य कोण ∠ACD इस प्रकार बना कि ∠ACD = 70°
माना ∠B = 25°
∴ ∠ACD = ∠B + ∠A (बाह्य कोण प्रमेय से)
70° = 25° + ∠A
∠A = 70° -25° = 45°
अत: दूसरा अन्तः सम्मुख कोण 45° का है।

प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज के दो अंतः सम्मुख कोणों की माप 60° तथा 80° है। उसके बाल कोण की माप ज्ञात कीजिए।
हल :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 3
माना ΔABC की भुजा \(\overline{B C}\) को आगे बढ़ने पर एक बाहा कोण ∠ACD प्राप्त होता है।
माना ∠A = 80° और ∠B = 60°
∠ACD = ∠A + ∠B (बाह्य कोण प्रमेय से)
∠ACD = 80° + 60°
∠ACD = 140°
अतः बाह्य कोण की माप = 140°

प्रश्न 3.
क्या इस आकृति में कोई त्रुटि है। टिप्पणी करें।
हल :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 4
आकृति में बाह्य कोण अन्त: सम्मुख कोणों के योग के बराबर नहीं है।
50° ≠ 50° + 50°
अतः दिए गए कोण गलत हैं।

पृष्ठ सं. 134

प्रश्न 1.
एक त्रिभुज के दो कोण 30° तथा 80 हैं। इस त्रिभुज का तीसरा कोण ज्ञात कीजिए।
हल :
हम जानते हैं कि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
माना ΔABC में ∠A = 30° और ∠B = 80° हो, तो
∠A + ∠B + ∠C = 180°
30° + 80° + ∠C = 180°
∠C = 180° – 30° – 80°
= 180° – 110° = 70°
अत: तीसरा कोण 70° होगा।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions

प्रश्न 2.
किसी त्रिभुज का एक कोण 80° है तथा शेष दोनों कोण बराबर हैं। बराबर कोणों में प्रत्येक की माप ज्ञात कीजिए।
हल :
माना त्रिभुज ABC में ∠A = 80° और ∠B = ∠C
∵ त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
∴ ∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ 80° + ∠B + ∠B = 180°,
[∵ ∠A = 80° और ∠C = ∠B]
⇒ 80° + 2∠B = 180°
⇒ 2∠B = 180° – 80°
⇒ 2∠B = 100°
⇒ ∠B + = 50°
अत: शेष दो कोणों की माप 50° है।

प्रश्न 3.
किसी त्रिभुज के तीनों कोणों में 1 : 2 : 1 का अनुपात है। त्रिभुज के तीनों कोण जात कीजिए। त्रिभुज का दोनों प्रकार से वर्गीकरण भी कीजिए। हल :
माना त्रिभुज के कोण x, 2x और x है, तो
x + 2x + x = 180°
4x = 180°
x = \(\frac {180°}{4}\) = 45°
अत:त्रिभुज का पहला कोण (x) = 45°
दूसरा कोण (2x) = 2 × 45° = 90°
तीसरा कोण (x) = 45°
अत: समकोण त्रिभुज है और यह एक समद्विबाहु त्रिभुज भी है।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions

पृष्ठ सं. 135

प्रश्न 1.
प्रत्येक आकृति में कोण x का मान ज्ञात कीजिए
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 5
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 6
हल :
त्रिभुज (i) समद्विबाहु त्रिभुज है।
∴ ∠B = ∠C
∴ x = 40°

त्रिभुज (ii) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AB = BC
∠A = ∠C = 45°
कोण योग गुण से :
∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ 45° + x + 45° = 180°
⇒ x = 180° – 45° – 45°
⇒ x = 90°

त्रिभुज (iii) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AC = AB
तथा ∠B = ∠C = 50°
∴ x = 50°

त्रिभुज (iv) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AC = AB
∠B = ∠C = x
कोण योग गुण से
∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ 100° + x + x = 180°
⇒ 2x = 180° – 100°
⇒ 2x = 80°
⇒ x = \(\frac {80°}{2}\) = 40°

त्रिभुज (v) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AC = BC
तथा ∠A = ∠B = x
कोण योग गुण से
∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ x + x + 90° = 180°
⇒ 2x = 180° – 90°
⇒ 2x = 90°
⇒ x = \(\frac {90°}{2}\) = 45°

त्रिभुज (vi) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AC = BC
तथा ∠A = ∠B = x
कोण योग गुण से,
∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ x + x + 40° = 180°
⇒ 2x = 180° – 40°
⇒ 2x = 140°
⇒ x = \(\frac {140°}{2}\) = 70°

त्रिभुज (vii) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AB = AC
∴ ∠B = ∠C
⇒ x = ∠C
क्योंकि बाह्य कोण और संलग्न अंत: कोण रैखिक युग्म बनाते हैं।
∠C + 120° = 180°
⇒ x = 180° – 120° = 60°
त्रिभुज (viii) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AB = AC
∴ ∠B = ∠C ⇒ ∠B = x
क्योंकि बाह्य कोण और संलग्न अंत: कोण रैखिक युग्म बनाते हैं।
110° + ∠A = 180°
∠A = 180° – 110° = 70°
कोण योग गुण से,
∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ 70° + x + x = 180°
⇒ 2x = 180° – 70°
⇒ 2x = 110°
⇒ x = 55°

त्रिभुज (ix) समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AB = AC
∠B + ∠C = x
∠B = 30°, (शीर्षाभिमुख कोण)
∴ x = 30°

प्रश्न 2.
प्रत्येक आकृति में कोण x तथा y का मा ज्ञात कीजिए।
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 7
हल :
(i) अन्त: कोण ∠C + 120° = 180°
∠C = 180° – 120°
∠C = 60°
∵ ΔABC समद्विबाहु Δहै, जिसमें
AB = AC
तथा ∠B = ∠C = 60°
∴ ∠B = y = 60°
कोण योग गुण से,
∠A + ∠B + ∠C = 180°
x + 60° + 60° = 180°
x = 180° – 120°
x = 60°
अत: x = 60° और y = 60°

(ii) त्रिभुज ABC एक समद्विबाहु Δ है, जिसमें
BC = AC
∠A = ∠B = x
और ∠A + ∠B = 90°
x + x = 90°
2x = 90°
x = \(\frac {90°}{2}\)
x = 45°
लेकिन ∠B + y = 180°
x + y = 180°
45° + y = 180°
y = 180°- 45° = 135°
अतः x = 45° और y = 135°

(iii) त्रिभुज ABC समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें
AB = AC
∠B = ∠C अर्थात्
∠B = ∠C = x
और ∠A = 92°, [शीर्षाभिमुख कोण]
कोण योग गुण से,
∠A + ∠B + ∠C = 180°
⇒ 92°+ x + x = 180°
⇒ 2x = 180° – 92° = 88°
⇒ x = (\(\frac {88}{2}\))° = 44°
और ∠C + y = 180°, [रैखिक युग्म]
⇒ y = 180° – 44° = 136°, [∵ ∠C = x = 44°]
अतः x = 44° और y = 136°

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions

पृष्ठ सं. 141

प्रश्न 1.
निम्न आकृति में अज्ञात लम्बाई x ज्ञात कीजिए :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 6 त्रिभुज और उसके गुण InText Questions 8
हल :
(i) ΔABC में कोण B समकोण है।
∴ पाइथागोरस प्रमेय से,
AC2 = AB2 + BC2
⇒ x2 = 32 + 42
⇒ x2 = 9 + 16
⇒ x2 = 25
⇒ x = \(\sqrt{25}\) = 5

(ii) ΔABC में, ∠B समकोण है।
∴ पाइथागोरस प्रमेय से,
AC2 = AB2 + BC2
⇒ x2 = 82 + 62
⇒ x2 = 64 + 36
⇒ x2 = 100
⇒ x = \(\sqrt{100}\) = 10

(iii) ΔABC में, ∠B समकोण है।
∴ पाइथागोरस प्रमेय से,
AC2 = AB2 + BC2
⇒ x2 = 82 + 152
⇒ x2 = 64 + 225
⇒ x2= 289
⇒ x = \(\sqrt{289}\) = 17

(iv) ΔABC का ∠B समकोण है।
∴ पाइथागोरस प्रमेय से,
AC2 = AB2 + BC2
⇒ x2 = 242 + 72
⇒ x2 = 576 + 49
⇒ x2 = 625
⇒ x = \(\sqrt{625}\) = 25

(v) समकोण ΔALB और ΔALC में पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग करने पर,
ΔALB में, BL2 = AB2 – AL2 = 372 – 122
= (37 + 12) (37 – 12)
= 49 × 25
BL = \(\sqrt{49 \times 25}\)
BL = 7 × 5 = 35
इसी प्रकार, CL = 35
∴ BC = BL + LC = 35 + 35 = 70
∴ x = 70

(vi) समकोण त्रिभुज ALB में पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग करने पर,
BL2 = AB2 – AL2
= 122 – 32 = 144 – 9
BL2 = 135
BL = \(\sqrt{135}\)
x = \(\sqrt{135}\) = 11.6 सेमी

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. ईसा के जन्म के समय विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 20 करोड़
(B) 30 करोड़
(C) 40 करोड़
(D) 80 लाख
उत्तर:
(B) 30 करोड़

2. बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 1 अरब
(B) 1.4 अरब
(C) 1.6 अरब
(D) 2 अरब
उत्तर:
(C) 3.

3. इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 5 अरब
(B) 6. अरब
(C) 7 अरब
(D) 5.5 अरब
उत्तर:
(B) 6. अरब

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

4. बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक विश्व की जनसंख्या कितने गुना बढ़ी?
(A) दो गुना
(B) तीन गुना
(C) चार गुना
(D) पांच गुना
उत्तर:
(C) चार गुना

5. विश्व के दस सर्वाधिक आबाद देशों में विश्व की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है?
(A) लगभग 20 प्रतिशत
(B) लगभग 50 प्रतिशत
(C) लगभग 60 प्रतिशत
(D) लगभग 90 प्रतिशत
उत्तर:
(C) लगभग 60 प्रतिशत

6. मानव बसाव के लिए अनुपयुक्त स्थान कौन-सा है?
(A) आर्द्र जलवायु प्रदेश
(B) लंबे वर्धनकाल वाले प्रदेश
(C) पर्वतीय तथा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश
(D) मैदानी प्रदेश
उत्तर:
(C) पर्वतीय तथा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश

7. प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाने वाली जनसंख्या को कहा जाता है-
(A) जनसंख्या वितरण
(B) जनगणना
(C) जनसंख्या घनत्व
(D) जनसंख्या विस्फोट
उत्तर:
(C) जनसंख्या घनत्व

8. निम्नलिखित में से उच्च जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र कौन-सा है?
(A) सहारा मरुस्थल
(B) अमेजन तथा जायरे बेसिन
(C) पूर्व एशिया
(D) पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया
उत्तर:
(C) पूर्व एशिया

9. अशोधित जन्म दर से तात्पर्य है-
(A) एक वर्ष में 1000 जनसंख्या के अनुपात में पैदा होने वाले व्यक्तियों की संख्या
(B) एक वर्ष में 1000 जनसंख्या के अनुपात में मरने वालों की संख्या
(C) एक वर्ष में एक स्थान पर आने वाले व्यक्तियों की संख्या
(D) एक वर्ष में बाहर जाने वाले व्यक्तियों की संख्या
उत्तर:
(C) एक वर्ष में एक स्थान पर आने वाले व्यक्तियों की संख्या

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

10. कुल जनसंख्या और कुल कृषि क्षेत्र के अनुपात को कहा जाता है
(A) अंकगणितीय घनत्व
(B) कायिक घनत्व
(C) जन घनत्व
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) कायिक घनत्व

11. विश्व जनसंख्या वृद्धि की वर्तमान दर क्या है?
(A) 1 प्रतिशत
(B) 1.8 प्रतिशत
(C) 1.2 प्रतिशत
(D) 2.1 प्रतिशत
उत्तर:
(C) 1.2 प्रतिशत

12. विश्व का हर पाँचवां व्यक्ति है
(A) भारतीय
(B) चीनी
(C) रूसी
(D) अमेरिकी
उत्तर:
(B) चीनी

13. विश्व का हर छठा व्यक्ति है
(A) भारतीय
(B) चीनी
(C) रूसी
(D) अमेरिकी
उत्तर:
(A) भारतीय

14. किस महाद्वीप में ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि-दर पाई जाती है?
(A) अफ्रीका
(B) उत्तर अमेरिका
(C) यूरोप
(D) एशिया
उत्तर:
(C) यूरोप

15. निम्न जनसंख्या घनत्व के क्षेत्र हैं-
(A) उष्ण आर्द्र अक्षांश
(B) शुष्क भूमि
(C) ठंडी भूमि
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) ठंडी भूमि

16. पहली शताब्दी में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 20 करोड़
(B) 25 करोड़
(C) 15 करोड़
(D) 40 करोड़
उत्तर:
(B) 25 करोड़

17. विश्व में सबसे कम जनसंख्या वृद्धि-दर किस महाद्वीप में पाई जाती है?
(A) एशिया
(B) यूरोप
(C) उत्तरी अमेरिका
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(B) यूरोप

18. विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि-दर किस देश में है?
(A) भारत में
(B) चीन में
(C) नाइजीरिया में
(D) बांग्लादेश में
उत्तर:
(C) नाइजीरिया में

19. श्रीलंका की जनसंख्या को दो गुनी होने में कितना समय लगेगा?
(A) 25 वर्ष
(B) 36 वर्ष
(C) 46 वर्ष
(D) 58 वर्ष
उत्तर:
(C) 46 वर्ष

20. भारत में विश्व की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है?
(A) 16.87 प्रतिशत
(B) 18.01 प्रतिशत
(C) 19.20 प्रतिशत
(D) 17.5 प्रतिशत
उत्तर:
(D) 17.5 प्रतिशत

21. नाइजीरिया में विश्व की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है?
(A) 1.84 प्रतिशत
(B) 2.09 प्रतिशत
(C) 2.13 प्रतिशत
(D) 2.43 प्रतिशत
उत्तर:
(D) 2.43 प्रतिशत

22. भारत की जनसंख्या को दो गुनी होने में कितने वर्ष लगेंगे?
(A) 25 वर्ष
(B) 30 वर्ष
(C) 36 वर्ष
(D) 46 वर्ष
उत्तर:
(C) 36 वर्ष

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
ईसा के जन्म के समय विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
30 करोड़।

प्रश्न 2.
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
1.6 अरब।

प्रश्न 3.
इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
लगभग 6 अरब से अधिक।

प्रश्न 4.
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ से इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक विश्व की जनसंख्या कितने गुना बढ़ी?
उत्तर:
चार गुना।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 5.
मानव बसाव के लिए अनुपयुक्त स्थान कौन-सा है?
उत्तर:
पर्वतीय तथा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश।

प्रश्न 6.
प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाने वाली जनसंख्या को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व।

प्रश्न 7.
कुल जनसंख्या और कुल कृषि क्षेत्र के अनुपात को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
कायिक घनत्व।

प्रश्न 8.
विश्व में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत कितना है? (वर्ष, 2001)
उत्तर:
48 प्रतिशत।

प्रश्न 9.
विश्व में उच्चतम जनसंख्या वृद्धि दर (2%+) वाले एक महाद्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर:
अफ्रीका।

प्रश्न 10.
विश्व में मध्यम जनसंख्या वृद्धि दर (1.1-1.9%) वाले एक महाद्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका।

प्रश्न 11.
विश्व में न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर (0-1%) वाले एक महाद्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर:
यूरोप।

प्रश्न 12.
पहली शताब्दी में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
लगभग 25 करोड़।

प्रश्न 13.
विश्व की जनसंख्या में प्रति वर्ष कितने लोग जुड़ रहे हैं?
उत्तर:
लगभग 8.2 करोड़।

प्रश्न 14.
विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या का संकेंद्रण कहाँ पर होता है?
उत्तर:
मैदानी क्षेत्रों पर।

प्रश्न 15.
विश्व में जनसंख्या वितरण का प्रारूप कैसा है?
उत्तर:
असमान।

प्रश्न 16.
किन्हीं दो प्रतिकर्ष कारकों के नाम लिखिए जो लोगों को उनके रहने के मूल स्थान से प्रवास करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
उत्तर:

  1. प्राकृतिक आपदा
  2. सामाजिक तनाव।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या घनत्व क्या है?
उत्तर:
किसी स्थान में प्रति वर्ग कि०मी० में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या जनसंख्या घनत्व कहलाती है।

प्रश्न 2.
अशोधित जन्म-दर क्या हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को अशोधित जन्म-दर कहा जाता है।

प्रश्न 3.
अशोधित मृत्यु-दर क्या हैं?
उत्तर:
एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के अनुपात में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को अशोधित मृत्यु-दर कहा जाता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 4.
प्रजननशीलता के चार निर्धारक तत्त्व कौन-से है?
उत्तर:

  1. जैव कारक
  2. जनांकिकीय कारक
  3. सामाजिक-सांस्कृतिक कारक
  4. आर्थिक कारक।

प्रश्न 5.
उद्गम स्थान किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब लोग एक-स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो वह स्थान जहाँ से लोग गमन करते हैं, उद्गम स्थान कहलाता है।

प्रश्न 6.
गंतव्य स्थान किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिस स्थान पर लोग आगमन करते हैं वह गंतव्य स्थान कहलाता है।

प्रश्न 7.
विश्व के उच्च जनसंख्या घनत्व वाले दो क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. पश्चिमी यूरोप
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के पूर्वी भाग।

प्रश्न 8.
जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में लोगों की संख्या में, एक निश्चित समय के भीतर होने वाले परिवर्तन वृद्धि को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं।

प्रश्न 9.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले प्राकृतिक कारक बताएँ।
उत्तर:
धरातलीय स्वरूप, जलवायु, मृदा, प्राकृतिक वनस्पति।

प्रश्न 10.
जनसंख्या में ऋणात्मक वृद्धि कब होती है?
उत्तर:
जब जन्म-दर, मृत्यु-दर से कम हो या लोग विदेशों में जाकर बस जाते हैं तो जनसंख्या में ऋणात्मक वृद्धि होती है।

प्रश्न 11.
अशोधित मृत्यु-दर की गणना किस प्रकार की जाती है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 1

प्रश्न 12.
जनसंख्या स्थानान्तरण क्या है?
उत्तर:
जनसंख्या के एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवसन होने को स्थानान्तरण कहते हैं। जन्म-दर तथा मृत्यु-दर की भाँति स्थानान्तरण भी जनसंख्या परिवर्तनशीलता का मुख्य निर्धारक है। स्थानान्तरण से किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती या कम होती है।

प्रश्न 13.
जनांकिकीय संक्रमण क्या है?
उत्तर:
मनुष्य के साथ जनसंख्या से होने वाले कृत्रिम परिवर्तन को जनांकिकीय संक्रमण कहते हैं। यह जनसंख्या के विकास की अवस्था है। जनसंख्या के इस विकास चक्र में सामान्यतया पाँच अवस्थाएँ होती हैं। इन अवस्थाओं को जनसंख्या चक्र भी कहते हैं।

प्रश्न 14.
मानसून एशिया में सघन जनसंख्या पाए जाने के कारण बताइए।
उत्तर:
मानसून एशिया में नदी-घाटियों, उपजाऊ मैदानों, अनुकूल जलवायु व लम्बे वर्धनकाल के कारण कृषि अधिक होती है; जैसे यहाँ पर चावल की तीन-तीन फसलें उगाई जाती हैं। नगरीकरण तथा औद्योगिकीकरण से यहाँ पर सघन जनसंख्या पाई जाती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 15.
विश्व में उच्च अथवा सघन जनसंख्या वाले मुख्य क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:
जिन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है, वे क्षेत्र उच्च घनत्व वाले क्षेत्र अथवा प्रदेश कहलाते हैं; जैसे-

  1. मानसून एशिया
  2. पश्चिमी यूरोप
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के पूर्वी भाग।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 16.
उत्प्रवास किसे कहते हैं?
उत्तर:
उत्प्रवास के द्वारा मनुष्य अपने प्रदेश से दूसरे स्थान को जाते हैं; जैसे यूरोप के मनुष्य उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया आदि गए। जिन प्रदेशों में कोई भौतिक प्रकार का कष्ट; जैसे जलवायु, बाढ़, सूखा अथवा जीवन निर्वाह की अन्य कठिनाइयाँ अथवा सामाजिक या आर्थिक कठिनाई उत्पन्न होती हों, उन स्थानों से मनुष्य बाहर की ओर स्थानान्तरण करने लगते हैं।

प्रश्न 17.
जन्म-दर और जनसंख्या की वृद्धि दर में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
जन्म-दर और जनसंख्या की वृद्धि दर में निम्नलिखित अंतर हैं-

जन्म-दरजनसंख्या वृद्धि दर
1. किसी देश में एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या जन्म-दर कहलाती है।1. दो समयावधियों के बीच होने वाले जनसंख्या परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि दर कहा जाता है।
2. यह दर प्रति हजार व्यक्ति होती है।2. यह दर प्रतिशत में होती है।

प्रश्न 18.
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि तथा वास्तविक वृद्धि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि तथा वास्तविक वृद्धि में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्राकृतिक वृद्धिवास्तबिक वृद्धि
दो समय बिंदुओं के बीच प्राकृतिक तौर पर होने वाले जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि कहते हैं।वास्तविक वृद्धि में जन्म-दर व मृत्यु-दर के साथ-साथ प्रवास व आप्रवास की भी गणना की जाती है।

प्रश्न 19.
जनसंख्या की प्राकृतिक तथा प्रवासी वृद्धि में अंतर बताइए।
उत्तर:
जनसंख्या की प्राकृतिक तथा प्रवासी वृद्धि में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्राकृतिक वृद्धिप्रवासी वृद्धि
1. जन्म-दर में से मृत्यु-दर घटाने से प्राकृतिक वृद्धि प्राप्त होती है।1. जब किसी देश से लोग आकर बस जाएँ तो यह प्रवासी वृद्धि होती है.।
2. इसका देश की कुल जनसंख्या पर प्रभाव पड़ता है।2. इसका देश की कुल जनसंख्या पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 20.
प्रवास एवं दिक् परिवर्तन में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रवास एवं दिक् परिवर्तन में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्रवासदिक् परिवर्तन
1. जनसंख्या के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं।1. किसी नगर तथा उसके पृष्ठ प्रदेश में स्थित गांवों के लोगों का स्थानांतरण दिक परिवर्तन कहलाता है।
2. यह स्थायी होता है।2. यह अस्थायी होता है।

प्रश्न 21.
अंतःराज्यीय प्रवास तथा अंतर्राज्यीय प्रवास में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
अंतःराज्यीय प्रवास तथा अंतर्राज्यीय प्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतःराज्यीय प्रवासअंतर्राज्यीय प्रवास
1. अपने ही राज्य में व्यक्तियों के स्थानांतरण को अंतःराज्यीय प्रवास कहते हैं।1. एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यक्तियों के स्थानांतरण को अंतर्राज्यीय प्रवास कहते हैं।
2. यह स्थानांतरण अधिक होता है।2. यह अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रश्न 22.
उत्प्रवास तथा आप्रवास में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्प्रवास तथा आप्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्प्रवासआप्रवास
1. जब किसी प्रदेश के निवासी दूसरे प्रदेश में जाते हैं तो उसे उत्प्रवास कहते हैं।1. जब दूसरे प्रदेशों के निवासी किसी प्रदेश में आकर निवास करते हैं तो उसे आप्रवास कहते हैं।
2. इससे मूल प्रदेश की जनसंख्या घटती है।2. इससे किसी प्रदेश की जनसंख्या में वृद्धि होती है।
3. अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों से उत्प्रवास होता है।3. कम जनसंख्या के क्षेत्रों की ओर आप्रवास होता है।

प्रश्न 23.
विश्व के विरल जनसंख्या वाले तथा जन विहीन प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. उष्ण मरुस्थल-सहारा, कालाहारी, अटाकामा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, अरब तथा थार।
  2. अति शीत क्षेत्र-कनाडा, साइबेरिया का उत्तरी भाग, ग्रीनलैंड तथा अंटार्कटिक महाद्वीप।
  3. ठंडे मरुस्थल व उच्च पर्वतीय प्रदेश मध्य एशिया, गोबी मरुस्थल, राकीज, एंडीज व हिमालय पर्वत।
  4. विषुवत् रेखीय क्षेत्र-अमेजन तथा जायरे बेसिन।

प्रश्न 24.
प्रवास को प्रभावित करने वाले अपकर्ष व प्रतिकर्ष कारक क्या हैं?
उत्तर:
अपकर्ष कारक-नगरीय सुविधाओं तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण जब. लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं तो इसे अपकर्ष कारक (Pull Factors) कहा जाता है। अपकर्ष कारक के कारण लोग गन्तव्य स्थान को आकर्षक बनाते हैं।

प्रतिकर्ष कारक-जब लोग जीविका के साधन उपलब्ध न होने के कारण गरीबी तथा बेरोज़गारी के कारण नगरों की ओर प्रवास करते हैं तो इसे प्रतिकर्ष कारक (Push Factors) कहा जाता है। प्रतिकर्ष कारक के कारण लोग अपने उद्गम स्थान से दूसरे स्थान की ओर जाते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवास क्या होता है? अस्थायी प्रवास के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या का एक निवास स्थल से दूसरे निवास स्थल तक किसी भी कारणवश संचलन या गतिशीलता प्रवास कहलाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के अनुसार, “प्रवास आवास परिवर्तन युक्त जनसंख्या की गतिशीलता को इंगित करता है।”

स्थानांतरण विभिन्न प्रकार का होता है। प्रवास को दूरी, अवधि, मात्रा, दिशा आदि के आधार पर कई भागों में विभाजित किया जा सकता है। प्रवास स्थायी और अस्थायी भी हो सकता है।
अस्थायी प्रवास के विभिन्न रूप-अस्थायी प्रवास को विभिन्न प्रकार से व्यक्त किया गया है। कुछ महत्त्वपूर्ण अस्थायी प्रवास निम्नलिखित हैं-
1. दैनिक प्रवास-नगरों में विविध प्रकार की सुविधाओं के उपलब्ध होने के कारण लोग प्रायः प्रतिदिन गांवों से नगरों में आते हैं और सायंकाल लौट जाते हैं। यदि व्यक्ति एक सप्ताह तक नगर में रुककर वापस लौट आता है तो इसे दैनिक या साप्ताहिक प्रवास कहते हैं।

2. मौसमी प्रवास-शीत ऋतु में पर्वतीय लोग सर्दी से बचने के लिए घाटियों में आ जाते हैं। इसी प्रकार गन्ने की पेराई के काल में मजदूर चीनी मिलों में काम करते हैं और पेराई बंद होने पर घरों में वापस चले जाते हैं। यह प्रवास मौसमी होता है। टुंड्रा, टैगा व स्टैप्स प्रदेश के निवासी मौसमी प्रवास करते हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए (क) विश्व जनसंख्या की दुगुना होने की अवधि, (ख) जनांकिकीय संक्रमण।।
उत्तर:
(क) विश्व जनसंख्या की दुगुना होने की अवधि किसी भी देश की जनसंख्या के दुगुना होने की अवधि का संबंध जनसंख्या की प्रति वर्ष प्रतिशत वृद्धि दर से है। वृद्धि दर जितनी कम होगी जनसंख्या के दुगुना होने का समय उतना ही अधिक होगा। इसके विपरीत यदि वृद्धि दर अधिक है तो जनसंख्या के दुगुना होने में कम समय लगेगा। इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा निकाला जा सकता है
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 2
विकसित देशों में जनसंख्या के दुगुना होने का समय अधिक है जबकि विकासशील देशों की जनसंख्या के दुगुना होने का समय अपेक्षाकृत बहुत कम है।

(ख) जनांकिकीय संक्रमण जनसंख्या का विकास कुछ क्रमिक अवस्थाओं में होता है। जैसे-जैसे किसी देश का आर्थिक विकास होता जाता है उसमें जनसंख्या परिवर्तन भी होते रहते हैं। आर्थिक विकास की अवस्था में स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रसार से पहले मृत्यु-दर में कमी आती है। तत्पश्चात् जन्म-दर भी घटनी प्रारंभ हो जाती है जिसके फलस्वरूप जनसंख्या वृद्धि दर कम हो जाती है। इस प्रकार की कमी पहले मृत्यु-दर में जिसके कारण वृद्धि दरें बढ़ीं। फिर जन्म-दरों में जिससे जन्म-दरें और मृत्यु-दरें लगभग बराबर हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप बहुत कम या शून्य वृद्धि दर हुई। इस स्थिति को जनांकिकीय संक्रमण कहते हैं।

प्रश्न 3.
जनसंख्या परिवर्तन तथा आर्थिक विकास में क्या सम्बन्ध है? व्याख्या कीजिए। अथवा “विकास सबसे उत्तम गर्भ निरोधक है।” वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व जनसंख्या का विकास बढ़ती हुई जनसंख्या के विकास दर का प्रतिपादक है। विकसित देशों में पहले मृत्यु-दर में कमी हुई। फिर जन्म-दर में भी कमी हुई जिससे जनसंख्या वृद्धि दर में भी कमी आई। यह प्रक्रिया जनसंख्या परिवर्तन कहलाती है। जनसंख्या के बढ़ने के साथ उनकी माँगें और आवश्यकताएँ भी बढ़ जाती हैं। जनसंख्या बढ़ने से राष्ट्रीय आय बढ़ जाती है। राष्ट्रीय आय के घटने-बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय और उसी के अनुरूप जीवन स्तर घटता-बढ़ता है।

कम आय से वस्तुओं की माँग पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिससे विकास अवरुद्ध हो जाता है। यदि जनसंख्या इष्टतम (Optimum) है तो संसाधनों का उचित उपयोग होगा और जीवन स्तर बढ़ेगा। विकासशील देशों की बढ़ती जनसंख्या के कारण आज वे गरीबी, कुपोषण और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। आर्थिक विकास के साथ जनसंख्या की वृद्धि कम होती चली जाती है। इसलिए कहा गया है कि विकास सबसे उत्तम गर्भ निरोधक है।

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प्रश्न 4.
जनसंख्या के अंकगणितीय घनत्व और कायिक घनत्व में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
जनसंख्या के अंकगणितीय घनत्व और कायिक घनत्व में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंकगणितीय घनत्वकायिक घनत्व
1. किसी देश की कुल जनसंख्या तथा कुल क्षेत्रफल के अनुपात को अंकगणितीय घनत्व कहते हैं।1. किसी देश की कुल जनसंख्या तथा कुल कृषि-भूमि के अनुपात को कायिक घनत्व कहते हैं।
2. बेशक भूगोलवेत्ता इसका प्रयोग करते हैं, फिर भी इस ढंग की अपनी त्रुटि है- ऋणात्मक क्षेत्र भी इस ढंग में धनात्मक दर्शाए जाते हैं।2. इस ढंग में कृषि अयोग्य भूमि को कुल भूमि में से घटा देते हैं। अतः इस ढंग द्वारा कृषि भूमि पर जन-दबाव का ठीक अनुमान लगता है।
3. इस ढंग से लोगों की संपन्नता का कोई पता नहीं लगता।3. इस ढंग से लोगों क् संपन्नता का कुछ अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रश्न 5.
ईसा से 8000 वर्ष पूर्व से वर्तमान तक विश्व की जनसंख्या किस प्रकार बढ़ी है?
उत्तर:
ईसा से 8000 वर्ष पूर्व विश्व की जनसंख्या लगभग 0.8 करोड़ थी। लगभग 2000 वर्ष पूर्व ईसा मसीह के समय में जनसंख्या 30 करोड़ के लगभग थी। वर्ष 1830 तक यह 100 करोड़ तक पहुँच गई और तब से यह बहुत तेजी से बढ़ती आ रही है जो लगभग 160 वर्षों में 700 करोड़ से भी अधिक हो गई है। निम्नलिखित तालिका में विश्व की जनसंख्या वृद्धि को दर्शाया गया है
तालिका : विश्व की जनसंख्या में वृद्धि

इन वर्षों के दौरानविश्व जनसंख्याइस संख्या तक पहुँचने के लिए लिया गया समय
आदिमानव से ईसा30 करोड़संपूर्ण मानव इतिहास के दौरान
0-1500 ई०50 करोड़1500 वर्ष
1500-1850 ई०100 करोड़350 वर्ष
1850-1930 ई०200 करोड़100 वर्ष
1930-1960 ईం300 करोड़30 वर्ष
1960-1974 ई400 करोड़14 वर्ष
1974-1987 ई०500 करोड़13 वर्ष
1987-1999 ई०600 करोड़ से अधिक12 वर्ष
1999-2011 ई०लगभग 700 करोड़12. वर्ष

प्रश्न 6.
विश्व के अधिक घनत्व वाले प्रदेश कौन-कौन से हैं और क्यों?
उत्तर:
वे क्षेत्र जहाँ जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है। इनके प्रमुख क्षेत्र हैं-

  • पूर्वी एशिया तथा दक्षिणी एशिया।
  • पश्चिमी यूरोप तथा उत्तर पूर्वी अमेरिका।

कारण-

  • ऊष्ण आर्द्र व समशीतोष्ण जलवायु जनसंख्या को आकर्षित करती है।
  • नदी घाटियों की उपजाऊ मिट्टी, जल-सिंचाई, समतल भूमि और चावल का अधिक उत्पादन, अधिक घनत्व में सहायक हैं।
  • निर्माण उद्योगों का अधिक होना तथा समुद्री मार्गों के कारण व्यापार का अधिक उन्नत होना भी जनसंख्या के उच्च घनत्व का कारण है।
  • मिश्रित कृषि का विकास, नगरीकरण के कारण बड़े-बड़े नगरों का विकास जनसंख्या को आकर्षित करता है।
  • वैज्ञानिक तथा तकनीकी ज्ञान में अधिक वृद्धि जनसंख्या के उच्च घनत्व का प्रमुख कारक है।

प्रश्न 7.
विश्व के मध्यम घनत्व वाले प्रदेश कौन-कौन से हैं और क्यों?
उत्तर:
वे क्षेत्र जहाँ 25 से 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० तक घनत्व मिलता है। इसमें निम्नलिखित क्षेत्र हैं

  • उत्तरी अमेरिका में प्रेयरीज का मध्य मैदान
  • अफ्रीका का पश्चिमी भाग
  • पूर्वी यूरोप और पूर्वी रूस
  • पूर्वी ऑस्ट्रेलिया
  • दक्षिणी अमेरिका में उत्तर:पूर्वी ब्राजील, मध्य चिली, मैक्सिको का पठार।

कारण –

  • विस्तृत खेती-बाड़ी में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है।
  • पर्वतीय व पठारी क्षेत्र के कारण जनसंख्या कम है।

प्रश्न 8.
विश्व में जनसंख्या का घनत्व असमान क्यों है?
उत्तर:
विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में विश्व की 60% से अधिक जनसंख्या रहती है और यह जनसंख्या विश्व के कुल क्षेत्रफल के लगभग 20% भाग पर रहती है। विश्व की 40% से भी कम जनसंख्या विश्व के लगभग 80% क्षेत्रफल पर निवास करती है। इस कारण विश्व में जनसंख्या का घनत्व असमान है। जनसंख्या की विशालता और इसके अत्याधिक ग्रामीण स्वरूप के अतिरिक्त नृ-जातीय विविधता, तीव्र वृद्धि दर और जनसंख्या का असमान वितरण अन्य पक्ष हैं जो देश की सामाजिक, आर्थिक विकास की प्रक्रिया और गति को धीमा कर रहे हैं।

प्रश्न 9.
विश्व में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले राजनीतिक कारक का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजनीतिक कारक भी कुछ सीमा तक जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करते हैं। सरकार की जनसंख्या नीति मानव के बसाव को अनुकूल तथा प्रतिकूल बना सकती है। रूस सरकार साइबेरिया में जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करके उनको पारितोषिक देती है। फ्रांस में जनसंख्या वृद्धि के लिए करों में रियायतें दी जाती हैं, जबकि चीन व भारत में जनसंख्या की विस्फोटक स्थिति है। चीन में एक बच्चा होने के बाद सरकार ने दूसरे बच्चे के जन्म देने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। भारत में भी जनसंख्या को नियन्त्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पिछले एक दशक से चीन की जनसंख्या में वृद्धि-दर निरन्तर अधिक है। वह दिन निकट ही है जब भारत की जनसंख्या विश्व में सबसे अधिक हो जाएगी।

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प्रश्न 10.
प्रवास कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
प्रवास मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

  • उत्प्रवास
  • अप्रवास।

1. उत्प्रवास (Emigration) – उत्प्रवास के द्वारा मनुष्य अपने प्रदेश से दूसरे स्थान को जाते हैं। जैसे यूरोप के मनुष्य उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया आदि गए। जिन प्रदेशों में कोई भौतिक प्रकार का कष्ट; जैसे जलवायु, बाढ़, सूखा अथवा जीवन निर्वाह की अन्य कठिनाइयाँ अथवा सामाजिक या आर्थिक कठिनाई उत्पन्न होती हों, उन स्थानों से मनुष्य बाहर की ओर स्थानान्तरण करने लगते हैं।

2. अप्रवास (Immigration)-अप्रवास के द्वारा बाहरी स्थानों से मनुष्य किसी प्रदेश या स्थान के अन्दर आते हैं। उदाहरण उत्तरी अमेरिका में ब्रिटेन, इटली, फ्रांस आदि देशों से मनुष्यों का प्रवास होता है। जिन देशों में जीविका निर्वाह की सुविधाएँ प्रचुर मात्रा में होती हैं, वे बाहर से मनुष्यों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कभी-कभी आर्थिक या सामाजिक आवश्यकताओं के कारण भी बाहरी क्षेत्रों से प्रवास होता है।

प्रश्न 11.
जनसंख्या की वृद्धि-दर की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
विश्व में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या की वृद्धि-दर की प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. प्राकृतिक वृद्धि-दर (Natural Growth Rate) – दो समय बिन्दुओं में जन्म-दर और मृत्यु-दर में अन्तर से बढ़ने वाली जनसंख्या को उस क्षेत्र की प्राकृतिक वृद्धि-दर कहते हैं अर्थात् प्राकृतिक वृद्धि-दर = जन्म-दर – मृत्यु-दर।

2. वास्तविक वृद्धि-दर (Real Growth Rate) – इसमें जनसंख्या की जन्म-दर व मृत्यु-दर के साथ-साथ आप्रवास व अप्रवास की भी गणना की जाती है अर्थात् वास्तविक वृद्धि-दर = जन्म-दर – मृत्यु-दर + आप्रवासी – उत्प्रवासी।

3. धनात्मक वृद्धि-दर (Positive Growth Rate) – धनात्मक वृद्धि-दर तब होती है जब दो समय बिन्दुओं के बीच जन्म-दर, मृत्यु-दर से अधिक हो या अन्य देशों के लोग स्थायी रूप से उस देश में प्रवास कर जाएँ।

4. ऋणात्मक वृद्धि-दर (Negative Growth Rate) – यदि दो समय बिन्दुओं के बीच जनसंख्या कम हो जाए तो उसे ऋणात्मक वृद्धि-दर कहते हैं। यह तब होती है जब जन्म-दर मृत्यु-दर से कम हो जाए या लोग अन्य देशों में प्रवास कर जाएँ।

प्रश्न 12.
विश्व में न्यून (विरल) जनसंख्या वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जिन क्षेत्रों में 1 से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहते हैं, उन्हें विरल जनसंख्या वाले प्रदेश कहते हैं। इनमें प्रमुख निम्नलिखित प्रदेश सम्मिलित हैं-
1. उष्ण मरुस्थल-सहारा, कालाहारी, अटाकामा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, अरब, थार तथा सोनोरैन मरुस्थल । इन क्षेत्रों में न्यून . वर्षा के कारण जल की कमी है और जनसंख्या विरल है।

2. अति-शीत क्षेत्र-ये ध्रुवीय क्षेत्र हैं, जिनमें कनाडा का उत्तरी भाग, ग्रीनलैंड, साइबेरिया का उत्तरी भाग तथा दक्षिणी ध्रुव के चारों ओर फैला हुआ अंटार्कटिक महाद्वीप सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों में तापमान कम है तथा फसलों के लिए वर्धनकाल छोटा है। अंटार्कटिक महाद्वीप तो बिल्कुल ही जनविहीन है।

3. विषुवत् रेखीय क्षेत्र इसमें दक्षिणी अमेरिका का अमेजन बेसिन तथा अफ्रीका का जायरे बेसिन सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों में वर्षा तथा तापमान दोनों ही अधिक हैं, जिससे घने वन उगते हैं, जिन्हें पार करना कठिन है। यह जलवायु मरुस्थल के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

प्रश्न 13.
विकसित तथा विकासशील देशों की जनांकिकीय प्रवृत्तियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विकसित और विकासशील देशों की जनांकिकीय प्रवृत्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

अभिलक्षणविकसित देशविकासशील देश
(1) वृद्धि दरनिम्न (0.6 प्रतिशत)उच्च (2.1 प्रतिशत)
(2) द्विगुणन अवधिउच्च (116 वर्ष)निम्न (35 वर्ष)
(3) शिशु मृत्यु-दरनिम्न (5-25)उच्च (50 – 100)
(4) साक्षरताउच्च 95 प्रतिशतनिम्न 35-75 प्रतिशत
(5) औद्योगीकरणउच्चनिम्न
(6) मुख्य जनसंख्यानगरीय 75 प्रतिशतग्रामीण 54 प्रतिशत
(7) जीवन स्तरउच्चनिम्न

प्रश्न 14.
जनसंख्या घनत्व और जनसंख्या वितरण में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व और जनसंख्या वितरण में निम्नलिखित अंतर हैं-

जनसंख्या घनत्वजनसंख्या वितरण
1. किसी स्थान में प्रति वर्ग कि०मी० में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या है।1. किसी स्थान की कुल जनसंख्या ही वहाँ का वितरण है।
2. जनसंख्या घनत्व एक अनुपात है।2. जनसंख्या वितरण की प्रकृति स्थितिगत है।
3. जनसंख्या वितरण को उसके घनत्व द्वारा अधिक सुचारु ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।3. जनसंख्या वितरण का प्रारूप क्षेत्रीय होता है।
4. घनत्व को प्रति वर्ग कि०मी० में व्यक्त करते हैं; जैसे भारत की जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।4. वितरण को व्यक्त करने के लिए कोई इकाई नहीं है।

प्रश्न 15.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौतिक कारक-किसी भी देश अथवा प्रदेश की जनसंख्या के वितरण को निम्नलिखित भौतिक कारक प्रभावित करते हैं-
1. धरातल-जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने में धरातल की विभिन्नता सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है। ऊबड़-खाबड़ तथा ऊँचे पर्वतीय प्रदेशों में जनसंख्या कम आकर्षित होती है। इन प्रदेशों में जनसंख्या विरल पाई जाती है, क्योंकि यहाँ पर मानव निवास की अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध नहीं होती, कृषि के लिए उपजाऊ मिट्टी का अभाव होता है, यातायात के साधनों का विकास आसानी से नहीं हो पाता, कृषि फसलों के लिए वर्धनकाल (Growing Period) छोटा होता है तथा जलवायु कठोर होती है।

2. जलवायु अनुकूल तथा आरामदेय जलवायु में कृषि, उद्योग तथा परिवहन एवं व्यापार का विकास अधिक आसानी से होता है। विश्व में मध्य अक्षांश का क्षेत्र (शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र) जलवायु की दृष्टि से अनुकूल है। इसलिए विश्व की अधिकांश जनसंख्या इन्हीं प्रदेशों में निवास करती है। इसके विपरीत अत्यधिक शीत प्रदेशों में जनसंख्या विरल पाई जाती है। इसी प्रकार शुष्क मरुस्थली प्रदेशों की जलवायु ग्रीष्म ऋतु में झुलसाने वाली तथा शीत ऋतु में ठिठुराने वाली होती है। यही कारण है कि विश्व के मरुस्थलों; जैसे सहारा, थार, कालाहारी, अटाकामा तथा अरब के मरुस्थलों में जनसंख्या विरल है।

3. मृदा मनुष्य की पहली आवश्यकता है भोजन। भोजन हमें मिट्टी से मिलता है। मिट्टी में ही विभिन्न कृषि उपजें पैदा होती विश्व के जिन क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी है, वहाँ जनसंख्या अधिक पाई जाती है। भारत में गंगा-सतलुज के मैदान, संयुक्त राज्य अमेरिका में मिसीसिपी के मैदान, पाकिस्तान में सिन्धु के मैदान, मिस्र में नील नदी के मैदान आदि में उपजाऊ मिट्टी की परतें हैं, जिससे अधिक लोग वहाँ आकर बस गए हैं।

4. वनस्पति-वनस्पति भी जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करती है। उदाहरणार्थ, भूमध्य-रेखीय क्षेत्रों में सघन वनस्पति (सदाबहारी वनों) के कारण यातायात के साधनों का विकास कम हुआ है। आर्द्र जलवायु के कारण मानव-जीवन अनेक रोगों से ग्रसित रहता है, इसलिए यहाँ की जनसंख्या विरल है। इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में वनस्पति आर्थिक उपयोग वाली होती है, वहाँ मानव लकड़ी से सम्बन्धित अनेक व्यवसाय आरम्भ हो जाते हैं; जैसे टैगा के वनों का आर्थिक महत्त्व है इसलिए वहाँ जनसंख्या अधिक पाई जाती है। वनस्पति विहीन क्षेत्रों (मरुस्थलों) में भी जनसंख्या विरल है।

5. खनिज सम्पदा-जिन क्षेत्रों में खनिज पदार्थों के भण्डार मिलते हैं, वहाँ खनन व्यवसाय तथा उद्योगों की स्थापना के कारण बेत होती है। ब्रिटेन में पेनाइन क्षेत्र, जर्मनी में रूर क्षेत्र, संयुक्त राज्य अमेरिका में आप्लेशियन क्षेत्र, रूस के डोलेत्स बेसिन तथा भारत के छोटा नागपुर के पठार में जनसंख्या का केन्द्रीयकरण वहाँ की खनिज सम्पदा की ही देन है।

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प्रश्न 16.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले मानवीय कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले मानवीय कारक निम्नलिखित हैं-
1. कृषि विश्व में जो क्षेत्र कृषि की दृष्टि से अनुकूल हैं, वहाँ जनसंख्या का अधिक आकर्षण होता है। वहाँ लोग प्राचीन समय से ही अधिक संख्या में निवास करते आ रहे हैं। प्रेयरीज तथा स्टेपीज प्रदेश कृषि के लिए उपयुक्त हैं, इसलिए वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है।

2. नगरीकरण-बीसवीं शताब्दी में नगरीकरण की प्रवृत्ति के कारण नगरों की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। नगरों में रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, व्यापार आदि की अधिक सुविधाएँ सुलभ हैं इसलिए जनसंख्या का जमघट नगरों में अधिक देखने को मिलता है। न्यूयॉर्क, लन्दन, मास्को, बीजिंग, शंघाई, सिडनी, दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई आदि नगरों में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हो रही है।

3. औद्योगिकीकरण-जिन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास तीव्र हुआ है, वहाँ जनसंख्या का आकर्षण बढ़ा है। जापान, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका का उत्तर:पूर्वी भाग, जर्मनी का रूर क्षेत्र, यूरोपीय देशों तथा भारत में पिछले दो दशकों से दिल्ली, मुम्बई तथा हुगली क्षेत्र में औद्योगिक विकास के कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है।

4. परिवहन-परिवहन की सुविधाओं का भी जनसंख्या के वितरण पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। जिन क्षेत्रों में यातायात की अधिक सुविधाएँ हैं, वहाँ जनसंख्या का अधिक आकर्षण होता है। महासागरीय यातायात के विकास के कारण कई बन्दरगाह विश्व के बड़े नगर बन चुके हैं। सिंगापुर, शंघाई, सिडनी, न्यूयॉर्क आदि नगर बन्दरगाहों के रूप में विकसित हुए थे, लेकिन आज इन नगरों में रेल, सड़क तथा वायु यातायात की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या घनत्व क्या है? विश्व में जनसंख्या घनत्व के वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व में न्यून या विरल जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व में सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
अथवा
संसार के सघन और विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
किसी भी प्रदेश की जनसंख्या और उस प्रदेश की भूमि के क्षेत्रफल के पारस्परिक अनुपात को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। इससे किसी प्रदेश के लोगों की सघनता का पता चलता है। यह जनसंख्या के विश्लेषणात्मक अध्ययन करने का महत्त्वपूर्ण माप है। इसे प्रति इकाई क्षेत्रफल पर व्यक्तियों की संख्या द्वारा व्यक्त किया जाता है। घनत्व इस प्रदेश की उन्नति और भावी विकास का अनुमान लगाने का मुख्य आधार होता है। इसका मुख्य लक्ष्य किसी क्षेत्र के संसाधनों पर जनसंख्या दबाव ज्ञात करना होता है। इसे निम्नलिखित रूपों में परिभाषित किया जाता है
1. गणितीय घनत्व (Arithmetic Density) किसी देश अथवा प्रदेश की कुल जनसंख्या तथा उसके कुल क्षेत्रफल के अनुपात को वहाँ की जनसंख्या का गणितीय घनत्व कहा जाता है। यह जनसंख्या तथा क्षेत्रफल के बीच एक साधारण अनुपात है। इसे निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है
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उदाहरण के लिए, जनसंख्या 376.80 करोड़ व क्षेत्रफल 440 लाख वर्ग कि०मी० है, तो जनसंख्या का घनत्व निम्नलिखित प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है
गणितीय घनत्व = \(\frac { 37680 }{ 440 }\)
= 85.64 या 86 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
यह जनसंख्या घनत्व का सबसे सरल रूप है, परन्तु इसमें कई त्रुटियाँ हैं। जैसे इससे जनसंख्या निवास तथा जीवन-स्तर का सही अनुमान नहीं लग पाता। लेकिन उपरोक्त त्रुटियों के बावजूद यह विभिन्न देशों की जनसंख्या विशेषताओं की तुलना करने की एक अच्छी विधि है।

2. कायिक घनत्व (Physiological Density)-इसे प्रति वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि (Cultivated Land) पर कुल निवास करने वाली जनसंख्या के अनुपात में व्यक्त किया जाता है। किसी देश या प्रदेश की कुल जनसंख्या वहाँ की कुल कृषि भूमि (Cultivated Land) के अनुपात को कायिक घनत्व कहते हैं। इसे निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
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उदाहरण के लिए, यदि कुल कृषि भूमि 14.26 लाख वर्ग कि०मी० व जनसंख्या 10270 लाख है तो जनसंख्या का कायिक घनत्व निम्नलिखित प्रकार से होगा
कायिक घनत्व = \(\frac { 10270 }{ 14.26 }\) = 720 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
कायिक घनत्व द्वारा यह पता चलता है कि कृषि भूमि के प्रति वर्ग कि०मी० पर कितने व्यक्ति निर्भर हैं। कृषि प्रधान विकासशील देशों के लिए इस घनत्व का विशेष महत्त्व है।

3. आर्थिक घनत्व (Economic Density) इससे उस देश या प्रदेश के साधनों की उत्पादन क्षमता (Productive Capacity) तथा उस प्रदेश में निवास करने वाली जनसंख्या के अनुपात को लिया जाता है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 5

4. कृषि घनत्व (Agriculture Density) इसमें उस देश या प्रदेश की कृषि की जाने वाली भूमि के क्षेत्रफल (Cultivated Area) तथा उसमें निवास करने वाली कृषक जनसंख्या (Agricultural Population) के अनुपात को लिया जाता है।
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5. पोषण घनत्व (Nutrition Density)-इसमें खेती की भोज्य फसलों (Food Crops) का क्षेत्रफल तथा उस प्रदेश की कुल जनसंख्या (Total Population) को लिया जाता है।
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जनसंख्या का विश्व वितरण-विश्व की जनसंख्या के वितरण पर यदि नजर डालें तो इसके आँकड़े चौंकाने वाले हैं। जनसंख्या का वितरण अत्यधिक असमान एवं विषम है। विश्व की लगभग 90 प्रतिशत आबादी केवल एक चौथाई भू-भाग पर निवास करती है और शेष 10 प्रतिशत जनसंख्या तीन-चौथाई क्षेत्रफल घेरे हुए है। सन् 2001 में विश्व की अनुमानित जनसंख्या 605 करोड़ थी, जोकि सन् 2011 में बढ़कर 693 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उत्तरी गोलार्द्ध में विश्व की 90% जनसंख्या रहती है तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 10% से भी कम जनसंख्या रहती है। विश्व का लगभग 33% भाग जनविहीन है।

जनसंख्या के वितरण के आधार पर विश्व को तीन प्रदेशों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
1. विरल जनसंख्या अथवा निम्न घनत्व वाले क्षेत्र-विश्व में कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ जनसंख्या का घनत्व 1 से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। ऐसे क्षेत्रों को विरल जनसंख्या के क्षेत्र कहते हैं। विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में कुल विश्व के क्षेत्रफल का तीन-चौथाई भाग आता है। इस प्रकार के प्रदेश निम्नलिखित हैं-
(1) उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र-उष्ण मरुस्थलीय भू-भाग अधिकांश महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में स्थित हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 1 व्यक्ति से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। ऐसे क्षेत्रों में वर्षा की न्यूनता तथा जल का अभाव है। यहाँ वर्षा के अभाव में केवल काँटेदार झाड़ियाँ ही उगती हैं। इन क्षेत्रों में कृषि बहुत कम होती है। यहाँ निवास करने वाले लोगों का मुख्य व्यवसाय भेड़-बकरी तथा ऊँट पालना है। इस प्रकार के मरुस्थलों में सहारा, कालाहारी, अटाकामा, थार, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया तथा अरब का मरुस्थल प्रमुख हैं।

(2) अति-शीत प्रदेश-इन प्रदेशों में ध्रुवीय प्रदेश सम्मिलित हैं। यहाँ की जलवायु अत्यन्त शीतल होती है और हर समय अधिकतर बर्फ जमी रहती है। यहाँ वर्धनकाल इतना छोटा होता है कि कोई भी फसल उगाना कठिन है। इस प्रकार के प्रदेशों में लोगों का मुख्य व्यवसाय आखेट करना तथा मछली पकड़ना है। इनमें ग्रीनलैण्ड, साइबेरिया का उत्तरी भाग, कनाडा का उत्तरी भाग, अलास्का तथा दक्षिणी ध्रुव का अंटार्कटिक महाद्वीप निर्जन हैं। ऐसे क्षेत्रों में 10 महीने तापमान हिमांक बिन्दु से नीचे ही रहता है। अधिकांश चलवासी चरवाहे हैं जो रेडियर पालते हैं और सील तथा व्हेल का शिकार करते हैं।

(3) उच्च पर्वतीय प्रदेश मध्य एशिया चारों ओर से सागरीय प्रभाव से वंचित शुष्क तथा अनाकर्षक प्रदेश हैं। पर्वतीय एवं पठारी होने के कारण मिट्टी की गहराई कम है तथा कृषि फसलें न के बराबर हैं या कहीं-कहीं साल-भर में केवल एक ही फसल उगाई जाती है। 4000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले पवर्तीय भागों में तो वायु का दबाव कम हो जाता है, जिससे साँस लेना भी कठिन हो जाता है। उत्तरी अमेरिका में रॉकीज पर्वत, दक्षिणी अमेरिका में एण्डीज़ तथा भारत में महान हिमालय तथा चीन के दक्षिण-पश्चिमी भाग में इस प्रकार के उच्च पर्वतीय प्रदेश हैं।

(4) विषुवत रेखीय क्षेत्र-यह प्रदेश अत्यधिक वर्षा तथा साल-भर ऊँचा तापक्रम होने के कारण मानवं बसाव की दृष्टि से अनुकूल नहीं है। यहाँ जनसंख्या विरल है। चारों ओर घने जंगल तथा वन्य प्राणियों का साम्राज्य है। यहाँ जलवायु उमस वाली है तथा विभिन्न प्रकार के कीटाणु तथा जहरीले कीड़े-मकौड़े यहाँ देखने को मिलते हैं। इनमें दक्षिणी अमेरिका का अमेज़न बेसिन, अफ्रीका का जायरे बेसिन आदि सम्मिलित हैं।

2. मध्यम जनसंख्या और घनत्व वाले क्षेत्र-विश्व के जिन भागों में जनसंख्या का घनत्व 11 से 50 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है, उन्हें मध्यम या साधारण जनसंख्या वाले क्षेत्र में रखा जा सकता है। ये प्रदेश सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं।

  • एशिया-म्यांमार, दक्षिणी भारत, पश्चिमी चीन, थाईलैण्ड, कम्बोडिया आदि हैं।
  • यूरोप डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, लिथुआनिया, बाल्टिक गणराज्य तथा रूस के उत्तर-पश्चिमी भाग।
  • अमेरिका-संयुक्त राज्य अमेरिका का पश्चिमी तथा मध्यवर्ती भाग, कनाडा का दक्षिण-पश्चिमी भाग।
  • अफ्रीका-अफ्रीका के तटीय भाग, नील नदी का डेल्टा, नाइजीरिया तथा दक्षिणी अफ्रीका के कुछ क्षेत्र।
  • दक्षिण अमेरिका-वेनेजुएला, उत्तरी-पूर्वी ब्राजील, मध्यवर्ती चिली आदि।
  • ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया का तटवर्ती भाग तथा मरे-डार्लिंग, नदियों का बेसिन।

3. सघन जनसंख्या अथवा उच्च घनत्व के क्षेत्र-जिन प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है, उन्हें सघन जनसंख्या वाले प्रदेश कहते हैं। उच्च घनत्व वाले प्रदेश विश्व में निम्नलिखित हैं
(1) मानसून एशिया – इस प्रदेश की जलवायु मानव तथा कृषि दोनों के लिए अनुकूल है। कृषि फसलों के लिए वर्धनकाल लम्बा है। जलवायु विभिन्नता के कारण अनेक ऋतुएँ तथा उनमें विभिन्न प्रकार की कृषि फसलें उगाई जाती हैं। वर्ष में 2 से 3 फसलें उगाई जाती हैं। यहाँ की जनसंख्या अधिकांशतः कृषि पर निर्भर करती है। इन क्षेत्रों में समतल मैदानी भू-भाग हैं, जिनमें कहीं-कहीं जनसंख्या का घनत्व 700 से 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० तक है। इस क्षेत्र में चीन, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इण्डोनेशिया, जापान, सिंगापुर आदि आते हैं। नगरीकरण एवं औद्योगिकीकरण के कारण कई क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 2000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से भी अधिक है। सिंगापुर में जनसंख्या का घनत्व 5000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है।

(2) पश्चिमी यूरोप – पश्चिमी यूरोप में औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण की प्रक्रिया 19वीं शताब्दी से ही चल रही है। लोग उद्योग, व्यापार तथा वाणिज्य को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। यहाँ सघन जनसंख्या दक्षिणी तथा पश्चिमी भाग में है। उत्तर में जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है। सघन जनसंख्या वाला क्षेत्र इंग्लिश चैनल से पूर्व में नीपर नदी तक है। इसमें स्पेन, पुर्तगाल, दक्षिणी फ्राँस, ब्रिटेन, जर्मनी, हॉलैण्ड और बेल्जियम आदि सम्मिलित हैं।

(3) संयुक्त राज्य अमेरिका का मध्य – पूर्वी भाग संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य-पूर्वी भाग में यूरोपीय लोग आकर बसे और उसके बाद इस क्षेत्र में औद्योगिकीकरण तथा नगरीकरण की गति भी तीव्र रही, जिसके कारण जनसंख्या का घनत्व वर्तमान समय में अधिक हो गया है। जीवन की सभी सुविधाएँ सुलभ हैं। कृषि, उद्योग, व्यापार, वाणिज्य आदि सभी व्यवसायों का विकास द्रुतगति से हुआ है। दक्षिणी-पूर्वी कनाडा भी जनसंख्या की दृष्टि से सघन क्षेत्र हैं। देश की राजधानी तथा अन्य व्यापारिक नगर इसी क्षेत्र में हैं।
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प्रश्न 2.
जनांकिकीय संक्रमण सिद्धान्त की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
अथवा जनांकिकीय
संक्रमण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संसार में जनसंख्या की वृद्धि के इतिहास पर दृष्टिपात करने से जनसंख्या के विकास की विभिन्न अवस्थाएँ (Stages) दिखाई देती हैं। समय के साथ-साथ जनसंख्या में होने वाले क्रमिक परिवर्तन को जनांकिकीय संक्रमण कहते हैं। जैसे-जैसे कोई देश विकास करता है, उसकी जन्म-दर और मृत्यु-दर में परिवर्तन होने लगता है। उस देश की जनसंख्या का विकास होने लगता है, जो कुछ क्रमिक अवस्थाओं में होता है। जनसंख्या के विकास चक्र में सामान्यतः पाँच अवस्थाएँ होती हैं। इन अवस्थाओं को जनसंख्या चक्र (Population Cycle) कहते हैं। बर्गडौरफर (Burgdorfer), ब्लेकर (Blaker), साइमन (Simon), संयुक्त राष्ट्र (United Nations) आदि ने जनसंख्या चक्र की विभिन्न अवस्थाओं पर अपने विचार दिए हैं। जनांकिकीय संक्रमण की प्रायः पाँच अवस्थाएँ देखने को मिलती हैं
1. प्रथम अवस्था (First Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की यह पहली अवस्था होती है। इसमें उच्च जन्म-दर और उच्च मृत्यु-दर दोनों होते हैं। अतः जनसंख्या धीमी गति से बढ़ती है। यह 40 से 50 तक जन्म तथा मृत्यु प्रति हजार होती है। जन्म-दर तथा मृत्यु-दर बराबर होने के कारण इन देशों में जनसंख्या वृद्धि-दर बहुत मन्द होती है। यहाँ लोगों की मान्यता होती है कि “बहुत सारे बच्चों में से कुछ तो जिएँगे।” इसमें जनसंख्या की शुद्ध वृद्धि-दर लगभग 1 प्रतिशत होती है। इसे उच्च स्थिरता की अवस्था भी कहा जाता है।

2. द्वितीय अवस्था (Second Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की दूसरी अवस्था में आर्थिक विकास होते हैं। अकाल तथा सूखे पर नियंत्रण, खान-पान में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की प्रक्रिया के आरम्भ होने से मृत्यु-दर कम हो जाती है। परन्तु जन्म-दर ऊँची बनी रहती है। अतः इस अवस्था में जनसंख्या तेजी से बढ़ती है। विकासशील देश इसी अवस्था से गुजर रहे हैं। एशिया में पूर्वी दक्षिणी और मध्य एशिया के देश इसी अवस्था में हैं।

3. तृतीय अवस्था (Third Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की इस अवस्था में जन्म-दर में कमी आने से जनसंख्या वृद्धि-दर कम हो जाती है। यह अवस्था उच्च जन्म-दर (High Fertility) तथा मध्यम मृत्यु-दर (Moderate Mortality) वाली होती है। अमेरिका, ब्राजील, इक्वाडोर तथा पेरू इसी अवस्था में है। आधुनिक खेती, नगरीकरण, औद्योगिकीकरण इस अवस्था की पहचान हैं। इस अवस्था को विलम्ब से वृद्धि वाली अवस्था कहा जाता है।

4. चौथी अवस्था (Fourth Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की इस अवस्था में जन्म-दर एवं मृत्यु-दर दोनों ही कम हो जाती है। यह अवस्था मध्यम जन्म-दर (Moderate Fertility) तथा निम्न मृत्यु-दर (Low Mortality) वाली होती है। फलस्वरूप जनसंख्या की वृद्धि-दर बहुत ही कम हो जाती है। कुछ देशों में तो वृद्धि-दर शून्य हो जाती है। इसे न्यून स्थिरता की अवस्था कहते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैण्ड आज इसी अवस्था में हैं।
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5. पाँचवीं अवस्था (Fifth Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की यह अन्तिम अवस्था मानी जाती है। इस अवस्था में जन्म-दर कम होकर प्रायः शून्य त है। मृत्यु-दर जन्म-दर से अधिक हो जाती है, जिससे जनसंख्या घटने लगती है। इस अवस्था में आर्थिक विकास अपने उच्चतम स्तर पर होता है। लोगों में बच्चे पैदा करने की चाहत नहीं रहती है और न ही उनके पास समय होता है। इस अवस्था को जनांकिकीय संक्रमण की ह्रासमान अवस्था कहा जाता है। पश्चिमी यूरोप के प्रायः सभी देश और जापान इसी अवस्था में हैं। रूस, यूक्रेन, फ्रांस व इटली में भी लगभग यही अवस्था है। यहाँ जनसंख्या बढ़ने की बजाय कम हो रही है।

प्रश्न 3.
प्रवास से आपका क्या अभिप्राय है? इसे निर्धारित करने वाले कारकों का विस्तृत वर्णन करें। अथवा प्रवास को प्रभावित करने वाले कारकों/तत्त्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रवास का अर्थ एवं परिभाषाएँ-युगों से ही मानव वर्गों (Human Groups) का प्रवास होता रहा है। मानव जातियाँ (Human Races) आदिकाल से ही अपने उद्गम प्रदेश के बाहर प्रवास करती रही हैं। ऐतिहासिक काल में भी, पृथ्वी के विभिन्न भागों, एक स्थान से दूसरे स्थान पर, मानव वर्गों का प्रवसन होता रहा है, इसे जनसंख्या का स्थानान्तरण या प्रवास कहते हैं। स्थानान्तरण या प्रवास मात्र स्थान परिवर्तन ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तत्त्वों को समझने का आधार भी है। यह सामाजिक और आर्थिक पक्षों से जुड़ी हुई एक महत्त्वपूर्ण घटना है। संयुक्त राष्ट्र संघ के जनांकिकीय शब्दकोष के अनुसार, “प्रवास/प्रवसन एक प्रकार की भौगोलिक अथवा स्थानिक प्रवासिता है जो एक भौगोलिक इकाई के बीच देखने को मिलती है, जिनमें रहने का मूल स्थान अथवा पहुँचने का स्थान दोनों भिन्न होते हैं। यह प्रवास स्थायी होता है, क्योंकि इसमें मानव का निवास स्थान स्थायी रूप से परिवर्तित हो जाता है।” इसी प्रकार डेविड हीर के अनुसार, “अपने सामान्य निवास स्थान से किसी दूसरे स्थान पर जाकर बसना स्थानान्तरण (प्रवसन) कहलाता है।”

स्थानान्तरण या प्रवास को निर्धारित करने वाले कारक-प्रवास को निर्धारित करने वाले अनेक कारक हैं। प्रवास के कारणों का कोई सामान्य नियम नहीं है, क्योंकि प्रवास की प्रक्रिया व्यक्ति के अपने निर्णय से जुड़ी होती है। बड़े पैमाने पर प्रवास के कई कारण हैं, जिन्हें मुख्य रूप से निम्न भागों में बाँटा जा सकता है आर्थिक कारक, भौतिक कारक, धार्मिक या सांस्कृतिक कारक, राजनीतिक कारक और जनसांख्यिकीय कारक आदि। इनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-
1. आजीविका (Earning) – सीमित संसाधन तथा बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि एवं अन्य क्षेत्रों में एक निश्चित जनसंख्या को ही रोजगार मिलता है। इस कारण जनसंख्या का एक बड़ा भाग आजीविका की खोज में गाँवों से नगरों की ओर प्रवास होता है। इसके अतिरिक्त किसी क्षेत्र में जनसंख्या का दबाव बढ़ने से जनसंख्या-संसाधन सन्तुलन बिगड़ने के कारण लोग आजीविका के लिए विकसित और सिंचाई समृद्ध कृषि क्षेत्रों में जाना पसन्द करते हैं। उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिणी अफ्रीका में उपलब्ध विस्तृत कृषि योग्य भूमि ने यूरोप, चीन और जापान में लोगों को आकर्षित किया है।

2. विवाह (Marriage) – सामाजिक रीति के अनुसार लड़कियों को विवाह के पश्चात् ससुराल में रहना पड़ता है। यही कारण है कि भारत में स्त्रियों की प्रवास दर काफी ऊँची है। यह प्रवास गाँव या नगरों से नगरों की ओर होता है। नगरों से गाँव की ओर प्रवास कम होता है।

3. शिक्षा (Education) – प्रायः गाँवों में उच्च शिक्षा की सुविधाएँ नहीं होतीं। उच्च शिक्षा व योग्यता में वृद्धि हेतु लोग शहरों में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की उच्च तथा तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहरों में प्रवास करते हैं। सुशिक्षित, निपुण, कलाकार, वैज्ञानिक तथा अन्य क्षेत्रों में योग्य लोग शहरों में अपनी उन्नति के अवसरों की तलाश में प्रवास करते हैं। इसके अतिरिक्त आर्थिक रूप से समृद्ध परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए गाँवों से शहरों व छोटे शहरों से बड़े शहरों में, जहाँ शिक्षा की अच्छी सुविधाएँ होती हैं, प्रवास करते हैं।

4. सामाजिक असुरक्षा (Social Unsecurity) – जिस किसी देश या प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता एवं गड़बड़ी, जातीय दंगे, वर्ग-संघर्ष आदि की सम्भावनाएँ अधिक होती हैं तो ऐसे क्षेत्रों की जनसंख्या क्षेत्र को छोड़कर अन्य शांत क्षेत्रों को प्रवास कर जाते हैं। उदाहरण के लिए, कश्मीर में राजनीतिक अस्थिरता व अशान्ति के कारण कश्मीरी पंडित कश्मीर प्रवास कर गए। इसी प्रकार सन् 1947 के देश विभाजन में भारत व पाकिस्तान से लोगों का प्रवास हुआ।

5. प्राकृतिक प्रकोप (Natural Destroy) – प्राकृतिक प्रकोप भी जनसंख्या को प्रवास करने पर मजबूर करते हैं। भयंकर बाढ़ें, सूखा, बीमारियाँ आदि प्राकृतिक प्रकोपों से लोग भयभीत व मजबूर होकर प्रवास करते हैं। ज्वालामुखी के आकस्मिक विस्फोट के कारण भी मानव को अपने निवास स्थान को छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ता है। सिसली, फिलीपीन और हवाई द्वीपों से इसी कारण लोग अन्य देशों में जाकर बस गए हैं। भूकम्प भी प्रवास का एक मुख्य कारण है। सन् 1934 में बिहार के भूकम्प के समय हजारों लोग पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में जाकर स्थाई रूप से बस गए थे।

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प्रश्न 4.
मर्त्यता से क्या तात्पर्य है? इसे निर्धारित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मर्त्यता का अर्थ (Meaning of Mortality) जन्म की तरह मृत्यु भी एक निश्चित घटित होने वाली महत्त्वपूर्ण जैविक घटना है। सन् 1953 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा मर्त्यता की दी गई परिभाषा के अनुसार “जन्म के बाद जीवन के सभी लक्षणों का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना मर्त्यता कहलाता है।”

मर्त्यता की माप (Measures of Mortality)-जनसंख्या वृद्धि के निर्धारण में मर्त्यता की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मर्त्यता में कमी आने के कारण भी जनसंख्या वृद्धि हो जाती है। मर्त्यता को मुख्य रूप से निम्नलिखित विधियों द्वारा मापा जाता है

  1. अशोधित मृत्यु-दर
  2. शिशु मृत्यु-दर
  3. मातृ मृत्यु-दर
  4. आयु विशिष्ट मृत्यु-दर।

इन विधियों में अशोधित मृत्यु-दर अधिक सर्वमान्य है जिसका वर्णन निम्नलिखित है-
अशोधित मृत्यु-दर (Crude Death Rate)-एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के अनुपात में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को अशोधित मृत्यु-दर कहा जाता है। इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है-
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मर्त्यता के निर्धारक कारक (Determinants of Mortality)-अधिक जन्म-दर और अधिक मृत्यु-दर किसी देश के पिछड़ेपन का सूचक है जबकि कम जन्म-दर और कम मृत्यु-दर किसी देश की आर्थिक उन्नति के सूचक हैं। मृत्यु-दर किसी देश की जनसांख्यिकी संरचना सामाजिक प्रगति तथा आर्थिक विकास की सूचक है। मर्त्यता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
1. आयु संरचना (Age Structure) युवाओं की अपेक्षा प्रौढ़ों में मृत्यु की संभावना अधिक होती है। अच्छी चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है तथा जीवन प्रत्याशा को बढ़ाया जा सकता है। इसी कारण विकसित देशों में प्रौढ़ों की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी प्रतीत हो रही है।

2. लिंग संरचना (Sex Structure) स्त्रियों और पुरुषों की मृत्यु-दर भी अलग-अलग होती है। स्त्रियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों की अपेक्षा अधिक है। इसलिए प्रत्येक आयु वर्ग में स्त्रियों की मर्त्यता भी कम है और उनकी जीवन प्रत्याशा भी पुरुषों की अपेक्षा अधिक है, परंतु विकासशील और पिछड़े देशों में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। इन देशों में स्त्रियों की मृत्यु-दर पुरुषों से अधिक है। इसका प्रमुख कारण इन देशों में लड़कियों और स्त्रियों के प्रति भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण का होना है।

3. नगरीकरण (Urbanization)-नगर में होने वाली दुर्घटनाएँ, प्रदूषित वातावरण तथा वहाँ की तनावपूर्ण जिंदगी भी उच्च मृत्यु-दर के लिए उत्तरदायी है।

4. सामाजिक कारक (Social Factors)-भ्रूण हत्या, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, साक्षरता दर तथा धार्मिक विश्वास आदि सामाजिक कारक भी मर्त्यता को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5.
प्रजननशीलता क्या है? प्रजननशीलता को निर्धारित या प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रजननशीलता का अर्थ (Meaning of Fertility)-प्रजननशीलता से तात्पर्य स्त्री द्वारा पूरे समय बाद किसी समय विशेष में जीवित जन्म देने वाले बच्चों की संख्या से है। कुछ स्त्रियों में गर्भ धारण करने की क्षमता तो होती है परंतु प्रजननशीलता नहीं होती। किसी देश की जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने में प्रजननशीलता महत्त्वपूर्ण कारक है। यदि प्रजननशीलता मृत्यु-दर से अधिक है तो जनसंख्या में वृद्धि होगी। इसके विपरीत प्रजननशीलता से मृत्यु-दर अधिक होने पर जनसंख्या में कमी होगी।

प्रजनन दर मापने की विधियाँ (Methods of Measuring Fertile Rate)-प्रजनन दर को निम्नलिखित दो विधियों द्वारा व्यक्त किया जाता है-
1. अशोधित जन्म-दर (Crude Birth Rate)-किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को जन्म-दर कहा जाता है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या में जन्म-दर को निम्नांकित प्रकार से दर्शाया जा सकता है-
B = \(\frac{\mathbf{N}_{\mathbf{n}}}{\mathbf{P}}\) x 100
B = जन्म-दर, Nn = एक वर्ष में जन्मे नवजात शिशुओं की संख्या।
P = उस वर्ष के मध्य की जनसंख्या
यद्यपि इस विधि का प्रचलन अधिक है, फिर भी यह दोषयुक्त है, क्योंकि इसमें संपूर्ण जनसंख्या से भाग दिया जाता है कि संपूर्ण जनसंख्या कभी भी प्रजनन क्षमता की परिधि में नहीं आती।

2. सामान्य प्रजनन दर (General Fertile Rate)-प्रजनन आयु वर्ग (15-49 वर्ष) की 1000 स्त्रियों के पीछे जन्मे जीवित बच्चों की संख्या को सामान्य प्रजनन दर कहते हैं। इसे निम्नलिखित प्रकार से निकाला जा सकता है-
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प्रजननशीलता/प्रजननता को निर्धारित या प्रभावित करने वाले कारक (Factor-Effecting of Fertility)-प्रजननशीलता को निर्धारित करने वाले कारकों को निम्नलिखित दो वर्गों में रखा गया है-
(क) जैव कारक (Biological Factors) – जैव कारकों में लोगों की प्रजातियाँ, प्रजनन क्षमता तथा उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव आता है। विश्व में विभिन्न प्रजातियों के लोगों का जनसंख्या स्तर एक जैसा नहीं पाया जाता जबकि वे एक समान पर्यावरण में रहते हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रजननशीलता को प्रभावित करता है। अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दशा में प्रजनन दर ऊँची पाई जाती है जबकि अस्वस्थ शारीरिक और मानसिक वातावरण में मर्त्यता (Mortality) ऊँची पाई जाती है। स्त्रियों की प्रजनन क्षमता भी प्रजननशीलता को प्रभावित करती है। प्रजनन क्षमता या संतानोत्पादकता स्त्रियों में सामान्यतया 14 से 44 वर्ष की आयु तक पाई जाती है, लेकिन यह अवधि विभिन्न स्त्रियों में अलग-अलग पाई जाती है। भारत में यह आयु 15 से 49 वर्ष की है जबकि ठंडे देशों में यह आयु वर्ग कुछ भिन्न होती है।

(ख) प्रजननता को प्रभावित करने वाले अन्य कारक (Other factor-Effecting of Fertility) प्रजननता को अन्य निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं
1. शिक्षा का स्तर (Stage of Education) – शिक्षा का उच्च स्तर प्रजननता को निश्चित रूप से प्रभावित करता है। शिक्षित पति-पत्नी की अपेक्षा अशिक्षित पति-पत्नियों में प्रजननता अधिक पाई जाती है। अतः शिक्षा का प्रजननता से सीधा संबंध है।

2. विवाह की आयु (Age of Marriage) – 15 से 49 वर्ष के वर्ग की स्त्रियाँ सामान्य रूप से बच्चे पैदा करने में सक्षम होती हैं। यदि 15 वर्ष की आयु में विवाह किया जाए तो 34 वर्ष बच्चे पैदा करने के लिए मिलते हैं। इस अवधि में नारी लगभग 14-15 बच्चे पैदा कर सकती है। यदि 21 वर्ष की आयु के बाद कन्या का विवाह किया जाए तो अपेक्षाकृत कम बच्चे पैदा करने का अवसर मिलता है। अतः विवाह की आयु प्रजननता को प्रभावित करती है। इसलिए सरकार ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए लड़कियों की विवाह आयु 18 वर्ष तथा लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की है।

3. आर्थिक स्तर (Economic Stage) – गरीबी और जनसंख्या वृद्धि का सीधा संबंध है। यहाँ विभिन्न आय वर्ग के लोगों में प्रजननता दर में भिन्नता पाई जाती है। सामान्यतया निम्न आय वर्ग या गरीबी की रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों में उच्च प्रजननता दर मिलती है, जबकि उच्च आय वर्ग के लोगों में कम प्रजननता मिलती है।

4. व्यवसाय (Business) – प्रत्येक व्यवसाय के लोगों में प्रजननता दर समान नहीं पाई जाती। किसान और मजदूरों में प्रजनन दर सामान्य से अधिक होती है, जबकि अन्य सेवाओं में लगे लोगों की प्रजननता दर कुछ कम होती है।

5. धार्मिक मान्यताएँ (Realistic Assumptions) – धर्म के अनुसार भी प्रजननता की दर में भिन्नता पाई जाती है। प्रायः सभी धर्म जनसंख्या नियंत्रण का विरोध करते हैं, फिर भी यह नियंत्रण भिन्न-भिन्न धर्मों में भिन्न-भिन्न है। जिन धर्मों में परिवार कल्याण के साधनों का उपयोग नहीं किया जा रहा है, उस धर्म के लोगों की प्रजनन दर अधिक है। हिंदुओं की प्रजननता दर मुसलमानों की प्रजननता दर से कम है।

प्रश्न 6.
विश्व में जनसंख्या वृद्धि के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में जनसंख्या वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं-
1. उच्च जन्म-दर तथा निम्न मृत्यु-दर (High Birth Rates and Low Death Rates)-जनसंख्या की वृद्धि-दर जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के अन्तर से ज्ञात की जाती है। जब मृत्यु-दर कम तथा जन्म-दर अधिक होती है, तब जनसंख्या में वृद्धि होती है। प्राकृतिक तौर पर होने वाले जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के अन्तर को प्राकृतिक वृद्धि-दर कहते हैं तथा दो समयावधियों के बीच होने वाले जनसंख्या सम्बन्धी परिवर्तन को वृद्धि-दर कहते हैं। जब जन्म-दर अधिक तथा मृत्यु-दर कम हो या किसी अन्य देश से आकर जनंसख्या में बढ़ोत्तरी हो जाए तो इसे धनात्मक वृद्धि कहते हैं। जब दो समयावधियों के बीच जनसंख्या में कमी आए तो इसे ऋणात्मक वृद्धि कहते हैं। ऐसा तब होता है, जब मृत्यु-दर अधिक तथा जन्म-दर कम हो या जनसंख्या बाहर प्रवास कर जाए।

2. प्रवास (Migration)-किसी स्थान पर धनात्मक कारकों के कारण दूसरे स्थान से लोग प्रवासित होते हैं तो भी जनसंख्या में वृद्धि होगी। शहरों तथा कस्बों में उच्च शिक्षा, रोजगार की सुविधा, सुरक्षा, यातायात के साधन, चिकित्सा सुविधाएँ आदि विकसित अवस्था में होते हैं तो आस-पास के क्षेत्र से लोग यहाँ पर आकर रहने लगते हैं। ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जर्मनी में जनसंख्या वृद्धि इसी कारण से हुई है।

3. खनिज संसाधनों का आकर्षण (Attraction of Minerals)-संसार में जिन भागों में खनिज संसाधन अधिक हैं, वे क्षेत्र मानव को बसाव के लिए आकर्षित करते हैं। मानव उन क्षेत्रों में श्रमिकों के रूप में कार्य करते हैं। चाहे वहाँ की जलवायु सम हो या विषम। स्वीडन में लौह-अयस्क के कारण गेलिवारे नगर में जनसंख्या बढ़ी है। कनाडा की यक्रेन में केपर बैंक नगर, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कालगुर्ली, भारत में दामोदर घाटी, जर्मनी में रूस घाटी, रूस का डोनेट्स बेसिन, अल्लेशिन क्षेत्र आदि कई उदाहरण हैं, जहाँ खनिजों के कारण ही उन क्षेत्रों में जनसंख्या आकर्षित हुई।

4. उद्योगों का प्रभाव (Effect of Industries)-किसी भी क्षेत्र में यदि उद्योग विकसित होते हैं, तब वहाँ पर जनसंख्या में वृद्धि होने लगती है, क्योंकि उद्योगों में काम करने के लिए उन क्षेत्रों में अन्य देशों से श्रमिक आते हैं और वहाँ बसते हैं। आबादी श्रम के रूप में आती है और उस क्षेत्र में इस प्रकार उद्योगों के साथ-साथ जनसंख्या भी बढ़ती जाती है; जैसे पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका तट, पश्चिमी यूरोप का तटीय भाग, भारत में छोटा नागपुर पठार आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ उद्योगों के विकास के साथ-साथ जनसंख्या भी बढ़ती गई।

5. निम्न जीवन-स्तर (Low Life Standard)-जिन क्षेत्रों में लोगों का जीवन-स्तर निम्न होगा, वहाँ अज्ञानता की बढ़ोतरी होगी, इसलिए वहाँ पर जनसंख्या वृद्धि तीव्र गति से होगी, क्योंकि वहाँ के लोगों को वहाँ के संसाधनों को प्रयोग करने का पूर्ण ज्ञान नहीं होता। वहाँ प्रति व्यक्ति आय कम होने से जनसंख्या में बढ़ोतरी होती है।

6. आर्थिक विकास (Economic Development)-जनसंख्या वृद्धि का मुख्य प्रभाव क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। प्राथमिक अर्थव्यवस्था वाले विकासशील देशों में वृद्धि-दर दो प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच होती है; जैसे एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका आदि। विकसित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि-दर 1.7% से भी कम पाई जाती है। इस प्रकार आर्थिक विकास तथा जनसंख्या वृद्धि-दर व सह-सम्बन्ध स्पष्ट देखने को मिलता है। आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में जन्म-दर अधिक पाई जाती है। आर्थिक पिछड़ेपन के कारण मृत्यु-दर भी अधिक होती है; जैसे कालाहारी मरुस्थल के बुशमैन।

7. स्वास्थ्य सेवाएँ (Health Services)-विकसित देशों में स्वास्थ्य सेवाओं के कारण मृत्यु-दर पर अंकुश लग जाता है, लेकिन जन्म-दर बढ़ती जाती है, जिससे जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ने लगती है; जैसे दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में ऐसी स्थिति बनी हुई है।

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प्रश्न 7.
जनसंख्या परिवर्तन के घटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक होते हैं-

  • प्रजननशीलता या जन्म दर
  • मृत्यु दर या मर्त्यता
  • प्रवास।

1. प्रजननशीलता-प्रजननशीलता से तात्पर्य स्त्री द्वारा पूरे समय बाद किसी समय विशेष में जीवित जन्म देने वाले बच्चों की संख्या से है। कुछ स्त्रियों में गर्भ धारण करने की क्षमता तो होती है परंतु प्रजननशीलता नहीं होती। किसी देश की जनसंख्या वृद्धि ननशीलता महत्त्वपूर्ण कारक है। यदि प्रजननशीलता मृत्यु-दर से अधिक है तो जनसंख्या में वृद्धि होगी। इसके विपरीत प्रजननशीलता से मृत्यु-दर अधिक होने पर जनसंख्या में कमी होगी।

प्रजनन दर मापने की विधियाँ – प्रजनन दर को निम्नलिखित दो विधियों द्वारा व्यक्त किया जाता है-
(1) अशोधित जन्म-दर-किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को जन्म-दर कहा जाता है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या में जन्म-दर को निम्नांकित प्रकार से दर्शाया जा सकता है
B = \(\frac{\mathbf{N}_{\mathbf{n}}}{\mathbf{P}}\) x 100
B = जन्म-दर, Nn = एक वर्ष में जन्मे नवजात शिशुओं की संख्या।
P = उस वर्ष के मध्य की जनसंख्या
यद्यपि इस विधि का प्रचलन अधिक है, फिर भी यह दोषयुक्त है, क्योंकि इसमें संपूर्ण जनसंख्या से भाग दिया जाता है कि संपूर्ण जनसंख्या कभी भी प्रजनन क्षमता की परिधि में नहीं आती।

(2) सामान्य प्रजनन दर-प्रजनन आयु वर्ग (15-49 वर्ष) की 1000 स्त्रियों के पीछे जन्मे जीवित बच्चों की संख्या को सामान्य प्रजनन दर कहते हैं। इसे निम्नलिखित प्रकार से निकाला जा सकता है-
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 12

2. मर्त्यता-जन्म की तरह मृत्यु भी एक निश्चित घटित होने वाली महत्त्वपूर्ण जैविक घटना है। सन् 1953 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा मर्त्यता की दी गई परिभाषा के अनुसार “जन्म के बाद जीवन के सभी लक्षणों का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना मयंता कहलाता है।”

मर्त्यता की माप – जनसंख्या वृद्धि के निर्धारण में मर्त्यता की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मर्त्यता में कमी आने के कारण भी जनसंख्या वृद्धि हो जाती है। मर्त्यता को मुख्य रूप से निम्नलिखित विधियों द्वारा मापा जाता है

  • अशोधित मृत्यु-दर
  • शिशु मृत्यु-दर
  • मातृ मृत्यु-दर
  • आयु विशिष्ट मृत्यु-दर।

इन विधियों में अशोधित मृत्यु-दर अधिक सर्वमान्य है जिसका उल्लेख निम्नलिखित है

अशोधित मृत्यु-दर – एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के अनुपात में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को अशोधित मृत्यु-दर कहा जाता है। इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 13

3. प्रवास-युगों से ही मानव वर्गों (Human Groups) का प्रवास होता रहा है। मानव जातियाँ (Human Races) आदिकाल से ही अपने उद्गम प्रदेश के बाहर प्रवास करती रही हैं। ऐतिहासिक काल में भी, पृथ्वी के विभिन्न भागों, एक स्थान से दूसरे स्थान पर, मानव वर्गों का प्रवसन होता रहा है, इसे जनसंख्या का स्थानान्तरण या प्रवास कहते हैं। स्थानान्तरण या प्रवास मात्र स्थान परिवर्तन ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तत्त्वों को समझने का आधार भी है। यह सामाजिक और आर्थिक पक्षों से जुड़ी हुई एक महत्त्वपूर्ण घटना है।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

प्रश्न 1.
क्षारीय धातुओं के सामान्य भौतिक तथा रासायनिक गुण क्या हैं ?
उत्तर:
क्षार धातुओं के भौतिक गुण:
(1) क्षार धातुएँ बहुत ही नरम तथा चाँदी के समान श्वेत होती है।

(2) घनत्व (Density) – क्षार धातुओं का बड़ा आकार होने के कारण इनका घनत्व कम होता है, जो लीथियम से सीजियम की ओर नीचे जाने पर कम होता जाता है, यद्यपि पोटैशियम धातु सोडियम की तुलना में हल्की होती है।

(3) क्वथनांक एवं गलनांक (Boiling and melting point) – क्षार धातुओं के क्वथनांक एवं गलनांक बहुत कम होते हैं क्योंकि क्षार धातुओं का परमाण्विक आकार अधिक होता है। इस कारण क्रिस्टल जालक में इनकी आबन्धन ऊर्जा का मान भी कम होता है। वर्ग में नीचे जाने पर परमाणुओं का आकार बढ़ता जाता है फलस्वरूप इनके क्वथनांक एवं गलनांक के मान भी कम होते जाते हैं।

Li > Na > K > Rb > Cs > Fr (क्वथनांक एवं गलनांक)

(4) ज्वाला परीक्षण (Flame test) – जब क्षार धातुओं के लवण ज्वाला में गर्म किये जाते हैं तो ये एक विशेष प्रकार के रंग देते हैं। ज्वाला की ऊष्मा से बाह्यतम् कक्ष का इलेक्ट्रॉन उत्तेजित हो जाता है तथा निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में पहुँच जाता है। जब यह उत्तेजित इलेक्ट्रॉन वापस अपने कक्ष में पहुँचता है तो ऊर्जा को प्रकाश के रूप में निकालता है तथा ज्वाला में एक विशेष रंग दिखाई देता है।
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क्षार धातुओं में लीथियम का आकार सबसे छोटा होता है। इस कारण इलेक्ट्रॉनों को उत्तेजित करने के लिये अधिकतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है जबकि सोडियम के लिये इस ऊर्जा का मान लीथियम से कम होता है। इस प्रकार वर्ग में नीचे जाने पर उत्तेजन के लिए आवश्यक ऊर्जा के मान में कमी आती जाती है। यही कारण है कि तत्वों की ज्वाला का रंग भिन्न-भिन्न होता है।

(5) ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state) – समूह-1 के तत्व संयोजी कोश में एक इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति होने के कारण +1 ऑक्सीकरण अवस्था को प्रदर्शित करते हैं।
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(6) धन विद्युती गुण (Electropositive Property) – किसी भी तत्व की इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की प्रवृत्ति धन विद्युती गुण (Electropositive Property) कहलाती है। क्षार धातुओं के धन विद्युती गुण का मान आवर्त सारणी में अधिकतम होता है क्योंकि इनकी आयनन एन्थैल्पी काफी कम होती है। इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की प्रवत्ति वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर अधिक होती जाती है क्योंकि क्षार धातुओं का परमाण्विक आकार बढ़ता जाता है इसके साथ-साथ आयनन विभव भी कम होता जाता है।

Li < Na < K < Rb < Cs < Fr (धन विद्युती गुण)

नोट – आवर्त सारणी में ‘Fr’ सबसे अधिक धन विद्युती होता है।
क्षार धातुएँ एक इलेक्ट्रॉन को त्याग कर एकल संयोजी धनायन बनाती हैं।
M → M+ + e

(7) वैद्युत ॠणात्मकता (Electro negativity) – किसी भी तत्व की वैद्युत ऋणात्मकता उस तत्व द्वारा किसी यौगिक में आबन्धित इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचने की प्रवृत्ति होती है। क्षार धातुओं की वैद्युत ऋणात्मकता सबसे कम होती है। समूह में ऊपर से नीचे आने पर विद्युत ऋणात्मकता का मान घटता जाता है क्योंकि परमाण्विक त्रिज्या का मान बढ़ता जाता है।

Li > Na > K > Rb > Cs > Fr ( वैद्युत ऋणात्मकता)

(8) अपचायक गुण (Reducing property) – क्षार धातुओं के आयनन विभव निम्न होते हैं। इसलिये ये आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग देते हैं, अत: ये प्रबल अपचायक हैं। ऊपर से नीचे आने पर अपचायक गुण बढ़ता जाता है।
Na < K < Rb < Cs < Li
अपवाद – Li क्षार धातुओं में सबसं प्रबलतम अपचायक है। इसके इस अपवाद को हम निम्न प्रकार समझ सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तीन तरह की ऊर्जा मुख्य रूप से उत्तरदायी होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 3
इस पूरी प्रक्रिया में तीन तरह की ऊर्जा मुख्य रूप से उत्तरदायी होरी है।

  • ऊर्ध्वपातन ऊर्जा (Sublimation energy)
  • आयनन ऊर्जा (Ionisation energy)
  • जलयोजन ऊर्जा (Hydration energy)

इन सभी ऊर्जाओं में से ऊर्ध्वपातन एवं आयनन ऊर्जा हमारे द्वारा प्रदान की जाती है जबकि जलयोजन ऊर्जा अभिक्रिया से निकलती है। अत: यह ऊष्माक्षेपी ऊर्जा है। Li में जलयोजन ऊर्जा का मान ऊर्ध्वपातन तथा आयनन ऊर्जा की अपेक्षा बहुत अधिक होता है जिससे पूर्ण अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी हो जाती है तथा Li सबसे प्रबल अपचायक बन जाता है।

(9) प्रकाश वैद्युत प्रभाव (Photo electric effect) – Li के अतिरिक्त सभी क्षार धातुएँ प्रकाश विद्युत प्रभाव प्रदर्शित करती हैं। “जब किसी धातु की सतह पर निश्चित आवृत्ति की किरणें टकराती हैं तो धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होकर निकलते हैं, इसे प्रकाश विद्युत प्रभाव कहते हैं।”
या
“धातु की सतह पर फोटॉन के प्रहार से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन प्रकाश विद्युत प्रभाव कहलाता है।” प्रकाश विद्युत प्रभाव का कारण क्षार धातुओं की न्यूनतम आयनन ऊर्जा है। लीथियम यह प्रभाव नहीं दिखाता क्योंकि इसकी आयनन ऊर्जा का मानु अधिक होता है। क्षार धातुओं के भौतिक गुणों को हम सारणी 10.1 में सूचीबद्ध कर सकते हैं।

क्षार धातुओं के रासायनिक गुण:
क्षार धातुएँ बहुत अधिक क्रियाशील होती हैं क्योकि इनकी आयनन ऊर्जा का मान बहुत कम होता है। क्षार धातुओं के रासायनिक गुण निम्न हैं-

(1) डाई हाइड्रोजन से अभिक्रिया (Reaction with dihydrogen) – लगभग 673K (लीथियम के लिए 1073K) पर क्षार धातुएँ डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया करके हाइड्राइड बनाती हैं। सभी क्षार धातुओं के हाइड्राइड रंगहीन, क्रिस्टलीय एवं आयनिक होते हैं। इन हाइड्राइडों के गलनांक उच्च होते हैं।
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क्षार धातुओं के हाइड्राइडों की अपचायक क्षमता नीचे जाने पर बढ़ती जाती है क्योंकि बन्ध ऊर्जा का मान कम होता जाता है जिसके कारण धातु तथा हाइड्रोजन के मध्य का बन्ध आसानी से टूट जाता है।

LiH < NaH < KH < RbH < CsH (अपचायक गुण)

क्षार धातुओं के हाइड्राइड कार्बनिक यौगिकों के लिये प्रबल अपचायक का कार्य करते हैं। एक प्रबल अपचायक लीथियम एल्युमीनियम हाइड्राइड को निम्न प्रकार बनाया जा सकता है-
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क्षार धातुओं के हाइड्राइड जल से अभिक्रिया करने पर डाइहाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं।
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क्षार धातुओं के हाइड्राइडों का आयनिक अभिलक्षण Li से Cs तक बढ़ता जाता है।

LiH < NaH < KH < RbH < CsH (आयनिक अभिलक्षण)

इसका कारण कम आयनन ऊर्जा है। कम आयनन ऊर्जा के कारण क्षार धातुओं के परमाणु संयोजी इलेक्ट्रॉनों को आसानी से मुक्त कर हाइड्रोजन परमाणु को दे देते हैं जिसके कारण आयनिक हाइड्राइड (MH) बनता है।

(2) द्रव अमोनिया में विलेयता (Solubility in liquid ammonia)-क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलनशील होती हैं। ये अमोनिया के साथ गहरे नीले रंग का विलयन बनाती हैं जो कि विद्युत का सुचालक होता है। क्षार धातुएँ कम आयनन ऊर्जा के कारण द्रव अमोनिया में आयनीकृत हो जाती हैं तथा अमोनीकृत धनायन एवं अमोनीकृत ऋणायन बनाती हैं।
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क्षार धातुओं का अमोनिया में नीले रंग के विलयन के बनने का कारण अमोनीकृत इलेक्ट्रॉन होते हैं जो कि दृश्य प्रकाश क्षेत्र की संगत ऊर्जा का अवशोषण करके विलयन को नीला रंग प्रदान करते हैं। अमोनीकृत विलयन अनुचुम्बकीय (paramagnetic) होता है, जो कुछ समय पड़े रहने पर हाइड्रोजन को मुक्त करता है। फलस्वरूप विलयन में ऐमाइड बनता है।

M+(am) + e + NH3(l) → MNH2(am) + 1/2H2(g)

जहाँ ‘am’ अमोनीकृत विलयन दर्शाता है। सान्द्र विलयन में नीला रंग ब्रॉन्ज रंग में बदल जाता है और विलयन प्रतिचुम्बकीय (diamagnetic) हो जाता है।

(3) वायु के साथ अभिक्रियाशीलता (Reactivity with air) – क्षार धातुएँ वायु की उपस्थिति में मलिन (exposed) हो जाती हैं; क्योंकि वायु की उपस्थिति में इन पर ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड की पर्त बन जाती है। ये ऑक्सीजन में तीव्रता से जलकर ऑक्साइड बनाती हैं। लीथियम और सोडियम क्रमशः मोनोऑक्साइड तथा परॉक्साइड का निर्माण करती हैं, जबकि अन्य धातुओं द्वारा सुपर ऑक्साइड आयन का निर्माण होता है। सुपर ऑक्साइड \(\mathrm{O}_2^{-}\) बड़े धनायनों; जैसे K+, Rb+ तथा Cs+ की उपस्थिति में स्थायी होता है।

4Li + O2 → 2Li2O (ऑक्साइड)
2Na +O2 → Na2O2 (परॉक्साइड)
M + O2 → MO2 (सुपर ऑक्साइड) (M = K, Rb, Cs)

इन सभी ऑक्साइडो में क्षार की ऑक्सीकरण अवस्था +1 होती है। लीथियम अपवाद स्वरूप वायु में उपस्थित नाइट्रोजन से अभिक्रिया करके नाइट्राइड, Li3N बना लेता है। इस प्रकार लीथियम भिन्न स्वभाव प्रदरित करता है। क्षार धातुओं की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रियाशीलता Li से Cs तक बढ़ती जाती है क्योंकि आयनन ऊर्जा का मान कम होता जाता है।

क्षार धातुओं के ऑक्साइडों का स्थायित्व अभिक्रिया में भाग लेने वाले धनायनों एवं ऋणायनों के आकार एवं इन पर उपस्थित आवेशों पर निर्भर करता है। एक बड़े आकार का धनायन सदैव बड़े आकार के ऋणायन को स्थायी करेगा जबकि एक छोटे आकार का धनायन, एक छोटे आकार के ऋणायन को स्थायी करेगा। यही कारण है कि लीथियम आयन (Li+) आकार में छोटा होने के कारण एक छोटे ऋणायन जैसे ऑक्साइड आयन (O2-) के साथ संयोजन कर ऑक्साइड बनाता है। इसी प्रकार सोडियम आयन (Na+) का आकार बड़ा होता है।

इस कारण यह बड़े “आकार के परॉक्साइड आयन (\(\mathrm{O}_2{ }^{2-}\)) के साथ संयोजन करके परॉक्साइड बनाता है जबकि K+, Rb+, Cs+ अधिक बड़े आकार के होने के कारण सुपर ऑक्साइड आयन (\(\mathrm{O}_2^{-}\)) से क्रिया कर सुपर ऑक्साइड बनाते हैं।
ऑक्साइड, परऑक्साइड एवं सुपर ऑक्साइड आयनों की संरचना निम्न है-
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ऑक्साइड एवं परॉक्साइड आयन अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण प्रतिचुम्बकीय प्रकृति के होते हैं जबकि सुपर ऑक्साइड आयन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण अनुचुम्बकीय प्रकृति का होता है।

(4) हैलोजनों से अभिक्रियाशीलता (Reactivity with halogens)-क्षार धातुएँ हैलोजन से प्रबल अभिक्रिया करके आयनिक हैलाइड बनाती हैं।
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(M = Li, Na, K, Rb, Cs)
धातु की क्रियाशीलता का क्रम :
Li < Na < K < Rb <Cs
आयनन ऊर्जा कम होने के कारण क्रियाशीलता समूह में नीचे जाने पर बढ़ती है।
हैलोजनों की क्रियाशीलता का क्रम :
F2 > Cl2 > Br2 > I2
विद्युत ऋणात्मकता का मान वर्ग में नीचे जाने पर घटता जाता है अतः क्रियाशीलता कम होती जाती है।

यद्यपि लीथियम के हैलाइड आंशिक रूप से सहसंयोजक होते हैं। इसका कारण लीथियम की उच्च ध्रुवण-क्षमता है। (धनायन के कारण ऋणायन के इलेक्ट्रॉन अभ्र का विकृत होना ‘ध्रुवणता’ (polarisation) कहलाता है।) लीथियम आयन का आकार छोटा होता है; अतः यह हैलाइड आयन के इलेक्ट्रॉन अभ्र को विकृत करने की अधिक क्षमता दर्शाता है।

चूँकि बड़े आकार का ऋणायन आसानी से विकृत हो जाता है, इसलिए लीथियम आयोडाइड सहसंयोजक प्रकृति सबसे अधिक दर्शां हैं। अन्य क्षार धातुएँ आयनिक प्रवृत्ति की होती हैं। इनके गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं। गलित हैलाइड विद्युत के सुचालक होते है। इनका प्रयोग क्षार धातुएँ बनाने में किया जाता है।

ध्रुवणता को हम फर्जॉन के नियम (Fajan’s Rule) द्वारा समझ सकते हैं। इसके अनुसार जिन यौगिको में निम्न प्रकृति होती है वे अधिक ध्रुवणता को प्रदर्शित करते हैं अर्थात् उनमें सहसंयोजक प्रकृति अधिकत। में पायी जाती है।

  • धनायन का आकार छोटा होना चाहिये।
  • ऋणायन का आकार बड़ा होना चाहिये।
  • धनायन एवं ऋणायन पर आवेश अधिक होना चाहिये।

उपरोक्त नियम के आधार पर हम हैलाइडों में उपस्थित आयनिक प्रवृत्ति को आसानी से समझ सकते हैं।

आयनिक प्रवृत्ति-
LiCl < NaCl < KCl < RbCl < CsCl < FrCl सहसंयोजक प्रवत्ति- LiCl > NaCl > KCl > RbCl > CsCl > FrCl

(5) जल से अभिक्रिया (Reaction with water) – क्षार धातुओं के ऑक्साइड, परॉक्साइड तथा सुपर ऑक्साइड जल में विलेय होकर घुलनशील हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं, जिन्हें क्षारक (Alkalies) कहा जाता है। उदाहरणार्थ-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 10
यद्यपि लीथियम के मानक इलेक्ट्रोड विभव (EΘ) का मान अधिकतम ऋणात्मक होता है, परन्तु जल के साथ इसकी अभिक्रियाशीलता सोडियम की तुलना में कम है, लीथियम के इस व्यवहार का कारण इसका छोटा आकार तथा अत्यधिक जलयोजन ऊर्जा का होना है। अन्य क्षार धातुएँ जल के साथ विस्फोटक अभिक्रिया करती हैं।

चूँकि अभिक्रिया उच्च ऊष्माक्षेपी होती है तथा विमुक्त होने वाली हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है, इसलिए क्षार धातुओं को जल के सम्पर्क में नहीं रखते। यही कारण है कि लीथियम को छोड़कर सभी क्षार धातुओं को मिट्टी के तेल में रखते है। चूँक लीथियम का घनत्व कम होता है जिसके कारण यह मिट्टी के तेल की सतह पर तैरने लगता है, इस कारण इसे पैराफीन मोम में रखा जाता है।

क्षार धातुओं के हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षारीय प्रकृति के होते हैं। क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा कम होती है।
LiOH < NaOH < KOH < RbOH < CsOH (क्षारीय प्रकृति)

(6) क्षार धातुओं के अपचायक गुण (Reducing properties of slkali metals) – क्षार धातुएँ प्र बल अपचायक होती हैं क्योंकि जो तत्व जितनी आसानी से इलेक्ट्रॉनों का त्याग करता है वह उतना १े अच्छा अपचायक होता है। क्षार धातुओं की आयनन ऊर्जा का मान कम होता है अतः ये अच्छी अपचायक होती हैं।

उदाहरणार्थ-
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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

प्रश्न 2.
क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण एवं गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभिलक्षण निम्न प्रकार होते हैं।

(1) ऑक्साइड (Oxides)-ऑक्साइडों में BeO, जोकि सहसंयोजी है को छोड़ शेष सभी धातुओं के ऑक्साइड सफेद क्रिस्टलीय आयनिक ठोस हैं। ऑक्साइडों की क्षारीय प्रबलता समूह से नीचे जाने पर बढ़ती है। BeO < MgO < CaO < SrO < BaO ( क्षारीय प्रबलता)
ऑक्साइड जल से क्रिया कर अल्प विलेय हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं।
MO + H2O → M(OH)2
यहाँ (M = Mg, Ca, Sr, Ba, Ra)

(2) हाइड्रॉक्साइड (Hydroxides) – इनके हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षारीय होते हैं। ये जल में विलेय होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों को गर्म करने पर ये धातु ऑक्साइड एवं जल में अपघटित हो जाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 12
क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रांक्साइडों के जलीय विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करने से उनके कार्बोनेट अवक्षेपित हो जाते हैं। CO2 गैस की अधिकता में प्रवाहित करने से उनके कार्बोनेट जल में विलेय बाई कार्बोनेटों में बदल जाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 13
क्षारीय मृदा धातुओं के ऑक्साइड धातुओं के संगत हाइड्रॉक्साइडों की तुलना में कम स्थायी होते हैं। हाइड्रॉक्साइडों का तापीय स्थायित्व, क्षारीय गुण, पानी में विलेयता ग्रुप में नीचे जाने पर बढ़ती जाती है क्योंकि धनायन का आकार नीचे बढ़ने पर बढ़ता जाता है जिससे M-OH बन्ध क्षीण होता जाता है और क्षारीय गुण बढ़ जाता है।

Be(OH)2 < Mg(OH)2 < Ca(OH)2 < Sr(OH)2 < Ba(OH)2

समूह में नीचे जाने पर आयनिक प्रवृति बढ़ती जाती है अतः जालक ऊर्जा बढ़ती है और तापीय स्थायित्व भी बढ़ जाता है।

(3) हैलाइड (Halide) – बेरीलियम हैलाइड के अतिरिक्त अन्य धातुओं के हैलाइडों की प्रकृति आयनिक होती है। बेरीलियम के हैलाइड सह संयोजक होते हैं। एवं कार्बनिक विलायकों में विलेय होते हैं। ठोस अवस्था में बेरीलियम क्लोराइड की शृखला संरचना होती है।
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वाष्प अवस्था में BeCl2 क्लोरो-सेतु द्विलक बनाता है जो 1200K के उच्च ताप पर रेखीय एकलक में वियोजित हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 15
हैलाइडों की हाइड्रेट बनाने की प्रवृति नीचे जाने पर कम होती जाती है क्योंकि जलयोजन ऊर्जा का मान कम हो जाता है।
MgCl2 . 8H2O
CaCl2 . 6H2O
SrCl2 . 6H2O
BaCl2 . 2H2O
हैलाइडों की विलेयता पानी में नीचे जाने पर घटती जाती है क्योंकि जलयोजन ऊर्जा घटती है तथा जालक ऊर्जा बढ़ती है। यही कारण है कि फ्लुओराइड क्लोराइड की तुलना में कम विलेय होते हैं।

(4) ऑक्सी अम्लों के लवण (Salts of oxyacids) – ऑक्सी अम्लों के लवण निम्न हैं-

(A) कार्बोनेट (Carbonates) – क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट जल में अविलेय होते हैं जिन्हें इन तत्वों के विलेय लवणों के विलयन में सोडियम या अमोनियम कार्बोनेट विलयन मिलाकर अवक्षेपित किया जा सकता है। कार्बोनेट की विलेयता पानी में नीचे समूह में जाने पर घटती जाती है क्योंकि जालक ऊर्जा बढ़ती है परन्तु जलयोजन ऊर्जा घटती है।

BeCO3 > MgCO3 > CaCO3 > SrCO3 > BaCO3 (घुलनशीलता)

जल में कार्बोनेटों की घुलनशीलता CO2 को प्रवाहित करने पर बढ़ जाती है क्योंक कार्बोनेट बाइकार्बोनेट में परिवर्तित हो जाते हैं।

MCO3 + H2O + CO2 → M(HCO3)2 (बाइकार्बोनेट)

कार्बोनेटों का तापीय स्थायित्व BeCO3 से BaCO3 तक बढ़ता है। BeCO3 इतना अधिक अस्थायी होता है कि अग्र अभिक्रिया को न्यूनतम करने हेतु इसे CO2 के वातावरण में रखना पड़ता है।

BeCO3 < MgCO3 < CaCO3 < SrCO3 < BaCO3 (तापीय स्थायित्व)

इसका कारण यह है कि ऑक्साइडों का स्थायित्व जितना अधिक होगा, कार्बोनेटों की ऑक्साइड बनाने की प्रवृत्ति भी उतनी ही अधिक होगी अर्थात् BeO अधिकतम एवं BaO न्यूनतम स्थायो होता है।

(B) सल्फेट (Sulphate) – क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेट श्वेत एवं ठोस होते हैं तथा ताप के प्रति स्थायी होते हैं। यद्यपि उच्च ताप पर ये अपघटित होकर SO2 तथा O2 दे सकते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 16
BeSO4 एवं MgSO4 शीघ्रता से जल में विलेय हो जाते हैं। CaSO4 से BaSO4 तक विलेयता कम होती जाती है। Be2+ तथा Mg2+ आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी इनकी जालक एन्थैल्पी की तुलना में अधिक होती है। अतः इनके सल्फेट जल में विलेय होते हैं।
BeSO4 > MgO > CaSO4 > SrSO4 > BaSO4
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BeSO4 < MgSO4 < CaSO4 > SrSO4 > BaSO4 (तापीय स्थायित्व )

(C) नाइट्रेट (Nitrate) – इन धातुओं के कार्बोनेटों को तनु नाइट्रिक अम्ल में घोलकर इनके नाइट्रेट प्राप्त किए जाते हैं। उदाहरणार्थ-

MCO3 + 2HNO3 → M(NO3)2 + H2O + CO2 ↑(M = Be, Mg, Ca, Sr, Ba)

मैग्नीशियम नाइट्रेट जल के छह अणुओं के साथ क्रिस्टलित होता है, जबकि बेरियम नाइट्रेट निर्जल लवण के रूप में क्रिस्टलित होता है। यह फिर बढ़ते आकार के साथ घटती जलयोजन एन्थैल्पी के कारण कम जलयोजित लवण बनाने की प्रवृत्ति को पुन: दर्शाता है। लीथियम नाइट्रेट के समान सभी नाइट्रेट गर्म करने पर अपघटित होकर ऑक्साइड बनाते है।
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इनकी विलेयता नीचे जाने पर घटती जाती है क्योंकि जालक ऊर्जा बढ़ती है तथा जलयोजन ऊर्जा घटती है।

Be(NO3)2 > Mg(NO3)2 > Ca(NO3)2 >Sr(NO3)2 > Ba(NO3)2 (विलेयता)

Be(NO3)2 < Mg(NO3)2 < Ca(NO3)2 < Sr(NO3)2 < Ba(NO3)2 (तापीय स्थायित्व)

आवर्त सारणी में s-ब्लॉक के तत्वों का द्वितीय समूह क्षारीय मृदा धातुएँ (Alkaline earth metals) कहलाता है क्योंकि इस समूह के सभी तत्वों के ऑक्साइड क्षारीय एवं मृदा की तरह अगलनीय होते हैं एवं ये . सामान्यतः भू-पर्पटी (earth crust) में पाये जाते हैं। क्षारीय मृदा धातुएँ अत्यधिक क्रियाशील होती हैं अतः इस कारण ये स्वतन्त्र अवस्था में नहीं पायी जाती हैं। द्वितीय समूह में कुल छः क्षारीय मृदा धातुएँ होती हैं जो कि इस प्रकार हैं-

  1. बेरीलियम (Be)
  2. मैग्नीशियम (Mg)
  3. कैल्सियम (Ca)
  4. स्ट्रॉन्शियम (Sr)
  5. बेरियम (Ba)
  6. रेडियम (Ra)

इन सभी क्षारीय मृदा धातुओं में भू-पर्पटी में उपस्थिति के आधार पर कैल्सियम व मैग्नीशियम का स्थान क्रमशः पाँचवाँ व छठवाँ है। स्ट्रॉन्शियम एवं बेरियम की उपलब्धता बहुत कम है। बेरीलियम एक दुर्लभ धातु है जबकि रेडियम की मात्रा आग्नेय शैल में केवल 10-10% है।

इलेक्ट्रानिक विन्यास: क्षारीय मृदा धातुओं का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (उत्कृष्ट गैस) ns2 होता है। क्षारीय मृदा धातुओं का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार होता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 19
4Be – 1s2, 2s2
12Mg – 1s2, 2s22p6, 3s2
20Ca – 1s2, 2s22p6, 3s23p6, 4s2
38Sr – 1s2, 2s22p6, 3s23p63d10, 4s24p6, 5s2
56Ba – 1s2, 2s22p6, 3s23p63d10, 4s24p6,4d10, 5s25p6, 6s2
88Ra – 1s2, 2s22p6, 3s23p63d10, 4s24p6,4d10, 5s25p6, 6s26p6, 7s1

(1) परमाण्विक त्रिज्या (Atomic Radius) – क्षारीय मृदा धातुओं की परमाण्विक त्रिज्याएँ समूह में ऊपर से नीचे आने पर बढ़ती हैं क्योंकि कक्षकों की संख्या बढ़ जाती है।
Be < Mg < Ca < Sr Ba Ra (परमाण्विक त्रिज्याएँ)
क्षारीय मृदा धातुओं की त्रिज्याएँ अधिक होती हैं परन्तु ये समान आवर्त में उपस्थित क्षार धातुओं से कम होती हैं। चूँकि इन तत्वों के परमाणुओं में मात्र दो संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा नाभिकीय आकर्षण बल काफी कम होता है अतः क्षारीय मृदा धातुओं का परमाण्विक आकार पर्याप्त रूप से अधिक होता है।

(2) आयनिक त्रिज्या (lonic Radius) – ये सभी तत्व दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागकर द्वि-संयोजी धनायन (M2+ ) बनाते हैं। आयनिक त्रिज्या का मान समूह में नीचे जाने पर बढ़ता जाता है पर आयनिक त्रिज्याएँ परमाण्विक त्रिज्याओं से छोटी होती हैं।
Be2+ < Mg2+ < Ca2+ < Sr2+ < Ba2+

(3) आयनन एन्थैल्पी (lonisation Enthelpy ) – क्षारीय मृदा धातुओं के प्रथम आयनन विभव (I1) क्षार धातुओं से ऊँचे होते हैं क्योंकि क्षारीय मृदा धातुओं के तत्वों का आकार क्षार धातुओं के तत्वों के आकार से छोटा होता है। इनके आयनन विभव के मान वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटते जाते हैं क्योंकि परमाण्विक आकार बढ़ता जाता है।

M + I.E. (1) → M+(g) + e
M(g) + I.E. (1) → M++(g) + e
Be > Mg > Ca > Sr> Ba (आयनन ऊर्जा )

इन तत्वों के प्रथम द्वितीय व तृतीय आयनन विभवों के मान निम्न

धातुBeMgCaSrBa
IE (1) (eV)9.327-646.115.705-2
IE (2) (eV)18.2115.0311-8711-010-0
IE (3) (eV)153-8580-1251.2143-635.5

जैसा कि उपरोक्त मानों से स्पष्ट है कि क्षारीय मृदा धातुओं के प्रथम और द्वितीय आयनन विभवों के मानों में अन्तर कम है और उनके द्वि-संयोजक यौगिकों की जालक ऊर्जा एक संयोजक यौगिकों से उच्च है। अतः क्षारीय मृदा धातुएँ M+ प्रकार के धनायनों का निर्माण न करके M2+ प्रकार के धनायन बनाती हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के IE 2 व IE 3 का अन्तर बहुत अधिक होने के कारण क्षारीय मृदा धातुएँ M3+ आयन नहीं बनाती हैं।

(4) जलयोजन ऊर्जा (Hydration Energy ) – ऊपर से नीचे आने पर आकार बड़ा होता जाता है। अतः जलयोजन एन्थैल्पी का मान घटता जाता है। क्षारीय मृदा धातुओं की जलयोजन ऊर्जा क्षार धातुओं की तुलना में ज्यादा होती है। इसलिये मृदा धातुओं के यौगिक क्षार धातुओं की तुलना में अधिक जलयोजित होते हैं।
Be2+ > Mg2+ > Ca2+ > Sr2+ > Ba2+ > Ra2+
क्षारीय मृदा धातुओं के गुणों को सारणी 10-2 में प्रदर्शित किया गया है।

क्षारीय मृदा धातुओं के परमाण्विक एवं भौतिक

गुणबेरीलियम Beमैग्नीशियम Mgकैल्सियम Caस्ट्रॉन्शियम Srबेरियम Baरेडियम Ra
परमाणु क्रमांक41220385688
परमाणु द्रव्यमान /g mol-19.0124.3140.0887.62137.33226.03
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास[He]2s2[Ne]3s2[Ar]4s2[Kr]5s2[Xe]6s2[Rn]7s2
आयनन एन्थैल्पी (I) kJ mol-1899737590549503509
आयनन एन्थैल्पी (II) kJ mol-11757145011451064965979
जलयोजन एन्थैपी (kJ mol-1)-2494-1921-1577-1443-1305
धात्विक त्रिज्या/pm112160197215222
आयनी त्रिज्या M2+/pm3172100118135148
गलनांक/K1560924112410621002973
क्वथनांक/K27451363176716552078(1973)
घनत्व / g cm-31.841.741.552.633.59(5.5)
मानक विभव EΘ/V (M2+/M)-1.97-2.36-2.84-2.89-2.92-2.92
स्थलमण्डल में प्राप्ति2*2.76**4.6**384*390*10-6

मृदा धातुओं के भौतिक गुण –

(1) क्षारीय मृदा धातुएँ सामान्यतया चाँदी की भाँति सफेद, चमकदार एवं गरम, परन्तु अन्य धातुओं की तुलना में कठोर होती हैं।

(2) बेरीलियम तथा मैग्नीशियम लगभग धूसर रंग (Greyish) के होते हैं।

(3) क्वथनांक एवं गलनांक (Boiling and Melting Point)- क्षारीय मृदा धातुओं के क्वथनांक एवं गलनांक क्षार धातुओं से अधिक होते हैं क्योंकि इनका आकार छोटा होता है।

(4) घनत्व (Density) – क्षारीय मृदा धातुओं का घनत्व उसी आवर्त मैं उपस्थित क्षार धातुओं से अधिक होता है। घनत्व पहले Be से Ca तक बढ़ता है और बाद में Ca से Ba तक घटता है। घनत्व की यह अनियमित प्रकृति उनकी क्रिस्टलीय संरचना के कारण होती है।

(5) ज्वाला परीक्षण (Flame test) – Be तथा Mg को छोड़कर अन्य सभी तत्व ज्वाला में रंग देते हैं। Be तथा Mg ज्वाला में कोई भी रंग नहीं देते हैं क्योंकि इनकी आयनन ऊर्जा का मान बहुत अधिक होता है। अन्य सभी तत्व निम्न रंग देते हैं-

CaSrBa
ईंट जैसाकिरमिजीहरा
लाललाल

ज्वाला में उच्च ताप पर वाष्प अवस्था में क्षारीय मृदा धातुओं के बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर में चले जाते हैं। ये उत्तेजित इलेक्ट्रॉन जब पुनः अपनी तलस्थ अवस्था में लौटते हैं, तब दृश्य प्रकाश के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं, जिससे ज्वाला रंगीन दिखायी देती है।

(6) ऑक्सीकरण अवस्था (Oxidation state) – समूह दो के तत्व संयोजी कोश में दो इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण +2 ऑक्सीकरण अवस्था को प्रदर्शित करते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 20
(7) विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) – क्षारीय मृदा धातुओं की विद्युत ऋणात्मकताओं के मान कम होते हैं। विद्युत ऋणात्मकता समुह में नीचे जाने पर घटती जाती है।

तत्वBeMgCaSrBa
विद्युत ऋणात्मकता1.51.21.01.00.9

प्रश्न 3.
क्षार धातुएँ प्रकृति में क्यों नहीं पायी जाती हैं ?
उत्तर:
क्षार धातुएँ कम आयनन एन्थैल्पी तथा प्रबल धन-विद्युती गुण के कारण उच्च क्रियाशील होती हैं। ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाई जार्ती तथा सदैव अन्य तत्वों के साथ संयुक्त रहती हैं। इसलिए सामान्यतया क्षार धातुएँ प्रकृति में नहीं पाई जाती हैं।

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प्रश्न 4.
Na2O2 में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना Na2O2 में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था x है। तब
x – 1
Na2O2
2 x+2(-1) & =0
x =+1
अत: Na2O2 में सोडियम की ऑक्सीकरण अवस्था + 1 है।

प्रश्न 5.
पोटैशियम की तुलना में सोडियम कम अभिक्रियाशील क्यों है ? बताइये ।
उत्तर:
सोडियम कम अभिक्रियाशील होता है क्योंकि इसकी आयनन एन्थैल्पी पोटैशियम की तुलना में कम हैं। तथा पोटैशियम सोडियम की तुलना में अधिक धन-विद्युती तथा प्रबल अपचायक होता है। यह सोडियम की तुलना में जल से अधिक तीव्रता के साथ अभिक्रिया करता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के सन्दर्भ में क्षार धातुओं एवं क्षारीय मृदा धातुओं की तुलना कीजिए-
(क) आयनन एन्थैल्पी,
(ख) ऑक्साइडों की क्षारकता,
(ग) हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता।
उत्तर:
(क) आयनन एन्थैल्पी-क्षारीय मृदा धातुओं (वर्ग 2) की आयनन एन्थैल्पी समान आवर्त में उपस्थित क्षार धातुओं (वर्ग 1) की तुलना में अधिक होती है। इसका कारण क्षारीय मृदा धातुओं के परमाणुओं का छोटा आकार तथा अधिक सममिताकार विन्यास है। उदाहरणार्थ-
सोडियम (Na) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी = 496 kJ mol-1
मैग्नीशियम (Mg) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी = 737 kJ mol-1

(ख) ऑक्साइडों की क्षारकता-क्षार धातुओं के ऑक्साइड समान आवर्त में उपस्थित क्षारीय मृदा धातुओं के ऑक्साइडों की तुलना में प्रबल क्षारक होते हैं। उदाहरणार्थ- जब Na2O को जल में घोला जाता है, NaOH प्राप्त होता है जो एक प्रबल क्षारक है, जबकि MgO को जल में घोलने पर दुर्बल क्षारक, Mg(OH)2 प्राप्त होता है।

(ग) हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता- क्षार धातु हाइड्रॉक्साइड समान आवर्त में उपस्थित क्षारीय मृदा धातु हाइड्रॉक्साइडों की तुलना में जल में अधिक विलेय होते हैं। ऐसा इसलिए होता है कि क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों की जालक ऊर्जा (Lattice energy) क्षार धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों की तुलना में उच्च होती है।

प्रश्न 7.
लीथियम किस प्रकार मैग्नीशियम से रासायनिक गुणों में समानताएँ दर्शाता है ?
उत्तर:
लीथियम एवं मैग्नीशियम के रासायनिक गुणों में समानता के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैं-
(1) लीथियम एवं मैग्नीशियम जल के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करते हैं। इनके ऑक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड बहुत कम घुलनशील हैं। हाइड्रॉक्साइड गर्म करने पर विघटित हो जाते हैं। दोनों ही नाइट्रोजन से सीधे संयोग करके क्रमश: Li3N एवं Mg3N2 नाइट्राइड बनाते हैं।

(2) Li2O एवं MgO औक्सीजन के आधिक्य से अभिक्रिया करके सुपर ऑक्साइड नहीं बनाते हैं।

(3) लीथियम एवं वैग्नीशियम धातुओं के कार्बोनेट गम करने पर सरलतापूर्वंक बिघटित के का उनके आक्साद्ड एवं CO2 बनाते हैं। दोनों

(4) LiCl एवं MgCl2 एहधन में विलेय हैं।

(5) LiCl एवं MgCl2 दोनों ही प्रस्वेद्य (deliquescent) यौगिक हैं। ये जलीय विलयन से LiCl.2H2O एवं MgCl2.8H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत होते हैं। नोट-अधिक जानकारी के लिए कृपया अनुच्छेद संख्या 10.6 को पृष्ठ संख्या 153 पर देखें।

प्रश्न 8.
क्षार धातुएँ तथा क्षारीय मृदा धातुएँ रासायनिक अपचयन विधि से क्यों नहीं प्राप्त की जा सकती हैं ? समझाइए।
उत्तर:
क्षार धातु तथा क्षारीय मृदा धतु परिवार के सदस्य अत्यन्त प्रबल अपचायक होते हैं। इसलिए इनके ऑक्साइडों को साधारण अपचायकों; जैसे-कार्बन (कोक), जिंक आदि की अभिक्रिया द्वारा अपचयित करना सम्भव नहीं है। इन्हें सामान्यतया इनके लवणों का गलित अवस्था में विद्युत-अपघटन कराने पर पृथक्कृत किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
प्रकाश-विद्युत सेल में लीथियम के स्थान पर पोटैशियम एवं सीजियम क्यों प्रयुक्त किए जाते हैं ?
उत्तर:
लीथियम की आयनन एन्थैल्पी अत्यन्त उच्च होती है। इस कारण प्रकाश के फोटॉन लीथियम धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन निष्कासित नहीं कर पाते हैं। अतः लीथियम धातु को प्रयोग करने पर प्रकाश-विद्युत प्रभाव नहीं देखा जाता है। पोटैशियम तथा सीजियम की आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए जब निश्चित न्यूनतम आवृत्ति के फोटॉन इन धातुओं की सतह से टकराते हैं तो इन धातुओं की सतह से इलेक्ट्रॉन सरलता से उत्सर्जित हो जाते हैं।

प्रश्न 10.
जब एक क्षार धातु को द्रव अमोनिया में घोला जाता है, तब विलयन विभिन्न रंग प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार के रंग-परिवर्तन का कारण बताइए।
उत्तर:
क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलनशील हैं। अमोनिया में इनके विलयन का रंग गहरा नीला होता है एवं विलयन प्रकृति में विद्युत का सुचालक होता है-

M + (x + y) NH3 → [M(NH3)x]+ + [e(NH3)y]

विलयन का नीला रंग अमोनीकृत इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है, जो दृश्य प्रकाश क्षेत्र की संगत ऊर्जा का अवशोषण करके विलयन को नीला रंग प्रदान करते हैं। अमोनीकृत विलयन अनुचुम्बकीय (paramagnetic) होता है, जो कुछ समय पड़े रहने पर हाइड्रोजन को मुक्त करता है। फलस्वरूप विलयन में ऐमाइड बनता है।

M+(am) + e + NH3(l) → MNH2(am) + 1/2H2(g)
(यहाँ ‘am’ अमोनीकृत विलयन दर्शाता है।)
सान्द्र विलयन का नीला रंग ब्रॉन्ज में बदल जाता है और विलयन प्रतिचुम्बकीय हो जाता है।

प्रश्न 11.
ज्वाला को बेरिलियम एवं मैग्नीशियम कोई रंग नहीं प्रदान करते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुएँ ऐसा करती हैं। क्यों ?
उत्तर:
बेरिलियम एवं मैग्नीशियम के परमाणुओं में इनके छोटे आकार के कारण बाह्यतम कोशों के इलेक्ट्रॉन इतनी प्रबलता से बँधे रहते हैं कि यदाला की ऊर्जा द्वारा इनका उत्तेजित होना कठिन हो जाता है। अतः ज्वाला में इन दोनों धातुओं का अपना कोई अभिलाक्षणिक रंग नहीं होता है। इन दोनों तत्वों के अतिरिक्त क्षारीय मृदा धातु परिवार के अन्य सदस्य, कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियम एवं बेरियम ज्वाला को क्रमशः ईंट जैसा लाल (brick red) रंग, किरमिजी लाल (Crimson red) एवं हरा (apple green) रंग प्रदान करते हैं।

ज्वाला में उच्च ताप पर वाष्प-अवस्था में क्षारीय मृदा धातुओं के बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं। ये उत्तेजित इलेक्ट्रॉन जब पुन: अपनी तलस्थ अवस्था में लौटते हैं, तब दृश्य प्रकाश के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित होती है। फलस्वरूप ज्वाला रंगीन दिखाई देने लगती है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

प्रश्न 12.
सॉल्वे प्रक्रम में होने वाली विभित्र अभिक्रियाओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
साधारणतया सोडियम कार्बोनेट ‘सॉल्वे विधि’ द्वारा बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में लाभ यह है कि सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट जो अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट एवं सोडियम क्लोराइड के संयोग से अवक्षेपित होता है, अल्प विलेय होता है। अमोनियम हाइड्रोजनकार्बोनेट CO2 गैस को सोडियम क्लोराइड के अमोनिया से संतृप्त सान्द्र विलयन में प्रवाहित कर बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में पहले अमोनियम कार्बोनेट और फिर अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनता है। सम्पूर्ण प्रक्रम की अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

2NH3 + H2O + CO2 → (NH4)2 CO3
(NH4)2 CO3 + H2O + CO2 → 2NH4HCO3 अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट
NH4HCO3 + NaCl → NH4Cl + NaHCO3 सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट

इस प्रकार सोडियम बाइकार्बोनेट के क्रिस्टल पृथक् हो जाते हैं जिन्हें गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त किया जाता है-

2NaHCO3 → Na2CO3 + CO2 ↑ + H2O

इस प्रक्रम में NH4Cl युक्त विलयन की Ca(OH)2 से अभिक्रिया पर NH3 को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। कैल्सियम क्लोराइड सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है-

2NH4Cl + Ca(OH)2 → 2NH3 ↑ + CaCl2 + 2H2O

प्रश्न 13.
पोटैशियम कार्बोनेट सॉल्वे विधि द्वारा नहीं बनाया जा सकता है। क्यों ?
उत्तर:
सॉल्वे विधि का उपयोग पोटैशियम कार्बोनेट के निर्माण में नहीं किया जा सकता है; क्योंकि पोटैशियम हाइड्रोजन कार्बोनेट की अधिक विलेयता के कारण इसे पोटैशियम क्लोराइड के संतृप्त विलयन में अमोनियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के संयोग द्वारा अवक्षेपित करना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 14.
LI2CO3 कम ताप पर एवं Na2CO3 उच्च ताप पर क्यों विघटित होता है?
उत्तर:
गर्म करने पर, Li2CO3 विघटित होकर Li2O तथा CO2 बनाता है। Li+ आयन का छोटा आकार Li2O के जालक को Li2CO3 के जालक से अधिक स्थायी बना देता है क्योंकि यहाँ पर Li+ तथा O2- दोनों ही छोटे आकार के होते हैं, परन्तु Na+ आयन का बड़ा आकार Na2O के जालक को Na2CO3 के जालक से कम स्थायी कर देता है क्योंकि Na+ तथा \(\mathrm{CO}_3^{2-}\) दोनों ही बड़े आकार के हैं। फलस्वरूप Na2CO3 उच्च ताप पर भी विघटित नहीं होता है, जबकि Li2CO3 कम ताप पर ही विघटित हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 21

प्रश्न 15.
क्षार धातुओं के निम्नलिखित यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिए-(क) नाइट्रेट (ख) कार्बोनेट (ग) सल्फेट।
उत्तर:
विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर क्षार धातुओं के यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से अग्रलिखित प्रकार की जा सकती है-

क्षार धातुओं के यौगिक
(क) नाइट्रेट-
(i) विलेयता-आयनिक प्रकृति के कारण ये यौगिक जल में विलेय होते हैं। इनकी विलेयता ग्रुप में नीचे जाने पर बढ़ती जाती है क्योंकि जालक ऊर्जा घटती जाती है तथा जलयोजन ऊर्जा बढ़ती जाती है।

LiNO3 < NaNO3 <KNO3 < RbNO3 < CsNO3 <FrNO3

(ii) तापीय स्थायित्व – गर्म करने पर ये नाइट्रेट में विघटित हो जाते है तथा ऑक्साइड एवं ऑक्सीजन देते हैं।

4LiNO3 → 2Li2O + 4NO2 ↑+ O2
2NaNO3 → 2NaNO2 + O2

(ख) कार्बोनेट-
(i) विलेयता-ये जल में विलेय होते है तथा समूह में नीचे जाने पर विलेयता बढ़ती जाती है।
Li2CO3 < Na2CO3 < K2CO3 <Rb2CO3 < Cs2CO3 < Fr2CO3

(ii) तापीय स्थायित्व-गर्म करने पर कार्बोनेट विघटित नहीं होते हैं। ये ऊष्मा के प्रति उच्च स्थायी होते हैं अर्थात् तापीय रूप से स्थायी होते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 22
(M = Na, K, Rb, Cs, Fr)

(ग) सल्फेट-
(i) विलेयता-ये जल में अल्प विलेय होते हैं। सोडियम तथा पोटैशियम के लवण जल में तीव्र विलेय होते हैं।
(ii) तापीय स्थायित्व-लीथियम को छोड़कर क्षार धातुओं के अन्य सभी तत्वों के सल्फेट तापीय रूप से स्थायी होते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 23

क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिक
(क) नाइट्रेट-
(i) विलेयता-सभी क्षारीय मृदा धातुओं के नाइट्रेट जल में विलेय होते हैं। उनकी विलेयता समूह में नीचे जाने पर कम होती जाती है। क्योंकि जलयोजन ऊर्जा घटती है तथा जालक ऊर्जा बढ़ती है।
Be(NO3)2 < Mg(NO3)2 < Ca(NO3)2 < Sr(NO3)2 < Ba(NO3)2

(ii) तापीय स्थायित्व-गरम करने पर ये विघटित होकर ऑक्साइड देते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 24

(ख) कार्बोनेट-
(i) विलेयता- \(\mathrm{CO}_3^{2-}\) ॠणायन का आकार धनायन की अपेक्षा बहुत बड़ा होता है अत: इसकी जालक ऊर्जा समूह में नीचे जाने पर लगभग समान होती है। जबकि जलयोजन ऊर्जा का मान नीचे जाने पर पर घटता जाता है। अतः इनकी विलेयता नीचे जाने पर घटती जाती है।
BeCO3 > MgCO3 > CaCO3 > SrCO3 > BaCO3

(ii) तापीय स्थायित्व-गर्म करने पर ये विधटित हो जाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 25
नीचे जाने पर इनका स्थायित्व बढ़ता जाता है क्योंकि इनका धन विद्युती गुण नीचे जाने पर बढ़ता जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 26

(ग) सल्फेट-
(i) विलेयता-इनकी विलेयता समूह में नीचे जाने पर घटती जाती है। Be तथा Mg के सल्फेट जल में विलेय होते हैं। Ca तथा Sr के सल्फेट जल में अल्प विलेय होते हैं जबकि BaSO4 अविलेय होता है।

BeSO4 > MgSO4 > CaSO4 > SrSO4 > BaSO3(विलेयता)

(ii) तापीय स्थायित्व-नीचे जाने पर इनका तापीय स्थायित्व बढ़ता जाता है क्योंकि इनका घन विद्युती गुण बढता जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 27

प्रश्न 16.
सोडियम क्लोराइड से प्रारम्भ करके निम्नलिखित को आप किस प्रकार बनाएँगे ?
(i) सोडियम धातु (ii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (iii) सोडियम पर्रॉक्साइड (vi) सोडियम कार्बोनेट।
उत्तर:
(i) सोडियम क्लोराइड से सोडियम धातु प्राप्त करना-सोडियम क्लोराइड लवण का गलित अवस्था में विद्युत-अपघटनी अपचयन कराने पर सोडियम धातु प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 28

(ii) सोडियम क्लोराइड से सोडियम हाइड्रॉक्साइड प्राप्त करना-सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन का नेलसन सेल अथवा कॉस्टनर-कैलनर सेल में विद्युत-अपघटन करने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड प्राप्त होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 29

(iii) सोडियम क्लोराइड से सोडियम परॉक्साइड प्राप्त करनापहले सोडियम क्लोराइड के विद्युत-अपघटनी अपचयन द्वारा सोडियम प्राप्त करते हैं, इसके बाद धातु को 573K पर ऑक्सीजन के आधिक्य के साथ नमी तथा CO2 से मुक्त वायुमण्डल में गर्म करने पर सोडियम परॉक्साइड बनता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 30

(iv) सोडियम क्लोराइड से सोडियम कार्बोनेट प्राप्त करना-सोडियम क्लोराइड से सोडियम कार्बोनेट बनाने के लिए सॉल्वे-अमोनिया प्रक्रम का प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रम में सोडियम क्लोराइड अथवा ब्राइन के सान्द्र विलयन (लगभग 30%), जिसे अमोनिया द्वारा संतृप्त कर लिया जाता है, में कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करने पर सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 31
विलयन में Na+ आयनों की उपस्थिति में सोडियम बाइकार्बोनेट अवक्षेपित जाता है। अवक्षेप को छानकर अलग करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है।
2NaHCO3 → Na2CO3 + CO2 ↑ + H2O

प्रश्न 17.
क्या होता है, जब-

  1. मैग्नीशियम को हवा में जलाया जाता है।
  2. बिना बुझे चूने को सिलिका के साथ गर्म किया जाता है।
  3. क्लोरीन बुझे चूने से अभिक्रिया करती है।
  4. कैल्सियम नाइट्रेट को गर्म किया जाता है।

उत्तर:
(i) मैग्नीशियम ऑक्साइड तथा मैग्नीशियम नाइट्राइड का मिश्रण बनता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 32

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

प्रश्न 18.
निम्नलिखित में प्रत्येक के दो-दो उपयोग लिखिए-

  1. कॉस्टिक सोडा,
  2. सोडियम कार्बोनेट
  3. बिना बुझा चूना।

उत्तर:
1. कॉस्टिक सोडा के उपयोग (Uses of caustic soda)-

  • साबुन, कागज, कृत्रिम रेशम तथा कई अन्य रसायनों के निर्माण में।
  • पेट्रोलियम के परिष्करण में।

2. सोडियम कार्बोनेट के उपयोग (Uses of sodium carbonate) –

  • जल के मृदुकरण, धुलाई एवं निर्मलन में।
  • पेट्रोलियम के परिष्करण में।
  • काँच, साबुन, बोरेक्स एवं कॉस्टिक सोडा के निर्माण में।

3. बिना बुझा चूना के उपयोग (Uses of Quick lime) –

  • सीमेन्ट के निर्माण के लिए प्राथमिक पदार्थ के रूप में तथा क्षारक के सबसे सस्ते रूप में।
  • शर्करा के शुद्धिकरण में रंजकों (dye stuffs) के निर्माण में।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित की संरचना बताइए-

  • BeCl2 (वाष्प),
  • BeCl2 (ठोस) ।

उत्तर:
1. वाष्प अवस्था में (In vapour state) – वाष्प अवस्था में यह यौगिक द्विलक (dimer) के रूप में पाया जाता है। (Be परमाणु sp2- संकरित होता है) जो लगभग 1000K ताप पर अपघटित होकर एक एकलक (monomer) देता है जिसमें Be परमाणु sp-संकरण अवस्था में होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 33

2. ठोस अवस्था में (In solid state)-ठोस अवस्था में बेरिलियम क्लोराइड की शृंखला संरचना (बहुलक) होती है जिसमें समीपवर्ती अणुओं पर उपस्थित क्लोरीन परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन-युग्म इलेक्ट्रॉन न्यून Be परमाणु को दान करके उपसहसंयोजी बन्ध निम्नवत् बनता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 34
उपर्युक्त शृंखला संरचना में Be परमाणु sp3- संकरित होता है, परन्तु Cl-Be-Cl बन्ध कोण सामान्य चतुष्फलकीय बन्ध कोण (109.5°) से अत्यधिक कम (98°) होता है।

प्रश्न 20.
सोडियम एवं पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में विलेय हैं, जबकि मैग्नीशियम एवं कैल्सियम के संगत लवण जल में अल्प विलेय हैं, समझाइए।
उत्तर:
दिए गए सभी यौगिक क्रिस्टलीय ठोस हैं तथा इनकी जल में विलेयता जालक एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी दोनों के द्वारा निर्धारित होती है। सोडियम तथा पोटैशियम यौगिकों की स्थिति में जालक एन्थैल्पी का परिमाण जलयोजन एन्थैल्पी की तुलना में अत्यन्त कम होता है। चूँकि धनायनों का आकार बड़ा होता है, इसलिए सोडियम तथा पोटैशियम के यौगिक जल में तुरन्त विलेय हो जाते हैं।

यद्रपि संगत मैग्नीशियम तथा कैल्सियम यौगिकों की स्थिति में धनायनों का आकार कम होता है तथा धनावेश का परिमाण अधिक होता है। इसका अर्थ है कि इनकी जालक ऊर्जा (एन्थैल्पी) सोडियम तथा पोटैशियम के यौगिकों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए इन धातुओं के हाइड्रॉक्साइड तथा कार्बोनेट जल में अल्प विलेय होते हैं।

सोडियम तथा पोटेशियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में विलेय हैं क्योंकि,
जलयोजन ऊर्जा > जालक ऊर्जा

मैग्नीशियम तथा कैल्शियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में अल्पविलेय हैं क्योंकि,
जलयोजन ऊर्जा ≤ जालक ऊर्जा

प्रश्न 21.
निम्नलिखित की महत्ता बताइए-

  1. चूना पत्थर,
  2. सीमेन्ट,
  3. प्लास्टर ऑफ पेरिस

उत्तर:
1. चूना पत्थर की महत्ता (Importance of Limestone)

  • संगमरमर के रूप में भवन-निर्माण में।
  • बुझे हुए चूने के निर्माण में।
  • कैल्सियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ लोहे जैसी धातुओं के निष्कर्षण में फ्लक्स (flux) के रूप में।
  • विशेष रूप से अवक्षेपित CaCO3 के प्रयोग से वृहद् रूप में उच्च गुणवत्ता वाले कागज के निर्माण में।
  • एन्टासिड, टूथपेस्ट में अपघर्षक के रूप में, चूइंगम के संघटक एवं सौन्दर्य प्रसाधनों में पूरक के रूप में।

2. सीमेन्ट की महत्ता: लोहा तथा स्टील के अतिरिक्त सीमेन्ट भी एक ऐसा ही पदार्थ है जो किसी राष्ट्र की उपयोगी वस्तुओं की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका उपयोग कंक्रीट, प्रबलित कंक्रीट, प्लास्टरिंग, पुल-निर्माण आदि में किया जाता है।

3. प्लास्टर ऑफ पेरिस की महत्ता: ग्लास्टर ऑफ पेरिस का वृहत्तर उपयोग भवन-निर्माण उद्योग के साथ-साथ टूटी हुई हड्डियों के प्लास्टर में भी होता है। इसका उपयोग दन्त-चिकित्सा, अलंकरण-कार्य एवं मूर्तियों तथा मूर्तियों के साँचे बनाने में भी होता है।

प्रश्न 22.
लीथियम के लवण साधारणतया जलयोजित होते हैं, जबकि अन्य क्षार धातुओं के लवण साधारणतया निर्जलीय होते हैं। क्यों?
उत्तर:
लीथियम लवणों में लीथियम आयन (Li+) अपने छोटे आकार के कारण नमी अथवा जल के सम्पर्क में आने पर तुरन्त जलयोजित हो जाता है। इसलिए लीथियम के लवण साधारणतया जलयोजित होते हैं, जबकि अन्य क्षार धातु आयन अपेक्षाकृत बड़े आकार के होने के कारण जलयोजित नहीं होते। अतः ये निर्जलीय होते हैं।

प्रश्न 23.
LiF जल में लगभग अविलेय होता है, जबकि LiCl न सिर्फ जल में, बल्कि ऐसीटोन में भी विलेय होता है। कारण बताइए।
उत्तर:
LiF की जल में अल्प विलेयता इसकी उच्च जालक एन्थैल्पी के कारण होती है (F आकार में अत्यन्त छोटा होता है )। दूसरी ओर लीथियम क्लोराइड (LiCl) में जालक एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है। इसका अर्थ है कि जलयोजन ऊर्जा का परिमाण अधिक है। इसलिए लीथियम क्लोराइड द्विध्रुवी आकर्षण के कारण न केवल जल में, अपितु ऐसीटोन में भी विलेय होता है (ऐसीटोन प्रवृत्ति में ध्रुवीय होता है)।

प्रश्न 24.
जैव द्रवों में सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम एवं कैल्सियम की सार्थकता बताइए।
उत्तर:
सोडियम एवं पोटैशियम की जैव उपयोगिता : सोडियम आयन मुख्यतः अंतराकाशीय द्रव में उपस्थित रक्त प्लाज्मा, जो कोशिकाओं को घेरे रहता है, में पाया जाता है। यह आयन शिरा संकेतों के संचरण में भाग लेते है, जो कोशिका झिल्ली में जल प्रवाह को नियमित करते हैं तथा कोशिकाओं में शर्करा और एमीनो अम्लों के प्रवाह को भी नियन्त्रित करते हैं। Na और K रासायनिक रूप से समान होते हुए भी कोशिका झिल्ली को पार करने की क्षमता एवं एन्जाइम को सक्रिय करने में मात्रात्मक रूप से भिन्न हैं।

इसलिये कोशिका द्रव में पोटैशियम धनायन बहुतायत में होते हैं, जहाँ ये एन्जाइम को सक्रिय करते हैं एवं ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ATP बनने में भाग लेते है। सोडियम आयन शिरा-संकेतों के संचरण के लिये उत्तरदायी हैं । कोशिका झिल्ली के अन्य हिस्सों में पाये जाने वाले Na एवं K आयनों की सांद्रता में उल्लेखनीय भिन्नता पाई जाती है।

उदाहरण – रक्त प्लाज्मा में लाल रक्त कोशिकाओं में Na की मात्रा 143 m mol L-1 जबकि K का स्तर केवल 5 m mol L-1 है। यह सान्द्रता 10 m mol L-1(Na+) एवं 105 mmolL-1(K+) तक परिवर्तित होती है। इसी असाधारण उतार चढ़ाव को सोडियम पोटैशियम पम्प कहते हैं । सेल झिल्ली पर कार्य करता है, जो मनुष्य की विश्रामावस्था के कुल उपभोगिता की एक-तिहाई के ज्यादा का उपयोग कर लेता है, जो मात्रा लगभग 15 किलो प्रति 24 घंटे तक हो सकती है।

मैग्नीशियम और कैल्सियम का जैविक महत्व: एक वयस्क व्यक्ति में लगभग 25 ग्राम मैग्नीशियम एवं 1200 ग्राम कैल्सियम होता है, जबकि लोहा मात्र 5 ग्राम एवं ताँबा 0.06 ग्राम होता है। मानव-शरीर में इनकी दैनिक आवश्यकता 200-300 मिलीग्राम अनुमानित की गई हैं। समस्त एन्जाइम, जो फॉस्फेट के संचरण में ATP का उपयोग करते हैं, मैग्नीशियम का उपयोग सह-घटक के रूप में करते हैं। पौधों में प्रकाश-संश्लेषण के लिए मुख्य रंजक (pigment) क्लोरोफिल में भी मैग्नीशियम होता है। शरीर में कैल्सियम का 99% दाँतों तथा हड्डियों में होता है।

यह अन्तरतांत्रिकीय पेशीय कार्यप्रणाली, अन्तरतांत्रिकीय प्रेषण कोशिका झिल्ली अखण्डता (cell membrane integrity) तथा रक्त-स्कन्दन (blood-coagulation)में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्लाज्मा में कैल्सियम की सान्द्रता लगभग 100 mg L-1 होती है। दो हॉमाकैल्सिटोनिन एवं पैराथायरॉइड इसे बनाए रखते हैं। चूँकि हड्डु अक्रिय तथा अपरिवर्तनशील पदार्थ नहीं है, यह किसी मनुष्य में लगभग 400 मिग्रा प्रतिदिन के अनुसार विलेयित और निक्षेपित होती है। इसका सारा कैल्सियम रक्त प्लाज्मा में ही गुजरता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 s-ब्लॉक तत्त्व

प्रश्न 25.
क्या होता है जब-

  1. सोडियम धातु को जल में डाला जाता है।
  2. सोडियम धातु को हवा की अधिकता में गर्म किया जाता है।
  3. सोडियम परॉक्साइड को जल में घोला जाता है।

उत्तर:
1. सोडियम धातु को जल में डालने पर उच्च ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है तथा हाइड्रोजन मुक्त होती है जो आग पकड़ लेती है।
2 Na + 2H2O → 2NaOH + H2

2. सोडियम धातु को वायु की अधिकता में गर्म करने पर सोडियम परॉक्साइड बनता है।
2Na + O2 → Na2O2

3. सोडियम परॉक्साइड को जल में घोलने पर ऑक्सीजन मुक्त होता है।
2Na2O2 + 2H2O → 4NaOH + O2

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रेक्षण पर टिप्पणी लिखिए-
(क) जलीय विलयनों में क्षार धातु आयनों की गतिशीलता Li+ <Na+ <K+ <Rb+ <Cs+ क्रम में होती है।
(ख) लीथियम ऐसी एकमात्र क्षार धातु है, जो नाइट्राइड बनाती है।
(ग) M2+(aq) + 2e → M(s) हेतु EΘ (जहाँ M = Ca, Sr या Ba) लगभग स्थिरांक है।
उत्तर:
(क) जलीय विलयनों में क्षार धातु आयनों की गतिशीलता निम्नलिखित क्रम में होती हैं-
Li+ < Na+ < K+ < Rb+ < Cs+
इसे धनायनों के जल में जलयोजित होने के आधार पर समझाया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप धनायन का आकार बढ़ने पर इसकी गतिशीलता घटती है। Li+ आयन छोटे आकर के कारण अधिकतम जलयोजित होता है तथा न्यूनतम गतिशीलता रखता है, जबकि Cs+ न्यूनतम जलयोजन के कारण अधिकतम गतिशीलता रखता है।

(ख) लीथियम एक प्रबल अपचायक है; अतः यह नाइट्रोजन से सीधे संयोग करके नाइट्राइड (Li3N) बनाता है।
6Li + N2 → 2Li3N लीथियम नाइटाइड

(ग) क्षार धातुओं के इलेक्ट्रोड विभव (EΘ), जो M(s) से M+(aq) तक सभी परिवर्तनों में अन्य धातुओं द्वारा प्रदर्शित अपचायक क्षमता को मापते हैं, तीन कारकों पर निर्भर करते हैं-(a) ऊर्ध्वपातन, (b) आयनन एन्थैल्पी तथा (c) जलयोजन एन्थैल्पी। क्योंकि Ca, Sr तथा Ba के लिये इन तीनों कारकों का सामूहिक प्रभाव लगभग समान होता है अतः इनका इलेक्ट्रोड विभव भी लगभग स्थिरांक होता है।

प्रश्न 27.
समझाइए कि क्यों-
(क) Na2CO3 का विलयन क्षारीय होता है।
(ख) क्षार धातुएँ उनके संगलित क्लोराइडों के विद्युत-अपघटन से प्राप्त की जाती हैं।
(ग) पोटैशियम की तुलना में सोडियम अधिक उपयोगी है।
उत्तर:
(क) सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3), जो प्रबल क्षार (NaOH) तथा दुर्बल अम्ल (H2CO3) का एक लवण है जल-अपघटन करने पर पर क्षारीय विलयन बनाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 10 Img 35
(ख) क्षार धातुएँ उच्च अभिक्रियाशील तथा प्रबल अपचायक होती हैं; अतः इन्हें साधारण विधियों द्वारा निष्कर्षित नहीं किया जा सकता है। इन्हें जलीय विलयनों के विद्युत-अपघटन द्वारा निष्कर्षित नहीं किया जा सकता है; क्योंकि तब बनने वाली धातुएँ जल से अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड बना लेंगी। इसलिए इन धातुओं को सामान्यता इनके संगलित क्लोराइडों के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त किया जाता है।

(ग) पोटैशियम की तुलना में सोडियम अधिक उपयोगी है। इसे निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है-

  1. सोडियम का उपयोग Na/Pb मिश्रधातुओं में होता है जो PbEt4 तथा PbMe4 के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। इन कार्बलेड यौगिकों का उपयोग पेट्रोल में अपस्फोटरोधी के रूप में होता है।
  2. यह प्रबल अपचायक सोडियम अमलगम के रूप में प्रयुक्त होता है।
  3. सोडियम धातु का उपयोग सोडियम यौगिकों; जैसे-परॉक्साइड, ऐमाइड तथा सोडियम सायनाइड बनाने में किया जाता है।
  4. यह रंजक उद्योग में प्रयोग किया जाता है।
  5. द्रव सोडियम धातु का उपयोग नाभिकीय रिऐक्टर में शीतलक (coolant) के रूप में होता है।
  6. इसका उपयोग कार्बनिक यौगिकों में नाइट्रोजन, सल्फर तथा हैलोजेनों की उपस्थिति निर्धारित करने में किया जाता है।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित के मध्य क्रियाओं के सन्तुलित समीकरण लिखिए-
(क) Na2CO3 एवं जल
(ख) KO2 एवं जल
(ग) Na2O एवं CO2.
उत्तर –
(ख) 2KO2 + 2H2O → 2KOH + H2O2 + O2
(ग) Na2O + CO2 → Na2CO3

प्रश्न 29.
आप निम्नलिखित तथ्यों को कैसे समझाएँगे-
(क) BeO जल में अविलेय है, जबकि BeSO4 विलेय है।
(ख) BaO जल में विलेय है, जबकि BaSO4 अविलेय है।
(ग) एथेनॉल में LiI, KI की तुलना में अधिक विलेय है।
उत्तर:
(क) छोटे आकार, उच्च आयनन विभव तथा उच्च इलैक्ट्रॉन ऋणात्मकता के कारण BeO अत्यधिक संहसयोजक गुण रखता है इसी कारण यह जल में अविलेय होता है जबकि BeSO4 आयनिक होता है एवं Be2+ आयन अत्यधिक छोटे आकार का होता है जिसके कारण इसकी जलयोजन ऊर्जा का मान अधिक होता है तथा जालक ऊर्जा का मान काफी कम। यही कारण है कि BeSO4 जल में विलेय होता है।

(ख) BaO तथा BaSO4 दोनों ही आयनिक यौगिक होते हैं। बेरियम ऑक्साइड (BaO) जल में विलेय होता है; क्योंकि इसकी जलयोजन ऊर्जा इसकी जालक ऊर्जा से अधिक होती है। दूसरी ओर BaSO4 की जालक ऊर्जा इसके द्विसंयोजी आवेशों के कारण उच्च होती है; इसलिए मुक्त होने वाली जलयोजन ऊर्जा जालक ऊर्जा से अधिक नहीं हो पाती तथा बन्ध टूट नहीं पाते हैं। इस कारण BaSO4 अविलेय होता है।

(ग) लीथियम आयोडाइड प्रवृत्ति में थोड़ा सहसंयोजी होता है। इसका कारण इसकी ध्रुवणता है (Li+ छोटे आकार के कारण सर्वाधिक ध्रुवण-क्षमता रखता है तथा आयोडाइड आयन बड़े आकार के कारण अधिकतम ध्रुवित किया जा सकता है) Li+ आयन की जलयोजन ऊर्जा K+ आयन से अधिक होती है; अत: Li+ आयन K+ आयन से बहुत अधिक जलयोजित हो जाते हैं। इसलिए Lil, KI की तुलना में अधिक विलेय है।

प्रश्न 30.
इनमें से किस क्षार धातु का गलनांक न्यूनतम है?
(क) Na
(ख) K
(ग) Rb
(घ) Cs.
उत्तर:
(घ) Cs.

प्रश्न 31.
निम्नलिखित में से कौन-सी क्षार धातु जलयोजित लवण देती है?
(क) Li
(ख) Na
(ग) K
(घ) Cs.
उत्तर:
(क) Li

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से कौन-सी क्षारीय मृदा धातु कार्बोनेट ताप के प्रति सबसे अधिक स्थायी है ?
(क) MgCO3
(ख) CaCO3
(ग) SrCO3
(घ) BaCO3
उत्तर:
(घ) BaCO3

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Bhag 2 Haryana Board

Haryana Board HBSE 7th Class Hindi Solutions वसंत भाग 2

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran व्याकरण

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HBSE 9th Class Physical Education Solutions Haryana Board

Haryana Board HBSE 9th Class Physical Education Solutions

HBSE 9th Class Physical Education Solutions in Hindi Medium

HBSE 9th Class Physical Education Solutions in English Medium

  • Chapter 1 Meaning and Importance of Health Education
  • Chapter 2 Meaning and Importance of Personal Health
  • Chapter 3 Meaning, Aims and Objectives of Physical Education
  • Chapter 4 Role of Physical Education in the Development of Individual and Society
  • Chapter 5 Meaning, Definition and Values of Yoga
  • Chapter 6 Role of Various Competitive Games & Sports in Physical Education
  • Chapter 7 Effects of Drinking, Smoking and Abuses of Drugs
  • Chapter 8 Safety Education and First Aid

HBSE 9th Class Physical Education Question Paper Design

Class: 9th
Subject: Health & Physical Education
Paper: Annual or Supplementary
Marks: 60
Time: 3 Hours

1. Weightage to Objectives:

ObjectiveKUATotal
Percentage of Marks403525100
Marks24211560

2. Weightage to Form of Questions:

Forms of QuestionsESAVSAOTotal
No. of Questions3761228
Marks Allotted1521121260
Estimated Time70702515180

3. Weightage to Content:

Units/Sub-UnitsMarks
1. Meaning & Importance of Health Education11
2. Meaning & Importance of Personal Health6
3. Meaning, aims and objectives of Physical Education7
4. Role of Physical Education in the development of Individual and Society7
5. Meaning, Definition and Values of Yoga9
6. Role of Various Competitive Games and Sports in Physical Education4
7. Effects of Drinks, Smoking and Abuse of Drugs7
8. Safety Education and First Aid9
Total60

4. Scheme of Sections:

5. Scheme of Options: Internal Choice in Long Answer Question, i.e. Essay Type

6. Difficulty Level:
Difficult: 10% marks
Average: 50% marks
Easy: 40% marks

Abbreviations: K(Knowledge), U(Understanding), A(Application), S(Skill), E(Essay Type), SA(Short Answer Type), VSA(Very Short Answer Type), O(Objective Type).

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HBSE 9th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 समकालीन विश्व में लोकतंत्र

Haryana State Board HBSE 9th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 समकालीन विश्व में लोकतंत्र Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 समकालीन विश्व में लोकतंत्र

HBSE 9th Class Civics समकालीन विश्व में लोकतंत्र Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित विकल्पों में सही विकल्प का चयन कीजिए।
(क) लोगों को संघर्ष
(ख) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण .
(ग) उपनिवेशवाद का अंत
(घ) लोगों की स्वतंत्रता की चाह
उत्तर-
(ख) विदेशी शासन द्वारा आक्रमण .

2. आज की दुनिया के बारे में इनमें से कौन-सा कथन सही है?
(क) राजशाही शासन की वह पद्धति है जो अब समाप्त हो गई हैं।
(ख) विभिन्न देशों में बीच संबंध पहले के किसी वक्त से अब नहीं ज्यादा लोकतांत्रिक हैं।
(ग) आज पहले के किसी दौर से ज्यादा देशों में शासकों का चुनाव लोगों के द्वारा हो रहा है।
(घ) आज दुनिया में सैनिक तानाशाह नहीं रह गए हैं।
उत्तर-
(ग) आज पहले के किसी दौर से ज्यादा देशों में शासकों का चुनाव लोगों के द्वारा हो रहा है।

3. निम्नलिखित वाक्यांशाके में से किसी एक का चुनाव करके इस वाक्य को पूरा कीजिए। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में लोकतंत्र की जरूरत है ताकि…….
(क) अमीर देशों की बातों का ज्यादा वजन हो।
(ख) विभिनन देशों की बात का वजन उनकी सैन्य शक्ति के अनुपात में हो।
(ग) देशों को उनकी आबादी के अनुपात में समान मिले।
(घ) दुनिया के सभी देशों के साथ समान व्यवहार हो।
उत्तर-
(घ) दुनिया के सभी देशों के साथ समान व्यवहार हो।

4. इन देशों और लोकतंत्र की उनकी राह में मेल बैठाएँ
I. देश — II. लोकतंत्र की ओर
(क) चिले — 1. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी
(ख) नेपाल — 2. सैनिक तानाशाही की समाप्ति ।
(ग) पोलैंड — 3. एक दल के शासन का अंत
(घ) घाना — 4. राजा ने अपने अधिकार छोड़ने पर सहमति दी।
उत्तर-
(क-2, ख-4, ग-3, घ-1)

प्रश्न 5.
गैर-लोकतांत्रिक शासन वाले देशों के लोगों को किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है? इस अध्याय में दिए गए उदाहरणों के आधार पर इस कथन मे पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर-

  • ऐसे लोगों को मूल अधिकारों से वंचित किया जात है।
  • उन पर हुए अत्याचारों के विरुद्ध उन्हें आवाज उठाने की आज़ादी नहीं होती।
  • वह अपना विरोध व्यक्त नहीं कर सकते।
  • अपनी शिकायतों को ज़ाहिर करने के लिए उन्हें संघ-समुदाय बनाने की अनुमति नहीं होती।
  • उन्हें स्वतंत्रताएँ प्राप्त नहीं होती।

HBSE 9th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 समकालीन विश्व में लोकतंत्र

प्रश्न 6.
जब सेना लोतंत्र को उखाड़ फेंकती हैं, तो सामान्यतः कौन-सी स्वतंत्रताएँ छीन ली जाती हैं?
उत्तर-
जब सेना लोकतंत्र को उखाड़ फेंकती है तो सामान्यतः लोगों की सभी स्वतंत्रताएँ छीन ली जाती हैं। वह अपने विचार नहीं रख सकते, उन विचारों की अभिव्यक्ति नहीं कर सकते। अपने संघ-समुदाय नहीं बना सकते तथा गतिविधियों व आन्दोलन के लिए एकत्रित नहीं हो सकते।

प्रश्न 7.
वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र बढ़ाने में किन बातों में मदद मिलेगी? प्रत्येक मामले में अपने जवाब के पक्ष में तर्क दीजिए।
(क) मेरा देश अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को ज्यादा पैसे देता है इसलिए मैं चाहता हूँ कि मेरे साथ ज्यादा सम्मानजनक व्यवहार हो और मुझे ज्यादा अधिकार मिलें।
(ख) मेरा देश छोटा या गरीब हो सकता है लेकिन मेरी आवाज को समान आदर के साथ सुना जाना चाहिए क्योंकि इन फैसलों का मेरे देश पर भी असर होगा।
(ग) अंतर्राष्ट्रीय मामलों में अमीर देशों की ज्यादा चलनी चाहिए। गरीब देशों की संख्या ज्यादा है, सिफ, इसके चलते अमीर देश अपने हितों का नुकसान नहीं होने दे सकते।
(घ) भारत जैसे बड़े देशों की आवाज का अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में ज्यादा वज़न होना ही चाहिए।
उत्तर-
(क) एक ऐश द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं को अधिक धन देने का यह अर्थ नहीं है कि उसे अन्य देशों की अपेक्षा अधिक समान प्राप्त हो तथा दूसरे देशों को उस देश की अपेक्षा कम अधिकार प्राप्त हों। लोकतंत्र धन के बलबूते पर नहीं पनपने चाहिए और न ही ऐसी व्यवस्था में धनियों का शासन हो।
(ख) एक देश छोटा व निर्धन देश हो सकता है। लोकतंत्र के स्वच्छ संचालन के लिए सभी देशों को (छोटे-बड़े, अमीर-अनर्धन आदि) समान व्यवहार मिलना चाहिए। लोकतंत्र में निर्णय सभी देशों द्वारा समान रूप से किए जाने चाहिएँ।
(ग) यदि अमीर देशों को अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में अधिक महत्त्व मिलता है तथा उनकी बात अधिक सुनी जाती है तो विश्व मंच पर वह अपवने हितों को प्रोत्साहित करेंगे। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र को मज़बूत नहीं करती, अपितु छति पहुँचाती हैं।
(घ) वह देश जो जनंसख्या तथा आकार में बड़े देश – हैं जैसे भारत, ऐसे देशों को आनुपातिक आधार पर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। मिल ने कहा था कि लोकतंत्र में आनुपातिक आधार पर प्रतिनिधित्व प्राप्त हो, गैर-आनुपातिक आधार पर नहीं।

प्रश्न 8.
नेपाल के संकट पर हुई एक टीवी चर्चा में व्यक्त किए गए तीन विचार कुछ इस प्रकार के थे। इनमें से आप किसे सही मानते हैं और क्यों?
वक्त-1: भारत एक लोकतांत्रिक देश है इसलिए राजशाही के खिलाफ और लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले नेपाली लोगों के समर्थन में भारत सरकार को ज्यादा दखल देना चाहिए।
वक्ता 2: यह एक खतरनाक तर्क है। हम उस स्थिति में पहुँच जाएँगे जहाँ इराक के मामले में अमेरिका पहुँचा है। किसी भी बाहरी शक्ति के सहारे लोकतंत्र नहीं आ सकता।
वक्ता-3: लेकिन हमें किसी देश के आंतरिक मामलों की चिंता ही क्यों करनी चाहिए? हमें वहाँ अपने व्यावसायिक हितों की चिंता करनी चाहिए लोकतंत्र की नहीं।
उत्तर-
लोकतंत्र थोपा नहीं जा सकता, थोपा जाना चाहिए भी नहीं। जब लोकतंत्र को थोपा जाता है जैसाकि अमेरिका ने इराक में करने का प्रयास किया है।, यह लोकतंत्र थोपने का प्रयास है भारत सहित अन्य देशों का यह यत्न होना चाहिए कि लोकतंत्र ऊपर से थोपा नहीं जाना चाहिए। कोई किसी को तैरना सिखा सकता है, परन्तु यदि कोई तैरना सीखता ही नहीं चाहता, तो कोई क्या कर सकता है, तीसरे वक्ता के विचार अधिक वज़नी हैं। हमें अन्य देशों में अपने हित सुरक्षित करने चाहिएँ, परंतु अपने हितों के बदले उन्हें लोकतांत्रिक नहीं बनाना चाहिए।

HBSE 9th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 समकालीन विश्व में लोकतंत्र

प्रश्न 9.
एक काल्पनिक देश आनंदलोक में लोग विदेशी शासन को समाप्त करके पुराने राजपरिवार को सत्ता सौपते हैं। वे कहते हैं, ‘आखिर ज विदेशियों ने हमारे ऊपर राज करना शुरू किया तब इन्ही के पूर्वज हमारे राजा थे। यह अच्छा है कि हमारा एक मजबूत शासक है जो हमें अमीर और ताकतवर बनने में मदद कर सकता है।’ जब किसी ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की बात की तो वहाँ के सयाने लागों ने कह कि यह तो एक विदेशी विचार है। हमारी लड़ाई विदेशियों और उनके विचारों को देश से खदेड़ने की थी। जब किसी ने मीडिया की आज़ादी की माँग की तो बड़े-बुजुर्गों ने कहा कि शासन की ज्यादा आलोचना करने से नुकसान होगा और इससे अपने जीवन स्तर को सुधारने में कोई मदद नहीं मिलेगी। “आखिर महाराज दयावान हैं और अपनी पूरी प्रजा के कल्याण में बहुत दिलचस्पी लेते हैं। उनके लिए मुश्किलें क्यों पैदा की जाएँ? क्या हम सभी खुशहाल नहीं होना चाहते?”
उपरोक्त उद्धरण को पढ़ने के बाद चयन, चंपा और चंदू ने कुछ इस तरह के निष्कर्ष निकाले :
चमन-:-आनंदलोक एक लोकतांत्रिक देश है क्योंकि लोगों ने विदेशी शासकों का उखाड़ फेका औरा राजा का शासन बहाल किया।
चंपा-:-आनंदलोक लोकतांत्रिक देश नही हैं क्योंकि लोग अपने शासन की आलोचना नहीं कर सकते। राजा अच्छा हो सकता है और आर्थिक समृद्धि भी जा सकता है लेकिन राजा लोकतांत्रिक शासन नहीं ला सकता।
चंदू-:-लोगों की खुशहाली चाहिए इसलिए वे अपने शासन को अपनी तरफ से फैसले लेने देना चाहते हैं। अगर लोग खुश हैं तो वहाँ का शासन लोकतांत्रिक ही है। . इन तीनों कथनों के बारे में आपकी क्या राय है? इस देश में सरकार के स्वरूप के बारे में आपकी राय
उत्तर-
लोकतंत्र का अर्थ, लोगों का शासन, लोगों द्वारा तथा लोगों के लिए। एक गुलाम देश कभी स्वतंत्र देश नहीं होता। राष्ट्रीय स्वतंत्रता वहाँ होती है जहाँ लोग विदेशी शासन से मुक्त होते हैं। अंग्रेजों से मुक्ति तथा देश की स्वतंत्रता लोकतंत्र के साथ जुड़े विचार थे। यदि एक देश जब विदेशी ताकत से मुक्त हो जाता है तथा बाद में राजतंत्रीय व्यवस्था को अपना लेता है, तो यह लोकतंत्र नहीं है, क्योंकि राजतंत्र लोकतंत्र नहीं होता।।

वास्तव मे जहाँ शासक लोगों द्वारा आलोचना के दायरे में नहीं आते अर्थात् लोगों को अपने शासकों की आलोचना का अधिकार नहीं होता, वहाँ लोकतंत्र नहीं होता। लोकतंत्र का सार यह है कि वहाँ शासकीय अधिकार अंततः लोगों के पास हों, वह अपने शासकों की आलोचना कर सकते हों, चुनावों में उन्हें बदल सकते हों।

लोकतंत्र तथा सुख एक नहीं होते। ज़रूरी नहीं कि ये सुखी व्यक्ति लोकतांत्रिक व्यक्ति भी हो और कि एक लोकतांत्रिक व्यक्ति सुखी व्यक्ति भी हो। यह अलग बात हैं कि एक स्वदल अर्थव्यवस्था लोकतंत्र को सुदृढ़ करने में विशेष भूमिका निभा सकती है तथा निभाती भी है। लोकतंत्र व अर्थव्यवस्था एक-दूसरे के पूरक है।

एक देश जहाँ राज्य अध्यक्ष कोई सम्राट हो तथा वहाँ राजतंत्र हो, तो यह लोकतंत्र नहीं है। यदि सम्राट मात्र एक संवैधानिक मुखिया है जैसा कि ब्रिटेन में हैं, वहाँ लोकतंत्रीय व्यवस्था हो सकती हैं।

HBSE 9th Class Civics समकालीन विश्व में लोकतंत्र Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
आयेंदे का सम्बन्ध किस देश से था?
उत्तर-
चिले से। वे चिले के राष्ट्रपति थे।

प्रश्न 2.
आयेंदे की सरकार का कब तख्ता पलट हुआ था?
उत्तर-
11 सितम्बर, 1973 को।

प्रश्न 3.
आयेंदे को चिले का राष्ट्रपति कब बनाया गया था? .
उत्तर-
1970 में।

प्रश्न 4.
1970 में चिले में किस राजनीतिक दल के पास सत्ता था?
उत्तर-
पापुलर यूनिटी. नातक गठबंधन के पास सत्ता थी।

HBSE 9th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 समकालीन विश्व में लोकतंत्र

प्रश्न 5.
चिले में तख्ता पलट के पश्चात् आयेंदे के बाद किसके पास सत्ता आयी थी?
उत्तर-
जनरल ऑगस्तों पिनोशे के हाथों में सत्ता आयी थी।

प्रश्न 6.
कालामा कहाँ स्थित हैं?
उत्तर-
चिले की राजधानी संटियागों से हजार मील दूर।

प्रश्न 7.
कालामा की स्त्रियों ने अपने दःख का इजहार कैसे किया था?
उत्तर-
चुप रह कर, सदैव चुप रह कर।

प्रश्न 8.
आपके देश में कौन-सा राज्य है जो आकार में चिले से मिलता-जुलता हैं?
उत्तर-
केरल।

प्रश्न 9.
जैसा कि चिले में महिलाओं के साथ हुआ, आप संसार के किसी अन्य देश में ऐसे हुए व्यवहार के बारे में जानते हो?
उत्तर-
जारशाही के रूस में महिलाओं के साथ ऐसा कुछ व्यवहार हुआ था।

प्रश्न 10.
कालामा में हुए महिलाओं के बारे में वहाँ के समाचार पत्रों ने क्यों नहीं लिखा/प्रकाशित किया?
उत्तर-
तब समाचार पत्र सरकार के नियंत्रण में थे। इस कारण उनमें महिलाओं के विषय में कुछ प्रकाशित नहीं हो पाया था।

प्रश्न 11.
आज चिले के राष्ट्रपति कौन हैं?
उत्तर-
मिशेल बैशले (जनवरी, 2006)।

प्रश्न 12.
1980 में पोलैंड में कौन-सा राजनीतिक दल शासन करता था?
उत्तर-
पॉलिश यूनाइटिड वर्कर्स पार्टी। वहाँ तक एक-दलीय शासकीय व्यवस्था थी।

प्रश्न 13.
गोलसंक में 1980 में किस फैक्ट्री में हड़ताल हुई थी?
उत्तर-
लेनिन शिपयार्ड।

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प्रश्न 14.
1980 में पोलैंड में जिस व्यक्ति ने हड़ताल में प्रवेश किया था, उसका नाम बताइए।
उत्तर-
लेक वालेशा।

प्रश्न 15.
पोलैंड को घेरे कुछ देशों के नाम बताइए।
उत्तर-
जर्मनी, लुथआनिया, बेलारूस, यूक्रेन।

प्रश्न 16.
पोलैण्ड के अतिरिक्त 1980 में उन दो देशों का नाम बताइए। जहाँ साम्यवादी दल का शासन था?
उत्तर-
बुल्गारिया तथा हंगरी।

प्रश्न 17.
पोलैंड में स्वतंत्र सजदूर दल के गठन की आवश्यकता क्यों थी?
उत्तर-
तब तक वहाँ सरकार के अधीन ही मजदूर दलों का गठन होता था जो सरकार की नीतियों का ही प्रचार करती थी।

प्रश्न 18.
इंग्लैंड में शानदारी क्रांति कब घटी थी?
उत्तर-
1688 में।

प्रश्न 19.
किस वर्ष अमेरिका के तेरह उपनिवेशों – ने अपना स्वतंत्रता संग्राम लड़ा था?
उत्तर-
1776 में।

प्रश्न 20.
अमरीकी स्वतंत्रता संग्राम किस देश के विरुद्ध लड़ा गया था?
उत्तर-
इंग्लैंड के विरुद्ध।

प्रश्न 21.
उन प्रयासों का वर्णन कीजिए जो यह बताएँ कि गरीबों की सहायता के लिए आयेंदे सरकार ने अनुकूल कदम उठाए हों?
उत्तर-

  1. शिक्षा प्रणाली में सुधार।
  2. बच्चों को मुफ्त दूध की आपूर्ति।
  3. किसानों में भूमि का पुनः वितरण।

प्रश्न 22.
दो कारण बताएं जिनस यह मालूम हा कि चिले मे आयोंदे की सरकार लोकप्रिय दिखायी देती थी?
उत्तर-

  • आयोंदे सरकार उन विदेशी ताकतों का विरोध करती थी जो चिले के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रही थीं।
  • उसकी सरकार अमीरों का भी विरोध कर रही थी जो गरीबों के हितों की अनेदखी करते थे।

प्रश्न 23.
1973 में आयेंदे को हराकर पिनोशे शासन ने क्या किया?
उत्तर-

  • पिनोशे सरकार ने जनसाधारण पर अत्याचार करने शुरू किए, विशेष रूप से उन पर आयोंदे का समर्थन करते थे।
  • पिनोशे सैनिकों ने लगभग दो हजार व्यक्तियों को मार दिया; हज़ारों लापता हो गए।
  • लोगों से सभी स्वतंत्रताएँ व अधिकार छीन लिये

प्रश्न 24.
बताइए कि कालामा की महिलाएँ व बच्चे चुप करा दिए गए। इन घटनाओं क विरुद्ध लोगों ने प्रतिक्रिया क्यों नहीं दिखायी थी? ..
उत्तर-
कालामा की महिलाएं व बच्चों को चुप करा दिया गया। लोगों ने इसके विरुद्ध आवाज उठाई कि सैनिक शासन अत्याचारी शासन था तथा लोग उस शासन के अत्याचार से डरते थे।

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प्रश्न 25.
1980 में पोलैंड में कौन शासन करता था?
उत्तर-
1980 में पोलैंड में साम्यवादी दल का शासन था। इस दल का नाम था पॉलिश यूनाटिड वर्कर्स पार्टी। यह एक दलीय व्यवस्था की। सभी शासकीय ताकतें इसी दल । के हाथों में थीं। सरकार का पूरी अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण था। सरकार ही मज़दूरों के संघों पर नियंत्रण रखती थी। मज़दूर संघ सरकार व दल से अलग नहीं थे।

प्रश्न 26.
गंदान्सक के मजदूरों की क्या माँगें थीं?
उत्तर-
1980 के आसपास गंदान्सक में लेमिन शिपयार्ड में हड़ताल हो गयी। मजदूरों की माँगें निम्नलिखित थीं:

  1. सभी मजदूरों को जिन्हें निकाल दिया गया था, वापस लिया जाए।
  2. मजदूरों ने स्वतंत्र मज़दूर संगठन बनाने के अधिकार की माँग की।
  3. राजनीतिक प्रक्रिया को अंकुश-मुक्त किया जाए।
  4. समाचार पत्रों पर से सैंसरशिप हटायी जाए।

प्रश्न 27.
सरकार व वालेश के बीस हुए समझौते की दो बातें बताइए।
उत्तर-
पॉलिश सरकार तथा वालेशा के नेतृत्व के बीच हुए मजदूरों के बीच हड़ताल के समाप्त होने पर समझौते की दो बातें निम्नलिखित बतायी जा सकती हैं-

  1. मजदूरों को स्वतंत्र मज़दूर संघ बनाने का अधिकार मिल गया;
  2. मजदूरों हड़ताल करने का अधिकार मिल गया।

प्रश्न 28.
पॉलिश यूनारिड वर्कर्स पार्टी की सरकार क्यों कमज़ोर पड़ने लग गयी?
उत्तर-
पॉलिश यूनारिड बर्कर्स पार्टी की पॉलिश सरकार के कमजोर पड़ने के कारणों में निम्नलिखित का उल्लेख किया जा सकता है।

  • वालेशा की सोलिडेरिटी की सदस्या संख्या एक करोड़ तक पहुँच गयी।
  • सरकार भ्रष्टाचार की ओर बढ़ने लगी। उसे डर पैदा हो गया कि वालेशा की सोलिडेरिटी उन पर हावी हो जाएगी। घबराहट में सरकार ने सैनिक कानून लागू कर दिया।
  • सरकार ने अत्याचार आरंभ कर दिए। वालेशा के लोगों को जेल में डाल दिया; उनकी स्वतंत्रताएँ वापस ले लीं।
  • अर्थव्यवस्था में तंज़ी से गिरावट आने लगी। सरकार वितीय संकट में ग्रस्त होती चली गयी।

प्रश्न 29.
लेक वालेशा ने पोलैण्ड में किस प्रकार सत्ता प्राप्त की?
उत्तर-
1988 में सोलिडेरिटी ने फिर से हड़तालें करवाई और लेक वालेशा ने इनकी अगुवाई की। इस समय पोलैंड की सरकार पहले से कमजोर थी, सोवियत संघ से मदद का भी पहले जैसा भरोसा न था और अर्थव्यवस्था में तेजी से – गिरावट आ रही थी। लेक वालेशा के साथ समझौता-वार्ता का एक और दौर चला और अप्रैल 1989 में जो समझौता हुआ उसमें स्वतंत्र चुनाव कराने की माँग मान ली गई। सोलिडेरिटी ने सीनेट के सभी 100 सीटों के लिए चुनाव लड़ा और उसे 99 सीटों पर सफलता मिली। अक्तूबर 1990 में पोलैंड मे राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार चुनाव हुए जिसमें एक से ज्यादा दल हिस्सा ले सकते थे। लेक वालेशा को पोलैंड का राष्ट्रपति चुना गया।

प्रश्न 30.
पोलैण्ड में सोलिडेरिटी के लोकप्रिय होने के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-

  • सोलिडेरिटी एक ऐसा संगठन था जो मज़दूरों के हितों की प्राप्ति के लिए गठित किया गया था।
  • यह मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रही।
  • लोगों के विचारों की अभिव्यक्ति के लिए भी सोलिडेरिटी लड़ रही थी।
  • बाद के दिनों में यह पार्टी लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ने लगी थी।

प्रश्न 31.
चिले की पिनोशे सरकार तथा पोलैण्ड के साम्यवादी दल के शासन में अंतर व समानताएँ बताइए।
उत्तर-
जिले में पिनोशे शासन और पोलैंड के साम्यवादी शासन में काफी अंतर है। चिले में सैनिक तानाशाह का राज था। जबकि पोलैंड में एक पार्टी का राज था। पोलैंड की सरकार का दावा था कि वह मजदूर वर्ग की ओर से शासन चला रही है। पिनोशे ने ऐसा कोई दावा नहीं किया और खुलेआम बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुँचाया। इन असमानताओं के बावजूद दोनों में कुछ समानताएँ भी थीं ।

  • लोग अपने शासकों को चुनाव या उनमें बदलाव नहीं कर सकते थे।
  • किसी को अपने विचार व्यक्त करने, संगइन बनाने, विरोध करने और राजनैतिक गतिवियिों में हिस्सा लेने की वास्तविक आजादी न थी।

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प्रश्न 32.
आयोंदे, वालेश तथा मिशेल (चिले की वर्तमान राष्ट्रपति) में आर्थिक मामलों के समान नजरिया ‘नहीं था? समझाइए।
उत्तर-
आयेंदे, वालेशा तथा मिशेल में आर्थिक व सामाजिक मामलों के संदर्भ में एक जैसा नज़रिया नहीं था। आयेंदे न अर्थव्यवस्था को नियंत्रित ढंग से चलाना पंसद किया जबकि वालेशा चाहते थे कि बाज़ार सरकारी दखल से मुक्त हों। मिशेल इस मामले में कुछ मध्यमार्गी रास्ता अपनाने वाली हैं। फिर भी इन तीनों सरकारों की कुछ विशेषताएँ समान थीं। यहाँ लोगों द्वारा चुनी गई सरकारें ही शासन चला रही थी। बिना चुने हुए नेता या बाहर से संचालित शक्तियाँ या फौज शासन नहीं चला रही थीं। लोगों को विभिन्न प्रकार की बुनियादी राजनैतिक स्वतंत्रता हासिल थीं।

प्रश्न 33.
लोकतंत्र की पहचान के कोई दो तरीके बताइए।
उत्तर-
लोकतंत्र में यह व्यवस्था रहती है कि लोग अपनी मर्जी की सरकार चुनें।
लोकतंत्र में सिर्फ लोगों द्वारा चुने गए नेताओं को ही देश पर शासन करना चाहिए।
लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी, संगठन बनाने और विरोध करने की आज़ादी जरूरी हैं।

प्रश्न 34.
जब चिले व पोलैण्ड में फौजी शासन था तब लोगों पर क्या-क्या प्रतिबंध थे?
उत्तर-

  • लोगों के पास वैयक्तिक स्वतंत्रताएँ नहीं थीं।
  • उन्हें विचार रखने का अधिकार नहीं था।
  • वह हड़ताल नहीं कर सकते थे।
  • वह अपना रोष एवं शिकायतें नहीं बता सकते थे।
  • वह प्रेस में अपने विचार नहीं रख सकते थे।

प्रश्न 35.
चिले के वर्तमान राष्ट्रपति के विषय में जानकारी दीजिए।
उत्तर-
चिले की वर्तमान राष्ट्रपति मिशेल बैशले आयोंदे सरकार के जनरल बैशेल की बेटी हैं। जनवरी 2006 में उन्होंने सत्ता सम्भाली है। समाजवादी विचारों वाली मिशेल पेशे से डॉक्टर हैं और लातिनी अमेरिका में रक्षा मंत्री के पद पर आने वाली पहली महिला हैं। राष्ट्रपति के चुनाव में उन्होंने जिस व्यक्ति को हराया वह चिले के सर्वाधिक धनी व्यक्तियों में गिना जाता है। चिले में लोकतंत्र के पतन और उत्थान की इस कथा को हम उनके ही भाषण के एक अंश समाप्त करते हैं।
“चूंकि मैं नफरत का शिकर बनी थी इसलिए मैंने अपना यह जीवन नफरत को खत्म करने, सहनशीलता और समझदारी के साथ-साथ प्रेम को बढ़ाने के प्रति समर्पित कर दिया है।”

प्रश्न 36.
लोकतंत्र के विकास में शुरुआती चरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
आधुनिक लोकतंत्र की कहानी कम-से-कम दो सदी पहले शुरू हुई। 1789 के जनविद्रोह ने फ्रांस में टिकाऊ और पक्के लोकतंत्र की स्थापना नहीं की थी। पूरी उन्नीसवीं सदी भर फ्रांस में बार-बार लोकतंत्र को उखाड़ फेंका गया और बार-बार इसे बहाल किया गया। लेकिन फ्रांसीसी क्रांति ने पूरे यूरोप में जगह-जगह पर लोकतंत्र के लिए संघर्षों की प्रेरणा दी। ब्रिटेन में लोकतंत्र की तरफ कदम उठने की शुरुआत फ्रांसीसी क्रांति से काफी पहले ही हो गई थी। लेकिन यहाँ प्रगति की रफ्तार काफी कम थी। अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में हुए राजनैतिक घटनाक्रमों ने राजशाही और सामंत – वर्ग की शक्ति में कमी कर दी थी। फ्रांसीसी क्रांति के आसपास ही उत्तर-अमेरिका में स्थित ब्रिटिश उपनिवेशों ने 1776 में खुद को आजाद घोषित कर दिया था। अगले कुछ ही वर्षों में इन उपनिवेशों ने साथ मिलकर संयुक्त राज्यअमेरिका आधुनिक अमेरिका का गठन किया। 1787 में उन्होंने एक लोकतांत्रिक संविधान को मंजूर किया। लेकिन इस व्यवस्था में भी मतदान का अधिकार पुरुषों तक सीमित था।
उन्नीसवीं सदी में लोकतंत्र के लिए होने वाले संघर्ष अकसर राजनैतिक समानता, आजादी और न्याय जैसे मूल्यों को लेकर ही होते थे। एक मुख्य माँग रहा करती थी कि सभी वयस्क नागरिकों को मतदान का अधिकार हो।

प्रश्न 37.
घाना का उदाहरण देते हुए बताइए कि – वहाँ किस प्रकार उपनिवेशवाद का अंत तथा लोकतंत्र की शुरुआत थी?
उत्तर-
पश्चिमी अफ्रीका देश घाना का उदाहरण उपनिवेश रहे देशों के सामान्य अनुभव हो बहुत अच्छी तरह दर्शाता है। यह ब्रिटिश उपनिवेश था और तब इसका नाम .गोल्ड कोस्ट था। यह 1957 मे आज़ाद हुआ। यह अफ्रीका में सबसे पहले आज़ादी पाने वाले देशों में एक था। इससे
अनेक अफ्रीकी देशों को आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिली। एक सुनार के पुत्र और शिक्षक रहे वामे एनक्र्मा ने देश की आजादी की लड़ाई से सक्रिय भूमिका निभाई थी।

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आज़ादी के बाद एनक्रूमा घाना के पहले प्रधानमंत्री और फिर राष्ट्रपति बने। वे जवाहर लाल नेहरू के मित्र और अफ्रीका में लोकतंत्रादियों के लिए प्रेरणा पुरुष थे। लेकिन वे नेहरू के नवशे-कदम पर टिक नहीं पाए। उन्हेंने अपने आपको आजीवन राष्ट्रपति के रूप में चुनवा लिया। लेकिन थोडे समय बाद ही 1966 में सेना ने उनका तख्तापलट कर दिया।

प्रश्न 38.
भारत में पड़ोसी देश मे लोकतंत्र के अनुभव पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
भारत के पड़ोस में भी काफी बड़े बदलाव हुए। 1990 के दशक में ही पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैनिक शासन की जगह लोकतंत्र का आगमन हुआ। नेपाल में राजा ने अपने अनेक अधिकार, चुने हुए प्रतिनिधियों की – सरकार को सौंपे और खुद संवैधानिक प्रमुख बने रहे।
लेकिन ये बदलाव स्थायी नहीं थे। 1999 में जनरल मुशर्रफ ने पाकिस्तान मे फिर से सैनिक शासन कायम कर लिया। 2005 में नेपाल के नए राजा ने चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर दिया और पिछले दशक में लोगों को दी गई राजनैतिक आज़ादी को समाप्त कर दिया। लेकिन 2006 में फिर लोकतांत्रिक शक्तियों की विजय हुई। राजा का संसद की बैठक बुलानी पड़ी और संसद ने राजा की शक्तियों को घटाकर उसे सिर्फ नाममात्र का शासक बना दिया।
नए देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर प्रयास तेज हो रहे हैं। सन् 2005 तक करीब 140 देशों में बहुदलीय प्रणाली के दायरे में चुनाव कराए जाते रहे हैं।

प्रश्न 39.
म्यांमार में लोकतंत्र का अनुभव किस प्रकार रहा है? चर्चा कीजिए।
उत्तर-
म्यांमार, जिसे पहले बर्मा कहा जाता था, यह 1948 में ही औपनिवेशिक शासन से आजाद हुआ और इसने लोकतंत्र को अपनाया। लेकिन 1962 में सैनिक तख्तापलट से लोकतंत्र का अंत हो गया। 1990 में लगभग 30 वर्षों बाद पहली बार चुनाव कराए गए। आंग सान सू ची का अगुवाई वाली नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी कई ने चुनाव जीते। पर म्यांमार के फौजी शासकों ने सत्ता छोड़ने से इंकार कर दिया और चुनाव परिणामों का मान्यता नहीं दी। बल्कि उन्होंने सूची समेत चुने हुए लोकतंत्र समर्थक नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया या उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया। बहुत छोटी-छोटी राजनैतिक गतिविधियों के लिए भी लोगों को पकड़ कर जेल की सज़ा दी गई। यहाँ सरकार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने या बयान जारी करने वाले किसी व्यक्ति सरकार के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने या बयान जारी करने वाने किसी भी व्यक्ति को बीस वर्ष तक की जेल की सज़ा हो सकती है।

म्यांमार की फौजी सरकार की ज्यादतियों से तंग आकर वहाँ के 6 से 10 लाख लोगों ने अपना घर-बार छोड़ दिया है और दूसरी जगहों पर शरणार्थी बनकर रह रहे हैं।
नज़रबंदी की सज़ा झेलने के बावजूद सूची ने लोकतंत्र के लिए अपना अभियान जारी रखा है। उनके अनुसार “बर्मा में लोकतंत्र की मुहिम वहां के लोगों की विश्व समुदाय के स्वतंत्र और बराबर सदस्य के रूप मे पूर्ण और अर्थपूर्ण जीवन जीने का संघर्ष हैं।”

उनके संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उन्हें नोबल शांति पुरस्कार भी मिला है। फिर भी म्यांमार के लोगों को अपने देश में लोकतांत्रिक सरकार कायम करने का संघर्ष समाप्त नहीं हुआ हैं।

प्रश्न 40.
यहाँ विश्व-लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कुछ सुझाव हैं। क्या आप इन बदलावों का समर्थन करते हैं? क्या ये बदलाव हो सकते हैं? प्रत्येक सुझाव के लिए अपने तर्क दीजिए। सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़नी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र को आम सभा को विश्व संसद के रूप में काम करना चाहिए। जिसमें सदस्य देशों में प्रतिनिधिों की संख्या उस देश की आबादी के आधार पर तय हों। ये प्रतिनिधि एक विश्व सरकार का चुनाव करें।
अलग-अलग देश अपनी सेना नहीं रखें। विभिन्न राष्ट्रों के बीच टकराव की स्थिति में शांति कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र अपने कार्य दल रखे।
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख का चुनाव दुनिया भर के लोग प्रत्यक्ष मतदान से करें।
उत्तर-
समय बदलता है तथा समय के साथ परिवर्तन भी होने चाहिए। सुरक्षा परिषद् में बेहतर प्रतिनिधित्व के लिए तथा उसके प्रभावकारी कार्य-संचालन के लिए उसके स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ायी जानी चाहिए अथवा सुरक्षा परिषद् की रचना व कार्य प्रणाली मे फेर-बदल होना चाहिए। महासभा को विश्व संसद के रूप में करना चाहिए तथा उसमें आनुपातिक आधार पर प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यदि संयुक्त राष्ट्र के पास अपनी सेना हो, तो शांति स्थापना में काफी सहायता हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रपति की व्यवस्था हो सकती हैं तथा चुने हुए सदस्य उसका चुनाव कर सकते हैं।

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प्रश्न 41.
क्या हम वैश्विक लोकतंत्र की ओर अग्रसर हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
यह सही है कि लोकतंत्र का विस्तार हुआ है तथा विस्तार भी हो रहा है, यद्यपि कहीं-कहीं अलोकतंत्र के उदाहरण भी मिलते हैं। राष्ट्रों में लोकतंत्र का विस्तार हुआ है। परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं में लोकतंत्र के विस्तार में कुछेक कठिनाइयाँ स्पष्ट दिखायी दे रही हैं।

  • आज संयुक्त राष्ट्र संघ के 192 सदस्य हैं। यह – एक विश्व संस्था है। यह सभी महासभा के सदस्य भी हैं। क्योंकि यह प्रभुसत्ता सम्पन्न राष्ट्रों की संस्था है, इसमें प्रत्येक देश दूसरे देश के समान है; प्रत्येक सदस्य राज्य को एक मत प्राप्त होता है। दूसरे सदस्य राज्य के समान। वस्तुतः आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अभाव में इस तथ्य को पूर्णतयः लोकतांत्रिक नहीं कहा जा सकता।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् एक कार्यपालिका जैसी है। इसके कुल 15 सदस्य हैं 5 : स्थायी तथा 10 अस्थायी। 5 स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन चीन मे प्रत्येक को वीटो शक्ति प्राप्त है। दूसरे शब्दों में सुरक्षा परिषद् के सभी सदस्य बराबर नहीं हैं। यह बात भी अपने आप मे लोकतांत्रिक नहीं है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा निधि के 173 सदस्य एक-दूसरे के समान नहीं हैं प्रत्येक देश को मिलने वाला धन इस तथ्य पर तोला जाता है कि उस देश ने कितना वित्तीय योगदान दिया है। जी 8 के देशों को अपंखाकृत अधिक-अधिकार प्राप्त हैं।
  • विश्व व्यापार केंद्र में भले ही सभी देश एक-दूसरे के बराबर हों, परन्तु वास्तविक निर्णय पहले ही अनुपाचिक बैठकों में बड़े-बड़े देशों द्वारा ले लिए जाते हैं। यह तथ्य भी अन्तर्राष्ट्रिय स्तर पर लोकतांत्रिक प्रवृत्ति को धक्का पहुँचा रहा है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों को उपयुक्त शब्दों से भरें।

(i) 1973 में पदमुक्त चिले का नेता था…..। (आयेंदे, पिनोशे)
(ii) कालामा ………….से हजारों मील दूर तक स्थान (शिकागो, संटयागो)
(iii) 1980 के दशक मे पोलैण्ड के मजदूर संगठन के नेता का ना………था। (वालेशा, त्युक्मवर्ग)
(iv) फ्रांसीसी क्रांति की घटना…….में हुई थी। (1776, 1789)
(v) सालाजार…………..का एक तानाशाह था। (पुर्तगाल, म्यांमार)
(vi) सूची को…………में नोबेल पुरस्कार मिला था। (अर्थशास्त्र में, शांति)
उत्तर-
(i) आयोंदे,
(ii) संटयागों,
(iii) वालेशा,
(iv) 1789,
(v) पुर्तगाल,
(v) शान्ति।

प्रश्न 2. निम्नलिखित वाक्यों में सही (√) च गलत (x) का चयन कीजिए।

(i) रूस लोकतंत्र-प्रोत्साहन कार्यों में लगा हुआ है।
(ii) म्यांमार बर्मा का बदला हुआ नाम हैं।
(iii) गोल्ड कोस्ट को नामीबिया कहा जाता है।
(iv) सालाजार पुर्तगाल का तानाशाह था।
(v) पोलैण्ड के एक लोकप्रिय/निर्वाचित राष्ट्रपति का नाम था पिनोशे।
(vi) लोकतंत्र सरकार की एक प्रणाली है।
उत्तर-
(i) x,
(ii) √,
(iii) x,
(iv) √,
(v) x,
(vi) √,

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प्रश्न 3. निम्नलिखित विकल्पों में सही विकल्प का चयन कीजिए।

(i) आयेंदे के राजनीतिक दल का नाम था
(a) सोलिडेरिटी
(b) पापुलर युनिटी
(c) यूनाइटिड वर्कर्स पार्टी
उत्तर-
(b) पापुलर युनिटी

(ii) म्यांमार को कभी कहा जाता था –
(a) हांग-काग
(b) बर्मा
(c) लाओस
(d) इन्डोनेशिया
उत्तर-
(b) बर्मा

(iii) निम्नलिखित देश लोकतंत्र से अलोकतंत्र में परिवर्तित हुआ था.
(a) अमेरिका
(b) चिले
(c) इंग्लैंड
(d) फ्रांस
उत्तर-
(b) चिले

(iv) वालेश 1990 में निम्नलिखित देश का राष्ट्रपति चुना गया था
(a) चिले
(b) पोलैण्ड
(c) पुर्तगाल
(d) म्यांमार
उत्तर-
(b) पोलैण्ड

(v). वर्ल्ड ट्रेड संस्था का सम्बन्ध निम्नलिखित से हैं
(a) यातायात ,
(b) व्यापार
(c) टेलीविजन
(d) ट्रैफिक
उत्तर-
(b) व्यापार

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(vi) निम्नलिखित जी-8 का सदस्य नहीं है
(a) इटली
(b) स्वीडन
(c) जापान
(d) कानाडा।
उत्तर-
(b) स्वीडन

समकालीन विश्व में लोकतंत्र Class 9 HBSE Notes in Hindi

अध्याय का सार

लोकतंत्र में चुनावों का होना अनिवार्य होता है। लोग अपने द्वारा चुनावों के माध्यम से सरकार का गठन करते हैं। लोकतंत्र में लोगों को स्वतंत्रताएँ प्राप्त होता हैं : भाषण की, अभिव्यक्ति की , विचार लिखने की। ऐसी व्यवस्था में लोग अपने आपकों समुदायों व संगठनों में भी एकत्रित कर सकते हैं।

इस अध्याय में लोकतंत्र से जुड़े दो देशों का वर्णन किया गया है। एक देश चिले में लोकतंत्र द्वारा संगठित सरकार जिसके राष्ट्रपति सल्वाडो आयेंदे थे, उन्हें सैनिक तख्ता पलट में पिनोशे ने हटा दिया तथा इस प्रक्रिया में उसकी हत्या कर दी गयी। दूसरा किस्सा पोलैंड का है जहां एक दलीय साम्यवादी दल की सरकार, जो तानाशाही की प्रतीक थी, उसके एक मजदूर नेता लेक वालेशा ने लोकतंत्रीय सरकार की रचना की थी एक किस्सा लोकतंत्र से अलोकतंत्र का तथा दूसरा किस्सा अलोकतंत्र से लोकतंत्र का।

20वीं शताब्दी ऐसे दौर का प्रतीक है जहाँ अनेकों देशों में लोकतंत्र की स्थापना की गयी तथा अनेक अन्य देशों मे लोकतंत्रीय व्यवस्था को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1945 से 1985 तक जिन अफ्रीकी देशों को विदेशी ताकतों से स्वाधीनता मिली थी, थे: नाइजर (1960) नाइजीरिया (1963), चाड (1960)। इस बीच एशियायी देश जो स्वतंत्र हुए, वे थे: भारत (1947), इन्डोनेशिया, सिंगापुर (1965) 1980 से 2004 के बीच स्वाधीन होने वाले यूरोपीय देशों में चैक गणराज्य (1993), सलोवेनिया (1991-92) स्लोवाकिया (1993) आदि आदि। इस दौरान विश्व में अलोकतंत्रीय सरकारें भी कहीं-कहीं स्थापित थीं : चिले (1973-1989) बोलिविया .(1963-64) पेरू (1969)।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद की घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि संसार के अनेक देशों में लोकतंत्र का प्रसार हुआ है, यद्यपि यह प्रसार एक जैसा नहीं हुआ है। 1945 से अब तक संसार में लोकतांत्रिक व अलोकतांत्रिक सरकारें दोनों ही देखने को मिलती हैं।

लोकतंत्र का आगमन एकदम नहीं हुआ है। लोकतंत्र के लिए लोगों ने त्याग व कष्ट सहे हैं। इस संदर्भ में क्रांतियों का वर्णन किया जा सकता है: फ्रांसीसी क्रांति (1789) तथा उससे पूर्व अमेरिका का स्वतंत्रता संग्राम आदि का उल्लेख किया जा सकता है। अनेक एशियायी व अफ्रीकी देशों में मुक्ति आन्दोलनों के बाद ही स्वाधीनता प्राप्त हुई है। लोकतंत्र के आगमन के साथ मताधिकार बढ़ा है। उत्तरदायी सरकारों की स्थापना हुई है। लोगों को अधिकारों व स्वतंत्रताओं का आश्वासन मिला है, चुनाव स्वतंत्र, निरपेक्ष तथा सामयिक हुए हैं। यह सही है कि कहीं-कहीं लोकतंत्रीय व्यवस्थाएँ अलोकतंत्रीय व्यवस्थाओं में परिवर्तित हुई है। पुर्तगाल में सालाजार का शासन, म्यांमार में सैनिक व्यवस्था, पाकिस्तान में सैनिक-सत्ता, घाना में सैनिकों का राज आदि ऐसे उदाहरण हैं।

कुछ बड़े देशों ने, जिनमें अमेरिका उल्लेखनीय है, अन्य में लोकतंत्र थोपने के प्रयास किए हैं। ऐसे मामलों में लोकतंत्र को तुरन्त सफलता तो मिल जाती है, परन्त दीर्घकालीन समय में लोकतंत्रीय व्यवस्था में चुनौतियों पनप उठती हैं।

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लोकतंत्र के आगमन से एक नयी बात यह है कि जहाँ राष्ट्रों के जीवन में लोकतंत्र का आगमन हुआ है, वहाँ अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर लोकतंत्रीय मूल्यों को क्षति पहुँची है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में कुछ देशों को वीटो अधिकार तथा अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा निधि में सदस्यों को एक प्रकार की सुविधाओं का न होना अलोकतंत्रीय प्रवृतियाँ हैं।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

प्रश्न 1.
पर्यावरणीय रसायन शास्त्र को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरणीय रसायन शास्त्र, विज्ञान की वह शाखा है जिसमें हम पर्यावरण में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों का अध्ययन करते हैं। इसमें हमारे चारों ओर का परिवेश सम्मिलित होता है; जैसे-वायु, जल, मिट्टी, वन, सूर्य का प्रकाश आदि। व्यापक रूप से, पर्यावरण के तीन प्रमुख घटक हैं-

  • अजैविक घटक (Abiotic or Non-living components) – स्थलमण्डल, जलमण्डल तथा वायुमण्डल अजैविक घटक कहलाते हैं।
  • जैविक घटक (Biotic or Living components)-पर्यावरण के जैविक घटक पादप तथा जन्तु हैं। इनमें मनुष्य भी सम्मिलित है।
  • ऊर्जा घटक (Energy components)-पर्यावरण के ऊर्जा घटक में सौर ऊर्जा, भू-रासायनिक ऊर्जा, ताप-रासायनिक ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा तथा नाभिकीय ऊर्जा सम्मिलित हैं। ये ऊर्जाएँ विभिन्न जीवों को जीवित रखने के लिए अति आवश्यक हैं।

प्रश्न 2.
क्षोभमण्डलीय प्रदूषण को लगभग 100 शब्दों में समझाइए।
उत्तर:
क्षोभमण्डल भूमि से ऊपरी वायु का क्षेत्र होता है, जो पृथ्वी को घेरे रहता है। वायु में उपस्थित अवांछनीय ठोस तथा गैस कणों के कारण क्षोभमण्डलीय प्रदूषण होता है। वायु का क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र की मुख्य प्रदूषक वस्तुयें निम्न होती हैं-

(i) विघाक्त गैसें (Toxic Gases) – बढ़ते हुए औद्योगीकरण तथा बढ़ते हुए वाहनों के कारण क्षोभमण्डल में उपस्थित वायु में विषाक्त गैसें विसरित (Diffuse) हो जाती हैं। इन गैसों में वाहनों से उत्सर्जित CO, N2O, NO, SO2, SO3, H2S, ऐल्केन्स प्रदूषण का प्रमुख कारण होती हैं। इसके अतिरिक्त कीटनाशक एवं सधूम कारकों (Fumigents) का प्रभाव भी क्षोभमण्डल पर पड़ रहा है तथा वह दिन-प्रतिदिन अधिक प्रदूषित होता जा रहा है।

(ii) धूल कण (Sand Particles) – तीव्र गति से चलने वाले वाहन, वायु इत्यादि के साथ धूल, रेत आदि के कोलॉइडी कण क्षोभ मण्डल को प्रदूषित करते हैं। औद्योगिक अपशिष्ट के कण, राख, सीमेण्ट, सीसा इत्यादि के महीन कण भी क्षोभमण्डल को प्रदूषित करते हैं। अपशिष्ट प्रबन्धन द्वारा इसे नियन्त्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
कार्बन डाईऑक्साइड अपेक्षा कार्बन मोनो ऑक्साइड अधिक खतरनाक क्यों है? समझाइए।
उत्तर:
CO2 की अपेक्षा CO ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह ऑक्सीजन की अपेक्षा अधिक प्रबलता से हीमोग्लोबिन के साथ संयुक्त होकर स्थायी संकुल बनाती है। इसके द्वारा कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन बनता है जो ऑक्सीहीमोग्लोबिन की अपेक्षा 300 गुना अधिक स्थायी है। यदि रक्त में कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन की मात्रा 3 – 4% तक पहुँच जाये तो रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है।

ऑक्सीजन की कमी से सिरदर्द, नेत्र दृष्टि में क्षीणता, तंत्रकीय आवेश में न्यूनता, हृदयवाहिका में तन्त्र अवस्था हो जाती है। CO की 1300 ppm की सान्द्रता प्राण घातक होती है। जबकि CO2 केवल वायुमण्डल की ताप वृद्धि के लिए उत्तरदायम है. वह हीमोग्लोबिन के साथ क्रिया नहीं करती है।

प्रश्न 4.
ग्रीन हाउस प्रभाव के लिये कौनसी गैसें उत्तरदायी हैं?
उत्तर:
ग्रीन हाउस-प्रभाव के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, मेथेन, ओजोन, क्लोरोफ्लुओरो कार्बन यौगिक तथा जलवाष्प उत्तरदायी होती हैं। ये गैसें वायुमण्डल में विकिरित सौर-ऊर्जा की कुछ मात्रा अवशोषित करके भूमण्डलीय ताप बढ़ा देती हैं।

प्रश्न 5.
अम्ल वर्षा मूर्तियों तथा स्मारकों को कैसे दुष्प्रभावित करती है ?
उत्तर:
अम्ल वर्षा में वायुमण्डल से पृथ्वी की सतह पर अम्ल निक्षेपित हो जाता है। अम्लीय प्रकृति के नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड वायुमण्डल में ठोस कणों के साथ हवा में बहकर या तो ठोस रूप में अथवा जल में द्रव रूप में कुहासे से या हिम की भाँति निक्षेपित होते हैं। नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड ऑक्सीकरण के पश्चात् जल के साथ अभिक्रिया करके अम्ल वर्षा में प्रमुख योगदान देते हैं, क्योंकि प्रदूषित वायु में सामान्यतया कणिकीय द्रव्य उपस्थित होते हैं जो ऑक्सीकरण को उत्प्रेरित करते हैं-

2SO2(g) + O2(g) + 2H2O(l) → 2H2SO4(aq)
4NO2(g) + O2(g) + 2H2O(l) → 4HNO3(aq)

अम्लवर्षा पत्थर एवं धातुओं से बनी संरचनाओं; जैसे- मूर्तियों तथा स्मारकों को नष्ट करती है। यह संगमरमर (CaCO3) से अग्रवत् अभिक्रिया करती है-

CaCO3 + H2SO4 → CaSO4 + H2O + CO2
संगमरमर
CaCO3 + 2HNO3 → Ca(NO3)2 + H2O + CO2

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प्रश्न 6.
धूम्र कोहरा क्या है? सामान्य धूम्र कोहरा प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरा से कैसे भिन्न है?
उत्तर:
धूम-कोहरा-यह धूम एवं कोहरे से मिलकर बना है। यह दो प्रकार का होता है।

सामान्य धूम्न कोहरा: यह धूम्र, कोहरे एवं SO2 का मिश्रण है। रासायनिक रूप में ये एक अपचायक मिश्रण है। इसे अपचायक धूम्र कोहरा भी कहते है।

प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरा : यह उष्ण, शुष्क एवं साफ धूपमयी जलवायु में होता है। यह स्वचालित वाहनों तथा कारखानों से निकलने वाले नाइट्रोजन के ऑक्साइडों तथा हाइड्रोकार्बनों पर सूर्य के प्रकाश की क्रिया के कारण उत्पन्न होता आक्यीकारक है इ्रांक द्यमें ऑक्षीकारा से चै की जत्ला शम्ला त्रो कहते है|

प्रश्न 7.
प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरे के निर्माण के दौराम होने वाली अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरे के निर्माण के दौरांन होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 Img 1

प्रश्न 8.
प्रकाश रासायनिक धूम्र कोहरे के दुष्परिणाम क्या हैं? इन्हें कैसे नियन्त्रित किया जा सकता है ?
उत्तर:
प्रकाश रासायनिक धूम्र का निर्माण सामान्यतः विषैली गैसों के कारण होता है। इनका सामान्य घटक हानिकारक गैसों का उच्च आनुपातिक मिश्रण होता है, जिसमें NO, NO2, O3, CH2 = CH-CHO, HCHO, ऐसीटिल नाइट्रेट इत्यादि होते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 Img 2
जब मनुष्य इन्हें वायु के साथ ग्रहण करता है तो यह मानव स्वास्थ्य पर गम्भीर प्रभाव उत्पन्न करते हैं। इन गैसों के कारण खाँसी, गले की तकलीफ, फेफड़ों की तकलीफ, सिरदर्द, आधासीसी, उच्च रक्तचाप, मिर्गी एवं दमा जैसे रोग होना आम बात है। प्रकाश रासायनिक कुहरे के परिणामस्वरूप रबर में दरार उत्पन्न हो जाती है। यह पौधों की वृद्धि पर भी कुप्रभाव डालता है तथा पौधों की वृद्धि को रोकता है।

मार्बल पत्थर पर प्रभाव, धातुओं (धातुओं के तारों पर) तथा मूर्तियों एवं भवनों के रंगों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है तथा उनके रंग धीरे-धीरे हल्के एवं मंद हो जाते हैं। सारांश में यह कहा जा सकता है कि प्रकाश रासायनिक कोहरे का व सजीव एवं निर्जीव तंत्रों पर क्षयकारी होता है।

नियन्त्रण (Control) – प्रकाश रासायनिक धूम्र का प्राथमिक कारण हानिकारक गैसें हैं। यदि वायुमण्डल में औद्योगिक क्षेत्रों से अथवा वाहनों से निकलने वाले धुएँ पर नियन्त्रण किया जाए तो उपरोक्त समस्याओं से बचा जा सकता है। महानगरों में यूरो मानक Uro-4 का उत्सर्जन लागू किया गया है, जिससे कुछ हद तक NO, SO2 इत्यादि की बढ़ती मात्रा पर नियंत्रण किया गया है।

प्रश्न 9.
क्षोभमण्डल पर ओजोन परत के क्षय में होने वाली अभिक्रिया कौन-सी है।
उत्तर:
क्षोभमण्डल पर ओजोन परत के क्षय में होने वाली अभिक्रियाएँ-कार्बन यौगिक, हैलोजेन, क्लोरोफॉर्म, NO आदि के बढ़ते हुए उपयोग के कारण वायुमण्डल में इन सभो पदार्थों की अधिकता होती जा रही है। यही प्रदूषक ओजोन परत के अपक्षय का मुख्य कारण हैं। वायुमण्डल में लम्बे समय तक पाए जाने के कारण, ये यौगिक सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों द्वारा विघटित हो जाते हैं। विघटन से बनने वाले उत्पाद ओजोन परत को नष्ट करते हैं।

ओजोन परत के क्षय के लिए क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन (CFCs) गैसें सर्वाधिक उत्तरदायी हैं। क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन वस्तुतः रेफ्रीजरेटरों, वातानुकूल संयन्त्रों, फोम निर्माण, सौन्दर्य प्रसाधन स्प्रे आदि में प्रयोग किया जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 Img 3
अत: उपर्युक्त अभिक्रियाओं से स्पष्ट है कि क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन द्वारा उत्पादित एक क्लोरीन मूलक ओजोन के कई अणुओं को नष्ट कर देता है।
सुपरसोनिक विमानों द्वारा निकली नाइट्रिक ऑक्साइड ओजोन परत में पहुँचकर उसे नष्ट करती है।
NO + O3 → NO2 + O2

प्रश्न 10.
ओजोन छिद्र से आप क्या समझते हैं? इसके परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
ओजोन छिद्र (Ozone hole)-हाइड्रोकार्बन्स तथा फ्रेऑन्स अथवा गैसीय प्लास्टिक अवशिष्टों के वायुमण्डल में ओजोन से क्रिया करके उसकी परत को पतला कर देना ओजोन छिद्र बनना कहलाता है। ओजोन छिद्र बनने के कारण पृथ्वी के ऊपर ओजोन की रक्षक परत सूर्य से आने वाले घातक पराबैंगनी विकिरण को पूर्ण रूप से नहीं रोक पा रही है। इस कारण पृथ्वी के तापमान में निरन्तर वृद्धि हो रही है।

ओजोन परत अपक्षय का जीवन पर प्रभाव-ओजोन परत पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणियों के लिए एक चादर का कार्य करती है। सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी विकिरण यदि सीधे पृथ्वी तक पहुँचती हैं, तो त्वचा केंसर जैसा भयानक रोग उत्पन्न हो जायेगा। इसके साथ-साथ आनुवांशिक गुणों में भी परिवर्तन आ जाएगा। पौधों में प्रकार संश्लेषण की दर कम हो जायेगी। पराबेंगनी विकिणों के कारण मनुष्य में से हिस्टेमिन नामक रसायन निकलता है। जिसके कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

प्रश्न 11.
जल प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं? समझाइये। उत्तर-जल में प्रदूषण उत्पन्न करने वाले मुख्य प्रदूषक तथा उनके स्रोत निम्नलिखित माने गये हैं
उत्तर:

प्रदूषणस्रोत/कारण
(i) सूक्ष्म जीवघरेलू सीवेज से
(ii) कार्बनिक अपशिष्टघरेलू सीवेज, पशु अपशिष्ट, सड़े हुए मृत पशु तथा पौधे, खाद्य संसाधन, कारखानों से विसर्जन से
(iii) पादप पोषकरासायनिक उर्वरक से
(iv) विषाक्त भारी वस्तुउद्योग तथा रसायन कारखानों से कीटों, कवक तथा खरपतवार को नष्ट करने के लिये प्रयुक्त रसायन से
(v) पीड़कनाशीयूरेनियम युक्त खनिजों के खनन से
(vi) रेडियोधर्मी पदार्थस्रोत/कारण

यदपि वर्गौकृत सभी प्रदूषण्क जल के लिए घातक हैं। परन्तु इनमें सबसे अधिक घातक प्रदूषक रेड्वियोधर्मीं पदार्थ है, जो बिकसित देशों में गम्भीर समस्या उत्पन्न करते हैं। भारत जैसे विकसित देश में रासायनिक प्रदूषक, जल पर तीव्र प्रभाव डाल रहे हैं। नदियों के किनारे स्थित चमड़ा उद्योग, काँच उद्योग, वस्त्र उच्योग, कागज उद्योग, प्लास्टिक उद्योग, रंजक उदोग, उर्वरक उधोग, पेय (Beverage) उद्योग इत्यादि जल प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं। जल का सबसे प्रमुख गुण यह है कि वह सार्वभौमिक विलायक है। अतः यह आसानी से प्रदूषित हो जाता है।

प्रश्न 12.
क्या आपने अपने क्षेत्र में जल प्रदूषण देखा है। इसे नियन्त्रित करने के कौन-से उपाय हैं?
उत्तर:
हाँ। हमारे क्षेत्र में जल प्रदूषिता हो रहा है। जल के प्रदूषित होने की जाँच हम स्वयं कर सकते हैं। इसके लिए हम स्थानीय झोतों का निरीक्षण कर सकते हैं। जैसे कि नदी, तालाब, कुणँ, झील आदि का पानी अप्रदूषित या आंशिक प्रद्धित या सामान्य प्रद्षित या अत्यधिक प्रद्षित हैं, इसकी जानकारी हम pH के द्वारा ज्ञात कर सकते है।

जल प्रदूषण नियंत्रण हेतु उपाय-जल प्रदूषण को नियँत्रित करने के लिए अग्रलिखित उपाय किए जाने चाहिए-

  • उछोगों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बिना उपचार के नदी में नही बहाना चाहिए।
  • घरेलू बहिंसाव एवं सीवेज में बहने वाले अपशिष्ट पदार्थाँ को उपचारित करने के बाद ही जल में ब्रेड़ना चाहिए।
  • औधोगिक क्षेत्र, आवादी क्षेत्रों से दूर होने चाहिए।
  • साजुन और अपमार्जकीं (डिटरजेंट) का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।
  • पीने के पानी की पाइ्दप लाइन, सीखेज लाइन से काफी दूर होनी चाहिए।
  • मरे हुए जानवरों के शरीर को तालाब या नदी में नहीं डालना चाहिए।
  • जलाशय में कछुआ, मछली, घोंघा आदि की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए जिससे कि जलाशय को साफ रखा जा सके।
  • उर्वरकों एवं रसायनों का प्रयोग कृषि में कम से कम किया जाना चाहिए।
  • जलाशय में पशुओं को नहलाना नहीं चाहिए।
  • जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा को बनाए रखने के लिए वनस्पति को जल में बढ़ने से रोकना चाहिए।
  • नए उद्योग लगाने की दशा में, स्थापना के समय ही जल उपचार संयंत्र अवश्य लगाना चाहिए।
  • समुद्री जल को प्रदूषण से बचाने के लिए उसमें खनिज तेलों को फैलने से रोकना चाहिए।
  • जल प्रदूषण के नियंत्रण के सम्बन्ध में सरकार द्वारा मानक मापदण्ड निर्धारित करके उनको लागू करना चाहिए।
  • लोगों को जल प्रदूषण रोकने के लिए जन चेतना जाग्रत करना चाहिए।
    उपर्युक्त सभी जल-प्रदूषण नियंत्रण के कारगर उपाय हैं।

प्रश्न 13.
आप अपने ‘जैव रासायनिक ऑक्सीजन माँग’ (BOD) से क्या समझते हैं?
उत्तर:
जल के एक नमूने के निश्चित आयतन में उपस्थित कार्बनिक पदार्थ को विखण्डित करने के लिए जीवाणु द्वारा आवश्यक जॉक्सीजन को ‘जैवरासायनिक ऑक्सीजन माँग (BOD)’ कहा जाता है। अतः जल में BOD की मात्रा कार्बनिक पदार्थ को जैवीय रूप में विखण्डित करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा होती है। स्वच्छ जल की BOD का मान 5 ppm से कम होता है, जबकि अत्यधिक प्रदूषित जल में यह 17 ppm या इससे अधिक होता है।

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प्रश्न 14.
क्या आपने आस-पास के क्षेत्र में भूमि प्रदूषण देखा है? आप भूमि प्रदूषण को नियन्त्रित करने के लिये क्या प्रयास करेंगे ?
उत्तर:
हाँ, हमने अपने आसपास के क्षेत्र में भूमि-प्रदूषण देखा है। भूमि प्रदूषण की रोकथाम के उपाय-

  1. औद्योगिक संस्थान के कचरे का उपचार किये बिना निष्कासित किये जाने पर दण्ड का प्रावधान होना चाहिए एवं घरेलू कचरे का प्रबन्धन भी भली प्रकार होना चाहिये।
  2. कृषि में स्थिर प्रकृति के रसायनों के उपयोग पर रोक होनी चाहिए। इसके स्थान पर जैव उर्वरक व जैविक कीटनाशी के प्रयोग पर बदल देना चाहिए।
  3. अनियन्त्रित उत्खनन पर पाबन्दी लगनी चाहिए।
  4. भूमि अपरदन (soil erosion) रोकने के लिए सधन वृक्षारोपण होना चाहिए।
  5. अपमार्जकों का प्रयोग कम करना चाहिए तथा प्रदूषित जल सिंचाई के लिये उपयोग नहीं किया जाना चाहिये।
  6. भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगानी चाहिये।
  7. अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण करना चाहिये।
  8. जनता को मृदा प्रदूषण से होने वाले नुकसान के बारे में अंखबार, टेलीविजन, मीडिया, नाटकों द्वारा जागरूक करना चाहिये।

प्रश्न 15.
पीडकनाशी तथा शाकनाशी से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइये ।
उत्तर:
पीडकनाशी-द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले अनेक रसायनों जैसे निकोटीन का प्रयोग अनेक फसलों के लिए पीडक-नियन्त्रण के रूप में किया जाता था। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय मलेरिया तथा अन्य कीटजनित रोगों के नियन्त्रण में D.D.T बहुत उपयोगी पाया गया। युद्ध के पश्चात् D.D.T का प्रयोग कृषि में कीट, सेर्डेंट, खर-पतवार तथा फसलों के अनेक रोगों के नियन्त्रण में किया जाने लगा परन्तु बाद में यह प्रतिबन्धित किया गया।
मूल रूप से पीडकनाशी विषैले रसायन हैं जो पारिस्थितिकी प्रतिघाती भी हैं। इनका प्रयोग फसलों को हानिकारक कीटों तथा रोगों से बचाने हेतु करते हैं।

उदाहरणार्थ डाइऐल्ड्रीन, बी.एच.सी. ऐल्ड़ीन आदि। ये जल में अविलेय तथा अजैवनिम्नीकरणीय होते हैं। ये उच्च प्रभाव वाले जीव-विष भोजन शृंखला द्वारा निम्नपोषी स्तर से उच्चपोषी स्तर तक स्थानान्तरित होते हैं। समय के साथ-साथ उच्व प्राणियों में जीव-विषों की सान्द्रता बढ़ जाती है। यह अधिक सान्द्रता उपापचयी तथा शरीर क्रियात्मक अव्यवस्था का कारण बन जाती है। उच्च स्थायित्व वाले क्लोरीनीकृत कार्बनिक जीव-विष के प्रत्युत्तर में निम्न स्थायित्व अथवा अधिक जैव निम्नीकरणीय उत्पादों जैसेआर्गेनों फोंस्फेट्स तथा काबोनेट्स को प्रचलन में लाया गया परन्तु ये और अधिक हानिकारक होते हैं।

शाकनाशी-वे रसायन जो खरपतवार का नाश करने के लिए प्रयोग किये जाते हैं। उन्हें शाकनाशी कहते हैं। उदाहरण-सोडियम क्लोरेट, सोडियम आर्सिनेट, पोटैशियम आर्सिनेट आदि। ये स्तनधारियों के लिए विषैले होते हैं परन्तु कार्बक्लोराइड के समान स्थायी नहीं होते तथा कुछ समय पश्चात् अपघटित हो जाते हैं।

प्रश्न 16.
हरित रसायन से आप क्या समझते हैं? यह वातावरणीय प्रदूषण को रोकने में किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर:
हरित रसायन (Green Chemistry)-विषैले रसायनों की मात्रा वायुमण्डल में कम से कम करने या फैलने से रोकने के लिए एक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है, जिसे हरित रसायन कहते हैं। हरित रसायन के द्वारा अभिक्रियाओं का प्रारूप तैयार करके उस अभिक्रिया के अभिकर्मकों एवं उत्पादों के गुणों व प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। रासायनिक अभिक्रिया में उन पदार्थों तथा विलायकों का प्रयोग किया जाना चाहिए जो मनुष्य एवं पर्यावरण के लिए हानिकारक न हों।

मानव के लिए उपयोग – हरित रसायन मानव के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई है। कृषि रसायनों के उत्पादन के लिए अब विषैले पदार्थों जैसे-सायनाइड, फॉर्मेल्डिहाइड आदि की आवश्यकता नहीं होती है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए वाहनों में पेट्रोल, डीजल के स्थान पर हौलियम आदि का प्रयोग किए जाने पर शोधकार्य किए जा रहे हैं।

प्रदूषण घटाने में योगदान-दरित रसायन एक नया क्षेत्र अबश्य है, परन्तु इसके द्वारा प्रदूषण घटाने में कुछ विशेष उपलब्धियाँ हासिल की गई है। हरित रसायन के द्वारा किसी भी रासायनिक अभिक्रिया का प्रारूप तैयार करके उसमें प्रयुक्त रसायन एवं बनने वाले उत्पाद के गुणों एवं प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

रासायनिक अभिक्रियाओं को सूय्य के पराबैगनी प्रकाश, ध्वनि तरंगों एवं सुक्ष्म तरंगों की उपस्थिति में कराने पर सकारात्मक परिणाम सामने आए है। आजकल प्रतिजैविकों के निमांण में एन्जाइम का उपयोग उत्प्रेरक की तरह किया जा रहा है। हरित रसायन की मदद से कुछ ऐसे कार्बनिक विलायक बनाए गए हैं जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नह़ी हैं और न ही पर्यावरण में प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।

हरित रसायन के ही द्वारा SO2 को सल्फर में अपचयित कर वायु प्रदूषण कम करने की विधि तैयार की गई है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 14 Img 5
SO2 गैस के अवशोषण के लिए चूने के पत्थर का उपयोग उद्योगों में किया जा रहा है।
2CaCO3 + 2SO2 + O2 → 2CaSO4 + 2CO2

हरित रसायन के द्वारा जिओलाइट पर आधारित अपमार्जंकों का उपयोग किया जाता है जो कि प्रदूषण को कम करता है। आजकल फोम शीटों के पैकिंग के लिए क्लोरो-फ्लूओरो कार्बन के स्थान पर CO2 का उपयोग किया जा रहा है। मोटर वाहनों के द्वारा होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पेट्रोल, डीजल के स्थान पर हीलियम आदि के प्रयोग के लिए शोधकार्य किए जा रहे हैं।

कृषि रसायनों के निर्माण में ऐसी विधियाँ खोजी जा रही हैं, जिनमें विधले पदार्थ सायनाइड, फॉर्मेल्डिहाइड आदि की आवश्यकता नहीं पद्ती है। अतः हरित रसायन अभी सिर्फ एक शुरुआत है। इसके द्वारा अनेक शोध कार्य किए जा रहे हैं। कुछ ऐंसी तकनीकों का विकास किया जा रहा है जो प्रदूषण रोकने के लिए महत्वपूर्ण भुमिका अदा करेंगी।

प्रश्न 17.
क्या होता, जब भू-वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसें नहीं होतीं ? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
यदि भू-वायुमण्डल में ग्रीनहाउस गैसें न होतीं तो पृथ्वी का ताप घट जाता। पौधे प्रकाश-संश्लेषण नहीं कर पाते (यदि CO2 उपस्थिति नहीं होती)। पौधों की अनुपस्थिति में मानव-जीवन भी नहीं होता।

प्रश्न 18.
एक झील्ल में अचानक असंख्य मृत मछलियाँ तैरती हुई मिलीं। इसमें कोई विषाक्त पदार्थ नहीं था, परन्तु बहुतायत में पादप प्लवक पाए गए। मछलियों के मरने का कारण बताइए।
उत्तर:
जल में कार्बनिक द्रव्यों; जैसे-पत्तियों, घास, कूड़ा-करकट आदि की उपस्थिति के कारण पादप प्लवक विकसित हो जाते हैं। ये जल में घुलित ऑक्सीजन की अत्यधिक मात्रा का उपभोग कर लेते हैं जो जलीय जीवों; जैसे-मछली के जीवन हेतु अत्यन्त आवश्यक होती है। यदि जल में घुलित ऑक्सीजन की सान्द्रता 6 ppm से नीचे हो जाए तो मछलियों का विकास रूक जाता है।

जल में ऑक्सीजन या तो वातावरण या कई जलीय पौर्धों द्वारा दिन में प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रम से पहुँचती है। रात में प्रकाश-संश्लेषण रूक जाता है, परन्तु पौधे श्वसन करते हैं जिससे जल में घुलित ऑक्सीजन कम हो जाती है। घुलित ऑक्सीजन सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा कार्बनिक यौगिकों के ऑक्सीकरण में भी उपयोग में ली जाती है। इस प्रकार पादप प्लवकों तथा अन्य कारणों से जल में आँक्सीजन की कमी हो जाने के कारण मछलियाँ मृत पाई गई।

प्रश्न 19.
घरेलू अपशिष्ट किस प्रकार खाद के रूप में काम आ सकते हैं ?
उत्तर:
घरेलू अपशिष्ट में जैवनिम्नीकरण तथा अजैवनिम्नीकरण, दोनों घटकों का समावेश होता है। अपशिष्ट में से दोनों घटकों को छँटकर पृथक् कर लेते हैं। जैव अनिम्नीकरण पदार्थों; जैसे-प्लास्टिक, काँच, धातु छीलन आदि को पुनर्चक्रण के लिए भेज दिया जाता है। जैवुनिम्निकरण अपशिष्टों को खुले मैदानों में मिट्टी में दबा दिया जाता है। जैवनिम्नीकरण अपशिष्ट में कार्बनिक द्रव्य होते हैं जो कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित हो जाते हैं।

प्रश्न 20.
आपने अपने कृषि-क्षेत्र अथवा उद्यान में कम्पोस्ट खाद के लिए गड्डे बना रखे हैं। उत्तम कम्पोस्ट बनाने के लिए इस प्रक्रिया की व्याख्या दुर्गाध, मक्खियों तथा अपशिष्टों के चक्रीकरण के सन्दर्भ में कीजिए।
उत्तर:
यदि अपशिष्ट को कम्पोस्ट में परिवर्तित न किया जाए तो वह नालियों में चला जाता है। इसमें से कुछ मवेशियों द्वारा खा लिया जाता है। कम्पोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया दुर्गन्धपूर्ण होती है। इस पर मक्खियाँ उड़ती रहती हैं, इसे दुर्गन्ध तथा मक्खियों से बचाने के लिए मिट्टी से ढक दिया जाता है। अपशिष्ट के कम्पोस्ट खाद में परिवर्तन के पश्चात् इस पर डाली गई मिट्टी को हटा दिया जाता है तथा कम्पोस्ट खाद प्राप्त कर ली जाती है। यह खाद पौधों के लिए अत्यन्त उपयोगी होती है।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित स्पीशीज में प्रत्येक रेखांकित तत्व की ऑक्सीकरण संख्या का निर्धारण कीजिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 1
उत्तर:
(क) NaH2PO4 में माना कि P की ऑक्सीकरण संख्या x है।
Na H2 P O4
(+1) + 2 × (+1) + x + 4 × (- 2) = 0
या + 1 + 2 + x – 8 = 0
या x + 5 = 0
x = + 5

(ख) NaHSO4 में माना कि S की आ. सं. x है।
Na H SO4
+ 1 + 1 + x + 4 × (- 2) = 0
या + 2 + x – 8 = 0
या x – 6 = 0
∴ x = + 6

(ग) H4P2O7 में माना कि P की आ. सं. x है।
H4 P2 O7
4 × (+ 1) + 2 × x + 7 (- 2) = 0
या + 4 + 2x – 14 = 0
या 2x – 10 = 0
या 2x = +10
∴ x = \(\frac { 10 }{ 2 }\) = +5

(घ) K2MnO4 में माना कि Mn की आ. सं. x है
K2 Mn O4
2 × (+ 1) + x + 4 × (- 2) = 0
या + 2 + x – 8 = 0
या x – 6 = 0
∴ x = +6

(ङ) CaO2 में माना कि O की आ. सं. x है।
Ca O2
+ 2 + 2 × x = 0
या 2x = – 2
या x = \(\frac { -2 }{ 2 }\)
∴ x = -1

(च) NaBH4 में माना कि B की आ. सं. x है।
Na B H4
+ 1 + x + 4 × (-1) = 0
या + 1 + x – 4 = 0
या x – 3 = 0
∴ x = +3

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

(छ) H2S2O7 में माना कि S की आ. सं. x है।
H2 S2 O7
2 ×(+1) + 2 × x + 7 ×(- 2) = 0
या + 2 + 2x – 14 = 0
या 2x – 12 = 0
या 2x =+ 12
या x = \(\frac { +12 }{ 2 }\)
∴ x = +6

(ज) KAl(SO4)2.12H2O में माना S की आ. सं. x है।
K Al (SO4)2. 12H2O
+ 1 + 3 + 2[x + 4 (-2)] + 12 (2 × 1 + (-2) = 0
या 2x – 12 = 0
या 2x = + 12
या x = \(\frac { +12 }{ 2 }\)
x = +6

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के रेखांकित तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या क्या है तथा इन परिणामों को आप कैसे प्राप्त करते हैं ?
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 2
उत्तर:
(क) माना कि KI3 में I की ऑक्सीकरण संख्या x है।
K I3
(+1) + x × 3 = 0
या 3x = -1
∴ x = \(\frac { +1 }{ 3 }\)

स्पष्टीकरण-उपर्युक्त उदाहरण में आयोडीन की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक अर्थात् \(\left(-\frac{1}{3}\right)\) आयी है, जो कि सम्भव प्रतीत नहीं होती है। यदि हम \(\mathrm{I}_3^{-}\) की संरचना पर विचार करें तो हम पायेंगे कि आयोडीन के दो परमाणु सहसंयोजक आबन्ध (I – I) के द्वारा जुड़े हुए हैं तथा आयोडीन आयन (I) इस अणु से उपसहसंयोजक बन्ध (I) के द्वारा जुड़ा हुआ है। [I – I ← I] इस प्रकार KI3 को हम निम्न रूप से प्रदर्शित कर सकते हैं-
K+[I – I ← I]
अब \(\mathrm{I}_3^{-}\) आयन में दो आयोडीन परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या शून्य एवं एक I आयन की ऑक्सीकरण संख्या -1 है। अतः \(\mathrm{I}_3^{-}\) आयन की औसत ऑक्सीकरण संख्या इस प्रकार आयेगी-
\(\frac{0+0+(-1)}{3}\) = \(-\frac{1}{3}\)

(ख) H2S4O6 में माना कि S की ऑक्सीकरण संख्या x है।
H2 S4 O6
2 × (+1) + 4 × x + 6 × (-2) = 0
या + 2 + 4 x – 12 = 0
या 4x – 10 = 0
या 4x = +10
या x = \(\frac { +10 }{ 4 }\)
∴ x = +\(\frac { 5 }{ 2 }\) या + 2.5

स्पष्टीकरण-यहाँ सल्फर की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक है। इस भिन्नात्मक मान को हम अम्ल की संरचना के द्वारा ही स्पष्ट कर सकते हैं। H2S4O6 की संरचना निम्न प्रकार है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 3
संरचना से स्पष्ट है कि दो मध्यवर्ती सल्फर परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या शून्य है जबकि सीमान्त स्थिति में स्थित सल्फर परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या +5 है।
अतः सल्फर की औसत ऑक्सीकरण संख्या
= \(\frac { 1 }{ 4 }\) [5 + 0 + 0 + 5] = \(\frac { 10 }{ 4 }\) = \(\frac { 5 }{ 2 }\)

(ग) Fe3O4 में माना कि Fe की ऑक्सीकरण संख्या x है।
Fe3 O4
3 × x + 4 × (-2) = 0
या 3x – 8 = 0
या 3x = +8
∴ = \(\frac { +8 }{ 3 }\)
स्पष्टीकरण- Fe3 O4 में Fe की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक है। इसका कारण है कि Fe3 O4 एक मिश्रित ऑक्साइड है। यह FeO तथा Fe2 O3 का सममोलर मिश्रण होता है।

FeO में Fe की ऑक्सीकरण संख्या +2 है जबकि Fe2 O3 में दोनों Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3 है। अतः
Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या
= \(\frac { 1 }{ 3 }\) [+ 2 + 3 + 3] = \(\frac { 8 }{ 3 }\)

(घ) माना कि CH3CH2OH में C की ऑक्सीकरण संख्या x है।
CH3 CH2 OH
x + 3 + x + 2 + (-2) + 1 = 0
या 2x + 4 = 0
या 2x = -4
या x = \(\frac { -4 }{ 2 }\)
x = -2

स्पष्टीकरण – अब हम CH3CH2OH में C1 तथा C2 परमाणुओं की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 4
C2 कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ जुड़ा है। ये हाइड्रोजन परमाणु कम वैद्युत ऋणात्मक होते हैं साथ ही यही C2 कार्बन परमाणु एक CH2OH समूह से भी जुड़ा हुआ है। यह समूह कार्बन से अधिक वैद्युत ॠणात्मक है। अतः C2 की ऑक्सीकरण संख्या = 3 × (+1) + x + 1 ×(-1) = 0; x = -2

C1 कार्बन परमाणु जैसा कि चित्र से स्पष्ट है कि, यह एक OH समूह से (जिसकी ऑक्सीकरण संख्या -1 है) तथा दो H परमाणु से (जिसकी ऑक्सीकरण संख्या +1) एवं एक CH3 समूह से (ऑक्सीकरण संख्या = +1) से जुड़ा है, अत:
C1 की ऑक्सीकरण संख्या =
1 × (+1) + x + 1 × (-2) + 1 ×(-1) = 0
या +1 + x – 2 – 1 = 0
∴ x = + 2
कार्बन की औसत ऑक्सीकरण संख्या
= \(\frac { 1 }{ 2 }\) [+2 + -2] = 0

प्रश्न 3.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अपचयोपचय अभिक्रियाओं के रूप में औचित्य स्थापित करने का प्रयास करें-
(क) CuO(s) +H2(g) → Cu(s) + H2O(g)
(ख) Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3 CO2(g)
(ग) 4BCl3(g) + 3LiAlH4(s) → 2 B2H6(g) + 3LiCl(g) + 3 AlCl3(s)
(घ) 2K(s) + F2(g) → 2K2F(s)
(ङ) 4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 5
उपर्युक्त अभिक्रिया में CuO से ऑक्सीजन निकल रही है और यह Cu में अपचयित हो रहा है, इसी के साथ-साथ Cu की ऑक्सीकरण संख्या +2 से 0 हो रही है अत: CuO, Cu में अपचयित हो रहा है। इसके साथ-साथ हाइड्रोजन से ऑक्सीजन जुड़ रही है और यह H2 से H2O में परिवर्तित हो रहा है, इसी के साथ-साथ हाइड्रोजन की आ. स. 0 से बढ़कर +1 हो रही है अत: इसका ऑक्सीकरण हो रहा है। इसलिए यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 6
यहाँ Fe की आ. सं. +3 से 0 में परिवर्तित हो रही है। अतः इसका अपचयन हो रहा है जबकि कार्बन की आ. सं. +2 से +4 में परिवर्तित हो रही है अतः इसका ऑक्सीकरण हो रहा है। चूंकि अभिक्रिया में ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों हो रहे हैं अतः यह एक अपचयोपचय अधिक्रिया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 7
चूंकि उपर्युक्त अभिक्रिया में आ. सं. में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा है अतः अपचयोपचय अभिक्रिया नहीं है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 8
उपर्युक्त अभिक्रिया में K की ऑक्सीकरण संख्या 0 से +1 हो रही है अतः इसका ऑक्सीकरण हो रहा है तथा F की ऑक्सीकरण संख्या 0 से -1 हो रही है अतः इसका अपचयन हो रहा है चूंकि यहाँ ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों हो रहे हैं। अतः यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 9
यहाँ ऑक्सीजन का अपचयन हो रहा है क्योंकि ऑक्सीकरण संख्या 0 से -2 में बदल रही है तथा नाइट्रोजन का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण संख्या -3 से +2 में परिवर्तित हो रही है। अतः यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है। है-

प्रश्न 4.
फ्लोरीन बर्फ से अभिक्रिया करके यह परिवर्तन लाती
H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g)
इस अभिक्रिया का अपचयोपचय औचित्य स्थापित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 10
उपर्युक्त अभिक्रिया में फ्लोरीन का अपचयन और ऑक्सीकरण दोनों हो रहा है। यह अपचयोपचय अभिक्रिया के असमानुपात प्रकार का उदाहरण है।

प्रश्न 5.
H2SO5, Cr2O72- तथा NO3 में सल्फर, क्रोमियम तथा नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना कीजिए। साथ ही इन यौगिकों की संरचना बताइए तथा इसमें हेत्वाभास (Fallacy) का स्पष्टीकरण कीजिए।
उत्तर:
(i) H2SO5 में सल्फर की आ. सं. :
H2 S O5
2 × (+1) + x + 5 × (-2) = 0
+2 + x – 10 = 0
x = +8
परन्तु सल्फर की आ. सं. यहाँ +8 गलत है क्योंकि सल्फर की अधिकतम आ. सं. +6 हो सकती है इससे अधिक नहीं। परन्तु यहाँ सल्फर की आ. सं. +8 इसलिए आयी है क्योंकि यहाँ ऑक्सीजन की आ. सं. को गलत लिखा गया है, यहाँ ऑक्सीजन परऑक्साइड के रूप में उपस्थित है जिसकी आ. सं. (-1) होगी।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 11

H2 SO2 O3
2 × (+1) + x + 2 × (-1) + 3 × (-2) = 0
या + 2 + x – 2 – 6 = 0
∴ x = +6
अत: सल्फर की आ. सं. +6 है।
(ii) Cr2O72- में क्रोमियम की आ. सं. :
Cr2O72-
2 × x + 7 × (-2) = – 2
या 2x – 14 = – 2
या 2x = +12
∴ x = +6
यह आ. संख्या सही है क्योंकि चित्र के अनुसार प्रत्येक ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या (-2) है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 12

(iii) NO3 में N की ऑक्सीकरण संख्या-
NO3
x + 3 ×(-2) = -1
या x – 6 = -1
x = +5
यह ऑक्सीकरण संख्या सही है क्योंकि प्रत्येक ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या का मान यहाँ -2 ही है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 13

प्रश्न 6.
निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए-
(क) मरकरी (II) क्लोराइड
(ख) निकिल (II) सल्फेट
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
(ङ) आयरन (III) सल्फेट
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड
उत्तर:
(क) HgCl2
(ख) NiSO4
(ग) SnO2
(घ) Tl2SO4
(ङ) Fe2(SO4)3
(च) Cr2O3

प्रश्न 7.
उन पदार्थों की सूची तैयार कीजिए जिनमें कार्बन की -4 से +4 तक तथा नाइट्रोजन -3 से +5 तक की ऑक्सीकरण अवस्था होती है।
उत्तर:
कार्बन की परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (-4 से +4 तक)
Table

प्रश्न 8.
अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइ- ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परऑक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों ?
उत्तर:
सल्फर डाइऑक्साइड SO2 तथा हाइड्रोजन परऑक्साइड (H2O2) में सल्फर तथा ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्रमश: +4 तथा -1 हैं। ये यौगिक रासायनिक अभिक्रियाओं में भाग लेने के दौरान अपनी ऑक्सीकरण संख्याएँ घटा या बढ़ा सकते हैं अर्थात् ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया कर सकते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 14
ओजोन (O3) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है, जबकि नाइट्रिक अम्ल में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था +5 है। चूँकि ये दोनों ऑक्सीकरण अवस्था में कमी तो प्रदर्शित कर सकते हैं, परन्तु वृद्धि नहीं कर सकते; अतः ये केवल ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करते है, अपचायक के रूप में नहीं।

प्रश्न 9.
इन अभिक्रियाओं को देखिए-
(क) 6CO2(g) + 6H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + 2O2(g)
बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है ?

(क) 6CO2(g) + 12H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + O2(g) + O2(g)
उपर्युक्त अपचयोपचय अभिक्रियाओं (क) तथा (ख) के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
उत्तर:
(क) 6CO2(g) + 6H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6O2(g)
उपर्युक्त समीकरण को असन्तुलित अवस्था में लिखते हैं-
CO2(g) + H2O(l) → C6H12O6(aq) + O2(g)
अब इस समीकरण को अर्द्ध-अभिक्रिया या आयन इलेक्ट्रॉन विधि से सन्तुलित करने पर-

पद 1. सर्वप्रथम सभी की आक्सीकरण संख्या लिखते हैं। अपचयन
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 15

पद 2. अब इन्हें ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया के रूप में लिखने पर,
(A) ऑक्सीकरण अर्द्ध अभिक्रिया-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 16
पद (a) ऑक्सीजन को सन्तुलित करने
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 17
पद (b) ऑक्सीकरण संख्या सन्तुलित करने पर,
2H2O → O2 + 4e
पद (c) हाइड्रोजन सन्तुलित करने पर,
2H2O → O2 + 4e + 4H+

(B) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 18
पद (a) कार्बन सन्तुलित करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 19
पद (b) ऑक्सीकरण संख्या सन्तुलित करने पर,
6CO2 + 24e → C6H12O6
पद (c) ऑक्सीजन संतुलित करने पर,
6CO2 + 24e → C6H12O6 + 6H2O
पद (d) हाइड्रोजन की संख्या संतुलित करने पर,
6CO2 + 24e + 24H+ → C6H12O6 + 6H2O

पद 3. अब सन्तुलित ऑक्सीकरण तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या सन्तुलित करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में 6 का गुणा करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 20
उपर्युक्त लिखी अपचयोपचय अभिक्रिया की अन्वेषण की विधि बताती है कि किस प्रकार इलेक्ट्रॉन त्यागे या स्रहण किये जाते हैं, तथा इसके साथ-साथ इस अभिक्रिया को संशोधित रूप में किस तरह लिखते हैं, यह भी बताती है।
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + 2O2(g)
इस समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा सन्तुलित करते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 21
सन्तुलित ऑक्सीकरण तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रियाएँ लिखकर उन्हें जोड़ने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 22

  • इस अभिक्रिया में O3 ऑक्सीकारक की भाँति तथा H2O2 अपचायक की भाँति कार्य करते हैं।
  • यदि दो समान परमाणुओं के मध्य एक उपसहसंयोजी आबन्ध उपस्थित होता है तो दाता परमापु +2 ऑक्सीकरण संख्या प्राप्त करता है तथा ग्राही -2 ऑक्सीकरण संख्या प्राप्त करता है।

इस प्रकार अभिदि के अन्बेषण की विधि स्पष्ट हो जाती है तथा इसे संशोधित रूप में लिखने का कारण भी स्पष्ट हो जाता है।

प्रश्न 10.
AgF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है। क्यों ?
उत्तर:
AgF2 वियोजित होकर Ag2+ तथा 2F देता है। Ag2+, अपचायक द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Ag+ में अपचयित हो जाता है।
Ag2+ + 6– → Ag+
Ag+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पूर्णतया भरे हुए d-कक्षकों के कारण स्थायी होता है।
Ag+(46) : 1s2, 2s2 2p6, 3s23p63d10, 4s24p64d10, 5s0
अतः AgF2 एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

प्रश्न 11.
“जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया सम्पन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है।” इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 23

प्रश्न 12.
इन प्रेक्षणों की अनुकूलता को कैसे समझायेंगे ?
(क) यद्यपि क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट तथा अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट दोनों ही ऑक्सीकारक हैं। फिर भी टॉलुईन से बेन्जोइक अम्ल बनाने के लिए हम ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में क्यों करते हैं? इस अभिक्रिया के लिए सन्तुलित अपचयोपचय समीकरण दीजिए।
(ख) क्लोराइड युक्त अकार्बनिक यौगिक में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गन्ध वाली HCl गैस प्राप्त होती है, परन्तु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों ?
उत्तर:
(क) उदासीन माध्यम में KMnO4 निम्नलिखित प्रकार से ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है-
MnO4 + 2H2O + 3e → MnO2 + 4OH
प्रयोगशाला में टॉलुईन को बेन्जोइक अम्ल में ऑक्सीकृत करने के लिए क्षारीय $\mathrm{KMnO}_4$ का प्रयोग किया जाता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 24
औद्योगिक निर्माण के दौरान ऐल्कोहॉलिक KMnO4 को प्रयोग करने के निम्नलिखित दो कारण हैं-

  • अभिक्रिया के दौरान क्षार (OH आयन स्वतः उत्पन्न हो जाता है; अतः क्षार मिलाने का अतिरिक्त व्यय नहीं होता।
  • एक कार्बनिक ध्रुवी विलायक, एथिल ऐल्कोहॉल, दोनों अभिकारकों, $\mathrm{KMnO}_4$ (इसकी ध्रुवी प्रकृति के कारण) तथा टॉलुईन (इसके कार्बनिक यौगिक होने के कारण) को मिश्रित करने में सहायता प्रदान क्रता है।

(ख) एक क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक; जैसे- NaCl, जब सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तब हाइड्रोजन क्लोराइड गैस उत्पन्न होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 25
ब्रोमाइड (जैसे- NaBr) की H2SO4 से अभिक्रिया पर भी HBr की वाष्प उत्पन्न होती है, परन्तु HBr के प्रबल अपचायक होने के कारण, यह सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकृत होकर ब्रोमीन की लाल वाष्प मुक्त करता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 26

प्रश्न 13.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए-

(क) 2AgBr(s) + C6H6O2(aq) → 2Ag(s) + 2HBr(aq) + C6H4O2(aq)
(ख) HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH(aq) → 2Ag(aq) + HCOO(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)
(ग) HCHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH(aq) → Cu2O(s) + HCOO(aq) + 3H2O(l)
(घ) N2H4(l) + 2H2O2(l) → N2(g) + 4H2O(l)
(ङ) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)
उत्तर:
(क) 2AgBr(s) + C6H6O2(aq) → 2Ag(s) + 2HBr(aq) + C6H4O2(aq)
ऑक्सीकारक : AgBr (अपचयित पदार्थ)
अपचायक : C6H4O2(aq) (ऑक्सीकृत पदार्थ)

(ख) HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH(aq) → 2Ag(s) + HCOO(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)
ऑक्सीकारक : [Ag(NH3)2]+ (अपचयित पदार्थ)
अपचायक : HCHO (ऑक्सीकृत पदार्थ)

(ग) HCHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH(aq) + 3H2O(l)
ऑक्सीकारक : Cu2+ (अपचयित पदार्थ)
अपचायक : HCHO (ऑक्सीकृत पदार्थ)

(घ) N2H4(l) + 2H2O2(l) → N2(g) + 4H2O(l)
ऑक्सीकारक : H2O2 (अपचयित पदार्थ)
अपचायक : N2H4 (ऑक्सीकृत पदार्थ)

(ङ) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)
ऑक्सीकारक : PbO2 (अपचयित पदार्थ)
अपचायक : Pb (ऑक्सीकृत पदार्थ)

प्रश्न 14.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है?
2S2O32-(aq) + I2(s) → S4O62-(aq) + 2I(aq)
S2O32-(aq) + 2Br2(l) + 5H2O(l) → 2SO42-(aq) + 4Br(aq) + 10H+(aq)
उत्तर:
आयोडीन (I2) थायोसल्फेट आयन को टेट्राथायोनेट आयन में ऑक्सीकृत कर देती है अर्थात् S2O32- में S की ऑक्सीकरण संख्या +2 से S4O62- आयन में S की ऑक्सीकरण संख्या (\(\frac { 5 }{ 2 }\)) में परिवर्तित हो जाती है।

ब्रोमीन (Br2) थायोसल्फेट आयन को सल्फेट आयन में ऑक्सीकृत कर देती है अर्थात् S की ऑक्सीकरण संख्या +2 (S2O32- में) से +6(SO42- आयन में ) में परिवर्तित हो जाती है। इसका कारण यह है कि ब्रोमीन, आयोडीन की तुलना में प्रबल ऑक्सीकारक है।
E0(Br2/2Br = 1.09 V, E0(I2/2I) = 0.54 V |

प्रश्न 15.
अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजन में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रो हैलिक यौगिकों में हाइड्रो आयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।
उत्तर:
हैलोजनों में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता बहुत प्रबल होती है। अतः ये शक्तिशाली ऑक्सीकारक होते हैं। हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता इलेक्ट्रोड विभव के आधार पर निम्न प्रकार होती है।
F2(+2.87V)>Cl2(+1.36V) > Br2(+1.09V)>I2(+0.54V)
इलेक्ट्रोड विभव के आधार पर हम कह सकते हैं कि F2 सर्वश्रेष्ठ ऑक्सीकारक है तथा यह अन्य हैलोजनों को उनके यौगिकों से मुक्त कर देता है।
F2 + 2Cl → 2F + Cl2
F2 + 2Br → 2F + Br2
F2 + 2I → 2F + I2
तथा Cl2 अपने से नीचे वाले हैलोजनों को उनके यौगिकों से विस्थापित कर देता है।
Cl2 + 2Br → 2Cl + Br2
Cl2 + 2I → 2Cl + I2

जबकि हैलाइड आयनों की प्रकृति इलेक्ट्रॉन को मुक्त करने की होती है। अतः वे अपचायक की तरह कार्य करते हैं। हैलाइड आयनों के इलेक्ट्रोड विभव निम्न प्रकार से हैं-
I(-0.54V) > Br(-1.09V) > Cl(-1.36V) > F(-2.87V)
अतः इनकी अपचायक प्रकृति निम्न प्रकार है-
HI > HBr > HCl > HF
अतः हाइड्रोआयोडिक एसिड सबसे प्रबल अपचायक है।
उदाहरण:
(i) HI तथा HBr, H2SO4 को SO2 में अपचयित कर देते हैं परन्तु HCl तथा HF नहीं कर सकते।
2HBr + H2SO4 → Br2 + SO2 + 2H2O
2HI + H2SO4 → I2 + SO2 + 2H2O

(ii) I, Cu2+ को Cu+ में अपचयित कर सकता है परन्तु Br नहीं
2Cu2+ +4I → Cu2I2 + I2
Cu2++ 2Br → कोई भी अभिक्रिया नहीं
अतः HI सबसे प्रबल अपचायक है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित अभिक्रिया क्यों होती है?
XeO64-(aq) + 2F(aq) + 6H+(aq) → XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(l)
यौगिक Na4XeO6 (जिसका एक भाग XeO64- है) के बारे में आप इस अभिक्रिया में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर:
XeO64-(aq) + 2F(aq) + 6H+(aq) → XeO3(g) + F2(g) + 3H2O(l)

F2 के रासायनिक विधियों द्वारा निर्माण की हाल ही में यह अभिक्रिया विकसित की गई रासायनिक विधियों की श्रेणी में से एक है। यह प्रचलित विद्युत्-रासायनिक विधि नहीं है। इस अभिक्रिया में XeO64- एक प्रबल ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हुए F को F2 ऑक्सीकृत कर देता है जो विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में सर्वाधिक अपचायक क्षमता वाला तत्व है।
F2 के निर्माण की एक अन्य रासायनिक विधि में अन्य प्रबल ऑक्सीकारक K2MnF6 प्रयुक्त होता है।
2K2MnF6 + 4SbF5 → 4KSbF6 + 2MnF3 + F2

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में-
(क) H3PO2(aq) + 4AgNO3(aq) + 2H2O(l) → H3PO4(aq) + 4Ag(s) + 4HNO3(aq)

(ख) H3PO2(aq) + 2CuSO4(aq) + 2H2O(l) → H3PO4(aq) + 2Cu(s) + 2H2SO4(aq)

(ग) C6H5CHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH(aq) → C6H5COO(aq) + 2H2O(l)

(घ) C6H5CHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH(aq) → कोई परिवर्तन नहीं।
इन अभिक्रियाओं से Ag+ तथा Cu2+ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।
उत्तर:
(क) Ag+ आयन Ag में अपचयित होकर अवक्षेपित हो जाते हैं।
(ख) Cu2+ आयन Cu में अपचयित होकर अवक्षेपित हो जाते हैं।
(ग) संकुल में उपस्थित Ag+(aq),Ag में अपचयित हो जाता है जो चमकदार दर्पण की भाँति अवक्षेपित हो जाता है।
(घ) Cu2+(aq) आयन C6H5CHO (बेन्जैल्डिाइड) द्वारा अपचयित नहीं होते जो एक दुर्बल अपचायक है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

प्रश्न 18.
आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रियाओं को सन्तुलित कीजिए-
(क) MnO4(aq) + I(aq) → MnO2(s) + I2(s) (क्षारीय माध्यम)
(ख) MnO4(aq) + SO2(g) → Mn2+(aq) + HSO4(aq) (अम्लीय माध्यम)
(ग) H2O2(aq) + Fe2+(aq) → Fe3+(aq) + H2O(l) (अम्लीय माध्यम)
(घ) Cr2O72+ + SO2(g) → Cr+3(aq) + SO42-(aq) (अम्लीय माध्यम)
उत्तर:
(क) आयन इलेक्ट्रॉन विधि-
पद 1. सभी की ऑक्सीकरण संख्या लिखने पर-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 27

पद 2. अभिक्रिया को ऑक्सीकरण व अपचयन अर्द्ध अभिक्रिया में विभाजित करने पर,
अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया-
पद (a) ऑक्सीकरण की संख्या सन्तुलित करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 28

पद (b) ऑक्सीजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
MnO4 + 3e → MnO2 + 2H2O

पद (c) हाइड्रोजन की संख्या को क्षारीय माध्यम में सन्तुलित करने के लिए दाईं तरफ 4OH तथा बाईं तरफ 4H2O को जोड़ने पर,
MnO4 + 3e + 4H2O → MnO2 + 2H2O + 4OH (सन्तुलित अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया)

ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 29
पद (a) आयोडीन की संख्या बराबर करने पर,
2I → I2

पद (b) आवेश बराबर करने पर,
2I → I2 + 2e (सन्तुलित ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया)

पद 3. अब सन्तुलित ऑक्सीकरण तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ें तथा इलेक्ट्रॉनों की संख्या सन्तुलित करने के लिए अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में 2 का तथा ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में 3 का गुणा करें।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 30

उत्तर:
आयन इलेक्ट्रॉन विधि-
पद 1. सर्वप्रथम प्रत्येक की ऑक्सीकरण संख्या लिखिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 31
पद 2. अंब अभिक्रिया को अपचयन तथा ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में विभाजित करें।
अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया-
MnO4 → Mn2+
पद (a) इस पद में आवेश सन्तुलित करने पर,
MnO4 + 5e → Mn2+

पद (b) ऑक्सीजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
MnO4 + 5e → Mn2+ + 4H2O

पद (c) अम्लीय माध्यम में हाइड्रोजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
MnO4 + 5e + 8H+ → Mn2+ + 4H2O
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया-
SO2 → HSO4

पद (a) इस पद में आवेश सन्तुलित करने पर,
SO2 → HSO4 + 2e

पद (b) इस पद में ऑक्सीजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
SO2 + 2H2O → HSO4 + 2e

पद (c) अम्लीय माध्यम में हाइड्रोजन की संख्या संतुलित करने पर,
SO2 + 2H2O → HSO4 + 2e + 3H+

पद 3. अब ऑक्सीकरण व अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को जोड़ने पर तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या को सन्तुलित करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में 5 का तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में 2 का गुणा करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 32

(ग) H2O2(aq) + Fe2+(aq) → Fe3+(aq) + H2O(l) (अम्लीय माध्यम)
उत्तर:
आयन इलेक्ट्रॉन विधि-
पद 1. सर्वप्रथम प्रत्येक की ऑक्सीकरण संख्या लिखने पर-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 33

पद 2. अब अपचयन व ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में विभाजित करने पर,
अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 34
पद (a) ऑक्सीजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 35

पद (b) ऑक्सीकरण संख्या सन्तुलित करने पर,
H2O2 + 2e → 2H2O

पद (c) अम्लीय माध्यम में हाइड्रोजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
H2O2 + 2e + 2H+ → 2H2O
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया
Fe2+ → Fe3+

पद (d) ऑक्सीकरण संख्या सन्तुलित करने पर-
Fe2+ → Fe3+ + e

पद 3. इस पद में ऑक्सीकरण व अपचयन अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या को सन्तुलित करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में 2 का गुणा करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 36

(घ) Cr2O72+(aq) + SO2(g) → Cr3+(aq) + SO42-(aq) (अम्लीय माध्यम)
सर्वप्रथम आ. संख्या लिखने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 37
पद 1. अभिक्रिया को अपचयन व ऑक्सीकरण अर्द्ध- अभिक्रिया में विभाजित करने पर,
ऑसीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया
SO2 → SO42-

(a) आ. सं. को सन्तुलित करने पर,
SO2 → SO42- + 2e

(b) ऑक्सीजन की संख्या सन्तुलित करने पर,
SO2 + 2H2O → SO42- + 2e

(c)अम्लीय माध्यम में हाइड्रोजन संतुलित करने पर-
SO2 + 2H2O → SO42- + 2e + 4H+

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 38
(a) क्रोमियम की संख्या सन्तुलित करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 39
(b) ऑक्सीकरण संख्या व्यवस्थित करने पर,
6e + Cr2O22- → 2Cr3+

(c) ऑक्सीजन की संख्या संतुलित करने पर-
Cr2O22- + 6e → 2Cr3+ + 7H2O

(d) हाइड्रोजन की संख्या अम्लीय माध्यम में व्यवस्थित करने पर,
Cr2O72- + 6e + 14H+ → 2Cr3+ + 7H2O

पद 2. संतुलित ऑक्सीकरण व अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को जोड़ने पर तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या सन्तुलित करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द-अभिक्रिया में 3 का गुणा करने पर,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 40

प्रश्न 19.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरणों को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा सन्तुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और अपचायकों की पहचान कीजिए-
(क) P4(s) + OH(aq) → PH3(g) + H2PO2(aq)
(ख) N2H4(l) + ClO3(aq) → NO(g) + Cl(g)
(ग) Cl2O7(g) + H2O2(aq) → ClO2(aq) + O2(g) + H+(aq)
उत्तर:
(क) आयन इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण सन्तुलित करना-
पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
P4(s) + OH(aq) → PH3(g) + H2PO2(aq)

पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 41
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 42
(P) ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों की भाँति कार्य करता है)

पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में पहले $P$ परमाणुओं को सन्तुलित करके O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम बाईं ओर आठ जल अण जोडते हैं।
P4(s) + 8H2O(l) → 4H2PO2(aq)

इस अभिक्रिया में H परमाणु सन्तुलित करने के लिए आठ H+ आयन दाई ओर जोड़ते हैं।
P4(s) + 8H2O(l) → 4H2PO2(aq) + 8H+(aq)
अब चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अतः दोनों ओर OH आयन जोड़ते हैं-
P4(s) + 8H2O(l) + 8OH(aq) → 4H2PO2(aq) + 8H2O(l)

या P4(s) + 8H2O(l) + 8OH(aq) → 4H2PO2(aq) + 8H2O(l)

या P4(s) + 8OH(aq) → 4H2PO2(aq)

पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में P परमाणुओं को सन्तुलित करते हैं-
P4(s) → 4PH3(g)

H-परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम उपर्युक्त अभिक्रिया में बाई ओर बारह (6)H+ आयन जोड़ देते हैं-
P4(s) + 12H+(aq) → 4PH3(g)

क्योंकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अत: 12H+ आयनों के लिए 12OH आयन समीकरण के दोनों ओर ज़ड़ते हैं-
P4(s) + 12H+(aq) + 12OH(aq) → 4PH3(g) + 12OH(aq)

H+ तथा OH के संयोग से जल अणु बनने के कारण परिणामी समीकरण निम्नलिखित होगी-
P4(s) + 12H2O(l) → 4PH3(g) + 12OH(aq)

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन निम्नवत् करते हैं-
P4(s) + 8OH(aq) → 4H2PO2(aq) + 4e
P4(s) + 12H2O(l) + 12e → 4PH3(g) + 12OH(aq)

पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर-
4P4(s) + 12H2O(l) + 12OH(aq) → 4PH3(g) + 12H2PO2(aq)
या P4(s) + 3H2O(l) + 3OH(aq) → PH3(g) + 3H2PO2(aq)

अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण में दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण सन्तुलित करना-

पद 1. अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार है-
P4(s) + OH(aq) → PH3(g) + H2PO2(aq)

पद 2. अभिक्रिया में P की ऑक्सीकरण संख्या लिखते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 43
यह इस बात का सूचक है कि P ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों रूपों में कार्य करता है।

पद 3. P की ऑक्सीकरण अवस्था 3 घटती है तथा 1 बढ़ती है। अतः हमें H2PO2 को 3 से गुणा करना होगा।
P4(s) + OH(aq) → PH3(g) + 3H2PO2(aq)

पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा दोनों ओर के आयनों का आवेश एकसमान नहीं है। अतः हम बाई ओर तीन OH आयन जोड़ेंगे जिससे आवेश एकसमान हो जाए।
P4(s) + 3OH(aq) → PH3(g) + 3H2PO2(aq)

पद 5. इस पद में हाइड्रोजन आयनों को संतुलित करने के लिए हम तीन जल अणुओं को बाईं ओर जोड़ते हैं-

P4(s) + 3OH(aq) + 3H2O(l) → PH3(g) + 3H2PO2(aq)
यह सन्तुलित अभिक्रिया है।

(ख) आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण सन्तुलित करना-

पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
N2H4(l) + ClO3(aq) → NO(g) + Cl(g)

पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 44
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 45

(N2H4 अपचायक तथा ClO3 ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है।)
पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में N-परमाणुओं को सन्तुलित करते हैं-
N2H4(l) → 2NO(g)
अब O परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते हैं-
N2H4(l) + 2H2O(l) → 2NO(g)

अब H परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में दाईं ओर 8H+ जोड़ते हैं-

N2H4(l) + 2H2O(l) → 2NO(g) + 8H+(aq)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है; अतः समीकरण के दोनों ओर 8OH आयन जोड़ते हैं-
N2H4(l) + 2H2O(l) + 8OH(aq) → 2NO(g) + 8H+ + 8OH(aq)
H+ तथा OH आयनों के संयोग पर जल अणु बनने के कारण समीकरण निम्नवत् होगी-
N2H4(l) + 8OH(aq) → 2NO(g) + 6H2O(l)

पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए समीकरण के दाई ओर तीन जल अणु जोड़ते हैं-
ClO3(aq) → Cl(g) + 3H2O(l)

H परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण के बाईं ओर छ: H+ आयन जोड़ते हैं-

ClO3(aq) + 6H+(aq) + 6OH(aq) → Cl(g) + 3H2O(l)

चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अतः समीकरण में दोनों ओर छः OH आयन जोड़ते हैं-

ClO3(aq) + 6H+(aq) + 6OH(aq) → Cl(g) + 3H2O(l) + 6OH(aq)

H+ तथा OH के संयोग से जल अणु बनने पर,
ClO3(aq) + H2O(l) → Cl(g) + 6OH(aq)

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं के आवेश का सन्तुलन निम्नवत् करते हैं-
N2H4(l) + 8OH(aq) → 2NO(g) + 6H2O(l) + 8e
ClO3(aq) + 3H2O(l) + 6e → Cl(g) + 6OH(aq)

इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्धअभिक्रिया को 3 से तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को 4 से गुणा करते हैं-
3N2H4(l) + 24OH(aq) → 6NO(g) + 18H2O(l) + 24e
4ClO3(aq) + 12H2O(l) + 24e → 4Cl(g) + 24OH(aq)

पद 6. दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर-
3N2H4(l) + 4ClO3(aq) → 6NO(g) + 4Cl(g) + 6H2O(l)
अन्तिम सत्यापन दरांता है कि उपर्युक्त समीकरण परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से सन्तुलित हैं।
ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण सन्तुलित करना-

पद 1. अभिक्रिया का ढ्वाँचा इस प्रकार है-
N2H4(l) + ClO3(aq) → NO(g) + Cl(g)

पद 2. अभिक्रिया में N तथा Cl की ऑक्सीकरण संख्या लिखते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 46
स्पष्ट है कि N2H4 अपचायक तथा ClO3 ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हैं।

पद 3. ऑक्सीकरण संख्या में होने वाली वृद्धि तथा कमी की गणना करते हैं तथा इन्हें एकसमान बनाते हैं।
3N2H4(l) + 4ClO3(aq) → 6NO(g) + 4Cl(g)

पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा अभिक्रिया आवेश की दृष्टि से सन्तुलित है; अतः O तथा H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए अभिक्रिया में दाईं ओर 6 जल अणु जोड़ देने पर पूर्णतया सन्तुलित समीकरण प्राप्त हो जायेगी।

3N2H4(l) + 4ClO3(aq) → 6NO(g) + 4Cl(g) + 6H2O(l) यह सन्तुलित समीकरण है।

(ग) आयन इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण सन्तुलित करना-

पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-

Cl2O7(g) + H2O2(aq) → ClO(aq) + O2(aq) + H+(aq)

पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-

(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 47
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 48
(H2O2 अपचायक तथा Cl2O7ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करते है।)

पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध अभिक्रिया में H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम दो H+ दाईं ओर जोड़ते हैं-
H2O2(aq) → O2(g) + 2H+(aq)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में सम्पन्न होती है; अतः दोनों ओर दो-दो OH आयन जोड़ने पर,
2OH(aq) + H2O2(aq) → O2(g) + 2H+(aq) + 2OH(aq)
H+ तथा OH आयन के संयोग से जल अणु बनने पर परिणामी समीकरण निम्नवत् होगी-
H2O2(aq) + 2OH(aq) → O2(aq) + 2H2O(l)

पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में सर्वप्रथम Cl परमाणुओं को सन्तुलित करते हैं-
Cl2O7(g) → 2ClO2(aq)
O परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम दाईं ओर तीन जल-अणु जोड़ते हैं-
Cl2O7(g) → 2ClO2(aq) + 3H2O(l)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए हम 6H+ बाईं ओर जोड़ते हैं-
Cl2O7(g) + 6H+(aq) → 2ClO2(aq) + 3H2O(l)
चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में सम्पन्न होती है; अतः 6H+ के लिए दोनों ओर 6OH जोड़ते हैं-
Cl2O7(g) + 6H+(aq) + 6OH(aq) → 2ClO2(aq) + 3H2O(l) + 6OH(aq)
H+ तथा OH के संयोग से जल अणु बनने पर परिणामी समीकरण निम्नवत् होगी-
Cl2O7(g) + 3H2O(l) → 2ClO2(aq) + 6OH(aq)

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन निम्नवत् करते हैं-
H2O2(aq) + 2OH(aq) → O2(g) + 2H2O(l) + 2e
Cl2O7(g) + 3H2O(l) + 8e → 2ClO2(aq) + 6OH(aq)

इलेक्ट्रॉनों की संख्या एकसमान करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में 4 से गुणा करते हैं।
4H2O2(aq)+ 8OH(aq) → 4O2(g) + 8H2O(l) + 8e
Cl2O7(aq) + 3H2O(l) + 8e → 2ClO2(aq) + 6OH(aq)

पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर,
Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) + 2OH(aq) → 2ClO2(aq) + 4O2(g) + 5H2O(l)
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण में दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से समीकरण सन्तुलित है।

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण सन्तुलित करना-

पद 1. अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार है-
Cl2O7(g) + H2O2(aq) → ClO2(aq) + O2(aq) + H+(aq)

पद 2. अभिक्रिया में Cl तथा O की ऑक्सीकरण संख्या लिखते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 49
स्पष्ट है कि H2O2 अपचायक तथा Cl2O2 ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते हैं।

पद 3. ऑक्सीकरण संख्या में होने वाली कमी तथा वृद्धि की गणना करते हैं तथा इन्हें एकसमान बनाते हैं-
Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) → 2ClO2(aq) + 4O2(g)

पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा दोनों ओर के आयनों का आवेश एकसमान नहीं है; अतः हम दो OH आयन बाईं ओर जोड़ देते हैं-
Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) + 2OH(aq) → 2ClO2(aq) + 4O2(g)
H परमाणुओं के सन्तुलन के लिए दाईं ओर पाँच जल-अणु जोड़ते हैं।
Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) + 2OH(aq) → 2ClO2(aq) + 4O2(g) + 5H2O(l)
यह सन्तुलित समीकरण है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रिया से आप कौन-सी सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं-
(CN)2(g) + 2OH(aq) → CN(aq) + CNO(aq) + H2O(l)
उत्तर:
(CN)2(g) + 2OH(aq) → CN(aq) + CNO(aq) + H2O(l)
इस अभिक्रिया से निम्नलिखित सूचनाएँ प्राप्त होती हैं-

  • अभिक्रिया में क्षारीय माध्यम में सायनोजन (CN)2 का वियोजन हो रहा है।
  • (CN)2 तथा CN दोनों प्रकृति में छद्म हैलोजेन (pseudo halogen) हैं अर्थात् इनके गुण हैलोजनों के समान हैं।
  • यह एक असमानुपातन अभिक्रिया है। इसमें एक पदार्थ का ऑक्सीकरण तथा अपचयन होता है। सायनोजन (CN})2 का CNO में ऑक्सीकरण तथा CN में अपचयन होता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

प्रश्न 21.
Mn3+ आयन विलयन में अस्थायी होता है तथा असमानुपातन द्वारा Mn2+, MnO2 और H+ आयन देता है। इस अभिक्रिया के लिए सन्तुलित आयनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
प्रश्नानुसार असमानुपातन अभिक्रिया निम्नवत् होगी –
Mn3+ → Mn2+ + MnO2 + H+
इस अभिक्रिया को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्नांकित पदों में सन्तुलित किया जाता है-

पद 1. पहले हम ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
Mn3+ → Mn2+ + MnO2 + H+

पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया :
Mn3+ → MnO2
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया :
Mn3+ → Mn2+

पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को सन्तुलित करने के लिए इसमें बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते हैं। इससे O-परमाणु सन्तुलित हो जाते हैं।
Mn3+ + 2H2O → MnO2
अब H परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए चार H+ दाई ओर जोड़ देते हैं-
Mn3+ + 2H2O → MnO2 + 4H+

पद 4. सन्तुलित अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया निम्नलिखित है-
Mn3+ + 2H2O → Mn2+ + 4H+

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन निम्नलिखित प्रकार करते हैं-
Mn3+ + 2H2O → MnO2 + 4H+ + le
Mn3+ + le → Mn2+

पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर,
2Mn3+ + 2H2O → MnO2 + Mn2+ + 4H+
यही सन्तुलित समीकरण है।

प्रश्न 22.
Cs, Ne, I तथा F में ऐसे तत्व की पहचान कीजिए, जो
(क) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(घ) न ऋणात्मक और न ही धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
उत्तर:
(क) F (फ्लुओरीन) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) Cs (सीजियम) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) I (आयोडीन) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(घ) Ne ( निऑन) न ऋणात्मक और न ही धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 23.
जल के शुद्धिकरण में क्लोरीन को प्रयोग में लाया जाता है। क्लोरीन की अधिकता हानिकारक होती है। सल्फर डाइ-ऑक्साइड से अभिक्रिया करके इस अधिकता को दूर किया जाता है। जल में होने वाले इस अपचयोपचय परिवर्तन के लिए सन्तुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर:
क्लोरीन तथा सल्फर डाइऑक्साइड की अभिक्रिया निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त की जा सकती है-
Cl2 + SO2 → Cl + SO42-
इस अपचयोपचय अभिक्रिया को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से निम्नांकित पदों में सन्तुलित करते हैं-

पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-
Cl2 + SO2 → Cl + SO42-

पद 2. दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ निम्नवत् हैं-
(i) ऑक्सीकरण अर्द-अभिक्रिया :
SO2 → SO42-
(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया :
Cl2 → Cl

पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं को सन्तुलित करने के लिए समीकरण में बाई ओर दो जल अणु जोड़ते हैं-
SO2 + 2H2O → 4H+

पद 4. सन्तुलित अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया निम्नवत् होगी-
Cl2 → 2Cl

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का सन्तुलन इस प्रकार करेंगे-
SO2 + 2H2O → SO42- + 4H+ + 2e

पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर,
Cl2 + SO2 + 2H2O → 2Cl + SO42- + 4H+
अन्तिम सत्यापन दर्शाता है कि समीकरण परमाणुओं की संख्या एवं आवेश की दृष्टि से सन्तुलित है।

प्रश्न 24.
आवर्त सारणी की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) सम्भावित अधातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन की अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
(ख) किन्हीं तीन धातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
उत्तर:
(क) वे अधातुएँ जो परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाओं में रह सकती हैं, असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हैं। फॉस्फोरस, क्लोरीन तथा सल्फर ऐसी ही अधातुएँ हैं।
(ख) संक्रमण श्रेणी (d-ब्लॉक तत्व) से सम्बद्ध धातुएँ असमानुपातन अभिक्रियाएँ प्रदर्शित कर सकती हैं। उदाहरणार्थ-मैंगनीज, आयरन तथा कॉपर।

प्रश्न 25.
नाइट्रिक अम्ल निर्माण की ओस्टवाल्ड विधि के प्रथम पद में अमोनिया गैस के ऑक्सीजन गैस द्वारा ऑक्सीकरण से नाइट्रिक ऑक्साइड गैस तथा जलवाष्प बनती है। 10.0 g अमोनिया तथा 20.00 g ऑक्सीजन द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड की कितनी अधिकतम मात्रा प्राप्त हो सकती है?
उत्तर:
ओस्टवाल्ड विधि में अमोनिया गैस निम्न प्रकार ऑक्सीजन से क्रिया करके नाइट्रिक ऑक्साइड गैस तथा जलवाष्प बनाती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 50
68 g अमोनिया अभिक्रिया करती है = 160 g ऑक्सीजन से अतः
10 g अमोनिया अभिक्रिया करेगी = \(\frac { 160 × 10 }{ 68 }\) = 23.6 g ऑक्सीजन;
परन्तु ऑक्सीजन की उपलब्ध मात्रा 20g है जो आवश्यक मात्रा से कम है अतः ऑक्सीजन सीमान्त अभिकर्मक है।
अत: 160 g ऑक्सीजन बनाती है = 120 g NO
20 g ऑक्सीजन बनायेगी = \(\frac { 120 × 20 }{ 160 }\) = 15 g NO

प्रश्न 26.
पाठ्य-पुस्तक की सारणी 8.1 में दिए गए मानक विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या इन अभिकारकों के बीच अभिक्रिया सम्भव है?
(क) Fe3+ तथा I(aq)
(ख) Ag+ तथा Cu(s)
(ग) Fe3+(aq) तथा Br(aq)
(घ) Ag(s) तभा Fe3+(aq)
(ङ) Br2(aq) तथा Fe2+
उत्तर:
(क) Fe3+ तथा I(aq)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 51

(ख) Ag+ तथा Cu(s)
सारणी के अनुसार, E0Ag+/Ag = +0.80 V E0Cu++/Cu = 0.34V
2Ag+ + 2e → 2Ag (अपचयन, कैथोड पर)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 52

(ग) Fe3+(aq) तथा Br(aq)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 53

(घ) Ag(s) तभा Fe3+(aq)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 54

(ङ) Br2(aq) तथा Fe2+
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 55

प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से प्रत्येक के विद्युत्-अपघटन से प्राप्त उत्पादों के नाम बताइए।
(क) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
(ख) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ AgNO(s) का जलीय विलयन
(ग) प्लैटिनम इलेक्टोड के साथ H2SO4 का तनु विलयन
(घ) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ CuCl2 का जलीय विलयन
उत्तर:
(क) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
ऐनोड पर, Ag → Ag+ + e
कैथोड पर, Ag+ + e → Ag
ऐनोड पर सिल्वर छड़ घुल जायेगी तथा कैथोड पर सिल्वर छड़ पर जमा होने लगेगा।

(ख) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 का जलीय विलयन-
AgNO3 → Ag+ + NO3
H2O → H+ + OH
ऐनोड पर, 4OH → 2H2O + O2 + 4e
कैथोड पर, Ag+ + e → Ag
कैथोड पर सिल्वर जमा होगा तथा ऐनोड पर ऑक्सीजन गैस प्राप्त होगी।

(ग) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ H2SO4 का तनु विलयन
H2SO4 → 2H+ + SO42-
H2O → H+ + OH
ऐनोड पर, 4OH → 2H2O + O2 + 4e
कैथोड पर, 2H+ + 2e → H2
कैथोड पर हाइड्रोजन तथा ऐनोड पर ऑक्सीजन गैस प्राप्त होती है।

(घ) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ CuCl2 का जलीय विलयन
CuCl2 → Cu2+ + 2Cl
H2O → H+ + OH
ऐनोड पर, 2Cl → Cl2 + 2e
कैथोड पर, Cu2+ + 2e → Cu
कैथोड पर कॉपर जमा होगा तथा ऐनोड पर क्लोरीन गैस प्राप्त होगी।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 8 अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

प्रश्न 28.
निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में से विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए-
Al, Cu, Fe, Mg तथा Zn
उत्तर:
Mg > Al > Zn > Fe > Cu.

प्रश्न 29.
नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए-
K+/K = -2.93 V,
Ag+/Ag = 0.80V,
Hg2+/Hg = 0.79 V
Mg2+/Mg = -2.37 V,
Cr3+/Cr = -0.74V
उत्तर:
Ag < Hg < Cr < Mg < K .

प्रश्न 30.
उस गैल्वेनिक सेल को चित्रित कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
Zn(s) + 2Ag+(aq) → Zn2+(aq) + 2Ag(s)
अब बताइए कि-
(क) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है?
(ख) सेल में विद्युत्-धारा के वाहक कौन हैं?
(ग) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ क्या हैं?
उत्तर:
Zn(s)| Zn2+(aq) | | Ag+(aq) | Ag(s)
(क) Zn इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है।
(ख) इलेक्ट्रॉन।
(ग) ऐनोड पर, Zn → Zn2+ + 2e
कैथोड पर, Ag+ + e → Ag

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