Author name: Bhagya

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions

(पाठगत प्रश्न – पृष्ठ 210-211)

प्रश्न 1.
मोहन स्वयं अपने और अपनी बहन के लिए चाय बनाता है। वह 300 mL पानी, 2 चम्मच चीनी, 1 चम्मच चाय-पत्ती और 50 mL दूध का उपयोग करता है। यदि वह पाँच व्यक्तियों के लिए चाय बनाए, तो उसे प्रत्येक वस्तु की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
हल:
दो व्यक्तियों के लिए आवश्यक पानी की मात्रा = 300 mL
∴ पाँच व्यक्तियों के लिए आवश्यक पानी की मात्रा = \(\frac{300}{2}\) × 5mL
∴ पानी की मात्रा = 750 mL

दो व्यक्तियों के लिए आवश्यक चीनी की मात्रा = 2 चम्मच

∴ पाँच व्यक्तियों के लिए आवश्यक चीनी की मात्रा = \(\frac{2}{2}\) × 5
∴ चीनी की मात्रा = 5 चम्मच

दो व्यक्तियों के लिए आवश्यक चाय-पत्ती की मात्रा = 1 चम्मच

∴ पाँच व्यक्तियों के लिए आवश्यक चाय-पत्ती की मात्रा y
= \(\frac{1}{2}\) × 5

∴ चाय पत्ती की मात्रा = \(2 \frac{1}{2}\) चम्मच
दो व्यक्तियों के लिए आवश्यक दूध की मात्रा = 50 mL
∴ पाँच व्यक्तियों के लिए आवश्यक दूध की मात्रा
= \(\frac{50}{2}\) × 5mL
∴ = 125 mL
अतः, पाँच व्यक्तियों के लिए चाय बनाने के लिए मोहन को 750 mL पानी, 5 चम्मच चीनी, \(2 \frac{1}{2}\) चम्मच चाय-पत्ती और 125 mL दूध की आवश्यकता होगी।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 212)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणियों को देखिए तथा ज्ञात कीजिए कि क्या x और y अनुक्रमानुपाती हैं?
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हल:
(i) प्रश्नानुसार
\(\frac{20}{40}\) = \(\frac{17}{34}\) = \(\frac{14}{28}\) = \(\frac{11}{22}\) = \(\frac{8}{16}\) = \(\frac{5}{10}\) = \(\frac{2}{4}\) = \(\frac{1}{2}\), इस प्रकार, x और y की अनुरूप कीमत का औसत स्थिर है और \(\frac{1}{2}\) के बराबर है। अतः x और y स्थिर विचरण \(\frac{1}{2}\) के साथ अनुक्रमानुपाती हैं।

(ii) प्रश्नानुसार,
\(\frac{6}{4}\) ≠ \(\frac{10}{8}\) ≠ \(\frac{14}{12}\) ≠ \(\frac{18}{16}\) ≠ \(\frac{22}{20}\) ≠ \(\frac{26}{24}\) ≠ \(\frac{30}{28}\), इस प्रकार, x और y के अनुरूप कीमतों का औसत स्थिर नहीं है। अतः, x और y अनुक्रमानुपाती नहीं हैं

(iii) प्रश्नानुसार,
\(\frac{5}{15}\) = \(\frac{8}{24}\) = \(\frac{12}{36}\) ≠ \(\frac{15}{60}\) = \(\frac{18}{72}\) ≠ \(\frac{20}{100}\) इत्यादि इस प्रकार, x और y की अनुरूप कीमतें स्थिर नहीं हैं । अतः Jx और y अनुक्रमानुपाती नहीं हैं।

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प्रश्न 2.
मूलधन = ₹ 1000, ब्याज दर = 8% वार्षिक। निम्नलिखित सारणी को भरिए तथा ज्ञात कीजिए कि, किस प्रकार का ब्याज (साधारण या चक्रवृद्धि) समय अवधि के साथ प्रत्यक्ष अनुपात में बदलता या परिवर्तित होता है।

समय अवधि1 वर्ष2 वर्ष3 वर्ष
साधारण ब्याज (₹ में)
चक्रवृद्धि ब्याज (₹ मे)

हल:
दिया है-P = ₹ 1000, R = 8% वार्षिक
साधारण ब्याज के लिए
1 वर्ष का साधारण ब्याज = ₹ (\(\frac{1000×8×1}{100}\))
= ₹ 80

2 वर्ष का साधारण ब्याज = ₹ (\(\frac{1000×8×2}{100}\))
= ₹ 160

3 वर्ष का साधारण ब्याज = ₹ (\(\frac{1000×8×3}{100}\))
= ₹ 240

चक्रवृद्धि ब्याज के लिए
1 वर्ष के लिए राशि = ₹ 1000\(\left(1+\frac{8}{100}\right)^{1}\)
= ₹ 1000 × \(\frac{108}{100}\)
= ₹ 1080

∴ 1 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज = ₹ (1080 – 1000)
= ₹ 80

2 वर्ष के लिए राशि = ₹ 1000\(\left(1+\frac{8}{100}\right)^{2}\)
= ₹ 1000 × \(\frac{108}{100}\) × \(\frac{108}{100}\)
= ₹ 1166.40

∴ 2 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज = ₹ (1166.40 – 1000)
= ₹ 166.40

3 वर्ष के लिए राशि = ₹ 1000\(\left(1+\frac{8}{100}\right)^{3}\)
= ₹ 1000 × \(\frac{108}{100}\) × \(\frac{108}{100}\) × \(\frac{108}{100}\)
= ₹ 1259.712

∴ 3 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज = ₹ (1259.712 – 1000)
= ₹ 259.712

∴ सारणी अग्रांकित होगी

समय अवधि1 वर्ष2 वर्ष3 वर्ष
साधारण ब्याज (₹ में)80160240
चक्रवृद्धि ब्याज (₹ मे)80166.40259.71

साधारण ब्याज समय अवधि के साथ प्रत्यक्ष अनुपात में बदलता है।

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(इन्हें कीजिए – पृष्ठ 216-217)

प्रश्न 1.
एक वर्गांकित कागज़ पर भिन्न-भिन्न भुजाओं के पाँच वर्ग खींचिए। निम्नलिखित सूचना को एकसारणी के रूप में लिखिए:
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ज्ञात कीजिए कि क्या भुजा की लंबाई
(a) वर्ग के परिमाप के अनुक्रमानुपाती है।
(b) वर्ग के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती है।
हल :
• वर्ग-1
माना वर्ग के एक भुजा की लम्बाई (L) = 3 cm
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वर्ग का परिमाप (P) = (3 + 3 + 3 + 3) cm = 12 cm
\(\frac{L}{P}\) = \(\frac{3}{12}\) = \(\frac{1}{4}\)

वर्ग का क्षेत्रफल (A) = 3 cm × 3 cm = 9 cm

वर्ग – 2
माना वर्ग की एक भुजा की लम्बाई (L) = 4 cm
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वर्ग का परिमाप (P) = (4 + 4 + 4 + 4) cm = 16 cm
\(\frac{L}{A}\) = \(\frac{4}{16}\) = \(\frac{1}{4}\)
वर्ग का क्षेत्रफल (A) =4 cm × 4 cm = 16 cm
\(\frac{L}{A}\) = \(\frac{4}{16}\) = \(\frac{1}{4}\)

• वर्ग – 3
माना वर्ग की एक भुजा की लम्बाई (L) = 5 cm
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वर्ग की परिमाप (P) = (5 + 5 + 5 + 5) cm = 20 cm
\(\frac{L}{A}\) = \(\frac{5}{20}\) = \(\frac{1}{5}\)
वर्ग का क्षेत्रफल (A) =5 cm × 5 cm = 20 cm
\(\frac{L}{P}\) = \(\frac{5}{20}\) = \(\frac{1}{5}\)

• वर्ग – 4
माना वर्ग की एक भुजा की लम्बाई (L) = 6 cm
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions -6
वर्ग की परिमाप (P) = (6 + 6 + 6 + 6) cm = 24 cm
\(\frac{L}{P}\) = \(\frac{6}{24}\) = \(\frac{1}{6}\)
वर्ग का क्षेत्रफल (A) =6 cm × 6 cm = 20 cm
\(\frac{L}{A}\) = \(\frac{6}{24}\) = \(\frac{1}{6}\)

• वर्ग – 5
माना वर्ग की एक भुजा की लम्बाई (L) = 7 cm
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions -7
वर्ग की परिमाप (P) = (7 + 7 + 7 + 7) cm = 24 cm
\(\frac{L}{P}\) = \(\frac{7}{28}\) = \(\frac{1}{4}\)
वर्ग का क्षेत्रफल (A) =7 cm × 7 cm = 49 cm
\(\frac{L}{A}\) = \(\frac{7}{49}\) = \(\frac{1}{7}\)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions -8
(a) भुजा की लम्बाई वर्ग के परिमाप के अनुक्रमानुपाती होती है।
(b) भुजा की लम्बाई वर्ग के क्षेत्रफल के अनुक्रमानुपाती है।

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(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 217)

प्रश्न 1.
सीधा समानुपात (विचरण)’ की अब तक हल की गई समस्याओं में से कुछ को लीजिए। क्या आप सोचते हैं कि इन समस्याओं को इकाई की विधि या ऐकिक विधि (unitary method) से हल किया जा सकता है?
हल:
हम प्रश्नावली 13.1 से कुछ प्रश्न लेकर उन्हें ऐकिक विधि से निम्नानुसार हल करते हैं
प्रश्न 3:
∵ 75 mL मूल मिश्रण के लिए आवश्यक लाल पदार्थ = 1 भाग
∴ 1 mL मूल मिश्रण के लिए आवश्यक लाल पदार्थ = \(\frac{1}{75}\) भाग
∴ 1800 mL मूल मिश्रण के लिए आवश्यक लाल पदार्थ = \(\frac{1}{75}\) × 1800 भाग
= 24 भाग

प्रश्न 4:
∵ 6 घंटे में भरने वाली बोतलों की संख्या = 840
∴ 1 घंटे में बोतलें भरेंगी = \(\frac{840}{6}\)

∴ 5 घंटे में बोतलें भरेंगी = \(\frac{840}{6}\) × 5
= 700

प्रश्न 10:
25 मिनट अर्थात् \(\frac{25}{60}\) घंटे में, तय दूरी = 14 km
∴ 1 घंटे में तय दूरी = 14 ÷ \(\frac{25}{60}\)
= (14 × \(\frac{60}{25}\)) km
∴ 5 घंटे में तय दूरी = (14 × \(\frac{60}{25}\) × 5) km
= 168 km

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 219)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित सारणियों को देखिए तथा ज्ञात कीजिए कि कौन से चरों ( यहाँx और ) के युग्म परस्पर प्रतिलोम समानुपात में हैं
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 13 सीधा और प्रतिलोम समानुपात Intext Questions -9
हल:
(i) प्रश्नानुसार,
x × y = 50 × 5 ≠ 40 × 6 ≠ 30 × 7 ≠ 20 × 8
इस प्रकार, x और y परस्पर व्युत्क्रमानुपाती नहीं हैं।

(ii) प्रश्नानुसार,
x × y = 100 × 60 = 200 × 30
= 300 × 20 = 400 × 15
= 6000 = स्थिर
इस प्रकार, x और y परस्पर व्युत्क्रमानुपाती हैं।

(iii) प्रश्नानुसार
x × y = 90 × 10 = 60 × 15 = 45 × 20
≠ 30 × 25 ≠ 20 × 30 ≠ 5 × 35
इस प्रकार, x और y व्युत्क्रमानुपात में नहीं हैं।

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

(पाठगत प्रश्न – पृष्ठ 201)

प्रश्न 1.
10-10 किसके बराबर है?
हल:
ऐसी संख्या जो शून्य न हो तथा a का एक पूर्णांक n हो तो a-n को an का व्युत्क्रम कहते हैं।
अर्थात् a-n = \(\frac{1}{a^{n}}\)
∴ 10-10 = \(\frac{1}{10^{10}}\)

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 202)

प्रश्न 1.
गुणात्मक प्रतिलोम लिखिए
(i) 2-4
(ii) 10-5
(iii) 7-2
(iv) 5-3
(v) 10-100
हल:
हम जानते हैं कि a का गुणात्मक प्रतिलोम \(\frac{1}{a}\) है।
अतः
(i) 2-4 का गुणात्मक प्रतिलोम है \(\frac{1}{2^{4}}\) = 24
(ii) 10-5 का गुणात्मक प्रतिलोम है \(\frac{1}{10^{5}}\) = 105
(iii) 7-2 का गुणात्मक प्रतिलोम है \(\frac{1}{7^{2}}\) = 105
(iv) 5-3 का गुणात्मक प्रतिलोम है \(\frac{1}{5^{3}}\) = 53
(v) 10-100 का गुणात्मक प्रतिलोम है \(\frac{1}{10^{100}}\) = 10100

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 202)

प्रश्न 1.
घातांकों का उपयोग करते हुए निम्न को विस्तारित रूप में लिखिए
(i) 1025.63
(ii) 1256.249
हल:
(i) 1025.63 = 1 × 1000 + 2 × 10 + 5 × 1 + \(\frac{6}{10}\) + \(\frac{3}{100}\)
= 1 × 103 + 0 × 102 + 2 × 101 + 5 + 6 × 10-1 + 3 × 10-2.

(ii) 1256.249 = 1 × 1000 + 2 × 100 + 5 × 10 + 6 × 1 + \(\frac{2}{10}\) + \(\frac{4}{100}\) + \(\frac{9}{1000}\)
= 1 × 103 + 2 × 102 + 5 × 101 + 6 × 100 + 2 × 10-1 + 4 × 10-2 + 9 × 10-3.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 203)

प्रश्न 1.
घातांक रूप को सरल कीजिए और लिखिए
(i) (-2)-3 × (-2)-4
(ii) p3 × p-10
(iii) 32 × 3-5 × 36.
हल:
हम जानते हैं कि a (जो शून्य नहीं है) पूर्णांक है
और m, n पूर्णांक हैं तो am × an = am+n

(i) (-2)-3 × (-2)-4 = (-2)(-3) + (-4) = (-2)-7
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions -1
(ii) p3 × p-10 = p3 – 10 = p-7 = \(\frac{1}{p^{7}}\)

(iii) 32 × 3-5 × 36 = (3)2+(-5)+6 = 33.

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 206)

निम्न तथ्यों का अवलोकन कीजिए

1. पृथ्वी से सूर्य की दूरी 149,600,000,000 m है।
2. प्रकाश का वेग 300,000,000 m/s है।
3. कक्षा VII की गणित की पुस्तक की मोटाई 20 mm है।
4. लाल रक्त कोशिकाओं का औसत व्यास 0.000007 mm है।
5. मनुष्य के बाल की मोटाई की परास 0.005 cm से 0.01 cm होती है।
6. पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी लगभग 384,467,000 m होती है।
7. पौधों की कोशिकाओं का आकार 0.00001275 m है।
8. सूर्य की औसत त्रिज्या 695000 km है।
9. अंतरिक्ष शटल में ठोस राकेट बूस्टर को प्रेरित करने के लिए शटल का द्रव्यमान 503600 kg है।
10. एक कागज की मोटाई 0.0016 cm है।
11. कम्प्यूटर चिप के एक तार का व्यास 0.000003 m है।
12. माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई 8848 m है।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर बहुत बड़ी तथा बहुत छोटी संख्याओं की पहचान कीजिए और संगत सारणी में लिखिए-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions -2
हल:
बहुत बड़ी तथा बहुत छोटी संख्याओं की पहचान
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions -3

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

(प्रयास कीजिए। – पृष्ठ 207)

प्रश्न 1.
निम्न संख्याओं को मानक रूप में लिखिए
(i) 0.000000564
(ii) 0.0000021
(iii) 21600000
(iv) 15240000
हल:
(i) 0.000000564
= \(\frac{564}{1000000000}\) = \(\frac{564}{10^{9}}\)
= \(\frac{5.64 \times 100}{10^{9}}\)
= 5.64 × 102 × 10-9
= 5.64 × 10-7.

(ii) 0.0000021 = \(\frac{21}{10000000}\) = \(\frac{21}{10^{7}}\)
= \(\frac{2.1 \times 10}{10^{7}}\)
= 2.1 × 101 × 10-7
= 2.1 × 10-6

(iii) 21600000 = 216 × 105 = 2.16 × 100 × 105
= 2.16 × 102 × 105 = 2.16 × 107

(iv) 15240000 = 1524 × 104
= 1.524 × 1000 × 104
= 1.524 × 103 × 104
= 1.524 × 107.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

प्रश्न 2.
दिए गए तथ्यों (पाठ्यपुस्तक का पृष्ठ 206) को मानक रूप में लिखिए।
हल:
सभी तथ्य मानक रूप में निम्नानुसार हैं
1. पृथ्वी से सूर्य की दूरी = 149,600,000,000 m
= 1.496 × 1011 m

2. प्रकाश का वेग = 300,000,000 m/sec
= 3 × 108 m/sec

3. कक्षा VII की गणित की पुस्तक की मोटाई
= 20 mm = 2 × 101 mm

4. लाल रक्त कोशिकाओं का औसत व्यास
= 0.000007 mm
= 7 × 10-6mm

5. मनुष्य के बाल की मोटाई की परास
= 0.005 cm से 0.01 cm
= 5 × 10-3 cm से 1 × 10-2 cm

6. पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी = 384,467,000 m (लगभग)
= 3.84467 × 108 m

7. पौधों की कोशिकाओं का आकार = 0.00001275 m
= 1.275 × 10-5 m

8. सूर्य की औसत त्रिज्या = 695000 km
= 6.95 × 10-5 km

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 12 घातांक और घात Intext Questions

9. अंतरिक्ष शटल में ठोस रॉकेट बूस्टर को प्रेरित करने के लिए रॉकेट का द्रव्यमान 503600 kg = 5.036 × 105 kg

10. एक कागज की मोटाई = 0.0016 cm
= 1.6 × 10-3 cm

11. कम्प्यूटर चिप के एक तार का व्यास = 0.000003 m
= 3 × 10-6 m

12. माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई = 8848 m
= 8.848 × 103 m

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

प्रश्न 1.
आपको एक बेलनाकार टैंक दिया हुआ है, निम्नलिखित में से किस स्थिति में आप उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करेंगे और किस स्थिति में आयतन:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4 -1
(a) यह ज्ञात करने के लिए कि इसमें कितना पानी रखा जा र सकता है।
(b) इसका प्लास्टर करने के लिए वांछित सीमेंट बोरियों की संख्या।
(c) इसमें भरे पानी से भरे जाने वाले छोटे टैंकों की संख्या।
हल:
(a) आयतन ज्ञात करेंगे।
(b) पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करेंगे।
(c) आयतन ज्ञात करेंगे।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

प्रश्न 2.
बेलन A का व्यास 7 cm और ऊँचाई 14 cm है। बेलन B का व्यास 14 cm और ऊँचाई 7 cm है। परिकलन किए बिना क्या आप बता सकते हैं कि इन दोनों में किसका आयतन अधिक है। दोनों बेलनों का आयतन ज्ञात करते हुए इसका सत्यापन कीजिए। जाँच कीजिए कि क्या अधिक आयतन वाले बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल भी अधिक है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4 -2
हल:
(i) बेलन A के लिए-
पहले बेलन (A) के लिए आयतन = πr2h
दूसरे बेलन (B) के लिए आयतन = π(2r)2 × \(\frac{h}{2}\)
= \(\frac{4πr2h}{2}\)
= 2πr2h

अतः दूसरे बेलन (B) का आयतन पहले बेलन (A) के आयतन का दूना होगा।
अंत: दूसरे बेलन (B) का आयतन अधिक है।
त्रिज्या = \(\frac{7}{2}\) = 3.5 cm
ऊँचाई (h) = 14 cm
बेलन का आयतन = πr2h
= \(\frac{22}{7}\) × (3.5)2 × 14 cm3
= \(\frac{22}{7}\) × \(\frac{35}{10}\) × \(\frac{35}{10}\) × 14 cm3
आयतन = \(\frac{44 \times 35 \times 35}{100}\) cm3
= 539 cm3
अत: बेलन A का आयतन = 539 cm3
बेलन A का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr(r+h)
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 3.5 (3.5 + 14)
= 2 × 22 × 0.5 × 17.5
= 22 × 17.5
= 385 cm2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

(ii) बेलन B के लिए –
त्रिज्या r = \(\frac{14}{2}\) =7 cm
ऊँचाई h = 7cm बेलन का आयतन = πr2h
= \(\frac{22}{7}\) × (7)2 × 7
= \(\frac{22}{7}\) × 49 × 7
= 49 × 22 cm3
अत: आयतन = 1078 cm3 = 2 × 539
= 2 × पहले बेलन A का आयतन

बेलन B का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr(r+h)
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 7 (7+7)
= 44 × 14 = 616 cm2
अतः बेलन B का आयतन, बेलन A के आयतन से अधिक होगा । अधिक आयतन वाले बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल भी अधिक है।

प्रश्न 3.
एक ऐसे घनाभ की ऊँचाई ज्ञात कीजिए, जिसके आधार का क्षेत्रफल 180 cm और जिसका आयतन 900 cm है।
हल :
माना, घनाभ की ऊँचाई = h
अत: घनाभ का आयतन = घनाभ के आधार का क्षेत्रफल × h
900 = 180 × h
h = \(\frac{900}{180}\) = 5
अत: घनाभ की ऊँचाई = 5 cm.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

प्रश्न 4.
एक घनाभ की विमाएँ 60 cm × 54 cm × 30 cm हैं । इस घनाभ के अन्दर 6 cm भुजा वाले कितने छोटे घन रखे जा सकते हैं ?
हल:
लम्बाई (l) = 60 cm
चौड़ाई (b) = 54 cm
ऊँचाई (h) = 30 cm
घनाभ का आयतन = 60 × 54 × 30 (V = lbh)
= 97200 cm3

घन की भुजा = 6 cm
घन का आयतन = (6)3 [V = a3]
= 216 cm3
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4 -3
घनों की संख्या = \(\frac{97200}{216}\) = 450
अतः घनों की संख्या = 450

प्रश्न 5.
एक ऐसे बेलन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए, जिसका आयतन 1.54 m’ और जिसके आधार का व्यास 140 cm है?
हल:
बेलन का व्यास = 140 cm
त्रिज्या (r) = \(\frac{140}{2}\) = 70 cm
त्रिज्या (r) = 0.7 m
बेलन की ऊँचाई h = ?
बेलन का आयतन = πr2h =1.54
h = \(\frac{1.54}{\pi r^{2}}\)
h = \(\frac{1.54×7}{22 ×0.7×0.7}\)
h = 1
अतः, बेलन की ऊँचाई = 1 m

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

प्रश्न 6.
एक दूध का टैंक बेलन के आकार का है जिसकी त्रिज्या 1.5 mऔर । लम्बाई 7 m है। इस टैंक में भरे जा सकने वाले दूध की मात्रा लीटर में ज्ञातं कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4 -4
हल:
बेलनाकार टैंक की त्रिज्या (r) = 1.5m
टैंक की लम्बाई (h) = 7m
टैंक का आयतन = πr2h
= \(\frac{22}{7}\) × (1.5)2 × 7
= \(\frac{22}{7}\) × 1.5 × 1.5 × 7
= 2.25 × 22 m3

आयतन = 49.5 m2
अत: टैंक का आयतन = 49.5 m2
.. 1 m2 = 1000 लीटर
49.5 m2 = 49.5 x 1000 लीटर
= 49500 लीटर
टैंक में दूध की मात्रा = 49500 लीटर

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4

प्रश्न 7.
यदि किसी घन के प्रत्येक किनारे को दुगुना कर दिया जाए, तो
(i) इसके पृष्ठीय क्षेत्रफल में कितने गुना वृद्धि होगी?
(ii) इसके आयतन में कितने गुना वृद्धि होगी?
हल:
(i) माना, घन का किनारा = x
पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6x2
अब, घन का किनारा दुगुना किया जाता है।
नया किनारा = 2x
अब, नया पृष्ठीय के. = 6(2x)2
= 6 × 4x2
नया पृष्ठीय से. = 24x2
= 4(6x2)
घन के पृष्ठीय क्षे. में 4 गुना वृद्धि होगी।

(ii) घन का आयतन = x3
भुजा (किनारा) दुगुना करने पर, आयतन = (2x)2
नया आयतन = (8x)2
अतः आयतन में 8 गुना वृद्धि होगी।

प्रश्न 8.
एक कुंड के अन्दर 60 लीटर प्रति मिनट की दर से पानी गिर रहा है। यदि कुंड का आयतन 108zi है, तो ज्ञात कीजिए कि इस कुंड को भरने में कितने घंटे लगेंगे?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.4 -5
हल:
दिया है, कुंड का आयतन = 108 m3
पानी का आयतन = 108 × 1000 लीटर = 108000 लीटर
60 लीटर पानी कुंड में गिरता है = 1 मिनट में
108000 लीटर पानी कुंड में गिरेगा है
= \(\frac{1}{60}\) × 108000 मिनट में
= 1800 मिनट
= \(\frac{1800}{60}\) घंटे
= 30 घंटे
अतः कुल समय = 30 घंटे

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(पाठगत प्रश्न – पृष्ठ 177-178)

प्रश्न 1.
यह एक आयताकार बगीचे की आकृति है 3 जिसकी लम्बाई 30 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर है (आकृति देखिए।
(i) इस बगीचे को चारों ओर से घेरने वाली बाड़ की लम्बाई क्या है?
(ii) कितनी भूमि बगीचे द्वारा व्याप्त है।
(iii) बगीचे के परिमाप के साथ-साथ अन्दर की तरफ एक मीटर चौड़ा रास्ता है जिस पर सीमेंट लगवाना है। यदि 4 वर्गमीटर (m2) क्षेत्रफल पर सीमेंट लगवाने के लिए एक बोरी सीमेंट चाहिए तो इस पूरे रास्ते पर सीमेंट लगवाने के लिए कितनी सीमेंट की बोरियों की आवश्यकता है?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -1
(iv) जैसा कि आरेख (आकृति देखिए) में दर्शाया गया है। इस बगीचे में फूलों की दो आयताकार क्यारियाँ हैं, जिनमें से प्रत्येक का आकार 1.5 m × 2 m है और शेष बगीचे के ऊपर घास है। घास द्वारा घिरा हुआ क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) बगीचे को चारों ओर से घेरने वाली बाड़ की लम्बाई
= बगीचे का परिमाप
= 2(लम्बाई + चौड़ाई)
= 2 (30+ 20) मीटर
= 2 × 50 मीटर
= 100 मीटर

(ii) बगीचे द्वारा व्याप्त भूमि = बगीचे का क्षेत्रफल
= लम्बाई × चौड़ाई
= (30 × 20) मी2
= 600 मी2

(iii) यहाँ, AB की लम्बाई = 30 मीटर,
चौड़ाई = QR = 20 मी
ABCD का क्षेत्रफल = (30 × 20) मी2 = 600 मी2
लम्बाई PQ = (30 मी – 2 मी)= 28 मी
चौड़ाई QR = (20 मी – 2 मी)= 18 मी
∴ PQRS का क्षेत्रफल = (28 × 18) मी2 = 504 मी2

अब, सीमेंट लगवाने वाले रास्ते का क्षेत्रफल
= ABCD का क्षेत्रफल – PQRS का क्षेत्रफल = (600 – 504) मी2
= 96 मी2

सीमेंट की बोरियों की संख्या की गणना-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -2
= \(\frac{96}{4}\)
= 24 : अतः 24 बोरी सीमेंट की आवश्यकता होगी।

(iv) 1.5 मी × 2 मी आकार वाले 2 आयताकार फूल लगी क्यारियों का क्षेत्रफल
= (2 × 1.5 × 2) मी2
= 2 × 3 मी2 = 6 मी2

घास द्वारा घिरा हुआ क्षेत्रफल = ABCD का क्षेत्रफल – 2 फूल लगी क्यारियों का क्षेत्रफल
= (504 – 6) मी2
= 498 मी2
∴ घास लगे भाग का क्षेत्रफले = 498 मी2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(पृष्ठ 178)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का मिलान कीजिए-
हल:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -3
उपर्युक्त दी गई आकृतियों में से प्रत्येक के परिमाप के लिए व्यंजक (सूत्र) निम्नलिखित हैं-
आयत : 2(a+b)
वर्ग : 4a
त्रिभुज : तीनों भुजाओं का योग
समान्तर चतुर्भुज : 2 × आसन्न भुजाओं का योग
वृत्त . : 2πb

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 179)

प्रश्न 1.
(a) निम्नलिखित आकृतियों का उनके क्षेत्रफलों से मिलान कीजिए
(b) प्रत्येक आकार का परिमाप लिखिए।
हल:
(a) आकृतियों का उनके क्षेत्रफलों से मिलान निम्न प्रकार है
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -4
(b) संगत आकार का परिमाप
(i) 2(14 + a) सेमी, जहाँ a सेमी आसन्न भुजा की लम्बाई है।
(ii) (\(\frac{22}{7}\) × 4 + 14) सेमी = 36 सेमी
(iii) (14 + 11 + 9) सेमी = 34 सेमी
(iv) 2 (14 + 7) सेमी = 42 सेमी
(v) (4 × 7) सेमी = 28 सेमी

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 180)

प्रश्न 1.
नजमा की बहन के पास भी एक समलम्ब के आकार का प्लॉट है जैसा कि आकृति में दर्शाया गया है। इसे तीन भागों में बाँटिए। दर्शाइए कि समलम्ब =WXYZ का क्षेत्रफल = h
(\(\frac{a+b}{2}\)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -5
हल:
माना कि बिन्दु Z तथा बिन्दु Y से WX पर डाले गए लम्ब के पाद क्रमशः L तथा M हैं।
तब, WXYZ समलम्ब का क्षेत्रफल = समकोण AWLZ का क्षेत्रफल + आयत LMYZ का क्षेत्रफल + समकोण ΔMXY का क्षेत्रफल
=
\(\frac{1}{2}\)(WL × ZL) + LM × MY × \(\frac{1}{2}\) (MX × YM)
= \(\frac{1}{2}\)(WL × h) + LM × h + \(\frac{1}{2}\)(MX × h) [∵ ZL = MY = h]
= \(\frac{1}{2}\) h × (WL + 2LM + MX)
= \(\frac{1}{2}\)h × (WL + LM + MX + LM)
= \(\frac{1}{2}\)h × (WX + ZY)
[∵ WL + LM + MX = WX और LM = ZY]
= \(\frac{1}{2}\)h × (a + b) = h\(\frac{a+b}{2}\)

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

प्रश्न 2.
यदि h = 10 cm, c = 6 cm, b = 12 cm, d =4 cm, तो इसके प्रत्येक भाग का मान अलग-अलग ज्ञात कीजिए और WXYZ का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए इनका योग कीजिए। h, a तथा b का मान व्यंजक \(\frac{a+b}{2}\) में रखते हुए इसका सत्यापन कीजिए।
हल:
स्पष्टतः, h = 10 cm, c = 6 cm, b = 12 cm तथा d =4cm लेने पर a = c + b + d = (6 + 12 + 4) cm = 22 cm
समलम्ब WXYZ का क्षेत्रफल = ΔWLZ का क्षेत्रफल + आयत LMYZ का क्षेत्रफल + ΔMXY का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × c × h + b × h + \(\frac{1}{2}\) × d × h
= (\(\frac{1}{2}\) × 6 × 10 + 12 × 10 + \(\frac{1}{2}\) × 4 × 10) cm2
= (30 + 120 + 20) cm2
= 170 cm2
और सूत्र के अनुसार-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -6
समलम्ब WXYZ का क्षेत्रफल = \(\frac{h \times (a+b)}{2}\)
= \(\frac{10 \times (22+12)}{2}\) cm2
= 5 × 34 cm2
= 170 cm2
अतः, क्षेत्रफल सत्यापित होता है।

(पृष्ठ 181)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समलम्बों का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -7
हल:
(i) क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\)(9 + 7) × 3 cm2
= \(\frac{1}{2}\) × 16 × 3cm2
= 8 × 3 cm2
= 24 cm2

(ii) क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\)(10 + 5) × 6 cm2
= \(\frac{1}{2}\) × 15 × 6 cm2
= 15 × 3 cm2
= 45 cm2

(पृष्ठ 182)

प्रश्न 1
हम जानते हैं कि 2 0समान्तर चतुर्भुज भी एक चतुर्भुज है। आइए, इसे भी हम दो त्रिभुजों में है विभक्त करते हैं और इन दोनों त्रिभुजों का क्षेत्रफल ज्ञात करते हैं। इस प्रकार समान्तर चतुर्भुज का क्षेत्रफल भी ज्ञात करते हैं। क्या यह सूत्र आपको पूर्व में ज्ञात सूत्र से मेल खाता है? (आकृति देखिए)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -8
हल:
समान्तर चतुर्भुज PORS का क्षेत्रफल = ΔPQS का क्षेत्रफल + ΔQRS का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × b × h + \(\frac{1}{2}\) × b × h
= \(\frac{1}{2}\) × (b + b) × h
= \(\frac{1}{2}\) × 2b × h = bh
हम समलम्ब के क्षेत्रफल का सूत्र जानते हैं। आइए इसका प्रयोग करते हैं।

समान्तर चतुर्भुज PQRS का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) × (समान्तर भुजाओं का योग) × इन भुजाओं के बीच की दूरी
= \(\frac{1}{2}\) × (b + b) × h
= \(\frac{1}{2}\) × 2b × h = bh
हाँ, यह सूत्र हमें पूर्व में ज्ञात सूत्र से मेल खाता है।

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 183)

प्रश्न 1.
समान्तर चतुर्भुज का विकर्ण खींचकर इसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बाँटा जाता है। क्या समलम्ब को भी दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बाँटा जा सकता है?
हल:
एक समलम्ब को दो सर्वांगसम त्रिभुजों में नहीं बाँटा जा सकता है।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 183)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित चतुर्भुजों का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए (आकृति देखिए)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -9
हल:
(i) चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = क्षेत्रफल (ΔABC) + क्षेत्रफल (ΔACD)
= (\(\frac{1}{2}\) × 6 × 3 + \(\frac{1}{2}\) × 6 × 5) cm2
= (3 × 3 + 3 × 5) cm2
= (9 + 15) cm2 = 24 cm2

(ii) चतुर्भुज EFGH का क्षेत्रफल = समचतुर्भुज EFGH का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × EG × FH
= (\(\frac{1}{2}\) × 7 × 6) cm2
= 21 cm2

(iii) चतुर्भुज PQRS का क्षेत्रफल = समान्तर चतुर्भुज PQRS का क्षेत्रफल
= 2 × ΔPSR का क्षेत्रफल
= 2 × \(\frac{1}{2}\) × PR × SN
= (8 × 2) cm2
= 16 cm2

(पृष्ठ 184)

प्रश्न 1.
(i) निम्नलिखित बहुभुजों (आकृति देखिए) का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए इन्हें विभिन्न भागों (त्रिभुजों एवं समलम्बों) में विभाजित कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -10
हल:
बहुभुज EFGHI को जैसा कि आकृति में दिखाया गया है, अलग-अलग भागों में बाँटा जाता है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -11
बहुभुज EFGHI का क्षेत्रफल = क्षेत्रफल (ΔEFI) + क्षेत्रफल (ΔFLG) + क्षेत्रफल (समलम्ब LKHG) + क्षेत्रफलं (ΔHKI)
= \(\frac{1}{2}\) × FI × EM + latex]\frac{1}{2}[/latex] × FL × GL + \(\frac{1}{2}\)(KH + LG) × LK + \(\frac{1}{2}\) × KI × KH
बहुभुज MNOPQR को जैसा कि आकृति में दिखाया गया है, अलग-अलग भागों में N B बाँटा जाता है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -12
बहुभुज MNOPQR का क्षेत्रफल = क्षेत्रफल (MBN) + क्षेत्रफल (समलम्ब MBDR) + क्षेत्रफल (ΔRDQ) + क्षेत्रफल (ΔFCQ) + क्षेत्रफल (समलम्ब CPOA) + क्षेत्रफल (ΔOAN)
= \(\frac{1}{2}\) × BN × MB + \(\frac{1}{2}\) ×(DR+MB) × BD + \(\frac{1}{2}\) × QD × RD +
\(\frac{1}{2}\) × CQ × PC + \(\frac{1}{2}\) × (CP + AO) × AC + \(\frac{1}{2}\) × NA × OA

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(ii) बहुभुज ABCDE को विभिन्न भागों में बाँटा गया है जैसा कि आकृति में दर्शाया गया है। यदि AD = AE = 8 cm, AH = 6 cm, AG = 4 cm, AF = 3 cm और BF = 2 cm, CH = 3cm, EG = 2.5 cm तो इसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -13
हल:
बहुभुज ABCDE का क्षेत्रफल = ΔAFB का क्षेत्रफल + समलम्ब FBCH का क्षेत्रफल + ΔCHD का क्षेत्रफल + ADE का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × AF × BF + \(\frac{1}{2}\) × (BF + CH) × FH + \(\frac{1}{2}\) × HD × CH +
\(\frac{1}{2}\) × AD × GE
= \(\frac{1}{2}\) × 3 × 2 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × (2 + 3) × 3 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × 2 × 3 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × 8 × 2.5 cm2
[∵ FH = AH – AF= (6 – 3) cm = 3 cm और HD = AD – AH= (8 – 6) cm = 2 cm]
= (3 + \(\frac{1}{2}\) + 3 + 10) cm2
= (\(\frac{6+15+6+20}{2}\)) cm2
= \(\frac{47}{2}\) cm2
= \(23 \frac{1}{2}\) cm2

(iii) यदि MP = 9cm, MD = 7 cm, MC = 6 cm, MB = 4 cm, MA = 2 cm तो बहुभुज MNOPQR (आकृति देखिए) का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। NA, OC, QD एवं RB विकर्ण MP पर खींचे गए लम्ब हैं।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -14
हल:
बहुभुज MNOPQR का क्षेत्रफल = ΔMAN का क्षेत्रफल + समलम्ब ΔNOC का क्षेत्रफल + ΔOCP का क्षेत्रफल + ΔMBR का क्षेत्रफल + समलम्ब RBDQ का क्षेत्रफल + ΔQDP का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\) × MA × AN + \(\frac{1}{2}\) × (AN + CO) × AC + \(\frac{1}{2}\) × CP × CO + \(\frac{1}{2}\) × MB × RB + \(\frac{1}{2}\) × (RB+QD) + \(\frac{1}{2}\) × BD + \(\frac{1}{2}\) × DP × QD
= \(\frac{1}{2}\) × 2 × 2.5 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × (2.5 + 3) × 4 cm2 +1 × 3 × 3 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × 4 × 2.5 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × (2.5 + 2) × 3 cm2 + \(\frac{1}{2}\) × 2 × 2 cm2
[∵ AC = MC – MA = (6 – 2) =4 cm, CP = MP- MC = (9 – 6) cm = 3 cm, BD = MD – MB = (7 – 4)= 3 cm और DP = MP – MD = (9 – 7) cm = 2 cm]
= (2.5 + 11 + 4.5 + 5 + 6.75 + 2) cm2
= 31.75 cm2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 188)

प्रश्न 1.
संलग्न आकृति में दर्शाए गए ठोस को बेलन कहना क्यों गलत है?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -15
हल:
क्योंकि बेलन की वृत्ताकार सर्वांगसम फलकें होती हैं जो एकदूसरे के समान्तर होती हैं । इसलिए दिए गए ठोस को बेलन कहना गलत है।

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 189)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित घनाभों (आकृति देखिए) का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -16
हल:
(i) दिया गया हैलम्बाई (l) = 6cm, चौड़ाई (b) =4cm तथा ऊँचाई (h) =2 cm
∴ घनाभ का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (lb + bh + hl)
= 2(6 × 4 + 4 × 2 + 2 × 6)
= 2 (24 + 8 + 12)
= 2 × 44
= 88 cm2

(ii) दिया गया हैलम्बाई (l) = 4 cm, चौड़ाई (b) = 4 cm तथा ऊँचाई (h) = 10 cm
∴ घनाभ का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2 (lb + bh + hl)
= 2 (4 × 4 + 4 × 10 + 10 × 4)
= 2 (16 + 40 + 40)
= 2(56 + 40)
= 192 cm2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 190)

प्रश्न 1.
क्या हम कह सकते हैं कि घनाभ का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल + 2 × आधार का क्षेत्रफल?
हल:
अतः घनाभ का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल + 2 × आधार का क्षेत्रफल।

प्रश्न 2.
यदि हम किसी घनाभ [आकृति (i)) की ऊँचाई और आधार की लम्बाई को परस्पर बदलकर एक दूसरा घनाभ [आकृति (ii)] प्राप्त कर लें तो क्या पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल बदल जाएगा?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -17
हल:
घनाभ (i) का पार्श्व क्षेत्रफल = 2(l + b) h
और घनाभ (ii) का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(h + b) × l
स्पष्ट रूप से, ये परिणाम भिन्न हैं।
अतः, घनाभ की स्थिति को बदलने से इसका पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल बदल जाता है।

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 191)

प्रश्न 1.
घन A का पृष्ठीय क्षेत्रफल और घन B का पाव पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -18
हल:
घन (A) का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6l2
= 6(10)2 cm2
= 600 cm2

घन (B) का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4(side)2
= 4(8)2
= 4 × 64
= 256 cm2

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 191)

प्रश्न 1.
(i) b भुजा वाले दो घनों को मिलाकर एक घनाभ बनाया गया है (आकृति)। इस घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल क्या है? क्या यह 12b2 है? क्या ऐसे तीन घनों को मिलाकर बनाए गए घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल 18b2 है? क्यों?
(ii) न्यूनतम पृष्ठीय क्षेत्रफल का घनाभ निर्मित करने के लिए समान भुजा वाले 12 घनों को किस प्रकार व्यवस्थित करेंगे?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -19
(iii) किसी घन के पृष्ठीय क्षेत्रफल पर पेंट करने के पश्चात् उस घन को समान विमाओं वाले 64 घनों में काटा जाता है (आकृति)। इनमें से कितने घनों का कोई भी फलक पेंट नहीं हुआ है? कितने घनों का 1 फलक पेंट हुआ है? कितने घनों के 2 फलक पेंट हुए हैं? कितने घनों के तीन फलक पेंट हुए हैं?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -20
हल:
(i) दो घनों को मिलाने से हमें एक घनाभ प्राप्त
जिसकी लम्बाई, L = b + b = 2b इकाई
चौड़ाई, B = b इकाई
ऊँचाई, H = b इकाई
∴ घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (LB + BH + LH)
= 2(2b × b + b × b + 2b × b) वर्ग इकाई
= 2(2b2 + b2 + 2b2) वर्ग इकाई = 10b2 वर्ग इकाई
इसलिए, यह 12b2 नहीं है।

तीन घन को क्रमनुसर मिलाया जाये, तब इस प्रकार प्राप्त घनाभ की विमाएँ निम्न होंगी :
L = लम्बाई = 3b, B = चौड़ाई = b और H = ऊँचाई = b
∴ घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(LB + BH + LH)
= 2(3b × b + b × b + 3b × b) वर्ग इकाई
= 2(3b2 + b2 + 3b2) वर्ग इकाई
= 14b2 वर्ग इकाई
इसलिए, यह = 18b2 नहीं है।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(ii) बराबर भुजाओं के 12 घनों को मिलाने से निम्न घनाभ प्राप्त होता होता है :
(b) HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -21
इस स्थिति में : l = 12b, b = b तथा h = b
∴ इसका पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(12b × b + b × b + 12b × b)
= 2(12b2 + b2 + 12b2)
= 2 × 25b2
= 50b2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -22
इस स्थिति में : l = 6b, b = b तथा h = 2b
∴ इसका पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(6b × b + b × 2b + 6b × 2b)
= 2(6b2 + 2b2 + 12b2)
= 2 × 20b2
= 40b2

(c) HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -23
इस स्थिति में : l = 4b, b = b तथा h = 3b
∴ इसका पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(4b × b + b × 3b + 4b × 3b)
= 2(4b2 + 3b2 + 12b2)
= 2 × 19b2
= 38b2
अतः, सबसे कम पृष्ठीय क्षेत्रफल के लिए घनों को, चित्र के व्यवस्थित किया जा सकता है।

(iii) घनों की संख्या, जिनकी एक भी फलक पेंट नहीं किया गया है = 16
घनों की संख्या, जिनकी एक फलक पेंट किया गया है = 24
घनों की संख्या, जिनकी दो फलक पेंट किए गए हैं = 16
घनों की संख्या, जिनकी तीन फलकें पेंट किए गए हैं = 8

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 193)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित बेलनों का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -24
हल:
(i) प्रशनुसार , r = 14 cm और h = 8 cm
∴ कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh + 2πr2
= (2 × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 8 + 2 × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 14) cm2
= (704 + 1232) cm2
= 1936 cm2

(ii) चित्रानुसार, r = 7, m = 1 m तथा h = 2 m
कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh + 2πr2
= (2 × \(\frac{22}{7}\) × 1 × 2 + 2 × \(\frac{22}{7}\) × 1 × 1) m2
= (\(\frac{88}{7}\) +\(\frac{44}{7}\)) m2
= \(\frac{132}{7}\) m2
= \(18 \frac{6}{7}\) m2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 193)

प्रश्न 1.
नोट कीजिए कि किसी बेलन का पार्श्व पृष्ठीय (वक्र पृष्ठीय)क्षेत्रफल, आधार की परिधि- बेलन की ऊँचाई के समान होता है। क्या हम घनाभ के पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल को आधार का परिमाप x घनाभ की ऊँचाई के रूप में लिख सकते हैं?
हल:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -25
हम जानते हैं कि घनाभ का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(l + b) × h
= आधार का परिमाप × ऊँचाई इस प्रकार, हम एक घनाभ के पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल को आधार का परिमाप × घनाभ की ऊँचाई के रूप में लिख सकते हैं।

(पृष्ठ 196)

प्रश्न 1.
समान आकार (प्रत्येक घन की लम्बाई समान) वाले 36 घन लीजिए, एक घनाभ बनाने के लिए उन्हें व्यवस्थित कीजिए। आप इन्हें अनेक रूपों में व्यवस्थित कर सकते हैं। निम्नलिखित सारणी पर विचार कीजिए
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -26
हल:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -27
हम देखते हैं कि इन घनाभों को बनाने के लिए हमने 36 घनों का प्रयोग किया है। इसलिए प्रत्येक स्थिति में इसका आयतन 36 घन इकाई है। स्पष्ट रूप से, यह लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई के बराबर है।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 197)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित घनाभों (आकृति) का आयतन ज्ञात कीजिए
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -28
हल:
(i) घनाभ का आयतन = (8 × 3 × 2) cm3
= 48 cm3
(ii) घनाभ का आयतन = आधार का क्षेत्रफल × ऊँचाई
= (24 × \(\frac{3}{100}\)) m
= 0.72 m3

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 197)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित घनों का आयतन ज्ञात कीजिए-
(a) 4 cm भुजा वाला
(b) 1.5 m भुजा वाला
हल:
(a) घन का आयतन = (भुजा)3
= (4)3 cm3
= 64 cm3

(b) घन का आयतन = (भुजा)3
= (1.5)3 m3
= 3.375 m3

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 197-198)

प्रश्न 1.
एक कम्पनी बिस्कुट बेचती है। बिस्कुटों को पैक करने के लिए घनाभाकार डिब्बों का उपयोग किया जा रहा है। डिब्बा A → 3 cm × 8 cm × 20 cm, डिब्बा B → 4 cm × 12 cm × 10 cm. डिब्बे का कौन-सा आकार कम्पनी के लिए आर्थिक दृष्टि से लाभदायक रहेगा? क्यों? क्या आप ऐसे किसी और आकार (विमाएँ) के डिब्बे का सुझाव दे सकते हैं जिसका आयतन इनके समान हो परन्तु इनकी तुलना में आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभदायक हो?
हल:
डिब्बा A :
आयतन = (3 × 8 × 20) cm3
= 480 cm3

पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(3 × 8 + 8 × 20 + 20 × 3) cm2
= 2(24 + 160 + 60) cm2
= 2 × 244 cm3
= 488 cm2

डिब्बा B:
आयतन = (4 × 12 × 10) cm2
= 480 cm2

पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2(4 × 12+ 12 × 10 + 10 × 4) cm2
= 2(48 + 120+ 40) cm2
= 2 × 208 cm = 416 cm2

स्पष्ट है कि B प्रकार के डिब्बे का आयतन = A प्रकार के डिब्बे का आयतन

परन्तु, B प्रकार के डिब्बे का पृष्ठीय क्षेत्रफल A प्रकार के डिब्बे के पृष्ठीय क्षेत्रफल से कम है।
∴ डिब्बा B में कम सामग्री लगेगी।
इसलिए डिब्बा B आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक है। एक अन्य प्रकार का डिब्बा जिसका आकार 8 cm × 6 cm × 10 cm है अर्थात् आयतन 480 cm3 है।
इसका पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2(48 + 60 + 80) cm2
= 2 (188) cm2
= 376 cm2
स्पष्ट है कि इस डिब्बे का पृष्ठीय क्षेत्रफल डिब्बा B से भी कम है। इसलिए यह दिए गए दोनों प्रकार के डिब्बों से आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक है।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 198)

प्रश्न 1.
नीचे दिए बेलनों का आयतन ज्ञात कीजिए
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Intext Questions -29
हल:
(i) बेलन का आयतन = πr2h
जहाँ r = 7 cm, h = 10 cm
= (\(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 × 10) cm3
= (2 × 70) cm3
= 1540 cm3

(ii) बेलन का आयतन = (आधार का क्षेत्रफल) x ऊँचाई
= (250 × 2) m3
= 500 m3

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

प्रश्न 1.
दो घनाभाकार डिब्बे हैं जैसा कि संलग्न आकृति में दर्शाया गया है । किस डिब्बे को बनाने के लिए कम सामग्री की आवश्यकता है?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -1
हल :
घनाभाकार डिब्बे
(a) का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2 (lb + bh + hl)
= 2 (60 × 40 + 40 × 50 + 50 × 60) cm2
= 2(2400 + 2000 + 3000) cm2
= 2 × 7400 cm2
= 14800 cm2

घनाकार डिब्बे (b) का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6 × (50)2
= 6 × 50 × 50
= 15000 cm2
डिब्बे (a) का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल, डिब्बे (b) के कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल से कम है, अतः डिब्बे (a) को बनाने मैं कम सामग्री की आवश्यकता होगी।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

प्रश्न 2.
80 cm × 48 cm × 24 cm माप वाले एक सूटकेस को तिरपाल के कपड़े से ढकना है। ऐसे 100 सूटकेसों को रुकने के लिए 96 cm चौड़ाई वाले कितने मीटर तिरपाल के कपड़े की आवश्यकता होगी?
हल :
सूटकेस की ल. = 80 cm
चौ. = 48 cm
ऊँ. = 24 cm
सूटकेस की कुल सतह का क्षेत्रफल = 2(lb + bh + hl)
=2 (80 × 48 + 48 × 24 + 24 × 80)
= 2(3840 + 1152 + 1920)
= 2 × 6912
= 13824 cm2
अब, तिरपाल की चौ. = 96 cm
माना तिरपाल की ल. = x cm
∴ तिरपाल का क्षेत्रफल = l × b
= 96x cm2
∴ 96x = 13824
∴ ल., x = \(\frac{13824}{96}\) = 144 cm

अब,
100 सूटकेसों को तिरपाल से ढकने के लिए ल. = 144 × 100 cm
= \(\frac{144 \times 100}{100}\)m

∴ तिरपाल की कुल लम्बाई = 144 m

प्रश्न 3.
एक ऐसे घन की भुजा ज्ञात कीजिए, जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 600 cm है।
हल :
माना घन की भुजा = x
घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6x2
दिया है पृष्ठीय क्षेत्रफल = 600
∴ 6x2 = 600
x2 = 100
अत: घन की भुजा x = 10 cm

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

प्रश्न 4.
रूखसार ने 1 m x 2 m x 1.5 m माप वाली एक पेटी को बाहर से पेंट किया । यदि उसने पेटी – के तल के अतिरिक्त उसे सभी जगह से पेंट किया हो तो ज्ञात कीजिए कि उसने कितने पृष्ठीय क्षेत्रफल को पेंट किया ?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -2
हल:
पेटी की, ल. (l) = 1 m
चौ. (b) = 2 m
ऊँ. (h) = 1.5 m
पेटी का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल =2 (lb + bh + hl)
= 2 (1 × 2 + 2 × 1.5 + 1 × 1.5)
= 2(2 + 3 + 1.5)
= 2 (6.5)
= 13 m2

पेटी के तल का क्षे. (जिस पर पेंट नहीं होना है) = l × b = 2 ×1
= 2 m2
अत: वह पेटी के = (13 – 2) m2
= 11 m2 क्षेत्रफल को पेंट करती है

प्रश्न 5.
डैनियल एक ऐसे घनाभाकार कमरे की दीवारों और छत को पेंट कर रहा है, जिसकी ल., चौ. और ऊँ. क्रमश: 15 m, 10 m, एवं 7 m है । पेंट की प्रत्येक कैन की सहायता से 100 m2 क्षेत्रफल को पैंट किया जा सकता है तो उस कमरे के लिए उसे पैंट की कितनी कैनों की आवश्यकता होगी?
हल:
कमरे की माप : लम्बाई (l) = 15 m
चौड़ाई (b) = 10 m
ऊँचाई (h) = 7 m
कमरे का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 (lb + bh +hl)
= 2(15 × 10 + 10 × 7 + 7 × 15)
= 2(150 + 70 + 105)
= 2 × 325
= 650 m2

परन्तु वह फर्श पर पेंट नहीं कर रहा है।
तब, फर्श का क्षे. = l × b.
= 15 × 10
= 150 m2

∴ पेंट किया गया क्षेत्र = 650 – 150
= 500 m2

∵ 100 m2 में आवश्यक कैन = 1
∴ 500 m2 में आवश्यक कैन = \(\frac{500}{100}\) = 5
∴ कैनों की संख्या = 5

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

प्रश्न 6.
वर्णन कीजिए कि निम्न आकृतियाँ किस प्रकार एकसमान हैं और किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न हैं? किस डिब्बे का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक है ?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -3
हल :
(i) समानता – दोनों की समान ऊँचाई है।
(ii) असमानता – एक बेलन तथा दूसरा घन है।
वेलन की त्रिज्या = \(\frac{7}{2}\) = 3.5 cm,
ऊँ (h) = 7 cm

∴ बेलन का पार्श्व पृष्ठीय क्षे. = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 3.5 × 7
= 44 x 3.5
∴ पार्श्व पृष्ठीय क्षे. = 154 cm2
घन की भुजा (1) =7 cm
घन के पार्श्व का पृष्ठीय क्षे. = 6l2
= 6 × (7)2
=6 × 49
∴ पार्श्व पृष्ठीय क्षे. = 294 cm2
अत: घन का पार्श्व पृष्ठीय क्षे. अधिक है।

प्रश्न 7.
7 m त्रिज्या और 3 m ऊंचाई वाला एक बन्द बेलनाकार टैंक किसी धातु की एक चादर से बना हुआ है। उसे बनाने के लिए वांछित धातु की चादर की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल :
टैंक की त्रिज्या = 7 m
तथा, ऊँचाई = 3 m
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -4
बेलन का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr(h+r) = 2 × \(\frac{22}{7}\) × 7 (3+7) m2
= 44 × (10) m2
= 440 m2
अतः आवश्यक चादर = 440 m2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

प्रश्न 8.
एक खोखले बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 4224 cm है । इसे इसकी ऊंचाई के अनुदिश काटकर 33 cm चौड़ाई की एक आयताकार चादर बनाई जाती है। आयताकार चादर का परिमाप ज्ञात कीजिए ।
हल :
माना, आयताकार चादर की लम्बाई = l cm
तथा दिया है – चादर की चौड़ाई = 33 cm
∴ बेलन का पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल = आयताकार चादर का क्षेत्रफल
4224 = l × 33
∴ लम्बाई = 4224
∴ लम्बाई (l) = 128 cm
आयताकार चादर का परिमाप = 2 (लम्बाई + डाई)
= 2(128 + 33)
= 2 × 161
अत: चादर का परिमाप =322 cm

प्रश्न 9.
किसी सड़क को समतल करने के लिए एक सड़क रोलर को सड़क के ऊपर एक बार घूमने के लिए 750 चक्कर लगाने पड़ते हैं । यदि सड़क रोलर का व्यास 84 cm और लम्बाई 1 m हैं तो सड़क का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -5
हल :
रोलर का व्यास = 84 cm
∴ अर्द्धव्यास r = 42 cm
अतः r = 10.42 m
(∵ 1 m = 100 cm)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -6
रोलर की ल. (h) = 1 m
रोलर की आकृति बेलनाकार है, तब
∵ रोलर द्वारा 1 चक्कर में तय किया क्षेत्रफल = रोलर का पृष्ठीय क्षेत्रफल
= 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × (0.42) × 1
= \(\frac{44 \times 42 \times 1}{7 \times 100}\)
= 2.64 m2

∵ रोलर के 1 चक्कर में चला आवश्यक क्षेत्र = 2.64 m2
∴ 750 चक्कर में आवश्यक क्षेत्र = 2.64 × 750
= 1980 m2
अतः रोलर को चक्कर चलने के लिए सड़क का क्षेत्र
= 1980 m2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3

प्रश्न 10.
एक कम्पनी अपने दूध पाउडर को ऐसे बेलनाकार बर्तनों में पैक करती है, जिनका व्यास 14 cm और ऊँचाई 20 cm हैं । कम्पनी बर्तन के पृष्ठ के चारों ओर एक लेबल लगाती है। यदि यह लेबल बर्तन के तल और शीर्ष दोनों से 2 cm की दूरी पर चिपकाया जाता है, तो लेवल का क्षेत्रफल क्या है ?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -7
हल :
बेलन का व्यास = 14cm
∴ बेलन की त्रिज्या (r) = 7 cm
कर्तन की कुल ऊँचाई (h) = 20 cm
∴ लेवल की ऊँचाई (h) = 20 – (2 + 2)
= 20 – 4
h = 16 cm
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.3 -8
अत: चिपकाने वाले लेबल की आकृति भी बेलनाकार ही होगी, जिसकी त्रिज्य, r = 7 cm
तथा ऊँचाई (h) = 16 cm
अतः लेबल का क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 16
= 44 × 16 = 704 cm2
अतः लेबल का क्षेत्रफल = 704 cm2

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 1.
एक मेज के ऊपरी पृष्ठ ( सतह) का आकार समलम्ब जैसा है। यदि इसकी समान्तर भुजाएँ 1 m और 1.2 m हैं तथा इन समान्तर भुजाओं के बीच की दूरी 0.8 m है, तो इसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -1
हल:
हल :
मेज के ऊपरी पृष्ठ (समलम्ब) का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) × (समान्तर भुजाओं का योग) × ऊँचाई
= \(\frac{1}{2}\) (1+ 1.2) × 0.8
= \(\frac{1}{2}\) × 2.2 × 0.8
= 1.1 × 0.8
= 0.88 m2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 2.
एक समलम्ब का क्षेत्रफल 34 cm और ऊंचाई 4cm है। यदि समान्तर भुजाओं में से एक की 10 cm लम्बाई है। दूसरी समान्तर भुजा की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -2
हल:
माना दुसरी समान्तर भुजा = x cm.
हम जानते हैं कि समलम्ब का क्षे. = \(\frac{1}{2}\) ×(समान्तर भुजाओं का योग) × ऊँचाई
34 = \(\frac{1}{2}\) (10+ x) × 4
2 × 34 = (10+x) × 4 (2 का पक्षान्तरण करने पर)
\(\frac{2 \times 34}{4}\) = 10 + x (4 का पक्षान्तरण करने पर)
= 10 + x = 17
∴ x = 17 – 10 = 7 (10 का पक्षान्तरण करने पर)
∴ अतः, दूसरी समान्तर भुजा = 7 cm

प्रश्न 3.
एक समलम्ब के आकार के खेत ABCD की बाड़ की लम्बाई 120 m है। यदि BC = 48 m, CD = 17 m और AD = 40 m है, तो A इस खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। भुजा AB समान्तर भुजाओं AD तथा BC पर लम्ब है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -3
हल:
समलम्ब की भुजाएँ :
BC = 48 m
AD = 40 m
∠ABC = 90°.
D= 17 m
समलम्ब ABCD का परिमाप = 120 m
= AB + BC + CD + DA = 120
= AB+48+ 17+ 40 = 120
= AB+ 105 = 120
AB = 120 – 105 = 15
AB = 15m
अब, समलम्ब ABCD का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) (समान्तर भुजाओं का योग) × ऊँचाई
= \(\frac{1}{2}\)(48 + 40) × 15
खेत का क्षेत्रफल = 660 m2.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 4.
एक चतुर्भुज के आकार के खेत का विकर्ण 24 m है और शेष सम्मुख शीर्षों से इस विकर्ण पर खींचे गये लम्ब 8 m तथा 13 m हैं । खेत का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -4
हल:
चतुर्भुज ABCD को विकर्ण AC द्वारा 13m दो त्रिभुजों में बाँटा गया है।

(i) ∆ABC का क्षे. = \(\frac{1}{2}\) × आधार × ऊँचाई
= \(\frac{1}{2}\) × 24 × 8
= 24 × 4
= 96 m2

(ii) ∆ACD का क्षे. = \(\frac{1}{2}\) × AC × DE
= \(\frac{1}{2}\) × 24 × 3
= 12 × 13
= 156 m2

चतुर्भुज ABCD का क्षे= ∆ABC का क्षे. + ∆ACD का क्षे.
= 96 + 156 = 252 m2

प्रश्न 5.
किसी समचतुर्भुज के विकर्ण 7.5cm एवं 12 cm हैं । इसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल:
हम जानते हैं –
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -5
किसमचतुर्भुज का क्षेत्रफल = \(\frac{दोनों विकर्णों का गुणनफल}{2}\)
= \(\frac{12 \times 7.5}{2}\)
= 6 × 7.5
= 45.0 cm2
अत: क्षेत्रफल = 45 cm2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 6.
एक समचतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसकी भुजा 6 cm और शीर्षलम्ब 4 cm हैं । यदि एक विकर्ण की लम्बाई 8 cin है तो दूसरे विकर्ण की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल :
विकर्ण AC, समचतुर्भुज ABCD को दो ΔABC तथा ΔACD में बाँटता है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -6
अतः समचतुर्भुज का क्षे. = ΔACD का छे + ΔABC का क्षे.
अत: \(\frac{1}{2}\)(AB+ CD) × ऊँचाई (शीर्षलम्ब)
= \(\frac{1}{2}\) × AC × OD + \(\frac{1}{2}\) × AC × OB
= \(\frac{1}{2}\)(6+6) × 4
= \(\frac{1}{2}\) × 8 × OD + \(\frac{1}{2}\) × 8 × OD
= 12 × 2 = 4 DO + 4 DO (∵ OB = OD)
24 = 8 DO (∵ OD = \(\frac{24}{3}\) = 3)
∴ विकर्ण, BD = DO + BO
= 3 + 3 = 6cm
अत: समचतुर्भुज का क्षे० = 24 cm2
तथा, विकर्ण = 6 cm

प्रश्न 7.
किसी भवन के फर्श में चतुर्भुज के आकार की 3000 टाइलें हैं और इनमें से प्रत्येक के विकर्ण 45 cm तथा 30 cm लम्बाई के हैं । 14 प्रति वर्ग मीटर की दर से इस फर्श को पॉलिश करने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
हम जानते हैं कि,
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -7
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -8
= \(\frac{45 \times 30}{2}\)
= 45 × 15.
= 675 cm2
= \(\frac{675}{100 \times 100}\) m2
= 0.0675 mm2
अत: समचतुर्भुजाकार टाइल का क्षेत्रफल = 0.0675 m2

अब, 3000 टाइलों का क्षे. = 0.0675 × 3000 m2
= 202.5 m2
3000 टाइलों का क्षेत्रफल = 202.5 m2
अब, खर्च = 202.5 × 4 = 810.0
पॉलिश कराने का खर्च = ₹810

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 8.
मोहन एक समलम्ब के आकार का खेत खरीदना चाहता है । इस खेत की नदी के साथ वाली भुजा सड़क के साथ वाली भुजा के समान्तर हैं और लम्बाई में दुगुनी है । यदि इस खेत का क्षेत्रफल 10500 m है2 और दो समान्तर भुजाओं के बीच की लम्बवत् दूरी 100 m है, तो नदी के साथ वाली भुजा की लम्बाई ज्ञात कीजिए।
हल :
समलम्ब का क्षे.= 10500 m2
प्रश्नानुसार, DC = 2AB
तथा, DC||AB
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -9
समलम्ब चतुर्भुज का क्षेत्रफल = \(\frac{1}{2}\) (AB+ CD) × 100
10500 = \(\frac{1}{2}\) (AB+ 2AB) × 100
10500 = \(\frac{3}{2}\) AB × 100
\(\frac{10500 \times 2}{10o \times 3}\) = AB = 70
∴ AB = 70 m

अत: भुजा AB = 70 m
तथा CD = 70 × 2 = 140 m

प्रश्न 9.
एक ऊपर उठे हुए। चबूतरे का ऊपरी पृष्ठ 44m अष्टभुज के आकार का है। GHb जैसा कि आकृति में दर्शाया । गया है । अष्टभुजी पृष्ठ का । क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -10
हल :
चबूतरे का ऊपरी पृष्ठ एक आयत GHCD
तथा दो समलम्ब चतुर्भुजों DEFG तथा ARCH में बँटा है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -11
अत: ऊपरी पृष्ठ का क्षेत्रफल = आयत CDGH का क्षे. + 2 समलम्बों का क्षे.
⇒ 11 × 5 + 2 [\(\frac{1}{2}\)(5 + 4) × 4]
⇒ 55 + (5 + 4) × 4
⇒ 55 + 16 × 4
⇒ 55 + 64 = 119
अतः क्षेत्रफल = 119 m2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 10.
एक पंचभुज आकार का बगीचा है, जैसा कि आकृति में दर्शाया गया है। इसका क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए ज्योति और कविता ने इसे दो विभिन्न तरीकों से विभाजित किया । दोनों तरीकों का उपयोग करते हुए इस बगीचे का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए । क्या आप इसका क्षेत्रफल ज्ञात करने की कोई और विधि बता सकते हैं?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -12
हल :
(i) ज्योति के आरेख के अनुसार-
DF भुजा के द्वारा पंचभुज को दो भागों में बाँटा गया है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -13
इस प्रकार, 2 समान समलम्ब चतुर्भुजों में बैंट जायेगा ।
अतः बगीचे का क्षेत्रफल = AFDE का क्षे. + FBCD का क्षे.
या 2 × समलम्ब AFDE का क्षेत्र = 2 × [\(\frac{1}{2}\)(FD + AE) × AF]
= [(30 + 15) × \(\frac{15}{2}\)]
= 45 × \(\frac{15}{2}\)
= \(\frac{675}{2}\)
= 337.5 m2

∴ बगीचे का क्षेत्रफल = 337.5 m2

(ii) कविता के आरेख के अनुसार,
पंचभुज ABCDE को दो भागों में बाँटा गया है।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -14
∵ दो बगीचे का क्षेत्रफल ज्ञात करने की अन्य विधि भी है।
बगीचे AEDCBA का क्षेत्रफल = वर्ग ABCE का क्षेत्रफल + AEDC का क्षेत्रफल
= 15 × 15 + \(\frac{1}{2}\) × 15 ×15
= 225 + \(\frac{1}{2}\) × 225
= 225 + 112.5 = 337.5 m2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.2

प्रश्न 11.
संलग्न पिक्चर फ्रेम के आरेख की बाहरी एवं अन्त:विमाएँ क्रमश: 24 cm × 28 cm एवं 16 cm × 20 cm हैं । यदि फ्रेम के प्रत्येक खण्ड की चौड़ाई समान है, तो प्रत्येक खण्ड का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -15
हल :
प्रत्येक खण्ड की चौड़ाई समान है।
= 28 – 20 = 8cm
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -16
प्रत्येक खण्ड की चौड़ाई (x) = \(\frac{8}{2}\) = 4 cm
अत: x = 4cm

समलम्ब ABFE का क्षेत्रफल = समलम्ब DHGC का क्षे.
∴ समलम्ब ABFE का क्षे = \(\frac{1}{2}\)(24 + 16) × 4
= \(\frac{1}{2}\) × 40 × 4
= 80 cm2
तथा समलम्ब DHGC का क्षे.= 80 cm2
अब, समलम्ब, ADHE का क्षेत्रफल = समलम्ब BCGF का क्षेत्रफल
= \(\frac{1}{2}\)(28 + 20) × 4
= \(\frac{1}{2}\) × 48 × 4

∴ समलम्ब ADHE का क्षे. = 96 cm2
इसी प्रकार समलम्ब BCGF का क्षे. = 96 cm2
फ्रेम के खण्डों के क्षेत्रफल क्रमश 80 cm2, 96 cm2, 80 cm2, 96 cm2 होंगे।

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1

प्रश्न 1.
जैसा कि नीचे दी गई आकृति में दर्शाया गया है, एक आयताकार और एक वर्गाकार खेत के माप दिए हुए हैं। यदि इनके परिमाप समान हैं, तो किस खेत का क्षेत्रफल अधिक होगा?
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -1
हल:
वर्ग का परिमाप = 4 × भुजा
= 4 × 60
= 240 मीटर

दिया है –
वर्ग का परिमाप = आयत का परिमाप
240 = 2(लम्बाई + चौड़ाई)
240 = 2(80 + चौड़ाई)
\(\frac{240}{2}\) = 80 + चौड़ाई
120 – 80 = चौड़ाई
∴ चौड़ाई = 40 मीटर

अब, आयत का क्षेत्रफल = ल. × चौ.
= 80 × 40
= 3200 मी.
तथा वर्ग का क्षे = (भुजा)2
= 60 × 60 = 3600 मी2
अत: वर्ग का क्षेत्रफल अधिक होगा।

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प्रश्न 2.
श्रीमती कौशिक के पास चित्र में दर्शाई गई मापों वाला एक वर्गाकार प्लॉट है । वह प्लॉट के बीच में एक घर बनाना चाहता है । घर के चारों ओर एक बगीचा विकसित किया गया है।₹55 प्रति वर्गमीटर की दर से इस बगीचे के विकसित करने का व्यय ज्ञात कीजिए।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -2
हल :
वर्गाकार प्लाट की भुजा = 25m
प्लाट का क्षे. = (25)2
= 625 m2
घर की ल. = 20 m
तथा की चौ. = 15 m
घर का क्षे. = ल. × चौ.
= 20 x 15
= 300 m2

अब, बगीचे का क्षेत्रफल = प्लाट का क्षे. – घर का क्षे.
= 625 – 300
बगीचे का क्षे. = 325 m 2
अत: बगीचे को विकसित करने का खर्च = ₹325 × 55
अतः खर्च = ₹ 17875

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1

प्रश्न 3.
जैसा कि आरेख में दर्शाया गया है एक बगीचे का आकार मध्य में आयताकार है और किनारों पर अर्द्धवृत्त के रूप में है। इस बगीचे का परिमाप और क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। [आयत की लम्बाई 20 – (3.5 + 3.5) मीटर है]
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -3
हल:
आयत की लम्बाई = 20 – (3.5 + 3.5)
= 20 – 7 = 13 m

आयताकार भाग का क्षेत्रफल = ल. × चौ…
= 13 × 7
= 91 m2

अब, किनारों पर बने दो अर्द्धवृत्त मिलकर एक पूरा वृत्त
बन जायेगा, जिसकी त्रिज्या r = 3.5 m होगी ।
अत: दो अर्द्धवृत्तों (एक वृत्त) का क्षे. = πr2
= \(\frac{22}{7}\) × (3.5)2
= \(\frac{22}{7}\) × \(\frac{35}{10}\) × \(\frac{35}{10}\)
= \(\frac{11 \times 35}{10}\) = \(\frac{385}{10}\)
= 38.5 m2

अतः बगीचे का कुल क्षेत्रफल = आयत का क्षे. + वृत्त का. क्षे.
= 91 + 38.5
= 129.5 m

(ii) बगीचे का परिमाप = 2 × आयत की लम्बाई + वृत्त का परिमाप (2πr)
=2 × 13 + 2 × \(\frac{22}{7}\) × 3.5
= 26 + 22
= 48 m

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1

प्रश्न 4.
फर्श बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली एक टाइल का आकार समान्तर चतुर्भुज का है, जिसका आधार 24cm तथा संगत ऊँचाई 10 cm है। 1080 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के एक फर्श को ढकने के लिए ऐसी कितनी टाइलों की आवश्यकता है ? (फर्श के कोनों को भरने के लिए आप टाइल को किसी भी रूप में तोड़ सकते हैं।)
हल:
टाइल की ल. (l) = 24 cm
तथा चौ. (b) = 10 cm
प्रत्येक टाइल का क्षे. = l × b = 24 × 10 cm2
= 240 cm2
= \(\frac{240}{100 \times 100}\) m2 (∵ 1 m = 100 cm)

∴ क्षे. = 0.024 m2 (∵ 1 m2 = 100 × 100 cm2)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -4
\(\frac{1080}{0.024}\) = \(\frac{1080 \times 1000}{24}\)
= \(\frac{1080000}{24}\)
अत: संख्या = 45000 टाइल

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प्रश्न 5.
एक चींटी किसी फर्श पर बिखरे हुए विभिन्न आकारों के भोज्य पदार्थों के टुकड़ों के चारों ओर घूम रही है। भोज्य पदार्थ के किस टुकड़े के लिए चींटी को लम्बा चक्कर लगाना पड़ेगा।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -5
हल :
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -6
(a) प्रथम टुकड़े का चक्कर लगाने में दूरी = (अर्द्धवृत्त की परिधि + 2.8 cm)
= πr + 2.8
= \(\frac{22}{7}\) × 1.4 + 2.8
= 22 × 0.2 + 2.8
= 4.4 + 2.8
= 7.2 cm
अत: कुल दूरी = 7.2 cm ………(i)

(b) चीटी बिन्दु A से चलकर B,C, D से होकर A पर आवेगी ।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -7
अत: चीटी द्वारा तय की गई दूरी = आयताकार तीन भुजाओं का योग + अर्द्धवृत्त की परिधि
= (1.5+2.8+ 1.5) + πr
= 5.8 + \(\frac{22}{7}\) × 1.4
= 5.8 + 22 × 0.2
= 5.8 + 4.4
∴ कुल दूरी = 10.2 cm …………. (ii)

(c) चीटी द्वारा चली गई दूरी = 2 + 2 + अर्द्धवत्त की परिधि चींटी द्वारा चली गई दूरी
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 11 क्षेत्रमिति Ex 11.1 -8
= 4 + πr
= 4+ \(\frac{22}{7}\) × 1.4
= 4 + 22 × 0.2
= 4 + 4.4 = 8.4 cm …………. (iii)
अत: समीकरण (i), (i) तथा (iii) की तुलना करने पर-
समी. (ii) के चित्र (b) (भोज्य पदार्थ के टुकड़े) के चक्कर लगने में सबसे अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी और वह दूरी = 10.2 cm है।

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित युग्मों में प्रत्येक के व्यंजकों का गुणन कीजिए
(i) 4p, q + r
(ii) ab, a – b
(iii) a + b, 7a2b2
(iv) a2 – 9, 4a
(v) pq + qr + rp, 0.
हल:
(i) 4p, q + r
गुणनफल = 4p × (q+ r)
= 4p × q + 4p × r
= 4pq + 4pr

(ii) ab, a – b
गुणनफल = ab × (a – b)
= (ab × a) – (ab × b)
= a2b – ab2.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

(iii) a + b, 7a2b2
गुणनफल = (a + b) × (7a2b2)
= 7a2b2 + 7a2b3.

(iv) a2 – 9, 4a
गुणनफल = 4a × (az – 9)
= (4a × a2) – (4a × 9)
= 4a3 – 36a.

(v) pq + qr + rp, 0.
गुणनफल = 0 × (pq – qr + rp)
= 0

प्रश्न 2.
सारणी पूर्ण कीजिए-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 -1
हल:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 -2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

प्रश्न 3.
गुणनफल ज्ञात कीजिए
(i) (a2) × (2a22) × (4a26)
(ii) (\(\frac{2}{3}\)xy) × (\(-\frac{9}{10}\)x2y2
(iii) (\(\frac{-10}{3}\)pq3) × (\(\frac{6}{5}\)p3q)
(iv) x × x2 × x3 × x4
हल:
(i) (a2) × (2a22) × (4a26)
गुणनफल = (1 × 2 × 4) × (a2 × a22 × a26)
= (1 × 2 × 4) × (a2+22+26)
= 8(a50)

(ii) (\(\frac{2}{3}\)xy) × (\(\frac{-9}{10}\)x2y2)
गुणनफल = (\(\frac{2}{3}\) × \(\frac{-9}{10}\)) × (xy × x2y2)
= \(\frac{-18}{30}\) × x3y3
= \(\frac{-3}{5}\) × x3y3

(iii) (\(\frac{-10}{3}\)pq3) × (\(\frac{6}{5}\)p3q)
गुणनफल = (\(\frac{-10}{3}\) × \(\frac{6}{5}\))(pq3 × p3q)
= \(\frac{-60}{15}\) × p4q4
= -4 p4q4

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

(iv) x × x2 × x3 × x4
गुणनफल = x.x2.x3.x4
= x1+2+3+4
= x10.

प्रश्न 4.
(a) 3x (4x – 5) + 3 को सरल कीजिए और
(i) x = 3 एवं
(ii) x = \(\frac{1}{2}\) के लिए इसका मान ज्ञात कीजिए।

(b) (a2 + a + 1) + 5 को सरल कीजिए और
(i) a = 0
(ii) a = 1
(iii) a = -1 के लिए इसका मान ज्ञात कीजिएं।
हल:
(a) 3x (4x – 5) + 3 = 12x2 – 15x + 3

(i) x = 3 रेखने पर-
12 × (3)2 – 15 × 3 + 3
= 12 × 9 – 45 + 3
= 108 – 45 – 3
= 66.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

(ii) x = \(\frac{1}{2}\) रेखने पर-
12x2 – 15x + 3
= 12 (\(\left(\frac{1}{2}\right)^{2}\))2 – 15 × \(\frac{1}{2}\) + 3
= 12 × \(\frac{1}{4}\) – \(\frac{15}{2}\) + 3
= 3 – \(\frac{15}{2}\) + 3
= 6 – \(\frac{15}{2}\)
= \(\frac{12-15}{2}\)
= \(\frac{-3}{2}\)

(b) a(a2 + a + 1) + 5
= a3 + a2 + a + 5

(i) a = 0 रेखने पर-
a3 + a2 + a + 5 = (0)3 + (0)2 + 0 + 5
= 5.

(ii) a = 1 रेखने पर-
a3 + a2 + a + 5 = (1)3 + (1)2 + 1 + 5
= 1 + 1 + 1 + 5
= 8.

(iii) a = -1 रेखने पर-
a3 + a2 + a + 5 = (-1)3 + (-1)2 + (-1) + 5
= -1 + 1 – 1 + 5
= 6 – 2
= 4

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

प्रश्न 5.
(a) p (p – q), q(q – r) एवं r(r – p) को जोड़िए।
(b) 2x (z – x – y) एवं 2y (x – y – x) को जोडिए।
(c) 4l (10n – 3m + 2) में से 3l(l – 4m + 5n) को घटाइए।
(d) 4c (- a + b + c) में से 3a (a + b + c) – 2b (a – b + c) को घटाइए।
हल:
(a) p (p – q) = p2 – pq
q(q – r) = q2 – qr
r(r – p) = r2 – rp
इन तीनों पदों को निम्न प्रकार जोड़ेंगे –
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 -3

(b) 2x (z – x – y) = 2xz – 2x2 – 2xy
2y (x – y – x) = 2yz – 2y2 – 2xy
योग
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 -4

(c) 4l (10n – 3m + 2) = 40ln – 12lm + 8l2
तथा 3l(l – 4m + 5n) = 3l2 – 12lm + 15ln
प्रश्नानुसार, घटाने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 -5

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3

(d) 4c (- a + b + c) = -4ca + 4bc + 4c2
तथा 3a (a + b + c) – 2b (a – b + c) = 3a2 + 3ab + 3ac – (2ab + 2b2 – 2bc)
= 3a2 + 3ab + 3ac – 2ab + 2b2 – 2bc
= 3a2 + ab + 3ca + 2b2 – 2bc
प्रश्नानुसार, घटाने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.3 -6

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित एकपदी युग्मों का गुणनफल ज्ञात कीजिए-
(i) 4, 7p
(ii) -4p, 7p
(iii) -4p, 7pq
(iv) 4p3, -3p
(v) 4p, 0.
हल:
(i) 4 × 7p = (4 × 7) × p
= 28p.

(ii) -4p × 7p = (-4 × 7) × (p × p)
= -28p2.

(iii) -4p × 7pq = (-4 × 7) × (p × pq).
= -28p2q.

(iv) 4p3, -3p = [(4) × (-3)] × (p3 × p)
= -12 p4.

(v) 4p × 0 = (4 × 0) × p = 0 × p = 0.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2

प्रश्न 2.
निम्नलिखित एकपदी युग्मों के रूप में लम्बाई एवं चौड़ाई रखने वाले आयतों का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए
(p, q); (10m, 5n); (20x2, 5y2); (4x, 3x2); (3mn, 4np)
हल :
हम जानते हैं कि-
आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2 -1

प्रश्न 3.
गुणनफलों की सारणी को पूरा कीजिए-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2 -2
हल:
पूर्ण तालिका निम्न प्रकार है
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2 -3

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2

प्रश्न 4.
ऐसे आयताकार बक्सों का आयतन ज्ञात कीजिए जिनकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमशः निम्नलिखित है
(i) 5a, 3a2, 7a4,
(ii) 2p, 4p, 8r,
(iii) xy, 2x2y, 2xy2,
(iv) a, 2b, 3c.
हल:
आयताकार बक्से का आयतन = लम्बाई × चौड़ाई × ऊँचाई

(i) आयतन = 5a × 3a2 × 7a4
= (5 × 3 × 7) × (a × a2 × a4)
= 105a7

(ii) आयतन = 2p × 4q × 8r
= (2 × 4 × 8) × (p ×q × r)
= 64 pqr

(iii) आयतन = xy × 2x2y × 2xy2
= (1 × 2 × 2) × (xy × x2y × xy2)
= 4x4y4.

(iv) आयतन = a × 2b × 3c
= (1 × 2 × 3) (a × b × c)
= 6abc.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2

प्रश्न 5.
निम्नलिखित का गुणनफल ज्ञात कीजिए
(i) xy, yz, zx
(ii) a, -a2, a3
(iii) 2, 4y, 8y2, 16y3
(iv) a, 2b, 3c, 6abc
(v) m, -mn, mnp.
हल:
(i) xy, yz, zx
गुणनफल = xy × yz × zx
= (x.x) × (y.y) × (z.z)
= x2y2z2.

(ii) a, -a2, a3
गुणनफल = a × (-a2) × (a3)
= -a6.

(iii) 2 × 4y × 8y2 × 16y3
= (2 × 4 × 8 × 16) × (y × y2 × y3)
= 1024 y6.

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 9 बीजीय व्यंजक एवं सर्वसमिकाएँ Ex 9.2

(iv) a, 2b, 3c, 6abc
गुणनफल = a × 2b × 3c × 6abc
= (1 × 2 × 3 × 6) × (a x b × c × abc)
= 36a2b2c2.

(v) m, -mn, mnp.
गुणनफल = mx (-mn) × mnp
= -m3n2p.

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HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

Haryana State Board HBSE 12th Class Sanskrit Solutions व्याकरणम् Pathit Avbodhanam पठित-अवबोधनम् Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

(क) श्लोकस्य हिन्दीभाषायां व्याख्या

अधोलिखितश्लोकस्य हिन्दीभाषायां व्याख्या कार्या

1. अधोलिखितश्लोकस्य हिन्दीभाषया सरलार्थं कार्यम्
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥

प्रसंग-प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘शाश्वती द्वितीयो भागः’ के ‘कर्मगौरवम्’ नामक पाठ से लिया गया है। यह श्लोक महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ‘श्रीमदभगवद्गीता’ से संकलित है। इसमें कर्म के गौरव को प्रतिपादित किया गया है।

सरलार्थ-हे अर्जुन! बुद्धियुक्त अर्थात् समत्व बुद्धि को प्राप्त मनुष्य, इस संसार में पुण्य और पाप दोनों प्रकार के कार्यों में आसक्ति को छोड़ देता है। इसलिए तू समत्व योग के लिए प्रयत्न कर । कर्मों में कुशलता का नाम ही योग (अनासक्तिनिष्काम योग) है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

2. तं भूपतिर्भासुरहेमराशिं लब्धं कुबेरादभियास्यमानात्।
दिदेश कौत्साय समस्तमेव पादं सुमेरोरिव वज्रभिन्नम्॥

व्याख्या-प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘रघुकौत्ससंवाद:’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘रघुवंशमहाकाव्यम्’ के पञ्चम सर्ग से सम्पादित किया गया है। प्रस्तुत श्लोक में वर्णन किया गया है कि कुबेर ने राजा रघु के आक्रमण के भय से उसके खजाने को सुवर्ण मुद्राओं से भर दिया।

राजा रघु ने आक्रमण किए जाने वाले कुबेर से प्राप्त, वज्र के द्वारा टुकड़े किए गए सुमेरु पर्वत के चतुर्थ भाग के समान प्रतीत हो रही, उन चमकती हुई समस्त सुवर्ण मुद्राओं को कौत्स के लिए दे दिया।

भावार्थ यह है कि कुबेर ने रघु के आक्रमण के भय से उसके खजाने को सुवर्ण मुद्राओं से भर दिया। वे सुवर्ण मुद्राएँ परिमाण में इतनी अधिक थी कि ऐसा लगता था मानो सुमेरु पर्वत को ही वज्र से काटकर उसका चौथा हिस्सा खजाने में रख दिया। महाराज रघु ने कुबेर से प्राप्त हुई सभी सुवर्ण मुद्राएँ याचक कौत्स को प्रदान कर दी अर्थात् चौदह करोड़ ही न देकर पूरा खजाना ही कौत्स को सौंप दिया।

3. तथेति तस्यावितथं प्रतीतः प्रत्यग्रहीत्सङ्गममग्रजन्मा।
गामात्तसारां रघुरप्यवेक्ष्य निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कुबेरात्॥

व्याख्या- प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘रघुकौत्ससंवादः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘रघुवंशमहाकाव्यम्’ के पञ्चम सर्ग से सम्पादित किया गया है। प्रस्तुत श्लोक में वर्णन किया गया है कि राजा रघु ने कौत्स की याचना को पूर्ण करने के लिए धन के स्वामी कुबेर पर आक्रमण कर उसका धन हरण कर लेने की इच्छा की।

ब्राह्मण कौत्स ने प्रसन्न होकर उस राजा रघु के सत्यवचन / प्रतिज्ञा को ‘ठीक है’ यह कहकर स्वीकार किया। रघु ने भी पृथिवी को प्राप्तधन वाली देखकर कुबेर से धन छीन लेने की इच्छा की।

भावार्थ यह है कि याचक कौत्स और दाता रघु दोनों को परस्पर विश्वास है। कौत्स ने रघु के वचनों को सत्य प्रतिज्ञा के रूप में ग्रहण किया। रघु ने कौत्स की याचना के पूर्ण करने हेतु धन के स्वामी कुबेर पर आक्रमण कर उसका धन हरण कर लेने की इच्छा की।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

4. निर्बन्धसञ्जातरुषार्थकार्यमचिन्तयित्वा गुरुणाहमुक्तः।
वित्तस्य विद्यापरिसंख्यया मे कोटीश्चतस्रो दश चाहरेति॥

व्याख्या-प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘रघुकौत्ससंवादः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘रघुवंशमहाकाव्यम्’ के पञ्चम सर्ग से सम्पादित किया गया है। प्रस्तुत श्लोक में ऋषि वरतन्तु ने शिष्य कौत्स को चौदह करोड़ सुवर्ण मुद्राएँ गुरुदक्षिणा में समर्पित करने का आदेश दिया है।

कौत्स महाराज रघु से शेष वृत्तान्त निवेदन करते हुए कहता है-“मेरे बार-बार प्रार्थना (जिद्द) करने से क्रोधित हुए गुरु जी ने मेरी निर्धनता का विचार किए बिना मुझे कहा कि चौदह विद्याओं की संख्या के अनुसार तुम चौदह करोड़ सुवर्ण मुद्राएँ ले आओ।”

भावार्थ यह है कि गुरुदेव वरतन्तु को न धन का लोभ था, न विद्या का अभिमान। परन्तु शिष्य कौत्स की बार-बार जिद्द ने उन्हें क्रोधित कर दिया और उन्होंने कौत्स को पढ़ाई गई चौदह विद्याओं के प्रतिफल में चौदह करोड़ सुवर्ण मुद्राएँ गुरुदक्षिणा में समर्पित करने का आदेश दे दिया।

5. अन्धन्तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते।
ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायां रताः॥

प्रसंगः-प्रस्तुत मन्त्र हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘विद्ययाऽ-मृतमश्नुते’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ ‘ईशोपनिषद्’ से संकलित है। इस मन्त्र में बताया गया है कि केवल अविद्या = भौतिक विद्या अथवा केवल विद्या = अध्यात्म विद्या में लगे रहना अन्धकार में पड़े रहने के समान है।

व्याख्या-जो लोग केवल अविद्या अर्थात् भौतिक साधनों की प्राप्ति कराने वाले ज्ञान की उपासना करते हैं, वे घोर अन्धकार में प्रवेश करते हैं। परन्तु उनसे भी अधिक घोर अन्धकारमय जीवन उन लोगों का होता है, जो केवल विद्या अर्थात् अध्यात्म ज्ञान प्राप्त करने में ही लगे रहते हैं।

अविद्या और विद्या वेद के विशिष्ट शब्द हैं। ‘अविद्या’ से तात्पर्य है शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायता करने वाला ज्ञान। ‘विद्या’ का अर्थ है, आत्मा के रहस्य को प्रकट करने वाला अध्यात्म ज्ञान। वेद मन्त्र का तात्पर्य है कि यदि व्यक्ति केवल भौतिक साधनों को जुटाने का ज्ञान ही प्राप्त करता है और ‘आत्मा’ के स्वरूपज्ञान को भूल जाता है तो बहुत बड़ा अज्ञान है, उसका जीवन अन्धकारमय है। परन्तु जो व्यक्ति केवल अध्यात्म ज्ञान में ही मस्त रहता है, उसकी दुर्दशा तो भौतिक ज्ञान वाले से भी अधिक दयनीय होती है। क्योंकि भौतिक साधनों के अभाव में शरीर की रक्षा भी कठिन हो जाएगी। अतः वेदमन्त्र का स्पष्ट संकेत है कि भौतिक ज्ञान तथा अध्यात्म ज्ञान से युक्त सन्तुलित जीवन ही सफल और आनन्दित जीवन है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

6. स्वायत्तमेकान्तगुणं विधात्रा विनिर्मितं छादनमज्ञतायाः।
विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितानाम्॥

प्रसंग-प्रस्तुत पद्य ‘सूक्ति-सुधा’ नामक पाठ से संगृहीत है। इस पद्य के रचयिता महाकवि भर्तृहरि हैं। इस पद्य में मौन का महत्त्व बताया गया है।
व्याख्या-विधाता ने स्वतन्त्र, अद्वितीय गुण वाला, अज्ञान को ढकने वाला मौन नामक गुण बनाया है। विशेष रूप से विद्वानों की सभा में तो यह मौन मूों का आभूषण बन जाता है।

“एक चुप सो सुख’ हिन्दी की इस कहावत का मूल भाव इस पद्य में है। यह मौन अद्वितीय विशेषताओं वाला है। यह अज्ञान को ढक देता है। विद्वानों की सभा में यदि कोई मूर्ख मनुष्य बैठा हो और वह वहाँ बैठकर चुप रहे तब यह मौन उस मूर्ख का आभूषण बन जाता है और दूसरे लोग इस चुप रहने वाले मूर्ख को विद्वान् ही समझते हैं।

7. विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह।
अविद्यया मृत्यु तीा विद्ययाऽमृतमश्नुते॥

प्रसंग-प्रस्तुत मन्त्र हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ ‘ईशोपनिषद्’ से संकलित है। इस मन्त्र में अध्यात्मज्ञान तथा व्यावहारिक ज्ञान द्वारा सन्तुलित जीवन यापन करने का आदेश दिया है।

व्याख्या-जो मनुष्य विद्या अर्थात् अध्यात्मज्ञान तथा अविद्या अर्थात् अध्यात्म ज्ञान से भिन्न सभी प्रकार का व्यावहारिक ज्ञान, दोनों को एक साथ जानता है। वह व्यावहारिक ज्ञान द्वारा मृत्यु को पारकर अध्यात्म ज्ञान द्वारा जन्ममृत्यु के दुःख से रहित अमरत्व को प्राप्त करता है।

‘विद्या’ और ‘अविद्या’-ये दोनों शब्द विशिष्ट वैदिक प्रयोग हैं। ‘विद्या’ शब्द का प्रयोग यहाँ ‘अध्यात्म ज्ञान’ के अर्थ में हुआ है। इस जड़-चेतन जगत् में सर्वत्र व्याप्त परमात्मा तथा शरीर में व्याप्त जीवात्मा के ज्ञान को अध्यात्म ज्ञान कहा जाता है। यह मोक्षदायी यथार्थ ज्ञान ही ‘विद्या’ है। इससे भिन्न सभी प्रकार के ज्ञान को ‘अविद्या’ नाम दिया गया है।

अध्यात्म ज्ञान से भिन्न सृष्टिविज्ञान, यज्ञविज्ञान, भौतिकविज्ञान, आयुर्विज्ञान, गणितविज्ञान, अर्थशास्त्र, प्रौद्योगिकी, सूचनातन्त्र आदि सभी प्रकार का ज्ञान ‘अविद्या’ शब्द में समाहित हो जाता है। यह अध्यात्मेतर ज्ञान मनुष्य को मृत्यु दुःख से छुड़वाता है और इसी अध्यात्म ज्ञान द्वारा मनुष्य फिर अमरत्व अर्थात् मोक्ष को प्राप्त कर लेता है, जन्म-मरण के चक्र से छूट जाता है। इस प्रकार यह दोनों प्रकार का ज्ञान ही मनुष्य के लिए आवश्यक है, तभी वह इहलोक तथा परलोक दोनों को सिद्ध कर सकता है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

8. तमध्वरे विश्वजिति क्षितीशं निःशेषविश्राणितकोषजातम्।
उपात्तविद्यो गुरुदक्षिणार्थी कौत्सः प्रपेदे वरतन्तुशिष्यः॥

प्रसंग-प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘रघुकौत्ससंवादः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह श्लोक महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘रघुवंशमहाकाव्यम्’ के पञ्चम सर्ग से सम्पादित किया गया है। यह श्लोक ऋषि वरतन्तु के शिष्य कौत्स तथा महाराजा रघु के बीच हुए संवाद का अंश है।

व्याख्या-‘विश्वजित्’ नामक यज्ञ में अपनी सम्पूर्ण धनराशि दान कर चुके उस राजा रघु के पास वरतन्तु ऋषि का विद्यासम्पन्न शिष्य कौत्स गुरुदक्षिणा देने की इच्छा से धनयाचना करने के लिए पहुँचा।।

प्राचीन काल में राजा लोग ‘विश्वजित्’ यज्ञ करते थे। राजा रघु ने भी यह यज्ञ किया और अपना सम्पूर्ण खजाना (राजकोष-धनधान्य) दान कर दिया। तभी वरतन्तु का शिष्य कौत्स भी राजा के पास इस आशा में पहुँचा कि वह अपने गुरु को गुरुदक्षिणा में देने के लिए चौदह करोड़ स्वर्णमुद्राएँ राजा रघु से माँग लेगा।

9. न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥

प्रसंग-प्रस्तुत पद्य हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘कर्मगौरवम्’ नामक पाठ से लिया गया है। यह श्लोक महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ से संकलित है। इसमें कर्म के गौरव को प्रतिपादित किया गया है।

व्याख्या-हे अर्जुन ! कोई भी पुरुष कभी भी थोड़ी देर के लिए भी, बिना कर्म किए नहीं रहता है। नि:संदेह सब लोग प्रकृति से उत्पन्न हुए (स्वभाव अनुसार) गुणों द्वारा विवश होकर कर्म करते हैं।

कर्म करना मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। जब मनुष्य शरीर से कर्म नहीं करता, निठल्ला पड़ा रहता है, तब भी वह मन से तो कार्य करता ही है। अतः पूर्ण चेतना से निष्काम कर्म ही करना चाहिए। निठल्ले कभी नहीं रहना चाहिए।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

(ख) गद्यांशस्य हिन्दीभाषायां व्याख्या
अधोलिखित गद्यांशस्य हिन्दीभाषायां व्याख्या कार्या

1. राजवचनमनुगच्छति जनो भयात्।उपदिश्यमानमपि ते न शृणवन्ति।
अवधीरयन्तः खेदयन्ति हितोपदेशदायिनो गुरून्।

व्याख्या-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक ‘शाश्वती’ द्वितीयो भागः’ के शुकनासो पदेश: नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। प्रस्तुत अंश में मन्त्री शुकनास युवराज चन्द्रापीड को उपदेश करते हुए कहते हैं कि- हे राजकुमार चन्द्रापीड, लोग प्रायः भय के कारण राजा के वचनों का ही अनुसरण करते हैं। उपदेश देते हुए (विद्वान्) को भी वे सुनते नहीं हैं। हितकारी उपदेश करने वाले गुरुओं का तिरस्कार करते हुए उन्हें खिन्न कर देते हैं।

2. यौवनारम्भे च प्रायः शास्त्रजलप्रक्षालन-निर्मलापि
कालुष्यमुपयाति बुद्धिः। नाशयति च पुरुषमत्यासङ्गो विषयेषु।

व्याख्या-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक शाश्वती द्वितीयो भाग का ‘शुकनासो पदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की सुप्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। प्रस्तुत अंश में मन्त्री शुकनास युवराज चन्द्रापीड को उपदेश देते हुए कहते हैं कि-युवावस्था के आरम्भ में मनुष्य की बुद्धि शास्त्ररूपी जल में घुलने के कारण स्वच्छ होती हुई भी प्रायः दोषपूर्ण हो जाती है और विषयों में अति आसक्ति मनुष्य का विनाश कर देती है।

3. तदतिकुटिलचेष्टादारुणे राज्यतन्त्रे, अस्मिन् महामोहकारिणि च यौवने कुमार। तथा प्रयतेथाः यथा नोपहस्यसे जनैः, न निन्द्यसे साधुभिः, न धिविक्रयसे गुरुभिः, नोपालभ्यसे सुहृद्भिः, न वञ्च्यसे धूतैः।

व्याख्या-प्रस्तुत पाठ्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘शुकनाशोपदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। प्रस्तुत अंश में मन्त्री शुकनास युवराज चन्द्रापीड को उपदेश करते हुए कहते हैं कि हे राजकमार चन्द्रापीड ! इसीलिए अत्यन्त कुटिल चेष्टाओं से युक्त इस कठोर राज्यतन्त्र में और इस महामूर्छा पैदा करने वाली युवावस्था में तुम वैसा प्रयत्न करना जिससे तुम जनता की हँसी के पात्र न बनो। सज्जन तुम्हारी निन्दा न करें। गुरु लोग तुम्हें धिक्कार न कहें। मित्र लोग तुम्हें उपालम्भ (लाम्भा, उलाहना) न दें। धूर्त तुम्हें ठग न सकें। अर्थात् तुम राजसुख में डूब कर अपने कर्तव्य से कभी विमुख मत होना।

4. अपरे तु स्वार्थनिपादनपरैः दोषानपि गुणपक्षमध्यारोपयद्भिः प्रतारणकुशलैयूं तैः प्रतार्यमाणा वित्तमदमत्तचित्ता सर्वजनोपहास्यतामुपयान्ति। न मानयन्ति मान्यान्, जरावैक्लव्यप्रलपितमिति पश्यन्ति वृद्धोपदेशम्।

व्याख्या-प्रस्तुत पाठ्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘शुकनाशोपदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। प्रस्तुत अंश में मन्त्री शुकनास युवराज चन्द्रापीड को उपदेश करते हुए कहते हैं कि हे राजकमार चन्द्रापीड ! कुछ राजा लोग तो स्वार्थ सिद्ध करने में तत्पर, दोषों में गुणों को आरोपित करने वाले, ठग-विद्या में अतिनिपुण, धूर्तबुद्धि लोगों के द्वारा ठगे जाते हुए धन के मद से उन्मत्त चित्त वाले होकर सब लोगों की हँसी के पात्र बनते हैं। वे मानवीय लोगों का सम्मान नहीं करते। वृद्धों के उपदेश को, यह मानकर देखते हैं कि यह तो उनका बुढ़ापे में बड़बड़ाना है।
भाव यह है कि राजा को अपने विवेक से ही प्रजा के हित में कार्य करने चाहिए तथा स्वार्थी मन्त्रियों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

5. गर्भेश्वरत्वमभिनवयौवनत्वम् अप्रतिमरूपत्वममानुषंशक्तित्वञ्चेति महतीयं खल्वनर्थपरम्परा। यौवनारम्भे घ प्रायः शास्त्रजलप्रक्षालननिर्मलापि कालुष्यमुपयाति बुद्धिः। नाशयति च पुरुषमत्यासङ्गो विषयेषु।

व्याख्या-प्रस्तुत पाठ्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘शुकनाशोपदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। प्रस्तुत अंश में मन्त्री शुकनास युवराज चन्द्रापीड को उपदेश करते हुए अनर्थ के चार कारणों की ओर ध्यान दिला रहे हैं। मन्त्री शुकनास कहते हैं कि अनर्थ की परम्परा के चार कारण हैं
(i) जन्म से ही प्रभुता
(ii) नया यौवन
(iii) अति सुन्दर रूप
(iv) अमानुषी शक्ति।
इन चारों में से मनुष्य का विनाश करने के लिए कोई एक कारण भी पर्याप्त होता है। जिसके जीवन में ये चारों ही कारण उपस्थित हों, उसके बिनाश को कौन रोक सकता है ? इसीलिए प्रत्येक मनुष्य को घोर अनर्थ से बचने के लिए उक्त चारों वस्तुएँ पाकर से कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। युवावस्था के प्रारम्भ में मनुष्य की बुद्धि शास्त्ररूपी जल से धुलने के कारण स्वच्छ होती हुई भी प्राय: दोषपूर्ण हो जाती है। और विषयों में अति आसक्ति मनुष्य का विनाश कर देती है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

6. एवं समतिक्रामत्सु दिवसेषु राजा चन्द्रापीडस्य यौवराज्याभिषेकं चिकीर्षुः प्रतीहारानुपकरण सम्भारसंग्रहार्थमादिदेश। समुपस्थितयौवराज्याभिषेकं च तं कदाचिद् दर्शनार्थमागतमारूढविनयमपि विनीततरमिच्छन् कर्तुं शुकनासः सविस्तरमुवाच।

प्रसंग-प्रस्तुत पाठ्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘शुकनाशोपदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। इस पाठ में राजा तारापीड का अनुभवी मन्त्री राजकुमार चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व हितैषी भाव से उपदेश देते हैं। वे उसे युवावस्था में रूप, यौवन, प्रभुता तथा ऐश्वर्य से उत्पन्न होने वाले स्वाभाविक दोषों के विषय में सावधान कर देना अपना कर्तव्य समझते हैं।

व्याख्या-इस प्रकार कुछ दिन बीत जाने पर राजा तारापीड ने राजकुमार चन्द्रापीड को राजतिलक करने की इच्छा से द्वारपालों को आवश्यक सामग्री-समूह के संग्रह करने के लिए आदेश दिया। जिसके राजतिलक समय निकट ही आ चुका था, जो कदाचित् मन्त्री शुकनास का दर्शन करने के लिए आया था-ऐसे उस विनयसम्पन्न (विशेष नीति से युक्त) राजकुमार चन्द्रापीड को और भी अधिक विनयवान् बनाने की इच्छा वाले शुकनास ने विस्तारपूर्वक कहा।

7 भवादृशा एव भवन्ति भाजनान्युपदेशानाम्। अपगतमले हि मनसि विशन्ति सुखेनोपदेशगुणाः। हरति अतिमलिनमपि दोषजातं गुरूपदेशः गुरूपदेशश्च नाम अखिलमलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्। विशेषेण तु राज्ञाम्। विरला हि तेषामुपदेष्टारः।

प्रसंग-प्रस्तुत पाठ्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘शुकनाशोपदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। इस पाठ में राजा तारापीड का अनुभवी मन्त्री राजकुमार चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व हितैषी भाव से उपदेश देते हैं। वे उसे युवावस्था में रूप, यौवन, प्रभुता तथा ऐश्वर्य से उत्पन्न होने वाले स्वाभाविक दोषों के विषय में सावधान कर देना अपना कर्तव्य समझते हैं।

व्याख्या-मन्त्री शुकनास राजकुमार चन्द्रापीड से कहते हैं-हे बेटा, चन्द्रापीड! आप जैसे व्यक्ति ही उपदेशों के पात्र होते हैं। निर्दोष मन में ही उपदेश के गुण सुखपूर्वक प्रवेश करते हैं। गुरु का उपदेश अत्यन्त मलिन दोषसमूह को भी दूर कर देता है। गुरु का उपदेश सम्पूर्ण मलों को धोने में समर्थ जलरहित स्नान है। (अर्थात् जैसे पानी से स्नान करने पर बाहर के सब मैल धुल जाते हैं, वैसे ही गुरु के उपदेश से सब आन्तरिक दोष दूर हो जाते हैं।) ये उपदेश राजाओं के लिए तो विशेष रूप से लाभकारी होते है; क्योंकि उन्हें उपदेश देने वाले बहुत कम लोग होते हैं।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

8. आलोकयतु तावत् कल्याणाभिनिवेशी लक्ष्मीमेव प्रथमम्। न ह्येवं-विधमपरिचितमिह जगति किञ्चिदस्ति यथेयमनार्या। लब्धापि खलु दुःखेन परिपाल्यते। परिपालितापि प्रपलायते। न परिचयं रक्षति। नाभिजनमीक्षते। न रूपमालोकयते। न कुलक्रममनुवर्तते। न शीलं पश्यति। न वैदग्ध्यं गणयति। न श्रुतमाकर्णयति। न धर्ममनुरुध्यते। न त्यागमाद्रियते।

प्रसंग-प्रस्तुत पाठ्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘शुकनाशोपदेशः’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना ‘कादम्बरी’ से सम्पादित है। इस पाठ में राजा तारापीड का अनुभवी मन्त्री राजकुमार चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व हितैषी भाव से उपदेश देते हैं। वे उसे युवावस्था में रूप, यौवन, प्रभुता तथा ऐश्वर्य से उत्पन्न होने वाले स्वाभाविक दोषों के विषय में सावधान कर देना अपना कर्तव्य समझते हैं।

व्याख्या-हे चन्द्रापीड ! तुम कल्याण (मंगल) के लिए प्रयत्नशील हो, इसलिए पहले लक्ष्मी को ही विचार कर देखो। इस जैसी अपरिचित इस संसार में अन्य कोई वस्तु नहीं जैसी यह अनार्या लक्ष्मी है। इस लक्ष्मी को प्राप्त कर लेने पर भी, इसका महाकष्ट से पालन (रक्षण) करना पड़ता है और यह लक्ष्मी न परिचय की परवाह करती है, न कुलीन की ओर देखती है, न सौन्दर्य (रूप) को देखती है, न कुल-परम्परा का अनुगमन करती है। न सच्चरित्र को देखती है, न कुशलता (पाण्डित्य) की परवाह करती है। न शास्त्रज्ञान को सुनती है, न धर्म से रोकी जाती है, न त्याग (दान) को आदर देती है।

9. जनकः अये, शिष्टानध्याय इत्यस्खलितं खेलतां वटूनां कोलाहलः।
कौसल्याः सुलभसौख्यमिदानी बालत्वं भवति।
अहो, एतेषां मध्ये क एष रामभद्रस्य मुग्धललितैरङ्गैर्दारकोऽस्माकं लोचने
शीतलयति ?

प्रसंग-प्रस्तुत अंश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘बालकौतुकम्’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् नाटककार भवभूति के प्रसिद्ध नाटक ‘उत्तररामचरितम्’ के चतुर्थ अंक से सम्पादित किया गया है।

व्याख्या-वाल्मीकि आश्रम में अतिथि के रूप में, राजा जनक, महारानी कौशल्या तथा वशिष्ठ की पत्नी अरुन्धति आए हैं। वे आश्रम में बालकों के क्रीड़ा कौतूहल को देख रहे हैं। उन बालकों में सीता का पुत्र लव भी है, जिसका उन्हें पता नहीं है। यह अंश उनके वार्तालाप का ही है।

जनक कौशल्या से कहते हैं-अरे, बड़े लोगों के आने पर पढ़ाई में अवकाश होने के कारण, बेरोकटोक खेलते हुए छात्र-ब्रह्मचारियों का यह शोर है अर्थात् छुट्टी होने के कारण, सभी ब्रह्मचारी अनियन्त्रित होकर खेल रहे हैं।

कौसल्या जनकसे कहती हैं-इस बचपन में सुख सुलभ होता है अर्थात् बाल्यकाल में क्रीड़ा आदि सामान्य साधनों से ही सुख मिल जाता है। ओह, इन बालकों के बीच में यह कौन बालक, रामचन्द्र के समान सुन्दर और कोमल अंगों से हमारी आँखों को ठण्डा कर रहा है अर्थात् बाल्यावस्था में जैसा सुन्दर और कोमल रामभद्र था, वैसी ही आकृति वाला यह कौन बालक हमें आनन्द दे रहा है ?

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

10. लवः (प्रविश्य, स्वगतम्) अविज्ञातवय:-क्रमौचित्यात् पूज्यानपि सतः कथमभिवादयिष्ये ? (विचिन्त्य) अयं पुनरविरुद्धप्रकार इति वृद्धेभ्यः श्रूयते। (सविनयमुपसृत्य) एष वो लवस्य शिरसा प्रणामपर्यायः।

प्रसंग-प्रस्तुत अंश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘बालकौतुकम्’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ संस्कृत के महान् नाटककार भवभूति के प्रसिद्ध नाटक ‘उत्तररामचरितम्’ के चतुर्थ अंक से सम्पादित किया गया है।

व्याख्या-वाल्मीकि आश्रम में अतिथि के रूप में, राजा जनक, महारानी कौशल्या तथा वशिष्ठ की पत्नी अरुन्धति आए हैं। वे आश्रम में बालकों के क्रीड़ा कौतूहल को देख रहे हैं। उन बालकों में सीता का पुत्र लव भी है, जिसका उन्हें पता नहीं है। यह अंश उनके वार्तालाप का ही है।

लव प्रवेश करके अपने मन में ही कहता है-आयु क्रम अर्थात् आयु में छोटे-बड़े का क्रम और उचितता का ज्ञान न होने से, पूजनीय होते हुए भी इनको मैं कैसे प्रणाम करूँ अर्थात् इनमें कौन वयोवृद्ध है और किसे प्रथम प्रणाम करना चाहिए ? यह मैं नहीं जानता, तो इन्हें कैसे प्रणाम करूँ? (सोच विचारकर) यह प्रणाम की विरोधहीन पद्धति है। ऐसा गुरुजनों से सुना जाता है। विनयपूर्वक राजा जनक तथा महारानी कौशल्या के पास जाकर कहता है कि यह आपको ‘लव’ का औचित्य क्रम के अनुसार प्रणाम है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

(ग) पद्यांशं/पठित्वा-आधारितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि

अधोलिखितश्लोकं पठित्वा एतदाधारितानाम् प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतपूर्णवाक्येन लिखत
1. कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः|
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे।
प्रश्ना:
(क) शतं समाः कथं जिजीविषेत् ?
(ख) अस्ति’ इति पदस्य कः पदपरिचयः ?
उत्तराणि
(क) शतं समाः कर्माणि कुर्वन् एव जिजी विषेत।
(ख) ‘अस्ति’ इतिपदस्य पद परिचयः-अस्धातु लटलकार प्रथमपुरुष एकवचने।

2. अन्धन्तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते।
ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायां रताः।
प्रश्ना:
(क) के अन्धन्तमः प्रविशन्ति ?
(ख) ‘विद्यायाम्’ इति पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च ?
उत्तराणि
(क) येऽविद्यामुपासते ते अन्धन्तमः प्रविशन्ति।।
(ख) ‘विद्यायाम्’ इति पदे – ‘विद्या’ शब्दः, ‘सप्तमी’ विभक्तिश्च ।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

3. विपदि धैर्यमथाभ्युदये क्षमा सदसि वाक्पटुता युधि विक्रमः।
यशसि चाभिरुचिर्व्यसनं श्रुतौ प्रकृतिसिद्धमिदं हि महात्मनाम्।।
प्रश्नाः
(क) महात्मनाम् प्रकृतिसिद्धं किं भवति ?
(ख) ‘यशसि’ इति पदे का विभक्तिः कः शब्दश्च ?
उत्तराणि
(क) विपदि धैर्यम् महात्मनाम् प्रकृतिसिद्धं भवति ।
(ख) ‘यशसि’ इति पदे – ‘यशस्’ शब्दः, ‘सप्तमी’ विभक्तिश्च ।

4. स्वायत्तमेकान्तगुणं विधात्रा विनिर्मितं छादनमज्ञतायाः।
विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितानाम्॥
प्रश्नाः
(क) अपण्डितानां विभूषणं किम् ?
(ख) ‘विधात्रा’ – इति पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च ?
उत्तराणि
(क) अपण्डितानां विभूषणं मौनम् ।
(ख) ‘विधात्रा’ – इति पदे – ‘विधातृ’ शब्दः, ‘तृतीया’ विभक्तिश्च ।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

5. ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्।
(क) जगत्सर्वं कीदृशम् अस्ति?
(ख) सर्वम्’ इति पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च ?
उत्तराणि:
(क) जगत्सर्वम् ईशावास्यम् अस्ति।
(ख) ‘सर्वम्’ – सर्व शब्दः प्रथमा विभक्तिश्च।

6. तदन्यतस्तावदनन्यकार्यो गुर्वर्थमाहर्तुमहं यतिस्ये।
स्वस्त्यस्तु ते निर्गलिताम्बुग) शरद्घनं नादति चातकोऽपि।
(क) चातकोऽपि कं न याचते ?
(ख) अहम्’ इति पदे का विभक्तिः किं वचनञ्च ?
उत्तराणि
(क) चातकोऽपि शरद्घनं न याचते।
(ख) ‘अहम्’ – प्रथमा विभक्तिः एकवचनञ्च।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

7. कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे।
(क) शतं समाः कथं जिजीविषेत् ?
(ख) त्वयि’ पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च ?
उत्तराणि
(क) शतं समाः कर्माणि कुर्वन् एव जिजीविषेत् ।
(ख) ‘त्वयि’ – युष्मद् शब्दः सप्तमी विभक्तिश्च। ।

8. बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥
(क) बुद्धियुक्तः के जहाति?
(ख) तस्मात्’ इति पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च?
उत्तराणि
(क) बुद्धियुक्तः सुकृतदुष्कृते जहाति।
(ख) ‘तस्मात्’ – तद् शब्द: पञ्चमी विभक्तिश्च।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

9. पापान्निवारयति योजयते हिताय गुह्यं निगृहति गुणान् प्रकटीकरोति।
आपद्गतं च न जहाति ददाति काले सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः॥
(क) सन्मित्रं कस्मात् निवारयति ?
(ख) कः गुणान् प्रकटीकरोति ?
उत्तराणि
(क) सन्मित्रं पापात् निवारयति।
(ख) सन्मित्रं गुणान् प्रकटीकरोति ।

10. केयूराणि न भूषयन्ति पुरुषं द्वारा न चन्द्रोण्वलाः
न स्नानं न विलेपनं न कुसुमं नालंकृता मूर्धजाः।
वाण्येका समलंकरोति पुरुषं या संस्कृता धार्यते
क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्॥
(क) पुरुषं का एका समलङ्करोति ?
(ख) कीदृशं भूषणं न क्षीयते ?
उत्तराणि
(क) एका संस्कृता वाणी पुरुषं समलङ्करोति ।
(ख) वाग्भूषणं न क्षीयते।

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11. सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥
(क) परमापदां पदं कः ?
(ख) सम्पदः कं वृणते ?
उत्तराणि
(क) परमापदां पदम् अविवेकः ।
(ख) सम्पदः विमृश्यकारिणं वृणते।

12. कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
लोकसंग्रहमेवापि संपश्यन्कर्तुमर्हसि।।
(क) जनकादयः केन सिद्धिम् आस्थिता ?
(ख) संपश्यन् किम् कर्तुम् अर्हसि ?
उत्तराणि
(क) जनकादयः कर्मणा सिद्धिम् आस्थिताः ।
(ख) लोसंग्रहं पश्यन् कर्म कर्तुम् अर्हसि।

(घ) पठित गद्यांश पर आधारित प्रश्नोत्तर
अधोलिखित गद्यांशं पठित्वा एतदाधारितानाम् प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतपूर्णवाक्येन लिखत

1. कदाचित् कदाचित्त्वयं क्रूरः ‘किन्तुः’मुखस्य कवलमप्याच्छिनत्ति।स्वल्पदिनानामेव वर्तास्ति।आयुर्वेदमार्तण्डस्य श्रीमतः स्वामिमहाभगस्य औषधिं निषेव्य अधुनैवाहं नीरोगोऽभवम्।
प्रश्ना:
(क) ‘किन्तुः’ कं आच्छिनत्ति ?
(ख) कस्य औषधि निषेव्य अधुनैवाह नीरोगोऽभवम् ?
उत्तराणि:
(क) ‘किन्तुः’ मुखस्य कवलमपि आच्छिन्नत्ति।
(ख) श्रीमतः स्वामिमहाभागस्य औषधिं निषेव्य अघुनैवाहं निरोगोऽभवत्।

2. अहं देशसेवां कर्तुं गृहान बहिरभवम्। मया निश्चितमासीत् ‘एतावन्ति दिनानि स्वोदरसेवायै क्लिष्टोऽभवम्। इदानीं कियन्तं कालं देशसेवायामपि लक्ष्यं ददामि।
प्रश्ना:
(क) किमर्थं बहिरभवम् ?
(ख) किमर्थं क्लिष्टोऽभवम् ?
उत्तराणि
(क) देशसेवां कर्तुं बहिरभवम्।
(ख) स्वोदरसेवायै क्लिष्टोऽभवम्।

3. मनुष्याणां हिंसावृत्तिस्तु निरवधिः । पशुहत्या तु तेषाम् आक्रीडनम्। केवलं विक्लान्तचित्तविनोदाय महारण्यम् उपगम्य ते यथेच्छं निर्दयं च पशुघातं कुर्वन्ति।
प्रश्ना:
(क) हिंसावृत्तिः कीदृशी ?
(ख) तेषाम् आक्रीडनं का ?
उत्तराणि
(क) हिंसावृत्तिः निरवधिः।
(ख) तेषाम् आक्रीडनं पशुहत्या।

4. एवं चतुर्णां परस्परं विवादो लग्नः। ततो ब्राह्मणो राजसमीपमागत्य चतुर्णां विवादवृत्तान्तमकथयत्। राजापि तच्छ्रुत्वा तस्मै ब्राह्मणाय चत्वार्यपि रत्नानि ददौ।
प्रश्नाः
(क) केषां विवादो लग्न: ?
(ख) रत्नानि कः ददौ ?
उत्तराणि
(क) चतुर्णां विवादो लग्नः।
(ख) रत्नानि राजा ददौ।

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5. अस्माभिः पर्वताः शंकवः कृताः। एतेषां सप्तद्वीपानां प्रत्येकमावेष्टनरूपाः सप्तसमुद्राः।
(क) सप्तसमुद्राः केषाम् आवेष्टनरूपाः सन्ति ?
(ख) ‘अस्माभिः’ इति पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च ?
उत्तराणि
(क) सप्तसमुद्राः सप्तद्वीपानाम् आवेष्टनरूपाः सन्ति।
(ख) ‘अस्माभिः’ – अस्मद् शब्दः तृतीया विभक्तिश्च ।

6. इत्येवं विचार्य सर्वस्वदक्षिणं यज्ञं कर्तुमुपक्रान्तवान्। ततः शिल्पिभिरतीव मनोहरो मण्डपः कारितः। सर्वापि यज्ञसामग्री समहता। देवमुनिगन्धर्वयक्षसिद्धादयश्च समाहूताः।
(क) यज्ञे के के समाहूताः ?
(ख) सर्वा इति पदे कः शब्दः का विभक्तिश्च ?
उत्तराणि
(क) यज्ञे देवमुनिगन्धर्वयक्षसिद्धादयश्च समाहूताः ।
(ख) सर्वा – सर्व शब्दः प्रथमा विभक्तिश्च ।

7. श्रीनायारस्य दायित्वग्रहणस्य एकमासाभ्यन्तरे बहुदिनेभ्यः स्थगितानां विविधसमस्यानामपि समाधानं जातम्। स्वकार्यं त्यक्त्वा अपरस्य सहकारस्तस्य परमधर्मः।
(क) श्रीनायारस्य परमधर्मः कः आसीत् ?
(ख) ‘तस्य’ इति पदे का विभक्तिः किं वचनञ्च ?
उत्तराणि
(क) श्रीनायारस्य परमधर्मः अपरस्य सहकारः आसीत् ।
(ख) ‘तस्य’ – षष्ठी विभक्तिः एकवचनञ्च ।

8. मनुष्याणां हिंसावृत्तिस्तु निरवधिः। पशुहत्या तु तेषाम् आक्रीडनम्। केवलं विक्लान्तचित्तविनोदाय महारण्यम् उपगम्य ते यथेच्छं निर्दयं च पशुघातं कुर्वन्ति।
(क) पशुहत्या केषाम् आक्रीडनम्?
(ख) ‘ते’ इति पदे का विभक्तिः किं वचनञ्च ?
उत्तराणि
(क) पशुहत्या मनुष्याणाम् आक्रीडनम्।
(ख) ‘ते’ – प्रथमा विभक्तिः बहुवचनञ्च ।

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9. श्रीनायारस्य दायित्वग्रहणस्य एकमासाभ्यन्तरे बहुदिनेभ्यः स्थगितानां विविध-समस्यानामपि समाधानं जातम्। स्वकार्यं त्यक्त्वा अपरस्य सहकारस्तस्य परमधर्मः।
(क) अयं गद्यांशः कस्मात् पाठात् सङ्कलितः ?
(ख) श्रीनायारस्य परमधर्मः कः?
उत्तराणि
(क) अयं गद्यांशः दीनबन्धुः श्रीनायारः’ इति पाठात् सङ्कलितः ।
(ख) श्रीनायारस्य परमधर्मः अपरस्य सहकारः।

10. मासोऽयमाषाढः, अस्ति च सायं समयः, अस्तं जिगमिषुर्भगवान् भास्करः सिन्दूर-द्रव-स्नातानामिव वरुणदिगवलम्बिनामरुण-वारिवाहानामभ्यन्तरं प्रविष्टः।
(क) अयं गद्यांशः कस्मात् पाठात् संकलितः ?
(ख) सायं समये भगवान् भास्करः कुत्र जिगमिषुः भवति?
उत्तराणि
(क) अयं गद्यांश: ‘कार्यं वा साधयेयं देहं वा पातयेयम्’ इति पाठात् संकलितः?
(ख) सायं समये भगवान् भास्करः कुत्र जिगमिषुः भवति?

11. तस्मै राज्ञे व्याया) रत्नचतुष्टयं दास्यामि। एतेषां महात्म्यम्-एक रत्तं यद्वस्तु स्मर्यते तद्ददाति। द्वितीयरत्नेन भोजनादिकममृततुल्यमुत्पद्यते। तृतीयरत्नाच्चतुरङ्गबलं भवति। चतुर्थादत्लादिव्याभरणानि जायन्ते।
(क) अयं गद्यांशः कस्मात् पाठात् संकलित:?
(ख) चतुर्थाद् रत्नात् कानि जायन्ते ?
उत्तराणि
(क) अयं गद्यांश: ‘विक्रमस्यौदार्यम्’ इति पाठात् संकलितः।
(ख) चतुर्थाद् रत्नात् दिव्याभरणानि जायन्ते। …

12. अहो असारोऽयं संसारः, कदा कस्य किं भविष्यतीति न ज्ञायते। यच्चोपार्जितानां वित्तं तदपि दानभोगैर्विना सफलं न भवति।
(क) अयं संसारः कीदृशः ?
(ख) दानभोगैर्विना किं सफलं न भवति ?
उत्तराणि
(क) अयं संसारः असारः।
(ख) दानभोगै विना उपार्जितानां वित्तं सफलं न भवति।

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(ङ) सूक्तीनां हिन्दीभाषायां व्याख्या

1. कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेत् शतं समाः।
(मनुष्य इस संसार में कर्तव्य कर्म करता हुआ ही सौ वर्षों तक जीने की इच्छा करे) एवं त्वमि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे। (मनुष्य में कर्मों का लेप नहीं होता है, इसे छोड़कर कोई दूसरा रास्ता नहीं है।)

प्रसंग:-प्रस्तुत मन्त्रांश ‘ईशावास्योपनिषद्’ से संगृहीत ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ पाठ के दूसरे मन्त्र से लिया गया है। इसमें बताया गया है कि निष्काम कर्म बन्धन का कारण नहीं होते।

भावार्थ:-मन्त्रांश का अर्थ है-‘मनुष्य में कर्मों का लेप नहीं होता है’, इसे छोड़कर कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वे कौन से कर्म हैं, उन कर्मों की क्या विधि है, जिनसे कर्म मनुष्य के बन्धन का कारण नहीं बनते। पूरे मन्त्र में इस भाव . को अच्छी प्रकार स्पष्ट किया गया है। मन्त्र में कहा गया है कि मनुष्य अपनी पूर्ण इच्छाशक्ति से जीवन भर कर्म करे, निठल्ला-कर्महीन-अकर्मण्य बिल्कुल न रहे, पुरुषार्थी बने। जिन पदार्थों को पाने के लिए हम कर्म करते हैं, उनका वास्तविक स्वामी सर्वव्यापक ईश्वर है। वही प्रतिक्षण हमारे अच्छे बुरे कर्मों को देखता हैं। अतः यदि मनुष्य पदार्थों के ग्रहण में त्याग भाव रखते हुए, ईश्वर को सर्वव्यापक समझते हुए कर्तव्य भाव से (अनासक्त भाव से) कर्म करता है तो ऐसे निष्काम कर्म मनुष्य को सांसारिक बन्धन में नहीं डालते अपितु उसे जीवन्मुक्त बना देते हैं।

2. अविद्यया मृत्युं तीा विद्ययाऽमृतमश्नुते।
प्रसंग:-प्रस्तुत मन्त्रांश ‘ईशोवास्य-उपनिषद्’ से संकलित ‘विद्ययाऽमृतमश्नुते’ नामक पाठ में संगृहीत मन्त्र से उद्धृत है। इस मन्त्रांश में व्यावहारिक ज्ञान द्वारा मृत्यु को जीतकर अध्यात्म ज्ञान द्वारा अमरत्व प्राप्ति का रहस्य उद्घाटित किया गया है।

भावार्थ:-‘विद्या’ और ‘अविद्या’-ये दोनों शब्द विशिष्ट वैदिक प्रयोग हैं। ‘विद्या’ शब्द का प्रयोग यहाँ ‘अध्यात्म ज्ञान’ के अर्थ में हुआ है। इस जड़-चेतन जगत् में सर्वत्र व्याप्त परमात्मा तथा शरीर में व्याप्त जीवात्मा के ज्ञान को अध्यात्म ज्ञान कहा जाता है। यह मोक्षदायी यथार्थ ज्ञान ही ‘विद्या’ है। इससे भिन्न सभी प्रकार के ज्ञान को ‘अविद्या’ नाम दिया गया है। अध्यात्म ज्ञान से भिन्न सृष्टिविज्ञान, यज्ञविज्ञान, भौतिकविज्ञान, आयुर्विज्ञान, गणितविज्ञान, अर्थशास्त्र, प्रौद्योगिकी, सूचनातन्त्र आदि सभी प्रकार का ज्ञान ‘अविद्या’ शब्द में समाहित हो जाता है। यह अध्यात्मेतर ज्ञान मनुष्य को मृत्यु दुःख से छुड़वाता है और इसी अध्यात्म ज्ञान द्वारा मनुष्य फिर अमरत्व अर्थात् मोक्ष को प्राप्त कर लेता है, जन्ममरण के चक्र से छूट जाता है। इस प्रकार यह दोनों प्रकार का ज्ञान ही मनुष्य के लिए आवश्यक है, तभी वह इहलोक तथा परलोक दोनों को सिद्ध कर सकता है।

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3 कोटीश्चतस्त्रो दश चाहर।
प्रसंग:-प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ से ‘रघुकौत्ससंवादः’ नामक पाठ से ली गई है। यह पाठ कविकुलशिरोमणि महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘रघुवंशमहाकाव्यम्’ के पञ्चम सर्ग में से सम्पादित किया गया है। इसमें महर्षि वरतन्तु के शिष्य कौत्स का गुरुदक्षिणा के लिए आग्रह, बार-बार के आग्रह से क्रोधित ऋषि द्वारा पढ़ाई गई चौदह विद्याओं की संख्या के अनुरूप चौदह करोड़ मुद्राएँ देने का आदेश, सर्वस्वदान कर चुके राजा रघु से कौत्स की धनयाचना ‘रघु के द्वार से’ याचक खाली हाथ लौट गया-इस अपकीर्ति के भय से रघु का कुबेर पर आक्रमण का विचार तथा भयभीत कुबेर द्वारा रघु के खजाने में धन वर्षा करने को संवाद रूप में वर्णित किया गया है।

भावार्थ:-महर्षि वरतन्तु मन्त्रद्रष्टा ऋषि थे। न उनमें विद्या का अभिमान था, न गुरुदक्षिणा में धन का लोभ । कौत्स नामक एक शिष्य ने ऋषि से चौदह विद्याएँ अत्यन्त भक्ति भाव से ग्रहण की। विद्याप्राप्ति के पश्चात् कौत्स ने गुरुदक्षिणा स्वीकार करने का आग्रह किया। ऋषि ने कौत्स के भक्तिभाव को ही गुरुदक्षिणा मान लिया। परन्तु कौत्स गुरुदक्षिणा देने के लिए जिद्द करता रहता रहा और इस जिद्द से रुष्ट होकर कवि ने उसे पढ़ाई गई एक विद्या के लिए एक करोड़ सुवर्णमुद्राओं के हिसाब से चौदह करोड़ सुवर्ण मुद्राएँ भेंट करने का आदेश दे दिया-‘कोटीश्चतस्रो दश चाहर’।

4.
(i) मा भूत्परीवादनवावतारः।
(किसी निन्दा का नया प्रादुर्भाव न हो जाए।)
(ii) द्वित्राण्यहान्यर्हसि सोढुमर्हन्।
(हे पूजनीय ! दो-तीन तक आप मेरे पास ठहर जाएँ।)
(iii) निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कुबेरात्।
(रघु ने कुबेर से धन ग्रहण करने की इच्छा की।)
(iv) दिदेश कौत्साय समस्तमेव।
(रघु ने कुबेर से प्राप्त सारा धन कौत्स के लिए दे दिया।)
उत्तरम्:
(i), (ii), (iii) तथा (iv) के लिए संयुक्त भावार्थ

भावार्थ:-महर्षि वरतन्तु का शिष्य कौत्स राजा रघु के पास गुरुदक्षिणार्थ धन याचना के लिए आता है। रघु विश्वजित् यज्ञ में सर्वस्व दान कर चुके हैं, अत: वे सुवर्णपात्र के स्थान पर मिट्टी के पात्र में जल आदि लेकर कौत्स का स्वागत करते हैं। कौत्स मिट्टी का पात्र देखकर अपने मनोरथ की पूर्ति में हताश हो जाता है और वापस लौटने लगता है। राजा रघु खाली हाथ लौटते हुए कौत्स को रोकते हैं क्योंकि सम्मानित व्यक्ति के लिए अपयश मृत्यु से बढ़कर होता है अत: उन्हें भय यह है कि कहीं प्रजा में यह निन्दा न फैल जाए कि कोई याचक रघु के पास आया था और खाली हाथ लौट गया था। वे कौत्स से उसका मनोरथ पूछते हैं।

कौत्स सारा वृत्तान्त सुनाते हुए कहता है कि गुरु के आदेश के अनुसार चौदह करोड़ सुवर्ण मुद्राएँ गुरुदक्षिणा में भेंट करनी हैं। रघु कौत्स से दो-तीन के लिए आदरणीय अतिथि के रूप में ठहरने का अग्रह करते हैं, जिससे उचित धन का प्रबन्ध किया जा सके। कौत्स राजा की प्रतिज्ञा को सत्य मानकर ठहर जाता है। रघु भी उसकी याचना पूर्ति के लिए धन के स्वामी कुबेर पर आक्रमण, का विचार करते हैं। कुबेर रघु के पराक्रम से भयभीत होकर रघु के खजाने में सुवर्ण वृष्टि कर देते हैं। उदार रघु यह सारा धन कौत्स को दे देते हैं, परन्तु निर्लोभी कौत्स उनमें से केवल 14 करोड़ सुवर्ण मुद्राएँ लेकर लौट जाता है।

दाता सम्पूर्ण धनराशि देकर अपनी उदारता प्रकट करते हैं और याचक आवश्यकता से अधिक एक कौड़ी भी ग्रहण न करके उत्तम याचक का आदर्श उपस्थित करते हैं। इस प्रकार दोनों ही यशस्वी हो जाते हैं।

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5. सर्वक्षत्रपरिभावी महान् उत्कर्षनिकषः।
प्रसंग:- प्रस्तुत पंक्ति ‘बालकौतुकम्’ पाठ से संकलित है। वाल्मीकि आश्रम में ‘लव’ के साथ ब्रह्मचारी-सहपाठी खेल रहे हैं। इसी समय कुछ बटुगण आकर, लव को आश्रम के निकट अश्वमेध घोड़े की सूचना देते हैं। यह अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा रक्षकों से घिरा हुआ है। लव उस अश्वमेध यज्ञ के महत्त्व को अपने मन में विचार करता हुआ कहता है

भावार्थ:-यह अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा है । यह क्षत्रियों की शक्ति का सूचक होता है। क्षत्रिय राजा, अपने बलवान् शत्रु राजा पर अपनी विजय की धाक जमाने के लिए इसे छोड़ता है। वास्तव में यह घोड़ा सभी शत्रुओं पर प्रभाव डालने वाले उत्कर्ष श्रेष्ठपन का सूचक होता है।

6. सुलभं सौख्यम् इदानीं बालत्वं भवति।
प्रसंग:-प्रस्तुत पंक्ति ‘बालकौतुकम्’ पाठ से उद्धृत है। वाल्मीकि आश्रम में अतिथि के रूप में जनक, कौशल्या और अरुन्धती आए हुए हैं। उनके आने से आश्रम में अवकाश कर दिया गया है और सभी छात्रगण खेलते हुए शोर मचा रहे हैं। इस शोर को सुनकर, कौशल्या जनक को बता रही हैं

भावार्थ:-बाल्यकाल में सुख के साधन सुलभ होते हैं। बच्चों को मजा लेने के लिए किसी खिलौने आदि की आवश्यकता नहीं होती। वे तो साधारण से खेल-कूद और हँसी-मजाक द्वारा ही सुख प्राप्त कर लेते हैं। सुख प्राप्ति के लिए उन्हें बड़े बहुमूल्य क्रीडा-साधनों की आवश्यकता नहीं होती। ये ब्रह्मचारी अपने बचपन का आनन्द ले रहे हैं।

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7. योगः कर्मसु कौशलम्
भावार्थ:- यह सूक्ति कर्मगौरवम्’ पाठ से ली गई है। गीता की इस सूक्ति में कहा गया है कि जो कार्य लोकहित की दृष्टि से किया जाता है तथा पूरी निष्ठा से किया जाता है, वही सही कर्म है, यही कर्मों की कुशलता है तथा यही योग है। प्रत्येक कार्य को अनासक्तेिभावना से तथा पूरी तत्परता से करना ही योग है।

8. विशेषतः सर्वविदां समाजे विभूषणं मौनमपण्डितानाम्।
(समाज में मौन मूरों का आभूषण बन जाता है)
भावार्थ:-प्रस्तुत पंक्ति कवि भर्तृहरि द्वारा रचित ‘नीतिशतकम्’ से ली गई है। इसमें मौन के महत्त्व के बारे में बताया गया है लोग प्रायः आवश्यक्ता से अधिक बोलकर न केवल गंभीर से गंभीर बात का महत्त्व कम कर देते हैं अपितु कई बार तो उपहास का पात्र भी बन जाते हैं। हिन्दी में एक कहावत प्रसिद्ध है। ‘एक चुप सौ सुख’ ये कहावत

भी मौन के महत्त्व को दर्शाती है। विद्वानों की सभा में यदि कोई मूर्ख बैठा हो और कुछ भी न बोले तो लोग उसे विद्वान् ही समझते हैं। इस तरह से उस मूर्ख का मौन रहना उसका आभूषण बन जाता है। परन्तु जैसे ही वह मूर्ख अपना मौन तोड़कर कुछ बात कहेगा तो उसकी मूर्खता उजागर हो जाएगी। इसीलिए तो मौन को मूों का आभूषण कहा गया है।

9. हरति अतिमलिनमपि दोषजातं गुरूपदेशः।
भावार्थ:–प्रस्तुत पंक्ति शुकनासोपदेश नामक पाठ से ली गई है। यह पाठ संस्कृत के महान् गद्यकार बाणभट्ट द्वारा रचित कादम्बरी से लिया गया है। प्रस्तुत पंक्ति में शुकनास युवराज चन्द्रापीड को गुरु के उपदेश का महत्त्व समझा रहे हैं। मन्त्री शुकनास कहते हैं कि गुरु का उपदेश मनुष्य के जीवन में बहुत अधिक उपयोगी तथा हितकारी होता है। मनुष्य में यदि अत्यधिक गहरे दोषों का समूह हो तो गुरु का उपदेश उन गहरे से गहरे दोषों को भी दूर कर देता है और उन दोषों के स्थान पर अति उत्तम गुण प्रवेश कर जाते हैं। मनुष्य का जीवन उज्वल हो जाता है। सब जगह ऐसे व्यक्ति का यश फैलता है, इसीलिए गुरु का उपदेश प्रत्येक मनुष्य के लिए परम कल्याणकारी तथा आवश्यक है।

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10. सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
अथवा
वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः॥

प्रसंग:-प्रस्तुत पद्य ‘सूक्ति-सुधा’ नामक पाठ से उद्धृत है। इसके रचयिता महाकवि भारवि हैं। कवि ने इस श्लोक में सोच-विचार कर ही कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।

भावार्थ:-मनुष्यों को अचानक ही (बिना सोचे-विचारे) कोई कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि विवेकहीनता घोर विपत्तियों का स्थान होती है। सम्पत्तियाँ गुणों की लोभी होती हैं; अतः सोच-विचार कर कार्य करने वाले मनुष्य को वे स्वयं ही चुन लेती है।

‘बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताए’ हिन्दी की इस कहावत का मूल भाव इस सूक्ति में है। मनुष्य को सोचविचार कर ही प्रत्येक कार्य करना चाहिए। बिना सोचे-समझे कार्य करने से घोर विपत्तियों का सामना करना पड़ता है। मनुष्य सम्पत्ति पाने के लिए कार्य करता है, सम्पत्तियाँ गुणों के पीछे चलती हैं । गुणवान् मनुष्य विवेकपूर्वक कार्य करता है और सम्पत्तियाँ भी ऐसे विचारशील मनुष्य के पास स्वयं दौड़कर चली आती हैं।

11. ‘पश्येह मधुकरीणां सञ्चितमर्थं हरन्त्यन्ये’
(देखो, इस संसार में मधुमक्खियों के एकत्रित शहद को दूसरे लोग चुरा कर ले जाते हैं।

व्याख्या-प्रस्तुत पंक्ति ‘विक्रमस्यौदार्यम्’ नामक पाठ से उधत है। यह पाठ ‘सिंहासनद्वात्रिशशिंका’ नामक कथासंग्रह से संकलित है। इस पाठ में राजा विक्रम की उदारता को दर्शाया गया है। राजा विक्रम की मान्यता है कि व्यक्ति के पास जो भी धन होता है, यदि उसकी सच्चे अर्थों में रक्षा करनी हो तो उसका एक ही उपाय है कि परोपकार के कार्यों के लिए उस धन का त्याग अर्थात् दान कर देना चाहिए। क्योंकि संसार में देखा जाता है कि जो लोग धन को केवल इकट्ठा ही करते हैं उसका दान या भोग नहीं करते उनका धन या तो तिजौरियों में ही नष्ट हो जाता है, या उसे चोर आदि चुरा ले जाते हैं। मधुमक्खियाँ अपने छत्तों में शहद इकट्ठा करती हैं, न वे किसी को देती हैं और न स्वयं ही उसका भोग करती हैं। इस शहद को पाने के लिए दूसरे लोग आकर मक्खियों को उड़ा देते हैं और सारा शहद चुरा कर ले जाते हैं। अतः सञ्चित धन का सदुपयोग उस धन का परोपकार के कार्यों में खर्च कर देना ही है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

12. तटाकोदरसंस्थानां परीवाह इवाम्भसाम्।।
उत्तरम्

प्रसंग:-प्रस्तुत पंक्ति विक्रमस्यौदार्यम् नामक पाठ से ली गई है। यह कथा किसी अज्ञात लेखक द्वारा रचित ‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ कथा संग्रह से संकलित है। प्रस्तुत अंश में धन के दान को ही धन का सच्चा संरक्षण कहा गया है।

व्याख्या-मनुष्य जो भी धन अपने परिश्रम से इकट्ठा करता है। उसका संरक्षण खजाना भरकर नहीं हो सकता। अपितु असहायों की सहायता के लिए उस धन को दान कर देना ही उसकी सच्ची रक्षा है। तालाब में जल भरा होता है यदि वह जल तालाब में ही पड़ा रहे और किसी के काम न आएँ तो वह जल व्यर्थ है अपितु तालाब में ही पड़ेपड़े वह जल दुर्गन्धयुक्त हो जाता है, इसीलिए तालाब के जल को बाहर निकाल दिया जाता है, नया जल आ जाता है और उसका पानी उपयोगी बना रहता है। इसी प्रकार धन का दान करना ही धन का सच्चा उपयोग है।

13. षड्विधं प्रीतिलक्षणम्।
उत्तरम्:
प्रसंगः-प्रस्तुत पङ्क्ति ‘विक्रमस्यौदार्यम्’ नामक पाठ से ली गई है। यह कथा किसी अज्ञात लेखक द्वारा रचित ‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ कथासंग्रह से संकलित है। प्रस्तुत अंश में समुद्र ने ब्राह्मण को मित्रता का लक्षण बताया है।
व्याख्या-सच्ची मित्रता की पहचान के छह सूत्र हैं
1. मित्र मित्र को धन आदि प्रदान करता है।
2. मित्र मित्र से धन आदि स्वीकार करता है।
3. अपनी गोपनीय (छिपाने योग्य) बात मित्र को बताता है।
4. मित्र की गोपनीय बात उससे पूछता है।
5. मित्र के साथ बैठकर भोजन करता है।
6. मित्र को भोजन खिलाता है।
जिन दो मित्रों के बीच उक्त छ: प्रकार के आचरण बिना किसी औपचारिकता के सम्पन्न होते हैं उन्हीं में सच्ची मित्रता समझनी चाहिए।

14. दूरस्थितानां मैत्री नश्यति समीपस्थानां च वर्धते इति न वाच्यम्।
(दूर रहने वालों की मित्रता नष्ट हो जाती है और पास रहने वालों की मित्रता बढ़ती है- यह करना उचित नहीं)
‘यो यस्य मित्रं नहि तस्य दूरम्’
(जो जिसका मित्र होता है, वह दूर होकर भी दूर नहीं होता)
व्याख्या-प्रस्तुत पंक्ति ‘विक्रमस्यौदार्यम्’ नामक पाठ से उदधृत है। यह पाठ ‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ नामक कथासंग्रह से लिया गया है। प्रस्तुत पंक्ति में बताया गया है स्थान सम्बन्धी दूरी मित्रता में बाधक नहीं होती। जो जिसका मित्र होता है, वह दूर होकर भी दूर नहीं होता।

मित्रता के इस रहस्य को हम सरलता से अनुभव कर सकते हैं। बरसात के दिनों में बादल आकाश में गरजते हैं और उसके गर्जन को सुनकर धरती पर बादल के मित्र मोर खुशी से नाचने लगते हैं। इसी प्रकार आकाश में सूर्य उदित होता है। उसके उदय होते ही उसके मित्र कमल सरोवरों में खिल उठते हैं। अतः यह कहना उचित नहीं कि दूर रहने वालों की मित्रता नष्ट हो जाती है और समीप रहने वालों की मित्रता बढ़ती है।

15. ‘अद्यैव परोपकारविचाराणाम् इतिश्रीरभूत्’
(आज ही परोपकार के विचारों की इतिश्री हो गई)

व्याख्या–प्रस्तुत पंक्ति ‘किन्तोः कुटिलता’ नामक पाठ से ली गई है। इस पाठ में लेखक श्री भट्ट मथुरानाथ शास्त्री ने नित्य-प्रति के जीवन में ‘किन्तु’ की कुटिलता पर कठोर व्यंग्य किया है।

एक बार लेखक देशसेवा करने के विचार से घर बाहर चला गया और उसने दृढ़ निश्चय किया कि अपना पेट पालने की स्वार्थवृत्ति से ऊपर उठकर आज से यह जीवन देशसेवा में अर्पित कर दूंगा परन्तु मार्ग में उसके बचपन के अध्यापक मिल गये और उन्होंने लेखक से कहा कि देशसेवा का विचार तो उत्तम है किन्तु अपने घर-परिवार पर भी ध्यान देना चाहिए जिनके भरण-पोषण का भार तुम पर है और इस प्रकार ‘किन्तु’ ने बीच में टपक कर लेखक के परोपकार के विचार की इतिश्री कर दी।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

16. ‘शूरं कृतज्ञं दृढ़साहसं च लक्ष्मी: स्वयं वाञ्छति वासहेतोः
(शूरवीर, कृतज्ञ और दृढ़ साहस रखने वाले मनुष्यों के पास स्वयं ही स्थायी रूप से रहने के लिए आ जाती है)

व्याख्या-प्रस्तुत पंक्ति ‘विक्रमस्यौदार्यम्’ नामक पाठ से ली गई है। यह पाठ ‘सिंहासनद्वात्रिंशिका’ नामक कथा संग्रह से संकलित है। इस पाठ में पुत्तलिका के माध्यम से राजा विक्रम की उदारता और शूरवीरता का वर्णन है।

प्रस्तुत अंश में बताया गया है कि लक्ष्मी कभी भी कृतघ्न, कमज़ोर, कायर या ढुलमुल नीति वाले लोगों के पास नहीं रहती अपितु जो लोग शूरवीर, साहसी दृढनिश्चयी तथा कृतज्ञ होते हैं उन्हीं के पास रहती है। उनके पास रहती ही नहीं है अपितु स्वयं उनके पास रहने के लिए खिंची चली जाती है क्योंकि लक्ष्मी शूरवीरता, साहस, दृढ़निश्चय तथा कृतज्ञता को पसन्द करती है और कायर-डरपोक लोगों से घृणा करती है।

17. ‘श्वापदानां हिंसाकर्म किल जठरानलनिवार्णमात्रप्रयोजकम्’
(पशुओं का हिंसाकर्म केवल अपना पेट भरने के लिए होता है)
व्याख्या-प्रस्तुत पंक्ति ‘उद्भिज्जपरिषद्’ नामक पाठ से ली गई है। इस पाठ में लेखक पं० हृषीकेश भट्टाचार्य ने मनुष्यों की हिंसक प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला है।

सिंह आदि कुछ पशु भी हिंसक होते हैं, परन्तु उनकी हिंसा उनकी पेट पूर्ति तक सीमित रहती है, भूख मिटाने का साधन मात्र है, यही उनकी हिंसा की सीमा है। परन्तु मनुष्यों की हिंसा तो उनके मनोविनोद का साधन है और इस मनोविनोद का कोई अन्त नहीं। अतः वनस्पति सभा के सभापति अवश्त्थ देव (बड़ का वृक्ष) के मल में हिंसा की दृष्टि मनुष्य इस सृष्टि में पशुओं से भी निकृष्ट है। लेखक का तात्पर्य इस निरर्थक पशुहिंसा को रोकने के लिए युवा पीढ़ी को प्रेरित करना है।

18. कार्यं वा साधयेयम्, देहं वा पातयेयम्
उत्तरम्
(कार्य सिद्ध करूँगा या शरीर त्याग दूंगा) प्रस्तुति सूक्ति पं० अम्बिकादत्त व्यास द्वारा रचित ‘शिवराजविजयम्’ नामक संस्कृत के उपन्यास से ली गई है। जिसमें शिवाजी का एक गुप्तचर भारी आंधी-बरसात होने पर शिवाजी के पास पहुँचने के लिए प्रस्तुत सूक्ति द्वारा अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा प्रकट करता है।

भावार्थ-संसार में बिना दृढ़ संकल्प लिए कोई महान् कार्य नहीं किया जा सकता। संकल्प में ही वह शक्ति है, जिसके बल पर एक सैनिक मौत को गले लगा लेता है, साधारण मनुष्य भी तूफान से टक्कर ले लेता है। बिना दृढ़ संकल्प लिए सफलता के ऊँचे आकाश में उन्मुक्त उड़ान नहीं भरी जा सकती। संकल्प ने ही मनुष्य को चाँद पर पहुँचा दिया है। मनुष्य का संकल्प जितना प्रबल होता है, उसकी बुद्धि उतनी ही तीव्रता से काम करने लगती है। प्रभु भी दृढ़ संकल्पी के ही सहायी होते हैं।

शिवाजी के गुप्तचर का भी दृढ़ संकल्प है-‘कार्य की सिद्धि या मौत’। वह इन दोनों में से केवल एक को चुनता है। उसे न आँधी की परवाह है, न तूफानी बरसात की। वह आकाश में चमकती हुई बिजली के प्रकाश में ही अपना रास्ता ढूँढता हुआ घोड़े पर सवार होकर ऊबड़-खाबड़ रास्तों से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ा जा रहा है। एक सच्चे वीर की यही पहचान है। इस दृढ़ संकल्प ने ही शिवाजी के गुप्तचर को उसके लक्ष्य तक पहुंचा दिया था।

19. उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणम्।
उत्तरम्:
(अर्जित धन की रक्षा उस धन के त्याग से ही होती है)

प्रस्तुत पंक्ति ‘विक्रमस्यौदार्यम्’ नामक पाठ से उद्धृत है। यह पाठ ‘सिंहासनद्वात्रिशशिंका’ नामक कथासंग्रह से संकलित है। इस पाठ में राजा विक्रम की उदारता को दर्शाया गया है। राजा विक्रम की मान्यता है कि व्यक्ति के पास जो भी धन होता है, यदि उसकी सच्चे अर्थों में रक्षा करनी हो तो उसका एक ही उपाय है कि परोपकार के कार्यों के लिए उस धन का त्याग अर्थात् दान कर देना चाहिए। क्योंकि परोपकार के कार्यों में जब धन को खर्च कर दिया जाता है तो उससे मनुष्य का यश चारों ओर फैलता है और जिसका यश होता है संसार में वस्तुतः वही मनुष्य युग-युगों तक जीवित रहता है। भामाशाह ने राष्ट्रहित के लिए महाराणा प्रताप को अपना सारा धन दान में दिया था, आज भी लोग धनी और परोपकारी व्यक्ति को ‘भामाशाह’ कहकर पुकारते हैं। सूक्ति का भाव यही है कि धन का वास्तविक उपयोग धन का परोपकार के लिए दान कर देना ही है।

20. ‘उपभोक्तृणामपि अभियोगो नास्ति विभागस्य विपक्षे।
प्रसंगः-प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘दीनबन्धुः श्रीनायार:’ नामक पाठ से ली गई है। यह पाठ उड़िया के प्रख्यात साहित्यकार श्री चन्द्रशेखरदास वर्मा द्वारा रचित ‘पाषाणीकन्या’ नामक कथासंग्रह के संस्कृत अनुवाद से संकलित है। यह संस्कृत अनुवाद डॉ० नारायण दाश ने किया है।

भावार्थ:-प्रस्तुत पंक्ति में दीनबन्धु श्रीनायार की सत्यनिष्ठा एवं कर्तव्यनिष्ठा के फलस्वरूप खाद्य-आपूर्ति विभाग के विरोध में उपभोक्ताओं की ओर से किसी प्रकार के अभियोग न होने का उल्लेख किया गया है।

श्रीनायार एक सत्यनिष्ठ तथा मानवीय संवेदना से ओत-प्रोत कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे। उड़ीसा सरकार के खाद्यआपूर्ति विभाग के सचिव पद को सम्भालते ही इस विभाग का कायाकल्प हो गया। खाद्यान्न में मिलावट या हेरा-फेरी नाममात्र रह गई, अत: श्रीनायार के कार्यकाल में उपभोक्ताओं को विभाग पर किसी प्रकार का अभियोग चलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। श्रीनायार के आने से विभाग की न केवल सक्रियता बढ़ी अपितु ईमानदारी से काम करने का भी वातावरण बना। परिणामतः उपभोक्ता विभाग की कार्यप्रणाली से सन्तुष्ट हुए और कोर्ट-कचहरी के विवादों से विभाग मुक्त हो गया। इस पंक्ति से श्रीनायार की कर्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदारी का संकेत मिलता है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

21. सर्वे अथूलहृदयैः सौप्रस्थानिकी ज्ञापितवन्तः।
प्रसंग-प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती द्वितीयो भागः’ के ‘दीनबन्धुःश्रीनायार:’ नामक पाठ से ली गई है। यह पाठ उड़िया के प्रख्यात साहित्यकार श्री चन्द्रशेखरदास वर्मा द्वारा रचित ‘पाषाणीकन्या’ नामक कथासंग्रह के संस्कृत अनुवाद से संकलित है। यह संस्कृत अनुवाद डॉ० नारायण दाश ने किया है।

भावार्थ:–‘सभी ने आँसु भरे हृदय से श्रीनायार को विदाई दी’ प्रस्तुतपंक्ति का सम्बन्ध श्रीनायार के जीवन के उस क्षण से है, जब केरल राज्य में श्रीनायार द्वारा स्थापित अनाथ आश्रम की संचालिका सुश्री मेरी ने श्रीनायार को एक पत्र लिखा कि अब उनका अन्तिम समय आ चुका है और उन्हें स्वयं यह आश्रम सँभाल लेना चाहिए।

एक दिन श्रीनायार अपने कार्यालय में बैठे एक पत्र पढ़ रहे थे, उनकी आँखों से अश्रुधारा बह रह थी, जिससे पत्र भी भीग चुका था। उसी क्षण श्रीनायार के क्लर्क श्रीदास का प्रवेश हुआ और उन्होंने श्रीदास को कहा कि अब उनका छुट्टी लेकर चले जाने का समय आ गया है। यदि मुझसे कोई रूखा व्यवहार किसी के साथ अनजाने में हुआ हो तो उसके लिए मैं क्षमा चाहता हूँ। श्रीनायार का व्यवहार विभाग के सभी सहकर्मियों के साथ पूर्णतया मानवीय, मित्रतापूर्ण तथा अत्यन्त मधुर था। विभाग के सभी लोग श्रीनायार के स्वभाव और व्यवहार से सन्तुष्ट थे। आज जब श्रीनायार केरल वापस जाने लगे तो सहकर्मियों के हृदय को चोट पहुँची और न चाहते हुए भी उन्हें भीगी पलकों से विदाई की।

इस पंक्ति से विभाग के लोगों का श्रीनायार के प्रति सच्चा आदर-भाव तथा श्रीनायार की सद्-व्यवहारशीलता प्रकट होती है।

22. त्वया निर्मितोऽयं क्षुद्रोऽनाथाश्रमोऽधुना महाद्रुमेण परिणतः।
प्रसंग-प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती द्वितीयो भागः’ के ‘दीनबन्धुःश्रीनायारः’ नामक पाठ से ली गई है। यह पाठ उड़िया के प्रख्यात साहित्यकार श्री चन्द्रशेखरदास वर्मा द्वारा रचित ‘पाषाणीकन्या’ नामक कथासंग्रह के संस्कृत अनुवाद से संकलित है। यह संस्कृत अनुवाद डॉ० नारायण दाश ने किया है।

भावार्थः-प्रस्तुत पंक्ति सुश्री मेरी के उस पत्र की है, जो श्रीनायार के केरल वापस चले जाने के बाद उनके क्लर्क श्रीदास ने खोलकर पढ़ा था।
श्रीनायार ने एक अनाथ आश्रम की स्थापना केरल राज्य में की थी। जिसका संचालन सुश्री मेरी किया करती थी। मेरी अब मृत्यु के निकट थी, अतः उसने श्रीनायार को

स्वयं यह अनाथ आश्रम सँभालने तथा अन्तिम क्षणों में श्रीनायार के दर्शन करने की इच्छा प्रकट की थी। मेरी ने इस पत्र में यह भी बताया था कि यह आश्रम कभी बहुत छोटे रूप में था परन्तु आज यह बहुत बड़े वृक्ष का रूप धारण कर चुका है। अब इसमें सौ से भी अधिक अनाथ शिशु पल रहे हैं। श्रीनायार इसी आश्रम के संचालन के लिए अपने वेतन का आधे से भी अधिक भाग प्रतिमास की एक तारीख को ही मनीआर्डर द्वारा सुश्री मेरी के पास भेज दिया करते थे। इस घटना से श्रीनायार का दीनों के प्रति सच्चा दया-भाव प्रकट होता है। इसीलिए पाठ का नाम भी ‘दीनबन्धु श्रीनायार’ उचित ही दिया गया है।

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

23. मनुष्याणां हिंसावृत्तिस्तु निरवधिः। (मनुष्यों की हिंसावृत्ति की कोई सीमा नहीं) मानवा नाम सृष्टि धारायु निकृष्ट धारासु निकृष्टतम सृष्टिः
(इस सृष्टि मानव नामक दृष्टि सबसे निकट हैं)
उत्तरम्:
प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘शाश्वती-द्वितीयो भागः’ के ‘उद्भिज्ज-परिषद्’ नामक पाठ से लिया गया है। यह पाठ पण्डित हृषीकेश भट्टाचार्य के निबन्धसंग्रह ‘प्रबन्ध-मञ्जरी’ से संकलित है। इस निबन्ध में वृक्षों की सभा के सभापति पीपल ने मनुष्य की हिंसक प्रवृत्ति के प्रति तीखा व्यंग्य-प्रहार किया गया है।

भावार्थ: – हिंसा के दो प्रमुख रूप हैं-
(1) स्वाभाविक भूख की शान्ति के लिए हिंसा
(2) मन बहलाने के लिए हिंसा। मांस मनुष्य का स्वाभाविक भोजन नहीं है।

परन्तु सिंह-व्याघ्र आदि पशुओं का स्वाभाविक भोजन मांस ही है। अतः ऐसे पशुओं को न चाहते हुए भी केवल पेट की भूख शान्त करने हेतु पशुवध करना पड़ता है। परन्तु इन पशुओं की यह विशेषता भी है कि भूख शान्त होने पर पास खड़े हुए हिरण आदि का भी ये वध नहीं करते। पशुओं का पशुवध भूख शान्ति तक ही सीमित होता है। परन्तु मनुष्य की पशुहिंसा असीम है। क्योंकि वह तो अपने बेचैन मन की प्रसन्नता के लिए ही पशुवध करता है। ‘मानव’ नामक सृष्टिः को सबसे निकृष्ट कहा गया है।

(च) कथनानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणम्

1. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) अतिजवेन दूरमतिक्रान्तः स चपलः दृश्यते ?
(ख) कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
उत्तराणि:
(क) केन दूरमतिक्रान्तः स चपलः दृश्यते।
(ख) किं ज्यायो हि अकर्मणः।।

2. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) विस्फारितशरासनाः आयुधीयश्रेणयः कुमारं तर्जयन्ति।
(ख) कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः।
उत्तराणि:
(क) विस्फारितशरासनाः आयुधीय श्रेणयः कं तर्जयन्ति?
(ख) केन हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः ।

3. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क)अश्वमेध इति नाम क्षत्रियाणां महान् उत्कर्षनिकषः।
(ख)बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते।
उत्तराणि:
(क) अश्वमेध इति नाम केषां महान उत्कर्षनिकषः?
(ख) बुद्धियुक्तो जहातीह के सुकृतदुष्कृते?

4. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क)निपुणं निरुध्यमाण: लवः मुखचन्द्रेण सीतया संवदत्येव ।
(ख)नाशयति च पुरुषस्यासङ्गो विषयेषु
उत्तराणि:
(क) निपुणं निरुध्यमाणः लव: मुखचन्द्रेण कया संवदत्येव ?
(ख) नाशयति च पुरुषस्यासङ्गो केषु ?

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

5. रेखांकितपद्माधृत्य प्रश्ननिर्माण कुरुत
(क) शब्दैः प्रतीयते यद् गृहे चौरः अस्ति।
(ख) पशुहत्या तु तेषाम् आक्रीडनम्।
उत्तराणि:
(क) कैः प्रतीयते यद् गृहे चौरः अस्ति?
(ख) का तु तेषाम् आक्रीडनम्?

6. रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) स्वर्गभूमिं कुर्शीति वदन्ति।
(ख) असौ शिववीरचरः निजकार्यात् न विरमति।
उत्तराणि:
(क) कां कुर्शीति वदन्ति?
(ख) असौ शिववीरचरः कस्मात् न विरमति?

7. रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) पृथिव्याः सप्तभेदाः।
(ख) दिदेश कौत्साय समस्तमेव।
उत्तराणि:
(क) कस्याः सप्तभेदाः?
(ख) दिदेश कस्मै समस्तमेव?

8. रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क)निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कुबेरात्
(ख) अतिजवेन दूरमतिक्रान्तः।
उत्तराणि:
(क) निष्क्रष्टुमर्थं चकमे कस्मात्
(ख) कथं दूरमतिक्रान्तः?

9. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) दीर्घग्रीवः स भवति।
(ख) लोक स्तदनुवर्तते।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) कीदृशः स भवति?
(ख) कः तदनुवर्तते?

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

10. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) प्राज्ञः खलु कुमारः।।
(ख) कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) कः खलु कुमारः?
(ख) किं ज्यायो ह्यकर्मणः?

11. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) जीवने नियतं कर्म कुरु।
(ख) लवः मुखचन्द्रेण सीतया संवदत्येव।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) जीवने नियतं किं कुरु?
(ख) लव: मुखचन्द्रेण कया संवदत्येव?

12. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) उत्पथैः मम मनः पारिप्लवं धावति।
(ख) रामभद्रस्य एष दारकः अस्माकं लोचने शीतलयति।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) उत्पथैः कस्य मनः पारिप्लवं धावति ?
(ख) कस्य एष दारक: अस्माकं लोचने शीतलयति ?

13. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य-प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) विस्फारितशरासनाः आयुधीयश्रेणयः कुमारं तर्जयन्ति।
(ख) योगः कर्मसु कौशलम्।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) विस्फारितशरासनाः आयुधीयश्रेणयः कं तर्जयन्ति ?
(ख) कः कर्मसु कौशलम् ?

HBSE 12th Class Sanskrit व्याकरणम् पठित-अवबोधनम्

14. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य-प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) अश्वमेध इति नाम क्षत्रियाणाम् महान् उत्कर्षनिकषः।
(ख) अतिजवेन दूरमतिक्रान्तः स चपलः दृश्यते।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) अश्वमेधः इति नाम केषां महान् उत्कर्षनिकषः ?
(ख) अतिजवेन दूरमतिक्रान्तः सः कीदृशः दृश्यते ?

15. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) तस्याः दार्शनिकैः सप्तधा विभागः कृतः।
(ख) अयं सादी न स्वकार्याद् विरमति।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) तस्याः कैः सप्तधा विभागः कृतः?
(ख) अयं सादी न कस्माद् विरमति?

16. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) सः धनं धनादेशेन प्रेषयति स्म।
(ख) मनुष्याणां हिंसावृत्तिस्तु निरवधिः ।
उत्तराणि:
(प्रश्ननिर्माणम्)
(क) सः धनं केन प्रेषयति स्म?
(ख) केषां हिंसावृत्तिस्तु निरवधिः?

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 119)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित संख्याओं में से प्रत्येक के घन के इकाई का अंक ज्ञात कीजिए
(i) 3331
(ii) 8888
(iii) 149
(iv) 1005
(v) 1024
(vi) 77
(vii) 5022
(viii) 53
हल:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 1

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 119)

प्रश्न 1.
निम्न प्रतिरूप का प्रयोग करते हुए, निम्नलिखित संख्याओं को विषम संख्याओं के योग के रूप में व्यक्त कीजिए
(a) 63
(b) 83
(c) 73
हल:
प्रतिरूप-
1 = 1 = 13
3 + 5 = 8 = 23
7 + 9 + 11 = 27 = 33
13 + 15 + 17 + 19 = 64 = 43
21 + 23 + 25 + 27 + 29 = 125 = 53
हल:
दिए गए प्रतिरूप का प्रयोग करके पर,
(a) 63 = 31 + 33 + 35 + 37 + 39 + 41 = 216
(b) 83 = 57 + 59 + 61 + 63 + 65 + 67+ 69 + 71 = 512
(c) 73 = 43 + 45 + 47 + 49 + 51 + 53 + 55 = 343

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रतिरूप को देखिए
23 – 13 = 1 + 2 × 1 × 3
33 – 23 = 1 + 3 × 2 × 3
43 – 33 = 1 + 4 × 3 × 3
उपरोक्त प्रतिरूप का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिए
(i) 73 – 63
(ii) 123 – 113
(iii) 203 – 193
(iv) 513 – 503
हल:
दिए गए प्रतिरूप का प्रयोग करके
(i) 73 – 63 = 1 + 7 × 6 × 3 = 1 + 126 = 127
(ii) 123 – 113 = 1 + 12 × 11 × 3 = 1 + 396 = 397.
(iii) 203 – 193 = 1 + 20 × 19 × 3 = 1 + 1140 = 1141
(iv) 513 – 503 = 1 + 51 × 50 × 3 = 1 + 7650 = 7651

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

(प्रयास कीजिए – पृष्ठ 120)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौनसी संख्याएँ पूर्ण घन हैं?
(i) 400
(ii) 3375
(iii) 8000
(iv) 15625
(v) 9000
(vi) 6859
(vii) 2025
(viii) 10648
हल:
(i) 400 का अभाज्य गुणनखंड करने पर
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 2
400 = \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × 2 × 5 × 5
चूँकि अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर 2 × 5 × 5 शेष बचते हैं।
अतः 400 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(ii) 3375
3375 का अभाज्य गुणनखंड करने पर
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 3
3375 = \(\underline{3 \times 3 \times 3}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 3375 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 3375 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(iii) 8000
8000 का अभाज्य गुणनखंड करने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 4
8000 = \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 8000 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 8000 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

(iv) 15625
15625 का अभाज्य गुणनखंड करने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 5
15625 = \(\underline{5 \times 5 \times 5}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 15625 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 15625 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(v) 9000
9000 का अभाज्य गुणनखंड करने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 6
9000 = \(\underline{5 \times 5 \times 5}\) × 3 × 3 × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 9000 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर 3 × 5 शेष बचते है।
अतः 9000 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(vi) 6859
6859 का अभाज्य गुणनखंड करने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 7
6859 = \(\underline{19 \times 19 \times 19}\)
चूँकि 6859 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 6859 एक पूर्ण घन संख्या है।

(vii) 2025
2025 का अभाज्य गुणनखंड करने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 8
2025 = \(\underline{3 \times 3 \times 3}\) × 3 × 5 × 5
चूँकि 2025 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 2025 एक पूर्ण घन संख्या है।

(vii) 10648
10648 का अभाज्य गुणनखंड करने पर-
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions 9
10648 = \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{11 \times 11 \times 11}\)
चूँकि गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 10648 एक पूर्ण घन संख्या है।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 7 घन और घनमूल Intext Questions

(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 121)

प्रश्न 1.
जाँच कीजिए कि निम्नलिखित में से कौनसी संख्याएँ पूर्ण घन हैं-
(i) 2700
(ii) 16000
(iii) 64000
(iv) 900
(v) 125000
(vi) 36000
(vii) 21600
(viii) 10000
(ix) 27000000
(x) 1000
इन पूर्ण घनों में आप क्या प्रतिरूप देखते हैं?
हल:
(i) 2700 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
2700 = 2 × 2 × \(\underline{3 \times 3 \times 3}\) × 5 × 5
चूँकि अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर 2 × 2 × 5 × 5 शेष बचते है।
अतः 2700 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(ii) 16000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
16000 = 2 × 2 × 2 × 2 × 10 × 10 × 10
= 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 5 × 5 × 5
= 2 × \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 16000 के अभाज्य गुणनखंडों के त्रिक बनाने पर 2 × 2 × 5 × 5 शेष बचते है।
अतः 16000 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(iii) 64000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
64000 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 5 × 5 × 5
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) ×\(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 64000 के अभाज्य गुणनखंडों त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 64000 एक पूर्ण घन संख्या है।

(iv) 900 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
900 = 9 × 100 = 3 × 3 × 10 × 10
= 3 × 3 × 2 × 5 × 2 × 5
= 2 × 2 × 3 × 3 × 5 × 5
चूँकि 900 के अभाज्य गुणनखंडों कोई त्रिक नहीं बचता है।
अतः 900 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

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(v) 125000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
125000 = 125 × 1000
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 125000 के अभाज्य गुणनखंडों त्रिक बनाने पर कोई भी गुणनखण्ड नहीं बचता है।
अतः 125000 एक पूर्ण घन संख्या है।

(vi) 36000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
36000 = 36 × 1000
= 6 × 6 × 10 × 10 × 10
= 2 × 3 × 2 × 3 × 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × 2 × 2 × 3 × 3 × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 125000 के अभाज्य गुणनखंडों त्रिक बनाने पर 2 × 2 × 3 × 3 शेष बचते है।
अतः 125000 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(vii) 21600 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
21600 = 216 × 100 = 6 × 6 × 6 × 10 × 10
= 2 × 3 × 2 × 3 × 2 × 3 × 2 × 5 × 2 × 5
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × 2 × 2 × \(\underline{3 \times 3 \times 3}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 21600 के अभाज्य गुणनखंडों त्रिक बनाने पर 2 × 2 × 3 × 3 शेष बचते है।
अतः 21600 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

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(viii) 10000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
10000 = 10 × 10 × 10 × 10
= 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × 2 × 2 × \(\underline{3 \times 3 \times 3}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 10000 के अभाज्य गुणनखंडों त्रिक बनाने पर 2 × 2 × 3 × 3 शेष बचते है।
अतः 10000 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है।

(ix) 27000000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
27000000 = 27 × 10 × 10 × 10 × 10 × 10 × 10
= 3 × 3 × 3 × 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{3 \times 3 \times 3}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 27000000 के अभाज्य गुणनखंडों पूर्ण त्रिक बन पर जाते है।
अतः 27000000 एक पूर्ण घन संख्या है।

(x) 1000 के अभाज्य गुणनखण्ड करने पर-
1000 = 10 × 10 × 10
= 2 × 5 × 2 × 5 × 2 × 5
= \(\underline{2 \times 2 \times 2}\) × \(\underline{5 \times 5 \times 5}\)
चूँकि 1000 के अभाज्य गुणनखंडों पूर्ण त्रिक बन पर जाते है।
अतः 1000 एक पूर्ण घन संख्या है।

उपर्युक्त पूर्ण घन संख्याओं 64000, 125000, 27000000 तथा 1000 में हमें यह प्रतिरूप देखने को मिलता है कि इनके अन्त में तीन अथवा छः शून्य हैं। अत: 64,125, 27 तथा 1 भी पूर्ण घन संख्याएँ है।

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(सोचिए, चर्चा कीजिए और लिखिए – पृष्ठ 123)

प्रश्न 1.
बताइए कि सत्य है या असत्य-किसी पूर्णांक m के लिए m2 < m3 होता है। क्यों?
हल:
माना m = 2 या 3 लेने पर
जब m = 2:
m2 = 2 × 2 = 4 और m3 = 22 = 2 × 2 × 2 = 8
स्पष्ट है, 4 < 8 अर्थात् m2 < m3

जब m = 3:
m2 = 32 = 3 × 3 = 9 और m3 = 33 = 3 × 3 × 3 = 27
9 < 27, अर्थात् m2 < m3

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m माना 1 लेने पर
m2 = 12 = 1 × 1 = 1 और m3 = 13 = 1 × 1 × 1 = 1
तो m2 = m3
अतः, हम कह सकते हैं कि धन पूर्णांक (प्राकृत संख्या) के लिए m > 1, m2 < m3 सत्य है।
अब, माना m = – 1, -2 लेने पर

जब m = -1:
m2 = (-1)2 = – 1 × – 1 = 1
और m3 = (-1)3 = – 1 × – 1 × – 1 = – 1
स्पष्ट है, 1 > – 1, अर्थात् m2 > m3

जब m = – 2:
m2 = (-2)2 = – 2 × – 2 = 4 और
m3 = (-2)3 = – 2 × – 2 × – 2 = – 8
4 > -8, अर्थात् m2 > m3

अतः हम कह सकते हैं कि किसी ऋण पूर्णांक m के लिए m2 < m3 असत्य है।

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