Author name: Bhagya

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
0°C पर केल्विन तापक्रम का सही मान है-
(a) 273.15 K
(b) 272.85 K
(c) 273K
(d) 273.2 K
उत्तर:
(a) 273.15 K

प्रश्न 2.
किसी रोगी का ताप 40°C है तो उसका ताप फॉरनहाइट स्केल पर होगा-
(a) 72°F
(b) 100°F
(c) 96°F
(d) 104°F
उत्तर:
(d) 104°F

प्रश्न 3.
ताप जो सेण्टीग्रेड तथा फॉरेनहाइट पैमाने पर समान ताप देता है,
(a) 0°
(b) 30°
(c) + 40°
(d) – 40°
उत्तर:
(d) – 40°

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प्रश्न 4.
ऑक्सीजन -183 °C पर उबलती है यह ताप लगभग है-
(a) -297°F
(c) -261°F
(b) -285°F
(d) -329°F
उत्तर:
(a) -297°F

प्रश्न 5.
किसी जल का सेल्सियस तथा फॉरेनहाइट पैमाने पर ताप का अनुपात 13 है जल का ताप है-
(a) 40°C
(b) -26.66°C
(c) -40°C
(d) 26.66°C
उत्तर:
(d) 26.66°C

प्रश्न 6.
परम शून्य ताप है-
(a) जिस पर गैस द्रवित हो जाए
(b) न्यूनतम सम्भव ताप
(c) जिस पर वास्तविक गैसों का आयतन शून्य हो जाए
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) न्यूनतम सम्भव ताप

प्रश्न 7.
गैस नियतांक का मात्रक है-
(a) कैलोरी / °C
(b) जूल / मोल
(c) जूल / मोल K
(d) जूल/ किग्रा
उत्तर:
(c) जूल / मोल K

प्रश्न 8.
यदि कोई गैस बॉयल के नियम का पालन करे तो उसके लिए PV वP के बीच ग्राफ होगा-
(a) अतिपरवलय
(b) PV अक्ष के समान्तर सरल रेखा
(c) P अक्ष के समान्तर सरल रेखा
(d) मूल बिन्दु से गुजरती P अक्ष से 45° कोण पर सरल रेखा ।
उत्तर:
(c) P अक्ष के समान्तर सरल रेखा

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प्रश्न 9.
किसी गैस की विशिष्ट ऊष्मा के मान-
(a) केवल दो मान Cp तथा Cv होते हैं
(b) किसी दिये हुए ताप पर केवल एकमात्र मान होता है।
(c) मान 0 से ∞ के बीच कुछ भी हो सकते हैं
(d) मान गैस के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।
उत्तर:
(c) मान 0 से ∞ के बीच कुछ भी हो सकते हैं

प्रश्न 10.
100°C की वायु से जलन उसी ताप पर भाप की जलन से-
(a) अधिक घातक
(b) कम घातक
(c) दोनों बराबर घातक
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) कम घातक

प्रश्न 11.
कार के इंजन में पानी को रेडिएटर में शीतलक के रूप में प्रयोग किए जाने का कारण है-
(a) कम घनत्व के कारण
(b) निम्न क्वथनांक के कारण
(c) आसानी से उपलब्धता के कारण
(d) उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण।
उत्तर:
(d) उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण।

प्रश्न 12.
निम्न में कौन-सा ऊष्मा चालकता के बढ़ते क्रम में सही है-
(a) Al, Cu, Ag
(b) Cu, Ag. Al
(c) Al, Ag. Cu
(d) Ag. Cu, Al.
उत्तर:
(a) Al, Cu, Ag

प्रश्न 13.
यदि समान धातु की दो छड़ों की लम्बाइयों व त्रिज्याओं का अनुपात क्रमशः 12 तथा 23 हो तथा तापान्तर समान हो, तब स्थायी अवस्था में ऊष्मा प्रवाह की दर का अनुपात होगा-
(a) 8:9
(b) 4:3
(c) 1:3
(d) 3:2
उत्तर:
(a) 8:9

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प्रश्न 14.
दो समान लम्बाई की छड़ों A तथा B के दोनों सिरे नियत समान ताप तथा 02 पर हैं। छड़ों में ऊष्मा संचरण की समान दर के लिए शर्त होगी-
(a) K1A1 = K2A2
(b) K1²A1 = K2²A2
(c) K1A2 = K2A1
(d) K1A1² = K2A2²
उत्तर:
(a) K1A1 = K2A2

प्रश्न 15.
किसी छड़ का ऊष्मा चालकता गुणांक निर्भर करता है-
(a) छड़ के दोनों सिरों के बीच तापान्तर पर
(b) छड़ की लम्बाई पर
(c) छड़ के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर
(d) छड़ के पदार्थ पर |
उत्तर:
(d) छड़ के पदार्थ पर

प्रश्न 16.
स्थायी अवस्था में किसी छड़ का ताप-
(a) समय के साथ घटता है
(b) समय के साथ बढ़ता है
(c) समय के साथ नहीं बदलता परन्तु भिन्न-भिन्न बिन्दुओं पर भिन्न-भिन्न होता है
(d) समय के साथ नहीं बदलता तथा छड़ के प्रत्येक बिन्दु पर समान होता है।
उत्तर:
(c) समय के साथ नहीं बदलता परन्तु भिन्न-भिन्न बिन्दुओं पर भिन्न-भिन्न होता है

प्रश्न 17.
एक गर्म पानी से भरी बाल्टी 70°C से 65°C तक 11 मिनट में 65°C से 60°C तक 12 मिनट में तथा 60°C से 55°C तक मिनट में ठण्डी होती है, तो
(a) t1 = t2 = t3
(b) t1 < t2 < t3
(c) t1 > t2 > t3
(d) t1 < t2 > t3
उत्तर:
(b) t1 < t2 < t3

अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
ऊष्मा के विभिन्न मात्रक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
ऊष्मा के विभिन्न मात्रक जूल तथा कैलोरी हैं।

प्रश्न 2.
स्वस्थ मनुष्य के शरीर का ताप C में कितना होता है?
उत्तर:
37°C.

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प्रश्न 3.
द्रवों एवं गैसों में ऊष्मा संचरण किस विधि से होता है?
उत्तर:
द्रवों एवं गैसों में ऊष्मा संचरण संवहन विधि से होता है

प्रश्न 4.
ताप मापने के लिए कौन-कौन से तापक्रम पैमाने प्रचलित हैं?
उत्तर:
सेल्सियस पैमाना, डिग्री फॉरेनहाइट तथा केल्विन पैमाने प्रचलित हैं।

प्रश्न 5.
बर्फ का गलनांक ०°C है पानी का हिमांक कितना होगा ?
उत्तर:
पानी का हिमांक C होगा।

प्रश्न 6.
किसी वस्तु का ताप किस ऊर्जा की माप है?
उत्तर:
किसी वस्तु का ताप उसके अणुओं की औसत ऊर्जा की माप है।

प्रश्न 7.
परम शून्य ताप से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
0 K ताप को परम शून्य ताप कहा जाता है। यह न्यूनतम सम्भव ताप है इसीलिए इसे परम शून्य ताप कहते हैं डिग्री सेल्सियस पैमाने पर इसके संगत ताप – 273.15°C है।

प्रश्न 8.
किसी वस्तु को ऊष्मा प्रदान करने पर उसमें किस तरह के प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं?
उत्तर:
वस्तु का ताप बढ़ सकता है, उसका प्रसार हो सकता है, उसकी अवस्था में परिवर्तन हो सकता है।

प्रश्न 9.
केल्विन पैमाने पर जल का क्वथनांक कितना होता है?
उत्तर:
K = C + 273.15 – 100 + 273.15 = 373.15 K

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प्रश्न 10.
एक द्रव का नाम बताइए जो ऊष्मा का सुचालक है?
उत्तर:
पारा ऊष्मा का सुचालक है।

प्रश्न 11.
किसी पदार्थ के रेखीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
आयतन प्रसार गुणांक
= 3 × रेखीव प्रसार गुणांक
γ = 3α

प्रश्न 12.
किसी धातु के रेखीय प्रसार गुणांक (α), क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (ß) तथा आयतन प्रसार गुणांक (γ) में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
α : ß : γ = 1 : 2 : 3

प्रश्न 13.
क्या किसी पदार्थ को गर्म किए जाने पर उसका आयतन कम हो जाता है ? उदाहरण दें।
उत्तर:
हाँ, जल को 0°C से 4°C तक गर्म किए जाने पर जल का आयतन कम हो जाता है।

प्रश्न 14.
टेलीफोन के दो खम्भों के बीच तारों को कुछ ढीला क्यों छोड़ा जाता है?
उत्तर:
टेलीफोन के तारों को दो खम्भों के बीच ढीला इसलिए रखते हैं जिससे वे सर्दियों में सिकुड़कर टूट न जाएँ।

प्रश्न 15.
रेखीय प्रसार गुणांक का मात्रक लिखिए।
उत्तर:
रेखीय प्रसार गुणांक का मात्रक प्रति °C है।

प्रश्न 16.
विशिष्ट ऊष्मा का मात्रक क्या है?
उत्तर:
विशिष्ट ऊष्मा का मात्रक J kg-1 K-1 अथवा cal kg-1 °C-1 है।

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प्रश्न 17.
किस द्रव की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है?
उत्तर:
जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 18.
जल की विशिष्ट ऊष्मा कितनी होती है?
उत्तर –
जल की विशिष्ट ऊष्मा = 1 Cal g-1 °C-1
अथवा 4.18 × 10³ J kg-1 C-1 होती है।

प्रश्न 19.
जल की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होने से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
इसका अर्थ है कि जल देर में गर्म तथा देर में ठण्डा होता

प्रश्न 20.
यदि किसी वस्तु की ऊष्मा धारिता Q तथा उसका द्रव्यमान m हो तो वस्तु की विशिष्ट ऊष्मा क्या होगी ?
उत्तर:
वस्तु की विशिष्ट ऊष्मा (s) = \(\frac{\text { ऊष्मा धारिता (Q) }}{\text { द्रव्यमान (m) }}\)

प्रश्न 21.
ताँबा, लोहा, जल में से किसकी विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक है?
उत्तर:
जल की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक है।

प्रश्न 22.
m द्रव्यमान तथा गुप्त ऊष्मा वाले पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए ?
उत्तर:
पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के लिए आवश्यक ऊष्मा Q = mL

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प्रश्न 23.
किसी लोहे के टुकड़े को हथौड़े से पीटने पर वह गर्म हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि हथौड़े की गतिज ऊर्जा, टुकड़े से टकराने पर ऊष्मा में बदल जाती है।

प्रश्न 24.
बर्फ की गुप्त ऊष्मा का J kg-1 में मान बताइए। अथवा बर्फ की गुप्त ऊष्मा का मान बताइए।
उत्तर:
बर्फ की गुप्त ऊष्मा 3.36 × 105 J kg-1 है।

प्रश्न 25.
लकड़ी, काँच, पारा तथा वायु में ऊष्मा का सबसे बुरा चालक कौन है?
उत्तर:
वायु, सबसे बुरा चालक है।

प्रश्न 26.
जल के क्वथनांक पर दाब का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
दाब के बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है तथा दाब के घटने पर क्वथनांक घटता है।

प्रश्न 27.
द्रव में अपद्रव्य मिलाने पर क्वथनांक पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
क्वथनांक बढ़ जाता है।

प्रश्न 28.
ऊष्मा चालकता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पदार्थों का वह गुण, जिसके कारण उनमें चालन की प्रक्रिया द्वारा ऊष्मा का संचरण होता है, पदार्थ की ऊष्मा चालकता कहलाता है।

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प्रश्न 29.
स्थायी अवस्था में छड़ के प्रत्येक भाग का ताप स्थिर क्यों रहता है?
उत्तर:
क्योंकि इस अवस्था में छड़ का कोई भी भाग ऊष्मा का अवशोषण नहीं करता ।

प्रश्न 30.
ऊष्मीय विकिरण की प्रकृति कैसी होती है?
उत्तर:
ऊष्मीय विकिरण की प्रकृति विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के समान होती है। यही कारण है कि इसे चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 31.
सर्दियों में टेलीफोन की तारें तन जाती हैं, क्यों ?
उत्तर:
सर्दियों में ताप कम होने के कारण वे संकुचित हो जाती है, इस कारण वन जाती हैं।

प्रश्न 32.
निर्वात में प्रकाश की चाल क्या होती है?
उत्तर:
3 × 108 m/s.

प्रश्न 33.
ड्यूआर फ्लास्क अथवा धर्मस बोतल की भीतरी तथा बाहरी दीवारों पर किसका लेप होता है?
उत्तर:
चाँदी का |

प्रश्न 34.
दो व्यक्ति चाय पीने बैठते हैं। एक ने अपनी चाय में तुरन्त ठण्डा दूध मिला दिया पर दूसरे ने थोड़ी देर बाद किसकी चाय देरी से ठण्डी होगी ?
उत्तर:
जिसने तुरन्त दूध मिला दिया क्योंकि कम ताप वाली वस्तु के ठण्डी होने की दर कम होती है।

प्रश्न 35.
क्या भू-उपग्रह के भीतर जल को उबाला जा सकता है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि भू-उपग्रह के भीतर वायु भारहीन होती है, अतः संवहन धाराएँ नहीं बहती हैं।

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प्रश्न 36.
जब चीनी को चाय में मिलाया जाता है तो यह ठण्डी हो जाती है, क्यों ?
उत्तर:
चीनी चाय से ऊष्मा अवशोषित कर लेती है, अतः चाय का ताप घट जाता है।

प्रश्न 37.
किसी हीटर में ऊष्मा निरन्तर उत्पन्न होती है। फिर भी कुछ समय पश्चात् इसका ताप स्थिर हो जाता है, क्यों ?
उत्तर:
कुछ समय पश्चात् ऊष्मा उत्पन्न होने की दर तथा विकिरण के द्वारा ऊष्मा हानि बराबर हो जाती है जिससे ताप स्थिर रहता है।

प्रश्न 38.
अत्यधिक ठण्ड होने पर प्राणी अपने आप को समेट कर बैठते हैं, क्यों ?
उत्तर:
ऐसा करने पर उनका क्षेत्रफल कम हो जाता है, जिससे ऊष्मा की क्षति कम होती है।

प्रश्न 39.
हाथ पर ईथर डालने से हाथ को ठण्डक का अनुभव क्यों होता है ?
उत्तर:
ईथर के वाष्पीकरण के लिए गुप्त ऊष्मा हाथ में लेने के कारण ठण्डक का अनुभव होता है।

प्रश्न 40.
अवस्था परिवर्तन में कौन सी राशि नहीं बदलती है ?
उत्तर:
ताप ।

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प्रश्न 41.
वीन के नियम के उपयोग लिखिए।
उत्तर:
इसकी सहायता से सूर्य एवं अन्य नक्षत्रों के ताप ज्ञात किये जा सकते हैं।

प्रश्न 42.
गैसों के दाब गुणांकों का मान कितना होता है ?
उत्तर-
α = ß = \(\frac{1}{273}\)

प्रश्न 43.
ऊष्माधारिता किसे कहते हैं ?
उत्तर:
किसी पदार्थ की ऊष्माधारिता वह ऊष्मा है जो एकांक ताप परिवर्तन के लिए आवश्यक होती हैं।
S = \(\frac{∆Q}{∆T}\)

प्रश्न 44.
पूर्ण सूर्यग्रहण का समय फ्रॉनहॉफर रेखाएँ अपेक्षाकृत काली होती हैं या चमकीली ?
उत्तर:
चमकीली।

प्रश्न 45.
किरचॉफ के नियम के अनुसार अच्छे अवशोषक……. होते हैं।
उत्तर:
अच्छे उत्सर्जक ।

प्रश्न 46.
किस ताप पर डिग्री सेन्टीग्रेट व फॉरेनहाइट पैमाना बराबर होते हैं ?
उत्तर:
40°C पर ।

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लघु उत्तरीय प्रश्न ( Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
स्टीफन के नियम से न्यूटन के शीतलन के नियम की उत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
तापीय प्रसार (THERMAL EXPANSION):
जब किसी पदार्थ को गर्म किया जाता है, तो उसका ताप बढ़ने से पदार्थ के अनेक भौतिक गुण बदल जाते हैं। इनमें से एक प्रभाव पदार्थ के आकार पर भी पड़ता है। इसी को पदार्थ का तापीय प्रसार कहते हैं। तापीय प्रसार विभिन्न पदार्थों के लिए भिन्न-भिन्न होता है। ताप के बढ़ने से सभी पदार्थ (ठोस, द्रव या गैस) प्रसारित होते हैं।

ठोसों में तापीय प्रसार (Thermal Expansion In Solids):
ठोसों को गर्म करने पर अणुओं की गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप ठोस पदार्थों की लम्बाई, पृष्ठ का क्षेत्रफल तथा आयतन भी बढ़ जाता है। इस प्रकार ठोसों में प्रसार तीन प्रकार का होता है-

  • रेखीय प्रसार (Linear Expansion)
  • क्षेत्रीय प्रसार (Superficial Expansion)
  • आयतन प्रसार (Volume Expansion)

प्रश्न 2.
वीन के नियम से आप क्या समझते हो ?
उत्तर:
वीन का विस्थापन नियम (Wein’s Displacement Law):
कृष्णिका विकिरण में सभी तरंगदैर्घ्यों के लिए उत्सर्जन क्षमता eλ समान नहीं होती है। एक विशेष ताप पर एक विशेष तरंगदैर्घ्य को उत्सर्जकता अधिकतम होती है। इस तरंगदैर्घ्य को λm से व्यक्त करते हैं और ताप बढ़ाने पर λm का मान घटता है। वैज्ञानिक वीन से λm एवं ताप T में सम्बन्ध स्थापित करते हुए एक नियम दिया जो उन्हीं के नाम से ‘वीन का विस्थापन नियम’ के रूप में जाना गया। इस नियम के अनुसार ” λm का मान कृष्णिका के परम ताप (T) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” अर्थात्
λm ∝ \(\frac{1}{T}\)
या λm ∝ \(\frac{b}{T}\)
या λm.T = b
यहाँ b एक नियतांक है जिसे ‘वीन-नियतांक’ (Wein Constant) कहते हैं। इसका मान कृष्णिका के लिए 2.90 × 103m होता है। इस नियम की सहायता से सूर्य के ताप की गणना निम्न प्रकार की जा सकती है। विभिन्न प्रयोगों द्वारा यह ज्ञात हुआ है कि सूर्य के लिए λm का मान 4753 × 10-10 होता है। अतः वीन के नियमानुसार
\(T=\frac{b}{\lambda_m}=\frac{2.90 \times 10^{-3}}{4753 \times 10^{-10}}=6100 \mathrm{~K}\)

प्रश्न 4.
धातु छड़ की स्थायी दशा एवं परिवर्तित दशा से आप क्या समझते हो ?
उत्तर:
ऊष्मा स्थानान्तरण (Heat Transfer):
ऊष्मा का संचरण सदैव उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है। ताप में अन्तर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में अथवा किसी निकाय के एक भाग से उसके दूसरे भाग में ऊर्जा के स्थानान्तरण को ऊष्मा स्थानान्तरण कहते हैं। ऊष्मा स्थानान्तरण की निम्न तीन विधियाँ हैं-

  • चालन (Conduction)
  • संवहन (Convection) एवं
  • विकिरण (Radiation) ।

सामान्यतः ठोसों में ऊष्मा का स्थानान्तरण चालन विधि से होता है जबकि द्रवों व गैसों में ऊष्मा का संचरण संवहन विधि से होता है। सूर्य से पृथ्वी तक सूर्य की ऊर्जा विकिरण विधि से आती है। यहाँ पर यह उल्लेख भी आवश्यक है कि चालन व संवहन ऊष्मा संचरण की धीमी विधियाँ हैं जबकि विकिरण तीव्र गति की विधा है। चालन व संवहन के लिए माध्यम की आवश्यकता है जबकि विकिरण के लिए माध्य की आवश्यकता नहीं है।

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प्रश्न 5.
त्रिक बिन्दु से आप क्या समझते हैं? पानी के लिए इसका मान क्या होता है?
उत्तर:
त्रिक बिन्दु (Triple Point):
हम जानते हैं कि अवस्था परिवर्तन के समय किसी पदार्थ का ताप नियत रहता है। पदार्थ के दाब व ताप के मध्य खींच गया ग्राफ प्रावस्था आरेख कहलाता है। चित्र 11.13 में जल के लिए एवं चित्र (11.14) में CO2 के लिए प्रावस्था आरेख प्रदर्शित किये गये हैं। इस प्रकार के आरेख में P-T तल को ठोस, द्रव व वाष्प क्षेत्र में विभाजित किया जा सकता है। ये क्षेत्र विभिन्न वक्रों द्वारा प्रथक होते हैं। ये वक्र हैं-(i) ऊर्ध्वपातन वक्र (BO) (ii) वाष्पन वक्र (CO) (iii) संगलन वक्र (A O) । ऊर्ध्वपातन वक्र B O के बिन्दु उस अवस्था के व्यक्त करते हैं जिस पर ठोस व वाष्प अवस्थाएँ सहवर्ती होती हैं। इसी प्रकार वाष्पन वक्र CO के बिन्दुओं पर द्रव एवं वाष्प अवस्थाएँ सहवर्ती होती हैं। संगलन वक्र AO के बिन्दुओं पर ठोस व द्रव की अवस्थाएँ सहवर्ती होती हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 6.
उष्मीय चालकता गुणांक से आप क्या समझते हो ?
उत्तर:
ऊष्मा स्थानान्तरण (Heat Transfer):
ऊष्मा का संचरण सदैव उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है। ताप में अन्तर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में अथवा किसी निकाय के एक भाग से उसके दूसरे भाग में ऊर्जा के स्थानान्तरण को ऊष्मा स्थानान्तरण कहते हैं। ऊष्मा स्थानान्तरण की निम्न तीन विधियाँ हैं-

  • चालन (Conduction)
  • संवहन (Convection) एवं
  • विकिरण (Radiation) ।

सामान्यतः ठोसों में ऊष्मा का स्थानान्तरण चालन विधि से होता है जबकि द्रवों व गैसों में ऊष्मा का संचरण संवहन विधि से होता है। सूर्य से पृथ्वी तक सूर्य की ऊर्जा विकिरण विधि से आती है। यहाँ पर यह उल्लेख भी आवश्यक है कि चालन व संवहन ऊष्मा संचरण की धीमी विधियाँ हैं जबकि विकिरण तीव्र गति की विधा है। चालन व संवहन के लिए माध्यम की आवश्यकता है जबकि विकिरण के लिए माध्य की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न 7.
गलन की गुप्त ऊष्मा से क्या अभिप्राय है? बर्फ के लिए इसका क्या मान होता है?
उत्तर:
गुप्त ऊष्मा (Latent Heat):
पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के समय ऊष्मा की आपूर्ति निरन्तर होती रहती है, लेकिन पदार्थ का ताप नहीं बदलता है। यह तब तक नियत रहता है जब तक सम्पूर्ण पदार्थ की अवस्था परिवर्तित नहीं हो जाती है। इस समय पदार्थ को दी गई ऊष्मा उसका ताप न बढ़ाकर उसके अणुओं को आणविक बलों के विरुद्ध अलग करने में व्यय होती है। “पदार्थ के
एकांक द्रव्यमान की अवस्था परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा को पदार्थ की गुप्त ऊष्मा कहते हैं।” इसे L से व्यक्त करते हैं। चूँकि अवस्था परिवद्रन के समय दी गई ऊष्मा से ताप वृद्धि नहीं होती है इसलिए ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं। अवस्था परिवर्तन के दौरान ताप व दाब का मान नियत रहता है।

उदाहरण के लिए यदि -15°C पर स्थित बर्फ को ऊष्मा दी जाये तो पहले बर्फ का ताप बढ़कर 0°C तक पहुँचता है। यही बर्फ का गलनांक है। अतः ऊष्मा प्रदान करने की प्रक्रिया जारी रखी जाये तो बर्फ का अवस्था परिवर्तन अर्थात् पिघलना प्रारम्भ होता है। ताप का मान 0°C पर ही नियत रहेगा जब तक पूरी बर्फ नहीं गल जाती। अवस्था परिवर्तन की यही स्थिति वाष्पन के समय होती है। क्वथनांक पर द्रव का ताप नियत हो जाता है और तब तक नियत रहता है जब तक सारा द्रव वाष्प में परिवर्तित नहीं हो जाता है।
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प्रश्न 8.
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा से क्या अभिप्राय है? भाप के लिए इसका क्या मान होता है?
उत्तर:
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat of Vaporisation):
ऊष्मा की वह मात्रा जो पदार्थ के एकांक द्रव्यमान को उसके क्वथनांक पर द्रव से गैस अवस्था में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक होती है, पदार्थ की वाष्पन की गुप्त ऊष्मा Lv कहलाती है। अवस्था परिवर्तन से सम्बन्धित ऊष्मा व ताप के मध्य जल के लिए परिवर्तन चित्र में प्रदर्शित है।
यहाँ यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि अवस्था परिवर्तन के समय ऊष्मा चाहे ली जाये या दी जाये लेकिन ताप नियत रहता है। चित्र 11.15 में A B, C D तथा EF की प्रवणता समान नहीं है जिसका कारण।

विभिन्न अवस्थाओं में विशिष्ट ऊष्मा का असमान होना है। जल के लिए Lf = 2.33 × 105 J.kg-1 व Lv = 22.6 × 105 J.kg है अर्थात् 0°C पर 1 kg बर्फ को पूर्णतः पिघलाने के लिए 3.33 × 105 J ऊष्मा की आवश्यकता होती है और उक्त जल को 100°C पर पूर्णरूप से वाष्प में बदलने के लिए 22.6 × 105 J ऊष्मा की आवश्यकता होती है। स्पष्ट है कि 100°C के जल की अपेक्षा 100°C की भाप में 22.6 × 105 J ऊष्मा अधिक होती है। इसीलिए उबलते हुए जल की अपेक्षा भाप से अधिक जलन होती है। निम्न सारणी में कुछ पदार्थों के ताप व गुप्त ऊष्मा के मान दिये गये हैं-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -3
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 9.
विद्युत् हीटर का स्विच ऑन करने के कुछ समय पश्चात् हीटर का ताप स्थिर हो जाता है, जबकि उसमें धारा प्रवाहित होती रहती है, क्यों?
उत्तर:
कुछ समय के बाद स्थायी अवस्था आ जाती है, इस अवस्था मैं चालन, संवहन व विकिरण द्वारा ऊष्मा हानि दर हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर के बराबर हो जाती है।

प्रश्न 10.
जाड़ों में मोटी कमीज की अपेक्षा दो पतली कमीजें पहनना अधिक उपर्युक्त है, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि दो पतों के मध्य वायु की एक पर्त बन जाती है जो कि ऊष्मा की कुचालक है, जिससे शरीर की ऊष्मा बाहर नहीं जा पाती है।

प्रश्न 11.
किसी पदार्थ के उष्मीय प्रतिरोध से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
चालन (Conduction):
यदि किसी चालक छड़ के सिरों पर तापान्तर उत्पन्न किया जाता है तो ऊष्मा का संचरण उच्च ताप के सिरे से निम्न ताप के सिरे की ओर होने लगता है। ऊष्मा के इसी स्थानान्तरण को चालन कहते हैं। उदाहरण के लिए-लोहे की छड़ का एक सिरा गर्म करने पर दूसरे सिरे का गर्म हो जाना। हम जानते हैं कि ठोसों के अणु केवल अपने स्थान पर कम्पन कर सकते हैं लेकिन अपना स्थान नहीं छोड़ते। छड़ के गर्म सिरे पर अणु ऊष्मा ग्रहण करके अधिक आयाम के दोलन करने लगते हैं अर्थात् उनकी दोलन ऊर्जा बढ़ जाती है। इस प्रकार इस भाग के अणुओं की गतिज दूसरे पड़ोसी भाग के अणुओं की अपेक्षा अधिक हो जाती है। इन अणुओं की टक्क्र समीपवर्ती कम ऊर्जा वाले भाग के अणुओं से होती है, अतः ऊर्जा का स्थानान्तरण कम ऊर्जा वाले अणुओं को हो जाता है। यही प्रक्रिया आगे के भागों की ओर बढ़ती है और इस प्रकार अणुओं के माध्यम से ऊष्मीय ऊर्जा का स्थानान्तरण होता रहता है। यही चालन विधि है। स्पष्ट है कि इस विधा में केवल ऊष्मीय ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, द्रव्य का नहीं।

सभी पदार्थों का ऊष्मा के प्रति व्यवहार समान नहीं है। कुछ पदार्थ जैसे-ताँबा, चाँदी, लोहा आदि ऊष्मा के अच्छे चालक होते हैं। इसके विपरीत कुछ अन्य पदार्थ जैसे-काँच, प्लास्टिक, बेकेलाइट, प्लाईवुड आदि ऊष्मा के कुचालक होते हैं। धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन भी ऊष्मा चालन में सक्रिय योगदान देते हैं। “पदार्थों का वह गुण जो ऊष्मा के चालन की व्याख्या करता है उसे ऊष्मा चालकता से परिभाषित करते हैं। ऊष्मा चालन की व्याख्या किसी पदार्थ में किसी दिये गये तापान्तर पर ऊष्मा प्रवाह की दर से की जाती है।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -4

प्रश्न 12.
समान पदार्थ के दो गोलों की त्रिज्याओं एवं इसके पृष्ठ तापक्रम के मान क्रमशः r1,r2 एवं T1,T2 हैं तथा ये समान शक्ति की ऊर्जा विकिरित करते हैं, तो r1 एवं r2 का अनुपात कितना होगा?
उत्तर:
पदार्थ की शक्ति
(P) = Aσ T4 = 4πr²σ T4
P a r²T4
या r² ∝ \(\frac{1}{T^4}\) [∵ P = स्थिरांक ]
∴ \(\frac{r_1}{r_2}=\left(\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}\right)^2\)

प्रश्न 13.
तीन कृष्ण पिण्डों के लिए तीव्रता- तरंग दैर्ध्य ग्राफ प्रदर्शित है। पिण्डों के ताप क्रमश: T1,T2 व T3 हों तो T1,T2 व T3 में सम्बन्ध ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -5
उत्तर:
चीन के नियम से, λm × \(\frac{1}{T}\) तथा चित्र से,
m)1 < (λm)3 < (λm)2
अतः T1 > T3 > T2 से।

प्रश्न 14.
चित्र में दिखाया गया ग्राफ किसी वस्तु के तापक्रम के लिए डिग्री सेल्सियस एवं डिग्री फॉरेनहाइट के बीच है, तब AB रेखा का ढाल ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -6
उत्तर:
सेण्टीग्रेड तथा फॉरेनहाइट तापक्रम पैमाने में सम्बन्ध
\(\frac{C}{5}=\frac{F-32}{9}\)
\(C=\frac{5}{9} F-\frac{160}{9}\)
उपर्युक्त समीकरण की तुलना y = mx + c से करने पर,
\(m=\frac{5}{9}\)
अतः रेखा की ढाल = \(\frac{5}{9}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 15.
वायु तथा लकड़ी दोनों ही ऊष्मा के कुचालक हैं, यदि तप्त तन्तु व अपने बीच लकड़ी का पर्दा रख दें, तो ऊष्मा हम तक नहीं पहुँच पाती, परन्तु बीच में केवल वायु होने से हम तप्त तन्तु की ऊष्मा का आभास करते हैं, क्यों?
उत्तर:
वायु तथा लकड़ी दोनों ही ऊष्मा की कुचालक हैं, परन्तु वायु में संवहन द्वारा ऊष्मा का संचरण हो सकता है जबकि लकड़ी में संवहन की प्रक्रिया नहीं होती, इसलिए तप्त तन्तु व हमारे बीच लकड़ी का पर्दा होने से तप्त तन्तु की ऊष्मा हम तक नहीं पहुँच पाती, परन्तु लकड़ी के पर्दे की अनुपस्थिति में तप्त तन्तु से ऊष्मा संवहन द्वारा हम तक पहुँच जाती है।

प्रश्न 16.
धातु के दो गोले S1 एवं S2 समान पदार्थ के बने हैं एवं इनकी सतहों की प्रकृति भी समान है। S1 गोले का द्रव्यमान, S2 के द्रव्यमान का तीन गुना है। दोनों गोलों को समान उच्च तापक्रम तक गर्म कर एक कमरे में एक-दूसरे से ऊष्मारोधित रूप में भिन्न तापक्रम पर रखा जाता है तो S1 एवं S2 के ठण्डा होने की दरों का अनुपात ज्ञात कीजिए ।
उत्तर-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -7

प्रश्न 17.
स्टील के खाना पकाने के बर्तनों की पेंदी में ताँबे की पर्त लगाई जाती है, क्यों?
उत्तर:
स्टील की अपेक्षा ताँबे की ऊष्मा चालकता काफी अधिक होती है, अतः ताँबे की अतिरिक्त तली होने के कारण आग पर रखने पर यह अधिक ऊष्मा का कम समय में संचरण करती है।

प्रश्न 18.
रेफ्रिजरेटर में शीतलक कुण्डलियाँ ऊपर क्यों बनाई जाती हैं ?
उत्तर:
ऊपर की वायु कुण्डलियों के सम्पर्क में आने पर ठण्डी होकर भारी हो जाती है अतः नीचे आने लगती है तथा नीचे की गर्म हल्की वायु ऊपर जाने लगती है। इस प्रकार रेफ्रिजरेटर में वायु में संवहन धाराएँ बन जाती हैं तथा पूरा स्थान ठण्डा हो जाता है, यदि शीतलक कुण्डलियाँ नीचे लगायी जाएँ, तो संवहन धाराएँ नहीं बनेंगी।

प्रश्न 19.
तारा A हरे रंग का, तारा B नीले रंग का प्रकाश उत्सर्जित करता है। इन दोनों में किसका ताप अधिक है?
उत्तर:
वीन के नियम के अनुसार, λmT = नियतांक,
इसके अनुसार, T ∝ \(\frac{1}{λ_m}\)
चूँकि नीले रंग की तरंगदैर्घ्य हरे रंग से कम होती है, अतः नीला रंग उत्सर्जित करने वाले तारे का ताप अधिक होगा अर्थात् तारे B का ताप A की अपेक्षा अधिक होगा।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 20.
यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल अनुपस्थित होता तो पृथ्वी इतनी ठण्डी हो जाती है कि यहाँ जीवन सम्भव नहीं होता। समझाइए, क्यों ?
उत्तर:
पृथ्वी के चारों ओर वायुमण्डल अवरक्त विकिरणों के लिए एक कुचालक आवरण की भाँति व्यवहार करता है। यह दिन के समय पृथ्वी द्वारा प्राप्त की गई ऊष्मा को रात्रि के समय वापस जाने से रोक लेता है। किन्तु यदि पृथ्वी पर वायुमण्डल अनुपस्थित होता तो पृथ्वी सारी ऊष्मा को उत्सर्जित कर देती और यदि सारी ऊष्मा पृथ्वी की सतह छोड़ देती तो यह अत्यधिक ठण्डी हो जाती।

प्रश्न 21.
वे बर्तन जिनके पैदे काले और खुरदुरे होते हैं उनमें रखा द्रव पॉलिश किये हुए आधार वाले बर्तन की तुलना में जल्दी उबलने लग जाता है, क्यों?
उत्तर:
काले और खुरदुरे पृष्ठ चमकीले पृष्ठों की तुलना में ऊष्मा के अच्छे अवशोषक होते हैं। इस कारण ही वे बर्तन जिनके पैदे काले और खुरदुरे होते हैं, उनमें रखा द्रव पॉलिश किये हुए पेंदे वाले बर्तन की तुलना में जल्दी उबलने लग जाता है।

प्रश्न 22.
मोटे काँच के गिलास में गर्म चाय डालने से गिलास टूट जाता है परन्तु चम्मच रखे गिलास में चाय डालने से गिलास नहीं टूटता है, क्यों?
उत्तर:
जब काँच के गिलास में गर्म चाय डालते हैं तो गिलास के भीतर की सतह फैलती है परन्तु काँच ऊष्मा का कुचालक होने के कारण ऊष्मा बाहर की सतह पर शीघ्र नहीं पहुँचती जिसके कारण गिलास टूट जाता है। यदि गिलास में चम्मच रख दें तो ऊष्मा चम्मच में फैल जाती है और गिलास टूटने से बच जाता है।

प्रश्न 23.
रेल की पटरियों के मध्य कुछ स्थान खाली क्यों छोड़ा जाता है?
उत्तर:
यदि रेल की पटरियों के मध्य स्थान खाली नहीं छोड़ा जायेगा तो गर्मियों में ताप वृद्धि के कारण ये प्रसारित होंगी और खाली स्थान के अभाव में मुड़ जाएंगी इससे ट्रेन पटरी से उतर सकती है। इसी कारण दो पटरियों के मध्य कुछ स्थान खाली रखा जाता है।

प्रश्न 24.
दो छड़ों के पदार्थों की ऊष्मा चालकताओं का अनुपात 4 : 3 है। यदि दोनों की त्रिज्या एवं ऊष्मीय प्रतिरोध समान हों तो उनकी लम्बाईयों का अनुपात क्या
होगा ?
उत्तर:
R = \(\frac{l}{KA}\) ∵ R1 = R2 तथा A1 = A2
∴ \(\frac{l_1}{\mathrm{~K}_1 \mathrm{~A}}=\frac{l_2}{\mathrm{~K}_2 \mathrm{~A}} \Rightarrow \frac{l_1}{l_2}=\frac{\mathrm{K}_1}{\mathrm{~K}_2}=\frac{4}{3}\)
∴ l1 : l2 = 4 : 3

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प्रश्न 25.
जिस रात आकाश में बादल होते हैं, उस रात अधिक गर्मी पड़ती है। कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
दिन में पृथ्वी सूर्य के ऊष्मीय विकिरण को अवशोषित करके गर्म हो जाती है तथा रात को ऊष्मीय विकिरण उत्सर्जित करके ठण्डी होती है, जब आकाश में बादल होते हैं जो कि ऊष्मीय विकिरण के अवशोषक हैं, तब पृथ्वी से उत्सर्जित विकिरण बादलों से परावर्तित होकर वापस पृथ्वी की ओर आ जाती है, जिससे पृथ्वी गर्म बनी रहती है।

प्रश्न 26.
पारे के एक तापमापी A का बल्ब गोलाकार तथा दूसरे का बेलनाकार है। दोनों में पारे की मात्रा समान है। इनमें से कौन-सा तापमापी गर्म जल का ताप शीघ्र नापेगा ?
उत्तर:
शेष सभी बातें समान हैं, ऊष्मा चालन की दर क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती होती है, बेलनाकार बल्ब का पृष्ठ क्षेत्रफल गोलाकार बल्ब की अपेक्षा अधिक होता है, अतः बेलनाकार बल्ब में ऊष्मा चालान की दर अधिक होगी, अतः बेलनाकार बल्ब वाला तापमापी गर्म जल का ताप शीघ्र पढ़ेगा।

प्रश्न 27.
धातु की छड़ को गर्म करने पर परिवर्ती अवस्था में समय के साथ ताप का बढ़ना किस पर निर्भर करता है?
उत्तर:
विसरणशीलता पर।
विसरणशीलता = \(\frac{K}{ρs}\)
जहाँ K = ऊष्मा चालकता,
ρ = छड़ के पदार्थ का घनत्व
s = पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा

प्रश्न 28.
धातु की एक गेंद पर काला चिह्न है, गेंद को 1000° C तक गर्म करके अन्धेरे कमरे में ले जाया जाता है, यहाँ पर काला चिह्न शेष गेंद से अधिक चमकता हुआ दिखाई देता है, क्यों?
उत्तर:
काले धब्बे वाला भाग शेष सतह की तुलना में विकिरण का अच्छा अवशोषक है, अत: किरचॉफ के नियम के अनुसार उच्च ताप पर यह विकिरण का अच्छा उत्सर्जक भी है। यही कारण है कि उच्च ताप पर काला चिह्न, शेष गेंद की अपेक्षा अधिक चमकता हुआ दिखाई देता है।

प्रश्न 29.
ऊष्मा तापमापी में प्रयुक्त पदार्थ के क्या विभिन्न गुण हैं ?
उत्तर:
ऊष्मा तापमापी में प्रयुक्त पदार्थ में निम्न गुण हैं-
(i) क्वथनांक अधिक तथा हिमांक निम्न होना चाहिए जिससे अधिक परास के ताप को मापा जा सके।
(ii) पदार्थ का प्रसार गुणांक उच्च होना चाहिए जिससे तापमापी संवेदनशील हो ।
(iii) यह शुद्ध अवस्था में उपलब्ध होना चाहिए।
(iv) काँच की नली में यह चिपकना नहीं चाहिए।
(v) इसका ऊष्मा चालकता अच्छी होनी चाहिए।
(vi) इसका प्रसार एक समान होना चाहिए जिससे इसका अंशांकन युग्म हो सके।

प्रश्न 30.
बिजली के चूल्हे में ऊष्मा सतत निकलती रहती है, फिर भी उसका ताप कुछ समय बाद स्थिर हो जाता है, क्यों ?
उत्तर:
बिजली के चूल्हे में जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो चूल्हा लगातार धीरे-धीरे गर्म होने लगता है जिससे उसका ताप बढ़ता है। गर्म होने पर उससे ऊष्मा विकरित होने लगती है। कुछ समय बाद जब चूल्हे में विद्युत् धारा के कारण ऊष्मा उत्पादन की दर और चूल्हे द्वारा विकरित ऊष्मा की दर बराबर हो जाती है, तब चूल्हे का ताप स्थिर हो जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
तापमापन से क्या अभिप्राय है ? तापीय पैमाने क्या होते हैं ? इन्हें कैसे प्राप्त किया जाता है ? विभिन्न तापीय पैमानों के व्यंजक ज्ञात कीजिए एवं इनमें सम्बन्ध बताइये।
उत्तर:
ताप मापन (Temperature Measurement)
“तापमापन हेतु प्रयुक्त उपकरण तापमापी कहलाता है।” ताप के मापक्रम के लिए पदार्थ के ऐसे गुण का चयन किया जाता है, जो ताप के साथ परिवर्तित तथा प्रेक्षणीय होता है। पदार्थ के ऐसे गुण को “तापमापक गुण” कहते हैं। सामान्यतः उपयोग में आने वाला तापमापी काँच में द्रव के प्रसार (ताप के साथ आयतन में परिवर्तन) पर आधारित है।

इस प्रकार के तापमापियों में सामान्यतः पारा तथा ऐल्कोहॉल जैसे द्रवों का उपयोग किया जाता है। अन्य प्रकार के तापमापियों में गैसों के ऊष्मीय प्रसार (स्थिर आयतन पर गैस के दाब में परिवर्तन); चालक तार के विद्युत् प्रतिरोध को परिवर्तित होना आदि ताप मापक गुणों का उपयोग किया जाता है। तापमापी में अंशाकन इस प्रकार किया जाता है कि ताप को संख्यात्मक रूप से व्यक्त किया जा सके। किसी मानक तापमाप क्रम के निर्धारण हेतु दो नियत सन्दर्भ बिन्दुओं की आवश्यकता होती है। शुद्ध जल का हिमांक तथा क्वथनांक दो सुविधाजनक नियत बिन्दु हैं। ये ऐसे ताप हैं जो मानक दाब पर नियत रहते हैं तथा शुद्ध रूप से पुनरोत्पादित (reproduce) किये जा सकते हैं।
तापमापक गुणों के आधार पर तापमापियों को निम्न प्रकार विभाजित किया जा सकता है-

  • द्रव तापमापी ( जैसे-पारा तापमापी एवं ऐल्कोहॉल तापमापी)
  • गैस तापमापी (जैसे-स्थिर आयतन वायुतापमापी, हाइड्रोजन गैस तापमापी)
  • प्रतिरोध तापमापी (जैसे-प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी)
  • ताप युग्म तापमापी, ताप बढ़ने पर ताप वैद्युत वाहक बल बढ़ने के सिद्धान्त पर आधारित है।
  • विकिरण तापमापी, ताप बढ़ने पर विकिरण की मात्रा पर आधारित है।
  • तप्त तन्तु तापमापी, प्रदीप्ति समानता पर आधारित है।
  • वाष्पदाब तापमापी, संतृप्त वाष्पदाब पर आधारित है।

प्रश्न 2.
न्यूटन के शीतलन नियम को लिखिए तथा इसके लिए आवश्यक प्रतिबन्ध निकालिए।
उत्तर:
न्यूटन का शीतलन नियम (Newton’s Law of Cooling):
इस नियम के अनुसार, “किसी तप्त वस्तु के शीतल \(\frac{d T}{d t}\) अथवा वस्तु द्वारा ऊष्मा क्षय की दर \(\frac{d Q}{d t}\) वातावरण के मध्य तापान्तर के अनुक्रमानुपाती होती है तापान्तर अधिक न हो।” यदि वस्तु एवं वातावरण के ताप क्रमशः \mathrm{T}_0 हैं, तो न्यूटन के शीतलन नियम से
–\(\frac{d Q}{d t}\) ∝ (TY – T0)
या –\(\frac{d Q}{d t}\) = k(T – T0) ………(1)
जहाँ K एक नियतांक है जिसका मान धनात्मक होता है तथा इसका मान वस्तु के पृष्ठ व प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि T ताप पर वस्तु द्रव्यमान व विशिष्ट ऊष्मा क्रमशः m व S हों और d t समय में d T ताप हो,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -8

प्रश्न 3.
रेखीय प्रसार गुणांक, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक परिभाषित कर इनमें परस्पर सम्बन्ध प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
रेखीय प्रसार गुणांक तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक में सम्बन्ध (Relation Between Coefficient of Linear Expansion and Coefficient of Superficial Expansion)
माना किसी ताप पर किसी पदार्थ के एक वर्गाकार पटल की प्रत्येक भुजा की लम्बाई l मीटर है, अतः इसका क्षेत्रफल l² मी² होगा। इस पटल का ताप ∆t°C बढ़ा देने पर पटल की प्रत्येक भुजा की लम्बाई (l+∆l) मीटर तथा क्षेत्रफल (l+∆l)² मी² हो जायेगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -9

रेखीय प्रसार गुणांक तथा आयतन प्रसार गुणांक में सम्बन्ध (Relation Between Coefficient of Linear Expansion and Coefficient of Volume Expansion):
माना किसी ताप पर किसी पदार्थ के घन की प्रत्येक भुजा 1 मीटर है। अतः इसका आयतन 1 मी०³ होगा। इस घन का ताप 1°C बढ़ा देने पर घन की प्रत्येक भुजा (1+α) मीटर तथा घन का आयतन (1+α)³ हो जाएगा।
अतः घन के आयतन में वृद्धि
∆V = अन्तिम आयतन – प्रारम्भिक आयतन
= (1+α)³ – 1
∆V = 1 + 3α + 3α² + α³ – 1
= 3α + 3α² + α³
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -10
∵ α का मान अत्यन्त कम है अतः α² व α³ के मान बहुत छोटे होंगे। अतः α² व α³ को छोड़ने पर,
आयतन में वृद्धि ∆V = 3 α
∴ आयतन प्रसार गुणांक
\(\gamma=\frac{\text { आयतन में वृद्धि }}{\text { प्रारम्भिक आयतन } \times \text { ताप में वृद्धि }}\)
\(\gamma=\frac{3 \alpha}{1 \times 1} \quad \text { या } \gamma=3 \alpha\)
अतः किसी पदार्थ का आयतन प्रसार गुणांक उसके रेखीय प्रसार गुणांक का तीन गुना होता है।
अत: α : β : γ = α : 2 α : 3 α \\
या α : β : γ = 1 : 2 : 3
यही रेखीय, क्षेत्रीय तथा आयतन प्रसार गुणांकों में सम्बन्ध है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 4.
पदार्थ की अवस्था परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ? इसे उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर:
अवस्था परिवर्तन (Change of State):
पदार्थ की तीन अवस्थाएँ ठोस, द्रव एवं गैस हैं उदाहरण के लिए, जल ठोस अवस्था में बर्फ (ice) के रूप में, द्रव अवस्था में जल के रूप में तथा गैसीय अवस्था में भाप के रूप में होता है। इन परिवर्तनों का कारण पदार्थ और उसके परिवेश के बीच ऊष्मा का विनिमय होता है।
अतः वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ अपनी भौतिक अवस्था को परिवर्तित करता है, अवस्था परिवर्तन कहलाता है।
अवस्था परिवर्तन के बारे में अधिक जानकारी के लिए हम चित्र में प्रदर्शित प्रयोग पर विचार करते हैं।
एक बीकर में कुछ बर्फ के टुकड़े लेकर बर्फ का ताप (IPC) नोट कर लेते हैं। अब बीकर को बर्नर द्वारा गर्म करते हैं एवं तापमापी का पाठ्यांक हर दो मिनट बाद नोट करते जाते हैं विडोलक की सहायता से बर्फ को विडोलित करते रहते हैं प्रयोग में हम देखते हैं कि जब तक बीकर में बर्फ उपस्थित रहती है तब तक थर्मामीटर का पाठ्यांक नियत रहता है अर्थात् बढ़ता नहीं है। स्पष्ट है कि ऊष्मा की सतत आपूर्ति होने पर भी ताप के मान में कोई वृद्धि नहीं होती है। यहाँ ऊष्मा का उपयोग बर्फ (ठोस) से द्रव (जल) में अवस्था परिवर्तन में हो रहा है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -11
अवस्था परिवर्तन के लिए मुख्यतः दो शर्तें आवश्यक हैं-
(i) अवस्था परिवर्तन एक निश्चित ताप पर होता है।
(ii) जिस समय अन्तराल में अवस्था का परिवर्तन होता है उस बीच पदार्थ का ताप स्थिर रहता है, जब तक पूरे पदार्थ का अवस्था परिवर्तन नहीं हो जाता।

अवस्था परिवर्तन की कुछ मुख्य क्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) गलन (Melting) : ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में परिवर्तन को गलन कहते हैं। यह क्रिया जिस निश्चित ताप पर होती है, वह गलनांक (Melting Point) कहलाता है।

(ii) क्वथन (Boiling) : जब कोई पदार्थ पूर्णत: किसी निश्चित ताप पर द्रव अवस्था से गैस अवस्था में बदलता है तो इस परिवर्तन को क्वथन कहते हैं। यह क्रिया जिस निश्चित ताप पर होती है, वह क्वथनांक (Boiling Point) कहलाता है।

(iii) वाष्पन (Vapourisation ) : ऊपरी सतह से द्रव सभी ताप पर गैसीय अवस्था में परिवर्तित होता रहता है। यह क्रिया वाष्पन कहलाती है।

(iv) संघनन या द्रवण ( Condensation ) : वह क्रिया जिसमें गैस का ताप कम करने पर वह एक निश्चित ताप पर गैस अवस्था से द्रव अवस्था में परिवर्तित हो जाती है, द्रवण या संघनन कहलाती है। यह ताप द्रवणांक कहलाता है।

(v) ऊर्ध्वपातन (Sublimation ) : कुछ ठोस पदार्थ (जैसे- नौसादर, कपूर इत्यादि) ऐसे होते हैं, जो गर्म करने पर बिना द्रवित हुए भी ठोस अवस्था से सीधे गैस अवस्था में आ जाते हैं तथा ठण्डा होने या सीधे ठोस में बदल जाते हैं। इस क्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं। उदाहरण के लिए- आयोडीन, शुष्क हिम, नेप्यलीन इत्यादि ।

(vi) हिमायन (Freezing) : द्रव से ठोस अवस्था में परिवर्तन हिमायन (Freezing) कहलाता है। इस क्रिया के लिए आवश्यक निश्चित ताप हिमांक (Freezing point) कहलाता है।

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प्रश्न 5.
गलनांक एवं क्वथनांक पर दाब के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
गलनांक पर दाब का प्रभाव (Effect of Pressure on Meeting Point):
पदार्थ का गलनांक निश्चित दाब पर निश्चित (नियत) होता है लेकिन दाब बदलने पर गलनांक बदल जाता है। दाब बढ़ाने पर गलनांक भी बढ़ जाता है। इस तथ्य को समझने के लिए चित्र की भाँति एक प्रयोग करते हैं। एक बर्फ की पट्टिका पर चित्र की भाँति इसके दोनों ऊपर से गुजरते हुए तार के दोनों मुक्त सिरों पर समान भार (जैसे 5 kg) लटका देते हैं तो भार के कारण उत्पन्न दाब के कारण तार के नीचे की बर्फ कमरे के ताप पर भी पिघल जाती है जिससे तार बर्फ की पट्टिका में प्रवेश कर जाता है और धीरे-धीरे पूरी पट्टिका से आर-पार गुजर जाता है। तार नीचे धँसता जाता है और उसके ऊपर पिघली हुई बर्फ पुन: जम जाती है। इस क्रिया को ‘पुनर्हिमायन’ कहते हैं। स्पष्ट है कि दाब बढ़ाने पर गलनांक भी बढ़ जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -12

दाब पर क्वथनांक का प्रभाव (Effect of Pressure on Boiling Point):
द्रवों का क्वथनांक भी दाब पर निर्भर करता है। दाब बढ़ाने पर क्वथनांक बढ़ जाता है एवं दाब घटाने पर क्वथनांक कम हो जाता है। उदाहरण के लिए एक वायुमण्डलीय दाब पर जल का क्वथनांक 100°C होता है परन्तु दाब यदि दो वायुमण्डलीय दाब के बराबर कर दिया जाये तो जल का क्वथनांक 128°C हो जाता है। क्वथन की प्रक्रिया को समझने के लिए निम्न प्रयोग पर विचार करते हैं-
चित्र में प्रदर्शित व्यवस्था के अनुसार एक फ्लास्क में जल गर्म करते हैं जल को गर्म करने पर हम देखते हैं कि जल में घुली हुई वायु बुलबुलों के रूप में बाहर आती है इसके पश्चात् भाप के बुलबुले तली में बनते हैं किन्तु जैसे ही ऊपरी भाग के ठण्डे जल की ओर उठते हैं, संघनित होकर अदृश्य हो जाते हैं। जल का ताप जैसे ही 100°C पहुँचता है तो भाप के बुलबुले पृष्ठ पर पहुँचते हैं।

फ्लास्क के अन्दर भाप दिखाई नहीं देती हैं परन्तु जैसे ही वह बाहर आती है तो जल की अत्यन्त छोटी-छोटी बूँदों में संघनित होकर धुँध के रूप में प्रकट होती है। अब यदि कुछ देर के लिए भाप की निकासनली को बन्द कर दिया जाये तो फ्लास्क के भीतर दाब में वृद्धि होती है। क्वथन की प्रक्रिया कुछ देर के लिए रुक जाती है और फिर यह प्रक्रिया प्रारम्भ होती है तो हम देखते हैं कि थर्मामीटर का पाठ्यांक पहले से कुछ बढ़ जाता है। स्पष्ट है कि दाब बढ़ने पर जल का क्वथनांक बढ़ जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -13
अब यदि बर्नर को हटाकर जल को लगभग 80°C तक ठंडा करें और फ्लास्क से थर्मामीटर व निकास नली को हटाकर उसके मुख को कसकर बन्द कर दें तथा फ्लास्क को उल्टा करके उसके ऊपर बर्फ के समान ठंडा जल डालें तो फ्लास्क के भीतर की वाष्प संघनित होकर फ्लास्क के भीतर जल के पृष्ठ पर दाब को घटा देती है। अब निम्न दाब पर जल में पुन: क्वथन प्रारम्भ हो जाता है। इस प्रकार दाब में कमी होने पर क्वथनांक कम हो जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 6.
ऊष्मामिति का क्या सिद्धान्त है ? कैलोरीमापी की सहायता से द्रव ‘की विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कैलोरीमापी की संरचना:
कैलोरीमिति की क्रिया में प्रयोग किए जाने वाले उपकरण को कैलोरीमापी कहते हैं। इसमें ताँबे का बना एक बेलनाकार बर्तन होता है। ताँबे का प्रयोग करने का कारण इसकी विशिष्ट ऊष्मा कम होना (लगभग 0.095 कैलोरी / ग्राम°C) है। इसकी बाहरी सतह चमकदार बनायी जाती है जिससे विकिरण विधि द्वारा बाहर की ऊष्मा अन्दर तथा अन्दर की ऊष्मा बाहर नहीं जा पाती है। इस बर्तन को लकड़ी के बड़े
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -14
डिब्बे में रखकर खाली स्थान में ऊष्मा-अवरोधी पदार्थ, जैसे-रूई आदि रख देते हैं जिससे चालन तथा संवहन से होने वाले ऊष्मा के स्थानान्तरण को रोका जाता है। कैलोरीमापी में रखे पदार्थ को हिलाने के लिए विलोडक होता है जो कि ताँबे का बना होता है। कैलोरीमापी को लकड़ी के ढक्कन से बन्द कर देते हैं जिससे कि संवहन द्वारा ऊष्मा हानि को रोका जा सके। अन्दर भरे द्रव का ताप ज्ञात करने के लिए तापमापी T का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 7.
संवहन की प्रयोग द्वारा व्याख्या कीजिए एवं इसके निम्नलिखित दैनिक जीवन के उदाहरणों पर प्रकाश डालिए-
(i) हमारे पूरे शरीर का ताप समान रहना।
(ii) एअर कण्डीशनर का हीटर के रूप में उपयोग होना।
उत्तर:
संवहन (Convection):
संवहन ऊष्मा संचरण की वह विधि है, जिसमें ऊष्मा का संचरण पदार्थ की वास्तविक गति के द्वारा होता है। इस विधि द्वारा ऊष्मा का संचरण मुख्य रूप से द्रवों एवं गैसों में होता है। संवहन प्राकृतिक भी हो सकता है। प्राकृतिक संवहन में पदार्थ की गति घनत्व में अन्तर के कारण होती है और प्रणोदित भी हो सकता है। प्राकृतिक संवहन को समझने के लिए हम एक धातु के बर्तन में जल को गर्म करते हैं तो हम देखते हैं कि ऊष्मीय स्रोत से ऊष्मा प्राप्त करके बर्तन के पेढें के निकट के जल में प्रसार होता है, जिससे यहाँ का घनत्व घट जाता है। अतः उत्प्लावन के कारण यह ऊपर उठता है और इसकी जगह लेने के लिए ऊपर का ठंडा जल आता है तथा यह भी गर्म होकर पूर्व क्रिया को दोहराता है। इस प्रकार यही प्रक्रिया जारी रहती है और ऊष्मा का संचरण नीचे (अधिक ताप) से ऊपर (कम ताप) की ओर होता रहता है। स्पष्ट है संवहन में द्रव (तरल) के विभिन्न भागों का स्थूल अधिगमन होता है। तरल के इस अभिगमन को संवहन धारा से निरूपित करते हैं। इसी प्रकार गैसों (जैसे – वायु) में भी संवहन धारायें उत्पन्न होती हैं जिसके कारण ऊष्मा का संचरण अधिक ताप से निम्न ताप के क्षेत्र की ओर होता है।

संवहन की उक्त घटना को देखने के लिए हम जल में KMnO4 क्रिस्टल के कुछ कण एक फ्लास्क की तली में डालकर उसमें जल भर कर फ्लास्क को गर्म करते हैं तो हम देखते हैं कि गर्म करने पर KMnO4 के कण ऊपर की ओर गति करते हैं और संवहन धाराओं को रंग के आधार पर आसानी से देखा जा सकता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -15
प्रणोदित संवहन में पदार्थ को किसी पम्प या ब्लोअर द्वारा गति कराने हेतु विवश कराया जाता है।
संवहन के दैनिक जीवन में उदाहरण-
1. किसी स्वस्थ मनुष्य का हृदय एक पम्प की तरह कार्य करते हुए रक्त का पूरे शरीर में संचरण करता है जिसके कारण पूरे शरीर का ताप एक समान बना रहता है यह प्रणोदित संवहन का उदाहरण है।

2. ठंडे प्रदेशों में सर्दी के दिनों में बाहर का ताप 0°C से भी कम होता है जबकि किसी बन्द कमरे का ताप 20FC तक रखने के लिए एअर कंडीशनर को हीटर (Heater) की तरह काम में लाते हैं। यह भी प्रणोदित संवहन का उदाहरण है।

3. हम जानते हैं कि पृथ्वी को विषुवत् रेखीय व ध्रुवीय क्षेत्रों पर सूर्य से असमान ऊष्मा प्राप्त होती है विषुवत् रेखीय क्षेत्रों की वायु का तप्त होना तथा ध्रुवीय क्षेत्रों में वायु के शीतल होने का यही कारण है। इन्हीं कारणों से विषुवत् रेखीय क्षेत्रों से वायु का संचरण ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर होता है और पुनः विषुवत् रेखीय क्षेत्रों की ओर आती है। उक्त संवहन धाराओं को व्यापारिक धाराएँ कहते हैं। यह प्राकृतिक संवहन का उदाहरण है।

4. प्राकृतिक संवहन के कारण ही दिन में जलाशयों की तुलना में थल शीघ्र गर्म हो जाता है। इस घटना का मूल कारण जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा तथा मिश्रित धाराओं द्वारा अवशोषित ऊष्मा को बड़े आयतन के जल के सब भागों में विसरित करना है। जबकि गर्म जल के सम्पर्क वाली वायु चालन द्वारा गर्म होने से ऊपर की ओर फैलती है और अधिक घनत्व की वायु उसका रिक्त स्थान भरती है, फलस्वरूप गर्म वायु ऊपर उठती है व थल गर्म हो जाता है।

प्रश्न 8.
ऊष्मा चालन की परिवर्ती एवं स्थायी अवस्था की व्याख्या कीजिए तथा ऊष्मा चालक गुणांक की परिभाषा दीजिए। इसका मात्रक एवं विमीय सूत्र ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
चालन (Conduction):
यदि किसी चालक छड़ के सिरों पर तापान्तर उत्पन्न किया जाता है। तो ऊष्मा का संचरण उच्च ताप के सिरे से निम्न ताप के सिरे की ओर होने लगता है। ऊष्मा के इसी स्थानान्तरण को चालन कहते हैं। उदाहरण के लिए – लोहे की छड़ का एक सिरा गर्म करने पर दूसरे सिरे का गर्म हो जाना। हम जानते हैं कि ठोसों के अणु केवल अपने स्थान पर कम्पन कर- सकते हैं लेकिन अपना स्थान नहीं छोड़ते। छड़ के गर्म सिरे पर अणु ऊष्मा ग्रहण करके अधिक आयाम के दोलन करने लगते हैं अर्थात् उनकी दोलन ऊर्जा बढ़ जाती है। इस प्रकार इस भाग के अणुओं की गतिज दूसरे पड़ोसी भाग के अणुओं की अपेक्षा अधिक हो जाती है। इन अणुओं की टक्कर समीपवर्ती कम ऊर्जा वाले भाग के अणुओं से होती है, अतः ऊर्जा का स्थानान्तरण कम ऊर्जा वाले अणुओं को हो जाता है। यही प्रक्रिया आगे के भागों की ओर बढ़ती है और इस प्रकार अणुओं के माध्यम से ऊष्मीय ऊर्जा का स्थानान्तरण होता रहता है। यही चालन विधि है स्पष्ट है कि इस विधा में केवल ऊष्मीय ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है, द्रव्य का नहीं।

सभी पदार्थों का ऊष्मा के प्रति व्यवहार समान नहीं है। कुछ पदार्थ जैसे – ताँबा, चाँदी, लोहा आदि ऊष्मा के अच्छे चालक होते हैं। इसके विपरीत कुछ अन्य पदार्थ जैसे- काँच, प्लास्टिक, बेकेलाइट, प्लाईवुड आदि ऊष्मा के कुचालक होते हैं। धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन भी ऊष्मा चालन में सक्रिय योगदान देते हैं। “पदार्थों का वह गुण जो ऊष्मा के चालन की व्याख्या करता है उसे ऊष्मा चालकता से परिभाषित करते हैं। ऊष्मा चालन की व्याख्या किसी पदार्थ में किसी दिये गये तापान्तर पर ऊष्मा प्रवाह की दर से की जाती है।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -4.1
चित्र 11.16 के अनुसार माना L लम्बाई तथा A अनुप्रस्थ परिच्छेद की एक चालक छड़ है जिसका एक सिरा गर्म एवं दूसरा सिरा ठंडा है अर्थात् दोनों सिरों के मध्य तापान्तर है। ऊष्मा की हानि को कम करने के लिए छड़ के पार्श्व पृष्ठ पर कुचालक पदार्थ की पट्टी लपेट देते हैं छड़ को सूक्ष्म लम्बाई के अनेक परिच्छेदों से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं। चालन प्रक्रिया के प्रारम्भ में छड़ का प्रत्येक परिच्छेद अपने पूर्ववर्ती परिच्छेद से कुछ ऊष्मा Q1 प्राप्त करता है।

इस ऊष्मा का कुछ भाग Q2 यह परिच्छेद अवशोषित कर लेता है जिससे इस अंश का ताप बढ़ता है। तथा ऊष्मा के शेष भाग Q3 को यह अपने बाद वाले अल्पांश को स्थानान्तरित कर देता है। अत: इस अवस्था में Q1 = (Q2 + Q3) होता है। “जब तक इस प्रक्रिया द्वारा चालक छड़ का कोई भाग ऊष्मा का अवशोषण करता रहता है अर्थात् छड़ के किसी भाग का ताप बढ़ता रहता है तब तक यह ऊष्मा चालन की परिवर्ती अवस्था कहलाती है।” इस अवस्था में छड़ के प्रत्येक परिच्छेद का ताप समय के साथ बढ़ता रहता है परन्तु गर्म सिरे से छड़ की लम्बाई के अनुदिश ताप का पतन होता है।

छड़ के एक सिरे को लगातार गर्म करते रहने पर कुछ समय बाद छड़ के प्रत्येक परिच्छेद अल्पांश का ताप नियत हो जाता है। इस अवस्था में छड़ के प्रत्येक परिच्छेद, अपने से पहले परिच्छेद से प्राप्त ऊष्मा Q1 को अगले परिच्छेद को स्थानान्तरित कर देता है अर्थात् व किसी परिच्छेद द्वारा ऊष्मा का अवशोषण नहीं होता है (Q2 = 0) अत: Q1 = Q3 होता है। “छड की यह अवस्था जब छड़ का कोई भी भाग ऊष्मा का अवशोषण नहीं करता है, ऊष्मा चालन की स्थायी अवस्था (Steady State of Heat Conduction) कहलाती है।” इस अवस्था में छड़ के किसी भी परिच्छेद से एकांक समय में प्रवाहित ऊष्मा ऊष्मीय धारा कहलाती है। इसे से व्यक्त करते हैं अतः
H= \(\frac{ΔQ}{Δt}\) ………(1)
जहाँ ΔQ = Δt समय में प्रवाहित ऊष्मा की मात्रा
यह पाया जात है कि ऊष्मा चालन की स्थायी अवस्था में,
H ∝ A, (छड़ का परिच्छेद क्षेत्रफल)
H ∝ (T1 – T2) (छड़ के सिरों का तापान्तर)
एवं H ∝ \(\frac{1}{L}\) (L = छड़ की लम्बाई)
H ∝ \(\frac{A(T_1-T_2)}{L}\)
या H ∝ \(\frac{A.ΔT}{L}\)
या H = K.A.\(\frac{ΔT}{L}\) ………….(2)
यहाँ एक नियतांक है जिसे छड़ के पदार्थ का ऊष्मा चालकता गुणांक (Coefficient of Heat Conduction) कहते हैं।
यदि A = 1 ताप प्रवणता \(\frac{ΔT}{L}\) = 1°C.m-1
तो H = K
अर्थात् “किसी पदार्थ का ऊष्मा चालकता गुणांक ऊष्मा प्रवाह की उस दर के तुल्य है जो उस, पदार्थ की एकांक अनुप्रस्थ परिच्छेद वाली किसी छड़ के सिरों के मध्य एकांक ताप प्रवणता उत्पन्न कर दे।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -16

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 9.
स्टीफन का नियम लिखिए एवं इसके लिये आवश्यक प्रतिबन्ध बतलाइये। न्यूटन के नियम की उत्पत्ति स्टीफन के नियम से कीजिये।
उत्तर:
स्टीफन के नियम से न्यूटन के शीतलन नियम की व्युत्पत्ति
(Deduction Of Newton’s Law of Cooling By Stefan’s Law)
माना किसी वस्तु का क्षेत्रफल A व परमताप T तथा वातावरण का ताप T0 है तो स्टीफेन के नियम से-
\(\frac{d \mathrm{Q}}{d t}=\frac{\sigma \varepsilon \mathrm{A}}{\mathrm{J}}\left(T^4-\mathrm{T}_0^4\right)\)
जहाँ σ = स्टीफन नियतांक; ε = वस्तु की उत्सर्जकता एवं dQ = d t समय से उत्सर्जित ऊष्मीय ऊर्जा।
dQ = dt समय से उत्सर्जित ऊष्मीय ऊर्जा।
यदि T व T0 के मध्य तापान्तर ∆T हो,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -17
अर्थात् किसी तप्त वस्तु के शीतलन की दर वस्तु एवं वातावरण के मध्य तापान्तर के अनुक्रमानुपाती होती है बशर्तें कि तापान्तर कम हो। यही न्यूटन का शीतलन नियम है।

प्रश्न 10.
जल का असंगत प्रसार क्या है ? इसके दैनिक जीवन में उदाहरणों को समझाइये।
उत्तर:
जल का असंगत प्रसार (Anomalous Expansion of Water):
किसी द्रव को गर्म करने पर ताप वृद्धि के साथ-साथ उसके आयतन में भी वृद्धि होती है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -18
द्रव को ठण्डा करते जाने पर उसका ताप घटता जाता है तथा आयतन भी घटता जाता है। 4°C ताप तक आयतन कम होता है तथा 4°C के बाद जल के आयतन में वृद्धि होना प्रारम्भ होती है तथा 100°C तक वृद्धि होती जाती है।
4°C पर जल का आयतन सबसे कम तथा घनत्व सबसे अधिक (1.0 × 10³ kg / m³) होता है। इस प्रकार पानी का 0°C तथा 4°C के बीच में व्यवहार असामान्य होता है। इसे जल का असामान्य प्रसार कहते हैं।

प्रश्न 11.
ऊष्मीय विकिरण से क्या तात्पर्य है ? ऊष्मीय विकिरणों की क्या प्रकृति होती है ? समझाइये |
उत्तर:
विकिरण (Radiation)
“ऊष्मा संचरण की वह विधि जिसमें माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है, विकिरण कहलाती है।” सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा इसी विधि से आती है। चूँकि सूर्य व पृथ्वी सतह के मध्य कई करोड़ किलोमीटर की दूरी में विकिरण निर्वात् में गति करता है, जो इस बात का प्रमाण है कि विकिरण द्वारा ऊष्मा के संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं है।

अन्य उदाहरण में यदि हम आग के पास खड़े होते हैं तो हमें तुरन्त गर्मी का अनुभव होने लगता है, क्योंकि वायु अल्प ऊष्मा चालक हैं तथा धाराएँ इतनी शीघ्रता से स्थापित नहीं हो सकती। विकिरण ऊर्जा चुम्बकीय तरंगों की तरंगदैर्घ्य अलग-अलग भी हो सकती है। प्रकाश के वेग (c = 3 × 108 ms-1) से निर्वात में गति करती हैं। पदार्थ (ठोस, द्रव व गैस) विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। वस्तु द्वारा उसके तापान्तर के कारण उत्सर्जित विद्युत चुम्बकीय (जैसे गर्म लाल लोहे से उत्सर्जित विकिरण) को ऊष्मा विकिरण कहते हैं।” ऊष्मा विकिरणों की तरंगदैर्घ्य परास 1 μm से 100μm तक ये तरंगें सीधी रेखा में गमन करती हैं तथा परावर्तन व अपवर्तन नियमों का पालन करती हैं। प्रत्येक वस्तु 0K ताप से अधिक ताप वाले ऊष्मीय विकिरणों का उत्सर्जन करती है तथा जब किसी विकिरण आपतित होते हैं तो आपतित विकिरण (Q) का का कुछ भाग परावर्तित (QR) कुछ भाग का अवशोषण (QA) व शेष भाग (QT) होता है। अर्थात्
Q = QR + QA + QT
या \(\frac{Q}{Q}=\frac{Q_R}{Q}+\frac{Q_A}{Q}+\frac{Q_T}{Q}\)
या 1 = r + a + t
यहाँ r, a व t क्रमशः परावर्तन, अवशोषण व परागमन कहलाते है
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण -19
उक्त तीनों क्रियाएँ (परावर्तन, अवशोषण तथा पारगमन पृष्ठ की प्रकृति व आपतित विकिरणों की तरंगदैर्घ्य पर निर्भर) है।

प्रश्न 12.
ऊष्मीय संचरण की कौन-कौन सी विधियाँ हैं ? उनका वर्णन कीजिये तथा इनके व्यावहारिक अनुप्रयोग बताइये ।
उत्तर:
ऊष्मा स्थानान्तरण (Heat Transfer):
ऊष्मा का संचरण सदैव उच्च ताप से निम्न ताप की ओर होता है। ताप में अन्तर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में अथवा किसी निकाय के एक भाग से उसके दूसरे भाग में ऊर्जा के स्थानान्तरण को ऊष्मा स्थानान्तरण कहते हैं। ऊष्मा स्थानान्तरण की निम्न तीन विधियाँ हैं-
(i) चालन (Conduction)
(ii) संवहन (Convection) एवं
(iii) विकिरण (Radiation) ।
सामान्यतः ठोसों में ऊष्मा का स्थानान्तरण चालन विधि से होता है जबकि द्रवों व गैसों में ऊष्मा का संचरण संवहन विधि से होता है। सूर्य से पृथ्वी तक सूर्य की ऊर्जा विकिरण विधि से आती है। यहाँ पर यह उल्लेख भी आवश्यक है कि चालन व संवहन ऊष्मा संचरण की धीमी विधियाँ हैं जबकि विकिरण तीव्र गति की विधा है। चालन व संवहन के लिए माध्यम की आवश्यकता है जबकि विकिरण के लिए माध्य की आवश्यकता नहीं है।

आंकिक प्रश्न (Numerical Question)

तापमापन पर आधारित

प्रश्न 1.
दो वस्तुओं के तापों में अन्तर 63°F है सेल्सियस पैमाने पर यह अन्तर कितना होगा ?
उत्तर:
35°C

प्रश्न 2.
एक अशुद्ध तापमापी के स्थिर बिन्दु 5°C तथा 95°C चिह्नित हैं। इस तापमापी द्वारा एक वस्तु का ताप 59° मापा गया। सेल्सियस पैमाने पर इस वस्तु के ताप का शुद्ध मान क्या होगा ?
उत्तर:
60°C

ऊष्मीय प्रसार पर आधारित

प्रश्न 3.
पीतल के एक घन की भुजा की लम्बाई 15°C ताप पर 10 सेमी है। 60°C ताप पर गर्म करने पर इसकी भुजा की लम्बाई तथा आयतन ज्ञात कीजिए रेखीय प्रसार गुणांक = 1.9 × 10 प्रति °C है।
उत्तर:
10.0085 सेमी, 10002.5 सेमी

प्रश्न 4.
एक पीतल की चकती में एक छेद है। 27°C ताप पर छेद का व्यास 2.50 सेमी है। चकती को 327°C ताप पर गर्म करने पर इसके छेद के व्यास परिवर्तन ज्ञात कीजिए दिया है, पीतल का रेखीय प्रसार गुणांक = 1.9 × 10-5°C-1
उत्तर:
0.0142 सेमी

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 5.
स्टील की लोलक युक्त एक घड़ी का 20°C पर आवर्तकाल 2 सेकण्ड है। यदि घड़ी का ताप बढ़ाकर 30°C कर दिया जाये तो प्रतिदिन समय में कमी या वृद्धि कितनी होगी? स्टील के लिए रेखीय प्रसार गुणांक = 1.2 × 10-5°C-1 है।
उत्तर:
5.18 सेकण्ड धीमी हो जायेगी।

प्रश्न 6.
काँच के बने एक फलास्क का °C पर आयतन 100 सेमी³ है। इसका 100°C पर आयतन क्या होगा ? दिया है, काँच का आयतन प्रसार गुणांक = 2.5 × 10-5°C-1
उत्तर:
1000.25 सेमी³

प्रश्न 7.
कोई व्यक्ति किसी बैलगाड़ी के लकड़ी के पहिए की नेमी पर लोहे की रिंग चढ़ाता है। यदि 37°C पर नेमी व लोहे की रिंग का व्यास क्रमश: 5,443 व 5.434m हैं तो लोहे को किस ताप पर गर्म किया जाये कि नेमी पहिये में ठीक से बैठ जाये यहाँ लोहे का रेखीय प्रसार गुणांक 1.20 × 10-5 K-1 है। |
उत्तर:
T2 = 175.02°C

प्रश्न 8.
यदि पारे का काँच के सापेक्ष आभासी प्रसार गुणांक 0.00040/°C व इसका वास्तविक प्रसार 0.00049/°C है तो काँच का रेखीय प्रसार गुणांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
αg = 0.00003°C

प्रश्न 9.
एक धातु का आयतन प्रसार गुणांक 6.0 × 105 प्रति °C है। इसका रेखीय प्रसार गुणांक तथा क्षेत्रीय प्रसार गुणांक का मान कितना होगा ?
उत्तर:
4.0 × 10-5 प्रति/°C

ऊष्मामिति पर आधारित

प्रश्न 10.
-20°C की 5 किग्रा बर्फ को 100°C की भाप में बदलने के लिए कितनी ऊष्मा की आवश्यकता होगी? बर्फ की विशिष्ट ऊष्मा 0.5 किलो कैलोरी / किग्रा °C बर्फ की गुप्त ऊष्मा = 80 किलो कैलोरी / किग्रा, भाप की गुप्त ऊष्मा = 540 किलोकैलोरी/किया। |
उत्तर:
3650 जूल

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प्रश्न 11.
किसी बाँध से जल 200 मी की ऊँचाई से गिरता है। यदि गिरने के कारण सम्पूर्ण ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है और गिरते हुए जल द्वारा ग्रहण कर ली जाती है तो ताप वृद्धि ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
10.4°C

प्रश्न 12.
2 किलोग्राम अमोनिया प्रति मिनट बर्फ की मशीन में भेजी जाती है कितने समय में °C का 500 किग्रा जल बर्फ में बदल जायेगा ? (अमोनिया के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा = 320 किलोकॅलोरी/किग्रा. बर्फ की गुप्त ऊष्मा = 80 किलो कैलोरी /किलोग्राम)
उत्तर:
62.5 मिनट

प्रश्न 13.
एक बर्तन जिसकी ऊष्मा धारिता 5 कैलोरी है, में 95 ग्राम जल 50°C पर भरा है। इसमें ‘C की 10 ग्राम बर्फ डालने पर मिश्रण का ताप क्या होगा ?
उत्तर:
38.2°C

ऊष्मा के चालन पर आधारित

प्रश्न 14.
काँच की खोखली नली की दीवारें 1.5 mm मोटी हैं तथा क्षेत्रफल 10 cm² है। इस नली में बर्फ भरकर इसे एक पात्र में रख दिया जाता है जिसका ताप 100°C हैं। जब काँच की दीवारों में से ऊष्मा का प्रवाह स्थायी हो जायेगा तो बर्फ के पिघलने की दर कितनी होगी ? काँच का ऊष्मीय चालकता गुणांक 1 Wm-1 K-1 तथा बर्फ की गुप्त ऊष्मा 334.8 Jg-1 है |
उत्तर:
0.199 ग्राम/सेकण्ड

प्रश्न 15.
1.5 m लम्बाई की एकसमान अनुप्रस्थ काट की कॉपर की एक छड़ का एक सिरा बर्फ के सम्पर्क में एवं दूसरा सिरा 100°C के जल के साथ रखा गया। इसकी लम्बाई में किस बिन्दु पर 200°C का तापमान बनाये रखना चाहिए जिससे कि स्थायी अवस्था में पिघली हुई बर्फ का द्रव्यमान उसी समयान्तराल में उत्पन्न भाव के बराबर हो । कल्पना कीजिए कि पूरी पद्धति चारों ओर से ऊष्मारोधी है। बर्फ के पिघलने की गुप्त ऊष्मा = 80 कैलोरी प्रति ग्राम पानी के भाप बनने की गुप्त ऊष्मा = 540 कैलोरी/ग्राम ।
उत्तर:
1.396 मीटर

प्रश्न 16.
25 cm लम्बी धातु की छड़ का एक सिरा भाप में तथा दूसरा में है। यदि 12 ग्राम बर्फ प्रति मिनट गल रही हो, तो धातु की ऊष्मा चालकता ज्ञात कीजिए। छड़ का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 5 cm² तथा बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा = 3.4 × 105 J kg-1 है।
उत्तर:
3.4 × 10² J/m sec °C

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प्रश्न 17.
समान क्षेत्रफल की दो प्लेटें एक दूसरे के सम्पर्क में रखी जाती हैं। इसकी मोटाइयाँ क्रमश: 2.0 तथा 3.0 cm है। पहली प्लेट के बाह्य पृष्ठ का ताप -25°C तथा दूसरी प्लेट का बाह्य पृष्ठ का ताप 25°C है। इन प्लेटों के सम्पर्क पृष्ठ का ताप क्या होगा यदि (i) दोनों प्लेटें एक ही पदार्थ की बनी हों, (ii) दोनों प्लेटों के ऊष्मीय चालकता गुणांकों का अनुपात 2:3 हो ?
उत्तर:
(i) -5°C
(ii) 0°C

प्रश्न 18.
25.0 सेमी लम्बी और 8.80 वर्ग सेमी अनुप्रस्थ क्षेत्रफल की एक छड़ में ऊष्मा प्रवाहित हो रही है। छड़ के पदार्थ का ऊष्मा चालकता गुणांक 920 × 10-4 किलोकैलोरी मी-1 °C-1 से-1 है और स्थायी अवस्था में छड़ के सिरों के ताप 125°C और 0°C हैं निम्नलिखित गणनाएँ कीजिए-
(i) छड़ में ताप प्रवणता,
(ii) छड़ पर तप्त सिरे के 10.0cm दूर वाले बिन्दु पर ताप,
(iii) ऊष्मा स्थानान्तरण की दर
उत्तर:
(i) 5 × 10² °C / मीटर
(ii) 75°C
(iii) 4.1 × 10-2 k.cal/sec

प्रश्न 19.
4.0 cm व्यास वाली एवं 20 cm लम्बी ऐलुमिनियम की एक छड़ के ऊष्मीय प्रतिरोध की गणना कीजिए ऐलुमिनियम का ऊष्मा चालकता गुणांक 0.50 कैलोरी प्रति सेमी सेकण्ड °C है तथा ऊष्मा संचरण की दर छड़ की लम्बाई की दिशा में होती है। यदि छड़ के दोनों सिरों के बीच तापान्तर 50°C हो, तो ऊष्मा संचरण की दर ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
3.18 × 10³ s°C kcal, 1.57 × 10-2 kcals-1

प्रश्न 20.
एक समतल तली की केतली को स्टोव पर रखकर पानी उबाला जा रहा है। तली का क्षेत्रफल 270 cm², मोटाई 0.3 cm तथा उसके पदार्थ का ऊष्मा चालकता गुणांक 0.5 कैलोरी / sec °C cm है। यदि केतली में 10 ग्राम / मिनट की दर से भाप बन रही हो, तो तली के अन्दर तथा बाहर की सतह के तापान्तर की गणना कीजिए। (भाप की गुप्त ऊष्मा = 540 cal/gram)
उत्तर:
0.2°C

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प्रश्न 21.
35 cm लम्बी धातु की छड़ का एक सिरा भाप में दूसरा बर्फ में रहता है। यदि 10 gm. m-1 की दर से बर्फ पिघल रही हैं तो उस धातु की ऊष्मा चालकता ज्ञात कीजिए। यदि छड़ का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 7 cm² व बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा 3.4 × 105 J. kg-1
उत्तर:
2.833 × 107 Jm-1s-1°C-1

स्टीफन के नियम पर आधारित

प्रश्न 22.
ताँबे का एक ठोस गोला (घनत्व ρ, विशिष्ट ऊष्मा C, त्रिज्या r) जिसका प्रारम्भिक ताप 200 K है, एक ऐसे कोष्ठ में लटका है। जिसकी दीवारें लगभग 0 K ताप पर हैं। गोले के ताप को 100 K तक गिरने में लगने वाला समय कितना होगा? (स्टीफन नियतांक σ है ।)
उत्तर:
\(\frac{7}{72} \frac{r \rho \mathrm{C}}{\sigma} \times 10^{-6} \mathrm{sec}\)

प्रश्न 23.
पृथ्वी अपने तल पर सूर्य से 14000 वाट/मी² की दर से विकिरण प्राप्त करती है। पृथ्वी के तल से सूर्य के केन्द्र की दूरी 1.5 × 1011 m है, तथा सूर्य की त्रिज्या 7.0 × 108 m है सूर्य को कृष्णिका मानते हुए इसका पृष्ठ-ताप ज्ञात कीजिए। (स्टीफन नियतांक σ = 5.67 × 10-8 वाट/m² K4)
उत्तर:
5803 K

प्रश्न 24.
एक कृष्णिका के पृष्ठ का क्षेत्रफल 5 × 10-4 m² तथा ताप 727°C है यह प्रति मिनट कितनी ऊष्मा विकिरित करेगा? स्टीफन नियतांक= 5.67 × 10 -8J/m² sec K4.
उत्तर:
1.7 × 10³ जूल

प्रश्न 25.
यदि सूर्य के प्रत्येक cm² पृष्ठ से ऊर्जा 1.5 × 10-3 cal s-1 cm-2 की दर से विकरित हो रही है। यदि स्टीफन नियतांक 5.7 × 10-8 Js m-2 K-1 हो तो सूर्य के पृष्ठ का ताप केल्विन में ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
5765.9K

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

प्रश्न 26.
127°C का ताप वाले कृष्णिका के तल से 1.6 × 106 J cm-2 की दर से उत्सर्जन हो रहा है। कृष्णिका के ताप का मान ज्ञात कीजिए जिस पर उत्सर्जन की दर 81 × 106J cm-2 हो।
उत्तर:
1200K

न्यूटन के शीतलन के नियम पर आधारित

प्रश्न 27.
एक द्रव 5 मिनट में 80°C से 70°C तक ठण्डा होता है इसे 70°C से 60°C तक ठण्डा होने में कितना समय लगेगा? वातावरण का ताप 40°C पर स्थिर है।
उत्तर:
7 मिनट

प्रश्न 28.
किसी पिण्ड को 60°C से 50°C तक ठण्डा होने में 10 मिनट का समय लगा है। यदि कमरे का ताप 25°C हो, तो न्यूटन के शीतलन नियम को उचित मानते हुए पिण्ड का ताप अगले 10 मिनट में कितना होगा?
उत्तर:
42.85°C

प्रश्न 29.
किसी बर्तन में भरे जल का ताप 5 min में 90°C से 80°C हो जाता है, जबकि कमरे का ताप 20°C है तब 63°C से 55°C ताप गिरने में कितना समय लगेगा ?
उत्तर:
6.67 मिनट

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 11 द्रव्य के तापीय गुण

वीन के विस्थापन नियम पर आधारित

प्रश्न 30.
दो तारे X और Y क्रमश: 4800Å तथा 6000Å तरंगदैर्ध्य पर अधिकतम विकिरण उत्सर्जित करते हैं। यदि Y का ताप 5800K हो तो X का ताप क्या होगा ?
उत्तर:
7250 K

प्रश्न 31.
तरंगदैर्घ्य λ के संगत कृष्ण पिण्ड अधिकतम ऊर्जा उत्सर्जित करता है। कृष्ण पिण्ड का ताप इस प्रकार बढ़ायें कि अधिकतम ऊर्जा के संगत तरंगदैर्घ्य \(\frac{5 λ}{7}\) हो जाती है। कृष्ण पिण्ड से उत्सर्जित शक्ति कितने गुना बढ़ जायेगी?
उत्तर:
\(\frac{2401}{625}\) गुना

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. क्लोरोफिल में उपस्थित धातु आयन है-
(अ) Fe3+
(ब) Co2+
(स) Mg 2+
(द) Zn 2+
उत्तर:
(स) Mg 2+

2. संकुल [Co(en)2(NH3)2] Br3 में Co की समन्वयी संख्या (CN) है-
(अ) 3
(ब) 4
(स) 7
(द) 6
उत्तर:
(द) 6

3. संकुल [Pt(NH3)3Cl2Br]Cl2 के जलीय विलयन में उपस्थित हैलाइड आयनों की संख्या कितनी होगी?
(अ) 4
(ब) 3
(स) 1
(द) 2
उत्तर:
(स) 1

4. लिगेन्ड सामान्यतः होते हैं-
(अ) लुईस अम्ल
(ब) लुईस क्षार
(स) ऋणायन
(द) उदासीन अणु
(स) ऋणायन
उत्तर:
(ब) लुईस क्षार

5. K4[Fe(CN)6] में Fe की प्राथमिक संयोजकता कितनी है ?
(अ) -4
(ब) +2
(स) +6
(द) +4
उत्तर:
(ब) +2

6. संकुल [Co(NH3) )5Br] SO4 तथा [Co (NH3)5SO4]Br में आपस में कौनसी समावयवता है?
(अ) बंधनी
(ब) ज्यामितीय
(स) आयनन
(द) उपसहसंयोजन
उत्तर:
(स) आयनन

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7. संकुल में कौनसा लिगेन्ड होने पर बंधनी समावयवता होगी ?
(अ) NH3
(ब) en
(स) NC\(\overline{\mathbf{S}}\)
(द) H2O
उत्तर:
(स) NC\(\overline{\mathbf{S}}\)

8. निम्नलिखित में से कौनसा कीलेट लिगेन्ड है?
(अ) \(\overline{\mathrm{C}}\)N
(ब) C2O4-2
(स) NH3
(द) NO2
उत्तर:
(ब) C2O4-2

9. निम्नलिखित में से किस संकुल आयन में अनुचुंबकीय गुण अधिकतम होगा?
(अ) [Cr(H2O)6]3+
(ब) [Fe(CN)6]4-
(स) [Fe(H2O)6]2+
(द) [Zn(H2O)6]2+
उत्तर:
(स) [Fe(H2O)6]2+

10. निम्नलिखित में से कौनसा द्विक लवण (double salt) नहीं है?
(अ) KCl.MgC2.6H2O
(ब) FeSO4.(NH4)2SO4.6H2O
(स) K4[Fe (CN)6]
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(स) K4[Fe (CN)6]

11. संकुल (Co(H2O)6] [CrCl3] तथा [Cr(H2O)6] [CoCl6] दर्शाते हैं-
(अ) बन्धनी समावयवता
(ब) उपसहसंयोजन समावयवेता
(स) आयनन समावयवता
(द) विलायकयोजन समावयवता
उत्तर:
(ब) उपसहसंयोजन समावयवेता

12. निम्नलिखित से कौनसा संकुल ज्यामितीय समावयवता नहीं दर्शाता ?
(अ) [MX2L2]
(ब) [MX2AB]
(स) [ML4]
(द) [MABXY]
उत्तर:
(स) [ML4]

13. [Fe (CN)6)]4- में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या कितनी है?
(अ) 3
(ब) 4
(स) शून्य
(द) 2
उत्तर:
(स) शून्य

14. निम्नलिखित में से कौनसा धातु आयन, NH3 के साथ रंगीन विलयन देता है?
(अ) Cu2+
(ब) Zn2+
(स) Mg2+
(द) Ag+
उत्तर:
(अ) Cu2+

15. निम्नलिखित में से किसके जलीय विलयन में स्वतंत्र Fe3+ आयन उपस्थित होगा?
(अ) K3Fe (CN)6
(ब) Fe2 (SO4)3
(स) K4Fe(CN)6
(द) (NH4)2SO4 . FeSO4.6H2O
उत्तर:
(ब) Fe2 (SO4)3

16. संकुल (Cr(H2O)6]Cl3 तथा (Cr(H2O)5Cl]Cl2. H2O
(अ) बन्धनी समावयवी
(ब) आयनन समावयवी
(स) हाइड्रेट समावयवी
(द) उपसहसंयोजन समावयवी
उत्तर:
(स) हाइड्रेट समावयवी

17. [Fe(CO)5] का IUPAC नाम है-
(अ) आयरन पेन्टा कार्बोनिल
(ब) पेन्टा कार्बोनिल आयरन (O)
(स) आयरन पेन्टा कार्बनमोनोऑक्साइड
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) पेन्टा कार्बोनिल आयरन (O)

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18. निम्नलिखित में से कौनसा द्विदन्तुर लिगेन्ड है?
(अ) अमोनिया
(ब) जल
(स) एथिलीनडाइऐमीन
(द) पिरीडीन
उत्तर:
(स) एथिलीनडाइऐमीन

19. संकुल Na2[Ni ( EDTA)) में Ni की समन्वयी संख्या (CN) कितनी है?
(अ) 1
(ब) 2
(स) 4
(द) 6
उत्तर:
(द) 6

20. निम्नलिखित में से कौनसा बाह्य कक्षक संकुल है?
(अ) [Co(NH3)6]3+
(ब) [CoF6]3-
(स) [Co(CN)6]3-
(द) [Fe(CN)6]3-
उत्तर:
(ब) [CoF6]3-

21. [Fe(CN)6]4- में Fe पर कौनसा संकरण होता है?
(अ) dsp³
(ब) sp³d²
(स) d²sp³
(द) sp³d³
उत्तर:
(स) d²sp³

22. निम्नलिखित में से कौनसा संकुल आयन प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है?
(अ) [ZnCl4]2-
(ब) [Co(CN)6)3-
(स) [Cu(NH3)4]2+
(द) [Cr(C2O4)3]3-
उत्तर:
(द) [Cr(C2O4)3]3-

23. संकुल यौगिक [Cr(H2O)6]Cl3 के लिए चुम्बकीय आघूर्ण का मान 3.83 BM है तो इस संकुल में Cr परमाणु में 3d इलेक्ट्रॉनों का वितरण होगा-
(अ) \(3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xy}}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{yz}}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xz}}^1\)
(ब) \(3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xy}}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{x}^2-\mathrm{y}^2}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{z}}^1\)
(स) \(3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xy}}^{\mathrm{l}}, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{yz}}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{z}^2}^1\)
(द) \(3 \mathrm{~d}_{\mathrm{x}^2-\mathrm{y}^2}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{z}^2}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xy}}^1\)
उत्तर:
(अ) \(3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xy}}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{yz}}^1, 3 \mathrm{~d}_{\mathrm{xz}}^1\)

24. निम्नलिखित में से प्रतिचुम्बकीय संकुल आयन कौनसा है ?
(अ) [CoCl4]2-
(ब) (CoF6]2-
(स) [Ni (CN)4]2-
(द) [NiCl4]2-
उत्तर:
(स) [Ni (CN)4]2-

25. निम्नलिखित में से किस संकुल आयन की ज्यामिति वर्गाकार समतलीय है?
(अ) [NiCl4]2-
(ब) [FeCl4]2-
(स) [PtCl4]2-
(द) [CoCl4]2-
उत्तर:
(स) [PtCl4]2-

26. किसी संक्रमण धातु के संकुल का विन्यास (t2g)4 (eg)² है। धातु आयन से जुड़े लिगेण्ड की प्रकृति है-
(अ) प्रबल क्षेत्र
(ब) दुर्बल क्षेत्र
(स) उदासीन
(द) धनात्मक क्षेत्र
उत्तर:
(ब) दुर्बल क्षेत्र

27. [Co(NH3)4(NO2)2]Cl प्रदर्शित करता है-
(अ) बन्धन, आयनन समावयवता तथा प्रकाशिक समावयवता
(ब) बन्धन, आयनन तथा ज्यामितीय समावयवता
(स) आयनन ज्यामितीय तथा प्रकाशिक समावयवता
(द) बन्धन, ज्यामितीय तथा प्रकाशिक समावयवता
उत्तर:
(ब) बन्धन, आयनन तथा ज्यामितीय समावयवता

28. चतुष्फलकीय ज्यामिति निम्नलिखित में से किसकी है?
(अ) [Ni(NH3)6]2+
(ब) Ni (CO)4
(स) [Ni (CN)4]2-
(द) [Pt(CN)4]2-
उत्तर:
(ब) Ni (CO)4

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29. निम्नलिखित में से कौन अनुचुम्बकीय लक्षण प्रदर्शित नहीं करता है?
(परमाणु क्रमांक Ti = 22; Fe = 26; Cr = 24; Cu = 29 )
(अ) [Ti(H2O)6]3+
(ब) [Fe(CN)6]3+
(स) [Cr(NH3)6]3+
(द) [Co(NH3)6]3+
उत्तर:
(द) [Co(NH3)6]3+

30. निम्नलिखित में से कौनसा संकुल दृश्य प्रकाश अवशोषण के लिए प्रत्याशित (Expected) नहीं है?
(अ) [Cr(NH3)6]2+
(ब) [Fe (H2O)6]2+
(स) [Ni(CN)4]2-
(द) [Ni(H2O)6]2+
उत्तर:
(स) [Ni(CN)4]2-

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
\(\overline{\mathrm{N}}\)H2 लिगेन्ड का IUPAC नाम बताइए।
उत्तर:
\(\overline{\mathrm{N}}\)H2 का नाम ऐमीडो है।

प्रश्न 2.
[NiCl4]2- में Ni का प्रभावी परमाणु क्रमांक कितना है?
उत्तर:
[NiCl4]2- में Ni का प्रभावी परमाणु क्रमांक 26 + 8 = 34 है।

प्रश्न 3.
कार्नेलाइट का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
कार्नेलाइट का सूत्र KCl . MgCl2 . 6H2O होता है।

प्रश्न 4.
[Cr(EDTA)]-1 में Cr की समन्वयी संख्या कितनी है?
उत्तर:
इस संकुल आयन में Cr की समन्वयी संख्या 6 है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित संकुलों के जलीय विलयन की चालकता का आरोही क्रम बताइए।
(i) K4[Fe(CN)
(ii) [Pt(NH3)4] [PtCl4]
(iii) [Ni (CO)4]
उत्तर:
(iii) < (ii) < (i) क्योंकि (iii) के विलयन में कोई आयन नहीं है लेकिन (ii) व (i) के जलीय विलयन में क्रमशः 2 तथा 5 आयन होंगे।

प्रश्न 6.
(i) [Pt(NH3)4Cl2]Br2 तथा
(ii) [Pt(NH3)4Br2]Cl2 में किस प्रकार विभेद किया जा सकता है?
उत्तर:
दोनों संकुलों के जलीय विलयन में AgNO3 का विलयन डालने पर (i) में AgBr का पीला अवक्षेप बनेगा जबकि (ii) में AgCl का श्वेत अवक्षेप प्राप्त होगा।

प्रश्न 7.
संकुल (Fe (C5H5)2] का IUPAC नाम बताइए।
उत्तर:
बिस (साइक्लोपेन्टा डाइइनिल) आयरन (II)

प्रश्न 8.
किस प्रकार के वर्गाकार समतलीय संकुल ज्यामितीय समावयवता दर्शाते हैं?
उत्तर:
[MX2L2], [ML2X4], [M(AB)2] प्रकार के वर्गाकार समतलीय संकुल ज्यामितीय समावयवता दर्शाते हैं।

प्रश्न 9.
[M ABXY] प्रकार के संकुल के कितने ज्यामितीय समावयवी सम्भव हैं?
उत्तर:
तीन (दो समपक्ष तथा एक विपक्ष)।

प्रश्न 10.
[Fe(CO)5] में Fe पर dsp³ कौनसा संकरण होता है तथा इसका चुम्बकीय गुण भी बताइए।
उत्तर:
[Fe(CO)5] में Fe पर dsp³ संकरण होता है तथा यह प्रतिचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 11.
[Pt (NH3)4Cl2]2+ के समपक्ष तथा विपक्ष समावयवी बनाइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 1

प्रश्न 12.
समपक्ष [PtCl2(en)2] के प्रकाशिक समावयवी बनाइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 2

प्रश्न 13.
Pt(NH3)2Cl2 के ज्यामितीय समावयवी बनाइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 3

प्रश्न 14.
[Co(en)3]3+ के ध्रुवण समावयवियों की संरचना बनाइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 4

प्रश्न 15.
जल की कठोरता के निर्धारण के लिए आवश्यक लिगेन्ड का नाम बताइए।
उत्तर:
जल की कठोरता का निर्धारण EDTA ( एथिलीनडाई एमीनटेट्रासीटेट) द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 16.
[Cu (NH3)4]2+ संकुल आयन की अपेक्षा [Cu(CN)4]2- संकुल आयन अधिक स्थायी होता है, क्यों?
उत्तर:
NH3 की अपेक्षा \(\overline{\mathrm{C}}\)N अधिक प्रबल लिगेन्ड होता है अतः [Cu(NH3)4]2+ संकुल की अपेक्षा [Cu (CN)4]2- संकुल अधिक स्थायी होता है।

प्रश्न 17.
युग्मन ऊर्जा क्या होती है?
उत्तर:
किसी कक्षक में दो इलेक्ट्रॉनों के युग्मन के लिए आवश्यक ऊर्जा को युग्मन ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 18.
I, S2-, H2O, NC\(\overline{\mathrm{S}}\) तथा CO में से प्रबल क्षेत्र लिगन्ड कौनसे हैं ?
उत्तर:
NC\(\overline{\mathrm{S}}\) तथा CO प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
(a) विशेष नाम युक्त उदासीन लिगेन्डों के उदाहरण बताइए।
(b) धनात्मक लिगेन्डों का नाम किस प्रकार दिया जाता है ? समझाइए।
उत्तर:
(a) विशेष नाम युक्त उदासीन लिगेन्ड निम्नलिखित हैं-
H2O = एक्वा
CS = थायोकार्बोनिल
NH3 = एम्मीन
NO = नाइट्रोसिल
CO = कार्बोनिल
NS थायोनाइट्रोसिल

(b) धनात्मक लिगेन्डों के नाम के अन्त में अनुलग्न इयम (ium) प्रयुक्त किया जाता है।
उदाहरण- \(\stackrel{+}{N}\)O नाइट्रोसिलियम, NH2 – \(\stackrel{+}{N}\)H, हाइड्रेजिनियम तथा \(\stackrel{+}{N}\)O2 नाइट्रोनियम।

प्रश्न 2.
संकुल यौगिकों में उपस्थित केन्द्रीय धातु परमाणु का ऑक्सीकरण अंक तथा संकुल आयन पर आवेश किस प्रकार ज्ञात किया जाता है?
उत्तर:
(i) संकुल में केन्द्रीय धातु परमाणु पर उपस्थित आवेश को उसका ऑक्सीकरण अंक कहते हैं जब वह लिगन्डों से नहीं जुड़ा हो।

(ii) किसी संकुल स्पीशीज पर उपस्थित आवेश उसके केन्द्रीय धातु परमाणु या आयन तथा उससे जुड़े हुए लिगन्डों के आवेश के योग के बराबर होता है तथा यह प्रति आयनों द्वारा उदासीन होता है।

(iii) किसी उदासीन संकुल में केन्द्रीय धातु परमाणु तथा उससे जुड़े लिगन्डों के आवेश का योग शून्य होता है। कभी-कभी धातु तथा लिगन्ड दोनों ही उदासीन होते हैं, जैसे-[Ni(CO)4]

(iv) उदाहरण –
(a) संकुल K4[Fe(CN)6] में Fe का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करना-
यहाँ K तथा CN पर आवेश ज्ञात है जो कि क्रमशः + 1 तथा – 1 है। अतः
K4[Fe(CN)6]
+ 4 + x – 1 ( 6 ) = 0
+ 4 + x – 6 = 0
x = + 2
अतः इसमें Fe का ऑक्सीकरण अंक, + 2 है।

(b) [Co(NH3)5Cl] Cl2 में Co का ऑक्सीकरण अंक भी इसी प्रकार ज्ञात किया जाता है।
यहाँ NH3 उदासीन है तथा Cl पर आवेश – 1 है अतः
[Co(NH3)5Cl] Cl2
x + 0 – 1 – 2 = 0
x = + 3

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रकार के संकुलों के उदाहरण तथा IUPAC नाम बताइए –
(i) उदासीन संकुल
(ii) ऋणायनिक संकुल
(iii) धनायनिक संकुल
उत्तर:
(i) Fe(CO)5 पेन्टाकार्बोनिल आयरन (O)
(ii) [Co(NO3)6]3- हेक्सानाइट्रेटोकोबाल्टेट (IH) आयन
(iii) [Pt(NH3)4Cl2]2+ टेट्राऐम्मीनडाइक्लोरिडोप्लेटिनम (IV) आयन

प्रश्न 4.
Pt (IV), NH3, Cl तथा Na+ आपस में मिलकर सात प्रकार के संकुल यौगिक बनाते हैं। इनमें से एक संकुल यौगिक निम्नलिखित है-
[Pt(NH3)6]Cl4
(i) अन्य छः संकुल यौगिकों के सूत्र लिखिए।
(ii) इन संकुल यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए।
(iii) इनमें से किस संकुल जलीय विलयन की चालकता सर्वाधिक होगी?
(iv) इनमें से कौनसा संकुल अनआयनिक है?
(v) इन संकुलों में Pt का ऑक्सीकरण अंक व उपसहसयोजन संख्या भी बताइए।
उत्तर:
(i) (a) [Pt (NH3)5Cl]Cl3
(b) [Pt (NH3)4Cl2]Cl2
(c) [Pt(NH3)3Cl3]Cl
(d) [Pt(NH3)2Cl4]
(e) Na[Pt(NH3)Cl5]
(f) Na2[PtCl6]

(ii) (a) पेन्टाऐम्मीन प्लेटिनम (IV) क्लोराइड
(b) टेट्राऐम्मीन डाइक्लोरिडो प्लेटिनम (IV) क्लोराइड
(c) ट्राइऐम्मीन ट्राइक्लोरिडो प्लेटिनम (IV) क्लोराइड
(d) डाइऐम्मीन टेट्राक्लोरिडो प्लेटिनम (IV)
(e) सोडियम ऐम्मीन पेन्टाक्लोरिडो प्लेटिनेट (IV)
(f) सोडियम हेक्साक्लोरिडो प्लेटिनेट (IV)

(iii) संकुल [Pt(NH3)6]Cl4 की चालकता सर्वाधिक होगी क्योंकि यह विलयन में अधिकतम (पाँच आयन) देता है।

(iv) [Pt(NH3)2Cl4] अनआयनिक है।

(v) इन सभी संकुलों में Pt का ऑक्सीकरण अंक + 4 तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।

प्रश्न 5.
समावयवता को परिभाषित कीजिए तथा इसके प्रकार बताइए।
उत्तर:
समावयवता (Isomerism) – ऐसे दो या दो से अधिक यौगिक जिनके रासायनिक सूत्र (अणु सूत्र ) समान होते हैं परन्तु उनमें परमाणुओं की व्यवस्था भिन्न होती है, उन्हें एक-दूसरे के समावयवी कहते हैं तथा इस गुण को समावयवता कहते हैं। परमाणुओं की भिन्न व्यवस्थाओं के कारण इनके एक या अधिक भौतिक या रासायनिक गुणों में भिन्नता होती है। उपसहसंयोजन यौगिकों में दो प्रमुख प्रकार की समावयवताएँ होती हैं जिनको पुनः कई भागों में वर्गीकृत किया जाता है-
(a) त्रिविम समावयवता-

  • ज्यामितीय समावयवता
  • ध्रुवण समावयवता

(b) संरचनात्मक समावयवता-

  • बंधनी समावयवता
  • उपसहसंयोजन समावयवता या समन्वयी समावयवता
  • आयनन समावयवता
  • विलायकयोजन समावयवता या हाइड्रेट समावयवता
  • लिगन्ड समावयवता
  • बहुलकीकरण समावयवता
  • उपसहसंयोजन स्थिति समावयवता

प्रश्न 6.
आयनन समावयवता की व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर:
आयनन समावयवता – जब किसी संकुल में उपस्थित प्रतिआयन स्वयं एक संभावित लिगेन्ड हो तथा यह किसी लिगेन्ड को प्रतिस्थापित करके दूसरा संकुल बनाता है तो प्राप्त संकुल को आयनन समावयवी तथा इस गुण को आयनन समावयवता कहते हैं।
उदाहरण-
(i) [Co (NH3)5 SO4] Br तथा

(ii) [Co(NH3)5Br]SO4
(i) के आयनन से Br प्राप्त होता है जबकि
(ii) के आयनन से SO2-4 प्राप्त होगा।

प्रश्न 7.
उपसहसंयोजन समावयवता क्या होती है? समझाइए।
उत्तर:
उपसहसंयोजन समावयवता – जब किसी संकुल में उपस्थित भिन्न-भिन्न धातुओं की धनायनिक एवं ऋणायनिक उपसहसंयोजन सत्ता के मध्य लिगेन्डों का अंतरपरिवर्तन (Interchange) होता है तो यह समावयवता उत्पन्न होती है। संकुल [Co (NH3)6] [Cr(CN)6] जिसमें NH3, CO3+ से बंधित हैं तथा CN, Cr3+ से जबकि इसके उपसहसंयोजन समावयवी [Cr(NH3)6] [Co(CN6)] में, NH3, Cr3+ से तथा CN, Co3+ से बंधित है।

प्रश्न 8.
प्रकाशिक या ध्रुवण समावयवता किसे कहते हैं? संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
यह समावयवता असममित अणुओं या संकुलों में पाई जाती है जिनमें सममिति नहीं होती। ये संकुल ध्रुवित प्रकाश के तल को घुमा देते हैं, अतः इन्हें प्रकाशिक या ध्रुवण समावयवी कहते हैं। ध्रुवण समावयवी एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब होते हैं तथा इन्हें एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं किया जा सकता। इन्हें प्रतिबिम्ब रूप या एनैन्टिओमर (enantiomers) भी कहते हैं।

अणु या आयन जो एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं किए जा सकते, उन्हें काइरल (chiral) कहते हैं । काइरल अणु दो प्रकाशिक समावयवियों के रूप में पाया जाता है दक्षिण-ध्रुवण घूर्णक (d) तथा वाम ध्रुवण घूर्णक (l)। ये ध्रुव प्रकाश को अलग-अलग दिशा में घुमाते हैं (d दाईं तरफ तथा / बाईं तरफ)। प्रकाशिक समावयवता सामान्यतः द्विदंतुर लिगेन्ड युक्त. अष्टफलकीय संकुलों में पाई जाती है, जिनका सामान्य सूत्र

  • [M(AA)2X2]
  • M (AA )3]
  • [M (AA ) X2 Y2] तथा
  • [MX2Y2Z2] होता है।

लेकिन जिन संकुलों में ज्यामितीय समावयवता होती है, उनका समपक्ष रूप ही प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है क्योंकि विपक्ष रूप तो सममित होता है।

उदाहरण-
(i) [PtCl2(en)2]2+ या [Rh (en)2Cl2]+ या [Co(en)2 Cl2]+
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 21

(ii) [Co(en)3]3+ या [Cr(OX)3]5- [OX = ऑक्सेलेट (C2O2-4)]
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 22

(iii) [Co(en)(NH3)2Cl2]+
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 23

(iv) [Pt(NH3)2(Py)2Cl2]2+
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 24
उपसहसंयोजन संख्या 4 वाले संकुलों में वर्गाकार समतलीय ज्यामिति होने पर प्रकाशिक समावयवता नहीं होती क्योंकि इन संकुलों में सममिति तल पाया जाता है लेकिन असममित द्विदंतुर लिगेन्ड युक्त चतुष्फलकीय संकुलों में प्रकाशिक समावयवता होती है।

उदाहरण – बिस (ग्लाइसिनेटो) निकल (II)
[Ni(NH2-CH2-COO)2] (gly = O-N) या [Ni (Gly)2]
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 25

इसी प्रकार बस (बेन्जॉयल ऐसीटोनेटो) बेरिलियम (II) भी प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है।
[Be(C6H5COCHCOCH3)2]
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प्रश्न 9.
[Co(NH3)6]3+ की ज्यामिति तथा चुम्बकीय गुण की व्याख्या VBT की सहायता से कीजिए।
उत्तर:
[Co(NH3)6]3+ संकुल आयन-संकुल आयन [Co(NH3)6]3+ में, कोबाल्ट आयन +3 ऑक्सीकरण अवस्था में है तथा Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 36 है। अतः इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 5
छः अमोनिया अणुओं से प्रत्येक का एक इलेक्ट्रॉन युग्म छः d²sp³ संकरित कक्षकों में स्थान ग्रहण करता है। इस प्रकार संकुल की ज्यामिति अष्टफलकीय है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण यह संकुल आयन प्रतिचुंबकीय होता है। यह एक आन्तरिक कक्षक संकुल या निम्न चक्रण संकुल है।

प्रश्न 10.
[CoFo6]3- के अनुचुम्बकीय गुण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
[CoFo6]3- संकुल आयन-इस संकुल में भी कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है लेकिन F(WFL) की उपस्थिति में धातु आयन के इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता अतः इसमें sp³d² संकरण होता है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह अनुचुम्बकीय होता है तथा इसे बाह्य कक्षक संकुल या उच्च चक्रण संकुल कहते हैं। इसकी ज्यामिति भी अष्टफलकीय होती है। इस संकुल में संकरण को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 6

प्रश्न 11.
[Fe(CO)5] की ज्यामिति तथा प्रतिचुम्बकीय गुण की व्याख्या VBT की सहायता से कीजिए।
उत्तर:
त्रिकोणीय द्विपिरेमिडी संकुल-उदाहरण [Fe(CO)5] इस संकुल में Fe परमाणु अवस्था में है, जिसका इलेक्ट्रॉंनिक विन्यास 3d64s² होता है। CO(SFL) की उपस्थिति में Fe के 3d तथा 4s कक्षकों के सभी इलेक्ट्रॉन 3d में युग्मित हो जाते हैं तथा एक d कक्षक रिक्त होकर dsp³ संकरण होता है। इसमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह संकुल प्रतिचुम्बकीय होता है तथा इसकी ज्यामिति त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 7

प्रश्न 12.
[Cu(NH3)4]2+ की वर्गाकार समतलीय ज्यामिति को समझाइए।
उत्तर:
[Cu(NH3)4]2+ – इस संकुल में भी dsp² संकरण होता है क्योंकि X-किरण विवर्तन से ज्ञात हुआ है कि इसमें लिगेन्ड समतलीय अवस्था में पाए जाते हैं। इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाने के कारण यह अनुचुम्बकीय होता है तथा इसकी ज्यामिति भी वर्गाकार समतलीय होती है। इसमें संकरण को निम्न प्रकार दर्शाया जाता है-
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बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के कारण स्पष्ट कीजिए-
(i) निकल के अल्प स्पिन (Low spin) के अष्टफलकीय कॉम्पलेक्स (संकुल) ज्ञात नहीं हैं।
(ii) केवल संक्रमण तत्वों के लिए ही π-कॉम्पलेक्स जाने जाते हैं।
(iii) बहुत-सी धातुओं के लिए CO लिगेण्ड NH3 की अपेक्षा अधिक प्रबल है।
अथवा
निम्नलिखित संकुलों (कॉम्पलेक्सों) की तुलना, उनकी इकाइयों की आकृतियों, चुम्बकीय व्यवहार और इकाइयों में उपस्थित संकर ऑर्बिटलों के सन्दर्भ में कीजिए-
(i) [Ni(CN)4]2-
(ii) [NiCl4]2-
(iii) [CoF6]3- [परमाणु क्रमांक : Ni = 28; Co = 27]
उत्तर:
(i) निकल (Ni) सामान्यतः +2 अवस्था में संकुल बनाता है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d84s0 होता है जिसमें प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में भी इलेक्ट्रॉनों के युग्मन से दो d कक्षक रिक्त नहीं हो सकते अतः इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता एवं इसमें sp³d² संकरण होता है अतः यह उच्च चक्रण संकुल ही बनाता है अर्थात् निम्न चक्रण संकुल नहीं बनते।

(ii) केवल संक्रमण तत्व ही π कॉम्पलेक्स बनाते हैं क्योंकि इस प्रकार के संकुल बनाने के लिए आवश्यक लिगेन्ड (जैसे बेन्जीन, साइक्लोपेन्टा डाइइनिल ऋणायन) संक्रमण तत्वों के रिक्त कक्षकों के साथ π बन्ध बना लेते हैं। π संकुलों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
फेरोसीन Fe (η5 – C5H5)2
तथा डाइबेन्जीन क्रोमियम Cr (η56 -C6H6)2
(यहाँ η6 का अर्थ है C6H6 के 6C क्रोमियम से जुड़े हैं।)
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(iii) स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी से ज्ञात होता है कि CO लिगेन्ड, NH3 की अपेक्षा अधिक प्रबल है क्योंकि CO की इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति, NH3 की अपेक्षा अधिक होती है। क्योंकि कार्बन की विद्युतॠणता का मान नाइट्रोजन से कम होता है।
अथवा
उत्तर:

सकुलसंकरणआकृति (ज्यामिति)चुम्बकीय गुण
(i) [Ni(CN)4]2-dsp²वर्गाकार समतलीयप्रतिचुम्बकीय
(ii) [NiCl4]2-sp³चतुष्फलकीयअनुचुम्बकीय
(iii) [CoF6]3-sp³d²अष्टफलकीयअनुचुम्बकीय

(i) [Ni(CN)4]2- – [Pt(CN)4]2- – वर्ग समतलीय आयन [Ni(CN)4]2- में Ni पर dsp² संकरण होता है। इसमें Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 10
प्रत्येक संकरित कक्षक एक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण यह संकुल प्रतिचुंबकीय होते हैं।

(ii) [NiCl4]2--[NiCl4]2- आयन में Ni पर sp³ संकरण होता है तथा इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है। यहाँ एक s तथा तीन p कक्षकों के संकरण से चार समान sp³ संकर कक्षक बनते हैं। इस संकुल में निकल +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 11
संकरण के पश्चात् भी 3d कक्षकों में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं जिनके कारण यह संकुल आयन अनुचुम्बकीय होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

(iii) [CoF6]3- [परमाणु क्रमांक : Ni = 28; Co = 27] संकुल आयन-इस संकुल में भी कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है लेकिन F(WFL) की उपस्थिति में धातु आयन के इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता अतः इसमें sp³d² संकरण होता है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह अनुचुम्बकीय होता है तथा इसे बाह्य कक्षक संकुल या उच्च चक्रण संकुल कहते हैं। इसकी ज्यामिति भी अष्टफलकीय होती है। इस संकुल में संकरण को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 12

प्रश्न 2.
उपयुक्त कारण देते हुए निम्नलिखित की व्याख्या कीजिए-
(i) निकल न्यून-चक्रण अष्टफलकीय संकुल नहीं बनाता है।
(ii) π-कॉम्प्लेक्स केवल संक्रमण तत्वों के ही ज्ञात हैं।
उत्तर:
(i) निकल (Ni) सामान्यतः +2 अवस्था में संकुल बनाता है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d84s0 होता है जिसमें प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में भी इलेक्ट्रॉनों के युग्मन से दो d कक्षक रिक्त नहीं हो सकते अतः इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता एवं इसमें sp³d² संकरण होता है अतः यह उच्च चक्रण संकुल ही बनाता है अर्थात् निम्न चक्रण संकुल नहीं बनते।

(ii) केवल संक्रमण तत्व ही π कॉम्पलेक्स बनाते हैं क्योंकि इस प्रकार के संकुल बनाने के लिए आवश्यक लिगेन्ड (जैसे बेन्जीन, साइक्लोपेन्टा डाइइनिल ऋणायन) संक्रमण तत्वों के रिक्त कक्षकों के साथ π बन्ध बना लेते हैं। π संकुलों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
फेरोसीन Fe (η5 – C5H5)2
तथा डाइबेन्जीन क्रोमियम Cr (η56 -C6H6)2
(यहाँ η6 का अर्थ है C6H6 के 6C क्रोमियम से जुड़े हैं।)
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प्रश्न 3.
उपयुक्त उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रत्येक पद की व्याख्या कीजिए-
(i) उभयदन्ती लिगेन्ड ( Ambidentate ligand)
(ii) लिगण्ड की दंतिता (Denticity)
(iii) अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन।
उत्तर:
(i) उभयदन्ती या उभयदंतुर लिगन्ड वह लिगेन्ड होता है जो दो भिन्न-भिन्न परमाणुओं द्वारा धातु से जुड़ सकता है लेकिन एक समय में केवल एक दाता परमाणु ही बन्ध बनाता है।
उदाहरण – \(\overline{\mathrm{C}}\)N व \(\overline{\mathrm{N}}\)C

(ii) किसी संकुल में उपस्थित लिगेन्ड के उन परमाणओं की संख्या जो धातु के साथ बन्ध बनाते हैं, उसे लिगेन्ड की दंतिता या दन्तुरता कहते हैं।

(iii) अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन- एक अष्टफलकीय संकुल में धातु परमाणु छः लिगेन्डों द्वारा घिरा होता है। इसमें धातु के d कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों तथा लिगेन्डों के इलेक्ट्रॉनों के मध्य प्रतिकर्षण होता है। जब धातु ad कक्षक लिगेन्ड की ओर सीधे निर्दिष्ट (directed) होते हैं तो प्रतिकर्षण अधिक होता है। dx² – y² तथा dz² कक्षक, लिगेन्ड की दिशा वाले अक्षों पर होते हैं, अतः इन पर प्रतिकर्षण अधिक होता है जिससे इनकी ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है जबकि dxy, dyz और dxz कक्षक, अक्षों के बीच में स्थित होते हैं, अतः इनकी ऊर्जा गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र की औसत ऊर्जा की तुलना में कम हो जाती है।

इस प्रकार अष्टफलकीय संकुल लगन्ड इलेक्ट्रॉन धातु इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के कारण d कक्षकों की समभ्रंशता समाप्त हो जाती है तथा ये तीन निम्न ऊर्जा वाले, t2g कक्षकों तथा दो उच्च ऊर्जा वाले, eg कक्षकों में विभाजित हो जाते हैं। इस प्रकार समान eg ऊर्जा वाले कक्षकों का, लिगेन्डों की निश्चित ज्यामिति में उपस्थिति से दो भागों में विपाटन क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन कहलाता है तथा इस ऊर्जा अंतर को ∆0 [ यहाँ O = अष्टफलकीय (octahedral)] से दर्शाते हैं । eg कक्षकों की ऊर्जा में (3/5) ∆0 के बराबर वृद्धि होती है तथा t2g कक्षकों की ऊर्जा में (2/5) ∆0 के बराबर कमी होती है। प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में ∆0 का मान अधिक होता है जबकि दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में यह मान कम होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 13
∆ को प्रभावित करने वाले कारक – क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन (∆) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है-

  • धातु की प्रकृति
  • धातु आयन पर आवेश
  • लिगेन्ड की प्रकृति
  • संकुल की ज्यामिति
  • d- इलेक्ट्रॉनों की संख्या

ये कारक संकुल आयन के रंग को भी प्रभावित करते हैं। धातु आयन पर आवेश बढ़ने से तथा प्रबल क्षेत्र लिगेन्डों की उपस्थिति में विपाटन अधिक होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन अवस्थाओं ( एन्टीटियों) के नाम और उनके त्रिविम- समावयवियों की संरचनाएँ दीजिए-
(i) [ Co(en)2Cl2]+ (en = एथेन – 1, 2 – डाइऐमीन )
(ii) [Cr(C2O4)3]3-
(iii) [Co(NH3)3Cl3]
(परमाणु क्रमांक Cr = 24, Co = 27)
उत्तर:
(i) [Co(en)2 Cl2]+ का नाम बिस (एथेन – 1,2- डाइऐमीन) डाइक्लोरिडोकोबाल्ट (III) आयन है।
(ii) [Cr(C2O4)3]3- ट्राइऑक्सेलेटो क्रोमेट (III) आयन
(iii) ट्राइऐम्मीनट्राइक्लोरिडो कोबाल्ट (III)

प्रश्न 5.
अणुसूत्र Co (NH3)5SO4 Br वाले दो संकुलों को बोतल A व B में अलग-अलग भरा गया है। इनमें से एक संकुल BaCl2 के साथ श्वेत अवक्षेप जबकि दूसरा सिल्वर नाइट्रेट के साथ हल्का पीला अवक्षेप देता है तो बोतल A व B में उपस्थित संकुलों के सूत्र लिखिए तथा अलग-अलग अभिक्रिया प्रदर्शित करने का कारण समझाइये।
उत्तर:
अणु सूत्र Co ( NH3)5 SO4 Br वाले दो संकुलों में से बोतल A में [Co ( NH3 )5 Br] SO4 तथा बोतल B में [Co(NH3)5SO4]Br संकुल का विलयन है।

संकुल A के आयनन से SO2-2 आयन प्राप्त होगा जो BaCl2 के साथ क्रिया करके BaSO4 का श्वेत अवक्षेप देता है जबकि संकुल B आयनन से प्राप्त Br आयन AgNO3के साथ AgBr का हल्का पीला अवक्षेप देता है। अतः संकुल A तथा B एक-दूसरे के आयनन समावयवी हैं।

प्रश्न 6.
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन सिद्धान्त के आधार पर चतुष्फलकीय उपसहसंयोजन यौगिकों के बनने में d-कक्षकों के विपाटन को समझाते हुए बताइये कि ये संकुल हमेशा उच्च चक्रण वाले ही क्यों बनते हैं?
उत्तर:
चतुष्फलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन- चतुष्फलकीय संकुलों में d कक्षकों का विपाटन अष्टफलकीय संकुलों से विपरीत तथा कम होता है। अर्थात् eg कक्षकों की ऊर्जा t2g कक्षकों से कम होती है। समान धातु, समान लिगन्डों तथा धातु तथा लिगेन्ड के बीच की दूरी समान होने पर ∆t = 4 / 9 ∆0, ∆t = चतुष्फलकीय कक्षकों की क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, अतः कक्षकों की विपाटन ऊर्जा इतनी कम होती है कि इलेक्ट्रॉनों का युग्मन कक्षकों में नहीं होता अतः चतुष्फलकीय संकुल सामान्यतः उच्च चक्रण युक्त ही होते हैं।
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित संकुल यौगिकों के आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए-
(अ) [CoCl2 (en)2 ]Cl
(ब) K3[Fe (CN)6]
उत्तर:
(अ) डाइक्लोरिडोबिस (एथेन-1, 2- डाइऐमीन) कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ब) पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)

प्रश्न 8.
[NiCl4]2- आयन अनुचुम्बकीय है जबकि [Ni(CN)4]2- आयन प्रतिचुम्बकीय है। संयोजकता बंध सिद्धान्त की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
वर्ग समतलीय आयन [Ni (CN)4]2- में Ni पर dsp² संकरण पाया जाता है। इसमें Ni की ऑक्सीकरण अवस्था + 2 है अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
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प्रत्येक संकरित कक्षक एक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म प्राप्त करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होने के कारण यह संकुल प्रतिचुंबकीय है।

[NiCl4]2-आयन में Ni पर sp³ संकरण पाया जाता है तथा इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है।

इसमें एक s तथा तीन कक्षकों के संकरण से चार समान sp³ संकर कक्षक बनते हैं। यहाँ निकल + 2 ऑक्सीकरण अवस्था में है तथा इस आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है अतः इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 16
संकरण के पश्चात् भी 3d कक्षकों में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं जिनके कारण यह संकुल आयन अनुचुंबकीय होता है।

प्रश्न 9.
उभयदंती लिगन्ड का एक उदाहरण लेकर बताइए कि यह क्यों उभयदन्ती लिगेन्ड कहलाता है?
उत्तर:
वह लिगेन्ड जो दो भिन्न परमाणुओं द्वारा धातु आयन के साथ जुड़ सकता है, उसे उभयदंती लिगेन्ड कहते हैं। उदाहरण – NO2, यह नाइट्रोजन (NO2) अथवा ऑक्सीजन (\(\overline{\mathrm{O}}\)NO) द्वारा धातु आयन से जुड़ सकता है।

प्रश्न 10.
संकुल यौगिक K3[ Fe(C2O4)3] में केन्द्रीय धातु परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या तथा उपसहसंयोजन संख्या बताइए।
उत्तर:
संकुल यौगिक K3[Fe (C2O4)3] में केन्द्रीय धातु परमाणु (Fe) की ऑक्सीकरण संख्या + 3 तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
ऑक्सीकरण संख्या की गणना निम्न प्रकार की जाती है-
K3[Fe (C2O4)3]
+ 3 + x – 2 ( 3 ) = 0
+ 3 + x – 6 = 0
x = + 3
Fe से तीन द्विदंतुर लिगेन्ड (C2O42-) जुड़े हैं अतः इसकी उपसहसंयोजन संख्या 6 है।

प्रश्न 11.
समपक्ष [CoCl2 (en)2 ] तथा फलकीय [Co(NH3)3(NO2)3] समावयवियों की संरचना दीजिए।
उत्तर:
(i) समपक्ष [CoCl2 (en)2] की संरचना
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(ii) फलकीय [Co(NH3)3(NO2)3] की संरचना
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प्रश्न 12.
संकुल [NiCL]2- के लिए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) IUPAC नाम
(ii) संकरण का प्रकार
(iii) संकुल की ज्यामिति।
उत्तर:
(i) टेट्राक्लोरिडोनिकलेट (II) आयन
(ii) sp³ संकरण
(iii) चतुष्फलकीय ज्यामिति।

प्रश्न 13.
संकुल [Cr (NH3)4 Cl2]Cl का IUPAC नाम लिखिए तथा इसमें किस प्रकार की समावयवता पाई जाती है?
उत्तर:
संकुल [Cr(NH3)4 Cl2] Cl का IUPAC नाम- टेट्राएम्मीन डाइक्लोरिडो क्रोमियम (III ) क्लोराइड है तथा इसमें ज्यामितीय समावयवता पाई जाती है, अर्थात् इसके दो रूप होते हैं – समपक्ष एवं विपक्ष।

प्रश्न 14.
(अ) धातुओं के शुद्धिकरण के क्षेत्र में उपसहसंयोजन यौगिकों का अनुप्रयोग एक उदाहरण के साथ समझाइए
(ब) उपसहसंयोजन यौगिक [Ag (NH3)2] [Ag(CN)2] का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
(अ) धातुओं का शुद्धिकरण उनके संकुल बनाकर तथा उसे पुनः अपघटित करके किया जाता है। उदाहरण- अशुद्ध निकल को पहले [Ni(CO)4] में परिवर्तित किया जाता है तथा फिर इसे अपघटित करके शुद्ध निकल प्राप्त कर लिया जाता है।

(ब) [Ag (NH3)2] [Ag (CN)2] का IUPAC नाम डाइएम्मीनसिल्वर (I) डाइसायनो अर्जेन्टेट (I) है।

प्रश्न 15.
द्विक लवण तथा संकुल में अन्तर समझाते हुए प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
द्विक लवण तथा संकुल दोनों ही दो या दो से अधिक स्थायी यौगिकों के रससमीकरणमितीय अनुपात में मिलाने से बनते हैं। फिर भी दोनों में निम्नलिखित अन्तर पाए जाते हैं-
(i) द्विक लवण, जल में पूर्ण रूप से साधारण आयनों में वियोजित हो जाते हैं जबकि संकुल, जल में वियोजित होकर संकुल आयन तथा प्रति आयन देते हैं।

(ii) द्विक लवण का विलयन सभी आयनों का परीक्षण देता है जबकि संकुल का विलयन संकुल आयन तथा प्रतिआयन का ही परीक्षण देता है।

(iii) द्विक लवण में आयनिक बन्ध पाया जाता है जबकि संकुल में उपसहसंयोजी बन्ध भी पाया जाता है। मोहर लवण (FeSO4 . (NH4)2SO4 . 6H2O) ( फेरस अमोनियम सल्फेट) द्विक लवण का उदाहरण है जबकि पोटैशियम फेरो सायनाइड K4[Fe(CN)6] संकुल का उदाहरण है।

प्रश्न 16.
[Cr (H2O) Br2]Cl के आयनन समावयवी का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
[Cr(H2O)4 Br2] Cl का आयनन समावयवी [Cr(H2O)4BrCl] Br होता है।

प्रश्न 17.
मर्क्युरी टेट्राथायोसायनेटो – कोबाल्टेट (III) उपसहसंयोजक यौगिक का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
Hg [Co(SCN)4]

प्रश्न 18.
संयोजकता बंध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि [Ni(CN)4]2- एक निम्न प्रचक्रण संकुल आयन है।
उत्तर:
वर्ग समतलीय आयन [Ni(CN)4]2- में Ni पर dsp² संकरण पाया जाता है। इसमें Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। इसमें संकरण निम्न प्रकार होगा-
Ni2+ आयन के कक्षक
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 19
\(\overline{\mathrm{C}}\)N (प्रबल क्षेत्र लिगन्ड) की उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
Ni2+ के dsp² संकरित कक्षक
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 20
प्रत्येक संकरित कक्षक एक \(\overline{\mathrm{C}}\)N से एक इलेक्ट्रॉन युग्म प्राप्त करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण यह एक निम्न प्रचक्रण संकुल आयन है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 19.
[Co(NH3)5ONO]Cl2 किस प्रकार की समावयवता प्रदर्शित करता है?
(ii) क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के आधार पर यदि ∆0 < P है, तो d+ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
(iii) [Fe(CN)′′]’ में संकरण अवस्था और इसका आकार लिखिए।
(Fe का परमाणु क्रमांक = 26)
उत्तर:
(i) [Co(NH3)5ONO]Cl2 बन्धनी तथा आयनन समावयवता दर्शाता है क्योंकि इसमें ONO में दाता परमाणु O है जबकि NO2 में दाता परमाणु N है। इसके साथ ही ŌNO व \(\overline{\mathrm{C}}\)l के विनिमय से आयनन समावयवता होती है।

(ii) जब ∆0 < P, तो क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के अनुसार + आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t2g³eg1 होगा।

(iii) [Fe(CN)6]3- में d²sp³ संकरण होता है क्योंकि इसमें \(\overline{\mathrm{C}}\)l प्रबल श्क्षेत्र लिगेन्ड है जिसकी उपस्थिति में Fe+3 आयन में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है और इस आयन का आकार अष्टफलकीय है।

प्रश्न 20.
(i) निम्नलिखित कॉम्प्लेक्स का आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए-
[Pt(NH3)(H2O)Cl2]
(ii) निम्नलिखित कॉम्प्लेक्स का सूत्र लिखिए- ट्रिस (एथेन – 1, 2 – डाइऐमीन) क्रोमियम (III ) क्लोराइड
उत्तर:
(i) इस कॉम्प्लेक्स (संकुल) का आई. यू. पी. ए. सी. नाम ऐम्मीन एक्वा डाइक्लोरिडो प्लेटिनम (II) है।
(ii) इस कॉम्प्लेक्स का सूत्र [Cr(en)3]Cl3 है।

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
एक आदर्श गैस का वर्ग-माध्य-मूल वेग है-
(a) \(\mathrm{C}_{r m s}=\sqrt{3 \mathrm{RTM}}\)
(b) \(\mathrm{C}_{r m s}=\sqrt{\mathrm{RTM}}\)
(c) \(C_{r m s}=\sqrt{\frac{3 R T}{M}}\)
(d) \(\mathrm{C}_{r m s}=\sqrt{\frac{\mathrm{M}}{\mathrm{RT}}}\)
उत्तर:
(c) \(C_{r m s}=\sqrt{\frac{3 R T}{M}}\)

प्रश्न 2.
समान ताप पर हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के अणुओं के वर्ग- माध्य-मूल वेगों का अनुपात होगा-
(a) 32:1
(b) 16:1
(c) 8:1
(d) 4:1
उत्तर:
(d) 4:1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 3.
गैस नियतांक का मात्रक है-
(a) कैलोरी / °C
(b) जूल / मोल
(c) जूल / मोल K
(d) जूल / किग्रा
उत्तर:
(c) जूल / मोल K

प्रश्न 4.
किसी बर्तन में P दाब पर गैस है। यदि सभी अणुओं के द्रव्यमान आधे और उनकी चालें दोगुनी कर दी जाएँ तो परिणामी दाब होगा-
(a) 4P0
(b) P0
(c) 2P0
(d) P0/2
उत्तर:
(c) 2P0

प्रश्न 5.
यदि कोई गैस बॉयल के नियम का पालन करे तो उसके लिए PV व P के बीच ग्राफ होगा-
(a) अतिपरवलय
(b) PV अक्ष के समान्तर सरल रेखा
(c) P-अक्ष के समान्तर सरल रेखा
(d) मूलबिन्दु से गुजरती P अक्ष से 45° कोण पर सरल रेखा ।
उत्तर:
(d) मूलबिन्दु से गुजरती P अक्ष से 45° कोण पर सरल रेखा ।

प्रश्न 6.
हीलियम गैस के परमाणुओं की वर्ग-माध्य-मूल चाल हाइड्रोजन गैस के अणुओं की वर्ग-माध्य-मूल चाल का \(\frac{5}{7}\) है। यदि हाइड्रोजन गैस का ताप 0°C हो तो हीलियम का ताप लगभग होगा-
(a) 0°C
(b) 0K
(c) 273°C
(d) 100°C
उत्तर:
(a) 0°C

प्रश्न 7.
किसी गैस का परम ताप 9 गुना बढ़ा दिया जाता है। गैस के अणुओं का वर्ग माध्य-मूल वेग हो जाएगा-
(a) 9 गुना
(b) 3 गुना
(c) \(\frac{1}{3}\) गुना
(d) √3 गुना ।
उत्तर:
(b) 3 गुना

प्रश्न 8.
एक ही बर्तन में ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन अणुओं की औसत गतिज ऊर्जाओं का अनुपात होगा-
(a) 1:1
(c) 8:1
(b) 4:1
(d) 16:1
उत्तर:
(a) 1:1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 9.
एक आदर्श गैस का दाब P और इसके एकांक आयतन की गतिज ऊर्जा E में परस्पर सम्बन्ध है-
(a) P = E
(b) P = \(\frac{E}{2}\)
(c) P = \(\frac{2}{3}\) E
(d) P = \(\frac{2}{5}\) E
उत्तर:
(c) P = \(\frac{2}{3}\) E

प्रश्न 10.
यदि किसी गैस के एक ग्राम अणु की गतिज ऊर्जा 27°C पर E है तो 627°C पर यह होगी-
(a) 26
(b) 3E
(c) \(\frac{627}{27}\) E
(d) \(\frac{27}{627}\) E
उत्तर:
(b) 3E

प्रश्न 11.
त्रि-परमाणुक अरेखीय गैस की सामान्य ताप पर स्वातन्त्र्य की कोटियों की कुल संख्या है-
(a) 1
(b) 2
(c) 6
(d) 3.
उत्तर:
(c) 6

प्रश्न 12.
किसी द्वि-परमाणुक अणु की स्थानान्तरीय तथा घूर्णीय स्वातन्त्र्य कोटियों की कुल संख्या होगी-
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 5
उत्तर:
(d) 5

प्रश्न 13.
एक गुब्बारे में 4 वायुमण्डलीय दाब तथा 27°C ताप पर 1500 m³ गैस है। -3°C ताप तथा 2 वायुमण्डलीय दाब पर गैस का आयतन हो जाएगा-
(a) 2700 m³
(b) 1900 m³
(c) 1700 m³
(d) 1500 m³
उत्तर:
(a) 2700 m³

प्रश्न 14.
गैस समीकरण PV = RT में V निम्न में से किसका आयतन है-
(a) गैस की किसी मात्रा का
(b) 1 ग्राम गैस का
(c) 1 ग्राम अणु गैस का
(d) 1 लीटर गैस का।
उत्तर:
(c) 1 ग्राम अणु गैस का

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 15.
सामान्य ताप तथा दाब (STP) पर वायु में ब्राउनियन गति में 5 × 10-17 kg द्रव्यमान के धुएँ के कणों की वर्ग-माध्य-मूल
चाल ज्ञात कीजिए-
(a) 1.5mm gl
(b) 1.5 cm st
(c) 1.5 m sl
(d) 1.5 kms l
उत्तर:
(b) 1.5 cm st

प्रश्न 16.
नियत दाब पर 27°C की एक आदर्श गैस को इस प्रकार गर्म लिया जाता है कि उसका आयतन दो गुना हो जाता है। गैस का ताप होगा-
(a) 300°C
(b) 327°C
(c) 600°C
(d) 54°C
उत्तर:
(b) 327°C

प्रश्न 17.
स्थिर दाब पर 300 ml गैस को जो 27°C पर है, 7°C तक ठण्डा किया जाता है, तब इसका अन्तिम आयतन होगा-
(a) 540 ml
(b) 350ml
(c) 280 ml
(d) 135ml
उत्तर:
(c) 280 ml

प्रश्न 18.
किस ताप पर किसी आदर्श गैस का आयतन 0°C के आयतन का तीन गुना हो जाएगा-
(a) 546°C
(b) 182°C
(c) 819°C
(d) 646°C
उत्तर:
(a) 546°C

प्रश्न 19.
हीलियम गैस के अणुओं का वर्ग माध्य-मूल वेग हाइड्रोजन अणुओं के वर्ग माध्य-मूल वेग का वाँ भाग है। यदि हाइड्रोजन गैस का ताप °C है तो हीलियम का ताप लगभग होगा-
(a) 5°C
(b) 0K
(c) 273°C
(d) 100°C
उत्तर:
(a) 5°C

प्रश्न 20.
किसी द्वि- परमाणुक गैस के अणुओं का कमरे के ताप पर वर्ग-माध्य-मूल वेग 1930 m/see पाया गया है। गैस है-
(a) H2
(b) F2
(c) O2
(d) Cl2
उत्तर:
(b) F2

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 21.
अणु गति सिद्धान्त से परम शून्य ताप पर अणुओं का वेग-
(a) अनन्त होता है
(b) धनात्मक किन्तु नगण्य होता है
(c) शून्य होता है
(d) कुछ निश्चित नहीं होता।
उत्तर:
(c) शून्य होता है

प्रश्न 22.
किसी निश्चित द्रव्यमान की गैस के दाब में कितने प्रतिशत वृद्धि की जाये कि स्थिर ताप पर इसके आयतन में 10% कमी आजाये-
(a) 10%
(b) 11%
(c) 9%
(d) 8%.
उत्तर:
(b) 11%

प्रश्न 23.
चन्द्रमा पर वायुमण्डल की अनुपस्थिति का कारण है कि चन्द्रमा के पृष्ठ पर पलायन वेग का मान-
(a) वायु के अणुओं के Crms से अधिक होता है
(b) वायु के अणुओं के Crms से कम होता है
(c) वायु के अणुओं के Crms से दोगुना होता है।
(d) 11.2 km/sec होता है जो कि वायु के अणुओं के Crms से अधिक है।
उत्तर:
(d) 11.2 km/sec होता है जो कि वायु के अणुओं के Crms से अधिक है।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अणु गति सिद्धान्त के आधार पर किसी गैस के दाब का सूत्र लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ भी स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
आदर्श गैस के दाब का सूत्र P = \(\frac{1}{3} \frac{m \mathrm{~N}}{\mathrm{~V}} \bar{v}^2\)
जहाँ
m → गैस के एक अणु का द्रव्यमान
\(\bar{v}\)गैस के अणुओं का वर्ग माध्य वेग
N → गैस के V आयतन में अणुओं की संख्या ।

प्रश्न 2.
सामान्य ताप एवं दाब पर एक मोल गैस का आयतन कितना होता है?
उत्तर:
सामान्य ताप व दाब पर एक मोल गैस का आयतन 22.4 लीटर होता है।

प्रश्न 3.
आदर्श गैस के लिए स्थिर ताप पर दाब P तथा घनत्व d में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
\(\frac{P}{d}\) = नियतांक

प्रश्न 4.
गैस नियतांक का मात्रक SI पद्धति में लिखिए।
उत्तर:
जूल / मोल K

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 5.
आदर्श गैस समीकरण PV = RT से R का विमीय सूत्र लिखिए।
उत्तर:
PV = RT से,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -1
= \(\frac{\mathrm{ML}^{-1} \mathrm{~T}^{-2} \times \mathrm{L}^3}{\mathrm{~K}}\)
= \({\left[\mathrm{ML}^2 \mathrm{~T}^{-2} \mathrm{~K}^{-1}\right]}\)

प्रश्न 6.
गैस के अणु गति सिद्धान्त के अनुसार परम शून्य ताप क्या होता है?
उत्तर:
परम शून्य ताप वह ताप है, जिस पर गैस के समस्त अणु गतिहीन हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
परम शून्य ताप पर किसी गैस की गतिज ऊर्जा कितनी होगी ?
उत्तर:
परम शून्य ताप पर किसी गैस की गतिज ऊर्जा शून्य होती है, क्योंकि किसी गैस के अणु की गतिज ऊर्जा E, परम ताप T के अनुक्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 8.
क्या ताप बढ़ने पर स्वातन्त्र्य कोटियाँ बदल जाती हैं?
उत्तर:
ताप बढ़ने पर गैस के अणु की घूर्णन गति के साथ उसके परमाणुओं की कम्पनिक गति भी प्रारम्भ हो जाती है जिसके कारण स्वातन्त्र्य की कोटियाँ बढ़ जाती हैं।

प्रश्न 9.
किसी गैस की स्वातन्त्र्य कोटियों का क्या अर्थ है?
उत्तर:
किसी कण के पास जितने प्रकार की स्वतन्त्र गतिज ऊर्जाएँ हो सकती हैं, उनकी संख्या उस कण की स्वातन्त्र्य कोटियाँ कहलाती हैं।

प्रश्न 10.
एकपरमाणुक गैस के लिए दो विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात कितना होता है?
उत्तर:
\(\frac{C_P}{C_V}\) = \(\frac{5}{3}\)

प्रश्न 11.
एकपरमाणुक गैस की आन्तरिक ऊर्जा अणुओं की कौन-सी गति के कारण होती है?
उत्तर:
स्थानान्तरीय गति के कारण।

प्रश्न 12.
किसी गैस के परम ताप T तथा उसके एक अणु की औसत ऊर्जा E में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा E = \(\frac{3}{2}\) KBT,
जहाँ KB बोल्ट्जमैन नियतांक है।

प्रश्न 13.
बोल्ट्जमैन नियतांक से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सार्वत्रिक गैस नियतांक R तथा आवोगाद्रो संख्या NA के अनुपात को बोल्ट्जमैन नियतांक कहते हैं।
KB = \(\frac{R}{N_A}\)

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प्रश्न 14.
एक सिलेण्डर में समान परम ताप T पर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन गैसें भरी हैं। इनमें से किसके अणुओं की औसत गतिज अधिक होगी ?
उत्तर:
दोनों के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जाएं बराबर होंगी-
E ∝ T

प्रश्न 15.
एक चींटी फर्श पर चल रही है। इसकी स्वातन्त्र्य की कोटि कितनी है?
उत्तर:
2 (दो)।

प्रश्न 16.
ऊर्जा के समविभाजन का नियम बताइए ।
उत्तर:
इस नियम के अनुसार किसी गैस की सम्पूर्ण ऊर्जा उसकी सभी स्वातन्त्र्य कोटियों में समान रूप से बँटी रहती है तथा परम ताप T पर प्रत्येक स्वातन्त्र्य कोटि से सम्बद्ध ऊर्जा – ABT होती है, जहाँ बोल्ट्जमैन नियतांक है।

प्रश्न 17.
एक वायुयान हवा में उड़ रहा है। इसके उड़ने की स्वातन्त्र्य कोटि कितनी है?
उत्तर:
वायुयान तीनों दिशाओं में स्वतन्त्रतापूर्वक गति कर सकता है, अतः वायुयान की स्वातन्त्र्य कोटि 3 होगी।

प्रश्न 18.
किसी दृढ़ द्विपरमाणुक गैस के लिए दो विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात कितना होगा?
उत्तर:
∵ γ = \(1+\frac{2}{f}\) = \(1+\frac{2}{5}\)
[∵दृढ द्वि-परमाणुक के लिए /= 5)
∴ γ = \(\frac{7}{5}\)

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अणु गति सिद्धान्त के आधार पर आवोगाद्रो के नियम का सत्यापन कीजिए।
उत्तर:
आवोगाद्रो का नियम (Avagadra’s Law):
इस नियम के अनुसार, “समान ताप व दाब पर सभी गैसों के समान आयतनों में अणुओं की संख्या समान होती है।”
गैसों के अणुगति सिद्धान्त से निगमन-अणुगति सिद्धान्त के अनुसार गैस का दाब
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -15
अर्थात् नियत दाब तथा ताप पर समान आयतन पर सभी गैसों में अणु की एक नियत संख्या होती है। यही आवोगाद्रो नियम है।

प्रश्न 2.
परम शून्य ताप से क्या अभिप्राय है?
उत्तर;
आदर्श गैस के ताप की अणुगतिक व्याख्या (Molecular Kinetic Interpretation of Temperature of an Ideal Gas):
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -6
अर्थात् गैस का परमताप उसकी औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि आदर्श गैस की आन्तरिक ऊर्जा केवल उसके परमताप पर निर्भर करती है, दाब या आयतन पर नहीं। ताप की इस व्याख्या से स्पष्ट है कि आदर्श गैसों का अणुगति सिद्धान्त आदर्श गैस समीकरण और इस पर आधारित विभिन्न गैस नियमों के पूर्णतः संगत है।

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प्रश्न 3.
कणों की ब्राउनियन गति से क्या अभिप्राय है? तथा यह किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर:
द्रव्य की आण्विक प्रकृति (Molecular Nature Of Matter):
‘द्रव्य परमाणुओं से मिलकर बना है।’ इस सिद्धान्त को बीसर्वी शताब्दी के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण माना है। इनमें से रिचर्ड फिनमेन ने परमाणु परिकल्पना प्रस्तुत की जिसके अनुसार – “सभी वस्तुएँ परमाणुओं से बनी हैं, जो अनवरत गतिमान अत्यन्त सूक्ष्म कण हैं, बीच में अल्प दूरी होने पर ये एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं पर एक-दूसरे में निष्पीड़ित किए जाने पर प्रतिकर्षित करने लगते हैं।”

यह विचार कि द्रव्य सतत नहीं हो सकता, कई संस्कृतियों में पहले से ही विद्यमान था। भारत में कणाद ने वैशेषिक दर्शन (छठठी शताब्दी ई.पू.) में परमाण्वीय प्रारूप का विस्तृत विकास किया। उन्होंने परमाणुओं को अविभाज्य, सूक्ष्म तथा द्रव्य को अविभाज्य अंश माना। यह भी तर्क दिया कि यदि द्रव्य को विभाजित करने के क्रम में कोई अन्त हो तो किसी सरसों के दाने तथा मेरु पर्वत में कोई अन्तर नहीं होगा।

प्रश्न 4.
अणुओं के वेग के वर्ग-माध्य-मूल मान एवं परम ताप में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
गैस के अणुओं का वर्ग माध्य मूल वेग (Root mean square velocity of Gas molecules):
माना 1 ग्राम मोल गैस का आयतन V तथा ताप T है। गैस के 1 ग्राम मोल मे अणुओं की संख्या NA = 6.02 × 1023 इस संख्या को आवोगाद्रो संख्या कहते हैं। गैस के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार 1 मोल गैस का दाब
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -16
समी (5) से स्पष्ट है कि वर्ग माध्य मूल वेग गैस के परम ताप पर निर्भर करता है। परम शून्य ताप पर Crms = 0 अर्थात् वर्ग माध्य मूल वेग शून्य होने से गतिज ऊर्जा का मान भी शून्य होगा। परम शून्य ताप पर गैस में आण्विक गति समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 5.
परम शून्य ताप पर अणु का वेग व गतिज ऊर्जा कितनी होगी ?
उत्तर:
आदर्श गैस का दाब का व्यंजक
(Expression Of Pressure Of Ideal Gas):
जब कोई गैस किसी पात्र में बन्द कर दी जाती है तो बर्तन की दीवार पर दाब लगाती है। गैस के अणुगति मॉडल के अनुसार गैस के गतिमान अणुओं द्वारा बर्तन की दीवारों से टकराने के कारण उत्पन्न होता है। जब भी गैस का कोई अणु पात्र की दीवार से टकराकर लौटता है, तो उनके संवेग में कुछ परिवर्तन होता है। संवेग संरक्षण सिद्धान्त के अनुसार यह परिवर्तन दीवार को हस्तान्तरित हो जाता है। गति के द्वितीय नियम से संवेग परिवर्तन की दर दीवार पर लगने वाले बल के बराबर होती हैं। क्योंकि गैस में असंख्यक अणु निरन्तर एक के बाद एक दीवार से टकसाते हैं। दीवार पर लगा बल स्थायी होता है। दीवार के इकाई क्षेत्रफल पर आरोपित बल ही गैस का दाब होता है।

प्रश्न 6.
हल्की गैस का विसरण भारी गैस की तुलना में आसानी से क्यों होता है ?
उत्तर:
गैस के अन्दर अणुओं का वेग उनके द्रव्यमानों पर निर्भर करता है, इसलिए भारी गैस के अणुओं की गति हल्की गैस की तुलना में कम होती है। इस कारण ही हल्की गैस, भारी गैस में आसानी से विसरित होती है।

प्रश्न 7.
किसी बर्तन में भरी गैस के ताप पर क्या प्रभाव पड़ेगा यदि उसे तीव्र गतिमान ट्रेन में रख दियाजाये ?
उत्तर:
गैस का ताप प्रति अणु स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा के अनुक्रमानुपाती होता है तीव्र गतिमान ट्रेन में रखने पर गैस के अणुओं की द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष गति अपरिवर्तित रहती है, अतः बर्तन में भरी गैस के ताप में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

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प्रश्न 8.
यदि अणुओं के मध्य आकर्षण बल अचानक समाप्त हो जाये तो एक पात्र में भरी गैस के दाब में क्या कोई परिवर्तन होगा ?
उत्तर:
गैस के अणुओं के मध्य आकर्षण बल की अनुपस्थिति में, गैस के अणु पात्र की दीवारों से कठोरता से टकराएँगे। इस कारण गैस द्वारा लगाया गया दाब बढ़ जायेगा।

प्रश्न 9.
किसी गैस के परम ताप T तथा गैस के वर्ग माध्य वेग (C) में ग्राफ खींचिए।
उत्तर:
गैस का वर्ग माध्य वेग
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -2
\(C_{r m s}^2=\frac{3 \mathrm{RT}}{\mathrm{M}} \text { या } c_{r m s}^2 \propto \mathrm{T}\)
अर्थात् \(C_{r m s}^2\) व T के बीच खींचा गया ग्राफ सरल रेखीय होगा।

प्रश्न 10.
“ब्राउनियन गति अवलोकनीय होती है चूँकि आवोगाद्रो संख्या निश्चित होती है।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
यदि आवोगाद्रो संख्या अनिश्चित हो तो प्रत्येक निलम्बित कण पर बहुत से परमाणुओं द्वारा बमबारी की जायेगी, इस प्रकार निलम्बित कणों को प्रदान किया गया कुल आवेग शून्य होगा। इसलिए कर्णों का गमन नगण्य हो जायेगा और इनको प्रेक्षित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 11.
एक प्रयोग में एक गैस एक अतिरिक्त नियम VP²= नियतांक का पालन करती है। प्रारम्भ में गैस का ताप T तथा आयतन V है। इसके प्रसार के पश्चात् इसका आयतन 2V हो जाता है, तो इसका ताप कितना होगा?
लागू
उत्तर – आदर्श गैस का समीकरण PV = RT सभी प्रक्रमों के लिए होता है।
अतिरिक्त प्रतिबन्ध है-
VP² = नियतांक ……….(1)
समीकरण PV = RT से,
P= \(\frac{RT}{V}\) ……….(2)
यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
V(\(\frac{RT}{V}\))² = नियतांक
या \(\frac{T^2}{V}\) = नियतांक (चूँकि R = नियतांक)
यदि अंतिम आयतन V’ तथा ताप T’ हो, तो
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -3

प्रश्न 12.
किसी पात्र में P0 दाब पर गैस भरी है। यदि अणुओं का द्रव्यमान आधा व चाल दोगुनी कर दी जाये तो परिणामी दाब क्या होगा ?
उत्तर:
अणु गति सिद्धान्त के अनुसार,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -4

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 13.
एक पिस्टनयुक्त सिलेण्डर में निश्चित ताप व दाब पर गैस भरी है। अणु गति सिद्धान्त से स्पष्ट कीजिए-
(i) ताप बढ़ने पर गैस का दाब बढ़ जाता है।
(ii) पिस्टन को बाहर खींचने पर दाब घट जाता है।
उत्तर:
(i) ताप बढ़ाने से गैस के अणुओं की औसत चाल बढ़ जाती है। इससे सिलेण्डर की दीवार से प्रति सेकण्ड अधिक अणु टकराते हैं तथा प्रत्येक टक्कर में दीवार को अधिक संवेग हस्तान्तरित होता है। इन दोनों ही कारणों से दाब बढ़ जाता है।

(ii) आयतन बढ़ने से अणुओं को गति करने के लिए अधिक स्थान मिलता है, अतः दीवारों से प्रति सेकण्ड कम अणु टकराते हैं। इसके अतिरिक्त ये टक्करें अब दीवारों के बड़े क्षेत्रफल पर होती हैं। इन दोनों ही कारणों से दाब घट जाता है।

प्रश्न 14.
ब्राउनियन गति तापमान के साथ क्यों बढ़ जाती है ?
उत्तर:
क्योंकि ताप बढ़ जाता है, इसलिए अणु अधिक तेज गति करते हैं और इस तरह निलम्बित कण पर अधिक बल लगाते हैं यही कारण है कि ब्राउनियन गति ताप में वृद्धि से बढ़ जाती है।

प्रश्न 15.
किसी आदर्श द्वि-परमाण्विक गैस को नियत दाब पर गर्म किया जाता है प्रदान ऊष्मा का वह भाग ज्ञात कीजिए जो गैस की अन्तिम ऊर्जा में वृद्धि करता है।
उत्तर:
जब किसी गैस को गर्म किया जाता है तो प्रदान ऊष्मा का एक भाग उसकी आन्तरिक ऊर्जा बढ़ाता है, जबकि दूसरा दाब के विरुद्ध कार्य करने में खर्च होता है अर्थात्
(∆Q)P = ∆U + ∆W
⇒ nCP∆T = nCV∆T + P∆V
अतः वह भाग जो आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि करता है
\(\frac{\mathrm{DU}}{(\mathrm{DQ})_{\mathrm{P}}}=\frac{\mathrm{C}_{\mathrm{V}}}{\mathrm{C}_{\mathrm{P}}}=\frac{1}{\gamma}=\frac{5}{7}\)
[क्योंकि y = 3 द्विपरमाण्विक गैस के लिए]

प्रश्न 16.
दो गैसों X व Y के ताप, दाब व आयतन क्रमशः T, P व V हैं। यदि गैसें मिश्रित की जायें तो मिश्रण का ताप व आयतन क्रमशः V व T ही रहते हैं। मिश्रण का दाब व द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
डाल्टन नियम से,
मिश्रण का दाब = P1 + P2 = P + P = 2P
इसी प्रकार द्रव्यमान दोगुना अर्थात् 2M हो जायेगा।

प्रश्न 17.
देर तक स्कूटर चलाते रहने पर टायर में वायुदाब कुछ बढ़ जाता है, क्यों?
उत्तर:
टायर व सड़क के बीच घर्षण के कारण टायर का ताप बढ़ जाने से उसमें भरी वायु का दाव बढ़ जाता है।

प्रश्न 18.
एक बन्द बर्तन में हीलियम व नाइट्रोजन के उच्च समान ताप हैं किस गैस की प्रति अणु कुल गतिज ऊर्जा अधिक होगी ?
उत्तर:
नाइट्रोजन की, क्योंकि दोनों गैसें समान ताप पर होने से दोनों की स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जाएँ तो समान होंगी, परन्तु नाइट्रोजन गैस द्विपरमाणुक है, अतः इसके घूर्णन की गतिज ऊर्जा अधिक होगी।

प्रश्न 19.
गैस का अवस्था समीकरण (\(P+\frac{aT^2}{V}\))Vc = (RT + b) द्वारा प्रदर्शित है, जहाँ a, b, c व R नियतांक हैं। समतापी वक्र P = BVm – NVn द्वारा प्रदर्शित है, जहाँ A व B ताप पर निर्भर हैं तब व के मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(\(P+\frac{aT^2}{V}\) )Vc = RT + b
⇒ P + aT2V-1 = RTV-c + bV-c
⇒ P = (RT+ b) V-c – (aT²) V-1
इस समीकरण की दिये गये समीकरण P = BVm – NVn से तुलना करने पर m = -c व n = -1 प्राप्त होता है।

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प्रश्न 20.
चित्र में तीन गैसों A, B व C के निश्चित मोलों के दाब (P) के सापेक्ष दाब आयतन (PV) का परिवर्तन स्थिर ताप (T) पर प्रदर्शित है। उचित तर्क देकर बताइए कि इनमें से कौन-सी गैस आदर्श गैस है
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -5
उत्तर:
आदर्श गैस के निश्चित मोलों (i) के लिए समीकरण है = PV – MRT चूँकि मोलों की संख्या व ताप T नियत हैं, अत: PV – नियत रहेगा। अतः ग्राफ C आदर्श गैस को निरूपित करता है

प्रश्न 21.
एक बक्से में हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के बराबर-बराबर अणु हैं, यदि बक्से में एक सूक्ष्म छिद्र हो तो कौन-सी गैस तेजी से निकलेगी ?
उत्तर:
प्रति सेकण्ड छिद्र से गैस लीक होने का आयतन छिद्र का क्षेत्रफल × गैस की औसत चाल
चूँकि गैस के अणुओं की चाल
अणुभार हाइड्रोजन का अणुभार ऑक्सीजन की तुलना में कम होता है, अतः बक्से में से छिद्र द्वारा हाइड्रोजन गैस तेजी से निकलेगी।

प्रश्न 22.
आदर्श गैस को ठोस या द्रव अवस्था में नहीं परिवर्तित किया जा सकता है?
उत्तर:
आदर्श गैस के अणुओं के मध्य अन्तराण्विक बल शून्य माने जाते हैं। द्रव व ठोस अवस्था में अणु परस्पर बन्धन की अवस्था में होते हैं और यह बन्धन आदर्श गैस के अणुओं में सम्भव नहीं है।

प्रश्न 23.
किस ताप पर गैस के सभी अणु गति विहीन हो जाते हैं?
उत्तर:
गैस के अणु गति सिद्धान्त के अनुसार गैस की प्रति अणु औसत गतिज ऊर्जा परमताप के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात्
\(\frac{1}{2}\)mvrms² = kT
\(\frac{1}{2}\)mvrms² ∝ T
∵ vrms² = 0
∴ T = 0
अतः परम शून्य ताप पर गैस के अणु गतिविहीन हो जाते हैं।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अणु गति सिद्धान्त की आदर्श गैस के लिए प्रमुख परिकल्पनाएँ लिखिए। उनके आधार पर गैस दाब के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
आदर्श गैसों का अणुगति सिद्धान्त (Molecular Kinetic Theory Of Ideal Gas):
आदर्श गैसों का अणुगति सिद्धान्त निम्नलिखित मुख्य परिकल्पनाओं पर आधारित है-
1. अणु (Molecule): प्रत्येक गैस बहुत छोटे-छोटे अणुओं से मिलकर बनी मानी गई है। ये अणु दृढ़ पूर्णतः प्रत्यास्थ ठोस गोले के रूप में माने गये हैं। ये अणु द्रव्यमान बिन्दु (Mass Point) माने जाते हैं अर्थात् इनका द्रव्यमान तो होता है, परन्तु आकार तथा आयतन प्रायः नगण्य होता है। वास्तव में ऐसा होना असम्भव है क्योंकि अणुओं का आयतन गैस के आयतन की तुलना में कम चाहे जितना हो, लेकिन शून्य कदापि नहीं हो सकता।

2. गति (Motion): अणु अनवरत ( Incessant) यादृच्छिक या अनियमित गति की अवस्था में माना जाता है। ये सभी सम्भव दिशाओं में सभी सम्भव वेगों से निरन्तर गति करते रहते हैं, अतः गैस आण्विक अव्यवस्था की अवस्था में होती है।

3. संघट्ट (Collisions): अणु आपस में तथा वर्तन की दीवारों से निरन्तर टकराते रहते हैं। प्रत्येक टक्कर में अणु की चाल तथा गति की दिशा बदल जाती है, परन्तु सभी अणुओं की कुल गतिज ऊर्जा स्थिर रहती है। टक्कर के कारण आण्विक घनत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, अतः प्रति इकाई आयतन में अणुओं की संख्या पूरी गैस में समान रहती है।

4. बल (Force): अणुओं की टक्करें पूर्ण प्रत्यास्थ होती हैं, अतः अणुओं के मध्य कोई भी आकर्षण या प्रतिकर्षण बल कार्य नहीं करता है इसका तात्पर्य यह है कि आदर्श गैस की सम्पूर्ण ऊर्जा केवल गतिज ऊर्जा के रूप में ही होती है, आण्विक स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।

5. समय ( Time): टक्कर में अणुओं के सम्पर्क का समय दो उत्तरोत्तर टक्करों के मध्य लगे समय की तुलना में नगण्य होता है।

6. पथ (Path): दो उत्तरोत्तर टक्करों के बीच अणुओं का मार्ग ऋजुरेखीय होता है, इसे मुक्त पथ ( Free Path) कहते हैं। दो उत्तरोत्तर टक्करों के मध्य अणुओं के बीच औसत दूरी माध्य मुक्त पथ (Mean free Path) कहलाती है। सामान्य ताप एवं दाब पर यह 107 मी कोटि का होता है। माध्य मुक्त पथ को तय करने में लगा समय माध्य मुक्मत काल (mean free time) कहलाता है इसका मान 10-10 सेकण्ड कोटि का होता है।

7. अणुओं की गति पर गुरुत्वाकर्षण बल का कोई प्रभाव नहीं होता है क्योंकि अणुओं का द्रव्यमान नगण्य तथा वेग अत्यधिक होता है। इसी कारण पूरे बर्तन में गैस का घनत्व हर जगह समान होता है।

8. गैस के अणु सभी दिशाओं में समान रूप से दाव डालते हैं।

प्रश्न 2.
अणु गति सिद्धान्त के आधार पर ताप की क्या अविधारणा है? इसके आधार पर परम शून्य ताप की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
आदर्श गैस के ताप की अणुगतिक व्याख्या (Molecular Kinetic Interpretation of Temperature of an Ideal Gas):
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -6.1
अर्थात् गैस का परमताप उसकी औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि आदर्श गैस की आन्तरिक ऊर्जा केवल उसके परमताप पर निर्भर करती है, दाब या आयतन पर नहीं। ताप की इस व्याख्या से स्पष्ट है कि आदर्श गैसों का अणुगति सिद्धान्त आदर्श गैस समीकरण और इस पर आधारित विभिन्न गैस नियमों के पूर्णतः संगत है।

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प्रश्न 3.
वाण्डर वाल्स समीकरण लिखिए। समझाइए कि सामान्य गैस समीकरण में यह संशोधन किन कारणों से आवश्यक हुए?
उत्तर:
वास्तविक गैसों के लिए अवस्था समीकरण : वाण्डरवाल समीकरण
(Equation Of State For Real Gas : Vanderwaal’s Equation):
बॉयल के नियमानुसार, स्थिर ताप पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान के लिए दाब P तथा आयतन V का गुणनफल एक नियतांक होता है अर्थात् PV= नियतांक प्रयोगों द्वारा यह पाया जाता है कि कोई भी वास्तविक गैस इस नियम का पूर्णतः पालन नहीं करती। अति निम्न दाब तथा उच्च ताप पर वास्तविक गैसें इस नियम का एक सीमा तक पालन करती है, परन्तु उच्च दाब तथा निम्न ताप पर वास्तविक गैसें इस नियम से बहुत अधिक विचलन दिखाती हैं। बॉयल के नियमानुसार यदि PV व P के बीच ग्राफ खींचा जाए तो P अक्ष के समान्तर एक सरल रेखा आनी चाहिए परन्तु इन ग्राफों से स्पष्ट है कि PV का मान P के बढ़ने पर नियत नहीं रहता है बल्कि हाइड्रोजन के लिए P का मान बढ़ने पर PV का मान बढ़ता है। जबकि नाइट्रोजन के लिए P के बढ़ने पर PV का मान पहले घटता है तथा फिर बढ़ने लगता है। कार्बन डाइ ऑक्साइड जैसी गैसें (अधिक ताप पर द्रवित होने वाली गैसें) तो बॉयल के नियम से और भी अधिक विचलन दिखाती हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -7
के बढ़ने पर PV का मान बढ़ता है, जबकि नाइट्रोजन के लिए P के बढ़ने पर PV का मान पहले घटता है तथा फिर बढ़ने लगता है। कार्बन डाइ ऑक्साइड जैसी गैसें (अधिक ताप पर द्रवित होने वाली गैसें तो बॉयल के नियम से और भी अधिक विचलन दिखाती हैं।
यह पाया गया है कि वास्तविक गैसों के आदर्श गैस के नियम से विचलन के दो प्रमुख कारण हैं- (i) अणुओं का अशून्य आकार तथा (ii) अन्तराण्विक अन्योन्यक्रिया ।

(i) अणुओं का अशून्य आकार :
आदर्श गैस के लिए अणुओं का आकार नगण्य माना जाता है जिससे अणुओं द्वारा घेरा गया आयतन गैस के कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है, परन्तु वास्तव में अणुओं का आकार नगण्य नहीं माना जा सकता है। एक वास्तविक गैस के लिए अणु का व्यास 10-10 मीटर की कोटि का होता है, जबकि गैस में दो अणुओं के बीच की औसत दूरी 10 मीटर की कोटि की होती है, अतः गैस के अणुओं का आयतन गैस के आयतन की तुलना में नगण्य नहीं माना जा सकता, विशेषकर अधिक दाब की स्थिति में जबकि गैस का स्वयं का आयतन बहुत कम होता है। यदि गैस का आयतन V है तो इस आयतन का कुछ भाग तो स्वयं अणु घेर लेते हैं, अतः अणुओं की गति के लिए उपलब्ध आयतन V से कुछ कम होगा। इसके लिए अणुओं के प्रभावी आयतन को गैस के प्रेक्षित आयतन V में से घटाना होगा। यदि अणुओं का प्रभावी आयतन 6 हो तो अणुओं को अपनी गति के लिए उपलब्ध आयतन (V – b) होगा।
अतः आदर्श गैस का आयतन Vi = V – b
जहाँ b एक नियतांक है।

(ii) अन्तराण्विक अन्योन्यक्रिया : आदर्श गैस के लिए अणुओं के बीच पारस्परिक आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल को नगण्य माना जाता है, परन्तु वास्तविक गैस के लिए यह मान्यता सही नहीं है। गैस का प्रत्येक अणु दूसरे अणुओं पर एक बल आरोपित करता है, जिसे अन्तराण्विक बल कहते हैं साधारण दाब पर गैस के अणु बहुत दूर-दूर होते हैं, अतः उनके बीच अन्तराण्विक बल का मान नगण्य होता है। इसके अतिरिक्त उच्च ताप पर अणुओं की गतिज ऊर्जा अधिक होती है। जिससे अन्तराण्विक बल का उनकी गति पर प्रभाव नगण्य होता है, अतः निम्न दाब तथा उच्च ताप पर अन्तराण्विक बलों को नगण्य माना जा सकता है परन्तु उच्च दाब पर अणु एक-दूसरे के पास आ जाते हैं तथा वै एक-दूसरे को आकर्षित करने लगते हैं, अतः उच्च दाब तथा निम्न ताप पर आकर्षण बल की उपेक्षा नहीं की जा सकती।

माना कि गैस किसी बर्तन में बन्द है जो अणु पूर्णतः वर्तन के अन्दर हैं, जैसे- अणु A (चित्र 13.8); वे अपने चारों ओर के अणुओं द्वारा समान रूप से आकर्षित होते हैं, अतः ऐसे अणुओं पर परिणामी अन्तराण्विक बल शून्य होता है, परन्तु जो अणु वर्तन की दीवार के समीप हैं, जैसे- अणु B उन पर परिणामी अन्तराण्विक बल अन्दर की ओर कार्य करता है जिससे वे अन्दर की ओर खिंचते हैं। इस खिचाव के कारण दीवार से टकराते समय अणु के संवेग में कुछ कमी आ जाती है। जिससे अणु दीवार पर उतना बल आरोपित नहीं कर पाता जितना कि वह अन्तराण्विक बल की अनुपस्थिति में करता है। अतः गैस का प्रेक्षित दाब उसके वास्तविक दाब से कम होता है। यदि दाब में यह कमी ß हो तो गैस का वास्तविक दाब (P + ß) रखना होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -8
ß का मान दो बातों पर निर्भर करता है- (i) दीवार के समीप अणु को आकर्षित करने वाले अणुओं की प्रति एकांक आयतन में संख्या पर, (ii) दीवार के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर प्रति सेकण्ड टकराने वाले अणुओं की संख्या पर ये दोनों कारक प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या अर्थात् गैस के घनत्व के अनुक्रमानुपाती होते हैं।
अतः दाब में कमी ß ∝ (घनत्व × घनत्व) ∝ (घनत्व)²
घनत्व ∝ \(\frac{1}{\text { आयतन (V) }}\)
अतः ß ∝ \(\frac{1}{V^2}\) अथवा ß = \(\frac{a}{V^2}\)
जहाँ गैस के 1 ग्राम अणु के लिए नियतांक है।
अतः वास्तविक दाब (P+ ß) = \(P+\frac{a}{V^2}\)
अतः आदर्श गैस समीकरण में P के स्थान पर (\(P+\frac{a}{V^2}\)) रखना होगा।

वाण्डर वाल्स समीकरण : आदर्श गैस समीकरण में अणुओं के अशून्य आकार तथा अणुओं के बीच लगने वाले अन्तराण्विक बल का संशोधन लगाने पर वास्तविक गैस के लिए निम्न समीकरण प्राप्त होता है-
(\(P+\frac{a}{V^2}\))(V – b) = RT
यह वाण्डर वाल गैस समीकरण कहलाता है तथा 6 वाण्डर वाल नियतांक कहलाते हैं। वास्तविक गैसें इस समीकरण का उच्च दाब व निम्न ताप पर भी काफी सीमा तक पालन करती हैं।

प्रश्न 4.
गैसों के अणु गति सिद्धान्त के आधार पर किसी गैस के लिए बॉयल, चार्ल्स, आवोगाद्रो तथा गेलुसाक के नियमों का निगमन कीजिए।
उत्तर:
गैसीय नियम एवं अणुगति सिद्धान्त से निगमन
(Gas Laws and Derivations of its on the Basis of Kinetic Theory)
(i) बॉयल का नियम (Boyle’s Law):
इस नियम के अनुसार, “नियत ताप पर, गैस के किसी दिए गए द्रव्यमान का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -9
यही बॉयल का नियम है अर्थात् नियत ताप पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती है।

(ii) चार्ल्स का नियम (Charle’s Law):
इस नियम के अनुसार, “नियत दाब पर किसी दी गई गैस का आयतन उसके परमताप (T) के अनुक्रमानुपाती होता है।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -10

(iii) दाब-ताप का नियम या गैलुसॉक का नियम (PressureTemperature law or Gay-Lussac’s Law):
इस नियम के अनुसार, “नियत आयतन पर गैस का दाब परमताप के अनुक्रमानुपाती होता है।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -11

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 5.
स्वतन्त्र्यता की कोटि से क्या अभिप्राय है? ऊर्जा समवितरण से एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक एवं त्रिपरमाणुक गैसों की विशिष्ट ऊष्माओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एकल, द्विपरमाणुक व बहुपरमाणुक अणुओं की स्वातंत्र्य कोटियाँ (Degrees Of freedom Of monoatomic Diatomic and Polyatomic Molecules):
(a) गैस के एक-परमाण्विक अणु के लिए,
N = 1 तथा K = 0
f = 3 × 1 – 0 = 3
अर्थात् गैसों के एक परमाण्विक अणु में स्वतन्त्रता की तीन कोटियाँ होती हैं।

(b) गैस के द्वि-परमाण्विक अणु के लिए, द्वि-परमाण्विक अणु में दोनों परमाणु एक निश्चित दूरी पर आण्विक बन्ध द्वारा बँधे रहते हैं, अत:
N = 2 तथा K = 1
f = 3 × 2 – 1 = 5

(c) गैस के त्रि-परमाण्विक अणु के लिए-समतलीय त्रि-परमाण्विक अणु में तीनों परमाणु एक-दूसरे के सापेक्ष निश्चित दूरियों पर तीन आण्विकों द्वारा बद्ध रहते हैं जैसा चित्र 13.9 में प्रदर्शित है। अतः
N = 3 तथा K = 3
f = 3 × 3 – 3 = 6
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -12
अर्थात् समतलीय त्रि-परमाण्विक अणु में छः स्वतन्त्रता की कोटियाँ होती हैं।
रेखीय त्रि-परमाण्विक अणु में,
N = 3 तथा K = 2
f = 3 × 3 – 2 = 7
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -13
अर्थात् रेखीय त्रि-परमाण्विक अणु में सात स्वतन्त्रता की कोटियाँ होती हैं।
किसी बर्तन में बन्द गैस एक ऊष्मागतिक निकाय है। गैस के परमाणु अथवा अणु अनियमित गति की अवस्था में रहते हैं। उनमें विभिन्न प्रकार की गतियों के कारण गतिज ऊर्जा होती है। गैस के अणुओं की स्वतन्त्रता की कोटियाँ इस बात से भी निर्धारित की जाती हैं कि वे अणु कितने तरीके से ऊर्जा अवशोषित करते हैं। किसी निकाय के कण जितने स्वतन्त्र तरीकों से ऊर्जा अवशोषित कर सकते हैं, वे उसकी स्वतन्त्रता की कोटियाँ कहलाती हैं।

गैसों की विशिष्ट ऊष्माएँ (SPECIFIC HEAT OF A GAS)
हमें ज्ञात है कि 1 मोल गैस की परमताप पर कुल आन्तरिक ऊर्जा
U = \(\frac{1}{2} f \mathrm{RT}\) …….(1)
अवकलन करने पर
\(\frac{d \mathrm{U}}{d \mathrm{~T}}=\frac{1}{2} f \mathrm{R}\) …………..(2)
माना कि गैस को ‘स्थिर आयतन पर’ गर्म करके उसके ताप में dT वृद्धि की जाती है। तब गैस को दी गयी ऊष्मा dQ = CVdT होगी। चूँकि आयतन स्थिर रहता है, अतः बाह्य कार्य शून्य होगा। अतः ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,
dU = dQ – dW से,
dU = CVdT
या CV = \(\frac{dU}{dT}\) ……………(3)
समी (2) व (3) से
\(\mathrm{C}_{\mathrm{V}}=\frac{1}{2} f \mathrm{R}\)
यह गैस की स्थिर आयतन पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा है। स्थिर दाब पर ग्राम-अणुक विशिष्ट ऊष्मा के लिए मेयर सम्बन्ध \(\mathrm{C}_{\mathrm{P}}-\mathrm{C}_{\mathrm{V}}=\mathrm{R}\) से
CP = CV + R = \(\frac{1}{2} fR\) + R
CP = (\(\frac{f}{2}\) + 1)R
गैस की ग्राम अणुक विशिष्ट ऊष्माओं की निष्पत्ति-
\(\gamma=\frac{\mathrm{C}_{\mathrm{P}}}{\mathrm{C}_{\mathrm{V}}}=\frac{\left(\frac{f}{2}+1\right) \mathrm{R}}{\frac{f}{2} \mathrm{R}}\)
\(\gamma=1+\frac{2}{f}\)
स्पष्ट है कि स्वातंत्र्य कोटि की संख्या f का मान बढ़ने पर γ घटता है।

प्रश्न 6.
माध्य मुक्त पथ से क्या अभिप्राय है? इसके लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
माध्य मुक्त पथ की अवधारणा (Concept Of Mean Free Path):
गैसों के अणुगति सिद्धान्त के अनुसार किसी गैस के अणु विभिन्न चालों से सभी सम्भव दिशाओं में लगातार गति करते रहते हैं। गति करने के दौरान ये एक-दूसरे से संघट्ट करते हैं जिससे उनकी चाल तथा गति की दिशा दोनों बदलते रहते हैं। टक्करों के समय को छोड़कर, अणु एक-दूसरे पर कोई आकर्षण बल नहीं लगाते हैं, अतः दो टक्करों के बीच अणु नियत चालों से सीधी रेखाओं में चलते हैं। यदि किसी एक अणु के पथ को प्रेक्षित किया जाए तब वह टेढ़ी-मेढ़ी सीधी रेखाओं का पथ प्राप्त होता है।

दो उत्तरोत्तर टक्करों के बीच अणु पथ की लम्बाई अणु का मुक्त पथ कहलाती है। एक दीर्घ समयावधि में अणु के सभी मुक्त पथों का औसत अणु का माध्य मुक्त पथ (Mean Free Path) कहलाता है अतः “किसी अणु का माध्य मुक्त पथ वह औसत दूरी है जो कि अणु अन्य अणुओं से दो उत्तरोत्तर टक्करों के बीच तय करता है।” इसे प्रायः λ से प्रदर्शित करते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -13
यदि गैस के अणु द्वारा N टक्करों में तय की गई दूरियाँ क्रमश: λ1, λ2, λ3 ……… λN

औसत मुक्त पथ λ = \(\frac{\lambda_1+\lambda_2+\lambda_3+\ldots \lambda_N}{N}\) ……….(1)
यदि कुल पथ में अणु द्वारा लिया गया समय t हो तथा अणु की औसत चाल हो तो
औसत मुक्त पथ λ = \(\frac{\lambda_1+\lambda_2+\lambda_3+\ldots \lambda_N}{N}\) …….(2)

माध्य मुक्त पथ के लिए व्यंजक (Expressions for Mean Free Path):
माना एक पात्र में गैस भरी है तथा इसके प्रति एकांक आयतन में अणु है। प्रत्येक अणु का व्यास है माना इस गैस का केवल एक अणु 1] वेग से गतिमान है तथा शेष सभी अणु स्थिर हैं। गतिमान अणु उन सभी अणुओं से टकरायेगा, जिनके केन्द्र इसके केन्द्र से दूरी पर है जैसा चित्र 13-15 में प्रदर्शित है 3 समय में अणु द्वारा तय की गई दूरी है। अत: Ar समय में यह अणु उन सभी अणुओं से टकरायेगा जिनकी त्रिज्या है तथा लम्बाई के बेलन में है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -14
बेलन का आयतन = πd²v.∆t
बेलन में अणुओं की संख्या = आयतन × प्रति एकांक आयतन में उपस्थित अणु
= (πd²v.∆t).n ……..(3)
यदि अणु द्वारा अन्य अणुओं से 3 समय में टक्करों की संख्या है अर्थात्
N = = πd²v.∆t.n …………(4)
औसत मुक्त पशु λ = \(\frac{v.∆t}{N}\)
= \(\frac{v \cdot \Delta t}{\pi d^2 v \cdot \Delta t \cdot n}=\frac{1}{\pi d^2 n}\)
या λ = \(\frac{1}{\pi d^2 n}\) ………..(5)
इस सूत्र को प्राप्त करने में हमने यह कल्पना की कि दूसरे सभी अणु विरामावस्था में है। परन्तु वास्तव में सभी अणु गतिमान है और संघट्ट दर अणुओं के औसत आपेक्षिक वेग द्वारा निर्धारित की जाती है। अन्य अणुओं की गति पर विचार करने पर अणु का माध्य मुक्त पथ निम्नलिखित होगा –
λ = \(\frac{1}{√2 \pi d^2 n}\) ………..(6)
यही अभीष्ट व्यंजक है, इसके अनुसार अणु का माध्य मुक्त पथ प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या के अनुक्रमानुपाती है अर्थात् यह गैस के अणु घनत्व के व्युत्क्रमानुपाती है।
आदर्श गैस के लिए
PV = NkT
n = \(\frac{N}{V}\)
P = nkT ⇒ n = \(\frac{P}{kT}\)
समीकरण (6) मैं n का मान रखने पर
λ = \(\frac{kT}{√2 \pi d^2 P}\) ………..(7)
स्पष्ट है कि
λ ∝ \(\frac{T}{P}\)
अर्थात् गैस के अणुओं का औसत मुक्त पथ गैस के परमताप के अनुक्रमानुपाती तथा गैस के दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 7.
अणु गति सिद्धान्त का सम्बन्ध P = \(\frac{1}{3} r \bar{c^2}\) मानते हुए सिद्ध कीजिए कि अणु की औसत गतिज ऊर्जा गैस के परम ताप के समानुपाती होती है।
उत्तर:
आदर्श गैस के ताप की अणुगतिक व्याख्या (Molecular Kinetic Interpretation of Temperature of an Ideal Gas):
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत -6.2
अर्थात् गैस का परमताप उसकी औसत गतिज ऊर्जा के समानुपाती होता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि आदर्श गैस की आन्तरिक ऊर्जा केवल उसके परमताप पर निर्भर करती है, दाब या आयतन पर नहीं। ताप की इस व्याख्या से स्पष्ट है कि आदर्श गैसों का अणुगति सिद्धान्त आदर्श गैस समीकरण और इस पर आधारित विभिन्न गैस नियमों के पूर्णतः संगत है।

आंकिक प्रश्न (Numerical Questions)

आदर्श गैस समीकरण तथा इसके नियम पर आधारित

प्रश्न 1.
250 सेमी³ आयतन वाले विद्युत् बल्ब को सील करते समय 27°C ताप पारे का 10-3 मिमी दाब था। बल्ब में अणुओं की संख्या कितनी है?
उत्तर:
8.04 × 1015

प्रश्न 2.
1 × 10-6 m³ आयतन के वायु के बुलबुले झील की सतह के नीचे 40 मीटर गहराई पर हैं, जहाँ ताप 283K है। जब बुलबुला जल की संतह पर पहुँचे, तो इसका आयतन बताइए जल की सतह पर ताप 27°C है वायुमण्डलीय दाब = 1.01 × 105 Pa
उत्तर:
4.15 × 10-6

प्रश्न 3.
किसी गैस का निश्चित आयतन पर दाब 2000 न्यूटन / मी² से परिवर्तित होकर 3000 N/m² हो जाता है। यदि प्रारम्भिक ताप 350 K था तो अन्तिम ताप ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
525K

प्रश्न 4.
किसी फ्लास्क में 27°C ताप पर 13 ग्राम आदर्श गैस भरी है ताप बढ़कर 52°C करने पर कितनी गैस फ्लास्क से निकल जायेगी जबकि गैस का तापं 52°C व दाब पूर्ववत् ही रहें?
उत्तर:
1 ग्राम

प्रश्न 5.
अन्तरिक्ष के किसी क्षेत्र के प्रति सेमी³ आयतन में औसतन केवल 5 अणु हैं तथा वहाँ पर ताप 3 K है इतनी विरल गैस का दाब क्या है ? (बोल्ट्जमैन नियतांक (k) = 1.38 × 10-23 जूल / K)
उत्तर:
20.7 x 10-17N/m²

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

अणुओं के वेगों पर आधारित

प्रश्न 6.
स्थिर दाब पर 327°C ताप की हाइड्रोजन को किस ताप तक ठण्डा किया जाए कि उसके अणुओं का वर्ग माध्य-मूल वेग पहले का आधा हो जाये ?
उत्तर:
123°C

प्रश्न 7.
तीन अणुओं के वेग क्रमश: 3v, 4v व 5v हैं। इनकी वर्ग-माध्य-मूल चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
4.08v

प्रश्न 8.
किसी ताप पर ऑक्सीजन के अणुओं की वर्ग-माध्य मूल चाल 150 मी/से है उसी ताप पर हाइड्रोजन के अणुओं की वर्ग- माध्य-मूल चाल क्या होगी ? (Mo = 32, MH = 2)
उत्तर:
600 मी/से

प्रश्न 9.
नाइट्रोजन अणु के वर्ग माध्य-मूल वेग का मान 15°C ताप तथा पारे के स्तम्भ के 76 सेमी दाब पर ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
5.06 × 104 सेमी / से

अणुओं की ऊर्जा पर आधारित

प्रश्न 10.
27°C ताप पर हाइड्रोजन के लिए ज्ञात कीजिए-
(i) एक ग्राम अणु गैस की गतिज ऊर्जा,
(ii) एक ग्राम गैस की गतिज ऊर्जा [हाइड्रोजन का अणुभार 2, तथा R = 8.31 J mol-1K-1]
उत्तर:
(i) 3.74 × 105 जूल
(ii) 1.87 × 103 जूल

प्रश्न 11.
एक ग्राम अणु गैस की गतिज ऊर्जा सामान्य ताप व दाब पर ज्ञात कीजिए तथा 273°C पर इसका मान क्या होगा ?
उत्तर:
3.40 × 103 जूल, 6.80 × 103 जूल

प्रश्न 12.
गैस की गतिज ऊर्जा प्रति मोल, NTP पर ज्ञात कीजिए यदि गैस का घनत्व 0.178 किग्रा / घन मीटर है तथा अणुभार 4 हो ।
उत्तर:
3414 जूल

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 13 अणुगति सिद्धांत

प्रश्न 13.
किसी गैस का ताप 68°C है इसको किस ताप पर गर्म किया जाये ताकि (i) अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा दोगुनी हो जाये, (ii) अणुओं का वर्ग माध्य-मूल वेग दोगुना हो जाये ?
उत्तर:
(i) 137°C
(ii) 547°C

प्रश्न 14.
300 K ताप पर किसी गैस के अणु की माध्य गतिज ऊर्जा क्या है? इस ताप पर हाइड्रोजन गैस के किसी अणु की वर्ग-माध्य-मूल चाल क्या होगी ? (R = 8.31 J mole-1 K-1, N = 6.02 × 1023 प्रति मोल तथा हाइड्रोजन के अणु का द्रव्यमान 3.34 × 10-27 Kg)
उत्तर:
1.93 × 103 ms-1

औसत मुक्त पथ पर आधारित

प्रश्न 15.
100°C तथा I arm दाब पर, जल वाष्य में, जल के अणु के माध्य मुक्त पथ की गणना कीजिए। जल के अणु का व्यास 44 बोल्ट्समैन नियतांक kg = 1.38 × 10-23 JK
उत्तर:
7.2 × 10-8 मी

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. PH3 (फॉस्फीन) में फॉस्फोरस परमाणु पर संकरण है-
(अ) sp
(ब) sp2
(स) sp3d
(द) sp3
उत्तर:
(द) sp3

2. ns2np5 बाह्यतम सामान्य विन्यास वाला तत्व है-
(अ) नाइट्रोजन वर्ग का
(ब) ऑक्सीजन वर्ग का
(स) हैलोजन वर्ग का
(द) अक्रिय गैस वर्ग का
उत्तर:
(स) हैलोजन वर्ग का

3. अंतराहैलोजन यौगिक है-
(अ) PCl5
(ब) SF6
(स) ICl
(द) XeF2
उत्तर:
(स) ICl

4. हैलोजनों की क्रियाशीलता का सही क्रम है-
(अ) F2 > Br2 > Cl2 > I2
(ब) F2 > Cl2 > Br2 > I2
(स) I2 > Br2 > Cl2 > F2
(द) F2 = Cl2 > Br2 = I2
उत्तर:
(ब) F2 > Cl2 > Br2 > I2

5. OF2 में ऑक्सीज़न की ऑक्सीकरण अवस्था है-
(अ) -2
(ब) +1
(स) +2
(द) -1
उत्तर:
(स) +2

6. अभिक्रिया 2SO2 + O2 → 2SO3 + x k.cal में अधिक मात्रा में उत्पाद बनाने के लिए अनुकूल शर्तें हैं-
(अ) कम ताप एवं कम दाब
(ब) कम दाब एवं अधिक ताप
(स) कम ताप एवं अधिक दाब
(द) अधिक ताप, अधिक दाब तथा O2 की कम मात्रा
उत्तर:
(स) कम ताप एवं अधिक दाब

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

7. वर्ग 16 के तत्व कहलाते हैं-
(अ) हैलोजन
(ब) कैल्कोजन
(स) संक्रमण तत्व
(द) उत्कृष्ट गैसें
उत्तर:
(ब) कैल्कोजन

8. सल्फर की अधिकतम सहसंयोजकता कितनी हो सकती है?
(अ) 2
(ब) 4
(स) 6
(द) 8
उत्तर:
(स) 6

9. निम्नलिखित में से कौनसा तत्व +3 ऑक्सीकरण अवस्था में अधिक स्थायी यौगिक बनाता है?
(अ) P
(ब) As
(स) Sb
(द) Bi
उत्तर:
(द) Bi

10. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक चिली साल्ट पीटर या चिली शोरा कहलाता है?
(अ) NaNO3
(ब) KNO3
(स) Na2SO4
(द) K2SO4
उत्तर:
(अ) NaNO3

11. निम्नलिखित में से किस तत्व में अक्रिय युग्म प्रभाव सबसे अधिक प्रभावी होता है?
(अ) N
(ब) P
(स) As
(द) Bi
उत्तर:
(द) Bi

12. निम्नलिखित में से नाइट्रोजन का कौनसा हाइड्राइड अम्लीय है?
(अ) NH3
(ब) N3H
(स) N2H4
(द) N2H2
उत्तर:
(ब) N3H

13. निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक न्यूनतम होता है?
(अ) H2O
(ब) H2S
(स) H2Se
(द) H2Te
उत्तर:
(ब) H2S

14. H2SO4 के लिए निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है?
(अ) यह एक ऑक्सीकारक है।
(ब) यह निर्जलीकारक है।
(स) यह द्विक्षारकीय अम्ल है।
(द) यह दुर्बल अम्ल है।
उत्तर:
(द) यह दुर्बल अम्ल है।

15. विरंजक के रूप में प्रयुक्त होने वाला हैलोजन है-
(अ) F2
(ब) Cl2
(स) Br2
(द) I2
उत्तर:
(ब) Cl2

16. प्रबलतम अम्ल है-
(अ) HF
(ब) HCl
(स) HBr
(द) HI
उत्तर:
(द) HI

17. HClO है, एक-
(अ) ऑक्साइड
(ब) ऑक्सी अम्ल
(स) क्लोराइड
(द) हाइड्राइड
उत्तर:
(ब) ऑक्सी अम्ल

18. कौनसा तत्व केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था ही दर्शाता है?
(अ) F
(ब) Cl
(स) Br
(द) I
उत्तर:
(अ) F

19. किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिकतम ऋणात्मक होती है?
(अ) F
(ब) Cl
(स) Br
(द) I
उत्तर:
(ब) Cl

20. निम्नलिखित में से कौनसा ऑक्साइड सर्वाधिक अम्लीय है?
(अ) N2O5
(ब) P2O5
(स) As2O5
(द) Sb2O5
उत्तर:
(अ) N2O5

21. XeF2 में Xe पर कितने एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित हैं?
(अ) 2
(ब) 3
(स) 1
(द) 4
उत्तर:
(ब) 3

22. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक नहीं बनता?
(अ) XeF5
(ब) XeF
(स) XeF3
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

23. निम्नलिखित में से कौनसा तत्व +1 से +5 सभी ऑक्सीकरण अवस्थाओं में ऑक्साइड बनाता है?
(अ) P
(ब) Sb
(स) N
(द) As
उत्तर:
(स) N

24. XeF3 की जल से क्रिया द्वारा कौनसा यौगिक बनाया जा सकता है?
(अ) XeO3
(ब) XeOF4
(स) XeO2F2
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

25. BrF3 की आकृति है-
(अ) त्रिकोणीय समतल
(ब) बेन्ट- T आकृति
(स) पिरैमिडी
(द) वर्गाकार समतलीय
उत्तर:
(ब) बेन्ट- T आकृति

26. निम्नलिखित में से किसकी आकृति रेखीय है?
(अ) SO2
(ब) O3
(स) \(\mathrm{NO}_2^{-}\)
(द) \(\stackrel{+}{\mathrm{N}} \mathrm{O}_2\)
उत्तर:
(द) \(\stackrel{+}{\mathrm{N}} \mathrm{O}_2\)

27. निम्नलिखित में से कौनसा क्रम (उनके साथ दिए गए गुणों के आधार पर) सही नहीं है?
(अ) ऑक्सीकारक गुण F2 > Cl2 > Br2 > I2
(ब) विद्युतत्रणता F > Cl > Br > I
(स) अम्लीय गुण HI > HBr > HCl > HF
(द) बन्ध वियोजन एन्थैल्पी F2 > Cl2 > Br2 > I2
उत्तर:
(द) बन्ध वियोजन एन्थैल्पी F2 > Cl2 > Br2 > I2

28. निम्नलिखित में से किसमें सभी बन्ध समान नहीं हैं?
(अ) XeF4
(ब) SF4
(स) \(\mathrm{BF}_4^{-}\)
(द) SiF4
उत्तर:
(ब) SF4

29. वह यौगिक कौनसा है जो गैस अवस्था में आण्विक प्रकृति रखता है लेकिन ठोस अवस्था में उसमें आयनिक गुण आ जाता है?
(अ) PCl3
(ब) NCl3
(स) POCl3
(द) PCl5
उत्तर:
(द) PCl5

30. H2SO5 में सल्फर की ऑक्सीजन अवस्था है-
(अ) +8
(ब) +4
(स) +6
(द) -2
उत्तर:
(स) +6

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

31. कौनसा अम्ल अधिकतम वाष्पशील है?
(अ) HF
(ब) HCl
(स) HBr
(द) HI
उत्तर:
(ब) HCl

32. निम्नलिखित में से किसमें P-O-P बन्ध पाया जाता है?
(अ) H3PO3
(ब) H4P2O6
(स) H4P2O7
(द) H3PO4
उत्तर:
(स) H4P2O7

33. \(\mathrm{NO}_3^{-}\) के परीक्षण में भूरी वलय निम्नलिखित में से किसके बनने के कारण बनता है?
(अ) [Fe(H2O)5.NO]SO4
(ब) [Fe(SO4)2.NO]H2O
(स) Fe2(SO4)3. NO
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) [Fe(H2O)5.NO]SO4

34. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(अ) आवर्त सारणी के वर्ग 15 में हाइड्राइडों का स्थायित्व NH3 से BiH3 तक बढ़ता है।
(ब) नाइट्रोजन dπ-pπ बन्ध नहीं बना सकता।
(स) N-N एकल बन्ध P-P एकल बन्ध की अपेक्षा दुर्बल होता है।
(द) N2O4 की दो अनुनादी संरचनाएँ होती हैं।
उत्तर:
(अ) आवर्त सारणी के वर्ग 15 में हाइड्राइडों का स्थायित्व NH3 से BiH3 तक बढ़ता है।

35. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक O3 द्वारा ऑक्सीकृत नहीं होता है?
(अ) KI
(ब) FeSO4
(स) K2MnO4
(द) KMnO4
उत्तर:
(द) KMnO4

36. XeF2, XeF4 तथा XeF6 में Xe के एकल इलेक्ट्रॉन युग्मों की संख्या है-
(अ) 3,2,1
(ब) 2,4,6
(स) 1,2,3
(द) 6,4,2
उत्तर:
(अ) 3,2,1

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
वर्ग 15 के तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ बताइए।
उत्तर:
वर्ग 15 के तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ – 3,+ 3 तथा +5 होती हैं।

प्रश्न 2.
नाइट्रोलियम का सूत्र बताइए।
उत्तर:
नाइट्रोलियम का सूत्र Ca CN2 होता है।

प्रश्न 3.
वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में बन्ध कोण का बढ़ता क्रम लिखिए।
उत्तर:
BiH3 < SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3

प्रश्न 4.
नाइट्रोजन के उदासीन ऑक्साइड कौनसे होते हैं?
उत्तर:
N2O तथा NO

प्रश्न 5.
वर्ग 15 के तत्वों में कौनसा तत्व मुक्त अवस्था में अधिक मात्रा में पाया जाता है?
उत्तर:
नाइट्रोजन।

प्रश्न 6.
नाइट्रोजन का वह यौगिक कौनसा है जो ऑक्सीकारक, अपचायक दोनों की भाँति व्यवहार करता है?
उत्तर:
नाइट्रस अम्ल (HNO2)।

प्रश्न 7.
किसी एक समीकरण द्वारा नाइट्रिक अम्ल के ऑक्सीकारण गुण को बताइए।
उत्तर:
2HNO3 + 3SO2 + 2H2O → 3H2SO4 + 2NO

प्रश्न 8.
H3PO3 में π बन्ध की प्रकृति HNO3 के π बन्ध से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
H3PO3 में π बन्ध p-p समपाश्रिक अतिव्यापन से बनता है जबकि H3PO3 में d कक्षकों के प्रयोग से pπ-dπ अतिव्यापन होता है।

प्रश्न 9.
सान्द्र HNO3 को ऐलुमिनियम तथा क्रोमियम के पात्र में रखा जा सकता है, क्यों?
उत्तर:
ऐलुमिनियम तथा क्रोमियम धातुएँ सान्द्र HNO3 में विलेय नहीं होतीं क्योंकि इनकी सतह पर ऑक्साइड की एक निष्क्रिय परत बन जाती है अतः सान्द्र HNO3 को ऐलुमिनियम तथा क्रोमियम के पात्र में रखा जा सकता है।

प्रश्न 10.
सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में सान्द्र HNO3 रंगहीन न होकर पीला होता है, क्यों?
उत्तर:
सूर्य के प्रकाश में HNO3 का आंशिक विघटन हो जाता है जिससे NO2 गैस बनती है जिसके कारण HNO3 पीलुा होता है।

प्रश्न 11.
वह यौगिक कौनसा है जिससे लाल तथा श्वेत फॉस्फोरस के मिश्रण को पृथक् किया जा सकता है तथा क्यों?
उत्तर:
NaOH, लाल फॉस्फोरस से क्रिया नहीं करता जबकि श्वेत फॉस्फोरस, NaOH से क्रिया करके विलेय NaH2PO2 बनाता है अत: NaOH द्वारा लाल तथा श्वेत फॉस्फोरस के मिश्रण को पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 12.
नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्सो अम्लों के नाम तथा सूत्र बताइए।
उत्तर:

  • हाइपोनाइट्रस अम्ल (H2N2O2)
  • नाइट्रस अम्ल (HNO2)
  • नाइट्रिक अम्ल (HNO3)

प्रश्न 13.
फॉस्फोरस का कौनसा अपररूप विद्युत का चालक होता है?
उत्तर:
काला फॉस्फोरस।

प्रश्न 14.
ऐसे यौगिक बताइए जिनमें ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था क्रमशः +2, -1 तथा –\(\frac { 1 }{ 2 }\) हो।
उत्तर:
OF2 (+ 2), H2O2(- 1) तथा KO2 (-\(\frac { 1 }{ 2 }\))

प्रश्न 15.
सल्फर का एक यौगिक बताइए जिसे रसायनों का राजा कहा जाता है।
उत्तर:
सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) |

प्रश्न 16.
H2S2O7 (पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल) की संरचना लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 1

प्रश्न 17.
SO2 के अपचायक गुण को दर्शाने वाला एक समीकरण दीजिए।
उत्तर:
2Fe3+ + SO2 + 2H2O → 2Fe2+ + \(\mathrm{SO}_4^{2-}\) + \(4 \stackrel{+}{\mathrm{H}}\)

प्रश्न 18.
सल्फर के कौनसे दो ऑक्सो अम्लों में परऑक्साइड (-O-O-) बन्ध पाया जाता है?
उत्तर:
H2SO5 तथा H2S2O8
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 2

प्रश्न 19.
H2SO5 तथा H2S2O8 में सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था बताइए।
उत्तर:
इनमें पराक्साइड बन्ध होने के कारण सल्फर की ऑक्सीकरण अवस्था +6 होती है।

प्रश्न 20.
H2SO5 तथा H2S2O8 के विशिष्ट नाम बताइए।
उत्तर:
H2SO5 को कैरो अम्ल तथा H2S2O8 को मार्शल अम्ल कहा जाता है।

प्रश्न 21.
वर्ग 16 का वह हाइड्राइड कौनसा होता है जो रंगहीन, गंधहीन द्रव है तथा जीवन के लिए अतिआवश्यक होता है।
उत्तर:
जल (H2O)।

प्रश्न 22.
सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की श्यानता तथा क्वथनांक अधिक होते हैं, क्यों?
उत्तर:
H2SO4 के अधिक अणुभार तथा इसके अणुओं के मध्य पाए जाने वाले प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध के कारण इसकी श्यानता तथा क्वथनांक अधिक होते हैं।

प्रश्न 23. निम्नलिखित ऑक्साइडों की प्रकृति बताइए-
(i) Al2O3
(ii) K2O
(iii) CO
(iv) P2O5
उत्तर:
(i) Al2O3 उभयधर्मी
(ii) K2O क्षारीय
(iii) CO उदासीन
(iv) P2O5 अम्लीय

प्रश्न 24.
गंधक का वह यौगिक कौनसा है जो ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों की तरह व्यवहार करता है?
उत्तर:
सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) |

प्रश्न 25.
निम्नलिखित यौगिकों के विशिष्ट नाम बताइए-
(i) H2SO4
(ii) FeS2
(iii) FeSO2. 7H2O
उत्तर:
(i) कसीस का तेल (ऑयल ऑफ विट्रियॉल )
(ii) मूर्खों का सोना (फूल्स गोल्ड)
(iii) हरा कसीस।

प्रश्न 26.
SO2 के प्रतिक्लोर गुण को दर्शाने वाला समीकरण लिखिए।
उत्तर:
Cl2 + SO2 + 2H2O → 2HCl + H2SO4

प्रश्न 27.
SF6, SeF6 तथा TeF6 की क्रियाशीलता का क्रम बताइए।
उत्तर:
SF6, < SeF6 < TeF6

प्रश्न 28.
वर्ग 16 के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान वर्ग 15 के संगत तत्वों की आयनन एन्थैल्पी से कम होता है, इसका क्या कारण है?
उत्तर:
वर्ग 15 के तत्वों का अर्धपूरित स्थायी विन्यास (ns2np3) होता है अतः उनमें से इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक मुश्किल होता है।

प्रश्न 29.
HF, HCl, HBr तथा HI के क्वथनांक का बढ़ता क्रम लिखिए।
उत्तर:
HCl < HBr < HI < HF

प्रश्न 30.
क्लोरीन की गर्म तथा सान्द्र NaOH के साथ अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 3

प्रश्न 31.
CIF5 में क्लोरीन पर संकरण बताइए।
उत्तर:
sp3d2

प्रश्न 32.
F2, Cl2, Br2 तथा I2 की बन्ध वियोजन एन्थैल्पी का घटता क्रम बताइए।
उत्तर:
CI-CI > Br-Br > F-F > I-I

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 33.
फ्लुओरीन के अन्तराहैलोजन यौगिकों की संख्या सबसे अधिक होती है, क्यों?
उत्तर:
फ्लुओरीन के छोटे आकार, उच्च विद्युतत्तणता तथा प्रबल ऑक्सीकारक गुण के कारण इसके अन्तराहैलोजन यौगिकों की संख्या सबसे अधिक होती, है।

प्रश्न 34.
अश्रु गैस के रूप में प्रयुक्त होने वाले एक यौगिक का नाम बताइए जिसमें हैलोजन होता है।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 4

प्रश्न 35.
क्लोरीन का विरंजक गुण इसके किस गुण के कारण होता है?
उत्तर:
ऑक्सीकारक गुण।

प्रश्न 36.
हैलोजनों के ऑक्सीकारक गुण का क्रम बताइए।
उत्तर:
F2 > Cl2 > Br2 > I2

प्रश्न 37.
वह हैलोजन कौनसा होता है जिसमें ऊध्र्वपातन का गुण पाया जाता है?
उत्तर:
आयोडीन (I2) ।

प्रश्न 38.
फ्लुओरीन केवल -1 ऑक्सीकरण अवस्था ही दर्शाती है। इसका कारण बताइए।
उत्तर:
अधिक विद्युतत्रणता तथा d कक्षकों की अनुपस्थिति।

प्रश्न 39.
\(\mathrm{ClO}_4^{-}\) में Cl पर कौनसा संकरण होता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 5

प्रश्न 40.
जीनॉन, केवल फ्लुओरीन तथा ऑक्सीजन के साथ ही यौगिक बनाती है, क्यों?
उत्तर:
फ्लुओरोन तथा ऑक्सीजन की विद्युत्तरणता अधिक होने के कारण इनमें ऑक्सीकारक गुण पाया जाता है, अतः जीनॉन इनके साथ ही यौगिक बनाती है।

प्रश्न 41.
न्यूनतम क्वथनांक वाली उत्कृष्ट गैस कौनसी होती है?
उत्तर:
हीलियम (He)।

प्रश्न 42.
He को p-ब्लॉक में रखा गया है जबकि इसमें इलेक्ट्रॉन p-कक्षक में नहीं भरे जाते, क्यों?
उत्तर:
He के गुणों के आधार पर इसे अन्य उत्कृष्ट गैसों के साथ p-ब्लॉक में रखा गया है।

प्रश्न 43.
आवर्त सारणी में He की आयनन एन्थैल्पी अधिकतम होती है। क्यों?
उत्तर:
He के छोटे आकार तथा पूर्ण पूरित विन्यास के कारण इसकी इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति नगण्य होती है अतः इसकी आयनन एन्थैल्पी अधिकतम होती है।

प्रश्न 44.
जीनॉन के फ्लुओराइडों के स्थायित्व का क्रम लिखिए।
उत्तर:
XeF2 > XeF4 > XeF6

प्रश्न 45.
XeO3 की संरचना बताइए।
उत्तर:
XeO3 में sp3 संकरण होता है तथा इसकी ज्यामिति पिंरैमिडी होती है।

प्रश्न 46.
H2SO4 में S की संकरण अवस्था बताइए।
उत्तर:
sp3 संकरण।

प्रश्न 47.
निम्नलिखित में से कौनसे यौगिक ज्ञात नहीं हैं?
BiCl5, PCl3, SbCl3, NCl5, PCl5
उत्तर:
NCl5 तथा BiCl5

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
अमोनिया की FeCl3 तथा ZnSO4 के साथ अभिक्रियाओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक गुण:
(i) अम्लों से क्रिया-अमोनिया की अम्लों से क्रिया कराने पर अमोनियम लवण बनते हैं। इससे इसकी दुर्बल क्षारीय प्रकृति की पुष्टि होती है।
NH3 + HCl → NH4Cl (अमोनियम क्लोराइड)
2NH3 + H2SO4 → (NH4)2SO4 (अमोनियम सल्फेट)

प्रश्न 2.
Cu2+ तथा Ag+ आयनों की NH3 द्वारा पहचान की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
Cu2+ तथा Ag+ आयन, NH3 के साथ उपसहसंयोजी बन्ध बनाकर संकुल बना लेते हैं जिनमें NH3 धातु आयन को एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करता है (लुइस क्षार)। इन संकुल यौगिकों से ही आयनों की पहचान की जाती है। जैसे Cu+2, NH3 के साथ गहरा नीला संकुल बनाता है जबकि NH3 विलयन में AgCl का अवक्षेप विलेय हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 6

प्रश्न 3.
नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइडों को कैसे बनाया जाता है? केवल अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 7

प्रश्न 4.
नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइडों की उ्यामिति बताइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन के विभिन्न औक्साइड N2O, NO, N2O3, NO2, N2O4 तथा N2O5 होते हैं। N2O, N2O3, NO2, N2O4 तथा N2O5 की ज्यामिति क्रमशः रेखीय, समतलीय, कोणीय तथा समतलीय होती हैं।

प्रश्न 5.
अमोनिया से नमी को दूर करने के लिए निर्जल CaCl2 या P4O10 या सान्द्र H2SO4 प्रयुक्त नहीं किए जाते। क्यों?
उत्तर:
NH3 क्षारीय होती है अतः अम्लीय प्रकृति के निर्जलीकारक (जैसे P4O10 या सान्द्र H2SO4) इसमें से नमी को दूर करने के लिए प्रयुक्त नहीं किए जा सकते क्योंकि ये NH3 से क्रिया करके लवण बना लेते हैं तथा CaCl2, NH3 के साथ क्रिया करके योगोत्पाद बनाता है।

प्रश्न 6.
वर्ग 15 क एक तत्व का हाइड्राइड (Y) का जलीय विलयन (i) लाल लिटमस को नीला करता है। (ii) CuSO4 विलयन के साथ आधिक्य में प्रयुक्त करने पर गहरा नीला विलयन देता है तथा (iii) FeCl3 विलयन के साथ भूरा अवक्षेप देता है तो यौगिक Y तथा अभिक्रिया (ii) एवं (iii) के उत्पाद बताइए।
उत्तर:
(i) यौगिक Y, NH3 है जिसका जलीय विलयन (NH4 OH) क्षारीय होता है अंतः यह लाल लिटमस को नीला करता है। अभिक्रिया (ii) में प्राप्त उत्पाद [Cu(NH3 )4 ]SO4 तथा अभिक्रिया (iii) का उत्पाद Fe(OH)3 होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 8

प्रश्न 7.
श्वेत फॉस्फोरस की निम्नलिखित के साथ क्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) वायु
(ii) HNO3
(iii) H2SO4
(iv) NaOH
(v) Ca
उत्तर:
(i) P4 + 5O2 → P4O10 (फॉस्फोरस पेन्य ऑक्साइड)
(ii) P4 + 2oHNO3 → 4H3PO4 + 2oNO2 + 4H2O
(iii) P4 + 10H2SO4 → 4H3PO4 + 10SO2 + 4H2O
(iv) P4 + 3NaOH + 3H2O → PH3 + 3NaH2PO2 (सोडियम हाइपोफॉस्फाइट)
(v) P4 + 6Ca → 2Ca3P2 (कैल्सियम फॉस्फाइड)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.
फॉस्फीन की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया बताइए-
(i) ऑक्सीजन
(ii) सान्द्र HNO3
(iii) कॉपर सल्फेट तथा मरक्यूरिक क्लोराइड।
उत्तर:
(i) ऑक्सीजन से क्रिया- PH3 की वायु के साथ क्रिया होने पर P2O5 बनता है।
2PH3 + 4O2 → P2O5 + 3H2O

(ii) सान्द्र HNO3 द्वारा PH3 का ऑक्सीकरण हो जाता है तथा P2O5 बनता है।
2PH3 + 16HNO3 → P2O5 + 16NO2 + 11H2O

(iii) कॉपर सल्फेट तथा मरक्यूरिक क्लोराइड, फॉस्फीन के साथ क्रिया करके संगत फॉस्फाइड बनाते हैं।
3CuSO4 + 2PH3 → Cu3P2 + 3H2SO4
3HgCl2 + 2PH3 → Hg3P2 + 6HCl

प्रश्न 9.
PCl3 तथा PCl5 की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं की तुलना कीजिए-
(i) C3H3OH
(ii) CH3COOH
उत्तर:
(i) C2H5OH के साथ PCl3 तथा PCl5 दोनों की क्रिया से ही मुख्य उत्पाद C5H5Cl बनता है लेकिन इसके साथ ही PCl3 द्वारा H3PO3 तथा PCl5 द्वारा POCl3 एवं HCl बनते हैं।
3C2H5OH + PCl3 → 2C2H5Cl + H3PO3
C2H5OH + PCl5 → C2H5Cl + HCl + POCl3

(ii) CH3COOH की PCl3 तथा PCl5 के साथ क्रिया द्वारा CH3COCl बनता है तथा सहउत्पाद C2H5OH के साथ क्रिया के समान ही होते हैं।

3CH3COOH + PCl3 → 3CH3COCl + H3PO3
CH3COOH + PCl5 → CH3COCl + POCl3 + HCl

प्रश्न 10.
फॉस्फोरस के विभिन्न ऑक्सो अम्लों को बनाने के . लिए आवश्यक यौगिक बताइए।
उत्तर:
फॉस्फोरस के विभिन्न ऑक्सो अम्लों को बनाने के लिए आवश्यक यौगिक निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 9

प्रश्न 11.
(a) ठोस अवस्था में PCl5 किस रूप में पाया जाता है?
(b) H3PO2, H3PO3 तथा H3PO4 तीनों में ही हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या समान है फिर भी इनकी क्षारकता क्रमश: 1 , 2 तथा 3 है। क्यों?
उत्तर:
(a) ठोस अवस्था में PCl5 एक आयनिक ठोस [PCl4]+[PCl6] के रूप में पाया जाता है, जिसमें धनायन [PCl4+] चतुष्फलकीय होता है तथा ऋणायन [PCl6] अष्टफलकीय होता है जिनमें क्रमशः sp3 तथा sp3d2 संकरण होता है।

(b) फॉस्फोरस के ऑक्सो अम्लों में केवल वे ही हाइड्रोजन आयनित होकर H+ देते हैं जो ऑक्सीजन से जुड़े होते हैं अतः H3PO2, H3PO3 तथा H3PO4 की क्षारकता क्रमशः 1, 2 तथा 3 है क्योंकि इनमें क्रमशः एक, दो तथा तीन -OH बन्ध पाए जाते हैं।

प्रश्न 12.
SO2 के अम्लीय गुण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अम्लीय गुण:
SO2 गैस जल में विलेय होकर H2SO3 (सल्फ्यूरस अम्ल) बनाती है अतः इसे सल्फ्यूरस एन्हाइड्राइड भी कहते हैं। यह विलयन नीले लिटमस को लाल कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 10
यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन के साथ अभिक्रिया कर सोडियम सल्फाइट बनाती है जो कि सल्फरडाइऑक्साइड के आधिक्य के साथ अभिक्रिया कर सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट में परिवर्तित हो जाता है।
2NaOH + SO2 → Na2SO2 + H2O
Na2 SO3 + H2O + SO2 → 2NaHSO3

प्रश्न 13.
सल्फर डाइऑक्साइड के अपचायक गुण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अपचायक गुण-नमी की उपस्थिति में SO2 अपचायक की भाँति व्यवहार करती है।
उदाहरण-(a) यह अम्लीय पोटेशियम परमैंगनेट विलयन (गुलाबी) को रंगहीन कर देती है। इस अभिक्रिया से SO2 गैस का परीक्षण किया जा सकता है।
5SO2 + \(\begin{gathered} 2 \mathrm{MnO}_4^{-} \\ +7 \end{gathered}\) + 2H2O → 2Mn2+ + \(5 \mathrm{SO}_4^{2-}\) + 4H+

(b) यह अम्लीय पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन (नारंगी) को हरा कर देती है।
\(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}\) + 3SO2 + 2H+ → 2Cr3+ + \(3 \mathrm{SO}_4^{2-}\) + H2O

(c) सल्फरडाइऑक्साइड, Fe(III) को Fe(II) में अपचयित कर देती है।
2Fe3+ + SO2 + 2H2O → 2Fe2+ + \(\mathrm{SO}_4^{2-}\) + 4H+

(d) सल्फर डाइऑक्साइड हैलोजनों को हैलोजन अम्लों में परिवर्तित कर देती है।
Cl2 + SO2 + 2H2O → 2HCl + H2SO4

इस अभिक्रिया में क्लोरीन का गुण नष्ट हो रहा है अतः SO2 को प्रतिक्लोर (Antichlor) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 14.
नमी की उपस्थिति में SO2 विरंजक का कार्य करती है। इस कथन की व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर:
नमी की उपस्थिति में SO2 रंगीन वनस्पतियों आदि का रंग उड़ा देती है। यहाँ भी यह अपचायक का ही कार्य करती है। अतः SO2 को विरंजक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
SO2 + 2H2O → H2SO4 + 3S
ये हाइड्रोजन परमाणु पदार्थ का विरंजन करते हैं लेकिन यह विरंजन अस्थायी होता है क्योंकि रंगहीन पदार्थ (अपचयित रूप) वायुमण्डल्भिय ऑक्सीजन के सम्पर्क में आते ही ऑक्सीकृत होकर पुनः वास्तविक रूप (रंगीन ) में आ जाता है।

प्रश्न 15.
सान्द्र H2SO4 का तनुकरण करते समय जल में H2SO4 डालना चाहिए न कि H2SO4 में जल। क्यों?
उत्तर:
सांद्र H2SO4 का तनुकरण करते समय H2SO4 की कम मात्रा को धीरे-धीरे जल में डालना चाहिए तथा इसको लगातार हिलाते रहना चाहिए क्योंकि H2SO4 का जल में विलयन बनना उच्च ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा उत्सर्जित होती है। अतः इसका विपरीत अर्थात् H2SO4 में जल मिलाने पर विस्फोट होकर दुर्घटना हो सकती है।

प्रश्न 16.
सल्प्यूरिक अम्ल एक प्रबल अम्ल है तथा यह एक निर्जलीकारक भी होता है, व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सल्फ्यूरिक अम्ल के उपयोग – सल्फ्यूरिक अम्ल एक बहुत महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन होता है। इसके मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं-

  • उर्वरकों के उत्पादन में (जैसे अमोनियम सल्फेट, सुपर फॉस्फेट );
  • पेट्रोलियम के शुद्धिकरण में;
  • अपमार्जक उद्योग में;
  • संचायक बैटरियों में;
  • प्रयोगशाला में महत्त्वपूर्ण अभिकर्मक के रूप में;
  • वर्णकों, प्रलेपों (Paints) तथा रंजकों के मध्यवर्तियों के उत्पादन में;
  • धातुकर्म में इनेमलन (enameling), वैद्युतलेपन एवं यशदलेपन (Galvanisation) प्रक्रमों से पहले धातुओं के शोधन में;
  • नाइट्रोसेलुलोज उत्पादों के निर्माण में।

प्रश्न 17. H2SO4 के ऑक्सीकरण गुण को समझाइए।
उत्तर:
ऑक्सीकारक गुण – सांद्र H2SO4 गरम अवस्था में मध्यम आक्सीकारक होता है। यह धातुओं तथा अधातुओं को आक्सीकृत कर देता है तथा स्वयं SO2 में अपचयित हो जाता है। ऑक्सीकारक गुण में यह H3PO4 तथा HNO3 के बीच का होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 11

(a) धातुओं से क्रिया-सक्रिय धातुएँ तनु H2SO4 से क्रिया करके H2 गैस देती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 12

(b) अधातुओं से क्रिया-सल्फर तथा कार्बन की सान्द्र H2SO4 के साथ क्रिया से संगत ऑक्साइड तथा जल प्राप्त होता है।
3S + H2SO4 (सांद्र) → 3SO2 + 2H2O
C + 2H2SO4 (सांद्र) → CO2 + 2SO2 + 2H2O

प्रश्न 18.
(a) SF6 ज्ञात है जबकि SH6 नहीं, क्यों?
(b) ऑक्सीजन का अणुसूत्र O2 है जबकि सल्फर का S8, क्यों?
उत्तर:
(a) S की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था (+ 6) उच्च विद्युत ऋणी तत्वों जैसे फ्लुओरीन के साथ संयोग से प्राप्त हो जाती है, अतः SF6 ज्ञात है लेकिन हाइड्रोजन ऐसा नहीं कर सकता अतः SH6 नहीं बनता।

(b) ऑक्सीजन के छोटे परमाणु आकार के कारण इसमें pπ – pπ अतिव्यापन द्वारा यह O2 (O = O) बना लेता है जबकि सल्फर के बड़े आकार के कारण इसमें π बन्ध नहीं बनता अतः इसके परमाणु एकल बन्ध द्वारा जुड़कर S8 बनाते हैं।

प्रश्न 19.
सान्द्र H2SO4 का प्रयोग H2 तथा H2S से नमी हटाने में नहीं किया जाता। इसका कारण बताइए।
उत्तर:
(i) H2SO4 द्वारा नमी के अवशोषण के दौरान बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिसके कारण हाइड्रोजन गैस जल उठती है अतः H2 के शुष्कन हेतु H2SO4 का प्रयोग नहीं किया जाता।

(ii) जब H2S से नमी के अवशोषण हेतु H2SO4 का प्रयोग करते हैं तो यह H2S का ऑक्सीकरण कर देता है अतः इसे H2S के शुष्कन हेतु भी प्रयोग नहीं किया जाता।
H2S + H2SO4 → H2O + SO2 + S

प्रश्न 20.
(a) O2 अनुचुम्बकीय होती है जबकि O3 प्रतिचुम्बकीय, क्यों?
(b) ओजोन की क्रियाशीलता, ऑक्सीजन से अधिक होती है, इसका कारण दीजिए।
उत्तर:
(a) अणु कक्षक सिद्धान्त (MOT) के अनुसार O2 में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं अतः यह अनुचुम्बकीय होती है जबकि ओजोन में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं अतः यह प्रतिचुम्बकीय होती है।

(b) ओजोन का बनना एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया होती है अतः ओजोन का अणु अधिक ऊर्जा युक्त होता है जिसके कारण इसका पुनः वियोजन हो जाता है। इसलिए इसकी क्रियाशीलता अधिक होती है जबकि O2 में O = O के कारण यह अधिक स्थायी होती है अतः इसकी क्रियाशीलता कम होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 21.
(a) SO2 केवल गीले फूलों का रंग ही उड़ा पाती है, सूखों का नहीं, क्यों?
(b) अधिक भीड़युक्त स्थानों पर ओजोन का प्रयोग किया जाता है, क्यों?
उत्तर:
(a) SO2 का विरंजक गुण क्रियाशील हाइड्रोजन परमाणुओं के कारण होता है, जो केवल नमी की उपस्थिति में ही उत्पन्न होते हैं अतः SO2 केवल गीले फूलों का रंग ही उड़ा पाती है, सूखों का नहीं।
SO2 + 2H2O → H2SO4 + 2H

(b) ओजोन अस्थायी होती है अतः इसके विघटन से O2 प्राप्त हो जाती है इसलिए अधिक भीड़युक्त स्थान जहाँ पर ऑक्सीजन को कमी होती है, उसकी पूर्ति हो जाती है अतः इन स्थानों पर ओजोन का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 22.
क्लोरीन से निम्नलिखित यौगिक प्राप्त करने के लिए समीकरण लिखिए-
(i) NaOCl
(ii) NaClO3
(iii) विरंजक चूर्ण
(iv) NH4Cl
(v) NCl3 |
उत्तर:
(i) 2NaOH + Cl2 → NaCl + NaOCl + H2O ठण्डा तथा तनु
(ii) 6NaOH + Cl2 → 5NaCl + NaClO3 + 3H2O गर्म तथा सान्द्र
(iii) Ca(OH)2 +2Cl2 → [Ca(OCl)2 + CaCl2 + 2H2O] विरंजक चूर्ण
(iv) 8NH3 + 3Cl2 → 6NH4Cl + N2 अधिक्य
(v) NH3 + 3Cl2 (आधिक्य) → NCl3 + 3HCl

प्रश्न 23.
क्लोरीन के ऑक्सीकारक गुण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
क्लोरीन बनाने की औद्योगिक विधियाँ-ये विधियाँ निम्नलिखित हैं-
(i) वैद्युतअपघटन-लवण जल (सांद्र NaCl विलयन या ब्राइन ) के वैद्युतअपघटन से क्लोरीन प्राप्त की जाती है। ब्राइन के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाहित करने पर ऐनोड पर क्लोरीन प्राप्त होती है। इस प्रक्रम में कास्टिक सोडा (NaOH) का निर्माण भी होता है। अतः क्लोरीन यहाँ अन्य उत्पाद है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 13
गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से कैथोड पर सोडियम तथा ऐनोड पर क्लोरीन प्राप्त होती है।

(ii) डेकॉन विधि – हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का CuCl2 उत्प्रेरक की उपस्थिति में 723K ताप पर वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकरण करने पर क्लोरीन प्राप्त होती है।

प्रश्न 24.
क्लोरीन का विरंजक गुण समझाइए।
उत्तर:
विरंजक गुण-क्लोरीन एक प्रबल विरंजक है। इसकी विरंजन क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है, जो कि नवजात ऑक्सीजन उत्पन्न करती है।
Cl2 + H2O → 2HCl + [O]
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ
क्लोरीन नमी की उपस्थिति में ही वनस्पति अथवा कार्बनिक पदार्थों का विरंजन करती है तथा क्लोरीन का यह विरंजक प्रभाव स्थायी होता है। लेकिन SO2 का विरंजक प्रभाव अस्थायी होता है।

प्रश्न 25.
HCl एक अपचायक है, समझाइए।
उत्तर:
अपचायक गुण – प्रबल ऑक्सीकारकों के साथ क्रिया कराने पर यह अपचायक की तरह व्यवहार करती है। जैसे- MnO2, K2Cr2O2 तथा KMnO4 इत्यादि।

4HCl + MnO2 → MnCl2 + 2H2O + Cl2
14HCl + K2Cr2O7 → 2CrCl3 + 2KCl + 3Cl2 + 7H2O
16HCl + 2KMnO4 → 2MnCl2 + 2KCl + 5Cl2 + 8H2O

प्रश्न 26.
अम्लराज (एक्वारेजिया) कैसे बनाया जाता है? तथा इसके उपयोग भी बताइए।
उत्तर:
सान HCl त्षा यान्द्र HNO3 को 3 : 1 में मिलाने पर एक्यांजिजिया बनता है जिसे घोने तथा प्लेटिनम औैसी उल्क्ष्ट धातुओं को घोलने के लिए प्रयुक्त किया काता है।
Au + 4H+ + \(\mathrm{NO}_3^{-}\) + \(4 \mathrm{Cl}^{-}\) → \(\mathrm{AuCl}_4^{-}\) + NO + 2H2O3Pt + 16H+ + \(4 \mathrm{NO}_3^{-}\) + \(18 \mathrm{Cl}^{-}\) → \(3 \mathrm{PtCl}_6^{2-}\) + 4NO + 8H2O

प्रश्न 27.
इकृष्ट गैसों की द्रव तथा ठोस अवस्था में पाएँ जाने वाले आकर्षण बलों को समझाइए।
उत्तर:
उत्कृष्ट गैसों के परमाणु अधुखीय होते हैं लेकिन यह माना जात है कि इलेक्यान अभक्षे हिचलन से इमें धुवता उत्पन्न हो जती है तबा एक परमायु अन्य पस्मागुओं को भी पुवित कर सेत है। इन ज्ञनणुओं के मध्य उनक्षित आकर्षंग बस, परिशेपग बल या सन्द्न बल कहागता है। यह एक प्रकर का वन्डवल कल है तथा इस्ते के कारण उत्लृष्ट शैसों बदी द्रव तथा वोस अयलक्वा होती है।

प्रश्न 28.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) XeF2 का जल अघघटन
(ii) XeF4 का अषचयन
(iii) XeF2 की PF5 से किया
(iv) XeF4 की SbF5 से लिख्या
(v) XeF6 से NaF से क्रिया।
उत्तर:
(i) 2XCF2(S) + 2H2O(l) → 2Xe(g) + 4HF(aq) + O2(g)
(ii) XeF4 + 2H2 → Xe + 4HF
(iii) XeF2 + PF5 → [XeF]+ [PF6]
(iv) XeF4 + SbF5 → [XeF3]+ [SbF6]
(v) XeF6 + NaF → Na+ [XeF7]

प्रश्न 29.
XeO3, XeOF4 तथा XeO2F2 को विस्स प्रकास बनाया जाता है? समझाइए।
उत्तर:
XeO3 : XeF4 तथा XeF6 के जल अकघटन से XeO3 बना है।
6XeF4 + 12H2O → 4Xe + 2XeO3 + 24HF + 3O2
XeF6 + 3H2O → XeO3 + 6HF

XeOF4 तथा XeO2F2 :

XeF6 के आंिक क्ल अपवटन से आक्यीफ्तुओंग्ड XeOF4 तथा XeO2F2 प्राप्त होते हैं।
XeF6 + H2O → XeOF4 + 2HF
XeF6 + 2H2O → XeO2F2 + 4HF

प्रश्न 30.
XeF6 तथा XeOF4 की आकृति को समझाइए।
उ्तर:
XeF6 में Xe पर 6 खची क्लेकट्रॉन युग्म तथा एक एक्लकी इसेष्ट्रोन युग्म वपास्थित होते है अतः इस पर sp3d3 संकर्य होत है तथा झसकी अकृति विकृत अष्टफलकीय होती है। XeOF4 में Xe पर 5 बंधी इलेक्ट्रॉन युग्म तथा एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण sp3d2 संकरण होता है तथा इसकी आकृति वर्ग पिरैमिडी होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 14
XeF6 की विकृत अष्ठल्लकीय अवृति XeOF6 की वर्ग विर्मिड्री आकृति

प्रश्न 31.
वर्ग 16 के तत्वों के हाइड़ाइडों में निम्नलिखित गुणों वाले यौगिक बताइए।
(i) अधिकतम बन्ध कोण
(ii) निम्नतम क्वथनांक
(iii) अधिकतम अम्लीय गुण।
उत्तर:
(i) H2O
(ii) H2S
(iii) H2Te

प्रश्न 32.
SF6 ज्ञात है लेकिन SCl2 नहीं, क्यों?
उत्तर:
फ्नुओरीन की विद्युतत्ताणता अधिक होने के कारण यह प्रबल औक्सीकारक होती है इसलिए यह सल्फर को + 6 औक्सीकरण अवस्था तक ऑवसीकृत कर देती है अतः SF6 ज्ञात है। लेकिन क्लोरीन की दुर्बल ऑक्सीकारक प्रवृत्ति के कारण यह सल्फर को + 4 ऑक्सीकरण अवस्था तक ही ऑक्सीकृत कर पाती है, इसलिए SCl6 ज्ञात नहीं है।

प्रश्न 33.
SO2 की विरंजक क्रिया अस्थायी होती है, जबकि Cl2 की विरंजक क्रिया स्थायी होती है, क्यों?
उत्तर:
SO2 की जल के साथ क्रिया द्वारा नवजात हाइड्रोजन उत्पन्न होती है जो कि रेगीन पदार्थ को अपचयित करके रंगहीन कर देती है, लेकिन यह पदार्थ वायु द्वारा आंक्सीकृत होकर पुनः रेगीन हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 15
जबकि क्लोरीन, जल से क्रिया करके नवजात आंक्लीजन देती है जो कि रंगहीन पदार्थ को आंक्सीकृत करके रंगहीन कर देती है जिस पर वायु का कोई प्रभाव नर्हीं होता।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 16

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
सफफेद् फॉस्फोरस की अपेक्षा लाल फॉस्फोरस कम क्रियाशील क्यों होता है?
उत्तर:
सफेद फॉस्फोरस के P4 अणुओं में कोणीय तनाव के कारण (60° का कोण ) यक कम स्थायी होता है अतः यह अधिक क्रियाशील होता है जबकि लाल फॉस्फोरस में ऐसा नहीं होता इसलिए सफेद फॉस्फोरस की अपेक्ष लाल फॉर्फोरस कम क्रियाशील होता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) XeF2 + H4O →
(ii) PH3 + HgCl2
उत्तर:
(i) 2XeF2(s) + 2H2O(l) → 2Xe(g) + 4HF(aq) + O2(g)
(ii) PH3 + 3HgCl2 → Hg3P2 + 6HCl मरक्यूरिक फॉस्फाइड

प्रश्न 3.
(a) निम्नलिखित की संरचनाएँ आरेखित कीजिए-
(i) XeF4
(ii) H2S2O7
(b) निम्नलिखित अवलोकनों की व्याख्या कीजिए-
(i) नाइट्रोजन की अपेक्षा फॉस्फोरस में शृंखलन की प्रवृत्ति अधिक होती है।
(ii) इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान फ्लुओरीन के लिए, क्लोरीन के अपेक्षाकृत कम होता है।
(iii) हाइड्रोजन क्नोराइड की अपेक्षा हाइड्रोजन फ्लुओराइड का क्वथनांक बहुत अधिक होता है।
अथवा
(a) निम्नलिखित की संरचनाएँ आरेखित कीजिए-
(i) PCl3(s)
(ii) \(\mathrm{SO}_3^{2-}\)

(b) निम्नलिखित अवलोकनों के आधार स्पष्ट कीजिए-
(i) फॉस्फीन की अपेक्षा अमोनिया का क्वथनांक उच्चतर होता है।
(ii) हीलियम कोई रासायनिक योगिक नहीं बनाता है।
(iii) Sb(V) की अपेक्षा Bi(V) एक अधिक प्रबल उपचायक है।
उत्तर:
(a) XeF4 वथा H2S2O7 की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 17

(b) (i) नाइट्रोजन की अवेक्षा फैस्फोरस में शृंखलन की प्रवृत्ति अधिक होती है क्योंकि फॉस्फोरस विवृत (open) तथा संवृत (closed) दोनों प्रकार की श्रंखला बनाता है तथा नाइट्रोजन के छोटे आकार के कारण यह N ≡ N बनाकर, N2 के रूप में ही पाया जाता है ल्लेकिन फॉस्फोरस के बड़े आकार के कारण यह द्विपरमाणुक अणु नहीं बनाता।

(ii) हाइड्रोजन क्लोराइड की अपेक्षा हाइड्रोजन फ्लुओराइड का क्वथनांक बहुत अधिक होता है क्योंकि HF के अणुओं के मध्य प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जिसके कारण अणु बहुत अधिक पास आ जाते हैं जिन्हें दूर-दूर करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता ह्षेती है, जबकं HCl के अणुओं के मध्य दुर्बल वान्डरवाल बल पाया जाता है।
अथवा
(a) (i) PCl5(s) → ठोस अवस्था में PCl5 एक आयनिक ठोस के रूप में पाया जाता है जिसमें चतुष्फलकीय \(\mathrm{PCl}_4^{+}\) तथा अष्टफल्लकीय \(\mathrm{PCl}_6^{-}\) पाया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 18
(b) (i) फॉस्फीन की अपेक्षा अमोनिया का क्वधनांक उच्च होता है क्यौंकि NH3 में धुरुखीय बन्य (N-H) होने के कारण इसके अणुओं के मध्य अन्तरअणुक छाइडोजन बन्ध पाचा जाता है जिससे आण्विक संगुणन अधिक हो जाता है उबकि PH3 के अणुओं के मध्य दुर्बल बान्डरवाल बल पाया जाता है।

(ii) हीलियम कोई रुसायनिक यौगिक नहीं बनाता है ब्योकि हीलियम के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (1s2) में पूर्ण पूरित कोश है अतः इसके पास कोई अयुम्मित इलेक्टॉन नहैं है तथा इसके छोटे आकार के कारण इसकी आयनन एव्थैल्पी भी उच्च होती है इसलिए इसमें इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृति भी नही होती तथा धनात्रक इ्लेक्ट्रॉन ल्यिं एन्येल्पी के कारण यह इ्लेक्ट्रॉन स्रक्षण भी नहीं करती।

(iii) Sb(V) की अपेक्षा Bi(V) अधिक प्रबल उपचायक (ऑक्सीकारक ) होता है क्योंकि Bi+5 अवस्था की अपेक्षा Bi+3 अवस्था अधिक स्थायी होती है (निक्रिय युग्म प्रभास के कारण) अतः Bi(V) आसानी से इसेक्ट्रॉन ग्रहण करके Bi(III) बनाता है जिसके कारण इसका औक्सीकारक गुण अधिक छोता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 4.
फ्तुओरीन कोई धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित नहीं करती। क्यों?
उत्तर:
फ्लुओरीन की विद्युप्रणता सर्वाधिक होती है तथा इसके संयोजी कोश में रिक्त d कक्षेक भी उपलय्ध नलीं है अतः इसमें अश्टक का प्रस्तर नहीं हैता इस्स कारण यह केवल -1 औक्सीकरण अवस्था दर्शाती है अधाँत् यह कोई धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रक्रांत नहर्ती करती।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया समीकर्णों को पूरा कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 19

प्रश्न 6.
निम्नलिखित योगिकों के संखचा सूत्र बनाइए-
(i) H4P2O5
(ii) XeF4
उत्तर:
H4P2O5 तखा XeF4 की संरचना निम्न फ्रकार सेती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 20

प्रश्न 7.
निम्नलिखित को कारण देते हुए आष कैसे समझाएंगे-
(i) NCl3 एक ऊष्माशोषी यौगिक है जलकि NF3 ऊष्चाजिया है।
(ii) XeF2 मुड्ता हुभा न द्रोका एक सीधा रेख्रिय आकार वाता क्या है।
उत्तर:
(i) NCl3 एक कप्माोोी वौगिक है वबकि NF3 ऊप्यारेपी है क्योंकि NCl3 बनते समय कर्न का अवरोष्य होता है हसका कारण Cl-Cl बन्थ वियोग्यन एन्देली कर मान F-F बन्ध क्लिजन एन्थैल्पी से अधिक होना है अतः इस बन्य को तोड़ने के हिए अधिक ऊर्जा की आवस्पकता हैती है जबकि फ्लुओरीन के होटे आलार के बाएग प्रयत्त बन्य बनती है अतः NF3 बनते समख कर्जा उत्सरित होती है।

(ii) XeF2 में Xe पा दो बन्धित क्षेक्टॉन युग्म वथा तीन एकाही इलेकट्टॉन तुम्य कोते है। (sP3d स्थिकण) VSEPR स्द्धान्त के अनुसार रेखीय ज्यामिति होने पर प्रतिकर्षण न्यूनत्न होता है उतः XeF2 रेखीय ख्वामिति युक्ल अणु है।

प्रश्न 8. निम्नलिखित के वया कााएण हैं-
(i) H2O की अपेक्षा H2S अधिक अम्लीय है।
(ii) \(\mathrm{NO}_2^{-}\) में N-O आबंध \(\mathrm{NO}_3^{-}\) में N-O काजंध से छोटा होता है।
(iii) O2 और F2 दोनों ही उख्य उपषयन अवस्तुओ को स्थायित्य केते हैं परन्तु इसमें फलुओरीन की आवेक्षा औंवसीजन बक्रात है।
उत्तर:
(i) H2O की अपेक्षा H2S अधिक अम्लीय है क्योंकि सल्फर के बड़े आकार के कारण S-H बन्ध वियोजन एन्थैल्पी का मान O-H बन्ध वियोजन एन्थैल्पी से कम होता है अतः H2S की H+ देने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 21
\(\mathrm{NO}_2^{-}\) में एक N = O तथा एक N-O बन्थ होता है जबकि \(\mathrm{NO}_3^{-}\) में एक N = O तथा दो N-O बन्ध होते हैं अतः \(\mathrm{NO}_2^{-}\) में औसत बन्ध क्रम (1.5), \(\mathrm{NO}_3^{-}\) में औसत बन्ध क्रम (1.33) से अधिक है अतः \(\mathrm{NO}_2^{-}\) में N-O आब्दैघ, \(\mathrm{NO}_3^{-}\) में N-O आबन्ध से छोटा होत है।

(iii) O2 तथा F2 दोनों ही उच्च उपचयन अवस्थाओं (आक्सीकरण अवस्थाओं) को स्थायित्व देते हैं लेकिन ऑक्सीजन कौ द्विन्ध बनाने की क्षमत के कारण या उच्च ओंक्सीकरण अवस्था को अंक ए्थायित्व प्रदान करता है जबक्षक फ्लुओरीन में द्विआंन्ध नहीं बनखा।

प्रश्न 9.
(a) निम्नलिखित अणुओं की संरचनाएँ आरेखित कीजिए-
(i) (HPO3)3
(ii) BrF2
(b) निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को पूरा कीजिए-
(i) HgCl2 + PH2
(ii) SO3 + H2SO4
(iii) XeF4 + H2O →
अथवा
(a) क्या होता है जब
(i) NaOH के सान्द्र गरम विलयन में क्लोरीन गैस प्रवाहित की जाती है?
(ii) Fe(III) लवण के जलीय विलयन में से सस्फर डाइओंक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है ?

(b) निम्नलिखित के उत्तर दीजिए-
(i) H3PO3 की क्षार्त्ता (basicity) ब्या है और क्यों?
(ii) अन्तराहललोजन यौगिकों में फ्लुओरीन केन्द्रीय पसमाणु की भूमिका में क्यों नहीं होती है?
(iii) उत्कृष्ट (नोबल) गैसों के क्वथनांक बहुत कम क्यों होते हैं?
उत्तर:
(a) (i) (HPO3)3 पौलीमेटाफॉस्पेरिक अम्ल की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 22

(ii) BrF3 की संरचना बंकित T जैसी होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 23
(b) (i) 3HgCl2 + 2PH3 → Hg3P2 + 6HCl
(ii) SO3 + H2SO4 → H2S2O7 (अ)लिम)
(iii) 6XeF4 + 12H2O → 4Xe + 2XeO3 + 24HF + 3O2
अधवा
(a) (i) NaOH के सान्द्र स्वम विलयन में करोरोन सैस प्रवाहित कहने का NaCl तथा NaClO3 (संडियम बलोरोट) बनल है।
6NaOH + 3Cl2 → 5NaCl + NaClO3 + 3H2O
गन् तथा बान्द्र

(ii) Fe(III) के लवण के जलीय विलयन में से सल्फर डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करने पर फैरस (Fe2+) तथा सल्फेट आयन बनते हैं।
2Fe3+ + SO2 + 2H2O → 2Fe2+ + \(\mathrm{SO}_4^{2-}\) + 4H+

(b) (i) H3PO3 की क्षारकता दो होती है क्योंकि इसकी संरचना में दो -O-H बन्ध होते हैं जिसके आयनन से H+ प्राप्त होते हैं, लेकिन P-H बन्ध का आयनन नहीं होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 24

(ii) अन्तराहैलोजन यौगिकों में केन्द्रीय परमाणु पर अष्टक का प्रंसार होता है चूँकि फ्लुओरीन में रिक्त $\mathrm{d}$ कक्षक उपलब्ध नहीं होते अतः इसमें अष्टक का प्रसार नहीं हो पाता। इस कारण अन्तराहैलोजन यौगिकों में फ्लुओरीन, केन्द्रीय परमाणु की भूमिका में नहीं होती है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित में सो प्रत्येक के लिए उषघुक्त उद्बाहला बेते हुए उनखा स्पष्टीसरण कीजिए-
(i) NF3 एक कब्मांक्षेपी चौनिक है जक्कि NCl3 एमा नहीं है।
(ii) SF4 में सभी आघन्ध समतुल्ब नहीं हैं।
उत्तर:
(i) क्सी भाग (विभिन्न पणिधाओं के प्रश्न ) में प्रश्न संख्या 7(i) क्ष उत्तर देखें।
(ii) SF4 में सल्फर पर चार बन्धित इलेक्ट्रॉन युग्म तथा एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित है। (sp3d संकरण) तथा इसकी ज्यामिति सी सॉं (see saw) जैसी होती है जिसमें निरक्षीय बन्धों की तुलना में विषुवतरेखीय बन्धों पर अधिक तनाव होता है अतः इनकी बन्ध लम्बाई कुछ अधिक होती है SF4 के सभी बन्य सनतात्व नली कोते।

प्रश्न 11.
SbH3 तथा BiH3 में खौन अधिक प्रबल भबचादक है और वर्खों ?
उत्तर:
SbH3 तथा BiH3 में से BiH3 अधिक प्रबल अपचायक है क्योंकि BiH3 में Bi के बड़े आकार के कारण बन्ध वियोजन एन्थैल्पी कम होती है अतः हाइड्रोजन परमाणुओं के प्राप्त होने की सम्भावना अधिक होती है।

प्रश्न 12.
(a) निम्नलिखित यौगिकों की आण्विक संरचनाएँ आरेखित कीजिए-
(i) N2O5
(ii) XeOF4
(b) निम्नलिखित अवलोकनों की व्याख्या कीजिए-
(i) ऑक्सीजन की अपेक्षा सल्फर में श्रृंखलन की प्रवृत्ति अधिक होती है।
(ii) I2 की अपेक्षा ICI अधिक क्रियाशील है।
(iii) फ्लुओरीन की इलेक्ट्रॉन प्राप्ति एन्थैल्पी ऋण चिह्न के साथ यद्यपि क्लोरीन की अपेक्षा कम है, फिर भी फ्लुओरीन (F2) अपेक्षाकृत क्लोरीन (Cl2) से प्रबल ऑक्सीकारक है।
अथवा
(a) निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) Cu + HNO3 (तनु) →
(ii) XeF4 + O2F2
(b) निम्नलिखित अवलोकनों की व्याख्या कीजिए-
(i) नाइट्रोजन की अपेक्षा फॉस्फोरस में श्रृंखलन की प्रवृत्ति अधिक होती है।
(ii) ऑक्सीजन एक गैस है जबकि सल्फर एक ठोस है।
(iii) हैलोजन रंगीन होते हैं। क्यों?
उत्तर:
(a) N2O5 तथा XeOF4 की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 25
(b) ऑक्सीजन के छोटे आकार के कारण यह pπ-pπ अतिव्यापन द्वारा बन्ध बनाकर O2 के रूप में पाया जाता है। जबकि सल्फर के बड़े आकार के कारण यह π बन्ध नहीं बनाता तथा बहुत से परमाणु आपस में जुड़कर S8 बनाते हैं अर्थात् सल्फर में श्रृंखलन की प्रवृत्ति; ऑक्सीजन की अपेक्षा अधिक होती है।
अथवा
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 26
(b) हैलोजनों में दृश्य क्षेत्र में विकिरणों का अवशोषण होता है जिससे बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर में चले जाते हैं। जब ये इलेक्ट्रॉन वापस निम्न ऊर्जा स्तर में आते हैं तो ऊर्जा उत्सर्जित होती है जिसके कारण हैलोजन रंगीन होते हैं। विकिरण के भिन्न-भिन्न क्वान्टम अवशोषित करने के कारण इनका रंग भी भिन्न-भिन्न होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 13.
(i) ‘इंडियन साल्टपीटर’ का नाम एवं रासायनिक सूत्र लिखिए।
(ii) क्या होता है जब अमोनिया के जलीय विलयन को- (A) Cu2+ आयन युक्त जलीय विलयन में डालते हैं ( समीकरण सहित ) ।
(B) Cl आयनों की उपस्थिति में Ag+ आयन युक्त जलीय विलयन में डालते हैं। (समीकरण सहित )
(iii) H3PO4 अम्ल की संरचना बनाइये।
अथवा
(i) किस वर्ग के तत्व चैल्कोजेन कहलाते हैं और क्यों?
(ii) (A) फ्लोरीन केवल 1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है, क्यों?
(B) फ्लोरीन के अलावा अन्य हैलोजन धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दर्शाते हैं, क्यों?
(iii) विषमलंबा गंधक की Ss आणविक संरचना को चित्रित कीजिए।
उत्तर:
(i) पोटैशियम नाइट्रेट (KNO3) को इंडियन साल्टपीटर कहते हैं।
(ii) (A) Cu2+ आयन युक्त जलीय विलयन में अमोनिया का जलीय विलयन डालने पर गहरे नीले रंग का विलेयशील संकुल टेट्राऐमीन कॉपर (II) सल्फेट बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 27
(B) Cl आयनों की उपस्थिति में Ag+ के जलीय विलयन में अमोनिया का जलीय विलयन डालने पर एक विलेय संकुल डाइऐमीन सिल्वर (I) क्लोराइड प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 28
(iii) H3PO4 (आर्थो फॉस्फोरिक अम्ल) की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 29
अथवा
(i) 16वें वर्ग (ऑक्सीजन परिवार) के तत्वों को चैल्कोजेन कहते हैं क्योंकि इसका अर्थ है अयस्क बनाने वाला तथा सामान्यतः अयस्कों में ऑक्सीजन तथा सल्फर होता है अर्थात् अयस्क ऑक्साइड तथा सल्फाइड के रूप में पाए जाते हैं।

(ii) (A) फ्लोरीन केवल – 1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शता है क्योंकि इसका परमाणु आकार छोटा होता है तथा इसमें d कक्षक अनुपस्थित है एवं इसकी विद्युत ऋणात्मकता भी सबसे अधिक होती है।

(B) फ्लोरीन के अलावा अन्य हैलोजन धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दर्शाते हैं क्योंकि इनमें रिक्त d कक्षक उपस्थित होते हैं अतः ये अपने अष्टक का प्रसार कर सकते हैं। इनकी ये ऑक्सीकरण अवस्थाएँ + 1, + 3, + 5 तथा + 7 होती हैं।

(iii) विषम लंबा गंधक की S8 आण्विक संरचना क्राउन शेप यानी किरीटाकार वलय होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 30

प्रश्न 14.
(अ) निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) Cl2 + NaOH (ठण्डा व तनु) →
(ii) C + सान्द्र HNO3
(ब) निम्नलिखित को समझाइए –
(i) 17वें वर्ग में F2 प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) ऑक्सीजन गैस है जबकि सल्फर ठोस है।

(स) निम्नलिखित की संरचना बनाइए-
(i) N2O5
(ii) H3PO4
अथवा

(अ) निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 31

(ब) निम्नलिखित को समझाइए-
(i) नाइट्रोजन का अणुसूत्र N2 है जबकि फॉस्फोरस का P4 है।
(ii) नाइट्रोजन की तुलना में फॉस्फोरस अधिक क्रियाशील है।
(स) निम्नलिखित की संरचना बनाइए-
(i) H2S2O7
(ii) XeF2
उत्तर:
(अ) (i) Cl2 + NaOH (ठण्डा व तनु ) → NaCl + NaClO + H2O
(ii) C + 4HNO3 (सान्द्र) → CO2 + 2H2O + 4NO2

(च) (i) 17वें वर्ग में F2 प्रबल ऑक्सीकारक है क्योंकि F-F आबंध की वियोजन एन्थैगी कम है तथा F की जलयोजन एन्यैल्पी का मान उच्च होता है, अतः F में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

(ii) ऑक्सीजन परमाणु के छोटे आकार तथा संयोजी कोश में d कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण इसमें pπ-pπ बन्ध बनाने की प्रबल प्रवृत्ति होती है अतः यह O = O बनाकर अपना अष्टक पूर्ण कर लेती है। तथा O2 के विविक्त अणुओं के रूप में गैस अवस्था में पायी जाती है। लेकिन सल्फर के बड़े आकार के कारण S = S बन्ध एन्पी कम होती है अतः यह S2 न बनाकर S8 के रूप में पाया जाता है जिससे अणुओं के मध्य आकर्षण बल बढ़ जाता है। इसी कारण सल्फर ठोस अवस्था में पाया जाता है।

(स) N2O5 तथा H3PO4 की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 32

(ब) (i) नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु N2 के रूप में पाया जाता है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु के छोटे आकार तथा d कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण इसमें बहुल आबन्ध (N ≡ N) बनाने की प्रबल क्षमता होती है जबकि फॉस्फोरस P4 के रूप में पाया जाता है क्योंकि इसके बड़े आकार के कारण इसमें बहुल आबन्ध बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती तथा आन्तरिक अबन्धित इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण होता है अतः इसमें P-P-P बन्ध कोण 60″ होता है इसलिए pπ-pπ बन्ध संभव नहीं है।

(ii) नाइट्रोजन की तुलना में फॉस्फोरस अधिक क्रियाशील है क्योंकि नाइट्रोजन का आकार बहुत छोटा होता है तथा इसकी विद्युतॠणता एवं आयनन एन्फैल्पी, फॉस्फोरस की तुलना में अधिक होती है। नाइट्रोजन के संयोजी कोश में रिक्त d कक्षक उपलब्ध नहीं हैं जबकि फॉस्फोरस के संयोजी कोश में रिक्त d कक्षक होते हैं नाइट्रोजन में pπ-pπ अतिव्यापन द्वारा त्रिआबन्ध बनाने की प्रवृत्ति होती है अतः इसकी [बन्ध एन्येपी बहुत अधिक होती है जिसके कारण वह बहुत कम क्रियाशील होता है जबकि फॉस्फोरस में pπ-pπ अतिव्यापन नहीं होता।

(स) H2S2O7 तथा XeF2 की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 33

प्रश्न 15.
(अ) वर्ग 15 में ऊपर से तीसरे तत्व का नाम एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
(ब) अमोनिया अणु की संरचना बनाइए ।
(स) NH3 लुइस क्षारक की तरह व्यवहार करती है। क्यों?
(द) तनु एवं सान्द्र HNO3 की Zn के साथ अभिक्रिया के समीकरण दीजिए।
उत्तर:
(अ) वर्ग 15 में ऊपर से तीसरे तत्व का नाम आर्सेनिक 33(As) है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d104s24p3 है।
(ब) अमोनिया का अणु त्रिकोणीय पिरैमिडी होता है, क्योंकि इसमें नाइट्रोजन पर sp3 संकरण होता है। (3σ बन्ध तथा एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म ) इसे निम्न प्रकार दर्शाया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 34

(स) अमोनिया में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म, प्रदान करने के लिए उपलब्ध है अतः यह लूइस धारक की तरह व्यवहार करती है।
(द) 4Zn + 10 HNO3
तनु → 4Zn (NO3)2 + 5H2O + N2O
Zn + 4HNO3 (सांद्र ) → Zn (NO3)2 + 2H2O + 2NO2

प्रश्न 16.
(अ) वर्ग 15 के धातु तत्व का नाम एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
(ब) क्लोरीन गैस की विरंजन क्रिया का कारण समझाइए ।
(स) भूरी वलय परीक्षण के समीकरण लिखिए।
(द) PCl5 अणु की संरचना बनाइए ।
उत्तर:
(अ) वर्ग 15 का धातु तत्व बिस्मथ (88Bi) है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Xe]-4f14 5d10 6s2 6p3 है।

(ब) क्लोरीन गैस की विरंजन क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है। नमी की उपस्थिति में क्लोरीन नवजात ऑक्सीजन [O] देती है जो रंगीन पदार्थ का ऑक्सीकरण करके उसे रंगहीन कर देती है।
Cl2 + H2O → 2HCl + [O]
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ

(स) भूरी वलय परीक्षण नाइट्रेट आयन के लिए किया जाता है। इसमें प्रयुक्त समीकरण निम्नलिखित हैं-
NO3 + 3Fe2+ + 4H+ → NO + 3Fe3+ + H2O
[Fe(H2O)6]2+ + NO → [Fe(H2O)5(NO)]2+ + H2O भूरी वलय

(द) PCl5 की संरचना त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी होती है क्योंकि इसमें फॉस्फोरस पर 5 σ बन्ध होते हैं। (sp3d संकरण) इसे निम्न प्रकार दर्शाया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 35

प्रश्न 17.
(i) H3PO3 की क्षारकता कितनी होती है तथा क्यों?
(ii) क्लोरीन गैस से बनाई जा सकने वाली दो जहरीली गैसों का नाम बताइए।
(iii) नाइट्रोजन +5 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है फिर भी यह पेन्टालाइड नहीं बनाती, क्यों?
उत्तर:
(i) H3PO3 की धारकता दो होती है क्योंकि इसमें दो O-H बन्ध होते हैं।
(ii) फॉस्जीन (COCl2) तथा मस्टर्ड गैस (ClCH2– CH2SCH2CH2Cl)
(iii) नाइट्रोजन में d कवक अनुपस्थित होते हैं अतः यह पेन्टालाइड नहीं बनाती।

प्रश्न 18.
R3P = O पाया जाता है जबकि R3N = O नहीं क्यों ? (R= ऐल्किल समूह)
उत्तर:
वर्ग 15 के तत्वों में अतिरिक्त स्थायित्व प्राप्त अर्धपूरित इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के p-कक्षक होते हैं। अतः वर्ग 16 के तत्वों की तुलना में इनमें से इलेक्ट्रॉन को निकालने में बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, अतः वर्ग 15 के तत्वों की तुलना में वर्ग 16 के तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता है।

प्रश्न 19.
(a) निम्नलिखित की संरचनाएँ बताइए-
(i) XeF2
(ii) BrF3
(b) H3PO3 की अपेक्षा H2PO2 अधिक प्रबल अपचायक है, क्यों?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 36
(b) H3PO2 में ऐ P-H बन्ध होते हैं तथा इसमें की ऑक्सीकरण अवस्था निम्न (+1) है। अतः यह उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तित हो सकता है। जबकि H3PO3 में एक P-H बन्ध एवं P की ऑक्सीकरण अवस्था उच्च (+ 3) है अतः H3PO3 की अपेक्षा H3PO2 अधिक प्रबल अपचायक है।

प्रश्न 20.
(अ) क्लोरीन के चार ऑक्सो अम्लों के रासायनिक सूत्र लिखिए।
(ब) उत्कृष्ट गैस समूह का सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखिए। चुम्बकीय अनुनाद प्रतिविम्ब (MRI) में इस समूह का कौन-सा तत्व उपयोगी है?
(स) C2H5OH की PCl3 एवं PCl5 के साथ पृथक् पृथक् रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए।
अथवा
(अ) सल्फर के चार ऑक्सो अम्लों के रासायनिक सूत्र लिखिए।
(ब) केल्कोजेन समूह का सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखिए। एप्सम लवण का रासायनिक सूत्र लिखिए।
(स) अमोनिया एक लुइस क्षारक की तरह व्यवहार करता है। समझाइए |
उत्तर:
(अ) क्लोरीन के चार ऑक्सो अम्ल निम्नलिखित हैं- HOCl (हाइपोक्लोरस अम्ल) HClO2 (क्लोरस अम्ल), HClO3 (क्लोरिक अम्ल) तथा HCIO4 (परक्लोरिक अम्ल)।

(ब) उत्कृष्ट गैस समूह का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 np2 होता है जहाँ n = 2 से 6 [He (1s2) के अतिरिक्त), चुम्बकीय अनुनाद प्रतिषिध (MRI) में हीलिंगम प्रयुक्त होती है।

(स) C2H5OH + PCl5 → C2H5Cl + HCl + POCl3
2C2H5OH + PCl3 → 3C2H5Cl + P(OH)3 या H3PO3
अथवा

(अ) सल्फर के चार ऑक्सो अम्ल निम्नलिखित है-
H2SO3 (सल्फ्यूरस अम्ल), H2SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल), H2S2O8 (परॉक्सो डाइसल्फ्यूरिक अम्ल) तथा H2S2O7 (पायरो सल्फ्यूरिक अम्ल )।

(ब) केल्कोजेन समूह ऑक्सीजन समूह होता हैं जिसका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 np4 है जहाँ n = 2 से 61 एप्सम लवण का रासायनिक सूत्र MgSO4 . 7H2O होता है।

(स) अमोनिया में नाइट्रोजन पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करने के लिए उपलब्ध है अतः यह लुइस क्षारक की तरह व्यवहार करता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 21.
Ba(N3)2 के तापीय अपघटन से क्या होता है? (केवल अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।)
उत्तर:
Ba(N3)2 के तापीय अपघटन से बेरियम तथा नाइट्रोजन गैस प्राप्त होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 37

प्रश्न 22.
H3PO3 की क्षारकता क्या है?
उत्तर:
H3PO3 में दो P-OH बन्ध उपस्थित हैं अतः इसकी क्षारकता 2 है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 38

प्रश्न 23.
(अ) क्लोरीन के ठण्डे व तनु NaOH विलयन से अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।
(ब) H3PO2 की अपचायक प्रकृति को समझाइए |
अथवा
(अ) क्लोरीन की गरम व सान्द्र NaOH विलयन से अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।
(ब) PCl5 के पाँचों बन्ध समतुल्य क्यों नहीं हैं? समझाइए |
उत्तर:
(अ) क्लोरीन की ठण्डे व तनु NaOH मिलयन से अभिक्रिया कराने पर सोडियम क्लोराइड (NaCl) तथा सोडियम हाइपोक्लोराइट (NaClO) बनते हैं।

Cl2 + 2NaOH → NaCl + NaClO + H2O

(ब) H3PO2 में दो P-H बन्ध होने के कारण वह एक अच्छा अपचायक होता है। इसी कारण वह AgNO3 को Ag में अपचारित कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 39
अथवा
OH
(अ) क्लोरीन की गरम व सान्द्र NaOH विलयन से अभिक्रिया कराने पर सोडियम क्लोराइड (NaCl) तथा सोडियम क्लोरेट (NaClO3) प्राप्त होते हैं।
3Cl2 + 6NaOH → 5NaCl + NaClO3 + 3H2O

(ब) PCl5 के पाँच बन्धों में से तीन निरक्षीय बन्ध समान होते हैं। जबकि वे अक्षय बन्यों की बन्ध लम्बाई अधिक होती है क्योंकि निरखीय बन्ध युग्मों की अपेक्ष अक्षीय बन्ध युग्मों पर प्रतिकर्षण अधिक होता है। PCl5 की त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी संरचना होती है (sp3d संकरण ) ।

प्रश्न 24.
(a) निम्नलिखित के कारण देते हुए स्पष्ट कीजिए-
(i) \(\mathrm{NH}_4^{+}\) में आबन्ध कोण अपेक्षाकृत NH3 वाले कोण से बड़ा है।
(ii) अपचायक व्यवहार SO3 से TeO2 की ओर घटता है।
(iii) HClO की अपेक्षा HClO4 प्रबलतर अम्ल है।

(b) निम्नलिखित की संरचनाएँ आरेखित कीजिए—
(i) H2S2O8
(ii) XeOF4
अथवा
(a) जब सफेद फॉस्फोरस को सान्द्र NaOH के विलयन के साथ गर्म किया जाता है तो कौनसी जहरीली गैस निकलती है? रासायनिक समीकरण लिखिए।
(b) एन. बेर्टलेट द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट गैस के प्रथम यौगिक का सूत्र लिखिए। इस यौगिक को बनाने के लिए एन. बैर्टलेट की प्रेरणा क्या थी?
(c) क्लोरीन की अपेक्षा फ्लुओरीन प्रबलतर उपचाचक है क्यों?
(d) क्लोरीन गैस का एक उपयोग लिखिए।
(e) निम्नलिखित समीकरण को पूर्ण कीजिए-
CaF2 + H2SO4
उत्तर:
(a) (i) NH3 तथा \(\mathrm{NH}_4^{+}\) दोनों में से नाइट्रोजन sp3 संकरित है। लेकिन \(\mathrm{NH}_4^{+}\) में आबन्ध कोण अपेक्षाकृत NH3 वाले बन्ध कोण से बड़ा है क्योंकि इसमें चारों ही बन्धित इलेक्ट्रॉन युग्म है जबकि NH3 में N पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म है जो कि एकाकी युग्म आबंध युग्म प्रतिकर्षण के लिए उत्तरदायी है, जिससे NH3 में आबन्ध कोण कम हो जाता है।

(ii) अपचायक व्यवहार SO2 से TeO2 की ओर घटता है, क्योंकि इस वर्ग में नीचे जाने पर 6 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व कम होता है तथा 4 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व बढ़ता है। अतः इनकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति भी कम होती जाती है।

(iii) HClO की अपेक्षा HClO4 प्रबलतम अम्ल है क्योंकि HClO में Cl का ऑक्सीकरण अंक + 1 है जबकि HClO4 में Cl का ऑक्सीकरण अंक + 7 है अतः HClO4 में Cl की इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति अधिक होती है जिससे इसका आयनन होकर H+ आसानी से प्राप्त हो जाते हैं।
(b) (i) H2S2O8
(ii) XeOF4
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 40
अथवा
(a) जब सफेद फॉस्फोरस को सान्द्र NaOH के विलयन के साथ गर्म किया जाता है तो फाल्जीन (PH3) गैस निकलती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 7 Img 41
(b) इस प्रश्न के उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न संख्या 7.30 का उत्तर देखें।

(c) क्लोरीन की अपेक्षा फ्लुओरीन प्रबलतर उपचायक (ऑक्सीकारक) है क्योंकि क्लोरीन के मानक अध्ययन विभव का मान फ्लुओरीन के मानक अपचयन विभव के अपेक्षा कम होता है। इसी कारण फ्लुओरीन जल को ऑक्सीजन में ऑक्सीकृत कर देती है जबकि क्लोरीन, जल के साथ अभिक्रिया करके HCl तथा HClO बनाती है।

(d) क्लोरीन को पीने के जल को जीवाणुरहित करने में प्रयुक्त किया जाता है।

(e) CaF2 + H2SO4 → CaSO4 + 2HF

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HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. मेथेन व एथेन को इससे एक पद अभिक्रिया में प्राप्त किया जाता है-
(1) C2H2
(2) CH3I
(3) CH3OH
(4) C2H5OH.
उत्तर:
(2) CH3I

2. द्रव हाइड्रोकार्बन को इसके द्वारा गैसीय हाइड्रोकार्बन मिश्रण में परिवर्तित किया जा सकता है-
(1) भंजन
(2) जल-अपघटन
(3) ऑक्सीकरण
(4) कम दाब पर आसवन।
उत्तर:
(1) भंजन

3. निम्नलिखित में से कौन जल के साथ अभिक्रिया द्वारा मेथेन गैस, उत्पन्न करता है?
(1) सिलिकौन कार्बाइड
(2) कैल्सियम कार्बाइड
(3) ऐलुमिनियम का कार्बाइड
(4) आयरन कार्वाइड।
उत्तर:
(3) ऐलुमिनियम का कार्बाइड

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

4. सिर्फ दो मोनो-क्लोरो व्युत्पन्न समावयवी संभव है-
(1) n-ब्यूटेन के
(2) 2, 4-द्वाइमेयिल पेन्टेन के
(3) बेंजीन के
(4) 2 -मेथिल प्रोपेन के।
उत्तर:
(1) n-ब्यूटेन के

5. C2H5Cl बनाने के लिए सबसे अच्छी अभिक्रिया दशाएँ हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 1
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 2

6. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक Conc. H2SO4 को गर्म करने पर भी नहीं घुलेगा ?
(1) ऐथिलीन
(2) बेंजीन
(3) हैक्सेन
(4) एनिलीन।
उत्तर:
(3) हैक्सेन

7. अधिकतम क्यथनांक है-
(1) आइसो ऑक्टेन
(2) n-ऑक्टेन
(3) 2, 2, 3, 3-टेट्रामेषिल ब्यूटेन
(4) n-ब्यूटेन।
उत्तर:
(2) n-ऑक्टेन

8. पैराफिन इसमें घुलता है-
(1) आसवित जल
(2) बेंजीन
(3) मेथेनॉल
(4) लवणीय जल।
उत्तर:
(2) बेंजीन

9. एल्किल हैलाइड पर Zn की अभिक्रिया द्वारा ऐल्केन बनने की क्रिया को कहते है-
(1) फ्रैंकर्सैं अभिक्रिया
(2) वुर्ट्ज अभिक्रिया
(3) कैनिजारो अभिक्रिया
(4) कोल्बे की अभिक्रिया।
उत्तर:
(1) फ्रैंकर्सैं अभिक्रिया

10. बन्द नली में मेषिल ब्रोमाइह को बिंक के साथ गर्म करने पर प्राप्त होता है-
(1) मेथेन
(2) ऐेथेन
(3) ऐथाइडलीन
(4) मेथेनॉल।
उत्तर:
(2) ऐेथेन

11. C2H6 में C-C-H है-
(1) 90°
(2) 109.5°
(3) 120°
(4) 180°
उत्तर:
(2) 109.5°

12. निम्न में से किसकी अभिक्रिया ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साध कराने पर हाइड्रोकार्बन बनता है-
(1) CH3CH2OH
(2) CH3CHO
(3) CH3COCH3
(4) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(1) CH3CH2OH

13. निम्नलिखित में से कौन-से यौगिक मुख्वतया प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं-
(1) ऐल्केन
(2) ऐल्कीन
(3) ऐल्काइन
(4) ये सभी।
उत्तर:
(1) ऐल्केन

14. किसके द्वारा भंजन प्रदर्शित होता है-
(1) ऐल्केन
(2) पेट्रोलियम
(3) ईथर
(4) बेंजीन।
उत्तर:
(1) ऐल्केन

15. किसी पदार्थ का जलीय विलयन विद्युत-अपघटन द्वारा ऐथेन देता है, वह पदार्थ है-
(1) एसीटिक अम्ल
(2) एसिटेमाइड
(3) पोटेशियम ऐसीटेट
(4) ऐथाइल ऐसीटेट।
उत्तर:
(3) पोटेशियम ऐसीटेट

16. ऐल्केनों का हैलोजनीकरण उदाहरण है-
(1) इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन का
(2) न्यूक्लिओफिलिक प्रतिस्थापन का
(3) मुक्त मूलक प्रतिस्थापन का
(4) ऑक्सीकरण का
उत्तर:
(3) मुक्त मूलक प्रतिस्थापन का

17. अभिक्रिया \(\mathrm{C}_{10} \mathrm{H}_{22} \stackrel{900 \mathrm{~K}}{\longrightarrow} \mathrm{C}_4 \mathrm{H}_8+\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_{14}\) का नाम है-
(1) एल्कलीकरण
(2) भंजन
(3) हिद्हड्रोजनीकरण
(4) आसवन।
उत्तर:
(2) भंजन

18. मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड तथा एथिल ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया में कार्बनिक उत्पाद है-
(1) मेथेन
(2) ऐथेन
(3) प्रोपेन
(4) व्यूटेन।
उत्तर:
(1) मेथेन

19. विकार्वांक्सिलीकरण निम्न में से किससे सम्बन्धित है-
(1) योगात्मक अभिक्रिया
(2) सोडालाइम
(3) ऐल्केनों की संरचना
(4) इंयर।
उत्तर:
(2) सोडालाइम

20. कौन जल-अपघटन पर मेथेन देता है-
(1) CaC2
(2) CH2Br
(3) Al4C3
(4) C2H5MgBr
उत्तर:
(3) Al4C3

21. जब सोडियम ऐसीटेट को सोडालाइम के साथ अभिकृत कराया जाता है तो पदार्थ बनता है-
(1) मेथेन
(2) एसिटाईलीन
(3) एधाइलीन
(4) ऐेथेन।
उत्तर:
(1) मेथेन

22. यौगिक जो CH3Mgl के साथ अभिक्रिया द्वारा मेथेन नहीं देता है-
(1) CH3CH2NH2
(2) C2H5OH
(3) (CH3)3N
(4) NH3
उत्तर:
(3) (CH3)3N

23. निम्नलिखित में से कौन हाइड्रोकार्बन का मिश्रण नहीं है-
(1) केंडल वैक्स
(2) कँरोसिन
(3) वनस्पति तेल
(4) पैराफिन तेल।
उत्तर:
(3) वनस्पति तेल

24. जब सोडियम प्रोपिओनेट को सोडालाइम के साय गर्म करते हैं जो उत्पाद बनात है-
(1) CH3
(2) C2H6
(3) C3H8
(4) C4H10
उत्तर:
(2) C2H6

25. ऐल्केन श्रेणी C1 से C4 तक के सदस्यों की जौतिक अवस्या है-
(1) टेस
(2) द्रव
(3) गैस
(4) इनमें से कोई नही।
उत्तर:
(3) गैस

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

26. मार्श गैस में मुख्यतः होता है।
(1) C2H2
(2) CH4
(3) H2S
(4) CO
उत्तर:
(2) CH4

27. पैराफिन इसमें विलेय है-
(1) आसुत जल
(2) बेन्जीन
(3) मेषेनॉल
(4) CO
उत्तर:
(2) बेन्जीन

28. मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड पर जल की क्रिया द्वारा हूमें प्राप्त होता है-
(1) CH4
(2) C2H6
(3) CH3OH
(4) C2H5OH
उत्तर:
(1) CH4

29. मेथेन एक आकार होता है-
(1) समचतुष्फलकीय
(2) अष्टफलकीय
(3) गोलीय
(4) वर्गाकार समतल।
उत्तर:
(1) समचतुष्फलकीय

30. किस यौगिक का क्वथनांक सर्वाधिक है-
(1) n-पेन्टेन
(2) 2-मेथिल ब्यूटेन
(3) 2, 2-डाइमेथिल प्रोपेन
(4) n-हेक्सेन।
उत्तर:
(4) n-हेक्सेन।

31. मेथेन बनाने में निम्न में से कौन-सा कार्बाइड प्रयुक्त होता है।
(1) CaC2
(2) Mg2C3
(3) Al4C3
(4) B4C
उत्तर:
(3) Al4C3

32. कार्बन शृंखला में कार्बन परमाणु बढ़ाने पर ऐल्केन का क्वथनांक-
(1) बढ़ता है
(2) घटता है
(3) अप्रभावित रहता है
(4) बढ़ या घट सकता है।
उत्तर:
(1) बढ़ता है

33. निम्न में से किसके जल अपघटन पर मेथेन प्राप्त होता है-
(1) Al4C3
(2) CaC2
(3) n-C3H7MgBr
(4) शुष्क बर्फ।
उत्तर:
(1) Al4C3

34. मेथेन व एथेन दोनों को अलग-अलग एक पद अभिक्रिया द्वारा निम्न से प्राप्त कर सकते हैं-
(1) C2H4
(2) CH3I
(3) CH2OH
(4) C2H2OH
उत्तर:
(2) CH3I

35. मेथेन बनाने की सबसे उचित विधि है-
(1) प्राकृतिक गैस का द्रवीकरण
(2) वुर्ट्ज अभिक्रिया
(3) CH2Cl2 का अपचयन
(4) इनपमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(2) वुर्ट्ज अभिक्रिया

36. CCl4 में बन्ध कोण का मान लगभग है-
(1) 90°
(2) 109°
(3) 120°
(4) 180°
उत्तर:
(2) 109°

37. आइसो पेन्टेन में कितने द्वितीयक (secondary) कार्बन परमाणु है-
(1) 1
(2) 2
(3) 3
(4) 4
उत्तर:
(1) 1

38. निम्न में से कौन-सा यौगिक सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर भी नहीं घुलता है।
(1) एधिलीन
(2) बेन्जीन
(3) हेक्सेन
(4) ऐनिलीन।
उत्तर:
(3) हेक्सेन

39. शुद्ध n-हेक्सेन को प्राप्त करने के लिये सोडियम की निम्न में से किस अभिकर्मक द्वारा क्रिया कराते हैं।
(1) एथिल ब्रोमाइड तथा n-ब्यूटिल ब्रोमाइड
(2) n-प्रोपित ब्रोमाइड
(3) मेथिल ब्रोमाइड तथा n-ऐमिल ब्रोमाइड
(4) एथिल क्लोराइड तथा n-ब्यूटिल क्लोराइड।
उत्तर:
(2) n-प्रोपित ब्रोमाइड

40. ऐल्केन के भिन्न-भिन्न कार्बन परमाणुओं से आबन्धित हाइड्रोजन परमाणुओं की क्रियाशीलता का क्रम है-
(1) 3° > 2° > 1°
(2) 1° > 2° > 3°
(3) 3° > 1° > 2°
(4) 2° > 1° > 3°
उत्तर:
(1) 3° > 2° > 1°

41. निम्न किसमें H2% अधिकतम है।
(1) CH4
(2) C2H4
(3) C6H6
(4) C2H2
उत्तर:
(1) CH4

42. ऐल्किल हैलाइड पर जिंक की अभिक्रिया द्वारा ऐल्केन का बनना कहलाता है-
(1) फ्रेंकलैण्ड अभिक्रिया
(2) कैनीजारो अभिक्रिया
(3) वुर्द्ज अभिक्रिया
(4) कोल्बे अभिक्रिया
उत्तर:
(1) फ्रेंकलैण्ड अभिक्रिया

43. ज्यामितीय समावयवता दर्शाने वाले यौगिक है-
(1) प्रोपीन
(2) 1-ब्यूटीन
(3) 2-क्यूटीन
(4) आइसो ब्यूटिलीन।
उत्तर:
(3) 2-क्यूटीन

44. संचयी हाईन का उदाहरण है-
(1) CH2 = CH-CH=CH2
(2) CH2 = C = CH-CH3
(3) CH3 = CH-CH2CH = CH2
(4) CH3 = CH-C = CH2
उत्तर:
(2) CH2 = C = CH-CH3

45. सी. एन. जी. में मुख्य रूप से होती है-
(1) मेथेन
(2) ऐधेन
(3) प्रोपेन
(4) ब्यूटेन।
उत्तर:
(1) मेथेन

46. यौगिक जिसके ओज्ञोनी अपघटन से ऐथेनेल प्राप्त होती है-
(1) ऐथीन
(2) ऐथाईन
(3) 2-ब्यूटीन
(4) 1-ब्यूटीन।
उत्तर:
(3) 2-ब्यूटीन

47. अमोनीकृत क्यूप्रस क्लोराइड विलयन के साथ अभिक्रिया कर लाल अवक्षेप देने वाला यौगिक है-
(1) प्रोषीन
(2) प्रोपाईन
(3) 2-व्यूटारन
(4) 2-ब्यूटीन।
उत्तर:
(2) प्रोपाईन

48. CH3CH = C = CH-CH3 अणु में sp संकरित कार्बन परमाणु है-
(1) C-2
(2) C-3
(3) C-4
(4) इनमें से कोई नही।
उत्तर:
(2) C-3

49. ऐथिलीन शीतल, तनु क्षारीय परमैगनेट बिलयन के साथ अभिक्रिया करके देता है-
(1) CH3CO
(2) CO3 के दो मोल
(3) CH3O के दो मोल
(4) C2H4(OH)2
उत्तर:
(2) CO3 के दो मोल

50. HBr का एट्टीमारकोनीकॉफ योग किसमें सम्भव नहीं है?
(1) प्रोपीन
(2) ब्यूटीन-1
(3) ब्यूट-2-ईन
(4) पेन्ट-2-इ्दन।
उत्तर:
(4) पेन्ट-2-इ्दन।

51. परॉक्साइड की उपस्थिति में ब्यूटीन-1 से HBr अणु के योग द्वारा उत्पन्न होता है-
(1) I-क्रोमो ब्यूटेन
(2) 2-ब्रोमो ब्यूटेन
(3) 1, 2-हाईं्रोमो ब्यूटेन
(4) n-ब्यूटेन।
उत्तर:
(1) I-क्रोमो ब्यूटेन

52. वह अभिक्रिया, जिसमें ऐल्कीन से जल के योग द्वारा ऐल्कोहॉल बनता है, कहलाती है-
(1) हाइड्रोजनीकरण
(2) जलयोजना
(3) जल-अपघटन
(4) संघनन।
उत्तर:
(2) जलयोजना

53. निम्न में से किस प्रकार की समावयवता ऐल्कीन में नहीं पायी जाती है-
(1) श्रृंखला समावयवता
(2) ज्यामितीय समावयवता
(3) मध्यावयवता
(4) स्थान समावयवता।
उत्तर:
(3) मध्यावयवता

54. ऐल्कीनों का सामान्य सूत्र है-
(1) CnH2n + 1
(2) CnH2n
(3) CnH2n + 2
(4) CnH2n – 2
उत्तर:
(3) CnH2n + 2

55. प्रोपिलीन में C-2 कार्बन परमाणु पर किस प्रकार का संकरण है-
(1) sp
(2) sp2
(3) sp3
(4) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(4) इनमें से कोई नहीं

56. CH3-CH = CH2 में C-C-C कोण कितना है-
(1) 90°
(2) 109.5°
(3) 120°
(4) 180°
उत्तर:
(3) 120°

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

57. निम्न में से कौन-सी ऐल्कीन ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करती है-
(1) 1-ब्यूटीन
(2) 2-ब्यूटीन
(3) 2-मेथिलप्रोपीन
(4) प्रोपीन।
उत्तर:
(2) 2-ब्यूटीन

58. एथिलीन डाइब्रोमाइड के विहाइड्रोहैलोजनीकरण पर प्राप्त होता है-
(1) ऐथीन
(2) ऐथाइन
(3) ब्यूटाइन
(4) प्रोपाइन।
उत्तर:
(2) ऐथाइन

59. ऐथिलीन इस श्रेणी का सदस्य है-
(1) ऐल्काइन
(2) ओलिफिन
(3) पैराफिन
(4) ऐमीन।
उत्तर:
(2) ओलिफिन

60. ऐधिलीन निम्नलिखित किसके निर्जलीकरण पर प्राप्त होती है-
(1) CH3OH
(2) C2H5OH
(3) प्रोपिल ऐल्कोहॉल
(4) ऐथिल ऐसीटेट।
उत्तर:
(2) C2H5OH

61. ऐथिल ऐल्कोहॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म किया जाता है। प्राप्त पदार्थ है-
(1) CH3COOC2H5
(2) C2H6
(3) C2H4
(4) C2H2
उत्तर:
(3) C2H4

62. निम्न में से कौन-सा क्षारीय KMnO4 का रंग नष्ट करता है-
(1) C3H8
(2) C2H4
(3) CH4
(4) CCl4
उत्तर:
(2) C2H4

63. CH3CH = CH.CHO निम्न के अनुप्रयोग द्वारा CH3CH = CH-COOH में ऑक्सीकृत हो सकता है-
(1) भारीय परमैगनेट
(2) अमोनीकृत सिल्वर नाइट्टेट
(3) सेलीनिमय द्वाओक्साएड
(4) ऑस्मियम टेट्राऑक्साइह।
उत्तर:
(2) अमोनीकृत सिल्वर नाइट्टेट

64. ऐोयीन में H-C-H कोण है, लगभग-
(1) 90°
(2) 60°
(3) 180°
(4) 120°
उत्तर:
(4) 120°

65. ऐंघिलीन में कार्बन परमाणुओं के मध्य है-
(1) दो पाई बन्ध
(2) एक सिग्मा तथा एक पाई बन्ध
(3) दो सिम्मा बन्य
(4) एक सिग्मा तथा दो पाई बन्ध
उत्तर:
(2) एक सिग्मा तथा एक पाई बन्ध

66. C4H8 अणुसूत्र के कितने संरचनात्मक समावयवी है-
(1) 2
(2) 3
(3) 4
(4) 5
उत्तर:
(3) 4

67. 2 -ब्यूटीन में कितने समावयवी होते हैं-
(1) 1
(2) 2
(3) 3
(4) 4
उत्तर:
(2) 2

68. ऐेयेन, ऐेंिलीन तथा ऐेसीटिलीन श्रेणी में C-H बन्ध कर्जा होती है-
(1) तीनों यौगिकों में समान
(2) ऐथेन में सर्वाधिक
(3) ऐधिलीन में सर्वाधिक
(4) ऐसीटिसीन में सर्थांकिक
उत्तर:
(4) ऐसीटिसीन में सर्थांकिक

69. “योग अणु का ऋणात्मक भाग उस C- परमाणु से जुड़ता है जो कम H – परमाणुओं से जुड़ा है।” यह कथन कहलाता है—
(1) थीले सिद्धान्त
(2) बायर का विकृति सिद्धान्त
(3) मारकोनीकॉफ का नियम
(4) परॉक्साइड का प्रभाव ।
उत्तर:
(3) मारकोनीकॉफ का नियम

70. —C ≡ C— उपस्थित है—
(1) एथीन में
(2) ब्यूटीलीन में
(3) एथाइन में.
(4) ग्लिसरीन में।
उत्तर:
(3) एथाइन में.

71. निम्न में से कौन-सा सोडियम के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन दिस्थापित करता है?
(1) CH4
(2) C2H6
(3) C2H4
(4) C2H2
उत्तर:
(4) C2H2

72. आइसोप्रोपीन पदार्थों का उपयोग इनके संश्लेषण में किया जाता
(1) प्रोपेन
(2) द्रव ईंधन
(3) रबड़
(4) पेट्रोन।
उत्तर:
(3) रबड़

73. निम्न में किसमें क्लोरीन की सर्वाधिक प्रतिशत मात्रा है ?
(1) पायरीन
(2) पी. वी. सी
(3) क्लोरल
(4) ऐथिलिडीन क्लोराइड
(5) गैर्मेक्सीन।
उत्तर:
(2) पी. वी. सी

74. HBr का एन्टीमारकोनीकॉफ योग किसमें सम्भव नहीं है?
(1) प्रोपीन
(2) ब्यूटीन 1
(3) ब्यूट-2 ईन
(4) पेण्ट-2 ईन।
उत्तर:
(3) ब्यूट-2 ईन

75. अमोनियामय AgNO3 से अभिक्रिया करके ऐसीटिलीन देता है-
(1) सिल्वर दर्पण
(2) सिल्वर धातु
(3) सिल्वर ऐसीटेट
(4) सिल्वर ऐसीटिलाइड।
उत्तर:
(4) सिल्वर ऐसीटिलाइड।

76. ऐल्कोहॉलीय NaOH निम्न में किसका विशिष्ट अभिकर्मक है?
(1) निर्जलीकरण
(2) विहाइड्रोजनीकरण
(3) विहाइड्हैलोजनीकरण
(4) विहैलोजनीकरण ।
उत्तर:
(3) विहाइड्हैलोजनीकरण

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

77. ऐसीटिलीन का औद्योगिक निर्माण निम्न में से किसके वातवरण में ग्रेफाइट इलैक्ट्रोड में विद्युत प्रवाहित करके किया जाता है?
(1) वायु
(2) N2
(3) H2
(4) CO2
उत्तर:
(3) H2

78. टेफ्लॉन इस एकलक का बहुलक है-
(1) मोनोफ्लुओरो ऐथेन
(2) डाइफ्लुओरो ऐथेन
(3) टेट्राफ्लुओरो ऐथीन
(4) टेट्राफ्लुओरो ऐथेन ।
उत्तर:
(3) टेट्राफ्लुओरो ऐथीन

79. एथिलीन में कौन-सा कोण लगभग सही है ?
(1) 60°
(2) 120°
(3) 90°
(4) 109.5°
उत्तर:
(2) 120°

80. 1, 3-ब्यूटाडाईन की ब्रोमीन के साथ संघनन अभिक्रिया से प्राप्त होगा—
(1) केवल 1, 2 संघनन उत्पाद
(2) केवल 1 4 संघनन उत्पाद
(3) केवल 1, 2 तथा 1 4 संघनन उत्पाद
(4) इनमें से कुछ नहीं।
उत्तर:
(3) केवल 1, 2 तथा 1 4 संघनन उत्पाद

81. प्रोपाइन तथा प्रोपीन को पहचान सकते हैं-
(1) सान्द्र H2SO4 द्वारा
(2) CCl4 में Bl2 द्वारा
(3) तनु KMnO4 द्वारा
(4) अमोनिया में AgNO3 द्वारा।
उत्तर:
(4) अमोनिया में AgNO3 द्वारा।

82. टेट्राब्रोमोऐथेन को जिंक चूर्ण के साथ गर्म करने पर प्राप्त होता है.—
(1) ऐथेन
(2) एथीन
(3) एथाइन
(4) एथिल ब्रोमाइड ।
उत्तर:
(3) एथाइन

83. अम्लीय हाइड्रोजन उपस्थित होते हैं—
(1) ऐथेन में
(2) एथीन में
(3) एथाहन में
(4) बेन्जीन में
उत्तर:
(3) एथाहन में

84. सल्फर मोनोक्लोराइड एथिलीन से अभिक्रिया करके उत्पन्न करता हैं—
(1) मस्टर्ड गैस
(2) ल्यूसाइट
(3) सैकरीन
(4) थायोफीन
उत्तर:
(1) मस्टर्ड गैस

85. बेन्जीन का नाइट्रीकरण है
(1) नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन
(2) इलेक्ट्रॉन-स्नेही प्रतिस्थापन
(3) नाभिक स्नेही योग
(4) इलेक्ट्रॉन स्नेही योग
उत्तर:
(2) इलेक्ट्रॉन-स्नेही प्रतिस्थापन

86. बेन्जीन में σ एवं π-इलेक्ट्रॉनों की संख्या है
(1) 24 σ इलेक्ट्रॉन एवं 6π इलेक्ट्रॉन
(2) 12 σ इलेक्ट्रॉन एवं 6π इलेक्ट्रॉन
(3) 12 σ इलेक्ट्रॉन एवं 3π इलेक्ट्रॉन
(4) 24 σ इलेक्ट्रॉन एवं 3π इलेक्ट्रॉन
उत्तर:
(1) 24 σ इलेक्ट्रॉन एवं 6π इलेक्ट्रॉन

87. निम्न में सबसे अधिक शक्तिशाली मेटा दैशिक है—
(1) -NO2
(2) -SO3H
(3) -CHO
(4)-COOH.
उत्तर:
(1) -NO2

88. BHC में द्विबन्धों की संख्या है—
(1) 1
(2) 2
(3) 3
(4) शून्य ।
उत्तर:
(4) शून्य ।

89. फ्रीडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया में शुष्क ऐल्यूमिनियम क्लोराइड का
कार्य है—
(1) जल अवशोषित करना
(2) हाइड्रोक्लोरीन अम्ल अवशोषित करना
(3) इलेक्ट्रॉन स्नेही उत्पन्न करना
(4) नाभिक स्नेही उत्पन्न करना ।
उत्तर:
(3) इलेक्ट्रॉन स्नेही उत्पन्न करना

90. HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 3
(1) बुर्टन-फिटिंग अभिक्रिया
(2) कोल्बे अभिक्रिया
(3) फ्रीडेल-क्राफ्टस अभिक्रिया
(4) रोजेनमुन्ड अभिक्रिया।
उत्तर:
(3) फ्रीडेल क्राफ्टस अभिक्रिया

91. बेन्जीन अणु में कार्बन परमाणुओं की संकरण अवस्था होती है-
(1) sp
(2) sp2
(3) sp3
(4) sp2 एवं sp3
उत्तर:
(2) sp2

92. निम्न यौगिकों की इलेक्ट्रॉन स्नेही से अभिक्रिया का सही क्रम है-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 4
(1) II > III > I
(2) III > I > II
(3) I > II > III
(4) I > II > III
उत्तर:
(3) I > II > III

93. बेन्जीन अणु में C—C दूरी है
(1) 1.54A°
(2) 1.39 A
(3) 1.34 A°
(4) 1.20 A°
उत्तर:
(2) 1.39 A

94. बेन्जीन के नाइट्रीकरण के लिए नाइट्रीकरण मिश्रण देता है
(1) NO3
(2) NO2+
(3) NO2
(4) NO2
उत्तर:
(3) NO2

95. सांद्र HNO3 एवं सांद्र H2SO4 के मिश्रण के उपयोग से बेन्जीन के द्वारा नाइट्रोबेन्जीन बनाई जा सकती है, नाइट्रीकरण मिश्रण में HNO3 कार्य करता है—
(1) क्षार की तरह
(2) अम्ल की तरह
(3) अपचायक की तरह
(4) उत्प्रेरक की तरह।
उत्तर:
(1) क्षार की तरह

96. बेन्जीन की खोज की थी
(1) केवेन्डिस ने
(2) फैराडे ने
(3) बर्जीलियमस ने
(4) बोहलर ने
उत्तर:
(2) फैराडे ने

97. बेन्जीन में C—C—C बन्ध कोण होता है लगभग
(1) 90°
(2) 109°
(3) 120°
(4) 108
उत्तर:
(3) 120°

98. निम्न से कौन-सा समूह ऑर्थो पैरा दैशिक है
(1) -NO2
(2) -CN
(3)-COOH
(4) -OH.
उत्तर:
(4) -OH.

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

99. बेन्जीन AICI3 की उपस्थिति में CH3COCl के साथ देती है
(1) C6H5Cl
(2) C6H5CO2Cl
(3) C6H5 – CH3
(4) C6H5 – COCH3
उत्तर:
(4) C6H5 – COCH3

100. निम्न में से किसमें कार्बोक्सिलिक समूह नहीं हैं-
(1) बेन्जोइक अम्ल
(2) पिकरिक अम्ल
(3) ऐस्परिन
(4) ऐथेनोइक अम्ल ।
उत्तर:
(2) पिकरिक अम्ल

101. बेन्जेल्डिहाइड एवं फार्मेल्डिहाइड का मिश्रण जलीय NaOH के साथ गर्म करने से देता है—
(1) बेन्जिल ऐल्कोहॉल एवं सोडियम
(2) सोडियम बेन्जोएट एवं मेथिल ऐल्कोहॉल
(3) सोडियम बेन्जोएट एवं सोडियम फॉर्मेट
(4) बेन्जिल ऐल्कोहॉल एवं मैथिल ऐल्कोहॉल |
उत्तर:
(1) बेन्जिल ऐल्कोहॉल एवं सोडियम

102. निम्न यौगिकों में इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन के प्रति क्रियाशीलता का घटता क्रम होता है—
C6H5—CH3, C6H6. C6H5 – CO – CH3, C6H5 – CF3
(1) III > I > II > IV
(2) IV > I > II > III
( 3 ) I > II > III > V
( 4 ) II > I > III > IV
उत्तर:
(1) III > I > II > IV

103. टॉलूईन के फ्रीडेल- क्राफ्ट संश्लेषण में शुष्क AlCl3 के अतिरिक्त अन्य अधिकर्मक होते हैं-
(1) C6H6 + CH4
(2) C6H6 + CH3Cl
(3) C6H5Cl + CH3Cl
(4) C6H5Cl + CH4
उत्तर:
(2) C6H6 + CH3Cl

104. सोडियम बेन्जोएट एवं सोडालाइम का मिश्रण गर्म करने पर देता
(1) बेन्जीन
(2) मेथेन
(3) सोडियम बेन्जोएट
(4) कैल्सियम बेन्जोएट ।
उत्तर:
(1) बेन्जीन

105. HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 5
(1) बेन्जोइक अम्ल
(2) सेलिसिलिक अम्ल
(3) फीनॉल
(4) ऐनिलीन।
उत्तर:
(4) ऐनिलीन।

106. फीनॉल Zn चूर्ण के साथ आसवन पर देता है—
(1) C6H6
(2) C6H5 – C6H5
(3) C6H12
(4) C6H5 – O – C6H5
उत्तर:
(1) C6H6

107. इलेक्ट्रान स्नेही नाइट्रीकरण के लिए सबसे अधिक क्रियाशील यौगिक
(1) बेन्जीन
(2) नाइट्रोबेन्जीन
(3) बेन्जोइक अम्ल
(4) टॉलूईन।
उत्तर:
(4) टॉलूईन।

108. निम्न में से किस पर इलेक्ट्रॉन स्नेही आक्रमण सबसे आसान होता
(1) C6H6
(2) C6H5 – Cl
(3) C6H5OH
(4) C6H5 – CH3
उत्तर:
(3) C6H5OH

109. C7H5OH से बेन्जीन रिंग युक्त कितने समायवी बनते हैं-
(1) 4
(2) 5
(3) 6
(4) 7
उत्तर:
(2) 5

110. क्रोमिल क्लोराइड द्वारा टॉलूईन के बेन्जोल्डिहाइड में ऑक्सीकरण को कहते हैं—
(1) रोजेनमुन्ठ अभिक्रिया
(2) बुर्ज अभिक्रिया
(3) इटार्ड अभिक्रिया
(4) फिटिंग अभिक्रिया ।
उत्तर:
(3) इटार्ड अभिक्रिया

111. HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 6
(1) 4- नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन
(2) 1 नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(3) 3- नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(3) 3- नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन

112. कार्बोक्सिलिक अम्ल है-
(1) फीनॉल
(2) फेनिल बेन्जोएट
(3) फेनिल ऐसीटेट
(4) सैलोल।
उत्तर:
(1) फीनॉल

अति लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी ऐल्केन का पुन: संभवन क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
किसी ऐल्केन की ऑक्टेन संख्या में वृद्धि करने के लिए पुन: संभवन किया जाता है। पुनः संभवन क्रिया उच्च ताप व उच्च दाब (28-50 वायुमण्डल दाब) पर होती है।

प्रश्न 2.
2, 2-डाइमेथिल ब्यूटेन में कितने द्वितीयक कार्बन हैं ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 7

प्रश्न 3.
ऐथेन के ग्रस्त तथा सांतरित रूप साधारण ताप पर पृथक्कृत क्यों नहीं किए जा सकते हैं ?
उत्तर:
इन दोनों रूपों की ऊर्जाओं में अन्तर कम होने के कारण इन्हें साधारण ताप पर पृथक्कृत करना सम्भव नहीं होता।

प्रश्न 4.
ऐथेन के कितने संरूपण सम्भव हैं?
उत्तर:
असंख्य।

प्रश्न 5.
संरूपण क्या हैं?
उत्तर:
आबन्धों के विदलन के बिना एकल आबन्ध के परितः घूर्णन अथवा मरोड़न से प्राप्त संरचनाएँ संरूपण कहलाती हैं।

प्रश्न 6.
मेथेन को एथेन में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 8

प्रश्न 7.
1, 2-डाइक्लोरोऐथेन के सांतरित रूप का न्यूमैन प्रक्षेपण खींचिए।
उत्तर-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 9

प्रश्न 8.
हाइड्रोकार्बन का मुब्य स्तोत बताइए।
उत्तर:
हाइड्रोकार्बन का मस्य रोत पेट्रोलियम है। घेट्टोलिखम चन्तनील विशेथ गन्थयकक्त गादे द्रव के रुप में पृथ्वी के नीचे कुछ विशेष स्तरों में पाबा जाता है। बह कार्बनिक पद्वार्थों के दौर्थकाल हक पृथ्वी के अन्दर द्वे रहने के कारण घनती है। पैट्टोलियम में भारी मात्रा में अनेक हाइड्रोकार्बन होते है। इन हाइड्रोकार्जन के साथ कूछ सोटोटिक बौगिक और नाइट्टोजन तथा सल्फर अदि की भी अल्प-मात्रा पाई जाती है। पेट्रोलियम के शोषन से प्राप्त कब्चे तेल्ल के प्रभाजी आसबन से हाइड्रोकार्बन प्राप्त हते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 10

प्रश्न 9.
सान्द्र H2SO4 ऐेघेन को सुखाने के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है, परन्तु ऐेखिलीन के लिए नही, समझाइए।
उत्तर:
क्यॉंकि ऐेषेन H2SO4 से कोई अभिक्रिजा नहाँ करती है, गबकि एधिलीन बान्द्र H2SO4 से अधिक्रिया करके एधिल हडड़्रोजन सल्फेट बनाती है।

प्रश्न 10.
ऐल्क्केन की क्रियाशीलता एल्कीनों एवं एल्काइ़ोनों से कम क्यों होती है।
उत्तर:
क्योंकि इनके C-C तथा C-H बन्ध क्रमशः अधुवीय एवं लगभग अपुवीय होते हैं। अतः भुवी आक्रमणकारी अभिकर्यक इन पर अक्रमण नहीं कर सकता है त्रबकि द्विबन्ध व त्रिबन्ध के π-इस्लेक्टॉन E+ को आकाषित कर लेते हैं।

प्रश्न 11.
मेखेन के सभी C-H बन्ध समान होते है, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि मेयेन में कार्बन परमाणु sp3 संकरित होता है तथा सभी C-H बन्ष sp+ – 5 के अतिव्यापन से बने सिम्मा बन्ध होते हैं।

प्रश्न 12.
निओपेन्टेन केवल एक मोनो प्रतिस्थापन समाबयवी बेता है, बस्यों ?
उत्तर:
क्योंकि निओपेन्टेन [(CH3)4C] में उप्वस्वित सभी H समान 1° के होते है।

प्रश्न 13.
यह्छपि F की विद्युत ऋणात्मकता Cl से अधिक है, किन्यु CH3Cl का द्विशुव आघूर्ण CH3F से अधिक है, क्यों ?
उत्तर:
क्चोंकि C-Cl बन्ध की लम्बाई अधिक हेती है।

प्रश्न 14.
COOH समूह के विकार्थोक्सिलीकरण अभिक्रिया में प्रयुक्त होने वासा अभिकर्मक लिखें।
उत्तर:
सोडा लाइम (NaOH + CaO) ।

प्रश्न 15.
क्या CH4 एक रेखीय अणु है।
उत्तर:
नहीं।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 16.
मेश्थेन के H-C-H कोण का मान बात्तए।
उत्तर:
109°28′

प्रश्न 17.
ऐल्केनों के दो अन्य सामान्य नाम बातइए।
उत्तर:

  1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन,
  2. पैराफीन।

प्रश्न 18.
उन ऐल्केनों के नाम लिखें जिनमें कोई समावयवता नहीं होती।
उत्तर:
मेथेन, ऐथेन, प्रोपेन।

प्रश्न 19.
मार्श गैस का रासायनिक नाम लिखें।
उत्तर:
मेथेन (CH4)।

प्रश्न 20.
कृत्रिम कपूर के रूप में प्रयोग होने वाले रसायन के सूत्र लिखें।
उत्तर:
C2Cl6 हेक्साक्लोरोऐोथेन।

प्रश्न 21.
मेध्रेन की खोज किसने की ?
उत्तर:
वोल्गा ने।

प्रश्न 22.
सूर्य के प्रकाश में एल्केनों के हैलोजनीकरण करने के लिए क्लोरीन, ब्रोमीन एवं आयोडीन में सर्बाधिक क्रियाशील हैलोजन कौन है?
उत्तर:
क्लोरीन।

प्रश्न 23.
ऐल्केन के उस न्यूनतम समजात्त का नाम लिखें जो प्रकाश समावयवता प्रदशिंत करता है
उत्तर:
3-मेधिरन हेक्सेन।

प्रश्न 24.
वे कौन से एल्केन हैं, जो किसी भी प्रकार की समावयवता को प्रदर्शित नहीं करते हैं?
उत्तर:
मेथेन, ऐथेन तथा प्रोपेन।

प्रश्न 25.
ऐल्केन की क्रियाशीलता एल्कीन तथा एल्काइनों से कम होती है। क्यों ?
उत्तर:
ऐल्केन में C-C तथा C-H आबन्ध लगभग अध्रुवीय होते है। जिसके कारण ध्रुवी आक्रमणकारी अभिकमक इन पर आक्रमण नहीं कर सकता है, जबकि प्विबन्ध व त्रिवन्ध के π-द्लेक्ट्रॉन E+ को आकर्षित कर लेते हैं।

प्रश्न 26.
सान्द्र H2SO4 के द्वारा एथेन को शुष्क किया ज्ञा सकता है, परन्तु एमीन को नहीं। क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि ऐथीन H2SO4 में अवशोषित हो जाती है तथा एथिलीन हाइड्रोजन सल्फेट बनाती है।

प्रश्न 27.
मेथेन के सभी C-H बन्ध समान होते हैं, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि मेथेन में कार्बन परमाणु sp2 संकरित होता है तथा सभी C-H बन्ध sp3s के अतिव्यापन से बने सिग्मा बन्ध होते हैं।

प्रश्न 28.
ब्यूटेन को घरेलू ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं, क्यों ?
उत्तर:
ब्यूटेन के दोनों समावयवी (n वे आइसो) आसानी से द्रवीकृत हो जाते हैं तथा इन्हें सिलिण्डर में रखा जा सकता है। इसके अलावा सिलिण्डर को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।

प्रश्न 29.
L.P.G. गैस के प्रमुख घटक बताइये।
उत्तर:
यह द्रवित प्रोपेन तथा ब्यूटेन का मिश्रण होती है।

प्रश्न 30.
कैलोरी गैस के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
कैलोरी गैस द्रवित ब्यूटेन (n-ब्यूटेन + आइसो ब्यूटेन) का मिश्रण होती है।

प्रश्न 31.
कम तापमान वाले तापमापी में कौन-सी ऐल्केन प्रयुक्त होती है?
उत्तर:
कम तापमान वाले तापमापी में पेन्टेन (C5H12) प्रयुक्त होती है।

प्रश्न 32.
लिण्डलार अभिकर्मक किसे कहते हैं?
उत्तर:
पैलेडियम तथा कार्बन Pd/C को लिण्डला उत्प्रेरक कहते हैं।

प्रश्न 33.
ब्यूटेन के दहन की क्रिया की समीकरण दीजिये।
उत्तर:
\(\mathrm{C}_4 \mathrm{H}_{10(\mathrm{~g})}+\frac{13}{2} \mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})} \rightarrow 4 \mathrm{CO}_{2(\mathrm{~g})}+5 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(3)} \Delta \mathrm{H}=-n \mathrm{e}\)

प्रश्न 34.
ऐल्केन के दहन का सामान्य सूत्र दें।
उत्तर:
\(\mathrm{C}_n \mathrm{H}_{2 n+2}+\left(\frac{3 n+1}{2}\right) \mathrm{O}_2 \rightarrow n \mathrm{CO}_2+(n+1) \mathrm{H}_2 \mathrm{O}\)

प्रश्न 35.
प्रोपेन के नाइट्रीकरण से कौन-कौन से उत्पाद बनाते है?
उत्तर:
नाइट्रो मेथेन, नाइट्रो ऐथेन, 1-नाइट्रो प्रोपेन तथा 2-नाइट्रो प्रोपेन बनती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 11

प्रश्न 36.
ऐल्केन के नियन्त्रित ऑक्सीकरण की क्रिया दीजिये तथा बनने वाले उत्पाद का नाम भी बताइये।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 12

प्रश्न 37.
निओपेन्टेन केवल एक मोनो प्रतिस्थापन समावयवी देता है, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि निओ पेन्टेन [(CH3)4C] में उपस्थित सभी H समान (1° की) होती हैं।

प्रश्न 38.
n-पेन्टेन, आइसो ब्यूटेन व निओपेन्टेन के सूत्र लिखें।
उत्तर:
n-पेन्टेन-CH3CH2CH2CH2CH3
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 13

प्रश्न 39.
2-मेथिल ब्यूटेन में 1°, 2°, 3° हाइड्रोजन प्रदर्शित करें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 14

प्रश्न 40.
n-पेन्टेन तथा आइसो पेन्टेन में से किसका क्वधनांक उच्च है ? और क्यों ?
उत्तर:
n-पेन्टेन का क्वधनांक उच्च होता है क्योंकि इसका पृष्टीय क्षेत्रफल अधिक होता है।

प्रश्न 41.
तेलों के हाइड्रोजनीकरता से वनस्पति घी बनाने में किस ऊप्रेरक का उप्रयोग किया जाता है ?
उत्तर:
वेलों के हाइड्रोजनीकरण से वनस्पति घी के निर्माण की क्रिया निकिल उत्प्रेरक के माध्यम में होती है।

प्रश्न 42.
मेथेन और ऑक्सीजन के मिश्रण को गर्म MoO पर प्रवाहित करने से बनने वाले उत्पाद का नाम बताइये।
उत्तर:
मेथेन और औंक्सीजन के मिश्रण को गर्म MoO पर प्रवाहित करने पर मेथेनेल (HCHO) प्राप्त होता है।

प्रश्न 43.
C8H18 आणिबक सूत्र वाले उस ऐल्केन की संरचना बताइये जो क्लोरोनीकरण कराने पर मात्र एक मोनोक्लोरो व्युत्पन्न घनाती है।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 15

प्रश्न 44.
ऐथेन में C-C एकल बन्ध का घूर्णन मुक्त नहीं होता है। क्यों ?
उत्तर:
ऐेथेन में C-C एकल बन्ध का यूर्णन मुक्त नहीं होता है। ऐसा प्रतिकर्षण अन्योन्य क्रिया के कारण होता है। यह घूर्णन 1 से 20kJ mol-1 तक की ऊर्जा द्वारा बाधित ह्रेता है। यहाँ पर प्रतिकर्षण के बावनूद C-C एकल आबन्ध में घूर्णन होता हैं जिसके फलस्वरूप असंख्य संरूपण सम्भव हैं। इन असंख्य संरूपणों को संरूपणीय समावयव या घूर्णी समावयव भी कहते है।

प्रश्न 45.
नाभिकस्नेही व इलेक्ट्रॉनस्नेही स्पीशीज को छाँटें।
(1) H3CO,
(2) H3 C-C-O-,
(3) Cl,
(4) Cl2 C:,
(5) (H3C)3C+,
(6) Br,
(7) H3COH,
(8) R-NH-R
उत्तर:
नाभिक-स्नेही-
(1) H3CO-
(2) IMG – 16
(3) CH3-O-H
(4) RNHR
इलेक्ट्रॉन स्नेही- (1) Cl, (2) Cl2, C:, (3) (H3C)3 C+

प्रश्न 46.
2-मेथिल प्रोपेन के मोनोक्लोरीनीकरण के दौरान बनने वाले दोनों हाइड्रोकार्बन मूलक को लिखें व बतायें कि इनमें से कौन-सा अधिक स्थायी है ?
उत्तर:
2-मेथिल प्रोपेन से निम्न दो मूलक बनते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 17
मूलक (I) का स्थायित्व मूलक (II) से अधिक है क्योंकि मूलक (I) तृतीयक है जबकि मूलक (II) द्वितीयक है।

प्रश्न 47.
ऐथिलीन के प्रमुख उपयोगों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
ऐथिलीन का प्रयोग निम्नलिखित कार्यों में होता है-

  1. ग्लाइकॉल, ऐथिल, ऐल्कोहॉल, फॉर्मेल्डिहाइड, ऐथेन आदि के बनाने में।
  2. कच्चे फलों को कृत्रिक विधि से पकाने में।
  3. पॉलिथीन बहुलक बनाने में।
  4. निश्चेतक के रूप में तथा युद्ध में मारक (killer) मस्टर्ड गैस बनाने में।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 48.
किसी कार्बनिक यौगिक में आप असंतृप्तता की उपस्थिति की जाँच कैसे करेंगे?
उत्तर:
ब्रोमीन जल मिलाकर; यदि ब्रोमीन जल मिलाने पर यह रंगहीन हो जाता है तो यौगिक असंतृप्त है।

प्रश्न 49.
ऐल्कीन के प्रति HCl, HBr, HI तथा HF की क्रियाशीलता का घटता क्रम लिखिए।
उत्तर:
HI > HBr > HCl> HF

प्रश्न 50.
क्या होता है जब ऐथेनॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ 443K पर गर्म किया जाता है?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 18

प्रश्न 51.
HCI, HBr, HI एवं HF को एल्कीनों के साथ क्रियाशीलता के घटते क्रम में लिखें।
उत्तर:
HI > HBr > HCl > HF

प्रश्न 52.
ऐधिलीन और हाइपोक्लोरस अम्ल की अभिक्रिया लिखें।
उत्तर:
CH2 = CH2 + HOCl → HOCH2.Ch2Cl

प्रश्न 53.
उन ओलिफिनों के सूत्र लिखें जो ओजोनीकरण पर निम्न उत्पाद देती हों-
(1) 2-पेन्टेनॉन एवं ऐसीटेल्डिहाइड
(2) 2-पेन्टेनॉन केवल
(3) ऐसीटोन एवं 2-मेथिल प्रोपेनल
(4) ऐथेनेल एवं मेथेनल
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 19

प्रश्न 54.
हाइड्रोकार्बन का सूत्र C3H6 है। इसकी संरचना बताओ यदि –
(1) यह बॉयर अभिकर्मक का रंग उड़ा देती है।
(2) यह बॉयर अभिकर्मक का रंग नहीं उड़ाती है।
उत्तर:
(1) CH3CH = CH2
प्रोपीन
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 20

प्रश्न 55.
मस्टर्ड गैस का सूत्र लिखो।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 21

प्रश्न 56.
ऐथिलीन व ऐथेन में कैसे विभेद करेंगे ?
उत्तर:
ऐथिलीन बॉयर अभिकर्मक का रंग उड़ा देती है, जबकि ऐथेन नहीं।

प्रश्न 57.
2-क्लोरोप्रोपेने के समपक्ष एवं विपक्ष ज्यामितीय समावयवती प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 22

प्रश्न 58.
एक ऐल्कीन C4H8,HBr से योगात्मक अभिक्रिया पर ऑक्साइड की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति में एक ही उत्पाद देती है। एल्कीन बताओ।
उत्तर:
ऐल्कीन सममिति होनी चाहिए। अतः एल्कीन होगी,
CH3CH = CH-CH3

प्रश्न 59.
ऐल्कीन का सामान्य सूत्र लिखो।
उत्तर:
CnH2n

प्रश्न 60.
| के ओजोनीकरण से क्या प्राप्त होगा ?
उत्तर:
OHCCH2.CH2CHO.

प्रश्न 61.
ऐल्कीन में द्विआबन्ध की उपस्थिति की पहचान करने में प्रयुक्त हैलोजन का नाम बताइये।
उत्तर:
Br2

प्रश्न 62.
उस अभिक्रिया को बताइये जिसमें हैलोऐल्केन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म किया जाता है।
उत्तर:
विहाइड्रोहैलोजनीकरण।

प्रश्न 63.
ऐथाइन को एथीन में परिवर्तित करने के लिये प्रयुक्त होने वाले उत्त्रेरक का नाम बताइये।
उत्तर:
लिण्डलार उत्प्रेरक।

प्रश्न 64.
ब्यूट-2-ईन के ओजोनी अपघटन से प्राप्त होने वाले उत्पाद के नाम लिखें।
उत्तर:
केवल ऐथेनेल।

प्रश्न 65.
मारकोनीकॉफ नियम में प्रयुक्त क्रियाविधि की प्रकृति बताइये।
उत्तर:
मारकोनीकॉफ नियम में प्रयुक्त क्रियाविधि की प्रकृति आयनिक होती है।

प्रश्न 66.
ऐल्कीन में द्विआबन्ध की स्थिति कैसे निर्धारित करेंगे ?
उत्तर:
ओजोनी अपघटन के द्वारा।

प्रश्न 67.
क्या प्रोपीन से HCl के योग में परॉक्साइड प्रभाव प्रभावी है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 68.
तनु क्षारीय KMnO4 क्या कहलाता है?
उत्तर:
बेयर अभिकर्मक।

प्रश्न 69.
मारकोनीकॉफ का नियम बताइये।
उत्तर:
इसके अनुसार क्रियाकारक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु पर जाता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणु की संख्या न्यूनतम होती है।
उदाहरण:CH3—CH = CH2 + H – Cl→
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 23

प्रश्न 70.
खराश प्रभाव क्या कहा जाता है?
उत्तर:
इसे एन्टी मारकोनीकॉफ कहते हैं।
उदाहरण-
\(\mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2+\mathrm{H}-\mathrm{Br} \frac{\mathrm{O}_3}{\mathrm{H}_2 \mathrm{O}_2} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2 \mathrm{CH}_2 \mathrm{Br}\) 1- ब्रोमो प्रोपेन

प्रश्न 71.
प्रोपीन पर HBr का योग HCl तथा HI से भिन्न प्रकार का होता है?
उत्तर:
HBr बन्ध कमजोर होता है तथा यह टूट जाता है और मुक्त मूलक बनाता है जबकि HF, HCI तथा HI मुक्त मूलक नहीं बनाते हैं।

प्रश्न 72.
ऐथीन के बहुलकीकरण की व्याख्या करें।
उत्तर:
ऐथीन का बहुलकीकरण ताप द्वारा होता है तथा उत्पाद पॉलिथीन बनती है।
उदाहरण:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 24

प्रश्न 73.
निम्न अभिक्रिया को पूर्ण करें।
(1) \(\mathbf{C H}_3-\mathbf{C H}=\mathbf{C H}_2 \frac{(\mathrm{Ph}-\mathrm{CO}-\mathrm{O})_2}{\mathrm{HBr}}\)
(2) \(\mathbf{C H}_3-\mathbf{C H}=\mathbf{C H}_2 \stackrel{\mathrm{HBr}}{\longrightarrow}\)
उत्तर:
(1) \(\mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \frac{(\mathrm{PhCOO})_2}{\mathrm{HBr}} \rightarrow \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2 \mathrm{Br}\) एण्टी मारकोनीकॉफ का नियम

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 25

प्रश्न 74.
ऐल्कीन में ज्यामितीय समावयवता क्यों होती है ?
उत्तर:
ऐल्कीन में π-बन्ध पाया जाता है। इस π-बन्ध के परित: घूर्णन सम्भव नहीं होता। अतः ये ज्यामितीय समावयव बनते हैं।

प्रश्न 75.
ऐल्काइन से क्या समझते हैं?
उत्तर:
कार्बन – कार्बन त्रिबन्ध (C ≡ C) युक्त असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को ऐल्काइन कहते हैं।

प्रश्न 76.
ऐल्काइन का सामान्य सूत्र क्या है?
उत्तर:
CnH2n-2 अथवा R—C ≡ C—R

प्रश्न 77.
संगत ऐल्केन की अपेक्षा ऐल्काइनों में कितने हाइड्रोजन कम होते है ?
उत्तर:
चार हाइड्रोजन कम होते हैं।

प्रश्न 78.
ऐल्काइनों की संरचना कैसी होती है?
उत्तर:
ऐल्काइनों की संरचना रेखीय होती है।

प्रश्न 79.
ऐल्काइन श्रेणी का प्रथम सदस्य कौन-सा है ?
उत्तर:
ऐथाइन या ऐसीटिलीन

प्रश्न 80.
ऐल्काइनों में त्रिबन्ध से जुड़े दोनों कार्बनों में किस प्रकार का संकरण होता है?
उत्तर:
ऐल्काइनों में त्रिबन्ध से जुड़े दोनों कार्बन sp- संकरित होते है।

प्रश्न 81.
ऐल्काइनों में ≡ C—H (sp—s) बन्ध में $ लक्षण कितना होता है ?
उत्तर:
50%

प्रश्न 82.
त्रिबन्ध के प्रत्येक कार्बन परमाणु पर कितने असंकरित p-कक्षक होते हैं?
उत्तर:
दो असंकरित p-कक्षक py तथा pzहोते हैं।

प्रश्न 83.
त्रिबन्ध के प्रत्येक कार्बन परमाणु पर दो असंकरित p- कक्षक संपाश्विक अतिव्यापन से कितने बन्ध बनाते हैं?
उत्तर:
दो बन्ध बनाते हैं।

प्रश्न 84.
त्रिबन्ध के दोनों बन्धों की त्रिविम स्थिति किस प्रकार की होती है?
उत्तर:
प्रत्येक कार्बन पर उपस्थित दोनों p-कक्षक के अक्ष एक-दूसरे से तथा sp-संकरित कक्षकों से 90° का कोण बनाते हैं।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 85.
दो बन्ध के चारों पिण्डक नाभिकों को जोड़ने वाली रेखा के चारों ओर किस रूप से रहते हैं?
उत्तर:
दोनों बन्धों के चारों पिण्डक नाभिकों को जोड़ने वाली रेखा के चारों ओर एक बेलनाकार आच्छद (Cylindrical sheath) के रूप में स्थित रहते हैं।

प्रश्न 86.
CHI3 को चाँदी के साथ गर्म करने पर क्या पदार्थ बनता है?
उत्तर:
ऐसीटिलीन ।

प्रश्न 87.
अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन में ऐसीटिलीन प्रवाहित करने पर क्या बनता है?
उत्तर:
सिल्वर ऐसीटैलाइड बनता है।

प्रश्न 88.
ऐसीटिलीन के द्विलकीकरण से क्या बनता है?
उत्तर:
वाइनिल ऐसीटिलीन ।

प्रश्न 89.
प्रोपाइन के त्रिलकीकरण से क्या उत्पाद बनता है?
उत्तर:
मेसिटिलीन ।

प्रश्न 90.
कृत्रिम रबड़ का नाम है?
उत्तर:
नियोप्रीन रबड़ ।

प्रश्न 91.
ऐसीटिलीन के कार्बोनिलीकरण से क्या बनता है?
उत्तर:
ऐक्राइलिक अम्ल ।

प्रश्न 92.
C2H2 का क्रोमिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण करने पर क्या बनता है?
उत्तर:
ऐसीटिक अम्ल ।

प्रश्न 93.
ल्यूसाइट किस प्रकार प्राप्त होती हैं?
उत्तर:
ऐसीटिलीन पर आर्सेनिक क्लोराइड की क्रिया से ।

प्रश्न 94.
ऐथाइन को प्रोपाइन में परिवर्तित कीजिए ।
उत्तर:
HC ≡ CH+ NaNH2 → एथाइन
HC = CNa+ + Cl CH3 → HC ≡ C—CH3 + NaCl प्रोपाइन

प्रश्न 95.
ऐसीटिलीन के प्रमुख उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. ऐसीटिलीन से ऑक्सी-ऐसीटिलीन ज्वाला बनाई जाती है जिसे धातु को काटने एवं जोड़ने में प्रयोग किया जाता हैं
  2. कच्चे फलों को पकाने में।
  3. कार्बनिक यौगिकों; जैसे—बेन्जीन, कृत्रिम रबर, ऐसीटेल्डिहाइड, ऐसीटिक अम्ल आदि के निर्माण में ।

प्रश्न 96.
ऐसीटिलीन के H-अम्लीय होते हैं, किन्तु यह NaOH अथवा KOH से क्रिया नहीं करते हैं। क्यों ?
उत्तर:
यह अति दुर्बल अम्ल है तथा कुछ क्षारों जैसे- NaNH2 के साथ क्रिया करता है।

प्रश्न 97.
1-ब्यूटीन व 1- ब्यूटाइन में किसका द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है और क्यों ?
उत्तर:
CH3CH2C ≡ CH व CH3CH3CH = CH2 में 1 – ब्यूटाइन का आघूर्ण अधिक होता है क्योंकि C ≡ C में sp2 संकरित होता है। sp- संकरित कक्षकों की विद्युतऋणात्मकता अधिक होने के कारण इसके बन्ध अधिक ध्रुवित होते हैं।

प्रश्न 98.
C–C, C = C में, C ≡ C में, C ≡ C की बन्ध लम्बाई न्यूनतम होती है क्यों?
उत्तर:
C ≡ C में σ बन्ध छोटे आकार की sp-sp कक्षकों के बीच बनता है। s- चरित्र घटने से संकरित कक्षक छोटे होते हैं। तथा अतिव्यापन की प्रकृति अधिक होती है।

प्रश्न 99.
यद्यपि ऐसीटिलीन के C–H बन्ध ऊर्जा ऐल्केन व ऐल्कीन के C–H बन्ध से अधिक हाती है, किन्तु ऐसीटिलीन अम्लीय है, क्यों?
उत्तर:
चूँकि ऐसीटिलीन के CH बन्ध की ध्रुवता अधिक होती है। यह बन्ध sp3 व sp2 से अधिक विद्युत ऋणात्मक कक्षकों के s-कक्षक के साथ अतिव्यापन से बनता है।

प्रश्न 100.
इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिक्रियाओं में ऐल्कीनों की क्रियाशीलता, ऐल्काइनों से अधिक क्यों होती है। ?
उत्तर:
क्योंकि ऐल्काइनों पर E+ के योग से बनने वाला ब्रिजयुक्त कार्बोधनायन, ऐल्कीनों पर योग से बनने वाले कार्बोधनायन से कम स्थायी है।

प्रश्न 101.
CH2 = CH- अधिक क्षारीय है, HC ≡ C से क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि संयुग्नी अम्ल CH ≡ CH, CH2 = CH2 से अधिक अम्लीय है।

प्रश्न 102.
ऐसीटिलीन श्रेणी के प्रथम तीन सदस्यों के सूत्र लिखें ?
उत्तर:
C2H2, C3H4, C4H6

प्रश्न 103.
-C ≡ C—बन्ध को क्या कहते हैं?
उत्तर:
ऐसीटिलीनिक बन्ध ।

प्रश्न 104.
दो कार्बन परमाणुओं से युक्त हाइड्रोकार्बन ‘क’ बॉयर अभिकर्मक का रंग उड़ा देता है। Cu2cl2/ NH4OH में प्रवाहित करने पर यह अवक्षेप देता है। इसकी प्रकृति बताइए ?
उत्तर:
यह ऐसीटिलीन है तथा इसमें त्रिबन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 105.
ऐसीटिलीन के प्रमुख उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
PH3, H2S, AsH3, NH3 आदि।

प्रश्न 106.
ऐसीटिलीन की अम्लीय प्रकृति को सिद्ध करने के लिये एक रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
सोडियम के साथ यह ऐसीलाइड देता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 26

प्रश्न 107.
एथिलीन व ऐसीटिलीन कैसे विभेद करेंगे।
उत्तर:
सोडियम से क्रिया करके ऐसीटिलीन H2 मुक्त करती है, जबकि एथिलीन नहीं करती है।

प्रश्न 108.
त्रिक-बन्ध पर जुड़ा N परमाणु क्या कहलाता है तथा इसकी प्रकृति कैसी होती है?
उत्तर:
ऐसीटिलीनिक हाइड्रोजन अम्लीय प्रकृति ।

प्रश्न 109.
अधिकतम ऐसीटिलीनिक हाइड्रोजन की संख्या किसी यौगिक में कितनी हो सकती है तथा किसमें ।
उत्तर:
दो, ऐसीटिलीन में (CH ≡ CH)

प्रश्न 110.
मोनो प्रतिस्थापित एवं डाइप्रतिस्थापित ऐसीटिलीन को क्या कहते हैं? इनमें अम्लीय H कितने होते हैं।
उत्तर:
मोनो प्रतिस्थापित ऐसीटिलीन — RC ≡ CH—अम्लीय H = 1
डाई प्रतिस्थापित ऐसीटिलीन — RC ≡ CR—अम्लीय H = 0

प्रश्न 111.
ऐल्काइन का अपचयन NH3(3) में Na के साथ करने पर एक ट्रान्स- ऐल्कीन प्राप्त होती है क्या 2-ब्यूटाइन का अपचयन करने पर ब्यूटीन प्राप्त होगी।
उत्तर:
—CH3—C ≡ C—CH3
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 27
2- ब्यूटीन ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित कर सकती है।

प्रश्न 112.
ऐसीटिलीन से नाइट्रोबेन्जीन किस प्रकार बनायेंगे ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 28

प्रश्न 113.
ऐल्काइन ज्यामितीय समावयवता क्यों नहीं प्रदर्शित करती है ?
उत्तर:
ऐल्काइन की संरचना रेखीय होती है अतः यह ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित नहीं करती है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 114.
C5H10 के विभिन्न साइक्लो समावयव बनायें ।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 29
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH}+\mathrm{HC} \equiv \mathrm{CH} \frac{\mathrm{Cu}_2 \mathrm{Cl}_2}{\mathrm{CH}_4 \mathrm{OH}} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{CH}\) वाइनिल ऐसीटिलीन

प्रश्न 115.
संगलित वलय तथा विलगित वलय यौगिकों का एक-एक उदाहरण दीजिए तथा इनके संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
संगलित वलय उदाहरण नैफ्थलीन ।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 30
विलगित वलय उदाहरण – डाइफैनिल
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 31
डाइफैनिल

प्रश्न 116.
90% बेंजॉल के मुख्य घटक क्या-क्या हैं?
उत्तर:
बेंजीन (70%), टॉलूईन (24%), जाइलीन (थोड़ी मात्रा में ) ।

प्रश्न 117.
बेंजीन की संरचना बनाइए जो बायर और डेवार ने दी।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 32

प्रश्न 118.
बेंजीन, सल्फोनीकरण का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 33

प्रश्न 119.
बेन्जीन m-डाइनाइट्रोबेन्जीन तथा टॉलूईन में से किसका नाइट्रीकरण आसानी से होता है और क्यों ?
उत्तर:
टॉलूईन का नाइट्रीकरण सरलता से होता है, क्योंकि-CH3 समूह इलेक्ट्रॉन विमुक्त समूह होता है। यह बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन- घनत्व बढ़ा देता है।

प्रश्न 120.
बेन्जीन के ऐथिलीकरण में निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड के स्थान पर कोई दूसरा लुइस अम्ल सुझाइए ।
उत्तर:
फेरिक क्लोराइड (FeCl3) अन्य लुइस अम्ल है। जिसे प्रयोग किया जा सकता है यह इलेक्ट्रॉनस्नेही (C2H5+) उत्पन्न करने में सहायता करता है।

प्रश्न 121.
बेंजीन को ऐसीटोफीनोन में परिवर्तित करो ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 34

प्रश्न 122.
बेन्जीन से ब्रोमीन की संकलन अभिक्रिया कठिन क्यों होती है?
उत्तर:
π-इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकृत होने के कारण बेन्जीन से ब्रोमीन की संकलन अभिक्रिया कठिन होती है। इसमें परिशुद्ध द्विआबन्ध नहीं होते है।

प्रश्न 123.
क्या होता है जब बेन्जीन को सूर्य के प्रकार की उपस्थिति में क्लोरीन के अधिक्य से अभिकृत कराया जाता है। रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 35

प्रश्न 124.
बैन्जीन अंसतृप्त यौगिक होते हुये भी सामान्यतः योग अभिक्रियाएँ नहीं देता, क्यों?
उत्तर:
योग उत्पाद प्रति ऐरोमैटिक होने के कारण प्रतिस्थापन उत्पाद ( ऐरोमैटिक) से कम स्थायी होते हैं।

प्रश्न 125.
t- ब्यूटिल बैन्जीन, ऑक्सीकृत होकर बैन्जोइक अम्ल नहीं देता, क्यों?
उत्तर:
नाभिक से जुड़े C-परमाणु [-C(CH3)3] पर H-परमाणु नहीं है।

प्रश्न 126.
फेनिल समूह-1 प्रभाव प्रदर्शित करता है, किन्तु डाइफेनिल के दोनों नाभिक इलेक्ट्रॉन-स्नेही अभिक्रियाओं में बैन्जीन से अधिक क्रियाशील है, क्यों?
उत्तर:
फेनिल समूहों के M व + E प्रभाव के कारण।

प्रश्न 127.
साइक्लो ओक्टाटेटाईन, बैन्जीन से कम स्थायी क्यों है?
उत्तर:
हकेल के नियमानुसार, साइक्लो ओक्टा टेट्राईन प्रति ऐरामैटिक यौगिक है, जबकि बैन्जीन ऐरोमैटिक यौगिक है। अतः बेन्जीन अनुनाद प्रदर्शित करने के कारण अधिक स्थायी है।

प्रश्न 128.
फ्रीडल क्राफ्ट अभिक्रिया में मोनोएल्किल बैन्जीन बनाने के लिये बैन्जीन आधिक्य में लेते हैं, क्यों?
उत्तर:
बैन्जीन की कमी में बहुऐल्किलीकृत बैन्जीन प्राप्त होगी। अतः बहुऐल्किलीकरण को रोकने के लिये बैन्जीन को अधिक्य में लेते हैं।

प्रश्न 129.
बैन्जीन कपड़ों से वसा के दाग हटा देती है, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि वसा अध्रुवित विलायक बैन्जीन में विलेय है।

प्रश्न 130.
कमरे के ताप पर O हाइड्रॉक्सी-बैन्जेल्डिहाइड द्रव है, जबकि p-हाइड्रॉक्सी बैन्जेल्ड़हाइड उच्च गलनांक का ठोस है, क्यों ?
उत्तर:
p-हाइड्रॉक्सी बैन्जेल्ड़्ड़ाइड में अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बन्ध बनते है, जबकि O हाइड्रॉक्सी बैन्जेल्डिहाइड में अन्तः हाइड्रोजन बन्ध बनते हैं, जो क्षीण होते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 36

प्रश्न 131.
आर्थो एवं पैरा दैशिक प्रभाव वाले समूह बैन्जीन नाभिक की सक्रियता बढ़ा देते हैं, क्यों?
उत्तर:
ये समूह इलेक्ट्रॉन मुक्त करने वाले होते हैं, जिनकी उपस्थिति में बैन्जीन नाभिक पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है तथा इसकी सक्रियता बढ़ जाती है।

प्रश्न 132.
ऐरोमैटिक शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
उत्तर:
केकुले नै ।

प्रश्न 133.
एक यौगिक जलाने पर धुएँदार ज्वाला से जलता है। इसकी प्रकृति बताओ ?
उत्तर:
ऐरोमैटिक ।

प्रश्न 134.
बेन्जीन में C-C बन्ध की लम्बाई कितनी होती है।
उत्तर:
1.39A°।

प्रश्न 135.
नॉन-बैन्जीनाएड ऐरोमैटिक यौगिक क्या हैं?
उत्तर:
वे ऐरोमैटिक यौगिक जिनमें नाभिक नहीं होते हैं।

प्रश्न 136.
एक ऐरोमैटिक यौगिक जो धुएँदार ज्वाला से नहीं जलता, उसका नाम लिखें?
उत्तर:
बैन्जिल ऐल्कोहॉल |

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 137.
एरीन क्या हैं?
उत्तर:
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन ।

प्रश्न 138.
विषम चक्रीय ऐरोमैटिक यौगिक क्या हैं?
उत्तर:
वे ऐरोमैटिक यौगिक जिनके रिंग में कोई विषम परमाणु होता है। उदाहरणार्थ पिरिडीन ।

प्रश्न 139.
ऐरोमैटिक यौगिक किस प्रकार की अभिक्रियाएँ देते हैं।
उत्तर:
सामान्यतः इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ।

प्रश्न 140.
बैन्जीन की खोज किसने की।
उत्तर:
माइकल फैराडे ने।

प्रश्न 141.
B.H.C क्या है?
उत्तर:
बैन्जीन हैक्साक्लोराइड़ (B.H.C) एक कीटानाशक है।

प्रश्न 142.
आप कैसे सिद्ध करोगे कि
(i) बैन्जीन असंतृप्त यौगिक है।
(ii) इसमें तीन द्विबन्ध है।
(iii) ये बन्ध सामान्य द्विबन्ध से भिन्न हैं।
उत्तर:
(i) बेंजीन योग अभिक्रिया देता है।
(ii) यह अणु 3H2, 3Cl2 या 3O3 का योग करता है।
(iii) यह HOX या HX की अभिक्रियाओं को नहीं देता है।

प्रश्न 143.
बेन्जीन को निम्न में से कैसे परिवर्तित करोगे
(1) p- नाइट्रोनोमोबेन्जीन
(2) m-नाइट्रोनोमोबेन्जीन
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 37

प्रश्न 144.
निम्न यौगिकों को अभिक्रिया के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 38
उत्तर:
अभिक्रिया का घटता क्रम-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 39

प्रश्न 145.
अभिक्रिया पूर्ण करें-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 40
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 41

लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
1 मोल ब्यूटेन के पूर्ण दहन के लिए कितने मोल O2 की आवश्यकता होती है ?
उत्तर:
\(\frac { 13 }{ 2 }\) मोल O2 की
C4H10 + \(\frac { 13 }{ 2 }\) O2 → 4CO2 + 5H2O

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिक में 1°, 2°, 3° एवं 4° कार्बन छाँटिए।
(1) 3-ऐथिल-2-मेथिल हेक्सेन
(2) 2, 2, 4-ट्राईमेथिल पेन्टेन।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 42

प्रश्न 3.
क्या होता है जब-
(i) CH3COONa को सोड़ा लाइम के साथ गर्म करते हैं?
(ii) Al4C3 का जल अपघटन करते हैं?
(iii) मेथिल आयोडाइड को सोडियम व ईथर के साथ गर्म करते हैं?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 43

प्रश्न 4.
क्या होता है जब-
(i) ऐसीटिक अम्ल का उत्र्रेरकीय अपचयन कराया जाता है?
(ii) ऐल्केन को Cr2O3/Mo2O3 की उपस्थिति में गर्म किया जाता है।
(iii) कार्बन चूर्ण एवं हाइड्रोजन को Ni उत्त्रेरक की उपस्थिति में गर्म किया जाता है?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 44
(ii) ऐल्केन की क्रिया Cr2O3/Mo2O3 कराने पर ऐरोमैटिक व्युत्पन्न बनते हैं।
\(\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_{14} \stackrel{\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_3 / \mathrm{Mo}_2 \mathrm{O}_3}{\longrightarrow} \mathrm{C}_6 \mathrm{H}_6+4 \mathrm{H}_2\)

(iii) कार्बन चूर्ण को H2 के साथ Ni की उपस्थिति में गर्म करने पर मेथेन गैस प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 45

प्रश्न 5.
1-आयोडो-2-मेथिल प्रोपेन तथा 2-आयोडोप्रोपेन के मिश्रण की क्रिया सोडियम से कराने पर प्राप्त होने वाले उत्पादों की संरचना तथा नाम लिखें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 46

प्रश्न 6.
बुर्टज अभिक्रिया में एक प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड अभिक्रिया कर केवल एक ऐल्कल C8H18 बनाता है। इस ऐल्केन के मोनोब्रोमीनीकरण पर केवल एक तृतीयक ब्रोमाइड प्राप्त होता हैं। इस ऐल्केन की तथा तृतीयक ब्रोमाइड की संरचना लिखें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 47

प्रश्न 7.
निम्न अभिक्रिया के एक-एक उदाहरण दीजिए (केवल समीकरण दीजिए)-
(i) विकार्बोक्सीकरण
(ii) क्लीमेन्सन अपचयन
(iii) उत्प्रेरकी पुनःसंस्कार या हाइड्रोसम्भवन
(iv) ताप-अपघटन
(1) वुर्ट्ज अभिक्रिया।
उत्तर:
(i) विकार्बोक्सीकरण-
CH2COONa + NaOH → CH4 + Na2CO3
सोडियम
ऐसीटेट

(ii) क्लीमेन्सन अपचयन-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 48

प्रश्न 8.
क्या होता है जबकि (केवल रासायनिक समीकरण दीजिए –
(i) आइसोब्यूटेन की सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
(ii) ऐसीटोन की Zn-Hg + सान्द्र HCl के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
(iii) आइसोपेण्टेन की क्लोरीन के साथ 300°C पर अभिक्रिया कराई जाती है।
(iv) मेथेन की अमोनिया के साथ Al2O3 की उपस्थिति में गरम किया जाता है।
उत्तर:
(i) ब्यूटिल सल्फोनिक अम्ल बनता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 49
(iv) हाइड्रोजन सायनाइड बनता है।
\(\mathrm{CH}_4+\mathrm{NH}_3 \frac{\mathrm{Al}_2 \mathrm{O}_3}{700^{\circ} \mathrm{C}} \mathrm{H}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{N}+3 \mathrm{H}_2\)

प्रश्न 9.
क्या होता है जबकि (केवन रासायनिक समीकरण दीजिए) –
(i) प्रोपेन, SO2 तथा Cl2 के साथ सूर्य के प्रकाश में अभिक्रिया करती है।
(ii) ऐथिल आयोडाइड की लाल फॉस्पोरस तथा HI से अभिक्रिया कराई जाती है।
(iii) शुष्क इंघर में मेथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से कराई जाती है।
(iv) n-ब्यूटेन को निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में गरम किया जाता है।
(1) सोडियम ऐसीटेट को NaOH तथा CaO के मिश्रण के साथ गरम किया जाता है।
उत्तर:
(i) प्रोपेन सल्फ्यूरिल क्लोराइड बनता है।
\(\mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3+\mathrm{SO}_2+\mathrm{Cl}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{CH}_3 \mathrm{CH}_2 \mathrm{CH}_2 \mathrm{SO}_2 \mathrm{Cl}+\mathrm{HCl}\)
प्रोपेन सल्फ्यूरिल क्लोराइड

(ii) ऐथेन प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 50
(iii) ऐथेन प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 51

प्रश्न 10.
n-ब्यूटेन के भंजन से कौन-कौन से उत्पाद प्राप्त होते हैं ?
उत्तर:
n-ब्यूटेन के भंजन से निम्न उपाद भिन्न-भिन्न तापक्रमों पर प्राप्त होते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 52

प्रश्न 11.
द्वितीयक ब्यूटिल ब्रोमाइड की ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ अभिक्रिया कराने पर कौन-कौन सी ऐल्कीनें बनती हैं तथा मुख्य उत्पाद कौन-सी ऐल्कीन हैं ?
उत्तर:
द्वितीयक ब्यूटिल ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गरम करने पर ब्यूटीन तथा 2-ब्यूटीन का मिश्रण बनता है। जिसमें 2 -ब्यूटीन की मात्रा अधिक होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 53

प्रश्न 12.
प्रोपीन पर HBr के योग से आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनता है न कि प्रोपिल ब्रोमाइड, क्यों ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 54
चूँकि द्वितीय कार्बोधनायन, प्राथमिक से अधिक स्थायी होने के कारण जल्दी प्राप्त होता है। अतः Br से संयोग के बाद आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनता है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 13.
2- ब्यूटीन के दो ज्यामितीय समावयव होते हैं, जबकि 1- ब्यूटीन के नहीं क्यों ?
उत्तर:
– 2 – ब्यूटीन में द्विबन्ध से जुड़े दोनों कार्बनों की शेष दो संयोजकताएँ भिन्न-2 समूहों द्वारा संतृप्त होती हैं, जबकि 1 ब्यूटीन में से एक कार्बन की दोनों संयोजकताएँ H – परमाणुओं से संतृप्त हैं। अतः 1- ब्यूटीन ज्यामितीय समावयव नहीं बनाते ।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 55

प्रश्न 14.
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, संतृप्त हाइड्रोकार्बन की तुलना में अधिक क्रियाशील होते हैं, क्यों?
उत्तर:
सभी ऐल्केनों में प्रबल C-C (σ) बन्ध होते हैं तथा C-H बन्ध भी प्रबल तथा कम ध्रुवीय प्रकृति के होते हैं। वहीं एल्कीन में C = C बन्ध में-बन्ध की उपस्थिति के कारण एल्कीन क्रियाशील होती है ।

प्रश्न 15.
एक दो कार्बन परमाणुओं वाला हाइड्रोकार्बन (A) एक प्रतिशत क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट का रंग उड़ा देता है। परन्तु अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट से अभिक्रिया नहीं करता है। यौगिक (A) का नाम एवं संरचना सूत्र लिखो ।
उत्तर:
हाइड्रोकार्बन (A) क्षारीय KMnO4 का रंग उड़ा देता है। इसलए यह असंतृप्त है, क्योंकि अमोनिकल AgNO3 से अभिक्रिया नहीं करता है। इसलिए यह ऐसीटिलीन नर एथिलीन है, क्योंकि इसमें दो ही कार्बन परमाणु हैं। अत: (A) : CH2 = CH2

प्रश्न 16.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण करें-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 56

प्रश्न 17.
ब्यूट-2 ईन-1, 4-डाइओइक अम्ल से बनने वाले दो ज्यामितीय समावयव बनाये। इनमें से किसका द्विध्रुव आघूर्ण अधिक होगा।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 57
Cis- समावयन के द्विध्रुव आघूर्ण का मान trans- से अधिक होगा।

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन अध्रुवीय है?
ट्रान्स-ब्यूट – 2 – ईन ट्रान्स पेन्ट – 2 – ईन
उत्तर:
ट्रान्स-ब्यूट 2-ईन में दो C-CH3 बन्धों के द्विध्रुव आघूर्ण के मान समान तथा विपरीत है। अतः ये निरस्त हो जायेंगे। इस कारण ट्रान्स-2-ब्यूटीन अध्रुवीय है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 58

प्रश्न 19.
C2H2Cl2 के सभी सम्भव समावयव बनाये। इनमें से कौन-सा अध्रुवीय होगा ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 59

प्रश्न 20.
निम्न ऐल्कीनों को उनके स्थायित्व के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 60
उत्तर:
स्थायित्व का क्रम I > III > II

प्रश्न 21.
उन सभी ऐल्कीनों की संरचना बनायें जो कि हाइड्रोजनीकरण पर मेथिल ब्यूटेन देते हैं।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 61

प्रश्न 22.
निम्न को पूर्ण करें
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 62
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 63

प्रश्न 23.
ऐल्काइनों की बहुलीकरण अभिक्रियाओं को समझाइए । उत्तर- ऐल्काइनों में बहुलीकरण की प्रवृत्ति बहुत कम पायी जाती
(1) द्वितीयकरण – जब 1- ऐल्काइन को 355 K ताप पर क्यूप्रस क्लोराइड एवं NH4OH के विलयन में प्रवाहित करते हैं, तो दो अणु आपस में मिलकर ऐल्कीनिल ऐल्काइन बनाते हैं।

(2) तृतीयकरण – जब ऐल्काइन को रक्त तप्त लोहे की नली में होकर प्रवाहित करते हैं, तो ऐल्काइन के तीन अणु आपस में संयुक्त होकर बेंजीन या बेंजीन व्युत्पन्न बनाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 64
(3) चतुष्कीकरण – जब ऐसीटिलीन को निकिल सायनाइड के विलयन में 340 K ताप तथा 200 वायुमण्डल दाब पर प्रवाहित किया जाता है, तो ऐसीटिलीन के चार अणु संयुक्त होकर साइक्लो ऑक्टाटेट्राईन बनाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 65
(iv) बहुलीकरण – ऐसीटोन के बहुलीकरण से एक रेखीय पॉलीऐसीटिलीन प्राप्त होती है।
H—C ≡ CH + CH ≡ CH → —CH = CH—CH = CH—

प्रश्न 24.
निम्नलिखित को कैसे प्राप्त करोगे (केवल रासायनिक समीकरण लिखिए) –
(i) ऐसीटिलीन से मेथिल वाइनिल ईथर,
(ii) ऐसीटिलीन से वाइनिल सायनाइड,
(iii) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक अम्ल,
(iv) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक एस्टर ।
उत्तर:
(i) ऐसीटिलीन से मेथिल वाइलिन ईथर
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \underset{\mathrm{KOH}}{\stackrel{\mathrm{CH}_3 \mathrm{OH}}{\longrightarrow}} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{O}-\mathrm{CH}_3\)
ऐसीटिलीन मेथिल वाइनिल ईथर

(ii) ऐसीटिलीन से वाइनिल सायनाइड-
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \frac{\mathrm{HCN}}{\mathrm{Cu}_2 \mathrm{Cl}+\mathrm{HCl}} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{CN}\) वाइनिल सायनाइड

(iii) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक अम्ल-
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{CO}+\mathrm{H}_2 \mathrm{O}}{\longrightarrow} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{COOH}\)

(iv) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक एस्टर–
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{CO}+\mathrm{ROH}}{\longrightarrow} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{COOR}\)

प्रश्न 25.
ऐल्काइन के संगत ऐल्कीन तथा संगत ऐल्केन में परिवर्तन की क्रिया दीजिए।
उत्तर:
\(\mathrm{R}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{Pd}-\mathrm{CaCO}_3-\mathrm{PbO}}{\longrightarrow} \mathrm{R}-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2\) ऐल्कीन
\(\mathrm{R}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{CH}+4 \mathrm{H} \frac{\mathrm{Ni} / \mathrm{H}_2}{200^{\circ} \mathrm{C}} \mathrm{R}-\mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}_3\) ऐल्केन

प्रश्न 26.
ऐथाइन से प्रोपाइन कैसे प्राप्त करोगे?
उत्तर:
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{NaNH}_2}{\longrightarrow} \mathrm{CH} \equiv \mathrm{C}-\mathrm{Na} \stackrel{\mathrm{CH}_3 \mathrm{Br}}{\longrightarrow}\) ऐल्केन

प्रश्न 27.
प्रोपाइन से मेसेटिलीन कैसे प्राप्त करोगे ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 66

प्रश्न 28.
ऐथाइन से डाइआयोडो ऐथाइन कैसे प्राप्त करोगे ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 67

प्रश्न 29.
औद्योगिक ऐसीटिलीन को ऐसीटोन में संग्रहीत करते हैं क्यों?
उत्तर:
ऐसीटिलीन को – 75°C पर द्रव अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है। 260 वायुमण्डलीय दाब पर इसे O°C पर ही द्रवीभूत किया जा सकता है। द्रव ऐसीटिलीन अत्यन्त विस्फोटक पदार्थ होता है। अतः द्रव ऐसीटिलीन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिये पहले इसे ऐसीटोन से भीगे किसी सरन्ध्र पदार्थ द्वारा अवशोषित करा लिया जाता है, क्योंकि C2H2 ऐसीटोन में अधिक मात्रा में घुल जाती है।

प्रश्न 30.
निम्नलिखित परिवर्तन को तीन पदों में कीजिए-
CH3CH2C ≡ CH → CH3CH2CH2COCH3
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 68

प्रश्न 31.
A, B, C, D, E, F तथा G पहिचानिए-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 69
उत्तर:
A ⇒ ME CH2C ≡ CNa
B ⇒ Me CH2C ≡ C—Et
C ⇒ CH ≡ CH
D ⇒ CH3CHO
E ⇒ CH3COOH
F ⇒ CH3COCl
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 70

प्रश्न 32.
निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण करो-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 71

प्रश्न 33.
एक ऐल्किल हैलाइड C5H11Br (A) ऐल्कोहॉलीय KOH से क्रिया करके एक ऐल्कीन (B) देता है जो कि Br2 से अभिक्रिया करके यौगिक ‘C’ देता है जिसका विहाइड्रोब्रोमीनीकरण करने पर ऐल्काइन ‘D’ प्राप्त होता है एक मोल ‘D’ द्रव अमोनिया में सोडियम धातु से क्रिया करके एक मोल D का सोडियम लवण तथा \(\frac { 1 }{ 2 }\) मोल हाइड्रोजन गैस देता है। D पूर्ण हाइड्रोजनीकरण करने पर एक अशाखित ऐल्केन प्राप्त होता है यहाँ A, B, C तथा D क्या है?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 72
अभिक्रिया बताती है कि ‘D’ एक terminal alkyne है। अत: इसकी सम्भव संरचना निम्न है-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 73

प्रश्न 34.
निम्न को परिवर्तित करें-
(1) ऐथाइन से मेथेन
(2) ऐथीन से ऐथाइन
(3) ऐथेन से ऐथाइन
(4) ऐथाइन से 2-ब्यूटाडाइन
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 74

प्रश्न 35.
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन को संक्षिप्त में समझाइए ।
उत्तर:
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Aromatic hydrocarbon ) ऐसे हाइड्रोकार्बन जो हकेल नियम का अनुपालन करते हैं, ऐरोमँटिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ऐसे यौगिक सुगन्धित होते हैं। उदाहरण– बेंजीन । बेंजीन में 6 कार्बन परमाणु होते हैं, जो बन्द श्रृंखला में एकान्तर से एकल व द्विबन्ध में रहते हैं। ऐसे यौगिक जिनमें एक बेंजीन वलय पाई जाती हैं। उन्हें बेन्जीनॉयड (Benzenoid) ऐरोमैटिक यौगिक कहते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 75
ऐसे यौगिक जो एक से अधिक बेंजीन वलय से बने होते हैं बहुनाभिकीय (Polynuclear) हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 76

प्रश्न 36.
केकुले सूत्र के दो प्रमुख दोष क्या हैं?
उत्तर:
(i) 1 : 2 तथा 1 : 6 दो ऑर्थो व्युत्पन्नों की सम्भावना- लैडनबर्ग (1889) के अनुसार, केकुले सूत्र से चार द्वि-प्रतिस्थापित यौगिकों की सम्भावना है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 78
(ii) केकुले सूत्र द्वारा बेन्जीन के स्थायित्व को नहीं समझाया जा सकता है, यद्यपि इसमें तीन द्वि-आबन्ध हैं।

प्रश्न 37.
ऐरोमैटिक व ऐलिफैटिक यौगिकों में विभेद कीजिए।
उत्तर:
ऐरोमैटिक व ऐलिफैटिक यौगिकों में भेद

ऐरोमैटिक यौगिकऐलिफैटिक यौगिक
1. ये चक्रीय होते हैं।ये खुली श्रृंखला के यौगिक होते हैं।
2. इसमें कार्बन की प्रतिशतता अधिक होती है।इसमें कार्बन की प्रतिशता कम होती है।
3. ये धुएँदार लौ से जलते हैं।ये बिना धुएँ की लौ से जलते हैं। ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ आसानी से नहीं देते।
4. ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सुगमता से देते हैं।इनके हाइड्रॉक्सी यौगिक उदासीन होते हैं।
5. इनके हाइड्रॉक्सी यौगिक अम्लीय होते हैं।इनके हैलोजेन व्युत्पन्न अधिक क्रियाशील होते हैं।
6. इनके हैलोजेन व्युत्पन्न कम क्रियाशील होते हैं।ऐलिफैटिक यौगिक

प्रश्न 38.
निम्नलिखित समीकरणों की पूर्ति करो-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 78

प्रश्न 39.
निम्न में से कौन ऐरोमैटिक है? (हकेल के नियमानुसार)
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 79
उत्तर:

  1. इसमें 8-π इलेक्ट्रॉन है अतः यह हकेल के नियम का पालन नहीं करता है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रॉन conjugate form में नहीं है
  2. इसमें 6-π इलेक्ट्रॉन delocalised हैं अतः यह ऐरोमैटिक है।
  3. इसमें 6-π इलेक्ट्रॉन conjugate तो है परन्तु वलय में नहीं है अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।
  4. इसमें 10x इलेक्ट्रॉन हैं यहाँ प्रत्येक C-परमाणु sp2 संकरित है। तथा वलय planar है अतः यह ऐरामैटिक है।
  5. इसमें 8- इलेक्ट्रॉन हैं इसमें 8 में से 6-π इलेक्ट्रॉन delocalised है तथा एक planar वलय में है अतः यह ऐरोमैटिक है।
  6. 14-π electron हैं जो कि conjugate होने के साथ-साथ planar ring में है। परन्तु यह (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन के नियम का पालन नहीं करते हैं अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।

प्रश्न 40.
एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन ‘A’ में दो H2 के अणु जुड़ सकते हैं। इसका ओजोन अपचयन करने पर यह ब्यूटेन 1, 4- डाई अलए ऐथेनेल तथा प्रोपेनोन देता है ‘A’ की संरचना बनायें।
उत्तर:
चूँकि दो अणु H2 से जुड़ रहे हैं अतः इसका अर्थ है कि ‘A’ या तो ऐल्काइन है या एल्काडाईईन है। ओजोनी अपघटन पर ‘A’ यह तीन यौगिक देता है जिसमें से एक डाईएल्डिहाइड है अतः अणु दो जगहों से टूट रहा है। इसका अर्थ है कि ‘A’ में दो द्विबन्ध है।

‘A’ ओजोनी अपघटन पर निम्न अणु दे रहा है—
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 80
IUPAC नाम – 2 – मेथिल ओक्ट-2, 6-डाईईन अभिक्रिया निम्न है अभिक्रिया निम्न है—
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 81

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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. गोबर गैस संयंत्र में काम आने वाला जीवाणु है-
(अ) मीश्रेनोजनं
(ब) नाइट्रीकारी जीवाणु
(स) अमीनोकारी जीवाणु
(द) विनाइट्रीकारी जीवाणु
उत्तर:
(अ) मीश्रेनोजनं

2. ब्रेड बनाते समय किसकी क्रिया के द्वारा CO2 निकलने से यह छिद्रित हो जाती है ?
(अ) यीस्ट
(ब) जीवाणु
(स) वाइरस
(द) प्रोटोजोन्स
उत्तर:
(अ) यीस्ट

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

3. निम्न में से कौनसा युग्म जैव उर्वरक है-
(अ) एजोला तथा BGA
(ब) नास्टॉक तथा लेग्यूम
(स) राइजोबियम वास
(द) साल्मोनेला व इकोलाई
उत्तर:
(अ) एजोला तथा BGA

4. निम्नलिखित में से कौनसा एक जोड़ा गलत मिलाया गया है?
(अ) कोलिफॉर्मर्स – सिरका
(ब) मेथोनोजन्स – गोबर गैस
(स) यीस्ट – एथेनॉल
(द) स्ट्राप्टोमाईसाटीज – एंटीबायोटिक
उत्तर:
(अ) कोलिफॉर्मर्स – सिरका

5. ‘जीवन के खिलाफ’ किससे सम्बन्धित है-
(अ) प्रतिजैविक
(ब) जीवाणु
(स) कवक से
(द) शैवाल से
उत्तर:
(अ) प्रतिजैविक

6. कवक एवं पादपों के साथ सहजीवी सम्बन्ध कहलाता है-
(अ) माइकोराइजा
(ब) लाइकेन
(स) सिम्बायोसिस
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) माइकोराइजा

7. बटर फ्लाई केटरपिलर के नियंत्रण में प्रयोग किया जाता है-
(अ) बैसीलस थूरिजिऐसिस
(ब) ट्राइकोडर्मा
(स) बैम्पूलोवायरेसिस
(द) मीथेनोबैक्टिरिया
उत्तर:
(अ) बैसीलस थूरिजिऐसिस

8. जल के एक नमूने में सूक्ष्जीवियों द्वारा ऑक्सीजन के उद्य्रहण की दर का मापन किया जाता है-
(अ) सी.ओ.डी. परीक्षण
(ब) एच.ओ.डी. परीक्षण
(स) एस.ओ.डी. परीक्षण
(द) बी.ओ.डी. परीक्षण
उत्तर:
(द) बी.ओ.डी. परीक्षण

9. ‘थक्का स्फोटन’ के रूप में निम्न में से प्रयोग किया जाता है-
(अ) स्ट्रेप्टोकाइनेज
(ब) लाइपेज
(स) एमाइलेज
(द) प्रोटिऐजिज
उत्तर:
(अ) स्ट्रेप्टोकाइनेज

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

10. सायनोबैक्टिरिया पोषण के आधार पर है-
(अ) परजीवी
(ब) परपोषी
(स) स्वपोषित
(द) मृतजीवी
उत्तर:
(स) स्वपोषित

11. एफिडो तथा मच्छरों से छुटकारा दिलवाने में निम्न में से लाभप्रद है-
(अ) ड्रेगनफ्लाई एवं बीटल
(ब) वैक्यूलोवायरेसिस
(स) बेसीलस थूरिजिऐसिस
(द) ट्राइकोडर्मी
उत्तर:
(अ) ड्रेगनफ्लाई एवं बीटल

12. ताड़ वृक्ष (palms) के किस भाग से प्राप्त स्राव को किण्वित कर टोडी (Toddy) तैयार किया जाता है-
(अ) जड़
(ब) पत्ती
(स) तना
(द) पुष्प
उत्तर:
(स) तना

13. कौनसा पीड़कनाशी वसा-स्नेही है?
(अ) आर्गेनोक्लोरीन
(ब) आर्गेनोफॉस्फेट
(स) ट्राइआजीन
(द) पायरिथोयड
उत्तर:
(अ) आर्गेनोक्लोरीन

14. निम्न में से किसका उत्पादन बिना आसवन के किया जाता है-
(अ) वाइन
(ब) व्हिस्की
(स) ब्रांडी
(द) रम
उत्तर:
(अ) वाइन

15. निम्न में से किसे किण्वित रस के आसवन द्वारा तैयार किया जाता है-
(अ) रम
(ब) बीयर
(स) वाइन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) रम

16. पैनिसिलीन के खोजकर्ता हैं-
(अ) एलैग्जेंडर हुक
(ब) एलैग्जैंडर फ्लैमिंग
(स) एलैग्जैंडर ब्राउन
(द) एलैग्जैंडर श्वान
उत्तर:
(ब) एलैग्जैंडर फ्लैमिंग

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17. एसीटीक अम्ल के उत्पादन में निम्न में से कौनसा जीवाणु सहायक है-
(अ) लैक्टोबैसिलस
(ब) क्लोस्ट्रीडियम
(स) एसीटोबेक्टर एसिटाई
(द) पेनीसिलीयम नोटेटम
उत्तर:

18. निम्न में से कौनसा प्लान सूत्रपात किया गया ताकि देश की प्रमुख नदियों को प्रदूषण से बचाया जा सके-
(अ) यमुना एक्शन प्लान
(ब) गंगा एक्शन प्लान
(स) साँभर झील एक्शन प्लान
(द) (अ) व (ब) दोनों
उत्तर:
(द) (अ) व (ब) दोनों

19. व्यावसायिक पैमाने पर सूक्ष्मजीवियों को पैदा करने के लिए बड़े बर्तन की आवश्यकता होती है जिसे कहते हैं-
(अ) फरमैंटर
(ब) थरमैंटर
(स) इरमैंटर
(द) पीरमेंटर
उत्तर:
(अ) फरमैंटर

20. प्रतिजैविक कौनसे संक्रमित रोग के रोकथाम में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं?
(अ) डिप्थीरिया
(ब) काली खांसी
(स) निमोनिया
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

21. किस तत्व के पोषण के लिए माइकोराइजा उत्तरदायी है?
(अ) पोटैशियम
(ब) कॉपर
(स) जिंक
(द) फॉस्फोरस
उत्तर:
(द) फॉस्फोरस

22. द्वितीयक सीवेज उपचार मुख्यतः क्या है?
(अ) भौतिक प्रक्रिया
(ब) यांत्रिक प्रक्रिया
(स) रासायनिक प्रक्रिया
(द) जैविक प्रक्रिया
उत्तर:
(द) जैविक प्रक्रिया

23. सीवेज पर अवायवीय बैक्टिरिया को क्रिया द्वारा मुख्यतः क्या बनता है?
(अ) लाफिंग गैस
(ब) प्रोपेन
(स) मस्टर्ड गैस
(द) मार्स गैस
उत्तर:
(ब) प्रोपेन

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24. ‘फेड बैच’ किण्वन विधि में शर्करा को निरन्तर डालने की क्रिया निम्न में किस एक के लिए की जाती है?
(अ) मीथेन बनाने में
(ब) एन्यीबायोटिक्स प्रास्त करने में
(स) एन्जाइमों के शुद्धिकरण में
(द) सीवेज विघटन में
उत्तर:
(ब) एन्यीबायोटिक्स प्रास्त करने में

25. एथेनॉल के उत्पादन के लिए मद्यनिर्माणशालाओं (डिस्टिलेरीज) में सर्वाधिक सामान्यतः इस्तेमाल किया जाने वाला क्रियाधर (सब्ट्रेट) कौनसा होता है?
(अ) मकई का आटा
(ब) सोयाबीन का आटा
(स) चने का आटा
(द) शीरा
उत्तर:
(द) शीरा

26. मायोकार्डियल इन्फार्कस (हुदय पेशी रोध गलन) के रोगी को अस्पताल में लाने पर तत्काल सामान्यतः क्या दिया जाता है-
(अ) पेनेसिलिन
(ब) स्टेप्टोकाइनेज
(स) साइक्लोस्पोरिन
(द) स्टैटिन्स
उत्तर:
(द) स्टैटिन्स

27. सूक्ष्म जीवों का उपयोग करते हुए पीड़कों/रोगों के जैविकीय नियंत्रण का निम्नलिखित में से एक उदाहरण कौनसा है?
(अ) कुछ खास पादप रोग जनकों के लिए ट्राइकोडर्मा स्पी का होना।
(ब) ब्रैसिमा में श्वेत किट्ट के प्रति न्यूकिलयोपा हैड्रो वाइरस का होना
(स) कपास की उपज में बढ़ोतरी करने के लिए Bt कपास का बनाया जाना
(द) सरसों में कीटों के प्रति लेडी बर्ड बीटल का होना
उत्तर:
(अ) कुछ खास पादप रोग जनकों के लिए ट्राइकोडर्मा स्पी का होना।

28. निम्न में से कौनसा युग्म जैव उर्वरक का है ?
(अ) एजोला तथा BGA
(ब) नास्टॉक तथा लेग्यूम
(स) राइजोबियम तथा घास
(द) साल्मोनेला व ई. कोलाई
उत्तर:
(अ) एजोला तथा BGA

29. निम्नलिखित में से कौनसा एक जोड़ा सही नहीं मिलाया गया है?
(अ) सिरोटिया – औषधि व्यसन
(ब) स्पाइरूलाइना – एकल कोशिका प्रोटीन
(स) राइजोबियम – जैव उर्वरक
(द) स्ट्रेप्टोमाइसीज – एंटिबायोटिक
उत्तर:
(अ) सिरोटिया – औषधि व्यसन

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30. जैविक अपशिष्ट के अवायवीय पीपन के दौरान जैसा कि बायो गैस बनाने में होता है, निम्नलिखित में से कौनसा एक अंश अपघटित नहीं होता-
(अ) लिपिड
(ब) लिग्निन
(स) हेमोसेलुलोज
(द) सेलुलोज
उत्तर:
(ब) लिग्निन

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
बैक्टीरिया का नाम लिखिए जो दूध को दही में परिवर्तित कर देते हैं ।
उत्तर:
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया ।

प्रश्न 2.
ब्रेड बनाने में प्रयोग किये जाने वाले आटे में किस यीस्ट का उपयोग किया जाता है ?
उत्तर:
ब्रेड बनाने में प्रयोग किये जाने वाले आटे में बैकर यीस्ट (Satcharomyces cerevisiae) का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3.
डोसा बनाये जाने वाले आटे की फूली एवं उभरी हुई शक्ल किस गैस के उत्पादन से होती है?
उत्तर:
डोसा बनाये जाने वाले आटे की फूली एवं उभरी हुई शक्ल CO2 गैस के उत्पादन से होती है।

प्रश्न 4.
दक्षिण भारत में कुछ भागों में पारंपरिक पेय टोडी (Toddy) किस वृक्ष के स्राव को किण्वित कराकर तैयार किया जाता है ?
उत्तर:
दक्षिण भारत के कुछ भागों में पारंपरिक पेय टोडी (Toddy) ताड़ वृक्ष (Palms) के तने के स्राव को किण्वित कराकर तैयार किया जाता है।

प्रश्न 5.
स्विस चीज में बड़े-बड़े छिद्र किस गैस के उत्पन्न होने के कारण होते हैं?
उत्तर:
स्विस चीज (Swiss Cheese) में बड़े-बड़े छिद्र अधिक मात्रा में CO2 गैस के उत्पन्न होने के कारण होते हैं ।

प्रश्न 6.
उस जीवाणु का नाम बनाइए जो स्विस चीज (Swiss Cheese) में CO2 का उत्पादन करता है?
उत्तर:
प्रोपिओ निबैक्टीरियम शारमे नाई (Propionibacterium sharmanii) नामक जीवाणु स्विस चीज में CO2 का उत्पादन करता है।

प्रश्न 7.
राक्यूफोर्ट चीज (Roquefort Cheese) में विशेष सुगंध किसके कारण आती है ?
उत्तर:
राक्यूफोर्ट चीज (Roquefort Cheese) एक विशेष प्रकार के कवक की वृद्धि से परिपक्व होते हैं जिससे विशेष सुगंध आती है।

प्रश्न 8.
सामान्यतः कौनसा यीस्ट ब्रीवर्स यीस्ट के नाम से प्रसिद्ध है ?
उत्तर:
सैके रो माइ सीज सैरीविसी (Saccharomyces cerevisiae) यीस्ट ब्रीवर्स यीस्ट के नाम से प्रसिद्ध है ।

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प्रश्न 9.
उस कवक का नाम लिखिए जिससे पैनीसीलिन प्राप्त किया जाता है।
उत्तर:
पैनीसीलियम नोटेटम नामक कवक से पैनीसीलिन प्राप्त किया जाता है।

प्रश्न 10.
किन वैज्ञानिकों ने पैनीसीलिन की एक शक्तिशाली तथा प्रभावशाली एंटीबॉयोटिक के रूप में पुष्टि की ?
उत्तर:
अरनैस्ट चैन तथा हावर्ड फ्लौरे ने पैनीसीलिन की एक शक्तिशाली तथा प्रभावशाली एंटीबॉयोटिक के रूप में पुष्टि की।

प्रश्न 11.
पैनीसीलिन एंटीबॉयोटिक का प्रयोग दूसरे विश्व युद्ध में किसके लिए किया गया था ?
उत्तर:
पैनीसीलिन एंटीबॉयोटिक का प्रयोग दूसरे विश्व युद्ध में घायल अमरीकन सिपाहियों के उपचार में व्यापक रूप से किया गया था।

प्रश्न 12.
बाजार से खरीदा गया बोतल का फल रस अधिक साफ व स्वच्छ किसके प्रयोग के कारण दिखाई देता है?
उत्तर:
बाजार से खरीदा गया बोतल का फल रस अधिक साफ व स्वच्छ पेक्टीनेजिज तथा प्रोटीऐजिज के प्रयोग के कारण दिखाई देता है।

प्रश्न 13.
साइक्लोस्पोरिन ए का उत्पादन किस कवक से किया जाता है?
उत्तर:
साइक्लोस्पोरिन ए का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पालोस्पोरम नामक कवक से किया जाता है।

प्रश्न 14.
मोनास्कस परप्यूरीअस यीस्ट से उत्पन्न स्टैटिन (Statins) का कार्य क्या है?
उत्तर:
मोनास्कस परप्यूरीअस यीस्ट से उत्पन्न स्टैटिन (Statins) का कार्य रक्त में उपस्थित कॉलेस्ट्रॉल को कम करने का कार्य करता है।

प्रश्न 15.
बी.ओ.डी. का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
र- बॉयोकेमीकल ऑक्सीजन डिमांड (Biochemical Oxygen Demand)

प्रश्न 16.
पर्यावरण तथा वन मंत्रालय ने हमारे देश की प्रमुख नदियों को बचाने के लिए कौनसे दो ऐक्शन प्लान तैयार किए हैं?
उत्तर:

  • गंगा ऐक्शन प्लान
  • यमुना ऐक्शन प्लान ।

प्रश्न 17.
भारत में बायोगैस उत्पादन की प्रौद्योगिकी का विकास किसके प्रयासों से हुआ?
उत्तर:
भारत में बायोगैस उत्पादन की प्रौद्योगिकी का विकास निम्न के प्रयासों के द्वारा हुआ-

  • भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान
  • खादी एवं ग्रामीण उद्योग आयोग

प्रश्न 18.
ऐसे रोगजनक का नाम लिखिए जो कीटों एवं संधिपादों (आर्थ्रोपोडों) पर हमला करते हैं ।
उत्तर:
बैक्यूलोवायेरेसिस ऐसे रोगजनक हैं जो कीटों तथा संधिपादों (आर्थ्रोपोडों) पर हमला करते हैं।

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प्रश्न 19.
औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में काम आने वाले किन्हीं तीन सूक्ष्मजीवों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • यीस्ट
  • जीवाणु
  • कवक

प्रश्न 20.
उद्योगों में सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके प्राप्त होने वाले दो उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • ऐल्कोहॉल
  • प्रतिजैविक ।

प्रश्न 21.
लैक्टिक अम्ल जीवाणु के कोई दो लाभ लिखिए।
उत्तर;

  • दूध में वृद्धि करते हैं।
  • दूध को दही में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 22.
जलाक्रांत खेत में नॉस्टॉक एवं एनाबीना जैसे शैवालों की आबादी अधिक हो जाने से खेत किस प्रकार प्रभावित होगा? सकारण समझाइए ।
उत्तर:
जलाक्रांत खेत में नॉस्टॉक एवं एनाबीना आदि शैवालों की अधिकता से उर्वरता बढ़ जाती है क्योंकि ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत करते हैं। ये शैवाल जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं। ये मृदा में कार्बनिक पदार्थ भी बढ़ा देते हैं।

प्रश्न 23.
जैव वैज्ञानिक नियंत्रण के तहत कौन-सी कवक का उपयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है?
उत्तर:
ट्राइकोडर्मा कवक ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
सूक्ष्मजीव की आवास व्यवस्था का वर्णन कीजिए। इन्हें पोषक माध्यमों पर क्यों उगाया जाता है? समझाइए ।
उत्तर:
सूक्ष्मजीव की आवास व्यवस्था – सूक्ष्मजीव सर्वव्यापी होते हैं। ये मृदा, जल, वायु हमारे शरीर के अन्दर तथा अन्य प्रकार के प्राणियों तथा पादपों में पाये जाते हैं। जहाँ किसी प्रकार जीवन संभव नहीं है जैसे- गीजर के भीतर गहराई तक (तापीय चिमनी) जहाँ ताप 100°C तक बढ़ा हुआ रहता है, मृदा में गहराई तक बर्फ की परतों के कई मीटर नीचे तथा उच्च अम्लीय पर्यावरण जैसे स्थानों पर पाये जाते हैं। सूक्ष्मजीव विविध रूपायित प्रोटोजोआ, जीवाणु, कवक तथा सूक्ष्मदर्शीय पादपों से होते हैं।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव 1

सूक्ष्मजीवियों को जीवाणु तथा अधिकांश कवकों के समान इसलिए पोषक माध्यमों पर उगाया जाता है, ताकि ये वृद्धि कर सकें एवं कॉलोनी का रूप ले लें और इन्हें नग्न आँखों से देखा जा सके। देखिए ऊपर चित्र में ऐसे संवर्धनजन सूक्ष्मजीवी अध्ययन के दौरान लाभदायक होते हैं।

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प्रश्न 2.
वाइरस से विरोइड कैसे भिन्न होते हैं?
उत्तर:
वाइरस से विरोइड में भिन्नता-

वाइरस (Viruses)विरोइड (Viroids)
1. ये बैक्टीरिया से छोटे होते हैं।1. ये वायरस से छोटे होते हैं।
2. इनमें आनुवंशिक पदार्थ RNA अथवा DNA2. जबकि इनमें केवल RNA पाया जाता है।
3. हो सकता है। इनमें प्रोटीन का आवरण पाया जाता है।3. जबकि इनमें प्रोटीन का आवरण नहीं पाया जाता है।
4. इनके द्वारा निम्न रोग होते हैंएड्स, चेचक आदि।4. जबकि इनके द्वारा पोटेटो स्पाइन्डल ट्यूबर नामक रोग होता है।

प्रश्न 3.
बैक्टीरिया तथा सायनोबैक्टीरिया में कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर:
बैक्टीरिया तथा सायनोबैक्टीरिया में चार अन्तर-

बैक्टीरिया (Bacteria)सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria)
1. छोटी कोशिकाएँ।1. अपेक्षाकृत बड़ी कोशिकाएँ।
2. कशाभ हो सकते हैं।2. कशाभ नहीं होते हैं।
3. कुछ बैक्टीरिया (हरे बैक्टीरिया) में प्रकाश- संश्लेषण एक अलग प्रकार से होता है, जिसमें ऑक्सीजन बाहर निकलती है।3. प्रकाश-संश्लेषण में सामान्य तरीके से ऑक्सीजन निकलती है जैसा कि हरे पौधों में होता है।
4. लैंगिक जनन संयुग्मन द्वारा।4. संयुग्मन होता नहीं देखा गया।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित बैक्टीरिया के लाभकारी क्रियाकलाप लिखिए-

  • राइजोबियम
  • एजोटोबैक्टर
  • स्ट्रेप्टोमाइसीज
  • लेक्टोबैसिलस ।

उत्तर:
बैक्टीरिया के लाभकारी क्रियाकलाप निम्न हैं-

बैक्टीरियम का नामक्रियाकलाप
1. राइजोबियम (Rhizobium)1. लेग्यूमो (मटर, चना, दालें आदि) की जड़ों में रहता पाया जाता है, वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को अमोनिया के रूप में स्थिर कर देता है जो फिर आगे उपयोगी ऐमिनो अम्लों में बदल जाती है।
2. एजोटोबैक्टर (Azotobacter)2. मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। यह वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर कर देता है।
3. स्ट्रेप्टोमाइसीज (Streptomyces)3. इससे स्ट्रे प्टोमाइसिन नामक ऐंटिबायोटिक बनती है।
4. लेक्टोबैसिलस (Lactobacillus)4. लैक्टोज़ (दुग्ध शर्करा) का लैक्टिक अम्ल में किण्वन करता है। इससे दूध के दही में जमने में सहायता मिलती है।

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प्रश्न 5.
स्पाईरुलीना का खाद्य के रूप में क्या महत्त्व है?
उत्तर:
स्पाईरुलीना नील हरित शैवाल का सदस्य है। इसका उपयोग सम्पूर्ण आहार के रूप में किया जा सकता है। स्पाईरुलीना में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, एमीनो अम्ल, विटामिन्स, मिनरल्स, एन्जाइम्स, वसा तथा पिगमेन्ट्स ये सभी तत्व इसमें विद्यमान होते हैं। स्पाईरुलीना में उपस्थित प्रोटीन की खास बात यह भी है कि यह ठीक वैसा ही है, जैसा कि शरीर स्वयं अपने लिए तैयार करता है। इसमें दूध के बराबर कैल्सियम पाया जाता है तथा गाजर के मुकाबले 15 गुणा अधिक विटामिन A होता है।

प्रश्न 6.
चावल की खेती में खाद की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ती है?
उत्तर:
नील हरी शैवाल अर्थात् सायनोजीवाणु की कुछ जातियाँ जिनमें नॉस्टॉक, एनेबीना तथा टोलीपोथ्रिक्स आदि वायुमण्डल की नाइट्रोजन का यौगिकीकरण करने में सक्षम होती हैं। ये शैवाल भूमि की उर्वरता में वृद्धि करती हैं। चावल की खेती में इनका योगदान सराहनीय है। अतः इसी कारण खाद की आवश्यकता नहीं रहती है।

प्रश्न 7.
माइकोराइजा किसे कहते हैं? इसके प्रमुख लाभ लिखिए।
उत्तर:
कवक तथा उच्च वर्ग के पादपों की मूल (root) का परस्पर सहजीवन माइकोराइजा कहलाता है। इसमें कवक अपने तन्तुओं द्वारा पादप की मूल के बाहर की तरफ चारों ओर पूरी तरह से एक आवरण बना लेता है। कवक तन्तु पादप मूल की कार्टेक्स कोशिकाओं के मध्य अन्तराकोशिका (Intercellular) स्थान में प्रवेश कर जाते हैं और एक जाल रूपी संरचना बनाते हैं जिसको हारटिंग नेट कहते हैं। इसमें पादपमूल पर मूल रोम नहीं होते हैं। कवक मूल का मुख्य कार्य खनिज लवण (फॉस्फोरस) के अवशोषण में सहायता करना है। कवक के कारण मूल का अवशोषण क्षेत्र बढ़ जाता है।

माइकोराइजा के प्रमुख लाभ-

  1. मूलवातोढ (root-borne ) रोगजनक के प्रति प्रतिरोधकता ।
  2. कवक मूल से मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।
  3. कवक मूल से पादप की वृद्धि तीव्र तथा उत्पादन बढ़ता है।
  4. खनिज लवण व अन्य पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक मात्रा में व सुगमता से होता है। इस कारण पादप को बाह्य पोषक तत्वों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।
  5. ऑक्सीजन का संश्लेषण बढ़ जाता है।
  6. कवकमूल में कवक के कारण अवशोषण सतह बढ़ जाती है।
  7. कुछ पादपों में यह सम्बन्ध बीज अंकुरण के लिए आवश्यक है।
  8. कवक मूल के कारण उर्वरकों पर पादप की निर्भरता कम होती है तथा इससे धन की बचत होती है।
  9. पादप में लवणता तथा सूखे के प्रति सहनशीलता बढ़ जाती है।
  10. चीड़ के पादप कवक सम्बन्ध के अभाव में कभी-कभी सड़ जाते हैं अतः यह सम्बन्ध जंगल निर्माण में सहायक होता है।
  11. एक्टोट्रॉफिक कवक मूल के कारण बहुत से पादपों से पिथियम, फाइटोप्थोरा, फ्यूसेरियम आदि का संक्रमण नहीं हो पाता है।

प्रश्न 8.
बीटी क्या है? यह किस प्रकार कीटों के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न करते हैं? समझाइए ।
उत्तर:
बीटी (Bt) एक प्रकार का जीवविष है । यह बैसीलस थुरीनजिएंसीस ( संक्षेप में बीटी) नामक जीवाणु से निर्मित होता है । बीटी जीवविष जीन जीवाणु से क्लोनीकृत होकर पौधों में अभिव्यक्त होकर कीटों (पीड़कों) के प्रति प्रतिरोधकता पैदा करता है। जिससे कीटनाशकों के उपयोग की आवश्यकता नहीं रह गई है। इस तरह से जैव पीड़कनाशकों का निर्माण होता है।

उदाहरण- बीटी कपास, बीटी मक्का, धान, टमाटर, आलू आदि । बीटी कपास – बैसीलस धूरीनजिएंसीस की कुछ नस्लें ऐसे प्रोटीन का निर्माण करती हैं जो विशिष्ट कीटों जैसे-लपीडोप्टेशन (तम्बाकू की कलिका कीड़ा, सैनिक कीड़ा) कोलियोप्टेरान (भृंग) व डीप्टेरान (मक्खी, मच्छर ) को मारने में सहायक हैं। बी. थूरीनजिएंसीस अपनी वृद्धि की विशेष अवस्था में कुछ प्रोटीन रवों का निर्माण करती है।

इन रवों में विषाक्त कीटनाशक प्रोटीन होता है। यह जीवविष बैसीलस को क्यों नहीं मारता? वास्तव में बीटी जीवविष प्रोटीन, प्राक्जीव विष निष्क्रिय रूप में होता है, ज्योंही कीट इस निष्क्रिय जीव विष को खाता है, इसके रवे आंत में क्षारीय पी. एच. के कारण घुलनशील होकर सक्रिय रूप में परिवर्तित हो जाते हैं।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

सक्रिय जीवविष मध्य आंत के उपकलीय कोशिकाओं की सतह से बंधकर उसमें छिद्रों का निर्माण करते हैं जिस कारण से कोशिकाएँ फूल. कर फट जाती हैं और परिणामस्वरूप कीट की मृत्यु हो जाती है। विशिष्ट बीटी जीवविष बैसीलस थुरीनजिएंसीस से पृथक् कर कई फसलों जैसे कपास में समाविष्ट किया जा चुका है। जींस का चुनाव फसल व निर्धारित कीट पर निर्भर करता है। जबकि सर्वाधिक बीटी जीवविष कीट समूह विशिष्टता पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न को कारण सहित समझाइए-
(1) अस्पतालों में उबले हुए उपकरणों का प्रयोग आवश्यक है।
उत्तर:
उपकरणों को उबालने से जीवाणु इत्यादि समाप्त हो जाते हैं जिससे संक्रमण होने की संभावना नहीं रहती है।

(2) लेग्यूमिनोसी कुल के पौधे जिस खेत में उगाये जाते हैं उसकी उर्वरता बनी रहती है।
उत्तर:
लेग्यूमिनोसी कुल के पादपों की जड़ें ग्रन्थिकामय होती हैं। इन ग्रन्थियों में राइजोबियम लेग्यूमिनोसेरम नामक जीवाणु रहते हैं जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण कर भूमि की उर्वरता को बढ़ाते हैं ।

(3) ताजा तथा बिना उबला हुआ दूध खट्टा होने की सम्भावना अधिक होती है।
उत्तर:
कुछ जीवाणु दूध में उपस्थित लेक्टोस शर्करा को लेक्टिक अम्ल में किण्वित करते हैं जिससे दूध खट्टा हो जाता है, जैसे-. स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस, लेक्टोबैसिलस कैसिआई, ले. एसिडोफिल्स आदि । दूध को उबालने से ये जीवाणु समाप्त हो जाते हैं तथा दूध को खट्टा होने से बचाया जा सकता है।

(4) शराब अधिक समय तक रखने पर खट्टी हो जाती है।
उत्तर:
शराब अधिक समय तक रखने पर जीवाणुओं का प्रकोप हो जाने से खट्टी हो जाती है।

(5) सड़ी-गली चीजों का सड़ते समय तापमान अधिक होता है।
उत्तर:
ये मृतोपजीवी जीवाणु होते हैं, कार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण व उपापचय क्रियाओं से ऊर्जा निकलने के कारण ताप बढ़ जाता है।

प्रश्न 10.
बायोगैस का उत्पादन करते समय किण्वन सम्बन्धी कौन-कौनसी परिस्थितियाँ बनाए रखना आवश्यक है ?
उत्तर:
बायोगैस का उत्पादन करते समय किण्वन सम्बन्धी निम्न परिस्थितियाँ बनाए रखना आवश्यक है-

  1. किण्वन पूर्णत: अवायवीय पर्यावरण में कराया जाना चाहिए और किसी भी तरह मुक्त ऑक्सीजन मौजूद नहीं होनी चाहिए।
  2. फरमेंटर (किण्वक) के भीतर pH 6.8 से 7.6 तक लगभग उदासीन (Neutral) स्तर पर बनाए रखना चाहिए।
  3. किण्वन में मीथेनजनी बैक्टीरिया उपस्थित होने चाहिए।

प्रश्न 11.
उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मजीव के नाम लिखिए। किन्हीं पाँच उत्पादों का नाम लिखिए जिनके निर्माण में सूक्ष्मजीवों का इस्तेमाल किया जाता है।
उत्तर:
उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मजीव इस प्रकार हैं-

  1. यीस्ट (कवक)
  2. फंफूद (कवक)
  3. जीवाणु
  4. तंतुमय बैक्टीरिया (ऐक्टिनोमायेसिटीज) ।

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सूक्ष्मजीवों को अग्र उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है-

  • ऐल्कोहॉल-युक्त पेय पदार्थ
  • दही
  • प्रतिजैविक
  • कार्बनिक रसायन जिनमें विटामिन, स्टीरॉइड एवं एंजाइम शामिल हैं।
  • बायोगैस ।

प्रश्न 12.
ऐसे कोई सामान्य पाँच एंटीबायोटिक लिखकर उनके स्रोत का भी नाम लिखिए।
उत्तर:
एंटीबायोटिक तथा उनके स्रोत

एंटीबायोटिकस्रोत
1. क्लोरोटेट्रासाइक्लिनस्ट्रेप्टोमाइसीज ऑरीफेसिस
2. स्ट्रेप्टोमाइसिनस्ट्रेप्टोमाइसीज ग्रीसेव्स
3. पैनिसीलिनपेनिसिलियम नोटेटम
4. सेफेलोस्पोरिनसेफेलोस्पोरियम एक्रीमोनियम
5. साइक्लोहेक्सिमाइडस्ट्पेप्टोमाइसीज ग्रीसेक्स

प्रश्न 13.
जैव उर्वरक पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
जैव उर्वरक किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर:
जैव उर्वरक (Biofertilisers) – मृदा की उर्वरता बढ़ाने वाले सूक्ष्मजीवों को जैव उर्वरक अथवा बायोफर्टिलाइजर्स कहते हैं। कई नाइट्रोजन स्थायीकर जीवाणु, नीलहरित शैवालें, मूल कवकें आदि मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं। उनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण उदाहरण निम्न हैं-
(1) लेग्यूम – राइजोबियम सहजीवन- फलीदार पौधों की मूलों की ग्रंथियों में निवास करने वाली राइजोबियम की जातियाँ पौधे को उपयोग करने योग्य रूप में नाइट्रोजन उपलब्ध कराती हैं।

(2) एजोला – एनाबीना सहजीवन – एजोला एक जलीय टेरिडोफाइट है जो जल की सतह पर वृद्धि करता है। इसके साथ ऐनाबीना नामक नील हरित शैवाल सहजीवी रूप में रहती है तथा पादप को नाइट्रेट उपलब्ध कराती है।

(3) मुक्तजीवी सायेनोबैक्टीरिया तथा बैक्टीरिया-रिवुलेरिया व नॉस्टॉक (नील हरित शैवाल) तथा क्लोस्ट्रीडियम व एजेटोबेक्टर (मुक्तजीवी जीवाणु) मृदा में स्वतंत्र रूप से रहते हुये वायुमण्डल की नाइट्रोजन का यौगिककरण करते हैं। आजकल जैवप्रौद्योगिकी तकनीकों के अनुप्रयोग से सूक्ष्मजीवों के नाइट्रोजन स्थिर करने वाले जीन (Nif जीन) को उच्च पादपों में स्थानांतरित करने के प्रयास जारी हैं।

प्रश्न 14.
लैग्यूमिनस पादप की जड़ों पर स्थित ग्रन्थियों को नष्ट कर दिया जाये तो पादप पर क्या प्रभाव पड़ेगा? सकारण समझाइए ।
उत्तर:
जैव उर्वरक एक प्रकार के जीव हैं, जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं। लैग्यूमिनस पादपों की जड़ों पर विद्यमान ग्रन्थियों (nodules) का निर्माण राइजोबियम जीवाणु के सहजीवी संबंध द्वारा होता है। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में परिवर्तित कर देते हैं व पादप इसका उपयोग पोषकों के रूप में करते हैं। यदि इन पौधों से ग्रन्थियों को नष्ट कर दिया जाये तो पादप पोषक पदार्थों के अभाव में वृद्धि नहीं कर पायेंगे व धीरे-धीरे नष्ट हो जायेंगे।

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प्रश्न 15
विभिन्न पेय उत्पादन में सूक्ष्मजीवों के उपयोग को उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर:
सूक्ष्मजीव विशेषकर यीस्ट का प्रयोग प्राचीन काल से वाइन, बियर, व्हिस्की, ब्रान्डी, जिन, रम आदि पेयों के उत्पादन में किया जाता रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वही यीस्ट- सैकेरोमाइसिस सिरेबिसी जो सामान्यतः बेकर्स यीस्ट के नाम से प्रसिद्ध है, ब्रेड बनाने वाले तथा माल्टीकृत धान्यों फलों के रसों में एथेनॉल उत्पन्न करने में प्रयुक्त किया जाता है। इन सभी क्रियाओं में किण्वन होता है, जिसे निम्न समीकरण द्वारा बताया जा रहा है-
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विभिन्न प्रकार के ऐल्कोहॉलीय पेय की प्राप्ति किण्वन तथा विभिन्न प्रकार के संसाधन (आसवन अथवा उसके बिना) कच्चे पदार्थों पर निर्भर करती है। शराब, बियर, सिडर, रेड वाइन, शैम्पियन, शैरी, टोड़ी आदि का उत्पादन बिना आसवन के होता है जबकि व्हिस्की, ‘ब्रान्डी तथा रम किण्वित रस के आसवन द्वारा तैयार किये जाते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव से क्या तात्पर्य है? पेय पदार्थ बनाने में सूक्ष्मजीव किस प्रकार हमारी मदद करते हैं? समझाइए ।
उत्तर:
औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव-उद्योगों में सूक्ष्मजीवियों का प्रयोग बहुत से उत्पादों के निर्माण में किया जाता है जो कि मनुष्य के लिए मूल्यवान होते हैं। मादक पेय तथा प्रतिजैविक (एंटीबॉयोटिक) इसके कुछ उदाहरण हैं । व्यावसायिक पैमाने पर सूक्ष्मजीवियों को पैदा करने के लिए बड़े बर्तन की आवश्यकता होती है जिसे किण्वक (Fermenter) कहते हैं।

सूक्ष्म जीव विशेषकर यीस्ट का प्रयोग प्राचीन काल से वाइन, बीयर, व्हिस्की, रम जैसे पेयों के उत्पादन में किया जाता आ रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यीस्ट सैकेरोमाइसीज सेरीविसी (Saccharomyces cerevisiae) ब्रेड बनाने तथा माल्टीकृत धान्यों तथा फलों के रसों से ऐथनॉल उत्पन्न करने में प्रयोग किया जाता है।

किण्वन तथा विभिन्न प्रकार के संसाधन (आसवन अथवा उसके बिना) कच्चे पदार्थों पर निर्भर करती है; वाइन तथा बीयर का उत्पादन बिना आसवन के; जबकि व्हिस्की, ब्रांडी तथा रम किण्वित रस के आसवन द्वारा तैयार किये जाते हैं।

प्रश्न 2.
जीवाणु फेज क्या हैं? इनकी संरचना का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विषाणु जो जीवाणुओं को संक्रमित कर नष्ट कर देते हैं, उन्हें जीवाणुभोजी या बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage) या संक्षेप में फेज (Phage) कहते हैं। फेज शब्द ग्रीक शब्द फेगॉस (Phagos) से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ दूसरों का भक्षण करना है। इनकी खोज ट्वार्ट एवं डी हैरेल द्वारा पृथक् रूप से की गई थी। जीवाणुभोजी जीवाणुओं की ही भाँति लगभग हर प्रकार के आवास एवं प्राकृतिक अवस्थाओं में पाये जाते हैं।

आकारिकी (Morophology) की दृष्टि से इनमें अत्यधिक असमानताएँ हैं। जीवाणुभोजी की संरचना – एक प्रारूपिक जीवाणुभोजी की संरचना टैडपोल के समान होती है, जो स्पष्ट शीर्ष एवं पुच्छ (Tail) में विभेदित होता है। अधिकांश जीवाणुभोजी (T2, T6) सिर प्रिज्माभ होता है जबकि इसकी पूँछ लम्बी एवं बेलनाकार होती है, पूँछ प्रिज्माभ सिर से जुड़ी रहती है।

इसकी सहायता से ये जीवाणु कोशिका से संलग्न होते हैं। इसकी लम्बाई लगभग सिर की लम्बाई के बराबर होती है। प्रिज्माभ सिर प्रोटीन अणुओं द्वारा बना होता है एवं इसके केन्द्रीय कोर में एक लम्बा DNA का एक वृहत् अणु होता है। सिर एवं पूँछ के मध्य एक कॉलर होती है। पूँछ के समीपस्थ छोर पर कॉलर से जुड़ी षट्कोणीय प्लेट होती है जिसे आधार प्लेट कहते हैं। आधार प्लेट की निचली सतह पर 6 पुच्छ तंतु जुड़े रहते हैं जिनकी सहायता से फेज जीवाणु की सतह से चिपका रहता है तथा इनके द्वारा स्त्रावित एन्जाइम जीवाणु की भित्ति से संलयन (Lysis) में सहायक होते हैं।
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प्रश्न 3.
जीवाणुओं की लाभदायक गतिविधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
हम किस प्रकार कह सकते हैं कि जीवाणु हमारे मित्र हैं? समझाइए ।
उत्तर:
लाभदायक गतिविधियाँ ( Useful activities) – बैक्टीरिया अत्यंत महत्त्वपूर्ण सूक्ष्मजीव हैं। ये वातावरण के नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं, डेयरी उद्योग में दही बनाने के काम आते हैं तथा अनेक प्रमुख प्रतिजैविक भी इन्हीं से मिलते हैं। बैक्टीरिया द्वारा मनुष्य को पहुँचने वाले लाभों की सूची अग्र दी गई है-
(1) नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) – कुछ बैक्टीरिया वायुमण्डल में स्थित आणविक नाइट्रोजन को नाइट्रोजन के यौगिक में बदल देते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं-

  • स्वतंत्र रूप से रहने वाले (Fire Living) -मृदा में नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने वाले, जैसे- ऐजोटोबैक्टर, क्लॉस्ट्रीडियम आदि ।
  • सहजीवी (Symbiotic) -लेग्यूमिनोसी कुल के पौधों की जड़ों की ग्रंथिकाओं में सहजीवन करने वाले, जैसे- राइजोबियम लेग्युमिनोसेर ।

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(2) नाइट्रीकरण जीवाणु (Nitrifying Bacteria) – ये दो प्रकार के होते हैं-

  • अमोनिया को नाइट्राइट (NO2) में बदल देने वाले, जैसे- नाइट्रोसोमोनास ।
  • अमोनिया को नाइट्रेट (NO3) में बदल देने वाले, जैसे- नाइट्रोबेक्टर ।

(3) अमोनीकरण (Ammonification)- ये बैक्टीरिया, प्रोटीन तथा कुछ अन्य जटिल पदार्थों को अमोनिया में बदल देते हैं, जैसे- बैसिलस माइकॉइडिस ।

(4) खाद्य श्रृंखला में (In Food Chains) – कुछ बैक्टीरिया, पौधे तथा जन्तुओं के मृत शरीर पर वृद्धि करते हैं और इन जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं। इस कारणवश मृदा में पौधों के लिए उपयोगी पोषक तत्त्व संचयित होते हैं । पौधे इन सरल अकार्बनिक तत्वों का अवशोषण करते हैं।

(5) डेयरी उद्योग में (In Dairy) – बैक्टीरिया, दूध में उपस्थित लैक्टोस (Lactose) शर्करा को लैक्टिक अम्ल में बदल देते हैं। इस कारणवश दूध खट्टा हो जाता है। इस प्रकार की किण्वन क्रिया करने वाले मुख्य बैक्टीरिया हैं स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस, लैक्टोबैसिलस कैसिआई, लै. एसिडोफिलस इत्यादि ।

(6) अन्य उद्योगों में (In other Industries) – अनेक महत्त्वपूर्ण पदार्थों का निर्माण विभिन्न बैक्टीरिया की सहायता से किया जाता है। सिरका, लैक्टिक अम्ल, लाइसीन, ऐसीटोन, ब्यूटोनोल निर्माण में तथा तन्तुओं को सड़ाने व तम्बाकू एवं चाय उद्योग में बैक्टीरिया का विशेष महत्त्व है।

(7) मानव के आंत्र में सहजीवन (Symbiosis in Human Intestine)-मानव तथा अनेक कशेरुकी प्राणियों के आंत्र में एशिरिकिआ कोली ( Escherichia coli) पाया जाता है। यह बैक्टीरिया सामान्यतः हानिकारक नहीं होता और पाचन क्रियाओं में सहायक होता है।

(8) रोमन्थी प्राणियों में (In Ruminate Animals) – इन प्राणियों के रुमेन (rumen, प्रथम आमाशय) में सेलुलोस के पाचन के काम करने वाले बैक्टीरिया, जैसे- रुमिनोकोकस एल्बस इत्यादि पाये जाते हैं। ये प्राणी मुख्यतः घास चरते हैं परन्तु घास के सेलुलोस को केवल उनके रुमेन में पाये जाने वाले बैक्टीरिया ही अपघटित कर सकते हैं।

(9) प्रतिजैविक अथवा ऐन्टिबायोटिक (Antibiotics) – ये जीवधारियों के उपापचयी व्युत्पन्न होते हैं। किसी अन्य सूक्ष्म बैक्टीरिया के लिए हानिकारक अथवा निरोधी ( inhibitory ) होते हैं। प्रतिजैविक प्रतियोगिता निरोध (competitive inhibition ) द्वारा रोगों को ठीक करते हैं। अधिकतर प्रतिजैविक, बैक्टीरिया से ही प्राप्त होते हैं।

(10) मल व्यवस्था ( Sewage Oxidation) – कृत्रिम जलाशयों में मलमूत्र इत्यादि एकत्रित करके बैक्टीरिया द्वारा उनका ऑक्सीकरण किया जाता है। इस क्रिया में निकलने वाली CO2 शैवाल उपयोग में ले जाते हैं। और यह शैवाल ऑक्सीजन छोड़ते हैं। यह ऑक्सीजन मलमूत्र के ऑक्सीकरण में उपयोगी होती है। शैवाल तथा बैक्टीरिया, मलव्यवस्था ताल (Sewage pond) में सहजीविता ( Symbiosis) दिखाते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. निम्न में से वाहित मल उपचार के लिए अवायवीय अपांक संपाचित्र में डाला जाता है- (NEET-2020)
(अ) तैरते हुए कूड़े-करकट
(ब) प्राथमिक उपचार के लिए वहिःसाव
(स) संक्रियीत अपांक
(द) प्राथमिक अपांक
उत्तर:
(स) संक्रियीत अपांक

2. निम्न स्तम्भों का मिलान कीजिए- (NEET-2020)

स्तम्भ-Iस्तम्भ-II
1. क्लोस्ट्रीडियम ब्यूटायलिकम(i) साइक्लोस्पेरिन
2. टाइकोडर्मा पॉलीस्पोरम(ii) ब्यूटिरिक अम्ल
3. मोनास्कस परप्यूरीअस(iii) सिट्रिक अम्ल
4. एस्चरजिलस नाइगर(iv) रक्त-कोलेस्टेरोल कम करने वाला कारक
विकल्प :1234
(अ)(ii)(i)(iv)(iii)
(ब)(i)(ii)(iv)(iii)
(स)(iv)(iii)(ii)(i)
(द)(iii)(iv)(ii)(i)

उत्तर:

(अ)(ii)(i)(iv)(iii)

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3. निम्नलिखित में से किसे जैव नियंत्रण के एक कारक के रूप में पादप रोग उपचार के लिए उपयोग किया जा सकता है? (NEET-2019)
(अ) लैक्टोवेसीलस
(ब) ट्राइकोडर्मा
(स) क्लोरेला
(द) एनाबीना
उत्तर:
(ब) ट्राइकोडर्मा

4. निम्न में से कौन रुधिर कॉलेस्ट्राल कम करने वाला व्यावसायिक कारक है?
(NEET-2019)
(अ) लाइपेज
(ब) साइक्लोस्पोरीन
(स) स्टैनिन
(द) स्ट्रेप्टोकाइनेज
उत्तर:
(स) स्टैनिन

5. दूध के दही में रूपान्तरण से इसकी अच्छी पोषक क्षमता किसकी वृद्धि के कारण होता है? (NEET-2018)
(अ) विटामिन B12
(ब) विटामिन A
(स) विटामिनD
(द) विटामिन E
उत्तर:
(अ) विटामिन B12

6. बेमेल चुनिए- (NEET-2017)
(अ) फ्रंकिया – एलनस
(ब) रोडोस्पायरलम – कवकमूल
(स) एनाबीना – नाइट्रोजन स्थायीकारक\
(द) राइजोवियम-एल्फाएल्फा
उत्तर:
(ब) रोडोस्पायरलम – कवकमूल

7. निम्नलिखित में से कौनसा वाहितमल उपचार में निलम्बित हुए ठोसों को निकालता है? (NEET-2017)
(अ) तृतीयक उपचार
(ब) द्वितीयक उपचार
(स) प्राथमिक उपचार
(द) अपांक उपचार
उत्तर:
(स) प्राथमिक उपचार

8. निम्न में कौन उसके द्वारा उत्पन्न उत्पाद के साथ उचित रूप से मेलित है- (NEET-2017)
(अ) एसीटोवेक्टर : प्रतिजैविक
(ब) मीथोमोबैक्टीरियम : लैक्टिक अम्ल
(स) पेनीसिलीयम नोटेटम : एसीटिक अम्ल
(द) सैकरोसाइसीटीज सैरीवीसी : एथेनॉल
उत्तर:
(द) सैकरोसाइसीटीज सैरीवीसी : एथेनॉल

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9. नीचे दी गई तालिका में गलत मिलाई गई मदों को चुनिए- (NEET-2016)

विकल्प :सूक्ष्मजीवउत्पादअनुप्रयोग
(अ)स्ट्रेप्टोकॉकसस्ट्रेप्टोकाइनेजरुधिर वाहिका से थक्का को हटाना
(ब)क्लॉस्ट्रीडियमलाइपेजतेल के धब्बों को हटाना
(स)ट्राइकोडर्मा पोलीस्पोरमसाइक्लोस्पोरिन – Aप्रतिरक्षा संदमक औषधि
(द)मौनेस्कस परप्यूरियसस्टेटिंसरुधिर कॉलेस्ट्रोल को कम करना

उत्तर:
(ब)

10. कॉलम-I और कॉलम-II के बीच मिलान कीजिए- (NEET-2016)

कॉलम-Iकॉलम-II
1. सिट्रिक अम्ल(i) ट्राइकोडर्मा
2. साइक्लोस्पोरिन(ii) क्लास्ट्रिडियम
3. स्टेनिन(iii) ऐस्परिजिलस
4. ब्यूटाइरिक अम्ल(iv) मौनेस्कस
विकल्प :1234
(अ)(i)(iv)(ii)(iii)
(ब)(iii)(iv)(i)(ii)
(स)(iii)(i)(ii)(iv)
(द)(iii)(i)(iv)(ii)

उत्तर:

(द)(iii)(i)(iv)(ii)

11. वह कौनसा शैवाल है जिसे मानव के लिए खाद्य के रूप में नियोजित किया जा सकता है- (NEET-2014)
(अ) यूलोथ्रिक्स
(ब) क्लोरेला
(स) स्पाइरोगायरा
(द) पालिसाइफोनिया
उत्तर:
(ब) क्लोरेला

12. निम्नलिखित में से कौनसे कवक में हेलोसिनोजन होते हैं- (NEET-2014)
(अ) मारकेला एस्कुलेन्टा
(ब) अमानीरा मास्कादिया
(स) न्यूरोरचोरा जाति
(द) अस्टीलेगो जाति
उत्तर:
(ब) अमानीरा मास्कादिया

13. सिट्रिक अम्ल का अच्छा उत्पादक कौनसा है- (NEET-2013)
(अ) एस्चरजिलस
(ब) स्यूडोमोनास
(स) क्लॉस्ट्रीडियम
(द) सैकेरोमाइसीज
उत्तर:
(अ) एस्चरजिलस

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14. जल-मल के उपचार के दौरान विभिन्न बायो गैसें उत्पन्न होती हैं, जिनमें शामिल हैं- (NEET-2013)
(अ) मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बनडाइऑक्साइड
(ब) मीथेन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजनसल्फाइड
(स) हाइड्रोजनसल्फाइड, मीथेन सल्फरडाइऑक्साइड
(द) हाइड्रोजनसल्फाइड, नाइट्रोजन, मीथेन
उत्तर:
(अ) मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड, कार्बनडाइऑक्साइड

15. धान के खेतों में एजोला के साथ साहचर्य बनाता हुआ एक नाइट्रोजन यौगीकरण जीवाणु कौनसा है- (NEET-2012)
(अ) स्पाइरूलाइना
(ब) ऐनाबीना
(स) फ्रेन्किया
(द) टोलीपेश्रिक्स
उत्तर:
(ब) ऐनाबीना

16. गोबर गैस में सबसे अधिक मात्रा किसकी होती है? (Mains-2012)
(अ) ब्यूटेन
(ब) मीथेन
(स) प्रोपेन
(द) कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर:
(ब) मीथेन

17. निम्नलिखित में से कौनसा एक जैव उर्वरक नहीं है? (NEET-2011)
(अ) एग्रोबेक्टिरियम
(ब) राइजोवियम
(स) नॉस्टॉक
(द) माइकोराइजा
उत्तर:
(अ) एग्रोबेक्टिरियम

18. मिथेनोजन कहे जाने वाले जीव प्रचुर मात्रा में कहाँ पाए जाते हैं? (NEET-2011)
(अ) गंधक की चट्टानों
(ब) मवेशी बाड़ा
(स) प्रदूषित सरिता
(द) उष्म झरने
उत्तर:
(ब) मवेशी बाड़ा

19. जैविक ऑक्सीजन आवश्यकता (Biological Oxygen Demand) एक माप है- (RPMT-2010)
(अ) जल स्रोतों में उड़ेले गये औद्योगिक अपशिष्टों की
(ब) जैविक यौगिकों द्वारा प्रदूषित जल के विस्तार की
(स) पृथक् न होने योग्य कार्बन मोनोऑक्साइड की हीमोग्लोबिन युक्त मात्रा
(द) रात्रि में हरे पौधों को आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा
उत्तर:
(द) रात्रि में हरे पौधों को आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा

20. जैव गैस उत्पादन में प्रयुक्त जीवाणु समूह है- (BSEB-2010)
(अ) यूबैक्टिरिया
(ब) आर्गेनोट्राॅफ
(स) मीथेनोट्रॉफ
(द) मेथेनोजन
उत्तर:
(द) मेथेनोजन

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21. सर्वाधिक एन्टीबायोटिक्स किससे प्राप्त किये जाते हैं- (MP PMT-2009)
(अ) बेसिलस द्वारा
(ब) पेनिसिलियम द्वारा
(स) स्ट्रेप्टोमायसिसं द्वारा
(द) सिफेलोस्पोरियम द्वारा
उत्तर:
(अ) बेसिलस द्वारा

22. निम्न में सहजीवी नाइट्रेजन स्थिरीकरण है- (CBSE PMT-2009)
(अ) एजेटेबैक्टर
(ब) फ्रेंकिया
(स) एजोला
(द) ग्लोमस
उत्तर:
(ब) फ्रेंकिया

23. निम्न में से किसका प्रयोग जैव कीटनाशी के रूप में नहीं किया जाता है- (CBSE PMT-2009)
(अ) ट्राइकोडर्मा हाराजिए्सिस
(ब) न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस वायरस (NPV)
(स) जैन्थोमोनास कैस्पेस्ट्रिस
(द) बेसीलस थूरिज्जिएन्सिस
उत्तर:
(ब) न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस वायरस (NPV)

24. लेक्टिक अम्ल जीवाणु (LAB) उचित तापक्रम पर दूध को दही में बदल देता है जिससे उसकी पोषक गुणवत्ता में निम्न में से कौन-सा विटामिन बढ़ जाता है- (AMU-2009)
(अ) A
(ब) B
(स) C
(द) D
उत्तर:
(ब) B

25. ऐलनस की मूल ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण किसके द्वारा सम्पन्न होता है? (NEET-2008)
(अ) फ्रेन्किया
(ब) एजोराइजोवियम
(स) ब्रैडीराइजोवियम
(द) क्लास्ट्रीडियम
उत्तर:
(अ) फ्रेन्किया

26. ट्राइकोडर्मा हैर्जिएनम किस एक के लिए एक उपयोगी सूक्ष्म जीव सिद्ध हो चुका है? (NEET-2008)
(अ) उच्चतर पौधों में जीन स्थानान्तरण
(ब) मृदावाही पादप रोगजनकों के जैवकीय नियंत्रण
(स) सदूषित मृदाओं का जैवोपचार
(द) बंजर भूमि का पुनरुद्धार
उत्तर:
(ब) मृदावाही पादप रोगजनकों के जैवकीय नियंत्रण

27. प्रोबायोटिक्स (NEET-2007)
(अ) सजीव सूक्ष्मजीवीय खाद्य सम्पूरक
(ब) सुरक्षित एंटीबायोटिक्स
(स) कैंसर प्रेरक सूक्ष्मजीव
(द) नये प्रकार के खाद्य पदार्थ
उत्तर:
(अ) सजीव सूक्ष्मजीवीय खाद्य सम्पूरक

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30. स्ट्रैप्टोमाइसिन उत्पादित की जाती है- (BHU-2006)
(अ) स्ट्रेप्टोमाइसिस स्कोलियस द्वारा
(ब) स्ट्रेप्टोमाइसिस फ्रेडी द्वारा
(स) स्ट्रेप्टोमाइसिस वैनेजुएली द्वारा
(द) स्ट्रेप्टोमाइसिस ग्रीसिअस द्वारा
उत्तर:
(स) स्ट्रेप्टोमाइसिस वैनेजुएली द्वारा

31. ऐल्कोहॉल का किण्वन किसकी उपस्थिति में होता है- (RPMT-2006)
(अ) माल्टेज
(ब) जाइमेज
(स) एमाइलेज
(द) इन्वरटेज
उत्तर:
(ब) जाइमेज

32. बीयर बनाने में किण्वन (Fermentation) प्रक्रम के दौरान किस कच्चे पदार्थ का उपयोग किया जाता है- (Orissa JEE-2005)
(अ) सब्जियों का मण्ड
(ब) अनाजों का मण्ड
(स) फलों की शर्करा
(द) दालों की प्रोटीन
उत्तर:
(ब) अनाजों का मण्ड

33. बैसीलस थूरिन्जियन्सिस (Bt) प्रभेद का प्रयोग किया गया है- (CBSE-2005)
(अ) बायो-मैटालर्जिक तकनीक के लिए
(ब) बायो-मिनरेलाइजेशन प्रोसेस के लिये
(स) बायो-इन्सेक्टीसाइडल पौधों के लिए
(द) जैविक उर्वरकों के लिए
उत्तर:
(स) बायो-इन्सेक्टीसाइडल पौधों के लिए

34. एजोला का किसके साथ सहजीवी संबंध होता है- (CBSE-2004)
(अ) क्लोरेला
(ब) एनाबीना
(स) नोस्टोक
(द) टोलीपोश्रिक्स
उत्तर:
(ब) एनाबीना

35. Nif जीन पाया जाता है- (CPMT-2004)
(अ) पेनीसीलियम में
(ब) राइजोबियम में
(स) एस्परजिलस में
(द) स्ट्रैप्टोकोकस में
उत्तर:
(ब) राइजोबियम में

36. निम्नलिखित में से किसका उपयोग ब्रेड (bread) बनाने में होता है- (MP PMT-2004)
(अ) राइजोपस स्टोलोनीफर
(ब) जाइगोसैकरो माइसीज
(स) सैकेरोमाइसीज सेरेविसी
(द) सैकेरोमाइसीज लुडबीजाई
उत्तर:
(स) सैकेरोमाइसीज सेरेविसी

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37. स्ट्रैप्टोकॉकस किसके निर्माण में उपयोग किया जाता है- (BVP-2004)
(अ) वाइन (Wine)
(ब) ब्रेड (bread)
(स) चीज (Cheese)
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(स) चीज (Cheese)

38. निम्न में से कौनसे जीव का उपयोग रोक्यूफॉर्ट (Roquefort) पनीर को बनाने में किया जाता है- (BHU-2004)
(अ) म्युकर
(ब) राइजोपस
(स) एस्परजिलस
(द) पेनिसिलियम
उत्तर:
(द) पेनिसिलियम

39. ऐल्कोहॉलीय किण्वन के लिये कौन-सा जीवधारी प्रयोग किया जाता है- (MHCET-2004)
(अ) पेनिसिलियम (Penicillium)
(ब) स्यूडोमोनॉस (Pseudomonas)
(स) एस्पराजिलस (Aspergilus)
(द) सैकेरोमाइसीज (Saccharomyces)
उत्तर:
(द) सैकेरोमाइसीज (Saccharomyces)

40. गुंथे हुए आटे को पूरी रात गर्म वातावरण में रखने पर यह मुलायम एवं स्पंजी क्यों हो जाता है- (CBSE PMT-2004)
(अ) संसंजन (Cohesion) के कारण
(ब) परासरण
(स) वायुमण्डल में CO2 के अवशोषण के कारण
(द) किण्वन के कारण
उत्तर:
(द) किण्वन के कारण

41. इथाइल ऐल्कोहॉल व्यावसायिक रूप से किससे निर्मित होता है- (BHU-2004)
(अ) गेहूं
(ब) अंगूर
(स) मक्का
(द) गन्ना
उत्तर:
(द) गन्ना

42. स्ट्रेप्टोकोकस का प्रयोग तैयार करने में किया जाता है- (CBSE-2003)
(अ) वाइन
(ब) इडली
(स) पनीर
(द) ब्रेड
उत्तर:
(स) पनीर

43. एन्टीबायोटिक शब्द् सर्वप्रथम प्रयोग किया- (CBSE-2003)
(अ) फ्लेमिंग ने
(ब) पाश्चर ने
(स) वाक्समेन ने
(द) लिस्टर ने
उत्तर:
(स) वाक्समेन ने

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

44. पनीर तथा योगर्ट किस प्रक्रिया के उत्पाद हैं- (MP PMT-2003)
(अ) आसवन
(ब) पाश्चुराइजेशन
(स) किण्वन
(द) निर्जलीकरण
उत्तर:
(स) किण्वन

45. प्राचीनकाल में पनीर या चीज (Cheese) बनाई जाती थी- (BVP-2003)
(अ) एस्परजिलस के उपयोग से
(ब) रेनेज एन्जाइम के उपयोग से
(स) क्लॉस्ट्रीडियम जीवाणु के उपयोग से
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) रेनेज एन्जाइम के उपयोग से

46. पनीर उद्योग में उपयोग आने वाला रेनिन क्या होता है- (BVP-2002)
(अ) प्रतिजैविक (Antibiotic)
(ब) एल्केलॉएड (Alkaloid)
(स) जैव उत्प्रेरक (Biocatalyst)
(द) संदमक (Inhibitor)
उत्तर:
(स) जैव उत्प्रेरक (Biocatalyst)

47. स्वतंत्रजीवी अवायवीय नाइट्रोजन स्थिरीकारी जीवाणु है- (MP PMT-2002)
(अ) राइजोबियम
(ब) स्ट्रैप्टोकोकस
(स) एजोटोबैक्टर
(द) क्लॉस्ट्रीडियम
उत्तर:
(द) क्लॉस्ट्रीडियम

48. सिट्रिक अम्ल का उत्पादन होता है- (CBSE-2002)
(अ) राइजोपस से
(ब) म्यूकर से
(स) एस्परजिलस से
(द) सैकरोमाइसिस से
उत्तर:
(अ) राइजोपस से

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 10 मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव

49. नॉस्टॉक में नाइट्रोजिनेज एन्जाइम पाया जाता है- (MP PMT-2001)
(अ) वर्धी कोशिकाओं में
(ब) हेटरोसिस्ट में
(स) दोनों ‘अ’ व ‘ब’ में
(द) केवल हार्मोगोन्स में
उत्तर:
(ब) हेटरोसिस्ट में

50. सायनोबैक्टीरिया के लिये यह सही है कि- (CBSE-2001)
(अ) ऑक्सीजन उत्पादी व नाइट्रीकारी है
(ब) ऑक्सीजन उत्पादी व अनाइट्रीकारी है
(स) अ-ऑक्सीजन उत्पादी व नाइट्रीकारी है
(द) अ-ऑक्सीजन उत्पादी व अनाइट्रीकारी है
उत्तर:
(अ) ऑक्सीजन उत्पादी व नाइट्रीकारी है

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
कौन-सा कथन अशुद्ध है-
(a) द्रव के ऊपरी मुक्त तल पर द्रव का दाब शून्य होता है।
(b) किसी बर्तन में भरे द्रव का दाब सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।
(c) किसी क्षैतिज तल में द्रव का दाब सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।
(d) किसी तल पर द्रव का दाब क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है।
उत्तर:
(b) किसी बर्तन में भरे द्रव का दाब सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।

प्रश्न 2.
द्रव दाब निर्भर करता है-
(a) केवल गहराई पर
(b) केवल घनत्व पर
(c) केवल गुरुत्वीय त्वरण पर
(d) गहराई, घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण तीनों पर।
उत्तर:
(d) गहराई, घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण तीनों पर।

प्रश्न 3.
किसी बाह्य बल के कार्य न करने पर एक छोटी बूँद की आकृति निर्धारित होती है-
(a) द्रव के पृष्ठ तनाव से
(b) द्रव के घनत्व से
(c) द्रव की श्यानता से
(d) वायु के ताप से केवल ।
उत्तर:
(a) द्रव के पृष्ठ तनाव से

प्रश्न 4.
द्रव का पृष्ठ तनाव-
(a) क्षेत्रफल के साथ बढ़ता है
(b) क्षेत्रफल के साथ घटता है
(c) ताप के साथ बढ़ता है
(d) ताप के साथ घटता है।
उत्तर:
(d) ताप के साथ घटता है।

प्रश्न 5.
जल की बड़ी बूँद को छोटी-छोटी बूंदों में फुहारने की क्रिया में-
(a) ताप बढ़ता है
(b) ताप घटता है
(c) पृष्ठीय ऊर्जा घटती है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) ताप घटता है

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 6.
पेन्ट गन आधारित है-
(a) बरनौली के सिद्धान्त पर
(b) बॉयल के नियम पर
(c) आर्किमिडीज के सिद्धान्त पर
(d) न्यूटन के नियमों पर ।
उत्तर:
(a) बरनौली के सिद्धान्त पर

प्रश्न 7.
सीसे की गोली किसी श्यान द्रव में मुक्त रूप से गिर रही है। गोली का वेग-
(a) बढ़ जाता है
(b) घट जाता है
(c) सदैव समान रहता है
(d) बढ़ता है फिर गोली एक निश्चित वेग से गिरती रहती है।
उत्तर:
(d) बढ़ता है फिर गोली एक निश्चित वेग से गिरती रहती है।

प्रश्न 8.
त्रिज्या की एक छोटी गोली द्रव में गिर रही है। इसका सीमान्त वेग अनुक्रमानुपाती है-
(a) 1/r²
(b) 1/r
(c) r²
(d) r
उत्तर:
(c) r²

प्रश्न 9.
ताप बढ़ने पर गैस की श्यानता-
(a) बढ़ती हैं
(b) घटती है
(c) अपरिवर्तित रहती है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) बढ़ती हैं

प्रश्न 10.
बरनौली प्रमेय आधारित है-
(a) संवेग संरक्षण पर
(b) ऊर्जा संरक्षण पर
(c) द्रव्यमान संरक्षण पर
(d) इनमें से किसी पर नहीं।
उत्तर:
(b) ऊर्जा संरक्षण पर

प्रश्न 11.
किसी असमान त्रिज्या वाली नली में जल बह रहा है नली के प्रविष्टि तथा निकासी सिरों पर त्रिज्याओं का अनुपात 5:7 है। नली में प्रविष्ट करने वाले तथा बाहर निकलने वाले जल के वेगों का अनुपात होगा-
(a) 25 : 49
(b) 125 : 343
(c) 49 : 25
(d) 1 : 1.
उत्तर:
(c) 49 : 25

प्रश्न 12.
श्यान द्रव में सीमान्त वेग से गिरने वाले पिण्ड का त्वरण है-
(a) शून्य
(b) g
(c) g से अधिक
(d) g से कम।
उत्तर:
(a) शून्य

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 13.
असमान अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षैतिज पाइप में जल बह रहा है। पाइप में संकरे स्थान पर होगा-
(a) वेग अधिक दाब अधिक
(b) वेग कम दाब अधिक
(c) वेग अधिक दाब कम
(d) वेग कम दाब कम ।
उत्तर:
(c) वेग अधिक दाब कम

प्रश्न 14.
दो गोलों की त्रिज्याओं का अनुपात 1:2 है। वे एक श्यान दव में नीचे गिर रहे हैं। इनके सीमान्त वेगों का अनुपात होगा-
(a) 1 : 2
(b) 2 : 1
(c) 1 : 4
(d) 4 : 1.
उत्तर:
(c) 1 : 4

प्रश्न 15.
जल से भरे बर्तन में मुक्त तल से 3-2 मीटर गहराई पर एक छिद्र हो, तो जल का बहिःस्राव वेग है। यदि गुरुत्वीय त्वरण 10 ms-2 होगा-
(a) 5.7 m/s
(b) 7.5 m/s
(c) 8 m/s
(d) 32 m/s.
उत्तर:
(c) 8 m/s

प्रश्न 16.
मोम युक्त केशनली को जल में डुबाने पर उसमें जल-
(a) ऊपर चढ़ेगा
(b) नीचे गिरेगा
(c) ऊपर चढ़कर फब्बारों के रूप में गिरेगा
(d) पहले चढ़ेगा फिर गिरेगा ।
उत्तर:
(b) नीचे गिरेगा

प्रश्न 17.
एक द्रव ठोस की सतह को नहीं भिगोएगा, यदि स्पर्श कोण है-
(a) 0°
(b) अधिक कोण
(c) 450
(d) 60°
उत्तर:
(b) अधिक कोण

प्रश्न 18.
किसी केशिका में चड़े हुए पानी की ऊँचाई होगी-
(a) 4°C पर अधिकतम
(b) 2°C पर अधिकतम
(c) 4°C पर न्यनतम
(d) 0°C पर न्यूनतम ।
उत्तर:
(c) 4°C पर न्यनतम

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 19.
पृष्ठ तनाव के कारण गोलाकार मुड़े हुए पृष्ठ के भीतर दाब आधिक्य होता है-
(a) \(\frac{2T}{r}\)
(b) \(\frac{T}{2r}\)
(c) \(\frac{T}{r_1}+\frac{T}{r_2}\)
(d) \(\frac{T}{r_1}-\frac{T}{r_2}\)
उत्तर:
(c) \(\frac{T}{r_1}+\frac{T}{r_2}\)

प्रश्न 20.
जब पानी की सतह पर तेल डाल दिया जाये तो मच्छर प्रजनन नहीं कर सकते, क्योंकि-
(a) उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिलती है
(b) पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।
(c) श्यानता बढ़ जाती है
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।

प्रश्न 21.
ताप कम करने पर पृष्ठ तनाव होता है-
(a) बढ़ता है
(b) कम होता है
(c) अपरिवर्तित रहता है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) बढ़ता है

प्रश्न 22.
रेनॉल्ड्स संख्या का विमीय सूत्र है-
(a) [M0L0T0]
(b) [M-1L0T1]
(c) [ML0T0]
(d) [MLT-2]
उत्तर:
(a) [M0L0T0]

प्रश्न 23.
वायु में अधिक ऊँचाई से जल की बूंद गिरती है। यदि बूँद h ऊँचाई से गिरे तो सीमान्त वेग है-
(a) h के समानुपाती
(b) √h के समानुपाती
(c) \(\frac{1}{h}\) के समानुपाती
(d) h पर निर्भर नहीं करता।
उत्तर:
(d) h पर निर्भर नहीं करता।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 24.
पृथ्वी पर एक केश नली में द्रव स्तम्भ की ऊँचाई h है। चन्द्रमा पर जहाँ गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी का है, यह ऊँचाई है-
(a) \(\frac{h}{6}\)
(b) 6 h
(c) h
(d) शून्य ।
उत्तर:
(b) 6 h

प्रश्न 25.
क्रान्तिक ताप पर पृष्ठ तनाव हो जाता है-
(a) अनन्त
(b) शून्य
(c) ऋणात्मक एवं निश्चित
(d) धनात्मक एवं निश्चित ।
उत्तर:
(b) शून्य

प्रश्न 26.
ताप बढ़ने पर द्रवों तथा गैंसों में श्यानता-
(a) दोनों में बढ़ती है
(b) दोनों में घटती है
(c) द्रवों में बढ़ती है तथा गैसों में घटती है।
(d) द्रवों में घटती है तथा गैसों में बढ़ती है।
उत्तर:
(d) द्रवों में घटती है तथा गैसों में बढ़ती है।

प्रश्न 27.
यदि एक काँच की छड़ को पारे में डुबोकर निकालें तो पारा छड़ से नहीं चिपकता है, क्योंकि-
(a) स्पर्श कोण बहुत छोटा होता है
(b) ससंजक बल अधिक है
(c) आसंजक बल अधिक है।
(d) पारे का घनत्व अधिक है।
उत्तर:
(b) ससंजक बल अधिक है

प्रश्न 28.
पृष्ठ तनाव के कारण बेलनाकार मुड़े हुए पृष्ठ के भीतर दाब आधिक्य होता है-
(a) \(\frac{2T}{r}\)
(b) \(\frac{T}{r}\)
(c) \(2T {\frac{T}{r_1}+\frac{T}{r_2}}\)
(d) \(4T {\frac{T}{r_1}-\frac{T}{r_2}}\)
उत्तर:
(b) \(\frac{T}{r}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 29.
चॉक द्वारा श्यामपट्ट पर लिखना किस गुण के कारण सम्भव है-
(a) ससंजक बल
(b) आसंजक बल
(c) पृष्ठ तनाव
(d) श्यानता।
उत्तर:
(b) आसंजक बल

प्रश्न 30.
बैरोमीटर को पहाड़ से खान में ले जाने पर पारे का तल-
(a) गिरेगा
(b) ऊपर उठेगा
(c) उतना ही रहेगा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) ऊपर उठेगा

प्रश्न 31.
वायुमण्डलीय दाब में अचानक कमी का संकेत मिलता
(a) तूफान
(b) वर्षा
(c) साफ मौसम
(d) शीत लहर
उत्तर:
(a) तूफान

प्रश्न 32.
संकीर्ण नली के लिये रेनॉल्ड्स संख्या का मान होता है-
(a) 10
(b) 100
(c) 1000
(d) 10000.
उत्तर:
(c) 1000

प्रश्न 33.
एक नली में दाब P पर प्रवाहित जल की दर Q है। यदि नली की त्रिज्या पहले से आधी कर दी जाये तथा दाब को 2P कर दिया जाये तो प्रवाह दर होगी-
(a) 4Q
(b) \(\frac{Q^2}{4}\)
(c) \(\frac{Q}{4}\)
(d) \(\frac{Q}{8}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{Q}{8}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
वायुमण्डलीय दाब के अचानक कम हो जाने पर क्या सूचना प्राप्त होती है ?
उत्तर:
तूफान आने की सूचना प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
सूटकेस के हत्थे चौड़े क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर: हत्थे चौड़े बनाने से क्षेत्रफल बढ़ जाता है जिससे दाव घट जाता है। यदि ऐसा न किया जाए तो हत्थे हाथ पर अधिक दबाव डालेंगे |

प्रश्न 3.
स्वस्थ मनुष्य का प्रकुंचन रक्त दाब कितना होता है ?
उत्तर:
स्वस्थ मनुष्य का प्रकुंचन रक्त दाब 120mm ऊँचाई वाले पारे के स्तम्भ के दाब के बराबर (120 टॉर) होता है।

प्रश्न 4.
क्या बहते हुए द्रव में दो धारा रेखाएँ एक-दूसरे को काट सकती हैं ?
उत्तर:
नहीं, दो धारा रेखाएँ एक-दूसरे को काटेंगी तो कटान बिन्दु पर द्रव के वेग की दो दिशाएँ होंगी जो कि असम्भव है।

प्रश्न 5.
द्रवों तथा गैसों की श्यानता पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
द्रवों की श्यानता ताप बढ़ाने पर घटती है जबकि गैसों की श्यानता ताप के बढ़ने पर बढ़ जाती है।

प्रश्न 6.
क्रिकेट तथा टेनिस के खेल में चक्रण करती हुई गेंद अपने मार्ग से घूम जाती है। इसकी व्याख्या किस सिद्धान्त या प्रमेव के आधार पर की जा सकती है ?
उत्तर:
क्रिकेट तथा टेनिस के खेल में चक्रण करती हुई गेंद के अपने मार्ग से घूम जाने की व्याख्या बरनौली प्रमेय के आधार पर की जा सकती है।

प्रश्न 7.
जल, वायु, रक्त तथा शहद को श्यानता के बढ़ते क्रम में लिखिए।
उत्तर:
वायु, जल, रक्त, शहद।

प्रश्न 8.
वर्षा की छोटी बूँदें जमीन पर नियत वेग से पहुँचती हैं, अथवा नियत त्वरण से।
उत्तर:
वायुमण्डल की श्यानता के कारण वर्षा की छोटी बूँदें नियत वेग से गिरती हैं।

प्रश्न 9.
नली में प्रवाहित द्रव की कौन-सी पर्त का वेग सबसे अधिक होता है ?
उत्तर:
नली के अक्ष पर स्थित पर्त का वेग सबसे अधिक होता है।

प्रश्न 10.
किस द्रव में पिण्ड का सीमान्त वेग कम होगा-जल में या ग्लिसरीन में ?
उत्तर:
ग्लिसरीन में, क्योंकि ग्लिसरीन की श्यानता अधिक होती है।

प्रश्न 11.
क्या बरनौली की प्रमेय विक्षुब्ध प्रवाह के लिए भी सत्य है ?
उत्तर:
नहीं, वरनौली की प्रमेय केवल धारा रेखीय प्रवाह के लिए ही सत्य है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 12.
यदि टंकी में ताजे जल के स्थान पर मिट्टी का तेल भर दें तो क्या मिट्टी के तेल का बाहर निकलने का वेग बदल जायेगा ?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि बहिःस्राव वेग द्रव के घनत्व पर निर्भर नहीं करता।

प्रश्न 13.
यदि हम धागे की रील के छेद में ऊपर से फूँक मारें तो उसके निचले सिरे पर रखा गत्ते का टुकड़ा नीचे नहीं गिरता, क्या कारण है ?
उत्तर:
रील व गत्ते के टुकड़े के बीच वायु वेग अधिक हो जाने से दाब वायुमण्डलीय दाब से कम हो जाता है।

प्रश्न 14.
जल के पृष्ठ तनाव को कैसे कम कर सकते हैं ?
उत्तर:
गर्म करके, तेल अथवा साबुन का घोल डालकर ।

प्रश्न 15.
कपड़े पर मोम रगड़ देने पर कपड़ा ‘वाटर प्रूफ’ हो जाता है, क्यों ?
उत्तर:
कपड़े के धागों में बनी केशनलियाँ समाप्त हो जाती हैं।

प्रश्न 16.
थर्मामीटर की नली (काँच) में पारे का भरना कठिन होता है, क्यों ?
उत्तर:
पारे तथा काँच का स्पर्श कोण अधिककोण है, अतः जब थर्मामीटर की नली के एक सिरे को पारे में डुबोते हैं तो उसमें पारे का तल नीचे गिरता है।

प्रश्न 17.
क्या वर्षा की सभी बूँदें (बड़ी और छोटी) एक ही अन्तिम वेग से पृथ्वी पर पहुँचती हैं ?
उत्तर:
नहीं, चूँकि vt ∝ r², अतः बड़ी बूंद का अन्तिम वेग अधिक होता है।

प्रश्न 18.
समान आकार की लोहे की गेंद और टेनिस की गेंद एक ऊँची मीनार की चोटी से गिराई जाती हैं वायु का अक्षेप तथा श्यानता को ध्यान में रखते हुए यह बताइए कि कौन सी गेंद पृथ्वी पर पहले पहुँचेगी ?
उत्तर:
पहले लोहे की गेंद पहुँचेगी।

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प्रश्न 19.
एक बर्तन की तली में एक क्षैतिज केशनली जुड़ी है जिससे प्रति सेकण्ड प्रवाहित द्रव का आयतन Q है। अब यदि इस केशनली के साथ एक अन्य समान लम्बाई व समान त्रिज्या की केशनली को श्रेणीक्रम में जोड़ दिया जाये तो द्रव की प्रवाह दर क्या होगी ?
उत्तर:
\(Q=\frac{πpr^4}{8ηl}\), अत: लम्बाई दुगनी होने पर प्रवाह दर आधी अर्थात् \(\frac{Q}{2}\) रह जायेगी।

प्रश्न 20.
एक छोटी ठोस गोल गेंद किसी श्यान द्रव में छोड़ी जाती है। द्रव में इसके गमन के लिए वेग तथा चली दूरी में अनुमानित ग्राफ खींचिए ।
उत्तर:
वेग तथा चली दूरी के बीच ग्राफ चित्र के अनुसार होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -1

प्रश्न 21.
पॉस्कल नियम के दो अनुप्रयोग लिखिये ।
उत्तर:
द्रवचालिक ब्रेक, द्रवचालित लिफ्ट

प्रश्न 22.
जल के पृष्ठ तनाव को कैसे कम कर सकते हैं ?
उत्तर:
गर्म करके, तेल अथवा साबुन का घोल डालकर ।

प्रश्न 23.
खेतों में बरसात के तुरन्त बाद जुताई कर दी जाती है, क्यों ?
उत्तर:
जुताई करने से मिट्टी में बनी केशनलियों टूट जाती हैं, जिससे मिट्टी के अन्दर का पानी ऊपर चढ़कर वाष्पित नहीं हो पाता है।

प्रश्न 24.
गर्म सूप ठण्डे सूप की अपेक्षा स्वादिष्ट क्यों लगता है ?
उत्तर:
गर्म सूप का पृष्ठ तनाव कम होने से वह जीभ के अधिक पृष्ठ क्षेत्रफल पर फैल जाता है और स्वादिष्ट लगता है।

प्रश्न 25.
तापवृद्धि से स्पर्श कोण के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
स्पर्श कोण कम हो जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 26.
क्षैतिज नली के लिए बर्नूली सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:
(P1 – P2) = \(\frac{1}{2}\) ρ(v2² – v1²)

प्रश्न 27.
जल का पृष्ठ तनाव किस ताप पर अधिक होगा ?
उत्तर:
4°C पर ।

प्रश्न 28.
किस पदार्थ की केशनली में जल का नवचन्द्रक समतल होगा ?
उत्तर:
चाँदी की केशनली में।

प्रश्न 29.
पृष्ठ तनाव व पृष्ठ ऊर्जा में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
W = T.∆A

प्रश्न 30.
द्रव का पृष्ठ तनाव किस ताप पर शून्य हो जायेगा ?
उत्तर:
क्रान्तिक ताप पर ।

प्रश्न 31.
पृष्ठ तनाव की व्याख्या किन बलों के आधार पर करते
उत्तर:
अंतराणविक बलों के आधार पर।

प्रश्न 32.
फाउन्टेन पेन से अखबार के कागज की लिखावट अस्पष्ट हो जाती है क्या कारण है ?
उत्तर:
अखबार के कागज की केशनलियों से स्याही फैल जाती है।

प्रश्न 33.
श्यानता का CGS मात्रक लिखिए।
उत्तर:
प्वाइज या डाइन- से / सेमी²

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 34.
रेनॉल्डस संख्या से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
यह शुद्ध संख्या है जो पाइप में तरल के प्रवाह की प्रकृति को बताती है।

प्रश्न 35.
पृष्ठ तनाव के लिए उत्तरदायी बल कौन-सा है ?
उत्तर:
ससंजक बल ।

प्रश्न 36.
गर्मियों में सूती कपड़े अधिक आरामदायक होते हैं ?
उत्तर:
सूती कपड़ों में धागों के मध्य केशनलियाँ होती हैं जिनसे पसीना उनमें प्रवेश कर जाता है और वाष्प बनकर उड़ जाता है अतः शरीर को ठण्डक का अनुभव होता है।

प्रश्न 37.
द्रव में हवा का बुलबुला ऊपर क्यों उठता है ?
उत्तर:
क्योंकि हवा के बुलबुले का सीमान्त वेग ऋणात्मक होता है अतः वह ऊपर उठता है।

प्रश्न 38.
बहते हुए द्रव के वेग शीर्ष एवं दाब शीर्ष के सूत्र लिखिए।
उत्तर:
वेग शीर्ष- \(\frac{v^2}{2g}\)
दाब शीर्ष – \(\frac{ρ}{ρg}\)

प्रश्न 39.
भारहीनता की स्थिति में यदि केशनली को पानी में डुबोया जाये तो क्या होगा ?
उत्तर:
भारहीनता की स्थिति में द्रव नली की पूरी लम्बाई तक चढ़ जायेगा।

प्रश्न 40.
एक सुई साफ पानी में तैरती है, लेकिन साबुन के पानी में ‘डूब जाती है। क्यों ?
उत्तर:
साफ पानी का पृष्ठ तनाव साबुन मिले पानी से अधिक होता है, अतः साफ पानी का पृष्ठ तनाव सुई के भार को सन्तुलित कर सकता है।

प्रश्न 41.
किसी बेलनाकार नली में बहते हुए द्रव में किस पर्त का वेग सर्वाधिक होता है ?
उत्तर:
नली की अक्ष के अनुदिश पर्त का।

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प्रश्न 42.
केशनली में पारा भरना कठिन क्यों है ?
उत्तर:
काँच के लिए पारे का स्पर्श कोण 135° है अतः यह केशनली में अवनमन दिखाता है।

प्रश्न 43.
यदि टंकी में ताजे जल के स्थान पर समुद्री जल भर दें तो क्या छिद्र से निकलने वाले जल का वेग बदल जाएगा ?
उत्तर:
नहीं, बहिस्राव वेग घनत्व पर निर्भर नहीं करता।

लघुत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल बराबर कैसे चढ़ता रहता है ?
उत्तर:
लालटेन की बत्ती के धागों के बीच में असंख्य केशनलियाँ होती हैं। जब मिट्टी के तेल में डुबोया जाता है तो मिट्टी का तेल इन केशनलियों में से ऊपर चढ़ जाता है।

प्रश्न 2.
दाबमापी में पारे का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
इसके निम्न कारण हैं-
(1) पारा केशनली की दीवारों से चिपकता नहीं है।
(2) पारे का घनत्व अधिक होने के कारण प्रयुक्त केशनली की लम्बाई कम होती है।
(3) पारे का वाष्प दाब कम होता है।

प्रश्न 3.
समुद्र की लहरों को शान्त करने के लिए लहरों पर तेल डाल देते हैं, क्यों ?.
उत्तर:
तेल डाल देने पर तेज हवा तेल को जल के पृष्ठ पर हवा की दिशा में दूर तक फैला देती है, बिना तेल वाले जल का पृष्ठ तनाव तेल वाले जल से अधिक होता है, अतः बिना तेल वाला जल, तेल वाले जल को वायु की विपरीत दिशा में खींचता है, जिससे समुद्र की लहरें शान्त हो जाती हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 4.
वायुयान लगभग 10 km की ऊंचाई पर ही उड़ाये जाते हैं जबकि इतनी ऊँचाई तक ले जाने में काफी ईंधन (Fuel) खर्च होता है, क्यों ?
उत्तर:
10 km से कम ऊँचाई पर वायुमण्डल सघन है, इसलिए 10 km से कम ऊँचाई पर वायु की श्यानता प्रभावी होती है। वायु की श्यानता के कारण वायुयान पर पीछे की ओर एक श्यान बल लगेगा, जो वायुवान के वेग के अनुक्रमानुपाती होगा। वायुयान का वेग अधिक होने के कारण श्यान बल भी अधिक होगा। इससे वायुवान गर्म हो जायेगा तथा ईंधन भी अधिक खर्च होगा, यही कारण है कि वायुयान 10 km से कम ऊँचाई पर नहीं उड़ाये जाते ।

प्रश्न 5.
एक असमान परिच्छेद वाले क्षैतिज पाइप में जल बह रहा है। जल का किसी बिन्दु P पर वेग एक अन्य बिन्दु Q पर जल के वेग का चार गुना है। बिन्दु P पर पाइप का व्यास बिन्दु Q के सापेक्ष कितना होगा ?
उत्तर:
सातत्य समीकरण से,
A1v1 = A2v2
πr1².v1 = πr2².v2
या \(\frac{\mathrm{D}_1^2}{4} \cdot v_1=\frac{\mathrm{D}_2^2}{4} \cdot v_2\)
या \(\mathrm{D}_1^2 \cdot 4 v_2=\mathrm{D}_2^2 v_2\)
या \(2 \mathrm{D}_1=\mathrm{D}_2 \Rightarrow \mathrm{D}_1=\mathrm{D}_2 / 2\)
अतः व्यास आधा होगा।

प्रश्न 6.
बरसात के बाद किसान भूमि की जुताई करते हैं, क्या कारण है ?
उत्तर:
खेत की जुताई कर देने से मिट्टी में बनी केशनलियाँ टूट जाती हैं, फलस्वरूप नीचे का जल पौधों के काम आता है। जुताई न करने पर मिट्टी में बनी केशनलियों में चढ़कर जल भूमि की सतह पर ऊपर आ जायेगा तथा वाष्प बन कर उड़ जायेगा।

प्रश्न 7.
यदि किसी द्रव व ठोस के बीच स्पर्श कोण 90° से कम हो तो क्या वह द्रव ठोस को भिगोयेगा ? उस ठोस से बनी केशनली में इसका पृष्ठ कैसा होगा ? क्या वह केशनली में चढ़ेगा ?
उत्तर:
भिगोयेगा, अवतल चढ़ेगा।

प्रश्न 8.
किसी ठोस के पृष्ठ और द्रव के बीच ‘स्पर्श कोण’ की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
स्पर्श कोण – “द्रव व ठोस के किसी स्पर्श विन्दु से द्रव के तल पर खींची गई स्पर्श रेखा तथा ठोस के तल पर द्रव के अन्दर की ओर खींची गई स्पर्श रेखा के बीच बने कोण को उस द्रव एवं ठोस के लिए स्पर्श कोण कहते हैं।

प्रश्न 9.
तेल में छोड़ी गई पानी की बूंद क्यों सिकुड़ जाती है?
उत्तर:
जल के अणुओं के बीच ससंजक बल, जल व तेल के अणुओं के बीच आसंजक बल की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है जब जल की बूँद तेल की सतह पर डाली जाती है तो जल के अणु ससंजक बलों के कारण परस्पर चिपके रहकर गोल आकृति ग्रहण किए रहते हैं तथा सतह पर नहीं फैलते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 10.
पृष्ठ तनाव को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Surface Tension):

  • ताप का प्रभाव (Effect of temperature): ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव रेखीय रूप से घटता है।
    लेकिन पिघले ताँबे तथा कैडमियम के लिए ताप बढ़ाने पर पृष्ठ तनाव बढ़ता है।
  • संदूषण पर (On Contamination): जल की सतह पर मिट्टी के कण या चिकनाई युक्त पदार्थ उपस्थित होने पर जल का पृष्ठ तनाव घट जाता है।
  • विद्युतीकरण पर (On electrification): विद्युतीकरण के कारण द्रव का पृष्ठ तनाव घट जाता है क्योंकि इसके कारण द्रव के मुक्त पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की तरफ बल लगता है।
  • विलेय पदार्थ का प्रभाव (Effect of solute): सामान्यतः किसी द्रव में विलेय पदार्थ घुला हो तो उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। जल में साबुन या फीनॉल डालने पर उसका पृष्ठ तनाव घट जाता है, परन्तु यदि विलेय पदार्थ बहुत घुलनशील है तो द्रव का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।

प्रश्न 11.
चक्रण गति करती हुई गेंद के पथ में परिवर्तन का कारण समझाइए है ?
उत्तर:
मैगनस प्रभाव (Magnus Effect):
टेनिस या क्रिकेट के खिलाड़ी जब गेंद को स्पिन (spin) करते हुए फेंकते हैं तो गेंद वायु में एक सरल रेखा पर न चलकर एक वक्राकार पथ पर चलती है जिसे गेंद का स्विंग (swing) करना कहते हैं। इसका कारण यह है कि जब गेंद स्पिन करती है तो उसके साथ-साथ उसके चारों ओर की वायु भी v वेग से घूमती है । स्पिन करती हुई गेंद जब आगे बढ़ती है तो गेंद के आगे की वायु गेंद द्वारा छोड़े गए खाली स्थान को भरने के लिए u वेग से पीछे की ओर दौड़ती है। गेंद के ऊपर वायु की धारा रेखाओं की दिशा गेंद की स्पिन गति के विपरीत है, अतः गेंद के ऊपर वायु का परिणामी वेग (u – v) हो जाता है। गेंद के नीचे वायु की धारा रेखाओं की दिशा गेंद की स्पिन गति की दिशा में है, अतः गेंद के नीचे वायु का परिणामी वेग (u + v) हो जाता है ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -2

इस प्रकार गेंद के ऊपर वायु का वेग घट जाता है तथा नीचे बढ़ जाता है, अतः बर्नूली की प्रमेय के अनुसार गेंद के ऊपर वायुदाब अधिक तथा गेंद के नीचे वायुदाब कम हो जाता है। इस दाबान्तर के कारण गेंद सरल रेखा में न चलकर नीचे की ओर झुकते हुए वक्राकार पथ पर चलती है, इसे मैगनस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 12.
जल की छोटी बूँदें फुहारने से ठण्डक क्यों उत्पन्न होती
उत्तर:
पृष्ठ तनाव पर आधारित दैनिक घटनाएँ (Events in Daily Life Based on Surface Tension):
(i) सीसे के छर्रे बनाना-सीसे के गोल छर्रे बनाने के लिए पिघलते हुए सीसे को धीरे: धीरे ऊँचाई से पानी पर गिराते हैं। पृष्ठ तनाव के कारण गिरते समय पिघला हुआ सीसा न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल घेरता हुआ गोलीय आकृति धारण कर लेता है तथा पानी में पहुँचने पर ठोस बन जाता है। इस प्रकार सीसे के छोटे-छोटे गोल छर्डे बन जाते हैं। छर्रा जितना अधिक बड़ा होगा, गुरुत्व बल उतना ही अधिक प्रभावी होगा तथा छर्रा भी उतना ही अधिक चपटा हो जायेगा।

(ii) जल की अपेक्षा साबुन के घोल के अधिक बड़े बुलबुले बनाए जा सकते हैं: साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव शुद्ध जल की अपेक्षा कम होता है। पृष्ठ तनाव कम होने का अर्थ है कि द्रव के पृष्ठ की न्यूनतम क्षेत्रफल घेरने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, अतः साबुन के घोल के अधिक बड़े बुलबुले बनाए जा सकते हैं जबकि जल के बड़े बुलबुले अधिक पृष्ठ तनाव के कारण टूट जाते हैं।

(iii) साबुन मिले हुए गरम जल से शुद्ध जल की अपेक्षा कपड़ों की धुलाई अधिक साफ होती है: साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव शुद्ध जल की अपेक्षा काफी कम होता है, अतः साबुन के घोल की एक बूँद शुद्ध जल की एक बूँद की अपेक्षा कपड़े के अधिक क्षेत्रफल को भिगोती है।
इस प्रकार साबुन का घोल कपड़े के बारीक छिद्रों में घुसकर, वहाँ जमे मैल को अपने साथ चिपकाकर बाहर निकाल लाता है (क्योंकि घोल व मैल के बीच आसंजक बल का मान, घोल के अपने ससंजक बल के मान से अधिक होता है); यदि घोल को गरम कर दिया जाए तो उसका पृष्ठ तनाव और भी कम हो जाता है। इस प्रकार साबुन मिले हुए गरम जल से शुद्ध जल की अपेक्षा कपड़ों की धुलाई अधिक साफ होती है।

(iv) काँच की नली के सिरों का गर्म होने पर गोल हो जाना: जब काँच की एक नली को बर्नर की ज्वाला में गर्म करते हैं तो काँच पिघलकर द्रव बन जाता है। इस द्रव का पृष्ठ कम-से-कम क्षेत्रफल घेरने का प्रयत्न करता है। चूँकि दिए हुए आयतन के लिए गोले का क्षेत्रफल न्यूनतम होता है, अतः पिघला हुआ काँच गोले की आकृति लेने का प्रयत्न करता है जिससे नली के सिरे गोल हो जाते हैं।

(v) फुहारने से ठण्डक उत्पन्न होती है: जब किसी द्रव को फुहारा जाता है तो उसकी असंख्य छोटी-छोटी बूँदें बन जाती हैं। जिससे द्रव का पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया में द्रव के भीतर के अणु ऊपर उठकर बूँदों के पृष्ठ पर पहुँचते हैं जिसके लिए उन्हें ससंजक बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। इससे द्रव की आन्तरिक ऊर्जा कम हो जाती है और बूँदों का ताप गिर जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 13.
यदि कोई वस्तु असमरूपी होती है तो वस्तु तरल में घूमने क्यों लग जाती है ?
उत्तर:
यह इसलिए होता है क्योंकि गुरुत्व केन्द्र, उत्प्लावन केन्द्र के सम्पाती नहीं होता है। इस कारण वस्तु का भार तथा द्रव का उत्प्लावक बल एक बल युग्म का निर्माण करते हैं। इस बल युग्म का आघूर्ण ही वस्तु को घूर्णन गति कराने के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 14.
दोनों सिरों पर खुली केशनली को जल में डुबाने पर केशनली में जल कुछ ऊपर तक क्यों चढ़ जाता है ?
उत्तर:
केशनली के भीतर, अवतल जल पृष्ठ के नीचे दाब, पृष्ठ के ऊपर वाले दाब से 2T / R कम होता है,
अतः केशनली के बाहर जल का आधिक्य दाब, केशनली में अतिरिक्त जल भेजकर जल को कुछ ऊपर तक चढ़ा देता है।

प्रश्न 15.
वह कपास जिसमें चर्बी तथा चिकनाई अलग कर दी जाती है, अधिक जल अवशोषित करती है, क्यों ?
उत्तर:
जब कपास को जल में डुबाते हैं तो उसमें बनी केशिकाओं में पृष्ठ तनाव के कारण जल चढ़ता है जिसकी ऊँचाई पृष्ठ तनाव पर निर्भर करती है। चिकनी कपास के सम्पर्क में जल का पृष्ठ तनाव घट जाता है जिससे जल कम ऊपर चढ़ता है।

प्रश्न 16.
भारहीनता की अवस्था में (जैसे कृत्रिम उपग्रह में) यदि किसी केशनली को जल में डुबोया जाये तो उसमें जल का चढ़ना सामान्य अवस्था में जल के चढ़ने से किस प्रकार भिन्न होगा ?
उत्तर:
सामान्य अवस्था में पृष्ठ तनाव का बल (जिसके कारण जल केशनली में चढ़ता है) जब नली में चढ़े जल-स्तम्भ के भार के बराबर हो जाता है तो जल का चढ़ना रुक जाता है। भारहीनता की अवस्था में (g = 0) नली में चढ़ने वाले जल-स्तम्भ का प्रभावी भार शून्य होगा। अतः जल केशनली के दूसरे सिरे पर पहुँच जायेगा चाहे केशनली कितनी ही लम्बी क्यों न हो ?

प्रश्न 17.
गर्म सूप ठण्डे सूप की अपेक्षा अधिक स्वादिष्ट लगता है, क्यों ?
उत्तर:
द्रव का ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है जिस कारण गर्म सूप का पृष्ठ तनाव ठण्डे सूप की अपेक्षा कम हो जाता है पृष्ठ तनाव कम होने के कारण द्रव का क्षेत्रफल अधिक हो जाता है जिससे गर्म सूप जीभ के अधिक क्षेत्रफल में फैल जाता है और अधिक स्वादिष्ट लगता है।

प्रश्न 18.
आकाश में बादल तैरते क्यों दिखाई देते हैं ?
उत्तर:
जब वायु में उपस्थित जल की वाप्य धूल, धुएँ आदि के कणों पर संघनित होती है तो प्रारम्भ में बहुत छोटी बूँदें बनती हैं। जब ये बूँदें नीचे गिरती हैं तो वायु द्वारा इन पर ऊपर की ओर श्यान बल लगाया जाता है, अतः कुछ समय बाद ये बूँदें सीमान्त वेग से नीचे गिरने लगती हैं। चूँकि बूँदें बहुत ही छोटी होती हैं, अतः इनका सीमान्त वेग बहुत कम होता है। जिससे ये नीचे गिरने की बजाय आकाश में तैरती प्रतीत होती हैं, ऐसी अवस्था में इन्हें ‘बादल’ (clouds) कहते हैं।

प्रश्न 19.
फब्बारे के ऊपर हल्की गेंद क्यों टिकी रहती है ? नीचे क्यों नहीं गिर जाती ?
उत्तर:
गेंद फब्बारे की जल धारा पर ऊपर-नीचे नाचती रहती है, जल धारा से अलग होकर गिरती नहीं है, क्योंकि बरनौली प्रमेय के अनुसार जल फुहार का वेग अधिक होने के कारण वहाँ दाब कम रहता है, अतः जब भी गेंद जल धारा से बाहर आने की कोशिश करती है तो के दाब से जल धारा के भीतर कम दाब की ओर पुनः खिंच जाती है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 20.
आँधी में टीन की छतें क्यों उड़ जाती हैं ?
उत्तर:
आँधी में टीन की ऊपरी सतह पर से वायु का वेग अधिक होने के कारण बरनौली प्रमेय के अनुसार वायु की गतिज ऊर्जा बढ़ जाने से इसकी सतह पर वायु दाब टीन की निचली सतह पर वायु दाब की तुलना में कम हो जाता है। अतः टीन की नीचे की सतह के अधिक दाब के कारण टीन की छतें आँधी में उड़ जाती हैं।

प्रश्न 21.
वर्षां की बूंदें अन्त में नियत वेग से क्यों गिरती हैं ?
उत्तर:
जब वर्षा की बूँदें अपने भार के कारण पृथ्वी की ओर गिरती हैं तो वायु की श्यानता इनके गिरने का विरोध करती है। गुरुत्व के कारण जैसे-जैसे बूँदों के नीचे गिरने का वेग बढ़ता है, स्टोक्स के नियमानुसार वैसे-वैसे इसके विरुद्ध वायु का श्यान बल भी बढ़ता जाता है। एक विशेष स्थिति में विरोधी श्वान बल नीचे की ओर कार्य करने वाले प्रभावी गुरुत्व बल के बराबर हो जाता है। इस दशा में अन्त में बूँदें एक निश्चित सीमान्त वेग से गिरती हैं।

प्रश्न 22.
गहरा जल सदैव शान्त बहता है, कारण बताइए।
उत्तर:
बरनौली प्रमेय के अनुसार किसी द्रव के क्षैतिज प्रवाह के लिए P+ +2pv2 = नियतांक; अत: गहरे जल का दाब (P) अधिक होने से वेग ” का मान कम होता है।

प्रश्न 23.
जल की एक बड़ी बूँद को अनेक छोटी-छोटी बूँदों में विभाजित करने पर पृष्ठीय ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर:
एक बड़ी बूँद को अनेक छोटी बूंदों में विभाजित करने पर, जल का मुक्त पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ेगा। अतः पृष्ठीय ऊर्जा भी बढ़ेगी।

प्रश्न 24.
वर्षा की बूँदे अनन्त से नियत वेग से क्यों गिरती है ?
उत्तर:
जब बूँद वायु में नीचे गिरती है तो उस पर 40 लगने वाले बल चित्र में दर्शाए हैं। इन बलों में दो बल नियत रहते हैं- (i) बूँद का भार mg एवं बूँद पर ऊपर उछाल U; लेकिन स्टोक्स बल F = 6πnrv का मान बूँद का वेग बढ़ने के साथ बढ़ता हैं एक स्थिति ऐसी आती है जब बूंद का भार ऊपर की ओर लगने वाले बलों के योग के बराबर हो जाता है तो परिणामी बल शून्य हो जाने के कारण बूँद नियत वेग से गिरने लगती है।

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प्रश्न 25.
हिमखण्ड जल पर क्यों तैरता है ?
उत्तर:
हिमखण्ड का घनत्व जल के घनत्व से कम होता है, जिससे हिमखण्ड के आयतन के बराबर जल का mig उत्क्षेप-बल हिमखण्ड के भार से अधिक हो जाता है और हिमखण्ड जल पर तैरता रहता है। तैरते समय हिमखण्ड का केवल उतना आयतन ही जल में डूबता है, जितने आयतन के द्वारा हटाये गये जल का भार हिमखण्ड के भार के बराबर होता है।

प्रश्न 26.
काँच की छड़ के सिरे को उच्च ताप पर गर्म करने पर सिरा गोल क्यों हो जाता है ?
उत्तर:
जब काँच को गर्म करते हैं तो वह पिघलकर द्रव बन जाता है। इस द्रव का पृष्ठ कम-से-कम क्षेत्रफल घेरने का प्रयत्न करता है। हम जानते हैं कि दिये हुए आयतन के लिये गोले के पृष्ठ का क्षेत्रफल सबसे कम होता है। अतः पिघला हुआ काँच गोले का रूप लेने का प्रयत्न करता है जिससे कि नली के किनारे गोल हो जाते हैं।

प्रश्न 27.
चिपकन रहित खाना पकाने के लिए बर्तन पर टेफ्लॉन की परत क्यों चढ़ाई जाती है ?
उत्तर:
बर्तनों पर टेफ्लॉन की परत चढ़ाई जाती है, क्योंकि टेफ्लॉन की परत तथा तेल आदि के बीच का स्पर्श कोण 90° से अधिक होता है। इसके कारण वर्तन चिपकन रहित हो जाता है।

प्रश्न 28.
पास-पास लटकी दो हल्की गेंदों के मध्य फूँक मारने पर वे एक-दूसरे की ओर आकर्षित होती हैं क्यों ?
उत्तर:
फूँक मारने पर गेंदों के बीच का वायु वेग बढ़ जाता है, अतः बरनौली के प्रमेय से इसका दाब कम हो जाता है। इसीलिए गेंद परस्परं आकर्षण बल का अनुभव करती है।

प्रश्न 29.
भारी वाहनों के पहियों के टायर अधिक चौड़े क्यों बनाये जाते हैं ?
उत्तर:
भारी वाहनों के पहियों के टायर चौड़े होने से सड़क अथवा जमीन पर लगने वाला दाब कम हो जाता है क्योंकि वाहन का भार अधिक क्षेत्रफल पर लगता है। इसलिये वाहन के पहिये सड़क पर भैंसने से बच जाते हैं।

प्रश्न 30.
धमनियों में बनूंली सिद्धान्त से रक्त के प्रवाहको समझने में किस प्रकार सहायता मिलती है ?
उत्तर:
धमनी की भीतरी दीवार पर प्लाक (Plaque) का जमाव होने के कारण धमनी भीतर से संकीर्ण हो जाती है इन संकरी धमनियों से रक्त प्रवाहित कराने के लिए हृदय की गतिविधि पर अधिक बोझ पड़ जाता है। इस क्षेत्र में रक्त के प्रवाह की चाल बढ़ जाती है और आन्तरिक दाब घट जाता है। बाहरी दाब के कारण धमनी दब जाती है। हृदय इस धमनी को खोलने के लिए रक्त को धक्का देता है। जैसे ही रक्त इसे खोलकर बाहर की ओर तीव्र गति से प्रवाहित होता है, आंतरिक दाब पुनः गिर जाता है और धमनी पुनः दब जाती है, इससे हार्ट अटैक हो सकता है।

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प्रश्न 31.
चाय की केतली के ढ़क्कन में सुराख होता है, क्यों ?
उत्तर:
चाय की केतली के दक्कन में सुराख न होने पर चाय से भरी केतली के अन्दर का दाब वायुमण्डलीय दाब से कम होगा। स्पष्ट है, केतली को टेढ़ा करने पर उसकी टोंटी से चाय सरलता से नहीं निकलेगी क्योंकि बाहर का दाब केतली के अन्दर के दाब से अधिक होगा।

प्रश्न 32.
धारा रेखीय प्रवाह तथा विक्षुब्ध प्रवाह में अन्तर बताइये।
उत्तर:
धारा रेखीय प्रवाह व विक्षुब्ध प्रवाह में निम्नलिखित अन्तर हैं-

धारा रेखीय प्रवाहविक्षुब्ध प्रवाह
(1) यह द्रव का व्यवस्थित और नियमित रूप से प्रवाह है।यह द्रव का अव्यवस्थित व अनियमित प्रवाह है।
(2) धारा रेखीय प्रवाह में द्रव का वेग क्रांतिक वेग से कम होता है।इस प्रवाह में द्रव का वेग क्रान्तिक वेग से अधिक होता है।
(3) इस प्रवाह में द्रव के अन्दर भंवर धाराएँ उत्पन्न नहीं होती है।इस प्रवाह में द्रव के अन्दर भंवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं।
(4) किसी बिन्दु से गुजरने वाले कणों के वेग की दिशा नियत रहती है।इस प्रवाह में किसी बिन्दु से गुजरने वाले कणों के वेग की दिशा परिवर्तित होती रहती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1.
बर्नूली प्रमेय का कथन लिखते हुए इसे सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
बर्नूली का सिद्धान्त (Bernoulli’s Theorem)
बर्नूली के सिद्धान्त के अनुसार, “जब कोई आदर्श द्रव (अश्यान एवं असंपीड्य) धारा रेखीय प्रवाह में बहता है तो प्रवाह के प्रत्येक स्थान पर द्रव की सम्पूर्ण ऊर्जा नियत रहती है अर्थात् द्वव की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा दाब ऊर्जा का योग नियत रहता है।” अर्थात्
दाब ऊर्जा + गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = नियतांक
अतः एकांक आयतन के लिए,
P + \(\frac{1}{2}\)ρv² + ρgh = नियतांक
अथवा एकांक द्रव्यमान के लिए
\(\frac{{P}}{\rho}+\frac{1}{2} v^2+g h\) = नियतांक
अथवा
\(\frac{{P}}{\rho g}+\frac{v^2}{2 g}+h\) = नियतांक
जहाँ \(\frac{{P}}{\rho g}\) दाब शीर्ष, \(\frac{v^2}{2 g}\) वेग शीर्ष व h गुरुत्वीय शीर्ष है।

उपपत्ति (Derivation)
माना असमान परिच्छेद के क्षैतिज पाइप में एक आदर्श तरल का धारा रेखीय प्रवाह हो रहा है। पाइप के दो स्थानों {X} व {Y} पर पाइप का परिच्छेद क्षेत्रफल क्रमशः A1 व A2 है और इन स्थानों पर द्रव के वेग क्रमशः v1 व v2 हैं और इन स्थानों के गुरुत्वीय तल क्रमशः h1 व h2 हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -3
यदि एकांक समय में प्रवाहित द्रव का द्रव्यमान m हो तो अविरतता के सिद्धान्त से-
m = A1v1ρ = A2v2ρ
\(\frac{m}{ρ}\) = A1v1 = A2v2 …………..(11)
अतः विस्थापित द्रव पर किया गया कुल कार्य
\({W}={W}_1+{W}_2={P}_1 {~A}_1 v_1-{P}_2 {~A}_2 v_2\)
\({~W}=\frac{{P}_1 m}{\rho}-\frac{{P}_2 m}{\rho}\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -4
इस प्रकार बर्नूली के सिद्धान्त में ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग किया गया और यह माना गया है कि घर्षण के कारण कोई ऊर्जा क्षति नहीं होती। परन्तु वास्तव में, जब तरल प्रवाह करता है तो आन्तरिक घर्षण के कारण कुछ ऊर्जा की हानि हो जाती है। इसी व्युत्पत्ति तरल की विभिन्न परतों के भिन्न-भिन्न वेगों के कारण होती है। यह सतें एक-दूसरे पर घर्षण बल लगाती हैं और परिणामस्वरूप ऊर्जा का ह्रस होता है। अतः बर्नूली का समीकरण शून्य श्यानता पर लागू होता है। बर्नूली प्रमेय पर एक और प्रतिबन्ध है कि यह असंपीड्य तरलों पर ही लागू होता है, क्योंकि तरलों की प्रत्यास्थ ऊर्जा को नहीं लिया गया है। अस्थिर अथवा विक्षोभ प्रवाह में भी बर्नूली समीकरण काम नहीं आता क्योंकि इसमें वेग तथा दाब समय में लगातार अस्थिर रहते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 2.
किसी टंकी में पानी के धरातल से मीटर नीचे छिद्र से बहिःस्राव वेग का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। टॉरिसेली सिद्धान्त को भी समझाइये।
उत्तर:
टॉरिसेली प्रमेय : बहिःस्राव वेग (Torricelli’s Theorem : Velocity of Efflux) :
कथन (Statement): इसके अनुसार द्रव से भरे किसी टैंक में किसी गहराई पर बने छिद्र से निकलने वाले द्रव का वेग अर्थात् बहिःस्त्राव वेग उस वेंग के बराबर होता है जो द्रव अपने स्वतन्त्र तल से छिद्र तक स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने में प्राप्त कर लेता है। इसे बर्नूली-प्रमेय के आधार पर सिद्ध किया जा सकता है।

उपपत्ति (Proof): चित्र में एक बर्तन दर्शाया गया है जिसमें H ऊँचाई तक कोई द्रव भरा है। इसका घनत्व माना ρ है। बर्तन में द्रव के स्वतन्त्र तल से h गहराई पर एक छिद्र A है। माना A से निकलने वाले द्रव का बहि:स्राव वेग v है। द्रव के स्वतन्त्र तल पर गतिज ऊर्जा शून्य है, केवल स्थितिज ऊर्जा है। परन्तु A से निकलने वाले द्रव में स्थितिज
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -5
तथा गतिज दोनों ही प्रकार की ऊर्जाएँ हैं। द्रव के स्वतन्त्र तल तथा छ्दिध्र से बाहर निकलते द्रव जैट दोनों पर वायुमण्डलीय दांब P होगा। माना छिद्र से निकलने वाले द्रव का बहिःसाव वेग v है। बर्नूली प्रमेय के अनुसार, द्रव के स्वतन्त्र तल पर तथा छिद्र के प्रत्येक बिन्दु पर दाब तथा द्रव के एकांक आयतन की कुल ऊर्जा का योग बराबर होना चाहिए। अतः
\({P}+0+\rho g {H}={P}+\frac{1}{2} \rho v^2+\rho g({H}-h)\)
अथवा \(\frac{1}{2} \rho v^2=\rho g h\) अथवा \(v=\sqrt{(2 g h)}\)
इस सूत्र की स्थापना सर्वप्रथम सन् 1644 ई. में टॉरिसली ने की थी।

द्रव की परास (Range of Liquid): छिद्र से निकलने वाले द्रव द्वारा तय की गयी क्षैतिज दूरी को द्रव की परास कहते हैं।”
छिद्र से निकलने वाले द्रव का वेग क्षैतिज होता है जबकि वह (H-h) ऊर्ध्व ऊँचाई गुरुत्वीय त्वरण के अन्तर्गत गिरता है, अतः द्रव का मार्ग परवलयाकार हो जाता है।
माना (H-h) ऊँचाई तय करने में द्रव को लगा समय t हो तो u = 0, a = +g तथा s = H – h
s = ut + \(\frac{1}{2}\)at²
(H – h) = 0 + \(\frac{1}{2}\)gt²
\(t=\sqrt{\frac{2(H-h)}{g}}\) …………..(2)
चूँकि क्षैतिज दिशा में कोई बल कार्य नहीं करता है अतः उसका क्षैतिज वेग v ही रहता है।
अतः
R = v.t
= \(\sqrt{2 g h} \cdot \sqrt{\frac{2({H}-h)}{g}}\)
= \(2 \sqrt{h({H}-h)}\) ………..(3)
अतः इस सूत्र द्वारा स्पष्ट होता है कि h तथा (H-h) को आपस में बदल देने पर द्रव की परास में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसलिए क्षैतिज परास R समान रहता है।
अधिकतम परास के लिए,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -6

प्रश्न 3.
बेन्चयूरी प्रवाह मापी द्वारा नली में प्रति सेकण्ड बहने वाले द्रव की मात्रा के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।
उत्तर:
(ii) वैंटुरीमापी (Venturimeter):
यह बर्नूली प्रमेय पर आधारित वह युक्ति है, जिसकी सहायता से किसी नली में बहने वाले द्रव के प्रवाह की दर ज्ञात की जा सकती है।

उपकरण का वर्णन-इसमें एक क्षैतिज नली RST होती है जिसका बीच का भाग (S) संकरा है। R व S भागों पर दो ऊर्ध्वाधर नलियाँ E तथा F जुड़ी रहती हैं। दोनों ऊर्ध्वाधर नलियाँ R व S स्थानों पर द्रव दाब नापने के लिए काम में लायी जाती हैं। इसे वैंटुरीमीटर कहते हैं। इसे उस नली के साथ जोड़ देते हैं, जिससे द्रव दाब की गणना करनी है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -7
कार्यविधि (Working): जब द्रव नली RST में प्रवाह करता है तो अविरतता के सिद्धान्त से नली के चौड़े भाग {R} की अपेक्षा संकरे भाग (S) पर वेग अधिक होता है, अतः बरनौली प्रमेय से चौड़े भाग की अपेक्षा संकरे भाग ({S}) पर दाब कम होता है। इस दाबान्तर को नलियों {E} तथा {F} में चढ़े द्रव के अन्तर को पढ़कर ज्ञात किया जा सकता है।
माना नली में आदर्श द्रव का प्रवाह धारा रेखीय है, नली के {R} से {S} स्थानों पर क्रमशः नली के परिच्छेद क्षेत्रफल A1 व A2 हैं, द्रव के प्रवाह वेग v1 व v2 तथा दाब P1 व P2 हैं।
चूँकि नली क्षैतिज है, अतः बर्नूली प्रमेय से,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -8
इस प्रकार द्रव के प्रवाह की दर ज्ञात की जाती है।
इस सिद्धान्त पर मोटर वाहनों में काबुरिटर में नोजल काम करती है जिसमें तीव्र गति से वायु प्रवाहित होती है। संकरी गर्दन पर दाब कम होता है इसलिए पेट्रोल भीतर की ओर चैम्बर में चूस लिया जाता है ताकि दहन के लिए वायु तथा ईंधन का सही मिश्रण प्राप्त हो सके।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 4.
केशिकत्व क्या है ? केशनली में चढ़े जल स्तम्भ की ऊँचाई के लिए सूत्र प्रतिपादित कीजिए ।
उत्तर:
केशनली में द्रव के उन्नयन के लिए सूत्र (Formula For Capillary Rise of Liquid):
माना ρ घनत्व का कोई द्रव r त्रिज्या की केशनली में भरा है, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। द्रव का पृष्ठ तनाव T है। नली के अन्दर द्रव के वक्र तल की त्रिज्या R व स्पर्श कोण θ है। चढ़े हुए द्रव स्तम्भ की ऊँचाई h है। द्रव स्तम्भ के दाब में कमी \(\frac{2T}{R}\) है, अत:
द्रव स्तम्भ का दाब = दाब आधिक्य
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -9
स्पष्ट है कि r का मान जितना कम होगा अर्थात् नली जितनी संकीर्ण होगा, h का मान उतना ही अधिक होगा अर्थात् केशनली में द्रव का उन्नयन उतना ही अधिक होगा।

प्रश्न 5.
आन्तरिक बलों के आधार पर पृष्ठ तनाव की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव की आण्विक बलों के आधार पर व्याख्या (Explanation of Surface Tension Based on Molecular Forces);
लाप्लास (Laplace) ने पृष्ठ तनाव को अन्तराण्विक बलों के आधार पर समझाया। हम पढ़ चुके हैं कि जब अणुओं के बीच की दूरी आण्विक परास (≈ 10-9. मीटर) से अधिक होती है तो उनके बीच लगने वाला ससंजक बल नगण्य होता है तथा जब अणुओं के बीच की दूरी आण्विक परास से कम होती है तो उनके बीच ससंजक बल कार्य करता है। किसी अणु को केन्द्र मानकर आण्विक परास की त्रिज्या के बराबर खींचा गया गोला, ‘आण्विक सक्रियता का गोला’ कहलाता है।

चित्र में बर्तन में भरे किसी द्रव में तीन अणु A, B व C दिखाए गए हैं। इन अणुओं के चारों ओर आण्विक सक्रियता के गोले खींचे गए हैं। अणु A पूर्णतः द्रव के अन्दर, अणु B द्रव के पृष्ठ के ठीक नीचे तथा अणु C द्रव के पृष्ठ पर स्थित है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -10
अणु A के आण्विक सक्रियता का गोला पूर्णतः द्रव के भीतर है, अतः यह अणु अपने चारों ओर के अणुओं द्वारा सभी दिशाओं में समान बल से आकर्षित होता है। इस प्रकार इस अणु पर परिणामी ससंजक बल का मान शून्य होता है। अणु B के आण्विक सक्रियता के गोले का कुछ भाग द्रव के पृष्ठ के बाहर है। इस स्थिति में इस अणु के नीचे स्थित अणुओं की संख्या, ऊपर स्थित अणुओं की संख्या से अधिक होती है जिससे यह अणु नीचे की ओर अधिक आकर्षित होता है, अतः अणु B पर द्रव के भीतर की ओर परिणामी बल कार्य करता है। अणु C के आण्विक सक्रियता के गोले का आधा भाग द्रव के पृष्ठ के बाहर तथा आधा भाग द्रव के अन्दर है, इस गोले के निचले अर्धभाग में ही द्रव के अणु हैं, अतः अणु C पर एक परिणामी ससंजक बल द्रव के पृष्ठ के लम्बवत् नीचे की ओर कार्य करता है जिसका मान अधिकतम होता है (पृष्ठ के द्रव वाष्प के अणुओं के कारण आकर्षण बल को नगण्य माना जा सकता है।)

इस प्रकार द्रव के पृष्ठ पर स्थित प्रत्येक अणु पर नीचे की ओर अधिकतम आकर्षण बल कार्य करता है। द्रव के पृष्ठ नीचे जाने पर इस आकर्षण बल का मान कम हो जाता है। द्रव के पृष्ठ से आण्विक परास की दूरी से अधिक दूरी पर इस परिणामी बल का मान शून्य हो जाता है। अतः द्रव के स्वतन्त्र पृष्ठ से आण्विक परास ( 10 m ) की गहराई तक द्रव का भाग पृष्ठीय झिल्ली (surface film) कहलाता है। पृष्ठीय झिल्ली में स्थित सभी अणु द्रव के अन्दर की ओर आकर्षण बल का अनुभव करते हैं।

जब किसी अणु को द्रव के अन्दर से पृष्ठीय झिल्ली में लाया जाता है, तो द्रव के अन्दर की ओर लगने वाले आकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यह कार्य अणु में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। स्पष्ट है कि पृष्ठीय झिल्ली में स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा द्रव के भीतर स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा से अधिक होती है। इस प्रकार द्रव के स्वतन्त्र पृष्ठ पर स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है। यदि स्वतन्त्र पृष्ठ का क्षेत्रफल अधिक है तो उसमें स्थित अणुओं की संख्या भी अधिक होगी, अतः उसकी स्थितिज ऊर्जा भी अधिक होगी, परन्तु हम जानते हैं कि कोई भी निकाय (system) उस समय स्थायी साम्यावस्था में होता है जब उसकी स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है, अतः द्रव के पृष्ठ पर स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होने के लिए पृष्ठ का क्षेत्रफल कम-से-कम होना चाहिए। इस प्रकार द्रव का स्वतन्त्र पृष्ठ एक तनी हुई झिल्ली की भाँति कार्य करता है। द्रव की इस प्रवृत्ति को पृष्ठ तनाव कहते हैं।

प्रश्न 6.
एक अनन्त विस्तार के श्यान द्रव में गिर रहे गोले के लिए अन्तिम वेग का सूत्र प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर:
सीमान्त वेग (Terminal Velocity):
जब कोई गोलाकार वस्तु किसी श्यान माध्यम में स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने दी जाती है तो वस्तु का वेग उसके भार (W) के कारण पहले बढ़ता है लेकिन वेग बढ़ने के साथ-साथ माध्यम द्वारा उस पर आरोपित घर्षण बल भी बढ़ता है जो गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है। वस्तु के घर्षण बल का कारण यह है कि वस्तु के सम्पर्क में आने वाली परत वस्तु के साथ गति करना चाहती है अबकि दूर की अन्य परतें स्थिर रहती हैं। द्रव की परतों में इस आपेक्षिक गति के कारण परतों के मध्य आन्तरिक घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है। यही श्यान बल होता है। एक स्थिति ऐसी आती है जब वस्तु का भार उस पर ऊपर की ओर लगने वाले उत्प्लावन बल एवं स्टोक्स बल के योग के बराबर हो जाता है तो वस्तु पर परिणामी बल शून्य हो जाता है और वह नियत वेग से गिरने लगती है। इसी नियत वेग को ‘सीमान्ते वेग’ या ‘ चरम वेग’ या ‘अधिकतम वेग’ या ‘अन्तिम वेग’ कहते हैं।

सीमान्त वेग के लिए सूत्र-माना r त्रिज्या एवं ρ घनत्व की एक गोलाकार वस्तु σ घनत्व एवं η श्यानता गुणांक वाले द्रव में स्वतन्त्रतापूर्वक गिर रही है। वस्तु पर लगने वाले बर्लों को चित्र में दिखाया गया है। इन बलों में केवल स्टोक्स बल वस्तु के वेग पर निर्भर करता है। अतः चरम वेग (vt) की अवस्था में,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -11
स्पष्ट है कि गोली का सीमान्त वेग (vt), गोली की त्रिज्या (r), गोली के घनत्व (ρ), माध्यम के घनत्व (σ) तथा माध्यम की श्यानता (η) पर निर्भर करता है।
यदि द्रव में गिरती हुई वस्तु के वेग एवं समय के मध्य ग्राफ खींचा जाये तो ग्राफ की भाँति मिलेगा।
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प्रश्न 7.
कोशिका उन्नयन विधि द्वारा पृष्ठ तनाव ज्ञात करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोशिका उन्नयन विधि द्वारा जल का पृष्ठ तनाव ज्ञात करना
(Determination Of Surface Tensionof Liquid By Capillary Rise Method):
आवश्यक उपकरण-द्रत्र भरा बीकर, स्टैण्ड, एक समान व्यास की साफ केशनली तथा चल सूक्ष्मदर्शी।
आवश्यक सूत्र-द्रव का पृष्ठ तनाव \(\mathrm{T}=\frac{r h \rho g}{\cos \theta}\)
जहाँ r → केशनली की त्रिज्या
h → केशनली में चढ़े स्तम्भ की ऊँचाई
ρ → द्रव का घनत्व, g → गुरुत्वीय त्वरण
θ → स्पर्श कोण
प्रयोग विधि-प्रयोग के लिए काँच की केशनली को तनु नाइट्रिक अम्ल एवं कॉस्टिक सोडा के विलयन से साफ करके शुद्ध जल से धोकर सुखा लेते हैं। अब इस स्वच्छ नली को एक स्टैण्ड की सहायता से जल
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -13
से भरे बीकर में इस प्रकार डुबोया जाता है कि केशनली ऊर्ध्वाधर रहे । ऐसा करने पर केशनली में पृष्ठ तनाव के कारण (केशिकत्व) द्रव चढ़ने लगता है। जिस समय द्रव का चढ़ना बन्द हो जाए, केशनली में द्रव स्तम्भ की ऊँचाई चलायमान सूक्ष्मदर्शी की सहायता से नाप ली जाती है। नली की त्रिज्या भी सूक्ष्मदर्शी की सहायता से व्यास ज्ञात करके ज्ञात करते हैं। अब सूत्र में h व r के मान रखकर द्रव का पृष्ठ ज्ञात कर लेते हैं।

प्रायोगिक सावधानियाँ:

  • केशनली, बीकर, पैमाना सब बिल्कुल साफ होने चाहिए। जल भी स्वच्छ होना चाहिए। आसुत जल (distilled water) का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ-न-कुछ चिकनाई अवश्य मिली रहती है। थोड़ी-सी धूल अथवा चिकनाई पृष्ठ तनाव के मान को काफी बदल देती है।
  • केशनली की आन्तरिक त्रिज्या उसी स्थान पर नापनी चाहिए जहाँ तक द्रव नली में चढ़ा था। इसके लिए नली को उसी स्थान पर तोड़ लेना चाहिए।
  • प्रयोग में समस्त द्रव के ताप को अवश्य लिखना चाहिए क्योंकि पृष्ठ तनाव पर ताप का प्रभाव पड़ता है।
  • केशनली एकदम ऊर्ध्वाधर होनी चाहिए जिससे द्रव (पानी) के स्तम्भ की ऊँचाई ठीक-ठीक नापी जा सके।

प्रश्न 8.
किसी द्रव का क्षेत्रफल बढ़ाने में आवश्यक कार्य का पृष्ठ तनाव से सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव तथा पृष्ठीय ऊर्जा में सम्बन्ध (Relation between Surface Tension and Surface Energy):
माना PQRS एक तार का आयताकार छल्ला है, जिसकी भुजा QR अपने सम्पर्क वाली भुजाओं पर गति करने के लिए स्वतन्त्र है। यदि इस छल्ले में किसी द्रव की कोई फिल्म बनायी जाये तो पृष्ठ तनाव के कारण फिल्म के प्रत्येक भुजा पर अन्दर की ओर बल आरोपित करेगी। भुजा Q, R की लम्बाई यदि $l$ हो तो इस भुजा पर F = 2T. l बल लगेगा। चूँकि फिल्म में दो पृष्ठ होते हैं। अतः तार की प्रति एकांक लम्बाई पर दोनों पृष्ठ एक ही दिशा में T पृष्ठ तनाव बल लगायेंगी। इस प्रकार प्रति एकांक लम्बाई पर 2T बल लगेगा। इस बल F के प्रभाव में भुजा QR अन्दर की ओर गति करने लगेगी। अतः इसे अपने स्थान पर बनाये रखने के लिए इस पर बाहर की ओर इतना ही बल F’ लगाना होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -14
यदि F’ को थोड़ा बढ़ाकर QR भुजा को ∆x विस्थापन देकर Q’R’ स्थिति में पहुँचा दे तो इस क्रिया में पृष्ठ तनाव बल के विरुद्ध कृत कार्य

W =F . ∆x = 2T.l.∆x
W = F.2l.x
W = T.∆A
जहाँ ∆A = 2.l.∆x क्षेत्रफल में प्रभावी वृद्धि
यही कार्य बढ़े हुए पृष्ठ की पृष्ठीय ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगा। अतः पृष्ठीय ऊर्जा
Es = T.∆A
यदि ∆A =1 m² तो Es = T
“अर्थात् किसी द्रव के एकांक क्षेत्र की पृष्ठीय ऊर्जा उसके पृष्ठ तनाव के तुल्य होती है।”
\(\mathrm{T}=\frac{\mathrm{E}_s}{\Delta \mathrm{A}}=\frac{\mathrm{W}}{\Delta \mathrm{A}}\)

T का मात्रक- जूल / मी²
T का विमीय सूत्र- [M1L0T-2]

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प्रश्न 9.
पॉस्कल का नियम लिखिये और इसका सत्यापन कीजिये। इसके आधार पर कार्य करने वाले दो उपकरणों का नाम लिखिये । और उनका वर्णन कीजिये।
उत्तर:
पास्कल का नियम (Pascal’s Law)
इस नियम के अनुसार, “यदि गुरुत्व के प्रभाव को नगण्य मान लें तो किसी द्रव के किसी भाग पर लगाया गया दाब बिना क्षय हुए सम्पूर्ण द्रव में सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित हो जाता है। इसे द्रव के दाब का संचरण नियम भी कहते हैं।”

नोट-इस नियम का प्रतिपादन करने वाले वैज्ञानिक ब्लेज पास्कल थे। ब्लेज पास्कल के नाम पर इस नियम को जाना जाता है पास्कल के सम्मान में दाब का S.I. मात्रक ‘पास्कल’ (Pa) लिया जाता है।

व्युत्पत्ति (Derivation): चित्र में विराम स्थिति के किसी तरल के भीतर कोई अवयव दिखाया गया है यह ABC-DEF एक समकोण प्रिज्म के रूप में है। इस अवयव पर आरोपित बल शेष तरल के कारण हैं। तरल के कारण बल पृष्ठों के अभिलम्बवत् कार्य करते हैं। अवयव के फलकों BEFC, ADFC तथा ADEB पर बल क्रमशः Fa, Fb, Fc तथा दाब क्रमशः Pa, Pb, Pc हैं तथा इन फलकों के क्षेत्रफल क्रमशः Aa, Ab व Ac हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -15
चित्र में प्रदर्शित अवयव (ABC-DEF) अत्यन्त छोटा है ताकि गुरुत्व के प्रभाव की उपेक्षा की जा सके, लेकिन स्पष्टता के दृष्टिकोण से इसे बड़ा दिखाया गया है।
साम्यावस्था में बलों में निम्न सम्बन्ध होंगे-
Fb sin θ = Fc; Fb cos θ = Fa
तथा ज्यामिति से,
Ab sin θ = Ac; Ab cos θ = Aa
अतः भाग देने पर
\(\frac{F_b}{A_b}=\frac{F_c}{A_c}\) तथा \(\frac{F_b}{A_b}=\frac{F_a}{A_a}\)
या Pa = Pc तथा Pb = Pa
या Pa = Pb = Pc
अतः विरामावस्था में द्रव के अन्दर सभी दिशाओं में दाब समान रूप से कार्य करता है। यही पास्कल का नियम है।

प्रश्न 10.
द्रव के भीतर स्थित किसी बिन्दु पर दाब के व्यंजक को ज्ञात कीजिये और सिद्ध कीजिये कि P ∝ h होता है यदि द्रव के मुक्त पृष्ठ पर वायुमण्डलीय दाब Po हो तो द्रव के मुक्त पृष्ठ से / गहराई पर कुल दाब ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दाब (Pressure):
किसी क्षेत्रफल पर लगने वाले बल का प्रभाव क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। क्षेत्रफल बदल जाने पर बल का प्रभाव भिन्न हो जाता है। उदाहरण के लिए यदि सुई पर थोड़ा भी बल लगाया जाये तो वह हमारी त्वचा में धँस जाती है जबकि चम्मच पर अधिक बल लगाने पर भी वह त्वचा में नर्ही धँसती है। इन दोनों घटनाओं में अन्तर क्षेत्रफल के कारण है। सुई की नोंक का सम्पर्क क्षेत्रफल अति अल्प जबकि चम्मच का सम्पर्क क्षेत्रफल अधिक होता है। स्पष्ट है क्षेत्रफल बढ़ाने पर बल का प्रभाव कम हो जाता है।

इन अनुभवों से स्पष्ट है कि बल के साथ-साथ वह क्षेत्रफल भी महत्त्वपूर्ण होता है जिस पर बल कार्य करता है। जब कोई पिण्ड किसी तरल में डूबा रहता है तो तरल द्वारा इस पिण्ड पर उसके पृष्ठ के लम्बवत् बल आरोपित किया जाता है। “एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित बल को दाब कहते हैं।” यदि पृष्ठ का क्षेत्रफल A एवं इस पर आरोपित अभिलम्बवत् बल F हो तो दाब
\(P=\frac{F}{A}\).
सैद्धान्तिक रूप में पिण्ड के क्षेत्रफल को अत्यन्त सूक्ष्म ले सकते है। तब
\(\mathrm{P}=\lim _{\Delta \mathrm{A} \rightarrow 0} \frac{\Delta \mathrm{F}}{\Delta \mathrm{A}}=\frac{d \mathrm{~F}}{d \mathrm{~A}}\)
यदि समान परिमाण का बल भिन्न-भिन्न क्षेत्रफलों के पृष्ठ पर आरोपित किया जाये तो कम क्षेत्रफल वाले पृष्ठ पर कार्यरत दाब अधिक होगा। दाब एक अदिश राशि है।
मात्रक एवं विमीय सूत्र
मात्रक- MKS मात्रक न्यूटन / मी² \left(N-m-2) या पॉस्कल CGS मात्रक- डाइन/सेमी²
दाब के अन्य मात्रक-
(i) वायुमण्डलीय दाब: 76 सेमी पारा स्तम्भ का दाबं 1 वायुमण्डलीय दाब (1 atm दाब) कहलाता है।
1 वायुमण्डलीय दाब = 0.76 × 13.6 × 103 × 9.8
& =1.013 × 105 N-m-2

(ii) बार-मौसम विज्ञान में दाब को बार या मिलीबार में व्यक्त
1 बार (bar)=105 Pa
विमीय सूत्र – [M1L-1T-2]

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प्रश्न 11.
पानी की बड़ी बूँद को छोटी बूंदों में फुहारने पर पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
जल की एक बड़ी बूँद को m छोटी बूँदों में फुहारने पर पृष्ठीय ऊर्जा में वृद्धि (Increase in Surface Energy on Spraying a Big Water Drop):
पानी की बड़ी बूँद को छोटी बूँदों में फुहारने पर पृष्ठ क्षेत्रफल का मान बढ़ता है, अतः पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि होती है। लेकिन इस कार्य में आन्तरिक ऊर्जा में कमी होती है। अतः ताप गिरने से ठण्डक उत्पन्न होती है जिसे हम दैनिक जीवन में फब्वारे के नीचे नहते समय अनुभव करते हैं।
माना R त्रिज्या की एक बड़ी बूँद है जिसे r त्रिज्या की n छोटी समान बूँदों में फुहारा जाता है। इस क्रिया में आयतन नियत रहता है। अत:
बड़ी बूँद का आयतन = n × छोटी बूँदों का आयतन
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प्रश्न 12.
गोलीय बूंद के लिए दाब आधिक्य Pex = \(\frac{2T}{R}\) का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
पृष्ठीय ऊर्जा (Surface Energy):
यदि किसी द्रव के पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ाया जाये तो कुछ अणु द्रव के अन्दर से द्रव के पृष्ठ पर आ जाते हैं। इन अणुओं को द्रव के पृष्ठ के ठीक नीचें वाले अणुओं के आकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यही कार्य नये पृष्ठ में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। इस प्रकार द्रव के पृष्ठ पर स्थित अणुओं के पास कुछ अतिरिक्त ऊर्जा को ही पृष्ठ ऊर्जा कहते हैं।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक व्यक्ति का भार 60 kg है तथा उसके प्रत्येक पैर का क्षेत्रफल 30 cm है। बताइए व्यक्ति द्वारा पृथ्वी पर कितना दाब डाला जायेगा यदि (i) वह एक पैर पर खड़ा है, (ii) दोनों पैरों पर खड़ा है।
उत्तर:
(i) 19.6 × 104 N/m²
(ii) 9.8 × 104 N/m²

प्रश्न 2.
एक बेलनाकार जार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 50 cm² है। यह 20 cm ऊँचाई तक जल से भरा हुआ है। इसके पिस्टन का द्रव्यमान नगण्य है। जब इसके पिस्टन पर 1 kg द्रव्यमान रखा जाता है तो जार की तली में दाब की गणना कीजिए। वायुमण्डलीय दाब को नगण्य मानिए।
उत्तर:
3.92 × 10³ N/m²

आर्किमिडीज के सिद्धान्त पर आधारित

प्रश्न 3.
एक ठोस गेंद जिसका घनत्व जल के घनत्व का आधा है, 19.6m की ऊँचाई से गुरुत्वीय क्षेत्र में स्वतन्त्रता पूर्वक गिरकर जल के अन्दर प्रवेश करती है गेंद जल में कितनी गहराई तक जायेगी ? जल की सतह पर फिर दुबारा आने में इसे कितना समय लगेगा ? (g = 9.8 m/sec²) जल की श्यानता तथा वायु के अवरोध को नगण्य मान लीजिए।
उत्तर:
19.6 m, 4 sec

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प्रश्न 4.
समुद्र में एक हिम शैल स्थित है, (i) जल की सतह के नीचे हिम शैल का प्रभाग ज्ञात कीजिए, (ii) जल की सतह के ऊपर हिम शैल का प्रभाग ज्ञात कीजिए। दिया है, बर्फ का घनत्व = 917 kg/m³ और समुद्री जल का घनत्व 1.024 × 103 kg/m³
उत्तर:
(i) 89.7% (ii) 10.3%

प्रश्न 5.
अन्दर से खोखली एक ताँबे की गेंद का वायु में धार 264 ग्राम तथा जल में डुबाने पर भार 221 ग्राम है यदि ताँबे का घनत्व 8.8 ग्राम / सेमी हो, तो गेंद के खोखले भाग का आयतन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
13 सेमी³

श्यानता पर आधारित

प्रश्न 6.
10 cm × 10 cm की एक समतल प्लेट तथा बड़ी प्लेट के बीच 1 mm मोटी ग्लिसरीन की तह है। यदि ग्लिसरीन का श्यानता गुणांक 1.0 kg/m sec हो, तो प्लेट को 10 cm/sec के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए।
उत्तर:
1.0 न्यूटन

प्रश्न 7.
100 cm² क्षेत्रफल की एक समतल प्लेट तथा एक बड़ी प्लेट के बीच ग्लिसरीन की 1.0mm मोटी तह है, यदि ग्लिसरीन का श्यानता गुणांक 1.0 kg/m sec हो, तो प्लेट को 7.0 cm/sec के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए।
उत्तर:
0.70 न्यूटन

प्रश्न 8.
5 cm² क्षेत्रफल की एक चौरस प्लेट तथा एक बड़ी प्लेट के बीच ग्लिसरीन की 1 mm मोटी पर्त है यदि ग्लिसरीन का n = 10 प्वॉइज हो तो प्लेट को 7 cm/see के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए ?
उत्तर:
0.035 न्यूटन

प्रश्न 9.
पानी की दो समान्तर परतों में आपेक्षिक वेग 18.0 cms-1 है। यदि परतों के बीच की लम्बवत् दूरी 0.1 cm हो तो वेग प्रवणता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
180 s-1

सीमान्त वेग पर आधारित

प्रश्न 10.
जल की एक बूँद का व्यास 0.003 mm है। यह वायु से गिर रही है, बूंद का सीमान्त वेग ज्ञात कीजिए।
वायु का श्यानता गुणांक 1.8 × 10-5 kg/m see वायु का घनत्व उपेक्षणीय है।
उत्तर:
2.72 × 10 m/sec

प्रश्न 11.
यदि बूँद का अन्तिम वेग 12 cm/sec हो तो वायु में गिरती हुई पानी की बूंदों की त्रिज्या ज्ञात कीजिए, वायु की श्यानता 1.8× 10-4 वॉइज है तथा वायु का घनत्व 1.21 × 10-3 ग्राम / सेमी है।
उत्तर:
3.15 × 10³ cm

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प्रश्न 12.
समान त्रिज्या की दो बूँदें वायु में गिर रही हैं। उनके क्रान्तिक वेग 10 cm/sec हैं। यदि बूँदें संयुक्त हो जाए तो क्रान्तिक वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
15.9 cm / sec

प्रश्न 13.
तेल की एक बूंद का वायु में सीमान्त वेग 5.0 × 10-4 m/sec है। बूँद की त्रिज्या क्या है ? यदि ऐसी ही दो बूँदें परस्पर मिल जायें तो परिणामी बूँद का सीमान्त वेग कितना होगा ? तेल का श्यानता गुणांक 1.8 × 10-3 kg/m-sec तथा घनत्व 9 × 10² kg/m² है। वायु का घनत्व तेल के सापेक्ष नगण्य है तथा (2)2/3 = 1.59, g = 9.8 m/sec²
उत्तर:
2.14 × 10-5m, 7.95 × 10-4 m / sec

अविरतता के समीकरण पर आधारित

प्रश्न 14.
8 × 10-3 m आन्तरिक व्यास वाली एक टोंटी से पानी सततः 4 × 10-1 m/sec के प्रारम्भिक वेग से बह रहा है। टोंटी के नीचे 2 × 10-1 m की दूरी पर पानी की धारा के व्यास की गणना कीजिए।
उत्तर:
3.56 × 10 m

प्रश्न 15.
हौज पाइप जिसका आन्तरिक व्यास 2.1 cm है, से जल 1.1m/sec की चाल से प्रवाहित हो रहा है नोजल का व्यास क्या होना चाहिए यदि इससे जल 4 m/sec की चाल से निकल रहा है ?
उत्तर:
1.1 cm

प्रश्न 16.
एक क्षैतिज पाइप लाइन के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल असमान है। इसमें जल 0.2m³/sec की दर से प्रवाहित हो रहा है उस बिन्दु पर जल के वेग की गणना कीजिए जहाँ पाइप के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 0.02 m² हो ।
उत्तर:
10 m/sec

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बरनौली के प्रमेय तथा इसके अनुप्रयोगों (वेन्दुरीमीटर तथा बहिःस्राव वेग) पर आधारित

प्रश्न 17.
4 × 104 न्यूटन /मी दाब का जल 2 मीटर / सेकण्ड वेग से 0.02 मीटर² अनुप्रस्थ-परिच्छेद के पाइप से प्रवाहित होता है जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद घटकर 0.01 मी हो जाता है। पाइप के छोटे अनुप्रस्थ- परिच्छेद में कितना दाब है ?
उत्तर:
3.4 × 104 न्यूटन / मी²

प्रश्न 18.
हृदय से रुधिर को सिरे के शीर्ष (ऊर्ध्वाधर दूरी = 50 cm) तक पहुँचाने के लिए आवश्यक न्यूनतम दाब की गणना कीजिए। रुधिर का घनत्व 1.04 ग्रा. सेमी-3 है। घर्षण नगण्य है।
उत्तर:
5.096 × 104 डाइन / सेमी²

प्रश्न 19.
एक क्षैतिज पाइप जिसमें जल बह रहा है, उसके दो बिन्दुओं पर जल के दावों का अन्तर 1.4 cm पारे के स्तम्भ के बराबर है, यदि असमान परिच्छेद के कारण अधिक परिच्छेद वाले बिन्दु पर जल की चाल 60 cm/sec है, तो दूसरे बिन्दु पर जल की चाल की गणना कीजिए पारे का घनत्व 13.6 × 10 kg/m. तथा g = 9.8N/kg.
उत्तर:
2.02 m/sec

प्रश्न 20.
एक क्षैतिज नली के दो बिन्दुओं A व B पर अनुप्रस्थ क्षेत्रफल भिन्न-भिन्न हैं। A पर व्यास 4 cm तथा B पर 2 cm है। A तथा B पर दो मैनोमीटर भुजाएँ लगी हैं। जब 0.8 ग्राम / सेमी घनत्व का द्रव नली में से होकर बहता है तो मैनोमीटर की भुजाओं के बीच दावान्तर 8 cm है। नली में बहने वाले द्रव के प्रवाह की दर की गणना कीजिए। (g = 980 cm/sec²)
उत्तर:
406 cm³/sec

प्रश्न 21.
एक क्षैतिज सिरिंज में, जमीन से 1.25m की ऊँचाई पर, जल भरा है। प्लंजर का व्यास 8 mm एवं नोजिल का व्यास 2 mm है। प्लंजर को एक नियत चाल 0.25 m/sec से दबाया जाता है। जमीन पर सिरिंज से निकलने वाली जल धारा का क्षैतिज परास ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/sec²)
उत्तर:
2m

प्रश्न 22.
35m ऊँचाई तक भरे जल की एक टंकी में जल पृष्ठ से 7m नीचे टंकी की दीवार में 1 cm त्रिज्या का एक छेद है। ज्ञात कीजिए – (i) बहि:स्राव वेग, (ii) छेद से जल प्रवाह की दर, (iii) जल का परास, (iv) जल पृष्ठ से वह गहराई जहाँ टंकी में छेद करने पर परास का मान वही हो जो 7m गहराई पर है, (v) वह गहराई जहाँ छेद पर परास का मान अधिकतम हो, (vi) अधिकतम परास ।
उत्तर:
(i) 11.7m/sec.
(ii) 3.67 10m / sec
(iii) 28 m.
(iv) 28 m
(v) 17.5 m
(vi) 35 m

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प्वाइजली सूत्र पर आधारित

प्रश्न 23.
एक केशिकानली का व्यास 1 mm व लम्बाई 15 cm है। इसे एक क्षैतिज विधि से किसी पात्र से जोड़ दिया जाता है जो ऐल्कोहॉल से भरा हुआ है जिसका घनत्व 0.8 ग्राम/सेमी³ है। केशिकानली के केन्द्र की गहराई ऐल्कोहॉल के मुक्त पृष्ठ से 25 cm नीचे है। यदि ऐल्कोहॉल की श्यानता 0.12 प्वॉइज हो तो 5 min में बहने वाले द्रव की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
6,408 ग्राम

पृष्ठ तनाव तथा पृष्ठीय ऊर्जा पर आधारित

प्रश्न 24.
एक पतला तार 3.0 cm व्यास की रिंग के रूप में मोड़ा गया है। इस रिंग को साबुन के घोल में क्षैतिज स्थिति में रखकर, धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है रिंग व घोल के बीच बनी फिल्म को तोड़ने के लिए कितना उपरिमुखी (upward) बल चाहिए ? साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव = 3.0 × 10-2 N/m
उत्तर:
5.652 × 10-3 N

प्रश्न 25.
जल की R त्रिज्या की एक बड़ी बूँद को 8000 समान आयतन की छोटी बूँदों में विभाजित करने में 5.582 πR² जूल कार्य करना पड़ता है जल का पृष्ठ तनाव ज्ञात कीजिए
उत्तर:
7.3 × 10-2 N/m

प्रश्न 26.
दो सीधे 10 cm लम्बाई वाले समान्तर तारों के बीच जो 0.5 cm दूर हैं, जल की एक फिल्म बनाई जाती है। यदि तारों के बीच की दूरी 1 mm बढ़ाई जाये, तो कितना कार्य करना पड़ेगा ? जल का पृष्ठ तनाव 72 × 10-3 N/m
उत्तर:
1.44 × 10-5 जूल

प्रश्न 27.
जल की 1000 छोटी बूँदों को जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 10-7 m है, आपस में मिलाकर एक बुड़ी बूँद बनाने पर मुक्त ऊर्जा ज्ञात कीजिए। जल का पृष्ठ तनाव 7 × 10-2 N/m.
उत्तर:
7,92 × 10-12 Joule

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

दाब आधिक्य तथा केशिकत्व पर आधारित

प्रश्न 28.
साबुन के दो बुलबुलों की त्रिज्याएँ क्रमश: 0.5 cm व 1.0 cm है। इनके अन्दर दाबों का अन्तर 14 N/m² है। साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.035 N/m

प्रश्न 29.
1 mm व्यास की काँच की केशनली पारा भरे बीकर में ऊर्ध्वाधर खड़ी की जाती है। केशनली का निचला सिरा बीकर में पारे के पृष्ठ से 1 coin नीचे है। केशनली के निचले सिरे पर वायु का अर्द्धगोलीय बुलबुला . बनाने के लिए केशनली में वायु का गेज दाब क्या होना चाहिए ? पारे का पृष्ठ तनाव (0.465 N/m, तथा बुलबुले का व्यास केशनली के व्यास के बराबर मान लें।
उत्तर:
3193 N/m²

प्रश्न 30.
पारे के एक बैरोमीटर की नली का व्यास 3 mm है। पृष्ठ तनाव के कारण पाठ में क्या त्रुटि आयेगी ? स्पर्श कोण = 135° पारे का घनत्व = 13.5 × 10³ kg/m³ H T = 465 × 10-3 N/m.
उत्तर:
3.3 mm गिर जायेगा

प्रश्न 31.
एक U-नली की दोनों ऊर्ध्वाधर नलियों के व्यास क्रमश: 5.0 mm तथा 2.0 mm है। इसमें जल भरा है, नलियों में जल स्तम्भ की ऊँचाइयों में कितना अन्तर है ? जल का पृष्ठ तनाव = 7.3 × 10-2 N/ml
उत्तर:
8.94 mm

प्रश्न 32.
एक केशनली की लम्बाई 0.10 m है, जब इसे ऊर्ध्वाधर स्थिति में जल में रखा जाता है तो जल 0.06 m ऊँचाई तक चढ़ जाता है। यदि केशनली को ऊर्ध्वाधर स्थिति में 30° पर झुका दिया जाये तो केशनली में जल-स्तम्भ की लम्बाई क्या होगी ? यदि केशनली को बीचों-बीच से काट दिया जाये, तो केशनली में जल के पृष्ठ की स्थिति क्या होगी ? क्या जल फब्बारे के रूप में निकलने लगेगा ?
उत्तर:
6.94 cm, 0.05 m, जल पृष्ठ की वक्रता कम हो जायेगी।

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions )

प्रश्न 1.
ध्वनि तीव्रतम चलती है-
(a) वायु में
(b) जल में
(c) निर्वात में
(d) स्टील में
उत्तर:
(d) स्टील में

प्रश्न 2.
न्यूटन द्वारा दिये गये ध्वनि की चाल के सूत्र में लाप्लास संशोधन की आवश्यकता पड़ी क्योंकि गैस में ध्वनि तरंगें-
(a) अनुदैर्घ्य हैं
(b) समतापीय रूप में चलती हैं।
(c) रुद्धोष्म रूप में चलती हैं।
(d) अधिक तरंगदैर्घ्य की हैं।
उत्तर:
(c) रुद्धोष्म रूप में चलती हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 3.
समान ताप पर गैस में ध्वनि की चाल अधिकतम होगी-
(a) H में
(b) N में
(c) O में
(d) सभी में बराबर ।
उत्तर:
(a) H में

प्रश्न 4.
ध्वनि की चाल निर्भर नहीं करती है-
(a) आर्द्रता पर
(b) ताप पर
(c) दाब पर
(d) इनमें से किसी पर नहीं।
उत्तर:
(c) दाब पर

प्रश्न 5.
एक तनी हुई डोरी का तनाव बढ़ाकर चार गुना कर देने पर उसमें अनुप्रस्थ तरंग की चाल हो जाएगी-
(a) चार गुनी
(b) आठ गुनी
(c) दो गुनी
(d) आधी
उत्तर:
(c) दो गुनी

प्रश्न 6.
किसी गैस में उत्पन्न ध्वनि तरंगें होती हैं-
(a) अनुप्रस्थ
(b) अनुदैर्घ्य
(c) अप्रगामी
(d) विद्युत् चुम्बकीय।
उत्तर:
(b) अनुदैर्घ्य

प्रश्न 7.
सितार के तार में किस प्रकार के कम्पन्न उत्पन्न होते हैं-
(a) प्रगामी अनुप्रस्थ
(b) प्रगामी अनुदैर्घ्य
(c) अप्रगामी अनुप्रस्थ
(d) अप्रगामी अनुदैर्घ्य
उत्तर:
(c) अप्रगामी अनुप्रस्थ

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 8.
श्रोता, किस वेग से ध्वनि स्रोत की ओर चले कि उसकी आभासी आवृत्ति दुगुनी हो जाये, ध्वनि का वेग है-
(a) v
(b) v/2
(c) 2v
(d) 3v
उत्तर:
(a) v

प्रश्न 9.
अप्रगामी तरंगों में प्रस्पन्दों पर घनत्व –
(a) अधिकतम
(b) न्यूनतम
(c) अधिकतम परावर्तन
(d) न्यूनतम परिवर्तन।
उत्तर:
(d) न्यूनतम परिवर्तन।

प्रश्न 10.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग का वेग निर्भर नहीं करता है-
(a) घनत्व
(b) त्रिज्या
(c) तनाव
(d) लम्बाई
उत्तर:
(d) लम्बाई

प्रश्न 11.
ध्वनि की चाल किसमें अधिकतम होगी-
(a) पानी में
(b) लोहे में
(c) हवा में
(d) निर्वात में
उत्तर:
(d) निर्वात में

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 12.
जब ताप बढ़ता है तो आर्गन पाइप की आवृत्ति
(a) घट जाती है
(b) बढ़ जाती है
(c) स्थिर रहती है
(d) शून्य हो जाती है।
उत्तर:
(b) बढ़ जाती है

प्रश्न 13.
डॉप्लर प्रभाव लागू नहीं होता है-
(a) श्रव्य तरंगों के लिये
(b) पराश्रव्य तरंगों के लिए
(c) विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए
(d) प्रघाती तरंगों के लिए।
उत्तर:
(d) प्रघाती तरंगों के लिए।

प्रश्न 14.
जब किसी स्वरित्र को कम्पित किया जाता है तो इसकी दोनों भुजाओं के कम्पनों में कलान्तर-
(a) शून्य
(b) π
(c) \(\frac{π}{2}\)
(d) \(\frac{π}{4}\)
उत्तर:
(b) π

प्रश्न 15.
एक 4 मीटर लम्बा तार अपने सिरे पर लगे 300 Hz के कम्पित के द्वारा कम्पनशील है तार चार खण्डों में कम्पन कर रहा है। तार में अनुप्रस्थ तरंगों की चाल है-
(a) 150 ms-1
(b) 300 ms-1
(c) 600 ms-1
(d) 200 ms-1
उत्तर:
(c) 600 ms-1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 16.
l तथा 2l लम्बाइयों वाले एक ही पदार्थ के बने समान त्रिज्या के दो तार क्रमशः 100 Hz तथा 150 Hz आवृत्ति के कम्पन करते हैं, उन पर लगे तनावों का अनुपात है-
(a) 1:9
(b) 3:2
(c) 2:3
(d) 1:3
उत्तर:
(a) 1:9

प्रश्न 17.
450 हर्ट्ज की ध्वनि देने वाली एक सीटी एक स्थिर श्रोता की ओर 33 मी/से की चाल से आ रही है। वायु में ध्वनि की चाल 330 मी/से है श्रोता द्वारा सुनी गई आवृत्ति हज में है-
(a) 409
(b) 429
(c) 517
(d) 500
उत्तर:
(c) 517

प्रश्न 18.
ध्वनि के डॉप्लर प्रभाव लागू होने की प्रमुख शर्त है-
(a) vs > v
(b) vs = v
(c) vs < V
(d) vs = ∞
उत्तर:
(b) vs = v

प्रश्न 19.
यदि आवृत्ति का ध्वनि स्रोत किसी स्थिर श्रोता से दूर v वेग से जा रहा हो तो श्रोता को सुनाई पड़ने वाली आवृत्ति होगी-
(a) \(\text { n. } \frac{\left(v-v_s\right)}{v}\)
(b) \(\text { n. } \frac{\left(v+v_s\right)}{2}\)
(c) \(\text { n. } \frac{\left(v-v_s\right)}{2}\)
(d) \(\text { n. } \frac{v}{\left(v+v_s\right)}\)
उत्तर:
(d) \(\text { n. } \frac{v}{\left(v+v_s\right)}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 20.
एक गतिमान ध्वनि स्रोत के पीछे खड़े एक स्थिर श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति सुनाई देगी-
(a) मूल आवृत्ति से अधिक
(b) मूल आवृत्ति के बराबर
(c) मूल आवृत्ति से कम
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) मूल आवृत्ति से कम

प्रश्न 21.
एक स्थिर ध्वनि खोत की ओर एक श्रोता एकसमान वेग से गति कर रहा है। श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति के सापेक्ष होगी-
(a) कम
(b) अधिक
(c) समान
(d) कुछ भी हो सकती है।
उत्तर:
(b) अधिक

प्रश्न 22.
एक तारा पृथ्वी से दूर जा रहा है पृथ्वी पर प्रेक्षक को तारे की तरंगदैर्घ्य प्रतीत होगी-
(a) घटी हुई
(b) बढ़ी हुई
(c) अपरिवर्तित
(d) गिरती हुई।
उत्तर:
(d) गिरती हुई।

प्रश्न 23.
यदि आवृत्ति का एक ध्वनि स्रोत v/4 वेग से प्रेक्षक की तरफ गति करे तथा प्रेक्षक v/5 वेग से स्रोत की ओर गति करे तो आभासी आवृत्ति होगी-
(a) \(\frac{5}{8}\) n
(b) \(\frac{8}{5}\) n
(c) \(\frac{7}{5}\) n
(d) \(\frac{5}{7}\) n
उत्तर:
(b) \(\frac{8}{5}\) n

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
किसी गैस में ध्वनि की चाल का न्यूटन का सूत्र लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए ।
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{P}{d}}\) जहाँ P→ दाब, d → घनत्व

प्रश्न 2.
रेल की पटरी पर एक व्यक्ति चोट मारकर ध्वनि उत्पन्न करता है। इस स्थान से 1.0 किमी की दूरी पर कान लगाकर बैठे एक दूसरे व्यक्ति को दो ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। कारण बताइए।
उत्तर:
एक ध्वनि तरंग वायु में संचरित होकर तथा दूसरी ध्वनि तरंग रेल की पटरी से होकर श्रोता के कानों तक पहुँचती है। इसलिए दो ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।

प्रश्न 3.
किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता गुणांक E तथा घनत्व पर निर्भर करती है। ध्वनि की चाल का सूत्र E तथा d के पदों में लिखिए ।
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{E}{d}}\)

प्रश्न 4.
वायु का ताप 1°C बढ़ाने पर उसमें ध्वनि का वेग कितना बढ़ जाता है?
उत्तर:
वायु का ताप 1°C पर बढ़ाने से वायु में ध्वनि की चाल का मान 0.61 मी/सेकण्ड बढ़ जाता है।

प्रश्न 5.
तरंग गति में किसका स्थानान्तरण होता है ?
उत्तर:
तरंग गति में माध्यम के कम्पित कणों द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 6.
एक तनी हुई डोरी की लम्बाई दुगुनी तथा तनाव चार गुना कर दें तो नई आवृत्ति व पूर्व आवृत्ति में क्या सम्बन्ध होगा ?
उत्तर:
n1 = \(\frac{1}{2l} \sqrt{\frac{T}{m}}\) तथा n2 = \(\frac{1}{2 \times 2 l} \sqrt{\frac{4 \mathrm{~T}}{m}}=\frac{2}{2} \times \frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{T}}{m}}\)
या n2 = n1

प्रश्न 7.
कोणीय आवृत्ति, कोणीय तरंग संख्या तथा तरंग वेग में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
ω = 2πn ⇒ n = \(\frac{ω}{2π}\)
संचरण वेग k = \(\frac{2π}{λ}\) ⇒ λ = \(\frac{2π}{k}\)
तरंग वेग v = nλ = \(\frac{ω}{2π} \times \frac{2π}{k}\)
या v = \(\frac{ω}{k}\)

प्रश्न 8.
माध्यम के किसी कण द्वारा एक सेकण्ड में किये गये कम्पनों की संख्या को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
आवृत्ति ।

प्रश्न 9.
एक कम्पन करने में लिया गया समय क्या कहलाता है?
उत्तर:
आवर्तकाल ।

प्रश्न 10.
तरंग वेग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
तरंग वेग v = nλ, जहाँ n = आवृत्ति λ = तरंगदैर्घ्य है।

प्रश्न 11.
वायु में मानक ताप व दाब पर ध्वनि का वेग कितना होता है ?
उत्तर:
मानक ताप व दाब पर वायु में ध्वनि का वेग = 332 ms-1.

प्रश्न 12.
किसी तरंग का आयाम यदि आधा कर दिया जाये तो उसकी तीव्रता में क्या परिवर्तन आएगा ?
उत्तर:
तरंग की तीव्रता I ∝ (आयाम)²
या I ∝ a² या I = ka²
जब आयाम = \(\frac{a}{2}\) तीव्रता
I’ ∝ \(\frac{a^2}{2}\) या I’ = \(\frac{1}{4}\) ka² = \(\frac{1}{4}\)
I’ = \(\frac{I}{4}\) अर्थात् तीव्रता पहले की चौथाई रह जायेगी।
∴ \(\frac{P}{d}=\frac{RT}{M}\) = नियतांक |

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 13.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल की सूत्र लिखिए ।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
जहाँ T डोरी का तनाव एवं m = डोरी की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान ।

प्रश्न 14.
एक पूर्णतः दृढ़ छड़ में ध्वनि का वेग कितना होता है ?
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{Y}{d}}\) जहाँ Y = यंग प्रत्यास्थता गुणांक
तथा d = छड़ कर घनत्व ।

प्रश्न 15.
स्थिर ताप पर वायु का दाब चार गुना कर देने पर वायु में ध्वनि की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
कोई प्रभाव नहीं क्योंकि v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\) जिसमें दाब नहीं है।

प्रश्न 16.
ध्वनि तरंगों तथा ऊष्मीय तरंगों में क्या अन्तर है ?
उत्तर;
ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें’ हैं जबकि ऊष्मीय तरंगें ‘विद्युत् चुम्बकीय तरंगें’ हैं।

प्रश्न 17.
गैस, द्रव एवं ठोस माध्यमों में ध्वनि की चाल किसमें सबसे अधिक होगी ?
उत्तर:
ठोस माध्यम में; क्योंकि ठोसों के लिए v = \(\sqrt{\frac{Y}{d}}\) और Y का मान सबसे अधिक होता है।

प्रश्न 18.
किसी गैस के अणुओं की वर्गमाध्य मूल चाल ” एवं उसी में ध्वनि की चाल के मध्य क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
\(\frac{v}{v_{r m s}}=\frac{\sqrt{\frac{\gamma \mathrm{RT}}{\mathrm{M}}}}{\sqrt{\frac{3 \mathrm{RT}}{\mathrm{M}}}}=\sqrt{\frac{\gamma}{3}}\)
∴ \(v=v_{r m s} \cdot \sqrt{\frac{\gamma}{3}}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 19.
समान लम्बाई की रबर तथा स्टील की दो डोरियों में एक सिरे पर ध्वनि उत्पन्न की जाये तो किस डोरी से दूसरे सिरे पर ध्वनि खुले पहुँचेगी ?
उत्तर:
स्टील की डोरी में।

प्रश्न 20.
किसी बिन्दु पर तरंग की तीव्रता और उसके आयाम तथा आवृत्ति में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
I = 2π²n²a²ρv
जहाँ I = तरंग की तीव्रता; n = आवत्ति; a = आयाम; ρ = माध्यम का घनत्व; v = तरंग की चाल ।

प्रश्न 21.
किसी प्रगामी तरंग का समीकरण y(x,t) = A sin (ωt – kx) है। इसका वेग कितना होगा ?
उत्तर:
दिया है-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -1

प्रश्न 22.
कम्पन्न करते हुए किसी कण के कलान्तर तथा पथान्तर के बीच सम्बन्ध का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
पथान्तर के कारण कलान्तर
∆ϕ = \(\frac{2π}{λ}\) × ∆x
जहाँ ∆x = पथान्तर ।

प्रश्न 23.
समतल प्रगामी तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
X- अक्ष की धनात्मक दिशा में प्रगामी तरंग का समीकरण
y = asin \(\frac{2π}{λ}\) (vt – x)
जहाँ a = आयाम; λ = तरंगदैर्घ्य; v = तरंग वेग

प्रश्न 24.
कलान्तर एवं समयान्तर में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
∆ϕ = \(\frac{2π}{λ}\) × ∆t
जहाँ T = आवर्तकाल; ∆t = समयान्तर।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 25.
गैसों में उत्पन्न तरंगें किस प्रकार की होती हैं ?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंगें।

प्रश्न 26.
क्या द्रवों में अनुप्रस्थ तरंगें सम्भव हैं ?
उत्तर:
हीं; केवल द्रव के तल पर ।

प्रश्न 27.
गैसों में अनुप्रस्थ तरंगें क्यों उत्पन्न नहीं की जा सकती हैं ?
उत्तर:
क्योंकि गैसों में दृढ़ता नहीं होती है।

प्रश्न 28.
एक समतल प्रगामी तरंग का आयाम A मीटर, v वेग मीटर / सेकण्ड तथा आवृत्ति vHz है। इस तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
y = A sin2π (t – \(\frac{x}{t}\))

प्रश्न 29.
किस माध्यम से परावर्तित होने पर परावर्तित तरंग की कला परिवर्तित हो जाती है ?
उत्तर:
जब तरंग सघन माध्यम से परावर्तित होती है तो तरंग की कला में का परिवर्तन हो जाता है।

प्रश्न 30.
400 व 402 आवृत्ति के स्वरित्र एक साथ कम्पित कराने पर विस्पन्द की आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर:
विस्पन्द आवृत्ति n = n1 ~ n2 = 400 ~ 402
या n = 2 विस्पन्द / सेकण्ड ।

प्रश्न 31.
समान लम्बाई के खुले व बन्द ऑर्गन पाइपों की मूल आवृत्तियों का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर- खुले पाइप की मूल आवृत्ति n = \(\frac{v}{2l}\)
बन्द पाइप की मूल आवृत्ति n’ = \(\frac{v}{4l}\)
या n’ = \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{v}{2l}\) = \(\frac{1}{2}\)n
∴ \(\frac{n^{\prime}}{n}=\frac{1}{2}\) या \(\frac{n}{n^{\prime}}=\frac{2}{1}\)
∴ n : n’ = 2 : 1

प्रश्न 32.
खुले या बन्द ऑर्गन पाइप में से किसमें केवल विषम सनादी ही उत्पन्न हो सकती है ?
उत्तर:
बन्द आर्गन पाइप में।

प्रश्न 33.
माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
आयाम।

प्रश्न 34.
क्या अप्रगामी तरंगों के माध्यम से ऊर्जा स्थानान्तरण होता है ?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 35.
अनुनादित वायु स्तम्भ में कौन-सी तरंगें उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर;
अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें ।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 36.
एक प्रस्पन्द व उसके क्रमिक निस्पन्द के मध्य कितनी दूरी होती है?
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -2
उत्तर:
एक प्रस्पन्द व उसके क्रमिक निस्पन्द के मध्य दूरी = \(\frac{λ}{4}\)

प्रश्न 37.
ध्वनि के वेग पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
v ∝ √T अर्थात् ताप बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ जाता है। ताप के साथ परिवर्तन निम्न सूत्र से प्राप्त होता है-
vt = vo + 0.61t

प्रश्न 38.
कहा जाता है कि ध्वनि कम्पनों के कारण उत्पन्न होती है फिर सरल लोलक दोलनों की ध्वनि क्यों नहीं सुनाई देती है ?
उत्तर:
दोलनों की आवृत्ति कम (अपश्रव्य क्षेत्र में) होने के कारण सरल लोलक के दोलनों की ध्वनि सुनाई नहीं देती है।

प्रश्न 39.
अप्रगामी तरंगें बनने के लिए क्या बद्ध माध्यम होना आवश्यक है ?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 40.
अपग्रामी तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
y = 2a sin(\(\frac{2πx}{λ}\) cos (2πnt)
जहाँ a = अध्यारोपण करने वाली तरंगों के आयाम; λ = तरंगदैर्घ्य; n = आवृत्ति ।

प्रश्न 41.
आर्द्रता बढ़ने पर ऑर्गन पाइप से उत्पन्न स्वर की आवृत्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
आर्द्रता बढ़ने से वायु में ध्वनि का वेग बढ़ जाता है अतः पाइप की आवृत्ति बढ़ जाती है।

प्रश्न 42.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की मूल आवृत्ति का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
n = \(\frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{T}{m}}\), जहाँ T = डोरी का तनाव l = डोरी की लम्बाई तथा m = डोरी की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान ।

प्रश्न 43.
अप्रगामी तरंग में किसी निस्पन्द एवं उसके तुरन्त बाद वाले प्रस्पन्द के बीच कितना कलान्तर होता है ?
उत्तर:
π/2

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 44.
सोनोमीटर से किसी स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात करने के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर:
\(\frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{Mg}}{\pi r^2 \cdot d}}\)
जहाँ l = तार की लम्बाई; M = सोनोमीटर तार में तनाव लगाने के लिए लटकाया गया द्रव्यमान; r = तार की त्रिज्या; d = तार का घनत्व ।

प्रश्न 45.
किसी तार के तनाव को नौ गुना कर देने पर तरंग की चाल कितने गुना हो जायेगी ?
उत्तर:
∵ v a √T
∴ \(\frac{1}{2}\)
∴ v2 = 3v1

प्रश्न 46.
कम्पित स्वरित्र के प्रस्पन्दों एवं निस्पन्दों की स्थिति चित्र में प्रदर्शित कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -3
उत्तर:
कम्पित स्वरित्र के प्रस्यन्द एवं निस्पन्द संलग्न चित्र में दिखाए गये हैं।

प्रश्न 47.
स्वरित्र द्विभुज की पिच किन-किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर:
पिच आवृत्ति पर निर्भर करती है और आवृत्ति स्वरित्र की लम्बाई के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती तथा मोटाई के अनुक्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 48.
सितार में भिन्न-भिन्न आवृत्तियों के स्वर उत्पन्न होते हैं क्यों ?
उत्तर:
उत्पन्न अधिस्वरकों की भिन्नता के कारण।

प्रश्न 49.
डॉप्लर का प्रभाव ध्वनि तारत्व परिवर्तन के बारे में बताता है अथवा तीव्रता परिवर्तन के बारे में?
उत्तर:
तारत्व परिवर्तन के बारे में।

प्रश्न 50.
ध्वनि स्रोत तथा श्रोता एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिर हैं। यदि ध्वनि की चाल बदल जाये तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति तथा तरंगदैर्ध्य में किसमें परिवर्तन नहीं होगा ?
उत्तर:
आवृत्ति में परिवर्तन नहीं होगा।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 51.
एक ही दिशा में ध्वनि स्त्रोत एवं श्रोता समान वेग से चल रहे हैं। ध्वनि-स्रोत की आवृत्ति और श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति का अनुपात बताइये।
उत्तर:
1:1 क्योंकि स्रोत एवं श्रोता के मध्य सापेक्ष गति नहीं होती है अतः आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति के बराबर होगी।

प्रश्न 52.
कम्पित स्वरित्र को यदि दीवार की ओर तेजी से ले जायें तो क्या श्रोता को विस्पन्द सुनाई देंगे ? यदि हाँ तो क्यों ?
उत्तर:
हाँ क्योंकि दीवार से परावर्तित ध्वनि की आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से अधिक होगी।

प्रश्न 53.
यदि आप सड़क पर जा रहे हैं और कार पीछे से हॉर्न बजाती हुई आती है और क्रॉस करके निकल जाये तो आपको आवृत्ति में क्या परिवर्तन प्रतीत होगा ?
उत्तर:
कार के पास आते समय आवृत्ति बढ़ती हुई एवं क्रॉस करने बाद घटती हुई प्रतीत होगी।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य तरंगों में क्या अन्तर है? लिखिये ।
उत्तर:

अनुदैर्घ्य तरंगेंअनुप्रस्थ तरंगें
1. जिन तरंगों के संचरण के समय माध्यम के कण संचरण दिशा के अनुदिश गति करते हैं, उन तरंगों को अनुदैर्घ्य तरंगें कहते हैं।1. जब माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् गति करते हैं, उन तरंगों को अनुप्रस्थ तरंगें कहते हैं।
2. अनुदैर्घ्य तरंगें सम्पीडन एवं विरलन के रूप में गमन करती हैं।2. अनुप्रस्थ तरंगें श्रंग एवं गर्त के रूप में आगे बढ़ती हैं।
3. अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण के लिए माध्यम सम्पीडन होना चाहिए।3. अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम दृढ़ अथवा असंपीड्य होना चाहिए।

प्रश्न 2.
तरंग के दक्षतापूर्ण संचरण हेतु माध्यम में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?
उत्तर:
माध्यम में तरंग के दक्षतापूर्वक संचरण के लिए निम्न गुण देने चाहिए-

  1. माध्यम प्रत्यास्थ होना चाहिए ताकि विस्थापित कण अपनी माध्य स्थिति में लौट सके।
  2. माध्यम में जड़त्व का गुण होना चाहिए ताकि वह ऊर्जा को एकत्र कर सके।
  3. माध्यम का प्रतिरोध अल्प होना चाहिए ताकि कम्पित कण की ऊर्जा में क्षय न हो सके।

प्रश्न 3.
प्रत्यास्थ तरंगें किन्हें कहते हैं ?
उत्तर:
वे तरंगें जो प्रत्यास्थ माध्यम में उत्पन्न होती हैं, प्रत्यास्थ तरंगें कहलाती हैं। सभी यांत्रिक तरंगें प्रत्यास्थ तरंगों की श्रेणी में आती हैं क्योंकि इनके बनने एवं संचरण के लिए प्रत्यास्थ माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 4.
प्रगामी तथा अप्रगामी तरंगों की परिभाषा बताइये और उनमें अन्तर लिखो ।
उत्तर:
प्रगामी तरंगें : वे तरंगें जिनके द्वारा ऊर्जा का संचरण होता हैं, प्रगामी तरंगें कहलाती है।
अप्रगामी तरंगें : वे तरंगें जिनके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है, बल्कि ये अपने ही स्थान पर बनती और बिगड़ती रहती हैं, उन्हें अप्रगामी तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 5.
तरंगों के अध्यारोपण से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

प्रश्न 6.
गैस में तरंग वेग व्यंजक हेतु लाप्लास संशोधन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल : न्यूटन सूत्र
(Velocity Of Sound In A medium : Newton’s Formula)
ध्वनि तरंगों या अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण को समझने एवं उनका वेग ज्ञात करने के लिए हम एक पिस्टन नली पर विचार करते हैं, जिसमें कोई सम्पीड्य तरल भरा हैं चित्र में समान्तर रेखाओं द्वारा तरल की परतों को प्रदर्शित किया गया है। सम्पीडन की स्थिति में ये समान्तर रेखाएँ सघन (पास-पास) हैं । यहाँ पर तरल का दाब एवं घनत्व दोनों अधिक हैं। जब दूर-दूर रेखाओं द्वारा व्यक्त विरलन की स्थिति में दाब एवं घनत्व दोनों कम हैं। यहाँ हम तरल को सतत् माध्यम मानेंगे और इस बात की अपेक्षा करेंगे कि वास्तव में यह अणुओं से मिलकर बना है जो भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न वेगों से गतिशील हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -7
यदि पिस्टन को नली के अन्दर की ओर धक्का दें तो इसके सम्पर्क से तरल का सम्पीडन होगा तथा इसका दाब एवं घनत्व बढ़ेगा। सम्पीडित तरल की यह परत आगे की ओर गति करेगी तथा अगली परत में सम्पीडन उत्पन्न करेगी। यदि पुनः पिस्टन को बाहर की ओर खींचे तो इसके सम्पर्क से तरल फैलेगा जिससे उसका दाब एवं घनत्व कम होगा। यही विरलन की स्थिति होती है। इस प्रकार यदि पिस्टन की सतत् रूप से अन्दर-बाहर गति दी जाये तो विक्षोभ नली में सम्पीडन एवं विरलन के रूप में आगे बढ़ता जायेगा और यह अनुदैर्घ्य तरंग की तरह व्यवहार करेगा।

माना पिस्टन को अन्दर की ओर धक्का देकर एक विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है, जो सम्पीडन के रूप में होता है तथा दायीं ओर वेग से गतिशील है। सरलता के लिए यह माना जाता है कि इस सम्पीडन क्षेत्र के अन्दर तरल का दाब व घनत्व एक समान है। अब यदि प्रेक्षक भी सम्पीडन की दिशा में समान वेग से गतिशील माना जाये तो तरल मध्यम ” वेग से सम्पीडन की विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होगा एवं प्रेक्षक के सापेक्ष सम्पीडन स्थिर होगा। इस स्थिति में जब तरल वेग से सम्पीडन क्षेत्र की ओर गति करता हुआ सम्पीडन क्षेत्र से टकराता है, तब इसके आगे के किनारे पर पीछे के किनारे से दाब कुछ अधिक होगा। माना इन दोनों किनारों पर दाबान्तर ∆P है। इस कारण इस क्षेत्र B में यह अल्पांश (तरल माध्यम) संपीडित होगा तथा इस क्षेत्र में इसका वेग कुछ कम (v – ∆v) होगा तथा जब यह अल्पांश इस सम्पीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा तो पुनः अपने प्रारम्भिक आयतन को प्राप्त कर लेगा तथा दावान्तर ∆P के कारण पीछे की ओर दाब आधिक्य होने के कारण त्वरित होगा अतः इसका वेग पुनः हो जायेगा।
इस प्रकार अल्पांश C स्थिति में पहुँच जायेगा।
जब तरल अल्पांश सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उस पर दाय और कार्यरत् परिणामी बल
बल = दाब × क्षेत्रफल
परिणामी बल,
F = (P + ∆P) A – PA = PA + ∆P.A – P.A
या F = ∆P.A ……….(1)
जहाँ A, नली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
सम्पीडन क्षेत्र के बाहर इस अल्पांश की लम्बाई v.Δt है जहाँ Δt अल्पांश को किसी बिन्दु से गुजरने में लगा समय है। अतः अल्पांश का आयतन (v.Δt × A) व द्रव्यमान v.Δt.A.ρ होगा जहाँ ρ तरल का सम्पीडन क्षेत्र से बाहर घनत्व है। जब यह सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अनुभव किया गया त्वरण
\(a=-\frac{\Delta v}{\Delta t}\) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न का प्रयोग $v$ घटने के कारण किया गया है।)
न्यूटन के द्वितीय नियम से
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -8.1
स्पष्ट है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों प्रत्यास्थता गुणांक तथा घनत्व पर निर्भर करता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 7.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ कम्पन के नियम लिखिए।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
(Velocity Of Transverse Wave In A Stretched String):
तनी हुई डोरी में विक्षोभ से अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती है। अतः अनुप्रस्थ तरंग का वेग ज्ञात करने हेतु माना एक डोरी, जिसकी एकांक लम्बाई का द्रव्यमान m है तथा तनाव T है, में एक विक्षोभ बायीं ओर से दायीं ओर वेग से गतिशील है। हम यह मान सकते हैं कि प्रेक्षक विक्षोभ की दिशा में समान वेग v से गतिशील है तो प्रेक्षक को स्पन्द स्थिर प्रतीत होगा तथा डोरी विपरीत दिशा में गति करती हुई प्रतीत होगी।

अब डोरी के अल्पांश ∆l पर विचार करें तो विक्षोभ के कारण यदि डोरी में अल्प विस्थापन हो तो इस अल्पांश ∆l को चित्र की भाँति R त्रिज्या के वृत्तीय चाप के रूप में ले सकते हैं।
इस चाप का द्रव्यमान M = m. ∆l
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -14.1
इस अल्पांश पर केन्द्र की ओर लगने वाला कुल तनाव बल 2T sin θ ही आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करेगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -15
अर्थात् तरंग वेग डोरी के तनाव एवं डोरी की एकांक लम्बाई के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। यह तरंग वेग आयाम व तरंग दैर्ध्य पर निर्भर नहीं करता है। इस सूत्र की उपपत्ति में डोरी को आदर्श (पूर्णत: प्रत्यास्थ, समान घनत्व) माना गया है तथा कम्पन करते समय इसकी लम्बाई में कोई परिवर्तन नहीं होता है ।

प्रश्न 8.
सोनोमीटर में अप्रगामी तरंगों का निर्माण किस प्रकार होता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सोनोमीटर तार में तनाव उत्पन्न करके जब एक कम्पित स्वरित्र की मूँठ को सोनोमीटर के तख्ते पर ऊर्ध्वाधर खड़ा किया जाता है। तो तख्ते में प्रणोदित कम्पन (स्वरित्र की आवृत्ति से) प्रारम्भ होते हैं। ये कम्पन सेतुओं द्वारा तार में पहुँचते हैं, फलवरूप सेतुओं से समान आवृत्ति की एवं समान आयाम की दो तरंगें परस्पर विपरीत दिशाओं में चलकर अध्यारोपित होती हैं और तार में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें उत्पन्न हो जाती

प्रश्न 9.
ध्वनि के वेग पर ताप, दाब एवं आर्द्रता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
दाब का प्रभाव v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\) में दाब P नहीं आता है, अतः यदि ताप नियत हो दाब P का ध्वनि के वेग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
ताप का प्रभाव : v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
एक ही माध्यम के लिए व M के मान नियत रहते हैं।
अतः v ∝ √T
अर्थात् किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के परम ताप के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् ताप बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ जाता है।

आर्द्रता का प्रभाव : v = \(\sqrt{\frac{γP}{d}}\)
अर्थात् ν ∝ \(\frac{1}{\sqrt{d}}\)
शुष्क वायु एवं जल वाष्य के घनत्वों का अनुपात 8 : 5 में होता है। अतः जिस वायु में जलवाष्प मिली होती है। उसका घनत्व शुष्क वायु से कम होता है अतः आर्द्रवायु में ध्वनि का वेग अधिक होता है।

प्रश्न 10.
रेल की पटरी पर एक व्यक्ति चोट मारकर ध्वनि उत्पन्न करता है। इस स्थान से 1.0 km दूर कान लगाकर बैठे व्यक्ति को दो ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। कारण बताइये ।
उत्तर:
रेल की पटरी में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt{\frac{Y}{d}}\) वायु में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt{\frac{γP}{d}}\) से अधिक होती है। इसलिए श्रोता को पटरी से हो Vd कर जाने वाली ध्वनि पहले एवं वायु से होकर आने वाली ध्वनि बाद में सुनाई देती है अर्थात् उसे दो ध्वनियाँ सुनाई देती है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 11.
सामान्य ताप व दाब पर वायु में ध्वनि की चाल 330 ms है। ताप स्थिर रखते हुए दाब को दोगुना करने पर ध्वनि की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? कारण बताइये।
v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
उत्तर:
इस सूत्र में दाब P नहीं है, अतः यदि ताप I नियत है तो ध्वनि की चाल पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है अतः दाब को नियत ताप पर दो गुना कर देने पर चाल अपरिवर्तित रहेगी।

प्रश्न 12.
किसी गैस में ध्वनि तरंग की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यदि गैस का परम ताप पहले का चार गुना कर दिया जाये ?
उत्तर:
ν ∝ √ T
∴ \(\frac{v_2}{v_1}=\sqrt{\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}}=\sqrt{\frac{4 \mathrm{~T}_1}{\mathrm{~T}_1}}=\sqrt{4}=2\)
या v2 = 2v1

प्रश्न 13.
समान ताप पर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन गैसों में ध्वनि तरंगों के वेगों का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर- :
v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
यदि ताप नियत रहे तो v ∝ \(\frac{1}{\sqrt{M}}\)
∴ \(\frac{v_{\mathrm{H}}}{v_{\mathrm{O}}}=\sqrt{\frac{\mathrm{M}_{\mathrm{O}}}{\mathrm{M}_{\mathrm{H}}}}=\sqrt{\frac{32}{2}}=\sqrt{\frac{16}{1}}=\frac{4}{1}\)
∴ vH : vO = 4 : 1

प्रश्न 14.
किसी तार के तनाव को चार गुना कर दें तो तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\), ∴ V ∝ √T
∴ \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
∴ v2 = 2v1

प्रश्न 15.
वायु की अपेक्षा कार्बन डाई ऑक्साइड में ध्वनि अधिक तीव्र सुनाई देती है, क्यों ?
उत्तर:
ध्वनि की तीव्रता (I =2π²n²a²ρv) माध्यम के घनत्व ρ के अनुक्रमानुपाती होती है। CO2 का घनत्व वायु के घनत्व से अधिक होता है इसीलिए CO2 में ध्वनि की तीव्रता व प्रबलता वायु की अपेक्षा अधिक रहती है।

प्रश्न 16.
चन्द्रमा पर एक व्यक्ति दूसरे की आवाज नहीं सुन सकता ? आवाज को सुनने के लिए किस प्रकार के सहायक यंत्र चाहिए ?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों के चरण के लिए माध्यम की आवश्यकता रहती है और चन्द्रमा पर वायुमण्डल नहीं है इसीलिए चन्द्रमा पर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की आवाज नहीं सुन सकता है। वहाँ पर आवाज सुनने के लिए ऐसे यंत्र की आवश्यकता होगी जिससे विद्युत् चुम्बकीय तरंगों का सूचन एवं प्रसारण हो सके।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 17.
आकाश में बिजली की कड़क तथा दमक एक साथ सम्पन्न होती हैं, परन्तु बिजली की दमक पहले दिखाई देती है एवं कड़क बाद में सुनाई देती है क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि ध्वनि की चाल 332 ms-1 प्रकाश की चाल 108 ms-1 से कम होती है। इसीलिए बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और कड़क बाद में सुनाई देती है।

प्रश्न 18.
वर्षां के मौसम में मेढकों के बोलने की आवाज दूर-दूर तक स्पष्ट सुनी जाती है क्यों ?
उत्तर:
वर्षा के मौसम में वायु में आर्द्रता अधिक होती है और आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल अधिक होती है इसलिए मेड़कों के बोलने की आवाज दूर-दूर तक सुनी जाती है।

प्रश्न 19.
यदि हम दूर स्थित किसी फैक्ट्री के साइरन से अपनी घड़ी मिलाते हैं तो घड़ी सुस्त हो जाती है क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि साइरन की ध्वनि को फैक्ट्री से हमारे पास तक आने कुछ समय लग जाता है, अतः घड़ी सुस्त हो जाती है।

प्रश्न 20.
सभी प्रकार की यांत्रिक तरंगों में कौन-सा गुण सर्वनिष्ठ है ?
उत्तर:
तरंगें माध्यम के कणों की सहायता से आगे बढ़ती हैं परन्तु माध्यम तरंग के साथ आगे नहीं बढ़ता है।

प्रश्न 21.
बद्ध माध्यम से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
बद्ध माध्यम से अभिप्राय एक निश्चित परिसीमा तथा उसकी सीमाएँ अन्य माध्यमों से स्पष्ट पृष्ठों द्वारा अलग होना है।

प्रश्न 22.
सन्नादी से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
वे स्वर जिनकी आवृत्तियाँ मूल स्वरक की पूर्ण गुणज होती. हैं, सन्नादी कहलाते हैं। सम गुणज को सम सन्नादी एवं विषम गुणज का विषम सन्नादी कहते हैं।

प्रश्न 23.
अप्रगामी तरंगों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
जब समान आवृत्ति एवं समान आयाम की दो तरंगें किसी बद्ध माध्यम में एक ही रेखा में विपरीत दिशाओं से आकर अध्यारोपण करती है, तो उत्पन्न हुई नई तरंग माध्यम में स्थिर प्रतीत होती है, अत: इसे ‘स्थावर तरंग’ (Standing wave ) या ‘अप्रगामी तरंग’ (Stationary wave) कहते हैं ये तरंगें अनुप्रस्थ व अनुदैर्घ्य दोनों प्रकार की होती हैं।
डोरियों में ‘अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें’ जबकि वायु स्तम्भों में अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें’ उत्पन्न होती हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 24.
क्या कारण है कि खुले पाइप का स्वर बन्द पाइप की अपेक्षा अधिक मधुर होता है ?
उत्तर:
किसी स्वर में सन्नादियों की संख्या जितनी अधिक होती है वह उतना ही अधिक मधुर होता है। चूँकि बन्द पाइप में केवल विषम सन्नादी एवं खुले पाइप में सम और विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं अतः खुले पाइप का स्वर अधिक मधुर होता है।

प्रश्न 25.
एक ध्वनि स्त्रोत की मूल आवृत्ति 200 Hz है तथा इससे सभी सन्नादी उत्पन्न होते हैं। बताइये कि यह ध्वनि स्रोत निम्न आवृत्तियों में से किस-किस के साथ अनुनाद कर सकता है ?
उत्तर:
अनुनाद के लिए प्रणोदित दोलनों की आवृत्ति कम्पित वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति या इसके पूर्व गुणज के बराबर होनी चाहिए। अतः अनुनादी आवृत्तियाँ 200 व 6000 Hz होगी।

प्रश्न 26.
व्यतिकरण तथा विस्पन्द में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यतिकरण तथा विस्पन्द में निम्न अन्तर हैं-
1. व्यतिकरण में दोनों तरंगों की आवृत्ति समान होती है, जबकि विस्पन्दों में आवृत्तियाँ लगभग समान होती हैं।
2. व्यतिकरण में एक स्थान पर तीव्रता समय के साथ नियत रहती है जबकि विस्पन्दों में एक ही स्थान पर तीव्रता समय के साथ बदलती रहती है।

प्रश्न 27.
विस्पन्द उत्पन्न होने के लिए आवश्यक शर्त बताइये।
उत्तर:
विस्पन्द उत्पन्न होने के लिए आवश्यक शर्तें निम्नलिखित

  • दोनों तरंगों की आवृत्तियाँ लगभग समान होनी चाहिए।
  • दोनों तरंगों के आयाम समान होने चाहिए।
  • दोनों तरंगें एक ही दिशा में तथा एक ही सरल रेखा में गति करनी चाहिए।
  • दोनों तरंगों के कम्पन तल समान होने चाहिए।

प्रश्न 28.
एक ध्वनि स्त्रोत ध्वनि के वेग से एक स्थिर श्रोता की ओर गतिमान है। श्रोता द्वारा सुनी गई आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर:
ध्वनि स्रोत पास आ रहा है, तो आभासी आवृत्ति –
n’ = \(\frac{v}{\left(v-v_s\right)}\).n
दिया है- स्रोत का वेग vs = v
n’ = \(\frac{v}{v-v}=\frac{v}{0}\) = ∞ (अनन्त)
या n’ = ∞ अनन्त
यह श्रोता की श्रव्य परास से अधिक है, अतः श्रोता को ध्वनि सुनाई। नहीं देगी।

प्रश्न 29.
ध्वनि तरंगों में डॉप्लर प्रभाव किन-किन पर निर्भर करता है ?
उत्तर:
ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव निम्न बातों पर निर्भर करता है-
1. श्रोता एवं स्रोत के मध्य आपेक्षिक वेग पर।
2. श्रोता एवं श्रोता के वेगों पर।
3. इस बात पर कि खोत एवं श्रोता में कौन गतिशील है ?
4. माध्यम (वायु) के प्रवाह वेग पर ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
तरंग गति से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए। प्रगामी तरंग समीकरण हेतु व्यंजक एवं तरंग का एक विमीय अवकल समीकरण प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंग गति (Wave Motion):
यदि हम तालाब में एक पत्थर का टुकड़ा डालें, तो हम देखेंगे कि जल में पत्थर के गिरने के स्थान पर विक्षोभ (Disturbance) उत्पन्न हो जाता है। यह विक्षोभ उसी रूप में व निश्चित चाल से आगे बढ़ता है और तालाब के किनारे पर पहुँच जाता है। इसी प्रकार यदि हम किसी रस्सी का एक सिरा किसी हुक से बाँधकर तथा दूसरे सिरे को हाथ में पकड़कर ऊपर-नीचे हिलायें, तो रस्सी में भी एक प्रकार का विक्षोभ उत्पन्न हो जाता है, जो एक निश्चित चाल से आगे बढ़ता है तथा दूसरे सिरे तक पहुँच जाता है।
इस प्रकार, “तरंग माध्यम में उत्पन्न वह विक्षोभ (Disturbance) है, जिसमें माध्यम के कण अपनी साम्यावस्था के इर्द-गिर्द दोलन करते रहते हैं और माध्यम के स्थानान्तरण के बिना ही ऊर्जा स्थानान्तरित हो जाती है।
तरंग गति में माध्यम में ऊर्जा तथा संवेग में परिवर्तन होता है व माध्यम के कणों की कला सतत रूप से परिवर्तित होती रहती है। • तरंग के संचरण के लिए माध्यम के आवश्यक गुण

  • तरंग संचरण के लिए माध्यम में अवस्था परिवर्तन का विरोध करने वाला अर्थात् जड़त्व का गुण होना चाहिए।
  • माध्यम में बल लगाने पर विस्थापित होने तथा बल हटाने पर प्रारम्भिक अवस्था में आ जाने का अर्थात् प्रत्यास्थता का गुण होना चाहिए।
  • तरंग संचरण के लिए माध्यम का प्रतिरोध कम-से कम होना चाहिए।

प्रगामी तरंग समीकरण (Progressive wave Equation):
वह तरंग जिसके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण एक स्थान से दूसरे स्थान तक होता है, प्रगामी तरंग कहलाती है। जब माध्यम में कोई प्रगामी तरंग संचरित होती है तो माध्यम के कण अपने स्थान पर सरल आवर्त गति करने लगते हैं। ये कण समान व अलग-अलग कलाओं में कम्पन करते रहते हैं।

माना कोई विक्षोभ बिन्दु O पर उत्पन्न होता है, जो प्रगामी तरंग के रूप में +X दिशा में आगे बढ़ता है। सबसे पहले O पर स्थित कण कम्पन आरम्भ करता है और उसके पश्चात् क्रमशः माध्यम के आगे वाले कण कम्पन आरम्भ करते जाते हैं। यदि O से x दूरी पर स्थित बिन्दु P पर कोई कण स्थित है, जो O पर स्थित कण की कला से ϕ पीछे होगा। अतः यदि किसी क्षण t पर कण O का विस्थापन समीकरण
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -5
y = a sin ωt
हो तो इसी क्षण कण P का विस्थापन समीकरण
y = a sin (ωt – ϕ) ……………….. (1)
होगा। यहाँ ϕ, बिन्दुओं O व P के मध्य कलान्तर है।
∵ पथान्तर के कारण
कलान्तर = \(\frac{2 \pi}{\lambda}[latex] × पथान्तर
∴ [latex]\phi=\frac{2 \pi}{\lambda} x\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -6
समी (2), (3) व (4) धनात्मक X-दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग समीकरण हैं। यदि तरंग X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में गतिशील है तो उक्त समीकरण
y = a sin (ωt + kx)
से व्यक्त होगा। समी (3) व (4) में भी (-x) के स्थान पर (+x) का प्रयोग करना होगा।

प्रश्न 2.
वायु में ध्वनि की चाल के लिए न्यूटन का सूत्र लिखिए। लाप्लास ने इसमें क्या संशोधन किया और क्यों ?
उत्तर:
विभिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल : न्यूटन सूत्र
(Velocity Of Sound In A medium : Newton’s Formula)
ध्वनि तरंगों या अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण को समझने एवं उनका वेग ज्ञात करने के लिए हम एक पिस्टन नली पर विचार करते हैं, जिसमें कोई सम्पीड्य तरल भरा हैं चित्र में समान्तर रेखाओं द्वारा तरल की परतों को प्रदर्शित किया गया है। सम्पीडन की स्थिति में ये समान्तर रेखाएँ सघन (पास-पास) हैं । यहाँ पर तरल का दाब एवं घनत्व दोनों अधिक हैं। जब दूर-दूर रेखाओं द्वारा व्यक्त विरलन की स्थिति में दाब एवं घनत्व दोनों कम हैं। यहाँ हम तरल को सतत् माध्यम मानेंगे और इस बात की अपेक्षा करेंगे कि वास्तव में यह अणुओं से मिलकर बना है जो भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न वेगों से गतिशील हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -7.1
यदि पिस्टन को नली के अन्दर की ओर धक्का दें तो इसके सम्पर्क से तरल का सम्पीडन होगा तथा इसका दाब एवं घनत्व बढ़ेगा। सम्पीडित तरल की यह परत आगे की ओर गति करेगी तथा अगली परत में सम्पीडन उत्पन्न करेगी। यदि पुनः पिस्टन को बाहर की ओर खींचे तो इसके सम्पर्क से तरल फैलेगा जिससे उसका दाब एवं घनत्व कम होगा। यही विरलन की स्थिति होती है। इस प्रकार यदि पिस्टन की सतत् रूप से अन्दर-बाहर गति दी जाये तो विक्षोभ नली में सम्पीडन एवं विरलन के रूप में आगे बढ़ता जायेगा और यह अनुदैर्घ्य तरंग की तरह व्यवहार करेगा।

माना पिस्टन को अन्दर की ओर धक्का देकर एक विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है, जो सम्पीडन के रूप में होता है तथा दायीं ओर वेग से गतिशील है। सरलता के लिए यह माना जाता है कि इस सम्पीडन क्षेत्र के अन्दर तरल का दाब व घनत्व एक समान है। अब यदि प्रेक्षक भी सम्पीडन की दिशा में समान वेग से गतिशील माना जाये तो तरल मध्यम ” वेग से सम्पीडन की विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होगा एवं प्रेक्षक के सापेक्ष सम्पीडन स्थिर होगा। इस स्थिति में जब तरल वेग से सम्पीडन क्षेत्र की ओर गति करता हुआ सम्पीडन क्षेत्र से टकराता है, तब इसके आगे के किनारे पर पीछे के किनारे से दाब कुछ अधिक होगा। माना इन दोनों किनारों पर दाबान्तर ∆P है। इस कारण इस क्षेत्र B में यह अल्पांश (तरल माध्यम) संपीडित होगा तथा इस क्षेत्र में इसका वेग कुछ कम (v – ∆v) होगा तथा जब यह अल्पांश इस सम्पीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा तो पुनः अपने प्रारम्भिक आयतन को प्राप्त कर लेगा तथा दावान्तर ∆P के कारण पीछे की ओर दाब आधिक्य होने के कारण त्वरित होगा अतः इसका वेग पुनः हो जायेगा।
इस प्रकार अल्पांश C स्थिति में पहुँच जायेगा।
जब तरल अल्पांश सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उस पर दाय और कार्यरत् परिणामी बल
बल = दाब × क्षेत्रफल
परिणामी बल,
F = (P + ∆P) A – PA = PA + ∆P.A – P.A
या F = ∆P.A ……….(1)
जहाँ A, नली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
सम्पीडन क्षेत्र के बाहर इस अल्पांश की लम्बाई v.Δt है जहाँ Δt अल्पांश को किसी बिन्दु से गुजरने में लगा समय है। अतः अल्पांश का आयतन (v.Δt × A) व द्रव्यमान v.Δt.A.ρ होगा जहाँ ρ तरल का सम्पीडन क्षेत्र से बाहर घनत्व है। जब यह सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अनुभव किया गया त्वरण
\(a=-\frac{\Delta v}{\Delta t}\) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न का प्रयोग v घटने के कारण किया गया है।)
न्यूटन के द्वितीय नियम से
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -8.2
स्पष्ट है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों प्रत्यास्थता गुणांक तथा घनत्व पर निर्भर करता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 3.
किसी गैस में ध्वनि की चाल पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ? आवश्यक सूत्र का निगमन कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल : न्यूटन सूत्र (Velocity Of Sound In A medium : Newton’s Formula)
ध्वनि तरंगों या अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण को समझने एवं उनका वेग ज्ञात करने के लिए हम एक पिस्टन नली पर विचार करते हैं, जिसमें कोई सम्पीड्य तरल भरा हैं चित्र में समान्तर रेखाओं द्वारा तरल की परतों को प्रदर्शित किया गया है। सम्पीडन की स्थिति में ये समान्तर रेखाएँ सघन (पास-पास) हैं । यहाँ पर तरल का दाब एवं घनत्व दोनों अधिक हैं। जब दूर-दूर रेखाओं द्वारा व्यक्त विरलन की स्थिति में दाब एवं घनत्व दोनों कम हैं। यहाँ हम तरल को सतत् माध्यम मानेंगे और इस बात की अपेक्षा करेंगे कि वास्तव में यह अणुओं से मिलकर बना है जो भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न वेगों से गतिशील हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -7.2
यदि पिस्टन को नली के अन्दर की ओर धक्का दें तो इसके सम्पर्क से तरल का सम्पीडन होगा तथा इसका दाब एवं घनत्व बढ़ेगा। सम्पीडित तरल की यह परत आगे की ओर गति करेगी तथा अगली परत में सम्पीडन उत्पन्न करेगी। यदि पुनः पिस्टन को बाहर की ओर खींचे तो इसके सम्पर्क से तरल फैलेगा जिससे उसका दाब एवं घनत्व कम होगा। यही विरलन की स्थिति होती है। इस प्रकार यदि पिस्टन की सतत् रूप से अन्दर-बाहर गति दी जाये तो विक्षोभ नली में सम्पीडन एवं विरलन के रूप में आगे बढ़ता जायेगा और यह अनुदैर्घ्य तरंग की तरह व्यवहार करेगा।

माना पिस्टन को अन्दर की ओर धक्का देकर एक विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है, जो सम्पीडन के रूप में होता है तथा दायीं ओर वेग से गतिशील है। सरलता के लिए यह माना जाता है कि इस सम्पीडन क्षेत्र के अन्दर तरल का दाब व घनत्व एक समान है। अब यदि प्रेक्षक भी सम्पीडन की दिशा में समान वेग से गतिशील माना जाये तो तरल मध्यम ” वेग से सम्पीडन की विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होगा एवं प्रेक्षक के सापेक्ष सम्पीडन स्थिर होगा। इस स्थिति में जब तरल वेग से सम्पीडन क्षेत्र की ओर गति करता हुआ सम्पीडन क्षेत्र से टकराता है, तब इसके आगे के किनारे पर पीछे के किनारे से दाब कुछ अधिक होगा। माना इन दोनों किनारों पर दाबान्तर ∆P है। इस कारण इस क्षेत्र B में यह अल्पांश (तरल माध्यम) संपीडित होगा तथा इस क्षेत्र में इसका वेग कुछ कम (v – ∆v) होगा तथा जब यह अल्पांश इस सम्पीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा तो पुनः अपने प्रारम्भिक आयतन को प्राप्त कर लेगा तथा दावान्तर ∆P के कारण पीछे की ओर दाब आधिक्य होने के कारण त्वरित होगा अतः इसका वेग पुनः हो जायेगा।
इस प्रकार अल्पांश C स्थिति में पहुँच जायेगा।
जब तरल अल्पांश सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उस पर दाय और कार्यरत् परिणामी बल
बल = दाब × क्षेत्रफल
परिणामी बल,
F = (P + ∆P) A – PA = PA + ∆P.A – P.A
या F = ∆P.A ……….(1)
जहाँ A, नली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
सम्पीडन क्षेत्र के बाहर इस अल्पांश की लम्बाई v.Δt है जहाँ Δt अल्पांश को किसी बिन्दु से गुजरने में लगा समय है। अतः अल्पांश का आयतन (v.Δt × A) व द्रव्यमान v.Δt.A.ρ होगा जहाँ ρ तरल का सम्पीडन क्षेत्र से बाहर घनत्व है। जब यह सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अनुभव किया गया त्वरण
\(a=-\frac{\Delta v}{\Delta t}\) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न का प्रयोग $v$ घटने के कारण किया गया है।)
न्यूटन के द्वितीय नियम से
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -8
स्पष्ट है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों प्रत्यास्थता गुणांक तथा घनत्व पर निर्भर करता है।

प्रश्न 4.
कोणीय आवृत्ति एवं तरंग संरचण नियतांक तथा तरंग बेग की परिभाषाएँ लिखिए और इनमें संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
तरंग से सम्बन्धित कुछ परिभाषाएँ (Definition Related To Waves):
तरंग गति से सम्बन्धित विभिन्न परिभाषाओं को समझने के लिए हमें विक्षोभ के कारण उत्पन्न कम्पन के कारण विस्थापन का अध्ययन करना होगा जिसके माध्यम से विक्षोभ या तरंग आगे बढ़ती है।

संलग्न चित्र में कणों की माध्य स्थिति से विस्थापन दर्शाए गये हैं। माना किसी कण की माध्य अवस्था में स्थिति A पर है तो विक्षोभ के कारण कम्पन करने के साथ इसका विस्थापन विक्षोभ (तरंग) की दिशा में बढ़ता है व अधिकतम विस्थापन की स्थिति में B बिन्दु पर जाकर पुनः माध्य स्थिति की ओर गति करता है। अतः विस्थापन पुनः कम होता है तथा C स्थिति पर कण माध्य स्थिति में आकार पुनः पूर्व गति की दिशा के विपरीत दिशा में विस्थापित होता है व अधिकतम विपरीत विस्थापन की स्थिति में D पर जाकर पुनः माध्य स्थिति की ओर गति करता है तथा स्थिति E पर पहुँचता है। इस प्रकार कम्पन्न गति का एक चक्र पूर्ण होता है व उत्तरोत्तर समय के साथ कण इस प्रकार की आवर्ती गति करता है।

1. आयाम (Amplitude) (A): “माध्य स्थिति के कण के अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं।” इसे सामान्यत: A से प्रदर्शित करते हैं। चित्र 15.3 (a) में BB’, DD, FF’ आदि द्वारा दर्शाया गया है। इसका मात्रक मीटर है।

2. आवृत्ति (Frequency) (n) : प्रगामी तरंग के संचरण के दौरान, “माध्यम के किसी कण द्वारा एक सेकण्ड में किये गये कम्पनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।” इसे ” से व्यक्त करते हैं। आवृत्ति माध्यम के किसी बिन्दु से एक सेकण्ड में गुजरने वाली तरंगों की संख्या को बताती है। इसका मात्रक कम्पन / सेकण्ड या हर्ट्ज (Hz) है।

3. आवर्त काल (Time Period) (T) : प्रगामी तरंग संचरण के दौरान, “कण द्वारा एक कम्पन पूरा करने में लिया गया समय आवर्त काल कहलाता है ।” इसे T से व्यक्त करते हैं और इसका मात्रक सेकण्ड है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -9
यदि कम्पित कण की आवृत्ति ” एवं आवर्त काल T हो, तो इन दोनों में निम्न सम्बन्ध होता है-
T = \(\frac{1}{n}\) या n = \(\frac{1}{T}\)

4. तरंगदैर्घ्य (Wavelength) (λ): “एक आवर्तकाल में कण द्वारा तय की गई दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।” इसे λ से व्यक्त करते हैं इसका मात्रक है। तरंगदैर्घ्य की परिभाषा इस प्रकार भी कर सकते हैं। “समान कला के दो निकटतम बिन्दुओं के मध्य दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।” चित्र 15.3 में समान कला के दो निकटतम बिन्दुओं A व E अथवा B’ व F’ अथवा D व H आदि के मध्य दूरी तरंगदैर्घ्य λ के बराबर होगी।

अनुप्रस्थ तरंगों में दो क्रमागत शीर्षो (श्रंगों) अथवा दो क्रमागत गर्त के मध्य दूरी एवं अनुदैर्ध्य तरंगों में दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के मध्य दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं। अतः
∵ λ = एक आवर्त काल में तरंग द्वारा तय की गई दूरी
या λ = v.T
या λ = v.\(\frac{1}{n}\)
या v = nλ

5. तरंग संख्या (Wave Number) (\(\bar{v}\)) : “तरंगदैर्घ्य का व्युत्क्रम तरंग संख्या कहलाता है अर्थात् एकांक दूरी में तरंगों की संख्या को तरंग संख्या कहते हैं।” इसे से व्यक्त करते हैं।
∴ \(\bar{v}=\frac{1}{λ}\)

6. तरंगाग्र (Wavefront) : “समान कला में दोलन करने वाले कणों की निधि (Locus) तरंगाग्र कहलाती है अर्थात् वह तल, जिसमें मौजूद प्रत्येक कण समान कला में कम्पन करता है, तरंगाग्र कहलाता है।
तरंगाय निम्न प्रकार के हो सकते हैं-

  • समतल तरंगा (Plane Wavefront)
  • गोलाकार तरंगा (Spherical wavefront)
  • बेलनाकार तरंगा (Cylindrical Wavefront)

7. पथान्तर (Path Difference) : दो कम्पित कर्णो के साम्यावस्था से विस्थापन के अन्तर को पथान्तर कहते हैं।

8. कला (Phase) : प्रगामी तरंग में किसी क्षण कम्पन करते हुए कण की कला उस क्षण कण की स्थिति तथा गति की दिशा को प्रदर्शित करती है इसे प्रायः कोण के रूप में व्यक्त करते हैं। यदि माध्यम के दो कण किसी क्षण साम्य स्थिति से एक ही दिशा में समान दूरियों पर स्थित हों वे दोनों समान कला में कहलाते हैं तथा यदि दो कण साम्य स्थिति से बराबर दूरी पर परस्पर विपरीत दिशा में गतिशील हो तो वे विपरीत कला में होते हैं। कम्पित कण की साम्यावस्था एवं प्रारम्भिक स्थिति के मध्य कण को प्रारम्भिक कला कहते हैं। चित्र में बिन्दु A व E, B व F, C व G, D व H समान कला में होंगे।
इसी प्रकार A व C, B व D आदि विपरीत कला में होंगे।

9. कलान्तर (Phase Difference) : दो कणों अथवा एक ही कण की दो भिन्न स्थितियों के बीच कला के अन्तर को कलान्तर कहते हैं।
समान कला में कलान्तर 0, 2π, 4π, ….. होता है तथा विपरीत कला में कलान्तर = π, 3π, 5π, …..

10. कोणीय आवृत्ति (Angular Frequency) (ω) – समय के साथ कला कोण में परिवर्तन की दर कोणीय आवृत्ति कहलाती है। इसका मात्रक रेडियन सेकण्ड होता है।
चूँकि एक आवर्त काल (T) में कला में परिवर्तन 2π होता है अतः कोणीय आवृत्ति
ω = \(\frac{2π}{T}\) या ω = 2πn

11. तरंग संचरण नियतांक (Wave Propagation Constant ) (k) : कम्पन करते हुए कणों में एकांक दूरी पर स्थित कणों के मध्य कलान्तर को तरंग संचरण नियतांक कहते हैं।” इसे कोणीय तरंग संख्या भी जाता है। चूँकि λ दूरी पर स्थित कणों के मध्य कलान्तर 2π होता है अतः एकांक दूरी पर कलान्तर $\frac{2 \pi}{\lambda}$ होगा।
∴ \(k=\frac{2 \pi}{λ}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 5.
अनुदैर्घ्य तरंगों का संचरण समझाइये एवं उनके वेग के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंगों के प्रकार (Types Of Waves):
तरंगें निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है-

  1. यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves)
  2. विद्युत् चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)
  3. द्रव्य तरंगें (Matter Waves)

(1) यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves) : यांत्रिक तरंग वह आवर्ती विक्षोभ है जिसमें संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है एवं जो बिना आकृति बदले माध्यम में एक नियत चाल से बढ़ती है। यह माध्यम के प्रत्यास्थ गुणों पर निर्भर करता है। उदाहरण- जल तरंगें, वायु में ध्वनि तरंगें तथा द्रवों में उत्पन्न तरंगें।

यांत्रिक तरंगों के प्रकार :
यांत्रिक तरंगें दो प्रकार की होती है-
(a) अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves): जब किसी माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् दोलन करते हैं तो इस तरंग को अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं।
उदाहरण के लिए – तनी हुई डोरी में उत्पन्न कोई विक्षोभ डोरी की लम्बाई के अनुदिश गति करता है लेकिन डोरी के कण लम्बाई के लम्बवत् कम्पन करते हैं। अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम का संपीड्य होना आवश्यक है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -10
अनुप्रस्थ तरंग में ऊपर की ओर अधिकतम विस्थापन की स्थिति को श्रृंग व नीचे की ओर अधिकतम विस्थापन की स्थिति को गर्त कहा जाता है तथा श्रृंग एवं गर्त के रूप में आगे बढ़ती है। इसमें भी दो क्रमागत शृंगों अथवा दो क्रमागत गर्तों के मध्य दूरी अनुप्रस्थ तरंग की तरंगदैर्घ्य (2) कहलाती है।

(b) अनुदैर्घ्य तरंगें ( Longitudinal Waves) : “यदि माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के अनुदिश गति करते हैं तो इस तरंग को अनुदैर्घ्य तरंग कहते हैं।” उदाहरण के लिए वायु में ध्वनि तरंगें ठोस में अनुदैर्घ्य कम्पनों से उत्पन्न तरंगें स्प्रिंग में उत्पन्न संपीडन एवं विरलन आदि अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण के लिए माध्यम का संपीड्य होना आवश्यक है, क्योंकि इन तरंगों का संचरण संपीड़न एवं विरलन के रूप में ही होता है। माध्यम का घनत्व व दाव सम्पीडन के स्थान पर अधिक (कणों के पास आने के कारण) तथा विरलन पर दाब व घनत्व कम (कणों के दूर जाने के कारण होता है दो क्रमागत विरलनों अथवा सम्पीडनों के बीच की दूरी को अनुदैर्घ्य तरंग की तरंगदैर्घ्य (A.) कहते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -11
उपरोक्त तरंगों में माध्यम की प्रत्यास्थता अधिक होने पर तरंग की चाल बढ़ जाती है व जड़त्व अधिक होने पर तरंग की चाल कम हो जाती है।

2. विद्युत् चुम्बकीय तरंगें (Electro Magnetic Waves) : ये वे तरंगें हैं, जिनके संचरण के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है। इन तरंगों का संचरण निर्वात में सम्भव है। ये तरंगें प्रकाश के वेग अर्थात् 3 × 10<sup>8</sup> मी./से. की चाल से गति करती है। ऊष्मा विकिरण, दृश्य प्रकाश X किरणें, सूक्ष्म तरंगें पराबैंगनी किरणें इत्यादि सभी विद्युत् चुम्बकीय तरंगें हैं इनकी अनुप्रस्थ प्रकृति होती है।

3. द्रव्य तरंगें (Matter Waves) : डी ब्रॉली परिकल्पना के आधार पर गतिशील द्रव्य कणों के साथ तरंगों के अभिलाक्षणिक गुण सम्बद्ध होते हैं अर्थात् उनके साथ तरंगों का सम्बद्ध होना पाया जाता है। इन्हीं तरंगों को ‘द्रव्य तरंगें’ कहते हैं। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध द्रव्य तरंगों का उपयोग किया जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 6.
समतल प्रगामी तरंग का समीकरण स्थापित कीजिए एवं इसे दो स्वरूपों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
प्रगामी तरंग समीकरण (Progressive wave Equation):
वह तरंग जिसके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण एक स्थान से दूसरे स्थान तक होता है, प्रगामी तरंग कहलाती है। जब माध्यम में कोई प्रगामी तरंग संचरित होती है तो माध्यम के कण अपने स्थान पर सरल आवर्त गति करने लगते हैं। ये कण समान व अलग-अलग कलाओं में कम्पन करते रहते हैं।

माना कोई विक्षोभ बिन्दु O पर उत्पन्न होता है, जो प्रगामी तरंग के रूप में +X दिशा में आगे बढ़ता है। सबसे पहले O पर स्थित कण कम्पन आरम्भ करता है और उसके पश्चात् क्रमशः माध्यम के आगे वाले कण कम्पन आरम्भ करते जाते हैं। यदि O से x दूरी पर स्थित बिन्दु P पर कोई कण स्थित है, जो O पर स्थित कण की कला से ϕ पीछे होगा। अतः यदि किसी क्षण t पर कण O का विस्थापन समीकरण
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -5.1
y = a sin ωt
हो तो इसी क्षण कण P का विस्थापन समीकरण
y = a sin (ωt – ϕ) ……………….. (1)
होगा। यहाँ ϕ, बिन्दुओं O व P के मध्य कलान्तर है।
∵ पथान्तर के कारण
कलान्तर = \(\frac{2 \pi}{\lambda}[latex] × पथान्तर
∴ [latex]\phi=\frac{2 \pi}{\lambda} x\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -6.1
समी (2), (3) व (4) धनात्मक X-दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग समीकरण हैं। यदि तरंग X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में गतिशील है तो उक्त समीकरण
y = a sin (ωt + kx)
से व्यक्त होगा। समी (3) व (4) में भी (-x) के स्थान पर (+x) का प्रयोग करना होगा।

प्रश्न 7.
समतल प्रगामी तरंग के लिए विस्थापन- दूरी ग्राफ खींचकर आयाम, तरंगदैर्घ्य एवं कलान्तर प्रदर्शित करते हुए इनकी परिभाषाएँ लिखिए।
उत्तर:
प्रगामी तरंग समीकरण (Progressive wave Equation):
वह तरंग जिसके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण एक स्थान से दूसरे स्थान तक होता है, प्रगामी तरंग कहलाती है। जब माध्यम में कोई प्रगामी तरंग संचरित होती है तो माध्यम के कण अपने स्थान पर सरल आवर्त गति करने लगते हैं। ये कण समान व अलग-अलग कलाओं में कम्पन करते रहते हैं।

माना कोई विक्षोभ बिन्दु O पर उत्पन्न होता है, जो प्रगामी तरंग के रूप में +X दिशा में आगे बढ़ता है। सबसे पहले O पर स्थित कण कम्पन आरम्भ करता है और उसके पश्चात् क्रमशः माध्यम के आगे वाले कण कम्पन आरम्भ करते जाते हैं। यदि O से x दूरी पर स्थित बिन्दु P पर कोई कण स्थित है, जो O पर स्थित कण की कला से ϕ पीछे होगा। अतः यदि किसी क्षण t पर कण O का विस्थापन समीकरण
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -5.2
y = a sin ωt
हो तो इसी क्षण कण P का विस्थापन समीकरण
y = a sin (ωt – ϕ) ……………….. (1)
होगा। यहाँ ϕ, बिन्दुओं O व P के मध्य कलान्तर है।
∵ पथान्तर के कारण
कलान्तर = \(\frac{2 \pi}{\lambda}[latex] × पथान्तर
∴ [latex]\phi=\frac{2 \pi}{\lambda} x\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -6.2
समी (2), (3) व (4) धनात्मक X-दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग समीकरण हैं। यदि तरंग X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में गतिशील है तो उक्त समीकरण
y = a sin (ωt + kx)
से व्यक्त होगा। समी (3) व (4) में भी (-x) के स्थान पर (+x) का प्रयोग करना होगा।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 8.
अप्रगामी तरंगों से क्या अभिप्राय है ? किसी बद्ध माध्यम में इनका बनना चित्र द्वारा समझाइये।
उत्तर:
अप्रगामी तरंगें (Stationary Waves):
जब समान आवृत्ति एवं समान आयाम की दो प्रगामी तरंगें किसी बद्ध माध्यम में समान बाल से, एक ही रेखा में, परस्पर विपरीत दिशाओं से आकर अध्यारोपित होती हैं तो उत्पन्न हुई नई तरंग माध्यम में स्थिर प्रतीत होती है, अतः इस तरंग को प्रगामी स्थावर तरंग (standing waves) कहते हैं। इन तरंगों द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है अतः इन तरंगों को अप्रगामी तरंग कहते हैं।

अप्रगामी तरंगें दो प्रकार की होती हैं-
(i) अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें,
(ii) अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें।
(i) अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें : जब दो समान आवृत्ति एवं समान आयाम की अनुदैर्घ्य तरंगें एक ही सरल रेखा पर विपरीत दिशा में गति र करती हुई अध्यारोपित होती हैं तो माध्यम में इनके अध्यारोपण से अनुदैर्घ्य J अप्रगामी तरंगें बनाती हैं वायु स्तम्भों पर आधारित वाद्य यंत्रों जैसे बिगुल, बांसुरी, बीन आदि में अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें बनाती हैं।

(ii) अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें : जब दो समान आवृत्ति एवं समान आयाम की अनुप्रस्थ तरंगें एक सरल रेखा पर विपरीत दिशा में गति करती हुई अध्यारोपित होती है तो माध्यम में इनके अध्यारोपण से अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं। तनी हुई डोरी पर आधारित वाद्य यंत्रों जैसे सितार, वॉयलिन, इकतारा आदि की डोरियों में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं।

अप्रगामी तरंगें बनने की आवश्यक शर्ते :
अप्रगामी तरंगें बनने के लिए माध्यम सीमित होना चाहिए अर्थात् माध्यम बद्ध होना चाहिए क्योंकि इस प्रकार के माध्यम में संचरित कोई प्रगामी तरंग माध्यम की परिसीमा पर परावर्तित होकर अपने ही अनुरूप तथा विपरीत दिशा में संचरित तरंग उत्पन्न करती है। इन आपतित एवं परावर्तित तरंगों के अध्यारोपण के फलस्वरूप ही अप्रगामी तरंग बनती है। “इस प्रकार अप्रगामी तरंगों के बनने के लिए बद्ध माध्यम होना एक आवश्यक शर्त है।”

प्रश्न 9.
अप्रगामी तरंग के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
अप्रगामी तरंगों का गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis of Standing Waves)
माना धनात्मक X- अक्ष की दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग का समीकरण –
y1 = a sin (ωt – kx) ……..(1)
जब यह तरंग बद्ध माध्यम की परिसीमा से परावर्तित होती है तो परावर्तित तरंग का समीकरण-
y2 = ±a sin (ωt + kx) ……..(2)
इस समीकरण (+) चिह्न का प्रयोग तब होगा जब तरंग का परावर्तन मुक्त परिसीमा मुक्त है अर्थात् परावर्तन विरल माध्यम से हो रहा हो ओर दृढ़ परिसीमा अर्थात् सघन माध्यम से परावर्तन होने पर (-) चिह्न का प्रयोग होगा क्योंकि इस स्थिति में परावर्तित तरंग में का कलान्तर और उत्पन्न हो जायेगा। परावर्तित तरंग की दिशा X- अक्ष की ऋणात्मक दिशा में होगी अतः kx से पूर्व (+) चिह्न का ही प्रयोग होगा।

अब हम यह मानकर गणितीय विवेचना में आगे बढ़ते हैं कि परावर्तन सघन माध्यम से हो रहा है।
अध्यारोपण के सिद्धान्त से-
y = y1 + y2 ………..(3)
या y = a sin (ωt – kx) – asin(ωt + kx)
= a [sin (ωt – kx) – sin(ωt + kx)]
= a [{sin ωt cos kx – cos ωt sin kx} – {sin ωt cos kx + cos ωt sin kx}]
= a[sin ωt cos kx – cos ωt sin kx – sin ωt cos kx – cos ωt sin kx]
[ क्योंकि sin (A ± B) = sin Acos B ± cosA sinB]
या y = -2a cos ωt sin kx
या y = -2a sin kx cos ωt ………(4)
या y = A cos ωt ……….(5)
जहाँ y = A sin kx तरंग का आयाम है। ……….(6)
समी (4) एवं (5) परिणामी तरंग का समीकरण व्यक्त करते हैं। स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी आवर्ती तरंग है जिसकी कोणीय आवृत्ति (ω) अध्यारोपित होने वाली तरंगों की कोणीय आवृत्ति के समान है लेकिन इसका आयाम (A) नियत नहीं है बल्कि यह समी. (6) के अनुसार परिवर्तित होता है।
अब समी. ( 4 ) का अवकलन करने पर कणों का वेग
v = \(v=\frac{d y}{d t}=\frac{d}{d t}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\)
या v = 2aω sinkx win ωt …………(7)
तथा विकृति
\(\frac{d y}{d x}=\frac{d}{d x}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\) …………(8)
या \(\frac{d y}{d x}=2 a k \cos k x \cos \omega t\)

प्रश्न 10.
अप्रगामी तरंगों के सूत्र लिखिए और इसकी सहायता से प्रस्पन्दों एवं निस्पन्दों की स्थितियाँ प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
अप्रगामी तरंगों का निर्माण (Formation of Standing Waves):
अप्रगामी तरंगों के बनने की प्रक्रिया निम्न चित्र में प्रदर्शित हैं-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -11.1
प्रगामी तरंगों की भाँति अप्रगामी तरंगें भी अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य दोनों प्रकार की होती हैं। तनी हुई डोरियों में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें एवं वायु स्तम्भों में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं। सभी वाद्य यंत्रों से संगीत अप्रगामी तरंगों के बनने से ही उत्पनन होता है। सितार वायलिन, पियानो, गिटार, इकतारा आदि में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें तथा बाँसुरी, विगुल, सीटी, तबला आदि में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं।

वह माध्यम जिसमें तरंग एक नियत रेखा के अनुदिश गति करती है, रेखीय माध्यम कहलाता है तथा यदि रेखीय माध्यम की लम्बाई अनन्त नहीं है अर्थात् निश्चित है तो माध्यम ‘बद्ध माध्यम’ कहलाता है। रेखीय बद्ध माध्यम में प्रायः सीमा पर एक तरंग आपतित होती है एवं दूसरी तरंग पहली तरंग के परावर्तन से प्राप्त है (क्योंकि समान आवृत्ति व समान आयाम की दो तरंगों को दो भिन्न स्रोतो से प्राप्त करना काफी कठिन है)। इन दोनों तरंगों के अध्यारोपण से अप्रगामी तरंगें बनती हैं। इन तरंगों का बनना समझने के लिए चित्र का अध्ययन करते हैं।

यहाँ दो समान आवृत्ति तथा समान आयाम की तरंगों की दिशा में संचरित होते हुए दिखाया गया है। एक तरंग को बायीं ओर से तथा दूसरी को दायीं ओर से बायीं ओर क्रमशः सतत् रेखा तथा कित रेखा द्वारा दर्शाया गया है। सतत रेखा वाली तरंग बद्धमाध्यम परिसीमा पर आपतित तरंग है एवं बिन्दुकित रेखा से व्यक्त तरंग पर तरंग है ।

(i) प्रारम्भ में (t = 0) पर) दोनों तरंगें विपरीत कला में अध्यारोपित रही हैं अतः माध्यम के सभी कण माध्यस्थिति में है ।
(ii) t = \(\frac{T}{4}\) (जहाँ T दोनों तरंगों का आवर्तकाल है) समय के बाद दोनों तरंगें विपरीत दिशाओं में λ/4 दूरी से आगे बढ़ जाती हैं। अतिरिक्त λ/2 का पथान्तर (λ/4 + λ/4) या का उत्पन्न हो जाता है। अतः दोनों तरंगें समान कला में मिलता परिणामी के चित्र से स्पष्ट है इस स्थिति में कूछ [A1, A2, A3, A4, A5] का विस्थापन अधिकतम है जबकि कण [N1, N2, N3, N4] अभी भी माध्यम स्थिति में हैं।
(iii) t = \(\frac{T}{2}\) समय के पश्चात् पुनः तरंगें विपरीत कला में अध्यारोपित होती हैं अत: माध्यम के सभी कण पुनः अपनी माध्य स्थिति आ जाते हैं।
(iv) t = \(\frac{3T}{4}\) समय के पश्चात् पुनः तरंगें समान कला में हो जाती हैं और माध्यम के कणों A1, A2, A3, A4 व A5 का विस्थापन फिर अधिकतम हो जाता है लेकिन इनकी कला विपरीत हो जाती है। N1, N2, N3 व N4 अब माध्य स्थिति में ही रहते हैं ।
(v) t = T समय पश्चात् पुनः प्रारंभिक स्थिति प्राप्त हो जाती है।

उपरोक्त विवेचना से निम्नलिखित निष्कर्ण निकलते हैं-
1. माध्यम के कूछ कण (A1, A2, A3, A4, A5) सदैव अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर अधिकतम आयाम से कम्पन करते हैं, उन्हें ‘प्रस्पन्द’ (Antinodes ) कहते हैं। प्रस्पन्दों पर कणों का वेग (\(\frac{d y}{d t}\)) अधिकतम होता है तथा दाब या घनत्व परिवर्तन शून्य होता है (क्योंकि \(\frac{d y}{d x}=0\))

2. क्रमागत प्रस्पन्दों के बीच के कण (N1, N2, N3, N4) सदैव स्थिर रहते हैं। इन्हें ‘निस्पन्द’ (Nodes) कहते हैं। ये समान दूरियों पर स्थिर रहते हैं । निस्पन्दों पर कणों का वेग (\(\frac{d y}{d t}\)) शून्य होता है तथा दाब तथा घनत्व परिवर्तन अधिकतम होता है।

3. दो क्रमागत प्रस्पन्दों या दो क्रमागत निस्पन्दों के बीच की दूरी λ/2 होती है तथा एक निस्पन्द व उसके समीपस्थ प्रस्पन्द के बीच की दूरी λ/4 होती, जहाँ λ तरंग की तरंगदैर्ध्य है।

4. प्रस्पन्दों की ऊर्जा दोनों ओर के निस्पन्दों को स्थानान्तरित नहीं होती है अर्थात् इन तरंगों के द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है तथा तरंगें माध्यम में भी आगे नहीं बढ़ती हैं बल्कि अपने ही स्थान पर माध्यम की परिसीमाओं के बीच स्थिर रहकर फैलती व सिकूड़ती रहती है। इन्हीं गुणों के कारण इन तरंगों को अप्रगामी या स्थावर तरंगें कहा जाता है।

5. अप्रगामी तरंगों में प्रत्येक कण का आवर्तकाल (T) समान होता है परन्तु दो निस्पन्दों के मध्य प्रत्येक कण का आयाम भिन्न होता है। इसी प्रकार दो निस्पन्दों के मध्य सभी कण समान कला में दोलन करते हैं।

6. एक निस्पन्द के दोनों ओर के कण परस्पर विपरीत कला में दोलन करते हैं।

7. एक आवर्तकाल में दो बार माध्यम के कण एक साथ अपनी साम्यावस्था में आते हैं अर्थात् एक आवर्तकाल में दो बार सभी कणों का विस्थापन शून्य होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 11.
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त क्या है ? इसका उपयोग करते हुए दो तरंगों के अध्यारोपण से परिणामों तरंग के आयाम के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]:
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.1
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.2
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 12.
सिद्ध कीजिए कि तनी हुई डोरियों में सम एवं विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अप्रगामी तरंगें एवं कम्पन की विधाएँ तथा कम्पन के नियम
(STANDING WAVES IN STRETCHED STRING AND MODES OF VIBRATION AND LAWS OF VIBRATIONS)
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं। इसके लिए हम के मध्य तनी हुई डोरी में उत्पन्न अप्रग्रामी तरंगों पर विचार यदि डोरी में तनाव T, डोरी की लम्बाई / तथा डोरी की एकांक का द्रव्यमान यदि । हो तो डोरी में उत्पन्न तरंगों का वेग
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) ……….(1)
जब डोरी की लम्बवत् दिशा में थोड़ा खींचकर छोड़ा जाता है, तो इसके सिरों की ओर अनुप्रस्थ प्रगामी तरंगें चलने लगती हैं। ये तरंगें डोरी के दृढ़ सिरों से परावर्तित हो जाती हैं और आपतित तथा परावर्तित तरंगें अध्यारोपण करके अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें उत्पन्न करते हैं। ये तरंगें तब तक रहती हैं जब तक कि घर्षण इत्यादि कारणों से उनकी ऊर्जा नष्ट नहीं हो जाती है। डोरी के कसे हुए सिरों पर दोलन की स्वतन्त्रता न होने के कारण सदैव इन सिरों पर निस्पन्द बनते हैं। जब डोरी को मध्य बिन्दु से थोड़ा खींचकर छोड़ दिया जाता है तो डोरी एक खण्ड में कम्पन करती है। डोरी के दोनों सिरों पर निस्पन्द एवं मध्य बिन्दु पर प्रस्पन्द बनता है। यह तनी हुई डोरी में अप्रगामी तरंग की सबसे सरल विधा है जिसमें डोरी एक लूप में कम्पन्न करती है। इस अवस्था में डोरी न्यूनतम आवृत्ति का स्वर उत्पन्न करती है जिसे ‘मूल स्वरक’ कहते हैं। इस स्थिति में यदि
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -12
उत्पन्न, अप्रगामी तरंगों की तरंगदैर्ध्य λ1 हो तो
\(\frac{\lambda_1}{2}=l \Rightarrow \lambda_1=2 l\)
अतः मूल स्वर की आवृत्ति
\(n_1=\frac{v}{\lambda_1}=\frac{v}{2 l}\)
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
∴ \(n_1=\frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{T}}{m}}\)
यदि डोरी के मध्य बिन्दु के पास B बिन्दु (एक सिरे से λ/ 4 दूरी पर स्थित बिन्दु) से थोड़ा खींचकर छोड़ दें तो डोरी चित्र अनुसार दो खण्डों में कम्पन करती है। इस स्थिति में λ2 = l, अतः उत्पन्न अप्रगामी तरंगों की आवृत्ति
\(n_2=\frac{v}{\lambda_2}=\frac{v}{t}=\frac{2 v}{2 l}\)
या n2 = 2n1 ……………….(3)
या \(n_2=\frac{2}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{T}}{m}}\)
इसी प्रकार चित्र के अनुसार जब C बिन्दु पर डोरी को थोड़ा खींचकर छोड़ा जाता है तो डोरी तीन खण्डों में कम्पन करने लगती है। इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य यदि λ3 हो तो
\(\lambda_3+\frac{\lambda_3}{2}=l \Rightarrow \frac{3 \lambda_3}{2}=l\)
या \(\lambda_3=\frac{2 l}{3}\)
इन तरंगों की आवृत्ति
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -13
मूल आवृत्ति से अधिक आवृत्तियों के स्वरकों को ‘अधिस्वरक’ (over tone) कहते हैं। आवृत्तियों n2, n3, n4 … आदि के स्वर क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय …… अधिस्वरक कहलाते हैं।

जिन अधिस्वरकों की आवृत्तियाँ मूल स्वरक की आवृत्ति की पूर्ण गुणज होती हैं उन्हें ‘सन्नादी’ (harmonics) कहते हैं। जिन स्वरकों को आवृत्ति मूलस्वरक की आवृत्ति की विषम गुणज होती है उन्हें ‘विषम सन्नादी’ (odd harmonic) कहते हैं और जिनकी आवृत्ति सम गुणज होती है उन्हें ‘सम सन्नादी’ (even harmonics) कहते हैं। समी. (2), (3), (5) आदि स्पष्ट है कि तनी हुई डोरियों में सम एवं विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 13.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ कम्पनों के नियमों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल (Velocity Of Transverse Wave In A Stretched String):
तनी हुई डोरी में विक्षोभ से अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती है। अतः अनुप्रस्थ तरंग का वेग ज्ञात करने हेतु माना एक डोरी, जिसकी एकांक लम्बाई का द्रव्यमान m है तथा तनाव T है, में एक विक्षोभ बायीं ओर से दायीं ओर वेग से गतिशील है। हम यह मान सकते हैं कि प्रेक्षक विक्षोभ की दिशा में समान वेग v से गतिशील है तो प्रेक्षक को स्पन्द स्थिर प्रतीत होगा तथा डोरी विपरीत दिशा में गति करती हुई प्रतीत होगी।

अब डोरी के अल्पांश ∆l पर विचार करें तो विक्षोभ के कारण यदि डोरी में अल्प विस्थापन हो तो इस अल्पांश ∆l को चित्र की भाँति R त्रिज्या के वृत्तीय चाप के रूप में ले सकते हैं।
इस चाप का द्रव्यमान M = m. ∆l
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -14
इस अल्पांश पर केन्द्र की ओर लगने वाला कुल तनाव बल 2T sin θ ही आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करेगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -15.1
अर्थात् तरंग वेग डोरी के तनाव एवं डोरी की एकांक लम्बाई के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। यह तरंग वेग आयाम व तरंग दैर्ध्य पर निर्भर नहीं करता है। इस सूत्र की उपपत्ति में डोरी को आदर्श (पूर्णत: प्रत्यास्थ, समान घनत्व) माना गया है तथा कम्पन करते समय इसकी लम्बाई में कोई परिवर्तन नहीं होता है ।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 14.
बन्द वायु स्तम्भों में कम्पन की विधाओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वायु स्तम्भों में अप्रगामी तरंगें एवं कम्पन की विधाएँ
(Standing Waves In Air Columns And Mode Of Vibrations):
वायु स्तम्भों में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं। जब कोई कम्पित ध्वनि स्रोत जैसे स्वरित्र वायु स्तम्भ के पास लाया जाता है तो वायु स्तम्भ में सम्पीडन एवं विरलन उत्पन्न होते हैं और ये अनुदैर्ध्य प्रगामी तरंगें वायु स्तम्भ के दूसरे सिरे से परावर्तित होकर आपतित तरंगों के साथ अध्यारोपण हो जाती हैं। फलस्वरूप वायु स्तम्भ में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें उत्पन्न होती है। वायु स्तम्भ दो प्रकार के होते हैं-
1. बन्द वायु स्तम्भ – वे वायु स्तम्भ एक सिरे पर खुले एवं दूसरे सिरे पर बन्द होते हैं।
2. खुले वायु स्तम्भ – ये वायु स्तम्भ दोनों सिरों पर खुले होते हैं।
वायु स्तम्भों में कम्पन की विधाओं का अध्ययन करने के लिए निम्न बातें ध्यान में रखने चाहिए-
(i) पाइप के बन्द सिरे पर दोलन की स्वतन्त्रता नहीं होती है, अतः इस सिरे पर सदैव निस्पन्द बनता है।
(ii) वायु स्तम्भ का खुला सिरा वायुमण्डल के सम्पर्क में होता है इसलिए इस सिरे पर घनत्व परिवर्तन लगभग शून्य होता है अर्थात् यहाँ विकृति शून्य होनी चाहिए और पाइप के खुले सिरे पर प्रस्पन्द होना चाहिए।
(iii) दो निस्पन्दों के मध्य एक प्रस्पन्द और दो प्रस्पन्दों के मध्य एक निस्पन्द होना चाहिए।

बन्द वायु स्तम्भ में कम्पन की विधाएँ (Modes of Vibrations in Closed Organ Pipes):
(i) मूलस्वरक (Fundamental Tone):
बन्द वायु के कम्पन की सरलतम विधा संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। इसमें बन्द सिरे पर निस्पन्द एवं खुले सिरे पर प्रस्पन्द बनता है। इस स्थिति में उत्पन्न स्वरक को मूल स्वरक कहते हैं। चित्र से
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -16
\(\frac{\lambda_1}{4}=l \Rightarrow \lambda_1=4 l\)
अतः मूल स्वरक की आवृत्ति,
\(n_1=\frac{v}{\lambda_1}\)
या \(n_1=\frac{v}{4 l}\) ………(1)
यह आवृत्ति मूल आवृत्ति की एक गुनी है। अत: इसे प्रथम सन्नादी (first harmonic) भी कहते हैं।

(ii) प्रथम अधिस्वरक (First Overtone ): यदि कम्पन संलग्न चित्र की भाँति हो रहे हैं अर्थात् पाइप के सिरों पर प्रस्पन्द एवं निस्पन्द के अलावा मध्य में एक प्रस्पन्द व एक निस्पन्द और बनता है तो उत्पन्न स्वरक को ‘प्रथम अधिस्वरक’ कहते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -17
∵ n2 का मान n1 का तीन गुना है अतः इसे तृतीय सन्नादी (Third harmonic) कहते हैं।

(iii) द्वितीय अधिस्वरक (Second Overtone): द्वितीय अधिस्वरक की स्थिति में वायु स्तम्भ में कम्पन की विधा चित्र में प्रदर्शित है।
इस स्थिति में;
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -18
अतः बन्द वायु स्तम्भों में केवल विषम सन्नादी ही उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 15.
सिद्ध कीजिए कि खुले ऑर्गन पाइप में सम एवं विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं।
उत्तर;
अप्रगामी तरंगों का गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis of Standing Waves)
माना धनात्मक X- अक्ष की दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग का समीकरण –
y1 = a sin (ωt – kx) ……..(1)
जब यह तरंग बद्ध माध्यम की परिसीमा से परावर्तित होती है तो परावर्तित तरंग का समीकरण-
y2 = ±a sin (ωt + kx) ……..(2)
इस समीकरण (+) चिह्न का प्रयोग तब होगा जब तरंग का परावर्तन मुक्त परिसीमा मुक्त है अर्थात् परावर्तन विरल माध्यम से हो रहा हो ओर दृढ़ परिसीमा अर्थात् सघन माध्यम से परावर्तन होने पर (-) चिह्न का प्रयोग होगा क्योंकि इस स्थिति में परावर्तित तरंग में का कलान्तर और उत्पन्न हो जायेगा। परावर्तित तरंग की दिशा X- अक्ष की ऋणात्मक दिशा में होगी अतः kx से पूर्व (+) चिह्न का ही प्रयोग होगा।

अब हम यह मानकर गणितीय विवेचना में आगे बढ़ते हैं कि परावर्तन सघन माध्यम से हो रहा है।
अध्यारोपण के सिद्धान्त से-
y = y1 + y2 ………..(3)
या y = a sin (ωt – kx) – asin(ωt + kx)
= a [sin (ωt – kx) – sin(ωt + kx)]
= a [{sin ωt cos kx – cos ωt sin kx} – {sin ωt cos kx + cos ωt sin kx}]
= a[sin ωt cos kx – cos ωt sin kx – sin ωt cos kx – cos ωt sin kx]
[ क्योंकि sin (A ± B) = sin Acos B ± cosA sinB]
या y = -2a cos ωt sin kx
या y = -2a sin kx cos ωt ………(4)
या y = A cos ωt ……….(5)
जहाँ y = A sin kx तरंग का आयाम है। ……….(6)
समी (4) एवं (5) परिणामी तरंग का समीकरण व्यक्त करते हैं। स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी आवर्ती तरंग है जिसकी कोणीय आवृत्ति (ω) अध्यारोपित होने वाली तरंगों की कोणीय आवृत्ति के समान है लेकिन इसका आयाम (A) नियत नहीं है बल्कि यह समी. (6) के अनुसार परिवर्तित होता है।
अब समी. ( 4 ) का अवकलन करने पर कणों का वेग
v = \(v=\frac{d y}{d t}=\frac{d}{d t}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\)
या v = 2aω sinkx win ωt …………(7)
तथा विकृति
\(\frac{d y}{d x}=\frac{d}{d x}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\) …………(8)
या \(\frac{d y}{d x}=2 a k \cos k x \cos \omega t\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 16.
सोनोमीटर किस सिद्धान्त पर कार्य करता है ? इसकी सहायता से स्वरित्र की अज्ञात आवृत्ति किस प्रकार ज्ञात की जाती है ?
उत्तर:
स्वरमापी (Sonometer)
तनी हुई डोरियों में अप्रगगमी तरंगों एवं अनुनाद के सिद्धान्त पर यह ऐसा उपकरण है जिसकी सहायता से किसी स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात की जा सकती है।

इसमें बढ़िया किस्म की मुलायम लकड़ी का बना एक आयताकार खोखला बक्सा है जिसे ‘ध्वनि बॉक्स’ (Sound Box) कहते हैं और इसे चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इसमें दो बड़े छेद होते हैं जिससे बॉक्स के अन्दर उत्पन्न ध्वनि बाहर सुनी जा सके। इसे ‘अनुनाद बॉक्स’ (Resonancl Box) भी कहते हैं। ध्वनि बॉक्स को दो ऊर्ध्वाधर स्टेण्डों पर रख दिया जाता है तथा इसकी ऊपरी सतह पर एक तार हुक से बंधा होता है जो सतुओं A, B, C के ऊपर से होता हुआ ध्वनि बॉक्स के दूसरे सिरे घिरनी पर होकर गुजरता है तार के दूसरे सिरे पर एक हैंगर लगा जिस पर चॉट चढ़ाकर तार में तनाव उत्पन्न किया जाता है। सेतुओं के दूरी ज्ञात करने के लिए बॉक्स के एक किनारे पर एक मीटर स्केल भी रहता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -19

जब तार को कर्षित (Plucked) किया जाता है तो उसमें अनुप्रस्थ प्रगामी तरंगे उत्पन्न होती हैं जो कर्षण बिन्दु के दोनों ओर तार के अनुदिश गति करती हैं और सेतुओं से परावर्तित होकर अध्यारोपण करती है। जिससे तार में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें उत्पन्न होती हैं ये तरंगें सेतुओं के माध्यम से ध्वनि बॉक्स में जाकर वायु को कम्पित करती हैं। अनुनाद की स्थिति में ध्वनि बॉक्स के छिद्रों से होकर तीव्र ध्वनि सुनाई देती है।

जब कोई तना हुआ तार मूल स्वर में (एक खण्ड) कम्पन करता है तो उसकी आवृत्ति निम्न सूत्र से दी जाती है।
n = \(\frac{1}{2} \sqrt{\frac{T}{m}}\) जहाँ T = Mg
m = तार की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान
l = कम्पित तार की लम्बाई
g = गुरुत्वीय त्वरण
M = हँगर सहित उस पर लटकाया गया द्रव्यमान
यदि स्वरमापी पर एक कम्पित स्वरित्र की मूठ रखी जाती है तो ता कम्पन करने लगता है जो सेतुओं के माध्यम से तार में पहुँचकर अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगे उत्पन्न करते हैं यदि सेतुओं के मध्य दूरी को समायोजित करके अनुनाद की स्थिति ज्ञात कर ली जाये तो-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -20

प्रश्न 17.
विस्पन्द विधि द्वारा स्वरित्र द्विभुज की अज्ञात आवृत्ति किस प्रकार ज्ञात की जा सकती है ?
उत्तर:
विस्पन्दों के अनुप्रयोग (Applications of Beats)
(i) विस्पंदों विधि द्वारा स्वरित्र की अज्ञात आवृत्ति ज्ञात करना
किसी दिये हुए स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात करने के लिए एक लगभग समान किन्तु ज्ञात आवृत्ति का स्वरित्र लिया जाता है, क्योंकि ध्वनि तरंगों के विस्पन्दों को प्रेक्षित करने के लिए यह आवश्यक है कि दोनों तरंगों की आवृत्ति में अन्तर अधिक नहीं होना चाहिए अन्यथा विस्पन्द इतनी शीघ्रता से बनेंगे कि उनका सुनना सम्भव न होगा। दोनों स्वरित्रों को एक साथ कम्पित करवाकर प्रति सेकण्ड विस्पन्दों की संख्या ज्ञात की जाती है माना स्वरित्र की आवृत्ति n व उत्पन्न विस्पन्द आवृत्ति ∆n हो, तो अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति (n + ∆n) या (n – ∆n) होगी।

यह निर्धारित करने के लिए अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति (n + ∆n) या (n – ∆n) है, अज्ञात आवृत्ति वाले स्वरित्र की भुजा पर थोड़ा मोम लगा देते हैं, जिससे भुजा का भार बढ़ जाने से उसकी आवृत्ति कम हो जायेगी। पुनः दोनों स्वरित्रों को एक साथ कम्पित कराकर विस्पन्दों की संख्या ज्ञात करते हैं। यदि विस्पन्द आवृत्ति पहले से अधिक मिलती है, आवृत्ति (n – ∆n) और विस्पन्द आवृत्ति कम होने पर अज्ञात आवृत्ति (n + ∆n) होगी।

(ii) वाद्ययंत्रों का स्वर मिलाना संगीतज्ञ दो वाद्य यंत्रों के मिलाने के लिए अर्थात् उनकी आवृत्तियों को समान करने के लिए विस्पन्द का उपयोग करते हैं। यदि दोनों की आवृत्तियों में थोड़ा-सा अन्तर हैं तो उन्हें अलग-अलग बजाकर समस्वरित नहीं किया जा सकता, परन्तु यदि दोनों वाद्य यन्त्रों को साथ-साथ बजाया जाए तो उनकी आवृत्तियों में थोड़ा-सा अन्तर होने पर विस्पन्द सुनाई देंगे। इस स्थिति में एक वाद्य यंत्र को इस प्रकार समायोजित करते हैं कि विस्पन्दों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगे तथा अन्त में विस्पन्द सुनाई देने बन्द हो जाएँ। इस प्रकार वाद्य यंत्र समस्वरित हो जाते हैं।

(iii) खानों में खतरनाक गैसों का पता लगाना- इसके लिए एक विशेष प्रकार का यंत्र प्रयोग में लाया जाता है। इसमें बिल्कूल समान आकार के दो छोटे पाइप होते हैं। एक पाइप में शुद्ध हवा तथा दूसरे पाइप में खान की हवा प्रवाहित की जाती है। यदि खान की हवा शुद्ध है तो दोनों पाइप समस्वरित (Tuned) होंगे अर्थात् दोनों पाइपों में एक ही आवृत्ति का स्वर निकलेगा, अतः विस्पन्द सुनाई नहीं देंगे। यदि खान की हवा में खतरनाक गैस का वेग बढ़ जाता है। इससे उत्पन्न ध्वनि स्वर की आवृत्ति बदल जाती है, अतः विस्पन्द सुनाई देने लगेंगे।

(iv) संकरण विधि से ध्वनि उत्पन्न करना इसके लिए दो विद्युत परिपथ तैयार किये जाते हैं। इनमें प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न की जाती है। ये धाराएँ दो लाउडस्पीकरों को दी जाती है। इनमें से एक धारा की आवृत्ति को समायोजित करके इच्छित आवृत्ति के विस्पन्द उत्पन्न किए जा सकते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 18.
डॉप्लर प्रभाव से आप क्या समझते हैं ? किस परिस्थिति में यह लागू नहीं होता है ?
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.3
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

सूत्र sin (A + B) = sin A cos B + cos A sin B का प्रयोग करने पर
या y = sin ωt (a cos α + b cos ß) + cos ωt (a sin α + b sin ß)
माना a cos α + b cos ß = r cos θ …………(3)
एवं a sin α + b sin ß = r sin θ ………..(4)
अतः y = r sin ωt cos θ + r cos ωt sin θ
या y = r sin(ωt + θ) ………(5)
यह परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी उसी आवृत्ति से गति करेगी जिससे अध्यारोपित होने वाली तरंगे करती है। समी (5) में θ परिणामी तरंग की प्रारम्भिक कला है।

परिणामी तरंग का आयाम : समी (3) व (4) के वर्गों को जोड़ने पर
r² cos² θ + r² sin² θ = (a cos α + b cos ß)² + (a sin α + b sin ß)²
या r²(cos² θ + sin² θ) = a² cos α + b² cos ß+ 2ab cos α cos ß + a² sin² α + b² sin² ß + 2ab sin α sin ß
या r² = a² (cos² α + sin² α) + b² (cos² ß + sin² ß) + 2ab(cos α cos ß + sin α sin ß)
या r² = a² + b² + 2ab cos (ß – α) ………..(6)
[क्योंकि cos (A – B) = cosA cosB + sinA sinB]
∴ r = \(\sqrt{a^2+b^2+2ab cos(ß-α)}\) …………(7)

परिणामी तरंग का कला कोण : समी (4) में (3) का भाग देने पर-
\(\tan \theta=\frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)
\(\theta=\tan ^{-1} \frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 19.
यदि ध्वनि स्त्रोत एवं श्रोता दोनों गतिमान है, तो आभासी आवृत्ति के लिए विभिन्न स्थितियों में सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.4
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

सूत्र sin (A + B) = sin A cos B + cos A sin B का प्रयोग करने पर
या y = sin ωt (a cos α + b cos ß) + cos ωt (a sin α + b sin ß)
माना a cos α + b cos ß = r cos θ …………(3)
एवं a sin α + b sin ß = r sin θ ………..(4)
अतः y = r sin ωt cos θ + r cos ωt sin θ
या y = r sin(ωt + θ) ………(5)
यह परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी उसी आवृत्ति से गति करेगी जिससे अध्यारोपित होने वाली तरंगे करती है। समी (5) में θ परिणामी तरंग की प्रारम्भिक कला है।

परिणामी तरंग का आयाम : समी (3) व (4) के वर्गों को जोड़ने पर
r² cos² θ + r² sin² θ = (a cos α + b cos ß)² + (a sin α + b sin ß)²
या r²(cos² θ + sin² θ) = a² cos α + b² cos ß+ 2ab cos α cos ß + a² sin² α + b² sin² ß + 2ab sin α sin ß
या r² = a² (cos² α + sin² α) + b² (cos² ß + sin² ß) + 2ab(cos α cos ß + sin α sin ß)
या r² = a² + b² + 2ab cos (ß – α) ………..(6)
[क्योंकि cos (A – B) = cosA cosB + sinA sinB]
∴ r = \(\sqrt{a^2+b^2+2ab cos(ß-α)}\) …………(7)

परिणामी तरंग का कला कोण : समी (4) में (3) का भाग देने पर-
\(\tan \theta=\frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)
\(\theta=\tan ^{-1} \frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 20.
डॉप्लर प्रभाव के उपयोग से पनडुब्बी का वेग किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.5
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

सूत्र sin (A + B) = sin A cos B + cos A sin B का प्रयोग करने पर
या y = sin ωt (a cos α + b cos ß) + cos ωt (a sin α + b sin ß)
माना a cos α + b cos ß = r cos θ …………(3)
एवं a sin α + b sin ß = r sin θ ………..(4)
अतः y = r sin ωt cos θ + r cos ωt sin θ
या y = r sin(ωt + θ) ………(5)
यह परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी उसी आवृत्ति से गति करेगी जिससे अध्यारोपित होने वाली तरंगे करती है। समी (5) में θ परिणामी तरंग की प्रारम्भिक कला है।

परिणामी तरंग का आयाम : समी (3) व (4) के वर्गों को जोड़ने पर
r² cos² θ + r² sin² θ = (a cos α + b cos ß)² + (a sin α + b sin ß)²
या r²(cos² θ + sin² θ) = a² cos α + b² cos ß+ 2ab cos α cos ß + a² sin² α + b² sin² ß + 2ab sin α sin ß
या r² = a² (cos² α + sin² α) + b² (cos² ß + sin² ß) + 2ab(cos α cos ß + sin α sin ß)
या r² = a² + b² + 2ab cos (ß – α) ………..(6)
[क्योंकि cos (A – B) = cosA cosB + sinA sinB]
∴ r = \(\sqrt{a^2+b^2+2ab cos(ß-α)}\) …………(7)

परिणामी तरंग का कला कोण : समी (4) में (3) का भाग देने पर-
\(\tan \theta=\frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)
\(\theta=\tan ^{-1} \frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)

आंकिक प्रश्न (Numerical Problems )

तरंगदैर्ध्य व तरंग गति पर आधारित

प्रश्न 1.
एक रेडियो प्रसारण केन्द्र की आवृत्ति 60 MHz है। केन्द्र से प्रसारित तरंगों की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। (प्रकाश की चाल = 3 × 108 ms-1)
उत्तर:
5 m

प्रश्न 2.
एक दर्शक समुद्र के किनारे खड़ा होकर देखता है कि 1 मिनट में 70 तरंगें किनारे तक पहुंचती हैं। यदि तरंगदैर्घ्य 12m हो तो उनका वेग बताइये।
उत्तर:
14 ms-1

प्रश्न 3.
समुद्र की तरंगों में दो शृंगों के बीच की दूरी 12m है और प्रति मिनट 20 श्रृंग बनते हैं तो तरंगों की चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
4 ms-1

तनी डोरी में तरंग की चाल

प्रश्न 4.
4.0m लम्बे तार का द्रव्यमान 0.01 kg है, इसे 400N बल से खींचा जाता है। तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल कितनी है ?
उत्तर:
400 ms-1

यांत्रिक तरंगों की चाल पर आधारित

प्रश्न 5.
इस्पात के लिए प्रत्यास्थता गुणांक 2.9 × 1011 Nm-2 है एवं घनत्व 8 × 103 kg.m-3 है इस्पात में अनुदैर्घ्य तरंगों का वेग बताइये।
उत्तर:
6.02 × 103 ms-1

प्रश्न 6.
105 Nm-2 वायुमण्डलीय दाब पर वायु का घनत्व 1.29 kg. m-3 है। यदि वायु के लिए = 1.41 है तो वायु में ध्वनि की चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
330.6 ms-1

प्रश्न 7.
जल में ध्वनि की चाल 1346 ms-1 है तथा जल का घनत्व 1.0 × 103 kg.m-3 है। जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए।
उत्तर:
1.81 × 109 N.m-2

प्रश्न 8.
105 Nm-2 दाब पर जल की आयतन विकृति 5 × 10-5 है। यदि जल का घनत्व 1 × 103 kg.m-3 हो, तो जल में ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
उत्तर:
1414.2 ms-1

गैसों में ध्वनि की चाल पर आधारित

प्रश्न 9.
0°C पर वायु में ध्वनि की चाल 330 ms-1 है। किस ताप पर ध्वनि की चाल 495 ms-1 होगी ?
उत्तर:
341.25°C

प्रश्न 10,
0°C व 1092K ताप पर ध्वनि की चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
1 : 2

प्रश्न 11.
किसी ताप पर वायु में ध्वनि की चाल 25°C ताप पर वायु में ध्वनि की चाल की 1.6 गुनी हो जायेगी ?
उत्तर:
489.9°C

प्रश्न 12.
किस ताप पर ऑक्सीजन में ध्वनि की चाल वही होगी जो कि 28°C पर नाइट्रोजन में है ? ऑक्सीजन व नाइट्रोजन के अणुभार क्रमशः 32 व 28 है।
उत्तर:
71°C

प्रगामी तरंगों पर आधारित

प्रश्न 13.
किसी तरंग का समीकरण y = 0.5 sin π (100x – 3t) है। इसमें y व x मीटर में तथा t सेकण्ड में है। इस तरंग का प्रसारण वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
300 ms-1

प्रश्न 14.
निम्नलिखित तरंग समीकरण से तरंगदैर्घ्यं ज्ञात कीजिए-
y = 0.4 sin (120πt – \(\frac{4π}{5}\)), जहाँ दूरी m में तथा समय सेकण्ड में दिया गया है।
उत्तर:
2.5m

प्रश्न 15.
एक प्रगामी तरंग का आयाम 0.05m; चाल 330 ms-1 तथा आवृत्ति 110 Hz है। इस तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर :
y = 0.05 sin 2π (110t – \(\frac{x}{3}]/latex])।

प्रश्न 16.
एक माध्यम के दो कणों के बीच की दूरी 5 cm है। यदि इनका कलान्तर [latex]\frac{π}{3}\) हो तो तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.3 m

प्रश्न 17.
एक प्रगामी तरंग का समीकरण y = 0.04 sin (157 t – 3.14 x) है जहाँ दूरियाँ m में तथा t सेकण्ड में हैं। तरंग आयाम, आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए इसी प्रकार यदि किसी अन्य तरंग का समीकरण y’ = 0.30 sin (157t – 3.14 x + 3.14) हो तो उपर्युक्त दोनों तरंगों के मध्य कलान्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.04 m; 25 Hz; 2m; π rad. या 180°

प्रश्न 18.
दो तरंगों के आयामों का अनुपात 2:3 है तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
4 : 9

प्रश्न 19.
एक समतल प्रगामी तरंग का समीकरण y = 0.4sin 8π (t – \(\frac{x}{20}\)) है। यदि तरंग किसी तल से परावर्तित होती है एवं परावर्तित तरंग का आयाम पहले का आधा रह जाता है तो परावर्तित तरंग का समीकरण ज्ञात कीजिए यदि तरंग किसी (i) दृढ़ तल से (ii) मुक्त तल से परावर्तित हो।
उत्तर:
(i) y’ = 0.2 sin 8π (t + \(\frac{x}{20}\))
(ii) y” = 0.2 sin 8π (t + \(\frac{x}{20}\))

प्रश्न 20.
अप्रगामी तरंग का समीकरण y = 12 cos \(\frac{πx}{5}\) sin 20πt जहाँ x व y सेमी में तथा t सेकण्ड में है ज्ञात कीजिए-
(i) प्रगामी तरंगों की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति (ii) वेग तथा आयाम ।
उत्तर:
(i) 10 cm; 10 Hz
(ii) 100 cms; 6 cm

प्रश्न 21.
किसी बन्द ऑगंन नली में बनी अप्रगामी तरंग का समीकरण है y = 7 cos (\(\frac{πx}{6}\)) sin (30 πt) जिसमें x एवं y, cm में तथा t, s में है। है। इस तरंग को उत्पन्न करने वाली प्रगामी तरंगों की आवृत्ति, चाल, आयाम तथा तरंगदैर्घ्यं ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
15 Hz; 180 cms; 3.5 cm 12 cm

प्रश्न 22.
एक सिरे पर बन्द नली में मूल स्वर की आवृत्ति 200 Hz है। इसी प्रकार की इसी लम्बाई की, परन्तु दोनों सिरों पर खुली नली के मूल स्वर की आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर:
400 Hz

प्रश्न 23.
एक बन्द आर्गन पाइप के मूल अधिस्वरक की आवृत्ति एवं एक खुले पाइप के मूल अधिस्वरक की आवृत्ति समान हैं उनकी लम्बाइयों में क्या अनुपात है ?
उत्तर:
1 : 2

प्रश्न 24.
दो स्वरित्र A व B एक साथ कम्पन करने पर क्षय विस्पन्द प्रति सेकण्ड उत्पन्न करते हैं। 32 cm लम्बे बन्द ऑर्गन पाइप के साथ A तथा 33 cm लम्बे बन्द ऑर्गन पाइप के साथ B अनुनाद करता है। स्वरित्रों की आवृत्तियाँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
264 Hz; 256 Hz

प्रश्न 25.
341 Hz आवृत्ति के एक स्वरित्र को 1m लम्बी नली के ठीक ऊपर कम्पित कराया जाता है। नली में धीरे-धीरे जल भरा जा रहा है। जल की कितनी ऊँचाई अनुनाद के लिए आवश्यक होगी ? (वायु में ध्वनि की चाल = 341 ms2 )
उत्तर:
75cm; 25cm

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2

प्रश्न 1.
निम्न बिन्दुओं को एक वर्गांकित कागज पर अंकित कीजिए और जाँचिए कि क्या वे सभी एक सरल रेखा पर स्थित हैं?
(a) A(4,0), B(4,2), C(4,6), D(4, 2.5)
(b) P(1, 1), Q(2, 2), R(3, 3), S(4,4)
(c) K(2, 3), L(5, 3),M(5,5), N(2,5)
हल:
(a) A(4, 0), B(4, 2), C(4, 6), D(4, 2.5)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2 -1
अतः इसके सभी बिन्दु एक ही सरल रेखा पर स्थित हैं। अतः यह एक सरल रेखा है।

(b) P(1, 1) Q(2,2) R(3,3) S(4,4)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2 -2
इसके सभी बिन्दु एक सरल रेखा पर हैं। अत: यह एक सरल रेखा है।

(c) K(2,3) L(5,3) M(5,5) N(2,5).
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2 -3
यह आलेखा एक आयत बना रहा है । अत: यह सरल रेखा नहीं ।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2

प्रश्न 2.
बिन्दुओं (2,3) तथा (3,2) में से गुजरती हुई एक सरल रेखा खींचिए। उन बिन्दुओं के निर्देशांक लिखिये,? जिन पर यह रेखाxअक्ष तथा Y-अक्षको । प्रतिच्छेद करती है।
हल :
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2 -4
बिन्दु (2,3) तथा (3,2) से जाती हुई एक रेखा खींची। यह आलेख रेखा x-अक्ष को (5,0) तथा Y-अक्ष को (0, 5) पर काटेगी।

प्रश्न 3.
आलेख में बनाई गई आकृतियों में प्रत्येक के शीर्षों के निर्देशांक लिखिये ।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2 -5
हल :
इस आलेख से स्पष्ट है कि हम सर्वप्रथम ABCO के शीषों के निर्देशांक लिखेंगे, जो इस प्रकार है-
ABCO आकृति में-
O(0,0), A (2,0), B (2, 3),C (0, 3)

PQRS आकृति में-
P(4,3),Q(6, 1), R (6,5), 8 (4,7)

KLM आकृति में-
K(10,5),(7,7),M (10,8)

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 15 आलेखों से परिचय Ex 15.2

प्रश्न 4.
निम्न कथनों में कौन-सा सत्य है तथा कौन-सा असत्य ? असत्य को ठीक कीजिए ।
(i) कोई बिन्दु जिसकाx-निर्देशांक शून्य तथा निर्देशांक शून्येतर हैं, Y-अक्ष पर स्थित होता है।
(ii) कोई बिन्दु जिसका y-निर्देशांक शून्य है तथा :निर्देशांक 5 है, y-अक्ष पर स्थित होगा ।
(iii) मूल बिन्दु के निर्देशांक (0,0) हैं ।
हल :
(i) सत्य
(ii) असत्य क्योंकि कोई बिन्दु जिसका “-निर्देशांक शून्य है तथा x-निर्देशांक 5 है वह y-अक्ष पर स्थित नहीं है । वह बिन्दु x-अक्ष पर स्थित होगा ।
(iii) सत्य

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
द्रव्यमान केन्द्र की गति का मुख्य कारण है-
(a) पारस्परिक बल
(b) नाभिकीय बल
(c) बाह्य बल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) बाह्य बल

प्रश्न 2.
एक तार जिकसी लम्बाई L तथा द्रव्यमान M है, को वृत्ताकार छल्ले में मोड़ा जाता है। इसका जड़त्व आघूर्ण केन्द्र से गुजरने वाली तथा तल के लम्बवत् अक्ष के परित: है-
(a) \(\frac{ML²}{8π²}\)
(b) 8π² ML²
(c) \(\frac{ML²}{4π²}\)
(d) π² ML²
उत्तर:
(c) \(\frac{ML²}{4π²}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 3.
द्रव्यमान केन्द्र वह बिन्दु है जिसके सापेक्ष किसी पिण्ड के लिए निम्न राशि का मान शून्य होता है-
(a) कोणीय आघूर्ण
(b) बलाघूर्ण
(c) द्रव्यमान आघूर्ण
(d) भार
उत्तर:
(c) द्रव्यमान आघूर्ण

प्रश्न 4.
द्रव्यमान केन्द्र हमेशा वह बिन्दु है-
(a) जो पिण्ड का ज्यामितीय केन्द्र है
(b) जहाँ से सभी कणों की दूरी समान है।
(c) जहाँ पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जा सके
(d) जो निर्देश तन्त्र का मूल बिन्दु है।
उत्तर:
(c) जहाँ पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जा सके

प्रश्न 5.
यदि HCI अणु में H की द्रव्यमान केन्द्र से दूरी हो तो CI35 की दूरी होगी-
(a) 35x
(b) x
(c) \(\frac{36x}{35}\)
(d) \(\frac{x}{35}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{x}{35}\)

प्रश्न 6.
बाह्य बल की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केन्द्र से सम्बद्ध राशि नियत रहती है-
(a) वेग
(b) त्वरण
(c) स्थिति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) वेग

प्रश्न 7.
एक घूमती हुई चकती की त्रिज्या यकायक आधी कर दी जाये परन्तु द्रव्यमान स्थिर रहे तो उसका कोणीय वेग हो जायेगा-
(a) दोगुना
(b) आधा
(c) चार गुना
(d) अपरिवर्तित
उत्तर:
(c) चार गुना

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 8.
कोणीय संवेग का 2 घटक रैखिक संवेग के घटकों रूप में निम्न है-
(a) Lz =xpy – yPx
(b) Lz = ypy – xPx
(c) Lz = yPx – xPy
(d) Lz =xpx – ypz
उत्तर:
(a) Lz =xpy – yPx

प्रश्न 9.
ग्रहों की परिभ्रमण गति में नियत रहता है-
(a) गुरुत्वीय बल
(b) अभिकेन्द्र बल
(c) कोणीय संवेग
(d) कोणीय त्वरण
उत्तर:
(c) कोणीय संवेग

प्रश्न 10.
घूर्णन गति में किया गया कार्य होता है-
(a) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\alpha}\)
(b) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\theta}\)
(c) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\omega}\)
(d) \(\vec{L} \cdot \vec{\theta}\)
उत्तर:
(b) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\theta}\)

प्रश्न 11.
केन्द्रीय बल क्षेत्र में नियत रहता है-
(a) रैखिक संवेग
(b) कोणीय संवेग
(c) गतिज ऊर्जा
(d) स्थितिज ऊर्जा
उत्तर:
(b) कोणीय संवेग

प्रश्न 12.
दो बिन्दु द्रव्यमान क्रमश: m1,m2 अपने परस्पर गुरुत्वीय आकर्षण बल के प्रभाव में गति करते हैं। यदि कोई अन्य बल नहीं लग रहा हो तो संरक्षित रहेगा-
(a) केवल रैखिक संवेग
(b) केवल कोणीय संवेग
(c) दोनों रैखिक एवं कोणीय संवेग
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) दोनों रैखिक एवं कोणीय संवेग

प्रश्न 13.
यदि दो द्रव्यमान m1 तथा m2 की द्रव्यमान केन्द्र से दूरी क्रमशः r1 तथा r2 हो तो का मान होगा-
(a) m1 / m2
(b) (m1 / m2
(c) m2 / m1
(d) (m2 / m1
उत्तर:
(c) m2 / m1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 14.
दो कण जिनके द्रव्यमान 10 तथा 30 किलोग्राम हैं और इनके स्थिति सदिश क्रमश: \((\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})\) तथा \((-\hat{i}-\hat{j}-\hat{k})\) है तो निकाय का द्रव्यमान केन्द्र होगा-
(a) \(– \frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{2}\)
(b) \(\frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{2}\)
(c) \(– \frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{4}\)
(d) \(\frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{4}\)
उत्तर:
(a) \(– \frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{2}\)

प्रश्न 15.
एक समान वर्गाकार प्लेट ABCD के दो किनारों B व C पर एक-एक किग्रा के पिण्ड रखे हैं। एक तीसरे 2 किग्रा द्रव्यमान के पिण्ड को प्लेट पर कहाँ रखें कि प्लेट का द्रव्यमान केन्द्र वर्ग के केन्द्र 0 पर ही रहे?
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -1
(a) P
(b) 2
(c) R
(d) s
उत्तर:
(b) 2

प्रश्न 16.
जूल सेकण्ड मात्रक है-
(a) शक्ति का
(b) कोणीय संवेग का
(c) बल आघूर्ण का
(d) रैखिक संवेग का
उत्तर:
(b) कोणीय संवेग का

प्रश्न 17.
डिस्क की स्वयं की अक्ष के प्रति घूर्णन त्रिज्या है-
(a) R / 2
(b) R / √2
(c) R
(d) R√2
उत्तर:
(b) R / √2

प्रश्न 18.
लम्बाई तथा द्रव्यमान के एक पतले तार को अर्धवृतत के रूप में मोड़ा गया है। उसके स्वतन्त्र किनारों को मिलाने वाली रेखा के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण होगा-
(a) \(\frac{m l^2}{2 \pi^2}\)
(b) \(\frac{m l^2}{2}\)
(c) \(\frac{m l^2}{\pi^2}\)
(d) ml²
उत्तर:
(a) \(\frac{m l^2}{2 \pi^2}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 19.
एक छल्ला किसी नत तल पर प्रथम बार बिना लुढ़के खिसकता है तथा दूसरी बार बिना खिसके लुढ़कता है तो दोनों परिस्थितियों में उत्पन्न त्वण का अनुपात है-
(a) 1 : 1
(b) 2 : 1
(c) 1 : 2
(d) 4 : 1
उत्तर:
(b) 2 : 1

प्रश्न 20.
एक पतला खोखला बेलन जिसका व्यास 0.3 मीटर है, 2 मीटर ऊँचे नत तल पर विरामावस्था से लुढ़कता है पैदे पर पहुँचने पर उसका रेखीय वेग होगा-
(a) 2g
(b) √2g
(c) g/2
(d) \(\frac{3g}{10}\)
उत्तर:
(b) √2g

प्रश्न 21.
बाह्य बल की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केन्द्र का वेग-
(a) शून्य है
(b) नियत रहेगा
(c) बढ़ेगा
(d) छटेगा।
उत्तर:
(b) नियत रहेगा

प्रश्न 22.
किसी पदार्थ के गोले के लिए उसके व्यास के जड़त्व आघूर्ण / का मान उसकी त्रिज्या R की किस घात के समानुपाती है?
(a) R²
(b) R²
(c) R4
(d) R²
उत्तर:
(b) R²

प्रश्न 23.
किसी ठोस गोले का व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण का मान I है तो गोले का उसकी स्पर्श रेखा के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण होगा-
(a) \(\frac{7}{2}\)I
(b) \(\frac{5}{2}\)I
(c) \(\frac{2}{5}\)I
(d) \(\frac{1}{2}\)I
उत्तर:
(a) \(\frac{7}{2}\)I

प्रश्न 24.
1 मीटर व 5 मीटर त्रिज्या की दो वलय एक नत तल पर एक साथ बिना फिसले प्रारम्भ करते हैं। पृथ्वी तल पर कौन-सी वलय पहले पहुंचेगी?
(a) बड़ी वलय
(b) छोटी वलय
(c) दोनों एक साथ
(d) कुछ नहीं कहा जा सकता।
उत्तर:
(c) दोनों एक साथ

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
दृढ़ पिण्ड की साम्यावस्था के लिए प्रतिबन्ध लिखिए।
उत्तर:
ΣF = 0 तथा Στ = 0

प्रश्न 2.
द्विपरमाणुक अणु के जड़त्व आघूर्ण के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
I = \(\frac{m_1m_2}{m_1+m_2}\)r² जहाँ दोनों परमाणुओं के मध्य दूरी।

प्रश्न 3.
क्या किसी पिण्ड की घूर्णन त्रिज्या अचर राशि है?
उत्तर:
नहीं; घूर्णन अक्ष बदलने पर जड़त्व आघूर्ण एवं घूर्णन त्रिज्या दोनों के मान बदल जाते हैं।

प्रश्न 4.
धनात्मक आघूर्ण व ऋणात्मक आघूर्ण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यदि बल की प्रवृत्ति पिण्ड को वामावर्त (Anticlockwise) दिशा में घुमाने की है तो उसका बल आघूर्ण धनात्मक आघूर्ण कहलाता है। इसके विपरीत पिण्ड को दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घुमाने की प्रवृत्ति रखने वाले बल का आघूर्ण ऋणात्मक आघूर्ण कहलाता है।

प्रश्न 5.
किसी गोले को पिघलाकर उसे चकती का स्वरूप प्रदान कर दिया जाता है तो उसके जड़त्व आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
चकती का जड़त्व आघूर्ण गोले के जड़त्व आघूर्ण से अधिक होगा।

प्रश्न 6.
क्या द्रव्यमान केन्द्र व गुरुत्व केन्द्र सम्पाती होते हैं?
उत्तर:
समरूप द्रव्यमान घनत्व वाली वस्तुओं में उक्त दोनों केन्द्र सम्पाती होते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 7.
पेंचकस का हत्या चौड़ा क्यों बनाया जाता है?
उत्तर:
पेंचकस के हत्थे पर अंगूठे एवं उँगलियों की सहायता से बलयुग्म लगाकर उसे घूर्णन गति प्रदान की जाती है और बलयुग्म का आघूर्ण τ = F × r
अतः r के मान को बढ़ाने के लिए पेंचकस का हत्था चौड़ा लिया जाता है ताकि कम बल (F) लगाने पर भी अधिक बलयुग्म का आघूर्ण (τ) प्राप्त हो सके और पेंच को आसानी से खोला या कसा जा सके।

प्रश्न 8.
किसी दृढ़ पिण्ड के समस्त कणों के कोणीय वेग एक समान होते हैं या भिन्न-भिन्न?
उत्तर:
दृढ़ पिण्ड के सभी कणों के कोणीय वेग समान होते हैं।

प्रश्न 9.
समान द्रव्यमान त्रिज्या तथा आकृति की खोखली तथा ठोस वस्तुओं में किसका जड़त्व अधिक होगा?
उत्तर:
खोखली वस्तुओं का जड़त्व अधिक होता है ।

प्रश्न 10.
क्या घर्षण रहित नत तल पर कोई वस्तु लोटनी गति कर सकती है?
उत्तर:
नहीं; वह फिसल जायेगी।

प्रश्न 11.
किसी पिण्ड के कोणीय संवेग J, जड़त्व आघूर्ण एवं कोणीय वेग 00 में क्या सम्बन्ध होता है?
उत्तर:
J = I.ω ।

प्रश्न 12.
किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
(i) घूर्णन अक्ष की स्थिति पर
(ii) घूर्णन अक्ष के सापेक्ष पिण्ड के द्रव्यमान वितरण पर ।

प्रश्न 13.
क्या यह आवश्यक है कि द्रव्यमान केन्द्र पर द्रव्यमान उपस्थित हो?
उत्तर:
नहीं। उदाहरण के लिए वलय का द्रव्यमान केन्द्र उसके केन्द्र पर होता है जहाँ द्रव्यमान नहीं होता है।

प्रश्न 14.
क्या द्रव्यमान केन्द्र एक वास्तविकता है?
उत्तर:
नहीं, यह केवल एक गणितीय अवधारणा है।

प्रश्न 15.
क्या रेखीय गति में वस्तु में कोणीय संवेग हो सकता है?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 16.
यदि पृथ्वी की त्रिज्या कम हो जाये तो दिन की लम्बाई में क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
पृथ्वी की त्रिज्या कम होने पर जड़त्व आघूर्ण (I) कम हो जायेगा। फलस्वरूप कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त के अनुसार (I.ω = नियतांक) उसका कोणीय वेग ω का मान बढ़ेगा और ω का मान बढ़ने से (ω = \(\frac{2π}{T}\)) आवर्तकाल T का मान कम होगा। परिणामस्वरूप दिन की लम्बाई घट जायेगी।

प्रश्न 17.
किस अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण न्यूनतम होता है?
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण न्यूनतम होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 18.
एक व्यक्ति घूर्णन कर रही मेज पर अपनी भुजाएं फैलाये हुए बैठा है। यदि वह भुजाएं सिकोड़ ले तो क्या होगा?
उत्तर:
भुजाएं सिकोड़ने पर उसका जड़त्व आघूर्ण कम होने से उसका कोणीय वेग बढ़ जायेगा।

प्रश्न 19.
एक पतली छड़ का द्रव्यमान M एवं इसकी लम्बाई L है तो छड़ के सिरे से छड़ के लम्बवत् गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष उसका जड़त्व आघूर्ण क्या होगा?
उत्तर:
I = \(\frac{ML^{2}}{3}\)

प्रश्न 20.
गतिशील वाहनों के पहिए बीच में खोखले एवं परिधि पर मोटे बनाये जाते हैं क्यों?
उत्तर:
ऐसा करने से पहिए का जड़त्व आघूर्ण बढ़ जाता है और वह गति पालक चक्र (Flywheel) की भाँति कार्य करने लगता है। फलस्वरूप इंजन बन्द कर देने पर भी वाहन अचानक नहीं रुकता है।

प्रश्न 21.
क्या पिण्ड के जड़त्व आघूर्ण का मान उसके कोणीय वेग पर निर्भर करता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 22.
M द्रव्यमान तथा / लम्बाई के एक खोखले बेलन की आंतरिक तथा बाह्य त्रिज्याएं क्रमश: R1 व R2 हैं। इसके केन्द्र से होकर जाने वाली तथा बेलन के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण कितना होता है?
उत्तर:
\(I=M\left[\frac{l^2}{12}+\frac{R_1^2+R_2^2}{4}\right]\)

प्रश्न 23.
कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर किस भौतिक राशि को प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
बल आघूर्ण को = \(\left[\tau=\frac{\Delta J}{\Delta t}\right]\)

प्रश्न 24.
बलयुग्म किस प्रकार की गति उत्पन्न करता है?
उत्तर:
केवल घूर्णन गति उत्पन्न करता है।

प्रश्न 25.
साइकिल के पहिए तानेंदार (spokes) क्यों बनाये जाते हैं?
उत्तर:
जड़त्व आघूर्ण बढ़ाने के लिए साइकिल के पहिए तानेदार बनाये जाते हैं।

प्रश्न 26.
जब कोई वस्तु क्षैतिज से θ कोण पर झुके तल पर फिसलती है तो उसका त्वरण क्या होता है?
उत्तर:
g sin θ

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प्रश्न 27.
समान कोणीय वेग से घूर्णन कर रहे एक वृत्ताकार प्लेटफार्म के किनारे के निकट एक व्यक्ति बैठा है। यदि वह अचानक प्लेटफार्म के केन्द्र की ओर चलना प्रारम्भ करता है तो प्लेटफार्म के कोणीय वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
केन्द्र की ओर व्यक्ति के चलने पर कुल जड़त्व आघूर्ण कम होगा फलस्वरूप कोणीय संरक्षण के सिद्धान्त से कोणीय वेग बढ़ जायेगा।

प्रश्न 28.
विलगित निकाय क्या होता है?
उत्तर:
वह निकाय जिस पर कोई बाह्य बल न लग रहा हो, विलगित निकाय कहलाता है।

प्रश्न 29.
यदि दो विभिन्न द्रव्यमान के तरबूज एक पुल से एक साथ ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर गिराये जायें तो तरबूजों के द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण क्या होगा?
उत्तर:
दोनों तरबूजों के द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण g होगा।

प्रश्न 30.
एक त्रिभुजाकार पटल के द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति क्या होगी?
उत्तर:
त्रिभुजाकार पटल की तीनों मध्यिकाओं का कटान बिन्दु ही पटल का द्रव्यमान केन्द्र होगा।

प्रश्न 31.
एक आयताकार पटल का द्रव्यमान M, लम्बाई l व चौड़ाई b है तो उसके तल के लम्बवत् तथा उसके द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष के परित: उसका जड़त्व लिखिए ।
उत्तर:
\(I=M\left[\frac{l^2+b^2}{12}\right]\)

प्रश्न 32.
ठोस गोले का उसके किसी व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण क्या होगा?
उत्तर:
I = \(\frac{2}{5}\) MR²,
जहाँ M = गोले का द्रव्यमान
R = गोले की त्रिज्या

प्रश्न 33.
किसी वलय का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आपूर्ण क्या होगा?
उत्तर:
I = \(\frac{1}{2}\) MR²
जहाँ M= वलय का जड़त्व आघूर्ण;
R = वलय की त्रिज्या

प्रश्न 34.
रेखीय गति में बल = द्रव्यमान × त्वरण होता है। इससे संगत घूर्णन गति का व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
बल आघूर्ण = जड़त्व आघूर्ण × कोणीय त्वरण

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 35.
पेन का ढक्कन दो अंगुलियों की सहायता से आसानी से खुल जाता है परन्तु एक अंगुली से नहीं, क्यों?
उत्तर:
पेन का ढक्कन खोलने के लिए बलयुग्म की आवश्यकता होती है जो दो अंगुलियों द्वारा ही सम्भव हो पाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
धातु की दो वृत्ताकार चकतियाँ A व B के द्रव्यमान व मोटाई समान हैं। 4 का घनत्व B के घनत्व का दो गुना है। चकती व B का इनके अक्षों के प्रति जड़त्व आघूर्णो का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर:
चकती का जड़त्व आघूर्ण I = \(\frac{1}{2}\) Mr²
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -2

प्रश्न 2.
जब ठोस गोला किसी नत तल पर लुढ़कता है तो घूर्णन ऊर्जा कुल ऊर्जा का कितना प्रतिशत होगी?
उत्तर:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -3

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 3.
तीन वलय जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान M एवं त्रिज्या है, त्रिभुजाकार आकृति में व्यवस्थित है। इस निकाय का YY” अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -4
उत्तर:
वलय का उसकी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण = MR²
वलय का व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण
Id = \(\frac{1}{2}\) MR²
अतः व्यास के समान्तर स्पर्शरेखीय अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
IT = \(\frac{3}{2}\) MR²
अतः पूरे निकाय का YY’ अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण
IYY’ = I1 + I2 + I3
= \(\frac{3}{2}\) MR² + \(\frac{3}{2}\) MR² + \(\frac{1}{2}\) MR²
या IYY’ = \(\frac{7}{2}\) MR²

प्रश्न 4.
एक सीढ़ी दीवार के सहारे तिरछी लगी है। यदि वह फिसले तो उसका तात्क्षणिक घूर्णन केन्द्र कहाँ होगा?
उत्तर:
ऊपरी सिरे के स्पर्श बिन्दु पर दीवार के लम्बवत् तथा नीचे के स्पर्श बिन्दु पर जमीन के लम्ब के कटान बिन्दु पर होगा।

प्रश्न 5.
द्रव्यमान m का एक कण v वेग से X-दिशा में गतिशील है। जब वह बिन्दु (x,y,z) पर स्थित होता है तो उस पर मूल बिन्दु के परितः कण के कोणीय संवेग के घटक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
कण X- अक्ष के अनुदिश गतिशील है अतः उसका रेखीय संवेग
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -5

प्रश्न 6.
समान पदार्थ के गोलों के लिए जड़त्व आघूर्ण तथा त्रिज्या का क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण
I = \(\frac{2}{5}\) MR²
∵ M = \(\frac{4}{3}\) πR³ . ρ
∴ I = \(\frac{2}{5}\) × \(\frac{4}{3}\) πR³ . ρ . R²
= \(\frac{8}{15}\) πρR5
∴ I ∝ R5 (क्योंकि \(\frac{8πρ}{15}\) = नियतांक)

प्रश्न 7.
एक वलय का उसकी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण मात्रक है। वलय का उसके तल में स्थित परितः अक्ष (अर्थात् वलय के तल में स्पशरिखीय अक्ष) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर;
दिया है MR² = 8 मात्रक
∴ वलय के तल में स्थित स्पर्शरेखीय अक्ष के सापेक्ष वलय का जड़त्व आघूर्ण समान्तर अक्षों की प्रमेव से-
I = ICM + MR² = Id + MR² = \(\frac{1}{2}\)MR² + MR²
I = \(\frac{3}{2}\) MR²
= \(\frac{3}{2}\) × 8 = 12 मात्रक
या I = 12 मात्रक

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 8.
समान द्रव्यमान के ठोस गोले भिन्न-भिन्न पदार्थों के बनाये जाते हैं। गोलों के जड़त्व आघूर्ण का उनके घनत्व d के साथ क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर;
ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण I = \(\frac{1}{2}\)MR²
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -6

प्रश्न 9.
यदि एक ठोस गोला जिसका द्रव्यमान M है, ऊर्ध्वाधर दिशा में एक नत तल पर से hm नीचे लुढ़ककर आ जाता है। गोले का वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
नत तल पर लुढ़कने पर प्राप्त वेग,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -7

प्रश्न 10.
हेलिकॉप्टर में दो नोदक (Propellers) क्यों काम में लाये जाते हैं?
उत्तर:
हेलिकॉप्टर में केवल एक नोदक लगाने पर कोणीय संवेग संरक्षण के नियमानुसार हेलिकॉप्टर स्वयं नोदक के घूर्णन के विपरीत दिशा में घूम जायेगा। फलस्वरूप वह ऊपर नहीं उठ पायेगा। इस समस्या के निदान के लिए दो नोदक प्रयोग में लाये जाते हैं।

प्रश्न 11.
मोम की एक चकती को पिघलाकर ठोस गोले के रूप में डाल दिया जाता है। केन्द्र से गुजरने वाली उभयनिष्ठ अक्ष के प्रति जड़त्व आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
चकती को पिघलाकर गोले के रूप में डाल देने उसकी त्रिज्या (R) का मान काफी कम हो जायेगा अतः गोले का जड़त्व आघूर्ण (\(\frac{2}{5}\)MR1²) चकती के जड़त्व आघूर्ण (\(\frac{1}{2}\)MR²) से काफी कम हो जायेगा।

प्रश्न 12.
मूल बिन्दु से (\((2 \hat{i}-4 \hat{j}+2 \hat{k})\))m दूरी पर एक बिन्दु पर बल \((3 \hat{i}+2 \hat{j}-4 \hat{k})\) N कार्य कर रहा है। बल आघूर्ण का परिमाण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -8

प्रश्न 13.
समान द्रव्यमान के एवं समान त्रिज्या के एक ठोस व खोखले गोले को एक साथ समान कोणीय वेग से घुमाया जाता है तो कौन सा गोला पहले रुकेगा?
उत्तर:
ठोस गोला क्योंकि इसका जड़त्व आघूर्ण कम है अतः यह समान घूर्णन गति का विरोध कम करेगा।

प्रश्न 14.
m1, m2 तथा m3 द्रव्यमानों के तीन कण एक समबाहु त्रिभुज के तीन शीर्षो पर स्थित हैं। त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई a हो, तो इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण त्रिभुज की m1 द्रव्यमान से गुजरने वाली माध्यिका के परितः ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
द्रव्यमानों एवं माध्यिका की व्यवस्था संलग्न चित्र में प्रदर्शित है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -9

प्रश्न 15.
द्रव्यमान m व त्रिज्या r की एक ठोस चकती क्षैतिज तल पर कोणीय चाल ω से लुढ़क रही है। मूल बिन्दु O के परितः चकती का कोणीय संवेग ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -10
उत्तर:
OX अक्ष के सापेक्ष चकती का जड़त्व आघूर्ण
I = ICM + Mr² = \(\frac{1}{2}\)Mr² + Mr²
या I = \(\frac{3}{2}\) Mr²
∴ चकती का कोणीय संवेग,
J = I.ω = \(\frac{3}{2}\) Mr².ω

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 16.
समान द्रव्यमान तथा समान मोटाई की दो कतियाँ A व B भिन्न धातुओं की बनी हैं जिनके घनत्व ρA व ρBA > ρB) हैं। यदि उनके वृत्ताकार तलों के लम्बवत् तथा गुरुत्वीय केन्द्रों से पारित अक्षों के परितः जड़त्व आघूर्ण IA व IB हों तो IA व IB में कौन बड़ा होगा?
उत्तर:
चकती का उसकी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण I = \(\frac{3}{2}\) MR²
यदि चकतियों की मोटाई t हो तो चकती का द्रव्यमान
M = आयतन × घनत्व = πR².t.ρ
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -11

प्रश्न 17.
यदि ध्रुवों पर जमी हुई बर्फ पिघल जाये तो दिन-रात, की अवधि पर क्या प्रभाव सम्भव है?
उत्तर:
ध्रुवों पर दिन रात की अवधि पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन गति पर निर्भर करती है। यदि ध्रुवों की बर्फ पिघल जाये तो यह पृथ्वी की सतह पर फैल जायेगी जिससे पृथ्वी का द्रव्यमान विस्तार बढ़ने से जड़त्व आघूर्ण बढ़ जायेगा और जड़त्व आघूर्ण बढ़ जाने पर कोणीय वेग घट जायेगा। अत: सूत्र (ω = \(\frac{2π}{T}\)) के अनुसार ω घटने से T (दिन-रात की अवधि) का मान बढ़ जायेगा अर्थात् दिन-रात की अवधि बढ़ जायेगी।

प्रश्न 18.
न्यूटन का गति विषयक नियम निकाय के अलग-अलग कणों के लिए लागू है, फिर भी निकाय की गति को न्यूटन के नियम द्वारा वर्णित किया जा सकता है। समझाइये।
उत्तर:
निकाय का सम्पूर्ण द्रव्यमान निकाय के द्रव्यमान केन्द्र पर संकेन्द्रित माना जा सकता है तथा सभी बाह्य बल भी द्रव्यमान केन्द्र पर लगे माने जा सकते हैं। तब न्यूटन के नियम के अन्तर्गत द्रव्यमान केन्द्र की गति निकाय की गति को व्यक्त करेगी।

प्रश्न 19.
एक बिल्ली गिरने पर अपने पैरों पर सुरक्षित उत्तर जाती है। क्यों?
उत्तर:
कोणीय संवेग संरक्षण के अनुसार,
Iω = नियतांक ⇒ ω ∝ \(\frac{1}{I}\)
जब बिल्ली नीचे गिरती है तो यह अपनी पूँछ एवं शरीर को तान लेती है जिससे बिल्ली का जड़त्व आघूर्ण बढ़ जाता है और फलस्वरूप उसका कोणीय वेग घट जाता है। इस प्रकार बिल्ली गिरने पर अपने पैरों पर सुरक्षित उतर जाती है।

प्रश्न 20.
गुरुत्व केन्द्र एवं द्रव्यमान केन्द्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए। क्या ये पिण्ड में एक ही बिन्दु पर होते हैं?
उत्तर:
\(\vec{r}_{C M}=\frac{\Sigma m_i \overrightarrow{r_i}}{\Sigma m_i}\) तथा \(\overrightarrow{r_{C G}}=\frac{\Sigma m_i g_i \overrightarrow{r_i}}{\Sigma m_i g_i}\)
अतः एक समान गुरुत्व केन्द्र में अर्थात् पिण्ड का आकार पृथ्वी की तुलना में बहुत छोटा होने पर, इसके प्रत्येक कण पर का मान समान होने से दोनों द्रव्यमान केन्द्र व गुरुत्व केन्द्र सम्पाती होंगे।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 21.
घूर्णन गति करने वाली दो वस्तुओं 4 तथा B के जड़त्व आघूर्ण IA व IB हैं। यदि इनके कोणीय संवेग बराबर हों, तो किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी? दिया है- IA > IB
उत्तर;
दिया है: JA = JB
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -12

प्रश्न 22.
छोटी डोरी से एक पत्थर के टुकड़े को बाँधकर घुमाना आसान होता है जबकि बड़ी डोरी से बाँधकर इसे घुमाना कठिन है, क्यों?
उत्तर:
पत्थर का जड़त्व आघूर्ण I = mr²
यदि डोरी छोटी है, तो वृत्त की त्रिज्या (r) कम होगी अतः जड़त्व आघूर्ण कम होगा। इसके विपरीत डोरी बड़ी होने पर जड़त्व आघूर्ण अधिक होगा। घूर्णन गति के समीकरण τ = Iα के अनुसार समान कोणीय त्वरण उत्पन्न करने के लिए छोटी डोरी की स्थिति में कम व बड़ी डोरी की स्थिति में अधिक बल-आघूर्ण लगाना पड़ेगा। अतः छोटी डोरी से पत्थर को बाँधकर घुमाना आसान है।

प्रश्न 23.
चक्रवात में चक्करदार वायु के झोंके के अक्ष के निकट की परतों का वेग बहुत अधिक होता है। समझाइये क्यों?
उत्तर:
चक्रवात में वायु की आन्तरिक परतें अक्ष के बहुत निकट होती हैं जिससे वायु के कणों का जड़त्व आघूर्ण बहुत कम हो जाता है अतः कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त से इन आन्तरिक परतों का कोणीय वेग बहुत अधिक हो जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1.
दृढ़ पिण्ड से क्या अभिप्राय है? इसकी स्थानान्तरीय एवं घूर्णन गतियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दृढ पिण्ड (Rigid Body) :
“वे पिण्ड जिनकी आकृति बाह्य बल लगाने पर भी अपरिवर्तित रहती है अर्थात् जिनके कणों की आन्तरिक दूरियाँ अपरिवर्तित रहती हैं, दृढ़ पिण्ड कहलाते हैं।”
प्रकृति में कोई वस्तु पूर्णतः दृढ़ पिण्ड नहीं होती है क्योंकि उच्च दाब या बल लगाकर वस्तु में विकृति उत्पन्न की जा सकती है। अतः ऐसी वस्तुओं का अध्ययन करने के लिए आदर्श दृढ़ पिण्ड की कल्पना करते हैं जिसमें विकृतियाँ नगण्य रहती हैं। दृढ पिण्ड की गति में स्थानान्तरीय गति (Translational motion) तथा घूर्णन गति (Rotational motion) सम्मिलित होती है। यदि दृढ पिण्ड उससे गुजरने वाली स्थिर अक्ष के प्रति घूर्णन करती है, तो उसे पिण्ड की शुद्ध घूर्णन गति (Pure-rotational motion) कहते हैं तथा अक्ष घूर्णन अक्ष (axis of rotation) कहलाती है, उदाहरण के लिए छत से लटके पंखे की गति शुद्ध घूर्णन गति होती है। परन्तु कुछ स्थितियों में दृढ़ पिण्ड की गति के दौरान घूर्णन अक्ष स्थिर नहीं रहती है। इस स्थिति में पिण्ड में घूर्णन गति के साथ-साथ स्थानान्तरीय गति भी होती है। यदि गति के दौरान दृढ़ पिण्ड के कण परस्पर समान्तर पथ में गति करते हैं, तो वह स्थानान्तरीय गति कहलाती है । उदाहरण के लिए किसी पिण्ड का किसी तल पर फिसलना व्यक्ति का किसी तल पर चलना आदि।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -13

जब गति के दौरान दृढ़ पिण्ड के कण घूर्णन अक्ष के सापेक्ष अपनी स्थिति परिवर्तित करते हैं तो वह गति घूर्णन एवं स्थानान्तरीय गतियों का मिश्रण होती है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -14

दौरान दृढ पिण्ड का प्रत्येक कण घूर्णन अक्ष के परितः वृत्ताकार गति करता है। गति के दौरान घूर्णन अक्ष स्थिर या अपनी दिशा परिवर्तित कर सकती है। अतः “यदि दृढ़ पिण्ड का प्रत्येक बिन्दु वृत्ताकार पथ में गति करता हो तथा प्रत्येक वृत्त का केन्द्र एक उभयनिष्ठ रेखा पर स्थित हो, तो उस गति को शुद्ध घूर्णन गति कहते हैं तथा रेखा को घूर्णन-अक्ष कहते हैं।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -15

चित्र में पिण्ड की घूर्णन गति को दर्शाया गया है। चित्र में पिण्ड के तीन कण P, Q R दिखाये गये हैं जो घूर्णन अक्ष AB से क्रमशः r1, r2 व r3 दूरियों पर स्थित हैं। पिण्ड की घूर्णन गति के दौरान इन कणों के वृत्तीय पथों की त्रिज्याएं क्रमशः r1, r2 व r3 होगी और इन पथों के केन्द्र O, O’ और O” उभयनिष्ठ अक्ष AB पर होंगे। इन सभी कणों के कोणीय वेग एवं आवर्तकाल समान होंगे।

कुछ विशेष स्थितियों में दृढ़ पिण्ड के घूर्णन अक्ष की स्थिति में परिवर्तन होता रहता है परन्तु उसमें कोई स्थानान्तरण नहीं होता है। उदाहरण के लिए घूमते हुए लट्टू की गति। इस गति को शुद्ध पुरस्सरण गति (Pure Precessional motion) कहते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 2.
द्रव्यमान केन्द्र से क्या अभिप्राय है? इसके कार्तीय घटकों के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र (Centre of Mass) :
दृढ़ पिण्डों की जटिल गतियों, जिनमें वह स्थानान्तरीय गति के साथ-साथ घूर्णन गति भी करता है, को समझना गणितीय रूप से अत्यधिक कठिन होता है। इस प्रकार की गतियों को समझने के लिए यदि हम पिण्ड के एक विशेष बिन्दु पर ध्यान रखें तो गति का विश्लेषण करना अत्यधिक सरल हो जाता है। इस विशेष बिन्दु को द्रव्यमान केन्द्र कहते हैं। द्रव्यमान केन्द्र को निम्न प्रकार परिभाषित करते हैं-
“किसी दृढ़ पिण्ड अर्थात् कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र वह बिन्दु है जो इस प्रकार गति करता है कि मानों निकाय का समस्त द्रव्यमान वहाँ पर केन्द्रित हो और समस्त बाह्य बल इसी बिन्दु पर कार्यरत् हों।” उदाहरण के लिए ठोस गोले का केन्द्र ही द्रव्यमान केन्द्र होता है। सामान्यत: नियमित आकार के पिण्डों का द्रव्यमान केन्द्र उनका ज्यामितीय केन्द्र होता है।

दो कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र (Centre of Mass of a System of Two Particles) :
माना किसी निकाय में दो कण हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः m1 व m2 हैं तथा निर्देश बिन्दु O से जिनके स्थिति सदिश \(\overrightarrow{r_1}\) व \(\overrightarrow{r_2}\) हैं एवं इन कणों का आपस में तथा बाह्म वातावरण से सम्बन्ध है। इनके द्रव्यमान केन्द्र (C.M.) का स्थिति सदिश,
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उपपत्ति (Proof):
माना इन कणों पर कार्य करने वाले बाह्य बल क्रमश: \(\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}\) व \(\overrightarrow{F_{2 \mathrm{ext}}}\) तथा आन्तरिक बल क्रमश: \(\overrightarrow{F_{12}}\) व \(\overrightarrow{F_{21}}\) हैं। अतः कण A पर नेट बल,
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माना किसी क्षण पर द्रव्यमान केन्द्र के स्थिति सदिश, वेग तथा त्वरण क्रमशः \(\overrightarrow{r_{c m}} ; \overrightarrow{v_{c m}}\) एवं \(\overrightarrow{a_{c m}}\) हैं।
निकाय का कुल द्रव्यमान M = (m1 + m2)
∵ द्रव्यमान केन्द्र की अभिधारणा से कुल बाह्य बल \(\vec{F}=\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}+\vec{F}_{2 \mathrm{ext}}\) द्रव्यमान केन्द्र पर कार्य करता है तथा कुल द्रव्यमान भी द्रव्यमान केन्द्र पर केन्द्रित माना जाता है। अत: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से
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प्रश्न 3.
सतत् पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
दो कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र (Centre of Mass of a System of Two Particles) :
माना किसी निकाय में दो कण हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः m1 व m2 हैं तथा निर्देश बिन्दु O से जिनके स्थिति सदिश \(\overrightarrow{r_1}\) व \(\overrightarrow{r_2}\) हैं एवं इन कणों का आपस में तथा बाह्म वातावरण से सम्बन्ध है। इनके द्रव्यमान केन्द्र (C.M.) का स्थिति सदिश,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -16.1
उपपत्ति (Proof):
माना इन कणों पर कार्य करने वाले बाह्य बल क्रमश: \(\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}\) व \(\overrightarrow{F_{2 \mathrm{ext}}}\) तथा आन्तरिक बल क्रमश: \(\overrightarrow{F_{12}}\) व \(\overrightarrow{F_{21}}\) हैं। अतः कण A पर नेट बल,
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माना किसी क्षण पर द्रव्यमान केन्द्र के स्थिति सदिश, वेग तथा त्वरण क्रमशः \(\overrightarrow{r_{c m}} ; \overrightarrow{v_{c m}}\) एवं \(\overrightarrow{a_{c m}}\) हैं।
निकाय का कुल द्रव्यमान M = (m1 + m2)
∵ द्रव्यमान केन्द्र की अभिधारणा से कुल बाह्य बल \(\vec{F}=\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}+\vec{F}_{2 \mathrm{ext}}\) द्रव्यमान केन्द्र पर कार्य करता है तथा कुल द्रव्यमान भी द्रव्यमान केन्द्र पर केन्द्रित माना जाता है। अत: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -18.1

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प्रश्न 4.
सिद्ध कीजिए कि जब किसी तन्त्र पर बाह्य बल शून्य होता है तो उसका द्रव्यमान केन्द्र नियत वेग से गति करता है।
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र का रेखीय संवेग (Linear Momentum of Centre of Mass) :
माना कि एक निकाय n कणों से मिलकर बना है, जिसके कणों का द्रव्यमान क्रमशः \(m_1, m_2, m_3 \ldots . m_n\) तथा वेग क्रमशः \(v_1, v_2, v_3 \ldots . v_n\) है इसलिए इस निकाय का संवेग
\(\vec{p}=m \overrightarrow{v_1}+m \overrightarrow{v_2}+m \overrightarrow{v_3}+\ldots \ldots . .+m_n \overrightarrow{v_n}\)
लेकिन हम जानते हैं
\(\overrightarrow{v_cm}=\frac{1}{2}(m \overrightarrow{v_1}+m \overrightarrow{v_2}+m \overrightarrow{v_3}+\ldots \ldots . .+m_n \overrightarrow{v_n})\)
\(\vec{p}=M \vec{v_cm}\) ………….(1)
अर्थात् कणों के निकाय का कुल रेखीय संवेग, निकाय के कुल द्रव्यमान तथा द्रव्यमान केन्द्र के वेग के गुणनफल के बराबर होता है।
समी० (1) का समय t के सापेक्ष अवकलन करने पर
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अर्थात् जब किसी निकाय पर आरोपित बाह्य बलों का योग शून्य होता है तब उस निकाय का कुल रेखीय संवेग नियत अर्थात् संरक्षित रहता है। यह किसी निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का रेखीय संरक्षण नियम कहलाता है।
∴ \(\frac{d \vec{p}}{d t}=0\) होने पर
\(\frac{d}{d t}\left(M v_{c m}\right)=0\)
v cm= नियतांक ………….(4)
या \(m_A \overrightarrow{a_A}+m_B \overrightarrow{a_B}=0\)
यहाँ \(\overrightarrow{a_A}[latex] व [latex]\overrightarrow{a_B}\) क्रमश: A व B की गतियों में त्वरणों का मान है। यदि \(\overrightarrow{F_{A B}}\) एवं \(\overrightarrow{F_{B A}}\) क्रमशः A व B पर B व A के कारण लगने वाले आन्तरिक बल हैं, तो-
\(\overrightarrow{F_{A B}}+\overrightarrow{F_{B A}}=0\)
या \(\overrightarrow{F_{A B}}=-\overrightarrow{F_{B A}}\)
यह न्यूटन का क्रिया एवं प्रतिक्रिया का नियम है।

प्रश्न 5.
बल आघूर्ण की परिभाषा दीजिए एवं इसके लिए सूत्र प्राप्त कीजिए तथा दैनिक जीवन में बल आघूर्ण के उपयोग समझाइये।
उत्तर:
बल आघूर्ण (Torque) tau :
“घूर्णन गति में दिये गये घूर्णन अक्ष के सापेक्ष किसी कण पर कार्यरत् बल का आघूर्ण ही बल आघूर्ण कहलाता है।’ इसे \(\vec{\tau}\) (tau) से व्यक्त करते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -20
चित्र में एक कण P पर बल \(\vec{F}\) आरोपित है। जिससे वह O से गुजरने वाले घूर्णन अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करता है।
बल आघूर्ण = बल × बल की घूर्णन अक्ष से लम्बवत् दूरी
τ = F(OM)
= F r sin θ
τ = r F sin θ
सदिश गुणन के रूप में \(\vec{\tau}=\vec{r} \times \vec{F}\)
यहाँ पर \theta, \(\vec{r}\) और \(\vec{F}\) के मध्य कोण है। बल आघूर्ण की दिशा \(\vec{r}\) तथा \(\vec{F}\) के तल के लम्बवत् दक्षिणावर्ती पेंच नियम से ज्ञात करते हैं। चित्र में \(\vec{r}\) व \(\vec{F}\) X-Y तल में है अतः बल आघूर्ण Z अक्ष की धन दिशा में होगा।
बल आघूर्ण का मात्रक-न्यूटन-मीटर होता है तथा इसका विमीय सूत्र \(\left[\mathrm{M}^1 \mathrm{~L}^2 \mathrm{~T}^{-2}\right]\) होता है।

प्रश्न 6.
कोणीय वेग एवं कोणीय त्वरण की परिभाषा दीजिए तथा घूर्णन गति के समीकरणों की उपपत्ति दीजिए।
उत्तर:
कोणीय वेग (Angular Velocity) :
“समय के साथ कोणीय विस्थापन के परिवर्तन की दर को कोणीय वेग कहते हैं।” इसे ω से व्यक्त करते हैं। यह सदिश राशि है। यह एक अक्षीय सदिश है जिसकी दिशा पिण्ड की घूर्णन अक्ष के अनुदिश होती है। यदि दृढ़ पिण्ड वामावर्त (anti clockwise) दिशा में घूर्णन करता है, तो उसका कोणीय वेग घूर्णन अक्ष के अनुदिश पिण्ड के तल से बाहर की ओर होगा। अर्थात् यदि पिण्ड X-Y तल में वामावर्त (anti clockwise) दिशा में घूर्णन गति करता है तो कोणीय वेग +z दिशा में होगा। इसी प्रकार यदि पिण्ड दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घूर्णन करता है तो कोणीय वेग -z दिशा के अनुदिश होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -21
कोणीय वेग की दिशा को दाहिने हाथ के नियम से व्यक्त किया जाता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित किया गया है। कोणीय वेग की दिशा को ज्ञात करने के लिए दाहिने हाथ से घूर्णन अक्ष को इस पकड़े जाने की कल्पना करें कि अंगूठा अक्ष के समान्तर रहे तो यदि उँगलियों के घुमाव से पिण्ड के घूर्णन की दिशा व्यक्त होती है तो अँगूठे द्वारा कोणीय वेग की दिशा व्यक्त होगी। कोणीय वेग को rad.s-1 में मापा जाता है।
यदि समयान्तर ∆t = (t2 – t1 ) में कोणीय विस्थापन ∆θ = (θ2 – θ1 ) हो तो औसत कोणीय वेग
\(\omega_{a v}=\vec{\omega}=\frac{\Delta \theta}{\Delta t}=\frac{\left(\theta_2-\theta_1\right)}{\left(t_2-t_1\right)}\)
यदि ∆t का मान अत्यल्प हो अर्थात् ∆t → 0 तो पिण्ड के कोणीय वेग का तात्क्षणिक मान (Instantaneous Values of Angular Velocity) निम्न प्रकार व्यक्त होगा-
\(\omega=\lim _{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta \theta}{\Delta t}=\frac{d \theta}{d t}\) ………..(2)
\(\omega=\frac{d \theta}{d t}\)
इसी तात्क्षणिक कोणीय वेग को ‘कोणीय वेग’ के नाम से जाना जाता है। कोणीय वेग धनात्मक एवं ऋणात्मक हो सकता है लेकिन कोणीय चाल सदैव धनात्मक होती है।

कोणीय त्वरण (Angular Acceleration) :
जब किसी पिण्ड के कोणीय वेग का मान परिवर्तित होता है तो उसमें कोणीय त्वरण होता है। उदाहरण के लिए जब हम साइकिल चलाते हैं या उसको रोकते हैं तो दोनों स्थितियों में उसके कोणीय वेग में परिवर्तन होता है अर्थात् साइकिल पहियों में कोणीय त्वरण होता है। अतः “पिण्ड के कोणीय वेग में परिवर्तन की दर को कोणीय त्वरण कहते हैं।” इसे द्वारा प्रदर्शित करते हैं और यह एक सदिश राशि है और इसका मात्रक rad.s-2 होता है।
माना t2 एवं t1 क्षण पर दृढ पिण्ड के कोणीय वेग ω1 व ω2 हैं।
अतः पिण्ड का औसत कोणीय त्वरण
\(\alpha_{a v}=\bar{\alpha}=\frac{\omega_2-\omega_1}{t_2-t_1}=\frac{\Delta \omega}{\Delta t}\) ……(1)
कोणीय त्वरण की दिशा को दाँये हाथ के नियम से ज्ञात किया जा सकता है। α की दिशा पिण्ड के कोणीय वेग में वृद्धि की दिशा में होगी। अर्थात् यदि ω2 > ω1 तो कोणीय वेग में वृद्धि होने पर α का मान धनात्मक होगा एवं ω2 < ω1 होने पर कोणीय वेग में कमी होगी और फलस्वरूप α का मान ऋणात्मक होगा। अतः धनात्मक α त्वरण की दिशा कोणीय वेग ω की दिशा में एवं ऋणात्मक α की दिशा कोणीय वेग की विपरीत दिशा में होगी।
यदि ∆t का मान अत्यल्प हो अर्थात् ∆t → 0 तो पिण्ड के कोणीय त्वरण को तात्क्षणिक कोणीय त्वरण या केवल कोणीय त्वरण के नाम से जाना जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -22

प्रश्न 7.
निम्नलिखित राशियों में सम्बन्ध स्थापित कीजिए-
(i) रेखीय वेग, कोणीय वेग तथा त्रिज्या में।
(ii) रेखीय त्वरण एवं कोणीय त्वरण में ।
उत्तर:
रेखीय वेग तथा कोणीय वेग में संबंध (Relation between Linear Velocity and Angular Velocity) :
जब कोई दृढ़ पिण्ड अपनी स्थिर अक्ष के परितः घूर्णन करता है तो उसका प्रत्येक कण विभिन्न त्रिज्याओं के वृत्तीय पथों पर गति करता है। सभी पथों के केन्द्र घूर्णन अक्ष पर होते हैं और सभी का कोणीय वेग समान होता है लेकिन उनकी चाल घूर्णन अक्ष से उनकी दूरी अर्थात् उनके वृत्तीय पथों की त्रिज्या पर निर्भर करती है। दूरी बढ़ने पर चाल बढ़ जाती है। शुद्ध घूर्णी गति में कण की चाल का मान उसके कोणीय वेग के अनुक्रमानुपाती होता है। संलग्न चित्र (7.18) में दृढ़ पिण्ड का कण P त्रिज्या r के वृत्तीय पथ में घूर्णन गति कर रहा है। यदि किसी क्षण उसका कोणीय विस्थापन θ rad. हो तो, चाप PP’ की लम्बाई s निम्न प्रकार व्यक्त कर सकते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -23
शुद्ध घूर्णी गति में सभी कणों के लिए कोणीय वेग ω समान होता है अत: समी० (2) से स्पष्ट है कि घूर्णन अक्ष से दूरी (r) बढ़ने पर रेखीय वेग (v) उतना ही अधिक बढ़ जायेगा।
उक्त सम्बन्ध [समी० (2)] को सदिश गुणनफल में निरूपित करने के लिए माना कण P का t = 0 पर स्थिति सदिश \(\vec{R}=\overrightarrow{O P}\) है। अत: चित्र से-
\(\frac{r}{R}=\sin \phi \quad \text { या } \quad r=R \sin \phi\)
अत: समी० (2) से
\(v=\omega \cdot R \sin \phi\)
चूँकि \(\omega R \sin \phi\) कोणीय वेग ω के तल के लम्बवत् है, अत: उक्त समी० (2) को सदिश गुणनफल के रूप में निम्न प्रकार व्यक्त कर सकते हैं।
\(\vec{v}=\vec{\omega} \times \overrightarrow{\boldsymbol{R}}\)
यहाँ यह ध्यान देने योग्य कि \(\phi=\frac{\pi}{2} \mathrm{rad}\) की स्थिति में R का मान वृत्तीय पथ की त्रिज्या r के तुल्य होगा।

रेखीय त्वरण एवं कोणीय त्वरण में सम्बन्ध (Relation between Linear Acceleration and Angular Acceleration):
जब कोई कण वृत्तीय पथ पर नियत कोणीय वेग से गति करता है, तो उस पर केवल त्रिज्य त्वरण \(\vec{a}_{\mathrm{rad}}\) ही कार्य करता है, लेकिन कण की चाल (v) भी बदलती है, तो उसमें \(\vec{a}_{\mathrm{rad}}\) के साथ-साथ स्पर्श रेखीय त्वरण \(\vec{a}_{\mathrm{tan}}\) भी होता है। इन्हीं दोनों त्वरणों का परिणामी कण का त्वरण \(\overrightarrow{a_R}\) होता है। इन दोनों घटकों एवं परिणामी त्वरण \(\left(\overrightarrow{a_R}\right)\) को संलग्न चित्र 7.19 में दिखाया गया है। स्पर्श रेखीय त्वरण \(\left(\vec{a}_{\text {tan }}\right)\) की दिशा कण के रेखीय वेग \(\vec{v}\) की दिशा में होती है, क्योंकि इस त्वरण की उत्पत्ति रेखीय वेग \(\vec{v}\) के परिमाण में परिवर्तन से ही होती है। अत:
\(a_{\mathrm{tan}}=\frac{d v}{d t}=r \cdot \frac{d \omega}{d t}=r \cdot \alpha\)

यहाँ \(\alpha=\frac{d \omega}{d t}\) कण का कोणीय त्वरण है। कण के त्रिज्य त्वरण \(\left(a_{\mathrm{rad}}\right)\) का मान कण के रेखीय वेग की दिशा में परिवर्तन से सम्बन्धित होता है। अत:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -24
कण के रेखीय त्वरण व कोणीय त्वरण के सम्बन्ध को सदिश रूप में निम्न प्रकार व्यक्त करते हैं।
यदि कण का स्थिति सदिश \(\vec{R}\) हो तो चित्र से,
r =R sin ϕ
atan =αR sin ϕ
या \(\overrightarrow{a_{\tan }} \propto R \sin \hat{n}\)

जहाँ \(\hat{n}\) घूर्णन तल के लम्बवत् दिशा में एकांक सदिश को व्यक्त करता है। अत:

\(\vec{a}_{\mathrm{tan}}=\vec{a}=\vec{\alpha} \times \vec{R}\) ………………..(3)
यदि \(\phi=\frac{\pi}{2} \mathrm{rad} तो R \sin \phi=r\)
अतः a = α . r
यदि घूर्णन अक्ष स्थिर है तो कण के ω व α के मान स्थिर रहेंगे। कण पर परिणामी त्वरण
\(a_R=\sqrt{a_{\mathrm{rad}}^2+a_{\mathrm{tan}}^2} \text { क्योंकि } \vec{a}_{\mathrm{rad}} \perp \vec{a}_{\mathrm{tan}}\)

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प्रश्न 8.
जड़त्व आघूर्ण की परिभाषा दीजिए एवं दैनिक जीवन में इसके महत्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia):
न्यूटन के प्रथम नियम के अनुसार बाह्य बल की अनुपस्थिति में वस्तुएँ अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करती हैं अर्थात् यदि वस्तु विरामावस्था में है, तो वह गति में आने का विरोध करती हैं और यदि गतिशील हैं तो उसी दिशा में उसी वेग से चलती रहना चाहती है और वेग तथा वेग की दिशा में परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तुओं के इस गुण को जड़त्व (Inertia) कहते हैं जो कि पदार्थ का मूल गुण है। इसीलिए न्यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम भी कहते हैं।

इसी प्रकार यदि कोई वस्तु किसी अक्ष के परितः घूर्णन के लिए स्वतन्त्र हैं तो बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में वह अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करती है अर्थात् यदि विरामावस्था में है तो घूर्णन गति करने का विरोध करती है और यदि घूर्णन कर रही है तो कोणीय वेग में ‘ परिवर्तन का विरोध करती है। किसी अक्ष के परितः वस्तुओं के इस गुण को घूर्णन जड़त्व या ‘जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) कहते हैं। इसे प्रायः I से व्यक्त करते है “पिण्ड के किसी कण का घूर्णन अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण उस कण के द्रव्यमान तथा उसकी घूर्णन अक्ष से दूरी के वर्ग के गुनणनफल के बराबर होता है।” अर्थात्
I = mr²
I का मात्रक = kg.m²
तथा I का विमीय सूत्र = [M1L2T0] …(1)

1. कणों के निकाय का जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia of a System of Particles ) :
माना M द्रव्यमान का कोई दृढ पिण्ड (कणों का निकाय) चित्र में प्रदर्शित एक बिन्दु O से गुजरने वाली ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः घूर्णन के लिए स्वतन्त्र है और पिण्ड का इसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करना है। माना पिण्ड विभिन्न द्रव्यमानों m1, m2, m3 …………., mn के n कणों से मिलकर बना है और घूर्णन अक्ष से इन कणों की दूरियाँ क्रमश: r1, r2, r3 …………., rn हैं। इन सभी कणों के जड़त्व आघूर्णो का योग पूरे पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण प्रदान करेगा अर्थात्
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -25

2. सतत् द्रव्यमान वितरण वाले पिण्ड या निकाय का जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia of a Block of Homogeneous Mass Distribution ) :
यदि किसी पिण्ड में कणों की संख्या अत्यधिक व अति पास-पास स्थित हो जैसे- बेलन, चकती, गोला, मीटर स्केल आदि तो ऐसे पिण्डों को या निकाय को सतत् द्रव्यमान वितरण वाले निकाय के रूप में जाना जाता है। इन पिण्डों के जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए समाकलन (Integration) विधि का उपयोग करते हैं।
माना dm द्रव्यमान का एक अल्पांश घूर्णन अक्ष से r दूरी पर स्थित है तो इस अल्पांश का जड़त्व आघूर्ण
dI = dm.r² …..(3)
अतः पूरे पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण उचित सीमाओं के अन्तर्गत समी० (3) का समाकलन ज्ञात करके ज्ञात करते हैं, अर्थात्
I = \(\int r^2 \cdot d m\) ………….(4)

जड़त्व आघूर्ण का भौतिक महत्व (Physical Significance of Moment of Inertia):
जब किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाया जाता है, तो यदि वह विरामावस्था में है अथवा सीधी रेखा में किसी वेग से गतिशील है, अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तुओं या पिण्डों के इस गुण को ‘जड़त्व’ कहते हैं। किसी पिण्ड का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसकी अवस्था परिवर्तन हेतु उतने ही अधिक बल की आवश्यकता होती है अतः किसी पिण्ड का द्रव्यमान ही उसके जड़त्व की माप है।

ठीक इसी प्रकार किसी पिण्ड को जो विरामावस्था में है, किसी अक्ष के परितः घुमाने के लिए अथवा घूर्णन गति कर रहे पिण्ड के कोणीय वेग में परिवर्तन के लिए उस पर बल आघूर्ण लगाने की आवश्यकता होती है। पिण्ड के इस गुण को ‘जड़त्व आघूर्ण’ कहते हैं। पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण जितना अधिक होता है, उसकी अवस्था परिवर्तन ( घूर्णन गति में) के लिए उतने ही अधिक बल आघूर्ण की आवश्यकता होती है।

उक्त विवेचना से स्पष्ट है कि “रेखीय गति में जो भूमिका द्रव्यमान की होती है, वही भूमिका घूर्णन गति में जड़त्व आघूर्ण की होती है। इसी प्रकार जो भूमिका रेखीय गति में बल की होती है वही भूमिका घूर्णन गति में बल आघूर्ण की होती है।”

जड़त्व तथा जड़त्व आघूर्ण में अन्तर (Difference between Inertia and Moment of Inertia):
पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण केवल पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है परन्तु पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण पिण्ड के द्रव्यमान पर तो निर्भर करता ही है, साथ ही साथ पिण्ड की घूर्णन अक्ष से दूरी पर भी निर्भर करता है अर्थात् पूरे पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण इस तथ्य पर निर्भर करता है कि पूरे पिण्ड के द्रव्यमान का घूर्णन अक्ष के परितः वितरण कैसा है। पिण्ड के द्रव्यमान का जितना अधिक भाग घूर्णन अक्ष से दूर होगा, पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण उतना ही अधिक होगा।

जड़त्व आघूर्ण का दैनिक जीवन में महत्व :
(Importance of Moment of Inertia in Daily Life)
हमारे दैनिक जीवन में जड़त्व आघूर्ण की अहम् भूमिका है। स्कूटर, मोटर साइकिल, साइकिल, रिक्शा, ताँगा तथा बैलगाड़ी इत्यादि में पहिए का जड़त्व आघूर्ण बढ़ाने के लिए पदार्थ की अधिकतम मात्रा परिधि पर रखने का प्रयास किया जाता है परिधि का घेरा तानों द्वारा घूर्णन अक्ष से जुड़ा होता है। ऐसा करने से पहिये में ‘गतिपालक चक्र’ (Fly wheel) का गुण उत्पन्न हो जाता है अर्थात् साइकिल के पैडल चलाना बन्द कर देने पर भी साइकिल कुछ दूरी तक चलती रहती है।

जड़त्व आघूर्ण का व्यावहारिक एवं अच्छा उपयोग ऑटोमोबाइल क्षेत्र में होता है। ऑटोमोबाइल इंजन जो घूर्णी गति पैदा करता है, इसमें बहुत अधिक जड़त्व आघूर्ण वाली एक चकती लगी रहती हैं जिसे गतिपालक चक्र कहते हैं। जब शैफ्ट को घुमाने वाले बल आघूर्ण का मान घटता या बढ़ता है, तो गतिपालक चक्र अपने अधिक जड़त्व आघूर्ण के कारण लगभग एक समान चाल से घूमता रहता है जिससे झटके वाली स्थिति से बच जाते हैं।

बच्चों के खिलौने के मोटर के नीचे भी एक छोटा सा गतिपालक चक्र लगा रहता है। इसे जमीन से रगड़ कर घुमाकर छोड़ देते हैं। जड़त्व आघूर्ण के कारण मोटर कुछ देर तक चलती रहती है।

प्रश्न 9.
बल आघूर्ण एवं जड़त्व में सम्बन्ध स्थापित कीजिए और इसकी सहायता से जड़त्व आघूर्ण की परिभाषा कीजिए।
उत्तर:
बल आघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण एवं कोणीय त्वरण में सम्बन्ध (Relation between Torque, Moment of Inertia and Angular Acceleration) :
किसी घूर्णन अक्ष के सापेक्ष किसी बल का आघूर्ण बल एवं घूर्णन अक्ष से बल की क्रिया रेखा की लम्बवत् दूरी के गुणनफल से प्राप्त होता है; अर्थात्
बल आघूर्ण = बल × घूर्णन अक्ष से बल की क्रिया रेखा की लम्बवत् दूरी
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -26

या τ = F × r
∵ F = ma एवं a = r.a
जहाँ a रेखीय त्वरण एवं α कोणीय त्वरण है।
τ = ma × r = m × r α × r
या τ = mr²α
यदि पिण्ड बड़ा है तो उसे अनेक छोटे-छोटे द्रव्यमान कणों से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं जिनके द्रव्यमान क्रमश: \(m_1, m_2, \ldots, m_n\) हैं। सभी कणों का कोणीय त्वरण पिण्ड के कोणीय त्वरण α के बराबर होगा। इन सभी कणों पर लगने वाले बल आघूर्णों का योग पूरे पिण्ड का बल आघूर्ण प्रदान करेगा। अत:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -27
उक्त समीकरण में यदि α = 1 rad.s-2 तो τ = I “अर्थात् किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण उस बल आघूर्ण के तुल्य है जो पिण्ड में एकांक कोणीय त्वरण उत्पन्न कर दे।”

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प्रश्न 10.
घूर्णन ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए एवं इसकी सहायता से जड़त्व आघूर्ण की परिभाषा कीजिए।
उत्तर:
घूर्णन गतिज ऊर्जा (Rotational Kinetic Energy):
घूर्णन गति में किसी कण की गतिज ऊर्जा ही घूर्णन गतिज ऊर्जा कहलाती है। इसे ER से व्यक्त करते हैं। यदि m द्रव्यमान का कण घूर्णन अक्ष के परितः r त्रिज्या के वृत्तीय मार्ग पर v चाल से घूर्णन गति करता है तो उसकी घूर्णन गतिज ऊर्जा
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -28
यदि पिण्ड बड़ा है तो उसे अनेक छोटे-छोटे द्रव्यमान कणों से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं। इन कणों के द्रव्यमान क्रमशः \(m_1, m_2, m_3, \ldots, m_n\) एवं घूर्णन अक्ष से इनकी दूरियाँ क्रमश: \(r_1, r_2, r_3, \ldots, r_n\) हैं। चूँकि पूरा पिण्ड ω कोणीय वेग से घूर्णन गति करता है, अत: सभी कणों का कोणीय वेग ω होगा। सभी कणों की घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का योग पूरे पिण्ड की घूर्णन गतिज ऊर्जा प्रदान करेगा; अर्थात्
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -29
जहाँ I = Σmr² = पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण
समी० (1) एक समान घूर्णन गति में घूर्णन ऊर्जा का सूत्र है। स्पष्ट है कि जिस प्रकार किसी पिण्ड की रेखीय गतिज ऊर्जा (\(\frac{1}{2} m v^2\)) पिण्ड के द्रव्यमान m तथा रेखीय वेग के वर्ग v² के गुणनफल की आधी होती है; उसी प्रकार घूर्णन गतिज ऊर्जा (\(\frac{1}{2} I \omega^2\)) पिण्ड के जड़त्व आघूर्ण I एवं कोणीय वेग के वर्ग ω² के गुणनफल की आधी होती है।
समी० (1) में यदि ω = 1 rad.s-1
तो I = 2 Er
अर्थात् “किसी घूर्णन अक्ष के सापेक्ष किसी पिण्ड का जड़त्त आघूर्ण उसकी घूर्णन ऊर्जा के दोगुने के तुल्य है जो पिण्ड में एकांक कोणीय वेग की अवस्था में होती है।”
यदि कोई पिण्ड अपनी अक्ष पर घूमने के साथ-साथ सरल रेखा में भी गतिमान हो (जैसे चलते हुए वाहनों के पहिए) तो उसकी कुल गतिज ऊर्जा उसकी घूर्णन गतिज ऊर्जा एवं रेखीय गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होगी। अर्थात्
\(E_{\text {total }}=E_K+E_R[latex]
या [latex]E_{\text {total }}=\frac{1}{2} m v^2+\frac{1}{2} I \omega^2\) ………..(2)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 11.
सिद्ध कीजिए
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र की गति (Motion of Centre of Mass) :
माना एक निकाय n कणों से मिलकर बना है, जिसके द्रव्यमान \(m_1, m_2, m_3 \ldots . m_n\) हैं तथा स्थिति सदिश \(\overrightarrow{r_1}, \overrightarrow{r_2}, \vec{r}_3, \ldots . \vec{r}_n\) हैं। द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा के अनुसार इस निकाय के द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -30
न्यूटन के द्वितीय नियम से, पहले कण पर बल \(\vec{F}_1=m_1 \vec{a}_1\) तथा द्वितीय कण पर बल \(\overrightarrow{F_2}=m_2 \overrightarrow{a_2}\) तथा इसी प्रकार अन्य सभी कणों के लिए बल लेते हैं। अत:
\(M \overrightarrow{a c m}_{c m}=\vec{F}_1+\vec{F}_2+\ldots . \vec{F}_n=\sum_{i=1}^n \vec{F}_i\)
सभी कणों पर लगने वाले बाह्य बलों का योग \(\vec{F}=\sum_{i=1}^n \vec{F}_i\) है। कणों के मध्य लाने वाले आन्तरिक बल, बराबर तथा विपरीत युग्म में होते हैं। अत: वे परस्पर निरस्त हो जाते हैं। इस प्रकार
\(M \overrightarrow{a_{c m}}=\vec{F}=\overrightarrow{F_{\mathrm{ext}}}\)
अत: निकाय का द्रव्यमान तथा द्रव्यमान केन्द्र के त्वरण का गुणनफल निकाय पर आरोपित बाह्म बलों के सदिश योग के बराबर होता है।

प्रश्न 12.
दिखाइये कि क्षैतिज से 8 कोण पर झुके तल पर बिना फिसले लुढ़कने वाले पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण निम्न सम्बन्ध द्वारा दिया जाता है-
\(a=\frac{g \sin \theta}{1+\frac{K^2}{R^2}}\)
जहाँ गुरुत्वीय त्वरण; K पिण्ड की घूर्णन त्रिज्या एवं R त्रिज्या है।
उत्तर:
नत तल पर लोटनी गति (Rolling Motion on Inclined Plane):
जब आनत तल पर कोई पिण्ड बिना फिसले लुढ़कता है तो पिण्ड की इस गति को लोटनी गति कहते हैं। इस गति में पिण्ड अपने द्रव्यमान केन्द्र के परित: अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करती है तथा साथ ही वस्तु का द्रव्यमान केन्द्र भी आगे बढ़ता है। इस प्रकार लोटनी गति में स्थानान्तरीय एवं घूर्णन गति दोनों प्रकार की गति होती है। नत तल पर जब वस्तु नीचे की ओर लोटनी गति करती है तो पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा कम होती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है।

माना एक नत तल θ° के कोण पर झुका है और तल के शीर्ष की ऊँचाई h है। शीर्ष से कोई पिण्ड स्वतन्त्रतापूर्वक नत तल पर छोड़ दिया जाता है तो लोटनी गति करते हुए नीचे आती है। तल के आधार पर पहुँचने पर पिण्ड की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा (M g h), पिण्ड की गतिज ऊर्जा \(\left(\frac{1}{2} M v^2\right)\) एवं घूर्णन ऊर्जा \(\left(\frac{1}{2} I \omega^2\right)\) में बदल जाती है। अत:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -31

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 13.
कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धान्त उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
कोणीय संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Angular Momentum):
जब कोई पिण्ड एक बाह्य बल आघूर्ण के अन्तर्गत किसी अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करता है तो पिण्ड के कोणीय संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगने वाले बल आघूर्ण के बराबर होती है। अर्थात्
\(\vec{\tau}=\frac{d \vec{J}}{d t}\)
\(\text { यदि } \vec{\tau}=0 \text { तो } \frac{d \vec{J}}{d t}=0\)
\(\text { या } \vec{J}\text { नियतांक }\)
\(\text { या } J=I \omega\text { नियतांक }\)
अर्थात् “बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में कण या पिण्ड का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है। यही कोणीय संवेग संरक्षण का नियम है।”
बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में यदि घूर्णन गति के दौरान किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण I1 से बदलकर I1 कर दिया जाये तो माना उसका कोणीय वेग ω1 से ω2 में बदल जाता है। अतः कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त से,
I1ω1 = I2ω2 …………(1)

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प्रश्न 14.
दृढ़ पिण्डों के संतुलन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दृढ़ पिण्डों का संतुलन (Equilibrium of Rigid Bodies):
किसी पिण्ड पर आरोपित बल के कारण स्थानान्तरीय गति उत्पन्न होती है जिसके कारण पिण्ड के रेखीय संवेग में परिवर्तन होता है। रेखीय संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल के बराबर होती है। ठीक उसी प्रकार यदि पिण्ड पर बल आघूर्ण क्रिया करता है तो पिण्ड घूर्णन गति करता है, जिसके कारण पिण्ड के कोणीय संवेग में परिवर्तन होता है और कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल आघूर्ण के बराबर होती है।

यदि बाह्म बल का मान शून्य हो जाये तो रेखीय संवेग नियत हो जाता है और यदि बल आघूर्ण शून्य हो जाये तो कोणीय संवेग का मान नियत हो जाता है। अत: स्पष्ट है बाह्य बल एवं बल आघूर्ण दोनों शून्य होने पर पिण्ड का रेखीय त्वरण एवं कोणीय त्वरण दोनों शून्य हो जाते हैं।
” किसी दृढ़ पिण्ड को यांत्रिक संतुलन की अवस्था में तब कहा जाता है जब इसके रेखीय व कोणीय दोनों प्रकार के संवेग समय के साथ न बदलें।” अर्थात् पिण्ड में न तो रेखीय त्वरण हो और न ही कोणीय त्वरण हो। इस प्रकार किसी पिण्ड के यांत्रिक संतुलन के लिए-
(i) पिण्ड पर लगने वाले सभी बलों का सदिश योग शून्य होना चाहिए, अर्थात्
\(\vec{F}_1+\vec{F}_2+\ldots+\vec{F}_n=\sum_{i=1}^n F_i=0\) …………(1)
यदि पिण्ड पर लगने वाला कुल बल शून्य होगा तो उस पिण्ड के रेखीय संवेग में समय के साथ परिवर्तन नहीं होगा। समी० (1) को पिण्ड के स्थानान्तरीय संतुलन की शर्त कहते हैं।
समी० (1) को x, y व z घटकों के रूप में निम्न प्रकार लिख सकते
हैं-
\(\sum_{i=1}^n \vec{F}_{i x}=0 ; \sum_{i=1}^n \vec{F}_{i y}=0 ; \sum_{i=1}^n \vec{F}_{i z}=0\) ……….(2)

यहाँ Fix, Fiy व Fiz बल Fi के क्रमशः X, Y व Z दिशाओं में घटक हैं।

(ii) दृढ़ पिण्ड पर लगने वाले बल आघूर्णों का सदिश योग शून्य होना चाहिए, अर्थात्
\(\overrightarrow{\tau_1}+\overrightarrow{\tau_2}+\overrightarrow{\tau_3}+\ldots+\overrightarrow{\tau_n}=\sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_i}=0\) ………..(3)
यदि पिण्ड पर आरोपित कुल बल आघूर्ण शून्य है तो उसका कुल कोणीय संवेग समय के साथ नहीं बदलेगा। समीकरण (3) को पिण्ड के घूर्णी संतुलन की शर्त है। समी० (3) निम्न तीन समीकरणों के तुल्य हैं-
\(\sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_{i x}}=0 ; \sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_{i y}}=0 ; \sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_{i z}}=0\)

जहाँ, τix, τiy व τiz क्रमशः X, Y व Z दिशाओं में τi के घटक हैं। समीकरण (2) व (4) किसी दृढ़ पिण्ड के यांत्रिक संतुलन के लिए आवश्यक छः ऐसी शर्तें बताते हैं जो एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करती हैं।

यदि किसी पिण्ड पर लगने वाले बल एक तल में हों तो पिण्ड के यांत्रिक संतुलन के लिए केवल तीनों शर्तों का पूर्ण होना आवश्यक होगा। इनमें से दो शर्तें स्थानान्तरीय संतुलन के संगत होंगी जिनके अनुसार सभी बलों के इस तल स्वच्छ चुनी गईं दो परस्पर लम्बवत् अक्षों के अनुदिश अवयवों का सदिश योग अलग-अलग शून्य होगा। तीसरी शर्त घूर्णी संतुलन के संगत है। बलों के तल के अभिलम्बवत् अक्ष के अनुदिश बल आघूर्णों का सदिश योग शून्य होगा।

एक पिण्ड आंशिक संतुलन में तभी हो सकता है अर्थात् दृढ़ पिण्ड स्थानान्तरीय संतुलन में तो हो, परन्तु घूर्णी संतुलन में न हो या फिर घूर्णी संतुलन में तो हो परन्तु स्थानान्तरीय संतुलन में न हो।

सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न
(Matrix Matching Type Questions)

प्रश्न 1.
पृथ्वी की त्रिज्या व द्रव्यमान M है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या सिकुड़कर आधी हो जाये जबकि उसका द्रव्यमान परिवर्तित न हो तो स्तम्भ को स्तम्भ ।। से सुमेलित कीजिए ।

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) पृथ्वी का कोणीय वेग(P) दो गुना हो जायेगा
(B) पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन का परिक्रमण काल(Q) चार गुना हो जायेगा
(C) पृथ्वी की घूर्णन गतिज ऊर्जा(R) नियत रहेगा
(S) कोई नहीं

उत्तर:

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) पृथ्वी का कोणीय वेग(R) नियत रहेगा
(B) पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन का परिक्रमण काल(S) कोई नहीं
(C) पृथ्वी की घूर्णन गतिज ऊर्जा(Q) चार गुना हो जायेगा

प्रश्न 2.
सूची (A) तथा सूची (B) को सुमेलित कीजिए ।

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) वृत्ताकार वलय ( इसके केन्द्र से गुजरने वाली एवं इसके तल के लम्बवत् अक्ष)(P) \(I=\frac{2}{5} M R^2\)
(B) वृत्ताकार डिस्क (ज्यामितीय अक्ष)(Q) \(I=\frac{2}{3} M R^2\)
(C) ठोस गोला (व्यास)(R) \(I=\frac{1}{2} M R^2\)
(D) खोखला गोला (व्यास)(S) \(I=M R^2\)

उत्तर:

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) वृत्ताकार वलय ( इसके केन्द्र से गुजरने वाली एवं इसके तल के लम्बवत् अक्ष)(S) \(I=M R^2\)
(B) वृत्ताकार डिस्क (ज्यामितीय अक्ष)(R) \(I=\frac{1}{2} M R^2\)
(C) ठोस गोला (व्यास)(P) \(I=\frac{2}{5} M R^2\)
(D) खोखला गोला (व्यास)(Q) \(I=\frac{2}{3} M R^2\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

आंकिक प्रश्न (Numerical Questions )

द्रव्यमान केन्द्र पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
1 kg तथा 3 kg के दो कण क्रमश: \((2 \hat{i}+3 \hat{j})\) तथा \((3 \hat{i}-4 \hat{j})\) ms-1 के वेग से गतिमान हैं। द्रव्यमान केन्द्र का वेग बताइये।
उत्तर:
\(\frac{1}{4}(11 \hat{i}-9 \hat{j})\)

प्रश्न 2.
तीन बिन्दु द्रव्यमान m1 = 1kg, m2 = 2 kg एवं m3 = 3 kg एक समबाहु त्रिभुज के तीनों शीर्षो पर स्थित हैं। त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई ० है द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति के सापेक्ष
उत्तर:
\(-\left(\frac{7}{12} a, \frac{3 \sqrt{3}}{12} a, 0\right)\)

प्रश्न 3.
दो कणों के एक निकाय में, कणों के द्रव्यमान क्रमशः 2 व 5 kg हैं। इनकी स्थितियाँ t = 0 पर क्रमश: \((4 \hat{i}+3 \hat{j})\) तथा \((6 \hat{i}-3 \hat{j}+7 \hat{k})\) m हैं तथा उनके वेग क्रमशः \((10 \hat{i}-6 \hat{k})\) तथा \((3 \hat{i}+6 \hat{j})\) ms-1 है। इस कण तन्त्र के द्रव्यमान केन्द्र का वेग ज्ञात कीजिए | समय t = 0 तथा t = 4 पर द्रव्यमान केन्द्र की स्थितियाँ क्या होंगी?
उत्तर:
\(v_{C M}=\frac{1}{7}(35 \hat{i}+30 \hat{j}-12 \hat{k}) \mathrm{ms}^{-1}\)
\(t=0 \text { पर } \overrightarrow{r_{C M}}=\frac{1}{7}(38 \hat{i}-29 \hat{j}+35 \hat{k}) \mathrm{m}\)
\(t=4 \text { पर } \overrightarrow{r_{C M}}=\frac{1}{7}(178 \hat{i}+91 \hat{j}-13 \hat{k}) \mathrm{m}\)

बल आघूर्ण, कोणीय संवेग तथा घूर्णन गति के नियमों पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 4.
m द्रव्यमान का एक कण वेग से क्षैतिज से 6 कोण पर फेंका जाता है जब कण महत्तम ऊँचाई पर पहुँचता हैं तब प्रक्षेपण बिन्दु के परितः कोणीय संवेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
\(\frac{m v^3 \sin ^2 \theta \cos \theta}{2 g}\)

प्रश्न 5.
0.05 kg.m² जड़त्व आघूर्ण वाला एक गतिमान पहिया 10 चक्कर / मिनट से अपने अक्ष के परितः घूर्णन कर रहा है। उसको 5 गुना तेजी से घुमाने के लिए और कितना कार्य करना पड़ेगा?
उत्तर:
0.6573 J

प्रश्न 6.
20 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड 0.20m व्यास के वृत्ताकार पथ पर 3 सेकण्ड में 100 चक्कर की दर से घूम रहा है। ज्ञात कीजिए – (i) पिण्ड की घूर्णन गतिज ऊर्जा, (ii) पिण्ड का कोणीय संवेग, r = 9.86
उत्तर:
(i) 4.382×10³ J
(ii) 41.87 J.s.

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 7.
किसी वलय (ring) का जड़त्व आघूर्ण 0.40 kg.m² है। यदि यह प्रति मिनट 2100 चक्कर लगा रही हो तो इसे 2s में रोकने के लिए कितने बल आघूर्ण की आवश्यकता होगी?
उत्तर:
44 N.m

प्रश्न 8.
एक व्यक्ति अपने हाथों में 10-10 kg के गोले लेकर 2s में 1 चक्कर लगाने वाली घूमती मेज पर खड़ा है। उसकी भुजाएं फैली हैं तथा प्रत्येक गोला घूर्णन अक्ष से 3 m दूर है। यदि वह व्यक्ति गोलों को दूर फेंक दे तो मेज का नया कोणीय वेग क्या होगा? व्यक्ति सहित मेज का जड़त्व आघूर्ण 15 kg.m² है।
उत्तर:
6.5 चक्कर / सेकण्ड

प्रश्न 9.
5 × 10 kg.m-4 जड़त्व आघूर्ण की एक चकती अपनी अक्ष के परितः 40 चक्कर / मिनट लगा रही है। यदि 0.02 Kg की मोम की एक गोली अक्ष से 0.08m की दूरी पर धीरे से गिरा दी जाती है। तो अब वह कितने चक्कर प्रति मिनट करेगी?
उत्तर:
31.85 चक्कर / मिनट

प्रश्न 10.
25 cm त्रिज्या तथा 5000 g द्रव्यमान का ऊर्ध्वाधर ठोस पहिया अपनी क्षैतिज धुरी पर घूमने के लिए स्वतन्त्र है। पहिए पर एक डोरी लिपटी है। डोरी को 2 N के बल से 55 तक खींचा जाता है। गणना कीजिए कि पहिया किस कोणीय वेग से घूमने लगेगा? (धुरी घर्षण रहित है।)
उत्तर:
16 rad.s-1

संतुलन पर आधारित

प्रश्न 11.
समान घनत्व की एक मीटर लम्बी छड़ 40 cm के निशान पर कीलकित की जाती है। 10g द्रव्यमान एक ब्लॉक 10 cm के चिन्ह पर लटकाया जाता है। यदि छड़ सन्तुलित अवस्था में हो तो उसका द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -32
उत्तर:
30 g

प्रश्न 12.
एक छड़ जिसका भार W है, दो समान्तर क्षुरधारों A व B पर आधारित है, क्षैतिज स्थिति में संतुलित है। क्षुरधारों के बीच की दूरी d है। छड़ का द्रव्यमान केन्द्र क्षुरधार A से x दूरी पर है। बिन्दु A व B पर अभिलम्ब प्रतिक्रियाएं ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(R_A=\frac{W(d-x)}{d} ; R_B=\frac{W \cdot x}{d}\)

जड़त्व आघूर्ण, घूर्णन गतिज ऊर्जा तथा संरक्षण के नियमों पर आधारित

प्रश्न 13.
लकड़ी के हल्के मीटर पैमाने 18 पर 200 g व 300 g के भार क्रमश: 20 cm व 70 cm के चिन्हों पर रखे हैं। इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण (i) 0cm; (ii) 50 cm (iii) 100 cm वाले चिन्हों से गुजरने वाली तथा मीटर पैमाने के लम्बवत् अक्षों के परितः ज्ञात
कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -33
उत्तर:
(i) 15.5 × 105 g.cm²;
(ii) 3 × 105 g.cm²;
(iii) 5.9 × 105 g.cm²

प्रश्न 14.
एक वृत्ताकार चकती जिसका द्रव्यमान 49 kg तथा त्रिज्या 50 cm है, अपनी अक्ष के परितः 120 घूर्णन / मिनट की दर से घुमायी जाती है। चकती की गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
484J

प्रश्न 15.
एक मीटर लम्बी एक पतली छड़ पर पाँच बिन्दुवत् कण जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 1 kg है, समान दूरी पर क्रमश: A, B, C, D और E पर चित्र के अनुसार स्थित हैं। छड़ का द्रव्यमान 0.5 है जो केन्द्रीय बिन्दु पर केन्द्रित माना गया है। इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण से पारित एवं छड़ के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
2 kg.m²

प्रश्न 16.
यदि पृथ्वी अचानक सिकुड़ जाती है जिससे इसकी त्रिज्या पूर्व त्रिज्या की एक तिहाई रह जाये तो अब दिन कितना छोटा हो जायेगा? यह मान लीजिए कि द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
उत्तर:
21 घंटे 20 मिनट

प्रश्न 17.
एक पुच्छल तारें की सूर्य से अधिकतम एवं न्यूनतम दूरी क्रमश: 1.4 × 1012 m एवं 7 × 1010 m है। यदि सूर्य के निकटतम इसका वेग 6 × 104 ms-1 है तो दूरस्थ स्थिति में इसका वेग ज्ञात कीजिए। पुच्छल तारे का पथ वृत्ताकार माना गया है।
उत्तर:
3 × 10³ ms-1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 18.
एक 500 kg द्रव्यमान एवं 1 m त्रिज्या वाला गतिपालक चक्र 500 घूर्णन प्रति मिनट की दर से घूम रहा है। यह मानते हुए कि उसका सम्पूर्ण द्रव्यमान इसकी परिधि पर रहा है, निम्नलिखित की गणना कीजिए।
(i) कोणीय वेग (ii) जड़त्व आघूर्ण (iii) घूर्णन ऊर्जा ।
उत्तर:
(i) 52.33 rad.s-1
(ii) 500 kg.m²;
(iii) 6.85 × 105 J

लोटनी गति पर आधारित

प्रश्न 19.
10 kg द्रव्यमान तथा 20 cm त्रिज्या का एक गोला 5 mis के रेखीय वेग से एक क्षैतिज पर बिना फिसले लुढ़क रहा है। इसकी कुल गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर;
175 J

प्रश्न 20.
एक वृत्ताकार चकती का द्रव्यमान 0.05 kg तथा त्रिज्या 0.01 m है। यह क्षैतिज तल पर 0.05 ms-1 के वेग से लुढ़कता है। कुल गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
9.4 × 10-5 J

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. निम्नलिखित में से किस धातु का निक्षालन (निष्कर्षण) सायनाइड विधि द्वारा किया जाता है?
(अ) सोडियम
(ब) सिल्वर
(स) ऐलुमिनियम
(द) कॉंपर
उत्तर:
(ब) सिल्वर

2. निम्नलिखित अभिक्रिया धातुओं के शोधन की किस विधि से सम्बन्धित है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 1
(अ) मंडल परिक्करण
(ब) वॉन-आरकलल विधि
(स) मान्ड प्रक्रम
(द) वर्णलेखिकी
उत्तर:
(ब) वॉन-आरकलल विधि

3. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक ऐलुमिनियम का अयस्क है?
(अ) Al2O3
(ब) Na3AlF6
(स) Al2O3 . H2O
(द) Al2O3 . 2H2O
उत्तर:
(द) Al2O3 . 2H2O

4. भूपर्पटी में सबसे अधिक मात्रा में पायी जाने वाली धातु है-
(अ) Mg
(ब) Ag
(स) Al
(द) Cu
उत्तर:
(स) Al

5. अयस्कों के सान्द्रण की फेन (झाग) प्लवन विधि कौनसे अयस्कों के लिए प्रयुक्त होती है?
(अ) कार्बोनेट अयस्क
(ब) सल्फाइड अयस्क
(स) औंक्साइड अयस्क
(द) हेलाइड अयस्क
उत्तर:
(ब) सल्फाइड अयस्क

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

6. सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में परिवर्तित करने का प्रक्रम है-
(अ) निस्तापन
(ब) भर्जंन
(स) निक्षालन
(द) फेन प्लवन विधि
उत्तर:
(ब) भर्जंन

7. कॉपर के धातु कर्म में FeO की अशुद्धि को हटाने के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला गालक है-
(अ) CaO
(ब) CaCO3
(स) SiO2
(द) Cu2S
उत्तर:
(स) SiO2

8. जिंक ऑक्साइड के अपचयन के लिए कौनसा अपचायक प्रयुक्त किया जाता है?
(अ) CO
(ब) कोक
(स) Al
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) कोक

9. पीतल बनाने में प्रयुक्त धातुएँ है-
(अ) Cu + Ni
(ब) Fe + Cu
(स) Cu + Zn
(द) Cu + Mn
उत्तर:
(स) Cu + Zn

10. निम्नलिखित में से मैग्नेटाइट अयस्क कौनसा है?
(अ) Fe2O3
(ब) ZnO
(स) Na3AlF6
(द) Fe3O4
उत्तर:
(द) Fe3O4

11. जिंक धातु के शोधन की विधि है-
(अ) मंडल परिष्करण
(ब) प्रभाजी आसवन
(स) वाष्म अवस्था परिष्करण
(द) वैद्युत अपघटनी शोधन
उत्तर:
(ब) प्रभाजी आसवन

12. कैलामाइन, निम्नलिखित में से किस धातु का अयस्क है?
(अ) Cu
(ब) Ag
(स) Zn
(द) Al
उत्तर:
(स) Zn

13. धातकर्म में निस्तान प्रत्रम किस प्रक्र है अयस्कों के लिए प्रयुक्त नहाँ होत है?
(अ) कलयेज्ञित औक्साइड
(ब) काबनिद
(स) सक्फाइड
(द) उपर्वुक्त सभी
उत्तर:
(स) सक्फाइड

14. मंड्डल परिफ्राग किजि किस शतु के शोधन के लिए प्रदुम्त्त की जाती है?
(अ) जम्निनिम्म
(ब) गैलिखम
(स) इंध्यिम
(द) उर्ज्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उर्ज्युक्त सभी

15. Al2O3 के वैद्युत अपषटन से Al प्राप्त करने की सिधि है-
(अ) मौन्ड प्रक्रम
(ब) बॉन-असक्त विधि
(स) सल- हेराएट प्रक्म
(द) मदल बिंजि
उत्तर:
(स) सल- हेराएट प्रक्म

16. नौतय, निम्नलिखित में से किसका सुनि है?
(अ) Cu
(ब) Al
(स) Zn
(द) Fe
उत्तर:
(ब) Al

17. कौपर के बैद्युत अपषटनी शोधन में सौने की कुछ माता किस हूप में मिलती है?
(अ) कैषेड
(ब) वैद्युत अनबटृद
(स) श्नोड मंक
(द) कैराड पंक
उत्तर:
(स) श्नोड मंक

18. निम्नलिखित में से किस धात्व के पहुकार्म में दर्मद्ध किधि का प्रयोग किवा जाता है?
(अ) Ag
(ब) Pb
(स) Fe
(द) Cr
उत्तर:
(द) Cr

19. मोडिवम के निबर्बें की किषि है-
(अ) केषर की विधि
(ब) धर्नाइट विधि
(स) द्वॉक की विधि
(द) सर्पक की विधि
उत्तर:
(ब) धर्नाइट विधि

20. चौड़ी के धातुकर्म में बना वौगिक है-
(अ) AgCN
(ब) [Na[Ag(CN)2]
(स) Na3[Ag(CN)4]
(द) वपर्वुक्त समी
उत्तर:
(ब) [Na[Ag(CN)2]

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

21. धातुं के सल्पद्ड अवस्कों को समान्यक् फेन सबन बिधि दूरा सान्हित किय जल है। निम्नलिखित सार्फाइड अवस्कों में से कौनसा अपवाद है गिले रासायनिक विषिए त्वरा सन्द्रित किया ज्ञाता है?
(अ) अजेंन्टम्ट
(ब) गैलेना
(स) कापर घझढ़्ट
(द) सेलेरइट
उत्तर:
(द) सेलेरइट

22. गालक, अगतनीय अथृद्धियों को गलाइए बनात है-
(अ) अधत्री
(ब) धतुमाल
(सं) मैट
(द) मैट्रिक्य
उत्तर:
(ब) धतुमाल

23. कॉचर के निद्रांग में कौन अयस्क को सिलिक तथा क्षेक दूरा है। घतुमल क अगुसात्र है-
(अ) FeSiO3
(ब) Fe2O3
(स) FeSi ( वोस)
(द) FeSi (बाल)
उत्तर:
(अ) FeSiO3

24. निम्नलिखित कपनों में से गसत क्षच को पहचानिदे-
(अ) अयन्त के सान्दूर में द्रवीब धवन से हूके कैं के कर जल के साध बहकर बाहर निकल वाते हैं तथा अ्यस्क के भागी का शोष चर ज्ञाते हैं।
(ब) श्रद्ध Al2O3 को, बौक्साद्ट अपस्क का सान सोडियम लम्ड्रौस्सद्ड के संथ निषालन से प्राप्त कहीं किपा व्या सकत है।
(स) फेन प्लवन विधि के दौरन अयस्क के कण को फेन के रूप में अलग कर लिया जाता है और गैंग शेष बचा रहता है।
(द) सल्फाइड अयस्कों को, फेन-प्लवन विधि में तेल तथा जल का अनुपात परिवर्तित करके सफलतापूर्वक अलग किया जा सकता है।
उत्तर:
(ब) श्रद्ध Al2O3 को, बौक्साद्ट अपस्क का सान सोडियम लम्ड्रौस्सद्ड के संथ निषालन से प्राप्त कहीं किपा व्या सकत है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाने वाली तीन धातुएँ बताइए।
उत्तर:
सोना, चाँदी तथा प्लेटिनम।

प्रश्न 2.
सान्द्रण की फेन प्लवन विधि किस प्रकार के अयस्कों के लिए प्रयुक्त की जाती है?
उत्तर:
सल्फाइड अयस्कों के लिए।

प्रश्न 3.
गालक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे पदार्थ जो अशुद्धियों के गलनांक को कम करने के लिए प्रगलन प्रक्रम में मिलाए जाते हैं, उन्हें गालक कहते हैं।

प्रश्न 4.
धातुमल क्या होता है?
उत्तर:
अशुद्धि तथा गालक की क्रिया से बना पदार्थ धातुमल या कीट कहलाता है। इसका गलनांक कम होने के कारण यह आसानी से पिघल जाता है।

प्रश्न 5.
आधात्री या गैंग किसे कहते हैं?
उत्तर:
अयस्क के साथ उपस्थित अवांछनीय पदार्थों जैसे कंकड़, रेत तथा मिट्टी को आधात्री या मैट्रिक्स कहते हैं।

प्रश्न 6.
प्लवन कारक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे पदार्थ जो सल्फाइड अयस्क के कणों को जल प्रतिकर्षी बनाकर जल की सतह पर लाते हैं, उन्हें प्लवन कारक कहते हैं।

प्रश्न 7.
प्लवन कारकों के दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
सोडियम एथिल जेन्थेट तथा सोडियम ऐमिल जेन्थेट प्लवन कारक होते हैं।

प्रश्न 8.
किस प्रकार के अयस्कों के लिए निस्तापन प्रक्रम की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
जलयोजित ऑक्साइड, कार्बोनेट तथा हाइड्रॉक्साइड अयस्कों के लिए निस्तापन प्रक्रम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 9.
थर्माइट क्या होता है?
उत्तर:
धातु ऑक्साइड तथा ऐलुमिनियम चूर्ण के मिश्रण को थर्माइट कहते हैं।

प्रश्न 10.
क्रोमियम के ऑक्साइड (Cr2O3) के अपचयन के लिए कार्बन के स्थान पर Al का प्रयोग किया जाता है, क्यों?
उत्तर:
Cr की ऑक्सीजन से बन्धुता, कार्बन की ऑक्सीजन से बन्धुता की तुलना में अधिक होती है, अतः क्रोमियम ऑक्साइड का अपचयन कार्बन के बजाय Al से किया जाता है।

प्रश्न 11.
पायरोधातुकर्म या तापीय अपचयन क्या होता है?
उत्तर:
धातु ऑक्साइडों को गर्म करके धातु में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को पायरोधातुकर्म कहते हैं।

प्रश्न 12.
वर्णलेखिकी के विभिन्न प्रकार बताइए।
उत्तर:
वर्णलेखिकी मुख्यतः चार प्रकार की होती है-

  • पेपर वर्णलेखिकी
  • स्तंभ वर्णलेखिकी
  • गैस वर्णलेखिकी
  • पतली परत वर्णलेखिकी।

प्रश्न 13.
स्तंभ वर्णलेखिकी में प्रयुक्त अधिशोषक बताइए।
उत्तर:
ऐलुमिना जेल (Al2O3)

प्रश्न 14.
कॉपर का शोधन किस विधि द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
कॉपर का शोधन वैद्युत अपघटनी विधि से किया जाता है।

प्रश्न 15.
सिलिकॉन के शोधन की विधि का नाम बताइए।
उत्तर:
मण्डल परिष्करण विधि।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 16.
कॉपर तथा मैग्नीशियम के मिश्रण में से इन धातुओं को किस विधि द्वारा पृथक् किया जाता है तथा क्यों?
उत्तर:
Mg तथा Cu के मिश्रण में से इन धातुओं को द्रवण विधि द्वारा पृथक् किया जाता है क्योंकि Mg की तुलना में Cu का गलनांक उच्च होता है।

प्रश्न 17.
जिंक तथा आयस के मिश्रण के पुथक्करण की विधि बताइए।
उत्तर:
Zn तथा Fe के मिश्रण को आसवन विधि द्वारा पृथक् किया जाता है क्योंकि Zn का वाष्पीकरण सुगमता से हो जाता है।

प्रश्न 18.
थर्माइट विधि द्वारा कौनसे धातु ऑक्साइडों का अपचयन किया जाता है?
उत्तर:
Cr2O3, MnO2 इत्यादि।

प्रश्न 19.
प्रगलन की प्रक्रिया कौनसी भट्टी में की जाती है?
उत्तर:
वात्या भट्टी।

प्रश्न 20.
Zn, Cd तथा Hg के शोधन के लिए कौनसी विधि प्रयुक्त की जाती है?
उत्तर:
आसवन विधि।

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
भर्जन प्रक्रम को समझाइए।
उत्तर:
भर्जन (Roasting)-इस प्रक्रम में सल्फाइड अयस्कों को वायु (O2) की उपस्थिति में धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर परावर्तनी भट्टी में तेजी से गर्म करते हैं जिससे सल्फाइड, ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं तथा SO2 गैस निकल जाती है।
उदाहरण-
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2
2Pbs + 3O2 → 2Pbo + 2SO2
2Zns + 3O2 → 2Zno + SO2

प्रश्न 2.
धातु ऑक्साइडों के अपचयन की थर्माइट विधि को समझाइए।
उत्तर:
धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन – धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन विभिन्न विधियों द्वारा किया जा सकता है जो कि धातु ऑक्साइड की प्रकृति पर निर्भर करता है।

(i) रासायनिक अपचयन (प्रगलन ) – इस विधि में धातु ऑक्साइड का अपचयन कार्बन या CO द्वारा किया जाता है। यह प्रक्रम वात्या भट्टी में किया जाता है, जिसके लिए धातु ऑक्साइड, कार्बन (अपचायक) तथा गालक (फ्लक्स) के मिश्रण को भट्टी में डालकर गर्म किया जाता है तो कार्बन द्वारा धातु ऑक्साइड के अपचयन से धातु प्राप्त होती है जो कि द्रवित अवस्था में होती है। कुछ धातु ऑक्साइड आसानी से अपचयित हो जाते हैं, जबकि कुछ को अपचयित करना कठिन होता है। अपचयन की सामान्य अभिक्रिया निम्नलिखित है-

MxOy + yC → xM + yCO

ऊष्मागतिकी की मूल धारणाएँ धातुकर्मीय परिवर्तनों के सिद्धान्त को समझने में सहायक होती हैं। तापीय अपचयन (पायरो धातुकर्म) के लिए आवश्यक ताप परिवर्तन तथा ऑक्साइड के अपचयन के लिए आवश्यक अपचायक की पहचान गिब्ज ऊर्जा द्वारा की जाती है। इसके लिए यह आवश्यक है कि दिए गए ताप पर गिब्ज ऊर्जा का मान ऋणात्मक हो।
उदाहरण- Fe के धातुकर्म में होने वाली अभिक्रियाएँ-

Fe2O3 + 3C → 2Fe + 3CO
Fe2O3 + CO → 2FeO + CO2
FeO + CO → Fe + CO2

इस प्रक्रम में कार्बन (कोक) ईंधन तथा अपचायक दोनों का कार्य करता है। धातु के साथ उपस्थित अशुद्धियों का गलनांक उच्च होने के कारण वे आसानी से नहीं पिघलतीं अतः इनके गलनांक को कम करने के लिए फ्लक्स या गालक मिलाया जाता है जो अशुद्धि के साथ क्रिया करके धातुमल (slag) बनाता है, यह आसानी से पिघल जाता है तथा हल्का होने के कारण द्रवित धातु की सतह पर तैरता है। आयरन के धातुकर्म में SiO2 की अशुद्धि होती है जिसके लिए गालक के रूप में CaO(CaCO3) प्रयुक्त किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 2
ताँबे के धातुकर्म में FeO की अशुद्धि उपस्थित होने पर SiO2 को गालक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 3
ताँबा, कॉपर मेट के रूप में प्राप्त होता है जिसमें Cu2S तथा FeS होता है।

(ii) थर्माइट विधि (गोल्डश्मिट विधि) या एलुमिनोतापी Cr तथा Mn के ऑक्साइड कार्बन द्वारा आसानी से अपचयित नहीं होते अतः इनका अपचयन सक्रिय धातुओं जैसे Al से किया जाता है। धातु ऑक्साइड तथा ऐलुमिनियम चूर्ण के मिश्रण को थर्माइट कहते हैं। अतः इस विधि को थर्माइट विधि भी कहते हैं। इस विधि में ऑक्साइड को ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ Mg से जलाते हैं। प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है, अतः यह स्वतः चलती रहती है।
Cr2O3 + 2 Al → Al2O3 + 2Cr + x K. Cal
3 MNO2 + 4Al → 2Al2O3 + 3Mn + x K.Cal
भारी धातु (द्रव) नीचे रहती है तथा द्रवित Al2O3 ऊपर की तरफ रहता है, जिसे टेपिंग होल द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।

प्रश्न 3.
(a) कच्चे लोहे तथा ढलवाँ लोहे का संघटन बताइए तथा कच्ये लोहे से ढलवाँ लोहा किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
(b) ढलवाँ लोहे से पिटवाँ लोहा कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
(a) कच्चे लोहे में 4% कार्बन तथा सूक्ष्म मात्रा में S, P, Si तथा Mn की अशुद्धियाँ होती हैं। इसे विभिन्न आकृतियों में ढाला जा सकता है। ढलवाँ लोहा में 3% कार्बन होता है। यह अतिकठोर तथा भंगुर होता है, अतः इसे पीटा नहीं जा सकता। कच्चे लोहे को रद्दी लोहे तथा कोक के साथ गर्म करने पर ढलवाँ लोहा प्राप्त होता है।

(b) ढलवाँ लोहे को हेमाटाइट की परत चढ़ी परावर्तनी भट्टी में गर्म करने से अशुद्धियाँ आक्सीकृत हो जाती हैं तथा हेमाटाइट कार्बन को कार्बन मोनोक्साइड में आक्सीकृत कर देता है-
Fe2O3 + 3C → 2Fe + 3CO
इसमें चूना पत्थर को गालक के रूप में मिलाया जाता है जिससे सल्फर, सिलिकन तथा फॉस्फोरस ऑक्सीकृत होकर धातुमल में चले जाते हैं। धातु को निकाल लिया जाता है तथा रोलरों पर से गुज़ार कर धातुमल से पृथक् कर लिया जाता है। पिटवाँ लोहा, लोहे का शुद्धतम रूप है तथा यह आघातवर्धनीय होता है। इसमें 0.25 तक कार्बन होता है।

प्रश्न 4.
अयस्क के सान्द्रण के लिए निक्षालन प्रक्रम का प्रयोग कब किया जाता है? सोने के निष्कर्षण के उदाहरण द्वारा इस प्रक्रम को समझाइए।
उत्तर:
जब कोई अयस्क, किसी उपयुक्त विलायक में विलेय हो तो प्रायः सान्द्रण की निक्षालन विधि का प्रयोग किया जाता है। सोने के निष्कर्षण में सायनाइड द्वारा निक्षालन किया जाता है। इसमें Au का ऑक्सीकरण होता है। इसके पश्चात् अधिक सक्रिय धातु जैसे जिंक का अपचायक के रूप में प्रयोग करके Au को विस्थापित कर लिया जाता है। इस प्रक्रम में प्रयुक्त अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
4Au(s) + 8CN(aq) + 2H2O(aq) + O2(g) → 4[Au(CN)2](aq) + 4OH(aq)
2[Au(CN)2](aq) + Zn(s) → 2Au(s) + [Zn(CN)4]2-(aq)

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
‘ताप धातुकर्म’ से क्या तात्पर्य होता है?
उत्तर:
धातु ऑक्साइडों को गर्म करके धातु में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को ताप धातुकर्म या तापीय अपचयन कहते हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित की भूमिका का वर्णन कीजिए-
(i) सिल्वर अयस्क से सिल्वर के निष्कर्षण में NaCN की
(ii) विशुद्ध ऐलुमिना से ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में क्रायोलाइट की।
उत्तर:
(i) सिल्वर अयस्क से सिल्वर के निष्कर्षण में NaCN का उपयोग, सिल्वर का संकुल बनाने में किया जाता है जिसे पृथक् करके इसकी क्रिया सक्रिय धातु (Zn) से कराकर Ag को प्राप्त कर लिया जाता है।
(ii) ऐलुमिनियम के धातु कर्म में क्रायोलाइट इसलिए मिलाया जाता है क्योंकि इससे मिश्रण का गलनांक कम हो जाता है तथा विलयन की चालकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित की भूमिका का वर्णन कीजिए-
(i) टाइटेनियम के परिष्करण में आयोडीन की
(ii) ऐलुमिनियम के धातुकर्म में क्रायोलाइट की।
उत्तर:
(i) जर्कोनियम या टाइटेनियम के शोधन के लिए वॉनआरकैल विधि-यह विधि Zr तथा Ti जैसी धातुओं से अशुद्धियों के रूप में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन को हटाने में प्रयुक्त की जाती है। अपरिष्कृत धातु को निर्वातित पात्र में आयोडीन के साथ गरम करते हैं, जिससे धातु आयोडाइड बनता है। यह अधिक सहसंयोजी होने के कारण आसानी से वाष्पीकृत हो जाता है तथा अशुद्धि बच जाती है।
Zr + 2I2 → ZrI4
धातु आयोडाइड को 1800K ताप पर विद्युत द्वारा गरम किए गए टंग्टन तंतु पर गर्म किया जाता है, जिससे यह विघटित होकर शुद्ध धातु देता है जो कि तंतु पर जमा हो जाती है।
ZrI4 → Zr + 2I2

(ii) ऐलुमिनियम के धातु कर्म में क्रायोलाइट इसलिए मिलाया जाता है क्योंकि इससे मिश्रण का गलनांक कम हो जाता है तथा विलयन की वालकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 4.
एक खनिज और एक अयस्क में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यौगिक जिन्हें खनन द्वारा प्राप्त किया जाता है, उन्हें खनिज कहते हैं लेकिन अयस्क वे खनिज होते हैं जिनसे धातु का निष्कर्षण आसानी से हो सके तथा आर्थिक दृष्टि से लाभदायक हों।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक प्रक्रम के निर्धारक सिद्धान्त का वर्णन कीजिए-
(i) टाइटेनियम धातु का वाष्प प्रावस्था परिष्करण
(ii) सल्फाइड अयस्क का झाग प्लवन विधि द्वारा सान्द्रण।
उत्तर:
(i) जर्कोनियम या टाइटेनियम के शोधन के लिए वॉनआरकैल विधि-यह विधि Zr तथा Ti जैसी धातुओं से अशुद्धियों के रूप में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन को हटाने में प्रयुक्त की जाती है। अपरिष्कृत धातु को निर्वातित पात्र में आयोडीन के साथ गरम करते हैं, जिससे धातु आयोडाइड बनता है। यह अधिक सहसंयोजी होने के कारण आसानी से वाष्पीकृत हो जाता है तथा अशुद्धि बच जाती है।
Zr + 2I2 → ZrI4
धातु आयोडाइड को 1800K ताप पर विद्युत द्वारा गरम किए गए टंग्टन तंतु पर गर्म किया जाता है, जिससे यह विघटित होकर शुद्ध धातु देता है जो कि तंतु पर जमा हो जाती है।
ZrI4 → Zr + 2I2

(ii) सान्द्रण की यह विधि सल्फाइड अयस्कों को गैंग से मुक्त करने के लिए प्रयुक्त की जाती है, जैसे कॉपर पाइराइटीज, गैलेना इत्यादि। इस विधि में चूर्णित अयस्क का पानी के साथ निलंबन बनाकर इसमें संग्राही (Collectors) तथा फेन-स्थायीकारी (Froth stabilisers) मिला देते हैं। संग्राही (जैसे चीड़ का तेल, यूकेलिप्टस का तेल, वसा अम्ल, जैंथेट इत्यादि ) अयस्क कणों के नहीं भीगने के गुण अक्लेदनीयता को बढ़ा देते हैं तथा फेन (झाग) स्थायीकारी (जैसे क्रिसॉल, ऐनीलीन ) फेन को स्थायित्व प्रदान करते हैं।

चीड़ का तेल इत्यादि झागकारक होते हैं तथा जैन्थैट जैसे सोडियम एथिलजैन्थैट या सोडियम एमिलजैन्थैट सल्फाइड अयस्क के कणों को जल प्रतिकर्षी बनाकर उन्हें जल की सतह पर लाने तथा तैरने में सहायक होते हैं, अतः इन्हें प्लवनकारक कहते हैं। फेन प्लवन विधि अयस्क तथा आधात्री के भीगने के गुणों में अन्तर पर आधारित है। अयस्क के कण तेल से, जबकि गैंग या (आधात्री ) के कण जल से भीगते हैं।

पैडल मिश्रण को विलोडित करता है तथा इससे वायु प्रवाहित होती है, जिससे झाग बनते हैं जिसमें अयस्क के कण होते हैं। झाग हल्के होते हैं जिन्हें मथकर अलग निकाल लिया जाता है। अयस्क के कणों को प्राप्त करने के लिए इसे सुखा लिया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 4

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.
निम्न श्रेणी के अपने अयस्कों से कॉपर का निष्कर्षण कैसे किया जाता है?
उत्तर:
निम्न कोटि अयस्कों तथा रद्दी धातु से कॉपर का निष्कर्षण – वैद्युत रासायनिक सिद्धान्त का उपयोग करते हुए निम्न कोटि अयस्कों से कॉपर का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा किया जाता है। निम्न कोटि अयस्कों में कॉपर बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है। कॉपर प्राप्त करने के लिए, अयस्क का निक्षालन अम्ल या जीवाणु (बैक्टीरिया) के उपयोग द्वारा किया जाता है, जिससे कॉपर आयन (Cu2+) विलयन में चले जाते हैं जिनकी क्रिया H2 या रद्दी आयरन से करके Cu प्राप्त किया जाता है। इस क्रिया में Cu2+ का अपचयन होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 5

प्रश्न 7.
निम्नलिखित धातुओं को परिष्कृत करने के लिए कौन-कौन सी विधियाँ साधारण रूप से काम में लाई जाती हैं-
(i) निकल
(ii) जर्मनियम
इन विधियों के पीछे निहित सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
(i) वाष्प प्रावस्था परिष्करण – शोधन की इस विधि में, धातु को वाष्पशील यौगिक में बदल कर उसे दूसरी जगह एकत्रित कर लेते हैं तथा इस वाष्पशील यौगिक के विघटन से शुद्ध धातु प्राप्त कर ली जाती है। इस विधि के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं-
(i) उपलब्ध अभिकर्मक के साथ धातु वाष्पशील यौगिक बनाती हो तथा
(ii) वाष्पशील पदार्थ आसानी से विघटित होने वाला हो, ताकि धातु आसानी से पुनः प्राप्त की जा सके। इस विधि से Zr, Ti तथा Ni का शोधन किया जाता है।

उदाहरण- (a) निकल के शोधन की मॉन्ड की विधि-इस विधि में Ni को CO के प्रवाह में गर्म करने पर वाष्पशील संकुल यौगिक निकल टेट्राकार्बोनिल बनता है, जिसे उच्च ताप पर गर्म करने पर इसके विघटन से शुद्ध निकैल प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार निकल से अशुद्धियाँ पृथक् हो जाती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 6

(ii) मंडल परिष्करण या जोन परिष्करण – मंडल परिष्करण द्वारा अतिशुद्ध धातु प्राप्त होती है। यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि अशुद्धियों की विलेयता धातु की ठोस अवस्था की अपेक्षा गलित अवस्था में अधिक होती है। इस विधि में अशुद्ध धातु की छड़ के एक किनारे पर एक वृत्ताकार गतिशील हीटर ( तापक) लगा होता है। जो छड़ को हर तरफ से घेरे रहता है। हीटर जैसे ही आगे बढ़ता है, गलित मण्डल भी आगे बढ़ता जाता है और गलित से शुद्ध धातु क्रिस्टलित हो जाती है तथा अशुद्धियाँ पास वाले गलित जोन में चली जाती हैं।

इस प्रक्रिया को कई बार दोहराते हैं तथा हीटर को एक ही दिशा में बार-बार चलाते जाते हैं। अशुद्धियाँ छड़ के एक किनारे पर एकत्रित हो जाती हैं, जिसे काटकर अलग कर लेते हैं। इस विधि से अति शुद्ध अर्धचालकों तथा अन्य शुद्ध धातुओं; जैसे-जर्मेनियम, सिलिकॉन, बोरॉन, गैलियम तथा इंडियम को प्राप्त किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 7

प्रश्न 8.
वैद्युत अपघटन क्रिया का ताँबे के शोधन में किस प्रकार प्रयोग होता है? समीकरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वैद्युत अपघटनी शोधन – धातुओं के शोधन की इस विधि में अशुद्ध धातु का ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पट्टी का कैथोड बनाया जाता है। वैद्युत अपघटनी सेल में उसी धातु के किसी उपयुक्त लवण का जलीय विलयन वैद्युत अपघट्य के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इसमें अधिक क्षारीय धातु विलयन में तथा कम क्षारीय धातुएँ ऐनोड पंक (anode mud) के रूप में प्राप्त होती हैं।

वैद्युत अपघटन की इस प्रक्रिया की व्याख्या इलेक्ट्रॉड विभव, अधिविभव तथा गिब्ज ऊर्जा की सहायता से की जा सकती है। वैद्युत अपघटन करने पर शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है तथा अशुद्धियाँ ऐनोड पर ऐनोड पंक के रूप में एकत्रित हो जाती हैं। वैद्युत अपघटन की सामान्य अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

कैथोड पर Mn+ + ne → M
ऐनोड पर M → Mn+ + ne

प्रश्न 9.
फेन प्लवन विधि में संग्राही व फेन स्थायीकारक के नाम व भूमिका दीजिए।
उत्तर:
फेन प्लवन विधि में संग्राही के रूप में चीड़ का तेल, यूकेलिप्टस का तेल, वसा अम्ल या जैन्थेट प्रयुक्त किया जाता है तथा फेन स्थायीकारक के रूप में क्रिसॉल या ऐनीलिन का प्रयोग किया जाता है। संग्राही अयस्क कणों के नहीं भीगने का गुण बढ़ाता है जबकि फेन स्थायीकारक फेन को स्थायित्व प्रदान करता है।

प्रश्न 10.
बॉक्साइट अयस्क में उपस्थित किन्हीं दो अशुद्धियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
बॉक्साइट अयस्क में सिलिका (SiO2) तथा टाइटेनियम आक्साइड (TiO2) की अशुद्धियाँ उपस्थित होती हैं।

प्रश्न 11.
निकल धातु शोधन के मॉन्ड प्रक्रम से सम्बन्धित रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 8

प्रश्न 12.
(i) कॉपर का शुद्धिकरण किस विधि से किया जाता है?
(ii) ऐलुमिनियम के मुख्य अयस्क का नाम बताइए तथा ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन के महत्त्व की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(i) कॉपर के शुद्धिकरण में वैद्युत अपघटनी विधि का प्रयोग किया जाता है।
(ii) ऐलुमिनियम का मुख्य अयस्क बॉक्साइट (Al2O3 . 2H2O) है। ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन के महत्व की व्याख्या के लिए बॉक्साइट से ऐलुमिना का निक्षालन, बेयर की विधि – निक्षालन विधि से मुख्यतः ऐलुमिनियम के अयस्क बॉक्साइट का सान्द्रण किया जाता है। बॉक्साइट (Al2O3.2H2O) में मुख्यतः सिलिका (SiO2), आयरन ऑक्साइड (Fe2O3) तथा टाइटेनियम ऑक्साइड (TiO2) की अशुद्धियाँ होती हैं।

ऐलुमिना से सिलिका इत्याद को पृथक् करने के लिए 473 – 523K ताप तथा 35 bar दाब पर चूर्ण किए हुए अयस्क को सान्द्र NaOH विलयन से क्रिया कराकर सान्द्रित किया जाता है, चूँकि SiO2 अम्लीय, Al2O3 उभयधर्मी तथा NaOH क्षारीय हैं, अतः इनकी क्रिया से Al2O3, सोडियम ऐलुमिनेट के रूप में एवं SiO2 सोडियम सिलिकेट के रूप में प्राप्त होता है, जो जल में विलेय होने के कारण निक्षालित हो जाते हैं तथा अन्य अशुद्धियाँ बच जाती हैं।

Al2O3(s) + 2NaOH(aq) + 3H2O(l) → 2Na [A]

जल में विलेय सोडियम ऐलुमिनेट विलयन में CO2 गैस प्रवाहित करने से ऐलुमिनेट उदासीन होंकर जलयोजित Al2O3 के रूप में अवक्षेपित हो जाता है। यहाँ पर विलयन में थोड़ा-सा ताजा बना जलयोजित Al2O3 डालने पर अवक्षेपण की दर बढ़ जाती है। इसे बीजारोपण कहा जाता है।

2Na[Al(OH)4](aq) + 2CO2(g) → Al2O3 . 2H2O(s) + 2NaHCO3(aq) + H2O

सोडियम सिलिकेट विलयन में बच जाता है तथा जलयोजित ऐलुमिना को छानकर, सुखाकर, गरम करने से पुनः शुद्ध Al2O3 प्राप्त हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 9

प्रश्न 13.
निम्नलिखित विधियों द्वारा धातुओं के शोधन में प्रयुक्त सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए-
(i) वाष्प अवस्था परिष्करण
(ii) मंडल परिष्करण।
उत्तर:
(i) वाष्प प्रावस्था परिष्करण – शोधन की इस विधि में, धातु को वाष्पशील यौगिक में बदल कर उसे दूसरी जगह एकत्रित कर लेते हैं तथा इस वाष्पशील यौगिक के विघटन से शुद्ध धातु प्राप्त कर ली जाती है। इस विधि के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं-
(i) उपलब्ध अभिकर्मक के साथ धातु वाष्पशील यौगिक बनाती हो तथा
(ii) वाष्पशील पदार्थ आसानी से विघटित होने वाला हो, ताकि धातु आसानी से पुनः प्राप्त की जा सके। इस विधि से Zr, Ti तथा Ni का शोधन किया जाता है।
उदाहरण:
(a) निकल के शोधन की मॉन्ड की विधि-इस विधि में Ni को CO के प्रवाह में गर्म करने पर वाष्पशील संकुल यौगिक निकल टेट्राकार्बोनिल बनता है, जिसे उच्च ताप पर गर्म करने पर इसके विघटन से शुद्ध निकैल प्राप्त हो जाता है। इस प्रकार निकल से अशुद्धियाँ पृथक् हो जाती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 10
(b) जर्कोनियम या टाइटेनियम के शोधन के लिए वॉनआरकैल विधि – यह विधि Zr तथा Ti जैसी धातुओं से अशुद्धियों के रूप में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन को हटाने में प्रयुक्त की जाती है। अपरिष्कृत धातु को निर्वातित पात्र में आयोडीन के साथ गरम करते हैं, जिससे धातु आयोडाइड बनता है। यह अधिक सहसंयोजी होने के कारण आसानी से वाष्पीकृत हो जाता है तथा अशुद्धि बच जाती है।
Zr + 2I2 → Zrl4
धातु आयोडाइड को 1800K ताप पर विद्युत द्वारा गरम किए गए टंग्टन तंतु पर गर्म किया जाता है, जिससे यह विघटित होकर शुद्ध धातु देता है जो कि तंतु पर जमा हो जाती है।
Zrl4 → Zr + 2I2

(ii) मंडल परिष्करण या जोन परिष्करण – मंडल परिष्करण द्वारा अतिशुद्ध धातु प्राप्त होती है। यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि अशुद्धियों की विलेयता धातु की ठोस अवस्था की अपेक्षा गलित अवस्था में अधिक होती है। इस विधि में अशुद्ध धातु की छड़ के एक किनारे पर एक वृत्ताकार गतिशील हीटर (तापक) लगा होता है। जो छड़ को हर तरफ से घेरे रहता है। हीटर जैसे ही आगे बढ़ता है, गलित मण्डल भी आगे बढ़ता जाता है और गलित से शुद्ध धातु क्रिस्टलित हो जाती है तथा अशुद्धियाँ पास वाले गलित जोन में चली जाती हैं।

इस प्रक्रिया को कई बार दोहराते हैं तथा हीटर को एक ही दिशा में बार-बार चलाते जाते हैं। अशुद्धियाँ छड़ के एक किनारे पर एकत्रित हो जाती हैं, जिसे काटकर अलग कर लेते हैं। इस विधि से अति शुद्ध अर्धचालकों तथा अन्य शुद्ध धातुओं; जैसे-जर्मेनियम, सिलिकॉन, बोरॉन, गैलियम तथा इंडियम को प्राप्त किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 11

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 14.
निक्षालित निम्न कोटि अयस्क से कॉपर प्राप्त करने के लिए कौनसा अपचायक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
निक्षालित निम्न कोटि अयस्क से कॉपर प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन या रद्दी आयरन (स्क्रेप आयरन) का अपचायक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 15.
ऐलुमिनियम के निष्कर्षण के लिए वैद्युत अपघटनी सेल का नामांकित चित्र बनाइए एवं इसमें होने वाली सम्पूर्ण अभिक्रिया लिखिए।
अथवा
मंडल परिष्करण प्रक्रम का नामांकित चित्र बनाइए। यह विधि मुख्य रूप से किसमें उपयोगी है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के निष्कर्षण के लिए वैद्युत अपघटनी सेल का नामांकित चित्र निम्न है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 12
इस प्रक्रम में होने वाली सम्पूर्ण अभिक्रिया को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है-
2Al2O3 + 3C → 4Al + 3CO2
अधवा
मंडल परिष्करण प्रक्रम का नामांकित चित्र निम्न है
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 13

प्रश्न 16.
निस्तापन तथा भर्जन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
निस्तापन-निस्तापन में अयस्क को धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर वायु की अनुपस्थिति में धीर-धीरे गर्म करते हैं जिससे वाष्पशील पदार्थ जैसे CO2, H2O इत्यादि निकल जाते हैं तथा धातु ऑक्साइड बच जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 6 Img 14
भर्जन-भर्जन प्रक्रम में सल्फाइड अयस्कों को वायु की उपस्थिति में धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर गर्म करते हैं जिससे सल्फाइड, ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं तथा S, P, As, Sb इत्यादि की अशुद्धियाँ वाष्पशील ऑक्साइड के रूप में निकल जाती हैं।
उदाहरण – 2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2

प्रश्न 17.
(i) टाइटेनियम के परिष्करण के लिए प्रयुक्त होने वाली विधि का नाम लिखिए।
(ii) सिल्वर के निष्कर्षण में Zn की क्या भूमिका होती है?
(iii) धातु ऑक्साइड का धातु में अपचयन सरल हो जाता है यदि प्राप्त धातु द्रव अवस्था में हो। क्यों?
उत्तर:
(i) टाइटेनियम के परिष्करण के लिए वॉन-ऑरकेल विधि का प्रयोग किया जाता है।

(ii) सिल्वर के निष्कर्षण में Zn मिलाने पर सिल्वर के संकुल Na[Ag(CN)2] में उपस्थित Ag का विस्थापन होकर Zn का संकुल बन जाता है तथा सिल्वर प्राप्त हो जाती है। यह Zn अपचायक का कार्य करता है।

(iii) जब धातु ठोस अवस्था की अपेक्षा द्रव अवस्था में होती है तो उसकी एन्ट्रॉपी अधिक होती है। जब निर्मित धातु द्रव अवस्था में होती है और अपचयित होने वाली धातु ऑक्साइड ठोस अवस्था में होती है तो अपचयन प्रक्रम के एन्ट्रॉपी परिवर्तन (△S) का मान अधिक धनात्मक हो जाता है। अतः △G° का मान अधिक ऋणात्मक हो जाता है और अपचयन आसान हो जाता है।

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