HBSE 8th Class Social Science Solutions History Chapter 6 उपनिवेशवाद और शहर

Haryana State Board HBSE 8th Class Social Science Solutions History Chapter 6 उपनिवेशवाद और शहर Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Social Science Solutions History Chapter 6 उपनिवेशवाद और शहर

HBSE 8th Class History उपनिवेशवाद और शहर Textbook Questions and Answers

फिर से याद करें

प्रश्न 1.
सही या गलत बताएँ:
(क) पश्चिमी विश्व में आधुनिक शहर औद्योगीकरण के साथ विकसित हुए।
(ख) सूरत और मछलीपट्नम का उन्नीसवीं शताब्दी में विकास हुआ।
(ग) बीसवीं शताब्दी में भारत की ज्यादातर आबादी शहरों में रहती थी।
(घ) 1857 के बाद जामा मसजिद में पांच साल तक नमाज नहीं हुई।
(छ) नयी दिल्ली के मुकाबले पुरानी दिल्ली की साफ-सफाई पर ज्यादा पैसा खर्च किया गया।
उत्तर:
(क) सत्य
(ख) असत्य
(ग) असत्य
(घ) सत्य
(ङ) असत्य।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थान भरें :
(क) सफलतापूर्वक गुंबद का इस्तेमाल करने वाली पहली इमारत …………….. थी।
(ख) नयी दिल्ली और शाहजहांनाबाद की रूपरेखा तय करने वाले दो वास्तुकार ……………………. और …………… थे।
(ग) अंग्रेज भीड़ भरे स्थानों को …………… मानते थे।
(घ) …………….. के नाम से 1888 में एक विस्तार – योजना तैयार की गई।
उत्तर:
(क) गोल छत वाली इमारत/मकबरा
(ख) एडवर्ड लुटयस, शाहजहाँ
(ग) अश्वेत क्षेत्र
(घ) लाहौरी गेट।

HBSE 8th Class Social Science Solutions History Chapter 6 उपनिवेशवाद और शहर

प्रश्न 3.
नयी दिल्ली और शाहजहानाबाद की नगर योजना में तीन फर्क ढूँढ़ें।
उत्तर:
नयी दिल्ली एवं शाहजहांनाबाद के मध्य निम्नलिखित अंतर बताये जा सकते हैं :
(i) शाहजहाँनाबाद को मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा 1639 में बनाना शुरू किया गया। यह एक किला-महल इमारतों का समूह (afort-palace complex) है तथा इसके साथ एक विशाल शहर सटा (समीप ही) था। दूसरी तरफ नई दिल्ली 20वीं शताब्दी में ब्रिटिश सरकार से आधुनिक पश्चिमी शैली एवं डंग पर बना नये ढंग का शहर था। यद्यपि अंग्रेजी सेना ने 1803 में ही दिल्ली पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था लेकिन इसे कलकत्ता (कोलकाता) के स्थान पर 1911 में नई राजधानी बनाया गया।

(ii) शाहजहाँनाबाद की मुख्य इमारतें थीं लाल किला जो – पूर्णतया लाल पत्थर का बना हुआ था जिसमें अनेक भव्य सुन्दर इमारतें सफेद संगमरमर एवं पत्थर की बनी थीं। दूसरी ओर नई दिल्ली का विकास 1911 के बाद हुआ जिसमें विशाल सचिवालय, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन आदि बनाये गये थे।

(iii) शाहजहानाबाद के चारों ओर विशाल शहर की दीवार या सीमा दीवार (boundary wall) है जिसमें 14 बड़े (विशाल)द्वार हैं। नई दिल्ली का विकास पुराने तीन ब्रिटिश शहरों बंबई, मद्रास तथा कलकत्ता से भिन्न था जो दो रंगों के लोगों के आधार पर
अश्वेत कालोनी तथा श्वेत कालोनी क्षेत्र थे। दिल्ली में ऐसा नहीं | था। हाँ, यहाँ सिविल लाइन एरिया जरूर था।

(v) शाहजहानाबाद में एशिया के दो बड़े विशाल ऐतिहासिक बाजार-चाँदनी चौक तथा फैज बाजार था। यह इतने चौड़े थे कि इनमें से विशाल शाही सवारी निकला करती थी। दिल्ली में अंग्रेज बीसवीं शताब्दी के प्रथम अर्ध भाग में धनी भारतीयों के साथ-साथ | रहते थे।

प्रश्न 4.
मद्रास जैसे शहरों के “गोरे” इलाकों में कौन लोग रहते थे?
उत्तर:
अंग्रेज और अन्य यूरोपीय लोग शहरों के “श्वेत क्षेत्रों” अथवा ‘गोरे’ इलाकों में रहा करते थे। ऐसे क्षेत्र बंबई तथा कलकत्ता (जो आजकल क्रमशः मुंबई तथा कोलकाता कहलाते हैं) एवं मद्रास में रहा करते थे। ये प्रायः कंपनी तथा कालातर में ब्रिटिश सरकार के बड़े-बड़े अधिकारीगण, सौदागर, व्यापारी, बागान मालिक, जहाजरानी के स्वामी, उद्योगपति तथा साधारण कर्मचारी एवं कार्यकर्ता ही होते थे।

आइए विचार करें

प्रश्न 5.
विशहरीकरण का क्या मतलब है?
उत्तर:
विशहरीकरण उस स्थिति को कहते हैं जब देश में कुछ शहरों की तीव्र वृद्धि हो रही है तथा उसी समय बहुत सारे दूसरे शहर कमजोर पड़ते आ रहे हों। उदाहरण के लिए जब अठारहवीं सदी के आखिर में कलकत्ता, बंबई और मद्रास का महत्त्व प्रेजिडेंसी शहरों के रूप में तेजी से बढ़ रहा था तो देश में खास चीजों के उत्पादन करने वाले बहुत सारे शहर इसलिए पिछड़ने लगे क्योंकि वहाँ जो चीजें बनती थीं उनकी मांग घट गई थी। जब व्यापार नए क्षेत्रों में केन्द्रित होने लगा तो पुराने व्यापारिक केन्द्र और बंदरगाह पहली वाली स्थिति में नहीं रहे।

इसी प्रकार, जब अंग्रेजों ने स्थानीय राजाओं को पराजित कर दिया और शासन के नए केन्द्र पैदा हुए तो क्षेत्रीय सत्ता के पुराने केन्द्र भी ढह गए। इस प्रक्रिया को प्रायः विशहरीकरण कहा जाता है। मछलीपटनम, सूरत और श्रीरंगपट्म जैसे शहरों का उन्नीसवीं सदी से काफी ज्यादा विशहरीकरण हुआ। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में केवल 11 प्रतिशत लोग शहरों में रहते थे। ऐतिहासिक शाही शहर दिल्ली उन्नीसवीं सदी में एक धूलभरा छोटा-सा कस्बा बनकर रह गया था। लेकिन 1912 में ब्रिटिश भारत की राजधानी बनने के उपरांत इसमें दोबारा जान आ गई।

प्रश्न 6.
अंग्रेजों ने दिल्ली में ही विशाल दरबार क्यों लगाया जबकि दिल्ली राजधानी नहीं थी?
उत्तर:
निम्नलिखित कारणों की वजह से ही अंग्रेजों ने दिल्ली में ही विशाल दरबार लगाया जबकि दिल्ली देश की राजधानी नहीं थी।
(अ) (1) अंग्रेजों को भलीभाँति दिल्ली शहर के ऐतिहासिक एवं प्रतीकात्मक (Symbolic) महत्त्व की जानकारी थी। वे जानते थे कि यह शहर एक हजार साल से भी ज्यादा समय तक राजधानी रह चुका है। इस दौरान इसमें छोटे-मोटे अंतराल भी आते रहे हैं। यमुना नदी के बाएँ किनारे पर लगभग साठ वर्ग मील के छोटे से क्षेत्रफल में कम से कम 14 राजधानियाँ अलग-अलग समय पर बसाई गई।

(ii) आधुनिक नगर राज्य दिल्ली में घूमने पर इन सारी राजधानियों के अवशेष देखे जा सकते हैं। इनमें बारहवीं से सत्रहवीं शताब्दी के बीच बसाए गए राजधानी शहर सबसे महत्त्वपूर्ण थे।

(iii) इन सारी राजधानियों में सबसे शानदार राजधानी शाहजहाँ ने बसाई थी। शाहजहांनाबाद की स्थापना 1639 में शुरू हुई। इसके भीतर एक किला-महल और बगल में सटा पाहर था। लाल पत्थर से बने लाल किले में महल परिसर बनाया गर। था। इसके पश्चिम की ओर 14 दरवाजों वाला पुराना शहर था। चाँद चौक और फैज बाजार की मुख्य सड़कें इतनी चौड़ी थी कि वहाँ स शाही यात्राएँ आसानी से निकल सकती थीं। चाँदनी चौक के बीचोंबीच नहर थी।

(iv) घने मौहल्लों और दर्जनों बाजारों से भिरी जामा मसजिद भारत की सबसे विशाल और भव्य मनिता में से एक थी। उस समय पूरे शहर में इस मसजिद से ऊँचा ई स्थान नहीं था।

(ब) (i) 1857 के बाद यह सब कुछ बदल गया। उस साल हुए विद्रोह के दौरान विद्रोहियों ने बहादुर शाह जफर को विद्रोह – का नेतृत्व संभालने के लिए मजबूर कर दिया। चार महीने तक दिल्ली विद्रोहियों के नियंत्रण में रही। अंग्रेज दिल्ली के मुगल अतीत को पूरी तरह भुला देना चाहते थे। किले के इर्द-गिर्द का ‘सारा इलाका साफ कर दिया गया। वहाँ के बाग, मैदान और मसजिदें नष्ट कर दिए गए (उन्होंने मंदिरों को नहीं तोड़ा)। अंग्रेज आसपास के इलाके को सुरक्षित करना चाहते थे। खासतौर से मसजिदों को या तो नष्ट कर दिया गया या उन्हें अन्य कामों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। मिसाल के तौर पर जीनत-अल-मसजिद को एक बेकरी में तब्दील कर दिया गया। जामा मसजिद में पांच साल तक किसी को नमाज की इजाजत नहीं मिली। शहर का एक-तिहाई हिस्सा ढहा दिया गया। नहरों को पाटकर समतल कर दिया गया।

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प्रश्न 7.
पुराना दिल्ली शहर ब्रिटिश शासन के तहत (अंतर्गत) किस तरह बदलता गया ?
उत्तर:
अंग्रेजों के अधीन पुरानी दिल्ली के बदलाव की प्रक्रिया :
1. 1803 में अंग्रेजों ने मराठों को हराकर दिल्ली पर नियंत्रण हासिल कर लिया था। क्योंकि ब्रिटिश भारत की राजधानी कलकत्ता थी इसलिए मुगल बादशाह को लाल किले के महल में रहने की छूट मिली हुई थी। आज हमारे सामने जो आधुनिक शहर दिखाई देता है यह 1911 में तब बनना शुरू हुआ जब दिल्ली ब्रिटिश भारत की राजधानी बन गयी।

2. 1857 से पहले दिल्ली के हालात दूसरे औपनिवेशिक शहरों से काफी अलग थे। मद्रास, बंबई या कलकत्ता में भारतीयों और अंग्रेजों की बस्तियाँ अलग-अलग होती थीं। भारतीय लोग “काले” इलाकों में और अंग्रेज लोग सुसज्जित “गोरे” इलाकों | में रहते थे। दिल्ली में ऐसा नहीं था। खासतौर से उन्नीसवीं सदी | के पूर्वार्द्ध में दिल्ली के अंग्रेज भी पुराने शहर के भीतर अमीर | हिंदुस्तानियों के साथ ही रहा करते थे। वे भी उर्दू/फ़ारसी संस्कृति | व शायरी का मजा लेते थे और स्थानीय त्योहारों में हिस्सेदारी करते

3. 1824 में दिल्ली कॉलेज की स्थापना हुई जिसकी शुरुआत – अठारहवीं सदी में मदरसे के रूप में हुई थी। इस संस्था ने विज्ञान
और मानवशास्त्र के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात कर दिया। यहाँ मुख्य रूप से उर्दू भाषा में काम होता था। बहुत सारे लोग – 1830 से 1857 की अवधि को दिल्ली पुनर्जागरण काल बताते हैं।

4. जब अंग्रेजों ने शहर पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया तो वे बदले और लूटपाट की मुहिम पर निकल पड़े। प्रसिद्ध शायर गालिब उदास मन से इन घटनाओं को देख रहे थे। 1857 में दिल्ली की तबाही को उन्होंने इन शब्दों में व्यक्त किया, “जब गुस्साए शेर (अंग्रेज़) शहर में दाखिल हुए तो उन्होंने बेसहारों को मारा. …… घर जला डाले। न जाने कितने औरत-मर्द, आम और खास, तीन दरवाजों से दिल्ली से भाग खड़े हुए और उन्होंने छोटे-छोटे समुदायों तथा शहर के बाहर मकबरों में पनाह ली।” .

5. भविष्य में विद्रोहों को रोकने के लिए अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर को देश से निकाल दिया। अंग्रेजों ने उन्हें बर्मा (अब म्यांमार) भेज दिया, उनका दरबार बंद कर दिया, कई महल गिरा दिए, बागों को बंद कर दिया और उनकी जगह अपने सैनिकों के लिए बैरके बना दीं।

6. अंग्रेज़ दिल्ली के मुगल अतीत को पूरी तरह भुला देना चाहते थे। किले के इर्द-गिर्द का सारा इलाका साफ कर दिया गया। वहाँ के बाग, मैदान और मसजिदें नष्ट कर दिए गए (उन्होंने मंदिरों को नहीं तोड़ा)। अंग्रेज आसपास के इलाके को सुरक्षित करना चाहते थे। खासतौर से मसजिदों को या तो नष्ट कर दिया गया या उन्हें अन्य कामों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। मिसाल के तौर पर, जीनत-अल-मसजिद को एक बेकरी में तब्दील कर दिया गया। जामा मसजिद में पांच साल तक किसी को नमाज की इजाजत नहीं मिली। शहर का एक-तिहाई हिस्सा ढहा दिया गया। नहरों को पाटकर समतल कर दिया गया।

प्रश्न 8.
विभाजन से दिल्ली के जीवन पर क्या असर पड़ा?
उत्तर:
1. विभाजन के समय जीवन (Life at the time of partition) : 1947 में भारत के विभाजन से नयी सीमा के दोनों तरफ आबादी बड़ी तादाद में विस्थापित हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि दिल्ली की आबादी बढ़ गई। रोजगार बदल गए और शहर की संस्कृति बिलकुल भिन्न हो गई।

2. दंगों का प्रभाव (Effects of riots) : स्वतंत्रता और विभाजन के कुछ ही दिनों बाद भीषण दंगे शुरू हो गए। दिल्ली में हजारों लोग मारे गए और उनके घर बार लूटकर जला दिए गए। दिल्ली से पाकिस्तान जाने वाले मुसलमानों की जगह पाकिस्तान से सिख और हिंदू शरणार्थियों ने ले ली। शाहजहाँनाबाद में लावारिस मकानों पर कब्जे के लिए शरणार्थियों के झुंड घूमने लगे। कई बार उन्होंने मुसलमानों को भाग जाने और अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर भी किया।

3. शरणार्थियों के सामने चुनौतियाँ एवं उनके समाधान (Challenges before the refugees and their solutions): उस समय दिल्ली शरणार्थियों का शहर बन गई थी। दिल्ली की आबादी में लगभग पाँच लाख की वृद्धि हो गई (जबकि 1951 में यहाँ की आबादी 8 लाख से कुछ ही ज्यादा थी)। ज्यादातर लोग पंजाब से आए थे। वे शिविरों, स्कूलों, फ़ौजी बैरकों और बाग-बगीचों में आकर रहने लगे। उनमें से कुछ को खाली पड़े मकानों पर कब्जे का मौका मिल गया। बहुत सारे लोग शरणार्थी बस्तियों में रहने लगे। लाजपत नगर और तिलक नगर जैसी बस्तियाँ इसी समय बसी थीं। दिल्ली में आने वालों की जरूरतों को पूरा करने के लिए दुकान और स्टॉल खुल गए। कई नए स्कूल और कॉलेज भी खोल दिए गए।

4. मुसलमानों का पाकिस्तान को पलायन (Movement | of the Muslims to Pakistan) : दिल्ली के दो-तिहाई मुसलमान | पलायन कर गए थे जिससे लगभग 44,000 मकान खाली हो गए। बहुत सारे मुसलमान पाकिस्तान जाने के इंतजार में कामचलाऊ शिविरों में रहने लगे।

5. आर्थिक बदलाव (Economic Changes) : जो लोग यहाँ से गए थे उनकी जगह आए शरणार्थियों की निपुणता और काम-धंधे बिलकुल अलग थे। पाकिस्तान जाने वाले बहुत सारे मुसलमान कारीगर, छोटे-मोटे व्यापारी और मजदूर थे। दिल्ली आए नए लोग ग्रामीण भूस्वामी, वकील, शिक्षक, व्यापारी और छोटे दुकानदार थे। विभाजन ने उनकी जिंदगी और उनके व्यवसाय बदल दिए थे। फेरीवालों, पटरीवालों, बढ़ई और लुहारों के तौर पर उन्होंने नए रोजगार अपनाए। इनमें से बहुत सारे नए व्यवसाय में काफी सफल भी रहे।

6. सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव (Social and Cultural Changes) : पंजाब से आई विशाल टोलियों ने दिल्ली का सामाजिक परिवेश पूरी तरह बदल दिया। भोजन, पहनावे और कला के हर क्षेत्र में मुख्य रूप से उर्दू पर आधारित शहरी संस्कृति नयी रुचियों और संवेदनशीलता के नीचे दब गई।

आइए करके देखें

प्रश्न 9.
अपने शहर या आसपास के किसी शहर के इतिहास का पता लगाएं। देखें कि वह कब और कैसे फैला तथा समय के साथ उसमें क्या बदलाव आए हैं। आप बाजारों, इमारतों, सांस्कृतिक संस्थानों और बस्तियों का इतिहास दे सकते हैं।
उत्तर:
मैं शिवाजी धावले हूँ। मैं आजकल मुंबई (जो पहले बंबई कहलाता था।) में रहता हूँ। मेरे शहर के इतिहास, समय-समय पर इसमें आये परिवर्तन, बाजारों, सांस्कृतिक पहलुओं, संस्थाओं और बस्तियों से जुड़े कुछ तथ्य निम्नलिखित हैं:
(i) यदि शाही दृष्टि को साकार करने का एक तरीका नगर-नियोजन था तो दूसरा तरीका यह था कि शहरों में भव्य इमारतों के मोती टाँक दिए जाएँ। शहरों में बनने वाली इमारतों में किले, सरकारी दफ्तर, शैक्षणिक संस्थान, धार्मिक इमारतें, स्मारकीय मीनारें, व्यावसायिक डिपो यहाँ तक कि गोदियाँ और पुल, कुछ भी हो सकता था।

(ii) टापुओं का परस्पर जुड़ाव (Mutual Linkage of Islands) : शुरुआत में बंबई सात टापुओं का इलाका था। जैसे-जैसे आबादी बढ़ी, इन टापुओं को एक-दूसरे से जोड़ दिया गया ताकि ज्यादा जगह पैदा की जा सके।

(iii) अमेरिकी गृहयुद्ध का प्रभाव (Impact of American Civil War) : जब 1861 में अमरिकी गृह युद्ध शुरू हुआ तो अमेरिका के दक्षिणी भाग से आने वाली कपास अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आना बंद हो गई। इससे भारतीय कपास की मांग पैदा हुई
जिसकी खेती मुख्य रूप से दक्कन में की जाती थी। भारतीय व्यापारियों और बिचौलियों के लिए यह बेहिसाब मुनाफे का मौका था। 1869 में स्वेज नहर को खोला गया जिससे विश्व अर्थव्यवस्था के साथ बंबई के संबंध और मजबूत हुए। बंबई सरकार और भारतीय व्यापारियों ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए बंबई को “भारत का सरताज शहर” घोषित कर दिया। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध तक बंबई में भारतीय व्यापारी कॉटन मिल जैसे नए उद्योगों में अपना पैसा लगा रहे थे।

(iv) शैलियों का परस्पर विनिमय (Mutual Exchange of Styles) : शुरुआत में ये इमारतें परंपरागत भारतीय इमारतों के मुकाबले अजीब सी दिखाई देती थीं लेकिन धीरे-धीरे भारतीय भी यूरापीय स्थापत्य शैली के आदी हो गए और उन्होंने इसे अपना लिया दूसरी तरफ अंग्रेजों ने अपनी जरूरतों के अनुसार कुछ भारतीय शैलियों को अपना लिया।

(v) ज्यादा भारतीयपन (More Indian Look) : बंबई के ज्यादा “भारतीय” इलाकों में सजावट एवं भवन-निर्माण और साज-सज्जा में परंपरागत शैलियों का ही बोलबाला था। शहर में जगह की कमी और भीड़-भाड़ की वजह से बंबई में खास तरह की इमारतें भी सामने आई जिन्हें ‘चॉल’ का नाम दिया गया।

इमारतें और स्थापत्य शैलियाँ क्या बताती हैं (What Buildings and Architecture Styles Tell Us) :
(i) स्थापत्य शैलियों से अपने समय के सौंदर्यात्मक आदर्शों और उनमें निहित विविधताओं का पता चलता है। लेकिन, जैसा कि हमने देखा, इमारतें उन लोगों की सोच और नजर के बारे में भी बताती हैं जो उन्हें बना रहे थे। इमारतों की जरिए सभी शासक अपनी ताकत का इजहार करना चाहते हैं।

(ii) रूपरेखा संबंधी निर्णय (Decision of Formation) : स्थापत्य शैलियों से केवल प्रचलित रुचियों का ही पता नहीं चलता। वे उनको बदलती भी हैं। वे नयी शैलियों को लोकप्रियता प्रदान करती हैं और संस्कृति की रूपरेखा तय करती हैं।

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प्रश्न 10.
अपने शहर, कस्बे या गांव के कम से कम बस व्यवसायों की सूची बनाएँ। पता लगाएँ कि ये व्यवसाय कब से चले आ रहे हैं। इस सूची से इस इलाके में आए बदलावों के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर:
मेरे गाँव अथवा कस्बे के वस व्यवसायों की सूची:

  • कृषि
  • पशु-पालन
  • बढ़ईगीरी या काष्ठ कार्य
  • लोहार का कार्य
  • आभूषण निर्माण
  • व्यापार
  • मिट्टी के बर्तन बनाना
  • कताई करना
  • बुनाई करना, तथा
  • अध्यापन कार्य।

परिवर्तन (Changes):
1. कृषि (Agriculture) : जहाँ तक कृषि का प्रश्न है अब | कई लोग लकड़ी तथा लोहे की फाल की हल के साथ-साथ ट्रैक्टर एवं नवीन मशीनों का प्रयोग भी करते हैं। अब कृषि सदा के लिए वर्षा का जुआ नहीं है। हमारे गाँव/शहर में नहरें हैं, ट्यूबवैल हैं। फसल काटने के लिए नये ढंग की तकनीक एवं मशीनों का प्रयोग होता है। रासायनिक खाद एवं कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग होता

2. पशुपालन (Animal rearing) : अब गाँव/कस्बों में | बड़ी संख्या में एक साथ पशु पाले जाते हैं। इन्हें दुग्ध डेरी व्यवसाय कहा जाता है। डॉक्टर पशुओं की देखभाल करते हैं। वे उन्हें | समय-समय पर जांच-पड़ताल कर आवश्यकतानुसार दवाइयाँ तथा टीके लगाने का कार्य करते रहते हैं। दूध तथा दूध के उत्पाद दूर-दूर तक भेजे जाते हैं। फ्रिज तथा ठंडी मशीनों का प्रयोग यातायात के साधनों पर ही किया जाता है।

3. बढ़ईगीरी या काष्ठ कार्य (Carpentary): बढ़ई केवल सूखे पेड़ ही काटते हैं। पेड़ों की कटाई से पूर्व वे प्रमाणपत्र प्राप्त करते हैं। आधुनिक मशीनों तथा आरों से टिम्बर तथा प्लाई बनाई जाती है। बढ़ई तरह-तरह के उपकरण, फर्नीचर तथा सामान बनाते हैं। वे अपने उत्पाद को स्थानीय बाजारों के साथ-साथ दूर-दूर तक बेचते हैं। उनकी माली हालत दिन-प्रतिदिन सुधर रही

4. लोहार का कार्य (Black smithy) : उन्होंने उत्पादन बढ़ा दिया है। लोहे के साथ स्टील से भी सामान तथा चीजें बनती हैं। उन पर निकेल पालिश भी की जाती है। वे नई-नई तकनीक, मशीनों तथा उपकरणों का प्रयोग करते हैं। लोहे के रॉडस, दरवाजे, खिड़कियाँ, फर्नीचर, उपकरण बनाये जाते हैं। वे लोगों की माँग तथा बाजार के प्रचलन को देखकर ही वस्तुएं बनाते हैं।

5. आभूषण-निर्माण (Jwellery-making) : सुनार तथा शिल्पकार चाँदी, तांबे, सोने, हीरे आदि के आभूषण बनाते हैं। वे देश के साथ-साथ विदेशों को भी जेवरात बेचते हैं। हर रोज सोने-चाँदी के भाव प्रायः बदलते रहते हैं। आजकल इस वर्ग के लोग बहुत ही धनी हैं।

6. व्यापार (Trade) : आजकल व्यापारी अपने व्यापार के प्रसार के लिए रेडियो, दूरदर्शन, समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में विज्ञापन देते रहते हैं। भारत का आंतरिक तथा बाह्य व्यापार दिन दुगनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा है। दुनिया भर के देशों से हमारे व्यापारिक संबंध अच्छे हैं। व्यापारी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। वे चीन से कई तरह की वस्तुएँ मंगवा रहे हैं तथा भारत से भी कई उत्पाद तथा वस्तुएँ अमेरिका, यूरोप, अफ्रीकी देशों के साथ-साथ एशियाई देशों में भी निर्यात की जाती हैं।

7. मिट्टी के बर्तन (Pottery) : हर जगह नये-नये मिट्टी के बर्तन बनाये जा रहे हैं। प्रजापति (कुम्हार) नई-नई तकनीक एवं मशीनों का प्रयोग कर रहे हैं। नये-नये रंगों तथा डिजाइनों का प्रयोग किया जा रहा है। रेलवे में कुल्हड़ के प्रयोग से उन्हें खूब काम मिल रहा है।

8. कताई (Spinning) : यद्यपि अब भी गाँव में महिलाएं पुराने ढंग के चरखों से ही सूत कातती है लेकिन कई स्थानों पर नई तकनीक, उपकरणों तथा मशीनों का भी प्रयोग होने लगा है। विभिन्न प्रकार के वस्त्र निर्माण किए जाते हैं। औद्योगीकरण के कारण कताई की मांग बढ़ गई है जिसे मशीनें ही पूरा कर सकी हैं।

9. बुनाई (Weaving) : भारत में सन् 1991 से नई आर्थिक नीति, वैश्वीकरण तथा उदारीकरण की आर्थिक नीतियाँ तथा कार्यक्रम अपना लिए गये हैं। भारतीय वस्त्रों की गुणवत्ता तथा कीमतें विश्वभर में अच्छी तथा अनुकूल मानी जाती हैं। बुनकर नई-नई डिजाइनों तथा प्रदर्शनियों के द्वारा फैशन की दुनिया में बहुत आगे निकल गये हैं।

10. अध्यापन कार्य (Teaching) : हमारे क्षेत्रों में अध्यापक पर्याप्त रूप से शिक्षित तथा प्रशिक्षित हैं। वे अपने व्यवसाय में कुशल हैं। वे जागरूक लोग हैं। प्रतिदिन वे समाचार पत्र पढ़ते हैं, सी. डी. एस., टी. वी., रेडियो, कंप्यूटर आदि का प्रयोग करके विद्यार्थियों को नई-नई जानकारियाँ, पुस्तकों के बारे में सूचनायें तथा ज्ञानवर्धन में योगदान देते हैं। वे अध्यापन के पुराने तरीके छोड़ चुके हैं। प्रयोगशालाएँ, कार्यशालाएँ, ट्यूटर, पुस्तकालय, वाचनालय, दूरदर्शन पर आने वाले शैक्षिक कार्यक्रम, इंटरनेट आदि का प्रयोग किया जा रहा है।

आइए कल्पना करें

मान लीजिए कि आप सन् 1700 के आसपास शाहजहांनाबाद में रहते हैं। इस अध्याय में दिए गए ब्योरों के आधार पर उस जीवन के किसी एक दिन के अपने अनुभव लिखें।
उत्तर:
मुझे आपने कल्पना करने को कहा है। मैं 21वीं शताब्दी में दिल्ली में रह रहा हूँ। आज की दिल्ली 1700 के आसपास की दिल्ली से पूर्णतया बदली हुई है।
1. आजकल औरंगजेब हमारा सम्राट है। लेकिन वह दक्कन (दक्षिण) में व्यस्त है। उसके पिता शाहजहाँ ने शाहजहाँनाबाद का निर्माण कराया था। लोग सुबह-सुबह झरोखा दर्शन करने के लिए लाल किले के झरोखे पर जाते थे तथा सम्राट से आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन लेते थे। औरंगजेब इस प्रथा को गैर-इस्लामी मानता है। उसने यह प्रथा बंद कर दी है।

2. मैं इस्लाम का अनुयायी हूँ। मैं जामा मस्जिद में हर रोज पाँच बार की नमाज अदा करने के लिए जाता हूँ। लाल किले के पास ही बह रही यमुना में स्नान करने का मजा ही कुछ और है।

3. मैं संगीत तथा नृत्य नहीं देखता हूँ। चाँदनी चौक की रौनक देखने लायक होती है। नहरों में फव्वारे चलते हैं। जगह-जगह हरियाली है। लोग हवेलियों में संयुक्त परिवारों में रहते हैं। मैं उर्दू की गजलें प्रायः त्योहारों के समय सुनता रहता हूँ।

4. हमें हर वक्त ताजा पानी पीने के लिए मिलता है लेकिन गंदे जल की निकासी की व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं है।

5. आजकल सुगबुगाहट है कि साम्राज्य के कुछ भागों में लोग बगावत करने लगे हैं। सम्राट बहुत परेशान है।

HBSE 8th Class History उपनिवेशवाद और शहर Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों/पदों के अर्थ संक्षेप में लिखिए:
(अ) उपनिवेशवाद
(ब) शाही राजधानी
(स) औपनिवेशिक शासना
उत्तर:
(अ) उपनिवेशवाद (Colonialism): वह विचारधारा जो वर्चस्व की राजनीतिक स्थिति की स्थापना की पक्षधर होती है तथा उसी में यकीन करती है, उसे हम उपनिवेशवाद कहते हैं। कभी-कभी किसी एक देश द्वारा किसी दूसरे देश पर अपनी सत्ता थोपे बिना या.थोपकर, सेना सहित या बिना सैन्य दबाव के ही उसका राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक वर्चस्व एवं शोषण भी उपनिवेशवादी स्थिति कहलाती है।

(ब) शाही राजधानी (Imperial Capital): किसी देश की राजनीतिक गतिविधियों के केन्द्र को राजधानी या शाही राजधानी कहते हैं। दिल्ली अनेक बार बसी तथा बीच-बीच में कुछ अंतरालों को छोड़कर प्राचीन तथा मध्य काल में भी शाही राजधानी रही। 1803 में अंग्रेजों ने सैनिक दृष्टि से इस पर कब्जा कर लिया था। लेकिन औपचारिक रूप से यह 1857 तक मुगलों की शाही राजधानी रही। अंग्रेजों के काल में 1911-1912 से 14 अगस्त 1974 तक ब्रिटिश साम्राज्य की राजधानी रही।

(स) औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule) : वह शासन या सरकार जो किसी उपनिवेशवादी राष्ट्र द्वारा अपने उपनिवेश (Colony) में स्थापित किया गया हो, उसे औपनिवेशिक शासन कहते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजों ने लगभग 1757 से 14 अगस्त 1947 तक भारत में औपनिवेशिक शासन ही चलाया था।

प्रश्न 2.
पश्चिमी दुनिया में शहरों के विकास में योगदान देने वाला एक कारण बताइए।
उत्तर:
औद्योगीकरण।

HBSE 8th Class Social Science Solutions History Chapter 6 उपनिवेशवाद और शहर

प्रश्न 3.
औद्योगीकरण’ पद से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आधुनिक ढंग के कारखानों में मशीनों के सहयोग से औद्योगिक उत्पादन औद्योगीकरण कहलाता है। इंग्लैंड में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रांति हुई। कालांतर में यूरोप के अन्य देशों में यह क्रांति हुई। इसी से औद्योगीकरण हुआ।

प्रश्न 4.
19वीं तथा 20वी शताब्दियों में ब्रिटेन के दो औद्योगिक शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • लीड
  • मैनचेस्टर।

प्रश्न 5.
18वीं शताब्दी में मछलीपटनम का महत्त्व क्यों कम हो गया?
उत्तर:
मछलीपटनम सत्रहवीं शताब्दी में एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह के रूप में विकसित हुआ। अठारहवीं सदी के आखिर में जब व्यापार बंबई, मद्रास और कलकत्ता के नए ब्रिटिश बंदरगाहों पर केंद्रित होने लगा तो मछलीपटनम का महत्त्व घटता गया।

प्रश्न 6.
भारत के 18वीं शताब्दी के तीन प्रेजिडेन्सी शहरों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • कलकत्ता (कोलकाता).
  • बंबई (मुंबई)
  • मद्रास (चेन्नई)।

प्रश्न 7.
प्रेज़िडेंसी शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर:
प्रेज़िडेंसी : शासन की सुविधा के लिहाज से औपनिवेशिक भारत को तीन “प्रेजिडेंसी” (बंबई, मद्रास और बंगाल) में बाँट दिया गया था। ये तीनों प्रेजिडेंसी सूरत, मद्रास और कलकत्ता में स्थित ईस्ट इंडिया कंपनी की “फैक्ट्रियों” (व्यापारिक चौकियों) को ध्यान में रखकर बनायी गई थीं।

प्रश्न 8.
18वीं शताब्दी में बंबई शहर का विकास क्यों होता चला गया?
उत्तर:
(i) बंबई शहर का विकास अंग्रेजों से पहले ही पुर्तगालियों के द्वारा होने लगा था। जब बंबई का छोटा सा टापू ब्रिटेन के महाराजा को प्राप्त हो गया तथा उसने अपने देश की ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया तो कंपनी ने इसे पश्चिमी भारतीय समुद्र तट पर स्थित एक प्रमुख केंद्र के रूप में प्रयोग करना शुरू किया।

(ii) उन्होंने बंबई का अपने योजनाबद्ध तरीके से निर्माण किया। वहाँ अनेक विशाल इमारतें बनाई। बंबई में सड़कों तथा लेन्स का जाल बिछाया गया। न्यायालय, स्कूल तथा शिक्षा के केन्द्र खोले गये।

(iii) अंग्रेजों ने बंबई में सूती वस्त्र की अनेक मिलें स्थापित की जिनमें आसपास के राज्यों तथा गाँवों से आकर लोग बसने लगे।
(iv) 1850 के दशक में प्रथम रेलवे लाइन बंबई से थाणे तक बिछाई गई। इसने बंबई की जीवन रेखा बनकर प्रगति में योगदान दिया।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित पदों का संक्षिप्त परिचय दीजिए :
(i) शहरीकरण (Urbanisation)
(ii) दरगाह (Dargah).
(iii) खानगाह (Khanqah)
(iv) ईदगाह (Idgah)
(v) कुल-दे-सेक (Cul-de-sac)
उत्तर:
(i) शहरीकरण (Urbanisation) : ऐसी प्रक्रिया जिसमें अधिक से अधिक लोग शहरों और कस्बों में जाकर रहने लगते हैं।

(ii) वरगाह (Dargah) : सूफी संत का मकबरा।

(iii) खानकाह (Khanqah) : यात्रियों के लिए विश्राम घर और ऐसा स्थान जहाँ लोग आध्यात्मिक मामलों पर चर्चा करते हैं, संतों का आशीर्वाद लेते हैं या नृत्य-संगीत कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं।

(iv) ईदगाह (Idgah) : मुसलमानों का खुला प्रार्थना स्थल जहाँ सार्वजनिक प्रार्थना और त्योहार आदि मनाए जाते हैं।

(v) कुल-दे-सेक (Kul-de-Sac) : ऐसा रास्ता जो एक जगह जाकर बंद हो जाता है।

प्रश्न 10.
‘पुनर्जागरण’ शब्द का साहित्यिक या शाब्दिक अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पुनर्जागरण शब्द का साहित्यिक अथवा शाब्दिक अर्थ है पुनः जन्म या दोबारा उत्पन्न होना। इस शब्द को यूरोप के इतिहास में पुराने यूनानी तथा रोमन कला एवं साहित्य के पुनःजन्म (Re-birth) के लिए किया जाता है। प्रायः ज्यादातर लोग इसका | इस्तेमाल उस समय के लिए करते हैं जब निर्माणकारी गतिविधियाँ तीव्रता से होती हैं।

प्रश्न 11.
क्यों और कौन सी अवधि को दिल्ली का पुनर्जागरण काल बताया जाता है?
उत्तर:
1824 में दिल्ली कॉलेज की स्थापना हुई जिसकी शुरुआत अठारहवीं सदी में मदरसे के रूप में हुई थी। इस संस्था ने विज्ञान और मानवशास्त्र के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात कर दिया। यहाँ मुख्य रूप से उर्दू भाषा में काम होता था। बहुत सारे लोग 1830 से 1857 की अवधि को दिल्ली का पुनर्जागरण काल बताते हैं।

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प्रश्न 12.
निम्नलिखित शब्दों/पदों के अर्थ लिखिए : (i) अमीर, (ii) गुलफरोशन
उत्तर:
(i) अमीर (Amir) : इसका अर्थ है कुलीन व्यक्ति। उदाहरणार्थ मुगल दरबार एवं साम्राज्य में अनेक अमीर लोग उपस्थित रहते या रहा करते थे।

(ii) गुलफरोशन (Gulfaroshan) : फूलों का त्योहार। अब भी प्रतिवर्ष हिंदुओं तथा मुसलमानों द्वारा महरौली के पास गुलफरोशन का त्योहार मनाया जाता है।

लघु उत्तरातमक प्रश्न

प्रश्न 1.
ब्रिटिश शासन काल में भारत के छोटे शहरों के पतन के विभिन्न कारणों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर:
भारत में छोटे शहरों के पतन के कारण (Causes of decline of India’s small cities):
(i) अठारहवीं सदी के आखिर में कलकत्ता, बैंबई और मद्रास का महत्त्व प्रेजिडेंसी शहरों के रूप में तेजी से बढ़ रहा था। ये शहर भारत में ब्रिटिश सत्ता के केंद्र बन गए थे। उसी समय बहुत सारे दूसरे शहर कमजोर पड़ते जा रहे थे। उदाहरणार्थ पश्चिमी समुद्र तट पर सूरत, दक्षिण में मछलीपटनम तथा श्रीरंगपटनम आदि।

(ii) खास चीजों के उत्पादन वाले बहुत सारे शहर इसलिए पिछड़ने लगे क्योंकि वहाँ जो चीजें बनती थीं उनकी माँग घट गई थी। जब व्यापार नए इलाकों में केंद्रित होने लगा तो पुराने व्यापारिक केंद्र और बंदरगाह पहली वाली स्थिति में नहीं रहे।

(iii) इसी प्रकार, जब अंग्रेजों ने स्थानीय राजाओं को हरा दिया और शासन के नए केंद्र पैदा हुए तो क्षेत्रीय सत्ता के पुराने केंद्र भी ढह गए।

प्रश्न 2.
पुरानी दिल्ली अथवा शाहजहानाबाद के अच्छे एवं बुरे बिंदुओं पर विचार-विमर्श कीजिए। (M.Imp.)
उत्तर:
1. पुरानी दिल्ली अथवा शाहजहाँनाबाद के अच्छे बिन्दु या आकर्षक विशेषताएँ (Good points or attractive features of Old Delhi or Shahjahanabad):
(i) इन सारी राजधानियों में सबसे शानदार राजधानी शाहजहाँ ने बसाई थी। शाहजहाँनाबाद की स्थापना 1639 में शुरू हुई। इसके भीतर एक किला-महल और बगल में सटा शहर था। लाल पत्थर से बने लाल किले में महल परिसर बनाया गया था। इसके पश्चिम की ओर 14 दरवाजों वाला पुराना शहर था।

(ii) चाँदनी चौक और फैज बाजार की मुख्य सड़कें इतनी चौड़ी थीं कि वहाँ से शाही यात्राएँ आसानी से निकल सकती थीं। चाँदनी चौक के बीचोंबीच नहर थी।

(iii) घने मोहल्लों और दर्जनों बाजारों से घिरी जामा मसजिद भारत की सबसे विशाल और भव्य मसजिदों में से एक थी। उस समय पूरे शहर में इस मसजिद से ऊंचा कोई स्थान नहीं था।

II. पुरानी दिल्ली अथवा शाहजहाँनाबाद के बुरे बिंदु या आकर्षणविहीन विशेषताएं (Bad points or non-attractive features of Old Delhi or Shahjahanabad):
(i) दिल्ली को अनेक लोग कई दृष्टियों से अच्छा शहर नहीं मानते क्योंकि यह आदर्श शहर नहीं था। इसके ऐशो-आराम भी सिर्फ कुछ लोगों के हिस्से में आते थे। अमीर और गरीब के बीच फ़ासला बहुत गहरा था।

(ii) हवेलियों के बीच गरीबों के असंख्य कच्चे मकान होते थे। शायरी और नृत्य संगीत की रंग-बिरंगी दुनिया आमतौर पर सिर्फ मर्दो के मनोरंजन का साधन थी।

(iii) त्योहारों और जलसे-जुलूसों में जब-जब टकराव भी फूट पड़ते थे, सो अलग।

(iv) 1857 के बाद यह सब कुछ बदल गया। उस साल हुए विद्रोह के दौरान विद्रोहियों ने बहादुर शाह जफ़र को विद्रोह का नेतृत्व संभालने के लिए मजबूर कर दिया। चार महीने तक दिल्ली विद्रोहियों के नियंत्रण में रही।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ब्रिटिश शासन काल में कलकत्ता (अब का कोलकाता) की नींव रखने, योजना एवं विकास की चर्चा कीजिए।
अथवा
निम्नलिखित पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए:
(i) कलकत्ता का निर्माण (नींव डाली गई) (The Foundation of Calcutta)
(ii) लाई वेलेजली के उपरांत कलकत्ता की योजना एवं लाटरी कमेटी की भूमिका (Planning of Calcutta after Lord Wellesley and Role of Lottery Committeel
(iii) कलकत्ता की नगर योजना एवं स्वास्थ्य की भूमिका (Role of Health and Town Planning of Calcutta
उत्तर:
1. कलकत्ता की योजना कैसे शुरू हुई एवं इसका महत्त्व (How did the foundation of Calcutta begin and its importance) : 1. कलकत्ता (कोलकाता) हमारे पश्चिम बंगाल राज्य की राजधानी है। यह शहर अंग्रेजों द्वारा तीन गाँवों सुतानारी, कालिकाता तथा गोविंदपुर की जमीन पर सन् 1698 ई. में बसाया गया। प्रारंभ में अंग्रेज कलकत्ता में अपनी व्यापारिक बस्ती को ‘फोर्ट विलियम’ कहते थे। यहाँ पर गोदाम, दफ्तर तथा कर्मचारियों के घर (निवास स्थल) होते थे लेकिन यहाँ किसी वस्तु का उत्पादन नहीं होता था।

2. दक्षिण भारत में फ्रांसीसियों को पराजित करने के बाद मद्रास (चेन्नई) के स्थान पर कलकत्ता अंग्रेजों की दिन-प्रतिदिन की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनता गया। एक तरह से 1757 से लेकर 1911 तक कलकत्ता ब्रिटिश भारत की राजधानी रहा। 1911 के बाद लार्ड हार्डिंग के कार्यकाल में दिल्ली को राजधानी बनाया गया। कोलकाता में योजनाबद्ध तरीके से अंग्रेजों, जमींदारों, सर्वसाधारण लोगों के निवास के लिए बस्तियाँ बसाई गई। प्रायः सिविल लाइंस के क्षेत्र यूरोपियों और अंग्रेजों के रहने के लिए निर्धारित थे। इस क्षेत्र में बड़ी-बड़ी सरकारी और गैर-सरकारी इमारतें, पुस्तकालय, समुदाय भवन, संग्रहालय आदि बनाए गए।

II. लार्ड वेलेजली तथा लॉटरी कमेटी (Lord wellesely and Lottery Committee):
कलकत्ता में नगर नियोजन को अपनाया गया। वास्तव में कलकत्ता शहर तीन गाँवों सुतानाटी, कालिकाता और गोविंदपुर को मिलाकर बनाया गया था। अंग्रेजों ने अनेक क्षेत्रों से पुराने बुनकरों और कारीगरों को हटने का आदेश दिया। शहर के बीचोंबीच नए बनाए गए फोर्ट वि आस-पास के विशाल मैदान को खाली जगह के रूप में छोड़ दिया गया। लार्ड वेलेजली ने 18वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में अपने लिए गवर्नमेंट हाउस के नाम से एक विशाल महल बनवाया जो अंग्रेजी सत्ता का प्रतीक माना जाने लगा। वेलेजली कलकत्ता के आस-पास के जंगलों. गंदे तालाबों, जल निकासी की खस्ता हालान और बदबू फैलाने वाले गंदे पानी के ठहराव को देखकर बहुत परेशान हो गया।

स्वच्छता की दृष्टि से शहर के बीच-बीच में खुले स्थान छोड़े गए। अनेक बाजारों, घाटों, कब्रिस्तानों और चमड़े साफ करने की इकाइयों को हटा दिया गया। शहर को साफ करने के लिए 1817 में ‘लॉटरी कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने शहर में स्वास्थ्य और सफाई के लिए एक नया नक्शा बनवाया। सड़क निर्माण और अवैध बस्तियों को हटाने का कार्य शुरू किया गया। भयंकर बीमारियों के दिनों में सरकार ने बड़ी मात्रा में स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करके कलकत्तावासियों की सहायता की। जिन बस्तियों में सूर्य की रोशनी और साँस के लिए हवा का इंतजाम नहीं था, वहाँ गंदी बस्तियों को उखाड़ फेंकने का कार्य किया गया। तीनों औपनिवेशिक शहरों में नियोजन कार्य के अंतर्गत विशाल व भव्य इमारतें बनाई गई।

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III. सफाई, स्वास्थ्य एवं कलकत्ता में नगर योजना तथा प्रशासनिक केंद्र (Cleanliness. Health, Planning of Calcutta as a town and its role as an administrative centre):
(i) आधुनिक नगर नियोजन की शुरुआत औपनिवेशिक शहरों से हुई। इस प्रक्रिया में भूमि उपयोग और भवन निर्माण के नियमन के जरिए शहर के स्वरूप को परिभाषित किया गया। इसका एक मतलब यह था कि शहरों में लोगों के जीवन को सरकार ने नियंत्रित करना शुरू कर दिया था। इसके लिए एक योजना तैयार करना और पूरी शहरी परिधि का स्वरूप तैयार करना जरूरी था।

(ii) राजनीतिक संघर्ष का प्रारंभ (Beginning of Political Struggle) : इसकी कई वजह थीं कि अंग्रेजों ने बंगाल में अपने शासन के शुरू से ही नगर नियोजन का कार्यभार अपने हाथों में क्यों ले लिया था। एक फौरी वजह तो रक्षा उद्देश्यों से संबंधित थी। 1756 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने कलकत्ता पर हमला किया और अंग्रेज व्यापारियों द्वारा मालगोदाम के तौर पर बनाए गए छोटे किले पर कब्जा कर लिया।

(iii) कंपनी द्वारा किलाबंदी (Fortification by Company): कुछ समय बाद, 1757 में प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दौला की हार हुई। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक ऐसा नया किला बनाने का फैसला लिया जिस पर आसानी से हमला न किया जा सके।

(iv) नगर नियोजन (Town Planning) : कलकत्ता में नगर-नियोजन का इतिहास केवल फोर्ट विलियम और मैदान के निर्माण के साथ पूरा होने वाला नहीं था। 1789 में लॉर्ड वेलेजली गवर्नर जनरल बने। उन्होंने कलकत्ता में अपने लिए गवर्नमेंट हाउस के नाम से एक महल बनवाया।

उपनिवेशवाद और शहर Class 8 HBSE Notes

1. प्रेजिडेंसी (Presidency) : शासन की सुविधा के लिहाज से औपनिवेशिक भारत को तीन “प्रेजिडेंसी” (बंबई, मद्रास और बंगाल) में बाँट दिया गया था। ये तीनों प्रेजिडेंसी सूरत, मद्रास और कलकत्ता में स्थित ईस्ट इंडिया कंपनी की “फैक्ट्रियों” (व्यापारिक चौकियों) को ध्यान में रखकर बनायी गई थीं।

2. शहरीकरण (Urbanisation) : वह प्रक्रिया जिसमें छोटे-छोटे कस्बों तथा गाँवों के स्थान पर शहरों की आबादी तथा संख्या बढ़ती जाती है। प्रतिदिन ज्यादा और ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़ करके शहरों में बसते जाते हैं।

3. शहरीकरण का विघटन एवं पतन (De-Urbanisation) : शहरों या बड़े पुराने कस्बों का प्राकृतिक, राजनीतिक एवं अन्य – दूसरे कारणों से पतन एवं विघटन की प्रक्रिया, गैर-शहरीकरण या शहरों का विघटन या पतन कहलाता है।

4. बरगाह (Dargah): सूफी संत का मकबरा।

5. खानकाह (Khangah) : यात्रियों के लिए विश्राम घर और ऐसा स्थान जहाँ लोग आध्यात्मिक मामलों पर चर्चा करते हैं, संतों का आशीर्वाद लेते हैं या नृत्य-संगीत कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं।

6. ईदगाह (Idgah) : मुसलमानों का खुला प्रार्थना स्थल जहाँ सार्वजनिक प्रार्थना और त्योहार होते हैं।

7. कुल-ने-सेक (Cul-de-Sac) : ऐसा रास्ता जो एक जगह जाकर बंद हो जाता है।

8. दरयागंज (Daryaganj) : दो शब्दों के संगम से यह एक शब्द बना है। वे शब्द हैं-दरया तथा गंज। दरया का अर्थ है नदिया तथा गंज का अर्थ है- बाजार। अर्थात् दरयागंज का अर्थ हुआ नदी के समीप का बाजार।

9. भीर ताकी मीर (Mir Taqi Mir) : वह 18वीं शताब्दी का एक प्रसिद्ध उर्दू कवि था।

10. मिर्जा गालिब (Mirza Galib) : वह 18वीं शताब्दी का दिल्ली शहर का एक प्रसिद्ध उर्दू कवि था।

11. गुलफरोशान (Gulfaroshan) : फूलों का त्योहार।

12. पुनर्जागरण (Renaissance) : इसका शाब्दिक अर्थ होता है कला और ज्ञान का पुनर्जन्म। यह शब्द ऐसे दौर के लिए इस्तेमाल होता है जब बहुत बड़े पैमाने पर रचनात्मक गतिविधियाँ होती हैं।

13. हेनरी बेकर\(Henry Baker): वह 19वीं तथा 20वीं शताब्दियों में एक अंग्रेज स्थापत्य कलाकार (Architect) था।

14. भारत का विभाजन (Partition of India) : 14-15 अगस्त, 1947 की आधी रात को भारत का विभाजन हिन्दुस्तान (भारत) तथा पाकिस्तान के नामों से हो गया था।

15. शाहजहांनाबाद (Shahjahanabad) : महान मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा निर्मित दिल्ली शहर का वह भाग जो पुरानी दिल्ली या चारदीवारी के भीतर बसाया गया था, शाहजहानाबाद कहलाता है।

16. निजामुद्दीन औलिया (Nizamuddin Auliya) : दिल्ली का महान सूफी संत।

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17. चांदनी चौक (Chandni Chowk) : दिल्ली का शानदार, महान ऐतिहासिक बाजार।

18. अमीर (Amir) : एक कुलीन व्यक्ति (Nobleman)

19. फैक्ट्रियाँ (Factories) : व्यापारिक चौकियाँ। यूरोपीय कंपनियों की व्यापारिक चौकियाँ ही फैक्ट्रियों कहलाती थीं। यहाँ कारखानों की भाँति कोई वस्तु पैदा नहीं की जाती थी। यहाँ कंपनी के कार्यालय, गोदाम तथा कर्मचारियों आदि के निवास स्थान होते थे।

20. कलकत्ता (अब कोलकाता) ब्रिटिश भारत की राजधानी रहा : 1773 से 1911 तक।

21. महारानी विक्टोरिया को भारत की सम्राज्ञी घोषित करने हेतु वायसराय लिटन ने इलाहाबाद में एक शानदार दरबार – आयोजित किया था : 1877।

22. दिल्ली ब्रिटिश भारत की राजधानी बनाई गई थी। 1911

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