Author name: Prasanna

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

प्रश्न 1.
एक द्रव को सील बन्द पात्र में निश्चित ताप पर उसके वाष्प के साथ साम्य में रखा जाता है। पात्र का आयतन अचानक बढ़ा दिया जाता है-
(क) वाष्प दाब परिवर्तन का प्रारम्भिक परिणाम क्या होगा ?
(ख) प्रारम्भ में वाष्पन एवं संघनन की दर कैसे बदलती है?
(ग) क्या होगा जबकि साम्य पुन: अन्तिम रूप से स्थापित हो जायेगा तब अन्तिम वाष्प दाब क्या होगा ?
उत्तर:
(क) पात्र का आयतन बढ़ाने पर वाष्प दाब प्रारम्भिक रूप से घटेगा क्योंकि इस स्थिति में वाष्पों की समान मात्रा अधिक स्थान पर वितरित रहती है।

(ख) पात्र का आयतन बढ़ाने पर प्रारम्भ में वांष्पन दर बढ़ेगी, क्योंकि अब अधिक स्थान उपलब्ध होगा। चूँक प्रति इकाई आयतन में वाष्प की मात्रा आयतन बढ़ाने पर घटेगी। अतः प्रारम्भ में संघनन की दर कम होगी।

(ग) साम्यावस्था पर वाष्पन दर संघनन दर के बराबर होती है। अन्तिम वाष्प दाब समान होगा क्योंक यह ताप पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित साम्य के लिये Kc क्या होगा यदि साम्य पर प्रत्येक पदार्थ की सान्द्रतायें हैं-
[SO2] = 0.60M, [O2] = 0.82 M, [SO3] = 1.90M
2SO2(g) + O2 (g) \(\rightleftharpoons\) 2SO3 (g)
हल:
अभिक्रिया
2SO2(g) + O2(g) \(\rightleftharpoons\) 2SO3(g)
Kc = \(\frac{\left[\mathrm{SO}_3\right]^2}{\left[\mathrm{SO}_2\right]^2\left[\mathrm{O}_2\right]}\)
Kc = \(\frac{(1.90)^2}{(0.60)^2(0.82)}\)
Kc = 12.229 mol L-1

प्रश्न 3.
एक निश्चित ताप एवं कुल दाब 105Pa पर आयोडीन वाष्प में आयतानुसार 40% आयोडीन परमाणु होते हैं।
I2(g) = 2I(g)
साम्य के लिए Kp की गणना कीजिए।
हल:
साम्य पर कुल दाब = 105Paa
आयोडीन परमाणु I का आंशिक दाब
Pi = \(\frac { 40 }{ 100 }\) x (105Pa) = 0.4 x 105Pa
आयोडीन अणुओं (12) का आंशिक दाब
Pi2 = \(\frac { 60 }{ 100 }\) × (105Pa) = 0.6 × 105Pa
Kp = \(\frac{\left(\mathrm{P}_{\mathrm{I}}\right)^2}{P_{\mathrm{I}_2}}=\frac{\left(0.4 \times 10^5\right)^2}{\left(0.6 \times 10^5\right)}\)
= 2.67 × 104 Pa

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से प्रत्येक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक KC का व्यंजक लिखिए-
(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO (g) + Cl1⁄2 (g)
(ii) 2Cu(NO3)2(s) ⇌ 2CuO(s) + 4NO2(g) + O2(g)
(iii) CH3COOC2H5(g) + H2O(l) ⇌ C3COOH(aq) + C2H5OH(aq)
(iv) Fe3+(aq) + 3OH(aq) ⇌ Fe(OH)3(s)
(v) I2(s) + 5F2 ⇌ 2IF5
हल:
(i) Kc = \(\frac{\left[\mathrm{NO}^2\left[\mathrm{Cl}_2\right]\right.}{[\mathrm{NOCl}]^2}]\)
(ii) Kc = \(\frac{\left[\mathrm{NO}_2\right]^4[\mathrm{CuO}]^2\left[\mathrm{O}_2\right]}{\left[\mathrm{Cu}\left(\mathrm{NO}_3\right)_2\right]^2}=\left[\mathrm{NO}_2\right]^4\left[\mathrm{O}_2\right]\)
(iii) Kc = \(\frac{\left[\mathrm{CH}_3 \mathrm{COOH}\right]\left[\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{OH}\right]}{\left[\mathrm{CH}_3 \mathrm{COOC}_2 \mathrm{H}_5\right]\left[\mathrm{H}_2 \mathrm{O}\right]}\)
(iv) Kc = \(\frac{\left[\mathrm{Fe}(\mathrm{OH})_3\right]}{\left[\mathrm{Fe}^{3+}\right]\left[\mathrm{OH}^{-}\right]^3}=\frac{1}{\left[\mathrm{Fe}^{3+}\right]\left[\mathrm{OH}^{-}\right]^3}\)
(v) Kc = \(\frac{\left[\mathrm{IF}_{\mathrm{s}}\right]^2}{\left[\mathrm{~F}_2\right]^5}\)

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प्रश्न 5.
K के मान से निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य के लिए Kc का मान ज्ञात कीजिए।
(i) 2NOCl (g) ⇌ 2NO(g) + Cl2 (g)
Kp = 1·8 × 10-2 500K ताप पर

(ii) CaCO3 (g) ⇌ CaO ( s) + CO2 (g)
Kp = 1.67, 1073K ताप पर
हल:
(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl2(g)
Kp = 1.8 × 10-2
∆n = (2 + 1) – 2 = 1
Kc = \(\frac{\mathrm{K}_p}{(\mathrm{RT})^{\Delta n}}=\frac{1.8 \times 10^{-2}}{(0.0821 \times 500)^1}\)
= 4.4 × 10-4 mol L-1

(ii) CaCO3(s) ⇌ CaO (s) + CO2(g)
Kp = 167 ∆n = 1
Kc = \(\frac{\mathrm{K}_p}{(\mathrm{RT})^{\Delta n}}=\frac{167}{0.0821 \times 1073}\)
= 1.90 mol L-1

प्रश्न 6.
NO(g) + O3(g) ⇌ NO2(g) + O2(g) के लिए 1000 K पर KC = 6.3 x 1014 है। साम्य में अग्र एवं प्रतीप दोनों अभिक्रियाएँ प्राथमिक रूप से द्विअणुक हैं। प्रतीप अभिक्रिया के लिए K’C क्या है?
उत्तर:
प्रतीप अभिक्रिया के लिये.
K’c = \(\frac{1}{6.3 \times 10^{14}}\) = 1.59 × 10-15

प्रश्न 7.
साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है?
उत्तर:
सुविधा के लिए शुद्ध ठोस के लिए द्रव्यमान स्थिर होता है यदि शुद्ध द्रव अधिक मात्रा में है तब इसका त्रिज्या द्रव्यमान भी स्थिर होगा अतः क्रिया द्रव्यमान एक लिया जा सकता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 1
घनत्व एक गहन गुण है तथा पदार्थ के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है। इसके अतिरिक्त एक शुद्ध पदार्थ (ठोस या द्रव) की मोलर सान्द्रता के मान सदैव समान रहते हैं तथा इन्हें साम्य स्थिरांक का मान लिखते समय उपेक्षित किया जा सकता है। यद्यपि गैसीय अवस्था या जलीय विलयन में, पदार्थों लिए दिये गये आयतन में उनकी मात्रा परिवर्तनीय हो सकती है तथा उनकी मोलर सान्द्रता स्थिर नहीं रहती जिससे साम्य स्थिरांक के लिए व्यंजक लिखते समय इसे उपेक्षित नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 8.
N2 और O2 के मध्य निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
2N2(g) + O2(g) ⇌ 2N2O(g)
यदि एक 101 के पात्र में 0.48 mol N2 एवं 0.933 mol O2 रखे जायें तथा एक ताप जिस पर N2O बनने दिया जाये तो साम्य मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए। (Kc = 20 x 10-37)
हल:
माना कि N2(g) के X मोल अभिक्रिया में भाग लेते हैं। अभिक्रिया के अनुसार O2 के \(\frac { X }{ 2 }\) मोल अभिक्रिया करके N2O(g) के X मोल बनायेंगे। उस स्पीशीज की अभिक्रिया के पहले तथा साम्य बिन्दु पर प्रति लीटर मोलर सान्द्रतायें हैं-
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साम्य स्थिरांक का मान अत्यन्त कम है अतः अभिकारकों को केवल कुछ मात्रा ही अधिकृत हुई है। इसलिए X अत्यन्त कम होगा तथा अभिकारकों के सम्बन्ध में इसे उपेक्षणीय माना जा सकता है।
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उत्तर-अतः साम्य मिश्रण में
N2 की मोलर सान्द्रता = 0.0482 mol L-1
O2 की मोलर सान्द्रता = 0.0433 mol L-1
N2O की मोलर सान्द्रता = 6.58 x 10-20 mol L-1

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प्रश्न 9.
निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार नाइट्रिक ऑक्साइड Br2 से अभिक्रिया करके नाइट्रोसिल ब्रोमाइड बनाती हैं।
2NO(g) + Br2(g) ⇌ 2NOBr(g)
जब स्थिर ताप पर एक बन्द पात्र में 0-087 mol NO एवं 0.0437 mol Br2 मिश्रित किए जाते हैं तब 0.0518 mol NOBr प्राप्त होती है। NO तथा Br2 की साम्य मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
2NO(g) + Br2(g) ⇌ 2NOBr(g)
NO(g) के 2 मोल, Br2(g) के मोल से अभिक्रिया करके 2 मोल NOBr(g) बनाते हैं। साम्य मिश्रण के संगठन निम्नवत् हैं-
साम्य पर निर्मित NOBr(g) के मोलों की संख्या = 0.0518 mol
NO(g) के मोलों की संख्या = 0.0518 मोल
साम्य पर NO (g) के शेष मोलों की संख्या
= 0.087 – 0.0518 = 00352 मोल
Br2(g) के मोलों की संख्या =\(\frac { 1 }{ 2 }\) x 0.0518 = 0.0259
साम्य पर Br2(g) के शेष मोलों की संख्या
= 0.437 – 0.0259
= 0.0178 mol
उत्तर-विभिन्न स्पीशीज की प्रारम्भिक मोलर सान्द्रताएँ तथा साम्य मोलर सान्द्रताओं को निम्न प्रकार निरूपित कर सकते हैं।
2NO(g) + Br2(g) ⇌ 2NOBr(g)
प्रारम्भिक मोल 0-087 0.0437 0
साम्य पर मोल 0.0352 00178 0.0518

प्रश्न 10.
साम्य 2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g) के लिये 450K पर Kp = 2.0 × 10+10 bar-1 है। इस ताप पर KC के मान की गणना करो।
हल:
दिया गया है
Kp = 2 × 1010 bar-1
R = 0.0831 L bar K-1 mol-1
T = 450K
2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)
∆n = 2 – 3 = – 1
Kc = \(\frac{\mathrm{K}_p}{(\mathrm{RT})^{\Delta n}}\)
Kc = \(\frac{2.0 \times 10^{10}}{(0.0831 \times 450)^{-1}}\)
Kc = 2.0 x 1010 x 0.0831 x 450
Kc = 7.47 x 1010 mol L-1

प्रश्न 11.
HI (g) का एक नमूना 0.2 atm दाब पर एक फ्लास्क में रखा जाता है। साम्य पर H2(g) का आंशिक दाब 0.08 atm है। दिये गये साम्य के लिए Kp का मान क्या होगा?
2HI (g) ⇌ H2 (g) + I2 (g)
हल:
PHI = 0.04 atm
PH2 = 0.08 atm
PI2 = 0.08 atm
Kp = \(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{H}_2} \times \mathrm{P}_{1_2}}{\mathrm{P}_{\mathrm{HI}}^2}\)
= \(\frac{(0.08)(0.08)}{(0.04)(0.04)}\)
Kp = 4

प्रश्न 12.
500 K ताप पर एक 20 L पात्र में Ng के 1.57 मोल H2 के 1.92 मोल एवं NH3 के 8.13 मोल को लिया जाता है। अभिक्रिया
N2(g) + 3 H2 (g) ⇌ 2NH3 (g) के लिए KC का मान 1.7 x 10² है। क्या अभिक्रिया मिश्रण साम्य में है? यदि नहीं तो नेट अभिक्रिया की दिशा क्या होगी?
हल:
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यहाँ अभिक्रिया भागफल (QC) का मान Kc से अधिक है। अर्थात् QC > Kc अतः अभिक्रिया साम्य में न होकर विपरीत दिशा में अग्रसरित होगी।

प्रश्न 13.
एक गैसीय अभिक्रिया के लिए
Kc = \(\frac{\left[\mathrm{NH}_3\right]^4\left[\mathrm{O}_2\right]^5}{\left[\mathrm{NO}^4\left[\mathrm{H}_2 \mathrm{O}\right]^6\right.}\) है तो
इस व्यंजक के लिए संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर:
4 NO(g) + 6H2O(g) → 4 (4NH3) NH3 (g) + 5O2 (g)

प्रश्न 14.
H2O का एक मोल एवं CO का एक मोल 725 K ताप पर 101 के पात्र में लिए जाते हैं। साम्य पर 40% जल भारात्मक CO के साथ निम्नलिखित समीकरण के अनुसार अभिक्रिया करता है।
H2O (g) + CO (g) ⇌ H2 (g) + CO2 (g)
अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल:
वास्तविक रूप से उपस्थित जल के मोलों की संख्या = 1 mol
अधिकृत जल का प्रतिशत = 40%
अधिकृत जल के मोलों की संख्या = (1.0 0.4)
समीकरण के अनुसार जल के 0.4ml, CO के 0.4 ml के साथ अभिक्रिया करके 0.4 ml H2 तथा 0.4 mol CO2 बनाएँगे। अतः अभिक्रिया से पहले तथा साम्य बिन्दु पर अभिकारकों तथा उत्पादों की मोलर सान्द्रता प्रति लीटर निम्न प्रकार होगी-
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प्रश्न 15.
700K ताप पर अभिक्रिया
H2 (g) + I2 (g) = 2HI (g)
के लिए साम्य स्थिरांक 54.8 है। यदि हमने शुरू में HI (g) लिया हो, 700K ताप पर साम्य स्थापित हो तथा साम्य पर 0.5 ml L-1 HI (g) उपस्थित हो तो साम्य पर H2 (g) एवं I2 (g) की सान्द्रता क्या होगी ?
हल:
माना H2 (g) तथा I2 (g) की साम्यावस्था पर सान्द्रता X mol L-1 है।
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साम्यावस्था पर [H2] = 0.068 mol L-1
[I2] = 0.068 mol L-1

प्रश्न 16.
ICl की सान्द्रता प्रारम्भ में 0.78 M को यदि साम्य पर दिया जाये प्रत्येक की साम्य सान्द्रतायें क्या होंगी।
2 ICl(g) ⇌ I2(g) + Cl2(g) Kc = 0.14
हल:
अभिक्रिया
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प्रश्न 17.
नीचे दर्शाये गये साम्य में 899 K पर Kp का मान 0.04 atm है। C2H6 (g) साम्य पर सान्द्रता क्या होगी यदि 4.0 atm दाब पर C2H 6को एक फ्लास्क में रखा गया है एवं साम्यावस्था पर आने दिया जाता है।
C2H6(g) ⇌ C2H4(g) + H2(g)
हल:
अभिक्रिया में,
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साम्यावस्था पर मोलों की कुल संख्या,
= 4 – α + α + α
= 4 + α
C2H6 के मोल अंश xC2H6 = \(\frac{(4-\alpha)}{(4+\alpha)}\)
C2H4 के मोल अंश xC2H6 = \(\frac{\alpha}{(4+\alpha)}\)
H2 के मोल अंश HH2 = \(\frac{\alpha}{(4+\alpha)}\)
PC2 = XC2H6 x कुल दाब
= \(\frac{(4-\alpha)}{(4+\alpha)}\) x 1 atm
= \(\frac{(4-\alpha)}{(4+\alpha)}\) atm
PC2H4 = xC2H4 x कुल दाब
= \(\frac{\alpha}{(4+\alpha)}\) x 1 atm
= \(\frac{\alpha}{(4+\alpha)}\)atm
PH2 = XH2 x कुल दाब
= \(\frac{\alpha}{(4+\alpha)}\) x 1 atm
= \(\frac{\alpha}{(4+\alpha)}\) atm
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अत: C2H6 की सान्द्रता (4 – α) = 4 – 0.78 = 3.22

प्रश्न 18.
एथेनॉल एवं ऐसीटिक अम्ल की अभिक्रिया में ऐथिल ऐसीटेट बनाया जाता है एवं साम्य को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है।
CH3COOH(l) + C2H5OH(l) ⇌ CH3COOC2H5(l) + H2O
(i) इस अभिक्रिया के लिए सान्द्रता अनुपात (अभिक्रिया भागफल) Qc लिखिए।

(ii) यदि 293 K पर 1.00 mol ऐसीटिक अम्ल एवं 0.18 mol ऐथेनॉल प्रारम्भ लिया जाय तो अन्तिम साम्य मिश्रण में 0.171 mol एथिल ऐसीटेट है। साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए।

(iii) 0.5mol ऐथेनॉल 1.0 mol ऐसीटिक अम्ल से प्रारम्भ करते हुए 293 K ताप पर कुछ समय पश्चात् एथिल ऐसीटेट के 0.214 मोल पाए गये तो क्या साम्य स्थिरांक स्थाई हो गया।
हल:
(i) अभिक्रिया के लिए सान्द्रता अनुपात
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चूँकि QC का मान K से कम है (QC < Kc) अतः साम्यावस्था प्राप्त नहीं होगी परन्तु अभिकारक अभिक्रिया में भाग लेंगे तथा उत्पाद बनाएँगे।

प्रश्न 19.
437 K ताप पर निर्वात में PCl5 का एक नमूना एक फ्लास्क में लिया गया। साम्य स्थापित होने पर PCI5 की सान्द्रता 0.5 x 10-1 mol L-1 पाई गई, यदि Kc का मान 8.3 x 10-3 है। तो साम्य पर PCI3 एवं CI2 की सान्द्रताएँ क्या होंगी।
PCI5 (g) ⇌ PCI3 (g) + CI2 (g)
हल:
माना PCl5 की मोलर सान्द्रता प्रति लीटर = X मोल L-1
साम्यावस्था पर PCI5 की मोलर सान्द्रता = 0.05 mol L-1
PCI3 के वियोजित मोल = (X – 0.05) mol L-1
CI2 के प्राप्त मोल = (X – 0.05) mol L-1
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साम्य बिन्दु पर PCI3 की मोलर सान्द्रता
= (0.07 – 0.05) = 0.02 mol L-1

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प्रश्न 20.
लौह अयस्क से स्टील बनाते समय जो अभिक्रिया होती है वह आयरन (II) ऑक्साइड का कार्बन मोनो ऑक्साइड द्वारा अपचयन है एवं इससे धात्विक लौह एवं CO2 मिलते हैं।
FeO (s) + CO (g) ⇌ Fe (s) + CO2 (g)
Kp = 0.265 atm at 1050K
1050 K पर CO एवं CO2 के साम्य पर आंशिक दाब क्या होंगे यदि उनके प्रारम्भिक आशिक दाब हैं।
PCO = 14 atm एवं PCO2 = 0.80 atm
हल:
FeO(s) + CO (g) ⇌ Fe (s) + CO2(g)
अभिक्रिया के लिये, Qp = \(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{CO}_2}}{\mathrm{P}_{\mathrm{CO}}}\)
दिया गया है। PCO2 = 0.80atm
PCO = 1.4 atm
Kp = 0.265 atm
Qp = \(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{CO}_2}}{\mathrm{P}_{\mathrm{CO}}}=\frac{0 \cdot 81}{1 \cdot 40}\) = 0.571
परन्तु Kp = 0.265
चूँकि Qp, Kp से अधिक है अतः अभिक्रिया पश्चगामी दिशा में अग्रसारित होगी। अत: CO2 का दाव घटेगा तथा CO का दाब बढ़ेगा जिससे साम्यावस्था प्राप्त हो सके। अतः यदि CO2 के दाब में होने वाली कमी p है तो CO के दाव में वृद्धि होगी।
साम्यावस्था पर PCO2 = (0.80 – p) atm
PCO = (1.4 + p) atm
Kp = \(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{CO}_2}}{\mathrm{P}_{\mathrm{CO}}}\)
0.265 = \(\frac{0 \cdot 80-p}{1 \cdot 40+p}\)
0.265 (1.4+p) = 0.80 – p
0.371 + 0.265p = 0.80 – p
1.265p = 0.429
P = \(\frac { 0.429 }{ 1.265 }\) = 0.339 atm
अतः साम्यावस्था पर PCO = 1.4 + 0.339
= 1.739 atm
PCO2 = 0.80 – 0.339 = 0.461 atm

प्रश्न 21.
अभिक्रिया N2 (g) + 3H2 ⇌ 2 NH3 के लिए (500 K पर) साम्य स्थिरांक KC = 0.061 है एक विशेष समय पर मिश्रण का संघटन इस प्रकार है-
[N2] = 3.0 mol L-1 [H2] = 2.0 mol L-1
एवं [NH3] = 0.5 mol L-1
क्या अभिक्रिया साम्य में है? यदि नहीं तो साम्य स्थापित करने के लिए अभिक्रिया किस दिशा में अग्रसरित होगी?
हल:
N2 (g) + 3H2 ⇌ 2 NH3 (g)
[N2] = 3.0 mol L-1
[H2] = 2.0 mol L-1
[NH3] = 0.5 mol L-1
QC = \(\frac{\left[\mathrm{NH}_{3(\mathrm{~g})}\right]^2}{\left[\mathrm{~N}_{2(\mathrm{~g})}\right]\left[\mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}\right]^3}=\frac{(0.5)^2}{(3.0)(2.0)^3}\)
= \(\frac{0.25}{(3.0)(2.0)^3}=\frac{0.25}{24}\)
= 0.0104
चूँकि QC का मान K के मान (0.061) से कम है अतः अभिक्रिया साम्यावस्था में नहीं है। यह तब तक अग्रगामी दिशा में अग्रसरित होगी जब तक कि QC का मान Kc के समान न हो जाये।

प्रश्न 22.
ब्रोमीन मोनो क्लोराइड (BrCI) विघटित होकर ब्रोमीन एवं क्लोरीन देता है तथा साम्य स्थापित होता है ।
2 BrCl (g) ⇌ Br2 (g) + Cl2(g)
इसके लिए 500 K पर KC = 32 है। यदि प्रारम्भ में BrCl की सान्द्रता 3.3 x 10-3 mol L-1 हो तो साम्य पर मिश्रण में इसकी सान्द्रता क्या होगी?
हल:
माना साम्यावस्था प्राप्त करने के लिये BrCl के x मोल वियोजित होते हैं। विभिन्न स्पीशीज की प्रारम्भिक व साम्य बिन्दु पर मोलर सान्द्रतायें निम्न प्रकार होंगी।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 12
साम्य बिन्दु पर BrCl की मोलर सान्द्रता
= 3.3 x 10-3 – 3.0 x 10-3
= 3.0 x 10-4 mol/L-1

प्रश्न 23.
1127 K एवं 1 atm दाब पर CO तथा CO2 के गैसीय मिश्रण में साम्यावस्था पर ठोस कार्बन में 90.55% (भारात्मक) CO है।
C(s) + CO2(g) ⇌ 2CO(g)
उपर्युक्त ताप पर अभिक्रिया के लिए Kc के मान की गणना कीजिए।
हल:
अभिक्रिया के लिए Kp की गणना-
माना गैसीय मिश्रण का कुल द्रव्यमान = 100 g
मिश्रण में CO का द्रव्यमान = 90.55 g
मिश्रण में CO2 का द्रव्यमान = (100 – 90.55) = 9.45 g
CO के मोलों की संख्या = \(\frac { 90.55 }{ 28 }\)
= 3.234 mol
CO2 के मोलों की संख्या =\(\frac { 9.45 }{ 44 }\)
= 0.2l5 mol
मिश्रण में CO का आंशिक दाब
PCO = \(\frac{3.234}{3.234+0.215}\)
= 0.938 atm
मिश्रण में CO2 का आंशिक दाब
PCO2 = \(\frac{0.215}{(3.234+0.215)}\) x 1 atm
= 0.062 atm
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 13
Kp = 0.959 atm R = 0.082 L atm K-1 mol-1
= 1127K
n = 2 – 1 = 1
Kc = \(\frac{14.19}{(0.082) \times(1127 K)}\)
= 0.153 mol L-1

प्रश्न 24.
298 K पर NO एवं O2 से NO2 बनती है।
NO (g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2 (g) ⇌ NO2 (g)
अभिक्रिया के लिए (क) ∆G° एवं (ख) साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए –
fG° (NO2) = 52.0KJ/mol
fG° (NO) = 87.0kJ/mol
fG° (O2) = 0.0kJ/mol
हल:
(क) ∆G° की गणना –
∆G° = ∑ ∆G° (उत्पाद) – ∑ ∆G°(अधिकारक)
∆G° = [∆fG° (NO2)] – [∆fG°(NO) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) ∆fG°(O2)]
∆G° = 52.0 (87.0 + \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 0)
∆G° = 52 – 87
∆G° = – 35 kJ mol-1

(ख) Kc की गणना ∆fG° = – 2.303 RT log Kc
log Kc = \(\frac{-\Delta_f \mathrm{G}^{\mathrm{o}}}{2 \cdot 303 \mathrm{RT}}\)
log Kc = \(\frac{-\left(-35 \times 10^3\right)}{2 \cdot 303 \times 8.314 \times 298}\)
log Kc = 6.134
Kc = Antilog 6.134
Kc = 1.36 x 106

प्रश्न 25.
निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य में जब आयतन बढ़ाकर दाब कम किया जाता है तब बतलाइए कि अभिक्रिया के उत्पादों के मोलों की संख्या बढ़ती है या घटती है या समान रहती है –
(क) PCl5 (g) ⇌ PCI (g) + Cl2 (g)
(3) CaO (s) + CO2 (g) ⇌ CaCO3 (s)
(ग) 3Fe (s) + 4H2O (g) ⇌ Fe3O4 (s) + 4H2 (g)
उत्तर:
(क) दाब में कमी अग्रगामी अभिक्रिया को बढ़ा देगी तथा उत्पादों के मोलों की संख्या बढ़ेगी।
(ख) दाब में कमी पश्चगामी अभिक्रिया को बढ़ा देगी तथा उत्पादों के मोलों की संख्या घटेगी।
(ग) साम्यावस्था स्थिरांक पर दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। क्योंकि उत्पादों के मोलों की संख्या समान है।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित में से दाब बढ़ाने कौन-कौन सी अभिक्रिया प्रभावित होगी? यह भी बताइए कि दाब परिवर्तन करने पर अभिक्रिया अग्र या प्रतीप दिशा में गतिमान होगी।
(i) COCl2 (g) ⇌ CO (g) + Cl2 (g)
(ii) CH4 (g) + 2S2 (g) ⇌ CS2 (g) + 2H2S (g)
(iii) CO2 (g) + C(s) ⇌ 2 CO (g)
(iv) 2H2 (g) + CO (g) ⇌ CH3OH (g)
(v) CaCO3 (s) ⇌ CaO (s) + CO2 (g)
(vi) 4NH (g) + 5O2(g) ⇌ 4NO (g) + 6H2O (g)
उत्तर:
(i) मोलों की संख्या में अन्तर ∆n = 1 + 1 – 1 – 1 दाब वृद्धि पश्चगामी अधिक्रिया का समर्थन करेगी चूँकि पश्चगामी दिशा में गैसीय घटकों के मोलों की संख्या की प्रति इकाई आयतन में कमी हो रही है।

(ii) मोलों की संख्या में अन्तर ∆n = (1 + 2) – (1 + 2) = 0
दाब वृद्धि साम्यावस्था को प्रभावित नहीं करती है क्योंकि अभिक्रिया के फलस्वरूप मोलों की संख्या में कोई अन्तर नहीं हो रहा है।

(iii) मोलों की संख्या में अन्तर ∆n = 2 – 1 = 1
दाब में वृद्धि पश्चगामी अभिक्रिया का समर्थन करेगी चूँकि पश्चगामी दिशा में गैसीय घटकों के मोलों की संख्या की प्रति इकाई आयतन में कमी हो रही है।

(iv) मोलों की संख्या में अन्तर ∆n = 1 – (2 + 1) = – 2
दाब में वृद्धि अग्रगामी क्रिया का समर्थन करेगी चूँकि अग्रगामी दिशा में गैसीय घटकों के मोलों की संख्या की प्रति इकाई आयतन में कमी हो रही है।

(v) मोलों की संख्या में अन्तर = ∆n = 1
दाब में वृद्धि पश्चगामी अभिक्रिया का समर्थन करेगी चूँकि पश्चगामी दिशा में गैसीय घटकों के मोलों की संख्या की प्रति इकाई आयतन में कमी हो रही है।

(vi) मोलों की संख्या में अन्तर ∆n = (4 + 6) – (4 + 5) = 1
दाब में वृद्धि पश्चगामी अभिक्रिया का समर्थन करेगी चूँकि पश्चगामी दिशा में गैसीय घटकों के मोलों की संख्या की प्रति इकाई आयतन में कमी हो रही है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

प्रश्न 27.
निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए 1024 K पर साम्य स्थिरांक 1.6 x 105 है।
H2(g) + Br2(g) ⇌ 2HBr(g)
यदि HBr के 10.0 bar सील युक्त पात्र में डाले जाएँ तो सभी गैसों के 1124 K पर साम्य दाब ज्ञात कीजिए।
हल:
Kp की गणना-
H2(g) + Br2(g) ⇌ 2HBr(g)
Kp = Kc(RT)∆n ∆n = 0
Kp = Kc = 1.6 x 105
गैसों के आंशिक दाब-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 14
उत्तर-PH2 = 0.050/2 = 0.025 bar
PBr2 = 0.025 bar
PHBr = (10 – 0.050) = 9.95 bar

प्रश्न 28.
निम्नलिखित ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं के अनुसार ऑक्सीकरण द्वारा डाई हाइड्रोजन गैस प्राकृतिक गैस से प्राप्त की जाती है।
CH4(g) + H2O(g) ⇌ CO(g) + 3H2(g)
(क) उपर्युक्त अभिक्रिया के लिए Kp का व्यंजक लिखिए।
(ख) Kp एवं अभिक्रिया मिश्रण का साम्य पर संघटन किस प्रकार प्रभावित होगा यदि –
(i) दाब बढ़ा दिया जाय।
(ii) ताप बढ़ा दिया जाय।
(iii) उत्प्रेरकं प्रयुक्त किया जाय।
उत्तर:
(क) CH4(g) + H2O(g) ⇌ CO(g) + 3H2(g) के लिए Kp का व्यंजक
Kp = \(\frac{\left(\mathrm{P}_{\mathrm{CO}}\right)\left(\mathrm{P}_{\mathrm{H}_2}\right)^3}{\left(\mathrm{P}_{\mathrm{CH}_4}\right)\left(\mathrm{P}_{\mathrm{H}_2 \mathrm{O}}\right)}\)

(ख) (i) दाब बढ़ाने पर मोलों की संख्या प्रति इकाई आयतन बढ़ेगी। अतः दाब बढ़ाने पर साम्यावस्था बायीं ओर अर्थात् पश्चगामी दिशा में स्थानान्तरित होगी। परिणामस्वरूप अभिकारकों की अधिक मात्रा बनेगी तथा Kp का मान घट जायेगा।

(ii) यदि ताप बढ़ाया जाता है तो अग्रगामी अभिक्रिया बढ़ेगी चूँकि यह ऊष्माशोषी है इसलिए साम्यावस्था दाई ओर अग्रगामी दिशा में स्थानान्तरित होगी तथा Kp का मान घटेगा।

(iii) उत्प्रेरक के प्रयोग से साम्यावस्था परिवर्तित नहीं होगी क्योंकि यह अग्रगामी तथा पश्चगामी दोनों अभिक्रियाओं को समान रूप से प्रभावित करता है।

प्रश्न 29.
साम्य 2H2 (g) + CO (g) ⇌ CH3OH (g) पर (i) H2 मिलाने पर (ii) CH3OH मिलाने पर (iii) CO हटाने पर (iv) CH3OH हटाने पर साम्यावस्था किस प्रकार प्रभावित होगी?
उत्तर:
(i) साम्यावस्था अग्रगामी दिशा में स्थानान्तरित होगी।
(ii) साम्यावस्था पश्चगामी दिशा में स्थानान्तरित होगी।
(iii) साम्यावस्था पश्चगामी दिशा में स्थानान्तरित होगी।
(iv) साम्यावस्था अग्रगामी दिशा में स्थानान्तरित होगी।

प्रश्न 30.
473 K पर PCl5 के विघटन के लिए K का मान 8.3 x 10-3 है। यदि विघटन इस प्रकार दर्शाया जाये तो
PCI5 (g) ⇌ PCl3 (g) + Cl2 (g)
rH° = 124.0 kJ mol-1
(क) अभिक्रिया के लिए Kc का व्यंजक लिखिए।
(ख) प्रतीप अभिक्रिया के लिए समान ताप पर Kc का मान क्या होगा?
(ग) यदि
(i) और अधिक PCl5 मिलाया जाये।
(ii) दाब बढ़ाया जाये।
(iii) ताप बढ़ाया जाये तो Kc पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
(क) Kc = \(\frac{\left[\mathrm{PCl}_3\right]\left[\mathrm{Cl}_2\right]}{\left[\mathrm{PCl}_5\right]}\)
यहाँ दिया है Kc = 8.3 × 10-3

(ख) प्रतीप अभिक्रिया के लिये,
Kc‘ = \(\frac{\left[\mathrm{PCl}_5\right]}{\left[\mathrm{PCl}_3\right]\left[\mathrm{Cl}_2\right]}\)
Kc‘ = \(\frac{1}{\mathrm{~K}_{\mathrm{C}}}\)
Kc‘ = \(\frac{1}{8.3 \times 10^{-3}}\) = 120.48

(ग) (i) यदि और अधिक PCl5 मिलाया जायेगा तो Kc का मान नियत रहता है।

(ii) जब दाब बढ़ाया जाता है तो अभिक्रिया कम आयतन की दिशा में अग्रसर होती है अतः अभिक्रिया पश्चगामी दिशा में विस्थापित हो जायेगी परिणामस्वरूप Kc का मान घट जायेगा।

(iii) ताप बढ़ाने पर अग्रगामी अभिक्रिया तीव्र होगी चूँकि अभिक्रिया ऊष्माशोषी है। इसलिए साम्यावस्था स्थिरांक Kc का मान बढ़ जायेगा।

प्रश्न 31.
हैबर विधि में प्रयुक्त हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस से प्राप्त मेथेन को उच्च ताप की भाप से क्रिया कर बनाया जाता है। दो पदों वाली अभिक्रिया में प्रथम पद में CO तथा H2 बनती है। दूसरे पद में प्रथम पद में बनने वाली CO और अधिक भाप से क्रिया करती है।
CO(g) + H2O(g) ⇌ CO2(g) + H2(g)
यदि 400°C पर अभिक्रिया पात्र में CO एवं भाप का सममोलर मिश्रण इस प्रकार लिया जाये कि PCO = PH2O = 4.0 bar, H2 का साम्यावस्था पर आंशिक दाब क्या होगा?
400°C पर Kp = 10.1 है।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 15

प्रश्न 32.
बताइए कि निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया में अभिकारकों एवं उत्पादों की सान्द्रता सुप्रेक्ष्य होगी –
(क) Cl2 (g) ⇌ 2Cl (g) Kc = 5 × 10-39
(ख) Cl2 (g) + 2NO (g) ⇌ 2NOCl (g) Kc = 3.7 x 108
(ग) Cl2 (g) + 2 NO2 (g) ⇌ 2 NO2 Cl (g) Kc = 1.8
उत्तर:
(क) Kc = 5 x 10-9 यह मान अत्यन्त कम है। इसलिये साम्यावस्था पर अभिकारकों की मात्रा बहुत अधिक है।

(ख) Kc = 3.7 x 108 यह मान अत्यधिक उच्च है इसलिए साम्यावस्था पर उत्पादों की मात्रा बहुत अधिक है तथा अभिक्रिया पूर्णता के निकट है।

(ग) Kc = 1.8 यह मान 1 से अधिक है। इसलिए अभिकारकों की मात्रा उत्पादों की मात्रा से कम होगी। अतः इस अभिक्रिया में अभिकारकों एवं उत्पादों की सान्द्रता सप्रेक्ष्य होगी।

प्रश्न 33.
25°C पर अभिक्रिया 3O2 (g) ⇌ 2O3 (g) के लिए K का मान 2.0 x 10-50 है यदि वायु में 25°C ताप पर O2 की साम्यावस्था सान्द्रता 1.6 x 10-2 है तो O3 की सान्द्रता क्या होगी?
हल:
3O2 (g) ⇌ 2O3 (g)
Kc = \(\frac{\left[\mathrm{O}_3\right]^2}{\left[\mathrm{O}_2\right]^3}\)
2.0 x 10-50 = \(\frac{\left[\mathrm{O}_3\right]^2}{\left(1.6 \times 10^{-2}\right)^3}\)
[O3]² = 2.0 x 10-50 x 2.56 x 1.6 × 10-6
= 8.19 × 10-56
[O3] = 2.9 x 10-28 mol L-1

प्रश्न 34.
CO(g) + 3H2(g) ⇌ CH4 (g) + H2O(g) अभिक्रिया एक लीटर फ्लास्क में 1300 K पर साम्यावस्था में है। इसमें CO के 0.3 mol, H2,के 0.01 mol, H2 O के 0.01 mol एवं CH4, की अज्ञात
मात्रा है दिये गये ताप पर अभिक्रिया के लिए Kc का मान 3.90 है। मिश्रण में CH4 की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 16

प्रश्न 35.
संयुग्मी अम्ल-क्षारक युग्म का क्या अर्थ है। निम्नलिखित स्पीशीज के लिए संयुग्मी अम्ल / क्षारक बताइए-
HNO2 CN, HClO4, F, OH, CO32-, एवं S2-
उत्तर:
अम्ल तथा क्षारक के वे युग्म जो क्रमश: एक प्रोटॉन की उपस्थिति या अनुपस्थिति के कारण एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, संयुग्मी अम्ल-क्षारक युग्म कहलाते हैं अतः संयुग्मी अम्ल में एक अतिरिक्त प्रोटॉन होता है तथा प्रत्येक क्षारक में एक प्रोटॉन कम होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 17

प्रश्न 36.
निम्नलिखित में कौन लूइस अम्ल हैं?
H2O, BF3, H+ एक NH4+
उत्तर:
BF3, H+ लूईस अम्ल हैं।

प्रश्न 37.
निम्नलिखित ब्रॉन्स्टेड अम्लों के लिए संयुग्मी क्षारकों के सूत्र लिखिए-
HF, H2SO4 एक HCO3
उत्तर:

ब्रॉन्स्टेड अम्लसंयुग्मी क्षारक
HFF
H2SO4HSO4
HCO3CO32-

प्रश्न 38.
ब्रॉन्स्टेड क्षारकों NH2, NH3 तथा HCOO के संयुग्मी अम्ल लिखिए।
उत्तर:

ब्रॉन्स्टेड क्षारकसंयुग्मी अम्ल
NH2NH3
NH3NH4+
HCOOHCOOH

प्रश्न 39.
स्पीशीज H2O, HCO3, HSO4 तथा NH3 ब्रॉन्स्टेड अम्ल तथा क्षारक दोनों की भाँति व्यवहार करते हैं, प्रत्येक के संयुग्मी अम्ल तथा क्षारक बताइए।
उत्तर:

स्पीशीजसंयुग्मी अम्लसंयुग्मी क्षारक
H2OH3O+OH
HCO3H2CO3CO32-
HSO4H2SO4SO42-
NH3NH4+NH2-

प्रश्न 40.
निम्नलिखित स्पीशीज को लूइस अम्ल तथा क्षारक में वर्गीकृत कीजिए तथा बताइए कि ये किस प्रकार लूईस अम्ल-क्षारक का कार्य करते हैं-
(क) OH (ख) F (ग) H+ (घ) BCl3
उत्तर:
(कं) OH लुईस क्षारक, यह इलेक्ट्रॉन युग्म दाता है।
(ख) F लूईस क्षारक, एक इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकता है।
(ग) H+ लुईस अम्ल, एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकता है।
(घ) BCl3 लूइस अम्ल, एक इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

प्रश्न 41.
एक मृदु पेय के नमूने में हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता 3.8 x 10-3 M है, उसकी pH ज्ञात कीजिए।
हल:
pH = – log [H+]
= – log (3.8 x 10-3)
= 2.4202

प्रश्न 42.
सिरके के एक नमूने की pH 3. 76 है। इसमें हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात कीजिए।
हल:
pH = – log [H+]
= \(\frac{1}{\log \left[\mathrm{H}^{+}\right]}=3.76\)
= 3.76
\(\frac{1}{\left[\mathrm{H}^{+}\right]}\) = anti log 3.76 = 5754.4
[H+] = 1.74 × 104M

प्रश्न 43.
HF, HCOOH तथा HCN का 298 K का आयनन स्थिरांक क्रमश: 6.8 × 10-4, 1.8 × 104 तथा 4.8 x 10-9 है। इनके संगत संयुग्मी क्षारकों के आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
हल:
HF के लिए,
Kw = 10-14
Ka = 6.8 × 10-4
Kb = \(\frac{\mathrm{K}_w}{\mathrm{~K}_a}=\frac{10^{-14}}{6.8 \times 10^{-4}}\)
= 1.47 × 10-11
HCOOH के लिए
Ka = 1.8 × 10-4
Kb = \(\frac{\mathrm{K}_w}{\mathrm{~K}_a}\)
= \(\frac{10^{-14}}{4.8 \times 10^{-4}}\)
= 5.55 x 10-9
HCN के लिए
Ka = 4.8 × 10-9
Kb = \(\frac{\mathbf{K}_w}{\mathbf{K}_a}\)
= \(\frac{10^{-14}}{1.8 \times 10^{-9}}\)
= 2.08 x 10-6

प्रश्न 44.
फीनॉल का आयनन स्थिरांक 1.0 x 10-10 है। 0.05 M फीनॉल के विलयन में फीनॉलेट आयन की सान्द्रता तथा 0.01 M सोडियम फीनेट विलयन में उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
माना फीनॉल के C mol जल में घुलकर विलयन बनाते हैं तथा फीनॉल के वियोजन की मात्रा α है । साम्य बिन्दु पर विभिन्न स्पीशीज की सान्द्रता निम्न प्रकार होगी-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 18
जब फीनॉल (PhOH) को 0.01 M सोडियम फीनेट विलयन में मिलाया जाता है तब
PhOH ⇌ PhO + H+
PhONa ⇌ PhO + Na+
सोडियम फीनेट के आयनन के कारण PhO की सान्द्रता की पूर्णता (पूर्ण आयनन) = 0.01 M
PhOH से PhO आयनों की सान्द्रता = x M
PhO आयनों की कुल सान्द्रता PhO = 0.01 + x
= 0.01 M (x अत्यन्त कम होने के कारण नगण्य है)
अनायनित PhOH की सान्द्रता = 0.05 – x = 0.05 M
PhOH के लिए आयनन स्थिरांक
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 19

प्रश्न 45.
H2S का प्रथम आयनन विभव स्थिरांक 9.1 x 10-8 है। इसके 0.1 M विलयन में HS आयनों की सान्द्रता की गणना कीजिए तथा बताइए कि यदि इसमें 0.1 M HCl भी उपस्थित हो तो सान्द्रता किस प्रकार प्रभावित होगी। यदि H2S का द्वितीय वियोजन स्थिरांक 1.2 x 10-13 हो तो सल्फाइड S2- आयनों की दोनों स्थितियों में सान्द्रता की गणना कीजिए।
उत्तर:
0.1 M H2S विलयन में [HS ] की गणना-
माना H2S के विलयन की मात्रा = α
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 20
0.1 M HCl विलयन में [HS] सान्द्रता-
जब 0.1 M HCl विलयन में H2S मिलाई जाती है तब वियोजन निम्न प्रकार होता है-
H2S ⇌ H+ + HS
HCl → H+ + Cl
HCl के वियोजन से प्राप्त (H+] = 0.1 M
माना H2S (दुर्बल अम्ल) के वियोजन के कारण [H+] = xM
H+ आयनों की कुल सान्द्रता = 0.1 x 0.1 M
(x अत्यन्त कम होने के कारण उपेक्षणीय है)
विलयन में [HS] = xM
अवियोजित H2S की सान्द्रता = [H2S] = 0.1 – x = 0.1 M
Kαl = \(\frac{\left[\mathrm{H}^{+}\right]\left[\mathrm{HS}^{-}\right]}{\left[\mathrm{H}_2 \mathrm{~S}\right]}\)
9.1 × 10-8 = \(\frac{(0.1 \times x)}{(0.1)}\)
x = 9.1 × 10-8
HCl की अनुपस्थिति में [S2-] की गणना-
H2S ⇌ H+ + HS, Kα1 = 9.1 × 10-8
HS ⇌ H+ + S2-, Kα2 = 1.2 × 10-13
सम्पूर्ण अभिक्रिया के लिए Kα गणना हेतु दोनों समीकरणों से
Kα = Kα1 × Kα2 = (9.1 × 10-8) × (1.2 × 10-13)
= 1.092 × 10-20
H2S का समीकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 21
0.1 MHCI की उपस्थिति में [S2-] की गणना-
माना H2S के वियोजन के कारण [S2-] = zM.
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 22

प्रश्न 46.
ऐसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.74 x 10-5 है इसके 0.05M विलयन में वियोजन की मात्रा, ऐसीटेट आयन सान्द्रता तथा pH का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 23

प्रश्न 47.
0.01 M कार्बनिक अम्ल (HA) के विलयन की PH 4.15 है। इसके ऋणायन की सान्द्रता, अम्ल का आयनन स्थिरांक तथा pKa मान परिकलित कीजिए।
हल:
HA ⇌ H+ + A
pH = 4.15, C = [HA] = 0.01 M
[H+] = 10-PH
– log [H+] = 4.15
log [H+] = – 4.15 = \(\overline{5}\).85
[H+] = antilog \(\overline{5}\).85 = 7.079 × 10–5
ऋणायन की सान्द्रता [A] = [H+] = 7.08 x 10-5 M
Ka = (7.08 × 10-5)²/0.01 = 5.8 × 10-7
pKa = – log Ka
= – log 5.08 × 10-7 = 6.29

प्रश्न 48.
पूर्ण वियोजन मानते हुए निम्नलिखित विलयनों के pH मान ज्ञात कीजिए।
(क) 0.003 M HCl
(ख) 0.005 M NaOH
(ग) 0.002 M HBr
(घ) 0.002 M KOH
हल:
(क) HCl(aq) → H+(aq) + Cl (g)
[HCl] = 0.003 M
[H+] = [HCl] = 0.003
pH = – log [H+] = – log 3 × 10-3 = 2.528

(ख) NaOHaq → Na+aq + OHaq
[NaOH] = 0.005 = 5 × 10-3 M
[OH] = [NaOH] = 5 × 10-3 M
[H+] = \(\frac{\left[\mathrm{K}_w\right]}{\left[\mathrm{OH}^{-}\right]}=\frac{10 \times 10^{-14}}{5.0 \times 10^{-3}}\) = 2 × 10-12
pH = – log 2 x 10-12 = 11.70

(ग) HBr → H+ + Br
[HBr] = 0.002M = [H+]
|pH = – log [H+] = – log 2 × 10-3 = 2.70

(घ) KOH → K+ + OH
[OH] = 0.002 M
[H+] = \(\frac{\left[\mathrm{K}_w\right]}{\left[\mathrm{OH}^{-}\right]}=\frac{1 \times 10^{-14}}{0.002}\) = 5 × 10-12 M
pH = – log [H+] = 11.30

प्रश्न 49.
निम्नलिखित में विलयनों के pH ज्ञात कीजिए-
(क) 2g TiOH को जल में घोलकर 2 L विलयन बनाया जाए।
(ख) 0.3 g Ca(OH)2 को जल में घोलकर 500 ml विलयन बनाया जाए।
(ग) 0.3 g NaOH को जल में घोलकर 200 ml विलयन बनाया जाए।
(घ) 13.6 M HCl के ml को जल से तनुकरण करके कुल आयतन 1 L किया जाए।
हल:
(क) Ti(OH) विलयन की मोलरता
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 24
pOH = – log [OH]
= – log (3.75 × 10-2 ) = 1.426
pH = 14 – pOH
= 14 – 1.426 = 12.574

(घ) M1V1 = M2V2
13.6M × 1 = M2 x 1000
M2 = \(\frac { 13.6 }{ 1000 }\)
= 1.36 × 10-2 M
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 25
pH = – log [H+]
= – log (1.36 × 10-2)
= 1.866.

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

प्रश्न 50.
ब्रोमो ऐसीटिक अम्ल की आयनन की मात्रा 0.132 है। 0.1 M अम्ल की pH तथा pka का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
ब्रोमो ऐसीटिक अम्ल की आयनन की मात्रा (α) = 0.132
अम्ल की सान्द्रता = 0.1 M
[H+] = C × α = 0.1 x 0.132
= 00132 M
PH = – log [H+] = – log 0.0132
= – log (1.32 × 10-2)
= 1.88.
Ka = \(\frac { Ca² }{ 1-α }\)
[CH3COO] = Cα तथा [CH3COOBr] =C(1 – α)
= \(\frac{0.1 \times(0.0132)^2}{1-0.0132}\)
= 2.01 x 10-3
pKa = – log Ka = – log (2.01 × 10-3)
= 2.71

प्रश्न 51.
0.005 M कोडीन C18H21 NO3 विलयन की PH 9.95 है। इसका आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 26

प्रश्न 52.
0.001 M एनिलीन विलयन का pH क्या है एनिलीन का आयनन स्थिरांक 4.27 x 10-10 है। इसके संयुग्मी अम्ल का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 27

प्रश्न 53.
यदि 0.05 M ऐसीटिक अम्ल के pKa का मान 4.74 है तो आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए। यदि इसे
(अ) 0.01 M HCl
(ब) 0.1 M HCl विलयन में डाला जाए तो वियोजन की मात्रा किस प्रकार प्रभावित होती है।
हल:
PKa = – log Ka
4.74 = – log Ka
log Ka = – 4.74 + 1 – 1
log Ka = \(\overline{5}\).26
Ka = anti log (\(\overline{5}\).26)
= 1.8 × 10-5
Ka = Cα²
α = \(\sqrt{\frac{\mathrm{K}_a}{\mathrm{C}}}=\sqrt{\frac{\left(1.8 \times 10^{-5}\right)}{0.05}}\)
= \(\sqrt{3.6 \times 10^{-4}}\)
= 1.9 x 10-2
= 0.019 = 1.9 %
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 28
इस स्थिति में वियोजन की मात्रा 0.01 M HCl से 10 गुना कम हो जाती है।

प्रश्न 54.
डाइ मेथिल एमीन का आयनन स्थिरांक 5.4 x 10-4 है। इसके 0.02 M विलयन की आयनन की मात्रा की गणना करिए यदि यह विलयन NaOH के प्रति 0.1M हो तो डाड़ मेथिल एमीन का प्रतिशत आयनन क्या होगा?
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 29
NaOH की अनुपस्थिति में वियोजन की मात्रा 0.164 से अत्यन्त कम है।

प्रश्न 55.
निम्नलिखित जैविक द्रवों जिनकी PH दी गई है की हाइड्रोजन आयन सान्द्रता परिकलित कीजिए।
(क) मानव पेशीय द्रव 6.83
(ख) मानव उदर द्रव 1.2
(ग) मानव रुधिर 7.38
(घ) मानव लार 6.4
हल:
(क) मानव पेशीय द्रव की [H+]
pH = 6.83
log\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 6.83
= antilog 6.83
[H+] = antilog (6.83)
= 1.48 × 10-7 M

(ख) मानव उदर द्रव की [H+]
pH = 1.2 या log \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 1.2
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = anti log (1.2)
= anti log (- 1.2)
= 6.309 × 10-2 M

(ग) मानव रुधिर की [H+]
pH = 7.38 या \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 73.8
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = anti log (7.38)
[H+] = anti log (- 7.38)
= 4.168 × 10-8 M

(घ) मानव लार की [H+]
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = anti log (6.4)
[H+] = anti log ( – 6.4)
= 3.981 × 107M.

प्रश्न 56.
दूध, कॉफी, टमाटर रस, नीबू रस तथा अण्डे की सफेदी के pH का मान क्रमश: 6.8, 5.0, 4.2 2.2 तथा 7.8 हैं। प्रत्येक के संगत H+ आयन की सान्द्रता ज्ञात कीजिए।
हल:
दूध की [H+]
pH = 6.8
या log \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 6.8
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = antilog (6.8)
[H+] = antilog (- 6.8)
= 1.585 x 10-7 M
कॉफी की [H+]
pH = 5.0
या log \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 5.0
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = antilog (5.0)
[H+] = antilog (-5.0)
= 1.0 x 10-5 M
टमाटर रस की [H+]
pH = 4.2
या log \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 4.2
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = anti log 4.2
[H+] = anti log (4.2)
= 6.309 × 10-5 M
नीबू रस की [H+]
pH = 2.2
या log \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 2.2
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = anti log (2.2)
[H+] = anti log (2.2)
= 6.309 × 10-3 M
अण्डे की सफेद जर्दी की [H+]
pH = 7.8
या \(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = 7.8
\(\left[\frac{1}{\mathrm{H}^{+}}\right]\) = anti log (7.8)
[H+] = anti log ( 7.8)
= 1.585 × 10-8 M.

प्रश्न 57.
298K पर 0.561 g KOH जल में घोलने पर प्राप्त 200 ml विलयन की pH तथा पोटैशियम, हाइड्रोजन तथा हाइड्रोक्सिल आयनों की सान्द्रताऐं ज्ञात कीजिए।
हल:
विलयन की मोलर सान्द्रता
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 30

प्रश्न 58.
298 K पर Sr (OH)2 विलयन की विलेयता 19.23g/ L है स्ट्रॉन्शियम तथा हाइड्रोक्सिल आयन की सान्द्रता एवं विलयन की pH ज्ञात कीजिए।
हल:
विलयन की मोलरता
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 31

प्रश्न 59.
प्रोपेनोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.32 × 105 है, 0.05 M अम्ल विलयन के आयनन की मात्रा तथा PH ज्ञात कीजिए। यदि विलयन में 0.01 M HCI मिलाया जाये तो उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
यदि आयनन की मात्रा है तो
α = \(\sqrt{\frac{\mathrm{K}_a}{\mathrm{C}}}\)
= \(\sqrt{\frac{1.32 \times 10^{-5}}{0.05}}\)
= 1.62 × 10-2
[H+] = Cα
= 0.05 x 1.62 × 10-2
= 8.12 x 10-4
pH = – log [H+]
= – log (8.12 x 10-4)
= 3.09
0.01 M HCl की उपस्थिति में आयनन की मात्रा घटेगी क्योंकि HCl की उपस्थिति में साम्य बाँयी तरफ जायेगा अतः प्रोपेनोइक अम्ल की सान्द्रता बढ़ेगी।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 32

प्रश्न 60.
यदि सायनिक अम्ल (HCNO) के 0.1M विलयन की pH = 2.34 हो तो अम्ल के आयनन स्थिरांक तथा आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 33

प्रश्न 61.
यदि नाइट्स अम्ल का आयनन स्थिरांक 4.5 x 10-4 है तो 0.04 M सोडियम नाइट्राइट विलयन की pH तथा जलयोजन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
सोडियम नाइट्राइट प्रबल क्षार NaOH तथा दुर्बल अम्ल HNO का लवण है। इसके जलयोजन की मात्रा निम्न प्रकार होगी –
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 34
PH की गणना-जलीय विलयन में NaNO2 का जलयोजन निम्न प्रकार होता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 35

प्रश्न 62.
यदि पिरीडीनियम हाइड्रोजन क्लोराइड के 0.02 M विलयन का pH 3.44 है तो पिरीडीन का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए ।
हल:
पिरीडीनियम हाइड्रोजन क्लोराइड [C6H5N+ HCl) का
pH = – \(\frac { 1 }{ 2 }\) [log Kw – log Kb + log c]
pH = 3.44, Kw = 1 x 10-14, C = 0.02 M
3.44= – \(\frac { 1 }{ 2 }\)[log(1 × 10-14) – log Kb + log(2 x 10-2)]
3.44 = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)[- 14 – log Kb – 1.70]
6.88 = 14 + log Kb + 1.70
log Kb = 6.88 – 14 – 1.70 = – 8.82
Kb = antilog (- 8.82) = 1.51 x 10-9

प्रश्न 63.
निम्नलिखित लवणों के जलीय विलयनों के उदासीन अम्लीय तथा क्षारीय होने की प्रागुक्ति कीजिए।
NaCl, KBr, NaCN, NH4NO3, NaNO3 तथा KF
हल:
अम्लीय – NH4NO3
क्षारीय – NaCN, NaNO3, KF
उदासीन NaCl, KBr

प्रश्न 64.
क्लोरोऐसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक 1.35 x 10-3 है 0.1 M अम्ल तथा इसके 0.1 M सोडियम लवण की pH ज्ञात कीजिए।
हल:
अम्ल विलयन का pH
Ka = 1.35 x 10-3
C = 0.1 M
[H+] = (Ka × C)1/2
= (1.35 × 10-3 x 0.1) 1⁄2
= 1.16 × 10-2 M
pH = – log [H+] = – log (1.16 × 10-2) = 1.94
अम्ल के सोडियम लवण का pH
Kh = \(\frac{\mathrm{K}_w}{\mathrm{~K}_a}=\frac{1.0 \times 10^{-14}}{1.35 \times 10^{-3}}=7.4 \times 10^{-12}\)
जलयोजन मात्रा h = \(\sqrt{\frac{\mathrm{K}_h}{\mathrm{C}}}\)
= \(\sqrt{\frac{\left(7.4 \times 10^{-12}\right)}{0.1}}\)
= 8.6 x 10-7
अम्ल का सोडियम लवण जलयोजन द्वारा क्षारीय विलयन बनाता है
[OH] = Ch = 0.1 x 8.6 × 10 = 8.6 × 10-7
[H+] = \(\frac{\mathrm{K}_w}{\left[\mathrm{OH}^{-}\right]}=\frac{1.0 \times 10^{-14}}{8.6 \times 10^{-7}}\) = 1.16 x 10-8
pH = – log[H+] = log (1.16 × 10-8)
= 7.94

प्रश्न 65.
310K ताप पर यदि जल का आयनन स्थिरांक 2.7 x 10-14 है तो ताप पर उदासीन जल की pH क्या होगी?
हल:
उदासीन जल के लिए [H+] = [OH]
[H+] [OH] = Kw = 2.7 x 10-14
[H+]² = 2.7 x 10-14
[H+] = (2.7 x 10-14)1/2 = 1.643 × 10-7
जल का pH = – log [H+] = log (1.643 x 10-7) = 6.78

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

प्रश्न 66.
निम्नलिखित मिश्रणों की pH परिकलित कीजिए-
(क) 0.2 M Ca(OH) का 10 ml + 0.1 M HCl का 25 ml
(ख) 0.01 M H2 SO4 का 10ml + 0.01 M Ca(OH)2 का 10 ml
(ग) 0.1 M H2SO4 का 10ml + 0.1 M KOH का 10ml
हल:
(क) मिश्रित करने पर Ca(OH)2 विलयन की मोलरता
= \(\frac{(0.2 \mathrm{M}) \times(10 \mathrm{ml})}{(35 \mathrm{ml})}\)
= 0.057 M
विलयन में [OH] = 2 x 0.057 M = 0.114 M
मिश्रित करने पर HCl की मोलरता
= \(\frac{(0.1 \mathrm{M}) \times(25 \mathrm{ml})}{(35 \mathrm{ml})}\)
= 0.071 M
विलयन में [H+] = 0.071 M
उदासीनीकरण के पश्चात् [OH] = (0114 – 0.071) = 0.043 M
[OH] = = log[OH]
= – log (4.3 x 10-2)
= 1.367 = 1.37
pH = 14 – POH = 14 – 1.37 = 12.63

(ख) मिश्रित करने पर H2 SO4 विलयन की मोलरता
= \(\frac{(0.01 \mathrm{M} \times 10 \mathrm{ml})}{(20 \mathrm{ml})}\)
= 0.005 M
विलयन में [H+] = 2 × 0.005 = 0.01 M
मिश्रित करने पर Ca(OH)2 विलयन की मोलरता
= \(\frac{(0.01 \mathrm{M} \times 10 \mathrm{ml})}{(20 \mathrm{ml})}\)
= 0.005 M
विलयन में [OH] = 0.005 × 2 = 0.01 M
चूँकि विलयन में [H+] तथा [OH] समान हैं अतः विलयन उदासीन है।
अतः विलयन का pH = 7

(ग) मिश्रित करने पर H2SO4 की मोलरता
= \(\frac{(0.1 \times 0.1)}{20}\)
= 0.05 M
विलयन में [H+] = (0.05 x 2 ) = 0.10 M
मिश्रित करने पर KOH की मोलरता
= \(\frac{(0.1 \times 0.1)}{20}\)
= 0.05 M
विलयन में [OH] = 0.05 M
उदासीनीकरण के पश्चात् [H+] = 0.05 M
= 0.1 – 0.05 = 0.05 M
pH = – log [H+] = – log (5 x 10-2)
= 1.301

प्रश्न 67.
सिल्वर क्रोमेट, बेरियम क्रोमेट, फैरिक हाइड्रोक्साइड, लैंड क्लोराइड तथा मरक्यूरस आयोडाइड विलयन के 298 K पर निम्नलिखित दिये गये विलेयता गुणनफल स्थिरांक की सहायता से विलेयता ज्ञात कीजिए तथा प्रत्येक आयन की मोलरता भी ज्ञात कीजिए।
Ksp(Ag2CrO4) = 1.1 × 10-12
Ksp (BaCr O4) = 1.2 × 10-10
Ksp = (Fe(OH3) = 1.0 × 10-38
Ksp = (PbCl2) = 1.6 x 10-5
Ksp(Hg2I2) = 45 × 10-29
उत्तर:
(i) (Ag2CrO4)
(Ag2CrO4) ⇌ 2Ag+(aq) + CrO42- (aq)
माना जल में लवण की विलेयता = S
[Ag+(aq)]= 2S
[CrO4-2(aq)] = S
Ksp = [Ag+ (aq)]² [CrO42- (aq)
1.1 x = 10-12 = (2S)² × S = 4s³
S³ = \(\frac{\left(1.1 \times 10^{-12}\right)}{4}\)
= 0.275 x 10-12
S = \(\sqrt[3]{0.275 \times 10^{-12}}\)
S = 6.5 × 10-5 M
Ag+ आयनों की मोलरता
= 2S = 2 × 6.5 x 10-5 M
= 1.3 × 10-4 M
CrO42- आयनों की मोलरता
= S = 6.5 x 10-5 M

(ii) (BaCrO4)
BaCrO4 ⇌ Ba2+ (aq) + CrO42- (aq)
माना जल में लवण की विलेयता S है।
[Ba2+(aq)] = S
[CrO42-] = S
Ksp = [Ba2+ (aq)] [CrO42-(aq)]
1.2 × 10-10 = S x S = S²
S = (1.2 × 10-10)1/2
S = 1.10 × 105- M
Ba2+ (aq) आयनों की मोलरता = 1.1 x 105- M
CrO42- आयनों की मोलरता = 1.1 × 105- M

(iii) (Fe(OH)3)
Fe(OH)3(aq) ⇌ Fe3+(aq) + 3OH(aq)
माना जल में लवण की विलेयता S है।
Fe3+(aq) = S
[OH] (aq) = 3S
Ksp = [Fe3+(aq)] [OH(aq)]³
1.0 × 10-38 = S × (3S)³ = 27S4
S = \(\left(\frac{1.0 \times 10^{-38}}{27}\right)^{1 / 4}\)
= 1.387 x 10-10 M
Fe3+(aq) आयनों की मोलरता
= 1.387 × 10-10 M
OH (aq) आयनों की मोलरता
= 3 × 1.387 × 10-10 M
= 4.16 × 10-10 M

(iv) (PbCl2)
PbCl2 ⇌ Pb2+ + 2Cl(aq)
माना लवण की जल में विलेयता = S
Pb2+(aq) = S
Cl (aq) = 2S
Ksp = [Pb2+aq] [CI(aq)]²
1.6 × 10-5 = (S) × (2S)² = 4S³
S³ = \(\frac{1.6 \times 10^{-5}}{4}\) = 4.0 x 10-6
S = (4.0 × 10-6)1/3 = 1.58 × 10-2 M
Pb2+ (aq) आयनों की मोलरता
= 1.58 x 10-2 M
Cl(aq) आयनों की मोलरता
= 3.16 × 10-2 M

(v) (Hg2I2)
Hg2I2 ⇌ Hg22+ + 2I (aq)
माना जल में Hg2I2 की विलेयता = S
Hg2I2+(aq) = S
I (aq) = 2S
Ksp= [Hg22+(aq)] [I(aq)]²
45 × 10-29 = (S) × (2S)² = 4S³
S³ = \(\frac{4.5 \times 10^{-29}}{4}\) = 1.125 × 10-29
S = (1.125 × 10-29)1/3
= 2.24 x 10-10 M
Hg22+ (aq) आयनों की मोलरता
= 2.24 x 10-10 M
I (aq) आयनों की मोलरता
= 4.48 × 10-10 M

प्रश्न 68.
Ag2CrO4 तथा AgBr का विलेयता गुणनफल क्रमशः 1.1 × 10-12 तथा 5.0 x 10-13 है। उनके संतृप्त विलयन की मोलरता का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल:
Ag2CrO4 ⇌ = 2Ag+(aq) + CrO42-(aq)
माना लवण की जल में विलेयता S है।
[Ag+(aq)] = 2S
[CrO42-(aq)] = S
Ksp = [Ag+(aq)]² [CrO42-(aq)]
= (2S)² × S = 4S³
S = \(\left(\frac{\mathrm{K}_{s p}}{4}\right)^{1 / 3}=\left(\frac{1.1 \times 10^{-12}}{4}\right)^{1 / 3}\)
= 0.65 × 10-4 mol L-1
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था 36

प्रश्न 69.
यदि 0.002 M सान्द्रता वाले सोडियम आयोडेट तथा क्यूप्रिक क्लोरेट विलयन के समान आयतन को मिलाया जाए तो क्या कॉपर आयोडेट का अवक्षेपण होगा?
(कॉपर आयोडेट के लिए Ksp = 7.4 x 10-6)
हल:
मिश्रण के पश्चात् NaIO3 की सान्द्रता
= \(\frac { 0.002 }{ 2 }\) = 0.001 M
Cu (ClO3)2 की सान्द्रता मिश्रण के पश्चात्
= \(\frac { 0.002 }{ 2 }\) = 0.001 M
NaIO3 ⇌ Na+ + IO3
[IO3] = 0.001 M
Cu (ClO3)2 ⇌ Cu2+ + 2 ClO3
[Cu2+] = 0.001 M
Cu (IO3)2 का आयनिक गुणनफल= [Cu2+][IO3
= (0.001) (0.001)²
= (0.001) (0.001)²
= 1 × 10-9
चूँकि Kp (7.4 x 10-4) का मान आयनिक गुणनफल (1 × 10-9) की तुलना में काफी अधिक है अतः अवक्षेपण नहीं होगा। आयनिक गुणनफल विलेयता गुणनफल से कम है। अतः कोई अवक्षेप नहीं बनेगा।

प्रश्न 70.
बैन्जोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक 6.46 x 10-5 तथा सिल्वर बैन्जोएट का Ksp2.5 x 10-13 है। 3.19 pH वाले बफर विलयन में सिल्वर बॅन्जोएट जल की तुलना में कितना विलेय होगा?
हल:
C6H5COOAg ⇌ C6H5COO + Ag+
माना सिल्वर वैन्जोएट की विलेयता X mol L
Ksp = [C6H5COO][Ag+]
X² = Ksp = 2.5 × 10-13
X = \(\sqrt{\mathrm{K}_{S P}}=\sqrt{2.5 \times 10^{-13}}\)
= 5.0 x 10-7 mol L-1
बफर का pH = 3.19
PH = – log [H+]
3.19 = – log [H] = 3.19 = \(\overline{4}\).81
[H+] = antilog \(\overline{4}\).81 = 6.457 x 10-4
C6H5COO ⇌ आयन H+ आयन के साथ बैन्जोइक अम्ल बनाता है। परन्तु H+ आयन स्थिर रहता है बफर विलयन के कारण
C6H5COOH ⇌ C6H5COO + H+
Ka = \(\frac{\left[\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_5 \mathrm{COO}^{-}\right]\left[\mathrm{H}^{+}\right]}{\left[\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_5 \mathrm{COOH}\right]}\)
= \(\frac{6.457 \times 10^{-4}}{6.46 \times 10^{-5}}\) = 10
माना बफर विलयन में विलेयता Y मोल/लीटर है।
तब लगभग सारा बैजोएट आयन बैन्जोइक अम्ल में बदल जायेगा।
Y = [Ag+] = [C6H5COO] + [C6H5COOH]
= [C6H5COO] + 10[C6H5COO]
= 11[C6H5COO]
या [C6H5COO] = \(\frac { y }{ 11 }\)
Ksp = [C6H5COO] [Ag+]
2.5 × 10-13 = \(\frac { y }{ 11 }\) x y
y² = 11 x 2.5 x 10-13 = 2.75 × 10-12
y = (2.75 x 10-12)1/2 = 166 x 10-6 mol L-1
बफर तथा जल में सिल्वर बैन्जोएट की विलेयताओं का अनुपात
\(\frac { y }{ x }\) = \(\frac{\left(1.66 \times 10^6\right)}{5.0 \times 10^7}\) = 3.32

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 7 साम्यावस्था

प्रश्न 71.
फेरस सल्फेट तथा सोडियम सल्फाइड के सममोलर विलयनों की अधिकतम सान्द्रता बताइए जब उनके समान आयतन मिलाने पर आयरन सल्फाइड अवक्षेपित न हो।
(आयरन सल्फाइड के लिये Ksp = 6.3× 10-18)
हल:
माना FeSO4 तथा Na2S दोनों विलयनों की सान्द्रताएँ मिलाने से पहले x mol L-1 या xM है विलयनों के समान आयतन मिलाने पर विलयन तथा आयनों की सान्द्रता घटकर आधी अर्थात् \(\frac { x }{ 2 }\) रह जाती है।
FeS का विलेयता गुणनफल Ksp = 6.3 × 10-18
FeS(s) ⇌ Fe2+ (aq) + S2- (aq)
\(\frac { x }{ 2 }\) \(\frac { x }{ 2 }\)
\(\frac { x }{ 2 }\) x \(\frac { x }{ 2 }\) = 6.3 x 10-18
x² = 4 × 6.3 × 10-18
= 25.2 x 10-18 M
x = (25.2 × 10-18)1/2
= 5.02 x 10-9 M
दोनों विलयनों की अधिकतम सान्द्रताएँ 5-02 x 10-9 M हैं

प्रश्न 72.
1g कैल्सियम सल्फेट को घोलने के लिए कम से कम कितने आयतन जल की आवश्यकता होगी?
(CaSO4 के लिए Ksp 9.1 x 10-6)
हल:
CaSO4 (s) ⇌ Ca2+(aq) + SO42-(aq)
यदि CaSO4 की विलेयता S है, तो
S = \(\sqrt{\mathrm{K}_{s p}}\)
= \(\sqrt{9.1 \times 10^{-6}}\)
= 3.02 x 10-3 mol L-1
CaSO4 का मोलर द्रव्यमान = 40 + 32 + 64
= 136 g mol-1
CaSO4 का द्रव्यमान
= (3.02 x 10-3) × 136
= 0.411 g L-1
0.411 g CaSO4 को घोलने के लिये आवश्यक जल
= 1 L
1 g CaSO4 को घोलने के लिये आवश्यक जल का आयतन
= \(\frac { 1×1 }{ 0.411 }\)
= 2.43 L

प्रश्न 73.
0.1 M HCl में हाइड्रोजन सल्फाइड से संतृप्त विलयन की सान्द्रता 1.0 x 10-19 M है। यदि इस विलयन का 10 mL निम्नलिखित 0.04 M विलयन के 5mL में डाला जाये तो किन विलयनों से अवक्षेप प्राप्त होगा?
FeSO4, MnCl2, ZnCl2 एवं CdCl2
हल:
प्रश्नानुसार
सल्फाइड (S2-) आयनों की सान्द्रता
= 1.0 × 10-19M
M = 1.0 × 10-19M
M2 = ?
V1 = 10mL
V2 = 15ml
M1 V1 = M2V2
1.0 × 10-19 × 10 = M2 × 15
M2 = \(\frac{1.0 \times 10^{-19} \times 10}{15}\)
= 0.67 × 10-19
= 6.7 × 10-20
धातु आयनों [M2-] की सान्द्रता
= 5 × 0.04 × 103- mol L-1
= 2 × 10-4 mol L-1
M1V1 = M2V2
M1 = 2 × 10-4 M
M2 = ?
V1 = 5 mL
V1 = 15 ml
M1V1 = M2V2
2 × 10-4 × 5 = M2 × 15
M2 = \(\frac { 5 }{ 15 }\) x 2 x 104-
= 6.7 x 10-5 mol L-1
आयनिक गुणनफल
= [M2+] [S2-]
= 6.7 × 10-5 × 6.7 x 10-20
= 44.89 × 10-25
= 4.5 × 10-24
चूँकि Zn S का Ksp 2.0 x 10-23 है जो आयनिक गुणनफल से अधिक है, अत: यह अवक्षेपित नहीं होगा। FeS का Ksp 6.3 x 10-18 है, MnS का Ksp 2.5 × 10-3 तथा Cds का Ksp 8.0 x 10-27 है। चूंकि Cds का Ksp आयनिक गुणनफल से कम है इसलिये CdCl2 में अवक्षेपण हो जायेगा।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 6 ऊष्मागतिकी

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 6 ऊष्मागतिकी Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 6 ऊष्मागतिकी

सही उत्तर चुनिए-

प्रश्न 1.
ऊष्मागतिकी अवस्था फलन एक राशि है-
(i) जो ऊष्मा परिवर्तनों के लिए प्रयुक्त होती है।
(ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।
(iii) जो दाब – आयतन कार्य की गणना करने में प्रयुक्त होती है।
(iv) जिसका मान केवल ताप पर निर्भर करता है।
उत्तर:
(ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 2.
एक प्रक्रम के रूद्धोष्म परिस्थितियों के होने के लिए-
(i) ∆T = 0
(ii) ∆P = 0
(iii) q = 0
(iv) W = 0
उत्तर:
(iii) q = 0

प्रश्न 3.
सभी तत्वों की एन्थैल्पी उनकी सन्दर्भ – अवस्था में होती है-
(i) इकाई
(ii) शून्य
(iii) < 0
(iv) सभी तत्वों के लिए भिन्न होती है
उत्तर:
(iii) शून्य।

प्रश्न 4.
मेथेन के दहन के लिये ∆U° का मान – X kJ mol-1 है, इसके लिये ∆H° का मान होगा-
(i) = ∆U°
(ii) > ∆U°
(iii) < ∆U°
(iv) = 0
उत्तर:
(iii) < ∆U°
मेथेन के दहन को निम्न अभिक्रिया द्वारा प्रदर्शित करते हैं-
CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(l)
∆ng = 1 – 3 = – 2
अतः
∆HΘ = ∆U° + ∆ng RT से
∆HΘ < ∆U° (∵ ∆ng = – 3)

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 6 ऊष्मागतिकी

प्रश्न 5.
मेथेन, ग्रेफाइट एवं डाई हाइड्रोजन के लिए 298 K पर एन्थैल्पी के मान क्रमश: – 890 kJ mol-1 393.5 kJ mol-1 एवं – 285.8 kJ mol-1 है। CH4(g) की विरचन एन्थैल्पी क्या होगी?
(i) – 74.8 kJ mol-1
(ii) – 52.27 kJ mol-1
(iii) – 74.8 kJ mol-1
(iv) + 52.26 kJ mol-1
उत्तर:
(i) – 74.8 kJ mol-1
fHΘ(CH4) = 2 ∆cHΘ (H2) + ∆cHΘ(C) – ∆cHΘ (CH4)
= 2 + (- 285.8) + (- 293.5) – (- 890.3)
= – 74 kJ mol-1

प्रश्न 6.
एक अभिक्रिया A + B → C + D + q के लिए एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक पाया गया है। यह अभिक्रिया सम्भव होगी-
(i) उच्च ताप
(ii) केवल निम्न ताप पर
(iii) किसी भी ताप पर नहीं
(iv) किसी भी ताप पर।
उत्तर:
(iv) किसी भी ताप पर।
क्योंकि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है जिसके लिये (∆H < 0) तथा (AS > 0) इसलिये यह अभिक्रिया सभी तापों पर स्वतः प्रवर्तित होगी।

प्रश्न 7.
एक प्रक्रम में निकाय द्वारा 70 J ऊष्मा अवशोषित होती है एवं 394 J कार्य किया जाता है। इस प्रक्रम में आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा ?
उत्तर:
निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा (q) = 701 J
निकाय द्वारा किया गया कार्य (W) = 394 J
अतः आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन (∆U) = g + w
= 701 + (- 394)
= 701394 = 307 J
इस प्रक्रम की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन 307 जूल होता है।

प्रश्न 8.
एक बम कैलोरीमीटर में NH4CN (s) की अभिक्रिया डाई ऑक्सीजन के साथ की गई एवं ∆U का मान 742.7 kJ mol-1 पाया गया (298K पर)। इस अभिक्रिया के लिए 298K पर एन्थैल्पी परिवर्तन ज्ञात कीजिए-
NH2 CN(s) + \(\frac { 3 }{ 2 }\) O2 (g) → N2 (g) + CO2 (g) + H2O(l)
उत्तर:
अभिक्रिया NH2 CN (s) + 2 O2 (8) → N2(g) + CO2(g) + H2O (l) के लिए
∆U = – 742.7 kJ mol-1
∆ng = 2 – \(\frac { 3 }{ 2 }\) = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
R = 8.314 × 10-3 KJ K-1 mol-1
T = 298 K
∆H = ∆U + ∆ngRT मान रखने पर
∆H = (- 742.7) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) (8.314 × 10-3) × 298
= – 741 kJ mol-1
अभिक्रिया के दौरान होने वाला परिवर्तन – 741 kJ mol-1 है।

प्रश्न 9.
60.0 ग्राम एलुमिनियम का ताप 35°C से 55°C करने के लिये कितने kJ ऊष्मा की आवश्यकता होगी ? AI की मोलर ऊष्माधारिता 24 J moll K-1 है।
उत्तर:
Al का द्रव्यमान = 60.0 ग्राम
ताप में वृद्धि ∆T = T2 – T1
= 55 – 35
= 20°C
या T2 = 55 + 273
= 328K
T1 = 35 + 273
= 308K
T2 – T1 = 328 – 308
= 20K
Al की मोलर ऊष्माधारिता = 24 J mol K-1
Al का मोलर द्रव्यमान = 27g mol-1
Al की विशिष्ट ऊष्माधारिता =\(\frac { 24 }{ 27 }\) Jg-1 K-1
आवश्यक ऊष्मा (q) = C x m + ∆T
= \(\frac { 24 }{ 27 }\) x 60.0 × 20
= 1065.6 J
= 1.067 kJ
1.067 kJ ऊष्मा की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 10.
10-0°C पर 1 मोल जल की बर्फ जमाने पर एन्थैल्पी रिवर्तन की गणना कीजिए-
∆Hfus = 6.03 kJ mol-1 0°C पर
Cp [H2O (l)] = 75.3 mol-1 K-1
Cp [H2O (s) = 360 J mol-1 K-1
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 6 ऊष्मागतिकी 1
हैस के नियमानुसार,
ΔΗ = ΔH1 + ΔH2 + ΔH3
∆H1 = Cp [H2O (l) ] × ΔT
= 75.3 J mol-1 K-1 ( 10K)
= 753 J mol
∆H2 (ठोसीकरण) = – 6.03 kJ mol-1
(चिन्ह परिवर्तित) = – 6030 J mol-1
∆H3 = Cp [H2O (s)] × ∆T
= 36.8 J mol-1 K-1 (-10K )
= – 368 J mol-1
∆H = (753 – 6030 – 368) J mol-1
∆H = – 5635J mol-1
= – 5.645 kJ mol-1

प्रश्न 11.
CO2 की दहन एन्थैल्पी 393.5 kJ mol-1 हैं। कार्बन एवं ऑक्सीजन से 35.2 g CO2 बनने पर उत्सर्जित ऊष्मा की गणना कीजिए।
उत्तर:
C(s) + O2 (g) ⇒ CO2 (g); ∆H° = 393 kJ mol-1
∵ 44g CO2 के निर्माण में मुक्त ऊर्जा = 393.5 kJ
∴ 35.2g CO2 के निर्माण में मुक्त होने वाली ऊर्जा = \(\frac { 393.5×35.2 }{ 44 }\)
= 314.8 kJ
35.2g CO2 के बनने में 314.8 kJ ऊर्जा मुक्त होती है।

प्रश्न 12.
CO(g), CO2 (g), N2O(g) एवं N2O4(g) की विरचन एन्थैल्पी क्रमश: – 110, – 393,81 एवं 9.7 kJ हैं। अभिक्रिया, N2O4(g) + 3CO(g) → N2O(g) + 3CO2(g) के लिये ∆rHΘ का मान ज्ञात करें।
उत्तर:
N2O4(g) + 3CO(g) → N2O(g) + 3CO2(g)
rHΘ = (∆fHΘ (N2O) + 3 × ∆fHΘ (CO2)
– (∆fHΘN2O4 + 3 × ∆fHΘ (CO)]
= [81 + (3 x 393)] – 9.7 + (3 x – 110)]
= [81 – 1179][9.7 – 330]
= – 777.7 kJ mol-1

प्रश्न 13.
N2 (g) + 3H2(g) → 2NH3 (g) ; ∆rHΘ = – 92.4 kJ mol-1
गैस की विरचन एन्थैल्पी का मान क्या होगा?
उत्तर:
NH3 गैस की मानक विरचन एन्थैल्पी
fHΘ (NH3(g)) = \(\frac { -92.4 }{ 2 }\)
= – 46.2 kJ mol-1
NH3 की मानक विरचन एन्थैल्पी का मान – 46.2 kJ mol-1 है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित आँकड़ों से CH3 OH (l) की मानक विरचन एन्थैल्पी ज्ञात कीजिए-
CH3 OH (l) + \(\frac { 3 }{ 2 }\) O2 (g) → CO2 (g) + 2H2O (l)
rHΘ = – 726 kJ mol-1
C (s) + O2 (g) → CO2 (g),
cHΘ = – 393 kJ mol-1
H2 (g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2 (g) H2O (l)
fHΘ = – 286 kJ mol-1
उत्तर:
CH3OH (g) की मानक विरचन एन्थैल्पी निम्नलिखित समीकरण से ज्ञात की जा सकती है-
C(s) + 3H2 (g) + O2 (g) ⇒ CH3OH (l) ∆fH° = ?
दी गई समीकरण निम्न प्रकार है-
CH3OH (l) + \(\frac { 3 }{ 2 }\) O2 (g) ⇒ CO2(g) + 2H2O (l),
rHΘ = 726 kJ mol-1 … (1)
C(s) + O2 (g) = CO2 (g),
cHΘ = 393 kJ mol-1 … (2)
H2(g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2 (g) ⇒ H2O (l),
rHΘ= – 286 kJ mol-1 … (3)
समीकरण (3) को (2) से गुणा करके समीकरण (2) में जोड़ने पर,
C(s) + 2H2 (g) + 2O2 (g) ⇒ CO2 (g) + 2H2O (l),
rHΘ = (- 393 – 572)
= – 965 kJ mol-1 … (4)
CH3OH (l) + \(\frac { 3 }{ 2 }\) O2 (g) ⇒ CO2(g) + 2H2O (l),
rHΘ = 726 kJ mol-1
समीकरण (4) में समीकरण (1) घटाने पर,
C(s) + 2H2 (g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2 (g) ⇒ CH3OH (l),
fHΘ = – 239 kJ mol-1
CH3OH की मानक विरचन एन्थैल्पी का मान – 239 kJ mol-1

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प्रश्न 15.
CCl4(g) → C(g) + 4Cl(g) अभिक्रिया के लिये एन्थैपी परिवर्तन ज्ञात कीजिए एवं CCl4 में C – Cl की आबंध एन्थैल्पी की गणना कीजिए।
∆VapHΘ (CCl4) = 30.5 kJ mol-1
fHΘ (CCl4) = 135.5 kJ mol-1
aHΘ (C) = 715.0 kJ mol-1)
यहाँ ∆aHΘ कन एन्थैल्पी है।
aHΘ(Cl2) = 242 kJ mol-1
उत्तर:
दिये गये मानों के लिये ऊष्मीय रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) CCl4(g) → CCl4 (g) ∆H1 = 30.5kJ mol-1
(ii) C(s) + 2Cl2 (g) → CCl4 (l) ; ∆H2 = 135.5kJ mol-1
(iii) C(s) → C(g) ; ∆H3 = 715.0kJ mol-1
(iv) Cl2(g) → 2Cl(g) ; ∆H4 = 242 kJ mol-1
प्रश्नानुसार, CCl4(g) → C(g) +4Cl(g) ; ∆H = ?
समी. (iii) + 2 x समी. (iv) – समी. (i) समी. (ii)
∆H = ∆H3 + 2∆H4 – ∆H1 – ∆H2
∆H = 715.0 + 2 (242) 30.5 – ( – 135.5 ) kJ mol-1
= 1304 kJ mol-1
CCl4 में C – CI की बन्ध एन्थैल्पी ( औसत मान )
= \(\frac { 1304 }{ 4 }\)
= 326 kJ mol-1
C – Cl की बन्ध एन्थैल्पी का मान 326 kJmol-1 है।

प्रश्न 16.
एक विलगित निकाय के लिए ∆U = 0, इसके लिए ∆S क्या होगा?
उत्तर:
∆S शून्य से अधिक होगा क्योंकि विलगित निकाय में यदि दो गैसों को मिश्रित किया जाता है तो ∆U = 0 परन्तु एन्ट्रॉपी बढ़ती है । अत: ∆S शून्य से अधिक होगा।

प्रश्न 17.
298 K पर अभिक्रिया 2A + B → C के लिए ∆H = 400kl mol-1 एवं ∆S = 0.2kJK-1 mor ∆H एवं ∆S को ताप विस्तार में स्थिर मानते हुए बताइए कि किस ताप पर अभिक्रिया स्वतः होगी?
उत्तर:
2A + B → C
∆H = 400kJ mol-1
AS = 0.2kJmol-1
∆G = ∆H – T ∆ S
0 = 400 2.0 X T (∵ ∆G = 0 साम्यावस्था)
0.2T = 400
T = \(\frac { 400 }{ 0.2 }\) = 2000K
2000 K से अधिक ताप पर अभिक्रिया स्वतः होगी।

प्रश्न 18.
अभिक्रिया 2Cl (g) →Cl2 (g) के लिए ∆H एवं ∆S के चिन्ह क्या होंगे ?
उत्तर:
∆H = – ve
AS = – ve
अभिक्रिया में आबन्धों का निर्माण होने से यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है। Cl परमाणु के 2 क्लोरीन, क्लोरीन अणु के एक मोल की तुलना में अधिक एन्ट्रॉपी रखते हैं।

प्रश्न 19.
अभिक्रिया 2A (g) + B (g) → 2D (g) के लिए AU° = – 10.5 kJ उवं ∆S° = 44.1 JK-1 अभिक्रिया के लिए ∆G° की गणना कीजिए और बताइए कि क्या अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित हो सकती है?
उत्तर:
2A (g) + B (g) → 2D(g)
∆H° = ∆U° + ∆ng RT
∆U° = – 10.5 kJ mol-1
∆ng = 2 – 3 = -1
R = 8.314 × 10-3 kJ K-1 mol-1
T = 298K
∴ ∆H° = (- 10.5 kJ mol-1) + [(- 1) × (8.314 × 10-3 kJ mol-1 K-1 x (298K)]
= – 10.5 kJ mol-1 – 2.478 kJmol-1
= – 12.978 kJ mol-1
गिब्स हैल्महोल्ट्ज समीकरण के अनुसार,
∆G° = ∆H° – T∆S°
∆G° = (- 12.978 kJ mol-1 ) – ( 298K) × (- 0.44K JK-1 mol-1)
= – 12.978 + 13.112
= + 0.134 kJ mol-1
चूँकि ∆G° धनात्मक है अतः अभिक्रिया की प्रकृति स्वतः प्रवर्तित नहीं होगी।

प्रश्न 20.
300K पर एक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक 10 है। ∆G° का मान क्या होगा?
(R = 8.314 JK-1 mol’)
उत्तर”
∆G° = – RT In K = 2.303 RT log Kp
R = 8.314 JK-1 mol-1
T = 300K
Kp = 10
∆G° = – 2.303 × (8.314 JK-1 mol-1 ) x (300K ) log 10
= – 5744.14 J mol-1
= – 5.744 kJ mol-1

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 6 ऊष्मागतिकी

प्रश्न 21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के आधार पर NO (g) तथा NO2 (g) की ऊष्मागतिकी पर टिप्पणी कीजिए-
(i) \(\frac { 1 }{ 2 }\) N2(g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2 (g) → NO(g); ∆rHΘ = 90 kJ mol-1
(ii) NO(g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\)O2 (g) → NO2(g); ∆rHΘ = – 74 kJ mol-1
उत्तर:
(i) \(\frac { 1 }{ 2 }\) N2(g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\) O2 (g) → NO(g); ∆rHΘ = 90 kJ mol-1
चूँकि यहाँ ∆rHΘ धनात्मक है अत: NO ऊष्मागतिक रूप से स्थायी नहीं है। अतः इसका निर्माण एक ऊष्माशोषी प्रक्रम है।

(ii) NO(g) + \(\frac { 1 }{ 2 }\)O2 (g) → NO2(g); ∆rHΘ = – 74 kJ mol-1
NO का NO2 में ऑक्सीकरण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है क्योंकि ∆Hr° – ऋणात्मक है इसलिए NO2 ऊष्मागतिक रूप से स्थायी है।

प्रश्न 22.
जब 1.00 mol H2O (1) को मानक परिस्थितियों में विरचित किया जाता है तब परिवेश के एन्ट्रॉपी परिवर्तन की गणना कीजिए। ∆fHΘ = – 286kJ mol-1
उत्तर:
H2O(l) की ∆fHΘ = – 268 kJ mol-1
जो कि परिवेश में ऊष्मा उत्सर्जन को बताता है,
q(surr) = H2O के लिए – ∆fHΘ
= – (- 268 kJ mol-1 )
= + 286 kJ mol-1
∆Ssurr = \(\frac{q_{\text {(surr) }}}{\mathrm{T}}\)
= \(\frac{286 \times 10^3\left(\mathrm{~J} \mathrm{~mol}^{-1}\right)}{298 \cdot 15(\mathrm{~K})}\)
= 959.24 JK-1 mol-1

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 1.
30°C तथा 1 bar दाब पर वायु के 500dm आयतन 200 dm³ तक संपीडित करने के लिये कितने न्यूनतम दाब की आवश्यकता होगी ?
हल:
P1 = 1 bar, P2 =?
V1 = 500 dm³
V2 = 200 dm³
स्थिर ताप 30°C है अतः
P1V1 = P2V2 (बॉयल का नियम)
1 × 500 = P2 × 200
P2 = \(\frac{1 \times 500}{200}\) = 2.5 bar

प्रश्न 2.
35°C ताप तथा 1.2 bar दाब पर 120 ml धारिता वाले पात्र में गैस की निश्चित मात्रा भरी है। यदि 35°C पर गैस को 180 ml धारिता वाले फ्लास्क में स्थानान्तरित किया जाता है तो गैस का दाब क्या होगा?
हल:
P1 = 1.2 bar, P2 = ?
V1 = 120 ml, V2 = 180ml
चूँकि ताप स्थिर है अतः
P1 V1 = P2 V2 (बॉयल का नियम)
P2 = \(\frac{1.2 \mathrm{bar} \times 120 \mathrm{ml}}{180 \mathrm{ml}}\)
= 0.8 bar

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 3.
आदर्श गैस समीकरण PV = nR T का उपयोग करते हुए स्पष्ट कीजिए कि दिये गये ताप पर गैस का घनत्व गैस के दाब के समानुपाती होता है?
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 1

प्रश्न 4.
0°C पर तथा 2 bar दाब पर किसी गैस के ऑक्साइड का घनत्व 5 bar दाब पर डाई नाइट्रोजन के घनत्व के समान है तो ऑक्साइड का अणुभार क्या है?
हल:
गैस का घनत्व (घ) = \(\frac { PM }{ RT }\) (R तथा T स्थिरांक हैं)
नाइट्रोजन के लिए P = 5 bar M = 28g mol-1
dN2 = \(\frac { PM }{ RT }\) = \(\frac { 5×28 }{ RT }\)
गैसीय ऑक्साइड के लिए P = 2 bar, M = ?
\(\frac { PM }{ RT }\) = \(\frac { 2×M }{ RT }\)
प्रश्न के अनुसार dN2 = d ऑक्साइड
\(\frac { 5×28 }{ RT }\) = \(\frac { 2×M }{ RT }\)
5 × 28 = \(\frac { 2 × M × R × T }{ RT }\)
5 x 28 = 2 × M
M = \(\frac { 5×28 }{ 2 }\)
= 70g mol-1

प्रश्न 5.
27°C पर 1g आदर्श गैस का दाब 2 bar है। जब समान ताप एवं दाब पर उसमें 2g आदर्श गैस मिलायी जाती है तो दाब 3 bar हो जाता है। इन गैसों के अणुभार में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
हल:
माना दोनों गैसों A तथा B के मोलर द्रव्यमान क्रमश: MA तथा MB हैं।
गैस A के मोलों की संख्या (nA)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 2
गैस A का दाब (PA = 2 bar)
गैस A तथा B का दाब (PA + PB) = 3 bar
PB = (3 – 2) = 1 bar
PAV = nA RT (आदर्श गैस समीकरण)
PBV = nB RT (आदर्श गैस समीकरण)
\(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{P}_{\mathrm{B}}}=\frac{n_{\mathrm{A}}}{n_{\mathrm{B}}}=\frac{(2 \mathrm{bar})}{(1 \mathrm{bar})}=\frac{2}{1}\) … (2)
समीकरण (1) तथा (2) से,
\(\frac{\mathrm{M}_{\mathrm{B}}}{2 \mathrm{M}_{\mathrm{A}}}=\frac{n_{\mathrm{A}}}{n_{\mathrm{B}}}=\frac{2}{1}\)
या \(\frac{\mathrm{M}_{\mathrm{B}}}{2 \mathrm{M}_{\mathrm{A}}}=\frac{2}{1}\)
MB = 4MA

प्रश्न 6.
नाली साफ करने वाले ड्रेनेक्स में सूक्ष्म मात्रा में एलुमिनियम होता है। यह कास्टिक सोडा से क्रिया कर डाई हाइड्रोजन गैस देता है। यदि 1 bar तथा 20°C ताप पर 0.15 g एलुमिनियम अभिक्रिया करेगा तो निर्गमित डाइ हाइड्रोजन का आयतन क्या होगा?
हल:
2 Al + 2 NaOH + 2H2O → 2Na AlO2 + 3H2
2 × 27 = 54g
NTP पर 54 g Al द्वारा प्राप्त हाइड्रोजन = 3 x 22400 ml
NTP पर 0.15 g Al द्वारा प्राप्त हाइड्रोजन
= \(\frac{(3 \times 22400) \times(0.15 \mathrm{~g})}{(54 \mathrm{~g})}\) = 186.67 ml
V1 = 186.67 ml, V2 = ?
P1 = 1.013 bar, P2 = 1 bar
T1 = 0 + 273 = 273 K, T2 = 20 + 273 = 293 K
\(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}{\mathrm{~T}_2}\)
V2 = \(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1 \mathrm{~T}_2}{\mathrm{P}_2 \mathrm{~T}_1}=\frac{1.013 \times 186.67 \times 293}{273}\)
= 203 ml
निर्गमित डाईहाइड्रोजन का आयतन 200.35ml होगा।

प्रश्न 7.
यदि 27°C पर 9dm धारिता वाले फ्लास्क में 3.21 मेथेन तथा 4.4g कार्बन डाइ ऑक्साइड का मिश्रण हो तो इसका दाव क्या होगा?
हल:
मेथेन के मोलों की संख्या (n1)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 3
गैसीय मिश्रण का कुल दाब P = PCH4 + PCO2
= 5.543 × 104 Pa + 2.771 × 104 Pa
= 8.314 × 104 Pa

प्रश्न 8.
27°C ताप पर जब 1L के फ्लास्क में 0.7bar पर 2.0 L ऑक्सीजन तथा 0.8 bar पर 0.5 L डाइ हाइड्रोजन को भरा जाता है तो गैसीय मिश्रण का दाब क्या होगा?
हल:
डाइऑक्सीजन के मोलों की संख्या
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 4

प्रश्न 9.
यदि 27°C ताप तथा 2 bar दाब पर एक गैस का घनत्व 5.46 g/dm³ है तो STP पर इसका घनत्व क्या होगा?
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 5
प्रश्नानुसार
d1 = 5.46g/dm³ d2 = ?
T1 = 27 + 273 = 300K, T2 = 0 + 273 = 273 K
P1 = 2 bar P2 = 1.01325 bar
d2 = \(\frac{5.46 \times 1.01325 \times 300}{2 \times 273}\)
= 3.04 g/dm³

प्रश्न 10.
यदि 546°C तथा 0.1 bar दाब पर 34.05 ml फॉस्फोरस वाष्प का भार 0.0625 g है तो फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
PV = nRT (आदर्श गैस समीकरण)
PV = \(\frac { w }{ M }\)RT
M = \(\frac { wRT }{ PV }\)
फॉस्फोरस वाष्पों का द्रव्यमान (w) = 0.0625g
वाष्पों का आयतन (V) = 34.05 × 10-3 L
वाष्पों का दाब (P) = 0.1 bar
ताप (T) = 819 K
मान रखने पर
M = \(\frac { wRT }{ PV }\)
= \(\frac{(0.0625 \mathrm{~g})\left(0.083 \mathrm{bar} \mathrm{L} K^{-1} \mathrm{~mol}^{-1}\right) \times(819 K)}{(0.1 \text { bar }) \times\left(34.05 \times 10^{-3} \mathrm{~L}\right)}\)
= 1.248 × 103 g mol-1

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 11.
एक विद्यार्थी 27°C पर गोल पेंदे के फ्लास्क में अभिक्रिया मिश्रण डालना भूल गया तथा उस फ्लास्क को ज्वाला पर रख दिया। कुछ समय पश्चात् उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने उत्तापमापी की सहायता से फ्लास्क का ताप 477°C पाया। आप बताइये कि वायु का कितना भाग फ्लास्क से बाहर निकला।
हल:
प्रयोगशाला में कार्य करते समय दाब में कोई परिवर्तन नहीं हुआ अत: चार्ल्स के नियमानुसार
\(\frac{\mathrm{V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{V}_2}{\mathrm{~T}_2}\)
V2 = \(\frac{\mathrm{V}_1 \times \mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}\)
V1 = VL (माना) V2 = ?
T1 = 27 + 273 = 300K
T2 = 477 + 273 = 750K
V2 = \(\frac{\mathrm{VL} \times(750 \mathrm{~K})}{(300 \mathrm{~K})}\) = 2.5 V
बाहर निकलने वाली वायु का आयतन = 2.5 V – V
= 1.5 V
बाहर निकलने वाली वायु का भाग = \(\frac { 1.5V }{ 2.5V }\) = \(\frac { 3 }{ 5 }\)

प्रश्न 12.
3.32 bar पर 5dm³ का आयतन घेरने वाली 4.0 mol गैस के ताप की गणना कीजिए। (R = 0.083 bar dm 3 K-1 mol-1 )
हल:
गैस के मोलों की संख्या (n) = 4.0
मोल गैस का आयतन (V) = 5 dm³
गैस का दाब (P) = 3.32 bar
गैस स्थिरांक (R) = 0.083 bar dm³ K-1 mol-1
PV = nRT
T = \(\frac { PV }{ nR }\)
T = \(\frac{3.32 \times 5}{4.0 \times 0.083}\)
= 50K

प्रश्न 13.
1.4 ग्राम डाई नाइट्रोजन गैस में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की गणना कीजिए।
हल:
N2 का आण्विक द्रव्यमान = 28g
∵ 28g N2 में अणुओं की संख्या = 6.022 × 1023
∴ 1.4g N2 में अणुओं की संख्या
= \(\frac{6.022 \times 10^{23} \times 1.4 g}{28 g}\)
= 3.011 × 1022
नाइट्रोजन का परमाणुक्रमांक = 7
डाई नाइट्रोजन के एक अणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2 × 7 = 14
N2 के 3.011 × 1022 अणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या
= 14 × 3.011 × 1022
= 4.215 x 1023 इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 14.
यदि एक सेकेण्ड में 1010 गेहूँ के दाने वितरित किये जायें तो आवोगाद्रो की संख्या के बराबर दाने वितरित करने में कितना समय लगेगा।
हल:
1010 दानों को वितरित करने में लगने वाला समय = 1s
6.022 x 1023 दानों को वितरित करने में लगने वाला समय
= \(\frac{(1 s) \times 6.022 \times 10^{23}}{10^{10}}\)
= \(\frac{6.022 \times 10^{13}}{60 \times 60 \times 24 \times 365}\)
= 1.91 x 106 वर्ष

प्रश्न 15.
27°C ताप पर 1dm³ आयतन वाले फ्लास्क में 8g डाइ ऑक्सीजन तथा 4g डाइ हाइड्रोजन के मिश्रण का कुल दाब कितना होगा?
हल:
ऑक्सीजन के मोलों की सख्या (n1)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 6
गैसीय मिश्रण का कुल दाब P = PO2 + PH2
= 6.225 + 49.8 = 56.025 bar

प्रश्न 16.
गुब्बारे के भार तथा विस्थापित वायु के भार के अन्तर को पेलोड कहते हैं। यदि 27°C पर 10m त्रिज्या वाले गुब्बारे में 1.66 bar पर 100 kg हीलियम भरी जाये तो पेलोड की गणना कीजिए। (वायु का घनत्व d = 1.2 kgm-3 तथा R = 0.08bar dm³ K-1 mol-1)।
हल:
विस्थापित वायु के द्रव्यमान की गणना-
गुब्बारे की त्रिज्या = 10m
गुब्बारे का आयतन V = \(\frac { 4 }{ 3 }\)πr³
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) x (10)³
= 4190.5 m³
विस्थापित वायु का द्रव्यमान-
= गुब्बारे का आयतन वायु का घनत्व
= 4190.5 × 12
= 5028.6 kg
गुब्बारे का द्रव्यमान ज्ञात करना-
= \(\frac{1.66 \times 4190.5 \times 10^3}{0.083 \times 300}\)
= 279.37 x 10³ मोल
He का द्रव्यमान = He के मोल He का द्रव्यमान
= 279.37 × 10³ × 4
= 1117.48 × 10³ = 1117.48 kg
भरे हुए गुब्बारे का द्रव्यमान = 100 + 1117.48
= 1217.48 kg
पेलोड की गणना –
पेलोड = विस्थापित वायु का द्रव्यमान – भरे हुए गुब्बारे का द्रव्यमान
= 5028.6 – 1217.48
= 3811.12 kg

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 17.
31.1°C तथा 1 bar दाब पर 8.8g CO2 द्वारा घेरे गये आयतन की गणना कीजिए। (R= 0.083 bar L mol-1)।
हल:
CO2 के मोलों की संख्या (n)
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 7
= \(\frac { 8.8 }{ 44 }\)
= 0.2 mol
CO2 का दाब P = 1 bar
गैस स्थिरांक R = 0.083 bar LK-1 mol-1
ताप T = 31.1 + 273 = 304.1 K
PV = nRT
V = \(\frac{n \mathrm{RT}}{\mathrm{P}}=\frac{0.2 \times 0.083 \times 304.1}{1}\)
= 5.048 L

प्रश्न 18.
समान दाब पर किसी गैस के 2.9 g द्रव्यमान का 95°C तथा 0.184 g हाइड्रोजन का 17°C पर आयतन समान है। बताइये गैस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
गैस के मोलों की संख्या
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 8
गैस का ताप T1 = 95 + 273 = 368 K
हाइड्रोजन का ताप T2 = 17 + 273 = 290K
PV = n RT
दोनों गैसों के लिए PV तथा R स्थिरांक हैं।
n(g) × T1 = n(H2) × T2
n(g) = \(\frac{n_{\left(\mathrm{H}_2\right)} \times \mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}\)
\(\frac{2.9 g}{M}=\frac{(0.092 \mathrm{~mol})(290 \mathrm{~K})}{(368 \mathrm{~K})}\)
M = \(\frac{(2.9 \mathrm{~g})(368 \mathrm{~K})}{(0.092 \mathrm{~mol})(290 \mathrm{~K})}\)
= 40 g mol-1

प्रश्न 19.
1 bar दाब पर डाइ हाइड्रोजन तथा डाइ ऑक्सीजन को मिश्रण में 20% डाइ हाइड्रोजन (भार से) रखा जाता है तो डाइ हाइड्रोजन का आंशिक दाब क्या होगा?
हल:
माना कि मिश्रण में हाइड्रोजन का द्रव्यमान = 20 g मिश्रण में ऑक्सीजन का द्रव्यमान = 80 g
H2 के मोलों की संख्या (NH2) = \(\frac{20 \mathrm{~g}}{2 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}\)
= 10 mol
O2 के मोलों की संख्या (nO2) = \(\frac{80 \mathrm{~g}}{32 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}\) = 2.5 mol
गैसीय मिश्रण का कुल दाब = 1 bar
समान परिस्थितियों में गैसों के आंशिक दाबों का अनुपात इनके मोलों की संख्या के अनुपात के बराबर होगा।
अत : H2 का आंशिक दाब (PH2)
= \(\frac{10 \mathrm{~mol}}{12.5 \mathrm{~mol}}\) x (1 bar)
= 0.8 bar

प्रश्न 20.
\(\frac{\mathbf{P V}^2 \mathbf{T}^2}{n}\) राशि की SI इकाई क्या होगी?
हल:
\(\frac{\mathrm{PV}^2 \mathrm{~T}^2}{n}=\frac{\left(\mathrm{Nm}^{-2}\right)\left(\mathrm{m}^3\right)^2(\mathrm{~K})^2}{\mathrm{~mol}}\)
= Nm4K² mol-1

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 21.
चार्ल्स के नियम के आधार पर समझाइये कि न्यूनतम सम्भव ताप – 273°C होता है।
हल:
चार्ल्स के नियमानुसार
Vt = V0[1 + \(\frac { t }{ 273 }\)]
यदि t = 273°C हो तो
Vt = V0[1 + \(\frac { 1 }{ 273 }\) x – 273]
= V0(1 – 1)
Vt = 0
अतः – 273°C पर किसी गैस का आयतन शून्य हो जाता है। इस ताप को परम शून्य ताप कहते हैं परन्तु वास्तव में यह सम्भव नहीं है, क्योंकि सभी गैसें – 273°C ताप पर पहुँचने से पहले ही द्रव में परिवर्तित हो जाती हैं।

प्रश्न 22.
कार्बन डाइऑक्साइड तथा मेथेन का क्रान्तिक ताप क्रमशः 31.1.C एवं – 81.9 °C है। इनमें से किसमें प्रबल अन्तराआण्विक बल है, तथा क्यों ?
उत्तर:
क्रान्तिक तापों के मान से ज्ञात होता है कि CO2 के अणुओं में आकर्षण बल अधिक है दोनों ही गैसें अध्रुवीय हैं, परन्तु CO2 के अणुओं में वान्डर वाल बल अधिक होते हैं क्योंकि इसका आण्विक आकार बड़ा है।

प्रश्न 23.
वान्डर वाल प्राचल की भौतिक सार्थकता को समझाइये।
उत्तर:
(i) वान्डर वाल प्राचल (a) – इसका मान गैसों के अणुओं में उपस्थित आकर्षण बलों के परिमाण की माप होती है। अतः a का मान अधिक होने पर अन्तराआण्विक आकर्षण बलों का मान भी बढ़ जाता है।

(ii) वान्डर वाल प्रचल (b) – इसका मान गैस अणुओं के प्रभावी आकार की माप है। इसका मान गैस अणुओं के वास्तविक आयतन का चार गुना होता है। यह अपवर्जित आयतन कहलाता है।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 1.
रासायनिक आबन्ध के बनने की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
परमाणुओं के संयोग से अणु का बनना उनके बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करता है। जब परमाणु आपस में संयोग करते हैं तो वे पास-पास आते हैं। संयोग करने के बाद उनकी निकाय की ऊर्जा धारिता सबसे कम हो जाती है और निकाय का स्थायित्व बढ़ जाता है।

अतः एक अणु के दो परमाणुओं को एक साथ बाँधे रह सकने की आकर्षण बल क्षमता को रासायनिक आबन्धन कहते हैं।
कॉसेल-लुइस के अनुसार एक परमाणु के बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु के बाह्य कोश में स्थानान्तरित होकर अपना अष्टक पूरा करते हैं। जिससे वैद्युत संयोजक बंध बन जाता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित तत्वों के परमाणुओं के लूइस बिन्दु प्रतीक लिखिए।
Mg, Na, B, O, N, Br
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित परमाणुओं तथा आयनों के लूइस बिन्दु प्रतीक लिखिए।
S और S2-, Al तथा Al3+ H और H
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अणुओं तथा आयनों की लुइस संरचना लिखिए।
H2S, SiCl4, BeF2, CO32-, HCOOH
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 3

प्रश्न 5.
अष्टक नियम परिभाषित कीजिए। इस नियम का महत्त्व तथा सीमाएँ बताइ।
उत्तर:
परमाणुओं के बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण या सहभाजन द्वारा अष्टक पूरा करने को अष्टक नियम कहते हैं।
अष्टक नियम का महत्व –

  • कार्बनिक यौगिकों की संरचना समझने में अष्टक नियम महत्त्वपूर्ण है।
  • अधिकांश अणु बनने में अष्टक नियम का पालन करते हैं।

अष्टक नियम की सीमाएँ –

  • कुछ यौगिकों में केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर उपस्थित इलेक्ट्रॉन 8 से कम होते हैं। जैसे – BH3, BCl3
  • संक्रमण तत्वों में केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः ऐसे यौगिकों पर अष्टक नियम लागू नहीं होता है। जैसे SF6, PCl5 आदि।

अष्टक नियम की कुछ अन्य कमियाँ Some Other Demerits of Octel Rule:-
(1) जीनॉन के यौगिक (Compounds of xenone)-अष्टक नियम के अनुसार उत्कृष्ट गैसें यौगिक नहीं बनाती हैं, परन्तु Xe ऑक्सीजन तथा फ्लुओरीन के साथ यौगिक बनाती है जो कि काफी स्थायी होते हैं। उदाहरण- XeF2, XeF4, XeF6, XeOF2, XeOF4 आदि।

(2) अणुओं की आकृति (Shapes of molecules)-अणुओं की आकृति के सम्बन्ध में अष्टक नियम किसी भी प्रकार की व्याख्या नहीं करता है।

प्रश्न 6.
आयनिक बंध बनाने के लिए अनुकूल कारकों को लिखिये।
उत्तर:
निम्न कारक अनुकूल होते हैं –

  • आयनन एन्थैल्पी का मान कम से कम होना चाहिए ।
  • इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान अधिक ऋणात्मक होना चाहिए।
  • जालक ऊर्जा का परिमाण अधिक होने पर आयनिक बंध का स्थायित्व अधिक होगा।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 7.
निम्नलिखित अणुओं की आकृति की व्याख्या VSEPR सिद्धान्त के अनुरूप करें।
BeCl2, BCl3, SiCl4, AsF5, H2S, PH3
उत्तर:
(1) BeCl2 में दो आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = रेखीय

(2) BCl3 में तीन आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = त्रिकोणीय समतलीय

(3) SiCl4 में चार आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = चतुष्फलकीय

(4) AsF5 में पाँच आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय

(5) H2S में दो आबन्धी युग्म तथा दो एकाकी युग्म हैं।
अतः आकृति = बंकित अणु या मुड़ी हुयी

(6) PH3 में तीन आबन्धी युग्म तथा एक एकाकी युग्म
है, अत: आकृति = पिरामिडी

प्रश्न 8.
यद्यपि NH3 तथा H2O दोनों अणुओं की ज्यामिती विकृत चतुष्फलकीय होती है। तथापि जल में आबन्ध कोण अमोनिया की अपेक्षा कम होता है। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
NH3 तथा H2O में sp³ संकरण होता है। अतः इन अणुओं की आकृति चतुष्फलकीय होनी चाहिए। परन्तु NH3 में एक एकाकी युग्म N पर होता है जबकि H2O अणु में 0 पर दो एकाकी युग्म उपस्थित रहते हैं। VSEPR सिद्धान्त के अनुसार H2O में एकाकी युग्मों में प्रतिकर्षण अधिक होता है। अत: NH3 में आबन्ध कोण (107°) H2O के आबन्ध कोण (104.5) से अधिक होता है।

प्रश्न 9.
आबन्ध प्रबलता को आबन्ध कोटि के रूप में किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
उत्तर:
आबन्ध प्रबलता ∝ आबन्ध कोटि
अर्थात् आबन्ध कोटि जितना अधिक होगी, आबन्ध स्थायित्व उतना ही अधिक होगा।
उदाहरण-

अणुआबन्ध कोटि या आबन्ध क्रमआबन्ध स्थायित्व या आबन्ध वियोजन ऊर्जा (kJ/mol)
(1) नाइट्रोजन अणु (N2)3945
(2) ऑक्सीजन (O2)2498
(3) फ्लुओरीन अणु (F2)1158

प्रश्न 10.
आबन्ध लम्बाई की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी अणु में आबन्धित परमाणुओं के नाभिकों के बीच साम्यावस्था दूरी आबन्ध लम्बाई कहलाती है। इसे पिकोमीटर (1 pm = 10-12 m) में व्यक्त करते हैं।

‘आबन्ध लम्बाई’ कहलाती है। आबन्ध लम्बाई या सहसंयोजक आबन्ध की लम्बाई को स्पेक्ट्रमी, एक्स-किरण विवर्तन तथा इलेक्ट्रॉन विवर्तन (Electron Diffraction) आदि विधियों के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।

आबन्धित युग्म का प्रत्येक परमाणु आबन्ध की लम्बाई में योगदान करता है। सहसंयोजी आबन्ध में प्रत्येक परमाणु का योगदान उस परमाणु की सहसंयोजी त्रिज्या कहलाती है। वास्तव में सहसंयोजक आबन्ध आबन्धित परमाणुओं की सहसंयोजक त्रिज्या का योग होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 4
R = rA + rB
यहाँ R = आबन्ध लम्बाई है तथा rA एवं rB क्रमश: A व B परमाणुओं की सहसंयोजी त्रिज्यायें है । वाण्डर वाल त्रिज्या अनाबन्धित अवस्था में संयोजी कोश सहित परमाणु का समग्र आकार निरूपित करती है । वाण्डर वाल त्रिज्या ठोस अवस्था में विभिन्न अणुओं के दो समरूप परमाणुओं के बीच की दूरी की आधी होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 5
आबन्ध लम्बाई का मान सामान्यतया पिकोमीटर (1 pm = 10-12 m) में व्यक्त करते हैं। आबन्ध लम्बाई को प्रभावित करने वाले कारक निम्न प्रकार हैं-
(1) परमाणु का आकार (Size of Atom) – आबन्ध लम्बाई परमाणु के आकार से सीधे सम्बन्धित होती है।
आबन्ध लम्बाई ∝ परमाणु का आकार
उदाहरण – H – F < H – Cl < H – Br < H – I (आबन्ध लम्बाई) 2. आबन्धों की बहुलता (Multiplicity of Bonds) – आबन्धों की बहुलता बढ़ने पर आबन्ध लम्बाई कम हो जाती है क्योंकि परमाणु एक दूसरे के नजदीक आ जाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 6
उदाहरण – C – C > C = C > C ≡ C

3. संकरण का प्रकार (Type of Hybridisation) – आबन्ध लम्बाई संकरण के द्वारा भी प्रभावित होती है। अणु में s-अभिलक्षण बढ़ने पर आबन्ध लम्बाई कम हो जाती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 7
उदाहरण – sp³ (C-H आबन्ध ( 111pm) > sp² C – H आबन्ध ( 110 pm ) > sp² – C – H आबन्ध (108 pm)
कुछ सामान्य तत्वों की आबन्ध लम्बाई निम्न सारणी में दी गयी है।
सारणी 4.1 : कुछ एकल, द्वि तथा त्रि आबन्धों की औसत लम्बाई

आबन्ध का प्रकारसहसंयोजी आबन्ध लम्बाई (pm)
1. H – H74
2. O – H96
3. C – H107
4. N – O136
5. C – O143
6. C – N143
7. C – C154
8. C = O121
9. N = O122
10. C = C133
11. C = N138
12. C ≡ N116
13. C ≡ C120

सारणी 4-2 : कुछ सामान्य अणुओं की आबन्ध लम्बाई

अणुआबन्ध लम्बाई (pm)
1. H2 (H-H)74
2. F2 (FF)144
3. Cl2 (Cl-CI)199
4. Br2 (Br – Br)228
5. I2 (I – I)267
6. N2 (N = N)109
7. O2 (0 = 0)121
8. HF (H – F)92
9. HCl(H – Cl)127
10. HBr (H-Br)141
11.  HI (H-I)160

सारणी 4.3 सहसंयोजी त्रिज्याएँ rcov(pm)

तत्व (आबन्ध प्रकृति)सहसंयोजी त्रिज्या rcov (pm)
1. H (एकल आबन्ध)37
2. C (एकल आबन्ध)77
3. C (द्विआबन्ध)67
4. C (त्रिआबन्ध)60
5. N (एकल आबन्ध)74
6. N (द्वि आबन्ध)65
7. N (त्रि आबन्ध)55
8. P (एकल आबन्ध)110
9. As (एकल आबन्ध)121
10. Sb (एकल आबन्ध)141
11. O (एकल आबन्ध)66
12. O (द्वि आबन्ध)57
13. S (द्वि एकल आबन्ध)104
14. S (द्वि आबन्ध)95
15. Se (एकल आबन्ध)104
16. Te (एकल आबन्ध)137
17. F (एकल आबन्ध)64
18. Cl (एकल आबन्ध)99
19. Br (एकल आबन्ध)114
20. I (एकल आबन्ध)133

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 11.
CO32- आयन के संदर्भ में अनुनाद के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लूइस संरचना के अनुसार तीन कार्बन-ऑक्सीजन आबन्धों की लम्बाई भिन्न होनी चाहिए, परन्तु CO32- आयन के तीनों कार्बन – ऑक्सीजन आबन्धों की लम्बाई समान होती है। अतः कार्बोनेट आयन को तीन विहित संरचनाओं (I II III) का अनुनादी संकर माना जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 8

प्रश्न 12.
नीचे दी गई संरचनाओं (I) और (II) द्वारा H3PO3 को प्रदर्शित किया जा सकता है। क्या ये दो संरचनाएँ H3PO3 के अनुनाद संकर के विहित (केनॉनीकल) रूप माने जा सकते हैं? यदि नहीं तो उसका कारण बताइये।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 9
उत्तर:
उपरोक्त संरचनायें (I) व (II) अनुनादी संरचनायें नहीं हैं क्योंकि अनुनाद के लिये सामान्य नियम है कि अनुनादी संरचनाओं में इलेक्ट्रॉन युग्मों की व्यवस्था में भिन्नता होनी चाहिये न कि परमाणुओं की। संरचनायें (I) तथा (II) विहित (Canonical ) संरचनायें नहीं है क्योंकि संरचना (I) में फॉस्फोरस परमाणु H (PH आबन्ध) से जुड़ा होता है जबकि संरचना (II) में यह OH समूह ( P – OH आबन्ध) से जुड़ा है।

प्रश्न 13.
SO3, NO2 तथा NO3 की अनुनाद संरचनाएँ लिखिए।
उत्तर:
SO3 की अनुनादी संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 10
NO2 की अनुनादी संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 11
NO3 की अनुनादी संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 12

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण द्वारा धनायनों तथा ऋणायनों में विरचन को लूइस बिन्दु प्रतीकों की सहायता से दर्शाइये
(क) K तथा S
(ख) Ca तथा O
(ग) AI तथा N
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 13

प्रश्न 15.
हालांकि CO2 तथा H2O दोनों त्रिपरमाणुक अणु हैं। परन्तु H2O अणु की आकृति बंकित होती है जबकि CO2 की रैखिक आकृति होती है। द्विध्रुव आघूर्ण के आधार पर इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
CO2 तथा H2O दोनों त्रिपरमाणुक अणु हैं। CO2 की आकृति रेखीय होती है। जबकि H2O की आकृति बंकित होती है। CO2 अणु में दो C = O आबन्ध ध्रुवित प्रकृति के होते हैं लेकिन दोनों का प्रभाव समान व विपरीत दिशा में होने के कारण निष्क्रिय हो जाता है। अतः CO2 का अणु रेखीय अणु है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 14
H2O-H अणु में दो OH आबन्ध होते हैं। इनकी प्रकृति भी ध्रुवीय होती है। लेकिन आबन्ध रैखिक न होने के कारण द्विध्रुव आघूर्ण दर्शाते हैं इसलिये आकृति बंकित होती है।
H2O अणु का द्विध्रुव आघूर्ण मान
μ = 1.84D होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 15

प्रश्न 16.
द्विध्रुव आघूर्ण के महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग बताएँ-
उत्तर:
(i) आबन्ध की घूर्णता ज्ञात करने में।

(ii) अणुओं की आण्विक संरचना ज्ञात करने में।

(iii) अणुओं की प्रकृति ज्ञात करने में।

(iv) आबन्धों की आयनिक प्रतिशतता ज्ञात करने में।
(1) द्विपरमाणुक अणु (Diatomic molecules) – द्विपरमाणुक अणुओं में आबन्ध की ध्रुवणता द्विध्रुब आघूर्ण के मान से सीधे सम्बन्धि होती है। यदि अणु का द्विध्रुव आघूर्ण मान अधिक है तो आबन्ध की ध्रुवणता भी उच्च होगी।
उदाहरण-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 16

(2) बहुपरमाणुक अणु (Polyatomic molecules) बहुपरमाणुक अणुओं में एक से अधिक सहसंयोजक बन्ध होते हैं तथा द्विध्रुव आघूर्ण का मान विभिन्न आबन्धों की ध्रुवता तथा उनके संगत आबन्ध कोणों पर निर्भर करता है।
(A) त्रिपरमाणुक अणु (Triatomic molecules) – ऐसे त्रिपरमाणुक अणु जिनमें द्विध्रुव आघूर्ण उपस्थित होता है उनमें एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म पाया जाता है। यहाँ पर आबन्ध ध्रुवता को निरस्त नहीं कर पाता है। ऐसे अणुओं की ज्यामिति मुड़ी हुयी या V-आकृति की होती है परन्तु ऐसे त्रिपरमाणुक अणु जिनमें एकाकी युग्म उपस्थित नहीं होता है।

ऐसे अणु में दो समान आबंध द्विध्रुव विपरीत दिशा में होते हैं तथा एक दूसरे के प्रभाव को समाप्त (Cancel) कर देते हैं। इनका द्विध्रुव आघूर्ण का मान शून्य होता है एवं ज्यामितीय रेखीय होती है।
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(B) चतुष्परमाणुक अणु (Tetraatomic molecule) – ऐसे अणु जिनमें द्विध्रुव आघूर्ण उपस्थित होता है तथा उनमें एकाकी युग्म होता है। यहाँ पर आबन्ध ध्रुवता को निरस्त नहीं कर पाते। इन अणुओं की ज्यामिति पिरामिडीय होती है।

जबकि शून्य द्विध्रुव आघूर्ण वाले अणुओं की ज्यामिति त्रिकोणीय होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 18
NH3 तथा NF3 अणुओं के द्विध्रुव-आघूर्ण की तुलना :
NH3 तथा NF3 दोनों अणुओं की आकृति पिरामिडीय होती है। . जबकि दोनों अणुओं में नाइट्रोजनं परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है। हालाँकि फ्लुओरीन की विद्युत ऋणात्मकता नाइट्रोजन की अपेक्षा अधिक होती है परन्तु NH3 का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण (4.9 × 10-30 cm) NF3 के द्विध्रुव आघूर्ण (0.80 x 10-30 cm) की अपेक्षा अधिक होता है। इसका कारण यह है कि NH3 में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का कक्षक द्विध्रुव आघूर्ण तीन N – F आबन्धों के द्विध्रुव आघूर्णों के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की विपरीत दिशा में होता है। कक्षक का द्विध्रुव आघूर्ण एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण N – F आबन्ध आघूर्णो के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण को कम कर देता है। अतः NF3 के अणु का द्विध्रुव आघूर्ण कम होता है।
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कुछ अणुओं के द्विध्रुव आघूर्ण तथा आकृति के नीचे दी गई सारणी में दर्शाया गया है-
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(3) प्रतिशत आयनिक गुण ज्ञात करने में (In determining the percentage ionic character) – किसी सहसंयोजक यौगिक में हम प्रतिशत आयनिक गुण को निम्न सूत्र की सहायता से ज्ञात कर सकते हैं।
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उदाहरण-HCI का प्रतिशत आयनिक लक्षण ज्ञात करो यदि HCI के द्विध्रुव आघूर्ण का प्रायोगिक मान 1.03D है तथा बन्ध लम्बाई 1-275 है।
हल:
यदि इलेक्ट्रॉन पूर्ण रूप से स्थानान्तरित हो रहा है। अर्थात् 100 प्रतिशत आयनिक अभिलक्षण के लिये H+ व Cl आयनों पर आवेश एक इकाई (4.8 x 10-10 esu) के बराबर होता है। यहाँ H-CI आबन्ध लम्बाई =1.275 A
= 1.275 x 10-8 cm
µ (आयनिक या सैद्धान्तिक )
= q x d
= 4.8 x 10-10 x 1.275 x 108 esu cm
= 6.12 × 10-18 esu cm
= 6.12D
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प्रश्न 17.
विद्युत ऋणात्मकता को परिभाषित कीजिए। यह इलेक्ट्रॉन बन्धुता से किस प्रकार भिन्न है।
उत्तर:
किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता अणु में उपस्थित साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता है। इसकी इकाई नहीं होती है। विद्युत ऋणात्मकता परमाणु की साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।

विद्युत ऋणात्मकता तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता में अन्तर

विद्युत ऋणात्मकताइलेक्ट्रॉन बन्धुता
1. यह सहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की किसी परमाणु की प्रवृत्ति होती है।1. यह किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा बाहय इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा है।
2. यह परमाणु की सापेक्ष इलेक्ट्रॉन आकर्षण की प्रवत्ति है।2. यह परमाणु की परिशुद्ध आकर्षण प्रवृत्ति है।
3. यह आबंधित परमाणु का गुणधर्म है।3. यह विलगित परमाणु का गुणधर्म है।
4. इसकी कोई इकाई नहीं होती। यह केवल तुलनात्मक पैमाने द्वारा व्यक्त की जाती है।4. इसकी इकाई होती है। इसकी इकाई KJ या eV/परमाणु है।

प्रश्न 18.
ध्रुवीय सहसंयोजी आबन्ध से आप क्या समझते हो? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विषम परमाणुक अणु में सहसंयोजक बंध के इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक ऋणात्मक परमाणु की ओर आकर्षित होकर विस्थापित हो जाते हैं। जिससे एक परमाणु पर धनावेश तथा दूसरे परमाणु पर ऋणावेश आ जाता है। अत: सह-संयोजक बंध ध्रुवीय हो जाता है। ऐसे बंध को ध्रुवीय सहसंयोजक बंध कहते हैं। उदाहरणार्थ-
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प्रश्न 19.
निम्नलिखित अणुओं को आबन्धों की बढ़ती आयनिक प्रकृति के क्रम में लिखिए-
LIF, K2O, N2, SO2 तथा CIF3
उत्तर:
अणुओं में आबन्धों की बढ़ती आयनिक प्रकृति का क्रम निम्न प्रकार है-
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प्रश्न 20.
CH3COOH की नीचे दी गई ढाँचा संरचना सही हैं परन्तु कुछ आबन्ध त्रुटि पूर्ण दर्शाए गए हैं। ऐसीटिक अम्ल की लूइस संरचना लिखिए-
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उत्तर:
उपरोक्त प्रश्न में दी गयी संरचना में केवल ढाँचा संरचना सही है, परन्तु यह लूइस संकल्पना के साथ-साथ कार्बन की चतुसंयोजी प्रकृति के अनुसार नहीं है। ऐसीटिक अम्ल की लूइस संरचना निम्नवत् होगी-
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प्रश्न 21.
चतुष्फलकीय ज्यामिति के अलावा CH4 अणु की एक और संभव ज्यामिति वर्ग समतली है जिसमें हाइड्रोजन के चार परमाणु एक वर्ग के चारों कोनों पर होते हैं। व्याख्या कीजिए कि CH4 का अणु वर्ग समतली नहीं होता है।
उत्तर:
CH4 की चतुष्फलकीय एवं वर्ग समतली संरचनायें निम्न प्रकार हैं-
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VSEPR सिद्धान्त के अनुसार, केन्द्रीय परमाणु पर स्थित इलेक्ट्रॉन युग्मों में प्रतिकर्षण कम करने के लिये उनके मध्य दूरी अधिक होनी चाहिये। CH4 की वर्ग समतली संरचना में चार C-H आबन्ध युग्म 90° कोण पर होते हैं। जबकि चतुष्फलकीय संरचना में C-H बन्ध युग्म 109.5° पर होते हैं। अतः चतुष्फलकीय संरचना में बन्ध कोण अधिक होने के कारण C-H आबन्ध युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण भी कम होगा। अतः CH4 की ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है न कि वर्ग समतलीय।

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प्रश्न 22.
यद्यपि Be-H आबन्ध ध्रुवीय है तथा BeH2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है, स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
BeH2 अणु में sp संकरण होता है जिससे अणु की आकृति रेखीय है। Be-H आबन्ध में Be तथा H की विद्युत ऋणात्मकता का अन्तर अधिक है। लेकिन BeH2 में द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। क्योंकि दोनों आबन्ध एक-दूसरे के घूर्णन को समाप्त कर देते हैं।
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प्रश्न 23.
NH3 तथा NF3 में किस अणु का द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है और क्यों?
उत्तर:
NH3 अणु का द्विध्रुव आघूर्ण (1.46D) NF3 के द्विध्रुव आघूर्ण (0-24 D) से बहुत अधिक है । N और F परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकताओं का अन्तर (4.0-3.0 = 10 ) है जोकि N, और H परमाणु के अन्तर ( 3.0 – 2.1 = 09) के बराबर है। NH3 में N – H
आबन्ध घूर्णता समान दिशा में है जबकि NF3 में आबन्ध घूर्णता विपरीत दिशा में है । अत: NH3 अणु में द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है।
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प्रश्न 24.
परमाणु कक्षकों के संकरण से आप क्या समझते हैं? sp, sp², sp³ संकर कक्षकों की आकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संकरण समान ऊर्जा वाले कक्षकों के आपस में मिलकर ऊर्जा के पुनर्वितरण द्वारा समान ऊर्जा तथा आकार के कक्षकों के बनने की प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।
(i) sp संकरण – एक s तथा एक p कक्षक संकरित होकर दो सम sp संकरित कक्षक बनाते हैं। यहाँ संकरित कक्षक में 50% s – लक्षण तथा 50% p-लक्षण होता है।
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(ii) sp² संकरण – एक s तथा दो कक्षक संकरित होकर तीन सम sp² संकरित कक्षक बनाते हैं। इस sp² संकरित कक्षक में 33.34% s – लक्षण तथा 66.66% p- लक्षण होते हैं।
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(iii) sp³ संकरण – एक s तथा तीन p कक्षक संकरित होकर चार sp³ संकरित कक्षक बनाते हैं। sp³ संकरित कक्षक में 25% s- लक्षण तथा 75% p-लक्षण पाये जाते हैं।
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प्रश्न 25.
निम्नलिखित अभिक्रिया में Al परमाणु की संकरण अवस्था में परिवर्तन (यदि होता है तो) को समझाइये-
AlCl3 + Cl → [AlCl4]
उत्तर:
AlCl3 में, केन्द्रीय Al परमाणु sp² संकरित होता है। जबकि [AlCl4] आयन में यह sp³ संकरित होता है।
AlCl3 में संकरण = 3 + 3 × 7 = \(\frac { 24 }{ 8 }\) = 3 (sp² संकरण)
[AlCl4] में संकरण = 3 + 4 × 7 + 1
= \(\frac { 32 }{ 8 }\) = 4 (sp³ संकरण)

प्रश्न 26.
क्या निम्नलिखित अभिक्रिया के फलस्वरूप B और N परमाणुओं के संकरण में कोई परिवर्तन होता है?
BF3 + NH3 → [F3B.NH3]
उत्तर:
BF3 में B परमाणु sp² संकरित होता है जबकि NH3 में N परमाणु sp³ संकरित होता है | BF3 तथा NH, दोनों ही आपस में संयोग करके योगात्मक यौगिक बनाते हैं। योगात्मक यौगिक में NH3 एक इलेक्ट्रॉन युग्म BF3 को देता है, इस प्रकार B परमाणु का संकरण sp² से sp³ में परिवर्तित हो जाता है। जबकि N परमाणु के संकरण में कोई अन्तर नहीं होता है।
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प्रश्न 27.
C2H4 तथा C2H4 अणुओं में कार्बन परमाणुओं के बीच क्रमशः द्वि-आबन्ध तथा त्रिआबन्ध के निर्माण को चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
C2H4
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प्रश्न 28.
निम्नलिखित अणुओं में सिग्मा (σ) तथा पाई (π) आबन्धों की कुल संख्या कितनी है-
(क) C2H2
(ख) C2H4
उत्तर:
(क) C2H2
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कुल तीन सिग्मा (σ) तथा दो पाई (π) बन्ध यहाँ उपस्थित हैं।

(ख) C2H4
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यहाँ कुल 5 सिग्मा (σ) तथा 1 पाई (π) बन्ध उपस्थित हैं।

प्रश्न 29.
X- अक्ष को अन्तरनाभिकीय अक्ष मानते हुए बताइए कि निम्नलिखित में कौन से कक्षक सिग्मा (σ) आबन्ध नहीं बनाएँगे और क्यों? (क) 1s तथा 1s (ख) 1s तथा 2px (ग) 2py तथा 2py (घ) 1s तथा 2s.
उत्तर:
(क) 1s तथा 1s
(ख) 1s तथा 2px
(घ) 1s तथा 2s, σ आबन्ध बनाएँगे क्योंकि ये अक्षीय अतिव्यापन से बनते हैं। परन्तु
(ग) 2py तथा 2py सिग्मा आबन्ध नहीं बनायेगा।

प्रश्न 30.
निम्नलिखित अणुओं में कार्बन परमाणु कौन-से संकर कक्षक प्रयुक्त करते हैं।
(क) CH3 – CH3
(ख) CH3CH=CH3
(ग) CH3-CH2-OH
(घ) CH3CHO
(ङ) CH3COOH
उत्तर:
इन अणुओं में कार्बन परमाणुओं द्वारा प्रयुक्त संकर कक्षक इस प्रकार हैं –
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प्रश्न 31.
इलेक्ट्रॉनों के आबन्धी युग्म तथा एकाकी युग्म से आप क्या समझते हैं। प्रत्येक को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
आबन्धी युग्म (Bond pair) तत्वों के परमाणुओं के मध्य उपस्थित इलेक्ट्रॉन का साझा युग्म आबन्धी युग्म कहलाता है।

एकाकी युग्म (Lone pair) – ये इलेक्ट्रॉन युग्म बन्ध निर्माण में प्रयुक्त नहीं होते हैं। उदाहरणार्थ – NH3
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प्रश्न 32.
सिग्मा तथा पाई आबन्ध में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

सिग्मा बन्धपाई बन्ध
(1) सिग्मा आबन्ध परमाण्विक कक्षकों के अक्ष्रीय अतिव्यापन के कारण बनता है।(1) पाई आबन्ध परमाण्विक कक्षकों वे पाशर्व अतिव्यापन के कारण बनता है।
(2) यह s-s, s-p, p-p इत्यादि के अतिव्यापन द्वारा बन सकता है।(2) यह केवल p-कक्षकों के अतिव्यापन से बनता है।
(3) इस प्रकार के आबन्ध में अतिव्यापन अधिक होने के कारण आबन्ध प्रबल होता है।(3) इस प्रकार के आबन्ध में अतिव्यापन कम होता है। अतः यह आबन्ध तुलनात्मक रूप से थोड़ा दुर्बल होता है।
(4) इसमें कोई भी नोडल तल नहीं होता है।(4) इसमें एक नोडल तल पाया जाता है।
(5) σ-आबन्ध के चारों ओर परमाणुओं का मुक्त घूर्णन सम्भव होता है।(5) π-आबन्ध के चारों ओर परमाणुओं का मुक्त घूर्णन सम्भव नहीं हैं।
(6) यह कम क्रियाशील होता है।(6) यह अधिक क्रियाशील होता है।
(7) अन्तरानाभिकीय अक्ष के चारों ओर आण्विक कक्षक का इलेक्ट्रॉन अभ्र सममित होता है।(7) इलेक्ट्रॉन अभ्र असममित होता है।
(8) यह आबन्ध π-आबन्ध की अनुपस्थिति में भी बन सकता है।(8) यह आबन्ध σ आबन्ध की अनुपस्थिति में नहीं बनता है।
(9) यह अणु की आकृति निर्धारित करता है।(9) इसका अणुओं की आकृति पर कोई प्रभाव नहीं होता। यह बन्ध कोण को प्रभावित करता है।

प्रश्न 33.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के आधार पर H2 अणु के विरचन की व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त:
इस सिद्धान्त का प्रतिपादन सर्वप्रथम हाइटलर और लण्डन (Heitler and London) ने सन् 1927 में किया था। बाद में इस सिद्धान्त का संशोधन पॉलिंग और उसके सहकर्मियों (Pauling and co-workers) ने किया था।

इस सिद्धान्त का विवेचन परमाणु कक्षकों, तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, कक्षकों के अतिव्यापन और संकरण तथा विचरण (Variation) एवं अध्यारोपण (Superposition) के सिद्धान्तों के ज्ञान पर आधारित है। इस सिद्धान्त के आधार पर हाइड्रोजन अणु के निर्माण की व्याख्या इस प्रकार है।

माना कि हाइड्रोजन के दो परमाणु A व B जिनके नाभिक क्रमशः NA व NB हैं तथा इनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन eA और और हैं। जब ये दोनों हाइड्रोजन परमाणु HA तथा HB एक दूसरे की तरफ बन्ध बनाने के लिए बढ़ते हैं तो इन पर आकर्षण व प्रतिकर्षण दोनों प्रकार के बल कार्य करते हैं।

जब ये दोनों परमाणु एक-दूसरे से अत्यधिक दूरी पर होते हैं तब उनके बीच कोई भी अन्योन्य क्रिया नहीं होती है ज्यों-ज्यों वे एक-दूसरे के समीप आते जाते हैं त्यों-त्यों उनके मध्य आकर्षण व प्रतिकर्षण बल कार्य करने लगता है।

दोनों परमाणुओं के मध्य लगने वाला आकर्षण बल निम्न प्रकार उत्पन्न होता है-

  • एक परमाणु के नाभिक तथा उसके इलेक्ट्रॉनों के मध्य NA– eA, NB – eB
  • एक परमाणु के नाभिक तथा दूसरे परमाणु के इलेक्ट्रॉनों के मध्य NA – eB, NB – eA

इसी प्रकार प्रतिकर्षण बल निम्न कारण से उत्पन्न होता है।
(1) दोनों परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों के बीच eA – eB

(2) दोनों परमाणुओं के नाभिकों के बीच NA – NB
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दोनों परमाणुओं के मध्य उत्पन्न आकर्षण बल दोनों को एक-दूसरे के पास लाते हैं। जबकि प्रतिकर्षण बल एक-दूसरे को दूर करने का प्रयास करते हैं। प्रयोग के द्वारा यह पाया गया है कि हाइड्रोजन अणु के बनने के दौरान नये आकर्षण बलों के मान, नये प्रतिकर्षण बलों के मान की तुलना में अधिक होते हैं। इसके परिणामस्वरूप दोनों परमाणु एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं। इससे उनकी स्थितिज ऊर्जा के मान में कमी आ जाती है।

अंत में एक ऐसी स्थिति आ जाती है कि कुल आकर्षण बल तथा कुल प्रतिकर्षण बल आपस में बराबर हो जाते हैं और निकाय की ऊर्जा निम्न स्तर पर पहुँच जाती है।

इस अवस्था में हाइड्रोजन के परमाणु आबन्ध बनाते हैं और एक स्थायी अ में परिवर्तित हो जाते हैं। यहाँ H2 अणु की आबन्ध लम्बाई का मान 74pm होता है।

हाइड्रोजन के परमाणुओं के मध्य आबन्ध बनने से ऊर्जा मुक्त होती है। इस कारण हाइड्रोजन अणु दो पृथक हाइड्रोजन परमाणुओं की अपेक्षा अधिक स्थायी होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मुक्त हुयी ऊर्जा को आबन्ध एन्थैल्पी (Bond enthalpy) के रूप में जाना जाता है।

हाइड्रोजन परमाणुओं से हाइड्रोजन अणु बनने का क्रम निम्न ग्राफ के द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।
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H2 अणु के सम्बन्ध में आरेख से यह निष्कर्ष निकलता है कि इसकी आबन्ध लम्बाई 74 pm तथा आबन्धन ऊर्जा का मान 435.8kJ/mol है। यह ऊर्जा या ऐन्थैल्पी ऊपर दिए गये आरेख में न्यूनतम के संगत होती है।

वहीं यदि H2 के एक मोल अणुओं के वियोजन के लिये इतनी ही ऊर्जा 435.8 kJ /mol की आवश्यकता होती है।
H2 (g) + 4358kJ /mol = H (g) + H (g)
ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी रासायनिक बन्ध का स्थायित्व बन्ध ऊर्जा से सम्बन्धित होता है । बन्ध ऊर्जा का मान जितना अधिक होता है आबन्ध का स्थायित्व उतना ही अधिक होगा।

उदाहरण के लिये, Cl – Cl(g) आबन्ध की आबन्ध ऊर्जा 239 kJ / mol है। जबकि H – H(g) आबन्ध की आबन्ध ऊर्जा 433kJ/mol है। इसका तात्पर्य यह है कि हाइड्रोजन परमाणुओं के मध्य आबन्ध क्लोरीन परमाणुओं के मध्य आबन्ध की अपेक्षा अधिक स्थायी है।

प्रश्न 34.
परमाणु कक्षकों के रैखिक संयोग से आण्विक कक्षक बनने के लिए आवश्यक शर्तों को लिखिए।
उत्तर:

  • संयोजी कक्षक समान ऊर्जा के होने चाहिये।
  • संयोजक कक्षक आण्विक कक्षक के साथ दिशात्मक गुण रखता है।
  • संयोग करने वाले कक्षक अधिक दूरी तक विरचन अतिव्यापन करें।

आण्विक कक्षक भाग लेने वाले परमाण्विक कक्षकों के तरंग फलनों (wave functions) के रेखीय संयोजन के फलस्वरूप बनते हैं । परमाण्वीय कक्षक योग (Addition ) या अन्तर (Subtraction) द्वारा संयोजित होते हैं।

माना कि संयोजन में भाग लेने वाले दो परमाण्विक कक्षक A व B के तरंग फलन या आयाम (Wave function or Amplitude) क्रमश: ψA व ψB हैं तो,
गणितीय रूप से आण्विक कक्षकों को परमाणु कक्षकों के रैखिक संयोग व्यक्तिगत परमाणु कक्षकों के तरंग फलनों WA तथा WB के योग या अन्तर द्वारा किया जाता है, जैसा नीचे दर्शाया गया है।
ψMO = ψA ± ψB
इस प्रकार दो आण्विक कक्षक ० तथा * प्राप्त होते हैं।
σ = ψA + ψB
σ* = ψA – ψB
परमाणु कक्षकों के योग से बनने वाले आण्विक कक्षक σ को आबंधन आण्विक कक्षक तथा परमाणु कक्षकों के अन्तर से बनने वाले आण्विक कक्षक σ* को प्रतिआबंधन (विपरीत बन्धी) आण्विक कक्षक कहते हैं।

बन्धी अणु कक्षक की ऊर्जा हमेशा कम जबकि विपरीत बन्धी अणु कक्षक की ऊर्जा सदैव अधिक होती है। आबन्धी तथा विपरीत बन्धी आण्विक कक्षकों का परमाण्वीय कक्षकों से बनना निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है।
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यहाँ पर (+) और (-) चिन्ह इलेक्ट्रॉन तरंग के शिखर (Crest) और गर्त (troughs) को व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 35.
आण्विक कक्षक सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि Be2 अणु का अस्तित्व क्यों नहीं होता।
उत्तर:
Be का परमाणु क्रमांक 4 है। इसके आण्विक कक्षक में 8 इलेक्ट्रॉन भरे जाएँगे । इसका आण्विक कक्षक विन्यास निम्न प्रकार है-
KK (σ2s)² (σ*2s)²
आबन्ध कोटि =\(\frac { 1 }{ 2 }\)(2 – 2) = 0
बन्ध कोटि शून्य होने से Be2 का अणु अस्तित्व में नहीं होता है।

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प्रश्न 36.
निम्नलिखित स्पीशीज के आपेक्षिक स्थायित्व की तुलना कीजिए तथा उनके चुम्बकीय गुण इंगित कीजिए।
O2, O2+, O2– (सुपर ऑक्साइड) तथा O22- (परऑक्साइड)
उत्तर:
इन स्पीशीज की आबन्ध कोटि निम्न है।

स्पीशीजइलेक्ट्रॉनों की संख्याआबंध कोटि
(1) O2162.0
(2) O2+152.5
(3) O2171.5
(4) O22-181.0

इनका स्थायित्व का क्रम निम्न है-
O2+ > O2 > O2 > O22-
(i) O2 अनुचुम्बकीय है
(ii) O2+ अनुचुम्बकीय है
(iii) O2 अनुचुम्बकीय है
(iv) O22- प्रति चुम्बकीय है

प्रश्न 37.
कक्षकों के निरूपण में उपयुक्त धन (+) तथा ऋण (-) चिन्हों का क्या महत्त्व होता है।
उत्तर:
जब संयोजित होने वाले परमाणु कक्षकों की पालियों के चिन्ह समान (+ तथा + या तथा) होते हैं तब आबन्धी आण्विक कक्षक बनते हैं।

जब संयोजित होने वाले परमाणु कक्षकों की पालियों के चिन्ह (+ तथा -) होते हैं तब प्रतिआबन्धी आण्विक कक्षक बनते हैं। इसके अतिरिक्त + और चिन्ह को इलेक्ट्रॉन तरंगों की प्रकृति ज्ञात करने में उपयोग किया जाता है। धन (+ve) चिन्ह श्रृंग (crest ) को जबकि ऋण (-ve) चिन्ह गर्त (trough) को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 38.
PCl5 अणु में संकरण का वर्णन कीजिए। इसमें अक्षीय आबन्ध विषुवतीय आबन्धों की अपेक्षा अधिक लम्बे क्यों होते हैं?
उत्तर:
PCl5 में P का परमाणु क्रमांक 15 है। तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p6 3s² 3p³ है। यहाँ पर एक 3s कक्षक तीन 3p कक्षक व एक 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉन तीन 3p कक्षक व एक 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉन संकरण से sp³d संकरित कक्षक बनता है।
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VSEPR सिद्धान्त के अनुसार संकरित आर्बिटल त्रिकोणीय द्वि-पिरामिडी के शीर्षों की ओर दिष्ट होती है। इसके एक तल के तीन-तीन आबन्धों के परस्पर बंध कोण में से प्रत्येक 120° तथा शेष दो में से प्रत्येक उस तल के लम्बवत् 90° का कोण बनाते हैं।

चूँकि अक्षीय आबन्ध इलेक्ट्रॉन युग्मों में विषुवतीय आबन्धी युग्मों से अधिक प्रतिकर्षण अन्योन्य क्रियायें होती है अतः ये आबन्ध विषुवतीय आबन्धों से लम्बाई में कुछ अधिक तथा प्रबलता में कुछ कम होते हैं। इसलिये PCl5 अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 39.
हाइड्रोजन आबन्ध की परिभाषा दीजिए। ये वान डर वाल्स बलों की अपेक्षा प्रबल होते हैं या दुर्बल।
उत्तर:
हाइड्रोजन आबन्ध को उस आकर्षण बल के रूप में परिभाषित कर सकते हैं जोकि एक अणु के H-परमाणु को दूसरे अणु के विद्युत ऋणात्मक परमाणु (F,O,N) से बाँधता है। हाइड्रोजन आबन्ध वान डर वाल्स बलों की अपेक्षा अधिक प्रबल- होता है क्योंकि यह प्रबल द्विध्रुवीय अन्तः क्रिया को निरूपित करता है।

प्रश्न 40.
आबन्ध कोटि से आप क्या समझते हैं। निम्नलिखित आबन्ध कोटि का परिकलन कीजिए – N2, O2, O2+ तथा O2
उत्तर:
किसी अणु या आयन में दो परमाणुओं के बीच आबन्धों की संख्या आबन्ध कोटि कहलाती है।
आबन्ध कोटि =\(\frac { 1 }{ 2 }\) = (Nb – Na)
N2(14) : (σ1s)²(σ*1s)²(σ2s)²(σ*2s)² (π2px)²(π2py)²(σ2pz)²
आबन्ध कोटि =\(\frac { 1 }{ 2 }\)(10-4) = 6/23 = 3
O2 (16) : (σ 1s)² (σ*1s)² (σ*2s)² (π 2px)² (π 2py)² (π* 2px)1 (π* 2py)1
आबन्ध कोटि = \(\frac { 1 }{ 2 }\)(10 – 6) = 4/2 = 2
O2+(15) : (σ1s)² (σ*1s)² (σ2s)² (σ*2s)² (σ2pz)² (π2px)² (π2py)² (π*2px)1
आबन्ध कोटि = \(\frac { 1 }{ 2 }\)(10 – 5) = 5/2 = 2.5
O2 – ( 17 ) : (σ1s)² (σ*1s)² (σ2s)² (σ*2s)² (σ2pz)² (π2px)² (πpy)² (π 2px)² (π 2py)1
आबन्ध कोटि = 1/2 (10 – 7) = 3/2 = 1.5

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
उत्तर:
आवर्त सारणी में व्यवस्था का मूल आधार समान अभिलक्षणों (भौतिक एवं रासायनिक) वाले तत्त्वों को एक साथ वर्गीकृत करना है। जिससे कि इन लक्षणों का पालन करना काफी आसान हो जाये। चूँक ये अभिलक्षण मुख्यतः तत्त्वों के संयोजी कोश इलेक्ट्रॉंनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं इसलिये किसी समूह या वर्ग में स्थित तत्त्वों में समान संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की निश्चित अन्तरालों पर पुनरावृत्ति होती है।

प्रश्न 2.
मेण्डलीव ने किस गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया ? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाये ?
उत्तर:
मेण्डलीव ने परमाणु भार को अपनी आवर्त सारणी में तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया। मेण्डलीव ने एक नियम दिया जिसे मेण्डलीव का आवर्त नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार, “तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म उनकी द्रव्यमान संख्याओं या परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं।”

मेण्डलीव अपने इस सन्दर्भ पर दृढ़ बने रहे। उन्होंने प्रथम बार तत्त्वों को एक सारणी के रूप में व्यवस्थित किया, जहाँ उन्होंने आवर्त तथा समूह बनाये। नि:सन्देह बाद में इसमें कई कमियाँ पायी गयीं तथा वैज्ञानिकों ने वर्गीकरण के इस आधार को चुनौती भी दी थी।

प्रश्न 3.
मेण्डलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अन्तर क्या है ?
उत्तर:
मेण्डलीव के आवर्त नियम का आधार परमाणु भार है जबकि आधुनिक आवर्त नियम का मौलिक आधार परमाणु क्रमांक है।

प्रश्न 4.
क्वाण्टम संख्याओं के आधार पर सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होने चाहिए।
उत्तर:
छठा आवर्त छठवें कोश के अनुरूप होता है। छठवें कोश में 6s, 4f, Sp तथा 6d कक्षक उपस्थित होते हैं। इन कक्षकों में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या इस आवर्त में तत्त्वों की संख्या का निर्धारण करेगी। अत: छठवें आवर्त में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
कक्षक – 6s, 4f, 5p, 6d
इलेक्ट्रॉन – 2 + 14 + 6 + 10 = 32 इलेक्ट्रॉन
अतः छठे आवर्त में अधिकतम 32 तत्त्व उपस्थित होंगे।

प्रश्न 5.
आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइये कि Z = 14 कहाँ स्थित होगा?
उत्तर:
Z = 14 वाले तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न होगा – 1s², 2s², 2p6, 3s² 3p²
इस तत्त्व का आवर्त तृतीय है तथा यह p-ब्लॉक का तत्त्व है। तत्त्व के वर्ग का निर्धारण हम निम्न प्रकार कर सकते हैं।
p-ब्लॉक के लिये वर्ग = 10 + ns में e + np में e
= 10 + 2 + 2
= 14वें वर्ग का तत्त्व है तथा यह सिलिकॉन हैं।

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प्रश्न 6.
उस तत्त्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त में और 17वें वर्ग में स्थित होता है।
उत्तर:
यह तत्त्व क्लोरीन (CI) है जिसका परमाणु क्रमांक 17 है।

प्रश्न 7.
कौन से तत्त्व का नाम निम्नलिखित के द्वारा दिया गया?

  1. लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
  2. सीबोर्ग समूह द्वारा।

उत्तर:

  1. लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा लॉरेन्सियम (Lr) नाम दिया गया जिसका परमाणु क्रमांक 103 है।
  2. सीबोर्ग समूह द्वारा सीबोर्गियम (Sg) नाम दिया गया जिसका परमाणु क्रमांक 106 है।

प्रश्न 8.
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
उत्तर:
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं क्योंकि इन परमाणुओं के संयोजी कोश में समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। हालांकि इसके परमाण्वीय आकार भिन्न होते हैं जो कि वर्ग में नीचे आने पर बढ़ते जाते हैं। अतः किसी भी समूह या वर्ग में तत्त्वों के रासायनिक गुणधर्म तो समान होते हैं परन्तु इनके भौतिक लक्षणों में बहुत कम परिवर्तन होता है।

प्रश्न 9.
‘परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनी त्रिज्या’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) – किसी तत्त्व के परमाणु के नाभिक के केन्द्र से बाह्यतम कोश की प्रभावी दूरी, उस तत्त्व के परमाणु की परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) कहलाती है।

आयनी त्रिज्या (Ionic radius) – किसी आयन के नाभिक के केन्द्र से वह प्रभावी दूरी जहाँ तक नाभिक इलेक्ट्रॉन मेघ पर अपना प्रभाव छोड़ सके, आयनी त्रिज्या (ionic radius) कहलाती है।

परमाणु त्रिज्या के मापन के लिये अन्य त्रिज्याओं की आवश्यकता होती है। जैसे-सहसंयोजक त्रिज्या, वाण्डर वाल त्रिज्या, धात्विक त्रिज्या आदि । वर्ग में परमाणु त्रिज्या नीचे की ओर जाने पर बढ़ती है। ऐसा इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या बढ़ने तथा आवरण प्रभाव के परिमाण में वृद्धि कारण होता है। आवर्त में परमाणु त्रिज्या बायें से दायें जाने पर घटती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन समान कोश में भरते हैं तथा कोई भी नया कोश नहीं बनता है।

प्रश्न 10.
किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे ?
उत्तर:
किसी वर्ग में परमाणु त्रिज्या नीचे की ओर जाने पर बढ़ती है। क्योंकि वर्ग में नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है तथा आवरण प्रभाव (Shielding effect) का परिमाण बढ़ता जाता है।

आवर्त में परमाणु त्रिज्या बायें से दायें जाने पर घटती जाती है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन समान कोश में भरते हैं तथा कोई नया कोश नहीं बनता है। इस कारण नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है तथा आकार घट जाता है।

प्रश्न 11.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज का नाम लिखिए जो निम्नलिखित परमाणुओं या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी ?
(i) F
(ii) Ar
(iii) Mg2+
(iv) Rb+.
उत्तर:
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज में इलेक्ट्रॉन की संख्यायें समान होती हैं। प्रश्न में दी गई स्पीशीज के साथ निम्न समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज होगी-
(i) Na+
(ii) K+
(iii) Na+
(iv) Sr2+.

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प्रश्न 12.
निम्नलिखित स्पीशीज पर विचार कीजिए – .
N3-, O2-, F, Na+, Mg2+ तथा Al3+.
(क) इनमें क्या समानता है?
(ख) इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
(क) ये सभी समइलेक्ट्रॉनिक हैं। इनमें प्रत्येक में 10 इलेक्ट्रॉन हैं।
(ख) Al3+ + < Mg2+ < Na+ < F < O² – < N3-.

प्रश्न 13.
धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
धनायन (Cation ) जनक परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकल जाने पर धनायन बनते हैं। धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन की संख्या कम होने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है जिससे अन्तरानाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है तथा आकार छोटा हो जाता है।
Na > Na+, Mg > Mg2+
ऋणायन (Anion ) ऋणायन जनक परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन के जुड़ने पर बनते हैं। ऋणायन हमेशा अपने जनक परमाणुओं से बड़े होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन की संख्या बढ़ जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है, जिससे अन्तरानाभिकीय आकर्षण बल कम होता है तथा आकार बढ़ जाता है।
Cl < CE, O < O2-

प्रश्न 14.
आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में विलगित गैसीय परमाणु तथा आद्य अवस्था पदों की सार्थकता क्या है?
उत्तर:
(i) विलगित गैसीय परमाणु की सार्थकता – जब कोई परमाणु गैसीय अवस्था में विलगित होता है तो इसकी इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति एवं ग्रहण करने की प्रवृत्ति दोनों प्रकृति में असीमित होती हैं। अर्थात् इनकी आयनन एन्थैल्पी एवं इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान अन्य परमाणुओं की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होते हैं । परमाणुओं के द्रव एवं ठोस अवस्था में ऐसा होना सम्भव नहीं होता है।

(ii) आद्य अवस्था की सार्थकता – आद्य अवस्था से तात्पर्य है कि कोई विशेष परमाणु तथा इससे सम्बन्धित इलेक्ट्रॉन न्यूनतम ऊर्जा अवस्था में होते हैं। आद्य अवस्था परमाणु की सामान्य अवस्था में उपस्थित ऊर्जा को प्रदर्शित करती है। आयनन विभव तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्यैल्पी दोनों को परमाणु की आद्य अवस्था होने पर ही व्यक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 2.1 × 10-18 J है। परमाण्विक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी J mol-1 के पदों में परिकलित कीजिए।
हल:
यनन एन्थैल्पी हमेशा 1 मोल परमाणुओं के लिये व्यक्त की जाती है। अतः एक मोल परमाणु की आद्य अवस्था में ऊर्जा,
E(आद्य अवस्था) = (- 2.18 × 10-18) × 6.02 × 1023
= 1.312 x 106
आयनन एन्थैल्पी = E – E(आद्य अवस्था)
= 0 – (-1.312 × 106 J)
आयनन एन्थैल्पी = 1.312 x 106 J

प्रश्न 16.
द्वितीय आवर्त के तत्त्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है-
Li < B < Be < C < O < N < F < Ne
व्याख्या कीजिए कि-
(i) Be की ∆i, H, B से अधिक क्यों है?
(ii) O की ∆i, H, N और F से कम क्यों है?
उत्तर:
(i) Be (1s², 2s²) में बाह्यतम इलेक्ट्रॉन 2s कक्षक में उपस्थित है जबकि B(1s², 2s², 2p1) में 2p कक्षक में उपस्थित है। 2s इलेक्ट्रॉनों नाभिक का आकर्षण 2p कक्षक इलेक्ट्रॉनों की तुलना में अधिक होता है इसलिये 2s इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप Be के लिए ∆iH का मान B से ज्यादा होता है।

(ii) N का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (1s², 2s², 2p1x, 2p1y, 2p1z) है जिसमें 2p कक्षक अर्द्धपूरित अवस्था में है जबकि O (1s², 2s², 2p1x, 2p1y, 2p1z) में 2p कक्षक न तो अर्द्धपूरित है न ही पूर्णपूरित है। अर्द्धपूरित अवस्था के स्थायी होने के कारण N से इलेक्ट्रॉन को निकालना कठिन है। जिसके परिणामस्वरूप O के लिए ∆iH का मान N की तुलना में कम होता है। फ्लुओरीन के छोटे आकार व अधिक नाभिकीय आवेश (+ 9) के कारण इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान की तुलना में अधिक होता है। इसलिये O की आयनन एन्थैल्पी N व F की तुलना में कम होती है।

प्रश्न 17.
आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी, मैग्नीशियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है किन्तु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्पी से अधिक है।
उत्तर:
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Mg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3s कक्षक में पूर्ण है अर्थात् स्थायी है जिससे इलेक्ट्रॉन निकालना Na के 3s कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालने की तुलना में कठिन है । अत: Na की प्रथम आयनन एन्थैल्पी Mg की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है परन्तु Na की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी Mg की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है क्योंकि Na से एक 3s इलेक्ट्रॉन निकलने के पश्चात् यह स्थायी विन्यास 1s², 2s², 2p6 प्राप्त कर लेता है जबकि मैग्नीशियम से इलेक्ट्रॉन निकालने के पश्चात् यह एक अस्थायी विन्यास 1s², 2s², 2p63s1 प्राप्त करता है। अतः मैग्नीशियम के 3p कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालना सोडियम की तुलना में सरल हो जाता है। अतः सोडियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है।

प्रश्न 18.
मुख्य समूह तत्त्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कौन-कौन से कारक हैं?
उत्तर:
मुख्य समूह तत्त्वों में आयनन एन्थैल्पी किसी समूह में नीचे जाने पर निम्न कारकों के कारण कम होती है-

  • समूह में नीचे जाने पर नये कोश बढ़ने से परमाणु आकार बढ़ जाता है।
  • समूह में नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन बढ़ने से बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर आवरण प्रभाव बढ़ जाता है।
  • समूह में नीचे जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है।

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प्रश्न 19.
वर्ग-13 के तत्त्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol-1) में इस प्रकार हैं-

BAlGaInTl
801577579558589

सामान्य से इस विचलन की प्रवृत्ति की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
B से Al तक प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान का कम होना Al परमाणु के बड़े आकार के कारण है। Ga की प्रथम आयनन एन्थैल्पी Al से ज्यादा है। इसका कारण यह है कि Ga में 10 इलेक्ट्रॉन 3d – उपकोश में उपस्थित हैं ये 10 इलेक्ट्रॉन संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉनों को पूर्ण रूप से परिरक्षित नहीं कर पाते, जिस कारण Ga का आकार Al से छोटा हो जाता है तथा प्रथम आयनन विभव का मान बढ़ जाता है। TI की अधिक प्रथम आयनन एन्थैल्पी यह प्रदर्शित करती है कि यहाँ प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बहुत अधिक है जो कि 4f- इलेक्ट्रॉनों के क्षीण या दुर्बल आवरण प्रभाव (Poor shielding effect) के कारण है।

प्रश्न 20.
तत्त्वों के निम्नलिखित गुणों में किस तत्त्व की इलेक्ट्रॉन ब्ध एन्थैपी अधिक ऋणात्मक होगी?
(i) O या F
(ii) F या Cl
उत्तर:
(i) F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है क्योंकि F का आकार ऑक्सीजन से छोटा होता है जिसके कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होता है और जुड़ने वाला इलेक्ट्रॉन अधिक आकर्षण बल अनुभव करता है।

अतः अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण e अधिक आकर्षण बल का अनुभव करता है तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान बढ़ जाता है।

(ii) Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी क्योंकि F का आकार छोटा होता है। F परमाणु का अधिक उच्च आवेश घनत्व होने के कारण जुड़ने वाले इलेक्ट्रॉन प्रबल इलेक्ट्रॉन – इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अनुभव करते हैं। अतः F से एक इलेक्ट्रॉन जुड़ने पर ऊर्जा अवशोषित होती है तथा ऋणायन बनने पर निर्गत कुल ऊर्जा में कमी आ जाती है। यदि इलेक्ट्रॉन को बड़े p-कक्षक में जोड़ा जाता है तो इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अत्यन्त कम हो जाता है तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का उच्च मान प्रेक्षित होता है। इस प्रकार F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान क्लोरीन के मान से कम हो जाता है।

प्रश्न 21.
आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
ऑक्सीजन की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होगी। ऑक्सीजन परमाणु का आकार छोटा होता है और नाभिकीय आवेश उच्च होता है जिससे यह सरलता से इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लेता है और ऊर्जा निकलती है। इस प्रकार प्राप्त O(g) समान आवेशों के मध्य स्थिर विद्युत प्रतिकर्षण के कारण सरलता से इलेक्ट्रॉन प्राप्त नहीं कर सकता। अतः द्वितीय इलेक्ट्रॉन को O(g) में प्रवेश कराने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होगी। अतः प्रतिकर्षण समाप्त करने के लिए यह ऊर्जा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से निकली ऊर्जा अर्थात् प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी से अधिक होती है।

अतः ऑक्सीजन की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी ऋणात्मक तथा द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है।
O(g) + e → O(g) E. A. (1) = – ve
O(g) + e → O2-(g) E. A. (2) = + ve

प्रश्न 22.
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और वैद्युत ऋणात्मकता में क्या मूल अन्तर है?
उत्तर:

वैद्युत ऋणात्मकताइलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
1. इसमें परमाणु के सहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की प्रवृत्ति होती है।इसमें परमाणु के बाह्य इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति होती है।
2. इसमें परमाणु के सापेक्ष इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।इसमें परमाणु के असीमिति इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।
3. इसमें बन्धित परमाणु का गुण है।इसमें विलगित परमाणु का गुण है।
4. इसकी कोई भी इकाई नहीं होती है।इसकी इकाई KJ mol-1 तथा eV / atom होती है।

प्रश्न 23.
सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की ऋणात्मकता पॉउलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे ?
उत्तर:
पॉउलिंग पैमाने पर N की विद्युत ऋणात्मकता 3.0 है, जो यह प्रदर्शित करती है कि N पर्याप्त रूप से विद्युत ऋणात्मक है। परन्तु किसी तत्त्व की विद्युत ऋणात्मकता स्थिर नहीं होती है। यह परमाणु के किसी दूसरे तत्त्व के साथ बन्धन पर तथा संकरण की अवस्था पर निर्भर करती है। इसलिये यह कथन गलत है।

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प्रश्न 24.
उस सिद्धान्त का वर्णन कीजिए जो परमाणु की त्रिज्या से सम्बन्धित होता है-
(i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
(ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
उत्तर:
(i) परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने पर ऋणायन बनता है जिसके फलस्वरूप एक या अधिक इलेक्ट्रॉन परमाणु के संयोजी कोश में जुड़ जाते हैं। नाभिकीय आवेश जनक परमाणु के बराबर ही रहता है। संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉन बढ़ने से इलेक्ट्रॉन द्वारा परिरक्षण की अधिकता होने से प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है जिससे आयनिक त्रिज्या बढ़ जाती है।
F < F-(त्रिज्या)
(2, 7) (2, 8)
72 pm 136 pm

(ii) इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन बनता है जो अपने जनक परमाणु से आकार में छोटा होता है। इसके दो कारण हो सकते हैं- (a) संयोजी कोश का समाप्त हो जाना जैसे सोडियम में। (b) प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि हो जाने से।
Na > Na+(त्रिज्या)
(2, 8, 1) (2, 8)
(157 pm) (95 pm)

प्रश्न 25.
किसी तत्त्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न ? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
आयनन एन्थैल्पी नाभिकीय आवेश के परिमाण एवं तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से सम्बन्धित होती है। चूँक किसी तत्त्व के समस्थानिकों में नाभिकीय आवेश एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होते हैं। इसलिए इनकी आयनन एन्थैल्पी समान होती है।

प्रश्न 26.
धातुओं तथा अधातुओं में मुख्य अन्तर क्या है?
उत्तर:
धातुओं तथा अधातुओं में अन्तर निम्न प्रकार है-

गुणधातुअधातु
1. भौतिक अवस्थाये कमरे के ताप पर ठोस होती हैं। (अपवाद -Hg कमरे के ताप पर द्रव होती है।)ये कमरे के ताप पर ठोस द्रव गैस कुछ भी हो सकती है। अर्थात् ये द्रव की सभी अवस्थाओं में पाई जाती है। ये सामान्यतः चमक रहित होती हैं। (अपवाद-ग्रेफाइट)
2. चमक
3. चालकताधातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं।अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। (अपवाद-ग्रेफाइट)
4. कठोरताये मुख्यतः कठोर होती हैं।ये सामान्यतया मृदु होती हैं।
5. आघातवर्धनीयता एवं तन्यताधातुएँ आघतवर्धनीय एवं तन्य होती हैं।ये आघातवर्धनीय एवं तन्य नहीं होती हैं। ये भंगुर होती हैं।
6. गलनांक एवं क्वथनांकइनके गलनांक व क्वथनांक उच्च होते हैं व ये तीनों अवस्थाओं में पायी जाती हैं।इनके गलनांक व क्वथनांक उच्च नहीं होते हैं।

प्रश्न 27.
आवर्त सारणी का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) उस तत्त्व का नाम बताइए जिसके बाह्य कोश में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(ii) उस तत्त्व का नाम बताइए जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉन त्यागने की हो।
(iii) उस तत्त्व का नाम बताइए जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की हो।
(iv) उस वर्ग का नाम बताइए जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।
उत्तर:
(i) नाइट्रोजन N (7) = 2, 5
(ii) मैग्नीशियम Mg (12) = 2, 8, 2
(iii) ऑक्सीजन O (8) = 2, 6
(iv) प्रथम वर्ग में H अधातु गैस है, Cs द्रव है तथा Na, K ठोस धातु हैं।

प्रश्न 28.
प्रथम वर्ग के तत्त्वों के लिए अभिक्रिया-शीलता का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है-
Li < Na < K < Rb < Cs जबकि वर्ग 17 के तत्त्वों में क्रम F> Cl > Br > I है। इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रथम वर्ग में तत्त्वों की अभिक्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति के कारण होती है। जिसे आयनन एन्थैल्पी से ज्ञात करते हैं। आयनन एन्थैल्पी वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर आने पर घटती है। अतः धातुओं की अभिक्रियाशीलता बढ़ती है।
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हैलोजनों में अभिक्रियाशीलता ऋणायनों के बनने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। अर्थात् इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान पर हैलोजनों की अभिक्रियाशीलता पर निर्भर करते हैं। वर्ग में नीचे आने पर इलेक्ट्रॉन – लब्धि एन्थैल्पी का मान घटता है तथा हैलोजनों की अभिक्रियाशीलता भी घटती है।

अधातुओं की अभिक्रियाशीलता ∝ इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी

प्रश्न 29.
s, p, d और f-ब्लॉकों के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:

  1. s-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1 तथा ns² होता है ।
  2. p-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np1-6 होता है।
  3. d-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n – 1)d1-10 ns1-2 होता है।
  4. f-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n – 2)f1-14 (n – 1)d0-1 ns² होता है।

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प्रश्न 30.
तत्त्व जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित है, का स्थान आवर्त सारणी में बताइए –
(i) ns² np4, जिसके लिए n = 3 है ।
(ii) (n – 1)d²ns², जब n = 4 है ।
(iii) (n – 2)f1(n – 1 )d1ns², जब n = 6 है ।
उत्तर:
(i) तत्त्व तीसरे आवर्त में स्थित है तथा वर्ग 16 (10 + 2 + 4 = 16) है।
(ii) तत्त्व चौथे आवर्त में तथा वर्ग 4 ( 2 + 2 = 4) में स्थित है।
(iii) तत्त्व छठवें आवर्त तथा वर्ग 3 में स्थित है।

प्रश्न 31.
कुछ तत्त्वों की प्रथम ∆iH1, और द्वितीय ∆iH2 आयनन एन्थैल्पी (kJ mol-1 में) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (∆egH) (kJ mol-1 में) निम्नलिखित है –

तत्त्वiH1iH2egH
I5207300-60
II4193051-48
III16813374-328
IV10081846-295
V23725251+48
VI7381451-40

ऊपर दिये गये तत्त्वों में कौन-सी-
(क) सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है।
(ख) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
(ग) सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है।
(घ) सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है।
(ङ) ऐसी धातु है जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड जिसका सूत्र MX2 (X = हैलोजन) बनाती है।
(च) ऐसी धातु जो मुख्यत: MX (X = हैलोजन ) वाले स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाती है।
उत्तर:
(क) तत्त्व V की आयनन एन्थैल्पी उच्चतम है। अतः यह सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है।

(ख) न्यूनतम प्रथम आयनन एन्थैल्पी वाले तत्त्व सरलता से इलेक्ट्रॉन त्याग देते हैं। इसलिए ये अधिक अभिक्रियाशील होते हैं। तत्त्व II की प्रथम आयनन एन्थैल्पी न्यूनतम है अत: यह सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।

(ग) अधातुओं की आयनन एन्थैल्पी उच्च तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है अतः तत्त्व III सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है।

(घ) तत्त्व IV सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है । क्योंकि इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तो ऋणात्मक है पर आयनन एन्थैल्पी उच्च नहीं है।

(ङ) धातुओं की आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है। वर्ग 2 के तत्त्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी वर्ग 1 के तत्त्वों की तुलना में उच्च होती है। चूँकि तत्त्व M सूत्र MX2 का एक स्थायी द्विअंगी हैलाइड बनाता है। अत: M को आवर्त सारणी के वर्ग 2 में होना चाहिए। वर्ग 2 के तत्त्वों के लिए प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का योग इनके समीपवर्ती तत्त्वों की तुलना में कम होता है अतः तत्त्व VI ही वह धातु है जो सूत्र MX2 के द्विअंगी हैलाइड को बनाने की क्षमता रखती है।

(च) धातु जो मुख्यत: MX वाले स्थायी सह-संयोजक हैलाइड बनाती है तत्त्व I है, चूँकि वर्ग I में तत्त्वों के छोटे आकारों के कारण आयनन एन्थैल्पी उच्च होती है।

प्रश्न 32.
तत्त्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रागुक्ति कीजिए।
(क) लीथियम और ऑक्सीजन,
(ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन,
(ग) ऐलुमिनियम और आयोडीन,
(घ) सिलिकॉन और ऑक्सीजन,
(ङ) फास्फोरस और फ्लोरीन,
(च) 71वाँ तत्त्व व फ्लोरीन।
उत्तर:
(क) Li2O
(ख) Mg3N2
(ग) AlI3
(घ) SiO2
(ङ) PF5
(च) LuF2

प्रश्न 33.
आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्न में से किसको व्यक्त करता है?
(क) परमाणु संख्या
(ख) परमाणु द्रव्यमान
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
(घ) दिगंशी क्वाण्टम संख्या
उत्तर:
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या

प्रश्न 34.
आधुनिक आवर्त सारणी के लिए निम्नलिखित के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) p-ब्लॉक में 6 स्तम्भ हैं क्योंकि कोश के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ख) d-ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं क्योंकि d उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ग) प्रत्येक ब्लॉक में स्तम्भों की संख्या उपकोश में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
(घ) तत्त्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को भरते समय अन्तिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन का उपकोश उसकी दिगंशी क्वाण्टम संख्या को प्रदर्शित करता है।
उत्तर:
(ख) d-ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं क्योंकि d उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। यह कथन गलत है। d ब्लॉक में 10 स्तम्भ होते हैं और d उपकोश के कक्षक भरने के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 35.
ऐसा कारक जो संयोजकता इलेक्ट्रॉन को प्रभावित करता हैं, उस तत्त्व की रासायनिक प्रवृत्ति भी प्रभावित करता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता?
(क) संयोजक मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ख) नाभिकीय आवेश (Z)
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान
(घ) क्रोड इलेक्ट्रॉन की संख्या
उत्तर:
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को प्रभावित नहीं करता है।

प्रश्न 36.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज F, Ne और Na+ का आकार इनमें से किससे प्रभावित होता है ?
(क) नाभिकीय आवेश (Z)
(ख) मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ग) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया
(घ) ऊपर दिये गये कारणों में से कोई भी नहीं क्योंकि उनका आकार समान है।
उत्तर:
(क) समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज का आकार नाभिकीय आवेश (Z) द्वारा प्रभावित होता है।

प्रश्न 37.
आयनन एन्थैल्पी के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है-
(क) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन से आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है।
(ख) क्रोड उत्कृष्ट गैस के विन्यास से जब इलेक्ट्रॉन को निकाला जाता है तब आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है।
(ग) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करती है।
(घ) कम मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
उत्तर:
(घ) असत्य है।

प्रश्न 38.
B, Al, Mg, K तत्त्वों के लिए धात्विक अभिलक्षण का सही क्रम इनमें से कौन-सा है ?
(क) B > Al > Mg > K
(ख) Al > Mg > B > K
(ग) Mg > Al > K > B
(घ) K > Mg > Al > B
उत्तर:
(घ) K > Mg > Al > B क्रम सही है।

प्रश्न 39.
तत्त्वों B, C, N, F और Si के लिए अधातु अभिलक्षण का इनमें से सही क्रम कौन-सा है?
(क) B> C > Si > N > F
(ख) Si> C > B>N>F
(ग) F > N > C > B > Si
(घ) F > N > C > Si > B
उत्तर:
(ग) F > N > C > B > Si क्रम सही है।

प्रश्न 40.
तत्त्वों F, CI, O और N तथा ऑक्सीकरण गुणधर्मों के आधार पर उनकी रासायनिक अभिक्रिया- शीलता का क्रम निम्नलिखित में से कौन-से तत्त्वों में से है-
(क) F > Cl > O > N
(ख) F > O > Cl > N
(ग) Cl> F > O > N
(घ) O > F > N > Cl
उत्तर:
(ख) F > O > Cl > N क्रम सही है।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 1.
(i) एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए।
(ii) एक मोल इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान और आवेश का परिकलन कीजिए।
हल:
(i) एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
= 9.1 × 1028 ग्राम
1 ग्राम भार = \(\frac{1}{9.1 \times 10^{-28}}\)
अतः एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉन की संख्या
= 1.099 × 1027 इलेक्ट्रॉन

(ii) एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
= 9.1 × 10-31 kg
1 मोल (6.023 × 1023) इलेक्ट्रॉन का भार
= 9.1 × 10-31 × 6.023 x 1023
= 5.48 × 10-7 kg
1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.602 x 10-19 कूलाम्ब
अतः एक मोल इलेक्ट्रॉन पर आवेश
= 1.602 × 10-19 x 6.023 x 1023
= 9.65 x 104 कूलाम्ब

प्रश्न 2.
(i) मेथेन के एक मोल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए।
(ii) 7mg14C में न्यूट्रॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27 kg मान लीजिए।
(iii) मानक ताप और दाब (STP) पर 34mg NH3 में प्रोटॉनों की (क) कुल संख्या और (ख) कुल द्रव्यमान बताइए। दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर परिवर्तित हो जाएगा।
हल:
(i) 1 मोल मेथेन में 1 कार्बन और 4 मोल हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
एक अणु CH4 में कुल इलेक्ट्रॉन = 6 + 4 = 10
मेथेन के एक मोल में इलेक्ट्रॉनों की संख्या
= 6 × 6.023 × 1023 + 4 x 6.023 x 1023 इलेक्ट्रॉन
= 3.614 x 1024 + 2.409 x 1024
= 6.023 x 1024 इलेक्ट्रॉन

(ii) (क) न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.675 x 10-27kg
14 ग्राम कार्बन में 1 मोल 14C परमाणु होते हैं।
14 ग्राम C-14 में न्यूट्रॉनों की संख्या
= 8 × 6.023 x 1023 न्यूट्रॉन
7 x 10-3 ग्राम C-14 में न्यूट्रॉनों की संख्या
= \(\frac{8 \times 6.023 \times 10^{23} \times 7 \times 10^{-3}}{14}\)
= 2.409 x 1021 न्यूट्रॉन

(ख) कुल न्यूट्रॉनों की संख्या = 2.409 × 1021
1 न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 × 10-27kg
∴ 2.409 x 1021 न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान
= 2.409 x 1021 x 1.675 x 10-27kg
अत: कुल न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान
= 4.0347 × 10-6 kg

(iii) (क) 17 ग्राम NH3 में 1 मोल नाइट्रोजन तथा तीन मोल हाइड्रोजन परमाणु हैं।
1 मोल नाइट्रोजन परमाणु में प्रोटॉन = 7 मोल
3 मोल हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटॉन = 3 मोल
अतः अमोनिया के एक मोल में प्रोटॉन = 10 मोल
17 ग्राम NH3 में प्रोटॉन = 10 मोल प्रोटॉन
= 10 × 6.02 × 1023 प्रोटॉन
= 6.02 × 1024 प्रोटॉन
34 x 10-3 ग्राम NH3 में प्रोटॉन
= \(\frac{6.02 \times 10^{24} \times 34 \times 10^{-3}}{17}\)
= 1.2044 ×1022 प्रोटॉन

(ख) 34 x 10-3 ग्राम NH3 में प्रोटॉन की संख्या
= 1.2044 × 1022
∵ एक प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27 kg
∴ 1022 प्रोटॉन का द्रव्यमान
= 1.675 × 10-27 × 1.2044 x 1022
= 2.015 × 10-5 kg
ताप व दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं रहता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 3.
निम्नलिखित नाभिकों में उपस्थित न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या बताइए।
\({ }_6^{13} \mathrm{C},{ }_8^{16} \mathrm{O}, \quad{ }_{12}^{24} \mathrm{Mg},{ }_{26}^{56} \mathrm{Fe},{ }_{38}^{88} \mathrm{Sr}\)
हल:
\({ }_6^{13} \mathrm{C}\) में प्रोटॉनों की संख्या =6
न्यूट्रॉनों की संख्या = 13 – 6 = 7
\({ }_8^{16} \mathrm{O}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 8,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 16 – 8 = 8
\({ }_{12}^{24} \mathrm{Mg}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 12,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 24 – 12 = 12
\({ }_{26}^{56} \mathrm{Fe}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 26,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 56 – 26 = 30
\({ }_{38}^{88} \mathrm{Sr}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 38,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 88 – 38 = 50

प्रश्न 4.
नीचे दिये गये परमाणु द्रव्यमान (A) और परमाणु संख्या (Z) वाले परमाणुओं का पूर्ण प्रतीक लिखिए –
(i) Z = 17 A = 35
(ii) Z = 92 A = 233
(iii) Z = 4 A = 9
हल:
(i) \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\)
(ii) \({ }_{92}^{233} \mathrm{U}\)
(iii) \({ }_4^9 \mathrm{Be}\)

प्रश्न 5.
सोडियम लैम्प द्वारा उत्सर्जित पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ) 580 nm है। इसकी आवृत्ति (υ) और तरंग संख्या (\(\overline{\mathcal{V}}\)) का परिकलन कीजिए।
हल:
पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ) = 580nm
अतः υ = \(\frac{c}{\lambda}=\frac{3 \times 10^8}{580 \times 10^{-9}}\) = 5.17 x 1014s-1
(\(\overline{\mathcal{V}}\)) = \(\frac{1}{\lambda}=\frac{1}{580 \times 10^{-9}}\)
= 0.0172 × 108m-1
= 1.72 × 106m-1

प्रश्न 6.
प्रत्येक ऐसे फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए –
(i) जो 3 × 1015 Hz आवृत्ति वाले प्रकाश के संगत हो।
(ii) जिसकी तरंगदैर्ध्य 0.50 Å हो ।
हल:
(i) E = hυ = 6.626 × 10-34 × 3 × 1015
= 1.988 × 10-18 J

(ii) E = hυ = h\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{\left(0.5 \times 10^{-10} \mathrm{~m}\right)}\)
= 3.97 × 10-15J

प्रश्न 7.
2.0 x 10-10s काल वाली प्रकाश तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, और तरंग संख्या की गणना कीजिए।
हल:
तरंग काल T = 2.0 × 10-10 s
आवृत्ति υ = \(\frac { 1 }{ T }\) = \(\frac{1}{2.0 \times 10^{-10}}\) = 5.0 x 109 s-1
तरंगदैर्ध्य λ = \(\frac { c }{ υ }\) = \(\frac{3 \times 10^8}{5 \times 10^9}\) = 6.0 x 10-2 m
तरंग संख्या (\(\overline{\mathcal{V}}\)) = \(\frac { 1 }{ λ }\) = \(\frac{1}{\left(6.0 \times 10^{-2}\right)}\)
= \(\frac { 100 }{ 6 }\)
= 16.66 m-1

प्रश्न 8.
ऐसा प्रकाश जिसकी तरंगदैर्ध्य 4000 pm हो और जो 1J ऊर्जा दे, में फोटॉनों की संख्या बताइए।
हल:
फोटॉन की ऊर्जा E = \(\frac { hc }{ λ }\) (h = 6.626 × 10-34 Js)
c = 3 ×108 ms-1
2 = 4000 pm = 4000 x 10-12 m
= 4 × 10-9 m
E = \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{4 \times 10^{-9}}\)
= 4.9687 × 10-17 J
= 4.97 × 10-17 J
4.97× 10-17 J ऊर्जा है = 1 फोटॉन की
1 J ऊर्जा होगी =\(\frac{1}{4.97 \times 10^{-17}}\) फोटॉन की
= 2012 × 10-16 फोटॉन

प्रश्न 9.
यदि 4 × 10-7m तरंगदैर्ध्य वाला एक फोटॉन 2.13 ev कार्यफलन वाली धातु की सतह से टकराता है तो –
(i) फोटॉन की ऊर्जा (eV) में,
(ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा और
(iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन के वेग का परिकलन कीजिए।
(1 eV = 1.6020 × 10-19 J)
हल:
(i) फोटॉन की ऊर्जा
E = \(\frac { hc }{ λ }\) = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{4 \times 10^{-7}}\)
= 4.97 × 10-19 J
= \(\frac{(1 \mathrm{eV}) \times 4.97 \times 10^{-19}}{1.6020 \times 10^{19} \mathrm{~J}}\)
फोटॉन की ऊर्जा 3.1eV

(ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा = E – कार्यफलन
= 3.10 – 2.13
= 0.97 ev

(iii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा (KE) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)
v² = \(\frac { 2 K.E. }{ m }\)
प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग
= v = \(\sqrt{\frac{2 \mathrm{KE}}{m}}\)
= \(\sqrt{\frac{2 \times 0.97 \times 1.602 \times 10^{-19}}{9.1 \times 10^{-31}}}\)
= 5.84 × 105 m/s

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 10.
सोडियम परमाणु के आयनन के लिए 242 m तरंगदैर्ध्य की विद्युत चुम्बकीय विकिरण पर्याप्त होती है। सोडियम की आयनन ऊर्जा kJmol-1 में ज्ञात कीजिए।
हल:
तरंगदैर्ध्य λ = 242 nm = 242 x 10-9 m
E = \(\frac { hc }{ λ }\) = \(\frac{6.626 \times 10^{-17} \times 3 \times 10^8}{242 \times 10^{-9}}\)
= 0.0821 × 10-17 J
सोडियम के 1 मोल के लिए आयनन ऊर्जा
E = \(\frac{0.0821 \times 10^{-12} \times 6.022 \times 10^{23}}{1000}\)
= 494 kJ mol-1

प्रश्न 11.
25 वाट का एक बल्ब 0.57 μm तरंगदैर्ध्य वाले पीले रंग का एक वर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है तो प्रति सेकेण्ड क्वाण्टा के उत्सर्जन की दर ज्ञात कीजिए।
हल:
फोटॉन की ऊर्जा
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना 1

प्रश्न 12.
किसी धातु की सतह पर 6800 Å तरंगदैर्ध्य वाली विकिरण डालने से शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति (υ0) और कार्यफलन (W0) ज्ञात कीजिए।
हल:
देहली आवृत्ति (υ0) = \(\frac{c}{\lambda_0}=\frac{3 \times 10^8}{6800 \times 10^{-10}}\)
= 4.41 × 1014 s-1
कार्यफलन W0 = hv0 = 6.626 × 10-34 × 4.41 × 1014 J
= 2.92 × 10-19 J

प्रश्न 13.
जब हाइड्रोजन परमाणु के n = 4 ऊर्जा स्तर से = 2 ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉन जाता है तो किस तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित करेगा ?
हल:
RH = 109677
\(\overline{\mathcal{υ}}\) = RH\(\left[\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right]\)
= 109677\(\left[\frac{1}{2^2}-\frac{1}{4^2}\right]\)
= 20564.4 cm-1
λ = \(\frac{1}{\bar{v}}=\frac{1}{20564 \cdot 4}\)
= 486 × 10-7 cm
= 486 × 10-9 m = 486nm

प्रश्न 14.
यदि इलेक्ट्रॉन n = 5 कक्षक में उपस्थित हो तो H परमाणु के आयनन के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी ? अपने उत्तर की तुलना हाइड्रोजन परमाणु की आयनन एन्थैल्पी से कीजिए। आयनन एन्थैल्पी n = 1 कक्षक में इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा होती है।
हल:
एक निश्चित ऊर्जा कक्षक में उपस्थित हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन के लिए ऊर्जा
En = \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-19} \mathrm{~J}}{n^2}\) परमाणु
n = 5 कक्षक में उपस्थित हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन के लिए आयनन ऊर्जा n1 = 5, n2 = ∞
∆E5 = E – E5
= 0 – \(\left(\frac{-2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{(5)^2}\right)\) J/atom
= \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{25}\) J / atom
= 8.72 × 10-20 J / atom
कक्षा n = 1 में उपस्थित हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन के लिये आयनन ऊर्जा
1 = E – E1
= 0 – \(\left(\frac{-2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{(1)^2}\right)\)
= 2.18 × 10-18 J / atom
तुलना करने पर,
\(\frac{\Delta \mathrm{E}_5}{\Delta \mathrm{E}_1}=\frac{8 \cdot 72 \times 10^{-20}}{2.18 \times 10^{-18}}\)
= 0.04

प्रश्न 15.
जब हाइड्रोजन परमाणु में उत्तेजित इलेक्ट्रॉन n = 6 से मूल अवस्था में जाता है तो प्राप्त उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या होगी?
हल:
उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या
= \(\frac{n(n-1)}{2}=\frac{6(6-1)}{2}\) = 15

प्रश्न 16.
(i) हाइड्रोजन के प्रथम कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा – 2.18 × 10-18 जूल / परमाणु है। पाचवें कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा बताइए। (ii) हाईड्रोजन परमाणु के पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या की गणन कीजिए।
हल:
(i) n कक्षक के लिए ऊर्जा
En = – \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{n^2}\) J
अतः पाँचवें कक्षक के लिए ऊर्जा
E5 = – \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{5^2}\)
= – 8.72 × 10-20 J

(ii) nवें कोश की त्रिज्या = ae
an = 52.9pm
= 52.9 × 10-12 x 25
= 1322.5 × 10-12 m
= 1.3225 nm

प्रश्न 17.
हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी में अधिकतम तरंगदैर्ध्य वाले संक्रमण की तरंग संख्या की गणना कीजिए।
हल:
बामर श्रेणी के लिए n1 = 2
अत:
\(\overline{\mathcal{V}}\) = RH\(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)\)
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac { 1 }{ λ }\)
अतः यदि \(\overline{\mathcal{V}}\) अधिकतम है तो छोटी होगी।
∴ \(\overline{\mathcal{V}}\) = (1.097 x 107)\(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{3^2}\right)\)
= 1097×107 x \(\frac { 5 }{ 56 }\) m-1
= 1.523 × 106 m-1

प्रश्न 18.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन को पहली कक्षा से पाँचवीं कक्षा तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की जूल में गणना कीजिए। जब यह इलेक्ट्रॉन तलस्थ अवस्था में लौटता है तो किस तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित होता ? (इलेक्ट्रॉन की तलस्थ अवस्था ऊर्जा – 2.18 x 10-11 अर्ग है)।
हल:
तलस्थ अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 2.18 x 10-11 अर्ग अर्थात्
En = – \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-11}}{n^2}\) अर्ग
∆E = E5 – E1 = 2.18 x 10-11\(\left(\frac{1}{1^2}-\frac{1}{5^2}\right)\)
= 2.18 x 10-11\(\frac { 24 }{ 25 }\)
= 209 × 10-11 अर्ग
= 2.09 × 10-18 जूल (1 अर्ग = 10-7 जूल)
जब इलेक्ट्रॉन तलस्थ अवस्था में लौटता है। (n = 1 में)
उत्सर्जित ऊर्जा = 2.09 10-11 अर्ग
∴ ∆E = hv = \(\frac { c }{ λ }\)
या λ = \(\frac { hc }{ ΔΕ }\)
= \(\frac{6626 \times 10^{-27} \times 3 \times 10^{10}}{2.09 \times 10^{-11}}\)
= 9.51 × 10-6 cm
= 951 × 10-8 cm
= 951 Å

प्रश्न 19.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा En = \(\frac{-2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{n^2} \mathrm{~J}\) द्वारा दी जाती है। n = 2 कक्षा से इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। प्रकाश की सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य $(\mathrm{cm}$ में) क्या होगी जिसका प्रयोग इस। संक्रमण में किया जा सके?
हल :
∆E = E – E2
= 0 – \(\left[\frac{-2.18 \times 10^{-18}}{2^2}\right]\)
= 5.45 x 1-19 J atom-1
∆E = hv = h\(\frac { c }{ λ }\) या λ = \(\frac { hc }{ ΔΕ }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js} \times 3 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{5.45 \times 10^{-19} \mathrm{~J}}\)
= 3.647 × 10-7m
= 3.647 × 10-5 cm

प्रश्न 20.
2-05 × 107ms-1 वेग से गति कर रहे किसी इलेक्ट्रॉन का तरंगदैर्ध्य क्या होगा ?
हल:
डी-ब्रॉग्ली समीकरण द्वारा
λ = \(\frac { h }{ mv }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}}{\left(9.11 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}\right) \times 2.05 \times 10^7 \mathrm{~ms}^{-1}}\)
= 3.55 × 10-1m

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 21.
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 x 10-31 kg है। यदि इसकी गतिज ऊर्जा 3.0 x 10-25 J हो तो इसकी तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
गतिज ऊर्जा = \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv²
v = \(\sqrt{\frac{2 \mathrm{KE}}{m}}=\sqrt{\frac{2 \times 3.0 \times 10^{-25} \mathrm{~J}}{9 \cdot 1 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}}}\)
= 812 ms-1
λ = \(\frac { h }{ mv }\) = \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}}{\left(9.1 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}\right)\left(812 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}\)
= 8.967 × 10-7m
= 8967 A

प्रश्न 22.
निम्नलिखित में से कौन-से समआयनी स्पीशीज (isoelectronic) हैं? अर्थात् किनमें इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या है।
Na+, K+, Mg2+, Ca2+, S2-, Ar
हल:
Na+ तथा Mg2+ समइलेक्ट्रॉनी हैं (इनमें 10 इलेक्ट्रॉन हैं)
K+, Ca2+, S2- तथा Ar समइलेक्ट्रॉनी हैं (इनमें 18 इलेक्ट्रॉन हैं)

प्रश्न 23.
(i) निम्नलिखित आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए-
(क) H
(ख) Na+
(ग) O2
(घ) F

(ii) उन तत्वों की परमाणु संख्या बताइए जिनके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को निम्नलिखित रूप में दर्शाया गया है
(क) 3s1
(ख) 2p³
(ग) 3p5

(iii) निम्नलिखित विन्यासों वाले परमाणुओं के नाम बताइए-
(क) (He) 2s1
(ख) (Ne) 3s² 3p³
(ग) (Ar) 4s² 3d1
हल:
(i) निम्नलिखित आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-
(क) H = 1s²
(ख) Na+ = 1s², 2s², 2p6
(ग) O2- = 1s², 2s², 2p6
(घ) F = 1s², 2s², 2p6

(ii) :

बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यासपरमाणु क्रमांकपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(क) 3s1111s², 2s², 2p6 , 3s²
(ख) 2p³71s², 2s², 2p6
(ग) 3p5171s², 2s², 2p6, 3s² 3p5

(iii) :

इलेक्ट्रॉनिक विन्यासपरमाणु क्रमांकपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(क) [He] 2s13लीथियम
(ख) [Ne] 3s² 3p³15फॉस्फोरस
(ग) [Ar] 4s² 3d121स्कैन्डियम

प्रश्न 24.
किस निम्नतम n मान द्वारा g कक्षक का अस्तित्व अनुमत होगा?
हल:
g उपकक्ष के लिये l = 4. l का मान 0 से (n – 1) होता है। अत: l = 4 तब n = 5 अत: n का निम्नतम मान = 5

प्रश्न 25.
एक इलेक्ट्रॉन 3d कक्षक में है इसके लिये n, l, m के सम्भव मान दीजिए।
हल:
n = 3 1=2
m = – 2, – 1, 0, +1, +2 (कोई भी एक मान)

प्रश्न 26.
किसी तत्व के परमाणु में 29 इलेक्ट्रॉन और 35 न्यूट्रॉन हैं (i) प्रोटॉनों की संख्या (ii) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बताइए।
हल:
Z = 29 अत: प्रोटॉन = 29
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = Z = 29
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1s², 2s², 2p6, 3s², 3p6, 4s1, 3d10

प्रश्न 27.
H2+, H2, और O2+ स्पीशीज में उपस्थित इलेक्ट्रानों की संख्या बताइए।
हल:
H2+ = 2 – 1 = 1, H2 = 2, O2+ = 16 – 1 = 15

प्रश्न 28.
(i) किसी परमाणु कक्षक का n = 3 है, इसके लिए l और m के सम्भव मान क्या होंगे?
(ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए m और l क्वाण्टम संख्याओं के मान बताइए।
(iii) निम्न में से कौन-से कक्षक सम्भव हैं-
1p, 2s, 2p 3f
हल:
(i) n = 3
l = 0 → (n – 1) = 0, 1, 2
1 = 0 m = 0
1 = 1 m = – 1, 0, + 1
1 = 2 m = – 2, – 1, 0, +1, +2

(ii) 3d कक्षक के लिए
l = 2 m = – 2, – 1, 0, +1, +2

(iii) 2s, 2p कक्षक सम्भव हैं।

प्रश्न 29.
s, p, d, f संकेतन द्वारा निम्नलिखित क्वाण्टम संख्याओं वाले कक्षकों को बताइए –
(क) n = 1, l = 0
(ख) n = 3 l = 1
(ग) n = 4 l = 2
(घ) n = 4 l = 3
हल:

l का मानकक्षक
0s
1p
2d
3F

अत: (क) 1s (ख) 3p (ग) 4d (घ) 4f

प्रश्न 30.
कारण देते हुए बताइए कि निम्नलिखित क्वाण्टम संख्या के कौन-से मान सम्भव नहीं हैं।
(क) n = 0 l = 0 m1 = 0 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ख) n = 1 l = 0 m1 = 0 ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ग) n = 1 l = 1 m1 = 0 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(घ) n = 2 l = 1 m1 = 0 ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ङ) n = 3 l = 3 m1 = -3 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(च) n = 3 l = 1 m1 = 0 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
हल:
(क) सम्भव नहीं है क्योंकि n = 0 असम्भव हैं।
(ख) n = 1, l = 0, m1 = 0, ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\) (सम्भव है।)
(ग) n = 1, l = 1 असम्भव है क्योंकि 7 का मान 0 से (n – 1) तक होता है।
(घ) सम्भव है।
(ङ) n = 3, l = 3, m1 = 3, ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
असम्भव है क्योंकि यहाँ पर n तथा का मान समान नहीं हो सकता है।
(च) सम्भव है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 31.
किसी परमाणु में निम्नलिखित क्वाण्टम संख्याओं वाले कितने इलेक्ट्रॉन होंगे-
(क) n = 4, m, = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ख) n = 3, l = 0
हल:
(क) n = 4 के लिए कुल सम्भव इलेक्ट्रॉन 2n² = 32 इलेक्ट्रॉन होंगे।
जिनमें 16 इलेक्ट्रॉन के लिए ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)

(ख) n = 3, l = 0 केवल दो इलेक्ट्रॉन 3s कक्षक में सम्भव हैं।

प्रश्न 32.
यह दर्शाइए कि हाइड्रोजन परमाणु की बोर कक्षा की परिधि उस कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणक होती है।
उत्तर:
बोर के अनग्रहित द्वारा
mvr = \(\frac { nh }{ 2π }\) या 2πr = \(\frac { nh }{ mv }\) … (1)
डी-ब्रॉग्ली के अनुसार λ = \(\frac { h }{ mv }\) … (2)
समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर
2πr = nλ
अतः हाइड्रोजन परमाणु की बोर कक्षा की परिधि (2πr) उस कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणक होती है।

प्रश्न 33.
He+ स्पेक्ट्रम के n = 4 से n = 2 बामर संक्रमण से प्राप्त तरंगदैर्ध्य के बराबर वाला संक्रमण हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में क्या होगा?
हल:
किसी परमाणु के लिए
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac { 1 }{ λ }\) = RHZ²\(\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)\)
He+ स्पेक्ट्रम के लिए
Z = 2, n2 = 4, n1 = 2
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac { 1 }{ λ }\) = RH x (2)² \(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{4^2}\right)=\frac{3 \mathrm{R}_{\mathrm{H}}}{4}\)
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के लिए
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac{3 R_H}{4}\) तथा Z = 1
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac{1}{\lambda}=\mathrm{R}_{\mathrm{H}} \times 1\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)\)
= RH\(\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)=\frac{3 \mathrm{R}_{\mathrm{H}}}{4}\)
या \(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}=\frac{3}{4}\)
अर्थात् n1 = 1 तथा n2 = 2
अतः हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की स्थिति में संक्रमण n2 = 2 से n1 = 1 होगा।

प्रश्न 34.
He+ (g) → He2+ (g) + e
प्रक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। हाइड्रोजन परमाणु की तलस्थ अवस्था में आयनन ऊर्जा 2.18 × 1018 J atom-1 है।
हल:
H परमाणु के लिये E1 = – I.E. ( आयनन ऊर्जा )
= – 2.18 × 10-18 J
He+ के लिये E1 = E1 (H) × Z²
= – 2·18 × 10-18 × (2)² J
= – 8.72 × 10-18 J
दी गयी प्रक्रिया H+ के आयनन को प्रदर्शित कर रही है अतः He+ के आयनन के लिये आवश्यक ऊर्जा
= – E1 (He+)
= – (8-72 × 10-18 J)
= 8.72 × 10-18 J

प्रश्न 35.
यदि कार्बन परमाणु का व्यास 0.15 nm है तो उन कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए जिन्हें 20 cm स्केल की लम्बाई में एक-एक करके व्यवस्थित किया जा सकता है।
हल:
कार्बन परमाणु का व्यास
= 0-15 nm = 0.15 × 10 = 1.5 x 10-10m
रेखा की लम्बाई = 20cm = 20 x 10-2m = 2 x 10-1 m
20cm लम्बाई में रखे, कार्बन परमाणु जिनकी संख्या
= \(\frac{2 \times 10^{-1}}{1.5 \times 10^{-10}}\)
= 1.33 × 10o परमाणु

प्रश्न 36.
कार्बन के 2 x 108 परमाणु एक कतार में व्यवस्थित हैं। यदि इस व्यवस्था की लम्बाई 2-4 cm है तो कार्बन परमाणु के व्यास की गणना कीजिए।
हल:
कार्बन परमाणुओं की संख्या = 2 x 108
कतार की लम्बाई = 2.4 cm = 24 x 10-2m
कार्बन परमाणु का व्यास =\(\frac{2 \cdot 4 \times 10^{-2}}{2 \times 10^8}\)
= 12 × 10-10m

प्रश्न 37.
जिंक परमाणु का व्यास 2.6 Å है।
(क) जिंक की परमाणु त्रिज्या pm में तथा
(ख) 1.6cm की लम्बाई में कतार में लगातार उपस्थित परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए ।
हल:
(क) 1 Å = 10² pm
अतः व्यास \(\frac { 2.6 }{ 2 }\) = 1.3 Å = 1·3 × 10-10m
= 130 × 10-12 m = 130pm

(ख) दी हुई लम्बाई = 1.6 cm = 1.6 × 10-2m
परमाणु का व्यास = 26 Å = 2.6 x 10-10 m
1.6 लम्बाई में परमाणुओं की संख्या
= \(\frac{1.6 \times 10^{-2}}{2.6 \times 10^{-10}}\)
= 6.154 × 107

प्रश्न 38.
किसी कण का स्थिर विद्युत आवेश 2.5 x 10-16 C है। इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
कण का स्थिर विद्युत आवेश (q) = 2.5 x 10-16C
इलेक्ट्रॉन पर आवेश (e) = 1.602 × 10-19C
इलेक्ट्रॉन की संख्या \(\frac { q }{ e }\) = \(\frac{2.5 \times 10^{-16}}{1.602 \times 10^{-19}}\)
= 1560

प्रश्न 39.
मिलीकन के प्रयोग में तेल की बूँद पर चमकती X-किरणों द्वारा स्थैतिक विद्युत आवेश प्राप्त किया जाता है। तेल की बूँद पर यदि स्थैतिक विद्युत आवेश – 1.282 x 10-18C हो तो इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए ।
हल:
तेल की बूँद पर आवेश (q) = – 1.282 x 10-18 C
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश (e) = – 1.602 x 10-19 C
इलेक्ट्रॉन की संख्या = \(\frac { q }{ e }\)
= \(\frac{\left(-1.282 \times 10^{-18}\right)}{\left(-1.602 \times 10^{-19}\right)}\)
= 8

प्रश्न 40.
रदरफोर्ड के प्रयोग में सोने, प्लैटिनम आदि भारी परमाणुओं की पतली पन्नी पर – कणों द्वारा बमबारी की जाती है। यदि ऐल्यूमिनियम आदि जैसे हल्के परमाणु की पतली पन्नी ली जाये तो उपर्युक्त परिणामों में क्या अन्तर होगा ?
हल:
ऐल्यूमिनियम का नाभिक हल्का और छोटा तथा कम अव्यवस्थित होगा, अतः α-कण अपने पथ से कम विक्षेपित होंगे और सीधे निकल जायेंगे। इस प्रकार ऐल्यूमिनियम की पतली पन्नी लेने पर रदरफोर्ड के प्रयोग के परिणाम भिन्न होंगे।

प्रश्न 41.
\({ }_{35}^{79} \mathrm{Br}\) तथा 79Br प्रतीक मान्य है, जबकि \({ }_{35}^{79} \mathrm{Br}\) तथा
35 Br मान्य नहीं हैं। संक्षेप में कारण बताइये।
हल:
किसी भी तत्व का परमाणु क्रमांक स्थायी होता है। जबकि द्रव्यमान संख्या स्थिर नहीं होती है। प्रत्येक समस्थानिक के लिये भी द्रव्यमान संख्या का मान भिन्न-भिन्न होता है। अतः प्रत्येक समस्थानिक की द्रव्यमान संख्या भी व्यक्त करना अनिवार्य है। अतः \({ }_{35}^{79} \mathrm{Br}\) तथा 35 Br मान्य नहीं है क्योंकि 35Br में द्रव्यमान संख्या नहीं है। इस कारण \({ }_{79}^{35} \mathrm{Br}\) तथा 79Br प्रतीक मान्य है।

प्रश्न 42.
एक 81 द्रव्यमान संख्या वाले तत्व में प्रोटॉनों की तुलना में 31.7% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इसका परमाणु प्रतीक लिखिए।
हल:
द्रव्यमान संख्या (A) = 81, p + n = 81
यदि प्रोटॉन = x तब न्यूट्रॉन = x + \(\frac{31.7 \times x}{100}\) = 1.317x
∴ x + 1.317x = 81
या 2.317x = 81
x = \(\frac { 81 }{ 2.317 }\) = 35
अतः प्रोटॉन = 35; Z = 35
न्यूट्रॉन = 81 – 35 = 46
अतः प्रतीक \({ }_{35}^{81} \mathrm{Br}\) है।

प्रश्न 43.
37 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर ऋण आवेश की एक इकाई है। यदि आयन में इलेक्ट्रॉन की तुलना में न्यूट्रॉन 11.1% अधिक हैं तो आयन का प्रतीक लिखिए।
हल:
माना आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = x
प्रोटॉनों की संख्या = x – 1
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{11.1 \times x}{100}\)
आयन का द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
37 = (x – 1) + 1-11x
या 2.11x = 38
या x = \(\frac{38}{2.11}\) = 18
प्रोटॉन की संख्या = परमाणु क्रमांक = x – 1
= 18 – 1 = 17
अतः आयन की परमाणु संख्या = 17,
आयन का प्रतीक = \({ }_{37}^{17} \mathrm{Cl}\)

प्रश्न 44.
56 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर धनावेश 3 इकाई है और उसमें इलेक्ट्रॉन की तुलना में 30.4% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इस आयन का प्रतीक लिखिए।
हल:
आयन में इलेक्ट्रॉन की संख्या = x
अत: प्रोटॉन की संख्या = x 3
न्यूट्रॉन की संख्या = x + \(\frac{30.4 \times x}{100}\)
= 1.304 x
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या = x + 3
प्रोटॉन की संख्या = x + 3
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{30.4 \times x}{100}\)
= x + 0.304x
आयन का द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
= (x + 3) + (x + 0.304x)
56 = (x + 3) + (x + 0.304x)
2.304x = 56 – 3 = 53
x = \(\frac{53}{2.304}\) = 23
परमाणु संख्या = 23 + 3 = 26
अतः आयन का प्रतीक = \({ }_{56}^{26} \mathrm{Fe}\)+3

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 45.
निम्नलिखित विकिरणों के प्रकारों को आवृत्ति के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(क) माइक्रोवेव ऑवन से विकिरण।
(ख) यातायात संकेत से त्रणमणि (amber) प्रकाश।
(ग) एफ. एम. रेडियो से प्राप्त विकिरण।
(घ) बाहरी दिक् से कॉस्मिक किरणें।
(ङ) X – किरणें।
हल:
बाहरी दिक् से कॉस्मिक किरणें < X – किरणें < त्रणमणि प्रकाश माइक्रोवेव < एफ. एम रेडियो से प्राप्त विकिरण।

प्रश्न 46.
नाइट्रोजन लेजर 337.1 nm की तरंगदैर्ध्य पर एक विकिरण उत्पन्न करती है। यदि उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 5.6 x 1024 हो तो इस लेजर की क्षमता की गणना कीजिए।
हल:
नाइट्रोजन लेजर की तरंगदैर्ध्य = 337.1nm
फोटॉनों की संख्या = 5.6 x 1024
E = Nhv = Nh\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{\left(5.6 \times 10^{24)}\left(6 \cdot 626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)\right.}{\left(337.1 \times 10^{-9} \mathrm{~m}\right)}\)
= 3.3 × 106 J

प्रश्न 47.
नियॉन गैस को सामान्यतः संकेत बोर्डों में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यह 616 nm पर प्रबलता से विकिरण उत्सर्जन करती है तो (क) उत्सर्जन की आवृत्ति (ख) 30 सेकेण्ड में इस विकिरण द्वारा तय की गई दूरी, (ग) क्वाण्टम की ऊर्जा तथा (घ) उपस्थित क्वाण्टम की संख्या की गणना कीजिए। (यदि यह 2J की ऊर्जा उत्पन्न करती है।)
हल:
λ = 616 x 10-9 m
(क) आवृत्ति υ = \(\frac { c }{ λ }\) = \(\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{616 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 4.87 × 10-14 s-1

(ख) विकिरण का वेग = 3.0 x 108 ms-1
∴ 30 सेकेण्ड में विकिरण द्वारा तय की गई दूरी = समय × वेग
= 30 × 3 × 108
= 9.0 x 108 m

(ग) E = hυ = h\(\frac { c }{ λ }\)
= υ = \(\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right) \times 3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{616 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 32.27 × 10-20 J

(घ) 2J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या
32-27 × 10-20 J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या = 1
2J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या
= \(\frac{2}{32.27 \times 10^{-20}}\)
= 6.2 × 1018

प्रश्न 48.
खगोलीय प्रेक्षणों में दूरस्थ तारों से मिलने वाले संकेत बहुत कमजोर होते हैं। यदि प्रोटॉन संसूचक 600 nm के विकिरण से कुल 3-15 × 10-18 J प्राप्त करता है तो संसूचक द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
एक फोटॉन की ऊर्जा = hυ = h\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}{\left(600 \times 10^{-9} \mathrm{~m}\right)}\)
= 3.313 × 10-19 J
कुल प्राप्त ऊर्जा = 3.15 × 10-18 J
प्राप्त फोटॉनों की संख्या = \(\frac{3.15 \times 10^{-18}}{3.313 \times 10^{-19}}\)
= 9.51 ≈ 10

प्रश्न 49.
उत्तेजित अवस्थाओं में अणुओं के जीवनकाल का माप प्रायः लगभग नैनो सेकेण्ड परास वाले विकिरण स्रोत का उपयोग करके किया जाता है। यदि विकिरण स्रोत का काल 2ns और स्पंदित विकरण स्रोत के दौरान उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 2.5 x 1015 है तो स्रोत की ऊर्जा की गणना कीजि।
हल:
स्रोत में विकिरण की अवधि
T = 2 ns = 2 × 10-9 s
आवृत्ति = \(\frac{1}{2 \times 10^{-9}}\)
= 0.5 × 109 s-1
ऊर्जा = nhv = (2.5 x 1015) (6.626 x 10-34Js) (0.5 x 109 s-1)
= 8.28 ×10-10 J

प्रश्न 50.
सबसे लम्बी द्विगुणित तरंगदैर्ध्य जिंक अवशोषण संक्रमण 589 और 589-6nm पर देखा जाता है। प्रत्येक संक्रमण की आवृत्ति और दो उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा के अन्तर की गणना कीजिए।
हल :
λ1 = 589 nm = 589 x 10-9m
∴ υ = \(\frac { c }{ λ }\) = \(\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{589 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 5.093 × 1014 s-1
λ2 = 589.6nm = 589.6 × 10-9m
∴ υ2 = \(\frac { c }{ λ2 }\) = \(\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{589.6 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 5.008 × 1014 s-1
∆E = E2 – E1 = h (υ2 – υ1)
= (6.626 × 10-34 Js) (5.93 – 5.088) x 1014 s-1
= 3.31 × 10-22 J

प्रश्न 51.
सीजियम परमाणु का कार्य फलन 1-9 eV है तो
(क) उत्सर्जित विकिरण की देहली तरंगदैर्ध्य,
(ख) देहली आवृत्ति की गणना कीजिए।
यदि सीजियम तत्व को 500 nm की तरंगदैर्ध्य के साथ विकीर्णित किया जाये तो निकले हुए फोटो-इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और वेग की गणना कीजिए।
हल:
(क) कार्य फलन (W0) = hυ0
∴ υ0 = \(\frac{\left(W_0\right)}{h}=\frac{1.9 \times 1.602 \times 10^{-19} \mathrm{~J}}{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}}\)
= 4.59 × 1014 s-1

(ख) λ0 = \(\frac{c}{v_0}=\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{4.59 \times 10^{14} \mathrm{~s}^{-1}}\)
= 6.54 x 10-7 m
= 654 × 10-9 m
उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की K.E. = 654nm
= h(v-vo ) = hc\(\left(\frac{1}{\lambda}-\frac{1}{\lambda_0}\right)\)
= (6·626 × 10-34 Js) (3.0 x 108 ms-1)\(\left(\frac{1}{500 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}-\frac{1}{654 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\right)\)
= \(\frac{6.626 \times 3.0 \times 10^{-26}}{10^{-9}}\left(\frac{154}{500 \times 654}\right) \mathrm{J}\)
= 9.36 × 10-20 J
K.E.= \(\frac { 1 }{ 2 }\) mv² =9.36×10-20 J
∴ \(\frac { 1 }{ 2 }\) x (9.11 × 10-31 kg)v² = 9.36 × 10-20 kg m² s²
या v² = 2055 x 10-11 m² s-2
= 20.55 × 1010 m² s-2
या v = 4.53 × 105 ms-1

प्रश्न 52.
जब सोडियम धातु को विभिन्न तरंगदैर्ध्य के साथ विकीर्णित किया जाता है तो निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होते हैं –

λ (nm)500450400
v × 10-5 (cm s-1)2.554.355.35

(क) देहली तरंगदैर्ध्य और (ख) प्लांक स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल:
माना कि देहली तरंगदैर्ध्य
= λ0 nm = λ0 x 10-9 m
h (v – v0) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv² या hc\(\left(\frac{1}{\lambda}-\frac{1}{\lambda_0}\right)\) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv²
तीनों परिणामों को जोड़ने पर –
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना 2
इस मान को समीकरण (iii) में रखने पर
= \(\frac{h \times\left(3 \times 10^8\right)}{10^{-9}}\left(\frac{1}{400}-\frac{1}{531}\right)\)
= \(\frac { 1 }{ 2 }\)(9.11 × 10-31)(5.20 × 105
h = 6.66 × 10-34 Js

प्रश्न 53.
प्रकाश विद्युत प्रभाव प्रयोग में सिल्वर धातु से फोटो इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन 0.35V की वोल्टता द्वारा रोका जा सकता है। जब 256.7 nm के विकिरण का उपयोग किया जाता है तो सिल्वर धातु के लिए कार्य फलन की गणना कीजिए।
हल:
विकिरण की ऊर्जा कार्य फलन +फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज
ऊर्जा
कार्यफलन = विकिरण ऊर्जा फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा E = hv = h\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}{\left(256.7 \times 10^{-9} \mathrm{~m}\right)}\)
= 7.74 × 10-19 J
= 4·83 eV (1 eV = 1.602 × 10-19 J)
अत: इलेक्ट्रॉन की K. E. = 0.35 eV
∴ कार्य फलन = 4.83 eV – 0.35 ev
= 4.48 ev

प्रश्न 54.
यदि 150 pm तरंगदैर्ध्य का फोटॉन एक परमाणु से टकराता है और उसके अन्दर बंधा हुआ इलेक्ट्रॉन 1.5 x 107 ms-1 वेग से बाहर निकलता है तो उस ऊर्जा की गणना कीजिए। जिससे यह नाभिक से बंधा हुआ है।
हल:
फोटॉन की ऊर्जा
= \(\frac{h c}{\lambda}=\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}{\left(150 \times 10^{-12} \mathrm{~m}\right)}\)
= 13.25 × 10-16 J
(150 × 10-12 m )
बाहर निकलने वाले इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा
= \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv²
= \(\frac { 1 }{ 2 }\) (9.11 × 10-31 kg) (1.5 × 107 ms-1
= 1.025 × 10-16 J
इलेक्ट्रॉन की नाभिक से बंधे रहने की ऊर्जा = (टकराने वाले फॉटोन की ऊर्जा) – (गतिज ऊर्जा)
= 13.25 × 10-16 J – 1.025 × 10-16 J
= 12.225 × 10-16
= \(\frac{12.225 \times 10^{-16}}{1.602 \times 10^{-19}}\)eV
= 7.63 x 10 ev

प्रश्न 55.
पाश्चन श्रेणी का उत्सर्जन संक्रमण n कक्ष से आरम्भ होता है। कक्ष n = 3 में खत्म होता है तथा इसे v = 3.29 × 1015 (Hz) \(\left[\frac{1}{3^2}-\frac{1}{n^2}\right]\) से दर्शाया जा सकता है। यदि संक्रमण 1285nm पर प्रेक्षित होता है तो ” के मान की गणना कीजिए तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
हल:
v = \(\frac{c}{\lambda}=\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{1285 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 3.29 × 1015\(\left[\frac{1}{3^2}-\frac{1}{n^2}\right]\)
\(\frac{1}{n^2}=\frac{1}{9}-\frac{3.0 \times 10^8}{1285 \times 10^{-9}} \times \frac{1}{3.29 \times 10^{15}}\)
= 0.111 – 0.071 = 0.04 =
n² = 25, n = 5
1285 nm का विकिरण स्पैक्ट्रम के अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में होता है।

प्रश्न 56.
उस उत्सर्जन संक्रमण के तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए जो 1.3225 nm त्रिज्या वाले कक्ष से आरम्भ और 211.6pm पर समाप्त होता है। इस संक्रमण की श्रेणी का नाम और स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
हल:
H-जैसे कणों के लिये nth कक्षक की त्रिज्या = \(\frac{0.529 n^2}{Z}\) = \(\frac{52 \cdot 9 n^2}{Z}\)pm
r1 = 1.3225 nm = 1322.5pm
= 52.9 n²1 pm
1 = \(\frac { 1322.5 }{ 52.9 }\) = 25
n1 = 5
r2 = 211·6 pm = 52.9 n²22 pm
2 = \(\frac { 211.6 }{ 52.9 }\) = 4
n2 = 2
अत: n2 = 2, n = 5
चूँकि संक्रमण पाँचवें से द्वितीय कक्ष में होता है। अतः यह बामर श्रेणी है।
\(\overline{\mathrm{υ}}\) = 1.097 × 107m-1\(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{5^2}\right)\)
= 10-9 x \(\frac { 21 }{ 100 }\) x 107 m-1
या λ = \(\frac { 1 }{ υ }\)
= \(\frac{100}{1.097 \times 21 \times 10^7}\)m = 434 x 10-9m
यह दृश्य (Visible) स्पेक्ट्रम क्षेत्र में पड़ता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 57.
डी-ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित द्रव्य के दोहरे व्यवहार से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज हुई जिसे जैव अणुओं और अन्य प्रकार के पदार्थों की अति आवर्धित प्रतिबिम्ब के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस सूक्ष्मदर्शी में यदि इलेक्ट्रॉन का वेग 1.6 x 106ms-1 है तो इस इलेक्ट्रॉन से सम्बन्धित डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
λ = \(\frac { h }{ mv }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{\left(9.11 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}\right)\left(1.6 \times 10^6 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}\)
= 4.55 ×10-10 m
= 455 pm

प्रश्न 58.
इलेक्ट्रॉन विवर्तन के समान न्यूट्रॉन विवर्तन सूक्ष्मदर्शी को अणुओं की संरचना के निर्धारण में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यहाँ 800 pm की तरंगदैर्ध्य ली जाये तो न्यूट्रॉन से सम्बन्धित अभिलाक्षणिक वेग की गणना कीजिए।
हल:
तरंगदैर्ध्य λ = 800pm = 800 × 10-12 m
= 8 ×10-10 m
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1675 x 10-27 kg
λ = \(\frac { h }{ mv }\) या v = \(\frac { h }{ mλ }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{1.675 \times 10^{-27} \mathrm{~kg} \times 8 \times 10^{-10} \mathrm{~m}}\)
= \(\frac{6.625}{1.675 \times 8}\)
= 4.94 × 10² ms-1

प्रश्न 59.
यदि बोर के प्रथम कक्ष में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.9 x 106 ms-1 है तो इससे सम्बन्धित डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए ।
हल:
बोर के प्रथम कक्ष में इलेक्ट्रॉन का वेग
= 2.9 × 106ms-1
h = 6-626 × 10-34m 2s-1
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9-11 × 10-31 kg
λ = \(\frac { h }{ mv }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{9.11 \times 10^{-31} \times 2.9 \times 10^6}\)
= 3.32 ×10-10m = 332 pm

प्रश्न 60.
एक प्रोटॉन जो 1000 V के विभवान्तर में गति कर रहा है, से सम्बन्धित वेग 4.37 x 105 ms-1 है। यदि 0.1 kg द्रव्यमान की हॉकी की गेंद इस वेग से गतिमान है तो इससे सम्बन्धित तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
हॉकी की गेंद का वेग
v = 4.37 × 105 ms-1
गेंद का द्रव्यमान m = 0.1 kg
λ = \(\frac{h}{m v}=\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{0.1 \times 4.37 \times 10^5 \mathrm{~ms}^{-1}}\)
= 1·516 × 10-28 m

प्रश्न 61.
यदि एक इलेक्ट्रॉन की स्थिति को ± 0.002 nm की शुद्धता से मापा जाता है तो इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता की गणना कीजिए। यदि इलेक्ट्रॉन का संवेग h/4πm x 0.05nm है तो क्या इस मान को निकालने में कोई कठिनाई होगी?
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना 3
यह सम्भव नहीं है क्योंकि संवेग का मान अनिश्चितता के मान से बहुत कम है।

प्रश्न 62.
छ: इलेक्ट्रॉनों की क्वाण्टम संख्या नीचे दी गई है। इन्हें ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। क्या इनमें से किसी की ऊर्जा समान है?
1. n = 4 l = 2 ms = – 1 / 2 ml = 2
2. n = 3 l = 2 ms = + 1 / 2 ml = 1
3. n = 4 l = 1 ms = + 1 / 2 ml = 0
4. n = 3 l = 2 ms = – 1 / 2 ml = – 2
5. n = 3 l = 1 ms = + 1 / 2 ml = – 1
6. n = 4 l = 1 ms = – 1 / 2 ml = 0
हल:
इलेक्ट्रॉन कक्षक के क्रम इस प्रकार हैं-
(1) 4d (2) 3d (3) 4p (4) 3d (5) 3p तथा (6) 4p
संयोजन (2) तथा (4) की ऊर्जाएँ समान होंगी। इसी प्रकार (3) तथा (6) की ऊर्जाएँ समान होंगी।
ऊर्जा का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है –
(5) < 2 (4) < (6) = (3) < (1)

प्रश्न 63.
ब्रोमीन परमाणुओं में 35 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसके 2p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन, 3p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन तथा 4p कक्षक में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनमें से कौन-सा इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करता है।
हल:
जैसे-जैसे नाभिक से दूर जाते हैं नाभिकीय आवेश घटता जाएगा, अत: 4p कक्षक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन सबसे कम नाभिकीय आवेश अनुभव करता है। 4p अन्तिम कक्षक है। Br (35) : 1s², 2s²
2p6, 3s² 3p6 3d10, 4s² 4p5

प्रश्न 64.
निम्नलिखित में से कौन-सा कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
(i) 2s और 3s (ii) 4d और 5f तथा (iii) 3d और 3p
उत्तर:
(i) 2s इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे।
(ii) 4d इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे।
(iii) 3p इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे।

प्रश्न 65.
Al तथा Si में 3p कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। कौन-सा इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
हल:
Al (13) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p1
Si (14) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3px1 3py1
सिलिकान (Si) में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अत्यधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे। क्योंकि Si का परमाणु क्रमांक Al से अधिक है।

प्रश्न 66.
इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए-
(क) P (ख) Si (ग) Cr (घ) Fe (ङ) Kr
हल:
(क) P (15) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3px1 3py1 3pz1
3- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं

(ख) Si (14) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3px1 3py1
2- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

(ग) Cr (24) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p6 4s1 3d5
6- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

(घ) Fe (26) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p6 4s² 3a6
4- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

(ड.) Kr (36) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p6 4s² 3d10 4p6
कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 67.
(क) n = 4 से सम्बन्धित कितने उपकोश हैं?
(ख) उस उपकोश में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित होंगे जिसके लिए
ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\) एवं n = 4 है।
हल:
(क) n = 4
l = 0, 1, 2, 3, (0 से (n – 1) तक)
l = 0 4s
l = 1 4p
l = 2 4d
l = 3 4f
चार उपकोश 4s, 4p, 4d, 4f होंगे।

(ख) n = 4 ms = 1/2 अत : कुल 16 इलेक्ट्रॉन होंगे।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के लिये मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –
(i) H2O
(ii) CO2
हल:
(i) H2O का मोलर द्रव्यमान
= 2 × हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान + ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान
= 2 × 1 + 16
= 18 u

(ii) CO2 का मोलर द्रव्यमान
= कार्बन का परमाणु द्रव्यमान + (2 x ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान)
= 12 + 32
= 44 u

(iii) CH4 का मोलर द्रव्यमान
= कार्बन का परमाणु द्रव्यमान
+ (4 × हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान)
= 12 + 4 × 1
= 16 u

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 2.
सोडियम सल्फेट (Na2SO4) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।
हल:
सोडियम सल्फेट का आण्विक द्रव्यमान = (2 x सोडियम का परमाणु द्रव्यमान) + सल्फर का परमाणु द्रव्यमान + (4 x ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान)
= (2 x 23) + 32 + (4 x 16)
= 46 + 32 + 64
= 142 u
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 1

प्रश्न 3.
आयरन के उस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए, जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।
हल:

तत्वप्रतिशततापरमाणु द्रव्यमानप्रतिशतता / परमाणु द्रव्यमानसरल अनुपातपूर्ण अनुपात
Fe69.956\(\frac { 69.9 }{ 56 }\) = 1.25\(\frac { 1.25 }{ 1.25 }\) = 1.01.0 x 2 = 2
O30.116\(\frac { 30.1 }{ 16 }\) = 1.88\(\frac { 1.88 }{ 1.25 }\) = 1.51.5 x 2 = 3

मूलानुपाती सूत्र Fe2O3

प्रश्न 4.
प्राप्त कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए।
जब
(i) 1 मोल कार्बन को वायु में जलाया जाता है और
(ii) 1 मोल कार्बन को 16 ग्राम ऑक्सीजन में जलाया जाता है।
हल:
(i) HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 2
अतः 1 मोल कार्बन को वायु में जलाने पर 44 g CO2 प्राप्त होगी ।

(ii) HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 3
32 g ऑक्सीजन को जलाने पर प्राप्त होता है।
= 44 g CO2
16 g ऑक्सीजन को जलाने पर प्राप्त होता है = \(\frac { 44×16 }{ 32 }\)
= 22 g CO2
अतः 16 ग्राम ऑक्सीजन का दहन कराने पर 22 g CO2 प्राप्त होगा।

प्रश्न 5.
सोडियम ऐसीटेट (CH3COONa) का 500ml, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82.O245 ग्राम / मोल है।
हल:
दिया गया है,
विलेय का भार (WB) = ?
विलयन का आयतन (V) = 500ml
मोलरता (M) = 0.375 mol/L
विलेय का आण्विक द्रव्यमान
(MB) = 82.0245 g/mol
M = \(\frac{W_B \times 1000}{M_B \times V}\)
WB = \(\frac{\mathrm{M} \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}}{1000}\)
= \(\frac{0.375 \times 82 \cdot 0245 \times 500}{1000}\)
= 15.38 g
विलेय का द्रव्यमान = 15.38 g

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 6.
सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श का मोल प्रति लीटर में सान्द्रता का परिकलन कीजिए, जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और जिसका घनत्व 1.41 g ml-1 हो।
हल:
दिया गया है,
द्रव्यमान प्रतिशत = 69%
घनत्व = 1.41 g/ml
विलेय (HNO3) का आण्विक द्रव्यमान = (हाइड्रोजन का परमाणु भार ) + ( नाइट्रोजन का परमाणु भार ) + (3 x ऑक्सीजन का परमाणु भार )
= 1 + 14 + 3 × 16
= 1 + 14 + 48
= 63 u
69% HNO3 का तात्पर्य है 69 g HNO3, 100 g उपस्थित है।
विलेय का भार (WB) = 69 g
विलायक का भार (WA) = 100 – 69 = 31 g
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 4

प्रश्न 7.
100 ग्राम, कॉपर सल्फेट (CuSO4) से कितना कॉपर प्राप्त किया जा सकता है?
हल:
कॉपर सल्फेट का आण्विक द्रव्यमान- = Cu का परमाणु भार + S का परमाणु भार + 4 × 0 का परमाणु भार
= 63.5+ 32+ 4 × 16
= 63.5+ 32+ 64
= 159.5 u
159.5 ग्राम CuSO4 देता है = 63.5 ग्राम Cu
100 ग्राम CuSO4 देता है = \(\frac { 63.5×100 }{ 159.5 }\)
= 39.81 ग्राम Cu
100 ग्राम CuSO4 से 39.81 ग्राम कॉपर प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.
आयरन के ऑक्साइड का आण्विक सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत 69.9g तथा 30.1g है।
हल:

तत्वप्रतिशततापरमाणु द्रव्यमानप्रतिशतता / परमाणु द्रव्यमानसरल अनुपातपूर्ण अनुपात
Fe69.956\(\frac { 69.9 }{ 56 }\) = 1.25\(\frac { 1.25 }{ 1.25 }\) = 1.01 x 2 = 2
O30.116\(\frac { 30.1 }{ 16 }\) = 1.88\(\frac { 1.88 }{ 1.25 }\) = 1.51.5 x 2 = 3

मूलानुपाती सूत्र = Fe2O3
आण्विक सूत्र = n x मूलानुपाती सूत्र
= 1 × Fe2O3
= Fe2O3

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर क्लोरीन के औसत परमाणु द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –
हल:
क्लोरीन का औसत परमाणु भार
= \(\frac{(75.77 \times 34.9689)+(24.23 \times 36.9659)}{75.77+24.23}\)
= \(\frac{2649 \cdot 5936+89568376}{100}\)
= \(\frac{3545 \cdot 2774}{100}\)
= 35.45 amu

प्रश्न 10.
ऐथेन (C2H6) के तीन मोलों में निम्नलिखित का परिकलन कीजिए-
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या।
हल:
(i) यहाँ 1 मोल एथेन (C2H6) में 2 मोल कार्बन परमाणु होते हैं। अत: 3 मोल एथेन में कार्बन के मोलों की संख्या
= 2 × 3 = 6 मोल

(ii) 1 मोल एथेन (C2H6) में 6 मोल हाइड्रोजन होते हैं । अतः 3 मोल एथेन में हाइड्रोजन के मोलों की संख्या
= 3 × 6 = 18 मोल

(iii) 1 मोल ऐथेन 6.022 x 1023 अणु ऐथेन होते हैं।
अत: 3 मोल एथेन में अणुओं की संख्या
= 3 × 6.022 x 1023
= 1·8069 × 1024 अणु

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 11.
यदि 20 ग्राम चीनी (C12H2O11) को जल की पर्याप्त मात्रा में घोलने पर उसका आयतन 2L हो जाए, तो चीनी के इस विलयन की सान्द्रता क्या होगी ?
हल:
विलेय का भार (WB) = 20 ग्राम
विलेय का अणु भार (C12H22O11)
= 12 × 12 + 1 × 22 + 11 × 16
= 144 +22 + 176
= 342 g/mol
आयतन (V) = 2000ml
मोलरता (M) = \(\frac{W_B \times 1000}{M_B \times V}\)
= \(\frac{20 \times 1000}{342 \times 2000}\)
= 0.029 मोल/लीटर

प्रश्न 12.
यदि मेथेनॉल का घनत्व 0.793 kg L-1 हो तो इसके 0.25 M के 2.5 L विलयन को बनाने के लिए कितने आयतन की आवश्यकता होगी?
हल:
विलेय का घनत्व (d) = 0.793 kg/L-1
मोलरता (M) = 0.25 M
आयतन (V) = 2.5 L
मेथेनॉल का आण्विक द्रव्यमान (MB) = CH3OH
= (कार्बन का परमाणु भार ) + (4 × हाइड्रोजन का परमाणु भार) + (ऑक्सीजन का परमाणु भार )
= 12 + 4 x 1 + 16
= 12+4+ 16
= 32 amu
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 5

प्रश्न 13.
दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। दाब का SI मात्रक नीचे दिया गया है-
1 Pa = 1 N/m²
यदि समुद्र तल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm-2 हो तो पास्कल में दाब का परिकलन कीजिए।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 6

प्रश्न 14.
द्रव्यमान का SI मात्रक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
हल:
द्रव्यमान का SI मात्रक किग्रा. है। यह अन्तर्राष्ट्रीय मानक किग्रा. के बराबर है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित पूर्व-लग्नों को उनके गुणांकों के साथ मिलाइए-

पूर्व लग्नगुणांक
(i) माइक्रो106
(ii) डेका109
(iii) मेगा10-6
(iv) गीगा10-15
(v) फेम्टो10

हल:
इसका सुमेल निम्न प्रकार है-

पूर्व लग्नगुणांक
(i) माइक्रो10-6
(ii) डेका10
(iii) मेगा106
(iv) गीगा109
(v) फेम्टो10-15

प्रश्न 16.
सार्थक अंकों से आप क्या समझते हैं?
हल:
सार्थक अंक (Significant Figure):
सार्थक अंक वे अर्थपूर्ण अंक होते हैं, जिनके द्वारा निश्चितता अंक को अंतिम अंक के रूप में लिखा जाता है। सार्थक अंक माप की विश्वसनीयता (reliability) सूचित करते हैं। किसी अभिलिखित माप में सार्थक अंकों की संख्या जितनी अधिक होती है उतना ही अधिक विश्वास (confidence) उस माप में हम रख सकते हैं।

अर्थात् जिस माप में सार्थक अंकों की संख्या जितनी अधिक होती है उसका मान उतना ही अधिक परिशुद्ध (Precise) होता है तथा जिस मान में सार्थक अंकों की संख्या कम होती है वह उतना ही कम परिशुद्ध (Precise) होता है।

सार्थक अंकों को निर्धारित करने के कुछ नियम होते हैं। यह नियम निम्न प्रकार हैं-
(1) सभी गैर शून्य अंक सार्थक होते हैं।
उदाहरण-
2856 = चार सार्थक अंक
5.35 = तीन सार्थक अंक

(2) प्रथम गैर शून्य अंक से पहले आने वाले शून्य सार्थक नहीं होते हैं। ऐसे शून्य केवल दशमलव की स्थिति को बताते हैं ।
उदाहरण-
0.03 = एक सार्थक अंक
0.0052 = दो सार्थक अंक

(3) दो गैर-शून्य अंकों के मध्य स्थित शून्य सार्थक होते हैं।
उदाहरण-
2.005 = चार सार्थक अंक
5.0032 = पाँच सार्थक अंक

(4) किसी अंक की दाँयीं ओर या अंत में आने वाले शून्यं सार्थक होते हैं, परन्तु उसके लिये यह शर्त है कि वे दशमलव की दाँयीं ओर स्थित हों।
उदाहरण-
0.300 तीन सार्थक अंक
0.8000 = चार सार्थक अंक
परन्तु दशमलव विहीन संख्याओं में दाँयीं ओर के शून्य सार्थक नहीं होते।
उदाहरण – 100 में केवल एक सार्थक अंक है तथा 1000 में चार सार्थक अंक हैं। अतः ऐसी संख्याओं को वैज्ञानिक संकेतन में प्रदर्शित करना उपयुक्त होता है अतः अंक 100 के लिए-
1 x 10² = एक सार्थक अंक
1.0 × 10² = दो सार्थक अंक
100 x 10² = तीन सार्थक अंक

(5) वस्तुओं की गिनती, उदाहरण के लिए 2 पेन्सिल, 20 सेबों में । सार्थक अंकों की संख्या अनंत है, क्योंकि ये दोनों ही यथार्थपरक संख्याएँ हैं और इनको दशमलव लिखकर उनके बाद अनंत शून्य लिखकर व्यक्त किया जा सकता है।
जैसे-
2 = 2.0000000 या
20 = 20.0000000

(6) वैज्ञानिक संकेतन में लिखी सभी संख्याओं के अंक सार्थक होते हैं।
उदाहरण – 4.01 x 10² = तीन सार्थक अंक
8.256 x 10-3 = चार सार्थक अंक

परिशुद्धता (Precision) – एक ही राशि के मान ज्ञात करने में उसी प्रयोग को बार-बार दोहराने (replicate) पर करीब-करीब एक से मान (concordancent value) प्राप्त हों तो इसे परिशुद्धता (Precision) कहते हैं ।

यथार्थता (Accuracy ) – किसी भी राशि की सही माप की तुलना मानक मान से करने को ही यथार्थता (Accuracy) कहते हैं।

किसी भी राशि का मान मापने के पश्चात् उसकी तुलना मानक मान से करने पर यदि दोनों के मान आपस में मेल खाते हैं, तो मान अधिक यथार्थ है।

उदाहरण के लिए-यदि किसी परिणाम का सही मान 2.00g है, और एक विद्यार्थी ‘क’ दो मापन करता है, उसे 1.95g और 1.93g परिणाम प्राप्त होते हैं। एक-दूसरे के बहुत पास होने के कारण ये मान परिशुद्ध हैं, परन्तु यथार्थपरक नहीं हैं। दूसरा विद्यार्थी ‘ख’ दो मापनों के लिए 1.94g और 2.05g परिणाम प्राप्त करता है। ये दोनों परिणाम न तो परिशुद्ध हैं और न ही यथार्थपरक । तीसरे विद्यार्थी ‘ग’ को इन मापनों के लिए 2.01g और 1.99g परिणाम प्राप्त होते हैं। ये मान परिशुद्ध भी है और यथार्थपरक भी ।

इसे निम्न सारणी द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।

सारणी 1.4 : आँकड़ों की परिशुद्धता और यथार्थता का निरूपण

मापन (में)
1 मान2 मानऔसत (g)
छात्र ‘क’1.951.931.940
छात्र ‘ख’1.942.051.995
छात्र ‘ग’2.011.992.000

प्रायोगिक या परिकलित मानों में अनिश्चितता को सार्थक अंकों की संख्या द्वारा व्यक्त किया जाता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 17.
पेय जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म, जो कैंसरजन्य है, से अत्यधिक संदूषित पाया गया। संदूषण का स्तर 15 ppm (द्रव्यमान के रूप में) था।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना
15 ppm से तात्पर्य है कि नमूने के 106 ग्राम में 15 ग्राम क्लोरोफॉर्म उपस्थित है।
विलेय का भार = 15 ग्राम
106 ग्राम नमूने में है = 15 ग्राम क्लोरोफॉर्म
100 ग्राम नमूने में है = \(\frac{15 \times 100}{10^6}\) = 15 x 10-4
अत: नमूने की द्रव्यमान प्रतिशतता = 15 x 10-4%

(ii) मोललता की गणना
विलेय क्लोरोफॉर्म का भार (WB) = 15 x 10-4 g
क्लोरोफॉर्म का अणुभार (MB)
= 12 + 1 + (3 x 35.-5)
= 119.5 g/mol
विलयन का द्रव्यमान = 100 g
विलायक का द्रव्यमान = 1000 – 0015
(WA) = 99.9985 g
मोललता (m) = \(\frac{W_B \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\)
= \(\frac{0.0015 \times 1000}{119.5 \times 99.9985}\)
= 1.25 × 10-4 मोल/ किग्रा.
= 1.25 × 10-4 mol/kg

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को वैज्ञानिक संकेतन में लिखिए-
(i) 0.0048
(ii) 234,000
(iii) 8008
(iv) 500.0
(v) 6.0012
हल:
वैज्ञानिक संकेतन
(i) 0.0048 = 4.8 x 10-3
(ii) 234,000 = 2.34 × 105
(iii) 8008 = 8.008 × 103
(iv) 500.0 = 5.000 × 10²
(v) 6.0012 = 6.0012 × 100

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में सार्थक अंकों की संख्या बताइए-
(i) 0.0025
(ii) 208
(iii) 5005
(iv) 126,000
(v) 500.0
(vi) 2.0034
हल:
सार्थक अंक
(i) 0.0025 = 2
(ii) 208 = 3
(iii) 5005 = 4
(iv) 126,000 = 6
(v) 500.0 = 3
(vi) 2.0034 = 5

प्रश्न 20.
निम्न का तीन सार्थक अंकों तक निकटतम मान ज्ञार कीजिए।
(i) 34.216
(ii) 10.4107
(iii) 0.04597
(iv) 2808
हल:
(i) 34.216 = 34.2
(ii) 10.4107 = 10.4
(iii) 0.04597 = 0.0460
(iv) 2808 = 2810

प्रश्न 21.
(क) जब डाईनाइट्रोजन और डाईऑक्सीजन आपस में अभिक्रिया करके भिन्न यौगिक बनाती हैं तो निम्न आँकड़े प्राप्त होते हैं –

डाईनाइट्रोजन का द्रव्यमानडाईऑक्सीजन का द्रव्यमान
(i) 14 ग्राम16 ग्राम
(ii) 14 ग्राम32 ग्राम
(iii) 28 ग्राम32 ग्राम
(iv) 28 ग्राम80 ग्राम

उपर्युक्त प्रायोगिक आँकड़ों से रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप है, बताइए।
हल:
डाईनाइट्रोजन का नियत द्रव्यमान 14 ग्राम लेने पर, डाइनाइट्रोजन के 14 ग्राम से संयोजित होने वाले डाइऑक्सीजन का (द्रव्यमानानुसार) अनुपात है –
16 : 32 : 16 : 40 या 2 : 4 : 2 : 5
चूँकि अनुपात एक सरल पूर्ण संख्याएँ हैं, अतः ये आँकड़े गुणित अनुपात के नियम का पालन करते हैं।
गुणित अनुपात का नियम – यह नियम डाल्टन ने सन् 1803 में दिया था।
इसके अनुसार,
“यदि दो तत्व संयोग करके एक से अधिक यौगिक बनाते हैं तो एक तत्व के साथ दूसरे तत्व के संयुक्त होने वाले द्रव्यमान सरल पूर्णांकों के अनुपात में होते हैं।”

(ख) निम्न रूपान्तरणों (Conversions) में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(i) 1 km = – mm = – pm
(ii) 1 mg = – kg = – ng
(iii) 1 mL = – L = – dm³
हल:
(i) 1 km = (1 km ) x \(\frac{(1000 \mathrm{~m})}{(1 \mathrm{~km})}\)
= (10³ m) x \(\frac{\left(10^3 \mathrm{~mm}\right)}{(1 \mathrm{~m})}\)
= 106 mm
1 km = (1 km ) x \(\frac{(1000 \mathrm{~m})}{(1 \mathrm{~km})}\)
= (10³ m) x \(\frac{\left(10^{12} \mathrm{pm}\right)}{(1 \mathrm{~m})}\)
= 1015 pm
अतः 1 km = 106 mm = 1015 pm

(ii) 1 mg = (1 mg) x \(\frac{\left(10^{-6} \mathrm{~kg}\right)}{(1 \mathrm{mg})}\)
= 10-6 kg
1 mg = (1 mg) x \(\frac{\left(10^{6} \mathrm{~kg}\right)}{(1 \mathrm{mg})}\)
= 10-6 kg
अतः 1 mg = 10-6 kg = 106 ng

(iii) 1 mL = (1 mL) × \(\frac{\left(10^{-3} \mathrm{~L}\right)}{(1 \mathrm{~mL})}\)
= 10-3 L
1 mL = (1 mL ) x \(\frac{\left(10^{-3} \mathrm{dm}^3\right)}{(1 \mathrm{~mL})}\)
= 10-3 dm³
अतः, 1 mL = 10-3 L = 10-3 dm³.

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प्रश्न 22.
यदि प्रकाश का वेग 300 x 108 m/s1 हो, तो 2.00ns में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा?
हल:
प्रकाश द्वारा 1 सेकेण्ड में तय दूरी
= 3.0 × 108 m
अर्थात् चाल = 3 x 108 m/s
समय = 2.00ns
= 2.0 × 10-9 s
चाल = \(\frac { दूरी }{ समय }\)
दूरी = चाल x समय
= 3 x 108 × 2 × 10-9
= 0.6m

प्रश्न 23.
किसी अभिक्रिया A + B → AB में निम्नलिखित अभिक्रिया मिश्रणों में सीमांत अभिकर्मकों, यदि कोई हो, तो ज्ञात कीजिए।
(i) A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
(ii) A के 2 मोल + B के 3 मोल
(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
(iv) A के 5 मोल + B के 2.5 मोल
(v) A के 2.5 मोल + B के 5 मोल
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 7
(i) प्रश्न के अनुसार, A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
A के 1 परमाणु के साथ अभिक्रिया करने वाले B अणुओं की संख्या = 1
A के 300 परमाणु के साथ अभिक्रिया करने वाले B अणुओं की संख्या = 300
किन्तु B के वस्तुतः उपलब्ध अणुओं की संख्या = 200
अतः यहाँ B सीमान्त अभिकर्मक है।

(ii) 2 मोल A + B के 3 मोल B
A परमाणु के 1 मोल B के 1 मोल अणु के साथ अभिक्रिया करते A के 2 मोल परमाणु B2 के 2 मोल अणुओं के साथ ही क्रिया करेंगे। अतः यहाँ A सीमान्त अभिकर्मक है।

(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
चूँकि A का 1 परमाणु B के 1 अणु के साथ अभिक्रिया करता है, अतः A के 100 परमाणु B के 100 अणु के साथ अभिक्रिया करेगा। इसलिए यहाँ पर कोई भी सीमान्त अभिकर्मक नहीं है।

(iv) A के 5 मोल तथा B के 2.5 मोल
चूँकि A का 1 परमाणु B के 1 अणु के साथ अभिक्रिया करता है, अत: 5 मोल A परमाणुओं के लिए 5 मोल B के अणुओं की आवश्यकता होगी। परन्तु B के केवल 2.5 मोल ही उपलब्ध है अत: यहाँ B सीमान्त अभिकर्मक है।

(v) A के 2.5 मोल + B के 5 मोल
A परमाणु के 1 मोल B के 1 मोल अणु के साथ अभिक्रिया करते हैं तो A के 2.5 मोल परमाणु B के 2.5 मोल अणु के साथ अभिक्रिया करेगा परन्तु यहाँ B के 5 मोल अणु उपलब्ध हैं। अतः यहाँ A सीमान्त अभिकर्मक हैं।

प्रश्न 24.
डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाती हैं –
N2 (g) + 3H2(g) → 2NH3 (g)
(i) यदि 2.00 × 10³ g डाइनाइट्रोजन 100 x 10³ g डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती है, तो प्राप्त अमोनिया के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिक्रियक शेष बचेगा ?
(iii) यदि हाँ, तो कौन.सा, उसका द्रव्यमान क्या होगा ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 8
28 g N2 को अभिक्रिया के लिये आवश्यकता है
= 6 g H2 की
2 × 10³ g N2 को अभिक्रिया के लिये आवश्यकता है
= \(\frac{6 \times 2 \times 10^3}{28}\)
= 428.6 g H2 की

(ii) किन्तु उपलब्ध हाइड्रोजन की मात्रा = 1 x 10³ g
= 1000 g
अर्थात् हाइड्रोजन अधिकता में है एवं हाइड्रोजन की शेष मात्रा
= 1000.428.6
= 571.4g H2

(iii) यहाँ डाइनाइट्रोजन सीमान्त अभिकर्मक है।
28 g N2 अभिक्रिया करके बनाती है = 34 g NH3
2000 g N2 अभिक्रिया करके बनाती है
= \(\frac{34 \times 2000}{28}\)
= 2428.6g NH3
अर्थात् 2428.6g NH3 बनेगी।

प्रश्न 25.
0.5 mol Na2CO3 और 0.50 M Na2CO3 में क्या अन्तर है?
हल:
Na2CO3 के मोलर द्रव्यमान
= 2 × 23 + 12 + 3 × 16
= 106 g/mol
0.5 मोल Na2CO3 = 0.50 × 106 = 53 g
जबकि 0.50 M Na2CO3 विलयन की मोलरता है। यह Na2CO3 की सान्द्रता को मोल/ली. में व्यक्त करती है। 0.5 mol Na2CO3 को विलयन में घोला गया है।

प्रश्न 26.
यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइऑक्सीजन गैस के 5 आयतनों से अभिक्रिया करें तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 9
अतः 10 आयतन डाइहाइड्रोजन 5 आयतन डाइऑक्सीजन से क्रिया करके 10 आयतन जलवाष्प प्रदान करता है।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को मूल मात्रकों में परिवर्तित कीजिए –
(i) 28.7pm
(ii) 15.15pm
(iii) 25365mg
हल:
(i) 28.7pm = 2.87 × 10-11 m

(ii) 15.15 pm = 15.15 × 10-12
= 1.515 × 10-11 m

(iii) 25365 mg = 2.5365 × 10-2 kg

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी?
(i) 1g Au (s)
(ii) 1g Na (s)
(iii) 1 g Li (s)
(iv) 1g Cl2 (g)
हल:
(i) 1 g Au में (Au का परमाणु द्रव्यमान = 197g/mol)
197 g Au में उपस्थित परमाणु = 6·022 × 1023
1g Au में उपस्थित परमाणु =\(\frac{6022 \times 10^{23}}{197}\)
= 3.06 × 1021 परमाणु

(ii) 1g Na में (Na का परमाणु भार = 23 g/mol)
23 g Na में उपस्थित परमाणु = 6.022 x 1023
1 g Na में उपस्थित परमाणु =\(\frac{6022 \times 10^{23}}{23}\)
= 2.62 × 1022 परमाणु

(iii) 1 g Li में (Li का परमाणु भार = 6.9g/mol)
6.9 g Li में उपस्थित परमाणु = 6.022 × 1023
1 g Li में उपस्थित परमाणु =\(\frac{6022 \times 10^{23} \times 11}{6.9}\)
= 8.73 × 1022 परमाणु

(iv) 1 g Cl2 में (Cl का परमाणु भार = 35.5 g/mol)
71 g Cl2 में उपस्थित परमाणु = 2 x 6.022 × 1023
1 g Cl2 में उपस्थित परमाणु =\(\frac{2 \times 6022 \times 10^{23}}{71}\)
= 1.697 × 1022 परमाणु
अत: 1 g Li में सबसे अधिक परमाणु होंगे।

प्रश्न 29.
ऐथेनॉल के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए। जिसमें ऐथेनॉल का मोल. अंश 0.040 है। (मान लें कि जल का घनत्व 1 है ।)
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 10
अत: ऐथेनॉल की मोलरता = 2.31 मोल / लीटर है।

प्रश्न 30.
एक 12C कार्बन परमाणु का ग्राम (g) में द्रव्यमान का क्या होगा ?
हल:
कार्बन के 6.022 × 1023 परमाणुओं का द्रव्यमान = 12 g
कार्बन के 1 परमाणु का द्रव्यमान = \(\frac{12}{6.022 \times 20^{23}}\)
= 1.993 × 10-23g
अत: एक 12C कार्बन परमाणु का द्रव्यमान 1993 × 10-23g है।

प्रश्न 31.
निम्नलिखित परिकलनों के उत्तर में कितने सार्थक अंक उपस्थित होने चाहिये ?
(i) \(\frac{002856 \times 298.15 \times 0.112}{0.5785}\)
(ii) 5 × 5.364
(iii) 0.0125 +0.7864+0.0215
हल:
(i) न्यूनतम परिशुद्ध अंक (0.112) में 3 सार्थक अंक है। अतः उत्तर में तीन सार्थक अंक होने चाहिये।
(ii) दूसरे अंक (5.364) में चार सार्थक अंक हैं। अत: उत्तर में चार सार्थक अंक होने चाहिये।
(iii) चूँकि दशमलव के बाद चार अंक हैं अत: उत्तर में भी चार सार्थक अंक होने चाहिये।

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प्रश्न 32.
प्रकृति में उपलब्ध आर्गन के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए-

समस्थानिकसमस्थानिक (मोलर द्रव्यमान)प्रचुरता
36Ar35.967550.337 %
38Ar37.962720.063 %
40Ar39.962499.600 %

हल:
आर्गन का औसत मोलर द्रव्यमान निम्न प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है,
औसत मोलर द्रव्यमान
= \(\begin{aligned}
& (0.337 \times 35.96755)+(0.063 \times 37.96272) \\
& \frac{+(99.600 \times 39.9624)}{99.600+0.337+0.063} \\
&
\end{aligned}\)
= \(\frac{12 \cdot 121064+2 \cdot 3916514+3980 \cdot 255}{100}\)
= 3994.7678/100
= 39.94 g/mol

प्रश्न 33.
निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए –
(i) 52 मोल Ar
(ii) 52 u He
(iii) 52g He
हल:
(i) 1 मोल Ar = 6.022 × 1023 परमाणु
52 मोल Ar = 52 × 6.022 x 1023 परमाणु
= 3.13 × 1025 परमाणु

(ii) 4 u He = 1 परमाणु
52u He = \(\frac { 52 }{ 4 }\) परमाणु
= 13 परमाणु He

(iii) He का परमाणु द्रव्यमान = 4gm
4 ग्राम He = 6.022 × 1023 परमाणु
52 ग्राम He = \(\frac{6 \cdot 022 \times 10^{23} \times 52}{4}\) परमाणु
= 78.286 × 1023 परमाणु
= 7.83 x 1024 परमाणु

प्रश्न 34.
एक वेल्डिंग ईंधन गैस (Welding fuel gas) में केवल कार्बन और हाइड्रोजन है। इसके नमूने की कुछ मात्रा ऑक्सीजन से जलाने पर 3.38g कार्बन डाईऑक्साइड, 0.690g जल के अतिरिक्त और कोई उत्पाद नहीं बनाती है। इस गैस के 10.0L (STP पर मापित) आयतन का भार 11.6 gm पाया गया। इसके –
(i) मूलानुपाती सूत्र,
(ii) अणु द्रव्यमान और
(iii) अणुसूत्र की गणना कीजिए।
हल:
प्रथम पद कार्बन व हाइड्रोजन की द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना करना
44 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड में है = 12 g कार्बन
3.38 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड में होगा = \(\frac{12 \times 3.38}{44}\)
18 ग्राम जल में है = 2 g हाइड्रोजन
0.690 ग्राम जल में होगी = \(\frac{2 \times 0.690}{18}\)ग्राम हाइड्रोजन
= 0.0766 ग्राम हाइड्रोजन
अतः ईंधन का कुल द्रव्यमान = 0.9218 + 0.0766
= 0.9984 g
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द्वितीय पद-ईंधन गैस का मूलानुपाती सूत्र
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 12
अतः ईंधन गैस का मूलानुपाती सूत्र = CH
तृतीय पद-ईंधन गैस का आण्विक द्रव्यमान
10 लीटर गैस का N.T.P पर भार= 11.6 g
22.4 लीटर गैस का N. T. P. पर भार = \(\frac { 11.6 }{ 10.0 }\) x 22.4
= 25.98 g
अतः ईंधन गैस का आण्विक द्रव्यमान = 25.98 ≈ 26.0g
चतुर्थ पद-गैस के आण्विक सूत्र की गणना
मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = 12 + 1 = 13 g
आण्विक द्रव्यमान = 26g
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 13
आण्विक सूत्र = n x मूलानुपाती सूत्र
= 2 × CH = C2H2
ईंधन गैस का आण्विक सूत्र C2H2 है एवं यह गैस ऐसिटिलीन

प्रश्न 35.
CaCO3 जलीय HCl के साथ निम्नलिखित अभिक्रिया कर CaCl2 और CO2 बनाता है।
CaCO3(s) + 2HCl(g) → CaCl2 (aq) + CO2 (g) + H2O(l)
0.75M HCl के 25ml के साथ पूर्णत: अभिक्रिया करने के लिये CaCO3 की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
हल:
(i) HCl के द्रव्यमान की गणना करना दिया गया है –
मोलरता (M) = 0.75M
मोलर द्रव्यमान (MB) = 1 + 35.5 = 36.5 g
आयतन (V) = 25ml
द्रव्यमान (WB) = ?
मोलरता (M) = \(\frac{W_B \times 1000}{M_B \times V}\)
WB = \(\frac{\mathrm{M} \times \mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}}{1000}=\frac{0.75 \times 36.5 \times 25}{1000}\)
= 0.684g

(ii) CaCO3 के द्रव्यमान की गणना
CaCO3 (s) + 2 HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)
1 मोल = 2ml
100gm = 2 × 36.5 = 73g
73 g HCl से अभिक्रिया करने के लिये आवश्यक है
= 100 g CaCO3
0.684 g HCl से अभिक्रिया के लिये आवश्यक होगा
= \(\frac{100 \times 0.684}{73}\)
= 0.94g
अत: 0.94g CaCP3 की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 36.
प्रयोगशाला में क्लोरीन का विरचन मैग्नीज डाइऑक्साइड (MnO2) को जलीय HCI विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित समीकरण के अनुसार किया जाता है-
4 HCl(aq) + MnO2 (s) 2H2O(l) + MnCl2 (aq) + Cl2 (g) 5.0g मैंग्नीज डाइऑक्साइड के साथ HCI के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?
हल:
दी गई अभिक्रिया के अनुसार,
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 14
87 ग्राम MnO2 से अभिक्रिया करने वाला HCl = 146 g
5 ग्राम MnO2 से अभिक्रिया करने वाला HCl = \(\frac { 146×5 }{ 87 }\)
= 8.39 g

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HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Exercise 13.2

प्रश्न 1.
एक ठोस एक अर्धगोले पर खड़े एक शंकु के आकार का है जिनकी त्रिज्याएँ 1 cm हैं तथा शंकु की ऊँचाई उसकी त्रिज्या के बराबर है। इस ठोस का आयतन π के पदों में ज्ञात कीजिए।
हल :
यहाँ पर,
दिए गए ठोस के अर्धगोलाकार भाग की त्रिज्या (r) = 1 cm
दिए गए ठोस के शंक्वाकार भाग की त्रिज्या (r) = 1 cm
दिए गए ठोस के शंक्वाकार भाग की ऊँचाई (h) = 1 cm
अतः दिए गए ठोस का आयतन = (अर्धगोलाकार भाग + शंक्वाकार भाग) का आयतन
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प्रश्न 2.
एक इंजीनियरिंग के विद्यार्थी रचेल से एक पतली एल्यूमीनियम की शीट का प्रयोग करते हुए एक मॉडल बनाने को कहा गया जो एक ऐसे बेलन के आकार का हो जिसके दोनों सिरों पर दो शंकु जुड़े हुए हों। इस मॉडल का व्यास 3 cm है और इसकी लंबाई 12 cm है। यदि प्रत्येक शंकु की ऊँचाई 2 cm हो तो रचेल द्वारा बनाए बए मॉडल में अंतर्विष्ट हवा का आयतन ज्ञात कीजिए। (यह मान लीजिए कि मॉडल की आंतरिक और बाहरी विमाएँ लगभग बराबर हैं।)
हल :
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 4
यहाँ पर,
मॉडल के बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r1) = \(\frac{3}{2}\) cm
k-3 cm मॉडल के बेलनाकार भाग की ऊँचाई (h1) (12-2 x 2) cm
= 8 cm
मॉडल के प्रत्येक शंक्वाकार भाग की त्रिज्या (r2) = \(\frac{3}{2}\) cm
मॉडल के प्रत्येक शंक्वाकार भाग की ऊँचाई (h2) = 2 cm
मॉडल में अंतर्विष्ट हवा का आयतन = (बेलनाकार भाग + दोनों शंक्वाकार भागों) का आयतन
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 5

प्रश्न 3.
एक गुलाबजामुन में उसके आयतन की लगभग 30% चीनी की चाशनी होती है। 45 गुलाबजामुनों में लगभग कितनी चाशनी होगी, यदि प्रत्येक गुलाबजामुन एक बेलन के आकार का है, जिसके दोनों सिरे अर्धगोलाकार हैं तथा इसकी लंबाई 5 cm और व्यास 2.8 cm है (देखिए संलग्न आकृति)।
हल :
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 6
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 7
यहाँ पर,
गुलाबजामुन के बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r1) = \(\frac{2.8}{2}\) = 1.4 cm
गुलाबजामुन के बेलनाकार भाग की ऊँचाई (h1) = (5 – 1.4 x 2) cm
= 2.2 cm
गुलाबजामुन के प्रत्येक अर्धगोलाकार भाग की त्रिज्या (r2) = \(\frac{2.8}{2}\) cm = 1.4 cm अतः 1 गुलाबजामुन का आयतन = (बेलनाकार भाग + दोनों शंक्वाकार भागों) का आयतन
= πr12h1 + 2(\(\frac{2}{3}\)πr22)
= [ \(\frac{22}{7}\) x 1.4 x 1.4 x 2.2 + \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}m\) x 1.4 x 1.4 x 1.4] cm3
= [13.552 + 11.499]cm3 = 25.051 cm3
45 गुलाबजामुनों का आयतन = 45 x 25.051 cm3
= 1127.295 cm3 = 1127 cm3
अतः 45 गुलाबजामुनों में चीनी की चाशनी की मात्रा = \(\frac{1127 \times 30}{100}\) cm3
= 338.1 cm3 = 338 cm3

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प्रश्न 4.
एक कलमदान घनाभ के आकार की एक लकड़ी से बना है जिसमें कलम रखने के लिए चार शंक्वाकार गड्ढे बने हुए हैं। घनाभ की विमाएँ 15 cm x 10 cm x 3.5 cm हैं। प्रत्येक गड्ढे की त्रिज्या 0.5 cm है और गहराई 1.4 cm है। पूरे कलमदान में लकड़ी का आयतन ज्ञात कीजिए (देखिए संलग्न आकृति)।
हल :
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 8
यहाँ पर,
घनाभाकार लकड़ी का कुल आयतन = (15 x 10 x 3.5) cm3
= 525 cm3
कलमदान के प्रत्येक शंक्वाकार गड्ढे की त्रिज्या (r) = 0.5 cm
कलमदान के प्रत्येक शंक्वाकार गड्ढे की गहराई (h) = 1.4 cm
कलमदान के चारों शंक्वाकार गड्ढों का आयतन = 4(\(\frac{1}{3}\) πr²h)
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) x 0.5 x 0.5 x 1.4 cm3
= 1.47 cm3
अतः कलमदान की लकड़ी का आयतन = (घनाभाकार लकड़ी – शंक्वाकार गड्ढों ) का आयतन
= (525 – 1.47) cm3
= 523.53 cm

प्रश्न 5.
एक बर्तन एक उल्टे शंकु के आकार का है। इसकी ऊँचाई 8 cm है और इसके ऊपरी सिरे (जो खुला हुआ है) की त्रिज्या 5 cm है। यह ऊपर तक पानी से भरा हुआ है। जब इस बर्तन में सीसे की कुछ गोलियाँ जिनमें प्रत्येक 0.5 cm त्रिज्या वाला एक गोला है, डाली जाती हैं, तो इसमें से भरे हुए पानी का एक चौथाई भाग बाहर निकल जाता है। बर्तन में डाली गई सीसे की गोलियों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल :
यहाँ पर,
शंकु के आकार के बर्तन की त्रिज्या (r1) = 5 cm
शंकु के आकार के बर्तन की ऊँचाई (h) = 8 cm
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 9
बर्तन में डाली गई प्रत्येक सीसे की गोली की त्रिज्या (r2) = 0.5 cm
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 10

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2

प्रश्न 6.
ऊँचाई 220 cm और आधार व्यास 24 cm वाले एक बेलन, जिस पर ऊँचाई 60 cm और त्रिज्या 8 cm वाला एक अन्य बेलन आरोपित है, से लोहे का एक स्तंभ बना है। इस स्तंभ का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए, जबकि दिया है 1 cm’ लोहे का द्रव्यमान लगभग 8g होता है। (π = 3.14 लीजिए।)
हल :
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 11
यहाँ पर,
बड़े बेलन का व्यास = 24 cm
बड़े बेलन की त्रिज्या (R) = \(\frac{24}{2}\) cm = 12 cm
बड़े बेलन की ऊँचाई (H) = 220 cm
बड़े बेलन का आयतन (V1) = πR2H
= 3.14 x 12 x 12 x 220 cm3
= 99475.2 cm2
छोटे बेलन की त्रिज्या (r) = 8 cm
छोटे बेलन की ऊँचाई (h) = 60 cm
छोटे बेलन का आयतन (V2) = πr2h
= 3.14 x 8×8 x 60 cms
= 12057.6 cm स्तंभ में लगे कुल लोहे का आयतन = V1 + V2
= (99475.2 + 12057.6) cm3
= 111532.8 cm3
1 cm3 लोहे का द्रव्यमान = 8g
111532.8 cm लोहे का द्रव्यमान = 111532.8 x 8 g
= [laex]\frac{111532.8 \times 8}{1000}[/latex] kg
= 892.26 kg

प्रश्न 7.
एक ठोस में, ऊँचाई 120 cm और त्रिज्या 60 cm वाला एक शंकु सम्मिलित है, जो 60 cm त्रिज्या वाले एक अर्धगोले पर आरोपित है। इस ठोस को पानी से भरे हुए एक लंब वृत्तीय बेलन में इस प्रकार सीधा डाल दिया जाता है कि यह बेलन की तली को स्पर्श करे। यदि बेलन की त्रिज्या 60 cm है और ऊँचाई 180 cm है तो बेलन में शेष बचे पानी का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 12
यहाँ पर,
लंब वृत्तीय बेलनाकार बर्तन की त्रिज्या (R) = 60 cm
लंब वृत्तीय बेलनाकार बर्तन की ऊँचाई (H) = 180 cm
लंब वृत्तीय बेलनाकार बर्तन का आयतन (V1) = πR2H
= \(\frac{22}{7}\) x 60 x 60 x 180cm3
= 2036571.40 cm3
ठोस के शंक्वाकार भाग की त्रिज्या (r) = अर्धगोलाकार भाग की त्रिज्या
(r) = 60 cm
ठोस के शंक्वाकार भाग की ऊँचाई (h) = 120 cm
ठोस का आयतन (V2) = (शंक्वाकार भाग + अर्धगोलाकार भाग) का आयतन
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2 13
अतः बेलनाकार बर्तन में शेष बचे पानी का आयतन = V1 – V2
= (2036571.40-905142.85) cm3
= 1131428.55 cm3
= 1.131m3 (लगभग)

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन Ex 13.2

प्रश्न 8.
एक गोलाकार काँच के बर्तन की एक बेलन के आकार की गर्दन है जिसकी लंबाई 8 cm है और व्यास 2 cm है जबकि गोलाकार भाग का व्यास 8.5 cm है। इसमें भरे जा सकने वाली पानी की मात्रा माप कर, एक बच्चे ने यह ज्ञात किया कि इस बर्तन का आयतन 345 cm है। जाँच कीजिए कि उस बच्चे का उत्तर सही है या नहीं, यह मानते हुए कि उपरोक्त मापन आंतरिक मापन है और π = 3.14
हल :
यहाँ पर,
बर्तन के बेलनाकार भाग का व्यास (d1) = 2 cm
बर्तन के बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r1) = \(\frac{2}{2}\) cm = 1 cm
बर्तन के बेलनाकार भाग की ऊँचाई (h) = 8 cm
बर्तन के बेलनाकार भाग का आयतन (V1) = πr12h
= 3.14 x 1 x 1 x 8 cm3
= 25.12 cm
बर्तन के गोलाकार भाग का व्यास (d2) = 8.5 cm
बर्तन के गोलाकार भाग की त्रिज्या (r2) = \(\frac{8.5}{2}\) cm = 4.25 cm
बर्तन के गोलाकार भाग का आयतन (V2) = \(\frac{4}{3} \pi r_{2}^{3}\)
= \(\frac{4}{3}\) x 3.14 x 4.25 x 4.25 x 4.25 cm3
= 321.39 cm 3
बर्तन में भरे जा सकने वाले पानी का कुल आयतन = V1 + V2
= [25.12 + 321.39] cm3
= 346.51 cm3
अतः बच्चे का उत्तर 345 cm3 सही नहीं है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. सबसे कम परिवर्तनशील अनुपात किस जनसंख्या वर्ग का होता है?
(A) बाल वर्ग का
(B) प्रौढ़ वर्ग का
(C) वृद्ध वर्ग का
(D) युवा वर्ग का
उत्तर:
(C) वृद्ध वर्ग का

2. आयु और लिंग पिरामिड से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
(A) आयु संरचना
(B) लिंग संरचना
(C) आयु और लिंग संरचना
(D) लिंग अनुपात
उत्तर:
(C) आयु और लिंग संरचना

3. आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उत्पादक आयु वर्ग कौन-सा है?
(A) बाल वर्ग
(B) प्रौढ़ वर्ग
(C) वृद्ध वर्ग
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) वृद्ध वर्ग

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

4. बौद्धिकतापूर्ण व्यवसाय किस वर्ग में आते हैं?
(A) प्राथमिक व्यवसाय
(B) द्वितीयक व्यवसाय
(C) तृतीयक व्यवसाय
(D) चतुर्थक व्यवसाय
उत्तर:
(C) तृतीयक व्यवसाय

5. विश्व का सर्वाधिक नगरीकृत महाद्वीप कौन-सा है?
(A) यूरोप
(B) एशिया
(C) ऑस्ट्रेलिया
(D) उत्तरी अमेरिका
उत्तर:
(C) ऑस्ट्रेलिया

6. लिंगानुपात = HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन 2
(A) कुल जनसंख्या
(B) मृत्यु-दर
(C) जन्म-दर
(D) स्त्रियों की जनसंख्या
उत्तर:
(D) स्त्रियों की जनसंख्या

7. चौड़ा आधार तथा पतला होता शीर्ष आकृति वाला पिरामिड क्या दर्शाता है?
(A) स्थिर जनसंख्या
(B) विकासशील जनसंख्या
(C) घटती जनसंख्या
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(D) कोई नहीं

8. बच्चे, वृद्ध, सेवानिवृत्त व्यक्ति, गृहणियां तथा विद्यार्थियों को जनसंख्या के किस वर्ग में रखा गया है?
(A) सक्रिय जनसंख्या
(B) नगरीय जनसंख्या
(C) पराश्रित जनसंख्या
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(C) पराश्रित जनसंख्या

9. निम्नलिखित में कौन-सा घटक जनसंख्या के संघटन को प्रदर्शित नहीं करता-
(A) आयु
(B) लिंग
(C) साक्षरता
(D) प्रजननशीलता
उत्तर:
(D) प्रजननशीलता

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10. एशिया का कौन-सा देश उच्च मानव विकास की श्रेणी में है?
(A) जापान
(B) भारत
(C) श्रीलंका
(D) चीन
उत्तर:
(A) जापान

11. 1951 में भारत की साक्षरता दर कितनी थी?
(A) 16%
(B) 17%
(C) 18%
(D) 19%
उत्तर:
(C) 18%

12. जनसंख्या की आयु संरचना का अर्थ है-
(A) विभिन्न आयु वर्ग के लिंग अनुपात की जनसंख्या
(B) आयु और लिंग अनुपात का विवरण
(C) विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या
(D) 60 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों की संख्या
उत्तर:
(C) विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या

13. ऋणात्मक वार्षिक जनसंख्या वृद्धि-दर दिखलाने वाला देश कौन-सा है?
(A) बेल्जियम
(B) इंग्लैंड
(C) रूस
(D) अमेरिका
उत्तर:
(C) रूस

14. जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना सबसे अच्छी प्रदर्शित होती है-
(A) सममान रेखा द्वारा
(B) वृत्त आरेख द्वारा
(C) छाया आरेख द्वारा
(D) पिरामिड आरेख द्वारा
उत्तर:
(D) पिरामिड आरेख द्वारा

15. जनांकिकीय संक्रमण की दूसरी अवस्था में कौन-सा देश है?
(A) चिली
(B) कनाडा
(C) फ्रांस
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(D) अफ्रीका

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

16. जनांकिकीय संक्रमण की तीसरी अवस्था में कौन-सा देश है?
(A) चिली
(B) कनाडा
(C) फ्रांस
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(A) चिली

17. जनांकिकीय संक्रमण की चौथी अवस्था में कौन-सा देश है?
(A) चिली
(B) कनाडा
(C) फ्रांस
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(B) कनाडा

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
कृषि अथवा प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न जनसंख्या को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या।

प्रश्न 2.
चौड़ा आधार तथा पतला होता शीर्ष आकृति वाला पिरामिड क्या दर्शाता है?
उत्तर:
विकासशील जनसंख्या को।

प्रश्न 3.
गैर-कृषि कार्यों में संलग्न जनसंख्या को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या।

प्रश्न 4.
वर्ष 1951 में भारत की साक्षरता दर कितने प्रतिशत थी?
उत्तर:
18 प्रतिशत।

प्रश्न 5.
ऋणात्मक वार्षिक जनसंख्या वृद्धि-दर दिखलाने वाला देश कौन-सा है?
उत्तर:
रूस।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 6.
सबसे कम परिवर्तनशील अनुपात किस जनसंख्या वर्ग का होता है?
उत्तर:
वृद्ध वर्ग।

प्रश्न 7.
बच्चे, वृद्ध, सेवानिवृत्त व्यक्ति, गृहणियाँ तथा विद्यार्थियों को जनसंख्या के किस वर्ग में रखा गया है?
उत्तर:
पराश्रित जनसंख्या वर्ग।

प्रश्न 8.
किसी जनसंख्या के आयु-लिंग पिरामिड का आधार संकीर्ण है, तो उस जनसंख्या की वृद्धि-दर कितनी होगी?
उत्तर:
कम जनसंख्या वृद्धि-दर।

प्रश्न 9.
किसी जनसंख्या में उच्च जन्म-दर होने पर आयु-लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
त्रिभुज के आकार का।

प्रश्न 10.
किसी जनसंख्या में जन्म-दर व मृत्यु-दर समान होने पर आयु-लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
घण्टी के आकार का।

प्रश्न 11.
जनांकिकीय संक्रमण की तीसरी अवस्था में शामिल कोई एक देश बताएँ।
उत्तर:
चिली।

प्रश्न 12.
प्रति सौ व्यक्तियों के अनुपात में साक्षर व्यक्तियों की संख्या क्या कहलाती है?
उत्तर:
साक्षरता दर।

प्रश्न 13.
विस्तृत जनसंख्या पिरामिड किस आकार का होता है?
उत्तर:
चौड़े आकार का।

प्रश्न 14.
ऑस्ट्रेलिया का जनसंख्या पिरामिड किस प्रकार का है?
उत्तर:
विस्तृत प्रकार का।

प्रश्न 15.
कार्यशील जनसंख्या का आयु वर्ग कौन-सा है?
उत्तर:
15 से 59 वर्ष।

प्रश्न 16.
किसी जनसंख्या के आयु लिंग पिरामिड का आधार संकीर्ण है, तो उस जनसंख्या की वृद्धि दर कितनी होगी?
उत्तर:
ह्रासमान जनसंख्या।

प्रश्न 17.
किसी जनसंख्या में उच्च जन्म-दर होने पर आयु लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
विस्तारित होती जनसंख्या।

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प्रश्न 18.
किसी जनसंख्या में जन्म-दर व मृत्यु-दर समान होने पर आयु लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
स्थिर जनसंख्या।

प्रश्न 19.
आयु और लिंग पिरामिड से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर:
आयु और लिंग संरचना।

प्रश्न 20.
आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उत्पादक आयु वर्ग कौन-सा है?
उत्तर:
प्रौढ़ वर्ग।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आयु संरचना को प्रभावित करने वाले तीन कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर:
आयु संरचना को प्रभावित करने वाले तीन कारक निम्नलिखित हैं-

  1. जन्म-दर या प्रजननशीलता
  2. मृत्यु-दर या मर्त्यता
  3. प्रवास।

प्रश्न 2.
जनसंख्या के तीन बड़े आयु वर्ग कौन से हैं?
उत्तर:

  1. बाल तरुण आयु वर्ग (0 से 14 वर्ष)
  2. प्रौढ़ आयु वर्ग (15 से 59 वर्ष)
  3. वृद्ध आयु वर्ग (60 वर्ष व इससे ऊपर)।

प्रश्न 3.
नगरीय जनसंख्या की वृद्धि किन तीन तरीकों से होती है?
उत्तर:

  1. प्राकृतिक वृद्धि द्वारा
  2. गाँव से नगर की ओर प्रवास द्वारा तथा
  3. किसी ग्रामीण क्षेत्र के नगरीय घोषित हो जाने से।

प्रश्न 4.
जनसंख्या पिरामिड (Population Pyraimid) क्या होता है?
उत्तर:
जनसंख्या पिरामिड विभिन्न आयु वर्ग की जनसंख्या का एक त्रिकोणात्मक प्रदर्शन है। इसका प्रतिपादन डब्ल्यू एम० थॉमसन तथा ऑर्थर लेविस ने किया था। इस पिरामिड में सबसे नीचे के आधार पर निम्नतम आयु वर्ग की जनसंख्या (पुरुष एवं महिला) को प्रदर्शित करते हैं, जो सबसे बड़ी संख्या होती है। क्रमशः घटते हुए आयु वर्ग पर चलते हैं। उच्चतम आयु वर्ग की जनसंख्या जो आकार में सबसे कम होगी, सबसे ऊपर प्रदर्शित होती है। इस प्रकार बनी आकृति पिरामिड की तरह होगी। यही जनसंख्या पिरामिड कहलाता है।

प्रश्न 5.
लिंगानुपात किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रति हजार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या के अनुपात को लिंगानुपात कहा जाता है। यह भारत के संदर्भ में है क्योंकि विभिन्न देशों में लिंगानुपात की परिभाषा अलग-अलग है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 6.
ह्रासमान जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले आयु-लिंग पिरामिड का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ह्रासमान या घटती हुई जनसंख्या के पिरामिड का आधार संकीर्ण और शीर्ष शुण्डाकार होता है। यह निम्न जन्म-दर तथा मृत्यु-दर को दर्शाता है। इसमें जनसंख्या वृद्धि दर शून्य अथवा ऋणात्मक होती है। जापान, ऑस्ट्रेलिया के जनसंख्या पिरामिड इसी प्रकार के हैं।

प्रश्न 7.
विस्तारित होती या विकासशील जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले आयु-लिंग पिरामिड का उल्लेख कीजिए।
अथवा
किसी क्षेत्र का विस्तारित होती जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले आयु लिंग पिरामिड की व्याख्या करें।
उत्तर:
अल्पविकसित या विकासशील देशों में आयु-लिंग पिरामिड का आधार चौड़ा और शीर्ष तेजी से पतला होता जाता है। यह उच्च जन्म दर तथा मृत्यु दर को दर्शाता है। इसमें जनसंख्या वृद्धि दर धनात्मक होती है। अल्पविकसित या विकासशील देशों में वृद्धों की जनसंख्या कम और बच्चों की जनसंख्या बढ़ती जाती है। नाइजीरिया, बांग्लादेश के जनसंख्या पिरामिड इसी प्रकार के हैं।

प्रश्न 8.
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्पादक जनसंख्याआश्रित जनसंख्या
1. उत्पादक जनसंख्या लाभदायक आर्थिक क्रियाओं में काम करती है।1. आश्रित जनसंख्या आर्थिक क्रियाओं में विशेष योगदान नहीं देती।
2. ऐसे लोगों के समुदाय को श्रमिक बल कहा जाता है।2. ऐसे लोगों के समुदाय को अश्रमिक बल कहा जाता है।
3. ये लोग स्वयं परिश्रम करके अपना जीवन-निवर्वाह करते हैं।3. ये लोग बेरोज़गार होते हैं तथा श्रमिक लोगों पर आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 9.
विकासशील और हासशील जनसंख्या में क्या अंतर है?
उत्तर:
विकासशील और ह्रासशील जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

विकासशील जनसंख्याहासशील जनसंख्या
1. विकासशील जनसंख्या में जन्म-दर तथा मृत्यु-दर दोनों उच्च होती हैं।1. ह्रसशील जनसंख्या में जन्म-दर तथा मृत्यु-दर दोनों निम्न होती हैं।
2. जनसंख्या पिरामिड का आधार चौड़ा तथा शीर्ष पतला होता जाता है।2. जनसंख्या पिरामिड का आधार पतला तथा शीर्ष संकीर्ण होता जाता है।

प्रश्न 10.
जनसंख्या के घटते लिंगानुपात के कारण क्या हैं?
उत्तर:

  1. पुरुष और स्त्री मृत्यु-दर में अंतर होने के कारण लिंगानुपात कम हो रहा है।
  2. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर होने के कारण भी लिंगानुपात कम हो रहा है।
  3. प्रवास भी लिंगानुपात को प्रभावित करने वाला महत्त्वपूर्ण कारक है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकासशील देशों में नगरीकरण की दर तेजी से क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
विकासशील देशो में तेजी से बढ़ते नगरीकरण के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. इन देशों में भारी मात्रा में औद्योगीकरण हुआ है जिससे रोजगार के अवसर अधिक उपलब्ध हैं। फलस्वरूप इन देशों के गांवों से लोग नगरों की ओर स्थानांतरित हुए।
  2. इन देशों के गांवों में जीवन की आवश्यक सुविधाएँ; जैसे-चिकित्सा तथा शिक्षा आदि का अभाव पाया जाता है। इसलिए अधिक-से-अधिक लोग नगरो की ओर प्रवास करते हैं जिससे इन देशों के नगरों के आकार में भारी वृद्धि हो गई।

प्रश्न 2.
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. किसी भी देश में निम्न शिशु मृत्यु-दर होने पर वहाँ बच्चों की संख्या का अनुपात घट जाता है।
  2. वृद्ध मृत्यु-दर निम्न होने पर उनकी संख्या बढ़ जाती है और बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
  3. युवा व वृद्ध आयु वर्ग में मृत्यु-दर कम होने पर उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात बढ़ जाता है। विकसित देशों में ऐसा ही हो रहा है।।

प्रश्न 3.
आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जन्म-दर किसी देश की जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में लोगों के अनुपात को प्रभावित करती है। आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं

  1. एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी अल्पविकसित देशों में उच्च जन्म-दर पाई जाती है इसलिए वहाँ निम्न आयु वर्ग तथा युवा वर्ग की प्रधानता होती है।
  2. जब निम्न आयु वर्ग संतान पैदा करने की उम्र में शामिल होते हैं तो जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  3. निम्न आयु वर्ग (0-14 वर्ष) और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अधिक संख्या आश्रित जनसंख्या को प्रदर्शित करती है।
  4. जिन देशों में जन्म-दर कम तथा जीवन प्रत्याशा अधिक होती है, वहाँ बच्चों की संख्या कम और वृद्धों की संख्या अधिक होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 4.
स्त्री-पुरुष की भिन्न मृत्यु-दर लिंगानुपात को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर:
विकासशील और अल्प-विकसित देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की मृत्यु-दर अधिक होती है। इन देशों में स्त्रियों का सामाजिक और आर्थिक रूप से निम्न स्तर तथा स्त्रियों के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण के कारण स्त्री मृत्यु-दर अधिक पाई जाती है।

विकसित देशों में जीवन के सभी आयु वर्गों में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है। फलस्वरूप पुरुषों की संख्या उत्तरोतर समाप्त होती जाती है। इसका एक कारण और भी हो सकता है कि जैविक दृष्टि से स्त्रियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों से अधिक होती है।

प्रश्न 5.
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. गाँवों में रहने वाली जनसंख्या को ग्रामीण जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय कृषि होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक व्यवसाय; जैसे-कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्यपालन, संग्रहण व कुटीर उद्योग पर निर्भर करते हैं।
  3. गाँव के लोग सरल, धर्मनिष्ठ व सामुदायिक भावना से ओत-प्रोत होते हैं।
  4. ग्रामीण जनसंख्या भावनात्मक होती है।

प्रश्न 6.
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. नगरों में रहने वाली जनसंख्या को नगरीय जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय उद्योग एवं व्यापार होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए द्वितीयक, तृतीयक व चतुर्थक व्यवसाय; जैसे विनिर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, सेवाओं आदि पर निर्भर करते हैं।
  3. नगरीय लोगों के जीवन की तीव्र गति व सम्बन्ध बनावटी होते हैं।
  4. नगरीय जनसंख्या व्यावसायिक होती है।

प्रश्न 7.
किसी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से उस देश के आर्थिक विकास के स्तर का पता कैसे लगता है?
उत्तर:
किसी भी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना को चार भागों में बाँटा जा सकता है प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक। किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास का स्तर उसकी कार्यशील जनसंख्या के आधार पर होता है। जिस देश की जनसंख्या द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक क्रियाकलापों में लगी होती है, वह देश विकसित अवस्था में होता है।

प्रश्न 8.
आयु-लिंग पिरामिड से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग पिरामिड का अर्थ-जनसंख्या की आयु लिंग संरचना का अभिप्राय विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। आयु लिंग संरचना को दर्शाने के लिए एक विशेष प्रकार का रेखाचित्र बनाया जाता है, जिस कारण इसे आयु-लिंग अथवा जनसंख्या पिरामिड कहा जाता है।

आयु-लिंग पिरामिड के प्रकार-आयु-लिंग पिरामिड के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. विस्तारित होती जनसंख्या-यह विस्तृत आकार वाला त्रिभुजाकार पिरामिड है जो कम विकसित देशों का प्रतिरूपी है। इस पिरामिड में उच्च जन्म-दर के कारण निम्न आयु वर्गों में विशाल जनसंख्या पाई जाती है। उदाहरणतया-नाइजीरिया, बांग्लादेश, मैक्सिको के लिए ऐसे पिरामिड की रचना होगी।

2. स्थिर जनसंख्या इस आयु-लिंग पिरामिड का आकार घंटी के आकार का है जो शीर्ष की ओर शुंडाकार होता जाता है। यह दर्शाता है कि जन्म-दर और मृत्यु-दर लगभग समान है जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या स्थिर हो जाती है। उदाहरणतया ऑस्ट्रेलिया का आयु-लिंग पिरामिड।

3. हासमान जनसंख्या-इस पिरामिड का संकीर्ण आधार और शुंडाकार शीर्ष निम्न जन्म-दर और मृत्यु-दर को दर्शाता है। इन देशों में जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक या शून्य होती है।

प्रश्न 9.
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

ग्रामीण जनसंख्यानगरीय जनसंख्या
1. ग्रामीण लोग अपनी व्यवसाय-संरचना, जीवन-पद्धति, विचारों तथा दृष्टिकोणों से नगरों की जनसंख्या से भिन्न होते हैं। ये लोग छोटी बस्तियों तथा छोटे मकानों में रहते हैं। इनके आपसी संबंध घनिष्ठ होते हैं।1. ये लोग बड़े मकानों में रहते हैं तथा इनके आपसी संबंध औपचारिक ही होते हैं।
2. इन लोगों का मुख्य धंधा ‘कृषि’ है।2. ये लोग अधिकतर उद्योगों तथा व्यापार में काम करते हैं।
3. गाँवों में यातायात, स्वास्थ्य तथा शैक्षणिक सुविधाएँ अच्छी नहीं हैं।3. शहरों में ये सभी सुविधाएँ पर्याप्त हैं।
4. ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से कम होती है।4. नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से अधिक होती है।

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प्रश्न 10.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग में असंतुलन के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-
1. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर-प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं। साधारणतया इनका अनुपात क्रमशः 107 से 100 का है किंतु जन्म के पहले और बाद की दशाएँ कभी-कभी इस स्थिति को परिवर्तित कर देती हैं।

2. स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर-स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर होने के कारण भी लिंगानुपात में अंतर आ जाता है। विकसित देशों में जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है जबकि विकासशील देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में मृत्यु-दर अधिक होती है। ऐसे समाज में स्त्री भ्रूण हत्या, स्त्री शिशु हत्या और स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा की प्रथा प्रचलित होती है। इन देशों में न केवल स्त्रियों की मृत्यु-दर ऊँची होती है बल्कि उनकी जीवन प्रत्याशा भी कम हो जाती है।

3. प्रवास-स्त्रियों और पुरुषों का प्रवास भी लिंगानुपात को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। अधिकांश विकासशील देशों में विशेषतया एशियाई और अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में पुरुष ग्रामीण इलाकों से नगरों की ओर आजीविका की तलाश में प्रवास करते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकासशील देशों में नगरीकरण की दर तेजी से क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
विकासशील देशो में तेजी से बढ़ते नगरीकरण के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. इन देशों में भारी मात्रा में औद्योगीकरण हुआ है जिससे रोजगार के अवसर अधिक उपलब्ध हैं। फलस्वरूप इन देशों के गांवों से लोग नगरों की ओर स्थानांतरित हुए।
  2. इन देशों के गांवों में जीवन की आवश्यक सुविधाएँ; जैसे-चिकित्सा तथा शिक्षा आदि का अभाव पाया जाता है। इसलिए अधिक-से-अधिक लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं जिससे इन देशों के नगरों के आकार में भारी वृद्धि हो गई।

प्रश्न 2.
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. किसी भी देश में निम्न शिशु मृत्यु-दर होने पर वहाँ बच्चों की संख्या का अनुपात घट जाता है।
  2. वृद्ध मृत्यु-दर निम्न होने पर उनकी संख्या बढ़ जाती है और बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
  3. युवा व वृद्ध आयु वर्ग में मृत्यु-दर कम होने पर उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात बढ़ जाता है। विकसित देशों में ऐसा ही हो रहा है।

प्रश्न 3.
आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जन्म-दर किसी देश की जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में लोगों के अनुपात को प्रभावित करती है। आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी अल्पविकसित देशों में उच्च जन्म-दर पाई जाती है इसलिए वहाँ निम्न आयु वर्ग तथा युवा वर्ग की प्रधानता होती है।
  2. जब निम्न आयु वर्ग संतान पैदा करने की उम्र में शामिल होते हैं तो जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  3. निम्न आयु वर्ग (0-14 वर्ष) और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अधिक संख्या आश्रित जनसंख्या को प्रदर्शित करती है।
  4. जिन देशों में जन्म-दर कम तथा जीवन प्रत्याशा अधिक होती है, वहाँ बच्चों की संख्या कम और वृद्धों की संख्या अधिक होती है।

प्रश्न 4.
स्त्री-पुरुष की भिन्न मृत्यु-दर लिंगानुपात को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर:
विकासशील और अल्प-विकसित देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की मृत्यु-दर अधिक होती है। इन देशों में स्त्रियों का सामाजिक और आर्थिक रूप से निम्न स्तर तथा स्त्रियों के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण के कारण स्त्री मृत्यु-दर अधिक पाई जाती है।

विकसित देशों में जीवन के सभी आयु वर्गों में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है। फलस्वरूप पुरुषों की संख्या उत्तरोतर समाप्त होती जाती है। इसका एक कारण और भी हो सकता है कि जैविक दृष्टि से स्त्रियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों से अधिक होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 5.
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. गाँवों में रहने वाली जनसंख्या को ग्रामीण जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय कृषि होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक व्यवसाय; जैसे-कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्यपालन, संग्रहण व कुटीर उद्योग पर निर्भर करते हैं।
  3. गाँव के लोग सरल, धर्मनिष्ठ व सामुदायिक भावना से ओत-प्रोत होते हैं।
  4. ग्रामीण जनसंख्या भावनात्मक होती है।

प्रश्न 6.
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. नगरों में रहने वाली जनसंख्या को नगरीय जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय उद्योग एवं व्यापार होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए द्वितीयक, तृतीयक व चतुर्थक व्यवसाय; जैसे विनिर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, सेवाओं आदि पर निर्भर करते हैं।
  3. नगरीय लोगों के जीवन की तीव्र गति व सम्बन्ध बनावटी होते हैं।
  4. नगरीय जनसंख्या व्यावसायिक होती है।

प्रश्न 7.
किसी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से उस देश के आर्थिक विकास के स्तर का पता कैसे लगता है?
उत्तर:
किसी भी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना को चार भागों में बाँटा जा सकता है प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक। किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास का स्तर उसकी कार्यशील जनसंख्या के आधार पर होता है। जिस देश की जनसंख्या द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक क्रियाकलापों में लगी होती है, वह देश विकसित अवस्था में होता है।

प्रश्न 8.
आयु-लिंग पिरामिड से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग पिरामिड का अर्थ-जनसंख्या की आयु लिंग संरचना का अभिप्राय विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। आयु लिंग संरचना को दर्शाने के लिए एक विशेष प्रकार का रेखाचित्र बनाया जाता है, जिस कारण इसे आयु-लिंग अथवा जनसंख्या पिरामिड कहा जाता है।

आयु-लिंग पिरामिड के प्रकार-आयु-लिंग पिरामिड के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. विस्तारित होती जनसंख्या-यह विस्तृत आकार वाला त्रिभुजाकार पिरामिड है जो कम विकसित देशों का प्रतिरूपी है। इस पिरामिड में उच्च जन्म-दर के कारण निम्न आयु वर्गों में विशाल जनसंख्या पाई जाती है। उदाहरणतया नाइजीरिया, बांग्लादेश, मैक्सिको के लिए ऐसे पिरामिड की रचना होगी।

2. स्थिर जनसंख्या इस आयु-लिंग पिरामिड का आकार घंटी के आकार का है जो शीर्ष की ओर शुंडाकार होता जाता है। यह दर्शाता है कि जन्म-दर और मृत्यु-दर लगभग समान है जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या स्थिर हो जाती है। उदाहरणतया ऑस्ट्रेलिया का आयु-लिंग पिरामिड।

3. हासमान जनसंख्या-इस पिरामिड का संकीर्ण आधार और शुंडाकार शीर्ष निम्न जन्म-दर और मृत्यु-दर को दर्शाता है। इन देशों में जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक या शून्य होती है।

प्रश्न 9.
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

ग्रामीण जनसंख्यानगरीय जनसंख्या
1. ग्रामीण लोग अपनी व्यवसाय-संरचना, जीवन-पद्धति, विचारों तथा दृष्टिकोणों से नगरों की जनसंख्या से भिन्न होते हैं। ये लोग छोटी बस्तियों तथा छोटे मकानों में रहते हैं। इनके आपसी संबंध घनिष्ठ होते हैं।1. ये लोग बड़े मकानों में रहते हैं तथा इनके आपसी संबंध औपचारिक ही होते हैं।
2. इन लोगों का मुख्य धंधा ‘कृषि’ है।2. ये लोग अधिकतर उद्योगों तथा व्यापार में काम करते हैं।
3. गाँवों में यातायात, स्वास्थ्य तथा शैक्षणिक सुविधाएँ अच्छी नहीं हैं।3. शहरों में ये सभी सुविधाएँ पर्याप्त हैं।
4. ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से कम होती है।4. नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से अधिक होती है।

प्रश्न 10.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग में असंतुलन के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-
1. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं। साधारणतया इनका अनुपात क्रमशः 107 से 100 का है किंतु जन्म के पहले और बाद की दशाएँ कभी-कभी इस स्थिति को परिवर्तित कर देती हैं।

2. स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर-स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर होने के कारण भी लिंगानुपात में अंतर आ जाता है। विकसित देशों में जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है जबकि विकासशील देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में मृत्यु-दर अधिक होती है। ऐसे समाज में स्त्री भ्रूण हत्या, स्त्री शिशु हत्या और स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा की प्रथा प्रचलित होती है। इन देशों में न केवल स्त्रियों की मृत्यु-दर ऊँची होती है बल्कि उनकी जीवन प्रत्याशा भी कम हो जाती है।

3. प्रवास स्त्रियों और पुरुषों का प्रवास भी लिंगानुपात को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। अधिकांश विकासशील देशों में विशेषतया एशियाई और अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में पुरुष ग्रामीण इलाकों से नगरों की ओर आजीविका की तलाश में प्रवास करते हैं।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या की आयु लिंग संरचना पर एक भौगोलिक निबंध लिखिए।
उत्तर:
जनसंख्या की आयु लिंग संरचना (Age composition of Population) इसे आयु एवं लिंग पिरामिड द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। यह वास्तव में एक विशेष वर्ष का दंड ग्राफ होता है जिसमें प्रत्येक अनुप्रस्थ पट्टी जनसंख्या के एक विशेष आयु वर्ग को दर्शाती है। बाईं ओर के दंड की लंबाई पुरुषों की संख्या के प्रतिशत को दर्शाती है तथा दाईं ओर यह स्त्रियों के लिए दर्शाई गई है।
(क) विकासशील देशों के आयु एवं लिंग पिरामिड का आधार व्यापक होता है। इसका अर्थ है प्रति 5 वर्ष पहले 5 वर्ष के मुकाबले जनसंख्या में और अधिक बच्चे शामिल हो रहे हैं। इस प्रकार पिरामिड का आधार विस्तृत हो रहा है और उच्च आयु वर्ग के लोगों की संख्या में कम वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही जब अधिक बच्चे संतान पैदा करने की आयु में आते हैं, तब पैदा होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ जाती है।

(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका के आयु लिंग पिरामिड का आधार छोटा पाया जाता है अर्थात् यहाँ प्रत्येक अगले 5 वर्षों में कम बच्चे पैदा होते रहे हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि यहाँ की जनसंख्या में वृद्धि नहीं हो रही है; जैसे ही बच्चों की संख्या उच्च आयु समूह में शामिल होती है वैसे ही पूरी जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन 1

(ग) तीसरी प्रकार के पिरामिड का आधार पतला तथा शीर्ष संकीर्ण होता जाता है। ऐसी जनसंख्या में बिल्कुल वृद्धि नहीं होती। ऐसी स्थिति स्वीडन में पाई जाती है।

प्रश्न 2.
आयु-संरचना क्या है? आयु-संरचना पर जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु-संरचना किसी भी जनसंख्या की एक आधारभूत विशेषता होती है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या में विभिन्न आयु के लोग रहते हैं। किसी भी व्यक्ति की आयु उसकी जन्म-तिथि तथा वर्तमान तिथि के बीच का समय होता है। किसी क्षेत्र की आयु-संरचना में समस्त मनुष्यों की आयु को पूर्ण वर्षों में ज्ञात किया जा सकता है, न कि महीनों अथवा दिनों में।

आयु-संरचना पर जन्म-दर का प्रभाव (Effect of Birth Rate on Age Composition) – जन्म-दर किसी देश की जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में लोगों के अनुपात को प्रभावित करती है। आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं

  • एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी अल्प विकसित देशों में उच्च जन्म-दर पाई जाती है इसलिए वहाँ निम्न आयु वर्ग तथा युवा वर्ग की प्रधानता होती है।
  • जब निम्न आयु वर्ग संतान पैदा करने की उम्र में शामिल होते हैं तो जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  • युवा वर्ग का जनसंख्या में अधिक पाए जाने का अर्थ है कि वहाँ श्रम की उपलब्धता अधिक है।
  • निम्न आयु वर्ग (0-14 वर्ष) और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अधिक संख्या आश्रित जनसंख्या को प्रदर्शित करती है।
  • जिन देशों में जन्म-दर कम तथा जीवन प्रत्याशा अधिक होती है, वहाँ बच्चों की संख्या कम और वृद्धों की संख्या अधिक होती है।

आयु-संरचना पर मृत्यु-दर का प्रभाव (Effect of Death Rate on Age Composition)-आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं

  • शिशु मृत्यु-दर में सुधार होने पर जनसंख्या में बच्चों का अनुपात बढ़ जाता है तथा बड़ी आयु वाले लोगों का अनुपात घट जाता है।
  • यदि वृद्धों की मृत्यु-दर में सुधार होता है तो उनकी संख्या बढ़ जाती है और बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
  • इसी प्रकार यदि युवा व वृद्ध आयु-वर्गों में मृत्यु-दर कम हो जाती है तो उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात बढ़ जाता है जैसा कि विकसित देशों में होता है।
  • यदि निम्न आयु वर्गों में मृत्यु-दर में तेज़ गिरावट उच्च आयु वर्गों की अपेक्षा अधिक है तो युवा वर्ग की जनसंख्या बढ़ जाती है जैसा कि विकासशील देशों में होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 3.
साक्षरता से क्या तात्पर्य है? साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता (Literacy) यद्यपि साक्षरता (Literacy) जनसंख्या का एक सामाजिक पक्ष है तथापि यह जनसंख्या की गुणवत्ता का बोध कराती है। व्यापक रूप से साक्षरता वह ज्ञान है जो लोगों में जागृति लाए। साधारणतया साक्षरता लोगों को किसी भाषा में समझ के साथ लिखने या पढ़ने की योग्यता को कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ जनसंख्या आयोग के अनुसार, “साक्षर वह व्यक्ति है जो किसी भाषा में साधारण संदेश को पढ़, लिख और समझ सकता है।”

विश्व स्तर पर अधिकांश देशों में साक्षरता की गणना की जाती हैं। प्रति सौ व्यक्तियों के अनुपात में साक्षर व्यक्तियों की संख्या को साक्षरता दर कहा जाता है।
साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक (Factory affecting Literacy) साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
1. अर्थव्यवस्था (Economy)-विश्व के विभिन्न भागों में साक्षरता की दरों में विभिन्नता पाई जाती है। किसी भी देश के आर्थिक विकास के स्तर और साक्षरता दर में घनिष्ठ संबंध पाया जाता है। ऊंची अर्थव्यवस्था वाले देशों में उच्च साक्षरता दर पाई जाती है जबकि कम विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों में निम्न साक्षरता दर पाई जाती है।

2. नगरीकरण (Urbanization) साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारकों में किसी देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ उस देश के नगरीकरण का स्तर भी प्रमुख है। उच्च नगरीकृत देशों में साक्षरता भी अधिक है। क्योंकि नगरीय क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था उपयुक्त होती है। इसके अतिरिक्त नगरों में विभिन्न स्तर की शिक्षा सुविधाओं के अवसर भी उपलब्ध होते हैं।

3. समाज में स्त्रियों का स्तर (Level of Female in Society)-विभिन्न समाजों में साक्षरता उनकी अपनी विशेषताओं द्वारा भी निर्धारित होती है। समाज में स्त्रियों का स्तर और उनकी जनसंख्या भी साक्षरता दर को प्रभावित करती है। विकासशील तथा पिछड़े राष्ट्रों में स्त्रियों के निम्न सामाजिक स्तर के कारण स्त्रियों में साक्षरता दर कम पाई जाती है जबकि ईसाई समुदाय की स्त्रियों
के उच्च सामाजिक स्तर के कारण उनमें साक्षरता दर उच्च पाई जाती है।

4. यातायात एवं संचार के साधन (Source of Transport and Communication) यातायात एवं संचार के साधनों का अल्प विस्तार भी विकासशील समाज में ग्रामीण समाज को अलग-थलग कर देता है और ग्रामीण समाज ज्ञान से वंचित रह जाता है।

5. प्रशासकीय नीतियाँ (Administrial Policies)-सरकारी नीतियाँ भी साक्षरता दर की वृद्धि में सहायक सिद्ध होती हैं। विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा की मुफ्त व्यवस्था और उसका प्रसार सरकारी नीति पर ही निर्भर करता है।

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अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से किसने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग-अनुपात को निम्न किया है?
(A) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास
(B) पुरुषों की उच्च जन्म-दर
(C) स्त्रियों की निम्न जन्म-दर
(D) स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास
उत्तर:
(C) स्त्रियों की निम्न जन्म-दर

2. निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु-वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?
(A) 15 से 65 वर्ष
(B) 15 से 66 वर्ष
(C) 15 से 64 वर्ष
(D) 15 से 59 वर्ष
उत्तर:
(D) 15 से 59 वर्ष

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3. निम्नलिखित में से किस देश का लिंग-अनुपात विश्व में सर्वाधिक है?
(A) लैटविया
(B) जापान
(C) संयुक्त अरब अमीरात
(D) फ्रांस
उत्तर:
(A) लैटविया

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या संघटन जनसंख्या के उस पक्ष को प्रदर्शित करता है जिसको मापा जा सकता है। जनसंख्या के मात्रात्मक पक्ष; जैसे-लिंग, आयु, श्रम शक्ति, आवास, कार्यशील और आश्रित जनसंख्या तथा साक्षरता आदि तथ्यों का वर्गीकरण और अध्ययन जनसंख्या संघटन कहलाता है।

प्रश्न 2.
आयु-संरचना का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
आयु संरचना जनसंख्या संघटन का महत्त्वपूर्ण सूचक है। यह विभिन्न आयु वर्गों में लोगों की संख्या को प्रदर्शित करती है। इसके अंतर्गत किसी देश की जनसंख्या को तीन आयु वर्गों में बाँटा जाता है- 0-14 आयु वर्ग, 15-59 आयु वर्ग और 60 से ऊपर का आयु वर्ग। इसके द्वारा ही देश की जनसंख्या की जन्म-दर, उत्पादकता, मानव क्षमता, रोजगार की स्थिति तथा आश्रित जनसंख्या आदि का पता चलता है। इससे ही भविष्य में जनसंख्या वृद्धि का अनुमान होता है।

प्रश्न 3.
लिंग-अनुपात कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
जनसंख्या में पुरुषों और स्त्रियों की संख्या के बीच के अनुपात को लिंग-अनुपात कहा जाता है। भारत में यह अनुपात प्रति हजार पुरुषों और स्त्रियों की संख्या के रूप में दर्शाया जाता है।
HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन 1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जनसंख्या के ग्रामीण-नगरीय संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आवास के आधार पर जनसंख्या को दो वर्गों में बाँटा गया है-(i) ग्रामीण जनसंख्या तथा (ii) नगरीय जनसंख्या।
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या की अपनी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं तथा इनको अपने अलग-अलग व्यवसाय, संरचना, जीवन-पद्धति आदि के आधार पर पहचाना जा सकता है। गांव के लोग साधारण, सामाजिक संबंधों से ओत-प्रोत तथा अधिकतर कृषि-कार्यों में संलग्न रहते हैं। उनके आचार-विचार तथा सांसारिक दृष्टिकोण नगर में रहने वाले लोगों से भिन्न होते हैं। इसके विपरीत, नगरों में रहने वाले लोग उद्योग तथा व्यापार में संलग्न रहते हैं। इनके आपसी सामाजिक संबंध औपचारिक होते हैं तथा इनका दृष्टिकोण अपेक्षतया भिन्न होता है।

विश्व में ग्रामीण जनसंख्या सबसे अधिक एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों में पाई जाती है जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में नगरीय जनसंख्या अधिक पाई जाती है। सामान्यतया औद्योगिक दृष्टि से विकसित राष्ट्रों में नगरीय जनसंख्या का अनुपात अधिक पाया जाता है जबकि कृषि प्रधान देशों में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात अधिक पाया जाता है। कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत किसी देश के आर्थिक विकास का सूचक होता है। इसका कारण है नगरों में उपलब्ध सुविधाएँ और रोजगार की संभावनाएँ। यही कारण है कि विकसित राष्ट्रों में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत अधिक होता है। विश्व में प्रतिवर्ष नगरीय जनसंख्या में लगभग 6 करोड़ की वृद्धि हो रही है।

विश्व में नगरीय जनसंख्या में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं-

  • नगरीय क्षेत्रों में स्त्रियों की संख्या अधिक होने का कारण ग्रामीण क्षेत्रों से स्त्रियों का नौकरियों हेतु शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवास करना है।
  • विकासशील देशों में कृषि संबंधी कार्यों में स्त्रियों की सहभागिता दर काफी ऊँची है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों का कृषि पर प्रभुत्व है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 2.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों तथा व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना से अभिप्राय विभिन्न आयु-वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। इसे एक विशेष प्रकार के रेखाचित्र द्वारा दर्शाया जाता है जिसकी आकृति पिरामिड से मिलती है। इस कारण इसे आयु-लिंग अथवा जनसंख्या पिरामिड कहा जाता है। विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं-
1. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं। सामान्यतया जन्म के समय प्रत्येक 104 से 107 नर बच्चों के अनुपात में 100 मादा बच्चे होते हैं।

2. स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर-विकसित देशों में जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है इसके विपरीत विकासशील देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में मृत्यु-दर अधिक होती है।

3. प्रवास-अधिकांश विकासशील देशों, विशेषतया एशियाई तथा अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में पुरुष ग्रामीण इलाकों से नगरों की ओर आजीविका की तलाश में प्रवास करते हैं। विकसित देशों में नगरीय लिंगानुपात स्त्रियों के पक्ष में अधिक होता है क्योंकि वहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के काम में पुरुषों की संख्या ज्यादा होती है स्त्रियाँ नगरों में नौकरी की तलाश में प्रवास करती है।

व्यावसायिक संरचना किसी क्षेत्र की विशिष्ट आर्थिक क्रियाओं में लगे जनसंख्या के अनुपात को व्यावसायिक संरचना कहते हैं। व्यावसायिक संरचना को चार मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

  1. प्राथमिक व्यवसाय इन व्यवसायों में आखेट, मत्स्यपालन, फल संग्रहण, कृषि संग्रहण, कृषि तथा वानिकी इत्यादि आते हैं।
  2. द्वितीयक व्यवसाय-इन व्यवसायों में विनिर्माण उद्योग तथा शक्ति उत्पादन इत्यादि आते हैं।
  3. तृतीयक व्यवसाय-इन व्यवसायों के अंतर्गत परिवहन, संचार, व्यापार, सेवाएँ आदि शामिल किए जाते हैं।
  4. चतुर्थक व्यवसाय-इनके अंतर्गत चिंतन, शोध योजना तथा विचारों के विकास से जुड़े अत्याधिक बौद्धिकतापूर्ण व्यवसायों को रखा जाता है।

जनसंख्या संघटन HBSE 12th Class Geography Notes

→ नगरीकरण (Urbanisation) : वे प्रक्रियाएँ जिनसे नगर की जनसंख्या बढ़ती है; जैसे-प्राकृतिक वृद्धि, प्रवास व निकटवर्ती गाँवों के शहर में सम्मिलित होने पर।

→ लिंगानुपात (Sex Ratio) : प्रति हज़ार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या (भारत के संदर्भ में)।

→ आयु संरचना (Age Composition) : विभिन्न आयु वर्गों में जनसंख्या का वर्गीकरण।

→ श्रमजीवी (कार्यरत) जनसंख्या (Working Population) : जनसंख्या में वे लोग जो किसी आर्थिक लाभ के कार्यों में संलग्न हैं।

→ सहभागिता दर (Participation Rate) : कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत अनुपात।

→ आश्रित जनसंख्या (Dependent Population) : देश की कुल जनसंख्या का वह भाग जिसमें 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चे तथा 60 वर्ष व इससे ऊपर की आयु के वृद्ध आते हैं।

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HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

प्रश्न 1.
एक आयताकार भूखण्ड की लम्बाई और चौड़ाई क्रमशः 500 मीटर तथा 300 मीटर है। ज्ञात कीजिए :
(i) भूखण्ड का क्षेत्रफल
(ii) भूखण्ड का मूल्य, यदि 1 मीटर2 का मूल्य ₹ 10,000 है।
हल :
लम्बाई = 500 मीटर, चौड़ाई = 300 मीटर
(i) क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= (500 × 300) मीटर2
= 1,50,000 मीटर2 उत्तर

(ii) ₹ 10,000 प्रति मीटर2 से जमीन की कीमत
= ₹ (10,000 × 1,50,000)
= ₹ 1,500,000,000 उत्तर

प्रश्न 2.
एक वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसका परिमाप 320 मीटर है।
हल :
वर्गाकार पार्क का परिमाप = 320 मीटर
∴ वर्गाकार पार्क की भुजा = \(\left(\frac{320}{4}\right)\) मीटर
= 80 मीटर।
∴ वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल = (भुजा)2
= (80 मीटर)2 = 80 × 80 मीटर2
= 6400 मीटर2। उत्तर

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

प्रश्न 3.
एक आयताकार भूखण्ड की चौड़ाई ज्ञात कीजिए यदि इसका क्षेत्रफल 440 मीटर2 और लम्बाई 22 मीटर हो। इसका परिमाप भी ज्ञात कीजिए।
हल :
माना एक आयताकार भूखण्ड की चौड़ाई = b मीटर है।
भूखण्ड की लम्बाई = 22 मीटर है।
भूखण्ड का क्षेत्रफल = 440 मीटर2
∴ भूखण्ड का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
440 मीटर2 = b मीटर × 22 मीटर
b = \(\frac{440}{22}\) मीटर = 20 मीटर
अत: भूखण्ड का परिमाप = 2 × (ल. + चौ.)
= 2 × (22 + 20) मीटर
= 2 × 42 मीटर
= 84 मीटर। उत्तर

प्रश्न 4.
एक आयताकार शीट का परिमाप 100 सेमी है। यदि लम्बाई 35 सेमी हो तो इसकी चौड़ाई ज्ञात कीजिए। क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल :
माना आयताकार शीट की चौड़ाई = b सेमी है। तथा लम्बाई = 35 सेमी और परिमाप = 100 सेमी
∴ परिमाप = 2 × (ल. + चौ.)
⇒ 100 = 2 × (35 + b)
⇒ \(\frac{100}{2}\) = 35 + b
⇒ 50 – 35 = b
⇒ 15 = b
⇒ शीट की चौड़ाई = 15 सेमी
∴ शीट का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= (35 × 15) सेमी2
= 525 सेमी2। उत्तर

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

प्रश्न 5.
एक वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल एक आयताकार पार्क के बराबर है। यदि वर्गाकार पार्क की एक भुजा 60 मीटर हो और आयताकार पार्क की लम्बाई 90 मीटर हो तो आयताकार पार्क की चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल :
वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल = (भुजा)2
= (60)2 मीटर2
= 3600 मीटर2
माना आयताकार पार्क की चौड़ाई = 5 मीटर है।
∴ क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई = 90 × b मीटर2
लेकिन आयताकार पार्क का क्षेत्रफल = वर्गाकार पार्क का क्षेत्रफल
∴ 90 × b = 3600
⇒ b = \(\frac{3600}{90}\) = 40
∴ आयताकार पार्क की चौड़ाई = 40 मीटर। उत्तर

प्रश्न 6.
एक तार आयत के आकार का है। इसकी लंबाई 40 सेमी और चौड़ाई 22 सेमी है। यदि उसी तार को दुबारा मोड़कर एक वर्ग बनाया जाता है तो प्रत्येक भुजा की माप क्या होगी? यह भी ज्ञात कीजिए कि किस आकार का क्षेत्रफल अधिक होगा?
हल :
जब तार आयत की आकृति का हो :
लम्बाई = 40 सेमी, चौड़ाई = 22 सेमी
तार की परिमाप = 2(लम्बाई + चौड़ाई)
= 2(40 + 22) सेमी
= 2 × 62 सेमी = 124 सेमी
इसका क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= (40 × 22) सेमी2 = 880 सेमी2
जब वही तार वर्ग के आकार में मोड़ा जाता है तब इसका परिमाप आयत के आकार के समान होगा।
∴ परिमाप = 124 सेमी
⇒ 4 × भुजा = 124
⇒ भुजा = \(\frac{124}{4}\) सेमी = 31 सेमी
इसका क्षेत्रफल = (31)2 सेमी2 = 961 सेमी2
अतः वर्ग की भुजा की माप = 31 सेमी है और वर्गाकार आकृति का क्षेत्रफल अधिक है। उत्तर

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 11 परिमाप और क्षेत्रफल Ex 11.1

प्रश्न 7.
एक आयत का परिमाप 130 सेमी है। यदि आयत की चौड़ाई 30 सेमी हो तो आयत की लम्बाई ज्ञात कीजिए। आयत का क्षेत्रफल भी ज्ञात कीजिए।
हल :
माना आयत की लम्बाई = l सेमी है।
परिमाप = 130 सेमी और चौड़ाई = 30 सेमी
परिमाप = 2 × (ल. + चौ.)
⇒ 130 = 2 × (l + 30)
⇒ \(\frac{130}{2}\) = l + 30
⇒ 65 – 30 = 1
⇒ l = 35
आयत की लम्बाई = 35 सेमी
आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= (35 × 30) सेमी2
= 1050 सेमी2। उत्तर

प्रश्न 8.
2 मीटर लम्बाई और 1 मीटर चौड़ाई वाले दरवाजे को एक दीवार में लगाया जाता है। दीवार की लम्बाई 4.5 मीटर तथा चौड़ाई 3.6 मीटर है। (आकृति देखें) ₹ 20 प्रति मीटर2 की दर से दीवार पर सफेदी (white wash) कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
दीवार का कुल क्षेत्रफल
= लम्बाई × चौड़ाई
= (4.5 × 3.6) मीटर2
= 16.2 मीटर2
दरवाजे का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
= (2 × 1) मीटर2 = 2 मीटर2
∴ दीवार पर सफेदी का क्षेत्रफल = दीवार का क्षेत्रफल – दरवाजे का क्षेत्रफल
= (16:2 – 2) मीटर2
= 14.2 मीटर2
∴ सफेदी करने का खर्च ₹ 20 प्रति मीटर2 की दर से
= ₹ 20 × 14.2 = ₹ 284। उत्तर

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