Author name: Bhagya

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. 250 ग्राम जल में 2 g NaOH घुला हुआ है तो विलयन की सान्द्रता होगी –
(अ) 0.2 M
(ब) 0.2 N
(स) 0.2 m
(द) 4 ग्राम लीटर-1
उत्तर:
(स) 0.2 m

2. निम्न में से किस मात्रक में विलयन की सान्द्रता ताप पर निर्भर नहीं करती है?
(अ) मोलरता
(ब) नार्मलता
(स) फार्मलता
(द) मोललता
उत्तर:
(द) मोललता

3. निम्नलिखित में से किस विलयन का परासरण दाब न्यूनतम होगा?
(अ) 0.1M BaCl2
(ब) 0.1M यूरिया
(स) 0.1M HCl
(द) 0.2M ग्लूकोस
उत्तर:
(ब) 0.1M यूरिया

4. वाट हॉफ गुणक के लिए कौनसा सूत्र सही नहीं है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 1

5. निम्नलिखित में से किसके लिए वान्ट हॉफ गुणक का मान K4[Fe (CN)6] के लिए वान्ट हॉफ गुणक के बराबर होगा ?
(अ) NaCl
(ब) Na2SO4
(स) Al2(SO4)3
(द) Al(NO3)3
उत्तर:
(स) Al2(SO4)3

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6. प्रकृति में कुल कितने प्रकार के विलयन संभव हैं?
(अ) 6
(ब) 10
(स) 12
(द) 9
उत्तर:
(द) 9

7. शुद्ध जल की मोलरता कितनी होती है?
(अ) 5.5
(ब) 55.5
(स) 18.0
(द) 10.0
उत्तर:
(ब) 55.5

8. प्रतिलोम परासरण (Reverse osmosis) के लिए प्रयुक्त अर्धपारगम्य झिल्ली किससे बनी होती है?
(अ) सेलोफेन
(ब) सूअर का ब्लेडर
(स) सेलूलोस ऐसीटेट
(द) पार्चमेन्ट
उत्तर:
(स) सेलूलोस ऐसीटेट

9. रुधिर कोशिका में स्थित द्रव का परासरण दाब निम्नलिखित में से किसके समान होता है?
(अ) 1% (w/V) NaCl विलयन
(ब) 0.9% (w/V) NaCl विलयन
(स) 1% (w/V) Na2SO4 विलयन
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) 0.9% (w/V) NaCl विलयन

10. विलायक के प्रति किलोग्राम में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या कहलाती है-
(अ) मोलरता
(ब) मोलरता
(स) मोललता
(द) मोल भिन्न
उत्तर:
(स) मोललता

11. परासरण की क्रिया को रोकने हेतु प्रयुक्त दाब कहलाता है-
(अ) वाष्प दाब
(ब) आंशिक दाब
(स) परासरण दाब
(द) वायुमण्डलीय दाब
उत्तर:
(स) परासरण दाब

12. समान परासरण दाब वाले विलयन कहलाते हैं-
(अ) अतिपरासरी विलयन
(ब) अल्पपरासरी विलयन
(स) समपरासरी विलयन
(द) सामान्य परासरी विलयन
उत्तर:
(स) समपरासरी विलयन

13. दो द्रवों का विलयन जो संघटन में परिवर्तन के बिना एक निश्चित ताप पर आसवित होता है, कहलाता है-
(अ) संतृप्त विलयन
(ब) आदर्श विलयन
(स) स्थिर क्वाथी मिश्रण
(द) असंतृप्त विलयन
उत्तर:
(स) स्थिर क्वाथी मिश्रण

14. एक वायुमण्डलीय दाब पर निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक उच्चतम होगा-
(अ) 0.1M ग्लूकोस
(ब) 0.1 M यूरिया
(स) 0.1M बेरियम क्लोराइड
(द) 0.1M NaCl
उत्तर:
(स) 0.1M बेरियम क्लोराइड

15. निम्नलिखित में से कौनसा गुण अणुसंख्य गुण नहीं है ?
(अ) क्वथनांक उन्नयन
(स) हिमांक अवनमन
(ब) वाष्प दाब अवनमन
(द) हिमांक
उत्तर:
(द) हिमांक

16. बेन्जीन और टॉलूईन का मिश्रण है-
(अ) धनात्मक विचलन युक्त विलयन
(ब) ऋणात्मक विचलन युक्त विलयन
(स) आदर्श विलयन
(द) अनादर्श विलयन
उत्तर:
(स) आदर्श विलयन

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17. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म आदर्श विलयन नहीं बनाता?
(अ) C2H5Br, C2H5I
(ब) C2H5I, C2H5OH
(स) C6H5Cl, C6H5Br
(द) C6H6, C6H5CH3
उत्तर:
(ब) C2H5I, C2H5OH

18. H2SO4 का एक मोलर विलयन किसके समान होगा?
(अ) नॉर्मल विलयन
(ब) N/2 विलयन
(स) 2N विलयन
(द) 4N विलयन
उत्तर:
(स) 2N विलयन

19. निम्नलिखित में से किस मिश्रण में मुख्य रूप से द्विध्रुव – द्विध्रुव आकर्षण पाया जाता है?
(अ) KCl तथा H2O
(ब) C6H6 तथा CCl4
(स) C6H6 तथा C2H5OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 2
उत्तर:
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20. आदर्श विलयन के लिए निम्नलिखित में से कौनसी शर्त सही है?
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21. सोडा वाटर होता है-
(अ) CO2 गैस में जल का विलयन
(ब) CO2 गैस का जल में विलयन
(स) CO2 तथा O2 का विलयन
(द) CO2 तथा N2 का विलयन
उत्तर:
(ब) CO2 गैस का जल में विलयन

22. निम्नलिखित में से कौनसा अणुसंख्य गुण है?
(अ) पृष्ठ तनाव
(ब) श्यानता
(स) परासरण दाब
(द) चालकता
उत्तर:
(स) परासरण दाब

23. 0.1 M KCl, 0.1 M CaSO4 तथा 0.1M K2CO3 के जलीय विलयनों के हिमांक अवनमन का अनुपात होगा-
(अ) 1 : 1 : 3
(ब) 2 : 2 : 5
(स) 1 : 1 : 1.5
(द) 1 : 1 : 1
उत्तर:
(स) 1 : 1 : 1.5

24. जब विलयन में वैद्युत अपघट्य वियोजित होता है तो इसके वान्ट हॉफ गुणक का मान होगा-
(अ) > 1
(ब) < 1
(स) 1
(द) शून्य
उत्तर:
(अ) > 1

25. यूरिया के एक जलीय विलयन के क्वथनांक में उन्नयन 0.52° है। [Kb = 0.52°C मोल’ किग्रा.] तो इस विलयन में यूरिया का मोल प्रभाज है-
(अ) 0.982
(स) 0.943
(ब) 0.567
(द) 0.018
उत्तर:
(द) 0.018

26. अर्द्धपारगम्य झिल्ली अनुमति करती है-
(अ) एक विलयन को गुजरने देना
(ब) विलेय को गुजरने देना
(स) विलायक को गुजरने देना
(द) विलेय एवं विलायक दोनों को गुजरने देना
उत्तर:
(स) विलायक को गुजरने देना

27. 5 ग्राम NaOH के 450 मिली. विलयन की मोलरता होगी-
(अ) 0.189 मोल dm-3
(ब) 0.278 मोल dm-3
(स) 0.556 मोल dm-3
(द) 0.027 मोल dm-3
उत्तर:
(ब) 0.278 मोल dm-3

28. किसी जलीय विलयन का हिमांक- 0.186°C है, इसी विलयन के क्वथनांक में उन्नयन का मान है ( Kf = 1.86°C mol-1 kg) (Kb = 0.512°C mol-1 kg)
(अ) 0.186°C
(ब) 0.0512°C
(स) 1.86°C
(द) 5.12°C
उत्तर:
(ब) 0.0512°C

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29. निम्नलिखित में से द्रवों का कौन-सा युग्म राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन प्रदर्शित करता है?
(अ) जल-हाइड्रोजन अम्ल
(ब) बेन्जीन – मेथेनॉल
(स) जल- नाइट्रिक अम्ल
(द) ऐसीटोन – क्लोरोफॉर्म
उत्तर:
(ब) बेन्जीन – मेथेनॉल

30. समान तापमान पर 5% ग्लूकोस ( अणु भार 180 ) का विलयन एवं 10% अज्ञात पदार्थ का विलयन समपरासरी है, तो अज्ञात पदार्थ का अणुभार है-
(अ) 90
(ब) 180
(स) 360
(द) 45
उत्तर:
(स) 360

31. कौनसा सान्द्रता अभिव्यक्ति का माध्यम ताप से स्वतंत्र है?
(अ) मोलरता
(ब) नार्मलता
(स) फॉर्मलता
(द) मोललता
उत्तर:
(द) मोललता

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न :

प्रश्न 1.
0.2 मोलल विलयन का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
0.2 मोलल विलयन का अर्थ है कि 0.2 मोल विलेय 1000g (1 kg) विलायक में घुला हुआ है।

प्रश्न 2.
जलीय विलयन के लिए मोललता तथा किसी पदार्थ (विलेय) मोल अंश में क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर:
विलेय का मोल अंश = \(\frac { m }{ m + 55.5 }\)
m = मोललता, 1000 ग्राम जल के मोल = \(\frac { 1000 }{ 18 }\) = 55.5

प्रश्न 3.
विलयन का ताप बढ़ाने पर मोलरता पर क्या प्रभाव होगा ?
उत्तर:
विलयन का ताप बढ़ाने पर मोलरता कम हो जाती है क्योंकि विलयन का आयतन बढ़ जाता है।

प्रश्न 4.
H2O2 की आयतन सान्द्रता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एक आयतनं H2O2 विलयन के वियोजन से NTP पर प्राप्त ऑक्सीजन का आयतन, इसकी आयतन सान्द्रता कहलाती है।

प्रश्न 5.
मोलरता की तुलना में मोललता को अधिक महत्त्व दिया जाता है, क्यों?
उत्तर:
मोलरता की तुलना में मोललता को अधिक महत्त्व दिया जाता है क्योंकि मोललता ताप पर निर्भर नहीं करती।

प्रश्न 6.
एक मोलल तथा एक मोलर जलीय विलयन में से किसकी सान्द्रता अधिक होती है?
उत्तर:
एक मोलर विलयन।

प्रश्न 7.
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता पर क्या प्रभाव
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता कम हो जाती है।

प्रश्न 8.
हेनरी के नियम की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
किसी विलयन में गैस का मोल अंश, उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है, अर्थात् किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब, उस विलयन में गैस के मोल अंश के समानुपाती होता है। इसे हेनरी का नियम कहते हैं।

प्रश्न 9.
किस प्रकार के द्रवों में आदर्श विलयन बनाने की प्रवृत्ति होती है?
उत्तर:
बहुत अधिक तनु विलयन, लगभग समान संरचना तथा ध्रुवता वाले द्रवों में आदर्श विलयन बनाने की प्रवृत्ति होती है।

प्रश्न 10.
स्थिरक्वाथी मिश्रण में उपस्थित अवयवों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता। क्यों?
उत्तर:
स्थिर क्वाथी मिश्रण में उपस्थित अवयव निश्चित अनुपात में होते हैं जो निश्चिंत ताप पर एक साथ उबलते हैं, अतः इन्हें प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 11.
समान ताप पर नाइट्रोजन की जल में विलेयता, हाइड्रोजन की तुलना में कम होती है तो किस गैस का हेनरी स्थिरांक अधिक है?
उत्तर:
नाइट्रोजन का हेनरी स्थिरांक अधिक है क्योंकि किसी गैस की
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प्रश्न 12.
गैसों की द्रवों में विलेयता पर दाब का क्या प्रभाव
उत्तर:
दाब बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता बढ़ती है।

प्रश्न 13.
अमोनिया की बोतल को खोलने से पहले ठण्डा किया जाता है। क्यों?
उत्तर:
अमोनिया की बोतल को ठण्डा करने से उसका वाष्प दाब कम हो जाता है जिससे द्रव अमोनिया तेजी से बाहर नहीं निकलती ।

प्रश्न 14.
विलयन में विलेय की वियोजन की मात्रा तथा वान्ट हॉफ गुणक में क्या सम्बन्ध होता है ?
उत्तर:
∝ = \(\frac{i-1}{n-1}\)
∝ = वियोजन की मात्रा, n = वियोजन से प्राप्त कणों की संख्या तथा i = वान्टहॉफ गुणक ।

प्रश्न 15.
जल में थोड़ा-सा ग्लुकोस मिलाने पर इसके वाष्पदाब पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
ग्लुकोस मिलाने से जल का वाष्पदाब कम हो जाएगा क्योंकि ग्लुकोस अवाष्पशील पदार्थ है।

प्रश्न 16.
किसी विलयन के क्वथनांक उन्नयन (△Tb) तथा विलेय के मोलर द्रव्यमान में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
△Tb, विलेय के मोलर द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

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प्रश्न 17.
प्रतिलोम परासरण कब होता है?
उत्तर:
जब विलयन पर परासरण दाब से अधिक दाब लगाते हैं तो प्रतिलोम परासरण होता है।

प्रश्न 18.
शर्करा तथा KCl के सममोलर विलयन समपरासरी होंगे या नहीं, तथा क्यों?
उत्तर:
शर्करा तथा KCl के सममोलर विलयन समपरासरी नहीं होते क्योंकि KCl वियोजित होकर दो आयन देता है जबकि शर्करा का वियोजन नहीं होता।

प्रश्न 19.
जल के लिए मोलल अवनमन (Kf) स्थिरांक 1.86 K Kg mol-1 होता है, इसका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जल के लिए Kf = 1.86 का अर्थ है कि जब 1 मोल अवाष्पशील विलेय को 1 Kg विलायक में घोला जाता है तो जल के हिमांक में 1.86 K की कमी हो जाती है।

प्रश्न 20.
अण्डे के बाहरी खोल को हटाकर जब उसे लवण (NaCl) के संतृप्त विलयन में रखा जाता है, तो क्या होगा ?
उत्तर:
अण्डे में बाह्यपरासरण होगा जिसके कारण वह सिकुड़ जाता है।

प्रश्न 21.
मोललता तथा क्वथनांक उन्नयन में सम्बन्ध बताइए |
उत्तर:
क्वथनांक उन्नुयन तथा मोललता एक-दूसरे के समानुपाती होते हैं।

प्रश्न 22.
एक प्रतिहिम (Anti Freezing Agent) पदार्थ का उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
एथिलीन ग्लाइकॉल प्रतिहिम का कार्य करता है।

प्रश्न 23.
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल को त्वचा पर रगड़ने से शीतलन का अनुभव होता है, क्यों?
उत्तर:
आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल वाष्पशील होता है अतः यह त्वचा से गुप्त ऊष्मा का अवशोषण करके वाष्प में परिवर्तित हो जाता है, जिसके कारण शीतलन का अनुभव होता है।

प्रश्न 24.
गले में सूजन होने पर साधारण नमक के पानी से गरारे करने की सलाह दी जाती है । क्यों?
उत्तर:
नमक का पानी अतिपरासरी (हाइपरटोनिक ) होता है, जिसके कारण यह गल में खिंचाव उत्पन्न करने वाले कारक को बाहर निकाल देता है।

प्रश्न 25.
जलीय जीवजन्तु गरम जल की अपेक्षा ठण्डे जल में अधिक आसानी से रहते हैं, क्यों ?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर गैसों की जल में विलेयता कम होती है अतः गरम जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है इसलिए जलीय जीवजन्तु गरम जल की अपेक्षा ठण्डे जल में अधिक आसानी से रहते हैं ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न :

प्रश्न 1.
राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन की व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए ।
उत्तर:
दो द्रव A तथा B के मिश्रण में धनात्मक विचलन होने पर A-B आकर्षण A-A तथा B-B के मध्य आकर्षण की तुलना में दुर्बल होता है। अर्थात् इस स्थिति में विलेय-विलायक अणुओं के मध्य अंतराआण्विक आकर्षण बल विलेय-विलेय और विलायक – विलायक अणुओं की तुलना में दुर्बल होते हैं। अतः इस प्रकार के विलयनों में से A अथवा B के अणु शुद्ध अवयव की तुलना में अधिक आसानी से निकल सकते हैं, जिसके कारण वाष्प दाब में वृद्धि होती है।

उदाहरण-एथेनॉल तथा ऐसीटोन का मिश्रण। शुद्ध एथेनॉल में अणुओं के हाइड्रोजन बंध होते हैं। इसमें ऐसीटोन मिलाने पर इसके अणु एथेनॉल के अणुओं के बीच में आ जाते हैं, जिसके कारण इनके बीच पहले से उपस्थित हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं। इससे अंतराआण्विक आकर्षण बल दुर्बल हो जाने के कारण यह मिश्रण राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है।

प्रश्न 2.
राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन को उदाहरण सहित समझाइए |
उत्तर:
दो द्रव A तथा B के मिश्रण में ऋणात्मक विचलन की स्थिति में A-A तथा B-B के मध्य आर्कषण बल A-B की तुलना में दुर्बल होता है। इसके कारण वाष्पदाब कम हो जाता है। उदाहरण- फीनॉल तथा ऐनिलीन का मिश्रण। इस स्थिति में फीनॉलिक प्रोटॉन एवं ऐनिलीन के नाइट्रोजन परमाणु के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के मध्य अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध समान अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध की तुलना में प्रबल होता है। इसी प्रकार से क्लोरोफॉर्म तथा ऐसीटोन का मिश्रण भी उल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन दर्शाता है। इसका कारण यह है कि क्लोरोफॉर्म, ऐसीटोन के साथ हाइड्रोजन बंध बना लेता है।
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प्रश्न 3.
एक शीतल पेय पदार्थ जो कि कार्बोनेटीकृत है, की house बोतल को खोलने पर गैस के बुलबुले तेजी से बाहर निकलते हैं। क्यों?
उत्तर:
कार्बोनेटीकृत पेय की बोतल में उच्च दाब पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस भरी होती है। जब बोतल का ढक्कन खोला जाता है, तो यह गैस उच्च दाब से निम्न दाब की ओर तेजी से बाहर निकलती है। अतः गैस के बुलबुले बाहर की तरफ निकलते हुए दिखाई देते हैं।

प्रश्न 4.
NaOH की जल में विलेयता पर ताप का क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
NaOH का जल में विलयन बनना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है अतः ले-शातैलिए के नियमानुसार ऊष्माक्षेपी प्रक्रम हेतु ताप बढ़ाने पर साम्यावस्था पश्च दिशा में जाती है अर्थात् NaOH की विलेयता कम हो जाएगी।

प्रश्न 5.
ऐनॉक्सिया क्या है?
उत्तर:
ऐनॉक्सिया एक प्रकार की बीमारी है जो सामान्यतः अधिक ऊँचाई पर रहने वाले लोगों में पाई जाती है। इसमें व्यक्तियों के रक्त एव ऊतकों में ऑक्सीजन की सान्द्रता कम हो जाती है अतः वे कमजोर हो जाते हैं तथा उनकी सोचने की क्षमता में भी कमी आ जाती है।

प्रश्न 6.
एथिल ऐल्कोहॉल तथा साइक्लोहेक्सेन का मिश्रण, राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है, क्यों?
उत्तर:
साइक्लोहेक्सेन के अणुओं के मध्य वान्डरवाल बल तथा एथिल ऐल्कोहॉल (एथेनॉल) के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है लेकिन जब एथेनॉल तथा साइक्लोहेक्सेन को मिलाया जाता है तो एथेनॉल के अणुओं के मध्य उपस्थित हाइड्रोजन बन्ध टूट जाते हैं अर्थात् A-B आकर्षण, A-A तथा B-B आकर्षण से कम है अतः अणु दूर-दूर जाते हैं इसलिए यह धनात्मक विचलन का उदाहरण है।

प्रश्न 7.
राउल्ट के नियम की सीमाएँ बताइए ।
उत्तर:

  • यह नियम केवल तनु विलयनों पर ही लागू होता है।
  • विद्युत अपघट्यों के विलयनों पर यह नियम नहीं लगता है।
  • जब विलयन में पदार्थ का संगुणन या वियोजन होता है तो भी राउल्ट का नियम नहीं लगता।

प्रश्न 8.
नमक के सान्द्र विलयन में ताजा अंगूर डालने पर वे सिकुड़ जाते हैं जबकि इन्हें पुन: जल में डालने पर ये फूल जाते हैं। क्यों?
उत्तर:
परासरण के कारण विलायक निम्न सान्द्रता युक्त विलयन से उच्च सान्द्रता वाले विलयन की ओर गमन करता है। यहाँ अंगूर की कोशिका झिल्ली, अर्धपारगम्य झिल्ली की तरह व्यवहार करती है अतः अंगूर को नमक के सान्द्र विलयन में रखने पर जल अंगूर से बाहर आ जाता है, जिसके कारण वे सिकुड़ जाते हैं तथा इन्हें पुनः जल में डालने पर जल अंगूर में प्रवेश कर जाता है अतः वे फूलकर पुनः ताजा हो जाते हैं।

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प्रश्न 9.
हिमांक अवनमन विधि से अणुभार ज्ञात करने के लिए साधारण थर्मामीटर के स्थान पर विशिष्ट थर्मामीटर (बैकमान थर्मामीटर) का प्रयोग किया जाता है। क्यों?
उत्तर:
विलायक में विलेय मिलाने पर होने वाला हिमांक अवनमन बहुत कम मात्रा में होता है जिसका मापन साधारण थर्मामीटर द्वारा नहीं होता क्योंकि इसमें न्यूनतम माप 0.01°C से अधिक होती है जबकि बैकमान ने इस कार्य के लिए एक विशिष्ट थर्मामीटर बनाया जो बहुत संवेदी (Sensi- tive) होता है जिसमें न्यूनतम माप 0.01°C होती है जिससे कम मात्रा में होने वाले हिमांक अवनमन का भी मापन हो जाता है अतः हिमांक अवनमन विधि में साधारण थर्मामीटर के स्थान पर यह विशिष्ट थर्मामीटर (बैकमान थर्मामीटर) प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 10.
किसी पदार्थ के गलनांक तथा क्वथनांक से उसमें उपस्थित अशुद्धियों के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाती है। इस कंथन की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
शुद्ध अवस्था में प्रत्येक पदार्थ का गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित होता है। जब इसमें अवाष्पशील अशुद्धि मिली होती है तो क्वथनांक में वृद्धि तथा गलनांक में कमी हो जाती है, अशुद्धि की मात्रा बढ़ने पर ये मान भी उसी अनुपात में परिवर्तित हो जाते हैं, अतः गलनांक तथा क्वथनांक के मान से किसी पदार्थ में उपस्थित अशुद्धियों की जानकारी प्राप्त हो जाती है ।

प्रश्न 11.
प्याज को सामान्य ताप पर काटने के बजाय फ्रिज में ठण्डा करने के बाद काटने से आँसू कम आते हैं। क्यों?
उत्तर:
प्याज को जब ठण्डा करते हैं तो उसमें उपस्थित वाष्पशील द्रव जिनके कारण आँसू आते हैं, का वाष्पदाब कम हो जाता है, अतः उनका वाष्पन कम होता है। अतः ठण्डे प्याज को काटने पर आँसू कम आते हैं।

प्रश्न 12.
क्वथनांक उन्नयन से किसी वाष्पशील पदार्थ का मोलर द्रव्यमान ज्ञात नहीं किया जा सकता। क्यों?
उत्तर:
क्वथनांक उन्नयन इत्यादि विधियाँ (अणुसंख्यक गुण) केवल अवाष्पशील पदार्थों के लिए ही उपयुक्त होती हैं क्योंकि विलयन में वाष्पशील पदार्थ मिलाकर गर्म किया जाता है तो वाष्पशील पदार्थ, वाष्प बनकर बाहर निकल जाता है, जिससे इसके कारण क्वथनांक में उन्नयन ही नहीं होगा अतः इस विधि से वाष्पशील पदार्थ का मोलर द्रव्यमान ज्ञात नहीं- कर सकते।

प्रश्न 13.
सर्दी के मौसम में गाड़ी के रेडिएटर में जल के साथ एथिलीन ग्लाइकॉल मिलाया जाता है। क्यों?
उत्तर:
सर्दी के मौसम में केवल जल को गाड़ी का इंजन ठण्डा करने में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता क्योंकि जल 0°C (273K) पर ही जम जाता है जबकि 35% (V/V) एथिलीन ग्लाइकॉल के जलीय विलयन का हिमांक – 17.6°C होता है, अतः यह निम्न ताप पर भी नहीं जमता इसलिए इसे शीतलक (Coolant) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। यहाँ एथिलीन ग्लाइकॉल हिमरोधी (Anti Freezing Agent ) का कार्य करता है। अतः एथिलीन ग्लाइकॉल को सर्दी के मौसम में गाड़ी के रेडिएटर में जल के साथ मिलाया जाता है।

प्रश्न 14.
सड़कों पर जमी बर्फ को हटाने के लिए NaCl के स्थान पर CaCl2 लेना अधिक उपयुक्त है। क्यों?
उत्तर:
NaCl तथा CaCh2 दोनों ही प्रतिहिम कारक का कार्य करते हैं क्योंकि इनको मिलाने से जल का हिमांक कम हो जाता है लेकिन हिमांक अवनमन एक कण संख्यक गुण है जो कणों की संख्या पर निर्भर करता है। CaCl2 के आयनन से तीन आयन (Ca+2 तथा 2Cl) प्राप्त होते हैं जबकि NaCl के आयनन से केवल दो आयन ही प्राप्त होंगे, अतः CaCl2 मिलाने पर बर्फ अधिक तेजी से पिघलती है क्योंकि हिमांक में अधिक कमी हो जाने के कारण बर्फ के जमने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।

प्रश्न 15.
प्रेशर कुकर में भोजन जल्दी पकता है लेकिन पहाड़ों पर भोजन धीरे पकता है । इसकी व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
प्रत्येक द्रव का क्वथनांक निश्चित होता है तथा दाब बढ़ाने पर क्वथनांक में वृद्धि होती है। प्रेशर कुकर में दाब अधिक होने के कारण, जल का क्वथनांक बढ़ जाता है अतः यह अधिक ताप पर उबलता है जिसके कारण भोजन को अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है इसलिए वह जल्दी पक जाता है जबकि पहाड़ों पर वायुमण्डलीय दाब कम होता है जिसके कारण क्वथनांक भी कम हो जाता है अतः पानी उबल तो जल्दी जाता है लेकिन भोजन को कम ऊष्मा प्राप्त होती है, जिससे वह धीरे पकता है ।

प्रश्न 16.
किसी विलायक के लिए मोलल उन्नयन स्थिरांक का मान निश्चित होता है। क्यों?
उत्तर:
मोलल उन्नयन स्थिरांक को निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 7
इस सूत्र में उपस्थित सभी मान, R ( विलयन स्थिरांक या गैस स्थिरांक), M1 ( विलायक का मोलर द्रव्यमान ), Tb ( विलायक का क्वथनांक) तथा △Hवाष्पन( वाष्पन एन्थैल्पी) किसी विलायक के लिए निश्चित होते हैं अतः मोलल उन्नयन स्थिरांक (Kb) का मान भी निश्चित होगा ।

प्रश्न 17.
केवल दूध से आइसक्रीम बनाने की तुलना में शर्करायुक्त दूध से आइसक्रीम बनाने में अधिक समय लगता है। क्यों?
उत्तर:
दूध में शर्करा (चीनी) मिलाने पर दूध का हिमांक कम हो जाता है (हिमांक अवनमन) अर्थात् दूध पहले की तुलना में कम ताप पर जमेगा अतः इससे आइसक्रीम बनाने में अधिक समय लगता है।

प्रश्न 18.
दो ग्राम शर्करा को 100 ग्राम जल में घोलने पर विलयन X तथा 2 ग्राम यूरिया को 100 ग्राम जल में घोलने पर विलयन Y प्राप्त होता है तो किस विलयन में क्वथनांक उन्नयन अधिक होगा तथा क्यों ?
उत्तर:
विलयन Y में क्वथनांक उन्नयन अधिक होगा क्योंकि यूरिया का अणुभार शर्करा के अणुभार से कम होता है अतः विलयन Y की मोललता, विलयन X की मोललता से अधिक होगी तथा क्वथनांक उन्नयन मोललता के समानुपाती होता है।

प्रश्न 19
(i) प्रतिहिम (Antifreezing agent) क्या होता है ?
(ii) विहिमीकारक (de-icing agent) किसे कहते हैं? समझाइए |
उत्तर:

  • वह पदार्थ जिसे जल में मिलाने पर उसके हिमांक को कम कर देता है, उसे प्रतिहिम कहते हैं। उदाहरण – एथिलीन ग्लाइकॉल।
  • वह पदार्थ जो जल के हिमांक को कम करता है तथा जिसे बर्फ पर डालने से बर्फ जल्दी पिघलती है, उसे विहिमीकारक कहते हैं, जैसे- – NaCl, CaCl2 इत्यादि ।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
राउल्ट के नियम से धनात्मक तथा ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयनों के उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
धनात्मक विचलन- एथेनॉल तथा ऐसीटोन से बना विलयन ऋणात्मक विचलन- नाइट्रिक अम्ल तथा जल से बना विलयन

प्रश्न 2.
‘परासरण’ और ‘परासरणी दाब’ पदों को परिभाषित कीजिए । अन्य अणुसंख्य गुणधर्मों की तुलना में परासरण दाब के उपयोग का विलयनों में विलेय पदार्थों के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए क्या लाभ होता है ?
उत्तर:
परासरण – प्रकृति तथा घर पर कई सामान्य घटनाएँ होती हैं जैसे वातावरण में जल की कमी से लचीली हुई गाजर को जल में रखने पर ताजा होना, मटर के सूखे दानों को जल में रखने पर उनकी फूलना, मुरझाए हुए फूलों को ताजे जल में रखने पर पुनः ताजा होना, कच्चे आम के टुकड़ों को नमक के जलीय विलयन में रखने पर उनका सिकुड़ना तथा लाल रुधिर कणिकाओं को लवण जल में रखने पर सिकुड़ना इत्यादि। ये सभी परासरण के उदाहरण हैं तथा इनमें सभी पदार्थ झिल्लियों युक्त हैं जिसे अर्धपारगम्य झिल्ली कहते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 3.
NaCl (मोलर द्रव्यमान = 58.5 g mol-1) की कितनी मात्रा 65 g जल में घोली जाए जिससे हिमांक में 7.5°C की गिरावट आ जाए ? जल के लिए हिमांक अवनमन स्थिरांक Kf, 1.86 K Kg mol-1 है। यह मानकर चलिए कि NaCl के लिए वाट हॉफ गुणक 1.87 है।
उत्तर:
हिमांक अवनमन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 8

प्रश्न 4.
निम्नलिखित का कथन लिखिए-
(i) विलयनों के सन्दर्भ में सामान्य रूप में राउल्ट का नियम ।
(ii) मिश्रण में एक गैस के आंशिक दाब के सम्बन्ध में हेनरी का नियम ।
उत्तर:

  • वाष्पशील द्रवों के विलयन में किसी अवयव का आंशिक दाब, विलयन में उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।
  • किसी विलयन में गैस का मोल अंश उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है, अर्थात् किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब (P) उस विलयन में गैस के मोल अंश (x) के समानुपाती होता है।

प्रश्न 5.
जल के 35.0 mL में जीन के एक खण्ड की 8.95 mg मात्रा घुलाकर विलयन बनाया गया, जिसका 25°C पर परासरण दाब 0.335.torr. है । यह मानते हुए कि जीन खण्ड विद्युत अपघट्य है, इसका आणव (मोलर) द्रव्यमान ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
परासरण दाब
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 9

अतः जीन खण्ड का मोलर द्रव्यमान = 14.218 kg.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पदों को परिभाषित कीजिए-
(a) (i) मोल प्रभाज (Mole fraction)
(ii) आदर्श विलयन
(b) एक अज्ञात आण्विक पदार्थ की 15.0 g मात्रा को जल 450g में घुलाया जाता है। प्राप्त विलयन – 0.34°C पर हिमीभूत होता है । पदार्थ का मोलर द्रव्यमान क्या है ? ( जल के लिए Kf = 1.86 K Kg mol-1)
अथवा
(a) निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए-

  • एक द्रव में किसी गैस के घुलने के सम्बन्ध में हेनरी का नियम ।
  • एक विलायक के लिए क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक ।

(b) जल के 500 g में कुछ ग्लिसरॉल को घुलाकर ग्लिसरॉल (C3H8O3) का एक विलयन बनाया जाता है। इस विलयन का क्वथनांक 100.42°C है। इस विलयन को बनाने में ग्लिसरॉल की कितनी मात्रा घुलाई गई थी ? (जल के लिए Kb = 0.512K Kg mol-1)
उत्तर:
(a) (i) मोलरता – एक लीटर विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को विलयन की मोलरता (M) कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 18
यदि w ग्राम विलेय, V मिली विलयन में घुला हो तो
मोलरता (M) = \(\frac{\mathrm{W} \times 1000}{\mathrm{M} . \mathrm{W} \cdot \times \mathrm{V}}\)
M.W. = विलेय का अणुभार
उदाहरण- NaOH के 0.25 molL-1(0.25 M) विलयन का अर्थ है कि 0.25 मोल NaOH एक लीटर विलयन में घुला हुआ है।

(ii) आदर्श विलयन :
वह विलयन जो ताप तथा सान्द्रता के सभी मानों पर राउल्ट के नियम का पालन करता है, उसे आदर्श विलयन कहते हैं। एक पूर्ण रूप से आदर्श विलयन होना बहुत मुश्किल है लेकिन कुछ विलयन व्यवहार में लगभग आदर्श होते हैं। आदर्श विलयन के लिए आवश्यक शर्तें-
(i) विलयन बनने पर एन्थैल्पी परिवर्तन शून्य होता है अर्थात् इसके अवयवों को मिश्रित करने पर ऊष्मा का उत्सर्जन या अवशोषण नहीं होता, अर्थात् △Hमिश्रण = 0।

(ii) आयतन में परिवर्तन शून्य होता है अर्थात् विलयन का आयतन दोनों अवयवों के आयतन के योग के बराबर होता है, अर्थात् △Vमिश्रण = 0।

(iii) राउल्ट के नियम के अनुसार,
\(\mathrm{P}_{\text {कुल }}=\mathrm{p}_{\mathrm{o}} \mathrm{A}+\mathrm{p}_{\mathrm{B}}\)
\(\mathrm{p}_{\text {कुल }}=\mathrm{p}_{\mathrm{A}} \mathrm{X}_{\mathrm{A}}+\stackrel{\circ}{\mathrm{p}} \mathrm{B}_{\mathrm{B}} \mathrm{X}_{\mathrm{B}}\)

माना मिश्रण दो अवयव (द्रव) A तथा B से बना है जिनमें अन्तराआण्विक आकर्षण A-A तथा B-B प्रकार के हैं लेकिन द्विअंगी विलयन (मिश्रण) में A-A तथा B-B आकर्षण के साथ-साथ A-B प्रकार का आकर्षण भी होगा जो कि A-A तथा B-B के बीच अंतराआण्विक आकर्षण बल के ही समान होगा।

इसलिए △H=0 तथा △V=0, इसी कारण यह आदर्श विलयन बनाता है। अत: A-B आकर्षण = A-A आकर्षण तथा B-B आकर्षण।
आदर्श विलयनों के उदाहरण-
(i) n-हेक्सेन + n-हेप्टेन (n-C6H14 + n-C7H16)
(ii) बेन्जीन + टॉलूईन (C6H6 + C6H5 – CH3)
(iii) ब्रोमोएथेन + क्लोरोएथेन (C2H5Br + C2H5Cl)
(iv) कार्बन टेट्राक्लोरइड + सिलिकन टेट्रक्लोरइड (CCl4 + SiCl4)
(v) मेथिल ऐल्कोहॉल + एथिल एल्कोहॉल (CH3OH + C2H5OH)
(vi) क्लोरोबेन्जीन + ब्रोमोबेन्जीन (C6H5Cl + C6H5Br)

(b) हिमांक अवनमन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 14
अतः पदार्थ का मोलर द्रव्यमान = 182.3
अथवा
(a)

  • गैसों की द्रवों में विलेयता: भिन्न-भिन्न गैसों की जल या अन्य विलायकों में विलेयता भिन्न-भिन्न होती है। कुछ गैसें जल में अधिक्त मात्रा में घुल जाती हैं जब्वक्रि ऑक्सीजन जल में बहुत कम मात्रा में घुलती है तथा इसी घुली हुई ऑक्सीजन के कारण जलीय जीवन जीवित रहता है। गैसों की द्रव में विलेयता को अवशोषण गुणांक द्वारा समझा सकते हैं। निश्चित ताप तथा वायुमण्डलीय दाब पर किसी विलायक के निश्चित आयतन में घुली हुई गैस के मानक ताप व दाब (NTP) पर आयतन को उस गैस का अवशोषण गुणांक (Absorption Coefficient) कहते हैं।
  • किसी विलायक का क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक उस विलायक के क्वथनांक में वह वृद्धि है जो उसके 1 Kg में एक मोल अवाष्पशील विलेय मिलाने पर होती है।

(b) क्वथनांक उन्नयन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 10
अतः ग्लिसरॉल की मात्रा = 37.7 ग्राम।

प्रश्न 7.
प्रतिलोम परासरण किसे कहते हैं? इसका एक उपयोग दीजिए।
उत्तर:
प्रतिलोम परासरण – विलयन पर परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब लगाने पर शुद्ध विलायक, अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा विलयन से बाहर निकलता है अर्थात् परासरण की दिशा बदल जाती है, इसे प्रतिलोम परासरण कहते हैं। प्रतिलोम परासरण का उपयोग समुद्री जल के विलवणीकरण (Desalination) में किया जाता है।

प्रश्न 8.
यदि 10% (w/w) जलीय H2SO4 का घनत्व 1.84 ग्राम सेमी 3 है तो H2SO4 विलयन की मोललता की गणना कीजिए | (H2SO4 का मोलर द्रव्यमान = 98 ग्राम मोल-1 )
उत्तर:
मोललता
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 11

प्रश्न 9.
निम्नलिखित विलयनों को वान्ट हॉफ गुणक के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
0.1 M CaCl2, 0.1M KCl, 0.1 M Al2 (SO4)3, 0.1 M C12H22O11.
उत्तर:
उपर्युक्त विलयनों के वान्ट हॉफ गुणक का बढ़ता क्रम निम्नलिखित है-
C12H22O11 < KCl < CaCl2 < Al2(SO4)3

प्रश्न 10.
5g NaOH को 500 ml जल में घोला गया। विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
NaOH के मोल = 5g/40g mol-1 = 0.125 mol
विलयन का लीटर में आयतन = \(\frac{500 \mathrm{ml}}{1000 \mathrm{ml} \mathrm{L}^{-1}}\)
मोलरता = विलेय के मोल / विलयन का लीटर में आयतन
= \(\frac{0.125 \times 1000 \mathrm{ml} \mathrm{L}^{-1}}{500 \mathrm{ml}}\)
= o.25 M

प्रश्न 11.
एक प्रोटीन के 0.2 L जलीय विलयन में 1.26 g प्रोटीन है। 300 K पर इस विलयन का परासरण दाब 2.57 × 10-3 bar पाया गया। प्रोटीन के मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए। (R = 0.083 L bar mol-1 K-1)
उत्तर:
मोलर द्रव्यमान (M2) = \(\frac{W_2 \mathrm{RT}}{\Pi \mathrm{V}}\)

W2 = 1.26 g, R = 0.083 L bar mol-1 K-1
T = 300K, Π = 2.57 × 10-3 bar, V = 0.2 L
M2 = \(\frac{1.26 \mathrm{~g} \times 0.083 \mathrm{LbarK}^{-1} \mathrm{~mol}^{-1} \times 300 \mathrm{~K}}{2.57 \times 10^{-3} \mathrm{bar} \times 0.2 \mathrm{~L}}\)
M2 = 61038 g mol-1
अतः प्रोटीन का मोलर द्रव्यमान = 61038 g mol-1

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 12.
(i) स्थिर क्वाथी मिश्रण को परिभाषित कीजिए ।
(ii) वाष्पशील घटकयुक्त विलयन के लिए राउल्ट के नियम की व्याख्या कीजिए तथा किस प्रकार राउल्ट का नियम, हेनरी के नियम की एक विशेष स्थिति है ?
उत्तर:

  • दो या अधिक घटकों का वह मिश्रण जिसका संघटन द्रव तथा वाष्प अवस्था में होता है तथा जिसका क्वथनांक निश्चित होता है, उसे स्थिर क्वाथी मिश्रण कहते हैं।
  • 2.4.1. द्रव-द्रव विलयना का वाष्प दाब – एक बंद पात्र में दो वाष्पशील द्रवों का विलयन लेते हैं तो इन द्रवों का वाष्पीकरण होगा तथा कुछ समय के बाद वाष्य अवस्था तथा द्रव अवस्था के मध्य साम्य स्थापित हो जाता है।
  • माना दोनों द्रवों के आंशिक वाष्प दाब क्रमशः p1 p2 हैं तथा कुल दाब pकुल है, तो राउल्ट के नियम के अनुसार, वाष्पशील द्रवों के विलयन में किसी अवयव (द्रव) का आंशिक दाब, विलयन में उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।
    अतः प्रथम द्रव के लिए-
    p1 ∝ x1
    या \(\mathrm{p}_1=\mathrm{p}_1^0 \mathrm{x}_1\)
    यहाँ \(\mathrm{p}_1^0\) = शुद्ध अवस्था में प्रथम घटक का समान ताप पर वाष्प दाब है। इसी प्रकार द्वितीय द्रव के लिए-
    \(\mathrm{p}_2=\mathrm{p}_2^0 \mathrm{x}_2\)
    यहाँ \(\mathrm{p}_2^0\) द्वितीय शुद्ध द्रव का वाष्प दाब है।डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार, पात्र में विलयन का कुल दाब \(\mathrm{p}_{\text {कुल }}\), विलयन के सभी अवयवों के आंशिक दाब के योग के बराबर होता है। अतः
    \(\mathrm{p}_{\text {कुल }}\) = p1 + p2
    p1 व p2 का मान रखने पर,
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 15
    इस समीकरण से निम्नलिखित निष्कर्ष प्राप्त होते हैं-
    (1) किसी विलयन के कुल वाष्प दाब को उसके किसी अवयव के मोल-अंश से संबंधित कर सकते हैं।
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 16
    (2) किसी विलयन का कुल वाष्प दाब द्वितीय अवयव के मोल-अंश के साथ रेखीय रूप से बदलता है।
    (3) शुद्ध अवयवों के वाष्प दाब पर निर्भर रहते हुए विलयन का कुल वाष्प दाब प्रथम अवयव के मोल-अंश के बढ़ने से कम या अधिक होता है।किसी विलयन के लिए p1 या p2 का x1 तथा x2 के मध्य आलेखित करने पर सीधी रेखा प्राप्त होती है। जब x1 व x2 का मान 1 होता है तो ये रेखाएँ (I व II) क्रमशः बिंदु \(\mathrm{p}_1^0\) व \(\mathrm{p}_2^0\) से होकर गुज़रती हैं। इसी प्रकार pकुल का x2 के साथ आलेख (लाइन III) भी रेखीय होता है। pकुल का न्यूनतम मान \(\mathrm{p}_1^0\) तथा इसका अधिकतम मान \(\mathrm{p}_2^0\) होगा। यहाँ प्रथम घटक द्वितीय घटक की तुलना में कम वाष्पशील है अर्थात् \(\mathrm{p}_1^0<\mathrm{p}_2^0\) |वाष्प अवस्था में संघटन – विलयन के साथ साम्य अवस्था में स्थित वाष्प प्रावस्था के संघटन का निर्धारण अवयवों के आंशिक दाब से किया जा सकता है। यदि y1 एवं y2 क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय अवयव के वाष्पीय अवस्था में मोल-अंश हैं तो डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 17
    राउल्ट का नियम : हेनरी के नियम की एक विशेष स्थिति राउल्ट के नियम से
    \(\mathrm{p}_{\mathrm{i}}=\mathrm{x}_{\mathrm{i}} \mathrm{p}_{\mathrm{i}}^0\)
    अर्थात् किसी विलयन में उसके वाष्पशील अवयव का वाष्पदाब उसके मोल अंश के समानुपाती होता है। किसी द्रव में गैस के विलयन में गैसीय अवयव गैस के रूप में-ही रहता है जिसकी विलेयता हेनरी के नियम के अनुसार होती है।अतः p = KH.xअतः राउल्ट के नियम तथा हेनरी के नियम की तुलना करने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि वाष्पशील घटक (गैस) का आंशिक दाब विलयन में उसके मोल-अंश के समानुपाती होता है, केवल समानुपातिक स्थिरांक KH एवं \(\mathrm{p}_{\mathrm{i}}^0\) में भिन्नता है। अतः राउल्ट का नियम, हेनरी के नियम की एक विशेष स्थिति है जिसमें KH तथा \(\mathrm{p}_{\mathrm{i}}^0\) के मान के बराबर हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
(i) समपरासरी विलयन किसे कहते हैं?
(ii) आदर्श विलयन को परिभाषित कीजिए तथा इसका एक लक्षण बताइए।
(iii) मोलल उन्नयन स्थिरांक की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:

  • दिए गए ताप पर दो विलयन, जिनका परासरण दाब समान होता है, उन्हें ‘समपरासरी’ विलयन कहते हैं। इन विलयनों की मोलर सान्द्रता समान होती है।
  • वह विलयन जो ताप तथा सान्द्रता के सभी मानों पर राउल्ट के नियम का पालन करता है, उसे आदर्श विलयन कहते हैं। आदर्श विलयन बनने पर एन्थैल्पी परिवर्तन शून्य होता है।
  • 1000 g विलायक में एक मोल अवाष्पशील विलेय घुला होने पर क्वथनांक में जितनी वृद्धि होती है, उसे मोलल उन्नयन स्थिरांक कहते हैं।

प्रश्न 14.
(अ) (i) जल वाष्प दाब का क्या होगा यदि एक चम्मच चीनी उसमें डाल दी जाए?
(ii) वृहदअणुओं के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए कौन-सा अणुसंख्य गुणधर्म उपयुक्त है ?
(ब) क्या क्वथनांक का उन्नयन समान होगा यदि 0.1 मोल सोडियम क्लोराइड या 0.1 मोल चीनी को 1 लीटर जल में विलेय किया जाए? समझाइए ।
(स) क्या हम स्थिर क्वाथी मिश्रण के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् कर सकते हैं? समझाइए ।
उत्तर:
(अ)

  • जल में एक चम्मच चीनी डालने पर उसका वाष्प दाब कम हो जाता है क्योंकि वाष्प दाब अवनमन कणों की संख्या पर निर्भर करता है तथा जल में चीनी डालने पर कणों की संख्या बढ़ जाती है।
  • बृहदअणुओं के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए परासरण दाव विधि अधिक उपयुक्त है क्योंकि ये उच्च ताप पर स्थायी नहीं होते हैं तथा परासरण दाब कमरे के ताप पर ही ज्ञात किया जाता है एवं परासरण दाब का परिमाण भी अधिक होता है।

(च) 0.1 मील सोडियम क्लोराइड या 0.1 मोल चीनी को 1 लीटर जल में विलेय करने पर क्वथनांक का उन्नयन समान नहीं होगा क्योंकि चीनी का आयनन नहीं होता जबकि सोडियम क्लोराइड (NaCl) का आयनन होकर दुगुनी संख्या में आयन प्राप्त होंगे।

(स) स्थिर क्वाथी मिश्रण के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् नहीं किया जा सकता क्योंकि इस मिश्रण का व्वथनांक निश्चित होता है जिस पर मिश्रण में उपस्थित सभी यौगिक निश्चित अनुपात में एक साथ आसवित होते हैं। अतः इस मिश्रण के यौगिकों को स्थिर क्वाथी आसवन विधि द्वारा पृथक् किया जाता है।

प्रश्न 15.
विलयन की मोललता ज्ञात करने का सूत्र लिखिये ।
उत्तर:
विलयन की मोललता को निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 12

प्रश्न 16.
400 K तापक्रम पर किसी विलयन का परासरण दाब 0.0821 वायुमण्डल है तो विलयन की सान्द्रता मोल / लीटर में ज्ञात कीजिए। [R 0.0821 L atm K-1 mol-1]
उत्तर:
परासरण दाब Π = CRT
Π = 0.0821 वायुमण्डल,
R = 0.0821 L atm K-1 mol-1
T = 400K
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 2 Img 13
C = 0.0025 mol L-1

प्रश्न 17.
(i) क्या कारण है कि जलीय जीव ठण्डे जल में अधिक अच्छा महसूस करते हैं अपेक्षाकृत गर्म जल में?
(ii) क्या होता है जब हम रक्त सेल को नमकीन जल के विलयन (अतिपरासरणदाबी विलयन) में रखते हैं? कारण बताइए।
उत्तर:

  • जलीय जीव गर्म जल की अपेक्ष ठण्डे जल में अधिक अच्छा महसूस करते हैं क्योंकि ताप बढ़ने पर गैसों की जल में विलेयता कम होती है जिसके कारण जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है।
  • जब रक्त सेल को नमकीन जल के विलयन (अतिपरासरण- दात्री विलयन) में रखा जाता है तो परासरण के कारण रक्त सेल संकुचित हो जाती हैं अर्थात् जल रक्त सेल से बाहर आ जाता है।

प्रश्न 18.
20°C पर जल का वाष्प दाब 17.5 mm Hg है। ग्लूकोस (मोलर द्रव्यमान = 180 gmol-1) का 15 g जल के घुला हो, तो 20°C पर जल का वाष्प दाब परिकलित कीजिए ।
उत्तर:
\(\frac{\mathrm{P}_1^0-\mathrm{P}_1}{\mathrm{P}_1^0}\) = \(\frac{\mathbf{W}_2 \times \mathbf{M}_1}{\mathbf{M}_2 \times \mathbf{W}_1}\)
\(\mathrm{P}_1^0\) = शुद्ध जल का वाष्प दाब = 17.5 mm Hg
P1 = विलयन का वाष्प दाब = ?
W1 = 150 g, W2 = 15 g, M1 = 18 g mol-1
M2 = 180g mol-1
अतः = \(\frac{17.5 \mathrm{~mm} \mathrm{Hg}-\mathrm{P}_1}{17.5 \mathrm{~mm} \mathrm{Hg}}\) = \(\frac{15 \mathrm{~g} \times 18 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}{180 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1} \times 150 \mathrm{~g}}\)
\(\frac{17.5-\mathrm{P}_1}{17.5}\) = \(\frac { 270 }{ 27000 }\)
\(\frac{17.5-P_1}{17.5}\) = 0.01
17.5 – P1 = 17.5 × 0.01
17.5 – P1 = 0.175
P1 = 17.5 – 0.175
P1 = 17.325mm Hg
अतः 20°C पर ग्लूकोसयुक्त जल का वाष्प दाब (P1) = 17.325 mm Hg.

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की मुख्य अभिक्रिया है-
(अ) इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया
(ब) इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया
(स) नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया
(द) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया
उत्तर:
(स) नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया

2. कार्बोनिल समूह के कार्बन पर कौनसा संकरण होता है?
(अ) sp
(ब) sp²
(स) sp³
(द) sp³d
उत्तर:
(ब) sp²

3. निम्नलिखित में से किस यौगिक में कैनिजारो अभिक्रिया नहीं होती ?
(अ) C6H5CHO
(ब) HCHO
(स) CCl3CHO
(द) CH3 – CHO
उत्तर:
(द) CH3 – CHO

4. ऐल्किल सायनाइड के जल अपघटन से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 1
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 2

5. निम्नलिखित में से किसके द्वारा ऐल्डिहाइड तथा कीटोन में विभेद किया जा सकता है?
(अ) NaHCO3
(ब) HCN
(स) फेलिंग विलयन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(स) फेलिंग विलयन

6. सोडियम प्रोपेनॉएट (CH3-CH2-COONa) को सोडालाइम (NaOH + CaO) के साथ गर्म करने पर बना उत्पाद है-
(अ) ऐसीटोन
(स) ऐथेन
(ब) मेथेन
(द) एथीन
उत्तर:
(स) ऐथेन

7. यौगिक X फेनिल हाइड्रेजीन से क्रिया करता है लेकिन टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता तो यौगिक X होगा-
(अ) ऐमाइड
(ब) कीटोन
(स) ऐल्डिहाइड
(द) ऐल्कोहॉल
उत्तर:
(ब) कीटोन

8. यौगिक जो ऐल्डोल संघनन नहीं देता, वह है-
(अ) CH3CHO
(ब) CH3 – COCH3
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 3
(द) HCHO
उत्तर:
(द) HCHO

9. टॉलेन अभिकर्मक निम्नलिखित में से किस धातु आयन का NH3 के साथ संकुल है?
(अ) Cu2+
(ब) Cu+1
(स) Ag+
(द) Co2+
उत्तर:
(स) Ag+

10. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक आयोडीन के क्षारीय विलयन के साथ गर्म करने पर पीला अवक्षेप देता है?
(अ) मेथेनैल
(ब) प्रोपेनोन
(स) प्रोपेनैल
(द) ब्यूटेनैल
उत्तर:
(ब) प्रोपेनोन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

11. निम्नलिखित में से सर्वाधिक प्रबल अम्ल है-
(अ) HCOOH
(ब) CH3COOH
(स) CH3 – CH2-COOH
(द) Cl – CH2 – COOH
उत्तर:
(द) Cl – CH2 – COOH

12. ऐसीटिक अम्ल से ऐसीटिल क्लोराइड बनाने में निम्नलिखित में से किस अभिकर्मक को प्रयुक्त नहीं किया जा सकता ?
(अ) PCl5
(ब) PCl3
(स) SOCl2
(द) Cl2
उत्तर:
(द) Cl2

13. निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पाद D है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 4
(अ) CH3 – CH2NH2
(ब) CH3CN
(स) HCONH2
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 5
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 5

14. निम्नलिखित में से सिन्नेमैल्डिहाइड का सूत्र कौनसा है ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 6
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 7

15. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 8 का IUPAC नाम है-
(अ) साइक्लोहेक्सेनैल
(ब) साइक्लोहेक्सेन ऐल्डिहाइड
(स) साइक्लोहेक्सेन कार्बेल्डिहाइड
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) साइक्लोहेक्सेन कार्बेल्डिहाइड

16. प्रोपाइन (CH3C ≡ CH) के जलयोजन से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 9
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 10

17. अभिक्रिया HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 11 से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 12
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 13

18. ऐल्डिहाइड तथा कीटोनों के क्वथनांक समतुल्य अणुभार वाले हाइड्रोकार्बनों तथा ईथरों से ………………
(अ) कम होते हैं
(स) समान होते हैं
(ब) अधिक होते हैं
(द) तुलना करना असंभव है
उत्तर:
(ब) अधिक होते हैं

19. कीटोनों की क्लीमेन्सन अपचयन अभिक्रिया से प्राप्त यौगिक होते हैं-
(अ) ऐल्कोहॉल
(ब) ऐल्केन
(स) कार्बोक्सिलिक अम्ल
(द) ऐल्काइन
उत्तर:
(ब) ऐल्केन

20. फेलिंग परीक्षण में प्राप्त लाल अवक्षेप निम्नलिखित में से किस यौगिक के बनने के कारण आता है ?
(अ) Ag2O
(ब) CuO
(स) Cu2O
(द) Cu(OH)2
उत्तर:
(ब) CuO

21. एथिल ब्यूटेनोएट के जल अपघटन से प्राप्त यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 14
उत्तर:
(स) CH3 – CH2-CH2-COOH

22. निम्नलिखित में से सबसे दुर्बल अम्ल है-
(अ) HCOOH
(ब) C2H5-CH2-COOH
(स) CH3COOH
(द) CH3 – CH2-COOH
उत्तर:
(ब) C2H5-CH2-COOH

23. नाइलॉन 66 के निर्माण में किस यौगिक का प्रयोग होता है?
(अ) ब्यूटेन डाइओइक अम्ल
(ब) प्रोपेनोइक अम्ल
(स) हैक्सेन डाइ ओइक अम्ल
(द) बेन्जोइक अम्ल
उत्तर:
(स) हैक्सेन डाइ ओइक अम्ल

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

24. बेन्जोइक अम्ल द्वारा निम्नलिखित में से कौनसी अभिक्रिया नहीं दर्शायी जाती?
(अ) नाइट्रीकरण
(ब) फ्रीडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया
(स) हैलोजेनीकरण
(द) सल्फोनीकरण
उत्तर:
(ब) फ्रीडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया

25. अभिक्रिया HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 15 का उत्पाद है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 16
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 17

26. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है?
(अ) CH3COOH
(ब) CH3COCH3
(स) HCOOH
(द) C6H5COOH
उत्तर:
(स) HCOOH

27. एथेनैल निम्नलिखित में से कौनसा परीक्षण नहीं देता है?
(अ) टॉलेन परीक्षण
(ब) फेलिंग परीक्षण
(स) लुकाश परीक्षण
(द) आयोडोफॉर्म परीक्षण
उत्तर:
(स) लुकाश परीक्षण

28. प्रोपेनाइक अम्ल की श्मिट अभिक्रिया से प्राप्त यौगिक है-
(अ) CH3 – NH2
(ब) CH3CONH2
(स) CH3 – CH2 – NH2
(द) CH3 – CN
उत्तर:
(स) CH3 – CH2 – NH2

29. ऐसीटिलीकरण के लिए सर्वाधिक उपयुक्त यौगिक कौनसा है ?
(अ) CH3CONH2
(ब) CH3COOH
(स) (CH3CO)2O
(द) CH3COOC2H5
उत्तर:
(स) (CH3CO)2O

30. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 18 है-
(अ) श्मिट अभिक्रिया
(ब) हुन्स्डीकर अभिक्रिया
(स) राइमर टीमान अभिक्रिया
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) हुन्स्डीकर अभिक्रिया

31. एक हाइड्रोकार्बन के ओजोनी अपघटन पर एक मोल एसीटोन तथा एक मोल फॉर्मेल्डिहाइड बनता है तो वह हाइड्रोकार्बन है-
(अ) प्रोपीन
(ब) 2 – मेथिल प्रोपीन
(द) 2 – मेथिल – ब्यूट- 1 – ईन
(स) 2 – मेथिल – ब्यूट – 2 – ईन
उत्तर:
(ब) 2 – मेथिल प्रोपीन

32. कीटोन किस विधि द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं ?
(अ) रोजेनमुण्ड अपचयन द्वारा
(ब) इटार्ड अभिक्रिया द्वारा
(स) कैनिजारो अभिक्रिया द्वारा
(द) फ्रीडल – क्राफ्ट अभिक्रिया द्वारा
उत्तर:
(द) फ्रीडल – क्राफ्ट अभिक्रिया द्वारा

33. जब प्रोपेनोइक अम्ल की क्रिया जलीय सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ करवाई जाती है तो CO2 गैस निष्कासित होती है। CO2 का कार्बन कहाँ से आता है?
(अ) मेथिल समूह से
(ब) कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह से
(स) मेथिलीन समूह से
(द) बाईकार्बोनेट से
उत्तर:
(द) बाईकार्बोनेट से

34. सोडियम एथॉक्साइड की उपस्थिति में एथिल ऐसीटेट के दो मोल के स्वः संघनन से प्राप्त होता है-
(अ) एथिल ब्यूटरेट
(ब) ऐसीटोऐसीटिक एस्टर
(स) मेथिल ऐसीटोऐसीटेट
(द) एथिल प्रोपिओनेट
उत्तर:
(ब) ऐसीटोऐसीटिक एस्टर

35. निम्नलिखित अभिक्रिया का अन्तिम उत्पाद है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 19
उत्तर:
(स) CH2 = CHOOOH

36. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक आयोडीन तथा NaOH के साथ पीला अवक्षेप देगा ?
(अ) ICH2COCH2CH3
(ब) CH3COOCOCH3
(स) CH3-CH2-CH(OH)CH2CH3
(द) CH3COOH
उत्तर:
(अ) ICH2COCH2CH3

37. निम्नलिखित में से किस यौगिक के ओजोनीकरण पश्चात् जल-अपघटन से ऐसीटोन प्राप्त होगा ?
(अ) 2- मेथिल – 2 – ब्यूटीन
(ब) 3 – मेथिल- 1- ब्यूटीन
(स) साइक्लोपेन्टेन
(द) 2-मेथिल- 1- ब्यूटीन
उत्तर:
(अ) 2- मेथिल – 2 – ब्यूटीन

38. निम्नलिखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीयता पर विचार करें-
(i) Ph-COOH
(ii) 0-NO2C6H4COOH
(iii) p-NO2C6H4COOH
(iv) m-NO2C6H4COOH
निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम (अवरोही) सही है ?
(अ) (i), (ii), (iii), (iv)
(ब) (ii), (iv), (iii), (i)
(स) (ii), (iv), (i), (iii)
(द) (ii), (iii), (iv), (i)
उत्तर:
(द) (ii), (iii), (iv), (i)

39. CH3CHO और C6H5CH2CHO में किसके द्वारा अन्तर जा सकता है ?
(अ) बेनेडिक्ट विलयन द्वारा
(ब) आयोडोफॉर्म परीक्षण द्वारा
(स) टॉलेन अभिकर्मक द्वारा
(द) फेहलिंग विलयन द्वारा
उत्तर:
(ब) आयोडोफॉर्म परीक्षण द्वारा

40. निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया द्वारा बेन्जेल्डिहाइड नहीं बन सकता है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 20
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 21

41. यौगिक जो जलीय सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन द्वारा अभिक्रिया कर CO2 नहीं देता है, वह है-
(अ) बेन्जोइक अम्ल
(ब) बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल
(स) सेलिसिलिक अम्ल
(द) कारबोलिक अम्ल (फीनॉल)
उत्तर:
(द) कारबोलिक अम्ल (फीनॉल)

42. यौगिक HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 22 का IUPAC नाम है-
(अ) प्रोपे- 1, 2, 3-ट्राईकार्बेल्डिहाइड
(ब) 3 – फॉर्मिल – 1, 5- पेन्टेनडाईअल
(स) 3- प्रोपेन- 1, 2, 3 – ट्राई अल
(द) 3 – ऐल्डो -1, 5- पेन्टेनडाईअल
उत्तर:
(अ) प्रोपे- 1, 2, 3-ट्राईकार्बेल्डिहाइड

43. बेन्जेल्डिहाइड एवं फॉर्मेल्डिहाइड के मिश्रण की अभिक्रिया सान्द्र तथा गर्म NaOH से करवाने पर प्राप्त उत्पाद हैं-
(अ) C6H5COONa + CH3OH
(ब) C6H5CH2OH + HCOONa
(स) C6H5COONa + C6H5CH2OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 23
उत्तर:
(ब) C6H5CH2OH + HCOONa

44. निम्नलिखित में उत्पाद C होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 24
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 25

45. हेल – फोलार्ड – जेलिंस्की अभिक्रिया में 2- मेथिलप्रोपेनॉइक अम्ल एक यौगिक (A) देता है। यह यौगिक (A) है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 26
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 27

46. निम्नलिखित यौगिकों की अम्ल-सामर्थ्य का अवरोही क्रम है-
(अ) RCOOH > CH = CH > HOH > ROH
(ब) RCOOH > ROH > HOH > CH = CH
(स) RCOOH > HOH > ROH > CH = CH
(द) RCOOH > HOH > CH = CH > ROH
उत्तर:
(स) RCOOH > HOH > ROH > CH = CH

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 28
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29

प्रश्न 2.
कार्बोक्सिलिक अम्लों से बेन्जेल्डिहाइड बनाने का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29a

प्रश्न 3.
ब्यूट – 2 – आइन के जलयोजन से कौनसा यौगिक बनता है?
उत्तर:
ब्यूटेन – 2 ऑन।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 29b

प्रश्न 4.
रोजेनमुंड अभिक्रिया से कौनसा ऐल्डिहाइड प्राप्त नहीं होता?
उत्तर:
HCHO फार्मेल्डिहाइड।

प्रश्न 5.
स्टीफैन अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 30

प्रश्न 6.
किसी ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से CH3COCH3 तथा CH3CHO प्राप्त होते हैं तो उस ऐल्कीन की संरचना बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 31

प्रश्न 7.
ईटाई अभिक्रिया द्वारा टॉलुईन से बेन्जेल्डिहाइड किस प्रकार बनाया जाता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 32

प्रश्न 8.
फार्मेल्डिहाइड की सान्द्र KOH से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 33
इसे कैनिजारो अभिक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 9.
एक यौगिक सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट के साथ करता है लेकिन फेलिंग विलयन से क्रिया नहीं करता, यह यौगिक होगा?
उत्तर:
यह यौगिक कोई कीटोन जैसे ऐसीटोन होगा।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 10.
पाँच कार्बन युक्त द्विशाखित ऐल्डिहाइड बताइए जो कैनिजारो अभिक्रिया देता है।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 34

प्रश्न 11.
एथेनोइक अम्ल से प्रोपेनोन प्राप्त करने का समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 35

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कार्बोनिल यौगिकों की HCN के साथ क्रिया के लिए क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम लिखिए-
C6H5CHO, CCl3,CHO, CH3CHO
उत्तर:
C6H5CHO < CH3CHO < CCl3CHO

प्रश्न 13.
वह कौनसा ऐल्डिहाइड जिसकी क्रिया सोडियम हाइपो आयोडाइट (NaOI ) के साथ करवाने पर आयोडोफॉर्म बनता है?
उत्तर:
CH3CHO (ऐसिटैल्डिहाइड)।

प्रश्न 14.
ऐसिटेल्डिहाइड से क्रोटोन ऐल्डिहाइड बनाने का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 36

प्रश्न 15.
क्या होगा जब HCHO को कुछ दिन तक बेरायटा जल [Ba(OH)2] के सम्पर्क में रखा जाता है?
उत्तर:
HCHO को कुछ दिन तक Ba(OH)2 के सम्पर्क में रखने पर हेक्सोस शर्कराओं का मिश्रण प्राप्त होता है जिसे फार्मेस कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 37

प्रश्न 16.
निम्न यौगिकों के क्वथनांक का आरोही क्रम बताइए-
n-ब्यूटेन (I) मेथॉक्सीमेथेन (II), ऐसीटोन (III) प्रोपेनैन (IV), तथा प्रोपेन- 1 ऑल (V)
उत्तर:
I < II < III < IV < V

प्रश्न 17.
CH3CHO की NH3 के साथ क्रिया का अन्तिम उत्पाद क्या होता है?
उत्तर:
CH3CHO की NH के साथ क्रिया कराने पर अन्तिम उत्पाद के रूप में 2, 4, 6 ट्राइमेथिल हेक्साहाइड्रो-1, 3, 5 ट्राइऐजीन ट्राइहाइड्रेट बनता है।

प्रश्न 18.
Br, CI. CN NO2 तथा CF3 समूह के -1 प्रभाव का बढ़ता क्रम लिखिए।
उत्तर:
Br < CI < CN < NO, < CF3

प्रश्न 19.
प्रोपेनोइक अम्ल की थायोनिल क्लोराइड से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
CH3 – CH2 – COOH + SOCl2 → CH3 – CH2-COCl+SO2+HCl

प्रश्न 20.
ऐसीटिक अम्ल, क्लोरो ऐसीटिक अम्ल, डाइक्लोरो ऐसीटिक अम्ल तथा ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल के अम्लीय सामर्थ्य का घटता क्रम क्या होगा ?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 38

प्रश्न 21.
सेब, नींबू तथा इमली में पाए जाने वाले अम्लों के सूचना सूत्र, सामान्य नाम तथा IUPAC नाम बताइए।
उत्तर:
सेब में मैलिक अम्ल
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 39

प्रश्न 22.
निम्नलिखित अम्लों के सूत्र लिखिए-
(i) स्टियरिक अम्ल
(ii) ऑलिक अम्ल।
उत्तर:
(i) C17H35COOH
(ii) C17H33COOH

प्रश्न 23.
फार्मिक अम्ल तथा ऐसीटिक अम्ल को किन विधियों द्वारा नहीं बनाया जा सकता है?
उत्तर:
फार्मिक अम्ल तथा ऐसीटिक अम्ल को ऐल्कीनों के कार्बोनिलीकरण तथा आर्ट आइसटर्ट अभिक्रिया द्वारा नहीं बनाया जा सकता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 24.
प्रारम्भिक कार्बोक्सिलिक अम्ल जल में विलेय होते हैं, क्यों?
उत्तर:
प्रारम्भिक कार्बोक्सिलिक अम्ल, जल के साथ अंतराअणुक हाइड्रोजन बंध बना लेते हैं, अतः ये जल में विलेय होते हैं।

प्रश्न 25.
ऐसीटिक अम्ल से मैलोनिक अम्ल बनाने के लिए आवश्यक अभिक्रिया अनुक्रम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 40

प्रश्न 26.
सिरके का संघटन बताइए।
उत्तर:
ऐसीटिक अम्ल का तनु जलीय विलयन (8-10%) सिरका कहलाता है।

प्रश्न 27.
बेन्जोइक अम्ल की जल में विलेयता ऐसीटिक अम्ल की तुलना में कम होती है, क्यों?
उत्तर:
बेन्जोइक अम्ल (C6H5COOH) में फेनिल (हाइड्रोकार्बन) समूह के बड़े आकार के कारण इसकी जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाने की प्रवृत्ति कम होती है, अतः यह ऐसीटिक अम्ल की तुलना में जल में कम विलेय होता है।

प्रश्न 28.
फार्मिक अम्ल तथा ऐसीटिक अम्ल में विभेद करने के लिए एक परीक्षण बताइए।
उत्तर:
फार्मिक अम्ल टॉलेन अभिकर्मक के साथ रजत दर्पण देता है जबकि ऐसीटिक अम्ल ऐसा नहीं करता है ।

प्रश्न 29.
सक्रिय हाइड्रोजन युक्त यौगिकों के ऐसिटिलीकरण के लिए ऐसिटिल क्लोराइड की तुलना में ऐसीटिक ऐन्हाइड्राइड अधिक उपयुक्त ह है, क्यों?
उत्तर:
ऐसिटिक ऐन्हाइड्राइड की तुलना में ऐसिटिल क्लोराइड अधिक क्रियाशील होता है। अतः अभिक्रिया का वेग अधिक होता है जिसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है अतः ऐसिटिलीकरण के लिए ऐसीटिक ऐन्हाइड्राइड अधिक उपयुक्त होता है।

प्रश्न 30.
ऐसीटिक अम्ल के विभिन्न व्युत्पन्नों को क्वथनांक के बढ़ते क्रम में रखिए।
उत्तर:
CH3COCl < CH3COOCH5 < (CH3CO)2O < CH3CONH2

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोनिल यौगिकों के सन्दर्भ में निम्नलिखित के उदाहरण दीजिए—
(i) मध्यावयवता
(ii) स्थिति समावयवता।
उत्तर:
(i) मध्यावयवता – यह समावयवता बहुसंयोजी समूह युक्त यौगिक कीटोन में होती है जिसमें > C = O से जुड़े ऐल्किल समूहों में भिन्नता होती है।
उदाहरण- पेन्टेन – 2 ऑन तथा पेन्टेन 3-ऑन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 41

(ii) स्थिति समावयवता भी कीटोन में ही होती है। उपरोक्त उदाहरण स्थिति समावयवता का भी है।

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प्रश्न 2.
टॉलुइन से बेन्जेल्डिहाइड बनाने की विभिन्न विधियाँ बताइए।
उत्तर:
टॉलुइन के पार्श्व शृंखला क्लोरीनीकरण-जल अपघटन द्वारा (By the Side Chain Chlorination-Hydrolysis of Soluene)-सूर्य के प्रकाश में टॉलुईन की क्रिया क्लोरीन से कराने पर पहले बेन्जल क्लोराइड बनता है जिसके जल अपघटन से बेन्जैल्डिहाइड प्राप्त होता है। बेन्जैल्डिहाइड बनाने की यह एक औद्योगिक विधि है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 43

प्रश्न 3.
(i) रोजेनमुंड अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए। (ii) ऑक्सो अभिक्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
(i) ऐसिल क्लोराइडों के अपचयन द्वारा – रोजेनमुंड अपचयन (By the Reduction of Acyl Chlorides – Rosenmund Reduction) – Pd तथा BaSO की उपस्थिति में ऐसिल क्लोराइड पर हाइड्रोजन की क्रिया (हाइड्रोजनीकरण) से ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 44
नोट – (i) इस अभिक्रिया में प्रयुक्त BaSO Pd की उत्प्रेरकं क्षमता को कम कर देता है जिससे ऐल्डिहाइड का पुनः अपचयन होकर प्राथमिक ऐल्कोहॉल नहीं बनता है ।
(ii) इस अभिक्रिया से HCHO नहीं बनाया जा सकता क्योंकि HC-CI अस्थायी होता है।

(ii) ऑक्सो अभिक्रिया द्वारा (हाइड्रोफार्मिलीकरण) (By Oxo Reaction (Hydroformylation) ] – कोबाल्ट उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कीन की क्रिया कार्बन मोनोऑक्साइड तथा हाइड्रोजन के मिश्रण के साथ करवाने पर ऐल्डिहाइड बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 45
इस अभिक्रिया में कोबाल्ट के स्थान पर [Co2(CO)2] को भी प्रयुक्त किया जा सकता है तथा इस अभिक्रिया में द्विबन्ध का वियोजन होकर हाइड्रोजन तथा फार्मिल समूह का योग होता है अतः इसे हाइड्रोफार्मिलीकरण भी कहते हैं।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) बेन्जीन का फ्रीडेल क्राफ्ट ऐसिटिलीकरण
(ii) गाटरमान कोख ऐल्डिहाइड संश्लेषण
(iii) गाटरमान ऐल्डिहाइड संश्लेषण।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 46

प्रश्न 5.
कार्बोनिल यौगिक नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं, क्यों?
उत्तर:
कार्बोनिल यौगिकों में प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण से बना ऐल्कॉक्साइड आयन, इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण से बने कार्बोकेटायन की तुलना में अधिक स्थायी होता है। इसी कारण कार्बोनिल यौगिक नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं।

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प्रश्न 6.
बेन्जेल्डिहाइड तथा ऐसिटैल्डिहाइड में किस प्रकार विभेद किया जाता है?
उत्तर:
(i) बेन्जेल्डिहाइड (C6H5CHO) आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देता जबकि ऐसिटैल्डिहाइड (CH3CHO) आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है।

(ii) C6H5CHO फेलिंग विलयन से क्रिया नहीं करता जबकि CH3CHO, फेलिंग विलयन को अपचयित कर देता है।

प्रश्न 7.
अणुसूत्र C4H8O वाला यौगिक हाइड्रेजीन के साथ क्रिया करके हाइड्रेजोन बनाता है तथा यह आयोडीन व NaOH के साथ क्रिया करके आयोडोफॉर्म बनाता है लेकिन इसकी फेलिंग विलयन से कोई क्रिया नहीं होती तो इस यौगिक की संरचना तथा आवश्यक समीकरण बताइए।
उत्तर:
यौगिक हाइड्रेजीन से क्रिया करता है अतः यह एक कार्बोनिल यौगिक है लेकिन इसकी फेलिंग विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं होती अतः यह कीटोन होगा तथा यह आयोडोफॉर्म बनाता है इसलिए यह ब्यूटेनोन (CH3COCH2-CH3) मेथिल कीटोन है जो कि अणुसूत्र से भी सिद्ध हो जाता है।

उपरोक्त अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं-
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प्रश्न 8.
CH3CHO की NH3 के साथ अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
परअम्लों से ऑक्सीकरण (बेयर विलिगर अभिक्रिया) परअम्लों द्वारा ऑक्सीकरण से ऐल्डिहाइड तथा कीटेन क्रमशः कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा एस्टर देते हैं।
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प्रश्न 9.
एथेनैल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं को समझाइए –
(i) C2H5NH2
(ii) फेनिल हाइड्रेजीन
(iii) सेमीकार्बेजाइड।
उत्तर:
(i) एथेनैल की C2H5NH2 के साथ क्रिया कराने पर एक शिफ क्षारक बनता है।
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प्रश्न 10.
ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों के क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों तथा ईथरों से अधिक होते हैं, लेकिन ऐल्कोहॉलों से कम, क्यों?
उत्तर:
ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों के क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों तथा ईथरों से अधिक होते हैं, क्योंकि ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों में द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल के कारण आण्विक संगुणन पाया जाता है। लेकिन इनके क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों से कम होते हैं क्योंकि ऐल्कोहॉलों में अंतराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जो कि इनमें नहीं होता ।

प्रश्न 11.
(a) कार्बोनिल यौगिकों में -हाइड्रोजन अम्लीय होते हैं, क्यों?
(b) एथेनैल की एल्डोल संघनन अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(a) कार्बोनिल यौगिकों (ऐल्डिहाइड तथा कीटोन) में α-हाइड्रोजन अम्लीय होते हैं क्योंकि कार्बोनिल समूह -I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव) दर्शाता है तथा हाइड्रोजन आयन (Hsup>+) के निकलने से प्राप्त संयुग्मी क्षार, अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है।
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(b) एथेनैल में α-हाइड्रोजन उपस्थित होते हैं अतः तनु क्षार की उपस्थिति में इसके दो अणु क्रिया करके 3 -हाइड्रॉक्सी-ब्यूटैनैल बनाते हैं जिसे गर्म करने पर ब्यूट-2-ईनैल बनता है। इस अभिक्रिया को एल्डोल संघनन कहते हैं।
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प्रश्न 12.
निम्नलिखित कार्बोनिल यौगिकों का अम्लीय KMnO4 या अम्लीय K2Cr2O7 से ऑक्सीकरण करवाने पर प्राप्त
उत्पाद बताइए –
(i) CH3CHO
(ii) CH3COCH3
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उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 53
अभिक्रिया (iii) में प्राप्त उत्पाद पोपाफ के नियम के अनुसार है।

प्रश्न 13.
पोपाफ का नियम क्या होता है ? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब किसी असममित कीटोन के ऑक्सीकरण से दो असमान कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं तो > C = 0 समूह छोटे ऐल्किल समूह की तरफ जाता है।
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प्रश्न 14.
कार्बोनिल यौगिकों की नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि-कार्बोनिल यौगिकों में कार्बोनिल समूह ध्रुवीय होता है HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 55 प्रथम पद में नाभिकस्नेही का आक्रमण धनावेशित (इलेक्ट्रॉन न्यून) कार्बन पर होता है इसी कारण इसे नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया कहते हैं। प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है-
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प्रथम पद में नाभिकस्नेही के आक्रमण से प्राप्त ऐल्कोक्साइड आयन इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण से प्राप्त कार्बोकैटायन की तुलना में अधिक स्थायी होता है, अतः कार्बोनिल समूह पर प्रथम पद में नाभिकस्नेही का आक्रमण होता है। यह पद उत्क्रमणीय होता है।

नाभिकस्नेही, कार्बोनिल समूह के कार्बन पर उस दिशा से आक्रमण करता है जो कार्बोनिल कार्बन के sp² संकरित कक्षकों के तल के लम्बवत् होती है तथा इस क्रिया में कार्बन की संकरण अवस्था sp² से sp³ हो जाती है। इसके पश्चात् द्वितीय पद में इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण होकर योगोत्पाद बन जाता है।

प्रश्न 15.
नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के लिए कार्बोनिल यौगिकों की अभिक्रियाशीलता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया के लिए कार्बोनिल यौगिकों की अभिक्रियाशीलता-इलेक्ट्रॉनिक तथा त्रिविम विन्यासी प्रभावों के कारण नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रिया के लिए ऐल्डिहाइड की क्रियाशीलता कीटोन से अधिक होती है क्योंकि ऐल्डिहाइडों में कार्बोनिल समूह के कार्बन से केवल एक ऐल्किल समूह जुड़ा होता है जबकि कीटोन में दो ऐल्किल समूह जुड़े होते हैं, जिनकी त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण कार्बोनिल कार्बन पर नाभिकस्नेही का आक्रमण मुश्किल हो जाता है तथा इन ऐल्किल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I प्रभाव) के कारण ये कार्बोनिल कार्बन के धनावेश को कम कर देते हैं जिसके कारण नाभिकस्नेही के आक्रमण की सम्भावना कम हो जाती है।

ऐल्डिहाइड तथा कीटोन दोनों में ऐल्किल समूहों का आकार बढ़ने पर इनकी क्रियाशीलता कम होती जाती है, क्योंकि +I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा बढ़ती है।
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प्रश्न 16.
ऐसीटोन की HCN तथा NaHSO3 के साथ अभिक्रियाएँ बताइए।
उत्तर:
(i) ऐसीटोन की HCN के साथ क्रिया से ऐसीटोन सायनोहाइड्रिन प्राप्त होता है। शुद्ध HCN के साथ यह अभिक्रिया धीमी गति से होती है; अतः यह अभिक्रिया क्षार की उपस्थिति में करवायी जाती है।
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(ii) ऐसीटोन की NaHSO3 के साथ क्रिया से ऐसीटोन सोडियमहाइड्रोजन सल्फाइट (योगोत्पाद) बनता है।
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प्रश्न 17.
ऐल्डॉल संघनन की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर:
ऐल्डॉल संघनन की क्रियाविधि-क्षार से प्राप्त \(\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}\), कार्बोनिल यौगिक के α-H (सक्रिय) से क्रिया करके जल तथा कार्बत्रणायन मध्यवर्ती बनाता है जिसमें अनुनाद होता है।
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यह कार्ब ऋणायन (नाभिकस्नेही) कार्बोनिल यौगिक के दूसरे अणु से क्रिया करता है तथा जल से H+ को पुनः ग्रहण करके ऐल्डोल बना देता है।
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मिश्र या क्रॉस ऐल्डोल संघनन-जब दो भिन्न-भिन्न ऐल्डिहाइड या कीटोन या एक ऐल्डिहाइड व एक कीटेन के मध्य ऐल्डोल संघनन होता है तो उसे क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं। जब दोनों कार्बोनिल यौगिकों में α- हाइड्रोजन होते हैं तो इस अभिक्रिया द्वारा चार उत्पादों का मिश्रण प्राप्त होता है।

उदाहरण-यौगिक A तथा यौगिक B के ऐल्डोल संघनन से चार उत्पाद निम्न प्रकार बनते हैं-
सरल ऐल्डोल संघनन द्वारा-
(i) A पर A के संकलन से [A – A]
(ii) B पर B के संकलन से [B – B]

मिश्र ऐल्डोल संघनन द्वारा-
(iii) A पर B के संकलन से [A – B]
(iv) B पर A के संकलन से [B – A]

यहाँ उत्पाद A – B तथा B – A के संरचना सूत्र भिन्न-भिन्न होंगे, जैसे-एथेनैल व प्रोपेनैल के मिश्रण की ऐल्डोल संघनन अभिक्रिया निम्न प्रकार होगी-
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α-H युक्त यौगिक, α-H रहित यौगिक से क्रिया करके भी ऐल्डोल संघनन दर्शाता है।

प्रश्न 18.
पिनेकॉल अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सोडामाइड या सोडियम के साथ अभिक्रिया-ऐसीटोन की क्रिया सोडियम या सोडामाइड के साथ ईथरी विलयन में कराने पर सोडियम ऐसीटेनेट प्राप्त होता है।
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प्रश्न 19.
ऐसिटैल्डिहाइड के त्रिलकीकरण तथा चतुष्टयीकरण के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
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प्रश्न 20.
ऐसीटोन से निम्नलिखित यौगिकों को किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
(i) मेसिटिल ऑक्साइड (ii) फोरोन (iii) मेसिटिलीन।
उत्तर”
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(i) शुष्क HCl की उपस्थिति में ऐसीटेन को गरम करने पर मेसिटिल ऑक्साइड तथा फोरोन का मिश्रण प्राप्त होता है।
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(ii) सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल की उपस्थिति में ऐसीटोन को गरम करने पर संघनन तृतीयकरण द्वारा समचक्रीय एरोमैटिक यौगिक मेसिटिलीन प्राप्त होता है।
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं पर टिप्पणी लिखिए- (i) बेन्जोइन संघनन (ii) पर्किन अभिक्रिया।
उत्तर:
ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइडों की विशिष्ट अभिक्रियाएँ (Specific Reactions of Aromatic Aldehydes) –
(i) बेन्जॉइन संघनन-बेन्जैल्डिहाइड को जलीय ऐल्कोहॉली KCN के साथ गरम करने पर बेन्जोइन बनता है जो कि एक कीटोनिक द्वितीयक ऐल्कोहॉल है। उत्पाद के नाम के आधार पर इस अभिक्रिया को बेन्जोइन संघनन कहते हैं।
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(ii) पर्किन अभिक्रिया-बेन्जैल्डिहाइड को ऐसीटिक एन्हाइड्राइड तथा सोडियम एसीटेट के साथ गरम करने पर सिन्नेमिक अम्ल (α, ß – असंतृप्त अम्ल) प्राप्त होता है, इसे पर्किन अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 22.
क्लेजन संघनन तथा नोवेनैजेल अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
क्लेजन संघनन-न्यूनतम दो α-हाइड्रोजन परमाणु युक्त ऐल्डिहाइड या कीटोन की क्रिया तनु क्षार की उपस्थिति में बेन्जैल्डिहाइड के साथ कराने पर α, ß असंतृप्त ऐल्डिहाइड या कीटोन प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को क्लेजन संघनन कहते हैं।

उदाहरण-बेन्जैल्डिहाइड तथा ऐसीटैल्डिहाइड की क्रिया से सिन्नेमैल्डिहाइड बनता है।
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नोवेनैजेल अभिक्रिया-पिरिडीन की उपस्थिति में बेन्जैल्डिहाइड की क्रिया मैलोनिक एस्टर के साथ कराने पर सिन्नैमिक अम्ल प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया में मैलोनिक एस्टर में उपस्थित सक्रिय मेथिलीन समूह के दो हाइड्रोजन परमाणु जल के रूप में बाहर निकलते हैं।

प्रश्न 23.
ऐसीटोन की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) नाइट्र्स अम्ल
(ii) सोडामाइड।
उत्तर:
केवल कीटोनों की अभिक्रियाएँ (Reactions of only Ketones) – कुछ अभिक्रियाएँ केवल कीटोनों द्वारा ही दर्शायी जाती हैं जो कि निम्नलिखित हैं-
(i) नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया-ऐसीटेन की क्रिया नाइट्रस अम्ल (HNO2) के साथ कराने पर ऑक्सिमीनोऐसीटोन तथा जल बनता है।
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(ii) क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया一क्षार की उपस्थिति में ऐसीयेन तथा क्लोरोफॉर्म की क्रिया से क्लोरीटोन बनता है जो कि निद्राकारी होता है।
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(iii) सोडामाइड या सोडियम के साथ अभिक्रिया-ऐसीटोन की क्रिया सोडियम या सोडामाइड के साथ ईथरी विलयन में कराने पर सोडियम ऐसीटेनेट प्राप्त होता है।
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प्रश्न 24.
क्या होता है? जब-
(i) लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल की क्रिया क्लोरीन से करवाई जाती है।
(ii) सिल्वर ऐसीटेट की क्रिया अक्रिय विलायक (CCl4) में ब्रोमीन से करवायी जाती है।
उत्तर:
(i) लाल फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐसीटिक अम्ल, क्लोरीन से क्रिया करके मोनोक्लोरो एसीटिक अम्ल देता है। इस अभिक्रिया को हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया कहते हैं।
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(ii) अक्रिय विलायक में सिल्वर ऐसीटेट की क्रिया ब्रोमीन के साथ करवाने पर मेथिल ब्रोमाइड बनता है। इस अभिक्रिया को हुंस्डीकर अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 25.
कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा इनके व्युत्पन्नों में कार्बोनिल समूह पाया जाता है, फिर भी ये कार्बोनिल समूह के गुण नहीं दर्शाते, क्यों?
उत्तर:
कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा इनके व्युत्पन्नों में कार्बोनिल समूह (> C = O) पाया जाता है लेकिन इन यौगिकों में अनुनाद होता है जिससे कार्बोनिल समूह के कार्बन-ऑक्सीजन द्विबन्ध में एकल बन्ध के गुण आ जाते हैं अतः यह वास्तविक कार्बोनिल समूह नहीं रह पाता है इसी कारण ये यौगिक कार्बोनिल समूह के गुण जैसे ऑक्सिम बनाना इत्यादि नहीं दर्शाते।

अम्ल तथा इसके व्युत्पन्नों की अनुनादी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
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Z = OH तो कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा Z = विभिन्न समूह होने पर ये अम्ल के व्युत्पन्न होंगे।

प्रश्न 26.
निम्नलिखित परिवर्तनों के लिए आवश्यक समीकरण दीजिए-
(i) ऐसीटोफीनॉन से बेंजोइक अम्ल
(ii) प्रोपिओनिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल।
उत्तर:
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प्रश्न 27.
कार्बोक्सिलिक अम्लों में श्रृंखला तथा स्थिति समावयवता के उदाहरण बताइए ।
उत्तर:
(i) ब्यूटेनोइक अम्ल तथा 2 मेथिलप्रोपेनोइक अम्ल एक- दूसरे से श्रृंखला समावयवी हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 79

(ii) 2-मेथिल ब्यूटेनॉइक अम्ल तथा 3- मेथिल ब्यूटेनोइक अम्ल एक-दूसरे के स्थिति समावयवी हैं।
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प्रश्न 28.
(i) वह सरलतम मोनो कार्बोक्सिलिक अम्ल कौनसा है जो प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है तथा क्यों ?
(ii) प्रोपेनोइक अम्ल तथा एथिल मेथेनॉएट के युग्म में कौनसी समावयवता पायी जाती है तथा क्यों?
उत्तर:
(i) 2 – मेथिलब्यूटेनोइक अम्ल एक सरलतम मोनो कार्बोक्सिलिक अम्ल है जो प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है क्योंकि इसमें एक असममित कार्बन उपस्थित है।
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(ii) प्रोपेनोइक अम्ल तथा एथिल मेथेनॉएट एक-दूसरे के क्रियात्मक समूह समावयवी हैं क्योंकि इनमें भिन्न-भिन्न क्रियात्मक समूह उपस्थित हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 82

प्रश्न 29.
(i) ऐल्कीनो के कार्बोनिलीकरण से कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने की एक अभिक्रिया लिखिए।
(ii) आर्ट आइसटर्ट अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(i) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 83

(ii) आणर्ट आइसटर्ट अभिक्रिया से (From Arndt Eistert Reaction)-ऐसिड हैलाइड की क्रिया डाइऐजोमेथेन से कराने पर प्राप्त उत्पाद का जल अपघटन करने से कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं जिनमें ऐसिड हैलाइड की तुलना में एक कार्बन अधिक होता है। इस विधि को आण्ट्ट आइसटर्ट अभिक्रिया कहते हैं। इस विधि द्वारा न्यूनतम तीन कार्बन का अम्ल बनाया जा सकता है। अतः यह विधि HCOOH तथा CH3COOH बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 84
इस विधि के लिए आवश्यक ऐसिड हैलाइड, कार्बोक्सिलिक अम्लों से ही प्राप्त होता है अतः इस अभिक्रिया को एक सजातीय श्रेणी में आरोहण के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 30.
एस्टरीकरण अभिक्रिया की क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर:
एस्टरीकरण – सान्द्र H2SO4 या HCl गैस उत्प्रेरक की उपस्थिति में कार्बोक्सिलिक अम्लों की क्रिया ऐल्कोहॉल तथा फीनॉल के साथ करवाने पर संगत एस्टर बनते हैं तथा इस अभिक्रिया को एस्टरीकरण कहते हैं।
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एस्टरीकरण की क्रियाविधि – कार्बोक्सिलिक अम्लों से एस्टर बनने की अभिक्रिया की व्याख्या निम्नलिखित क्रियाविधि की सहायता से की जा सकती है। समस्थानिक ऑक्सीजन \(\left(\begin{array}{l} 18 \\ \mathrm{O} \end{array}\right)\) युक्त यौगिकों के प्रयोग से यह सिद्ध हो गया है कि इस अभिक्रिया में बने जल में – OH समूह अम्ल से आता है न कि ऐल्कोहॉल से।

कार्बोक्सिलिक अम्लों की ऐल्कोहॉलों के साथ क्रिया द्वारा एस्टरों का बनना एक नाभिकस्नेही ऐसिल प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। इसमें पहले कार्बोंक्सिलिक अम्ल में उपस्थित कार्बोनल समूह की ऑक्सीजन का प्रोटेनीकरण (Protonation) होता है, जिससे कार्बोनिल समूह, ऐल्कोहॉल के नाभिकस्नेही योग के लिए सक्रिय हो जाता है।

इसके पश्चात् ऐल्कोहॉल के योग से बने मध्यवर्ती में प्रोटॉन का स्थानान्तरण -OH समूह को –\(\stackrel{+}{\mathrm{O}}\)H2 में परिवर्तित कर देता है जो कि एक आसानी से निकलने वाला समूह होने के कारण, जल के अणु के रूप में निकल जाता है तथा इंस प्रकार बना प्रोटॉनित एस्टर प्रोटॉन को त्यागकर एस्टर बना देता है।
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प्रश्न 31.
बेन्जोइक अम्ल से निम्नलिखित यौगिक किस प्रकार बनाए जाते हैं?
(i) m नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(ii) m- ब्रोमो बेन्जोइक अम्ल।
उत्तर:
(i) बेन्जोइक अम्ल को सान्द्र HNO3 तथा सान्द्र H2SO3 (नाइट्रीकारक मिश्रण) के साथ गरम करने पर II- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
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(ii) FeBr3 की उपस्थिति में बेन्जोइक अम्ल की ब्रोमीन के साथ क्रिया करवाने पर m-ब्रोमोयेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
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प्रश्न 32.
ऐसिल क्लोराइड तथा ऐसिड ऐन्हाइड्राइड के जल अपघटन से कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 33.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समतुल्य अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों, कीटोनों तथा ऐल्कोहॉलों से उच्च होते हैं, क्यों?
उत्तर:
समतुल्य अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों कीटोनों तथा ऐल्कोहॉलों की तुलना कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक उच्च होते हैं क्योंकि कार्बोक्सिलिक अम्लों में प्रबल अंतराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है। जिसके कारण इनके अणु आपस में संगुणित हो जाते हैं तथा अधिकांश अम्ल वाष्प अवस्था एवं ऐप्रोटिक विलायकों में द्विलक के रूप में पाए जाते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 34.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्लीय गुणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कार्बोक्सिलिक अम्ल, क्षारों के साथ क्रिया करके लवण बनाते हैं जिससे इनके अम्लीय गुण की पुष्टि होती है। कार्बोंक्सिलिक
अम्लों के अम्लीय गुण की व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती हैकार्बोक्सिलिक अम्ल, (RCOOH) जल में आयनित होकर RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) (कार्बोक्सिलेट आयन) तथा H3 (हाइड्रोनियम आयन) बनाते हैं। RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 89a

इस अभिक्रिया के लिएसाम्य स्थिरांक, Keq = \(\frac{\left[\mathrm{H}_3 \mathrm{O}^{+}\right]\left[\mathrm{RCOO}^{-}\right]}{\left[\mathrm{H}_2 \mathrm{O}\right][\mathrm{RCOOH}]}\)
अम्ल वियोजन स्थिरांक Ka = Keq[H2O] = ]\(\frac{\left[\mathrm{H}_3 \mathrm{O}^{+}\right]\left[\mathrm{RCOO}^{-}\right]}{[\mathrm{RCOOH}]}\)
अम्लों की सामर्थ्य को सामान्यतः Ka मान की अपेक्षा PKa के से दर्शाते हैं
pKa = – log Ka
किसी अम्ल का pKa मान जितना कम होता है वह उतना ही प्र अम्ल होता है।
अम्लों की प्रबलता को pKa मानों से निम्न प्रकार सम्बन्धित किया जा सकता है-

pKaअम्लीय प्रबलता
1 से कमप्रबल अम्ल
1 से 5मध्यम प्रबल अम्ल
5 से 15दुर्बल अम्ल
15 से अधिकअत्यधिक दुर्बल अम्ल

कुछ अम्लीय यौगिकों के pK मान निम्नलिखित हैं-

यौगिकpKमानयौगिकpKमान
KCl– 7.0CH3COOH4.76
CF3COOH0.23C6H5OH10
C6H5COOH4.19C2H5OH~  1.6

ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल (CF3COOH) के pKa मान से यह सिद्ध होता है कि यह प्रबलतम कार्बनिक अम्ल है। कार्बोक्सिलिक अम्ल, खनिज अम्लों से दुर्बल लेकिन ऐल्कोहॉलों तथा फीनॉलों से प्रबल होते हैं।

प्रश्न 35.
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्ल सामर्थ्य पर विभिन्न प्रतिस्थापियों के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
कार्बोक्सिलिक अम्लों के अम्ल सामर्थ्य पर प्रतिस्थापियों का प्रभाव – कार्बोक्सिलिक अम्लों के आयनन से प्राप्त कार्बोक्सिलेट आयन जितना अधिक स्थायी होता है साम्य उतना ही अग्र दिशा में विस्थापित होता है जिससे हाइड्रोजन आयन (H+) अधिक बनते हैं अतः अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है।

कार्बोक्सिलिक अम्ल में उपस्थित प्रतिस्थापी कार्बोक्सिलेट आयन (संयुग्मी क्षारक) के स्थायित्व को प्रभावित करते हैं अतः इनसे इनके अम्लीय सामर्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।

इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह ( – I प्रभाव या EWG) कार्बोक्सिलेट आयन के स्थायित्व को बढ़ाते हैं क्योंकि ये साझित इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं जिससे ऋणावेशित ऑक्सीजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अर्थात् ऋणावेश का विस्थानीकरण हो जाता है । अतः अम्ल की अम्लीय प्रबलता बढ़ जाती है।

विभिन्न समूहों के – I प्रभाव का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होता है-
C6H5 – < OCH3 < OH < I < Br < CI < F < CN < NO2 < CF3 (−I प्रभाव )

इसके विपरीत इलेक्ट्रॉन दाता समूह ( + I प्रभाव या EDG) के कारण कार्बोक्सिलेट आयन का स्थायित्व कम हो जाता है क्योंकि यह ऑक्सीजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ा देता है, जिससे इसकी क्रियाशीलता बढ़ जाती है अतः अम्ल की अम्लीय प्रबलता कम हो जाती है।

अतः निम्नलिखित अम्लों की अम्लीय प्रबलता का घटता क्रम निम्न प्रकार होता है-
(1) CF3COOH> CCl3COOH > CHCl2COOH > NO2CH2COOH > N≡C-CH2COOH > FCH2COOH > ClCH2COOH > BrCH2COOH > HCOOH > ClCH2CH2COOH > > C6H5COOH > C6H5CH2COOH > CH3COOH > CH3CH2COOH

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 90
(+I प्रभाव कम हो रहा है, क्योंकि + I प्रभाव ऐल्किल समूह आकार के समानुपाती होता है। )

(3) अशाखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लीय प्रबलता, शाखित अम्लों की तुलना में अधिक होती है क्योंकि शाखित ऐल्किल समूह का +I प्रभाव अधिक होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 90a

(4) इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह, – COOH समूह अम्लीय प्रबलता उतनी ही कम होगी।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 90b

(5) – I प्रभाव वाले समूहों की संख्या बढ़ने पर अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है।
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(6) कार्बोक्सिल समूह पर वाइनिल या फेनिल समूह जुड़े होने पर अम्ल की प्रबलता बढ़ जाती है क्योंकि इनमें कार्बोक्सिल समूह से जुड़े कार्बन पर sp² संकरण होता है जिससे कार्बन की विद्युतऋणता बढ़ जाती है तथा इनमें अनुनाद भी पाया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 90d

(7) ऐलिफैटिक कार्बोक्सिलिक अम्लों के समान, ऐरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्लों में भी इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाले समूह के कारण अम्लीय प्रबलता में वृद्धि होती है जबकि इलेक्ट्रॉनदाता समूह के कारण अम्लीय प्रबलता में कमी होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 91a

(8) बेन्जोइक अम्ल में ऑर्थोस्थिति पर कोई भी समूह (+I या -I प्रभाव दर्शाने वाला) उपस्थित होने पर अम्लीय गुण में वृद्धि होती है इसे ऑर्थोप्रभाव कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 90e

(ii) धातुओं तथा क्षारों के साथ अभिक्रिया – ऐल्कोहॉलों के समान कार्बोक्सिलिक अम्ल भी सक्रिय धातुओं के साथ क्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन गैस देते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 90f

फनॉल के समान, कार्बोक्सिलिक अम्ल भी क्षारों के साथ क्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं, लेकिन NaHCO3 के साथ केवल कार्बोक्सिलिक अम्ल ही क्रिया करते हैं, फीनॉल नहीं । अतः इस अभिक्रिया द्वारा फीनॉल तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल में विभेद किया जा सकता है।
R – COOH + 2NaOH → R – CO\(\overline{\mathrm{O}}\)N\(\overline{\mathrm{a}}\) + H2
2R COOH + Na2CO3 → 2R COONa + H2O + CO2
2R COOH + Ca(OH)2 → (RCOO)2 Ca + 2H2O
RCOOH + AgOH → RCOOAg + H2O
R – COOH + NaHCO3 → R – CO\(\overline{\mathrm{O}}\)N\(\overline{\mathrm{a}}\) + H2O + CO2

प्रश्न 36.
फार्मिक अम्ल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाएँ दीजिए-
(i) सान्द्र H2SO4 (ii) जलीय Cl2
उत्तर:
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प्रश्न 37.
फ्लुओरीन की विद्युतॠणता, क्लोरीन की विद्युतॠणता से अधिक होती है फिर भी p-क्लोरोबेन्जोइक अम्ल की अम्लीय प्रबलता p-फ्लुओरोबेन्जोइक अम्ल से अधिक होती है क्यों ?
उत्तर:
हैलोजन, +M तथा I दोनों प्रभाव दर्शाते हैं लेकिन फ्लुओरीन तथा कार्बन का परमाणु आकार लगभग समान होता है अतः p-फ्लुओरो बेन्जोइक अम्ल में +M प्रभाव p-क्लोरो बेन्जोइक अम्ल की तुलना में अधिक होता है । इसलिए इसमें – I प्रभाव कम प्रभावी रह जाता है इस कारण p-क्लोरोबेन्जोइक अम्ल की अम्लीय प्रबलता, P- फ्लुओरोबेन्जोइक अम्ल से अधिक होती है।

प्रश्न 38.
अणु सूत्र C12H12 युक्त एक ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से दो भिन्न-भिन्न यौगिक प्राप्त होते हैं जिनमें से एक यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता जबकि दूसरा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है लेकिन आयोडोफॉर्म परीक्षण नहीं देता तो इस ऐल्कीन तथा उत्पादों के नाम एवं सूत्र बताइए ।
उत्तर:
ऐल्कीन के ओजोनी अपघटन से प्राप्त एक यौगिक टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया नहीं करता अतः यह कीटोन होना चाहिए लेकिन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह मेथिल कीटोन होगा जबकि दूसरा यौगिक टॉलेन अभिकर्मक से क्रिया करता है अतः यह एक ऐल्डिहाइड होगा चूंकि एल्कीन में छः कार्बन हैं। अतः एक यौगिक ऐसीटोन तथा दूसरा यौगिक प्रोपिऑन ऐल्डिहाइड होंगा जो कि निम्नलिखित अभिक्रिया से भी स्पष्ट है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 92
ऐसीटोन (मेथिल कीटोन) आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है लेकिन प्रोपिऑन ऐल्डिहाइड नहीं।

प्रश्न 39.
(i) ऐसी दो विधियाँ बताइए जिनसे C = 0 समूह CH2 में परिवर्तित हो जाता है।
(ii) ऐल्डिहाइडों के शोधन में सोडियम बाइसल्फाइट का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
(i) क्लीमेन्सन अपचयन तथा वोल्फ किश्नर अपचयन द्वारा > C = 0 समूह CH2 में परिवर्तित हो जाता है।

(ii) ऐल्डिहाइड सोडियम बाइ सल्फाइट (NaHSO3) से क्रिया करते हैं लेकिन अन्य अशुद्धियाँ नहीं, अतः अशुद्ध ऐल्डिहाइड की NaHSO3 से क्रिया द्वारा प्राप्त श्वेत ठोस का जल अपघटन करके शुद्ध ऐल्डिहाइड प्राप्त कर लिया जाता है।

प्रश्न 40.
आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे?
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उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 94

प्रश्न 41.
बेन्जोइक अम्ल को ऐनिलीन में किस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है ?
उत्तर:
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प्रश्न 42.
(i) अपचायक के प्रयोग के बिना फॉर्मेल्डिहाइड से मेथेनॉल किस प्रकार बनाया जा सकता है?
(ii) फेलिंग विलयन में रोशेल लवण क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर:
(i) फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) की सान्द्र NaOH के साथ अभिक्रिया से केनिजारो अभिक्रिया होकर मेथेनॉल (CH3OH) तथा सोडियम फॉर्मेट बनता है। इस अभिक्रिया में प्रयुक्त NaOH अपचायक नहीं है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 96

(ii) फेलिंग विलयन में क्षारीय माध्यम होता है तथा क्षारीय माध्यम में Cu2+ आयन Cu(OH)2 के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं। अतः रोशेल लवण मिलाने पर Cu2+ तथा रोशेल लवण के मध्य संकुल बन जाता है। जिससे Cu2+ अवक्षेप के रूप में न रहकर विलयन में आ जाते हैं अन्यथा परीक्षण में बाधा उत्पन्न होगी।

प्रश्न 43.
(i) निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए-
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(ii) ऐसीटोफीनॉन की हाइड्रॉक्सिल ऐमीन के साथ क्रिया से बने दो समावयवियों की संरचना लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 98

(ii) ऐसीटोफीनॉन की हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ क्रिया से इसका ऑक्सिम बनता है जो कि दो ज्यामितीय समावयवी रूपों में पाया जाता है।
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बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
(a) निम्नलिखित नामधारिक अभिक्रियाओं (Name reactions) को रासायनिक समीकरण देकर स्पष्ट कीजिए-
(i) कैनिजारो की अभिक्रिया
(ii) हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया

(b) निम्नलिखित यौगिक युग्मों में भिन्नता की पहचान करने के लिए एक-एक रासायनिक परीक्षण दीजिए-
(i) प्रोपेनेल तथा प्रोपेनोन में
(ii) ऐसीटोफीनोन और बेन्जोफीनोन में
(iii) फीनॉल और बेन्जोइक अम्ल में।
अथवा
(a) निम्नलिखित रूपांतरण आप कैसे करेंगे-
(i) एथेनॉल को 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनेल में
(ii) बेन्जैल्डिहाइड को बेन्जोफीनोन में

(b) एक ऑर्गोनिक (कार्बनिक) यौगिक A (आण्विक सूत्र C8H16O2) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से जल-अपघटित किया गया जिससे एक कार्बोक्सिलिक अम्ल B और एक ऐल्कोहॉल C उत्पादित हुआ। C के क्रोमिक अम्ल के साथ उपचयन (ऑक्सीकरण) से भी B प्राप्त होता है। C का निर्जलीकरण करने पर ब्यूट-1-ईन प्राप्त होता है। सन्निहित अभिक्रियाओं के लिए समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
(a) (i) फेलिंग अभिकर्मक से क्रिया-फेलिंग अभिकर्मक, फेलिंग विलयन A तथा फेलिंग विलयन B से मिलकर बना होता है।
फेलिंग विलयन A जलीय कॉपर सल्फेट (CuSO) का नीला तथा फेलिंग विलयन B सोडियम पोटैशियम टार्ट्रेट ( रोशेल लवण) का रंगहीन क्षारीय विलयन होता है। विलयन A तथा B को समान मात्रा में मिलाकर ऐल्डिहाइड के साथ गर्म करने पर क्युप्रस ऑक्साइड का लाल भूरा अवक्षेप बनता है।
R – CHO + 2Cu2+ + 5\(\overline{\mathrm{O}}\)H → RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) + Cu2O + 3H2O
एरोमैटिक ऐल्डिहाइड जैसे बेन्जेल्डिहाइड, फेलिंग अभिकर्मक में क्रिया नहीं करते हैं।
रोशेल लवण का सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 100 होता है, तथा इस अभिक्रिया में पहले गहरे नीले रंग का संकुल बनता है जिससे Cu2+ आयनों का अवक्षेप [Cu(OH)2] बनने के बजाय ये विलयन में आ जाते हैं। सकुल की संरचना निम्नलिखित है- HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 101 क्यूरिट आयन (गहरा नीला)

(ii) हैलोजेनीकरण-α, हाइड्रोजन परमाणु युक्त कार्बोक्सिलिक अम्लों की क्रिया क्लोरीन या ब्रोमीन के साथ करवाने पर α – हैलोकार्बोंक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 102
फॉस्फोरस की उपस्थिति में मोनोक्लोरो उत्पाद अधिक म्रात्रा में बनता है।

(b) (i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन में विभेद – प्रोपेनैल (CH3CH2CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि (CH3COCH3) एक मेथिल कीटोन है। इनमें निम्न परीक्षणों द्वारा विभेद किया जा सकता है-

  • आयोडोफॉर्म परीक्षण – जलीय NaOH तथा I2 के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल में कोई क्रिया नहीं होती जबकि प्रोपेनोन द्वारा आयोडोफॉर्म बनने के कारण पीला अवक्षेप आता है।
    HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 103
  • टॉलेन अभिकर्मक (अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट) के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल रजत दर्पण देता है (रजत दर्पण परीक्षण) जबकि प्रोपेनोन में कोई क्रिया नहीं होती।
  • फेलिंग विलयन के साथ गर्म करने पर प्रोपेनैल से लाल अवक्षेप बनता है जबकि प्रोपेनोन से कोई अभिक्रिया नहीं होती।

(ii) ऐसीटोफ़ीनॉन एवं बेन्ज़ोफ़ीनॉन में विभेद – ऐसीटोफ़ीनॉन (CH3COC6H5) एक सेथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्ज़ोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 104यह परीक्षण नहीं देता।

(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्ज़ोइक अम्ल में विभेद-
(1) फ़ीनॉल NaHCO3 विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं करता जबकि बेन्ज़ोइक अम्ल NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके CO2 गैस देता है।
C6H5COOH + NaHCO3 → C6H5COONa +CO2↑ + H2

(2) उदासीन FeCl3 विलयन के साथ फ़ीनॉल बैंगनी (Violet) रंग देता है जबकि बेन्ज़ोइक अम्ल के साथ इसकी कोई क्रिया नहीं होती।
अथवा
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 105
(b) यौगिक A का अणुसूत्र तथा इसके जल अपघटन से कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा ऐल्कोहॉल बनने से ज्ञात होता है कि यह एक संतृप्त एस्टर है। ऐल्कोहॉल के निर्जलीकरण से ब्यूट-1-ईन प्राप्त होती है अतः ऐल्कोहॉल में सीधी श्रृंखला में चार कार्बन परमाणु हैं अतः कार्बोक्सिलिक अम्ल में भी चार कार्बन परमाणु ही होंगे। सन्निहित अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 106

प्रश्न 2.
1-फेनिल पेन्टेन-1-ओन का संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 107

प्रश्न 3.
टॉलेन अभिकर्मक क्या होता है? इस अभिकर्मक की एक उपयोगिता लिखिए।
उत्तर:
अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन को टॉलेन अभिकर्मक कहते हैं। इस अभिकर्मक से ऐल्डिहाइड तथा कीटोन में विभेद किया जा सकता है। ऐल्डिहाइड इसके साथ क्रिया करके रजत दर्पण देते हैं लेकिन कीटोन नहीं।

प्रश्न 4.
(a) निम्नलिखित नाम वाली अभिक्रियाओं को प्रत्येक के लिए रासायनिक समीकरण देकर लिखिए-
(i) क्लीमेन्सन अभिक्रिया
(ii) कैनिज़ारो की अभिक्रिया

(b) वर्णन कीजिए कि निम्नलिखित रूपांतरण कैसे किए जाते हैं-
(i) साइक्लोहेक्सैनॉल का साइक्लोहेक्सेन-1-ओन में
(ii) एथिलबेन्जीन का बेन्जोइक अम्ल में
(iii) ब्रोमोबेन्जीन का बेन्जोइक अम्ल में।
अथवा
(a) निम्नलिखित नामों की अभिक्रियाओं को उदाहरण के साथ लिखिए-
(i) हेल-फोलार्ड-जेलिंस्की अभिक्रिया
(ii) वोल्फ-किश्नर अपचयन अभिक्रिया

(b) निम्न रूपांतरण कैसे किए जा सकते हैं-
(i) मेथिल सायनाइड का एथेनोइक अम्ल में
(ii) ब्यूटेन-1-ऑल का ब्यूटेनोइक अम्ल में
सन्निहित अभिक्रियाओं के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
(a) (i) क्लीमेन्सन अपचयन-कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन जिंक अमलगम तथा सान्द्र HCl(Zn/Hg + HCl) के मिश्रण से कराया जाता है तो ऐल्केन बनते हैं, इसे क्लीमेन्सन अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 108
यह अभिक्रिया मुख्यतः कीटोनों के लिए प्रयुक्त की जाती है क्योंकि सान्द्र HCl की उपस्थिति में ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों का बहुलकीकरण हो जाता है।

(ii) कैनिजारो अभिक्रिया-वे ऐल्डिहाइड जिनमें α हाइड्रोजन नहीं होते वे कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं। इन ऐल्डिहाइडों को सान्द्र क्षार (KOH या NaOH) के साथ गर्म करते हैं जिससे एक अणु का ऑक्सीकरण होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण तथा दूसरे अणु के अपचयन से ऐल्कोहॉल बनता है। अतः यह एक असमानुपातन या विषमीकरण अभिक्रिया है।
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(b)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 110
अथवा
(a) (i) हैलोजेनीकरण-α, हाइड्रोजन परमाणु युक्त कार्बोक्सिलिक अम्लों की क्रिया क्लोरीन या ब्रोमीन के साथ करवाने पर α – हैलोकार्बोंक्सिलिक अम्ल प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया को हेलफोलार्ड जेलिंस्की अभिक्रिया कहते हैं।
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फॉस्फोरस की उपस्थिति में मोनोक्लोरो उत्पाद अधिक म्रात्रा में बनता है।

(ii) वोल्फ-किश्नर अपचयन-कार्बोनिल यौगिकों की हाइड्रैजीन के साथ अभिक्रिया कराने के पश्चात्, एथिलीन ग्लाइकॉल में सोडियम या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर > C = O समूह – CH2 समूह में बदल जाता है तथा ऐल्केन बनते हैं।
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उपरोक्त अभिक्रिया में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (HO-CH2-CH2-O-CH2-OH) तथा KOH लेने पर इसे हुएंगमिनलॉन अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 5.
4-क्लोरोपेन्टेन 2-ओन की संरचना आरेखित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 113a

प्रश्न 6.
(a) निम्नलिखित नाम वाली अभिक्रियाओं के उदाहरण दीजिए-
(i) कैनिज़ारो की अभिक्रिया
(ii) क्लीमेन्सन अपचयन

(b) निम्नलिखित को आप कैसे प्राप्त करेंगे-
(i) एथेनैल से ब्यूट – 2 – इनैल
(ii) ब्यूटेनॉल से ब्यूटेनोइक अम्ल
(iii) एथिलबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल।
अथवा
(a) निम्नलिखित में विभेद करने के लिए रासायनिक परीक्षणों को लिखिए-
(i) बेन्जोइक अम्ल और एथिल बेन्जोएट
(ii) बेन्जेल्डिहाइड और ऐसीटोफीनोन

(b) निम्नलिखित में अभिकारक अथवा उत्पाद जो न लिखे गए हों उन्हें लिखकर प्रत्येक संश्लेषण को पूर्ण कीजिए-
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उत्तर:
(a) (i) कैनिजारो अभिक्रिया-वे ऐल्डिहाइड जिनमें α हाइड्रोजन नहीं होते वे कैनिजारो अभिक्रिया देते हैं। इन ऐल्डिहाइडों को सान्द्र क्षार (KOH या NaOH) के साथ गर्म करते हैं जिससे एक अणु का ऑक्सीकरण होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण तथा दूसरे अणु के अपचयन से ऐल्कोहॉल बनता है। अतः यह एक असमानुपातन या विषमीकरण अभिक्रिया है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 115

(ii) क्लीमेन्सन अपचयन-कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन जिंक अमलगम तथा सान्द्र HCl(Zn/Hg + HCl) के मिश्रण से कराया जाता है तो ऐल्केन बनते हैं, इसे क्लीमेन्सन अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 116
यह अभिक्रिया मुख्यतः कीटोनों के लिए प्रयुक्त की जाती है क्योंकि सान्द्र HCl की उपस्थिति में ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों का बहुलकीकरण हो जाता है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित का आई.यू. पी. ए. सी. (IUPAC ) नाम लिखिए-
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उत्तर:
पेन्ट – 2 – ईन – 1- ऐल।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

प्रश्न 8.
(a) उपयुक्त रासायनिक समीकरण को लिखकर निम्नलिखित प्रत्येक रूपांतरण को पूर्ण कीजिए-
(i) ब्यूटेन – 1 – ऑल को ब्यूटेनॉइक अम्ल में
(ii) 4 – मेथिलऐ सीटोफीनोन को बेन्जीन-1, 4- डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल में

(b) एक ऑर्गेनिक (कार्बनिक यौगिक, जिसका आण्विक सूत्र C9H10O है, 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करता है, और कैनिजारो की अभिक्रिया देता है। तीव्र ऑक्सीकरण पर यह 1, 2 – बेन्जीनडाइकार्बोक्सिलिक अम्ल देता है । यौगिक की पहचान कीजिए।
अथवा
(a) निम्न के बीच अंतर करने के लिए रासायनिक जाँचों को दीजिए-
(i) प्रोपेनैल और प्रोपेनोन में
(ii) बेन्जेल्डिहाइड और ऐसीटीफीनोन में

(b) अग्रलिखित यौगिकों को उनके सामने दिए गए गुणधर्मों के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए –
(i) ऐसीट-ऐल्डिहाइड, ऐसीटोन, मेथिल टर्ट (तृतीयक) ब्यूटिल कीटोन (HCN के प्रति क्रियाशीलता)
(ii) बेन्जोइक अम्ल, 3, 4 – डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल, 4- मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल (अम्ल सामर्थ्य)
(iii) CH3CH2CH(Br)COOH, CH3CH(Br) CH3COOH,
(CH3)2CH COOH (अम्ल सामर्थ्य)
उत्तर:
(a)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 118
(b) यह कार्बनिक यौगिक 2,4-DNP व्युत्पन्न बनाता है। अतः यह कार्बोनिल यौगिक (ऐल्डिहाइड या कीटोन) होगा लेकिन यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचित (reduced) कर रहा है। अतः यह ऐल्डिहाइड है तथा यह कैनिजारो अभिक्रिया दे रहा है। अतः इसमें α-H अनुपस्थित है। इसके आक्सीकरण से 1,2 -बेन्जीनडाईकार्बोक्सिलिक अम्ल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 119
ऑक्सीकरण के बाद बने उत्पाद से यह सिद्ध होता है कि इसमें एक बेन्जीन वलय है, एक COOH समूह – CHO समूह के ऑक्सीकरण से तथा दूसरा – COOH समूह ऐल्किल समूह के ऑक्सीकरण से प्राप्त होगा। अतः अणुसूत्र के अनुसार इसका संरचना सूत्र निम्न प्रकार होगा-
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अथवा
(a) (i) प्रोपेनैल एवं प्रोपेनोन में विभेद-प्रोपेनैल (CH3CH2CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि (CH3COCH3) एक मेथिल कीटेन है। इनमें निम्न परीक्षणों द्वारा विभेद किया जा सकता है-

(ii) (1) बेन्ज़ैल्डिहाइड (C6H5CHO) एक ऐल्डिहाइड है जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 121एक मेथिल कीटोन है अतः ऐसीटोफ़ीनॉन, आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि बेन्ज़ैल्डिहाइड यह परीक्षण नहीं देता है।

(2) बेन्ज़ल्डिहाइड टॉलेन अभिकर्मक से ऑक्सीकृत हो जाता है, जबकि ऐसीटोफ़ीनॉन इससे क्रिया नहीं करता।

(b) (i) ऐल्डिहाइड तथा कीटोन की नाभिकरागी संकलन के लिए क्रियाशीलता + I प्रभाव तथा त्रिविम विन्यासी बाधा पर निर्भर करती है। अतः इनकी HCN के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होगा-डाइ तृतीयक – ब्यूटिल कीटोन – मेथिल तृतीयक ब्यूटिल कीटोन < ऐसीटोन – ऐसिटैल्डिहाइड

(ii) कार्बोक्सिलिक अम्लों का अम्लीय गुण, प्रेरणिक प्रभाव (+I तथा -I) तथा विभिन्न समूहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अतः इनके अम्लीय गुण का क्रम निम्न प्रकार होगा-
(CH3)2CHCOOH < CH3CH2CH2COOH < CH3CH(Br)CH2COOH < CH3CH2CH(Br)COOH

(iii) 4 – मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल < 3, 4 – डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(अम्लता की सामर्थ्य का बढ़ता क्रम)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 122

प्रश्न 9.
निम्नलिखित कार्बनिक यौगिकों के आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 123
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 124

प्रश्न 10.
(i) रोजेनमुंड अपचयन अभिक्रिया लिखिए।
(ii) HCOOH, CF3COOH, ClCH2CUUH, अम्लों को उनकी अम्लीयता के बढ़ते क्रम में लिखिए।
(iii) एथेनोइक अम्ल की क्रिया अमोनिया से कराने पर यौगिक A बनता है जिसे गर्म करने पर यौगिक B प्राप्त होता है। B का अम्लीय जल अपघटन कराने पर पुन: एथेनोइक अम्ल बनता है। A व B के IUPAC नाम एवं सूत्र लिखो व अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।
(iv) कार्बोनिल समूह का कक्षीय आरेख चित्र बनाइए।
अथवा
(i) वोल्फ-किश्नर अपचयन की अभिक्रिया लिखिए।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 125संरचना में α हाइड्रोजन परमाणु की अम्लीय प्रकृति को समझाइए।
(iii) एक कार्बोनिल यौगिक A का ऑक्सीकरण टॉलन अभिकर्मक से कराने पर यौगिक B बनता है जिसका अपचयन LiAlH4 से कराने पर एथेनॉल बनता है। A व B के IUPAC नाम एवं सूत्र लिखिए।
(iv) ऐसीटेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइये।
उत्तर:
(i) Pd तथा BaSO4 की उपस्थित में ऐसिल क्लोराइड पर हाइड्रोजन की क्रिया से ऐल्डिहाइड बनते हैं। इसे रोजेनमुंड अपचयन अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 126

(ii) अम्लों की अम्लीयता का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 127
अतः (A) = CH3COONH4 अमोनियम ऐसीटेट या अमोनियम एथेनॉएट
(B) = CH3CONH2 एथेनेमाइड

(iv) कार्बोनिल समूह में कार्बन परमाणु पर sp² संकरण होता है तथा ये तीन sp² संकरित कक्षक तीन σ बन्ध बनाते हैं एवं कार्बन का असंकरित p कक्षक, ऑक्सीजन के p – कक्षक के साथ सम्पार्श्विक अतिव्यापन द्वारा π बन्ध बनाता है।

इस प्रकार कार्बोनिल समूह का कार्बन तथा इससे जुड़े तीन परमाणु एक ही तल में स्थित होते हैं तथा π इलेक्ट्रॉन अभ्र इस तल के ऊपर एवं नीचे स्थित होता है। बंध कोण का मान लगभग 120° होता है तथा ज्यामिति त्रिकोणीय समतल होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 128
कार्बन की तुलना में ऑक्सीजन की विद्युतऋणात्मकता अधिक होने के कारण कार्बन-ऑक्सीजन द्विआबंध ध्रुवित हो जाता है अतः कार्बोनिल समूह का कार्बन एक इलेक्ट्रॉनस्नेही (लूइस अम्ल) केन्द्र तथा ऑक्सीजन एक नाभिकस्नेही (लूइस क्षारक) केन्द्र के समान व्यवहार करता है।

> C = O समूह की ध्रुवता के कारण ही कार्बोनिल यौगिकों के द्विध्रुव आघूर्ण का मान अधिक होता है तथा ये ईथर की तुलना में अधिक ध्रुवीय होते हैं। कार्बोनिल समूह की ध्रुवता का कारण अनुनाद है जिसे निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 129
अथवा
(i) वोल्फ-किश्नर अपचयन-कार्बोनिल यौगिक की हाइड्रेजीन के साथ अभिक्रिया कराने के पश्चात्, एथिलीन ग्लाइकॉल (विलायक) में सोडियम या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर >C = O समूह -CH2 समूह में बदल जाता है तथा एल्केन बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 130

(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 131 संरचना में कार्बोनिल समूह है तथा कार्बोनिल यौगिकों के alpha-हाइड्रोजन परमाणु की अम्लता कार्बोनिल समूह के इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने के प्रबल प्रभाव तथा संयुग्मी क्षार के अनुनाद द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेने के कारण होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 132

(iii) कार्बोनिल यौगिक A का यॅलेन अभिकर्मक द्वारा ऑक्सीकरण हो रहा है अतः यौगिक A ऐल्डिहाइड होगा तथा ऐल्डिहाइड के ऑक्सीकरण से अम्ल बनता है अतः यौगिक B अम्ल होगा जिसका LiAlH4 के द्वारा अपचयन से एथेनॉल बन रहा है। अतः यौगिक B, CH3CHO तथा A, CH3CHO होगा। सम्पूर्ण अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 133

(iv) ऐसीटेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ निम्न हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 134

प्रश्न 11.
साइक्लोप्रोपेनॉन-2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजोन की संरचना दीजिए।
उत्तर:
साइक्लोप्रोपेनॉन – 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजोन की संरचना निम्नलिखित है-
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यह साइक्लोप्रोपेनॉन की 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रेजीन के साथ क्रिया से बनता है।
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प्रश्न 12.
(अ) निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) कैनिजारो अभिक्रिया
(ii) ऐल्डोल संघनन
(ब) निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांक के बढ़ते क्रम में लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 137
(स) टॉलेन अभिकर्मक द्वारा ऐल्डिहाइड एवं कीटोन में विभेद कैसे करेंगे?
अथवा
(अ) निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण दीजिए-
(i) रोजेनमुंड अपचयन
(ii) गाटरमान – कोख अभिक्रिया

(ब) निम्नलिखित यौगिकों को उनकी अम्लीयता के बढ़ते क्रम में लिखिए-
(CH3)2 CH – COOH, HCOOH, CH3 – COOH, (CH3)3 C – COOH

(स) सोडियम बाइकार्बोनेट द्वारा कार्बोक्सिलिक अम्ल व फीनॉल में विभेद किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
(अ) (i) कैनिजारो अभिक्रिया – वे ऐल्डिहाइड, जिनमें a – हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते, सान्द्र क्षार (NaOH या KOH) की उपस्थिति में स्वऑक्सीकरण व अपचयन (असमानुपातन) दर्शाते हैं। इस अभिक्रिया में ऐल्डिहाइड का एक अणु ऐल्कोहॉल में अपचयित होता है जबकि दूसरा अणु कार्बोक्सिलिक अम्ल के लवण में ऑक्सीकृत हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 138

(ii) ऐल्डोल संघनन – जिन ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों में a- हाइड्रोजन उपस्थित होते हैं, वे तनु क्षार (NaOH, Ca (OH)2) की उपस्थिति में आपस में क्रिया करके क्रमशः ß-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड (एल्डोल) अथवा p-हाइड्रॉक्सी कीटोन (कीटोल) बनाते हैं। इस अभिक्रिया को ऐल्डोल संघनन कहते हैं।

उदाहरण – ऐसीटैल्डिहाइड का ऐल्डोल संघनन-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 139

(ब) क्वथनांक का बढ़ता क्रम-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 140

(स) ऐल्डिहाइड को अमोनियम सिल्वर नाइट्रेट विलयन (AgNO3 + NH4OH) (टॉलेन अभिकर्मक ) के साथ गर्म करने पर सिल्वर बनने के कारण चमकदार सिल्वर दर्पण बनता है तथा ऐल्डिहाइड संगत कार्बोक्सिलेट आयन में ऑक्सीकृत हो जाते हैं।
RCHO + 2[Ag(NH3)2]+ + 3\(\overline{\mathrm{OH}}\) → RCO\(\overline{\mathrm{O}}\) + 2Ag + 2H2O + 4NH3
कीटोन, टॉलेन अभिकर्मक के साथ क्रिया नहीं करते।
अथवा
(अ) (i) रोजेनमुंड अपचयन – Pd तथा BaSO4 की उपस्थिति में एसिल क्लोराइड की हाइड्रोजन के साथ क्रिया (हाइड्रोजनीकरण) से ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 141

(ii) गाटरमान – कोख अभिक्रिया – ऐलुमिनियम क्लोराइड की उपस्थिति में बेन्जीन की कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ क्रिया कराते हैं तो बेन्जेल्डिहाइड प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 142
इस अभिक्रिया को गाटरमान – कोख अभिक्रिया कहते हैं।

(ब) अम्लीयता का बढ़ता क्रम-
(CH3)3 C – COOH < (CH3)2 CHCOOH < CH3COOH < HCOOH

(स) फीनॉल (C6H5OH) सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन के साथ कोई क्रिया नहीं करता जबकि कार्बोक्सिलिक अम्ल (RCOOH), NaHCO3 विलयन के साथ क्रिया करके बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस देता है।
RCOOH + NaHCO3 → RCOONa + CO2 ↑ + H2O

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प्रश्न 13.
एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र C3H6O है, 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रैजीन के साथ नारंगी लाल अवक्षेप देता है किन्तु टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता है। यौगिक का IUPAC नाम व संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
कार्बनिक यौगिक C3H6O 2, 4- डाइनाइट्रोफेनिल हाइड्रैजीन के साथ नारंगी लाल अवक्षेप देता है अतः यह एक कार्बोनिल यौगिक ( ऐल्डिहाइड या कीटोन) है तथा यह टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता है अतः यह ऐल्डिहाइड नहीं है इसलिए यह एक कीटोन है। अणुसूत्र के अनुसार इसका संरचना सूत्र तथा IUPAC नाम निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 143

प्रश्न 14.
निम्नलिखित यौगिकों के संरचना सूत्र एवं IUPAC नाम दीजिए-
(अ) फार्मेल्डिहाइड
(ब) ऐसीटोन।
अथवा
निम्नलिखित यौगिकों के संरचना सूत्र एवं IUPAC नाम दीजिए-
(अ) मेलोनिक अम्ल
(ब) सक्सिनिक अम्ल।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 144

प्रश्न 15.
(अ) कार्बोक्सिलेट आयन किस प्रकार अनुनाद .द्वारा स्थायित्व प्राप्त करता है? संरचाओं द्वारा स्पष्ट करें।
(ब) कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की अपेक्षा अधिक अम्लीय होता है। समझाइए |
उत्तर:
(अ) कार्बोक्सिलिक अम्ल, जल में आयनित होकर कार्बोक्सिलेट आयन RCOŌ तथा \(\mathrm{H}_3 \stackrel{+}{\mathrm{O}}\) (हाइड्रोनियम आयन) बनाते हैं। RCOŌ अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है। इसकी अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 145
इस अभिक्रिया के लिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 146
यहाँ Keq साम्यावस्था स्थिरांक तथा Ka अम्ल वियोजन स्थिरांक है।

(ब) फीनॉल के आयनन से प्राप्त फीनॉक्साइड आयन (C6H5O) में ऋणात्मक आवेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु तथा कम विद्युतऋणी कार्बन पर होता है, जबकि कार्बोक्सिलिक आयन (RCO) में ऋणात्मक आवेश दो विद्युतऋणी ऑक्सीजन परमाणुओं पर वितरित होता है, अतः कार्बोक्सिलेट आयन में ऋणात्मक आवेश का विस्थानीकरण, फीनॉक्साइड आयन से अधिक होता है इस कारण इसका अनुनाद स्थायीकरण अधिक होता है । इसलिए कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल से अधिक अम्लीय है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
CH3-CHO, CH3-CH2-OH, CH3-CH2-CH3
उत्तर:
CH3-CH2-CH3 < CH3-CHO < CH3-CH2-OH

प्रश्न 17.
(i) निम्नलिखित को किस प्रकार परिवर्तित करेंगे-
(a) प्रोपेनॉन से प्रोपेन – 2 – ऑल
(b) एथेनैल से 2- हाइड्रॉक्सीप्रोपेनॉइक अम्ल
(c) टॉलूईन से बेन्जोइक अम्ल
(ii) निम्नलिखित में विभेद कीजिए-
(a) पेन्टेन – 2 – ऑन तथा पेन्टेन- 3 – ऑन
(b) एथेनैल तथा प्रोपेनैल।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 147

(ii) (a) पेन्टेन-2-ऑन एक मेथिल कीटोन है अतः यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि पेन्टेन – 2 – ऑन यह परीक्षण नहीं देता है।
(b) एथेनैल आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है जबकि प्रोपेनैल यह परीक्षण नहीं देता।
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प्रश्न 18.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 149
उत्तर:
(i) 3- हाइड्रॉक्सीब्यूटेनॉइक अम्ल
(ii) 3-ऐमीनो ब्यूटेनैल
(iii) 4-हाइड्रॉक्सी पेन्टेन-2-ऑन

प्रश्न 19.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पाद लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 150
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 151

प्रश्न 20.
उचित उदाहरण के साथ निम्न को समझाइए –
(अ) रोजेनमुंड अपचयन
(ब) गाटरमान – कॉख अभिक्रिया।
अथवा
उचित उदाहरण के साथ निम्न को समझाइए-
(अ) क्लीमेन्सन अपचयन
(ब) स्टीफेन अभिक्रिया।
उत्तर:
(अ) रोजेनमुंड अपचयन – ऐसिल क्लोराइड पर Pd तथा BaSO4 की उपस्थिति में हाइड्रोजन की क्रिया कराने (हाइड्रोजनीकरण) पर ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 152

(ब) गाटरमान – कॉख अभिक्रिया – जब बेन्जीन की क्रिया ऐलुमिनियम क्लोराइड की उपस्थिति में कार्बनमोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ कराते हैं तो बेन्जेल्डिहाइड बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 153
इस अभिक्रिया को गाटरमान कोख ऐल्डिहाइड संश्लेषण भी कहते हैं।
अथवा
(अ) क्लीमेन्सन अपचयन – इस अभिक्रिया में कार्बोनिल यौगिकों का जिंक अमलगम तथा सान्द्र HCl ( Zn / Hg + HCI) के मिश्रण से अपचयन कराया जाता है जिससे ऐल्केन बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 154
यह अभिक्रिया मुख्यतः कीटोनों के लिए प्रयुक्त की जाती है क्योंकि सान्द्र HCl की उपस्थिति में ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों का बहुलकीकरण हो जाता है।

(ब) स्टीफेन अभिक्रिया – जब ऐल्केन नाइट्राइल का अपचयन SnCl2 + HCl से कराया जाता है तो संगत इमीन बनते हैं जिनके जल अपघटन से ऐल्डिहाइड बनते हैं। इसे स्टीफेन अभिक्रिया कहते हैं।
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प्रश्न 21.
आप एक पद में सोडियम एसिटेट को मेथेन में परिवर्तित कैसे करेंगे?
उत्तर:
सोडियम एसिटेट को सोडालाइम (NaOH तथा CaO का मिश्रण 3 : 1) के साथ गरम करने पर मेथेन प्राप्त होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 157

प्रश्न 22.
(अ) रोजेनमुण्ड अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।
(ब) फ्लोरोऐसीटिक अम्ल, क्लोरोऐसीटिक अम्ल की तुलना में अधिक अम्लीय है, क्यों?
(स) कार्बोक्सिलेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।
अथवा
(अ) वोल्फ – किश्नर अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।
(ब) कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों से उच्च होते हैं, क्यों?
(स) एथेनॉइक अम्ल की वाष्प अवस्था में बनने वाले द्वितय की संरचना बनाइए।
उत्तर:
(अ) रोजेनमुंड अपचयन – ऐसिल क्लोराइड पर Pd तथा BaSO4 की उपस्थिति में हाइड्रोजन की क्रिया कराने (हाइड्रोजनीकरण) पर ऐल्डिहाइड बनते हैं, इसे रोजेनमुंड अपचयन कहते हैं।
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(ब) फ्लोरोऐसीटिक अम्ल में उपस्थित फ्लोरीन का इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रभाव (-1 प्रभाव) क्लोरोऐसीटिक अम्ल में उपस्थित क्लोरीन के – I प्रभाव से अधिक होता है अतः यह अम्ल के आयनन से प्राप्त कार्बोक्सिलेट आयन के ऋणावेशित ऑक्सीजन से इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करके उसका स्थायित्व बढ़ा देता है जिससे विलयन में H+ आयन अधिक प्राप्त होते हैं। अतः फ्लोरोऐसीटिक अम्ल, क्लोरोऐसीटिक अम्ल की तुलना में अधिक अम्लीय है।

(स) कार्बोक्सिलेट आयन (RCO\(\overline{\mathrm{O}}\)) की अनुनादी संरचनाएँ निम्न हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 158
अथवा
(अ) (i) वोल्फ-किश्नर अपचयन-कार्बोनिल यौगिक की हाइड्रेजीन के साथ अभिक्रिया कराने के पश्चात्, एथिलीन ग्लाइकॉल (विलायक) में सोडियम या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर > C = O समूह – CH2 समूह में बदल जाता है तथा एल्केन बनते हैं।

(ब) कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्डिहाइड तथा कीटोनों से उच्च होते हैं क्योंकि इनमें प्रचल अंतराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जिसके कारण इनके अणु आपस में संगुणित हो जाते हैं तथा अधिकांश कार्बोक्सिलिक अम्ल वाष्प अवस्था तथा ऐप्रोटिक विलायकों में द्विलक के रूप में पाए जाते हैं।

(स) एथेनॉइक अम्ल की वाष्प अवस्था में बनने वाले द्वितय (द्विलक) की संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 159

प्रश्न 23.
बेन्जोइक अम्ल, 4 मेथिल बेन्जोइक अम्ल एवं 4- नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल को अम्लीय सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
उपरोक्त अम्लों की अम्लीय सामर्थ्य का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होता है-
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प्रश्न 24.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों की प्रागुक्ति कीजिए :
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उत्तर:
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प्रश्न 25.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं में जो अभिकर्मक प्रयुक्त होते हैं, उन्हें लिखिए :
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अथवा
निम्नलिखित यौगिकों को उनके सामने दिए गए गुणधर्म के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
(i) CH3CHO, C6H5CHO, HCHO
(नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के प्रति सक्रियता)
(ii) 2,4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक एसिड, 4- मेथॉक्सीबेन्जोइक एसिड, 4 – नाइट्रोबेन्जोइक एसिड (अम्लीय व्यवहार)।
उत्तर-
(i) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 164
(ii) CH3COOH + PCl5 → CH3COCl + HCl + POCl3
अतः अभिक्रिया (i) में Zn Hg व सान्द्र HCl तथा अभिक्रिया (ii) में PCL5 अभिकर्मक है।
अथवा
(i) CH3CHO, C6H5CHO HCHO का नाभिकस्नेही संकलन अभिक्रिया के प्रति सक्रियता का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
C6H5CHO < CH3CHO < HCHO
उपरोक्त यौगिकों के अम्लीय व्यवहार का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार हैं –
4- मेक्सीबेन्जोइक एसिड < 4- नाइट्रोबेन्जोइक एसिड < 2,4- डाइनाइट्रोक एसिड
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 12 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल 165

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए-
(i) क्षेत्र सर्वेक्षण की योजना के लिए नीचे दी गई विधियों में कौन-सी विधि सहायक है?
(क) व्यक्तिगत साक्षात्कार
(ख) द्वितीयक सूचनाएँ
(ग) मापन
(घ) प्रयोग
उत्तर:
(ख) द्वितीयक सूचनाएँ।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 5 क्षेत्रीय सर्वेक्षण

(ii) क्षेत्र सर्वेक्षण के निष्कर्ष के लिए क्या किया जाना चाहिए?
(क) आंकड़ा प्रवेश एवं सारणीयन
(ख) प्रतिवेदन लेखन
(ग) सूचकांकों का अभिकलन
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) प्रतिवेदन लेखन।

(iii) क्षेत्र सर्वेक्षण के प्रारंभिक स्तर पर अत्यंत महत्त्वपूर्ण क्या है?
(क) उद्देश्य का निर्धारण करना
(ख) द्वितीयक आंकड़ों का संग्रहण
(ग) स्थानिक एवं विषयक सीमाओं को परिभाषित करना (घ) निर्देशन अभिकल्पना।
उत्तर:
(क) उद्देश्य का निर्धारण करना

(iv) क्षेत्र सर्वेक्षण के समय किस स्तर की सूचनाओं को प्राप्त
करना चाहिए?
(क) बृहत् स्तर की सूचनाएँ
(ख) मध्यम स्तर की सूचनाएँ
(ग) लघु स्तर की सूचनाएँ
(घ) उपर्युक्त सभी स्तर की सूचनाएँ।
उत्तर:
(क) बृहत् स्तर की सूचनाएँ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) क्षेत्र सर्वेक्षण क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण विधि से किसी क्षेत्र के स्थानीय भूगोल के बारे में प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है। इस विधि से विद्यार्थियों में आपसी सहयोग तथा नेतृत्व की भावना जागृत होती है। क्षेत्रीय कार्य से भूगोलवेत्ता स्वयं आँकड़े एकत्र करके मानचित्र बनाने का कार्य कर सकते हैं।

(ii) क्षेत्र सर्वेक्षण के उपकरण एवं प्रविधियों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्रीय सर्वेक्षण आयोजित किया जाता है जिसके लिए अलग-अलग किस्मों की विधियों की जरूरत होती है। इनमें मानचित्रों एवं अन्य आंकड़ों सहित द्वितीयक सूचनाएँ, क्षेत्रीय पर्यवेक्षण। लोगों के साक्षात्कार हेतु प्रश्नावलियों से आंकड़ा उत्पाद इत्यादि को शामिल किया जाता है।

(iii) क्षेत्र सर्वेक्षण के चुनाव से पहले किस प्रकार के व्याप्ति क्षेत्र की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर:
जाँच करने वाला खुद यह तय करेगा कि सर्वेक्षण सारी जनसंख्या के लिए जनगणना रूप में संचालित करना है या फिर कुछ चुनिन्दा सैम्पल पर आधारित होगा। अगर सर्वेक्षण का क्षेत्र ज्यादा विशाल न हो पर इसकी रचना विविध तत्वों की है तो अपेक्षा में सारी जनसंख्या का सर्वेक्षण होना चाहिए।

(iv) सर्वेक्षण अभिकल्पना को संक्षिप्त में समझाएँ।
उत्तर:
सैम्पल सर्वेक्षण की संरचना में हम इसके नाप तथा उसके अध्ययन के ढंग को शामिल करते हैं। ऐसे अध्ययन स्थितियों और प्रक्रियाओं की उनकी संपूर्णता और उनके घटना स्थल के परिप्रेक्ष्य में समझने में अन्वेषक को समर्थ बनाते हैं। यह सर्वेक्षण स्थानीय स्तर पर स्थानिक वितरण के प्रारूपों, उनके साहचर्य और संबंधों के बारे में हमारी समझ को बढ़ाते हैं।

(v) क्षेत्र सर्वेक्षण के लिए प्रश्नों की अच्छी संरचना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण के प्रश्नों की अच्छी संरचना आवश्यक है।
इससे हम पहले बनाए प्रश्न उस व्यक्ति से पूछ सकते हैं जिससे साक्षात्कार चलता है। यह प्रश्नावली सुरक्षित है। यह प्रश्न आर्थिक स्थिति से संबंधित होने चाहिए। ताकि उनकी मुश्किलों के उत्तर मिल सकें। यह बहुत जरूरी है कि उनसे उनकी स्थिति की सही जानकारी ले ली जाए। इस प्रकार एक अच्छी प्रश्नावली बहुत आवश्यक है।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय कार्य से क्या अभिप्राय है? भूगोल में क्षेत्रीय कार्य की क्या आवश्यकता है? इसके महत्त्व तथा उद्देश्य का वर्णन करो।
उत्तर:
भूगोल एक क्षेत्रीय विज्ञान है या क्षेत्र परक (field oriented) है जिसमें किसी क्षेत्र के विभिन्न भागों में प्राकृतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक तत्वों में विभिन्नताओं का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन मानचित्रों की सहायता से किया जा सकता है, परंतु किसी क्षेत्र का विस्तारपूर्वक तथा व्यावहारिक ज्ञान अमुक क्षेत्र में स्वयं जाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। क्षेत्रीय अध्ययन से हमें स्थाई जानकारी प्राप्त होती है। जैसे- प्रो० फेयरग्रीव ( Fairgrieve) के अनुसार-

‘भूगोल का ज्ञान व्यक्ति अपने जूतों के तले घिसकर प्राप्त करता है।” (Geography comes through the soles of one’s shoes.) प्रो० ई० ए० फ्रीमेन के अनुसार, “भूगोल यात्रा करने तथा स्वयं अपनी आँखों से देखने का विषय है।” (Geography is a matter of travel, a matter of seeing things with our own eyes.)

क्षेत्रीय अध्ययन (Field Work )-
क्षेत्रीय अध्ययन वह क्रिया है। जिसमें किसी क्षेत्र में घूम-फिर कर प्रेक्षण किया जाता है। विशेष रूप से बनाई गई प्रश्नमाला (Questionnaire) द्वारा लोगों से पूछताछ की जाती है तथा एकत्र किए आँकड़ों को मानचित्रों द्वारा व्यक्त किया जाता है।

आवश्यकता (Necessity )-
किसी क्षेत्र के बारे में सरकार द्वारा मुद्रित आँकड़े इतने पर्याप्त नहीं होते कि उनकी मदद से भौगोलिक अध्ययन किया जा सके। इसलिए मानवीय जीवन के विभिन्न तत्वों की प्रत्यक्ष जानकारी तथा विश्लेषण केवल क्षेत्रीय अध्ययन द्वारा ही संभव है। इस प्रकार क्षेत्रीय अध्ययन किसी क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए आवश्यक है। इसलिए वातावरण के प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक लक्षणों का अध्ययन करने के लिए क्षेत्रीय कार्य भूगोल में आवश्यक है। क्षेत्र सर्वेक्षण के दो मौलिक चरण हैं-

  1. आँकड़ों का संग्रहण (Collection of Data)
  2. आँकड़ों का प्रसंस्करण (Processing of Data)

उपग्रह चित्र भौगोलिक अध्ययन के महत्त्वपूर्ण साधन हैं। परंतु क्षेत्र सर्वेक्षण नवीनतम सूचनाएं प्राप्त करने का महत्त्वपूर्ण स्रोत है।

महत्त्व तथा उद्देश्य (Importance and Objectives) –

  1. क्षेत्रीय अध्ययन से मानवीय क्रियाओं पर प्रभाव डालने वाले वातावरण के प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक तत्वों के संबंध का ज्ञान होता है।
  2. इस विधि से किसी क्षेत्र के स्थानीय भूगोल (Local Geography) के बारे में प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त होता है।
  3. इस विधि से विद्यार्थियों में आपसी सहयोग (Team Spirit) तथा नेतृत्व (Leadership) की भावना जागृत होती है।
  4. इस विधि से लोगों के साथ साक्षात्कार करने का एक सुअवसर प्रदान होता है तथा निकट संबंध स्थापित होता है।
  5. क्षेत्रीय कार्य से भूगोलवेत्ता स्वयं आँकड़े एकत्र करके मानचित्र बनाने का कार्य कर सकता है।
  6. इस विधि से किसी क्षेत्र का व्यावहारिक ज्ञान (Practical knowledge) प्राप्त होता है जिससे यह कार्य सरल और रुचिकर हो जाता है।

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प्रश्न 2.
क्षेत्रीय कार्य की विभिन्न क्रियाओं का वर्णन करो।
उत्तर:
क्षेत्रीय कार्य की विभिन्न क्रियाएं क्षेत्र का निरीक्षण करने, आँकड़े एकत्र करने, विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त करने तथा उसे मानचित्रों पर व्यक्त करने पर निर्भर करती हैं। ये सभी कार्य विभिन्न अवस्थाओं में बांटकर एक क्रमबद्ध ढंग से किए जाते हैं। क्षेत्रीय अध्ययन की विभिन्न विधियां क्षेत्रीय अध्ययन के उद्देश्य तथा विषय पर निर्भर करती हैं। इस कार्य को निम्नलिखित चरणों (Stages) में बांटा जाता है-
1. प्रारंभिक अवस्था (Preliminary Stage )- इस चरण में क्षेत्रीय कार्य की योजना तैयार करके निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं-

  1. अध्ययन क्षेत्र का चुनाव।
  2. विषय का चुनाव।
  3. क्षेत्र का एक आधार मानचित्र (Base Map) तैयार करना।
  4. आधार मानचित्र की कई प्रतिलिपियां तैयार करना।
  5. क्षेत्र का एक स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Map)-प्राप्त करना। स्थलाकृतिक मानचित्र से हमें धरातल, जलप्रवाह, भूमि उपयोग, बस्ती प्रतिरूप परिवहन आदि का पता चलता है।

2. क्रियान्वयन अवस्था (Operational Stage )- इस अवस्था में निम्नलिखित कार्य किए जाते हैं-

  1. क्षेत्र में जाकर स्वयं निरीक्षण करना।
  2. विषय से संबंधित प्रश्नावली (Questionnaire) तैयार करना।
  3. नवीनतम आँकड़े एकत्रित करना।
  4. क्षेत्र से कुछ चुने हुए ( लगभग 20%) भागों के नमूने का सर्वेक्षण (Sample Survey) करना।
  5. स्थलाकृतिक मानचित्र से क्षेत्र की पूरी जानकारी प्राप्त करना।

3. परिकलन अवस्था (Tabulation Stage )- इस अवस्था में प्राप्त आँकड़ों को तालिकाओं (Tables) के रूप में लिखा जाता है। इन आँकड़ों की संख्या कम करके कुछ निष्कर्ष तथा औसत आँकड़े प्राप्ता किए जाते हैं।

4. मानचित्रण अवस्था ( Mapping Stage )-

  • आँकड़ों को विभिन्न आरेखों द्वारा प्रकट किया जाता है।
  • आँकड़ों की सहायता से विभिन्न मानचित्र तैयार किए जाते

5. रिपोर्ट विवरण चरण (Reporting Stage ) – सर्वेक्षण पूरा होने पर उस क्षेत्र का पूरा विवरण लिखा जाता है। उसके आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले जाते हैं तथा उद्देश्यों की पूर्ति संबंधी विवरण दिया जाता है।

प्रश्न 3.
क्षेत्रीय कार्य के लिए प्रश्नमाला तैयार करते समय किन- किन बातों का ध्यान रखा जाता है?
उत्तर:
आँकड़े एकत्र करने के लिए एक विशेष प्रकार की प्रश्नमाला तैयार करना आवश्यक है। इस प्रश्नमाला द्वारा लोगों से पूछताछ की जाती है। यह प्रश्नमाला ही वास्तव में क्षेत्रीय कार्य का आधार है। प्रश्नमाला बनाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  1. सर्वेक्षण का स्वयं निरीक्षण करके ही प्रश्नमाला बनानी चाहिए।
  2. सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य सदा ध्यान में रखना चाहिए।
  3. प्रश्न संक्षिप्त तथा सीधे होने चाहिए।
  4. प्रश्न सरल होने चाहिए ताकि उत्तर देने में कोई कठिनाई न हो।
  5. प्रश्न क्रमबद्ध तथा क्षेत्रीय कार्य से संबंधित हों।
  6. ऐसे प्रश्न नहीं होने चाहिएं जो निजी या धार्मिक हों, जिससे उत्तर देने वाले की भावना को ठेस पहुंचे।

सावधानियां (Precautions)

  1. सर्वेक्षक को उत्तर देने वाले लोगों से अच्छे संबंध स्थापित करने चाहिए।
  2. उत्तर संक्षिप्त लिखने चाहिए।
  3. प्रश्नमाला की प्रत्येक सूची का उत्तर लिखना चाहिए।
  4. अपने निजी विचार नहीं लिखने चाहिए।
  5. उत्तर देने वाले लोगों की सुविधा के अनुसार प्रश्नमाला भरने का समय निश्चित करना चाहिए।

प्रश्न 4.
प्रश्नावली से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकार बताएं।
उत्तर:
प्रश्नावली (Questionnaire )
प्रश्नावली विधि में पहले से तैयार किए गए प्रश्नों को कुछ चुने हुए लोगों के समक्ष रखा जाता है। प्रश्नावली संरचनात्मक अथवा असंरचनात्मक हो सकती है जब एक संरचनात्मक प्रश्नावली का प्रयोग किया जाता है तो शोधकर्ता के लिए फेरबदल की कम गुंजाइश होती है, उसे यांत्रिक तरीकों से प्रश्नों को रखते हुए उनके उत्तर लिखने पड़ते हैं। संरचना विहीन प्रश्नावलियों में, सर्वेक्षण की आवश्यकतानुसार प्रश्नों के क्रम को बदला जा सकता है। उत्तर लिखने के साथ एक मानचित्र या रेखाचित्र बनाया जा सकता है। प्रत्येक प्रश्न के साथ कोष्ठक में कुछ टिप्पणियां दी जाती हैं जो उत्तरों को संशोधित करने में प्रेक्षक को मदद देती हैं। प्रश्नों के अनेक प्रकार होते हैं किस प्रकार के प्रश्न बनाए जाएं यह वांछित आँकड़ों की प्रकृति तथा प्रश्नोत्तर देने वाले लोगों की अपनी पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।

प्रश्नावलियों के प्रकार (Types of Questionnaire)-

  1. सरल चयन (Simple Choice Questions)
  2. बहुविकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions)
  3. क्रममापक उत्तर का प्रश्न (Semantic Scale Questions)
  4. मुक्तांत उत्तर का प्रश्न (Open ended Questions)

1. सरल चयन के प्रश्न (Simple Choice Questions ) सरल चयन वाले प्रश्नों के संदर्भ में, ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में हो सकता है। उदाहरण के लिए इस प्रश्न- ‘क्या आप खेती करते हैं?’ का उत्तर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ होगा। यह प्रश्न लोगों के व्यवसाय की जानकारी देता है।

2. बहुविकल्पी प्रश्न (Multiple Choice Questions ) – बहुविकल्प वाले प्रश्नों के उत्तर में, कुछ विकल्प दिए जाते हैं, किन्तु उनमें से केवल एक विकल्प ही सही उत्तर होता है। उदाहरण – X प्रदेश में A स्थान पर ही चीनी मिल क्यों स्थित है? इसका संभव्य उत्तर है-

  1. भूमि की उपलब्धता
  2. श्रम की उपलब्धता
  3. पूँजी की उपलब्धता
  4. बाजार की सुगमता
  5. मालिकों अथवा उभयकर्ता की स्थान के लिए अपनी व्यक्तिगत पसन्द।
  6. कोई अन्य कारण उपरोक्त उत्तरों में से केवल एक ही उत्तर सही है।

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3. क्रममापक उत्तर का प्रश्न (Semantic Scale Questions)-
यहां पर उत्तरदाता को सोचने की श्रेणी को बिंदुमापक पर अंकित किया जाता है उत्तरदाता की सोच पक्ष अथवा विपक्ष में कितनी शक्तिशाली है, इसलिए किया जाता है।
उदाहरण के लिए गरीबी हटाओ कार्यक्रम को सरकार द्वारा कैसे लागू किया जाता है?

  1. बहुत अच्छा
  2. अच्छा
  3. संतोषजनक
  4. खराब
  5. बहुत खराब यहां पर उत्तरदाता के कामों को लिख लिया जाता है।

4. मुक्तांत उत्तर का प्रश्न (Open Ended Questions )-
इस संदर्भ में, प्रश्नों को पूछा जाता है तथा उत्तरदाता के उत्तर को लिख लिया जाता है।
उदाहरण के लिए-ग़रीबी उन्मूलन हेतु सरकार को क्या कदम उठाने चाहिएं?
इस प्रश्न का उत्तर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच उनकी व्यक्तिगत, सामाजिक तथा आर्थिक पृष्ठभूमि के अनुसार अलग-अलग होगा।

प्रश्न 5.
क्षेत्र सर्वेक्षण संबंधी उपकरणों का वर्णन करें।
उत्तर:
क्षेत्र सर्वेक्षण हेतु आवश्यक व्यवस्था तथा उपकरण (Equipment)-सर्वेक्षण करने के लिए क्षेत्र में जाने से पहले, उससे संबंधित पुस्तकालयों में प्रकाशित जानकारी का अध्ययन आवश्यक होता है। इस प्रकार एकत्रित सूचनाएं, अध्ययन के आधार के रूप में कार्य करती हैं। यह क्षेत्र में मिलने वाले संभावित लक्षणों की पूर्व जानकारी प्रदान करता है। क्षेत्र में ठहरने के लिए समुचित व्यवस्था करना नहीं भूलना चाहिए।

क्षेत्र में जाते समय निम्न उपकरणों को ले जाना चाहिए-

  1. आवश्यक ड्राइंग सामग्री सहित एक लेखन पुस्तिका (Field Book)।
  2. कार्य की प्रकृति तथा शिक्षक द्वारा निर्देश अनुसार सर्वेक्षण- उपकरण (Survey Instruments)।
  3. मानचित्र पर प्रदर्शित लक्षणों का क्षेत्र के लक्षणों से तुलना करने के लिए क्षेत्र का स्थलाकृतिक सर्वेक्षण मानचित्र (Topographical Maps )
  4. विशिष्ट लक्षणों का फोटोचित्र प्राप्त करने के लिए कैमरा (Camera)।
  5. दूर से भूदृश्यों को सरलतापूर्वक देखने के लिए दूरबीन (Birnoculars)।
  6. शैल नमूने तोड़ने के लिए हथौड़ा (Hammer)।
  7. मिट्टी के नमूने लेने के लिए मृदा प्रतिदर्श (Rock Specimens)
  8. शैलों के नमूने रखने के लिए बैग (Bag)
  9. अन्य सामग्रियां।

प्रश्न 6.
किसी गांव का भूमि उपयोग सर्वेक्षण कैसे किया जाता है? इस सर्वेक्षण में प्रयोग की जाने वाली प्रश्नावली तैयार करो।
उत्तर:
भूमि उपयोग सर्वेक्षण (Land Use Survey)
1. परिचय (Introduction )-भारत एक कृषि प्रधान देश है। किसी क्षेत्र में कृषि की विशेषताएं प्रकार तथा भूमि उपयोग की जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी एक गांव को इकाई मान कर भूमि उपयोग सर्वेक्षण किया जाता है।
2. उद्देश्य (Aims )-

  1. कृषि क्षेत्र में भूमि उपयोग की जानकारी प्राप्त करना।
  2. भूमि उपयोग को मानचित्र पर दिखाना।
  3. बोई जाने वाली फ़सलों की जानकारी प्राप्त करना।
  4. मिट्टी की किस्में तथा उत्पादकता ज्ञात करना।
  5. सिंचित क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करना।

3. विधि (Method)-
(क) प्रारंभिक अवस्था सबसे पहले पटवारी से गांव का भूकर मानचित्र (Cadastral Map) प्राप्त किया जाता है जिस पर प्रत्येक खेत की सीमा तथा खसरा नंबर लिखा जाता है। इस मानचित्र की कई प्रतिलिपियां तैयार की जाती हैं। गांव की स्थिति निर्धारित की जाती है।

(ख) क्रियान्वयन अवस्था इसके पश्चात् गांव के पटवारी के रिकॉर्ड से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त की जाती है-

क्रम संख्याभूमि का आकार
1.गांव की कुल भूमि
2.कृषि के लिए प्राप्त न होने वाली भूमि
3.अन्य अकृषित भूमि
4.कृषिकृत भूमि
5.कुल सिंचित भूमि
6.कुल असिंचित भूमि
7.खेतों की कुल संख्या
8.खेतों का औसत आकार

किसानों से पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची तैयार की जाती है। क्षेत्रीय कार्य की तिथि तथा समय निश्चित किया जाता है। खेतों को विभिन्न वर्गों में बांट दिया जाता है।
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(ग) क्षेत्रीय कार्य – गांव के खेतों का क्रमवार निरीक्षण किया जाता है। प्रत्येक किसान से खेतों के आकार, उनका उपयोग तथा फ़सलों की जानकारी प्राप्त की जाती है। इस जानकारी को प्रश्नमाला में लिख लिया जाता है। मुख्यतः आषाढ़ी (Rabi) तथा सावनी (Kharif) दो प्रकार की फ़सलें बोई जाती हैं। भूमि उपयोग तथा मिट्टियों को दिखाने के लिए विभिन्न रंगों तथा आभाओं का प्रयोग किया जाता है। विभिन्न फ़सलों को दिखाने के लिए चिह्नों तथा अक्षर प्रयोग किये जाते हैं।

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(घ) मानचित्र – आँकड़ों की सहायता से भूमि उपयोग दिखाने के लिए मानचित्र बनाए जाते हैं जिनमें विभिन्न प्रविधियां प्रयोग की जाती हैं। फ़सलों के लिए विभिन्न रंगों तथा आभाओं का प्रयोग किया जाता है।

(ङ) रिपोर्ट – इन मानचित्रों का विश्लेषण करके कुछ निष्कर्ष निकाले जाते हैं जिससे कई प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है। जैसे-

  1. गांव में कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल
  2. खेतों की कुल संख्या
  3. मिट्टी के मुख्य प्रकार
  4. आषाढ़ी तथा सावनी की मुख्य फ़सलें
  5. कृषिकृत क्षेत्रफल
  6. भूमि उपयोग की सघनता की त्रुटियां
  7. भूमि उपयोग में सुधार तथा अधिक विकास की संभावनाएं (8) कुल सिंचित क्षेत्र।

प्रश्न 7.
कृषि क्षेत्र में मृदा प्रदूषण, औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण तथा यातायात वाहनों द्वारा नगरीय क्षेत्र में प्रदूषण सर्वेक्षण का वर्णन करो।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण का सर्वेक्षण (Survey of Environmental Pollution )-पर्यावरण प्रदूषण में मृदा प्रदूषण, जलप्रदूषण, वायु प्रदूषण तथा शोर प्रदूषण सम्मिलित किए जाते हैं।
(क) सर्वेक्षण विधि –

  1. प्रदूषण के कारणों तथा प्रदूषित करने वाले ठोस अपशिष्ट पदार्थों के बारे में जानकारी क्षेत्र के निवासियों से बातचीत द्वारा प्राप्त की जा सकती है।
  2. प्रदूषण फैलाने वाले कारक, आस-पास के क्षेत्रों पर प्रदूषण का प्रभाव लोगों के द्वारा झेली गई कठिनाइयां तथा
  3. मिट्टी के अनुपजाऊ होने के बारे में भी बता सकते हैं।
  4. क्षेत्र सर्वेक्षण को अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन में प्रयुक्त तकनीकों, विभिन्न लाभान्वित होने वाले लोगों की भूमिका, समस्या के समाधान के लिए किए गए प्रयासों एवं अभी तक के परिणामी विकास को भी देखना चाहिए।

1. औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण – औद्योगिक क्षेत्र में ईंधन तथा रसायनों द्वारा प्रदूषण होता है।

उद्योगों द्वारा पर्यावरण के प्रदूषण की अनुसूची
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2. यातायात के साधनों द्वारा प्रदूषण – विभिन्न वाहन, जैसे- बसें, ट्रक, कारें, तिपहिया व दुपहिया वाहन आदि पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। यह समस्या नगरीय इलाकों में अधिक होती है।
वाहनों द्वारा प्रदूषण की प्रश्नावली
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3. कृषि क्षेत्र में रासायनिक पदार्थों से प्रदूषण – कृषि | रसायनों का प्रयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण का प्रदूषण क्षेत्र में कृषि की उपज को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के होता है।
मृदा प्रदूषण की प्रश्नावली
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प्रश्न 8.
किसी क्षेत्र में ग़रीबी का क्षेत्र सर्वेक्षण करने की विधि तथा उद्देश्य बताओ।
उत्तर:
गरीबी का क्षेत्र सर्वेक्षण (Field Study of Poverty )-गरीबी के मुख्य कारण बेरोजगारी तथा अशिक्षा हैं। गरीबी का सामाजिक अध्ययन किसी मलिन बस्तियों के प्रत्येक परिवार का अध्ययन हो सकता है।
गरीबी का मापदंड-

  1. लोगों की औसत आमदनी,
  2. उन को प्राप्त कैलोरी की मात्रा
  3. चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता
  4. व्यवसाय आदि
  5. क्षेत्र में जनसंख्या का वितरण
  6. मानव निवास-स्थान,
  7. भोजन, वस्त्र एवं सामाजिक- सांस्कृतिक संबंध।

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उद्देश्य –

  1. सरकार द्वारा विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों द्वारा किए जा रहे प्रयासों, उनका क्षेत्र के लोगों पर प्रभावों का भी प्रभावी प्रश्नावलियों के माध्यम से निश्चय किया जा सकता है।
  2. आँकड़ों का विश्लेषण तथा अध्ययन से क्षेत्र में गरीबी के स्तर का पता लगाया जा सकता है।
  3. गरीबी के मुख्य कारणों का पता लग सकता है।

गरीबी सर्वेक्षण की प्रश्नावली
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प्रश्न 9.
किसी क्षेत्र में मृदा ह्रास, सूखा तथा बाढ़ व ऊर्जा संबंधी अध्ययन की सर्वेक्षण विधि बताओ।
उत्तर:
मृदा ह्रास का अध्ययन (Soil Degradation ) -मृदा पर कृषि उपज तथा उत्पादकता निर्भर करती है। इसलिए मृदा ह्रास सर्वेक्षण आवश्यक है-
ऐसा अध्ययन संपन्न करने के लिए मिट्टी की विभिन्न सतहों पर मिट्टी के प्रतिदर्श (Sample) प्राप्त करने के लिए मृदा नमूना प्राप्त करने वाले उपकरण का प्रयोग किया जा सकता है। क्षेत्र के विभिन्न खेतों से मृदा-प्रतिदर्श प्राप्त किये जा सकते हैं प्रतिदर्शो के विभिन्न थैलों (Bags) में अथवा शीशे की नलियों (Glass Tubes) में रखकर स्थान का नाम तथा क्रमांक लिख देते हैं। ऊपरी मिट्टी (Top Soil), मध्यवर्ती मिट्टी ( Sub Soil), कड़ी तह एवं मूल शैलों (Parent Rocks) आदि को अलग-अलग प्रदर्शित करने के लिए उनकी आरेखीय परिच्छेदिकाएं बनानी चाहिए। मृद्रा ह्रास के मापदंड के लिए तत्व-

  1. क्षेत्र के फसल प्रारूप,
  2. भूमि उपयोग प्रतिरूप,
  3. सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता,
  4. अपवाह,
  5. जल भराव,
  6. खारापन तथा क्षारीय स्तर
  7. वनस्पतियों का अंकन करना। इनका मानचित्र, कटाव के स्तर के आधार पर किया जाता है। परिणाम का विवेचन करते समय क्षेत्र में मिट्टी की दशा के सुधार हेतु विभिन्न रणनीतियों का सुझाव भी देना होता है।

सूखा तथा बाढ़ का अध्ययन (Study of Droughts and Floods)-
सूखा तथा बाढ़ अक्सर आते रहते हैं। इनमें भी मात्रा में जन-धन की हानि होती है। बाढ़ क्षेत्रों तथा सूखाग्रस्त क्षेत्रों के मानचित्र तथा इनके प्रभावों को कम करने वाली योजनाओं को तैयार करना आज का महत्त्वपूर्ण कार्य हो गया है।

मुख्य पक्ष (Main Aspects )-
इन योजनाओं के तीन मुख्य पक्ष होने चाहिए

  1. दिये गए मानक स्तर पर आधारित अधिकतम सीमा तक खतरों में कमी करना (Reduction of Risk),
  2. सीमाओं के भीतर खतरों में अनुकूलतम कमी (Optimum Risk Reduction),
  3. जीवन तथा सम्पत्ति की रक्षा (Saving lives and property)।

मापदंड-

  1. किसी प्राकृतिक (Disaster) विपदा द्वारा की जा सकने वाली अधिकतम क्षति का मात्रात्मक तथा गुणात्मक दोनों ही रूपों में आकलन किया जाना।
  2. किसी प्रदेश की अनुकूलतम वहन क्षमता (Carrying Capacity) का भी आकलन तथा गणना।
  3. उन क्रिया-कलापों का जिनसे आपदाएँ उत्पन्न हो सकती हैं, उनकी सीमाओं को भी निर्धारित किया जाना चाहिए।
  4. नियंत्रक तरीकों को भी विकसित किया जाना चाहिए जिससे आपदाओं में प्रभावशाली तरीके से कमी भी की जा सके।
  5. लोगों की सक्रिय भागीदारी महत्त्वपूर्ण है।
  6. तकनीकी तथा अतकनीकी उपायों दोनों पर ही बल दिया जाना चाहिए।
  7. आपदा प्रवण क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा सांख्यिकीय एवं आंकिक विधियों का कंप्यूटर की सहायता से बने सूक्ष्म मानचित्रों के द्वारा पूर्वानुमान करना चाहिए।

ऊर्जा संबंधी अध्ययन (Study of Energy Issues )-
विद्यार्थियों द्वारा ग्रामीण तथा नगरीय ऊर्जा उपभोग प्रारूप की निगरानी करने वाले सर्वेक्षण किए जा सकते हैं। अनेक पारिस्थितिकी दृष्टि से कमजोर क्षेत्रों में तथा पर्वतीय क्षेत्रों, पहाड़ियों तथा वन क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी (Fire Wood) ईंधन का अभी भी महत्त्वपूर्ण साधन है। बहुत-से शोधकार्य का निष्कर्ष है कि ग्रामीण ईंधन उपभोग निर्वनीकरण का (Deforestation) महत्त्वपूर्ण कारण नहीं था, बल्कि यह बहुत कुछ शाखाओं तथा टहनियों को तोड़ने तक सीमित था।

किंतु नगरीय लकड़ी जलाऊ लट्ठों के रूप में प्राप्त की जाती थी जिसने सीधे जंगलों पर दबाव डाला ऐसा भारत में वर्तमान स्थिति के बाद विशेषज्ञों की राय में ग्रामीण ईंधन उपभोग की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के बाद कहा गया जो एक नई रोचक जानकारी है। ऐसे नए मुद्दों पर लगातार सर्वेक्षण किया जा सकता है तथा लोगों के वृक्षारोपण संबंधी कार्य का नियमित सर्वेक्षण किया जा सकता है। सर्वेक्षण का एक अति महत्त्वपूर्ण क्षेत्र ईंधन के मूल्यों से संबंधित भी होगा।

मौखिक परीक्षा के प्रश्न
(Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
क्षेत्र सर्वेक्षण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब हम स्वयं किसी क्षेत्र में जाकर अध्ययन करते हैं तो उसे क्षेत्र सर्वेक्षण कहते हैं।

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प्रश्न 2.
क्षेत्र सर्वेक्षण के दो चरण बताओ।
उत्तर:
आँकड़ों का संग्रहण तथा प्रसंस्करण |

प्रश्न 3.
स्थलाकृतिक मानचित्र क्या है?
उत्तर:
वे मानचित्र जो किसी क्षेत्र के धरातल, अपवाह तथा मानवीय लक्षणों को दिखाते हैं।

प्रश्न 4.
सैंपल सर्वेक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब सारे क्षेत्र का सर्वेक्षण करने की बजाय उसके एक भाग का ही सर्वेक्षण करें, तो उसे सैंपल सर्वेक्षण कहते हैं।

प्रश्न 5.
मानचित्र दिक् विन्यास किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी की प्रमुख दिशाओं के अनुरूप मानचित्र सैट करना।

प्रश्न 6.
पर्यावरण के प्रमुख घटक बताओ।
उत्तर:
जल, स्थल, वायु, जीव-जंतु।

प्रश्न 7.
प्रदूषण के प्रमुख कारण बताओ।
उत्तर:
उद्योग, परिवहन, रसायन तथा अपशिष्ट पदार्थ।

प्रश्न 8.
मानचित्र दिक् विन्यास की तीन विधियां बताओ।
उत्तर:

  1. सूर्य की सहायता से
  2. ट्रफ कंपास की सहायता से
  3. वस्तुओं की सापेक्षिक तुलना से।

प्रश्न 9.
क्षेत्र सर्वेक्षण हेतु तीन उपकरण बताओ।
उत्तर

  1. नोट बुक
  2. स्थलाकृतिक मानचित्र
  3. कैमरा।

प्रश्न 10.
स्थिर तत्व के तीन उदाहरण दें।
उत्तर:
इमारतें, खेत, नहरें।

प्रश्न 11.
प्रश्नावलियों के चार प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. सरल प्रश्न
  2. बहुविकल्पी प्रश्न
  3. क्रममापक प्रश्न
  4. मुक्तांत प्रश्न।

प्रश्न 12.
आँकड़े निर्धारित करने की विधि बताओ।
उत्तर:
मिलान चिह्न।

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प्रश्न 13.
भू-उपयोग में विभिन्न फसलें किस प्रकार दिखाई जाती हैं?
उत्तर:
रंगों तथा आभाओं द्वारा।

प्रश्न 14.
भौमजल स्तर किसे कहते हैं?
उत्तर:
भूमिगत जल की ऊपरी सतह।

प्रश्न 15.
प्राकृतिक आपदाओं के दो उदाहरण दो।
उत्तर:
सूखा तथा बाढ़।

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
(i) निम्नलिखित आंकड़ों के प्रदर्शन के लिए आप किस प्रकार के ग्राफ का उपयोग करेंगे?

राल्यलौह अयस्क उपादन का आंश (प्रतिशत में)
मध्य प्रदेश23.44
मोवा21.82
कर्नाटक20.95
बिहार16.98
ओडिशा16.30
आंध्र प्रदेश0.45
महाराष्ट्र0.04

(क) रेखा
(ख) बहुदंड आलेख
(ग) वृत्त आरेख
(घ) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) वृत्त आरेख।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

(ii) राज्य के अंतर्गत जिलों का प्रदर्शन किस प्रकार के स्थानिक आंकड़ों द्वारा होगा?
(क) बिंदु
(ख) रेखाएँ
(ग) बहुभुज
(घ) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) बिंदु।

(iii) एक वर्कशीट के सेल में दिए गए सूत्र में वह कौन-सा प्रचालक है जिसका पहले परिकलन किया जाता है?
(क) +
(ख) –
(ग) /
(घ) ×
उत्तर:
(घ) ×

(iv) एक सेल में विजार्ड पंक्शन आपको समर्थ बनाता है-
(क) ग्राफ रचना में
(ख) गणितीय और सांख्यिकीय क्रियाओं को करने में
(ग) मानचित्र आलेखन में
(घ) उपयुक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) ग्राफ रचना में।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) एक्सेल में विजार्ड फंक्शन आपको समर्थ बनाता है।
उत्तर:
एक्सेल विजार्ड फंक्शन हमें वर्कशीट की संख्या चयनित आंकड़ा परिसर और दंड आरेख का पूर्व दर्शन प्रकट करता है क्योंकि आंकड़ों में वर्ग पंक्ति अनुसार व्यवस्थित होते हैं, इसलिए इसे पंक्ति- अनुसार चार्ट निर्माण कहा जाता है।

(ii) एक कंप्यूटर के विभिन्न भागों की हस्तेन विधियों की तुलना में कंप्यूटर के प्रयोग के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
कंप्यूटर एक तीव्र तथा सर्वतोमुखी मशीन है जो जोड़ना, घटाना, गुणा अथवा भाग जैसे साधारण अंकगणितीय संक्रियाएँ कर सकता है तथा जटिल गणितीय सूत्रों को भी हल कर सकता है। यह आंकड़ों के प्रक्रमक है जो चलने पर मानव प्रचालक के हस्तक्षेप के बिना अलग-अलग गणितीय अभिकलन कर सकता है।

(iii) आंकड़ा प्रक्रमण और प्रदर्शन की हस्तेन विधियों की तुलना में कंप्यूटर के प्रयोग के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
कंप्यूटर के प्रयोग से हम आंकड़ों का समूहन और विश्लेषण अत्यधिक सरलता से कर पाते हैं। कंप्यूटर तुलनात्मक विश्लेषण को मानचित्रों के आरेखन अथवा आलेखन द्वारा अत्यंत सरल बना देता है। यह आसानी से आंकड़ों को प्रमाणीकरण, पड़ताल और सशुद्धि के योग्य बना देता है। कंप्यूटर आंकड़ों की विशाल मात्रा का निपटान कर सकता हैं जो सामान्यतः हाथों द्वारा संभव नहीं है। कंप्यूटर आंकड़ों की प्रतिलिपि बना सकता है, आंकड़ों का संपादन कर सकता है, उन्हें सुरक्षित कर सकता है।

(iv) वर्कशीट क्या होती हैं?
उत्तर:
एम एस एक्सेल को स्प्रैड शीट प्रोग्राम भी कहते है। स्प्रैडशीट एक आयतकार पेज होती है जो सूचना का भंडारण करती है। और यह स्प्रैडशीट वर्कबुक्स और एक्सेल फाइलों में होती है। एक्सेल वर्कशीट में 16384 कतारें तथा 256 कॉलम होते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों से अधिक न दें
(i) स्थानिक व गैर-स्थानिक आंकड़ों में क्या अंतर है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थानिक आंकड़े: स्थानिक आंकड़े भौगोलिक दिक् स्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिंदु आंकड़े मानचित्र पर प्रदर्शित विद्यालय, अस्पताल, कुएँ, कस्बे तथा गाँव जैसे कुछ भौगोलिक लक्षणों की अवस्थिति संबंधी विशेषताओं का प्रदर्शन करते हैं। इसी प्रकार रेखाएँ सड़कों, रेलवे लाइनों, नहरों, नदियों, शक्ति और संचार पथों जैसे रैखिक लक्षणों को चित्रित करती हैं।

गैर स्थानिक आंकड़े: स्थानिक आंकड़ों का वर्णन करने वाले आंकड़े गैर-स्थानिक आंकड़े तथा गुण न्यास कहलाते हैं। अगर आपके पास आपके विद्यालय की स्थिति दर्शाने वाला मानचित्र है तो आप विद्यालय का नाम, इसके द्वारा प्रदूत विषय – धारा, हर एक कक्षा में विद्यार्थियों की अनुसूची, पुस्तकालय इत्यादि की सुविधा जैसी सूचनाओं को संलग्न कर सकते हैं।

(ii) भौगोलिक आंकड़ों के तीन प्रकार कौन से हैं?
उत्तर:
भौगोलिक आंकड़े अंकीय तथा रेखीय रूप में उपलब्ध होते हैं।
कंप्यूटर के प्रयोगः मानचित्रण सॉफ्टवेयर – मानचित्रण सॉफ्टवेयर स्थानिक तथा गुण न्यास निवेश के माध्यम से स्क्रीन पर क्रमवीक्षित मानचित्रों के अंकीकरण, मापनी के रूपांतरण और प्रक्षेपण, आंकड़ा समन्वय, मानचित्र डिजाइन, प्रदर्शन तथा विश्लेषण की क्रियाएँ प्रदान करता है। एक अंकरूपीय मानचित्र में तीन प्रकार की फाइलें होती है। इन फाइलों के विस्तारण shpishx तथा dbf हैं। डी बेस फाइल हैं जिसमें गुण न्यास होता है तथा यह shx तथा shp से जुड़ी होती हैं।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

लघु उत्तरीय प्रश्न 
(Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
कम्प्यूटर हार्डवेयर के मुख्य भाग कौन से है?
उत्तर:
कम्प्यूटर हार्डवेयर के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:-
(i) केंद्रीय प्रक्रमण (CPU) और भंडारण तंत्र
(ii) आलेखी प्रदर्शन तंत्र और मॉनीटर
(iii) निवेश उपकरण
(iv) बहिर्वेश उपकरण

प्रश्न 2.
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की आवश्यकताएँ स्पष्ट रूप में बताएँ।
उत्तर:
कम्प्यूटर में हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर दोनों ही आंकड़ों के प्रक्रमण तथा मानचित्र के सहायक के रूप में समाविष्ट होते हैं। कम्प्यूटर के हार्डवेयर में भंडारण, प्रदर्शन तथा निवेशी तथा बहिर्वेशी उपतंत्र को शामिल किया जाता है और इसके उलट सॉफ्टवेयर इलैक्ट्रॉनिक संकेतों के द्वारा बनाए गए क्रमादेश को शामिल किया जाता है। कम्प्यूटर सहायता प्राप्त आंकड़ों के प्रक्रमण तथा मानचित्रण में हार्डवेयर घटर तथा संबंधित अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर दोनों की ही आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 3.
स्प्रैड शीट क्या होती हैं?
उत्तर:
स्प्रैड शीट एक पेज है जो आयताकार आकार में होता है और यह सूचना का भंडारण भी करती है। वर्कबुक्स तथा एक्सेल फाइलों में भी स्प्रैडशीट अवस्थित होती हैं। एक्सेल स्प्रैडशीट में 16384 कतारें तथा 256 कॉलम होते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

प्रश्न 4.
कम्प्यूटर क्या कर सकता है?
उत्तर:
कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक उपकरण है। इसके अपने कई हिस्से होते हैं जिनमें कुछ हैं, मैमोरी, माइक्रो प्रोसैसर, निवेश एवं निर्गत उपकरण। कम्प्यूटर के यह सारे हिस्से मिलकर बहुत ही अधिक प्रभावशाली उपकरण मतलब कम्प्यूटर का निर्माण करते हैं। इसके द्वारा आंकड़ा पेशकारी प्रक्रिया तथा संचालन का काम अच्छे ढंग के साथ किया जा सकता है। कम्प्यूटर की सहायता के साथ जोड़ तथा घटाव से लेकर तर्क से हल करने वाले सारे साधारण तथा जटिल प्रश्न हल किये जा सकते हैं।

प्रश्न 5.
स्थानीय आंकड़े कौन-से होते हैं?
उत्तर:
जो आंकड़े किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति को दर्शाते हैं उनको स्थानीय आंकड़े कहते हैं। इसे आमतौर पर बिन्दु रेखाओं तथा बहुर्भुज के रूप में मिलते हैं। इसमें ट्यूवबैल, कस्बे, गाँव, अस्पताल इत्यादि बिन्दुओं की सहायता के साथ रेल की लाइनों, नदियों इत्यादि रेखाओं की सहायता के साथ भूमि, तालाब, झीलों, जंगल, जिले इत्यादि बहुभुजों की सहायता से दिखाये जाते हैं।

निबंधात्मक प्रश्न
(Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
कम्प्यूटर के अलग-अलग हिस्सों के क्या काम हैं?
उत्तर:
कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक उपकरण है। आमतौर पर हम इस प्रणाली को दो हिस्सों में विभाजित करते हैं:-
(i) यंत्र सामग्री (Hardware)- सारे कम्प्यूटर के भाग जिनकों हाथ से छुआ जा सके।
(ii) प्रक्रिया सामग्री ( Software) कम्प्यूटर के जिस हिस्से को हाथ से हुआ न जा सके।
(i) यंत्र सामग्री (Hardware)
कम्प्यूटर के भौतिक हिस्से जिनको हम देख या छू सकते हैं, वह हार्डवेयर कहलाते हैं। यह भाग मशीनी, इलैक्ट्रॉनिक या इलैक्ट्रीकल हो सकते हैं वह कम्प्यूटर के यंत्र सामग्री कहलाते हैं। हर कम्प्यूटर की यंत्र सामग्री अलग-अलग हो सकती हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि संगठक किस उद्देश्य के लिए प्रयोग में लाया जा सके तथा व्यक्ति की आवश्यकता क्या है एक कम्प्यूटर में विभिन्न तरह के हार्डवेयर होते हैं जैसे कि सी. पी. .यू.. हार्ड डिस्क, रैम, प्रोसैसर, मॉनीटर, मदरबोर्ड, फ्लापी ड्राइव इत्यादि। कम्प्यूटर के सिर्फ पावर सप्लाई यूनिट की-बोर्ड, माऊस इत्यादि भी यंत्र सामग्री के अंतर्गत आते हैं।

(ii) प्रक्रिया सामग्री (Software) कम्प्यूटर हमारी तरह हिन्दी या अंग्रेजी भाषा नहीं समझता। हम कम्प्यूटर को जो निर्देश देते हैं वह एक नियत भाषा होती है इसको मशीनी लँगवेज ( भाषा) या मशीन की भाषा कहते हैं। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर लिखित प्रोग्रामों का एक समूह है। जो कि कम्प्यूटर की भंडार शाखा में जमा हो जाता है। आजकल कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसमें कम्प्यूटर का उपयोग नहीं होता। आज कम्प्यूटर का प्रयोग हर कार्यालय में किया जाता है।

कम्प्यूटर के भाग हैं-
(1) निवेश एवं निर्गत उपकरण (Input output Device)- इन उपकरणों का प्रयोग कम्प्यूटर में निवेश करने के लिए तथा कम्प्यूटर द्वारा निर्गत दिखाने के लिए किया जाता है। निवेश उपकरण जैसे की-बोर्ड का प्रयोग, आंकड़ों तथा प्रोग्रामों को कम्प्यूटर स्मृति में भरने के लिए किया जाता है। दूसरी प्रकार चूंकि एक कम्प्यूटर के भीतर सभी आँकड़ों कार्यक्रमों को कोड स्वरूप में वैद्युत धारा में संचित किया जाता है, निर्गत उपकरणों जैसे प्रिंटर, प्लाटर इत्यादि का प्रयोग इन आंकड़ों की सूचनाओं के रूप में बदलने के लिए किया जाता है जिनका मानव द्वारा उपयोग किया जा सके।

(2) सिस्टम यूनिट (System Unit)- सिस्टम यूनिट को सिस्टम कैबिनेट भी कहा जाता है। कम्प्यूटर के इस भाग के कई हिस्से हैं जैसे मदरबोर्ड, रैम तथा प्रोसैसर सिस्टम यूनिट के अंदर ही आते हैं।

(3) मैमोरी (Memory) कम्प्यूटर में मैमोरी का प्रयोग प्रोग्राम तथा डाटा को संग्रहित करने के लिए होता है, ताकि बाद में जरूरत के अनुसार उसका प्रयोग किया जा सके। मैमोरी किसी भी कम्प्यूटर का एक काफी महत्त्वपूर्ण अंग होता है। मैमोरी का उपयोग परिणामों को संग्रहित करने के लिए भी किया जाता है। मैमोरी दो प्रकार की होती हैं-
(A) रोम (Rom)- इसको Read only Memory कहते हैं। इसमें जो जानकारी होती है उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता बस सिर्फ उसे पढ़ा जा सकता है।
(B) रैम (Ram)-Random Access Memory इसका प्रयोग तब होता है जब कम्प्यूटर पर काम करते हैं। यह जानकारी सिर्फ तब तक रहती है जब तक आपका कम्प्यूटर काम कर रहा होता है। कम्प्यूटर को बंद करते ही रैम की जानकारी नष्ट हो जाती है।

(4) संग्राहक उपकरण (Storage Unit) एक कम्प्यूटर में कई संग्राहक इकाइयाँ जैसे हार्ड डिस्क, फ्लापी, टेप, मैगनेट, आप्टिकल डिस्क, कांपेकट डिस्क (सीडी), कार्टिज इत्यादि लगे होते हैं जिनका प्रयोग आंकड़ों तथा कार्यक्रम-निर्देशों को संचित करने के लिए होता है। इन युक्तियों की आंकड़ा संग्रहण करने की क्षमता मेगाबाइड (MB) से गीगाबाइड (GB) तक होती है।

(5) संचार (Communication)- संचार के लिए काफी उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इन यंत्रों का उपयोग एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर के साथ जोड़ने के लिए तथा इंटरनेट का प्रयोग करने के लिए किया जाता है। वाई फाई रिसीवर, मोड्स इत्यादि इस वर्ग में शामिल हैं।

(6) सॉफ्टवेयर का एक हिस्सा आँकड़ा प्रक्रिया की पेशकारी के लिए प्रयोग के लिए तथा कम्प्यूटर के माध्यम से तालमेल बिठाता है। तत्वों को क्रमवार करने के लिए अशुद्धियों को हटाने के लिए, आंकड़ों के जोड़-तोड़ तथा संभाल इत्यादि काम सॉफ्टवेयर द्वारा किये जाते हैं। प्रमुख सॉफ्टवेयर हैं- MS Excel Spreadsheet, Lotus-1,2,3 तथा D Base, Arc-view, Are GIS Geomedia इत्यादि। इनके द्वारा सॉफ्टवेयर नक्शे बनाने के लिए अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 2.
स्थानिक तथा गैर स्थानिक आंकड़ों में क्या अन्तर है? उदाहरण सहित बताओ।
उत्तर:
स्थानिक तथा गैर-स्थानिक आंकड़ों में अंतर निम्नलिखित
स्थानिक आंकड़े

  1. स्थानीय आंकड़े किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति को दर्शाते। यह धरती पर किसी स्थान को दर्शाता है।
  2. स्थानीय आंकड़ों में किसी क्षेत्र जैसे अस्पताल, स्कूल इत्यादि क्षेत्रों की भौगोलिक विशेषताओं के बारे में दिखाया जाता है।
  3. इनको तैयार करना थोड़ा मुश्किल होता है।
  4. इसमें लकीरों की सहायता के साथ नदियों, रेलवे लाइन इत्यादि दिखाये जाते हैं।
  5. जब नक्शे के ऊपर केवल स्कूल को दिखाया जाता है उसको स्थानीय आँकड़े कहते हैं।
  6. Shx तथा Shq फाइलों में स्थानिक आंकड़े होते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 4 आंकड़ों का प्रक्रमण एवं मानचित्रण में कंप्यूटर का उपयोग

गैर-स्थानिक आंकड़े

  1. जब कोई डाटा / आंकड़ा हमें धरती की किसी जगह के बारे में ज्ञान करवाए वह गैर-स्थानिक आंकड़े कहलाते हैं।
  2. गैर-स्थानिक आंकड़े में नम्बर, अंक, व्यक्ति या श्रेणियों की संख्या इत्यादि को दिखाया जाता है।
  3. गैर स्थानीय आंकड़े तैयार करने आसान होते हैं।
  4. गैर-स्थानीय आंकड़ों की सहायता के साथ आंकड़ों की विशेषता के बारे में दिखाया जाता है।
  5. अगर स्कूल का नाम, कक्षा कक्षों तथा विद्यार्थियों की संख्या के बारे में बताया जाए। तब वह गैर-स्थानीय आंकड़े कहलाते हैं।
  6. dbf एक dbase फाइल होती है कि shx तथा shp फाइलों से जुड़े होते हैं।

उदाहरण- जब हम किसी स्कूल, कस्बे, गाँव इत्यादि की भौगोलिक विशेषता को बिन्दुओं, बहुभुजों या लकीरों की सहायता से नक्शे पर दिखाते हैं, तो उसे स्थानीय आंकड़े कहते हैं। तथा अगर हम स्कूल का नाम, कक्षा, बच्चों की संख्या, गाँव, कस्बे में घर, घरों में व्यक्तियों की संख्या का अध्ययन करते हैं तब वह गैर-स्थानीय आंकड़ों की उदाहरण मानी जाती है।

प्रश्न 3.
वर्कशीट (कार्यपत्रक) क्या है?
उत्तर:
वर्कशीट (कार्यपत्रक) आमतौर पर एक कागज की शीट होती है जिस पर विद्यार्थियों के लिए कुछ प्रश्न लिखे होते हैं तथा उत्तर लिए जाते हैं। एक्सल वर्कशीट एकहरी स्प्रैडशीट होती है जिसका प्रयोग आंकड़ा प्रक्रिया, नक्शे तथा रेखाचित्र इत्यादि बनाने के लिए किया जाता है। वर्कशीट टर्म का प्रयोग एक स्प्रैडशीट सॉफ्टवेयर के तौर पर भी किया जाता है तथा एक एकाऊंटैंट की तरफ से प्रयोग किए गये एक पेपर जिस पर कोई रिकार्ड लिखा है, को वर्कशीट का नाम दिया जाता है। वर्कशीट शब्द का प्रयोग सबसे पहले 1900 में की गयी।

एक कक्षा के कमरे में वर्कशीट से भाव उन कागज़ों की शीटों से है, जिन पर प्रश्न तथा कुछ अभ्यास योग्य प्रश्न विद्यार्थी के लिए पूरा करने तथा जवाब रिकॉर्ड करने के लिए बनाई गई होती है। एकाऊंट में वर्कशीट का अर्थ है, एक खुले पन्ने होते हैं जिसमें वर्क शैड्यूल, काम का समय, खास हिदायतों इत्यादि का रिकॉर्ड रखा जाता है तथा कम्प्यूटर में एक्सल वर्कशीट में आंकड़े बहुत ही सरल तरीके के साथ दाखिल तथा जमा किये जा सकते हैं।

आंकड़ों की नकल की जा सकती है या एक सैल से दूसरे सैल में भेजे जाते हैं। इसके द्वारा आंकड़े मिटाये जा सकते हैं। इस वर्कशीट द्वारा काम के आंकड़े स्थाई तौर पर संभाले जा सकते हैं। इस तरह आंकड़े सरलता से दाखिल किये जाते हैं। कालम बनाकर आंकड़े दाखिल करने के समय नम्बर- पैड के साथ ऐंटर की क्रिया या डाऊन चिह्नित का प्रयोग किया जाता है। स्तरों में आंकड़ों को दाखिल करते समय नम्बर पैड के साथ राइट चिह्नित का भी प्रयोग किया जाता है।

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रेरित वि.वा. बल की दिशा ज्ञात की जाती है:
(अ) ऐम्पियर के नियम द्वारा
(ब) फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम से
(स) फ्लेमिंग के दायें हाथ के नियम से
(द) लेन्ज के नियम से
उत्तर:
(द) लेन्ज के नियम से

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 2.
लेन्ज का नियम देता है:
(अ) प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण
(ब) प्रेरित धारा की दिशा
(स) प्रेरित धारा का परिमाण व दिशा दोनों
(द) प्रेरित धारा का परिमाण
उत्तर:
(ब) प्रेरित धारा की दिशा

प्रश्न 3.
लेन्ज का नियम जिस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित होता है, वह है:
(अ) आवेश
(ब) संवेग
(स) द्रव्यमान
(द) ऊर्जा
उत्तर:
(द) ऊर्जा

प्रश्न 4.
एक क्षेत्रीय रेखाचित्र में प्रदर्शित है। यह क्षेत्र प्रदर्शित नहीं करता:
(अ) चुम्बकीय क्षेत्र
(ब) स्थिर-वैद्युत क्षेत्र
(स) प्रेरित विद्युत क्षेत्र
(द) गुरुत्वीय क्षेत्र
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 1
(संकेत-स्थिर-वैद्युत तथा गुरुत्वीय क्षेत्र बन्द लूप नहीं बनाते।)
उत्तर:
(ब) स्थिर-वैद्युत क्षेत्र

प्रश्न 5.
किसी क्षण ‘ t’ पर एक कुण्डली से सम्बन्धित फ्लक्स दिया गया है ¢ = 10t2 – 50t + 250 तो t= 3 ऊपर प्रेरित वि. वा. बल
(अ) 190 V
(ब) -190 V
(स) 10V
(द) 10V
उत्तर:
(स) 10V

प्रश्न 6.
ताँबे के तार की कुण्डली व एक तार AB चित्रानुसार तार में प्रवाहित धारा I का कागज के तल में स्थित है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 2
मान यदि बढ़ रहा हो तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा होगी:
(अ) वामावर्त
(ब) दक्षिणावर्त
(स) प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) दक्षिणावर्त

प्रश्न 7.
संलग्न चित्र में चालक छड़ AB को धारावाही तार MN के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय में धारा के समान्तर दिशा में चलाया जा रहा है। छड़ AB में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा होगी:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 3
(अ) A → B
(ब) B → A
(स) प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) A → B

प्रश्न 8.
संलग्न चित्र में जब कुंजी k को बन्द किया जाता है तो कुण्डली B में प्रेरित धारा की दिशा होगी:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 4
(अ) वामावर्त तथा क्षणिक
(ब) दक्षिणावर्त तथा क्षणिक
(स) वामावर्त तथा लगातार
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) वामावर्त तथा क्षणिक

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसके द्वारा अधिकतम वि.वा. बल उत्पन्न होगा:
(अ) 50A dc
(ब) 50A 50Hz ac
(स) 50 A 500 Hz ac
(द) 100 A dc.
उत्तर:
(स) 50 A 500 Hz ac

प्रश्न 10.
एक 2 मीटर लम्बा तार 0.5 वेबर/ मी2 के चुम्बकीय क्षेत्र लम्बवत 1 मीटर / से. के वेग से के गतिमान है। उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान होगा:
(अ) 0.5 वोल्ट
(ब) 2 वोल्ट
(स) 0.1 वोल्ट
(द) 1 वोल्ट
उत्तर:
(द) 1 वोल्ट

प्रश्न 11.
L भुजा व R प्रतिरोध का वर्गाकार चालक लूप अपनी एक भुजा के लम्बवत एकसमान वेग से अपने तल में गति कर रहा है, जहाँ चुम्बकीय प्रेरण B है जो आकाश व समय में नियत है तथा लूप के तल के लम्बवत अन्दर की ओर है लूप में प्रेरित धारा है:
(अ) \(\frac{\mathrm{BL} v}{\mathrm{R}}\) दक्षिणावर्त
(ब) \(\frac{\mathrm{BL} v}{\mathrm{R}}\) वामावर्त
(स) \(\frac{2 \mathrm{BL} v}{\mathrm{R}}\) वामावर्त
(द) शून्य
उत्तर:
(द) शून्य

प्रश्न 12.
एक ताँबे की वलय को क्षैतिज रखा जाता है तथा एक छड़ चुम्बक को वलय की अक्ष की दिशा में गिराया जाता है। गिरते हुए चुम्बक का त्वरण होगा:
(अ) गुरुत्वीय त्वरण के बराबर
(ब) गुरुत्वीय त्वरण से कम
(स) गुरुत्वीय त्वरण से अधिक
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) गुरुत्वीय त्वरण से कम

प्रश्न 13.
चित्रानुसार एक चालक छड़ AB नियत वेग v से एकसमान चुम्बकीय नियत वेग क्षेत्र में गतिशील है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 5
(अ) छड़ विद्युत आवेशित हो जायेगी
(ब) छड़ जूल ऊष्मा के कारण गर्म हो जायेगी
(स) छड़ का सिरा A धनावेशित होगा
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) छड़ का सिरा A धनावेशित होगा

प्रश्न 14.
एक चालक लूप को एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखा जाता है कि इसका तल चुम्बकीय क्षेत्र के प्रेरित वि. वा. बल उत्पन्न होगा यदि:
(अ) लूप की क्षेत्र में गति स्थानान्तरीय हो
(ब) लूप अपनी अक्ष पर घूर्णन करे
(स) लूप अपने व्यास के सापेक्ष घूर्णन करे
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) लूप अपने व्यास के सापेक्ष घूर्णन करे

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 15.
चित्रानुसार एक चालक तार AB (लम्बाई l) दो समान्तर पटरियों P तथा Q पर वेग से गतिशील है। पटरियों के तल के लम्बवत् नीचे की ओर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र लगाया लम्बवत् है, लूप में
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 6
गया है। छड़ का वेग नियत बनाये रखने के लिए आवश्यक बल का मान होगा:
(अ) शून्य
(ब) I/B
(स) I/B sin θ
(द) इनमें से
उत्तर:
(अ) शून्य

प्रश्न 16.
निम्न में से किसकी विमा [M1 L2T-3 A-1] नहीं है:
(अ) \(\int \overrightarrow{\mathrm{E}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{d} l}\)
(ब) VBl
(स) \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{B}}}{\mathrm{dt}}\)
(द) \(\phi_{\mathrm{B}}\)
उत्तर:
(द) \(\phi_{\mathrm{B}}\)

प्रश्न 17.
दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान 2.5 H है। यदि एक कुण्डली में धारा का मान 1 A/s की दर से परिवर्तित होता हो तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान होगा-
(अ) 2.5 mV
(ब) 2.5 V
(स) 2.5 m
(द) शून्य
उत्तर:
(ब) 2.5 V

प्रश्न 18.
संलग्न चित्र में तार AB में एक नियत मान की धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली A में प्रवाहित प्रेरित धारा की दिशा होगी:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 7
(अ) वामावर्त
(ब) दक्षिणावर्त
(स) प्रेरित धारा प्रवाहित नहीं होगी
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) प्रेरित धारा प्रवाहित नहीं होगी

प्रश्न 19.
प्रेरकत्व का कौन-सा मात्रक त्रुटिपूर्ण है:
(अ) \(\frac{\mathrm{Wb}}{\mathrm{A}}\)
(ब) \(\frac{V-s}{A^2}\)
(स) \(\frac{\mathrm{J}}{\mathrm{A}^2}\)
(द) Ω – s
उत्तर:
(ब) \(\frac{V-s}{A^2}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 20.
संलग्न चित्र में एक इलेक्ट्रॉन A से B की ओर गतिशील हो तो लूप में प्रेरित धारा की दिशा होगी-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 8
(अ) पहले वामावर्त तथा C को पार करने के पश्चात् दक्षिणावर्त
(ब) पहले दक्षिणावर्त तथा C को पार करने के पश्चात् वामावर्त
(स) वामावर्त
(द) दक्षिणावर्त
उत्तर:
(अ) पहले वामावर्त तथा C को पार करने के पश्चात् दक्षिणावर्त

प्रश्न 21.
5 ओम प्रतिरोध वाले बन्द परिपथ से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स का तात्क्षणिक मान निम्न सम्बन्ध से व्यक्त किया जाता है:
¢B = 6t2 – 5t + 1
तो t = 0.25 सेकण्ड पर परिपथ में प्रेरित धारा का मान ऐम्पियर में होगा:
(अ) 2.4
(ब) 1.6
(स) 0.4
(द) 1.2
उत्तर:
(स) 0.4

प्रश्न 22.
दो कुण्डलियों को एक-दूसरे निकट रखा है, तो कुण्डली के युग्म का अन्योन्य प्रेरण गुणांक निर्भर करता है:
(अ) दोनों कुण्डलियों में धारा परिवर्तन की दर
(ब) दोनों कुण्डलियों की आपेक्षिक स्थिति पर
(स) दोनों कुण्डलियों के तारों के पदार्थ पर
(द) दोनों कुण्डलियों में धारा पर
उत्तर:
(ब) दोनों कुण्डलियों की आपेक्षिक स्थिति पर

प्रश्न 23.
l लम्बाई की धातु की छड़ को चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत रखकर f आवृत्ति से वृत्ताकार पथ पर घूर्णन कराने पर छड़ के किनारों के बीच विभवान्तर होगा:
(अ) \(\frac{B}{f}\)
(ब) \(\frac{\pi l^2 \mathrm{~B}}{\mathrm{f}}\)
(स) \(\frac{\mathrm{B} l}{\mathrm{f}}\)
(द) πl2Bf
उत्तर:
(द) πl2Bf

प्रश्न 24.
स्वप्रेरण गुणांक की विमा होती है:
(अ) ML2T-3A-2
(ब) M2LT-2A-2
(स) M0L2T-3 A-2
(द) ML2T-2A-2
उत्तर:
(द) ML2T-2A-2

प्रश्न 25.
समीपवर्ती दो कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरकत्व 4.0 H (हेनरी) है। यदि प्राथमिक कुण्डली में धारा 5 ऐम्पियर से 102 सैकण्ड में शून्य हो जाती है, तो द्वितीयक कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल का मान होगा:
(अ) 0.20 वोल्ट
(ब) – 2000 वोल्ट
(स) 2000 वोल्ट
(द) -0.20 वोल्ट
उत्तर:
(ब) – 2000 वोल्ट

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 26.
l भुजा का एक वर्गाकार लूप समरूप चुम्बकीय क्षेत्र B के लम्बवत् नियत वेग से चलाया जाता है। प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान होगा:
(अ) VBI
(ब) \(\frac{\mathrm{B} l}{\mathrm{v}}\)
(स) \(\frac{\mathrm{v} l}{\mathrm{B}}\)
(द) शून्य
उत्तर:
(अ) VBI

प्रश्न 27.
चुम्बकीय ध्रुवों के बीच एक आयताकार कुण्डली समान कोणीय वेग से घूर्णन गति कर रही है, तो कुण्डली में से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स व प्रेरित विद्युत वाहक बल (e) का समय (t) के साथ परिवर्तन का सही ग्राफ है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 9
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 10

प्रश्न 28.
भँवर धाराओं का प्रयोग निम्नलिखित में से किसमें नहीं होता है:
(अ) चल कुण्डल धारामापी
(ब) विद्युत ब्रेक
(स) प्रेरण मोटर
(द) डायनामो
उत्तर:
(द) डायनामो

प्रश्न 29.
विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदला जाता है
(अ) विद्युत मोटर से
(ब) विद्युत इस्तरी से
(स) विद्युत जनित्र से
(द) सीसा संचायक सेल से
उत्तर:
(अ) विद्युत मोटर से

प्रश्न 30.
लम्बाई L की एक तांबे की छड़ एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र B में कोणीय वेग से घुमाई जाती है। घूर्णन अक्ष B के समानान्तर व छड़ के एक सिरे से पारित है। छड़ के सिरों के मध्य उत्पन्न वि. वा. बल होगा:
(अ) BπL2
(ब) 1⁄2- BoL2
(स) 1⁄2-BOL
(द) शून्य
उत्तर:
(ब) 1⁄2- BoL2

प्रश्न 31.
दो कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरकत्व M है। यदि पहली कुण्डली मेंt समय में धारा के मान में परिवर्तन I हो तो दूसरी कुण्डली में प्रेरित वि. वा. बल होगा:
(अ) MIt
(ब) \(\frac{\mathrm{MI}}{\mathrm{t}}\)
(स) \(\frac{\mathrm{Mt}}{\mathrm{I}}\)
(द) \(\frac{\mathrm{i}}{\mathrm{MIt}}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{\mathrm{MI}}{\mathrm{t}}\)

प्रश्न 32.
एक प्रेरण कुण्डली में जब धारा 1 मिली. सेकण्ड में 3 ऐम्पियर से 2 ऐम्पियर तक परिवर्तित होती है तो उसमें 5 वोल्ट का विद्युत वाष्प है। कुण्डली का स्व-प्रेरकत्व होगा:
(अ) शून्य
(ब) 5 मिली. हेनरी
(स) 5 किलो हेनरी
(द) 5 हेनरी
उत्तर:
(ब) 5 मिली. हेनरी

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प्रश्न 33.
किसी कुण्डली का स्व-प्रेरकत्व कम होगा, जबकि:
(अ) कुण्डली में प्रवाहित धारा कम हो
(ब) चुम्बकीय क्षेत्र बहुत दुर्बल हो
(स) कुण्डली का तल चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश हो
(द) कुण्डली को प्रतिचुम्बकीय पदार्थ पर लपेटा जाये
उत्तर:
(द) कुण्डली को प्रतिचुम्बकीय पदार्थ पर लपेटा जाये

प्रश्न 34.
ट्रान्सफॉर्मर किस सिद्धान्त पर आधारित है:
(अ) चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर
(ब) विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर
(स) स्वप्रेरण के सिद्धान्त पर
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

प्रश्न 35.
यदि एक कुण्डली में तात्कालिक चुम्बकीय फ्लक्स का मान BA cosωt हो, तो उसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान होगा:
(अ) sinωt
(ब) B ω/A sinωt
(स) BA sin ωt
(द) BA cos ωt
उत्तर:
(स) BA sin ωt

प्रश्न 36.
किसी पदार्थ में भँवर धारायें उत्पन्न होती हैं जब उसे:
(अ) गर्म किया जाता है
(ब) विद्युत क्षेत्र में रखा जाता है
(स) एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है
(द) समय के साथ परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है।
उत्तर:
(द) समय के साथ परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
जब किसी कुण्डली से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो क्या सदैव प्रेरित (i) विद्युत वाहक बल (ii) धारा उत्पन्न होती है?
उत्तर:
प्रेरित विद्युत वाहक बल सदैव उत्पन्न होता है, लेकिन प्रेरित विद्युत धारा तब ही उत्पन्न होती है जब कुण्डली का परिपथ बन्द होगा।

प्रश्न 2.
चुम्बकीय फ्लक्स का SI मात्रक और विमा सूत्र लिखिये।
उत्तर:
SI मात्रक वेबर और विमा सूत्र = ML2T-2A-1

प्रश्न 3.
किसी कुण्डली में प्रेरित धारा किन-किन बातों पर निर्भर करती है?
उत्तर:
यह निम्न बातों पर निर्भर करती है:
(i) कुण्डली में फेरों की संख्या,
(ii) कुण्डली का प्रतिरोध,
(iii) कुण्डली में फ्लक्स परिवर्तन की दर।

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प्रश्न 4.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखी किसी कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
जब कोई कुण्डली किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखी जाती है, तो उससे संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-
∵ ΦB = NBA cos θ
(i) कुण्ड के तल के क्षेत्रफल A पर
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B पर
(iii) कुण्डली की अक्ष द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से बनाये गये कोण 6 पर
(iv) N फेरों की संख्या।

प्रश्न 5.
यदि किसी लूप का तल चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर रखा गया हो तो लूप से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स का मान क्या होगा?
उत्तर:
शून्य चूँकि ΦB = BdA cos 90° = 0

प्रश्न 6.
किसी कुण्डली में संग्रहित ऊर्जा का क्या रूप होता है?
उत्तर:
चुम्बकीय ऊर्जा।

प्रश्न 7.
क्या किसी कुण्डली में प्रेरित वि.वा. बल का मान परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर करता है?
उत्तर:
नहीं। (चूँकि प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान सिर्फ चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। )

प्रश्न 8.
लेंज का नियम किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित होता है?
उत्तर:
ऊर्जा संरक्षण

प्रश्न 9.
प्रेरित वि. वा. बल की दिशा किस नियम से ज्ञात की जाती है?
उत्तर:
लेंज के नियम से।

प्रश्न 10.
किसी धातु को परिवर्ती चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर क्या भँवर धारायें उत्पन्न होंगी?
उत्तर:
हाँ, भँवर धारायें उत्पन्न होंगी।

प्रश्न 11.
किसी कुण्डली का स्वप्रेरकत्व या स्वप्रेरण गुणांक 1 H है। इससे आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ε = -Ldl/dt
यहाँ पर L = 1 है।
∵ ε = -Ldl/dt
अर्थात् 1 ऐम्पियर / से की दर से धारा परिवर्तन होने पर । वोल्ट का विद्युत वाहक बल प्रेरित होगा।

प्रश्न 12.
दो एकसमान समाक्षीय वृत्ताकार कुण्डलियों में समान धारायें एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। यदि दोनों कुण्डलियों को एक-दूसरे की ओर लाया जाये तो धाराओं में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
प्रत्येक कुण्डली में धारा घटेगी (लेंज के नियम से)।

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प्रश्न 13.
एक धातु का सिक्का तथा एक अधातु का सिक्का एक ही ऊँचाई से पृथ्वी तल के समीप छोड़े गये हैं। कौन-सा पहले पृथ्वी पर पहुँचेगा?
उत्तर:
गिरते हुए धातु के सिक्के में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण उत्पन्न भंवर धारायें टुकड़े की गति का विरोध करती हैं। अतः धातु का टुकड़ा (गुरुत्वीय त्वरण के सापेक्ष) कम त्वरण से गिरता है. परन्तु अधातु के टुकड़े में भँवर धारायें नहीं होंगी, अतः वह गुरुत्वीय त्वरण से गिरता है अतः अधातु का सिक्का पृथ्वी पर पहले पहुँचेगा।

प्रश्न 14.
एक ऋजुरेखीय चालक तार में विद्युत वाहक बल के एक स्रोत के कारण एक नियत धारा बायीं से दायीं ओर बह रही है। जब स्रोत का स्विच बन्द कर देते हैं, तो तार में प्रेरित धारा की दिशा होगी-
उत्तर:
बायीं से दायीं ओर (स्विच बन्द करने पर उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल की दिशा वही होती है जिस दिशा में धारा बहती है)।

प्रश्न 15.
प्रतिरोध बॉक्स में प्रयुक्त प्रतिरोध तार दुहरा मोड़ कर कुण्डली के रूप में लगाये जाते हैं क्यों?
उत्तर:
स्वप्रेरण प्रभाव के निराकरण के लिये।

प्रश्न 16.
जब किसी कुण्डली के पास छड़ चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव लाया जाता है तो कुण्डली में प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी ? कारण सहित समझाओ।
उत्तर:
दक्षिणावर्त होगी, क्योंकि इससे कुण्डली के सिरों पर दक्षिण ध्रुव बनेगा जो लेंज के नियम के अनुसार चुम्बक के दक्षिणी ध्रुव के आगे बढ़ने की गति का विरोध करेगा।

प्रश्न 17.
ट्रान्सफॉर्मर, डायनेमो इत्यादि की क्रोड पटलित क्यों होती है?
उत्तर:
क्रोड में भंवर धाराओं के कारण ऊर्जा का हास कम हो जाता है।

प्रश्न 18.
यदि किसी प्रेरकत्व में धारा का मान दुगुना कर दिया जाता है तो संग्रहित ऊर्जा कितने गुना हो जायेगी?
उत्तर:
हम जानते हैं कि किसी कुण्डली में संग्रहित चुम्बकीय ऊर्जा
U = \(\frac{1}{2}\) LI2θ
यदि धारा का मान दुगुना करने पर
U = \(\frac{1}{2}\) LI2I0 = 4 x \(\frac{1}{2}\) LI2
U’= 4U
अतः संग्रहित ऊर्जा का मान चार गुना होगा।

प्रश्न 19.
धारामापी के क्रोड में भँवर धाराओं के प्रभाव को किस प्रकार कम किया जा सकता है?
उत्तर:
क्रोड को पटलित लेकर।

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प्रश्न 20.
क्या कारण है कि दोलन करती हुई चुम्बकीय सूई के ठीक नीचे ताँबे की प्लेट रखने पर चुम्बकीय सूई शीघ्रता से रुक जाती है, जबकि काँच की प्लेट नीचे रखने पर चुम्बकीय सूई नहीं रुकती है?
उत्तर:
इसका मुख्य कारण यह है कि ताँबे की प्लेट में भँवर धारायें प्रेरित होती हैं जो चुम्बकीय सूई के दोलनों का विरोध करती हैं, जबकि काँच की प्लेट में भँवर धारायें उत्पन्न नहीं होती हैं।

प्रश्न 21.
एक कुण्डली के मध्य में लोहे का क्रोड लगाने की स्थिति में उसके स्वप्रेरकत्व के मान पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
स्वप्रेरकत्व का मान बढ़ जायेगा।

प्रश्न 22.
तीन कारकों (factors) के नाम लिखिये जिन पर किसी कुण्डली का स्व-प्रेरण गुणांक निर्भर करता है।
उत्तर:
(i) कुण्डली की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल,
(ii) कुण्डली में फेरों की संख्या,
(iii) कुण्डली के अन्दर रखी क्रोड की चुम्बकशीलता।

प्रश्न 23.
स्व-प्रेरकत्व पर क्रोड का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
बढ़ जाता है।

प्रश्न 24.
भँवर धाराओं का कोई एक उपयोग लिखिये।
उत्तर:
रुद्ध दोलन (dead beat ) चल कुण्डली धारामापी।

प्रश्न 25.
स्व-प्रेरण को विद्युत का जड़त्व क्यों कहते हैं?
उत्तर:
स्व-प्रेरण किसी कुण्डली का वह गुण है जिसके कारण यह इसके बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स को बनाये रखने के लिए प्रयत्नशील रहती है अर्थात् फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करती है। यह गुण यान्त्रिकी में जड़त्व के अनुरूप है अतः स्व-प्रेरण को विद्युत का जड़त्व कहते हैं।

प्रश्न 26.
दो कुण्डलियों को किस प्रकार लपेटना चाहिये कि प्रेरित वि. वा. बल का मान अधिकतम हो।
उत्तर:
एक कुण्डली के ऊपर दूसरी कुण्डली को लपेट लेना चाहिये जिससे प्रेरित वि.वा. बल अधिकतम हो जायेगा।

प्रश्न 27.
क्या रेलगाड़ी में बैठे व्यक्ति के द्वारा रेलगाड़ी की धुरी में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल का मापन सम्भव है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि यात्री के सापेक्ष गाड़ी स्थिर है। = 0 होने से प्रेरित वि. वा. बल शून्य होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 28.
यदि किसी चालक को चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर गतिशील किया जाये तो क्या इसमें प्रेरित धारा उत्पन्न होगी?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि इस स्थिति में चालक से सम्बन्धित चुम्बकीय फ्लक्स का मान नहीं बदलता है।

प्रश्न 29.
किसी कुण्डली के स्व-प्रेरकत्व गुणांक का सूत्र लिखो।
उत्तर:
L = \(\frac{\mu_0 \pi \mathrm{N}^2 \mathrm{R}}{2}\) हेनरी

प्रश्न 30.
वोल्ट सेकण्ड किस भौतिक राशि का मात्रक है? समझाइये
उत्तर:
ε = \(\frac{\Delta \phi}{\Delta t}\)
से ∆Φ = ε x At
चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक = प्रेरित विद्युत वाहक बल ६ का मात्रक x समय का मात्रक = वोल्ट सेकण्ड

प्रश्न 31.
फैराडे का वैद्युतचुम्बकीय प्रेरण का नियम लिखिए।
उत्तर:
फैराडे ने विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की घटना पर आधारित दो महत्त्वपूर्ण नियम दिये:
I. फैराडे का प्रथम नियम – “इस नियम के अनुसार जब किसी कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स के मान में परिवर्तन होता है तो कुण्डली में प्रेरित वि.वा. बल तथा प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।” उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल तब तक ही उत्पन्न होता है जब तक कि चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है।
II. फैराडे का द्वितीय नियम- इस नियम के अनुसार कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल फ्लक्स में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।”

प्रश्न 32.
निम्न चित्र में दो कुंडली AB व CD के बीच एक छड़ चुम्बक NS को तीर की दिशा में चलाने पर किस कुंडली में प्रेरित धारा बायीं ओर से देखने पर वामावर्ती होगी?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 11
उत्तर:
AB ↑↓ वामावर्त्त।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित कुण्डली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा यदि-
(i) कुण्डली में फेरों की संख्या बढ़ा दी जाये?
(ii) कुण्डली के तल का क्षेत्रफल बढ़ा दिया जाये?
(iii) कुण्डली के चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ा दी जाये?
उत्तर:
(i) चुम्बकीय फ्लक्स पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि चुम्बकीय फ्लक्स फेरों की संख्या पर निर्भर नहीं करता है।
(ii) चुम्बकीय फ्लक्स का मान बढ़ जायेगा क्योंकि
(iii) चुम्बकीय फ्लक्स बढ़ जायेगा
Φ α A
Φ α B

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प्रश्न 2.
किसी कुण्डली में उत्पन्न प्रेरित आवेश तथा प्रेरित धारा संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स परिवर्तन तेजी पर क्या प्रभाव पड़ेगा जब इससे से किया जाये अथवा धीरे-धीरे किया जाये?
उत्तर:
प्रेरित आवेश
q = \(\frac{\mathrm{N} \Delta \phi_{\mathrm{B}}}{\mathrm{R}}\)
तथा प्रेरित धारा I = \(\frac{N \Delta \phi_B}{\mathrm{R} \Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{N\left(\Delta \phi_{\mathrm{B}} / \Delta t\right)}{\mathrm{R}}\)
इन सूत्रों से स्पष्ट है कि प्रेरित आवेश केवल कुल फ्लक्स- परिवर्तन ∆ΦB पर निर्भर करता है, जबकि प्रेरित धारा फ्लक्स परिवर्तन की दर \(\left(\Delta \phi_{\mathrm{B}} / \Delta \mathrm{t}\right)\) पर निर्भर करती है अतः पलक्स परिवर्तन तेजी से अथवा धीरे से करने पर प्रेरित आवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि धारा बदल जायेगी। फ्लक्स तेजी से करने पर धारा बढ़ेगी तथा धीरे से करने पर धारा घटेगी।

प्रश्न 3.
फैराडे एवं हेनरी के प्रयोग संख्या दो में विचार करके बताइए:
(a) धारामापी में अधिक विक्षेप प्राप्त करने के लिए आप क्या करेंगे?
(b) धारामापी की अनुपस्थिति में आप प्रेरित धारा की उपस्थिति किस प्रकार दर्शाएँगे?
उत्तर:
(a) अधिक विक्षेप प्राप्त करने के लिए निम्न में से एक या अधिक उपाय किए जा सकते हैं-
(i) कुण्डली C2 के अन्दर नर्म लोहे की छड़ का उपयोग करेंगे,
(ii) कुण्डली को एक उच्च शक्ति की बैटरी से जोड़ेंगे,
(iii) परीक्षण कुण्डली C1 की ओर संयोजन को अधिक तेजी से ले जाएंगे।
(b) धारामापी को टॉर्च में उपयोग किए जाने वाले छोटे बल्ब से बदल देंगे। दोनों कुण्डलियों के बीच सापेक्ष गति से बल्ब क्षणिक अवधि के लिए चमकेगा जो प्रेरित धारा के उत्पन्न होने का द्योतक है।

प्रश्न 4.
लेन्ज के नियम में ऋणात्मक चिन्ह का क्या अर्थ है?
उत्तर:
लेन्ज का नियम: “विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की प्रत्येक अवस्था में प्रेरित विद्युत वा बल एवं धारा की दिशा सदैव इस प्रकार होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है, जिससे उसकी उत्पत्ति हुई है।” फैराडे एवं लेंज के नियम से परिपथ में उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा
ε α – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
ε = – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
यहाँ पर K एक समानुपाती स्थिरांक है जिसका मान होता है। ऋण चिन्ह प्रदर्शित करता है कि प्रेरित वि.वा. बल सदैव फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 5.
एक आयताकार लूप तथा एक वृत्ताकार लूप एक समरूप (uniform) चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर की ओर नियत वेग से सामने दिये गये चित्र की भाँति गति कर रहे हैं:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 12
चुम्बकीय क्षेत्र लूपों के तल के लम्बवत् है। समझाइए कि चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर निकलते हुए किस लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल नियत रहेगा?
उत्तर:
आयताकार लूप को चुम्बकीय क्षेत्र से बाहर नियत वेग v से गति कराते समय इसके क्षेत्रफल परिवर्तन की दर \(\frac{\mathrm{dA}}{\mathrm{dt}}\) नियत
होगी जबकि यह वृत्ताकार लूप के लिये नियत नहीं रहेगी, अतः सूत्र
∈ = – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
= \(\frac{-\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) (BA)
= – B \(\left(\frac{\mathrm{dA}}{\mathrm{dt}}\right)\)
के आधार पर नियत B के लिये आयताकार लूप में प्रेरित विद्युत बल नियत रहेगा।

प्रश्न 6.
एक संधारित्र C के आर-पार जुड़े एक धात्विक लूप की ओर दो दण्ड चुम्बक तेजी से चित्र की भाँति गति कराये जाते हैं। संधारित्र की धुवता बताइए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 13
उत्तर:
लूप का चुम्बक (1) के N ध्रुव की ओर वाला तल N ध्रुव की भाँति तथा चुम्बक (2) के S ध्रुव की ओर वाला तल S ध्रुव की भाँति व्यवहार करना चाहिए जिससे कि लेन्ज के नियमानुसार लूप में प्रेरित धारा चुम्बकों की इसकी ओर गति का विरोध प्रतिकर्षण बल लगाकर कर सके।
अतः चुम्बक (1) की ओर से देखने पर लूप में धारा A से B की ओर (वामावर्त) प्रवाहित होनी चाहिए तथा चुम्बक (2) की ओर से देखने पर धारा दक्षिणावर्त प्रवाहित होगी। अतः संधारित्र C की A प्लेट B प्लेट की अपेक्षा धनात्मक विभव पर होगी। इसलिए A धनात्मक तथा B ऋणात्मक विभव पर होंगे।

प्रश्न 7.
सामने दिये गये चित्र में दो कुण्डलियाँ P Q प्रदर्शित हैं। कुण्डली Q में क्षणिक प्रेरित धारा की दिशा क्या होगी जबकि (i) स्विच K को बन्द किया जाता है। (ii) स्विच
K को कुछ देर बाद पुनः खोला जाता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 14
उत्तर:
(i) वामावर्त (ii) दक्षिणावर्त।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 8.
एक साइकिल में लगा लैम्प, डायनेमो से जलता है। साइकिल को तेज चलाने पर लैम्प तेज प्रकाश से जलता है तथा धीरे चलाने पर धीमे प्रकाश से जलता है, क्यों?
उत्तर:
डायनेमो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है। साइकिल को तेज चलाने से डायनेमो में चुम्बकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर \(\left(\frac{\Delta \phi_{\mathrm{B}}}{\Delta t}\right)\) बढ़ जाती है ε α \(\left(\frac{\Delta \phi_{\mathrm{B}}}{\Delta t}\right)\) जिससे प्रेरित वि. वा. बल का मान बढ़ जाता अतः बल्ब तेज प्रकाश से जलता है।
(डायनेमो में प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र e = (NBAω) sin ωt है। साइकिल तेज चलने से ७ का मान बढ़ता है तथा धीमे चलने से 60 का मान कम होता है ।)

प्रश्न 9.
चित्र त्रिज्या के वृत्ताकार लूप KLMN में प्रेरित धारा का परिमाण क्या होगा यदि सीधे तार PQ में 1 ऐम्पियर परिमाण की स्थायी धारा प्रवाहित की जाती है?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 15
उत्तर:
शून्य, क्योंकि PQ में धारा स्थायी होने से इसके निकट रखे लूप से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में कोई परिवर्तन नहीं होगा अतः कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी।

प्रश्न 10.
संलग्न चित्र में वृद्धि हो प्रदर्शित तार xy में x से y की ओर वैद्युत धारा के परिमाण में रही है। तार के समीप रखे लूप में क्या कोई धारा प्रेरित होगी?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 16
उत्तर:
हाँ, प्रेरित धारा की दिशा दक्षिणावर्त होगी। दायें हाथ के अँगूठे के नियमानुसार तार xy में धारा के कारण लूप से गुजरने वाला चुम्बकीय क्षेत्र लूप के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर होगा और लेंज के नियमानुसार लूप में धारा की दिशा ऐसी होगी जो इस क्षेत्र में धारा को बढ़ने (अर्थात् तार xy में धारा के बढ़ने का विरोध करे।

प्रश्न 11.
चुम्बकीय फ्लक्स Φ तथा वैद्युत धारा I के बीच ग्राफ दो प्रेरकों (Inductors) A तथा B के लिए चित्र में दिये गये हैं। किसके लिए स्व-प्रेरकत्व का मान अधिक होगा?
उत्तर:
चूँकि ¢ = LI⇒ L = ¢/I
तथा ¢ = LI ⇒ ó ∝ I, अतः तथा
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 17
I के बीच ग्राफ सरल रेखा है तथा इसका ढाल 0/1 प्रेरक के स्व- प्रेरकत्व को प्रदर्शित करेगा। चूँकि A के लिए B की अपेक्षा ग्राफ का ढाल अधिक है। अतः A का स्व-प्रेरकत्व अधिक होगा।

प्रश्न 12.
भँवर धाराओं के कोई दो अनुप्रयोग समझाइए।
उत्तर:
भँवर धाराओं के दो अनुप्रयोग:
(1) अवमंदन में भँवर धाराओं के उपयोग से चल कुण्डली धारामापी को रुद्ध दोल बना दिया जाता है। ऐसा करने के लिए चल- कुण्डली धारामापी की कुण्डली को हल्की धातु (जैसे ऐलुमिनियम) की क्रोड पर लपेटा जाता है। जब कुण्डली स्थायी चुम्बक के क्षेत्र में घूमती है तो कुण्डली की क्रोड में भँवर धारायें उत्पन्न होती हैं ये भँवर धारायें लेंज के नियम का पालन करते हुए कुण्डली की घूर्णन गति का विरोध करती हैं जिससे कुण्डली शीघ्र ही विरामावस्था प्राप्त कर लेती है।
(2) प्रेरण भट्टी में प्रेरण भट्टी में जिस धातु को गरम करना या पिघलाना होता है, उसे तीव्र गति से परिवर्तनशील चुम्बकीय क्षेत्र में क्रूसिबल में रख दिया जाता है। यह चुम्बकीय क्षेत्र उच्च आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा से उत्पन्न किया जाता है। इस विधि से जो भँवर धारायें उत्पन्न होती हैं. उनसे धातु इतनी गरम हो जाती है कि वह पिघल जाये। यह विधि अयस्क में से धातु निष्कर्षण के लिए काम में ली जाती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 13.
L1 व L2 स्वप्रेरकत्व वाली कुण्डलियों के मध्य महत्तम अन्योन्य प्रेरकत्व क्या होगा ?
उत्तर:
जब एक कुण्डली पर दूसरी कुण्डली को लपेटा जाता है। तो दोनों कुण्डलियों के पूर्ण रूप से युग्मित होने के कारण अन्योन्य प्रेरण गुणांक का मान अधिकतम होता है। फलस्वरूप प्रेरित वि. वा. बल का मान भी अधिकतम होता है। जब दोनों कुण्डलियों को किसी अन्य प्रकार से लपेटने पर अन्योन्य प्रेरण गुणांक व प्रेरित वि.वा. बल अधिकतम नहीं हो पाते क्योंकि दोनों कुण्डलियों में फ्लक्स की सम्बद्धता पूर्ण रूप से नहीं होती है। दो कुण्डली जिनके प्रेरकत्व L1 तथा L2 हैं और उनका अन्योन्य प्रेरण M है। तब L1, L2 और M में सम्बन्ध
M = = K√L1L2
जहाँ K कुण्डलियों
(परिनालिकाओं) का युग्मन गुणांक है। आदर्श स्थिति में K = 1
इसलिये M का अधिकतम मान \(\sqrt{\mathrm{L}_1 \mathrm{~L}_2}\) होगा।

प्रश्न 14.
दो कुण्डलियों के बीच अन्योन्य प्रेरण गुणांक किन- किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
दो कुण्डलियों का अन्योन्य प्रेरण गुणांक जिन कारकों पर निर्भर करता है वे हैं:
(i) कुण्डलियों की ज्यामिति पर जैसे आकार, आकृति, उनके फेरों की संख्या, उनके अनुप्रस्थ काट आदि।
(ii) दो कुण्डलियों के बीच की दूरी।
(iii) दो कुण्डलियों की सापेक्ष दिशाओं पर
(iv) दो कुण्डलियों के क्रोडों के पदार्थ पर

प्रश्न 15.
वास्तविक ट्रान्सफॉर्मर में अल्प ऊर्जा क्षय के कोई दो कारण समझाइए।
उत्तर:
ट्रांसफार्मरों में निम्नलिखित कारणों से अल्प मात्रा में ऊर्जा क्षय होता है:
(i) फ्लक्स क्षरण कुछ फ्लक्स हमेशा क्षरित होता ही रहता है। अर्थात् क्रोड के खराब अभिकल्पन या इसमें रही वायु रिक्ति के कारण प्राथमिक कुण्डली का पूरा फ्लक्स द्वितीयक कुण्डली से नहीं गुजरता है। प्राथमिक और द्वितीयक कुण्डलियों को एक-दूसरे के ऊपर लपेटकर फ्लक्स क्षरण को कम किया जाता है।
(ii) कुण्डलनों का प्रतिरोध- कुण्डलियाँ बनाने में लगे हुए तारों का कुछ न कुछ प्रतिरोध होता ही है और इसलिए इन तारों में उत्पन्न ऊष्मा (I2R) के कारण ऊर्जा क्षय होता है। उच्च धारा, निम्न वोल्टता कुण्डलनों में मोटे तार का उपयोग करके इनमें होने वाली ऊर्जा क्षय को कम किया जा सकता है।
(iii) भँवर धाराएँ – प्रत्यावर्ती चुम्बकीय फ्लक्स लौह क्रोड में भँवर धाराएँ प्रेरित करके इसे गर्म कर देता है। स्तरित क्रोड का उपयोग करके इस प्रभाव को कम किया जाता है।
(iv) शैथिल्य क्षय-प्रत्यावर्ती चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा क्रोड का चुम्बकन बार-बार उत्क्रमित होता है। इस प्रक्रिया में व्यय होने वाली ऊर्जा क्रोड में ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है। कम शैथिल्य क्षय वाले पदार्थ का क्रोड में उपयोग करके इस प्रभाव को कम रखा जाता है। (नोट – छात्र यहाँ पर अल्प ऊर्जा क्षय के कोई भी दो कारण दे सकते हैं।)

प्रश्न 16.
विद्युतचुम्बकीय प्रेरण के लेंज नियम का कथन लिखिए। पूर्व से पश्चिम दिशा में स्थित कोई 2 मी. लम्बा सीधा क्षैतिज चालक तार 0.3 x 104 टेसला के पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक के लम्बवत 5 मी/से की चाल से गिर रहा है। तार के सिरों के मध्य प्रेरित विद्युत वाहक बल के तात्क्षणिक मान की गणना कीजिए।
उत्तर:
लेंज का नियम:
“विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की घटना में उत्पन्न प्रेरित वि. वा. बल की ध्रुवता इस प्रकार होती है कि इससे उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा द्वारा परिपथ में स्थापित चुम्बकीय फ्लक्स अपने कारण
का विरोध करता है या मूल चुम्बकीय फ्लक्स के उस परिवर्तन का विरोध करता है, जिसके कारण प्रेरित वि.वा. बल उत्पन्न होता है।”
E α – \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\)
या
E = – \(\frac{\mathrm{kd} \phi}{\mathrm{dt}}\)
यहाँ पर k एक समानुपाती स्थिरांक है जिसका मान 1 होता है। ऋण चिन्ह प्रदर्शित करता है कि प्रेरित वि. वा. बल सदैव फ्लक्स परिवर्तन का विरोध करता है।
दिया गया है:
l = 2 मी.
BE = 0.3 x 104 टेसला
v = 5 मी/से
माना तार में प्रेरित तात्क्षणिक विद्युत वाहक बल का मान = E
= B/v sin 6 का प्रयोग करने पर
E = BElv sin 90°
मान रखने पर
E= (0.3 × 104) × 2 × 5 × 1
∴ sin 90° = 1
= 3 x 104 वोल्ट उत्तर

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
जब किसी कुण्डली में 2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसमें 40 मिली वेबर का चुम्बकीय फ्लक्स उत्पन्न होता है। कुण्डली का स्व-प्रेरकत्व क्या है?
उत्तर:
L = \(\frac{N \phi}{I}\) = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 17-1
= 20 x 10-3 वेबर प्रति ऐम्पियर
= 20 x 10-3 हेनरी
= 20 मिली. हेनरी

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 2.
यदि किसी परिनालिका में धारा परिवर्तन की दर 4 ऐम्पियर सेकण्ड होने पर उसमें 20 मिली वोल्ट का विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है, तो परिनालिका का स्व-प्रेरकत्व क्या होगा?
उत्तर:
| ε | = L \(\frac{\Delta \mathrm{I}}{\Delta \mathrm{t}}\)
⇒ L = \(\frac{\frac{|\varepsilon|}{\Delta I}}{\frac{\Delta t}{\Delta t}}\)
L = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 18
= 5 × 10-3
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 19
= 5 x 10-3 हेनरी = 5 मिली. हेनरी

प्रश्न 3.
2 हेनरी की एक चोक कुण्डली से प्रवाहित होने वाली धारा 5 ऐम्पियर प्रति सेकण्ड की दर से घट रही है। कुण्डली के सिरों के बीच उत्पन्न विद्युत वाहक बल ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
यहाँ कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक L = 2 हेनरी तथा कुण्डली में धारा परिवर्तन की दर (\(\Delta \mathrm{I} / \Delta \mathrm{t}\)) = 5 ऐम्पियर/सेकण्ड (यहाँ. ऋण चिह्न धारा घटने का प्रतीक है)। अतः कुण्डली के सिरों के बीच उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल
ε = – L(\(\Delta \mathrm{I} / \Delta \mathrm{t}\))
= -2 x (-5) वोल्ट
= 10 वोल्ट

प्रश्न 4.
R त्रिज्या की एक बड़ी कुण्डली तथा r त्रिज्या की छोटी कुण्डली एक-दूसरे के निकट रखी हैं। यदि इस युग्म के लिये अन्योन्य प्रेरण गुणांक 1 मिली. हेनरी हो तो बड़ी कुण्डली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स क्या होगा जबकि छोटी कुण्डली में 0.5A की धारा प्रवाहित होती है? जब छोटी कुण्डली में धारा शून्य हो तो बड़ी कुण्डली पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
दिया है:
M = 1 मिली. हेनरी I, = 0.5 A
= 10-3 हेनरी
∴ बड़ी कुण्डली से संबद्ध चुम्बकीय फ्लक्स
Φ2 = MI1 = 105 x 0.5
= 5.0 x 104 वेबर
जब छोटी कुण्डली में फ्लक्स में कमी के कारण बड़ी उत्पन्न होगा। धारा शून्य हो जाती है तो चुम्बकीय कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल

प्रश्न 5.
किसी कुण्डली के तल से लम्बवत् गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स निम्नलिखित सम्बन्ध के अनुसार समय के साथ बदल रहा है Φ = (5t3 + 4t2 + 2t – 5) वेबर = 2 सेकण्ड पर कुण्डली में प्रेरित धारा का मान ज्ञात कीजिये, जबकि कुण्डली का प्रतिरोध 5 ओम है।
उत्तर:
कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण
ε = \(\frac{\mathrm{d} \phi}{\mathrm{dt}}\) = \(\frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) (5t3 + 4t2 + 2t5)
= 5 × 3t2 + 4 × 2t + 2 × 1 – 0 = ( 15t2 + 8t + 2) वोल्ट
t = 2 सेकण्ड पर ε = 60 + 16 + 2 = 78 वोल्ट
वोल्टकुण्डली का प्रतिरोध R = 52
अतः कुण्डली में प्रेरित धारा I = \(\frac{\varepsilon}{\mathrm{R}}\)
= 15.6 ऐम्पियर

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण

प्रश्न 6.
ताँबे की एक वृत्ताकार चकती की त्रिज्या 10 सेमी. है। यह इसके केन्द्र से गुजरने वाली तथा इसके तल के लम्बवत् अक्ष के परितः 20 रेडियन/सेकण्ड की दर से घूम रही है। 0.2 टेस्ला का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र चकती के लम्बवत् कार्य कर रहा है। (i) चकती की अक्ष तथा परिधि के बीच उत्पन्न विभवान्तर ज्ञात कीजिए। (ii) यदि चकती का प्रतिरोध 202 हो तो प्रेरितं धारा क्या होगी?
उत्तर:
यहाँ चकती की त्रिज्या R = 10 सेमी
= 0.10 मीटर,
चकती का कोणीय वेग = 20π रे/से,
चुम्बकीय क्षेत्र B = 0.2 टेस्ला, चकती का प्रतिरोध R = 2Ω है।
(i) चकती द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र को काटते हुए एक चक्कर पूरा करने का समय ∆t = 2πω तथा एक चक्कर पूरा करने में तय किया गया क्षेत्रफल ∆A = πr2 होगा अतः इससे बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन के कारण इसकी अक्ष तथा परिधि के बीच उत्पन्न विभवान्तर
(गतिक विद्युत वाहक बल)
V= | ε | = \(\frac{\Delta \phi}{\Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{\Delta(\mathbf{B A})}{\Delta \mathrm{t}}\) = B.\(\frac{\Delta(\mathbf{B A})}{\Delta \mathrm{t}}\)
= \(\frac{\mathrm{B} \times \pi r^2}{2 \pi / \omega}\) = 1/2Br2ω
ज्ञात मान रखने पर,
V = 1⁄2(0.2)(0.10)ω x 20 वोल्ट
= 0.1 x (0.10)ω × 20 x 3.14 वोल्ट = 0.0628 वोल्ट

(ii) प्रेरित धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) =
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 20
= 0.0314 ऐम्पियर

प्रश्न 7.
10 सेमी. भुजा का धातु तार का एक वर्गाकार लूप जिसका प्रतिरोध 1 ओम है, एक चुम्बकीय क्षेत्र में नियत वेग Vg 200 वेबर / मीटर2 के एकसमान से चित्र की भाँति चलाया जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर है। यह लूप 362 मान के प्रतिरोधकों के एक नेटवर्क से जुड़ा है तार OS तथा तार PQ के प्रतिरोध नगण्य हैं। लूप में 1 ऐम्पियर की स्थायी धारा प्रवाहित होने के लिए लूप की चाल का मान क्या होना चाहिए? लूप में धारा की दिशा भी बताइए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 6 वैद्युत चुंबकीय प्रेरण 21
उत्तर:
चित्र से स्पष्ट है कि प्रतिरोधों का नेटवर्क एक सन्तुलित व्हीटस्टोन सेतु है। अतः AC भुजा (विकर्ण) में लगा 302 प्रतिरोध प्रभावहीन होगा। QA व AS आपस में श्रेणीक्रम में हैं। इसलिये श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध माना R1 है
∴ R1 = 3 + 3 = 62
और QC व CS के श्रेणीक्रम संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R2 (माना) = 3 + 3 = 6Ω
अब R1 व R2 समान्तर क्रम में होंगे जिसका तुल्य प्रतिरोध
R = 3.002
अर्थात् लूप का प्रतिरोध 152 है।
अतः सम्पूर्ण परिपथ (नेटवर्क सहित लूप) का कुल प्रतिरोध R = R’ + 1 = 32 + 12 = 42
चुम्बकीय क्षेत्र में लूप की गति के कारण परिपथ में उत्पन्न
प्रेरित विद्युत वाहक बल ε = Bv0l
अतः
लूप में धारा I = ε/R = \(\frac{\mathrm{B} v_0 l}{\mathrm{R}}\)
∴ लूप की चाल Vo = \(\frac{\mathrm{I} \times \mathrm{R}}{\mathrm{B} \times l}\) …………(1)
यहाँ I = 1 मिली. ऐम्पियर = 10-3 ऐम्पियर, R = 4Ω, B = 2 वेबर/मीटर2 तथा l = 0.1 मीटर
ये सभी मान समीकरण (1) में रखने पर
v = \(\left(\frac{10^{-3} \times 4}{2 \times 0.1}\right)\) मी./से.
= 2.0 x 10-2
= 2 सेमी / से.

प्रश्न 8.
50/π वर्ग सेमी. आकार की 200 फेरों की वर्गाकार कुण्डली 2.0 वेबर / मीटर2 के चुम्बकीय क्षेत्र में 1200 चक्कर प्रति मिनट की दर से घुमायी जा रही है। कुण्डली में प्रेरित अधिकतम वि. वा. बल का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
A = 50\(\frac{50}{\pi}\) वर्ग सेमी.
A = \(\frac{50}{\pi}\) x 104 वर्ग मीटर
N = 200 फेरे
B = 2.0 वेबर/मीटर2
f = \(\frac{1200}{60}\) चक्कर/से.
= 20 चक्कर/से.
अतः ω = 2πf = 2 x π x 20 = 40π रेडियन / से.
वि.वा. बल का अधिकतम मान ε0 = NBAω
∴ ε0 = 200 × 2 × \(\frac{50}{\pi}\) x 104 x 40
= 80 वोल्ट

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक दण्ड चुम्बक उत्तर-दक्षिण दिशा में इस प्रकार रखा जाता है कि उसका उत्तरी ध्रुव उत्तर की ओर है। शून्य चुम्बकीय क्षेत्र के बिन्दुओं की दिशा चुम्बक के केन्द्र से किस ओर होगी
(अ) उत्तर-दक्षिण
(ब) पूर्व-पश्चिम
(स) उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण-पश्चिम
(द) उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण-पूर्व
उत्तर:
(ब) पूर्व-पश्चिम

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 2.
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है:
(अ) चुम्बकीय ध्रुवों पर
(ब) भौगोलिक ध्रुवों पर
(स) प्रत्येक स्थान पर
(द) चुम्बकीय निरक्ष पर
उत्तर:
(द) चुम्बकीय निरक्ष पर

प्रश्न 3.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर रखी चुम्बकीय सूई को 60° घुमाने में W कार्य करना पड़ता है। इस स्थिति में सूई को बनाये रखने के लिये आवश्यक बल आघूर्ण होगा:
(अ) √3W
(ब) W
(स) \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) W
(द) 2W
उत्तर:
(अ) √3W

प्रश्न 4.
एक r त्रिज्या की वृत्ताकार कुण्डली में i धारा बह रही है। इसमें तार के n फेरे हैं। इसका चुम्बकीय आघूर्ण. r के साथ परिवर्तित होता है। जैसे:
(अ) \(\frac{1}{\mathrm{r}^2}\)
(ब) \(\frac{1}{r}\)
(स) r
(द) r2
उत्तर:
(द) r2

प्रश्न 5.
एक चुम्बकीय लोहे के तार की लम्बाई । एवं चुम्बकीय आघूर्ण m है । यदि इसे L आकृति में मोड़ने पर इसकी प्रत्येक भुजा समान लम्बाई की रहती है तो नवीन आकृति का चुम्बकीय आघूर्ण होगा:
(अ) m
(ब) \(\frac{\mathrm{m}}{2}\)
(स) √2m
(द) \(\frac{\mathrm{m}}{\sqrt{2}}\)
उत्तर:
(द) \(\frac{\mathrm{m}}{\sqrt{2}}\)

प्रश्न 6.
एक पतले दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण M है। यदि इसे पहले लम्बाई के लम्बवत् और फिर चौड़ाई के लम्बवत् काटा जाये तो प्राप्त टुकड़े का चुम्बकीय आघूर्ण होगा:
(अ) \(\frac{\mathrm{m}}{2}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{m}}{4}\)
(स) m
(द) 2m
उत्तर:
(ब) \(\frac{\mathrm{m}}{4}\)

प्रश्न 7.
यदि दो एकांक प्रबलता (1-Am) के चुम्बकीय ध्रुव के मध्य की दूरी 1 मीटर है अतः इनके मध्य लगने वाले बल का मान है:
(अ) 4π x 107 N
(ब) \(\frac{4 \pi}{10^{-7}}\) N
(स) 107 N
(द) \(\frac{10^{-7}}{4 \pi}\) N
उत्तर:
(स) 107 N

प्रश्न 8.
एक छोटे चुम्बक के कारण r दूरी पर उसकी अक्षीय एवं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की निरक्षीय स्थिति में स्थित बिन्दुओं तीव्रताओं का अनुपात होगा:
(अ) 1 : 2
(ब) 2 : 1
(स) 1 : 4
(द) 4 : 1
उत्तर:
(ब) 2 : 1

प्रश्न 9.
चुम्बकीय आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\) के एक चुम्बक दण्ड को \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर लगने वाले बल आघूर्ण का मान होगा:
(अ) \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\) × \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\)
(ब) \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) × \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\)
(स) \(\overrightarrow{\mathrm{m}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{B}}\)
(द) \(\frac{\overrightarrow{\mathrm{m}} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}}{\sqrt{2}}\)
उत्तर:
(अ) \(\overrightarrow{\mathrm{m}}\) × \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 10.
नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण मुख्य क्वान्टम संख्या n पर किस प्रकार निर्भर करता है?
(अ) μ α n
(ब) μ α 1/n
(स) μ α n2
(द) μ α \(\frac{1}{\mathrm{n}^2}\)
उत्तर:
(अ) μ α n

प्रश्न 11.
एक वर्गाकार धारावाही लूप एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में लटकाया गया, जो इसके तल में कार्यरत है। यदि लूप की एक भुजा पर बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) है, तो शेष तीन भुजाओं पर परिणामी बल होगा:
(अ) 3 \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\)
(ब) \(-\vec{F}\)
(स) \(-3 \vec{F}\)
(द) \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\)
उत्तर:
(ब) \(-\vec{F}\)

प्रश्न 12.
किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर एवं भौगोलिक याम्योत्तर के मध्य कोण कहलाता है:
(अ) नमन कोण
(ब) क्रान्तिक कोण
(स) दिक्पात कोण
(द) नति कोण।
उत्तर:
(स) दिक्पात कोण

प्रश्न 13.
चुम्बकीय ध्रुवों पर नति का कोण होता है:
(अ) 0°
(ब) 30°
(स) 45°
(द) 90°
उत्तर:
(द) 90°

प्रश्न 14.
यदि किसी स्थान पर पृथ्वी के क्षैतिज घटक Bv के मान समान हैं। अतः उस स्थान पर नमन क्षेत्र के ऊर्ध्वाधर घटक BH एवं कोण का मान है अतः उस स्थान पर नमन कोण का मान है:
(अ) 30°
(ब) 45°
(स) 60°
(द) 90°
उत्तर:
(ब) 45°

प्रश्न 15.
चुम्बकीय सुई सुरक्षित रह सकती है:
(अ) लोहे के बक्से में
(ब) लकड़ी के बक्से में
(स) धातु के बक्से में
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) लोहे के बक्से में

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बक में क्रोड कच्चे इसकी लोहे की बनायी जाती है, क्योंकि इसकी
(अ) प्रवृत्ति तथा धारणशीलता अधिक होती है।
(ब) प्रवृत्ति अधिक तथा धारणशीलता कम होती है।
(स) प्रवृत्ति व धारणशीलता दोनों कम होती हैं।
(द) धारणशीलता अधिक व प्रवृत्ति कम होती है।
उत्तर:
(ब) प्रवृत्ति अधिक तथा धारणशीलता कम होती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 17.
ताँबा कैसा पदार्थ है?
(अ) प्रतिचुम्बकीय
(ब) अनुचुम्बकीय
(स) लौह चुम्बकीय
(द) अचुम्बकीय
उत्तर:
(अ) प्रतिचुम्बकीय

प्रश्न 18.
चुम्बकीय पदार्थों का वह व्यवहार जिसके फलस्वरूप चुम्बकीय प्रेरण B चुम्बकन क्षेत्र H से पीछे रहता है, कहलाता है:
(अ) चुम्बकीय प्रवृत्ति
(ब) चुम्बकीय शैथिल्य
(स) निग्राहिता
(द) धारणशीलता।
उत्तर:
(ब) चुम्बकीय शैथिल्य

प्रश्न 19.
विपरीत दिशा में चुम्बकन क्षेत्र H का यह मान जिस पर चुम्बकीय प्रेरण B का मान शून्य हो जाता है, कहलाता है:
(अ) शैथिल्य हास
(ब) धारणशीलता
(स) निग्राहिता
(द) चुम्बकशीलता
उत्तर:
(स) निग्राहिता

प्रश्न 20.
अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति x एवं परम ताप T में सम्बन्ध है:
(अ) \(\chi \propto \frac{1}{T}\)
(ब) χ α T
(स) χ α \(\frac{1}{T^2}\)
(द) χ α T2
उत्तर:
(अ) \(\chi \propto \frac{1}{T}\)

प्रश्न 21.
अल्प चुम्बकन क्षेत्र (H) के लिए चुम्बकन I किस प्रकार निर्भर करता है:
(अ) I α H
(ब) I α \(1 / \mathrm{H}^2\)
(स) I α \(1 / \mathrm{H}\)
(द) I α H2
उत्तर:
(अ) I α H

प्रश्न 22.
चुम्बकीय प्रवृत्ति तथा चुम्बकनशीलता में सही सम्बन्ध है:
(अ) Xm = 14 – 1
(ब) Xm = 4 + 1
(स) X = +1
(द) Xm
उत्तर:
(अ) Xm = 14 – 1

प्रश्न 23.
पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों तथा विषुवत् पर नमन कोण क्रमशः होते हैं:
(अ) 0° तथा 90°
(ब) 90° तथा 0°
(स) 180° तथा 0°
(द) 0° तथा 180°
उत्तर:
(ब) 90° तथा 0°

प्रश्न 24.
एक विद्युत चुम्बक बना होता है:
(अ) Cu का
(ब) Al का
(स) स्टील का
(द) नरम लोहे का
उत्तर:
(द) नरम लोहे का

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 25.
निम्न में सही संबंध है:
(अ) \(\frac{B}{\mu_0}\) + I = H
(ब) \(\frac{B}{\mu_0}\) – 1 = H
(स) \(\frac{B}{\mu_0}\) + H = I
(द) \(\frac{B}{\mu_0}\) + H = -1
उत्तर:
(ब) \(\frac{B}{\mu_0}\) – 1 = H

प्रश्न 26.
लौह चुम्बकीय पदार्थों के लिये:
(अ) पारगम्यता बहुत अधिक तथा प्रवृत्ति धनात्मक व अधिक होती है।
(ब) पारगम्यता बहुत अधिक तथा प्रवृत्ति ऋणात्मक व कम होती है।
(स) पारगम्यता बहुत कम तथा प्रवृत्ति धनात्मक व अधिक होती है।
(द) पारगम्यता बहुत कम तथा प्रवृत्ति ऋणात्मक व कम होती है।
उत्तर:
(अ) पारगम्यता बहुत अधिक तथा प्रवृत्ति धनात्मक व अधिक होती है।

प्रश्न 27.
पृथ्वी के तल पर क्षैतिज क्षेत्र वाले बिन्दुओं को मिलाने वाली रेखा को कहते हैं:
(अ) चुम्बकीय याम्योत्तर
(ब) चुम्बकीय अक्ष
(स) चुम्बकीय रेखा
(द) चुम्बकीय निरक्ष
उत्तर:
(द) चुम्बकीय निरक्ष

प्रश्न 28.
चुम्बकीय याम्योत्तर और भौगोलिक याम्योत्तर के बीच के कोण को कहते हैं:
(अ) चुम्बकीय नति
(ब) चुम्बकीय दिक्पात
(स) चुम्बकीय आघूर्ण
(द) चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति
उत्तर:
(ब) चुम्बकीय दिक्पात

प्रश्न 29.
निम्न में से कौनसा कथन यथार्थ नहीं है?
(अ) प्रतिचुम्बकत्व सब पदार्थों का गुण है।
(ब) क्यूरी ताप पर लौह-चुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय बन जाते हैं।
(स) वे परमाणु जिनकी आन्तरिक कक्षायें अपूर्ण होती हैं, अनुचुम्बकीय होते हैं।
(द) लौह-चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति X क्यूरी ताप पर शून्य होती है।
उत्तर:
(द) लौह-चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति X क्यूरी ताप पर शून्य होती है।

प्रश्न 30.
आपेक्षिक पारगम्यता की इकाई होती है:
(अ) वेबर/ मी.
(ब) इकाई रहित
(स) हेनरी/मीटर
(द) ऐम्पियर/मीटर
उत्तर:
(ब) इकाई रहित

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 31.
किसी पदार्थ की अनुचुम्बकीय प्रवृत्ति χ का मान 9 है तो आपेक्षिक पारगम्यता μr का मान होगा:
(अ) 10
(ब) 0.1
(स) 9
(द) 11
उत्तर:
(अ) 10

प्रश्न 32.
1 टेसला बराबर होता है:
(अ) 10-7 गाउस
(ब) 10-4 गाउस
(स) 104 गाउस
(द) 10-8 गाउस
उत्तर:
(ब) 10-4 गाउस

प्रश्न 33.
ताप जिससे नीचे चुम्बकीय पदार्थ लौह-चुम्बकीय तथा जिसके ऊपर अनुचुम्बकीय होता है, कहलाता है:
(अ) उत्क्रमण ताप
(ब) केल्विन ताप
(स) क्यूरी ताप
(द) उदासीन ताप
उत्तर:
(स) क्यूरी ताप

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
उस भौतिक राशि का नाम बताइये जिसका मात्रक न्यूटन मीटर टेसला है यह अदिश राशि है अथवा सदिश?
उत्तर:
τmax = mB = m = \(\frac{\tau_{\max }}{\mathrm{B}}\)
इस सूत्र के आधार पर M का SI मात्रक = न्यूटन मीटर टेसला-1
अतः न्यूटन मीटर टेसला-1 चुम्बकीय आघूर्ण का SI मात्रक है। अतः एक सदिश राशि है।

प्रश्न 2.
समरूप चुम्बकीय क्षेत्र में एक चुम्बकीय द्विध्रुव को किस प्रकार रखा जाये ताकि इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम हो?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र के विसमान्तर अर्थात् इसका चुम्बकीय आघूर्ण \(\overrightarrow{\mathrm{m}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{B}}\) की दिशा के विपरीत दिशा में हो।
इस स्थिति में
θ = 180° तथा U = mB cosθ
U = -mB cos 180° = -mB x (-1) U = mB

प्रश्न 3.
चुम्बकीय याम्योत्तर किसे कहते हैं?
उत्तर:
दण्ड चुम्बक के चुम्बकीय अक्ष के लम्बवत् गुजरने वाले ऊर्ध्व तल को चुम्बकीय याम्योत्तर कहते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 4.
चुम्बकीय आघूर्ण को परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
किसी चुम्बक की ध्रुव प्राबल्यता एवं प्रभावी लम्बाई के गुणनफल को चुम्बकीय आघूर्ण कहते हैं। यह एक सदिश राशि है जिसकी दिशा दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है। इसका मात्रक ऐम्पियर मीटर होता है।

प्रश्न 5.
चुम्बकीय आघूर्ण \(\vec{m}\) के एक छोटे दण्ड चुम्बक से उसके अक्ष पर दूरी पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक लिखिये
उत्तर:
\(\vec{B}\) = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) × \(\frac{2 \overrightarrow{\mathrm{m}}}{\mathrm{r}^3}\)

प्रश्न 6.
चुम्बकीय आघूर्ण \(\vec{M}\) के छोटे दण्ड चुम्बक के निरक्ष पर r दूरी पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
\(\vec{B}\) = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) × \(\left(\frac{-\vec{m}}{r^3}\right)\)

प्रश्न 7.
लघुदण्ड चुम्बक के मध्य बिन्दु से अक्षीय तथा निरक्षीय स्थिति में समान दूरी पर स्थित बिन्दुओं पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रताओं में क्या अनुपात होता है?
उत्तर:
2 : 1
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 1

प्रश्न 8.
‘चुम्बकीय बल रेखायें बन्द वक्र बनाती हैं क्यों?
उत्तर:
चूँकि एकल चुम्बकीय ध्रुव का कोई अस्तित्व नहीं होता है अर्थात् उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव साथ-साथ होते हैं एवं चुम्बकीय बल रेखायें उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं तथा दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं इसलिये ये बन्द वक्र होती हैं।

प्रश्न 9.
उदासीन बिन्दु की परिभाषा दीजिये।
उत्तर:
ऐसे बिन्दु जिन पर चुम्बक का चुम्बकीय क्षेत्र तथा पृथ्वी का क्षैतिज चुम्बकीय क्षेत्र का परिणामी क्षेत्र शून्य होता है, उन्हें उदासीन बिन्दु कहते हैं।

प्रश्न 10.
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक HE ऊर्ध्वाधर घटक ZE एवं इस स्थान पर नति कोण I के मध्य सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
tan I = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)

प्रश्न 11.
वर्ष के किस माह में दिक्पात कोण का मान उत्तरी गोलार्द्ध में न्यूनतम एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में अधिकतम होता है?
उत्तर:
अगस्त माह में

प्रश्न 12.
दिक्पात कोण किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के कोण को दिक्पात कोण कहते हैं।

प्रश्न 13.
एक छड़ चुम्बक को किस प्रकार रखने पर उदासीन बिन्दु निरक्ष पर एवं अक्ष पर प्राप्त होगा?
उत्तर:
(i) चुम्बकीय याम्योत्तर में चुम्बक का उत्तरी ध्रुव उत्तर की ओर देखने पर उदासीन बिन्दु निरक्ष पर प्राप्त होता है।
(ii) चुम्बकीय याम्योत्तर में चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव उत्तर की ओर रखने पर उदासीन बिन्दु अक्ष पर बनता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 14.
माध्यम की पारगम्यता एवं चुम्बकीय प्रवृत्ति में सम्बन्ध लिखो।
उत्तर:
μ = μ0(1 + x)

प्रश्न 15.
चुम्बकीय क्षेत्र B चुम्बकन क्षेत्र H एवं माध्यम की पारगम्यता μ के बीच सम्बन्ध लिखो।
उत्तर:
μ = \(\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}\)

प्रश्न 16.
पृथ्वी के चुम्बकीय तत्व क्या हैं?
उत्तर:
(1) दिक्पात कोण
(2) नति कोण
(3) क्षैतिज घटक।

प्रश्न 17.
पृथ्वी तल पर किस स्थान पर नति कोण का मान 90° होता है?
उत्तर:
पृथ्वी के ध्रुवों पर

प्रश्न 18.
पृथ्वी तल पर कहाँ पर नति कोण का मान शून्य होता हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय निरक्ष पर।

प्रश्न 19.
पृथ्वी तल के किस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक शून्य होता है तथा क्यों?
उत्तर:
चुम्बकीय निरक्ष पर (ZE = BEsin θ = BE sin 0° = 0]

प्रश्न 20.
चुम्बकीय पदार्थ जो किसी असमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रतिकर्षण बल अनुभव करते हैं, क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ।

प्रश्न 21.
अनुचुम्बकीय पदार्थ लिये कोई दो उदाहरण लिखिये।
उत्तर:
(i) कॉपर, क्लोराइड
(ii) मैंगनीज डाइऑक्साइड

प्रश्न 22.
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के कोई दो उदाहरण लिखिये।
उत्तर:
(i) पानी
(ii) पारा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 23.
चुम्बकन तीव्रता की परिभाषा लिखिये।
उत्तर:
पदार्थ के एकांक आयतन में उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण (m) को चुम्बकन की तीव्रता कहते हैं।
\(\overrightarrow{\mathrm{I}}\) = \(\frac{\overrightarrow{\mathrm{m}}}{\mathrm{V}}\)
यह सदिश राशि है इसका मात्रक A/m है।

प्रश्न 24.
चुम्बकीय पारगम्यता की परिभाषा लिखिये।
उत्तर:
पदार्थ के अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण B एवं चुम्बकीय क्षेत्र H के अनुपात को पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता कहते हैं।

प्रश्न 25.
चुम्बकीय प्रेरण B, चुम्बकीय क्षेत्र H एवं चुम्बकन तीव्रता I के मध्य का सम्बन्ध बतलाइये।
एवं
उत्तर:
B = (μ0)(H + I ) यहाँ μ0 = निर्वात् की चुम्बकशीलता।

प्रश्न 26.
आपेक्षिक पारगम्यता μr चुम्बकीय पारगम्यता μ निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता μ0 के मध्य का संबंध लिखिये।
उत्तर:
μr = \(\frac{\mu}{\mu_0}\) या μ = μ0 μr

प्रश्न 27.
धारणशीलता किसे कहते हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र H का मान शून्यं करने पर भी पदार्थ में चुम्बकत्व शेष बने रहने के गुण को धारणशीलता कहते हैं।

प्रश्न 28.
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के परमाणु का नेट चुम्बकीय आघूर्ण कितना होता है?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 29.
किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकन तीव्रता ताप साथ किस प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर:
यह परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 30.
विद्युत चुम्बक बनाने के लिये नर्म लोहा क्यों प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
नर्म लोहे की चुम्बकशीलता अधिक तथा धारणशीलता कम होने के कारण।

प्रश्न 31.
जब किसी प्रतिचुम्बकीय पदार्थ को ठण्डा किया जाता है तो इसके चुम्बकत्व (Magnetisation) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकन तीव्रता ताप पर निर्भर नहीं करती। अतः ठण्डा करने का इसके चुम्बकन तीव्रता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 32.
किसी B-H वक्र के लिये शैथिल्य हास ज्ञात करने का सूत्र लिखिये।
उत्तर:
शैथिल्य हास (B-H) वक्र का क्षेत्रफल x पदार्थ की आयतन आवृति।

प्रश्न 33.
स्थायी चुम्बक बनाने के लिये इस्पात का उपयोग करते हैं। क्यों?
उत्तर:
चूँकि इस्पात की निग्राहिता एवं धारणशीलता अधिक है। यही कारण है कि इसका उपयोग स्थाई चुम्बक बनाने में किया जाता है।

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प्रश्न 34.
क्यूरी का नियम क्या है?
उत्तर:
क्यूरी के नियम के अनुसार अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति का मान उसके परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात्
χ α \(\frac{1}{\mathrm{~T}}\)
या χ = \(\frac{\mathrm{C}}{\mathrm{T}}\)
यहाँ ‘C’ एक नियतांक है जिसे क्यूरी नियतांक कहते हैं।

प्रश्न 35.
क्यूरी वाइस का नियम क्या है ?
उत्तर:
लौह-चुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति की ताप पर निर्भरता क्यूरी – वाइस नियम द्वारा व्यक्त की जाती है।
x = \(\frac{C}{T-T_c}\)
यहाँ Tc = क्यूरी ताप है।

प्रश्न 36.
किसी चुम्बकीय पदार्थ का चुम्बकीय क्षेत्र में एक चक्र पूरा होता है तो उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण B, चुम्बकीय क्षेत्र H से पीछे रहता है। चुम्बकीय प्रेरण के पिछड़ने को क्या कहते हैं?
उत्तर:
शैथिल्यता।

प्रश्न 37.
क्यूरी ताप की परिभाषा दीजिए। लोहे के लिए इसका मान लिखिए।
उत्तर:
क्यूरी ताप – वह ताप जिस पर या जिसके नीचे के ताप पर लौह- चुम्बकीय पदार्थ लौह-चुम्बकीय पदार्थ की तरह व्यवहार करता है तथा उससे ऊपर के ताप पर लौह चुम्बकीय पदार्थ अनुचुम्बकीय पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है, उस ताप को क्यूरी ताप कहते हैं। इसको हम Tc से प्रदर्शित करते हैं।
लोहे के लिए क्यूरी ताप Tc = 770°C (अर्थात 1043K) होता है।

प्रश्न 38.
लोहे का क्यूरी ताप कितना होता है?
उत्तर:
क्यूरी ताप 1043K

प्रश्न 39.
डोमेन सिद्धान्त (Domain Theory) के आधार पर कौनसे चुम्बकीय पदार्थों के चुम्बकत्व की व्याख्या की जाती है?
उत्तर:
लौह-चुम्बकीय पदार्थ।

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प्रश्न 40.
-0.2 चुम्बकीय प्रवृत्ति वाले चुम्बकीय पदार्थ की आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
चुम्बकीय प्रवृत्ति x = 0.2
आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता μr = ?
μr = 1 + x
= 1 – 0.2
= 0.8

प्रश्न 41.
जब किसी छड़ चुम्बक को उसकी अक्ष के लम्बवत् दो बराबर भागों में काटा जाता है, तो छड़ चुम्बक के (i) ध्रुव सामर्थ्य तथा (ii) चुम्बकीय आघूर्ण में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
(i) यदि किसी दण्ड चुम्बक को उसकी लम्बाई के अनुदिश दो समान भागों में काटा जाये तो अनुप्रस्थ काट आधा हो जाने के कारण प्रत्येक टुकड़े के दोनों ध्रुवों की ध्रुव प्राबल्यता आधी हो जायेगी। (ii) ऐसी स्थिति में प्रत्येक टुकड़े का चुम्बकीय आघूर्ण
m = qm x 2l
यहाँ पर
qm= \(\frac{\mathrm{m}}{2}\) अतः
m = \(\frac{\mathrm{q}_{\mathrm{m}}}{2}\) x 2l = qml = \(\frac{\mathrm{m}}{2}\) होगी।
चुम्बकीय आघूर्ण आधा हो जायेगा।

प्रश्न 42.
स्थायी चुम्बक बनाने के लिये प्रयुक्त पदार्थों की निग्राह्यता उच्च क्यों होनी चाहिये?
उत्तर:
इसका कारण है कि उच्च निग्राहयता के कारण ही पदार्थ का चुम्बकत्व ताप परिवर्तन के कारण नष्ट नहीं होता है।

प्रश्न 43.
इस्पात (steel) या एलनिको का प्रयोग स्थायी चुम्बक बनाने के लिये क्यों किया जाता है?
उत्तर:
इनकी निग्राह्यता उच्च होती है।

प्रश्न 44.
एक चुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति 1.9 x 105 है। यह किस प्रकार का पदार्थ है?
उत्तर:
क्योंकि चुम्बकीय प्रवृत्ति कम तथा धनात्मक है। अतः दिया गया पदार्थ अनुचुम्बकीय पदार्थ है।

प्रश्न 45.
एक स्थायी चुम्बक बनाने का सुगम तरीका संक्षेप में लिखिये स्थायी चुम्बक बनाने के लिये चुने गये उचित पदार्थों के दो गुण लिखिये।
उत्तर:
स्थायी चुम्बक बनाने का सबसे सुगम तरीका है कि एक फौलाद की छड़ को लेकर एक चुम्बक से रगड़ा जाये। स्थायी चुम्बक बनाने के लिये चुने गये उचित पदार्थ में निम्नलिखित दो गुण होने चाहिए
(i) उच्च धारणशीलता
(ii) उच्च निग्राहिता।

प्रश्न 46.
यदि चुम्बकीय एकल ध्रुवों का अस्तित्व होता तो चुम्बकत्व सम्बन्धी गाउस का नियम क्या रूप ग्रहण करता?
उत्तर:
किसी भी बंद सतह से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स इस स्थिति में शून्य न होकर ध्रुव) है।
\(\int_{\mathrm{S}} \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d \mathrm{~S}}\) = μ0qm, जहाँ qm S से घिरा चुम्बकीय आवेश (एकल

प्रश्न 47.
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ किसे कहते हैं ? एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जो पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में मामूली रूप से चुम्बकित हो जाते हैं तथा किसी शक्तिशाली चुम्बक के सिरों के पास लाये जाने पर कुछ प्रतिकर्षित होते हैं, प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहलाते हैं। इन पदार्थों का यह गुण प्रतिचुम्बकत्व कहलाता है।
उदाहरण: जस्ता (Zn). ताँबा (Cu), चाँदी (Ag), सोना (Au), आदि।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक चुम्बक की परिभाषा लिखिये और इसके दिशा निर्देशन व ध्रुव प्राबल्यता का गुण लिखिये।
उत्तर:
वह पदार्थ जो दूसरे चुम्बकीय पदार्थ लोहा आदि को आकर्षित कर सके और जब उसे स्वतन्त्र रूप से लटकाया जाए, तो यह उत्तर-दक्षिण दिशा में विराम कर सके इसके दो समान एवं विपरीत चुम्बकीय ध्रुव कुछ दूरी से विलगित होते हैं।
दिशा निर्देशन गुण: जब किसी छड़ चुम्बक को स्वतंत्रतापूर्वक निलम्बित किया जाता है तो यह निश्चित दिशा में स्थिर हो जाता है, इसका एक सिरा उत्तर की ओर और दूसरा सिरा दक्षिण की ओर संरेखित होता है जिन्हें कि क्रमशः उत्तरी ध्रुव (N-Pole) तथा दक्षिणी ध्रुव (S-Pole) कहते हैं छड़ चुम्बक सदैव उत्क्षण (NS) दिशा प्रदर्शित करती है।
ध्रुव प्राबल्यता: चुम्बकीय ध्रुवों की चुम्बकत्व की प्रबलता को ध्रुव प्राबल्यता कहते हैं। छड़ चुम्बक के दोनों ध्रुवों की ध्रुव प्राबल्य समान होती है। यदि छड़ चुम्बक को उसके अक्ष के लम्बवत् दो भागों में विभक्त कर दिया जाये तो प्रत्येक भाग के ध्रुवों की ध्रुव प्राबल्य लगभग पूर्ण समान होगी लेकिन यदि छड़ चुम्बक को उसके अक्ष के अनुदिश दो बराबर भागों में अलग कर दिया जाये तो प्रत्येक भाग की ध्रुव प्राबल्य मूल छड़ चुम्बक की ध्रुव प्राबल्य की आधी होगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 2.
चुम्बकीय बल रेखायें किसकी सहायता से खींची जाती हैं? इनकी चार प्रमुख विशेषतायें लिखिये।
उत्तर:
चुम्बकीय बल रेखायें लोहे के बुरादे अथवा चुम्बकीय सूई की सहायता से खींची जा सकती हैं। इनकी प्रमुख विशेषतायें निम्न हैं
(1) चुम्बकीय क्षेत्र में जिस स्थान पर गुजरने वाली बल रेखाओं की संख्या जितनी अधिक होती है, उतना ही उस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र होगा।
(2) दो बल रेखायें एक-दूसरे को नहीं काटती हैं।
(3) बल रेखा के किसी बिन्दु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती है।
(4) चुम्बक के बाहर ये चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से चलकर दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती हैं। चुम्बक के भीतर इनका मार्ग दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होता है।

प्रश्न 3.
किसी m चुम्बकीय आघूर्ण वाले चुम्बक को पहले लम्बाई के लम्बवत् एवं फिर चौड़ाई के लम्बवत् n बराबर भागों में विभक्त किया जाये तो प्रत्येक भाग के चुम्बकीय आघूर्ण की गणना करो।
उत्तर:
प्रत्येक भाग का चुम्बकीय आघूर्ण
= \(\frac{\mathrm{m}}{\mathrm{n}}\) x \(\frac{L}{n}\) = \(\frac{\mathrm{mL}}{\mathrm{n}^2}\)

प्रश्न 4.
चुम्बकीय याम्योत्तर से क्या समझते हो?
उत्तर:
किसी स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर वह काल्पनिक ऊर्ध्वाधर तल है जो कि स्वतन्त्रतापूर्वक लटके हुये चुम्बक या कीलकित चुम्बकीय अक्ष में से गुजरता है। यह उस स्थान पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करता है तथा उसके चुम्बकीय ध्रुवों में से गुजरता है।

प्रश्न 5.
चुम्बकीय क्षेत्र स्थित छड़ चुम्बक के धुवों पर कार्यरत बल का मान व दिशा लिखो।
उत्तर:
जब किसी छड़ चुम्बक को चुम्बकीय क्षेत्र में स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाया जाता है या कीलकित किया जाता है तो स्थिर अवस्था में इसके दोनों ध्रुवों पर एक बल कार्य करता है। इसकी दिशा चुम्बकीय क्षेत्र के समान्तर होती है। लेकिन ध्रुव N पर चुम्बकीय क्षेत्र की ओर जबकि ध्रुव S पर चुम्बकीय क्षेत्र के विपरीत दिशा में होती है। इस बल का मान \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = qm \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) होता है। अतः qm का मात्रक न्यूटन /टेसला होगा।

प्रश्न 6.
चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व क्या है? चुम्बकीय फ्लक्स एवं चुम्बकीय प्रेरण के मध्य संबंध स्थापित कीजिये।
उत्तर:
चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व बल रेखाओं लम्बवत् रखे इकाई क्षेत्रफल के पृष्ठ से गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या को चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व कहते हैं। यह एक सदिश राशि है
जिसे \(\vec{B}\) द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसे चुम्बकीय क्षेत्र या चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता या चुम्बकीय प्रेरण भी कहते हैं। चुम्बकीय प्रेरण का मात्रक वेबर/ मीटर2 या टेसला या न्यूटन / ऐम्पियर मीटर है।
यदि \(\vec{B}\) तीव्रता वाले चुम्बकीय क्षेत्र में किसी बिन्दु पर अल्प क्षेत्रफल δS वाला पृष्ठ स्थित है, तो उससे पारित या सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स δ¢B होगा।
δ¢B = \(\vec{B}\).δ\(\overrightarrow{\mathrm{S}}\) = Bδscosθ
तथा कुल सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स ¢B = \(\int_S\) \(\vec{B}\)δ\(\overrightarrow{\mathrm{S}}\)
चुम्बकीय फ्लक्स एक अदिश राशि है जबकि चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व एक सदिश राशि है।

प्रश्न 7.
एक दण्ड चुम्बक किसी एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखी है कि इसका चुम्बकीय आघूर्ण \(\vec{B}\) की दिशा से θ कोण पर है। इस विन्यास में इसकी स्थितिज ऊर्जा के लिये व्यंजक लिखिये यह कब न्यूनतम होगी?
उत्तर:
दण्ड चुम्बक के चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा इसकी अक्ष के अनुदिश होती है तथा यह \(\vec{B}\) से θ कोण बनाये हुये है। अतः इस स्थिति में इसकी स्थितिज ऊर्जा U = -mB cosθ
U के न्यूनतम के लिये θ = 0° तथा Umin = -mB cos 0°
= -mB
अतः जब \(\vec{M}\) तथा \(\vec{B}\) एक-दूसरे के समान्तर होते हैं तब U न्यूनतम होगी।

प्रश्न 8.
एक स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक वहाँ पर ऊर्ध्वाधर घटक के बराबर है उस स्थान पर नति कोण का मान ज्ञात कीजिये। उस स्थान पर क्षैतिज घटक तथा कुल चुम्बकीय क्षेत्र का अनुपात क्या होगा?
उत्तर:
tan I = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\) = \(\frac{Z_E}{Z_E}\)
I = tan 45°
∴ I = tan 45°
\(\frac{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{B}_{\mathrm{E}}}\) = \(\frac{\mathrm{B}_E \cos \theta}{\mathrm{B}_{\mathrm{E}}}\)
= cos θ = cos 45° = \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)[/latex]
∴ HE : BE = 1 : √2

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये:
(i) नति कोण का अधिकतम मान क्या है? यह किन-किन स्थानों पर होता है?
(ii) पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक का मान कितना होता है?
उत्तर:
(i) 90°, पृथ्वी के उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुवों पर,
(ii) शून्य
∵ HE = BE cosθ
= BE cos90°
= 0

प्रश्न 10.
दो पदार्थों के नाम लिखिये जिनमें एक की चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक तथा दूसरे की ऋणात्मक हो । ऋणात्मक चुम्बकीय प्रवृत्ति क्या प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
अनुचुम्बकीय पदार्थों (जैसे ऐलुमिनियम, कैल्सियम आदि) की चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों (जैसे- कॉपर, लैड आदि) की चुम्बकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक होती है। ऋणात्मक चुम्बकीय प्रवृत्ति का अर्थ है कि ये पदार्थ बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में चुम्बकित होते हैं।

प्रश्न 11.
भू-चुम्बकीय अवयवों के नाम लिखिए तथा उनमें से किन्हीं दो की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व की जानकारी के लिये जिन राशियों की आवश्यकता होती है, उन्हें उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकत्व के अवयव कहते हैं, जो कि तीन हैं।
(i) दिक्पात का कोण ( Angle of declination)
(ii) नमन कोण (नति कोण) ( Angle of dip)
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के घटक (Components of earth’s magnetic field)
(i) दिक्पात का कोण- किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के न्यून कोण को दिक्पात का कोण कहते हैं। दिक्पात उच्चतर अक्षांशों पर अधिक एवं विषुवत् रेखा के पास कम होता है। भारत में दिक्पात का मान कम है।
(ii) नमन कोण (नति कोण) – यदि कोई चुम्बकीय सुई, एक क्षैतिज अक्ष पर इस प्रकार पूर्ण सन्तुलन में हो कि चुम्बकीय याम्योत्तर के तल में घूम सके तो यह सुई क्षैतिज से एक कोण बनायेगी, यह नमन कोण (नति कोण) कहलाता है। अतः नति कोण वह कोण है जो पृथ्वी का कुल चुम्बकीय क्षेत्र BE पृथ्वी
(iii) पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र को की सतह से बनता है। घटक – पृथ्वी की सतह पर पूरी तरह निर्दिष्ट करने के लिए हमें तीन राशियों का विवरण देना होता है। ये हैं दिक्पात कोण D, नमन कोण I एवं पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव Hg ये पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के घटक कहलाते हैं।
यहाँ पर ऊर्ध्वाधर घटक ZE = BE sinI ……..(1)
क्षैतिज घटक HE = BE cos I ………(2)
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
tan I = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)
समीकरण (1) तथा (2) का वर्ग करके जोड़ने पर
ZE2 + HE2 = BE 2 (sin2I + cos2I) = BE 2

प्रश्न 12.
विभिन्न चुम्बकीय राशियों B, H, I, χ एवं के परस्पर सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
चुम्बकीय प्रवृत्ति X- किसी अल्प चुम्बकन क्षेत्र में पदार्थ की चुम्बकन तीव्रता (I) का मान चुम्बकन क्षेत्र (H) के समानुपाती होता है, अर्थात् I H
या
I = χH
या
χ = 1/H
यहाँ χ एक नियतांक है जिसे पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति कहते हैं। चुम्बकीय पारगम्यता – किसी माध्यम में चुम्बकीय बल रेखाओं के गुजरने की क्षमता को उस माध्यम की चुम्बकीय पारगम्यता अथवा चुम्बकशीलता कहते हैं। गणितीय दृष्टि से इसका मान पदार्थ ( माध्यम ) के अन्दर उत्पन्न चुम्बकीय प्रेरण B एवं चुम्बकन क्षेत्र H के अनुपात के तुल्य होता है। इसे द्वारा व्यक्त करते हैं। यह एक अदिश राशि है।
μ = \(\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}\)
समीकरण (1) में (2) का भाग देने पर
\(\frac{\mu}{\chi}\) = \(\frac{\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}}{\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{H}}} .\)

प्रश्न 13.
तीनों प्रकार के चुम्बकीय पदार्थों के लिये I-H आरेखों को प्रदर्शित कीजिये इनसे इनकी प्रवृत्तियों के बारे में क्या निष्कर्ष प्राप्त होते हैं? अनुचुम्बकीय पदार्थ की प्रवृत्ति ताप के साथ किस प्रकार बदलती है?
उत्तर:
लौह-चुम्बकीय, अनुचुम्बकीय तथा प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिये आरेख को सामने चित्र में दिखाया गया है।
यदि
अर्थात् संख्यात्मक रूप में चुम्बकीय प्रवृत्ति उस पदार्थ में एकांक चुम्बकन क्षेत्र द्वारा प्रेरित चुम्बकन की तीव्रता के बराबर होती है। इसका मान धनात्मक ऋणात्मक होता है। विभिन्न पदार्थों के लिये इसका मान अलग-अलग होता है।
χ = 1/H
H = 1 एकांक हो तो
χ = 1
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 2
प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के लिये इसका मान अत्यल्प तथा ऋणात्मक होता है।
अनुचुम्बकीय पदार्थों के लिये अत्यल्प तथा धनात्मक होता है। लौह-चुम्बकीय पदार्थों के लिये अत्यधिक तथा धनात्मक होता है। पदार्थों के लिये प्रवृत्ति (X) का मान ताप पर निर्भर करता है। ताप के बढ़ाने पर x का मान कम हो जाता है।

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प्रश्न 14.
भू-चुम्बकीय अवयवों में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भू-चुम्बकीय अवयवों में परिवर्तन: भू-चुम्बकीय अवयवों के मान पृथ्वी के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न भिन्न ही नहीं होते बल्कि एक ही स्थान पर भी इनके मानों में नियमित एवं अनियमित रूप से परिवर्तन होते रहते हैं। ये परिवर्तन निम्न हैं-
(1) दीर्घकालिक परिवर्तन केल्विन के अनुसार भू-चुम्बकीय अवयवों के मान में समय के साथ-साथ धीरे-धीरे परिवर्तन आता है तथा लगभग हजार वर्ष बाद ये सभी अवयव पुनः अपने प्रारम्भिक मान पर आ जाते हैं। उनके अनुसार इस परिवर्तन का कारण चुम्बकीय ध्रुवों का भौगोलिक ध्रुवों के चारों ओर घूर्णन करना है।
(2) वार्षिक परिवर्तन: इन परिवर्तन चक्रों का चक्र एक वर्ष में पूरा होता है ये परिवर्तन एक विशेष माह में अधिकतम तथा एक अन्य विशेष माह में न्यूनतम होते हैं तथा इनकी प्रकृति उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में परस्पर विपरीत प्रकार की होती है। उदाहरण के लिए, फरवरी माह में दिक्पात के कोण का मान उत्तरी गोलार्द्ध पर अधिकतम तथा दक्षिणी गोलार्द्ध पर न्यूनतम होता है। इसके विपरीत माह अगस्त में उत्तरी गोलार्द्ध पर न्यूनतम एवं दक्षिणी गोलार्द्ध पर अधिकतम होता है।
(3) दैनिक परिवर्तन: भू-चुम्बकीय अवयवों के मान में प्रतिदिन परिवर्तन होते हैं। दिन में एक विशेष समय पर ये परिवर्तन अधिकतम एवं दूसरे विशेष समय पर न्यूनतम होते हैं। ये समय तीनों अवयवों के लिए भिन्न-भिन्न होते हैं।
(4) अनियमित परिवर्तन: कभी-कभी भू-चुम्बकीय अवयवों के मानों में अचानक परिवर्तन भी होते हैं जिन्हें चुम्बकीय प्रक्षोभ कहते हैं। जब कभी भी सूर्य में उपस्थित काला धब्बा पृथ्वी की ओर होता है तो
भू-चुम्बकीय अवयवों में अचानक परिवर्तन होने लगता है तथा इनके मानों में अनियमित परिवर्तन देखने को मिलते हैं।

प्रश्न 15.
नमन कोण (आनति कोण) को परिभाषित कीजिए । नमन कोण का मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए किसी बिन्दु पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक एवं ऊर्ध्वाधर घटक बराबर होते हैं।
उत्तर:
नमन कोण (आनति कोण) (Angle of dip): यदि किसी चुम्बकीय सूई को उसके गुरुत्व केन्द्र से स्वतंत्रतापूर्वक इस प्रकार लटका दिया जाये, जिससे कि वह ऊर्ध्वाधर तल में घूम सके तब चुम्बकीय याम्योत्तर में स्थिर होने पर चुम्बकीय सूई क्षैतिज दिशा से कुछ झुक जाती है। सूई की चुम्बकीय अक्ष पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को व्यक्त करती है। इस प्रकार किसी स्थान पर पृथ्वी के परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा तथा क्षैतिज दिशा के मध्य बने कोण को उस स्थान का नमन कोण (Angle of dip) कहते हैं।
ऊर्ध्वाधर घटक क्षैतिज घटक
ZE = BE sin 6
HE = BE Cos 6
tan θ = \(\frac{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)
लेकिन दिया गया है ZE = HE
∴ tan θ = \(\frac{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}\)
∴ = 1 = tan 45°
θ = 45°

प्रश्न 16.
दिक्पात कोण (चुम्बकीय दिक्पात) को परिभाषित किसी स्थान के चुम्बकीय याम्योत्तर में पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव 0.25 गाउस है एवं नमन कोण 60° है। इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिक्पात कोण: किसी स्थान पर भौगोलिक याम्योत्तर तथा चुम्बकीय याम्योत्तर के बीच के न्यून कोण को दिक्पात का कोण कहते हैं। दिक्पात उच्चतर अक्षांशों पर अधिक एवं विषुवत रेखा के पास कम होता है।
दिया गया है:
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज अवयव
HE = 0.25 गाउस
HE = 0.25 × 104 T
नमन कोण I = 60°
∴ HE = BE cos 60°
या
BE = \(\frac{\mathrm{H}_{\mathrm{E}}}{\cos 60^{\circ}}\) = \(\frac{0.25 \times 10^{-4}}{1 / 2}\)
= 2 × 0.25 × 10-4
= 0.5 × 10-4T
= 5 × 10-5 T

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
5 cm2 क्षेत्रफल वाली एक कुण्डली 2.5 N/Am के एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखी है। इसमें फेरों की संख्या 100 है। यदि इसमें 0.2 A की धारा प्रवाहित हो रही हो, तो ज्ञात कीजिये:
(अ) चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण
(ब) अधिकतम बल आघूर्ण।
उत्तर:
कुण्डली के तल का क्षेत्रफल A = 5 cm2
= 5 × 104 m2
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = 2.5 N/A m.
फेरों की संख्या N = 100,
कुण्डली में प्रवाहित धारा I = 0.2A
(अ) चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण m= NIA
m = 100 × 0.2 A × 5 x 104m2
= 0.01 A-m2
(ब) अधिकतम बल-आघूर्ण = τmax = mB
= 0.01 A-m2 x 2.5 N/A-m
= 0.025 N-m.

प्रश्न 2.
(अ) एक इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन परमाणु में नाभिक के चारों ओर 0.51A° त्रिज्या की कक्षा में 2 x 102m/s की चाल से गति करता है। इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिये।
(ब) इलेक्ट्रॉन की कक्षीय गति के कारण तुल्य वैद्युत धारा
(स) नाभिक के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र।
उत्तर:
(अ) यहाँ पर त्रिज्या r = 0.51A°
= 0.51 x 10-10m चाल
v = 2 x 105 m/s
∴ चुम्बकीय आघूर्ण m = \(\frac{\mathrm{e} v \mathrm{r}}{2}\)
मान रखने पर
m = \(\frac{\left(1.6 \times 10^{-19}\right)\left(2 \times 10^5\right)\left(0.51 \times 10^{-10}\right)}{2}\)
= 8.16 × 10-25 Am2

(ब) तुल्य वैद्युत धारा
I = q/t
यहाँ
q = इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिमाण
= 1.6 × 10-19 C
तथा एक चक्कर में इस आवेश के प्रवाहित होने में लगा समय
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 3

(स) वृत्ताकार कक्षा के केन्द्र (अर्थात् नाभिक के केन्द्र) पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
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= 1.23A-m

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य

प्रश्न 3.
25 फेरों वाली एक 200 cm2 क्षेत्रफल वाली कुण्डली में 0.5 A की धारा प्रवाहित हो रही है। 10 cm लम्बाई के उस दण्ड चुम्बक की ध्रुव प्राबल्यता क्या होगी, जिसका चुम्बकीय आघूर्ण इस कुण्डली के चुम्बकीय आघूर्ण के बराबर है।
उत्तर:
दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण = कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण
∴ qm × 2l = NIA
अतः ध्रुव प्राबल्यता (qm) = \(\frac{\text { NIA }}{2 l}\)
मान रखने पर, = \(\frac{25 \times 0.5 \times\left(200 \times 10^{-4}\right)}{10 \times 10^{-2}}\)A-m
= 2.5 Am.

प्रश्न 4.
एक लघु दण्ड चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण 0.24 न्यूटन मीटर टेसला है। सेमी. की दूरी पर स्थित चुम्बक की अक्ष पर इसके केन्द्र से 10 बिन्दु पर चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कीजिये।
उत्तर:
दिया है:
m = 0.24 न्यूटन मीटर टेसला1
r = 10 सेमी = 0.10 मीटर
∴ अक्षीय स्थिति में
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 5

प्रश्न 5.
किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक 0.4 x 104 वेबर/मी2 है तथा नति कोण 30° है। पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक तथा सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दिया गया है:
Hg = 0.4 x 10-4 वेबर/मीटर2
I = 30°
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्व घटक
ZE = HE tan I
= 0.4 x 10-4 tan 30°
= 0.4 × 10-4 x \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)
= \(\frac{0.4 \times 10^{-4}}{1.732}\)
= 0.231 × 10-4 वेबर/मी2
सम्पूर्ण तीव्रता BE = \(\sqrt{\mathrm{Z}_{\mathrm{E}}^2+\mathrm{H}_{\mathrm{E}}^2}\)
= \(\sqrt{\left(\frac{0.4 \times 10^{-4}}{\sqrt{3}}\right)+\left(0.4 \times 10^{-4}\right)^2}\)
= 0.4 x 10-4 \(\sqrt{\frac{1}{3}+1}\)
= 0.4 x 10-4 \(\sqrt{\frac{4}{3}}\)
= \(\frac{0.8}{1.732}\) x 10-4 वेबर/मी2
= 0.462 × 10-4 वेबर/मी2

प्रश्न 6.
किसी स्थान पर नमन कोण 40.6° है तथा भू-चुम्बकीय क्षेत्र के ऊर्ध्वघटक की तीव्रता 6 x 10-5T है उस स्थान पर भू-चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता की गणना कीजिये।
(tan 40.6° = 0.8571)
उत्तर:
ZE = HE tan I
HE =
HE =
HE = 7 × 105 T
इसलिये भू-चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 6

प्रश्न 7.
यदि एक धारावाही वृत्ताकार कुण्डली की त्रिज्या दुगुनी एवं बहने वाली धारा की सामर्थ्य आधी कर दी जाये तो इसके चुम्बकीय आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
यदि किसी धारावाही कुण्डली का क्षेत्रफल A मी2 और उसमें प्रवाहित धारा ऐम्पियर तब कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण
m1 = A x i ऐम्पियर x मीटर2
यदि कुण्डली की प्रारम्भिक त्रिज्या r मी. और उसमें i ऐम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है तब उसका चुम्बकीय आघूर्ण
m1 = A x i = πr2 x i
m1 = πr2i ………..(1)
अब कुण्डली की त्रिज्या दुगुनी यानी 21 मी. करने पर उसका क्षेत्रफल
= π(2r)2 = 4πr2 मी2
कुण्डली में प्रवाहित धारा का आधा करने पर
वि. धारा = i/2 ऐम्पियर
∴ अब कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण
m2 = A x i
m2 = 4πr2 x i⁄2 ऐम्पियर × मी2
m2 = 2πr2 x i = 2πr2i ………..(2)
∴ \(\frac{m_2}{m_1}\) = \(\frac{2 \pi r^2 \mathrm{i}}{\pi r^2 \mathrm{i}}\) = \(\frac{2}{1}\)
अतः दिये हुए अनुसार कुण्डली की त्रिज्या और वि. धारा बदलने पर कुण्डली का चुम्बकीय आघूर्ण पहले के सापेक्ष दुगुना हो जायेगा।

प्रश्न 8.
एक दण्ड चुम्बक, जिसकी अनुप्रस्थ काट 0.25 सेमी2 है, को 5000 ऐम्पियर/मीटर तीव्रता के चुम्बकन क्षेत्र में रखा जाता है। यदि दण्ड से गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स का मान 2.5 x 105 वेबर है तो दण्ड के लिए गणना करो:
(अ) चुम्बकीय प्रेरण, (ब) चुम्बकीय प्रवृत्ति (स) चुम्बकन की तीव्रता
उत्तर:
(अ) दण्ड का अनुप्रस्थ काट
A = 0.25 सेमी5
A = 0.25 x 10-4 मीटर2
A = 25 x 106 मी2
छड़ के अनुप्रस्थ काट से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स
ΦB = 2.5 x 105 वेबर
∴ चुम्बकीय प्रेरण B = \(\frac{\phi_B}{A}\) = \(\frac{2.5 \times 10^{-5}}{2.5 \times 10^{-6}}\)
= 1 वेबर/मी2

(ब) चुम्बकीय प्रेरण B = μH …..(1)
यहाँ B चुम्बकीय प्रेरण, H चुम्बकन क्षेत्र की तीव्रता जिसका मान 5000 ऐ. x मीटर दिया हुआ है।
μ छड़ के पदार्थ की पारगम्यता है।
∴ समी (1) से
μ = \(\frac{\mathrm{B}}{\mathrm{H}}\)

μ = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य 7
= 0.0002 वेबर/ऐ. x मी.
= 2 × 10-4 A-m
μ = μo (1 + χm)
χm = \(\frac{\mu}{\mu_0}-1\)
= \(\frac{0.0002}{4 \pi \times 10^{-7}}-1\)
= 159.23-1
= 158.23

(स) चुम्बकन की तीव्रता m = χm x H
m = 158.23 x 5000
= 7.91 × 105 ऐम्पियर/मी.

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

बहुविकल्पीय प्रश्न :

1. गैल्वेनिक सेल के लिए कौनसा कथन सत्य नहीं है?
(अ) ऐनोड ऋणावेशित होता है।
(ब) कैथोड धनावेशित होता है।
(स) ऐनोड पर अपचयन होता है।
(द) कैथोड पर अपचयन होता है।
उत्तर:
(स) ऐनोड पर अपचयन होता है।

2. इलेक्ट्रॉड अभिक्रिया, \(\mathbf{M}_{(\mathrm{aq})}^{\mathrm{n}+}+\mathrm{ne}^{-} \rightarrow \mathbf{M}_{(\mathrm{s})}\) के लिये नेन्ंस्ट अभिक्रिया है-
(अ) E = E° + \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\frac{1}{\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]}\)
(ब) E = E° + \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)
(स) E = E° + RT ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)
(द) \(\frac{E}{E^{\circ}}\) = \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)
उत्तर:
(ब) E = E° + \(\frac { RT }{ nF }\) ln \(\left[\mathrm{M}^{\mathrm{n}+}\right]\)

3. विशिष्ट चालकत्व की इकाई है-
(अ) S cm2 mol-1
(ब) Scm2
(स) S m-1
(द) cm-1
उत्तर:
(स) S m-1

4. लैड संचायक सेल को आवेशित करने पर-
(अ) PbO2 घुलता है।
(ब) लैड इलेक्ट्रोड पर PbSO4 जमता है।
(स) H2SO4 पुनः बनता है
(द) H2SO4 की मात्रा कम होती है।
उत्तर:
(स) H2SO4 पुनः बनता है

5. चार पृथक् पृथक् परखनलियों में भिन्न-भिन्न लवणों के रंगहीन विलयन उपस्थित हैं। इनमें कॉपर की छड़ डुबोने पर कौनसे विलयन का रंग नीला हो जाएगा-
(अ) Pb(NO3)2
(ब) AgNO3
(स) Zn(NO3)2
(द) Cd (NO3)2
उत्तर:
(ब) AgNO3

6. \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}\left|\mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{+2} \| \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}\right| \mathrm{Cu}\) में दो खड़ी समानान्तर रेखाएँ (||) किसको दर्शाती हैं?
(अ) कैथोड
(ब) ऐनोड
(स) लवण सेतु
(द) विद्युत अपघट्य
उत्तर:
(स) लवण सेतु

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

7. कॉपर को अम्लीय CuSO4 तथा क्षारीय Cu(CN)2 से निक्षेपित किया जा सकता है। यदि समान विद्युत धारा समान समय के लिए इनके विलयन में प्रवाहित की जाए तो निम्नलिखित में से कौनसा कथन सत्य है?
(अ) क्षारीय कॉपर सायनाइड (Cu(CN)2) से निक्षेपित कॉपर की मात्रा अम्लीय CuSO4 की तुलना में दुगुनी होगी।
(ब) क्षारीय कॉपर सायनाइड से निक्षेपित कॉपर की मात्रा अम्लीय CuSO4 की तुलना में आधी होगी।
(स) दोनों विलयनों से कॉपर की समान मात्रा निक्षेपित होगी।
(द) उपरोक्त सभी कथन गलत हैं।
उत्तर:
(स) दोनों विलयनों से कॉपर की समान मात्रा निक्षेपित होगी।

8. निम्नलिखित में से किसके जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसका विघटन होगा?
(अ) ग्लूकोस
(ब) यूरिया
(स) शर्करा
(द) सिल्वर नाइट्रेट
उत्तर:
(द) सिल्वर नाइट्रेट

9. गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद हैं-
(अ) NaOH, H2 तथा Cl2
(ब) Na तथा Cl2
(स) Na, NaOH तथा Cl2
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ब) Na तथा Cl2

10. Zn2+ | Zn (E° = – 0.76 V) तथा Cu2+ | Cu(E° = +0.34) से बने एक गैल्वेनिक सेल का EMF है-
(अ) 0.42 V
(ब) 1.10 V
(स) – 0.10 V
(द) – 0.42 V
उत्तर:
(ब) 1.10 V

11. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव होता है-
(अ) 1.0 V
(ब) 0.0 v
(स) 1.10 V
(द) 0.20 V
उत्तर:
(ब) 0.0 v

12. धात्विक चालक में आवेश के वाहक होते हैं-
(अ) इलेक्ट्रॉन
(ब) आयन
(स) प्रोटोन
(द) लवण
उत्तर:
(अ) इलेक्ट्रॉन

13. Cu2+ आयन पर आवेश (कूलाम में ) है-
(अ) 96500
(ब) 57900
(स) 1.6 × 10-19
(द) 3.2 × 10-19
उत्तर:
(द) 3.2 × 10-19

14. लोहे पर जंग लगने से रोकने का सर्वोत्तम उपाय है-
(अ) लवणयुक्त जल में रखकर
(ब) कैथोडिक रक्षण
(स) टिन की परत चढ़ाकर
(द) साधारण जल में रखकर
उत्तर:
(ब) कैथोडिक रक्षण

15. \(\mathrm{MnO}_4^{-}\) के 1 मोल का MnO2 में अपचयन करने के लिए आवश्यक आवेश है-
(अ) 1F
(ब) 3F
(स) 5F
(द) 7F
उत्तर:
(ब) 3F

16. Na2SO4 के तनु जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन करने पर ऐनोड तथा कैथोड पर प्राप्त उत्पाद क्या होंगे? यदि Pt इलेक्ट्रॉड प्रयुक्त किया गया है-
(अ) O2, Na
(ब) H2. NaOH
(स) O2. H2
(द) \(\mathrm{S}_2 \mathrm{O}_8^{-2}, \mathrm{H}_2\)
उत्तर:
(स) O2. H2

17. निम्नलिखित में से किस अवस्था में विलयन की मोलर चालकता बढ़ती है?
(अ) सान्द्रता बढ़ाने पर
(ब) ताप कम करने पर
(स) तनुता बढ़ाने पर
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) तनुता बढ़ाने पर

18. डेनियल सेल में प्रयुक्त उपापचयी अभिक्रिया है-
(अ) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}\)
(ब) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e}^{-}\)
(स) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
(द) \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}\)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

19. प्रतिरोध का व्युत्क्रम होता है-
(अ) प्रतिरोधकता
(ब) चालकत्व
(स) सेल नियतांक
(द) चालकता
उत्तर:
(ब) चालकत्व

20. निम्नलिखित में से किसकी चालकता सर्वाधिक होती है?
(अ) सोडियम
(ब) सिल्वर
(स) गोल्ड
(द) कॉपर
उत्तर:
(ब) सिल्वर

21. इलेक्ट्रॉनिक चालकत्व निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करता है-
(अ) धातु की प्रकृति एवं संरचना
(ब) ताप
(स) प्रति परमाणु संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

22. किसी विलयन की चालकता का सूत्र है-
(अ) k = \(\frac { G }{ R }\)
(ब) k = \(\frac { l }{ A }\)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 1
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 2

23. लैड संचायक सेल में ऐनोड पर होने वाली अभिक्रिया है-
(अ) PbO2(s) → PbSO4(s)
(ब) PbSO4(s) → PbO2(s)
(स) \(\mathrm{Pb}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{SO}_{4(\mathrm{aq})}^{2-} \rightarrow \mathrm{PbSO}_{4(\mathrm{~s})}+2 \mathrm{e}^{-}\)
(द) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(aq) + 2H2O(l)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{Pb}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{SO}_{4(\mathrm{aq})}^{2-} \rightarrow \mathrm{PbSO}_{4(\mathrm{~s})}+2 \mathrm{e}^{-}\)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

24. H2 व O2 से बने ईंधन सेल में कैथोड पर होने वाली अभिक्रिया है-
(अ) \(2 \mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}+4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-} \rightarrow 4 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-}\)
(ब) \(2 \mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}+\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})} \rightarrow 2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}\)
(स) \(\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-} \rightarrow 4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-}\)
(द) \(4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-} \rightarrow \mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-}\)
उत्तर:
(स) \(\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+4 \mathrm{e}^{-} \rightarrow 4 \mathrm{OH}_{(\mathrm{aq})}^{-}\)

25. सेल स्थिरांक किस पदार्थ के जलीय विलयन की चालकता मापकर ज्ञात करते हैं?
(अ) NaCl
(ब) CaCl2
(स) KCl
(द) MgCl2
उत्तर:
(स) KCl

26. किसी सेल अभिक्रिया की साम्यावस्था पर सेल का विद्युत वाहक बल (EMF) होता है-
(अ) धनात्मक
(ब) शून्य
(स) ऋणात्मक
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) शून्य

27. किसी स्वतः प्रवर्तित अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक E°सेल तथा △G क्रमशः होंगे-
(अ) <1, +ve, -ve
(ब) >1, +ve, -ve
(स) = 1, +ve, +ve
(द) = 1, – ve, -ve
उत्तर:
(ब) >1, +ve, -ve

28. लवण सेतु में KNO का संतृप्त विलयन प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि-
(अ) KNO3 की जल में विलेयता उच्च है।
(ब) K+ तथा \(\mathrm{NO}_3^{-}\) की गति लगभग समान होती है।
(स) K+ की गति \(\mathrm{NO}_3^{-}\) से अधिक होती है।
(द) K+ की गति \(\mathrm{NO}_3^{-}\) से कम होती है।
उत्तर:
(ब) K+ तथा \(\mathrm{NO}_3^{-}\) की गति लगभग समान होती है।

29. यदि सेल अभिक्रिया स्वतः परिवर्तित है, तो-
(अ) E° = -ve
(ब) E° = + ve
(स) emf = + ve
(द) (△G + E°) = + ve
उत्तर:
(स) emf = + ve

30. Zn – Cu सेल के लिए E° = 1.10 V है। यदि \(\mathrm{Cu}^{2+}{ }_{(\mathrm{aq})} / \mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\) युग्म का अपचयन विभव 0.34 V हो तो \(\mathrm{Zn}^{2+}(\mathrm{aq}) / \mathrm{nn}_{(\mathrm{s})}\) युग्म का अपचयन विभाग होगा-
(अ) – 0.76 V
(ब) 0.76 V
(स) 7.6 V
(द) 0.38 V
उत्तर:
(अ) – 0.76 V

31. 25°C पर, Zn + Cu2+ → Cu + Zn2+ का मानक विद्युत वाहक बल 1.10 है तो इस सेल में 0.1 M Cu2+ तथा 0.1 M Zn2+ विलयन का प्रयोग करने पर सेल के विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा?
(अ) 1.10 V
(ब) + 0.110 V
(स) – 1.10 V
(द) – 0.11 V
उत्तर:
(अ) 1.10 V

32. तीन धात्विक धनायनों X, Y, Z के मानक अपचयन विभव मान क्रमश: 0.52 – 3.03 तथा – 1.18 V है | संगत धातुओं की अपचायक क्षमता का क्रम है-
(अ) Y > Z > X
(ब) X > Y > Z
(स) Z> Y> X
(द) Z > x > Y
उत्तर:
(अ) Y > Z > X

33. अभिक्रिया IMG गैलवेनिक सेल में होती है। इसका सही निरूपण है-
(अ) Ag/AgCl(s)/KCl(aq)//AgNO3(aq)/Ag
(ब) Pt, H2(g)/HCl(aq)//AgNO3(qa)/Ag
(स) Pt, H2(g)/HCl(aq)//AgCl(aq)/ Ag(s)
(द) Pt, H2(g)/KCl(aq)//AgCl(s)/Ag
उत्तर:
(स) Pt, H2(g)/HCl(aq)//AgCl(aq)/ Ag(s)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
जब CuSO4 के जलीय विलयन में जिंक धातु की छड़ को डुबोते हैं तो विलयन का नीला रंग गायब हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
Zn+2 का मानक अपचयन विभव, Cu+2 के मानक अपचयन विभव से कम होने के कारण Zn Cu+2 को इलेक्ट्रॉन देकर उसे अपचयित कर देता है। अतः विलयन का नीला रंग गायब हो जाता है क्योंकि विलयन का नीला रंग Cu+2 आयनों के कारण होता है।

प्रश्न 2. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड (SHE) में प्लैटिनम का कार्य बताइए।
उत्तर:
SHE में प्लैटिनम, उत्प्रेरक तथा धात्विक सम्पर्क हेतु अक्रिय धातु का कार्य करता है।

प्रश्न 3.
साम्यावस्था स्थिरांक Kc. E°(सेल) से सम्बन्धित होता है, न कि Eसेल से क्यों?
उत्तर:
Kc का सम्बन्ध E°(सेल) से होता है क्योंकि साम्य पर Eसेल का मान शून्य होता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रिया होगी या नहीं-
ZnSO4(aq) + 2Ag(s) → Ag2SO4(aq) + Zn(s)
उत्तर:
यह अभिक्रिया नहीं होगी क्योंकि Ag की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति Zn की ऑक्सीकृत होने की प्रवृत्ति से कम होती है।

प्रश्न 5.
Zn+2 की सान्द्रता बढ़ाने पर Zn इलेक्ट्रॉड के इलेक्ट्रॉड विभव के मान पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
Zn+2 की सान्द्रता बढ़ाने पर Zn इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव बढ़ता है।

प्रश्न 6.
विलयन की pH तथा हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड विभव में सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 3

प्रश्न 7.
कॉपर सल्फेट (CuSO4) के जलीय विलयन को आयरन के पात्र में रखा जा सकता है या नहीं?
उत्तर:
CuSO4 के जलीय विलयन को आयरन के पात्र में नहीं रख सकते क्योंकि इसकी क्रियाशीलता Cu से अधिक है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 16 अतः Fe, Cu+2 को Cu में अपचयित कर देता है जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
\(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{+2}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

प्रश्न 8.
तनु H2SO4 से H2 को विस्थापित नहीं करने वाली धातुएँ बताइए।
उत्तर:
Cu, Ag. Au, Pt

प्रश्न 9.
Na, Al तथा Zn की क्रियाशीलता का अवरोही क्रम लिखिए।
उत्तर:
Na > Al > Zn

प्रश्न 10.
गैल्वेनी सेल में लवण सेतु में प्रयुक्त एक लवण का नाम बताइए।
उत्तर:
पोटेशियम क्लोराइड (KCl)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 11.
निम्नलिखित सेल अभिक्रिया का सेल आरेख लिखिए-
\(2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})}+3 \mathrm{Cd}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow 2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{+3}+3 \mathrm{Cd}_{(\mathrm{s})}\)
उत्तर:
उपर्युक्त सेल अभिक्रिया का सेल आरेख निम्न प्रकार होगा- एनोड-
एनोड \({ }^{-} \mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})}\left|\mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{+3} \| \mathrm{Cd}_{(\mathrm{aq})}^{2+}\right| \mathrm{Cd}_{(\mathrm{s})}{ }^{+}\) कैथोड

प्रश्न 12.
डेनियल सेल में धारा तथा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा बताइए |
उत्तर:
डेनियल सेल में धारा का प्रवाह Cu से Zn इलेक्ट्रॉड की तरफ तथा इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह Zn से Cu इलेक्ट्रॉड की तरफ होता है अर्थात् धारा तथा इलेक्ट्रॉनों का प्रभाव एक-दूसरे से विपरीत दिशा में होता है।

प्रश्न 13.
सेल का ऋणात्मक मान क्या दर्शाता है?
उत्तर:
सेल के ऋणात्मक होने का अर्थ है, △G = +ve तथा इस स्थिति में सेल में कार्य नहीं होगा।

प्रश्न 14.
सेल अभिक्रिया \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}+2 \mathrm{Ag}_{(\mathrm{aq})}^{+} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{Ag}_{(\mathrm{s})}\) के लिए EMF का मान बताइए जब \(\mathrm{E}_{\mathrm{Cu}^{+2 / \mathrm{Cu}}}^{\mathrm{o}}=0.34 \mathrm{~V}\) तथा \(\mathrm{E}_{\mathrm{Ag}^{+} / \mathrm{Ag}}^{\mathrm{o}}=0.80 \mathrm{~V}\)
उत्तर:
सेल = ER – EL
= 0.80 – (0.34)
सेल = 0.46 V

प्रश्न 15.
प्लैटिनम इलेक्ट्रॉड प्रयुक्त करके CuSO4 के विलयन का विद्युत अपघटन करने पर प्राप्त उत्पाद बताइए ।
उत्तर:
CuSO4 के विलयन का विद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर कॉपर तथा एनोड पर ऑक्सीजन प्राप्त होती है।

प्रश्न 16.
Al3+ से एक मोल AI प्राप्त करने के लिए कितने कूलॉम आवेश चाहिए?
उत्तर:
Al3+ + 3e →Al
अभिक्रिया के अनुसार 1 मोल Al प्राप्त करने के लिए 3F= 3 × 96500 = 289500 कूलॉम आवेश आवश्यक होगा।

प्रश्न 17.
NaCl के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाहित करने पर विलयन की pH में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
NaCl के जलीय विलयन में विद्युत प्रवाहित करने पर विलयन की pH बढ़ जाती है (pH > 7) क्योंकि इसमें प्रबल क्षार (NaOH) बनता है।

प्रश्न 18.
विशिष्ट चालकत्व (K) तथा सेल स्थिरांक में सम्बन्ध बताइए |
उत्तर:
K = \(\frac { 1 }{ R }\) × \(\frac { 1 }{ A }\) (\(\frac { 1 }{ A }\) = सेल स्थिरांक)

प्रश्न 19.
मोलर चालकता ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
मोलर चालकता, \(\Lambda_{\mathrm{m}}=\frac{K \times 1000}{\mathrm{M}}\) (M = मोलरता)

प्रश्न 20.
मोलर चालकता तथा तुल्यांकी चालकता में क्या सम्बन्ध होता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 4

प्रश्न 21.
अधिविभव किसे कहते हैं?
उत्तर:
कुछ वैद्युत रासायनिक प्रक्रम सम्भव होते हैं लेकिन उनकी गति इतनी कम होती है कि वे निम्न विभव पर आसानी से नहीं होते। इस स्थिति में प्रक्रम को करवाने के लिए अतिरिक्त विभव लगाना पड़ता है, उसे अधिविभव कहते हैं।

प्रश्न 22.
गलित PhBr2 का विद्युत अपघटन करने पर प्राप्त उत्पाद क्या होंगे? यदि अक्रिय इलेक्ट्रॉड लिया गया है।
उत्तर:
गलित PhBr2 का विद्युत अपघटन करने पर कैथोड पर Pb तथा एनोड पर Br2 प्राप्त होती है।

प्रश्न 23.
डिबाई हकल-आंनसेगर समीकरण क्या होता है?
उत्तर:
\(\Lambda_m=\Lambda_m^{\circ}-A \sqrt{C}\)
\(\Lambda_{\mathrm{m}}\) मोलर चालकता, \(\Lambda_{\mathrm{m}}^{\circ}\) = सीमान्त मोलर चालकता, A = स्थिरांक तथा C = सान्द्रता

प्रश्न 24.
विद्युत रासायनिक तुल्यांक (Z) किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी विद्युत अपघट्य के विलयन में एक ऐम्पियर की धारा एक सेकण्ड (एक कूलॉम आवेश ) तक प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रॉड पर निक्षेपित पदार्थ की मात्रा को उसका विद्युत रासायनिक तुल्यांक कहते हैं।

प्रश्न 25.
वैद्युत अपघटन से Na, Mg तथा Al कैसे प्राप्त की जाती है?
उत्तर:
सोडियम तथा मैग्नीशियम को उनके गलित क्लोराइडों के वैद्युत अपघटन द्वारा तथा ऐलुमिनियम को क्रायोलाइट (Na3AlF6) की उपस्थिति में ऐलुमिनियम ऑक्साइड के वैद्युत अपघटन से प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 26.
Al के लवणों के विद्युत अपघटन से Al धातु प्राप्त नहीं होती, क्यों?
उत्तर:
Al के लवणों के विद्युत अपघटन से Al धातु प्राप्त नहीं होती क्योंकि यह जल से क्रिया करके Al2O3 बना लेता है।

प्रश्न 27.
सीसा संचायक सेल को लगातार प्रयोग में लेने पर उसमें उपस्थित H2SO4 पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
सीसा संचायक सेल को लगातार प्रयोग में लेने पर उसमें उपस्थित H2SO4, का घनत्व कम हो जाता है क्योंकि अभिक्रिया होने पर सल्फेट (\(\mathrm{SO}_4^{2-}\)) आयन, Pb+2 से क्रिया करके PbSO4 बना देते हैं।

प्रश्न 28.
शुष्क सेल में जिंक क्लोराइड (ZnC12) का क्या कार्य है ?
उत्तर:
ZnCl2 से प्राप्त Zn2+, अभिक्रिया में उत्पन्न NH3 से क्रिया करके [Zn(NH3)4] 22+ संकुल आयन बना लेता है जिससे दाब उत्पन्न नहीं होता है तथा सील के टूटने की सम्भावना नहीं रहती ।

प्रश्न 29.
मर्क्यूरी सेल में सम्पूर्ण कार्य अवधि में विभव स्थिर रहता है, क्यों?
उत्तर:
मयूरी सेल की सम्पूर्ण सेल अभिक्रिया में कोई ऐसा आयन नहीं है, जिसकी सान्द्रता विलयन में होने के कारण बदलती हो ।

प्रश्न 30.
शुष्क सेल को काफी समय तक प्रयोग में नहीं लेने पर वह नष्ट हो जाता है, क्यों?
उत्तर:
शुष्क सेल को काफी समय तक प्रयोग में नहीं लेने पर इसमें उपस्थित अमोनियम क्लोराइड, उसके जिंक से बने पात्र को संक्षारित करके उसे नष्ट कर देता है।

प्रश्न 31.
लवणीय जल में जंग जल्दी लगती है, क्यों?
उत्तर:
लवण (NaCl), H2O के आयनन को बढ़ा देता है जिससे H+ की सान्द्रता बढ़ जाती है जो कि जंग लगने में सहायक है।

प्रश्न 32.
(i) 100 मिली विलयन में एक मोल NaCl तथा (ii) 250 मिली विलयन में एक मोल NaCl में से किसकी मोलर चालकता अधिक होगी तथा क्यों?
उत्तर:
विलयन (ii) की मोलर चालकता अधिक होगी क्योंकि \(\Lambda_{\mathrm{m}}=\kappa \times \mathrm{V}\) अर्थात् आयतन बढ़ने पर मोलर चालकता बढ़ती है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
कॉपर की HCl तथा HNO3 से अभिक्रिया कराने पर क्या होता है?
उत्तर:
कॉपर की HCl से कोई अभिक्रिया नहीं होती क्योंकि H+ आयन, Cu को ऑक्सीकृत नहीं कर सकता अर्थात् Cu, H+ को इलेक्ट्रॉन नहीं दे सकता क्योंकि कॉपर, हाइड्रोजन से कम क्रियाशील होता है। लेकिन Cu की HNO3 से क्रिया करवाने पर यह H+ से क्रिया न करके \(\mathrm{NO}_3^{-}\) आयनों द्वारा ऑक्सीकृत होता है।

प्रश्न 2.
गैल्वेनिक सेल में लवण सेतु की बनावट तथा कार्य बताइए ।
उत्तर:
गैल्वैनी सेल एक वैद्युत रासायनिक सेल है। इसमें स्वतः उपापचयी अभिक्रिया की गिब्ज ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा (वैद्युत कार्य ) में परिवर्तित होती है, जिससे मोटर, पंखा, गीजर, हीटर इत्यादि चलाए जाते हैं।

डेनियल सेल, गैल्वैनी सेल का एक उदाहरण है जिसमें Zn का ऐनोड तथा Cu का कैथोड लिया जाता है। इस सेल के दोनों इलेक्ट्रॉंडों को अर्ध सेल कहते हैं तथा इन पर होने वाली अभिक्रियाओं को अर्ध सेल अभिक्रिया कहते हैं। दोनों इलेक्ट्रॉडों को लवण सेतु से जोड़ा जाता है। डेनियल सेल में होने वाली अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
यह अभिक्रिया निम्नलिखित दो अभिक्रियाओं का योग है-

(i) कैथोड पर Cu2+ + 2e → Cu(s) (अपचयन अर्ध अभिक्रिया)
(ii) ऐनोड पर Zu(s) → Zn2+ + 2e (ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया )

Z के ऑक्सीकरण से प्राप्त इलेक्ट्रॉन धातु के तार की सहायता से Cu की छड़ पर चले जाते हैं तथा CuSO4 विलयन से Cu2+ आयन, कॉपर की छड़ की ओर गमन करते हैं। ऐनोड (Zn छड़ ) पर इलेक्ट्रॉन निकलने के कारण इसे ऋण ध्रुव (-ve) कहते हैं तथा कैथोड (Cu छड़) पर Cu2+ आयन एकत्रित होने के कारण इसे धन ध्रुव (+ve) कहते हैं। बाहरी परिपथ में इलेक्ट्रॉन -ve इलेक्ट्रॉड से +ve इलेक्ट्रॉड की ओर जाते हैं। उपर्युक्त अभिक्रियाएँ डेनियल सेल के दो अलग-अलग भागों में होती हैं। अपचयन अर्ध अभिक्रिया कॉपर इलेक्ट्रॉड पर जबकि ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया ज़िंक इलेक्ट्रॉड पर होती है। डेन्यल सेल के ये भाग, अर्ध सेल या रेडॉक्स युग्म कहलाते हैं। कॉपर इलेक्ट्रॉड को अपचयन अर्ध सेल एवं ज़िंक इलेक्ट्रॉड को ऑक्सीकरण अर्ध सेल कहते हैं।

प्रश्न 3.
सान्द्रता सेल की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
वह सेल जिसमें दो समान इलेक्ट्रॉड अपने आयनों की भिन्न-भिन्न सान्द्रता के विलयनों में डूबे होते हैं। इस कारण इन इलेक्ट्रॉडों के विभव भी भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः सेल में विभवान्तर उत्पन्न होता है। इसके लिए 298 K पर सेल विभव
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 5

प्रश्न 4.
किसी एक इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव ज्ञात करना सम्भव नहीं है। क्यों?
उत्तर:
किसी एक इलेक्ट्रॉड का इलेक्ट्रॉड विभव इसलिए ज्ञात नहीं किया जा सकता क्योंकि विद्युत वाहक बल (EMF) उसी स्थिति में माप सकते हैं जब परिपथ पूर्ण हो तथा एक इलेक्ट्रॉड से परिपथ पूर्ण नहीं होता ।

प्रश्न 5.
Fe2+ → Fe3+ (E° = – 0.77V)
तथा Cu → Cu2+ (E° = – 0.34V)
इन मानों के आधार पर ज्ञात कीजिए कि Cu+ आयन, Fe2+ आयन से अपचयित हो सकता है या नहीं।
उत्तर:
दिए गए मान ऑक्सीकरण विभव के हैं, अतः अपचयन विभव के मान Fe+3 → Fe2+ के लिए 0.77 V तथा Cu+2 → Cu के लिए 0.34 V होंगे। चूँकि Fe+3 का अपचयन विभव Cu2+ के अपचयन विभव से अधिक है। अतः Cu2+ आयन, Fe2+ आयन से अपचयित नहीं हो सकता।

प्रश्न 6.
अपचयन विभव तथा ऑक्सीकरण विभव क्या होते हैं?
उत्तर:
उपापचयी अभिक्रिया में अपचयन अर्ध- अभिक्रिया के विभव को अपचयन विभव तथा ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया के विभव को ऑक्सीकरण विभव कहते हैं। किसी अर्ध-अभिक्रिया के लिए ऑक्सीकरण विभव तथा अपचयन विभव के मान समान होते हैं लेकिन उनके चिह्न विपरीत होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 7.
सेल \(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}\left|\mathbf{Z n}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \| \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+2}\right| \mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\) के लिए सेल विभव का मान धनात्मक है। इससे क्या निष्कर्ष प्राप्त होता है?
उत्तर:
यह गैल्वेनिक सेल है तथा इसके लिए नेंस्ट समीकरण निम्न प्रकार लिखा जाता है-
\(\mathrm{E}_{\text {सेल }}=\mathrm{E}_{\text {सेल }}^0-\frac{0.059}{2} \log \frac{\left[\mathrm{Zn}^{2+}\right]}{\left[\mathrm{Cu}^{2+}\right]}\)
इस समीकरण से सिद्ध होता है कि Cu2+ की सान्द्रता अधिक होने पर ही Eसेल का मान धनात्मक होना सम्भव है। इस स्थिति में Zn ऑक्सीकृत होकर Zn2+ देता है तथा Cu2+ आयन का अपचयन होकर Cu प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.
एक मोल इलेक्ट्रॉनों के आवेश की गणना कीजिए ।
उत्तर:
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1.6021 × 10-19C (कूलॉम)
1 मोल इलेक्ट्रॉन = आवोगाद्रो संख्या (NA) = 6.022 × 1023
अतः एक मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश
= एक इलेक्ट्रॉन का आवेश × NA
= 1.6021 × 10-19 C × 6.022 × 1023 mol-1
= 96478 C mol-1 ≈ 96500 C mol-1 = 1 फैराडे (IF)

प्रश्न 9.
किसी विद्युत अपघट्य के विलयन के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद किन कारकों पर निर्भर करते हैं?
उत्तर:
वैद्युत अपघटन के उत्पाद: किसी पदार्थ (विद्युत अपघट्य) के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद (i) पदार्थ की अवस्था, (ii) प्रयुक्त किए गए इलेक्ट्रॉडों की प्रकृति तथा (iii) ओंक्सीकारक व अपचायक स्पीशीज एवं उनके मानक इलेक्ट्रोंड विभव पर निभर करते हैं। सक्रिय धातुओं के इलेक्ट्रॉडड लेने पर वे अभिक्रिया में भाग लेते हैं लेकिन अक्रिय धातुओं जैसे प्लैटिम इत्यादि के इलेक्ट्रॉड बनाने पर ये अभिक्रिया में भाग नहीं लेते तथा केवल इलेक्ट्रॉनों के स्रोत का कार्य करते हैं।

गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से कैथोड पर Na तथा ऐनोड पर Cl2 प्राप्त होती है क्योंकि द्रव अवस्था में केवल एक ही प्रकार के धनायन Na+ तथा ऋणायन (Cl हैं, जिनका क्रमशः अपचयन तथा ऑंक्सीकरण होता है-
कैथोड पर- Na+ + e → Na
ऐनोड पर- Cl → \(\frac { 1 }{ 2 }\)Cl2 + e

जब विद्युत अपघट्य का जलीय विलयन लिया जाता है तो विलयन में एक से अधिक प्रकार के धनायन तथा ऋणायन होते हैं क्योंकि कुछ मात्रा में H2O के आयनन से H+ तथा \(\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}\) आयन भी प्राप्त होते हैं। इस स्थिति में किसी इलेक्ट्रोंड पर कौनसा आयन विसर्जित होगा, इसे चयनात्मक विसर्ज्जन सिद्धान्त (Preferential Discharge Theory) के आधार पर समझाया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार, जब विलयन में एक ही प्रकार (धनायन या ऋणायन) के एक से अधिक आयन होते हैं तो इलेक्ट्रॉंड पर वह आयन पहले विसर्जित (Discharge) होगा, जिसका विसर्जन विभव (Discharge Potential) कम हो अर्थात् जिसके विसर्जन हेतु कम ऊर्जा की आवश्यकता हो।

प्रश्न 10.
सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पादों को इलेक्ट्रॉड विभव मानों के आधार पर समझाइए |
उत्तर:
वैद्युत अपघटन के उत्पाद: किसी पदार्थ (विद्युत अपघट्य) के वैद्युत अपघटन से प्राप्त उत्पाद (i) पदार्थ की अवस्था, (ii) प्रयुक्त किए गए इलेक्ट्रॉडों की प्रकृति तथा (iii) ओंक्सीकारक व अपचायक स्पीशीज एवं उनके मानक इलेक्ट्रोंड विभव पर निभर करते हैं। सक्रिय धातुओं के इलेक्ट्रॉडड लेने पर वे अभिक्रिया में भाग लेते हैं लेकिन अक्रिय धातुओं जैसे प्लैटिम इत्यादि के इलेक्ट्रॉड बनाने पर ये अभिक्रिया में भाग नहीं लेते तथा केवल इलेक्ट्रॉनों के स्रोत का कार्य करते हैं।

गलित NaCl के वैद्युत अपघटन से कैथोड पर Na तथा ऐनोड पर Cl2 प्राप्त होती है क्योंकि द्रव अवस्था में केवल एक ही प्रकार के धनायन Na+ तथा ऋणायन (Cl हैं, जिनका क्रमशः अपचयन तथा ऑंक्सीकरण होता है-
कैथोड पर- Na+ + e → Na
ऐनोड पर- Cl → \(\frac { 1 }{ 2 }\)Cl2 + e

जब विद्युत अपघट्य का जलीय विलयन लिया जाता है तो विलयन में एक से अधिक प्रकार के धनायन तथा ऋणायन होते हैं क्योंकि कुछ मात्रा में H2O के आयनन से H+ तथा \(\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}\) आयन भी प्राप्त होते हैं। इस स्थिति में किसी इलेक्ट्रोंड पर कौनसा आयन विसर्जित होगा, इसे चयनात्मक विसर्ज्जन सिद्धान्त (Preferential Discharge Theory) के आधार पर समझाया जाता है। इस सिद्धान्त के अनुसार, जब विलयन में एक ही प्रकार (धनायन या ऋणायन) के एक से अधिक आयन होते हैं तो इलेक्ट्रॉंड पर वह आयन पहले विसर्जित (Discharge) होगा, जिसका विसर्जन विभव (Discharge Potential) कम हो अर्थात् जिसके विसर्जन हेतु कम ऊर्जा की आवश्यकता हो।

किसी आयन का विसर्जन विभव निम्न कारको पर निर्भर करता है-
(i) विद्युत रासायनिक श्रेणी में आयन का स्थान,
(ii) आयन की सान्द्रता तथा
(iii) इलेक्ट्रॉंड की प्रकृति।
इस आधार पर विभिन आयनों के विसर्जित होने का क्रम निम्न प्रकार होता है-
धनायन – Li+ < K+ <Na+ < Ca2+ < Mg2+ < Al3+ < Zn2+ < Fe2+ < Co2+ < Ni2+ < Sn2+ < H+ < Cu2+ < Hg2+ < Ag2+ < Au3+

ॠणायन – \(\mathrm{SO}_4^{2-}<\mathrm{NO}_3^{-}<\mathrm{OH}^{-}<\mathrm{Cl}^{-}<\mathrm{Br}^{-}<\mathrm{I}^{-}\)

(i) सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन-सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन के वैद्युत अपघटन से NaOH, Cl2 गैस तथा H2 गैस बनती है। इसमें Na+ एवं Cl के साथ H+ एवं OH आयन तथा विलायक के अणु (H2O) भी होते है। कैथोड पर निम्नलिखित दो अभिक्रियाएँ हो सकती है-

Na+(aq) + e → Na(s); E°सेल = – 2.71 V …(1)
H+(aq) + e → \(\frac { 1 }{ 2 }\)H2(g); E°सेल = 0.00 V …(2)

लेकिन कैथोड पर वह अभिक्रिया होती है जिसके लिए E° का मान अधिक हो, अतः कैथोड पर अभिक्रिया (2) होगी। \(\mathrm{H}_{(\mathrm{aq})}^{+}\), H2O के वियोजन से प्राप्त होता है, अतः कैथोड पर होने वाली अभिक्रिया को निम्न प्रकार लिखा जाता है-

\(\mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(l)}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \frac{1}{2} \mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})}+\overline{\mathrm{O}} \mathrm{H}_{(a q)}\)

ऐनोड पर होने वाली संभावित अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

Cl(aq) → \(\frac { 1 }{ 2 }\) Cl2(g) + e; E°सेल = 1.36 V …(1)
2H2O(l) → O2(g) + 4H+(aq)+4e; E°सेल = 1.23 V …(2)

ऐनोड़ पर कम E° मान वाली अभिक्रिया पहले होती है अतः ऐनोड पर अभिक्रिया (2) होनी चाहिए लेकिन ऑक्सीजन के अधिविभव (Over Potential) के कारण अभिक्रिया (1) ही सम्पन्न होती है। अतः सम्पूर्ण अभिक्रिया को निम्न प्रकार से लिखा जाता है-

NaCl(aq) + H2O(l) →Na+ (aq) + OH(aq)+\(\frac { 1 }{ 2 }\)H2 (g)+\(\frac { 1 }{ 2 }\)Cl2(g)

नोट-इस विद्युत अपघटन में अक्रिय इलेक्ट्रोंड (Pt) प्रयुक्त किया जाता है लेकिन मर्करी का इलेक्ट्रॉंड प्रयुक्त करने पर कैथोड पर H+ का विसर्जन, Na+ की तुलना में मुश्किल से होता है। अतः कैथोड पर H2 के स्थान पर Na प्राप्त होता है तथा सोडियम अमलगम (Na/Hg) बन जाता है।

(ii) H2SO4 का वैद्युत अपघटन (Pt इलेक्ट्रॉड) – H2SO4 के वैद्युत अपघटन उत्पाद सान्द्रता पर निर्भर करते हैं अतः इसमें इलेक्ट्रॉड विभव के स्थान पर नेर्न्स्ट.समीकरण से प्राप्त इलेक्ट्रॉड विभव काम में लेते हैं।

(i) तनु H2SO4 के वैद्युत अपघटन पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
2H2O(l)→O2(g) + 4H+(aq) + 4e; E°सेल = +1.23 V

(ii) सांद्र H2SO4 लेने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
\(2 \mathrm{SO}_4^{2-}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{S}_2 \mathrm{O}_8^{2-}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{e}^{-} ; \mathrm{E}_{\text {(सेल) }}^{\circ}=+1.96 \mathrm{~V}\)

(iii) K2SO4 के जलीय विलयन का वैद्युत अपघटन (Pt इलेक्ट्रॉड) –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 17
K+ की तुलना में H+ अधिक क्रियाशील है अतः कैथोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
2H+ + 2e → H2(g)

तथा \(\mathrm{SO}_4^{2-}\) की तुलना में OH अधिक क्रियाशील है अतः ऐनोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-

2OH → [O] + H2O + 2e
या 4OH → O2 + 2H2O + 4e

प्रश्न 11.
गलित NaCl का वैद्युत अपघटन किस प्रकार होता
उत्तर:
गलित NaCl में केवल Na+ तथा Cl आयन होते हैं अतः कैथोड पर Na+ अपचयित होकर Na बनाते हैं तथा ऐनोड पर Cl ऑक्सीकृत होकर Cl2 बनाते हैं।
कैथोड पर – 2Na+ + 2e → 2Na(s)
ऐनोड पर – 2Cl – 2e → Cl2(g)

प्रश्न 12.
तनु तथा सान्द्र H2SO4 के वैद्युत अपघटन में होने वाली अभिक्रियाएँ लिखिए ।
उत्तर:
तनु H2SO4 के वैद्युत अपघटन पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
2H2O(/) → O2(g) + 4H+ (aq) + 4e, \(E_{\text {(सेल) }}^{\circ}\) = +1.23V तथा सांद्र H2SO4 लेने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
\(2 \mathrm{SO}_4^{2-}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{S}_2 \mathrm{O}_8^{2-}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{e}^{-}, \mathrm{E}_{\text {(बेल) }}^{\circ}=+1.96 \mathrm{~V}\)

प्रश्न 13.
अनन्त तनुता पर किसी दुर्बल वैद्युत अपघट्य की मोलर चालकता को किस प्रकार ज्ञात किया जाता है?
उत्तर:
दुर्बल वैद्युत अपघट्यों की मोलर चालकता पर सान्द्रता या तनुता का प्रभाव-दुर्बल वैद्युत अपघट्यों में प्रारम्भ में सान्द्रता अधिक होने पर वियोजन कम होता है लेकिन इनकी तनुता बढ़ाने पर, वियोजन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे एक मोल वैद्युत अपघट्य युक्त विलयन में आयनों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे मोलर चालकता (\(\Lambda_m\)) का मान बढ़ जाता है। अतः निम्न सान्द्रता के समीप तनुता बढ़ाने पर \(\Lambda_m\) का मान तेजी से बढ़ता है। (ग्राफ) उदाहरण-ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) |

प्रश्न 14.
किसी अल्प विलेय लवण की विलेयता को चालकता मापन द्वारा किस प्रकार ज्ञात किया जाता है?
उत्तर:
अल्प विलेय लवणों जैसे BaSO की जल में विलेयता, बहुत ही कम होती है अतः इसके विलयन में आयनों की सान्द्रता बहुत ही कम होगी। इसलिए इसके विलयन को अनन्त तनु मान सकते हैं तथा इसके संतृप्त विलयन की सान्द्रता ही इसकी विलेयता होगी। इस विलयन की मोलर चालकता तथा विशिष्ट चालकत्व ज्ञात करके विलेयता की गणना निम्नलिखित सूत्र द्वारा की जा सकती है-
S = \(\frac{\kappa \times 1000}{\Lambda_{\mathrm{m}}^{\circ}}\)

प्रश्न 15.
विद्युत अपघटनी चालन तथा धात्विक चालन में अन्तर बताइए ।
उत्तर:

  • विद्युत अपघटनी चालन आयनों द्वारा होता है जबकि धात्विक चालन इलेक्ट्रॉनों द्वारा होता है।
  • विद्युत अपघटन चालन में विद्युत प्रवाहित करने पर आयन क्रिया में भाग लेते हैं अर्थात् वैद्युत अपघटन होता है जबकि धात्विक चालकों पर कोई प्रभाव नहीं होता।
  • विद्युत अपघटन चालकों का ताप बढ़ाने पर चालकता बढ़ती है जबकि ताप बढ़ाने पर धात्विक चालकों की चालकता कम हो जाती है।

प्रश्न 16.
निम्नलिखित युग्मों में से किसमें अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होगी तथा क्यों ?
(a) 25°C पर KCl विलयन तथा 50°C पर KCl विलयन
(b) 0.2M CH3COOH क्लियन तथा 2M CH3COOH विलयन
(c) 25°C पर NH4OH विलयन तथा 75°C पर NH4OH विलयन
(d) 25°C पर AI का तार तथा 50°C पर Al का तार ।
उत्तर:
(a) 50°C पर KCl विलयन, क्योंकि ताप बढ़ाने पर आयनों की गति बढ़ती है।
(b) 0.2M CH3COOH विलयन, क्योंकि तनु विलयन में दुर्बल वैद्युत अपघट्य का आयनन अधिक होता है।
(c) 75°C पर NH4OH विलयन, क्योंकि ताप बढ़ाने पर दुर्बल वैद्युत अपघट्य का आयनन अधिक होता है।
(d) 25°C पर Al का तार क्योंकि ताप बढ़ाने पर धातुओं की चालकता कम होती है।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन में 3 घण्टे में 1.5 ग्राम कॉपर प्राप्त करने के लिए कितनी विद्युत धारा प्रवाहित करनी होगी ? [Cu का परमाणु भार = 63.5]
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 18
कॉपर का तुल्यांकी भार = \(\frac { 63.5 }{ 2 }\) = 31.75
क्योंकि Cu2+ से Cu बनता है जिसके लिए 2 इलेक्ट्रॉन आवश्यक है।
अतः \(Z=\frac{31.75}{96500}=3.29 \times 10^{-4}\)

फैराडे के प्रथम नियम से
W = ZIt
I = \(\frac { W }{ Zt }\)
W = 1.5 ग्राम, Z = 3.29 × 10-4, t = 3 × 60 × 60 सेकण्ड
अतः I = \(\frac{1.5}{3 \times 60 \times 60 \times 3.29 \times 10^{-4}}\)
I = 0.422 ऐम्पियर

प्रश्न 2.
गलित NaCl में 50 एम्पियर की धारा 2 घण्टे तक प्रवाहित करने पर
(a) ऐनोड पर कितने ग्राम क्लोरीन गैस प्राप्त होगी?
(b) प्राप्त क्लोरीन गैस का मानक ताप तथा दाब (NTP) पर आयतन कितना होगा?
उत्तर:
गलित NaCl में विद्युत प्रवाहित करने पर ऐनोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
(a) 2C → Cl2 + 2e
Cl2 का अणुभार = 35.5 × 2 = 71 ग्राम
आवेश Q = It
1 = 50 ऐम्पियर तथा t = 2 × 60 × 60 सेकण्ड = 7200 सेकण्ड
अतः Q = 50 × 7200 = 360000 C समीकरण के अनुसार,
2 × 96500 कूलॉम, Cl2 = 71 ग्राम Cl2 (1 मोल )
360000 कूलॉम Cl2 = \(\frac{360000}{2 \times 96500}\) × 71 = 132.4 ग्राम क्लोरीन

(b) 2 × 96500 कूलॉम Cl2 = 1 मोल Cl2
अतः 36,000 कूलॉम Cl2 = \(\frac{3,60,000}{2 \times 96500}\) = 1.8652 मोल क्लोरीन
NTP पर एक मोल Cl2 = 22.4 लीटर
अत: 1.8652 मोल Cl2 = 22.4 × 1.8652 = 41.78 लीटर क्लोरीन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 3.
कॉपर धातु की सतह जिसका क्षेत्रफल 60 cm2 है पर 0.004 मिलीमीटर मोटी Ag की परत के लेपन के लिए AgNO3 के विलयन में 5.0 ऐम्पियर की धारा कितने सेकण्ड तक प्रवाहित करनी आवश्यक होगी?
(सिल्वर का घनत्व 10.5 ग्राम सेमी तथा Ag का परमाणु भार = 108)
उत्तर:
कॉपर पर लेपित Ag की मात्रा (W)
= आयतन × घनत्व
= सतह का क्षेत्रफल × सतह की मोटाई × घनत्व
= 60 × 0.004 × 10.5
W = 2.52 ग्राम
फैराडे के प्रथम नियम से
W = Zlt
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 18

अभिक्रिया \(\mathrm{Ag}_{(\mathrm{aq})}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Ag}_{(\mathrm{s})}\) में एक इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त हो रहा
है अतः Ag का तुल्यांकी भार
= \(\frac { 108 }{ 1 }\) = 108
अतः Z = \(\frac { 108 }{ 96500 }\)
समय t = \(\frac { W }{ ZI }\) = \(\frac{2.52 \times 96500}{108 \times 5}\)
t = 450.3 सेकण्ड

प्रश्न 4.
श्रेणीक्रम में जुड़े हुए दो विद्युत अपघटनी सेलों में क्रमशः अम्लीकृत जल तथा CuSO4 के विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर 200 ml H2 (NTP पर ) तथा 0.60 ग्राम Cu प्राप्त हुए, तो Cu का तुल्यांकी भार कितना होगा?
उत्तर:
H2 का अणुभार = 2 तथा तुल्यांकी भार = 1
NTP पर 22.4 लीटर (22400 ml) H2 ग्राम
अतः 200ml H2 = \(\frac{2 \times 200}{22400}\) = 0.01785 ग्राम
प्राप्त Cu का भार = 0.60 ग्राम
फैराडे के द्वितीय नियम से-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 6

प्रश्न 5.
AlCl3 के विलयन में 0.1 फैराडे विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर कितने ग्राम AI धातु प्राप्त होगी ? (Al का परमाणु भार = 27)
उत्तर:
कैथोड पर होने वाली अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Al}_{(\mathrm{aq})}^{3+}+3 \mathrm{e} \rightarrow \mathrm{Al}_{(\mathrm{s})}\)
फैराडे के प्रथम नियम से-
W = ZQ
Z = \(\frac { M }{ nF }\)
अतः W = \(\frac{M}{n F} Q\)
Al के लिए M = 27, n = 3, F = 96500 कूलॉम
Q = 0.1. फैराडे = 9650 कूलॉम
W = \(\frac{27 \times 9650}{3 \times 96500}\) = 0.9 ग्राम

प्रश्न 6.
किसी आयन से परमाणु बनने पर होने वाले अपचयन में 6 × 1020 इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त होते हैं तो आयन के तुल्यांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(\mathrm{X}^{\mathrm{n}+}+\mathrm{ne}^{-} \rightarrow \mathrm{X}\)
n = 6 × 1023 = 0.001 मोल
क्योंकि 6 × 1023 = 1 मोल
चूँकि एक तुल्यांक आयन 1 मोल इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। अतः 0.001 मोल इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने वाले आयन के तुल्यांक = 0.001

प्रश्न 7.
गलित AlCl3, CuSO4 के जलीय विलयन तथा गलित NaCl से भरे विभिन्न विद्युत अपघटनी सेलों में 3 फैराडे विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कैथोड पर प्राप्त Al, Cu तथा Na की मात्राओं का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर:
(i) \(\mathrm{Al}_{(\mathrm{aq})}^{3+}+3 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Al}_{(\mathrm{s})}\) (कैथोडिक अभिक्रिया)
3 × 96500 कूलॉम विद्युत = 3
तुल्यांक Al = 1 मोल Al

(ii) \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e} \rightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
3 × 96500 कूलॉम विद्युत = 3
तुल्यांक Cu = 1.5 मोल Cu

(iii) \(\mathrm{Na}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Na}_{(\mathrm{s})}\)
3 × 96500 कूलॉम विद्युत = 3
तुल्यांक Na = 3 मोल Na
अतः Al, Cu तथा Na की मात्राओं का अनुपात
= 1 : 1.5 : 3
=2 : 3 : 6

प्रश्न 8.
Mg2+ आयन के विलयन से 1 ग्राम Mg प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की कीमत 5.00 रुपए है तो Al3+ से 10 ग्राम Al प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की कीमत ज्ञात कीजिए। (AI का परमाणु भार = 27 तथा Mg का परमाणु भार = 24 ) हल – फैराडे के प्रथम नियम से-
Al के लिए- W = ZQ
Z = \(\frac { E }{ F }\) = \(\frac { M }{ nF }\)
अतः W = \(\frac{M}{n F} Q\)
W = 10 ग्राम तथा n 3 क्योंकि Al3+ से Al बनता है।
अतः Q = \(\frac { WnF }{ M }\) = \(\frac{10 \times 3 \times 96500}{27}\) = 107222 कूलाम
इसी प्रकार Mg के लिए, Q = \(\frac { WnF }{ M }\)
(W= 1 ग्राम तथा n = 2 क्योंकि Mg2+ से Mg बनता है।)
= \(\frac{1 \times 2 \times 96500}{24}\) = 8041 कूलाम
प्रश्नानुसार, 8041 कूलाम विद्युत = 5.00 रुपए तो
107222 कूलाम विद्युत = \(\frac { 5 }{ 8041 }\) × 107222 = 66.67 रुपए

प्रश्न 9.
HCl से अम्लीकृत किए गए जल में 1 ऐम्पियर की धारा 3000 सेकण्ड तक प्रवाहित करने पर कैथोड पर मुक्त H2 की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विद्युत धारा की मात्रा Q = It
I = 1 ऐम्पियर, t = 3000 सेकण्ड
Q = 1 × 3000 = 3000 कूलॉम
कैथोड पर निम्नलिखित अभिक्रिया होगी-
\(\mathrm{H}_{(\mathrm{aq})}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \frac{1}{2} \mathrm{H}_2\)
अतः इस अभिक्रिया के अनुसार \(\frac { 1 }{ 2 }\) मोल H2 (1g H2) प्राप्त होने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा = 96500 कूलॉम = (1 मोल इलेक्ट्रॉन)
चूँकि 96,500 कूलॉम से प्राप्त
H2 = 1 ग्राम
अतः 3000 कूलॉम से प्राप्त
H2 = \(\frac { 1 }{ 96500 }\) × 3000 = 0.0310 ग्राम

प्रश्न 10.
H+ आयन के विलयन के विद्युत अपघटन से 6 मोल H2 गैस प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा कूलॉम में ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(2 \mathrm{H}^{+}+2 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{H}_2\)
समीकरण के अनुसार 1 मोल H2 प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा = 2 फैराडे

अतः 6 मोल H2 प्राप्त करने के लिए आवश्यक विद्युत की मात्रा = 2 × 6 = 12 फैराडे
12F = 12 × 96500 कूलॉम
=1158000 कूलॉम
=11.58 × 105 कूलॉम

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
सीमान्त मोलर चालकता क्या होती है ?
उत्तर:
किसी विलयन की अनन्त तनुता (लगभग शून्य सान्द्रता ) पर मोलर चालकता को सीमान्त मोलर चालकता कहते हैं। इसे \(\Lambda_{\mathrm{m}}^{\mathrm{o}}\) से दर्शाते हैं।

प्रश्न 2.
सेल स्थिरांक, सेल में विलयन का प्रतिरोध और विलयन की चालकता के बीच जो सम्बन्ध होता है, उसे स्पष्ट कीजिए। किस प्रकार विलयन की चालकता उसकी मोलर चालकता से सम्बन्धित होती है?
उत्तर:
(i) G = \(\frac { 1 }{ R }\) = \(\frac { A }{ pl }\) = k\(\frac { A }{ l }\)
यहाँ G = चालकत्व, k= चालकता (विशिष्ट चालकत्व)
\(\frac { l }{ A }\) = सेल स्थिरांक
R = विलयन का प्रतिरोध, p = प्रतिरोधकता

(ii) मोलर चालकता \(\Lambda_{\mathrm{m}}\) = \(\frac { k × 1000 }{ M }\)
K = चालकता, M = मोलरता

प्रश्न 3.
कुछ धातुओं के मानक इलेक्ट्रॉड विभव (E°) दिए गए हैं-
K+/K = – 2.93 V, Ag+/Ag = 0.80 V, Cu2+/Cu = 0.34 V, Mg2+/Mg = – 2.37 V, Cr2+ / Cr = – 0.74 V, Fe2+/ Fe = – 0.44 V.
इन धातुओं को उनके बढ़ते अपचायी सामर्थ्य के क्रम में पुनः व्यवस्थित कीजिए।
अथवा
एक विद्युत रासायनिक सेल की दो अर्ध-अभिक्रियाएँ नीचे दी गई हैं-
\(\mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+8 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+5 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Mn}^{2+}(\mathrm{aq})+4 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l), \mathrm{E}^{\circ}=+1.51 \mathrm{~V}\)

\(\mathrm{Sn}^{2+}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{Sn}^{4+}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{e}^{-}, \mathrm{E}^{\circ}=+0.15 \mathrm{~V}\)
इन दो अर्ध- अभिक्रियाओं के आधार पर रेडॉक्स (अपचयोपचय) अभिक्रिया का समीकरण लिखिए और मानक इलेक्ट्रॉड विभवों से सेल विभव परिकलित कीजिए और प्रागुक्ति कीजिए कि अभिक्रिया अभिकारक अनुकूली होगी अथवा उत्पाद अनुकूल होगी।
उत्तर:
मानक इलेक्ट्रॉड विभव के आधार पर इन धातुओं की बढ़ती अपचायी सामर्थ्य का क्रम निम्नलिखित है-
Ag < Cu < Fe < Cr < Mg < K [मानक इलेक्ट्रॉड विभव (अपचयन विभव) का घटता क्रम ]
अथवा
मानक इलेक्ट्रॉड विभव के आधार पर अभिक्रिया का संतुलित समीकरण निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 7
अधिक क्रियाशील धातु (Mn) का एनोड होगा अतः
\(\mathrm{E}_{\mathrm{R}}^{\circ}=1.51 \mathrm{~V} \mathrm{E}_{\mathrm{L}}^{\circ}=-0.15 \mathrm{~V}\) (क्योंकि ऑक्सीकरण विभव दिया गया है अतः इसका विपरीत अपचयन विभव होगा)
सेल = 1.51 – (- 0.15 V)
सेल = 1.66 V
सेल का मान धनात्मक है अतः उपरोक्त अभिक्रिया सम्पन्न होगी, अर्थात् अभिक्रिया उत्पाद अनुकूली है।

प्रश्न 4.
(a) सीसा संचायक बैटरी किस प्रकार की बैटरी है? सीसा संचायक बैटरी के काम करने पर जो एनोड और कैथोड पर अभिक्रियाएँ होती हैं और कुल मिलाकर जो सेल अभिक्रिया होती है, उन्हें लिखिए।
(b) 0.10 M K2Cr2O7 (aq), 0.20 M Cr3+ (aq) और 1.0 × 10-4 M H+ (aq) वाले अर्ध-सेल का विभव परिकलित कीजिए । अर्ध- सेल अभिक्रिया इस प्रकार दी जाती है-
\(\begin{array}{r}\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+14 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+6 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \\2 \mathrm{Cr}^{3+}(\mathrm{aq})+7 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l)\end{array}\)
इसके लिए मानक इलेक्ट्रॉड विभव दिया गया है, E° = 1.33V.
उत्तर:
(a) सीसा संचायक बैटरी (सेल) एक द्वितीयक सेल है। सीसा संचायक बैटरी के काम करने पर होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 8

प्रश्न 5.
एक विद्युत अपघट्य के 1.5 M विलयन की मोलर चालकता 138.9 S mol-1 पाई जाती है। इस विलयन की चालकता परिकलित कीजिए ।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 9

प्रश्न 6.
1 cm व्यास और 50 cm लम्बाई वाले 0.05 M NaOH विलयन के कॉलम का विद्युतीय प्रतिरोध 5.55 × 103 ohm है। इसकी प्रतिरोधकता, चालकता और मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
r = 1/2 = 0.5 cm
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
A = πr2 = 3.14 × 0.52 cm2 = 0.785cm2 = 0.785 × 10-4m2
l = 50 cm 0.5 m
प्रतिरोध R = \(\frac { pl }{ A }\)
या p = \(\frac { RA }{ l }\) = \(\frac{5.55 \times 10^3 \Omega \times 0.785 \mathrm{~cm}^2}{50 \mathrm{~cm}}\)
प्रतिरोधकता (p) = 87.135 Ω cm
चालकता \(\kappa=\frac{1}{\rho}=\left(\frac{1}{87.135}\right) \mathrm{S} \mathrm{cm}^{-1}\)
\(\mathcal{K}\) = 0.011476 s cm-1
\(\mathcal{K}\) = 0.01148 s cm-1
मोलर चालकता,
\(\Lambda_{\mathrm{m}}=\frac{\kappa \times 1000}{\mathrm{c}} \mathrm{cm}^3 \mathrm{~L}^{-1}\)
c = 0.05 mol L-1
\(\Lambda_{\mathrm{m}}=\frac{0.01148 \mathrm{~S} \mathrm{~cm}^{-1} \times 1000 \mathrm{~cm}^3 \mathrm{~L}^{-1}}{0.05 \mathrm{~mol} \mathrm{~L}^{-1}}\)
\(\Lambda_{\mathrm{m}}=229.6 \mathrm{~S} \mathrm{~cm}{ }^2 \mathrm{~mol}^{-1}\)
जब cm के स्थान पर m के पदों में गणना करें तो-
p = \(\frac { RA }{ l }\) = \(\frac{5.55 \times 10^3 \Omega \times 0.785 \times 10^{-4} \mathrm{~m}^2}{0.5 \mathrm{~m}}\)
= 87.135 × 10-2 Ω m
\(\mathcal{K}\) = \(\frac { l }{ p}\) = \(\frac { 100 }{ 87.135 }\)Ω cm
= 1.148 S m-1
तथा \(\Lambda_{\mathrm{m}}\) = \(\frac{\mathrm{K}}{\mathrm{c}}\) = \(\frac{1.148 \mathrm{~S} \mathrm{~m}^{-1}}{50 \mathrm{~mol} \mathrm{~m}^{-3}}\)
= 229.6 × 10-4 S m2 mol-1

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 वैद्युत रसायन

प्रश्न 7.
AgNO3 के विलयन को 2.0 ऐम्पियर की धारा से 30 मिनट तक वैद्युत अपघटित किया गया। कैथोड पर निक्षेपित चाँदी का द्रव्यमान क्या होगा?
(Ag का मोलर द्रव्यमान 108 ग्राम मोल-1, F = 96500 कूलाम मोल-1)
उत्तर:
समय (t) = 30 मिनट = 30 × 60 = 1800 sec.
I = 2 ऐम्पियर
आवेश = धारा × समय
Q = It = 2 × 1800 कूलाम
= 3600 amp sec. = 3600 कूलाम
\(\mathrm{Ag}_{(\mathrm{aq})}^{+}+\mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Ag}_{(\mathrm{s})}\) के अनुसार, एक मोल (108 g) Ag को निक्षेपित करने के लिए IF या 96500 कूलाम आवेश की आवश्यकता होती है।
अतः 3600 कूलाम आवेश द्वारा निक्षेपित Ag का द्रव्यमान
= \(\frac{108 \times 3600}{96500}\) = 4.029 = 4.03 ग्राम

प्रश्न 8.
KCl, HCl एवं CH3COOK के लिए \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) के मान क्रमशः 149.8 S Cm2 mol-1, 425.9 S cm2 mol-1 एवं 114.4 S Cm2 mol-1 हैं | CH3COOH के लिए \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (CH3COOH) = \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (CH3COOK) + \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (HCl) – \(\stackrel{\circ}{\Lambda}_m\) (KCl)
= 114.4 + 425.9 – 149,8
= 540.3 – 149.8
= 390.5 S cm2 mol-1

प्रश्न 9.
विद्युत चालन के आधार पर अचालक एवं अर्धचालक को समझाइए |
उत्तर:
अचालक या विद्युतरोधी – वे ठोस जिनकी चालकता बहुत कम (10-20 से 10-10 ohm-1 m-1 ) होती है, उन्हें अचालक कहते हैं। इनमें स्वतंत्र आयन या स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन नहीं होते अतः ये विद्युत का चालन नहीं करते हैं। इनमें संयोजी बैंड पूर्ण भरा होता है तथा संयोजी बैण्ड एवं चालन बैंड के मध्य ऊर्जा अन्तराल अधिक होता है। उदाहरण- यूरिया तथा शर्करा ।

अर्धचालक – वे ठोस जिनकी चालकता, चालक तथा अचालक के मध्य (10-6 से 104 ohm-1 m-1 ) होती है, उन्हें अर्धचालक कहते हैं। अर्धचालकों में संयोजी बैंड तथा चालक बैंड के मध्य ऊर्जा अन्तराल बहुत कम होता है अतः ये अल्प चालकता दर्शाते हैं। उदाहरण- सिलिकन एवं जर्मेनियम ।

प्रश्न 10.
साम्य अवस्था पर डेन्यल सेल के लिए नेन्ंस्ट समीकरण लिखिए एवं E°(सेल) तथा साम्य स्थिरांक (Kc) में सम्बन्ध व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
डेनियल सेल में प्रयुक्त अभिक्रिया-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 10
अतः T = 298 K पर R तथा F का मान रखने पर, उपर्युक्त समीकरण को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है-
सेल = \(\frac { 0.059V }{ 2 }\)log KC
डेन्यल सेल के लिए E°सेल =1.1 V
1.1 V = \(\frac { 0.059V }{ 2 }\)log Kc
log Kc = \(\frac{(1.1 \mathrm{~V} \times 2)}{0.059 \mathrm{~V}}\) = 37.288
Kc = Antilog 37.288 = 1.941 × 1037
Kc = 2 × 1037 (297 K परं)
अतः सामान्य रूप में,
सेल = \(\frac{2.303 \mathrm{RT}}{\mathrm{nF}}\)log Kc या E°सेल = \(\frac{0.059 \mathrm{~V}}{\mathrm{nF}}\) log Kc
यह समीकरण सेल के मानक विभव (E°सेल) तथा साम्य स्थिरांक (Kc) के मध्य सम्बन्ध है।

प्रश्न 11.
(अ) डेनियल सेल का नामांकित चित्र बनाइए ।
(ब) इलेक्ट्रॉडों पर होने वाली ऑक्सीकरण एवं अपचयन की अर्ध अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
(अ) डेनियल सेल को निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जाता हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 11
डेनियल सेल जिसमें जिंक एवं कॉपर इलेक्ट्रॉड अपने लवणों के विलयनों में उपस्थित हैं।
(ब) डेन्यल सेल में इलेक्ट्रॉडों पर होने वाली अर्ध अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-

कैथोड पर-

(i) \(\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \mathrm{Cu}(\mathrm{s})\) (अपचयन अर्ध अभिक्रिया)
ऐनोड पर –
(ii) \(\mathrm{Zn}(\mathrm{s}) \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{e}^{-}\) (ऑक्सीकरण अर्ध अभिक्रिया) तथा सम्पूर्ण अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

प्रश्न 12.
डेनियल सेल का मानक इलेक्ट्रॉड विभव E° = + 1.1V है तो अभिक्रिया \(\mathbf{Z n}_{(\mathrm{s})}+\mathbf{C u}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathbf{Z n}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathbf{C u}_{(\mathrm{s})}\) के लिए △G° का परिकलन कीजिए। (F = 96500C mol-1)
उत्तर:
उपरोक्त अभिक्रिया के लिए n = 2
△G° = – nFE°सेल
= – 2 × 96500 × 1.1
= – 212,300
= – 212,300 जूल मोल-1
= 212.30 किलो जूल मोल-1

प्रश्न 13.
(i) 298 K पर निम्नलिखित सेल के विद्युत वाहक बल का परिकलन कीजिए-
Mg(s) | Mg2+ (0.1M) || Cu2+(0.01M) | Cu(s)
दिया गया है-
सेल = + 2.71V तथा 1F = 96500 C mol-1

(ii) अपोलो अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए विद्युत शक्ति उपलब्ध कराने के लिए प्रयुक्त सेल के प्रकार का नाम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 12

प्रश्न 14.
(अ) क्या हम CuSO4 के विलयन को लोहे के पात्र में भण्डारण कर सकते हैं? समझाइए ।
(ब) कॉलराउश का नियम लिखिए एवं एक अनुप्रयोग बताइए ।
उत्तर:
(अ) CuSO4 के विलयन का लोहे के पात्र में भण्डारण नहीं किया जा सकता क्योंकि लोहा, कॉपर से अधिक क्रियाशील होता है। अर्थात् आयरन (लोहा) कॉपर की तुलना में प्रबल अपचायक है। अतः यह CuSO4 के विलयन से कॉपर को अवक्षेपित कर देता है।
\(\mathrm{CuSO}_{4(\mathrm{aq})}+\mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})} \rightarrow \mathrm{FeSO}_{4(\mathrm{aq})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

(ब) कोलराडश के अनुसार वैद्युत अपघट्यों के वे युग्म जिनमें धनायन या ऋणायन समान हों, उनकी अनन्त तनुता पर मोलर चालकताओं (A) का अन्तर निश्चित होता है।
\(\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{KCl})}^{\circ}-\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{NaCl})}^{\circ}=\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{KBr})}^{\circ}-\Lambda_{\mathrm{m}(\mathrm{NaBr})}^{\circ}\)

अतः अनन्त तनुता पर किसी विद्युत अपघट्य का प्रत्येक आयन मोलर चालकता (\(\Lambda_{\mathrm{m}}\)) में एक निश्चित योगदान देता है तथा यह दूसरे आयन पर निर्भर नहीं करता। इस आधार पर कोलराडश ने आयनों के स्वतंत्र अभिगमन का नियम दिया जिसे कोलराडश का नियम कहते हैं। इसके अनुसार किसी वैद्युत अपघट्य की सीमान्त मोलर चालकता, उसके धनायन तथा ऋणायन की सीमान्त मोलर चालकता का योग होती है।
उदाहरण – KCl के लिए
\(\Lambda_{\mathrm{m}}^{\circ} \mathrm{KCl}=\lambda_{\mathrm{K}^{+}}^{\circ}+\lambda_{\mathrm{Cl}^{-}}^{\circ}\) \(\lambda_{\mathrm{K}^{+}}^{\circ}\)

\(\lambda_{\mathrm{K}^{+}}^{\circ}\) व \(\lambda_{\mathrm{Cl}^{-}}^{\circ}\) क्रमश: K+ तथा Cl की सीमान्त मोलर चालकता है। कोलराडश के नियम से किसी दुर्बल विद्युत अपघट्य की सीमान्त मोलर चालकता (अनन्त तनुता पर मोलर चालकता) ज्ञात की जा सकती है।
उदाहरण – CH3COOH (HAc) के लिए
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 13

प्रश्न 15.
(अ) लोहे के जंग लगने की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
(ब) डेन्यल सेल की सम्पूर्ण अभिक्रिया दीजिए एवं इस सेल के लिए नेर्नूस्ट समीकरण का गणितीय रूप लिखिए।
उत्तर:
(अ) लोहे के जंग लगने की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})}+4 \stackrel{+}{\mathrm{H}}_{(\mathrm{aq})} \rightarrow 2 \mathrm{Fe}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+2 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(/)}\)
इसके पश्चात् वायुमण्डलीय ऑक्सीजन के द्वारा Fe2+ आयन पुनः ऑक्सीकृत होकर Fe3+ बनाते हैं। ये आयन जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3. x H2O) बना लेते हैं। यही जंग का रासायनिक संघटन है।

(ब) डेनियल सेल की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया निम्नलिखित है-
\(\mathrm{Zn}_{(\mathrm{s})}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+} \rightarrow \mathrm{Zn}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)
इसके लिए नेर्नूस्ट समीकरण इस प्रकार लिखा जा सकता है-
E(सेल) = E°सेल – \(\frac{\mathrm{RT}}{2 \mathrm{~F}} \ln \frac{\left[\mathrm{Zn}^{2+}\right]}{\left[\mathrm{Cu}^{2+}\right]}\)
सेल = मानक सेल विभव
समीकरण में प्राकृतिक लघुगणक को 10 के आधार में बदलने तथा R, F एवं T के मान रखने पर
E(सेल) = E°सेल – \(\frac{0.059}{2} \log \frac{\left[\mathrm{Zn}^{2+}\right]}{\left[\mathrm{Cu}^{2+}\right]}\)

प्रश्न 16.
प्रतिरोधकता का SI मात्रक लिखिये ।
उत्तर:
प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम मीटर (Ωm) होता है।

प्रश्न 17.
Mg2+ व Cl आयनों की सीमान्त मोलर चालकता क्रमश: 106.0 s.cm2.mol-1 तथा 76.3 s.cm2.mol-1 है। MgCl2 की सीमान्त मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
MgCl2 की सीमान्त मोलर चालकता
\(\Lambda_{\mathrm{m}}^0\left(\mathrm{MgCl}_2\right)=\lambda^{\circ}\left(\mathrm{Mg}^{2+}\right)+2 \lambda^{\circ}\left(\mathrm{Cl}^{-}\right)\)
= 106.0 s.cm.mol-1 + 2( 76.3 s. cm2.mol-1) = 258.6 s.cm2.mol-1

प्रश्न 18.
(अ) फैराडे के विद्युत अपघटन के द्वितीय नियम को लिखिए।
(ब) मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉड का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(अ) फैराडे के विद्युत अपघटन का द्वितीय नियम – विभिन्न वैद्युत अपघट्यों के विलयनों में विद्युत की समान मात्रा समान समय तक प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रॉडों पर प्राप्त विभिन्न पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों के समानुपाती होती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 14

प्रश्न 19.
जब 1.5 A की विद्युत धारा AgNO3 के विलयन में से प्रवाहित की जाती है तो कैथोड पर सिल्वर का 1.5 g जमा होने में जो समय लगता है, उसका परिकलन कीजिए ।
(Ag का मोलर द्रव्यमान = 108 g mol-1, 1 F = 96500 C mol-1)
उत्तर:
1 मोल (108g) Ag के निक्षेपित होने के लिए आवश्यक आवेश = 96500 कूलाम
अतः 1.5 g Ag के निक्षेपित होने के लिए प्रयुक्त आवेश
= \(\frac { 96500 }{ 108 }\) × 1.5 = 1340.3 कूलाम
आवेश Q = I × t
अतः समय (t) = \(\frac { Q }{ I }\) = \(\frac { 1340.3 }{ 1.5 }\) = 893.5 सेकण्ड
इसलिए 1.5 g सिल्वर के जमा होने में लगा समय = 893.5 सेकण्ड

प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए E°सेल और △rG° को 25°C पर परिकलित कीजिए-
A2+ + B+ → A3+ + B
दिया गया है – Kc = 1010, 1 F = 96500 C mol-1
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 3 Img 15

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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु  Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु


(A) वस्तुनिष्ठ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित दो कार्बनिक यौगिकों के संरचनात्मक सूत्रों में से कौन, उसके सम्बन्धित कार्य के साथ सही प्रकार से पहचाना गया है ? (CBSE AIPMT)
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु 1

(A) A: ट्राइग्लिसराइड – ऊर्जा का मुख्य स्रोत
(B) B : यूरेसिल – DNA का एक संघटक ‘
(C) A : लैसीथिन – कोशिका कला का एक संघटक
(D) B: एडीनीन – एक न्यूक्लिओटाइड, जो न्यूक्लिक अम्ल बनाता है।
उत्तर:
(B) B : यूरेसिल – DNA का एक संघटक ‘

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु

2. एपोएन्जाइम होता है एक-
(A) प्रोटीन
(B) कार्बोहाइड्रेट
(C) विटामिन
(D) अमीनो अम्ल ।
उत्तर:
(A) प्रोटीन

3. DNA द्विकुण्डलिनी के दोनों सूत्र परस्पर जुड़ रहते हैं-
(A) हाइड्रोजन बन्धों द्वारा
(B) हाइड्रोफोबिक बन्धों द्वारा
(C) पेप्टाइड बन्धों द्वारा
(D) फास्फोडाइएस्टर बन्धों द्वारा ।
उत्तर:
(C) पेप्टाइड बन्धों द्वारा

4. हिस्टोन में पाए जाने वाले अमीनो अम्ल हैं- (RPMT)
(A) आर्जिनिनि तथा हिस्टीडीन
(B) आर्जिनीन तथा लाइसी
(C) बेलीन तथा हिस्टीडीन
(D) लाइसीन तथा हिस्टीडीन ।
उत्तर:
(C) बेलीन तथा हिस्टीडीन

5. नीचे A D तक चार सूत्र दिए गए हैं- इनमें से कौन-सा एक क्षारीय अमीनो अम्ल के सही संरचना सूत्र को प्रदर्शित करता है ? (CBSE-AIPMT)
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु 2

(A) C
(C) A
(B) D
(D) B.
उत्तर:
(A) C

6. एक एंजाइमी अभिक्रिया के दौरान बनी पदार्थ की परिवर्तित अवस्था रचना है-
(A) क्षणिक परन्तु स्थिर
(B) स्थायी परन्तु अस्थिर
(C) क्षणिक और अस्थिर
(D) स्थायी और स्थिर ।
उत्तर:
(A) क्षणिक परन्तु स्थिर

7. फास्फोग्लिसेराइड सदैव बने होते हैं- (NEET)
(A) ग्लिसरॉल अणु से एस्टरीकृत एक संतृप्त वसा अम्ल जिसमें फॉस्फेट समूह भी संयोजित रहता है
(B) ग्लिसरॉल अणु से एस्टरीकृत एक असंतृप्त वसा अम्ल जिसमें फॉस्फेट समूह भी संयोजित रहता है।
(C) ग्लिसरॉल अणु से एस्टरीकृत एक संतृप्त या असंतृप्त वसा अम्ल जिसमें फॉस्फेट समूह भी संयोजित रहता है।
(D) फॉस्फेट समूह से एस्टरीकृत एक संतृप्त या संतृप्त वसा अम्ल जिसमें एक ग्लिसरॉल अणु भी संयोजित रहता है।
उत्तर:
(D) फॉस्फेट समूह से एस्टरीकृत एक संतृप्त या संतृप्त वसा अम्ल जिसमें एक ग्लिसरॉल अणु भी संयोजित रहता है।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु

8. काइटिन महाअणु- (NEET)
(A) नाइट्रोजनी पॉलीसेकेराइड है
(B) फास्फोरसमय पॉलीसेकेराइड है।
(C) सल्फरमय पॉलीसैकेराइड है
(D) सरल पॉलीसेकेराइड हैं।
उत्तर:
(B) फास्फोरसमय पॉलीसेकेराइड है।

9. अनेक सह एंजाइमों के रासायनिक घटक क्या हैं ?
(A) प्रोटीन
(C) कार्बोहाइड्रेट
(B) न्यूक्लिक अम्ल
(D) विटामिन ।
उत्तर:
(A) प्रोटीन

(B) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न के लिए एस्टर बंध, ग्लाइकोसिडिक बंध, पेप्टाइड बंध व हाइड्रोजन बंध में से सही बंध का चुनाव कीजिए-(Exemplar Problem NCERT)
(A) पालीसैकेराइड
(B) प्रोटीन
(C) वसा
(D) जल
उत्तर:
(A) ग्लाइकोसिडिक,
(B) पेप्टाइड बंध,
(C) एस्टर बंध,
(D) हाइड्रोजन बंध

प्रश्न 2.
किसी एक अमीनो अम्ल शर्करा, न्यूक्लिओटाइड व वसीय अम्ल का नाम लिखिए। (Exemplar Problem NCERT)
उत्तर:
अमीनो अम्ल – ग्लाइसीन, एलेनीन, वैलीन।
शर्करा – ग्लूकोस, फ्रक्टोस, सुक्रोस ।
न्यूक्लिओटाइड – एडीनोसीन, ट्राइफॉस्फेट ।
वसीय अम्ल – स्टीयरिक अम्ल, पामिटिक अम्ल, ब्यूटाइरिक अम्ल ।

प्रश्न 3.
कार्बोहाइड्रेट क्या होते हैं ?
उत्तर:
कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के बने यौगिक जिनका सामान्य सूत्र (CH2 O)n होता है।

प्रश्न 4.
संगठन के तीन स्तरों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • उप-परमाण्विक स्तर,
  • परमाण्विक स्तर तथा
  • आण्विक स्तर ।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु

प्रश्न 5.
जैविक तत्व किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वे तत्व जो जीवधारी की शरीर रचना में भाग लेते हैं।

प्रश्न 6.
तीन वृहत् तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर:
न्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन, वसा।

प्रश्न 7.
स्टार्च परीक्षण में क्या प्रदर्शित होता है ?
उत्तर:
स्टार्च आयोडीन घोल ( iodine solution) के साथ नीला-काला रंग देता है

प्रश्न 8.
दो असंतृप्त वसा अम्लों के नाम लिखिए।
उत्तर:
लिनोलीक (linolic) तथा लिनोलेनिक (linolenic) अम्ल ।

प्रश्न 9.
पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं में कौन-से बन्य होते हैं ?
उत्तर:
पेप्टाइड बन्ध (peptide bonds)।

प्रश्न 10.
यूनीमेरिक प्रोटीन अणु क्या होते हैं ?
उत्तर:
यूनीमेरिक प्रोटीन अणु में केवल एक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला (polypeptide chain) होती है।

प्रश्न 11.
प्राकृत संरूपण के आधार पर प्रोटीन्स के कितने स्तर होते हैं ?
उत्तर:
चार स्तर – प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक व चतुष्क स्तर ।

प्रश्न 12.
ATP के उच्च ऊर्जा बन्ध के जल अपघटन से विमोचित ऊर्जा की कितनी मात्रा होती है ?
उत्तर:
7.3k cal. किलो कैलोरी ।

प्रश्न 13.
एन्जाइम क्रियाविधि की ताला चाबी परिकल्पना किसने प्रस्तुत की ?
उत्तर:
एमिल फिशर (1894) ने।

प्रश्न 14.
एन्जाइम क्रिया विधि की प्रेरित जोड़ संकल्पना किसने प्रस्तुत की ?
उत्तर:
कोशलैण्ड (Koshland: 1960) ने ।

प्रश्न 15.
काइटिन क्या है ?
उत्तर:
काइटिन सेलुलोस की भाँति संरचनात्मक पॉलीसेकेराइड (stuctural polysacharide) है ।

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प्रश्न 16.
दो हैक्सोज शर्कराओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • ग्लूकोस,
  • फ्रक्टोस ।

प्रश्न 17.
डेक्स्ट्रान क्या है ?
उत्तर:
यीस्ट एवं जीवाणुओं के संचायक होमोपॉलीसेकेराइड ।

प्रश्न 18.
एगार- एगार क्या होता है ?
उत्तर:
समुद्री शैवालों से प्राप्त श्लेष्मी पॉलीसेकेराइड ।

प्रश्न 19.
संयुग्मित लिपिड क्या होते हैं ?
उत्तर:
ये ऐल्कोहॉल के साथ वसीय अम्लों के एस्टर हैं जिनमें एक फॉस्फेट, कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन समूह भी होता है।

प्रश्न 20.
जब एक पेन्टोज शर्करा एक नाइट्रोजनी क्षारक से जुड़ती है तो क्या बनता है ?
उत्तर:
एक न्यूक्लिओसाइड ( nucleoside )

प्रश्न 21.
डी. एन. ए. की संरचना का डबल हैलिकल मॉडल किसने प्रस्तुत किया ?
उत्तर:
वाटसन एवं क्रिक ने।

प्रश्न 22.
सह-संयोजी बन्ध किसे कहते हैं ?
उत्तर:
अणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बनने वाले बन्ध सहसंयोजी बन्ध कहलाते हैं।

प्रश्न 23.
डी. एन. ए. द्विरज्जुक में ग्वानिन व साइटोसीन के बीच कितने हाइड्रोजन बन्ध बनते हैं ?
उत्तर:
तीन (CG)

प्रश्न 24.
प्यूरीन तथा पिरिमिडीन का क्या अनुपात होता है ?
उत्तर:
A/T = 1 तथा G / C = 1

(C) लघु उत्तरीय प्रश्न-I

प्रश्न 1.
प्रोटीन्स के विकृतीकरण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
उच्च तापमान या pH परिवर्तन के फलस्वरूप प्रोटीन्स की तृतीयक या चतुष्क संरचना को बनाए रखने वाले बन्ध टूट जाते हैं, जिससे प्रोटीन्स की प्रकार्य सक्रियता समाप्त हो जाती है। इसे विकृतीकरण (denaturation ) कहते हैं। जैसे- अण्डे को उबालने पर इसका पीतक ( yolk ) जम जाता है।

प्रश्न 2.
जीवधारियों के शरीर में होने वाली उपचय तथा अपचय क्रियाओं में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
उपचय या संश्लेषण अभिक्रियाओं के तरल अणुओं से जटिल अणुओं का संश्लेषण होता है जैसे ग्लूकोस के अणुओं के संयोजन से ग्लाइकोजन का निर्माण। अपचय ( catabolic) क्रियाओं में जटिल अणु छोटे-छोटे अणुओं में विघटित हो जाते हैं और ऊर्जा मुक्त होती है जैसे श्वसन क्रिया।

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प्रश्न 3.
न्यूक्लिक अम्ल में पाए जाने वाले विभिन्न नाइट्रोजनी क्षारकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्यूरीन्स (Purines ) –

  • एडिनीन ( Adenine)
  • ग्वानीन ( Guanine)

पिरिमिडीन्स (Pyrimidines)-

  • साइटोसीन (Cytosine)
  • थाइमीन (Thymine)
  • यूरेसिल (Uracil)।

प्रश्न 4.
वसा अम्ल क्या है ?
इनका सामान्य सूत्र लिखिए।
उत्तर:
वसा अम्ल (Fatty acid) ये कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन से मिलकर बनते हैं। तीन अणु वसा अम्ल तथा एक अणु ग्लिसरॉल मिलकर वसा (fat) अणु बनाते हैं। वसा अम्ल का सामान्य सूत्र CH3(CH2)n COOH है ।

प्रश्न 5.
जैविक अणुओं का संश्लेषण कहाँ होता है ?
उत्त:
जैविक अणुओं का संश्लेषण पौधों एवं जन्तुओं में होता है। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अकार्बनिक अणुओं से जैविक अणुओं का संश्लेषण करते हैं। जन्तु इन्हें भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। जन्तुओं द्वारा इनसे आवश्यक अन्य जैव अणुओं का संश्लेषण होता है।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न-II

प्रश्न 1.
ऊष्माशोषी तथा ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं को उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर:
ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ (Endothermic reactions ) – ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऊष्मा का अवशोषण होता है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ (endothermic reactions) कहलाती हैं। जैसे- प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) ।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु 4

C6H12O6 + 6H2 O + 6O2
ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ (Exothermic reactions ) – ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऊर्जा मुक्त होती है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ (exothermic reactions) कहलाती हैं-जैसे श्वसन (Respiration) ।
C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा

प्रश्न 2.
आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्लों का क्या अर्थ है ?
उत्तर:
(A) आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) – इन ऐमीनो अम्लों का संश्लेषण हमारे शरीर में नहीं हो सकता है। यह हमें केवल पौधों से भोजन के रूप में प्राप्त होते हैं। परन्तु किसी भी पादप स्रोत में ये सभी आवश्यक एमीनो अम्ल ( amino acids) नहीं पाए जाते हैं। जन्तु प्रोटीन्स में सभी आवश्यक ऐमीनो अम्ल पाए जाते हैं। आवश्यक एमीनो अम्लों की संख्या 10 है ।

(B) अनावश्यक एमीनो अम्ल (Non essential Amino 3(Non-essential Acids) इन ऐमीनो अम्लों का संश्लेषण स्वयं शरीर द्वारा अन्य ऐमीनो अम्लों द्वारा हो जाता है। अतः इन्हें अतिरिक्त रूप से भोजन में लेने की आवश्यकता नहीं होती है, इनकी संख्या भी 10 है।

प्रश्न 3.
ATP क्या है ? ATP की संरचना समझाइए ।
उत्तर;
ATP या एडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine triphosphate) एक उच्च ऊर्जा यौगिक है। इसका निर्माण राइबोस शर्करा, नाइट्रोजनी क्षारक तथा फॉस्फेट समूह के जुड़ने से होता है। सर्वप्रथम नाइट्रोजनी क्षारक एडेनीन एवं राइयोज शर्करा (ribose sugar) अणु मिलकर एडिनोसिन (adenosine) न्यूक्लिओसाइड (nucleoside) बनाते हैं। न्यूक्लिओसाइड से अब एक फॉस्फेट जुड़कर न्यूक्लिओटाइड ( nucleotide ) बनता है। इसे एडिनोसिन मोनोफास्फेट (AMP) कहते हैं। न्यूक्लिओसाइड से न्यूक्लिओटाइड
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु 3

बनने बने फास्फोडाइएस्टर बन्ध में 1500-1800 कैलारी प्रतिमोल ऊर्जा संचित होती है। AMP में अब एक और फॉस्फेट अणु जुड़ता है तथा एडिनोसिन डाइ फास्फेट ( ADP) बनता है और इस बन्ध में 7300 कैलोरी मोल ऊर्जा संचित होती है। अब ADP में एक और फॉस्फेट अणु जुड़ता है जिससे एडिनोसिन है ट्राइ फॉस्फेट ( ATP ) बनता है। इस बन्ध में भी 7300 कैलारी मोल ऊर्जा संचित होती है। ATP को ऊर्जा की करेन्सी कहा जाता है। ATP जब ADP में बदलता है तब ऊर्जा मुक्त होती है जो जैविक क्रियाओं में प्रयोग की जाती है।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु

प्रश्न 4.
माइकेलिस स्थिरांक से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
माइकेलिस स्थिरांक (Michalis constant ) – रासायनिक अभिक्रिया में क्रियाधार (substrate) की वह सान्द्रता जिस पर क्रिया की गति उसकी अधिकतम गति की आधी होती है, माइकेलिस स्थिरांक कहलाता है। यह क्रियाघर (substrat ) से लगाव प्रदर्शित करता है। इसे Km से दर्शाते हैं। Km का मान एन्जाइम का क्रियाधार (substrate) से अधिक लगाव की स्थिति में कम होता है। किसी भी विकर में Km का मान अलग-अलग क्रियाधारों में अलग-अलग होता है।

प्रश्न 5.
न्यूक्लिओसाइड्स तथा न्यूक्लिओटाइड में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
न्यूक्लिओसाइड्स तथा न्यूक्लिओटाइड्स में अन्तर (Differences between Nucleside and Nucleotides)-

न्यूक्लिओसाइड्स (Nucleosides)न्यूक्लिओटाइड्स (Nucleotides)
1. इसमें एक नाइट्रोजनी क्षारक तथा एक पेन्टोस शर्करा होती है।इसमें एक नाइट्रोजनी क्षारक, एक | पेन्टोस शर्करा तथा एक फॉस्फेट समूह होता है।
2. यह स्वभाव में क्षारीय ( basic ) होते हैं।यह स्वभाव में अम्लीय (acidic) होते हैं।
3. यह न्यूक्लिओटाइड्स के घटक अणु होते हैं।यह न्यूक्लिक अम्लों के घटक अणु होते हैं।

प्रश्न 6.
संतृप्त तथा असंतृप्त वसा अम्लों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
संतृप्त वसा अम्ल तथा असंतृप्त वसा अम्ल में अन्तर (Differences between saturated fatty acids and unsaturated fatly acids)

संतृप्त वसा अम्लअसंतृप्त वसा अम्ल
1. इनमें शृंखला के सभी कार्बन परमाणु एकल बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं।श्रृंखला के एक या अधिक स्थानों पर कार्बन कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि या त्रि बन्ध होते हैं।
2. इनमें श्रृंखला के शीर्षस्थ कार्बन – COOइसमें दोहरे बन्धों वाले कार्बन परमाणुओं पर हाइड्रोजन परमाणु नहीं होते हैं।
3. यह सामान्य ताप पर ठोस (solid) होते हैं।यह सामान्य ताप पर द्रव (liquid) होते हैं।
4. इनका गलनांक (melting point) अधिक होता है।इनका गलनांक (melting point) कम होता है।
5. यह सामान्यतया जन्तु वसाओं किन्तु कुछ पौधों में भी पाए जाते हैं ।यह सामान्यतया पादप वसाओं में पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
न्यूक्लिओटाइड्स के कार्य लिखिए।
उत्तर:
न्यूक्लिओटाइड्स के कार्य (Functions of Nucleotides ) – न्यूक्लिओटाइड्स के निम्नलिखित कार्य हैं-
(1) न्यूक्लीक अम्लों का निर्माण (Formation of Nucleic Acids) – न्यूक्लिओटाइड्स के बहुलीकरण (polymerization) से न्यूक्लीक अम्ल DNA, RNA बनते हैं।

(2) ऊर्जा वाहकों का निर्माण (Formation of Energy Carriers) न्यूक्लिओटाइड्स फास्फेट अणुओं से संयुक्त होकर AMP ADP व ATP बनाते हैं।

(3) सह- एन्जाइम का निर्माण (Formation of Co-enzymes ) – न्यूक्लिओटाइड्स अन्य अणुओं से संयुक्त होकर NAD, NADP, FAD, FMN आदि सह- एन्जाइम (Coenzeyme) बनाते हैं। अनेक सह एंजाइम विटामिन के रूप में कार्य करते हैं। श्वसन एवं प्रकाश संश्लेषण क्रियाओं में प्रयोग में आते हैं।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कार्बोहाइड्रेट्स क्या हैं? कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख संवर्गों का उल्लेख कीजिए। सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट का रासायनिक सूत्र लिखिए। बताइए कि जन्तु में कार्बोहाइड्रेट्स की क्या भूमिका है ?
अथवा
कार्बोहाइड्रेट क्या होते हैं ? इनका महत्व लिखिए।
अथवा
कार्बोहाइड्रेट क्या होते हैं ? इन्हें सैकेराइड्स क्यों कहते हैं? इनका वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
कार्बोहाइड्रेट्स क्या हैं ? इनका खोत तथा संयोजन लिखिए । कार्बोहाइड्रेट के विभिन्न प्रकार लिखिए।
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेटस (Carbohydrates)
कार्बोहाइड्रेटस, कार्बन, हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के यौगिक हैं, जिनमें हाइड्रोजन व ऑक्सीजन का अनुपात जल में हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के अनुपात के समान होता है। इसीलिए इन्हें कार्बन के हाइड्रेटस (hydrates of carbon) कहते हैं। इनका सामान्य सूत्र Cn (H2 O)n या (C2 H2 O) है।

कार्बोहाइड्रेट्स को शर्करा के यौगिक या सैकेराइड्स भी कहते हैं क्योंकि या तो ये शर्करा होते हैं अथवा शर्करा एककों (monomers) के बहुलक (polymes) होते हैं। कुछ कार्बोहाइड्रेटस में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस या सल्फर के परमाणु (atom) भी होते हैं। इनमें एक से अधिक हाइड्रोक्सिल समूह (OH) भी होते हैं।

कार्बोहाइड्रेट के स्रोत (Sources of carbohydrates) – कार्बोहाइड्रेट्स भोजन के मौलिक घटक हैं। हरे पादप सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण द्वारा CO2 एवं जल से कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करते हैं। पौधों के शुष्क भार (dry weight) का लगभग 80% भाग कार्बोहाइड्रेट का बना होता हैं।

कार्बोहाइड्रेटस के तीन प्रकार (Three Types of Carbohydrates) –
1. मोनोसैकेराइडस
2. औलिगोसैकेराइड्स तथा
3. पॉलीसैकेराइड्स । मोनोसैकेराइडस तथा ओलिगोसैकेराइड्स सामान्य शर्कराएँ हैं, जो जल में घुलनशील हैं। इन्हें लघु अणु कहते हैं जबकि पॉलिसैकेराइडस को वृहदाणु कहते शर्करा (Sugas) – स्वाद में मीठे कार्बोहाइड्रेट्स ही शर्करा कहलाते हैं जैसे- ग्लूकोस, फ्रक्टोस, सुक्रोस आदि। सभी मीठे पदार्थ शर्करा (sugar) नहीं होते। मोनोसैकेराइड व डाइसैकेराइड विभिन्न प्रकार की शर्कराएँ हैं।
1. मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides) या सरल शर्कराएँ (Simple Sugars) –
मोनोसैकेराइड्स सरलतम कार्बोहाइड्रेटस हैं, जिन्हें सरल शर्कराएं भी कहते है। इनका और अधिक छोटा इकाइया में जल अपघटन (hydrolysis) नहीं हो सकता। इनका सामान्य सूत्र CnH2On होता है। मोनोसैकेराइडस के प्रत्येक अणु में 3-7 कार्बन परमाणु होते हैं।

प्रत्येक मोनोसैकेराइड्स अणु में कार्बन अणुओं की एक अशाखित श्रृंखला (unbranched chain) होती है जिसमें कार्बन परमाणु एकल सहसंयोजी बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं। एक कार्बन परमाणु दोहरे बन्ध द्वारा एक ऑक्सीजन परमाणु से जुड़कर कार्बोनिल समूह बनाता है। शेष कार्बन परमाणुओं में से प्रत्येक परमाणु हाइड्रोक्सिल समूह (-OH) से जुड़ा होता है।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 9 जैव अणु

कार्बोनिल समूह जब कार्बन श्रृंखला के छोर पर होता है तो ऐल्डिहाइड (HCO) समूह बनाता है। ऐसी शर्करा एल्डोलेस कहलाती है। जब कार्बोनिल समूह मध्यवर्ती कार्बन से जुड़ा हो तो कीटोन समूह (C = O) बनता है। इन्हें कीटोज कहते हैं। इसी आधार पर मोनोसैकेराइड्स के दो प्रमुख रासायनिक गुण हैं। कीटोन या ऐल्डिहाइड समूह वाली शर्करा Cu u++ को Cut में अपचयित ( reduce ) कर देती है।

इन्हें अपचायक शर्कराएँ (reducing sugars) कहा जाता है। यही बेनेडिक्ट (Benedict’s ) टेस्ट या फेहलिंग टेस्ट (Fehling’s Test) का आधार है। मोनोसैकेराइड्स का वर्गीकरण (Classification of Monosaccharides) कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर मोनोसैकेराइड्स को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जाता है-
(i) ट्रायोजेस (Trioses: CHO2 – इनके प्रत्येक अणु में 3- कार्बन परमाणु होते हैं जैसे – ग्लिसरैल्डीहाइड (glyceraldehyde ) तथा डाइहाइड्रॉक्सी ऐसीटोन (Dihydroxyacetone)। यह सबसे छोटे मोनोसैकेराइड्स हैं।

(ii) टेट्रोजेस (Tetroses: C4H6 O4 ) – यह चार कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ हैं, जैसे- एरिथ्रोस ( erythrose) तथा थ्रिओस (threose)।

(iii) पेन्टोज (Pentose C5 H10H5 – यह पाँच कार्बन वाली शर्कराएँ हैं जो कोशिका द्रव्य में मुक्त रूप से नहीं मिलती हैं। जैसे-राइबोस, राइबुलोस, जाइलोस, आर्बीनोस, डिऑक्सीराइबोस।

(iv) हेक्सोस (Haxose C6 H12O6) – इनमें कार्बन के छ: परमाणु होते हैं। यह एक सामान्य कार्बोहाइड्रेट है। जैसे- ग्लूकोस, फ्रक्टोस, गैलेक्टोस तथा मैनोस इन चारों का रासायनिक सूत्र एक समान होता है। इनमें से केवल ग्लूकोस (glucose) तथा फ्रक्टोस (fructose) विलयन के रूप में मिलते हैं।

इनके अणुओं में परमाणुओं के विन्यास में अन्तर के कारण इनके गुणों में अन्तर होता है। ग्लूकोस, फ्रक्टोस तथा मेनोस की संरचना में प्रथम व द्वितीय कार्बन में अन्तर होता है। फ्रक्टोस कीटोस है जबकि ग्लूकोस व मैनोस एल्डोस हैं। गैलेक्टोस में 4- कार्बन में – OH समूह की स्थिति के कारण यह ग्लूकोज से भिन्न होता है ।

(v) हेप्टोस (Heptose C7 H14O7) – यह सात कार्बन परमाणु वाली शर्कराएँ (sugars) हैं, जैसे- सीडो हेप्टुलोस (sedoheptulose) तथा ग्लूकोहेप्टोस (glucoheptose) ।

प्रश्न 2.
लिपिड्स क्या हैं ? इनके उदाहरण दीजिए। लिपिड्स के विशिष्ट गुण लिखिए।
अथवा
वसा क्या है ? यह कितने प्रकार की होती हैं ? संतृप्त तथा असंतृप्त वसा अम्ल में अन्तर लिखिए ।
अथवा
लिपिड्स का संयोजन बताइए तथा लिपिड्स का वर्गीकरण कीजिए ।
उत्तर:
लिपिड्स (Lipids)
लिपिड विविध प्रकार के तैलीय, स्नेहकीय (lubricant) तथा मोम के समान कार्बनिक पदार्थ हैं जो जीवधारियों में पाए जाते हैं। घी, चर्बी, वनस्पति तेल, मोम, प्राकृतिक रबर, कोलेस्ट्रॉल, पादपों के रंगा पदार्थ एवं गंधयुक्त पदार्थ जैसे – मेंथाल यूकेलिप्टस आयल, वसा में घुलनशील विटामिन्स, स्टीरॉइड हॉर्मोन्स आदि लिपिड्स ही होते हैं। सभी लिपिड्स में निम्नलिखित दो लक्षण समान रूप से पाए जाते हैं-
(a) यह सब वास्तविक या सम्भाव्य रूप से वसीय अम्लों के एस्टर (esters of fatty acids) होते हैं।

(b) यह सब अध्रुवीय (non-polar) होते हैं। अतः यह जल में अघुलनशील परन्तु अध्रुवीय कार्बनिक विलायकों जैसे – क्लोरोफार्म, ईथर, बेन्जीन आदि में घुलनशील होते हैं ।

सभी लिपिड अणु छोटे जैव अणु होते हैं। इनका अणुभार 750 से 1500 ही होता है । कार्बोहाइड्रेटस की भाँति लिपिड्स भी कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के बने होते हैं, परन्तु इनमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के परमाणुओं का अनुपात 2: 1 नहीं होता है। हाइड्रोजन तथा कार्बन के परमाणुओं की संख्या ऑक्सीजन के परमाणुओं से बहुत अधिक होती है।

कुछ में फॉस्फोरस, नाइट्रोजन तथा सल्फर के भी कुछ परमाणु होते हैं । रासायनिक दृष्टि से लिपिड्स वसीय अम्लों (fatty acids) तथा ग्लिसरॉल (glycerol) के एस्टर या ग्लिसरॉइडस होते हैं । अर्थात लिपिड का एक अणु वसीय अम्लों के तीन तथा ग्लिसरॉल के एक अणु के मिलने से बनता है ।
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वसीय अम्ल (Fatty acids) – वसीय अम्लों का सामान्य सूत्र CH3 (CH2)n COOH होता है। यह अधिकांश लिपिड्स का प्रमुख भाग बनाते हैं । प्रत्येक वसीय अम्ल के अणु में हाइड्रोकार्बन्स (CH) की एक अशाखित श्रृंखला होती है। श्रृंखला के एक छोर के कार्बन परमाणु से एक कार्बोक्सिल समूह (- COOH) तथा दूसरे छोर के कार्बन परमाणु से एक मेथिल समूह ( – CH3) जुड़ा होता है ।

संतृप्त एवं असंतृप्त वसीय अम्ल (Saturated and Unsaturated Fatty Acids) – कुछ वसीय अम्लों में सभी कार्बन परमाणु एकल सहसंयोजी बन्धों (covalent bond) द्वारा एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, इन्हें संतृप्त वसीय अम्ल (saturated fatty acids) कहते हैं।

जन्तु वसाओं में प्रायः ऐसे ही वसीय अम्ल होते हैं। अन्य वसीय अम्लों की हाइड्रोकार्बन श्रृंखलाओं में निश्चित स्थानों के कार्बन परमाणु दोहरे बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसा प्रत्येक C- परमाणु एक अतिरिक्त हाइड्रोजन परमाणु से भी जुड़ सकता है। ऐसे वसीय अम्ल असंतृप्त वसीय अम्ल ( unsaturated fatty acids) कहलाते हैं।

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प्रश्न 3.
प्रोटीन की रचना प्रकार एवं कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
प्रोटीन्स (Proteins)
प्रोटीन शब्द प्रोटिओज (proteose) नामक ग्रीक शब्द से व्युत्पन्न हुआ है – जिसका अर्थ है पहला स्थान रखना। बर्जिलियस (1837 ) ने प्रोटीन की उत्प्रेरक क्रिया (catalytic reaction) को प्रस्तुत किया। प्रोटीन (protein) शब्द सर्वप्रथम मुल्डर (1839 ) ने दिया । कोशिकाओं में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला पदार्थ प्रोटीन ही होता है ।

प्रोटीन्स कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन के अतिरिक्त नाइट्रोजन सभी प्रोटीन्स का आवश्यक घटक है। प्रोटीन्स में सल्फर की भी कुछ मात्रा होती है। प्रोटीन्स की प्रतिशत मात्रा विभिन्न स्रोतों में भिन्न-भिन्न होती है जैसे- स्तनियों की पेशियों में 20%, रक्त प्लाज्मा में 70%, गाय के दूध में 3.5%, अनाज में 12%, दालों में 20%, अण्डे की सफेदी में 11-13%, अण्डे के पीतक ( yolk) में 15-17%, मुर्गे के गोश्त में 24%, सोयाबीन में 40% तथा मशरुम्स में 55% तक प्रोटीन्स होती है ।

प्रोटीन की संरचनात्मक इकाई : अमीनो अम्ल (Building Blocks of Protein : Amino acids)
प्रोटीन की निर्माणकारी इकाइयाँ अमीनो अम्ल होते हैं। यह एक प्रकार के कार्बनिक अम्ल हैं जिनमें कम-से-कम एक मुक्त अमीनो समूह (-NH2) तथा एक कार्बोक्सिलिक समूह ( – COOH) अवश्य होता है। अर्थात् अमीनो अम्ल मोनो या डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल हैं जिनमें एक या दो अमीनो समूह होता है । a कार्बन का स्थान कार्बोक्सिल कार्बन से अलग होता है ।

अमीनो अम्ल के a कार्बन की चार संयोजकताएँ में से एक पर अमीनो समूह (2), एक पर कार्बोक्सिलिक समूह (COOH), एक पर  हाइड्रोजन व एक पर पार्रव श्रृंखला होती है। यह पार्रव श्रृंखला ध्रुवीय (polar) या अध्रुवीय (non-polar) हो सकती है। इनका सामान्य सूत्र R – CHNH2 COOH होता है। ग्लाइसीन (glycine) सबसे सरल प्रकार का अमीनो अम्ल होता है। प्रत्येक अमीनो अम्ल उभयधर्मी (amphoteric) यौगिक होता है, क्योंकि इसमें – COOH मन्द अम्लीय व – NH2 मन्द क्षारीय समूह पाए जाते हैं। अमीनो अम्लों के आय विटर आयन्स (zwiter ions) कहलाते हैं।
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अनिवार्य एवं अनानिवार्य अमीनो अम्ल (Essential and non essential amino acids) – अब तक ज्ञात अमीनो अम्लों में से केवल 20 प्रकार के अमीनो अम्ल जैविक महत्व के होते हैं। सूक्ष्मजीवों एवं पादपों में इन बीसों प्रकार के अमीनो अम्लों का निर्माण होता है । परन्तु स्तनियों में केवल 10 ही शरीर में बनते हैं इन्हें अनानिवार्य अमीनो अम्ल (non-essential amino acids) कहते हैं। शेष 10 अमीनो अम्लों को ये स्तनी भोजन से प्राप्त करते हैं, जिन्हें अनिवार्य अमीनो अम्ल (essential amino acids) कहा जाता है।

प्रश्न 4.
एन्जाइम की रासायनिक संरचना एवं इनकी क्रियाविधि समझाइए ।
उत्तर:

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माइकेलिस स्थिरांक ( Michaelis constant) – रासायनिक अभिक्रिया में क्रियाधार की वह सान्द्रता जिस पर क्रिया की गति उसकी अधिकतम गति की आधी होती है, माइकेलिस स्थिरांक कहलाता है क्रियाधार से लगाव प्रदर्शित करता है। इसे Km से दर्शाते हैं। Km का मान एन्जाइम का क्रियाधार से अधिक लगाव की स्थिति में कम होता है।

किसी भी विकर में Km का मान अलग-अलग क्रियाधारों में अलग-अलग होता है। विकरों की क्रियाविधि को ताला चाबी परिकल्पना (lock and Key hypothesis) द्वारा समझाया जाता है। रासायनिक क्रियाओं के सम्पन्न होने के लिए ऊर्जा के ‘इनपुट’ की आवश्यकता होती है।

इस ऊर्जा की सक्रियण ऊर्जा (activation energy) कहा जाता है। क्रियाधार के एंजाइम से बंधने से सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है। वास्तव में सक्रियण ऊर्जा में कमी लाकर ही एंजाइम क्रिया की दर को बढ़ाते हैं। इसके अनुसार ताला क्रियाधार (substrate) तथा चाबी विकर की भाँति कार्य करती हैं। जिस प्रकार चाबी
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प्रश्न 5.
आई. यू. बी. प्रणाली के अनुसार विकरों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
विकरों का वर्गीकरण (Classification of Enzymes ) – विकर जिन पदार्थों पर क्रिया करते हैं, जिस प्रकार की क्रिया को उत्प्रेरित करते हैं अथवा है बनने वाले उत्पाद के नाम के पीछे ऐज (-ase) शब्द लगाकर इनका नामकरण किया जाता है- एन्जाइमों को उनकी कार्यात्मक विशिष्टता या उनकी उत्प्रेरक क्रिया (catalytic activity) के आधार पर अग्रलिखित 6 मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया गया

एन्जाइम समूह (Enzyme group)अभिक्रिया का प्रकार (Type of Reaction)
1. ऑक्सीडोरिडक्टेज (Oxydoredu- ctase)ऑक्सीकरण अपचयन अभिक्रियाएँ (Oxydation- reduction)
2. ट्रांसफरेज (Transferase)यह क्रियात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण समूह जैसे- CH3 NH2 आदि का एक अणु से दूसरे अणु में स्थानांतरण करता है।
3. हाइड्रोलेजेज (Hydrolases)यह क्रियाधर (substarate) का जल अपघटन करते हैं।
4. आइसोमरेजेज या म्यूटेजेज (Isomerases or Mutases)यह परमाणुओं का पुनर्वितरण करके किसी यौगिक के एक आइसोमर को दूसरे आइसोमर में बदलते हैं।
5. लायेजेज (Lyases)जल की अनुपस्थिति में विशिष्ट संयोजी बंधों को तोड़ते हैं तथा समूहों को हटाते हैं ।
6. लाइगेजेज सिंथेटेजेज (Ligases Synthetases)ऊर्जा के उपयोग से दो अणुओं को जोड़ने की क्रिया को उत्प्रेरित करते हैं। बंध का निर्माण करते हैं।

विवरण व उदाहरण यह इलेक्ट्रॉन अथवा या (H+ आयन) को घटाकर अथवा जोड़कर क्रिया सम्पन्न करते हैं- जैसे साइटोक्रोम ऑक्सीडेज साइटोक्रोम की ऑक्सीकृत करता है, लैक्टेट डिहाइड्रोजिनेज फॉस्फोट्रांसफरेज (phosphotransferase) – फॉस्फेट समूह का एक अणु से दूसरे अणु में स्थानांतरण करता है। जैसे- ग्लूटेमेट पाइरूवेट ट्रांसएमीनेज । सभी पाचक एन्जाइम इस श्रेणी में आते हैं। जैसे पेप्सिन (pepsin) आदि ।

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यह जल के अणु की सहायता से बड़े अणुओं को छोटे अणुओं में तोड़ देते हैं जैसे – एमाइलेज म्यूटेज (mutase) जैसे – फॉस्फोहेक्सोज आइसोमरेज (Phosphoheose isomerase) ग्लूकोज -6- फॉस्फेट को फ्रक्टोज – 6- फॉस्फेट में बदल देता है । हिस्टीडिन डिकार्बोक्टिनेज हिस्टीडिन के C-C बंध को तोड़कर हिस्टीडिन व कार्बनडाइऑक्साइड बनाता है। DNA लाइगेज दो DNA खण्डों को जोड़ता है। पाइरूवेट कार्बोक्सिलेज, पाइरूविक अम्ल व CO2 को जोड़कर ऑक्सेलोएसीटेट बनाता है।

प्रश्न 6.
न्यूक्लिक अम्ल क्या होते है ? यह कितने प्रकार के होते हैं ? इनके कार्य लिखिए ।
उत्तर:
न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic Acid)
फ्रेडरिक मीशर (Frederick Meischer) ने 1869 में सर्वप्रथम पस कोशिकाओं (pus cells) में न्यूक्लिक अम्ल ( nucleic acid) की खोज की थी। क्योंकि यह केन्द्रक में पाये जाते हैं अतः इन्हें न्यूक्लिन ( nuclein) नाम दिया गया। बाद में इनकी अम्लीय प्रवृत्ति का पता लगने पर इन्हें न्यूक्लिक अम्ल (nucleic acids) कहा गया। यह कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फॉस्फेट से बने वृहद् अणु  (maeromolecules) होते हैं। न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लिओटाइड्स (nucleotides) के रेखीय बहुलक (polymers) होते हैं अर्थात् न्यूक्लिक अम्ल की इकाई न्यूक्लिओटाइड है। न्यूक्लिओटाइड्स आपस में फॉस्फोडाइऐस्टर बन्धों (phosphodiester bonds)

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द्वारा जुड़े होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लिओटाइड में तीन प्रकार के अणु होते हैं, एक पंचकार्बनी शर्करा (pentose sugar), एक नाइट्रोजन क्षारक ( nitrogenouse base) तथा एक फॉस्फेट समूह ( phosphate group) ।
1. पंच कार्बनी शर्करा (Pentose sugar) – यह दो प्रकार की होती हैं- राइबोस शर्करा (ribose sugar) तथा डिऑक्सीराइबोस शर्करा ( deoxyribose sugar)।
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2. नाइट्रोजनी क्षारक (Nitrogeneous bases) – यह दो मुख्य प्रकार के होते हैं-

  • प्यूरीन (Purines) – यह दो वलयों वाले क्षारक हैं तथा दो प्रकार के होते हैं- एडिनीन ( adenine) तथा ग्वानीन ( guanine)।
  • पिरिमिडीन्स (Pyrimidines) – यह एक वलय वाले क्षारक हैं जो तीन प्रकार के होते हैं- सायटोसीन (cytosine), थायमीन (thymine) तथा यूरेसिल (uracil)।

3. फॉस्फेट समूह (Phosphate Group) – यह दो न्यूक्लिओटाइड्स को बंध बनाकर जोड़ते हैं।
न्यूक्लिक अम्ल के प्रकार (Types of Nucleic acids) न्यूक्लिक अम्ल दो प्रकार के होते हैं-

1. डिऑक्सीरिबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic acid or DNA ) – इसके न्यूक्लिओटाइड एक पंच कार्बनीय शर्करा डी-ऑक्सीराइबोस, एक नाइट्रोजनी क्षारक (एडिनीन, ग्वानीन, साइटोसीन तथा थाइमीन में से कोई एक ) तथा फॉस्फेट समूह के बने होते हैं।

2. राइबोन्यूक्लिक अम्ल (Ribonucleic acid ) – इनमें राइबोस शर्करा (ribose sugar) पायी जाती है। इसका प्रत्येक न्यूक्लिओटाइड एक शर्करा अणु, एक नाइट्रोजनी क्षारक (एडिनीन, ग्वानीन, साइटोसिन तथा यूरेसिल में से कोई एक तथा फॉस्फेट समूह से मिलकर बनता है। यह तीन प्रकार के होते हैं-

  • संदेश वाहक आर.एन.ए. (mRNA)
  • स्थानांतरण आर.एन.ए. ( tRNA)
  • राइबोसोमल आर. एन. ए. ( FRNA)

प्रश्न 7.
DNA की संरचना का द्विरज्जुक मॉडल (Double helical model) का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
उत्तर:
डीऑक्सी राइबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid, DNA
डी.एन.ए. (de-oxyribonucleic acid) न्यूक्लिओटाइड ( nucleotide ) अणुओं का रेखीय बहुलक (polymer) है। यह आनुवंशिक सूचनाओं (genetic informations) का वाहक (carrier) है। यह गुणसूत्रों (chromosoms) का प्रमुख घटक है और इनके द्वारा लक्षणों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाता है । यूकैरियोटिक कोशिकाओं में यह केन्द्रक के अतिरिक्त माइटोकान्ड्रिया तथा हरित लवक में भी पाया जाता है। DNA जीवजगत का अनूठा आणु है क्योंकि यह प्रतिकृतिकरण (replication) कर सकता है।

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डी. एन. ए. की संरचना (Structure of DNA)
DNA उच्च अणुभार वाला वृहत् अणु है। इसका निर्माण हजारों न्यूक्लिओटाइडों के फॉस्फोडाइएस्टर बन्धों द्वारा जुड़ने से होता है। प्रत्येक न्यूक्लिओटाइड में तीन अणु होते हैं – एक डिऑक्सीराइबोस शर्करा अणु एक नाइट्रोजनी क्षारक अणु तथा एक फॉस्फेट समूह । न्यूक्लिओटाइड्स, न्यूक्लिओसाइड्स के फॉस्फेट होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लिओसाइड एक शर्करा अणु व एक नाइट्रोजनी क्षारक से मिलकर बना होता है ।
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न्यूक्लिओसाइड (Nucleosides ) सबसे पहले पेन्टोस शर्करा (pentose sugar) अणु से एक नाइट्रोजनी क्षारक प्रथम कार्बन पर B ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़कर न्यूक्लिओसाइड बनाता है। क्योंकि DNA के निर्माण में चार प्रकार के नाइट्रोजनी क्षारक भाग लेते हैं। इस आधार पर न्यूक्लिओसाइड भी चार प्रकार के होते हैं-

(i) डि-ऑक्सीएडिनोसीन (Deoxyadenosine) – एडिनोसिन + डिऑक्सीराइबोज शर्करा ।

(ii) डि-ऑक्सीग्वानोसीन (Deoxyguanosine)- ग्वानोसीन + डिऑक्सीराइबोज शर्करा ।

(iii) डि-ऑक्सीसायटिडीन ( Deoxycytidine ) – सायटोसीन + डिऑक्सीराइबोज शर्करा ।

(iv) डि-ऑक्सीथायमिडीन (Deoxythymidine ) – थायमीन + डिऑक्सीराइबोज शर्करा ।

न्यूक्लिओटाइड (Nucleotides) – न्यूक्लिओसाइड डाइएस्टर बंधू द्वारा अब फॉस्फोरिक अम्ल के साथ जुड़कर न्यूक्लिओटाइड

(nucleotide) बनाता है। नाइट्रोजनी क्षारकों के आधार पर न्यूक्लिओटाइड भी चार प्रकार के होते हैं-
(i) डि-ऑक्सीएडिनिलिक अम्ल (Deoxyadenylic acid) – डि-ऑक्सीएडिनोसीन + फॉस्फोरिक अम्ल ।

(ii) डि-ऑक्सीग्वानीलिक अम्ल (Deoxyguanylic acid ) – डि-ऑक्सीग्वानोसीन + फॉस्फोरिक अम्ल
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(iii) डि-ऑक्सीसाइटिडिलिक अम्ल (Deoxycytidylic acid ) – डि- आक्सीसायटिडीन + फॉस्फोरिक अम्ल

(iv) डि-ऑक्सीथाइमीडिलिक अम्ल ( Deoxythymidylic acid ) – डि-ऑक्सीथाइमिडीन + फॉस्फोरिक अम्ल ।
इस प्रकार बने न्यूक्लिओटाइड एक-दूसरे से विभिन्न क्रमों में जुड़कर पॉलीन्यूक्लिओटाइड श्रृंखला (polynucleotide chain) का निर्माण करते हैं 1 पॉलीन्यूक्लिओटाइड्स की दो श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से हाइड्रोजन बंधों (hydrogen bonds) द्वारा प्रति समानान्तर जुड़कर DNA द्विरज्जु (DNA double strand) का निर्माण करती हैं।

इरविन चारगाफ (Erwin Chargaff) ने DNA के जल अपघटन (hydrolysis) के पश्चात् यह पाया कि DNA में एडीनीन की कुल मात्रा सदैव थायमीन के बराबर (A = T) तथा ग्वानीन की कुल मात्रा सायटोसीन के बराबर (G = C) होती है। इसे चारगाफ का तुल्यता का नियम ( equivalence rule of Chargaff) कहते हैं।

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DNA की रचना का द्विरज्जुकी मॉडल (Double helical model of DNA Structure)
वाटसन एवं क्रिक (Watson and Crick 1953) ने DNA की रचना का द्विरज्जुकी मॉडल (double helix model) प्रस्तुत किया। इसके अनुसार DNA अणु पॉलीन्यूक्लिओटाइड की दो प्रति समानान्तर शृंखलाओं से बना होता है। इसमें एक पॉलीन्यूक्लिओटाइड (polynucleotide ) अणु का फॉस्फेट समूह दूसरे न्यूक्लिओटाइड के शर्करा अणु के कार्बन परमाणु के साथ जुड़ा होता है।

इस प्रकार दो शर्करा अणुओं के मध्य 5′ और 3′ स्थितियों पर बंध बनता है। दोनों श्रृंखलाओं के नाइट्रोजनी क्षारक हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़कर DNA अणु का निर्माण करते हैं। दोनों शृंखलाएँ एक काल्पनिक केन्द्रीय अक्ष (axis) पर दक्षिणावर्त दिशा में कुण्डलित रहती हैं। और सीढ़ीनुमा रचना बनाते हैं।

शर्करा व फॉस्फेट अणु सीढ़ी के दो स्तंभ ( side bars) बनाते हैं तथा नाइट्रोजनी क्षारक इसके पगडण्डे होते हैं। दोनों रज्जुक (strands ) एक-दूसरे के प्रति समांतर होते हैं। अर्थात् एक स्ट्रेण्ड का 5′ छोर तथा दूसरे स्ट्रेण्ड का 3′ छोर एक ही दिशा में होते हैं । नाइट्रोजनी क्षारक एक-दूसरे से विशिष्ट क्रम में जुड़े रहते हैं।

एडिनीन थायमीन से द्वि- हाइड्रोजन बंधों द्वारा तथा ग्वानीन सायटोसीन से तीन हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े रहते हैं। DNA द्वि रज्जुक (double strand) का व्यास 20A होता है। कुण्डलिनी के प्रत्येक कुण्डल में 10 क्षारक युगल होते हैं। प्रत्येक क्षारक युग्म (base pain) के बीच की दूरी 3.4 A तथा सम्पूर्ण कुण्डल की लम्बाई 34 Å होती है।

DNA के कार्य (Function of DNA)

  • DNA गुणसूत्रों (Chromosomes) के निर्माण में भाग लेता है।
  • DNA के विशेष खण्ड जीन्स का कार्य करते हैं जिन पर आनुवंशिक सूचनाएँ निहित होती हैं जिन्हें गुणसूत्रों के माध्यम से नयी पीढ़ी में पहुँचाया जाता है।
  • DNA में स्वद्विगुणन की क्षमता होती है। अतः यह कोशिका विभाजन (cell division ) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • यह प्रोटीन संश्लेषण के लिए mRNA का निर्माण करता है
  • यह कोशिका की विभिन्न क्रियाओं का नियंत्रण करता है।
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प्रश्न 8.
जल के गुण तथा इसके जैविक महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जल (Water)
जल जीवद्रव्य (protoplasm) का सबसे महत्वपूर्ण एवं आवश्यक घटक है। यह हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के 21 के अनुपात में मिलने से बनता है। यह एक ऐसा पदार्थ है जो एक अद्वितीय (unique) प्रकार के भौतिक तथा रासायनिक लक्षण प्रदर्शित करता है। इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती । जीवों में जल की मात्रा सामान्यतया जीवधारियों में जल कुल जीव भार का 60-90% भाग बनाता है।

जल के गुण (Properties of water)

  1. जल पारदर्शी, स्वादहीन, गंधहीन, रंगहीन व उदासीन द्रव है। शुद्ध जल का pH-7 होता है। इसमें OH तथा H+ आयनों की संख्या बराबर होती
  2. द्विध्रुवीय (bipolar) होने के कारण जल एक उत्तम विलायक (solvent) है।
  3. जल का उच्च क्वथनांक (boiling point) होता है (100°C) ।
  4. जल का पृष्ठ तनाव (surface tension) उच्च होता है, क्योंकि इसके अणुओं के बीच अंतराणुक आकर्षण अधिक होते हैं।
  5. जल की विशिष्ट ऊष्मा (specific heat) उच्च होती है, अतः यह तप्त एवं ठंडा होने में अधिक समय लेता है।
  6. जल की ऊष्मा चालकता (heat conductivity) अधिक होती है इसीलिए जल के पात्र को एक ओर से गर्म करने पर सम्पूर्ण जल गर्म हो जाता
  7. शुद्ध जल की विद्युत चालकता (electrical conductivity) अल्प होती है किन्तु इसमें विद्युत अपघट्य मिलाने पर यह विद्युत का सुचालक हो जाता है।
  8. जल के अणुओं के बीच प्रबल आकर्षण के कारण इनमें ससंजन (cohesion) तथा आसंजन (adhesion) का गुण होता है।
  9. जल ठोस, द्रव तथा गैस तीन भौतिक अवस्थाओं में पाया जा सकता है।

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जल का जैविक महत्व (Biological Significance of water)

  1. अनेक अकार्बनिक एवं कार्बनिक पदार्थ जल में घुलनशील हैं। अतः घुलनशील अवस्था में रासायनिक क्रियाएँ अपेक्षाकृत सरलता से एवं तीव्र गति से सम्पन्न होती हैं।
  2. विभिन्न जैव-रासायनिक क्रियाओं में जल क्रियाशील पदार्थ के रूप में कार्य करता है तथा अनेक क्रियाओं के अन्त में उत्पाद के साथ बनता हैं।
  3. पौधों में जल के प्रकाशीय अपघटन से H+ आयन उत्पन्न होते हैं जो पौधों की परिपाचन शक्ति बनाते हैं। इस क्रिया में उत्पन्न ऑक्सीजन सभी जीवों के लिए श्वसन (respiration) में काम आती है।
  4. जल सजीवों के ताप नियन्त्रण में सहायक है।
  5. जल में ससंजन (cohesion) एवं आसंजन ( adhesion) का गुण होने के कारण यह ऊंचे वृक्षों में ऊपर चढ़ता है साथ ही अपने साथ खनिज लवणों का परिवहन करता है।
  6. जल प्राणियों के विभिन्न अंगों के मध्य स्नेहक (lubricant ) की भाँति कार्य करता है, जैसे-आँखों की पलकों के बीच।
  7. ल जैविक क्रियाओं के लिए माध्यम का कार्य करता है।
  8. अधिकांश विकर (enzyme) जलीय माध्यम में प्रभावशाली होते हैं।
  9. जल से उत्पन्न आयन्स pH मान स्थिर रखने में सहायक होते हैं।
  10. जल सजीवों के शरीर में विभिन्न पदार्थों के संवहन (conduction) के लिए माध्यम प्रदान करता है।
  11. जल जीवद्रव्य में कोलाइडी तन्त्र में परिक्षेपण प्रावस्था ( dispersion phase) का कार्य करता है।
  12. बहुत से जीवों का आवास भी जल होता है।

प्रश्न 9.
कोशिका में उपस्थित विभिन्न प्रकार के अकार्बनिक पदार्थों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
कोशिका के अकार्बनिक पदार्थ ( Inorganic substances of the cell)
इस प्रकार के पदार्थों में कार्बन नहीं होता है। यह सरल संरचना वाले छोटे अणु हैं जिनका आण्विक भार कम होता है। इनमें जल, खनिज लवण, आयन्स एवं गैसें सम्मिलित हैं।

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें


वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का मुख्य स्रोत है:
(अ) स्थिर आवेश
(ब) एक समान वेग से चलता आवेश
(स) त्वरित आवेश
(द) उपर्युक्त में कोई नहीं
उत्तर:
(स) त्वरित आवेश

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में कौनसी किरण विद्युत चुम्बकीय है:
(अ) धन किरणें
(ब) α-किरणें
(स) β-किरणें
(द) γ -किरणें तरंगदैर्घ्य होती है
उत्तर:
(द) γ -किरणें तरंगदैर्घ्य होती है

प्रश्न 3.
दृश्य प्रकाश की
(अ) 7800 Å से 1500 Å
(ब) 1 Å से 100 Å
(स) 4000 Å से 8000 Å
(द) 5000 Å से 1200 Å
उत्तर:
(स) 4000 Å से 8000 Å

प्रश्न 4.
सूर्य की निम्नलिखित तरंगों में से कौनसी तरंग अन्ततः विद्युत ऊर्जा के रूप में प्रयुक्त की जाती है:
(अ) रेडियो तरंगें
(ब) अवरक्त किरणें
(स) दृश्य प्रकाश
(द) माइक्रो तरंगें
उत्तर:
(ब) अवरक्त किरणें

प्रश्न 5.
I ( वाट/मी.2) तीव्रता की विद्युत चुम्बकीय तरंग द्वारा एक परावर्तक तल पर आरोपित दाब है:
(अ) Ic
(ब) Ic2
(स) I/c
(द) I/c2
उत्तर:
(स) I/c

प्रश्न 6.
क्रिस्टल संरचना का अध्ययन किया जाता है:
(अ) पराबैंगनी किरणों द्वारा
(ब) X – किरणों द्वारा
(स) अवरक्त विकिरणों द्वारा
(द) सूक्ष्म तरंगों द्वारा
उत्तर:
(ब) X – किरणों द्वारा

प्रश्न 7.
यदि λv,λx तथा λm क्रमशः दृश्य प्रकाश, X- किरणों तथा माइक्रो तरंगों की तरंगदैर्घ्य को व्यक्त करती है, तो
(ब) λm > λv > λx
(ब) λv > λm > λx
(स)) λm > λx > Av
(द) λv> λx > λm
उत्तर:
(ब) λv > λm > λx

प्रश्न 8.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की प्रकृति होती है:
(अ) अनुदैर्घ्य
(ब) अनुप्रस्थ
(स) यांत्रिक
(द) अनुप्रस्थ व अनुदैर्ध्य
उत्तर:
(ब) अनुप्रस्थ

प्रश्न 9.
विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में निम्न में से कौनसे घटक की तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होती है?
(अ) गामा किरणों की
(ब) X-किरणों की
(स) रेडियो तरंगों की
(द) सूक्ष्म तरंगों की
उत्तर:
(अ) गामा किरणों की

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

प्रश्न 10.
निम्न में से किस रंग के प्रकाश का तरंगदैर्घ्य, पीले रंग के प्रकाश के तरंगदैर्ध्य से अधिक होता है?
(अ) हरा
(ब) नीला
(स) लाल
(द) बैंगनी
उत्तर:
(स) लाल

प्रश्न 11.
निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वेग होता है:
(अ) 3 x 108 मीटर/सेकण्ड
(ब) 3 x 107 मीटर/सेकण्ड
(स) 3 x 106 मीटर/सेकण्ड
(द) 3 x 1010 मीटर/सेकण्ड
उत्तर:
(अ) 3 x 108 मीटर/सेकण्ड

प्रश्न 12.
वायुमण्डल में स्थित ओजोन परत सूर्य से आने वाले किन हानिकारक विकिरणों से हमारी रक्षा करती है?
(अ) X-किरणों से
(ब) गामा किरणों से
(स) पराबैंगनी किरणों से
(द) सूक्ष्म किरणों से
उत्तर:
(स) पराबैंगनी किरणों से

प्रश्न 13.
निम्न में से किस आवृत्ति की तरंगें आयनमण्डल को भेदित कर सकती हैं:
(अ) 5 हर्ट्ज से अधिक
(ब) 10 मेगा हर्ट्ज से अधिक
(स) 20 मेगा हर्ट्ज से अधिक
(द) 15 मेगा हर्ट्ज से अधिक
उत्तर:
(स) 20 मेगा हर्ट्ज से अधिक

प्रश्न 14.
निम्न में से कौनसी तरंगें विद्युतचुम्बकीय तरंगें नहीं हैं:
(अ) रेडियो तरंगें
(ब) ध्वनि तरंगें
(स) अवरक्त तरंगें
(द) सूक्ष्म तरंगें
उत्तर:
(ब) ध्वनि तरंगें

प्रश्न 15.
विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम का वह घटक जिसका उपयोग क्रिस्टल संरचना के अध्ययन के लिये किया जाता है, निम्न में से है:
(अ) सूक्ष्म तरंगें
(ब) रेडियो तरंगें
(स) X -किरणें
(द) अवरक्त तरंगें
उत्तर:
(स) X -किरणें

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व का सिद्धान्त दिया था:
(अ) न्यूटन ने
(ब) मैक्सवेल ने
(स) हर्ट्ज ने
(द) हाइगेन ने
उत्तर:
(ब) मैक्सवेल ने

प्रश्न 17.
प्रकाश तरंगें होती हैं:
(अ) अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगें
(ब) अनुप्रस्थ प्रत्यास्थ तरंगें
(स) अनुदैर्ध्य प्रत्यास्थ तरंगें
(द) अनुप्रस्थ विद्युत चुम्बकीय तरंगे
उत्तर:
(द) अनुप्रस्थ विद्युत चुम्बकीय तरंगे

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प्रश्न 18.
यदि μ0 तथा eo क्रमशः निर्वात की पारगम्यता तथा विद्युत- शीलता हो तो निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वेग होगा:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 1
उत्तर:
\(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\)

प्रश्न 19.
किसी माध्यम के लिये अपवर्तनांक का मान होता है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 2
उत्तर:
\(\sqrt{u_r \epsilon_r}\)

प्रश्न 20.
विद्युत चुम्बकीय तरंग प्रकृति प्रदर्शित करेगी:
(अ) प्रकाश एवं ध्वनि
(ब) प्रकाश एवं एक्स-किरणें
(स) एक्स-किरणें व इलेक्ट्रॉन
(द) प्रकाश एवं फोटोन
उत्तर:
(ब) प्रकाश एवं एक्स-किरणें

प्रश्न 21.
विद्युत चुम्बकीय तरंगें:
(अ) अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन करती हैं।
(ब) अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन नहीं करती हैं।
(स) केवल अध्यारोपण दर्शाती हैं।
(द) केवल व्यतिकरण दर्शाती हैं।
उत्तर:
(अ) अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन करती हैं।

प्रश्न 22.
E ऊर्जा का विकिरण एक पूर्णतः परावर्तक तल पर आपतित होता है। तल का स्थानान्तरित संवेग है:
(अ) E/c
(ब) 2E/c
(स) Ec
(द) E/c2
उत्तर:
(ब) 2E/c

प्रश्न 23.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है?
(अ) वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र वेक्टर दोनों एक ही स्थान पर एक ही क्षण अधिकतम तथा न्यूनतम मान को प्राप्त होते हैं।
(ब) विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ऊर्जा वैद्युत तथा चुम्बकीय वेक्टरों में बराबर-बराबर बँट जाती है।
(स) वैद्युत तथा चुम्बकीय वेक्टर दोनों एक-दूसरे के समान्तर होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं।
(द) इन तरंगों के संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
उत्तर:
(स) वैद्युत तथा चुम्बकीय वेक्टर दोनों एक-दूसरे के समान्तर होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं।

प्रश्न 24.
X- किरणों की तरंगदैर्ध्य का परास कौनसा है?
(अ) 10-4m से 10-8 m
(ब) 10-8m से 10-13m
(स) 108m से 1013m
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) 10-8m से 10-13m

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प्रश्न 25.
निम्न में से किसकी आवृत्ति निम्नतम है:
(अ) अवरक्त किरणें
(ब) X-किरणें
(द) y-किरणें
(स) UV-किरणें
उत्तर:
(अ) अवरक्त किरणें

प्रश्न 26.
निम्न में से कौनसी तरंग दूरसंचार में उपयुक्त होती है:
(अ) दृश्य प्रकाश
(ब) सूक्ष्म तरंगें
(स) पराबैंगनी प्रकाश
(द) अवरक्त
उत्तर:
(ब) सूक्ष्म तरंगें

प्रश्न 27.
विस्थापन धारा उतनी होती है जितनी-
(अ) r.m.s. धारा
(ब) चालन धारा
(स) शीर्ष धारा
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) चालन धारा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
विस्थापन धारा की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र अथवा विद्युत अभिवाह परिवर्तन से उत्पन्न धारा को विस्थापन धारा कहते हैं।

प्रश्न 2.
विस्थापन धारा किसके कारण उत्पन्न होती है?
उत्तर:
विस्थापन धारा विद्युत क्षेत्र में समय के साथ परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है और इसे इस प्रकार लिखते हैं
Id = ∈\(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)

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प्रश्न 3.
मैक्सवेल के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
मैक्सवेल के समीकरण:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 3

प्रश्न 4.
संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच परिवर्ती विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
उत्तर:
विस्थापन धारा, चुम्बकीय क्षेत्र।

प्रश्न 5.
……………उसी प्रकार चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है जैसे चालन धारा।
उत्तर:
विस्थापन धारा।

प्रश्न 6.
क्या विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 7.
विद्युत चुम्बकीय तरंगें निर्वात में किस वेग से गमन करती है?
उत्तर:
प्रकाश के वेग से।

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प्रश्न 8.
विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस घटक का उपयोग क्रिस्टल संरचना के अध्ययन के लिये किया जाता है?
उत्तर:
एक्स किरणों का।

प्रश्न 9.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व की प्रायोगिक पुष्टि सर्वप्रथम किसने की थी?
उत्तर:
हर्ट्ज ने।

प्रश्न 10.
विद्युत चुम्बकीय स्पैक्ट्रम में किसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है?
उत्तर:
गामा किरणें।

प्रश्न 11.
विद्युत चुम्बकीय तरंग में निर्वात में कुल ऊर्जा घनत्व कितना होता है?
उत्तर:
∈0 E2
जहाँ ∈0 पर निर्वात की विद्युतशीलता तथा E विद्युत क्षेत्र की तीव्रता।

प्रश्न 12.
क्या प्रकाश तरंगें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं? उत्तर की पुष्टि कारण बतलाकर कीजिए।
उत्तर:
चूँकि प्रकाश तरंगें विद्युत चुम्बकीय तरंगें हैं, जिन्हें परिगमन हेतु किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय तरंगों का नाम बतलाइए जो:
(a) माँसपेशियों के खिंचाव को दूर करने में सहायक हैं।
(b) वायुमण्डल में ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर ली जाती
उत्तर:
(a) अवरक्त तरंगें / अवरक्त क्षेत्र
(b) पराबैंगनी तरंगें / पराबैंगनी क्षेत्र।

प्रश्न 14.
विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के मूल स्रोत क्या हैं?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) के समय के साथ परिवर्तन से विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) उत्पन्न होता है तथा विद्युत क्षेत्र के समय के साथ परिवर्तन से चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) उत्पन्न होता है। इस प्रकार इन क्षेत्र सदिशों का समय के साथ परिवर्तन एक-दूसरे के लिए स्रोत का कार्य करता है। अतः चुम्बकीय तरंगों के मूल स्रोत चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) और विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) हैं।

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प्रश्न 15.
एक समतल विद्युत चुम्बकीय तरंग निर्वात में Z-अक्ष के अनुदिश संचरित होती है। आप वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र सदिशों के विषय में क्या कह सकते हैं?
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) विद्युत चुम्बकीय तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् तथा परस्पर भी लम्बवत् होती है। चूँकि यहाँ पर तरंग संचरण की दिशा Z-अक्ष के अनुदिश है । अतः \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) सदिश X Y तल में परस्पर लम्बवत् दिशाओं में होंगी।

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बकीय तरंग के संचरण वेग की वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के शिखर मानों के पदों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
c = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\mathrm{~B}_0}\)

प्रश्न 17.
किसी विद्युत चुम्बकीय तरंग के वैद्युत क्षेत्र सदिश के कम्पन की आवृत्ति 5 x 1014 Hz है। संगत चुम्बकीय क्षेत्र सदिश के कम्पन की आवृत्ति क्या होगी? यह विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किस भाग से सम्बन्धित होगी?
उत्तर:
5 x 1014 Hz, दृश्य भाग।

प्रश्न 18.
विद्युत चुम्बकीय रेडियो तरंगों का उत्पादन किससे होता है?
उत्तर:
विद्युत दोलित्रों से।

प्रश्न 19.
दूर संचार में कौनसी तरंगें प्रयुक्त होती हैं? इनकी तरंग परास लिखिये।
उत्तर:
रेडियो तरंगें 1 से 10 मीटर

प्रश्न 20.
निम्नलिखित विकिरणों को तरंगदैर्घ्य के घटते हुये क्रम में लिखिये-
एक्स किरणें, रेडियो किरणें पराबैंगनी तरंगें, गामा किरणें।
उत्तर:
रेडियो किरणें, पराबैंगनी तरंगें एक्स किरणें, गामा किरणें।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित विकिरणों में किसकी आवृत्ति सबसे कम है? गामा किरणें अवरक्त विकिरण, X-किरणें, नीला प्रकाश।
उत्तर:
अवरक्त विकिरण।

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प्रश्न 22.
सूक्ष्म तरंगों की लगभग तरंगदैर्ध्य परास बताइये।
उत्तर:
1 मिमी. से 30 सेमी.

प्रश्न 23.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का उत्पादन हर्ट्ज ने किसके द्वारा किया?
उत्तर:
स्फुर्लिंग विसर्जन द्वारा।

प्रश्न 24.
किसी माध्यम में विद्युत चुम्बकीय तरंगों के वेग का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
V = \(\frac{1}{\sqrt{\mu \epsilon}}\)

प्रश्न 25.
हर्ट्ज के प्रयोग से उत्पादित तरंगें कौनसी विद्युत- चुम्बकीय तरंगें होती हैं तथा इनकी तरंगदैर्ध्य किस कोटि की थीं?
उत्तर:
हर्ट्ज के प्रयोग से उत्पादित तरंगें लघु रेडियो तरंगें (Short radio waves) होती हैं। इन तरंगों की तरंगदैर्घ्य 1 मीटर की कोटि की थीं।

प्रश्न 26.
विद्युत चुम्बकीय तरंग के किस गुण के कारण यह माना जाता है कि प्रकाश तरंगें विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं?
उत्तर:
प्रकाश तरंगों का वेग, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के वेग के बराबर होता है।

प्रश्न 27.
किसी धातु के लक्ष्य पर उच्च ऊर्जा के इलेक्ट्रॉनों के टकराने से विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों का नाम बताइए।
उत्तर:
X – किरणें।

प्रश्न 28.
ठोस की क्रिस्टल संरचना का अध्ययन करने के लिए प्रयुक्त की जाने वाली विद्युत चुम्बकीय तरंग का नाम लिखिए।
उत्तर:
X – किरणें ( 1016 से 1020 Hz)

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प्रश्न 29.
उस विद्युत चुम्बकीय विकिरण का नाम लिखिए जिसकी तरंगदैर्ध्य 102 की परास में है। विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के इस भाग का एक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
माइक्रो तरंगें (दूरसंचार में)।

प्रश्न 30.
सूर्य के प्रकाश से विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का कौनसा भाग ओजोन परत द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है?
उत्तर:
पराबैंगनी किरणें।

प्रश्न 31.
सबसे अधिक वेधन क्षमता वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण का नाम लिखिए।
उत्तर:
गामा किरणें।

प्रश्न 32.
निम्नलिखित में से किसकी तरंगदैर्ध्य न्यूनतम होगी- माइक्रो तरंगें, पराबैंगनी विकिरण तथा X – किरणें।
उत्तर:
X – किरणें।

प्रश्न 33.
निम्न को तरंगदैर्घ्य के घटते क्रम में लिखिए- X-किरणें, रेडियो तरंगें, आसमानी प्रकाश, अवरक्त प्रकाश।
उत्तर:
रेडियो तरंगें, माइक्रो तरंगें, पराबैंगनी तरंगें X – किरणें।

प्रश्न 34.
विद्युत चुम्बकीय तरंग के लिये किसी माध्यम की प्रतिबाधा Z, चुम्बकशीलता एवं विद्युतशीलता है, तो इनमें सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
Z = \(\sqrt{\frac{\mu}{\epsilon}}\) ओम

प्रश्न 35.
विद्युत चुम्बकीय तरंग की कोई चार विशेषताएँ लिखिये।
उत्तर:
(i) विद्युत चुम्बकीय तरंगों के संचरण के लिये माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
(ii) विद्युत चुम्बकीय तरंगें सरल रेखा में संचरण करती हैं।
(iii) विद्युत चुम्बकीय तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं।
(iv) जिस माध्यम में विद्युत चुम्बकीय तरंगें संचरित होती हैं, उसके गुण अपरिवर्तित रहते हैं।

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प्रश्न 36.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों के स्पेक्ट्रम का कौनसा भाग उपग्रह संचार में प्रयुक्त होता है?
उत्तर:
सूक्ष्म तरंगें।

प्रश्न 37.
लम्बे परास (रेडियो तरंगों के ) प्रसारण में संकेतों की सूक्ष्म तरंगें रेडियो तरंगों की अपेक्षा क्यों अच्छी वाहक हैं?
उत्तर:
रेडियो तरंगों की अपेक्षा लम्बे प्रसारण में सूक्ष्म तरंगें अधिक अच्छी वाहक होती हैं क्योंकि रेडियो तरंगों की अपेक्षा इनका तरंगदैर्घ्य बहुत कम होता है। इस प्रकार वे अवरोध के कारण न्यूनतम विचलन प्राप्त करती हैं और निशाने पर सीधे भेजी जा सकती हैं।

प्रश्न 38.
तरंगदैर्ध्य 5000 Å और 8000 Å वाली प्रकाश तरंगों का निर्वात में वेग अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अनुपात 1 है क्योंकि निर्वात में प्रकाश का वेग तरंगदैर्ध्य से स्वतन्त्र होता है।

प्रश्न 39.
वैद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का कौनसा भाग राडार को चलाने के काम आता है?
उत्तर:
वैद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के अति सूक्ष्म तरंग क्षेत्र में राडार को चलाया जाता है। इसका तरंगदैर्घ्य 10-3 m से 0.3m तक है।

प्रश्न 40.
दोलित्र वैद्युत परिपथों से उत्पन्न वैद्युत चुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति क्या है ?
उत्तर:
रेडियो तरंगें (3 x 109 Hz 3 x 104 Hz)

प्रश्न 41.
विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के उस भाग का नाम लिखिए जिसकी तरंगदैर्घ्य 10-2 मी. है तथा इसका एक उपयोग लिखिए।
उत्तर:
माइक्रो तरंग – इसका प्रयोग माइक्रोवेव ओवन में तथा संचार निकाय में होता है।

प्रश्न 42.
(a) चुम्बकत्व के लिए गाऊस नियम को मैक्सवेल समीकरण के रूप में लिखिए।
(b) \(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\) का मान लिखिए।
उत्तर:
(a) \(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d \mathrm{~A}}\) = 0
(b) c या 3 x 108 m/s.

प्रश्न 43.
‘ऐम्पियर मैक्सवेल के नियम का गणितीय समीकरण लिखिए।
उत्तर:
\(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{d \mathrm{~l}}\) = μo (lC + Id)
जहाँ विस्थापन धारा imm
तथा I. = चालन धारा

प्रश्न 44.
निर्वात नलिका मेग्नेट्रॉन द्वारा उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंग का नाम लिखिए।
उत्तर:
सूक्ष्म तरंगें (Micro Waves)

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
सिद्ध कीजिए कि h = od (he) जबकि चिन्हों के सामान्य अर्थ हैं।
उत्तर:
हम जानते हैं:
ID = 1 …..(1)
और
I = dq/dt ……(2)
गाउस के नियमानुसार
E = \(\frac{q}{\epsilon_0 A}\)
या
q = E ∈0A
समीकरण (2) में मान रखने पर
I = d/DT(E ∈0A)
समीकरण (1) से
I = ID
= \(\epsilon_0 \mathrm{~A} \frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}(\mathrm{E})\)
= \(\epsilon_0 \mathrm{~A} \frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) \(\frac{\phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{A}}\)
= \(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~A}} \frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)
या
ID = \(\epsilon_0 \frac{\mathrm{d}}{\mathrm{dt}}\) (ΦE) इतिसिद्धम्

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प्रश्न 2.
आप विस्थापन धारा और चालन धारा के विषय में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर:
(1) विस्थापन धारा और चालन धारा अलग-अलग असतत हैं, लेकिन एक साथ दोनों धाराएँ बन्द मार्ग पर सतत होती हैं।
(2) विस्थापन धारा चालन धारा की तरह चुम्बकीय क्षेत्र का एक स्रोत है।
(3) दोनों धाराएँ सदैव एक-दूसरे के बराबर होती हैं।
(4) विस्थापन धारा सदैव संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत अभिवाह अथवा विद्युत क्षेत्र के परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है।
(5) I धारा संधारित्र की प्लेटों के बीच स्थित होती है जबकि IE (चालन धारा) प्लेटों को जोड़ने वाले तार और वि.वा. बल के स्रोत में होती है।

प्रश्न 3.
चालन धारा को मैक्सवेल ने विस्थापन धारा की परिभाषित करते हुए समझाइए कि संकल्पना क्यों की?
उत्तर:
चालन धारा- किसी परिपथ में जोड़ने वाले तारों द्वारा परिपथ में प्रवाहित धारा को चालन धारा कहते हैं। एक बैटरी द्वारा धारा से एक संधारित्र को आवेशित हुआ लेते हैं। चित्र से यह स्पष्ट है कि आवेशन के समय चालन धारा संधारित्र की प्लेटों के बाहर चित्रानुसार बाएं ओर से दाईं ओर प्रवाहित हो रही है और संधारित्र की प्लेटों के बीच कोई चालन धारा प्रवाहित नहीं है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 4
इस विरोधाभास को दूर करने के लिए मैक्सवेल ने एक नई संकल्पना विस्थापन धारा (ID) को लगाया और इसका उद्गम संधारित्र की पट्टिकाओं अर्थात् प्लेटों के बीच परिवर्ती विद्युत क्षेत्र को बताया। इसको यह दिखाने के लिए लगाया गया है कि संधारित्र के बाहर प्रवाहित धारा (IC) सदैव संधारित्र में से प्रवाहित धारा ID के तुल्य होती है। मैक्सवेल की शर्त के अनुसार चालन धारा IC संधारित्र की बायीं प्लेट में प्रवाहित होती है और विस्थापन धारा (ID) दाहिनी प्लेट की ओर प्रवाहित होती है।
संधारित्र के भीतर

प्रश्न 4.
कब एक आवेश विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है? विद्युत चुम्बकीय तरंगों में वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर तथा तरंग संचरण की दिशा से किस प्रकार सम्बन्धित होते हैं? वह कौन-सी भौतिक राशि है जो विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के सभी भागों की तरंगों के लिए समान हो?
उत्तर:
त्वरित वैद्युत आवेश ही विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है विद्युत चुम्बकीय तरंगों में वैद्युत क्षेत्र तथा चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत् होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा के भी लम्बवत् होते हैं। विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की तरंगों का वायु या निर्वात में वेग सभी के लिए एकसमान c = 3 x 108 मी./से होता है।

प्रश्न 5.
मैक्सवेल द्वारा ऐम्पियर सर्किटल नियम को कैसे संशोधित किया गया? समझाइए।
उत्तर:
ऐम्पियर सर्किटल नियम में विवाद इसलिए उत्पन्न हुआ कि संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच धारा असतत होने की परिकल्पना की गई है। मैक्सवेल ने विस्थापन धारा की संकल्पना ID दी जिसके अनुसार कोई चालन धारा IC प्रवाहित नहीं होती, केवल ID ही प्रवाहित है। जैसे संधारित्र आवेशित होता है, यह संधारित्र की प्लेटों के बीच विस्थापन धारा प्रवाह को जन्म देता है क्योंकि संधारित्र की प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र बढ़ जाता है। इस प्रकार ऐम्पियर सर्किटल नियम
(\(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{di}}\) = μIC) संशोधित रूप में \(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{di}}\) = μ (IC + ID) के रूप में लिखा गया।

प्रश्न 6.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की क्या प्रकृति होती है?
उत्तर:
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की प्रकृति “यह एक त्रिविमीय तरंग है जो कि दोलित विद्युत परिपथ से उत्सर्जित होती है। उसमें विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत् दोलित होते हैं।” इन तरंगों के संचरण के लिये किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है तथा ये निर्वात में भी गति कर सकती हैं अतः ये यांत्रिक तरंगों से भिन्न होती हैं। इनका वेग निर्वात में सर्वाधिक तथा प्रकाश के वेग के बराबर होता है ये तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं एवं ये जिस माध्यम से संचरित होती हैं उसके गुण अपरिवर्तित रहते हैं।

प्रश्न 7.
विद्युत चुम्बकीय तरंगों को उत्पन्न करने का सिद्धान्त लिखिए
उत्तर:
त्वरित आवेश विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो समय और स्थान दोनों में बदलते हैं ये परिवर्तनशील चुम्बकीय एवं वैद्युत क्षेत्र, वैद्युत चुम्बकीय तरंगों को जन्म देते हैं।

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प्रश्न 8.
वैद्युत चुम्बकीय तरंगों के कुछ गुण लिखिए।
उत्तर:
वैद्युत चुम्बकीय तरंगों के निम्नलिखित गुण होते हैं:
(i) ये प्रकृति में अनुप्रस्थ होती हैं।
(ii) ये तरंगें निर्वात में प्रकाश की चाल c = 3 x 108 m/s के बराबर चलती हैं।
(iii) इनके गमन के लिए किसी द्रव्य माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
(iv) ये त्वरित अथवा कम्पनशील आवेश द्वारा उत्पन्न होती हैं।
(v) ये आपस में लम्बवत् परिवर्तनशील वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्रों की होती हैं।
(vi) विद्युत चुम्बकीय तरंगों की ऊर्जा वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र सदिशों में समान रूप में बँटी हुई होती है।
(vii) तरंगें अध्यारोपण के सिद्धान्त का पालन करती हैं।
(viii) दोनों E और B अधिकतम एवं न्यूनतम मान एक ही स्थान और एक ही समय में प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 9.
निम्न तरंगों का एक-एक उपयोग बताइये:
(i) सूक्ष्म तरंगें
(ii) अवरक्त तरंगें
(iii) पराबैंगनी तरंगें
(iv) रेडियो तरंगें।
उत्तर:
(i) सूक्ष्म तरंगें टेलीविजन या रेडियो प्रसारण के लिये वाहक तरंगों के रूप में।
(ii) अवरक्त तरंगें-उपग्रहों को सौलर सेल द्वारा विद्युत ऊर्जा प्रदान करना।
(iii) पराबैंगनी तरंगें इन तरंगों की सहायता से दूसरे के हस्ताक्षर बनाने तथा लिखावट को पहचानने में सहायता मिलती है। इन तरंगों से मनुष्यों की त्वचा में विटामिन D का निर्माण होता है।
(iv) रेडियो तरंगें इन तरंगों का उपयोग टेलीविजन तथा रेडियो संकेतों के प्रसारण में किया जाता है।

प्रश्न 10.
किसी आवृत्ति से कम्पन करता हुआ कोई आवेश किस प्रकार विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्पन्न करता है? Z-अक्ष के
अनुदिश संचरित विद्युत चुम्बकीय तरंग के लिए वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र दर्शाते हुए एक व्यवस्थित आरेख (schematic diagram) बनाइए।
उत्तर:
जब कोई आवेश किसी आवृत्ति से कम्पन करता है तो यह दिक् स्थान से दोलन करते हुए वैद्युत क्षेत्र को उत्पन्न करता है। यह क्षेत्र दोलन करता हुआ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। दोलन करता हुआ
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चुम्बकीय क्षेत्र दोलन करते हुए वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करने का स्रोत बन जाता है। इस प्रकार से यह बारी-बारी से क्रम चलता रहता है। इस प्रकार एक- दूसरे को बार-बार उत्पादित करने वाले वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र वेक्टर परस्पर लम्बवत् दिशाओं में तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् होते हैं। Z-अक्ष के अनुदिश संचरित विद्युत चुम्बकीय तरंग के व्यवस्थित आरेख को ऊपर दर्शाया गया है।

प्रश्न 11.
एक समतल विद्युत-चुम्बकीय तरंग निर्वात में Y-दिशा में संचरित हो रही है। विद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्रों के (i) परिमाण का अनुपात, (ii) दिशाओं के विषय में लिखिए।
उत्तर:
(i) E/B = c; जहाँ E = |\( \overrightarrow{\mathrm{E}}\) | B = | \( \overrightarrow{\mathrm{B}}\) | तथा c = प्रकाश की चाल।
(ii) वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र सदिश \( \overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा \( \overrightarrow{\mathrm{B}}\) क्रमशः Z- अक्ष तथा X- अक्ष के अनुदिश होंगे। ये विद्युत चुम्बकीय तरंग संचरण दिशा के लम्बवत् होंगे।

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प्रश्न 12.
निर्वात में 4 x 109 हर्ट्ज आवृत्ति की विद्युत-चुम्बकीय तरंग की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए इसके दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
= HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 6
= 0.075 मीटर।
यह तरंगदैर्घ्य माइक्रो तरंगों की है। अतः इनके दो उपयोग निम्नलिखित हैं
(i) राडार निकाय में
(ii) माइक्रोवेव ओवेन में।

प्रश्न 13.
भू-तरंग एवं आकाश तरंगों को समझाइये।
उत्तर:
भू-तरंग – ये तरंगें कम आवृत्ति की रेडियो तरंगें होती हैं। जो पृथ्वी की सतह के सहारे चलकर पृथ्वी की सतह के एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक पहुँचती हैं लेकिन ये ज्यादा दूरी तक नहीं जा पाती हैं। इनके सहारे ही रेडियो के कार्यक्रम जो एक सीमित क्षेत्र में ही प्रसारित किये जाते हैं, उनके लिये इन तरंगों का उपयोग किया जाता है और इनको भू-तरंग कहा जाता है।
आकाश तरंगें – रेडियो तरंगें सीधी रेखा में चलती हैं। इसलिये जहाँ से ये प्रसारित की जाती हैं (जैसे- रेडियो स्टेशन से प्रेषित तरंगें ) वहाँ से पृथ्वी की गोलाई के कारण ज्यादा दूर तक नहीं जा पाती हैं। यदि कम आवृत्ति की तरंगें हैं तो ये पृथ्वी की सतह के सहारे चलती हैं लेकिन आवृत्ति अधिक होने पर दूर तक नहीं जा पाती हैं। ज्यादा आवृत्ति वाली तरंगें प्रकाश की ओर जाकर आयनमण्डल की निचली सतह से टकराकर पृथ्वी की ओर लौटकर दूर स्थान तक पहुँच जाती हैं। चूँकि ये आकाश से लौटकर किसी स्थान पर पहुँचती हैं, इसलिये इनको आकाश तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 14
विद्युत चुम्बकीय तरंगें कौनसी तरंगें होती हैं ? इनका उत्पादन किन किन कारणों से संभव होता है?
उत्तर:
विद्युत चुम्बकीय तरंग की परिभाषा – “यह एक त्रिविमीय तरंग है जो कि दोलित विद्युत परिपथ से उत्सर्जित होती है। उसमें विद्युत क्षेत्र एवं चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर लम्बवत् दोलित होते हैं।” इन तरंगों के संचरण के लिये किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
उत्पादन के कारण:
(1) दोलित विद्युत परिपथ में दोलन करने वाले आवेश की यांत्रिक ऊर्जा विद्युत चुम्बकीय तरंगों में परिवर्तित हो जाती है।
(2) आवेश के दोलन से आवेश की गतिज ऊर्जा विद्युत- चुम्बकीय तरंगों में बदल जाती है।

प्रश्न 15
X किरणों के उपयोग बताइये।
उत्तर:
उपयोग:
(1) रेडियो एस्ट्रोनोमी में ऐन्टेना से प्राप्त अत्यन्त क्षीण सूक्ष्म तरंग संकेतों को मेसर द्वारा प्रवर्धित करते हैं।
(2) अंतरिक्ष संचार, अधिक दूरियों के लिये रेडियो संचार आदि में प्रवर्धक के रूप में इनका उपयोग करते हैं।
(3) औषध विज्ञान चिकित्सा विज्ञान, सूक्ष्म सर्जरी में इनका अत्यधिक उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 16.
विद्युत चुम्बकीय तरंग स्पैक्ट्रम को आवृत्ति एवं तरंगदैर्घ्य के रूप में बताइये।
उत्तर:
विद्युत चुम्बकीय स्पैक्ट्रम रेडियो तरंगें, सूक्ष्म तरंगें, अवरक्त दृश्य प्रकाश, पराबैंगनी, X- किरणें, गामा किरणें आदि सभी
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तरंगों के गुण विद्युत चुम्बकीय तरंगों के गुणों जैसे ही होने के कारण मूलतः ये सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं अन्तर केवल इतना है कि इनकी तरंगदैर्घ्य भिन्न-भिन्न होती है। स्पष्ट है कि विद्युत चुम्बकीय तरंगों की तरंगदैर्ध्य का विस्तार काफी अधिक होता है इसलिये उपर्युक्त सभी तरंगों को तरंगदैर्घ्य के आधार पर एक क्रम में रखा जा सकता है, जिसे विद्युत चुम्बकीय स्पैक्ट्रम या वर्णक्रम कहते हैं।

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प्रश्न 17.
निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय विकिरणों को उनकी आवृत्ति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। इनमें से किसी एक के उपयोग लिखिए- माइक्रो तरंगें, रेडियो तरंगें, X-किरणें, गामा किरणें।
उत्तर:
रेडियो तरंगें, माइक्रो तरंगें X – किरणें गामा किरणें।
उपयोग – माइक्रो तरंगें- रेडार में उपग्रहों तथा लम्बी दूरी वाले बेतार संचार में माइक्रोवेव ओवन में।
रेडियो तरंगें – रेडियो तथा टी.वी. के संचारण में।
X – किरणें- चिकित्सा निदान व उपचार में।
गामा किरणें – नाभिकीय संरचना की जानकारी, चिकित्सा उपचार आदि।

प्रश्न 18.
(a) निम्नलिखित में से कौन विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है? कारण दीजिए।
(i) नियत वेग से गतिमान आवेश,
(ii) वृत्तीय गति करता हुआ आवेश,
(iii) स्थिर आवेश।
(b) विद्युत-चुम्बकीय वर्णक्रम का वह भाग बताइए जिससे
(i) 1020 Hz,
(ii) 109 Hz आवृत्ति की तरंगें सम्बन्धित हों।
उत्तर:
(a) (i) नियत वेग से गतिमान आवेश में कोई भी त्वरण नहीं होता है। अतः यह विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत नहीं हो सकता है।
(ii) वृत्तीय गति करते हुए आवेश की गति त्वरित गति होगी. अतः यह विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है।
(iii) स्थिर आवेश में भी त्वरण नहीं होता है अतः यह भी विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत नहीं हो सकता है।
(b) (i) y-किरणें (ii) माइक्रो तरंगें।

प्रश्न 19.
निम्नलिखित तरंगदैर्घ्य की विद्युत चुम्बकीय तरंगें:
(a) λ1: माँसपेशीय तनाव उपचार में प्रयुक्त की जाती है।
(b) λ2 : रेडियो ब्रॉडकास्टिंग में प्रयुक्त की जाती है।
(c) λ3 : हड्डियों के टूटने का पता लगाने में प्रयुक्त की जाती है।
(d) λ4: वायुमण्डल की ओजोन पर्त द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।
विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के उप भाग का नाम ये सम्बन्धित हैं। इनको तरंगदैर्घ्य के घटते क्रम में
उत्तर:
(a) λ1 → अवरक्त विकिरण
(b) λ2 → रेडियो तरंगें
(c) λ3 → X किरणें
(d) λ4 → पराबैंगनी विकिरण
λ2 > λ1 > λ4 > λ3
लिखिए जिससे लिखिए।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित विद्युत चुम्बकीय विकिरणों की आवृत्ति परास लिखकर प्रत्येक का एक उपयोग लिखिए:
(i) माइक्रो तरंग,
(ii) पराबैंगनी विकिरण,
(iii) गामा किरणें।
उत्तर:
(i) 1 x 109 Hz से 3 x 1011 Hz ( राडार में):
(ii) 8 x 1014 Hz से 1 x 1116 Hz (खाद्य संरक्षण) में;
(iii) 3 x 1018 Hz से 3 x 1022 Hz (रेडियो थैरेपी चिकित्सा में)।

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प्रश्न 21
विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उन विकिरणों के नाम लिखिए जो:
(i) उपग्रह संचार में प्रयुक्त होती हैं।
(ii) क्रिस्टल संरचना ज्ञात करने में प्रयुक्त होती हैं।
(iii) जो रेडियोऐक्टिव नाभिक के क्षय में उत्पन्न होती हैं।
(iv) जिनकी तरंगदैर्ध्य 350 nm तथा 770 nm के बीच होती है।
(v) सूर्य के प्रकाश से ओजोन पर्त द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं।
(vi) तीव्र ऊष्मीय प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
उत्तर:
(i) माइक्रो तरंगें
(ii) X – किरणें
(iii) y-किरणें,
(iv) दृश्य प्रकाश,
(v) पराबैंगनी विकिरण,
(vi) अवरक्त विकिरण।

प्रश्न 22.
(a) दिक्काल (मुक्त आकाश) में किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र सदिश (E) का परिमाण 9.3 V/m है। इस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र सदिश (B) का परिमाण ज्ञात कीजिए।
(b) पराबैंगनी, अवरक्त तथा X-किरणों में से किसकी तरंगदैर्ध्य अधिकतम होती है?
उत्तर:
(a) c = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\mathrm{~B}_0}\)
या B0 = \(\frac{\mathbf{E}_0}{\mathrm{c}}\)
B0 = \(\frac{9.3}{3 \times 10^8}\)
= 3.1 × 108 T

(b) अवरक्त।

प्रश्न 23.
एक रेखीय धुवित विद्युतचुम्बकीय तरंग का संचरण चित्र बनाइये तथा विद्युत चुम्बकीय तरंग के कोई दो गुण लिखिए। निर्वात में एक वैद्युतचुम्बकीय तरंग से सम्बद्ध चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम B0 = 50 x 108 टेसला है। तरंग से सम्बद्ध वैद्युत क्षेत्र के आयाम का मान वोल्ट / मीटर में लिखिए।
उत्तर:
रेखीय धुवित विद्युतचुम्बकीय तरंग का संचरण चित्र-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 8
विद्युत चुम्बकीय तरंग के गुण:
(1) यह एक प्रकाश तरंग है जिसकी प्रकृति अनुप्रस्थ होती है।
(2) विद्युतचुम्बकीय तरंगें निर्वात में प्रकाश के वेग C से गमन करती हैं। जहाँ
C = \(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\)
= 3 × 108m/s
नोट: छात्र और भी गुण लिख सकते हैं।
दिया गया है:
निर्वात में चुम्बकीय क्षेत्र का आयाम
B0 = 50 x 10-8 टेसला
निर्वात में तरंग का वेग C = 3 x 108 मी/से.
निर्वात में तरंग के विद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम = E0 = ?
हम जानते हैं कि वैद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिये
C = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\mathrm{~B}_0}\)
या
Eg = C Bo
मान रखने पर
Eg = 3 x 108 × 50 x 108
= 150 वोल्ट / मीटर

प्रश्न 24.
विद्युत् चुम्बकीय तरंगें किस प्रकार उत्पन्न होती हैं? संचरण करने वाली किसी विद्युत् चुम्बकीय तरंग द्वारा वहन की जाने वाली ऊर्जा का स्रोत क्या होता है?
(i) घरेलू इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों के सुदूर स्विचों में
(ii) चिकित्सा में नैदानिक साधन के रूप में।
उत्तर:
त्वरित आवेश विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो समय और स्थान दोनों में बदलते हैं। ये परिवर्तनशील चुम्बकीय एवं वैद्युत क्षेत्र, वैद्युत चुम्बकीय तरंगों को जन्म देते हैं। वृत्तीय गति करते हुए आवेश की गति त्वरित गति होगी, अतः यह विद्युत चुम्बकीय तरंगों की उत्पत्ति का स्रोत हो सकता है।
विद्युत चुम्बकीय विकिरणों का उपयोग होता है।
(i) Infrared विकिरणों में
(ii) X-किरणों में।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक समतल e.m. तरंग में विद्युत क्षेत्र 2 x 1010 s-1 आवृत्ति और 40 Vm-1 आयाम से दोलन करता है। (a) तरंग का तरंगदैर्घ्य (b) विद्युत क्षेत्र से सन्नद्ध ऊर्जा घनत्व का आकलन कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
आवृत्ति v = 2 x 1010 s-l
यह E की दोलन आवृत्ति है।
C = प्रकाश की चाल = 3 x 108 m/s
E0 = विद्युत क्षेत्र का आयाम = 40V/m.
∴ Emax = \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}}\)
= \(\frac{E_0}{\sqrt{2}}\)
= \(\frac{\sqrt{2} \times 40}{2}\)
= 20√2 V/m.
(a) तरंग का तरंगदैर्ध्य = λ = ?
λ = c/v = HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 8 वैद्युतचुंबकीय तरंगें 9
= \(\frac{3 \times 10^8}{2 \times 10^{10}}\)
= 1.50 × 102 m.

(b) विद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व = UE = ?
UE = \(\frac{1}{2}\) ∈0 E2r.m.s
= \(\frac{1}{2}\) × 8.85 × 10-12 × (20√2)2
= \(\frac{1}{2}\) × 8.85 × 10-12 × 400 × 2
= 35.416 × 10-10 jm-3
= 3.54 × 10-9jm-3
= 3.54 n Jm-3

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प्रश्न 2.
संधारित्र की प्लेटों के बीच क्षेत्र में विद्युत क्षेत्र परिवर्तन की दर 1.5 x 1012 Vm-1 s-1 है। यदि संधारित्र की वृत्तीय प्लेट की त्रिज्या 55 mm है, विस्थापन धारा कितनी होगी?
उत्तर:
दिया गया है:
r = 55 mm = 55 x 10-3 m
= 5.5 × 10-2 m
A = πr2 = \(\frac{22}{7}\) x (5.5 × 10-2)2
= \(\frac{22}{7}\) × 5.5 × 5.5 × 10-4
= 95.07 × 10-4 m-2
और
\(\frac{dE}{dt}\) = 1.5 x 1012 Vm-1s-1
विस्थापन धारा Id = ?
हम जानते हैं
विस्थापन धारा Id = ∈0 \(\frac{dE}{dt}\) (ΦE)
लेकिन
ΦE = EA
∴ Id = ∈0 \(\frac{dE}{dt}\)(EA)
= ∈0 \(\frac{dE}{dt}\)
मान रखने पर
= 8.85 × 10-12 × 95.07 × 10-4 × 1.5 x 1012
= 8.85 × 95.07 x 1.5 x 10-4
= 1262.05 × 10-4
= 126.205 × 10-3 A
= 126 mA

प्रश्न 3.
x- अक्ष के अनुदिश प्रगामी एक प्रकाश पुंज को विद्युत क्षेत्र Ey = 600 Vm-1 sin ω(t – x/c) से व्यक्त करते हैं y-अक्ष के अनुदिश 3.0 x 107 ms-1 चाल से प्रगामी एक आवेश q = 2e पर वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्रों के अधिकतम बल का आकलन कीजिए जहाँ e = 1.6 x 10-19 C है।
उत्तर:
दिया गया है:
E = 600Vm-1 sinω(1 – x/c)
Eg = 600Vm-1
q = 2e
= 2 × 1.6 × 10-19 C
प्रकाश की चाल = 3 x 108 m/s
v = 3.0 × 107 m/s
B0 = E0/c = \(\frac{600}{3 \times 10^8}\)
= 2 × 10-6 T
जो z-अक्ष के अनुदिश कार्य करता है।
इस प्रकार अधिकतम वैद्युत बल
Fo = qEo
= 2e E0
= 2 × 1.6 × 10-19 x 600
= 1.92 × 10-16 N से दिया जाता है।
अधिकतम चुम्बकीय बल
Fmax
= qvBo = 2evBo
= 2 × 1.6 × 10-19 x 3 x 107 x 2 x 10-6 N
= 1.92 x 10-17 N

प्रश्न 4.
एक संधारित्र की पट्टिकाओं पर आवेषण धारा 0.5 A है। इसकी प्लेटों पर विस्थापन धारा का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया गया है:
I = 0.5 A
Id = ?
हम जानते हैं:
Id = ∈0 \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)
लेकिन
\(\phi_E\) = EA
∴ Id = ∈0 \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\) (EA)
= ∈0 A \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)
लेकिन
E = \(\frac{q}{\epsilon_0 A}\)
Id = ∈0 A \(\frac{\mathrm{d} \phi_{\mathrm{E}}}{\mathrm{dt}}\)\(\frac{q}{\epsilon_0 A}\)
= \(\frac{\epsilon_0 A}{\epsilon_0 A}\) \(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\) =
\(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\)
= 0.5 A (\(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\) = 1 = 0.5A)

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प्रश्न 5.
6 μF धारिता आप 6 A की विस्थापन धारा के संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच कैसे स्थापित करेंगे?
उत्तर:
दिया गया है:
C = 6 μF = 6 × 106F
ld = 6 A
हम जानते हैं
ld = ∈0 A \(\frac{\mathrm{dE}}{\mathrm{dt}}\)
= ∈0 A \(\frac{\mathrm{dE}}{\mathrm{dt}}\) \(\left(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{d}}\right)\)
∴ E = \(\frac{V}{d}\)
= \(\frac{\epsilon_0 A}{d}\) \(\frac{\mathrm{dV}}{\mathrm{dt}}\)
ld = C. \(\frac{\mathrm{dV}}{\mathrm{dt}}\)
∴ \(\frac{\mathrm{dV}}{\mathrm{dt}}\) = \(\frac{I_d}{\mathrm{C}}\) = \(\frac{6}{6 \times 10^{-6}}\)
106 Vs-1
अतः संधारित्र की पट्टिकाओं पर विभवान्तर को 106 Vs-1 की दर से परिवर्तित करके उसकी पट्टिकाओं पर 6A की विस्थापन धारा स्थापित की जा सकती है।

प्रश्न 6.
निर्वात के लिये \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\) तथा \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) के मान क्रमशः 9 x 109 न्यूटन / मी. 2 तथा 10-7वेबर / ऐम्पियर भी होते हैं। निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंग का वेग ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
प्रश्नानुसार = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\)
= 9 x 109
= \(\frac{1}{4 \pi \times 9 \times 10^9}\) = \(\frac{1}{36 \pi \times 10^9}\)
तथा
\(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) = 10-7
= 4 x 10-7
किसी माध्यम में विद्युत चुम्बकीय तरंग का वेग V = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\)
निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंग के वेग के लिये V = C,
μ = μo तथा ∈ = ∈o
C = \(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \epsilon_0}}\) = \(\frac{1}{\sqrt{4 \pi \times 10^{-7} \times \frac{1}{36 \pi \times 10^9}}}\)
या
C = √9 x 1016 = 3 x 108 मी./से.

प्रश्न 7.
एक समान्तर बद्ध संधारित्र की प्लेटों का क्षेत्रफल A तथा इनके बीच की दूरी d है। इसको स्थिर धारा I द्वारा आवेशित किया गया है। एक A/2 क्षेत्रफल का कोई तत्व इसकी प्लेटों के ठीक बीच में समरूपता से प्लेटों के समान्तर रखा गया है। इस क्षेत्रफल से प्रवाहित धारा क्या होगी?
उत्तर:
माना किसी क्षण t पर प्लेटों पर आवेश q है। प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र
E = \(\frac{\sigma}{\epsilon_0}\) = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0 A}\)
प्लेटों के बीच स्थित क्षेत्रफल A/2 से गुजरने वाला वैद्युत फ्लक्स
= E × \(\frac{A}{2}\) = \(\frac{\mathrm{q}}{\epsilon_0 A}\) × \(\frac{A}{2}\)
= \(\frac{\mathrm{q}}{2 \epsilon_0}\)
इस तल से गुजरने वाली विस्थापन धारा
Id = ∈0 \(\frac{d}{d t}\) (ΦE)
= ∈0 \(\frac{d}{d t}\) \(\frac{\mathrm{q}}{2 \epsilon_0}\)
= \(\frac{1}{2}\) \(\frac{\mathrm{dq}}{\mathrm{dt}}\)
= \(\frac{1}{2}\)

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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन


(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. अर्थसूत्री विभाजन का परिणाम है- (Exemplar Problem NCERT)
(A) युग्मकों का निर्माण
(B) क्रोमोसोम की संख्या में कमी
(C) विभिन्नताओं का जन्म
(D) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी।

2. सेन्ट्रोमियर भाग लेता है-
(A) ट्रान्सक्रिप्सन में
(B) विनिमय में
(C) साइटोप्लाज्मिक विदलन में
(D) गुणसूत्र की ध्रुव की ओर गति में।
उत्तर:
(D) गुणसूत्र की ध्रुव की ओर गति में।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

3. अर्धसूत्री विभाजन की किस अवस्था में अन्ततः युग्मकों का आनुवंशिक संगठन निर्धारित हो जाता है- (Exemplar Problem NCERT)
(A) मध्यावस्था (I)
(B) पश्चावस्था II
(C) मध्यावस्था III
(D) पश्चावस्था I
उत्तर:
(A) मध्यावस्था (I)

4. जीवधारियों में अर्धसूत्री विभाजन किस दौरान होता है-
(A) लैंगिक जनन
(B) वर्षी प्रजनन
(C) लैंगिक व वर्धी प्रजनन दोनों
(D) उपर्युक्त कोई नहीं।
उत्तर:
(C) लैंगिक व वर्धी प्रजनन दोनों

5. अर्थसूत्री विभाजन की पश्चावस्था I के समय- (Exemplar Problem NCERT)
(A) समजात गुणसूत्र अलग हो जाते हैं
(B) असमजात ऑटोसोम अलग होते हैं।
(C) अर्धगुणसूत्र अलग होते हैं।
(D) नॉन-सिस्टर अर्धसूत्र अलग होते हैं।
उत्तर:
(A) समजात गुणसूत्र अलग हो जाते हैं

6. सूत्री विभाजन का विशिष्ट गुण है- (Exemplar Proble NCERT)
(A) निम्नकारी विभाजन
(B) समकारी विभाजन
(C) निम्नकारी व समकारी दोनों विभाजन
(D) उपर्युक्त कोई नहीं ।
उत्तर:
(B) समकारी विभाजन

7. केन्द्रक कला अदृश्य हो जाती है-
(A) प्रोफेज में
(B) मेटाफेज में
(C) एनाफेज में
(D) टीलोफेज में।
उत्तर:
(A) प्रोफेज में

8. कोशिका चक्र का सही क्रम है- (RPMT 2003)
(A) G1, S, G2, M
(B) G1, G2, S, M
(C) M, G1, G2, S
(D) S, G1, G2 M.
उत्तर:
(A) G1, S, G2, M

9. अर्द्धसूत्री विभाजन में समजाती गुणसूत्र कब पृथक् होते हैं ?
(A) मेटाफेज- I
(C) ऐनाफेज-1
(B) मेटाफेज-II
(D) ऐनाफेज-II.
उत्तर:
(C) ऐनाफेज-1

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

10. DNA का संश्लेषण किस अवस्था में होता है ? (UPCPMT2010)
(A) G1
(B) G2
(C) s
(D) M.
उत्तर:
(C) s

11. युम्मन के समय गुणसूत्रों के मध्य युग्मनहोता है-
(A) समान गुणसूत्रों के बीच
(B) समजात गुणसूत्रों के बीच
(C) असमजात गुणसूत्रों के बीच
(D) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(B) समजात गुणसूत्रों के बीच

12. अर्धसूत्री विभाजन का वाइवेलेन्ट बना होता है- (Exemplar Problem NCERT)
(A) दो अर्धगुणसूत्र व एक सेण्ट्रोमियर
(B) दो अर्धगुणसूत्र व दो सेण्ट्रोमियर
(C) चार अर्धगुणसूत्र व 2 सेण्ट्रोमियर
(D) चार अर्धगुणसूत्र व4 सेण्ट्रोमियर ।
उत्तर:
(C) चार अर्धगुणसूत्र व 2 सेण्ट्रोमियर

13. कोशिकाएँ जो विभाजित नहीं हो रही सम्भवतः कौन-सी अवस्था प्रदर्शित करती है ? (Exemplar Problem NCERT)
(A) G1
(C) Go
(B) G2
(D) SPhase.
उत्तर:
(C) Go

14. G1 अवस्था के बारे में सही कथन का चुनाव कीजिए- (Exemplar Problem NCERT)
(A) कोशिका उपापचयी रूप से असक्रिया होती है
(B) कोशिका का DNA प्रतिकृति नहीं बनाता
(C) यह दीर्घ अणुओंके संश्लेषण की प्रावस्था नहीं है।
(D) कोशिका वृद्धि बंद कर देती है।
उत्तर:
(B) कोशिका का DNA प्रतिकृति नहीं बनाता

15. अर्थसूत्री विभाजन-1 की प्रोफेज की उपावस्थाओं का सही कम है-
(A) जाइगोटीन, पैकोटीन, डिप्लोटीन, लैप्टोटीन, डिकाइनेसिस
(B) सैप्टोटीन, जाइगोटीन, पैकीटीन, डिप्लोटीन, डिकाइनेसिस
(C) डिकाइनेसिस, लैप्टोटीन, पैकीटीन, जाइगोटीन, डिप्लोटीन
(D) सैप्टोटीन, पैकीटीन, जाइगोटीन, डिकाइनेसिस, डिप्लोटीन
उत्तर:
(B) सैप्टोटीन, जाइगोटीन, पैकीटीन, डिप्लोटीन, डिकाइनेसिस

16. जीन विनिमय होता है-
(A) सेप्टोटीन में
(B) जाइगोटीन में
(C) पैकीटीन में
(D) डिप्लोटीन में
उत्तर:
(C) पैकीटीन में

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

17. तर्क तन्दुओं का निर्माण इस प्रोटीन से होता है- (UPPMT 2008)
(A) मायोसीन
(B) एक्टिन
(C) ग्लोबुलर
(D) दयूबलिन।
उत्तर:
(D) दयूबलिन।

18. मनुष्य में अर्धसूत्री विभाजन होता है-
(A) यकृत एवं किडनी में
(B) नाखूनों की जड़ों में
(C) अस्थियों एवं उपास्थियों में
(D) वृषण एवं अण्डाशय में।
उत्तर:
(D) वृषण एवं अण्डाशय में।

19. निम्न में से कौन-सी परिघटना सूत्री विभाजन के समय नहीं देखी जाती ? (Exemplar Problem NCERT)
(A) क्रोमेटिन संघनन
(B) सेष्ट्रि ओल का विपरीत ध्रुवों की ओर गमन
(C) दो अर्धगुणसूत्र जो सेण्ट्रोमियर पर जुड़े हों वाले गुणसूत्र
(D) सिंग ओवर
उत्तर:
(D) सिंग ओवर

20. कोशिका लागू नहीं होता है-
(A) समसूत्री विभाजन में
(B) अर्द्धसूत्री विभाजन में
(C) A तथा B दोनों में
(D) इनमें से किसी में नहीं।
उत्तर:
(B) अर्द्धसूत्री विभाजन में

21. कौन-सी मीओसिस की सबसे लम्बी अवस्था है ? (UPPMT 2001)
(A) प्रोफेज-1
(C) एनाफे
(B) मेटाफेज-11
(D) टीलोफेन।
उत्तर:
(A) प्रोफेज-1

22. सूक्ष्म नलिकाएँ अनुपस्थित होती है-(CBSE PMT, 2001)
(A) माइटोकॉण्ड्रिया
(B) सेन्ट्रियोल
(C) फ्लैजिला
(D) तर्कु तन्तु ।
उत्तर:
(A) माइटोकॉण्ड्रिया

23. एक कोशिका एक मिनट में एक बार विभाजित होती है एक घण्टे में कोई ट्यूब विभाजित कोशिकाओं से भर जाती है तो आधा ट्यूव धरने में कितना समय लगेगा ? (UPPMT 2001)
(A) तीस मिनट
(C) 59 मिनट
(B) 61 मिनट
(D) 45 मिनट
उत्तर:
(C) 59 मिनट

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24. G2 अवस्था में गुणसूत्र में DNA की संख्या होती हैRPMT 2002)
(A) एक
(C) चार
(B) दो
(D) आठ
उत्तर:
(A) एक

25. मिओटिक मेटाफेज-1 के लिए कौन-सा कथन सत्य है ? (RPMT, 2002)
(A) युग्मित गुणसूत्र मध्यवर्ती अक्ष पर व्यवस्थित होते हैं
(B) अयुग्मित गुणसूत्र मध्य रेखापर व्यवस्थित होते हैं
(C) विषमजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं
(D) तर्कुन्दु गुणसूत्र से जुड़े होते हैं।
उत्तर:
(A) युग्मित गुणसूत्र मध्यवर्ती अक्ष पर व्यवस्थित होते हैं

26. समसूत्री विभाजन होता है- (RPMT, 2001)
(A) अगुणित जीवों में
(C) A व B दोनों में
(B) द्विगुणित जीवों में
(D) केवल जीवाणु में
उत्तर:
(C) A व B दोनों में

27. माइटोटिक मुख्य बने होते हैं- (CBSE PMT 2002, RPMT 2003 RPPMT 2006, 2008)
(A) दम्बुलिन के
(C) एक्टोमायोसिन के
(B) मायोसिन के
(D) मायोग्लोबिन के
उत्तर:
(A) दम्बुलिन के

28. प्रयोगशाला में समसूत्री विभाजन के अध्ययन के लिए सबसे उत्तम है- (RPPMT 2006, 2008)
(A) पुंकेसार
(B) मूलशीर्ष
(C) पर्णशी
(D) अण्डाशय।
उत्तर:
(B) मूलशीर्ष

29. यदि द्विगुणित कोशिका को कोल्विसीन से उपचारित किया जाता है यह हो जाती है- (CBSE PMT 2002)
(A) त्रिगुणित
(B) चतुर्गुणित
(C) द्विगुणित
(D) एक गुणित
उत्तर:
(B) चतुर्गुणित

30. समसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्रों की संख्या (UPPMT 2003)
(A) बदल जाती है।
(B) नहीं बदलती है
(C) बदल सकती है यदि कोशिका परिपक्व है
(D) बदल सकती है यदि कोशिका अपरिपक्व हो ।
उत्तर:
(B) नहीं बदलती है

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31. निम्न में से किस अवस्था में गुणसूत्र कोशिका के वियुक्त वृत्त पर व्यवस्थित हो जाते हैं ? (UPPMT 2003, RPMT, 2008, UPCPMT 2008, 12)
(A) एनाफेज
(B) मेटाफेज
(C) मोफेज
(D) टीलोफेन
उत्तर:
(B) मेटाफेज

32. DNA का द्विगुणन होता है- (RPMT 2003)
(A) S-फेज में
(B) प्रोफेज में
(C) मेटाफे में
(D) एनाफेज में
उत्तर:
(A) S-फेज में

33. गुणसूत्रों की संख्या किस अवस्था में आधी हो जाती है ? (RPMT 2004, 2006)
(A) पश्चावस्था-1
(B) पश्चावस्था-II
(C) अन्त्यावस्था-1
(D) अत्यावस्था-II.
उत्तर:
(A) पश्चावस्था-1

34. कियाज्पेटा का निर्माण होता है- (RPMT 2004)
(A) युग्मित समजात गुणसूत्रों के कुछ भाग में विनिमय के कारण
(B) अयुग्मित असमजात गुणसूत्रों के कुछ भाग में विनिमय के कारण
(C) युग्मित व समजात गुणसूत्रों के द्विगुणन के कारण
(D) गुणसूत्रों के अयुग्मित भाग के टूटने के कारण।
उत्तर:
(A) युग्मित समजात गुणसूत्रों के कुछ भाग में विनिमय के कारण

35. GI- प्रावस्था में कौन-सा संश्लेषित होता है ? (UPPMT, 2004)
(A) रामोजाइ
(B) हिस्टोन
(C) केन्द्रिकीय DNA
(D) DNA पॉलिमरेज व ट्यूबुलिन प्रोटीन ।
उत्तर:
(D) DNA पॉलिमरेज व ट्यूबुलिन प्रोटीन ।

36. अर्द्धसूत्रीविभाजन की किस अवस्था में कियामेटा दिखाई देता है ? (UPPMT 2004)
(A) डाइकाइनेसिस में
(B) डिप्लोटीन में
(C) मेटाफेज-11 में
(D) पैकीटीन में
उत्तर:
(D) पैकीटीन में

37. जाइगोटिक मीओसिस पाया जाता है- (UPPMT 2005)
(A) क्लेमाइडोमोनास में
(B) सभी यूकैरियोट्स में
(C) फ्यूनेरिया में
(D) इनमें से किसी मेंनहीं। बनाने के लिए 80 सूत्री विभाजन होत
उत्तर:
(A) क्लेमाइडोमोनास में

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38. आवृतबीजियों में 64 युग्मनज हैं लेकिन जिम्नोस्पर्मस में जाता है- (UPPMT 2006)
(A) 40
(B) 80
(C) 160
(D) 20.
उत्तर:
(B) 80

39. कोशिका विभाजन के दौरान RNA तथा अहिस्टोन प्रोटीन का संश्लेषण होता है- (RPMT 2009, UPCPMT 2009)
(A) S-प्रावस्था में
(C) G2-भावस्था में
(B) G1 भावस्था में
(D) M-प्रावस्था में।
उत्तर:
(B) G1 भावस्था में

40. टोलोमीयर पुनरावर्ती DNA अनुक्रम सुकेन्द्री गुणसूत्रों के कार्य का नियन्त्रण करते हैं क्योंकि थे- (CBSE-AIPMT 2007)
(A) रेप्लिकानों की तरह कार्य करते हैं
(B) RNA ट्रांसक्रिप्शन के आरम्भकर्ता होते हैं
(C) गुणसूत्र युग्मन में सहायता करते हैं
(D) गुणसूत्र हानि को रोकते हैं।
उत्तर:
(D) गुणसूत्र हानि को रोकते हैं।

41. किस कोशिका विभाजन के दौरान कोशिका पट्ट (Cell plate) का निर्माण होता है ? (UPCPMT 2007)
(A) कोशिका द्रव्य विभाजन
(B) केन्द्रक विभाजन
(C) अन्तरावस्था
(D) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(A) कोशिका द्रव्य विभाजन

42. मानवों में प्रथम सूत्री विभाजन के बाद नर जनन कोशिकाएँ किसके रूप में विदित हो जाती हैं ? (CBSE AIPMT 2008)
(A) प्राथमिक प्रशुक्राणु जन
(B) द्वितीयक अशुक्राणुजन
(C) प्रशुक्राणुजन
(D) शुक्राणुजन ।
उत्तर:
(B) द्वितीयक अशुक्राणुजन

43. दिए गए चित्र में कोशिका विभाजन की विभिन्न अवस्थाओं की रूपरेखा दर्शायी गई है-
निम्नलिखित में से कौन कोशिका विभाजन की अवस्था का सही प्रदर्शन करता है ? (UPCPMT 2009)
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन 1
(A) B मध्यावसथा
(B) C-केन्द्रक विभाजन
(C) D संश्लेषण अवस्था
(D) A- कोशिका द्रव्य विभाजन ।
उत्तर:
(C) D संश्लेषण अवस्था

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44. अर्धसूत्री विभाजन के बारे में गलत तथ्य है-
(A) समजात गुणसूत्रों का युग्मन
(B) पार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं
(C) अंत में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है।
(D) DNA प्रतिकृतिकरण के दो चक्र होते हैं।
उत्तर:
(D) DNA प्रतिकृतिकरण के दो चक्र होते हैं।

45. समसूत्री विभाजन के सम्बन्ध में सही विकल्प चुनिए – (AIPMT 2011)
(A) अन्त्यावस्था में अर्द्धगुणसूत्र विपरीत ध्रुवों की ओर गति प्रारम्भ करते
(B) पूर्वावस्था के अन्त पर भी गॉल्जी समिश्र एवं अन्य दिखाई देती है द्रव्यी जालिका
(C) मध्यावस्था में गुणसूत्र तर्क मध्याक्ष की ओर गति करते हैं तथा मध्यवर्ती प्लेट के साथ व्यवस्थित हो जाते हैं।
(D) पश्चावस्था में अर्द्धगुणसूत्र हो जाते हैं किन्तु कोशिका के केन्द्र में ही बने रहते हैं।
उत्तर:
(C) मध्यावस्था में गुणसूत्र तर्क मध्याक्ष की ओर गति करते हैं तथा मध्यवर्ती प्लेट के साथ व्यवस्थित हो जाते हैं।

46. यदि अण्डकोशिका में गुणसूत्र की संख्या 8 हो तो भ्रूण में गुणसूत्रों की संख्या क्या होगी ? (UPCPMT 2011)
(A) 12
(B) 8
(C) 16
(D) 12.
उत्तर:
(A) 12

47. द्वितीय अर्द्ध-सूत्री विभाजन के फलस्वरूप होता है- (RPMT 2012)
(A) लिंग गुणसूत्रों का पृथक्करण
(B) नए DNA का संश्लेषण
(C) क्रोमेटिड्स तथा सेन्ट्रीमियर का पृथक्करण
(D) समजात गुणसूत्रों का पृथक्करण ।
उत्तर:
(C) क्रोमेटिड्स तथा सेन्ट्रीमियर का पृथक्करण

48. दिए गए चित्र में कोशिका विभाजन के दौरानएक निश्चित अवस्था पर एक विशेष घटना को प्रदर्शित किया जा रहा है कोशिका विभाजन की इस अवस्था को पहचानिए-(CBSE AIPMT 2012)
(A) अर्धसूत्री विभाजन के दौरान पूर्वावस्था-1
(B) अर्धसूत्रीविभाजन के दौरान पूर्वावस्था-II
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन 2
(C) सूत्री विभाजन के दौरान पूर्वावस्था
(D) सूत्री विभाजन के दौरान पूर्वीवस्था तथा मध्यावस्था ।
उत्तर:
(A) अर्धसूत्री विभाजन के दौरान पूर्वावस्था-1

49. सूत्र युग्मित समजात गुणसूत्रों के युग्प द्वारा बनाये गये सम्मिन्न को क्या कहा जाता है ? (NEET 2013)
(A) मध्यवर्ती पट्टी
(B) काइनेटोकोर
(C) greft (Bivalant)
(D) अक्षसूत्र (Axoneme)
उत्तर:
(C) greft (Bivalant)

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

50. चित्र में कोशिका विभाजन की एक अवस्था दर्शायी गयी है। अवस्था की सही पहचान और उसकी सही विशिष्टता को चुनिए-
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन 3

(A)अंत्यावस्था (टीलोफेज)केन्द्रकीय आवरण दुबारा बन जाता है, गॉल्जी सिम्मश्र भी दुबारा बन जाता है।
(B)परवर्ती पश्चावस्था (लेट ऐनाफेज)गुणसूत्र मध्यवर्ती पह्टी से दूर चले जाते हैं, गॉल्जी सम्मिश्र नहीं होता।
(C)कोशिकाभाजन (साइटोकाइनेसिस)कोशिकापह्टी बन जाती है, माइटोकीण्ड्रिया दोनों संतति कोशिकाओंमें वितरित हो जाती हैं।
(D)अंत्यावस्थ (टीलोफेज)एंडोप्लाज्ञिक रेटिकुलम और केन्द्रिका अभी दुबारा नहीं बने होते।

उत्तर:

(A)अंत्यावस्था (टीलोफेज)केन्द्रकीय आवरण दुबारा बन जाता है, गॉल्जी सिम्मश्र भी दुबारा बन जाता है।

B. अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. कोशिका चक्र की कौन-सी अवस्था सबसे लम्बी अवधि की होती है ? (Exemplar Problem NCERT)
उत्तर:
G1 अवस्था ।

प्रश्न 2.
कोशिका चक्र की सबसे छोटी तथा सबसे बड़ी प्रावस्थाओं के नाम बताए।
उत्तर:
सबसे छोटी प्रावस्था M तथा सबसे बड़ी प्रावस्था G1 है।

प्रश्न 3.
कोशिका चक्र का नियमन किस पदार्थ द्वारा होता है ?
उत्तर:
साइक्लिन निर्भर प्रोटीन काइनेज (cyclin dependent protein kinase) एन्जाइम द्वारा

प्रश्न 4.
DNA की दो कुण्डलियों को पृथक् करने का कार्य कौन-सा एन्जाइम करता है ?
उत्तर:
डी. एन. ए. हेलिकेज (DNA helicase) एन्जाइम ।

प्रश्न 5.
Go प्रावस्था की विशेषता लिखिए।
उत्तर:
Go प्रावस्था में कोशिका विभेदित हो जाती है जो विभाजन नहीं करती है।

प्रश्न 6.
सबसे कम तथा सबसे अधिक गुणसूत्र संख्या किन प्राणियों में पायी जाती है ?
उत्तर:
एस्कैरिस मैगालोसिफेला (Ascaris megalocephala) में सबसे कम (2) गुणसूत्र तथा ऑलाकैन्था (Alacantha) में सबसे अधिक (1600) गुणसूत्र पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
उस रंजक का नाम बताइये कि गुणसूत्रों के रंगने के लिए सामान्यतः प्रयोग किया जाता है ? (Exemplar Problem NCERT)
उत्तर:
एसीटोकामन ।

प्रश्न 8.
जन्तुओं और पौधों के कौन-से ऊतको में अर्धसूत्री विभाजन होता है ? (Exemplar Problem NCERT)
उत्तर:
जन्तु जनद (वृषण (testes) व अण्डाशय (ovaries). पौधे परागकोष (pollen sac), बीजाण्ड (owule) पुच्ची पौधों में बीजाणुधानी फर्म में।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

पान 9.
मिओसिस की किस अवस्था में क्रॉसिंग ओवर होता है ?
उत्तर:
पैकीटीन (Pachytene) में।

प्रश्न 10.
प्याज की जड़ की कोशिका में यदि गुणसूत्र संख्या 18 है तो इसके युग्मक में गुणसूत्र होंगे।
उत्तर:
9 गुणसूत्र

प्रश्न 11.
किस अवस्था में सेण्ट्रोमीअर के विभाजन से प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों कोमेटिक पृथक होकर दो संतति गुणसूत्र बनाते हैं ?
उत्तर:
पश्चावस्था या पेनाफेज (anaphase) में।

प्रश्न 12.
कोशा विभाजन की किस अवस्था में क्रोमोसेन्टर तथा न्यूक्लिओलाई पुनः दृष्टिगत हो जाते हैं ?
उत्तर:
अन्त्यावस्था या टीलोफेज में

प्रश्न 13.
किसी समसूत्री विष पदार्थ का नाम लिखिए।
उत्तर:
कोल्वीसीन (colchicinc)

प्रश्न 14.
ऑन्कोजीन्स किससे सम्बन्धित होते हैं ?
उत्तर:
कैंसर (cancer) से।

प्रश्न 15.
किस उप-प्रावस्था में गुणसूत्र लम्बे पतले व अकुण्डलित होते
उत्तर:
तनुपट्ट या लैप्टोटीन (laprotene) अवस्था में।

प्रश्न 16.
जीन विनिमय में क्या होता है ?
उत्तर:
गुणसूत्र के समजात खण्डों की बदला बदली।

प्रश्न 17.
क्या बिना सेण्ट्रोमियर वाला गुणसूत्र विभाजन कर सकता है ? उत्तर नहीं क्योंकि यह अधिक समय के लिए जीवन धम (viable) नहीं होता।

(C) लघु उत्तरीय प्रश्न- 1

प्रश्न 1.
अर्द्धसूत्री विभाजन केवल जन्द कोशिकाओं में ही क्यों होता है ?
उत्तर:
जनद कोशिकाओं से युग्मक (gamete) बनते समय गुणसूत्रों की संख्या घटकर आधी (अगुणित) रह जाती है। युग्मक केवल जनद कोशिकाओं में ही बनते हैं निषेचन (fertilization) के समय युग्मकों (gametes) के परस्पर मिलने से गुणसूत्रों की संख्या पुनः द्विगुणित (2n) हो जाती है। इससे प्रजाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित बनी रहती है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में होने वाले विभाजन का नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) आवृतबीजी पौधों में पराग मातृ कोशिका से परागकण (pollen grain) बनने में।
(ii) यूलोथ्रिक्स में लघु चलबीजाणु बनने में।
(iii) फ्यूनेरिया के संपुट (capsule) में बीजाणु मातृ कोशिका से बीजाणु (spore) बनने में।
(iv) सरसों के पौधे में नई पत्ती बनने में
उत्तर:
(i) अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis)
(ii) समसूत्री विभाजन (mitosis)
(iii) अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis)
(iv) समसूत्री विभाजन (mitosis)।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

प्रश्न 3.
कैंसर से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार कशेरुकियों में 20 ऐसे जीन्स (genes) होते हैं जो कोशिकाओं के अनियिमत विभाजन को प्रेरित करते हैं। इन्हें प्रोटोओंकोजीन्स (protooncogenes) कहते हैं। DNA के द्विगुणन के समय इनमें उत्परिवर्तन (mutation) होने से विभाजन में अनियमितताएं आ जाती हैं तथा कोशिका विभाजन अनियंत्रित हो जाता है। इस रोग को कैन्सर कहते हैं।

प्रश्न 4
सूत्री विभाजन का महत्व लिखिए।
उत्तर:
सूत्री विभाजन जीवधारी की दैहिक कोशिकाओं (somatic cell) में होती है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या समान बनी रहती है। यही विभाजन ऊतक सम्बर्धन हेतु आवश्यक है। इस विभाजन से जीवधारियों में कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है जिससे वृद्धि होती है। ऊतकों की मरम्मत ( repair) व घावों का भरना इसी के द्वारा होता है। कुछ एककोशिकीय जीवों में इसके द्वारा जनन होता है।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न- II

प्रश्न 1.
जन्तु कोशिका विभाजन तथा पादप कोशिका विभाजन में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
जन्तु कोशिका विभाजन तथा पादप कोशिका विभाजन में अन्तर (Differences between Animal and Plant cell division)

जनु कोशिका विधाजनपदूप कोशिंका विभाजन
1. इनमें पूर्वावस्था (prophase) में तारक काय दो भागों में बँट कर प्रत्येक से तारा रशिमयाँ (astral rays) निकलती हैं। इस प्रकार का विभाजन तारक प्रकार का विभाजन कहलाता है।इनमें तारक काय (centrosome) का अभाव होता है अत: इसे अतारक प्रकार का विभाजन कहते हैं।
2. इसमें संतति तारक काय दूर खिसके लगते हैं और अन्तत विपरीत ध्रुवों पर स्थापित हो जाते है। इनके मध्य तर्कु तन्तुओं (spindle fibres) का निर्माण होता है।इनमें तर्कु तन्तु कोशिका के विपरीत छोरों से जुड़ते हैं। इनमें तारक रश्मियाँ (astral rays) नहीं बनती है।
3. कोशिका द्रव्य विभाजन कोशिका कला के अन्तर्वलन द्वारा होता है जिसे खांच विधि कहते हैं।कोशिका द्रव्य विभाजन मध्य प्लेट (mid plate) द्वारा होता है। इसे पह्टिका निर्माण विधि कहते हैं।

प्रश्न 2.
जीविनिमय (Crossing over) पर संधित टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जीन विनिमय (Crossing over ) अर्द्धसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था प्रथम की जाइगोटीन (zygotene ) उपावस्था में समजात गुणसूत्र (homologous chromosome ) परस्पर जोड़े बनाते हैं। इस क्रिया को युग्मबन्धन (synapsis) कहते हैं। पैकीटीन (pachytene) उपावस्था में प्रत्येक गुणसूत्र क्रोमेटिड्स में विभाजित हो जाता है और इस अवस्था के अन्त में समजात गुणसूत्रों के क्रोमेटिड्स कुछ बिन्दुओं पर परस्पर चिपक जाते हैं। बिन्दुओं को काइज्मेटा (chiasmata) कहते हैं। इस बिन्दु पर समजात गुणसूत्रों में क्रोमेटिड्स के टुकड़ों का आदान-प्रदान होता है। इस क्रिया को जीन-विनिमय (crossing over) कहते हैं। जीन (gene) विनिमय के फलस्वरूप गुणसूत्रों की जीन संरचना बदल जाती है।

प्रश्न 3.
युग्मकी तथा युग्मनजी अर्द्धसूत्री विभाजन को समझाइए ।
उत्तर:
युग्मकी अर्द्धसूत्री विभाजन (Gametic Meiosis) – यह जन्तुओं पादपों तथा कुछ शैवालों में होता है। इसमें मुख्य काय द्विगुणित (Diploid-2n) होती है और युग्मकों के निर्माण के समय अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) होता है। उत्पनन युग्मक ( gametes) अगुणित (haploid) होते हैं। इसे समापन अर्द्धसूत्री विभाजन (terminal meiosis) भी कहते हैं। युग्मजी अर्द्धसूत्री विभाजन (Zygotic Meiosis) – यह प्रोटोजोअन्स तथा शैवालों में पाया जाता है।

इनमें जीवन चक्र (life cycle) मुख्यतः अगुणित (haploid) होता है और द्विगुणित अवस्था ( diploid phase) बहुत कम समय की होती है। जैसे पुलोजिक्स (Ulothrix) में दो युग्मकों के मिलने से युग्मनज (zygote) बनता है। युग्मनज अर्द्धसूत्री विभाजन ( meiosis) द्वारा चार अगुणित बीजाणु (haploid spores) बनाता है। इनसे अगुणित पौधे बनते हैं।

प्रश्न 4.
एक पुष्पी पौधे की मूलाग्र कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या 24 है उस पौधे की निम्नलिखित संरचनाओं में गुणसूत्रों की संख्या क्या होगी ?
(i) तना,
(ii) पत्ती,
(iii) परागकण,
(iv) भ्रूणपोष
(v) भ्रूण ।
उत्तर:
(i) तने में 24 गुणसूत्र,
(ii) पत्ती में 24 गुणसूत्र,
(iii) परागकण में 12 गुणसूत्र,
(iv) भूणपोष में 36 गुणसूत्र
(v) भ्रूण में 24 गुणसूत्र ।

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(E) निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कोशिका चक्र का विस्तृत वर्णन रेखाचित्र द्वारा कीजिए।
उत्तर:
कोशिका चक्र (Cell Cycle)
जीवधारियों के शरीर में विभाजन करने वाली कायिक कोशिकाओं (somatic cells) में वृद्धि एवं विभाजन का नियमित चक्र चलता रहता है। इस चक्र को कोशिका चक्र (cell cycle) कहते हैं। कोशिका चक्र कोशिका के पूर्ण जीवन काल को प्रदर्शित करता है। कोशिका का जीवन उसकी उत्पत्ति अर्थात कोशिका विभाजन के साथ संतति कोशिका ( daughter cell) के रूप में प्रारम्भ होता है और अगले कोशिका विभाजन के समाप्त होने के साथ समाप्त हो जाता है । संतति कोशिकाएँ जनक कोशिका की अपेक्षा छोटी होती हैं। वृद्धि की चरमसीमा पर पहुँचकर पुनः विभाजित होती है।

नियिमत रूप से विभाजन करने वाली कोशिकाओं में कोशिका चक्र की अवधि 10-30 घण्टे की होती है तथा कोशिका विभाजन (cell division ) से बनी संतति कोशिकाओं में आनुवंशिक पदार्थ (genetic material) की मात्रा बराबर तथा जनक कोशिकाओं के समान होती है। इसका अर्थ है कि कोशिका विभाजन से पूर्व इसके आनुवांशिक पदार्थ (genetic material) का अनुलिपिकरण होता है।

प्रश्न 2.
समसूत्री कोशिका विभाजन की विभिन्न अवस्थाओं का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समसूत्री कोशिका विभाजन या माइटोसिस (Mitotic cell division or mitosis)
समसूत्री विभाजन केवल यूकैरियोटिक जीवधारियों की कायिक कोशिकाओं (vegetative cells) में होता है। फलस्वरुप जनक- कोशिका (parent cell) दो समान संतति कोशिकाओं (daughter cells) में विभाजित हो जाती है। कोशिकाओं में गुणसूत्रों (chromosomes) की संख्या जनक कोशिका के बराबर होती है । इसीलिए इसे समसूत्री विभाजन कहते हैं ।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन 4
समसूत्री विभाजन को निम्नलिखित दो अवस्थाओं में बाँटा जा सकता है-
A. केन्द्रक विभाजन या कैरियोकाइनेसिस (Karyokinesis)
B. कोशिकाद्रव्य विभाजन या साइटोकाइनेसिस (Cytokinesis)

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 10 कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन

प्रश्न 3.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए-
(अ) कोशिका द्रव्य विभाजन,
(ख) बीजाणु जनक मीओसिस
(स) युग्मकी अर्धसूत्री विभाजन,
(द) जाइगोटिक मीओसिस ।
उत्तर:
द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis – II)
यह विभाजन सूत्री की भाँति ही होता है जिसमें प्रथम मिओटिक विभाजन से बनी दोनों सन्तति कोशिकाएँ बिना गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन के विभाजित होकर चार सन्तति कोशिकाएँ बिना गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन के विभाजित होकर चार सन्तति कोशिकाएँ ( daughter cells) बनाती हैं। इस विभाजन में सन्तति कोशिकाएँ अपनी जनक कोशिकाओं से गुणसूत्रों की संख्या में पूर्णतया समान होती है। अतः यह विभाजन समविभाजन (homotypic division) भी कहलाता है ।
यह विभाजन निम्नलिखित पाँच अवस्थाओं में पूर्ण होता है –
1. द्वितीय पूर्वावस्था (Prophase II)
2. द्वितीय मध्यावस्था ( Metaphase II)
3. द्वितीय पश्चावस्था (Anaphase II)
4. द्वितीय अन्त्यावस्था ( Telophase II )
5. कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis)

1. द्वितीय पूर्वावस्था (Prophase II) – इस अवस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) गुणसूत्र दो अर्द्ध- गुणसूत्रों (chromatids ) सहित भली प्रकार स्पष्ट हो जाते हैं ।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र दो अर्द्ध-गुणसूत्रों में विभक्त होकर सेण्ट्रयोल पर लगे रहते हैं ।
(iii) केन्द्रक कला तथा केन्द्रिका विलुप्त हो जाते हैं ।
(iv) सेण्ट्रोमीयर तथा गुणसूत्र बिन्दु के मध्य में तर्क तन्तु बन जाते हैं ।

2. द्वितीय मध्यावस्था (Metaphase II) – इस अवस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) इस अवस्था में गुणसूत्र मध्यतल ( equator) पर आकर विन्यस्त हो जाते हैं ।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र के दो अर्द्ध-गुणसूत्र सेण्ट्रोमियर्स के विभाजित हो जाने के कारण अलग हो जाते हैं।
(iii) स्पिण्डिल तन्तु, सेण्ट्रोमियर्स से जुड़े रहते हैं ।

3. द्वितीय पश्चावस्था ( Anaphase II )
इस अवस्था में गुणसूत्र से अलग अर्द्ध-गुणसूत्र, तर्क तन्तु के खिंचाव के कारण विपरीत ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं । यही अर्द्ध-सूत्र आगे चलकर सन्तति कोशाओं में गुणसूत्र का निर्माण करते हैं ।

4. द्वितीय अन्त्यावस्था (Telohase II) ।
(i) अर्द्ध-गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों पर पहुँचकर पुनः फैलकर क्रोमेटिन जाल बनाते हैं ।
(ii) क्रोमेटिन जाल के चारों ओर केन्द्रक कला बन जाती है।
(iii) केन्द्रिका पुनः बन जाती है। इस प्रकार केन्द्रक का निर्माण पूर्ण हो जाता है ।
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5. कोशिकाद्रव्य (Cytokinesis)
केन्द्रकों के बन जाने के बाद, प्रत्येक कोशिका का कोशिकाद्रव्य दो समान भागों में विभाजित हो जाता है जिससे प्रकार द्वितीय मिओटिक विभाजन के पश्चात् चार अगुणित (haploid) सन्तति कोशिकाएँ बन जाती हैं । सन्तति कोशिकाएँ बन जाती हैं। इस

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अर्द्धसूत्री विभाजन या न्यूनकारी विभाजन (Meiosis or Reduction Division)
अर्द्धसूत्री विभाजन (meiosis) के फलस्वरुप गुणसूत्रों की संख्या मूल संख्या से आधी रह जाती है। इसीलिए इसे न्यूनकारी विभाजन (reduction division ) भी कहते हैं।
मूल रूप से अर्द्धसूत्री विभाजन की क्रिया सभी जीवधारियों में एक ही प्रकार की होती है किन्तु जीवों के जीवन चक्र की विभिन्न अवस्थाओं में होने के कारण कुछ जीव-वैज्ञानिकों ने तीन प्रकार के अर्द्ध-सूत्री विभाजन ( meiosis) का वर्णन किया है।
1. बीजाणु जनक अर्द्धसूत्री विभाजन (Sporogenetic meiosis) – बीजाणुओं (spores) के निर्माण के समय होने वाले अर्द्धसूत्री विभाजन ( meiosis) को बीजाणु जनक मीओसिस कहते हैं। इस प्रकार का विभाजन केवल पादपों में पाया जाता है।
2. युग्मकी अर्द्धसूत्री विभाजन (Gametic Meiosis) – अधिकांश जन्तुओं एवं पादपों में युग्मन निर्माण के समय (शुक्रजनन एवं अण्ड जनन) अर्द्धसूत्री विभाजन होता है। इसे युग्मकी अर्द्धसूत्री विभाजन (gametic meiosis) कहते हैं।
3. जाइगोटिक अर्द्धसूत्री विभाजन (Zygotic meiosis) – कुछ निम्न पादपों में निषेचन के तुरन्त बाद ही अर्द्धसूत्री विभाजन प्रारम्भ हो जाता है। इसे जाइगोटिक अर्द्धसूत्री विभाजन कहते हैं।

अर्द्धसूत्री विभाजन की क्रिया (Process of Meiosis)
अर्द्धसूत्री विभाजन में दो क्रमिक कोशिका विभाजन होते हैं किन्तु गुणसूत्रों का विभाजन केवल एक बार ही होता है। अतः समसूत्री विभाजन की मुख्य विशेषता दो क्रमिक विभाजन तथा इनसे बनने वाली चार संतति कोशिकाएँ (daughter cells) हैं। प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है। इसे प्रथम, न्यूनकारी विभाजन या मीओसिस – प्रथम (Ist reduction division or meiosis-I) कहते हैं। दूसरा अर्धसूत्री विभाजन समविभाजन (homotypic) या मीओसिस – II कहलाता है। यह सूत्री विभाजन ( mitosis) के समान ही होता है। जिसमें संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या परिवर्तित नहीं होती है। उपरोक्त दोनों विभाजनों के फलस्वरूप चार संतति कोशिकाएँ बनती हैं जिनमें से प्रत्येक में गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है।

प्रश्न 4.
समसूत्री विभाजन का महत्व लिखिए।
उत्तर:
द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis-II)
यह विभाजन सूत्री की भाँति ही होता है जिसमें प्रथम मिओटिक विभाजन से बनी दोनों सन्तति कोशिकाएँ बिना गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन के विभाजित होकर चार सन्तति कोशिकाएँ बिना गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन के विभाजित होकर चार सन्तति कोशिकाएँ ( daughter cells) बनाती हैं। इस विभाजन में सन्तति कोशिकाएँ अपनी जनक कोशिकाओं से गुणसूत्रों की संख्या में पूर्णतया समान होती है। अतः यह विभाजन समविभाजन (homotypic division ) भी कहलाता है।
यह विभाजन निम्नलिखित पाँच अवस्थाओं में पूर्ण होता है –
1. द्वितीय पूर्वावस्था (Prophase II),
2. द्वितीय मध्यावस्था ( Metaphase II),
3. द्वितीय पश्चावस्था ( Anaphase II ),
4. द्वितीय अन्त्यावस्था ( Telophase II),
5. कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis)

प्रश्न 5.
प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन तथा द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन की विभिन्न अवस्थाओं का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis I)
प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन को पूर्वावस्था प्रथम (Prophase I) मध्यावस्था प्रथम ( Metaphase I), पश्चावस्था प्रथम (Anaphase I) तथा अन्त्यावस्था प्रथम (Telophase I) द्वारा निरूपित करते हैं।
1. पूर्वावस्था प्रथम (Prophase – 1 ) – प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था अपेक्षाकृत जटिल एवं लम्बी होती है। इसे लेप्टोटीन, जाइगोटीन, पैकीटीन, डिप्लोटीन तथा डाइकाइनेसिस नामक पाँच उप- अवस्थाओं में बाँटा गया है।
(a) तनुपट्ट अवस्था (Leptotene or Leptonema ) – लेप्टोटीन उपावस्था के साथ अर्द्धसूत्री विभाजन प्रारम्भ होता है। इस उपावस्था में निम्नलिखित घटनाएँ होती हैं-
(i) केन्द्रक में क्रोमेटिन पदार्थ संघनित होकर पतले, लम्बे एवं अकुण्डलित तन्तुओं के समान गुणसूत्रों में बदल जाता है।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र में दो अर्द्धगुणसूत्र बन जाते हैं किन्तु इनके क्रोमेटिड (chromatids ) एक-दूसरे के चारों ओर इतने घनिष्ठ रूप से लिपटे रहते हैं कि इनको अलग से पहचानना सम्भव नहीं है।

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(b) युग्मपट्ट अवस्था (Zygotene or Zygonema) – इस उपावस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) समजात गुणसूत्र एक-दूसरे केपास आकर जोड़े बनाते हैं, इसे युगली (bivalent ) कहते हैं ।
(ii) प्रत्येक युगल के सजातीय गुणसूत्र एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और धीरे-धीरे एक-दूसरे के समीप आकर सजातीय गुणसूत्र (homologous chromosome) आपस में लिपट जाते हैं, इसे सिनेप्स (synapse) कहते हैं।
(iii) प्रत्येक बाइवेलेन्ट (bivalent) के दो गुणसूत्र एक ही द्विगुण गुणसूत्र के दो क्रोमेटिड्स (chromatids ) जैसे लगते हैं और पूर्ण केन्द्रक में गुणसूत्रों की संख्या वास्तविक संख्या की आधी लगती है ।
(iv) तारक केन्द्र विभाजित होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गमन करने लगते हैं तथा केन्द्रिक के आकार के वृद्धि होती है।
(v) गुणसूत्र छोटे व मोटे दिखाई देते हैं।

(c) स्थूल पट्ट अवस्था (Pachytene or Pachynema ) – इस उपावस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) सजातीय गुणसूत्रों के युग्मन या सिनेप्सिस के पश्चात् प्रत्येक बाइवेलेन्ट के युग्मित गुणसूत्र आंकुचन के कारण ओर अधिक छोटे व मोटे हो जाते हैं।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों क्रोमेटिड्स (chromatids ) अधिक स्पष्ट हो जाते हैं जिससे प्रत्येक बाइवेलेंट चार स्पष्ट अर्द्धसूत्रों या क्रोमेटिड्स का बना प्रतीत होता है। अब इसे ट्रेट्रावेलेंट या टेट्राड (tatrad) कहते हैं।
(iii) सजातीय गुणसूत्रों में एक तनाव उत्पन्न होता है इससे दुर्बल क्रोमेटिड्स अनेक स्थानों पर टूट जाते हैं और अनुरुपी क्रोमेटिड्स में विच्छेदित खण्डों का विनिमय या पारस्परिक अदला-बदली होती है।
(iv) विनिमय की क्रिया को जीन विनिमय या क्रॉसिंग ओवर (crossing over) तथा विसंयोजन की क्रिया को पुनर्संयोजन (recombination) कहते

(d) द्विपट्ट अवस्था (Diplotene or Diplonema) – इस उपावस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) क्रोमेटिड्स के टूटने पर गुणसूत्रों के बीच आकर्षण बल समाप्त हो जाता है और इनमें प्रतिकर्षण आरम्भ हो जाता है।
(ii) सजातीय गुणसूत्र अकुण्डलित होकर पृथक् होने लगते हैं किन्तु विनिमय (crossing over) वाले स्थानों पर यह एक-दूसरे से चिपके रह जाते हैं। इन स्थानों को क्याज्पेटा (chiasmata) कहते हैं ।
(iii) प्रत्येक बाइवेलेन्ट के और अधिक छोटा होने पर क्याज्मेटा गुणसूत्रों के सिरों की ओर फिसलने लगते हैं। क्याज्मेटा इस प्रकार फिसलने को उपान्ती भवन या टर्मीनेलाइजेशन (terminalization) कहते हैं।
(iv) इस उपावस्था में केन्द्रक कला तथा केन्द्रिक (nucleolus) दोनों ही विलुप्त हो जाते हैं।
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(e) पारगतिक्रम या डाइकाइनेसिस (Diakinesis) – इस उपावस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) वाइवेन्ट सिकुड़कर और अधिक मोटे व छोटे हो जाते हैं और गुणसूत्र गहरी रंगीन कायों (bodies) के रुप में दिखाई देते हैं तथा केन्द्रक की परिधि पर पहुँच जाते हैं।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र के दोनों अर्द्धगुणसूत्र इतने निकट होते हैं कि उनको अलग-अलग नहीं पहचाना जा सकता।
(iii) इस उपावस्था के अन्त में तारक केन्द्र एवं तारक गोलार्द्ध (centriole and centrosphere) विभाजित होकर विमुख ध्रुवों की ओर चले जाते हैं।
(iv) केन्द्रक कला ( nuclear membrane) पूर्ण रुप से विलुप्त हो जाती है तथा गुणसूत्र कोशिकाद्रव्य में मुक्त हो जाते हैं।
(v) इस उपावस्था में केन्द्रीय तर्कु (central spindle) का निर्माण प्रारम्भ हो जाता है।

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2. मध्यावस्था प्रथम (Metaphase I) – इस अवस्था में-
(i) केन्द्रक कला तथा केन्द्रिका पूर्णतया विलुप्त हो जाते हैं ।
(ii) स्पिण्डिल तन्तु पूर्ण तथा विकसित हो जाते हैं तथा दोनों ध्रुवों तथा गुणसूत्र बिन्दुओं पर जुड़ जाते हैं।
(iii) गुणसूत्र अपने अर्द्ध गणसूत्र सहित तर्क के मध्य रेखा ( equator) पर व्यवस्थित ( arranged) हो जाते हैं ।
(iv) गुणसूत्र अधिक स्पष्ट एवं बड़े दिखाई देते हैं।

द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis – II)
यह विभाजन सूत्री की भाँति ही होता है जिसमें प्रथम मिओटिक विभाजन से बनी दोनों सन्तति कोशिकाएँ बिना गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन के विभाजित होकर चार सन्तति कोशिकाएँ बिना गुणसूत्र की संख्या में परिवर्तन के विभाजित होकर चार सन्तति कोशिकाएँ ( daughter cells) बनाती हैं। इस विभाजन में सन्तति कोशिकाएँ अपनी जनक कोशिकाओं से गुणसूत्रों की संख्या में पूर्णतया समान होती है। अतः यह विभाजन समविभाजन (homotypic division) भी कहलाता है ।
यह विभाजन निम्नलिखित पाँच अवस्थाओं में पूर्ण होता है –
1. द्वितीय पूर्वावस्था (Prophase II)
2. द्वितीय मध्यावस्था ( Metaphase II)
3. द्वितीय पश्चावस्था (Anaphase II)
4. द्वितीय अन्त्यावस्था ( Telophase II)
5. कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis)

1. द्वितीय पूर्वावस्था (Prophase II) – इस अवस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) गुणसूत्र दो अर्द्ध- गुणसूत्रों (chromatids) सहित भली प्रकार स्पष्ट हो जाते हैं ।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र दो अर्द्ध-गुणसूत्रों में विभक्त होकर सेण्ट्रयोल पर लगे रहते हैं ।
(iii) केन्द्रक कला तथा केन्द्रिका विलुप्त हो जाते हैं ।
(iv) सेण्ट्रोमीयर तथा गुणसूत्र बिन्दु के मध्य में तर्क तन्तु बन जाते हैं ।

2. द्वितीय मध्यावस्था (Metaphase II) – इस अवस्था में निम्नलिखित घटनाएँ दिखाई देती हैं-
(i) इस अवस्था में गुणसूत्र मध्यतल ( equator) पर आकर विन्यस्त हो जाते हैं ।
(ii) प्रत्येक गुणसूत्र के दो अर्द्ध-गुणसूत्र सेण्ट्रोमियर्स के विभाजित हो जाने के कारण अलग हो जाते हैं।
(iii) स्पिण्डिल तन्तु, सेण्ट्रोमियर्स से जुड़े रहते हैं ।

3. द्वितीय पश्चावस्था ( Anaphase II) इस अवस्था में गुणसूत्र से अलग अर्द्ध-गुणसूत्र, तर्क तन्तु के खिंचाव के कारण विपरीत ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं । यही अर्द्ध-सूत्र आगे चलकर सन्तति कोशाओं में गुणसूत्र का निर्माण करते हैं ।

4. द्वितीय अन्त्यावस्था (Telohase II) ।
(i) अर्द्ध-गुणसूत्र विपरीत ध्रुवों पर पहुँचकर पुनः फैलकर क्रोमेटिन जाल बनाते हैं ।
(ii) क्रोमेटिन जाल के चारों ओर केन्द्रक कला बन जाती है।
(iii) केन्द्रिका पुनः बन जाती है। इस प्रकार केन्द्रक का निर्माण पूर्ण हो जाता है ।
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5. कोशिकाद्रव्य (Cytokinesis)
केन्द्रकों के बन जाने के बाद, प्रत्येक कोशिका का कोशिकाद्रव्य दो समान भागों में विभाजित हो जाता है जिससे प्रकार द्वितीय मिओटिक विभाजन के पश्चात् चार अगुणित (haploid) सन्तति कोशिकाएँ बन जाती हैं । सन्तति कोशिकाएँ बन जाती हैं।

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प्रश्न 6.
समसूत्री एवं अर्द्धसूत्री विभाजन में अन्तर लिखिए।
उत्तर:

क्रमअर्ब्छसूत्री विभाजन (Melosis)समसूली विभाजन (Mitosis)
1. यह जनन कोशिकाओं में युग्मकों (gametes) के निर्माण के समय होता है।1. शरीर की सभी कोरिकाओं (vegetative cells) में वृद्धि विकास के लिए होता है।
2. यह दो बार में पूर्ण होता है। मीओसिस I न्यूनकारी होता है तथा मीओसिस II समविभाजन होता है। पूर्वावस्था-I (prophase-I)2. पूर्ण विभाजन क्रिया एक बार में ही पूर्ण हो जाती है।
3. यह लम्बी एवं जटिल प्रक्रिया है जिसे पाँच उप-अवस्थाओं लेप्टोटीन (Leptotene), जाइगोटीन (Zygotene), पैकीटीन (Pachytene) डिप्लोटीन (Diplotene) तथा डाइकानेसिस (Diakinesis) में बाँटा जाता है।3. प्रोफेज्ञ (Prophase) अपेक्षाफृत छेटी अवस्था है। इसे उप-अवस्थाओं में नहीं बॉंटा जाता है।
4. प्रोफेज के प्रारम्भ में प्रत्येक गुणसूत्र एक एकल रचना के रूप में होता है।4. गुणसूत्र दो लम्बवत् भागों में बँट जाते हैं, जिन्हें कोमेटिह्स कहते हैं।
5. समजात गुणसूत्र युग्मन (synapase) करके डायड (dyad) बनाते हैं।5. गुणसूत्रों में युग्म नहीं बनते हैं।
6. सजातीय गुणसूत्र एक-दूसरे से लिपटे रहते हैं।6. अर्द्ध-गुणसूत्र (chromatids) में कुण्डलित होते हैं।
7. पैकीटीन उपावस्था में क्रॉसिग ओवर (crossing over) तथा कियाज्मेटा का निर्माण होता है जिससे सजातीय गुणसूत्रों के क्रोमेटिड में आनुवंशिक पदार्थ का विनिमय (exchange) होता है।7. इसमें क्रतिंग ओवर तथा किभाज्भेटा (chiasmata) का निर्माण नहीं होता है।
8. इसमें गुणसूत्र टेट्रेड (tetrade) के रूप में होते हैं जिनमें चार अर्द्ध-गुणसूत्र होते हैं।8. इसमें गुणसूत्र ड्वायड (dyad) के कूप में होते हैं त्रिनें दो अर्द्ध-सूत्र होते है।
9. विषुवत् पर टेरेटे का विन्यास इस प्रकार होता है कि उनके दोनों सेन्ट्रोमियर्स विषुवत से धुवों की ओर तथा भुजाएँ विषुवत की दिशा में होती हैं।9. ड्ञायड़ो (dyad) का विन्यास इस प्रकार होता है कि सेच्ट्रोमीयर विषुवत् (equator) की ओर तथा भुजाएँ ध्रुवों की ओर होती है।
10. सेन्ट्रोमीयर्स का विभाजन नहीं होता किन्तु डायड में से सजातीय गुणसूत्र अलग रहते हैं।10. मेटाकेज में सेन्ट्रोमीयर्स के युगर्लो (bivalent) का विभाजन होता है।
11. इस अवस्था में गुणसूत्र युगलों (bivalent) में दो अर्द्ध-गुणसूत्र (chromatids) होते हैं।11.  इसमें एकल गुणसूू होते हैं।
12. गुणसूत्र अत्यधिक छोटे एवं मोटे होते हैं।12. गुणसूत्र अपेक्षाकृत्त बड़े वषा कम मोटे होते हैं।
13. अर्द्धसूत्री विभाजन में प्रथम अन्त्यावस्था (telophase) सार्वत्रिक रूप से कोशिकाओं में नहीं पायी जाती है। विभाजनशील केन्द्रक सीधे ही पश्चावस्था से पूर्वावस्था द्वितीय में आ जाता है। महरंव (Importance)13. अन्त्यावस्था (telophase) सार्वत्रिक रूप से कोशिकाओं में पाथी जाती हैं। इसके बाद कोशिकात्रव्य का विभाजन होता है।
14. अर्द्धसूत्री विभाजन के अन्त में चार कोशिकाएँ बनती हैं।14. इसाके अन्न में दो कोशिकाएँ बनती हैं।
15. संतति कोशिकाएँ (daughter cells) अगुणित होती हैं अर्थात् इनमें गुणसूत्रों की संख्या जनक की आधी होती हैं।15. संतति कोशिकाएँ (daughter cells) द्विगुणित होती हैं अर्थात् गुणसूत्रों की संख्या जनक कोशिक के बराबर होती है।
16. संतति कोशिकाएँ आनुवंशिक रूप से जनन कोशिका में भिन्न होती है।16. संतति कोशिकाएँ जनक कोशिका से आनुवंशिक रूप से समान होती हैं

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4. असूत्री विभाजन (Amitosis) – इसे सीधा विभाजन ( direct division) भी कहते हैं। यह कोशिका विभाजन की सरलतम विधि है। इस प्रकार का विभाजन श्रेणी के सरल रचना वाले एककोशिकीय (unicellular) जीवों, जैसे-क्लेमाइडोमोनास, यीस्ट, अमीबा आदि में होता है। सूत्री विभाजन (amitosis) केन्द्रक के दीर्घीकरण से प्रारम्भ होता है। लम्बे हुए केन्द्रक में एक संकीर्णन बनने के कारण इसकी आकृति डम्बल जैसी हो जाती है। संकीर्णन के और अधिक गहरा होने से केन्द्रक दो भागों में बँट जाता है। इसके साथ ही कोशिका द्रव्य भी दो भागों में बँटा जाता है और दो संतति कोशिकाएं बन जाती हैं।
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प्रश्न 7.
निम्न पर टिप्पणी लिखिए-
असूत्री विभाजन ।
उत्तर:
असूत्री विभाजन (Amitosis) -इसे सीधा विभाजन (direct division) भी कहते हैं। यह कोशिका विभाजन की सरलतम विधि है। इस प्रकार का विभाजन श्रेणी के सरल रचना वाले एककोशिकीय (unicellular) जीवों, जैसे —क्लेमाइडोमोनास, यीस्ट, अमीबा आदि में होता है। सूत्री विभाजन (amitosis) केन्द्रक के दीर्घीकरण से प्रारम्भ होता है। लम्बे हुए केन्द्रक में एक संकीर्णन बनने के कारण इसकी आकृति डम्बल जैसी हो जाती है। संकीर्णन के और अधिक गहरा होने से केन्द्रक दो भागों में बँट जाता है। इसके साथ ही कोशिका द्रव्य भी दो भागों में बँटा जाता है और दो संतति कोशिकाएँ बन जाती हैं।
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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. क्लोन शब्द का अर्थ है-
(अ) संतति जनक के एकदम समान हो
(ब) आनुवंशिक रूप से एकसमान हो
(स) आकारिकीय दृष्टि से एकसमान हो
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

2. प्रोटिस्टा तथा मोनेरा में जनन का प्रकार है-
(अ) कलिका
(ब) कोशिका विभाजन
(स) द्विखंडन
(द) कलिकाएँ
उत्तर:
(ब) कोशिका विभाजन

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

3. अमीबा तथा पैरामीशियम में जनन विधि है-
(अ) द्विखंडन
(ब) कोशिका विभाजन
(स) जैम्यूल
(द) कोनिडिया
उत्तर:
(अ) द्विखंडन

4. निम्न में से अलैंगिक जननीय संरचनाएँ हैं-
(अ) कोनिडिया
(ब) कलिका
(स) जैम्यूल
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

5. बंगाल का आतंक ( Terror of Bengal) किसे कहते हैं ?
(अ) स्पंज
(ब) पैरामीशियम
(स) वाटर हायसिंथ
(द) ब्रायोफिल्लम
उत्तर:
(स) वाटर हायसिंथ

6. कायिक प्रवर्धन में पादपकों (Plantlcts) का उत्पत्ति स्थल होता है-
(अ) पर्वसंधि
(ब) पर्व
(स) कक्ष
(द) शीर्ष
उत्तर:
(अ) पर्वसंधि

7. वह पर्ण जिसके फलककोर से अपस्थानिक कलिकाएँ उत्पन्न होती हैं, वह है-
(अ) डहलिया
(ब) बोगेनविलिया
(स) ब्रायोफिल्लम
(द) ब्रायोफाइटा
उत्तर:
(स) ब्रायोफिल्लम

8. वह पादप जो जीवन अवधि में केवल एक बार पुष्प उत्पन्न करता है-
(अ) नारियल
(ब) वाटर हायसिंथ
(स) कटहल
(द) स्ट्रोबिलैन्थस कुन्थिआना
उत्तर:
(द) स्ट्रोबिलैन्थस कुन्थिआना

9. प्राइमेटों में जनन के दौरान चक्र होता है-
(अ) मद चक्र
(ब) स्राव चक्र
(स) ऋतुस्राव चक्र
(द) मौसमी चक्र
उत्तर:
(स) ऋतुस्राव चक्र

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10. निम्न में से एकलिंगी प्राणी है-
(अ) केंचुआ
(ब) जोंक
(स) टेपवर्म
(द) तिलचट्टा
उत्तर:
(द) तिलचट्टा

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
जीवन अवधि से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
प्रत्येक जीव के जन्म से उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक का काल, उस जीव की जीवन अवधि होती है।

प्रश्न 2.
नारियल का वृक्ष उभयलिंगाश्रयी होता है जबकि खजूर का वृक्ष एकलिंगाश्रयी होता है। उन्हें ऐसा क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
नारियल के वृक्ष में नर व मादा पुष्प एक ही पौधे पर पाये जाते हैं, इसलिये उन्हें उभयलिंगाश्रयी कहते हैं परन्तु खजूर के वृक्ष में नर पुष्प व मादा पुष्प अलग-अलग पौधों पर पाये जाने से, उन्हें एकलिंगाश्रयी कहा जाता है।

प्रश्न 3.
प्रोटिस्टा तथा मोनेरा में किस प्रकार से जनन होता है?
उत्तर:
इनमें अलैंगिक जनन होता है। इन जीवों में जनक कोशिका दो भागों में विभक्त होकर नए जीवों को जन्म देती है। अतः इनमें कोशिका विभाजन एक प्रकार से जनन की क्रियाविधि है।

प्रश्न 4.
दो जनन लक्षण लिखिए जो सरीसृपों को उभयचरों की अपेक्षा अधिक सफल बनाते हैं।
उत्तर;
सरीसृप उभयचरों की अपेक्षा अधिक सफल है, क्योंकि-

  • सरीसृप भूमि पर अण्डे देते हैं।
  • सरीसृपों के अण्डों पर कवच होता है जो अण्डों को सूर्य के .. प्रकाश से सूखने से बचाता है।

प्रश्न 5.
कायिक प्रवर्धन करने वाले कुछ पौधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कायिक प्रवर्धन भी एक प्रकार का अलैंगिक जनन है। अनेक पौधे कायिक प्रवर्धन से विकसित होते हैं; जैसे-आलू, अदरक, अगैव, जलकुंभी ( वाटर हायसिंथ), प्याज, शकरकन्द, गन्ना, केला, डहलिया आदि ।

प्रश्न 6.
ऐसे दो पौधों को बताइए जो अपने जीवन काल में केवल एक बार पुष्प उत्पन्न करते हैं। इनमें क्या विशेषता देखी जाती है?
उत्तर:
कुछ पौधे अपने जीवन काल में केवल एक बार ही पुष्प उत्पन्न करते हैं। जैसे बांस में प्रायः 50-100 वर्षों के बाद तथा स्ट्रोबिलैन्थस कुन्थिआना (Strobilanthus Kunthiana ) में 12 वर्षों में एक बार पुष्प उत्पन्न होते हैं। इनमें अधिक संख्या में पुष्प व फल बनकर नष्ट हो जाते हैं।

प्रश्न 7.
वृद्धावस्था का क्या मापदंड है?
उत्तर:
प्रजनन आयु की समाप्ति को जीर्णता या वृद्धावस्था के मापदंड के रूप में माना जाता है।

प्रश्न 8.
उभयचरों तथा सरीसृपों में संयुग्मन (Syngamy) कहाँ होती है?
उत्तर:
उभयचरों में बाह्य निषेचन होता है, अतः संयुग्मन की क्रिया जल में होगी, जबकि सरीसृपों में निषेचन आन्तरिक होता है अतः संयुग्मन शरीर के अन्दर होगी।

प्रश्न 9.
एक मॉस ( Moss) का पौधा नर युग्मकों (antherogoids) का निर्माण बड़ी संख्या में करता है परन्तु उसकी तुलना में अण्ड कोशिकाओं की संख्या बहुत कम होती है। क्यों ?
उत्तर:
मॉस में नर युग्मक चल होते हैं जो अचल मादा युग्मक के साथ निषेचित होते हैं। इस प्रक्रिया में नर युग्मक के स्थानान्तरण में अनेक नर युग्मक नष्ट हो जाते हैं, इस कारण इनकी संख्या अधिक होती है ।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

प्रश्न 10.
समयुग्मकी लक्षण से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
लैंगिक जनन क्रिया में नर व मादा युग्मक बनते हैं। जब किसी जीव में जैसे कुछ शैवालों में दोनों युग्मक देखने में एक-दूसरे के समान दिखाई देते हैं, तब ऐसे युग्मकों को समयुग्मकी ( Isogametes or Homogametes) कहते हैं।

प्रश्न 11.
अधिकतर लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आकारिकी दृष्टि से किस प्रकार के युग्मक पाये जाते हैं?
उत्तर:
अधिकांश लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आकारिकी दृष्टि से स्पष्ट रूप से दो विभिन्न आकार के युग्मक पाये जाते हैं, इन्हें विषमयुग्मक (Heterogametes) कहते हैं। ऐसे जीवों में नर युग्मकों को पुमणु या शुक्राणु (Antherozoid or Sperms) कहते हैं; जबकि मादा युग्मकों को अंड या डिंब (Egg or Ovum) कहते हैं।

प्रश्न 12.
किन्हीं दो उभयलिंगाश्रयी (Monoecious) पादपों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कुकरबिट एवं नारियल वृक्ष उभयलिंगाश्रयी के उदाहरण हैं।

प्रश्न 13.
उभयलिंगी या द्विलिंगी प्राणी से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित बताइये ।
उत्तर:
जब किसी प्राणी में नर तथा मादा दोनों जनन अंग एक ही प्राणी में पाये जाते हैं तो उसे उभयलिंगी या द्विलिंगी (Hermaphrodite ) कहते हैं। उदाहरण – स्पंज (Sponge), टेपवर्म (Tapeworm), जोंक (Leech) व केंचुआ (Earthworm) ।

प्रश्न 14.
मानव, चूहा, आलू व प्याज में युग्मकों में पायी जाने वाली गुणसूत्रों की संख्या को बताइये ।
उत्तर:
युग्मकों (Gametes ) से तात्पर्य है कि वे अगुणित (n) होते हैं, अतः इनमें गुणसूत्रों की संख्या निम्न प्रकार से होती है-

जीव का नामयुग्मकों में अगुणित (n) गुणसूत्रों की संख्या
मानव23
चूहा21
आलू24
प्याज16

प्रश्न 15.
युग्मकों के बनने में निहित कोशिका विभाजन विभिन्न जीवों में एक ही समान प्रकार का नहीं होता। ऐसा कहना किस प्रकार न्यायोचित है? बताइए।
उत्तर:
युग्मकों के बनने में निहित कोशिका विभाजन विभिन्न जीवों में विभिन्न प्रकार का होता है। अगुणित जीवों (n) में युग्मकों के बनने में समसूत्री विभाजन होता है क्योंकि पैतृक जीव अगुणित होते हैं और बनने वाले युग्मक भी अगुणित होते हैं। इन जीवों में युग्मनज में अर्द्धसूत्री विभाजन होता है। द्विगुणित (2n ) जीवों में युग्मकों के निर्माण में अर्द्धसूत्री कोशिका विभाजन होता है जिसमें इसके युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या पैतृक जीव के गुणसूत्रों से आधी रह जाती है व निषेचन पश्चात् फिर से गुणसूत्रों की संख्या द्विगुणित हो जाती है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) को समझाइये।
उत्तर:
युग्मनज (Zygote) से भ्रूण (Embryo) के विकास की प्रक्रिया को भ्रूणोद्भव कहते हैं। इस प्रक्रिया में युग्मनज में समसूत्रण (Mitosis) के द्वारा कोशिका विभाजन होता है तथा उसी के साथ कोशिका विभेदीकरण (Cell Differentiation) भी होता है। भ्रूण के विकास के दौरान कोशिका विभाजन के फलस्वरूप कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है, उसी के साथ-साथ कोशिका विभेदीकरण होने से कोशिकाओं के समूह एक निश्चित रूपांतरणों से गुजरकर विशेषीकृत ऊतकों एवं अंगों की रचना करते हैं। इन प्रक्रियाओं के फलस्वरूप जीव का निर्माण होता है।

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प्रश्न 2.
अंडप्रजक (Oviparous ) तथा सजीवप्रजक (Viviparous ) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर:
प्राणियों को दो श्रेणी अंडप्रजक तथा सजीवप्रजक में विभक्त किया गया है। यह विभक्तीकरण इस आधार पर किया गया है कि युग्मनज का विकास मादा जनक के शरीर के अन्दर हुआ है या बाहर। अंडप्रजक प्राणियों जैसे कि सरीसृप वर्ग ( Reptiles ) तथा पक्षी आदि के द्वारा निषेचित अंडे पर्यावरण के सुरक्षित स्थानों पर दिये जाते हैं तथा ये कठोर कैल्सियमयुक्त कवच से ढके रहते हैं।

ये अण्डे एक निश्चित निवेशन अवधि (Incubation Period) के पश्चात् स्फुटन द्वारा नये शिशु को जन्म देते हैं। सजीवप्रजक प्राणियों में (अधिकांश स्तनधारी जिसमें मानव भी शामिल है) युग्मनज का विकास मादा जीव के भीतर होकर शिशु का विकास करता है। इस शिशु का निश्चित अवधि तथा विकास के चरणों के पूरा होने के पश्चात् मादा जीव के शरीर से प्रसव के द्वारा बाहर आता है। इस विधि में भ्रूण का सही विकास व संरक्षण होता है, इसी कारण सजीवप्रजक जीवों की उत्तरजीविता के अच्छे अवसर होते हैं।

प्रश्न 3.
पुष्पीय पादपों में निषेचन क्रिया के पश्चात् क्या प्रभाव होता है तथा युग्मनज कहाँ बनता है?
उत्तर:
पुष्पीय पादपों में युग्मनज का निर्माण बीजाण्ड के अंदर होता है। निषेचन के बाद पुष्प के बाह्य दल, पंखुड़ी तथा पुंकेसर मुरझा कर झड़ जाते हैं। युग्मनज से भ्रूण बनता है तथा बीजाण्ड बीज में विकसित हो जाता है। अंडाशय (Ovary) फल में परिवर्तित हो जाता है। अंडाशय की भित्ति से फलभित्ति (Pericarp) बनती है, यह फल को सुरक्षा प्रदान करती है। चित्र में मटर की फली में बीज हैं जो पूर्व में बीजाण्ड थे व बाद में विकसित होकर बीज बन गये हैं। सरसों व टमाटर के अनुप्रस्थ काट में भी यही रचना दिखाई दे रही हैं। बीज फलभित्ति के अन्दर रहते हैं ।

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प्रश्न 4.
समयुग्मक तथा विषमयुग्मक को सउदाहरण व चित्रों की सहायता से समझाइये।
उत्तर:
लैंगिक जनन की प्रक्रिया में युग्मकजनन होता है जिसमें दो प्रकार के नर व मादा युग्मकों का निर्माण होता है। कुछ शैवालों में दोनों प्रकार के युग्मक आकारिकीय दृष्टि से एकसमान दिखाई देते हैं। एकसमान होने से इन्हें नर व मादा में विभक्त नहीं किया जा सकता है, ऐसे युग्मकों को समयुग्मक (Isogametes) कहते हैं। उदाहरण- क्लैडोफोरा शैवाल।

अधिकांश जीवों में आकारिकीय दृष्टि से विभिन्न आकृति के नर व मादा युग्मक बनते हैं। नर युग्मक छोटे, चल (Motile) होते हैं तथा मादा बड़े व अचल (Non-motile) होते हैं। इनमें नर युग्मकों को पुमणु (Antherozoid) या शुक्राणु (Sperms) कहते हैं तथा मादा युग्मकों को अंड (Egg) या डिंब (Ovum) कहते हैं। विभिन्न आकृति के युग्मकों को विषमयुग्मक (Heterogametes) कहते हैं। उदाहरण- फ्यूकस (शैवाल)।

प्रश्न 5.
जीवों में पायी जाने वाली लैंगिकता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
लैंगिकता को स्पष्ट करने हेतु यहाँ पादपों के उदाहरण दिये जा रहे हैं। पादप में नर तथा मादा दोनों जनन संरचनाएँ पाई जाती हैं जब एक ही पौधे में दोनों नर तथा मादा जनन संरचनाएँ हों तो उसे द्विलिंगी (Bisexual) (चित्र अ व ब ) अथवा जब जनन संरचनाएँ भिन्न पादपों पर हों तो एकलिंगी (Unisexual) (चित्र-स) कहते हैं अनेक कवकों में द्विलिंगी अवस्था को दर्शाने के लिए उभयलिंगाश्रयी या समथैलसी (Monoccious or Homothallic) शब्द का प्रयोग करते हैं।

एकलिंगता को दर्शाने के लिये एकलिंगाश्रयी या विषमथैलसी (Dioecious or Heterothallic) शब्द का उपयोग करते हैं। प्रायः पुष्पों में दोनों लिंग (पुंकेसर व स्त्रीकेसर) होते हैं। कुछ पुष्पीय पादपों में अकेला पादप उभयलिंगाश्रयी (नर तथा मादा दोनों लिंगी) हो सकता है और इसमें पैदा होने वाले पुष्प एकलिंगी तथा द्विलिंगी दोनों हो सकते हैं। कुकरबिटा व नारियल वृक्ष उभयलिंगाश्रयी पादपों के उदाहरण हैं। पपीता व खजूर एकलिंगाश्रयी के उदाहरण हैं।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन 2प्राणियों में एकलिंगी व द्विलिंगी अवस्था होती है। केंचुए (Earthworm), स्पंज, टेपवर्म तथा जोंक (Leech) द्विलिंगी प्राणियों के उदाहरण हैं; इनमें दोनों प्रकार के जनन अंग एक ही प्राणी में मिलते हैं। तिलचट्टा (Cockroach) एकलिंगी प्राणी है।
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प्रश्न 6.
निषेचन के प्रकार पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
निषेचन से तात्पर्य है कि नर व मादा का संलयन। यह संलयन जीव के बाहर तथा उसके अन्दर हो सकता है। निषेचन दो प्रकार का होता है – बाह्य निषेचन (External Fertilization) तथा आंतरिक निषेचन (Internal Fertilization) अधिकांश जलीय जीवों (शैवाल तथा मछलियाँ) व जल-स्थल चर प्राणियों में युग्मक संलयन बाहरी माध्यम (जल) में होता है अर्थात् जीव के शरीर के बाहर सम्पन्न होता है इस प्रकार के युग्मक संलयन को बाह्य निषेचन कहते हैं।

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जिन जीवों में बाह्य निषेचन होता है उनके दो लिंगों में व्यापक समकालिता होती है तथा संलयन के अवसर को बढ़ाने के लिये अधिक संख्या में युग्मक निर्मुक्त होते हैं। उदाहरण मेंढक तथा ‘बौनी फिश’ (Bony Fishes ) । इससे बहुत अधिक संख्या में संतानें उत्पन्न होती हैं परन्तु इनका शिकार होते रहने से कम ही संतानें जीवित रहती हैं।

अनेक स्थलीय जीवों जैसे फंजाई, उच्च श्रेणी के प्राणी जैसे- सरीसृप ( Reptiles ), पक्षी तथा स्तनधारी एवं अधिकांश पादप (ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म एवं एंजिओस्पर्म) में युग्मक संलयन जीव शरीर के अंदर सम्पन्न होता है। इस प्रक्रिया को आंतरिक निषेचन कहते हैं।

इन सभी में अंडे की रचना मादा के शरीर के भीतर होती है ऐसे जीवों में नर युग्मक चलनशील होते हैं जो अंडे तक पहुँचते हैं। नर युग्मक के रूप में विशाल संख्या में शुक्राणु बनते हैं। मादा युग्मक अचल अण्ड होते हैं जो कम संख्या में बनते हैं। यद्यपि बीजीय पौधों में नर युग्मक अचल बनते हैं जो परागनली की सहायता से मादा युग्मक तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 7.
क्लोन (Clone) शब्द से आप क्या समझते हैं? कुछ साधारण श्रेणी के जीवों में पाये जाने वाले अलैंगिक जनन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन में जीव संतति उत्पन्न करते हैं। वह उत्पन्न संतति अपने जनक के एकदम समान होती है। आकारिकीय व आनुवंशिक रूप से समान होती है। अतः आकारिकीय तथा आनुवंशिक रूप से एकसमान जीवों के लिये क्लोन शब्द का उपयोग किया जाता है। अलैंगिक जनन सामान्य रूप से एकल जीव, पादप तथा जीव (साधारण जीव) आदि में पाया जाता है प्रोटेस्टा तथा मोनेरा (Protists and Monerans ) में जनक कोशिका दो भागों में विभक्त होकर नये जीवों को जन्म देती है।

अतः इन जीवों में कोशिका विभाजन एक प्रकार से जनन की क्रियाविधि है (अमीबा, पैरामीशियम) अन्य एकल कोशिका जीव द्विखण्डन (Binary Fission) से उत्पन्न होते हैं। यीस्ट में छोटी कलिकाएँ (Buds) उत्पन्न होती हैं जो आरम्भ में तो जनक कोशिका से जुड़ी रहती हैं तथा बाद में पृथक् होकर नये यीस्ट जीव में परिपक्व हो जाती हैं कवक जगत के सदस्य तथा साधारण पादप जैसे शैवाल में विशेष अलैंगिक जनन संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें अलैंगिक चलबीजाणु ( Zoospores) कहते हैं ये रचनाएँ चलनशील होती हैं। अन्य अलैंगिक संरचनाओं में कोनिडियम (पैनीसीलियम), कलिका (हाइड्रा ) तथा जैम्यूल (स्पंज ) होते हैं।

प्रश्न 8.
वाटर हायासिंथ को बंगाल के आतंक के नाम से क्यों जाना जाता है? कारण सहित समझाइये।
उत्तर:
वाटर हायासिंध को बंगाल के आतंक के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह ठहरे जल में सर्वाधिक वृद्धि करने वाला खरपतवार है। यह जल से 0 खींच लेता है जिसके परिणामस्वरूप मछलियाँ मर जाती हैं। इसमें कायिक प्रवर्धन द्रुतगति से होती है और अल्प समय में ही सम्पूर्ण जलाशय में फैल जाता है और अपने आप से जलाशय को ढक लेता है और इससे छुटकारा पाना बहुत ही कठिन होता है। उक्त कारणों के कारण इसे बंगाल के आतंक के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 9.
सजीव प्रजक जीवों में संतानों की उत्तरजीविता की अधिक सम्भावनाएँ हैं। कारण सहित समझाइये।
अथवा
“सजीव प्रजक प्राणियों की संतानों की उत्तरजीविता अधिक जोखिमपूर्ण नहीं होता है।” दो कारण बताते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
अथवा
अण्डप्रजक की तुलना में सजीवप्रजक प्राणियों से शिशु की उत्तरजीविता के सुअवसर क्यों बढ़ जाते हैं? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सजीव प्रजक प्राणियों में (अधिकांश स्तनधारी जिसमें मानव भी शामिल हैं) युग्मनज का विकास मादा जीव के भीतर होकर शिशु का विकास करता है। इस शिशु का निश्चित अवधि तथा विकास के चरणों के पूरा होने के पश्चात् मादा जीव के शरीर से प्रसव के द्वारा बाहर आता है। इस विधि में भ्रूण का सही विकास व संरक्षण होता है, इसी कारण सजीव प्रजक जीवों की उत्तरजीविता के अच्छे अवसर होते हैं।

प्रश्न 10.
“अलैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न संतति को क्लोन कहना अधिक उपयुक्त है।” दो कारण बताते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
अलैंगिक जनन द्वारा जो संतति उत्पन्न होती है वह केवल एक-दूसरे के समरूप ही नहीं बल्कि अपने जनक के एकदम समान होती हैं। आकारिकीय तथा आनुवंशिक रूप से एकसमान होती है। अतः आकारिकीय व आनुवंशिक रूप से एकसमान जीवों के लिए क्लोन शब्द की रचना की गई है।

प्रश्न 11.
बाह्य निषेचन एवं आंतर निषेचन में कोई चार अन्तर लिखिए ।
उत्तर:

बाह्य निषेचन (External fertilization)आन्तरिक निषेचन (Internal fertilization)
इसमें युग्मकसंलयन बाह्य माध्यम में होता है।आन्तरिक माध्यम में होता है।
इस प्रकार के निषेचन में दोनों प्रकार के युग्मक माध्यम में छोड़ दिये जाते हैं।इसमें केवल नर युग्मक ही माध्यम में छोड़े जाते हैं।
बाह्य निषेचन के द्वारा उत्पन्न हुए जीवों की संख्या अधिक होती है।जीवों की संख्या कम होती है ।
इस प्रकार के निषेचन में दोनों प्रकार के युग्मक अधिक संख्या में उत्पन्न किये जाते हैं।इसमें मादा युग्मक कम संख्या में परन्तु नर युग्मक अधिक संख्या में उत्पन्न किये जाते हैं।

प्रश्न 12.
लैंगिक तथा अलैंगिक जनन में कोई दो अन्तर लिखिए। ” कायिक जनन अलैंगिक जनन ही होता है।” समझाइये।
उत्तर:

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
प्रजनन में दो विपरीत लिंग वाले जनक भाग लेते हैं।इसमें एकल जीव संतति उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।
इसमें युग्मक संलयन होता है।युग्मक संलयन नहीं होता है।

कायिक जनन में दो जनक भाग नहीं लेते हैं। इसमें पादप शरीर का कोई भी कायिक भाग उसके शरीर से पृथक् होकर, अनुकूल परिस्थितियों में नये पौधे का निर्माण करता है । अतः कायिक जनन, अलैंगिक जनन की एक विधि है ।

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निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
लैंगिक जनन को विस्तार से समझाते हुये, इसमें होने वाली विभिन्न घटनाओं का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
लैंगिक जनन में नर तथा मादा युग्मक ( Gametes) का निर्माण होता है तथा ये युग्मक आपस में संलयित होकर द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण कर नये जीव का विकास करते हैं । यह क्रिया एक जटिल विस्तृत एवं धीमी प्रक्रिया है। इसके परिणामस्वरूप जो संतति उत्पन्न होती है, वह अपने जनकों के अथवा आपस में भी समरूप नहीं होती है।

प्रत्येक जीव परिपक्वता अवस्था प्राप्त करने के बाद लैंगिक जनन करता है। यद्यपि लैंगिक जनन से संबद्ध संरचनाएँ जीवों में एकदम भिन्न होती हैं तथा यह क्रिया विस्तृत व जटिल होने के बावजूद भी जीवों में लैंगिक जनन की घटनाएँ एक नियमित क्रम का अनुपालन करती हैं। इन घटनाओं को तीन भिन्न-भिन्न अवस्थाओं निषेचन पूर्व, निषेचन तथा निषेचन – पश्चात् में विभक्त किया जा सकता है।
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(अ) निषेचन पूर्व घटनाएँ (Pre-fertilization Events) – इसके अन्तर्गत युग्मकों के निषेचन पूर्व दो मुख्य घटनाएँ युग्मकजनन तथा युग्मक स्थानांतरण होती हैं।
(i) युग्मकजनन (Gamctogenesis) – युग्मकों के निर्माण को युग्मकजनन कहते हैं। युग्मक अगुणित होते हैं क्योंकि इनके निर्माण के समय अर्धसूत्री विभाजन होता है कुछ शैवालों में दोनों प्रकार ( नर व मादा) के युग्मक एकसमान दिखाई देते हैं तो उन्हें समयुग्मक (Isogametes) कहते हैं।

अधिकांश लैंगिक जनन करने वाले जीवों में दोनों युग्मक आकारिकी दृष्टि से भिन्न होते हैं, इन्हें विषमयुग्मक (Heterogametes) कहते हैं नर युग्मकों को पुमणु या शुक्राणु (Antherozoid or Sperms) तथा मादा युग्मकों को अंड या डिंब (Egg or Ovum) कहते हैं। लैंगिक जनन अंगों को धारण करने के आधार पर जीवों को उभयलिंगाश्रयी (Monoccious) अथवा एकलिंगाश्रयी (Dioecious ) कहते हैं।

(ii) युग्मक स्थानांतरण ( Gamete Transfer) – निषेचन क्रिया सम्पन्न होने के लिए दोनों युग्मक एक-दूसरे के पास आते हैं। प्रायः जीवों में नर युग्मक चलनशील तथा मादा अचल व स्थानबद्ध होते हैं। यद्यपि कुछ कवकों व शैवालों में दो प्रकार के युग्मक चलनशील होते हैं। इन्हें एक माध्यम की आवश्यकता होती है, जिसमें होकर नर युग्मक गति करता है ।

प्रायः साधारण पादपों जैसे शैवाल, ब्रायोफाइट्स तथा टैरिडोफाइट्स में जल माध्यम की आवश्यकता होती है नर युग्मक गति करके मादा युग्मक के पास जाता है। नर युग्मक संख्या में अधिक तथा मादा युग्मक तुलनात्मक कम बनते हैं। बीजीय पादपों में परागकण (Pollen Grain) नर युग्मकों के वाहक होते हैं तथा मादा युग्मक अर्थात् अंड, अण्डप के अन्दर होते हैं।

परागकण परागण (Pollination) क्रिया द्वारा पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) पर स्थानांतरित हो जाते हैं। परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर परागनली बनाते हैं। परागनली नर युग्मकों को अपने साथ लेती हुई अंडप के अन्दर प्रवेश कर जाती है तथा नर युग्मकों को छोड़ देती है। एकलिंगाश्रयी प्राणियों में युग्मकों के स्थानांतरण हेतु विशेष प्रकार की क्रियाविधि विकसित करनी पड़ती है।

(ब) निषेचन ( Fertilization) – दो युग्मकों के संलयन (Fusion) की क्रिया को निषेचन कहते हैं। कुछ जीवों में बिना निषेचन के ही मादा युग्मक नये जीव में विकसित हो जाता है। उदाहरण- रोटीफर्स (Rotifers ), मधुमक्खियाँ, कुछ छिपकलियाँ तथा पक्षी (टर्की) आदि । इस प्रकार की घटना को अनिषेकजनन (Parthenogenesis) कहते हैं।

कुछ जीवों जैसे शैवाल व मछलियों में युग्मक संलयन बाहरी माध्यम (जल) अर्थात् जीव के शरीर के बाहर होता है, इसे बाह्य निषेचन (External Fertilization) कहते हैं । स्थलीय जीवों, उच्च श्रेणी के प्राणी, अधिकांश पादपों में यह संलयन जीव के शरीर के भीतर होता है, अतः इसे आंतरिक निषेचन कहते हैं।

(स) निषेचन – पश्च घटनाएँ (Post-fertilization Events) – निषेचन पश्चात् द्विगुणित युग्मनज (Zygote) का निर्माण होता है। बाह्य निषेचन करने वाले सभी जीवों में युग्मनज का निर्माण बाहरी माध्यम में होता है जबकि आंतरिक निषेचन वालों में उनके शरीर के भीतर युग्मनज बनता है। युग्मनज के अंगों का विकास जीव के अपने जीवन-चक्र तथा वहाँ के पर्यावरण पर निर्भर करता है।

युग्मनज अपने चारों ओर एक मोटी भित्ति स्रावित करता है जिससे उसकी शुष्कन व क्षति से रक्षा होती है। युग्मनज के अंकुरण पूर्व कुछ विश्रांति समय भी होता है । द्विगुणित जीवन- -चक्र वाले जीवों में युग्मनज अर्धसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर अगुणित अंडाणु का निर्माण करता है जिससे अगुणित जीव बनता है। इस प्रकार युग्मनज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के जीव के बीच की महत्त्वपूर्ण कड़ी है।

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भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) – युग्मनज से भ्रूण के विकास को भ्रूणोद्भव कहते हैं। इस दौरान युग्मनज में कोशिका विभाजन तथा कोशिका विभेदन (Cell Differentiation) होता है। कोशिका विभाजन से कोशिकाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो कोशिका विभेदीकरण से कोशिकाओं के समूह एक निश्चित रूपांतरणों से गुजरकर विशेषीकृत ऊतकों एवं अंगों की रचना करते हैं।

इसके फलस्वरूप जीव का निर्माण होता है। प्राणियों को युग्मनज के विकास आधार पर अंडप्रजक (Oviparous) तथा सजीवप्रजक (Viviparous ) में विभक्त किया गया है । यदि युग्मनज का विकास मादा जनक के शरीर से बाहर होता है तो उसे अंड प्रजक कहते हैं, उदाहरण सरीसृप वर्ग तथा पक्षी ।

सजीवप्रजक में युग्मनज का विकास जीव के शरीर के भीतर होता है। सजीवप्रजक में भ्रूण की सही देखभाल तथा संरक्षण होता है जिससे यह विधि जीवों के उत्तरजीविता हेतु उत्तरदायी है। पुष्पीय पौधों में भी युग्मनज का निर्माण बीजांड के अंदर होता है। इन पौधों में युग्मनज भ्रूण में तथा बीजाण्ड बीज में विकसित होता है एवं अंडाशय फल के रूप में बनता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. कुछ पादपों में मादा युग्मक बिना निषेचन के भ्रूण में परिवर्तित हो जाता है। इस घटना को क्या कहा जाता है ? ( NEET-2019 )
(अ) अनिषेकजनन
(ब) स्वयुग्मन
(स) अनिषेक फलन
(द) युग्मक संलयन
उत्तर:
(अ) अनिषेकजनन

2. ‘ऑफसेटस’ किसके द्वारा उत्पादित होते हैं ? ( NEET 2018)
(अ) अनिषेक फलन द्वारा
(ब) सूत्री विभाजन द्वारा
(स) अर्धसूत्री विभाजन द्वारा
(द) अनिषेकजनन द्वारा
उत्तर:
(ब) सूत्री विभाजन द्वारा

3. निम्नलिखित में से किसमें उसके जीवन काल में केवल एक बार ही पुष्पन होता है? (NEET-2018)
(अ) आम
(ब) कटहल
(स) बाँस स्पेशीज
(द) पपीता
उत्तर:
(स) बाँस स्पेशीज

4. निम्नलिखित में से कौनसा विभिन्नता वाले नये आनुवंशिक संयोजन के उत्पन्न करता है? (NEET-2016)
(अ) लैंगिक जनन
(ब) बीजाण्डकायिक बहुभ्रूणता
(स) कायिक जनन
(द) अनिषेकजनन
उत्तर:
(अ) लैंगिक जनन

5. कॉलम – I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गये कूट का प्रयोग कर सही विकल्प को चुनिए । (NEET-2016)

कॉलम – Iकॉलम-II
1. आपस में जुड़े स्त्रीकेसर(i) युग्मकजनन
2. युग्मकों का बनना(ii) स्त्रीकेसर
3. उपचार ऐस्कोमाइसिटीज के कवक तन्तु(iii) मुक्ताण्डपी
4. एकलिंगी मादा पुष्प(iv) द्विकेन्द्रकी

उत्तर:

4. एकलिंगी मादा पुष्प(iv) द्विकेन्द्रकी

6. निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही नहीं है? (NEET-2016)
(अ) आलू, केला और अदरक में पादयक रूपान्तरिक तने में उपस्थित पर्वों से उत्पन्न होते हैं।
(ब) रुके हुए जल में उगती हुई जल हायसिन्थ जल से ऑक्सीजन खींच लेती है जिससे मछलियों की मृत्यु हो जाती है।
(स) अलैंगिक प्रजनन द्वारा उत्पन्न संतानों को क्लोन कहा जाता है ।
(द) सूक्ष्मदर्शीय, चल अलैंगिक प्रजनन संरचनायें, जल बीजाणु कहलाती हैं।
उत्तर:
(अ) आलू, केला और अदरक में पादयक रूपान्तरिक तने में उपस्थित पर्वों से उत्पन्न होते हैं।

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7. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सही रूप से नहीं मिलाया गया है ? (NEET-2015)

जनन का प्रकारउदाहरण
(अ) द्विखण्डनसारगेसम
(ब) कोनिडियापेलीसिलियम
(स) भूस्तारिका (ऑफसेट)वाटर हायसिन्थ
(द) राइजोमकेला

उत्तर:

(अ) द्विखण्डनसारगेसम

9. सामान्यतः लैंगिक जनन का उत्पाद क्या बनाता है? (NEET-2013)
(अ) बीज की लम्बी जीवन क्षमता
(ब) प्रवृद्धि सुसु
(स) नये आनुवंशिक संयोग जो विभिन्नता की ओर अग्रसर होते हैं।
(द) विशाल जीव संहिता
उत्तर:
(द) विशाल जीव संहिता

10. अर्धसूत्री विभाजन कहाँ होता है? (NEET-2013)
(अ) अर्धसूत्री कोशिका
(स) जेम्यूल
(ब) कोनिडिया
(द) गुरुबीजाणु
उत्तर:
(अ) अर्धसूत्री कोशिका

11. निम्नलिखित में से किस एक को सही मिलाया गया है? (NEET-2012)
(अ) प्याज- बल्ब
(ब) अदरक- अन्तः भूस्तारी
(स) क्लेमाइडोमोनास – कोनिडिया
(द) भीस्ट – चल बीजाणु
उत्तर:
(अ) प्याज- बल्ब

12. आले के कंद में जिन संरचनाओं को “आँखें” कहते हैं। वे क्या होती हैं? (NEET-2011)
(अ) मूल कलिकाएँ
(ब) पुष्प कलिकाएँ
(स) प्ररोह कलिकाएँ
(द) कक्षीय कलिकाएँ
उत्तर:
(द) कक्षीय कलिकाएँ

13. निम्न में से कौनसा पुष्पीय भाग निषेचन के बाद फल भित्ति (Pericarp) बनाता है। (MPPMT-2009 ORISSA JEE-2011)
(अ) भ्रूणपोष
(ब) बाह्य अध्यावरण
(स) अण्डाशय भित्ति
(द) अन्त: अध्यावरण
उत्तर:
(स) अण्डाशय भित्ति

14. जलकुम्भी में कायिक प्रवर्धन होता है- (MP PMT-2010)
(अ) तनों द्वारा
(ब) जड़ों द्वारा
(स) पत्तियों द्वारा
(द) जननांगों द्वारा
उत्तर:
(अ) तनों द्वारा

15. क्लोन, स्वयं का समूह है जिसे प्राप्त किया जाता है- (DPMT-2010)
(अ) स्वपरागण द्वारा
(ब) संकरण द्वारा
(स) कायिक जनन द्वारा
(द) परपरागण द्वारा
उत्तर:
(स) कायिक जनन द्वारा

16. पिस्टियों में कायिक प्रवर्धन किसके द्वारा होता है? (NEET 2010, CBSE PMT (Main) 2010)
(अ) भूस्तारिका
(ब) अपरिभूस्तारी
(स) अंत: भूस्तारी
(द) भूस्तारी
उत्तर:
(अ) भूस्तारिका

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17. पुदीने में कायिक प्रवर्धन किससे होता है? (CBSE, PMT-2009, NEET-2009)
(अ) अंत: भूस्तारी
(ब) उपरिभूस्तारी
(स) भूस्तारिका
(द) प्रमंद
उत्तर:
(अ) अंत: भूस्तारी

18. केला बीज रहित फल है यह उत्पन्न होता है- (BIHAR CECE-2006, WBJEE-2009)
(अ) अलैंगिक जनन के द्वारा
(ब) अनेषक जनन के द्वारा (पार्थिनोमार्पिक के द्वारा)
(स) त्रिगुणित के द्वारा
(द) परपरागण द्वारा
उत्तर:
(ब) अनेषक जनन के द्वारा (पार्थिनोमार्पिक के द्वारा)

19. बिना निषेचन से प्राप्त फल को कहते हैं या अण्डाशय बिना निषेचन के फल (Haryana PMT-2005, RPMT-2006, CPMT-2009)
(अ) अनिषेक फल
(ब) अनिषेकजनन
(स) बहुभ्रूणीयता
(द) पॉलीगेजी
उत्तर:
(अ) अनिषेक फल

20. निषेचन के बाद अण्डाशय परिवर्तित हो जाता है- (J&K CET-2008)
(अ) भ्रूण में
(ब) एण्डोरचर्म में
(स) फल में
(द) बीज में
उत्तर:
(स) फल में

21. निम्न युग्म के दोनों पौधे पत्ती द्वारा कायिक जनन करते हैं- (CBSE PMT 2005 NEET 2005)
(अ) ब्रायोफिल्लम और कालेनचोई
(ब) क्राइसेन्थियम और एगेव
(स) एगेव और कालेनचोई
(द) एस्पेरेगस और ब्रायोफिल्लम
उत्तर:
(अ) ब्रायोफिल्लम और कालेनचोई

22. अण्डयुग्मकों में निषेचन प्रक्रिया के दौरान ( NEET 2004)
(अ) गतिविहीन, एक छोटा मादा युग्मक और एक गतिशील नर युग्मक ।
(ब) एक बड़ा, गतिहीन मादा युग्मक और एक छोटा गतिशील नर युग्मक ।
(स) एक बड़ा, गतिविहीन मादा युग्मक और एक छोटा गतिविहीन नर युग्मक।
(द) एक बड़ा, गतिशील मादा युग्मक और एक छोटा गतिविहीन नर-युग्मक ।
उत्तर:
(अ) गतिविहीन, एक छोटा मादा युग्मक और एक गतिशील नर युग्मक ।

23. निम्न में से किस एक पौधे का उपयोग ‘पर्ण अपस्थानिक कलिका’ के रूप में कायिक प्रवर्धन के लिए किया जाता है- (AIEEE-2004)
(अ) केला
(ब) अदरक
(स) ब्रायोफिल्लम
(द) कोलोकेशिया
उत्तर:
(स) ब्रायोफिल्लम

24. पुनरुद्भवन के दौरान, एक अंग का दूसरे अंग में रूपान्तरण क्या कहलाता है? (NEET-2001)
(अ) सारफोजेनिसिस
(ब) एपिमार्फोसिस
(स) मार्फेलैम्सिस
(द) एक्रीएशनरी वृद्धि
उत्तर:
(ब) एपिमार्फोसिस

25. नर केन्द्रक के मादा केन्द्रक के साथ मिलने की क्रिया को कहा जाता है- (MP PMT-1995)
(अ) युग्मक संलयन (Syngamy)
(ब) त्रिसंयोजन (Triple-fusion )
(स) द्विनिषेचन (Double-fertilization)
(द) संयुग्मन (Conjugation)
उत्तर:
(अ) युग्मक संलयन (Syngamy)

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 1 जीवों में जनन

26. परागण की सही परिभाषा है- (AFMC-1994)
(अ) एन्थर से स्टिगमा तक परागकणों का स्थानान्तरण
(ब) परागकण का अंकुरण
(स) बीजाण्ड में परागनली की वृद्धि
(द) कीटों का पुष्पों पर आना
उत्तर:
(अ) एन्थर से स्टिगमा तक परागकणों का स्थानान्तरण

27. प्राकृतिक रूप से प्राप्त होने वाले अनिषेक फल (Parthino Carpic Fruit) है- (CPMT-1988)
(अ) अमरूद
(ब) आम
(स) केला
(द) सेब
उत्तर:
(स) केला

28. क्लोन, स्वयं का समूह है जिसे प्राप्त किया जाता है- (DPMT-1986)
(अ) स्वपरागण द्वारा
(ब) संकरण द्वारा
(स) कायिक प्रवर्धन द्वारा
(द) परपरागण द्वारा
उत्तर:
(स) कायिक प्रवर्धन द्वारा

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