Class 12

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 1 आंकड़े : स्रोत और संकलन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 1 आंकड़े: स्रोत और संकलन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 1 आंकड़े : स्रोत और संकलन

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए- (i) एक संख्या अथवा लक्षण को जो मापन को प्रदर्शित करता है, कहते हैं-
(क) अंक
(ग) संख्या
(ख) आंकड़े
(घ) लक्षण
उत्तर:
(ख) आंकड़े।

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(ii) एकल आधार सामग्री एकमात्र माप हैं-
(क) तालिका
(ग) वास्तविक संसार
(ख) आवृत्ति
(घ) सूचना।
उत्तर:
(क) तालिका।

(iii) एक मिलान चिह्न में, फोर एंड क्रासिंग फिफ्थ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं-
(क) फोर एंड क्रास विधि
(ख) मिलान चिह्न विधि
(ग) आवृत्ति अंकित विधि
(घ) समावेश विधि
उत्तर:
(क) फोर एंड क्रास विधि

(iv) ओजाइव एक विधि है जिसमें-
(क) साधारण आवृत्ति नापी जाती हैं
(ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती हैं।
(ग) साधारण आवृत्ति अंकित की जाती हैं
(घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती हैं।
उत्तर:
(घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती हैं।

(v) यदि वर्ग के दोनों अंत आवृत्ति समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं-
(क) बहिष्कार विधि
(ख) समावेश विधि
(ग) चिह्न विधि
(घ) सांख्यिकीय विधि।
उत्तर:
(ख) समावेश विधि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर।
उत्तर:
सभी प्रकार के स्वीकृत तथ्य, व्यक्ति, वस्तु, स्थानों इत्यादि के नाम उनसे जुड़े तथ्य विवरण व आंकड़ों को डेटा (आंकड़ा) कहते हैं। इन आंकड़ों की कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस कर एंड यूजर के लिए उपलब्ध करवाई जाने वाली उपयोगी जानकारियों को सूचना कहते हैं।

(ii) आंकड़ों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सभी प्रकार के स्वीकृत तथ्य, व्यक्ति, स्थानों इत्यादि के नाम उनसे जुड़े तथ्य, विवरण व आंकड़ों को डेटा या आंकड़े कहते हैं।

(iii) एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
एक तालिका में पाद टिप्पणी से लाभ इस प्रकार हैं- तालिका में, पाद टिप्पणी कुछ विशिष्ट सेल (cells) से जुड़ी होती है। इस सेल (cells) में कॉलम शीर्षक अथवा कतार शीर्षक शामिल होते हैं।

(iv) आंकड़ों के प्राथमिक स्त्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वे आंकड़े जो क्षेत्र से सीधे किसी तत्व की गणना द्वारा अथवा लोगों से साक्षात्कार करके प्राप्त किये जाते हैं, उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहते हैं।

(v) द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्त्रोत बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक आंकड़ों के पाँच प्रकाशित व अप्रकाशित स्त्रोत इस प्रकार हैं-

  1. सरकारी
  2. अर्ध सरकारी
  3. अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन
  4. निजी प्रकाशन
  5. समाचार पत्र और पत्रिकाएं।

(vi) आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्ती विधि क्या है?
उत्तर:

वर्गfCf
00-1044
10-2059
20-30514
30-40721
40-50627
50-601037
60-70845
70-80651
80-90556
90-100460

जैसे कि इस तालिका में दर्शाया गया है कि एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा जैसी है। इस विधि में कोई भी अवलोकन जिसका मूल्य 30 है उसी वर्ग में रखा जाएगा जिसमें यह निम्न सीमा पर आता है और यह उस वर्ग से निकाल दिया जाता है जिसमें यह उच्च सीमा पर है। इसलिए इस विधि को अपवर्ती विधि कहते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए-
(i) राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए। जहाँ से द्वितीयक आंकड़े एकत्र किए जा सकते हैं?
उत्तर:
द्वितीयक आंकड़ों को राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों द्वारा एकत्र किया जा सकता है जैसे कि-
सरकारी प्रकाशन – विभिन्न मंत्रालयों और भारत सरकार के विभागों, राज्य सरकारों के प्रकाशन और जिलों के बुलेटिन द्वितीयक सूचनाओं के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके अंतर्गत भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित भारत की जनगणना राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्ट, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की मौसम रिपोर्ट, राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित सांख्यिकीय सारांश और विभिन्न आयोगों द्वारा प्रकाशित आवधिक रिपोर्ट सम्मिलित किए जाते हैं।

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(ii) सूचकांक का क्या महत्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।
उत्तर:
सूचकांक एक सांख्यिकीय मापदण्ड है जो किसी परिवर्ती में आए बदलाव को दिखाने के लिए अथवा समय को ध्यान में रखकर परिवर्तीयों से जुड़े ग्रुप, भौगोलिक स्थानों तथा तापों को दिखाने के लिए डिजाइन किया गया है। सूचकांक न केवल समय के साथ हुए परिवर्तनों की माप करता है बल्कि विभिन्न स्थानों, उद्योगों, नगरों अथवा देशों की आर्थिक दशाओं की तुलना भी करता है। सूचकांक का प्रयोग व्यापक रूप में अर्थशास्त्र तथा व्यवसाय में लागत तथा मात्रा में आए बदलाव को देखने के लिए किया जाता है। सूचकांक के परिकलन के लिए अलग-अलग प्रकार की विधियाँ हैं। इसे इस प्रकार प्राप्त किया जाता है-
\(\frac{\sum q 1}{\sum q 0} \times 100\)
∑q1 = वर्तमान वर्ष के उत्पादन का योग
∑q0= आधार वर्ष के उत्पादन का योग
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लघु उत्तरीय प्रश्न
(Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भौगोलिक आँकड़े किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
भौगोलिक आँकड़े (Geographical Data)- भौगोलिक आँकड़े संख्याओं तथा सूचना के समूह का विवरण है।
आँकड़े किसी तथ्य के घनत्व, वितरण तथा विस्तार की जानकारी प्रदान करते हैं। भौगोलिक आँकड़े विभिन्न प्रकार के होते हैं जिनमें उच्चावच, चट्टानें, जलवायु, वनस्पति, कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन तथा मानव संबंधी आँकड़े हैं।

प्रश्न 2.
आँकड़ों के वर्गीकरण के कौन-कौन से चरण हैं?
उत्तर:
आँकड़ों के वर्गीकरण के निम्नलिखित मुख्य चरण हैं-

  1. समय, प्रदेश, गुण, मात्रा आदि के आधार पर आँकड़ों के वर्ग बनाना (Classification)
  2. आँकड़ों का शुद्ध रूप में सारणीयन (Tabulation)
  3. उपयुक्त सांख्यिकीय तकनीकों का प्रयोग करते हुए आँकड़ों को संसाधित करना (Processing)

प्रश्न 3.
आँकड़ों के प्राथमिक स्रोतों एवं गौण स्रोतों की तुलना करो।
उत्तर:
आँकड़ों के स्रोत (Sources of Data)- भौगोलिक आँकड़ों के दो मुख्य स्रोत होते हैं- प्राथमिक (Primary) तथा गौण (Secondary)।

  1. प्राथमिक आँकड़े-वे आँकड़े जो क्षेत्र से सीधे किसी तत्त्व की गणना द्वारा अथवा लोगों से साक्षात्कार करके प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहते हैं।
  2. गौण आँकड़े-गौण आँकड़े प्रयोगकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र नहीं किए जाते हैं। ये बहुधा प्रकाशित होते हैं अथवा किसी दूसरे के पास उपलब्ध होते हैं। प्रयोगकर्ता ऐसे आँकड़ों को लेकर उन्हें सही व विश्वसनीय मानते हुए अपना निष्कर्ष निकालते हैं।

प्रश्न 4.
आँकड़ों के स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़ों के स्त्रोत (Sources of Primary Data)- प्राथमिक आँकड़ों का मुख्य स्रोत क्षेत्र सर्वेक्षण (Field work) होता है गौण सूचनाओं के स्रोतों की संख्या अनगिनत है। प्रत्येक विशिष्ट संस्था अपने अलग-अलग आँकड़े एकत्र करके प्रकाशित करती है।
(1) भारत का जनगणना विभाग (Census Deptt.) जनसंख्या आँकड़ों का प्रकाशन करता है।
(2) कृषि विभाग (Agriculture Deptt.) द्वारा कृषि संबंधी आँकड़े प्रकाशित किए जाते हैं।
(3) भारत में मानचित्रों के प्रकाशन की दो सरकारी संस्थाएं हैं। पहली भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) तथा दूसरी राष्ट्रीय मानचित्र एवं विषयक मानचित्रण संगठन (नैटमी) (NATMO)। भारतीय सर्वेक्षण विभाग विभिन्न मापकों पर मुख्यतः स्थलाकृतिक मानचित्रों का प्रकाशन करता है जबकि नैटमो विभिन्न प्रकार के विषयक मानचित्रों को प्रकाशित करता है।

प्रश्न 5.
आँकड़ों का आरेखीय प्रदर्शन किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
आरेखीय प्रदर्शन – आँकड़ों का आरेखीय प्रदर्शन भूगोल की दूसरी महत्त्वपूर्ण विशेषता है। हम बड़े-बड़े आँकड़ों का लेखाचित्र चार्ट या मानचित्र में बदल सकते हैं तथा इसकी प्रमुख विशेषताओं को दृश्य स्वरूप प्रदान करते हैं। ऐसे मानचित्रों में चुने हुए तथ्यों के वितरण तथा उसके आपसी संबंधों का प्रदर्शन किया जाता है।

प्रश्न 6.
आँकड़ों के विश्लेषण के दो चरण बताओ।
उत्तर:
आंकड़ों का विश्लेषण ( Data Analysis) – आँकड़ों का विश्लेषण निम्नलिखित चरणों में होता है-
1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data) – इनके प्रयोग का प्रथम चरण होता है सही आँकड़े प्राप्त करने का यथासंभव प्रयास किया जाता है त्रुटिपूर्ण आँकड़ों से त्रुटिपूर्ण परिणाम मिलते हैं।
2. आँकड़ों का वर्गीकरण (Data Classification ) संकलित आँकड़ों को संक्षिप्त रूप देने के लिए उनका संपादन (Editing), वर्गीकरण (Classification) तथा संगठन (Organisation) किया जाता है। गणना करना, सारणीबद्ध करना और यथाप्राप्त सूचनाओं का एक उपयुक्त आधार पर संख्यात्मक स्वरूप प्रदान करना आदि क्रियाओं को सम्मिलित रूप में आँकड़ा विश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रिया में पहला चरण किन्हीं समान विशेषताओं के आधार पर आँकड़ों का वर्गीकरण करना होता है। यही आँकड़ों का वर्गीकरण है।

निबंधात्मक प्रश्न
(Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
आंकड़ों के सारणीयन (Tabulation) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों का सारणीयन (Tabulation of Data)- एकत्रित आँकड़े अव्यवस्थित तथा अवर्गीकृत रूप में प्राप्त होते हैं। इन आँकड़ों को सरल रूप में समझना तथा कोई निष्कर्ष निकालना कठिन होता है। इन आँकड़ों को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन आँकड़ों को स्तम्भ और पंक्तियों में रखा जाता है। इससे इनकी तुलना करना आसान हो जाता है। पंक्तियों को समान्तर क्षैतिजीय (Horizontal) रूप में रखा जाता है तथा स्तंभों को लंबवत् (Vertical) रूप में लिखा जाता है।
सारणी के प्रमुख भाग (Main Parts of a Table )-एक अच्छी सारणी के प्रमुख भागों को नीचे सारणी में एक प्रतिरूप (Format) द्वारा दिखाया गया है-
1. सारणी संख्या (Table Number ) सब से ऊपर सारणी का संकेत (Reference) देने के लिए नंबर दिया जाता है।
2. सारणी शीर्षक (Title of the Table)-सारणी के उद्देश्य को प्रकट करने के लिए शीर्षक दिया जाता है।

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3. शीर्षक टिप्पणी (Head-note) अधिक जानकारी के लिए शीर्षक टिप्पणी लिखी जाती है।
4. प्रतिपर्ण (Stubs) पंक्तियों के इकट्ठे शीर्षक को प्रतिपर्ण कहा जाता है। इसके आगे प्रतिपर्ण की प्रविष्टियां (enteries) होती हैं।
5. कक्ष शीर्ष (Book- head) सारणी के स्तंभों में लिखे जाने वाले विवरण को कक्ष शीर्ष कहा जाता है।
6. मुख्य भाग (Body) सारणी के आँकड़ों को कोशिकाओं के रूप में लिखा जाता है।
7.याद टिप्पणी (Foot-note)- सारणी के नीचे आँकड़ों से संबंधित आवश्यक सूचना लिखी जाती है तथा एक तारे (*) का चिह्न लगाया जाता है।
8. खोत (Source) सारणी में सबसे नीचे आँकड़ों के लोत के बारे में लिखा जाता है।

प्रश्न 2.
आँकड़ों के वर्गीकरण से क्या अभिप्राय है? इसे कितने प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर:
आँकड़ों का वर्गीकरण (Classification of Data)- आँकड़ों को सरल रूप में समझने के लिए विभिन्न वर्गों में रखा जाता है। वर्गीकरण एक ऐसी क्रिया है जिसके द्वारा आँकड़ों को उनके एक जैसे गुण के आधार पर समान वर्गों में या अलग गुणों के आधार पर अलग-अलग वर्गों में रखा जाता है। इन आँकड़ों को आरोही क्रम (Ascending order) तथा अवरोही क्रम (Descending order) में लिखा जाता है। आरोही क्रम में आँकड़ों का क्रम बढ़ता जाता है, परंतु अवरोही क्रम में आंकड़ों का क्रम घटता जाता है।
उदाहरण-नीचे दिए गए कुछ विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों को वर्गों तथा सारणी के रूप में रखो-

चिहन (Tally Bar) कहते हैं। जब इन मिलान चिहनों को संख्या के रूप में लिखते हैं तो इसे आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। किसी वर्ग की ऊपरी तथा निम्न सीमा के मध्य अंतर को वर्ग अंतराल (Class Interval) कहा जाता है।
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उत्तर:
आरोही क्रम (Ascending order)

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अवरोही क्रम (Descending order)
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बारंबारता बंटन सारणी (Frequency Distribution Table ) – बारंबारता बंटन सारणी एक ऐसी सारणी है जिसमें आँकड़ों को एक व्यवस्थित रूप में रखा जाता है। आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बांटा जाता है। इन वर्गों को मिलान चिह्नों द्वारा प्रकट किया जाता है। प्रत्येक वर्ग में जितने आँकड़े या संख्याएं आती हैं उन्हें एक खड़ी लाइन
(1) से लिखा जाता है। पांच संख्यात्मक मूल्यों को दिखाने के लिए चार लाइनें खींच कर पांचवीं लाइन से काट देते हैं। इसे मिलान

प्रश्न 3.
वर्गीकरण की मुख्य रीतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वर्गीकरण की विधियां ( Methods of Classification)
आँकड़ों को सरल व संक्षिप्त बनाया जाता है ताकि उनसे आसानी से निष्कर्ष निकाले जा सकें। जलवायु, तापमान, वर्षा आदि के आँकड़ों

3. अखंडित श्रृंखला – अखंडित अथवा अविच्छिन्न अथवा स श्रृंखला वह श्रृंखला होती है जिसमें इकाइयों का निश्चित माप संभव नहीं होता। इसी कारण उन्हें कुछ सीमाओं में व्यक्त किया जाता है। इन सीमाओं को वर्गन्तर कहते हैं। प्रत्येक वर्गातर के साथ उसकी आवृत्तियां लिखी जाती हैं।
आगे 30 विद्यार्थियों के अर्थशास्त्र में प्राप्त अंक दिए गए हैं जिन्हें हम 5-5 के वर्गांतर से अखंडित श्रृंखला अथवा श्रेणी में बदल सकते हैं।
अखंडित श्रृंखला को निम्नलिखित चार प्रकारों में बांटा जाता

(i) अपवर्जी शृंखला (Exclusive Series)
(ii) समावेशी श्रृंखला (Inclusive Series)
(iii) खुले सिरे वाली शृंखला (Open End Series)
(iv) संचयी आवृत्ति ( Cumulative Frequency Series)

(i) अपवर्जी श्रृंखला (Exclusive Series ) – यह विधि समावेशी विधि से अधिक प्रचलित है। इस रीति में एक वर्ग की जगह सीमा तथा अगले वर्ग की निचली सीमा एक ही होती है।
दिया उदाहरण इस विधि का उदाहरण है-

अंकविद्यार्थियों की संख्या
0-10

10-20

20-30

30-40

40-50

50-40

60-70

10

30

15

35

8

7

2

योग =107

इसमें पहला वर्ग 0-10 तथा 10-20 है। इसमें विदित होता है कि पहले वर्ग की उच्च सीमा तथा दूसरे वर्ग की निम्न सीमा एक हैं। जब वर्ग इस प्रकार होते हैं तो यह शंका होती है कि 10 को किस वर्ग में रखा जाए पहले में या दूसरे में? इस विषय में यह नियम है कि किसी वर्ग की उच्च सीमा को इस वर्ग के अंतर्गत सम्मिलित नहीं किया जाता बल्कि उसके बाद वाले वर्ग में सम्मिलित किया जाता है। इस प्रकार 10 पहले वर्ग में नहीं अपितु दूसरे में किया जाएगा।

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(ii) समावेशी श्रृंखला ( Inclusive Series) – इस प्रकार के वर्गीकरण में निम्न सीमा तथा उच्च सीमा दोनों की उसी वर्ग में सम्मिलित कर लिया जाता है। संदेह को दूर करने के लिए पहले वर्ग की उच्च सीमा दूसरे वर्ग की निम्न सीमा से 1 या कोई अन्य संख्या कम कर दी जाती है। जैसे-

वेतनमजनूरों की संख्या
100-14920
150-19925
200-24960
250-29915
300-3495
योग =125

(iii) खुले सिरे वाली शृंखला (Open End Series)-इस शृंखला में प्रथम वर्ग की निचली सीमा में ‘कम’ (Below) तथा ऊपरी सीमा में ‘अधिक’ (Above) का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

अंक (Marks)विद्यार्थियों की संख्या
10 से कम(Frequency)
10-207
20-307
30 से अधिक5
1

(iv) संचयी आवृत्ति भृंखला (Cumulative Frequency Series)-इस शृंखला में आवृत्तियों को जोड़ दिया जाता है। दूसरे वर्ग की आवृत्ति को जोड़कर संचयी आवृत्ति प्राप्त की जाती है। जैसे-

आय (रुपए में) (x)परिवारों की संख्या (f)संचयी आवृति (c)
0-50044
500-100064+6=10
1000-15001010+10=20
1500-2000520+5=25
2000-2500325+3=8

प्रश्न 5.
आँकड़ों के प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों का वर्णन करें।
उत्तर:
आँकड़ों के स्रोत आँकड़ों को दो प्रकार से एकत्रित किया जाता है –
1. प्राथमिक स्रोत
2. द्वितीयक स्रोत।
जिन आँकड़ों को हम पहली बार व्यक्तिगत रूप से अथवा किसी समूह इत्यादि के द्वारा एकत्रित किया जाता है उन्हें आँकड़ों के प्रथम स्त्रोत कहते हैं और जिन आँकड़ों को किसी प्रकाशित या अप्रकाशित साधनों के द्वारा एकत्रित किया जाता है उन्हें द्वितीयक स्रोत कहते हैं।

प्राथमिक आँकड़ों के साधन
1. व्यक्तिगत प्रेक्षण-
यह व्यक्तिगत या व्यक्तियों के समूह के संग्रह की ओर संकेत करता है जिस द्वारा क्षेत्र में प्रत्यक्ष प्रेक्षण के द्वारा एकत्र किया जाता है। इस प्रेक्षण द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण के अंतर्गत भू-आकृति के लक्षणों, मिट्टी तथा प्राकृतिक वनस्पति के प्रकारों के साथ ही जनसंख्या संरचना, लिंग अनुपात, साक्षरता, परिवहन तथा संचार के साधन नगरीय तथा ग्रामीण अधिवास इत्यादि की सूचना प्रदान की जाती हैं। परंतु व्यक्तिगत प्रेक्षण करते समय उसमें शामिल व्यक्तियों की निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए ज्ञान का तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण होना आवश्यक है।

2. साक्षात्कार-
इस विधि के द्वारा सूचना उत्तर देने वाले से शोधकर्ता संवाद तथा बातचीत द्वारा प्राप्त करता है फिर भी साक्षात्कार करते समय साक्षात्कारकर्ता को क्षेत्र के लोगों से निम्नलिखित सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए-
(1) जिन सूचनाओं को लोगों से साक्षात्कार द्वारा इकट्ठा करना है, उन विषयों की एक परिशुद्ध सूची तैयार की जानी चाहिए।
(2) साक्षात्कार लेने वाले व्यक्तियों को सर्वेक्षण के उद्देश्यों के बारे में जानकारी होनी आवश्यक है।
(3) अगर कोई भी संवेदनशील प्रश्न पूछना है तो पहले उत्तर देने वालों को विश्वास में लेना आवश्यक है और उसे विश्वास दिलाना चाहिए कि गोपनीयता बनाई रखी जाएगी।
(4) वातावरण का अनुकूल होना भी आवश्यक है। इससे उत्तर देने वाला बिना किसी झिझक के तथ्यों को स्पष्ट कर सकेगा।
(5) प्रश्नावली की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि उत्तर देने वाला प्रेरित होकर तथा सहज होकर प्रश्नों से संबंधित सूचना देने के लिए सहमत हो जाए।
(6) जिस प्रश्नों से उत्तर देने वाले के आत्मसम्मान अथवा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे ऐसे प्रश्नों को पूछने से परहेज करना चाहिए।
(7) अंत में उत्तर देने वाले से यह पूछना चाहिए कि जो भी सूचना वह दे चुके हैं, इसके अतिरिक्त और क्या जानकारी वह और दे सकते हैं?
(8) उत्तर देने वाले का अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने के लिए धन्यवाद किया जाना भी आवश्यक है।

3. प्रश्नावली अनुसूची-
यह एक ऐसी विधि है जिसमें साधारण प्रश्नों और उनके उत्तर एक सादे कागज पर लिखे जाते हैं तथा उत्तर देने वाले व्यक्ति से दिए गए विकल्पों में से किसी एक विकल्प पर निशान लगाना होता है। कई बार संरचनात्मक प्रश्नों का एक समूह भी प्रश्नावली में शामिल किया जाता है और उत्तर देने वाले के विचारों को ज्ञात करने के लिए उचित स्थान भी छोड़ दिया जाता है। यदि केवल विवृत्तांत प्रश्नों के माध्यम से लोगों के विचारों को एकत्र करने की आवश्यकता तो इसे प्रश्नावली कहते हैं सर्वेक्षण के उद्देश्य भी स्पष्ट रूप से प्रश्नावली में उल्लिखित होने चाहिए।

यह विधि बड़े क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए भी उपयोगी होती हैं इस विधि की सीमा यह है कि सूचनाओं को उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है कि केवल साक्षर और शिक्षित लोगों से ही संपर्क किया जा सकता है। इसमें एक अनुसूची होती है। जो प्रश्नावली से मिलती-जुलती होती है जिसमें जांच-पड़ताल से जुड़े प्रश्न दिए रहते हैं। अनुसूची और प्रश्नावली में केवल यह अंतर है कि प्रश्नावली में उत्तर देने वाला प्रश्नावलियों को स्वयं भरता तथा सूची में परिगणक उत्तर देने वाले से प्रश्न पूछकर वह खुद भरता है। प्रश्नावली की तुलना में अनुसूची का मुख्य लाभ यह है कि इसके द्वारा सूचना शिक्षित तथा अशिक्षित दोनों ही उत्तर देने वालों से एकत्र की जाती हैं। एक अनुसूची को भरने के लिए गणनाकर्ता को पूरी तरह से प्रशिक्षित होना आवश्यक है।

4. अन्य विधियां
जल तथा मृदा से संबंधित आँकड़े सीधे क्षेत्रों से उनकी विशेषताओं का मापन करके मृदा किट तथा जल गुणवत्ता किट का प्रयोग करके एकत्र किया जाता है। इस प्रकार क्षेत्र वैज्ञानिक के प्रयोग से फसलों तथा वनस्पति के स्वास्थ्य के बारे में आँकड़े एकत्र किए जाते हैं। आँकड़ों के द्वितीयक स्त्रोत इन स्रोतों के अंतर्गत आँकड़ों को प्रकाशित और अप्रकाशित रूप में एकत्र किया जाता है जिसमें सरकारी प्रकाशन, प्रलेख और रिपोर्ट सम्मिलित किए जाते हैं।

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प्रकाशित साधन

1. सरकारी प्रकाशन-
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों के प्रकाशन और बुलेटिन द्वितीयक सूचनाओं के उपयोगी स्रोत हैं। भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित भारत की जनगणना, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्टें, राज्य सरकारों के द्वारा प्रकाशित सांख्यिकीय सारांश और विभिन्न आयोगों द्वारा प्रकाशित आवधिक रिपोर्ट इसके अंतर्गत शामिल किए जाते हैं।

2. अर्ध सरकारी प्रकाशन-
विभिन्न नगरों और शहरों के नगर निगमों और नगर विकास प्राधिकरणों और जिला परिषदों के प्रकाशन तथा रिपोर्ट इत्यादि इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

3. अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन-
वार्षिकी, संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभिकरण जैसे कि वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व स्वास्थ्य संगठन, खाद्य व कृषि परिषद् इत्यादि द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट और मोनोग्राफ अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशनों के अंतर्गत शामिल किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के कुछ महत्वपूर्ण प्रकाशन जो आवधिक रूप में छपते हैं वह हैं – डेमोग्राफिक इयर बुक और मानव विकास रिपोर्ट इत्यादि।

4. निजी प्रकाशन-
समाचार पत्र और निजी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित वार्षिकी पुस्तिका, सर्वेक्षण शोध रिपोर्ट तथा प्रबंध इत्यादि इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

5. समाचार पत्र और पत्रिकाएं-
इस श्रेणी के अंतर्गत दैनिक समाचार पत्र और साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक पत्रिकाएं आसानी से प्राप्त स्रोत हैं।

अप्रकाशित साधन

1. सरकारी आलेख-
इस श्रेणी के अंतर्गत अप्रकाशित रिपोर्ट, मोनोग्राफ और प्रलेख इत्यादि शामिल हैं। यह प्रलेख सरकार के अलग-अगल स्तरों पर अप्रकाशित रिकॉर्ड के रूप में मिलते हैं और इनको अनुरक्षित रखा जाता है जैसे कि गांव के स्तर पर, राजस्व अभिलेख, गाँव के पटवारियों के द्वारा तैयार किए जाते हैं जो कि एक गांव स्तर की जानकारी प्रदान करने का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

2. अर्ध-सरकारी प्रलेख-
इस श्रेणी के अंतर्गत विभिन्न नगर-निगम, जिला परिषदों और लोक सेवा विभागों द्वारा बनाए और अनुरक्षित की गई रिपोर्ट और विकास की योजनाएं शामिल की जाती हैं।

3. निजी प्रलेख-
इस श्रेणी के अंतर्गत व्यापार संघों, विभिन्न राजनैतिक और अराजनैतिक संगठनों तथा कंपनियों इत्यादि अप्रकाशित रिपोर्ट और रिकॉर्ड शामिल किए जाते हैं।

मौखिक परीक्षा के प्रश्न
(Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
मानचित्र (Map) शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई?
उत्तर:
‘मैप’ शब्द लैटिन भाषा के शब्द मप्पा (Mappa) का बिगड़ा हुआ रूप है।

प्रश्न 2.
संसार में सर्वप्रथम मानचित्र किसने बनाया?
उत्तर:
संसार में सर्वप्रथम मानचित्र ट्यूरिन पैपीरस नामक विद्वान् ने तैयार किया।

प्रश्न 3.
आँकड़े किन-किन इकाइयों के आधार पर एकत्र होते हैं?
उत्तर:
आँकड़े प्राय: प्रशासनिक इकाइयों जैसे गांव, ब्लाक, जिला, नगर, राज्य के आधार पर एकत्र होते हैं।

प्रश्न 4.
आँकड़ों के दो प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. मात्रात्मक आँकड़े (Quantitation Data)
  2. गुणात्मक आँकड़े (Qualitation Data)

प्रश्न 5.
आँकड़ों के दो प्रमुख स्त्रोत बताओ।
उत्तर(:

  1. प्राथमिक आँकड़े (Primary Data)
  2. गौण आँकड़े (Secondary Data)।

प्रश्न 6.
NATMO किसे कहते हैं?
उत्तर:
भारत में राष्ट्रीय मानचित्र एवं विषयक मानचित्रण संघटन (National Atlas and Thematic Mapping Organisation) NATMO कहते हैं।

प्रश्न 7.
आँकड़ों का विश्लेषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़ों की गणना करना, सारणीबद्ध करना तथा संख्यात्मक रूप देना।

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प्रश्न 8.
आँकड़ों का वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
समान विशेषताओं के आधार पर वर्ग बनाना।

प्रश्न 9.
आँकड़ों के संगठन (Organisation of Data) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों को तर्कसंगत क्रम में व्यवस्थित करना तथा उन्हें सारणीबद्ध करना।

प्रश्न 10.
आँकड़ों के संक्षिप्तीकरण (Summarisation of Data) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आरेख, लेखाचित्र (Graphs ) तथा विषयक मानचित्रों में आँकड़ों को बदलना।

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Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु

बहुविकल्पीय प्रश्न 

1. मोनोसैकैराइड का सरल उदाहरण है–
(अ) माल्टोस
(ब) सूक्रोस
(स) सेलुलोस
(द) राइबोस
उत्तर:
(द) राइबोस

2. निम्नलिखित में से अपचायी शर्करा है-
(अ) स्टार्च
(ब) सेलुलोस
(स) लैक्टोस
(द) सूक्रोस
उत्तर:
(स) लैक्टोस

3. प्रोटीन होते हैं-
(अ) पॉलिएस्टर
(ब) पॉलिपेप्टाइड
(स) पॉलिसैकैराइड
(द) पॉलिन्यूक्लिओटाइड
उत्तर:
(ब) पॉलिपेप्टाइड

4. न्यूक्लिक अम्ल होते हैं-
(अ) सरल अणु
(ब) प्रोटीन
(स) शर्करा
(द) बहुलक
उत्तर:
(द) बहुलक

5. DNA में निम्नलिखित में से कौनसा क्षारक नहीं होता?
(अ) ऐडेनीन
(ब) यूरेसिल
(स) थायमीन
(द) साइटोसीन
उत्तर:
(ब) यूरेसिल

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6. संतरा तथा आँवला में पाया जाने वाला मुख्य विटामिन है-
(अ) D
(ब) C
(स) K
(द) E
उत्तर:
(ब) C

7. रतौधी रोग (रात्रि अंधता) किस विटामिन की कमी से होता है?
(अ) B6
(ब) A
(स) C
(द) D
उत्तर:
(ब) A

8. दो ऐमीनो अम्लों की परस्पर क्रिया से बने बन्ध को क्या कहते हैं?
(अ) आयनिक बन्ध
(ब) ग्लाइकोसाइडी बन्ध
(स) हाइड्रोजन बन्ध
(द) पेप्टाइड बन्ध
उत्तर:
(द) पेप्टाइड बन्ध

9. निम्नलिखित में से किसमें निरपवाद रूप से नाइट्रोजन उपस्थित होता है?
(अ) वसा
(ब) कार्बोहाइड्रेट
(स) प्रोटीन
(द) स्टार्च
उत्तर:
(स) प्रोटीन

10. विटामिन B1 है-
(अ) थायमीन
(ब) राइबोफ्लेविन
(स) ऐस्कॉर्बिक अम्ल
(द) पिरिडाक्सिन
उत्तर:
(अ) थायमीन

11. निम्नलिखित में से कौनसी शर्करा शेष तीनों से अधिक मीठी है?
(अ) ग्लूकोस
(ब) लैक्टोस
(स) फ्रक्टोस
(द) सूक्रोस
उत्तर:
(स) फ्रक्टोस

12. निम्नलितित में से कौन डाइसैकैराइड नहीं है?
(अ) सूक्रोस
(ब) गैलैक्टोस
(स) लैक्टोस
(द) माल्टोस
उत्तर:
(ब) गैलैक्टोस

13. कोशिका के आनुवांशिक गुणों के नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है-
(अ) RNA
(ब) प्रोटीन
(स) DNA
(द) विटामिन
उत्तर:
(स) DNA

14. ग्लूकोस को ब्रोमीन जल से ऑक्सीकृत करने पर बना अम्ल है-
(अ) ग्लाइकॉलिक अम्ल
(ब) सैकैरिक अम्ल
(स) ग्लूकोनिक अम्ल
(द) ग्लिसरिक अम्ल
उत्तर:
(स) ग्लूकोनिक अम्ल

15. दुग्ध में पाए जाने वाली शर्करा है-
(अ) ग्लूकोस
(ब) लैक्टोस
(स) माल्टोस
(द) सूक्रोस
उत्तर:
(ब) लैक्टोस

16. प्राणी शरीर में कार्बोहाइड्रेट किसके रूप में संग्रहित रहता है?
(अ) स्टार्च
(ब) सेलुलोस
(स) ग्लाइकोजन
(द) माल्टोस
उत्तर:
(स) ग्लाइकोजन

17. निम्नलिखित में से आवश्यक ऐमीनो अम्ल है-
(अ) ऐलानिन
(ब) ग्लाइसीन
(स) वैलीन
(द) ऐस्पार्टिक अम्ल
उत्तर:
(स) वैलीन

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18. प्रोटीन की तृतीयक संरचना में वे कौनसे प्रमुख बल हैं जो 2° तथा 3° संरचनाओं को स्थायित्व प्रदान करते हैं?
(अ) ह्यडड्रोजन आबंध
(ब) डाइसल्फाइड बन्ध
(स) स्थिर विद्युत आकर्षण बल
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

19. माल्टोस के जल अपघटन से ग्लूकोस बनता है। इस अभिक्रिया में प्रयुक्त एन्जाइम है-
(अ) इनवर्टेस
(ब) जाइमेस
(स) माल्टेस
(द) यूरियेस
उत्तर:
(स) माल्टेस

20. वसा में विलेय विटामिन है-
(अ) A
(ब) B
(स) C
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) A

21. मनुष्य के पाचन तंत्र द्वारा निम्न में से किसका जल अपघटन नहीं होता?
(अ) ग्लाइकोजन
(ब) सेलुलोस
(स) माल्टोस
(द) स्टार्च
उत्तर:
(ब) सेलुलोस

22. निम्नलिखित में कौनसा यौगिक ज्विटर आयन के रूप में नहीं पाया जाता है?
(अ) ऐलानिन
(ब) ग्लाइसीन
(स) सल्फेनिलिक अम्ल
(द) p-ऐमीनो बेन्जोइक अम्ल
उत्तर:
(द) p-ऐमीनो बेन्जोइक अम्ल

23. निम्नलिखित में से जल विलेय विटामिन कौनसा है?
(अ) विट्रमिन D
(ब) विटामिन C
(स) विटामिन E
(द) विटामिन A
उत्तर:
(ब) विटामिन C

24. ग्लोबुलर (गोलिकाकार) प्रोटीन में कौनसा बन्ध पाया जाता है?
(अ) हाइड्रोजन बन्ध
(ब) वान्डरवाल आकर्षण बल
(स) डाइसल्फाइड बन्ध
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

25. एक शर्करा-रोगी के मूत्र में किसका परीक्षण किया जाता है?
(अ) ग्लूकोस
(ब) फ्रक्टोस
(स) सुक्रोस
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) ग्लूकोस

26. DNA का पूर्ण जल अपघटन पेन्टोस शर्करा, डिआक्सीराइबोस बनाता है। राइबोस से डिऑक्सीराइबोस इस तरह भिन्न है कि इसमें किस कार्बन पर -OH ग्रुप नहीं होता है ?
(अ) C – 1
(ब) C – 2
(स) C – 3
(द) C – 4
उत्तर:
(ब) C – 2

27. एक महत्त्वपूर्ण विट्रामिन जो कि तेल एवं वसा में विलेय है तथा जल में अविलेय। यह बच्चों में रिकेट्स एवं वयस्कों में ऑस्टियोमेलेशिया के लिये उत्तरदायी है। यह विटामिन है-
(अ) विटामिन B12
(ब) विटामिन C
(स) विटामिन D
(द) विटामिन E
उत्तर:
(स) विटामिन D

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
फ्रक्टोस में उपस्थित क्रियात्मक समूह बताइए।
उत्तर:
फ्रक्टोस में – OH समूहों के अतिरिक्त कार्बन संख्या-2 पर कीटोनिक समूह होता है।

प्रश्न 2.
ओलिगोसैकैराइड किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे कार्बोहाइड्रेट जिनके जल अपघटन से 2 से 10 मोनोसैकैराइड इकाइयाँ प्राप्त होती हैं उन्हें ओलिगोसैकैराइड कहते हैं।

प्रश्न 3.
जैव तंत्र में पाए जाने वाले मुख्य जैव अणु कौनसे ह हैं?
उत्तर:
जैव तंत्र में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल तथा लिपिड इत्यादि जैव अणु पाए जाते हैं।

प्रश्न 4.
ऐसे दो यौगिकों के नाम बताइए जिनमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 है लेकिन वे कार्बोहाइड्रेट नहीं हैं।
उत्तर:
ऐसिटिक अम्ल (C2H4O2) तथा लैक्टिक अम्ल (C3HO3)।

प्रश्न 5.
एरिथ्रोस की संरचना दीजिए।
उत्तर:
CH2 (OH) – (CHOH)2 – CHO

प्रश्न 6.
डाइसैकैराइडों के दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
माल्टोस तथा लैक्टोस।

प्रश्न 7.
राइबोस की संरचना दीजिए।
उत्तर:
CH2(OH) – (CHOH)3 – CHO

प्रश्न 8.
एक ऐसा यौगिक बताइए जो कार्बोहाइड्रेट है लेकिन इसका अणु सूत्र कार्बोहाइड्रेट के सामान्य सूत्र के अनुसार नहीं है।
उत्तर:
रेम्नोस (C6H12O5)

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प्रश्न 9.
ग्लूकोस की निम्न के साथ अभिक्रिया के उत्पाद बताइए – (i) ब्रोमीन जल (ii) सोडियम अमलगम तथा जल।
उत्तर:

  1. ग्लूकोस ब्रोमीन जल द्वारा ऑक्सीकृत होकर ग्लूकोनिक अम्ल देता है।
  2. सोडियम अमलगम (Na / Hg) तथा जल द्वारा ग्लूकोस का अपचयन हो जाता है तथा सार्बिटॉल प्राप्त होता है।

प्रश्न 10.
जन्तुओं के यकृत में संग्रहित पॉलिसैकैराइड कौनसा होता है?
उत्तर:
ग्लाइकोजन।

प्रश्न 11.
सूक्रोस के स्रोत बताइए।
उत्तर:
सुक्रोस गन्ने तथा चुकन्दर से प्राप्त होता है।

प्रश्न 12.
a-D-ग्लूकोस तथा B-D-ग्लूकोस के विशिष्ट घूर्णन का मान बताइए।
उत्तर:
a-D- ग्लूकोस के विशिष्ट घूर्णन का मान 112° तथा B-D- ग्लूकोस के विशिष्ट घूर्णन का मान 19° होता है।

प्रश्न 13.
पेप्टाइड बन्ध का सूत्र क्या होता है?
उत्तर:
पेप्टाइड बन्ध का सूत्र – CO-NH – होता है।

प्रश्न 14.
ऐलानिन ( ऐमीनो अम्ल ) का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
ऐलानिन का सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 1 होता है।

प्रश्न 15.
क्षारक किस प्रकार के यौगिक होते हैं?
उत्तर:
क्षारक विषमचक्रीय यौगिक होते हैं?

प्रश्न 16.
क्षारकीय ऐमीनो अम्ल कौनसे होते हैं?
उत्तर:
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें कार्बोक्सिल ( – COOH) समूहों की तुलना में ऐमीनो (-NH2 ) समूहों की संख्या अधिक होती है, उन्हें क्षारकीय ऐमीनो अम्ल कहते हैं।

प्रश्न 17.
जल में विलेय विटामिन बताइए।
उत्तर:
B वर्ग के विटामिन तथा विटामिन C जल में विलेय होते हैं।

प्रश्न 18.
प्रोटीन के मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:
दूध, पनीर, दालें, मूंगफली तथा मांस प्रोटीन के मुख्य स्रोत होते हैं।

प्रश्न 19.
विटामिन K का मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:
विटामिन K हरे पत्ते वाली सब्जियों में पाया जाता है।

प्रश्न 20.
प्रोटीन को निनहाइड्रिन के साथ गरम करने पर क्या होते हैं?
उत्तर:
प्रोटीन को निहाइड्रिन के साथ गरम करने पर नीला रंग प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 21.
विटामिन B2 का नाम बताइए।
उत्तर:
विटामिन B2 को राइबोफ्लेविन कहते हैं।

प्रश्न 22.
सायनोकोबालैमीन किस विटामिन का नाम है?
उत्तर:
विटामिन B12

प्रश्न 23.
विटामिन D की कमी से कौनसे रोग होते हैं?
उत्तर:
विटामिन D की कमी से रिकेट्स तथा ऑस्टियोमेलेशिया रोग होते हैं।

प्रश्न 24.
यकृत में संग्रहित जल में विलेय विटामिन कौनसा होता है?
उत्तर:
विटामिन B12

प्रश्न 25.
प्रोटीन → पॉलीपेप्टाइड → α – ऐमीनो अम्ल
इस अभिक्रिया अनुक्रम के लिए आवश्यक एन्जाइम बताइए।
उत्तर:
प्रोटिऐस तथा पेप्टाइडेस।

प्रश्न 26.
न्यूक्लिओटाइड आपस में कौनसे बन्ध द्वारा जुड़े होते हैं?
उत्तर:
फास्फोडाइएस्टर बन्ध।

प्रश्न 27.
ग्लूकोस को डेक्सट्रोस क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ग्लूकोस दक्षिण ध्रुवण घूर्णक होता है अतः इसे डेक्सट्रोस भी कहते हैं।

प्रश्न 28.
सर्वाधिक मीठी शर्करा कौनसी होती है ?
उत्तर:
फ्रक्टोज सर्वाधिक मीठी शर्करा होती है।

प्रश्न 29.
कार्बोहाइड्रेट्स को सैकैराइड क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेट शर्करा या शर्करा एकलकों के बहुलक होते हैं अतः इन्हें सैकैराइड कहा जाता है।

प्रश्न 30.
मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए दूध पीना आवश्यक है, क्यों ?
उत्तर:
दूध एक सम्पूर्ण आहार है जिसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा विटामिन होते हैं अतः मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए दूध पीना आवश्यक है।

प्रश्न 31.
नर लिंग हॉर्मोनों को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
एन्ड्रोजन।

प्रश्न 32.
इन्सुलिन हॉर्मोन का क्या कार्य है ?
उत्तर:
रक्त में ग्लूकोस की मात्रा को सन्तुलित रखना।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अपचायी तथा अनअपचायी शर्करा में अन्तर बताइए तथा उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
अपचायी शर्करा में अपचायक गुण होते हैं अतः ये फेलिंग विलयन तथा टॉलेन अभिकर्मक इत्यादि का अपचयन कर देते हैं। उदाहरण सभी मोनोसैकैराइड, माल्टोस तथा लैक्टोस । अनअपचायी शर्करा में अपचायक गुण नहीं होता अतः ये फेलिंग विलयन तथा टॉलेन अभिकर्मक का अपचयन नहीं करते हैं। उदाहरण- सूक्रोस ।

प्रश्न 2.
ग्लूकोस एक ऐल्डोहेक्सोस मोनोसैकैराइड है फिर भी यह हाइड्रोजन सायनाइड से क्रिया करके सायनोहाइड्रिन तो देता है लेकिन सोडियम हाइड्रोजनसल्फाइट के साथ योग नहीं करता। क्यों?
उत्तर:
ग्लूकोस की चक्रीय संरचना होती है जिसमें – CHO समूह के प्रयोग से चक्रीय हैमीऐसीटैल संरचना बनती है अतः इसमें स्वतंत्र ऐल्डिहाइड समूह नहीं होता जिसके कारण इसकी सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट (NaHSO3) के साथ अभिक्रिया नहीं होती लेकिन हाइड्रोजन सायनाइड (HCN) से क्रिया में इसकी चक्रीय संरचना की वलय टूटकर ऐल्डिहाइड समूह स्वतंत्र हो जाता है क्योंकि ग्लूकोस की वलय तथा विवृत श्रृंखला संरचना में साम्य होता है। अतः HCN के साथ क्रिया द्वारा यह सायनो हाइड्रिन दे देता है।

प्रश्न 3.
कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेटों को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जाता है-
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प्रश्न 4.
सूक्रोस की संरचना तथा गुण बताइए।
उत्तर:
सूक्रोस (इक्षु-शर्करा) से-सूक्रोस को तनु HCl अथवा H2SO4 के साथ ऐल्कोहॉलिक विलयन में उबालने पर ग्लूकोस तथा फ्रक्टोज के एक-एक मोल (समान मात्रा) प्राप्त होते हैं।
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प्रश्न 5.
लैक्टोस की संरचना बताइए।
उत्तर:
लैक्टोस (Lactose) –
(i) लैक्टोस को दुग्ध शर्करा भी कहते हैं क्योंकि यह दुग्ध में उपस्थित होती है।
(ii) लैक्टोस के जल अपघटन से D (+) ग्लूकोस तथा D (+) गैलेक्टोस के समान मोल प्राप्त होते हैं।
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(iii) लैक्टोस की संरचना – लैक्टोस, ß – [D] गैलेक्टोस तथा ß- [D] ग्लूकोस से मिलकर बनी होती है। गैलैक्टोस के C1 तथा ग्लूकोस के C4 के मध्य ग्लाइकोसाइडी बंध होता है विलयन में ग्लूकोस इकाई C-1 पर मुक्त एल्डिहाइड समूह उत्पन्न होता है। अतः माल्टोस की तरह यह भी एक अपचायी शर्करा है।
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(iv) यह एक क्रिस्टलीय ठोस होता है जो कि जल में विलेय तथा ऐल्कोहॉल एवं ईथर में अविलेय है।

प्रश्न 6.
ग्लूकोस के α तथा ß रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्लूकोस प्रकृति में मुक्त अथवा संयुक्त अवस्था में पाया जाता है। यह मीठे फलों जैसे पके हुए अंगूर तथा शहद में पाया जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु

प्रश्न 7.
एपीमरीकरण किसे कहते हैं? समझाइए।
उत्तर:
वे ऐल्डोस जिनके α- कार्बन परमाणु (C2) के विन्यास में भिन्नता होती है उन्हें एक-दूसरे के एपीमर कहते हैं तथा एक एपीमर के दूसरे एपीमर में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को ऐपीमरीकरण कहते हैं। उदाहरण- ग्लूकोस तथा मैनोस।

ग्लूकोस में C2 पर – OH समूह दाईं ओर जबकि मैनोस में यह बायीं ओर होता है।

प्रश्न 8.
ऐमीनो अम्ल अम्लीय क्षारीय तथा उदासीन होते हैं। इनकी व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर:
(i) अम्लीय ऐमीनो अम्लों में ऐमीनो समूहों की तुलना में कार्बोक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है जैसे- ऐस्पार्टिक अम्ल HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 5a

(ii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल वे होते हैं जिनमें कार्बोक्सिल समूहों की तुलना में ऐमीनो समूहों की संख्या अधिक होती है जैसे- लाइसीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 5b

(iii) वे ऐमीनो अम्ल जिनमें कार्बोक्सिल समूह तथा ऐमीनो समूह समान संख्या में होते हैं उन्हें उदासीन ऐमीनो अम्ल कहते हैं। जैसे-ग्लाइसीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 5c

प्रश्न 9.
प्रोटीन का निर्माण किस प्रकार होता है ? समझाइए।
उत्तर:
प्रोटीन α-ऐमीनो अम्लों के बहुलक होते हैं जो आपस में पेप्टाइड अंघ द्वारा जुड़े होते हैं। ऐमीनो अम्लों के एक अणु के – COOH तथा दूसरे अणु के – NH2 समूह के मध्य अभिक्रिया होकर जल के अणु से निकलने से बने बन्ध को पेप्टाइड बन्ध कहते हैं जिसे – CONH- द्वारा दर्शाया जाता है।
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प्रोटीनों में α- ऐमीनो अम्ल समान तथा भिन्न भी हो सकते हैं। जब बनने वाला उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों से बनता है तो इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरण, ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलानीन के ऐमीनो समूह के साथ क्रिया करता है तो एक डइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलानिन बनता है। अतः डाइपेप्टाइड में एक पेप्टाइड बन्ध होता है।

जब तीसरा ऐमीनो अम्ल, डाइपेप्टाइड के साथ क्रिया करता है तो बने उत्पाद को ट्राइपेप्टाइड कहते हैं। अतः एक ट्राइपेप्टाइड में तीन ऐमीनो अम्ल दो पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं। इसी प्रकार चार, पाँच तथा छः ऐमीनो अम्लों के आपस में जुड़ने से बने उत्पादों को टेट्रापेप्टाइड पेन्टापेप्टाइड तथा हेक्सापेप्टाइड कहते हैं बहुत से ऐमीनो अम्लों (10 से अधिक) के आपस में संघनन द्वारा बने पेप्टाइडों को पॉलिपेप्टाइड कहते हैं।

वे पॉलिपेप्टाइड जिनमें असंख्य (100 से अधिक) भिन्न-भिन्न ऐमीनो अम्ल होते हैं तथा जिनका आण्विक द्रव्यमान 10,000 से अधिक होता है, उन्हें प्रोटीन कहते हैं। यद्यपि पॉलिपेप्टाइड तथा प्रोटीन विभेद अधिक स्पष्ट नहीं है। 100 से कम ऐमीनो अम्लों वाले पॉलिपेप्टाइडों को भी प्रोटीन कहा जाता है यदि उनमें प्रोटीन जैसा स्पष्ट संरूपण (conformation) हो। उदाहरण इन्सुलिन 51 ऐमीनो अम्लों से मिलकर बना होता है।

प्रोटीनों के सामान्य गुण:

  • प्रोटीन रंगहीन तथा अक्रिस्टलीय होते हैं लेकिन इन्सुलिन क्रिस्टलीय होती है।
  • प्रोटीन के गलनांक तथा क्वथनांक अनिश्चित होते हैं।
  • प्रोटीन सामान्यतः जल, ऐल्कोहॉल तथा ईधर इत्यादि में अविलेव होते हैं।
  • प्रोटीन, बहुलक होते हैं जिनका आण्विक द्रव्यमान अधिक होता है, अतः ये जल में कोलाइडों के रूप में पाए जाते हैं।
  • प्रोटीन उभयधर्मी होते हैं जिनके समविभव बिन्दु निश्चित होते हैं।

आण्विक आकृति के आधार पर प्रोटीनों का वर्गीकरण प्रोटीनों को इनकी आण्विक आकृति के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है- रेशेदार प्रोटीन तथा गोलिकाकार प्रोटीन।

(a) रेशेदार या तन्तुक प्रोटीन (Fibrous Proteins) – ये जल में अविलेय जन्तु प्रोटीन है जो प्रोटियोलिटिक एन्जाइम द्वारा भी अप्रभावित रहते हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर होती हैं जो हाइड्रोजन तथा डाइसल्फाइड बन्धों द्वारा जुड़कर रेशों के समान संरचना बनाती हैं।
उदाहरण – किरेटिन तथा मायोसिन । किरेटिन बाल, ऊन तथा रेशम में एवं मायोसिन मांसपेशियों में उपस्थित होती है।

(b) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins)- ये जल विलेय प्रोटीन हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं कुण्डली बनाकर गोलाकार आकृति ग्रहण कर लेती हैं।

उदाहरण- इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन।

प्रोटीनों की संरचना तथा आकृति का अध्ययन चार स्तरों पर किया जाता है – प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक तथा चतुष्क संरचनाएं। इनका प्रत्येक स्तर पूर्व स्तर की तुलना में अधिक जटिल होता है।

(i) प्रोटीन की प्राथमिक संरचना प्रोटीनों में एक या अधिक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं उपस्थित होती हैं किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट तथा निश्चित क्रम में जुड़े होते हैं। ऐमीनो अम्लों के विशिष्ट क्रम को ही प्रोटीनों की प्राथमिक संरचना कहते हैं। भिन्न-भिन्न प्रोटीनों में यह क्रम भिन्न-भिन्न होता है। फ्रेडरिंग सेंगर (1953) ने सर्वप्रथम अग्न्याशय द्वारा उत्सर्जित, इन्सुलिन की प्राथमिक संरचना का निर्धारण किया था।

किसी विशिष्ट प्रेटीन में उपस्थित विभिन्न ऐमीनो अम्लों में से एक a- ऐमीनो अम्ल के स्थान पर किसी अन्य x – ऐमीनो अम्ल के आ जाने से उस प्रोटीन की जैव रासायनिक क्रियाशीलता में परिवर्तन आ जाता है या नष्ट हो जाती है। उदहरण- हीमोग्लोबिन में ग्लुटेमिक अम्ल के स्थान पर वैलीन आ जाने पर सिकल सेल एनिमिया रोग हो जाता है। प्रोटीनों की प्राथमिक संरचना को चित्र 14.1 द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
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(ii) प्रोटीनों की द्वितीयक संरचना-प्रोटीन की द्वितीयक संरचना इनकी आकृति से सम्बन्धित होती है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला उपस्थित होती है। यह दो प्रकार की संरचनाओं में पायी जाती है(i) α-हेलिक्स तथा (ii) ß-प्लीटेड शीट संरचना (या लहरियादार चादर
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संरचना)। ये संरचनाएं पेप्टाइड बंध के HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 9 तथा -NH- समूह के मध्य हाइड्रोजन बंध के कारण पॉलिपेप्यइड की मुख्य श्रृंखला के नियमित कुंडलन (Folding) में उत्पन्न होती हैं।
(i) α-हेलिक्स संरचना की पॉलिपेप्यइड शृंखला में सभी संभव हाइड्रोजन बन्ध बन सकते हैं तथा इसकी पॉलिपेप्यइड शृंखला दक्षिणावर्ती पेच की तरह मुड़ी होती है जिससे प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट का NH-समूह कुण्डली के अगले मोड़ पर स्थित >C = O समूह के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता है।

(ii) ß-प्लीटेड शीट संरचना (लहरियादार चादर संरचना) में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं एक-दूसरे के पाश्र्व में होती हैं जिनमें अधिकतम खिंचाव होता है तथा ये आपस में अंतरा आण्विक हाइड्रोजन बन्ध द्वारा जुड़ी होती हैं। यह संरचना वस्त्रों (लहरियादार चादर) के समान होती है। अतः इसे ß-प्लीटेड शीट संरचना कहते हैं।

α-हेलिक्स तथा ß-प्लीटेड शीट संरचना को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 10

प्रश्न 10.
प्रोटीनों के सामान्य गुण बताइए।
उत्तर:
प्रोटीनों के सामान्य गुण:

  • प्रोटीन रंगहीन तथा अक्रिस्टलीय होते हैं लेकिन इन्सुलिन क्रिस्टलीय होती है।
  • प्रोटीन के गलनांक तथा क्वथनांक अनिश्चित होते हैं।
  • प्रोटीन सामान्यतः जल, ऐल्कोहॉल तथा ईधर इत्यादि में अविलेव होते हैं।
  • प्रोटीन, बहुलक होते हैं जिनका आण्विक द्रव्यमान अधिक होता है, अतः ये जल में कोलाइडों के रूप में पाए जाते हैं।
  • प्रोटीन उभयधर्मी होते हैं जिनके समविभव बिन्दु निश्चित होते हैं।

आण्विक आकृति के आधार पर प्रोटीनों का वर्गीकरण प्रोटीनों को इनकी आण्विक आकृति के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है- रेशेदार प्रोटीन तथा गोलिकाकार प्रोटीन।

(a) रेशेदार या तन्तुक प्रोटीन (Fibrous Proteins) – ये जल में अविलेय जन्तु प्रोटीन है जो प्रोटियोलिटिक एन्जाइम द्वारा भी अप्रभावित रहते हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर होती हैं जो हाइड्रोजन तथा डाइसल्फाइड बन्धों द्वारा जुड़कर रेशों के समान संरचना बनाती हैं।

उदाहरण – किरेटिन तथा मायोसिन । किरेटिन बाल, ऊन तथा रेशम में एवं मायोसिन मांसपेशियों में उपस्थित होती है।

(b) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins)- ये जल विलेय प्रोटीन हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं कुण्डली बनाकर गोलाकार आकृति ग्रहण कर लेती हैं।
उदाहरण- इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन।

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प्रश्न 11.
प्रोटीनों के परीक्षण बताइए।
उत्तर:
प्रोटीनों का परीक्षण:

  • बाइयूरेट परीक्षण-प्रोटीन में थोड़ा-सा 10% NaOH तथा कुछ बूंद 1% CuSO4 विलयन डालने पर नीला-बैंगनी रंग आता है।
  • जेन्थोप्रोटिक परीक्षण-प्रोटीन को सान्द्र HNO3 के साथ गर्म करने पर यह पीले ग का अवक्षेप देती है, इसे जेन्थोप्रोटिक परीक्षण कहते हैं।
  • निनहाइड्रिन परीक्षण-प्रोटीन में कुछ बूंदें निनहाइड्रिन विलयन मिलाकर उबालने से गहरा नीला रंग प्राप्त होता है।

प्रश्न 12.
DNA तथा RNA में उपस्थित शर्कराओं की संरचना बताइए।
उत्तर:
DNA में ß-D-2-डिऑक्सीराइबोस शर्करा होती है जबकि RNA में ß-D-राइबोस शर्करा होती है जिनकी संरचनाएं निम्न प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 11

प्रश्न 13.
DNA की द्विकुंडलनी संरचना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
DNA की द्विकुंडलनी संरचना (Double Strand Helix Structure of DNA):
न्यूक्लिक अम्ल की एक शृंखला के अनुक्रम से संबंधित जानकारी को इसकी प्राथमिक संरचना कहते हैं। प्रोटीन के समान न्यूक्लिक अम्लों की द्वितीयक संरचना भी होती है। जेम्स वाटसन तथा फ्रांसिस क्रिक ने DNA की द्विकुंडलनी त्रिविमीय संरचना दी।

DNA की वाटसन-क्रिक संरचना के अनुसार पॉलिन्यूक्लिओटाइड की दो सर्पिल शृंखलाएँ या स्ट्रेण्ड क्षारक इकाइयों के मध्य हाइड्रोजन बन्धन द्वारा जुड़कर परस्पर समानान्तर रूप से कुण्डिलत अवस्था में विद्यमान रहती हैं। एक पॉलिन्यूक्लिओटाइड शृंखला के पिरिमिडीन क्षारक तथा दूसरी पॉलिन्यूक्लिओटाइड श्रंखला के प्यूरीन क्षारक के मध्य ही हाइड्रोजन बन्ध बन सकता है। इसके पश्चात् प्रयोगों से ज्ञात हुआ कि प्रकृति में क्षारक ऐडेनीन A केवल थायमीन T के साथ दो हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़ सकता है तथा ग्वानीन G केवल साइटोसीन C के साथ तीन H बन्धों द्वारा जुड़ सकता है।

इस प्रकार, ‘ T तथा A ‘ और ‘ G तथा C’ क्षारकों के युग्म बनते हैं अर्थात् T तथा A एक-दूसरे के पूरक हैं और G तथा C एक-दूसरे के पूरक हैं। DNA में T: A तथा G: C अनुपात 1: 1 पाया गया, इससे उपरोक्त युग्मों की पुष्टि हो जाती है। अतः यह कहा जा सकता है कि DNA की दो पॉलिपेप्टाइड शृंखलाओं के मध्य निश्चित क्षारक युग्मों की उपस्थिति के कारण एक श्रृंखला (रज्जुक) दूसरी शृंखला की पूरक होती है, अर्थात् यदि एक पॉलिपेप्टाइड शृंखला में क्षारक अनुक्रम ज्ञात हो तो दूसरी शृंखला का क्षारक अनुक्रम स्वतः ही निश्चित हो जाता है। इसे निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
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प्रश्न 14.
DNA की द्विकुण्डलनी त्रिविमीय संरचना को चित्रित कीजिए।
उत्तर:
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DNA की तुलना में RNA की संरचना कम जटिल होती है। RNA की द्वितीयक संरचना में कुण्डली केवल एक रज्जुक (Strand) से बनी होती है जो कभी-कभी स्वयं के मुड़ने से ही द्विकुण्डलनी हो जाती है। RNA में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल क्षारक तथा डीऑक्सीराइबोस के स्थान पर राइबोस शर्करा होती है। RNA तीन प्रकार के होते हैं जिनके कार्य भिन्न-भिन्न हैं-

  • संदेशवाहक RNA (m-RNA)
  • राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  • अंतरण या स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

प्रश्न 15.
DNA अंगुली छापन क्या होता है? समझाइए तथा इसके उपयोग भी बताइए।
उत्तर:
डी.एन.ए. अंगुली छापन (DNA Finger Printing)प्रत्येक जीव के अंगुली छाप अद्वितीय (Unique) होते हैं। ये अंगुली के शीर्ष पर होते हैं तथा पहले इन्हें किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए काम में लाया जाता था, लेकिन शल्य चिकित्सा के द्वारा इन्हें बदला जा सकता है। किसी व्यक्ति में DNA के क्षारकों का अनुक्रम अद्वितीय होता है तथा DNA के क्षारकों के अनुक्रम का निर्धारण ही DNA अंगुली छापन कहलाता है। यह प्रत्येक कोशिकां के लिए समान होता है तथा इसे किसी भी इलाज द्वारा परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

DNA अंगुली छापन एक महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके निम्नलिखित उपयोग हैं-

  • विधि संबंधी प्रयोगशाला में अपराधी की पहचान करने में।
  • किसी व्यक्ति की पैतृकता (Paternity) को निर्धीरित करने में।
  • दुर्घटना में मृत व्यक्ति के शरीर की पहचान करने के लिए उसके बच्चों या जनक के DNA से तुलना करने में।
  • जैव विकास के पुनर्लेखन में किसी प्रजाति की पहचान करने में।

प्रश्न 16.
DNA की स्वप्रतिकृति (Self Replication) किस प्रकार होती है? समझाइए।
उत्तर:
स्व-प्रतिकृति (Self Replication)-डी.एन.ए. आनुवांशिकता का रासायनिक आधार होता है तथा यह आनुवांशिक सूचनाओं का संग्राहक होता है। DNA लाखों वर्षों से किसी जीव की विभिन्न प्रजातियों की पहचान को बनाए रखने के लिए विशिष्ट रूप से जिम्मेदार है।

जीवों में कोशिका विभाजन के समय DNA की प्रतिकृति होती है। इसमें जनक DNA दो संतति DNA में विभाजित हो जाता है। उपयुक्त एन्जाइम की उपस्थिति में पहले DNA के एक सिरे से हाइड्रोजन बन्धों के टूटने से दो स्ट्रेण्ड पृथक् होती जाती हैं तथा प्रत्येक स्ट्रेण्ड पर उपयुक्त न्यूक्लिओटाइड जुड़ते चले जाते हैं और दो समान संतति द्विकुण्डलनियाँ बन जाती हैं। इस प्रकार बनी प्रत्येक संतति द्विकुण्डलनी में एक कुण्डलनी जनक DNA से आती है तथा दूसरी कुण्डलनी नयी बनती है, जिन्हें क्रमशः जनक स्ट्रेण्ड तथा संतति स्ट्रेण्ड कहा जाता है। इस प्रकार पुत्री कोशिका में समान रज्जुक का अंतरण होता है।
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प्रश्न 17.
DNA द्वारा प्रोटीन संश्लेषण के नियंत्रण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रोटीन संश्लेषण का नियन्त्रण (Control of Protein Synthesis)-न्यूक्लिक अम्ल प्रोटीन संश्लेषण भी करते हैं। वास्तव में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण विभिन्न प्रकार के RŃA द्वारा होता है। परन्तु किसी विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का संदेश DNA में उपस्थित होता है। DNA का वह भाग जो प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण करता है उसे जीन कहते हैं। मानव कोशिका के केन्द्रक में एक DNA में सामान्यतः दस लाख जीन होते हैं।

न्यूक्लिक अम्ल की कुण्डलनी पर उपस्थित तीन-तीन क्रमागत विषमचक्रीय क्षारकों के समुच्चय एक त्रिककूट (Triplet Code) का काम करते हैं। प्रत्येक त्रिककूट का सम्बन्ध एक विशिष्ट ऐमीनो अम्ल से होता है। अतः अनेक त्रिककूटों का निश्चित अनुक्रम, विशिष्ट ऐमीनो अम्लों को निश्चित क्रम में व्यवस्थित करके प्रोटीन संश्लेषण को नियन्त्रित करता है।
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प्रश्न 18.
(i) सिकल सेल एनिमिया रोग कब होता है?
(ii) थायमीन तथा यूरेसिल के संरचना सूत्रों में क्या अन्तर होता है ?
(iii) आनुवांशिकता तथा क्रोमोसोम को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
(i) हीमोग्लोबिन में ग्लूटेमिक अम्ल के स्थान पर वेलिन – ऐमीनो अम्ल आ जाता हैं तो सिकल सेल एनिमिया रोग हो जाता है।

(ii) यूरेसिल के संरचना सूत्र में > C = 0 के पास वाले कार्बन पर हाइड्रोजन के स्थान पर मेथिल समूह आ जाने पर थायमीन की संरचना प्राप्त होती है।
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(iii) प्रत्येक प्रजाति की किसी पीढ़ी के गुण उसके पूर्वजों से मिलते-जुलते होते हैं जीवों के इस गुण को आनुवांशिकता कहते हैं। किसी सजीव कोशिका के नाभिक में उपस्थित वे कण जो अनुवांशिकता के लिए जिम्मेदार होते हैं, उन्हें क्रोमोसोम कहते हैं।

प्रश्न 19.
ग्लूकोस तथा स्टार्च में विभेद कीजिए।
उत्तर:

  1. ग्लूकोस, आयोडीन विलयन के साथ क्रिया नहीं करता जबकि स्टार्च, आयोडीन विलयन के साथ नीला रंग देता है।
  2. ग्लूकोस का जल अपघटन नहीं होता जबकि स्टार्च के जल अपघटन से ग्लूकोस बनता है।
  3. ग्लूकोस, फेलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देता है लेकिन स्टार्च नहीं।

प्रश्न 20.
सूक्रोसको तनु H2SO4 या तनु HCl के साथ गर्म करने पर क्या होता है?
उत्तर:
सूक्रोसको तनु H2SO4 या तनु HCl के साथ गर्म करने पर इसका जल अपघटन होकर ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस बनते है।
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए-
(i) ऐड्रिनोकॉर्टिकॉइड हॉर्मोन
(ii) प्रोटीन हॉर्मोन।
उत्तर:
(i) ऐड्डिनोकॉर्टि कॉइड हॉर्मोन (Adrenocorticoid Hormones)-ये वृक्क या गुर्दों (Kidney) में विद्यमान अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal gland) तथा वल्कुट (Cortex) द्वारा स्रावित होते हैं। जन्तुओं में ये हॉर्मोन अनुपस्थित होने पर तत्काल मृत्यु हो जाती है। ये हॉर्मोन अनेक प्रक्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं। उदाहरणग्लूकोक्रॉर्टिकायड हार्मोन कार्बोहाइड्रेट उपापचय का नियंत्रण करते हैं, जलन उत्पत्र करने वाली अभिक्रियाओं में कमी करते हैं तथा तनाव के प्रति प्रतिक्रिया में भी सम्मिलित होते हैं।

मिनरैलोकॉर्टिकॉयड गुर्दों से उत्सर्जित होने वले जल तथा लवण के स्तर को नियंत्रित करते हैं। यदि ऐड्रिनल कॉर्टेक्स ठीक से कार्य न करें तो इसके परिणामस्वरूप ऐडीसन्सडिजीज हो सकती है जिसके लक्षण हैं हाइपोग्लाइसीमिया, दुर्बलता और तनाव के प्रति संवेदनशीलता की संभावना बढ़ना।

(ii) प्रोटीन हॉर्मोन-प्रोटीन हॉर्मोनों को पॉलिपेप्टाइड हॉर्मोन भी कहा जाता है क्योंकि ये विभिन्न ऐमीनो अम्लों के संघनन सहबहुलकीकरण से बनते हैं। इन्सुलिन, ग्लूकागॉन, ऑक्सीटोसिन, वैसोप्रेसिन, गैस्ट्रिन तथा एन्डोर्फिन इस परिवार के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं। इन्सुलिन तथा ग्लूकागॉन का स्रवण अग्न्याशय (Pancreas) में होता है जबकि ऑक्सीटोसिन तथा वैसोप्रेसिन का स्रवण पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Gland) में होता है।

इन्सुलिन तथा ग्लूकागॉन दोनों एक साथ कार्बोहाइड्रेट उपापचय को नियंत्रित करके रक्त में ग्लूकोस की मात्रा को सामान्य स्तर पर बनाये रखते हैं। रक्त में ग्लूकोस को मात्रा तेजी से बढ़ने पर इन्सुलिन निकलने लगती है। दूसरी ओर हॉर्मोन ग्लूकागॉन की प्रवृत्ति रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ाने की होती है। ऑक्सीटोसिन, प्रसव के बाद गर्भाशय के संकुचन तथा स्तन ग्रन्थियों से दूध के मोचन (Release of milk) को नियंत्रित करता है। वैसोप्रेसिन हॉर्मोन रक्त दाब (Blood Pressure) को बढ़ाता है तथा वृक्क की जल-धारण क्षमता में वृद्धि करता है। गैस्ट्रिन, आमाशय में जठर रस के स्रवण को नियंत्रित करके प्रोटीन के पाचन में अपनी भूमिका निभाता है।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
चार क्षारकों के नाम लिखिए जो DNA में विद्यमान हैं। इनमें से कौनसा एक RNA में विद्यमान नहीं है?
उत्तर:
DNA में विद्यमान क्षारक साइटोसीन, ऐडेनीन, ग्वानीन तथा थायमीन हैं। इनमें से थायमीन RNA में नहीं पाया जाता लेकिन इसके स्थान पर यूरेसिल होता है।

प्रश्न 2.
वसा में घुलनशील दो विटामिनों के नाम, उनके स्रोत और उनकी भोजन में कमी से होने वाली बीमारियों के नाम बताइए।
उत्तर:
विटामिन A तथा Dवसा में घुलनशील होते हैं। विटामिन A गाजर, मक्खन, दूध तथा मछली के यकृत के तेल में पाया जाता है तथा इसकी कमी से रात्रि अंधता (रतौंधी) नामक बीमारी हो जाती है।

विटामिन D, सूर्य के प्रकाश, मछली तथा अंडे से प्राप्त होता है तथा इसकी कमी से रिकेट्स नामक बीमारी हो जाती है।

प्रश्न 3.
अपचायी शर्करा से क्या समझा जाता है?
उत्तर:
वे कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक या फेलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं। इनमें स्वतंत्र ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह होता है। जैसे-ग्लूकोस, फ्रक्टोस, माल्टोस तथा लैक्टोस।

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प्रश्न 4.
ऐमीनो अम्ल संभवतः अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन होते हैं। यह किस प्रकार होता है? आवश्यक और अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार का एकएक नाम बताइए।
उत्तर:
(a) ऐमीनो अम्लों की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण- ऐमीनो अम्लों में उपस्थित ऐमीनो तथा कार्बोक्सिल समूहों की संख्या के आधार पर इन्हें अम्लीय क्षारीय तथा उदासीन में वर्गीकृत किया जाता है।

(i) अम्लीय ऐमीनो अम्ल – वे ऐमीनो अम्ल जिनमें ऐमीनो समूहों की तुलना में कार्बोक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है उन्हें अम्लीय ऐमीनो अम्ल कहते हैं। उदाहरण-
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(ii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल ऐमीनो अम्ल, जिनमें कार्बोक्सिल समूहों की तुलना में ऐमीनो समूहों की संख्या अधिक होती है, उन्हें क्षारीय ऐमीनो अम्ल कहते हैं। उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 19

(iii) उदासीन ऐमीनो अम्ल वे ऐमीनो अम्ल, जिनमें कार्बोक्सिल समूहों तथा ऐमीनो समूहों की संख्या समान होती है, वे उदासीन ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं। उदाहरण-
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(b) संश्लेषण के आधार पर वर्गीकरण – संश्लेषण के आधार पर ऐमीनो अम्लों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है; अनावश्यक तथा आवश्यक ऐमीनो अम्ल।
(i) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल वे ऐमीनो अम्ल जिनका संश्लेषण हमारे शरीर में हो जाता है उन्हें अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहते हैं। आवश्यक ऐमीनो अम्लों के अतिरिक्त सभी ऐमीनो अम्ल इस श्रेणी में लिए जाते हैं जैसे ग्लाइसीन, ऐलानिन इत्यादि।

(ii) आवश्यक ऐमीनो अम्ल – वे ऐमीनो अम्लं जिनका संश्लेषण हमारे शरीर में नहीं होता है तथा जिनको भोजन में लेना आवश्यक होता है उन्हें आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहते हैं। आवश्यक ऐमीनो अम्लों की संख्या 10 होती है जो निम्नलिखित हैं-

ट्रिप्टोफेन (T), वैलीन (V), मेथिओनिन (M), आइसोल्यूसीन (I), ल्यूसीन (L.), लाइसीन (L), फेनिल ऐलानिन (P), आर्जिनीन (A), ट्रिप्टोफेन (T) तथा हिस्टिडीन (H)

आवश्यक ऐमीनो अम्लों को इनके अंग्रेजी नामों के प्रथम अक्षर ‘टीवीमीलपाथ’ (TVMILLPATH) से याद रखा जा सकता है।
ऐमीनो अम्लों के गुण-
(i) एमीनो अम्ल रंगहीन, अवाष्पशील क्रिस्टलीय ठोस होते हैं।

(ii) ये जल में विलेय तथा कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं तथा इनका गलनांक उच्च होता है क्योंकि इनमें -NH2 तथा -COOH दोनों समूह होने के कारण ये लवणों के समान व्यवहार करते हैं।

(iii) ग्लाइसीन के अतिरिक्त प्रकृति में उपलब्ध सभी ऐमीनो अम्ल ध्रुवण घूर्णक (optically active) होते हैं क्योंकि इनमें α-कार्बन परमाणु असममित होता है।

(iv) ये ‘D’ तथा ‘L’ रूपों में पाए जाते हैं।

(v) अधिकांश प्राकृतिक ऐमीनो अम्लों का विन्यास ‘L’ होता है तथा L- एमीनो अम्लों में NH2 समूह को सूत्र में बाईं ओर लिखकर दर्शाया जाता है।

प्रश्न 5.
स्पष्ट कीजिए कि निम्नलिखित से क्या समझा जाता है?
(i) पेप्टाइड लिंकेज
(ii) ग्लूकोस की पिरानोस संरचना।
उत्तर:
(i) वह बन्ध (लिंकेज) जिसके द्वारा विभिन्न α- ऐमीनो अम्ल आपस में जुड़कर प्रोटीन बनाते हैं उसे पेप्टाइड लिंकेज (-CONH-) कहते हैं। यह α – ऐमीनो अम्ल के एक अणु के – COOH तथा दूसरे अणु के -NH2 समूह से जल के निकलने से बनता है।

(ii) ग्लूकोस की छः सदस्यीय वलय युक्त संरचना पाइरैन के समान होती है अतः इसे पिरानोस (पाइरैनोस) संरचना कहते हैं। पाइरैन पांच कार्बन तथा एक ऑक्सीजन युक्त चक्रीय यौगिक होता है।
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प्रश्न 6.
DNA और RNA में मुख्य संरचनात्मक अंतर लिखिए। चार क्षारकों में से उनके नाम लिखिए जो इन दोनों में पाए जाते हैं।
उत्तर:
DNA की तुलना में RNA की संरचना कम जटिल होती है। RNA की द्वितीयक संरचना में कुण्डली केवल एक रज्जुक (Strand) से बनी होती है जो कभी-कभी स्वयं के मुड़ने से ही द्विकुण्डलनी हो जाती है। RNA में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल क्षारक तथा डीऑक्सीराइबोस के स्थान पर राइबोस शर्करा होती है। RNA तीन प्रकार के होते हैं जिनके कार्य भिन्न-भिन्न हैं-

  • संदेशवाहक RNA (m-RNA)
  • राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  • अंतरण या स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

DNA तथा RNA में विभेद

(a) संरचनात्मक विभेद्

  • DNA, कोशिका के नाभिक में स्थित क्रोमोसोम (गुणसूत्र ) में पाया जाता है जबकि RNA मुख्यतः कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है
  • DNA में ß-D-डीऑक्सीराइबोस शर्करा होती है जबक् RNA में ß-D राइबोस शर्करा होती है।
  • पिरीमिडीन क्षारक, थायमीन केवल DNA में होता है जबक् यूरेसिल केवल RNA में होता है।
  • DNA की द्विकुंडलनी संरचना होती है जबकि RNA कं एककुंडलनी संरचना होती है।

(b) क्रियात्मक विभेद: DNA में स्वप्रतिकरण (Self Replication) का गुण होता है तथ यह आनुवांशिक गुणों के स्थानान्तरण को नियंत्रित करता है जबकि RNA प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है। साइटोसीन, ऐडेनीन तथा ग्वानीन धारक DNA तथा RNA दोनों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
उस उत्पाद की संरचना लिखिए जो ग्लूकोस पर नाइट्रिक अम्ल की ऑक्सीकारक अभिक्रिया से प्राप्त होता है।
उत्तर:
ग्लूकोस पर नाइट्रिक अम्ल की ऑक्सीकारक अभिक्रिया से ग्लूकोनिक अम्ल प्राप्त होता है।
HOOC – (CHOH)4 – CH2OH

प्रश्न 8.
α- ग्लूकोस और ß – ग्लूकोस में विशेषतः क्या अंतर है? ग्लूकोस की पायरैनोस संरचना से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
α-ग्लूकोस तथा ß- ग्लूकोस में C1 पर उपस्थित हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह के विन्यास में भिन्नता होती है। α – ग्लूकोस में यह -OH समूह दायीं ओर (नीचे की तरफ ) जबकि ß-ग्लूकोस में यह बायीं ओर (ऊपर की तरफ) स्थित होता है इसलिए C1 कार्बन को ऐनोमरी कार्बन कहते हैं।

ग्लूकोस की ये संरचनाएँ विषमचक्रीय यौगिक पाइरैन के समान होती हैं अतः इन्हें पाइरैनोस संरचना कहते हैं।

प्रश्न 9.
(i) शारीरिक वृद्धि में मंदता होने पर व्यक्ति को किस प्रकार का आहार देना चाहिए?
(ii) ग्लूकोस की ऐसी अभिक्रियाएँ दीजिए जिससे यह सिद्ध होता है कि-
(A) ग्लूकोस के सभी छः कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।
(B) ग्लूकोन में ऐल्डिहाइड समूह पाया जाता है।
(iii) एन्जाइम किसे कहते हैं ?
उत्तर:
(i) शारीरिक वृद्धि में मंदता होने पर व्यक्ति को विटामिन B1 (थायमीन) युक्त आहार जैसे हरी सब्जियाँ, दालें तथा दूध इत्यादि देना चाहिए।

(ii)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 22
ग्लूकोस की HI से क्रिया द्वारा n हेक्सेन का बनना यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोस के सभी छः कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।

(B) ग्लूकोस का दुर्बल ऑक्सीकारक जैसे ब्रोमीन जल से ऑक्सीकरण कराने पर ग्लूकोनिक अम्ल बनता है। इससे सिद्ध होता है कि ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित है।
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(iii) सजीवों में होने वाली जैव रासायनिक क्रियाओं में प्रयुक्त होने वाले जैव उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहते हैं। जैसे – माल्टेस एन्जाइम की उपस्थिति में माल्टोस के जल अपघटन से ग्लूकोस बनता है।

प्रश्न 10.
(अ) DNA की द्विकुंडलनी संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
(ब) हमारे शरीर में विटामिन C संचित नहीं हो सकता है। कारण दीजिए।
(स) ग्लूकोस से कैसे प्राप्त करेंगे? (केवल समीकरण दीजिए)
(i) ग्लूकोनिक अम्ल
(ii) n-हैक्सेन।
उत्तर:
(अ) DNA की द्विकुंडलिनी संरचना निम्न प्रकार होती है-
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(ब) विटामिन C जल में विलेय होता है अतः यह हमारे शरीर में संचित नहीं हो सकता क्योंक यह जलीय विलयन के रूप में हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है।

(स) (i) ग्लूकोस से ग्लूकोनिक अम्ल-
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(ii) ग्लूकोस से n-हैक्सेन-
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प्रश्न 11.
(अ) सूक्रोस का हावर्थ सूत्र लिखिए।
(ब) सूक्रोस एक अनपचायी शर्करा है। क्यों?
उत्तर:
उत्तर:
(अ) सूक्रोस (C12H12O11) का हावर्थ सूत्र निम्न प्रकार होता है-
इसमें α- ग्लूकोस के C1 तथा ß – फ्रक्टोज के C2 के मध्य ग्लाइकोसाइडी बन्ध होता है।
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(ब) सूक्रोस में उपस्थित ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस के अपचायक समूह ग्लाइकोसाइडी बन्ध बना लेते हैं अतः यह एक अनअपचायी शर्करा है।

प्रश्न 12.
(a) दो ऐमीनो अम्लों को जोड़ने वाले बन्धन का नाम लिखिए।
(b) श्रीमती अनुराधा के घर में सहायक शान्ति एक दिन फर्श को पोंछते हुए अचानक बेहोश होकर गिर गई। श्रीमती अनुराधा शीप्र ही उसे निकट के अस्पताल में ले गई जहाँ बताया गया कि शान्ति को अत्यधिक रक्त की कमी हो गयी है। डॉक्टर ने उसके लिए लोह धारक भोजन और बहु विटामिनी गोलियाँ लिख दीं। औषधि खरीदने में श्रीमती अनुराधा ने उसकी आर्थिक सहायता की। एक माह पश्चात् निदान कराने पर शान्ति को साधारण बताया गया।

उपर्युक्त लेख को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) श्रीमती अनुराधा ने किन मूल्यों का परिचय दिया ?
(ii) उस विटामिन का नाम बताइए जिसके अभाव में शान्ति को ‘हानिकारक रक्त अभाव’ (प्रणांशी रक्ताल्पता) हुआ।
(iii) जलविलेय विटामिन का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
(a) दो ऐमीनो अम्लों को जोड़ने वाले बन्धन को पेप्टाइड बन्धन कहते हैं।
(b) (i) श्रीमती अनुराधा ने मानवता का परिचय दिया जो कि दयालु, बुद्धिमान तथा दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य के प्रति भी सजग है।
(ii) विटामिन B12
(iii) विटामिन C

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प्रश्न 13.
(i) स्टार्च का कौनसा घटक जल में विलेय होता है?
(ii) कौनसे विटामिन की कमी से रात्रि अंधता रोग उत्पन्न होता है?
(iii) उस क्षारक का नाम बताइए जो केवल RNA के न्युक्लिओटाइड में पाया जाता है।
(iv) ग्लूकोस की HI के साथ अभिक्रिया से n-हेक्सेन बनता है, इससे ग्लूकोस की संरचना के बारे में क्या जानकारी प्राप्त होती है?
उत्तर:
(i) ऐमिलोस
(ii) विटामिन-A
(iii) यूरेसिल
(iv) ग्लूकोस की HI के साथ अभिक्रिया से n-हेक्सेन का बनना यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोस में सभी छः कार्बन परमाणु सीधी श्रृंखला में होते हैं।

प्रश्न 14.
वह रासायनिक अभिक्रिया लिखिए जिससे ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति की पुष्टि होती है।
उत्तर:
ग्लूकोस, हाइड्रॉक्सिल ऐमीन (NH2OH) के साथ अभिक्रिया करके एक ऑक्सिम देता है। इस अभिक्रिया से ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह ( HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 28

प्रश्न 15.
विटामिन A, B, C और D को जल तथा वसा में विलेयता के आधार पर वर्गीकृत कर उनकी तुलना कीजिए।
उत्तर:
जल तथा वसा में विलेयता के आधार पर विटामिनों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है-
(i) वसा विलेय विटामिन-ये विटामिन वसा तथा तेल में विलेय होते हैं लेकिन जल में अविलेय होते हैं। ये विटामिन A तथा D हैं। ये यकृत तथा ऐडिपोस ऊतक में संग्रहित रहते हैं अतः इनका उत्सर्जन नहीं होता है।

(ii) जल विलेय विटामिन-ये विटामिन जल में विलेय होते हैं। ये विटामिन B तथा C हैं। ये मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं। इस कारण हमारे शरीर में संचित नहीं हो पाते हैं।

प्रश्न 16.
मोनोसैकैराइड क्या होते हैं?
उत्तर:
मोनोसैकैराइड वे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिनको और अधिक सरल यौगिकों में जल अपघटित नहीं किया जा सकता है। इनका सामान्य सूत्र C2H2nOn होता है। यहाँ n = 3 से 7. उदाहरण – ग्लूकोस, फ्रक्टोस तथा राइबोस।

प्रश्न 17.
प्रोटीन के विकृतिकरण को एक उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब प्राकृतिक प्रोटीन के ताप तथा pH में परिवर्तन किया जाता है तो उसमें उपस्थित हाइड्रोजन बन्धों की व्यवस्था बिगड़ जाती है जिसके कारण प्रोटीन की गोलिका खुल जाती है तथा हैलिक्स अकुंडलित हो जाती है अतः प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता खो देता है, इसे प्रोटीन का विकृतिकरण कहते हैं। उदाहरण-अंडे को उबालने पर उसमें उपस्थित सफेदी का स्कंदन।

प्रश्न 18.
(i) निम्नलिखित में कौनसा एक डाइसैकेराइड है : स्टार्च, माल्टोस, फ्रक्टोस, ग्लूकोस
(ii) अम्लीय ऐमीनो ऐसिड और क्षारीय ऐमीनो ऐसिड में क्या अन्तर है?
(iii) दो न्यूक्लिओटाइडों को जोड़ने वाली लिंकेज का नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) माल्टोस एक डाइसैकेराइड है।

(ii) अम्लीय ऐमीनो ऐसिड में ऐमीनो समूहों की तुलना में कार्बोक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है जबकि क्षारीय ऐमीनो ऐंसिड में कार्बोक्सिल समूहों की तुलना में ऐमीनो समूहों की संख्या अधिक होती है। उदाहरण-अम्लीय ऐमीनो ऐसिड-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 29
(iii) दो न्यूक्लिओटाइडों को जोड़ने वाली लिंकेज को फॉस्फोडाइएस्टर बंधन कहते हैं।

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. R3N में नाइट्रोजन परमाणु की संकरण अवस्था क्या है?
(अ) sp³
(ब) sp
(स) sp²
(द) sp³d
उत्तर:
(अ) sp³

2. अम्लीय माध्यम में Sn + HCI से नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन करने पर प्राप्त उत्पाद होगा-
(अ) N-फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
(ब) फीनॉल
(स) ऐनिलीन
(द) N-मेथिल ऐनिलीन
उत्तर:
(स) ऐनिलीन

3. एथेन नाइट्राइल का LiAlH4 द्वारा अपचयन करने पर प्राप्त उत्पाद होगा-
(अ) मेथिल ऐमीन
(ब) एथिल ऐमीन
(स) डाइमेथिल ऐमीन
(द) ट्राइमेथिल ऐमीन
उत्तर:
(ब) एथिल ऐमीन

4. निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्राथमिक ऐमीन की पहचान की जाती है?
(अ) NaOH
(ब) HCl
(स) CHCl3
(द) CHCl3 + KOH
उत्तर:
(द) CHCl3 + KOH

5. बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड की क्रिया यौगिक y से कराने पर एक रंजक बनता है तो यौगिक y है-
(अ) C6H6
(ब) C2H5OH
(स) H2O
(द) C6H5NH2
उत्तर:
(द) C6H5NH2

6. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 1का LiAlH4 / H2O से अपचयन कराने पर प्राप्त यौगिक है-
(अ) ऐथेनेमीन
(ब) प्रोपेन- 1- ऐमीन
(स) प्रोपेन -2- ऐमीन
(द) प्रोपेनॉइक अम्ल
उत्तर:
(ब) प्रोपेन- 1- ऐमीन

7. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 2 का आई.यू.पी.ए.सी. नाम है-
(अ) एथेन डाइऐमीन
(ब) एथेन – 1, 2 – डाइऐमीन
(स) 1, 2 – डाइऐमीनोएथेन
(द) 2 – ऐमीनो ऐथेनेमीन
उत्तर:
(ब) एथेन – 1, 2 – डाइऐमीन

8. निम्नलिखित में से कौनसा तृतीयक ऐमीन है ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 3
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 4

9. निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक उच्चतम है ?
(अ) CH3-CH2-CH-NH2
(ब) CH3-NH-CH2-CH3
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 5
(द) सभी का समान
उत्तर:
(अ) CH3-CH2-CH-NH2

10. निम्नलिखित में से किसका pKb मान न्यूनतम है?
(अ) N- मेथिल मेथेनेमीन
(ब) N N डाइमेथिलमेथेनेमीन
(स) मेथेनेमीन
(द) बेन्जीनेमीन
उत्तर:
(अ) N- मेथिल मेथेनेमीन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

11. निम्नलिखित में से अधिकतम क्षारीय यौगिक कौनसा है?
(अ) (C2H5)3N
(ब) (C2H5)2NH
(स) C2H5NH2
(द) NH3
उत्तर:
(ब) (C2H5)2NH

12. इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के लिए – NH2 समूह है-
(अ) निर्देशी
(ब) o, p-निर्देशी
(स) केवल 0-निर्देशी
(द) केवल p-निर्देशी
उत्तर:
(ब) o, p-निर्देशी

13. ऐनिलीन की ब्रोमीन जल से अभिक्रिया कराने पर बना यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 6
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 7

14. अभिक्रिया C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2, \(\stackrel{-}{C}\)l + KI से बना यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 8
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 9

15. C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2, \(\stackrel{-}{C}\)l का अपचयन CH3CH2OH से कराने पर कौनसा उत्पाद नहीं बनेगा-
(अ) C6H6
(ब) C6H5 – CHO
(स) N2
(द) NH3
उत्तर:
(द) NH3

16. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 10
में यौगिक C है-
(अ) CH3 – CH2 – CH2 – NH2
(ब) CH3 – CH2 – NH – CH3
(स) CH3 – CH2 – CH2 NHCOCH3
(द) CH3 – CH2 – CONH – COCH3
उत्तर:
(स) CH3 – CH2 – CH2 NHCOCH3

17. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 11
में यौगिक Z है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 12
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 13

18. निम्नलिखित में से कौनसी अभिक्रिया शॉटन बोमान अभिक्रिया कहलाती है?
(अ) CH3 NH2 + HCl → CH3N\(\stackrel{+}{H}\)3, \(\stackrel{-}{Cl}\)
(ब) CH3 – CH2 NH2 + C6H5 COCl → CH3 – CH2 – NH – COC6H5 + HCl
(स) C6H5 NH2 + CH3 COCl → C6H5 NH – COCH3 + HCl
(द) C6H5OH + CH3COCl → C6H5O COCH3 + HCl
उत्तर:
(ब) CH3 – CH2 NH2 + C6H5 COCl → CH3 – CH2 – NH – COC6H5 + HCl

19. निम्नलिखित में से कौनसे यौगिक की CH3COCl से अभिक्रिया नहीं होती?
(अ) C2H5OH
(ब) (CH3 – CH2)2 NH
(स) (CH3)3 N
(द) CH3 NH2
उत्तर:
(स) (CH3)3 N

20. निम्नलिखित में से किस यौगिक का अपचयन LiAIH4 द्वारा कराने पर \(\stackrel{\circ}{2}\) ऐमीन प्राप्त होता है?
(अ) CH3 – CH2 – NC
(ब) CH3CONH2
(स) CH3 – NO2
(द) CH3 – CH2 – CN
उत्तर:
(अ) CH3 – CH2 – NC

21. प्राथमिक ऐल्किल ऐमीन को क्लोरोफॉर्म एवं ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर बनता है-
(अ) ऐल्किल क्लोराइड
(ब) ऐल्किल ऐल्कोहॉल
(स) ऐल्किल आइसोसायनाइड
(द) ऐल्कीन
उत्तर:
(स) ऐल्किल आइसोसायनाइड

22. निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पाद की पहचान कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 14
(अ) 3, 4, 5 ट्राइबोमोबेन्जीन
(ब) 1, 2, 3 ट्राइब्रोमोबेन्जीन
(स) 3, 4, 5 ट्राइब्रोमोफीनॉल
(द) 3, 4, 5 ट्राइब्रोमोनाइट्रो बेन्जीन
उत्तर:
(ब) 1, 2, 3 ट्राइब्रोमोबेन्जीन

23. ऐमीन जो नाइट्स अम्ल के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन मुक्त नहीं करती है, वह है-
(अ) ट्राइमेथिल ऐमीन
(ब) एथिल ऐमीन
(स) द्वितीयक ब्यूटिल ऐमीन
(द) आइसोप्रोपिल ऐमीन
उत्तर:
(अ) ट्राइमेथिल ऐमीन

24. बेन्जिलऐमीन को क्लोरोफार्म तथा एथेनॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर प्राप्त उत्पाद है-
(अ) बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(ब) बेन्जेल्डिहाइड
(स) बेन्जोनाइट्राइल
(द) बेन्जिल आइसोसायनाइड
उत्तर:
(द) बेन्जिल आइसोसायनाइड

25. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक ऐमीन प्राप्त नहीं होती?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 15
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 16

26. अणुसूत्र C4H11N से कितने प्राथमिक ऐमीनों का निर्माण सम्भव है-
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
उत्तर:
(द) 4

27. ऐनिलीन सर्वप्रथम ऐसीटिल क्लोराइड के साथ क्रिया करके यौगिक ‘A’ बनाती है। ‘A’ नाइट्रिक अम्ल / सल्फ्यूरिक अम्ल मिश्रण के साथ क्रिया करता है तथा यौगिक ‘B’ बनाता है जो जल अपघटित होकर यौगिक ‘C’ देता है। यौगिक ‘C’ क्या है?
(अ) ऐसीटेनिलाइड
(ब) p-नाइट्रो ऐसीटेनिलाइड
(स) p- नाइट्रोऐनीलीन
(द) सल्फोनिक अम्ल
उत्तर:
(स) p- नाइट्रोऐनीलीन

28. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया गाटरमान अभिक्रिया कहलाती है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 17
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 18

29. O – टॉलुडीन से एक उत्पाद D बनता है
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 19
यह मुख्य उत्पाद D होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 20
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 21

30. निम्नलिखित अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 22
तो D होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 23
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 24

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
यौगिकों के निम्नलिखित युग्म में कौनसी समावयवता है?
CH3 – CH2 – CH2 – NH2 तथा HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 25
उत्तर:
स्थिति समावयवता।

प्रश्न 2.
ऐल्किल हैलाइड की अमोनिया के आधिक्य के साथ क्रिया कराने पर प्राप्त प्रमुख उत्पाद क्या होगा?
उत्तर:
प्राथमिक ऐमीन।

प्रश्न 3.
समान अणुभार वाले प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों के क्वथनांक का क्रम लिखिए।
उत्तर:
प्राथमिक ऐमीन > द्वितीयक ऐमीन > तृतीयक ऐमीन।

प्रश्न 4.
कौनसे ऐमीन जल में अविलेय होते हैं ?
उत्तर:
तृतीयक ऐमीन।

प्रश्न 5.
सल्फेनिलिक अम्ल का सूत्र तथा IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 26

प्रश्न 6.
ऐमीनों के प्राकृतिक स्रोत बताइए।
उत्तर:
प्रकृति में ऐमीन, प्रोटीन, विटामिन, ऐल्केलॉइड तथा हॉर्मोनों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
दो जैव सक्रिय ऐमीन बताइए जिनका उपयोग रक्त चाप बढ़ाने में किया जाता है।
उत्तर:
ऐड्रीनलिन और इफेड्रिन, ये द्वितीयक ऐमीन हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

प्रश्न 8.
बैनेड्रिल का उपयोग बताइए। इसमें उपस्थित क्रियात्मक समूह भी बताइए।
उत्तर:
बैनेड्रिल प्रतिहिस्टैमिन के रूप में प्रयुक्त होता है तथा इसमें तृतीयक ऐमीन समूह उपस्थित होता है।

प्रश्न 9.
चतुष्क अमोनियम लवणों का एक उपयोग बताइए।
उंत्तर:
चतुष्क अमोनियम लवणों \(\left(\mathrm{R}_4 \stackrel{+}{\mathrm{N}} \overline{\mathrm{X}}\right)\) को पृष्ठ सक्रिय पदार्थों के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 10.
तृतीयक ब्यूटिल ऐमीन किस प्रकार की ऐमीन है?
उत्तर:
प्राथमिक ऐमीन।

प्रश्न 11.
वह सरलतम प्राथमिक ऐमीन कौनसा है जो प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 27

प्रश्न 12.
मेथिल ऐमीन की अम्लीय प्रकृति को दर्शाने वाली एक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 28

प्रश्न 13.
एक प्राथमिक ऐमीन (अणु भार 31) HgCl2 की उपस्थिति में कार्बन डाइसल्फाइड के साथ क्रिया करके ऐसा यौगिक बनाता है जिसमें सरसों के तेल के समान गंध आती है तो प्राथमिक ऐमीन का सूत्र तथा रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 29

प्रश्न 14.
हिन्सबर्ग अभिकर्मक से 2° तथा 3° ऐमीन में विभेद कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
2° ऐमीन हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ क्रिया कर लेती है। लेकिन 3° ऐमीन की हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ कोई क्रिया नहीं होती।

प्रश्न 15.
ऐनिलीन की बैन्जेल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया का समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 30

प्रश्न 16.
मेथेनैमीन को एथेन नाइट्राइल में रूपान्तरित करने के लिए आवश्यक अभिक्रिया अनुक्रम को लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 31

प्रश्न 17.
जल में विलेय तथा जल में अविलेय डाइएजोनियम लवण कौनसे होते हैं?
उत्तर:
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड (C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2\(\overline{Cl}\)) जल में विलय होता है लेकिन बेन्जीन डाइएजोनियम फ्लुओरो बोरेट [C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2B\(\overline{F}\)4] जल में अविलेय होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित परिवर्तनों के लिए आवश्यक समीकरण दीजिए-
(i) एथेनैल से मेथेनेमीन
(ii) एथेनॉयल क्लोराइड से मेथेनेमीन
(iii) एथेनॉइक अम्ल से प्रोपेन- 1- ऐमीन।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 32

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 33
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 34

प्रश्न 3.
ऐथेनेमीन जल में पूर्ण विलेय है, जबकि बेन्जीनेमीन (ऐनिलीन) जल में लगभग अविलेय है, क्यों?
उत्तर:
ऐथेनेमीन जल के साथ आसानी से अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बन्ध बना लेती है, अतः यह जल में पूर्ण विलेय है लेकिन ऐनिलीन में फेनिल समूह के बड़े आकार के कारण यह जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना पाती है अतः यह जल में लगभग अविलेय है।

प्रश्न 4.
(i) ऐलुमिना की उपस्थिति में एथेनॉल के आधिक्य की क्रिया अमोनिया के साथ कराने पर प्राप्त उत्पाद बताइए।
(ii) निम्नलिखित यौगिकों से मेथिल ऐमीन किस प्रकार बनाया जाता है? समीकरण दीजिए।
(a) CH3-MgCl
(b) CH3COCl
उत्तर:
(i) ऐलुमिना (Al2O3) की उपस्थिति में एथेनॉल के अधिकय की क्रिया अमोनिया के साथ कराने पर प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐमीनों का मिश्रण प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 35

प्रश्न 5.
निम्नलिखित विधियों से प्राथमिक ऐमीन बनाने की अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(a) ऐल्किल आइसोसायनाइड का जल अपघटन
(b) कार्बोनिल यौगिकों का अपचायक ऐमीनीकरण
(c) ऐल्किल आइसोसायनेट का क्षारीय जल अपघटन
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 36

प्रश्न 6.
ऐथिलऐमीन क्षारीय होती है जबकि ऐसिटेमाइड उभयधर्मी होता है, इसका कारण बताइए।
उत्तर:
ऐथिलऐमीन में – NH2 समूह के नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रोटोन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन ऐसिटैमाइड में उपस्थित HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 37 समूह के – I प्रभाव के कारण, -NH2 समूह के नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अनुनाद में भाग लेता है अतः यह प्रोटेन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है इसलिए ऐथिलऐमीन क्षारीय होता है जबकि ऐसिटैमाइड उभयधर्मी होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 38

प्रश्न 7.
साइक्लोहेक्सेनैमीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 39 बेन्जीनेमीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 40की तुलना में अधिक क्षारीय होती है, क्यों?
उत्तर:
साइक्लोहेक्सेनैमीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से उपलब्ध हो जाता है क्योंकि इसमें अनुनाद नहीं होता जबकि बेन्जीनेमीन (ऐनिलीन) में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है अतः साइक्लोहेक्सेनैमीन, बेन्जीनेमीन की तुलना में अधिक क्षारीय होती है।

प्रश्न 8.
मेथिलऐमीन की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया दीजिए-
(i) HAuCl4
(ii) H2PtCl6
(iii) CH3COCl
(iv) C6H5COCl
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 42

प्रश्न 9.
हॉफमान मस्टर्ड ऑइल अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
हॉफमान मस्टर्ड ऑइल अभिक्रिया-ऐल्किल ऐमीन की क्रिया कार्बन डाइसल्फाइड CS2 के साथ कराने पर पहले N-ऐल्किल डाइथायोकार्बेमिक अम्ल बनता है जिसे मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCl2) के साथ गरम करने पर ऐल्किल आइसोथायोसायनेट प्राप्त होता है जिसकी सरसों के तेल के समान गंध आती है। अतः इस अभिक्रिया को हॉफमान मस्टर्ड ऑइल अभिक्रिया कहते हैं तथा यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के परीक्षण में प्रयुक्त होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 43
ऐरोमैटिक ऐमीन (जैसे ऐनिलीन) में यह अभिक्रिया निम्न प्रकार भी की जा सकती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 44

प्रश्न 10.
ऐनिलीन से o-ब्रोमोऐनिलीन तथा p-ब्रोमोऐनिलीन किस प्रकार बनाया जाता है? समझाइए।
उत्तर:
ऐनिलीन की इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति अधिक क्रियाशीलता के कारण प्रतिस्थापन o – तथा p – दोनों स्थितियों पर हो जाता है अतः ऐनिलीन का एकल प्रतिस्थापी व्युत्पन्न बनाने के लिए – NH2 समूह के सक्रियण प्रभाव को कम करने के लिए पहले ऐसिटिलीकरण द्वारा इसका रक्षण किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 45

प्रश्न 11.
ऐनिलीन के नाइट्रीकरण से p-नाइट्रोऐनिलीन किस प्रकार बनाया जाता है ? समीकरण सहित समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रीकारक मिश्रण में उपस्थित सान्द्र HNO3 के ऑक्सीकारक गुण के कारण यह ऐनिलीन का ऑक्सीकरण कर देता है अतः इस अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए नाइट्रीकरण से पहले ऐनिलीन का ऐसिटिलीकरण करके – NH2 समूह का रक्षण किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 46

प्रश्न 12.
नाइट्रोबेन्जीन को बेन्जीन में रूपान्तरित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 47

प्रश्न 13.
p-ऐमीनोटॉलुइन से 2-ब्रोमो-4-मेथिल ऐनिलीन बनाने के लिए आवश्यक अभिक्रिया अनुक्रम बताइए।
उत्तर:
p-ऐमीनोटॉलुइन से 2 -ब्रोमो-4-मेथिल ऐनिलीन बनाने के लिए निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम आवश्यक होते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 48

प्रश्न 14.
सैन्डमायर अभिक्रिया तथा गाटरमान अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
हैलाइड अथवा सायनाइड आयन द्वारा प्रतिस्थापन (हैलोबेन्जीन अथवा सायनो बेन्जीन का निर्माण) –
(i) बेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड की क्रिया Cu(I) की उपस्थिति में HCl, HBr तथा KCN के साथ करवाने पर क्रमशः C6H5Cl, C6H5Br तथा C6H5CN बनते हैं। इसे सैन्डमायर अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 49
इस अभिक्रिया में Cu(I) के स्थान पर कॉपर लेने परइसे गाटरमान अभिक्रिया कहते हैं लेकिन इसमें उत्पाद की लब्धि कम होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 50
नोट-C6H5CN (बेन्जोनाइट्राइल) से बेन्जिल ऐमीन, बेन्जेमाइड तथा बेन्जोइक अम्ल का संश्लेषण किया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 51

(ii) फ्लुओरोबेन्जीन का निर्माण – जब बेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया फ्लुओरोबोरिक अम्ल के साथ की जाती है तो पहले ऐरीनडाइएजोनियम फ्लुओरोबोरेट अवक्षेपित होता है जिसे गरम करने पर यह ऐरिलफ्लुओराइड देता है। इसे बाल्ज शीमान अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 52

(iii) आयोडोबेन्जीन का निर्माण – बेन्जीन वलय में आयोडीन को सीधे जोड़ना मुश्किल होता है अतः आयोडोबेन्जीन बनाने के लिए बेन्जीन डाइजोनियम क्लोराइड की क्रिया पोटेशियम आयोडाइड के साथ करवायी जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 53

प्रश्न 15.
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाएँ बताइए-
(i) N, N-डाइमेथिल ऐनिलीन
(ii) ß – नैफ्थॉल।
उत्तर:
(i) N, N-डाइमेथिलऐनिलीन के साथ क्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 54

(ii) ß – नैफ्थॉल के साथ क्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 55

प्रश्न 16.
ऐमीनों के बनाने की वे कौनसी विधियाँ हैं जिनसे ऐनिलीन नहीं बनायी जा सकती ?
उत्तर:
ऐमीन बनाने की निम्नलिखित विधियों द्वारा ऐनिलीन नहीं बनायी जा सकती-

  • नाइट्राइलों का अपचयन
  • ऐमाइडों का अपचयन
  • ऑक्सिमों का अपचयन
  • कार्बोनिल यौगिकों का अपचायक ऐमीनीकरण।

प्रश्न 17.
अणुसूत्र C4H11N युक्त दो समावयवी A तथा B की HNO2 के साथ क्रिया से यौगिक C तथा D बनते हैं। C का ऑक्सीकरण मुश्किल से होता है लेकिन यह शीघ्रता से ल्युकास अभिकर्मक से क्रिया करता है जबकि D की ल्युकास अभिकर्मक से क्रिया 5 मिनट में होती है तथा यह हैलोफॉर्म अभिक्रिया भी देता है तो A, B, C तथा D की पहचान कीजिए।
उत्तर:
A = (CH3)3 C – NH2
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 56
A व B प्राथमिक ऐमीन हैं जिनकी HNO2 के साथ क्रिया से संगत ऐल्कोहॉल बनते हैं। C तृतीयक ऐल्कोहॉल है जिसका ऑक्सीकरण मुश्किल से होता है तथा यह ल्युकास अभिकर्मक से तुरन्त क्रिया कर लेता है तथा D एक द्वितीयक ऐल्कोहॉल है अतः यह ल्युकास अभिकर्मक से 5 मिनट में क्रिया करता है एवं HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 57 समूह के कारण यह हैलोफॉर्म अभिक्रिया देता है।

प्रश्न 18.
आप निम्नलिखित परिवर्तन किस प्रकार करेंगे ?
(i) मेथिल ऐल्कोहॉल से एथिल ऐमीन
(ii) एथेनॉइक अम्ल से एथेनैमीन।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 58

प्रश्न 19.
बेन्जीन से फेनिल आइसोसायनाइड किस प्रकार बना जाता है ? आवश्यक ‘अभिक्रिया अनुक्रम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 59

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके जलीय विलयनों में क्षारीय सामर्थ्य के बढ़ते हुए क्रम में लिखिए-
NH3, CH3NH2, (CH3)2NH, (CH3)3N
उत्तर:
NH3 < (CH3)3 N < CH3 – NH2 < (CH3)2NH

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रिया समीकरणों को पूर्ण रूप में लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 60
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 61

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिक युग्मों में अंतर करने के लिए रासायनिक परीक्षण लिखिए-
(i) एथिलऐमीन और ऐनिलीन में
(ii) ऐनिलीन और बेन्जिलऐमीन में।
उत्तर:
(i) ऐथिलऐमीन बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोरइड से क्रिया करके ऐजो रंजक (Azo dye) नहीं बनाता जबकि ऐनिलीन, बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड से क्रिया करके एजोरंजक (पीला) बनाती है।

(ii) ऐनिलीन, बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड (C6H5\(\overline{N}\)2\(\overline{C}\)) से क्रिया करके एजोरंजक बनाती है लेकिन बेन्जिलऐमीन ऐसा नहीं करती।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रत्येक प्रक्रम में A और B की पहचान कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 62
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 63

प्रश्न 5.
निम्नलिखित को उनकी क्षारीय सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में पुनः व्यवस्थित कीजिए-
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C6H5)2NH और CH3NH2
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 64

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के कारण लिखिए-
(i) ऐनिलीन के लिए pKb का मान अपेक्षाकृत मेथिलऐमीन से अधिक होता है।
(ii) एथिलऐमीन जल में घुलनशील है परन्तु ऐनिलीन जल में नहीं घुलती।
(iii) प्राथमिक ऐमीनों के क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होते हैं।
उत्तर:
(i) मेथिल ऐमीन (CH3 – NH2) में मेथिल समूह के + I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) के कारण नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति अधिक होती है इसलिए इसका क्षारीय गुण अधिक होता है जबकि ऐनिलीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 65 में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद (+M प्रभाव) करता है जिससे इसके नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति कम हो जाती है इसलिए इसका क्षारीय गुण कम होता है। इसी कारण ऐनिलीन का pKb मेथिलऐमीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि क्षारीय गुण \(\propto \frac{1}{pK}{b} \propto K{b}\) (क्षार वियोजन स्थिरांक)

(ii) ऐथिलऐमीन (C2H5 – NH2) जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाती है जबकि ऐनिलीन के C6H5 – समूह (अध्रुवीय) के बड़े आकार के इसमें जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती अतः ऐथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं।

(iii) प्राथमिक ऐमीनों में नाइट्रोजन पर दो हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हैं जिनके कारण इनमें प्रबल अन्तराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध होता है जिससे आण्विक सगुणन (Molecular association) अधिक होता है जबकि तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन पर हाइड्रोजन परमाणु नहीं होने के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनता अतः प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 66

प्रश्न 7.
प्रत्येक के लिए संगत रासायनिक समीकरण देकर निम्नलिखित का वर्णन कीजिए-
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया
(ii) हॉफमान की ब्रोमैमाइड अभिक्रिया
उत्तर:
(i) हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया या आइसोसायनाइड परीक्षण-ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफ़ार्म तथा एथेनॉलिक KOH या NaOH के साथ गर्म करने पर तीक्ष्ण दुर्गधधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कार्बिलऐमीन बनता है इसे हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन में यह अभिक्रिया नहीं होती तथा यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के परीक्षण में प्रयुक्त की जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 67

(ii) हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया या हॉफमान हाइपोब्रोमाइट अभिक्रिया द्वारा (By Hofmann Bromamide Degradation Reaction or Hofmann Hypobromite Reaction) – NaOH याँ KOH के जलीय अथवा एथेनॉलिक विलयन में ऐमाइडों की क्रिया ब्रोमीन के साथ करवाने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया से प्राप्त ऐमीन में ऐमाइड की तुलना में एक कार्बन कम होता है। अतः इस अभिक्रिया को निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं तथा इसे सजातीय श्रेणी में अवरोहण के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इस अभिक्रिया के प्रथम पद में ब्रोमामाइड (हाइपोब्रोमाइट) बनता है अतः इसे हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया कहा जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 68
अभिक्रिया की क्रियाविधि – यह अभिक्रिया चार पदों में सम्पन्न होती है तथा इसमें नाइट्रीन मध्यवर्ती बनता है।
(i) ब्रोमीनीकरण (Bromination)-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 69
(ii) विहाइड्रोब्रोमीनीकरण (Dehydrobromination)-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 70

(iii) पुनर्विन्यास (Rearrangement) – इस पद में ऐल्किल समूह का स्थानान्तरण कार्बन परमाणु से नाइट्रोजन परमाणु पर होकर ऐल्किल आइसोसायनेट बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 71

(iv) जल अपघटन (Hydrolysis)-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 72

प्रश्न 8.
(i) ऐनिलीन के डाइएजोटीकरण से क्या अभिप्राय है? अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
(ii) ऐनिलीन की निम्नलिखित के साथ होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(A) हिन्सबर्ग अभिकर्मक से
(B) ब्रोमीन जल से
(C) नाइट्रीकारी मिश्रण से
(D) क्षार की उपस्थिति में क्लोरोफार्म से
उत्तर:
(i) बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड बनाने के लिए निम्न ताप पर ऐनिलीन की नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया करवायी जाती है। इस अभिक्रिया के लिए आवश्यक नाइट्रस अम्ल को अभिक्रिया मिश्रण में ही सोडियम नाइट्राइट (NaNO2 तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की क्रिया से उत्पन्न किया जाता है। प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन से डाइऐजोनियम लवण बनाने की इस अभिक्रिया को डाइऐजोकरण या डाइएजोटीकरण (Diazotisation) कहते हैं। यह अभिक्रिया उन्हीं प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीनों द्वारा दी जाती है जिनमें -NH2 समूह ऐरीमैटिक वलय से सीधे जुड़ा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 73
बेन्जीन डाइएजोनियम लवण केवल विलयन में ही कुछ समय के लिए स्थायी होते हैं अतः इनका भण्डारण नहीं किया जा सकता तथा इन्हें बनते ही प्रयोग में ले लिया जाता है।

(ii)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 74

B. हैलोजेनीकरण या हैलोजनन (Halogenation)-ऐनिलीन कमरे के ताप पर ही ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन का श्वेत अवक्षेप देती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 75
ऐनिलीन की इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति अधिक क्रियाशीलता के कारण प्रतिस्थापन आर्थो तथा पैरा दोनों स्थितियों पर हो जाता है। जब ऐनिलीन का एकल हैलो प्रतिस्थापी व्युत्पन्न बनाना हो तो NH2 समूह के सक्रियण प्रभाव को कम करने के लिए पहले ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से ऐसिटिलीकरण द्वारा इसको रक्षित (Protect) किया जाता है, इसके पश्चात् प्रतिस्थापन करते हैं और फिर अंत में प्रतिस्थापित ऐमाइड का जल अपघटन किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 76
ऐसिटेनिलाइड की नाइट्रोजन पर स्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म, ऑक्सीजन परमाणु की इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रवृत्ति के कारण इसके साथ अनुनाद में भाग लेता है जिससे नाइट्रेजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का बेन्जीन वलय की तरफ अनुनाद (+M प्रभाव) कम हो जाता है। इसी कारण – NHCOCH3 समूह का सक्रियण प्रभाव, – NH2 समूह से कम होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 77

C. नाइट्रीकरण (Nitration ) – नाइट्रीकारक मिश्रण (सान्द्र HNO3 + सान्द्र H2SO4) में उपस्थित सान्द्र HNO3 ऑक्सीकारक होता है अतः ऐनिलीन के सीधे नाइट्रीकरण में नाइट्रोव्युत्पन्नों के साथ ऑक्सीकरण उत्पाद भी बनते हैं तथा ऐनिलीन H2SO4 से प्रोटोन ग्रहण करके ऐनिलीनियम आयन बना देती है जिसके m – निर्देशी प्रभाव के कारण o- तथा p- उत्पादों के साथ m – उत्पाद भी अपेक्षित मात्रा से अधिक बन जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 78

अतः ऐनिलीन की नाइट्रीकरण अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए पहले, (CH3CO)2O के साथ क्रिया द्वारा – NH2 समूह का रक्षण (Protection) करते हैं इसके पश्चात् नाइट्रीकरण करके प्राप्त उत्पाद का जल अपघटन करने से पैरानाइट्रोऐनिलीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है।

D. हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया या आइसोसायनाइड परीक्षण-ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफ़ार्म तथा एथेनॉलिक KOH या NaOH के साथ गर्म करने पर तीक्ष्ण दुर्गधधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कार्बिलऐमीन बनता है इसे हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन में यह अभिक्रिया नहीं होती तथा यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के परीक्षण में प्रयुक्त की जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 80

प्रश्न 9.
(अ) ऐनिलीन एवं N मेथिल ऐनिलीन में विभेद के लिए एक रासायनिक समीकरण दीजिए।
(ब) डाइमेथिल ऐमीन मेथिल ऐमीन से प्रबल क्षार है । (कारण दीजिए)
(स) ऐनिलीन से कैसे प्राप्त करेंगे – (केवल समीकरण दीजिए)
(i) 2, 4, 6- ट्राइब्रोमोऐनिलीन?
(ii) बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड ?
उत्तर:
(अ) ऐनिलीन (1° – ऐमीन) CHCI, तथा क्षार के साथ कार्बिल ऐमीन परीक्षण देता है जबकि N- मेथिल ऐनिलीन (2°- ऐमीन) कार्बिल ऐमीन परीक्षण नहीं देती।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 81

(ब) डाइमेथिल ऐमीन, मेथिल ऐमीन से प्रबल क्षार है क्योंकि डाइमेथिल ऐमीन (2°) में दो मेथिल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I प्रभाव) के कारण नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

(स)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 82

प्रश्न 10.
(अ) निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में X तथा Y को पहचानिए एवं प्रयुक्त दोनों अभिक्रियाओं के नाम भी लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 83

(ब) ऐल्केनेमीन अमोनिया से प्रबल क्षारक है। कारण दीजिए।
उत्तर:
(अ) RCONH2 + Br2 + 4 NaOH → RNH2 + Na2CO3 + 2NaBr + 2H2O
यहाँ X = R-NH2 ( प्राथमिक ऐमीन) इस अभिक्रिया को हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 84
इस अभिक्रिया को कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया कहते हैं।

(ब) ऐल्केनेमीन, अमोनिया से प्रबल क्षारक है क्योंकि ऐल्केनेमीन में उपस्थित ऐल्किल समूह की इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रकृति के कारण यह इलेक्ट्रॉन युग्म को नाइट्रोजन की ओर प्रतिकर्षित करता है इससे नाइट्रोजन के असहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म की प्रोटॉन से साझेदारी के लिए उपलब्धता बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त ऐमीन से प्राप्त हुआ प्रतिस्थापित अमोनियम आयन, ऐल्किल समूह + I प्रभाव के कारण आवेश के वितरण द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

प्रश्न 11.
निम्नलिखित की संरचना लिखिए-
(i) प्रोप-2-ईन-1-ऐमीन
(ii) N-मेथिल ऐथेनैमीन
(iii) 2-ऐमीनो टॉलुईन
उत्तर:
(i) CH2 = CH – CH2 – NH2
(ii) CH3 – CH2 – NH – CH3
(iii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 85

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के मुख्य उत्पाद लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 86
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 87

प्रश्न 13.
(i) निम्नलिखित यौगिकों की जल में विलेयता का आरोही क्रम लिखिए-
C6H5NH2, (C2H5)2NH, C2H5NH2
(ii) निम्नलिखित यौगिकों को क्षारीय प्रबलता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
C6H5NH2, C6H5NHCH3, C6H5CH2NH2
उत्तर:
(i) जल में विलेयता का आरोही क्रम
C6H5NH2 < (C2H5)2 NH < C2H5NH2

(ii) क्षारीय प्रबलता का बढ़ता क्रम
C6H5NH2 < C6H5NHCH3 < C6H5CH2NH2

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परिवर्तन किस प्रकार करेंगे ? समीकरण दीजिए।
(i) नाइट्रोबेन्जीन से ऐनिलीन
(ii) एथेनॉइक अम्ल से मेथेनैमीन
(iii) ऐनिलीन से N – फेनिलएथेनैमाइड
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 88

प्रश्न 15.
हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
किसी ऐमाइड की NaOH या KOH के जलीय अथवा ऐथेनॉलिक विलयन में ब्रोमीन से अभिक्रिया कराने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है। इसे हॉफमान ब्रोमाइड अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 88a

प्रश्न 16.
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की फ़ीनॉल के साथ युग्मन अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की फीनॉल के साथ अभिक्रिया कराने पर युग्मन द्वारा p-हाइड्रॉक्सीऐजोबेन्जीन बनता है जो कि एक ऐजोरंजक है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 89

प्रश्न 17.
(i) ऐलीफैटिक एवं (ii) ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
(i) ऐलीफैटिक प्राथमिक ऐमीन की नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया से मुख्य उत्पाद के रूप में ऐल्केनॉल प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 90

(ii) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया द्वारा जीन डाइजोनियम लवण प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 91

प्रश्न 18.
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 92 का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
N, N-डाइएथिल ब्यूटेन-1-ऐमीन

प्रश्न 19.
क्या होता है जब बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया पोटेशियम आयोडाइड से कराई जाती है? (केवल अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।)
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 93

प्रश्न 20.
अधोलिखित यौगिकों को उनके बढ़ते हुए क्षारीय सामर्थ्य के क्रम में व्यवस्थित कर कारण स्पष्ट कीजिए-
C2H5NH2, NH3, C6H5NH2
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों के क्षारीय सामर्थ्य का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
C2H5NH2 < NH3 < C6H5NH2
C6H5NH2(ऐनिलीन) में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का बेन्जीन वलय के साथ संयुग्मन (अनुनाद ) (+ M प्रभाव) हो जाता है। अतः यह प्रोटोन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है इसलिए इसकी क्षारीय सामर्थ्य NH3 से कम होती है जबकि C2H5NH2 में एथिल समूह (C2H5-) के इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव (+I प्रभाव ) के कारण नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से प्रोटोन ग्रहण कर लेता है तथा इससे प्राप्त प्रतिस्थापित अमोनियम आयन में आवेश का वितरण हो जाता है जिससे वह स्थायी हो जाता है अतः एथिल एमीन (C6H5NH2) की क्षारीय सामर्थ्य, NH3 से अधिक होती है।

प्रश्न 21.
आणिकक सूत्र C7H7ON का एक ऐरोमैटिक यौगिक ‘A’ नीचे दिखाई गई एक अभिक्रिया श्रेणी में जाता है। निम्नलिखित अभिक्रियाओं में A, B, C, D और E की संरचनाएँ लिखिए :
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 94
अथवा
(a) जब ऐनिलीन निम्नलिखित अभिकारकों के साथ अभिक्रिया करता है तो प्राप्त उत्पादों की संरचनाएँ लिखिए :
(i) Br2 जल
(ii) HCl
(iii) (CH3CO)2O / पिरिडीन

(b) निम्नलिखित को उनके क्वथनांक के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
C2H5NH2, C2H5OH, (CH3)3 N

(c) यौगिकों के निम्नलिखित युग्म में अन्तर करने के लिए एक सामान्य रासायनिक जाँच दीजिए :
(CH3)2 – NH और (CH3)3N
उत्तर:
दिए गए ऐरोमैटिक यौगिक C7H7ON की अभिक्रिया श्रेणी निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 95
अतः
A = C6H5CONH2 बेन्जैमाइड
B = C6H5N2Cl बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड
C = C6H5CN फेनिल सायनाइड
D = C6H5NC फेनिल आइसोसायनाइड
E = C6H5OH फीनॉल
अथवा
(a)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 96
(b) क्वथनांक का बढ़ता क्रम-
(CH3)3N < C2H5NH2 < C2H5OH

(c) (CH3)2NH (\({ }_2^{\circ}\)-ऐमीन) हिन्सबर्ग अभिकर्मक से अभिक्रिया करती है लेकिन (CH3)3 N (\({ }_3^{\circ}\)-ऐमीन) हिन्सबर्ग अभिकर्मक से अभिक्रिया नहीं करती। अतः हिन्सबर्ग अभिकर्मक की सहायता से इनमें अन्तर किया जा सकता है।

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए-
(i) जनसंख्या वितरण दर्शाया जाता है-
(क) वर्णमात्री मानचित्रों द्वारा
(ख) सममान रेखा मानचित्रों द्वारा
(ग) बिंदुकित मानचित्रों द्वारा
(घ) ऊपर में से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) बिंदुकित मानचित्रों द्वारा।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

(ii) जनसंख्या की दशकीय वृद्धि को सबसे अच्छा प्रदर्शित
करने का तरीका है-
(क) रेखा ग्राफ
(ग) वृत्त आरेख
(ख) दंड आरेख
(घ) ऊपर में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(क) रेखा ग्राफ।

(iii) बहुरेखाचित्र की रचना प्रदर्शित करती है-
(क) केवल एक बार
(ख) दो चरों से अधिक
(ग) केवल दो चर
(घ) ऊपर में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(ख) दो चरों से अधिक।

(iv) कौन-सा मानचित्र “गतिदर्शी मानचित्र” जाना जाता है-
(क) बिंदुकित मानचित्र
(ख) सममान रेखा मानचित्र
(ग) वर्णमात्री मानचित्र
(घ) प्रवाह संचित्र।
उत्तर:
(घ) प्रवाह संचित्र।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) थिमैटिक मानचित्र क्या हैं?
उत्तर:
थिमैटिक मानचित्र मानचित्रों की विविधता। प्रादेशिक वितरणों के प्रतिरूपों अथवा स्थानों पर विविधताओं की विशेषताओं को समझने के लिए विविध मानचित्रों को बनाया जाता हैं। यह मानचित्र अलग-अलग विशेषताओं को पेश करने वाले आंकड़ों में आंतरिक विभिन्नताओं के मध्य की तुलना दिखाने के लिए भी उपयोगी प्रयोजन प्रदान करते हैं।

(ii) आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आंकड़े उन तथ्यों की विशेषताओं को हमारे सामने लाते हैं जो प्रदर्शित किए जाते हैं। आंकड़ो के प्रस्तुतीकरण की आलेखी विधि हमारी समझ के क्षेत्र को बढ़ाती हैं अथवा तुलनाओं को आसान बना देती हैं। इसके अतिरिक्त इस प्रकार की विधियाँ एक लंबे समय के लिए मस्तिष्क पर अपनी छाप छोड़ देती हैं।

(iii) बहुदंड आरेख और यौगिक दंड आरेख में अंतर बताइए।
उत्तर:
दंड आरेख-आँकड़े दिखाने के लिए यह सबसे सरल विधि है। इसमें आँकड़ों को समान चौड़ाई वाले दंडी या स्तंभों द्वारा दिखाया जाता हैं। इन दंडों की लंबाई वस्तुओं की मात्रा के अनुपात के अनुसार छोटी-बड़ी होती है। बहुदंड आरेख-यदि एक दंड को अनेक भागों में बांटकर उसके द्वारा कई वस्तुओं को एक साथ दिखाया जाए तो बहुदंड आरेख का निर्माण होता है। इस विधि के द्वारा आंकड़ों के कुल योग तथा उसके विभिन्न भागों को दिखाया जाता है।

(iv) एक बिंदुकित मानचित्र की रचना के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं?
उत्तर:
बिंदु विधि द्वारा मानचित्र की रचना के लिए आवश्यकता होती है-

  1. जिस वस्तु का वितरण प्रकट करना हो उसके सही-सही आँकड़े उपलब्ध होने चाहिए। ये आंकड़े प्रशासकीय इकाइयों के आधार पर होने चाहिए।
  2. उस प्रदेश का एक सीमा चित्र हो जिसमें जिले या राज्य आदि शासकीय भाग दिखाए हों।
  3. उस प्रदेश का धरातलीय मानचित्र हो जिसमें contours, marshes इत्यादि धरातल की आकृतियां दिखाई गई हों।
  4. उस प्रदेश का जलवायु मानचित्र हो जिसमें वर्षा तथा तापमान का ज्ञान हो सके।
  5. विभिन्न कृषि पदार्थों की उपज वाले मानचित्रों में भूमि के मानचित्र जरूरी हैं।

(v) सममान रेखा मानचित्र क्या हैं? एक क्षेपक का किस प्रकार कार्यान्वित किया जाता है?
उत्तर:
सममान रेखा शब्द Isopleth दो शब्दों के जोड़ से बना है ISO + Pleth अर्थ है समान रेखाएँ। इस प्रकार सममान रेखाएं वे रेखाएं हैं जिनका मूल्य, तीव्रता तथा घनत्व समान हो। ये रेखाएं उन स्थानों को आपस में जोड़ती हैं जिनका मान समान हो।
क्षेत्रक की कार्यान्वित करने का तरीका-

  1. सबसे पहले मानचित्र पर दिए गए न्यूनतम तथा अधिकतम मान को निश्चित करना चाहिए।
  2. उसके बाद परास की गणना की जानी चाहिए।
  3. उसके बाद श्रेणी के आधार पर, एक पूर्ण संख्या जैसे 5, 10, 15 इत्यादि में अंतराल निश्चित करनी चाहिए।
  4. सममान रेखा के चित्रण के बिल्कुल सही बिंदु को निम्नलिखित सूत्र द्वारा निश्चित किया जाता है-

सममान रेखा का बिंदु =
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 1

(vi) एक वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्त्वपूर्ण चरणों की सचित्र व्याख्या की कीजिए।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्त्वपूर्ण चरणों को सचित्र इस प्रकार हैं-

  1. आंकड़ों को चढ़ते अथवा उतरते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
  2. अति उच्च, उच्च, मध्यम, निम्न तथा अति निम्न केंद्रीकरण को दर्शाने के लिए आंकड़े को 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
  3. श्रेणियों के मध्य अंतराल की, निम्नलिखित सूत्र परास / 5 तथा अधिकतम मान-न्यूनतम मान, द्वारा पहचाना जा सकता है।
  4. प्रतिरूपी, छापाओं और रंगों का उपयोग चुनी हुई श्रेणियों को चढ़ते और उतरते क्रम में दर्शाने के लिए किया जाता है।

(vii) आंकड़े की वृत आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्त्वपूर्ण चरणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आंकड़े की वृत आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्त्वपूर्ण चरणों की विवेचना इस प्रकार है-

  1. आंकड़ों को चढ़ते क्रम में व्यवस्थित करो।
  2. मानों को दिखाने के लिए कोणों के अंशों की गणना करो। खींचे जाने वाले वृत्त के लिए एक उपयुक्त त्रिज्या को चुनना चाहिए।
  3. वृत्त के बीच से चाप एक त्रिज्या की तरह रेखा खींचनी चाहिए।
  4. वृत्त को विभागों की आवश्यक संख्या में विभाजन द्वारा आंकड़े को प्रदर्शित करते हैं।
  5. एक रेखा लगाओ केन्द्रीय धुरे से लेकर वृत्त तक।
  6. इसके बाद वृत्त तक के कोण को मापा जाए और हर एक वर्ग के वाहनों को चढ़ते क्रम में लिखा जाए। वाहनों की प्रत्येक श्रेणी के लिए चढ़ते हुए क्रम में, दक्षिणावर्त, छोटे कोण से शुरू करके वृत्त के चाप से कोणों को नापते हैं। उसके बाद शीर्षक उपशीर्षक और सूचिका द्वारा आरेख को पूर्ण किया जाता है।

क्रिया-कलाप
1. निम्न आंकड़ों को अनुकूल / उपयुक्त आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए:
भारत : नगरीकरण की प्रवृत्ति 1901-2001

वर्षदशवार्षिक वृर्धि (%)
19110.35
19218.27
193119.12
194131.97
195141.42
196126.41
197138.23
198146.14
199136.47
200131.13

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 2

रेखाग्राफ़ की रचना –

  • रेखाग्राफ़ में सबसे पहले आंकड़ों को पूर्णांक में बदला जाता है। ताकि इसे सरल बनाया जा सके। जैसे कि ऊपर दी गई तालिका में 1961 और 1981 के लिए दर्शाई गई नगरीकरण की प्रवृत्ति दर को क्रमश: 26.4 और 46.1 पूर्णांक में बदला जा सकता है।
  • इसके बाद x और y अक्ष खींचो। समय क्रम चरों को x अक्ष पर तथा आंकड़ों के मात्रा को अक्ष पर अंकित करें।
  • एक योग्य मापनी को चुनकर y अक्ष पर अंकित कर दो। यदि आंकड़ा एक ऋणात्मक मूल्य में हैं तो चुनी हुई मापनी को इसे भी दर्शाना चाहिए।
  • y अक्ष पर चुनी हुई मापनी के अनुसार वर्ष बार दर्शाने के लिए आंकड़े अंकित कीजिए तथा बिंदु द्वारा अंकित मूल्यों की स्थिति चिह्नित करें तथा हाथ से रेखा खींचकर मिला दो।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

2. निम्नलिखित आंकड़े को उपयुक्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए:
भारत: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में साक्षरता और नामांकन अनुपात।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
सांख्यिकीय आरेख से क्या अभिप्राय है? इनके लाभ तथा सीमाओं का वर्णन करो।
उत्तर:
सांख्यिकीय आरेख (Statistical Diagram) –
आवश्यकता (Necessity)-आर्थिक भूगोल के अध्ययन में आँकड़ों का विशेष महत्त्व है। विभिन्न प्रकार के आँकड़े किसी वस्तु की मात्रा, गुण, घनत्व, वितरण आदि को स्पष्ट करते हैं। ये आँकड़े अनेक तथ्यों की पुष्टि करते हैं। किसी क्षेत्र की जलवायु के अध्ययन में तापमान, वर्षा आदि के आँकड़ों का भी अध्ययन किया जाता है। इन आँकड़ों का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, परंतु इस विश्लेषण के लिए अनुभव, समय तथा परिश्रम की आवश्यकता होती है।

बड़ी- बड़ी तालिकाओं को याद करना बहुत कठिन तथा नीरस होता है। लंबी-लंबी सारणियां कई बार भ्रम उत्पन्न कर देती हैं। इन्हें सरल और स्पष्ट बनाने के लिये ये आँकड़े रेखाचित्रों द्वारा प्रकट किए जाते हैं। इन सांख्यिकीय आँकड़ों पर आधारित रेखाचित्रों तथा आरेखों को सांख्यिकीय आरेख कहा जाता है। “सांख्यिकीय आँकड़ों को चित्रात्मक ढंग से प्रदर्शित करने वाले रेखाचित्रों को सांख्यिकीय आरेख कहते हैं।” इन विधियों में विभिन्न प्रकार की ज्यामितीय आकृतियां रेखाएं, वक्र रेखाएं, रचनात्मक ढंग से प्रयोग की जाती हैं। ये आँकड़ों को एक दर्शनीय रूप (visual impression) देकर मस्तिष्क पर गहरी छाप डालते हैं।

सांख्यिकीय आरेखों के लाभ
(Advantages of Statistical Diagrams)

  1. आँकड़ों का सजीव रूप प्राय: किसी विषय संबंधी आँकड़े नीरस व प्रेरणा रहित होते हैं। रेखाचित्र इन विषयों को एक सजीव तथा रोचक रूप देते हैं। एक ही दृष्टि में रेखाचित्र तथ्यों का मुख्य उद्देश्य व्यक्त करने में सहायक होते हैं।
  2. सरल रचना-रेखाचित्रों की रचना सरल होने के कारण अनेक विषयों में इनका प्रयोग किया जाता है।
  3. तुलनात्मक अध्ययन-रेखाचित्रों द्वारा विभिन्न आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन सरल हो जाता है
  4. अधिक समय तक स्मरणीय-रेखाचित्रों का दर्शनीय रूप मस्तिष्क पर एक लंबे समय के लिए गहरी छाप छोड़ जाता है। यह आरेख दृष्टि सहायता (Visual Aid ) का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
  5. विश्लेषण में उपयोगी शोध कार्य में किसी तथ्य के विश्लेषण में रेखाचित्र सहायक होते हैं।
  6. साधारण व्यक्ति के लिए उपयोगी – साधारण व्यक्ति आँकड़ों को चित्र द्वारा आसानी से समझ सकता है।
  7. समय की बचत-रेखाचित्रों द्वारा तथ्यों को शीघ्र ही समझा जा सकता है, जिससे समय की बचत होती है।

आरेख चित्रों की सीमाएं
(Limitations of Statistical Diagrams)

  1. आँकड़ों का शुद्ध रूप से निरूपण का संभव न होना- रेखाचित्र आँकड़ों को कई बार शुद्ध रूप में प्रदर्शित नहीं करते। इनमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन किया जाता  है।
  2. आरेख आँकड़ों के प्रतिस्थापन नहीं हैं- मापक के अनुसार रेखाचित्रों का आकार बदल जाता है तथा कई भ्रम उत्पन्न हो जाते हैं।
  3. बहुमुखी आँकड़ों का निरूपण संभव नहीं है- एक ही रेखाचित्र पर एक से अधिक प्रकार के आँकड़े नहीं दिखाए जा सकते हैं। इसके द्वारा एक ही इकाई में मापे जाने वाले समान गुणों वाले आँकड़ों को ही दिखाया जा सकता है।
  4. उच्चतम तथा न्यूनतम मूल्य में अधिक अंतर- जब उच्चतम तथा न्यूनतम मूल्य में बहुत अधिक अंतर हो तो रेखाचित्र नहीं बनाए जा सकते।
  5. भ्रमात्मक परिणाम उपयुक्त आरेख का प्रयोग न करने से गलत तथा भ्रमात्मक परिणाम निकलने की संभावना होती है।

प्रश्न 2.
आँकड़ों को प्रदर्शित करने की कौन-कौन सी विधियां हैं?
उत्तर:
आँकड़े रेखाचित्रों तथा वितरण मानचित्रों द्वारा प्रकट किए जाते हैं।
आँकड़ों के विस्तार तथा प्रकृति के अनुसार ये रेखाचित्र निम्नलिखित प्रकार से हैं-

  1. रेखा आरेख चित्र (Line graph )
  2. दंड आरेख चित्र ( Bar diagram)
  3. चलाकृति चित्र (Wheel diagram)
  4. तारक चित्र (Star diagram)
  5. क्लाइमोग्राफ (Climograph)
  6. हीधरग्राफ (Hythergrahp)
  7. चित्रीय आरेख (Prictorial diagram)
  8. आयत चित्र (Rectangular diagram)
  9. मुद्रिक चित्र ( Ring diagram)
  10. मेखला चित्र (Circular diagram)

प्रश्न 3.
दंड आरेख (Bar diagrams ) क्या होते हैं? इनके विभिन्न प्रकारों का वर्णन करो।
उत्तर:
दंड आरेख (Bar Diagrams) आँकड़े दिखाने की यह सबसे सरल विधि है। इसमें आँकड़ों को समान चौड़ाई वाले दंडों (Bar या स्तंभों (Columns) द्वारा दिखाया जाता है। इन दंडों की लंबाई वस्तुओं की मात्रा के अनुपात के अनुसार छोटी-बड़ी होती है। प्रत्येक दंड किसी एक वस्तु की कुल मात्रा को प्रदर्शित करता है। इन आरेखों के प्रयोग से संख्याओं का तुलनात्मक अध्ययन आसानी से किया जा सकता है।

दंड आरेखों की रचना (Drawing of Bar Diagrams)
दंडचित्र बनाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है-
1. मापक (Scale) वस्तु को मात्रा के अनुसार मापक निश्चित करना चाहिए। भाषक तीन बातों पर निर्भर करता है-
(क) कागत का विस्तार।
(ख) अधिकतम संख्या।
(ग) न्यूनतम संख्या।
मापक अधिक बड़ी या अधिक छोटी नहीं होनी चाहिए।
2. दंडों की लंबाई (Length of Bars) दंडों की चौड़ाई समान रहती है, परंतु लंबाई मात्रा के अनुसार घटती-बढ़ती है।
3. शेड करना (Shading) दंड रेखा खींचने के पश्चात् उसे काला कर दिया जाता है या छायांकन का प्रयोग किया जाता है।
4. मध्यांतर (Interval) दंड रेखाओं के मध्य अंतर रखा जाता है।
5. आँकड़ों को निश्चित करना ( Determination of Datas) सर्वप्रथम आँकड़ों को संख्या के अनुसार क्रमवार तथा पूर्णांक बना लेना चाहिए।

गुण-दोष (Merits and Demerits)-

  1. यह आँकड़े दिखाने की सबसे सरल विधि है।
  2. इनके द्वारा तुलना करना आसान है।
  3. दंडचित्र बनाने कठिन हैं जब समय अवधि बहुत अधिक हो।
  4. जब अधिकतम तथा न्यूनतम संख्या में बहुत अधिक अंतर | हो, तो दंडचित्र नहीं बनाए जा सकते हैं।

दंड आरेखों के प्रकार (Types of Bar Diagrams ) दंड आरेख मुख्यतः निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
1. क्षैतिज दंड आरेख (Horizontal Bars) ये सरल दंड आरेख हैं। इन दंडों से किसी वस्तु का कुछ वर्षों का वार्षिक उत्पादन, जनसंख्या आदि दिखाए जाते हैं ये समान चौड़ाई के होते हैं। ये आसानी से पढ़े जा सकते हैं। सरल दंड आरेख किसी वस्तु के मूल्यों के केवल एक ही गुण को प्रदर्शित करते हैं। इन मूल्यों को आरोही (Ascending) क्रम में व्यवस्थित कर लेना चाहिए। इससे आरेख दंडों की ऊंचाई लगातार बढ़ती जाती है या घटती जाती है। इस विधि से मूल्यों की तुलना करना आसान हो जाता है। क्षैतिज दंड आरेख लंबवत् दंड ओरेखों की अपेक्षा में अच्छे माने जाते हैं क्योंकि इन पर मापक लिखने तथा पढ़ने में सुविधा रहती है।

2. लंबवत् दंड आरेख (Vertical Bars) ये आरेख किसी आधार रेखा के ऊपर खड़े देशों के रूप में बनाए जाते हैं। इन्हें स्तम्भी आरेख (Columnar diagrams) भी कहते हैं। आधार रेखा को शून्य माना जाता है और दंडों की ऊंचाई पैमाने के अनुसार मापी जाती है। इन दंडों से वर्षा का वितरण भी दिखाया जाता है जब उच्चतम तथा निम्नतम संख्याओं में अंतर बहुत अधिक हो तो दंड आरेख प्रयोग नहीं किए जाते दंड की लंबाई कागज के विस्तार से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि दंडों की संख्या बहुत अधिक हो तो भी ये आरेख प्रयोग नहीं किए जाते।

3. संश्लिष्ट दंड आरेख (Compound Bar )-यदि एक दंड को अनेक भागों में बांट कर उसके द्वारा कई वस्तुओं को एक साथ दिखाया जाए तो संश्लिष्ट दंड का निर्माण होता है। इन्हें मिश्रित या संयुक्त दंड आरेख भी कहा जाता है। इनसे आँकड़ों के कुल योग तथा उसके विभिन्न भागों को प्रदर्शित किया जाता है। विभिन्न भागों में अलग-अलग Shade कर दिए जाते हैं ताकि विभिन्न वस्तुएं स्पष्टतया अलग दृष्टिगोचर हों। इस विधि से जल सिंचाई के विभिन्न साधन और शक्ति के विभिन्न साधन आदि दिखाए जाते हैं।

4. प्रतिशत दंड आरेख (Percentage Bar ) किसी वस्तु के विभिन्न भागों को उस वस्तु के कुल मूल्य के प्रतिशत अंश के रूप में दिखाना हो तो प्रतिशत दंड बनाए जाते हैं। दंड की कुल लंबाई 100% को प्रकट करती है।

प्रश्न 4.
रेखाग्राफ की रचना तथा महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर:
सांख्यिकीय चित्रों में रेखाग्राफ का महत्व बहुत अधिक है। इसमें प्रत्येक वस्तु को दो निर्देशकों की सहायता से दिखाया जाता है यह ग्राफ किसी निश्चित समय में किसी वस्तु के शून्य में परिवर्तन को प्रकट करता है। आधार रेखा पर समय को प्रदर्शित किया जाता है जिसे ‘X’ अक्ष कहते हैं ‘Y’ अक्ष या खड़ी रेखा या किसी वस्तु मूल्य को प्रदर्शित किया जाता है। दोनों निर्देशकों के प्रतिच्छेदन के स्थान पर बिंदु लगाया जाता है। इस प्रकार विभिन्न बिंदुओं को मिलाने से एक वक्र रेखा प्राप्त होती है ये रेखाग्राफ दो प्रकार के होते है।

  1. जब किसी निरंतर परिवर्तनशील वस्तु (तापमान, नमी, वायु, भार आदि) को दिखाना हो तो उसे वक्र रेखा (Smooth Curve) से दिखाया जाता है।
  2. जब किसी रुक-रुक कर बदलने वाली वस्तु का प्रदर्शन करना हो तो विभिन्न बिंदुओं को सरल रेखा द्वारा मिलाया जाता है। जैसे वर्षा, कृषि उत्पादन, जनसंख्या।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

महत्त्व (Importance)-
रेखाग्राफ से तापमान, जनसंख्या वृद्धि, जन्म-दर, विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन दिखाया जाता है। यह आसानी से बनाए जा सकते हैं। रेखाग्राफ समय तथा उत्पादन में एक स्पष्ट संबंध प्रदर्शित करते हैं। इसलिए मापक चुना जाता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से हिसार तथा अंबाला नगर के उच्चतम मासिक तापमान तथा औसत मासिक तापमान को रेखाग्राफ से दिखाओ-
तापमान-1990

नगरज०फ०म०अ०म०जू०जु०अ०सि०अ०न०दि०
हिसार उच्चतम तापमान °C 24.126.835.243.145.045.640.140.339.035.234.327.5
अंबाला औसत तामयान °C14.815.719.226.530.833.029.028.524.134.015.014.6

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 3
उत्तर:
तापमान के आँकड़ों को दिखाने के लिए रेखाग्राफ का प्रयोग किया जाता है। ग्राफ पेपर पर एक आधार रेखा लो। इस रेखा पर समय दिखाने के लिए एक पैमाना निश्चित करो। पांच-पांच छोटे खानों के अंतर पर 12 मास दिखाओ। इसे क्षैतिज पैमाना कहते हैं। लंबात्मक पैमाने पर तापमान दिखाने के लिए एक खाना1°C का पैमाना निश्चित करो। प्रत्येक मास के लिए तापमान के लिए बिंदु लगाओ। इन 12 बिंदुओं को मिलाने से एक रेखाग्राफ बन जाएगा।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 4

प्रश्न 6.
वृत्त चक्र किसे कहते हैं? इनकी रचना और गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
चक्र चित्र (Pie-Diagram )-यह वृत्त चित्र (Circular Diagrams) का ही एक रूप है। इसमें विभिन्न राशियों के जोड़ को एक वृत्त द्वारा दिखाया जाता है। फिर इस वृत्त को विभिन्न भागों (Sectors) में बांटकर विभिन्न राशियों का आनुपातिक प्रदर्शन अंशों में किया जाता है। इस चित्र को चक्र चित्र (Pic Diagram). पहिया चित्र (Wheel diagram) या सिक्का चित्र (Coin diagram) भी कहते हैं।

रचना- इस चित्र में वृत्त का अर्धव्यास मानचित्र के आकार के अनुसार अपनी मर्जी से लिया जाता है। इसका सिद्धांत यह है कि कुल राशि वृत्त ‘के क्षेत्रफल के बराबर होती है। एक वृत्त के केंद्र पर 360° का कोण बनता है। प्रत्येक राशि के लिए वृत्तांश ज्ञात किए जाते हैं। इसलिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
किसी राशि के लिए कोण =
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कई बार वृत्त के विभिन्न भागों को प्रभावशाली रूप से दिखाने के लिए इनमें भिन्न-भिन्न शेड (छायांकन) कर दिए जाते हैं। गुण-दोष (Merits-Demerits)

  1. चक्र चित्र विभिन्न वस्तुओं के तुलनात्मक अध्ययन के लिए उपयोगी है।
  2. ये कम स्थान घेरते हैं। इन्हें वितरण मानचित्रों पर भी दिखावा जाता है।
  3. इसका चित्रीय प्रभाव (Pictorial Effect) भी अधिक है।
  4. इसमें पूरे आँकड़ों का ज्ञान नहीं होता तथा गणना करनी कठिन होती है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित आँकड़ों को लंबवत् (Vertical) दंड आरेख द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
POPULATION OF INDIA FROM 1901 TO 2001

Census yearPopulationCensus yearPopulation
190123,83,96,327196143,92.34.77
191125,20,93,390197154,81 i9,652
192125,13,21,213198168,38,10051
193127,89,77,238199134,39,30,861
194131,86,60,58020011,02,70,15,247
195136,10,88,09020111,21,01.93,42

उत्तर:
रचना-

  1. आधार रेखा (X-Axis) पर समय का पैमाना निश्चित करके जनगणना वर्ष दिखाओ।
  2. आधार रेखा के सिरों पर लंब रेखाएं (v- Axis) खींचो।
  3. बाई ओर लंब रेखा पर जनसंख्या दिखाने के लिए मापक निश्चित करो जैसे।” = 10 करोड़
  4. मापक के अनुसार प्रत्येक वर्ष के लिए जनसंख्या के लिए दंड की ऊँचाई ज्ञात करो आधार रेखा पर समान चौड़ाई वाली दंड रेखाएं खींचो तथा इन्हें काली छाया से सजाओ।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से कोलकाता की माध्य मासिक वर्षा का आरेख बनाओ।

वर्षा(सेमी.)
J1
F3
M3
A5
M14
J25
J30
A30
S25
O13
N3
D1

उत्तर:
रचना- आधार रेखा पर पांच-पांच छोटे खानों के अंतर पर 12 मास दिखाओ आधार रेखा के बाएँ सिरे पर एक लंब रेखा खींचो। इस रेखा पर एक छोटा खाना 1 सेंटीमीटर वर्षा का मापक बना कर प्रत्येक मास के लिए लंबवत् दंड रेखा खींचो। इन्हें काले रंग से छायांकन (Shade) करो।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित आंकड़ों को क्षैतिज दंड रेखाचित्र से प्रकट करो।
भारत में पक्की सडकों का वितरण

राज्यपककी सड़कों की लंबाई (कि० मी०)
1. कर्नाटक49,753
2. मध्य प्रदेश45,756
3. उत्तर प्रदेश45,361
4. आध्र प्रदेश35,714
5. तमिलनाडु35,138
6. पंजाब31,862

उत्तर:
रचना-सबसे पहले एक आधार रेखा खींचो। इस रेखा पर मापक बनाओ। सुविधा अनुसार मापक एक सेंटीमीटर = 10000 कि० मी० है तो मापक के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए दंड रेखा की लंबाई ज्ञात करो। समान चौड़ाई वाले क्षैतिज दंड खींचो। विभिन्न राज्यों के लिए दंड रेखाओं की लंबाई इस प्रकार होगी- कर्नाटक = 4.9 सेंटीमीटर, मध्य प्रदेश = 4.5 सेंटीमीटर, उत्तर प्रदेश = 4.5 सेंटीमीटर, आंध्र प्रदेश = 3.5 सेंटीमीटर, तमिलनाडु =3.5 सेंटीमीटर, पंजाब =3.1 सेंटीमीटर।
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित आंकड़ों को मिश्रित दंड आरेख से स्पष्ट करो।
भारत का विदेशी व्यापार (₹ करोड़ में )

बहैआयातनिर्यातकुल
1979-809,1426,45815,700
1980-8112,5606,71019,270
1981-8213,6717,80221,473
1982-8314,0478,63722,684

उत्तर:
रचना (Construction )-आधार रेखा को शून्य मान कर समय दिखाओ। पांच छोटे खाने एक वर्ष के बराबर मान कर समय दिखाएं | आधार पर रेखा की बाईं ओर एक लंब रेखा लो। इस पर एक पैमाना बनाओ जिसमें एक सेंटीमीटर = ₹ 5000 करोड़ का मापक लो। विभिन्न वर्षों के लिए कुल मूल्य के अनुसार खड़े दंड रेखाओं की ऊंचाई ज्ञात करो। प्रत्येक दंड रेखा को दो उप-भागों में बांटकर आयात तथा निर्यात प्रकट करो।
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित आँकड़ों को प्रतिशत दंड आरेख तथा वृत्तारेख से दिखाओ।
भारत में प्रमुख धर्म

धर्मपतिशत जनसंखा (सम 1991)
1. हिंदू (Hindus)82.41
2. मुसलमान (Muslims)11.67
3. ईसाई (Christians)2.32
4. सिक्ख (Sikhs)1.99
5. अन्य (Others)1.61
कुल =100.00

उत्तर:
रचना-10 सें० मी० लंबी रेखा प्रतिशत दंड बनाओ। इस पर 1 सेंटीमीटर = 10 प्रतिशत का लो। मापक के अनुसार विभिन्न धर्मों के लिए लंब ज्ञात करो और प्रत्येक भाग को दिखाकर अंकित करो।
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वृत्तारेख (Piegraph) द्वारा-यह एक द्विमित्तीय आरेख है। इसे पाई अथवा वृत्त अथवा चक्र रेखाचित्र भी कहा जाता है। इस चित्र में विभिन्न उप-भागों को वृत्तांश के कोणों द्वारा दिखाया जाता है।

वृत्त में कुल कोण 360° होते हैं जो कि वस्तु की कुल संख्या को दिखाते हैं। प्रत्येक संख्या के लिए कोण ज्ञात कर लिए जाते हैं।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 19
अर्थात् दी गई संख्या के प्रतिशत को 3.6 से गुणा करो। हिंदू धर्म के लिए कोण = 296.7°, मुसलमान धर्म के लिए कोण 42°, ईसाई धर्म के लिए कोण 8.4°, सिख धर्म के लिए कोण 7.1° है तथा अन्य के लिए 5.8° है।

भारत में धार्मिक आधार पर जनसंख्या 1991
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 11

प्रश्न 12.
निम्नलिखित आँकड़ों को रेखाग्राफ़ द्वारा प्रकट करो।
भारत की जनसंख्या वृद्धि (मिलियन में)

वर्षजनसंख्यावर्षजनसेख्य
19012381961439
19112521971548
19212511981683
19312791991844
194131920011027
1951361

उत्तर:
रचना-आधार रेखा को शून्य मानकर इस रेखा पर समय दिखाओ। पांच खाने एक वर्ष के बराबर रखकर विभिन्न वर्ष दिखाओ | आधार रेखा पर बाईं ओर लंब रेखा खींचकर मापक बनाओ। सुविधा के अनुसार मापक 1 सें० मी० = 100 मिलियन हो। प्रत्येक वर्ष की जनसंख्या के लिए खड़े अक्ष पर बिंदु निर्धारित करो। विभिन्न बिंदुओं को सरल रेखा से मिला कर रेखाग्राफ बनाओ।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 12 (2)

प्रश्न 13.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से बंबई (मुंबई ) नगर का तापमान तथा वर्षा का रेखाग्राफ बनाओ।

जि०फ०मा०अ०म०जू०जु०अ०सि०अ०न०दि०
तापमान °C22.522.27302928282828272625
वर्षा (सें० मी०)22××45060362664×

उत्तर:
तापमान तथा वर्षा को जब इकट्ठा प्रदर्शित किया जाए तो इसे संयुक्त रेखा तथा दंड ग्राफ कहते हैं। वर्षा को खड़े दंडों द्वारा दिखाया जाता है तथा तापमान को रेखाग्राफ द्वारा दिखाया जाता है। रचना-ग्राफ पेपर पर एक आधार रेखा लो। इस पर समय दिखाने के लिए एक पैमाना निश्चित करो। पांच-पांच छोटे खानों के अंतर पर 12 मास दिखाओ। इसे क्षैतिज पैमाना (Horizontal Scale) कहते हैं। आधार रेखा के सिरों पर लंब खींचो। एक लंब पर तापमान के लिए मापक बनाओ। दूसरे लंब पर वर्षा दिखाने के लिए मापक बनाओ। इसे लंबवत् मापक (Vertical Scale) कहते हैं। मापक के अनुसार वर्षा को खड़ी दंड रेखाओं द्वारा दिखाओ। प्रत्येक भाग के तापमान के लिए बिंदु लगाओ। इन 12 बिंदुओं को मिलाने से एक रेखाग्राफ बन जाएगा।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 12

प्रश्न 14.
प्रवाह आरेखों पर एक नोट लिखें।
उत्तर:
प्रवाह आरेख ( Flow Diagrams)-इन आरेखों से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की गतिशीलता एवं गति सघनता को दिखाया जाता है। इस प्रकार यह मानचित्र दो तथ्यों पर आधारित है-

  •  प्रवाह की दिशा
  • प्रवाह की मात्रा

ऐसे मानचित्रों को प्रवाह मानचित्र (Flow maps ) भी कहते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

उदाहरण-

  • जल, रेल, राजमार्गों पर वाहनों की संख्या।
  • ढोया गया माल जैसे गेहूँ, इस्पात आदि।
  • आयात-निर्यात व्यापार।

रचना-

  • क्षेत्र का रेखा-मानचित्र दो जिसमें सभी नगर तथा परिवहन मार्ग निश्चित हों।
  • प्रदर्शित किए जाने वाले तत्व के आँकड़े उपलब्ध हों।
  • एक मापक के अनुसार प्रत्येक मार्ग की मोटाई वाहनों की संख्या के अनुपात में मापी जाए।

गुण-दोष (Merits-Demerits)-

  • इन मानचित्रों द्वारा सभी मार्गों पर प्रवाह की मात्रा का महत्त्व एक साथ प्राप्त हो जाता है।
  • विभिन्न दिशाओं से मार्गों के मिलने के कारण संगम नगरों का महत्त्व बढ़ जाता है।
  • विभिन्न नगरों के प्रभाव क्षेत्र का ज्ञान होता है।
  • विभिन्न केंद्रों के अंतर्संबंधों का पता चलता है।

उदाहरण-निम्नलिखित बस सेवा संबंधी आँकड़ों को प्रवाह मानचित्र द्वारा दिखाइए।

पानीपत से प्रमुख स्थानों की बस सेवा

नूहारबर सेवा संख्या
करनाल70
दिल्ली50
रोहतक20
अंबाला90
जींद25
  1. रेखा-मानचित्रों पर इन नगरों की स्थिति दिखाओ।
  2. इन नगरों के मध्य सड़क मार्ग बनाओ।
  3. प्रत्येक सड़क मार्ग पर रेखा की मोटाई बसों की संख्या ( मापक के अनुसार) अंकित करें।
  4. प्रत्येक मार्ग पर बसों की संख्या तथा दिशा के लिए तीर बनाओ।
  5. मानचित्र पर बसों की संख्या का मापक बनाओ।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 13

प्रश्न 15.
वितरण मानचित्रों से क्या अभिप्राय है? इनकी क्या आवश्यकता है? इसका महत्त्व बताओ।
उत्तर:
वितरण मानचित्र (Distribution Maps )-वितरण मानचित्र वे मानचित्र हैं जो पृथ्वी के किसी भाग में किसी तत्व के वितरण को या मूल्य या घनत्व को प्रकट करते हैं। इन मानचित्रों पर विभिन्न भौगोलिक तत्व तथा वस्तुओं के उत्पादन को अंकित किया जाता है। जैसे- जनसंख्या, पशुधन, फसलें, खनिज आदि। इन मानचित्रों को बनाने के लिए कई विधियों का प्रयोग किया जाता है।

वितरण मानचित्रों की आवश्यकता (Necessity of distribution Maps)-
प्रारंभ में किसी वस्तु के वितरण को प्रकट करने के लिए नामांकन विधि (Writing the name of commodity) का प्रयोग किया था। जिस क्षेत्र में जो वस्तु उत्पन्न हो वहां पर उस वस्तु का नाम लिख दिया जाता था। जैसे- भारत में चावल का उत्पादन प्रकट करने के लिए गंगा के डेल्टा में Rice लिखा जाता था। परंतु इस विधि से न तो वस्तु का कुल उत्पादन और न ही उत्पादन क्षेत्र का ठीक ज्ञान होता था। इसलिए वितरण मानचित्र बनाए गए, जिनमें वैज्ञानिक ढंग पर शुद्धता हो।

भूगोल में विभिन्न तथ्यों की पुष्टि के लिए कई प्रकार के आँकड़ों (Data) का प्रयोग किया जाता है। ये आँकड़े तालिकाओं के रूप (Tables) में लिखे जाते हैं। इन आँकड़ों का अध्ययन बड़ा नीरस, कठिन होता है तथा बहुत समय नष्ट हो जाता है। आँकड़ों को इकट्ठा देखकर किसी परिणाम पर पहुंचना कठिन है। इसलिए इन आँकड़ों को वितरण मानचित्रों द्वारा प्रकट करके मस्तिष्क में एक वास्तविक चित्र की कल्पना की जा सकती है। इसलिए भौगोलिक तत्त्वों को चित्रों की भाषा में प्रकट किया जाता है।

गुण (Advantages) –
(1) यह आर्थिक भूगोल के अध्ययन में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। पृथ्वी पर विभिन्न साधन तथा मानव का वितरण इन मानचित्रों द्वारा स्पष्ट रूप से प्रकट किया जा सकता है।

(2) इन मानचित्रों से कारण तथा प्रभाव का नियम स्पष्ट हो जाता है। (They help the geographer to study the cause and effect of any distribution.) वस्तु विशेष के वितरण पर प्रभाव डालने वाले भौगोलिक तत्व समझ आ जाते हैं।

(3) आँकड़ों की लंबी-लंबी तालिकाओं को याद करना कठिन हो जाता है। परंतु वितरण मानचित्र एक तथ्य की स्थायी छाप मस्तिष्क पर छोड़ जाते हैं। (They give a visual impression.)

(4) इनका उपयोग शिक्षा संबंधी कार्य (Educational purposes) के लिए अधिक होता है।

(5) इन मानचित्रों द्वारा एक दृष्टि में ही किसी वस्तु के वितरण का तुलनात्मक ज्ञान हो जाता है। (They represent the pattern of distribution of any element.) यह स्पष्ट हो जाता है कि अमुक वस्तु किस क्षेत्र में अधिक और किस क्षेत्र में कम मिलती है।

(6) इन मानचित्रों द्वारा क्षेत्रफल और उत्पादन की मात्रा का तुलनात्मक अध्ययन होता है। (The contrast and comparison become clear at a glance.) वितरण मानचित्र वास्तविक आँकड़ों का स्थान नहीं ले सकते हैं। वास्तव में मानचित्रों के द्वारा एक भूगोलवेत्ता, केवल तथ्य प्रस्तुत कर सकता है। (Such maps supplement the data, but these do not replace the tables.)

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

बिंदु मानचित्र (Dot Maps)

प्रश्न 16.
बिंदु मानचित्र से क्या अभिप्राय है? इसकी रचना के लिए क्या आवश्यकताएं हैं? इनकी रचना संबंधी समस्याओं का वर्णन करो तथा गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
बिंदु मानचित्र ( Dot Maps )-इस विधि के अंतर्गत किसी वस्तु के उत्पादन तथा वितरण के आँकड़ों को बिंदुओं द्वारा प्रकट किया जाता है। ये बिंदु समान आकार के होते हैं। प्रत्येक बिंदु द्वारा एक निश्चित संख्या (Specific Value) प्रकट की जाती है, किसी वस्तु की निश्चित संख्या तथा मात्रा (Absolute Figures) उपलब्ध हों। वितरण मानचित्र बनाने की यह सबसे अधिक प्रचलित जब सर्वोत्तम विधि है। (This is the most common method used for showing the distribution of population, livestock, crops, minerals etc.) बिंदु मानचित्र बनाने के लिए आवश्यकताएं (Requirements for drawing Dot Maps )-बिंदु विधि द्वारा मानचित्र बनाने के लिए कुछ चीज़ों की आवश्यकता होती है।
1. निश्चित आँकड़े (Definite and Detailed Data )-जिस वस्तु का वितरण प्रकट करना हो उसके सही-सही आँकड़े उपलब्ध होने चाहिए। ये आँकड़े प्रशासकीय इकाइयों (Administrative Units) के आधार पर होने चाहिएं। जैसे जनसंख्या तहसील या जिले के अनुसार होनी चाहिए।

2. रूप-रेखा मानचित्र ( Outline Map)-उस प्रदेश का एक सीमा चित्र हो जिसमें ज़िले या राज्य आदि शासकीय भाग दिखाए हों। यह सीमा-चित्र समक्षेत्र प्रक्षेप (Equal Area Projection) पर बना हो।

3. धरातलीय मानचित्र (Relief Map)-उस प्रदेश का धरातलीय मानचित्र हो जिसमें Contours, Hills, Marshes आदि धरातल की आकृतियां दिखाई गई हों।

4. जलवायु मानचित्र (Climatic Map)-उस प्रदेश का जलवायु मानचित्र हो जिसमें वर्षा तथा तापमान का ज्ञान हो सके।

5. मृदा मानचित्र (Soil Map )-विभिन्न कृषि पदार्थों की उपज वाले मानचित्रों में भूमि के मानचित्र आवश्यक हैं क्योंकि हर प्रकार की मिट्टी का उपजाऊपन विभिन्न होता है।
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6. स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Map )-जनसंख्या के वितरण के लिए भूपत्रक मानचित्रों की आवश्यकता होती है जिनमें शहरी (Urban) तथा ग्रामीण ( Rural Settlements) नगर आवागमन के साधन और नहरें आदि प्रकट की जाती हैं।

रचना-विधि (Procedure )

  1. वितरण मानचित्र की सभी आवश्यक सामग्री को इकट्ठा कर लेना चाहिए।
  2. मानचित्र पर प्रशासकीय इकाइयों (Administrative Units) को दिखाओ।
  3.  राजनीतिक या प्रशासकीय इकाइयों के विस्तार को देखकर तथा आँकड़ों के कम-से-कम और अधिक से अधिक मूल्य को देखकर एक बिंदु का मूल्य ज्ञात करो।
  4. प्रत्येक इकाई के लिए बिंदुओं की संख्या गिनकर पूर्ण अंक बनाओ।
  5. प्रत्येक इकाई में बिंदुओं की संख्या हल्के हाथ से पेंसिल से लिख दो।
  6. धरातल, जलवायु और मिट्टी के मानचित्रों की सहायता से उस क्षेत्र में नकारात्मक प्रदेश (Negative areas) को ज्ञात करो और मानचित्र में पेंसिल से अंकित करो ताकि इन स्थानों को रिक्त छोड़ा जा सके।
  7. बिंदुओं के आकार को समान कर लो।
  8. घनत्व के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में बिंदु प्रकट करके मानचित्र बनाओ।

बिंदु मानचित्र की समस्याएं (Problems of Dot Map)

1. बिंदुओं का मान (Value of a dot)
बिंदुओं को अंकित करने से पहले एक बिंदु का मूल्य निश्चित कर लेना चाहिए। (The success of the map depends upon the choice of the value of a dot.) मानचित्र को प्रभावशाली बनाने के लिए बिंदु का मूल्य ध्यानपूर्वक निश्चित करना चाहिए। कई बार गलत मूल्य के कारण बिंदुओं की संख्या बहुत अधिक हो जाती है या बहुत थोड़ी रह जाती है। मापक या मूल्य ऐसा निश्चित करना चाहिए जिसमें क्षेत्र में बिंदुओं की संख्या इतनी अधिक न हो कि उन्हें गिनना कठिन हो जाए। बिंदुओं की संख्या इतनी कम भी न हो कि कुछ प्रदेश खाली रह जाएं। मूल्य का चुनाव निश्चित करना तीन बातों पर निर्भर करता है-

  • मानचित्र का मापक (Scale of the map)
  • अधिकतम तथा न्यूनतम आंकड़े (Maximum and Minimum Figures)
  • प्रदर्शित तत्व के प्रकार (Types of the Element).

2. मानचित्र का मापक (Scale of the Map)
यदि मानचित्र लघु मापक (Small Scale) पर बना हुआ है तो बिंदुओं की संख्या बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए। एक बिंदु का मूल्य अधिक होना चाहिए ताकि बिंदुओं की संख्या इतनी हो जो उस छोटे मानचित्र में अंकित की जा सके नहीं तो अधिक बिंदुओं के कारण मानचित्र का प्रभाव स्पष्ट नहीं होगा। (The areas having low density will also appear dark and give a misleading idea.) यदि मानचित्र दीर्घ मापक पर हो तो एक बिंदु का मूल्य बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। एक बिंदु के अधिक मूल्य के कारण कई क्षेत्रों में बिंदुओं की संख्या बहुत कम होगी (With very few dots the map will look blank.)

3. बिंदुओं को लगाना (Placing of dots)
बिंदु मानचित्र बनाते समय ऋणात्मक क्षेत्र (Negative areas) में बिंदु नहीं लगाने चाहिए। ऐसे क्षेत्र प्रायः दलदली भागों में, मरुस्थलों में, पर्वतों पर या बंजर भूमि में मिलते हैं ये क्षेत्र धरातलीय मानचित्र, मृदा मानचित्र तथा जलवायु मानचित्र की सहायता से मानचित्र पर लगाए जा सकते हैं। इन स्थानों को रिक्त छोड़ दिया जाता है क्योंकि यहां उत्पादन असंभव होता है। दीर्घ मापक मानचित्र पर क्षेत्र आसानी से दिखाए जा सकते हैं परंतु लघु मापक मानचित्रों पर इन्हें दिखाना कठिन होता है।

  • बिंदुओं की अधिक संख्या के कारण बिंदु एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। (Dots should not merge together.) इसमें मानचित्र पर संख्या गिनना असंभव हो जाता है।
  • बिंदु बिखरे हुए रूप में लगाना चाहिए अन्यथा नियमित बिंदुओं के कारण समान वितरण दिखाई देगा। (Straight rows of dots should be avoided.) जैसे कि शेडिंग मानचित्र (Shading Maps ) में दिखाई देता है। यह भौगोलिक नियम में विपरीत भी है क्योंकि उत्पादन में विभिन्नता होती है।
  • गुरुत्वीय केंद्र (Centre of Gravity) बिंदु अंकित करते समय प्रत्येक बिंदु अपने चित्र के आकर्षण केंद्र को प्रकट करे; जैसे- जनसंख्या मानचित्र में बिंदुओं के केंद्र नगरों के स्थान पर लगाने चाहिए।
  • अधिक उत्पादन के क्षेत्रों में बिंदु इकट्ठे होने चाहिए।

4. बिंदुओं का आकार (Size of the dots)
बिंदु मानचित्र की शुद्धता और सुंदरता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रत्येक बिंदु समान आकार का हो। इनका आकार दो बातों पर निर्भर करता है-

  • मानचित्र मापक (Scale of the Map)
  • बिंदुओं की संख्या (Number of Dots)

यदि मानचित्र दीर्घ मापक पर बना हुआ है तो बिंदु कुछ बड़े हो सकते हैं परंतु लघु मापक मानचित्रों पर बिंदुओं का आकार अपेक्षाकृत छोटा होगा। इसी प्रकार यदि बिंदुओं की संख्या अधिक है तो भी बिंदु का आकार छोटा होगा। बिंदुओं को समान आकार करने के लिए विशेष प्रकार की निब प्रयोग की जाती है जैसे Le Roy Nib तथा Pazent Nib आदि।

गुण (Merits)
(1) यह मानचित्र किसी वस्तु के क्षेत्रफल के साथ-साथ उसका मूल्य या मात्रा भी प्रकट करते हैं। (This method is both quantitative and qualitative.)

(2) मानचित्र में नकारात्मक क्षेत्रों को खाली छोड़ा जा सकता है। (Waste land can be avoided.).

(3) यह मानचित्र मस्तिष्क पर एक छाप छोड़ जाते हैं कि कहां उत्पादन अधिक है और कहां कम है। (It gives visual impression.)

(4) इन मानचित्रों में रंग का गहरापन उत्पादन की मात्रा के अनुसार होता है। इसलिए यह मानचित्र वितरण के स्वरूप (Pattern of Distribution) को ठीक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इस विधि द्वारा बिंदुओं को सरलतापूर्वक गिना जा सकता है और बिंदुओं को पुनः आँकड़ों में बदला जा सकता है। इस प्रकार किसी वस्तु की मात्रा का भी सही ज्ञान हो जाता है।

(5) इन मानचित्रों को शेडिंग मानचित्र (Shading Map) में बदला जा सकता है। अधिक बिंदुओं वाले क्षेत्र को शेड (Shade) में पूरा दिखाया जा सकता है। एक ही मानचित्र कई अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। जैसे-Markets, Fairs, Coal Fields Villages आदि दिखाने के लिए यह एक शुद्ध विधि है जिनमें वितरण तथा तीव्रता ठीक प्रकार से दिखाई जा सकती है।

दोष (Demerits)

  1. एक ही मानचित्र पर एक-से-अधिक वस्तुओं का वितरण नहीं दिखाया जा सकता।
  2. इनके बनाने में काफ़ी समय लगता है और यह कठिन कार्य
  3. इनका प्रयोग शिक्षा संबंधी कार्यों में किया जाता है परंतु वैज्ञानिक कार्यों के लिए सम मान रेखा-विधि ( Isopleth) का प्रयोग किया जाता है।
  4. यह मानचित्र अनुपात, प्रतिशत तथा औसत आँकड़ों के लिए प्रयोग नहीं किए जा सकते। (This method cannot be used for ratios and percentages and average figures.)
  5. बिंदु अधिक स्थान घेरते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

वर्णमात्री मानचित्र
(Shading Map)

प्रश्न 17.
वर्णमात्री मानचित्र किसे कहते हैं? इसका सिद्धान्त क्या है? इसकी रचना-विधि तथा गुण-दोष का वर्णन करो।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र (Shading Map)- इस विधि को Choropleth Method भी कहते हैं। इस विधि में किसी एक वस्तु के वितरण को मानचित्र पर विभिन्न आभाओं या रंगों द्वारा प्रकट किया जाता है। (In this method distribution of an element is shown by different shades.) किसी रंग की अपेक्षा Black and white shading का प्रयोग करना उचित समझा जाता है।

सिद्धांत (Principle of Shading)
जैसे-जैसे किसी वस्तु में वितरण का घनत्व बढ़ता जाता है उसी प्रकार आभा (Shade ) भी अधिक गहरी होती जाती है (The lighter shades show lower densities and deeper shades show higher densities.) आभा को अधिक सघन करने के कई तरीके हैं-

  1. बिंदुओं का आकार बड़ा करके (By enlarging the dots)
  2. रेखाओं को मोटा करके (By thickening the lines)
  3. बिंदु रेखाओं को निकट करके (By bringing the lines closed together)
  4. रेखा जाल बनाकर (By crossing the lines)
  5. रंगों को गहरा करके (By increasing the depth of the colours)

प्रत्येक मानचित्र के नीचे Scheme of shades का एक सूचक (Index) दिया जाता है।

रचना-विधि (Procedure)

  1. किसी वस्तु के निश्चित आँकड़े प्राप्त करो। यह आँकड़े प्रशासकीय इकाइयों के आधार पर हों।
  2. ये आँकड़े औसत के रूप में हों या प्रतिशत या अनुपात के रूप में, जैसे- जनसंख्या का घनत्व।
  3. घनत्व को प्रकट करने के लिए उचित अंतराल (Interval) चुन लेना चाहिए।
  4. अंतराल के अनुसार Shading का सूचक मानचित्र के कोने में बनाना चाहिए।
  5. यह आभा घनत्व के अनुसार गहरी होती चली जाए।
  6. प्रत्येक प्रशासकीय इकाई में घनत्व के अनुसार शेडिंग करके मानचित्र तैयार किया जा सकता है।

समस्याएं (Problems)-
1. प्रशासकीय इकाई का चुनाव (Choice Administrative Unit)-
प्राय: आँकड़े प्रशासकीय इकाइयों के आधार पर एकत्रित किए जाते हैं, जिसे जिले या तहसील के अनुसार मानचित्र बनाने के लिए सबसे पहले प्रशासकीय इकाई का चुनाव करना होता है। प्रशासकीय इकाई न बहुत बड़ी होनी चाहिए और न ही बहुत छोटी। यदि काफ़ी बड़ी इकाई को चुन लिया जाए तो मानचित्र से भ्रम उत्पन्न हो सकता है कि इतने बड़े क्षेत्र में समान वितरण है। कई बार कई आँकड़े छोटी इकाइयों के आधार पर उपलब्ध नहीं होते, इसलिए उस दशा में बड़ी इकाइयां चुनी जाती हैं।

2. अंतराल का चुनाव (Choice of Intervals) –
घनता के अनुसार शेडिंग में अंतर रखा जाता है। इसी अंतर के अनुसार Scheme of Shading या Scale of Densities या सूचक बनाया जाता है। इस उद्देश्य के लिए सारे आँकड़ों को कुछ वर्गों में बांटा जाता है। यह वर्ग बनाते समय इन आँकड़ों की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है।

  • अधिकतम संख्या (Maximum figures)
  • निम्नतम संख्या (Minimum figures)
  • दरमियानी संख्या (Intermediate figures)

श्रेणियों की संख्या काफ़ी होनी चाहिए ताकि प्रत्येक इकाई का सापेक्षिक महत्त्व (Comparative importance) स्पष्ट रूप से दिखाई दे बहुत अधिक श्रेणियां नक्शे पर गड़बड़ कर देती हैं और बहुत कम श्रेणियों के कारण वितरण की विभिन्नता प्रकट नहीं होती। (Too many categories can be confusing and too few categories can result in little differentiation) प्रायः अंतराल नियमित (Regular) होता है परंतु यह आवश्यक नहीं है कि हर श्रेणी में अंतर समान हो।

गुण (Merits)
(1) इस विधि के द्वारा किसी वस्तु के क्षेत्रीय घनत्व (Areal density) के औसत वितरण को प्रकट किया जा सकता है। (It is useful for showing average figures or percentage or ratios.)

(2) यह विधि अधिकतर फसलें, पशु, भू-उपयोग और जनसंख्या घनत्व को प्रकट करने के लिए प्रयोग की जाती है। इसके लिए क्षेत्रफल की प्रत्येक इकाई (Per unit area) के औसत आँकड़े दिए जाते हैं; जैसे-Numbers of persons per sq. km. या Number of livestock per sq. km. Yield of a crop per hectare.
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(3) एक जैसे प्रभाव के कारण यह रंग-विधि से मिलता-जुलता है। (This method is somewhat similar to colour method.)
(4) विभिन्न रंग प्रयोग करने से यह मानचित्र मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं। (It gives visual impression on the mind.)
(5) यह मानचित्र गुणात्मक होते हैं जिनमें केवल क्षेत्रफल के साथ-साथ आँकड़ों का ज्ञान हो जाता है।
(6) इस विधि से विभिन्न प्रकार के अन्य मानचित्र भी बनाए जा सकते हैं।
(7) जनसंख्या के घनत्व को प्रकट करने के कारण इसे मानवीय भूगोल का मुख्य उपकरण कहा जाता है। (Choropleth map is the chief tool of human Geographer.)

दोष (Demerits)

  1. ऐसे मानचित्रों के लिए आँकड़े इकट्ठे करना कठिन होता है।
  2. इन मानचित्रों से केवल औसत का ही पता चलता है तथा कुल उत्पादन का अनुमान लगाना कठिन होता है।
  3. इस विधि द्वारा किसी क्षेत्र में समान वितरण (Uniform distribution) प्रकट किया जाता है जो भौगोलिक नियम के अनुसार नहीं है। किसी क्षेत्र के विभिन्न भागों में उत्पादन विभिन्न होता है।
  4. प्राय: अधिक घनत्व वाले छोटे क्षेत्र अधिक महत्त्वपूर्ण दिखाई देते हैं जबकि किसी बड़े क्षेत्र में बहुत अधिक उत्पादन है परंतु औसत घनत्व कम है। ऐसा क्षेत्र अधिक उत्पादन होते हुए भी कम महत्त्वपूर्ण दिखाई देगा।
  5. इस विधि द्वारा ऋणात्मक प्रदेश में भी उत्पादन प्रकट किया जाता है जैसे मरुस्थल, दलदल, झील आदि ऐसे क्षेत्रों में 1 उत्पन्न नहीं होता परंतु वहां उत्पादन अंकित होता है।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

प्रश्न 18.
सममान रेखा मानचित्र किसे कहते हैं? इसके विभिन्न प्रकार बताओ। इन मानचित्रों की रचना कैसे की जाती है? इनके गुण तथा दोष बताओ।
उत्तर:
सममान रेखाएं (Isopleths )-शब्द Isopleth दो शब्दों के जोड़ से बना (Isos + plethron) है Isos शब्द का अर्थ है समान तथा Plethron शब्द का अर्थ है मान इस प्रकार सममान रेखाएं वे रेखाएं हैं जिनका मूल्य, तीव्रता तथा घनत्व समान हो। ये रेखाएं उन स्थानों को आपस में जोड़ती हैं जिनका मान (value) समान हो। (Isopleths are lines of equal value in the form of quantity, intensity and density.)
सममान रेखाओं के प्रकार (Types of Isopleths) विभिन्न तत्वों को दिखाने वाली सम-रेखाओं को क्रमशः इन नामों से पुकारा जाता है-
1. समदाब रेखाएं (Isobars) समान वायु दाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समदाब रेखा कहते हैं।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 162. समताप रेखाएं (Isotherms)-समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समताप रेखा कहते हैं।
3. समंवृष्टि रेखा (Isohyets) समान वर्षा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समवृष्टि रेखा कहते हैं।
4. समोच्य रेखाएं (Contours)-समान ऊंचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समोच्च रेखा कहते हैं।
5. सममेघ रेखा (Iso Npeh) समान मेघावरण वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को सममेघ रेखा कहते हैं।
6. अन्य (Others)-जैसे समगंभीरता रेखा (Isobath), समलवणता रेखा (Iso Haline), समभूकंभ रेखा (Iso Seismal), समधूप रेखा (Isohets) अन्य उदाहरण हैं।

सममान रेखाओं की रचना (Drawing of Isopleths)-
(1) संबंधित क्षेत्र का रूप रेखा मानचित्र (Outline map) की आवश्यकता होती है। इस मानचित्र पर सभी स्थानों की स्थिति अंकित हो।
(2) इस क्षेत्र के अधिक-से-अधिक स्थानों के आँकड़े प्राप्त होने चाहिए।
(3) अधिकतम तथा न्यूनतम आँकड़ों के अनुसार इन रेखाओं के मध्य अंतराल (Interval) चुनना चाहिए। अंतराल या सममान रेखाओं की संख्या न तो कम हो और न ही अधिक हो।
(4) अंतराल का चुनाव किसी तत्व के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। बड़े क्षेत्र पर दूर-दूर स्थित रेखाएँ मंद परिवर्तन प्रकट करती हैं। यदि परिवर्तन दर तीव्र हो तथा क्षेत्र कम हो तो ये रेखाएं उपयोगी सिद्ध नहीं होतीं।
(5) समान मान वाले स्थानों को मिलाकर सम-मान रेखाएँ खींची जाती हैं। यदि समान मूल्य वाले स्थान प्राप्त न हों तो विभिन्न मूल्य वाले स्थानों के बीच समानुपात दूरी पर इन रेखाओं का अन्तर्वेशन किया जाता है।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 17(6) कई बार विभिन्न मूल्य वाले क्षेत्रों को अलग-अलग स्पष्ट करने के लिए इनके बीच आभाओं (Shades ) या रंगों का प्रयोग भी किया जाता है।

गुण (Merits) –

  • सम-मान रेखाएँ वर्षा, तापमान आदि आँकड़ों के परिवर्तन को शुद्ध रूप से प्रदर्शित करती हैं।
  • ये रेखाएँ किसी स्थान पर उपस्थित मूल्य को प्रकट करती हैं।
  • अन्य विधियों की अपेक्षा यह एक अधिक वैज्ञानिक विधि है।
  • बिंदु मानचित्र तथा वर्णमात्री मानचित्रों को सम-मान रेखा, मानचित्रों में बदला जा सकता है।
  • इन मानचित्रों का प्रशासकीय इकाइयों से कोई संबंध नहीं होता है।

दोष (Demerits) –

  •  सम-मान रेखाओं का अंतर्वेशन एक कठिन कार्य है।
  • यदि आँकड़े अनेक स्थानों पर प्राप्त न हों तो ये मानचित्र नहीं बनाए जा सकते।
  • घनत्व में अधिक तथा तीव्र परिवर्तन हो तो ये मानचित्र अर्थपूर्ण नहीं रहते।
  • सम- मान रेखा-मानचित्रों पर ग्रामीण तथा शहरी जनसंख्या को एक साथ नहीं दिखाया जा सकता।

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मौखिक परीदा के प्रश्न (Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
आँकड़े प्रायः किस रूप में लिखे जाते हैं?
उत्तर:
तालिकाओं के रूप में।

प्रश्न 2.
दंड आरेख के मुख्य प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. क्षैतिज दंड आरेख
  2. लंबवत् दंड आरेख
  3. संश्लिष्ट दंड आरेख
  4. प्रतिशत दंडारेख।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

प्रश्न 3.
दंडारेख में मापक चुनते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
अधिकतम तथा न्यूनतम आँकड़ों का।

प्रश्न 4.
कौन-से दंडारेख अच्छे माने जाते हैं- क्षैतिज अथवा लंबवत्?
उत्तर:
क्षैतिज दंडारेख इनमें मापक दृष्टि के सामने होने से पढ़ने-लिखने में सुविधा रहती है।

प्रश्न 5.
भारत का विदेशी व्यापार ( आयात-निर्यात ) किस दंड आरेख द्वारा दिखाया जाता है?
उत्तर-:
संश्लिष्ट दंड आरेख

प्रश्न 6.
भारत की जनसंख्या वृद्धि किस रेखाग्राफ से दिखाई जाती है?
उत्तर:
सरल रेखाग्राफ से।

प्रश्न 7.
वृत्त चक्र कितने प्रकार के हैं?
उत्तर:

  1. चक्र चित्र (Pie-graph)
  2. मुद्रिका चित्र ( Ring Diagram)
  3. वृत्त चित्र (Circular Diagram)
  4. अंशंकित वृत्त।

प्रश्न 8.
वृत्त चित्रों का सिद्धांत क्या है?
उत्तर:
वृत्त का क्षेत्रफल मात्रा के अनुपात होता है।

प्रश्न 9.
भारत में विभिन्न धर्मों के लोगों की संख्या किस दंड आरेख से दिखाई जाती है?
उत्तर:
प्रतिशत दंड आरेख से।

प्रश्न 10.
वितरण मानचित्र के दो मुख्य प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. गुणात्मक (Qualitative)
  2. मात्रात्मक (Quantitative)

प्रश्न 11.
हरियाणा राज्य की जिलावार कुल जनसंख्या वितरण किस विधि से दिखाई जाती है?
उत्तर:
बिंदु विधि (Dot Method)।

प्रश्न 12.
एक बिंदु का मूल्य चयन किन दो तत्वों पर निर्भर
उत्तर:

  1. अधिकतम न्यूनतम आँकड़े।
  2. मानचित्र का विस्तार।

प्रश्न 13.
नकारात्मक प्रदेश क्या होते हैं?
उत्तर:
मरुस्थल, दलदली प्रदेश यहां कुछ नहीं होता।

प्रश्न 14.
बिंदु विधि से किस प्रकार के मानचित्र बनते हैं?
उत्तर:
गुणात्मक तथा मात्रात्मक।

प्रश्न 15.
वर्णं मात्री मानचित्र किस प्रकार के मानचित्र हैं?
उत्तर:
गुणात्मक।

प्रश्न 16.
हरियाणा राज्य की जिलावार जनसंख्या घनत्व किस विधि से दिखाई जाती है?
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र।

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प्रश्न 17.
वर्णमात्री मानचित्र का सिद्धांत क्या है?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में आभा का गहरापन घनत्व के अनुपात में होता है।

प्रश्न 18.
किसी वर्णमात्री मानचित्र (राज्य के) में प्रशासकीय इकाई क्या होती है?
उत्तर:
जिला या तहसील।

प्रश्न 19.
वर्णमात्री मानचित्र में वर्ग अंतराल क्या समान होता है?
उत्तर:
नहीं।

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. दो समान आवेश q एक-दूसरे से d दूरी पर रखे हैं। इनके मध्य दूरी पर स्थित बिन्दु पर विभव होगा-
(अ) शून्य
(ब) \(\frac{\mathrm{kq}^2}{\mathrm{~d}}\)
(स) \(4 \frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{d}}\)
(द) \(\frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{d}^2}\)
उत्तर:
(स) \(4 \frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{d}}\)

2. पृथ्वी का विद्युत विभव माना गया है-
(अ) धनात्मक
(ब) ऋणात्मक
(स) शून्य
(द) 1000 बोल्ट
उत्तर:
(स) शून्य

3. एक E = 0 वाले विद्युत क्षेत्र की तीव्रता में विद्युत विभव का दूरी के साथ परिवर्तन होगा-
(अ) V ∝ r
(स) V ∝ \(\frac{1}{r}\)
(ब) V ∝ \(\frac{1}{\mathrm{r}^2}\)
(द) V = नियत
उत्तर:
(द) V = नियत

4. एक समबाहु त्रिभुज के तीन कोनों पर समान आवेश स्थित है। त्रिभुज के केन्द्र O पर विद्युत विभव V तथा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E के लिए सत्य कथन होगा-
(अ) V = 0, E = 0
(स) V=0, E≠ 0
(ब) V = 0, E≠ 0
(द) V≠ 0, E = 0
उत्तर:
(द) V≠ 0, E = 0

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

5. जब दो आवेश के बीच की दूरी बढ़ाई जाती है तो आवेश की स्थितिज ऊर्जा-
(अ) बढ़ती है।
(स) नियत रहती है।
(ब) घटती है।
(द) बढ़ या घट सकती है।
उत्तर:
(द) बढ़ या घट सकती है।

6. यदि एक धन आवेश को निम्न विभव के क्षेत्र से उच्च विभव के क्षेत्र में ले जाया जाता है तो विद्युत स्थितिज ऊर्जा-
(अ) घटती है।
(स) स्थिर रहती है।
(ब) बढ़ती है।
(द) घट भी सकती है अथवा बढ़ भी सकती है।
उत्तर:
(ब) बढ़ती है।

7. दो बिन्दुओं के मध्य की दूरी 30 सेमी. है। यदि बिन्दु A पर 20 µC आवेश व B पर 10C आवेश पर रखा हुआ है तो A व B के बीच किस बिन्दु पर विभव शून्य होगा-
(अ) A से 20 सेमी. दूर
(स) A पर
(ब) B से 20 सेमी. दूर
(द) B पर।
उत्तर:
(अ) A से 20 सेमी. दूर

8. समविभव पृष्ठ में से पारित फ्लक्स हमेशा-
(अ) पृष्ठ के लम्बवत् होता है।
(ब) पृष्ठ के समान्तर होता है।
(स) शून्य होता है।
(द) पृष्ठ से 45° कोण पर होता है।
उत्तर:
(अ) पृष्ठ के लम्बवत् होता है।

9. पानी की आवेशित 64 बूंदों को मिलाकर एक बड़ी बूंद बना ली जाती है तो बड़ी बूंद पर विभव का मान पूर्ण मान से कितने गुना होगा-
(अ) 4 गुना
(ब) 16 गुना
(स) 64 गुना
(द) 8 गुना
उत्तर:
(ब) 16 गुना

10. धातु के एक आवेशित ठोस गोले के केन्द्र पर विद्युत विभव है-
(अ) शून्य
(ब) ठोस गोले की सतह पर विभव से आधा
(स) ठोस गोले की सतह पर विभव के बराबर
(द) ठोस गोले की सतह पर विभव से दुगुना
उत्तर:
(स) ठोस गोले की सतह पर विभव के बराबर

11. जब एक परीक्षण आवेश को किसी विद्युत द्विध्रुव के निरक्ष रेखा के अनुदिश अनन्त से द्विध्रुव के निकट लाया जाता है तो किया गया कार्य होगा-
(अ) धनात्मक
(ब) ऋणात्मक
(स) शून्य
(द) अनन्त
उत्तर:
(स) शून्य

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

12. किसी माध्यम की परावैद्युताशक्ति 2KV mm-1 है। 50µm के नमूने में बिना बंधे कितना अधिकतम विभवान्तर स्थापित किया जा सकता है?
(अ) 10000 V
(ब) 1000 V
(स) 100 V
(द) 10 V
उत्तर:
(स) 100 V

13. समविभव पृष्ठ वह है-
(अ) जिसका विभव शून्य हो ।
(ब) जिसके समस्त बिन्दुओं पर विभव समान हो।
(स) जिस पर ऋण विभव विद्यमान हो।
(द) जिस पर धन- विभव विद्यमान हो।
उत्तर:
(ब) जिसके समस्त बिन्दुओं पर विभव समान हो।

14. एक आवेशित गोलाकार चालक के केन्द्र पर विद्युत विभव चालक के तल पर विभव की तुलना में-
(अ) कम होगा
(स) समान होगा
(ब) अधिक होगा
(द) शून्य होगा।
उत्तर:
(स) समान होगा

15. शंकु की आकृति के सुचालक वस्तु का आवेश घनत्व अधिकतम होगा-
(अ) नीचे की चौड़ी सतह पर
(ब) ऊपर की चोटी पर
(स) सम्पूर्ण सतह पर
(द) सिर्फ ऊपर की सतह पर
उत्तर:
(ब) ऊपर की चोटी पर

16. r1 और r2 त्रिज्याओं के दो गोलों पर आवेश q इस प्रकार बंटा है कि उनका पृष्ठ घनत्व समान है। उनके विभव में अनुपात –
(अ) \(\frac{\mathrm{r}_1}{\mathrm{r}_2}\)
(ब) \(\frac{r_1^2}{\mathrm{r}_2^2}\)
(स) \(\mathrm{I}_1^3\)
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) \(\frac{\mathrm{r}_1}{\mathrm{r}_2}\)

17. विभवान्तर V, आवेश Q तथा धारिता C में सम्बन्ध है-
(अ) V = CQ
(ब) C = VQ
(स) V = \(\frac{Q}{C}\)
(द) Q = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{C}}\)
उत्तर:
(स) V = \(\frac{Q}{C}\)

18. समान त्रिज्या के ताँबे के खोखले गोले A व ठोस गोले B को एक समान विभव से आवेशित किया गया है। सत्य कथन है-
(अ) गोले A पर आवेश अधिक होगा
(ब) गोले B पर आवेश अधिक होगा
(स) दोनों पर समान आवेश होगा
(द) निश्चित नहीं कहा जा सकता ।
उत्तर:
(स) दोनों पर समान आवेश होगा

19. एक समान्तर प्लेट संधारित्र को एक बैटरी से आवेशित करके बैटरी हटा ली जाती है। अब संधारित्र की प्लेटों के मध्य दूरी बढ़ा दी जाये तो अब संधारित्र में-
(अ) संधारित्र पर आवेश बढ़ जाता है व धारिता घट जाती है।
(ब) विभवान्तर में वृद्धि तथा धारिता कम हो जाती है।
(स) धारिता बढ़ जाती है।
(द) एकत्रित ऊर्जा के मान में कमी हो जाती है।
उत्तर:
(ब) विभवान्तर में वृद्धि तथा धारिता कम हो जाती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

20. समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के मध्य के स्थान के आधे भाग में ∈r, परावैद्युतांक माध्यम भरा हुआ है। यदि हवा वाले भाग की धारिता C है तो सम्पूर्ण संधारित्र निकाय की धारिता होगी-
(अ) \(\frac{2 \epsilon_{\mathrm{r}} \mathrm{C}}{1+\epsilon_{\mathrm{r}}}\)
(ब) \(\frac{C\left(\epsilon_{\mathrm{r}}+1\right)}{2}\)
(स) \(\frac{C \epsilon_{\mathrm{r}}}{1+\epsilon_{\mathrm{r}}}\)
(द) ∈r
उत्तर:
(स) \(\frac{C \epsilon_{\mathrm{r}}}{1+\epsilon_{\mathrm{r}}}\)

21. तीन संधारित्रों को किस क्रम में जोड़ा जाए कि उनमें समान विभव पर संचित ऊर्जा अधिकतम हो-
(अ) दो समान्तर क्रम में एक श्रेणी क्रम में
(ब) तीनों समान्तर क्रम में
(स) तीनों श्रेणी क्रम में
(द) दो श्रेणी तथा एक समान्तर क्रम में
उत्तर:
(ब) तीनों समान्तर क्रम में

22. छोटी 64 बूँदें मिलकर एक बड़ी बूँद बनाती हैं। यदि प्रत्येक छोटी बूँद पर Q आवेश हो तो बड़ी बूँद पर आवेश होगा-
(अ) 64 Q
(ब) 8 Q
(स) 4 Q
(द) 2 Q
उत्तर:
(अ) 64 Q

23. कम से कम 2 µF धारिता वाले कितने संधारित्र 5 µF धारिता देंगे-
(अ) तीन
(ब) चार
(स) पाँच
(द) सात
उत्तर:
(ब) चार

24. एक संधारित्र की धारिता C है। इसे V विभवान्तर पर आवेशित किया गया है। यदि अब इसे प्रतिरोध से सम्बन्धित कर दिया जाये, ऊर्जा क्षय की मात्रा होगी-
(अ) \(\frac{1}{2}\)CV2
(ब) CV2
(स) \(\frac{\mathrm{CV}^2}{3}\)
(द) \(\frac{1}{2}\)QV2
उत्तर:
(अ) \(\frac{1}{2}\)CV2

25. एक वायु संधारित्र की धारिता 5 µF है। उसी संधारित्र में वायु के स्थान पर पूर्ण रूप से अभ्रक रख दिया जाये तो धारिता 30 µF हो जाती है, अभ्रक का परावैद्युतांक होगा-
(अ) 3
(ब) 6
(स) 12
(द) 24
उत्तर:
(ब) 6

26. 2uF के तीन संधारित्रों को समान्तर क्रम में जोड़ने पर तुल्यधारिता होगी-
(अ) 2μF
(ब) 6μF
(स) \(\frac{1}{3}\)μF
(द) \(\frac{2}{3}\)μF
उत्तर:
(ब) 6μF

27. एक आवेशित समान्तर प्लेट संधारित्र में U, विद्युत ऊर्जा संग्रहित है। संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी को दुगुना करने पर विद्युत ऊर्जा होगी-
(अ) U。
(ब) \(\frac{\mathrm{U}_0}{2}\)
(स) 2U。
(द) \(\frac{U_0}{4}\)
उत्तर:
(स) 2U。

28. एक समान त्रिज्या एवं समान आवेशयुक्त पानी को 27 छोटी बूंदें मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद की धारिता तथा एक छोटी बूंद की धारिता का अनुपात होगा-
(अ) 2 : 1
(ब) 3 : 1
(स) 4 : 1
(द) 16 : 1
उत्तर:
(ब) 3 : 1

29. दिये गये चित्र में प्रत्येक संधारित्र की धारिता x है बिन्दु A व B के मध्य तुल्यधारिता होगी-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 1
(अ) 3x
(ब) \(\frac{x}{3}\)
(स) \(\frac{2}{3} x\)
(द) \(\frac{3}{2} x\)
उत्तर:
(स) \(\frac{2}{3} x\)

30. 3μF धारिता प्राप्त करने के लिए 2μF के तीन प्रकार संयोजित करेंगे?
(अ) तीनों को समान्तर क्रम में
(ब) तीनों को श्रेणीक्रम में
(स) दो संधारित्र श्रेणीक्रम में तथा तीसरा संधारित्र संयोजन के समान्तर क्रम में
(द) दो संधारित्र समान्तर क्रम में तथा तीसरा संधारित्र संयोजन के श्रेणीक्रम में।
उत्तर:
(स) दो संधारित्र श्रेणीक्रम में तथा तीसरा संधारित्र संयोजन के समान्तर क्रम में

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

31. संधारित्र में ऊर्जा किस स्वरूप में उपस्थित होती है?
(अ) आवेश के रूप में
(ब) धारिता के रूप में
(स) विद्युत क्षेत्र के रूप में
(द) ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में
उत्तर:
(स) विद्युत क्षेत्र के रूप में

32. तीन संधारित्र जिनकी धारिताएँ क्रमश: 2, 4 व 8 μF हैं। पहले श्रेणीक्रम में फिर समान्तर क्रम में जोड़े जाते हैं। दोनों स्थितियों में इनकी तुल्यधारिताओं का अनुपात होगा-
(अ) 49 : 4
(ब) 3 : 7
(स) 4 : 49
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) 3 : 7

33. दो संधारित्र जिनकी धारिताएँ C1 व C2 हैं। यदि उन्हें समान आवेश दिये जायें तो उनमें संग्रहित ऊर्जाओं का अनुपात होगा-
(अ) \(\frac{\mathrm{C}_2}{\mathrm{C}_1}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{C}_1}{\mathrm{C}_2}\)
(स) \(\sqrt{\frac{C_2}{C_1}}\)
(द) \(\sqrt{\frac{C_1}{C_2}}\)
उत्तर:
(अ) \(\frac{\mathrm{C}_2}{\mathrm{C}_1}\)

34. 10μF धारिता के समान्तर प्लेट संधारित्र को 40μc आवेश देने पर उसकी कुल ऊर्जा का मान जूल में होगा-
(अ) 8 × 10-5
(ब) 800
(स) 8.00
(द) 2 × 10-3
उत्तर:
(अ) 8 × 10-5

35. 5 माइक्रो फैरड धारिता के एक आवेशित किया जाता है। संधारित्र पर संचित ऊर्जा होगी-(जूल में)
(अ) 2.5 × 10-3
(ब) 5.5 × 10-3
(स) 2.5
(द) 5.0 × 108
उत्तर:
(स) 2.5

36. दो संधारित्रों की धारितायें C1 तथा C2 में संग्रहित ऊर्जायें समान हैं। संधारित्रों पर विभवान्तर का अनुपात होगा-
(अ) C2 : C1
(ब) \(\sqrt{C_2}: \sqrt{C_1}\)
(स) C1 : C2
(द) \(\sqrt{C_1}: \sqrt{C_2}\)
उत्तर:
(ब) \(\sqrt{C_2}: \sqrt{C_1}\)

37. निम्नांकित परिपथ में तुल्यधारिता है-
(अ) \(\frac{5}{3}\) μF
(ब) \(\frac{3}{5}\) μF
(स) 15μF
(द) \(\frac{1}{15}\) μF
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 2
उत्तर:
(अ) \(\frac{5}{3}\) μF

38. संलग्न चित्र में बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता का मान होगा-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 3
(अ) 6μF
(ब) 4μF
(स) \(\frac{6}{11}\)
(द) \(\frac{11}{5}\)
उत्तर:
(अ) 6μF

39. आवेशित संधारित्र में संग्रहित ऊर्जा होती है-
(अ) धन आवेशित प्लेट पर
(ब) धन तथा ऋण आवेशित दोनों प्लेटों पर
(स) प्लेटों के मध्य क्षेत्र में
(द) संधारित्र के किनारे पर
उत्तर:
(स) प्लेटों के मध्य क्षेत्र में

40. C1 तथा C2 धारिता के दो संधारित्रों के समान्तर संयोजन को Q आवेश दिया जाता है। C1 पर Q1 तथा C2 पर Q2 आवेश होने पर \(\frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}\) का अनुपात होगा-
(अ) \(\frac{\mathrm{C}_2}{\mathrm{C}_1}\)
(ब) \(\frac{C_1}{C_2}\)
(स) \(\frac{\mathrm{C}_1 \mathrm{C}_2}{1}\)
(द) \(\frac{1}{\mathrm{C}_1 \mathrm{C}_2}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{C_1}{C_2}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

41. समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का मान कम करने के लिए प्लेटों के बीच रिक्त स्थान-
(अ) में परावैद्युत पदार्थ भर देते हैं।
(ब) को कम कर प्लेटों का क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं।
(स) को बढ़ाकर प्लेटों का क्षेत्रफल घटा देते हैं।
(द) भी बढ़ा देते हैं तथा क्षेत्रफल भी बढ़ा देते हैं।
उत्तर:
(स) को बढ़ाकर प्लेटों का क्षेत्रफल घटा देते हैं।

42. एक आवेशित संधारित्र की दोनों प्लेटों को एक तार से जोड़ दिया जाये तो-
(अ) विभव अनन्त हो जायेगा।
(ब) आवेश अनन्त हो जायेगा।
(स) संधारित्र निरावेशित हो जायेगा।
(द) आवेश पूर्णमान का दुगुना हो जायेगा।
उत्तर:
(स) संधारित्र निरावेशित हो जायेगा।

43. ( 8 μF – 250V) अंकित अनेक संधारित्र दिये गये हैं। एक (16 μF – 1000V) की तुल्यधारिता प्राप्त करने के लिए आवश्यक संधारित्रों की न्यूनतम संख्या होगी-
(अ) 4
(ब) 16
(स) 32
(द) 64
उत्तर:
(स) 32

44. एक समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों के बीच समरूप क्षेत्र E वोल्ट/मीटर है। यदि प्लेटों के बीच की दूरी d (मी) तथा प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A (मी2) है तो उसमें संचित कल ऊर्जा है-
(अ) \(c\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \mathrm{Ad}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{E}^2 \mathrm{Ad}}{\epsilon_0} \)
(स) \(\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \)
(द) ∈0AEd
उत्तर:
(अ) \(c\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \mathrm{Ad}\)

45. एक C धारिता का तथा दूसरा \(\frac{C}{2}\) धारिता का संधारित्र एक V बोल्ट की बैटरी से चित्र के अनुसार जोड़े गये हैं। दोनों संधारित्रों को पूर्णतया आवेशित करने में किया गया कार्य है-
(अ) \(\frac{3}{4}\)CV2
(ब) \(\frac{1}{2}\)CV2
(स) \(\frac{1}{4}\)CV2
(द) 2CV-2

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 4
उत्तर:
(अ) \(\frac{3}{4}\)CV2

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी बिन्दु पर विभव को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर विभव कार्य की वह मात्रा है जो एकांक धन आवेश को अनन्त से उस बिन्दु तक बिना त्वरण के लाने में करना पड़ता है।

प्रश्न 2.
विभवान्तर को परिभाषित करते हुए इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
विद्युत क्षेत्र में दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर एक एकांक धन परीक्षण आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक क्षेत्र के विपरीत ले जाने में किए गए कार्य से इसकी परिभाषा देते हैं। S. I. पद्धति में इसका मात्रक वोल्ट (V) या J/C

प्रश्न 3.
किसी क्षेत्र में वैद्युत विभव V नियत है। वहाँ पर आप वैद्युत क्षेत्र E के सम्बन्ध में क्या कह सकते हैं?
उत्तर:
हमारा कहना यह होगा कि उस क्षेत्र में वैद्युत क्षेत्र E शून्य होगा।

प्रश्न 4.
दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 20 वोल्ट है। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक 4 × 10-4 कूलॉम ले जाने में कितना कार्य करना होगा?
उत्तर:
कार्य (W) = आवेश (q) x विभवान्तर (V)
= 4 × 10-4 × 20 = 8 × 10-3 जूल

प्रश्न 5.
क्या निर्वात (vacuum) में किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य हो सकता है, जबकि उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य नहीं है?
उत्तर:
हाँ, (i) दो समान परिमाण तथा विपरीत प्रकृति के आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य होता है, वैद्युत क्षेत्र नहीं ।
(ii) वैद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में वैद्युत विभव शून्य होता है, वैद्युत क्षेत्र नहीं।

प्रश्न 6.
क्या किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य हो सकता है, जबकि उसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य न हो। उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हाँ, (i) दो समान परिमाण तथा समान प्रकृति के आदेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है, वैद्युत विभव नहीं।
(ii) आवेशित गोलीय कोश के अन्दर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है, वैद्युत विभव नहीं।

प्रश्न 7.
उस भौतिक राशि का नाम बताइए जिसका मात्रक जूल / कूलॉम है क्या यह सदिश राशि है अथवा अदिश?
उत्तर:
वैद्युत विभव अथवा वैद्युत विभवान्तर अदिश ।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 8.
धातु के 5 cm त्रिज्या के एक खोखले गोले को इतना आवेशित किया गया है कि उसके पृष्ठ का विभव 10V हो जाता है। इस गोले के केन्द्र पर विभव कितना होगा?
उत्तर:
खोखले गोले के केन्द्र व पृष्ठ पर विद्युत विभव समान होता है। अतः गोले के केन्द्र पर विभव V = 10 वोल्ट होगा।

प्रश्न 9.
समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? बिन्दु धनात्मक आवेश के कारण समविभव पृष्ठ का चित्र बनाइए ।
उत्तर:
ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 5

प्रश्न 10.
उस क्षेत्र के तदनुरूप तीन समविभव पृष्ठ खींचिये जिसके परिमाण में एकसमान वृद्धि होती है, परन्तु z-दिशा के अनुदिश नियत रहता है। ये पृष्ठ उन पृष्ठों से किस प्रकार भिन्न हैं जो किसी नियत विद्युत क्षेत्र के 2-दिशा के अनुदिश हैं?
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 6
यदि E एकसमान हो तो d2 = d1
एकसमान क्षेत्र के लिए प्रत्येक तल पर विभव समान होगा।

प्रश्न 11.
एक समविभव पृष्ठ एक-दूसरे से 5 सेमी. दूरी पर स्थित बिन्दुओं के बीच 500 HC आवेश को ले जाने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
उत्तर:
समविभव पृष्ठ के किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर ∆V = शून्य
अतः कार्य W = आवेश q × विभवान्तर (∆V)
= 100 µC × 0 = शून्य
अर्थात् कोई कार्य नहीं करना पड़ेगा।

प्रश्न 12.
वैद्युत विभव के मात्रक की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वैद्युत विभव का मात्रक वोल्ट होता है, जिसको निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है-“यदि एक कूलॉम परीक्षण धनावेश को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र के अन्तर्गत किसी बिन्दु तक क्षेत्र की दिशा के विपरीत लाने में एक जूल कार्य करना पड़े तो उस बिन्दु पर वैद्युत विभव का मान एक वोल्ट होगा।”

प्रश्न 13.
निम्नलिखित के कारण समविभव पृष्ठों की आकृति क्या होती है?
(a) बिन्दु आवेश के कारण
(b) एकसमान वैद्युत क्षेत्र के कारण।
उत्तर:
(a) बिन्दु आवेश को केन्द्र मानते हुए खींचे हुए संकेन्द्रीय गोले ।
(b) वैद्युत बल रेखाओं के लम्बवत् परस्पर समान्तर समतल तल ।

प्रश्न 14.
वैद्युत बल रेखाओं के अनुदिश जाने पर वैद्युत विभव घटता है अथवा बढ़ता है?
उत्तर:
विभव घटता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 15.
क्या इलेक्ट्रॉन अधिक विभव क्षेत्र में अथवा कम विभव- क्षेत्र में जाने का प्रयत्न करते हैं, क्यों?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन अधिक विभव क्षेत्र में जाने का प्रयत्न करते हैं। क्योंकि ऋणावेशित होते हैं।

प्रश्न 16.
एक वर्ग PQRS के केन्द्र पर 10 µC आवेश रखा है। इसके कोने P पर रखे 2 µC के बिन्दु आवेश को Q तक ले जाने में किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
शून्य, क्योंकि Vp = VQ एवं P तथा Q की केन्द्र 0 पर स्थित आवेश 10 µC से समान दूरी है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 7

प्रश्न 17.
किसी समरूप विद्युत क्षेत्र में समविभव पृष्ठ खींचिये ।
उत्तर-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 8

प्रश्न 18.
किन्हीं दो समान्तर पृष्ठों पर विभव समान हैं। इनके मध्य की दूरी है। यदि किसी q आवेश को एक पृष्ठ से दूसरे पृष्ठ तक ले जायें तो इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि दोनों पृष्ठ समान विभव

प्रश्न 19.
दिए गए चित्र में किसी बिन्दु आवेश को x से क्रमशः y तथा z बिन्दुओं तक ले जाने में किया गया कार्य कितना होगा?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 9
उत्तर:
बिन्दु 2 तथा y एक ही समविभव पृष्ठ पर स्थित हैं। आवेश को x से y तक ले जाने में किया गया कार्य, आवेश को x से 2 तक ले जाने में किए गए कार्य के समान होगा।
इसलिए Wy = Wz

प्रश्न 20.
क्या परीक्षण आवेश की प्रकृति पर धन या ऋण विद्युत विभव निर्भर करता है? समझाइए ।
उत्तर:
नहीं, यह परीक्षण आवेश की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है अपितु केवल स्रोत आवेश की प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 21.
दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को नहीं काटते। क्यों?
उत्तर:
यदि दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को काटते हैं तो इसका अर्थ है कि प्रतिच्छेद बिन्दु पर विद्युत विभव के दो अलग-अलग मान होंगे जो कि सम्भव नहीं है।

प्रश्न 22.
\(\overrightarrow{\mathrm{r}_1} \) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{r}_2} \) पर क्रमशः Q1 तथा Q2 दो बिन्दु आवेशों के कारण किसी बिन्दु पर जिसका स्थिति सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{r}}\) है। वैद्युत विभव (\(\overrightarrow{\mathrm{r}}\)) के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 58

प्रश्न 23.
मध्यवर्ती बिन्दु पर किसी वैद्युत द्विध्रुव के कारण स्थिर वैद्युत विभव क्या होता है?
उत्तर:
शून्य ।

प्रश्न 24.
जब कोई वैद्युत द्विध्रुव किसी वैद्युत क्षेत्र के लम्बवत् रखा जाता है, तो इसकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा क्या होगी ?
उत्तर:
U = -pE cos θ तथा
यहाँ θ = 90°
अतः U = – pE × 0 = 0

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 25.
वैद्युत बल रेखा के अनुदिश वैद्युत विभव घटता है अथवा बढ़ता है?
उत्तर:
वैद्युत बल रेखा की दिशा वैद्युत क्षेत्र की दिशा होती है। अतः इस दिशा में वैद्युत विभव घटता है।

प्रश्न 26.
एक परीक्षण आवेश १ को एक वैद्युत द्विध्रुव की मध्यवर्ती अक्ष ( equitorial axis) के अनुदिश एक सेमी ले जाने में कितना कार्य करना होगा?
उत्तर:
चूँकि द्विध्रुव की मध्यवर्ती अक्ष के प्रत्येक बिन्दु पर विभव शून्य होता है, अतः इसके किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर = 0.
अतः कार्य W=q × ∆V = q × 0 = 0

प्रश्न 27.
किसी बाह्य वैद्युत क्षेत्र में आवेश से q r दूरी पर स्थित बिन्दु पर इसकी स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी आवेश q की बाह्य वैद्युत क्षेत्र में इससे r दूरी पर इसकी स्थितिज ऊर्जा
U = q. V(r)

प्रश्न 28.
चालक तथा अचालक में क्या अन्तर है?
उत्तर:
चालक के सिरों पर वैद्युत विभवान्तर स्थापित करने पर इसमें आवेश का प्रवाह सुगमता से हो जाता है, जबकि ऐसा अचालक में नहीं होता है। चालकों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक होती है जबकि अचालकों में यह संख्या नगण्य होती है।

प्रश्न 29.
परावैद्युत से क्या तात्पर्य है? सिलिकॉन, माइका तथा कार्बन में कौनसा परावैद्युत है?
उत्तर:
परावैद्युत वे अचालक पदार्थ होते हैं जिनमें वैद्युत प्रभाव बिना आवेशों की गति के संचारित हो जाते हैं माइका परावैद्युत पदार्थ है।

प्रश्न 30.
किसी चालक की वैद्युत धारिता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी चालक द्वारा वैद्युत आवेश ग्रहण करने की क्षमता उसकी वैद्युत धारिता कहलाती है।

प्रश्न 31.
धारिता का मात्रक और इसकी विमा सूत्र लिखो।
उत्तर:
धारिता का SI मात्रक फैरड, विमा सूत्र [M-1L-2T4+A2]

प्रश्न 32.
धारिता के SI मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
यदि किसी चालक को एक कूलॉम आवेश देने से उसके विभव में एक वोल्ट की वृद्धि हो जाये तो उसकी धारिता एक फैरड कहलाती है।

प्रश्न 33.
एक संधारित्र की धनात्मक प्लेट पर + Q व ऋणात्मक प्लेट पर Q आवेश दिया जाता है। संधारित्र पर कुल आवेश क्या होगा? प्लेट पर – Q आवेश दिया जाता है। संधारित्र पर कुल आवेश क्या
उत्तर;
Q, जब हम संधारित्र की एक प्लेट को + Q आवेश देते हैं तब विद्युत प्रेरण के कारण दूसरी प्लेट धरती से जुड़े होने के कारण उस पर Q आवेश आ जाता है। संधारित्र पर कुल आवेश शून्य है।

प्रश्न 34.
समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के मध्य के स्थान को आंशिक रूप से परावैद्युत पदार्थ भरने पर धारिता का मान परावैद्युत पदार्थ की स्थिति पर किस प्रकार निर्भर करता है ?
उत्तर:
निर्भर नहीं करता।

प्रश्न 35.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की एक प्लेट का क्षेत्रफल आधा कर दिया जाये तो क्या युक्ति संधारित्र का कार्य करेगी ?
उत्तर;
नहीं, संधारित्र की एक प्लेट का क्षेत्रफल आधा करने से संधारित्र की धारिता आधी रह जायेगी इसलिये वह युक्ति कार्य नहीं करेगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 36.
धारिता C के संधारित्र को V विभवान्तर से आवेशित किया जाता है। संधारित्र के चारों ओर पृष्ठ से गुजरने वाले विद्युत फलक्स का मान क्या होगा ?
उत्तर:
शून्य, चूँकि विद्युत क्षेत्र संधारित्र की दो प्लेटों के मध्य में ही होता है।

प्रश्न 37.
एक फैरड विद्युत धारिता वाले चालक गोले की त्रिज्या क्या होगी ?
उत्तर:
दिया है-
C= 1 फैरड
R = ?
∵ C = 4π∈0R
∴ R = \(\frac{C}{4 \pi \epsilon_0}\) = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\) × C
R = 9 × 109 × 1 = 9 × 109 मीटर

प्रश्न 38.
तीन संधारित्र जिनके प्रत्येक की धारिता 6 μF है, के संयोजनों से प्राप्त अधिकतम व न्यूनतम धारिताओं का मान क्या होगा?
उत्तर:
अधिकतम धारिता = 6 μF + 6 μF + 6 μF
= 18 μF
न्यूनतम धारिता \(\frac{1}{\mathrm{C}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{6}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{6}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{6}}\) = \(\frac{3}{\mathrm{6}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{2}}\)
C = 2 μF

प्रश्न 39.
संधारित्रों का उपयोग कम्प्यूटरों में किस उद्देश्य के लिये किया जाता है?
उत्तर:
मेमोरी संग्रहित करने के लिये ।

प्रश्न 40.
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र लिखिये । धारिता पर प्लेटों के क्षेत्रफल का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता C = \(\frac{\epsilon_0 A}{d}\)
समीकरण से स्पष्ट है कि समान्तर संधारित्र की धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल के समानुपाती और उनके मध्य की दूरी के प्रतिलोमानुपाती होती है। प्लेटों का क्षेत्रफल A बढ़ाकर धारिता बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न 41.
समान धारिता C की दो संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। संयोजन की धारिता क्या होगी?
उत्तर:
श्रेणीक्रम में संयोजन की धारिता \(\frac{1}{\mathrm{C}}\) = \(\frac{1}{C_1}+\frac{1}{C_2}\)
संयोजन की धारिता = \(\frac{C}{2}\) होगी।

प्रश्न 42.
संधारित्र की धारिता पर परावैद्युत माध्यम का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
परावैद्युत माध्यम की उपस्थिति में धारिता के मान में वृद्धि हो जाती है। लेकिन यह वृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि प्लेटों के मध्य का भाग परावैद्युत पदार्थ से पूर्णतः आंशिक या विभिन्न परतों के रूप में कैसे-कैसे भरा हुआ है।

प्रश्न 43.
3 μF व 5 μF धारिता के दो संधारित्रों के समान्तर संयोजन को Q आवेश दिया जाता है। यदि 3 μF पर आवेश Q1 तथा 5 μF पर Q2 हो तो \( \frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}\) का मान क्या होगा ?
उत्तर:
\( \frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}=\frac{\mathrm{C}_1}{\mathrm{C}_2}=\frac{3}{5}\)

प्रश्न 44.
एक संधारित्र की प्लेटों के बीच रखे पदार्थ का परावैद्युतांक 5 है और इसकी धारिता C है। यदि इसको परावैद्युतांक 20 वाले पदार्थ से प्रतिस्थापित कर दिया जाये तो संधारित्र की नई धारिता क्या होगी ?
उत्तर:
संधारित्र की नई धारिता का मान पहले वाली धारिता का चार गुना होगा।

प्रश्न 45.
नीचे दिखाये गये परिपथ में A, बिन्दु पर विभव 100 वोल्ट है। बिन्दु B पर विभव होगा-
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उत्तर:
बिन्दु B पर विभव 50 वोल्ट होगा।

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प्रश्न 46.
तीन संधारित्र, परिपथ चित्र में दिखाये अनुसार व्यवस्थित हैं। बिन्दु A व B के मध्य कुल धारिता 3 μF है, तो X संधारित्र की धारिता का मान होगा-
उत्तर:
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प्रश्न 47.
दिये गये परिपथ चित्र में A व B के बीच तुल्यधारिता ज्ञात कीजिए।
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इसलिये A तथा B के बीच में तुल्यधारिता = 1+1=2pF उत्तर

प्रश्न 48.
एक आवेशित संधारित्र की प्लेटों को एक-दूसरे से दूर हटाने से प्लेटों के बीच विभवान्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्लेटों के बीच में विभवान्तर बढ़ेगा।

प्रश्न 49.
क्या समान आयतन के दो चालकों के बीच विभवान्तर हो सकता है, जबकि दोनों पर समान धनावेश है ?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि समान आयतन के दो चालकों का आकार भिन्न हो सकता है, जिसके कारण धारिता भिन्न होने के कारण विभव भिन्न-भिन्न होंगे अर्थात् उनके बीच विभवान्तर होगा ।

प्रश्न 50.
एक ग्राफ खींचिये जो धारिता के संधारित्र को दिये गये आवेश Q तथा उसके विभवान्तर V के बीच सम्बन्ध बताता हो।
उत्तर:
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प्रश्न 51.
समविभव पृष्ठ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है। समविभव पृष्ठ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर का मान शून्य होता है अतः समविभव पृष्ठ के किसी एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक किसी आवेश को ले जाने में किया गया कार्य शून्य के बराबर होता है किन्तु किया गया कार्य शून्य तभी होता है जब आवेश को विद्युत क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में ले जाया जाता है। अतः समविभव पृष्ठ विद्युत क्षेत्र के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत् होता है।

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प्रश्न 52.
4 × 10-9C आवेश के कारण इससे 9 × 10-2 मी. दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर विभव परिकलित कीजिए ।
हल- दिया है-
q = 4 × 10-9 C
r = 9 × 10-2 मी.
हम जानते हैं
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प्रश्न 53.
4 μF धारिता का मान कितना होगा यदि समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के मध्य 2 परावैद्युतांक का परावैद्युत पूर्णतः भर दिया जाए?
हल – जब प्लेटों के बीच सम्पूर्ण स्थान में ∈r परावैद्युतांक का माध्यम भरा हुआ हो, तब C = C0r होता है।
इसलिये C = 4 × 2 = 8 μF

प्रश्न 54.
किसी माध्यम के परावैद्युतांक की परिभाषा लिखिये। इसका एस.आई. (S.I.) मात्रक क्या है ?
उत्तर:
हम जानते हैं
C = C0r
या ∈r = \(\frac{C}{C_0}\)
अतः किसी माध्यम के परावैद्युतांक का मान, परावैद्युत पदार्थ से पूर्णतया भरी समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का मान C, हवा या निर्वात धारिता C के अनुपात के बराबर होता है। इसका कोई भी मात्रक नहीं होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक बिन्दु आवेश ‘q’ बिन्दु 0 पर चित्र में दिखाये अनुसार रखा है। क्या (VA – VB) धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य होगा यदि q (i) धनात्मक है (ii) ऋणात्मक ‘
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होगी इसलिए VA – VB का चिन्ह q के चिन्ह पर निर्भर करेगा ।
(∵ 4π∈0 = नियतांक)
अतः (i) q के धनात्मक होने पर (VA – VB) धनात्मक होगा।
(ii) q के ऋणात्मक होने पर (A – VB) ऋणात्मक होगा।

प्रश्न 2.
एक लघु वैद्युत द्विध्रुव के कारण अत्यधिक दूरी पर उत्पन्न वैद्युत विभव की दूरी पर निर्भरता बताइए, जबकि प्रेक्षण बिन्दु
(i) अक्षीय स्थिति में हो, तथा
(ii) निरक्षीय स्थिति में हो।
उत्तर:
(i) अक्षीय स्थिति में विभव (V) = \( \frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{p}{r^2}\right)\)
अतः स्पष्ट है V ∝ \(\frac{1}{r^2}\)
(ii) निरक्षीय स्थिति में V = 0, अतः यह दूरी पर निर्भर नहीं करता है। अर्थात् इस स्थिति में प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य होता है।

प्रश्न 3.
समविभव पृष्ठ की परिभाषा दीजिए। इसकी विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर:
परिभाषा – किसी वैद्युत क्षेत्र में वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिन्दु का विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
विशेषताएँ – (i) इसके किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर शून्य होता है।
(ii) इसके किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच किसी आवेश को ले जाने में कोई कार्य नहीं करना पड़ता।
(iii) वैद्युत क्षेत्र सदैव समविभव पृष्ठ के लम्बवत् रहता है।

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प्रश्न 4.
वैद्युत विभव तथा वैद्युत स्थितिज ऊर्जा में भेद स्पष्ट कीजिए तथा इनके बीच सम्बन्ध बताइए ।
उत्तर:
वैद्युत विभव एकांक धन आवेश को बिना त्वरण के अनन्त से लाने में किया गया कार्य है जबकि वैद्युत स्थितिज ऊर्जा दिये गये आवेशों को अनन्त से उनकी स्थिति तक लाने में किया गया कार्य होती है।
वैद्युत विभव V = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{\mathrm{q}_1}{\mathrm{r}}\right)\) तथा U = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{q_1 q_2}{r}\right)\)
जहाँ प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं। उपर्युक्त व्यंजकों से स्पष्ट है कि
U = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{q_1}{\mathrm{r}}\right)\) . q2
U = q2 . V
अतः q1 तथा q2आवेशों (जो परस्पर 1 दूरी पर स्थित ) बने निकाय की स्थितिज ऊर्जा
U = आवेश q2 x
(आवेश q1 के कारण q2 की स्थिति में विभव)

प्रश्न 5.
किसी बिन्दु आवेश से दूरी में परिवर्तन के संगत होने वाले विभव परिवर्तन दर्शाने वाला ग्राफ बनाइए चित्र में प्रदर्शित आवेश निकाय के लिए सिद्ध कीजिए कि बिन्दुओं A व B के मध्य विभवान्तर
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प्रश्न 6.
इस सत्य की भौतिक व्याख्या कीजिए कि धन आवेश युग्म की स्थितिज ऊर्जा धनात्मक होती है।
उत्तर:
धन आवेश युग्म के दो आवेश आपस में प्रतिकर्षित करेंगे और त्वरित गति से एक-दूसरे से दूर हो जायेंगे जब तक उनके बीच की दूरी अनन्त नहीं हो जाये। उन आवेशों में गति उनके अन्दर स्थितिज ऊर्जा के कारण ही सम्भव है। इसलिए धन आवेश युग्म की स्थितिज ऊर्जा धनात्मक होती है।

प्रश्न 7.
ध्रुवण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
आयतित विद्युत क्षेत्र में परावैद्युत में परमाणुओं को खींचकर आवेशों को पृथक करने के प्रक्रम को ध्रुवण कहते हैं। परमाणुओं का खिंचाव तब तक चलता है जब तक कि आवेशों पर विद्युत क्षेत्र द्वारा आयोजित बल प्रत्यानयन बल के तुल्य नहीं हो जाता। इस तनन के कारण नाभिक का धनात्मक गुरुत्व केन्द्र ऋणात्मक गुरुत्व केन्द्र, जो इलेक्ट्रॉनों के कारण बनता है, एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और इस प्रकार परमाणु द्विध्रुव आघूर्ण प्राप्त कर लेते हैं। अर्थात् किसी पदार्थ का प्रति एकांक आयतन द्विध्रुव आघूर्ण उसका ध्रुवण कहलाता है तथा इसे \(\vec{p}\) द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। रैखिक समदैशिक परावैद्युतों के लिए
\(\overrightarrow{\mathrm{p}}=\chi_0 \mathrm{E}\)
यहाँ Xo परावैद्युतका स्थिर अभिलक्षण है जिसे परावैद्युत माध्यम की वैद्युत प्रवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 8.
एक सीधी रेखा में समान दूरियों पर तीन आवेश q, Q तथा – q स्थित हैं। यदि तीनों आवेशों के निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा शून्य हो तो Q : q अनुपात का मान कितना होगा?
उत्तर:
निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा का मान होगा-
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प्रश्न 9.
तीन बिन्दु आवेशों से निर्मित किसी तंत्र की स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
तीन आवेशों q1, q2 तथा q3 से निर्मित तंत्र को सामने चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इस तंत्र की कुल स्थितिज ऊर्जा
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प्रश्न 10.
एक गोलाकार चालक कोश की त्रिज्या R है व उस पर आवेश Q है। गोले के केन्द्र से (2R) दूरी पर विभव की तुलना \(\frac{\mathbf{R}}{\mathbf{2}}\) दूरी पर विभव से कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि बाह्य बिन्दुओं के लिए आवेशित चालक कोश इस तरह से व्यवहार करता है जैसे उसका आवेश उसके केन्द्र पर स्थित हो अतः केन्द्र से (2R) दूरी पर विभव का मान माना V1 है।
अतः V1 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{Q}{2 R}\) ………..(1)
गोलीय कोश के अन्दर विभव नियत होता है तथा वह उसके पृष्ठ पर विभव के तुल्य होता है। अतः केन्द्र से R/2 दूरी पर विभव का मान माना (V2) है।
V2 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{Q}{R}\) …………(2)
अतः \(\frac{V_1}{V_2}\) = \(\frac{1}{2}\)

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प्रश्न 11.
किसी द्विध्रुव की विद्युत क्षेत्र में स्थितिज ऊर्जा के लिए सूत्र लिखिए तथा इनके न्यूनतम व अधिकतम मान ज्ञात कीजिए।
हल-विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में क्षेत्र के लम्बव्त् द्विध्रुव की स्थिति θ = 90° को निर्देश स्थिति मानते हुए अन्य स्थिति पर स्थितिज ऊर्जा का मान
U = \(-\overrightarrow{\mathrm{P}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{E}}\) = – PE cos θ
θ = 0, अर्थात् क्षेत्र के समान्तर स्थिति में
U = Umin = – PE
θ = π, अर्थात् क्षेत्र के विरुद्ध दिशा में
U = Umax = + PE
∵ cos π = -1

प्रश्न 12.
अधुवी व ध्रुवी परमाणुओं या अणुओं में अन्तर उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर:
अधुवी परमाणुओं या अणुओं में ऋण व धन आवेशों के वितरण केन्द्र सम्पाती होते हैं, जिससे द्विध्रुव आघूर्ण शून्य रहता है। ध्रुवी अणुओं में इन आवेशों के वितरण केन्द्रों के मध्य अन्तराल होता है और अणु का स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण होता है।
N2, CH4, OH2, O2 आदि अध्रुवी हैं जबकि H2O, NH3 HCI आदि ध्रुवी अणु हैं।

प्रश्न 13.
धुवी तथा अधुवी परावैद्युत में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
ध्रुवी तथा अधुवी परावैद्युत में अन्तर

ध्रुवी परावैद्युतअधुवी परावैद्युत
1. इनके अणु बाह्य वैद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में भी नैट विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण रखते हैं।इनके अणुओं में कोई स्थायी वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण नहीं होता। बाह्य वैद्युत क्षेत्र में रखे जाने पर ध्रुवण अवस्था में यह आघूर्ण उत्पन्न होता है।
2. इनके अणुओं की रचना असममित होती है। उदाहरणार्थ- NH3इनके अणुओं की रचना सममित होती है। उदाहरणार्थ- O2

प्रश्न 14.
संधारित्र का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर:
आवेशित चालक का विभव उसके समीप एक अन्य भू- सम्पर्कित चालक को रखकर कम किया जा सकता है इस प्रकार चालक की आवेश संग्रहित करने की क्षमता जिसे हम धारिता कहते हैं, बढ़ जाती है। ऐसे समायोजन को संधारित्र कहते हैं।

प्रश्न 15.
संधारित्र की धारिता पर परावैद्युत माध्यम का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
परावैद्युत माध्यम की उपस्थिति में धारिता के मान में वृद्धि हो जाती है लेकिन यह वृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि प्लेटों के मध्य का भाग परावैद्युत पदार्थ से पूर्णतः आंशिक या विभिन्न परतों के रूप में किस प्रकार भरा हुआ है।

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प्रश्न 16.
क्या एक फैरड धारिता का समान्तर पट्ट संधारित्र आपकी आलमारी में रखना सम्भव है?
हल-चूँकि चालक की धारिता C = 4π∈0R होती है, इसलिए इसकी त्रिज्या का मान
R = \(\frac{C}{4 \pi \epsilon_0}\) = 9 × 109 मीटर/फैरड × 1 फैरड
= 9 × 109 मीटर = 9 × 106 किमी.
अतः यह त्रिज्या बहुत बड़ी है। अर्थात् 1 फैरड धारिता का गोलाकार चालक बनाना सम्भव नहीं है, जिसको अलमारी में रखना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 17.
क्या 1 सेमी. त्रिज्या का धात्वीय गोला 1 कूलॉम आवेश ग्रहण कर सकता है?
हल – R = 1 सेमी = 1 × 10-2 मीटर त्रिज्या के गोले को Q = एक कूलॉम आवेश देने पर इसकी सतह पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E = \( \frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{Q}{R}\right)=9 \times 10^9 \times\left(\frac{1}{10^{-2}}\right)\)
= 9 × 1011 न्यूटन/कूलॉम
= 9 × 1011 वोल्ट/मीटर
यह चालक की वैद्युत सामर्थ्य होगी, लेकिन वायु की परावैद्युत सामर्थ्य 3 × 106 वोल्ट / मीटर होती है इसलिए चालक के चारों ओर की निकटतम वायु आयनीकृत हो जायेगी, जिससे कि गोले के आवेश का वायु में क्षरण होने लगेगा अतः कहा जा सकता है कि एक सेमी. त्रिज्या का गोला एक कूलॉम आवेश ग्रहण नहीं कर सकता है।

प्रश्न 18.
A और B दो समान त्रिज्या के चालक गोले हैं, जिसमें A गोला ठोस है और B खोखला है। दोनों को समान विभव तक आवेशित किया जाता है। दोनों गोलों पर आवेशों में क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर:
गोला चाहे ठोस हो अथवा खोखला हो, आवेश उसके बाहरी पृष्ठ पर रहता है। चूँकि गोलाकार चालक की धारिता उसकी त्रिज्या के अनुक्रमानुपाती होती है। यहाँ पर दोनों गोलों की त्रिज्या समान है। अतः दोनों की धारितायें भी समान होंगी। अतः CA = CB = C माना दोनों गोलों पर समान विभव (माना V तक) आवेशित किया गया है।
अर्थात् VA = VB = V, अतः इनका आवेश क्रमश: QA= CAVA = CV, QB = CBVB = CV
∴ QA : QB = 1 : 1 अर्थात् दोनों पर आवेश समान होगा।

प्रश्न 19.
समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों के बीच एक धातु की पन्नी (foil) रखने पर उसकी धारिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
संधारित्र की प्लेटों के बीच वायु होने पर धारिता C0 = \( \frac{\epsilon_0 A}{\mathrm{~d}}\)
इसकी प्लेटों के बीच धातु की पन्नी रखने पर (चित्र) यह संधारित्र दो समान्तर पट्ट संधारित्र के श्रेणी संयोजन के तुल्य होगा, जिनमें प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A तथा प्लेटों के बीच की दूरी = \(\frac{\mathrm{d}}{2}\)
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प्रश्न 20.
संधारित्रों के समान्तर संयोजन व श्रेणी संयोजन में अन्तर लिखिये।
उत्तर:
(1) संधारित्रों का ऐसा संयोजन जिसमें प्रत्येक संधारित्र पर विभवान्तर का मान एकसमान हो, उसे समान्तर संयोजन कहते हैं। संधारित्रों का ऐसा संयोजन, जिसमें प्रत्येक संधारित्र पर आवेश का परिमाण एकसमान रहता है उसे श्रेणी संयोजन कहते हैं।

(2) संधारित्रों को समान्तर क्रम में संयोजित करने पर संयोजन की तुल्यधारिता, प्रत्येक संधारित्र की धारिता के योग के बराबर होती है। श्रेणी संयोजन में परिपथ की तुल्यधारिता का व्युत्क्रम, इस संयोजन में प्रयुक्त प्रत्येक संधारित्र की
धारिता के व्युत्क्रम के योग के बराबर होता है। श्रेणी संयोजन में प्राप्त तुल्यधारिता का मान किसी भी धारिता के मान से भी कम होता है।

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प्रश्न 21.
एक गोलीय चालक पर आवेश की मात्रा तीन गुनी करने पर उसकी धारिता में कितने प्रतिशत वृद्धि होगी ?
उत्तर:
चालक पर आवेश में परिवर्तन करने पर उसके विभव में उसी अनुपात में परिवर्तन हो जाता है अतः आवेश व विभव वृद्धि का अनुपात स्थिर रहता है। इसलिए चालक की धारिता के मान में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 22.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच दो परावैद्युत गुटके (जिनके परावैद्युतांक क्रमश: K1 तथा K2 हैं) चित्र में दर्शाये अनुसार भरे हुए हैं। संधारित्र की धारिता क्या होगी?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 22

प्रश्न 23.
एक समान्तर पट्ट संधारित्र एक दिष्टधारा स्रोत से v विभवान्तर तक आवेशित किया गया है, जबकि प्लेटों के बीच वायु है। संधारित्र को बैटरी से अलग किये बिना वायु के स्थान पर K परावैद्युतांक का परावैद्युत माध्यम भर दिया गया है। कारण सहित बताइए कि निम्नलिखित में से क्या परिवर्तन होगा? उत्तरों का स्पष्टीकरण भी दो ।
(i) विभवान्तर
(ii) प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र
(iii) धारिता
(iv) आवेश
(v) ऊर्जा
उत्तर:
(i) चूँकि यहाँ पर संधारित्र को बैटरी से जोड़ा गया है, अतः वैद्युत विभवान्तर V अपरिवर्तित रहेगा।
(ii) चूँकि विभवान्तर और प्लेटों के मध्य की दूरी दोनों अपरिवर्तित हैं, अतः वैद्युत क्षेत्र \(E=\frac{V}{d} \) अपरिवर्तित रहेगा।
(iii) धारिता बढ़ जायेगी : ∵ C = KC0
(iv) चूँकि V नियत है और धारिता K गुनी हो जाती है, अतः आवेश Q भी K गुना हो जायेगा।
(v) प्रारम्भिक ऊर्जा \(\mathrm{U}_0=\frac{1}{2} \mathrm{C}_0 \mathrm{~V}_0^2\) और बाद में ऊर्जा U = \(\frac{1}{2} \mathrm{KC}_0 \mathrm{~V}_0^2=\mathrm{KU}_0\) अर्थात् ऊर्जा भी बढ़कर K गुनी हो जायेगी।

प्रश्न 24.
C धारिता के n संधारित्रों को श्रेणीक्रम में संयोजित करने पर तुल्यधारिता Cs तथा समान्तर क्रम में संयोजित करने पर तुल्यधारिता Cp है। सिद्ध कीजिए कि
उत्तर:
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प्रश्न 25.
आवेशों के निकाय के कारण विद्युत विभव के मान की गणना कीजिए ।
उत्तर:
किन्हीं आवेशों q1, q2, q3 , …….. qn के ऐसे निकाय पर विचार करते हैं, जिनके किसी मूल बिन्दु के सापेक्ष स्थिति सदिश क्रमशः
\(\overrightarrow{\mathrm{r}_1}, \overrightarrow{\mathrm{r}_2}, \overrightarrow{\mathrm{r}_3} \ldots \ldots, \overrightarrow{\mathrm{r}_{\mathrm{n}}}\)
बिन्दु P पर आवेश q1 के कारण विभव
V1 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{\mathrm{q}_1}{r_{1 \mathrm{P}}}\)
यहाँ r1p बिन्दु p तथा आवेश q1 के बीच की दूरी है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 24
इसी प्रकार बिन्दु P पर आवेश q2 के कारण विभव V2 तथा आवेश q3 के कारण विभव V3 को भी व्यक्त कर सकते हैं-
V2 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{q_2}{r_{2 P}}\)
V3 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{q_3}{r_{3 \mathrm{P}}}\)
यहाँ r2p तथा r3p बिन्दु p की क्रमशः q2 तथा q3 से दूरियाँ हैं। इसी प्रकार हम अन्य आवेशों के कारण बिन्दु p पर विभव व्यक्त कर सकते हैं। अध्यारोपण सिद्धान्त के अनुसार, समस्त आवेश विन्यास के कारण बिन्दु P पर विभव V विन्यास के व्यष्टिगत आवेशों के विभवों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है-
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प्रश्न 26.
समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? बिन्दु आवेश के लिए समविभव पृष्ठ बनाइए और इनके गुण लिखिए ।
उत्तर:
चित्र में एक बिन्दु आवेश Q, O पर रखा है। O को केन्द्र मानकर r त्रिज्या का गोला बनायें तो गोले की धरातल का प्रत्येक बिन्दु O से समान दूरी पर होगा अतः इस धरातल के प्रत्येक बिन्दु पर विभव का मान \(\frac{\mathrm{KQ}}{\mathrm{r}}\) होगा। इस प्रकार के पृष्ठ को समविभव पृष्ठ कहते हैं।
“विद्युत क्षेत्र में ऐसे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।” समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होने के कारण किन्हीं भी दो बिन्दुओं के मध्य जो पृष्ठ पर स्थित हैं, विभवान्तर शून्य होता है।

अतः गोले के पृष्ठ पर किसी भी मान के आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में सम्पन्न कार्य शून्य होगा। इस पृष्ठ पर बल रेखायें सदैव पृष्ठ के लम्बवत् होंगी। चित्र में S, S1, S2 बिन्दु आवेश Q के लिए समविभव पृष्ठ हैं। ये संकेन्द्रीय गोले हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 26
यदि दो समान्तर प्लेटों के मध्य बैटरी जोड़कर निश्चित विभवान्तर स्थापित किया जाये तो प्लेटों के मध्य एकसमान विद्युत क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस विद्युत क्षेत्र से समविभव पृष्ठ प्लेटों के समान्तर समतल पृष्ठ होते हैं। जैसा चित्र (b) में दिखाया गया है।
विभवान्तर की परिभाषा के अनुसार एकांक मान के परीक्षण आवेश को एक बिन्दु A से दूसरे बिन्दु B तक विस्थापित करने में किया गया कार्य विभवान्तर के तुल्य होता है।
अर्थात् VB – VA = WAB
यदि बिन्दु A और B एक समविभव तल पर स्थित हैं तो
VB = VA ∴ WAB = 0
अर्थात् समविभव तल पर किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरे तक विस्थापन में कार्य का मान शून्य होता है। रेखीय आवेश के लिए समविभव पृष्ठ बेलनाकार पृष्ठ होता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 27
समविभव पृष्ठ के गुण-

  1. पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव एकसमान होता है।
  2. समविभव पृष्ठ पर किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक विस्थापन में किया गया कार्य का मान शून्य होता है।
  3. दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को कभी भी नहीं काटते हैं।
  4. विद्युत बल रेखायें पृष्ठ के लम्बवत् होती हैं।
  5. किसी भी चाल की सतह हमेशा समविभव पृष्ठ होती है क्योंकि सतह के सभी बिन्दु एक-दूसरे से विद्युत सम्पर्क में होते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 27.
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा वैद्युत विभव में सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।
उत्तर:
(Relation between Intensity of Electric field \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) and potential V)
माना q0 परीक्षण आवेश एक समविभव पृष्ठ से dr दूरी पर स्थित दूसरी समविभव पृष्ठ पर विस्थापित होता है। परीक्षण आवेश पर क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य
W = – q0dV ……………(1)
जहाँ dV = समविभव पृष्ठों के मध्य विभवान्तर है।
इसी कार्य को निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त कर सकते हैं-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 28
यहाँ पर आंशिक अवकलन इस बात को दर्शाता है कि समीकरण (3) में V का परिवर्तन उस दिशा में है जिसमें क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) का घटक स्थित है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 29

प्रश्न 28.
तीन बिन्दु आवेशों से निर्मित किसी तंत्र की विद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अनुच्छेद 2.7 में उदाहरणार्थ देखें ।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 61

प्रश्न 29.
बाह्य क्षेत्र में एकल आवेश की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
एकल आवेश की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy of a single charge) आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के लिए हम सूत्र स्थापित कर चुके हैं, जिसमें वैद्युत क्षेत्र के स्रोत अर्थात् आवेशों की स्थितियों को भी ध्यान में रखा गया था। अब यहाँ पर हमें बाहरी विद्युत क्षेत्र में किसी आवेश की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात करनी है। यहाँ विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) उत्पन्न करने वाले आवेश अज्ञात हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 30
बाहरी विद्युत क्षेत्र ([/latex]\overrightarrow{\mathrm{E}}[/latex]) और किसी बिन्दु पर विद्युत विभव (V) दोनों प्रेक्षण बिन्दु की स्थिति बदलने पर बदल सकते हैं। यदि किसी बिन्दु P पर विद्युत विभव \(V(\vec{r})\) है, जहाँ \(\vec{r}\) बिन्दु P की स्थिति सदिश है, तो विभव की परिभाषा से एकांक आवेश को अनन्त से P बिन्दु तक लाने में किया गया कार्य V जूल होगा। अतः किसी आवेश q को अनन्त से P बिन्दु तक लाने में किया गया कार्य W = q. \(V(\vec{r})\) यही कार्य आवेश में उसकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगा।
अतः आवेश q की किसी बाहरी क्षेत्र /latex]\overrightarrow{\mathrm{E}}[/latex] में बिन्दु \(p(\vec{r})\) पर वैद्युत स्थितिज ऊर्जा = q . \(V(\vec{r})\)
यही कार्य आवेश में उसकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगा।
अतः आवेश q की किसी बाहरी क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में बिन्दु \(\mathrm{P}(\overrightarrow{\mathrm{r}})\) पर वैद्युत स्थितिज ऊर्जा = q. \(\mathrm{q} \cdot \mathrm{V}(\overrightarrow{\mathrm{r}})\)

प्रश्न 30.
किसी बाह्य क्षेत्र में दो आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। लिखिए।
उत्तर:
किसी बाह्य क्षेत्र में दो आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy of a system of two charges in an external field)
माना किसी बाह्य क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में दो आवेश q1 तथा q2 क्रमशः \(\overrightarrow{\mathrm{r}_1}\)
तथा \(\overrightarrow{\mathrm{r}_2}\)
अब q1 आवेश को अनन्त से स्थिति \(\vec{r}_1 \) तक लाने में किया गया कार्य
W1 = q1V(\(\vec{r}_1 \)) …………..(1)
यहाँ पर V(\(\vec{r}_1 \)), \(\vec{r}_1 \) दूरी पर स्थित बिन्दु पर विभव का मान है।
जब q2 आवेश को अनन्त से स्थिति \(\overrightarrow{\mathrm{r}_2}\) तक लाया जाता है तब किया गया कार्य W2 बाह्य क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{E}}\) के विरुद्ध किया गया कार्य +q1 के कारण क्षेत्र के विरुद्ध किंया गया कार्य
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 31

प्रश्न 31.
संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक
उत्तर:
संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक (Factors effecting the Capacity of a Conductor)
किसी संधारित्र विशेष के लिए उसकी धारिता नियत होती है तथा यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है-

(i) प्लेटों (चालकों) के क्षेत्रफल पर-प्रयोगों के आधार पर यह देखा गया है कि किसी संधारित्र की धारिता उसकी प्लेटों के प्रभावी क्षेत्रफल A के अनुक्रमानुपाती होती है।
अर्थात् C ∝ A

(ii) प्लेटों के बीच की दूरी पर-यदि संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी d को बढ़ाया जाता है तो संधारित्र की धारिता का मान घट जाता है। चूँकि यह प्लेटों के बीच की दूरी d के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

(iii) प्लेटों के बीच के माध्यम पर-यह देखा गया है कि यदि संधारित्र की प्लेटों के मध्य का स्थान किसी कुचालक पदार्थ जैसे पैराफिन, मोम, तेल, अभ्रक आदि से भर दिया जाये तो संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है, यदि प्लेटों के बीच की दूरी को स्थिर रखा जाये। अतः संधारित्र की धारिता का मान प्लेटों के बीच स्थित परावैद्युत माध्यम के परावैद्युतांक K के अनुक्रमानुपाती होता है। यदि संधारित्र की प्लेटों के मध्य वायु होने पर संधारित्र की धारिता C हो तो प्लेटों के मध्य K परावैद्युतांक का माध्यम होने पर संधारित्र की विद्युत धारिता KC हो जाती है। अर्थात् धारिता K गुनी बढ़ जाती है।

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प्रश्न 32.
संधारित्रों के उपयोग को लिखिए ।
उत्तर:
(1) आवेश के संचायक के रूप में (As a charge Accumulator):
संधारित्र का मुख्य कार्य आवेश को संचित करना होता है। यदि हम किसी परिपथ में क्षणिक (Instantaneous) परन्तु शक्तिशाली वैद्युत धारा प्रवाहित करना चाहें तो परिपथ के सिरे को एक आवेशित संधारित्र से सम्बन्धित कर देते हैं। स्पंदित वैद्युत चुम्बक जो क्षणिक परन्तु तीव्र चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त किये जाते हैं, आवेशित संधारित्रों से ही विद्युत-धारा प्राप्त करते हैं।

(2) विद्युत स्थितिज ऊर्जा संचित करने के लिए (For storing Electrostatic P.E):
संधारित्र द्वारा ऊर्जा संग्रहित करने की दर धीमी होती है जबकि ऊर्जा विसर्जन की प्रक्रिया अतिशीघ्र होती है। इसी गुण के आधार पर न्यून समय में फ्लश से (फलश) परिपथ में संधारित्र का उपयोग करके प्रकाश प्राप्त कर कैमरे में चित्र लिये जाते हैं।

(3) रेडियो व टीवी में (In Radio and T.V.):
रेडियो व टीवी की संचार प्रणाली में प्रयुक्त दो प्रमुख परिपथों (ट्रान्समीटर व रिसीवर) में संधारित्रों का उपयोग किया जाता है। उपयुक्त धारिता मान के संधारित्रों का उपयोग कर इन परिपथों में विद्युत चुम्बकीय दोलन उत्पन्न किये जाते हैं। दोलनों से उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंगों का उपयोग, संकेतों के प्रसारण में किया जाता है। संधारित्रों के उपयोगों से इच्छित आवृत्ति के रेडियो या टीवी संकेतों को प्राप्त किया जा सकता है।

(4) वैज्ञानिक अध्ययन में (In Scientific Study):
वैज्ञानिक अध्ययन में संधारित्र अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुए हैं। संधारित्र में भिन्नभिन्न आकार की प्लेटों का प्रयोग करके उनके मध्य भिन्न-भिन्न संरूपण (Configuration) के वैद्युत-क्षेत्र स्थापित किये जाते हैं। इन क्षेत्रों में विभिन्न परावैद्युत पदार्थ रखकर उनके व्यवहार के विषय में अध्ययन किया जाता है।

(5) चिकित्सा क्षेत्र में (In Medicine):
हृदय रोगी में छाती (Chest) पर विद्युत आघात (Electric shock) देकर हृदय की धड़कन को नियंत्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया में जिस उपकरण का प्रयोग किया जाता है, उसे डेफिब्रीलेटर (defibrillator) कहते हैं। इसमें कई F कोटि की संधारित्र होती है, जिसे कई हजार वोल्ट पर आवेशित किया जाता है। संधारित्र में संचित ऊर्जा का उपयोग छाती पर विद्युत आघात देकर हृदय रोगी की हृदय मांसपेशियों की क्रियाप्रणाली को व्यवस्थित करते हैं, जो हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने में सहायक होती है।

(6) विद्युत फिल्टरों में (In Electric Filters):
शक्तिप्रदाय स्रोतों में प्रयुक्त दिष्टकारी परिपथों से प्राप्त वोल्टता संकेत को smooth करने के लिए संधारित्रों का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त श्रव्य यंत्रों में प्रयुक्त शक्ति प्रवर्धकों का युग्मन करने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है।

(7) कम्प्यूटर में (In Computers):
कम्प्यूटर के कुंजी पटल (Key Board) की कार्यप्रणाली धारिता के सिद्धान्त पर आधारित होती है। कुंजी पटल में कुंजी प्लैन्जर (Plunger) के एक सिरे पर स्थितं होती है। प्लैन्जर का दूसरा सिरा गतिक धातु की प्लेट से जुड़ा होता है। गतिक प्लेट को एक अन्य स्थिर प्लेट से परावैद्युत माध्यम के द्वारा अलग रखा जाता है, जिससे एक परिवर्तित संधारित्र की संरचना होती है। कुंजी को दबाने से प्लेटों के मध्य की दूरी कम होती है, जिससे धारिता के मान में वृद्धि होती है। इस परिवर्तन को कम्प्यूटर के इलेक्ट्रॉनिक परिपथों द्वारा संसूचित कर लिया जाता है। सूक्ष्म संधारित्रों का उपयोग कम्य्यूटरों में मैमोरी संग्रहित करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 33.
10 संधारित्र प्रत्येक की धारिता 10 μF है, को श्रेणी संयोजन तत्पश्चात् समान्तर संयोजन में जोड़ने पर तुल्य धारिताओं का गुणनफल लिखिए।
हल – n संधारित्रों के श्रेणी संयोजन की तुल्यधारिता
\(\frac{1}{\mathrm{C}_{\mathrm{S}}}=\frac{1}{\mathrm{C}_{\mathrm{I}}}+\frac{1}{\mathrm{C}_2}+\frac{1}{\mathrm{C}_3}+\ldots \ldots \cdot \frac{1}{\mathrm{C}_{\mathrm{n}}}\) होगी
यहाँ पर 10 संधारित्र जिनकी प्रत्येक की धारिता 10 μF है। इन सभी को श्रेणी संयोजन में जोड़ा गया है। इसलिये तुल्यधारिता का मान 1 μF होगा।
इन सभी को श्रेणी संयोजन के बाद समान्तर संयोजन में जोड़ा गया है।
समान्तर संयोजन के लिये तुल्यधारिता का सूत्र
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आंकिक प्रश्न-

प्रश्न 1.
(a) आवेश 4 × 10-7C के कारण इससे 9 cm दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर विभव परिकलित कीजिए।
(b) अब, आवेश 2 × 10-9C को अनंत से बिंदु P तक लाने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। क्या उत्तर जिस पथ के अनुदिश आवेश को लाया गया है उस पर निर्भर करता है?
हल-दिया गया है-
(a) Q = 4 × 10-7C
r = 9 cm = 9 × 10-2m.
V = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_o} \frac{Q}{r}\)
मान रखने पर V = \(\frac{9 \times 10^9 \times 4 \times 10^{-7}}{9 \times 10^{-2}}\)
V = 4 × 104 Volt
(b) किया गया कार्य (W) = आवेश (q) × विभवान्तर (V)
W = 2 × 10-9 × 4 × 104
= 8 × 10-5
नहीं, कार्य पथ पर निर्भर नहीं होगा।

प्रश्न 2.
एक वर्ग की प्रत्येक भुजा 90 सेमी. लम्बी है। इसके कोने पर क्रमशः -2,+3,-4 तथा +5 माइक्रो कूलॉम आवेश रखे हैं। वर्ग के केन्द्र पर विद्युत विभव ज्ञात कीजिये।
हल-माना कि 90 सेमी. भुजा वाला वर्ग ABCD है और जिसके शीर्ष A,B,C,D पर क्रमश: -2, 3, -4, +5 माइक्रो कूलॉम मान के आवेश रखे हुए हैं।
यहाँ AC और BD वर्ग के विकर्ण हैं जो O पर काटते हैं जो कि वर्ग का केन्द्र है। वर्ग के केन्द्र O पर विभव V0 = वर्ग के शीर्षों पर रखे प्रत्येक आवेश के कारण उत्पन्न विभवों का बीजगणितीय योग
यहाँ पर (AC)2 = (AB)2 + (BC)2
(AC)2 = (90)2 + (90)2 = 2 × (90)2
∴ AC = 90√2 सेमी.
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प्रश्न 3.
एक बिन्दु आवेश के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा वैद्युत विभव क्रमशः 30 न्यूटन/कूलॉम तथा 15 जूल/कूलॉम है। ज्ञात कीजिए कि
(i) प्रेक्षण बिन्दु से आवेश की दूरी तथा
(ii) आवेश का परिमाण।
हल-दिया है-
E = 30 न्यूटन/कूलॉम
V = 15 जूल/कूलॉम
(i) एक बिन्दु आवेश q के कारण इससे $r$ दूरी पर स्थित प्रेक्षण बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
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प्रश्न 4.
+10 μC एवं -10 μC के दो बिन्दु आवेश वायु में परस्पर 40 cm की दूरी पर रखे हैं।
(a) निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। यह मान लीजिए कि अनन्त पर विद्युत स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।
(b) निकाय के लिए समविभव पृष्ठ खींचिये।
(c) निकाय के दोनों आवेशों को अनन्त तक दूर करने में कितना कार्य करना होगा?
हल-(a) दिया है-
q1 = 10 μC = 10 × 10-6C
q2 = -10 μC = – 10 × 10-6C
r12 = 40 cm = 0. 40 m
दो आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
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(b) अनुच्छेद 2.6 में देखें।
(c) जब दोनों आवेशों को एक-दूसरे से अलग करते हुए अनन्त तक विस्थापित किया जायेगा तो दोनों की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जायेगी अर्थात्
U2 = 0
परन्तु U1 = -2. 25 J
इसलिए दोनों को विस्थापित करने में किया गया कार्य
W = U2 – U1 = 0 – (- 2. 25)
= 2. 25 J

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प्रश्न 5.
किसी बिन्दु P पर वैद्युत विभव V(x, y, z) = 6x -8xy2 -8 y + 6yz – 4z2। मूल बिन्दु पर स्थित 4 कूलॉम बिन्दु आवेश पर वैद्युत बल ज्ञात कीजिए।
हल-हम जानते हैं-
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प्रश्न 6.
10-6 मीटर व्यास तथा 880.5 किलोग्राम/मीटर3 घनत्व वाली एक तेल बूँद 10 मिलीमीटर में पृथक्कृत प्लेटों के मध्य स्थिर रहती है। प्लेटों के मध्य विभवान्तर 36 वोल्ट है। तेल बूँद पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
g = 10 मीटर/सेकण्ड2
हल-दिया है-
घनत्व d0 = 880.5 किग्रा./मी.3
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प्रश्न 7.
तीन सर्वसम (एक-जैसे) संधारित्रों को श्रेणीक्रम में संयोजित करने (जोड़ने) पर उनकी तुल्य (कुल) धारिता 1 μF है। यदि
उन्हें पार्श्वक्रम (समान्तर क्रम) में संयोजित किया (जोड़ा) जाये, तो उनकी कुल धारिता कितनी होगी? यदि दोनों दशाओं (संयोजनों) में संधारित्रों को एक ही स्रोत से जोड़ा जाये तो इन दो प्रकार के संयोजनों में संचित ऊर्जा का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल-माना कि प्रत्येक संधारित्र की धारिता C μF है। इसलिए श्रेणीक्रम में संयोजन की स्थिति में
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प्रश्न 8.
संधारित्र C की धारिता की गणना कीजिए यदि A व B के मध्य संयोजन की तुल्यधारिता 15 μF है।
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प्रश्न 9.
चित्र में दर्शाये गये संयोजन की बिन्दु P व N के मध्य तुल्यधारिता ज्ञात कीजिए।.
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हल-यहाँ 10 μF व 20 μF मान के संधारित्र समान्तर क्रम में जुड़े हुए हैं, अतः इनकी तुल्यधारिता जुड़े हुए हैं, अतः इनकी तुल्यधारिता
C = (C1 + C2) से C = (10 + 20) = 30 μF होगी।
अतः इन संधारित्रों को बिन्दु P व N के मध्य अन्य 30 μF मान के एक संधारित्र से प्रतिस्थापित कर सकते हैं। यह प्रतिस्थापित संधारित्र; पहले से ही लगे हुए 30 μF संधारित्र के श्रेणीक्रम में है जैसा आगे के चित्र में दर्शाया गया है।
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प्रश्न 10.
चित्र में दर्शाये गये संयोजन की बिन्दु P व N के मध्य तुल्यधारिता का मान ज्ञात कीजिए जबकि (अ) स्विच S खुला है, (ब) स्विच S बन्द है। यहाँ C1 = 1 µF व C2 = 2 µF हैं।
हल-(अ) दिये गये संयोजन में बिन्दु a व b के मध्य स्विच S खुला होने पर बिन्दु P व a के मध्य जुड़ी संधारित्र Cp बिन्दु a व N के मध्य जुड़ी संधारित्र C1 के साथ श्रेणी संयोजन में होगी। इस संयोजन की तुल्यधारिता

इसी प्रकार बिन्दु P व N के मध्य जुड़ी दोनों C2 मान वाली संधारित्र भी श्रेणी संयोजन में हैं। इस संयोजन की तुल्यधारिता
\(\frac{1}{\mathrm{C}^{\prime \prime}}=\frac{1}{\mathrm{C}_2}+\frac{1}{\mathrm{C}_2}=\frac{2}{\mathrm{C}_2}\)
या C” = \(\frac{\mathrm{C}_2}{2}\) = 1 μF
∵ C2 = 2 μF
अब बिन्दु P व N के मध्य संधारित्र C’ तथा C” परस्पर समान्तर संयोजन में हैं अतः तुल्यधारिता
C = \( \frac{1}{2}\) μF + 1 μF = \(\frac{3}{2}\) μF होगी।
(ब) बिन्दु a व b के मध्य स्विच S बन्द (on) होने पर ये बिन्दु समान विभव पर होंगे इसलिए संयोजन के दोनों खण्ड परस्पर श्रेणी क्रम में हो जायेंगे जिनमें प्रत्येक खण्ड की धारिता होगी-
Ct = Ctt = Ct + Ctt = 1 + 2 = 3 μF

प्रश्न 11.
एक समान्तर पट्ट वायु संधारित्र की धारिता 8 μF है। इसकी प्लेटों के बीच की दूरी आध् कर दी जाती है तथा प्लेटों के बीच का स्थान 5 परावैद्युतांक वाले माध्यम से भर दिया जाता है। दूसरी स्थिति में संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
हल-समान्तर पट्ट वायु संधारित्र की धारिता
C = \(\frac{\epsilon_0 A}{\mathrm{~d}}\) = 8 μF (दिया है,)
प्लेटों के बीच की दूरी आधी अर्थात् d/2 करने पर तथा प्लेटों के बीच का स्थान K = 5 परावैद्युतांक वाले माध्यम से भरने पर संधारित्र की धारिता
Cm = \(\mathrm{K}\left(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~d} / 2}\right)=2 \mathrm{~K}\left(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~d}}\right)\)
इसलिए Cm = 2K × C
मान रखने पर Cm = 2 × 5 × 8 μF = 80 μF

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प्रश्न 12.
एक समान्तर पट्ट संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच की दूरी 4 मिमी. है। 3 पराव्द्युतांक वाली 3 मिमी. मोटी एक परावैद्युत पट्टी प्लेटों के बीच प्लेटों के समान्तर रख दी जाती है। प्लेटों के बीच की दूरी इस प्रकार व्यवस्थित की जाती है कि संधारित्र की धारिता प्रारम्भिक धारिता की 2/3 हो जाती है। प्लेटों के बीच नई दूरी क्या है?
हल-दिया गया है-प्रारम्भिक संधारित्र की धारिता का सूत्र,
C = \(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~d}}\)
यदि प्लेटों के बीच परावैद्युत रखने पर, इनके बीच नई दूरी d1 हो तो प्रश्नानुसार, संधारित्र की नई धारिता = \(\left(\frac{2}{3}\right)\) बिना परावैद्युत संधारित्र की प्रारम्भिक धारिता
परावैद्युत पट्टी रखने के उपरान्त धारिता का सूत्र
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प्रश्न 13.
C धारिता वाले अनेक संधारित्र चित्र में दर्शाये अनुसार अनन्त संख्या में संयोजित हैं। बिन्दु A व B के मध्य कुल धारिता का मान ज्ञात कीजिए।
हल-चूँकि श्रेणी अनन्त लम्बाई की है, अतः बिन्दुओं P व a के दाहिनी ओर की श्रेणी की धारिता का मान उतना ही होगा जो श्रेणी के बिन्दुओं A व B के दाहिनी ओर है। यदि श्रेणी की तुल्यधारिता C1 हो तो दिये गये चित्र के संयोजन को नीचे दिये गये चित्र द्वारा प्रतिस्थापित
कर सकते हैं। इस प्रकार A व B के मध्य तुल्यधारिता \(\left[\mathrm{C}+\frac{\mathrm{CC}_1}{\mathrm{C}+\mathrm{C}_1}\right]\)
होगी। परन्तु धारिता का यह मान मूल श्रेणी की तुल्यधारिता C1 के ही बराबर है। अतः
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प्रश्न 14.
एक गोलाकार संधारित्र के गोलों के बीच भरे माध्यम का परावैद्युतांक 7 है। इसके गोलों की त्रिज्यायें क्रमशः 50 सेमी. तथा 60 सेमी. हैं। संधारित्र की धारिता का मान ज्ञात कीजिए।
हल-गोलीय संधारित्र के आन्तरिक गोले की त्रिज्या a = 50 सेमी. = 0.50 मीटर, बाह्य गोले की त्रिज्या b = 60 सेमी. = 0.60 मीटर तथा दोनों गोलों के बीच माध्यम का परावैद्युतांक K = 7 इसलिए गोलीय संधारित्र की धारिता
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प्रश्न 15.
समान्तर पट्ट वायु संधारित्र की धारिता 10 μF है। इस संधारित्र को चित्र के अनुसार दो बराबर भागों में विभाजित करके \(\epsilon_{r_1}=2\) तथा \(\epsilon_{\boldsymbol{r}_2}=4\) परावैद्युतांक वाले माध्यम से भर दिया जाता है। इस निकाय की धारिता का मान ज्ञात कीजिए।
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हल-यहाँ पर प्रत्येक भाग को एक संधारित्र के तुल्य लिया जा सकता है। दोनों संधारित्रों की ऊपर वाली प्लेटें बैटरी के धनाग्र से व नीचे की प्लेटें ऋणाग्र से जुड़ी हैं। अतः कल्पित दोनों संधारित्रों को परस्पर समान्तर संयोजन में जुड़ा मानकर प्रथम संधारित्र की धारिता
C1 = द्वितीय संधारित्र की धारिता C2 = \(\frac{\epsilon_{\mathrm{r}_2} \in_0 \mathbf{A} / 2}{\mathrm{~d}}\) अतः संयोजन की कुल धारिता
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प्रश्न 16.
4 सेमी. व 7 सेमी. के दो चालक गोलों पर आवेश की मात्राएँ क्रमशः 500 माइक्रो कूलॉम और 60 माइक्रो कूलॉम हैं। चालकों को परस्पर जोड़ने पर विद्युत स्थितिज ऊर्जा हानि की गणना कीजिए।
हल-निकाय की कुल प्रारम्भिक विद्युत ऊर्जा
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प्रश्न 17.
दो समान आवेश घनत्व वाले चालकों A तथा B की त्रिज्याएँ क्रमशः R1 व R2 (R1 >R2) हैं। चालकों को नगण्य धारिता के चालक तार से जोड़ा जाता है तो ज्ञात कीजिए-
(अ) आवेश किस चालक से किसकी ओर प्रवाहित होगा?
(ब) आवेश पुनर्वितरण के पश्चात् चालकों पर आवेश का अनुपात क्या होगा?
हल-(अ) यदि आवेश पुनर्वितरण से पूर्व चालकों A व B पर
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समीकरण (iii) से \(\frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}\) का मान रखने पर
यहाँ R1 > R2 है, अतः गोले A पर विभव का मान (V1) गोले B पर विभव के मान (V2) से अधिक होगा। अतः आवेश; उच्चविभव के चालक A से निम्न विभव के चालक B की ओर प्रवाहित होगा।
(ब) आवेश पुनर्वितरण के पश्चात् गोलों पर आवेश की मात्राओं का अनुपात उनकी धारिताओं के अनुपात के तुल्य होगा। अर्थात
\(\frac{Q_1}{Q_2}=\frac{C_1}{C_2}=\frac{4 \pi \epsilon_0 R_1}{4 \pi \epsilon_0 R_2}=\frac{R_1}{R_2}\)

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प्रश्न 18.
एक अनावेशित संधारित्र को बैटरी से जोड़ा जाता है। दर्शाइये कि संधारित्र को आवेशित करने के लिए बैटरी द्वारा प्रयुक्त की गई ऊर्जा का आधा भाग ऊष्मा के रूप में क्षय होता है।
हल-किसी V विद्युत वाहक बल की बैटरी द्वारा C धारिता के संधारित्र को Q आवेश से आवेशित करने के लिए बैटरी द्वारा किये गये कार्य का मान W = QV होगा।
वस्तुतः यह कार्य बैटरी द्वारा संधारित्र को आवेशित करने की प्रक्रिया में खर्च की गई ऊर्जा है। इसमें जो ऊर्जा संधारित्र में संचित ऊर्जा के तुल्य होगी, वह है U = \(\frac{1}{2}\)CV2 = \(\frac{1}{2}\)QV
तथा शेष ऊर्जा = QV – \(\frac{1}{2}\)QV = \(\frac{1}{2}\)QV जो ऊष्मा के रूप में क्षय हो जायेगी। अतः बैटरी द्वारा आवेशन प्रक्रिया में खर्च की गई ऊर्जा का आधा भाग ऊष्मा के ऊर्जा के रूप में क्षय होता है।

प्रश्न 19.
समान धारिता की दो संधारित्र चित्रानुसार (चित्र) एक बैटरी से जुड़ी हुई हैं। स्विच S प्रारम्भ में बन्द अवस्था में है। अब स्विच S को खुला कर संधारित्र की प्लेटों के मध्य ∈r = 3 परावैद्युतांक के पदार्थ को भरा जाता है। परावैद्युत पदार्थ को रखने से पूर्व व उसके पश्चात् संधारित्रों में संग्रहित विद्युत ऊर्जा के मानों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
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हल-प्रारम्भ में स्विच S बन्द होने पर दोनों संधारित्रों के समान्तर क्रम में जुड़े होने के कारण, ये दोनों समान विभव V पर होंगे।
अर्थात् = Ui = \(\frac{1}{2}\)C1V2
= \(\frac{1}{2}\)(C1 + C2) V2 = CV2 ………..(i)
जब स्विच S को खुला रखकर संधारित्र की प्लेटों के मध्य परावैद्युत पदार्थ रखा जाता है तब प्रत्येक संधारित्र की धारिता ∈r गुणा हो जायेगी और चूँकि संधारित्र A अब भी बैटरी से जुड़ा है। अतः इस पर विभवान्तर का मान प्रारम्भिक विभवान्तर के मान V के तुल्य होगा जबकि संधारित्र B पर विभवान्तर का नया मान V’ = [/latex]\frac{\mathrm{V}}{\epsilon_{\mathrm{r}}}[/latex] हो जायेगा एवं आवेश स्थिर रहेगा। अतः इस स्थिति में निकाय की विद्युत ऊर्जा होगी-
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प्रश्न 20.
X एवं Y दो समान्तर प्लेट संधारित्र हैं, जिनकी प्लेटों का क्षेत्रफल एवं उनके बीच की दूरी समान है। X की प्लेटों के मध्य वायु है और Y की प्लेटों के मध्य K = 5 परावैद्युतांक वाला परावैद्युत माध्यम है। (चित्र में)
(a) X एवं Y की प्लेटों के मध्य विभवान्तर की गणना कीजिए।
(b) X एवं Y में संचित वैद्युत स्थितिज ऊर्जाओं का अनुपात क्या है?
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हल-(a) वायु संधारित्र X की धारिता
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प्रश्न 21.
चित्र में दर्शाए अनुसार तीन परिपथों, जिनमें प्रत्येक स्विच S और दो संधारित्र लगे हैं, को प्रारम्भ में आवेशित किया जाता है। स्विच को बन्द करने पर किस परिपथ में बार्यी ओर दिए गए संधारित्र में आवेश
(i) बढ़ेगा,
(ii) घटेगा और
(iii) अपरिवर्तित रहेगा? कारण दीजिए।
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हल-आवेश संरक्षण के नियम से
माना q1 तथा q2 दो आवेश हैं जो कि संधारित्र के बायीं तरफ तथा दायीं तरफ है।
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अतः बायें संधारित्र पर आवेश का मान अपरिवर्तित रहता है।
(b) दूसरे परिपथ के लिये
6Q + 3Q = CV + CV
उभयनिष्ठ विभवान्तर, V = \(\frac{9 \mathrm{Q}}{2 \mathrm{C}}\)
स्विच (S) की बन्द करने के बाद बायें संधारित्र पर संधारित्र का मान
q1 = CV
= C × \(\frac{9 \mathrm{Q}}{2 \mathrm{C}}\) = 4.5 Q
इसलिये परिपथ (b) में बायें संधारित्र पर आवेश का मान घटेगा।
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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 1
की अभिक्रिया की कोटि तथा अणुसंख्यता क्रमशः है-
(अ) 1, 3
(ब) 1, 2
(स) 2, 1
(द) 2, 2
उत्तर:
(ब) 1, 2

2. प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु 100 सेकण्ड है तो इसका वेग स्थिरांक होगा-
(अ) 6.93 × 10-3s
(ब) 6.93 × 10-2s
(स) 0.693 s
(द) 6.93 s
उत्तर:
(अ) 6.93 × 10-3s

3. अभिक्रिया x + y → उत्पाद के लिए अभिक्रिया का वेग = k[x]a [y]b है तो अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) b
(ब) a
(स) a + b
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(स) a + b

4. x तथा y के मध्य अभिक्रिया का वेग 100 गुना हो जाता है जब x की सांद्रता 10 गुना बढ़ा देते हैं तो X ‘संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) 10
(ब) 2
(स) 4
(द) 1
उत्तर:
(ब) 2

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

5. प्रथम कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई है-
(अ) सेकंड2
(ब) मोल लीटर-1 सेकंड-1
(स) सेकंड-1
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(स) सेकंड-1

6. अभिक्रिया के वेग की इकाई है-
(अ) मोल लीटर-1
(ब) मोल सेकंड-1
(स) मोल लीटर-1 सेकंड-1
(द) मोल लीटर-1 सेकंड
उत्तर:
(स) मोल लीटर-1 सेकंड-1

7. उत्प्रेरक की उपस्थिति में किसी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा-
(अ) बढ़ जाती है।
(ब) कम हो जाती है।
(स) स्थिर रहती है।
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ब) कम हो जाती है।

8. किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करता है?
(अ) सांद्रता
(ब) अभिक्रिया का ताप
(स) दाब
(द) माध्यम की प्रकृति
उत्तर:
(ब) अभिक्रिया का ताप

9. प्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्धायु निर्भर करती है-
(अ) क्रियाकारकों की सांद्रता पर
(ब) उत्पादों की सांद्रता पर
(स) वेग स्थिरांक पर
(द) उत्प्रेरक पर
उत्तर:
(स) वेग स्थिरांक पर

10. शून्य कोटि अभिक्रिया का उदाहरण है-
(अ) H2 + I2 → 2HI
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 2
(स) एस्टर का क्षारीय जल अपघटन
(द) \(\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_{4(\mathrm{~g})}+\mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})} \rightarrow \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_{6(\mathrm{~g})}\)
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 3

11. किसी अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करता तो उस अभिक्रिया की कोटि क्या होगी ?
(अ) 1
(ब) शून्य
(स) 2
(द) 3
उत्तर:
(ब) शून्य

12. किसी शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौनसा कथन सत्य है ?
(अ) वेग = k
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 4
(स) k का मात्रक = सेकण्ड-1
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(अ) वेग = k

13. अभिक्रिया A + B = 2C के लिए A के लुप्त होने का वेग 10-2 मोल लीटर-1 सेकंड-1 है तो C के बनने का वेग क्या होगा-
(अ) 1.5 × 10-2 मोल लीटर10-1 सेकंड10-1
(ब) 0.5 × 10-2 मोल-1 लीटर सेकंड
(स) 1 × 10-2 मोल लीटर सेकंड
(द) 2.0 × 10-2 मोल लीटर सेकंड ।
उत्तर:
(द) 2.0 × 10-2 मोल लीटर सेकंड ।

14. \({ }_6 \mathrm{C}^{14}\) की अर्धायु 5760 वर्ष है। \({ }_6 \mathrm{C}^{14}\) का 100 mg का नमूना कितने वर्ष के बाद 25 mg रह जाएगा ?
(अ) 1440 वर्ष
(ब) 23040 वर्ष
(स) 11520 वर्ष
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) 11520 वर्ष

15. किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए देहली ऊर्जा होती है-
(अ) सक्रियण ऊर्जा – अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा
(ब) सक्रियण ऊर्जा + अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा
(स) सक्रियण ऊर्जा के बराबर
(द) अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा के बराबर.
उत्तर:
(ब) सक्रियण ऊर्जा + अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा

16. अभिकारक अणुओं को उत्पाद में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा होती है-
(अ) गतिज ऊर्जा
(ब) स्थितिज ऊर्जा
(स) सक्रियण ऊर्जा
(द) गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
उत्तर:
(स) सक्रियण ऊर्जा

17. अभिक्रिया 2A + B → 3C + D के लिए, निम्नलिखित में से कौनसा व्यंजक, अभिक्रिया के वेग को नहीं दर्शाता ?
(अ) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{A})}{2 \mathrm{dt}}\)
(ब) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{B})}{\mathrm{dt}}\)
(स) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{C})}{\mathrm{dt}}\)
(द) \(+\frac{\mathrm{d}(\mathrm{D})}{\mathrm{dt}}\)
उत्तर:
(स) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{C})}{\mathrm{dt}}\)

18. किसी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को प्रभावित करने वाला कारक
(अ) ताप
(स) सांद्रता
(ब) टक्कर आवृत्ति
(द) ताप
उत्तर:
(द) ताप

19. किसी अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की ताप पर निर्भरता को निम्नलिखित में से किस समीकरण से दिया जाता है?
(अ) In k = In A – \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)
(ब) In A = In k – \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)
(स) In k = A\(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)
(द) In A = RT In Ea – In k
उत्तर:
(अ) In k = In A – \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)

20. शून्य कोटि अभिक्रिया का आलेख है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 5
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 6

21. किसी अभिक्रिया में अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता दुगुनी करने पर उस अभिक्रिया की अर्धआयु भी पहले की तुलना में दुगुनी हो जाती है तो इस अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) 3
(ब) 2
(स) शून्य
(द) 1
उत्तर:
(स) शून्य

22. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 7 यह ग्राफ किस कोटि की अभिक्रिया को दर्शाता है?
(अ) प्रथम
(ब) शून्य
(स) द्वितीय
(द) तृतीय
उत्तर:
(अ) प्रथम

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

23. रेडियोएक्टिव विघुटन की अभिक्रिया की कोटि कितनी होती है?
(अ) शून्य
(ब) 1
(स) 2
(द) 3
उत्तर:
(ब) 1

24. शून्य कोटि अभिक्रिया के पूर्ण होने में लगा समय है-
(अ) [R]o/k
(ब) 2k/[R]o
(स) [R]ok
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) [R]o/k

25. अभिक्रिया A + 2B → उत्पाद के लिए अवकलन दर समीकरण है-
(अ) \(-\frac{1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
(ब) \(\frac{1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
(स) \(\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{-1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
(द) \(\frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
उत्तर:
(स) \(\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{-1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)

26. अभिकर्मक की प्रारम्भिक सान्द्रता को दोगुना करने पर इसकी t1/2 आधी हो जाती है। इस अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) प्रथम कोटि
(ब) शून्य कोटि
(स) द्वितीय कोटि
(द) तृतीय कोटि
उत्तर:
(स) द्वितीय कोटि

27. यदि a तथा t1/2 क्रमशः अभिक्रियकों की प्रारम्भिक सान्द्रता तथा शून्य कोटि की अभिक्रिया की अर्द्ध आयु हो तो निम्नलिखित में से सही सम्बन्ध है?
(अ) t1/2 ∝ \(\frac { 1 }{ a }\)
(ब) t1/2 ∝ a
(स) t1/2 ∝ \(\frac{1}{a^2}\)
(द) t1/2 ∝ a2
उत्तर:
(ब) t1/2 ∝ a

28. प्रथम कोटि की अभिक्रिया के (t2/3) ज्ञात कीजिए। दिया है k = 5.48 × 10-14 सेकण्ड |
(अ) 2.00 × 1013 सेकण्ड
(ब) 2.00 × 1013 सेकण्ड
(स) 200 × 1020 सेकण्ड
(द) 0.200 × 1010 सेकण्ड
उत्तर:
(अ) 2.00 × 1013 सेकण्ड

29. 2A + B → उत्पाद (P) अभिक्रिया गति नियम दिया है। \(\frac { dp }{ dt }\) = k[A][B] जब [B] >> [A], तो इस परिस्थिति में अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) 0
(ब) 1
(स) 2
(द) 1.5
उत्तर:
(ब) 1

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
शर्करा के क्रिस्टल की तुलना में शर्करा का पाउडर जल में जल्दी घुल जाता है। क्यों?
उत्तर:
पाठडर अवस्था में शर्करा का पृष्ठ क्षेत्रफल क्रिस्टल की तुलना में अधिक होता है अतः यह जल में जल्दी घुल जाता है।

प्रश्न 2.
N2O5 के विघटन की अभिक्रिया की कोटि बताइए।
उत्तर:
N2O5 का विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

प्रश्न 3.
किसी अभिक्रिया का औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग कब समान होता है?
उत्तर:
जब समय अन्तराल △t बहुत ही कम (शून्य के नजदीक) हो तब अभिक्रिया का औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग समान होगा।

प्रश्न 4.
किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक तथा अभिक्रिया वेग की इकाई समान है तो इस अभिक्रिया की कोटि कितनी होगी?
उत्तर:
यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है क्योकि इसके लिए-
वेग = k

प्रश्न 5.
किस प्रकार की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई सान्द्रता पर निर्भर नहीं करती?
उत्तर:
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक (k) की इकाई sec-1 होती है अतः यह सान्द्रता पर निर्भर नहीं करती।

प्रश्न 6.
अभिक्रिया के वेग स्थिरांक को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक अभिकारकों की प्रकृति तथा ताप पर निर्भर करता है।

प्रश्न 7.
शून्य कोटि अभिक्रिया में अभिकारकों की सान्द्रता को तीन गुना करने पर इसके वेग पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
अभिक्रिया का वेग अपरिवर्तित रहेगा क्योंकि शून्य कोटि अभिक्रिया का वेग सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 8.
अभिक्रिया 2NO +O2 की आप्विकता तथा कोटि कितनी है?
उत्तर:
इस अभिक्रिया की कोटि तथा आण्विकता दोनों ही 3 हैं।

प्रश्न 9.
अभिक्रिया की कोटि तथा आण्विकता में एक अन्तर बताइए।
उत्तर:
अभिक्रिया की आण्विकता हमेशा पूर्णांक होती है जबकि कोटि का पूर्णांक होना आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 10.
कोई द्विअणुक अभिक्रिया किस स्थिति में प्रथम कोटि की होगी?
उत्तर:
द्विअणुक अभिक्रिया में किसी एक अभिकारक को आधिक्य में लेने पर अभिक्रिया प्रथम कोटि की होगी क्योंकि अभिक्रिया का वेग इस अभिकारक की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करेगा।

प्रश्न 11.
अवकल वेग समीकरण क्या होता है?
उत्तर:
किसी अभिक्रिया के लिए सांद्रता पर आधारित समीकरण को अवकल वेग समीकरण कहते हैं।

प्रश्न 12.
किसी अभिक्रिया का वेग निधाँक पद कौनसा होता है?
उत्तर:
जटिल अभिक्रियाओं में सबसे धीमा पद वेग निर्धारक पद होता है क्योंकि इससे अभिक्रिया का वेग निर्धारित किया जाता है।

प्रश्न 13.
किसी रेडियोएक्टिव विघटन अभिक्रिया की कोटि कितनी होती है?
उत्तर:
रेडियोएक्टिव विघटन अभिक्रिया हमेशा प्रथम कोटि की होती हैं।

प्रश्न 14.
प्रथम कोष्टि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का मात्रक बताइए।
उत्तर:
समय-1 (सेकण्ड-1 या मिनट-1)

प्रश्न 15.
शून्य कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का सूत्र बताइए।
उत्तर:
शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक
\(\mathrm{k}=\frac{[\mathrm{R}]_0-[\mathrm{R}]}{\mathrm{t}}\)

प्रश्न 16.
गैसीय अभिक्रिया A → B + C के लिए वेग नियतांक का सूत्र बताइए।
उत्तर:
\(k=\frac{2.303}{t} \log \frac{P_i}{\left(2 P_i-P_t\right)}\)

प्रश्न 17.
शून्य कोटि अभिक्रिया की अर्धयु ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
उत्तर:
\(\mathbf{t}_{\frac{1}{2}}=\frac{[\mathrm{R}]_0}{2 \mathrm{k}}\)

प्रश्न 18.
यदि किसी अभिक्रिया में अभिकारक के सभी अणुओं के मध्य प्रभावी टक्कर हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
अभिक्रिया तीक्र वेग से होगी तथा लगभग पूर्ण हो जाएगी।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 19.
देहली ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी अभिकारक की वह न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा जो उसे उत्पाद् में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक होती है, उसे देहली ऊर्जा कहते हैं।
देहली ऊर्जां = सामान्य अणु की ऊर्जा + सक्रियण ऊर्जा

प्रश्न 20.
किसी अभिक्रिया में टक्कर करने वाले अणुओं की पर्याप्त संख्या की ऊर्जा, देहली ऊर्जा से अधिक है फिर भी अभिक्रिया का वेग कम है, क्यों?
उत्तर:
अणुओं का अभिविन्यास सही नही होने के कारण अभिक्रिया का वेग कम है।

प्रश्न 21.
दो भिन्न-भिन्न अभिक्रियाएँ समान ताप पर करवाई जाती हैं तथा दोनों के लिए सक्रियण ऊर्जा भी समान है, तो क्या इन अभिक्रियाओं के वेग भी समान होंगे?
उत्तर:
इन अभिक्रियाओं के वेग समान नहीं हो सकते क्योंकि वेग नियतांक, पूर्व चरघातांकी गुणक (A) पर भी निर्भर करता है, जो कि भिन्नभिन्न अभिक्रियाओं के लिए भिन्न-भिन्न होता है।

प्रश्न 22.
प्रभावी टक्कर क्या होती है?
उत्तर:
वे टक्कर जिनके परिणामस्वरूप उत्पाद का निर्माण होता है, उन्हें प्रभावी टक्कर कहते है।

प्रश्न 23.
किसी अभिक्रिया के लिए t1/2 ∝ [R]0 है, तो इस अभिक्रिया की कोटि कितनी होगी?
उत्तर:
शून्य।

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
अभिक्रिया की कौटि तथा अणुसंख्यता (आणिवकता) में विभेद् कीजिए।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया की कोटि तथा अणुसंख्यता में निम्नलिखित विभेद है-

  • अभिक्रिया की कोटि प्रायोगिक राशि है जबकि आण्विक्ता एक सैद्धान्तिक राशि है।
  • कोटि, शून्य या भिन्नात्मक भी हो सकती है जबकि आण्विकता हमेशा पूर्णांक होती है।
  • कोटि से अभिक्रिया की क्रियाविधि ज्ञात होती है, आण्विकता से नहीं।
  • अभिक्रिया की कोटि प्राथमिक तथा जटिल दोनों प्रकार की अभिक्रियाओं के लिए लाग होती है लेकिन अभिक्रिया की आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रियाओ के लिए ही लागू होती है। जटिल अभिक्रियाओं की आण्विकता का कोई अर्थ नहीं होता। जटिल अभिक्रियाओं में कोटि सबसे धीमे पद से दी जाती है तथा सामान्यतः सबसे मंद पद की आण्विकता तथा कोटि समान होती है।
  • कोटि ताप, दाब या अभिक्रिया की परिस्थिति पर निभर करती है लेकिन आण्विकता नहीं।
  • कोटि सान्द्रता से सम्बन्धित होती है जबकि आण्विकता अणुओं की संख्या से सम्बन्धित है।

प्रश्न 2.
तीन अभिक्रियाएँ जिनकी कोटि 1,2 तथा 3 हैं इनके लिए वेग स्थिरांकों का मान समान है तो सान्द्रता का मान 1M, से कम तथा 1M से अधिक होने पर इन अभिक्रियाओं के वेगों का क्रम क्या होगा?
उत्तर:
माना R → उत्पाद्
प्रथम कोटि के लिए, वेग (v1)=k[R]
द्वितीय कोटि के लिए, वेग (v2)=k[R]2
तृतीय कोटि के लिए, वेग (v3)=k[R]3
अतः [R] = 1 होने पर v1 = v2 = v3
जब [R] = 1 तो v1 > v2 > v3
तथा [R] > 1 होने पर v1 < v2 < v3

प्रश्न 3.
किसी अभिक्रिया के वेग स्थिरांक तथा अभिक्रिया वेग में तीन अन्तर बताइए।
उत्तर:
वेग स्थिरांक तथा अभिक्रिया वेग में निम्नलिखित अन्तर होते है-

  • वेग स्थिरांक वह वेग है जब सभी अभिकारकों की सान्द्रता इकाई हो लेकिन इकाई समय में किसी अभिकारक या उत्पाद् की सान्द्रता में होने वाला परिवर्तन अभिक्रिया वेग होता है।
  • वेग स्थिरांक अभिकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता जबकि अभिक्रिया का वेग सान्द्रता के समानुपाती होता है।
  • वेग स्थिरांक का मात्रक अभिक्रिया की क्रोटि पर निर्भर करता है जबकि वेग का मात्रक mol L-1 s-1 है। अर्थात् यह निश्चित होता है।

प्रश्न 4.
अभिक्रिया – HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 8 में पात्र का आयतन प्रारम्भिक आयतन का \(\frac { 1 }{ 3 }\) करने पर अभिक्रिया वेग पर क्या प्रभाव होगा तथा आयतन में इस परिवर्तन से अभिक्रिया की कोटि में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
समीकरण के अनुसार,
अभिक्रिया का प्रारम्भिक वेग (v)= k [A]2 [B]
जब्न पात्र का आयतन प्रारम्भिक आयतन का \(\frac { 1 }{ 3 }\) कर द्यि जाता है तो A तथा B दोनों की सान्द्रता 3 गुना हो जाएगी। अतः इस स्थिति में अभिक्रिया का वेग
v1 = k [3A]2[3B]
v1 = 27k [A]2[B]
अतः अभिक्रिया का वेग प्रारम्भिक वेग की तुलना में 27 गुना हो जाएगा लेकिन अभिक्रिया की कोटि पर कोई प्रभाव नहीं होगा क्योंकि कोटि सान्द्रता या आयतन पर निभर नहीं करती।

प्रश्न 5.
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु का सूत्र ज्ञात कीजिए तथा सिद्ध कीजिए कि प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती।
उत्तर:
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 9
अतः किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अध्धायु का मान निश्चित होता है। अर्थात् यह अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती।

प्रश्न 6.
प्रथम कोटि की गैसीय अभिक्रिया A(g) → B(g) + C(g) के लिए वेग नियतांक के सूत्र \(k=\frac{2.303}{t} \log \frac{P_i}{\left(2 P_i-P t\right)}\) की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया का अर्ध आयु काल:
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 11
अतः किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु का मान निश्चित होता है, अर्थात् यह अभिकारक की प्रारंभिक सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।
इसे निम्नलिखित ग्राफ द्वारा दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 12
अत: n वीं कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु (t1/2) का सूत्र निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 13
[R]0 = अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता
तथा किसी अभिक्रिया के लिए n अर्धायु के बाद बचा पदार्थ = \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{2^n}\)
प्रथम कोटि अभिक्रियाओं के उदाहरण-
(i) एथीन का हाइड्रोजनीकरण-
C2H4 (g) + H2 (g) → C2H4 (g)
वेग = k (C2H4) (इसमें H2 आधिक्य में होता है।)

(ii) नाभिकीय विखण्डन (प्राकृतिक या कृत्रिम) की सभी अभिक्रियाएँ प्रथम कोटि की होती हैं जैसे
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 14

(iii) नाइट्स्सक्साइड का अपघटन-
2N2O → 2N2 + O2
वेग = k[N2O]
अभिक्रिया की क्रियाविधि

  • N2O → N2 + O (धीमा पद)
  • N2O → N2 + O2 (तेज पद)

(iv) गैसीय अभिक्रिया का अध्ययन विभिन्न समय पर अभिकारकों तथा उत्पादों के आंशिक दाब ज्ञात करके किया जाता है।
अभिक्रिया A(g) → B(g) + C(g)
उदाहरण-एजो आइसोप्रोपेन का विघटन
C6H14N2 → N2 + C6H14
अभिक्रिया के लिए वेग = k[A]
अतः यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

माना कि गैस A का प्रारंभिक दाब Pi तथा ‘t’ समय पर अभिक्रिया मिश्रण का कुल दाब Pt है तो इस अभिक्रिया हेतु समाकलित वेग समीकरण निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते हैं-
कुल दाब Pt = PA + PB + PC
PA, PB तथा PC क्रमशः A, B तथा C के आंशिक दाब हैं।
माना t समय पर A के दाब में x atm की कमी होती है तो B तथा C प्रत्येक के दाब में x atm की वृद्धि होगी।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 15
यहाँ Pi = t = 0 समय पर A का प्रारंभिक दाब
Pt = (Pi – x) + x + x
Pt = Pi + x
x = Pt – Pi
t समय पर, PA = Pi – x
= Pi – (Pt – Pi)
या PA = 2Pi – Pt
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
[R]0 = Pi, [R] pt
अतः k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{p_i}{p_A}\)
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{p_i}{\left(2 p_i-p_t\right)}\)

प्रश्न 7.
उस अभिक्रिया की कोटि क्या होगी जिसके 50% पूर्ण होने में 2 घण्टे तथा 75% पूर्ण होने में 4 घण्टे लगते हैं?
उत्तर:
इस अभिक्रिया के 50% पूर्ण होने में 2 घण्टे लग रहे हैं अर्थात् इस अभिक्रिया की अर्धायु 2 घण्टे है। इसमें 4 घण्टे (दो अर्धायु) के बाद 75% अभिक्रिया पूर्ण हो जाती है अर्थात् 25% अभिकारक बच जाता है, जिसका तात्पर्य यह है कि इस अभिक्रिया की अध्धायु प्रारम्भिक सान्द्रता पर निभर नर्ही करती। अतः यह एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

प्रश्न 8.
(a) किसी जटिल अभिक्रिया के धीमे पद् की अणुसंख्यता ही सम्पूर्ण अभिक्रिया की अणुसंख्यता होती है। समझाइए।
(b) उच्य कोटि की अभिक्रियाएँ सामान्यत: नहीं होती, क्यों?
उत्तर:
(a) जटिल अभिक्रियाओं की क्रियाविधि में सबसे धीमे पद को वेग निर्धारक पद माना जाता है। चूँक किसी अभिक्रिया के लिए अणुसंख्यता का मान सामान्यतया 3 से अधिक नहीं होता अतः धीमे पद में उपस्थित अणुओं से ही अभिक्रिया की अणुसंख्यता ज्ञात करते हैं, चाहे पूर्ण सन्तुलित समीकरण में अणुओ की संख्या अधिक हो।

(b) अभिक्रिया होते समय उन अणुओ के मध्य टक्कर होती है जो निश्चित दिशा में अभिविन्यासित होते हैं तथा जटिल अभिक्रियाओं में धीमे पद में जितने अणुओ की सान्द्रता में परिवर्तन होता है, वही अभिक्रिया की कोटि होती है। टककर में सामान्यतः तीन से अधिक अणु भाग नहीं लेते अतः उच्च कोटि की अभिक्रियाएँ सामान्यतः नहीं होती।

प्रश्न 9.
अभिक्रिया – 2N2O → 2N2 + O2 का प्रायोगिक वेग समीकरण निम्नलिखित है-वेग =k[N2O], इस अभिक्रिया की क्रियाविधि बताइए।
उत्तर:
वेग समीकरण में N2O की सान्द्रता की घात एक है अतः वेग निर्धारक पद (धीमा पद) में N2O का एक अणु उपस्थित होना चाहिए इसलिए इस अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्नलिखित है-
N2O → N2 + O (धीमा पद)
N2O + O → N2 + O2 (तेज पद)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 10.
अभिक्रिया 2NO + Br2 → 2NOBr की क्रियाविधि निम्नलिखित है –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 10
तो इस अभिक्रिया का वेग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
अभिक्रिया की क्रियाविधि के आधार पर धीमे पद से अभिक्रिया के वेग को ज्ञात किया जाता है अतः
वेग = k[NOBr2][NO] ….(1)
चूँकि NOBr2 अभिकारक नहीं है बल्कि माध्यमिक यौगिक है तथा प्रथम पद उत्क्रमणीय है अतः
साम्य स्थिरांक Kc = \(\frac{\left[\mathrm{NOBr}_2\right]}{[\mathrm{NO}]\left[\mathrm{Br}_2\right]}\) …(2)
या [NOBr2] = Kc [NO][Br2]
यह मान समीकरण (i) में रखने पर
वेग = k Kc [NO][Br2][NO]
वेग = k1 [NO]2[Br2]
यहाँ k1 = k . Kc
अतः अभिक्रिया का वेग समीकरण निम्न प्रकार होगा-
वेग = k1 [NO]2[Br2]

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
(a) निम्नलिखित पदों को स्पष्ट कीजिए-

  • अभिक्रिया की दर
  • अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा

(b) फॉस्फोन, PH3, का अपघटन निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है-
4PH3(g) → P4(g) + 6H2(g)
यह पाया जाता है कि अभिक्रिया निम्नलिखित दर समीकरण के अनुसार होती है-
दर = k [PH3].
120°C पर PH3 की अर्ध-आयु 37.9 s है।

(i) PH3 के 3/4 भाग के अपघटित होने के लिए कितना समय लगेगा?
(ii) 1 मिनट के पश्चात् PH3 के मूल प्रतिदर्श का कौनसा प्रभाज शेष रह जाएगा?
अथवा
(a) निम्न पदों को स्पष्ट कीजिए-

  • एक अभिक्रिया की कोटि
  • एक अभिक्रिया की आण्विकता

(b) तापमान 300 K से बढ़कर 320 K हो जाने पर एक अभिक्रिया की दर चार गुनी हो जाती है। अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा का परिकलन कीजिए, यह मानते हुए तापमान बदलने के साथ इसका मान परिवर्तित नहीं होता है। (R = 8.314 JK-1 mol-1)
उत्तर:
(a) (i) अभिक्रिया की दर-काई समय में कसी अभिकारक या उत्पाद की सान्द्रता में जितना परिंवर्तन होता है, उसे अभिक्रिया की दर कहते हैं।
(ii) अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा-किसी अभिकारक को उत्पाद में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा जो अभिकारक द्वारा ग्रहण करना आवश्यक है, उसे अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।
(b) (i) अभिक्रिया 4PH3(g) → P4(g)(g) + 6H2(g) की दर = k[PH3] दी गई है अतः यह एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। इसके लिए
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
k = 0.693/t1/2
t1/2 = 37.9 s
अतः k = \(\frac { 0.693 }{ 37.9 }\) = 0.01828
k = 1.82 × 10-2 s-1
समाकलित वेग समीकरण
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t समय पर PH3 का 3/4 भाग अपघटित हो रहा है।
अतः t = \(\frac { 2.303 }{ k }\)log\(\frac{[R]_0}{\frac{3}{4}[R]_0}\)
t = \(\frac{2.303}{1.82 \times 10^{-2}}\)log\(\frac { 4 }{ 3 }\)
t = 126.5 (log 4 – log 3)
t = 126.5 (0.6021 – 0.4771)
t = 126.5 × 0.125
t = 15.8 sec.

(ii) k = \(\frac { 2.303 }{ 37.9 }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t = 1 मिनट = 60 सेकण्ड
1.82 × 10-2 = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\)log\(\frac{1}{[R]}\)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 16
अतः 1 मिनट (60 sec) के बाद पदार्थ का बचा अंश = 0.335 अर्थात् 33.5%
अथवा
(a) (i) अभिक्रिया की कोटि:
रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों की सान्द्रता में परिवर्तन होता है, अतः किसी अभिक्रिया के प्रायोगिक वेग समीकरण (वेग नियम व्यंजक) में अभिकारकों की सान्द्रता के घातांकों का योग उस अभिक्रिया की कोटि कहलाता है।
अथवा
किसी अभिक्रिया में अभिकारक अणुओं की संख्या, जिनकी सान्द्रता में परिवर्तन होता है, उसे अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।
अभिक्रिया aA + bB → उत्पाद के लिए
वेग = k [A]x[B]y
अतः अभिक्रिया की कोटि (n) = x + y
इस अभिक्रिया में अभिकारक A के प्रति अभिक्रिया की कोटि x है एवं अभिकारक B के प्रति अभिक्रिया की कोटि y है। अभिक्रिया की कोटि शून्य, एक, दो, तीन अथवा भिन्नात्मक भी हो सकती है। किसी अभिक्रिया की कोटि शून्य होने का अर्थ है कि उस अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सान्द्रता के शून्य घात के समानुपाती होता है अर्थात् अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।

किसी रासायनिक अभिक्रिया के संतुलित समीकरण द्वारा अभिक्रिया की पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं होती। कुछ अभिक्रियाएँ एक पद में तथा कुछ अभिक्रियाएँ एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं। लेकिन एक पद में होने वाली अभिक्रियाएँ बहुत कम होती हैं। वे अभिक्रियाएँ जो एक पद में होती हैं, उन्हें प्राथमिक अभिक्रियाएँ (Elementary reactions) तथा एक से अधिक पदों में होने वाली अभिक्रियाओं को जटिल अभिक्रियाएँ (Complex reactions) कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में कुछ पद धीमे तथा कुछ पद तेज होते हैं, लेकिन धीमा पद अभिक्रिया का गति निर्धारक पद होता है जिससे अभिक्रिया का वेग लिखा जाता है।
जटिल अभिक्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं-

  • क्रमागत अभिक्रियाएँ
  • विपरीत अभिक्रियाएँ तथा
  • पाश्र्व अभिक्रियाएँ।

एथेन का CO2 तथा H2O में ऑक्सीकरण क्रमागत अभिक्रिया तथा फीनॉल का नाइट्रीकरण पार्श्व अभिक्रिया का उदाहरण है।

(ii) अभिक्रिया की आण्विकता:
प्राथमिक अभिक्रिया में भाग लेने वाली स्पीशीज (परमाणु, अणु या आयन ) की संख्या जो कि एक साथ टक्कर करके रासायनिक अभिक्रिया सम्पन्न करती हैं, उसे अभिक्रिया की आण्विकता कहते हैं।
उदाहरण – NH4NO2 → N2 + 2H2O (एक अणुक अभिक्रिया)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 18
तीन से अधिक अणुओं की उचित विन्यास के साथ एक साथ टक्कर होकर अभिक्रिया होने की सम्भावना बहुत ही कम होती है अतः अणुसंख्यता सामान्यतः तीन से अधिक नहीं होती है।
सरल अभिक्रियाओं की आण्विकता, संतुलित रासायनिक समीकरण में उपस्थित अभिकारक अणुओं की संख्या के बराबर होती है। उदाहरण-
H2 + I2 → 2HI (द्विअणुक अभिक्रिया)
जटिल अभिक्रियाएँ जिनमें तीन से अधिक अभिकारक अणु उपस्थित होते हैं, सामान्यतया एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं। जैसे-
KCIO3 + 6 FeSO4 + 3H2SO4 → KCI + 3Fe2 (SO4)3 + 3H2O

यह अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। इन जटिल अभिक्रियाओं की कोटि क्रियाविधि से ज्ञात होती है जिसमें धीमा पद गति निर्धारक पद होता है। अतः इनके लिए सम्पूर्ण अभिक्रिया की अणुसंख्यता का कोई महत्त्व नहीं होता है, केवल गति निर्धारक पद की अणुसंख्यता देखी जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 17

प्रश्न 2.
अभिक्रिया कोटि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया की कोटि:
रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों की सान्द्रता में परिवर्तन होता है, अतः किसी अभिक्रिया के प्रायोगिक वेग समीकरण (वेग नियम व्यंजक) में अभिकारकों की सान्द्रता के घातांकों का योग उस अभिक्रिया की कोटि कहलाता है।
अथवा
किसी अभिक्रिया में अभिकारक अणुओं की संख्या, जिनकी सान्द्रता में परिवर्तन होता है, उसे अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।
अभिक्रिया aA + bB → उत्पाद के लिए
वेग = k [A]x[B]y
अतः अभिक्रिया की कोटि (n) = x + y
इस अभिक्रिया में अभिकारक A के प्रति अभिक्रिया की कोटि x है एवं अभिकारक B के प्रति अभिक्रिया की कोटि y है। अभिक्रिया की कोटि शून्य, एक, दो, तीन अथवा भिन्नात्मक भी हो सकती है। किसी अभिक्रिया की कोटि शून्य होने का अर्थ है कि उस अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सान्द्रता के शून्य घात के समानुपाती होता है अर्थात् अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।

किसी रासायनिक अभिक्रिया के संतुलित समीकरण द्वारा अभिक्रिया की पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं होती। कुछ अभिक्रियाएँ एक पद में तथा कुछ अभिक्रियाएँ एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं। लेकिन एक पद में होने वाली अभिक्रियाएँ बहुत कम होती हैं। वे अभिक्रियाएँ जो एक पद में होती हैं, उन्हें प्राथमिक अभिक्रियाएँ (Elementary reactions) तथा एक से अधिक पदों में होने वाली अभिक्रियाओं को जटिल अभिक्रियाएँ (Complex reactions) कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में कुछ पद धीमे तथा कुछ पद तेज होते हैं, लेकिन धीमा पद अभिक्रिया का गति निर्धारक पद होता है जिससे अभिक्रिया का वेग लिखा जाता है।

जटिल अभिक्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं-

  • क्रमागत अभिक्रियाएँ
  • विपरीत अभिक्रियाएँ तथा
  • पाश्र्व अभिक्रियाएँ।

एथेन का CO2 तथा H2O में ऑक्सीकरण क्रमागत अभिक्रिया तथा फीनॉल का नाइट्रीकरण पार्श्व अभिक्रिया का उदाहरण है।

प्रश्न 3.
आप एक अभिक्रिया के दर नियम (वेग व्यंजक) और दर स्थिरांक (वेंग स्थिरांक) से क्या समझते हैं? दर स्थिरांक के निम्नलिखित मात्रकों से अभिक्रिया की कोटि की पहचान कीजिए-
(i) L-1 mol s-1
(ii) L mol-1 s-1
उत्तर:
किसी अभिक्रिया के वेग को अभिकारकों की सांद्रता के पदों में व्यक्त करना ही वेग नियम कहलाता है। अतः वेग नियम वह व्यंजक होता है जिसमें किसी अभिक्रिया के वेग को अभिकारकों की मोलर सांद्रता के पद पर कोई घातांक लगाकर व्यक्त किया जाता है। यह किसी संतुलित रासायनिक समीकरण में अभिकर्मकों के स्टॉइकियोमीट्री गुणांक के समान या भिन्न होता है।
वेग नियम को वेग समीकरण या वेग व्यजंक भी कहते हैं।
उदाहरण : अभिक्रिया-
a A + bB → cC + dD के लिए
अभिक्रिया का वेग ∝[A]x [B]y
x तथा y, a व b के समान भी हो सकते हैं अथवा भिन्न भी हो सकते हैं तथा x व y का मान प्रयोग द्वारा ज्ञात किया जाता है, अतः इसे प्रायोगिक वेग समीकरण कहते हैं।
या वेग = k[A]x [B]y
\(\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{R}]}{\mathrm{dt}}\) = k[A]x [B]y
इसे अवकल वेग समीकरण कहते हैं।
यहाँ k = समानुपाती स्थिरांक जिसे वेग स्थिरांक या वेग नियतांक भी कहते हैं। अतः वेग नियम अभिक्रिया के वेग तथा अभिकारकों की सान्द्रता में सम्बन्ध दर्शाता है।
(i) शून्य कोटि
(ii) द्वितीय कोटि।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.
दिए गए ताप पर 2.4 × 10-3 s-1 के दर स्थिरांक के साथ HCO2H का ऊष्मीय विघटन एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया होता है। परिकलन कीजिए HCO2H की एक आरम्भिक मात्रा को इसके तीन-चौथाई तक विघटन में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t = \(\frac { 2.303 }{ k }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t समय पर प्रारम्भिक मात्रा का तीन-चौथाई विघटन हो रहा है, अतः \(\frac { 1 }{ 4 }\) भाग बचेगा
t = \(\frac{2.303}{2.4 \times 10^{-3}}\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{\frac{1}{4}[\mathrm{R}]_0}\)
t = 0.9595 × 103 (log 4)
t = 0.9595 × 103 × 0.6021
t = 577.7 sec.

प्रश्न 5.
एक अभिक्रिया एक अभिकारक के सन्दर्भ में द्वितीय कोटि की है। यदि इस अभिकारक की सान्द्रता (i) दुगुनी कर दी जाए (ii) आधी कर दी जाए, तो दर (वेग) कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर:
वेग = k [R]2
(i) अभिकारक की सान्द्रता दुगुनी करने पर,
वेग = k [2R]2
वेग = 4k [R]2
अतः दर पहले की तुलना में 4 गुना हो जाएगी।
(ii) अभिकारक की सान्द्रता आधी करने पर,
वेग = \(\mathrm{k}\left[\frac{\mathrm{R}}{2}\right]^2\)
वेग = \(\frac{\mathrm{k}}{4}[\mathrm{R}]^2\)
अतः दर पहले की एक-चौथाई रह जाएगी।

प्रश्न 6.
(अ) रासायनिक अभिक्रिया में 10°C ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दुगुनी वृद्धि हो जाती है। नामांकित वितरण वक्र से समझाइए।
(ब) ताप 350 K से 400 K परिवर्तित करने पर प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग स्थिरांक चार गुना बढ़ जाता है। सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानकर कीजिए कि यह ताप के साथ परिवर्तित नहीं होती है।
(R=8.314 जूल केल्विन-1 मोल-1, log 4=0.6021)
अथवा
(अ) उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया का वेग अधिक हो जाता है। इस कथन को अभिक्रिया निर्देशांक व ऊर्जा में वक्र बनाकर समझाइए।
(ब) एक अभिक्रिया के लिए क्रियाकारकों की प्रारम्भिक सान्द्रता 0.4 M तथा वेग स्थिरांक 2.5 × 10-4 मोल लीटर-1 से.-1 हैं। अभिक्रिया का अर्द्ध-आयुकाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(अ) किसी पदार्थ का ताप बढ़ाने पर Ea से अधिक ऊर्जायुक्त संघट्ट करने वाले अणुओं की संख्या में वृद्धि होती है। चित्र से स्पष्ट है कि वक्र मेंt +10 तापमान पर सक्रियण ऊर्जा या इससे अधिक ऊर्जायुक्त अणुओं को दर्शाने वाला क्षेत्रफल लगभग दो गुना हो जाता है अतः अभिक्रिया वेग भी दो गुना हो जाता है।
आर्रेनिसस समीकरण में कारक \(\mathrm{e}^{-\mathrm{E}_a / \mathrm{RT}}, \mathrm{E}_{\mathrm{a}}\) से अधिक गतिज ऊर्जा वाले अणुओं की भिन्न के संगत होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 19
(ब) log\(\frac{k_2}{k_1}\) = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{2.303 \mathrm{R}}\left[\frac{\mathrm{T}_2-\mathrm{T}_1}{\mathrm{~T}_1 \mathrm{~T}_2}\right]\)
प्रश्नानुसार,
\(\frac{\mathrm{k}_2}{\mathrm{k}_1}\) = 4, T1 = 350K, T2 = 400 K, R = 8.314 जूल केल्विन-1 मोल-1
मान रखने पर,
log 4 = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{2.303 \times 8.314}\left[\frac{400-350}{350 \times 400}\right]\)
0.6021 = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{19.1471}\left[\frac{50}{140000}\right]\)
Ea = \(\frac{0.6021 \times 19.1471 \times 140000}{50}\)
Ea = 32279.71 J mol-1
अथवा
उत्तर:
(अ) उत्प्रेरक अभिक्रिया को वैकल्पिक पथ प्रदान करता है जिससे सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है अतः यह ऊर्जा अवरोध में कमी करके अभिक्रिया को सम्पन्न करता है जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है। इसे निम्नलिखित वक्र से समझाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 20
(ब) यह शून्य कोटि अभिक्रिया है क्योंकि इसमें प्रारम्भिक सान्द्रता दी गई है। अतः इसके लिए
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 21

प्रश्न 7.
एथिल ऐसीटेट के जल अपघटन का उदाहरण लेकर छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया-वह अभिक्रिया जिसकी कोटि एक हो तथा आण्विकता एक से अधिक हो उसे छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया कहते हैं। इस प्रकार की अभिक्रिया में दो अभिकारकों में से एक अभिकारक आधिक्य में होता है जिसकी सान्द्रता में परिवर्तन बहुत कम होता है अतः इसको नगण्य मानते हैं।
उदाहरण: एस्टर का अम्लीय माध्यम में जल अपघटन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 22

प्रश्न 8.
शून्य कोटि एवं प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के लिए वेग स्थिरांक की इकाइयाँ लिखिए।
उत्तर:
शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई = mol L-1S-1
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई =S-1

प्रश्न 9.
अभिक्रिया की अर्धायु किसे कहते हैं? प्रथम कोटि अभिक्रिया के वेग समीकरण से अर्धायु ज्ञात करने का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया की अर्धायु-किसी अभिक्रिया में जितने समय में अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता आधी रह जाती है, उसे अभिक्रिया की अर्धायु कहते हैं।
प्रथम कोटि अभिक्रिया का अवकल वेग समीकरण-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
[R]0 = प्रारम्भिक सान्द्रता, [R] = t समय पर सान्द्रता,
t = समय तथा k = वेग नियतांक
अर्धायु t1/2 पर, [R] = \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{2}\)
ये मान उपर्युक्त समीकरण में रखने पर,
k = \(\frac{2.303}{\mathrm{t}^{\frac{1}{2}}} \log \frac{\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]_0}}{2}\)
या t1/2 = \(\frac { 2.303 }{ k }\)log2
= \(\frac { 2.303 }{ k }\)log2
= \(\frac { 2.303 }{ k }\) × 0.3010
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)

प्रश्न 10.
(a) अभिक्रिया A + B → P के लिए वेग नियम v = \(\mathbf{k}[\mathbf{A}]^{\frac{1}{2}}[\mathrm{~B}]^2\) से दिया जाता है। इस अभिक्रिया की कोटि क्या होगी ?
(b) एक प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग नियतांक k = 5.5 × 10-14s-1 से दिया जाता है । इस अभिक्रिया की अर्धआयु कीजिए ।
उत्तर:
(a) अभिक्रिया की कोटि = \(\frac { 1 }{ 2 }\)+2 = 2\(\frac { 1 }{ 2 }\) या 2.5
(b) प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए-
अर्धआयु (t\(\frac { 1 }{ 2 }\)) = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
t\(\frac { 1 }{ 2 }\) = \(\frac{0.693}{5.5 \times 10^{-14}}\)
t\(\frac { 1 }{ 2 }\) = 1.26 × 1013s

प्रश्न 11.
स्थिर आयतन पर SO2Cl2 के प्रथम कोटि के तापीय विघटन के दौरान निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए-
SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl2(g)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 23
वेग नियतांक परिकलित कीजिए।
( दिया गया है – log 4 = 0.6021)
उत्तर:
अभिक्रिया SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl2(g)
अभिक्रिया Ag → B(g) + C(g) के समतुल्य है
अतः इसके लिए-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{P_i}{\left(2 P_i-P_t\right)}\)
यहाँ Pi = 0.4 atm, Pt = 0.7 atm तथा t = 100 s
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\)log\(\frac{0.4}{(2 \times 0.4-0.7)}\)
= \(\frac { 2.303 }{ 100 }\)log\(\frac { 0.4 }{ 0.1 }\)
= \(\frac { 2.303 }{ 100 }\)log4
= \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) × 0.6021
k = 0.01386 = 1.38 × 10-2 s-1

प्रश्न 12.
एक रासायनिक अभिक्रिया, R → P के लिए, समय (t) के प्रति सान्द्रता (R) में परिवर्तन को निम्नलिखित ग्राफ में दर्शाया गया है –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 24
(i) इस अभिक्रिया की कोटि बताइए ।
(ii) ग्राफ की प्रवणता ( ढलान ) क्या होगी ?
उत्तर:
(i) यह एक शून्य कोटि अभिक्रिया है ।
(ii) इस ग्राफ का ढाल = – k = –\(-\left[\frac{[\mathrm{R}]_0-[\mathrm{R}]}{\mathrm{t}}\right]\)
यदि [R]0 = a तथा [R] = a – x तो k = \(-\frac{x}{t}\)

प्रश्न 13.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं की कोटि बताइए-
(अ) कृत्रिम नाभिकीय क्षय
(ब) उच्च दाब पर गैसीय अमोनिया का तप्त Pt सतह पर वियोजन
(स) एथीन का हाइड्रोजनन
(द) N2O5 का अपघटन ।
उत्तर:
(अ) कृत्रिम नाभिकीय क्षय प्रथम कोटि अभिक्रिया होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 25
(ब) उच्च दाब पर गैसीय अमोनिया का तप्त Pt सतह पर वियोजन शून्य कोटि अभिक्रिया होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 26
वेग = k [NH3]

(स) एथीन का हाइड्रोजनन (हाइड्रोजनीकरण) एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।
C2H4(g) + H2(g) → C2H6(g)
वेग = K [C2H4]

(द) N2O5 का अपघटन एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।
2N2O5 → 4NO2 + O2
वेग = k[N2O5]

प्रश्न 14.
किसी अभिक्रिया की अर्धायु क्या है? प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग समीकरण से यह पुष्टि कीजिए कि इस अभिक्रिया की अर्धायु अभिक्रियकों की प्रारम्भिक सान्द्रताओं पर निर्भर नहीं होती।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया में अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता का आधा जितने समय में उत्पाद में बदल जाता है उसे अभिक्रिया की अर्धायु कहते हैं।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग समीकरण
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\);
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) पर [R] = \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{2}\)
R का यह मान रखने पर,
k = \(\frac{2.303}{\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}} \frac{[\mathrm{R}]_0}{\frac{[\mathrm{R}]_0}{2}}\)
या \(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log 2
= \(\frac { 2.303 }{ t }\) × 0.3010 (log 2 = 0.3010)
या \(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
अतः किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु निश्चित होती है, अर्थात् यह अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता पर निर्भर नहीं होती।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 15.
किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई सेकण्ड-1 है। अभिक्रिया की कोटि क्या होगी ?
उत्तर:
यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।

प्रश्न 16.
अभिक्रिया 2A + B → उत्पाद हेतु अवकलन वेग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
अभिक्रिया 2A + B → उत्पाद के लिए अवकलन वेग समीकरण निम्न प्रकार होगा-
\(-\frac{\mathrm{d}[\mathrm{R}]}{\mathrm{dt}}\) = K[A]2[B]

प्रश्न 17.
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु काल 10 sec
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु काल
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 0.693 }{ k }\) यहाँ k = वेग स्थिरांक
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = 10 sec.
अतः वेग स्थिरांक k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
k = \(\frac { 0.693 }{ 10 sec. }\) = 0.0693 sec-1

प्रश्न 18.
जलीय विलयन में मेथिल ऐसीटेट के जल- अपघटन से निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 27
(i) जल की सान्द्रता स्थिर रखते हुए प्रदर्शित कीजिए कि यह छद्म (स्यूडो) प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
(ii) समयांतराल 30 से 60 सेकण्ड के बीच अभिक्रिया की औसत दर का परिकलन कीजिए।
अथवा
(a) एक अभिक्रिया A + B → P के लिए दर दिया गया है। दर = k [A]2 [B]

  • यदि A की सान्द्रता दुगुनी कर दी जाए, तो अभिक्रिया की दर कैसे प्रभावित होती है ?
  • यदि B बड़ी मात्रा में उपस्थित हो, तो अभिक्रिया की सम्पूर्ण कोटि क्या है?

(b) एक अभिक्रिया 50% पूर्ण होने में 23.1 मिनट लेती है और अभिक्रिया प्रथम कोटि की है। इस अभिक्रिया को 75% पूर्ण होने में कितना समय लगेगा, उसका परिकलन कीजिए। ( दिया गया है – log 2 = 0.301, log 3 = 0.4771, log 4 = 0.6021)
उत्तर:
(i) जल की सान्द्रता स्थिर है अतः यह छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक है-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
उपर्युक्त आँकड़ों से सूत्र द्वारा k का मान 30 S तथा 60 S पर ज्ञात करते हैं तो समान आता है जो कि 2.310 × 10-2 s-1 है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि यह एक छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया है।

(ii) अभिक्रिया की औसत दर (rav) = \(-\frac{\Delta[\mathrm{R}]}{\Delta \mathrm{t}}\)=\(\frac{\mathrm{C}_2-\mathrm{C}_1}{\Delta \mathrm{t}}\)
= \(-\frac{0.15-0.30}{60-30}\) = \(-\frac{(-0.15)}{30}\)
= 0.005
= 5 × 10-3 mol L-1
अथवा
(a) अभिक्रिया की दर = k [A]2 [B]

(i) जब A की सान्द्रता दुगुनी की जाती है तो उपरोक्त समीकरण के अनुसार
दर = k [24]2 [B]
दर = 4k [A]2 [B]
अतः अभिक्रिया की दर 4 गुना हो जाती है।
(ii) जब B बड़ी मात्रा में उपस्थित हो तो अभिक्रिया की दर इस पर निर्भर नहीं करेगी इसलिए अभिक्रिया की सम्पूर्ण कोटि 2 + 0 = 2 होगी।

(b) प्रथम कोटि अभिक्रिया के 50% पूर्ण होने में लगा समय अर्थात्
अर्धायु
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
या k = \(\frac{0.693}{t_{\frac{1}{2}}}\) \(\frac{0.693}{23.1 \mathrm{~min}}\)
= 0.03 = 3 × 10-2 min-1
अतः अभिक्रिया के 75% पूर्ण {[R] = 0.25} होने में लगा समय-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{\left[\mathrm{R}_0\right]}{[\mathrm{R}]}\)
t = \(\frac{2.303}{3 \times 10^{-2}}\)log\(\frac{1}{0.25}\) = \(\frac{2.303}{0.03}\)log 4
t = \(\frac { 2.303 }{ 0.03 }\)(0.6021) = 46.2 मिनट

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Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 पृष्ठ रसायन Important Questions and Answers.

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बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. कोलॉइडी सॉल होता है-
(अ) वास्तविक विलयन
(ब) निलम्बन
(स) विषमांगी सॉल
(द) समांगी सॉल
उत्तर:
(स) विषमांगी सॉल

2. निम्नलिखित में से किस गैस का सक्रियित चारकोल पर अधिशोषण सुगमता से होगा?
(अ) SO2
(ब) O2
(स) N2
(द) H2
उत्तर:
(अ) SO2

3. दूध, निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
(अ) पायस (इमल्शन )
(ब) निलम्बन
(स) सॉल
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) पायस (इमल्शन )

4. निम्नलिखित में से किस धातु का सॉल नहीं बनाया जा सकता?
(अ) Au
(ब) Pt
(स) Cu
(द) K
उत्तर:
(द) K

5. कोहरा निम्नलिखित में से किसका कोलॉइड है-
(अ) द्रव में परिक्षिप्त ठोस
(ब) गैस में परिक्षिप्त द्रव
(स) द्रव में परिक्षिप्त गैस
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) गैस में परिक्षिप्त द्रव

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6. log \(\frac { x }{ m }\) तथा log p के मध्य ग्राफ खींचने पर सीधी रेखा प्राप्त होती है जिसका ढाल किसके तुल्य होगा-
(अ) n
(ब) log k
(स) 1/n
(द) k
उत्तर:
(स) 1/n

7. किसी ऋणावेशित कोलॉइड के स्कंदन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त लवण है-
(अ) Na3PO4
(ब) K4[Fe(CN)6]
(स) AlCl3
(द) ZnSO4
उत्तर:
(स) AlCl3

8. निम्नलिखित में से किसका सॉल जलविरोधी है?
(अ) स्टार्च
(ब) गोंद
(स) प्रोटीन
(द) आसनियस सल्फाइड
उत्तर:
(द) आसनियस सल्फाइड

9. किसी आयन की कोलॉइड को स्कन्दित करने की क्षमता निर्भर करती है-
(अ) आयन के आकार पर
(ब) आयन के आवेश पर
(स) ताप पर
(द) आयन की मात्रा तथा आवेश पर
उत्तर:
(द) आयन की मात्रा तथा आवेश पर

10. अधिशोषण सिद्धान्त, निम्नलिखित में से किस प्रकार के उत्प्रेरण की व्याख्या करता है?
(अ) समांगी उत्प्रेरण
(ब) एन्जाइम उत्प्रेरण
(स) अम्ल-क्षार उत्प्रेरण
(द) विषमांगी उत्प्रेरण
उत्तर:
(द) विषमांगी उत्प्रेरण

11. निम्नलिखित में कौनसा कोलॉइड का उदाहरण नहीं है?
(अ) तेल तथा जल का मिश्रण
(ब) दूध तथा पानी
(स) साधारण जल
(द) पनीर
उत्तर:
(स) साधारण जल

12. कोलॉइड को आवेशविहीन करके अवक्षेपित करना कहलाता है-
(अ) अपोहन
(ब) स्कन्दन
(स) पायसीकरण
(द) परिरक्षण
उत्तर:
(ब) स्कन्दन

13. स्टार्च के माल्टोस में परिवर्तन हेतु उपयुक्त एन्जाइम है-
(अ) माल्टेज
(ब) डायस्टेज
(स) जाइमेज
(द) इन्वर्टेज
उत्तर:
(ब) डायस्टेज

14. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ अच्छा अधिशोषक है?
(अ) चारकोल
(ब) सिलिका जेल
(स) ऐलुमिना जेल
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

15. ताप बढ़ाने पर भौतिक अधिशोषण-
(अ) बढ़ता है
(ब) घटता है
(स) स्थिर रहता है
(द) कभी बढ़ता है, कभी घटता है
उत्तर:
(ब) घटता है

16. निम्नलिखित में से किस एन्जाइम का स्रोत यीस्ट (खमीर) नहीं है?
(अ) इन्वर्टेज
(ब) जाइमेज
(स) माल्टेज
(द) यूरिएज
उत्तर:
(द) यूरिएज

17. वृहदाण्विक कोलॉइड का उदाहरण निम्नलिखित में से कौनसा नहीं है?
(अ) संश्लेषित रबर
(ब) सल्फर सॉल
(स) स्टार्च
(द) एन्जाइम
उत्तर:
(ब) सल्फर सॉल

18. ऋणावेशित सॉल का उदाहरण है-
(अ) हिमोग्लोबिन
(ब) गोल्ड सॉल
(स) Al2O3 . x H2O
(द) TiO2 सॉल
उत्तर:
(ब) गोल्ड सॉल

19. निम्नलिखित में से कौनसा कोलॉइड का उदाहरण है-
(अ) पेंट
(ब) स्याही
(स) रबर
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

20. समान सांद्रता पर कोलॉइडी विलयन के अणुसंख्यक गुणों का मान, वास्तविक विलयन की तुलना में-
(अ) कम होता है।
(ब) अधिक होता है।
(स) समान होता है।
(द) कभी कम तथा कभी अधिक होता है।
उत्तर:
(अ) कम होता है।

21. As2S3 के कोलॉइडी विलयन के स्कन्दन में निम्नलिखित में से किसका स्कन्दन मान न्यूनतम होगा-
(अ) BaCl2
(ब) KCl
(स) AlCl3
(द) NaCl
उत्तर:
(स) AlCl3

22. रक्षी कोलॉइडों A, B, C तथा D की स्वर्ण संख्या क्रमशः 0.5, 0.01 0.10 तथा 0.005 है तो इनकी रक्षण क्षमता का सही क्रम
(अ) B < D < A < C
(ब) C < B < D < A
(स) D < A < C < B
(द) A < C < B < D
उत्तर:
(द) A < C < B < D

23. निम्नलिखित में से जेल का उदाहरण है-
(अ) पनीर
(ब) कुहरा
(स) साबुन
(द) दूध
उत्तर:
(अ) पनीर

24. अधिशोषण प्रक्रम में किसका मान ऋणात्मक (शून्य से कम) होता है?
(अ) △H
(ब) △S
(स) △G
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

25. उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है-
(अ) सक्रियण ऊर्जा घटाकर
(ब) अभिकारकों से क्रिया करके
(स) उत्पादों से क्रिया करके
(द) सक्रियण ऊर्जा बढ़ाकर
उत्तर:
(अ) सक्रियण ऊर्जा घटाकर

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26. सल्फर (गन्धक) के सॉल में होते हैं-
(अ) विविक्त सल्फर अणु
(ब) ठोस सल्फर में परिक्षिप्त जल
(स) सल्फर अणुओं के बड़े समूह
(द) विविक्त सल्फर परमाणु
उत्तर:
(स) सल्फर अणुओं के बड़े समूह

27. फिटकरी द्वारा जल का शोधन होता है-
(अ) अपोहन से
(ब) अधिशोषण से
(स) स्कन्दन से
(द) अवशोषण से
उत्तर:
(स) स्कन्दन से

28. कृत्रिम वर्षा निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है-
(अ) स्कन्दन
(ब) अपोहन
(स) वैद्युतकणसंचलन
(द) पेप्टीकरण
उत्तर:
(अ) स्कन्दन

29. मानव शरीर में वृक्क (Kidney) द्वारा रक्त का शोधन है-
(अ) स्कन्दन
(ब) अपोहन
(स) वैद्युत परासरण
(द) वैद्युतकणसंचलन
उत्तर:
(ब) अपोहन

30. विभिन्न विधियों से प्राप्त गोल्ड सॉल का रंग भिन्न-भिन्न होने का कारण है-
(अ) भिन्न सान्द्रण
(ब) कणों का भिन्न-भिन्न आकार
(स) भिन्न अशुद्धियाँ
(द) भिन्न संयोजकता
उत्तर:
(ब) कणों का भिन्न-भिन्न आकार

31. स्वर्णांक मापक है-
(अ) रक्षी कोलॉइड की रक्षण क्षमता का
(ब) स्वर्ण की शुद्धता का
(स) धात्विक स्वर्ण का
(द) विद्युत लेपित स्वर्ण का
उत्तर:
(अ) रक्षी कोलॉइड की रक्षण क्षमता का

32. निम्नलिखित में से कौनसा मिलान अशुद्ध है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 1
उत्तर:
(द)

33. फेरिक क्लोराइड का प्रयोग कटने के कारण होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है, क्योंकि
(अ) Fe3+ आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक ऋणावेशित सॉल है।
(ब) Fe3+ आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक धनावेशित सॉल है।
(स) Cl आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि धनावेशित सॉल है।
(द) Cl आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक ऋणावेशित सॉल है।
उत्तर:
(अ) Fe3+ आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक ऋणावेशित सॉल है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
अधिशोषण एक सतही घटना है, क्यों?
उत्तर:
ठोस या द्रव की सतह पर मुक्त संयोजकताएँ पाई जाती हैं। अतः अधिशोषण सतह पर ही होता है अतः यह एक सतही घटना है।

प्रश्न 2.
अवशोषण को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
वह प्रक्रिया जिसमें एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ में प्रवेश करके समान रूप से वितरित हो जाते हैं, उसे अधिशोषण कहते हैं।

प्रश्न 3.
शर्करा के विलयन को रंगहीन करने के लिए कौनसा अधिशोषक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
शर्करा विलयन को रंगहीन करने के लिए जान्तव चारकोल प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 4.
Pd, Pt, Au तथा Ni की अधिशोषण क्षमता का घटता क्रम बताइए।
उत्तर:
इन धातुओं की अधिशोषण का क्षमता क्रम निम्न प्रकार होता है Pd > Pt > Au > Ni

प्रश्न 5.
दो अधिशोषण सूचकों के नाम बताइए।
उत्तर:
ईओसीन तथा फ्लुओरेसीन अधिशोषण सूचक का कार्य करते हैं।

प्रश्न 6.
रासायनिक अधिशोषण पर ताप का प्रभाव बताइए ।
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण पहले बढ़ता है फिर कम होता है।

प्रश्न 7.
अधिशोषण समतापी क्या होता है?
उत्तर:
निश्चित ताप पर अधिशोषित गैस की मात्रा तथा साम्यावस्था दाब के मध्य सम्बन्ध को अधिशोषण समतापी कहते हैं।

प्रश्न 8.
समांगी उत्प्रेरण का सिद्धान्त बताइए।
उत्तर:
समांगी उत्प्रेरण, माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त पर कार्य करता है।

प्रश्न 9.
टेट्रा एथिल लैड (C2H5)4Pb का उपयोग क्या है?
उत्तर:
टेट्रा एथिल लैड पेट्रोल की गुणवत्ता बढ़ाकर उसके अपस्फोटन को कम करता है।

प्रश्न 10.
एन्जाइम की कार्यप्रणाली क्या होती है?
उत्तर:
एन्जाइम ताला चाबी सिद्धान्त पर कार्य करता है।

प्रश्न 11.
सहएन्जाइम क्या होते हैं?
उत्तर:
वे अप्रोटीन भाग जो एन्जाइम के साथ जुड़े होते हैं तथा एन्जाइम की सक्रियता में वृद्धि करते हैं, उन्हें सहएन्जाइम कहते हैं। मुख्यतः ये विटामिनों के व्युत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 12.
एन्जाइम की सक्रियता को कम करने वाले विषकारकों (उत्प्रेरक विष) के उदाहरण बताइए।
उत्तर:
CS2 तथा HCN विषकारकों की भाँति कार्य करते हैं।

प्रश्न 13.
पेप्सिन एन्जाइम का कार्य बताइए |
उत्तर:
पेप्सिन एन्जाइम प्रोटीनों को एमीनो अम्लों में परिवर्तित करता है।

प्रश्न 14.
ऐल्कोहॉल को गैसोलीन (पेट्रोल) में परिवर्तित करने वाला उत्प्रेरक कौनसा होता है?
उत्तर:
ZSM-5

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प्रश्न 15.
एन्जाइम के अणुओं का आकार कितना होता है?
उत्तर:
एन्जाइम के अणुओं का आकार 10Å से 1000Å तक होता है।

प्रश्न 16.
सर्वप्रथम उत्प्रेरक शब्द का प्रयोग करने वाले वैज्ञानिक कौन थे?
उत्तर:
बर्जीलियस ने सर्वप्रथम उत्प्रेरक शब्द का प्रयोग किया था।

प्रश्न 17.
उत्प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी उत्प्रेरक द्वारा रासायनिक अभिक्रिया के वेग में वृद्धि करने की क्रिया को उत्प्रेरण कहते हैं।

प्रश्न 18.
वर्धक क्या होते हैं?
उत्तर:
वे पदार्थ जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को बढ़ा देते हैं, उन्हें उत्प्रेरक वर्धक कहते हैं। जैसे NH3 के निर्माण में Mo, Fe की क्रियाशीलता को बढ़ा देता है।

प्रश्न 19.
दो गैसों के मिलाने पर कोलॉइड नहीं बनता, क्यों?
उत्तर:
कोलॉइड विषमांगी तंत्र होता है जबकि गैसें आपस में मिलकर हमेशा समांगी विलयन बनाती हैं अतः दो गैसों को मिलाने पर कोलॉइड नहीं बनता।

प्रश्न 20.
दूध को कोलॉइडी विलयनों की किस श्रेणी में लिया जाता है?
उत्तर:
दूध, जल में तेल श्रेणी का एक पायस है।

प्रश्न 21.
सबसे कम तथा सबसे अधिक स्वणांक वाले द्रव स्नेही कोलॉइडों का नाम बताइए।
उत्तर:
जिलेटिन का स्वर्णाक सबसे कम (0.005) तथा आलू के स्टार्च का स्वणांक सबसे अधिक (25) होता है।

प्रश्न 22.
द्रव स्नेही सॉल, द्रव विरोधी सॉल की तुलना में अधिक स्थायी होता है, क्यों?
उत्तर:
द्रव स्नेही सॉल के अधिक स्थायित्व का कारण उनके कणों का जलयोजन (विलायकन) है।

प्रश्न 23.
कैसियस का पर्पल क्या होता है?
उत्तर:
गोल्ड के कोलॉइडी विलयन को कैसियस का पर्पल कहते हैं।

प्रश्न 24.
निम्नलिखित को किस प्रकार के कोलॉइड में वर्गीकृत किया जाएगा?
(i) साबुन का सान्द्र विलयन
(ii) जल में अण्डे का सफेद भाग ।
उत्तर:
(i) सहचारी कोलॉइड
(ii) वृहदाण्विक कोलॉइड (प्रोटीन) ।

प्रश्न 25.
कालाजार बुखार के इलाज के लिए प्रयुक्त कोलॉइड बताइए ।
उत्तर:
कोलॉइडी ऐण्टीमनी को कालाजार बुखार के इलाज के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 26.
फोटोग्राफी में जिलेटिन का क्या कार्य है?
उत्तर:
फोटोग्राफी में जिलेटिन रक्षी कोलॉइड का कार्य करता है।

प्रश्न 27.
दो नदियों के मिलने पर डेल्टा नहीं बनता, क्यों?
उत्तर:
दो नदियों में उपस्थित कोलॉइडी कणों पर समान आवेश होने के कारण, उनका स्कन्दन नहीं होता अतः डेल्टा नहीं बनता।

प्रश्न 28.
कोलॉइडों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन का कारण बताइए।
उत्तर:
कोलॉइडों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन ( टिन्डल प्रभाव ) का कारण परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम के अपवर्तनांक में अन्तर है।

प्रश्न 29.
उत्प्रेरक किस प्रकार कार्य करते हैं?
उत्तर:
उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम करके उसे एक नया पथ प्रदान करते हैं जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

प्रश्न 30.
एन्जाइम तथा अकार्बनिक उत्प्रेरक में एक अन्तर बताइए ।
उत्तर:
एन्जाइम उच्च अणुभार युक्त जटिल प्रोटीन होते हैं जबकि अकार्बनिक उत्प्रेरक सरल अणु या आयन होते हैं।

प्रश्न 31.
ब्राउनी गति किस सिद्धान्त के पक्ष में प्रायोगिक प्रमाण प्रस्तुत करती है?
उत्तर:
गैसों का अणुगति सिद्धान्त ।

प्रश्न 32.
भौतिक अधिशोषण बहुपरतीय होता है जबकि रासायनिक अधिशोषण एकपरतीय क्यों?
उत्तर:
भौतिक अधिशोषण के बहुपरतीय होने का कारण वान्डरवाल बल है जबकि रासायनिक अधिशोषण के एकपरतीय होने का कारण रासायनिक बन्ध का बनना है।

प्रश्न 33.
अधिशोषक का विशिष्ट क्षेत्रफल क्या होता है?
उत्तर:
किसी अधिशोषक के प्रतिग्राम पृष्ठ क्षेत्रफल को उसका विशिष्ट क्षेत्रफल कहते हैं।

प्रश्न 34.
नमी को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त दो अधिशोषक बताइए।
उत्तर:
सिलिका जेल तथा ऐलुमिना जेल।

प्रश्न 35.
जल की कठोरता को दूर करने के लिए प्रयुक्त अधिशोषक कौनसा होता है?
उत्तर:
जिओलाइट।

प्रश्न 36.
एन्जाइम उत्प्रेरण समांगी होता है या विषमांगी ।
उत्तर:
एन्जाइम उत्प्रेरण विषमांगी होता है।

प्रश्न 37.
उस अभिक्रिया का समीकरण लिखिए जो माइकोडर्मा एसीटि एन्जाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
उत्तर:
माइकोडर्मा एसीटि
C2H5OH + O2 → CH3COOH + H2O

प्रश्न 38.
समान रंग के कोलाइड तथा वास्तविक विलयन में कैसे अन्तर करेंगे?
उत्तर:
टिन्डल प्रभाव द्वारा, क्योंकि वास्तविक विलयन में टिन्डल प्रभाव नहीं होता।

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
ठोसों पर गैसों के अधिशोषण के प्रकार बताइए।
उत्तर:
ठोसों पर गैसों के अधिशोषण को, अधिशोष्य तथा अधिशोषक के अणुओं के मध्य आकर्षण बलों के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है-
(a) भौतिक अधिशोषण
(b) रासायनिक अधिशोषण या रसोवशोषण

(a) भौतिक अधिशोषण (Physical Adsorpiton or Physiorption) या वान्डरवाल अधिशोषण (Vanderwal Adsorption) – किसी ठोस की सतह पर जब गैस का अधिशोषण वान्डरवाल बलों के कारण होता है तो इसे भौतिक अधिशोषण कहते हैं। दुर्बल वान्डरवाल बलों के कारण ताप बढ़ाने से या दाब कम करने से इसे आसानी से कम किया जा सकता है। भौतिक अधिशोषण में अधिशोष्य तथा अधिशोषक के मध्य किसी प्रकार के रासायनिक बन्ध का निर्माण नहीं होता।

रासायनिक अधिशोषण या लेग्मूर अधिशोषण (Chemisorption or Chemical Adsorption or Langmuir Adsorption)-जब किसी ठोस की सतह पर गैस के अधिशोषण में रासायनिक बन्ध बनते हैं तो इसे रासायनिक अधिशोषण कहते हैं। ये रासायनिक बन्ध आयनिक या सहसंयोजक हो सकते हैं, लेकिन प्रायः यह बन्ध सहसंयोजक होता है। रासायनिक अधिशोषण की सक्रियण ऊर्जा उच्च होती है अतः इसे सक्रियत अधिशोषण (activated adsorption) भी कहते हैं।

भौतिक एवं रासायनिक अधिशोषण साथ-साथ भी हो सकते हैं। तब निम्न ताप पर होने वाला भौतिक अधिशोषण, ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण, H2 गैस पहले Ni की सतह पर वान्डरवाल बलों के द्वारा अधिशोषित होती है। उसके बाद हाइड्रोजन के अणु, परमाणुओं में वियोजित होकर रासायनिक अधिशोषण द्वारा निकल की सतह पर बंध जाते हैं, क्योंकि उच्च ताप पर अभिकारकों को सक्रियण ऊर्जा प्राप्त हो जाती है।

रासायनिक अधिशोषण में अधिशोषक की सतह पर उत्पाद बनता है, अतः विशोषण के समय उत्पाद का ही विशोषण होता है। जैसे कार्बन की सतह पर O2 के अधिशोषण से CO तथा CO2 बनती है तथा इन्हीं CO तथा CO2 का विशोषण होता है।

प्रश्न 2.
रासायनिक अधिशोषण के मुख्य अभिलक्षण बताइए।
उत्तर:
रासायनिक अधिशोषण या लेग्मूर अधिशोषण (Chemisorption or Chemical Adsorption or Langmuir Adsorption)-जब किसी ठोस की सतह पर गैस के अधिशोषण में रासायनिक बन्ध बनते हैं तो इसे रासायनिक अधिशोषण कहते हैं। ये रासायनिक बन्ध आयनिक या सहसंयोजक हो सकते हैं, लेकिन प्रायः यह बन्ध सहसंयोजक होता है। रासायनिक अधिशोषण की सक्रियण ऊर्जा उच्च होती है अतः इसे सक्रियत अधिशोषण (activated adsorption) भी कहते हैं।

भौतिक एवं रासायनिक अधिशोषण साथ-साथ भी हो सकते हैं। तब निम्न ताप पर होने वाला भौतिक अधिशोषण, ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण, H2 गैस पहले Ni की सतह पर वान्डरवाल बलों के द्वारा अधिशोषित होती है। उसके बाद हाइड्रोजन के अणु, परमाणुओं में वियोजित होकर रासायनिक अधिशोषण द्वारा निकल की सतह पर बंध जाते हैं, क्योंकि उच्च ताप पर अभिकारकों को सक्रियण ऊर्जा प्राप्त हो जाती है।

रासायनिक अधिशोषण में अधिशोषक की सतह पर उत्पाद बनता है, अतः विशोषण के समय उत्पाद का ही विशोषण होता है। जैसे कार्बन की सतह पर O2 के अधिशोषण से CO तथा CO2 बनती है तथा इन्हीं CO तथा CO2 का विशोषण होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 पृष्ठ रसायन

प्रश्न 3.
भौतिक अधिशोषण तथा रासायनिक अधिशोषण की तुलना कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 2

प्रश्न 4.
(a) नारियल चारकोल द्वारा अक्रिय गैसों का पृथक्करण किस प्रकार किया जाता है? समझाइए।
(b) अधिधारण किसे कहते हैं?
उत्तर:
(a) अक्रिय गैसों के मिश्रण को नारियल चारकोल पर प्रवाहित करके इन्हें पृथक किया जाता है क्योंकि इस चारकोल की अधिशोषण क्षमता भिन्न-भिन्न गैसों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। यह अधिशोषण भिन्नभिन्न तापों पर किया जाता है।
(b) किसी धातु के द्वारा हाइड्रोजन गैस के अधिशोषण को अधिधारण (Occlusion) कहते हैं।

प्रश्न 5.
एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
(i) स्टार्च का माल्टोस में परिवर्तन-डायस्टेज एन्जाइम स्टार्च को माल्टोस में परिवर्तित कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 3
(ii) माल्टोस का ग्लूकोस में परिवर्तन-माल्टेज एन्जाइम माल्टोस को ग्लूकोज में बदल देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 4
(iii) यूरिया का अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड में अपघटन-यह अपघटन यूरिएज एन्जाइम द्वारा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 5

प्रश्न 6.
निम्नलिखित एन्जाइमों द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रियाएँ लिखिए-
(i) इन्वर्टेस
(ii) जाइमेज
(iii) पेप्सिन
(iv) ट्रिप्सिन
(v) लैक्टोबैसिलस।
उत्तर:
(i) इन्बर्टेस एन्जाइम इक्षु शर्करा (सूक्रोस) को ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में परिवर्तित कर देता है। इसे शर्करा का प्रतीपन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 6
(ii) जाइमेज एन्जाइम से ग्लूकोस, ऐथिल ऐल्कोहॉल एवं कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 7
यहाँ ग्लूकोस का किण्वन हो रहा है।
(iii) पेप्सिन एन्जाइम, आमाशय में प्रोटीनों को पेप्टाइडों में परिवर्तित
(iv) ट्रिप्सिन एन्जाइम आँत में प्रोटीनों को ऐमीनो अम्लों में परिवर्तित करता है।
(v) लेक्टोबैसिलस द्वारा दुग्ध का दही में परिवर्तन होता है।

प्रश्न 7.
स्वः उत्प्रेरक क्या होता है ? समझाइए।
उत्तर:
समांगी उत्प्रेरण- किसी अभिक्रिया में जब अभिकारकों तथा उत्प्रेरकों की भौतिक अवस्था समान (द्रव या गैस) होती है तो इसे समांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण:
(i) सीस कक्ष विधि (लेड चेंबर प्रक्रम) में नाइट्रिक ऑक्साइड उत्प्रेक की उपस्थिति में, सल्फर डाइऑक्साइड की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया द्वारा सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 8
(ii) शर्करा का जल अपघटन, सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा प्राप्त H+ आयनों द्वारा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 9
(iii) NO की उपस्थिति में CO का CO2 में ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 10
(iv) HCl द्वारा प्राप्त H+ आयनों की उपस्थिति में मेथिल ऐसीटेट का जल अपघटन-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 11

प्रश्न 8.
कोलॉइडी विलयनों के अणुसंख्यक गुण वास्तविक विलयनों से कम होते हैं, क्यों?
उत्तर:
अणुसंख्य गुण, कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं। कोलॉइडी कण बड़े पुंज या समूह के रूप में होते हैं अतः क्रोलॉइडी विलयन हैं में कणों की संख्या वास्तविक विलयन की अपेक्षा कम होती है। अतः समान सान्द्रता पर इसके अणुसंख्य गुणों (परासरण दाब, वाष्पदाब अवनमन, हिमांक अवनमन, क्वथनांक उन्नयन आदि) के मान वास्तविक विलयन से कम होते हैं।

प्रश्न 9
रक्षी कोलॉइड क्या होते हैं? इनसे द्रव विरोधी कोलॉइडों का रक्षण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
कोलॉइडी विलयनों के गुण:
कोलॉइडी विलयनों के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं-

  • विषमांगी प्रकृति – कोलॉइडी विलयन विषमांगी होता है, जिसमें दो घटक परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था होते हैं।
  • निस्यन्दता – कोलॉइडी विलयन के कण साधारण फिल्टर पत्र से छन जाते हैं लेकिन जान्तव झिल्ली या चर्म पत्र से नहीं छनते।
  • सतही क्षेत्रफल – कोलॉइड में उपस्थित कोलाँइडी कणों का सतही क्षेत्रफल बहुत अधिक होता है अतः कोलॉइड अच्छे अधिशोषक तथा प्रभावी उत्प्रेरक होते हैं।
  • स्थायित्व – द्रवस्नेही कोलॉइड, द्रव विरोधी कोलॉइड की तुलना में अधिक स्थायी होते हैं।

प्रश्न 10.
(a) वैद्युत परासरण किसे कहते हैं?
(b) निम्नलिखित सॉलों में से धनावेशित तथा ऋणावेशित सॉलों को वर्गीकृत कीजिए-
Sh2S3 सॉल, सिल्वर सॉल, इओसिन रंजक, जिलेटिन, हिमोग्लोबिन, TiO2 सॉल।
उत्तर:
(a) वैद्युत परासरण जब किसी उपयुक्त विधि द्वारा वैद्युतकणसंचलन अर्थात् कोलॉइडी कणों की गति को रोका जाता है तो विद्युत क्षेत्र द्वारा परिक्षेपण माध्यम गति करना प्रारम्भ कर देता है। इस प्रक्रम को वैद्युत परासरण कहते हैं।
(b) धनावेशित सॉल – हिमोग्लोबिन (रक्त) TiO2 सॉल
ऋणावेशित सॉल – Sb2S3 सॉल, सिल्लर सॉल, इओसिन रंजक, जिलेटिन।

प्रश्न 11.
(a) स्वर्णांक क्या होता है? समझाइए।
(b) खतरे के संकेत हमेशा लाल रंग के ही बनाए जाते हैं, नीले रंग के नहीं, क्यों?
उत्तर:
(a) स्वणांक से द्रव स्नेही सॉल (रक्षक कोलॉइड) की रक्षण क्षमता को व्यक्त किया जाता है। स्वर्णक, रक्षक कोलॉइड की मिलीग्राम में वह न्यूनतम मात्रा है, जो NaCl के 10 प्रतिशत विलयन के एक मिली आयतन को 10 मिली मानक गोल्ड सॉल में मिलाने पर उसके स्कन्दन को रोकने के लिए पर्याप्त होती है।

(b) लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम होता है जिससे खतरे का संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जबकि नीले रंग का प्रकीर्णन अधिक होने के कारण संकेत फैला हुआ दिखाई देता है जो कि स्पष्ट नहीं होता । अतः खतरे के संकेत हमेशा लाल रंग के ही बनाए जाते हैं।

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प्रश्न 12.
उद्योगों में मिलों की चिमनियों में कॉट्रेल अवक्षेपक का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
कोलॉइडों के अनुप्रयोग – कोलॉइडों के महत्वपूर्ण औद्योगिक अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं-

(i) चर्मशोधन – पशुओं की खाल कोलॉइडी प्रकृति की होती है जिस पर धनात्मक आवेशित कण होते हैं। इसे टेनिन में भिगोया जाता है, जिसमें ऋणावेशित कोलॉइडी कण होते हैं, जिनसे पारस्परिक स्कंदन हो जाता है। इससे चमड़ा कठोर हो जाता है तथा इस प्रक्रिया को चर्मशोधन कहते हैं। टेनिन के स्थान पर क्रोमियम लवणों का उपयोग भी चर्मशोधन में किया जाता है।

(ii) धूम्र का विद्युतीय अवक्षेपण – धूम्र, कार्बन, आर्सेनिक यौगिकों, धूल आदि ठोस कणों
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का वायु में कोलॉइडी विलयन होता है। उद्योगों में चिमनी के बाहर आने से पहले धुएँ को इसके कणों से विपरीत आवेशित इलैक्ट्रोडों के कक्ष में से गुजारा जाता है। कण इन प्लेटों के संपर्क में आने पर अपना आवेश खोकर अवक्षेपित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त कण कक्ष के फर्श पर बैठ जाते हैं। इस अवक्षेपक को कॉट्रेल अवक्षेपक कहते हैं।

(iii) पेयजल का शुद्धिकरण – प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त जल में प्रायः अशुद्धियाँ मिली होती हैं। ऐसे जल से अशुद्धियों को स्कंदित करने के लिए फिटकरी मिलाई जाती है जिससे जल पीने योग्य हो जाता है।

(iv) औषधियाँ – अधिकांश औषधियाँ कोलॉइडी प्रकृति की होती हैं। उदाहरणार्थ, आँखों का लोशन आर्जिरॉल, एक सिल्वर सॉल है। कोलॉइडी एन्टिमनी का उपयोग कालाजार के इलाज में होता है। कोलॉइडी गोल्ड का उपयोग अन्तःपेशी इन्जेक्शन में होता है। दूधिया मैग्नीशिया (पायस) का उपयोग पेट की बीमारियों में किया जाता है। कोलॉइडी औषधियों का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होने के कारण, इनका स्वांगीकरण आसानी से होता है अतः ये अधिक प्रभावी होती हैं।

(v) फोटोग्राफी प्लेटें एवं फिल्में – जिलेटिन में प्रकाश संवेदी सिल्वर ब्रोमाइड के इमल्शन का ग्लास प्लेटों या सेलुलॉइड फिल्मों पर लेपन करके फोटोग्राफी की प्लेटें या फिल्म बनायी जाती हैं।

(vi) रबर उद्योग – लेटेक्स, रबर के ऋणात्मक आवेशित कणों का कोलॉइडी विलयन होता है। अतः रबर को लेटेक्स के स्कंदन से बनाया जाता है।

(vii) औद्योगिक उत्पाद – पेंट, स्याही, संश्लेषित प्लास्टिक, रबर, ग्रेफाइट, स्नेहक, सीमेन्ट आदि सभी पदार्थ कोलॉइड हैं।

(vii) औद्योगिक उत्पाद – पेंट, स्याही, संश्लेषित प्लास्टिक, रबर, ग्रेफाइट, स्नेहक, सीमेन्ट आदि सभी पदार्थ कोलॉइड हैं।

(viii) साबुन की शोधन क्रिया – साबुन की शोधन क्रिया में मिसेल का निर्माण होता है। इसकी व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है। हम पढ़ चुके हैं कि मिसेल निर्माण में जलविरोधी हाइड्रोकार्बन का एक केन्द्रीय कोड (भाग) होता है। शोधन क्रिया में साबुन के अणु तेल या चिकनाई की बूँदों के चारों ओर इस प्रकार मिसेल बनाते हैं कि स्टिऐरेट आयन (साबुन) का जलविरोधी भाग तेल की बूँदों के अंदर होता है एवं जल-स्नेही भाग चिकनाई की बूँदों के बाहर निकला रहता है।

(ix) वहित मल या अवशिष्ट का विसर्जन – नालियों में बहने वाले गन्दे जल में मल तथा मिट्टी के कण ऋणावेशित कोलॉइड के रूप में होते हैं, इसे शहर के बाहर बड़े-बड़े कुण्डों में लगे इलेक्ट्रोडों पर से प्रवाहित किया जाता है तो गन्दगी के कोलॉइडी कण अवक्षेपित होकर पृथक् हो जाते हैं, जिसे खाद के रूप में तथा जल को सिंचाई के लिए प्रयुक्त करते हैं। इस प्रकार के संयंत्रों को अवशिष्ट निस्तारण संयंत्र (Sewage Treatment Plant) कहते हैं।

प्रश्न 13.
(a) आइसक्रीम में जिलेटिन मिलाया जाता है, क्यों?
(b) गोंद तथा जिलेटिन का स्वर्णांक 0.10 तथा 0.005 है। इनमें से किसकी रक्षण क्षमता अधिक है तथा क्यों ?
उत्तर:
(a) आइसक्रीम में जिलेटिन मिलाने से इसमें उपस्थित दूध, . शर्करा तथा बर्फ का स्कन्दन नहीं होता है।
(b) गोंद तथा जिलेटिन में से जिलेटिन की रक्षण क्षमता अधिक है। क्योंकि जिस रक्षी कोलॉइड का स्वर्णाक कम होता है, उसकी रक्षण क्षमता अधिक होती है।

प्रश्न 14.
फाउण्टेन पेन की स्याही क्यों नहीं चिपकती है? कारण बताइए।
उत्तर:
स्याही बनाते समय इसमें काजल के साथ गोंद मिलाया जाता है जो कि रक्षी कोलॉइड है। यह स्याही को स्कन्दित होने से रोकता है अर्थात् उसको स्थायित्व प्रदान करता है। स्याही का स्कन्दन नहीं होने के कारण उसमें चिपचिपाहट नहीं होती अतः फाउण्टेन पेन की स्याही नहीं चिपकती।

प्रश्न 15.
सॉल, जेल तथा पायस में विभेद तथा उदाहरणों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 13

प्रश्न 16. बादलों से कृत्रिम वर्षा किस प्रकार की जाती है? समझाइए।
उत्तर:
बादल, कोलॉइडी अवस्था में होते हैं, जिसमें वायु में जल के कण परिक्षिप्त रहते हैं। इनके ऊपर विपरीत आवेशयुक्त लवण का छिड़काव करने से बादल में उपस्थित कोलॉइडी कणों का आवेश समाप्त हो जाता है, जिससे उनका स्कंदन होकर पानी की बूँदों (वर्षा) के रूप में नीचे आ जाते हैं, इसे कृत्रिम वर्षा कहते हैं।

प्रश्न 17.
सूजी का हलवा बनाते समय उसमें गोंद मिलाने पर क्या प्रभाव होता है तथा क्यों?
उत्तर:
सूजी का हलवा एक प्रकार का कोलॉइड (जेल) होता है जिसमें सूजी में पानी कण परिक्षिप्त होते हैं। गोंद रक्षी कोलॉइड होता है जिसे मिलाने पर हलवे को स्थायित्व प्राप्त होता है जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है एवं काफी समय तक नर्म बना रहता है।

प्रश्न 18.
सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है। क्यों ?
उत्तर:
सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज की ओर होता है अतः सूर्य से निकलने वाले प्रकाश की किरणें वायुमण्डल में लम्बी दूरी तय करती हैं। इसलिए वायु में उपस्थित धूल के कण प्रकाश के नीले भाग का प्रकीर्णन कर देते हैं अतः शेष भाग लाल दिखाई देता है।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का वर्णन कीजिए-
(i) टिन्डल प्रभाव
(ii) आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण।
उत्तर:
(i) टिन्डल प्रभाव (Tyndal effect) – जब अंधेरे में रखा एक समांगी विलयन, प्रकाश की दिशा से देखा जाता है, तो यह स्वच्छ दिखाई देता है तथा यदि इसे प्रकाश किरण पुंज की दिशा के लंबवत् देखा जाता है तो यह पूर्णतया अदीप्त (Perfect dark) दिखाई देता है। कोलॉइडी विलयन को भी इसी प्रकार से पारगमन प्रकाश (Transmitted light) द्वारा देखने पर पर्याप्त स्वच्छ या पारदर्शी दिखाई देते हैं परन्तु इसे प्रकाश के पथ की दिशा से लम्बवत् देखने पर वह मंद से प्रबल दूधियापन दर्शाता है।

अर्थात् प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं तथा प्रकाश का चमकीला शंकु (Cone), टिन्डल शंकु कहलाता है। इस प्रभाव को सर्वप्रथम फैराडे ने प्रेक्षित किया था अतः इसे फैराडे टिन्डल प्रभाव भी कहते हैं।
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(ii) आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण-वह उत्प्रेरकी अभिक्रिया जो उत्प्रेरक की रन्द्र संरचना (Pore structure) तथा अभिकारक एवं उत्पाद अणुओं के आकार पर निर्भर करती है उसे आकार वरणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं। मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के कारण जिओलाइट अच्छे आकृति-वरणात्मक उत्त्रेरक होते हैं। ये त्रिविमीय नेटवर्क वाले तथा सूक्ष्मरंध्री होते हैं। जिओलाइटों में होने वाली अभिक्रियाएँ जिओलाइटों के संरंध्रों एवं कोटरों (cavities) पर भी निर्भर करती हैं। जिओलाइट प्रकृति में उपलब्ध होते हैं तथा उत्प्रेरक वरणात्मकता के लिए इनका संश्लेषण भी किया जाता है।

जिओलाइटों के उपयोग-

  • जिओलाइट, पेट्रोरसायन उद्योग में हाइड्रोकार्बनों के भंजन (cracking) तथा समावयवीकरण (Isomerisation) में उत्प्रेरक की भाँति प्रयुक्त किए जाते हैं। इससे ईंधन की गुणवत्ता बढ़ती है।
  • ZSM-5 (एक जिओलाइट) ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण करके हाइड्रोकार्बन का मिश्रण बनाता है और यह उन्हें सीधे ही गैसोलीन (पेट्रोल) में परिवर्तित कर देता है।
  • जल योजित सोडियम जिओलाइट, आयन विनिमयक के रूप में कठोर जल को मृदु करने में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 2.
कोलॉइडी विलयन के स्कन्दन से क्या समझा जाता है ? किसी एक विधि का नाम बताइए जिससे द्रव विरोधी सॉल का स्कन्दन किया जा सकता हो ।
देखें।
उत्तर:
कोलॉइडों का स्कंदन या अवक्षेपण – द्रवस्नेही कोलॉइड-द्रवस्नेही कोलॉइडों का स्थायित्व उन पर उपस्थित आवेश तथा कणों के विलायकन (Solvation) के कारण होता है। जब इन दोनों कारकों को हटा दिया जाए तो द्रवरागी सॉल का स्कंदन हो जाता है क्योंकि इसके कण गुरुत्व बल के कारण नीचे बैठ जाते हैं।

इसके लिए वैद्युत अपघट्य या उपयुक्त विलायक मिलाया जाता है। जब द्रवस्नेही सॉल में ऐल्कोहॉल एवं ऐसीटोन आदि विलायक मिलाते हैं तो परिक्षिप्त प्रावस्था का निर्जलीकरण हो जाता है। इस स्थिति में विद्युत अपघट्य की कम मात्रा से भी स्कंदन हो जाता है। अतः कोलॉइडी कणों के स्कंदित होकर नीचे बैठ जाने के प्रक्रम को स्कंदन या अवक्षेपण कहते हैं।

प्रश्न 3.
आकृति आधारित (शेष सेलेक्टिव) उत्प्रेरण का क्या अर्थ होता है?
उत्तर:
ज़िओलाइटों का आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण-
जिओलाइट-जिओलाइट, विभिन्न धातुओं के ऐलुमिनो सिलिकेट होते हैं जिनका सामान्य सूत्र \(\mathrm{M}_{\mathrm{x} / \mathrm{n}}\left[\left(\mathrm{Al}_2 \mathrm{O}_3\right)_{\mathrm{x}}\left(\mathrm{SiO}_2\right)_{\mathrm{y}}\right]_{\mathrm{z}}^{\mathrm{m}} \mathrm{H}_2 \mathrm{O}\) होता है। यहाँ n = धातु आयन पर आवेश।

जिओलाइट में पाए जाने जाने वाले धनायन मुख्यतः Na+, K+, Mg2+ तथा Ca2+ आदि होते हैं। जिओलाइट आकार वरणात्मक उत्प्रेरण में प्रयुक्त होते हैं। इनमें कुछ Si परमाणु Al परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थापित होकर Al-O-Si दाँचे का निर्माण करते हैं।

आकृति वरणात्मक उत्त्रेरण – वह उत्प्रेरकी अभिक्रिया जो उत्प्रेरक की रन्ध्र संरचना (Pore structure) तथा अभिकारक एवं उत्पाद् अणुओं के आकार पर निर्भर करती है उसे आकार वरणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं। मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के कारण जिओलाइट अच्छे आकृति-वरणात्मक उत्प्रेरक होते हैं।

ये त्रिविमीय नेटवर्क वाले तथा सूक्ष्मरंध्री होते हैं। जिओलाइटों में होने वाली अभिक्रियाएँ जिओलाइटों के संरंध्रों एवं कोटरों (cavities) पर भी निर्भर करती हैं। जिओलाइट प्रकृति में उपलब्ध होते हैं तथा उत्प्रेरक वरणात्मकता के लिए इनका संश्लेषण भी किया जाता है।

जिओलाइटों के उपयोग-

  • जिओलाइट, पेट्रोरसायन उद्योग में हाइड्रोकार्बनों के भंजन (cracking) तथा समावयवीकरण (Isomerisation) में उत्प्रेरक की भाँति प्रयुक्त किए जाते हैं। इससे ईंधन की गुणवत्ता बड़ती है।
  • ZSM-5 (एक जिओलाइट) ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण करके हाइड्रोकार्बन का मिश्रण बनाता है और यह उन्हे सीधे ही गैसोलीन (पेट्रोल) में परिवर्तित कर देता है।
  • जल योजित सोडियम जिओलाइट, आयन विनिमयक के रूप में कठोर जल को मुद करने में प्रयुक्त किया जाता है।

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प्रश्न 4.
परिक्षेपण माध्यम जल वाले कोलॉइडों का वर्गीकरण कीजिए । प्रत्येक वर्ग की विशेषता और एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
परिक्षेपण माध्यम जल वाले कोलॉइडों को दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है-
(i) जल स्नेही सॉल (द्रव स्नेही)
(ii) जल विरोधी सॉल (द्रव विरोधी)

विभिन्न प्रकार के कोलॉइडों में से सबसे अधिक उपयोगी एवं प्रचलित कोलॉइड, सॉल (द्रव में ठोस), जेल (ठोस में द्रव) तथा इमल्सन (द्रव में द्रव ) हैं।

सॉलों का वर्गीकरण – परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम के मध्य अन्योन्य क्रिया के आधार पर कोलॉइडी सॉलों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है, द्रवरागी या द्रवस्नेही (विलायक को आकर्षित करने वाले) एवं द्रवविरागी या द्रव विरोधी (विलायक को प्रतिकर्षित करने वाले )। जब परिक्षेपण माध्यम जल होता है तो जलरागी एवं जलविरागी शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

(i) द्रवरागी या द्रवस्ने ही कोलॉइड – द्रवरागी का अर्थ है द्रव को आकर्षित करने वाला। वे कोलॉइड जिन्हें पदार्थों को उचित द्रव (परिक्षेपण माध्यम) में मिलाने से सीधे ही कोलॉइड प्राप्त हो जाते हैं उन्हें द्रवरागी कोलॉइड (सॉल) कहते हैं। जैसे गोंद, जिलेटिन, स्टार्च, रबर इत्यादि। इन्हें उत्क्रमणीय कोलॉइड भी कहते हैं क्योंकि परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था के पृथक् हो जाने के पश्चात् इन्हें पुनः मिश्रित करने पर कोलॉइड बन जाता है। ये स्थायी होते हैं अतः इनका स्कंदन आसानी से नहीं होता।

(ii) द्रवविरागी या द्रव विरोधी कोलॉइड (Lyophobic colloids )-द्रवविरागी का अर्थ है द्रव का विरोध करने वाला अर्थात् द्रव को प्रतिकर्षित करने वाला। परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम को मिश्रित करने से ये कोलॉइड नहीं बनते अतः इन्हें विशेष विधियों से बनाया जाता है। इस प्रकार के कोलॉइडों को द्रवविरोधी कोलॉइड कहते हैं। उदाहरण धातुएँ तथा उनके सल्फाइडों के सॉल।

द्रव विरोधी सॉलों को वैद्युत अपघट्य की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर, गर्म करके या हिलाकर आसानी से अवक्षेपित (स्कंदित) किया जा सकता है इसलिए ये स्थायी नहीं होते अतः एक बार अवक्षेपित होने के बाद, परिक्षेपण माध्यम मिलाने से ये पुनः कोलॉइड नहीं बनाते। अतः इनको अनुत्क्रमणीय कोलॉइड भी कहते हैं। द्रवविरागी सॉल के परिरक्षण के लिए स्थायी कारक आवश्यक होते हैं।

प्रश्न 5.
पेप्टीकरण पद को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी अवक्षेप में वैद्युत अपघट्य की थोड़ी-सी मात्रा मिलाकर, परिक्षेपण माध्यम के साथ हिलाकर कोलॉइडी सॉल बनाने की प्रक्रिया को पेप्टीकरण कहते हैं।

प्रश्न 6.
प्रत्येक के लिए एक-एक उपयुक्त उदाहरण देते हुए, निम्नलिखित पदों की व्याख्या कीजिए-
(i) ऐरोसॉल (Aerosol )
(ii) इमल्शन (Emulsion )
(iii) मिसेल (Micelle )
उत्तर:

  • ऐरोसॉल वह कोलॉइड होता है जिसमें परिक्षेपण माध्यम गैस होती है। उदाहरण-धुआँ (ठोस एरोसॉल) इसमें ठोस के कण गैस में परिक्षिप्त रहते हैं।
  • दो आंशिक मिश्रणीय या अमिश्रणीय द्रवों से मिलकर बने कोलॉइड को इमल्शन कहते हैं। उदाहरण- दूध (द्रव वसा का जल में परिक्षेपण) ।
  • वे पदार्थ जो कम सान्द्रता पर प्रबल वैद्युत अपघट्य के समान व्यवहार करते हैं, लेकिन उच्च सान्द्रताओं पर कोलॉइड की भाँति व्यवहार करते हैं, उन्हें मिसेल कहते हैं। उदाहरण-जल में साबुन ।

प्रश्न 7.
कोलॉइडी विलयन टिण्डल प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। दो कारण दीजिए।
उत्तर:
कोलॉइडी विलयन के कणों का आकार वास्तविक विलयन से अधिक होता है तथा ये प्रकाश को अन्तराल में सभी दिशाओं में प्रकीर्णित करते हैं। प्रकाश का यह प्रकीर्णन कोलॉइडी परिक्षेपण में किरण के पथ को प्रदीप्त करता है। अतः कोलॉइडी विलयन टिण्डल प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 8.
जल विरागी कोलॉइड का स्कन्दन आसानी से हो जाता है। कारण दीजिए।
उत्तर:
जल विरागी कोलॉइड विलायक को प्रतिकर्षित करते हैं तथा अस्थायी होते हैं। इनका स्थायित्व आवेश के कारण होता है। अतः किसी भी प्रकार से आवेश को समाप्त कर देने पर इनके कण एक-दूसरे के पास आकर आसानी से स्कंदित हो जाते हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रक्रियाओं के प्रभाव को दर्शाने के लिए उपयुक्त शब्द दीजिए—
(अ) आर्सेनिक सल्फाइड सॉल में फेरिक हाइड्रोक्साइड सॉल मिलाया जाता है।
(ब) फेरिक हाइड्रोक्साइड के ताजा अवक्षेप में फेरिक क्लोराइड का विलयन मिलाया जाता है।
(स) आर्सेनिक ऑक्साइड के विलयन में H2S गैस प्रवाहित की जाती है।
(द) कोलॉइडी विलयन में प्रकाश पुंज गुजरता है।
उत्तर:
(अ) स्कन्दन (Coagulation)
(ब) पेप्टन या पेप्टीकरण ( Peptisation)
(स) As2S3 का कोलॉइडी विलयन बनता है।
(द) टिण्डल प्रभाव।

प्रश्न 10.
(अ) भौतिक अधिशोषण एवं रासायनिक अधिशोषण में दो अन्तर लिखिए।
(ब) समांगी एवं विषमांगी उत्प्रेरण को परिभाषित कीजिए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
(स) विद्युत अपोहन का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(अ) भौतिक अधिशोषण एवं रासायनिक अधिशोषण में निम्न अन्तर हैं-

  • भौतिक अधिशोषण वान्डरवाल बलों के कारण होता है जबकि रासायनिक अधिशोषण रासायनिक बन्ध बनने के कारण होता है।
  • भौतिक अधिशोषण उत्क्रमणीय होता है जबकि रासायनिक अधिशोषण अनुत्क्रमणीय होता है।

(ब) (i) समांगी उत्प्रेरण किसी अभिक्रिया में जब अभिकारकों एवं उत्प्रेरकों की भौतिक अवस्था समान (द्रव या गैस) होती है तो इसे समांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण:
शर्करा का जल अपघटन, सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा उत्पन्न H+ आयनों से उत्प्रेरित होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 15

(ii) विषमांगी उत्प्रेरण – किसी अभिक्रिया में जब अभिकारक एवं उत्प्रेरक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्था में होते हैं तो इसे विषमांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 16

प्रश्न 11.
(अ) द्रवरागी एवं द्रवविरागी कोलॉइडों में दो अन्तर लिखिए।
(ब) यीस्ट में उपस्थित दो एन्जाइमों के नाम दीजिए। इनके द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के समीकरण भी दीजिए।
(स) ब्रेडिंग आर्क विधि का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(अ) (i) द्रवरागी कोलाइड उत्क्रमणीय होते हैं जबकि द्रवविरागी कोलाइड अनुत्क्रमणीय होते हैं।
(ii) द्रवरागी कोलाइड, पदार्थ को उचित परिक्षेपण माध्यम में मिलाने से सीधे ही प्राप्त हो जाते हैं क्योंकि इनमें पदार्थ द्रव को अपनी ओर आकर्षित ‘करता है जबकि द्रवविरागी कोलाइड विशेष विधियों द्वारा बनाए जाते हैं क्योंकि इनमें पदार्थ द्रव का विरोध करता है। रबर का कोलाइड द्रवरागी होता है जबकि धातु सल्फाइडों के कोलाइड द्रवविरागी होते हैं।

(ब) यीस्ट में इन्वर्ट्स तथा जाइमेज एन्जाइम पाए जाते हैं। इनके द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) इन्वर्टेस एन्जाइम इक्षु शर्करा (सूक्रोस) को ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में परिवर्तित कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 17
(ii) जाइमेज एन्जाइम से ग्लूकोस एथिल ऐल्कोहॉल एवं कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 18
(स) ब्रेडिंग आर्क विधि द्वारा कोलाइड बनाने का नामांकित चित्र निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 19

प्रश्न 12.
(i) जब एक प्रकाश किरण पुंज को कोलॉइडी विलयन में गुजारा जाता है, तो क्या होता है ?
(ii) बहु आण्विक कोलॉइड किसे कहते हैं?
उत्तर:
(i) जब एक प्रकाश किरण पुंज को कोलॉइडी विलयन में से गुजारा जाता है तथा इसे प्रकाश किरण पुंज की दिशा में लम्बवत् देखा जाता है तो प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं।

(ii) किसी पदार्थ को घोलने पर उसके बहुत से परमाणु या अणु एकत्रित होकर ऐसी स्पीशीज बनाते हैं जिनका आकार कोलॉइडी सीमा में होता है तो इन्हें बहु आण्विक कोलॉइड कहते हैं। उदाहरण- गोल्ड तथा सल्फर सॉल।

प्रश्न 13.
(i) द्रवस्नेही तथा द्रवविरोधी सॉल के एक-एक उदाहरण बताइए।
(ii) फ्रॉयन्डलिक अधिशोषण समतापी के सन्दर्भ में ठोसों पर गैसों के अधिशोषण के व्यंजक को एक समीकरण के रूप में लिखिए |
(iii) सहचारी कोलॉइड का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • द्रवस्नेही सॉल-गोंद
    द्रवविरोधी सॉल – सिल्वर सॉल
  • अधिशोषित गैस की मात्रा = \(\frac{x}{\mathrm{~m}}=\mathrm{kp}^{\frac{1}{n}}\)
  • साबुन तथा अपमार्जक सहचारी कोलॉइड के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 14.
(अ) सोने का कोलाइडी सॉल बनाने की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
(ब) सॉल एवं जैल में क्या अन्तर है ?
(स) स्कंदन किसे कहते हैं? समझाइए ।
अथवा
(अ) वैद्युत अपघट्य की अतिरिक्त मात्रा की अशुद्धियों वाले कोलाइडी विलयन के शुद्धिकरण की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
(ब) एरोसॉल एवं फोम में क्या अन्तर है?
(स) पेष्टन किसे कहते हैं ? समझाइए ।
उत्तर:
(अ) सोने का कोलाइडी सॉल बनाने के लिए विद्युत परिक्षेपण विधि (ब्रेडिंग आर्क विधि) परिक्षेपण एवं संघनन दोनों ही होते हैं प्रयुक्त की जाती है। इस प्रक्रम में गोल्ड, सिल्वर तथा प्लेटिनम इत्यादि धातुओं के कोलॉइडी सॉल इस विधि से बनाये जाते हैं। इस विधि में परिक्षेपण माध्यम में डूबे हुए धातु के इलैक्ट्रोडों के बीच एक विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है, इससे उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा द्वारा धातु वाष्पित हो जाती है जो पुनः हिमशीत जल द्वारा संघनित होकर कोलॉइडी अवस्था में आ जाती है। इसमें परिक्षेपण माध्यम सामान्यतः KOH या NaOH का तनु जलीय विलयन लिया जाता है।

(ब) सॉल वे कोलॉइड होते हैं जिनमें ठोस (परिक्षिप्त प्रावस्था), ठोस, द्रव या गैस (परिक्षेपण माध्यम ) में वितरित रहता है। मुख्यतः सॉल वे होते हैं जिनमें ठोस, द्रव में वितरित रहता है, जैसे गोंद, स्टार्च इत्यादि । जबकि जैल वे कोलॉइड हैं जिनमें द्रव प्रावस्था ठोस परिक्षेपण माध्यम में वितरित होती है, जैसे-पनीर, मक्खन इत्यादि ।

(स) स्कंदन – जब किसी सॉल में कोई विद्युत अपघट्य मिलाया जाता है तो उसका आवेश समाप्त हो जाता है जिससे इसके कण नीचे बैठ जाते हैं अर्थात् उनका अवक्षेपण हो जाता है। इसे सॉल का स्कंदन कहते हैं।

अथवा

(अ) कोलॉइडी विलयन में उपस्थित वैद्युत अपघट्यों की अशुद्धियों को अपोहन द्वारा पृथक् किया जाता है। इस विधि में एक उपयुक्त झिल्ली द्वारा वैद्युत अपघट्य के कणों को पृथक् किया जाता है। वास्तविक विलयन के कण जांतव झिल्ली ( ब्लैडर), पार्चमेन्ट पत्र या सेलोफेन शीट में से निकल जाते हैं परन्तु कोलॉइडी कण नहीं, अतः जांतव झिल्ली को अपोहन में प्रयुक्त किया जाता है। अपोहन के लिए प्रयुक्त उपकरण अपोहक कहलाता है।

अशुद्ध कोलॉइडी विलयन से भरा एक उपयुक्त झिल्ली का बैग पात्र में लटकाया जाता है जिसमें से होकर लगातार जल बहता रहता है। अणु एवं आयन झिल्ली में से विसरित होकर बाहरी जल में आ जाते हैं तथा शुद्ध कोलॉइडी विलयन बच जाता है। विद्युत प्रवाहित करने पर यह प्रक्रम जल्दी होता है तथा इस प्रक्रम को विद्युत अपोहन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 20
(ब) एरोसॉल में परिक्षेपण माध्यम गैस होती है जिसमें ठोस या द्रव परिक्षिप्त रहता है। जैसे तम्बाकू का धुआँ (ठोस एरोसॉल) तथा कोहरा (द्रव एरोसॉल), जबकि फोम में द्रव में गैस के कण परिक्षिप्त रहते हैं जैसे फेन (फ्रोथ ) तथा फेंटी हुई क्रीम।

(स) पेप्टन या पेप्टीकरण – किसी अवक्षेप में वैद्युत अपघट्य की थोड़ी-सी मात्रा मिलाकर परिक्षेपण माध्यम के साथ हिलाकर इसे कोलॉइडी सॉल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को पेप्टन कहते हैं तथा पेप्टन में प्रयुक्त वैद्युत अपघट्य को पेप्टीकारक कहते हैं। यह स्कंदन का विपरीत प्रक्रम है। इस विधि से ताजा बने अवक्षेप को कोलॉइडी सॉल में परिवर्तित किया जाता है।
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प्रश्न 15.
(अ) एन्जाइम उत्प्रेरण किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।
(ब) दूध किस प्रकार का इमल्शन है ? समझाइए।
(स) वैद्युतकणसंचलन को नामांकित चित्र सहित समझाइए।
अथवा
(अ) उत्प्रेरक की वरणात्मकता किसे कहते हैं ? उदाहरण लिखिए।
(ब) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड एवं आर्सेनियस सल्फाइड सॉल को मिश्रित करने पर क्या होता है ?
(स) टिन्डल प्रभाव को नामांकित चित्र सहित समझाइए ।
उत्तर:
(अ) एन्जाइमों द्वारा विभिन्न अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने की प्रक्रिया को एन्जाइम उत्प्रेरण कहते हैं। उदाहरण-
माल्टोस का ग्लूकोस में परिवर्तन-
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(ब) दूध, जल में तेल प्रकार का इमल्शन है। दूध में जल परिक्षेपण माध्यम है जिसमें द्रव वसा के कण परिक्षिप्त रहते हैं।

(स) जब किसी कोलॉइडी विलयन में डूबे हुये दो प्लैटिनम इलैक्ट्रॉडों पर विद्युत विभव लगाते हैं तो कोलॉइडी कण विपरीत आवेशित इलैक्ट्रॉड की ओर गमन करते हैं। इसे वैद्युत कण संचलन कहते हैं। धनात्मक आवेशित कण कैथोड की ओर तथा ऋणात्मक आवेशित कण ऐनोड की ओर गति करते हैं । वैद्युत कण संचलन से कोलाइडी कणों पर आवेश की उपस्थिति की पुष्टि होती है।
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(अ) उत्प्रेरक की उपस्थिति में किसी अभिक्रिया द्वारा विशिष्ट उत्पाद बनाने की क्षमता को उत्प्रेरक की वरणात्मकता कहते हैं अर्थात् विशिष्ट उत्पाद बनाते समय उत्प्रेरक अभिक्रिया को निश्चित दिशा प्रदान करता है। उदाहरण- Ni उत्प्रेरक की उपस्थिति में CO तथा H2 की क्रिया से CH4 बनती है जबकि Cu उत्प्रेरक की उपस्थिति में HCHO बनता है।
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(ब) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड ( धन-आवेशित सॉल) एवं आर्सेनियस सल्फाइड (ऋण आवेशित सॉल) को मिश्रित करने पर ये अवक्षेपित (स्कंदित) हो जाते हैं, इसे पारस्परिक स्कंदन भी कहते हैं।

(स) टिन्डल प्रभाव – जब अंधेरे में रखा एक समांगी विलयन, प्रकाश की दिशा से देखा जाता है, तो यह स्वच्छ दिखाई देता है तथा यदि इसे प्रकाश किरण पुंज की दिशा के लंबवत् देखा जाता है तो यह पूर्णतया अदीप्त (Perfect dark) दिखाई देता है। कोलॉइडी विलयन को भी इसी प्रकार से पारगमन प्रकाश (Transmitted light) द्वारा देखने पर पर्याप्त स्वच्छ या पारदर्शीं दिखाई देते हैं परन्तु इसे प्रकाश के पथ की दिशा से लम्बवत् देखने पर वह मंद से प्रबल दूधियापन दर्शाता है।

अर्थात् प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं तथा प्रकाश का चमकीला शंकु (Cone), टिन्डल शंकु कहलाता है। इस प्रभाव को सर्वप्रथम फैराडे ने प्रेक्षित किया था अतः इसे फैराडे टिन्डल प्रभाव भी कहते हैं।
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प्रश्न 16.
AlCl3 और NaCl में से कौन-सा ऋणात्मक सॉल को स्कंदित करने में अधिक प्रभावशाली है और क्यों?
उत्तर:
AlCl3 और NaCl में से AlCl3 ऋणात्मक सॉल को स्कंदित करने में अधिक प्रभावशाली है क्योंकि इसमें धनायन (Al3+) पर आवेश अधिक है जो कि ऋणात्मक सॉल के कणों को अधिक आसानी से उदासीन करेगा।

प्रश्न 17.
एक उदाहरण सहित अधिशोषण को परिभाषित कीजिए । क्या कारण है कि अधिशोषण स्वभाव में ऊष्माक्षेपी होता है ? अधिशोष्य और अधिशोषी के बीच बलों की प्रकृति के आधार पर अधिशोषण के प्रकार लिखिए।
उत्तर:
इस प्रश्न के उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न संख्या 5.1 तथा 5.8 का उत्तर देखें तथा अधिशोष्य और अधिशोषी (अधिशोषक) के बीच बलों की प्रकृति के आधार पर अधिशोषण दो प्रकार के होते हैं।

  • भौतिक अधिशोषण या वान्डरवाल अधिशोषण
  • रासायनिक अधिशोषण या लैग्म्यूर अधिशोषण।

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. 250 ग्राम जल में 2 g NaOH घुला हुआ है तो विलयन की सान्द्रता होगी –
(अ) 0.2 M
(ब) 0.2 N
(स) 0.2 m
(द) 4 ग्राम लीटर-1
उत्तर:
(स) 0.2 m

2. निम्न में से किस मात्रक में विलयन की सान्द्रता ताप पर निर्भर नहीं करती है?
(अ) मोलरता
(ब) नार्मलता
(स) फार्मलता
(द) मोललता
उत्तर:
(द) मोललता

3. निम्नलिखित में से किस विलयन का परासरण दाब न्यूनतम होगा?
(अ) 0.1M BaCl2
(ब) 0.1M यूरिया
(स) 0.1M HCl
(द) 0.2M ग्लूकोस
उत्तर:
(ब) 0.1M यूरिया

4. वाट हॉफ गुणक के लिए कौनसा सूत्र सही नहीं है?
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5. निम्नलिखित में से किसके लिए वान्ट हॉफ गुणक का मान K4[Fe (CN)6] के लिए वान्ट हॉफ गुणक के बराबर होगा ?
(अ) NaCl
(ब) Na2SO4
(स) Al2(SO4)3
(द) Al(NO3)3
उत्तर:
(स) Al2(SO4)3

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

6. प्रकृति में कुल कितने प्रकार के विलयन संभव हैं?
(अ) 6
(ब) 10
(स) 12
(द) 9
उत्तर:
(द) 9

7. शुद्ध जल की मोलरता कितनी होती है?
(अ) 5.5
(ब) 55.5
(स) 18.0
(द) 10.0
उत्तर:
(ब) 55.5

8. प्रतिलोम परासरण (Reverse osmosis) के लिए प्रयुक्त अर्धपारगम्य झिल्ली किससे बनी होती है?
(अ) सेलोफेन
(ब) सूअर का ब्लेडर
(स) सेलूलोस ऐसीटेट
(द) पार्चमेन्ट
उत्तर:
(स) सेलूलोस ऐसीटेट

9. रुधिर कोशिका में स्थित द्रव का परासरण दाब निम्नलिखित में से किसके समान होता है?
(अ) 1% (w/V) NaCl विलयन
(ब) 0.9% (w/V) NaCl विलयन
(स) 1% (w/V) Na2SO4 विलयन
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) 0.9% (w/V) NaCl विलयन

10. विलायक के प्रति किलोग्राम में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या कहलाती है-
(अ) मोलरता
(ब) मोलरता
(स) मोललता
(द) मोल भिन्न
उत्तर:
(स) मोललता

11. परासरण की क्रिया को रोकने हेतु प्रयुक्त दाब कहलाता है-
(अ) वाष्प दाब
(ब) आंशिक दाब
(स) परासरण दाब
(द) वायुमण्डलीय दाब
उत्तर:
(स) परासरण दाब

12. समान परासरण दाब वाले विलयन कहलाते हैं-
(अ) अतिपरासरी विलयन
(ब) अल्पपरासरी विलयन
(स) समपरासरी विलयन
(द) सामान्य परासरी विलयन
उत्तर:
(स) समपरासरी विलयन

13. दो द्रवों का विलयन जो संघटन में परिवर्तन के बिना एक निश्चित ताप पर आसवित होता है, कहलाता है-
(अ) संतृप्त विलयन
(ब) आदर्श विलयन
(स) स्थिर क्वाथी मिश्रण
(द) असंतृप्त विलयन
उत्तर:
(स) स्थिर क्वाथी मिश्रण

14. एक वायुमण्डलीय दाब पर निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक उच्चतम होगा-
(अ) 0.1M ग्लूकोस
(ब) 0.1 M यूरिया
(स) 0.1M बेरियम क्लोराइड
(द) 0.1M NaCl
उत्तर:
(स) 0.1M बेरियम क्लोराइड

15. निम्नलिखित में से कौनसा गुण अणुसंख्य गुण नहीं है ?
(अ) क्वथनांक उन्नयन
(स) हिमांक अवनमन
(ब) वाष्प दाब अवनमन
(द) हिमांक
उत्तर:
(द) हिमांक

16. बेन्जीन और टॉलूईन का मिश्रण है-
(अ) धनात्मक विचलन युक्त विलयन
(ब) ऋणात्मक विचलन युक्त विलयन
(स) आदर्श विलयन
(द) अनादर्श विलयन
उत्तर:
(स) आदर्श विलयन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

17. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म आदर्श विलयन नहीं बनाता?
(अ) C2H5Br, C2H5I
(ब) C2H5I, C2H5OH
(स) C6H5Cl, C6H5Br
(द) C6H6, C6H5CH3
उत्तर:
(ब) C2H5I, C2H5OH

18. H2SO4 का एक मोलर विलयन किसके समान होगा?
(अ) नॉर्मल विलयन
(ब) N/2 विलयन
(स) 2N विलयन
(द) 4N विलयन
उत्तर:
(स) 2N विलयन

19. निम्नलिखित में से किस मिश्रण में मुख्य रूप से द्विध्रुव – द्विध्रुव आकर्षण पाया जाता है?
(अ) KCl तथा H2O
(ब) C6H6 तथा CCl4
(स) C6H6 तथा C2H5OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 2
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 3

20. आदर्श विलयन के लिए निम्नलिखित में से कौनसी शर्त सही है?
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21. सोडा वाटर होता है-
(अ) CO2 गैस में जल का विलयन
(ब) CO2 गैस का जल में विलयन
(स) CO2 तथा O2 का विलयन
(द) CO2 तथा N2 का विलयन
उत्तर:
(ब) CO2 गैस का जल में विलयन

22. निम्नलिखित में से कौनसा अणुसंख्य गुण है?
(अ) पृष्ठ तनाव
(ब) श्यानता
(स) परासरण दाब
(द) चालकता
उत्तर:
(स) परासरण दाब

23. 0.1 M KCl, 0.1 M CaSO4 तथा 0.1M K2CO3 के जलीय विलयनों के हिमांक अवनमन का अनुपात होगा-
(अ) 1 : 1 : 3
(ब) 2 : 2 : 5
(स) 1 : 1 : 1.5
(द) 1 : 1 : 1
उत्तर:
(स) 1 : 1 : 1.5

24. जब विलयन में वैद्युत अपघट्य वियोजित होता है तो इसके वान्ट हॉफ गुणक का मान होगा-
(अ) > 1
(ब) < 1
(स) 1
(द) शून्य
उत्तर:
(अ) > 1

25. यूरिया के एक जलीय विलयन के क्वथनांक में उन्नयन 0.52° है। [Kb = 0.52°C मोल’ किग्रा.] तो इस विलयन में यूरिया का मोल प्रभाज है-
(अ) 0.982
(स) 0.943
(ब) 0.567
(द) 0.018
उत्तर:
(द) 0.018

26. अर्द्धपारगम्य झिल्ली अनुमति करती है-
(अ) एक विलयन को गुजरने देना
(ब) विलेय को गुजरने देना
(स) विलायक को गुजरने देना
(द) विलेय एवं विलायक दोनों को गुजरने देना
उत्तर:
(स) विलायक को गुजरने देना

27. 5 ग्राम NaOH के 450 मिली. विलयन की मोलरता होगी-
(अ) 0.189 मोल dm-3
(ब) 0.278 मोल dm-3
(स) 0.556 मोल dm-3
(द) 0.027 मोल dm-3
उत्तर:
(ब) 0.278 मोल dm-3

28. किसी जलीय विलयन का हिमांक- 0.186°C है, इसी विलयन के क्वथनांक में उन्नयन का मान है ( Kf = 1.86°C mol-1 kg) (Kb = 0.512°C mol-1 kg)
(अ) 0.186°C
(ब) 0.0512°C
(स) 1.86°C
(द) 5.12°C
उत्तर:
(ब) 0.0512°C

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

29. निम्नलिखित में से द्रवों का कौन-सा युग्म राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन प्रदर्शित करता है?
(अ) जल-हाइड्रोजन अम्ल
(ब) बेन्जीन – मेथेनॉल
(स) जल- नाइट्रिक अम्ल
(द) ऐसीटोन – क्लोरोफॉर्म
उत्तर:
(ब) बेन्जीन – मेथेनॉल

30. समान तापमान पर 5% ग्लूकोस ( अणु भार 180 ) का विलयन एवं 10% अज्ञात पदार्थ का विलयन समपरासरी है, तो अज्ञात पदार्थ का अणुभार है-
(अ) 90
(ब) 180
(स) 360
(द) 45
उत्तर:
(स) 360

31. कौनसा सान्द्रता अभिव्यक्ति का माध्यम ताप से स्वतंत्र है?
(अ) मोलरता
(ब) नार्मलता
(स) फॉर्मलता
(द) मोललता
उत्तर:
(द) मोललता

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न :

प्रश्न 1.
0.2 मोलल विलयन का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
0.2 मोलल विलयन का अर्थ है कि 0.2 मोल विलेय 1000g (1 kg) विलायक में घुला हुआ है।

प्रश्न 2.
जलीय विलयन के लिए मोललता तथा किसी पदार्थ (विलेय) मोल अंश में क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर:
विलेय का मोल अंश = \(\frac { m }{ m + 55.5 }\)
m = मोललता, 1000 ग्राम जल के मोल = \(\frac { 1000 }{ 18 }\) = 55.5

प्रश्न 3.
विलयन का ताप बढ़ाने पर मोलरता पर क्या प्रभाव होगा ?
उत्तर:
विलयन का ताप बढ़ाने पर मोलरता कम हो जाती है क्योंकि विलयन का आयतन बढ़ जाता है।

प्रश्न 4.
H2O2 की आयतन सान्द्रता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एक आयतनं H2O2 विलयन के वियोजन से NTP पर प्राप्त ऑक्सीजन का आयतन, इसकी आयतन सान्द्रता कहलाती है।

प्रश्न 5.
मोलरता की तुलना में मोललता को अधिक महत्त्व दिया जाता है, क्यों?
उत्तर:
मोलरता की तुलना में मोललता को अधिक महत्त्व दिया जाता है क्योंकि मोललता ताप पर निर्भर नहीं करती।

प्रश्न 6.
एक मोलल तथा एक मोलर जलीय विलयन में से किसकी सान्द्रता अधिक होती है?
उत्तर:
एक मोलर विलयन।

प्रश्न 7.
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता पर क्या प्रभाव
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता कम हो जाती है।

प्रश्न 8.
हेनरी के नियम की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
किसी विलयन में गैस का मोल अंश, उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है, अर्थात् किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब, उस विलयन में गैस के मोल अंश के समानुपाती होता है। इसे हेनरी का नियम कहते हैं।

प्रश्न 9.
किस प्रकार के द्रवों में आदर्श विलयन बनाने की प्रवृत्ति होती है?
उत्तर:
बहुत अधिक तनु विलयन, लगभग समान संरचना तथा ध्रुवता वाले द्रवों में आदर्श विलयन बनाने की प्रवृत्ति होती है।

प्रश्न 10.
स्थिरक्वाथी मिश्रण में उपस्थित अवयवों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता। क्यों?
उत्तर:
स्थिर क्वाथी मिश्रण में उपस्थित अवयव निश्चित अनुपात में होते हैं जो निश्चिंत ताप पर एक साथ उबलते हैं, अतः इन्हें प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 11.
समान ताप पर नाइट्रोजन की जल में विलेयता, हाइड्रोजन की तुलना में कम होती है तो किस गैस का हेनरी स्थिरांक अधिक है?
उत्तर:
नाइट्रोजन का हेनरी स्थिरांक अधिक है क्योंकि किसी गैस की
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प्रश्न 12.
गैसों की द्रवों में विलेयता पर दाब का क्या प्रभाव
उत्तर:
दाब बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता बढ़ती है।

प्रश्न 13.
अमोनिया की बोतल को खोलने से पहले ठण्डा किया जाता है। क्यों?
उत्तर:
अमोनिया की बोतल को ठण्डा करने से उसका वाष्प दाब कम हो जाता है जिससे द्रव अमोनिया तेजी से बाहर नहीं निकलती ।

प्रश्न 14.
विलयन में विलेय की वियोजन की मात्रा तथा वान्ट हॉफ गुणक में क्या सम्बन्ध होता है ?
उत्तर:
∝ = \(\frac{i-1}{n-1}\)
∝ = वियोजन की मात्रा, n = वियोजन से प्राप्त कणों की संख्या तथा i = वान्टहॉफ गुणक ।

प्रश्न 15.
जल में थोड़ा-सा ग्लुकोस मिलाने पर इसके वाष्पदाब पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
ग्लुकोस मिलाने से जल का वाष्पदाब कम हो जाएगा क्योंकि ग्लुकोस अवाष्पशील पदार्थ है।

प्रश्न 16.
किसी विलयन के क्वथनांक उन्नयन (△Tb) तथा विलेय के मोलर द्रव्यमान में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
△Tb, विलेय के मोलर द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 17.
प्रतिलोम परासरण कब होता है?
उत्तर:
जब विलयन पर परासरण दाब से अधिक दाब लगाते हैं तो प्रतिलोम परासरण होता है।

प्रश्न 18.
शर्करा तथा KCl के सममोलर विलयन समपरासरी होंगे या नहीं, तथा क्यों?
उत्तर:
शर्करा तथा KCl के सममोलर विलयन समपरासरी नहीं होते क्योंकि KCl वियोजित होकर दो आयन देता है जबकि शर्करा का वियोजन नहीं होता।

प्रश्न 19.
जल के लिए मोलल अवनमन (Kf) स्थिरांक 1.86 K Kg mol-1 होता है, इसका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जल के लिए Kf = 1.86 का अर्थ है कि जब 1 मोल अवाष्पशील विलेय को 1 Kg विलायक में घोला जाता है तो जल के हिमांक में 1.86 K की कमी हो जाती है।

प्रश्न 20.
अण्डे के बाहरी खोल को हटाकर जब उसे लवण (NaCl) के संतृप्त विलयन में रखा जाता है, तो क्या होगा ?
उत्तर:
अण्डे में बाह्यपरासरण होगा जिसके कारण वह सिकुड़ जाता है।

प्रश्न 21.
मोललता तथा क्वथनांक उन्नयन में सम्बन्ध बताइए |
उत्तर:
क्वथनांक उन्नुयन तथा मोललता एक-दूसरे के समानुपाती होते हैं।

प्रश्न 22.
एक प्रतिहिम (Anti Freezing Agent) पदार्थ का उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
एथिलीन ग्लाइकॉल प्रतिहिम का कार्य करता है।

प्रश्न 23.
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल को त्वचा पर रगड़ने से शीतलन का अनुभव होता है, क्यों?
उत्तर:
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल वाष्पशील होता है अतः यह त्वचा से गुप्त ऊष्मा का अवशोषण करके वाष्प में परिवर्तित हो जाता है, जिसके कारण शीतलन का अनुभव होता है।

प्रश्न 24.
गले में सूजन होने पर साधारण नमक के पानी से गरारे करने की सलाह दी जाती है । क्यों?
उत्तर:
नमक का पानी अतिपरासरी (हाइपरटोनिक ) होता है, जिसके कारण यह गल में खिंचाव उत्पन्न करने वाले कारक को बाहर निकाल देता है।

प्रश्न 25.
जलीय जीवजन्तु गरम जल की अपेक्षा ठण्डे जल में अधिक आसानी से रहते हैं, क्यों ?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर गैसों की जल में विलेयता कम होती है अतः गरम जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है इसलिए जलीय जीवजन्तु गरम जल की अपेक्षा ठण्डे जल में अधिक आसानी से रहते हैं ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न :

प्रश्न 1.
राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन की व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए ।
उत्तर:
दो द्रव A तथा B के मिश्रण में धनात्मक विचलन होने पर A-B आकर्षण A-A तथा B-B के मध्य आकर्षण की तुलना में दुर्बल होता है। अर्थात् इस स्थिति में विलेय-विलायक अणुओं के मध्य अंतराआण्विक आकर्षण बल विलेय-विलेय और विलायक – विलायक अणुओं की तुलना में दुर्बल होते हैं। अतः इस प्रकार के विलयनों में से A अथवा B के अणु शुद्ध अवयव की तुलना में अधिक आसानी से निकल सकते हैं, जिसके कारण वाष्प दाब में वृद्धि होती है।

उदाहरण-एथेनॉल तथा ऐसीटोन का मिश्रण। शुद्ध एथेनॉल में अणुओं के हाइड्रोजन बंध होते हैं। इसमें ऐसीटोन मिलाने पर इसके अणु एथेनॉल के अणुओं के बीच में आ जाते हैं, जिसके कारण इनके बीच पहले से उपस्थित हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं। इससे अंतराआण्विक आकर्षण बल दुर्बल हो जाने के कारण यह मिश्रण राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है।

प्रश्न 2.
राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन को उदाहरण सहित समझाइए |
उत्तर:
दो द्रव A तथा B के मिश्रण में ऋणात्मक विचलन की स्थिति में A-A तथा B-B के मध्य आर्कषण बल A-B की तुलना में दुर्बल होता है। इसके कारण वाष्पदाब कम हो जाता है। उदाहरण- फीनॉल तथा ऐनिलीन का मिश्रण। इस स्थिति में फीनॉलिक प्रोटॉन एवं ऐनिलीन के नाइट्रोजन परमाणु के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के मध्य अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध समान अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध की तुलना में प्रबल होता है। इसी प्रकार से क्लोरोफॉर्म तथा ऐसीटोन का मिश्रण भी उल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन दर्शाता है। इसका कारण यह है कि क्लोरोफॉर्म, ऐसीटोन के साथ हाइड्रोजन बंध बना लेता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 6

प्रश्न 3.
एक शीतल पेय पदार्थ जो कि कार्बोनेटीकृत है, की house बोतल को खोलने पर गैस के बुलबुले तेजी से बाहर निकलते हैं। क्यों?
उत्तर:
कार्बोनेटीकृत पेय की बोतल में उच्च दाब पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस भरी होती है। जब बोतल का ढक्कन खोला जाता है, तो यह गैस उच्च दाब से निम्न दाब की ओर तेजी से बाहर निकलती है। अतः गैस के बुलबुले बाहर की तरफ निकलते हुए दिखाई देते हैं।

प्रश्न 4.
NaOH की जल में विलेयता पर ताप का क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
NaOH का जल में विलयन बनना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है अतः ले-शातैलिए के नियमानुसार ऊष्माक्षेपी प्रक्रम हेतु ताप बढ़ाने पर साम्यावस्था पश्च दिशा में जाती है अर्थात् NaOH की विलेयता कम हो जाएगी।

प्रश्न 5.
ऐनॉक्सिया क्या है?
उत्तर:
ऐनॉक्सिया एक प्रकार की बीमारी है जो सामान्यतः अधिक ऊँचाई पर रहने वाले लोगों में पाई जाती है। इसमें व्यक्तियों के रक्त एव ऊतकों में ऑक्सीजन की सान्द्रता कम हो जाती है अतः वे कमजोर हो जाते हैं तथा उनकी सोचने की क्षमता में भी कमी आ जाती है।

प्रश्न 6.
एथिल ऐल्कोहॉल तथा साइक्लोहेक्सेन का मिश्रण, राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है, क्यों?
उत्तर:
साइक्लोहेक्सेन के अणुओं के मध्य वान्डरवाल बल तथा एथिल ऐल्कोहॉल (एथेनॉल) के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है लेकिन जब एथेनॉल तथा साइक्लोहेक्सेन को मिलाया जाता है तो एथेनॉल के अणुओं के मध्य उपस्थित हाइड्रोजन बन्ध टूट जाते हैं अर्थात् A-B आकर्षण, A-A तथा B-B आकर्षण से कम है अतः अणु दूर-दूर जाते हैं इसलिए यह धनात्मक विचलन का उदाहरण है।

प्रश्न 7.
राउल्ट के नियम की सीमाएँ बताइए ।
उत्तर:

  • यह नियम केवल तनु विलयनों पर ही लागू होता है।
  • विद्युत अपघट्यों के विलयनों पर यह नियम नहीं लगता है।
  • जब विलयन में पदार्थ का संगुणन या वियोजन होता है तो भी राउल्ट का नियम नहीं लगता।

प्रश्न 8.
नमक के सान्द्र विलयन में ताजा अंगूर डालने पर वे सिकुड़ जाते हैं जबकि इन्हें पुन: जल में डालने पर ये फूल जाते हैं। क्यों?
उत्तर:
परासरण के कारण विलायक निम्न सान्द्रता युक्त विलयन से उच्च सान्द्रता वाले विलयन की ओर गमन करता है। यहाँ अंगूर की कोशिका झिल्ली, अर्धपारगम्य झिल्ली की तरह व्यवहार करती है अतः अंगूर को नमक के सान्द्र विलयन में रखने पर जल अंगूर से बाहर आ जाता है, जिसके कारण वे सिकुड़ जाते हैं तथा इन्हें पुनः जल में डालने पर जल अंगूर में प्रवेश कर जाता है अतः वे फूलकर पुनः ताजा हो जाते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 9.
हिमांक अवनमन विधि से अणुभार ज्ञात करने के लिए साधारण थर्मामीटर के स्थान पर विशिष्ट थर्मामीटर (बैकमान थर्मामीटर) का प्रयोग किया जाता है। क्यों?
उत्तर:
विलायक में विलेय मिलाने पर होने वाला हिमांक अवनमन बहुत कम मात्रा में होता है जिसका मापन साधारण थर्मामीटर द्वारा नहीं होता क्योंकि इसमें न्यूनतम माप 0.01°C से अधिक होती है जबकि बैकमान ने इस कार्य के लिए एक विशिष्ट थर्मामीटर बनाया जो बहुत संवेदी (Sensi- tive) होता है जिसमें न्यूनतम माप 0.01°C होती है जिससे कम मात्रा में होने वाले हिमांक अवनमन का भी मापन हो जाता है अतः हिमांक अवनमन विधि में साधारण थर्मामीटर के स्थान पर यह विशिष्ट थर्मामीटर (बैकमान थर्मामीटर) प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 10.
किसी पदार्थ के गलनांक तथा क्वथनांक से उसमें उपस्थित अशुद्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है। इस कंथन की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
शुद्ध अवस्था में प्रत्येक पदार्थ का गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित होता है। जब इसमें अवाष्पशील अशुद्धि मिली होती है तो क्वथनांक में वृद्धि तथा गलनांक में कमी हो जाती है, अशुद्धि की मात्रा बढ़ने पर ये मान भी उसी अनुपात में परिवर्तित हो जाते हैं, अतः गलनांक तथा क्वथनांक के मान से किसी पदार्थ में उपस्थित अशुद्धियों की जानकारी प्राप्त हो जाती है ।

प्रश्न 11.
प्याज को सामान्य ताप पर काटने के बजाय फ्रिज में ठण्डा करने के बाद काटने से आँसू कम आते हैं। क्यों?
उत्तर:
प्याज को जब ठण्डा करते हैं तो उसमें उपस्थित वाष्पशील द्रव जिनके कारण आँसू आते हैं, का वाष्पदाब कम हो जाता है, अतः उनका वाष्पन कम होता है। अतः ठण्डे प्याज को काटने पर आँसू कम आते हैं।

प्रश्न 12.
क्वथनांक उन्नयन से किसी वाष्पशील पदार्थ का मोलर द्रव्यमान ज्ञात नहीं किया जा सकता। क्यों?
उत्तर:
क्वथनांक उन्नयन इत्यादि विधियाँ (अणुसंख्यक गुण) केवल अवाष्पशील पदार्थों के लिए ही उपयुक्त होती हैं क्योंकि विलयन में वाष्पशील पदार्थ मिलाकर गर्म किया जाता है तो वाष्पशील पदार्थ, वाष्प बनकर बाहर निकल जाता है, जिससे इसके कारण क्वथनांक में उन्नयन ही नहीं होगा अतः इस विधि से वाष्पशील पदार्थ का मोलर द्रव्यमान ज्ञात नहीं- कर सकते।

प्रश्न 13.
सर्दी के मौसम में गाड़ी के रेडिएटर में जल के साथ एथिलीन ग्लाइकॉल मिलाया जाता है। क्यों?
उत्तर:
सर्दी के मौसम में केवल जल को गाड़ी का इंजन ठण्डा करने में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता क्योंकि जल 0°C (273K) पर ही जम जाता है जबकि 35% (V/V) एथिलीन ग्लाइकॉल के जलीय विलयन का हिमांक – 17.6°C होता है, अतः यह निम्न ताप पर भी नहीं जमता इसलिए इसे शीतलक (Coolant) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। यहाँ एथिलीन ग्लाइकॉल हिमरोधी (Anti Freezing Agent ) का कार्य करता है। अतः एथिलीन ग्लाइकॉल को सर्दी के मौसम में गाड़ी के रेडिएटर में जल के साथ मिलाया जाता है।

प्रश्न 14.
सड़कों पर जमी बर्फ को हटाने के लिए NaCl के स्थान पर CaCl2 लेना अधिक उपयुक्त है। क्यों?
उत्तर:
NaCl तथा CaCh2 दोनों ही प्रतिहिम कारक का कार्य करते हैं क्योंकि इनको मिलाने से जल का हिमांक कम हो जाता है लेकिन हिमांक अवनमन एक कण संख्यक गुण है जो कणों की संख्या पर निर्भर करता है। CaCl2 के आयनन से तीन आयन (Ca+2 तथा 2Cl) प्राप्त होते हैं जबकि NaCl के आयनन से केवल दो आयन ही प्राप्त होंगे, अतः CaCl2 मिलाने पर बर्फ अधिक तेजी से पिघलती है क्योंकि हिमांक में अधिक कमी हो जाने के कारण बर्फ के जमने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।

प्रश्न 15.
प्रेशर कुकर में भोजन जल्दी पकता है लेकिन पहाड़ों पर भोजन धीरे पकता है । इसकी व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
प्रत्येक द्रव का क्वथनांक निश्चित होता है तथा दाब बढ़ाने पर क्वथनांक में वृद्धि होती है। प्रेशर कुकर में दाब अधिक होने के कारण, जल का क्वथनांक बढ़ जाता है अतः यह अधिक ताप पर उबलता है जिसके कारण भोजन को अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है इसलिए वह जल्दी पक जाता है जबकि पहाड़ों पर वायुमण्डलीय दाब कम होता है जिसके कारण क्वथनांक भी कम हो जाता है अतः पानी उबल तो जल्दी जाता है लेकिन भोजन को कम ऊष्मा प्राप्त होती है, जिससे वह धीरे पकता है ।

प्रश्न 16.
किसी विलायक के लिए मोलल उन्नयन स्थिरांक का मान निश्चित होता है। क्यों?
उत्तर:
मोलल उन्नयन स्थिरांक को निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 7
इस सूत्र में उपस्थित सभी मान, R ( विलयन स्थिरांक या गैस स्थिरांक), M1 ( विलायक का मोलर द्रव्यमान ), Tb ( विलायक का क्वथनांक) तथा △Hवाष्पन( वाष्पन एन्थैल्पी) किसी विलायक के लिए निश्चित होते हैं अतः मोलल उन्नयन स्थिरांक (Kb) का मान भी निश्चित होगा ।

प्रश्न 17.
केवल दूध से आइसक्रीम बनाने की तुलना में शर्करायुक्त दूध से आइसक्रीम बनाने में अधिक समय लगता है। क्यों?
उत्तर:
दूध में शर्करा (चीनी) मिलाने पर दूध का हिमांक कम हो जाता है (हिमांक अवनमन) अर्थात् दूध पहले की तुलना में कम ताप पर जमेगा अतः इससे आइसक्रीम बनाने में अधिक समय लगता है।

प्रश्न 18.
दो ग्राम शर्करा को 100 ग्राम जल में घोलने पर विलयन X तथा 2 ग्राम यूरिया को 100 ग्राम जल में घोलने पर विलयन Y प्राप्त होता है तो किस विलयन में क्वथनांक उन्नयन अधिक होगा तथा क्यों ?
उत्तर:
विलयन Y में क्वथनांक उन्नयन अधिक होगा क्योंकि यूरिया का अणुभार शर्करा के अणुभार से कम होता है अतः विलयन Y की मोललता, विलयन X की मोललता से अधिक होगी तथा क्वथनांक उन्नयन मोललता के समानुपाती होता है।

प्रश्न 19
(i) प्रतिहिम (Antifreezing agent) क्या होता है ?
(ii) विहिमीकारक (de-icing agent) किसे कहते हैं? समझाइए |
उत्तर:

  • वह पदार्थ जिसे जल में मिलाने पर उसके हिमांक को कम कर देता है, उसे प्रतिहिम कहते हैं। उदाहरण – एथिलीन ग्लाइकॉल।
  • वह पदार्थ जो जल के हिमांक को कम करता है तथा जिसे बर्फ पर डालने से बर्फ जल्दी पिघलती है, उसे विहिमीकारक कहते हैं, जैसे- – NaCl, CaCl2 इत्यादि ।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
राउल्ट के नियम से धनात्मक तथा ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयनों के उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
धनात्मक विचलन- एथेनॉल तथा ऐसीटोन से बना विलयन ऋणात्मक विचलन- नाइट्रिक अम्ल तथा जल से बना विलयन

प्रश्न 2.
‘परासरण’ और ‘परासरणी दाब’ पदों को परिभाषित कीजिए । अन्य अणुसंख्य गुणधर्मों की तुलना में परासरण दाब के उपयोग का विलयनों में विलेय पदार्थों के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए क्या लाभ होता है ?
उत्तर:
परासरण – प्रकृति तथा घर पर कई सामान्य घटनाएँ होती हैं जैसे वातावरण में जल की कमी से लचीली हुई गाजर को जल में रखने पर ताजा होना, मटर के सूखे दानों को जल में रखने पर उनकी फूलना, मुरझाए हुए फूलों को ताजे जल में रखने पर पुनः ताजा होना, कच्चे आम के टुकड़ों को नमक के जलीय विलयन में रखने पर उनका सिकुड़ना तथा लाल रुधिर कणिकाओं को लवण जल में रखने पर सिकुड़ना इत्यादि। ये सभी परासरण के उदाहरण हैं तथा इनमें सभी पदार्थ झिल्लियों युक्त हैं जिसे अर्धपारगम्य झिल्ली कहते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 3.
NaCl (मोलर द्रव्यमान = 58.5 g mol-1) की कितनी मात्रा 65 g जल में घोली जाए जिससे हिमांक में 7.5°C की गिरावट आ जाए ? जल के लिए हिमांक अवनमन स्थिरांक Kf, 1.86 K Kg mol-1 है। यह मानकर चलिए कि NaCl के लिए वाट हॉफ गुणक 1.87 है।
उत्तर:
हिमांक अवनमन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 8

प्रश्न 4.
निम्नलिखित का कथन लिखिए-
(i) विलयनों के सन्दर्भ में सामान्य रूप में राउल्ट का नियम ।
(ii) मिश्रण में एक गैस के आंशिक दाब के सम्बन्ध में हेनरी का नियम ।
उत्तर:

  • वाष्पशील द्रवों के विलयन में किसी अवयव का आंशिक दाब, विलयन में उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।
  • किसी विलयन में गैस का मोल अंश उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है, अर्थात् किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब (P) उस विलयन में गैस के मोल अंश (x) के समानुपाती होता है।

प्रश्न 5.
जल के 35.0 mL में जीन के एक खण्ड की 8.95 mg मात्रा घुलाकर विलयन बनाया गया, जिसका 25°C पर परासरण दाब 0.335.torr. है । यह मानते हुए कि जीन खण्ड विद्युत अपघट्य है, इसका आणव (मोलर) द्रव्यमान ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
परासरण दाब
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 9

अतः जीन खण्ड का मोलर द्रव्यमान = 14.218 kg.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पदों को परिभाषित कीजिए-
(a) (i) मोल प्रभाज (Mole fraction)
(ii) आदर्श विलयन
(b) एक अज्ञात आण्विक पदार्थ की 15.0 g मात्रा को जल 450g में घुलाया जाता है। प्राप्त विलयन – 0.34°C पर हिमीभूत होता है । पदार्थ का मोलर द्रव्यमान क्या है ? ( जल के लिए Kf = 1.86 K Kg mol-1)
अथवा
(a) निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए-

  • एक द्रव में किसी गैस के घुलने के सम्बन्ध में हेनरी का नियम ।
  • एक विलायक के लिए क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक ।

(b) जल के 500 g में कुछ ग्लिसरॉल को घुलाकर ग्लिसरॉल (C3H8O3) का एक विलयन बनाया जाता है। इस विलयन का क्वथनांक 100.42°C है। इस विलयन को बनाने में ग्लिसरॉल की कितनी मात्रा घुलाई गई थी ? (जल के लिए Kb = 0.512K Kg mol-1)
उत्तर:
(a) (i) मोलरता – एक लीटर विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को विलयन की मोलरता (M) कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 18
यदि w ग्राम विलेय, V मिली विलयन में घुला हो तो
मोलरता (M) = \(\frac{\mathrm{W} \times 1000}{\mathrm{M} . \mathrm{W} \cdot \times \mathrm{V}}\)
M.W. = विलेय का अणुभार
उदाहरण- NaOH के 0.25 molL-1(0.25 M) विलयन का अर्थ है कि 0.25 मोल NaOH एक लीटर विलयन में घुला हुआ है।

(ii) आदर्श विलयन :
वह विलयन जो ताप तथा सान्द्रता के सभी मानों पर राउल्ट के नियम का पालन करता है, उसे आदर्श विलयन कहते हैं। एक पूर्ण रूप से आदर्श विलयन होना बहुत मुश्किल है लेकिन कुछ विलयन व्यवहार में लगभग आदर्श होते हैं। आदर्श विलयन के लिए आवश्यक शर्तें-
(i) विलयन बनने पर एन्थैल्पी परिवर्तन शून्य होता है अर्थात् इसके अवयवों को मिश्रित करने पर ऊष्मा का उत्सर्जन या अवशोषण नहीं होता, अर्थात् △Hमिश्रण = 0।

(ii) आयतन में परिवर्तन शून्य होता है अर्थात् विलयन का आयतन दोनों अवयवों के आयतन के योग के बराबर होता है, अर्थात् △Vमिश्रण = 0।

(iii) राउल्ट के नियम के अनुसार,
\(\mathrm{P}_{\text {कुल }}=\mathrm{p}_{\mathrm{o}} \mathrm{A}+\mathrm{p}_{\mathrm{B}}\)
\(\mathrm{p}_{\text {कुल }}=\mathrm{p}_{\mathrm{A}} \mathrm{X}_{\mathrm{A}}+\stackrel{\circ}{\mathrm{p}} \mathrm{B}_{\mathrm{B}} \mathrm{X}_{\mathrm{B}}\)

माना मिश्रण दो अवयव (द्रव) A तथा B से बना है जिनमें अन्तराआण्विक आकर्षण A-A तथा B-B प्रकार के हैं लेकिन द्विअंगी विलयन (मिश्रण) में A-A तथा B-B आकर्षण के साथ-साथ A-B प्रकार का आकर्षण भी होगा जो कि A-A तथा B-B के बीच अंतराआण्विक आकर्षण बल के ही समान होगा।

इसलिए △H=0 तथा △V=0, इसी कारण यह आदर्श विलयन बनाता है। अत: A-B आकर्षण = A-A आकर्षण तथा B-B आकर्षण।
आदर्श विलयनों के उदाहरण-
(i) n-हेक्सेन + n-हेप्टेन (n-C6H14 + n-C7H16)
(ii) बेन्जीन + टॉलूईन (C6H6 + C6H5 – CH3)
(iii) ब्रोमोएथेन + क्लोरोएथेन (C2H5Br + C2H5Cl)
(iv) कार्बन टेट्राक्लोरइड + सिलिकन टेट्रक्लोरइड (CCl4 + SiCl4)
(v) मेथिल ऐल्कोहॉल + एथिल एल्कोहॉल (CH3OH + C2H5OH)
(vi) क्लोरोबेन्जीन + ब्रोमोबेन्जीन (C6H5Cl + C6H5Br)

(b) हिमांक अवनमन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 14
अतः पदार्थ का मोलर द्रव्यमान = 182.3
अथवा
(a)

  • गैसों की द्रवों में विलेयता: भिन्न-भिन्न गैसों की जल या अन्य विलायकों में विलेयता भिन्न-भिन्न होती है। कुछ गैसें जल में अधिक्त मात्रा में घुल जाती हैं जब्वक्रि ऑक्सीजन जल में बहुत कम मात्रा में घुलती है तथा इसी घुली हुई ऑक्सीजन के कारण जलीय जीवन जीवित रहता है। गैसों की द्रव में विलेयता को अवशोषण गुणांक द्वारा समझा सकते हैं। निश्चित ताप तथा वायुमण्डलीय दाब पर किसी विलायक के निश्चित आयतन में घुली हुई गैस के मानक ताप व दाब (NTP) पर आयतन को उस गैस का अवशोषण गुणांक (Absorption Coefficient) कहते हैं।
  • किसी विलायक का क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक उस विलायक के क्वथनांक में वह वृद्धि है जो उसके 1 Kg में एक मोल अवाष्पशील विलेय मिलाने पर होती है।

(b) क्वथनांक उन्नयन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 10
अतः ग्लिसरॉल की मात्रा = 37.7 ग्राम।

प्रश्न 7.
प्रतिलोम परासरण किसे कहते हैं? इसका एक उपयोग दीजिए।
उत्तर:
प्रतिलोम परासरण – विलयन पर परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब लगाने पर शुद्ध विलायक, अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा विलयन से बाहर निकलता है अर्थात् परासरण की दिशा बदल जाती है, इसे प्रतिलोम परासरण कहते हैं। प्रतिलोम परासरण का उपयोग समुद्री जल के विलवणीकरण (Desalination) में किया जाता है।

प्रश्न 8.
यदि 10% (w/w) जलीय H2SO4 का घनत्व 1.84 ग्राम सेमी 3 है तो H2SO4 विलयन की मोललता की गणना कीजिए | (H2SO4 का मोलर द्रव्यमान = 98 ग्राम मोल-1 )
उत्तर:
मोललता
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 11

प्रश्न 9.
निम्नलिखित विलयनों को वान्ट हॉफ गुणक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
0.1 M CaCl2, 0.1M KCl, 0.1 M Al2 (SO4)3, 0.1 M C12H22O11.
उत्तर:
उपर्युक्त विलयनों के वान्ट हॉफ गुणक का बढ़ता क्रम निम्नलिखित है-
C12H22O11 < KCl < CaCl2 < Al2(SO4)3

प्रश्न 10.
5g NaOH को 500 ml जल में घोला गया। विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
NaOH के मोल = 5g/40g mol-1 = 0.125 mol
विलयन का लीटर में आयतन = \(\frac{500 \mathrm{ml}}{1000 \mathrm{ml} \mathrm{L}^{-1}}\)
मोलरता = विलेय के मोल / विलयन का लीटर में आयतन
= \(\frac{0.125 \times 1000 \mathrm{ml} \mathrm{L}^{-1}}{500 \mathrm{ml}}\)
= o.25 M

प्रश्न 11.
एक प्रोटीन के 0.2 L जलीय विलयन में 1.26 g प्रोटीन है। 300 K पर इस विलयन का परासरण दाब 2.57 × 10-3 bar पाया गया। प्रोटीन के मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए। (R = 0.083 L bar mol-1 K-1)
उत्तर:
मोलर द्रव्यमान (M2) = \(\frac{W_2 \mathrm{RT}}{\Pi \mathrm{V}}\)

W2 = 1.26 g, R = 0.083 L bar mol-1 K-1
T = 300K, Π = 2.57 × 10-3 bar, V = 0.2 L
M2 = \(\frac{1.26 \mathrm{~g} \times 0.083 \mathrm{LbarK}^{-1} \mathrm{~mol}^{-1} \times 300 \mathrm{~K}}{2.57 \times 10^{-3} \mathrm{bar} \times 0.2 \mathrm{~L}}\)
M2 = 61038 g mol-1
अतः प्रोटीन का मोलर द्रव्यमान = 61038 g mol-1

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 12.
(i) स्थिर क्वाथी मिश्रण को परिभाषित कीजिए ।
(ii) वाष्पशील घटकयुक्त विलयन के लिए राउल्ट के नियम की व्याख्या कीजिए तथा किस प्रकार राउल्ट का नियम, हेनरी के नियम की एक विशेष स्थिति है ?
उत्तर:

  • दो या अधिक घटकों का वह मिश्रण जिसका संघटन द्रव तथा वाष्प अवस्था में होता है तथा जिसका क्वथनांक निश्चित होता है, उसे स्थिर क्वाथी मिश्रण कहते हैं।
  • 2.4.1. द्रव-द्रव विलयना का वाष्प दाब – एक बंद पात्र में दो वाष्पशील द्रवों का विलयन लेते हैं तो इन द्रवों का वाष्पीकरण होगा तथा कुछ समय के बाद वाष्य अवस्था तथा द्रव अवस्था के मध्य साम्य स्थापित हो जाता है।
  • माना दोनों द्रवों के आंशिक वाष्प दाब क्रमशः p1 p2 हैं तथा कुल दाब pकुल है, तो राउल्ट के नियम के अनुसार, वाष्पशील द्रवों के विलयन में किसी अवयव (द्रव) का आंशिक दाब, विलयन में उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।
    अतः प्रथम द्रव के लिए-
    p1 ∝ x1
    या \(\mathrm{p}_1=\mathrm{p}_1^0 \mathrm{x}_1\)
    यहाँ \(\mathrm{p}_1^0\) = शुद्ध अवस्था में प्रथम घटक का समान ताप पर वाष्प दाब है। इसी प्रकार द्वितीय द्रव के लिए-
    \(\mathrm{p}_2=\mathrm{p}_2^0 \mathrm{x}_2\)
    यहाँ \(\mathrm{p}_2^0\) द्वितीय शुद्ध द्रव का वाष्प दाब है।डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार, पात्र में विलयन का कुल दाब \(\mathrm{p}_{\text {कुल }}\), विलयन के सभी अवयवों के आंशिक दाब के योग के बराबर होता है। अतः
    \(\mathrm{p}_{\text {कुल }}\) = p1 + p2
    p1 व p2 का मान रखने पर,
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 15
    इस समीकरण से निम्नलिखित निष्कर्ष प्राप्त होते हैं-
    (1) किसी विलयन के कुल वाष्प दाब को उसके किसी अवयव के मोल-अंश से संबंधित कर सकते हैं।
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 16
    (2) किसी विलयन का कुल वाष्प दाब द्वितीय अवयव के मोल-अंश के साथ रेखीय रूप से बदलता है।
    (3) शुद्ध अवयवों के वाष्प दाब पर निर्भर रहते हुए विलयन का कुल वाष्प दाब प्रथम अवयव के मोल-अंश के बढ़ने से कम या अधिक होता है।किसी विलयन के लिए p1 या p2 का x1 तथा x2 के मध्य आलेखित करने पर सीधी रेखा प्राप्त होती है। जब x1 व x2 का मान 1 होता है तो ये रेखाएँ (I व II) क्रमशः बिंदु \(\mathrm{p}_1^0\) व \(\mathrm{p}_2^0\) से होकर गुज़रती हैं। इसी प्रकार pकुल का x2 के साथ आलेख (लाइन III) भी रेखीय होता है। pकुल का न्यूनतम मान \(\mathrm{p}_1^0\) तथा इसका अधिकतम मान \(\mathrm{p}_2^0\) होगा। यहाँ प्रथम घटक द्वितीय घटक की तुलना में कम वाष्पशील है अर्थात् \(\mathrm{p}_1^0<\mathrm{p}_2^0\) |वाष्प अवस्था में संघटन – विलयन के साथ साम्य अवस्था में स्थित वाष्प प्रावस्था के संघटन का निर्धारण अवयवों के आंशिक दाब से किया जा सकता है। यदि y1 एवं y2 क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय अवयव के वाष्पीय अवस्था में मोल-अंश हैं तो डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 17
    राउल्ट का नियम : हेनरी के नियम की एक विशेष स्थिति राउल्ट के नियम से
    \(\mathrm{p}_{\mathrm{i}}=\mathrm{x}_{\mathrm{i}} \mathrm{p}_{\mathrm{i}}^0\)
    अर्थात् किसी विलयन में उसके वाष्पशील अवयव का वाष्पदाब उसके मोल अंश के समानुपाती होता है। किसी द्रव में गैस के विलयन में गैसीय अवयव गैस के रूप में-ही रहता है जिसकी विलेयता हेनरी के नियम के अनुसार होती है।अतः p = KH.xअतः राउल्ट के नियम तथा हेनरी के नियम की तुलना करने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि वाष्पशील घटक (गैस) का आंशिक दाब विलयन में उसके मोल-अंश के समानुपाती होता है, केवल समानुपातिक स्थिरांक KH एवं \(\mathrm{p}_{\mathrm{i}}^0\) में भिन्नता है। अतः राउल्ट का नियम, हेनरी के नियम की एक विशेष स्थिति है जिसमें KH तथा \(\mathrm{p}_{\mathrm{i}}^0\) के मान के बराबर हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
(i) समपरासरी विलयन किसे कहते हैं?
(ii) आदर्श विलयन को परिभाषित कीजिए तथा इसका एक लक्षण बताइए।
(iii) मोलल उन्नयन स्थिरांक की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:

  • दिए गए ताप पर दो विलयन, जिनका परासरण दाब समान होता है, उन्हें ‘समपरासरी’ विलयन कहते हैं। इन विलयनों की मोलर सान्द्रता समान होती है।
  • वह विलयन जो ताप तथा सान्द्रता के सभी मानों पर राउल्ट के नियम का पालन करता है, उसे आदर्श विलयन कहते हैं। आदर्श विलयन बनने पर एन्थैल्पी परिवर्तन शून्य होता है।
  • 1000 g विलायक में एक मोल अवाष्पशील विलेय घुला होने पर क्वथनांक में जितनी वृद्धि होती है, उसे मोलल उन्नयन स्थिरांक कहते हैं।

प्रश्न 14.
(अ) (i) जल वाष्प दाब का क्या होगा यदि एक चम्मच चीनी उसमें डाल दी जाए?
(ii) वृहदअणुओं के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए कौन-सा अणुसंख्य गुणधर्म उपयुक्त है ?
(ब) क्या क्वथनांक का उन्नयन समान होगा यदि 0.1 मोल सोडियम क्लोराइड या 0.1 मोल चीनी को 1 लीटर जल में विलेय किया जाए? समझाइए ।
(स) क्या हम स्थिर क्वाथी मिश्रण के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् कर सकते हैं? समझाइए ।
उत्तर:
(अ)

  • जल में एक चम्मच चीनी डालने पर उसका वाष्प दाब कम हो जाता है क्योंकि वाष्प दाब अवनमन कणों की संख्या पर निर्भर करता है तथा जल में चीनी डालने पर कणों की संख्या बढ़ जाती है।
  • बृहदअणुओं के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए परासरण दाव विधि अधिक उपयुक्त है क्योंकि ये उच्च ताप पर स्थायी नहीं होते हैं तथा परासरण दाब कमरे के ताप पर ही ज्ञात किया जाता है एवं परासरण दाब का परिमाण भी अधिक होता है।

(च) 0.1 मील सोडियम क्लोराइड या 0.1 मोल चीनी को 1 लीटर जल में विलेय करने पर क्वथनांक का उन्नयन समान नहीं होगा क्योंकि चीनी का आयनन नहीं होता जबकि सोडियम क्लोराइड (NaCl) का आयनन होकर दुगुनी संख्या में आयन प्राप्त होंगे।

(स) स्थिर क्वाथी मिश्रण के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता क्योंकि इस मिश्रण का व्वथनांक निश्चित होता है जिस पर मिश्रण में उपस्थित सभी यौगिक निश्चित अनुपात में एक साथ आसवित होते हैं। अतः इस मिश्रण के यौगिकों को स्थिर क्वाथी आसवन विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 15.
विलयन की मोललता ज्ञात करने का सूत्र लिखिये ।
उत्तर:
विलयन की मोललता को निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 12

प्रश्न 16.
400 K तापक्रम पर किसी विलयन का परासरण दाब 0.0821 वायुमण्डल है तो विलयन की सान्द्रता मोल / लीटर में ज्ञात कीजिए। [R 0.0821 L atm K-1 mol-1]
उत्तर:
परासरण दाब Π = CRT
Π = 0.0821 वायुमण्डल,
R = 0.0821 L atm K-1 mol-1
T = 400K
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 13
C = 0.0025 mol L-1

प्रश्न 17.
(i) क्या कारण है कि जलीय जीव ठण्डे जल में अधिक अच्छा महसूस करते हैं अपेक्षाकृत गर्म जल में?
(ii) क्या होता है जब हम रक्त सेल को नमकीन जल के विलयन (अतिपरासरणदाबी विलयन) में रखते हैं? कारण बताइए।
उत्तर:

  • जलीय जीव गर्म जल की अपेक्ष ठण्डे जल में अधिक अच्छा महसूस करते हैं क्योंकि ताप बढ़ने पर गैसों की जल में विलेयता कम होती है जिसके कारण जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।
  • जब रक्त सेल को नमकीन जल के विलयन (अतिपरासरण- दात्री विलयन) में रखा जाता है तो परासरण के कारण रक्त सेल संकुचित हो जाती हैं अर्थात् जल रक्त सेल से बाहर आ जाता है।

प्रश्न 18.
20°C पर जल का वाष्प दाब 17.5 mm Hg है। ग्लूकोस (मोलर द्रव्यमान = 180 gmol-1) का 15 g जल के घुला हो, तो 20°C पर जल का वाष्प दाब परिकलित कीजिए ।
उत्तर:
\(\frac{\mathrm{P}_1^0-\mathrm{P}_1}{\mathrm{P}_1^0}\) = \(\frac{\mathbf{W}_2 \times \mathbf{M}_1}{\mathbf{M}_2 \times \mathbf{W}_1}\)
\(\mathrm{P}_1^0\) = शुद्ध जल का वाष्प दाब = 17.5 mm Hg
P1 = विलयन का वाष्प दाब = ?
W1 = 150 g, W2 = 15 g, M1 = 18 g mol-1
M2 = 180g mol-1
अतः = \(\frac{17.5 \mathrm{~mm} \mathrm{Hg}-\mathrm{P}_1}{17.5 \mathrm{~mm} \mathrm{Hg}}\) = \(\frac{15 \mathrm{~g} \times 18 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}{180 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1} \times 150 \mathrm{~g}}\)
\(\frac{17.5-\mathrm{P}_1}{17.5}\) = \(\frac { 270 }{ 27000 }\)
\(\frac{17.5-P_1}{17.5}\) = 0.01
17.5 – P1 = 17.5 × 0.01
17.5 – P1 = 0.175
P1 = 17.5 – 0.175
P1 = 17.325mm Hg
अतः 20°C पर ग्लूकोसयुक्त जल का वाष्प दाब (P1) = 17.325 mm Hg.

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की मुख्य अभिक्रिया है-
(अ) इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया
(ब) इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया
(स) नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया
(द) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया
उत्तर:
(स) नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया

2. कार्बोनिल समूह के कार्बन पर कौनसा संकरण होता है?
(अ) sp
(ब) sp²
(स) sp³
(द) sp³d
उत्तर:
(ब) sp²

3. निम्नलिखित में से किस यौगिक में कैनिजारो अभिक्रिया नहीं होती ?
(अ) C6H5CHO
(ब) HCHO
(स) CCl3CHO
(द) CH3 – CHO
उत्तर:
(द) CH3 – CHO

4. ऐल्किल सायनाइड के जल अपघटन से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 1
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 2

5. निम्नलिखित में से किसके द्वारा ऐल्डिहाइड तथा कीटोन में विभेद किया जा सकता है?
(अ) NaHCO3
(ब) HCN
(स) फेलिंग विलयन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(स) फेलिंग विलयन

6. सोडियम प्रोपेनॉएट (CH3-CH2-COONa) को सोडालाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करने पर बना उत्पाद है-
(अ) ऐसीटोन
(स) ऐथेन
(ब) मेथेन
(द) एथीन
उत्तर:
(स) ऐथेन

7. यौगिक X फेनिल हाइड्रेजीन से क्रिया करता है लेकिन टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता तो यौगिक X होगा-
(अ) ऐमाइड
(ब) कीटोन
(स) ऐल्डिहाइड
(द) ऐल्कोहॉल
उत्तर:
(ब) कीटोन

8. यौगिक जो ऐल्डोल संघनन नहीं देता, वह है-
(अ) CH3CHO
(ब) CH3 – COCH3
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 3
(द) HCHO
उत्तर:
(द) HCHO

9. टॉलेन अभिकर्मक निम्नलिखित में से किस धातु आयन का NH3 के साथ संकुल है?
(अ) Cu2+
(ब) Cu+1
(स) Ag+
(द) Co2+
उत्तर:
(स) Ag+

10. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक आयोडीन के क्षारीय विलयन के साथ गर्म करने पर पीला अवक्षेप देता है?
(अ) मेथेनैल
(ब) प्रोपेनोन
(स) प्रोपेनैल
(द) ब्यूटेनैल
उत्तर:
(ब) प्रोपेनोन

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11. निम्नलिखित में से सर्वाधिक प्रबल अम्ल है-
(अ) HCOOH
(ब) CH3COOH
(स) CH3 – CH2-COOH
(द) Cl – CH2 – COOH
उत्तर:
(द) Cl – CH2 – COOH

12. ऐसीटिक अम्ल से ऐसीटिल क्लोराइड बनाने में निम्नलिखित में से किस अभिकर्मक को प्रयुक्त नहीं किया जा सकता ?
(अ) PCl5
(ब) PCl3
(स) SOCl2
(द) Cl2
उत्तर:
(द) Cl2

13. निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पाद D है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 4
(अ) CH3 – CH2NH2
(ब) CH3CN
(स) HCONH2
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 5
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 5

14. निम्नलिखित में से सिन्नेमैल्डिहाइड का सूत्र कौनसा है ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 6
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 7

15. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 8 का IUPAC नाम है-
(अ) साइक्लोहेक्सेनैल
(ब) साइक्लोहेक्सेन ऐल्डिहाइड
(स) साइक्लोहेक्सेन कार्बेल्डिहाइड
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) साइक्लोहेक्सेन कार्बेल्डिहाइड

16. प्रोपाइन (CH3C ≡ CH) के जलयोजन से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 9
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 10

17. अभिक्रिया HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 11 से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 12
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 13

18. ऐल्डिहाइड तथा कीटोनों के क्वथनांक समतुल्य अणुभार वाले हाइड्रोकार्बनों तथा ईथरों से ………………
(अ) कम होते हैं
(स) समान होते हैं
(ब) अधिक होते हैं
(द) तुलना करना असंभव है
उत्तर:
(ब) अधिक होते हैं

19. कीटोनों की क्लीमेन्सन अपचयन अभिक्रिया से प्राप्त यौगिक होते हैं-
(अ) ऐल्कोहॉल
(ब) ऐल्केन
(स) कार्बोक्सिलिक अम्ल
(द) ऐल्काइन
उत्तर:
(ब) ऐल्केन

20. फेलिंग परीक्षण में प्राप्त लाल अवक्षेप निम्नलिखित में से किस यौगिक के बनने के कारण आता है ?
(अ) Ag2O
(ब) CuO
(स) Cu2O
(द) Cu(OH)2
उत्तर:
(ब) CuO

21. एथिल ब्यूटेनोएट के जल अपघटन से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 14
उत्तर:
(स) CH3 – CH2-CH2-COOH

22. निम्नलिखित में से सबसे दुर्बल अम्ल है-
(अ) HCOOH
(ब) C2H5-CH2-COOH
(स) CH3COOH
(द) CH3 – CH2-COOH
उत्तर:
(ब) C2H5-CH2-COOH

23. नाइलॉन 66 के निर्माण में किस यौगिक का प्रयोग होता है?
(अ) ब्यूटेन डाइओइक अम्ल
(ब) प्रोपेनोइक अम्ल
(स) हैक्सेन डाइ ओइक अम्ल
(द) बेन्जोइक अम्ल
उत्तर:
(स) हैक्सेन डाइ ओइक अम्ल

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24. बेन्जोइक अम्ल द्वारा निम्नलिखित में से कौनसी अभिक्रिया नहीं दर्शायी जाती?
(अ) नाइट्रीकरण
(ब) फ्रीडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया
(स) हैलोजेनीकरण
(द) सल्फोनीकरण
उत्तर:
(ब) फ्रीडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया

25. अभिक्रिया HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 15 का उत्पाद है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 16
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 17

26. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है?
(अ) CH3COOH
(ब) CH3COCH3
(स) HCOOH
(द) C6H5COOH
उत्तर:
(स) HCOOH

27. एथेनैल निम्नलिखित में से कौनसा परीक्षण नहीं देता है?
(अ) टॉलेन परीक्षण
(ब) फेलिंग परीक्षण
(स) लुकाश परीक्षण
(द) आयोडोफॉर्म परीक्षण
उत्तर:
(स) लुकाश परीक्षण

28. प्रोपेनाइक अम्ल की श्मिट अभिक्रिया से प्राप्त यौगिक है-
(अ) CH3 – NH2
(ब) CH3CONH2
(स) CH3 – CH2 – NH2
(द) CH3 – CN
उत्तर:
(स) CH3 – CH2 – NH2

29. ऐसीटिलीकरण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त यौगिक कौनसा है ?
(अ) CH3CONH2
(ब) CH3COOH
(स) (CH3CO)2O
(द) CH3COOC2H5
उत्तर:
(स) (CH3CO)2O

30. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 18 है-
(अ) श्मिट अभिक्रिया
(ब) हुन्स्डीकर अभिक्रिया
(स) राइमर टीमान अभिक्रिया
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) हुन्स्डीकर अभिक्रिया

31. एक हाइड्रोकार्बन के ओजोनी अपघटन पर एक मोल एसीटोन तथा एक मोल फॉर्मेल्डिहाइड बनता है तो वह हाइड्रोकार्बन है-
(अ) प्रोपीन
(ब) 2 – मेथिल प्रोपीन
(द) 2 – मेथिल – ब्यूट- 1 – ईन
(स) 2 – मेथिल – ब्यूट – 2 – ईन
उत्तर:
(ब) 2 – मेथिल प्रोपीन

32. कीटोन किस विधि द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं ?
(अ) रोजेनमुण्ड अपचयन द्वारा
(ब) इटार्ड अभिक्रिया द्वारा
(स) कैनिजारो अभिक्रिया द्वारा
(द) फ्रीडल – क्राफ्ट अभिक्रिया द्वारा
उत्तर:
(द) फ्रीडल – क्राफ्ट अभिक्रिया द्वारा

33. जब प्रोपेनोइक अम्ल की क्रिया जलीय सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ करवाई जाती है तो CO2 गैस निष्कासित होती है। CO2 का कार्बन कहाँ से आता है?
(अ) मेथिल समूह से
(ब) कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह से
(स) मेथिलीन समूह से
(द) बाईकार्बोनेट से
उत्तर:
(द) बाईकार्बोनेट से

34. सोडियम एथॉक्साइड की उपस्थिति में एथिल ऐसीटेट के दो मोल के स्वः संघनन से प्राप्त होता है-
(अ) एथिल ब्यूटरेट
(ब) ऐसीटोऐसीटिक एस्टर
(स) मेथिल ऐसीटोऐसीटेट
(द) एथिल प्रोपिओनेट
उत्तर:
(ब) ऐसीटोऐसीटिक एस्टर

35. निम्नलिखित अभिक्रिया का अन्तिम उत्पाद है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 19
उत्तर:
(स) CH2 = CHOOOH

36. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक आयोडीन तथा NaOH के साथ पीला अवक्षेप देगा ?
(अ) ICH2COCH2CH3
(ब) CH3COOCOCH3
(स) CH3-CH2-CH(OH)CH2CH3
(द) CH3COOH
उत्तर:
(अ) ICH2COCH2CH3

37. निम्नलिखित में से किस यौगिक के ओजोनीकरण पश्चात् जल-अपघटन से ऐसीटोन प्राप्त होगा ?
(अ) 2- मेथिल – 2 – ब्यूटीन
(ब) 3 – मेथिल- 1- ब्यूटीन
(स) साइक्लोपेन्टेन
(द) 2-मेथिल- 1- ब्यूटीन
उत्तर:
(अ) 2- मेथिल – 2 – ब्यूटीन

38. निम्नलिखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीयता पर विचार करें-
(i) Ph-COOH
(ii) 0-NO2C6H4COOH
(iii) p-NO2C6H4COOH
(iv) m-NO2C6H4COOH
निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम (अवरोही) सही है ?
(अ) (i), (ii), (iii), (iv)
(ब) (ii), (iv), (iii), (i)
(स) (ii), (iv), (i), (iii)
(द) (ii), (iii), (iv), (i)
उत्तर:
(द) (ii), (iii), (iv), (i)

39. CH3CHO और C6H5CH2CHO में किसके द्वारा अन्तर जा सकता है ?
(अ) बेनेडिक्ट विलयन द्वारा
(ब) आयोडोफॉर्म परीक्षण द्वारा
(स) टॉलेन अभिकर्मक द्वारा
(द) फेहलिंग विलयन द्वारा
उत्तर:
(ब) आयोडोफॉर्म परीक्षण द्वारा

40. निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया द्वारा बेन्जेल्डिहाइड नहीं बन सकता है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 20
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 21

41. यौगिक जो जलीय सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन द्वारा अभिक्रिया कर CO2 नहीं देता है, वह है-
(अ) बेन्जोइक अम्ल
(ब) बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल
(स) सेलिसिलिक अम्ल
(द) कारबोलिक अम्ल (फीनॉल)
उत्तर:
(द) कारबोलिक अम्ल (फीनॉल)

42. यौगिक HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 22 का IUPAC नाम है-
(अ) प्रोपे- 1, 2, 3-ट्राईकार्बेल्डिहाइड
(ब) 3 – फॉर्मिल – 1, 5- पेन्टेनडाईअल
(स) 3- प्रोपेन- 1, 2, 3 – ट्राई अल
(द) 3 – ऐल्डो -1, 5- पेन्टेनडाईअल
उत्तर:
(अ) प्रोपे- 1, 2, 3-ट्राईकार्बेल्डिहाइड

43. बेन्जेल्डिहाइड एवं फॉर्मेल्डिहाइड के मिश्रण की अभिक्रिया सान्द्र तथा गर्म NaOH से करवाने पर प्राप्त उत्पाद हैं-
(अ) C6H5COONa + CH3OH
(ब) C6H5CH2OH + HCOONa
(स) C6H5COONa + C6H5CH2OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 23
उत्तर:
(ब) C6H5CH2OH + HCOONa

44. निम्नलिखित में उत्पाद C होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 24
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 25

45. हेल – फोलार्ड – जेलिंस्की अभिक्रिया में 2- मेथिलप्रोपेनॉइक अम्ल एक यौगिक (A) देता है। यह यौगिक (A) है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 26
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 27

46. निम्नलिखित यौगिकों की अम्ल-सामर्थ्य का अवरोही क्रम है-
(अ) RCOOH > CH = CH > HOH > ROH
(ब) RCOOH > ROH > HOH > CH = CH
(स) RCOOH > HOH > ROH > CH = CH
(द) RCOOH > HOH > CH = CH > ROH
उत्तर:
(स) RCOOH > HOH > ROH > CH = CH

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 28
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29

प्रश्न 2.
कार्बोक्सिलिक अम्लों से बेन्जेल्डिहाइड बनाने का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29a

प्रश्न 3.
ब्यूट – 2 – आइन के जलयोजन से कौनसा यौगिक बनता है?
उत्तर:
ब्यूटेन – 2 ऑन।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29b

प्रश्न 4.
रोजेनमुंड अभिक्रिया से कौनसा ऐल्डिहाइड प्राप्त नहीं होता?
उत्तर:
HCHO फार्मेल्डिहाइड।

प्रश्न 5.
स्टीफैन अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 30

प्रश्न 6.
किसी ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से CH3COCH3 तथा CH3CHO प्राप्त होते हैं तो उस ऐल्कीन की संरचना बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 31

प्रश्न 7.
ईटाई अभिक्रिया द्वारा टॉलुईन से बेन्जेल्डिहाइड किस प्रकार बनाया जाता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 32

प्रश्न 8.
फार्मेल्डिहाइड की सान्द्र KOH से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 33
इसे कैनिजारो अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 9.
एक यौगिक सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ करता है लेकिन फेलिंग विलयन से क्रिया नहीं करता, यह यौगिक होगा?
उत्तर:
यह यौगिक कोई कीटोन जैसे ऐसीटोन होगा।

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प्रश्न 10.
पाँच कार्बन युक्त द्विशाखित ऐल्डिहाइड बताइए जो कैनिजारो अभिक्रिया देता है।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 34

प्रश्न 11.
एथेनोइक अम्ल से प्रोपेनोन प्राप्त करने का समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कार्बोनिल यौगिकों की HCN के साथ क्रिया के लिए क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम लिखिए-
C6H5CHO, CCl3,CHO, CH3CHO
उत्तर:
C6H5CHO < CH3CHO < CCl3CHO

प्रश्न 13.
वह कौनसा ऐल्डिहाइड जिसकी क्रिया सोडियम हाइपो आयोडाइट (NaOI ) के साथ करवाने पर आयोडोफॉर्म बनता है?
उत्तर:
CH3CHO (ऐसिटैल्डिहाइड)।

प्रश्न 14.
ऐसिटेल्डिहाइड से क्रोटोन ऐल्डिहाइड बनाने का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 36

प्रश्न 15.
क्या होगा जब HCHO को कुछ दिन तक बेरायटा जल [Ba(OH)2] के सम्पर्क में रखा जाता है?
उत्तर:
HCHO को कुछ दिन तक Ba(OH)2 के सम्पर्क में रखने पर हेक्सोस शर्कराओं का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे फार्मेस कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 37

प्रश्न 16.
निम्न यौगिकों के क्वथनांक का आरोही क्रम बताइए-
n-ब्यूटेन (I) मेथॉक्सीमेथेन (II), ऐसीटोन (III) प्रोपेनैन (IV), तथा प्रोपेन- 1 ऑल (V)
उत्तर:
I < II < III < IV < V

प्रश्न 17.
CH3CHO की NH3 के साथ क्रिया का अन्तिम उत्पाद क्या होता है?
उत्तर:
CH3CHO की NH के साथ क्रिया कराने पर अन्तिम उत्पाद के रूप में 2, 4, 6 ट्राइमेथिल हेक्साहाइड्रो-1, 3, 5 ट्राइऐजीन ट्राइहाइड्रेट बनता है।

प्रश्न 18.
Br, CI. CN NO2 तथा CF3 समूह के -1 प्रभाव का बढ़ता क्रम लिखिए।
उत्तर:
Br < CI < CN < NO, < CF3

प्रश्न 19.
प्रोपेनोइक अम्ल की थायोनिल क्लोराइड से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
CH3 – CH2 – COOH + SOCl2 → CH3 – CH2-COCl+SO2+HCl

प्रश्न 20.
ऐसीटिक अम्ल, क्लोरो ऐसीटिक अम्ल, डाइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल तथा ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल के अम्लीय सामर्थ्य का घटता क्रम क्या होगा ?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 38

प्रश्न 21.
सेब, नींबू तथा इमली में पाए जाने वाले अम्लों के सूचना सूत्र, सामान्य नाम तथा IUPAC नाम बताइए।
उत्तर:
सेब में मैलिक अम्ल
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 39

प्रश्न 22.
निम्नलिखित अम्लों के सूत्र लिखिए-
(i) स्टियरिक अम्ल
(ii) ऑलिक अम्ल।
उत्तर:
(i) C17H35COOH
(ii) C17H33COOH

प्रश्न 23.
फार्मिक अम्ल तथा ऐसीटिक अम्ल को किन विधियों द्वारा नहीं बनाया जा सकता है?
उत्तर:
फार्मिक अम्ल तथा ऐसीटिक अम्ल को ऐल्कीनों के कार्बोनिलीकरण तथा आर्ट आइसटर्ट अभिक्रिया द्वारा नहीं बनाया जा सकता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 24.
प्रारम्भिक कार्बोक्सिलिक अम्ल जल में विलेय होते हैं, क्यों?
उत्तर:
प्रारम्भिक कार्बोक्सिलिक अम्ल, जल के साथ अंतराअणुक हाइड्रोजन बंध बना लेते हैं, अतः ये जल में विलेय होते हैं।

प्रश्न 25.
ऐसीटिक अम्ल से मैलोनिक अम्ल बनाने के लिए आवश्यक अभिक्रिया अनुक्रम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 40

प्रश्न 26.
सिरके का संघटन बताइए।
उत्तर:
ऐसीटिक अम्ल का तनु जलीय विलयन (8-10%) सिरका कहलाता है।

प्रश्न 27.
बेन्जोइक अम्ल की जल में विलेयता ऐसीटिक अम्ल की तुलना में कम होती है, क्यों?
उत्तर:
बेन्जोइक अम्ल (C6H5COOH) में फेनिल (हाइड्रोकार्बन) समूह के बड़े आकार के कारण इसकी जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाने की प्रवृत्ति कम होती है, अतः यह ऐसीटिक अम्ल की तुलना में जल में कम विलेय होता है।

प्रश्न 28.
फार्मिक अम्ल तथा ऐसीटिक अम्ल में विभेद करने के लिए एक परीक्षण बताइए।
उत्तर:
फार्मिक अम्ल टॉलेन अभिकर्मक के साथ रजत दर्पण देता है जबकि ऐसीटिक अम्ल ऐसा नहीं करता है ।

प्रश्न 29.
सक्रिय हाइड्रोजन युक्त यौगिकों के ऐसिटिलीकरण के लिए ऐसिटिल क्लोराइड की तुलना में ऐसीटिक ऐन्हाइड्राइड अधिक उपयुक्त ह है, क्यों?
उत्तर:
ऐसिटिक ऐन्हाइड्राइड की तुलना में ऐसिटिल क्लोराइड अधिक क्रियाशील होता है। अतः अभिक्रिया का वेग अधिक होता है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है अतः ऐसिटिलीकरण के लिए ऐसीटिक ऐन्हाइड्राइड अधिक उपयुक्त होता है।

प्रश्न 30.
ऐसीटिक अम्ल के विभिन्न व्युत्पन्नों को क्वथनांक के बढ़ते क्रम में रखिए।
उत्तर:
CH3COCl < CH3COOCH5 < (CH3CO)2O < CH3CONH2

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोनिल यौगिकों के सन्दर्भ में निम्नलिखित के उदाहरण दीजिए—
(i) मध्यावयवता
(ii) स्थिति समावयवता।
उत्तर:
(i) मध्यावयवता – यह समावयवता बहुसंयोजी समूह युक्त यौगिक कीटोन में होती है जिसमें > C = O से जुड़े ऐल्किल समूहों में भिन्नता होती है।
उदाहरण- पेन्टेन – 2 ऑन तथा पेन्टेन 3-ऑन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 41

(ii) स्थिति समावयवता भी कीटोन में ही होती है। उपरोक्त उदाहरण स्थिति समावयवता का भी है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 42
प्रश्न 2.
टॉलुइन से बेन्जेल्डिहाइड बनाने की विभिन्न विधियाँ बताइए।
उत्तर:
टॉलुइन के पार्श्व शृंखला क्लोरीनीकरण-जल अपघटन द्वारा (By the Side Chain Chlorination-Hydrolysis of Soluene)-सूर्य के प्रकाश में टॉलुईन की क्रिया क्लोरीन से कराने पर पहले बेन्जल क्लोराइड बनता है जिसके जल अपघटन से बेन्जैल्डिहाइड प्राप्त होता है। बेन्जैल्डिहाइड बनाने की यह एक औद्योगिक विधि है।
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प्रश्न 3.
(i) रोजेनमुंड अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए। (ii) ऑक्सो अभिक्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
(i) ऐसिल क्लोराइडों के अपचयन द्वारा – रोजेनमुंड अपचयन (By the Reduction of Acyl Chlorides – Rosenmund Reduction) – Pd तथा BaSO की उपस्थिति में ऐसिल क्लोराइड पर हाइड्रोजन की क्रिया (हाइड्रोजनीकरण) से ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
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नोट – (i) इस अभिक्रिया में प्रयुक्त BaSO Pd की उत्प्रेरकं क्षमता को कम कर देता है जिससे ऐल्डिहाइड का पुनः अपचयन होकर प्राथमिक ऐल्कोहॉल नहीं बनता है ।
(ii) इस अभिक्रिया से HCHO नहीं बनाया जा सकता क्योंकि HC-CI अस्थायी होता है।

(ii) ऑक्सो अभिक्रिया द्वारा (हाइड्रोफार्मिलीकरण) (By Oxo Reaction (Hydroformylation) ] – कोबाल्ट उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कीन की क्रिया कार्बन मोनोऑक्साइड तथा हाइड्रोजन के मिश्रण के साथ करवाने पर ऐल्डिहाइड बनते हैं।
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इस अभिक्रिया में कोबाल्ट के स्थान पर [Co2(CO)2] को भी प्रयुक्त किया जा सकता है तथा इस अभिक्रिया में द्विबन्ध का वियोजन होकर हाइड्रोजन तथा फार्मिल समूह का योग होता है अतः इसे हाइड्रोफार्मिलीकरण भी कहते हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) बेन्जीन का फ्रीडेल क्राफ्ट ऐसिटिलीकरण
(ii) गाटरमान कोख ऐल्डिहाइड संश्लेषण
(iii) गाटरमान ऐल्डिहाइड संश्लेषण।
उत्तर:
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प्रश्न 5.
कार्बोनिल यौगिक नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं, क्यों?
उत्तर:
कार्बोनिल यौगिकों में प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण से बना ऐल्कॉक्साइड आयन, इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण से बने कार्बोकेटायन की तुलना में अधिक स्थायी होता है। इसी कारण कार्बोनिल यौगिक नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न 6.
बेन्जेल्डिहाइड तथा ऐसिटैल्डिहाइड में किस प्रकार विभेद किया जाता है?
उत्तर:
(i) बेन्जेल्डिहाइड (C6H5CHO) आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देता जबकि ऐसिटैल्डिहाइड (CH3CHO) आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है।

(ii) C6H5CHO फेलिंग विलयन से क्रिया नहीं करता जबकि CH3CHO, फेलिंग विलयन को अपचयित कर देता है।

प्रश्न 7.
अणुसूत्र C4H8O वाला यौगिक हाइड्रेजीन के साथ क्रिया करके हाइड्रेजोन बनाता है तथा यह आयोडीन व NaOH के साथ क्रिया करके आयोडोफॉर्म बनाता है लेकिन इसकी फेलिंग विलयन से कोई क्रिया नहीं होती तो इस यौगिक की संरचना तथा आवश्यक समीकरण बताइए।
उत्तर:
यौगिक हाइड्रेजीन से क्रिया करता है अतः यह एक कार्बोनिल यौगिक है लेकिन इसकी फेलिंग विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं होती अतः यह कीटोन होगा तथा यह आयोडोफॉर्म बनाता है इसलिए यह ब्यूटेनोन (CH3COCH2-CH3) मेथिल कीटोन है जो कि अणुसूत्र से भी सिद्ध हो जाता है।

उपरोक्त अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं-
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प्रश्न 8.
CH3CHO की NH3 के साथ अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
परअम्लों से ऑक्सीकरण (बेयर विलिगर अभिक्रिया) परअम्लों द्वारा ऑक्सीकरण से ऐल्डिहाइड तथा कीटेन क्रमशः कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा एस्टर देते हैं।
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प्रश्न 9.
एथेनैल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं को समझाइए –
(i) C2H5NH2
(ii) फेनिल हाइड्रेजीन
(iii) सेमीकार्बेजाइड।
उत्तर:
(i) एथेनैल की C2H5NH2 के साथ क्रिया कराने पर एक शिफ क्षारक बनता है।
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प्रश्न 10.
ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों के क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों तथा ईथरों से अधिक होते हैं, लेकिन ऐल्कोहॉलों से कम, क्यों?
उत्तर:
ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों के क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों तथा ईथरों से अधिक होते हैं, क्योंकि ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों में द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल के कारण आण्विक संगुणन पाया जाता है। लेकिन इनके क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों से कम होते हैं क्योंकि ऐल्कोहॉलों में अंतराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जो कि इनमें नहीं होता ।

प्रश्न 11.
(a) कार्बोनिल यौगिकों में -हाइड्रोजन अम्लीय होते हैं, क्यों?
(b) एथेनैल की एल्डोल संघनन अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(a) कार्बोनिल यौगिकों (ऐल्डिहाइड तथा कीटोन) में α-हाइड्रोजन अम्लीय होते हैं क्योंकि कार्बोनिल समूह -I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव) दर्शाता है तथा हाइड्रोजन आयन (Hsup>+) के निकलने से प्राप्त संयुग्मी क्षार, अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है।
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(b) एथेनैल में α-हाइड्रोजन उपस्थित होते हैं अतः तनु क्षार की उपस्थिति में इसके दो अणु क्रिया करके 3 -हाइड्रॉक्सी-ब्यूटैनैल बनाते हैं जिसे गर्म करने पर ब्यूट-2-ईनैल बनता है। इस अभिक्रिया को एल्डोल संघनन कहते हैं।
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प्रश्न 12.
निम्नलिखित कार्बोनिल यौगिकों का अम्लीय KMnO4 या अम्लीय K2Cr2O7 से ऑक्सीकरण करवाने पर प्राप्त
उत्पाद बताइए –
(i) CH3CHO
(ii) CH3COCH3
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उत्तर:
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अभिक्रिया (iii) में प्राप्त उत्पाद पोपाफ के नियम के अनुसार है।

प्रश्न 13.
पोपाफ का नियम क्या होता है ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब किसी असममित कीटोन के ऑक्सीकरण से दो असमान कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं तो > C = 0 समूह छोटे ऐल्किल समूह की तरफ जाता है।
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प्रश्न 14.
कार्बोनिल यौगिकों की नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि-कार्बोनिल यौगिकों में कार्बोनिल समूह ध्रुवीय होता है HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 55 प्रथम पद में नाभिकस्नेही का आक्रमण धनावेशित (इलेक्ट्रॉन न्यून) कार्बन पर होता है इसी कारण इसे नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया कहते हैं। प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है-
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प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण से प्राप्त ऐल्कोक्साइड आयन इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण से प्राप्त कार्बोकैटायन की तुलना में अधिक स्थायी होता है, अतः कार्बोनिल समूह पर प्रथम पद में नाभिकस्नेही का आक्रमण होता है। यह पद उत्क्रमणीय होता है।

नाभिकस्नेही, कार्बोनिल समूह के कार्बन पर उस दिशा से आक्रमण करता है जो कार्बोनिल कार्बन के sp² संकरित कक्षकों के तल के लम्बवत् होती है तथा इस क्रिया में कार्बन की संकरण अवस्था sp² से sp³ हो जाती है। इसके पश्चात् द्वितीय पद में इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण होकर योगोत्पाद बन जाता है।

प्रश्न 15.
नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के लिए कार्बोनिल यौगिकों की अभिक्रियाशीलता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया के लिए कार्बोनिल यौगिकों की अभिक्रियाशीलता-इलेक्ट्रॉनिक तथा त्रिविम विन्यासी प्रभावों के कारण नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया के लिए ऐल्डिहाइड की क्रियाशीलता कीटोन से अधिक होती है क्योंकि ऐल्डिहाइडों में कार्बोनिल समूह के कार्बन से केवल एक ऐल्किल समूह जुड़ा होता है जबकि कीटोन में दो ऐल्किल समूह जुड़े होते हैं, जिनकी त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण कार्बोनिल कार्बन पर नाभिकस्नेही का आक्रमण मुश्किल हो जाता है तथा इन ऐल्किल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I प्रभाव) के कारण ये कार्बोनिल कार्बन के धनावेश को कम कर देते हैं जिसके कारण नाभिकस्नेही के आक्रमण की सम्भावना कम हो जाती है।

ऐल्डिहाइड तथा कीटोन दोनों में ऐल्किल समूहों का आकार बढ़ने पर इनकी क्रियाशीलता कम होती जाती है, क्योंकि +I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा बढ़ती है।
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प्रश्न 16.
ऐसीटोन की HCN तथा NaHSO3 के साथ अभिक्रियाएँ बताइए।
उत्तर:
(i) ऐसीटोन की HCN के साथ क्रिया से ऐसीटोन सायनोहाइड्रिन प्राप्त होता है। शुद्ध HCN के साथ यह अभिक्रिया धीमी गति से होती है; अतः यह अभिक्रिया क्षार की उपस्थिति में करवायी जाती है।
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(ii) ऐसीटोन की NaHSO3 के साथ क्रिया से ऐसीटोन सोडियमहाइड्रोजन सल्फाइट (योगोत्पाद) बनता है।
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प्रश्न 17.
ऐल्डॉल संघनन की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर:
ऐल्डॉल संघनन की क्रियाविधि-क्षार से प्राप्त \(\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}\), कार्बोनिल यौगिक के α-H (सक्रिय) से क्रिया करके जल तथा कार्बत्रणायन मध्यवर्ती बनाता है जिसमें अनुनाद होता है।
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यह कार्ब ऋणायन (नाभिकस्नेही) कार्बोनिल यौगिक के दूसरे अणु से क्रिया करता है तथा जल से H+ को पुनः ग्रहण करके ऐल्डोल बना देता है।
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मिश्र या क्रॉस ऐल्डोल संघनन-जब दो भिन्न-भिन्न ऐल्डिहाइड या कीटोन या एक ऐल्डिहाइड व एक कीटेन के मध्य ऐल्डोल संघनन होता है तो उसे क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं। जब दोनों कार्बोनिल यौगिकों में α- हाइड्रोजन होते हैं तो इस अभिक्रिया द्वारा चार उत्पादों का मिश्रण प्राप्त होता है।

उदाहरण-यौगिक A तथा यौगिक B के ऐल्डोल संघनन से चार उत्पाद निम्न प्रकार बनते हैं-
सरल ऐल्डोल संघनन द्वारा-
(i) A पर A के संकलन से [A – A]
(ii) B पर B के संकलन से [B – B]

मिश्र ऐल्डोल संघनन द्वारा-
(iii) A पर B के संकलन से [A – B]
(iv) B पर A के संकलन से [B – A]

यहाँ उत्पाद A – B तथा B – A के संरचना सूत्र भिन्न-भिन्न होंगे, जैसे-एथेनैल व प्रोपेनैल के मिश्रण की ऐल्डोल संघनन अभिक्रिया निम्न प्रकार होगी-
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α-H युक्त यौगिक, α-H रहित यौगिक से क्रिया करके भी ऐल्डोल संघनन दर्शाता है।

प्रश्न 18.
पिनेकॉल अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सोडामाइड या सोडियम के साथ अभिक्रिया-ऐसीटोन की क्रिया सोडियम या सोडामाइड के साथ ईथरी विलयन में कराने पर सोडियम ऐसीटेनेट प्राप्त होता है।
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प्रश्न 19.
ऐसिटैल्डिहाइड के त्रिलकीकरण तथा चतुष्टयीकरण के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
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प्रश्न 20.
ऐसीटोन से निम्नलिखित यौगिकों को किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
(i) मेसिटिल ऑक्साइड (ii) फोरोन (iii) मेसिटिलीन।
उत्तर”
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(i) शुष्क HCl की उपस्थिति में ऐसीटेन को गरम करने पर मेसिटिल ऑक्साइड तथा फोरोन का मिश्रण प्राप्त होता है।
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(ii) सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में ऐसीटोन को गरम करने पर संघनन तृतीयकरण द्वारा समचक्रीय एरोमैटिक यौगिक मेसिटिलीन प्राप्त होता है।
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर टिप्पणी लिखिए- (i) बेन्जोइन संघनन (ii) पर्किन अभिक्रिया।
उत्तर:
ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइडों की विशिष्ट अभिक्रियाएँ (Specific Reactions of Aromatic Aldehydes) –
(i) बेन्जॉइन संघनन-बेन्जैल्डिहाइड को जलीय ऐल्कोहॉली KCN के साथ गरम करने पर बेन्जोइन बनता है जो कि एक कीटोनिक द्वितीयक ऐल्कोहॉल है। उत्पाद के नाम के आधार पर इस अभिक्रिया को बेन्जोइन संघनन कहते हैं।
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(ii) पर्किन अभिक्रिया-बेन्जैल्डिहाइड को ऐसीटिक एन्हाइड्राइड तथा सोडियम एसीटेट के साथ गरम करने पर सिन्नेमिक अम्ल (α, ß – असंतृप्त अम्ल) प्राप्त होता है, इसे पर्किन अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 22.
क्लेजन संघनन तथा नोवेनैजेल अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
क्लेजन संघनन-न्यूनतम दो α-हाइड्रोजन परमाणु युक्त ऐल्डिहाइड या कीटोन की क्रिया तनु क्षार की उपस्थिति में बेन्जैल्डिहाइड के साथ कराने पर α, ß असंतृप्त ऐल्डिहाइड या कीटोन प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को क्लेजन संघनन कहते हैं।

उदाहरण-बेन्जैल्डिहाइड तथा ऐसीटैल्डिहाइड की क्रिया से सिन्नेमैल्डिहाइड बनता है।
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नोवेनैजेल अभिक्रिया-पिरिडीन की उपस्थिति में बेन्जैल्डिहाइड की क्रिया मैलोनिक एस्टर के साथ कराने पर सिन्नैमिक अम्ल प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया में मैलोनिक एस्टर में उपस्थित सक्रिय मेथिलीन समूह के दो हाइड्रोजन परमाणु जल के रूप में बाहर निकलते हैं।

प्रश्न 23.
ऐसीटोन की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) नाइट्र्स अम्ल
(ii) सोडामाइड।
उत्तर:
केवल कीटोनों की अभिक्रियाएँ (Reactions of only Ketones) – कुछ अभिक्रियाएँ केवल कीटोनों द्वारा ही दर्शायी जाती हैं जो कि निम्नलिखित हैं-
(i) नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया-ऐसीटेन की क्रिया नाइट्रस अम्ल (HNO2) के साथ कराने पर ऑक्सिमीनोऐसीटोन तथा जल बनता है।
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(ii) क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया一क्षार की उपस्थिति में ऐसीयेन तथा क्लोरोफॉर्म की क्रिया से क्लोरीटोन बनता है जो कि निद्राकारी होता है।
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(iii) सोडामाइड या सोडियम के साथ अभिक्रिया-ऐसीटोन की क्रिया सोडियम या सोडामाइड के साथ ईथरी विलयन में कराने पर सोडियम ऐसीटेनेट प्राप्त होता है।
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प्रश्न 24.
क्या होता है? जब-
(i) लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल की क्रिया क्लोरीन से करवाई जाती है।
(ii) सिल्वर ऐसीटेट की क्रिया अक्रिय विलायक (CCl4) में ब्रोमीन से करवायी जाती है।
उत्तर:
(i) लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल, क्लोरीन से क्रिया करके मोनोक्लोरो एसीटिक अम्ल देता है। इस अभिक्रिया को हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया कहते हैं।
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(ii) अक्रिय विलायक में सिल्वर ऐसीटेट की क्रिया ब्रोमीन के साथ करवाने पर मेथिल ब्रोमाइड बनता है। इस अभिक्रिया को हुंस्डीकर अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 25.
कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा इनके व्युत्पन्नों में कार्बोनिल समूह पाया जाता है, फिर भी ये कार्बोनिल समूह के गुण नहीं दर्शाते, क्यों?
उत्तर:
कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा इनके व्युत्पन्नों में कार्बोनिल समूह (> C = O) पाया जाता है लेकिन इन यौगिकों में अनुनाद होता है जिससे कार्बोनिल समूह के कार्बन-ऑक्सीजन द्विबन्ध में एकल बन्ध के गुण आ जाते हैं अतः यह वास्तविक कार्बोनिल समूह नहीं रह पाता है इसी कारण ये यौगिक कार्बोनिल समूह के गुण जैसे ऑक्सिम बनाना इत्यादि नहीं दर्शाते।

अम्ल तथा इसके व्युत्पन्नों की अनुनादी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
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Z = OH तो कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा Z = विभिन्न समूह होने पर ये अम्ल के व्युत्पन्न होंगे।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित परिवर्तनों के लिए आवश्यक समीकरण दीजिए-
(i) ऐसीटोफीनॉन से बेंजोइक अम्ल
(ii) प्रोपिओनिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल।
उत्तर:
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प्रश्न 27.
कार्बोक्सिलिक अम्लों में श्रृंखला तथा स्थिति समावयवता के उदाहरण बताइए ।
उत्तर:
(i) ब्यूटेनोइक अम्ल तथा 2 मेथिलप्रोपेनोइक अम्ल एक- दूसरे से श्रृंखला समावयवी हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 79

(ii) 2-मेथिल ब्यूटेनॉइक अम्ल तथा 3- मेथिल ब्यूटेनोइक अम्ल एक-दूसरे के स्थिति समावयवी हैं।
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प्रश्न 28.
(i) वह सरलतम मोनो कार्बोक्सिलिक अम्ल कौनसा है जो प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है तथा क्यों ?
(ii) प्रोपेनोइक अम्ल तथा एथिल मेथेनॉएट के युग्म में कौनसी समावयवता पायी जाती है तथा क्यों?
उत्तर:
(i) 2 – मेथिलब्यूटेनोइक अम्ल एक सरलतम मोनो कार्बोक्सिलिक अम्ल है जो प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है क्योंकि इसमें एक असममित कार्बन उपस्थित है।
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(ii) प्रोपेनोइक अम्ल तथा एथिल मेथेनॉएट एक-दूसरे के क्रियात्मक समूह समावयवी हैं क्योंकि इनमें भिन्न-भिन्न क्रियात्मक समूह उपस्थित हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 82

प्रश्न 29.
(i) ऐल्कीनो के कार्बोनिलीकरण से कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने की एक अभिक्रिया लिखिए।
(ii) आर्ट आइसटर्ट अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(i) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 83

(ii) आणर्ट आइसटर्ट अभिक्रिया से (From Arndt Eistert Reaction)-ऐसिड हैलाइड की क्रिया डाइऐजोमेथेन से कराने पर प्राप्त उत्पाद का जल अपघटन करने से कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं जिनमें ऐसिड हैलाइड की तुलना में एक कार्बन अधिक होता है। इस विधि को आण्ट्ट आइसटर्ट अभिक्रिया कहते हैं। इस विधि द्वारा न्यूनतम तीन कार्बन का अम्ल बनाया जा सकता है। अतः यह विधि HCOOH तथा CH3COOH बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है।
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इस विधि के लिए आवश्यक ऐसिड हैलाइड, कार्बोक्सिलिक अम्लों से ही प्राप्त होता है अतः इस अभिक्रिया को एक सजातीय श्रेणी में आरोहण के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 30.
एस्टरीकरण अभिक्रिया की क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर:
एस्टरीकरण – सान्द्र H2SO4 या HCl गैस उत्प्रेरक की उपस्थिति में कार्बोक्सिलिक अम्लों की क्रिया ऐल्कोहॉल तथा फीनॉल के साथ करवाने पर संगत एस्टर बनते हैं तथा इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं।
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एस्टरीकरण की क्रियाविधि – कार्बोक्सिलिक अम्लों से एस्टर बनने की अभिक्रिया की व्याख्या निम्नलिखित क्रियाविधि की सहायता से की जा सकती है। समस्थानिक ऑक्सीजन \(\left(\begin{array}{l} 18 \\ \mathrm{O} \end{array}\right)\) युक्त यौगिकों के प्रयोग से यह सिद्ध हो गया है कि इस अभिक्रिया में बने जल में – OH समूह अम्ल से आता है न कि ऐल्कोहॉल से।

कार्बोक्सिलिक अम्लों की ऐल्कोहॉलों के साथ क्रिया द्वारा एस्टरों का बनना एक नाभिकस्नेही ऐसिल प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। इसमें पहले कार्बोंक्सिलिक अम्ल में उपस्थित कार्बोनल समूह की ऑक्सीजन का प्रोटेनीकरण (Protonation) होता है, जिससे कार्बोनिल समूह, ऐल्कोहॉल के नाभिकस्नेही योग के लिए सक्रिय हो जाता है।

इसके पश्चात् ऐल्कोहॉल के योग से बने मध्यवर्ती में प्रोटॉन का स्थानान्तरण -OH समूह को –\(\stackrel{+}{\mathrm{O}}\)H2 में परिवर्तित कर देता है जो कि एक आसानी से निकलने वाला समूह होने के कारण, जल के अणु के रूप में निकल जाता है तथा इंस प्रकार बना प्रोटॉनित एस्टर प्रोटॉन को त्यागकर एस्टर बना देता है।
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प्रश्न 31.
बेन्जोइक अम्ल से निम्नलिखित यौगिक किस प्रकार बनाए जाते हैं?
(i) m नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(ii) m- ब्रोमो बेन्जोइक अम्ल।
उत्तर:
(i) बेन्जोइक अम्ल को सान्द्र HNO3 तथा सान्द्र H2SO3 (नाइट्रीकारक मिश्रण) के साथ गरम करने पर II- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
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(ii) FeBr3 की उपस्थिति में बेन्जोइक अम्ल की ब्रोमीन के साथ क्रिया करवाने पर m-ब्रोमोयेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
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प्रश्न 32.
ऐसिल क्लोराइड तथा ऐसिड ऐन्हाइड्राइड के जल अपघटन से कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 33.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समतुल्य अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों, कीटोनों तथा ऐल्कोहॉलों से उच्च होते हैं, क्यों?
उत्तर:
समतुल्य अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों कीटोनों तथा ऐल्कोहॉलों की तुलना कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक उच्च होते हैं क्योंकि कार्बोक्सिलिक अम्लों में प्रबल अंतराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है। जिसके कारण इनके अणु आपस में संगुणित हो जाते हैं तथा अधिकांश अम्ल वाष्प अवस्था एवं ऐप्रोटिक विलायकों में द्विलक के रूप में पाए जाते हैं।

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प्रश्न 34.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्लीय गुणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कार्बोक्सिलिक अम्ल, क्षारों के साथ क्रिया करके लवण बनाते हैं जिससे इनके अम्लीय गुण की पुष्टि होती है। कार्बोंक्सिलिक
अम्लों के अम्लीय गुण की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती हैकार्बोक्सिलिक अम्ल, (RCOOH) जल में आयनित होकर RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) (कार्बोक्सिलेट आयन) तथा H3 (हाइड्रोनियम आयन) बनाते हैं। RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है।
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इस अभिक्रिया के लिएसाम्य स्थिरांक, Keq = \(\frac{\left[\mathrm{H}_3 \mathrm{O}^{+}\right]\left[\mathrm{RCOO}^{-}\right]}{\left[\mathrm{H}_2 \mathrm{O}\right][\mathrm{RCOOH}]}\)
अम्ल वियोजन स्थिरांक Ka = Keq[H2O] = ]\(\frac{\left[\mathrm{H}_3 \mathrm{O}^{+}\right]\left[\mathrm{RCOO}^{-}\right]}{[\mathrm{RCOOH}]}\)
अम्लों की सामर्थ्य को सामान्यतः Ka मान की अपेक्षा PKa के से दर्शाते हैं
pKa = – log Ka
किसी अम्ल का pKa मान जितना कम होता है वह उतना ही प्र अम्ल होता है।
अम्लों की प्रबलता को pKa मानों से निम्न प्रकार सम्बन्धित किया जा सकता है-

pKaअम्लीय प्रबलता
1 से कमप्रबल अम्ल
1 से 5मध्यम प्रबल अम्ल
5 से 15दुर्बल अम्ल
15 से अधिकअत्यधिक दुर्बल अम्ल

कुछ अम्लीय यौगिकों के pK मान निम्नलिखित हैं-

यौगिकpKमानयौगिकpKमान
KCl– 7.0CH3COOH4.76
CF3COOH0.23C6H5OH10
C6H5COOH4.19C2H5OH~  1.6

ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल (CF3COOH) के pKa मान से यह सिद्ध होता है कि यह प्रबलतम कार्बनिक अम्ल है। कार्बोक्सिलिक अम्ल, खनिज अम्लों से दुर्बल लेकिन ऐल्कोहॉलों तथा फीनॉलों से प्रबल होते हैं।

प्रश्न 35.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्ल सामर्थ्य पर विभिन्न प्रतिस्थापियों के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्ल सामर्थ्य पर प्रतिस्थापियों का प्रभाव – कार्बोक्सिलिक अम्लों के आयनन से प्राप्त कार्बोक्सिलेट आयन जितना अधिक स्थायी होता है साम्य उतना ही अग्र दिशा में विस्थापित होता है जिससे हाइड्रोजन आयन (H+) अधिक बनते हैं अतः अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है।

कार्बोक्सिलिक अम्ल में उपस्थित प्रतिस्थापी कार्बोक्सिलेट आयन (संयुग्मी क्षारक) के स्थायित्व को प्रभावित करते हैं अतः इनसे इनके अम्लीय सामर्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।

इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह ( – I प्रभाव या EWG) कार्बोक्सिलेट आयन के स्थायित्व को बढ़ाते हैं क्योंकि ये साझित इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं जिससे ऋणावेशित ऑक्सीजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अर्थात् ऋणावेश का विस्थानीकरण हो जाता है । अतः अम्ल की अम्लीय प्रबलता बढ़ जाती है।

विभिन्न समूहों के – I प्रभाव का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होता है-
C6H5 – < OCH3 < OH < I < Br < CI < F < CN < NO2 < CF3 (−I प्रभाव )

इसके विपरीत इलेक्ट्रॉन दाता समूह ( + I प्रभाव या EDG) के कारण कार्बोक्सिलेट आयन का स्थायित्व कम हो जाता है क्योंकि यह ऑक्सीजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ा देता है, जिससे इसकी क्रियाशीलता बढ़ जाती है अतः अम्ल की अम्लीय प्रबलता कम हो जाती है।

अतः निम्नलिखित अम्लों की अम्लीय प्रबलता का घटता क्रम निम्न प्रकार होता है-
(1) CF3COOH> CCl3COOH > CHCl2COOH > NO2CH2COOH > N≡C-CH2COOH > FCH2COOH > ClCH2COOH > BrCH2COOH > HCOOH > ClCH2CH2COOH > > C6H5COOH > C6H5CH2COOH > CH3COOH > CH3CH2COOH

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(+I प्रभाव कम हो रहा है, क्योंकि + I प्रभाव ऐल्किल समूह आकार के समानुपाती होता है। )

(3) अशाखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीय प्रबलता, शाखित अम्लों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि शाखित ऐल्किल समूह का +I प्रभाव अधिक होता है।
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(4) इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह, – COOH समूह अम्लीय प्रबलता उतनी ही कम होगी।
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(5) – I प्रभाव वाले समूहों की संख्या बढ़ने पर अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है।
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(6) कार्बोक्सिल समूह पर वाइनिल या फेनिल समूह जुड़े होने पर अम्ल की प्रबलता बढ़ जाती है क्योंकि इनमें कार्बोक्सिल समूह से जुड़े कार्बन पर sp² संकरण होता है जिससे कार्बन की विद्युतऋणता बढ़ जाती है तथा इनमें अनुनाद भी पाया जाता है।
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(7) ऐलिफैटिक कार्बोक्सिलिक अम्लों के समान, ऐरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्लों में भी इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह के कारण अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है जबकि इलेक्ट्रॉनदाता समूह के कारण अम्लीय प्रबलता में कमी होती है।
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(8) बेन्जोइक अम्ल में ऑर्थोस्थिति पर कोई भी समूह (+I या -I प्रभाव दर्शाने वाला) उपस्थित होने पर अम्लीय गुण में वृद्धि होती है इसे ऑर्थोप्रभाव कहते हैं।
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(ii) धातुओं तथा क्षारों के साथ अभिक्रिया – ऐल्कोहॉलों के समान कार्बोक्सिलिक अम्ल भी सक्रिय धातुओं के साथ क्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस देते हैं।
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फनॉल के समान, कार्बोक्सिलिक अम्ल भी क्षारों के साथ क्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं, लेकिन NaHCO3 के साथ केवल कार्बोक्सिलिक अम्ल ही क्रिया करते हैं, फीनॉल नहीं । अतः इस अभिक्रिया द्वारा फीनॉल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल में विभेद किया जा सकता है।
R – COOH + 2NaOH → R – CO\(\overline{\mathrm{O}}\)N\(\overline{\mathrm{a}}\) + H2
2R COOH + Na2CO3 → 2R COONa + H2O + CO2
2R COOH + Ca(OH)2 → (RCOO)2 Ca + 2H2O
RCOOH + AgOH → RCOOAg + H2O
R – COOH + NaHCO3 → R – CO\(\overline{\mathrm{O}}\)N\(\overline{\mathrm{a}}\) + H2O + CO2

प्रश्न 36.
फार्मिक अम्ल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाएँ दीजिए-
(i) सान्द्र H2SO4 (ii) जलीय Cl2
उत्तर:
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प्रश्न 37.
फ्लुओरीन की विद्युतॠणता, क्लोरीन की विद्युतॠणता से अधिक होती है फिर भी p-क्लोरोबेन्जोइक अम्ल की अम्लीय प्रबलता p-फ्लुओरोबेन्जोइक अम्ल से अधिक होती है क्यों ?
उत्तर:
हैलोजन, +M तथा I दोनों प्रभाव दर्शाते हैं लेकिन फ्लुओरीन तथा कार्बन का परमाणु आकार लगभग समान होता है अतः p-फ्लुओरो बेन्जोइक अम्ल में +M प्रभाव p-क्लोरो बेन्जोइक अम्ल की तुलना में अधिक होता है । इसलिए इसमें – I प्रभाव कम प्रभावी रह जाता है इस कारण p-क्लोरोबेन्जोइक अम्ल की अम्लीय प्रबलता, P- फ्लुओरोबेन्जोइक अम्ल से अधिक होती है।

प्रश्न 38.
अणु सूत्र C12H12 युक्त एक ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से दो भिन्न-भिन्न यौगिक प्राप्त होते हैं जिनमें से एक यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता जबकि दूसरा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है लेकिन आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देता तो इस ऐल्कीन तथा उत्पादों के नाम एवं सूत्र बताइए ।
उत्तर:
ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से प्राप्त एक यौगिक टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया नहीं करता अतः यह कीटोन होना चाहिए लेकिन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह मेथिल कीटोन होगा जबकि दूसरा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया करता है अतः यह एक ऐल्डिहाइड होगा चूंकि एल्कीन में छः कार्बन हैं। अतः एक यौगिक ऐसीटोन तथा दूसरा यौगिक प्रोपिऑन ऐल्डिहाइड होंगा जो कि निम्नलिखित अभिक्रिया से भी स्पष्ट है-
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ऐसीटोन (मेथिल कीटोन) आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन प्रोपिऑन ऐल्डिहाइड नहीं।

प्रश्न 39.
(i) ऐसी दो विधियाँ बताइए जिनसे C = 0 समूह CH2 में परिवर्तित हो जाता है।
(ii) ऐल्डिहाइडों के शोधन में सोडियम बाइसल्फाइट का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
(i) क्लीमेन्सन अपचयन तथा वोल्फ किश्नर अपचयन द्वारा > C = 0 समूह CH2 में परिवर्तित हो जाता है।

(ii) ऐल्डिहाइड सोडियम बाइ सल्फाइट (NaHSO3) से क्रिया करते हैं लेकिन अन्य अशुद्धियाँ नहीं, अतः अशुद्ध ऐल्डिहाइड की NaHSO3 से क्रिया द्वारा प्राप्त श्वेत ठोस का जल अपघटन करके शुद्ध ऐल्डिहाइड प्राप्त कर लिया जाता है।

प्रश्न 40.
आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे?
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उत्तर:
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प्रश्न 41.
बेन्जोइक अम्ल को ऐनिलीन में किस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है ?
उत्तर:
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प्रश्न 42.
(i) अपचायक के प्रयोग के बिना फॉर्मेल्डिहाइड से मेथेनॉल किस प्रकार बनाया जा सकता है?
(ii) फेलिंग विलयन में रोशेल लवण क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर:
(i) फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) की सान्द्र NaOH के साथ अभिक्रिया से केनिजारो अभिक्रिया होकर मेथेनॉल (CH3OH) तथा सोडियम फॉर्मेट बनता है। इस अभिक्रिया में प्रयुक्त NaOH अपचायक नहीं है।
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(ii) फेलिंग विलयन में क्षारीय माध्यम होता है तथा क्षारीय माध्यम में Cu2+ आयन Cu(OH)2 के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। अतः रोशेल लवण मिलाने पर Cu2+ तथा रोशेल लवण के मध्य संकुल बन जाता है। जिससे Cu2+ अवक्षेप के रूप में न रहकर विलयन में आ जाते हैं अन्यथा परीक्षण में बाधा उत्पन्न होगी।

प्रश्न 43.
(i) निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए-
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(ii) ऐसीटोफीनॉन की हाइड्रॉक्सिल ऐमीन के साथ क्रिया से बने दो समावयवियों की संरचना लिखिए।
उत्तर:
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(ii) ऐसीटोफीनॉन की हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ क्रिया से इसका ऑक्सिम बनता है जो कि दो ज्यामितीय समावयवी रूपों में पाया जाता है।
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बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
(a) निम्नलिखित नामधारिक अभिक्रियाओं (Name reactions) को रासायनिक समीकरण देकर स्पष्ट कीजिए-
(i) कैनिजारो की अभिक्रिया
(ii) हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया

(b) निम्नलिखित यौगिक युग्मों में भिन्नता की पहचान करने के लिए एक-एक रासायनिक परीक्षण दीजिए-
(i) प्रोपेनेल तथा प्रोपेनोन में
(ii) ऐसीटोफीनोन और बेन्जोफीनोन में
(iii) फीनॉल और बेन्जोइक अम्ल में।
अथवा
(a) निम्नलिखित रूपांतरण आप कैसे करेंगे-
(i) एथेनॉल को 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनेल में
(ii) बेन्जैल्डिहाइड को बेन्जोफीनोन में

(b) एक ऑर्गोनिक (कार्बनिक) यौगिक A (आण्विक सूत्र C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से जल-अपघटित किया गया जिससे एक कार्बोक्सिलिक अम्ल B और एक ऐल्कोहॉल C उत्पादित हुआ। C के क्रोमिक अम्ल के साथ उपचयन (ऑक्सीकरण) से भी B प्राप्त होता है। C का निर्जलीकरण करने पर ब्यूट-1-ईन प्राप्त होता है। सन्निहित अभिक्रियाओं के लिए समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
(a) (i) फेलिंग अभिकर्मक से क्रिया-फेलिंग अभिकर्मक, फेलिंग विलयन A तथा फेलिंग विलयन B से मिलकर बना होता है।
फेलिंग विलयन A जलीय कॉपर सल्फेट (CuSO) का नीला तथा फेलिंग विलयन B सोडियम पोटैशियम टार्ट्रेट ( रोशेल लवण) का रंगहीन क्षारीय विलयन होता है। विलयन A तथा B को समान मात्रा में मिलाकर ऐल्डिहाइड के साथ गर्म करने पर क्युप्रस ऑक्साइड का लाल भूरा अवक्षेप बनता है।
R – CHO + 2Cu2+ + 5\(\overline{\mathrm{O}}\)H → RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) + Cu2O + 3H2O
एरोमैटिक ऐल्डिहाइड जैसे बेन्जेल्डिहाइड, फेलिंग अभिकर्मक में क्रिया नहीं करते हैं।
रोशेल लवण का सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 100 होता है, तथा इस अभिक्रिया में पहले गहरे नीले रंग का संकुल बनता है जिससे Cu2+ आयनों का अवक्षेप [Cu(OH)2] बनने के बजाय ये विलयन में आ जाते हैं। सकुल की संरचना निम्नलिखित है- HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 101 क्यूरिट आयन (गहरा नीला)

(ii) हैलोजेनीकरण-α, हाइड्रोजन परमाणु युक्त कार्बोक्सिलिक अम्लों की क्रिया क्लोरीन या ब्रोमीन के साथ करवाने पर α – हैलोकार्बोंक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया कहते हैं।
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फॉस्फोरस की उपस्थिति में मोनोक्लोरो उत्पाद अधिक म्रात्रा में बनता है।

(b) (i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन में विभेद – प्रोपेनैल (CH3CH2CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि (CH3COCH3) एक मेथिल कीटोन है। इनमें निम्न परीक्षणों द्वारा विभेद किया जा सकता है-

  • आयोडोफॉर्म परीक्षण – जलीय NaOH तथा I2 के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल में कोई क्रिया नहीं होती जबकि प्रोपेनोन द्वारा आयोडोफॉर्म बनने के कारण पीला अवक्षेप आता है।
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 103
  • टॉलेन अभिकर्मक (अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट) के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल रजत दर्पण देता है (रजत दर्पण परीक्षण) जबकि प्रोपेनोन में कोई क्रिया नहीं होती।
  • फेलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल से लाल अवक्षेप बनता है जबकि प्रोपेनोन से कोई अभिक्रिया नहीं होती।

(ii) ऐसीटोफ़ीनॉन एवं बेन्ज़ोफ़ीनॉन में विभेद – ऐसीटोफ़ीनॉन (CH3COC6H5) एक सेथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्ज़ोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 104यह परीक्षण नहीं देता।

(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्ज़ोइक अम्ल में विभेद-
(1) फ़ीनॉल NaHCO3 विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं करता जबकि बेन्ज़ोइक अम्ल NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके CO2 गैस देता है।
C6H5COOH + NaHCO3 → C6H5COONa +CO2↑ + H2

(2) उदासीन FeCl3 विलयन के साथ फ़ीनॉल बैंगनी (Violet) रंग देता है जबकि बेन्ज़ोइक अम्ल के साथ इसकी कोई क्रिया नहीं होती।
अथवा
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(b) यौगिक A का अणुसूत्र तथा इसके जल अपघटन से कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा ऐल्कोहॉल बनने से ज्ञात होता है कि यह एक संतृप्त एस्टर है। ऐल्कोहॉल के निर्जलीकरण से ब्यूट-1-ईन प्राप्त होती है अतः ऐल्कोहॉल में सीधी श्रृंखला में चार कार्बन परमाणु हैं अतः कार्बोक्सिलिक अम्ल में भी चार कार्बन परमाणु ही होंगे। सन्निहित अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
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प्रश्न 2.
1-फेनिल पेन्टेन-1-ओन का संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
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प्रश्न 3.
टॉलेन अभिकर्मक क्या होता है? इस अभिकर्मक की एक उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन को टॉलेन अभिकर्मक कहते हैं। इस अभिकर्मक से ऐल्डिहाइड तथा कीटोन में विभेद किया जा सकता है। ऐल्डिहाइड इसके साथ क्रिया करके रजत दर्पण देते हैं लेकिन कीटोन नहीं।

प्रश्न 4.
(a) निम्नलिखित नाम वाली अभिक्रियाओं को प्रत्येक के लिए रासायनिक समीकरण देकर लिखिए-
(i) क्लीमेन्सन अभिक्रिया
(ii) कैनिज़ारो की अभिक्रिया

(b) वर्णन कीजिए कि निम्नलिखित रूपांतरण कैसे किए जाते हैं-
(i) साइक्लोहेक्सैनॉल का साइक्लोहेक्सेन-1-ओन में
(ii) एथिलबेन्जीन का बेन्जोइक अम्ल में
(iii) ब्रोमोबेन्जीन का बेन्जोइक अम्ल में।
अथवा
(a) निम्नलिखित नामों की अभिक्रियाओं को उदाहरण के साथ लिखिए-
(i) हेल-फोलार्ड-जेलिंस्की अभिक्रिया
(ii) वोल्फ-किश्नर अपचयन अभिक्रिया

(b) निम्न रूपांतरण कैसे किए जा सकते हैं-
(i) मेथिल सायनाइड का एथेनोइक अम्ल में
(ii) ब्यूटेन-1-ऑल का ब्यूटेनोइक अम्ल में
सन्निहित अभिक्रियाओं के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
(a) (i) क्लीमेन्सन अपचयन-कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन जिंक अमलगम तथा सान्द्र HCl(Zn/Hg + HCl) के मिश्रण से कराया जाता है तो ऐल्केन बनते हैं, इसे क्लीमेन्सन अपचयन कहते हैं।
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यह अभिक्रिया मुख्यतः कीटोनों के लिए प्रयुक्त की जाती है क्योंकि सान्द्र HCl की उपस्थिति में ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों का बहुलकीकरण हो जाता है।

(ii) कैनिजारो अभिक्रिया-वे ऐल्डिहाइड जिनमें α हाइड्रोजन नहीं होते वे कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं। इन ऐल्डिहाइडों को सान्द्र क्षार (KOH या NaOH) के साथ गर्म करते हैं जिससे एक अणु का ऑक्सीकरण होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण तथा दूसरे अणु के अपचयन से ऐल्कोहॉल बनता है। अतः यह एक असमानुपातन या विषमीकरण अभिक्रिया है।
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(b)
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अथवा
(a) (i) हैलोजेनीकरण-α, हाइड्रोजन परमाणु युक्त कार्बोक्सिलिक अम्लों की क्रिया क्लोरीन या ब्रोमीन के साथ करवाने पर α – हैलोकार्बोंक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया कहते हैं।
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फॉस्फोरस की उपस्थिति में मोनोक्लोरो उत्पाद अधिक म्रात्रा में बनता है।

(ii) वोल्फ-किश्नर अपचयन-कार्बोनिल यौगिकों की हाइड्रैजीन के साथ अभिक्रिया कराने के पश्चात्, एथिलीन ग्लाइकॉल में सोडियम या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर > C = O समूह – CH2 समूह में बदल जाता है तथा ऐल्केन बनते हैं।
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उपरोक्त अभिक्रिया में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (HO-CH2-CH2-O-CH2-OH) तथा KOH लेने पर इसे हुएंगमिनलॉन अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 5.
4-क्लोरोपेन्टेन 2-ओन की संरचना आरेखित कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 6.
(a) निम्नलिखित नाम वाली अभिक्रियाओं के उदाहरण दीजिए-
(i) कैनिज़ारो की अभिक्रिया
(ii) क्लीमेन्सन अपचयन

(b) निम्नलिखित को आप कैसे प्राप्त करेंगे-
(i) एथेनैल से ब्यूट – 2 – इनैल
(ii) ब्यूटेनॉल से ब्यूटेनोइक अम्ल
(iii) एथिलबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल।
अथवा
(a) निम्नलिखित में विभेद करने के लिए रासायनिक परीक्षणों को लिखिए-
(i) बेन्जोइक अम्ल और एथिल बेन्जोएट
(ii) बेन्जेल्डिहाइड और ऐसीटोफीनोन

(b) निम्नलिखित में अभिकारक अथवा उत्पाद जो न लिखे गए हों उन्हें लिखकर प्रत्येक संश्लेषण को पूर्ण कीजिए-
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उत्तर:
(a) (i) कैनिजारो अभिक्रिया-वे ऐल्डिहाइड जिनमें α हाइड्रोजन नहीं होते वे कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं। इन ऐल्डिहाइडों को सान्द्र क्षार (KOH या NaOH) के साथ गर्म करते हैं जिससे एक अणु का ऑक्सीकरण होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण तथा दूसरे अणु के अपचयन से ऐल्कोहॉल बनता है। अतः यह एक असमानुपातन या विषमीकरण अभिक्रिया है।
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(ii) क्लीमेन्सन अपचयन-कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन जिंक अमलगम तथा सान्द्र HCl(Zn/Hg + HCl) के मिश्रण से कराया जाता है तो ऐल्केन बनते हैं, इसे क्लीमेन्सन अपचयन कहते हैं।
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यह अभिक्रिया मुख्यतः कीटोनों के लिए प्रयुक्त की जाती है क्योंकि सान्द्र HCl की उपस्थिति में ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों का बहुलकीकरण हो जाता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित का आई.यू. पी. ए. सी. (IUPAC ) नाम लिखिए-
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उत्तर:
पेन्ट – 2 – ईन – 1- ऐल।

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प्रश्न 8.
(a) उपयुक्त रासायनिक समीकरण को लिखकर निम्नलिखित प्रत्येक रूपांतरण को पूर्ण कीजिए-
(i) ब्यूटेन – 1 – ऑल को ब्यूटेनॉइक अम्ल में
(ii) 4 – मेथिलऐ सीटोफीनोन को बेन्जीन-1, 4- डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल में

(b) एक ऑर्गेनिक (कार्बनिक यौगिक, जिसका आण्विक सूत्र C9H10O है, 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है, और कैनिजारो की अभिक्रिया देता है। तीव्र ऑक्सीकरण पर यह 1, 2 – बेन्जीनडाइकार्बोक्सिलिक अम्ल देता है । यौगिक की पहचान कीजिए।
अथवा
(a) निम्न के बीच अंतर करने के लिए रासायनिक जाँचों को दीजिए-
(i) प्रोपेनैल और प्रोपेनोन में
(ii) बेन्जेल्डिहाइड और ऐसीटीफीनोन में

(b) अग्रलिखित यौगिकों को उनके सामने दिए गए गुणधर्मों के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(i) ऐसीट-ऐल्डिहाइड, ऐसीटोन, मेथिल टर्ट (तृतीयक) ब्यूटिल कीटोन (HCN के प्रति क्रियाशीलता)
(ii) बेन्जोइक अम्ल, 3, 4 – डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल, 4- मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल (अम्ल सामर्थ्य)
(iii) CH3CH2CH(Br)COOH, CH3CH(Br) CH3COOH,
(CH3)2CH COOH (अम्ल सामर्थ्य)
उत्तर:
(a)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 118
(b) यह कार्बनिक यौगिक 2,4-DNP व्युत्पन्न बनाता है। अतः यह कार्बोनिल यौगिक (ऐल्डिहाइड या कीटोन) होगा लेकिन यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचित (reduced) कर रहा है। अतः यह ऐल्डिहाइड है तथा यह कैनिजारो अभिक्रिया दे रहा है। अतः इसमें α-H अनुपस्थित है। इसके आक्सीकरण से 1,2 -बेन्जीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 119
ऑक्सीकरण के बाद बने उत्पाद से यह सिद्ध होता है कि इसमें एक बेन्जीन वलय है, एक COOH समूह – CHO समूह के ऑक्सीकरण से तथा दूसरा – COOH समूह ऐल्किल समूह के ऑक्सीकरण से प्राप्त होगा। अतः अणुसूत्र के अनुसार इसका संरचना सूत्र निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 120

अथवा
(a) (i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन में विभेद-प्रोपेनैल (CH3CH2CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि (CH3COCH3) एक मेथिल कीटेन है। इनमें निम्न परीक्षणों द्वारा विभेद किया जा सकता है-

(ii) (1) बेन्ज़ैल्डिहाइड (C6H5CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 121एक मेथिल कीटोन है अतः ऐसीटोफ़ीनॉन, आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्ज़ैल्डिहाइड यह परीक्षण नहीं देता है।

(2) बेन्ज़ल्डिहाइड टॉलेन अभिकर्मक से ऑक्सीकृत हो जाता है, जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन इससे क्रिया नहीं करता।

(b) (i) ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की नाभिकरागी संकलन के लिए क्रियाशीलता + I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा पर निर्भर करती है। अतः इनकी HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होगा-डाइ तृतीयक – ब्यूटिल कीटोन – मेथिल तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < ऐसीटोन – ऐसिटैल्डिहाइड

(ii) कार्बोक्सिलिक अम्लों का अम्लीय गुण, प्रेरणिक प्रभाव (+I तथा -I) तथा विभिन्न समूहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अतः इनके अम्लीय गुण का क्रम निम्न प्रकार होगा-
(CH3)2CHCOOH < CH3CH2CH2COOH < CH3CH(Br)CH2COOH < CH3CH2CH(Br)COOH

(iii) 4 – मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल < 3, 4 – डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(अम्लता की सामर्थ्य का बढ़ता क्रम)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 122

प्रश्न 9.
निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों के आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 123
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 124

प्रश्न 10.
(i) रोजेनमुंड अपचयन अभिक्रिया लिखिए।
(ii) HCOOH, CF3COOH, ClCH2CUUH, अम्लों को उनकी अम्लीयता के बढ़ते क्रम में लिखिए।
(iii) एथेनोइक अम्ल की क्रिया अमोनिया से कराने पर यौगिक A बनता है जिसे गर्म करने पर यौगिक B प्राप्त होता है। B का अम्लीय जल अपघटन कराने पर पुन: एथेनोइक अम्ल बनता है। A व B के IUPAC नाम एवं सूत्र लिखो व अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।
(iv) कार्बोनिल समूह का कक्षीय आरेख चित्र बनाइए।
अथवा
(i) वोल्फ-किश्नर अपचयन की अभिक्रिया लिखिए।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 125संरचना में α हाइड्रोजन परमाणु की अम्लीय प्रकृति को समझाइए।
(iii) एक कार्बोनिल यौगिक A का ऑक्सीकरण टॉलन अभिकर्मक से कराने पर यौगिक B बनता है जिसका अपचयन LiAlH4 से कराने पर एथेनॉल बनता है। A व B के IUPAC नाम एवं सूत्र लिखिए।
(iv) ऐसीटेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइये।
उत्तर:
(i) Pd तथा BaSO4 की उपस्थित में ऐसिल क्लोराइड पर हाइड्रोजन की क्रिया से ऐल्डिहाइड बनते हैं। इसे रोजेनमुंड अपचयन अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 126

(ii) अम्लों की अम्लीयता का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 127
अतः (A) = CH3COONH4 अमोनियम ऐसीटेट या अमोनियम एथेनॉएट
(B) = CH3CONH2 एथेनेमाइड

(iv) कार्बोनिल समूह में कार्बन परमाणु पर sp² संकरण होता है तथा ये तीन sp² संकरित कक्षक तीन σ बन्ध बनाते हैं एवं कार्बन का असंकरित p कक्षक, ऑक्सीजन के p – कक्षक के साथ सम्पार्श्विक अतिव्यापन द्वारा π बन्ध बनाता है।

इस प्रकार कार्बोनिल समूह का कार्बन तथा इससे जुड़े तीन परमाणु एक ही तल में स्थित होते हैं तथा π इलेक्ट्रॉन अभ्र इस तल के ऊपर एवं नीचे स्थित होता है। बंध कोण का मान लगभग 120° होता है तथा ज्यामिति त्रिकोणीय समतल होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 128
कार्बन की तुलना में ऑक्सीजन की विद्युतऋणात्मकता अधिक होने के कारण कार्बन-ऑक्सीजन द्विआबंध ध्रुवित हो जाता है अतः कार्बोनिल समूह का कार्बन एक इलेक्ट्रॉनस्नेही (लूइस अम्ल) केन्द्र तथा ऑक्सीजन एक नाभिकस्नेही (लूइस क्षारक) केन्द्र के समान व्यवहार करता है।

> C = O समूह की ध्रुवता के कारण ही कार्बोनिल यौगिकों के द्विध्रुव आघूर्ण का मान अधिक होता है तथा ये ईथर की तुलना में अधिक ध्रुवीय होते हैं। कार्बोनिल समूह की ध्रुवता का कारण अनुनाद है जिसे निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 129
अथवा
(i) वोल्फ-किश्नर अपचयन-कार्बोनिल यौगिक की हाइड्रेजीन के साथ अभिक्रिया कराने के पश्चात्, एथिलीन ग्लाइकॉल (विलायक) में सोडियम या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर >C = O समूह -CH2 समूह में बदल जाता है तथा एल्केन बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 130

(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 131 संरचना में कार्बोनिल समूह है तथा कार्बोनिल यौगिकों के alpha-हाइड्रोजन परमाणु की अम्लता कार्बोनिल समूह के इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने के प्रबल प्रभाव तथा संयुग्मी क्षार के अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेने के कारण होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 132

(iii) कार्बोनिल यौगिक A का यॅलेन अभिकर्मक द्वारा ऑक्सीकरण हो रहा है अतः यौगिक A ऐल्डिहाइड होगा तथा ऐल्डिहाइड के ऑक्सीकरण से अम्ल बनता है अतः यौगिक B अम्ल होगा जिसका LiAlH4 के द्वारा अपचयन से एथेनॉल बन रहा है। अतः यौगिक B, CH3CHO तथा A, CH3CHO होगा। सम्पूर्ण अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 133

(iv) ऐसीटेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ निम्न हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 134

प्रश्न 11.
साइक्लोप्रोपेनॉन-2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजोन की संरचना दीजिए।
उत्तर:
साइक्लोप्रोपेनॉन – 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजोन की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 135
यह साइक्लोप्रोपेनॉन की 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजीन के साथ क्रिया से बनता है।
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प्रश्न 12.
(अ) निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) कैनिजारो अभिक्रिया
(ii) ऐल्डोल संघनन
(ब) निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांक के बढ़ते क्रम में लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 137
(स) टॉलेन अभिकर्मक द्वारा ऐल्डिहाइड एवं कीटोन में विभेद कैसे करेंगे?
अथवा
(अ) निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) रोजेनमुंड अपचयन
(ii) गाटरमान – कोख अभिक्रिया

(ब) निम्नलिखित यौगिकों को उनकी अम्लीयता के बढ़ते क्रम में लिखिए-
(CH3)2 CH – COOH, HCOOH, CH3 – COOH, (CH3)3 C – COOH

(स) सोडियम बाइकार्बोनेट द्वारा कार्बोक्सिलिक अम्ल व फीनॉल में विभेद किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
(अ) (i) कैनिजारो अभिक्रिया – वे ऐल्डिहाइड, जिनमें a – हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते, सान्द्र क्षार (NaOH या KOH) की उपस्थिति में स्वऑक्सीकरण व अपचयन (असमानुपातन) दर्शाते हैं। इस अभिक्रिया में ऐल्डिहाइड का एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है जबकि दूसरा अणु कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 138

(ii) ऐल्डोल संघनन – जिन ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों में a- हाइड्रोजन उपस्थित होते हैं, वे तनु क्षार (NaOH, Ca (OH)2) की उपस्थिति में आपस में क्रिया करके क्रमशः ß-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड (एल्डोल) अथवा p-हाइड्रॉक्सी कीटोन (कीटोल) बनाते हैं। इस अभिक्रिया को ऐल्डोल संघनन कहते हैं।

उदाहरण – ऐसीटैल्डिहाइड का ऐल्डोल संघनन-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 139

(ब) क्वथनांक का बढ़ता क्रम-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 140

(स) ऐल्डिहाइड को अमोनियम सिल्वर नाइट्रेट विलयन (AgNO3 + NH4OH) (टॉलेन अभिकर्मक ) के साथ गर्म करने पर सिल्वर बनने के कारण चमकदार सिल्वर दर्पण बनता है तथा ऐल्डिहाइड संगत कार्बोक्सिलेट आयन में ऑक्सीकृत हो जाते हैं।
RCHO + 2[Ag(NH3)2]+ + 3\(\overline{\mathrm{OH}}\) → RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) + 2Ag + 2H2O + 4NH3
कीटोन, टॉलेन अभिकर्मक के साथ क्रिया नहीं करते।
अथवा
(अ) (i) रोजेनमुंड अपचयन – Pd तथा BaSO4 की उपस्थिति में एसिल क्लोराइड की हाइड्रोजन के साथ क्रिया (हाइड्रोजनीकरण) से ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 141

(ii) गाटरमान – कोख अभिक्रिया – ऐलुमिनियम क्लोराइड की उपस्थिति में बेन्जीन की कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ क्रिया कराते हैं तो बेन्जेल्डिहाइड प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 142
इस अभिक्रिया को गाटरमान – कोख अभिक्रिया कहते हैं।

(ब) अम्लीयता का बढ़ता क्रम-
(CH3)3 C – COOH < (CH3)2 CHCOOH < CH3COOH < HCOOH

(स) फीनॉल (C6H5OH) सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं करता जबकि कार्बोक्सिलिक अम्ल (RCOOH), NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस देता है।
RCOOH + NaHCO3 → RCOONa + CO2 ↑ + H2O

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 13.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C3H6O है, 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रैजीन के साथ नारंगी लाल अवक्षेप देता है किन्तु टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता है। यौगिक का IUPAC नाम व संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
कार्बनिक यौगिक C3H6O 2, 4- डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रैजीन के साथ नारंगी लाल अवक्षेप देता है अतः यह एक कार्बोनिल यौगिक ( ऐल्डिहाइड या कीटोन) है तथा यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता है अतः यह ऐल्डिहाइड नहीं है इसलिए यह एक कीटोन है। अणुसूत्र के अनुसार इसका संरचना सूत्र तथा IUPAC नाम निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 143

प्रश्न 14.
निम्नलिखित यौगिकों के संरचना सूत्र एवं IUPAC नाम दीजिए-
(अ) फार्मेल्डिहाइड
(ब) ऐसीटोन।
अथवा
निम्नलिखित यौगिकों के संरचना सूत्र एवं IUPAC नाम दीजिए-
(अ) मेलोनिक अम्ल
(ब) सक्सिनिक अम्ल।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 144

प्रश्न 15.
(अ) कार्बोक्सिलेट आयन किस प्रकार अनुनाद .द्वारा स्थायित्व प्राप्त करता है? संरचाओं द्वारा स्पष्ट करें।
(ब) कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की अपेक्षा अधिक अम्लीय होता है। समझाइए |
उत्तर:
(अ) कार्बोक्सिलिक अम्ल, जल में आयनित होकर कार्बोक्सिलेट आयन RCOŌ तथा \(\mathrm{H}_3 \stackrel{+}{\mathrm{O}}\) (हाइड्रोनियम आयन) बनाते हैं। RCOŌ अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है। इसकी अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 145
इस अभिक्रिया के लिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 146
यहाँ Keq साम्यावस्था स्थिरांक तथा Ka अम्ल वियोजन स्थिरांक है।

(ब) फीनॉल के आयनन से प्राप्त फीनॉक्साइड आयन (C6H5O) में ऋणात्मक आवेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु तथा कम विद्युतऋणी कार्बन पर होता है, जबकि कार्बोक्सिलिक आयन (RCO) में ऋणात्मक आवेश दो विद्युतऋणी ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित होता है, अतः कार्बोक्सिलेट आयन में ऋणात्मक आवेश का विस्थानीकरण, फीनॉक्साइड आयन से अधिक होता है इस कारण इसका अनुनाद स्थायीकरण अधिक होता है । इसलिए कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल से अधिक अम्लीय है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
CH3-CHO, CH3-CH2-OH, CH3-CH2-CH3
उत्तर:
CH3-CH2-CH3 < CH3-CHO < CH3-CH2-OH

प्रश्न 17.
(i) निम्नलिखित को किस प्रकार परिवर्तित करेंगे-
(a) प्रोपेनॉन से प्रोपेन – 2 – ऑल
(b) एथेनैल से 2- हाइड्रॉक्सीप्रोपेनॉइक अम्ल
(c) टॉलूईन से बेन्जोइक अम्ल
(ii) निम्नलिखित में विभेद कीजिए-
(a) पेन्टेन – 2 – ऑन तथा पेन्टेन- 3 – ऑन
(b) एथेनैल तथा प्रोपेनैल।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 147

(ii) (a) पेन्टेन-2-ऑन एक मेथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि पेन्टेन – 2 – ऑन यह परीक्षण नहीं देता है।
(b) एथेनैल आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि प्रोपेनैल यह परीक्षण नहीं देता।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 148

प्रश्न 18.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 149
उत्तर:
(i) 3- हाइड्रॉक्सीब्यूटेनॉइक अम्ल
(ii) 3-ऐमीनो ब्यूटेनैल
(iii) 4-हाइड्रॉक्सी पेन्टेन-2-ऑन

प्रश्न 19.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पाद लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 150
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 151

प्रश्न 20.
उचित उदाहरण के साथ निम्न को समझाइए –
(अ) रोजेनमुंड अपचयन
(ब) गाटरमान – कॉख अभिक्रिया।
अथवा
उचित उदाहरण के साथ निम्न को समझाइए-
(अ) क्लीमेन्सन अपचयन
(ब) स्टीफेन अभिक्रिया।
उत्तर:
(अ) रोजेनमुंड अपचयन – ऐसिल क्लोराइड पर Pd तथा BaSO4 की उपस्थिति में हाइड्रोजन की क्रिया कराने (हाइड्रोजनीकरण) पर ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 152

(ब) गाटरमान – कॉख अभिक्रिया – जब बेन्जीन की क्रिया ऐलुमिनियम क्लोराइड की उपस्थिति में कार्बनमोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ कराते हैं तो बेन्जेल्डिहाइड बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 153
इस अभिक्रिया को गाटरमान कोख ऐल्डिहाइड संश्लेषण भी कहते हैं।
अथवा
(अ) क्लीमेन्सन अपचयन – इस अभिक्रिया में कार्बोनिल यौगिकों का जिंक अमलगम तथा सान्द्र HCl ( Zn / Hg + HCI) के मिश्रण से अपचयन कराया जाता है जिससे ऐल्केन बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 154
यह अभिक्रिया मुख्यतः कीटोनों के लिए प्रयुक्त की जाती है क्योंकि सान्द्र HCl की उपस्थिति में ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों का बहुलकीकरण हो जाता है।

(ब) स्टीफेन अभिक्रिया – जब ऐल्केन नाइट्राइल का अपचयन SnCl2 + HCl से कराया जाता है तो संगत इमीन बनते हैं जिनके जल अपघटन से ऐल्डिहाइड बनते हैं। इसे स्टीफेन अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 21.
आप एक पद में सोडियम एसिटेट को मेथेन में परिवर्तित कैसे करेंगे?
उत्तर:
सोडियम एसिटेट को सोडालाइम (NaOH तथा CaO का मिश्रण 3 : 1) के साथ गरम करने पर मेथेन प्राप्त होती है।
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प्रश्न 22.
(अ) रोजेनमुण्ड अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।
(ब) फ्लोरोऐसीटिक अम्ल, क्लोरोऐसीटिक अम्ल की तुलना में अधिक अम्लीय है, क्यों?
(स) कार्बोक्सिलेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।
अथवा
(अ) वोल्फ – किश्नर अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।
(ब) कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों से उच्च होते हैं, क्यों?
(स) एथेनॉइक अम्ल की वाष्प अवस्था में बनने वाले द्वितय की संरचना बनाइए।
उत्तर:
(अ) रोजेनमुंड अपचयन – ऐसिल क्लोराइड पर Pd तथा BaSO4 की उपस्थिति में हाइड्रोजन की क्रिया कराने (हाइड्रोजनीकरण) पर ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 152

(ब) फ्लोरोऐसीटिक अम्ल में उपस्थित फ्लोरीन का इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव (-1 प्रभाव) क्लोरोऐसीटिक अम्ल में उपस्थित क्लोरीन के – I प्रभाव से अधिक होता है अतः यह अम्ल के आयनन से प्राप्त कार्बोक्सिलेट आयन के ऋणावेशित ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करके उसका स्थायित्व बढ़ा देता है जिससे विलयन में H+ आयन अधिक प्राप्त होते हैं। अतः फ्लोरोऐसीटिक अम्ल, क्लोरोऐसीटिक अम्ल की तुलना में अधिक अम्लीय है।

(स) कार्बोक्सिलेट आयन (RCO\(\overline{\mathrm{O}}\)) की अनुनादी संरचनाएँ निम्न हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 158
अथवा
(अ) (i) वोल्फ-किश्नर अपचयन-कार्बोनिल यौगिक की हाइड्रेजीन के साथ अभिक्रिया कराने के पश्चात्, एथिलीन ग्लाइकॉल (विलायक) में सोडियम या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर > C = O समूह – CH2 समूह में बदल जाता है तथा एल्केन बनते हैं।

(ब) कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्डिहाइड तथा कीटोनों से उच्च होते हैं क्योंकि इनमें प्रचल अंतराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जिसके कारण इनके अणु आपस में संगुणित हो जाते हैं तथा अधिकांश कार्बोक्सिलिक अम्ल वाष्प अवस्था तथा ऐप्रोटिक विलायकों में द्विलक के रूप में पाए जाते हैं।

(स) एथेनॉइक अम्ल की वाष्प अवस्था में बनने वाले द्वितय (द्विलक) की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 159

प्रश्न 23.
बेन्जोइक अम्ल, 4 मेथिल बेन्जोइक अम्ल एवं 4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल को अम्लीय सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
उपरोक्त अम्लों की अम्लीय सामर्थ्य का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 160

प्रश्न 24.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों की प्रागुक्ति कीजिए :
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उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 162

प्रश्न 25.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में जो अभिकर्मक प्रयुक्त होते हैं, उन्हें लिखिए :
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 163
अथवा
निम्नलिखित यौगिकों को उनके सामने दिए गए गुणधर्म के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
(i) CH3CHO, C6H5CHO, HCHO
(नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के प्रति सक्रियता)
(ii) 2,4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक एसिड, 4- मेथॉक्सीबेन्जोइक एसिड, 4 – नाइट्रोबेन्जोइक एसिड (अम्लीय व्यवहार)।
उत्तर-
(i) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 164
(ii) CH3COOH + PCl5 → CH3COCl + HCl + POCl3
अतः अभिक्रिया (i) में Zn Hg व सान्द्र HCl तथा अभिक्रिया (ii) में PCL5 अभिकर्मक है।
अथवा
(i) CH3CHO, C6H5CHO HCHO का नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के प्रति सक्रियता का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
C6H5CHO < CH3CHO < HCHO
उपरोक्त यौगिकों के अम्लीय व्यवहार का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार हैं –
4- मेक्सीबेन्जोइक एसिड < 4- नाइट्रोबेन्जोइक एसिड < 2,4- डाइनाइट्रोक एसिड
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 165

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए-
(i) क्षेत्र सर्वेक्षण की योजना के लिए नीचे दी गई विधियों में कौन-सी विधि सहायक है?
(क) व्यक्तिगत साक्षात्कार
(ख) द्वितीयक सूचनाएँ
(ग) मापन
(घ) प्रयोग
उत्तर:
(ख) द्वितीयक सूचनाएँ।

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(ii) क्षेत्र सर्वेक्षण के निष्कर्ष के लिए क्या किया जाना चाहिए?
(क) आंकड़ा प्रवेश एवं सारणीयन
(ख) प्रतिवेदन लेखन
(ग) सूचकांकों का अभिकलन
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) प्रतिवेदन लेखन।

(iii) क्षेत्र सर्वेक्षण के प्रारंभिक स्तर पर अत्यंत महत्त्वपूर्ण क्या है?
(क) उद्देश्य का निर्धारण करना
(ख) द्वितीयक आंकड़ों का संग्रहण
(ग) स्थानिक एवं विषयक सीमाओं को परिभाषित करना (घ) निर्देशन अभिकल्पना।
उत्तर:
(क) उद्देश्य का निर्धारण करना

(iv) क्षेत्र सर्वेक्षण के समय किस स्तर की सूचनाओं को प्राप्त
करना चाहिए?
(क) बृहत् स्तर की सूचनाएँ
(ख) मध्यम स्तर की सूचनाएँ
(ग) लघु स्तर की सूचनाएँ
(घ) उपर्युक्त सभी स्तर की सूचनाएँ।
उत्तर:
(क) बृहत् स्तर की सूचनाएँ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) क्षेत्र सर्वेक्षण क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण विधि से किसी क्षेत्र के स्थानीय भूगोल के बारे में प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है। इस विधि से विद्यार्थियों में आपसी सहयोग तथा नेतृत्व की भावना जागृत होती है। क्षेत्रीय कार्य से भूगोलवेत्ता स्वयं आँकड़े एकत्र करके मानचित्र बनाने का कार्य कर सकते हैं।

(ii) क्षेत्र सर्वेक्षण के उपकरण एवं प्रविधियों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्रीय सर्वेक्षण आयोजित किया जाता है जिसके लिए अलग-अलग किस्मों की विधियों की जरूरत होती है। इनमें मानचित्रों एवं अन्य आंकड़ों सहित द्वितीयक सूचनाएँ, क्षेत्रीय पर्यवेक्षण। लोगों के साक्षात्कार हेतु प्रश्नावलियों से आंकड़ा उत्पाद इत्यादि को शामिल किया जाता है।

(iii) क्षेत्र सर्वेक्षण के चुनाव से पहले किस प्रकार के व्याप्ति क्षेत्र की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर:
जाँच करने वाला खुद यह तय करेगा कि सर्वेक्षण सारी जनसंख्या के लिए जनगणना रूप में संचालित करना है या फिर कुछ चुनिन्दा सैम्पल पर आधारित होगा। अगर सर्वेक्षण का क्षेत्र ज्यादा विशाल न हो पर इसकी रचना विविध तत्वों की है तो अपेक्षा में सारी जनसंख्या का सर्वेक्षण होना चाहिए।

(iv) सर्वेक्षण अभिकल्पना को संक्षिप्त में समझाएँ।
उत्तर:
सैम्पल सर्वेक्षण की संरचना में हम इसके नाप तथा उसके अध्ययन के ढंग को शामिल करते हैं। ऐसे अध्ययन स्थितियों और प्रक्रियाओं की उनकी संपूर्णता और उनके घटना स्थल के परिप्रेक्ष्य में समझने में अन्वेषक को समर्थ बनाते हैं। यह सर्वेक्षण स्थानीय स्तर पर स्थानिक वितरण के प्रारूपों, उनके साहचर्य और संबंधों के बारे में हमारी समझ को बढ़ाते हैं।

(v) क्षेत्र सर्वेक्षण के लिए प्रश्नों की अच्छी संरचना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण के प्रश्नों की अच्छी संरचना आवश्यक है।
इससे हम पहले बनाए प्रश्न उस व्यक्ति से पूछ सकते हैं जिससे साक्षात्कार चलता है। यह प्रश्नावली सुरक्षित है। यह प्रश्न आर्थिक स्थिति से संबंधित होने चाहिए। ताकि उनकी मुश्किलों के उत्तर मिल सकें। यह बहुत जरूरी है कि उनसे उनकी स्थिति की सही जानकारी ले ली जाए। इस प्रकार एक अच्छी प्रश्नावली बहुत आवश्यक है।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय कार्य से क्या अभिप्राय है? भूगोल में क्षेत्रीय कार्य की क्या आवश्यकता है? इसके महत्त्व तथा उद्देश्य का वर्णन करो।
उत्तर:
भूगोल एक क्षेत्रीय विज्ञान है या क्षेत्र परक (field oriented) है जिसमें किसी क्षेत्र के विभिन्न भागों में प्राकृतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक तत्वों में विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन मानचित्रों की सहायता से किया जा सकता है, परंतु किसी क्षेत्र का विस्तारपूर्वक तथा व्यावहारिक ज्ञान अमुक क्षेत्र में स्वयं जाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। क्षेत्रीय अध्ययन से हमें स्थाई जानकारी प्राप्त होती है। जैसे- प्रो० फेयरग्रीव ( Fairgrieve) के अनुसार-

‘भूगोल का ज्ञान व्यक्ति अपने जूतों के तले घिसकर प्राप्त करता है।” (Geography comes through the soles of one’s shoes.) प्रो० ई० ए० फ्रीमेन के अनुसार, “भूगोल यात्रा करने तथा स्वयं अपनी आँखों से देखने का विषय है।” (Geography is a matter of travel, a matter of seeing things with our own eyes.)

क्षेत्रीय अध्ययन (Field Work )-
क्षेत्रीय अध्ययन वह क्रिया है। जिसमें किसी क्षेत्र में घूम-फिर कर प्रेक्षण किया जाता है। विशेष रूप से बनाई गई प्रश्नमाला (Questionnaire) द्वारा लोगों से पूछताछ की जाती है तथा एकत्र किए आँकड़ों को मानचित्रों द्वारा व्यक्त किया जाता है।

आवश्यकता (Necessity )-
किसी क्षेत्र के बारे में सरकार द्वारा मुद्रित आँकड़े इतने पर्याप्त नहीं होते कि उनकी मदद से भौगोलिक अध्ययन किया जा सके। इसलिए मानवीय जीवन के विभिन्न तत्वों की प्रत्यक्ष जानकारी तथा विश्लेषण केवल क्षेत्रीय अध्ययन द्वारा ही संभव है। इस प्रकार क्षेत्रीय अध्ययन किसी क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए आवश्यक है। इसलिए वातावरण के प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक लक्षणों का अध्ययन करने के लिए क्षेत्रीय कार्य भूगोल में आवश्यक है। क्षेत्र सर्वेक्षण के दो मौलिक चरण हैं-

  1. आँकड़ों का संग्रहण (Collection of Data)
  2. आँकड़ों का प्रसंस्करण (Processing of Data)

उपग्रह चित्र भौगोलिक अध्ययन के महत्त्वपूर्ण साधन हैं। परंतु क्षेत्र सर्वेक्षण नवीनतम सूचनाएं प्राप्त करने का महत्त्वपूर्ण स्रोत है।

महत्त्व तथा उद्देश्य (Importance and Objectives) –

  1. क्षेत्रीय अध्ययन से मानवीय क्रियाओं पर प्रभाव डालने वाले वातावरण के प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक तत्वों के संबंध का ज्ञान होता है।
  2. इस विधि से किसी क्षेत्र के स्थानीय भूगोल (Local Geography) के बारे में प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है।
  3. इस विधि से विद्यार्थियों में आपसी सहयोग (Team Spirit) तथा नेतृत्व (Leadership) की भावना जागृत होती है।
  4. इस विधि से लोगों के साथ साक्षात्कार करने का एक सुअवसर प्रदान होता है तथा निकट संबंध स्थापित होता है।
  5. क्षेत्रीय कार्य से भूगोलवेत्ता स्वयं आँकड़े एकत्र करके मानचित्र बनाने का कार्य कर सकता है।
  6. इस विधि से किसी क्षेत्र का व्यावहारिक ज्ञान (Practical knowledge) प्राप्त होता है जिससे यह कार्य सरल और रुचिकर हो जाता है।

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प्रश्न 2.
क्षेत्रीय कार्य की विभिन्न क्रियाओं का वर्णन करो।
उत्तर:
क्षेत्रीय कार्य की विभिन्न क्रियाएं क्षेत्र का निरीक्षण करने, आँकड़े एकत्र करने, विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त करने तथा उसे मानचित्रों पर व्यक्त करने पर निर्भर करती हैं। ये सभी कार्य विभिन्न अवस्थाओं में बांटकर एक क्रमबद्ध ढंग से किए जाते हैं। क्षेत्रीय अध्ययन की विभिन्न विधियां क्षेत्रीय अध्ययन के उद्देश्य तथा विषय पर निर्भर करती हैं। इस कार्य को निम्नलिखित चरणों (Stages) में बांटा जाता है-
1. प्रारंभिक अवस्था (Preliminary Stage )- इस चरण में क्षेत्रीय कार्य की योजना तैयार करके निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं-

  1. अध्ययन क्षेत्र का चुनाव।
  2. विषय का चुनाव।
  3. क्षेत्र का एक आधार मानचित्र (Base Map) तैयार करना।
  4. आधार मानचित्र की कई प्रतिलिपियां तैयार करना।
  5. क्षेत्र का एक स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Map)-प्राप्त करना। स्थलाकृतिक मानचित्र से हमें धरातल, जलप्रवाह, भूमि उपयोग, बस्ती प्रतिरूप परिवहन आदि का पता चलता है।

2. क्रियान्वयन अवस्था (Operational Stage )- इस अवस्था में निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं-

  1. क्षेत्र में जाकर स्वयं निरीक्षण करना।
  2. विषय से संबंधित प्रश्नावली (Questionnaire) तैयार करना।
  3. नवीनतम आँकड़े एकत्रित करना।
  4. क्षेत्र से कुछ चुने हुए ( लगभग 20%) भागों के नमूने का सर्वेक्षण (Sample Survey) करना।
  5. स्थलाकृतिक मानचित्र से क्षेत्र की पूरी जानकारी प्राप्त करना।

3. परिकलन अवस्था (Tabulation Stage )- इस अवस्था में प्राप्त आँकड़ों को तालिकाओं (Tables) के रूप में लिखा जाता है। इन आँकड़ों की संख्या कम करके कुछ निष्कर्ष तथा औसत आँकड़े प्राप्ता किए जाते हैं।

4. मानचित्रण अवस्था ( Mapping Stage )-

  • आँकड़ों को विभिन्न आरेखों द्वारा प्रकट किया जाता है।
  • आँकड़ों की सहायता से विभिन्न मानचित्र तैयार किए जाते

5. रिपोर्ट विवरण चरण (Reporting Stage ) – सर्वेक्षण पूरा होने पर उस क्षेत्र का पूरा विवरण लिखा जाता है। उसके आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले जाते हैं तथा उद्देश्यों की पूर्ति संबंधी विवरण दिया जाता है।

प्रश्न 3.
क्षेत्रीय कार्य के लिए प्रश्नमाला तैयार करते समय किन- किन बातों का ध्यान रखा जाता है?
उत्तर:
आँकड़े एकत्र करने के लिए एक विशेष प्रकार की प्रश्नमाला तैयार करना आवश्यक है। इस प्रश्नमाला द्वारा लोगों से पूछताछ की जाती है। यह प्रश्नमाला ही वास्तव में क्षेत्रीय कार्य का आधार है। प्रश्नमाला बनाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  1. सर्वेक्षण का स्वयं निरीक्षण करके ही प्रश्नमाला बनानी चाहिए।
  2. सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य सदा ध्यान में रखना चाहिए।
  3. प्रश्न संक्षिप्त तथा सीधे होने चाहिए।
  4. प्रश्न सरल होने चाहिए ताकि उत्तर देने में कोई कठिनाई न हो।
  5. प्रश्न क्रमबद्ध तथा क्षेत्रीय कार्य से संबंधित हों।
  6. ऐसे प्रश्न नहीं होने चाहिएं जो निजी या धार्मिक हों, जिससे उत्तर देने वाले की भावना को ठेस पहुंचे।

सावधानियां (Precautions)

  1. सर्वेक्षक को उत्तर देने वाले लोगों से अच्छे संबंध स्थापित करने चाहिए।
  2. उत्तर संक्षिप्त लिखने चाहिए।
  3. प्रश्नमाला की प्रत्येक सूची का उत्तर लिखना चाहिए।
  4. अपने निजी विचार नहीं लिखने चाहिए।
  5. उत्तर देने वाले लोगों की सुविधा के अनुसार प्रश्नमाला भरने का समय निश्चित करना चाहिए।

प्रश्न 4.
प्रश्नावली से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकार बताएं।
उत्तर:
प्रश्नावली (Questionnaire )
प्रश्नावली विधि में पहले से तैयार किए गए प्रश्नों को कुछ चुने हुए लोगों के समक्ष रखा जाता है। प्रश्नावली संरचनात्मक अथवा असंरचनात्मक हो सकती है जब एक संरचनात्मक प्रश्नावली का प्रयोग किया जाता है तो शोधकर्ता के लिए फेरबदल की कम गुंजाइश होती है, उसे यांत्रिक तरीकों से प्रश्नों को रखते हुए उनके उत्तर लिखने पड़ते हैं। संरचना विहीन प्रश्नावलियों में, सर्वेक्षण की आवश्यकतानुसार प्रश्नों के क्रम को बदला जा सकता है। उत्तर लिखने के साथ एक मानचित्र या रेखाचित्र बनाया जा सकता है। प्रत्येक प्रश्न के साथ कोष्ठक में कुछ टिप्पणियां दी जाती हैं जो उत्तरों को संशोधित करने में प्रेक्षक को मदद देती हैं। प्रश्नों के अनेक प्रकार होते हैं किस प्रकार के प्रश्न बनाए जाएं यह वांछित आँकड़ों की प्रकृति तथा प्रश्नोत्तर देने वाले लोगों की अपनी पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।

प्रश्नावलियों के प्रकार (Types of Questionnaire)-

  1. सरल चयन (Simple Choice Questions)
  2. बहुविकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions)
  3. क्रममापक उत्तर का प्रश्न (Semantic Scale Questions)
  4. मुक्तांत उत्तर का प्रश्न (Open ended Questions)

1. सरल चयन के प्रश्न (Simple Choice Questions ) सरल चयन वाले प्रश्नों के संदर्भ में, ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में हो सकता है। उदाहरण के लिए इस प्रश्न- ‘क्या आप खेती करते हैं?’ का उत्तर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ होगा। यह प्रश्न लोगों के व्यवसाय की जानकारी देता है।

2. बहुविकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions ) – बहुविकल्प वाले प्रश्नों के उत्तर में, कुछ विकल्प दिए जाते हैं, किन्तु उनमें से केवल एक विकल्प ही सही उत्तर होता है। उदाहरण – X प्रदेश में A स्थान पर ही चीनी मिल क्यों स्थित है? इसका संभव्य उत्तर है-

  1. भूमि की उपलब्धता
  2. श्रम की उपलब्धता
  3. पूँजी की उपलब्धता
  4. बाजार की सुगमता
  5. मालिकों अथवा उभयकर्ता की स्थान के लिए अपनी व्यक्तिगत पसन्द।
  6. कोई अन्य कारण उपरोक्त उत्तरों में से केवल एक ही उत्तर सही है।

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3. क्रममापक उत्तर का प्रश्न (Semantic Scale Questions)-
यहां पर उत्तरदाता को सोचने की श्रेणी को बिंदुमापक पर अंकित किया जाता है उत्तरदाता की सोच पक्ष अथवा विपक्ष में कितनी शक्तिशाली है, इसलिए किया जाता है।
उदाहरण के लिए गरीबी हटाओ कार्यक्रम को सरकार द्वारा कैसे लागू किया जाता है?

  1. बहुत अच्छा
  2. अच्छा
  3. संतोषजनक
  4. खराब
  5. बहुत खराब यहां पर उत्तरदाता के कामों को लिख लिया जाता है।

4. मुक्तांत उत्तर का प्रश्न (Open Ended Questions )-
इस संदर्भ में, प्रश्नों को पूछा जाता है तथा उत्तरदाता के उत्तर को लिख लिया जाता है।
उदाहरण के लिए-ग़रीबी उन्मूलन हेतु सरकार को क्या कदम उठाने चाहिएं?
इस प्रश्न का उत्तर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच उनकी व्यक्तिगत, सामाजिक तथा आर्थिक पृष्ठभूमि के अनुसार अलग-अलग होगा।

प्रश्न 5.
क्षेत्र सर्वेक्षण संबंधी उपकरणों का वर्णन करें।
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण हेतु आवश्यक व्यवस्था तथा उपकरण (Equipment)-सर्वेक्षण करने के लिए क्षेत्र में जाने से पहले, उससे संबंधित पुस्तकालयों में प्रकाशित जानकारी का अध्ययन आवश्यक होता है। इस प्रकार एकत्रित सूचनाएं, अध्ययन के आधार के रूप में कार्य करती हैं। यह क्षेत्र में मिलने वाले संभावित लक्षणों की पूर्व जानकारी प्रदान करता है। क्षेत्र में ठहरने के लिए समुचित व्यवस्था करना नहीं भूलना चाहिए।

क्षेत्र में जाते समय निम्न उपकरणों को ले जाना चाहिए-

  1. आवश्यक ड्राइंग सामग्री सहित एक लेखन पुस्तिका (Field Book)।
  2. कार्य की प्रकृति तथा शिक्षक द्वारा निर्देश अनुसार सर्वेक्षण- उपकरण (Survey Instruments)।
  3. मानचित्र पर प्रदर्शित लक्षणों का क्षेत्र के लक्षणों से तुलना करने के लिए क्षेत्र का स्थलाकृतिक सर्वेक्षण मानचित्र (Topographical Maps )
  4. विशिष्ट लक्षणों का फोटोचित्र प्राप्त करने के लिए कैमरा (Camera)।
  5. दूर से भूदृश्यों को सरलतापूर्वक देखने के लिए दूरबीन (Birnoculars)।
  6. शैल नमूने तोड़ने के लिए हथौड़ा (Hammer)।
  7. मिट्टी के नमूने लेने के लिए मृदा प्रतिदर्श (Rock Specimens)
  8. शैलों के नमूने रखने के लिए बैग (Bag)
  9. अन्य सामग्रियां।

प्रश्न 6.
किसी गांव का भूमि उपयोग सर्वेक्षण कैसे किया जाता है? इस सर्वेक्षण में प्रयोग की जाने वाली प्रश्नावली तैयार करो।
उत्तर:
भूमि उपयोग सर्वेक्षण (Land Use Survey)
1. परिचय (Introduction )-भारत एक कृषि प्रधान देश है। किसी क्षेत्र में कृषि की विशेषताएं प्रकार तथा भूमि उपयोग की जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी एक गांव को इकाई मान कर भूमि उपयोग सर्वेक्षण किया जाता है।
2. उद्देश्य (Aims )-

  1. कृषि क्षेत्र में भूमि उपयोग की जानकारी प्राप्त करना।
  2. भूमि उपयोग को मानचित्र पर दिखाना।
  3. बोई जाने वाली फ़सलों की जानकारी प्राप्त करना।
  4. मिट्टी की किस्में तथा उत्पादकता ज्ञात करना।
  5. सिंचित क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करना।

3. विधि (Method)-
(क) प्रारंभिक अवस्था सबसे पहले पटवारी से गांव का भूकर मानचित्र (Cadastral Map) प्राप्त किया जाता है जिस पर प्रत्येक खेत की सीमा तथा खसरा नंबर लिखा जाता है। इस मानचित्र की कई प्रतिलिपियां तैयार की जाती हैं। गांव की स्थिति निर्धारित की जाती है।

(ख) क्रियान्वयन अवस्था इसके पश्चात् गांव के पटवारी के रिकॉर्ड से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त की जाती है-

क्रम संख्याभूमि का आकार
1.गांव की कुल भूमि
2.कृषि के लिए प्राप्त न होने वाली भूमि
3.अन्य अकृषित भूमि
4.कृषिकृत भूमि
5.कुल सिंचित भूमि
6.कुल असिंचित भूमि
7.खेतों की कुल संख्या
8.खेतों का औसत आकार

किसानों से पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची तैयार की जाती है। क्षेत्रीय कार्य की तिथि तथा समय निश्चित किया जाता है। खेतों को विभिन्न वर्गों में बांट दिया जाता है।
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(ग) क्षेत्रीय कार्य – गांव के खेतों का क्रमवार निरीक्षण किया जाता है। प्रत्येक किसान से खेतों के आकार, उनका उपयोग तथा फ़सलों की जानकारी प्राप्त की जाती है। इस जानकारी को प्रश्नमाला में लिख लिया जाता है। मुख्यतः आषाढ़ी (Rabi) तथा सावनी (Kharif) दो प्रकार की फ़सलें बोई जाती हैं। भूमि उपयोग तथा मिट्टियों को दिखाने के लिए विभिन्न रंगों तथा आभाओं का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न फ़सलों को दिखाने के लिए चिह्नों तथा अक्षर प्रयोग किये जाते हैं।

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(घ) मानचित्र – आँकड़ों की सहायता से भूमि उपयोग दिखाने के लिए मानचित्र बनाए जाते हैं जिनमें विभिन्न प्रविधियां प्रयोग की जाती हैं। फ़सलों के लिए विभिन्न रंगों तथा आभाओं का प्रयोग किया जाता है।

(ङ) रिपोर्ट – इन मानचित्रों का विश्लेषण करके कुछ निष्कर्ष निकाले जाते हैं जिससे कई प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है। जैसे-

  1. गांव में कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल
  2. खेतों की कुल संख्या
  3. मिट्टी के मुख्य प्रकार
  4. आषाढ़ी तथा सावनी की मुख्य फ़सलें
  5. कृषिकृत क्षेत्रफल
  6. भूमि उपयोग की सघनता की त्रुटियां
  7. भूमि उपयोग में सुधार तथा अधिक विकास की संभावनाएं (8) कुल सिंचित क्षेत्र।

प्रश्न 7.
कृषि क्षेत्र में मृदा प्रदूषण, औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण तथा यातायात वाहनों द्वारा नगरीय क्षेत्र में प्रदूषण सर्वेक्षण का वर्णन करो।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण का सर्वेक्षण (Survey of Environmental Pollution )-पर्यावरण प्रदूषण में मृदा प्रदूषण, जलप्रदूषण, वायु प्रदूषण तथा शोर प्रदूषण सम्मिलित किए जाते हैं।
(क) सर्वेक्षण विधि –

  1. प्रदूषण के कारणों तथा प्रदूषित करने वाले ठोस अपशिष्ट पदार्थों के बारे में जानकारी क्षेत्र के निवासियों से बातचीत द्वारा प्राप्त की जा सकती है।
  2. प्रदूषण फैलाने वाले कारक, आस-पास के क्षेत्रों पर प्रदूषण का प्रभाव लोगों के द्वारा झेली गई कठिनाइयां तथा
  3. मिट्टी के अनुपजाऊ होने के बारे में भी बता सकते हैं।
  4. क्षेत्र सर्वेक्षण को अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन में प्रयुक्त तकनीकों, विभिन्न लाभान्वित होने वाले लोगों की भूमिका, समस्या के समाधान के लिए किए गए प्रयासों एवं अभी तक के परिणामी विकास को भी देखना चाहिए।

1. औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण – औद्योगिक क्षेत्र में ईंधन तथा रसायनों द्वारा प्रदूषण होता है।

उद्योगों द्वारा पर्यावरण के प्रदूषण की अनुसूची
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2. यातायात के साधनों द्वारा प्रदूषण – विभिन्न वाहन, जैसे- बसें, ट्रक, कारें, तिपहिया व दुपहिया वाहन आदि पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। यह समस्या नगरीय इलाकों में अधिक होती है।
वाहनों द्वारा प्रदूषण की प्रश्नावली
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3. कृषि क्षेत्र में रासायनिक पदार्थों से प्रदूषण – कृषि | रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण का प्रदूषण क्षेत्र में कृषि की उपज को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के होता है।
मृदा प्रदूषण की प्रश्नावली
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प्रश्न 8.
किसी क्षेत्र में ग़रीबी का क्षेत्र सर्वेक्षण करने की विधि तथा उद्देश्य बताओ।
उत्तर:
गरीबी का क्षेत्र सर्वेक्षण (Field Study of Poverty )-गरीबी के मुख्य कारण बेरोजगारी तथा अशिक्षा हैं। गरीबी का सामाजिक अध्ययन किसी मलिन बस्तियों के प्रत्येक परिवार का अध्ययन हो सकता है।
गरीबी का मापदंड-

  1. लोगों की औसत आमदनी,
  2. उन को प्राप्त कैलोरी की मात्रा
  3. चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता
  4. व्यवसाय आदि
  5. क्षेत्र में जनसंख्या का वितरण
  6. मानव निवास-स्थान,
  7. भोजन, वस्त्र एवं सामाजिक- सांस्कृतिक संबंध।

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उद्देश्य –

  1. सरकार द्वारा विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों द्वारा किए जा रहे प्रयासों, उनका क्षेत्र के लोगों पर प्रभावों का भी प्रभावी प्रश्नावलियों के माध्यम से निश्चय किया जा सकता है।
  2. आँकड़ों का विश्लेषण तथा अध्ययन से क्षेत्र में गरीबी के स्तर का पता लगाया जा सकता है।
  3. गरीबी के मुख्य कारणों का पता लग सकता है।

गरीबी सर्वेक्षण की प्रश्नावली
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प्रश्न 9.
किसी क्षेत्र में मृदा ह्रास, सूखा तथा बाढ़ व ऊर्जा संबंधी अध्ययन की सर्वेक्षण विधि बताओ।
उत्तर:
मृदा ह्रास का अध्ययन (Soil Degradation ) -मृदा पर कृषि उपज तथा उत्पादकता निर्भर करती है। इसलिए मृदा ह्रास सर्वेक्षण आवश्यक है-
ऐसा अध्ययन संपन्न करने के लिए मिट्टी की विभिन्न सतहों पर मिट्टी के प्रतिदर्श (Sample) प्राप्त करने के लिए मृदा नमूना प्राप्त करने वाले उपकरण का प्रयोग किया जा सकता है। क्षेत्र के विभिन्न खेतों से मृदा-प्रतिदर्श प्राप्त किये जा सकते हैं प्रतिदर्शो के विभिन्न थैलों (Bags) में अथवा शीशे की नलियों (Glass Tubes) में रखकर स्थान का नाम तथा क्रमांक लिख देते हैं। ऊपरी मिट्टी (Top Soil), मध्यवर्ती मिट्टी ( Sub Soil), कड़ी तह एवं मूल शैलों (Parent Rocks) आदि को अलग-अलग प्रदर्शित करने के लिए उनकी आरेखीय परिच्छेदिकाएं बनानी चाहिए। मृद्रा ह्रास के मापदंड के लिए तत्व-

  1. क्षेत्र के फसल प्रारूप,
  2. भूमि उपयोग प्रतिरूप,
  3. सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता,
  4. अपवाह,
  5. जल भराव,
  6. खारापन तथा क्षारीय स्तर
  7. वनस्पतियों का अंकन करना। इनका मानचित्र, कटाव के स्तर के आधार पर किया जाता है। परिणाम का विवेचन करते समय क्षेत्र में मिट्टी की दशा के सुधार हेतु विभिन्न रणनीतियों का सुझाव भी देना होता है।

सूखा तथा बाढ़ का अध्ययन (Study of Droughts and Floods)-
सूखा तथा बाढ़ अक्सर आते रहते हैं। इनमें भी मात्रा में जन-धन की हानि होती है। बाढ़ क्षेत्रों तथा सूखाग्रस्त क्षेत्रों के मानचित्र तथा इनके प्रभावों को कम करने वाली योजनाओं को तैयार करना आज का महत्त्वपूर्ण कार्य हो गया है।

मुख्य पक्ष (Main Aspects )-
इन योजनाओं के तीन मुख्य पक्ष होने चाहिए

  1. दिये गए मानक स्तर पर आधारित अधिकतम सीमा तक खतरों में कमी करना (Reduction of Risk),
  2. सीमाओं के भीतर खतरों में अनुकूलतम कमी (Optimum Risk Reduction),
  3. जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा (Saving lives and property)।

मापदंड-

  1. किसी प्राकृतिक (Disaster) विपदा द्वारा की जा सकने वाली अधिकतम क्षति का मात्रात्मक तथा गुणात्मक दोनों ही रूपों में आकलन किया जाना।
  2. किसी प्रदेश की अनुकूलतम वहन क्षमता (Carrying Capacity) का भी आकलन तथा गणना।
  3. उन क्रिया-कलापों का जिनसे आपदाएँ उत्पन्न हो सकती हैं, उनकी सीमाओं को भी निर्धारित किया जाना चाहिए।
  4. नियंत्रक तरीकों को भी विकसित किया जाना चाहिए जिससे आपदाओं में प्रभावशाली तरीके से कमी भी की जा सके।
  5. लोगों की सक्रिय भागीदारी महत्त्वपूर्ण है।
  6. तकनीकी तथा अतकनीकी उपायों दोनों पर ही बल दिया जाना चाहिए।
  7. आपदा प्रवण क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा सांख्यिकीय एवं आंकिक विधियों का कंप्यूटर की सहायता से बने सूक्ष्म मानचित्रों के द्वारा पूर्वानुमान करना चाहिए।

ऊर्जा संबंधी अध्ययन (Study of Energy Issues )-
विद्यार्थियों द्वारा ग्रामीण तथा नगरीय ऊर्जा उपभोग प्रारूप की निगरानी करने वाले सर्वेक्षण किए जा सकते हैं। अनेक पारिस्थितिकी दृष्टि से कमजोर क्षेत्रों में तथा पर्वतीय क्षेत्रों, पहाड़ियों तथा वन क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी (Fire Wood) ईंधन का अभी भी महत्त्वपूर्ण साधन है। बहुत-से शोधकार्य का निष्कर्ष है कि ग्रामीण ईंधन उपभोग निर्वनीकरण का (Deforestation) महत्त्वपूर्ण कारण नहीं था, बल्कि यह बहुत कुछ शाखाओं तथा टहनियों को तोड़ने तक सीमित था।

किंतु नगरीय लकड़ी जलाऊ लट्ठों के रूप में प्राप्त की जाती थी जिसने सीधे जंगलों पर दबाव डाला ऐसा भारत में वर्तमान स्थिति के बाद विशेषज्ञों की राय में ग्रामीण ईंधन उपभोग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद कहा गया जो एक नई रोचक जानकारी है। ऐसे नए मुद्दों पर लगातार सर्वेक्षण किया जा सकता है तथा लोगों के वृक्षारोपण संबंधी कार्य का नियमित सर्वेक्षण किया जा सकता है। सर्वेक्षण का एक अति महत्त्वपूर्ण क्षेत्र ईंधन के मूल्यों से संबंधित भी होगा।

मौखिक परीक्षा के प्रश्न
(Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
क्षेत्र सर्वेक्षण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब हम स्वयं किसी क्षेत्र में जाकर अध्ययन करते हैं तो उसे क्षेत्र सर्वेक्षण कहते हैं।

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प्रश्न 2.
क्षेत्र सर्वेक्षण के दो चरण बताओ।
उत्तर:
आँकड़ों का संग्रहण तथा प्रसंस्करण |

प्रश्न 3.
स्थलाकृतिक मानचित्र क्या है?
उत्तर:
वे मानचित्र जो किसी क्षेत्र के धरातल, अपवाह तथा मानवीय लक्षणों को दिखाते हैं।

प्रश्न 4.
सैंपल सर्वेक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब सारे क्षेत्र का सर्वेक्षण करने की बजाय उसके एक भाग का ही सर्वेक्षण करें, तो उसे सैंपल सर्वेक्षण कहते हैं।

प्रश्न 5.
मानचित्र दिक् विन्यास किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी की प्रमुख दिशाओं के अनुरूप मानचित्र सैट करना।

प्रश्न 6.
पर्यावरण के प्रमुख घटक बताओ।
उत्तर:
जल, स्थल, वायु, जीव-जंतु।

प्रश्न 7.
प्रदूषण के प्रमुख कारण बताओ।
उत्तर:
उद्योग, परिवहन, रसायन तथा अपशिष्ट पदार्थ।

प्रश्न 8.
मानचित्र दिक् विन्यास की तीन विधियां बताओ।
उत्तर:

  1. सूर्य की सहायता से
  2. ट्रफ कंपास की सहायता से
  3. वस्तुओं की सापेक्षिक तुलना से।

प्रश्न 9.
क्षेत्र सर्वेक्षण हेतु तीन उपकरण बताओ।
उत्तर

  1. नोट बुक
  2. स्थलाकृतिक मानचित्र
  3. कैमरा।

प्रश्न 10.
स्थिर तत्व के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
इमारतें, खेत, नहरें।

प्रश्न 11.
प्रश्नावलियों के चार प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. सरल प्रश्न
  2. बहुविकल्पी प्रश्न
  3. क्रममापक प्रश्न
  4. मुक्तांत प्रश्न।

प्रश्न 12.
आँकड़े निर्धारित करने की विधि बताओ।
उत्तर:
मिलान चिह्न।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण

प्रश्न 13.
भू-उपयोग में विभिन्न फसलें किस प्रकार दिखाई जाती हैं?
उत्तर:
रंगों तथा आभाओं द्वारा।

प्रश्न 14.
भौमजल स्तर किसे कहते हैं?
उत्तर:
भूमिगत जल की ऊपरी सतह।

प्रश्न 15.
प्राकृतिक आपदाओं के दो उदाहरण दो।
उत्तर:
सूखा तथा बाढ़।

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(i) निम्नलिखित आंकड़ों के प्रदर्शन के लिए आप किस प्रकार के ग्राफ का उपयोग करेंगे?

राल्यलौह अयस्क उपादन का आंश (प्रतिशत में)
मध्य प्रदेश23.44
मोवा21.82
कर्नाटक20.95
बिहार16.98
ओडिशा16.30
आंध्र प्रदेश0.45
महाराष्ट्र0.04

(क) रेखा
(ख) बहुदंड आलेख
(ग) वृत्त आरेख
(घ) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) वृत्त आरेख।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

(ii) राज्य के अंतर्गत जिलों का प्रदर्शन किस प्रकार के स्थानिक आंकड़ों द्वारा होगा?
(क) बिंदु
(ख) रेखाएँ
(ग) बहुभुज
(घ) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) बिंदु।

(iii) एक वर्कशीट के सेल में दिए गए सूत्र में वह कौन-सा प्रचालक है जिसका पहले परिकलन किया जाता है?
(क) +
(ख) –
(ग) /
(घ) ×
उत्तर:
(घ) ×

(iv) एक सेल में विजार्ड पंक्शन आपको समर्थ बनाता है-
(क) ग्राफ रचना में
(ख) गणितीय और सांख्यिकीय क्रियाओं को करने में
(ग) मानचित्र आलेखन में
(घ) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) ग्राफ रचना में।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) एक्सेल में विजार्ड फंक्शन आपको समर्थ बनाता है।
उत्तर:
एक्सेल विजार्ड फंक्शन हमें वर्कशीट की संख्या चयनित आंकड़ा परिसर और दंड आरेख का पूर्व दर्शन प्रकट करता है क्योंकि आंकड़ों में वर्ग पंक्ति अनुसार व्यवस्थित होते हैं, इसलिए इसे पंक्ति- अनुसार चार्ट निर्माण कहा जाता है।

(ii) एक कंप्यूटर के विभिन्न भागों की हस्तेन विधियों की तुलना में कंप्यूटर के प्रयोग के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
कंप्यूटर एक तीव्र तथा सर्वतोमुखी मशीन है जो जोड़ना, घटाना, गुणा अथवा भाग जैसे साधारण अंकगणितीय संक्रियाएँ कर सकता है तथा जटिल गणितीय सूत्रों को भी हल कर सकता है। यह आंकड़ों के प्रक्रमक है जो चलने पर मानव प्रचालक के हस्तक्षेप के बिना अलग-अलग गणितीय अभिकलन कर सकता है।

(iii) आंकड़ा प्रक्रमण और प्रदर्शन की हस्तेन विधियों की तुलना में कंप्यूटर के प्रयोग के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
कंप्यूटर के प्रयोग से हम आंकड़ों का समूहन और विश्लेषण अत्यधिक सरलता से कर पाते हैं। कंप्यूटर तुलनात्मक विश्लेषण को मानचित्रों के आरेखन अथवा आलेखन द्वारा अत्यंत सरल बना देता है। यह आसानी से आंकड़ों को प्रमाणीकरण, पड़ताल और सशुद्धि के योग्य बना देता है। कंप्यूटर आंकड़ों की विशाल मात्रा का निपटान कर सकता हैं जो सामान्यतः हाथों द्वारा संभव नहीं है। कंप्यूटर आंकड़ों की प्रतिलिपि बना सकता है, आंकड़ों का संपादन कर सकता है, उन्हें सुरक्षित कर सकता है।

(iv) वर्कशीट क्या होती हैं?
उत्तर:
एम एस एक्सेल को स्प्रैड शीट प्रोग्राम भी कहते है। स्प्रैडशीट एक आयतकार पेज होती है जो सूचना का भंडारण करती है। और यह स्प्रैडशीट वर्कबुक्स और एक्सेल फाइलों में होती है। एक्सेल वर्कशीट में 16384 कतारें तथा 256 कॉलम होते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों से अधिक न दें
(i) स्थानिक व गैर-स्थानिक आंकड़ों में क्या अंतर है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थानिक आंकड़े: स्थानिक आंकड़े भौगोलिक दिक् स्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिंदु आंकड़े मानचित्र पर प्रदर्शित विद्यालय, अस्पताल, कुएँ, कस्बे तथा गाँव जैसे कुछ भौगोलिक लक्षणों की अवस्थिति संबंधी विशेषताओं का प्रदर्शन करते हैं। इसी प्रकार रेखाएँ सड़कों, रेलवे लाइनों, नहरों, नदियों, शक्ति और संचार पथों जैसे रैखिक लक्षणों को चित्रित करती हैं।

गैर स्थानिक आंकड़े: स्थानिक आंकड़ों का वर्णन करने वाले आंकड़े गैर-स्थानिक आंकड़े तथा गुण न्यास कहलाते हैं। अगर आपके पास आपके विद्यालय की स्थिति दर्शाने वाला मानचित्र है तो आप विद्यालय का नाम, इसके द्वारा प्रदूत विषय – धारा, हर एक कक्षा में विद्यार्थियों की अनुसूची, पुस्तकालय इत्यादि की सुविधा जैसी सूचनाओं को संलग्न कर सकते हैं।

(ii) भौगोलिक आंकड़ों के तीन प्रकार कौन से हैं?
उत्तर:
भौगोलिक आंकड़े अंकीय तथा रेखीय रूप में उपलब्ध होते हैं।
कंप्यूटर के प्रयोगः मानचित्रण सॉफ्टवेयर – मानचित्रण सॉफ्टवेयर स्थानिक तथा गुण न्यास निवेश के माध्यम से स्क्रीन पर क्रमवीक्षित मानचित्रों के अंकीकरण, मापनी के रूपांतरण और प्रक्षेपण, आंकड़ा समन्वय, मानचित्र डिजाइन, प्रदर्शन तथा विश्लेषण की क्रियाएँ प्रदान करता है। एक अंकरूपीय मानचित्र में तीन प्रकार की फाइलें होती है। इन फाइलों के विस्तारण shpishx तथा dbf हैं। डी बेस फाइल हैं जिसमें गुण न्यास होता है तथा यह shx तथा shp से जुड़ी होती हैं।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न 
(Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कम्प्यूटर हार्डवेयर के मुख्य भाग कौन से है?
उत्तर:
कम्प्यूटर हार्डवेयर के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:-
(i) केंद्रीय प्रक्रमण (CPU) और भंडारण तंत्र
(ii) आलेखी प्रदर्शन तंत्र और मॉनीटर
(iii) निवेश उपकरण
(iv) बहिर्वेश उपकरण

प्रश्न 2.
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की आवश्यकताएँ स्पष्ट रूप में बताएँ।
उत्तर:
कम्प्यूटर में हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर दोनों ही आंकड़ों के प्रक्रमण तथा मानचित्र के सहायक के रूप में समाविष्ट होते हैं। कम्प्यूटर के हार्डवेयर में भंडारण, प्रदर्शन तथा निवेशी तथा बहिर्वेशी उपतंत्र को शामिल किया जाता है और इसके उलट सॉफ्टवेयर इलैक्ट्रॉनिक संकेतों के द्वारा बनाए गए क्रमादेश को शामिल किया जाता है। कम्प्यूटर सहायता प्राप्त आंकड़ों के प्रक्रमण तथा मानचित्रण में हार्डवेयर घटर तथा संबंधित अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर दोनों की ही आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 3.
स्प्रैड शीट क्या होती हैं?
उत्तर:
स्प्रैड शीट एक पेज है जो आयताकार आकार में होता है और यह सूचना का भंडारण भी करती है। वर्कबुक्स तथा एक्सेल फाइलों में भी स्प्रैडशीट अवस्थित होती हैं। एक्सेल स्प्रैडशीट में 16384 कतारें तथा 256 कॉलम होते हैं।

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प्रश्न 4.
कम्प्यूटर क्या कर सकता है?
उत्तर:
कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसके अपने कई हिस्से होते हैं जिनमें कुछ हैं, मैमोरी, माइक्रो प्रोसैसर, निवेश एवं निर्गत उपकरण। कम्प्यूटर के यह सारे हिस्से मिलकर बहुत ही अधिक प्रभावशाली उपकरण मतलब कम्प्यूटर का निर्माण करते हैं। इसके द्वारा आंकड़ा पेशकारी प्रक्रिया तथा संचालन का काम अच्छे ढंग के साथ किया जा सकता है। कम्प्यूटर की सहायता के साथ जोड़ तथा घटाव से लेकर तर्क से हल करने वाले सारे साधारण तथा जटिल प्रश्न हल किये जा सकते हैं।

प्रश्न 5.
स्थानीय आंकड़े कौन-से होते हैं?
उत्तर:
जो आंकड़े किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति को दर्शाते हैं उनको स्थानीय आंकड़े कहते हैं। इसे आमतौर पर बिन्दु रेखाओं तथा बहुर्भुज के रूप में मिलते हैं। इसमें ट्यूवबैल, कस्बे, गाँव, अस्पताल इत्यादि बिन्दुओं की सहायता के साथ रेल की लाइनों, नदियों इत्यादि रेखाओं की सहायता के साथ भूमि, तालाब, झीलों, जंगल, जिले इत्यादि बहुभुजों की सहायता से दिखाये जाते हैं।

निबंधात्मक प्रश्न
(Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
कम्प्यूटर के अलग-अलग हिस्सों के क्या काम हैं?
उत्तर:
कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक उपकरण है। आमतौर पर हम इस प्रणाली को दो हिस्सों में विभाजित करते हैं:-
(i) यंत्र सामग्री (Hardware)- सारे कम्प्यूटर के भाग जिनकों हाथ से छुआ जा सके।
(ii) प्रक्रिया सामग्री ( Software) कम्प्यूटर के जिस हिस्से को हाथ से हुआ न जा सके।
(i) यंत्र सामग्री (Hardware)
कम्प्यूटर के भौतिक हिस्से जिनको हम देख या छू सकते हैं, वह हार्डवेयर कहलाते हैं। यह भाग मशीनी, इलैक्ट्रॉनिक या इलैक्ट्रीकल हो सकते हैं वह कम्प्यूटर के यंत्र सामग्री कहलाते हैं। हर कम्प्यूटर की यंत्र सामग्री अलग-अलग हो सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि संगठक किस उद्देश्य के लिए प्रयोग में लाया जा सके तथा व्यक्ति की आवश्यकता क्या है एक कम्प्यूटर में विभिन्न तरह के हार्डवेयर होते हैं जैसे कि सी. पी. .यू.. हार्ड डिस्क, रैम, प्रोसैसर, मॉनीटर, मदरबोर्ड, फ्लापी ड्राइव इत्यादि। कम्प्यूटर के सिर्फ पावर सप्लाई यूनिट की-बोर्ड, माऊस इत्यादि भी यंत्र सामग्री के अंतर्गत आते हैं।

(ii) प्रक्रिया सामग्री (Software) कम्प्यूटर हमारी तरह हिन्दी या अंग्रेजी भाषा नहीं समझता। हम कम्प्यूटर को जो निर्देश देते हैं वह एक नियत भाषा होती है इसको मशीनी लँगवेज ( भाषा) या मशीन की भाषा कहते हैं। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर लिखित प्रोग्रामों का एक समूह है। जो कि कम्प्यूटर की भंडार शाखा में जमा हो जाता है। आजकल कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसमें कम्प्यूटर का उपयोग नहीं होता। आज कम्प्यूटर का प्रयोग हर कार्यालय में किया जाता है।

कम्प्यूटर के भाग हैं-
(1) निवेश एवं निर्गत उपकरण (Input output Device)- इन उपकरणों का प्रयोग कम्प्यूटर में निवेश करने के लिए तथा कम्प्यूटर द्वारा निर्गत दिखाने के लिए किया जाता है। निवेश उपकरण जैसे की-बोर्ड का प्रयोग, आंकड़ों तथा प्रोग्रामों को कम्प्यूटर स्मृति में भरने के लिए किया जाता है। दूसरी प्रकार चूंकि एक कम्प्यूटर के भीतर सभी आँकड़ों कार्यक्रमों को कोड स्वरूप में वैद्युत धारा में संचित किया जाता है, निर्गत उपकरणों जैसे प्रिंटर, प्लाटर इत्यादि का प्रयोग इन आंकड़ों की सूचनाओं के रूप में बदलने के लिए किया जाता है जिनका मानव द्वारा उपयोग किया जा सके।

(2) सिस्टम यूनिट (System Unit)- सिस्टम यूनिट को सिस्टम कैबिनेट भी कहा जाता है। कम्प्यूटर के इस भाग के कई हिस्से हैं जैसे मदरबोर्ड, रैम तथा प्रोसैसर सिस्टम यूनिट के अंदर ही आते हैं।

(3) मैमोरी (Memory) कम्प्यूटर में मैमोरी का प्रयोग प्रोग्राम तथा डाटा को संग्रहित करने के लिए होता है, ताकि बाद में जरूरत के अनुसार उसका प्रयोग किया जा सके। मैमोरी किसी भी कम्प्यूटर का एक काफी महत्त्वपूर्ण अंग होता है। मैमोरी का उपयोग परिणामों को संग्रहित करने के लिए भी किया जाता है। मैमोरी दो प्रकार की होती हैं-
(A) रोम (Rom)- इसको Read only Memory कहते हैं। इसमें जो जानकारी होती है उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता बस सिर्फ उसे पढ़ा जा सकता है।
(B) रैम (Ram)-Random Access Memory इसका प्रयोग तब होता है जब कम्प्यूटर पर काम करते हैं। यह जानकारी सिर्फ तब तक रहती है जब तक आपका कम्प्यूटर काम कर रहा होता है। कम्प्यूटर को बंद करते ही रैम की जानकारी नष्ट हो जाती है।

(4) संग्राहक उपकरण (Storage Unit) एक कम्प्यूटर में कई संग्राहक इकाइयाँ जैसे हार्ड डिस्क, फ्लापी, टेप, मैगनेट, आप्टिकल डिस्क, कांपेकट डिस्क (सीडी), कार्टिज इत्यादि लगे होते हैं जिनका प्रयोग आंकड़ों तथा कार्यक्रम-निर्देशों को संचित करने के लिए होता है। इन युक्तियों की आंकड़ा संग्रहण करने की क्षमता मेगाबाइड (MB) से गीगाबाइड (GB) तक होती है।

(5) संचार (Communication)- संचार के लिए काफी उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इन यंत्रों का उपयोग एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर के साथ जोड़ने के लिए तथा इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए किया जाता है। वाई फाई रिसीवर, मोड्स इत्यादि इस वर्ग में शामिल हैं।

(6) सॉफ्टवेयर का एक हिस्सा आँकड़ा प्रक्रिया की पेशकारी के लिए प्रयोग के लिए तथा कम्प्यूटर के माध्यम से तालमेल बिठाता है। तत्वों को क्रमवार करने के लिए अशुद्धियों को हटाने के लिए, आंकड़ों के जोड़-तोड़ तथा संभाल इत्यादि काम सॉफ्टवेयर द्वारा किये जाते हैं। प्रमुख सॉफ्टवेयर हैं- MS Excel Spreadsheet, Lotus-1,2,3 तथा D Base, Arc-view, Are GIS Geomedia इत्यादि। इनके द्वारा सॉफ्टवेयर नक्शे बनाने के लिए अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 2.
स्थानिक तथा गैर स्थानिक आंकड़ों में क्या अन्तर है? उदाहरण सहित बताओ।
उत्तर:
स्थानिक तथा गैर-स्थानिक आंकड़ों में अंतर निम्नलिखित
स्थानिक आंकड़े

  1. स्थानीय आंकड़े किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति को दर्शाते। यह धरती पर किसी स्थान को दर्शाता है।
  2. स्थानीय आंकड़ों में किसी क्षेत्र जैसे अस्पताल, स्कूल इत्यादि क्षेत्रों की भौगोलिक विशेषताओं के बारे में दिखाया जाता है।
  3. इनको तैयार करना थोड़ा मुश्किल होता है।
  4. इसमें लकीरों की सहायता के साथ नदियों, रेलवे लाइन इत्यादि दिखाये जाते हैं।
  5. जब नक्शे के ऊपर केवल स्कूल को दिखाया जाता है उसको स्थानीय आँकड़े कहते हैं।
  6. Shx तथा Shq फाइलों में स्थानिक आंकड़े होते हैं।

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गैर-स्थानिक आंकड़े

  1. जब कोई डाटा / आंकड़ा हमें धरती की किसी जगह के बारे में ज्ञान करवाए वह गैर-स्थानिक आंकड़े कहलाते हैं।
  2. गैर-स्थानिक आंकड़े में नम्बर, अंक, व्यक्ति या श्रेणियों की संख्या इत्यादि को दिखाया जाता है।
  3. गैर स्थानीय आंकड़े तैयार करने आसान होते हैं।
  4. गैर-स्थानीय आंकड़ों की सहायता के साथ आंकड़ों की विशेषता के बारे में दिखाया जाता है।
  5. अगर स्कूल का नाम, कक्षा कक्षों तथा विद्यार्थियों की संख्या के बारे में बताया जाए। तब वह गैर-स्थानीय आंकड़े कहलाते हैं।
  6. dbf एक dbase फाइल होती है कि shx तथा shp फाइलों से जुड़े होते हैं।

उदाहरण- जब हम किसी स्कूल, कस्बे, गाँव इत्यादि की भौगोलिक विशेषता को बिन्दुओं, बहुभुजों या लकीरों की सहायता से नक्शे पर दिखाते हैं, तो उसे स्थानीय आंकड़े कहते हैं। तथा अगर हम स्कूल का नाम, कक्षा, बच्चों की संख्या, गाँव, कस्बे में घर, घरों में व्यक्तियों की संख्या का अध्ययन करते हैं तब वह गैर-स्थानीय आंकड़ों की उदाहरण मानी जाती है।

प्रश्न 3.
वर्कशीट (कार्यपत्रक) क्या है?
उत्तर:
वर्कशीट (कार्यपत्रक) आमतौर पर एक कागज की शीट होती है जिस पर विद्यार्थियों के लिए कुछ प्रश्न लिखे होते हैं तथा उत्तर लिए जाते हैं। एक्सल वर्कशीट एकहरी स्प्रैडशीट होती है जिसका प्रयोग आंकड़ा प्रक्रिया, नक्शे तथा रेखाचित्र इत्यादि बनाने के लिए किया जाता है। वर्कशीट टर्म का प्रयोग एक स्प्रैडशीट सॉफ्टवेयर के तौर पर भी किया जाता है तथा एक एकाऊंटैंट की तरफ से प्रयोग किए गये एक पेपर जिस पर कोई रिकार्ड लिखा है, को वर्कशीट का नाम दिया जाता है। वर्कशीट शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1900 में की गयी।

एक कक्षा के कमरे में वर्कशीट से भाव उन कागज़ों की शीटों से है, जिन पर प्रश्न तथा कुछ अभ्यास योग्य प्रश्न विद्यार्थी के लिए पूरा करने तथा जवाब रिकॉर्ड करने के लिए बनाई गई होती है। एकाऊंट में वर्कशीट का अर्थ है, एक खुले पन्ने होते हैं जिसमें वर्क शैड्यूल, काम का समय, खास हिदायतों इत्यादि का रिकॉर्ड रखा जाता है तथा कम्प्यूटर में एक्सल वर्कशीट में आंकड़े बहुत ही सरल तरीके के साथ दाखिल तथा जमा किये जा सकते हैं।

आंकड़ों की नकल की जा सकती है या एक सैल से दूसरे सैल में भेजे जाते हैं। इसके द्वारा आंकड़े मिटाये जा सकते हैं। इस वर्कशीट द्वारा काम के आंकड़े स्थाई तौर पर संभाले जा सकते हैं। इस तरह आंकड़े सरलता से दाखिल किये जाते हैं। कालम बनाकर आंकड़े दाखिल करने के समय नम्बर- पैड के साथ ऐंटर की क्रिया या डाऊन चिह्नित का प्रयोग किया जाता है। स्तरों में आंकड़ों को दाखिल करते समय नम्बर पैड के साथ राइट चिह्नित का भी प्रयोग किया जाता है।

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