Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Solutions Chapter 13 उत्पादन तथा लागत

पाठयपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्पादन फलन की संकल्पना को समझाइए।
उत्तर:
उत्पादन फलन से अभिप्राय भौतिक आगतों और अधिकतम संभावित निर्गत के तकनीकी संबंध से है। अर्थात् उत्पादन फलन (q) = f (L, K)
यहाँ f = फलन
L = श्रम की भौतिक इकाइयाँ
K = पूँजी की भौतिक इकाइयाँ
उत्पादन फलन दो प्रकार के हो सकते हैं-

  • आगतों का स्थिर अनुपात उत्पादन फलन
  • आगतों का परिवर्ती अनुपात उत्पादन फलन

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत

प्रश्न 2.
एक आगत का कुल उत्पाद क्या होता है?
उत्तर:
एक आगत (Input) का कुल उत्पाद उस आगत की सभी इकाइयों से प्राप्त कुल निर्गत (Output) है यदि अन्य आगतों को स्थिर रखा जाता है। अन्य शब्दों में, उत्पादन प्रक्रिया में प्रयोग हुई परिवर्ती कारक की प्रत्येक इकाई के उत्पादन का योग कुल उत्पाद है। अर्थात्
TP = \(\sum_{i=1}^{n} \mathrm{MP}\)
एक परिवर्ती कारक की सभी इकाइयों के सीमांत उत्पाद (MP) को जोड़कर हम कुल उत्पाद (TP) प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न 3.
एक आगत का औसत उत्पाद क्या होता है?
उत्तर:
एक आगत का औसत उत्पाद उस आगत के कुल उत्पाद को परिवर्ती आगत की इकाइयों से विभाजित करने से प्राप्त उत्पाद है। इस प्रकार,
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प्रश्न 4.
एक आगत का सीमांत उत्पाद क्या होता है?
उत्तर:
एक आगत का सीमांत उत्पाद उस आगत की अतिरिक्त इकाई में परिवर्तन करने से कुल उत्पाद में होने वाला परिवर्तन है। इस प्रकार,
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प्रश्न 5.
एक आगत के सीमांत उत्पाद तथा कुल उत्पाद के बीच संबंध समझाइए।
उत्तर:
परिवर्ती अनुपातों के नियम के अनुसार सीमांत उत्पाद और कुल उत्पाद में महरा संबंध है और सीमांत उत्पाद के कारण ही कुल उत्पाद में परिवर्तन होता है। सीमांत उत्पाद और कुल उत्पाद तीन अवस्थाओं से गुजरता है-

  • प्रथम अवस्था में, जब सीमांत उत्पाद बढ़ता है तो कुल उत्पाद अधिक दर से बढ़ता है।
  • द्वितीय अवस्था में, जब सीमांत उत्पाद घटता है तो कुल उत्पाद घटती हुई दर से बढ़ता है।
  • तृतीय अवस्था में, जब सीमांत उत्पाद ऋणात्मक होता है तो कुल उत्पाद भी घटता है।

इस संबंध को हम निम्न तालिका द्वारा स्पष्ट कर सकते हैं-

श्रमिकों की संख्यासीमांत उत्पादकुल उत्पाद
1100100
2120220
3130350
4100450
560510
620530
700530
8-10520

प्रश्न 6.
अल्पकाल तथा दीर्घकाल की संकल्पनाओं को समझाइए।
उत्तर:
अल्पकाल समय की वह अवधि है जिसमें उत्पादन के कुछ कारक स्थिर और कुछ परिवर्ती होते हैं, जिनके फलस्वरूप उत्पादन में परिवर्तन एक सीमा में ही किया जा सकता है। दीर्घकाल समय की वह अवधि है जिसमें उत्पादन के सभी कारक परिवर्ती होते हैं, जिसके फलस्वरूप उत्पादन में परिवर्तन वांछित मात्रा में किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
हासमान सीमांत उत्पाद का नियम क्या है?
उत्तर:
हासमान सीमांत उत्पाद का नियम यह बताता है कि जब स्थिर कारकों (Constant Factors) के साथ परिवर्ती कारक (Variable Factors) की मात्रा में वृद्धि की जाती है तो एक सीमा के पश्चात् कुल उत्पाद घटती दर से प्राप्त होते हैं।

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प्रश्न 8.
परिवर्ती अनुपात का नियम क्या है?
उत्तर:
परिवर्ती अनुपात का नियम यह बताता है कि जब स्थिर आगतों के साथ परिवर्ती आगत की मात्रा में वृद्धि की जाती है, तो पहले औसत तथा सीमांत उत्पाद एक सीमा तक बढ़ेंगे और उसके पश्चात् घटने लगेंगे।

प्रश्न 9.
एक उत्पादन फलन स्थिर पैमाने के प्रतिफल को कब संतुष्ट करता है?
उत्तर:
एक उत्पादन फलन स्थिर पैमाने के प्रतिफल को उस समय संतुष्ट करता है, जब सभी आगतों की इकाइयों में निश्चित अनुपात में वृद्धि करने से कुल उत्पाद में भी उसी अनुपात में वृद्धि हो।

प्रश्न 10.
एक उत्पादन फलन वर्धमान पैमाने के प्रतिफल को कब संतुष्ट करता है?
उत्तर:
एक उत्पादन फलन वर्धमान पैमाने के प्रतिफल को उस समय संतुष्ट करता है, जब कुल उत्पाद में उस अनुपात से अधिक वृद्धि होती है जिस अनुपात में आगतों को बढ़ाया जाता है।

प्रश्न 11.
एक उत्पादन फलन ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल को कब संतुष्ट करता है?
उत्तर:
एक उत्पादन फलन ह्रासमान पैमाने के प्रतिफल को उस समय संतुष्ट करता है, जब कुल उत्पाद में उस अनुपात से कम वृद्धि होती है जिस अनुपात में आगतों को बढ़ाया जाता है।

प्रश्न 12.
लागत फलन की संकल्पनाओं को संक्षिप्त में समझाइए।
उत्तर:
लागत फलन एक निर्गत स्तर और उसकी न्यूनतम लागत के संबंध को दर्शाता है। लागत फलन को निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है
C = f(Q, P, T, K………) यहाँ C = कुल लागत, f= फलन, Q = निर्गत, P = आगतों की कीमतें, T = उत्पादन तकनीक, K = मशीनरी।

प्रश्न 13.
एक फर्म की कुल स्थिर लागत, कुल परिवर्ती लागत तथा कुल लागत क्या हैं? वे किस प्रकार संबंधित हैं?
उत्तर:
कुल स्थिर लागत से हमारा अभिप्राय उन लागतों से है जो विभिन्न उत्पादन स्तरों पर एक-समान रहती हैं। कुल परिवर्ती लागत से हमारा अभिप्राय उन लागतों से है जो उत्पादन में परिवर्तन के साथ-साथ परिवर्तित होती हैं। कुल लागत से हमारा अभिप्राय उन सभी लागतों से है जिसका संबंध एक वस्तु के उत्पादन से है। कुल लागत, कुल स्थिर लागत और कुल परिवर्ती लागत का जोड़ है। इस प्रकार,
कुल लागत = कुल स्थिर लागत + कुल. परिवर्ती लागत

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प्रश्न 14.
एक फर्म की औसत स्थिर लागत, औसत परिवर्ती लागत तथा औसत लागत क्या है, वे किस प्रकार संबंधित हैं?
उत्तर:
औसत स्थिर लागत से अभिप्राय प्रति इकाई स्थिर लागत से है। कुल स्थिर लागत को उत्पादन की मात्रा (इकाइयों) से भाग देने पर औसत स्थिर लागत प्राप्त होती है। अर्थात्
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औसत परिवर्ती लागत से अभिप्राय प्रति इकाई परिवर्ती लागत से है। कुल परिवर्ती लागत को उत्पादन की मात्रा (इकाइयों) से भाग देने पर औसत परिवर्ती लागत प्राप्त होती है। अर्थात्
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औसत लागत से अभिप्राय प्रति इकाई उत्पादन लागत से है। कुल लागत को उत्पादन की मात्रा (इकाइयों) से भाग देने पर औसत लागत प्राप्त होती है। अर्थात्
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इस प्रकार औसत लागत, औसत स्थिर लागत और औसत परिवर्ती लागत का योग है।

प्रश्न 15.
क्या दीर्घकाल में कुछ स्थिर लागत हो सकती है? यदि नहीं तो क्यों?
उत्तर:
दीर्घकाल में कोई भी लागत स्थिर नहीं हो सकती, क्योंकि दीर्घकाल वह अवधि है जिसमें सभी आगत परिवर्ती हो जाते हैं।

प्रश्न 16.
औसत स्थिर लागत वक्र कैसा दिखता है? यह ऐसा क्यों दिखता है?
उत्तर:
औसत स्थिर लागत वक्र एक आयताकार अतिपरवलय (Rectangular Hyperbola) होता है। यदि हम निर्गत (उत्पादन) के किसी भी मूल्य को उससे संबंधित औसत स्थिर लागत से गुणा करते हैं, तब हम कुल स्थिर लागत प्राप्त करते हैं। औसत स्थिर लागत वक्र को संलग्न रेखाचित्र द्वारा दर्शाया गया है। औसत स्थिर लागत वक्र का आकार आयताकार अतिपरवलय होता है क्योंकि इस वक्र के विभिन्न बिंदुओं पर वक्र के नीचे कुल क्षेत्रफल समान रहता है।
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प्रश्न 17.
अल्पकालीन सीमांत लागत, औसत परिवर्ती लागत तथा अल्पकालीन औसत लागत वक्र कैसे दिखाई देते हैं?
उत्तर:
अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र, औसत परिवर्ती लागत वक्र और अल्पकालीन औसत लागत वक्र-ये तीनों वक्र U आकार के होते हैं, परंतु इनका यह आकार एक-समान नहीं होता। ऐसा परिवर्ती अनुपातों के नियम के लागू होने के कारण होता है। इन लागत वक्रों को संलग्न रेखाचित्र द्वारा दर्शाया गया है। संलग्न रेखाचित्र से यह स्पष्ट है कि एक सीमा तक ये तीनों वक्र नीचे गिरते हैं और फिर ऊपर उठने लगते हैं। अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र तेजी से नीचे गिरता है और तेजी से ऊपर उठता है। ऊपर उठते हुए यह वक्र औसत परिवर्ती लागत वक्र और अल्पकालीन औसत लागत वक्र को उनके न्यूनतम बिंदुओं पर काटता है।
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औसत परिवर्ती लागत और अल्पकालीन औसत परिवर्ती लागत वक्र धीरे-धीरे गिरते हैं और फिर धीरे-धीरे ऊपर उठते हैं। प्रारंभिक अवस्था में तीनों वक्रों में अधिक अंतर होता है लेकिन बाद में यह अंतर कम होता जाता है परंतु ये वक्र कभी-भी एक-दूसरे को स्पर्श नहीं करते।

प्रश्न 18.
क्यों अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र औसत परिवर्ती लागत वक्र को काटता है, औसत परिवर्ती लागत वक्र के न्यूनतम बिंदु पर?
उत्तर:
अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र और औसत परिवर्ती लागत वक्र दोनों ही ‘U’ आकार के होते हैं क्योंकि परिवर्ती अनुपातों का नियम लागू होता है। प्रारंभिक अवस्था में दोनों वक्र नीचे गिरते हुए होते हैं और एक सीमा के बाद दोनों ऊपर उठते हुए होते हैं। लेकिन सीमांत लागत के बढ़ने और घटने की दर औसत परिवर्ती लागत के बढ़ने और घटने की दर से अधिक होती है। इसलिए सीमांत लागत वक्र प्रारंभ में औसत परिवर्ती लागत वक्र से नीचे होता है और कुछ सीमा के बाद उठते हुए औसत लागत वक्र को न्यूनतम स्तर पर काटते हुए ऊपर उठता है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
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प्रश्न 19.
किस बिंदु पर अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्र को काटता है? अपने उत्तर के समर्थन में कारण बताइए।
उत्तर:
अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कर सकते हैं। रेखाचित्र से यह स्पष्ट होता है कि प्रारंभिक अवस्था में अल्पकालीन औसत लागत वक्र और अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र दोनों ही नीचे गिरते हुए होते हैं, लेकिन अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्र की तुलना में तेजी से गिरता है। अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र अल्पकालीन औसत लागत वक्र की तुलना में अधिक ऊपर उठता है। ऊपर उठते हुए अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र, अल्पकालीन औसत लागत वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ता जाता है, दोनों ही वक्र ऊपर उठते हैं परंतु अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र तेजी से ऊपर उठता है।
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प्रश्न 20.
अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र ‘U’ आकार का क्यों होता
उत्तर:
अल्पकालीन सीमांत लागत (MC) वक्र ‘U’ आकार का इसलिए होता है क्योंकि अल्पकाल में परिवर्ती अनुपातों का नियम लागू होता है। परिवर्ती अनुपातों के नियम के कारण सीमांत उत्पाद प्रारंभ में तेजी से बढ़ता है और एक सीमा के बाद सीमांत उत्पाद गिरने लगता है। सीमांत उत्पाद वक्र उल्टे ‘U’ आकार का होता है। जबकि अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र का आकार ‘U’ की तरह होता है जो यह दर्शाता है कि प्रारंभिक अवस्था में सीमांत लागत गिरती है और बाद में उठती है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
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प्रश्न 21.
दीर्घकालीन सीमांत लागत तथा औसत लागत वक्र कैसे दिखते हैं?
उत्तर:
दीर्घकाल में एक फर्म के सीमांत लागत वक्र और औसत लागत वक्र पैमाने के प्रतिफल पर निर्भर करते हैं। पैमाने के प्रतिफल की तीन अवस्थाएँ होती हैं-वर्धमान प्रतिफल, स्थिर प्रतिफल और ह्रासमान प्रतिफल। इन अवस्थाओं के कारण दीर्घकाल में औसत लागत वक्र और सीमांत लागत वक्र ‘U’ आकार का होता है, लेकिन अल्पकालीन औसत लागत वक्र और सीमांत लागत वक्र की तुलना में दीर्घकालीन औसत लागत व सीमांत लागत वक्र कम गहरे अर्थात् अधिक चपटे होते हैं। दीर्घकालीन औसत लागत वक्र तश्तरी (Dish) का आकार भी ग्रहण कर सकता है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
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प्रश्न 22.
निम्नलिखित तालिका श्रम का कुल उत्पादन अनुसूची देती है। तदनुरूप श्रम का औसत उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद अनुसूची निकालिए।

L012345
कुल उत्पाद01535504048

हल
औसत उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद अनुसूची

श्रम की इकाइयाँ (L)कुल उत्पादऔसत उत्पादसीमांत उत्पाद
0000
1151515
23517.520
35016.6715
4401010
5489.68

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प्रश्न 23.
नीचे दी हुई तालिका श्रम का औसत उत्पाद अनुसूची बताती है। कुल उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद अनुसूची निकालिए, जबकि श्रम प्रयोगता के शून्य स्तर पर यह दिया गया है कि कुल उत्पाद शून्य है।

L123456
कुल उत्पाद2344.2543.5

हल
कुल उत्पाद तथा सीमांत उत्पाद अनुसूची

श्रम की इकाइयाँ (L)औसत उत्पादकुल उत्पादसीमांत उत्पाद
0000
1222
2364
34126
44.25175
54203
63.5211

सूत्रों का प्रयोग : (i) कुल उत्पाद = औसत उत्पाद x श्रम की इकाइयाँ
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प्रश्न 24.
निम्नलिखित तालिका श्रम का सीमांत उत्पादं अनुसूची देती है। यह भी दिया गया है कि श्रम का कुल उत्पाद शून्य है। प्रयोग के शून्य स्तर पर श्रम के कुल उत्पाद तथा औसत उत्पाद अनुसूची की गणना कीजिए।

L123456
सीमांत उत्पाद357531

हल
कुल उत्पाद तथा औसत उत्पाद अनुसूची

श्रम की इकाइयाँ (L)सीमांत उत्पादकुल उत्पादऔसत उत्पाद
0000
1333
2584
37155
45205
53234.6
60244

सूत्रों का प्रयोग:
(i) कुल उत्पाद = सीमांत उत्पाद1 + सीमांत उत्पाद2 + ………+ सीमांत उत्पादn
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प्रश्न 25.
नीचे दी गई तालिका एक फर्म की कुल लागत अनुसूची दर्शाती है। इस फर्म का कुल स्थिर लागत क्या है? फर्म के कुल परिवर्ती लागत, कुल स्थिर लागत, औसत परिवर्ती लागत, अल्पकालीन औसत लागत तथा अल्पकालीन सीमांत लागत अनुसूची की गणना कीजिए।

Q0123456
कुल उत्पाद103045557090120

हल:
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सूत्रों का प्रयोग-
(i) कुल स्थिर लागत = शून्य उत्पादन पर कुल लागत

(ii) कुल परिवर्ती लागत = कुल लागत कुल स्थिर लागत
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प्रश्न 26.
निम्नलिखित तालिका एक फर्म के लिए कुल लागत अनुसूची देती है। यह भी दिया गया है कि औसत स्थिर लागत निर्गत की 4 इकाइयों पर 5 रुपए है। कुल परिवर्ती लागत, कुल स्थिर लागत, औसत परिवर्ती लागत, औसत स्थिर लागत, अल्पकालीन औसत लागत, अल्पकालीन सीमांत लागत अनुसूची फर्म के निर्गत के तदनुरूप मूल्यों के लिए निकालिए।

Qकुल लागत
150
265
375
495
5130
6185

हल:
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत 17
सूत्रों का प्रयोग
(i) कुल स्थिर लागत = शून्य उत्पादन पर कुल लागत

(ii) कुल परिवर्ती लागत = कुल लागत-कुल स्थिर लागत
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प्रश्न 27.
एक फर्म की अल्पकालीन सीमांत लागत अनुसूची निम्नलिखित तालिका में दी गई है। फर्म की स्थिर लागत 100 रुपए है। फर्म के कुल परिवर्ती लागत, कुल लागत, औसत परिवर्ती लागत तथा अल्पकालीन औसत लागत अनुसूची निकालिए।

Qअल्पकालीन सीमांत लागत
0
1500
2300
3200
4300
5500
6800

हल:
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत 19
सूत्रों का प्रयोग
(i) कुल परिवर्ती लागत = अल्पकालीन सीमांत लागत1 + अल्पकालीन सीमांत लागत2 +…….. + अल्पकालीन सीमांत लागतn

(ii) कुल लागत = कुल परिवर्ती लागत + कुल स्थिर लागत
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प्रश्न 28.
मान लीजिए, एक फर्म का उत्पादन फलन है, q = \(5 \mathrm{~L}^{\frac{1}{2}} \mathrm{~K}^{\frac{1}{2}}\) 100 इकाइयाँ L तथा 100 इकाइयाँ K द्वारा अधिकतम संभावित निर्गत निकालिए, जिसका उत्पादन फर्म कर सकती है।
हल:
उत्पादन फलन
q = \(5 \mathrm{~L}^{\frac{1}{2}} \mathrm{~K}^{\frac{1}{2}}\) = 100
यहाँ,
L = 100
K = 100
इस प्रकार,
q = \(5 \times 100^{\frac{1}{2}} \times 100^{\frac{1}{2}}\)
q = 5 x 10 x 10
= 500
अधिकतम संभावित निर्गत = 500 उत्तर

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत

प्रश्न 29.
मान लीजिए, एक फर्म का उत्पादन फलन है, q = 2L²K² 5 इकाइयाँ L तथा 2 इकाइयाँ K द्वारा अधिकतम संभावित निर्गत ज्ञात कीजिए, जिसका फर्म उत्पादन कर सकती है। शून्य इकाई L तथा 10 इकाई K द्वारा अधिकतम संभावित निर्गत क्या है, जिसका फर्म उत्पादन कर सकती है?
हल:
उत्पादन फलन-
q = 2L²K²
यहाँ,
L = 5
K = 2
इस प्रकार,
q = 2 x 5² x 2²
= 2 x 5 x 5 x 2 x 2
अधिकतम संभावित निर्गत = 200
यदि,
L = 0
K = 10
इस प्रकार,
q = 2L²K²
= 2 x 0 x 10²
= 2 x 0 x 0 x 10 x 10
= शून्य
अधिकतम संभावित निर्गत = शून्य उत्तर

प्रश्न 30.
एक फर्म के लिए शून्य इकाई L तथा 10 इकाइयाँ K द्वारा अधिकतम संभावित निर्गत निकालिए, जब इसका उत्पादन फलन है-q = 5L x 2K
हल:
उत्पादन फलन
q = 5L x 2K
यहाँ,
L = 0
K = 10
इस प्रकार,
q = 5 x 0 x 2 x 10
= शून्य
अधिकतम संभावित निर्गत = शून्य उत्तर

उत्पादन तथा लागत HBSE 12th Class Economics Notes

→ उत्पादन फलन-एक फर्म का उत्पादन फलन उपयोग में लाए गए आगतों तथा फर्म द्वारा उत्पादित निर्गतों के मध्य का संबंध है। उपयोग में लाए गए आगतों की विभिन्न मात्राओं के लिए यह निर्गत की अधिकतम मात्रा प्रदान कर सकता है, जिसका उत्पादन किया जा सकता है। उत्पादन फलन को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है
q = f(x1 + x2)
यह बताता है कि हम कारक 1 की x1 मात्रा तथा कारक 2 की x2 मात्रा का प्रयोग कर वस्तु की अधिकतम मात्रा q का उत्पादन कर सकते हैं।

→ कुल उत्पाद-किसी विशेष अवधि में कारकों की किसी विशेष मात्रा में फर्म द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की कुल .. मात्रा को कुल उत्पाद (TP) कहा जाता है।

→ औसत उत्पाद औसत उत्पाद निर्गत की प्रति इकाई परिवर्ती आगत के रूप में परिभाषित किया जाता है।

→ सीमांत उत्पाद-निर्गत के एक स्थिर कारक पर परिवर्ती कारक की एक अतिरिक्त इकाई लगाने से कुल उत्पाद में जो वृद्धि होती है, उसे सीमांत उत्पाद कहा जाता है।

→ परिवर्ती अनुपातों का नियम-परिवर्ती अनुपात का नियम बताता है कि जैसे-जैसे स्थिर कारक के साथ एक परिवर्ती कारक की अधिक-से-अधिक इकाइयों का प्रयोग किया जाता है तो एक स्थिति ऐसी अवश्य आ जाती है जब परिवर्ती कारक का अतिरिक्त योगदान अर्थात् परिवर्ती कारक का सीमांत उत्पादन कम होने लगता है।

→ कारक के प्रतिफल-यदि उत्पादक उत्पादन में परिवर्तन अन्य कारकों को स्थिर रखकर उत्पादन के केवल एक ही कारक में वृद्धि अथवा कमी के द्वारा करता है तथा इसके फलस्वरूप उत्पादन के कारकों के मिश्रण का अनुपात बदलता है तो उत्पादन और उत्पादन के कारकों के इस संबंध को कारक के प्रतिफल या परिवर्ती अनुपात का नियम कहते हैं।

→ उत्पादन की तीन अवस्थाएँ होती हैं-

प्रथम अवस्था बढ़ते (वर्धमान) प्रतिफल की है जब परिवर्ती कारक का सीमांत उत्पाद (MP) बढ़ रहा होता है।
दूसरी अवस्था घटते (हासमान) प्रतिफल की है जब परिवर्ती कारक का सीमांत उत्पाद (MP) घट रहा (किंतु धनात्मक) होता है।
तीसरी अवस्था ऋणात्मक प्रतिफल की है जब परिवर्ती कारक का सीमांत उत्पाद (MP) ऋणात्मक होता है। उत्पादक केवल दूसरी अवस्था में ही उत्पादन करेगा, प्रथम और तीसरी अवस्थाओं में नहीं।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 3 उत्पादन तथा लागत

→ कारक के प्रतिफल या परिवर्ती अनुपात के नियम की अवस्थाएँ-

  • कारक के वर्धमान (बढ़ते) प्रतिफल
  • कारक के समान प्रतिफल
  • कारक के ह्रासमान (घटते) प्रतिफल।

→ पैमाने के प्रतिफल पैमाने के प्रतिफल का संबंध सभी कारकों के समान अनुपात में होने वाले परिवर्तनों के फलस्वरूप कुल उत्पाद में होने वाले परिवर्तन से है।

→ पैमाने के प्रतिफल की तीन अवस्थाएँ-

  • पैमाने के वर्धमान (बढ़ते) प्रतिफल
  • पैमाने के ह्रासमान (घटते) प्रतिफल
  • पैमाने के स्थिर (समान) प्रतिफल।

→ औसत लागत-औसत लागत से अभिप्राय प्रति इकाई लागत से है।
या

→ औसत लागत औसत परिवर्ती लागत तथा औसत स्थिर लागत का जोड़ है। अर्थात्
AC = AVC + AFC
ध्यान रहे कि, AFC वक्र नीचे की ओर प्रवणता वाली होती है, जबकि AVC वक्र ‘U’ आकार की होती है।

→ सीमांत लागत-सीमांत लागत से अभिप्राय है एक इकाई का अधिक या कम उत्पादन करने से कुल लागत में होने वाला परिवर्तन।
MC = \(\)

→ अल्पकालीन सीमांत लागत, औसत परिवर्ती लागत तथा अल्पकालीन औसत लागत वक्र ‘U’ आकार के होते हैं।

→ अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र, औसत परिवर्ती लागत वक्र को नीचे से औसत परिवर्ती लागत के न्यूनतम बिंदु पर काटता है।

→ अल्पकालीन सीमांत लागत वक्र, अल्पकालीन औसत लागत वक्र को नीचे से अल्पकालीन औसत लागत के न्यूपर काटता है।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 10.1
निम्नलिखित हैलाइडों के नाम आईयूपीएसी ( IUPAC ) पद्धति से लिखिए तथा उनका वर्गीकरण ऐल्किल, ऐलिलिक, बेन्ज़िलिक (प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक) वाइनिल अथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए –
(i) (CH3)2CHCH(Cl)CH3
(ii) CH3CH2CH(CH3)CH(C2H5)Cl
(iii) CH3CH2C(CH3)2CH2I
(iv) (CH3)3CCH2CH(Br)C6H5
(v) CH3CH(CH3)CH(Br)CH3
(vi) CH3C(C2H5)CH2Br
(vii) CH3C(Cl)(C2H5)CH2CH3
(viii) CH3CH = C(Cl)CH2CH(CH3)2
(ix) CH3CH = CHC(Br)(CH3)2
(x) p-ClCH6CH4CH(CH3)2
(xi) m-ClCH2C6H4CH2C(CH3)3
(xii) o-Br-C6H4CH(CH3)CH2CH3
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 1

प्रश्न 10.2
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिए –
(i) CH3CH(Cl) CH(Br)CH3
(ii) CHF2CBrClF
(iii) ClCH2C≡CCH2Br
(iv) (CCl3)3CCl
(v) CH3C(p-ClC6H4)2CH(Br)CH3
(vi) (CH3)3CCH=CClC6H4I-P
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 2

प्रश्न 10.3
निम्नलिखित कार्बनिक हैलोजन यौगिकों की संरचना दीजिए-
(i) 2 – क्लोरो – 3 – मेथिलपेन्टेन
(ii) p-ब्रोमोक्लोरो बेन्जीन
(iii) 1 – क्लोरो-4 – एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iv) 2 – ( 2 – क्लोरोफेनिल) – 1 – आयोडोऑक्टेन
(v) 2 – ब्रोमोब्यूटेन
(vi) 4 – तृतीयक – ब्यूटिल – 3 – आयोडोहेप्टेन
(vii) 1- ब्रोमो – 4 – द्वितीयक ब्यूटिल – 2- मेथिल बेन्जीन
(viii) 1, 4-डाइब्रोमोब्यूट – 2 – ईन।
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों की संरचना निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 3

प्रश्न 10.4
निम्नलिखित में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक
(i) CH2Cl2
(ii) CHCl3
(iii) CCl4
उत्तर:
CH2Cl2, CHCl3 तथा CCl4 में से CH2Cl2 का द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक होगा क्योंकि CCl4 की चतुष्फलकीय ज्यामिति होने के कारण इसका द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है तथा CHCl3, का द्विध्रुव आघूर्ण CH2Cl2 से कम है क्योंकि इसमें तीसरे C-Cl बन्ध का बन्ध आघूर्ण, शेष दो C-Cl बन्धों के परिणामी बन्ध आघूर्ण के विपरीत होता है। अतः उसे कुछ मात्रा में निरस्त कर देता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 10.5
एक हाइड्रोकार्बन C5H10 अंधेरे में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता परन्तु सूर्य के तीव्र प्रकाश में केवल एक मोनोक्लोरो यौगिक C,H,CI देता है। हाइड्रोकार्बन की संरचना क्या है?
उत्तर:
यह हाइड्रोकार्बन केवल एक मोनो क्लोरो यौगिक C5H9Cl बनाता है। अतः इसके सभी हाइड्रोजन परमाणु समान हैं। इसलिए यह हाइड्रोकार्बन साइक्लोपेन्टेन है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 3a

प्रश्न 10.6
C4H9Br सूत्र वाले यौगिक के सभी समावयवी लिखिए।
उत्तर:
C4H9Br, ब्यूटेन का मोनोब्रोमो व्युत्पन्न है। अतः इसके चार समावयवी होंगे क्योंकि ब्यूटेन के एक संयोजी मूलकों की संख्या चार होती
है। ये समावयवी निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 4

प्रश्न 10.7
निम्नलिखित से 1- आयोडोब्यूटेन प्राप्त करने के लिए समीकरण दीजिए-
(i) 1- ब्यूटेनॉल
(ii) 1 – क्लोरोब्यूटेन
(iii) ब्यूट – 1- ईन
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 5

प्रश्न 10.8
उभयदंती नाभिकरागी ( नाभिकस्नेही ) क्या होते हैं? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
सायनाइड (:\(\overline{C}\)≡N) तथा नाइट्राइट (NO2) जैसे आयनों में दो नाभिकस्नेही केन्द्र होते हैं अतः इन्हें उभयदंती नाभिकस्नेही कहा जाता है | सायनाइड समूह दो अनुनादी संरचनाओं का संकर होता है। अतः यह दो भिन्न प्रकार के नाभिकरागी के रूप में कार्य करता है। HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 6अर्थात् कार्बन परमाणु से जुड़ने पर यह ऐल्किल सायनाइड तथा नाइट्रोजन परमाणु से जुड़ने पर आइसोसायनाइड देता है। इसी प्रकार नाइट्राइट आयन भी उभयदंती नाभिकरागी HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 7होता है। ऑक्सीजन के द्वारा जुड़ने पर यह ऐल्किल नाइट्राइट तथा नाइट्रोजन के द्वारा जुड़ने से नाइट्रोऐल्केन देता है।

इस प्रकार -CN तथा – NO2 उभयदंती नाभिकस्नेही होते हैं।
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प्रश्न 10.9
निम्नलिखित प्रत्येक युगलों (युग्मों) में से कौनसा यौगिक OH- के साथ SN2 अभिक्रिया में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा?
(i) CH3Br अथवा CH3I
(ii) (CH3)3CCI अथवा CH3Cl
उत्तर:
(i) CH3I, CH3Br की तुलना में OH के साथ SN2 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से करेगा क्योंकि C – I बन्ध में I के बड़े आकार के कारण C – Br बन्ध की तुलना में यह जल्दी टूट जाता है।

(ii) (CH3)3C-Cl की तुलना में CH3-Cl में OH के साथ SN2 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से होगी क्योंकि इसमें हैलोजन से जुड़े कार्बन परमाणु पर त्रिविम विन्यासी बाधा नहीं है।

प्रश्न 10.10
निम्नलिखित हैलाइडों के एथेनॉल में सोडियम हाइड्रॉक्साइड द्वारा विहाइड्रोहैलोजनन (विहाइड्रोहैलोजेनीकरण) के फलस्वरूप बनने वाली सभी ऐल्कीनों की संरचना लिखिए। इसमें से मुख्य ऐल्कीन कौनसी होगी ?
(i) 1- ब्रोमो -1 – मेथिलसाइक्लोहेक्सेन
(ii) 2 – क्लोरो-2 – मेथिलब्यूटेन
(iii) 2,2,3 – ट्राइमेथिल – 3 – ब्रोमोपेन्टेन।
उत्तर:
(i) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 9
इनमें मुख्य उत्पाद (b) है क्योंकि 1°H की तुलना में 2°H का निकलना आसान है इसका कारण हाइड्रोजन की क्रियाशीलता है जिसका क्रम निम्न प्रकार होता है – 1° < 2° < 3°
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 10

प्रश्न 10.11
निम्नलिखित परिवर्तन आप कैसे करेंगे?
(i) एथेनॉल से ब्यूट- 1 – आइन
(ii) एथीन से ब्रोमोएथेन
(iii) प्रोपीन से 1- नाइट्रोप्रोपेन
(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(v) प्रोपीन से प्रोपाइन
(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड
(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन
(viii) ब्यूट-1-ईन से ब्यूट – 2 – ईन
(ix) 1- क्लोरोब्यूटेन से n – ऑक्टेन
(x) बेन्जीन से बाइफेनिल
उत्तर:
(i) एथेनॉल से ब्यूट- 1 – आइन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 11
(ii) एथीन से ब्रोमोएथेन
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(iii) प्रोपीन से 1- नाइट्रोप्रोपेन
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(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
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(v) प्रोपीन से प्रोपाइन
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(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड
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(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन
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(viii) ब्यूट-1-ईन से ब्यूट – 2 – ईन
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(ix) 1- क्लोरोब्यूटेन से n – ऑक्टेन
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(x) बेन्जीन से बाइफेनिल
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प्रश्न 10.12
समझाइए क्यों –
(i) क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड तुलना में कम होता है?
(ii) ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय होते हुए भी जल में अमिश्रणीय हैं?
(iii) ग्रीन्यार अभिकर्मक का विरचन निर्जलीय अवस्थाओं में करना चाहिए ?
उत्तर:
(i) क्लोरोबेन्जीन में क्लोरीन का – I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव) बेन्जीन वलय की तरफ अनुनाद (+ M प्रभाव) (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) के द्वारा कुछ मात्रा में संतुलित हो जाता है। जबकि साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड में केवल – I प्रभाव है अतः क्लोरोबेन्जीन का C-CI बन्ध साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड के – C-CI बन्ध की तुलना में कम ध्रुवीय है। इसी कारण क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण, साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड की तुलना में कम होता है।

(ii) ऐल्किल हैलाइड (हैलोऐल्केन) ध्रुवीय होते हुए भी जल में अमिश्रणीय (लगभग अविलेय) होते हैं, क्योंकि हैलोऐल्केन को जल में घोलने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिससे कि हैलोऐल्केन के अणुओं के मध्य आकर्षण बल को तथा जल के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबंध को तोड़ा जा सके। लेकिन हैलोऐल्केन तथा जल के अणुओं के मध्य नए आकर्षण बल के कारण उत्सर्जित ऊर्जा कम होती है, क्योंकि ये आकर्षण बल जल के उपस्थित हाइड्रोजन आबंधों की तुलना में दुर्बल होते हैं अतः हैलोऐल्केन की जल में विलेयता नगण्य होती है अर्थात् ये जल में अमिश्रणीय हैं।

(iii) ग्रीन्यार अभिकर्मक जल से क्रिया करके विघटित हो जाता है तथा हाइड्रोकार्बन बनाता है अतः ग्रीन्यार अभिकर्मक का निर्माण निर्जलीय अवस्था में ही करना चाहिए।
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प्रश्न 10.13
फ्रेओन – 12, DDT, कार्बनटेट्राक्लोराइड तथा आयोडोफॉर्म के उपयोग दीजिए।
उत्तर:
फ्रेऑन (Freons) या CFC (क्लोरोफ्लुओरोकार्बन) (Chlorofluorocarbon) – फ्रेऑन ऐल्केन के क्लोरोफ्लुओरो व्युत्पन्न होते हैं।

विरचन-SbCl5 की उपस्थिति में CCl4 तथा C2Cl6 की क्रिया HF से कराने पर विभिन्न प्रकार के फ्रेऑन प्राप्त होते हैं।
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गुण- फ्रेऑन अत्यधिक स्थायी, निष्क्रिय तथा निर्विष (नॉन-टॉक्सिक) असंक्षारक (नॉन-कोरोसिव) गैस होते हैं तथा ये आसानी से द्रवित हो जाते हैं। ये रंगहीन व गंधहीन होते हैं तथा इनका क्वथनांक बहुत कम होता है।

उपयोग – फ्रेऑन ऐरोसोल प्रणोदक, प्रशीतक तथा वायु के शीतलन में प्रयुक्त किए जाते हैं। फ्रेऑन वायुमण्डल से होते हुए क्षोभमण्डल में विसरित हो जाते हैं, जहाँ पर ये मूलक श्रृंखला अभिक्रिया प्रारम्भ करके प्राकृतिक ओजोन संतुलन को अनियन्त्रित कर देते हैं।

फ्रेऑन अक्रिय विलायक के रूप में उपयोग में लिए जाते हैं। फ्रेऑन- 12(CF2Cl2) उद्योगों में सबसे अधिक मात्रा में प्रयुक्त किया जाता है।

p, p1-डाइक्लोरो डाइफेनिल ट्राइक्लोरोएथेन (p, p1-Dichloro Diphenyl Trichloroethane) (DDT)- विरचन – क्लोरोबेन्जीन तथा क्लोरैल के मिश्रण को सान्द्र H2SO4 की अल्प मात्रा के साथ गर्म करने पर DDT प्राप्त होता है।
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उपयोग – DDT एक प्रथम क्लोरीनीकृत कार्बनिक कीटनाशी है अतः इसे मुख्यतः मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों तथा टाइफस वाहक जुओं को समाप्त करने में प्रयुक्त किया जाता था। लेकिन DDT के अत्यधिक स्थायित्व, वसा में विलेयता तथा शीघ्र उपापचयन नहीं होने के कारण यह वसीय ऊतकों में एकत्रित तथा संग्रहित हो जाती है। कीटों की अनेक प्रजातियों में DDT के प्रति-प्रतिरोधकता विकसित हो गयी है तथा यह मछलियों के लिए अत्यधिक विषैली है । अतः इसके उपयोग को आजकल प्रतिबन्धित कर दिया गया है । लेकिन विश्व में अनेक स्थानों पर आज भी इसका उपयोग हो रहा है।

कार्बन टेट्राक्लोराइड (टेट्राक्लोरोमेथेन) (Carbon tetrachloride (Tetrachloromethane) (CCl4) –
(i) कार्बन टेट्राक्लोराइड को मुख्यतः प्रोपेन के क्लोरीनी अपघटन से बनाया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 24

(ii) CCl4 एक रंगहीन, रुचिकर गंधयुक्त, अज्वलनशील तथा भारी द्रव है। यह जल में अविलेय तथा कार्बनिक विलायकों में विलेय होता है।

(iii) CCl4 के भापीय जल अपघटन से फॉस्जीन बनती है।
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(iv) जलीय KOH से जल अपघटन कराने पर यह पोटेशियम कार्बोनेट देता है।
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(v) राइमर टीमान कार्बोक्सिलीकरण – CCl4 की क्रिया फीनॉल तथा क्षार के साथ करवाने पर सैलिसिलिक अम्ल प्राप्त होता है।
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(vi) उपयोग – कार्बन टेट्राक्लोराइड को प्रशीतक तथा ऐरोसॉल प्रणोदक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। यह एक अच्छा विलायक है अतः यह उद्योगों में ग्रीस को साफ करने तथा घरों में दाग-धब्बे हटाने में भी प्रयुक्त होता है। यह औषधि तथा फ्रेऑन के निर्माण में भी काम में आता है। CCl4 एक अग्निशामक भी होता है।

(vii) CCl4 के दुष्प्रभाव – CCl4 के सम्पर्क से तंत्रिका तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जिसके कारण चक्कर आना, उल्टी आना आदि प्रभाव होते हैं। इसकी अधिक मात्रा के कारण मनुष्य बेहोश हो जाता है, तथा मृत्यु हो सकती है। CCl4 के उद्भासन से हृदयगति अनियमित हो सकती है अथवा रुक जाती है। इसकी वाष्प के सम्पर्क के कारण आँखों में जलन उत्पन्न होती है। CCl4, यकृत का कैंसर भी उत्पन्न करता है।

कार्बनटेट्राक्लोराइड वायु में जाने पर ऊपरी वायुमण्डल में पहुँच कर ओजोन परत को विरल बना देती है। ओजोन परत के विरलीकरण से मनुष्यों का पराबैंगनी किरणों से उद्भासन बढ़ जाता है जिससे त्वचा का कैंसर, आँखों की बीमारियाँ तथा विकार उत्पन्न होते हैं। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर हो जाती है।

आयोडोफॉर्म (ट्राइआयोडो मेथेन) Iodoform (Trilodo-methane) CHl3

आयोडोफॉर्म का विरचन – एथेनॉल या एसीटोन की क्रिया आयोडीन तथा क्षार से करवाने पर पीले रंग का आयोडोफॉर्म प्राप्त होता है। इसे आयोडोफार्म परीक्षण कहते हैं।
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गुण- यह एक विशिष्ट गन्धयुक्त पीला क्रिस्टलीय ठोस है। यह जल अविलेय तथा कार्बनिक विलायकों में विलेय होता है। अन्य हैलोफॉर्म (CHCl3, CHBr3) से कम स्थायी होता है। इसका कारण आयोडीन का बड़ा आकार है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 29
इसी कारण आयोडोफॉर्म, AgNO3 विलयन के साथ, AgI का पीला अवक्षेप देता है जबकि शुद्ध अवस्था में CHCl3 की AgNO3 विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं होती ।

उपयोग – CHI3 का उपयोग पूतिरोधी (एन्टीसेप्टिक) के रूप में किया जाता है। इसका यह गुण वास्तव में इसके विघटन से मुक्त आयोडीन के कारण ही होता है। आयोडोफॉर्म की अरुचिकर गंध के कारण अब इसके स्थान पर आयोडीन युक्त अन्य दवाओं का उपयोग किया जाने लगा है।

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प्रश्न 10.14
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य कार्बनिक उत्पाद की संरचना लिखिए-
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उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 31

प्रश्न 10.15
निम्नलिखित अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 32
उत्तर:
यह एक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। n-BuBr-(n-ब्यूटिल ब्रोमाइड) प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड है अतः यह अभिक्रिया SN² क्रियाविधि से होगी तथा यह एक पद में ही सम्पन्न होती है एवं इसमें काल्पनिक संक्रमण अवस्था मानी जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 33

प्रश्न 10.16.
SN² प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता के आधार पर इन यौगिकों के समूहों को क्रमबद्ध कीजिए-
(i) 2 – ब्रोमो – 2 – मेथिलब्यूटेन, 1- ब्रोमोपेन्टेन, 2 – ब्रोमोपेन्टेन
(ii) 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2 – ब्रोमो – 2 – मेथिलब्यूटेन, 2- ब्रोमो – 3 – मेथिलब्यूटेन
(iii) 1- ब्रोमोब्यूटेन, 1- ब्रोमो-2, 2 – डाइमेथिलप्रोपेन, 1- ब्रोमो- 2- मेथिलब्यूटेन, 1- ब्रोमो – 3 – मेथिलब्यूटेन
उत्तर:
विभिन्न ऐल्किल हैलाइडों में SN² अभिक्रिया के लिए क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है- \(\stackrel{\circ}{1}>\stackrel{\circ}{2}>\stackrel{\circ}{3}\) तथा जब ऐल्किल हैलाइड समान प्रकार के होते हैं तो वह ऐल्किल हैलाइड जिसमें हैलोजनयुक्त कार्बन पर बड़ा समूह जुड़ा होता है तो वह त्रिविम विन्यासी बाधा उत्पन्न करता है जिससे उसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है। क्योंकि स्थूल (बड़ा) समूह आक्रमणकारी नाभिकरागी के लिए अवरोध उत्पन्न करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 34

प्रश्न 10.17.
C6H5CH2Cl तथा IMG में से कौनसा यौगिक जलीय KOH से शीघ्रता से जल अपघटित होगा?
उत्तर:
C6H5CH2Cl तथा HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 35 में से HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 36 का जलीय KOH से शीघ्रता से जल अपघटन होगा क्योंकि इसके जल अपघटन में बनने वाला मध्यवर्ती कार्बधनायन अधिक स्थायी होता है, क्योंकि इसमें दो बेन्जीन वलय के कारण अनुनाद अधिक होगा जबकि C6H5CH2Cl से बने कार्बधनायन में केवल एक बेन्जीनवलय ही अनुनाद में भाग लेती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 37

प्रश्न 10.18.
o- तथा m- समावयवियों की तुलना में p – डाइक्लोरोबेन्जीन का गलनांक उच्च होता है। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
p- डाइक्लोरोबेन्जीन की सममित संरचना के कारण इसके क्रिस्टल जालक में अणुओं का संकुलन सघन होता है अर्थात् इसमें अन्तराअणुक आकर्षण प्रबल होता है। अतः p-डाइक्लोरोबेन्जीन का गलनांक o- तथा m- समावयवियों की तुलना में उच्च होता है।
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प्रश्न 10.19.
निम्नलिखित परिवर्तन कैसे सम्पन्न किए जा सकते हैं?
(1) प्रोपीन से प्रोपेन- 1- ऑल
(2) एथेनॉल से ब्यूट- 1 – आइन
(3) 1- ब्रोमोप्रोपेन से 2 – ब्रोमोप्रोपेन
(4) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(5) बेन्जीन से 4 – ब्रोमोनाइट्रोबेन्जीन
(6) बेन्जिल ऐल्कोहॉल से 2 – फेनिल एथेनॉइक अम्ल
(7) एथेनॉल से प्रोपेन नाइट्राइल
(8) ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन
(9) 2 – क्लोरोब्यूटेन से 3, 4 – डाइमेथिलहेक्सेन
(10) 2 – मेथिल – 1- प्रोपीन से 2- क्लोरो-2 – मेथिलप्रोपेन
(11) एथिल क्लोराइड से प्रोपेनॉइक अम्ल
(12) ब्यूट – 1 – ईन से n – ब्यूटिल आयोडाइड
(13) 2 – क्लोरोप्रोपेन से 1- प्रोपेनॉल
(14) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफार्म
(15) क्लोरोबेन्जीन से p- नाइट्रोफीनॉल
(16) 2 – ब्रोमोप्रोपेन से 1- ब्रोमोप्रोपेन
(17) क्लोरोएथेन से ब्यूटेन
(18) बेन्जीन से डाइफेनिल
(19) तृतीयक – ब्यूटिल ब्रोमाइड से आइसो- ब्यूटिल ब्रोमाइड
(20) ऐनिलीन से फेनिल आइसोसायनाइड।
उत्तर:
उपर्युक्त परिवर्तन निम्न प्रकार सम्पन्न किए जाते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 39

प्रश्न 10.20
ऐल्किल क्लोराइड की जलीय KOH से अभिक्रिया द्वारा ऐल्कोहॉल बनती है लेकिन ऐल्कोहॉलिक KOH की उपस्थिति में ऐल्कीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। समझाइए |
उत्तर:
जब किसी ऐल्किल हैलाइड की क्रिया किसी नाभिकस्नेही या क्षार से करवाते हैं तो प्रतिस्थापन तथा विलोपन अभिक्रिया में प्रतिस्पर्धा होती है। इसमें कम ध्रुवीय विलायक जैसे ऐल्कोहॉल की उपस्थिति में विलोपन अभिक्रिया होकर मुख्य उत्पाद ऐल्कीन प्राप्त होती है क्योंकि ऐल्कोहॉल की कम ध्रुवता के कारण नाभिकस्नेही की सान्द्रता कम होगी। अतः ऐल्किल क्लोराइड से प्रोटोन (H+) तथा हैलोजन का विलोपन होकर ऐल्कीन बनती है जबकि अधिक ध्रुवीय विलायक जैसे जल में नाभिकस्नेही (\(\overline{O}\)H) की सान्द्रता अधिक होगी। अतः मुख्यतः प्रतिस्थापन होकर मुख्य उत्पाद ऐल्कोहॉल बनता है।

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विलोपन अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 40

प्रतिस्थापन अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 41

प्रश्न 10.21.
प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड C4H9Br (क), ऐल्कोहॉलिक KOH में अभिक्रिया द्वारा यौगिक (ख) देता है। यौगिक ‘ख’ HBr के साथ अभिक्रिया से यौगिक ‘ग’ देता है जो कि यौगिक ‘क’ का समावयवी है। जब यौगिक ‘क’ की अभिक्रिया सोडियम धातु से होती है तो यौगिक ‘घ’ C8H18 बनता है, जो n – ब्यूटिल ब्रोमाइड की सोडियम से अभिक्रिया द्वारा बने उत्पाद से भिन्न है । यौगिक ‘क’ का संरचना सूत्र दीजिए तथा सभी अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए।.
उत्तर:
अणुसूत्र C4H9Br से दो प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड संभव हैं।
CH3-CH2-CH2-CH2 – Br (n – ब्यूटिल ब्रोमाइड) तथा HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 42 (आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड)। प्रश्नानुसार, यौगिक ‘क’ n – ब्यूटिल ब्रोमाइड नहीं है अतः यह आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड होगा।
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अभिक्रियाओं के समीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 44

प्रश्न 10.22.
तब क्या होता है जब-
(i) n – ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ अभिकृत किया जाता है?
(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेन्जीन की अभिक्रिया मैग्नीशियम से होती है ?
(iii) क्लोरोबेन्जीन का जलअपघटन किया जाता है ?
(iv) एथिल क्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होती है ?
(v) शुष्क ईथर की उपस्थिति में मेथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से होती है?
(vi) मेथिल क्लोराइड की अभिक्रिया KCN से होती है ?
उत्तर:
(i) n – ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ अभिकृत कराने पर ß – विलोपन द्वारा ब्यूट- 1 – ईन बनती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 45

(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेन्जीन की अभिक्रिया मैग्नीशियम से कराने पर फेनिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड (ग्रीन्यार अभिकर्मक) बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 46

(iii) क्लोरोबेन्जीन के जलअपघटन से फीनॉल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 47

(iv) एथिल क्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होने पर नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया द्वारा एथिलऐल्कोहॉल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 48

(v) शुष्क ईथर की उपस्थिति में मेथिल ब्रोमाइड की क्रिया सोडियम से होने पर एथेन बनती है ( वुर्ज अभिक्रिया)।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 49

(vi) मेथिल क्लोराइड की KCN से अभिक्रिया होने पर मेथिल सायनाइड बनाता है (नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन ) ।
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HBSE 12th Class Chemistry हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन Intext Questions

प्रश्न 10.1.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए-
(i) 2-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टेन
(ii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iii) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन
(iv) 1, 4-डाइब्रोमोब्यूट-2-ईन
(v) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिलबेन्जीन।
उत्तर:
उपर्युक्त वौगिकों की संरचनाएँ अग्रलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 50

प्रश्न 10.2.
ऐल्कोहॉल तथा KI की अभिक्रिया में सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग क्यों नहीं करते?
उत्तर:
ऐल्कोहॉल के ऐल्किल आयोडाइड में परिवर्तन के लिए ऐल्कोहॉल तथा KI की अभिक्रिया में H2SO4 का प्रयोग नहीं किया जा सकता, क्योंक पहले यह KI से क्रिया करके उसे HI में परिवर्तित कर देता है, इसके बाद HI को I2 में आक्सीकृत कर देता है क्योंकि यह आक्सीकारक होता है।

प्रश्न 10.3.
प्रोपेन के विभिन्न डाइहैलोजन व्युत्पन्नों की संरचना लिखिए।
उत्तर:
प्रोपेन के डाइहैलोजन व्युत्पन्न चार होते हैं जिनकी संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 51

प्रश्न 10.4.
C5H12 अणुसूत्र वाले समावयवी ऐल्केनों में से उसको पहचानिए जो प्रकाश रासायनिक क्लोरीनन (क्लोरीनीकरण) पर देता है-
(i) केवल एक मोनो क्लोराइड
(ii) तीन समावयवी मोनो क्लोराइड
(iii) चार समावयवी मोनो क्लोराइड।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 52
क्योंकि इसमें सभी हाइड्रोजन परमाणु समान हैं, अतः इसके क्लोरीनीकरण से केवल एक मोनोक्लोराइड बनेगा।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 53
इसमें तीन प्रकार के  हाइड्रोजन परमाणु है जिन्हें a, b, c से दर्शाया गया है। अतः इन हाइड्रोजन परमाणुओं के प्रतिस्थापन से तीन समावयवी मोनोक्लोराइड बनेंगे।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 54
इसमें चार प्रकार के हाइड्रोज़न परमाणु हैं जिन्हें a, b, c तथा d से दर्शाया गया है, अतः इसके क्लोरीनीकरण से चार समावयवी मोनोक्लोराइड बनते हैं।

प्रश्न 10.5.
निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया के मुख्य मोनोहैलो उत्पाद की संरचना बनाइए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 55
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 56

प्रश्न 10.6.
निम्नलिखित यौगिकों को क्वथनांकों के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(i) ब्रोमोमेथेन, ब्रोमोफॉर्म, क्लोरोमेथेन, डाइब्रोमोमेथेन
(ii) 1-क्लोरोप्रोपेन, आइसोप्रोपिल क्लोराइ ड, 1-क्लोरोक्यूटन।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों के क्वथनांक का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
(i) क्लोरोमेथेन < ब्रोमोमेथेन < डाइब्रोमोमेथेन < ब्रोमोफार्म
क्योंकि अणुभार बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है।
(ii) आइसोप्रोपिल क्लोराइड < 1-क्लोरोप्रोपेन < 1-क्लोरोब्यूटेन शाखित होने के कारण आइसोप्रोपिल क्लोराइड का क्वथनांक 1-क्लोरेप्रोपेन से कम होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 10.7.
निम्नलिखित युगलों (युग्मों) में से आप कोनसे ऐल्किल हैलाइड द्वारा SN2 क्रियाविधि से अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करने की अपेक्षा करते हैं? अपने उत्तर को समझाइए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 57
उत्तर:
(i) CH3CH2CH2CH2Br, यह प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड होने के कारण इसमें त्रिविम बाधा नहीं होती।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 58
क्योंक द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड, तृतीयक ऐल्किल हैलाइड की तुलना में अधिक तीव्रता से SN2 अभिक्रिया करता है।
(iii) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 59
इसमें प्रतिस्थापी मेथिल समूह के हैलाइड से दूर होने के कारण त्रिविम बाधा कम होगी अतः SN2 अभिक्रिया का वेग अधिक होगा।

प्रश्न 10.8.
हैलोजन यौगिकों के निम्नलिखित युगलों में से कौनसा यौगिक तीव्रता से SN1 अभिक्रिया करेगा?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 60
उत्तर:
(i) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 61 क्योंक तृतीयक कार्बोकैटायन का स्थायित्व अधिक होने के कारण तृतीयक ऐल्किल हैलाइड की अभिक्रियाशीलता SN1 अभिक्रिया के लिए द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड से अधिक होती है।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 62 क्योंकि प्राथमिक कार्बोकैटायन की तुलना में द्वितीयक कार्बोकैटायन का स्थायित्व अधिक होने के कारण इसमें SN1 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से होगी।

प्रश्न 10.9.
निम्नलिखित में A, B, C, D, E, R तथा R1 को पहचानिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 63
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 64

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.1.
वर्ग 15 के तत्वों के सामान्य गुणधर्मों की उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था, परमाण्विक आकार, यथैी तथा विद्युत्ऋणात्मकता के संदर्भ में विवेचना कीजिए ।
उत्तर:
वर्ग 15 के तत्वों के सामान्य गुणधर्म निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 1
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – वर्ग 15 के तत्वों का संयोजकता कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ns2np3 होता है। इन तत्वों के s कक्षक पूर्णतया भरे होते हैं तथा p कक्षक अर्धपूरित (Half filled) होते हैं, जिससे इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अधिक स्थायी होता है।

(ii) ऑक्सीकरण अवस्था – वर्ग 15 के तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ – 3 +3 तथा +5 हैं। परमाणु आकार तथा धातु गुणों में वृद्धि के कारण वर्ग में नीचे जाने पर 3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने की प्रवृत्ति कम होती है । वर्ग में नीचे जाने पर +5 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व घटता है।

बिस्मथ [V] का एक ही यौगिक BiF5 ज्ञात है । वर्ग में नीचे की ओर +5 ऑक्सीकरण अवस्था के स्थायित्व में कमी के साथ-साथ ऑक्सीकरण अवस्था ( अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण) के स्थायित्व में होती है। ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया से बने यौगिकों में नाइट्रोजन +1, +2, +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दर्शाती है। फॉस्फोरस भी कुछ ऑक्सो अम्लों में, +1 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है।

नाइट्रोजन की अधिकतम सहसंयोजकता 4 हो सकती है; क्योंकि केवल 4 कक्षक (एक s तथा तीन p) ही बंधन के लिए उपलब्ध हैं। भारी तत्वों के बाह्यतम कोश में रिक्त d कक्षक पाए जाते हैं, जो बंध बनाने के लिए प्रयुक्त किए जा सकते हैं, अतः उनकी सहसंयोजकता बढ़ जाती है। जैसे PF6 में फॉस्फोरस की संयोजकता 6 है।

(iii) परमाण्विक आकार – वर्ग 15 में नीचे जाने पर परमाणु आकार (सहसंयोजी त्रिज्या) में वृद्धि होती है। N से P तक त्रिज्या में पर्याप्त वृद्धि होती है जबकि As से Bi तक त्रिज्या में वृद्धि अपेक्षाकृत कम होती है। इसका कारण भारी तत्वों में पूर्ण भरे d और / या f कक्षकों की उपस्थिति है।

(iv) आयनन एन्थैल्पी – वर्ग 15 के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी, वर्ग 14 तथा वर्ग 16 के संगत तत्वों की आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है क्योंकि इन तत्वों में अर्धपूरित स्थायी विन्यास (np3) होता है। सामान्यतः आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है क्योंकि परमाणु आकार कम होता है तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।

अतः बाह्यतम इलेक्ट्रॉन अधिक आकर्षण बल से बंधे होते हैं जिन्हें पृथक् करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। वर्ग में नीचे की ओर जाने पर आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता है क्योंकि परमाणु आकार में वृद्धि होती है। इन तत्वों के लिए विभिन्न आयनन एल्पियों का क्रम निम्न प्रकार होता है-
iH1 < △iH2 < △iH3
अर्थात् एक इलेक्ट्रॉन निकालने के बाद द्वितीय तथा तृतीय इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

(v) विद्युतऋणात्मकता – सामान्यतः वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार में वृद्धि के कारण विद्युतॠणात्मकता का मान घटता है, लेकिन भारी तत्वों में यह अंतर बहुत कम होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.2.
नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न क्यों है?
उत्तर:
नाइट्रोजन की क्रियाशीलता फॉस्फोरस से भिन्न होती है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-
(i) नाइट्रोजन का आकार बहुत छोटा होता है तथा इसकी विद्युतॠणता एवं आयनन एन्थैल्पी, फॉस्फोरस की तुलना में बहुत अधिक है।
(ii) नाइट्रोजन के संयोजी कोश में रिक्त d कक्षक उपलब्ध नहीं हैं जबकि फॉस्फोरस के संयोजी कोश में रिक्त d कक्षक होते हैं।
(iii) नाइट्रोजन में pπ -pπ अतिव्यापन द्वारा त्रिआबन्ध बनाने की प्रवृत्ति होती है अतः इसकी बन्ध एन्थैल्पी बहुत अधिक होती है जिसके कारण यह बहुत कम क्रियाशील होती है जबकि फॉस्फोरस में pπ – pπ अतिव्यापन नहीं होता।

प्रश्न 7.3.
वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता की प्रवृत्ति की विवेचना कीजिए ।
उत्तर:
वर्ग 15 के तत्वों की रासायनिक क्रियाशीलता में बहुत अन्तर होता है। नाइट्रोजन की बन्ध एन्थैल्पी का मान बहुत उच्च होने के कारण यह लगभग अक्रिय होती है। फॉस्फोरस का एक अपररूप, श्वेत फॉस्फोरस बहुत अधिक क्रियाशील होता है जिसका कारण P4 की संरचना में कोणीय तनाव ( angular strain) है। यह वायु में तेजी से आग पकड़कर P4O10 बनाता है जिसके श्वेत धूम बनते हैं। लाल फॉस्फोरस कमरे के ताप पर वायु में स्थायी होता है लेकिन गर्म करने पर क्रिया करता है।

As, Sb तथा Bi (भारी तत्व) कम क्रियाशील होते हैं। आर्सेनिक शुष्क वायु में स्थायी होता है लेकिन इसे वायु में गर्म करने पर यह 615°C पर ऊर्ध्वपातित होकर As4O6 बनाता है । एन्टिमनी वायु तथा जल के प्रति स्थायी होता है लेकिन वायु में गर्म करने पर यह Sb4O6, Sb4O8 या Sb4O10 बनाता है। Bi को वायु में गर्म करने पर यह Bi2O3 बनाता है।

प्रश्न 7.4.
NH3 हाइड्रोजन बंध बनाती है परन्तु PH3 नहीं बनाती। क्यों ?
उत्तर:
नाइट्रोजन के छोटे आकार तथा उच्च विद्युतॠणता के कारण N-H बन्ध, अधिक ध्रुवीय होता है अतः NH3 हाइड्रोजन बंध बनाती है जबकि फॉस्फोरस का आकार बड़ा होता है तथा इसकी विद्युतॠणता भी कम होती है अतः P-H बन्ध लगभग अध्रुवीय होता है इसलिए PH3 में हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनता ।

प्रश्न 7.5.
प्रयोगशाला में नाइट्रोजन कैसे बनाते हैं? सम्पन्न होने वाली अभिक्रिया के रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रयोगशाला में नाइट्रोजन बनाने के लिए अमोनियम क्लोराइड के जलीय विलयन की सोडियम नाइट्राइड के साथ अभिक्रिया कराई जाती है-
NH4Cl(aq) + NaNO2(aq) → N2(g) + 2H2O(l) + NaCl(aq)
इस अभिक्रिया में थोड़ी मात्रा में NO तथा HNO3 भी बनते हैं; इन अशुद्धियों को दूर करने के लिए गैस को पोटैशियम डाइक्रोमेट युक्त सल्फ्यूरिक अम्ल के जलीय विलयन में से प्रवाहित किया जाता है।

(ii) अमोनियम डाइक्रोमेट के ताप अपघटन से भी नाइट्रोजन गैस प्राप्त होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 2

(iii) बेरियम ऐजाइड के ताप अपघटन से अति शुद्ध नाइट्रोजन प्राप्त होती है-
Ba(N3)2 → Ba + 3N2

प्रश्न 7.6.
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
अमोनिया का औद्योगिक निर्माण हाबर प्रक्रम द्वारा किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 3
अमोनिया के अधिक निर्माण के लिए आवश्यक शर्तें – अमोनिया के निर्माण की अभिक्रिया उत्क्रमणीय तथा ऊष्माक्षेपी होती है। इसके साथ ही अभिक्रिया के कारण आयतन में कमी होती है अतः ले शातैलिए के सिद्धान्त के आधार पर उच्च दाब अमोनिया के अधिक निर्माण में सहायक होगा। अतः अमोनिया के निर्माण के लिए अनुकूलतम शर्तें निम्नलिखित हैं-
(i) लगभग 200 वायुमंडलीय दाब ( 200 × 105 Pa )
(ii) लगभग 700K ताप
(iii) K2O तथा Al2O3 युक्त आयरन ऑक्साइड उत्प्रेरक
(iv) शुद्ध N2 तथा H2 का प्रयोग |
अमोनिया में उपस्थित नमी को CaO द्वारा दूर कर लिया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 20

प्रश्न 7.7.
उदाहरण देकर समझाइए कि कॉपर धातु HNO3 के साथ अभिक्रिया करके किस प्रकार भिन्न उत्पाद दे सकती है?
उत्तर:
कॉपर धातु की HNO3 के साथ अभिक्रिया ताप तथा सांद्रता पर निर्भर करती है तथा इन अभिक्रियाओं में कॉपर का ऑक्सीकरण होता है-
(i) कॉपर की तनु तथा ठंडे HNO3 से क्रिया कराने पर कॉपर नाइट्रेट तथा नाइट्रिक ऑक्साइड बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 4

(ii) कॉपर की सान्द्र तथा गर्म HNO3 से क्रिया कराने पर कॉपर नाइट्रेट तथा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड प्राप्त होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 5

प्रश्न 7.8.
NO2 तथा N2O5 की अनुनादी संरचनाओं को लिखिए।
उत्तर:
NO2 तथा N2O5 की अनुनादी संरचनाएँ अग्र हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 6

प्रश्न 7.9.
HNH कोण का मान, HPH, HASH तथा HSH कोणों की अपेक्षा अधिक क्यों है ?
उत्तर:
NH3 में HNH कोण का मान वर्ग के अन्य हाइड्राइडों की तुलना में अधिक होता है क्योंकि NH3 में N पर sp3 संकरण तथा एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण बन्ध कोण लगभग 107.8° होता है जबकि वर्ग नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने तथा विद्युतॠणता कम होने के कारण sp3 संकरण का प्रभाव कम होता जाता है अर्थात् M-H बन्ध बनाने में M के शुद्ध p कक्षक हाइड्रोजन के s कक्षक के साथ अतिव्यापन करते हैं, अतः बन्ध कोण कम होता जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.10.
R3P = O पाया जाता है जबकि R3N = O नहीं | क्यों ? (R = ऐल्किल समूह)
उत्तर:
नाइट्रोजन के संयोजकता कोश में रिक्त d कक्षक नहीं होता अतः इसकी अधिकतम संयोजकता 4 होती है तथा यह dπ – pπ बन्ध नहीं बना सकता अतः R3N = O नहीं पाया जाता जबकि फॉस्फोरस के संयोजकता कोश में रिक्त d कक्षक होने के कारण यह dπ – pπ अतिव्यापन द्वारा R3P = O बना लेता है जिसमें फॉस्फोरस की संयोजकता 5 है। (अष्टक का प्रसार)

प्रश्न 7.11.
समझाइए कि क्यों NH3 क्षारकीय है जबकि BiH3 केवल दुर्बल क्षारक है।
उत्तर:
वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में केन्द्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होने के कारण ये लुइस क्षार होते हैं क्योंकि इनमें इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति होती है। NH3 में नाइट्रोजन के छोटे आकार के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति अधिक होती है इसलिए यह अधिक क्षारीय है जबकि BiH3 में Bi के बड़े आकार के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति कम होती है इसलिए यह बहुत ही दुर्बल क्षारक है।

प्रश्न 7.12.
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है तथा फॉस्फोरस P4 के रूप में। क्यों ?
उत्तर:
नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु के छोटे आकार तथा d कक्षकों की अनुपस्थिति के कारण इसमें बहुल आबन्ध बनाने की प्रवृति होती है जबकि फॉस्फोरस P4 के रूप में पाया जाता है क्योंकि बड़े आकार के कारण इसमें बहुल आबन्ध बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती तथा आन्तरिक अबन्धित इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण होता है। इसमें P-P-P बन्ध कोण 60° होता है अतः pπ – pπ बन्ध संभव नहीं है।

प्रश्न 7.13.
श्वेत फॉस्फोरस तथा लाल फॉस्फोरस के गुणों की मुख्य भिन्नताओं को लिखिए।
उत्तर:
श्वेत फॉस्फोरस तथा लाल फॉस्फोरस के गुणों में मुख्य भिन्नताएँ निम्नलिखित हैं-
(i) श्वेत फॉस्फोरस एक पारभासी मोम जैसा श्वेत ठोस होता है जबकि लाल फॉस्फोरस लोहे जैसी धूसर (grey) चमक वाला होता है।
(ii) श्वेत फॉस्फोरस विषैला होता है जबकि लाल फॉस्फोरस गन्धहीन तथा अविषैला होता है।
(iii) श्वेत फॉस्फोरस जल में अविलेय लेकिन कार्बन-डाइ- सल्फाइड में विलेय होता है लेकिन लाल फॉस्फोरस जल तथा कार्बन-डाइ- सल्फाइड दोनों में अविलेय होता है ।
(iv) रासायनिक रूप से लाल फॉस्फोरस श्वेत फॉस्फोरस की तुलना बहुत कम क्रियाशील होता है।
(v) श्वेत फॉस्फोरस अंधेरे में दीप्त होता है, लाल फॉस्फोरस दीप्त नहीं होता !
(vi) श्वेत फॉस्फोरस विविक्त चतुष्फलकीय P4 अणुओं से बना होता है जबकि लाल फॉस्फोरस बहुलकी होता है जिसमें P4 चतुष्फलक श्रृंखला के रूप में एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं ।

प्रश्न 7.14.
फॉस्फोरस की तुलना में नाइट्रोजन श्रृंखलन गुणों को कम प्रदर्शित करता है, क्यों?
उत्तर:
नाइट्रोजन परमाणु के छोटे आकार के कारण एक N-N. बन्ध, एक P-P बन्ध की तुलना में दुर्बल होता है क्योंकि N-N बन्ध में अबन्धी इलेक्ट्रॉनों (एकाकी इलेक्ट्रॉनयुग्मों) के मध्य प्रतिकर्षण अधिक होता है। अतः फॉस्फोरस की तुलना में नाइट्रोजन में श्रृंखलन की प्रवृत्ति कम होती है।

प्रश्न 7.15.
H3PO3 की असमानुपातन अभिक्रिया दीजिए।
उत्तर:
H3PO3 को 473K ताप पर गर्म करने पर इसका असमानुपातन होकर फॉस्फोरिक अम्ल (आर्थोफॉस्फोरिक अम्ल) तथा फॉस्फीन बनती है।
4H3PO3 → 3H3PO4 + PH3

प्रश्न 7.16.
क्या PCl5 ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों कार्य कर सकता है ? तर्क दीजिए ।
उत्तर:
PCl5 में P की ऑक्सीकरण अवस्था +5 है जो कि उच्चतम है, अतः यह अपनी ऑक्सीकरण अवस्था कम करके ऑक्सीकारक का कार्य कर सकता है लेकिन अपचायक का नहीं।
उदाहरण – PCl5 + 2Ag → 2AgCl + PCl3

प्रश्न 7.17.
O, S, Se, Te तथा Po को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्था तथा हाइड्राइड निर्माण के संदर्भ में आवर्त सारणी के एक ही वर्ग में रखने का तर्क दीजिए ।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – O, S, Se, Te तथा Po 16वें वर्ग के तत्व हैं। इन सभी का बाह्यतम इलेक्ट्रानिक विन्यास समान है जो कि ns2np4 है अर्थात् इनके बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः इन्हें एक ही वर्ग में रखा जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 7
(ii) ऑक्सीकरण अवस्था- ये सभी तत्व – 2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं। (Po के अलावा) तथा ऑक्सीजन के अलावा सभी तत्व +2, +4, +6 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करते हैं, ऑक्सीजन केवल +2 अवस्था दर्शाती है। अतः इन्हें एक ही वर्ग में रखा गया है।

(iii) हाइड्राइड निर्माण- सभी तत्व H2E (E= O, S, Se, Te Po) प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। अतः इन तत्वों को समान वर्ग में रखने का एक कारण यह भी है।

प्रश्न 7.18.
क्यों डाइऑक्सीजन एक गैस है जबकि सल्फर ठोस है?
उत्तर:
ऑक्सीजन परमाणु के छोटे आकार तथा संयोजी कोश में d कश्चकों की अनुपस्थिति के कारण इसमें Pπ – Pπ बन्ध बनाने की प्रबल प्रवृत्ति होती है अतः यह O = O बनाकर अपना अष्टक पूर्ण कर लेता है तथा यह स्वतंत्र अस्तित्व वाले ऑक्सीजन अणुओं (O2) के रूप में गैस अवस्था में पाई जाती है। लेकिन सल्फर के बड़े आकार के कारण S = S बन्ध एन्थैल्पी कम होती है अतः यह S2 न बनाकर Sg के रूप में पाया जाता है जिससे अणुभार बढ़ जाने के कारण अणुओं के मध्य आकर्षण बल बढ़ जाता है। इसी कारण सल्फर ठोस अवस्था में पाया जाता है।

प्रश्न 7.19.
यदि O→O तथा O→O2- के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी मान पता हो, जो क्रमशः -141 तथा 702 kJ mol-1 हैं, तो आप कैसे स्पष्ट कर सकते हैं कि O2- स्पीशीज वाले ऑक्साइड अधिक बनते हैं न कि O वाले?
उत्तर:
प्रश्नानुसार O से O बनने पर ऊर्जा उत्सर्जित होती है। जबकि O से O-2 बनने पर बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है लेकिन O2- स्पीशीज वाले ऑक्साइड अधिक बनते हैं क्योंकि ऑक्साइड बनने पर उत्सर्जित उच्च जालक एन्थैल्पी ( अधिक ऋणावेश के कारण ) द्वितीय उच्च धनात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की पूर्ति कर देती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 8

प्रश्न 7.20.
कौनसे ऐरोसोल्स ओजोन का क्षय करते हैं?
उत्तर:
ओजोन परत का क्षय करने वाले ऐरोसोल्स निम्नलिखित हैं-
(i) सुपर सोनिक जेट विमानों से उत्सर्जित नाइट्रिक ऑक्साइड (NO), ऊपरी वायुमण्डल में ओजोन परत की सांद्रता को कम करते हैं-
NO(g) + O3(g) → NO2(g) + O2(g)

(ii) ऐरोसोल स्प्रे तथा प्रशीतकों के रूप में प्रयुक्त फ्रेऑन भी ओजोन का क्षय करते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 9

प्रश्न 7.21.
संस्पर्श प्रक्रम ( Contact Process ) द्वारा H2SO4 के उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सम्पर्क विधि (Contact Process ) – इस विधि में तीन पद होते हैं-
(i) सल्फर अथवा सल्फाइड अयस्कों को वायु में जलाकर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) बनाना ।
(ii) V2O5 उत्प्रेरक की उपस्थिति में SO2 की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कराकर SO3 में परिवर्तित करना ।
(iii) SO3 को सल्फ्यूरिक अम्ल में अवशोषित करके ओलियम (H2S2O7) प्राप्त करना तथा इसके तनुकरण से H2SO4 प्राप्त करना ।

(i) SO2 बनाना – सल्फर या FeS2 को वायु के साथ गर्म करके SO2 का निर्माण किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 21
प्राप्त SO2 को धूल के कणों तथा आर्सेनिक यौगिकों की अशुद्धियों से मुक्त कर लिया जाता है। इसके लिए जिलेटिनी FerOH3 प्रयुक्त करते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.22.
SO2 किस प्रकार से एक वायु प्रदूषक है?
उत्तर:
SO2 ऍक हानिकारक गैसीय प्रदूषक है। वायुमण्डल में उपस्थित SO2, प्रकाश की उपस्थिति में आक्सीकृत होकर SO3 बनाती है जो कि नमी की उपस्थिति में H2SO4 बनाती है जो कि अम्ल वर्षा के रूप में नीचे आती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 10
SO2 पेड़ों की पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है तथा मनुष्य की आँखों तथा श्वसन तंत्र के लिए भी हानिकारक है।

प्रश्न 7.23.
हैलोजन प्रबल ऑक्सीकारक क्यों होते हैं?
उत्तर:
हैलोजनों की उच्च विद्युतॠणता तथा अधिक इलेक्ट्रॉन बन्धुता (उच्च ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी) के कारण इनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है तथा इनके मानक इलैक्ट्रोड – विभव (अपचयन विभव) के मान भी अधिक होते हैं। अतः ये प्रबल ऑक्सीकारक होते हैं।

प्रश्न 7.24.
स्पष्ट कीजिए कि फ्लुओरीन केवल एक ही ऑक्सो अम्ल, HOF क्यों बनाता है?
उत्तर:
फ्लुओरीन के छोटे आकार तथा उच्च विद्युतॠणता के कारण यह एकमात्र ऑक्सो अम्ल, HOF बनाती है जो कि फ्लुओरिक (I) अम्ल या हाइपोफ्लुओरस अम्ल कहलाता है। फ्लुओरीन उच्चतर ऑक्सो अम्लों में केन्द्रीय परमाणु के रूप में उपयोग में नहीं आ सकता, अतः यह उच्च ऑक्सो अम्ल नहीं बनाता।

प्रश्न 7.25.
व्याख्या कीजिए कि क्यों लगभग एक समान विद्युत्ऋणात्मकता होने के पश्चात् भी नाइट्रोजन हाइड्रोजन आबंध निर्मित करता है, जबकि क्लोरीन नहीं।
उत्तर:
नाइट्रोजन तथा क्लोरीन की विद्युतॠणता लगभग समान होती है फिर भी नाइट्रोजन, हाइड्रोजन बन्ध बनाता है जबकि क्लोरीन नहीं, क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु का आकार क्लोरीन परमाणु से छोटा होता है जो कि हाइड्रोजन बन्ध बनाने में सहायक होता है।

प्रश्न 7.26.
ClO2 के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
ClO2 (क्लोरीन डाइऑक्साइड) को आक्सीकारक तथा विरंजक (Bleaching agent) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 7.27.
हैलोजन रंगीन क्यों होते हैं?
उत्तर:
सभी हैलोजन रंगीन होते हैं, इसका कारण यह है कि इनमें दृश्य क्षेत्र में विकिरणों का अवशोषण होता है जिससे बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर में चले जाते हैं क्योंकि संयोजकता कोश व उच्च ऊर्जा स्तर में ऊर्जा अन्तराल कम होता है। विकिरण के भिन्न- भिन्न क्वान्टम अवशोषित करने के कारण ये अलग-अलग रंग प्रदर्शित करते हैं; जैसे- फ्लुओरीन पीला, क्लोरीन हरापन लिए हुए पीला, ब्रोमीन लाल तथा आयोडीन बैंगनी रंग का होता है।

प्रश्न 7.28.
जल के साथ F2 तथा – Cl2 की अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
फ्लुओरीन (F2) जल को आक्सीकृत करके ऑक्सीजन देती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 11
सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन, जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोक्लोरिक तथा हाइपोक्लोरस अम्ल बनाती है-
Cl2(g) + H2O(l) HCl(aq) + HOCl(aq)

प्रश्न 7.29.
आप HCI से Cl2 तथा Cl2 से HCl को कैसे प्राप्त करेंगे? केवल अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
(i) HCl से Cl2 प्राप्त करना
सांद्र HCI को मैंगनीज डाइऑक्साइड या KMnO4 जैसे ऑक्सीकारक के साथ गर्म करने से Cl2 प्राप्त होती है।
MnO2 + 4HCl → MnCl2 + Cl2 + 2H2O
2KMnO4 + 16HCl → 2KCl + 2MnCl2 + 8H2O + 5Cl2

(ii) Cl2 से HCl प्राप्त करना
Cl2 की H2 के साथ क्रिया से HCl प्राप्त होती है-
H2 + Cl2 → 2HCl

प्रश्न 7.30.
एन- बार्टलेट Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने के लिए कैसे प्रेरित हुए?
उत्तर:
लाल रंग के यौगिक \(\stackrel{+}{\mathrm{O}}_2 \mathrm{PtF}_6^{-}\) के संश्लेषण ने एन- बार्टलेट को Xe तथा PtF6 के बीच अभिक्रिया कराने को प्रेरित किया तथा उन्होंने लाल रंग का ही यौगिक Xe PtF6 बनाया क्योंकि Xe व O2 की प्रथम आयनन एन्थैल्पी लगभग बराबर होती है।
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प्रश्न 7.31.
निम्नलिखित में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्थाएँ क्या हैं?
(i) H3PO3
(ii) PCl3
(iii) Ca3P2
(iv) Na3PO4
(v) POF3
उत्तर:
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प्रश्न 7.32.
निम्नलिखित के लिए संतुलित समीकरण दीजिए।
उत्तर:
(i) जब NaCl को MnO2 की उपस्थिति में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गरम करते हैं तो क्लोरीन गैस निकलती है।
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(ii) जब क्लोरीन गैस को Nal के जलीय विलयन में प्रवाहित किया जाता है तो आयोडीन बनती है।
2Nal + Cl2 → 2NaCl + I2

प्रश्न 7.33.
जीनॉन फ्लुओराइड, XeF2, XeF4 तथा XeF6 कैसे बनाए जाते हैं?
उत्तर:
अनुकूल परिस्थितियों में तत्वों की प्रत्यक्ष क्रिया द्वारा जीनॉन तीन प्रकार के द्विअंगी फ्लुओराइड, XeF2, XeF4 तथा XeF6 बनाती है।
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143K ताप पर XeF4 तथा O2F2 की क्रिया से भी XeF6 बनता है।
XeF4 + O2F2 → XeF6 + O2

प्रश्न 7.34.
किस उदासीन अणु के साथ ClO समइलेक्ट्रॉनी है ? क्या यह अणु लुइस क्षारक है ?
उत्तर:
ClF (क्लोरीन फ्लुओराइड) ClO का समइलेक्ट्रॉनी है क्योंकि दोनों में 26 इलेक्ट्रॉन हैं तथा ClF लुइस क्षारक है क्योंकि इसमें एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित है।

प्रश्न 7.35.
निम्नलिखित प्रत्येक समुच्चय को सामने लिखे गुणों के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(क) F2, Cl2, Br2, I2 – आबंध वियोजन एन्थैल्पी के बढ़ते क्रम में
(ख) HF, HCI, HBr, HI -अम्ल सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में
(ग) NH3, PH3, AsH3, SbH3, BiH3 – क्षारक सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में ।
उत्तर:
(क) I—I < F−F < Br-Br < Cl-Cl
(ख) HF < HCl < HBr < HI
(ग) BiH3 ≤ SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3

प्रश्न 7.36.
निम्नलिखित में से कौनसा एक अस्तित्व में नहीं है?
(a) XeOF4
(b) NeF2
(c) XeF2
(d) XeF6
उत्तर:
(b) NeF2

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.37.
उस उत्कृष्ट गैस स्पीशीज का सूत्र देकर संरचना की व्याख्या कीजिए जो कि इनके साथ समसंरचनीय है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 16
उत्तर:
(a) \(\mathrm{ICl}_4^{-}\) का समसंरचनीय XeF4 है।

XeF4 की संरचना वर्ग समतलीय होती है क्योंकि इसमें Xe पर 4 बन्धित इलेक्ट्रॉन युग्म तथा 2 एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित हैं एवं Xe पर sp3d2 संकरण है।
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(b) \(\mathrm{IBr}_2^{-}\) का समसंरचनीय XeF2 होता है इसकी संरचना रेखीय है तथा Xe पर sp d संकरण है ( 31.p + 2 b. p ) |
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(c) \(\mathrm{BrO}_3\) का समसंरचनीय XeO3 है। इसकी संरचना पिरॅमिडी है तथा Xe पर sp3 संकरण है (3 b.p +1 1.p)।
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प्रश्न 7.38.
उत्कृष्ट ‘गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े क्यों होते हैं?
उत्तर:
उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या (आकार) वान्डरवाल त्रिज्या के रूप में ली जाती है जबकि अन्य तत्वों के लिए सहसंयोजी त्रिज्या ली जाती है। उत्कृष्ट गैसों के लिए सहसंयोजी त्रिज्या ज्ञात नहीं की जा सकती क्योंकि ये अणु नहीं बनातीं । चूँकि वान्डरवाल त्रिज्या का मान सहसंयोजी त्रिज्या से अधिक होता है अतः उत्कृष्ट गैसों के परमाण्विक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े होते हैं।

प्रश्न 7.39,
निऑन तथा ऑर्गन गैसों के उपयोग सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
निऑन तथा ऑर्गन गैसों के उपयोग निम्नलिखित
(a) (i) निऑन का उपयोग विसर्जन ट्यूब (Discharge tube) तथा प्रदीप्त बल्बों (Fluorescent bulbs ) में विज्ञापन प्रदर्शन हेतु किया जाता है।
(ii) निऑन बल्बों का उपयोग वनस्पति उद्यान तथा ग्रीनहाउस में किया जाता है।

(b) (i) ऑर्गन का उपयोग उच्चताप धातु कर्मीय प्रक्रमों में अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए किया जाता है (धातुओं तथा उपधातुओं के आर्क वेल्डिंग में)
(ii) इसका उपयोग विद्युत बल्ब को भरने में किया जाता है।
(iii) प्रयोगशाला में इसका उपयोग वायु सुग्राही (Sensitive) पदार्थों के प्रबन्धन (Handling) में भी किया जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry p-ब्लॉक के तत्व Intext Questions

प्रश्न 7.1.
P, As, Sb तथा Bi के द्राइहैलाइडों से पेन्टाहैलाइड अधिक सहसंयोजी क्यों होते हैं?
उत्तर:
किसी यौगिक में केन्द्रीय परमाणु की जितनी उच्च धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था होती है उतनी ही अधिक उसकी ध्रुवण क्षमता होती है जिसके कारण केन्द्रीय परमाणु और दूसरे परमाणु के बीच बने आबंध में सहसंयोजक लक्षण बढ़ते जाते हैं। चूंकि P, As, Sb तथा Bi के पेन्टाहैलाइडों में केन्द्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था (+5), इनके ट्राइहलाइडों में केन्द्रीय परमाणु की ऑक्सीकरण अवस्था (+3) से अधिक है अतः P, As, Sb तथा Bi के ट्राइहैलाइडों से पेन्यहैलाइड अधिक सहसंयोजी होते हैं।

प्रश्न 7.2.
वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों में BiH3 सबसे प्रबल अपचायक क्यों है?
उत्तर:
वर्ग 15 में NH3 से BiH3 तक हाइड्राइडों का स्थायित्व घटता है क्योंक केन्द्रीय परमाणु का आकार बढ़ने से बन्ध ऊर्जा कम होती है, जिससे इनकी हाइड्रोजन देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है अतः अपचायक गुण बढ़ता है, इसी कारण BiH3 सबसे प्रबल अपचायक है तथा यह सबसे कम स्थायी होता है।

प्रश्न 7.3.
N2 कमरे के ताप पर कम क्रियाशील क्यों है?
उत्तर:
नाइट्रोजन परमाणु के छोटे आकार के कारण N2 में दो नाइट्रोजन परमाणुओं के मध्य त्रिआबन्ध (N ≡ N) होता है जिसमें प्रबल pπ – pπ अतिव्यापन होता है अतः इसकी बन्ध एन्थल्पो अधिक हाता है, इसलिए बन्ध का टूटना मुश्किल होता है। इसी कारण यह कमरे के ताप पर कम क्रियाशील है।

प्रश्न 7.4.
अमोनिया की लब्धि को बढ़ाने के लिए आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन हाबर विधि द्वारा किया जाता है।
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ले-शातैलिए के सिद्धान्त के अनुसार उच्च दाब अमोनिया बनाने के लिए अनुकूल होता है। अतः अमोनिया के उत्पादन के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ 200 × 105 Pa (लगभग 200 वायुमंडलीय दाब, ~700K ताप तथा थोड़ी मात्रा में K2O एवं Al2O3 युक्त आयरन ऑक्साइड जैसे उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है, ताकि साम्य अवस्था प्राप्त करने की दर बढ़ाई जा सके।

प्रश्न 7.5.
Cu2+ विलयन के साथ अमोनिया कैसे क्रिया करती है?
उत्तर-:
Cu2+ विलयन के साथ अमोनिया (NH3) की क्रिया उपसहसंयोजक बन्ध बनकर संकुल आयन [Cu(NH3)4]2+ बनता है जिसमें NH3 के नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म धातु आयनों के साथ बन्ध बनाता है क्योंकि NH3 लुइस क्षारक है अतः यह इलेक्ट्रॉन युग्मदाता है।
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प्रश्न 7.6.
N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता क्या है?
उत्तर:
N2O5 में नाइट्रोजन की सहसंयोजकता 4 होती है जिसकी पुष्टि निम्नलिखित संरचना से होती है। इसमें नाइट्रोजन परमाणु चार बन्ध बना रहा है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 24

प्रश्न 7.7.
(a) PH3 से \(\stackrel{+}{\mathrm{P}} \mathrm{H}_4\) का आबंध कोण अधिक है। क्यों?
(b) जब PH3 अम्ल से अभिक्रिया करता है तो क्या बनता है?
उत्तर:
(a) PH3 तथा \(\stackrel{+}{\mathrm{P}} \mathrm{H}_4\) दोनों में ही फॉस्फोरस sp3 संकरित हैं। \(\mathrm{PH}_4^{+}\) में बन्ध कोण 109°28′ तथा इसमें चारों ही बन्धित इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं जबकि PH3 में P पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है जो कि एकाकी युग्म-आबंध युग्म प्रतिकर्षण के लिए उत्तरदायी है जिससे PH3 में आबंध कोण 109°28′ से कम हो जाता है। अतः PH3 से PH4 का आबंध कोण अधिक है।

(b) जब PH3 अम्ल से अभिक्रिया करता है तो फॉस्फोनियम यौगिक बनते हैं जैसे PH3 + HBr → PH4Br फॉस्फोनियम ब्रोमाइड।

प्रश्न 7.8.
क्या होता है जब श्वेत फॉस्फोरस को CO2 के अक्रिय वातावरण में सांद्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करते हैं?
उत्तर:
श्वेत फास्फोरस को CO2 के अक्रिय वातावरण में सांद्र कॉस्टिक सोडा विलयन के साथ गर्म करने पर PH3 (फॉस्फीन) तथा सोडियम हाइपो फॉस्फाइट (NaH2PO2) बनते हैं।
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प्रश्न 7.9.
क्या होता है जब PCl5 को गर्म करते हैं?
उत्तर:
PCl5 में तीन निरक्षीय या विषुवतरेखीय (equatorial bonds) बन्ध हैं तथा दो अक्षीय बन्ध (axial bonds) हैं जो निरक्षीय बन्धों से बड़े हैं अतः ये निरक्षीय बन्धों से दुर्बल होते हैं, इसी कारण PCl5 को गर्म करने पर यह PCl3 तथा Cl2 में वियोजित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 26

प्रश्न 7.10.
PCl5 की जल से अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए।
उत्तर:
PCl5 जल से अभिक्रिया करके (जल-अपघटन) फॉस्फोरस ऑक्सीक्लोराइड (POCl3) देता है जो कि अन्त में फास्फोरिक अम्ल (H3PO4) में परिवर्तित हो जाता है तथा इसके साथ ही HCl भी बनता है।

PCl5 + H2O → POCl3 + 2HCl
POCl3 + 3H2O → H3PO4 + 3HCl

प्रश्न 7.11.
H3PO4 की क्षारकता क्या है?
उत्तर:
H3PO4 में तीन P-OH बन्ध उपस्थित हैं अतः इसकी क्षारकता 3 होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 27

प्रश्न 7.12.
क्या होता है जब H3PO3 को गरम करते हैं?
उत्तर:
ऑर्थोफॉस्फोरस अम्ल (फॉस्फोरस अम्ल ) (H3PO3) को गर्म करने पर असमानुपातन होकर ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (फॉस्फोरिक अम्ल ) (H3PO4) तथा फॉस्फीन देता है। इसमें फॉस्फोरस +3 से +5 तथा -3 ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तित होता है।
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प्रश्न 7.13.
सल्फर के महत्वपूर्ण स्रोतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
सल्फर के महत्त्वपूर्ण स्रोत निम्नलिखित हैं-

  • भूपर्पटी में सल्फर की मात्रा केवल 0.03 से 0.1% ही होती है।
  • संयुक्त अवस्था में सल्फर मुख्यतया सल्फेटों के रूप में, जैसे-जिप्सम (CaSO4.2H2O), एपसम लवण (MgSO4.7H2O), बेराइट (BaSO4) तथा सल्फाइडों के रूप में, जैसे-गेलेना (PbS), यशद ब्लैंड (जिंक ब्लैंड) (ZnS), कॉपर पाइरॉइट (CuFeS2) में पाई जाती है।
  • सल्फर की सूक्ष्म मात्रा ज्वालामुखी में हाइड्रोजन सल्फाइड के रूप में भी पाई जाती है।
  • कार्बनिक पदार्थों; जैसे-अंडे, प्रोटीन, लहसुन, प्याज, सरसों, बाल तथा ऊन में भी सल्फर होती है।

प्रश्न 7.14.
वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्राइडों के तापीय स्थायित्व के क्रम को लिखिए।
उत्तर:
वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण बन्ध वियोजन एन्थैल्पी कम होती जाती है अतः हाइड्राइडों का तापीय स्थायित्व कम होगा।
H2O > H2S > H2Se > H2Te > H2Po
हाइड्राइडों का तापीय स्थायित्व

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.15.
H2O एक द्रव तथा H2S गैस क्यों है?
उत्तर:
ऑक्सीजन के छोटे आकार और उच्च विद्युत्त्त्टणात्मकता (3.0) के कारण O-H बन्ध अधिक ध्रुवीय होने से जल के अणु अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबंध के द्वारा अधिक संगुणित होकर पास-पास आ जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप यह द्रव अवस्था में रहता है, जबकि H2S के अणु दुर्बल वान्डरवाल बल द्वारा आकर्षित होते हैं अतः अणु दूरदूर होने के कारण यह गैस होती है।

प्रश्न 7.16.
निम्नलिखित में से कौनसा तत्व ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता?
Zn, Ti, Pt, Fe
उत्तर:
इन तत्वों में से Pt, ऑक्सीजन के साथ सीधे अभिक्रिया नहीं करता क्योंकि इसकी क्रियाशीलता बहुत कम होती है अतः यह उत्कृष्ट धातु (Noble metal) है।

प्रश्न 7.17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
(i) C2H4 + O2
(ii) 4Al + 3O2
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 29

प्रश्न 7.18.
O3, एक प्रबल ऑक्सीकारक की तरह क्यों क्रिया करती है?
उत्तर:
O3 (ओजोन ) आसानी से वियोजित होकर नवजात ऑक्सीजन [O] देती है अतः यह प्रबल ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करती है।
O3 → O2 + O ( नवजात ऑक्सीजन )

प्रश्न 7.19.
O3 का मात्रात्मक आकलन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
जब ओजोन, बोरेट बफर (उभय प्रतिरोधी) (pH 9.2) युक्त उभय प्रतिरोधित पोटैशियम आयोडाइड (KI) विलयन के आधिक्य से अभिक्रिया करती है तो आयोडीन (I2) मुक्त होती है जिसका मानक सोडियम थायोसल्फेट (Na2S2O3) विलयन के साथ अनुमापन करके O3 गैस का मात्रात्मक आकलन किया जाता है।

प्रश्न 7.20.
तब क्या होता है जब सल्फर डाइऑक्साइड को Fe(III) लवण के जलीय विलयन में से प्रवाहित करते हैं?
उत्तर:
जब सल्फर डाइऑक्साइ्ड को Fe(III) लवण के जलीय विलयन में प्रवाहित करते हैं तो SO2 इसे Fe(II) में अपचयित कर देती है क्योंकि नम सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) अपचायक की तरह व्यवहार करती है।
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प्रश्न 7.21.
दो S-O आबंधों की प्रकृति पर टिप्पणी कीजिए जो SO2 अणु बनाते हैं। क्या SO2 अणु के ये दोनों S-O आबंध समतुल्य (समान) हैं?
उत्तर:
SO2 अणु कोणीय होता है तथा यह दो अनुनादी संरचनाओं (विहित रूपों) का अनुनाद संकर है अतः ये दोनों S-O बन्ध समान हैं तथा सहसंयोजी हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 31

प्रश्न 7.22.
SO2 की उपस्थिति का पता कैसे लगाया जाता है?
उत्तर:
SO2 तीखी गंधयुक्त रंगहीन गैस है। SO2 गैस की उपस्थिति का पता निम्नलिखित परीक्षण से लगाया जाता है। यह अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (VII) (KMnO4) के गुलाबी विलयन को रंगहीन कर देती है क्योंकि इससे KMnO4 का अपचयन हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 32

प्रश्न 7.23.
उन तीन क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए जिनमें H2SO4 महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तर:
H2SO4 निम्नलिखित क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है-

  • पेट्रोलियम के शोधन में,
  • अपमार्जक उद्योग में तथा
  • उर्वरकों (अमोनियम सल्फेट, सुपर फास्फेट) के उत्पादन में।

प्रश्न 7.24.
संस्पर्श प्रक्रम (सम्पर्क विधि) द्वारा H2SO4 की मात्रा में वृद्धि करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों को लिखिए।
उत्तर:
संस्पर्श प्रक्रम द्वारा H2SO4 के निर्माण की मुख्य अभिक्रिया SO2 गैस का V2O5 उत्प्रेरक की उपस्थिति में O2 द्वारा ऑक्सीकरण है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 Img 33
यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है एवं इसमें आयतन में कमी होती है। अतः कम ताप और उच्च दाब SO3 की उच्च लब्धि (yield) के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ हैं। परन्तु ताप बहुत कम नहीं होना चाहिए अन्यथा अभिक्रिया की गति धीमी हो जाएगी। अतः सल्फ्यूरिक अम्ल के उत्पादन में प्रयुक्त संयंत्र का दाबं 2 तथा ताप 720K रखा जाता है।

प्रश्न 7.25.
जल में H2SO4 के लिए \(K_{a_2} \ll K_{a_1}\) क्यों है?
उत्तर:
जलीय विलयन में H2SO4 का आयनन दो पदों में होता है-
(i) \(\mathrm{H}_2 \mathrm{SO}_4(\mathrm{aq})+\mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l) \rightarrow \mathrm{H}_3 \mathrm{O}^{+}(\mathrm{aq})+\mathrm{HSO}_4^{-}(\mathrm{aq}) \text {; }\)

K1 = बहुत अधिक (\(K_{a_1}\) > 10)

(ii) \(\mathrm{HSO}_4^{-}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l) \rightarrow \mathrm{H}_3 \mathrm{O}^{+}(\mathrm{aq})+\mathrm{SO}_4^{2-}(\mathrm{aq})\)

K2 = 1.2 × 10-2

\(K_{a_1}\) का अधिक मान यह दर्शाता है कि H2SO4 अधिकतर H+ तथा \(\mathrm{HSO}_4^{-}\) में वियोजित हो जाता है।

\(\mathrm{K}_{\mathrm{a}_2}\) का मान \(\mathrm{K}_{\mathrm{a}_1}\) से बहुत कम होता है क्योंकि H2SO4 (उदासीन अणु) का प्रथम वियोजन आसानी से होता है जबकि \(\mathrm{HSO}_4^{-}\) का वियोजन (द्वितीय वियोजन) बहुत कम होता है क्योंक ऋणात्मक आयन में से प्रोटोन का निकलना मुश्किल होता है।

प्रश्न 7.26.
आबंध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी जैसे प्राचलों (Parameters) को महत्व देते हुए F2 तथा Cl2 की ऑक्सीकारक क्षमता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
वर्ग में नीचे जाने पर हैलोजनों के जलीय विलयन में उनकी ऑक्सीकारक क्षमता कम होती है जिसकी पुष्टि मानक इलेक्ट्रॉड विभव मानों से होती है जो कि आबंध वियोजन एन्थैल्पी, इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तथा जलयोजन एन्थैल्पी पर निर्भर करते हैं।
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F2 के लिए बन्ध वियोजन एन्थैल्पी का मान Cl2 की तुलना में कम है तथा F के छोटे आकार के कारण इसकी जलयोजन एन्थैल्पी भी Cl से बहुत अधिक है अतः F का मानक इलेक्ट्रोड विभव (अपचयन विभव) Cl के मानक इलेक्ट्रोड विभव से अधिक है। इसी कारण F2 का ऑक्सीकारक गुण Cl2 से अधिक है।

प्रश्न 7.27.
दो उदाहरणों द्वारा फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार को दर्शाइए।
उत्तर:
फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार का कारण उसका छोटे आकार, उच्च विद्युतत्रणता, निम्न F-F बन्ध वियोजन एन्थैल्पी तथा संयोजकता कोश में d कक्षकों की अनुपस्थिति है।
फ्लुओरीन के असामान्य व्यवहार के उदाहरण निम्नलिखित हैं-

  • फ्लुओरीन केवल एक ऑक्सो अम्ल बनाती है जबकि दूसर हैलोजन कई ऑक्सो अम्ल बनाते हैं।
  • F2 की आबंध वियोजन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान अपेक्षित मानों से बहुत कम होते हैं।

प्रश्न 7.28.
समुद्र कुछ हैलोजन का मुख्य स्तोत है। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
समुद्र कुछ हैलोजनों का मुख्य स्रोत है क्योंकि समुद्री पानी में सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम तथा कैल्शियम के क्लोराइड, ब्रोमाइड तथा आयोडाइड होते हैं लेकिन मुख्यतः यह सोडियम क्लोराइड का विलयन (द्रव्यमान 2.5%) है। शुष्क हुए समुद्री निक्षेपों में सोडियम क्लोराइड तथा कारनेलाइट (KCl.MgCl2.6H2O) जैसे यौगिक उपस्थित होते हैं। कुछ समुद्री जीवों के तंत्र में आयोडीन होती है; बहुत से समुद्री पादपों में 0.5% आयोडीन तथा चिली साल्टपीटर में 0.2% तक सोडियम आयोडेट पाया जाता है।

प्रश्न 7.29.
Cl2 की विरंजक क्रिया का कारण बताइए।
उत्तर:
Cl2 एक प्रबल विरंजक है। विरंजन क्रिया नमी की उपस्थिति में ऑक्सीकरण के कारण होती है। नमी की उपस्थिति में Cl2 नवजात ऑक्सीजन [O] देती है जो रंगीन पदार्थ का ऑक्सीकरण करके उसे रंगहीन कर देती है। यह विरंजन स्थायी होता है।
Cl2 + H2O → 2HCl + [O]
रंगीन पदार्थ + [O] → रंगहीन पदार्थ

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 7 p-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 7.30.
उन दो विषैली गैसों के नाम बताइए जो क्लोरीन गैस से बनाई जाती हैं।
उत्तर:
क्लोरीन गैस से बनाई जाने वाली विषैली गैसें फास्जीन (COCl2), अश्रु गैस (CCl3NO2) तथा मस्टर्ड गैस (Cl-CH2-CH2-S-CH2-CH2-Cl) हैं।

प्रश्न 7.31.
I2 से ICI अधिक क्रियाशील क्यों है?
उत्तर:
सामान्यतः अंतराहैलोजन यौगिक हैलोजन की अपेक्षा अधिक क्रियाशील होते हैं क्योंकि X-X आबंध की अपेक्षा X-X’ आबंध दुर्बल होता है। l-Cl बन्ध ध्रुवीय तथा l-l बन्ध अध्रुवीय है। अतः lCl, l2 से अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 7.32.
हीलियम को गोताखोरी के उपकरणों में उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
आधुनिक गोताखोरी के उपकरणों में हीलियम, ऑक्सीजन के तनुकारी (Diluent) के रूप में प्रयुक्त की जाती है क्योंक रक्त में इसकी विलेयता बहुत कम होती है।

प्रश्न 7.33.
निम्नलिखित समीकरण को संतुलित कीजिए –
XeF6 + 2H2O → XeO2F2 + 4HF
जीनॉन डाइऑक्सीडाइफ्लुओराइड

प्रश्न 7.34.
रेडॉन के रसायन का अध्ययन करना कठिन क्यों था?
उत्तर:
रेडॉन (Rn) रेडियोसक्रिय तत्व है तथा इसकी अर्धायु बहुत कम (3.82 दिन) होती है अतः इसका विघटन हो जाता है। इसलिए रेडॉन के रसायन का अध्ययन कठिन हो जाता है।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

प्रश्न 15.1.
बहुलक और एकलक पदों की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:

  1. बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले बृहदाणु होते हैं। जिनमें बहुत अधिक संख्या में, एकलक अणुओं से बनी पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ उपस्थित होती हैं।
  2. एकलक सरल तथा क्रियाशील अणु होते हैं जो बहुलकीकृत होने में सक्षम होते हैं तथा इनसे पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाई बनती है।

प्रश्न 15.2.
प्राकृतिक और संश्लिष्ट बहुलक क्या हैं? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:

  1. प्राकृतिक बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले बृहदाणु होते हैं जो प्रकृति (पादपों और जंतुओं) में पाए जाते हैं। प्रोटीन तथा न्यूक्लीक अम्ल इनके उदाहरण हैं।
  2. संश्लिष्ट बहुलक मानव निर्मित उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले बृहदाणु होते हैं। संश्लिष्ट प्लास्टिक तथा रबर इनके उदाहरण हैं।

प्रश्न 15.3.
समबहुलक और सहबहुलक पदों (शब्दों) में विभेद कर प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
समबहुलक – समान प्रकार की एकलक स्पीशीज़ के बहुलकीकरण से बने बहुलकों को समबहुलक कहते हैं। उदाहरण- पॉलिथीन ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 1
सहबहुलक – दो भिन्न प्रकार की एकलक स्पीशीज के बहुलकीकरण से बने बहुलकों को सहबहुलक कहा जाता है। उदाहरण- ब्यूना – S
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 2

प्रश्न 15.4.
एकलक की प्रकार्यात्मकता को आप किस प्रकार समझाएंगे ?
उत्तर:
एकलक में स्थित आबंधी स्थितियों की संख्या को एकलक की प्रकार्यात्मकता कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

प्रश्न 15.5.
बहुलकन पद (शब्द) को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
बहुलकन (Polymerisation ) – एक अथवा अधिक (समान या भिन्न) छोटे तथा सरल अणु (एकलक) आपस में क्रिया करके उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले वृहद अणु बनाते हैं इन्हें बहुलक कहते हैं तथा बहुलक बनने की इस क्रिया को बहुलकन कहते हैं।

प्रश्न 15.6.
(NH-CHR – CO) एक समबहुलक है या सहबहुलक?
उत्तर:
(NH-CHR-CO) इकाई एक ही प्रकार के एकलक अणु से बनी है अतः यह एक समबहुलक है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

प्रश्न 15.7.
प्रत्यास्थ बहुलकों में प्रत्यास्थ गुण किस कारण से होता है?
उत्तर:
प्रत्यास्थ बहुलकों में विभिन्न श्रृंखलाएं एक-दूसरे के साथ दुर्बल वान्डरवाल्स अन्योन्य क्रियाओं द्वारा जुड़ी होती हैं तथा कुंडलित संरचना बना लेती हैं इसलिए इन्हें स्प्रिंग की तरह खींचा जा सकता है अतः इन दुर्बल अन्तरा आण्विक बलों के कारण ही इनमें प्रत्यास्थ गुण होता है।

प्रश्न 15.8.
संकलन (योगात्मक) और संघनन बहुलकन के मध्य आप किस प्रकार विभेद करेंगे?
उत्तर:
संकलन या योगात्मक बहुलकन (बहुलकीकरण) में समान अथवा भिन्न अंसतृप्त एकलक अणु मिल कर बृहत् बहुलक अणु बनाते हैं जबकि संघनन बहुलकन में दो अथवा अधिक प्रकार के द्विक्रियात्मक एकलक अणु संघनन अभिक्रिया द्वारा बहुलक बनाते हैं, इस प्रक्रिया में छोटे अणु जैसे जल, ऐल्कोहॉल इत्यादि का विलोपन होता है। उदाहरण-प्रोपीन (CH3CH = CH2) से पॉलिप्रोपीन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 3 का बनना संकलन बहुलकन है जबकि हैक्सा मेथिलीन डाइऐमीन (NH2-(CH2)6NH2) तथा ऐडिपिक अम्ल (HOOC- (CH2)4COOH) के बहुलकन से नाइलॉन 6,6 का बनना संघनन बहुलकन है। इसमें H2O का विलोपन होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 4

प्रश्न 15.9.
सहबहुलकन शब्द (पद) की व्याख्या कीजिए और दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सहबहुलकन या सहबहुलकीकरण – सहबहुलकीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें बहुलक के निर्माण में एक से अधिक प्रकार की एकलक स्पीशीज़ प्रयुक्त होती है। सहबहुलक में प्रत्येक एकलक की अनेक इकाइयाँ होती हैं। 1, 3 – ब्यूटाडाईन तथा स्टाइरीन और 1, 3 – ब्यूटाडाईन एवं ऐक्रिलोनाइट्राइल के सहबहुलक इसके उदाहरण हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 5

प्रश्न 15.10.
एथीन के बहुलकन के लिए मुक्त मूलक क्रियाविधि दीजिए ।
उत्तर:
एथीन के बहुलकन की मुक्तमूलक क्रियाविधि में निम्नलिखित तीन पद होते हैं-
(1) श्रृंखला प्रारंभक पद-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 6

(2) श्रृंखला संचरण पद-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 7

(3) शृंखला समापन पद-दीर्घ श्रृंखला के समापन के लिए मुक्त- मूलक विभिन्न प्रकार से जुड़कर पॉलिथीन बनाते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 8

प्रश्न 15.11.
तापसुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों को प्रत्येक के दो उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
आण्विक बलों पर आधारित वर्गीकरण (Classifcation based on Molecular Forces):
सभी प्रकार के अणुओं में अन्तराअणुक बल पाए जाते हैं लेकिन बहुलकों में ये बल आपस में मिलकर अधिक प्रभावी होते हैं जिससे इनमें विशिष्ट गुण उत्पन्न हो जाते हैं। जैसे- तनन सामर्थ्य प्रत्यास्था तथा चर्मलता। इन बलों द्वारा बहुलक श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ी होती हैं। बहुलकों के यांत्रिक गुणों के आधार पर ही इन्हें दैनिक जीवन में विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग में लिया जाता है।

बहुलकों को उनमें उपस्थित अंतराआण्विक बलों के परिमाण के आधार पर इन्हें निम्नलिखित चार उपसमूहों में वर्गीकृत किया गया है-
(a) प्रत्यास्थ बहुलक (Elastomers ) – प्रत्यास्थ बहुलकों में बहुलक श्रृंखलाएँ आपस में दुर्बल अंतराआण्विक बलों द्वारा जुड़ी होती हैं। ये दुर्बल बल बहुलक को तनित होने देते हैं। श्रृंखलाओं के बीच कुछ ‘तिर्यकबंध’ भी होते हैं अतः ये बहुलक खींचने पर लम्बे हो जाते हैं तथा छोड़ देने पर पुनः अपनी पूर्व अवस्था में आ जाते हैं अर्थात् इनमें प्रत्यास्थता का गुण पाया जाता है। ये रबर के समान ठोस होते हैं। जैसे वल्कनीकृत रबर । ब्यूना – N, ब्यूना S तथा निओप्रीन भी प्रत्यास्थ बहुलकों के उदाहरण हैं।

(b) रेशे या रेशेदार बहुलक (Fibres or Fibrous Poly- mers ) – रेशेदार बहुलकों में तनन सामर्थ्य उच्च होता है क्योंकि इनमें बहुलक श्रृंखलाओं के मध्य असंख्य प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाए जाते हैं। इसी कारण ये क्रिस्टलीय ठोस होते हैं तथा इनका गलनांक तीक्ष्ण होता है। ये बहुलक धागे बनाने में प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरण-पॉलिएस्टर (टैरीलीन) तथा पॉलिऐमाइड (नाइलॉन- 6,6 ) इत्यादि ।

(c) तापसुघट्य बहुलक या ताप सुनम्य बहुलक (Thermo plastic Polymers) – ये बहुलक रेखीय अथवा अल्प शाखित लंबी श्रृंखला युक्त होते हैं, जिन्हें बार-बार गरम करने से मृदुल और ठंडा करने से कठोर हो जाते हैं अतः इन्हें साँचों में ढाला जा सकता है। इन बहुलकों में अंतराआण्विक आकर्षण बल प्रत्यास्थ बहुलकों से अधिक तथा रेशों से कम होता है। उदाहरण- पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड, पॉलिप्रोपिलीन इत्यादि ।

(d) तापदुढ़ बहुलक या थर्मोसेटिंग बहुलक (Thermoset- ting Polymers)-ये बहुलक तिर्यक बद्ध अथवा अत्यधिक शाखित होते हैं। इन्हें गर्म करने पर तिर्यक बन्धन बढ़ जाते हैं तथा इनकी संरचना त्रिविमीय जालक के समान हो जाती है अतः ये दुर्गलनीय ( Infusible ) हो जाते हैं। इसलिए इनका पुनः उपयोग नहीं किया जा सकता। ताप दृढ़ बहुलकों को सामान्यतः निम्न अणु भार वाले अर्ध तरल बहुलकों को गरम करके बनाया जाता है। उदाहरण-बैकेलाइट, यूरिया – फार्मेल्डिहाइड रेजिन इत्यादि ।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक

प्रश्न 15.12.
निम्न बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक लिखिए-
(i) पॉलिवाइनिल क्लोराइड
(ii) टेफ्लॉन
(iii) बैकेलाइट।
उत्तर:
उपर्युक्त बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक निम्न प्रकार हैं-

  • पॉलिवाइनिल क्लोराइड का एकलक CH2=CH-CI (वाइनिल क्लोराइड) है।
  • टेफ्लॉन का एकलक CF2 = CF2 (टेट्राफ्लुओरोएथिलीन) है।
  • बैकेलाइट के बनने में प्रयुक्त होने वाले एकलक HCHO (फार्मेल्डिहाइड) और C6H5OH (फ़ीनॉल) हैं।

प्रश्न 15.13.
मुक्तमूलक योगज बहुलकन में प्रयुक्त एक सामान्य प्रारंभक का नाम और संरचना लिखिए।
उत्तर:
मुक्तमूलक योगज बहुलकन में सामान्यतः बेन्जॉयल परॉक्साइड को प्रारंभक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है जिसकी संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 9

प्रश्न 15.14.
रबर अणुओं में द्विबंधों की उपस्थिति किस प्रकार उनकी संरचना और क्रियाशीलता को प्रभावित करती है?
उत्तर:
संरचनात्मक रूप से प्राकृतिक रबर एक रेखीय सिस – 1, 4 – पॉलि आइसोप्रीन है। इसमें द्विआबंध, आइसोप्रीन इकाइयों के C, और C के मध्य स्थित होते हैं तथा द्विआबंध का सिस अभिविन्यास होता है अतः इसकी श्रृंखलाओं के मध्य दुर्बल अंतराआण्विक आकर्षण होने के कारण ये समीप नहीं आ पाती हैं। इस कारण प्राकृतिक रबर की कुंडलित संरचना होती है तथा यह प्रत्यास्थता का गुण प्रदर्शित करता है ।

प्रश्न 15.15.
रबर के वल्कनीकरण के मुख्य उद्देश्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
प्राकृतिक रबर उच्च ताप (> 335K ) पर नरम तथा निम्न ताप पर (< 283K) भंगुर हो जाता है तथा इसमें जल को अवशोषित करने की क्षमता होती है। यह अध्रुवीय विलायकों में विलेय होता है तथा ऑक्सीकारकों के प्रति प्रतिरोधी नहीं होता है।

रबर के इन भौतिक गुणों में सुधार करने के लिए रबर का वल्कनीकरण किया जाता है। वल्कनीकरण से, द्विबंधों की क्रियाशील स्थितियों पर सल्फर तिर्यक बन्ध बन जाते हैं। इससे रबर की कठोरता तथा प्रत्यास्थता बढ़ जाती है।

प्रश्न 15.16.
नाइलॉन – 6 और नाइलॉन – 6,6 में पुनरावृत्त एकलक इकाइयाँ क्या हैं?
उत्तर:
नाइलॉन 6 की पुनरावृत्त एकलक इकाई [-NH(CH2)5-CO-] है तथा नाइलॉन – 6,6 बहुलक की पुनरावृत्त एकलक इकाई दो एकलकों हैक्सामेथिलीनडाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल से बनती है जो कि निम्न प्रकार है-
[-NH-(CH2)6-NH-CO-CH2)4-CO-]

प्रश्न 15.17.
निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों का नाम और संरचना लिखिए-
(i) ब्यूना – S
(ii) ब्यूना – N
(iii) डेक्रॉन
(iv) निओप्रीन ।
उत्तर:
उपर्युक्त बहुलकों के बनने में प्रयुक्त एकलकों के नाम तथा संरचना निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 10

प्रश्न 15.18.
निम्नलिखित बहुलक संरचनाओं के एकलक की पहचान कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 14
उत्तर:
उपर्युक्त बहुलकों में प्रयुक्त एकलक निम्नलिखित हैं-
(i) डेकेन – 1, 10 – डाइओइक अम्ल (HOOC(CH2)8 COOH) और हैक्सामेथिलीन डाइऐमीन H2N(CH2)6NH2

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 15

प्रश्न 15.19.
एथिलीन ग्लाइकॉल और टेरेपथैलिक अम्ल से डेक्रॉन किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:
एथिलीन ग्लाइकॉल तथा टेरेपथैलिक अम्ल की क्रिया से टेरिलीन अथवा डेक्रॉन बनाने का समीकरण निम्न है। यह संघनन बहुलकन का उदाहरण है क्योंकि इसमें जल का अणु निकलता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 11

प्रश्न 15.20
जैवनिम्ननीय बहुलक क्या है? एक जैवनिम्ननीय ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
बहुत से बहुलक पर्यावरण निम्नीकरण प्रक्रियाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं तथा ये लम्बे समय तक अनिम्नीकृत रूप में ही पड़े रहते हैं। ये बहुलक ठोस अपशिष्ट द्रव्य के रूप में एकत्रित हो जाते हैं जिनसे पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं इसी कारण जैव निम्ननीय बहुलकों का विकास हुआ।

जैवनिम्ननीय बहुलक वे बहुलक होते हैं जो एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं द्वारा विघटित हो जाते हैं। ये एन्जाइम, जीवाणुओं (Micro organisms) द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं। जैवनिम्ननीय बहुलकों में, जैव बहुलकों के समान क्रियात्मक समूह उपस्थित होते हैं। जैवनिम्ननीय बहुलकों से पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न नहीं होतीं। जैवनिम्ननीय बहुलकों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
(1) पॉलि β-हाइड्रॉक्सीब्यूटिरेट-को-β-हाइड्रॉक्सी वैलेरेट (PHB V)-यह एक ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर है। यह 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनॉइक अम्ल तथा 3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनॉइक अम्ल के सहबहुलकीकरण से बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 12

PHB V का उपयोग विशिष्ट पैकेजिंग, अस्थियों में प्रयुक्त युक्तियों (Devices) तथा औषधों के नियंत्रित मोचन (release) में होता है। पर्यावरण में PHBV का जीवाण्विक निम्नीकरण (Bacterial degradation) हो जाता है।

(2) नाइलॉन-2-नाइलॉन-6-यह ग्लाइसिन (NH2-CH2-COOH) तथा ऐमीनो कैप्रोइक अम्ल (NH2(CH2)5COOH) का एकान्तर पॉलिऐमाइड है। यह सहबहुलकीकरण का एक उदाहरण है जिसको निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 13

HBSE 12th Class Chemistry बहुलक Intext Questions

प्रश्न 15.1.
बहुलक क्या होते हैं?
उत्तर:
बहुलक उच्च आण्विक द्रव्यमान वाले पदार्थ होते हैं जिनमें बहुत अधिक संख्या में पुनरावृत्त संरचनात्मक इकाइयाँ पाई जाती हैं। जोकि कुछ सरल तथा क्रियाशील अणुओं से प्राप्त होती हैं जिन्हें एकलक कहते हैं। ये इकाइयाँ सहसंयोजक बंधों द्वारा आपस में जुड़ी होती हैं। बहुलकों को बृहदाणु भी कहते हैं। उदाहरणपॉलिथीन तथा बैकेलाइट, रबर तथा नाइलॉन-6,6.

प्रश्न 15.2.
निम्नलिखित बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 16
उत्तर:
उपर्युक्त बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम निम्नलिखित हैं-

  • हैक्सामेथिलीनडाइऐमीन तथा ऐडिपिक अम्ल
  • कैप्रोलैक्टम
  • टेट्राफ्लुओरोएथीन।

प्रश्न 15.3
निम्न को योगज (योगात्मक) (Addition) और संघनन बहुलकों में वर्गीकृत कीजिए-टेरिलीन, बैकेलाइट, पॉलिथीन, टेफ्लॉन।
उत्तर:

  1. योगज बहुलक-पॉलिथीन, टैफ्लॉन।
  2. संघनन बहुलक-टेरिलीन, बैकेलाइट।

प्रश्न 15.4.
ब्यूना-N और ब्यूना-S के मध्य अंतर समझाइए।
उत्तर:
ब्यूना-N, 1,3-ब्यूटाडाईन (CH2 = CH – CH = CH2) तथा ऐक्रिलो नाइट्राइल HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 17 का सहबहुलक है जबकि ब्यूना-S, 1,3-ब्यूटाडाईन तथा स्टाइरीन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 15 बहुलक 18का सहबहुलक है।

प्रश्न 15.5.
निम्न बहुलकों को उनके अंतराआण्विक बलों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
नाइलॉन-6,6, ब्यूना-S, पॉलिथीन
उत्तर:
उपरोक्त बहुलकों में अंतराआण्विक बलों का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होता है-
ब्यूना-S < पॉलिथीन < नाइलॉन-6,6

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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. जल की परासरणी गति के कारण पादप कोशिका भित्ति पर उत्पन्न दाब कहलाता है –
(A) परासरणी दाब
(B) भित्ति दाब
(C) स्फीति दाब
(D) परासरण विभव
उत्तर:
(C) स्फीति दाब

2. जब कोशिका पूर्णतया आशून हो तब निम्न में से कौन शून्य होगा ?
(A) आशून दाब
(B) भित्ति दाब
(C) चूषण दाब
(D) परासरण दाब
उत्तर:
(C) चूषण दाब

3. जल अवशोषण की क्रिया सबसे अधिक होती है-
(A) मूलरोमों द्वारा
(B) पत्तियों द्वारा
(C) परिपक्व जड़ द्वारा
(D) मूल गोप द्वारा
उत्तर:
(A) मूलरोमों द्वारा

4. पौधे मृदा से किस प्रकार के जल को अवशोषित करते हैं ?
(A) गुरुत्वीय जल
(B) रसायनिकबद्ध जल
(C) केशिकीय जल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) केशिकीय जल

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

5. डिक्सन तथा जॉली का रसारोहण सिद्धान्त आधारित है-
(A) जल का संसंजन बल
(B) जल स्तम्भ की निरन्तरता
(C) वाष्पोत्सर्जन अपकर्ष
(D) ये सभी
उत्तर:
(A) जल का संसंजन बल

6. पोटोमीटर का प्रयोग मापने में किया जाता है-
(A) श्वसन
(B) हवा का वेग
(C) प्रकाश संश्लेषण
(D) वाष्पोत्सर्जन
उत्तर:
(D) वाष्पोत्सर्जन

7. शुद्ध जल का विभव तथा परासरण विभव होता है –
(A) 0 तथा 0
(C) 100 तथा 100
(B) 100 तथा 0
(D) 0 तथा 100
उत्तर:
(A) 0 तथा 0

8. जिस विलयन में कोशिका स्फीति होती है, वह है –
(A) अल्पपरासारी
(B) समपरासारी
(C) अतिपरासारी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) अल्पपरासारी

9. रसारोहण का सिद्धान्त दिया था –
(A) मैक क्लंग ने
(B) जे. सी. बोस ने
(C) फ्लेमिंग ने
(D) लीडर वर्ग ने
उत्तर:
(B) जे. सी. बोस ने

10. वातरन्त्रों का कार्य है –
(A) बिन्दु स्राव
(B) वाष्पोत्सर्जन
(C) रक्त स्राव
(D) गैसों का विनिमय
उत्तर:
(D) गैसों का विनिमय

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

11. एक विलयन का जल विभव निरूपित किया जाता है –
(A) 4’r से
(B) 4°W से
(C) से
(D) App से
उत्तर:
(B) 4°W से

12. K+ आयन परिकल्पना किसने प्रस्तुत की ?
(A) जे. सी. बोस ने
(B) ए. फ्लेमिंग ने
(C) लैविट ने
(D) मुंच ने
उत्तर:
(C) लैविट ने

13. मूलदाय सिद्धान्त प्रस्तुत किया-
(A) मुंच ने
(B) डिक्सन तथा जॉली ने
(C) लैविट ने
(D) प्रीस्टले ने
उत्तर:
(D) प्रीस्टले ने

14. किसका जल विभव उच्चतम होगा ?
(A) 2% ग्लूकोज
(B) शुद्ध जल
(C) 10% ग्लूकोज
(D) 10% NaCl
उत्तर:
(B) शुद्ध जल

15. जल प्रवेश होने से कोशाओं के फूलने का कारण है-
(A) DPD
(B) स्फीति दाब
(C) अन्तःशोषण
(D) OP
उत्तर:
(B) स्फीति दाब

16. वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जल पादप कोशिकाओं में प्रवेश करता है-
(A) विसरण
(B) परासरण
(C) अन्तःचूषण
(D) परासरण और अन्तःचूषण
उत्तर:
(C) अन्तःचूषण

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

17. वेलामेन एवं स्पंजी ऊतक पाये जाते हैं-
(A) श्वसनमूल में
(B) परजीवी मूल में
(C) कन्दमूल में
(D) उपरिरोही मूल में
उत्तर:
(D) उपरिरोही मूल में

18. जब कोई जीवद्रव्य कुंचित कोशिका अल्प परासारी विलयन में रखी जाती है तो निम्न में से किस बल के कारण जल कोशिका के अन्दर प्रवेश
करता है-
(A) DPD
(B) OP
(C) WP
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) OP

19. परासरण में गति होती है-
(A) केवल विलेय की
(B) केवल विलायक की
(C) दोनों (अ) तथा (ब)
(D) न विलेय न विलायक की
उत्तर:
(B) केवल विलायक की

20. स्टोमेटा कह सकते हैं-
(A) स्टोमेट्स को
(B) लेन्टिसेल को
(C) हाइडेथोड को
(D) वार्म को
उत्तर:
(A) स्टोमेट्स को

21. भूमि में पौधों के लिए आवश्यक जल होता है-
(A) केशिका जल
(B) रासायनिक बन्धित जल
(C) गुरुत्वीय जल
(D) आर्द्रताग्राही जल
उत्तर:
(A) केशिका जल

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22. निम्नलिखित में से कोशिका विभाजन का क्षेत्र है-
(A) मूलगोप
(B) विभज्योतक क्षेत्र
(C) मूलरोम प्रदेश
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) विभज्योतक क्षेत्र

23. निम्न में से कौन-सा पदार्थ वाष्पोत्सर्जन की दर को कम करता है-
(A) फिनाइल मरक्यूरिक एसीटेट
(B) ऐब्सीसिक अम्ल
(C) (A) तथा (B)
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) तथा (B)

24. CAM पौधों के रन्ध्र –
(A) रात में खुलते हैं और दिन में बन्द हो जाते हैं
(B) कभी नहीं खुलते
(C) हमेशा खुले रहते हैं
(D) दिन में खुलते हैं तथा रात में बन्द हो जाते हैं।
उत्तर:
(A) रात में खुलते हैं और दिन में बन्द हो जाते हैं

25. यदि पुष्पों को काटकर तनु NaCl विलयन में डुबोया जाए तो-
(A) वाष्पोत्सर्जन कम होगा।
(B) अन्तः परासरण होगा।
(C) जीवाण्विक वृद्धि नहीं होगी।
(D) विलेय का पुष्प कोशिकाओं के अन्दर अवशोषण होगा।
उत्तर:
(B) अन्तः परासरण होगा।

26. एक कोशिका फूल जायेगी, यदि इसे रखा जाए-
(A) अल्प परासारी विलयन में
(B) अति परासारी विलयन में
(C) सम परासारी विलयन में
(D) इन सभी में।
उत्तर:
(A) अल्प परासारी विलयन में

27. पादपों में जल आपूर्ति होती है –
(A) परासरण के कारण
(B) अन्तःशोषण के कारण
(C) बिन्दुस्राव के कारण
(D) आसंजन बल के कारण
उत्तर:
(D) आसंजन बल के कारण

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28. रसारोहण के लिए सर्वमान्य परिकल्पना है-
(A) केशिका परिकल्पना
(B) मूल दाबवाद
(C) स्पन्दनवाद
(D) वाष्पोत्सर्जनाकर्षण
उत्तर:
(D) वाष्पोत्सर्जनाकर्षण

29. पथ कोशिकाएँ पतली भित्तियों वाली कोशिकाएँ होती हैं जो-
(A) जड़ों की अन्तस्त्वचा में पायी जाती हैं और ये कार्टेक्स से परिरंभ में जल के परिवहन को सुगम बना देती है।
(B) पोषवाह तत्वों में होती हैं जो पदार्थों के प्रवेश बिन्दु का कार्य करते हैं जहाँ से वे पदार्थ अन्य पादप भागों तक पहुँचा दिए जाते हैं।
(C) बीजों के बीज चोलों में होती हैं ताकि बीजांकुरण के दौरान वृद्धिशील भ्रूण अक्ष उनमें से होकर बाहर आ सकें।
(D) वर्तिका के केन्द्रीय भाग में पायी जाती हैं जिसमें से होकर पराग नलिका अण्डाशय की ओर बढ़ती जाती है।
उत्तर:
(A) जड़ों की अन्तस्त्वचा में पायी जाती हैं और ये कार्टेक्स से परिरंभ में जल के परिवहन को सुगम बना देती है।

30. रसारोहण के दौरान वाहिकाओं / ट्रैकीडों में जल स्तम्भ का टूटना एवं प्रभाजन सामान्यतः किसके कारण नहीं होता-
(A) लिग्नीकृत मोटी भित्तियाँ
(B) संसंजन तथा आसंजन
(C) मंद गुरुत्वाकर्ष अभिकर्ष
(D) वाष्पोत्सर्जन अभिकर्ष
उत्तर:
(B) संसंजन तथा आसंजन

31. द्वार कोशिकाएँ (Guard cells) सहायक होती हैं-
(A) चारण से सुरक्षा प्रदान करने में
(B) वाष्पोत्सर्जन में
(C) बिन्दुस्रावण में
(D) संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करने में
उत्तर:
(B) वाष्पोत्सर्जन में

32. वलयकरण प्रयोग (girdling experiment) में निम्नलिखित में से किसे हटा दिया जाता है ?
(A) केवल छाल को
(B) फ्लोएम सहित छाल को
(C) केवल फ्लोएम को
(D) सम्पूर्ण संवहन ऊतक को
उत्तर:
(B) फ्लोएम सहित छाल को

33. स्थलीय पादपों में द्वारा कोशिकाएँ निम्नलिखित में भिन्न होती हैं –
(A) माइटोकॉण्ड्रिया
(B) अन्तः प्रद्रव्यी जालिका
(C) हरित लवक
(D) कोशिका पंजर
उत्तर:
(C) हरित लवक

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

34. वाष्पोत्सर्जन निम्नलिखित में से किसकी अभिव्यक्ति है ?
(A) स्फीति दाब
(B) भित्तिदाब
(C) मूल दाब
(D) उपरोक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(A) स्फीति दाब

35. पूर्णतया स्फीति (fully turgid) कोशिका में होता है-
(A) TPO = 0
(B) WP = 0
(C) DPD = 0
(D) OP = 0
उत्तर:
(C) DPD = 0

36. खनिज तत्वों हेतु मुख्य सिंक (sink) है-
(A) जीर्ण पत्तियाँ
(B) पके फल
(C) पार्श्व विभज्योतक
(D) छाल
उत्तर:
(A) जीर्ण पत्तियाँ

37. रन्धों के खुलने एवं बन्द होने की क्रिया में K+ आयनों का आगम होता है तो निम्नलिखित का निर्गमन होता है-
(A) Na+
(B) K+
(C) Cl+
(D) H+
उत्तर:
(D) H+

38. वातरन्ध्र क्या करते हैं ?
(A) वाष्पोत्सर्जन
(B) गैसीय विनिमय
(C) खाद्य अभिगमन
(D) प्रकाश संश्लेषण।
उत्तर:
(B) गैसीय विनिमय

39. जल में रखी एक कोशिका का परासरणी फैलाव मुख्यतः किसके द्वारा नियन्त्रित होता है ?
(A) रसधानी
(B) लवक
(C) राइबोसोम
(D) सूत्रकणिका।
उत्तर:
(A) रसधानी

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

(B) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
शुद्ध जल का विभव कितना होता है ?
उत्तर:
शून्य बार (bars)

प्रश्न 2.
जल अणुओं का जाइलम वाहिकाओं की भित्ति के प्रति आकर्षण बल क्या कहलाता है ?
उत्तर:
आसंजन (adhesion)

प्रश्न 3.
मूल दाब को किस यन्त्र द्वारा नापा जाता है ?
उत्तर:
मैनोमीटर (manometer) द्वारा।

प्रश्न 4.
उस आयन का नाम बताइए जो रन्धों के खुलने एवं बन्द होने में भाग लेता है।
उत्तर:
पोटैशियम आयन (K+ ions )।

प्रश्न 5.
डोनन साम्यावस्था (Donnan’s equilibrium) के अनुसार यदि कोशिका में स्थिर आयन + ve हैं तो आने वाले आयन कौनसे होंगे ?
उत्तर:
-ve आयन अधिक संख्या में होंगे।

प्रश्न 6.
कार्बनिक भोज्य पदार्थ का स्थानान्तरण किस ऊतक द्वारा होता है ?
उत्तर:
फ्लोएम (phloem) द्वारा।

प्रश्न 7.
द्रव्य प्रवाह परिकल्पना किसने प्रस्तुत की ?
उत्तर:
मुंच (Munch) ने।

प्रश्न 8.
किन पौधों में रन्ध्र दिन में बन्द व रात में खुलते हैं ?
उत्तर:
माँसल पौधों में- जैसे-नागफनी (Opuntia)।

प्रश्न 9.
नमक के घोल में अंगूर क्यों सिकुड़ जाते हैं ?
उत्तर:
बहि परासरण (exosmosis) के कारण।

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प्रश्न 10.
रसारोहण का स्पन्दनवाद किसने प्रस्तुत किया था ?
उत्तर:
जे. सी. बोस (J. C. Bose) ने।

प्रश्न 11.
जल अणुओं के मध्य परस्पर आकर्षण को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
संसंजन बल (cohesion force)

प्रश्न 12.
जल अवशोषण के दो पथों के नाम लिखिए।
उत्तर:
एपोप्लास्ट पथ तथा सिमप्लास्ट पथ (apolast path and symplast path)

प्रश्न 13.
रन्धों के खुलते समय रक्षक कोशिकाओं का pH कितना होता है ?
उत्तर:
pH 7-8 होता है।

प्रश्न 14.
रसारोहण क्रिया किस ऊतक द्वारा होती है ?
उत्तर:
जाइलम (xylem) द्वारा।

प्रश्न 15.
माइकोराइजा क्या है ?
उत्तर:
उच्च पादप की जड़ों तथा कवक का सहजीवी सम्बन्ध (Symbiotic association ) ।

प्रश्न 16.
जल रन्ध्र कहाँ पाये जाते हैं ?
उत्तर:
शाकीय पौधों जैसे- टमाटर, घास आदि की पत्तियों के किनारों

प्रश्न 17.
कोशिका को आसुत जल में रखने पर क्या होगा ?
उत्तर:
यह जल अवशोषण करके फट जायेगी।

प्रश्न 18.
कौन-सा जल पौधों के लिए सर्वाधिक उपयोगी होता है ?
उत्तर:
केशिका जल (capillary water)

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प्रश्न 19.
मूलदाब उत्पन्न होने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता क्यों होती
उत्तर:
मूल दाब जल के सक्रिय अवशोषण से उत्पन्न होता है। अतः इसके लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 20.
बिन्दु श्रावण किससे होता है ?
उत्तर:
जलरन्ध्रों (hydrathodas) से ।

(C) लघु उत्तरीय प्रश्न -I ( Short answer type questions-I)

प्रश्न 1.
पौधों में जल एवं खाद्य पदार्थों का स्थानान्तरण किस ऊतक द्वारा होता है ? पदार्थों का दो दिशीय प्रवाह किस ऊतक में होता है ?
उत्तर:
जाइलम द्वारा जल एवं खनिज लवणों का जड़ों से ऊपर पत्तियों की ओर स्थानान्तरण होता है। पत्तियों में निर्मित खाद्य पदार्थ फ्लोएम द्वारा पहले संचयी क्षेत्रों में तथा फिर यहाँ से धीरे-धीरे उपभोग क्षेत्रों की ओर स्थानान्तरण होता है। पदार्थों का द्विदिशीय प्रवाह फ्लोयम द्वारा होता है।

प्रश्न 2.
जल विभव क्या है ?
उत्तर:
जल विभव (Water Potential ) – शुद्ध जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा तथा किसी अन्य तन्त्र (जैसे- विलयन में जल या पादप कोशिका या ऊतक में जल) में जल के अणुओं की मुक्त ऊर्जा में अन्तर को जल विभव ( water potential ) कहते हैं। इसे प्रीक अक्षर साई ( ) से प्रदर्शित करते हैं। जल विभव को दाब के मात्रकों में भी व्यक्त किया जाता है।
1 bar = 14.5lbf / in2 = 750mm Hg = 0.987 atm

प्रश्न 3.
अन्तःशोषण को कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर:
अन्तःशोषण को निम्न कारक प्रभावित करते हैं-
1. तापमान के साथ अन्तःशोषण बढ़ जाता है।
2. pH की अधिकता अन्तःशोषण को प्रभावित करती है।
3. विलेय की सान्द्रता अधिक होने पर अन्तःशोषण दर कम हो जाती है।

प्रश्न 4.
प्रतिवाष्पोत्सर्जक क्या हैं ? चार प्रतिवाष्पोत्सर्जकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ऐसे पदार्थ जो वाष्पोत्सर्जन को कम करते हैं, प्रतिवाष्पोत्सर्जक कहलाते हैं।
(i) CO2
(ii) ऐब्सीसिक अम्ल
(iii) फिनाइल मर्क्यूरिक एसीटेट
(iv) ऑक्सीएथीन ।

प्रश्न 5.
पारगम्यता एवं जीवद्रव्य कुंचन में भेद कीजिए।
उत्तर:
पारगम्यता एवं जीवद्रव्य कुंचन (Permeability and Plasmolysis) – कोशिका कला का वह गुण जिसके द्वारा वह अपने से होकर गुजरने वाले अणुओं का नियन्त्रण रखती है, पारगम्यता ( permeabilily ) कहलाती है। जब रिक्तिका में से रिक्तिका रस कोशिका के बाहर निकल जाता है तथा जीवद्रव्य सिकुड़ जाता है तो इसे जीवद्रव्य कुंचन (plamolysis) कहते हैं ।

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प्रश्न 6.
परासरण किसे कहते हैं ?
उत्तर:
परासरण (Osmosis) परासरण वह क्रिया है जिसमें अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा पृथक् किये गये विभिन्न सान्द्रता वाले घोलों में विलायक के अणुओं का विसरण कम सान्द्रता वाले घोल से अधिक सान्द्रता वाले घोल की ओर होता है।

प्रश्न 7.
भित्ति दाब से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
जल के प्रासरण के कारण कोशिका की अन्तर्वस्तुएँ कोशिका भित्ति पर दाब डालती हैं जिसे स्फीति दाब कहते हैं। स्फीति दाब के समान कोशिका भित्ति भी एक दाब डालती है जो कि स्फीति दाब के बराबर एवं विपरीत होता है। इसे भित्ति दाव (wall pressure) कहते हैं।

प्रश्न 8.
बिन्दुस्राव के लिए उत्तरदायी दो परिस्थितियाँ लिखिए।
उत्तर:
(i) मूल दाब (root pressure)
(ii) अधिक जल अवशोषण किन्तु कम वाष्पोत्सर्जन ।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न- II ( Short Answer Type Questions-II)

प्रश्न 1.
पारगम्यता क्या है ? पारगम्यता के आधार पर झिल्लियाँ कितने प्रकार की होती हैं। पारगम्यता को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
उत्तर:
पारगम्यता (Permeability) झिल्लियों का वह गुण जिसके कारण झिल्ली से होकर कोई विलेय अथवा विलायक गुजरता है, झिल्ली की पारगम्यता (permeability) कहलाता है। इसके आधार पर झिल्लियाँ चार प्रकार की होती हैं –
(i) अपारगम्य ( Impermeable ) – ये झिल्लियाँ विलेय या विलायक किसी को भी आर-पार नहीं होने देती, जैसे- कार्क कोशिकाओं की सुबेरिनयुक्त कोशाभित्ति ।
(ii) अर्द्ध- पारगम्य (Semi-permeable ) – यह केवल विलायक के अणुओं को अपने से पार जाने देती है; जैसे- रिक्तिका झिल्ली ।
(iii) वरणात्मक पारगम्य (Selectively permeable ) – यह आवश्यकतानुसार कुछ विलेय अणुओं को आर-पार जाने देती है जैसे—कोशिका झिल्ली (cell membrane) |
(iv) पारगम्य (Permeable ) – यह विलेय तथा विलायक दोनों को आर-पार जाने देती है। जैसे—कोशिका भित्ति ।

पारगम्यता को प्रभावित करने वाले कारक
(i) ताप, pH में अन्तर दाब आदि।
(ii) O2 की कमी, CO2 की अधिकता।
(iii) जीर्णावस्था।

प्रश्न 2.
परासरण तथा अन्तःशोषण में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
परासरण तथा अन्तः शोषण में अन्तर

परासरण ( osmosis):अन्तःशोषण (Imbibition):
(i) यह द्रव पदार्थों द्वारा जल का अवशोषण है।(i) यह ठोस पदार्थों द्वारा जल का अवशोषण है।
(ii) यह क्रिया केवल जीवित कोशिका में होती है।(ii) जीवित कोशिका में होना आवश्यक नहीं है।
(iii) इसमें अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) की आवश्यकता होती है।(iii) इसमें अर्द्ध-पारगम्य झिल्ली (semi-permeable membrane) की आवश्यकता नहीं होती है।
(iv) विलयन की सान्द्रता के अनुसार ही पररासरण की दिशा निर्धारित होती है।(iv) इसमें सान्द्रता का महत्व नहीं है।

प्रश्न 3.
परासरण का पौधों में महत्व लिखिए।
उत्तर:
परासरण का महत्व (Importance of Osmosis) – पौधों में परासरण के निम्नलिखित महत्व हैं-
(i) इसके फलस्वरूप मूलरोमों द्वारा जल का अवशोषण होता है।
(ii) एक कोशिका से दूसरी कोशिका में जल का स्थानान्तरण होता है।
(iii) कोशिका की स्फीति (turgidity) बनी रहती है।
(iv) रन्ध्रों के खुलने एवं बन्द होने की क्रिया होती है।
(v) वाष्पोत्सर्जन में सहायक होता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित के कारण लिखिए-
(क) बाढ़ के पानी में अधिक दिनों तक डूबे रहने के कारण पौधे नष्ट हो जाते हैं।
(ख) समुद्री जन्तु या पौधे को अलवणीय जल में रखने पर वह जीवित नहीं रहता, जबकि उचित मात्रा में जल यहाँ भी उपलब्ध है।
(ग) रन्ध्रीय एवं उपत्वचीय वाष्पोत्सर्जन की तुलना के लिए केवल पृष्ठाधारी पत्ती ही क्यों प्रयोग की जाती है ?
(घ) पौधघर से पौधों का बगीचे में स्थानान्तरण सायंकाल में करना क्यों लाभदायक है ?
उत्तर:
(क) बाढ़ के पानी में डूबे रहने से पौधों की अनेक क्रियाएँ प्रभावित होती हैं। इनमें प्रकाश संश्लेषण, वाष्पोत्सर्जन एवं श्वसन क्रियाएँ बन्द हो जाती हैं। जड़ों में श्वसन न हो पाने के कारण सक्रिय अवशोषण बन्द हो जाता है। रन्नों के बन्द हो जाने से गैसों का विनिमय (exchange of gases) नहीं हो पाता । अन्ततः पौधे की क्रियाएँ शिथिल होकर वह मर जाता।
(ख) समुद्र जलीय पौधे को अलवणीय जल में रखने पर इनमें अन्त: परासरण (endosmosis) होने लगता है जिससे इनकी कोशिकाएँ फटने लगती हैं।
(ग) पृष्ठाधारी पत्तियों (dorsiventral leaves) के एक ओर अधिक तथा दूसरी ओर कम प्रकाश पड़ता है। इसकी पृष्ठ सतह पर मोटी उपचर्म (cuticle) होती है और रन्ध्रों (stomata) की संख्या भी कम होती है। अतः इन पत्तियों की पृष्ठ सतह से वाष्पोत्सर्जन कम तथा अधर सतह से अधिक होता है।
(घ) सायं के समय पत्तियों में निर्मित खाद्य पदार्थ विलेय अवस्था में आकर निचले भागों में अधिक पहुँचता है। इसी कारण शीर्षो पर वृद्धि की दर भी सायंकाल में बढ़ जाती है। अतः पौधे को जमने में अधिक समय नहीं लगता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए – (क) परासरण दाब, (ख) प्लानि या मुर्झाना।
उत्तर:
(क) परासरण दाब (Osmotic Pressure):
परासरण दाब दो भिन्न-भिन्न सान्द्रता वाले विलयनों के बीच रखी गई अर्द्धपारगम्य झिल्ली के दोनों ओर वाले उच्चतम विसरण दाब ( diffusion pressure) को कहते हैं। परासरण दाब के कारण ही अर्द्धपारगम्य झिल्ली के दोनों ओर परासरण की क्रिया होती है। परासरण दाब को वायुमण्डलीय दाब ( atm) में मापा जाता है। यह विलेय अणुओं के अनुक्रमानुपाती होता है। विलेय की मात्रा बढ़ाने पर यह बढ़ता है। दूसरे शब्दों में, “किसी विलयन का परासरण दाब (OP) वह दाब है जो उस विलयन को अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा विलायक से पृथक् करने पर अधिक सान्द्रता वाले विलयन में विलायक के परासरण (Osmosis) के कारण उत्पन्न होता है।”

(ख) ग्लानि या मुर्झाना (wilting):
अत्यधिक वाष्पोत्सर्जन या जड़ों द्वारा कम जल अवशोषण के कारण पौधे में जल की कमी हो जाती है जिससे कोशिकाओं का स्फीति दाब (turgor pressure) कम हो जाता है। इसके कारण पत्तियाँ नीचे की ओर लटक जाती हैं। ऐसी स्थिति को ग्लानि या मुर्झाना (wilting) कहते हैं। जब पत्तियाँ दोपहर के समय मुर्झाती हैं तथा सायंकाल फिर सीधी हो जाती हैं तो इसे अस्थाई म्लानि कहते हैं। यदि मृदा में जल की कमी हो जाय तो यह स्थाई म्लानि में बदल सकती है। इस स्थिति में पौधा मर जाता है।

प्रश्न 6.
रन्ध्र तथा जलरन्ध्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रन्ध्र तथा जलरन्ध्र में अन्तर –

रन्य (Stomata)जलरन्य (Hydrathodes)
रन्ध्र (stomata) पौधों के वायवीय अंगों (पत्ती, कोमल तने) आदि पर मिलते हैं।जलरन्ध्र (hydrathodes) केवल कुछ पत्तियों पर मिलते हैं।
ये पत्ती, दल आदि की ऊपरी तथा निचली बाह्य त्वचा (upper or lower epidermis) पर मिलते हैं।ये केवल पत्ती के किनारे (margin) पर मिलते हैं।
इनमें रक्षक कोशिकाएँ (guard cells) पायी जाती हैं।इनमें नहीं मिलती हैं।
रक्षक कोशिकाओं क्लोरोप्लास्ट मिलता है।जलरन्ध्र (hydrathodes) को घेरने वाली कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट नहीं मिलता है।
रन्ध्र स्फीति तथा श्लथ (flaccid) दशा में खुलते तथा बन्द होते हैं।जलरन्ध्र्र हमेशा खुले रहते हैं।
केवल, शुद्ध जल बाहर वाष्प (vapour) बनकर निकलता है।जल द्रव के रूप में निकलता है तथा उसमें शर्करा, खनिज आदि मिले होते हैं।
रन्ध्र के नीचे रन्ध्रीय गुहा (stomatal cavity) पायी जाती है।जलरन्द्र के नीचे की ओर एपीथेम कोशिकाएँ मिलती हैं।
रन्ध्र का शिरा से कोई सम्बन्ध नहीं होता है।यह शिरा के अन्त में बनते हैं।

प्रश्न 7.
वाष्पोत्सर्जन तथा बिन्दुख्तावण में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
वाष्पोत्सर्जन तथा बिन्दुस्रावण में अन्तर

वाघ्मोत्सर्जन (Transpiration):बिन्दुसावण (Guttation):
यह क्रिया दिन में होती है।यह क्रिया रात में होती है।
पानी वाष्प बनकर उड़ता है। यह क्रिया रन्ध्रों (stomata) द्वारा होती है।पानी द्रव के रूप में निकलता है।
वाष्पोत्सर्जित (transpirated) जल शुद्ध होता है।यह जलरन्ड्रों (hydrathodes) द्वारा होती है जो शिराओं के अन्त में स्थित होते हैं।
यह क्रिया रन्ध्रों (stomata) से नियन्त्रित हैं।बिन्दु श्रावित जल अशुद्ध होता है परन्तु इसमें खनिज तथा शर्करा आदि पाए जाते हैं।
यदि सतह का तापमान घटा दिया जाय तो वाष्पोत्सर्जन (transpiration) की क्रिया धीमी पड़ जाती है।यह क्रिया अनियन्त्रित है।

प्रश्न 8.
निक्किय व सक्रिय खनिज अवशोषण में अन्तर लिखिए। उत्तरि्क्रिय व सक्रिय खनिज अवशोषण में अन्तर
उत्तर:

निक्क्रिय खनिज अवशोषण (Passive Mineral Absorption)सक्रिय खनिज अवशोषण (Active Mineral Absorption)
इसमें ऊर्जा की आवशयकता नहीं होती है।इसमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
यह कोशिका कला से अधिक सान्द्रता से कम सान्द्रता की ओर होता है ।यह कोशिका कला द्वारा सान्द्रण प्रवणता (concentration gradient) के विरुद्ध कम रासायनिक विभव से अधिक की ओर होता है।
यह कोशिका भित्ति व रिक्तिका (vacuole) के मध्य उपस्थित कोशिकाद्रव्य से होता है।यह कोशिका कला तथा रिक्तिका कला (tonoplast) द्वारा होता है।
इसे सामान्यतः पम्प नहीं कहते हैं।इसे सामान्यतः पम्प कहते हैं।
यह क्रिया अचानक होती है तथा सन्तलन होने तक चलती है।इस क्रिया में किसी प्रकार का सन्तुलन स्थापित नहीं होता है।

प्रश्न 9.
निष्क्रिय अवशोषण तथा सक्रिय जल अवशोषण में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
निक्क्रिय व सक्रिय जल अवशोषण में अन्तर

निक्किय जल अवशोषण (Passive water Absorption):सक्रिय जल अवशोवण (Active Water Absorption):
क्रियात्मक विभव पौधे के वायवीय भागों में उत्पन्न होता है।इसके लिए क्रियात्मक विभव मूल की कोशिकाओं में उत्पन्न होता है।
तेजी से वाष्पोत्सर्जन (transpiration) के कारण जाइलम वाहिनियों में वाष्पोत्सर्जन खिंबचाव उत्पन्न होता है।जड़ें धीमी गति से जल को भमि से परासरित करती रहती हैं और दारु वाहिनियों में भेजती रहती हैं।
वह खिंचाव मूलीय जाइलम (xylem) में पहुँचा दिया जाता है।अतः मूलदाब (root pressure) उत्पन्न होता है।
जड़ें निक्रिय अवशोषण तल का कार्य करती हैं।यह क्रिया धीमी गति से वाष्पोत्सर्जन करते हुए पादप के जाइलम (xylem) पर पर्याप्त दाब बनाती है।
अवशोषण मूल के माध्यम से होता है।अवशोषण मूल के द्वारा होता है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए –
(क) बिन्दुस्राव
(ख) रसस्राव।
उत्तर:
बिन्दुस्राव (Guttation ) – पत्तियों के किनारों (Margins) जल की छोटी-छोटी बूंदों का स्रावण (Secretion) बिन्दुस्राव कहलाता है। छिद्र कोशिका से अरबी (Colocasia ), टमाटर, आलू, घास आदि शाकीय पौधों की पत्तियों में यह क्रिया प्रातः काल के समय स्पष्ट देखी जा सकती है। इनमें पत्तियों के किनारों पर सूक्ष्म छिद्र पाये जाते हैं जिन्हें जलरन्ध्र (hydrathodes) कहते एपीथेम वाहिका हैं। इन जलरन्ध्रों में एपीथेम (epithem) कोशिकाएँ पायी जाती हैं जो जाइलम से जल ग्रहण करके जलरन्ध्रों से होकर इसे बूंदों के रूप में बाहर निकालती हैं।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन - 1
रसस्राव (Latex secretion) – पौधे के किसी क्षतिग्रस्त या कटे हुए भाग से जल सदृश रस या लैटेक्स (latex) का बाहर निकलना रसस्राव कहलाता है। पाम (palm) के पौधे में यह फ्लोएम से होता है। कनेर (Nerium), आम आदि में यह स्राव लैटेक्स (latex) के रूप में होता है।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन

(E) निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions )

प्रश्न 1.
परासरण किसे कहते हैं ? किसी एक प्रयोग द्वारा परासरण क्रिया प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
परासरण (Osmosis):
faeft अर्द्धपारगम्य (semi- permeable) कला से होकर एक विलयन से दूसरे विलयन की ओर जल के अणुओं के विसरण को परासरण ( osmosis) कहते हैं। जल के अणुओं का यह विसरण कम सान्द्रता वाले घोल से अधिक सान्द्रता वाले घोल की ओर होता है। परासरण की क्रिया दो प्रकार की होती है –
1. बहि: परासरण (Exosmosis) – कोशिका को किसी सान्द्र विलयन ( अतिपरासारी) में रखने पर कोशिका के अन्दर से जल बाह्य विलयन में जाने लगता है, इसे बहि: परासरण (exomosis) कहते हैं। जैसे- अंगूर को शर्करा या नमक के गाढ़े घोल में रखने पर यह सिकुड़ जाता है।

2. अन्तःपरासरण (Endosmosis) – कोशिका को आसुत या शुद्ध जल (अल्पपरासारी) में रखने पर जल के अणु कोशिका में प्रवेश करते हैं, इसे अन्त:परासरण (endosmosis) कहते हैं। जैसे- किशमिश (dry grapes) को जल में रखने पर ये जल अवशोषित कर फूल जाते हैं।

परासरण का प्रदर्शन (Demonstration of Osmosis)
अण्डे का ऑस्मोमीटर (Egg Osmometer ) – मुर्गी का साबुत अण्डा (egg) लेकर इसमें छोटा-सा एक गोल छेद करके इसका अन्तःपदार्थ निकाल देते हैं। अब अण्डे के खोल को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) में कुछ देर रखते हैं। जिससे इसका कैल्शियम कार्बोनेट का बना कड़ा घोल घुल जाता है और जीवद्रव्य कला बचती है। जीवद्रव्य कला को कांच की एक नली को कला में उपस्थित छिद्र में डालकर बाँध देते हैं। अब इस कला में चीनी का गाढ़ा घोल भरकर इसे जल से भरे बीकर में चित्रानुसार रखकर स्टैण्ड से कस देते हैं। कुछ समय बाद हम देखते हैं कि काँच की नली में जल का तल काफी ऊपर चढ़ गया है। इससे स्पष्ट है कि जीवद्रव्य कला से होकर जल के अणु अन्तःपरासरण (endosmosis) द्वारा अण्डे की झिल्ली के अन्दर घोल में प्रवेश करते हैं।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन - 2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए –
(क) आयन विनिमय
(ख) डोनन साम्यावस्था
(ग) वाहक संकल्पना
(घ) बेनेट क्लार्क का प्रोटीन लेसीथिन सिद्धान्त
(ङ) खनिज स्थानान्तरण।
उत्तर:
1. आयन विनिमय (Ion Exchange) – मृदा में खनिजों का अवशोषण आयनों (ions) के रूप में होता है। ये आयन मूलरोम (root hairs) की सतह पर अधिशोषित होते हैं तथा उनका विनिमय अपने ही प्रकार के आयनों से हो जाता है। यह क्रिया निम्न दो प्रकार से होती है-
(a) सम्पर्क आयन विनिमय (Contact Ion Exchange) – मृदा के कणों पर उपस्थित आयन जड़ की सतह पर उपस्थित आयनों के सम्पर्क में आकर बदल जाते हैं।
(b) काबोंनिक अम्ल विनिमय (Carbonic Acid Exchange)- जड़ों द्वारा श्वसन प्रक्रिया में छोड़ी गयी CO2मृदा जल से क्रिया करके कार्बोनिक अम्ल H2CO3 बनाती हैं। कारोनिक अम्ल H+तथा HCO3आयनों में टूट जाता है। H+ मृदा में उपस्थित दूसरे विद्युत धनात्मक तत्वों से मिलकर पौधों द्वारा अवशोषित होते
2. डोनन-साम्यावस्था (Donnan’s Equilibrium)-ऐसे आयन जो कोशिका कला से बाहर नहीं आ सकते, स्थिर आयन (fixed ions) कहलाते हैं। कोशिका कला धनात्मक +ve तथा ऋणात्मक -ve दोनों प्रकार के आयनों को भीतर आने दे सकती है। सामान्यतः कोशिका में कला से होकर जितने आयन प्रवेश करते हैं उतने ही
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दूसरे प्रकार के आयन बाहर निकल आते हैं। इस प्रकार आयनों की स्थिति सन्तुलित बनी रहती है, जो – ve आयन कोशिका से बाहर नहीं जा सकते उनके लिए +ve आयन बाहर से आते हैं। इस प्रकार अन्दर प्रवेश करने वाले + ve आयन की संख्या – ve आयनों से अधिक होती है। यदि स्थिर आयन + ve हैं तो अन्दर प्रवेश करने वाले – ve आयन्स की संख्या अधिक होगी। इसे डोनन साम्यावस्था कहते हैं।
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3. वाहक संकल्पना (Carrier Concept) कोशिका कला में मुक्त आयनों के विनिमय के लिए वाहक मिलते हैं, जो आयनों से मिलकर वाहक आयन समिश्र (Carrier Ion Complex) बनाते हैं। ये वाहक (Carriers) उन आयनों को कोशाकला से पार ले जाते हैं। ये वाहक (Carriers) सक्रिय अवशोषण (Active absorption) करते हैं। आयन्स का अवशोषण केवल संतृप्त दशा तक होता है।

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(घ) बैनेट-क्लार्क का प्रोटीन लेसीथिन सिद्धान्त (Protein Lecithin Theory of Bennet Clark) – बेनेट तथा क्लार्क (1956) ने कोशिका कला में प्रोटीन तथा फॉस्फोलिपिड की उपस्थिति को बताया। जहाँ प्रोटीन लैसीथिन (फॉस्फोटाइड) से बन्धित होते हैं। इनमें उपस्थित फाँस्फेट समूह + ve आयनो का बाँधता है जो कला के अन्दर की ओर लैसीथिनेज़ (lacithinase) विकर की क्रिया से मुक्त होते हैं। लेसीथिन का संश्लेषण पुनः कोलीन एसीटाइलेज (cholineacetylase) विकर की उपस्थिति में फॉस्फेटिडिक अम्ल (phosphatidic acid) एवं कोलीन (choline) से होता है।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन - 18

खनिज आयनों का स्थानान्तरण (Translocation of Mineral Ions) – जब आयन सक्रिय या निक्क्रिय उद्र्रहण से या फिर दोनों की सम्मिश्रित प्रक्रिया के माध्यम से जाइलम में पहुँच जाते हैं, तब उनका परिवहन पादप तने एवं सभी भागों तक वाष्पोत्सर्जन प्रवाह के माध्यम से होता है। खनिज तत्वों के लिए मुख्य कुंड पौधे की वृद्धि का क्षेत्र होता है जैसे कि शिखाग एवं पार्श्व विभज्योतक (meristems), तरुण पत्तियाँ, विकासशील फूल, फल एवं बीज तथा भंडारण अंग। खनिज आयनों का विसर्जन महीन शिराओं के अन्तिम छोर पर कोशिकाओं के द्वारा विसरण एवं सक्रिय उद्ग्रण से होता है। खनिज आयनों को जल्दी ही पुनः संघटित विशेष रूप से पुराने जरावस्था (senescing) वाले भाग से किया जाता है। पुरानी तथा मरती हुई पत्तियाँ अपने भीतर के खनिजों को नई पत्तियों में निर्यातित (export) कर देती है।
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ठीक इसी प्रकार से पत्तियाँ पर्णपाती वृक्ष (deciduous tree) से झड़ने से पहले अपने खनिज तत्त्वों को अन्य भागों को दे देती हैं। जो पदार्थ प्रायः त्वरित संचारित या संघटित होते हैं, वे हैं फॉस्फोरस, सल्फर, नाइट्रोजन तथा पौटेशियम। कुछ तत्व जो कि संरचनात्मक कारक होते हैं, जैसे कि कैल्सियम इन्हें पुनः संघटित नहीं किया जाता है। जाइलम स्राव का विश्लेषण यह दर्शाता है कि कुछ नाइट्रोजन अकार्बनिक आयनों के रूप में ढोए (carried) जाते हैं। इसी तरह फॉस्फोरस एवं सल्फर भी कार्बनिक यौगिकों के रूप में पहुँचाए जाते हैं। इसके अलावा जाइलम एवं फ्लोएम के बीच भी पदार्थों का आदान-्रदान होता है। अतः हम स्पष्ट रूप से अन्तर नहीं कर पाते कि जाइलम केवल अकार्बनिक पोषकों का परिवहन करता है तथा फ्लोएम कार्बनिक पदार्थों का, जैसा कि पहले विश्वास किया जाता है।

प्रश्न 3.
विसरण दाब न्यूनता से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
पौधों की कोशिका में विसरण दाब न्यूनता, परासरण दाब, स्फीति दाब एवं भित्ति दाव में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
1. परासरण दाब (Osmotic Pressure or OP)-परासरण दाब (O P) वह दाब है जो किसी विलयन पर बाहर से अनुप्रयुक्त करने पर विलायक के उस परासरण को रोकती है जो उस विलयन (solution) को उसके विलायक (solvent) से अर्द्धपारगम्य कला द्वारा पृथक् करने पर विलयन की ओर होता है। दूसरे शब्दों में, किसी भी विलयन को उसके विलायक (जल) से अर्द्धपारगम्य झिल्ली द्वारा पृथक् करने पर विलयन में उत्पन्न होने वाले अधिकतम दाब को परासरण दाब (OP) कहते है। किसी विलयन का परासरण दाब (OP) विलायक में उपस्थित विलेय पदार्थ के अणुओं की संख्या के समानुपाती होती है। किसी कोशिका में परासरण दाब (OP) तथा स्फीति दाब (TP) दोनों परासरण क्रिया के कारण उत्पन्न होते हैं। कुछ पदार्थों में जल का परासरण दाब (OP) सदैव शून्य होता है। जल का प्रवाह सदैव कम परासरी सान्द्रता से अधिक परासरी सान्द्रता की ओर होता है। परासरण दाब मापने के लिए ओस्मोमीटर (osmometer) नामक यन्त्र का प्रयोग किया जाता है।
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2. आशून या स्पीति दाब (Turgor Pressure TP) – किसी भी कोशिका में कोशिकाद्रव्य तथा कोशिकांग कोशिकाकला (plasmalemma) द्वारा घिरे रहते हैं। कोशिका झिल्ली के बाहर कोशिकाभित्ति (cell wall) होती है जो सेल्युलोज की बनी होती है जब किसी पादप कोशिका को जल में रखा जाता है तो जल कोशिका की रिक्तिका में रस का परासरण दाब (OP) अधिक होने लगता है, क्योंकि बाहर से जल के अणु कोशिका में विसरित होने लगते हैं, जिसके फलस्वरूप जीवद्रव्य कला या प्लाज्मालेमा कोशिकाभित्ति पर दबाव डालने लगती है जिसे आशून या स्पीति दाब्ब (TP) कहते हैं।

3. भित्ति दाब (Wall Pressure ; WP) – कोशिकाभित्ति मजबूत होती है जिसके फलस्वरूप स्फीति दाब के समान किन्तु विपरीत दिशा में जीवद्रव्य पर कोशिका भित्ति एक दाब उत्पन्न करती है अर्थात् स्फीति दाब (TP) का विरोध करती है, इसे भित्ति दाब (WP) कहते हैं। भित्ति दाब (WP) तथा स्फीति दाब (TP) के कारण ही कोशिकाएँ आशून (turgid) रहती हैं और आशून दाब (TP) के कम होने पर ही पत्तियाँ मुरझाती हैं।

विसरण दाब न्यूनता (Diffusion Pressure Deficit):
जीवित कोशिकाएँ प्रायः परासरण मापी (osmometer) के रूप में कार्य करती हैं। पादप कोशाभित्ति पूर्णत: पारगम्य (permeable) होती है। अतः ये शरीर क्रियात्मक दृष्टि से अधिक उपयोगी नहीं हैं, परन्तु यह कोशिका को एक निश्चित आकार प्रदान करती हैं। कोशाभित्ति के अन्दर की ओर अर्द्धपारगम्य कला (semipermeable membrane) होती है। पादप कोशिकाओं (plant cells) में एक बड़ी रसधानी (vacuole) होती है जिसमें कोशिका रस (cell Sap) भरा होता है। कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) को रसधानी से अलग करने वाली झिल्ली टोनोप्लास्ट (tonoplast) कहलाती है। यह भी प्लाज्माकला (plasma membrane) के समान होती है। कोशिका के परासरण (osmosis) के लिए आवश्यक दशाएँ होती हैं।
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जब कोशिका को जल में रखा जाता है तो इसके द्वारा जल अवशोषण (absorption) के कारण स्फीति दाब (TP) बढ़ता है और साथ ही भित्ति दाब (WP) भी बढ़ता जाता है। साम्यावस्था स्थापित होने पर स्फीति दाब (TP) परासरण दाब के बराबर होता है।
परासरण दाब = स्फीति दाब
OP = TP
OP – TP = 0
साम्यावस्था स्थापित होने से पूर्व परासरणी दाब (OP) एवं स्पीति दाब (TP) के कारण जल के अणु कोशिका में प्रवेश करते हैं। अतः जल का कोशिका के अन्दर प्रवेश करना अथवा न करना इन दोनों दाबों के अन्तर पर ही निर्भर करता है। अतः वह शक्ति जो कोशिका में जल (अथवा विलायक) के अणुओं के आने-जाने को नियत्रित करती है, उसे विसरण दाव्ब न्यूनता (Diffusion Pressure Deficit : DPD) कहते हैं। इसे कोशिका का चूष्ण दाब (Suction Pressure; SP) भी कहते हैं।
विसरण दाब न्यूनता = परासरण दाब – स्फीति दाब
DPD (SP) = OP – TP
चूँकि साम्यावस्था में OP = TP
इसलिए इस स्थिति में विसरण दाब न्यूनता
DPD = 0
श्लथ (Flaccid) कोशिका का स्फीति दाब (TP) शून्य होता है तथा ऐसी
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स्थिति में कोशिका रस का परासरण दाब (OP) विसरण दाब न्यूनता (DPD) के बराबर होता है।
यदि TP = 0 हो, तो
DPD = OP
जब कोशिका को अल्पपरासरी विलयन (hypotonic solution) में रखा जाता है तो स्फीति दाब (TP) धीरे-धीरे बढ़ने लगता है साथ ही परासरण दाब (OP) कम होने लगता है। स्फीति दाब के बढ़ने तथा परासरण दाब के कम होने से DPD भी कम होता रहता है। जब कोशिका पूर्ण रूप से स्सीति (turgid) होती है तब OP, TP के बराबर हो जाता है। उस समय DPD का मान शून्य होता है।

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प्रश्न 5.
मूलदाब किसे कहते हैं ? चित्र द्वारा मूल दाब का प्रदर्शन के लिए एक प्रयोग लिखिए।
उत्तर:
मूल दाब्ब सिद्धात (Root Pressure Theory) – सर्वप्रथम स्टीफन हेल्स (1727) ने मूल दाब (Root Pressure) शब्द का प्रयोग किया था। मूलरोम मृदा से जल अवशोषित करते हैं। वल्कुट कोशिकाएँ (cortical cells) मूलरोमों (root hairs) से जल प्रहण करके जाइलम वाहिनियों (xylem vessels) में अत्यधिक दबाव के साथ पहुँचाती हैं, इस दाब को मूलदाब (root pressure) कहते हैं।

मूल दाब का प्रदर्शन निम्न प्रयोग द्वारा किया जा सकता है –
मूलदाब का एक प्रयोग द्वारा प्रदर्शन (Demonstration of Root Pressure by an Experiment) – गमले में लगा एक छोटा पौधा लेकर इसे जल से भरी एक नाद में रख देते हैं। जल के अन्दर ही पौधे को मिट्टी से 7.8 cm ऊपर से तेज चाकू से काटकर ऊपरी भाग अलग कर देते हैं। तने के कटे हुए सिरे पर रबर की सहायता से काँच की एक नली लगा देते हैं। उपकरण को चित्रानुसार स्टैण्ड में कस देते हैं। काँच की नली के स्थान पर मैनोमीटर (manometer) भी लगाया जा सकता है।

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मैनोमीटर की U नली में पारा Hg भरा होता है। रबर की नली के अन्दर तथा मैनोमीटर के शेष भाग में जल भर लेते हैं। उपकरण को चित्रानुसार स्टैण्ड में कस देते हैं। मैनोमीटर के स्केल पर जल या पारे का तल प्रयोग प्रारम्भ करने से पहले तथा प्रयोग समाप्त होने के बाद पढ़ लेते हैं। मैनोमीटर की खड़ी भजा में पारे का तल में वृद्धि दाब को प्रदर्शित करता है। कटे हुए तने की जाइलम वाहिनियों से मूलदाब (root pressure) के कारण जल रबर की नली में उपस्थित जल में आता है, जिससे मैनोमीटर में पारे का तल ऊपर की ओर बढ़ जाता है।

2. जैव शक्तिवाद (Vital Force Theory) – रसारोहण की क्रियाविधि को समझाने के लिए भारतीय वनस्पति विज्ञानी सर जे. सी. बोस (Sir J. C. Bose) ने 1923 में जैविक शक्तिवाद प्रस्तुत किया। इसे बोस का स्पद्दन सिद्धान्त (Bose’s Pulsation Theory) भी कहते हैं। इन्होंने रसारोहण की क्रिया को स्वनिर्मित क्रिस्कोग्राफ उपकरण द्वारा प्रदर्शित किया। ड्वाक्टर बोस ने अपने प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि तने की सबसे भीतरी कारेंक्स की कोशिकाओं में स्पन्दन गति (pulsation movement) होती है, जिसके कारण रसारोहण होता है जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

3. भौतिक बल सिद्धांत (Physical Force Theory):
इस वाद के अनुसार रसारोहण की क्रिया निर्जीव कोशिकाओं में ही होती है, अनेक वैज्ञानिकों ने इसका समर्थन किया है। इसके अन्तर्गत महत्वपूर्ण सिद्धान्त निम्न प्रकार हैं –
(i) कोशिका बल सिद्धातत (Capillary Force Theory) – वोहम (1809) के मतानुसार जाइलम की वाहिकाएँ केशिका नली की भांति कार्य करती हैं जिनमें जल केशिका बल (capillary force) के कारण ऊपर चढ़ता है, किन्तु इस मत को मान्यता प्राप्त नहीं हो सकी क्योंकि वाहिकाओं का व्यास इतना कम नहीं होता और न ही इस के अनुसार जल पौधों की इतनी ऊँचाई तक पहुँच सकता है।
(ii) अन्त:शोषणवाद (Imbibition Theory) – सेक्स (1878) के अनुसार जाइलम वाहिनियों में जल अन्तःशोषण के कारण चढ़ता है परन्तु यह मत भी मान्य नहीं है।
(iii) वाद्योत्सर्जन खिंचाव एवं डिक्सन का ससंजनवाद (Transpiration Pull and Dixon’s Theory of Cohesion)
इस मत के अनुसार पौधों में लगातार वाष्पोत्सर्जन (transpiration) के कारण जल ऊपर चढ़ता रहता है तथा खड़ी दिशा में पानी का स्तथ (water column) टूटता नहीं है। इस मत को डिक्सन तथा जौली (1894) ने अपने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया।
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इस सिद्धान्त को निम्न तीन भागों में समझा जा सकता है –
(i) वाप्योत्सर्जन कर्षण (Transpiration Pull) – पौधों में वाष्पोत्सर्जन (transpiration) की क्रिया द्वारा जल की कमी होने से पर्णमध्योत्तक कोशिकाओं (mesophyll cells) में भी जल की कमी हो जाती है। यह कमी जाइलम द्वारा जल की आपूर्ति से पूर्ण की जाती है। जाइलम में जल की कमी या विसरणदाब न्यूनता (DPD) से एक खिंचाव या तनाव उत्पन्न होता है जिसे वायोत्सर्जन कर्षण (transpiration pull) कहते हैं। यह कर्षण पत्ती के जाइलम से जड़ों के जाइलम तक उत्पन्न होता जाता है। यह कर्षण ॠणात्मक खिंचचाव कहलाता है, क्योंकि यह वायवीय भाग.से भूमिगत भाग की ओर उत्पन्न होता है तथा वाष्पोत्सर्जन के कारण उत्पन्न होता है।

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(ii) जल का संसंजक बल (Cohesive Force of Water)-जल के अणुओं के बीज एक प्रबल बल कार्य करता है जिसे संसंजक बल (cohesive force) कहते हैं। इस बल के कारण जल के अण अधिक मजबती से ज़ड़े रहते हैं तथा जल के अणुओं को पृथक् करना कठिन होता है। जल के अणुओं तथा कोशिका भित्ति (cell wall) के बीच उत्पन्न बल को आसंजक बल (adhesive Force) कहते हैं। ये दोनों बल जाइलम कोशिका में एक साथ कार्य करते हैं जिससे जल स्तंभ की निरन्तरता बनी रहती है।

(iii) जल स्तम्भ की निरन्तरता (Continuity of Water Column) – जल का स्तम्भ जाइलम कोशिका की गुहा (lumen) में लगातार बनता है, जो आसानी से नहीं टूटता है।
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डिक्सन तथा जौली ने निष्कर्ष निकाला कि –
(a) पौधों में पत्तियों द्वारा निरन्तर वाष्पोत्सर्जन (transpiration) होता रहता है जिससे वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (transpiration pull) उत्पन्न होता है।
(b) पानी में अणुओं को अत्यन्त बल के साथ जकड़े रहने का गुण होता है जिसे संसजन शक्ति कहते हैं। इसी गुण के कारण पानी यूकेलिप्टस जैसे ऊँचे वृक्षों में 120 फीट तक चढ़ सकता है।

प्रश्न 6.
वाष्पोत्सर्जन से आप क्या समझते हैं ? वाष्पोत्सर्जन के प्रदर्शन के लिए बेलजार प्रयोग को समझाइए। वाष्पोत्सर्जन को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर:
वाष्योत्सर्जन (Transpiration) – पौधों के वायवीय भागों से जल का वाष्प के रूप में उड़ना वाष्योत्सर्जन (Transpiration) कहलाता है। पोधे जितना जल मृदा (soil) से प्रहण करते हैं, उसका केवल 1% भाग ही पौधे की उपापचयी क्रियाओं में प्रयक्त होता है। शेष जल वाष्पोत्सर्जन की क्रिया में उड़ जाता है। वाष्पोत्सर्जन (transpiration) पौधों का आवश्यक दुर्गुण (necessary evil) है।

वाष्पोत्सर्जन तीन प्रकार का होता है-
(i) रन्ध्रीय वाष्पोत्सर्जन (Stomatal Transpiration)-यह रन्ध्रों द्वारा एवं कुल वाष्पोत्सर्जन का लगभग $98 \%$ होता है।
(ii) उपत्वचीय वाष्पोत्रर्जन (cuticular Trans- piration)-यह पौधे की वायवीय उपत्वचा (cuticle) द्वारा होता है। यह केवल 1.8% होता है।
(iii) लेन्टीकुलर वाष्पोत्सर्जन (Lenticular Trans- piration)-यह लेन्ओसेल्स (lenticells) द्वारा होता है। यह केवल 0.2% होता है।

प्रयोग : बेलजार प्रयोग द्वारा वाप्योत्सर्जन क्रिया का प्रदर्शन –
गमले में लगे एक स्वस्थ पौधे को लेकर इसमें पर्याप्त मात्रा में जल डालते हैं। अब गमले को मिट्टी की सतह के ऊपर पॉलीधिन से इस प्रकार बाँधते हैं कि पौधे का प्ररोह बाहर रहे जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। अब गमले को काँच की प्लेट पर रखकर इसके ऊपर काँच का
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वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting Transpiration)
(अ) बाह्य कारक (External factors):
1. वायुमण्डलीय आपेक्षिक आर्द्रता (Relative humidity of atmosphere)वायुमण्डल में आर्द्रता कम होने पर वाष्पोत्सर्जन (transpiration) अधिक होता है। नम वातावरण होने पर वाष्पोत्सर्जन की दर घट जाती है।
2. प्रकाश (Light)-प्रकाश की उपस्थिति में रन्ध्र (stomata) खुलते हैं जिससे वाष्पोत्सर्जन (transpiration) अंधिक होता है। रन्ध्र बन्द होने की स्थिति में वाष्पोत्सर्जन कम होता है।
3. वायु (Wind) – तीव्र वायु वेंग की स्थिति में वाष्पोत्सर्जन (transpiration) बढ़ जाता है ।
4. तापक्रम (Temperature) – ताप बढ़ने से आपेक्षिक आर्द्रता कम हो जाती है तथा वायुमण्डल अधिक नमी ग्रहण कर सकता है। इससे वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ जाती है।
5. मृदा जल (Soil water) – मृदा में जल की कमी होने पर वाष्पोत्सर्जन (transpiration) कम हो जाता है।

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(ब) आन्तरिक कारक (Internal factors) – पत्तियों की संरचना, रन्ध्रों की संरचना एवं प्रकार, रन्ध्रों (Stomata) की संख्या, जाइलम एवं मूलरोम की संरचना आन्तरिक कारक हैं। ये वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करते हैं।

वाप्योत्सर्जन की उपयोगिता (Importance of Transpiration):
1. जल एवं खनिजों के अवशोषण के लिए वाष्पोत्सर्जन एक खिंचाव (pull) उत्पन्न करता है
2. इससे मृदा जल विभिन्न पादप अंगों में खनिजों का वितरण करता है।
3. इसके द्वारा पत्तियों का ताप अपेक्षाकृत कम रहता है।
4. अतिरिक्त जल पौधों से बाहर निकलता है।
5 कोशिकाओं की स्फीति बनी रहती है।

प्रश्न 7.
रन्धों के खुलने तथा बन्द होने की मण्ड शर्करा परिकल्पना को समझाइए।
उत्तर:
रन्ध्रों के खुलने तथा बन्द होने की क्रियाविधि (Mechanism of Stomatal Opening and Closing):
द्वार कोशिकाओं की स्फीति अवस्था (turgidity) तथा श्लथ अवस्था (flaccidity) पर रन्द्रों का खुलना एवं बन्द होना निर्भर करता है। द्वार कोशिकाओं (guard cells) की परासरण सान्द्रता अधिक होने पर इनमें पानी प्रवेश करता है और कोशिका में स्फीति दाब (TP) बढ़ जाता है जिससे बाहर की भित्ति पर दबाव पड़ने से रन्ध्र खुल जाते हैं। इसके विपरीत जब द्वार कोशिका से पानी निकल जाता है तो कोशिकाएँ श्लथ (flaccid) हो जाती हैं और रन्ध्र बन्द हो जाते हैं। रन्ध्र के बंद होने तथा खुलने की क्रिया पर प्रकाश तथा अन्धकार का बहुत प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त पानी की उपस्थिति, कोशिका रस की सान्द्रता, CO2 सान्द्रता, आदि भी इस क्रिया को प्रभावित करते हैं।

वॉन मोल (Von Mohl) ने 1856 में देखा कि यदि द्वार कोशिका (guard cells) की बाब्य त्वचा को जल के सम्पर्क में रखा जाता है तो रन्धु (stomata) खुल जाते हैं और यदि इसे शर्करा के घोल के सम्पर्क में रखा जाए तो रन्ध्र बन्द हो जाते हैं। हीथ (Heath) ने 1958 में बताया कि एक ओर की द्वारक कोशिका में एक बारीक छिद्र कर दिया जाए तो रन्ध्र एक तरफ से बन्द हो जाता है। अत: इससे सिद्ध होता है कि रन्ध्र केवल स्फीति दिशा में ही खुलते हैं। CO2 की सान्द्रता बढ़ने से रन्ध्र बन्द हो जाते हैं तथा कम होने पर एवं पानी की मात्रा बढ़ने पर रन्ध्र खुलते हैं। लगभग 30 C तापमान पर रन्ध्र खुलते हैं।

मण्ड शर्करा ⇔ अन्तरा परिवर्तन संकल्पना
(Starch ⇔ Sugar Interconversion Hypothesis)

यह संकल्पना जे. डी. सायरे (1923) ने प्रस्तुत की थी तथा इसे स्टीवार्ड ने 1964 में रूपान्तरित किया था। इस संकल्पना के प्रमुख बिन्दु निम्नवत् हैंप्रकाश में (In Light)
(i) दिन (प्रकाश) में प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया होती है, जिसमें अन्तराकोशिकीय स्थानों में उपलब्ध श्वसनीय CO2 का उपभोग होता है।
(ii) इसके परिणामस्वरूप कोशिका रस में H+ सान्द्रता कम हो जाता है तथा रक्षक कोशिकाओं में pH मान बढ़ जाता है।
(iii) उच्च pH (7 cdot 0) फॉस्फोरिलेस एन्जाइम की क्रियाशीलता बढ़ाता है जो कि स्टॉर्च को ग्लूकोस-1-फॉस्फेट में बदलता है।
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(iv) ग्लूकेस-1-फॉस्फेट, फॉस्फोग्लूकोम्यूटेस एन्जाइम की उपिस्थिति में ग्लूकोस-6-फॉस्फेट में बदल जाता है।
ग्लूकोस-6-फॉस्फेट → ग्लूकोस + फॉस्फेट
(v) ग्लूकोस-6-फॉस्फेट फॉस्फेटेस एन्जाइम की सहायता से ग्लूकोस तथा फॉस्फेट में बदल जाता है।
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(vi) ग्लूकोस तथा फॉस्फेट माध्यम में घुलकर कोशिका रस की सान्द्रता बढ़ा देते हैं।
(vii) सान्द्रता बढ़ने से रक्षक कोशिकाओं का OP बढ़ जाता है तथा जल विभव कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप रक्षक कोशिकाओं में परिवेश की कोशिकाओं से जल आ जाता है तथा रक्षक कोशिकाएँ स्फीति दशा में आकर फल जाती है एवं रन्ध खल जाते हैं।

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अन्धकार में (In dark):
(i) अन्धकार में प्रकाश संश्लेषण नहीं होता है। उपरन्द्रीय गुहा (substomatal cavity) में श्वसनीय CO2 का स्तर बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप रक्षक कोशिकाओं में pH मान घट जाता है।
(ii) निम्न pH पर ग्लूकोस अणु हेक्सोकाइनेस एन्जाइम की उपस्थिति में ATP का प्रयोग करके ग्लूकोस-1-फॉस्फेट में परिवर्तित हो जाते हैं।
ग्लूकोस + ATP हेक्सोकाइनेस ग्लूकोस-1-फॉस्फेट + ADP
(iii) ग्लूकोस-1-फॉस्फेट अणु फॉस्फोरिलेज एन्जाइम की उपस्थिति में स्टॉर्च में बदल जाता है।
ग्लूकोस-1-फॉस्फेट → स्टॉर्च
(iv) स्टॉर्च के संश्लेषण से कोशिका रस तनु हो जाता है क्योंकि घुलित ग्लूकोस अणुओं की खपत हो जाती है। इसके फलस्वरूप कोशिका रस का OP घट जाता है तथां जल विभव बढ़ जाता है। रक्षक कोशिकाएँ समीपस्थ कोशिकाओं को जल देकर स्लथ (flaccid) हो जाती हैं एवं स्टोमेटा रन्ध्र बन्द हो जाते हैं।

सीमाएँ (Limitations) –
(i) शर्करा, स्टॉर्च अन्तरा परिवर्तन एक मन्द प्रक्रम है जो तीव्र स्टोमेटा गति को नहीं समझाता।
(ii) स्टॉर्च या अन्य बहुलीकृत पॉलीसैकेराइड प्याज के पौधों में नहीं पाए जाते हैं जबकि इनमें स्टोमेटा खुलते तथा बन्द होते हैं।
(iii) जब स्टोमेटा खुलते हैं तब रक्षक कोशिकाओं में ग्लूकोस की पहचान नहीं होती है।
(iv) स्टोमेटा के खुलते समय नीले प्रकाश की अत्यधिक प्रभाविता (extra effectiveness) को यह सिद्धान्त नहीं समझाता है।

2. प्रोटॉन स्थानान्तरण अवधारणा (स्टोमेटा की गति में K+की भूमिका) (Proton Transport Concept (Role of K+ in Stomatal Movement) इस सिद्धान्त को लेविट (1974) ने प्रस्तावित किया था तथा रॉसके (1975) तथा बाउलिल (1976) ने परिमार्जित किया था।

इस सिद्धान्त का विवरण निम्नवत् है –
प्रकाश में (In Light):

(i) प्रकाश में स्टॉर्च लुप्त हो जाता है। सर्वप्रथम समस्त स्टॉर्च विशेषतः फॉस्फोईनोल पाइरूबिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है। फॉस्फोईनोल पाइरूबिक अम्ल CO2 से संयुक्त होकर ऑक्सेलोऐसीटिक अम्ल तत्पश्चात् मैलिक अम्ल बनाता है।
(ii) रक्षक कोशिकाओं में कार्बनिक अम्ल यथा मैलिक अम्ल मैलेट आयन तथा H+ में वियोजित हो जाते हैं।
(iii) H+ एपीडर्मल कोशिकाओं तथा समीपस्थ कोशिकाओं में स्थानान्तरित हो जाते हैं तथा इनके विनिमय के फलस्वरूप H + आयन रक्षक कोशिकाओं में आ जाते हैं। इस प्रक्रम को आयन विनिमय (ion-exchange) कहते हैं।
(iv) K+ आयन मैलेट ऋणायनों से सन्तुलित होते हैं। K+ आयनों के लघु सान्द्रण को उदासीन करने के लिए कुछ Cl आयन भी म्रहण किए जाते हैं ।
(v) H+ -K +विनिमय एक सक्रिय प्रक्रम है, जिसके लिए ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता होती है तथा ATP की आपूर्ति श्वसन या फोटोफॉस्फोरिलेशन से होती है।
(vi) रक्षक कोशिकाओं की रिक्तिका में K+ तथा मैलेट आयनों का बढ़ा सान्द्रण पर्याप्त परासरण दाब उत्पन्न करता है जिससे परिवेश की कोशिकाओं से जल अवशोषित हो सके।
(vii) जल के प्रवेश करने से रक्षक कोशिकाओं का स्फीति दाब बढ़ता है तथा रन्ध्र खुल जाते हैं।

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अन्धकार में (In dark)
(i) अन्धकार में उपरन्ध्रीय गुहा में CO2 सान्द्रण बढ़ जाता है क्योंकि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया रुक जाती है तथा श्वसन लगातार होता रहता है।
(ii) उपरन्ध्रीय गुहा में CO2 के उच्च सान्द्रण से रक्षक कोशिकाओं की जीवद्रव्य कला के आधार प्रोटॉन प्रवणता (proton gradient) का रक्षण होता है। इसके परिणामस्वरूप रक्षक कोशिकाओं में K+का सक्रिय स्थानान्तरण रुक जाता है।
(iii) रन्द्रों के बन्द होने की क्रिया में निरोधक हॉमोंन ऐब्सीसिक हॉमोंन भाग लेता है जो निम्न pH पर कार्य करता है। जैसे ही रक्षक कोशिकाओं का pH घटता है वैसे ही ऐब्सीसिक हॉमोंन रक्षक कोशिकाओं के विसरण तथा पारणम्यता को परिवर्तित करके K+प्रहण करने को रोकता है।
(iv) रक्षक कोशिकाओं में उपस्थित मैलेट आयन H+ से संयोग करके मैलिक अम्ल बनाते हैं। मैलिक अम्ल का आधिक्य PEP-कार्बोक्सिलेस की क्रियाशीलता घटाकर स्वयं के और अधिक संश्लेषण को रोकता है।
(v) इन परिवर्तनों के कारण आयनों की गति व्युक्कमित (reversed) हो जाती है, अतः रक्षक कोशिकाओं से K+आयन समीपस्थ कोशिकाओं में स्थानान्तरित हो जाते हैं।
(vi) रक्षक कोशिकाओं का परासरण दाब (OP) घट जाता है एवं जल रक्षक कोशिकाओं से परिवेश की कोशिकाओं में चला जाता है।
(vii) रक्षक कोशिकाएँ श्लथ (flaccid) हो जाती हैं तथा रन्ध्र बन्द हो जाते हैं।

प्रश्न 8.
जल अवशोषण की क्रियाविधि को समझाइए।
अथवा
जड़ों द्वारा अवशोषण का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जल अवशोषण (Water Absorption):
प्राय: पादपों में जल अवशोषण मूल पर उपस्थित मूलरोमों (root hairs) द्वारा होता है किन्तु कुछ पौधों में जल का अवशोषण पत्तियों तथा तनों द्वारा भी होता है। जलोद्भिदों (hydrophytes) में जल अवशोषण प्राय: सामान्य सतह द्वारा होता है। वुड (Wood; 1925) के अनुसार कुछ पौधे, जैसे-कोचिया, रेगोडिया आदि में जल का अवशोषण वायुमण्डल से होता है।
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पौधौं में जल अवशोषण ज़ड़ की सम्पूर्ण सतह से नहीं होता, अपितु मूल के सिरे (root tips) के समीप मूलरोमों द्वारा होता है। मूल के सिरों को चार प्रदेशों में बाँटा जा सकता है-
1. मूल गोप प्रदेश (Root Cap Zone) – यह मूल के सिरे पर एक आवरण के रूप में उपस्थित होता है। यह मूल के विभज्योतकी क्षेत्र (Meristematic zone) की मृदा की रगड़ से रक्षा करता है।
2. प्रविभाजी प्रदेश (Meristematic Zone)-यह मूल गोप के ठीक पीछे स्थित होता है, इसकी कोशिकाओं में विभाजन के कारण ही मूल की वृद्धि होती है।
3. दीर्घन प्रद्देश (Zone of Elongation)-इस प्रदेश की कोशिकाएँ लम्बाई में वृद्धि करती हैं।
4. मूलरोम प्रदेश (Root hair zone) – यह दीर्घन प्रदेश के ठीक पीछे का क्षेत्र होता है। इस पर अनेक एककोशिकीय मूलरोम (unicellular root hairs) पाये जाते हैं। इसी प्रदेश में मूल रोमों का सबसे अधिक जल का अवशोषण होता है। इस प्रदेश के पीछे परिपक्वन (maturation zone) प्रदेश होता है।

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पादपों में जल का पथ (Pathway of water in Plants) – मूलरोमों द्वारा अवशोषित जल को जड़ में आन्तरिक संवहनी उतक तक पहुँचाने के लिए पौधों में निम्नलिखित दो पथ पाये जाते हैं –
1. एपोप्लास्ट पथ (Apoplast pathway) – जल मृदा से मूलरोम कोशिकाओं की कोशिका भित्तियों, वल्कुटी कोशिकाओं, (cortical cells) अन्तः़्वचा (endodermis), परिरम्भ, (pericycle) जाइलम मुदतक (xylem parenchyma) तथा जाइलम मार्गों तक पहुँचता है। चूँकि जाइलम मारों में जल पर अत्यांजक ऋणात्मक दाब होता है। अतः यह एपोप्लास्ट के मध्य से गुजरता हुआ मृदा से जल प्राप्त कर लेता है, यद्यपि अन्त:स्वचा (endodermis) की भुत्ति पूर्णतया पारगम्य नहीं होती है, क्योंकि इन पर अपारगम्य स्थूलन होता है जिन्हें कैस्पेरियन पट्टियाँ (casparian strips) कहते हैं। ये पट्टियाँ मोम सदूश सुबेरिन तथा लिग्निन युक्त होती हैं। अतः एपोप्लास्ट अन्तस्त्वचा (endodermis) तक ही क्रियाकारी होता है। अन्तस्वचा से होकर गुजरने के लिए जल को कोशिकाओं के एक किनारे से प्रविष्ट होकर दूसरे किनारे से निकलना होता है।

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2. सिम्लास्ट पथ (Symplast Pathway) – युवा मूल रोम प्रदेश में जाइलम वाहनियाँ पूर्णkूपेण खाली नहीं होती हैं वरन् इनमें जीवित कोशिकाद्रव्य की एक पतली परत पायी जाती है। यह परत एक केन्द्रीय गुहा के चारों ओर होती है जिसमें जल भरा होता है। कोशिकाद्रव्य की यह स्तरित परत जाइलम मृदूतक, परिम्भ, अन्तस्वचा, बल्कुट तथा मूलरोम कोशिकाओं से जीवद्रव्य तन्तुओं द्वारा जुड़ी रहती है। वाष्पोत्सर्जन (transpiration) के कारण जाइलम में उत्पन्न तनाव से जल निक्रिय रूप से इन कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य की ओर गति करता है। कोशिकार्रव्यी प्रवाह (cytoplasmic flow) जल की गति को बढ़ाने में सहायक होता है ताकि यह प्रत्येक कोशिका से होता हुआ सुगमतापूर्वक गुजर सके। मृदा जल सिम्लास्ट में मूल रोम कोशाओं या अन्नस्वचा द्वारा प्रविष्ट होता है।

प्रश्न 9.
एक ऐसे प्रयोग का वर्णन कीजिए जिससे यह स्पष्ट किया जा सके कि वाष्पोत्सर्जन की क्रिया वातावरणीय कारकों द्वारा प्रभावित होती है. –
उत्तर:
वातावरणीय कारकों का अध्ययन (Study of environmental factors)
(i) यदि उपकरण को छायादार एवं नम स्थान पर रखा जाय तो वहाँ नमी की अधिकता के कारण वाष्तोर्सर्जन (transpiration) कम होगा और बुलबुला कम दूरी खिसकेगा।
(ii) यदि उपकरण को धूप में रखा जाय तो यहाँ वाष्पोत्सर्जन (transpiration) अधिक होता है।
(iii) यदि उपकरण को तीव वायु एवं धूप में रखा जाता है तो वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) बहुत तीव्र होता है और बुलबुला तेजी से गति करता है।
(iv) यदि उपकरण को अन्दें स्थान पर रखते हैं तो बुलबुला बिल्कुल गति नहीं करता है। रन्ध्र की संरचना (Structure of Stomata)

रन्ध्र (Stomata) पत्ती की सतह पर पाये जाने वाले छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। ये पत्ती के अतिरिक्त, फलों, कोमल तनों आदि वायवीय भागों पर भी पाये जाते हैं। प्रत्येक रन््ध दो वृक्काकार (kidney shaped) द्वार कोशिकाओं (guard cells) से घिरा हुआ छिद्र है। यह अत्यन्त सूक्ष्म संरचना है तथा छिद्र अण्डाकार होता है। द्वारकोशिका (guard cells) बाह्म त्वचा की अन्य कोशिकाओं से भिन्न होती हैं। इसकी बाह्य सतह पतली परन्तु भीतरी सतह मोटी होती है। कभी-कभी द्वार कोशिकाओं के बाहर सहायक कोशिकाएँ (subsidiary cells) भी मिलती हैं। जब द्वार कोशिकाएँ स्फीत (turgid) होती हैं तो छिद्र खुला होता है तथा इनकी श्लथ (flaccid) अवस्था में ये बन्द होते हैं।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 11 पौधों में परिवहन - 11

द्वार कोशिकाओं में केन्द्रक तथा क्लोरोप्लास्ट (chloroplast) पाए जाते हैं। द्वार कोशिकाओं में केन्द्रक तथा क्लोरोप्लास्ट मीसोफिल के क्लोरोप्लास्ट से भिन्न होता है। इसमें दोनों प्रकाशीय तंत्र PSI तथा PSII तन्त मिलते हैं। अतः फोटोफास्पोरिलेशन (photophosphorylation) की क्रिया प्रकाश में पूर्ण होती है परन्तु रिबुलोज डाइफास्फेट कार्बोंक्सिलेज एन्जाइम (ribulose biphosphate carboxylase enzyme) के न मिलने से भोजन नहीं बनता है। आसपास की कोशिकाओं से मिलने वाली शर्करा मण्ड (starch) में बदलती है। रात के समय मण्ड (starch) की मात्रा अधिक होने से रन्ध्र (stomata) बन्द हो जाते हैं तथा दिन में मण्ड के शर्करा में बदलने से ये खुल जाते हैं।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Bhag 2 Haryana Board

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन

प्रश्न 5.1.
अधिशोषण एवं अवशोषण शब्दों (पदों) के तात्पर्य में विभेद कीजिए । प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
अधिशोषण – किसी ठोस या द्रव द्वारा किसी पदार्थ के अणुओं को आकर्षित करके उन्हें पृष्ठ पर धारण करने को अधिशोषण कहते हैं।
अवशोषण – किसी पदार्थ का दूसरे पदार्थ में समान वितरण अवशोषण कहलाता है।
अधिशोषण में पदार्थ केवल पृष्ठ पर सांद्रित होता है जबकि अवशोषण में पदार्थ, दूसरे पदार्थ में समान रूप से वितरित हो जाता है। सिलिका जेल पर जल वाष्प का अधिशोषण होता है जबकि शुष्क CaCl2 पर जल वाष्प का अवशोषण होता है।

प्रश्न 5.2.
भौतिक अधिशोषण एवं रासायनिक अधिशोषण में क्या अंतर है?
उत्तर:
अधिशोषण के प्रकार:
ठोसों पर गैसों के अधिशोषण को अधिशोष्य तथा अधिशोषक के अणुओं के मध्य आकर्षण बलों के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है-
(a) भौतिक अधिशोषण
(b) रासायनिक अधिशोषण या रसोवशोषण

(a) भौतिक अधिशोषण – या वान्डरवाल अधिशोषण – किसी ठोस की सतह पर जब गैस का अधिशोषण वान्डरवाल बलों के कारण होता है तो इसे भौतिक अधिशोषण कहते हैं। दुर्बल वान्डरवाल बलों के कारण ताप बढ़ाने से या दाब कम करने से इसे आसानी से कम किया जा सकता है। भौतिक अधिशोषण में अधिशोष्य तथा अधिशोषक के मध्य किसी प्रकार के रासायनिक बन्ध का निर्माण नहीं होता ।

(b) रासायनिक अधिशोषण या लैंग्म्यूर अधिशोषण – जब किसी ठोस की सतह पर गैस के अधिशोषण में रासायनिक बन्ध बनते हैं तो इसे रासायनिक अधिशोषण कहते हैं। ये रासायनिक बन्ध आयनिक या सहसंयोजक हो सकते हैं, लेकिन प्रायः यह बन्ध सहसंयोजक होता है। रासायनिक अधिशोषण की सक्रियण ऊर्जा उच्च होती है अतः इसे सक्रियत अधिशोषण (activated adsorption) भी कहते हैं। भौतिक एवं रासायनिक अधिशोषण साथ-साथ भी हो सकते हैं। तब निम्न ताप पर होने वाला भौतिक अधिशोषण, ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण में परिवर्तित हो जाता है।

उदाहरण, H2 गैस पहले Ni की सतह पर वान्डरवाल बलों के द्वारा अधिशोषित होती है। उसके बाद हाइड्रोजन के अणु, परमाणुओं में वियोजित होकर रासायनिक अधिशोषण द्वारा निकल की सतह पर बंध जाते हैं, क्योंकि उच्च ताप पर अभिकारकों को सक्रियण ऊर्जा प्राप्त हो जाती है। रासायनिक अधिशोषण में अधिशोषक की सतह पर उत्पाद बनता है, अतः विशोषण के समय उत्पाद का ही विशोषण होता है। जैसे कार्बन की सतह पर O2 के अधिशोषण से CO तथा CO2 बनती है तथा इन्हीं CO तथा CO2 का विशोषण होता है।

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प्रश्न 5.3.
कारण बताइए कि सूक्ष्म विभाजित पदार्थ अधिक प्रभावी अधिशोषक क्यों होता है?
उत्तर:
सूक्ष्म विभाजित पदार्थ का पृष्ठ क्षेत्रफल तथा सक्रिय केन्द्र अधिक होते हैं। अधिशोषक का पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं सक्रिय केन्द्र बढ़ने पर अधिशोषण की मात्रा बढ़ती है अतः सूक्ष्म विभाजित पदार्थ अधिक प्रभावी अधिशोषक होता है।

प्रश्न 5.4.
किसी ठोस पर गैस के अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक कौनसे हैं ?
उत्तर:
भौतिक अधिशोषण के अभिलक्षण – या भौतिक अधिशोषण को प्रभावित करने वाले कारक – भौतिक अधिशोषण के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

(i) अधिशोष्य की प्रकृति किसी ठोस द्वारा अधिशोषित गैस की मात्रा गैस की प्रकृति पर निर्भर करती है। सामान्यतया, आसानी से द्रवित होने वाली गैसें, जैसे – SO2, CO2, HCl, NH2 ( उच्च क्रांतिक तापयुक्त) शीघ्रता से अधिशोषित हो जाती हैं, जबकि हल्की गैसें जो आसानी से द्रवित नहीं होतीं, जैसे- H2, N2, O2, का अधिशोषण मुश्किल से होता है क्योंकि वान्डरवाल बल क्रांतिक तापों के निकट अधिक प्रबल होते हैं। इसीलिए 1g सक्रियत चारकोल, मेथेन ( क्रांतिक ताप 190K) की अपेक्षा अधिक सल्फर डाइऑक्साइड (क्रांतिक ताप 630K) अधिशोषित करता है।

(ii) अधिशोषक की प्रकृति तथा उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल – अधिशोषक का पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ने पर अधिशोषण की मात्रा बढ़ती है तथा रन्ध्रहीन एवं कठोर पदार्थों की तुलना में सरन्ध्र व महीन चूर्णित धातुओं पर अधिशोषण अधिक मात्रा में होता है क्योंकि इनका पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होता है जैसे H2 गैस Ni पर सतह पर आसानी से अधिशोषित हो जाती है। विभिन्न धातुओं की अधिशोषण क्षमता का क्रम निम्न प्रकार होता है-
कोलाइडी Pd > सामान्य Pd Pt Au > Ni
विशिष्ट क्षेत्रफल – किसी अधिशोषक के प्रति ग्राम पृष्ठ क्षेत्रफल को उसका विशिष्ट क्षेत्रफल कहते हैं ।

(iii) विशिष्टता की कमी- भौतिक अधिशोषण की प्रकृति विशिष्ट नहीं होती क्योंकि वान्डरवाल बल व्यापक होते हैं अतः किसी भी गैस का किसी भी अधिशोषक की सतह पर अधिशोषण हो सकता है।

(iv) अधिशोषण की एन्थेल्पी – भौतिक अधिशोषण में ऊष्मा उत्सर्जित होती है अर्थात् यह एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है लेकिन अधिशोष्य (गैस) तथा अधिशोषक (ठोस) के मध्य दुर्बल वान्डरवाल बल होने के कारण अधिशोषण एन्थैल्पी का मान कम (20-40 kJ mol-1 ) होता है। किसी धातु की सतह पर एक मोल गैस के अधिशोषण से परिवर्तन को अधिशोषण की एन्थैल्पी कहते हैं।

(v) उत्क्रमणीय प्रकृति ठोस की सतह पर गैस का अधिशोषण उत्क्रमणीय प्रकृति का होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 1

(vi) अधिशोषक सक्रियण-
(i) अधिशोषक को रासायनिक तथा यांत्रिक विधियों द्वारा खुरदरा बनाकर इसका सक्रियण किया जाता है, इससे इसका पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ जाता है अतः अधिशोषण बढ़ जाता है।
(ii) ठोसों को सूक्ष्म विभाजित करने पर उनकी मुक्त संयोजकता तथा पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ जाता है।
(iii) अधिशोषक की सतह पर पहले से उपस्थित गैसों को हटाने के लिए उसे निर्वात में अतितप्त भाप के साथ गर्म करते हैं इससे प्राप्त अधिशोषक की अधिशोषण क्षमता अधिक होती है जैसे चारकोल का सक्रियण।

(vii) ताप तथा दाब का प्रभाव – दाब बढ़ाने पर किसी गैस का अधिशोषण अधिक मात्रा में होता है क्योंकि इससे गैस का आयतन कम होता है । (ले- शातैलिए का नियम) तथा ताप कम करने पर अधिशोषण अधिक होता है क्योंकि अधिशोषण एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। अतः ताप बढ़ाकर तथा दाब कम करके अधिशोषित गैस को बाहर निकाला जा सकता है।

(viii) आण्विक परत की प्रकृति – भौतिक अधिशोषण में बहु आण्विक परत बनती है क्योंकि इसमें अधिशोषक तथा अधिशोष्य के मध्य वान्डरवाल बल होता है अतः थोड़े से अधिक दाब से ही अधिशोषित गैस की मात्रा बढ़ जाती है।

प्रश्न 5.5.
अधिशोषण समतापी वक्र क्या है? फ्रॉयन्डलिक अधिशोषण समतापी वक्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अधिशोषण समतापी वक्र – अधिशोषण की मात्रा दाब पर निर्भर करती है अतः निश्चित ताप पर अधिशोषित गैस की मात्रा का दाब के साथ सम्बन्ध अधिशोषण समतापी वक्र कहलाता है।
प्रतिग्राम अधिशोषक द्वारा अधिशोषित गैस की मात्रा तथा दाब के मध्य ग्राफ बनाने पर जो वक्र प्राप्त होते हैं, उन्हें वैज्ञानिक के नाम के आधार पर फ्रायन्डलिक समतापी वक्र कहते हैं।
फ्रायन्डलिक अधिशोषण समतापी वक्र – प्रयोगों के आधार पर यह पाया गया कि अधिशोषित गैस की मात्रा \(\left(\frac{x}{\mathrm{~m}}\right)\), दाब (p) बढ़ाने पर बढ़ती है। गणितीय रूप में-
\(\frac { x }{ m }\) = k.p1/n (n>1) ….(1)
यहाँ x अधिशोषक के m द्रव्यमान द्वारा p दाब पर अधिशोषित गैस का द्रव्यमान है। k तथा n स्थिरांक हैं जो अधिशोषक एवं गैस की प्रकृति पर निर्भर करते हैं।
समीकरण (1) का लघुगणक लेने पर
log \(\frac { x }{ m }\) = log k + \(\frac { 1 }{ n }\) log p …..(2)
यह समीकरण y = mx + c ( सरल रेखा का समीकरण) के समतुल्य है अतः log\(\frac { x }{ m }\) तथा log P के मध्य ग्राफ एक सरल रेखा होती है जिसका ढाल = \(\frac { 1 }{ n }\) तथा अन्तःखण्ड log k (y अक्ष पर ) के बराबर होगा। इससे समतापी वक्रों की वैधता की पुष्टि हो जाती है लेकिन समीकरण (2) दाब के निश्चित परिसर तक ही लागू होता है।

प्रश्न 5.6.
अधिशोषक के सक्रियण से आप क्या समझते हैं? यह कैसे प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:
अधिशोषक के सक्रियण का अर्थ है उसकी अधिशोषण क्षमता बढ़ाना। इसे निम्न प्रकार प्राप्त किया जाता है-
(i) रासायनिक या यांत्रिक विधि से अधिशोषक की सतह को खुरदरा बनाना ।
(ii) अधिशोषण को चूर्णित ( Powdered ) या सूक्ष्म विभाजित अवस्था में परिवर्तित करना ।
(iii) ठोस पर पहले से अधिशोषित गैसों को हटाना ।

प्रश्न 5.7.
विषमांगी उत्प्रेरण में अधिशोषण की क्या भूमिका है?
उत्तर:
विषमांगी उत्प्रेरण में गैसीय अवस्था या विलयन में अभिकारक, ठोस उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषित हो जाते हैं । पृष्ठ पर अभिकारकों की सांद्रता में वृद्धि होने से अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है तथा उत्पाद बनकर, उत्प्रेरक की सतह से पृथक् हो जाते हैं एवं उत्प्रेरक की सतह पुनः अभिक्रिया के लिए उपलब्ध हो जाती है।

प्रश्न 5.8.
अधिशोषण हमेशा ऊष्माक्षेपी क्यों होता है?
उत्तर:
भौतिक अधिशोषण हमेशा ऊष्माक्षेपी होता है क्योंकि गैसीय अणुओं एवं ठोस सतह के मध्य आकर्षण ( वान्डरवाल बल) होता है। यह आकर्षण बल दुर्बल होता है अतः अधिशोषण की एन्थैल्पी कम (20-40 kJ mol-1 ) होती है।

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प्रश्न 5.9.
कोलॉइडी विलयनों को परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्थाओं के आधार पर कैसे वर्गीकृत किया जाता है ?
उत्तर:
परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम की भौतिक अवस्था के आधार पर आठ प्रकार के कोलाइडी तंत्र हो सकते हैं, क्योंकि परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम ठोस, द्रव अथवा गैस होते हैं। लेकिन किसी गैस का किसी अन्य गैस में मिश्रण हमेशा समांगी होता है अतः वह कोलॉइड नहीं होता । विभिन्न प्रकार के कोलॉइडों के उदाहरण तथा उनके विशिष्ट नामों के लिए भाग 5.4 में सारणी (कोलॉइडी तंत्रों के प्रकार) देखें ।

प्रश्न 5.10.
ठोसों द्वारा गैसों के अधिशोषण पर दाब एवं ताप के प्रभाव की विवेचना कीजिए ।
उत्तर:
ठोसों द्वारा गैसों के अधिशोषण पर दाब का प्रभाव- दाब बढ़ाने पर ठोस की सतह पर गैसों का अधिशोषण अधिक मात्रा में होता है। क्योंकि दाब बढ़ाने पर गैस का आयतन कम होता है। (ला शातैलिए का नियम )
ताप का प्रभाव – अधिशोषण, ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है अतः निम्न ताप पर अधिशोषण अधिक मात्रा में होता है तथा ताप बढ़ाने पर गैस का ठोस की सतह पर अधिशोषण कम होगा।

प्रश्न 5.11.
द्रवरागी एवं द्रवविरागी सॉल क्या होते हैं? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए। द्रवविरोधी सॉल आसानी से स्कंदित क्यों हो जाते हैं?
उत्तर:
परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम के मध्य अन्योन्य क्रिया के आधार पर कोलॉइडी सॉल को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है- द्रवरागी (द्रवस्नेही) अर्थात् विलायक को आकर्षित करने वाले तथा द्रवविरागी (द्रवविरोधी) अर्थात् विलायक को प्रतिकर्षित करने वाले । परिक्षेपण माध्यम जल होने पर जलस्नेही तथा जलविरोधी शब्द प्रयुक्त किया जाता है। गोंद द्रव कोलॉइड है जबकि धातुएँ एवं उनके सल्फाइडों के सॉल द्रवविरागी कोलॉइड के उदाहरण हैं। द्रवविरोधी सॉल आसानी से स्कंदित हो जाते हैं क्योंकि ये अस्थायी होते हैं एवं इनमें परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

प्रश्न 5.12.
बहुञ्यणुक एवं वृहदाणुक कोलॉइड में क्या अंतर है ? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए । सहचारी कोलॉइड इन दोनों प्रकार के कोलॉइडों से कैसे भिन्न हैं?
उत्तर:
परिक्षिप्त प्रावस्था के कणों के प्रकार के आधार पर कोलॉइड तीन प्रकार के होते हैं-
(i) बहुआण्विक कोलॉइड
(ii) वृहदाण्विक कोलॉइड तथा
(iii) सहचारी कोलॉइड (मिसेल)।

(i) बहुआण्विक कोलॉइड – किसी पदार्थ के घोलने पर उसके बहुत सारे परमाणु या अणु एकत्रित होकर ऐसी स्पीशीज बनाते हैं जिनका आकार कोलॉइडी सीमा (व्यास < 1nm ) में होता है, तो इन्हें बहुआण्विक कोलॉइड कहते हैं। उदाहरण, एक गोल्ड सॉल में अनेक परमाणु युक्त भिन्न-भिन्न आकारों के कण होते हैं। सल्फर सॉल में एक हजार या उससे अधिक S8 (सल्फर अणु) के कण उपस्थित होते हैं। इनमें कोलॉइडी कण वान्डरवाल बल से जुड़े होते हैं।

(ii) वृहदाण्विक कोलॉइड – वृहदाणु उपयुक्त विलायकों में ऐसे विलयन बनाते हैं जिनमें वृहदाणुओं का आकार कोलॉइडी कणों के समान होता है तो ऐसे निकाय को वृहदाण्विक कोलॉइड कहते हैं। ये कोलॉइड बहुत स्थायी होते हैं तथा कभी-कभी ये वास्तविक विलयनों के समान होते हैं। प्राकृतिक वृहदाण्विक कोलाइडों के उदाहरण हैं- स्टार्च, सेलुलोज प्रोटीन तथा एन्जाइम एवं मानव निर्मित उदाहरण हैं- पॉलीथीन, नायलोन, पॉलीस्टायरीन, संश्लेषित रबर आदि ।

(iii) सहचारी कोलॉइड (मिसेल) – कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो कम सांद्रता पर प्रबल वैद्युत अपघट्य के समान व्यवहार करते हैं परन्तु उच्च सांद्रता पर कणों का समूह बनने के कारण कोलॉइड की भाँति व्यवहार करते हैं, इन्हें सहचारी कोलॉइड या मिसेल कहते हैं। तनु करने पर ये कोलॉइड पुनः आयनों में टूट जाते हैं। उदाहरण – साबुन तथा अपमार्जक (पृष्ठ सक्रिय पदार्थ ) । मिसेल का निर्माण एक निश्चित ताप से अधिक ताप पर ही होता है जिसे क्राफ्ट ताप कहते हैं तथा जिस सान्द्रता के ऊपर मिसेल बनता है उसे क्रान्तिक मिसेल सान्द्रता कहते हैं। मिसेल में 100 या अधिक अणु हो सकते हैं।

प्रश्न 5.13.
एन्जाइम क्या होते हैं? एन्जाइम उत्प्रेरण की क्रियाविधि को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
एन्जाइम सजीव उत्प्रेरक (Biocatalyst) होते हैं जो जटिल नाइट्रोजनी कार्बनिक यौगिक हैं तथा ये जीवित पौधों एवं जन्तुओं द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं। इन्हें जैव-रासायनिक उत्प्रेरक (Bio chemical catalyst) भी कहते हैं तथा उत्प्रेरण की इस क्रिया को जैव-रासायनिक उत्प्रेरण कहते हैं।

एन्जाइम – एन्जाइम नाइट्रोजनयुक्त जटिल कार्बनिक यौगिक होते हैं जो पौधों तथा जन्तुओं द्वारा प्राप्त होते हैं। एन्जाइम उच्च अणुभार वाले प्रोटीन होते हैं जो कोलॉइडी अवस्था में होते हैं। जन्तुओं एवं पौधों में जीवन को व्यवस्थित रखने हेतु आवश्यक शारीरिक क्रियाएँ एन्जाइमों द्वारा ही उत्प्रेरित होती हैं, अतः एन्जाइमों को जैव-रासायनिक उत्प्रेरक भी कहते हैं। एन्जाइम बहुत प्रभावी उत्प्रेरक होते हैं, जो अनेक प्राकृतिक प्रक्रियाओं से सम्बन्धित अभिक्रियाओं का उत्प्रेरण करते हैं। सर्वप्रथम प्रयोगशाला में 1969 में एन्जाइम का संश्लेषण किया गया था।

एन्जाइम उत्प्रेरण – एन्जाइमों द्वारा विभिन्न अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने की प्रक्रिया को एन्जाइम उत्प्रेरण या जैव-रासायनिक उत्प्रेरण कहते हैं। ये विषमांगी उत्प्रेरण के उदाहरण हैं।
एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के उदाहरण-
(i) स्टार्च का माल्टोस में परिवर्तन – डायस्टेज एन्जाइम स्टार्च को माल्टोस में परिवर्तित कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 2

प्रश्न 5.14.
कोलॉइडों को निम्न आधार पर कैसे वर्गीकृत किया गया है ?
(क) घटकों की भौतिक अवस्था
(ख) परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति
(ग) परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम के मध्य अन्योन्य क्रिया ।
उत्तर:
कोलॉइडों का वर्गीकरण
(क) घटकों की भौतिक अवस्था के आधार पर – घटकों की भौतिक अवस्था के आधार पर कोलॉइडों को आठ प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है । इसके विस्तृत विवेचन के लिए भाग 5.4 में सारणी देखें ।

(ख) परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति के आधार पर – परिक्षेपण माध्यम की प्रकृति के आधार पर कोलॉइड निम्न प्रकार के होते हैं – (1) सॉल (द्रवों में ठेस) (2) जेल (ठोसों में द्रव) (3) इमल्शन (द्रव में द्रव ) । विभिन्न प्रकार के द्रवों के आधार पर सॉलों का विशिष्ट नाम दिया जाता है-
(i) एक्वासॉल या हाइड्रोसॉल (परिक्षेपण माध्यम – जल)
(ii) ऐल्कोसॉल (परिक्षेपण माध्यम – ऐल्कोहॉल)
(iii) बेन्जोसॉल) परिक्षेपण माध्यम – बेन्जीन ) ।
(ग) परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम के मध्य अन्योन्य क्रिया के आधार पर – कोलॉइडी सॉल दो प्रकार के होते हैं- (1) द्रवरागी या द्रवस्नेह विलायक को आकर्षित करने वाले, (2) द्रवविरागी या द्रवविरोधी विलयक को प्रतिकर्षित करने वाले ।

प्रश्न 5.15.
निम्नलिखित परिस्थितियों में क्या प्रेक्षण होंगे?
(i) जब प्रकाश किरण पु. कोलॉइडी सॉल में से गमन करता है ।
(ii) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड सॉल में NaCl वैद्युत अपघट्य मिलाया जाता है।
(iii) कोलॉइडी सॉल में से विद्युतधारा प्रवाहित की जाती है।
उत्तर:
(i) जब प्रकाश किरण पुंज, कोलॉ: डी सॉल में से गमन करता है तथा उसे प्रकाश के पथ की दिशा के लम्बवत् देखने पर वह मंद से प्रबल दूधियापन दर्शाता है, अर्थात् प्रकाश किरण पुंज का पागमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं । यह कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है।
(ii) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड Fe (OH), सॉल में NaCl वैद्युत अपघट्य मिलाया जाता है तो इस सॉल पर स्थित धनावेश, Cl के ऋणावेश द्वारा उदासीन हो जाता है जिससे कोलॉइडी कण पास-पास आकर अवक्षेपित हो जाते हैं।
(iii) कोलॉइडी सॉल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कोलॉइडी कण विपरीत आवेशित इलेक्ट्रोड की ओर गमन कसं हैं एवं इलेक्ट्रॉड पर आवेश विसर्जित करके अवक्षेपित हो जाते हैं।

प्रश्न 5.16.
इमल्शन क्या है? इनके विभिन्न प्रकार क्या हैं? प्रत्येक प्रकार का उदाहरण दी जाए।
उत्तर:
इमल्शन (पस) – इमल्शन वे कोलॉइड हैं जिनमें सूक्ष्म विभाजित द्रव की बूँदों का दूसरे द्रव में परिक्षेपण होता है, अर्थात् परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था दोनों ही द्रव होते हैं।
जब दो अमिश्रणीय या आंशिक मिश्रणीय द्रवों को मिलाकर तेजी से हिलाया जाता है, तो एक द्रव में दूसरे द्रव का परिक्षेपण प्राप्त होता है जिसे इमल्शन कहते हैं। सामान्यतया दो द्रवों में से एक जल होता है। इमल्शन दो प्रकार के होते हैं-
(i) तेल का जल में परिक्षेपण (o/w प्रकार) (जलीय इमल्शन) एवं
(ii) जल का तेल में परिक्षेपण (w/o प्रकार) (तेलीय इमल्शन)
प्रथम प्रकार में जल परिक्षेपण माध्यम का कार्य करता है। उदाहरण-
दूध एवं वेनीशिंग क्रीम दूध में, द्रव वसा जल में परिक्षिप्त होती है। दूसरे प्रकार में, तेल परिक्षेपण माध्यम का कार्य करता है। उदाहरण- मक्खन एवं क्रीम ।

प्रश्न 5.17.
पायसीकारक पायस को स्थायित्व कैसे देते हैं? दो पायसीकारकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
पायस अस्थायी होते हैं और पड़े रखने पर दो परतों में विभक्त हो जाते हैं अतः इनके स्थायित्व के लिए इनमें एक पदार्थ मिलाया जाता है, जिसे पायसीकारक कहते हैं । पायसीकारक माध्यम एवं निलंबित कणों के मध्य एक फिल्म बनाता है जिससे वे एक-दूसरे के साथ मिलकर द्रव की सतह के रूप में पृथक् न हो सकें। प्रोटीन तथा वसीय अम्लों के भारी धातुओं के लवण पायसीकारकों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 5.18.
“साबुन की क्रिया पायसीकरण एवं मिसेल बनने के कारण होती है ।” इस पर टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर:
मिसेल निर्माण की क्रियाविधि – मिसेल बनने की क्रियाविधि को साबुन के उदाहरण से समझा जा सकता है। पानी में विलेय साबुन उच्च वसा अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। उदाहरण सोडियम स्टिऐरेट (C17H35COONa) जिसे सामान्य सूत्र RCOONa से व्यक्त करते हैं। साबुन को जल में घोलने पर यह RCOO तथा Na+ आयन बनाता है।

RCOO आयन दो भागों से मिलकर बना है, एक लम्बी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (R) जो कि अध्रुवीय पूँछ या पुच्छ (Tail) कहलाती है तथा COO को ध्रुवीय आयनिक शीर्ष या सिर (Head) कहते हैं। पूँछ वाला भाग जल प्रतिकर्षी होता है जबकि सिर वाला भाग आयनिक होने के कारण जल – आकर्षी या जलस्नेही होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 3

प्रश्न 5.19.
विषमांगी उत्प्रेरण के चार उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
विषमांगी उत्प्रेरण – किसी अभिक्रिया में जब अभिकारक एवं उत्प्रेरक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्था में होते हैं तो इसे विषमांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
(i) प्लैटिनम की उपस्थिति में सल्फर डाइऑक्साइड का सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 4
यहाँ अभिकारक गैसीय प्रावस्था में हैं जबकि उत्प्रेरक ठोस अवस्था में हैं |

(ii) सूक्ष्म विभाजित Ni की उपस्थिति में वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण
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इस अभिक्रिया में अभिकारक द्रव तथा गैस है जबकि उत्प्रेरक ठोस है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 6
(v) ओस्टवाल्ड प्रक्रम में, प्लैटिनम की जाली पर अमोनिया का नाइट्रिक ऑक्साइड में ऑक्सीकरण-
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यहाँ अभिकारक गैस हैं जबकि उत्प्रेरक ठोस हैं।
(vi) ऐल्कीनों का बहुलकीकरण में जिग्लर नट्टा उत्प्रेरक (R3Al + TiCl4) प्रयुक्त किया जाता है। यहाँ ऐल्कीन गैस तथा जिग्लर नट्टा उत्प्रेरक ठोस है।
(vii) हाबर प्रक्रम में सूक्ष्म विभाजित आयरन की उपस्थिति में अमोनिया का बनना
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 8
यहाँ अभिकारक गैसीय प्रावस्था में हैं जबकि उत्प्रेरक ठोस हैं।

प्रश्न 5.20.
उत्प्रेरक की सक्रियता एवं वरण क्षमता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
(a) उत्प्रेरक की सक्रियता – उत्प्रेरक की किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाने की क्षमता को ही उसकी सक्रियता कहते हैं।
(b) उत्प्रेरक की वरण क्षमता (वरणात्मकता) – उत्प्रेरक द्वारा किसी अभिक्रिया द्वारा विशिष्ट उत्पाद बनाने की क्षमता को उसकी वरण क्षमता कहते हैं।
उदाहरण – H2 तथा CO से भिन्न-भिन्न उत्प्रेरकों द्वारा भिन्न-भिन्न उत्पाद प्राप्त होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 9

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 पृष्ठ रसायन

प्रश्न 5.21.
जिओलाइटों द्वारा उत्प्रेरण के कुछ लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(i) जिओलाइटों द्वारा उत्प्रेरण में उत्प्रेरकी अभिक्रिया उत्प्रेरक की रंध्र संरचना तथा अभिकारक एवं उत्पाद के अणुओं के आकार पर निर्भर करती है, अतः जिओलाइट आकार वरणात्मक उत्प्रेरक कहलाते हैं।
(ii) जिओलाइटों द्वारा उत्प्रेरण, जिओलाइटों के संरंध्रों तथा कोटरों (cavities) पर भी निर्भर करता है।

प्रश्न 5.22.
आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण क्या है?
उत्तर:
आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण – वह उत्प्रेरकी अभिक्रिया जो उत्प्रेरक की रंध्र संरचना एवं अभिकारक एवं उत्पाद अणुओं के आकार पर निर्भर करती है उसे आकार वरणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं । मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के कारण जिओलाइट अच्छे आकृति वरणात्मक उत्प्रेरक होते हैं। ये सिलिकेट्स के त्रिविमीय नेटवर्क वाले सूक्ष्मरंध्री ऐलुमिनो सिलीकेट होते हैं, जिनमें कुछ सिलिकन परमाणु ऐलुमिनियम के परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थापित होकर Al-O-Si ढाँचा बनाते हैं। जिओलाइटों में होने वाली अभिक्रियाएँ जिओलाइटों के संरंध्रों एवं कोटरों (cavities) पर भी निर्भर करती हैं। जिओलाइट प्रकृति में पाए जाते हैं तथा उत्प्रेरक वरणात्मकता के लिए इनका संश्लेषण भी किया जाता है।

प्रश्न 5.23.
निम्न पदों (शब्दों) को समझाइए –
(i) वैद्युतकणसंचलन,
(ii) स्कंदन,
(iii) अपोहन,
(iv) टिन्डल प्रभाव |
उत्तर:
(i) वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis) – कोलॉइडी विलयन में कणों पर धनावेश या ऋणावेश होता है। जब एक कोलॉइडी विलयन में डूबे हुये दो प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों पर विद्युत विभव लगाया जाता है तो कोलॉइडी कण विपरीत आवेशित इलेक्ट्रोड की ओर गमन करते हैं। इसे वैद्युतकणसंचलन कहते हैं। धनात्मक आवेशित कण कैथोड की ओर तथा ऋणात्मक आवेशित कण ऐनोड की ओर गति करते हैं।

(ii) स्कंदन (Coagulation) – द्रवविरागी (द्रवविरोधी) सॉल का स्थायित्व कोलॉइडी कणों पर आवेश के कारण होता है। यदि किसी प्रकार से इनका आवेश हटा दिया जाये तो कोलॉइडी कण एक-दूसरे के समीप आकर कंदित हो जाते हैं एवं गुरुत्व बल के कारण नीचे बैठ जाते हैं। कोलॉइडी कणों के स्कंदित होकर नीचे बैठने के प्रक्रम को प्रक्रम स्कंदन या अवक्षेपण कहते हैं।

(iii) अपोहन (Dialysis) – कोलॉइडी विलयन में घुले हुए विद्युत अपघट्य या अन्य विलेय पदार्थों को जांतव झिल्ली द्वारा पृथक् करने की प्रक्रिया को अपोहन कहते हैं।

(iv) टिन्डल प्रभाव (Tyndal effect ) – कोलॉइडी विलयन में प्रकाशकिरण पुंज गुजारकर उन्हें प्रकाश के पथ की दिशा के लम्बवत् देखने पर ये मंद से प्रबल दूधियापन दर्शाता है अर्थात् प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है। इसे टिण्डल प्रभाव कहते हैं। यह कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है।

प्रश्न 5.24.
इमल्शनों (पायस) के चार उपयोग लिखिये ।
उत्तर:
इमल्शनों के उपयोग निम्नलिखित हैं-
(i) दूधिया मैग्नीशिया जो कि एक इमल्शन है, का उपयोग पेट की गड़बड़ दूर करने में किया जाता है। मैग्नीशिया Mg(OH)2 का पायस होता है।
(ii) साबुन एवं अपमार्जकों की शोधन क्रिया में इमल्शन ( पायस) बनता है।
(iii) दूध जो कि हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, भी इमल्शन है जिसमें जल में वसा परिक्षिप्त रहती है।
(iv) धातुकर्म में अयस्क के सान्द्रण की झाग प्लवन विधि में भी पायस का योगदान होता है।

प्रश्न 5.25.
मिसेल क्या है? मिसेल निकाय का एक उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
मिसेल – कुछ पदार्थ विलयन में उच्च सान्द्रताओं पर कणों का एक पुंज बनाते हैं जिसे मिसेल कहते हैं। यह कोलॉइड के समान व्यवहार करता है। मिसेल सहचारी ( associated colloid) कोलॉइड द्वारा बनता है । अतः इन्हें सहचारी कोलॉइड भी कहते हैं।
मिसेल सामान्यतया पृष्ठ सक्रिय पदार्थों द्वारा बनते हैं जो कि विशिष्ट प्रकार के अणु होते हैं जिनमें द्रव – विरोधी तथा द्रवस्नेही सिरा होता है। साबुन, मिसेल बनाते हैं जैसे सोडियम ऑलिएट (C17H33 COONa+), इसमें हाइड्रोकार्बन भाग C17H33 – जलविरोधी सिरा है तथा COONa+ स्नेही सिरा है।

प्रश्न 5.26.
निम्न पदों को उचित उदाहरण सहित समझाइए –
(i) ऐल्कोसॉल,
(ii) ऐरोसॉल,
(iii) हाइड्रोसॉल।
उत्तर:
(i) ऐल्कोसॉल-वे कोलॉइडी सॉल जिनमें परिक्षेपण माध्यम ऐल्कोहॉल होता है, उन्हें एल्कोसॉल कहते हैं। उदाहरण – कोलोडियन।
(ii) ऐरोसॉल-वे कोलॉइड जिनमें द्रव, गैसीय अवस्था में परिक्षिप्त रहता है, उन्हें ऐरोसॉल कहते हैं। उदाहरण – कोहरा ।
(iii) हाइड्रोसॉल -वे कोलॉइडी सॉल जिनमें परिक्षेपण माध्यम जल होता है जिसमें ठोस के कण परिक्षिप्त रहते हैं, उन्हें हाइड्रोसॉल कहते हैं । उदाहरण – स्टार्च सॉल।

प्रश्न 5.27.
“कोलॉइड एक पदार्थ नहीं, पदार्थ की एक अवस्था है ।” इस कथन पर टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर:
“कोलॉइड एक पदार्थ नहीं, पदार्थ की एक अवस्था है।” यह कथन सत्य है क्योंकि एक ही पदार्थ भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में कोलॉइड तथा क्रिस्टलाभ की तरह व्यवहार दर्शाता है, अर्थात् एक परिस्थिति में वह कोलॉइड है तो दूसरी परिस्थिति में वह क्रिस्टलाभ होगा। जैसे NaCl जल में क्रिस्टलाभ (Crystalloid) की भांति व्यवहार करता है जबकि बेन्जीन में यह कोलॉइड की भांति व्यवहार करता है।

इसी प्रकार साबुन का तनु विलयन, क्रिस्टलाभ के गुण दर्शाता है। जबकि इसी का सांद्र विलयन, कोलॉइड के गुण दर्शाता है। अतः किसी पदार्थ का कोलॉइडी व्यवहार कणों के आकार पर निर्भर करता है। जब कणों का आकार 1 nm से 1000 nm की परास में होता है तो पदार्थ कोलॉइड की भांति व्यवहार करता है।

HBSE 12th Class Chemistry पृष्ठ रसायन Intext Questions

प्रश्न 5.1.
रसोवशोषण के दो अभिलक्षण दीजिए।
उत्तर:
(i) रसोवशोषण अतिविशिष्ट होता है।
(ii) रसोवशोषण अनुत्क्रमणीय होता है।

प्रश्न 5.2.
ताप बढ़ने पर भौतिक अधिशोषण क्यों घटता है?
उत्तर:
भौतिक अधिशोषण ऊष्माक्षेपी प्रक्रम होता है (△H =-ve)
अतः ली शातेलिए के नियम से ताप बढ़ाने पर साम्य पश्च दिशा में जाता है अर्थात् अधिशोषण घटता है। निम्न ताप पर भौतिक अधिशोषण आसानी सेहोता है।

प्रश्न 5.3.
अपने क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में चूर्णित पदार्थ, अधिक प्रभावी अधिशोषक क्यों होते हैं?
उत्तर:
अधिशोषक का पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ने पर अधिशोषण की मात्रा बढ़ती है। क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में चूर्णित एवं सरन्थ्र पदार्थों का पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होता है अतः ये अपने क्रिस्टलीय रूपों की तुलना में अधिक प्रभावी अधिशोषक होते हैं।

प्रश्न 5.4.
हॉबर प्रक्रम में हाइड्रोजन को NiO उत्प्रेरक की उपस्थिति में मेथेन के साथ भाप की अभिक्रिया द्वारा प्राप्त किया जाता है। प्रक्रम को भाप-पुन: संभवन कहते हैं। अमोनिया प्राप्त करने के लिए हॉबर प्रक्रम में CO को हटाना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
हॉबर प्रक्रम में प्रयुक्त हाइड्रोजन को निम्नलिखित अभिक्रिया द्वारा बनाया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 10
इस अभिक्रिया में CO भी सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। इस CO को अभिक्रिया माध्यम से हटाना आवश्यक है क्योंकि यह हॉबर प्रक्रम में प्रयुक्त Fe (उत्प्रेरक) से क्रिया करके [Fe(CO)5] बनाता है जो कि कमरे के ताप पर द्रव होता है अतः यह NH3 के बनने में बाधा उत्पन्न करता है तथा उच्च ताप पर CO, H2 से भी क्रिया करती है इसलिए CO उत्प्रेरक विष है तथा उत्प्रेरक की सक्रियता को कम कर देती है।

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प्रश्न 5.5.
एस्टर का जल अपघटन प्रारंभ में धीमा एवं कुछ समय पश्चात् तीव्र क्यों हो जाता है?
उत्तर:
एस्टर के जल अपघटन की अभिक्रिया निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 11
इस अभिक्रिया में उत्पन्न कार्बनिक अम्ल, उत्प्रेरक (स्वउत्प्रेरक) का कार्य करता है अतः एस्टर का जल अपघटन प्रारंभ में धीमा तथा कुछ समय पश्चात् तीव्र हो जाता है।

प्रश्न 5.6.
उत्त्रेरण के प्रक्रम में विशोषण की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ठोस उत्प्रेरक की सतह पर गैसीय अभिकारकों के अधिशोषण से मध्यवर्ती बनता है जिसके पश्चात् बने उत्पादों का उत्प्रेरक की सतह से विशोषण हो जाता है जिससे ठोस उत्प्रेरक की सतह पुन अभिक्रिया के लिए उपलब्ध हो जाती है। यदि विशोषण नहीं होगा तो आगे अभिक्रिया नहीं होगी अर्थात् अभिक्रिया रुक जाएगी। अतः उत्प्रेरण के प्रक्रम में विशोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रश्न 5.7.
आप हार्डी-शूल्से नियम में संशोधन के लिए क्या सुझाव दे सकते हैं?
उत्तर:
हार्डी-शूल्से नियम में निम्नलिखित संशोधन किया जा सकता है अर्थात् इसे इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है-
किसी विद्युत अपघट्य की स्कंदन शक्ति उसके स्कंदन मान के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात् जिस विद्युत अपघट्य का स्कंदन मान कम होगा उसकी स्कंदन शक्ति अधिक होगी। दो विद्युत अपघट्यों के लिए इसकी तुलना इस प्रकार की जा सकती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 5 Img 12
किसी विद्युत अपघट्य पर जितना अधिक आवेश होता है कोलाइड के अवक्षेपण के लिए उसकी उतनी ही कम मात्रा की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 5.8.
अवक्षेप का मात्रात्मक आकलन करने से पूर्व उसे जल से धोना आवश्यक क्यों है?
उत्तर:
अवक्षेप के मात्रात्मक आकलन करने से पूर्व उसे जल से धोना आवश्यक है क्योंकि अवक्षेप की सतह पर विद्युत अपघट्य के कुछ कण अधिशोषित होते हैं जो अवक्षेप को कोलाइडी अवस्था में परिवर्तित कर सकते हैं तथा अवक्षेप का द्रव्यमान भी बढ़ सकता है, जिससे अवक्षेप का मात्रात्मक आकलन सही नहीं होगा। अतः जल से धोने से विद्युत अपघट्य के कण फिल्टर पत्र द्वारा छनित में चले जाते हैं।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

प्रश्न 16.1.
हमें औषधों को विभिन्न प्रकार से वर्गीकृत करने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
औषधों (Drugs) का वर्गीकरण विभिन्न प्रकार से किया जाता है क्योंकि औषधों से सम्बन्धित विभिन्न व्यक्तियों के लिए यह उपयोगी होता. है। जैसे भेषजगुणविज्ञानीय (फार्माकोलोजिकल) प्रभाव के आधार पर वर्गीकरण डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे इन्हें किसी बीमारी से सम्बन्धित सभी औषधों की जानकारी हो जाती है। इसी प्रकार रासायनिक संरचना या लक्ष्य अणुओं (Molecular targets) पर आधारित वर्गीकरण एक केमिस्ट (रसायनज्ञ ) के लिए उपयोगी होता है जो औषध का संश्लेषण करता है।

प्रश्न 16.2.
औषध रसायन के पारिभाषिक शब्द, लक्ष्य- अणु अथवा औषध – लक्ष्य को समझाइए ।
उत्तर:
औषध रसायन में लक्ष्य- अणु या औषध – लक्ष्य (Target Molecule) वे वृहद् अणु (जैव अणु) होते हैं जिनसे औषधि क्रिया करके चिकित्सीय प्रभाव ( therapeutic effect) दर्शाती है, जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड तथा न्यूक्लीक अम्ल ।

प्रश्न 16.3.
उन वृहद अणुओं के नाम लिखिए जिन्हें औषध- लक्ष्य चुना जाता है।
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड तथा न्यूक्लीक अम्ल वे वृहद् अणु हैं जिन्हें औषध-लक्ष्य चुना जाता है।

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प्रश्न 16.4.
बिना डॉक्टर से परामर्श लिए दवाइयाँ क्यों नहीं लेनी चाहिए?
उत्तर:
बिना डॉक्टर से परामर्श लिए दवाइयाँ नहीं लेनी चाहिए क्योंकि अनुशंसित (Recommended ) मात्रा से अधिक मात्रा का उपयोग करने पर अधिकांश दवाइयाँ विष की भांति कार्य करती हैं। केवल डॉक्टर ही बीमारी का सही निदान (Diagnosis) करके सही दवा की उचित मात्रा बता सकता है।

प्रश्न 16.5.
‘रसायन चिकित्सा’ शब्द की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
रसायन चिकित्सा वह चिकित्सा है जिसमें रसायनों द्वारा रोगों का इलाज किया जाता है।

प्रश्न 16.6.
एन्जाइम की सतह पर औषध (Drugs) को थामने के लिए कौन से बल कार्य करते हैं?
उत्तर:
एन्जाइम की सतह पर औषध को थामने के लिए आयनिक बंध, हाइड्रोजन बंध, वान्डरवालस बल या द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल कार्य करते हैं।

प्रश्न 16.7
प्रतिअम्ल एवं प्रति एलर्जी औषध हिस्टैमिन के कार्य में बाधा डालती हैं परंतु ये एक-दूसरे के कार्य में बाधक क्यों नहीं होतीं?
उत्तर:
प्रतिअम्ल (antacids) तथा प्रतिएलर्जी औषध (antiallergic drugs) एक-दूसरे के कार्य में बाधक नहीं होतीं क्योंकि ये अलग-अलग ग्राहियों (Receptors) पर कार्य करती हैं। अतः प्रतिहिस्टैमिन (antihistamines) आमाशय के अम्ल स्रवण पर प्रभाव नहीं डालती क्योंकि यह आमाशय की दीवारों में स्थित ग्राहियों से क्रिया नहीं करती।

प्रश्न 16.8.
नॉरऍड्रिनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए किस प्रकार की औषध की आवश्यकता होती है? दो औषधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
नॉरऍड्रिनेलिन का कम स्तर अवसाद का कारण होता है। इस समस्या के निदान के लिए वे औषध लेते हैं जो उस एन्जाइम को संदमित (Inhibit) करती हैं जो नारएड्रिनेलिन के विघटन ( निम्ननीकरण) को उत्प्रेरित करता है। जब यह एन्जाइम संदमित हो जाता है तो इस महत्वपूर्ण तंत्रकीय संचारक (Neurotransmitter) का उपापचयन (Metabolism) धीरे होता है तथा यह अपने ग्राही को लम्बे समय तक सक्रिय रख सकता है। इससे अवसाद (Depression) का असर कम हो जाता है।

इप्रोनाइजिड तथा फिनल्जिन (नारडिल) ऐसी दो औषध हैं।

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प्रश्न 16.9.
वृहद् – स्पेक्ट्रम जीवाणुनाशी शब्द से आप क्या समझते हैं? समझाइए।
उत्तर:
जीवाणु अथवा अन्य सूक्ष्मजीवियों का वह परास (range). जिस पर प्रतिजैविक (Antibiotic) का प्रभाव होता है उसे प्रतिजीवाणु (प्रतिजैविक) का स्पेक्ट्रम कहते हैं। जो प्रतिजीवाणु ग्रैम-ग्राही (ग्रैम पॉजिटिव ) तथा ग्रैम-अग्राही (ग्रैम नेगेटिव) दोनों प्रकार के जीवाणुओं के विस्तृत प का विनाश या निरोध (Inhibition) करके बहुत से संक्रमणों को ठीक कर देते हैं इन्हें वृहद् या विस्तृत स्पेक्ट्रम (ब्रॉड स्पेक्ट्रम) जीवाणुनाशी (प्रतिजीवाणु) कहते हैं। उदाहरण- क्लोरैम्फेनिकॉल, इसे न्यूमोनिया, टाइफाइड, पेचिश, मूत्र. संक्रमण, मेनिनजाइटिस ( मस्तिष्क ज्वर) में प्रयुक्त करते हैं।

प्रश्न 16.10.
पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी (रोगाणुनाशी) किस प्रकार से भिन्न हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
पूतिरोधी तथा विसंक्रामी (संक्रमणहारी) ऐसे रसायन होते हैं जो या तो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं।

पूतिरोधियों (Antiseptic) को सजीव ऊतकों, जैसे घाव, चोट तथा अल्सर पर लगाया जाता है। फ़्यूरासिन तथा सोफ्रामाइसिन इसके मुख्य उदाहरण हैं।

संक्रमणहारी (रोगाणुनाशी) ( Disinfectant) भी सूक्ष्मजीवियों को नष्ट करते हैं तथा इनका प्रयोग निर्जीव वस्तुओं जैसे- फ़र्श, नालियाँ तथा यंत्रों को रोगाणुमुक्त करने में प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण- फ़ीनॉल का एक प्रतिशत विलयन।

प्रश्न 16.11.
सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन सोडियम हाइड्रोजन- कार्बोनेट अथवा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड की तुलना में श्रेष्ठ प्रतिअम्ल क्यों हैं?
उत्तर:
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के कारण आमाशय क्षारीय हो जाता है जिसके कारण अम्ल का उत्पादन अधिक होता है तथा मैग्नीशियम या ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड जैसे प्रतिअम्लों से केवल रोग के लक्षण कम होते हैं, कारण नहीं इसलिए सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन को प्रति अम्ल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि ये हिस्टैमिन की क्रिया को रोककर अम्ल के उत्पादन को ही रोक देते हैं। अतः ये श्रेष्ठ प्रतिअम्ल हैं।

प्रश्न 16.12.
एक ऐसे पदार्थ का उदाहरण दीजिए जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी, दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर:
फीनॉल एक ऐसा पदार्थ है जिसे पूतिरोधी तथा संक्रमणहारी, दोनों प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। सांद्रता में परिवर्तन से वही पदार्थ पूतिरोधी अथवा विसंक्रामी (संक्रमणहारी) का कार्य कर सकता है। फीनॉल का 0.2 प्रतिशत विलयन पूतिरोधी होता है जबकि इसका एक प्रतिशत विलयन विसंक्रामी ( रोगाणुनाशी) होता है।

प्रश्न 16.13.
डेटॉल के प्रमुख संघटक कौनसे हैं ?
उत्तर:
डेटॉल के प्रमुख संघटक क्लोरोज़ाइलिनॉल तथा टपनिऑल होता है।

प्रश्न 16.14.
आयोडीन का टिंक्चर क्या होता है? इसके क्या उपयोग हैं?
उत्तर:
आयोडीन का ऐल्कोहॉल-जल मिश्रण में 2.3 प्रतिशत विलयन आयोडीन का टिंक्चर कहलाता है। इसे घाव पर लगाते हैं तथा यह पूतिरोधी होता है।

प्रश्न 16.15.
खाद्य पदार्थ परिरक्षक क्या होते हैं?
उत्तर:
खाद्य पदार्थों को पड़ा रखने पर उनमें सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण ये खराब हो जाते हैं। अतः वे पदार्थ जिन्हें खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। उन्हें खाद्य परिरक्षक कहते हैं।

कुछ सामान्य परिरक्षक निम्नलिखित हैं- साधारण नमक, चीनी, वनस्पति तेल, सोडियम बेन्जोएट (C6H5COONa), सॉर्बिक अम्ल तथा प्रोपेनॉइक अम्ल के लवण |

सोडियम बेन्जोएट का प्रयोग सीमित मात्रा में किया जाता है क्योंकि यह शरीर द्वारा उपापचयित हो जाता है।

एक अच्छे खाद्य परिरक्षक में निम्नलिखित गुण होने चाहिये-

  • खाद्य पदार्थों पर इनका लम्बे समय तक असर रहना चाहिए ।
  • ये स्वादहीन होने चाहिए।
  • इन्हें अल्प मात्रा में ही प्रयुक्त किया जाना चाहिए।
  • इनकी खाद्य पदार्थों से कोई क्रिया नहीं होनी चाहिए ।
  • इनके प्रयोग से जलन, अम्लता, एलर्जी, गैस तथा पित्त नहीं होनी चाहिए।

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प्रश्न 16.16.
ऐस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक सीमित क्यों है?
उत्तर:
ऐस्पार्टेम एक कृत्रिम मधुरक है जिसका प्रयोग केवल ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक ही सीमित है, क्योंकि इसे खाना बनाने के ताप तक गर्म करने पर यह विघटित हो जाता है।

प्रश्न 16.17.
कृत्रिम मधुरक क्या हैं? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वे पदार्थ जो शर्करा (Sugar) के स्थान पर मधुरक (Sweet- ening agent) के रूप में प्रयोग में लिए जाते हैं लेकिन उनका कोई पोषण मान नहीं होता, उन्हें कृत्रिम मधुरक कहते हैं। सैकरीन (ऑर्थोसल्फोबेन्जीनीमाइड) तथा ऐस्पार्टेम कृत्रिम मधुरकों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 16.18.
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले मधुरकों के नाम क्या हैं?
उत्तर:
मधुमेह के रोगियों के लिए मिठाई बनाने के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला मुख्य मधुरक सैकरीन (ऑर्थोसल्फोबेन्जीनीमाइड) है क्योंकि इसका कोई पोषण मान नहीं होता तथा यह शरीर से अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र द्वारा उत्सर्जित हो जाता है। यह पूर्णतः अक्रिय तथा अहानिकारक होता है। इसके अतिरिक्त सुक्रालोस को भी इसके लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 16.19.
ऐलिटेम को कृत्रिम मधुरक की तरह उपयोग में लाने पर क्या समस्याएँ होती हैं?
उत्तर:
ऐलिटेम एक अधिक प्रबल कृत्रिम मधुरक है जो कि सूक्रोस से 2000 गुना अधिक मीठा होता है। यह स्थायी होता है लेकिन इसके द्वारा- उत्पन्न मिठास को नियंत्रित करना कठिन होता है।

प्रश्न 16.20.
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक किस प्रकार से श्रेष्ठ हैं?
उत्तर:
साबुनों की अपेक्षा संश्लेषित अपमार्जक श्रेष्ठ होते हैं क्योंकि ये मृदु एवं कठोर दोनों प्रकार के जल में उपयोग किए जा सकते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी झाग बनाते हैं क्योंकि इनके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण जल में विलेय होते हैं अतः ये अवशेष नहीं बनाते। अपमार्जकों को अम्लीय माध्यम में भी प्रयुक्त किया जा सकता है। साबुनों का विलयन क्षारीय होता है जबकि अपमार्जकों का विलयन उदासीन होता है अतः इन्हें ऊनी, रेशमी जैसे कोमल वस्त्रों को धोने के लिए भी प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 16.21.
निम्नलिखित शब्दों को उपयुक्त उदाहरणों द्वारा समझाइए-
(क) धनात्मक अपमार्जक
(ख) ऋणात्मक अपमार्जक
(ग) अनआयनिक अपमार्जक ।
उत्तर:
संश्लिष्ट अपमार्जक वे शोधन अभिकर्मक (Cleansing Agents ) होते हैं जिनमें साबुन के सभी गुण पाए जाते हैं लेकिन रासायनिक दृष्टि से ये साबुन नहीं होते हैं। अतः इन्हें साबुन रहित साबुन या सिन्डेट्स भी कहा जाता है।

अपमार्जक कठोर जल में भी झाग बनाते हैं अतः इन्हें कठोर तथा मृदु दोनों प्रकार के जल में उपयोग में लिया जा सकता है।

संश्लिष्ट अपमार्जक तीन प्रकार के होते हैं-
(a) धनायनी अपमार्जक
(b) ऋणायनी अपमार्जक
(c) अनआयनिक अपमार्जक ।
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(a) धनायनी अपमार्जक ( Cationic Detergents ) – धनायनी अपमार्जक एमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड आयनों के साथ बने चतुष्क अमोनियम लवण होते हैं। इनमें धनात्मक भाग में लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला तथा नाइट्रोजन परमाणु पर धन आवेश होता है। अतः इन्हें धनायनी अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण – सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड ।

धनायनी अपमार्जकों को बालों के कन्डीशनरों में प्रयुक्त किया जाता है तथा इनमें जीवाणुनाशक गुण पाया जाता है। महंगे होने के कारण इनका उपयोग सीमित मात्रा में होता है।

(b) ऋणायनी अपमार्जक (Anionic Detergents ) – ऋणायनी अपमार्जक लम्बी श्रृंखलायुक्त सल्फोनीकृत ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सोडियम लवण होते हैं। जैसे- सोडियम p-ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट तथा सोडियम लॉरिल सल्फोनेट या सल्फेट । दीर्घ श्रृंखला वाले ऐल्कोहॉलों की सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) के साथ अभिक्रिया कराने पर पहले ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फेट बनते हैं जिनकी क्रिया क्षार से कराने पर ऋणायनी अपमार्जक बनते हैं। इसी प्रकार ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट, ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनिक अम्लों की क्षार के साथ क्रिया से प्राप्त होते हैं।
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ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेटों के सोडियम लवण महत्त्वपूर्ण ऋणायनी अपमार्जक होते हैं। ऋणायनी अपमार्जकों में इनका ऋणात्मक भाग शोधन (Cleansing) क्रिया में भाग लेता है। ये सामान्यतः घरेलू उपयोग में आते हैं। ऋणायनी अपमार्जक दंतमंजन में भी प्रयुक्त किए जाते हैं।

(c) अनआयनिक अपमार्जक (Non-lonic Detergents) अनायनिक अपमार्जकों में कोई आयन नहीं होता है, अतः इसे अनआयनिक अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण- (i) स्टीऐरिक अम्ल तथा पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल की अभिक्रिया से बना अपमार्जक ।
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प्रश्न 16.22.
जैव-निम्ननीकृत होने वाले और जैव-निम्ननीकृत न होने वाले अपमार्जक क्या हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जैव निम्ननीकृत तथा जैव अनिम्ननीकृत अपमार्जक (Bio degradable and Non Bio-degradable Detergents) – वे अपमार्जक जो जीवाणुओं द्वारा आसानी से विघटित हो जाते हैं उन्हें जैव निम्ननीकृत अपमार्जक कहते हैं। इनसे प्रदूषण नहीं होता है। उदाहरणअशाखित हाइड्रोकार्बन शृंखलायुक्त अपमार्जक-n-लॉरिल सल्फेट।

वे अपमार्जक जो जीवाणुओं द्वारा आसानी से निम्ननीकृत नहीं होते, उन्हें जैव-अनिम्ननीकृत अपमार्जक कहते हैं। अपमार्जक जिनमें हाइड्रोकार्बन श्रृंखला शाखित होती है, वे जैव अनिम्ननीकृत होते हैं। उदाहरण-
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इसका निम्ननीकरण (Degradation) धीमा होने के कारण ये एकत्र होते जाते हैं तथा जल के साथ तालाब, नदी आदि में पहुँच जाते हैं एवं झाग उत्पन्न करते हैं जिससे पानी प्रदूषित हो जाता है।

आजकल हाइड्रोकार्बन शृंखला में शाखन को नियंत्रित करके इसे न्यूनतम रखा जाता है। अशाखित शृंखलाएँ आसानी से जैव निम्ननीकृत हो जाती हैं, अतः प्रदूषण नहीं होता है।

अपमार्जकों का संश्लेषण (Synthesis of Detergents) अपमार्जकों को निम्नलिखित विधियों द्वारा संश्लेषित किया जाता है-
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(ii) रीड अभिक्रिया द्वारा (By Reed Reaction)
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प्रश्न 16.23.
साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करता?
उत्तर:
दीर्घ शृंखलायुक्त वसा अम्लों के सोडियम तथा पोटैशियम लवणों को साबुन कहते हैं। संतृप्त तथा असंतृप्त मोनोकार्बोक्सिलिक अम्लों को वसा अम्ल (Fatty Acids) कहते हैं। जैसे स्टिऐरिक अम्ल (C17H35COOH), पामिटिक अम्ल (C15H31 COOH ) तथा ओलीक अम्ल (C17H33 COOH)। ये प्रकृति में प्रमुखता से पाये जाते हैं।

वसा अम्लों के सोडियम लवणों को सोडियम साबुन अथवा कठोर साबुन (Hard Soaps) अथवा धावन साबुन (Washing Soaps) कहते हैं, जबकि पोटैशियम साबुन को नहाने के साबुन (Bathing Soaps) अथवा मृदु साबुन (Soft Soaps) कहते हैं।

साबुन बनाना – वसा (वसा अम्लों के ग्लिसरिल एस्टर) को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन के साथ गर्म करने पर साबुन प्राप्त होता है तथा साबुन बनाने की इस प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं । इस अभिक्रिया में वसा अम्लों के एस्टर का जल अपघटन होता है तथा प्राप्त साबुन कोलॉइडी अवस्था में होता है। इसे विलयन में सोडियम क्लोराइड (NaCl) डालकर अवक्षेपित कर लेते हैं। साबुन को पृथक् कर लेने के बाद बचे हुए विलयन में ग्लिसरॉल रह जाता है जिसे प्रभाजी आसवन के द्वारा प्राप्त किया जाता है।
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आठ से अठारह कार्बन परमाणु युक्त साबुन की ‘गुणवत्ता अच्छी होती है। अठारह से अधिक कार्बन होने पर इनकी जल में विलेयता कम होती है तथा अठारह से कम कार्बन होने पर इनकी शोधन शक्ति (Cleansing Power) कम हो जाती है। सोडियम तथा पोटेशियम साबुन जल में विलेय होते हैं तथा इन्हें सफाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पोटेशियम साबुन मृदु होते हैं अतः इस प्रकार के साबुन त्वचा के लिए कोमल होते हैं। पोटेशियम साबुन बनाने के लिए NaOH के विलयन के स्थान पर KOH का विलयन लिया जाता है।

प्रश्न 16.24.
क्या आप साबुन तथा संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए कर सकते हैं?
उत्तर:
साबुन का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए किया जा सकता है क्योंकि मृदु जल, साबुन के साथ तुरन्त झाग देता है जबकि कठोर जल में झाग बनने में बहुत समय लगता है तथा इसमें चिपचिपा अवक्षेप भी बनता है तथा अवक्षेप की मात्रा के अनुसार जल की कठोरता भी अधिक होगी लेकिन संश्लेषित अपमार्जकों का प्रयोग जल की कठोरता जानने के लिए नहीं कर सकते क्योंकि ये कठोर तथा मृदु दोनों प्रकार के जल के साथ झाग (Lather) देते हैं।

प्रश्न 16.25.
साबुन की शोधन क्रिया को समझाइए |
उत्तर:
साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action of Soaps):
साबुन की शोधन क्रिया में पायसीकरण (इमल्सीकरण) होता है। इस प्रक्रिया में साबुन, कपड़े पर लगे ग्रीस तथा मिट्टी के कणों का जल के साथ इमल्सन (पायस) बनाने में मदद करता है।

स्पष्टीकरण (Explanation) – साबुन के अणु में अध्रुवीय जल विरोधी तथा ध्रुवीय जलस्नेही भाग होता है। कपड़े की सतह पर मिट्टी के कण, ग्रीस या तेल द्वारा चिपके रहते हैं। ग्रीस या तेल जल में अविलेय होता है अतः मिट्टी के कणों को केवल जल द्वारा नहीं हटाया जा सकता। जब साबुन का प्रयोग किया जाता है तो इसका अध्रुवीय एल्किल समूह तेल की बूँदों में विलेय होता है जबकि ध्रुवीय -COON+a समूह जल में विलेय होता है अतः तेल की प्रत्येक बूँद के चारों ओर ऋणावेश आ जाता है इससे इमल्सन बन जाता है तथा मिट्टी के कण युक्त तेल की बूँदें जल द्वारा साफ हो जाती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 8
साबुन केवल मृदु जल (Soft Water) में ही कार्य करते हैं कठोर जल में नहीं, क्योंकि कठोर जल में Ca2+ तथा Mg2+ आयन होते हैं इसलिए सोडियम अथवा पोटैशियम साबुन को कठोर जल में घोलने पर वह अघुलनशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम साबुन में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 9
ये अघुलनशील साबुन, मलफेन (Scum) की भाँति जल से पृथक् हो जाते हैं तथा शोधन अभिकर्मक के रूप में उपयुक्त नहीं रहते। ये अच्छी धुलाई में रुकावट डालते हैं क्योंकि यह अवक्षेप कपड़ों पर चिपक जाता है। कठोर जल से धुले बाल इसी चिपचिपे पदार्थ के कारण ही चमकदार नहीं होते हैं। कठोर जल और साबुन से धुले कपड़ों में इस चिपचिपे पदार्थ के कारण रंजक भी एकसमान रूप से अवशोषित नहीं होता है।

प्रश्न 16.26.
यदि जल में कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट घुला हो तो आप कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जकों में से किसका प्रयोग करेंगे?
उत्तर:
जब जल में कैल्सियम हाइड्रोजन कार्बोनेट Ca(HCO3)2 घुला हो तो कपड़े धोने के लिए साबुन एवं संश्लेषित अपमार्जक में से संश्लेषित अपमार्जक का प्रयोग करेंगे क्योंकि अपमार्जकों के कैल्सियम लवण जल में विलेय होते हैं जबकि साबुन Ca+2 आयनों के साथ अवक्षेप बना देते हैं।

प्रश्न 16.27.
निम्नलिखित यौगिकों में जलरागी एवं जलविरागी भाग दर्शाइए-
(क) CH3(CH2)10CH2OS\(\overline{\mathbf{O}}\)3, \(\stackrel{+}{\mathbf{N}} \mathbf{a}\)
(ख) CH3(CH2)15N(CH3)3Br
(ग) CH3(CH2)COO(CH2CH2O)nCH2CH2CH
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों में जलरागी तथा जलविरागी भाग निम्नानुसार हैं-
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HBSE 12th Class Chemistry दैनिक जीवन में रसायन Intext Questions

प्रश्न 16.1.
अनिद्राग्रस्त रोगियों को चिकित्सक नींद लाने वाली गोलियाँ लेने का परामर्श देते हैं, परततु बिना चिकित्सक से परामर्श लिए इनकी खुराक लेना उचित क्यों नहीं है?
उत्तर:
नींद की गोलियाँ तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं, परन्तु अधिक मात्रा में या बिना आवश्यकता के लेने पर ये शरीर के अंगों पर विपरीत प्रभाव डालती हैं तथा विष का कार्य करती हैं। अतः ये प्राणघातक भी हो सकती हैं। इसलिए चिकित्सक के परामर्श के बिना इन्हें नहीं लेना चाहिए।

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प्रश्न 16.2.
किस वर्गीकरण के आधार पर वक्तव्य (Statement), रैनिटिडिन प्रतिअम्ल है’, दिया गया है?
उत्तर:
यह वक्तव्य भेषजगुणविज्ञानीय प्रभाव (Pharmacological effect) वर्गीकरण के आधार पर दिया गया है, क्योंकि कोई भी औषध जो अम्ल के आधिक्य (excess) का प्रतिकार (Counteract) करती है उसे प्रतिअम्ल कहते हैं। रैनिटिडीन भी अम्ल के प्रभाव को कम करती है। अतः यह एक प्रतिअम्ल है।

प्रश्न 16.3.
हमें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
प्राकृतिक मधुरक जैसे सूक्रोस ग्रहण की गई कैलोरी मान बढ़ाते हैं अतः मधुमेह के रोगी तथा वे व्यक्ति जिन्हें कैलोरी ग्रहण करने पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है, उन्हें कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता पड़ती है। क्योंकि कृत्रिम मधुरक अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं तथा ये पूर्णतः अक्रिय होते हैं तथा इनसे कोई हानि नहीं होती एवं इनसे कैलोरी में भी वृद्धि नहीं होती।

प्रश्न 16.4.
ग्लिसरिल ओलिएट तथा ग्लिसरिल पामिटेट से सोडियम साबुन बनाने के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए। इनके संरचनात्मक सूत्र नीचे दिए गए हैं-
(i) (C15H31COO)3C3H5 – ग्लिसरिल पामिटेट
(ii) (C17H33COO)3C3H5 – ग्लिसरिल ओलिएट।
उत्तर:
(i) ग्लिसरिल पामिटेट (C15H31COO)3C3H5 से सोडियम साबुन बनाना-
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(ii) ग्लिसरिल ओलिएट (C17H33COO)3C3H5 से सोडियम साबुन बनाना-
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प्रश्न 16.5.
निम्न प्रकार के अनायनिक अपमार्जक, द्रव अपमार्जकों, इमल्सीकारकों और क्लेदन कारकों (Wetting agents) में उपस्थित होते हैं। अणु में जलरागी (Hydrophilic ) तथा जलविरागी (Hydrophobic) हिस्सों को दर्शाइए। अणु में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह की पहचान करिए।
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उत्तर:
उपरोक्त अपमार्जक में बायीं ओर का हिस्सा जलविरागी (जल प्रतिकर्षी) है जबकि दायों ओर का हिस्सा जलरागी (जलस्नेही) है तथा इस अपमार्जक में ईथर तथा ऐल्कोहॉल प्रकार्यात्मक समूह (Functional Group) उपस्थित है।
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HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Haryana State Board HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

HBSE 8th Class Science Friction Textbook Questions and Answers

Question 1.
Fill in the blanks :
(a) Friction opposes the __________ between the surfaces in contact with each other.
(b) Friction depends on the __________ of surfaces.
(c) Friction produces __________.
(d) Sprinkling of powder on the carom board __________ friction.
(e) Sliding friction is __________ than the static friction.
Answer:
(a) relative motion
(b) nature
(c) heat
(d) reduces
(e) less.

Question 2.
Four children were asked to arrange forces due to rolling, static and sliding frictions in a decreasing order. Their arrangement are given below. Choose the correct arrangement:
(a) rolling, static, sliding
(b) rolling, sliding, static
(c) static, sliding, rolling
(d) sliding, static, rolling
Answer:
(c) static, sliding, rolling.

Question 3.
Alida runs her toy ear on dry marble floor, wet marble floor, newspaper and towel spread on the floor. The force of friction acting on the car on different surfaces in increasing order will be
(a) wet marble floor, dry marble floor, newspaper and towel.
(b) newspaper, towel, dry marble floor, wet marble floor.
(c) towel, newspaper, dry marble floor, wet marble floor.
(d) wet marble floor, dry marble floor, towel, newspaper.
Answer:
(a) wet marble floor, dry marble floor, newspaper and towel.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 4.
Suppose your writing desk is tilted a little. A book kept on it starts sliding down. Show the direction of frictional force acting on it.
Answer:
Frictional force is acting opposite to the movement of book i.e. upwards.

Question 5.
You spill a bucket of soapy water on a marble floor accidently. Would it make it easier or more difficult for you to walk on the floor? Why?
Answer:
It is difficult to walk on a soapy floor because layer of soap makes floor smooth. The coating of soap reduces the friction and the foot cannot make a proper grip on the floor and it starts getting to slip on the floor.

Question 6.
Explain why sportsmen use shoes with spikes.
Answer:
Sportsmen use shoes with spike to increase the friction so, that their shoes do not slip while they run or play.

Question 7.
Iqbal has to push a lighter box and Seema has to push a similar heavier box on the same floor. Who will have to apply a larger force and why?
Answer:
Seema will experience more frictional force because heavy object will be pressed hard against the opposite surface and produces more friction.

Question 8.
Explain why sliding friction less than static friction.
Answer:
Sliding friction is always less than static friction because two sliding objects find less time to get interlocked against, each others, irregularities of surfaces so they get less friction.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 9.
Give examples to show that friction is both a friend and a foe.
Answer:
Friction is a friend because :

  • It allows us to walk comfortably on ground.
  • It allows us to grip and catch different objects.
  • Things don’t move from their places because of friction.
  • Speeds of moving objects can be minimized or stopped by friction only.

Friction is foe because :

  • It causes wear and tear in objects of our daily use and machines we use.
  • Regular maintenance of objects moving against each other (machines and tools) wastes a lot of useful money.
  • It makes the movement of heavy objects very difficult.
  • It does not allow the regular free movement of substances.

Question 10.
Explain why objects moving in fluids must have special shapes.
Answer:
Objects moving in fluids must have a special shape called steamlined shape. Streamlined shape is that shape which overcomes the friction of fluid. They have pointed fronts with little broader middle portion which gets tapered at the back.

Extended Learning – Activities and Projects

Question 1.
What role does friction play in the sport of your choice? Collect some pictures of that sport in action where friction is either supporting it or opposing it. Display these pictures with proper captions on the bulletin board of your classroom.
Answer:
For self attempt.

Question 2.
Imagine that friction suddenly vanishes. How would life be affected. List ten such situations.
Answer:
For self attempt.

Question 3.
Visit a shop which sells sports shoes. Observe the soles of shoes meant for various sports. Describe your observations.
Answer:
For self attempt.

Question 4.
A toy to play with :
Take an empty match box. Take out its tray. Cut a used refill of a ball pen of the same width as the tray as shown in the figure below. Fix the refill with two pins on the top of the tray as shown in Fig. Make two holes on the opposite sides of the tray. Make sure that the holes are large enough to allow a thread to pass through them easily. Take a thread about a metre long and pass it through the holes as shown. Fix beads at the two ends of the thread so that it does not come out. Insert the tray in the outer cover of the matchbox.
Suspend the match box by the thread. Leave the thread loose. The match box will start falling down due to gravity. Tighten the thread now and observe what happens.
Explain your observation. Can you relate it to friction?
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction 1
Answer:
For self attempt.

HBSE 7th Class Science Friction Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is friction?
Answer:
Force acting equal and opposite to the relative motion of two objects in contact.

Question 2.
What does the friction depend upon?
Answer:
Nature of object.

Question 3.
Which surface produces more friction?
Answer:
Rough.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 4.
Which surface produces less friction?
Answer:
Smooth.

Question 5.
In which direction does friction work?
Answer:
Opposite to the motion.

Question 6.
What causes-friction between two surfaces?
Answer:
Irregularities of two surfaces.

Question 7.
What happens between irregularities of two surfaces in contact which produce friction?
Answer:
Irregularities get interlocked.

Question 8.
Which surface has large number of irregularities to cause friction?
Answer:
Rough surface.

Question 9.
Between flat and sliding surfaces which surface will cause less friction?
Answer:
Sliding surface.

Question 10.
What causes chalk to write on black board?
Answer:
Friction.

Question 11.
What does friction do to soles of our shoes?
Answer:
It causes wear and tear in soles.

Question 12.
What causes a matchstick to catch fire, when rubbed on rough surface?
Answer:
Friction.

Question 13.
What does friction produce?
Answer:
Heat.

Question 14.
What are things like oils, creams and grease called?
Answer:
Lubricants.

Question 15.
How are the shoes made to counter the friction and make better grip?
Answer:
They have grooves on their soles.

Question 16.
How are athletes and other sports shoes are designed to reduce friction?
Answer:
There soles have nails fixed on them.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 17.
What is done to the tyres of the vehicles to reduce the friction?
Answer:
They are treaded.

Question 18.
What is used in cycle brakes to increase friction?
Answer:
Brake pads.

Question 19.
What does the kabaddi players use to increase friction of their hands to grip their opponents?
Answer:
They rub their hands with soil.

Question 20.
What do we use on carrom board to reduce friction?
Answer:
Talcum powder.

Question 21.
What do we use on the hinges of the door to make door move smoothly?
Answer:
Machine oil/ Oil.

Question 22.
What is avoided between two surfaces to make movement smooth?
Answer:
Interlocking of irregularities.

Question 23.
What is used to reduce friction in machines, where lubrication are not advisable?
Answer:
Oil cushion.

Question 24.
Can we eliminate friction completely?
Answer:
No.

Question 25.
What is used to make heavy luggages move easily?
Answer:
Wheels are attached to their base.

Question 26.
Which friction is applicable when wheels are used to carry heavy weights?
Answer:
Rolling friction.

Question 27.
Among Static, Sliding and Rolling friction which is the smallest?
Answer:
Rolling friction.

Question 28.
How sliding is replaced by rolling in machines?
Answer:
By using ball bearings.

Question 29.
Name any machine, where ball bearing is used to reduce friction.
Answer:
Ceiling fan.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 30.
What is frictional force exerted by liquids called?
Answer:
Drag.

Question 31.
What does frictional force on an object in a fluid depend on?
Answer:
On its speed with respect to the fluid and its shape.

Question 32.
What is the special shape given to objects moving in fluid called?
Answer:
Streamlined shape.

Question 33.
Give three examples of streamlined objects.
Answer:
Ships, boats, aeroplanes.

Question 34.
How is the shape of the body of a fish which helps it in moving in water?
Answer:
It has streamlined shape.

Question 35.
When does rolling friction come in play?
Answer:
When a body rolls on other body.

Short Answer Type Questions

Question 1.
What is friction?
Answer:
Friction is a force which comes in play when two -bodies move on each other. Friction works in opposite direction to the direction of the movement of objects.

Question 2.
What causes friction?
Answer:
Friction occurs when two bodies move on each other. Each surface has some irregularities on it. When two such objects move on each other their irregularities get interlocked and friction arises.

Question 3.
How does the nature of surface effect friction?
Answer:
Nature of the surface plays major role in production of friction. The rough surface produces more friction than the smooth surface. The rough surface has more irregularities on it than the smooth surface, so more force is required to overcome the friction caused by irregularities.

Question 4.
What is a spring balance? How does it work?
Answer:
Spring balance is a device which is used to measure the force acting on a body. It consists of a coiled spring, which is attached to pointer and scale. When some object is hung with it the spring stretches and pointer points to the graduated scale to give the measurement of the force.
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction 2

Question 5.
Which friction is less static friction or sliding friction? Why?
Answer:
Sliding friction is lesser than static friction, because in sliding friction the relative motion between two surfaces is less opposed by friction as the irregularities of the two surfaces in contact do not get enough time to interlock with each other which makes the motion easy.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 6.
What would happen, if the floor we walk on, does not produce any friction?
Answer:
If there is no friction on the floor, we would not be able to stand or walk on the floor, because it is the friction which unables us to stand or walk on the surface. The grooves of our feet or shoes get locked into the irregularities of the floor and makes us stand. If friction is not there, then we would simply slip on the floor.

Question 7.
What helps us write with a pen or pencil?
Answer:
It is the friction between the hand and pen or pencil which causes us write with pen. The grooves on our fingers make a grip on the pen’s irregularities and we are able to write.

Question 8.
Why is it difficult to move an object from its static position?
Answer:
When an object is in its static position, it has better hold of the surface on which it is placed. The irregularities of the surface are interlocked properly and more force is needed to overcome the friction offered by interlocking surfaces. So it is difficult to move the object from its position of rest.

Question 9.
Why do we rub our hands in winter when we feel cold?
Answer:
We rub our hands to make them warm, when we feel cold. Rubbing hands against each other cause friction between them. Friction produces heat, this heat makes us warm. We can feel the warmth by touching our hands on our face.

Question 10.
Why do we need to decrease friction?
Answer:
Friction is an evil which causes a lot of wear and tear in objects coming under its effects. It causes a lot of wear in machine parts which rub against each other, it erodes the surfaces and destroy their symmetries. So, we lubricate surfaces to decrease the friction.

Question 11.
How can we increase friction?
Answer:
We need to increase friction of surfaces to control the movement. Friction can be increased by increasing the irregularities of the surfaces in contact. We use spikes in the shoes of the athletes so that they can lock better in the irregularities of the ground to make better grip.

Question 12.
How can we decrease friction?
Answer:
Friction can be decreased by rolling, sliding and lubricating the surfaces in contact. We use ball bearings, wheels and lubricants like oils, grease, cream etc. to decrease the friction. Rolling, sliding and lubricating decrease the irregularities of the surfaces and make them smooth.

Question 13.
What is drag?
Answer:
Drag is the frictional force exerted by fluids. Liquids and gases are collectively called fluids. So the friction caused due to movement of objects in liquids and in air medium is called a drag.

Long Answer Type Questions

Question 1.
What is friction? How do friction arise? Explain.
Answer:
Equal and opposite force exerted by relative motion between two surfaces is called friction. Friction is always exerted in opposite direction to the force exerted. Friction acts between two surfaces. It is caused due to the movement of these two surfaces in contact. Every surface has some irregularities on it. When two surfaces come in contact, these irregularities get locked with each other. When objects are moved, the friction arises in the opposite direction of the movement.

Question 2.
What factors effect the force of friction? Explain.
Answer:
Force of friction depends upon the nature of the surfaces in contact and the force with which these two surfaces are pressed against each other. Nature of the surface on which an object moves, effects the force of friction. Rough surfaces produce more friction, while smooth surfaces produce less friction. Rough surfaces have more irregularities on them so they produce more friction. Smooth surfaces allow easy movement as they have less irregularities and the interlocking of irregularities with other surface is less as compared to the rough surfaces, so they produce less friction.

Secondly, force of friction depends upon how hardly two surfaces are pressed against each other. If two surfaces are pressed hard against each other, then the friction produced will be more.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 3.
How many types of frictions do you know about? Explain.
Answer:
Friction is of different types : Static friction, sliding friction and rolling friction.
Static friction is one which is produced between two surfaces in contact with each at the position of rest. This friction is more powerful than others. It is most difficult to overcome the static friction at this positions, the irregularities are most effectively pressed against each other. This type of friction needs a lot of energy to overcome.

Sliding friction: arises when two objects in contact are in motion. It is lesser than static friction. This friction is lesser because the irregularities of both surfaces do not get enough time to get locked with each other as an object is already in motion.
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction 3

Rolling friction: comes in effect when two bodies are rolling on each other. Rolling movement of both objects don’t allow the locking of irregularities, thus it is the smallest friction of all they three types. Drag is the frictional force which is exerted by the fluids on the bodies moving in it. This friction needs a lot of energy to overcome so, bodies of such objects which move in fluids are streamlined to counter the friction offered by fluids.
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction 4

Question 4.
What is fluid friction and on what factors does fluid friction depend?
Answer:
Friction exerted by fluids is called fluid friction. Bodies moving in air and liquids bear friction caused by air and liquid. Air and liquids are collectively called fluids. Fluid friction is also called Drag.Drag depends upon the speed of the object with respect to fluid, nature of the fluid and the shape of the object. Slow moving objects face more friction and heavy fluids offer more friction. Objects with pointed front, face less friction. All objects moving in fluids have streamlined shape so as to minimise the friction exerted by fluids.

Streamlined objects have narrow front, broader middle portion and which tapers at the back. All living organisms moving in air and water have streamlined shapes. Birds, fish etc. have streamlined body. So, Aeroplanes, boats, ships etc are designed according to birds and fish, so that they have to face less friction and has to spend less energy to overcome the friction.

Question 5.
prove with the help of an experiment that smoothness of surface reduces friction.
Answer:
Take a pencil or pen. Now put it on a table. Slightly push the pencil and see how much distance it covers, mark the point where the pencil stops after covering the distance. Now take some.cream or oil. Make a small coating of oil on the table or spread polythene on the table if possible. Now again take the pencil and put it at the same initial point. Now push the pencil slightly and let it stop on its own as done earlier. Now mark the point where the pencil stops. See the difference in the distance. In second attempt the pencil has covered more distance. This means it had to face less friction in second attempt. It proves that smoothness of the surface reduces friction.

Question 6.
Why and how do we increase friction?
Answer:
We increase friction deliberately to control the movements and motion of the objects. We also increase the friction for better grip and hold. Friction can be increased by making surfaces coarse and pressing two surfaces harder. Coarse surface has more irregularities to grip irregularities of other surface better, thus making the things come to a halt and give a better grip if object is stationary. We use brake pads in vehicles. When brake pads are pressed by pressing the lever, it gets pressed against the tyres and arrest the movement of the tyres and with this the vehicle comes to stop.

Pens are provided with ridges at the point where we hold them for writing, so that the friction between fingers and pen becomes more and a better grip can be made to write fluently. Pens without ridges get slipped out from our hands easily.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 12 Friction

Question 7.
Why and how do we decrease friction?
Answer:
We decrease friction to save the objects from wear and tear. Friction causes wear and tear on the surfaces of the objects. It causes damage to the objects specially machines and machine parts. So, we apply a film of oil or grease between the surfaces in contact, so that it produces less friction and it causes no damage to the parts. Oils, grease etc. are called lubricants, which are used to make surfaces smooth and minimise friction. In most of the cases rolling of objects is used to reduce friction. Ball bearings are used in cycles, vehicles and machines because it reduces friction. Wheels are used to move heavy objects because wheels roll on the ground thus reducing friction and this makes the dragging of heavy objects easy. Tyres carry heavy and loaded trucks on them, as they produce less friction and need lesser energy to move them.

Friction Class 8 HBSE Notes

1. Friction is the force equal and opposite to the relative motion between two surfaces in contact.

2. Force of friction acts on both the surfaces in contact.

3. There are many factors which affect friction :

  • It depends on the nature of surface.
  • It depends on smoothness of surface.
  • It depends on the hardness with which two surfaces in contact are pressed against each other.

4. Friction has no relation with area exposed to force of friction.

5. Friction is static, when it opposes the force applied on the body.

6. When two surfaces slide on each other, sliding friction comes into play.

7. Sliding friction is less than the static friction.

8. Friction is an evil which causes a lot of wear and tear on the surfaces of the objects due to opposite forces in action.

9. Wear and tear is more in case of static friction and less in case of sliding friction.

10. Friction is an evil but a necessary evil. No body would have been able to walk on the floor, if friction was not in play :

11. When two surfaces roll on each other the rolling friction is applied, for example in case of wheels under attache-cases. Rolling reduces the friction and movement becomes easy and smooth.

12. Fluids also exert force of friction and reduce the speed. To avoid friction due to fluid, bodies of objects moving in fluids have pointed and streamlined fronts and bodies.

13. Aeroplanes and ships etc. have streamlined bodies to over come the friction caused by air and liquids.

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 12.1.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए-
(i) सायनोहाइड्रिन
(ii) ऐसीटेल
(iii) सेमीकार्बेजोन
(iv) ऐल्डोल
(v) हेमीऐसीटेल
(vi) ऑक्सिम
(vii) कीटेल
(viii) इमीन
(ix) 2,4-DNP व्युत्पन्न
(x) शिफ क्षारक।
उत्तर:
(i) सायनोहाइड्रिन- कार्बोनिल यौगिकों पर HCN के योग से बने यौगिक सायनोहाइड्रिन कहलाते हैं। इनमें OH तथा -CN समूह उपस्थित होते हैं। जैसे-
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(ii) ऐसीटेल ऐल्डिहाइड की दो मोल मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल से क्रिया कराने पर प्राप्त यौगिकों को ऐसीटेल कहते हैं।
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(iii) सेमीकार्बेजोन कार्बोनिल यौगिकों की सेमीकार्बेजाइड से अभिक्रिया कराने पर बने यौगिकों को सेमीकार्बेजोन कहते हैं। जैसे-
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(iv) ऐल्डोल – a-H युक्त ऐल्डिहाइडों का तनु क्षार की उपस्थिति में संघनन करने से बना उत्पाद ऐल्डोल कहलाता है।
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(v) हेमीऐसीटेल – शुष्क HCl की उपस्थिति में ऐल्डिहाइड की मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल के एक मोल के साथ अभिक्रिया कराने पर ऐल्कॉक्सी ऐल्कोहॉल बनते हैं, इन्हें हेमीऐसीटेल कहते हैं।
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(vi) ऑक्सिम – कार्बोनिल यौगिकों की हाइड्रॉक्सिल एमीन से क्रिया कराने से बने उत्पाद ऑक्सिम कहलाते हैं।
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(vii) कीटैल – शुष्क HCl की उपस्थिति में कीटोन, एथिलीन ग्लाइकॉल के साथ अभिक्रिया करके चक्रीय उत्पाद बनाते हैं जिसे एथिलीन ग्लाइकॉल कीटैल कहते हैं।
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(viii) इमीन – कार्बोनिल यौगिक NH3 के साथ अभिक्रिया करके इमीन बनाते हैं।
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(ix) 2,4-DNP व्युत्पन्न – ऐल्डिहाइड तथा कीटोन 2,4-डाई नाइट्रो फेनिल हाइड्रेजीन (2,4-DNP) से क्रिया करके 2,4-डाईनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजोन बनाते हैं, इन्हें 2,4-DNP व्युत्पन्न कहते हैं।
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(x) शिफ – क्षारक – कार्बोनिल यौगिकों की प्राथमिक ऐमीन से क्रिया द्वारा बने उत्पाद प्रतिस्थापित इमीन होते हैं, इन्हें शिफ क्षारक कहते हैं।
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प्रश्न 12.2.
निम्नलिखित यौगिकों के आईयूपीएसी (IUPAC ) नामपद्धति में नाम लिखिए-
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उत्तर:
इन यौगिकों के IUPAC नाम निम्नलिखित हैं-
(i) 4- मेथिलपेन्टेनैल
(ii) 6- क्लोरो-4 एथिलहेक्सेन 3 ओन
(iii) ब्यूट-2 ईन -1- ऐल
(iv) पेन्टेन-2, 4-डाइओन
(v) 3,3,5 ट्राइमेथिलहेक्सेन-2-ओन
(vi) 3, 3 – डाइमेथिलब्यूटेनॉइक अम्ल
(vii) बेन्जीन-1, 4-डाइकार्बेल्डिहाइड

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 12.3.
निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए-
(i) 3- मेथिल ब्यूटेनैल
(ii) p- नाइट्रोप्रोपिओफीनोन
(iii) p-मेथिलबेन्जेल्डिहाइड
(iv) 4- मेथिलपेन्ट- 3 – ईन- 2- ओन
(v) 4-क्लोरोपेन्टेन- 2- ऑन
(vi) 3- ब्रोमो-4- फेनिल पेन्टेनॉइक अम्ल
(vii) P,p’-डाइहाइड्रॉक्सीबेन्ज़ोफीनोन
(viii) हेक्स-2 ईन- 4 आइनोइक अम्ल।
उत्तर:
इन यौगिकों की संरचना निम्न प्रकार है-
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प्रश्न 12.4.
निम्नलिखित ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनों के आईयूपीएसी (IUPAC ) नाम लिखिए और जहाँ संभव हो सके साधारण नाम भी दीजिए-
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(vi) PhCOPh
उत्तर:
इन यौगिकों के IUPAC नाम निम्न प्रकार हैं-
(i) हेप्टेन -2- ओन
(ii) 4- ब्रोमो-2- मेथिलहेक्सेनैल
(iii) हेप्टेनैल
(iv) 3- फ़ेनिलप्रोपीनैल
(v) साइक्लोपेन्टेनकार्बेल्डिहाइड
(vi) डाइफ़ेनिलमेथेनोन
इनके सामान्य (साधारण) नाम निम्न प्रकार होंगे-
(i) मेथिल पेन्टिल कीटोन
(ii) नहीं है
(iii) नहीं है
(iv) सिन्नेमैल्डिहाइड
(v) नहीं है
(vi) बेन्जोफीनॉन

प्रश्न 12.5.
निम्नलिखित व्युत्पन्नों की संरचना बनाइए-
(i) बेन्जेल्डिहाइड का 2, 4- डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रेजोन
(ii) साइक्लोप्रोपेनोन ऑक्सिम
(iii) ऐसीटैल्डिहाइडडाइमेथिलऐसीटैल
(iv) साइक्लोब्यूटेनोन का सेमीकार्बेजोन
(v) हेक्सेन – 3 – ओन का एथिलीन कीटेल
(vi) फॉर्मेल्डिहाइड का मेथिल हेमीऐसीटेल।
उत्तर:
इन व्युत्पन्नों (Derivatives) की संरचना निम्न प्रकार होगी-
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प्रश्न 12.6.
साइक्लोहेक्सेनकार्बेल्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए-
(i) PhMgBr एवं तत्पश्चात् H3O+
(ii) टॉलेन अभिकर्मक
(iii) सेमीकार्बेजाइड एवं दुर्बल अम्ल
(iv) एथेनॉल का आधिक्य तथा अम्ल
(v) जिंक अमलगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल।
उत्तर:
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प्रश्न 12.7.
निम्नलिखित में से कौनसे यौगिकों में ऐल्डोल संघनन होगा, किनमें कैनिज़ारो अभिक्रिया होगी और किनमें उपरोक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डोल संघनन तथा कैनिज़ारो अभिक्रिया में संभावित उत्पादों की संरचना लिखिए।
(i) मेथेनैल
(ii) 2- मेथिलपेन्टेनैल
(iii) बेन्ज़ैल्डिहाइड
(iv) बेन्ज़ोफ़ीनॉन
(v) साइक्लोहेक्सेनोन
(vi) 1 – फेनिलप्रोपेनोन
(vii) फेनिलऐसीटैल्डिहाइड
(viii) ब्यूटेन – 1- ऑल
(ix) 2,2 – डाइमेथिलब्यूटेनैल।
उत्तर:
उपर्युक्त में से निम्नलिखित यौगिक ऐल्डोल संघनन देते हैं- (ii), (v), (vi), (vii); निम्नलिखित यौगिक कैनिज़ारो अभिक्रिया दर्शाते हैं- (i), (iii), (ix) तथा निम्नलिखित यौगिक दोनों ही अभिक्रिया नहीं दर्शाते- (iv), (viii).
संभावित उत्पादों की संरचना निम्न प्रकार होगी-
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प्रश्न 12.8.
ऐथेनैल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे?
(i) ब्यूटेन-1, 3-डाई ऑल
(ii) ब्यूट-2-ईनैल
(iii) ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल।
उत्तर:
(i) एथेनैल से ब्यूटेन-1, 3-डाईऑल-
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(ii) एथेनैल से ब्यूट-2-ईनैल
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(iii) एथेनैल से ब्यूट-2-इनॉइक अम्ल-
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प्रश्न 12.9.
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के एल्डोल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए | प्रत्येक में बताइए कि कौन-सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौन – सा इलेक्ट्रॉनरागी होगा ?
उत्तर:
प्रोपेनैल एवं ब्यूटेनैल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार उत्पाद निम्नलिखित हैं-
(i) प्रोपेनैल से बना उत्पाद-
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(ii) ब्यूटेनैल से बना उत्पाद-
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(iii) प्रोपेनैल नाभिकरागी तथा ब्यूटेनैल इलेक्ट्रॉनरागी होने पर बना उत्पाद-
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(iv) ब्यूटेनैल नाभिकरागी तथा प्रोपेनैल इलेक्ट्रॉनरागी होने पर बना उत्पाद –
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प्रश्न 12.10.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C9H10O है 2,4 DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचित करता है तथा कैनिज़ारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1, 2 – बेन्ज़ीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।
उत्तर:
यह कार्बनिक यौगिक 2,4-DNP व्युत्पन्न बनाता है। अतः यह कार्बोनिल यौगिक ( ऐल्डिहाइड या कीटोन) होगा लेकिन यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचित ( reduced ) कर रहा है। अतः यह ऐल्डिहाइड है तथा यह कैनिज़ारो अभिक्रिया दे रहा है। अतः इसमें a-H अनुपस्थित है। इसके आक्सीकरण से 1, 2 – बेन्जीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 24
ऑक्सीकरण के बाद बने उत्पाद से यह सिद्ध होता है कि इसमें एक बेन्जीन वलय है, एक – COOH समूह -CHO समूह के ऑक्सीकरण से तथा दूसरा – COOH समूह ऐल्किल समूह के ऑक्सीकरण से प्राप्त होगा। अतः अणुसूत्र के अनुसार इसका संरचना सूत्र निम्न प्रकार होगा-
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प्रश्न 12.11.
एक कार्बनिक यौगिक ‘क’ (आण्विक सूत्र, C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जल अपघ करने के उपरांत एक कार्बोक्सिलिक अम्ल ‘ख’ एवं एक ऐल्कोहॉल ‘ग’ प्राप्त हुई। ‘ग’ को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर ‘ख’ उत्पन्न होता है। ‘ग’ निर्जलीकरण पर ब्यूट- 1 – ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 26
(ग) के निर्जलीकरण से ब्यूट- 1 -ईन बनता है। इसमें चार कार्बन परमाणु हैं अतः अन्य उत्पाद (ख) में भी चार कार्बन होंगे तथा इसमें अन्तस्थ – COOH होगा। अतः यौगिक- क, ख तथा ग निम्नलिखित है-
(क) CH3 – CH2 – CH2 – COO CH2 – CH2-CH2-CH3 ब्यूटिल ब्यूटेनॉएट (एस्टर)
(ख) CH3-CH2-CH2 – COOH (ब्यूटेनॉइक अम्ल)
(ग) CH3-CH2-CH2 – CH2 – OH ( ब्यूटेन – 1-ऑल )

तथा अभिक्रियाओं के समीकरण निम्न प्रकार होंगे-
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प्रश्न 12.12.
निम्नलिखित यौगिकों को उनसे सम्बन्धित (कोष्ठकों में दिए गये) गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए- (i) ऐसीटैल्डिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तृतीयक ब्यूटिलकीटोन, मेथिलतृतीयक ब्यूटिलकीटोन (HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता) ।
(ii) CH3CH2CH(Br) COOH, CH3CH(Br)CH2COOH (CH3)2CHCOOH, CH3CH2CH2 COOH (अम्लता के क्रम में ) ।
(iii) बेन्जोइक अम्ल; 4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल; 3,4- डाईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल 4- मेथॉक्सी बेन्जोइक अम्ल (अम्लता की सामर्थ्य के क्रम में) ।
उत्तर:
(i) ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की नाभिकरागी संकलन के लिए क्रियाशीलता + I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा पर निर्भर करती है। अतः इनकी HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होगा-
डाइ तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < मेथिल तृतीयक ब्यूटिल कोटोन < ऐसीटोन < ऐसिटैल्डिहाइड

(ii) कार्बोक्सिलिक अम्लों का अम्लीय गुण, प्रेरणिक प्रभाव (+I तथा-I) तथा विभिन्न समूहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अतः इनके अम्लीय गुण का क्रम निम्न प्रकार होगा-
(CH3), CHCOOH < CH3CH2CH2COOH < CH3 CH(Br)CH2COOH – CH3CH2CH( Br)COOH

(iii) 4- मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल बेन्जोइक अम्ल <4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल < 3, 4 डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(अम्लता की सामर्थ्य का बढ़ता क्रम )
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प्रश्न 12.13.
निम्नलिखित यौगिक युगलों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षणों को दीजिए-
(i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन
(ii) ऐसीटोफ़ीनॉन एवं बेन्जोफ़ीनॉन
(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल
(iv) बेन्जोइक अम्ल एवं एथिलबेन्जोएट
(v) पेन्टेन 2 ऑन एवं पेन्टेन 3-ऑन
(vi) बेन्जेल्डिहाइड एवं एसीटोफ़ीनॉन
(vii) एथेनैल एवं प्रोपेनैल।
उत्तर:
(i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन में विभेद – प्रोपेनैल (CH3CH2CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि (CH3COCH3) एक मेथिल कीटोन है। इनमें निम्न परीक्षणों द्वारा विभेद किया सकता है-
(1) आयोडोफॉर्म परीक्षण जलीय NaOH तथा I के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल में कोई क्रिया नहीं होती जबकि प्रोपेनोन द्वारा आयोडोफॉर्म बनने के कारण पीला अवक्षेप आता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29

(2) टॉलेन अभिकर्मक (अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट) के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल रजत दर्पण देता है (रजत दर्पण परीक्षण) जबकि प्रोपेनोन में कोई क्रिया नहीं होती।

(3) फेलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल से लाल अवक्षेप बनता है जबकि प्रोपेनोन से कोई अभिक्रिया नहीं होती।

(ii) ऐसीटोफ़ीनॉन एवं बेन्जोफ़ीनॉन में विभेद – ऐसीटोफ़ीनॉन (CH3COC6H5) एक सेथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्ज़ोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 30 यह परीक्षण नहीं देता।

(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल में विभेद-
(1) फ़ीनॉल NaHCO3 विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं करता जबकि बेन्जोइक अम्ल NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके CO2 गैस देता है।
C6H5COOH + NaHCO3 → C6H5COONa + CO2↑+ H2O

(2) उदासीन FeCl3 विलयन के साथ फ़ीनॉल बैंगनी (Violet) रंग देता है जबकि बेन्जोइक अम्ल के साथ इसकी कोई क्रिया नहीं होती।

(iv) बेन्जोइक अम्ल एवं एथिलबेन्जोएट में विभेद-
(1) बेन्जोइक अम्ल (C6H5COOH) अम्लीय है। अतः यह नीले लिटमस को लाल करता है जबकि एथिल बेन्जोएट (C6H5COOC2H5) ‘एस्टर है अतः यह नीले लिटमस से कोई क्रिया नहीं करता।

(2) बेन्जोइक अम्ल NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके CO2 गैस की बुदबुदाहट देता है जबकि एथिल बेन्जोएट की NaHCO विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं होती।

(v) पेन्टेन 2 ऑन एवं पेन्टेन 3-ऑन में विभेद – पेन्टेन- 2-ऑन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 31 एक मैथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि पेन्टेन 3 ऑन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 32में यह परीक्षण नहीं होता।

(vi) बेन्जेल्डिहाइड एवं ऐसीटोफ़ीनॉन में विभेद-
(1) बेन्जेल्डिहाइड (C6H5CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 33एक मैथिल कीटोन है अतः ऐसीटोफ़ीनॉन, आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्जेल्डिहाइड यह परीक्षण नहीं देता है।

(2) बेन्जेल्डिहाइड टॉलेन अभिकर्मक ऑक्सीकृत हो जाता है, जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन इससे क्रिया नहीं करता।

(vii) ऐथेनैल एवं प्रोपेनैल में विभेद – एथेनैल आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि प्रोपेनैल (CH3CH2 – CHO) यह परीक्षण नहीं देता।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 34

प्रश्न 12.14.
बेन्जीन से निम्नलिखित यौगिकों का विरचन आप किस प्रकार करेंगे? आप कोई भी अकार्बनिक अभिकर्मक एवं कोई भी कार्बनिक अभिकर्मक, जिसमें एक से अधिक कार्बन न हो, का उपयोग कर सकते हैं।
(i) मेथिल बेन्जोएट
(ii) m- नाइट्रोबेन्ज़ोइक अम्ल
(iii) p- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iv) फ़ेनिल ऐसीटिक अम्ल
(v) p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड।
उत्तर:
(i) बेन्जीन से मेथिल बेन्ज़ोएट-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35
(ii) बेन्जीन से m-नाइट्रोबेन्ज़ोइक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35a
(iii) बेन्जीन से p-नाइट्रोबेन्ज़ोइक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35b
(iv) बेन्जीन से फ़ेनिल ऐसीटिक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35c
(v) बेन्जीन से p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35d

प्रश्न 12.15.
आप निम्नलिखित रूपांतरणों को अधिकतम दो चरणों में किस प्रकार से सम्पन्न करेंगे ?
(i) प्रोपेनोन से प्रोपीन
(ii) बेन्जोइक अम्ल से बेन्ज़ैल्डिहाइड
(iii) ऐथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
(iv) बेन्ज़ीन से m – नाइट्रोऐसीटोफ़ीनॉन
(v) बेन्ज़ैल्डिहाइड से बेन्ज़ोफ़ीनॉन
(vi) ब्रोमोबेन्जीन से 1 – फेनिलएथेनॉल
(vii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से 3- फेनिलप्रोपेन- 1 – ऑल
(viii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से – हाइड्रॉक्सीफ़ेनिलऐसीटिक अम्ल
(ix) बेन्जोइक अम्ल से m- नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।
उत्तर:
(i) प्रोपेनोन से प्रोपीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 36

(ii) बेन्जोइक अम्ल से बेन्ज़ैल्डिहाइड
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(iii) ऐथेनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
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(iv) बेन्ज़ीन से m – नाइट्रोऐसीटोफ़ीनॉन
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(v) बेन्ज़ैल्डिहाइड से बेन्ज़ोफ़ीनॉन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 40

(vi) ब्रोमोबेन्जीन से 1 – फेनिलएथेनॉल
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(vii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से 3- फेनिलप्रोपेन- 1 – ऑल
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(viii) बेन्ज़ैल्डिहाइड से – हाइड्रॉक्सीफ़ेनिलऐसीटिक अम्ल
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(ix) बेन्जोइक अम्ल से m- नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल।
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प्रश्न 12.16.
निम्नलिखित पदों (शब्दों) का वर्णन करो-
(i) ऐसीटिलन ( ऐसीटिलीकरण)
(ii) कैनिज़ारो अभिक्रिया
(iii) क्रॉस ऐल्डोल संघनन
(iv) विकार्बोक्सिलन (विकार्बोक्सिलीकरण) ।
उत्तर:
(i) ऐसीटिलन या ऐसीटिलीकरण – निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड (AlCl3) की उपस्थिति में बेन्जीन अथवा प्रतिस्थापित बेन्जीन, अम्ल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया कर संगत कीटोन देते हैं। इसे फ्रीडेल- क्राफ्ट्स ऐसीटिलन अभिक्रिया कहते हैं ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 45a
लेकिन सक्रिय H युक्त यौगिक जैसे ऐल्कोहॉल (ROH) फ़ीनॉल (C6H5OH) तथा ऐमीन्स (R – NH2) की क्रिया बिना उत्प्रेरक के CH3COCl से कराने पर H+ के स्थान परHBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 45 आ जाता है। इसे ऐसीटिलन अभिक्रिया कहते हैं।

(ii) कैनिज़ारो अभिक्रिया – वे ऐल्डिहाइड, जिनमें – हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते, सांद्र क्षार (NaOH या KOH) की उपस्थिति में स्वऑक्सीकरण तथा अपचयन (असमानुपातन) दर्शाते हैं। इस अभिक्रिया में ऐल्डिहाइड का एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है जबकि दूसरा अणु कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 46

(iii) क्रॉस ऐल्डोल संघनन – जब दो भिन्न ऐल्डिहाइड या कीटोन के मध्य ऐल्डोल संघनन होता है तो उसे क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं। यदि दोनों यौगिकों में α-हाइड्रोजन हो तो चार उत्पादों का मिश्रण प्राप्त होता है। जैसे एथेनैल व प्रोपेनैल के मिश्रण की ऐल्डोल संघनन अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 47
क्रॉस ऐल्डोल संघनन में कीटोन भी प्रयुक्त हो सकते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 48

(iv) विकार्बोक्सिलन – कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम लवणों को सोडालाइम (NaOH तथा CaO, ( 3:1) का मिश्रण ) के साथ गरम करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है एवं हाइड्रोकार्बन प्राप्त होते हैं। यह अभिक्रिया विकार्बोक्सिलन या विकार्बोक्सिलीकरण कहलाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 49

प्रश्न 12.17.
निम्नलिखित प्रत्येक संश्लेषण में छूटे हुए प्रारम्भिक पदार्थ, अभिकर्मक अथवा उत्पादों को लिखकर पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 50
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 51

प्रश्न 12.18.
निम्नलिखित के सम्भावित कारण दीजिए-
(i) साइक्लोहेक्सेनोन अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बनाता है। परन्तु 2, 2, 6- ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन ऐसा नहीं करता ।
(ii) सेमीकार्बेज़ाइड में दो – NH2 समूह होते हैं, परन्तु केवल एक – NH2 समूह ही सेमीकार्बेजोन विरचन में प्रयुक्त होता है।
(iii) कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल से, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एस्टर के विरचन के समय जल अथवा एस्टर जैसे ही निर्मित होता है उसको निकाल दिया जाना चाहिए।
उत्तर:
(i) साइक्लोहेक्सेनोन का कार्बोनिल समूह ध्रुवीय होता है। अतः इस पर HCN का नाभिकस्नेही संकलन आसानी से होकर अच्छी लब्धि में सायनोहाइड्रिन बन जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 52
लेकिन 2,2,6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोन में उपस्थित तीन मेथिल समूहों के +I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) के कारण कार्बोनिल समूह की ध्रुवता कम हो जाती है तथा इन तीन मेथिल समूहों की त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण नाभिकस्नेही (CN) का आक्रमण मुश्किल होता है। अतः इस पर HCN के योग से प्राप्त सायनोहाइड्रिन की लब्धि बहुत कम होती
है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

(ii) सेमीकार्बोजाइड में उपस्थित दो – NH2 समूह में से केवल एक -NH2 समूह ही सेमीकार्बेजोन बनाने में प्रयुक्त होता है, क्योंकि >C = 0 समूह के पास वाले -NH2 समूह के – N-H बन्ध अनुनाद के कारण प्रबल होते हैं जबकि -NH- के पास वाले – NH2 समूह के -N-H बन्ध दुर्बल होते हैं क्योंकि इनमें अनुनाद नहीं होता अतः ये अभिक्रिया में भाग लेते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 53
कार्बोक्सिलिक अम्ल की ऐल्कोहॉल से क्रिया द्वारा एस्टर बनने की अभिक्रिया उत्क्रमणीय होती है अतः एस्टर बनते ही वह वापस जल से क्रिया करके अम्ल तथा ऐल्कोहॉल बना देता है। अतः अभिकारकों एवं उत्पादों के मध्य साम्य स्थापित हो जाता है इसलिए जल या एस्टर को बनते ही अभिक्रिया मिश्रण से निकाल देने पर साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाता है जिससे एस्टर अधिक मात्रा में बनता है।

प्रश्न 12.19.
एक कार्बनिक यौगिक में 69.77% कार्बन, 11.63% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। यौगिक का आण्विक द्रव्यमान 86 है। यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता परन्तु सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ योगज यौगिक देता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर एथेनॉइक तथा प्रोपेनॉइक अम्ल देता है। यौगिक की संभावित संरचना लिखिए।
उत्तर:
यौगिक में उपस्थित कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन की % मात्रा के आधार पर यौगिक का अणुसूत्र निम्न प्रकार ज्ञात किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 54
अतः यौगिक का अणुसूत्र C5H10O होगा क्योंकि इसका अणुभार 86 है।

प्रश्नानुसार यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता। अतः यह ऐल्डिहाइड नहीं है, लेकिन सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट (NaHSO3) के साथ योगज यौगिक बनाता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह मेथिल कीटोन है इसलिए इसका संरचना सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 55होगा ।

रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होंगी-
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आयोडोफॉर्म परीक्षण-
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ऑक्सीकरण-
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प्रश्न 12.20
यद्यपि फ़ीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक हैं परन्तु कार्बोक्सिलिक अम्ल फ़ीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है। क्यों?
उत्तर:
फ़ीनॉक्साइड आयन में ऋणात्मक आवेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु तथा कम विद्युतऋणी कार्बन पर वितरित होता है, जबकि कार्बोक्सिलेट आयन में ऋणात्मक आवेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित होता है, अतः इसमें ऋणात्मक आवेश का विस्थानीकरण, फ़ीनॉक्साइड आयन में अधिक होता है इसलिए इसका अनुनाद स्थायीकरण अधिक होता है। इसलिए कार्बोक्सिलिक अम्ल, फ़ीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है।

HBSE 12th Class Chemistry ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Intext Questions

प्रश्न 12.1.
निम्न यौगिकों की संरचना लिखिए-
(i) α-मेथॉक्सीप्रोप्रिऑनऐल्डिहाइड
(ii) 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
(iii) 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन कार्बैल्डिहाइड
(iv) 4-ऑक्सोपेन्टेनैल
(v) डाइ-द्वितीयकब्यूटिल कीटोन
(vi) 4-क्लोरोऐसीटोफीनॉन
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 1

प्रश्न 12.2.
निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 2
उत्तर:
उपरोक्त अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना अग्र प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 3

प्रश्न 12.3.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
CH<3CHO, CH3CH2OH, CH3OCH3, CH3CH2CH3
उत्तर:
CH<3-CH<2-CH<3 < CH<3-O-CH<3 < CH<3-CHO < CH<3-CH<2-OH
क्वथनांकों का बढ़ता क्रम

प्रश्न 12.4.
निम्नलिखित योगिका को नाभकरागा योगात्मक (Addition) अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(क) एथेनैल, प्रोपेनैल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
(ख) बेन्जैल्डिहाइ ड, p-टॉॅलू ऐल्डिहाइड, p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड, ऐसीटोफीनोन।
संकेत-त्रिविम प्रभाव व इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव को ध्यान में रखें।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों की नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रियाओं में बढ़ती हुई क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार है-
(क) ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपेनैल < एथेनैल
(ख) ऐसीटोफ़ीनोन <p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्जैल्डिहाइड

प्रश्न 12.5.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 4

प्रश्न 12.6.
निम्नलिखित यौगिकों के आईयूपीएसी नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 5
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों के आईयूपीएसी नाम निम्न प्रकार हैं-
(i) 3-फेनिलप्रोपेनॉइक अम्ल
(ii) 3-मेथिलब्यूट-2-इनोइक अम्ल
(iii) 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल
(iv) 2,4,6-ट्राईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल

प्रश्न 12.7.
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है?
(i) एथिलबेन्जीन
(ii) ऐसीटोफीनोन
(iii) ब्रोमोबेन्जीन
(iv) फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में निम्न प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 6

प्रश्न 12.8.
नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौनस अम्ल अधिक प्रबल है?
(i) CH3CO2H अथवा CH2FCO2H
(ii) CH2FCO2H अथवा CH2CICO2H
(iii) CH2FCH2CH2CO2H
अथवा CH3CHFCH2CO2H
(iv) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 7
उत्तर:
उपर्युक्त युग्मों में से अधिक प्रबल अम्ल निम्नलिखित हैं-
(i) CH2FCOOH
(ii) CH2FCOOH
(iii) CH3CHFCH2COOH
(iv) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 8

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 18 Wastewater Story

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 18 Wastewater Story Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 18 Wastewater Story

HBSE 7th Class Science Wastewater Story Textbook Questions and Answers

Question 1.
Fill in the blanks :
(a) Cleaning of water is a process of removing _________.
(b) Wastewater released by houses is called _________.
(c) Dried _________ is used as manure.
(d) Drains get blocked by _________ and _________.
Answer:
(a) pollutants
(b) sewage
(c) sludge
(d) chemicals, kitchenwaste.

Question 2.
What is sewage? Explain why it is harmful to discharge untreated sewage into rivers or seas.
Answer:
Sewage is a liquid containing wastes disposed off by household, industrial and agricultural, activities in water. It is dangerous to release untreated sewage in water because it can pollute the whole source of water. Sewage contain harmful substances and disease causing organisms. It is therefore, dangerous and unsafe to release untreated sewage in water.

Question 3.
Why should oils and fats be not realeased in the drain? Explain.
Answer:
Oils and fats should not be released in, the drains because they harden the soil in the pipes and block them. Fats get clogged in the holes of the soil in the drain and block it. It does not allow the wastewater to flow and thus the whole sewer system is blocked.

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Question 4.
Describe the steps involved in getting clarified water from wastewater.
Answer:
Water is treated physically, chemically and biologically in wastewater treatment plant.
Following Steps are involved in the purification of water:
(i) At first stage all the physical impurities like stones, rags, napkins, plastic bags, cans, packets etc. are removed. It is done by passing the water through bar screens.

(ii) Then water is taken to grit and sand removal tank where impurities are removed by sedimentation.

(iii) Solids impurities and faeces etc. are collected from the bottom of the water. These solid impurities collected are called sludge. Water is cleared of floatable solids like oil and grease.

(iv) Clarified water is cleared of other impurities by aerator. All disease causing bacteria are removed by chlorination and water is released in various water bodies.

Question 5.
What is sludge? Explain how it is treated.
Answer:
Sludge is the collected solid waste from the wastewater during the treatment in water treatment plant. Sludge is decomposed in a separate tank by the anaerobic bacteria. Activated sludge is used as manure.

Question 6.
Untreated human excreta is a health hazard. Explain.
Answer:
Untreated excreta can cause a lot of health related problems. It pollutes soil, water and air. The polluted water contain disease causing bacteria, which can spread epidemics like cholera, meningities etc.

Question 7.
Name two chemicals used to disinfect water.
Answer:
Chlorine and ozone are the chemical used to clean the wastewater.

Question 8.
Explain the function of bar screens in a wastewater treatment plant.
Answer:
Bar screens clear the wastewater of all the physical impurities. Large waste objects like napkins, plastics, can sticks, rags etc. are, removed from the wastewater through the bar screens.

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Question 9.
Explain the relationship between sanitation and disease.
Answer:
Sanitation and disease are related each other. It sanitation is there no disease will occur, but if the sanitation is not there various types of diseases will occur and spread. So sanitation should be kept to avoid diseases.

Question 10.
Outline your role as an active citizen in relation to sanitation.
Answer:
As active citizen we should take care of our personal and environmental sanitation. We should make people around us, aware of the benefits of sanitation we should help the municipal corporations and gram panchayats to cover all the open drains and remove the unhygenic and disease causing substances thrown in’open.

Question 11
Here is a crossword puzzle : “Good luck !
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Across:
3. Liquid waste products
4. Solid waste extracted in sewage treatment
6. A word related to hygiene
8. Waste matter discharged from human body

Down:
1. Used water
2. A pipe carrying sewage
5. Micro-organisms which causes cholera
7. A chemical to disinfect water
Answer:
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Question 12.
Study the following statements about ozone:
(a) It is essential for breathing of living organisms.
(b) It is used to disinfect water.
(c) It absorbs ultraviolet rays.
(d) Its- proportion in air is about 3%.
Which of these statements are correct?
(i) (a), (b) and (c)
(ii) (b) and (c)
(iii) (a) and (d)
(iv) All four
Answer:
(b) and (c)

Extended Learning – Activities and projects

Question 1.
Construct a crossword puzzle of your own using the keywords.
Answer:
Do it yourself.

Question 2.
Then and now; Talk to your grand parents and other elderly people in the neighbourhood. Find out the sewage disposal systems available to them. You can also write letters to people living in far off places to get more information. Prepare a brief-report, on the information you collected.
Answer:
Do it yourself.

Question 3.
Visit a sewage treatment,plant.
It-could be as exciting and enriching as a visit to a zoo, a museum, or a park. To guide your observation here are a few suggestions.
Record in your notepad :
Place _________ Date _________ Time Name of the official at the plant _________ Guide/Teacher _________.
(a) The location of the sewage plant.
(b) Treatment capacity.
(c) The purpose of screening as the initial process.
(d) How is air bubbled through the aeration tank?
(e) How safe is the water at the end of the treatment? How is it tested?
(f) Where is the water discharged after treatment?
(g) What happens to the plant during heavy rains?
(h) Is biogas consumed within the plant or sold to other consumers?
(i) What happens to the treatment sludge?
(j) Is there any special effort to protect nearby houses from the plant?
(k) Other observations.
Answer:
Do it yourself.

HBSE 7th Class Science Wastewater Story Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Write different sources of wastewater?
Answer:
Household activities, industrial activities and agricultural activities.

Question 2.
Name certain organic impurities in the wastewater.
Answer:
Animal waste, Human faeces, oil and urine, fruits and vegetables.

Question 3.
Write certain Inorganic impurities in, the wastewater.
Answer:
Metals, phosphates and nitrates.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 18 Wastewater Story

Question 4.
Name certain disease causing micro-organism.
Answer:
Bacterias, Viruses etc.

Question 5.
Which process removes the solids like faeces and other substances from the wastewater?
Answer:
Grit and sand removal tank.

Question 6.
Which instrument is used to remove floatable solids from the wastewater?
Answer:
A skimmer is used to remove floatable impurities.

Question 7.
Who decomposes the sludge?
Answer:
Anaerobic bacteria decompose the sludge.

Question 8.
What helps to clean the clarified water?
Answer:
Aerobic bacteria helps to clean the clarified water.

Question 9.
Why is ozone and chlorine used?
Answer:
Ozone and Chlorine is used to kill the bacteria etc. present in the clarified water.

Short Answer Type Questions

Question 1.
How is water’polluted?
Answer:
Water is used for various’purposes in homes, industries and agriculture. When water is used for cleaning, bathing, washing, dying etc. it pollutes the water. Unwanted waste materials and chemicals etc. get added in the water and this wastes the water.

Question 2.
How “bar screen” and ‘grit and sand removal tank’ help in clarification of water?
Answer:
When wastewater is passed through bar screens it separates big and large objects like plastics, bags, sticks, can, napkins etc. In grit and sand removal tank other solid impurities like pebbless and etc. are removed.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 18 Wastewater Story

Question 3.
How is sludge treated?
Answer:
Sludge is the solid impurities separated from the sewage. It is removed and treated in a separate tank with anaerobic bacteria. During this process biogas is produced which is used to produce electricity. Dried sludge is used as manure.

Question 4.
What are the problem arising due to open drains and other unsanitary conditions?
Answer:
Open drains and unsanitary conditions produce bad smell. It becomes an idle place of breeding for mosquitoes, files and other harmful insects. These insects spread many harmful diseases and other health hazards.

Question 5.
How the kitchen waste blocks the drains?
Answer:
Kitchen waste like oils and fats clogs the pores in soil and reduce the Alteration process. It also blocks the pipes by hardening the pipes. Wastes like tealeaves solid food remains, cotton etc. also choke the pipes and slows down flow of oxygen. This slows down the decomposition process by the aerobic bacteria.

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Long Answer Type Questions

Question 1.
How defection in open cause health hazards?
Answer:
Due to lack of proper sewage disposal system a large amount of people in India defecates in open. They use riverbeds, railway lines, fields and drains for this purpose. These excreta dries down and percolate, in soil with rain water. It pollutes the ground water. Excreate along river bed pollutes the river water. In this way water on the ground and under the ground get polluted. This polluted water contains the micro-organisms of various communicable diseases like cholera, typhoid, hepatilis and meningiti it is dysentry etc.

Wastewater Story Class 7 HBSE Notes

  • Water is a precious natural resource.
  • We cannot imagine our lives without water.
  • We waste a lot of water daily in various household and industrial activities Such water is called wastewater.
  • The wastewater produced during household acitivities, industrial activities and various agricultural processes is also called sewage.
  • Sewage is the liquid waste which can cause various’diseases and environmental hazards if not managed.
  • Sewage is collected from its sources and treated to destroy its harmful constituent to clean it.
  • It is made usable in treatment plants and disposed off in various sources of water.
  • Drainage system should be covered to avoid communicable diseases.
  • We should not throw waste in open and should not defecate in open.
  • Low cost disposal methods can be adopted in the areas where proper sewer system is not available.

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