Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.1.
निम्नलिखित यौगिकों के आई यूपीएसी (IUPAC) नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 1
उत्तर:
(i) 2,2,4-ट्राइमेथिल पेन्टेन-3-ऑल
(ii) 5-एथिल हेप्टेन-2, 4-डाइऑल
(iii) ब्यूटेन-2, 3-डाइऑल
(iv) प्रोपेन-1, 2, 3-ट्राइऑल
(v) 2-मेथिल फीनॉल
(vi) 4-मेथिल फीनॉल
(vii) 2, 5-डाइमेथिल फीनॉल
(viii) 2, 6-डाइमेथिल फीनॉल
(ix) 1-मेथॉक्सी-2-मेथिल प्रोपेन
(x) एथॉक्सी बेन्जीन
(xi) 1-फीनॉक्सी हेप्टेन
(xii) 2-एथॉक्सी ब्यूटेन

प्रश्न 11.2.
निम्नलिखित आईयूपीएसी (IUPAC) नाम वाले यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए-
(i) 2-मेथिल ब्यूटेन-2-ऑल
(ii) 1-फेनिल प्रोपेन-2-ऑल
(iii) 3,5-डाइमेथिल हैक्सेन-1,3,5-ट्राइऑल
(iv) 2,3-डाइएथिलफ़ीनॉल
(v) 1-एथॉक्सीप्रोपेन
(vi) 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन
(vii) साइक्लोहैक्सिलमेथेनॉल
(viii) 3-साइक्लोहैक्सिलपेन्टेन-3-ऑल
(ix) साइक्लोपेन्टेन-3-ईन-1-ऑल
(x) 4-क्लोरो-3-एथिलब्यूटेन-1-ऑल
उत्तर:
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प्रश्न 11.3.
(i) C5H12O आण्विक सूत्र वाले ऐल्कोहॉलों के सभी समावयवों की संरचना लिखिए एवं उनके आईयूपीएसी (IUPAC) नाम दीजिए।
(ii) C5H12O के समावयवी ऐल्कोहॉलों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉलों में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 11.4.
समझाइए कि प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक क्यों होता है?
उत्तर:
प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक होता है क्योंकि प्रोपेनॉल में प्रबल अंतरा – आण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जिसे तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जबकि ब्यूटेन में अणुओं के मध्य दुर्बल वान्डरवाल बल पाया जाता है जिसे तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 11.5.
समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं? इस तथ्य को समझाइए।
उत्तर:
ऐल्कोहॉलों में ध्रुवीय – OH समूह उपस्थित होने के कारण ये जल के साथ आसानी से हाइड्रोजन बन्ध बना लेते हैं जबकि हाइड्रोकार्बन, जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना सकते। अतः समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं।

प्रश्न 11.6.
हाइड्रोबोरॉनन – ऑक्सीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण (Hydroboronation- Oxidation)-डाइबोरेन (B2H6), ऐल्कीनों से अभिक्रिया करके एक
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योगोत्पाद (Addition Product ) ट्राइऐल्किन बोरेन बनाता है जो जलीय NaOH की उपस्थिति में H2O2 द्वारा ऑक्सीकृत होकर ऐल्कोहॉल देता है। इसे हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण अभिक्रिया कहते हैं।

इस अभिक्रिया में ऐल्कोहॉलों की लब्धि अधिक होती है तथा इसमें अप्रत्यक्ष विधि से एल्कीन का जलयोजन (मार्कोनीकॉफ के नियम के विपरीत) होता है।

प्रश्न 11.7.
आण्विक सूत्र C7H8O वाले मोनोहाइड्रिक फीनॉलों की संरचनाएँ तथा IUPAC (आईयूपीएसी) नाम लिखिए।
उत्तर:
आण्विक सूत्र C7H8O से तीन मोनोहाइड्रिक फीनॉल संभव हैं जो निम्न प्रकार हैं-
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प्रश्न 11.8.
ऑर्थो तथा पैरा- नाइट्रोफीनॉलों के मिश्रण को भाप – आसवन द्वारा पृथक् करने में भाप – वाष्पशील समावयवी का नाम बताइए। इसका कारण दीजिए।
उत्तर:
o – नाइट्रो फ़ीनॉल अंतः अणुक हाइड्रोजन बन्ध (Intramolecular H – bond) के कारण भाप में वाष्पशील है क्योंकि इसमें अन्तराअणुक बल, p- समावयवी की तुलना में दुर्बल होता है।
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प्रश्न 11.9.
क्यूमीन से फीनॉल बनाने की अभिक्रिया का समीकरण दीजिए ।
उत्तर:
क्यूमीन (आइसोप्रोपिल बेन्जीन) को पहले वायु (O2) के द्वारा हाइड्रोपरॉक्साइड में ऑक्सीकृत करते हैं फिर इसकी तनु अम्ल (H2SO4) के साथ क्रिया करवाने पर यह फीनॉल तथा ऐसीटोन में विघटित हो जाता है।
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प्रश्न 11.10.
क्लोरोबेन्जीन से फीनॉल बनाने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
क्लोरोबेन्जीन को 623 K ताप एवं लगभग 300 वायुमण्डलीय दाब पर NaOH के साथ संगलित करने पर सोडियम फीनॉक्साइड बनता है जिसकी तनु अम्ल के साथ क्रिया कराने पर फीनॉल बनता है।
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प्रश्न 11.
11 एथीन के जलयोजन (Hydration) से एथेनॉल प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
एथीन का जलयोजन – तनु अम्ल (HCl, H2SO4) उपस्थिति में एल्कीन की जल के साथ अभिक्रिया से ऐल्कोहॉल बनता है तथा असममित ऐल्कीनों में योगात्मक अभिक्रिया मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होती है।

एथीन का जलयोजन निम्न प्रकार होता है-
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क्रियाविधि – इस अभिक्रिया की क्रियाविधि में निम्नलिखित तीन पद होते हैं-
पद 1-H3O+ के इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण के द्वारा ऐल्कीन के प्रोटोनीकरण (Protonation) से कार्बोकैटायन बनता है।
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पद 2-कार्बोकैटायन पर जल का नाभिकस्नेही (Nucleophyllic) आक्रमण
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पद 3-विप्रोटोनीकरण (deprotonation) जिससे ऐल्कोहॉल बनता है।
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प्रश्न 11.12.
आपको बेन्जीन, सान्द्र H2SO4 और NaOH दिए गए हैं। इन अभिकर्मकों के उपयोग द्वारा फीनॉल के विरचन की समीकरण लिखिए।
उत्तर:
पहले बेन्जीन का ओलियम ( सधूम H2SO4) द्वारा सल्फोनीकरण किया जाता है तथा इससे प्राप्त बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ संगलित करने से सोडियम फीनॉक्साइड प्राप्त होता है। प्राप्त सोडियम फीनॉक्साइड की तनु अम्ल से क्रिया कराने पर फीनॉल प्राप्त हो जाता है।
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प्रश्न 11.13.
आप निम्नलिखित को कैसे संश्लेषित करेंगे ? दर्शाइए।
(i) एक उपयुक्त ऐल्कीन 1- फेनिलएथेनॉल
(ii) SN2 अभिक्रिया द्वारा ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल
(iii) एक उपयुक्त ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से पेन्टेन -1- ऑल।
उत्तर:
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प्रश्न 11.14.
ऐसी दो अभिक्रियाएँ दीजिए जिनसे फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती हो। फीनॉल की अम्लता की तुलना एथेनॉल से कीजिए |
उत्तर:
निम्नलिखित अभिक्रियाओं से फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती है-
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प्रश्न 11.15.
समझाइए कि ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो- मेथॉक्सी फीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होती है ?
उत्तर:
ऑर्थो – नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो मेथॉक्सी फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय होती है क्योंकि -NO2 समूह का इलेक्ट्रॉन- आकर्षी अनुनाद प्रभाव (-I तथा -M) फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ाता है जबकि -OCH3 (मेथॉक्सी) समूह का इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षी प्रभाव फीनॉक्साइड आयन के स्थायित्व को कम करता है। फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ने से फीनॉल का वियोजन अधिक होता है अतः अम्लीय प्रबलता बढ़ती है।

प्रश्न 11.16.
समझाइए कि बेन्जीन वलय से जुड़ा – OH समूह उसे इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति कैसे सक्रियित करता है?
उत्तर:
ऐरोमैटिक इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन – फीनॉलों में ऐरोमैटिक वलय पर होने वाली अभिक्रियाएँ इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ होती हैं। बेन्ज़ीन वलय से जुड़ा – OH समूह इसे इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया के लिए सक्रियित करता है और आने वाले इलेक्ट्रॉनस्नेही को ऑर्थो एवं पैरा स्थिति पर निर्देशित करता है। क्योंकि – OH समूह के इलेक्ट्रॉन -प्रतिकर्षी (+ M प्रभाव) अनुनाद प्रभाव के कारण o तथा p- स्थितियाँ इलेक्ट्रॉन-धनी हो जाती हैं अतः इलेक्ट्रॉनरागी इन स्थितियों पर आसानी से आक्रमण करता है तथा बेन्जीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है जिससे आने वाले इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण सुगमता से होता है। फीनॉल की अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार हैं-
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प्रश्न 11.17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण दीजिए-
(i) प्रोपेन- 1 ऑल का क्षारीय KMnO के साथ ऑक्सीकरण
(ii) ब्रोमीन की CS2 में फीनॉल के साथ अभिक्रिया
(iii) तनु HNO3 की फीनॉल से अभिक्रिया
(iv) फीनॉल की जलीय NaOH की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ अभिक्रिया।
उत्तर:
(i) प्रोपेन – 1- ऑल का क्षारीय KMnO4 ऑक्सीकरण-
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(ii) ब्रोमीन की CS2 में फीनॉल के साथ अभिक्रिया-
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(iii) तनु HNO3 की फीनॉल से अभिक्रिया-
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(iv) फीनॉल की जलीय NaOH की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया-
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इसे राइमर -टीमान अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 11.18.
निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए –
(i) कोल्बे अभिक्रिया
(ii) राइमर – टीमान अभिक्रिया
(iii) विलियम्सन ईथर संश्लेषण
(iv) असममित ईथर।
उत्तर:
(i) कोल्बे अभिक्रिया (Kolbe Reaction) – या कोल्बे शिमट अभिक्रिया-सोडियम फीनॉक्साइड को 130° ताप तथा उच्च दाब (4-7 वायु-दाब) पर CO2 के साथ गर्म करने पर पहले सोडियम फेनिल कार्बोनेट मध्यवर्ती बनता है जिसके पुनर्विन्यास से सोडियम सैलिसिलेट प्राप्त होता है। सोडियम सैलिसिलेट के अम्लीकरण से सैलिसिलिक अम्ल बनता है।
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इस अभिक्रिया में CO2 दुर्बल इलेक्ट्रॉनस्नेही होते हुए भी अभिक्रिया सुगमता से सम्मन्न हो जाती है जिसका कारण फीनॉक्साइड आयन का, फीनॉल की तुलना में अधिक क्रियाशील होना है।

(ii) राइमर – टीमान अभिक्रिया – फीनॉल की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ अभिक्रिया से ऑर्थो स्थिति पर – CHO समूह आ जाता है। इस अभिक्रिया को राइमर-टीमन अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में पहले प्रतिस्थापित बेन्जल क्लोराइड (मध्यवर्ती) बनता है जो क्षार की उपस्थिति में अपघटित होकर सैलिसैल्डिहाइड बनाता है।
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(iii) विलियम्सन ईथर संश्लेषण (Williamson’s Ether Synthesis) – ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने से ईथर प्राप्त होते हैं, इसे विलियम्सन ईथर संश्लेषण कहते हैं।
\(\mathrm{RX}+\mathrm{R}^{\prime}-\overline{\mathrm{O}}-\stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{R}-\mathrm{O}-\mathrm{R}^{\prime}+\mathrm{NaX}\)
\(\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{Br}+\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \stackrel{-}{\mathrm{O}} \stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{O} \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5+\mathrm{NaBr}\)
यह सममित तथा असममित ईथर बनाने की महत्त्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है।
इस विधि से द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्किल समूह युक्त ईथर भी बनाए जा सकते हैं तथा इसमें प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड पर ऐल्कॉक्साइड आयन आक्रमण करता है, अतः इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN² होती है।
उदाहरण-
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द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड लेने पर ईथर तथा एल्कीन ( विलोपन अभिक्रिया) दोनों बनती हैं तथा तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग करने पर एल्कीन ही बनती है क्योंकि RO (ऐल्कॉक्साइड) आयन प्रबल क्षार होता है, अतः विलोपन अभिक्रिया होती है।

उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24a

इस विधि द्वारा फीनॉल से भी ईथर बनाया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24

लेकिन C6H5Br की R\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) से अभिक्रिया द्वारा ईथर नहीं बनता क्योंकि ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति बहुत कम क्रियाशील होते हैं।
C6H5Br + CH3–\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) → कोई अभिक्रिया नहीं

(iv) असममित ईथर – वे ईथर जिनमें दोनों हाइड्रोकार्बन समूह भिन्न-भिन्न होते हैं, उन्हें असममित ईथर कहते हैं। जैसे CH3-O-C2 H5 एथिल मेथिल ईथर।

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प्रश्न 11.19.
एथेनॉल के अम्लीय निर्जलन या निर्जलीकरण (Dehydration) से एथीन प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
एथेनॉल को 443 K ताप पर सान्द्र H2SO4 के साथ करने पर इसका निर्जलीकरण होकर एथीन बनती है।
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एथेनॉल के निर्जलीकरण (Dehydration) की क्रियाविधि में निम्नलिखित पद होते हैं-
क्रियाविधि-
I. प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल का बनना-
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II. कार्बोकैटायन का बनना (Formation of Carbocation) – यह सबसे धीमा पद है अतः यह वेग निर्धारक पद है-
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III. विप्रोटोनीकरण-
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पद 1 में प्रयुक्त अम्ल, पद 3 में स्वतंत्र हो जाता है। इस अभिक्रिया में साम्य को दाईं ओर विस्थापित करने के लिए, एथीन को बनते ही निकाल लिया जाता है।

प्रश्न 11.20.
निम्नलिखित परिवर्तनों को किस प्रकार किया जा सकता है?
(i) प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल
(ii) बेन्जिल क्लोराइड → बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड → प्रोपेन-1-ऑल
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड → 2-मेथिलप्रोपेन-2ऑल।
उत्तर:
(i) प्रोपीन → प्रोपेन-2-ऑल (प्रोपीन के जलयोजन से)
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(ii) बेन्जिल क्लोराइड → बेन्जिल ऐल्कोहॉल
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(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड → प्रोपेन-1-ऑल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 31
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड → 2-मेथिलप्रोपेन-2ऑल।
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प्रश्न 11.21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में प्रयुक्त अभिकर्मकों के नाम बताइए –
(i) प्राथमिक ऐल्कोहॉल का कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकरण
(ii) प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऐल्डिहाइड में ऑक्सीकरण
(iii) फीनॉल का 2, 4, 6 – ट्राइब्रोमोफीनॉल में ब्रोमीनन
(iv) बेन्जिल ऐल्कोहॉल से बेन्जोइक अम्ल
(v) प्रोपेन – 2 – ऑल का प्रोपीन में निर्जलन (vi) ब्यूटेन – 2 – ऑन से ब्यूटेन – 2 – ऑल |
उत्तर:
(i) KMnO4 का अम्लीय विलयन (या अम्लीय K2Cr2O7)
(ii) गर्म अपचयित कॉपर या पिरीडिनियम क्लोरो क्रोमेट (PCC)
(iii) ब्रोमीन का जलीय विलयन
(iv) KMnO4 का अम्लीय विलयन
(v) गर्म तथा सान्द्र H2SO4
(vi) लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड (LiAlH4) या सोडियम बोरोहाइड्राइड (NaBH4)

प्रश्न 11.22.
कारण बताइए कि मेथॉक्सीमेथेन की तुलना में एथेनॉल का क्वथनांक उच्च क्यों होता है?
उत्तर:
एथेनॉल में अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जबकि मेथॉक्सी मेथेन में द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण (वान्डरवाल बल) पाया जाता है। अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बन्ध की प्रबलता, द्विध्रुव- द्विध्रुव आकर्षण से अधिक होती है। अतः एथेनॉल का क्वथनांक, मेथॉक्सी मेथेन की तुलना में उच्च होता है।

प्रश्न 11.23.
निम्नलिखित ईथरों के आईयूपीएसी ( IUPAC ) नाम दीजिए-
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उत्तर:
(i) 1-एथॉक्सी-2 – मेथिलप्रोपेन
(ii) 2 – क्लोरो-1 – मेथॉक्सीएथेन
(iii) 4 – नाइट्रोऐनिसॉल
(iv) 1- मेथॉक्सीप्रोपेन
(v) 1- एथॉक्सी-4, 4- डाइमेथिलसाइक्लोहेक्सेन
(vi) एथॉक्सीबेन्जीन

प्रश्न 11.24.
निम्नलिखित ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मकों के नाम एवं समीकरण लिखिए-(i) 1- प्रोपॉक्सीप्रोपेन (ii) एथॉक्सीबेन्जीन (iii) 2-मेथॉक्सी-2 – मेथिलप्रोपेन (iv) 1 – मेथॉक्सीएथेन।
उत्तर:
उपर्युक्त ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा निम्न प्रकार बनाया जाता है-
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प्रश्न 11.25.
कुछ विशेष प्रकार के ईथरों को विलियम्सन संश्लेषण द्वारा बनाने की सीमाओं को उदाहरणों से समझाइए।
उत्तर:
विलियम्सन ईथर संश्लेषण (Williamson’s Ether Synthesis) – ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने से ईथर प्राप्त होते हैं, इसे विलियम्सन ईथर संश्लेषण कहते हैं।
\(\mathrm{RX}+\mathrm{R}^{\prime}-\overline{\mathrm{O}}-\stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{R}-\mathrm{O}-\mathrm{R}^{\prime}+\mathrm{NaX}\)
\(\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{Br}+\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \stackrel{-}{\mathrm{O}} \stackrel{+}{\mathrm{Na}} \longrightarrow \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5 \mathrm{O} \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_5+\mathrm{NaBr}\)
यह सममित तथा असममित ईथर बनाने की महत्त्वपूर्ण प्रयोगशाला विधि है।
इस विधि से द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्किल समूह युक्त ईथर भी बनाए जा सकते हैं तथा इसमें प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड पर ऐल्कॉक्साइड आयन आक्रमण करता है, अतः इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN² होती है।
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 23
द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड लेने पर ईथर तथा एल्कीन ( विलोपन अभिक्रिया) दोनों बनती हैं तथा तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग करने पर एल्कीन ही बनती है क्योंकि RO (ऐल्कॉक्साइड) आयन प्रबल क्षार होता है, अतः विलोपन अभिक्रिया होती है।

उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24a

इस विधि द्वारा फीनॉल से भी ईथर बनाया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24

लेकिन C6H5Br की R\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) से अभिक्रिया द्वारा ईथर नहीं बनता क्योंकि ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति बहुत कम क्रियाशील होते हैं।
C6H5Br + CH3–\(\overline{\mathrm{O}} \stackrel{+}{Na}\) → कोई अभिक्रिया नहीं

प्रश्न 11.26.
प्रोपेन- 1 ऑल से 1 प्रोपॉक्सी प्रोपेन को किस प्रकार बनाया जाता है ? इस अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
प्रोटिक अम्लों (H2SO4, H3PO4) की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल के आधिक्य को लगभग 413 K ताप पर गर्म करने पर ईथर मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
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ईथर बनाने की यह विधि द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN2) है जिसमें ऐल्कोहॉल का अणु एक प्रोटोनित ऐल्कोहॉल अणु पर आक्रमण करता है।
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प्रश्न 11.27.
द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन (निर्जलीकरण) द्वारा ईथरों को बनाने की विधि उपयुक्त नहीं है। कारण बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथर बनाना मुश्किल होता है क्योंकि प्रतिस्थापन तथा विलोपन अभिक्रियाओं के मध्य प्रतिस्पर्धा में विलोपन अभिक्रिया अधिक होने से मुख्य उत्पाद ऐल्कीन बनती है।
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प्रश्न 11.28.
हाइड्रोजन आयोडाइड की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए-
(i) 1 – प्रोपॉक्सीप्रोपेन
(ii) मेथॉक्सीबेन्जीन तथा
(iii) बेन्जिल एथिल ईथर ।
उत्तर:
(i) जब HI कम मात्रा में लिया जाता है तो 1- आयोडोप्रोपेन तथा प्रोपेन- 1 – ऑल बनता है जबकि HI आधिक्य में लेने पर 1-आयोडोप्रोपेन के दो मोल बनते हैं।
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प्रश्न 11.29.
ऐरिल ऐल्किल ईथरों में निम्न तथ्यों की व्याख्या कीजिए-
(i) ऐल्कॉक्सी समूह बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रियित करता है, तथा
(ii) यह प्रवेश करने वाले प्रतिस्थापियों को बेन्जीन वलय की ऑर्थो एवं पैरा स्थितियों की ओर निर्दिष्ट करता है।
उत्तर:
(i) ऐरिल ऐल्किल ईथरों में ऐल्कॉक्सी समूह बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति सक्रियित करता है क्योंकि फीनॉल के समान ईथर के ऑक्सीजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद ( + M प्रभाव) करता है जिससे बेन्जीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण आसान हो जाता है।

(ii) अनुनाद के कारण ( + M प्रभाव) ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है (ऋणावेश) अतः आने वाला इलेक्ट्रॉनरागी ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर आक्रमण करता है। इसे निम्न अनुनादी संरचनाओं द्वारा समझा सकते हैं-
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प्रश्न 11.30.
मेथॉक्सी मेथेन की HI के साथ अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
उत्तर:
मेथॉक्सी मेथेन की HI के साथ अभिक्रिया SN² क्रियाविधि द्वारा होती है।
पद I.
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 40
पद II.
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 42
जब HI आधिक्य में होता है तो CH3OH, पुनः HI से क्रिया करके CH3I बना देता है।
पद III.
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 43

प्रश्न 11.31.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए –
(i) फ्रीडेल क्राफ्ट अभिक्रिया – ऐनिसोल का ऐल्किलन (ऐल्किलीकरण)
(ii) ऐनिसोल का नाइट्रीकरण
(iii) एथेनॉइक अम्ल माध्यम में ऐनिसोल का ब्रोमीनन (ब्रोमीनीकरण)
(iv) ऐनिसोल का फ्रीडेल क्राफ्ट ऐसीटिलन (ऐसीटिलीकरण)
उत्तर:
(i) फ्रीडेल- क्राफ्ट अभिक्रिया – ऐनिसोल का ऐल्किलन (Alkylation) –
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 44
यहाँ AICI3 लुइस अम्ल की भाँति कार्य करता है।

(ii) ऐनिसोल का नाइट्रीकरण (Nitration ) – सान्द्र H2SO4 तथा सान्द्र HNO3 के मिश्रण (नाइट्रीकारक मिश्रण) से ऐनिसोल का नाइट्रीकरण कराने पर ऑर्थो तथा पैरानाइट्रो ऐनिसोल का मिश्रण बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 45

(iii) एथेनॉइक अम्ल माध्यम में ऐनिसोल का ब्रोमीनन (ब्रोमीनीकरण) (Bromination)-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 46

(iv) ऐनिसोल का फ्रीडेल-क्राफ्ट ऐसीटिलन (ऐसीटिलीकरण) (Acetylation) –
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 47

प्रश्न 11.32.
उपयुक्त ऐल्कीनों से आप निम्नलिखित ऐल्कोहॉलों का संश्लेषण कैसे करेंगे?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 48
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 49

प्रश्न 11.33.
3 – मेथिलब्यूटेन – 2 – ऑल को HBr से अभिकृत कराने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 50
इस अभिक्रिया की क्रियाविधि दीजिए।
संकेत – चरण II में प्राप्त द्वितीयक कार्बोकैटायन हाइड्राइड आयन विचलन कारण पुनर्विन्यासित होकर स्थायी तृतीयक कार्बोकैटायन बनाते हैं।
उत्तर:
इस अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्न है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 51

HBSE 12th Class Chemistry ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर Intext Questions

प्रश्न 11.1.
निम्नलिखित को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉल में वर्गीकृत कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 52
उत्तर:
प्राथमिक ऐल्कोहॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 53

द्वितीयक ऐल्कोहॉल (iv) तथा (v)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 54

तृतीयक ऐल्कोहॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 55

प्रश्न 11.2.
उपरोक्त उदाहरणों में से ऐलिलिक ऐल्कोहॉलों को पहचानिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 56

प्रश्न 11.3.
निम्नलिखित यौगिकों के आई यूपीएसी (IUPAC) नामपद्धति से नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 57
उत्तर:
(i) 3-क्लोरोमेथिल-2-आइसोप्रोपिलपेन्टेंन-1-ऑल
(ii) 2, 5-डाइमेथिलहेक्सेन-1, 3-डाइऑल
(iii) 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्सेन-1-ऑल
(iv) हेक्स-1-ईन-3-ऑल
(v) 2-ब्रोमो-3-मथथिलब्यूट-2-ईन-1-ऑल।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.4.
दर्शाइए कि मेथेनैल पर उपयुक्त ग्रीन्यार अभिकर्मक से अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित ऐल्कोहॉल कैसे विरचित किए जाते हैं?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 58
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 59

प्रश्न 11.5.
निम्नलिखित अभिक्रिया के उत्पादों की संरचना लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 60
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 61

प्रश्न 11.6.
यदि निम्नलिखित ऐल्कोहॉल क्रमशः (क) HCl-ZnCl2 (ख) HBr (ग) SOCl2 से अभिक्रिया करें तो आप अपेक्षित उत्पादों की संरचनाएँ दीजिए।
(i) ब्यूटेन -1- ऑल
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल
उत्तर:
(i) ब्यूटेन – 1 – ऑल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 62

प्रश्न 11.7.
(i) 1- मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल और
(ii) ब्यूटेन – 1- ऑल के अम्ल उत्प्रेरित निर्जलन (Dehydration) के मुख्य उत्पादों की प्रागुक्ति कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 63
ब्यूट – 1 – ईन तथा ब्यूट – 2 – ईन का मिश्रण बनता है जिसमें उत्पाद ब्यूट-2-ईन मुख्य उत्पाद होती है क्योंकि पुनर्विन्यास द्वारा अधिक स्थायी 2° – कार्बोनियम आयन (सेकेंड्री कार्बोकैटायन) बनता है।

प्रश्न 11.8.
ऑर्थो तथा पैरा नाइट्रोफीनॉल, फीनॉल से अधिक अम्लीय होती हैं। उनके संगत फीनॉक्साइड आयनों की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।
उत्तर:
फीनॉल में ऑर्थो तथा पैरा स्थिति पर नाइट्रो समूह आने पर अम्लीय गुण बढ़ जाता है जिसे निम्न अनुनादी संरचनाओं से समझा सकते हैं-
(i) आर्थो नाइट्रो फीनॉल के ऋणायन की अनुनादी संरचनाएँ-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 64
(ii) पैरानाइट्रो फीनॉल के ऋणायन की अनुनादी संरचनाएँ
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 65
प्रतिस्थापित फीनॉलों में -NO2 समूह जैसे इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह फीनॉल की अम्लीय प्रबलता को बढ़ा देते हैं तथा ये समूह o तथा p- स्थिति पर होने पर यह प्रभाव अधिक होता है क्योंकि इससे फीनॉक्साइड आयन के ऋणावेश का प्रभावी विस्थापन या विस्थानीकरण होता है जिससे इनका स्थायित्व बढ़ जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 11.9.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में सम्मिलित समीकरण लिखिए-
(i) राइमर – टीमन अभिक्रिया
(ii) कोल्बे अभिक्रिया।
उत्तर:
(i) राइमर – टीमन अभिक्रिया – फीनॉल की सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) की उपस्थिति में क्लोरोफार्म के साथ अभिक्रिया से ऑर्थो स्थिति पर – CHO समूह आ जाता है। इस अभिक्रिया को राइमर टीमन अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में पहले प्रतिस्थापित बेन्जल क्लोराइड (मध्यवर्ती) बनता है जो क्षार की उपस्थिति में अपघटित होकर सैलिसैल्डिहाइड बनाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 66

(ii) कोल्बे अभिक्रिया – या कोल्बे शिमिट अभिक्रिया-सोडियम फीनॉक्साइड को 130° ताप तथा उच्च दाब (4-7 वायु-दाब) पर CO2 के साथ गर्म करने पर पहले सोडियम फेनिल कार्बोनेट मध्यवर्ती बनता है जिसके पुनर्विन्यास से सोडियम सैलिसिलेट प्राप्त होता है। सोडियम सैलिसिलेट के अम्लीकरण से सैलिसिलिक अम्ल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 67
इस अभिक्रिया में CO2 दुर्बल इलेक्ट्रॉनस्नेही होते हुए भी अभिक्रिया सुगमता से सम्पन्न हो जाती है जिसका कारण फीनॉक्साइड आयन का, फीनॉल की तुलना में अधिक क्रियाशील होना है।

प्रश्न 11.10.
एथेनॉल एवं 3-मेथिलपेन्टेन-2-ऑल से प्रारम्भ कर 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेन्टेन के विलियम्सन संश्लेषण की अभिक्रिया लिखिए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 68
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 69

प्रश्न 11.11.
1-मेथॉक्सी-4-नाइट्रोबेन्जीन के विरचन के लिए निम्नलिखित अभिकारकों में से कौन-सा युग्म उपयुक्त है और क्यों?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 70
उत्तर:
1-मेथॉक्सी-4-नाइट्रोबेन्जीन के विरचन के लिए युग्म (ii) उपयुक्त है क्योंकि युग्म (i) में बेन्जीन वलय से जुड़े ब्रोमीन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होने के कारण C-Br बन्ध में द्विबन्ध के गुण आ जाते हैं अतः बन्ध प्रबल हो जाता है तथा इसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है।
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प्रश्न 11.12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों का अनुमान लगाइए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 72
उत्तर:
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HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

प्रश्न 1.
ज्ञात कीजिए :
(i) 12 ÷ \(\frac {3}{4}\)
(ii) 14 ÷ \(\frac {5}{6}\)
(iii) 8 ÷ \(\frac {7}{3}\)
(iv) 4 ÷ \(\frac {8}{3}\)
(v) 3 ÷ 2\(\frac {7}{3}\)
(vi) 5 ÷ 3\(\frac {4}{7}\)
हल :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4 - 1

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

प्रश्न 2.
निम्नलिखित भिन्नों में से प्रत्येक का व्युत्क्रम ज्ञात कीजिए। व्युत्क्रमों को उचित भिन्न, विषम भिन्न एवं पूर्ण संख्या के रूप में वर्गीकृत कीजिए:
(i) \(\frac {3}{7}\)
(ii) \(\frac {5}{8}\)
(iii) \(\frac {9}{7}\)
(iv) \(\frac {6}{5}\)
(v) \(\frac {12}{7}\)
(vi) \(\frac {1}{8}\)
(vii) \(\frac {1}{11}\)
हल :
(i) \(\frac {3}{7}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {7}{3}\) है, यह उचित भिन्न नहीं है।
(ii) \(\frac {5}{8}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {8}{5}\), यह उचित भिन्न नहीं है।
(iii) \(\frac {9}{7}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {7}{9}\), यह उचित भिन्न है।
(iv) \(\frac {6}{5}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {5}{6}\), यह उचित भिन्न है।
(v) \(\frac {12}{7}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {7}{12}\), यह उचित भिन्न है।
(vi) \(\frac {1}{8}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {8}{1}\) = 8, यह उचित भिन्न है।
(vii) \(\frac {1}{11}\) का व्युत्क्रम = \(\frac {11}{1}\) = 11, यह एक पूर्ण संख्या है।

प्रश्न 3.
ज्ञात कीजिए:
(i) \(\frac {7}{3}\) ÷ 2
(ii) \(\frac {4}{9}\) ÷ 5
(iii) \(\frac {6}{13}\) ÷ 7
(iv) 4\(\frac {1}{3}\) ÷ 3
(v) 3\(\frac {1}{2}\) ÷ 4
(vi) 4\(\frac {3}{7}\) ÷ 7
हल :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4 - 2

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4

प्रश्न 4.
ज्ञात कीजिए :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4 - 3
हल :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4 - 4
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 2 भिन्न एवं दशमलव Ex 2.4 - 5

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.1.
कॉपर का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा किया जाता है, परन्तु जिंक का नहीं । व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
कॉपर का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा किया जा सकता है। क्योंकि कॉपर कम क्रियाशील धातु (विद्युत रासायनिक श्रेणी में नीचे ) है, जबकि Zn ( जिंक) अत्यधिक क्रियाशील (विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर) धातु है अतः इसको ZnSO4 विलयन से आसानी से प्रतिस्थापित करना संभव नहीं है इसलिए जिंक का निष्कर्षण हाइड्रो धातुकर्म द्वारा नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 6.2.
फेन प्लवन विधि में अवनमक की क्या भूमिका है?
उत्तर:
फेन प्लवन विधि में अवनमक एक घटक (अशुद्धि) के साथ संकुल बना लेता है एवं इसे झाग में आने से रोकता है। उदाहरण- NaCN, ZnS के लिए अवनमक का कार्य करता है। PbS के लिए नहीं। अतः किसी अयस्क में PbS तथा ZnS दोनों उपस्थित हैं केवल PbS ही फेन बनाता है अतः इस विधि से PbS को ZnS से पृथक् किया जा सकता है।

प्रश्न 6.3.
अपचयन द्वारा ऑक्साइड अयस्कों की अपेक्षा पाइराइट से ताँबे का निष्कर्षण अधिक कठिन क्यों है?
उत्तर:
कार्बन, सल्फाइड अयस्कों के लिए अच्छा अपचायक नहीं है। जबकि यह ऑक्साइड अयस्कों के लिए अच्छा अपचायक है। अतः अपचयन द्वारा ऑक्साइड अयस्कों की अपेक्षा पाइराइट (सल्फाइड अयस्क) से ताँबे का निष्कर्षण अधिक मुश्किल है तथा अधिकांश सल्फाइडों के विरचन की गिब्ज़ ऊर्जा CS2 के विरचन की गिब्ज ऊर्जा से अधिक होती है। वास्तव में CS2 एक ऊष्माशोषी यौगिक है अतः अपचयन से पहले सल्फाइड अयस्कों का संगत ऑक्साइडों में भर्जन करना उचित रहता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.4.
व्याख्या कीजिए-
(1) मंडल परिष्करण
(2) स्तंभ वर्णलेखिकी।
उत्तर:
1. मंडल परिष्करण या जोन परिष्करण – मंडल परिष्करण द्वारा अतिशुद्ध धातु प्राप्त होती है। यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि अशुद्धियों की विलेयता धातु की ठोस अवस्था की अपेक्षा गलित अवस्था में अधिक होती है। इस विधि में अशुद्ध धातु की छड़ के एक किनारे पर एक वृत्ताकार गतिशील हीटर (तापक) लगा होता है। जो छड़ को हर तरफ से घेरे रहता है। हीटर जैसे ही आगे बढ़ता है, गलित मण्डल भी आगे बढ़ता जाता है और गलित से शुद्ध धातु क्रिस्टलित हो जाती है तथा अशुद्धियाँ पास वाले गलित जोन में चली जाती हैं।

इस प्रक्रिया को कई बार दोहराते हैं तथा हीटर को एक ही दिशा में बार-बार चलाते जाते हैं। अशुद्धियाँ छड़ के एक किनारे पर एकत्रित हो जाती हैं, जिसे काटकर अलग कर लेते हैं। इस विधि से अति शुद्ध अर्धचालकों तथा अन्य शुद्ध धातुओं; जैसे – जर्मेनियम, सिलिकॉन, बोरॉन, गैलियम तथा इंडियम को प्राप्त किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 1

2. वर्णलेखिकी या क्रोमेटोग्रैफी विधि – वर्णलेखिकी (क्रोमेटोग्रफी) किसी मिश्रण के विभिन्न घटकों को पृथक् करने की विधि होती है । वर्णलेखिकी पद ग्रीक भाषा के शब्द क्रोमा अर्थात् रंग से लिया गया है क्योंकि प्रारम्भ में इसे रंगीन पदार्थों को पृथक् करने में प्रयुक्त किया गया था। वर्णलेखिकी, अधिशोषण तथा विभेदी अभिगमन के सिद्धान्त पर आधारित होती है, अर्थात् अधिशोषक पर मिश्रण के विभिन्न घटकों का अधिशोषण भिन्न-भिन्न होता है। मिश्रण को द्रव या गैसीय माध्यम में रखा जाता है जो कि अधिशोषक में से गुजरता है।

स्तम्भ में विभिन्न घटक भिन्न- भिन्न स्तरों पर अधिशोषित हो जाते हैं। इसके पश्चात् अधिशोषित घटक उपयुक्त विलायक (निक्षालक) द्वारा निक्षालित किए जाते हैं। गतिशील माध्यम की भौतिक अवस्था, अधिशोष्य पदार्थ की प्रकृति तथा गतिशील माध्यम के गमन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है। वर्णलेखिकी कई प्रकार की होती है- पेपर वर्णलेखिकी, स्तम्भ वर्णलेखिकी, पतली परत वर्णलेखिकी तथा गैस वर्णलेखिकी। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण वर्णलेखिकी स्तम्भ वर्णलेखिकी है।

प्रश्न 6.5.
673K ताप पर C तथा CO में से कौनसा अच्छा अपचायक है ?
उत्तर:
कम ताप जैसे 673K पर △G°( CO, CO2) रेखा, △G°(C, CO2) रेखा के नीचे है, अतः 673K पर C तथा CO में से CO अच्छा अपचायक है।

प्रश्न 6.6.
कॉपर के वैद्युत अपघटनी शोधन में ऐनोड पंक में उपस्थित सामान्य तत्वों के नाम दीजिए। ये वहाँ कैसे उपस्थित होते हैं?
उत्तर:
कॉपर के वैद्युत अपघटनी शोधन में ऐनोड पंक में एन्टीमनी सेलेनियम, टेल्यूरियम, चाँदी, सोना तथा प्लेटिनम इत्यादि धातुएँ उपस्थित होती हैं क्योंकि ये कॉपर की तुलना में कम विद्युत धनी (कम क्रियाशील ) होती हैं अतः इनका ऐनोड पर ऑक्सीकरण नहीं होता तथा ये ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक के रूप में जमा हो जाती हैं।

प्रश्न 6.7.
आयरन (लोहे) के निष्कर्षण के दौरान वात्या भट्टी के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर:
(i) वात्या भट्टी के ऊपरी भाग में जहाँ ताप परिसर 500- 800K होता है, निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं-
3Fe2O3 + CO → 2Fe3O4 + CO2
Fe3O4 + 4CO → 3FeO + CO2
Fe2O3 + CO → 2FeO + CO2

(ii) वात्या भट्टी के मध्य भाग में जहाँ ताप परिसर 900-1500K होता है, निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं-
C + CO2 → 2CO
FeO + CO → Fe + CO2
CaCO3 → CaO + CO2
CaO + SiO2 → CaSiO3

(iii) वात्या भट्टी के नीचे के भाग में जहाँ उच्च ताप होता है, कोक जलकर CO2 बनाता है जो कोक से अपचयित होकर CO बनाता है।
C + O2 → CO2
CO2 + C → 2CO
FeO + C → Fe + CO

प्रश्न 6.8.
जिंक ब्लेंड से जिंक के निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को लिखिए।
उत्तर:
जिंक ब्लेंड (ZnS) से जिंक के निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 2

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.9.
कॉपर के धातुकर्म में सिलिका की भूमिका समझाइए ।
उत्तर:
कॉपर के धातुकर्म में सिलिका (SiO2), गालक (Flux ) की तरह कार्य करता है जो कि कॉपर के साथ उपस्थित FeO की अशुद्धि से क्रिया करके उसे स्लेग (कीट) के रूप में पृथक् कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 3

प्रश्न 6.10.
यदि तत्व सूक्ष्म मात्रा में प्राप्त हुआ हो तो शोधन की कौन-सी तकनीक अधिक उपयोगी होगी?
उत्तर:
जब कोई तत्व सूक्ष्म मात्रा में प्राप्त हुआ है तो शोधन की स्तम्भ वर्णलेखिकी विधि अधिक उपयोगी होगी।

प्रश्न 6.11.
यदि किसी तत्व में उपस्थित अशुद्धियों के गुण तत्व से मिलते जुलते हों तो आय शोधन के लिए किस विधि का सुझाव देंगे ?
उत्तर:
जब किसी तत्व में उपस्थित अशुद्धियों के गुण तत्व से मिलते हों तो शोधन के लिए स्तम्भ वर्ण लेखिकी (कॉलम क्रोमेटोग्राफी) विधि का ही प्रयोग करेंगे।

प्रश्न 6.12.
निकल के शोधन की विधि समझाइए |
उत्तर:
निकल (Ni) का शोधन मॉन्ड की विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में निकल को कार्बन मोनोक्साइड के साथ गरम करने से वाष्पशील निकल टेट्राकार्बोनिल संकुल बन जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 4
इस संकुल को और अधिक ताप पर गरम करते हैं, तो यह विघटित होकर शुद्ध Ni दे देता है तथा CO पृथक् हो जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 5

प्रश्न 6.13.
उदाहरण देते हुए भर्जन व निस्तापन में अंतर बताइए ।
उत्तर:
निस्तापन प्रक्रम में अयस्क ( जलयोजित ऑक्साइड, कार्बोनेट, हाइड्रॉक्साइड आदि) को धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर धीरे- धीरे गर्म करते हैं, जिससे वाष्पशील पदार्थ (CO2, H2O) निकल जाते हैं तथा धातु ऑक्साइड बच जाता है। परन्तु भर्जन में सल्फाइड अयस्कों को वायु (O2) की उपस्थिति में धातु के गलनांक से नीचे के ताप पर परावर्तनी भट्टी में तेजी से गर्म करते हैं जिससे सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं तथा SO2 गैस निकल जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 6

प्रश्न 6.14.
ढलवाँ लोहा ( Cast Iron) कच्चे लोहे (Pig Iron) से किस प्रकार भिन्न होता है?
उत्तर:
ढलवाँ लोहे में लगभग 3% कार्बन होता है जबकि कच्चे लोहे में लगभग 4% कार्बन होता है। कच्चे लोहे के साथ रद्दी लोहा तथा कोक को गलाकर ढलवाँ लोहा बनाया जाता है।

प्रश्न 6.15.
अयस्कों तथा खनिजों में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
अयस्क ( Ores) – वे खनिज जिनसे धातु का निष्कर्षण आसानी से हो सके तथा आर्थिक रूप से लाभदायक हों उन्हें अयस्क कहते हैं। जैसे कॉपर ग्लांस (Cu2S), क्युपराइट (Cu2O) तथा कॉपर पाइराइटीज (CuFeS2) कॉपर के अयस्क हैं, लेकिन इनमें से कॉपर पाइराइटीज ही कॉपर का अयस्क है।
खनिज (Minerals) – भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक पदार्थ ( यौगिक ) जिन्हें खनन द्वारा प्राप्त किया जाता है उन्हें खनिज कहते हैं।

प्रश्न 6.16.
कॉपर मेट को सिलिका की परत चढ़े हुए परिवर्तक में क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
कॉपर मेट में Cu2S तथा FeS उपस्थित होते हैं। परिवर्तक में FeS, FeO में बदल जाता है। इसे दूर करने में सिलिका सहायक होता है क्योंकि FeO सिलिका से क्रिया द्वारा आयरन सिलिकेट (कीट) बनकर पृथक् हो जाता है, अतः परिवर्तक पर सिलिका की परत चढ़ाते हैं।
2FeS + 3O2 → 2FeO + 2SO2
FeO + SiO2 → FeSiO3 आयरन सिलिकेट (कीट)

प्रश्न 6.17.
ऐलुमिनियम के धातु कर्म में क्रायोलाइट की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के धातु कर्म में क्रायोलाइट इसलिए मिलाया जाता है क्योंकि इससे मिश्रण का गलनांक कम हो जाता है तथा विलयन की चालकता बढ़ जाती है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.18.
निम्न कोटि के कॉपर अयस्कों के लिए निक्षालन क्रिया को कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
कॉपर का निक्षालन अम्ल या बैक्टिरिया ( जीवाणु) द्वारा किया जाता है। विलयन में उपस्थित Cu+2 को आयरन या H2 गैस से क्रिया करवाकर पृथक् किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 7

प्रश्न 6.19.
CO का उपयोग करते हुए अपचयन द्वारा जिंक ऑक्साइड से जिंक का निष्कर्षण क्यों नहीं किया जाता ?
उत्तर:
Zn के अपचयन के लिए आवश्यक ताप ( 1673K) पर एलिंघम आलेख में \(\Delta_r G^{\ominus}\)(CO, CO2) रेखा, \(\Delta_r G^{\ominus}\)(Zn, ZnO) की रेखा से ऊपर है। अतः इस अभिक्रिया के लिए \(\Delta_r G^{\ominus}\) का मान धनात्मक होगा।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 8
इसलिए 1673K ताप पर ZnO के लिए CO को अपचायक के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए अत्यधिक उच्च ताप की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 6.20.
Cr2O3 के विरचन के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान – 540 kJmol-1 है तथा Al2O3 के लिए – 827kJ mol-1 है। क्या Cr2 O3 का अपचयन Al से संभव है?
उत्तर:
Al द्वारा Cr2O3 के अपचयन के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान ऋणात्मक होता है अतः Cr2O3 का अपचयन Al द्वारा संभव है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 9
समीकरण ( 2 ) में से समीकरण (1) को घटाने पर,
\(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) = 827 – (-540)
= – 287 kJ mol-1

प्रश्न 6.21.
C व CO में से ZnO के लिए कौन-स अपचायक अच्छा है?
उत्तर:
ZnO के अपचयन के लिए C व CO में से C (कार्बन) अच्छा अपचायक है, क्योंकि एलिंघम आलेख में \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) ( C. CO) रेखा, \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\)(Zn, ZnO) की रेखा से नीचे है अतः इस अभिक्रिया के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान ऋणात्मक होगा।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 10

प्रश्न 6.22.
किसी विशेष स्थिति में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकी कारकों पर आधारित है। आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? अपने मत के समर्थन में दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
किसी विशेष स्थिति में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकी कारकों पर आधारित है, यह कथन सत्य है। किसी अपचायक तथा धातु ऑक्साइड के मध्य अभिक्रिया होने के लिए \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) का मान ऋणात्मक होना चाहिए। अतः जिस अपचायक से होने वाली अपचयन अभिक्रिया का \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) ऋणात्मक होगा वह अपचायक उस अभिक्रिया के लिए उपयुक्त होगा।
उदाहरण- (i) 1000K पर Al, Cr2O3 का अपचयन कर सकता है लेकिन MgO का नहीं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 11
अतः यह अभिक्रिया संभव है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 12
अतः यह अभिक्रिया संभव नहीं है।

(ii) 1500K ताप पर कोक (C), ZnO का अपचयन कर सकता है लेकिन CO नहीं ।
ZnO + C → Zn + CO; \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) = -Ve
ZnO + CO → Zn + CO2; \(\Delta_f \mathbf{G}^{\circ}\) = +Ve

प्रश्न 6.23.
उस विधि का नाम लिखिए जिसमें क्लोरीन सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। क्या होगा यदि NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन किया जाए?
उत्तर:
निम्नलिखित विधियों में क्लोरीन सहउत्पाद के रूप में प्राप्त होती है-
(i) गलित NaCl का वैद्युत अपघटन (डॉऊ की विधि)
(ii) जलीय NaCl का वैद्युत अपघटन (कॉसनर केलनर विधि)
NaCl के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर H2 गैस तथा ऐनोड पर Cl2 गैस प्राप्त होती है तथा विलयन में NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 Img 13

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 6 तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम

प्रश्न 6.24.
ऐलुमिनियम के वैद्युत धातु कर्म में ग्रैफाइट छड़ की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के वैद्युत धातु कर्म में ग्रेफाइट की छड़ ऐनोड की भांति कार्य करती है तथा यह Al2O3 के अपचयन से Al बनाने में सहायक होती है। ग्रेफाइट में उपस्थित कार्बन ऐनोड पर उत्सर्जित O2 से क्रिया द्वारा CO तथा CO2 बनाता है।

प्रश्न 6.25.
उन परिस्थितियों का अनुमान लगाइए जिनमें Al, MgO को अपचयित कर सकता है।
उत्तर:
1350°C (1623K ) से अधिक ताप पर Al, MgO को अपचयित कर सकता है। यह अनुमान \(\Delta \mathrm{rG}^{\Theta}\) तथा T के मध्य आरेख से लगाया जाता है। (पाठ्यनिहित प्रश्न 6.4 का उत्तर भी देखिए )

HBSE 12th Class Chemistry तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम Intext Questions

प्रश्न 6.1.
सारणी 6.1 में दर्शाए गए अयस्कों में से कौन-से चुंबकीय पृथक्करण विधि द्वारा सांद्रित किए जा सकते हैं।
उत्तर:
वे अयस्क जिनमें एक घटक चुंबकीय (अशुद्धि या अयस्क) होता है, उन्हें इस विधि से सांद्रित किया जा सकता है। जैसे लोहयुक्त अयस्क हेमेटाइट (Fe2O3), मैग्नेटाइट (Fe2O3), सिडेराइट (FeCO3) तथा आयरन पाइराइट (FeS2) |

प्रश्न 6.2.
ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन (leaching) का क्या महत्व है?
उत्तर:
ऐलुमिनियम के निष्कर्षण में निक्षालन द्वारा बॉक्साइट अयस्क में उपस्थित SiO2, Fe2O3 आदि की अशुद्धियों को निष्कासित किया जाता है।

प्रश्न 6.3.
अभिक्रिया
Cr2O3 + 2 Al → Al2 O3 + 2 Cr (△G° = – 421 kJ)
के गिब्ज़ ऊर्जा मान से लगता है कि अभिक्रिया ऊष्मागतिकी के अनुसार संभव है, पर यह कक्ष ताप पर संपन्न क्यों नहीं होती?
उत्तर:
अभिक्रिया Cr2O3 + 2 Al → Al2 O3 + 2 Cr के लिए मानक गिब्ज़ मुक्त ऊर्जा परिवर्तन ऋणात्मक है अतः यह लगता है कि यह अभिक्रिया ऊष्मागतिकी के अनुसार संभव है लेकिन कमरे के ताप पर यह अभिक्रिया नहीं होती क्योंकि इसमें सभी अभिकारक ठोस हैं। अतः इस अभिक्रिया को सम्पन्न होने के लिए निश्चित मात्रा में सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है इसलिए गर्म करना आवश्यक है जिससे अभिकारक पिघल जाते हैं।

प्रश्न 6.4.
क्या यह सत्य है कि कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में मैग्नीशियम, Al2 O3 को अपचित कर सकता है और Al, MgO को भी। वे परिस्थितियाँ कौनसी हैं?
उत्तर:
हाँ यह सत्य है कि विशिष्ट परिस्थितियों में मैग्नीशियम Al2 O3 को अपचित कर सकता है और Al, MgO को भी। △G° के T के मध्य आलेख (एलिंघम आलेख) से ज्ञात होता है कि 1623K से कम ताप पर Mg, Al2 O3 को अपचित कर सकता है तथा 1623K से अधिक ताप पर Al, MgO का अपचयन कर सकता है क्योंकि Al तथा Mg के वक्र 1623K पर एक-दूसरे को प्रतिच्छेदित कर रहे हैं।

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HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 15 ठोस आकारों का चित्रण Ex 15.4

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 15 ठोस आकारों का चित्रण Ex 15.4 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 15 ठोस आकारों का चित्रण Ex 15.4

प्रश्न 1.
निम्नलिखित ठोसों के ठीक ऊपर एक जलता हुआ बल्ब रखा गया है। प्रत्येक स्थिति में प्राप्त छाया के आकार का नाम बताइए। इस छाया का एक रफ चित्र बनाने का प्रयास कीजिए। (पहले आप प्रयोग करने का प्रयास करें और फिर उत्तर दें।)
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 15 ठोस आकारों का चित्रण Ex 15.4 1
हल :
जब बल्ब ठोसों के ऊपर जलता हुआ रखा है :
गेंद : इसकी छाया वृत्त की तरह प्रतीत होगी।
बेलनाकार पाइप : इसकी छाया आयत की तरह प्रतीत होगी।
पुस्तक : इसकी छाया वर्ग की तरह प्रतीत होगी।

प्रश्न 2.
यहाँ कुछ 3-D वस्तुओं की छायाएँ दी गई हैं जो उन्हें एक ओवरहैड प्रोजेक्टर के लैम्प (बल्ब) के अन्तर्गत या नीचे रख कर प्राप्त की गई हैं। प्रत्येक छाया से मिलान वाले ठोस की पहचान कीजिए। (इनमें एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं।)
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 15 ठोस आकारों का चित्रण Ex 15.4 2
हल :
प्रत्येक छाया से मिलान वाले ठोस निम्न हैं-
(i) एक गेंद, एक थाली आदि।
(ii) एक घन, पुस्तक आदि।
(iii) एक शंकु, आइसक्रीम कोन आदि।
(iv) एक बेलन, एक घनाभ आदि।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 15 ठोस आकारों का चित्रण Ex 15.4

प्रश्न 3.
जाँच कीजिए कि क्या ये कथन सत्य हैं-
(i) एकघन एक आयत के आकार की छाया दे सकता है।
(ii) एक घन एक षड्भुज के आकार की छाया दे सकता है।
हल :
(i) सत्य
(ii) असत्य।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.1.
वर्नर की अभिधारणाओं के आधार पर उपसहसंयोजन यौगिकों में आबंधन (bonding) को समझाइए।
उत्तर:
सर्वप्रथम वर्नर नामक वैज्ञानिक ने उपसहसंयोजन यौगिकों की संरचना की व्याख्या की। उन्होंने बहुत से उपसहसंयोजन यौगिक बनाकर प्रयोगों द्वारा उनके भौतिक तथा रासायनिक गुणों का अध्ययन किया तथा इन यौगिकों की विशेषताओं को बताया। वर्नर के अनुसार धातु आयन की दो प्रकार की संयोजकता

एँ होती हैं प्राथमिक संयोजकता तथा द्वितीयक संयोजकता साधारण यौगिक जैसे PdCl2 तथा CrCl3 में Pd तथा Cr की प्राथमिक संयोजकता क्रमशः 2 तथा 3 है।

वर्नर ने CoCl3 तथा NH3 की क्रिया से विभिन्न यौगिक बनाकर उनका अध्ययन किया तथा यह देखा कि सामान्य ताप पर इनके जलीय विलयन के आधिक्य में AgNO3 विलयन डालने पर कुछ क्लोराइड आयन ही AgCl के रूप में अवक्षेपित होते हैं तथा कुछ क्लोराइड आयन विलयन में ही रहते हैं। सभी यौगिकों के एक-एक मोल लेने पर CoCl3.6NH3(पीला) से 3 मोल AgCl, CoCl3.5NH3 [नीललोहित (बैंगनी)) से 2 मोल AgCl, CoCl3. 4NH3 (हरा) से 1 मोल AgCl तथा CoCl3.4NH3 (बैंगनी ) से 1 मोल AgCl बनता है।

इन प्रेक्षणों से ज्ञात होता है कि ये यौगिक संकुल के रूप में पाए जाते हैं जिनके सूत्र निम्नलिखित प्रकार से लिखे जाते हैं जो कि विलयनों में चालकता मापन के परिणामों से सिद्ध हो जाते हैं। इन संकुलों में बड़े कोष्ठक में उपस्थित परमाणु एकल सत्ता (single entity) के रूप में रहते हैं जिनका वियोजन नहीं होता तथा इनमें कोबाल्ट की द्वितीयक संयोजकता 6 है जो NH3 या Cl या दोनों द्वारा संतुष्ट होती है।

क्र.सं.रंगसूत्रविलयन चालकता संबंध
1.पीला[Co(NH3)6]3+3Cl1: 3 विद्युत अपघट्य
2.बैंगनी[CoCl(NH3)5]2+2Cl1: 2 विद्युत अपघट्य
3.हरा[CoCl2(NH3)4]+Cl1: 1 विद्युत अपघट्य
4.बैंगनी[CoCl2(NH3)4]+Cl1: 1 विद्युत अपघट्य

उपर्युक्त सारणी में यौगिक 3 तथा 4 के मूलानुपाती सूत्र समान होते. हुए भी इनके गुणों में भिन्नता होती है अतः इन्हें एक-दूसरे के समावयवी (Isomers) कहते हैं।

इन प्रेक्षणों से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर वर्नर (1898) ने उपसहसंयोजन यौगिकों का सिद्धान्त दिया जिसकी मुख्य अभिधारणाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) उपसहसंयोन यौगिकों में धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएं दर्शाती हैं – प्राथमिक तथा द्वितीयक । प्राथमिक संयोजकता धातु के ऑक्सीकरण अंक के बराबर होती है। इसे मुख्य या आयनिक संयोजकता भी कहते हैं।

(ii) प्राथमिक संयोजकताएँ सामान्यतः आयननीय (lonisable) होती हैं तथा ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं।

(iii) द्वितीयक संयोजकताएँ अन आयननीय (Non-ionisable) होती हैं। ये उदासीन अणुओं या ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। द्वितीयक संयोजकता धातु की उपसहसंयोजन संख्या (Coordination number) के बराबर होती है। इसे कक्षीय संयोजकता (orbital valance) भी कहते हैं तथा इसका मान किसी धातु के लिए सामान्यतः निश्चित होता है।

(iv) धातु के साथ द्वितीयक संयोजकता से बंधित आयन या समूह विभिन्न उपसहसंयोजन संख्या के अनुसार अन्तराल में (space) विशिष्ट रूप से व्यवस्थित होते हैं।

(v) उपसहसंयोजन यौगिकों में आयनों या समूहों की अन्तराल (त्रिविम) में व्यवस्था को समन्वय बहुफलक (Coordination Polyhedra) कहते हैं।

(vi) बड़े कोष्ठक में लिखी स्पीशीज को संकुल तथा बाहर लिखे आयन को प्रति आयन ( Counter lons) कहते हैं।

(vii) संक्रमण तत्वों के उपसहसंयोजन यौगिकों (Coordination Compounds) में सामान्यतः अष्टफलकीय, चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतलीय ज्यामितियाँ पाई जाती हैं। उदाहरण [Co(NH3)6]3+, [CoCI(NH3)5]2+ तथा (CoCl2(NH3)4]+ की ज्यामिति अष्टफलकीय हैं, जबकि [Ni(CO)4] तथा [PtCl4]2- की ज्यामिति क्रमशः चतुष्फलकीय तथा वर्ग समतली होती हैं।

वर्नर के सिद्धान्त की कमियाँ-वर्नर सिद्धान्त की सहायता से संकुल यौगिकों के कण संख्यक गुण तथा चालकता की व्याख्या कर सकते हैं लेकिन वर्नर का सिद्धान्त निम्नलिखित तथ्यों को नहीं समझा सका-

  • कुछ ही तत्वों में उपसहसंयोजन यौगिक बनाने का विशिष्ट गुण क्यों होता है?
  • उपसहसंयोजन यौगिकों में उपस्थित बंधों में दिशात्मक गुण क्यों पाए जाते हैं?
  • उपसहसंयोजन यौगिकों में विशिष्ट चुंबकीय तथा ध्रुवण घूर्ण गुण क्यों पाए जाते हैं?
  • इन यौगिकों की ज्यामिति की व्याख्या नहीं की जा सकती है।

प्रश्न 9.2.
FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1: 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है परन्तु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए क्यों?
उत्तर:
FeSO4 तथा (NH4)2SO4 विलयन के 11 मोलर अनुपात में मिश्रण से द्विक लवण FeSO4(NH4)2SO4.6H2O (मोर लवण) बनता है जो विलयन आयनित होकर Fe2+ आयन देता है अतः यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है लेकिन CuSO4 व जलीय NH3 का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण संकुल लवण [Cu(NH3)4]SO4 बनाता है। इसमें स्थित संकुल आयन [Cu(NH3)4]2+ का आयनन नहीं होता अतः इसमें स्वतंत्र Cu2+ आयन नहीं होते इस कारण यह Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.3.
प्रत्येक के दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए – उपसहसंयोजन सत्ता ( समन्वय सत्ता ), लिगन्ड, उपसहसंयोजन संख्या, उपसहसंयोजन बहुफलक, होमोलेप्टिक तथा हेट्रोलेप्टिक संकुल ।
उत्तर:
(i) उपसहसंयोजन सत्ता या समन्वय सत्ता (Coordination Entity ) – वह स्पीशीज जिसमें केन्द्रीय धातु परमाणु या आयन से एक निश्चित संख्या में आयन अथवा अणु उपसहसंयोजी बन्ध बनाकर जुड़े होते हैं उसे उपसहसंयोजन सत्ता कहते हैं। जैसे [CoCl3(NH3)3] में कोबाल्ट आयन तीन NH3 अणुओं तथा तीन क्लोराइड आयनों से घिरा है। अन्य उदाहरण – [Ni(CO)4) तथा [Co(NH3)6]3+

(ii) लिगन्ड (Ligand)- उपसहसंयोजन सत्ता (संकुल स्पीशीज) में केन्द्रीय धातु परमाणु या आयन से जुड़े अणुओं या आयनों को लिगेन्ड कहते हैं। ये धातु को इलेक्ट्रॉन युग्म का दान करके उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। उदाहरण – Cl, H2O तथा NH3

(iii) उपसहसंयोजन संख्या (Coordination Number) (CN)- किसी संकुल स्पीशीज में धातु से बंधित लिगेन्डों के उन दाता परमाणुओं की संख्या को जो सीधे उससे जुड़े होते हैं, उसे धातु की उपसहसंयोजन संख्या या समन्वयी संख्या कहते हैं। उदाहरण-संकुल आयन [PtCl6]2- में Pt की उपसहसंयोजन संख्या 6 है तथा [Ni(NH3)4]2+ में Ni की उपसहसंयोजन संख्या 4 है।

(iv) उपसहसंयोजन बहुफलक या समन्वयी बहुफलक (Coordination Polyhedra) – किसी संकुल स्पीशीज में केन्द्रीय धातु परमाणु से सीधे जुड़े लिगेन्डों की अन्तराल (space) में विशिष्ट व्यवस्था को उपसहसंयोजन बहुफलक कहते हैं। उदाहरण – [Co(NH3)6]3+ अष्टफलकीय तथा [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय है।

(v) होमोलेप्टिक तथा हेट्रोलेप्टिक संकुल संकुल जिनमें धातु परमाणु केवल एक ही प्रकार के दाता समूहों से जुड़ा होता है उन्हें होमोलेप्टिक संकुल कहते हैं। जैसे- [Co(NH3)6]3+ तथा वे संकुल जिनमें धातु परमाणु एक से अधिक प्रकार के दाता समूहों से जुड़ा होता है उन्हें हेट्रोलेप्टिक संकुल कहते हैं। उदाहरण- [Co(NH3)4Cl2]+

प्रश्न 9.4.
एकदंतुर (Unidentate), द्विदंतुर तथा उभयदंतुर लिगेन्ड से क्या तात्पर्य है? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
एकदंतुर लिगेन्ड (Unidentate Ligand)-वह लिगेन्ड जो धातु आयन से एक दाता परमाणु द्वारा जुड़ा होता है उसे एकदंतुर लिगन्ड कहते हैं। जैसे-Cl H2O तथा NH3

द्विदंतुर लिन्ड (Didentate Ligand) – वह लिगेन्ड जो धातु आयन से दो दाता परमाणुओं द्वारा जुड़ा होता है उसे द्विदंतुर लिगेन्ड कहते हैं। जैसे- C2O2-4 (ऑक्सेलेट) तथा H2N – CH2 – CH2 – NH2 (एथेन-1,2-डाइऐमीन)

उभयदंतुर लिगेन्ड (Ambidentate Ligand) – वह लिगेन्ड जो दो भिन्न-भिन्न परमाणुओं द्वारा धातु से जुड़ सकता है उसे उभयदंतुर लिगेन्ड कहते हैं।

उदाहरण – NO2 तथा SCN आयन। NO2 आयन केन्द्रीय धातु परमाणु से नाइट्रोजन अथवा ऑक्सीजन द्वारा जुड़ सकता है। इसी प्रकार, SCN आयन सल्फर अथवा नाइट्रोजन परमाणु द्वारा जुड़ सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 1

प्रश्न 9.5.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में धातुओं के ऑक्सीकरण संख्या का उल्लेख कीजिए-
(i) (Co(H2O)(CN)(en)2]2+
(ii) [CoBr2(en)2]+
(iii) [PtCl4]2-
(iv) K3[Fe(CN)6]
(v) [Cr(NH3)3Cl3]
उत्तर:
(i) [Co(H2O)(CN)(en)2]2+
x + 0 + (- 1) + 0 = + 2
x = + 3 अतः Co की ऑक्सीकरण संख्या = + 3

(ii) [CoBr2(en)2]+
x – 2 + 0 = + 1
x = + 3 अतः Co की ऑक्सीकरण संख्या +3

(iii) [PtCl4]2-
x – 4 = – 2
x = + 2 अतः Pt की ऑक्सीकरण संख्या = + 2

(iv) K3[Fe(CN)6]
+ 3 + x – 6 = 0
x = + 3 अतः Fe की ऑक्सीकरण संख्या +3

(v) [Cr(NH3)3Cl3]
x + 0 – 3 = 0
x = + 3 अतः Cr की ऑक्सीकरण संख्या +3

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.6.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के लिये सूत्र लिखिए-
(i) टेट्राहॉइड्राक्सोजिंकेट (II) आयन
(ii) पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
(iii) डाइऐम्मीनडाइक्लोरिडोप्लेटिनम (II)
(iv) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II)
(v) पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो -O- कोबाल्ट (III) आयन
(vi) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) सल्फेट
(vii) पोटैशियम ट्राइ (आक्सेलेटो) क्रोमेट (III)
(viii) हेक्साऐम्मीन प्लैटिनम (IV) आयन
(ix) टेट्राब्रोमिडोक्यूपेट (II) आयन
(x) पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो – N – कोबाल्ट (III) आयन
उत्तर:
(i) [Zn(OH)4]2-
(ii) K2[PdCl4]
(iii) [Pt(NH3)2Cl2]
(iv) K2[Ni(CN)4]
(v) [Co(NH3)5(ONO)]2+
(vi) [Co(NH3)6](SO4)3]
(vii) K3[Cr(C2O4)3]
(viii) [Pt(NH3)6]4+
(ix) [CuBr4]2-
(x) [Co(NH3)5(NO2)2+

प्रश्न 9.7.
IUPAC नियमों के आधार पर निम्नलिखित के सुव्यवस्थित नाम लिखिए-
(i) [Co(NH3)6]Cl3
(ii) [Pt(NH3)2CI(NH2CH3)]Cl
(iii) [Ti(H2O)6]3+
(iv) [Co(NH3)4Cl(NO2)]Cl
(v) [Mn(H2O)6]2+
(vi) [NiCl4]2-
(vii) [Ni(NH3)6]Cl2
(viii) [Co(en)3]3+
(ix) [Ni(CO)4]
उत्तर:
(i) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) डाइऐम्मीनक्लोरिडो (मेथेन एमीन) प्लेटिनम (II) क्लोराइड
(iii) हेक्साएक्वाटाइटेनियम (III) आयन
(iv) टेट्राऐम्मीनक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(v) हेक्साऐक्वामैंगनीज (II) आयन
(vi) टेट्राक्लोरिडोनिकैलेट (II) आयन
(vii) हेक्साऐम्मीननिकैल (II) क्लोराइड
(viii) ट्रिस (एथेन 1, 2 डाइएमीन) कोबाल्ट (III) आयन
(ix) टेट्राकार्बोनिल निकल (O)।

प्रश्न 9.8.
उपसहसंयोजन यौगिकों के लिए संभावित विभिन्न प्रकार की समावयवताओं को सूचीबद्ध कीजिए तथा प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
समावयवता (Isomerism)-ऐसे दो या दो से अधिक यौगिक जिनके रासायनिक सूत्र (अणु सूत्र) समान होते हैं परन्तु उनमें परमाणुओं की व्यवस्था भिन्न होती है, उन्हें एक-दूसरे के समावयवी कहते हैं तथा इस गुण को समावयवता कहते हैं। परमाणुओं की भिन्न व्यवस्थाओं के कारण इनके एक या अधिक भौतिक या रासायनिक गुणों में भिन्नता पाई जाती है। उपसहसंयोजन यौगिकों में दो प्रमुख प्रकार की समावयवताएँ होती हैं जिनको पुनः कई भागों में वर्गीकृत किया जाता है-

  • संरचनात्मक समावयवता
  • त्रिविम समावयवता

(a) संरचनात्मक समावयवता (Structural Isomerism)संरचनात्मक समावयवता में यौगिकों में स्थित बन्धों में भिन्नता पाई जाती है अर्थात् इनके संरचनात्मक सूत्र भिन्न होते हैं। संरचनात्मक समावयवता को पुनः सात प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

  • बंधनी समावयवता
  • उपसहसंयोजन या समन्वयी समावयवता
  • आयनन समावयवता
  • विलायकयोजन समावयवता या हाइड्रेट समावयवता
  • लिगेन्ड समावयवता
  • बहुलकीकरण समावयवता
  • उपसहसंयोजन स्थिति समावयवता।

प्रश्न 9.9.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में कितने ज्यामितीय समावयव संभव हैं?
(क) [Cr(C2O4)3]3-
(ख) [Co(NH3)3Cl3]
उत्तर:
(क) [Cr(C2O4)3]3- में ज्यामितीय समावयवता संभव नहीं है क्योंकि इसकी केवल एक ही प्रकार की व्यवस्था संभव है।

(ख) (Co(NH3)3Cl3] के दो विशेष प्रकार के ज्यामितीय समावयवी संभव हैं- (1) फलकीय (Facial) (Fac) तथा (ii) रेखांशिक (Meridional) (Mer)।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 2

प्रश्न 9.10.
निम्न के प्रकाशिक समावयवों की संरचनाएँ बनाइए-
(i) [Cr(C2O4)3]3-
(ii) [PtCl2(en)2]2+
(iii) [Cr (NH3)2Cl2(en)] +
उत्तर:
(i) [Cr(C2O4)3]3- में C2O2-4 ( ऑक्सेलेट) आयन है जिसका संकेत ox प्रयुक्त किया जाता है। इस संकुल आयन के दो प्रकाशिक समावयवियों की संरचना निम्न प्रकार है-
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(ii) [PtCl2(en)2]2+ संकुल आयन के प्रकाशिक समावयवी निम्नलिखित हैं-
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(iii) [Cr(NH3)2Cl2(en)]+ के समपक्ष तथा विपक्ष दोनों समावयवी प्रकाशिक समावयवता दर्शाते हैं।
(a) समपक्ष रूप के प्रकाशिक समावयवियों को निम्न प्रकार दर्शाते हैं-
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(b) विपक्ष रूप के प्रकाशिक समावयवियों को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
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प्रश्न 9.11.
निम्नलिखित के सभी समावयवियों (ज्यामितीय व ध्रुवण) की संरचनाएँ बनाइए-
(i) [CoCl2(en)2]+
(ii) [Co(NH3)Cl(en)2]2+
(iii) [Co(NH3)2Cl2(en)]+
उत्तर:
(i) [CoCl2(en)2]+ यह संकुल आयन ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है अतः इसके समपक्ष तथा विपक्ष रूप होते हैं। इनमें से समपक्ष रूप असममित है अतः यह प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है।
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(ii) [Co(NH3)Cl(en)2]2+ – इस संकुल आयन में ज्यामितीय समावयवता होती है जिसके समपक्ष तथा विपक्ष रूप निम्न प्रकार होते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 8
इसका समपक्ष रूप प्रकाशिक समावयवता भी दर्शाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 9

(iii) [Co(NH3)2Cl2(en)]+ – इस संकुल आयन में ज्यामितीय समावयवता होती है जिसके समपक्ष तथा विपक्ष समावयवी निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 10
इसके समपक्ष तथा विपक्ष दोनों ही समावयवी प्रकाशिक समावयवता दर्शाते हैं जिनकी संरचनाएँ (i) तथा (ii) की तरह ही बना सकते हैं।

प्रश्न 9.12.
[Pt(NH3)(Br)(Cl)(Py)] के सभी ज्यामितीय समावयवी लिखिए। इनमें से कितने ध्रुवण समावयवता दर्शाएंगे?
उत्तर:
संकुल [PI(NH3)(Br)(CI) (Py)] के तीन ज्यामितीय समावयवी संभव हैं जिनमें से दो समपश्च तथा एक विपक्ष समावयवी माना जाता है। इनकी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
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इस संकुल की वर्गाकार समतलीय ज्यामिति होती है अतः इसमें प्रकाशिक समावयवता (ध्रुवण समावयवता) नहीं होती।

प्रश्न 9.13.
जलीय कॉपर सल्फेट विलयन (नीले रंग का), निम्नलिखित प्रेक्षण दर्शाता है-
(i) जलीय पोटैशियम फ्लुओराइड (KF) के साथ हरा रंग
(ii) जलीय पोटैशियम क्लोराइड (KCI) के साथ चमकीला हरा रंग
उपर्युक्त प्रायोगिक परिणामों को समझाइए।
उत्तर:
जलीय विलयन में CuSO4,[Cu(H2O)4]SO4 के रूप में पाया जाता है, जिसका नीला रंग (Cu(H2O)4]2+ आयनों के कारण होता है।
(i) इसमें जलीय KF मिलाने पर दुर्बल लिगन्ड H2O F द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं तथा [CuF4]2+ आयन बनता है जो हरा अवक्षेप देता है।
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(ii) [Cu(H2O)4]2+ में जलीय KCI मिलाया जाता है, तो Cl लिगेन्ड H2O (दुर्बल लिगन्ड) को प्रतिस्थापित कर [CuCl4]2- आयन बनाता है जिसका रंग चमकीला हरा होता है।
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प्रश्न 9.14.
कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में जलीय KCN को आधिक्य में मिलाने पर बनने वाली उपसहसंयोजन सत्ता क्या होगी ? इस विलयन में जब HS गैस प्रवाहित की जाती है तो कॉपर सल्फाइड का अवक्षेप क्यों नहीं प्राप्त होता ?
उत्तर:
कॉपर सल्फेट का जलीय विलयन [Cu(H2O)4]2+ के रूप में पाया जाता है तथा इसमें जलीय KCN का आधिक्य मिलाने पर निम्नलिखित संकुल आयन बनता है-
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चूँकि CN एक प्रबल लिगन्ड है, अतः यह Cu2+ आयन के साथ स्थायी संकुल बनाता है। इसमें Cu2+ आयन स्वतंत्र नहीं है। अतः इसमें H2S गैस प्रवाहित करने पर Cus का अवक्षेप नहीं बनता।

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प्रश्न 9.15
संयोजकता आबंध सिद्धान्त के आधार पर निम्नलिखित उपसहसंयोजन सत्ता में आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए-
(क) [Fe(CN)6]4-
(ख) [FeF6]3-
(ग) [Co(C2O43]3-
(घ) [CoF6]3-
उत्तर:
(क) [Fe(CN)6]4- : [Fe(CN)6]4- में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d6
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CN प्रबल लिगन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में 3d में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
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इस प्रकार दो d कक्षक रिक्त हो जाने के कारण इसमें d²sp³ संकरण होता है। इन d²sp³ संकरित कक्षकों में 6CN इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं।

इस संकुल की ज्यामिति अष्टफलकीय है तथा सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय है। इसे आंतरिक कक्षक संकुल या निम्न चक्रण (Low spin) संकुल या चक्रण युग्मित (Spin paired ) संकुल कहते हैं।
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(ख) [FeF6]3- : [FeF6]3- में Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Fe+3 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d5
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F दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता।
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अतः इसमें sp³d² संकरण होता है। इन sp³d² संकरित कक्षकों में 6F, इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। यह अष्टफलकीय संकुल है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण यह अनुचुंबकीय है। इसे बाह्य कथक संकुल या उच्च चक्रण (High spin) या चक्रण मुक्त (Spin free) संकुल कहते हैं।
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(ग) [Co(C2O4)3]3- – [Co(C2O4)3]3- में Co की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d6
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C2O2-4] – (ऑक्सेलेट) प्रबल लिगन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में 3d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है।
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दो d कक्षक रिक्त हो जाने के कारण इसमें d²sp³ संकरण होता है। इन संकरित कक्षकों में 3C2O-24इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। इस अष्टफलकीय संकुल में सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुंबकीय होता है। इसे आंतरिक कक्षक संकुल कहते हैं।
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(घ) [CoF6]3- : [CoF6]3- में Co की ऑक्सीकरण संख्या +3 तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है।
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d6
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F दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता।
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अतः इसमें sp³d² संकरण होता है। इन संकरित कक्षकों में 6F इलेक्ट्रॉन युग्मों का दान करके 6 उपसहसंयोजी बन्ध बनाते हैं। यह अष्टफलकीय संकुल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण अनुचुंबकीय होता है तथा इसे बाह्य कक्षक संकुल कहते हैं।

प्रश्न 9.16.
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d कक्षकों के विपाटन को दर्शाने के लिए चित्र बनाइए।
उत्तर:
अष्टफलकीय क्रिस्टल क्षेत्र में d कक्षकों ‘विपाटन को निम्न प्रकार दर्शाया जाता है-
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प्रश्न 9.17.
स्पेक्ट्रम रासायनिक श्रेणी क्या है? दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड तथा प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत के अनुसार अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन, ∆0 लिंगन्ड तथा धातु आयन पर स्थित आवेश से उत्पन्न क्षेत्र पर निर्भर करता है। कुछ लिगेन्ड प्रबल क्षेत्र उत्पन्न करते हैं तथा इस स्थिति में विपाटन अधिक होता है, इन्हें प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड कहते हैं। अन्य लिगड दुर्बल क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जिसके कारण कक्षकों का विपाटन कम होता है, इन्हें दुर्बल क्षेत्र लिगन्ड कहते हैं। लिगेन्डों को उनके बढ़ती हुई क्षेत्र प्रबलता के क्रम में एक श्रेणी में निम्नानुसार व्यवस्थित किया जाता है-
I < Br < SCN < Cl <S2- <F < OH <C2O2-4 < H2O < NCS < edta4- < NH3 < en < CN < CO
इस श्रेणी को स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी (spectrochemical series) कहते हैं तथा यह विभिन्न लिगन्डों के साथ बने संकुलों द्वारा प्रकाश के अवशोषण के प्रायोगिक मापन से प्राप्त तथ्यों के आधार पर प्राप्त की जाती है

प्रश्न 9.18.
क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा क्या है? उपसहसंयोजन सत्ता में d कक्षकों का वास्तविक विन्यास ∆0 के मान के आधार पर कैसे निर्धारित किया जाता है?
उत्तर:
अष्टफलकीय संकुलों में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन- एक अष्टफलकीय संकुल में धातु परमाणु छः लिगेन्डों द्वारा घिरा होता है। इसमें ad कक्षकों के इलेक्ट्रॉनों तथा लिगेन्डों के इलेक्ट्रॉनों के मध्य प्रतिकर्षण होता है। जब धातु होते हैं तो प्रतिकर्षण अधिक होता है। dx² – y² तथा d² कक्षक लिगेन्ड की ओर सीधे निर्दिष्ट (directed) की दिशा वाले अक्षों पर होते हैं, अतः इन पर प्रतिकर्षण अधिक होता है जिससे इनकी ऊर्जा में वृद्धि हो जाती है जबकि dxy, dyz और dxz कक्षक, अक्षों के बीच में स्थित होते हैं, अतः इनकी ऊर्जा गोलीय क्रिस्टल क्षेत्र की औसत ऊर्जा की तुलना में कम हो जाती है।

इस प्रकार अष्टफलकीय संकुल में लिगन्ड इलेक्ट्रॉन – धातु इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के कारण d कक्षकों की समभ्रंशता समाप्त हो जाती है तथा ये तीन निम्न ऊर्जा वाले, t2g कक्षकों तथा दो उच्च ऊर्जा वाले, eg कक्षकों में विभाजित हो जाते हैं। इस प्रकार समान ऊर्जा वाले कक्षकों का, लिगेन्डों की निश्चित ज्यामिति में उपस्थिति से दो भागों में विपाटन क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन कहलाता है तथा इस ऊर्जा अंतर को ∆0 [यहाँ O = अष्टफलकीय (octahedral)] से दर्शाते हैं। eg कक्षकों की ऊर्जा में (3/5) ∆0 के बराबर वृद्धि होती है तथा t2g कक्षकों की ऊर्जा में (2/5) ∆0 के बराबर कमी होती है। प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में ∆0 का मान अधिक होता है जबकि दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड की उपस्थिति में यह मान कम होता है।
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∆ को प्रभावित करने वाले कारक – क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन (∆) निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है-

  • धातु की प्रकृति
  • धातु आयन पर आवेश
  • लिगेन्ड की प्रकृति
  • संकुल की ज्यामिति
  • d- इलेक्ट्रॉनों की संख्या

कारक संकुल आयन के रंग को भी प्रभावित करते हैं। धातु आयन पर आवेश बढ़ने से तथा प्रबल क्षेत्र लिगेन्डों की उपस्थिति में विपाटन अधिक होता है।

स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी (Spectrochemical Series) – जब विभिन्न लिगेन्डों को उनकी बढ़ती हुई क्षेत्र प्रबलता के क्रम में रखा जाता है तो प्राप्त श्रेणी को स्पेक्ट्रमी रासायनिक श्रेणी कहते हैं। यह श्रेणी विभिन्न लिडों के साथ बने संकुल यौगिकों द्वारा प्रकाश के अवशोषण के प्रायोगिक मापन से प्राप्त तथ्यों के आधार पर प्राप्त की जाती है। प्रमुख लिगेन्डों के लिए यह श्रेणी निम्नलिखित है-
I < Br < SCN < Cl < S2- < F < OH < C2O42- < H2O < NCS < EDTA4- + < NH3 < en < NO2 < CN < CO
इस श्रेणी में H2O तक के लिगेन्ड दुर्बल क्षेत्र लिगेन्ड (WFL) तथा इससे आगे के लिगेन्ड प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड (SFL) होते हैं।

प्रश्न 9.19.
[Cr(NH3)6)]3+ अनुचुंबकीय है जबकि [Ni(CN)4]2- प्रतिचुंबकीय, समझाइए क्यों?
उत्तर:
[Cr(NH3)6)]3+ में Cr, + 3 ऑक्सीकरण अवस्था में है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d³ है, जिसमें तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।
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संकरण (d²sp) के पश्चात् भी ये अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं क्योंकि रिक्त d कक्षक ही संकरण में प्रयुक्त होते हैं अतः [Cr(NH3)6]3+ अनुचुंबकीय है लेकिन (Ni(CN)4]2- में Ni, Ni2+ अवस्था में है जिसका विन्यास 3d<sup<>8 है। प्रबल लिगेन्ड (\(\overline{C}\)N) के कारण इसके अयुग्मित इलेक्ट्रॉन संकरण के समय युग्मित हो जाते हैं अतः यह प्रतिचुंबकीय है।

प्रश्न 9.20
[Ni(H2O)6]2+ का विलयन हरा है परन्तु [NI(CN)4]2- का विलयन रंगहीन है। समझाइए।
उत्तर:
[Ni(H2O)6]2+ में उपस्थित Ni2+ के 3d8 विन्यास में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं। H2O दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसके कारण इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता तथा इसमें sp³d² संकरण है।

अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के कारण इस संकुल में dd संक्रमण आसानी से हो जाता है जिसके कारण यह रंगीन (हरा) है परन्तु [Ni (CN)4]2- में CN प्रबल लिगेन्ड है जिसके कारण Ni2+ के 3d8 विन्यास में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो है अतः इस संकुल में dsp² संकरण के कारण कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है इसलि d – d संक्रमण संभव नहीं है। इस कारण यह रंगहीन है।

प्रश्न 9.21.
[Fe(CN)6]4- तथा [Fe(H2O)6]2+ के तनु विलयनों के रंग भिन्न होते हैं। क्यों?
उत्तर:
Fe (CN)6]4- में CN प्रबल लिगन्ड है तथा इसमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं (d²sp³ संकरण) अतः इसमें d – d संक्रमण नहीं होता है, इस कारण यह संकुल रंगहीन होता है जबकि [Fe(H2O)6]2+ में H2O दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसमें sp³d² संकरण के पश्चात् भी चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन रहते हैं, जिनके कारण d – d संक्रमण आसानी से हो जाता है। इस कारण यह संकुल रंगीन होता है।

भिन्न-भिन्न लिगेन्ड के कारण क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा भी भिन्न- भिन्न होती है जिसके कारण समान धातु आयन होते हुए भी रंगों में भिन्नता होती है।

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प्रश्न 9.22.
धातु कार्बोनिलों में आबंध की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
धातु कार्बोनिलों में बंध की प्रकृति को निम्न प्रकार समझा सकते हैं-होमोलेप्टिक कार्बोनिल यौगिक (जिनमें केवल कार्बोनिल लिगेन्ड हों) सामान्यतः संक्रमण धातुओं द्वारा बनाए जाते हैं। इन धातु कार्बोनिलों की संरचनाएँ सरल होती हैं। टेट्राकार्बोनिलनिकल (0), [Ni(CO)4] चतुष्फलकीय (sp³ संकरण), पेन्टाकार्बोनिल आयरन (O), (Fe(CO)5] त्रिकोणीय द्विपिरैमिडी (sp³d संकरण) तथा हेक्साकार्बोनिलक्रोमियम (0), [Cr(CO)6] अष्टफलकीय (d²sp³ संकरण ) होता है।

कार्बोनिलडाइ मैंगनीज (0), [Mn2(CO)10] में दो वर्ग पिरैमिडी Mn(CO)5 इकाइयां Mn – Mn बंध द्वारा जुड़ी होती हैं। ऑक्टाकार्बोनिलडाइकोबाल्ट (0), [Co2(CO)8] में Co – Co बन्ध के मध्य दो CO समूह सेतु के रूप में पाए जाते हैं।

इनकी संरचनाएँ निम्न प्रकार दर्शाई जा सकती हैं-
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धातु कार्बोनिलों में पश्च बन्धन या सहक्रियाशीलता बन्ध (Back Bonding or Synergic Bond in Metal Carbonyls) – धातु कार्बोनिलों के धातु- कार्बन बंध में s तथा p दोनों गुण होते हैं। M-C σ बंध कार्बोनिल (CO) समूह के कार्बन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म धातु के रिक्त कक्षक में दान करने से बनता है तथा M-C π बंध धातु के पूर्ण भरे असंकरित कक्षकों में से एक इलेक्ट्रॉन युग्म को CO के रिक्त विपरीत बन्धी अणुकक्षक (Antibonding M.O) (π*) में दान करने से बनता है।

धातु से लिगेन्ड का बंध एक सहक्रियाशीलता प्रभाव (Synergic effect) उत्पन्न करता है जिसे पश्च बन्धन कहते हैं। इसके कारण धातु पर उपस्थित इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है, जो धातु तथा CO के मध्य उपस्थित बन्ध की प्रबलता को बढ़ाता है, जिससे धातु कार्बोनिल का स्थायित्व बढ़ जाता है। यहाँ C= O (कार्बोनिल) को π एसिड लिगेन्ड कहते हैं क्योंकि इसके π या π* अणुकक्षक में धातु से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति होती है।
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प्रश्न 9.23.
निम्न संकुलों में केन्द्रीय धातु आयन की ऑक्सीकरण अवस्था, d कक्षकों का अधिग्रहण (Occupation) एवं उपसहसंयोजन संख्या बतलाइए-
(i) K3[Co(C2O4)3]
(ii) cis – [Cr(en)2Cl2]Cl
(iii) (NH4)2[C0F4]
(iv) [Mn(H2O)6]SO4
उत्तर:
(i) K3[Co(C2O4)3] में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है क्योंकि C2O42- (ऑक्सेलेट) द्विदन्तुर (didentate) प्रबल लिगेन्ड है अतः Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t2g6 e0g होगा (Co+3 = 3d6)

(ii) cis – [Cr(en)2Cl2]Cl में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +3 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है। इसमें धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 12 है। (Cr+3 = 3d³)

(iii) (NH4)2[CoF] में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 4 है। इसमें धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2gg है। (Co+2 = 3d7)

(iv) [ Mn (H2O)6]SO4 में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है तथा उपसहसंयोजन संख्या 6 है। इसमें धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2gg होगा। (Mn3+ = 3d5)

प्रश्न 9.24.
निम्न संकुलों के IUPAC नाम लिखिए तथा ऑक्सीकरण अवस्था, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और उपसहसंयोजन संख्या दर्शाइए। संकुल का त्रिविम रसायन तथा चुंबकीय आघूर्ण भी बतलाइए-
(i) K [Cr(H2O)2 (C2O4)2].3H2O
(ii) [CrCl3(py)3]
(iii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iv) Cs[FeCl4]
(v) K4[Mn(CN)6]
उत्तर:
(i) K [Cr(H2O)2 (C2O4)2].3H2O : संकुल का IUPAC नाम पोटेशियमडाएएक्वाडाइ – ऑक्सेलेटो क्रोमेट (III) ट्राइहाइड्रेट
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था + 3(3d³)
Cr3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय इस संकुल में ज्यामितीय तथा प्रकाशिक समावयवता होती है।
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = \(\sqrt{n(n+2)}\) B.M.
Cr3+ = 3d³, अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 3
H = \(\sqrt{3(3+2)}\) = \(\sqrt{15}\) B.M. 3.87B.M.

(ii) [CrCl3(py)3]
ट्राइक्लोरिडोट्रिसपिरी डीनक्रोमियम (III)
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था + 3(3d³)
Cr3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास t³2g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय इस संकुल में ज्यामितीय तथा प्रकाशिक समावयवता होती है।
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = \(\sqrt{3(3+2)}\) = \(\sqrt{15}\) B.M. 3.87 B.M. (n = 3)

(iii) [Co(NH3)5Cl]Cl2 : संकुल का IUPAC नाम- पेन्टाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था = + 3(3d6)
Co3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = t62g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = शून्य, क्योंकि इसमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं।

(iv) Cs[FeCl4] : संकुल का IUPAC नाम- सिजियमटेट्राक्लोरिडोफेरेट (III)
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था = +3 (3d5)
Fe3+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = e²g t32g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 4
संकुल की ज्यामिति चतुष्फलकीय
चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = \(\sqrt{5(5+2)}\)
= \(\sqrt{35}\) = 5.91B.M. (n = 5)

(v) K4 [Mn (CN)6] : संकुल का IUPAC नाम- पोटैशियमहेक्सासायनोमैंगनेट (II)
धातु की ऑक्सीकरण अवस्था = +2 (3d5)
Mn2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = t52g e0g
धातु की उपसहसंयोजन संख्या = 6
संकुल की ज्यामिति = अष्टफलकीय
चुंबकीय आघूर्ण (i) (μ) = \(\sqrt{1(1+2)}\)
= \(\sqrt{3}\) = 1.73 BM (n = 1)

प्रश्न 9.25
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के आधार पर संकुल [Ti(H2O)6]3+ के बैंगनी रंग की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
[Ti(H2O)6]3+ एक अष्टफलकीय संकुल है जिसमें धातु के d कक्षक का इलेक्ट्रॉन संकुल की निम्नतम ऊर्जा अवस्था में t2g कक्षक में है। इस इलेक्ट्रॉन के लिए उपलब्ध इससे अगली उच्च अवस्था eg कक्षक रिक्त संगत प्रकाश का अवशोषण करता
है। यह संकुल पीले हरे क्षेत्र की है जिससे इलेक्ट्रॉन t2g स्तर से eg स्तर में उत्तेजित हो जाता है (t2g1 eg0 → t2g0 eg1) जिसके कारण संकुल बैंगनी रंग का दिखाई देता है। क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त के अनुसार यह इलेक्ट्रॉन का ded संक्रमण है। लिगेन्ड की अनुपस्थिति में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन नहीं होता है अतः [Ti(H2O)6]3+ को गरम करने पर इसमें से जल निकल जाने के कारण यह रंगहीन हो जाता है।
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प्रश्न 9.26.
कीलेट प्रभाव से क्या तात्पर्य है? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कीलेट प्रभाव – किसी संकुल में जब एक द्विदंतुर अथवा बहुदंतुर लिगेन्ड अपने दो या दो से अधिक दाता परमाणुओं द्वारा एक ही धातु आयन से बन्ध बनाता है, तो इसे कीलेट (chelate) लिगेन्ड कहते हैं तथा बन्ध बनाने वाले परमाणुओं की संख्या को लिगेन्ड की दंतुरता या डेन्टिसिटी (denticity) कहते हैं। बन्ध बनाने की इस प्रक्रिया को कीलेटन कहते हैं तथा ऐसे संकुल, कीलेट संकुल (chelate complexes) कहलाते हैं, ऐसे संकुलों का स्थायित्व अपेक्षाकृत अधिक होता है। कोलेटन (chelaton) द्वारा किसी संकुल ( उपसहसंयोजन यौगिक) के स्थायीकरण को कीलेट प्रभाव कहते हैं। कीलेट संकुल बनते समय एक वलय बनती है, इसे कीलेट वलय कहते हैं तथा इस वलय के बनने के कारण ही संकुल का स्थायित्व बढ़ता है।

उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 32

प्रश्न 9.27.
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित में उपसहसंयोजन यौगिकों की भूमिका की संक्षिप्त विवेचना कीजिए-
(i) जैव प्रणालियाँ
(ii) औषध रसायन
(iii) विश्लेषणात्मक रसायन
(iv) धातुओं का निष्कर्षण / धातु कर्म ।
उत्तर:
(i) जैव प्रणालियाँ-उपसहसंयोजन यौगिक जैव तंत्र में भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक हरा वर्णक क्लोरोफिल, मैग्नीशियम का उपसहसंयोजन यौगिक है, रक्त का लाल वर्णक (pigment) हीमोग्लोबिन, आयरन का एक उपसहसंयोजन यौगिक है, जो कि ऑक्सीजन वाहक होता है। विटामिन B12 (सायनाकोबालेमीन), कोबाल्ट का एक उपसहसंयोजन यौगिक है, जो कि एनिमिया के उपचार में प्रयुक्त होता है। जैविक महत्व के अन्य धातु आयन युक्त उपसहसंयोजन यौगिक कार्बोक्सीपेप्टिडेज-A, कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम (जैव उत्प्रेरक) तथा साइटोक्रोम-C (Fe2+ का संकुल) है।

(ii) औषध रसायन-में-औषध रसायन में कीलेट चिकित्सा का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। उदाहरण-पौधे/जीव-जंतुओं में विषैले अनुपात में उपस्थित धातुओं के द्वारा उत्पन्न समस्याओं का उपचार। इस प्रकार कॉपर तथा आयरन की अधिकता को D-पेनिसिलऐमीन तथा डेसफेरीऑक्सिम B लिगन्डों के साथ उपसहसंयोजन यौगिक बनाकर दूर किया जाता है। EDTA को लेड की विषाक्तता के उपचार हेतु प्रयुक्त किया जाता है। प्लैटिनम के कुछ उपसहसंयोजक यौगिक ट्यूमर की वृद्धि को रोकते हैं। उदाहरण-समपक्ष-प्लेटिन (cis-platin), cis [Pt(NH3)2Cl2] कैंसररोधी (Anticancer) होता है।

(iii) विश्लेषणात्मक रसायन-
(a) गुणात्मक ( qualitative) तथा मात्रात्मक (quantitative) रासायनिक विश्लेषणों में उपसहसंयोजन यौगिक बहुत उपयोगी होते हैं। अनेक रंगीन अभिक्रियाएँ जिनमें धातु आयनों की विभिन्न लिगेन्डों के साथ क्रिया से (विशेषतः कीलेट लिगन्ड) उपसहसंयोजन यौगिक बनते हैं जिनके कारण रंग उत्पन्न होता है। विभिन्न विधियों से धातु आयनों की पहचान व उनका मात्रात्मक आकलन इसी आधार पर किया जाता है। ये अभिकर्मक EDTA, DMG (डाइमेथिल ग्लाई ऑक्सिम ), α – नाइट्रोसो – ß – नेफ्थॉल, क्यूपफेरॉन आदि हैं।

(b) क्षारीय मूलकों का परीक्षण – प्रथम समूह में Ag+ तथा Hg2+2 का पृथक्करण-लवण के मूल विलयन में जब HCI डालते हैं तो पहले AgCl तथा Hg2Cl2 का अवक्षेप बनता है जिसकी NH4OH के साथ क्रिया कराने पर AgCl, विलेय संकुल बनता है जबकि Hg2Cl2 से Hg(NH2)Cl का काला अवक्षेप बनता है।
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द्वितीय समूह में IIA तथा IIB का पृथक्करण-IIB समूह के धातु सल्फाइड पीले अमोनियम सल्फाइड से क्रिया करके विलेय संकुल बनाते हैं जबकि IIA समूह के सल्फाइड अविलेय रहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 34
Cu2+ का परीक्षण – Cu+2 का परीक्षण NH3 विलयन तथा पोटैशियम फेरोसायनाइड से क्रिया द्वारा किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 35
III समूह में Fe3+ का परीक्षण-III समूह में Fe3+ का परीक्षण पोटैशियम फेरोसायनाइड तथा पोटैशियम थायोसायनेट विलयन द्वारा किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 36
IV समूह में Ni2+ का परीक्षण-यह परीक्षण डाइमेथिल ग्लाइऑक्सिम (DMG) द्वारा किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 37
प्राच्छादक के रूप में (Masking agent)- Cu2+ की उपस्थिति में Cd2+ का आकलन करने के लिए \(\overline{C}\)N आयन मिलाकर Cu2+ का संकुल बना लेते हैं जो कि स्थायी होता है लेकिन Cd2+ का संकुल अस्थायी होता है अतः वियोजित होकर Cd2+ दे देता है जिसकी H2 के साथ क्रिया से Cds का पीला अवक्षेप प्राप्त होता है।

(iv) धातुओं का निष्कर्षण / धातु कर्म – धातुओं का निष्कर्षण-धातुओं की कुछ प्रमुख निष्कर्षण विधियों में जैसे सिल्वर तथा गोल्ड के निष्कर्षण में संकुल के विरचन का उपयोग किया जाता है। उदाहरण-ऑक्सीजन तथा जल की उपस्थिति में Au3+, सायनाइड आयन से संयोजित होकर उपसहसंयोजन आयन, [Au(Ch2)] बनाता है। इस विलयन में जिंक मिलाकर गोल्ड को पृथक् कर लिया जाता है (एकक 6)।

प्रश्न 9.28.
संकुल [Co(NH3)6]Cl2 से विलयन में कितने आयन उत्पन्न होंगे-
(i) 6
(ii) 4
(iii) 3
(ii) 4
(iv) 2
उत्तर:
(iii) इस संकुल का आयनन निम्न प्रकार होता है अतः इसके विलयन में तीन आयन उत्पन्न होंगे।
[Co(NH3)6]Cl2 → [Co(NH3)6]2+ + 2Cl

प्रश्न 9.29.
निम्नलिखित आयनों में से किसके चुंबकीय आघूर्ण का मान सर्वाधिक होगा?
(i) [Cr(H2O)6]3+
(ii) [Fe(H2O)6]2+
(iii) [Zn(H2O)6]2+
उत्तर:
(ii) इन संकुल आयनों में Zn2+, Cr3+ तथा Fe2+ में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः 0 3 एवं 4 है अतः संकुल आयन [Fe (H2O)6]2+ का चुम्बकीय आघूर्ण सर्वाधिक होगा।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.30.
K[Co(CO)4] में कोबाल्ट की ऑक्सीकरण संख्या है-
(i) +1
(iii) -1
(ii) +3
(iv) -3
उत्तर:
(iii) K [Co(CO)4]
+ 1 + x + = 0
x = – 1

प्रश्न 9.31.
निम्न में सर्वाधिक स्थायी संकुल है-
(i) [Fe(H2O)6]3+
(ii) [Fe(NH3)6]3+
(iii) Fe(C2O4)3]3-
(iv) [FeCl6]3-
उत्तर:
(iii) क्योंकि इसमें C2O2-3 ( ऑक्सेलेट) लिगेन्ड कीटकारी है, जिससे स्थायित्व बढ़ता है।

प्रश्न 9.32.
निम्नलिखित के लिए दृश्य प्रकाश में अवशोषण की तरंगदैर्घ्य का सही क्रम क्या होगा?
[Ni(NO2)6]4-, [Ni(NH3)6]2+, [Ni(H2O)6]2+
उत्तर:
दिए गए संकुलों में प्रयुक्त लिगेन्डों के लिए स्पेक्ट्रमी- रासायनिक श्रेणी में प्रबलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-
H2O < NH3 < NO2
अतः उत्तेजन हेतु अवशोषित प्रकाश (ऊर्जा) का क्रम निम्न होगा-
[Ni(H2O)6]2+ <[Ni(NH3)6]2+ <[Ni (NO2)6]4+
इसलिए अवशोषित तरंगदैर्घ्य का क्रम इसके विपरीत होगा क्योंकि (E = hc/λ)
[Ni(NO2)6]4- < [Ni(NH3)6]2+ < [Ni(H2O)6]2+

HBSE 12th Class Chemistry उपसहसंयोजन यौगिक Intext Questions

प्रश्न 9.1.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए-
(i) टेट्राऐम्मीनडाइएक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेद (II)
(iii) ट्रिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
(iv) ऐम्मीनब्रोमिडोक्लोरिडोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II)
आयन
(v) डाइक्लोरोबिस (एथेन-1, 2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
(vi) आयरन (III) हेक्सासायनोफेरेट (II)।
उत्तर:
(i) [Co(NH3)4(H2O)2]Cl3
(ii) K2[Ni(CN)4]
(iii) [Cr(en3]Cl3
(iv) [Pt(NH3)BrCl}\left(NO2)]
(v) [PtCl2(en)2] (NO3)2
(vi) Fe4[Fe(CN)6]3

प्रश्न 9.2.
निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
(i) [Co(NH3)6]Cl3
(ii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iii) K3[Fe}(CN)6]
(iv) K3[Fe(C2O4)3]
(v) K2[PdCl4]
(vi) [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl
उत्तर:
(i) हेक्साऐम्मीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पेन्टाऐम्मीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iii) पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)
(iv) पोटैशियम ट्राइआक्सैलेटोफेरेट (III)
(v) पोटैशियम टेट्राक्लोरिडोपैलेडेट (II)
(vi) डाइऐम्मीनक्लोरिडो ( मेथेनेमीन ) प्लैटिनम (II) क्लोराइड।

प्रश्न 9.3.
निम्नलिखित संकुलों द्वारा प्रदर्शित समावयवता का प्रकार बतलाइए तथा इन समावयवों की संरचनाएं बनाइए-
(i) K[Cr(H2O)2(C2O4)2]
(ii) [Co(en)3]Cl3
(iii) [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2
(iv) [Pt(NH3)(H2O)Cl2]
उत्तर:
(i) संकुल K[Cr(H2O)2(C2O4)2] ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है अतः इसके दो रूप होते हैं-समपक्ष तथा विपक्ष। समपक्ष समावयवी, प्रकाशिक समावयवता भी दर्शाता है अतः इसके दो ध्रुवण समावयवी ( d तथा l रूप) होंगे। यहाँ C2O4 (ऑक्सेलेट) का संकेत ox दिया गया है। इस संकुल के समपक्ष, विपक्ष तथा प्रकाशिक समावयवियों की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 38
(ii) संकुल [Co(en)3]Cl3 प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है। अतः इसके दो रूप (d तथा l) होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 39
(iii) संकुल [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2 के कुल संभावित समावयवी दस होंगे तथा यह संकुल निम्न प्रकार की समावयवता दर्शाता है-ज्यामितीय, आयनन तथा बंधनी समावयवता।

आयनन समावयवी-
[Co(NH3)5(NO)2] (NO3)2 तथा [Co(NH3)5(NO3)] (NO2) (NO3)

बन्धनी समावयवी-
[Co(NH3)5(NO2)](NO3)2 तथा [Co(NH3)5(ONO)](NO3)2

(iv) संकुल [Pt(NH3)(H2O)Cl2] ज्यामितीय समावयवता दर्शाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 40

प्रश्न 9.4.
इसका प्रमाण दीजिए कि [Co(NH3)5Cl] SO4 तथा [Co(NH3)5SO4]Cl आयनन समावयवी हैं।
उत्तर:
आयनन समावयवी जल में विलेय होकर भिन्न-भिन्न आयन देते हैं अतः इनकी विभिन्न अभिकर्मकों से अभिक्रिया का प्रकार भिन्न-भिन्न होगा-
[Co(NH3)5Cl]SO4 +BaCl2 विलयन → BaSO4(s) श्वेत अवक्षेप
[Co(NH3)5SO4]Cl + BaCl2 विलयन → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5Cl]SO4 + AgNO3 विलयन → कोई अभिक्रिया नहीं
[Co(NH3)5SO4]Cl + AgNO3 विलयन → AgCl श्वेत अवक्षेप

प्रश्न 9.5.
संयोजकता आबंध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि वर्ग समतलीय संरचना वाला [Ni(CN)4]2- आयन प्रतिचुंबकीय है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति वाला [NiCl4]2- आयन अनुचुंबकीय है।
उत्तर:
वर्ग समतलीय आयन [Ni(CN)4]2- में Ni पर dsp2 संकरण पाया जाता है। इसमें Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है। इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 41
प्रत्येक संकरित कक्षक एक सायनाइड आयन से एक इलेक्ट्रॉन युग्म प्राप्त करता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होने के कारण यह संकुल प्रतिचुंबकीय है। [NiCl4]2- आयन में Ni पर sp3 संकरण पाया जाता है तथा इसकी ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है।

इसमें एक s तथा तीन p कक्षकों के संकरण से चार समान sp3 संकर कक्षक बनते हैं। यहाँ निकल +2 ऑक्सीकरण अवस्था में है तथा इस आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 है अतः इसमें संकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक 42
संकरण के पश्चात् भी 3d कक्षकों में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं जिनके कारण यह संकुल आयन अनुचुंबकीय होता है।

प्रश्न 9.6.
[NiCl4]2- अनुचुंबकीय है जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुंबकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं। क्यों?
उत्तर:
[Ni(CO)4] में, Ni की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है जबकि [NiCl4]2- में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है। CO की उपस्थिति में, Ni के 3d तथा 4s कक्षकों के इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं क्योंकि CO प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड है परन्तु Cl एक दुर्बल क्षेत्र लिगन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं हो पाता है। इसलिए [NiCl4]2- अनुचुंबकीय है जबकि [Ni(CO)4] प्रतिचुंबकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं तथा दोमों में sp3 संकरण है।

प्रश्न 9.7.
[Fe(H2O)6]3+ प्रबल अनुचुंबकीय है जबकि [Fe(CN)6]3- दुर्बल अनुचुंबकीय। समझाइए।
उत्तर:
[Fe(CN)6]3- में CN (प्रबल क्षेत्र लिगेन्ड) की उपस्थिति में, 3d इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं तथा केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन बचता है। इसमें d2sp3 संकरण होता है तथा यह आंतरिक कक्षक संकुल बनाता है अतः यह दुर्बल अनुचुंबकीय है जबकि [Fe(H2O)6]3+ में H2O (दुर्बल लिगेन्ड) की उपस्थिति में, 3d इलेक्ट्रॉन युग्मित नहीं होते अतः इसमें sp3d2 संकरण है तथा यह बाह्यकक्षक संकुल बनाता है जिसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं अतः यह प्रबल अनुचुंबकीय है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 9 उपसहसंयोजन यौगिक

प्रश्न 9.8.
समझाइए कि [Co(NH3)6]3+ एक आंतरिक कक्षक संकुल है जबकि [Ni(NH3)6]2+ एक बाह्य कक्षक संकुल है।
उत्तर:
कुल Co(NH3)6]3+ में NH3 प्रबल लिगेन्ड है जिससे इसमें d2sp संकरण होता है। Co+3 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d6 होता है तथा NH3 की उपस्थिति में ये इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं एवं शेष बचे दो रिक्त d कक्षक d2sp3 संकरण द्वारा आंतरिक कक्षक संकुल बनाते हैं जबकि [Ni(NH3)6]2+ में Ni+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d8 होने के कारण NH3 जैसे प्रबल लिगेन्ड की उपस्थिति में भी इलेक्ट्रॉनों के युग्मन से दो आन्तरिक d कक्षक रिक्त नहीं हो सकते। अतः इसमें sp3d2 संकरण होता है तथा यह बाह्य कक्षक संकुल बनाता है।

प्रश्न 9.9.
वर्ग समतली [Pt(CN)4]2- आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर:
[Pt(CN)4]2- की वर्ग समतली आकृति के कारण इसमें dsp2 संकरण होता है तथा इस संकुल आयन में Pt,+2 अवस्था में है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 5d8 है तथा प्रबल लिगेन्ड (CN) की उपस्थिति में इन 5d इलेक्ट्रॉनों का युग्मन हो जाता है तथा शेष बचा एक रिक्त d कक्षक संकरण में भाग लेता है। (dsp2 संकरण ) अतः इसमें एक भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 9.10.
क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धान्त को प्रयुक्त करते हुए समझाइए कि कैसे हेक्साएक्वा मैंगनीज (II) आयन में पांच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं जबकि हेक्सासायनो मैंगनीज (II) आयन में केवल एक ही अयुगलित (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉन है।
उत्तर:
हेक्साएक्वा मैंगनीज (II) आयन, [Mn(H2O6]2+ में Mn+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d5 है तथा इसमें H2O दुर्बल लिगेन्ड है अतः इसकी उपस्थिति में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा का मान कम होता है। इसलिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}^3 \mathrm{e}_{\mathrm{g}}^2\) होगा तथा sp3d2 संकरण होने के कारण इसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं क्योंकि इसमें इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं होता। जबकि हेक्सासायनो मैंगनीज (II) आयन, [Mn(CN)6]-4 में CN प्रबल लिगेन्ड है जिसकी उपस्थित में क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा का मान अधिक होने के कारण Mn2+ का इलेक्ट्रॉंनिक विन्यास \(t_{2 \mathrm{~g}}^5 \mathrm{e}_{\mathrm{g}}^0\) (दो रिक्त d कक्षक) होगा जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है तथा इसमें sp3d2 संकरण होगा।

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HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
उपभोक्ता के बजट सेट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उपभोक्ता का बजट सेट उन वस्तुओं के सभी बंडलों का संग्रह है, जिन्हें उपभोक्ता प्रचलित बाजार कीमत पर अपनी आय से खरीद सकता है।

प्रश्न 2.
बजट रेखा क्या है?
उत्तर:
बजट रेखा वह रेखा है जो दो वस्तुओं के ऐसे विभिन्न बंडलों को दिखाती है, जिन्हें उपभोक्ता दी हुई कीमतों और दी। हुई आय पर खरीद सकता है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 3.
बजट रेखा की प्रवणता नीचे की ओर क्यों होती है? समझाइए।
उत्तर:
बजट रेखा दो वस्तुओं की अधिकतम इकाइयाँ दर्शाती है जिन्हें एक उपभोक्ता अपनी दी हुई आय से दोनों वस्तुओं को दी गई कीमतों पर खरीद सकता है। मान लीजिए कि एक उपभोक्ता की आय 1000 रुपए है और दो वस्तुओं x तथा y की कीमतें क्रमशः 2 रुपए और 5 रुपए प्रति इकाई है। इस प्रकार वह अपनी आय से x की अधिकतम 500 इकाइयाँ तथा y की शून्य इकाई खरीद सकेगा अथवा y की 200 इकाइयाँ और x की शून्य इकाई खरीद सकेगा। इस प्रकार x की 500 और y की 200 इकाइयों के अंदर ही एक उपभोक्ता x और की इकाइयाँ खरीदेगा। मान लीजिए, वह x की 200 और y की 120 इकाइयाँ खरीदता है। अगर । वह ) की अधिक इकाइयाँ खरीदना चाहता है, तो उसे x वस्तु की कुछ इकाइयों का त्याग करना पड़ेगा। इस प्रकार दोनों वस्तुओं की इकाइयों में ऋणात्मक (विपरीत) संबंध होता है। इसी संबंध के कारण बजट रेखा की प्रवणता नीचे की ओर होती है

प्रश्न 4.
एक उपभोक्ता दो वस्तुओं का उपभोग करने के लिए इच्छुक है। दोनों वस्तुओं की कीमत क्रमशः 4 रुपए तथा 5 रुपए है। उपभोक्ता की आय 20 रुपए है
(i) बजट रेखा के समीकरण को लिखिए।
(ii) उपभोक्ता यदि अपनी संपूर्ण आय वस्तु 1 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है?
(iii) यदि वह अपनी संपूर्ण आय वस्तु 2 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी कितनी मात्रा का उपभोग कर सकता है?
(iv) बजट रेखा की प्रवणता क्या है?
उत्तर:
(i) बजट रेखा का समीकरण निम्नलिखित होगा
p1x1 + p2x2 = M
4x1 + 5x2 = 20

(ii) बजट रेखा समीकरण
4x1 + 5x2 = 20
चूँकि x2 = 0
इसलिए 4x1 + 5 x 0 = 20
4x1 = 20
x1 = \(\frac { 20 }{ 4 }\) = 5
अतः यदि उपभोक्ता अपनी संपूर्ण आय वस्तु 1 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी 5 इकाइयों का उपभोग कर सकता है।

(iii) बजट रेखा समीकरण-
4x1 + 5x2 = 20
चूँकि x1 = 0
इसलिए 4 x 0 + 5x2 = 20
5x2 = 20
x2 = \(\frac { 20 }{ 5 }\) = 4
अतः यदि उपभोक्ता अपनी संपूर्ण आय वस्तु 2 पर व्यय कर दे, तो वह उसकी 4 इकाइयों का उपभोग कर सकता है।

(iv) बजट रेखा की प्रवणता = \(\frac{p_{1}}{p_{2}}\)
= \(\frac { 4 }{ 5 }\) = 0.8
नोट-प्रश्न 5, 6 तथा 7 प्रश्न 4 से संबंधित हैं।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 5.
यदि उपभोक्ता की आय बढ़कर 40 रुपए हो जाती है, परंतु कीमत अपरिवर्तित रहती है तो बजट रेखा में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
उपभोक्ता की आय बढ़ने पर बजट रेखा का समीकरण निम्नलिखित प्रकार से बदल जाएगा
4x1 + 5x2 = 40
इस समीकरण के अनुसार-
4x1 + 5 x 0 = 40
4x1 = 40
x1 = \(\frac { 40 }{ 4 }\) = 10
4 x 0 + 5x2 = 40
5x2 = 40
x2 = \(\frac { 40 }{ 5 }\) = 8
इस प्रकार, उपभोक्ता अपनी आय से वस्तु 1 की अधिकतम 10 और वस्तु 2 की 8 इकाइयाँ खरीद सकेगा। बजट रेखा में निम्नलिखित परिवर्तन होगा-
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत 1
रेखाचित्र में AB प्रारंभिक बजट रेखा है। जब उपभोक्ता की आय 20 रुपए से बढ़कर 40 रुपए हो जाती है, तो बजट रेखा AB से बढ़कर A,B, हो जाएगी।

प्रश्न 6.
यदि वस्तु 2 की कीमत में एक रुपए की गिरावट आ जाए परंतु वस्तु 1 की कीमत में तथा उपभोक्ता की आय में कोई परिवर्तन न हो, तो बजट रेखा में क्या परिवर्तन आएगा?
उत्तर:
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत 2
पुरानी P2 = 5
नई P2 = 5 – 1 = 4 रुपए
इसलिए नई x2 = 20 = 5 इकाइयाँ
p2 में परिवर्तन से बजट रेखा में निम्नलिखित परिवर्तन आएगा-
रेखाचित्र में AB प्रारंभिक बजट रेखा है, जबकि A1B नई बजट रेखा है।

प्रश्न 7.
अगर कीमतें और उपभोक्ता की आय दोनों दुगुनी हो जाए, तो बजट सेंट कैसा होगा?
उत्तर:
पुरानी M = 20
नई M = 20 x 2 = 40 रुपए
पुरानी P1 = 4
नई P1 = 4 x 2 = 8 रुपए
नई x1 = \(\frac { 40 }{ 8 }\) = 5 इकाइयाँ
पुरानी p2 = 5
नई p2 = 5 x 2 = 10 रुपए
नई x2 = \(\frac { 40 }{ 10 }\) = 4
इकाइयाँ चूँकि बजट रेखा के सभी तत्त्व (x1 और x2) पूर्ववत हैं इसलिए बजट रेखा में कोई भी परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 8.
मान लीजिए कि कोई उपभोक्ता अपनी पूरी आय का व्यय करके वस्तु 1 की 6 इकाइयाँ तथा वस्तु 2 की 8 इकाइयाँ खरीद सकता है। दोनों वस्तुओं की कीमतें क्रमशः 6 रुपए तथा 8 रुपए हैं। उपभोक्ता की आय कितनी है?
उत्तर:
वस्तु 1 की इकाइयाँ (x1) = 6
वस्तु 1 की कीमत (p1) = 6
वस्तु 2 की इकाइयाँ (x2) = 8
वस्तु 2 की कीमत (p2) = 8
बजट रेखा समीकरण के अनुसार
M = p1x1 + p2x2
= 6 x 6 + 8 x 8
= 36 + 64
= 100
रुपए इस प्रकार उपभोक्ता की आय 100 रुपए है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 9.
मान लीजिए, उपभोक्ता दो ऐसी वस्तुओं का उपभोग करना चाहता है जो केवल पूर्णांक इकाइयों में उपलब्ध हैं। दोनों वस्तुओं की कीमत 10 रुपए के बराबर ही है तथा उपभोक्ता की आय 40 रुपए है।
(i) वे सभी बंडल लिखिए, जो उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं।
(ii) जो बंडल उपभोक्ता के लिए उपलब्ध हैं, उनमें से वे बंडल कौन-से हैं जिन पर उपभोक्ता के पूरे 40 रुपए व्यय हो जाएँगे?
उत्तर:
(i)
M = 40
p = 10
x1 = \(\frac { 40 }{ 10 }\) = 4 इकाइयाँ
p2 = 10
x2 = \(\frac { 40 }{ 10 }\) = 4 इकाइयाँ
उपभोक्ता के लिए उपलब्ध बंडल निम्नलिखित होंगे
(0,0) (0, 1) (0, 2) (0, 3) (0, 4)
(1,0) (1, 1) (1, 2) (1, 3)
(2, 0) (2, 1) (2, 2)
(3,0) (3, 1)
(4,0)

(ii) वे बंडल जिन पर उपभोक्ता के पूरे 40 रुपए व्यय हो जाएँगे, निम्नलिखित हैं
(0,4) (1,3) (2, 2) (3, 1) (4,0)

प्रश्न 10.
‘एकदिष्ट अधिमान’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
एकदिष्ट अधिमान’ का अर्थ यह है कि एक उपभोक्ता दो वस्तुओं के विभिन्न बंडलों में से उस बंडल को अधिमान देता है, जिसमें इन वस्तुओं में से कम-से-कम एक वस्तु की अधिक मात्रा हो और दूसरे बंडल की तुलना में दूसरी वस्तु की मात्रा भी कम न हो।

प्रश्न 11.
यदि एक उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो क्या वह बंडल (10, 8) और बंडल (8, 6) के बीच तटस्थ हो सकता है?
उत्तर:
यदि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो वह बंडल (10, 8) और बंडल (8, 6) के बीच तटस्थ नहीं हो सकता। वह बंडल (10, 8) का चुनाव करेगा, क्योंकि इस बंडल में दोनों वस्तुओं की इकाइयाँ दूसरे बंडल की दोनों वस्तुओं की इकाइयों से अधिक हैं।

प्रश्न 12.
मान लीजिए कि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं। बंडल (10, 10), (10, 9) तथा (9,9) पर उसके अधिमान श्रेणीकरण के विषय में आप क्या बता सकते हैं?
उत्तर:
यदि उपभोक्ता के अधिमान एकदिष्ट हैं, तो हम विभिन्न बंडलों को निम्नलिखित प्राथमिकता देंगे-

बंडलप्राथमिकता
(10, 10)I
(10, 9)II
(9, 9)III

प्रश्न 13.
मान लीजिए कि आपका मित्र, बंडल (5, 6) तथा (6, 6) के बीच तटस्थ है। क्या आपके मित्र के अधिमान एकदिष्ट हैं?
उत्तर:
यदि हमारा मित्र बंडल (5, 6) और (6, 6) के बीच तटस्थ है तो उसके अधिमान एकदिष्ट नहीं हैं, क्योंकि बंडल (6,6) से उसे बंडल (5, 6) की तुलना में अधिक संतुष्टि प्राप्त होगी। अधिमान एकदिष्ट के रूप में उसे बंडल (5, 6) की तुलना में बंडल (6,6) को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रश्न 14.
मान लीजिए कि बाज़ार में एक ही वस्तु के लिए दो उपभोक्ता हैं तथा उनके माँग फलन इस प्रकार हैं-
d1 (p) = 20 – p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से कम या बराबर हो तथा
d2 (p) = 0 किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से अधिक हो।
d2 (p) = 30 – 2p किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से कम या बराबर हो और
d2 (p) = 0 किसी भी ऐसी कीमत के लिए जो 15 से अधिक हो।
बाज़ार माँग फलन को ज्ञात कीजिए। उत्तर
d1 (p) = 20 – p …..(i)
d2 (p) = 30 – 2p ….(ii)
बाज़ार माँग (d1 + d2) = 50 – 3p इस प्रकार बाज़ार माँग 15 रुपए से कम या बराबर वाली कीमत पर 50-3p होगी और 15 रुपए से अधिक कीमत पर शून्य (0) होगी।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 15.
मान लीजिए, किसी वस्तु के लिए 20 उपभोक्ता हैं तथा उनके माँग फलन एक-जैसे हैं
d (p) = 10 – 3p किसी ऐसी कीमत के लिए जो \(\frac { 10 }{ 3 }\) से कम हो अथवा बराबर हो तथा
d1(p) = 0 किसी ऐसी कीमत पर जो \(\frac { 10 }{ 3 }\) से अधिक है।
बाज़ार माँग फलन क्या है?
उत्तर
उपभोक्ताओं की संख्या = 20
एक उपभोक्ता का माँग फलन = d(p) = 10 – 3p क्योंकि p ≤ \(\frac { 10 }{ 3 }\)
चूँकि सभी 20 उपभोक्ताओं के माँग फलन एक-जैसे हैं, अतः बाज़ार माँग फलन व्यक्तिगत माँग फलन का 20 गुना होगा।
बाज़ार माँग फलन = 20(10 – 3p) क्योंकि p ≤ \(\frac { 10 }{ 3 }\)
= 200 – 60p क्योंकि p ≤ \(\frac { 10 }{ 3 }\)

प्रश्न 16.
एक ऐसे बाज़ार को लीजिए, जहाँ केवल दो उपभोक्ता हैं तथा मान लीजिए, किसी वस्तु के लिए उनकी माँगें इस प्रकार हैं-

pd1d2
1924
2820
3718
4616
5514
6412

वस्तु के लिए बाज़ार माँग की गणना कीजिए।
उत्तर:
वस्तु के लिए बाज़ार माँग तालिका

कीमत रुपए (p)उपभोक्ता (1) द्वारा माँगी गई मात्रा (d1)उपभोक्ता (2) द्वारा  माँगी गई मात्रा (d2)बाज़ार माँग (d1 + d2)
192433
282028
371825
461622
551419
641216

प्रश्न 17.
सामान्य वस्तु से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सामान्य वस्तुएँ वे होती हैं जिनकी माँगी गई मात्रा में वृद्धि होती है। जब उपभोक्ता की आय बढ़ती है तथा वस्तु की मात्रा में कमी आती है, तब उपभोक्ता की आय कम होती है; जैसे गेहूँ, मलाईयुक्त दूध, फल आदि।

प्रश्न 18.
निम्नस्तरीय वस्तुओं को परिभाषित कीजिए तथा कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
निम्नस्तरीय वस्तुएँ ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है जिनके लिए माँग उपभोक्ता की आय के विपरीत दिशा में जाती है। उपभोक्ता की आय बढ़ने पर इनकी माँग घटती है और आय घटने पर इनकी माँग बढ़ती है। उदाहरण के लिए, मोटे अनाज, मोटा कपड़ा, घटिया मार्क वाली वस्तुएँ, टोंड दूध आदि।

प्रश्न 19.
स्थानापन्न को परिभाषित कीजिए। ऐसी दो वस्तुओं के उदाहरण दीजिए जो एक-दूसरे के स्थानापन्न हैं।
उत्तर:
स्थानापन्न वस्तुएँ वे होती हैं जो एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग होती हैं; जैसे चाय-कॉफी, चीनी-गुड़।

प्रश्न 20.
पूरकों को परिभाषित कीजिए। ऐसी दो वस्तुओं के उदाहरण दीजिए जो एक-दूसरे के पूरक हैं।
उत्तर:
जिन वस्तुओं का साथ-साथ उपयोग किया जाता है उन्हें पूरक वस्तुएँ कहा जाता है; जैसे चाय-चीनी, जूते तथा जुराबे, टॉर्च तथा सैल।

प्रश्न 21.
माँग की कीमत लोच को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
माँग की कीमत लोच से हमारा अभिप्राय उस दर से है जिसके अनुसार वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने से वस्तु की माँग में परिवर्तन होता है।
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत 3

प्रश्न 22.
एक वस्तु की माँग पर विचार करें। 4 रुपए की कीमत पर इस वस्तु की 25 इकाइयों की माँग है। मान लीजिए वस्त की कीमत बढ़कर 5 रुपए हो जाती है तथा परिणामस्वरूप वस्तु की माँग घटकर 20 इकाइयाँ हो जाती है। कीमत लोच की गणना कीजिए।
उत्तर:
p0 = 4
q0 = 25
p1 = 5
q0 = 20
कीमत की लोच = \(\frac{\Delta q}{\Delta p} \times \frac{p^{0}}{q^{0}}\)
= \(\frac{25-20}{5-4} \times \frac{4}{25}=\frac{5}{1} \times \frac{4}{25}\)
= \(\frac { 20 }{ 25 }\) = 0.8
इस उदाहरण में माँग की लोच 0.8 या इकाई से कम (eD < 1) या कम लोचदार है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

प्रश्न 23.
माँग वक्र D (p) = 10 – 3p को लीजिए। कीमत \(\frac { 5 }{ 3 }\) पर लोच क्या है?
उत्तर:
रैखिक माँग वक्र की दिशा में लोच- (eD) = -b\(\frac { p }{ q }\)
= –\(\frac { bp }{ a-bp }\)
दी हुई माँग वक्र D (p) = 10 – 3p
यहाँ a= 10 और b = – 3
कीमत \(\frac { 5 }{ 3 }\) पर q = 10 – 3(\(\frac { 5 }{ 3 }\)) = 5
माँग की लोच = -b\(\frac { p }{ q }\)
= -3\(\frac{\frac{5}{3}}{5}\)
= – 1
अर्थात् माँग की लोच इकाई के बराबर है।

प्रश्न 24.
मान लीजिए, किसी वस्तु की माँग की कीमत लोच -0.2 है। यदि वस्तु की कीमत में 5% की वृद्धि होती है, तो वस्तु के लिए माँग में कितनी प्रतिशत कमी आएगी?
उत्तर:
eD = – 0.2
% ∆p = 5
eD = \(\frac{\% \Delta q}{\% \Delta p}\)
-0.2 = \(\frac{\% \Delta q}{5}\)
∴ % ∆q = -0.2 x 5 = – 1
इस प्रकार वस्तु की माँग में 1 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।

प्रश्न 25.
मान लीजिए, किसी वस्तु की माँग की कीमत लोच -0.2 है। यदि वस्तु की कीमत में 10% वृद्धि होती है, तो उस पर होने वाला व्यय किस प्रकार प्रभावित होगा?
उत्तर:
eD = – 0.2
% ∆p = 10
eD = \(\frac{\% \Delta q}{\% \Delta p}\)
– 0.2 = \(\frac{\% \Delta q}{10}\)
∴ % ∆q = -0.2 x 10
= – 2

प्रश्न 26.
मान लीजिए कि किसी वस्तु की कीमत में 4% की गिरावट होने के परिणामस्वरूप उस पर होने वाले व्यय में 2% की वृद्धि हो गई। आप माँग की लोच के बारे में क्या कहेंगे?
उत्तर:
कीमत में % कमी = 4
कुल व्यय में % वृद्धि = 2
चूँकि कीमत में 4% कमी वस्तु पर होने वाले व्यय में 2% वृद्धि से अधिक है, अतः माँग की लोच इकाई से कम या बेलोचदार है।

उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत HBSE 12th Class Economics Notes

→ उपयोगिता-किसी वस्तु की वह क्षमता जो आवश्यकता को संतुष्ट करती है, उपयोगिता कहलाती है।

→ कुल उपयोगिता-किसी वस्तु की सभी इकाइयों से प्राप्त संतुष्टि के कुल जोड़ को कुल उपयोगिता कहते हैं।

→ सीमांत उपयोगिता-सीमांत उपयोगिता (MU) से अभिप्राय वस्तु की एक अधिक इकाई के प्रयोग करने से प्राप्त होने
वाली अतिरिक्त उपयोगिता से है। उदाहरण-
कुल उपयोगिता (TU) जब 10 इकाइयों का उपयोग किया जाता है = 100 यूटिल
कुल उपयोगिता जब 11 इकाइयों का उपयोग किया जाता है = 110 यूटिल
MU11th = TU11 – TU10 = 110 – 100 = 10 यूटिल

→ सीमांत उपयोगिता (MU) और कुल उपयोगिता (TU) में संबंध-सभी इकाइयों की सीमांत उपयोगिता (MU) को जोड़ने पर कुल उपयोगिता (TU) प्राप्त हो जाती है, अतएव TU = ∑MU
सीमांत उपयोगिता (MU) ह्रासमान होती है (ह्रासमान सीमांत उपयोगिता नियम के अनुसार)। यह शून्य या ऋणात्मक हो जाती है। स्पष्ट है कि जब MU = 0 तब TU में कोई वृद्धि नहीं होती। इसलिए जब MU = 0 (शून्य) होती है, तब TU अधिकतम होती है। जब MU ऋणात्मक हो जाती है तब TU घटना शुरू हो जाती है।

→ ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम ह्रासमान सीमांत उपयोगिता का नियम बतलाता है कि अन्य बातें समान रहने पर जब किसी वस्तु (जैसे चाय का एक प्याला) की अधिक इकाइयों का निरंतर उपभोग किया जाता है तब प्रत्येक अगली इकाई से मिलने वाली अतिरिक्त उपयोगिता (MU) अवश्य ह्रासमान होती है और शून्य या ऋणात्मक भी हो सकती है।

→ उपभोक्ता संतुलन-उपभोक्ता संतुलन एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक उपभोक्ता अपनी सीमित आय को व्यय करके अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है तथा वह अपनी आय को खर्च करने के वर्तमान ढंग में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना पसंद नहीं करता।

→ उपभोक्ता संतुलन का निर्धारण-एक ही वस्तु के लिए उपभोक्ता संतुलन (अधिकतम संतुष्टि) की स्थिति तब प्राप्त करता है जब वस्तु से प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता कीमत के रूप में दी जाने वाली मुद्रा की सीमांत उपयोगिता (MUM ) के बराबर हो जाती है।

→ बजट सेट-बजट सेट उन वस्तुओं के सभी बंडलों का संग्रह है, जिन्हें उपभोक्ता प्रचलित बाज़ार कीमत पर अपनी आय से खरीद सकता है।

→ बजट रेखा बजट रेखा उन सभी बंडलों का प्रतिनिधित्व करती है जिन पर उपभोक्ता की संपूर्ण आय व्यय हो जाती है। बजट रेखा की प्रवणता ऋणात्मक होती है। यदि कीमतों या आय दोनों में से किसी एक में परिवर्तन आता है, तो बजट सेट में परिवर्तन आ जाता है।

→ सुस्पष्ट अधिमान-सभी संभावित बंडलों के संग्रह के विषय में उपभोक्ता के सुस्पष्ट अधिमान हैं। वह उन पर अपनी अधिमानता के अनुसार उनका श्रेणीकरण कर सकता है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत

→ अनधिमान वक्र-अनधिमान वक्र सभी बिंदुओं का बिंदुपथ है जो उन बंडलों को प्रदर्शित करते हैं, जिनके बीच उपभोक्ता तटस्थ है।

→ अनधिमान वक्र की प्रवणता-अधिमान की एकदिष्टता से अभिप्राय है कि अनधिमान वक्र की प्रवणता नीचे की ओर है।

→ अनधिमान मानचित्र-उपभोक्ता का अधिमान सामान्यतया अनधिमान मानचित्र द्वारा दर्शाया जा सकता है। उपभोक्ता का अधिमान सामान्यतया उपयोगिता फलन द्वारा भी दर्शाया जा सकता है।

→ उपभोक्ता का चयन-एक विवेकशील उपभोक्ता सदा बजट सेट में से अपने सर्वाधिक अधिमानता बंडल का चयन करता

→ उपभोक्ता का इष्टतम बंडल उपभोक्ता का इष्टतम बंडल बजट रेखा तथा अनधिमान वक्र के बीच स्पर्शिता बिंदु पर स्थित होता है।

→ उपभोक्ता का माँग वक्र-उपभोक्ता का माँग वक्र वस्तु की मात्रा को प्रदर्शित करता है, जिसका चयन उपभोक्ता कीमत के विभिन्न स्तरों पर ऐसी स्थिति में करता है, जब अन्य वस्तुओं की कीमत, उपभोक्ता की आय तथा उनकी रुचियाँ और अधिमान अपरिवर्तित रहते हैं।

→ सामान्य वस्तुओं की माँग-किसी सामान्य वस्तु की माँग में वृद्धि (गिरावट) उपभोक्ता की आय में वृद्धि (गिरावट) के साथ होती है।

→ निम्नस्तरीय वस्तु की माँग-उपभोक्ता की आय में वृद्धि (गिरावट) होने के साथ-साथ निम्नस्तरीय वस्तु की माँग में गिरावट (वृद्धि) होती है।

→ बाज़ार माँग वक्र बाज़ार माँग वक्र बाज़ार में सभी उपभोक्ताओं की माँग को वस्तु की कीमत में विभिन्न स्तरों पर समग्र दृष्टि से देखकर माँग को प्रदर्शित करता है।

→ माँग की कीमत लोच-किसी वस्तु की माँग की कीमत लोच, किसी वस्तु की माँग के प्रतिशत में परिवर्तन को इसकी कीमत के प्रतिशत-परिवर्तन से भाग देकर प्राप्त किया जाता है।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.1.
निम्नलिखित के इलेक्ट्रानिक विन्यास लिखिए –
(i) Cr3+
(ii) Pm3+
(iii) Cu+
(iv) Ce4+
(v) Co2+
(vi) Lu2+
(vii) Mn2+
(viii) Th4+
उत्तर:
इन आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित हैं-
परमाणु क्रमाक Cr= 24, Pm = = 61, Cu 29, Ce = 58, Co 27, Lu = 71, Mn = 25, Th = 90
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प्रश्न 8.2.
+3 ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत होने के संदर्भ में Mn2+ के यौगिक Fe2+ के यौगिकों की तुलना में अधिक स्थायी क्यों हैं ?
उत्तर:
Mn2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d5 होता है जो कि अर्धपूरित उपकोश के कारण अधिक स्थायी होता है अतः Mn+2 आसानी से इलेक्ट्रॉन नहीं देता, अर्थात् इसकी ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति कम होती है। लेकिन Fe+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Ar] 3d6 होता है अतः यह एक इलेक्ट्रॉन देकर 3d5 स्थायी विन्यास बनाता है इसलिए यह आसानी से ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 2

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.3.
संक्षेप में स्पष्ट कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अर्धभाग में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था कैसे अधिक स्थायी होती जाती है ?
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी की (Sc के अलावा) सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +2 है जो कि 4s में से दो इलेक्ट्रॉन निकलने के कारण बनती है। प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अर्धभाग में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ +2 ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती जाती है क्योंकि 3d कक्षकों में प्रत्येक में एक इलेक्ट्रॉन होता है अतः प्रत्येक कक्षक अर्धपूरित है जिनमें अन्तर इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण न्यूनतम होता है तथा नाभिकीय आवेश बढ़ता है। लेकिन श्रेणी के द्वितीय अर्धभाग में 3d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन प्रारम्भ हो जाता है।

प्रश्न 8.4.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस सीमा तक ऑक्सीकरण अवस्थाओं को निर्धारित करते हैं ? उत्तर को उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व काफी सीमा तक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करता है। वे ऑक्सीकरण अवस्थाएँ जिनमें उत्कृष्ट गैस विन्यास होता है या अर्धपूरित (d5) तथा पूर्ण पूरित स्थायी विन्यास (d10) होता है वे अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होती हैं।
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प्रश्न 8.5.
संक्रमण तत्वों की मूल अवस्था में नीचे दिए गए d इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों में कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्था स्थायी होगी ?
3d3, 3d5, 3d8 तथा 3d4
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की मूल अवस्था में इन d इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों के लिए स्थायी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ निम्न प्रकार होंगी-
3d3 (वैनेडियम) (+ 2), + 3, + 4, + 5, ( + 5 सर्वाधिक स्थायी )
3d5 (क्रोमियम) + 3, 4, + 6, (+3 सर्वाधिक स्थायी )
3d5 (मैंगनीज़) +2, +4, +6, +7, ( + 2 सर्वाधिक स्थायी )
3d8 ( कोबाल्ट ) + 2 + 3 (संकुलों में )
3d4 मूल अवस्था में कोई d4 विन्यास नहीं होता।

प्रश्न 8.6.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के ऑक्सो-धातुऋणायनों का नाम लिखिए; जिसमें धातु संक्रमण श्रेणी की वर्ग संख्या के बराबर ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती है।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के ऑक्सो धातुऋणायन निम्नलिखित हैं जिनमें धातु संक्रमण श्रेणी की वर्ग संख्या के बराबर ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 4

प्रश्न 8.7.
लैन्थेनॉयड आकुंचन ( संकुचन ) क्या है ? लैन्थेनॉयड आकुंचन के परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
लैन्थेनॉयड संकुचन – लैन्थेनॉयडों में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर La से Lu (लैन्थेनम से ल्यूटीशियम) तक परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में समग्र (over all) कमी होती है, इसे लैन्थेनॉयड संकुचन कहते हैं। परमाणु त्रिज्याओं के मानों में यह कमी नियमित नहीं होती है जैसा कि M+3 आयनों में नियमित रूप से कमी होती है। यह संकुचन भी सामान्य संक्रमण श्रेणियों के समान ही है तथा इसका कारण भी समान है अर्थात् एक ही उपकोश में एक इलेक्ट्रॉन का दूसरे इलेक्ट्रॉन द्वारा परिरक्षण प्रभाव अपूर्ण. होता है।

फिर भी श्रेणी में नाभिकीय आवेश बढ़ने पर एक d- इलेक्ट्रॉन पर दूसरे d- इलेक्ट्रॉन के परिरक्षण प्रभाव की तुलना में, एक 4f इलेक्ट्रॉन का दूसरे 41 इलेक्ट्रॉन पर परिरक्षण प्रभाव कम होता है तथा 1-कक्षकों की आकृति भी इसके लिए अनुकूल नहीं है। अतः श्रेणी में बढ़ते हुए नाभिकीय आवेश के कारण परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु आकार में एक नियमित कमी पायी जाती है, लेकिन Eu की परमाणु त्रिज्या अधिक होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 25
लैन्थेनॉयड संकुचन के प्रभाव-

(i) द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार में समानता ( Similarities in the Atomic Size of Second and Third Transition Series Elements) – लैन्धेनॉयड संकुचन का तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों पर बहुत प्रभाव पड़ता है। इसके कारण तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार दूसरी संक्रमण श्रेणी के संगत तत्वों के परमाणु आकार के लगभग समान होते हैं। Zr (160 pm) तथा Hf ( 159 pm ) के परमाणु आकार का लगभग समान मान लैन्धेनॉयड संकुचन का ही परिणाम है, लेकिन वर्ग 3 में ऐसा नहीं होता।

(ii) लैन्थेनॉयडों का पृथक्करण (Separation of Lanthanoids) – लैन्थेनॉयडों की आयनिक त्रिज्या में अन्तर बहुत कम होता है इसलिए इनके रासायनिक गुणों में काफी समानता होती है, अतः इन तत्वों का पृथक्करण मुश्किल से होता है। लेकिन इनके आकार में कुछ अन्तर होता है जिसके कारण इनकी विलेयता तथा संकुल बनाने की प्रवृत्ति में भिन्नता आ जाती है अतः इनका पृथक्करण आयन विनिमय विधि द्वारा सम्भव हो पाता है।

(iii) हाइड्रॉक्साइडों की क्षरीय प्रबलता (Basic Strength of Hydroxides) – 12 से 1.1 तक इनके हाइड्रॉक्साइडों की क्षारीय प्रबलता कम होती है क्योंकि इनकी आयनिक त्रिज्याओं में कमी होती है। इसलिए La(OH)2 का क्षारीय गुण अधिकतम तथा Lu (OH)2 का क्षारीय गुण न्यूनतम होता है।

प्रश्न 8.8.
संक्रमण धातुओं के अभिलक्षण क्या हैं? ये संक्रमण धातु क्यों कहलाती हैं ? d-ब्लॉक के तत्वों में कौनसे तत्व संक्रमण श्रेणी के तत्व नहीं कहे जा सकते ?
उत्तर:
संक्रमण धातुओं के सामान्य अभिलक्षण निम्नलिखित हैं-
संक्रमण तत्व प्रारूपिक धात्विक गुण, जैसे- उच्च तनन सामर्थ्य, तन्यता, आघातवर्धनीयता, उच्च तापीय तथा विद्युत् चालकता व धात्विक चमक दर्शाते हैं। Zn, Cd, Hg तथा Mn जैसे अपवादों को छोड़कर सामान्य ताप पर इनकी एक या अधिक प्रारूपिक धात्विक संरचनाएँ होती हैं।

संक्रमण तत्व वे d-ब्लॉक के तत्व होते हैं जिनकी परमाणु या किसी ऑक्सीकरण अवस्था में अपूर्ण d कक्षक होते हैं। वर्ग 12 के तत्व जिंक, कैडमियम तथा मर्क्युरी (Zn, Cd तथा Hg ) में उनकी मूल अवस्था तथा सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में पूर्ण पूरित (d10) विन्यास है अतः इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता।

प्रश्न 8.9.
संक्रमण धातुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किस प्रकार असंक्रमण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से भिन्न हैं?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में उपान्त्य कोश में आंशिक भरे d उपकोश होते हैं जबकि असंक्रमण तत्वों में आंशिक भरे d उपकोश नहीं होते, लेकिन इनके आन्तरिक विन्यास में पूर्ण भरे d उपकोश होते हैं। संक्रमण तत्वों में अन्तिम इलेक्ट्रॉन उपान्त्य कोश के d उपकोश में भरा जाता है जबकि असंक्रमण तत्वों में अन्तिम इलेक्ट्रॉन s या p उपकोश में भरा जाता है।

प्रश्न 8.10.
लैन्थेनॉयडों द्वारा कौन-कौनसी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित की जाती हैं ?
उत्तर:
लैन्थेनॉयडों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था +3 है लेकिन कुछ लैन्थेनॉयड +2 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी प्रदर्शित करते हैं। जैसे – Eu2+ तथा Ce+4

प्रश्न 8.11.
कारण देते हुए स्पष्ट कीजिए-
(i) संक्रमण धातुएँ तथा उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय हैं।
(ii) संक्रमण धातुओं की कणन एन्थैल्पी (Enthalpy of atomisation) के मान उच्च होते हैं।
(iii) संक्रमण धातुएँ सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती हैं।
(iv) संक्रमण धातुएँ तथा इनके अनेक यौगिक उत्तम उत्प्रेरक का कार्य करते हैं।
उत्तर:
(i) संक्रमण धातुएँ तथा उनके अधिकांश यौगिक अनुचुंबकीय होते हैं, क्योंकि इनमें धातु के पास अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं तथा वे तत्व या यौगिक अनुचुम्बकीय होते हैं जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। जैसे Sc = [Ar] 3d1 4s2, इसके पास एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है अतः यह अनुचुम्बकीय है, इसी प्रकार FeSO4 में Fe+2 के पास चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह भी अनुचुम्बकीय है।

(ii) इस प्रश्न के उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक का उदाहरण 8.2 देखें ।

(iii) संक्रमण धातुओं के यौगिक सामान्यतः रंगीन होते हैं क्योंकि इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जिससे दृश्य प्रकाश द्वारा d-d संक्रमण (t2g से eg) आसानी से हो जाता है। लिगन्ड (जल इत्यादि) की उपस्थिति में d कक्षक दो भागों में विभाजित हो जाते हैं. – t2g तथा eg | इसी कारण इनका रंग जलीय विलयन या जलयोजित अवस्था में ही प्रेक्षित होता है।

(iv) संक्रमण धातुएँ तथा इनके अनेक यौगिक अच्छे उत्प्रेरक होते हैं क्योंकि इनमें परिवर्तनशील संयोजकता ( ऑक्सीकरण अंक) तथा संकुल यौगिक बनाने का गुण पाया जाता है जिसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.12.
अंतराकाशी यौगिक क्या हैं? इस प्रकार के यौगिक संक्रमण धातुओं के लिए भली प्रकार से ज्ञात क्यों हैं ?
उत्तर:
संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालक में परमाणुओं के मध्य बचे रिक्त स्थान (अन्तराकाश) में छोटे आकार वाले परमाणु जैसे H, N, B या C व्यवस्थित हो जाते हैं तो बने यौगिकों को अन्तराकाशी यौगिक कहते हैं। उदाहरण-TiC, Mn4N, Fe3H, VH0.56 तथा TiH1.7 इत्यादि। इन यौगिकों में धातुओं की कोई सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था नहीं होती । संक्रमण तत्वों में रिक्त d कक्षक होते हैं अतः ये अंतराकाशी यौगिक आसानी से बनाते हैं।

प्रश्न 8.13.
संक्रमण धातुओं की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में परिवर्तनशीलता असंक्रमण धातुओं में ऑक्सीकरण अवस्थाओं में परिवर्तनशीलता से किस प्रकार भिन्न है ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तरसंक्रमण तत्वों में ऑक्सीकरण अवस्थाओं में एक का अंतर होता है। जैसे- मैंगनीज, +2, +3, 4, +5, +6, +7 अवस्था दर्शाता है जबकि असंक्रमण तत्वों जैसे p-ब्लॉक के तत्वों में सदैव दो का अंतर होता है, जैसे +2, +4 या +3, +5 या +4, +6 आदि ।

प्रश्न 8.14.
आयरनक्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाने की विधि का वर्णन कीजिए । पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन पर pH बढ़ाने से क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
आयरन क्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट बनाना – आयरन क्रोमाइट [ क्रोमाइट अयस्क (FeCr2O4)] को जब वायु की उपस्थिति में सोडियम कार्बोनेट के साथ संगलित किया जाता है तो सोडियम क्रोमेट प्राप्त होता है। क्रोमाइट की सोडियम कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है-
4FeCr2O4 + 8Na2CO3 + 7O2 → 8Na2CrO4 + 2Fe2O3 + 8CO2
सोडियम क्रोमेट के विलयन को छानकर इसे सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा अम्लीय बना लेते हैं जिसमें से नारंगी सोडियम डाइक्रोमेट, (Na2Cr2O72H2O) को क्रिस्टलित कर लिया जाता है।
2Na2CrO2 + 2H+ → Na2Cr2O7 + 2Na+ + H2O

सोडियम डाइक्रोमेट की विलेयता, पोटैशियम डाइक्रोमेट से अधिक होती है। अतः सोडियम डाइक्रोमेट के विलयन में पोटैशियम क्लोराइड डालने पर पोटैशियम डाइक्रोमेट प्राप्त होता है।
Na2Cr2O7 + 2KCl → K2Cr2O7 + 2NaCl

विलयन से नारंगी रंग के क्रिस्टल, क्रिस्टलीकृत हो जाते हैं। पोटैशियम डाइक्रोमेट विलयन का pH बढ़ाने पर अर्थात् क्षारीय माध्यम करने पर यह क्रोमेट में बदल जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 5

प्रश्न 8.15.
पोटैशियम डाइक्रोमेट की ऑक्सीकरण क्रिया का उल्लेख कीजिए तथा निम्नलिखित के साथ आयनिक समीकरण लिखिए-
(i) आयोडाइड आयन
(ii) आयरन (II) विलयन
(iii) H2S
उत्तर:
पोटैशियम डाइक्रोमेट प्रबल ऑक्सीकारक होता है। अम्लीय माध्यम में डाइक्रोमेट आयन की ऑक्सीकरण क्रिया को निम्न प्रकार दर्शाया जाता है, इसमें Cr+6, Cr+3 में बदलता है।
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(i) आयोडाइड आयन – K2Cr2O7, आयोडाइड आयन को आयोडीन में ऑक्सीकृत करता है।
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(ii) आयरन (II) विलयन – K2Cr2O7, Fe2+ को Fe+3 में ऑक्सीकृत कर देता है।
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(iii) H2S – डाइक्रोमेट, H2S को सल्फर में ऑक्सीकृत करता है।
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प्रश्न 8.16.
पोटैशियम परमैंगनेट को बनाने की विधि का वर्णन कीजिए । अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट किस प्रकार – (i) आयरन (II) आयन (ii) SO2 तथा (iii) ऑक्सैलिक अम्ल से अभिक्रिया करता है? अभिक्रियाओं के लिए आयनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
पोटैशियम परमैंगनेट बनाने के लिए MnO2 को KOH या KNO3 जैसे ऑक्सीकारक के साथ संगलित किया जाता है, इससे गाढ़े हरे रंग का पोटैशियम मैंगनेट (K2MnO4) बनता है जो उदासीन या अम्लीय माध्यम में असमानुपातित होकर पोटैशियम परमैंगनेट बनाता है।
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प्रयोगशाला में Mn (II) आयन के लवणों को परऑक्सोडाइसल्फेट द्वारा ऑक्सीकृत कराने पर भी परमैंगनेट बनता है।
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अम्लीय माध्यम में KMnO, की अभिक्रियाएँ —
(i) आयरन (II) आयन से यह आयरन (II) को आयरन (III) में ऑक्सीकृत कर देता है।
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(ii) SO2 से – यह जलीय SO2 को H2SO4 में ऑक्सीकृत करता है।
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(iii) ऑक्सैलिक अम्ल से – KMnO4 , के साथ अभिक्रिया से ऑक्सैलिक अम्ल, CO2 में ऑक्सीकृत हो जाता है।
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प्रश्न 8.17.
M2+ / M तथा M3+ / M2+ निकाय के संदर्भ में कुछ धातुओं के E° के मान नीचे दिए गए हैं-
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उपर्युक्त आँकड़ों के आधार पर निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए-
(i) अम्लीय माध्यम में Cr3+ या Mn3+ की तुलना Fe3+ का स्थायित्व |
(ii) समान प्रक्रिया के लिए क्रोमियम अथवा मैंगनीज धातुओं की तुलना में आयरन के ऑक्सीकरण में सुगमता ।
उत्तर:
(i) जब किसी स्पीशीज का अपचयन विभव (इलेक्ट्रोड विभव) अधिक होता है तो इसके अपचयित होने की प्रवृत्ति अधिक होती है। Mn+3 का अपचयन विभव अधिकतम है इसलिए यह आसानी से Mn2+ में अपचयित हो जाता है अतः Mn+3, Fe+3 से कम स्थायी होता है। लेकिन Cr+3, Fe+3 की तुलना में अधिक स्थायी है क्योंकि Cr+3 का अपचयन विभव, Fe+3 के अपचयन विभव से बहुत कम है।

(ii) जब किसी धातु आयन के इलेक्ट्रोड विभव (अपचयन विभव) का मान कम होता है तो उस धातु परमाणु की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति अधिक होगी, अतः Mn की Mn+2 में ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति सर्वाधिक होगी तथा Fe की Fe+2 मैं ऑक्सीकरण की प्रवृत्ति न्यूनतम होगी। इसलिए इनके ऑक्सीकृत होने का क्रम निम्न प्रकार होगा -Mn > Cr > Fe

प्रश्न 8.18.
निम्नलिखित में कौनसे आयन जलीय विलयन में रंगीन होंगे ?
Ti3+, V3+,Cu+,Sc3+, Mn2+, Fe3+ तथा Co2+ प्रत्येक के लिए कारण बताइए ।
उत्तर:
Sc3+ के अतिरिक्त सभी आयन जलीय विलयन में रंगीन होते हैं क्योंकि इनमें d कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं अतः इनमें d-d संक्रमण आसानी से हो जाता है जो इनके रंग के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रश्न 8.19.
प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं की +2 ऑक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व की तुलना कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं में बाएँ से दाएँ जाने पर +2 ऑक्सीकरण अवस्थाओं का स्थायित्व बढ़ता है तथा बीच में अधिकतम होने के बाद कम होता जाता है क्योंकि प्रारम्भ में d कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जिससे अन्तर इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण न्यूनतम होता है। उसके पश्चात् d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन प्रारम्भ हो जाता है। Zn+2 अपवाद है क्योंकि इसमें पूर्णपूरित (3d10) स्थायी विन्यास होता है।

प्रश्न 8.20.
निम्नलिखित के संदर्भ में, लैन्थेनॉयड एवं ऐक्टिनॉयड के रसायन की तुलना कीजिए-
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) परमाण्वीय एवं आयनिक आकार
(iii) ऑक्सीकरण अवस्था
(iv) रासायनिक अभिक्रियाशीलता ।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – लैन्थेनॉयडों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में सभी तत्वों में 6s2 होता है तथा 4f में इलेक्ट्रॉन भरता जाता है अर्थात् यह परिवर्तनशील है, लेकिन Ln3+ में 4f1 से 4f14 तक विन्यास पाया जाता है। सभी ऐक्टिनॉयडों में 7s2 विन्यास होता है तथा 5f एवं 6d उपकोशों में परिवर्तनशील विन्यास होता है। 5f उपकोश में 14 इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं। Th तक 5f नहीं होता । Pa से प्रारम्भ होकर Lr तक 5f पूर्णरूप से भर जाता है। लैन्थेनॉयडों के समान ऐक्टिनॉयडों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अनियमितताएँ, 5f उपकोश में उपस्थित f0, f7 तथा f14 स्थायी विन्यासों के कारण होती हैं।

(ii) परमाण्वीय एवं आयनिक आकार – लैन्थेनॉयडों में La से Lu तक तत्वों की परमाणु एवं आयनिक त्रिज्या में कमी होती है लेकिन परमाणु त्रिज्या में कमी नियमित नहीं होती। ऐक्टिनॉयडों में भी लैन्थेनॉयडों के समान परमाणु या M3+ आयनों के आकार में क्रमिक कमी होती है, इसे ऐक्टिनॉयड संकुचन कहते हैं। लेकिन आकार में यह कमी एक तत्व से दूसरे तत्व में उत्तरोत्तर बढ़ती जाती है जो कि 51 इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण है।

(iii) ऑक्सीकरण अवस्था – लैन्थेनॉयडों में मुख्य रूप से +3 ऑक्सीकरण अवस्था पायी जाती है लेकिन कुछ तत्व +2 तथा +4 अवस्था भी दर्शाते हैं।
लैन्थेनॉयडों के समान ऐक्टिनॉयड भी +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं, लेकिन इनमें अन्य ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (+3 से +7 ) भी पायी जाती हैं।
लैन्थेनॉयड तथा ऐक्टिनॉयड दोनों में ही +4 की अपेक्षा +3 अवस्था में अधिक यौगिक बनते हैं तथा + 3 एवं +4 अवस्था वाले आयनों की जल अपघटित होने की प्रवृत्ति होती है।

(iv) रासायनिक अभिक्रियाशीलता (Chemical reactivity)-लैन्थेनॉयडों तथा ऐक्टिनॉयडों में कुछ समानता लेकिन कुछ भिन्नता भी होती है।

  • लैन्थेनॉयडों में लैन्थेनॉयड संकुचन होता है उसी प्रकार ऐक्टिनॉयडों में ऐक्टिनॉयड संकुचन पाया जाता है।
  • लैन्थेनॉयडों के कुछ आयन रंगहीन होते हैं जबकि ऐक्टिनॉयडों के आयन रंगीन होते हैं।
  • लैन्थेनॉयड आसानी से संकुल नहीं बनाते लेकिन ऐक्टिनॉयडों में संकुल बनाने की प्रवृत्ति अधिक होती है।
  • लैन्थेनॉयड ऑक्सो धनायन नहीं बनाते जबकि ऐक्टिनॉयड \(\mathrm{UO}_2^{2+}, \mathrm{PuO}_2^{2+}\) तथा UO+ जैसे ऑक्सो धनायन बनाते हैं।
  • लैन्थेनॉयडों में केवल Pm रेडियोधर्मी है जबकि सभी ऐक्टिनॉयड रेडियोधर्मी होते हैं।
  • लैन्थेनॉयडों के चुंबकीय गुणों की व्याख्या आसान है जबकि ऐक्टिनॉयडों के चुंबकीय गुण इनकी तुलना में जटिल होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.21.
आप निम्नलिखित को किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे-
(i) d4 स्पीशीज में से Cr2+ प्रबल अपचायक है जबकि मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।
(ii) जलीय विलयन में कोबाल्ट (II) स्थायी है परन्तु संकुलनकारी अभिकर्मकों की उपस्थिति में यह सरलतापूर्वक ऑक्सीकृत हो जाता है।
(iii) आयनों का d1 विन्यास अत्यंत अस्थायी है।
उत्तर:
(i) Cr2+ प्रबल अपचायक है क्योंकि इसमें से एक इलेक्ट्रॉन निकलने पर d4 से d3 में परिवर्तन होता है तथा d3 विन्यास (\(t_{2 g}^3\)) अधिक स्थायी होता है क्योंकि यह अर्धपूरित है। Mn(III) द्वारा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Mn (II) में परिवर्तित होने पर 3d4 से 3d5 हो जाता है तथा 3d5 एक अर्धपूरित स्थायी विन्यास है । अतः मैंगनीज (III) प्रबल ऑक्सीकारक है।

(ii) संकुलनकारी अभिकर्मक (लिगण्ड) की उपस्थिति में Co(II) आसानी से ऑक्सीकृत होकर Co(III) बनाता है जिसमें 3d6 विन्यास है। इसका कारण यह है कि संकुल बनने पर प्राप्त क्रिस्टल क्षेत्र विपाटन ऊर्जा, (CFSE) Co+3 बनने के लिए आवश्यक तृतीय आयनन ऊर्जा की पूर्ति कर देती है तथा +3 अवस्था में स्थायी अष्टफलकीय संकुल बन जाते हैं जो कि सामान्यतः प्रतिचुम्बकीय होते हैं।

(iii) d1 विन्यास के आयन अत्यंत अस्थायी होते हैं क्योंकि d1 विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक आयनीकरण ऊर्जा की पूर्ति जलयोजन ऊर्जा या जालक ऊर्जा द्वारा आसानी से हो जाती है तथा d1 विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकलने पर प्राप्त विन्यास (d0) स्थायी होता है। कुछ उदाहरणों में असमानुपातन भी होता है।
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प्रश्न 8.22.
असमानुपातन से आप क्या समझते हैं ? जलीय विलयन में असमानुपातन अभिक्रियाओं के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
असमानुपातन (Disproportionation) – किसी स्पीशीज में किसी तत्व के लिए जब एक ऑक्सीकरण अवस्था अन्य ऑक्सीकरण अवस्थाओं (कम तथा अधिक) से कम स्थायी होती है तो इस स्पीशीज के एक परमाणु का ऑक्सीकरण तथा दूसरे परमाणु का अपचयन हो जाता है। इस क्रिया को असमानुपातन कहते हैं।
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प्रश्न 8.23.
प्रथम संक्रमण श्रेणी में कौनसी धातु बहुधा (frequently) तथा क्यों +1 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाती है?
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी में Cu बहुधा (+1) स्थायी ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है, क्योंकि इसके फलस्वरूप 3d10 स्थायी विन्यास प्राप्त होता है। Cu+1 = [Ar] 3d10

प्रश्न 8.24.
निम्नलिखित गैसीय आयनों में अ (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉनों की गणना कीजिए ।
Mn3+, Cr3+, V3+ तथा Ti3+ इनमें से कौनसा जलीय विलयन में अतिस्थायी है ?
उत्तर:
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इन आयनों में से जलीय विलयन में Cr3+ सबसे अधिक स्थायी होता है। क्योंकि इसमें अर्धपूरित विन्यास (\(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}^3\)) होता है, जो कि स्थायी होता है।

प्रश्न 8.25.
उदाहरण देते हुए संक्रमण धातुओं के रसायन के निम्नलिखित अभिलक्षणों का कारण बताइए –
(i) संक्रमण धातु का निम्नतम ऑक्साइड क्षारकीय है, जबकि उच्चतम ऑक्साइड उभयधर्मी या अम्लीय है।
(ii) संक्रमण धातु की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ऑक्साइडों तथा फ्लुओराइडों में प्रदर्शित होती है।
(iii) धातु के ऑक्सोऋणायनों में उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित होती है।
उत्तर:
(i) संक्रमण धातुओं के ऑक्साइड निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था में क्षारकीय तथा उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था में उभयधर्मी या अम्लीय होते हैं क्योंकि निम्न ऑक्सीकरण अवस्था में बन्ध बनाने में थोड़े से इलेक्ट्रॉन ही प्रयुक्त होते हैं अतः प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होता है इस कारण ये आसानी से इलेक्ट्रॉन दे सकते हैं इसलिए ये क्षारीय होते हैं लेकिन उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होने के कारण इनमें इलेक्ट्रॉन लेने की प्रवृत्ति अधिक होती है अतः ये मुख्यतः अम्लीय तथा कभी-कभी उभयधर्मी होते हैं। उदाहरण-
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(ii) ऑक्सीजन तथा फ्लुओरीन की उच्च विद्युतॠणता तथा छोटे आकार के कारण ये धातुओं को उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत कर देते हैं अतः संक्रमण धातुओं की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ऑक्साइडों तथा फ्लुओराइडों में ही प्रदर्शित होती है।

(iii) संक्रमण धातुओं के ऑक्सोऋणायन इनके उच्च ऑक्सीकरण अवस्था युक्त ऑक्साइडों की अम्ल तथा क्षार से क्रिया करवाने पर ही बनते हैं। अतः ऑक्सोऋणायनों में भी धातु की ऑक्सीकरण अवस्था उच्च होगी तथा इन ऑक्सोऋणायनों में धातु के साथ उच्च विद्युतऋणी ऑक्सीजन जुड़ी होती है।

प्रश्न 8.26.
निम्नलिखित को बनाने के लिए विभिन्न पदों का उल्लेख कीजिए-
(i) क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7
(ii) पाइरोलुसाइट से KMnO4
उत्तर:
(i) क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाना-
क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाने में निम्नलिखित तीन पद होते हैं-(a) क्रोमाइट अयस्क को वायु की उपस्थिति में सोडियम कार्बोनेट के साथ संगलित करना-

4FeCr2O4 + 8Na2CO3 + 7O2 → 8Na2 CrO4 + 2Fe2O3 + 8CO2

(b) Na2CrO4 के विलयन को छानकर सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा अम्लीकृत करना तथा सोडियम डाइक्रोमेट के क्रिस्टल प्राप्त करना-
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(ii) पाइरोलुसाइट से KMnO4 बनाना – पाइरोलु साइट (MnO2) से KMnO4 बनाने के लिए पाइरोलुसाइट को KOH के साथ संगलित करके वायु या KNO3 द्वारा ऑक्सीकृत करते हैं, तथा प्राप्त \(\mathrm{MnO}_4^{2-}\) आयन का क्षारीय माध्यम में वैद्युत अपघटनी ऑक्सीकरण किया जाता है।
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प्रश्न 8.27.
मिश्र धातुएँ क्या हैं? लैन्थेनॉयड धातुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्र धातु का उल्लेख कीजिए। इसके उपयोग भी बताइए |
उत्तर:
मिश्र धातु – दो या दो से अधिक धातुओं या धातु तथा अधातु का समांगी मिश्रण मिश्र धातु कहलाता है।
लैन्थेनॉयड धातुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्रधातु, मिश धातु है जिसमें ~ 95% एक लैन्थेनॉयड धातु, ~ 5% आयरन तथा थोड़ा-सा S, C, Ca तथा Al होता है। मिश धातु की अत्यधिक मात्रा, मैग्नीशियम आधारित मिश्र धातुओं में प्रयुक्त होती है जिसका उपयोग बंदूक की गोली, कवच या खोल तथा हल्के फ्लिंट के उत्पादन में किया जाता है।

प्रश्न 8.28.
आंतरिक संक्रमण तत्व क्या हैं? बताइए कि निम्नलिखित में कौनसे परमाणु क्रमांक आंतरिक संक्रमण तत्वों के हैं–
29, 59, 74, 95, 102, 104
उत्तर:
आन्तरिक संक्रमण तत्व ( Inner Transition Elements) वे तत्व होते हैं जिनमें परमाणु या किसी ऑक्सीकरण अवस्था में बाह्यतम तीन कोश अपूर्ण होते हैं तथा इनके fकक्षक अपूर्ण होते हैं। ये । खण्ड के तत्व होते हैं। इनकी दो श्रृंखलाएं होती हैं- (i) लैन्थेनॉयड (Z= 58 से 71) तथा (ii) ऐक्टिनॉयड (Z = 90 से 103)। उपर्युक्त में से परमाणु क्रमांक 59, 95 तथा 102 आंतरिक संक्रमण तत्वों के हैं।

प्रश्न 8.29.
ऐक्टिनॉयड तत्वों का रसायन उतना नियमित नहीं है जितना कि लैन्थेनॉयड तत्वों का रसायन । इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं के आधार पर इस कथन का आधार प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर:
ऐक्टिनॉयड तत्वों के रसायन में लैन्थेनॉयडों के रसायन की तुलना में कम नियमितता होती है क्योंकि ऐक्टिनॉयड श्रेणी में ऑक्सीकरण अवस्थाओं की परास अधिक है। इसका कारण 5f, 6d तथा 7s स्तरों की लगभग समान ऊर्जा है।
ऐक्टिनॉयड सामान्यतः +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं। श्रेणी के प्रारंभिक अर्ध-भाग वाले तत्व सामान्यतः उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं। जैसे Th में +4, Pa, U तथा Np में क्रमश: +5, +6 तथा +7 ऑक्सीकरण अवस्था होती है परन्तु बाद के तत्वों में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ कम होती जाती हैं अतः प्रारम्भ एवं बाद वाले ऐक्टिनॉयडों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में अधिक अनियमितता होती है।

प्रश्न 8.30.
ऐक्टिनॉयड श्रेणी का अंतिम तत्व कौन-सा है ? इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इस तत्व की संभावित ऑक्सीकरण अवस्थाओं पर टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर:
ऐक्टिनॉयड श्रेणी का अंतिम तत्व लारेंशियम है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित है-
103Lr = [Rn]5f146d17s2
Lr की संभावित ऑक्सीकरण अवस्था +3 है क्योंकि इसमें पूर्ण पूरित स्थायी विन्यास (4f14) पाया जाता है।
Lr3+ = [Rn]4f14

प्रश्न 8.31.
हुंड – नियम के आधार पर Ce3+ आयन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को व्युत्पन्न कीजिए तथा ‘प्रचक्रण मात्र सूत्र’ (spin only formula) के आधार पर इसके चुंबकीय आघूर्ण की गणना कीजिए ।
उत्तर:
Ce का परमाणु क्रमांक 58 है तथा इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ! 54Ce = [Xe]4f1 5d1 6s2 होता है अतः Ce3+ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Xe] 4f1 होगा जिसमें केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित है अतः इसका चुम्बकीय आघूर्ण (µ)
µ = \(\sqrt{n(n+2)}\) B.M.
n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 1
µ = \(\sqrt{1(1+2)}\) = √3 = 1.732 B.M.
अतः Ce3+ का चुम्बकीय आघूर्ण = 1.732 B.M. होगा।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.32.
लैन्थेनॉयड श्रेणी के उन सभी तत्वों का उल्लेख कीजिए जो +4 तथा जो +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाते हैं। इस प्रकार के व्यवहार तथा उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के बीच संबंध स्थापित कीजिए |
उत्तर:
लैन्थेनॉयड श्रेणी में +4 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने वाले तत्व निम्नलिखित हैं-
सीरियम (58Ce), प्रैजियोडिमियम (59Pr), नियोडिमियम (60Nd), टर्बियम (65Tb) तथा डिसप्रोसियम (66Dy ) । इसी प्रकार +2 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाने वाले मुख्य लैन्थेनॉयड निम्न हैं- यूरोपियम (63Eu) तथा इटर्बियस (70Yb)।

लैन्थेनॉयडों में +4 तथा +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ रिक्त, अर्धपूरित तथा पूर्णपूरितf उपकोशों के अधिक स्थायित्व के कारण होती हैं। जैसे Ce+4 में उत्कृष्ट गैस विन्यास 4f0 है, इसी प्रकार Tb4+ तथा Eu2+ में 4f7 (अर्धपूरित) तथा Yb+2 में 4f14 (पूर्ण पूरित) विन्यास होता है।

प्रश्न 8.33. निम्नलिखित के संदर्भ में ऐक्टिनॉयड श्रेणी के तत्वों तथा लैन्थेनॉयड श्रेणी के तत्वों के रसायन की तुलना कीजिए । (i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (iii) रासायनिक अभिक्रियाशीलता ।
उत्तर:
इसके लिए पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न संख्या 8.20 का उत्तर देखें।

प्रश्न 8.34.
61, 91, 101 तथा 109 परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 22

प्रश्न 8.35.
प्रथम श्रेणी के संक्रमण तत्वों के अभिलक्षणों की द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के वर्गों के संगत तत्वों से ऊर्ध्वाधर वर्गों में तुलना कीजिए । निम्नलिखित बिन्दुओं पर विशेष महत्व दीजिए-
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ
(iii) आयनन एन्थैल्पी तथा
(iv) परमाण्वीय आकार ।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – प्रथम संक्रमण श्रेणी में इलेक्ट्रॉन 3d कक्षकों में भरे जाते हैं जबकि द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी में इलेक्ट्रॉन क्रमशः 4d तथा 5d कक्षकों में भरे जाते हैं तथा सामान्यतः किसी वर्ग के सभी तत्वों का विन्यास समान होता है लेकिन इसके अपवाद भी होते हैं. जो कि संक्रमण तत्वों में भी हैं।

(ii) ऑक्सीकरण अवस्थाएँ — संक्रमण तत्वों के किसी वर्ग के सभी तत्वों द्वारा सामान्यतः समान ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाई जाती हैं। ये श्रेणी के मध्य में अधिकतम तथा अन्त में न्यूनतम होती हैं।

(iii) आयनन एन्थैल्पी – प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों की तुलना में द्वितीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता है लेकिन तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान द्वितीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों से अधिक होता है।

(iv) परमाण्वीय आकार — द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के परमाणु आकार प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों से अधिक होते हैं। लेकिन लैन्थेनॉयड संकुचन के कारण द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के आकार लगभग समान होते हैं।

प्रश्न 8.36.
निम्नलिखित आयनों में प्रत्येक के लिए 3d इलेक्ट्रॉनों की संख्या लिखिए-
Ti2+, V2+, Cr3+, Mn2+, Fe2+, Fe3+, Co2+, Ni2+, Cu2+
आप इन जलयोजित आयनों (अष्टफलकीय) में पाँच 3d कक्षकों को किस प्रकार अधिग्रहीत ( occupied ) करेंगे? दर्शाइए |
उत्तर:
जलयोजित आयनों में जल (H2O) लिगेण्ड का कार्य करता है जिसके कारण समान ऊर्जा के पाँच 3d कक्षक दो भागों में विभाजित हो जाते हैं- t2g तथा egl t2g कक्षकों की ऊर्जा eg कक्षकों से कम होती है। t2g तथा eg | t2g कक्षकों के मध्य ऊर्जा अन्तर कम होता है क्योंकि H2O एक दुर्बल लिगेण्ड है। विभिन्न आयनों के इलेक्ट्रॉन इन कक्षकों में निम्न प्रकार भरे जाते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 23

प्रश्न 8.37.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्व भारी संक्रमण तत्वों के अनेक गुणों से भिन्नता प्रदर्शित करते हैं। टिप्पणी कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों तथा भारी संक्रमण तत्वों के गुणों में निम्नलिखित भिन्नता होती है-
(i) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्व सामान्यतया +2 तथा +3 ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं जबकि भारी संक्रमण तत्वों में उच्च ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी होती है।
(ii) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में धातु- धातु (M-M) बन्ध नहीं होता जो कि भारी संक्रमण तत्वों में सामान्यतः पाया जाता है। इसी कारण भारी संक्रमण तत्वों के गलनांक प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के गलनांक से अधिक होते हैं।
(iii) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में उच्च समन्वयी संख्या वाले संकुल नहीं बनते, जैसे 7 या 8 जबकि भारी संक्रमण तत्व 7 या 8 समन्वयी संख्या वाले संकुल भी बनाते हैं।
(iv) प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों में लिगण्ड की प्रकृति (प्रबलता ) आधार पर निम्न चक्रण संकुल तथा उच्च चक्रण संकुल बनते हैं जबकि भारी संक्रमण तत्व हमेशा निम्न चक्रण संकुल ही बनाते हैं।

प्रश्न 8.38.
निम्नलिखित संकुल स्पीशीज के चुंबकीय आघूर्णी के मान से आप क्या निष्कर्ष निकालेंगे ?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 24
उत्तर:
(i) K4[Mn(CN)6] का चुम्बकीय आघूर्ण = 2.2 B.M. दिया गया है। सैद्धान्तिक आधार पर सूत्र, µ = \(\sqrt{n(n+2)}\) BM
के अनुसार n = 1 होने पर µ का मान 1.732 BM आता है जो कि 2.2 के लगभग समान है।

अतः इस संकुल में Mn पर d2 sp3 संकरण होगा क्योंकि \(\overline{\mathrm{C}} \mathrm{N}\) प्रबल लिगण्ड है जिसके कारण Mn2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (t2g)5 होगा, जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है। अतः यह संकुल अनुचुम्बकीय है।

(ii) [Fe (H2O)6]2+ के लिए µ = 5.3BM दिया गया है।

अतः सूत्रानुसार n = 4 लेने पर µ = 4.89BM आता है जो कि 5.3 के लगभग समान है। अतः इस संकुल में Fe पर sp3d2 संकरण होगा क्योंकि H2O दुर्बल लिगण्ड है जिससे Fe2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (t2g)4 (eg)2 होगा, जिसमें चार अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। अतः यह संकुल भी अनुचुम्बकीय है।

(iii) K2[MnCl4] के लिए µ = 5.9BM दिया है।

अतः सूत्रानुसार n = 5 लेने पर µ = 5.91BM आता है जो कि 5.9 के लगभग समान है। अतः इस संकुल में Mn पर sp3 संकरण होगा तथा Cl दुर्बल लिगण्ड है। जिसकी उपस्थिति में Mn+2 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (eg)2 (t2g)3 होगा, जिसमें 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं। अतः यह संकुल भी अनुचुम्बकीय है।

HBSE 12th Class Chemistry d- एवं f-ब्लॉक के तत्व Intext Questions

प्रश्न 8.1.
सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण भरित d कक्षक (4d10) हैं। आप कैसे कह सकते हैं कि यह एक संक्रमण तत्व है?
उत्तर:
सिल्वर (Z=47),+1 के अलावा + 2 ऑक्सीकरण अवस्था भी प्रदर्शित करता है, जिसमें इसके 4d कक्षक अपूर्ण हैं अतः यह संक्रमण तत्व है क्योंकि संक्रमण तत्व वे होते हैं जिनमें परमाणु अवस्था या किसी भी ऑक्सीकृत अवस्था में d- कक्षक अपूर्ण होता है।

प्रश्न 8.2.
श्रेणी Sc(Z=21) से Zn(Z=30) में, जिंक की कणन एन्थैल्पी (Enthalpy of atomisation) का मान सबसे कम होता है, अर्थात् 126 kJ mol-1; क्यों?
उत्तर:
जिंक में 3d कक्षकों के इलेक्ट्रॉन धात्विक बन्ध बनाने में प्रयुक्त नहीं होते हैं क्योंकि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d104s2 होता है जबकि 3d श्रेणी के अन्य सभी धातुओं के d कक्षक अपूर्ण भरे होने के कारण ये इलेक्ट्रॉन धात्विक बनाने में प्रयुक्त होते हैं। अतः Zn में धात्विक बन्ध दुर्बल होता है इसलिए इसकी कणन एन्थैल्पी (परमाणुकरण की एन्थैल्पी) सबसे कम होती है।

प्रश्न 8.3.
संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी का कौन-सा तत्व बड़ी संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है एवं क्यों?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी में Mn सबसे अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (+2 से +7) दर्शाता है क्योंकि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d54s2 होने के कारण इसमें सर्वाधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।

प्रश्न 8.4.
कॉपर के लिए E°(M2+/M) का मान धनात्मक (+0.34 V) है। इसके संभावित कारण क्या हैं?
उत्तर:
किसी धातु के लिए E° (M2+/M) (इलेक्ट्रोड विभव) का मान परमाणुकरण की एन्थैल्पी (△aH°), आयनन एन्थैल्पी (△iH) तथा

जलयोजन एन्थैल्पी △hydH° पर निर्भर करता है। Cu(s) से \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{g})}^{+2}\) बनने के लिए आवश्यक उच्च आयनन एन्थैल्पी तथा परमाणुकरण एन्थैल्पी Cu2+ की निम्न जलयोजन एन्थैल्पी द्वारा संतुलित नहीं हो पाती है, अतः Cu2+ के लिए अपचयन विभव का मान धनात्मक होता है।

प्रश्न 8.5.
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में आयनन एन्थैल्पी (प्रथम और द्वितीय) में अनियमित परिवर्तन को आप कैसे समझायेंगे?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की प्रथम श्रेणी में प्रथम और द्वितीय आयनन एन्थैल्पी में अनियमित परिवर्तन विभिन्न 3d विन्यासों के स्थायित्व की क्षमता में भिन्नता के कारण है। उदाहरण d0, d5, d10 विन्यास असामान्य रूप से स्थायी होते हैं। अतः इनकी आयनन एन्थैल्पी उच्च होती है।

प्रश्न 8.6.
कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही क्यों प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
किसी धातु की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही होती है क्योंकि छोटे आकार, उच्च विद्युतऋणता तथा उच्च धनात्मक अपचयन विभव के कारण ऑक्सीजन अथवा फ्लुओरीन, धातु को उसकी उच्च ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत कर देती है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.7.
Cr2+ और Fe2+ में से कौन प्रबल अपचायक है और क्यों?
उत्तर:
Fe2+ की तुलना में Cr2+ एक प्रबल अपचायक पदार्थ है, क्योंकि Cr2+ से Cr3+ बनने में d4 का d3 में परिवर्तन होता है किन्तु Fe2+ Fe3+बनने में d6 का d5 में परिवर्तन होता है तथा जल जैसे माध्यम में d5 की तुलना में d3 अधिक स्थायी है। इसका कारण \(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}^3}\) विन्यास का अधिक स्थायी होना है तथा इनके E° मानों से भी यह स्पष्ट हो जाता है।

प्रश्न 8.8.
M2+(aq) आयन (Z=27) के लिए ‘प्रचक्रणमात्र’ (spin only) चुंबकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर:
परमाणु क्रमांक Z = 27 के तत्व (M) के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar]3d74s2
अतः M2+ के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = [Ar]3d7
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 8 Img 26
इसमें तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (n) हैं-
अतः चुम्बकीय आघूर्ण (µ) = \(\sqrt{n(n+2)}\) B.M.
µ = \(\sqrt{3(3+2)}\) = √15 = 3.87 B.M.

प्रश्न 8.9.
स्पष्ट कीजिए कि Cu2+ आयन जलीय विलयन में स्थायी नहीं है, क्यों? समझाइए।
उत्तर:
\(\mathrm{Cu}_{\text {(aq) }}^{+}\) की तुलना में \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+2}\) अधिक स्थायी होता है। Cu के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का मान उच्च होता है लेकिन Cu2+ की \(\Delta_{\text {hyd }} \mathrm{H}^{\ominus}\) का मान Cu+ की तुलना में उच्च ऋणात्मक होने के कारण यह द्वितीय आयनन एन्थैल्पी को संतुलित कर देता है अतः जलीय विलयन में Cu+ अस्थायीं होता है अतः यह असमानुपातित होकर Cu2+ बना देता है। इसके लिए \(\mathrm{E}^{\ominus}\) मान भी अनुकूल है।
\(2 \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}(\mathrm{s})\)

प्रश्न 8.10.
लैन्थेनॉयड आकुंचन (संकुचन contraction) की तुलना में एक तत्व से दूसरे तत्व के बीच ऐक्टिनॉयड आकुंचन अधिक होता है। क्यों?
उत्तर:
लैन्थेनॉयड संकुचन की तुलना में एक तत्व से दूसरे तत्व के बीच ऐक्टिनॉयड संकुचन अधिक होता है, क्योंकि 5f इलेक्ट्रॉन नाभिकीय आवेश से प्रभावी रूप से आकर्षित रहते हैं। अर्थात् श्रेणी में एक तत्व से दूसरे तत्व की ओर जाने पर 5f इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण प्रभाव दुर्बल होता है।

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HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
एक वृत्त की त्रिज्या 2 cm है। उसके केंद्र से 5 cm दूर स्थित किसी बिंदु से वृत्त पर दो स्पर्श रेखाएँ खींचिए तथा स्पर्श रेखा की लंबाई मापिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 1
रचना के चरण-

  1. O को केंद्र मानकर 2 cm त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए ।
  2. O से 5 cm की दूरी पर एक बिंदु P. लीजिए तथा OP को मिलाइए ।
  3. रेखाखंड OP को समद्विभाजित कीजिए । मान लीजिए समद्विभाजक रेखाखंड OP को बिंदु M पर काटता है ।
  4. M को केंद्र मानकर तथा OM त्रिज्या लेकर एक वृत्त खींचिए । मान लीजिए यह दिए गए वृत्त को बिंदुओं Q तथा R पर प्रतिच्छेद करता है।
  5. PQ तथा PR को मिलाइए । PQ तथा PR ही अभीष्ट स्पर्श रेखा – युग्म है। मापने पर PQ = PR = 4.6 cm (लगभग)।

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 2.
एक वृत्त की त्रिज्या 3 cm है। उसकी परिधि पर स्थित एक बिंदु P से केंद्र का प्रयोग किए बिना एक स्पर्श रेखा की रचना कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 2
रचना के चरण-

  1. 3 cm त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए ।
  2. वृत्त की परिधि पर एक बिंदु P लीजिए ।
  3. P से होकर जाने वाली वृत्त की एक जीवा PQ खींचिए जैसाकि आकृति में दिखाई गई है।
  4. दीर्घ चाप PQ पर एक बिंदु R लीजिए । PR व QR को मिलाइए ।
  5. अब ∠QPX = ∠PRQ बनाइए । तब PX बिंदु P पर अभीष्ट स्पर्श रेखा होगी।

प्रश्न 3.
एक दिए गए त्रिभुज ABC के समरूप एक त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ दिए गए त्रिभुज की संगत भुजाओं की \(\frac {3}{4}\) हों ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 3
रचना के चरण-

  1. एक ΔABC की रचना कीजिए ।
  2. B से BC पर एक न्यून कोण बनाती हुई नीचे की ओर एक किरण BX खींचिए ।
  3. BX पर चार समान भाग BB1, B1B2, B2B3 व B3B4 बनाएँ ।
  4. B4 को C से मिलाओ ।
  5. B3 से B3C’ || B4C खींचने के लिए ∠BB3C’ = ∠BB4C बनाइए जो BC को C’ पर काटे
  6. C’ से C’A’ || CA खींचने के लिए ∠BC’A’ = ∠BCA बनाइए जो AB को A’ पर काटे ।
  7. A’C’ को मिलाइए। इस प्रकार A’BC’ अभीष्ट त्रिभुज है जिसकी भुजाएँ ΔABC की भुजाओं की \(\frac {3}{4}\) हैं ।

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 4.
एक दिए गए त्रिभुज ABC के समरूप एक त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ त्रिभुज ABC की संगत भुजाओं की \(\frac {5}{3}\) हैं।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 4
रचना के चरण-

  1. एक ΔABC की रचना कीजिए ।
  2. B से BC पर एक न्यून कोण बनाती हुई नीचे की ओर एक किरण BX खींचिए ।
  3. BX पर पाँच समान भाग BB1, B1B2, B2B3, B3B4 व B4B5 बनाएँ।
  4. B3 को C से मिलाओ ।
  5. B5 से B5C’ || B3C खींचने के लिए ∠BB5C’ = ∠BB3C बनाइए जो BC को बढ़ाने पर C’ मिले ।
  6. C’ से C’A’ || CA खींचने के लिए ∠BC’A’ = ∠BCA बनाइए जो BA को बढ़ाने पर A’ पर मिले ।
  7. इस प्रकार ΔA’BC’ अभीष्ट त्रिभुज है जिसकी भुजाएँ ΔABC की भुजाओं की \(\frac {5}{3}\) हैं।

प्रश्न 5.
एक त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी भुजाएँ 3 सेमी और 4 सेमी और 5 सेमी हों। इस त्रिभुज के समरूप दूसरे त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ इस त्रिभुज की \(\frac {3}{2}\) हैं ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 5
रचना के चरण-

  1. एक त्रिभुज ABC बनाइए जिसकी भुजाएँ AB = 5 सेमी, BC = 4 सेमी तथा AC = 3 सेमी हों ।
  2. बिंदु A से एक किरण AX रेखाखण्ड AB के साथ न्यून कोण बनाते हुए खींचिए।
  3. किसी चाप की परकार खोलकर रेखा AX को तीन बराबर भागों AX1, X1X2, X2X3 में बाँटिए ।
  4. X2 को B से मिलाइए ।
  5. X3 से X3B’ || X2B खींचिए जो AB को बढ़ाने पर B’ पर मिले।
  6. B’ से B’C’ || BC खींचिए जो AC को बढ़ाने पर C’ पर मिले |
  7. इस प्रकार ΔAB’C’ अभीष्ट त्रिभुज है जिसकी भुजाएँ ΔABC की भुजाओं की \(\frac {3}{2}\) गुनी है।

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प्रश्न 6.
4 cm त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए और एक बाह्य बिन्दु से केन्द्र का उपयोग करते हुए, इस पर स्पर्श रेखाओं की रचना कीजिए।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 6
रचना के चरण-

  1. O को केंद्र मानकर 4.0 cm त्रिज्या की चाप द्वारा एक वृत्त खींचिए ।
  2. एक बिंदु P लीजिए। जो वृत्त की परिधि से बाहर हो ।
  3. O और P को मिलाइए ।
  4. OP को बिंदु M पर समद्विभाजित कीजिए ।
  5. अब M को केंद्र मानकर तथा OM को त्रिज्या लेकर एक वृत्त खींचिए जो दिए हुए वृत्त को Q तथा R पर प्रतिच्छेद करें ।
  6. PQ तथा PR को मिलाइए । यही PQ तथा PR वृत्त की अभीष्ट स्पर्श रेखाएँ हैं ।

प्रश्न 7.
एक चक्रीय चतुर्भुज ABCD की रचना कीजिए जिसमें AB = 3 cm, BC = 6 cm, CA = 4 cm तथा AD = 2 cm हो। ABCD के समरूप एक चतुर्भुज की भी रचना कीजिए जिसकी प्रत्येक भुजा चतुर्भुज ABCD की संगत भुजा का 1.5 गुना हो ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 7
रचना के चरण-

  1. एक रेखाखंड AC = 4 cm खींचो। A से 3 cm माप की चाप काटिए ।
  2. C से 6 cm माप की दूसरी चाप खींचिए जो पहले वाली चाप को B पर प्रतिच्छेद करे ।
  3. AB तथा BC को मिलाइए जिससे ABC त्रिभुज प्राप्त होगा ।
  4. AB तथा BC का लंब समद्विभाजक खींचो जो परस्पर O पर प्रतिच्छेद करे ।
  5. O को केंद्र तथा OA = OB = OC को त्रिज्या मानकर एक वृत्त की रचना कीजिए ।
  6. A से 2 cm माप का चाप AD पर काटिए । AD तथा DC को मिलाइए। इससे ABCD अभीष्ट चक्रीय चतुर्भुज प्राप्त होगा ।
  7. AC को AC’ = 6 cm तक बढ़ाइए। (1.5 × 4 = 6)
  8. C’ से C’ D’ || CD तथा C’ B’ || CB खींचो।
  9. AB’C’D’ अभीष्ट चतुर्भुज है, जिसकी प्रत्येक भुजा चक्रीय चतुर्भुज ABCD की भुजा 1.5 गुनी हैं ।

प्रश्न 8.
एक त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी दो भुजाएँ 4 सेमी और 5 सेमी हों और उनके बीच का कोण 45° हो। इस त्रिभुज के समरूप एक दूसरे त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी भुजाएँ इस त्रिभुज की \(\frac {3}{2}\) हो।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 8
रचना के चरण-

  1. एक त्रिभुज ABC बनाइए जिसकी भुजाएँ AB = 5 सेमी, ∠A = 45° तथा AC = 4 सेमी हों ।
  2. बिंदु A से एक किरण AX रेखाखण्ड AB के साथ न्यूनकोण बनाते हुए खींचिए ।
  3. किसी चाप की परकार खोलकर रेखा AX को तीन बराबर भागों AX1, X1X2, X2X3 में बाँटिए ।
  4. X2 को B से मिलाइए ।
  5. X3 से X3B’ || X2B खींचिए जो AB को बढ़ाने पर B’ पर मिले ।
  6. B’ से B’C’ || BC खींचिए जो AC को बढ़ाने पर C’ पर मिले ।
  7. इस प्रकार A’B’C’ अभीष्ट त्रिभुज है जिसकी भुजाएँ ΔABC की भुजाओं की \(\frac {3}{2}\) गुनी हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
रेखाखंडों को खींचने के लिए ज्यामिति बॉक्स में से किस उपकरण का प्रयोग किया जाता है ?
(A) परकार का
(B) रूलर का
(C) डिवाइडर का
(D) उपरोक्त सभी का
हल :
(B) रूलर का

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 2.
लंब रेखाओं तथा समांतर रेखाओं को खींचने के उपयोग में आने वाला उपकरण है-
(A) रूलर
(B) चांदा
(C) सेट-स्कवेयर
(D) डिवाइडर
हल :
(C) सेट – स्कवेयर

प्रश्न 3.
वृत्त खींचने के लिए उपयोग में आने वाला उपकरण है-
(A) परकार
(C) सेट – स्कवेयर
(B) रूलर
(D) चांदा
हल :
(A) परकार

प्रश्न 4.
कोणों को मापने के लिए ज्यामिति बॉक्स में से किस उपकरण का प्रयोग किया जाता है ?
(A) परकार का
(B) रूलर का
(C) सेट स्कवेयर का
(D) चांदे का
हल :
(D) चांदे का

प्रश्न 5.
संलग्न आकृति में, वृत्त के बर्हिभाग में स्थित बिंदु है-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ - 9
(A) O
(B) C
(C) A
(D) B
हल :
(B) C

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 6.
प्रश्न 5 की आकृति में वृत्त की परिधि पर स्थित बिंदु है-
(A) O
(B) C
(C) A
(D) B
हल :
(C) A

प्रश्न 7.
प्रश्न 5 की आकृति में वृत्त के अभ्यंतर में स्थित बिंदु है-
(A) 0
(B) B
(C) O और B दोनों
(D) C
हल :
(C) O और B दोनों

प्रश्न 8.
वृत्त की परिधि पर स्थित बिंदु से वृत्त पर कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं ?
(A) केवल एक
(B) शून्य
(C) दो
(D) तीन
हल :
(A) केवल एक

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 9.
वृत्त के बर्हिभाग में स्थित एक बिंदु से वृत्त पर कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं-
(A) केवल एक
(B) शून्य
(C) दो
(D) तीन
हल :
(C) दो

प्रश्न 10.
वृत्त के अभ्यंतर में स्थित एक बिंदु से वृत्त पर कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं ?
(A) केवल एक
(B) शून्य
(C) दो
(D) तीन
हल :
(B) शून्य

प्रश्न 11.
एक त्रिभुज ABC का अंतःवृत्त खींचने के लिए केंद्र लिया जाता है-
(A) कोण समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु
(B) भुजाओं के समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु
(C) शीर्ष – लंबों का प्रतिच्छेद बिंदु
(D) माध्यिकाओं का प्रतिच्छेद बिंदु
हल :
(A) कोण समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु

प्रश्न 12.
किसी त्रिभुज का परिवृत्त खींचने के लिए केंद्र लिया जाता है-
(A) कोण समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु
(B) भुजाओं के समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु
(C) शीर्ष – लंबों का प्रतिच्छेद बिंदु
(D) भुजाओं के समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु माध्यिकाओं का प्रतिच्छेद बिंदु
हल :
(B) भुजाओं के समद्विभाजकों का प्रतिच्छेद बिंदु

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 13.
समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण होता है-
(A) 45°
(C) 60°
(B) 90°
(D) 80°
हल :
(C) 60°

प्रश्न 14.
2 cm त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 5 cm की दूरी पर स्थित बिंदु से वृत्त की कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं?
(A) शून्य
(B) केवल एक
(C) तीन
(D) दो
हल :
(D) दो

प्रश्न 15.
3 cm त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 3 cm की दूरी पर स्थित बिंदु से वृत्त की कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं?
(A) शून्य
(B) केवल एक
(C) दो
(D) तीन
हल :
(B) केवल एक

प्रश्न 16.
4 cm त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 2.5 cm की दूरी पर स्थित बिंदु से वृत्त की कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं ?
(A) शून्य
(B) एक
(C) दो
(D) तीन
हल :
(A) शून्य

प्रश्न 17.
एक त्रिभुज की भुजाएँ 5 cm, 12 cm तथा 13 cm हैं इसे कहा जाएगा-
(A) समद्विबाहु त्रिभुज
(B) समबाहु त्रिभुज
(C) विषमबाहु त्रिभुज
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
हल :
(C) विषमबाहु त्रिभुज

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 18.
समद्विबाहु त्रिभुज में होती है-
(A) तीनों भुजाएँ बराबर
(B) दो भुजाएँ बराबर
(C) तीनों भुजाएँ भिन्न-भिन्न
(D) प्रत्येक कोण 60°
हल :
(B) दो भुजाएँ बराबर

प्रश्न 19.
समकोण त्रिभुज में समकोण के सामने की भुजा को कहा जाता है-
(A) आधार
(B) लंब
(C) शीर्ष-लंब
(D) कर्ण
हल :
(D) कर्ण

प्रश्न 20.
निम्नलिखित में से कौन-सा त्रिभुज बनाना संभव है ?
(A) तीन न्यून कोण वाला
(B) दो समकोण वाला
(C) दो अधिक कोण वाला
(D) एक समकोण व एक अधिक कोण वाला
हल :
(A) तीन न्यून कोण वाला

प्रश्न 21.
त्रिभुज के तीनों कोणों का योग होता है-
(A) 540°
(B) 360°
(C) 180°
(D) 720°
हल :
(C) 180°

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 22.
चतुर्भुज के चारों कोणों का योग होता है-
(A) 540°
(B) 360°
(C) 180°
(D) 720°
हल :
(B) 360°

प्रश्न 23.
जिस चतुर्भुज के चारों शीर्ष वृत्त पर हों उसे कहा जाता है-
(A) समचतुर्भुज
(B) आयत
(C) वर्ग
(D) चक्रीय चतुर्भुज
हल :
(D) चक्रीय चतुर्भुज

प्रश्न 24.
एक चक्रीय चतुर्भुज का एक कोण 70° है इसका सम्मुख कोण होगा-
(A) 110°
(B) 70°
(C) 20°
(D) 290°
हल :
(A) 110°

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 25.
10 cm लंबे रेखाखंड को 2 : 3 के अनुपात में बाँटने पर बड़े भाग की लंबाई होगी-
(A) 2 cm
(B) 4 cm
(C) 6 cm
(D) 8 cm
हल :
(C) 6 cm

प्रश्न 26.
9.6 cm लंबे रेखाखंड को 3 : 1 के अनुपात में बाँटने पर छोटे भाग की लंबाई होगी-
(A) 7.2 cm
(B) 2.4 cm
(C) 1.2cm
(D) 3.6 cm
हल :
(B) 2.4 cm

प्रश्न 27.
6 cm के त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 10 cm पर स्थित बिंदु से वृत्त की स्पर्श रेखाओं की लंबाई होगी-
(A) 8 cm
(B) 7 cm
(C) 6 cm
(D) 9 cm
हल :
(A) 8 cm

प्रश्न 28.
3 cm के त्रिज्या के वृत्त के केंद्र से 5 cm दूर स्थित बिंदु से वृत्त की स्पर्श रेखाओं की लंबाई होगी-
(A) 5 cm
(B) 4 cm
(C) 3 cm
(D) 2 cm
हल :
(B) 4cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 11 रचनाएँ

प्रश्न 29.
यदि वृत्त के किसी बाहरी बिंदु से वृत्त के केंद्र की दूरी 10 cm तथा स्पर्श रेखा की लंबाई 8 cm हो तो वृत्त की
त्रिज्या होगी –
(A) 9 cm
(C) 7 cm
(B) 8 cm
(D) 6 cm
हल :
(D) 6 cm

प्रश्न 30.
यदि वृत्त के किसी बाहरी बिंदु से वृत्त के केंद्र की दूरी 25 cm तथा स्पर्श रेखा की लंबाई 24 cm हो तो वृत्त की त्रिज्या होगी –
(A) 7 cm
(B) 6 cm
(C) 5 cm
(D) 9 cm
हल :
(A) 7 cm

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HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
एक कोल्हू का बैल 3m लंबी रस्सी से बंधा हुआ है। वह 14 चक्करों में कितनी दूरी तय करेगा ?
हल :
यहाँ पर,
कोल्हू के बैल के वृत्ताकार पथ की त्रिज्या (r) = 3 m
बैल द्वारा वृत्ताकार पथ पर 1 चक्कर में तय दूरी = 2πr
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 3m = \(\frac {132}{7}\)m
अतः बैल द्वारा वृत्ताकार पथ पर 14 चक्करों में तय दूरी = \(\frac {132}{7}\) × 14 m
= 264 m

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 2.
समान केंद्र वाले दो वृत्तों की त्रिज्याएँ 350m और 490m हैं। इनकी परिधियों में कितना अंतर है ?
हल :
यहाँ पर,
पहले वृत्त की त्रिज्या (r1) = 350 m
∴ पहले वृत्त की परिधि (c1) = 2πr1
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 350m
= 2200m
दूसरे वृत्त की त्रिज्या (r2) = 490m
∴ दूसरे वृत्त की परिधि (c2) = 2πr2
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 490m
= 3080m
अतः दोनों वृत्तों की परिधियों में अंतर = c2 – c1
= (3080 – 2200) m
= 880m

प्रश्न 3.
एक वृत्ताकार तालाब के अनुदिश 90 cm चौड़ी एक पटरी बनी हुई है। एक व्यक्ति पटरी के बाहरी किनारे के अनुदिश 66 cm लंबे डग भरता हुआ चल रहा है। 400 डगों में वह एक चक्कर पूरा कर लेता है । तालाब की त्रिज्या कितनी है ?
हल :
यहाँ पर, व्यक्ति द्वारा 1 डग भरने में तय लंबाई = 66 cm
व्यक्ति द्वारा 400 डगों को भरने में तय लंबाई = 66 × 400 cm = 26400 cm
अतः पटरी की बाहरी परिधि (c) = 26400 cm
पटरी की बाहरी त्रिज्या (r) = \(\frac{c}{2 \pi}=\frac{26400}{2 \times \frac{22}{7}}\) cm
= \(\frac{26400 \times 7}{2 \times 22}\)
= 4200 cm
पटरी की चौड़ाई = 90 cm
∴ तालाब की त्रिज्या = (4200 – 90) cm
= 4110 cm = 41.1m

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 4.
(i) 4 cm त्रिज्या वाले एक वृत्त के एक त्रिज्यखण्ड का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसका कोण 30° है। (π = 3.14 का प्रयोग करते हुए)
(ii) 7 सेमी त्रिज्या वाले एक वृत्त के त्रिज्यखंड (sector) का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जिसका केन्द्र पर कोण 30° हो।
(iii) 6 सेमी त्रिज्या और 60° कोण वाले वृत्त के त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
(i) यहाँ पर, वृत्त की त्रिज्या (r) = 4 cm
त्रिज्यखण्ड का कोण (θ) = 30°
∴ त्रिज्यखण्ड का क्षेत्रफल = \(\frac {θ}{360°}\) × πr²
= \(\frac {30}{360}\) × 3.14 × 4 × 4
= 4.19 cm2

(ii) यहाँ पर,
वृत्त की त्रिज्या (r) = 7 सेमी
त्रिज्यखण्ड का कोण (θ) = 30°
∴ त्रिज्यखण्ड का क्षेत्रफल = \(\frac {θ}{360}\) × πr²
= \(\frac{30}{360} \times \frac{22}{7}\) × 7 × 7
= \(\frac {77}{6}\) सेमी2

(iii) यहाँ पर,
वृत्त की त्रिज्या (r) = 6 सेमी
त्रिज्यखण्ड का कोण (θ) = 60°
∴ त्रिज्यखण्ड का क्षेत्रफल = \(\frac {θ}{360}\) × πr²
= \(\frac{60}{360} \times \frac{22}{7}\) × 6 × 6
= \(\frac {132}{7}\) सेमी2

प्रश्न 5.
भुजाओं 30 cm और 40 cm वाली, धातु की एक आयताकार शीट में से जितनी बड़ी से बड़ी वृत्ताकार काटी जा सकती थी, काट ली गई है। शेष शीट का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
दी गई शीट में से काटी गई बड़ी से बड़ी
वृत्ताकार शीट का व्यास (d) = 30 cm
काटी गई वृत्ताकार शीट की त्रिज्या (r) = \(\frac {30}{2}\)cm = 15 cm
∴ वृत्ताकार शीट का क्षेत्रफल (A) = πr²
= \(\frac {22}{7}\) × 15 × 15 cm²
= \(\frac {4950}{7}\) cm²
= 707.14 cm²
दी गई आयताकार शीट का क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई
= 40 × 30 cm²
= 1200 cm²
अतः शेष शीट का क्षेत्रफल = (1200 – 707.14) cm²
= 492.86 cm²

प्रश्न 6.
व्यास 150 cm वाले किसी कुएँ के चारों ओर पत्थर की एक मेड़ बनी है । यदि इस मेड़ के बाहरी घेरे की लंबाई 660 cm हो, तो इस मेड़ की चौड़ाई ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 1
यहाँ पर,
मेड़ के बाहरी घेरे की लंबाई = परिधि (c) = 660 cm
∴ मेड़ के बाहरी घेरे की त्रिज्या (r1) = \(\frac{\mathrm{c}}{2 \pi}=\frac{660}{2 \times \frac{22}{7}}\) cm
= \(\frac{660 \times 7}{2 \times 22}\)cm = 105 cm
मेड़ के अंदर घेरे का व्यास (d) = 150 cm
मेड़ के अंदर घेरे की त्रिज्या (r2) = \(\frac {150}{2}\)cm = 75cm
अतः मेड़ की चौड़ाई = r1 – r2
= (105 – 75)cm = 30cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 7.
एक वृत्तीय बाग की त्रिज्या 70 मी० है। इसके गिर्द बाहर की ओर एक 3.5 मी० चौड़ी सड़क बनी है। सड़क बनाने पर क्या व्यय होगा, जबकि व्यय की दर 20 रु० प्रति वर्ग मी० हो ?
हल :
वृत्तीय बाग की अंदर की त्रिज्या = 70 मी०
वृत्तीय बाग का अंदर का = π × (त्रिज्या)2
= \(\frac {22}{7}\) × 70 × 70 = 15400 वर्ग मी०
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 2
वृत्तीय बाग की बाहर की त्रिज्या = 70 + 3.5 = 73.5 मी०
वृत्तीय बाग का बाहर का क्षेत्रफल = π × (त्रिज्या)2
= \(\frac {22}{7}\) × (73.5)2
= \(\frac {22}{7}\) × 73.5 × 73.5
= 16978.50 वर्ग मी०
सड़क का क्षेत्रफल = बाहर का क्षेत्रफल – अंदर का क्षेत्रफल
= 16978.50 – 15400 वर्ग मी०
= 1578.50 वर्ग मी०
1 वर्ग मी० सड़क बनाने पर खर्च = 20 रु०
1578.50 वर्ग मी० सड़क बनाने पर खर्च = 20 × 1578.50
= 31570 रुपए

प्रश्न 8.
एक वृत्ताकार मैदान के चारों ओर तार लगाया गया है। तार लगाने का खर्च 12 रु० प्रति मी० की दर से 2640 रु० है । इसके बाद मैदान को 0.50 रु० प्रति वर्ग मी० की दर से जोता गया है। मैदान की जुताई में कितना धन खर्च होगा ? (π = \(\frac {22}{7}\) लीजिए)
हल :
यहाँ पर, यदि व्यय 12 रु० हो तो बाड़ की लंबाई = 1 m
यदि व्यय 1 रु० हो तो बाड़ की लंबाई = \(\frac {1}{12}\) m
यदि व्यय 2640 रु० हो तो बाड़ की लंबाई = \(\frac {1}{12}\) × 2640m = 220 m
⇒ वृत्ताकार मैदान की परिधि = 220 m
⇒ 2πr = 220 m [जहाँ r मैदान की त्रिज्या]
⇒ 2 × \(\frac {22}{7}\) × r = 220m
⇒ r = 200 × \(\frac {1}{2}\) × \(\frac {7}{22}\) = 35m
वृत्ताकार मैदान का क्षेत्रफल = πr² = \(\frac {22}{7}\) × 35 × 35m²
= 3850m²
1m² मैदान की जुताई का व्यय = 0.50 रु०
3850m² मैदान की जुताई का व्यय = 3850 × 0.50 रु०
= 1925 रु०

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 9.
एक वृत्ताकार ट्रैक की आंतरिक परिधि 220m है। यदि ट्रैक की चौड़ाई प्रत्येक स्थान पर 7m हो तो 2 रु० प्रति m की दर से बाह्य वृत्त के चारों ओर तार लगाने के खर्च की गणना कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 3
यहाँ पर,
माना वृत्ताकार पथ की बाह्य त्रिज्या = R m
तथा वृत्ताकार पथ की आंतरिक त्रिज्या = r m
वृत्ताकार पथ की आंतरिक परिधि = 220m
⇒ 2πr = 220
⇒ 2 × \(\frac {22}{7}\) × r = 220m
⇒ r = 220 × \(\frac{1}{2} \times \frac{7}{22}\) = 35m
पथ की चौड़ाई = 7 m
∴ वृत्ताकार पथ की बाह्य त्रिज्या (R) = r + 7 = (35 + 7)m = 42 m
वृत्ताकार पथ की बाह्य परिधि = 2π R
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 42m = 264 m
1m बाह्य पथ पर तार लगाने का व्यय = 2 रु०
264m बाह्य पथ पर तार लगाने का व्यय = 264 × 2 रु०
= 528 रु०

प्रश्न 10.
21 cm त्रिज्या के वृत्त से 150° कोण वाला त्रिज्यखंड काटा गया है । त्रिज्यखंड की संगत चाप की लंबाई और क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
वृत्त के त्रिज्यखंड की त्रिज्या (r) = 21cm
त्रिज्यखंड की चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण (θ) = 150°
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 4

प्रश्न 11.
एक घड़ी की मिनट की सुई 10 cm लंबी है । मिनट की सुई द्वारा प्रातः 9 बजे से 9.35 बजे तक रचित क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
मिनट की सुई की लंबाई (r) = 10 cm
मिनट की सुई द्वारा 9 बजे से 9.35 बजे तक तय कोण (θ) = (\(\frac {360}{60}\) × 35)°
= 210°
अतः मिनट की सुई द्वारा 9 बजे से 9.35 बजे तक तय क्षेत्रफल = \(\frac {θ}{360}\) × πr²
= \(\frac{210}{360} \times \frac{22}{7}\) × 10 × 10 cm²
= 183.3 cm²

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 12.
एक वृत्त के चाप की लंबाई 5π है तथा त्रिज्यखंड 20π cm² के क्षेत्रफल से घिरा है । वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 5
यहाँ पर, माना वृत्त का केंद्र O तथा वृत्त की त्रिज्या l cm है।
प्रश्नानुसार,
चाप AB की लंबाई = 5πcm
⇒ \(\frac {θ}{360}\) × 2πr = 5π
⇒ r = \(\frac{360}{\theta} \times \frac{1}{2}\) × 5 = \(\frac {900}{θ}\) …………….(i)
तथा त्रिज्यखंड OAB का क्षेत्रफल = 20π cm²
⇒ \(\frac {θ}{360}\) × πr² = 20π
⇒ r2 = 20 × \(\frac {360}{θ}\) = \(\frac {7200}{θ}\) …………….(ii)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) से भाग करने पर,
\(\frac{r^2}{r}=\frac{7200}{\theta} \times \frac{\theta}{900}\)
⇒ r = 8
अतः वृत्त की त्रिज्या = 8

प्रश्न 13.
14 cm त्रिज्या वाले वृत्त की एक जीवा केंद्र पर समकोण बनाती है, वृत्त के लघु तथा दीर्घ वृत्तखंडों के क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 6
यहाँ पर, वृत्त की त्रिज्या (r) = 14 cm
माना जीवा AB द्वारा वृत्त के केंद्र पर अंतरित कोण (θ) = 90°
संगत लघु वृत्तखंड (APB) का क्षेत्रफल = (त्रिज्यखंड OAPB – समकोण ΔOAB) का क्षेत्रफल
= [\(\frac {θ}{360}\) × πr² – \(\frac {1}{2}\) × OA × OB]
= [\(\frac{90}{360} \times \frac{22}{7}\) × 14 × 14 – \(\frac {1}{2}\) × 14 × 14]cm²
= [154 – 98]cm² = 56 cm²
संगत दीर्घ वृत्तखंड AQB का क्षेत्रफल = वृत्त का क्षेत्रफल – लघुखंड का क्षेत्रफल
= [πr² – 56]cm²
= [\(\frac {22}{7}\) × 14 × 14 – 56]cm²
= [616 – 56] cm²
= 560 cm²

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 14.
एक 70m × 52m माप के आयताकार मैदान के कोने में एक घोड़े को 21m लंबी रस्सी से घास चरने के लिए बाँधा गया है। वह कितने क्षेत्रफल में घास चर सकता है? (π = 3. 14 लीजिए)
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 7
प्रश्नानुसार, छायांकित भाग उस क्षेत्रफल को दर्शाता है, जिसे घोड़ा चर सकता है।
अब छायांकित भाग (चतुर्थांश) के वृत्त की त्रिज्या (r) = 21m
छायांकित भाग (चतुर्थांश) का क्षेत्रफल = \(\frac{\pi r^2}{4}\)
= \(\frac{1}{4} \times \frac{22}{7}\) × 21 × 21 m2
= \(\frac {693}{2}\) = 346.5m2

प्रश्न 15.
संलग्न आकृति में, छायांकित भाग का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 8
आकृति अनुसार,
वृत्त का व्यास (AC) = आयत ABCD का विकर्ण
= \(\sqrt{(\mathrm{AB})^2+(\mathrm{BC})^2}\)
= \(\sqrt{(8)^2+(6)^2}\)
= \(\sqrt{64+36}\)
= \(\sqrt{100}\) = 10 cm
वृत्त की त्रिज्या (r) = \(\frac{\mathrm{AC}}{2}=\frac{10}{2}\) = 5cm
∴ वृत्त का क्षेत्रफल = πr²
= 3.14 × 5 × 5 cm² = 78.50 cm²
आयत ABCD का क्षेत्रफल = AB × BC
= 8 × 6 cm²
= 48 cm²
अतः छायांकित भाग का क्षेत्रफल = वृत्त का क्षेत्रफल – आयत ABCD का क्षेत्रफल
= (78.50 – 48) cm²
= 30.50 cm²

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 16.
एक समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल 49\(\sqrt{3}\) cm² है। प्रत्येक शीर्ष को केंद्र मानकर त्रिभुज की भुजा की लंबाई की आधी त्रिज्या लेकर वृत्त खींचे गए हैं, जैसा कि संलग्न आकृति में दर्शाया गया है । त्रिभुज के उस भाग का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए जो वृत्तों में सम्मिलित नहीं है (\(\sqrt{3}\) = 1.73 लीजिए)
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 9
यहाँ पर,
समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल = 49\(\sqrt{3}\) cm²
⇒ \(\frac{\sqrt{3}}{4}\) (भुजा)² = 49\(\sqrt{3}\)
⇒ (भुजा)² = 49\(\sqrt{3}\) × \(\frac{4}{\sqrt{3}}\) = 196 = (14)²
⇒ भुजा = 14 cm
∴ प्रत्येक वृत्त की त्रिज्या (r) = \(\frac {14}{2}\) = 7 cm
प्रत्येक त्रिज्यखंड का कोण (θ) = 60° (समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण)
तीनों त्रिज्यखंडों का क्षेत्रफल = 3[\(\frac {θ}{360}\) × πr²] = 3[\(\frac{60}{360} \times \frac{22}{7}\) × 7 × 7]cm²
= 77 cm²
अतः छायांकित क्षेत्रफल जो वृत्तों में सम्मिलित नहीं है = ΔABC का क्षेत्रफल – तीनों त्रिज्यखंडों का क्षेत्रफल
= (49 × 1.73 – 77 ) cm²
= 7.77 cm²

प्रश्न 17.
एक वृत्त की परिधि ज्ञात कीजिए जिसका क्षेत्रफल 6.16 cm² है।
हल :
यहाँ पर
वृत्त का क्षेत्रफल = 6.16 cm²
⇒ πr² = 6.16
⇒ r² = \(\frac {616}{π}\)
⇒ r² = \(\frac{6.16 \times 7}{22}\) = 1.96
⇒ r = \(\sqrt{1.96}\) = 1.4 cm
अतः वृत्त की परिधि = 2πr
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 1.4 = 8.8 cm

प्रश्न 18.
वृत्त का क्षेत्रफल क्या है, जिसकी परिधि 11 cm भुजा के एक वर्ग के परिमाप के बराबर है?
हल :
यहाँ पर,
वर्ग की भुजा = 11 cm
वर्ग का परिमाप = 4 × भुजा
= 4 × 11 = 44 cm
प्रश्नानुसार,
वृत्त की परिधि = वर्ग का परिमाप
2πr = 44
r = \(\frac {44}{2π}\)
= \(\frac{44}{2} \times \frac{7}{22}\) = 7 cm
अतः वृत्त का क्षेत्रफल = πr² = \(\frac {22}{7}\) × 7 × 7
= 154 cm²

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 19.
अर्ध-वृत्ताकार डिजाइन के टुकड़े की परिधि 72 cm है। इसका क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
माना अर्धवृत्ताकार डिजाइन के टुकड़े की त्रिज्या = r cm
दिया है अर्धवृत्ताकार डिजाइन के टुकड़े की परिधि = 72 cm
⇒ \(\frac {1}{2}\)(2πr) = 72
⇒ πr = 72
⇒ r = \(\frac {72}{π}\)cm
अर्धवत्ताकार डिजाइन के टुकड़े का क्षेत्रफल = \(\frac {1}{2}\)πr²
= \(\frac {1}{2}\) × π × \(\frac {72}{π}\) × \(\frac {72}{π}\)
= \(\frac {1}{2}\) × \(\frac{72 \times 72 \times 7}{22}\)
= 824.73 cm²

प्रश्न 20.
एक वृत्त की परिधि व्यास से 33.6 cm अधिक है । वृत्त का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
मान लीजिए वृत्त की त्रिज्या = r cm
∴ व्यास = 2r cm तथा परिधि = 2πr cm
दिया गया है कि वृत्त की परिधि उसके व्यास से 33.6 cm अधिक है। अर्थात्
परिधि = व्यास + 33.6
⇒ 2πr = 2r + 33.6
⇒ 2(\(\frac {22}{7}\))r = 2r + 33.6
⇒ 44r = 14r + 235.2
⇒ 30r = 235.2
⇒ r = \(\frac {235.2}{30}\) = 7.84 cm
वृत्त का क्षेत्रफल = πr²
= \(\frac {22}{7}\) × 7.84 × 7.84
= 22 × 1.12 × 7.84 cm²
= 193.18 cm²

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
एक वृत्त के अनुदिश एक बार चलने में तय की दूरी को कहा जाता है-
(A) त्रिज्या
(B) व्यास
(C) परिधि
(D) क्षेत्रफल
हल :
(C) परिधि

प्रश्न 2.
वृत्त की परिधि और व्यास का अनुपात है :
(A) 2π : 1
(B) 7 : 1
(C) 1 : 1
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) π : 1

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 3.
π एक ……………….. संख्या है।
(A) परिमेय
(B) सम
(C) विषम
(D) अपरिमेय
हल :
(D) अपरिमेय

प्रश्न 4.
वृत्त की परिधि और त्रिज्या का अनुकूल है :
(A) 2π : 1
(B) π : 1
(C) 1 : 1
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) 2π : 1

प्रश्न 5.
अर्धवृत्त में बना प्रत्येक कोण होता है-
(A) 45°
(B) 60°
(C) 90°
(D) 180°
हल :
(C) 90°

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 6.
संलग्न आकृति में केंद्र वाले वृत्त के अंतर्गत एक समबाहु त्रिभुज ABC है तो ∠BOC = ∠COA = ∠AOB का मान होगा-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 10
(A) 60°
(C) 30°
(B) 90°
(D) 120°
हल :
(D) 120°

प्रश्न 7.
7 cm त्रिज्या वाले वृत्त की परिधि होगी :
(A) 154 cm2
(B) 154 cm
(D) 44cm2
(C) 44 cm
हल :
(D) 44 cm

प्रश्न 8.
d व्यास वाले वृत्त की परिधि होगी-
(A) πd2
(B) 2πd
(C) πd
(D) πd2
हल :
(C) πd

प्रश्न 9.
3.5 cm त्रिज्या वाले वृत्त की परिधि होगी :
(A) 22 cm
(B) 22 cm2
(C) 44 cm2
(D) 44 cm
हल :
(A) 22 cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 10.
उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसकी परिधि 44 से.मी. हो ?
(A) 14 cm
(B) 7 cm
(C) 49 cm
(D) 28 cm
हल :
(B) 7 cm

प्रश्न 11.
यदि π = 3.14 हो तो 2.5 cm त्रिज्या वाले वृत्त की परिधि होगी-
(A) 15.7 m
(B) 15.7 cm
(C) 1.57 m
(D) 1.57 cm
हल :
(B) 15.7 cm

प्रश्न 12.
यदि π = 3.14 हो तो 12.56 cm परिधि वाले वृत्त का व्यास होगा-
(A) 8 cm
(B) 6 cm
(C) 4 cm
(D) 2 cm
हल :
(C) 4 cm

प्रश्न 13.
एक वृत्ताकार सिक्के का व्यास 2 cm है । इसकी परिधि होगी-
(A) \(\frac {22}{7}\) cm
(B) \(\frac {11}{7}\) cm
(C) \(\frac {88}{7}\) cm
(D) \(\frac {44}{7}\) cm
हल :
(D) \(\frac {44}{7}\) cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 14.
गारे के उस वृत्ताकार गड्ढे का व्यास क्या होगा जिसकी परिधि 220 cm है ?
(A) 70 cm
(B) 140 cm
(C) 35 cm
(D) 17.5 cm
हल :
(A) 70 cm

प्रश्न 15.
यदि π = 3.14 हो तो 75.36 cm परिधि वाली खाने की किसी प्लेट की त्रिज्या होगी-
(A) 24 cm
(B) 12 cm
(C) 6 cm
(D) 17.5 cm
हल :
(D) 3 cm

प्रश्न 16.
एक कोल्हू का बैल 3m लंबी रस्सी से बँधा हुआ है, वह एक चक्कर में दूरी तय करेगा-
(A) \(\frac {33}{7}\) m
(B) \(\frac {66}{7}\) m
(C) \(\frac {132}{7}\) m
(D) \(\frac {264}{7}\) m
हल :
(C) \(\frac {132}{7}\) m

प्रश्न 17.
दो पहियों की त्रिज्याओं में अनुपात 3 : 4 है। इनकी परिधियों में अनुपात होगा-
(A) 6 : 4
(B) 3 : 8
(C) \(\frac {3}{2}\) : 4
(D) 3 : 4
हल :
(D) 3 : 4

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 18.
वृत्त के व्यास व त्रिज्या में क्या संबंध होता है ?
(A) व्यास = 2 × त्रिज्या
(B) त्रिज्या = 2 × व्यास
(C) व्यास = त्रिज्या / 2
(D) व्यास = 4 × त्रिज्या
हल :
(A) व्यास = 2 × त्रिज्या

प्रश्न 19.
7 cm त्रिज्या के वृत्त का क्षेत्रफल होगा :
(A) 154 cm
(B) 154 cm2
(C) 44 cm
(D) 44 cm2
हल :
(B) 154 cm2

प्रश्न 20.
त्रिज्या r वाले अर्धवृत्त का क्षेत्रफल होगा-
(A) πr2
(B) \(\frac {1}{2}\)πr2
(C) 2πr2
(D) 2πr
हल :
(B) \(\frac {1}{2}\)πr2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 21.
त्रिज्या r वाले वृत्त के चतुर्थांश का क्षेत्रफल होगा-
(A) πr2
(B) \(\frac {1}{2}\)πr2
(C) \(\frac {1}{4}\)πr2
(D) 4πr2
हल :
(C) \(\frac {1}{4}\)πr2

प्रश्न 22.
यदि एक वृत्त का परिमाप और क्षेत्रफल संख्यात्मक रूप में बराबर हों तो उस वृत्त की त्रिज्या होगी-
(A) 2 मात्रक
(B) π मात्रक
(C) 4 मात्रक
(D) 7 मात्रक
हल :
(A) 2 मात्रक

प्रश्न 23.
दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 12cm व 7cm हैं । उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसकी परिधि इन दोनों वृत्तों की परिधियों के योग के बराबर है?
(A) 5cm
(B) 9.2cm
(C) 19cm
(D) 17cm
हल :
(C) 19cm

प्रश्न 24.
दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 15cm व 10cm हैं । उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसकी परिधि इन दोनों वृत्तों की परिधियों के योग के बराबर है?
(A) 5cm
(B) 19cm
(C) 25cm
(D) 17cm
हल :
(C) 25cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 25.
दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 17cm व 9cm हैं । उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसकी परिधि इन दोनों वृत्तों की परिधियों के योग के बराबर है?
(A) 8cm
(B) 16cm
(C) 13cm
(D) 26cm
हल :
(D) 26cm

प्रश्न 26.
दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 4cm व 3cm हैं । उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसका क्षेत्रफल इन दोनों वृत्तों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर है?
(A) 5cm
(B) 3.5cm
(C) 7cm
(D) 1cm
हल :
(A) 5cm

प्रश्न 27.
दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 8cm व 6cm हैं। उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसका क्षेत्रफल इन दोनों वृत्तों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर है?
(A) 14cm
(B) 12cm
(C) 10cm
(D) 2cm
हल :
(C) 10cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 28.
दो वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 12cm व 9cm हैं । उस वृत्त की त्रिज्या क्या होगी जिसका क्षेत्रफल इन दोनों वृत्तों के क्षेत्रफलों के योग के बराबर है?
(A) 21cm
(B) 15cm
(C) 10.5cm
(D) 7.5cm
हल :
(B) 15cm

प्रश्न 29.
उस वृत्ताकार खेत की परिधि क्या होगी जिस पर 24 रु० प्रति मीटर की दर से बाड़ लगाने का व्यय 5280 रु० है?
(A) 110m
(B) 440m
(C) 330m
(D) 220m
हल :
(D) 220m

प्रश्न 30.
उस वृत्ताकार खेत की परिधि क्या होगी जिस पर 25 रु० प्रति मीटर की दर से बाड़ लगाने का व
(A) 220m
(B) 330m
(C) 440m
(D) 110m
हल :
(A) 220m

प्रश्न 31.
उस वृत्ताकार खेत की परिधि क्या होगी जिस पर 20 रु० प्रति मीटर की दर से बाड़ लगाने का व्यय 5000 रु० है?
(A) 500m
(B) 250m
(C) 125m
(D) 375m
हल :
(B) 250m

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 32.
200 cm व्यास वाले वृत्त का क्षेत्रफल होगा-
(A) \(\frac {22}{7}\)mm2
(B) \(\frac {22}{7}\)dm2
(C) \(\frac {22}{7}\)cm2
(D) \(\frac {22}{7}\)m2
हल :
(D) \(\frac {22}{7}\)m2

प्रश्न 33.
154 cm2 क्षेत्रफल वाले वृत्त की त्रिज्या होगी –
(A) 7 cm
(B) 14 cm
(C) 3.5 cm
(D) 1.75 cm
हल :
(A) 7 cm

प्रश्न 34.
\(\frac {2200}{7}\)dm2 क्षेत्रफल वाले वृत्त की त्रिज्या होगी –
(A) 20 cm
(B) 10 dm
(C) 20 dm
(D) 10 cm
हल :
(B) 10 dm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 35.
π का मान 3.14 लेते हुए उस वृत्त की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका क्षेत्रफल 314 cm2 है
(A) 20 dm
(B) 20 cm
(C) 10 cm
(D) 10 dm
हल :
(C) 10 cm

प्रश्न 36.
10 cm व्यास वाली वृत्ताकार प्लेट का क्षेत्रफल होगा-
(A) \(\frac {550}{7}\)cm2
(B) \(\frac {5500}{7}\)cm2
(C) \(\frac {275}{7}\)cm2
(D) \(\frac {2750}{7}\)cm2
हल :
(A) \(\frac {550}{7}\)cm2

प्रश्न 37.
0.50 रु० प्रति वर्ग मीटर की दर 3850m2 क्षेत्रफल को जोतने का व्यय होगा-
(A) 1925 रु०
(B) 19.25 रु०
(C) 192.5 रु०
(D) 19250 रु०
हल :
(A) 1925 रु०

प्रश्न 38.
संलग्न आकृति के दो संकेंद्रीय वृत्तों की त्रिज्याएँ क्रमशः 10.5cm व 21cm हैं। इनके बीच घिरे छायांकित क्षेत्र का क्षेत्रफल होगा-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 11
(A) 346.5 cm2
(B) 1039.5 cm2
(C) 693.0 cm2
(D) 1732.5cm2
हल :
(B) 1039.5 cm2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 39.
दो संकेंद्रीय वृत्तों जिनकी त्रिज्याएँ R तथा r हों, के बीच घिरे क्षेत्र का क्षेत्रफल होगा-
(A) 2π (R – r)
(B) 2π (R2 – r2)
(C) π(R2 – r2)
(D) π(R2 + r2)
हल :
(C) π(R2 – r2)

प्रश्न 40.
यदि किसी वृत्त की त्रिज्या को दुगुना कर दिया जाए तो प्राप्त वृत्त के क्षेत्रफल का दिए गए वृत्त के क्षेत्रफल से अनुपात होगा-
(A) 1 : 2
(B) 1 : 3
(C) 1 : 4
(D) 1 : 9
हल :
(C) 1 : 4

प्रश्न 41.
यदि किसी वृत्त की त्रिज्या को तीन गुणा कर दिया जाए तो प्राप्त वृत्त के क्षेत्रफल का दिए गए वृत्त के क्षेत्रफल से अनुपात होगा-
(A) 1 : 3
(B) 1 : 9
(C) 2 : 3
(D) 2 : 9
हल :
(B) 1 : 9

प्रश्न 42.
यदि किसी वृत्त की त्रिज्या को चार गुणा कर दिया जाए तो प्राप्त वृत्त के क्षेत्रफल का दिए गए वृत्त के क्षेत्रफल से अनुपात होगा-
(A) 1 : 4
(B) 1 : 9
(C) 1 : 16
(D) 1 : 8
हल :
(C) 1 : 16

प्रश्न 43.
वृत्तीय क्षेत्र का वह भाग जो दो त्रिज्याओं और संगत चाप से घिरा हो, उसे वृत्त का एक ………………… कहा जाता है ।
(A) त्रिज्यखंड
(B) अर्धवृत्त
(C) वृत्तखंड
(D) परिमाप
हल :
(A) त्रिज्यखंड

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 44.
वृत्तीय क्षेत्र का वह भाग जो एक जीवा और संगत चाप के बीच में परिबद्ध हो, उसे कहा जाता है-
(A) त्रिज्यखंड
(B) क्षेत्रफल
(C) परिमाप
(D) वृत्तखंड
हल :
(D) वृत्तखंड

प्रश्न 45.
संलग्न आकृति में छायांकित क्षेत्र कहलाता है-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 12
(A) लघु त्रिज्यखंड
(B) दीर्घ त्रिज्यखंड
(C) लघु वृत्तखंड
(D) दीर्घ वृत्तखंड
हल :
(A) लघु त्रिज्यखंड

प्रश्न 46.
प्रश्न 45 की आकृति में क्षेत्र OAQB कहलाता है-
(A) लघु त्रिज्यखंड
(B) दीर्घ त्रिज्यखंड
(C) लघु वृत्तखंड
(D) दीर्घ वृत्तखंड
हल :
(B) दीर्घ त्रिज्यखंड

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 47.
संलग्न आकृति में, यदि O वृत्त का केंद्र तथा PQ, एक जीवा हो तो छायांकित भाग को कहा जाता है-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 13
(A) लघु त्रिज्यखंड
(B) दीर्घ त्रिज्यखंड
(C) लघु वृत्तखंड
(D) दीर्घ वृत्तखंड
हल :
(C) लघु वृत्तखंड

प्रश्न 48.
संलग्न आकृति में, यदि AB वृत्त की जीवा तथा O वृत्त का केंद्र हो, तो छायांकित भाग कहलाता है-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 14
(A) लघु त्रिज्यखंड
(B) दीर्घ त्रिज्यखंड
(C) लघु वृत्तखंड
(D) दीर्घ वृत्तखंड
हल :
(D) दीर्घ वृत्तखंड

प्रश्न 49.
त्रिज्या r वाले वृत्त के एक त्रिज्यखंड जिसका कोण अंशों में θ है, उसके संगत चाप की लंबाई होगी-
(A) \(\frac {θ}{360}\) × 2πr
(B) \(\frac {θ}{360}\) × πr
(C) \(\frac {θ}{360}\) × πr2
(D) \(\frac {θ}{360}\) × 2πr2
हल :
(A) \(\frac {θ}{360}\) × 2πr

प्रश्न 50.
त्रिज्या r वाले वृत्त के एक त्रिज्यखंड जिसका कोण अंशों में θ है, का क्षेत्रफल होगा –
(A) \(\frac {θ}{360}\) × 2πr
(B) \(\frac {θ}{360}\) × πr
(C) \(\frac {θ}{360}\) × πr2
(D) \(\frac {θ}{360}\) × 2πr2
हल :
(C) \(\frac {θ}{360}\) × πr2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 51.
त्रिज्या R वाले वृत्त के उस दीर्घ त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल जिसका कोण θ° है, होगा –
(A) \(\frac {θ}{360}\) × πR2
(B) \(\frac {θ}{180}\) × πR2
(C) (\(\frac{360-\theta}{360}\)) × πR2
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(C) (\(\frac{360-\theta}{360}\)) × πR2

प्रश्न 52.
त्रिज्या r वाले वृत्त के उस त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल जिसका कोण 1° है-
(A) πr2 / 360
(B) πr2 / 180
(C) 2πr / 360
(D) 2πr2 / 360
हल :
(A) πr2 / 360

प्रश्न 53.
6cm त्रिज्या वाले एक वृत्त के उस त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल क्या होगा, जिसका कोण 60° है ?
(A) \(\frac {132}{7}\) cm3
(B) \(\frac {132}{7}\) cm2
(C) \(\frac {132}{7}\) cm
(D) \(\frac {44}{7}\) cm2
हल :
(B) \(\frac {132}{7}\) cm2

प्रश्न 54.
22cm परिधि वाले वृत्त के चतुर्थांश का क्षेत्रफल होगा-
(A) \(\frac {77}{2}\)cm2
(B) \(\frac {77}{4}\)cm2
(C) \(\frac {77}{6}\)cm2
(D) \(\frac {77}{8}\)cm2
हल :
(D) \(\frac {77}{8}\)cm2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 55.
एक घड़ी की मिनट की सुई जिसकी लंबाई 14cm है। इसके द्वारा 5 मिनट में रचित क्षेत्रफल होगा-
(A) \(\frac {154}{9}\)cm2
(B) \(\frac {154}{6}\)cm2
(C) \(\frac {154}{3}\)cm2
(D) \(\frac {154}{5}\)cm2
हल :
(C) \(\frac {154}{3}\)cm2

प्रश्न 56.
किसी वृत्त का क्षेत्रफल क्या होगा, यदि इसकी त्रिज्या 7cm हो ?
(A) 154 cm
(B) 154 cm2
(C) 44 cm2
(D) 44 cm
हल :
(B) 154 cm2

प्रश्न 57.
r त्रिज्या वाले वृत्त का एक चाप केंद्र पर 60° का कोण अंतरित करता है, चाप की लंबाई क्या होगी ?
(A) \(\frac {πr}{3}\) cm
(B) \(\frac {2πr}{3}\) cm2
(C) πr2 / 3 cm2
(D) \(\frac {πr}{3}\) cm 2
हल :
(A) \(\frac {πr}{3}\) cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 58.
त्रिज्या 21cm वाले वृत्त के उस त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल क्या होगा जो केंद्र पर 60° का कोण अंतरित करता है –
(A) 115.5 cm2
(B) 462 cm2
(C) 231 cm2
(D) 693 cm2
हल :
(C) 231 cm2

प्रश्न 59.
वृत्त की त्रिज्या 14 cm है, तो उसकी परिधि होगी-
(A) 44 cm
(B) 44 cm2
(C) 88 cm
(D) 88 cm2
हल :
(C) 88 cm

प्रश्न 60.
14 cm त्रिज्या वाले वृत्त के त्रिज्याखंड का क्षेत्रफल होगा जिसका कोण 60° हो :
(A) \(\frac {308}{3}\) cm3
(B) \(\frac {308}{3}\) cm
(C) \(\frac {308}{3}\) cm2
(D) \(\frac {22}{3}\) cm2
हल :
(A) \(\frac {308}{3}\) cm3

प्रश्न 61.
p भुजा वाले समबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल होगा-
(A) \(\frac{\sqrt{3}}{4}\)p
(B) \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)p2
(C) \(\frac{\sqrt{3}}{4}\)p2
(D) \(\frac{\sqrt{3}}{4}\)p3
हल :
(C) \(\frac{\sqrt{3}}{4}\)p2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल

प्रश्न 62.
संलग्न आकृति में, यदि O वृत्त का केंद्र, PQ = 24 cm तथा PR = 7cm हो तो ARPQ का क्षेत्रफल होगा-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 12 वृतों से संबंधित क्षेत्रफल - 15
(A) 84 cm2
(B) 168 cm2
(C) 42 cm2
(D) 63 cm2
हल :
(A) 84 cm2

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HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
दो सिक्के एक साथ उछाले जाते हैं। निम्नलिखित की प्राप्ति की प्रायिकता ज्ञात कीजिए ।
(i) दो चित
(ii) कम-से-कम एक चित
(iii) कोई चित नहीं ।
हल :
(i) दो सिक्के एक साथ उछाले जाने की स्थिति में सभी संभव परिणाम [HH, HT, TH, TT] की संख्या 4 हैं । दो चित HH प्राप्ति का केवल एक ही अनुकूल परिणाम है ।
∴ P (दो चित) = \(\frac {1}{4}\)

(ii) कम-से-कम एक चित प्राप्ति की स्थिति में अनुकूल परिणाम [HH, HT, TH] की संख्या 3 है ।
∴ P (कम-से-कम एक चित) = अनुकूल परिणामों की संख्या / सभी संभव परिणामों की कुल संख्या
= \(\frac {3}{4}\)

(iii) कोई चित नहीं प्राप्ति की केवल एक ही संभावना है – [ TT ]
∴ P (कोई चित नहीं) = \(\frac {1}{4}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 2.
अच्छी प्रकार से फेंटी गई 52 पत्तों की एक गड्डी में से एक पत्ता निकाला जाता है । प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि यह पत्ता-
(i) एक इक्का होगा,
(ii) एक इक्का नहीं होगा ।
हल :
यहाँ पर,
ताश की गड्डी में पत्तों की कुल संख्या = 52
∴ सभी सम्भव परिणामों की संख्या = 52
(i) इक्का होने के अनुकूल परिणामों की संख्या = 4
अतः P (एक इक्का होगा) = \(\frac{4}{52}=\frac{1}{13}\)

(ii) इक्का न होने के अनुकूल परिणामों की संख्या = 48
अतः P (एक इक्का नहीं होगा) = \(\frac{48}{52}=\frac{1}{13}\)

प्रश्न 3.
17 कार्ड, जिन पर 1, 2, 3, 16, 17 संख्याएँ अंकित हैं, एक पेटी में रखे गए हैं और उन्हें अच्छी तरह से मिलाया गया है। एक व्यक्ति पेटी में से एक कार्ड निकालता है । प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि निकाले गए कार्ड पर संख्या –
(i) विषम हो
(ii) अभाज्य हो
(iii) 3 से विभाज्य हो
(iv) 3 और 2 दोनों से विभाज्य हो ।
हल :
यहाँ पर,
कार्डों की संख्या = 17
सभी संभव परिणामों की कुल संख्या = 17

(i) विषम संख्याएँ = 1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17 = 9
P (विषम संख्या वाला कार्ड) = \(\frac {9}{17}\)

(ii) अभाज्य संख्याएँ = 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17 = 7
P (अभाज्य संख्या वाला कार्ड) = \(\frac {7}{17}\)

(iii) 3 से विभाज्य संख्याएँ = 3, 6, 9, 12, 15 = 5
P (3 से विभाज्य संख्या वाला कार्ड) = \(\frac {5}{17}\)

(iv) 3 और 2 दोनों से विभाज्य संख्याएँ = 6, 12 = 2
P (3 और 2 दोनों से विभाज्य संख्या वाला कार्ड) = \(\frac {2}{17}\)

प्रश्न 4.
किसी लाटरी की 1000 टिकटें बेची गईं और उन पर 5 पुरस्कार रखे गए हैं। यदि साकेत ने लाटरी का एक टिकट खरीदा हो, तो उसके पुरस्कार जीतने की प्रायिकता क्या है?
हल :
क्योंकि पुरस्कारों की संख्या 5 है। इसलिए पुरस्कार जीतने की इस स्थिति में अनुकूल परिणामों की संख्या 5 है तथा सभी संभव परिणामों की कुल संख्या 1000 है, क्योंकि 1000 टिकटें बेची गई हैं।
साकेत के पुरस्कार जीतने की प्रायिकता = अनुकूल परिणामों की संख्या / संभावित परिणामों की कुल संख्या
= \(\frac{5}{1000}=\frac{1}{200}\) = 0.005

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 5.
52 पत्तों की ताश की गड्डी से चिड़ी के बादशाह, बेगम और गुलाम को अलग करके शेष को अच्छी तरह से फेंट दिया गया है । शेष पत्तों में से एक पत्ता निकाला जाता है। निम्नलिखित की प्राप्ति की प्रायिकता ज्ञात कीजिए-
(i) पान
(ii) बादशाह
(iii) चिड़ी
(iv) पान का दहला ।
हल :
ताश की गड्डी में पत्तों की कुल संख्या
चिड़ी का बादशाह, बेगम व गुलाम निकालने के बाद पत्तों की संख्या
(i) 49 पत्तों में पान के पत्ते
अतः P (एक पान का पत्ता है) = \(\frac {13}{49}\)

(ii) 49 पत्तों में बादशाह के पत्ते = 3
अतः P (एक बादशाह है) = \(\frac {3}{49}\)

(iii) 49 पत्तों में चिड़ी के पत्ते = 13 – 3 = 10
अतः P (एक चिड़ी का पत्ता है) = \(\frac {10}{49}\)

(iv) 49 पत्तों में पान के दहले = 1
अतः P (एक पान का दहला) = \(\frac {1}{49}\)

प्रश्न 6.
एक पेटी में रखे कार्डों पर 2 से 101 तक की संख्याएँ अंकित हैं। उन्हें अच्छी तरह मिलाया गया है। इस पेटी में से एक कार्ड निकाला जाता है । प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि कार्ड पर अंकित संख्या
(i) एक सम संख्या है
(ii) 14 से कम संख्या है
(iii) एक पूर्ण वर्ग संख्या है
(iv) 20 से कम एक अभाज्य संख्या है।
हल :
पेटी में कार्डों की कुल संख्या = 101 – 1 = 100
अतः सभी संभव परिणामों की संख्या = 100

(i) 2 से 101 तक की संख्याओं के बीच सम संख्याएँ = 50
∴ अनुकूल परिणामों की संख्या = 50
अतः P (एक सम संख्या) = \(\frac {50}{100}\) = \(\frac {1}{2}\)

(ii) 14 से कम संख्याएँ = 13 – 1 = 12
∴ अनुकूल परिणामों की संख्या = 12
अतः P (14 से कम संख्या) = \(\frac {12}{100}\) = \(\frac {3}{25}\)

(iii) 2 से 101 तक की संख्याओं के बीच पूर्ण वर्ग संख्याएँ = 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64, 81, 100 = 9
∴ अनुकूल परिणामों की संख्या = 9
अतः P (एक पूर्ण वर्ग संख्या) = \(\frac {9}{100}\)

(iv) 20 से कम अभाज्य संख्याएँ = 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19 = 8
∴ अनुकूल परिणामों की संख्या = 8
अतः P (20 से कम एक अभाज्य संख्या) = \(\frac{8}{100}=\frac{2}{25}\)

प्रश्न 7.
यदि किसी खेल में जीतने की प्रायिकता 0.3 हो, तो उस खेल में हारने की प्रायिकता क्या है?
हल :
यहाँ पर, खेल खेलने की प्रायिकता = 1
खेल में जीतने की प्रायिकता P (E) = 0.3
खेल में हारने की प्रायिकता P (E नहीं) = 1 – P (E)
= 1 – 0.3 = 0.7

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 8.
एक बक्से में 3 नीले, 2 सफेद और 4 लाल कंचे (marbles) हैं। यदि इस बक्से में से एक कंचा यादृच्छया निकाला जाता है, तो इसकी क्या प्रायिकता है कि यह कंचा-
(i) सफेद है,
(ii) नीला है,
(iii) लाल है।
हल :
यहाँ पर,
बक्से में नीले कंचों की संख्या = 3
बक्से में सफेद कंचों की संख्या = 2
बक्से में लाल कंचों की संख्या = 4
बक्से में कुल कंचों की संख्या = 3 + 2 + 4 = 9
∴ सभी संभव परिणामों की संख्या = 9

(i) सफेद कंचों के अनुकूल परिणामों की संख्या = 2
∴ P (सफेद कंचा) = \(\frac {2}{9}\)

(ii) नीले कंचों के अनुकूल परिणामों की संख्या = 3
∴ P (नीला कंचा) = \(\frac{3}{9}=\frac{1}{3}\)

(iii) लाल कंचों के अनुकूल परिणामों की संख्या = 4
∴ P (लाल कंचा) = \(\frac {4}{9}\)

प्रश्न 9.
एक ताश की अच्छी तरह फेंटी गई गड्डी से एक पत्ता निकाला जाता है । उस पत्ते के पान का पत्ता होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए। उस पत्ते के इक्का न होने की प्रायिकता भी ज्ञात कीजिए।
हल :
यहाँ पर,
ताश की गड्डी में पत्तों की कुल संख्या = 52
∴ सभी सम्भव परिणामों की संख्या = 52

(i) पान के पत्तों की संख्या = 13
⇒ अनुकूल परिणामों की संख्या = 13
अतः P (पान का पत्ता) = \(\frac{13}{52}=\frac{1}{4}\)

(ii) इक्के के पत्तों की संख्या = 4
∴ P (इक्का) = \(\frac{4}{52}=\frac{1}{13}\)
⇒ P (इक्का नहीं) = 1 – \(\frac{1}{13}=\frac{13-1}{13}=\frac{12}{13}\)

प्रश्न 10.
शब्द ASSASSINATION से यादृच्छया एक अक्षर चुना जाता है । प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह अक्षर
(i) एक स्वर है
(ii) एक व्यंजन है।
हल :
यहाँ पर,
शब्द ASSASSINATION में अक्षरों की संख्या = 13
⇒ सभी संभव परिणामों की संख्या = 13
(i) शब्द ASSASSINATION में स्वरों की संख्या = 6
⇒ अनुकूल परिणामों की संख्या = 6
∴ P (एक स्वर अक्षर) = अनुकूल परिणामों की संख्या / सभी संभव परिणामों की कुल संख्या
= \(\frac {6}{13}\)

(ii) P (एक व्यंजन अक्षर) = 1 – P (एक स्वर अक्षर )
= 1 – \(\frac{6}{13}=\frac{13-6}{13}=\frac{7}{13}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 8.
एक बक्से में 3 नीले, 2 सफेद और 4 लाल कंचे (marbles) हैं। यदि इस बक्से में से एक कंचा यादृच्छया निकाला जाता है, तो इसकी क्या प्रायिकता है कि यह कंचा-
(i) सफेद है,
(ii) नीला है,
(iii) लाल है।
हल :
यहाँ पर,
बक्से में नीले कंचों की संख्या = 3
बक्से में सफेद कंचों की संख्या = 2
बक्से में लाल कंचों की संख्या = 4
बक्से में कुल कंचों की संख्या = 3 + 2 + 4 = 9
∴ सभी संभव परिणामों की संख्या = 9

(i) सफेद कंचों के अनुकूल परिणामों की संख्या = 2
∴ P (सफेद कंचा) = \(\frac {2}{9}\)

(ii) नीले कंचों के अनुकूल परिणामों की संख्या = 3
∴ P (नीला कंचा) = \(\frac{3}{9}=\frac{1}{3}\)

(iii) लाल कंचों के अनुकूल परिणामों की संख्या = 4
∴ P (लाल कंचा) = \(\frac {4}{9}\)

प्रश्न 9.
एक ताश की अच्छी तरह फेंटी गई गड्ड़ी से एक पत्ता निकाला जाता है । उस पत्ते के पान का पत्ता होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए। उस पत्ते के इक्का न होने की प्रायिकता भी ज्ञात कीजिए।
हल :
यहाँ पर,
ताश की गड्डी में पत्तों की कुल संख्या = 52
∴ सभी सम्भव परिणामों की संख्या = 52

(i) पान के पत्तों की संख्या = 13
⇒ अनुकूल परिणामों की संख्या = 13
अतः P (पान का पत्ता) = \(\frac{13}{52}=\frac{1}{4}\)

(ii) इक्के के पत्तों की संख्या = 4
∴ P (इक्का) = \(\frac{4}{52}=\frac{1}{13}\)
⇒ P (इक्का नहीं) = 1 – \(\frac{1}{13}=\frac{13-1}{13}=\frac{12}{13}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 10.
शब्द ASSASSINATION से यादृच्छया एक अक्षर चुना जाता है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि वह अक्षर (i) एक स्वर है (ii) एक व्यंजन है।
हल :
यहाँ पर,
शब्द ASSASSINATION में अक्षरों की संख्या = 13
⇒ सभी संभव परिणामों की संख्या = 13

(i) शब्द ASSASSINATION में स्वरों की संख्या = 6
⇒ अनुकूल परिणामों की संख्या = 6
∴ P (एक स्वर अक्षर) = अनुकूल परिणामों की संख्या / सभी संभव परिणामों की कुल संख्या = \(\frac {6}{13}\)

(ii) P (एक व्यंजन अक्षर) = 1 – P (एक स्वर अक्षर)
= 1 – \(\frac{6}{13}=\frac{13-6}{13}=\frac{7}{13}\)

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
किसी पासे को एक बार उछालने पर 5 से कम अंक प्राप्त होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{2}\)
(B) \(\frac {1}{3}\)
(C) \(\frac {2}{3}\)
(D) \(\frac {5}{6}\)
हल :
(C) \(\frac {2}{3}\)

प्रश्न 2.
एक थैले में 3 लाल, 5 काली और 4 सफेद गेंदे हैं। थैले में से एक गेंद यादृच्छया निकाली गई । निकाली गई गेंद के काली होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{4}\)
(B) \(\frac {1}{9}\)
(C) \(\frac {3}{4}\)
(D) \(\frac {5}{12}\)
हल :
(D) \(\frac {5}{12}\)

प्रश्न 3.
एक थैले में 3 लाल, 5 काली और 4 सफेद गेंदे हैं। थैले में से एक गेंद यादृच्छया निकाली गई । निकाली गई गेंद के लाल होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{4}\)
(B) \(\frac {1}{9}\)
(C) \(\frac {3}{4}\)
(D) \(\frac {5}{12}\)
हल :
(A) \(\frac {1}{4}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 4.
यदि 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 में से एक अंक यादृच्छया चुना जाता है तो इसके विषम अंक होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{9}\)
(B) \(\frac {3}{9}\)
(C) \(\frac {4}{9}\)
(D) \(\frac {5}{9}\)
हल :
(D) \(\frac {5}{9}\)

प्रश्न 5.
यदि 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 में से एक अंक यादृच्छया चुना जाता है तो इसके सम अंक होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {4}{9}\)
(B) \(\frac {3}{9}\)
(C) \(\frac {2}{9}\)
(D) \(\frac {1}{9}\)
हल :
(A) \(\frac {4}{9}\)

प्रश्न 6.
पासे को एक बार फेंकने पर 4 से बड़ी संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता होती है-
(A) \(\frac {2}{3}\)
(B) \(\frac {1}{3}\)
(C) \(\frac {4}{3}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) \(\frac {1}{3}\)

प्रश्न 7.
पासे को एक बार फेंकने पर संख्या 6 आने की प्रायिकता होगी :
(A) 1
(B) 0
(C) \(\frac {1}{6}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(C) \(\frac {1}{6}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 8.
पासे को एक बार फेंकने पर संख्या 8 आने की प्रायिकता होगी :
(A) 1
(B) 0
(C) \(\frac {1}{6}\)
(D) \(\frac {1}{2}\)
हल :
(B) 0

प्रश्न 9.
एक सिक्के की एकल उछाल में चित्त प्राप्त करने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{2}\)
(B) \(\frac {1}{3}\)
(C) \(\frac {2}{3}\)
(D) \(\frac {5}{6}\)
हल :
(A) \(\frac {1}{2}\)

प्रश्न 10.
52 पत्तों की अच्छी प्रकार से फेंटी गई एक गड्डी में से एक पत्ता निकाला जाता है। लाल रंग का चित्र पत्ता प्राप्त करने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {5}{26}\)
(B) \(\frac {1}{4}\)
(C) \(\frac {3}{26}\)
(D) \(\frac {1}{26}\)
हल :
(C) \(\frac {3}{26}\)

प्रश्न 11.
52 पत्तों की अच्छी प्रकार से फेंटी गई एक गड्डी में से एक पत्ता निकाला जाता है। काले रंग का बेगम का पत्ता होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{13}\)
(B) \(\frac {1}{26}\)
(C) \(\frac {2}{13}\)
(D) \(\frac {3}{13}\)
हल :
(B) \(\frac {1}{26}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 12.
एक थैले में 3 लाल और 2 नीली गोलियाँ हैं । एक गोली यादृच्छयां (at random) निकाली जाती है । नीली गोली के निकलने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{5}\)
(B) \(\frac {3}{5}\)
(C) \(\frac {4}{5}\)
(D) \(\frac {2}{5}\)
हल :
(D) \(\frac {2}{5}\)

प्रश्न 13.
एक निश्चित घटना की प्रायिकता ………………….. होती है ।
(A) शून्य
(B) 1
(C) \(\frac {1}{2}\)
(D) \(\frac {1}{3}\)
हल :
(B) 1

प्रश्न 14.
यदि तीन सिक्कों को एक साथ उछाला जाता है तो कम-से-कम दो चित प्राप्त करने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{2}\)
(B) \(\frac {1}{3}\)
(C) \(\frac {1}{4}\)
(D) \(\frac {3}{8}\)
हल :
(A) \(\frac {1}{2}\)

प्रश्न 15.
एक पासे को एक बार फेंकने में 3 के गुणांक प्राप्त करने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{2}\)
(B) \(\frac {1}{3}\)
(C) \(\frac {1}{4}\)
(D) \(\frac {2}{3}\)
हल :
(B) \(\frac {1}{3}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 16.
एक असंभव घटना की प्रायिकता ……………… होती है ।
(A) शून्य
(B) 1
(C) 0.5
(D) 0.4
हल :
(A) शून्य

प्रश्न 17.
किसी घटना (निश्चित और असंभव घटनाओं के अतिरिक्त) की प्रायिकता ………………….. के बीच में होती है ।
(A) शून्य और दो
(B) शून्य और तीन
(C) शून्य और एक
(D) शून्य और चार
हल :
(C) शून्य और एक

प्रश्न 18.
एक पासे को एक बार उछाला गया। अभाज्य संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता ………………… है ।
(A) 1
(B) शून्य
(C) \(\frac {2}{3}\)
(D) \(\frac {1}{2}\)
हल :
(D) \(\frac {1}{2}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 19.
यह ज्ञात है कि बिजली के 600 बल्बों की एक पेटी में 12 बल्ब त्रुटिपूर्ण हैं। इस पेटी से एक बल्ब यादृच्छया निकाला जाता है । बल्ब के ठीक निकलने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{50}\)
(B) \(\frac {49}{50}\)
(C) \(\frac {12}{50}\)
(D) \(\frac {1}{25}\)
हल :
(B) \(\frac {49}{50}\)

प्रश्न 20.
17 कार्ड, जिन पर 1, 2, 3, …….,16, 17 संख्याएँ अंकित हैं, एक पेटी में रखे गए हैं और उन्हें अच्छी तरह से मिलाया गया है । एक व्यक्ति पेटी में से एक कार्ड निकालता है। निकाले गए कार्ड पर संख्या 3 और 2 दोनों से विभाज्य होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {2}{17}\)
(B) \(\frac {3}{17}\)
(C) \(\frac {4}{17}\)
(D) \(\frac {5}{17}\)
हल :
(A) \(\frac {2}{17}\)

प्रश्न 21.
किसी लाटरी की 1000 टिकटें बेची गईं और उन पर 5 पुरस्कार रखे गए हैं। यदि साकेत ने लाटरी का एक टिकट खरीदा हो, तो उसके पुरस्कार जीतने की प्रायिकता होगी –
(A) 0.5
(B) 0.05
(C) 0.005
(D) 0.0005
हल :
(C) 0.005

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 22.
अच्छी तरह से फेंटी गई ताश की गड्डी से एक पत्ता निकाला गया है । प्रायिकता क्या होगी कि निकाला गया पत्ता एक चित्र पत्ता (a face card) है-
(A) \(\frac {1}{13}\)
(B) \(\frac {2}{13}\)
(C) \(\frac {5}{13}\)
(D) \(\frac {3}{13}\)
हल :
(D) \(\frac {3}{13}\)

प्रश्न 23.
किसी पासे को एक बार फेंका जाता है । सम संख्या प्राप्ति की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{6}\)
(B) \(\frac {1}{3}\)
(C) \(\frac {1}{2}\)
(D) \(\frac {2}{3}\)
हल :
(C) \(\frac {1}{2}\)

प्रश्न 24.
निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या किसी घटना की प्रायिकता नहीं हो सकती ?
(A) 0.8
(B) 9%
(C) – 2.3
(D) \(\frac {4}{5}\)
हल :
(C) – 2.3

प्रश्न 25.
एक थैले में 3 हरे, 4 नीले तथा 2 संतरी रंग के कंचे हैं। यदि एक कंचा यादृच्छया निकाला जाता है तो संतरी रंग कंचा नहीं होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {2}{9}\)
(B) \(\frac {7}{9}\)
(C) \(\frac {4}{9}\)
(D) \(\frac {1}{3}\)
हल :
(B) \(\frac {7}{9}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 26.
52 पत्तों की ताश की गड्डी से चिड़ी के बादशाह, बेगम और गुलाम को अलग करके शेष को अच्छी तरह से फेंट दिया गया है । शेष पत्तों में से एक पत्ता निकाला जाता है। निकाला गया पत्ता पान का दहला होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{49}\)
(B) \(\frac {1}{50}\)
(C) \(\frac {1}{51}\)
(D) \(\frac {1}{26}\)
हल :
(A) \(\frac {1}{49}\)

प्रश्न 27.
52 पत्तों की ताश की गड्डी से चिड़ी के बादशाह, बेगम और गुलाम को अलग करके शेष को अच्छी तरह से फेंट दिया गया है। शेष पत्तों में से एक पत्ता निकाला जाता है। निकाला गया पत्ता बादशाह होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{49}\)
(B) \(\frac {2}{49}\)
(C) \(\frac {3}{49}\)
(D) \(\frac {4}{49}\)
हल :
(C) \(\frac {3}{49}\)

प्रश्न 28.
यदि P (A) = 0.07, तो P (A नहीं) का मान है :
(A) 0.07
(B) 0.93
(C) 0.3
(D) 0
हल :
(B) 0.93

प्रश्न 29.
एक पेटी में रखे कार्डों पर 2 से 101 तक की संख्याएँ अंकित हैं। उन्हें अच्छी तरह मिलाया गया है। इस पेटी में से एक कार्ड निकाला जाता है। कार्ड पर अंकित संख्या एक सम संख्या होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{2}\)
(B) \(\frac {1}{4}\)
(C) \(\frac {3}{25}\)
(D) \(\frac {2}{25}\)
हल :
(A) \(\frac {1}{2}\)

प्रश्न 30.
एक पेटी में रखे कार्डों पर 2 से 101 तक की संख्याएँ अंकित हैं। उन्हें अच्छी तरह से मिलाया गया है। इस पेटी में से एक कार्ड निकाला जाता है। कार्ड पर अंकित संख्या 14 से कम होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{2}\)
(B) \(\frac {1}{4}\)
(C) \(\frac {3}{25}\)
(D) \(\frac {2}{25}\)
हल :
(C) \(\frac {3}{25}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 31.
एक थैले में 5 लाल, 8 सफेद, 4 हरी और 7 काली गेंदे हैं। एक गेंद यादृच्छया थैले से निकाली जाती है। निकाली गई गेंद के काली होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {5}{24}\)
(B) \(\frac {7}{24}\)
(C) \(\frac {1}{6}\)
(D) \(\frac {5}{6}\)
हल :
(B) \(\frac {7}{24}\)

प्रश्न 32.
एक थैले में 5 लाल, 8 सफेद, 4 हरी और 7 काली गेंदे हैं। एक गेंद यादृच्छया थैले से निकाली जाती है । निकाली गई गेंद के लाल होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {7}{24}\)
(B) \(\frac {1}{6}\)
(C) \(\frac {5}{6}\)
(D) \(\frac {5}{24}\)
हल :
(D) \(\frac {5}{24}\)

प्रश्न 33.
पासे को एक बार फेंकने पर संख्या 7 आने की प्रायिकता होगी :
(A) \(\frac {1}{6}\)
(B) 1
(C) 0
(D) \(\frac {2}{3}\)
हल :
(C) 0

प्रश्न 34.
ताश के 52 पत्तों में से एक पत्ता अचानक गिर जाता है। इसके इक्का होने की प्रायिकता होगी –
(A) \(\frac {1}{26}\)
(B) \(\frac {1}{13}\)
(C) \(\frac {1}{4}\)
(D) \(\frac {3}{52}\)
हल :
(B) \(\frac {1}{13}\)

प्रश्न 35.
पासे को एक बार फेंकने पर विषम संख्या प्राप्त होने की प्रायिकता होगी :
(A) \(\frac {1}{6}\)
(B) \(\frac {2}{3}\)
(C) \(\frac {1}{3}\)
(D) \(\frac {1}{2}\)
हल :
(D) \(\frac {1}{2}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 36.
अच्छी प्रकार से फेंटी गई 52 पत्तों की गड्डी में से एक पत्ता खींचा गया है। लाल रंग के एक बादशाह के प्राप्त होने की प्रायिकता होगी –
(A) \(\frac {3}{13}\)
(B) \(\frac {1}{26}\)
(C) \(\frac {1}{13}\)
(D) \(\frac {1}{4}\)
हल :
(B) \(\frac {1}{26}\)

प्रश्न 37.
1 से 30 तक अंकित टिकटों को अच्छी तरह से मिलाकर एक बॉक्स में डाला जाता है तथा उसमें से एक टिकट निकाली जाती है । टिकट पर अंकित अंक सम पूर्ण वर्ग होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {1}{30}\)
(B) \(\frac {1}{15}\)
(C) \(\frac {1}{10}\)
(D) \(\frac {2}{15}\)
हल :
(B) \(\frac {1}{15}\)

प्रश्न 38.
1 से 25 तक की संख्याओं में से एक संख्या चुनी जाती है। उस संख्या के अभाज्य होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {2}{25}\)
(B) \(\frac {7}{25}\)
(C) \(\frac {9}{25}\)
(D) \(\frac {1}{5}\)
हल :
(C) \(\frac {9}{25}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 39.
यदि P (E) = 0.05, तो P (E नहीं ) है :
(A) 0.05
(B) 0.5
(C) 0.95
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(C) 0.95

प्रश्न 40.
यदि P (E) = 0.03, तो P (E नहीं) का मान है :
(A) 0.97
(B) 0.7
(C) 0.03
(D) 0
हल :
(A) 0.97

प्रश्न 41.
किसी घटना E के लिए निम्न रिक्त स्थान भरें-
P(E) = ……………….. – P (E)
(A) 1
(B) 2
(C) 0
(D) -1
हल :
(A) 1

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 42.
दो खिलाड़ी संगीता और रेशमा टेनिस का एक मैच खेलते हैं । यह ज्ञात है कि संगीता द्वारा मैच जीतने की प्रायिकता 0.62 है । रेशमा के जीतने की प्रायिकता होगी-
(A) 0.038
(B) 3.8
(C) 0.0038
(D) 0.38
हल :
(D) 0.38

प्रश्न 43.
एक थैले में केवल नींबू की महक वाली मीठी गोलियाँ हैं । मालिनी बिना थैले में झाँके, उसमें से एक गोली निकालती है । निकाली गई गोली के संतरे की महक वाली होने की प्रायिकता होगी-
(A) शून्य
(B) \(\frac {1}{2}\)
(C) \(\frac {1}{4}\)
(D) 1
हल :
(A) शून्य

प्रश्न 44.
एक थैले में केवल नींबू की महक वाली मीठी गोलियाँ हैं । मालिनी बिना थैले में झाँके उसमें से एक गोली निकालती है | निकाली गई गोली के नींबू की महक वाली होने की प्रायिकता होगी-
(A) शून्य
(B) \(\frac {1}{2}\)
(C) \(\frac {1}{4}\)
(D) 1
हल :
(D) 1

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 45.
यदि 3 विद्यार्थियों के एक समूह में से 2 विद्यार्थियों के जन्मदिन एक ही दिन न होने की प्रायिकता 0.992 हो तो 2 विद्यार्थियों का जन्मदिन एक ही दिन होने की प्रायिकता होगी-
(A) 0.8
(B) 0.08
(C) 0.008
(D) 0.0008
हल :
(C) 0.008

प्रश्न 46.
एक थैले में 3 लाल और 5 काली गेंदे हैं । इस थैले में से एक गेंद यादृच्छया निकाली जाती है। इसके लाल रंग के होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {5}{8}\)
(B) \(\frac {3}{8}\)
(C) \(\frac {3}{5}\)
(D) \(\frac {1}{4}\)
हल :
(B) \(\frac {3}{8}\)

प्रश्न 47.
एक डिब्बे में 5 लाल कंचे, 8 सफेद कंचे और 4 हरे कंचे हैं। इस डिब्बे में से एक कंचा यादृच्छया निकाला जाता है । इसके हरा न होने की प्रायिकता होगी-
(A) \(\frac {5}{17}\)
(B) \(\frac {8}{17}\)
(C) \(\frac {4}{17}\)
(D) \(\frac {13}{17}\)
हल :
(D) \(\frac {13}{17}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 15 प्रायिकता

प्रश्न 48.
किसी कारण 12 खराब पेन, 132 अच्छे पेनों में मिल गए हैं। केवल देखकर यह नहीं बताया जा सकता है कि कोई पेन खराब है या अच्छा है। इस मिश्रण में से एक पेन यादृच्छया निकाला जाता है । निकाले गए पेन के अच्छा होने की प्रायिकता होगी –
(A) \(\frac {11}{12}\)
(B) \(\frac {1}{12}\)
(C) \(\frac {1}{11}\)
(D) 1
हल :
(A) \(\frac {11}{12}\)

प्रश्न 49.
20 बल्बों के एक समूह में 4 बल्ब खराब हैं। इस समूह में से एक बल्ब यादृच्छया निकाला जाता है । इसके खराब होने की प्रायिकता होगी-
(A) शून्य
(B) 1
(C) \(\frac {1}{5}\)
(D) \(\frac {4}{5}\)
हल :
(C) \(\frac {1}{5}\)

प्रश्न 50.
यदि P (A नहीं) = 0.04, तो P (A) का मान है :
(A) 0.04
(B) 0
(C) 0.96
(D) 0.6
हल :
(C) 0.96

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HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
धातु की बनी एक घनाभ के आकार की टंकी की लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमशः 3 m, 2m और 1.5m है; उसका (i) आयतन और (ii) उसे बनाने में लगी धातु का क्षेत्रफल ज्ञात करें ।
हल :
यहाँ पर,
घनाभ के आकार की टंकी की लंबाई (l) = 3 m
घनाभ के आकार की टंकी की चौड़ाई (b) = 2 m
घनाभ के आकार की टंकी की ऊँचाई (h) = 1.5 m
(i) घनाभ के आकार की टंकी का आयतन = lbh = 3 × 2 × 1.5m3
= 9m3

(ii) घनाभ के आकार की टंकी को बनाने में लगी धातु का क्षेत्रफल = 2 [lb + bh + hl]
= 2 [3 × 2 + 2 × 1.5 + 1.5 × 3 ] m2
= 2[6 + 3 + 4.5] m2
= 2 × 13.5 m2
= 27m2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 2.
घन का एक किनारा 6 cm है । इसका आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करें ।
हल :
यहाँ पर
घन का किनारा (भुजा) = 6 cm
(i) घन का आयतन (भुजा)3 = (6)3 cm3
= 6 × 6 × 6 cm3
= 216 cm3

(ii) घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6(भुजा)2
= 6(6)2 cm2
= 6 × 6 × 6 cm2
= 216 cm2

प्रश्न 3.
एक घन का आयतन 1728 cm3 है ।
(i) उसकी कोर, (ii) उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
घन का आयतन = 1728 cm3
(i) घन की कोर (भुजा) = \(\sqrt[3]{1728}\) = \(\sqrt[3]{12 \times 12 \times 12}\) = \(\sqrt[3]{12^3}\) = 12 cm
(ii) घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल 6 (भुजा)2 = 6 × 12 × 12 = 864 cm2

प्रश्न 4.
एक लंब वृत्तीय बेलन के आधार का व्यास 28 cm और उसकी ऊँचाई 21 cm है ।
(i) वक्र पृष्ठ,
(ii) संपूर्ण पृष्ठ,
(iii) आयतन ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
लंब वृत्तीय बेलन के आधार का व्यास = 28 cm
लंब वृत्तीय बेलन के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac {28}{2}\) = 14 cm
लंब वृत्तीय बेलन की ऊँचाई (h) = 21 cm
(i) लंब वृत्तीय बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 14 × 21 cm2
= 1848 cm2

(ii) लंब वृत्तीय बेलन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr (r + h)
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 14 (14 + 21) cm2
= 88 × 35 = 3080 cm2

(iii) लंब वृत्तीय बेलन का आयतन = πr²h
= \(\frac {22}{7}\) × 14 × 14 × 21 cm3
= 12936 cm3

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 5.
एक लंब वृत्तीय बेलन के आधार का व्यास 14 cm और ऊँचाई 10 cm है। इसका आयतन तथा संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करें ।
हल :
यहाँ पर,
लंब वृत्तीय बेलन के आधार का व्यास = 14 cm
लंब वृत्तीय बेलन के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac {14}{2}\) = 7 cm
लंब वृत्तीय बेलन की ऊँचाई (h) = 10 cm
(i) लंब वृत्तीय बेलन का आयतन = πr²h
= \(\frac {22}{7}\) × 7 × 7 × 10 cm3
= 1540 cm3

(ii) लंब वृत्तीय बेलन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr(r + h)
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 7 (7 + 10) cm2
= 44 × 17 = 748 cm2

प्रश्न 6.
एक लंब वृत्तीय शंकु के आधार की त्रिज्या और उसकी ऊँचाई क्रमशः 7 cm और 24 cm हैं। शंकु का आयतन और संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = 7 cm
शंकु की ऊँचाई (h) = 24 cm
शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) = \(\sqrt{r^2+h^2}\) = \(\sqrt{(7)^2+(24)^2}\)
= \(\sqrt{49+576}\)
= \(\sqrt{625}\)
= 25 cm

(i) शंकु का आयतन = \(\frac {1}{3}\)πr²h
= \(\frac{1}{3} \times \frac{22}{7}\) × 7 × 7 × 24 cm3
= 1232 cm3

(ii) शंकु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr (r + l)
= \(\frac {22}{7}\) × 7 (7 + 25) cm²
= 22 × 32 = 704 cm²

प्रश्न 7.
धातु के एक गोले का व्यास 8.4 cm है। उसका आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
गोले का व्यास = 8.4 cm
गोले की त्रिज्या (r) = \(\frac {8.4}{2}\)
= 4.2 cm

(i) गोले का आयतन = \(\frac {4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) × 4.2 × 4.2 × 4.2 cm3
= 310.46 cm3

(ii) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr²
= 4 × \(\frac {22}{7}\) × 4.2 × 4.2 cm2
= 221.76cm2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 8.
एक खोखले अर्धगोलीय बर्तन के अंतः और बाह्य व्यास क्रमशः 42 cm और 45.5 cm हैं। उसकी धारिता तथा उसका बाहरी वक्र पृष्ठ ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
अर्धगोलीय बर्तन का अंतः व्यास = 42 cm
अर्धगोलीय बर्तन की अंतः त्रिज्या (r) = \(\frac {42}{2}\) = 21cm
अर्धगोलीय बर्तन का अंतः आयतन = \(\frac {2}{3}\)πr3 = \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7}\) × 21 × 21 × 21 cm3
= 19404 cm3
अतः अर्धगोलीय बर्तन की धारिता = \(\frac{19404}{1000}\)लीटर
= 19.404 लीटर
अब अर्धगोलीय बर्तन का बाह्य व्यास = 45.5 cm
अर्धगोली बर्तन की बाह्य त्रिज्या (R) = \(\frac {45.5}{2}\) cm
= \(\frac{455}{20}=\frac{91}{4}\) cm
अर्धगोलीय बर्तन का बाह्य पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πR²
= 2 × \(\frac{22}{7} \times \frac{91}{4} \times \frac{91}{4}\)cm2
= 3253.25 cm2

प्रश्न 9.
2m व्यास वाला 14 m गहरा एक कुआँ खोदा गया है। उससे निकली हुई मिट्टी को कुएँ के चारों ओर 5m चौड़ाई तक समान रूप से फैलाकर एक चबूतरा बनाया गया है । चबूतरे की ऊँचाई ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
कुएँ का व्यास = 2m
⇒ कुएँ की त्रिज्या (r) = \(\frac {2}{2}\) = 1m
कुएँ की गहराई (h) = 14 m
∴ कुएँ से निकली मिट्टी का आयतन = πr²h
= \(\frac {22}{7}\) × 1 × 1 × 14 = 44 m3
चंबूतरे सहित कुएँ की बाह्य त्रिज्या (R) = 5 + 1 = 6 m
चबूतरे के तल का क्षेत्रफल = बाह्य वृत्त का क्षेत्रफल – अंतः वृत्त का क्षेत्रफल
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 1

प्रश्न 10.
एक अर्धगोलाकार कटोरी, जिसकी आंतरिक त्रिज्या 9 cm है, द्रव से भरी है । इस द्रव को बेलनाकार छोटी बोतलों में भरना है, जबकि प्रत्येक बोतल के आधार का व्यास 3 cm और ऊँचाई 4 cm है । कटोरी को खाली करने के लिए कितनी बोतलों की आवश्यकता होगी ?
हल :
यहाँ पर
अर्धगोलाकार कटोरी की आंतरिक त्रिज्या (R) = 9cm
अर्धगोलाकार कटोरी का आयतन = \(\frac {2}{3}\)πR3
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7}\) × 9 × 9 × 9 cm3
कटोरी में द्रव का आयतन = \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7}\) × 9 × 9 × 9 cm3
छोटी बोतल की त्रिज्या (r) = \(\frac {3}{2}\)cm
छोटी बोतल की ऊँचाई (h) = 4 cm
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 11.
एक 8.25m ऊँचा तम्बू 30 m व्यास वाले अधार तथा 5.5 m ऊँचाई वाले बेलन पर समान आधार के शंकु को जोड़कर बनाया गया है। 45 रु० प्रति वर्ग m की दर से तम्बू में लगे कपड़े (कैनवास) का मूल्य ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 3
यहाँ पर,
बेलनाकार भाग का व्यास = 30m
बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r1) = \(\frac {30}{2}\) = 15 m
बेलनाकार भाग की ऊँचाई (h1) = 5.5m
बेलनाकार भाग का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr1h1
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 15 × 5.5m2
= \(\frac {3630}{7}\)m²
शंक्वाकार भाग का व्यास = 30 m
शंक्वाकार भाग की त्रिज्या (r2) = \(\frac {30}{2}\) m = 15 m
शंक्वाकार भाग की ऊँचाई (h2) = (8.25 – 5.5) m = 2.75m
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 4

प्रश्न 12.
पेट्रोल की एक बेलनाकार टंकी के आधार का व्यास 21 cm और लंबाई 18 cm है। वह शंक्वाकार सिरों से जुड़ी है, जिनमें से प्रत्येक की अक्ष लंबाई 9 cm है । टंकी की धारिता ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 5
यहाँ पर,
बेलनाकार भाग का व्यास = 21 cm
बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r1) = \(\frac {21}{2}\) m
बेलनाकार भाग की लंबाई (h1) = 18 cm
बेलनाकार भाग का आयतन = πr12h1
= \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{2} \times \frac{21}{2}\) × 18cm3
= 6237 cm3
शंक्वाकार सिरों की त्रिज्या (r2) = \(\frac {21}{2}\) cm
शंक्वाकार सिरों की ऊँचाई (h2) = 9 cm
दोनों शंक्वाकार सिरों का आयतन = 2 × \(\frac {1}{3}\)πr12h2
= 2 × \(\frac{1}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{21}{2} \times \frac{21}{2}\) × 9 cm3
= 2079 cm3
अतः टंकी का कुल आयतन = [6237 + 2079] cm3
= 8316 cm3

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 13.
एक बर्तन एक खोखले बेलन के रूप में है जिसकी पेंदी उसी के आधार पर बना एक गोलार्ध है । बेलन की गहराई 43 m है और गोलार्ध का व्यास 3.5 m है। उस बर्तन का आयतन और आंतरिक पृष्ठ ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 6
यहाँ पर,
बर्तन के बेलनाकार भाग की गहराई (h) = 4\(\frac {2}{3}\) = \(\frac {14}{3}\)m
बर्तन के बेलनाकार भाग का व्यास = 3.5 m
बर्तन के बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r1) = \(=\frac{35}{10 \times 2}=\frac{7}{4}\)
बर्तन के बेलनाकार भाग का आयतन = πr12h
= \(\frac{22}{7} \times \frac{7}{4} \times \frac{7}{4} \times \frac{14}{3}=\frac{539}{12}\)m3
बर्तन के बेलनाकार भाग का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr1h
= 2 × \(\frac{22}{7} \times \frac{7}{4} \times \frac{14}{3}=\frac{154}{3}\)
बर्तन के अर्धगोलाकार भाग का व्यास = 3.5m
बर्तन के अर्धगोलाकार भाग की त्रिज्या (r2) = \(\frac{35}{10 \times 2}=\frac{7}{4}\) m
बर्तन के अर्धगोलाकार भाग का आयतन = \(\frac {2}{3}\)πr23
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{7}{4} \times \frac{7}{4} \times \frac{7}{4}=\frac{539}{48}\)m3
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 7

प्रश्न 14.
एक गोदाम का आकार आकृति के अनुसार है। गोदाम की चौड़ाई की ओर का ऊर्ध्वाधर अनुप्रस्थ-परिच्छेद 7m × 3m माप का एक आयत है जिसके ऊपर 3.5 m त्रिज्या का अर्धवृत्त है। घनाभ के आकार वाले भाग की आंतरिक माप 10m × 7m × 3m हैं। गोदाम का आयतन और उसके फर्श को छोड़कर संपूर्ण आंतरिक पृष्ठ का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 8
हल :
यहाँ पर,
गोदाम के घनाभाकार भाग का आयतन = l × b × h
= 10 × 7 × 3 m3
= 210 m3
गोदाम के अर्धबेलनाकार भाग की त्रिज्या (r) = \(\frac {7}{2}\)m
गोदाम के अर्धबेलनाकार भाग की लंबाई (h) = 10 m
गोदाम के अर्धबेलनाकार भाग का आयतन = \(\frac {1}{2}\)πr²h
= \(\frac{1}{2} \times \frac{22}{7} \times \frac{7}{2} \times \frac{7}{2}\) × 10 m3
= 192.5 m3
अतः गोदाम का आयतन = (210 + 192.5) m3
= 402.5m3
गोदाम की चारदीवारी का क्षेत्रफल
= 2 (l + b) × h
= 2 (10 + 7) × 3m2
= 2 × 17 × 3 = 102m2
गोदाम के अर्धबेलनाकार भाग का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल =\(\frac {1}{2}\)(2πrh)
= \(\frac{22}{7} \times \frac{7}{2}\) × 10 = 110m2
गोदाम के दो अर्धवृत्तों का क्षेत्रफल = 2(\(\frac {1}{2}\)πr²)
= \(\frac {22}{7}\) × 3.5 × 3.5 m2
= 3.5 m2
गोदाम का कुल अंतः पृष्ठीय क्षेत्रफल = (102 + 110 + 38.5) m2
= 250.5m2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 15.
एक ठोस लंब वृत्तीय बेलन, जिसकी ऊँचाई 10cm और आधार की त्रिज्या 6 cm हैं, से उसी ऊँचाई और उसी आधार का एक लंब वृत्तीय शंकु काटकर हटा दिया जाता है। शेष ठोस का आयतन ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
बेलन की ऊँचाई (h) = 10cm
बेलन की त्रिज्या (r) = 6 cm
बेलन का आयतन = πr²h
= \(\frac {22}{7}\) × 6 × 6 × 10 = \(\frac {7290}{7}\)cm3
शंकु की ऊँचाई (h1) = 10 cm
शंकु की त्रिज्या (r1) = 6 cm
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 9

प्रश्न 16.
एक जूस (juice) बेचने वाला अपने ग्राहकों को संलग्न आकृति में दर्शाए गिलासों में जूस देता था । बेलनाकार गिलास का आंतरिक व्यास 5 cm था, परंतु गिलास के निचले आधार (तली) एक उभरा हुआ अर्धगोला था, जिससे गिलास की धारिता कम हो जाती थी । यदि एक गिलास की ऊँचाई 10 cm थी, तो गिलास की आभासी (apparent) धारिता तथा उसकी वास्तविक धारिता ज्ञात कीजिए । (π = 3. 14 लीजिए )
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 10
यहाँ पर,
गिलास का आंतरिक व्यास (d) = 5 cm
गिलास की आंतरिक त्रिज्या (r) = \(\frac {5}{2}\)cm
∴ गिलास की आंतरिक ऊँचाई (h) = 10 cm
गिलास की आभासी धारिता = πr²h
= 3.14 × \(\frac {5}{2}\) × \(\frac {5}{2}\) × 10 cm3 = 196.25cm3
आधार में उपस्थित अर्धगोले की त्रिज्या (r1) = \(\frac {5}{2}\)cm
आधार में उपस्थित अर्धगोले का आयतन = \(\frac {2}{3}\)πr3
= \(\frac {2}{3}\) × 3.14 × \(\frac {5}{2}\) × \(\frac {5}{2}\) × \(\frac {5}{2}\) cm3 = 32.71 cm3
अतः गिलास की वास्तविक धारिता = आभासी धारिता – अर्धगोले का आयतन
= (196.25 – 32.71) cm3
= 163.54 cm3

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 17.
एक बिल्डिंग का आन्तरिक भाग एक बेलन के आकार का है जिसके आधार की त्रिज्या 12 m और ऊँचाई 3.5 m है एक शंकु समान आधार और तिर्यक ऊँचाई 12.5 m के द्वारा आरोपित है। बिल्डिंग की धारिता ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 11
यहाँ पर
बिल्डिंग के बेलनाकार भाग की त्रिज्या (r) = 12 m
बिल्डिंग के बेलनाकार भाग की ऊँचाई (h) = 3.5m
बिल्डिंग के बेलनाकार भाग की धारिता = πr²h
= \(\frac {22}{7}\) × 12 × 12 × 3.5m3
= 1584 m3
बिल्डिंग के शंकु वाले भाग की त्रिज्या (r1) = 12m
बिल्डिंग के शंकु वाले भाग की तिर्यक ऊँचाई (l) = 12.5 m
बिल्डिंग के शंकु वाले भाग की ऊँचाई (h) = \(\sqrt{l^2-r^2}\)
= \(\sqrt{(12.5)^2-(12)^2}\)
= \(\sqrt{156.25-144}\)
= \(\sqrt{12.25}\)
= 3.5m
बिल्डिंग के शंकु वाले भाग की धारिता = \(\frac {1}{3}\)πr12h
= \(\frac{1}{3} \times \frac{22}{7}\) × 12 × 12 × 3.5 m3
= 528 m3
बिल्डिंग की कुल धारिता = (1584 + 528) m3
= 2112m 3

प्रश्न 18.
5.6 सेमी त्रिज्या वाले एक धातु के गोले को पिघलाकर 6 सेमी त्रिज्या वाले एक बेलन के रूप में ढाला जाता है । बेलन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
धातु के गोले की त्रिज्या (r) = 5.6 सेमी
⇒ धातु के गोले का आयतन = \(\frac {4}{3}\)πr3
= \(\frac {4}{3}\)π(5.6)3सेमी3
धातु के गोले को पिघलाकर बने बेलन की त्रिज्या (r) = 6 सेमी
माना धातु के गोले को पिघलाकर बने बेलन की ऊँचाई = H सेमी
धातु के गोले को पिघलाकर बने बेलन का आयतन = πR²H
= π(6)2H सेमी3
= 36πH सेमी3
प्रश्नानुसार,
36πH = \(\frac {4}{3}\)π(5.6)3
⇒ H = \(\frac{4}{3} \times \frac{1}{36}\) × 5.6 × 5.6 × 5.6
= 6.50 सेमी
अतः धातु के गोले को पिघलाकर बने बेलन की ऊँचाई = 6.50 सेमी

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 19.
यदि 45 cm ऊँची एक बाल्टी के सिरों की त्रिज्याएँ 28 cm और 7 cm हों, तो उसकी धारिता, वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल और संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
बाल्टी की ऊँचाई (h) = 45 cm
बाल्टी के एक सिरे की त्रिज्या (r1) = 28 cm
बाल्टी के दूसरे सिरे की त्रिज्या (r2) = 7 cm
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 12
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 13

प्रश्न 20.
एक शंकु की ऊँचाई 30 cm है। उसके शिखर की ओर से एक छोटा शंकु उसके आधार के समांतर एक तल द्वारा काटा गया है। यदि छोटे शंकु का आयतन दिए हुए शंकु के आयतन का \(\frac {1}{27}\) हो, तो आधार से कितनी ऊँचाई पर उसे काटा गया है ?
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 14
यहाँ पर,
शंकु की ऊँचाई(h1) = 30 cm
माना शीर्ष से h2 ऊँचाई पर एक शंकु काटा जाता है, जिसकी त्रिज्या R2 है ।
क्योंकि ΔADO’ ~ ΔABO
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 15
जितनी ऊँचाई से शंकु काटा गया = 30 – 10 = 20 cm
∴ शंकु के आधार से 20 cm ऊँचाई पर दूसरे शंकु को काटा गया है।

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 21.
एक खिलौना एक अर्धगोले के ऊपर उसी अर्धव्यास का शंकु रखकर बनाया गया है। यदि शंकु आकार भाग के आधार का अर्धव्यास 7 cm और ऊँचाई 24 cm हो तो खिलौने की सतह का पृष्ठीय क्षेत्रफल तथा 2 रु० प्रति वर्ग cm की दर से इसकी सतह को पॉलिश कराने का खर्च ज्ञात करें।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 16
यहाँ पर,
अर्धगोले की त्रिज्या (r) = 7 cm
अर्धगोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr²
= 2 × \(\frac {22}{7}\) × 7 × 7 cm²
= 308 cm²
शंकु वाले भाग की त्रिज्या (R) = 7 cm
शंकु वाले भाग की ऊँचाई (H) = 24 cm
शंकु वाले भाग की तिर्यक ऊँचाई (L) = \(\sqrt{\mathrm{R}^2+\mathrm{H}^2}\)
= \(\sqrt{(7)^2+(24)^2}\)
= \(\sqrt{49+576}\)
= \(\sqrt{625}\) = 25 cm
शंकु वाले भाग का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πRL
= \(\frac {22}{7}\) × 7 × 25 cm2
= 550 cm2
खिलौने का कुल क्षेत्रफल = (308 + 550) = 858 cm2
1 cm2 सतह को पॉलिश कराने का खर्च = 2 रु०
858cm2 सतह को पॉलिश कराने का खर्च = 858 × 2रु० = 1716 रु०

प्रश्न 22.
किसी धातु की चादर का बना एक बर्तन एक शंकु के छिन्नक के आकार का है। इसकी ऊँचाई 16 cm तथा निचले और ऊपरी सिरों की त्रिज्याएँ 8 cm और 10 cm हैं। बर्तन का आयतन तथा इसकी पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करें।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 17
यहाँ पर,
बर्तन की ऊँचाई (h) = 16 cm
बर्तन के एक सिरे की त्रिज्या (r1) = 10 cm
बर्तन के दूसरे सिरे की त्रिज्या (r2) = 8 cm
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 18
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन - 19

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
l लंबाई, b चौड़ाई व h ऊँचाई वाले किसी घनाभ का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) lbh
(B) 2lbh
(C) 2 (lb + bh + hl)
(D) lb + bh + hl
हल :
(C) 2 (lb + bh + hl)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 2.
l भुजा वाले किसी धन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) l3
(B) 6l2
(C) 2l3
(D) 12l2
हल :
(B) 6l2

प्रश्न 3.
l लंबाई, b चौड़ाई व h ऊँचाई वाले किसी घनाभ की चारदीवारी का क्षेत्रफल होगा-
(A) 2 (l + b) h
(B) (l + b) h
(C) 2 (b + h) l
(D) lbh
हल :
(A) 2 (l + b) h

प्रश्न 4.
l लंबाई, b चौड़ाई व h ऊँचाई वाले किसी घनाभ का आयतन होगा-
(A) 2 (lb + bh + hl)
(B) lb + bh + hl
(C) 2lbh
(D) lbh
हल :
(D) lbh

प्रश्न 5.
l भुजा वाले घन का आयतन होगा-
(A) l3
(B) 6l2
(C) 2l3
(D) 12l2
हल :
(A) l3

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 6.
l लंबाई, b चौड़ाई व h ऊँचाई वाले किसी घनाभ का विकर्ण होगा-
(A) \(\sqrt{l+b+h}\)
(B) \(\sqrt{l^2+b^2+h^2}\)
(C) \(\sqrt{lbh}\)
(D) \(\sqrt{2(l b+b h+h l)}\)
हल :
(B) \(\sqrt{l^2+b^2+h^2}\)

प्रश्न 7.
a भुजा वाले घन का विकर्ण होगा-
(A) 6a2
(B) a3
(C) \(\sqrt{3}\) a
(D) \(\sqrt{2}\) a
हल :
(C) \(\sqrt{3}\) a

प्रश्न 8.
10 cm भुजा वाले दो घन सिरे से सिरे तक जोड़े जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 500 cm2
(B) 1000 cm2
(C) 2000 cm2
(D) 2000 cm3
हल :
(B) 1000 cm2

प्रश्न 9.
एक भूमिगत जलाशय घनाभ के आकार का है, जिसकी विमाएँ 48 m, 36m और 28m हैं। जलाशय का आयतन होगा-
(A) 48384m2
(B) 48384m3
(C) 8160m3
(D) 8160m2
हल :
(B) 48384m3

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 10.
घनाभ, जिसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमश: 12m, 10m और 8m का आयतन है-
(A) 592m3
(B) 960m3
(C) 480m3
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) 960m3

प्रश्न 11.
48 cm × 36 cm माप की एक धातु की आयताकार चद्दर है। इसके प्रत्येक कोने से 8 cm भुजा का वर्ग काटकर निकाल लिया गया है । शेष चद्दर से ऊपर से खुला एक संदूक बनाया गया है। संदूक का आयतन ज्ञात कीजिए ।
(A) 5120 cm3
(B) 5120 cm2
(C) 13824 cm2
(D) 13824 cm3
हल :
(A) 5120 cm3

प्रश्न 12.
घनाभ, जिसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमशः 10m, 8m और 5m का आयतन है-
(A) 400m3
(B) 200m3
(C) 3000m3
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) 400m3

प्रश्न 13.
एक घन का आयतन 1728 घन cm है, उसकी कोर की लंबाई होगी-
(A) 12 cm
(B) 12 m
(C) 144 cm
(D) 864cm
हल :
(A) 12 cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 14.
5 cm भुजा वाले 3 घन सिरे से सिरे तक जोड़े जाते हैं । इस प्रकार प्राप्त घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 375 cm3
(B) 375 cm2
(C) 350 cm2
(D) 350 cm3
हल :
(C) 350 cm2

प्रश्न 15.
घनाभ, जिसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमश: 13m, 10m और 8m का आयतन है-
(A) 1040 m3
(B) 1060 m3
(C) 1020 m3
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) 1040m3

प्रश्न 16.
तीन घन जिनकी कोरें क्रमशः 3, 4 व 5 cm हैं, को पिघलाकर एक घन बनाया जाता है, तो नए घन की कोर होगी-
(A) 6 cm
(B) 12 cm
(C) 8 cm
(D) 3 cm
हल :
(A) 6 cm

प्रश्न 17.
घनाभ, जिसकी लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई क्रमशः 10m, 8m और 6m का आयतन है-
(A) 460m3
(B) 480m3
(C) 520m3
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) 480m3

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 18.
त्रिज्या 2 cm तथा 7 cm ऊँचाई वाले बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 88 cm2
(B) 88 cm
(C) 88 cm3
(D) 44 cm2
हल :
(A) 88 cm2

प्रश्न 19.
r त्रिज्या व h ऊँचाई वाले बेलन का आयतन होगा-
(A) 2πr (r + h)
(B) 2πrh
(C) πr2h
(D) 2πr2h
हल :
(C) πr2h

प्रश्न 20.
एक लंब वृत्तीय बेलन के आधार का व्यास 28 cm और उसकी ऊँचाई 21 cm है। उसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 588 वर्ग cm
(B) 1848 वर्ग cm
(C) 924 वर्ग cm
(D) 1386 वर्ग cm
हल :
(B) 1848 वर्ग cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 21.
एक बेलन के आधार की त्रिज्या 14 सेमी और ऊँचाई 6 सेमी है, तो उसका आयतन है :
(A) 196 π
(B) 392 π
(C) 1176 π
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(C) 1176 π

प्रश्न 22.
एक लंब वृत्तीय बेलन के आधार की त्रिज्या 14m और ऊँचाई 21 m है, उसका संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 1848 m2
(C) 3080 m3
(B) 1848 m2
(D) 5080 m3
हल :
(C) 3080 m2

प्रश्न 23.
एक बेलन के आधार की त्रिज्या 2.1 सेमी और ऊँचाई 5 सेमी है, तो उसका आयतन है :
(A) 22.05 π
(B) 7.35 π
(C) 21 π
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) 22.05 π

प्रश्न 24.
यदि R और खोखले लंब वृत्तीय बेलन की बाह्य और अंतः त्रिज्याएँ हों तो उसमें लगी धातु का आयतन होगा-
(A) 2πh (R2 – r2)
(B) 2π (R + r)h
(C) πh (R2 + r2)
(D) πh (R2 – r2)
हल :
(D) πh (R2 – r2)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 25.
r त्रिज्या तथा h ऊँचाई वाले लंब वृत्तीय शंकु की तिर्यक ऊँचाई होगी-
(A) \(\sqrt{r^2+h^2}\)
(B) \(\sqrt{r^2-h^2}\)
(C) \(\sqrt{2\left(r^2+h^2\right)}\)
(D) \(\sqrt{2\left(r^2-h^2\right)}\)
हल :
(A) \(\sqrt{r^2+h^2}\)

प्रश्न 26.
r त्रिज्या तथा l तिर्यक ऊँचाई वाले शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 2 πrl
(B) πrl
(C) πr (r + l)
(D) \(\frac {1}{3}\)πr²l
हल :
(B) πrl

प्रश्न 27.
त्रिज्या, h ऊँचाई तथा / तिर्यक ऊँचाई वाले शंकु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 2 πrl
(B) πrl
(C) πr (r + l)
(D) \(\frac {1}{3}\)πr2h
हल :
(C) πr (r + l)

प्रश्न 28.
r त्रिज्या, h ऊँचाई तथा l तिर्यक ऊँचाई वाले शंकु का आयतन होगा-
(A) 2 πrl
(B) πrl
(C) πr (r + l)
(D) \(\frac {1}{3}\)πr2h
हल :
(D) \(\frac {1}{3}\)πr2h

प्रश्न 29.
एक शंकु के आधार की त्रिज्या 4 सें०मी० और ऊँचाई 3 सें०मी० है, तो उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा (π = \(\frac {22}{7}\)) :
(A) 20 सें०मी०2
(B) 20π सें०मी०2
(C) 30π सें०मी०2
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(D) 20π सें०मी०2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 30.
एक शंकु के आधार की त्रिज्या 7 सेमी और ऊँचाई 6 सेमी है, तो उसका आयतन है (π = \(\frac {22}{7}\)) :
(A) 924 सेमी3
(B) 308 सेमी3
(C) 1232 सेमी3
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) 308 सेमी3

प्रश्न 31.
एक शंकु के आधार की त्रिज्या 3.5 सेमी और ऊँचाई 9 सेमी है, तो उसका आयतन है :
(A) 36.75 π
(B) 110.25 π
(C) 330.75 π
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) 36.75 π

प्रश्न 32.
2 m व्यास वाला 14 m गहरा एक कुआँ खोदा गया है। उससे निकाली हुई मिट्टी को कुएँ के चारों ओर 5 m चौड़ाई तक समान रूप से फैलाकर एक चबूतरा बनाया गया है । चबूतरे की ऊँचाई होगी-
(A) 0.4 m
(B) 1.0 m
(C) 1.5 m
(D) 2.0 m
हल :
(A) 0.4m

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 33.
50 वृत्ताकार प्लेटों, जिसमें से प्रत्येक की त्रिज्या 7 cm और मोटाई cm है, को एक-दूसरे के ऊपर रखकर एक ठोस वृत्ताकार बेलन बनाया जाता है। इस प्रकार बने बेलन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 1408 वर्ग cm
(B) 1408 घन cm
(C) 3850 वर्ग cm
(D) 3850 घन cm
हल :
(A) 1408 वर्ग cm

प्रश्न 34.
एक घन का आयतन 216 मी.3 है, तो इसकी भुजा की लम्बाई होगी :
(A) 6 मी.
(B) 6 मी.3
(C) 12 मी.
(D) 12 मी.2
हल :
(A) 6 मी.

प्रश्न 35.
2 सें. मी. त्रिज्या तथा 7 सें.मी. ऊँचाई वाले बेलन का आयतन है :
(A) 88 सें.मी.3
(B) 88 सें.मी.2
(C) 88 सें.मी.
(D) \(\frac {352}{21}\) सें.मी.2
हल :
(A) 88 सें.मी.3

प्रश्न 36.
आधार की त्रिज्या 12 dm तथा तिर्यक ऊँचाई 9 dm वाले लंब वृत्तीय शंकु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) \(\frac {2376}{7}\)cm2
(B) \(\frac {2376}{7}\)dm2
(C) 792 cm2
(D) 792 dm2
हल :
(D) 792 dm2

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प्रश्न 37.
आधार की त्रिज्या 24m तथा ऊँचाई 10 m वाले शंक्वाकार तंबू की तिर्यक ऊँचाई होगी-
(A) 34m
(B) 14m
(C) 26m
(D) 24 m
हल :
(C) 26m

प्रश्न 38.
वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 528 cm2 तथा तिर्यक ऊँचाई 21 cm वाले लंब वृत्तीय शंकु के आधार की त्रिज्या होगी –
(A) 16 cm
(B) 8 cm
(C) 6 cm
(D) 4 cm
हल :
(B) 8 cm

प्रश्न 39.
एक शंक्वाकार गुम्बज की तिर्यक ऊँचाई और आधार की त्रिज्या क्रमशः 25m तथा 7m है। इस गुम्बज का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 550 m2
(B) 550 cm2
(C) 704 m2
(D) 704 cm2
हल :
(A) 550m2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 40.
r त्रिज्या वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करने का सूत्र होगा-
(A) 2πr²
(B) 3πr²
(C) 4πr²
(D) πr²
हल :
(C) 4πr²

प्रश्न 41.
r त्रिज्या वाले अर्धगोले का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करने का सूत्र है-
(A) 3πr²
(B) 4πr²
(C) πr²
(D) 2πr²
हल :
(D) 2πr²

प्रश्न 42.
r त्रिज्या वाले अर्धगोले का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करने का सूत्र है-
(A) 3πr²
(B) 4πr²
(C) πr²
(D) 2πr²
हल :
(A) 3πr²

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 43.
r त्रिज्या वाले गोले का आयतन होगा-
(A) \(\frac {1}{3}\)πr3
(B) \(\frac {4}{3}\)πr3
(C) \(\frac {2}{3}\)πr3
(D) 4πr3
हल :
(B) \(\frac {4}{3}\)πr3

प्रश्न 44.
r त्रिज्या वाले अर्धगोले का आयतन होगा-
(A) \(\frac {1}{3}\)πr3
(B) \(\frac {4}{3}\)πr3
(C) \(\frac {2}{3}\)πr3
(D) 4πr3
हल :
(C) \(\frac {2}{3}\)πr3

प्रश्न 45.
2.1 cm त्रिज्या वाले गोले का आयतन होगा-
(A) 3880.8 cm3
(B) 388.08 cm3
(C) 3.8808 cm3
(D) 38.808 cm3
हल :
(D) 38.808 cm3

प्रश्न 46.
36πcm3 आयतन वाले गोले की त्रिज्या होगी –
(A) 3 cm
(B) 6 cm
(C) 1.5 cm
(D) 4.5 cm
हल :
(A) 3 cm

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प्रश्न 47.
3 cm त्रिज्या वाले अर्धगोले का आयतन है :
(A) \(\frac {198}{7}\)cm3
(B) \(\frac {792}{7}\)cm3
(C) \(\frac {396}{7}\)cm3
(D) \(\frac {198}{14}\)cm3
हल :
(C) \(\frac {396}{7}\)cm3

प्रश्न 48.
एक खोखले अर्धगोलीय बर्तन के अंतः और बाह्य व्यास क्रमशः 42 cm और 45.5 cm हैं। उसकी धारिता होगी-
(A) 17.404 लीटर
(B) 18.404 लीटर
(C) 19.404 लीटर
(D) 20.404 लीटर
हल :
(C) 19.404 लीटर

प्रश्न 49.
धातु के एक गोले का अर्धव्यास 4.2 cm है। उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 220.76 वर्ग cm
(B) 221.76 वर्ग cm
(C) 222.76 वर्ग cm
(D) 223.76 वर्ग cm
हल :
(B) 221.76 वर्ग cm

प्रश्न 50.
4.2 cm की त्रिज्या वाले गोले का आयतन होगा-
(A) 310.46 घन cm
(B) 305.46 घन cm
(C) 309.46 घन cm
(D) 300.46 घन cm
हल :
(A) 310.46 घन cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 51.
यदि एक गोले का व्यास 2R हो तो उसका संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) πR2
(B) 2πR2
(C) 3πR2
(D) 4πR2
हल :
(D) 4πR2

प्रश्न 52.
धातु के एक गोले का व्यास 6 cm है । गोले को पिघलाकर एक समान वृत्तीय अनुप्रस्थ- परिच्छेद वाला तार बनाया गया है। यदि तार की लंबाई 36 m हो, तो उसकी त्रिज्या होगी-
(A) 0.1 cm
(B) 1 cm
(C) 0.1mm
(D) 0.01 cm
हल :
(A) 0.1 cm

प्रश्न 53.
सीसे के एक ठोस गोले, जिसकी त्रिज्या 8 cm है, से 1 cm त्रिज्या वाली कितनी गोलियाँ बनाई जा सकती हैं?
(A) 512
(B) 256
(C) 522
(D) 532
हल :
(A) 512

प्रश्न 54.
एक शंकु 8.4 cm ऊँचा है और उसके आधार की त्रिज्या 2.1 cm है। उसे पिघलाकर एक गोले के रूप में ढाला जाता है । गोले की त्रिज्या होगी –
(A) 6.3 cm
(B) 8.4 cm
(C) 4.2 cm
(D) 2.1 cm
हल :
(D) 2.1 cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 55.
धातु के एक गोले की अंतः और बाह्य त्रिज्याएँ क्रमशः 3 cm और 5 cm हैं । उसको पिघलाकर 105 cm ऊँचाई वाला एक ठोस लंब वृत्तीय बेलन बनाया जाता है। बेलन के आधार का व्यास होगा-
(A) 5 cm
(B) 6 cm
(C) 7 cm
(D) 8 cm
हल :
(C) 7 cm

प्रश्न 56.
एक घन के आयतन और उस गोले के आयतन का अनुपात क्या होगा जो घन में ठीक समा सके ?
(A) 2 : π
(B) 3 : π
(C) 4 : π
(D) 6 : π
हल :
(D) 6 : π

प्रश्न 57.
r त्रिज्या वाले एक ठोस गोले को पिघलाकर r ऊँचाई के एक टोस शंकु के आकार में ढाला जाता है । शंकु के आधार की त्रिज्या होगी-
(A) 2r
(B) 3r
(C) r
(D) 4r
हल :
(A) 2r

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 58.
एक धातु के शंकु को समान त्रिज्या के बेलन के आकार में बदला जाता है। यदि बेलन की ऊँचाई 5 cm हो तो शंकु की ऊँचाई होगी-
(A) 10 cm
(B) 15 cm
(C) 20 cm
(D) 25 cm
हल :
(B) 15 cm

प्रश्न 59.
यदि प्रत्येक गोले की त्रिज्या 3 cm है जिन्हें पिघलाकर 45 cm ऊँचाई व 4 cm व्यास का एक टोस धातु का बेलन बनाया जाता है, तो गोलों की संख्या होगी-
(A) 8
(B) 7
(C) 6
(D) 5
हल :
(D) 5

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 60.
एक खिलौना 3.5 cm की त्रिज्या वाले गोलार्ध पर बने शंकु के आकार का है। खिलौने की कुल ऊँचाई 15.5 cm है । इसका संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 7.7 cm2
(C) 214.5 cm2
(B) 137.5 cm2
(D) 214.5 cm3
हल :
(C) 214.5 cm2

प्रश्न 61.
पेट्रोल की एक बेलनाकार टंकी के आधार का व्यास 21 cm और लंबाई 18 cm है। वह शंक्वाकार सिरों से जुड़ी है, जिनमें से प्रत्येक की अक्ष लंबाई 9 cm है। टंकी की धारिता होगी –
(A) 8316 cm3
(B) 8216 cm3
(C) 8116 cm3
(D) 8016 cm3
हल :
(A) 8316 cm3

प्रश्न 62.
एक बॉयलर (boiler) बेलनाकार है जिसकी लंबाई 3m है और उसके प्रत्येक सिरे पर 2 m व्यास का एक गोलार्ध है। बॉयलर का आयतन होगा-
(A) 13\(\frac {13}{21}\)
(B) 13\(\frac {10}{21}\)
(C) 13\(\frac {11}{21}\)
(D) 13\(\frac {12}{21}\)
हल :
(A) 13\(\frac {13}{21}\)

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प्रश्न 63.
एक छत से, जिसका आकार 22m × 18m है, वर्षा का पानी बहकर नाली द्वारा एक बेलनाकार बर्तन में गिरता है । यदि बर्तन का व्यास 2.4m तथा बर्तन में पानी की ऊँचाई 1.4 m हो तो cm में वर्षा की माप होगी-
(A) 1.3 cm
(B) 1.4 cm
(C) 1.5 cm
(D) 1.6 cm
हल :
(D) 1.6 cm

प्रश्न 64.
यदि शंकु के छिन्नक के वृत्तीय आधारों की त्रिज्याएँ r1 व r2 (r1 > r2), ऊँचाई h तथा तिर्यक ऊँचाई l हों तो उसका आयतन होगा-
(A) \(\frac {1}{3}\)πh(r12 + r1r2 + r22)
(B) π[(r1 + r2)l + r12 + r22]
(C) π(r1 + r2)l
(D) \(\frac {1}{3}\)πh(r12 – r1r2 + r22)
हल :
(A) \(\frac {1}{3}\)πh(r12 + r1r2 + r22)

प्रश्न 65.
यदि शंकु के छिन्नक के वृत्तीय आधारों की त्रिज्याएँ r1 व r2 (जहाँ r1 > r2) व तिर्यक ऊँचाई l हों तो इसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 2π(r1 + r2) l
(B) π(r1 + r2) l
(C) π[(r1 + r2)l + r12 + r22]
(D) \(\frac {π}{3}\)h(r12 + r1r2 + r22)
हल :
(B) π(r1 + r2) l

प्रश्न 66.
यदि शंकु के छिन्नक के वृत्तीय आधारों की त्रिज्याएँ r1 व r2 (जहाँ 1/2) तथा तिर्यक ऊँचाई / हो तो छिन्नक का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल होगा-
(A) 2π(r1 + r2) l
(B) π(r1 + r2) l
(C) π[(r1 + r2)l + r12 + r22]
(D) \(\frac {π}{3}\)h(r12 + r1r2 + r22)
हल :
(C) π[(r1 + r2)l + r12 + r22]

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 67.
एक जलाशय लंब वृत्तीय शंकु के छिन्नक के आकार में है। इसका ऊपरी सिरा 8 m तथा पेंदी वाला सिरा 4m चौड़ा है। यदि यह 6m गहरा हो तो इसकी क्षमता होगी-
(A) 176 m3
(B) 196 m3
(C) 110m3
(D) 352 m3
हल :
(A) 176m3

प्रश्न 68.
एक 6 cm ऊँचाई वाले शंकु के छिन्नक के आधारों की त्रिज्याएँ 14 cm व 6 cm हैं। इसकी तिर्यक ऊँचाई होगी-
(A) 8 cm
(B) 10cm
(C) 12 cm
(D) 20 cm
हल :
(B) 10cm

प्रश्न 69.
एक 24 cm ऊँचाई वाले शंकु के छिन्नक के आधारों की त्रिज्याएँ 10 cm व 3 cm हैं। इसकी तिर्यक ऊँचाई होगी-
(A) 13 cm
(B) 12 cm
(C) 25 cm
(D) 24 cm
हल :
(C) 25 cm

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

प्रश्न 70.
एक 12 cm ऊँचाई वाले शंकु के छिन्नक के आधारों की त्रिज्याएँ 9 cm व 4 cm हैं। इसकी तिर्यक ऊँचाई होगी-
(A) 26 cm
(B) 6.5 cm
(C) 24 cm
(D) 13 cm
हल :
(D) 13 cm

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