Author name: Bhagya

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Exercise 13.8

[नोट-जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।]

प्रश्न 1.
उस गोले का आयतन ज्ञात कीजिए जिसकी त्रिज्या निम्न है :
(i) 7 सें०मी०
(ii) 0.63 मी०
हल :
(i) यहां पर,
गोले की त्रिज्या (r) = 7 सें०मी०
गोले का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) 7 × 7 × 7 सें०मी०3
= \(\frac{4312}{3}\) सें०मी०3 = 1437\(\frac{1}{3}\)सें०मी०3 उत्तर

(ii) यहां पर,
गोले की त्रिज्या (r) = 0.63 मी० = \(\frac{63}{100}\) मी०
गोले का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{63}{100} \times \frac{63}{100} \times \frac{63}{100}\) मी०3
= \(\frac{1047816}{1000000}\) मी०3
= 1.05 मी०3 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8

प्रश्न 2.
उस ठोस गोलाकार गेंद द्वारा हटाए गए (विस्थापित) पानी का आयतन ज्ञात कीजिए, जिसका व्यास निम्न है:
(i) 28 सें०मी०
(ii) 0.21 मी०
हल :
(i) यहां पर,
गोले का व्यास (d) = 28 सें०मी०
गोले की त्रिज्या (r) = \(\frac{28}{2}\) सें०मी० = 14 सें०मी०
गोले का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) × 14 × 14 × 14 सें०मी०3
\(\frac{34496}{3}\) सें०मी०3 = 11498\(\frac{2}{3}\) सें०मी०3 उत्तर
अतः गोले द्वारा हटाए गए पानी का आयतन = 11498\(\frac{2}{3}\) सें०मी०3 उत्तर

(ii) यहां पर,
गोले का व्यास (d) = 0.21 मी० = \(\frac{21}{100}\) मी०
गोले की त्रिज्या (r) = \(\frac{21}{2 \times 100}\) = \(\frac{21}{100}\)
∴ गोले का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{21}{200} \times \frac{21}{200} \times \frac{21}{200}\) सें०मी०3
= \(\frac{4851}{1000000}\) सें०मी०3 = 0.004851 मी०3
अतः गोले द्वारा हटाए गए पानी का आयतन = 0.004851 मी०3 उत्तर

प्रश्न 3.
धातु की एक गेंद का व्यास 4.2 सें०मी० है। यदि इस धातु का घनत्व 8.9 ग्राम प्रति सें०मी०3 है, तो इस गेंद का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
धातु की गेंद का व्यास (d) = 4.2 सें०मी० = \(\frac{21}{100}\) सें०मी०
धातु की गेंद की त्रिज्या (r) = \(\frac{21}{100}\) सेंमी० = \(\frac{21}{100}\) सें०मी०
धातु की गेंद का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{21}{10} \times \frac{21}{10} \times \frac{21}{10}\) सें०मी०3
= \(\frac{38808}{1000}\) सें०मी०3
1 सें०मी० धातु का द्रव्यमान = 8.9 ग्राम
दी गई धातु की गेंद का द्रव्यमान = \(\frac{38808}{1000} \times \frac{89}{10}\) ग्राम
\(\frac{3453912}{10000}\) ग्राम = 345.3912 ग्राम
= 345.39 ग्राम उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8

प्रश्न 4.
चंद्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। चंद्रमा का आयतन पृथ्वी के आयतन की कौन-सी भिन्न है ?
हल :
माना पृथ्वी का व्यास (d) = 2x मी०
पृथ्वी की त्रिज्या (r1) = \(\frac{2 x}{2}\)
पृथ्वी का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr13
= \(\frac{4}{3}\)π × x × x × x मी०3
= \(\frac{4}{3}\)πx3
चंद्रमा का व्यास (d) = \(\frac{2 x}{4}\) मी०
चंद्रमा की त्रिच्या (r2) = \(\frac{2 x}{2 \times 4}=\frac{x}{4}\) मी०
चंद्रमा का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr23
= \(=\frac{4}{3} \pi \times \frac{x}{4} \times \frac{x}{4} \times \frac{x}{4}\) मी०3
= \(\frac{1}{48}\)πx3 मी०3
चंद्रमा का आयतन पृथ्वी के आयतन का जितना भाग है
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 1

प्रश्न 5.
व्यास 10.5 सें०मी० वाले एक अर्धगोलाकार कटोरे में कितने लीटर दूध आ सकता है ?
हल :
यहां पर,
अर्धगोलाकार कटोरे का व्यास (d) = 10.5 सें०मी० = \(\frac{105}{10}\) = \(\frac{21}{2}\) सें०मी०
अर्धगोलाकार कटोरे की त्रिज्या (r) = \(\frac{21}{2 \times 2}\) सें०मी० = \(\frac{21}{4}\) सें०मी०
∴ अर्धगोलाकार कटोरे का आयतन (V) = \(\frac{2}{3}\)πr3
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{21}{4} \times \frac{21}{4} \times \frac{21}{4}\) सें०मी०3
= \(\frac{4851}{16}\) सें०मी०3
अतः अर्धगोलाकार कटोरे की धारिता = \(\frac{4851}{16 \times 1000} \ell\)
= \(\frac{4851}{16000} \ell\) = 0.303 l (लगभग) उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8

प्रश्न 6.
एक अर्धगोलाकार टंकी 1 सें०मी० मोटी एक लोहे की चादर (sheet) से बनी है। यदि इसकी आंतरिक त्रिज्या 1 मी० है, तो इस टंकी के बनाने में लगे लोहे का आयतन ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
अर्धगोलाकार टंकी की अंतः त्रिज्या (r) = 1 मी० = 100 सें०मी०
अर्धगोलाकार टंकी की बाह्य त्रिज्या (R) = 100 + 1 = 101 सें०मी०
∴ टंकी में लगी लोहे की चादर का आयतन = बाह्य आयतन – आंतरिक आयतन
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 2

प्रश्न 7.
उस गोले का आयतन ज्ञात कीजिए जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 154 सें०मी०2 है।
हल :
यहां पर,
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 154 सें०मी०2
⇒ 4πr2 = 154
या 4 × \(\frac{22}{7}\) × r2 = 154
या \(\frac{88}{7}\)r2 = 154
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 3

प्रश्न 8.
किसी भवन का गुंबद एक अर्धगोले के आकार का है। अंदर से, इसमें सफेदी कराने में ₹ 4989.60 व्यय हुए। यदि सफेदी कराने की दर ₹ 20 प्रति वर्ग मीटर है, तो ज्ञात कीजिए :
(i) गुंबद का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(ii) गुंबद के अंदर की हवा का आयतन।
हल :
(i) गुंबद के अंतः तल पर सफेदी कराने का खर्च = ₹ 4989.60
सफेदी कराने की दर = ₹ 20 प्रति वर्ग मीटर
4989.60 इस प्रकार गुंबद के अंतः तल का क्षेत्रफल = \(\frac{4989.60}{2}\)
= 249.48 वर्ग मीटर उत्तर
(ii) 2πr2 = 249.48
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 4

प्रश्न 9.
लोहे के 27 ठोस गोलों को पिघलाकर, जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या r है और पृष्ठीय क्षेत्रफल S है, एक बड़ा गोला बनाया जाता है जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल S’ है। ज्ञात कीजिए :
(1) नए गोले की त्रिज्या r’
(ii) S और S’ का अनुपात
हल :
(i) यहां पर,
गोले की त्रिज्या (r) = r
गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल (S) = 4πr2
गोले का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
इस प्रकार 27 ठोस गोलों को पिघलाकर बने
गोले का आयतन (V) = 27 × \(\frac{4}{3}\)πr3 = 36πr3
नए गोले की त्रिज्या = r’
नए गोले का आयतन = \(\frac{4}{3}\)π(r’)3
प्रश्नानुसार \(\frac{4}{3}\)π(r’)3 = 36πr3
या (r’)3 = 36r3 × \(\frac{3}{4}\)
या (r’)3 = 27(r)3
या (r’)3 = (3r)3
⇒ r’ = 3r
नए गोले की त्रिज्या r’ = 3r उत्तर

(ii) यहां पर,
नए गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल (S’) = 4π(r’)2
= 4π(3r)2
= 4π(9r2)
S’ = 36πr2
S तथा S’ का अनुपात = 4πr2 : 36πr2
= 1 : 9 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8

प्रश्न 10.
दवाई का एक कैपसूल (capsule) 3.5 मि०मी० व्यास का एक गोला (गोली) है। इस कैपसूल को भरने के लिए कितनी दवाई (mm3 में) की आवश्यकता होगी ?
हल :
यहां पर,
कैपसूल का व्यास (d) = 3.5 मि०मी० = \(\frac{35}{10}=\frac{7}{2}\) मि०मी०
कैपसूल की त्रिज्या (r) = \(\frac{7}{2} \times \frac{1}{2}\) मि०मी० = \(\frac{7}{4}\) मि०मी०
कैपसूल का आयतन (V) = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times \frac{7}{4} \times \frac{7}{4} \times \frac{7}{4}\) मि०मी०
= \(\frac{539}{24}\) मि०मी०3 = 22.46 मि०मी०3 (लगभग)
इस प्रकार कैपसूल को भरने के लिए जितनी दवाई की आवश्यकता होगी।
= 22.46 मि०मी०3 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.8 Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Exercise 13.5

प्रश्न 1.
माचिस की डिब्बी के माप 4 सें०मी० × 2.5 सेंमी० × 1.5 सें०मी० हैं। ऐसी 12 डिब्बियों के एक पैकेट का आयतन क्या होगा ?
हल :
यहां पर,
माचिस की डिब्बी की लंबाई (l) = 4 सें०मी०
माचिस की डिब्बी की चौड़ाई (b) = 2.5 सें०मी०
माचिस की डिब्बी की ऊंचाई (h) = 1.5 सें०मी०
माचिस की 1 डिब्बी का आयतन (V) = l × b × h = 4 × 2.5 × 1.5 सें०मी०3
= 15 सें०मी०3
अतः माचिस की 12 डिब्बियों का आयतन = 15 × 12 = 180 सें०मी०3 उत्तर

प्रश्न 2.
एक घनाभाकार पानी की टंकी 6 मी० लंबी, 5 मी० चौड़ी और 4.5 मी० गहरी है। इसमें कितने लीटर पानी आ सकता है ? (1 मी०3 = 1000 l)
हल :
यहां पर,
घनाभाकार टंकी की लंबाई (l) = 6 मी०
घनाभाकार टंकी की चौड़ाई (b) = 5 मी०
घनाभाकार टंकी की गहराई (h) = 4.5 मी०
घनाभाकार टंकी का आयतन (V) = l × b × h= 6 × 5 × 4.5 मी०3
= 135 मी०3
1 मी०3 टंकी में पानी आ सकता है = 1000 l
135 मी०3 टंकी में पानी आ सकता है = 135 × 1000
= 135000 लीटर उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

प्रश्न 3.
एक घनाभाकार बर्तन 10 मी० लंबा और 8 मी० चौड़ा है। इसको कितना ऊंचा बनाया जाए कि इसमें 380 घन मीटर द्रव आ सके ?
हल :
यहां पर,
घनाभाकार बर्तन की लंबाई (l) = 10 मी०
घनाभाकार बर्तन की चौड़ाई (b) = 8 मी०
घनाभाकार बर्तन की ऊंचाई (h) = ?
घनाभाकार बर्तन का आयतन (V) = 380 मी०3
⇒ l × b × h = 380
या 10 × 8 × h = 380
या 80h = 380
या h = \(\frac{380}{80}\) = 4.75 मी०
अतः घनाभाकार बर्तन की ऊंचाई (h) = 4.75 मी० उत्तर

प्रश्न 4.
8 मी० लंबा, 6 मी० चौड़ा और 3 मी० गहरा एक घनाभाकार गड्ढा खुदवाने में ₹ 30 प्रति मी०3 की दर से होने वाला व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
घनाभाकार गड्ढे की लंबाई (l) = 8 मी०
घनाभाकार गड्ढे की चौड़ाई (b) = 6 मी०
घनाभाकार गड्ढे की गहराई (h) = 3 मी०
घनाभाकार गड्ढे का आयतन (V) = l × b × h = 8 × 6 × 3 मी०3
= 144 मी०3
अतः घनाभाकार गड्ढे को खुदवाने का व्यय = 144 × 30 = ₹ 4320 उत्तर

प्रश्न 5.
एक घनाभाकार टंकी की धारिता 50000 लीटर पानी की है। यदि इस टंकी की लंबाई और गहराई क्रमशः 2.5 मी० और 10 मी० हैं, तो इसकी चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
घनाभाकार टंकी का आयतन (V) = 50000 लीटर
= \(\frac{50000}{1000}\) मी०3
= 50 मी०3
घनाभाकार टंकी की लंबाई (l) = 2.5 मी०
घनाभाकार टंकी की चौड़ाई (b) = ?
घनाभाकार टंकी की गहराई (h) = 10 मी०
घनाभाकार टंकी का आयतन (V) = 50 मी०3
⇒ l × b × h = 50
या 2.5 × b × 10 = 50
या 25 b = 50
या b = \(\frac{50}{25}\) = 2 मी०
अतः घनाभाकार टंकी की चौड़ाई = 2 मी० उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

प्रश्न 6.
एक गांव जिसकी जनसंख्या 4000 है, को प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 150 लीटर पानी की आवश्यकता है। इस गांव में 20 मी० × 15 मी० × 6 मी० मापों वाली एक टंकी बनी हुई है। इस टंकी का पानी वहां कितने दिन के लिए पर्याप्त होगा ?
हल :
यहां पर, एक व्यक्ति को प्रतिदिन जितने पानी की आवश्यकता है = 150 लीटर
4000 व्यक्तियों को प्रतिदिन जितने पानी की आवश्यकता है = 4000 × 50 = 6,00,000 लीटर
दी गई टंकी की लंबाई (l) = 20 मी०
दी गई टंकी की चौड़ाई (b) = 15 मी०
दी गई टंकी की गहराई (h) = 6 मी०
दी गई टंकी में उपस्थित पानी का आयतन (V) = l × b × h = 20 × 15 × 6 = 1800 मी०3
= 1800 × 1000 लीटर
= 18,00,000 लीटर
अतः टंकी का पानी जितने दिन के लिए पर्याप्त है = \(\frac{1800000}{600000}\) = 3 दिन उत्तर

प्रश्न 7.
किसी गोदाम की माप 40 मी० × 25 मी० × 15 मी० हैं। इस गोदाम में 1.5 मी० × 1.25 मी० × 0.5 मी० की माप वाले लकड़ी के कितने अधिकतम क्रेट (crate) रखे जा सकते हैं ? [B.S.E.H. March, 2018]
हल :
यहां पर,
गोदाम का आयतन (V1) = 40 × 25 × 15 = 15000 मी०3
1 क्रेट का आयतन (V2) = 1.5 × 1.25 × 0.5 = 0.9375 मी०3
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 1

प्रश्न 8.
12 सें०मी० भुजा वाले एक ठोस धन को बराबर आयतन वाले 8 घनों में काटा जाता है। नए घन की क्या भुजा होगी? साथ ही, इन दोनों घनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात भी ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
ठोस धन की भुजा = 12 सें०मी०
ठोस घन का आयतन = 12 × 12 × 12 = 1728 सें०मी०3
नए घन का आयतन = \(\frac{1728}{8}\) = 216 सें०मी०3
अतः नए घन की भुजा = \(\sqrt[3]{\text { आयतन }}=\sqrt[3]{216}=\sqrt[3]{6 \times 6 \times 6}\)
= 6 सें०मी० उत्तर
पहले घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6 × भुजा
= 6 × (12)2 सें०मी०2
= 6 × 144 = 864 सें०मी०2
नए घन का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 6 × भुजा2
= 6 × (6)2 सें०मी०2
= 6 × 36 = 216 सें०मी०2
दोनों घनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = 864 : 216
= 4 : 1 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5

प्रश्न 9.
3 मी० गहरी और 40 मी० चौड़ी एक नदी 2 km प्रति घंटा की चाल से बह कर समुद्र में गिरती है। एक मिनट में समुद्र में कितना पानी गिरेगा ?
हल :
यहां पर,
नदी की गहराई (h) = 3 मी०
नदी की चौड़ाई (b) = 40 मी०
1 घंटे में बहने वाले पानी की लंबाई (l) = 2 km = 2000 मी०
अतः 1 घंटे में बहने वाले पानी का आयतन (V) = l × b × h = 2000 × 40 × 3 मी०3
= 24,0000 मी०3
1 मिनट में बहने वाले पानी का आयतन = \(\frac{240000}{60}\) मी०3
= 4000 मी०3
अतः 1 मिनट में जितना पानी समुद्र में गिरेगा = 4000 मी०3 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.5 Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Exercise 14.2

प्रश्न 1.
आठवीं कक्षा के 30 विद्यार्थियों के रक्त समूह ये हैं :
A, B, O, O, AB, O, A, O, B, A, O, B, A, O, O,
A, AB, O, A, A, O, O, AB, B, A, O, B, A, B, O
इन आंकड़ों को एक बारंबारता बंटन सारणी के रूप में प्रस्तुत कीजिए। बताइए कि इन विद्यार्थियों में कौन-सा रक्त समूह अधिक सामान्य है और कौन-सा रक्त समूह विरलतम रक्त समूह है।
हल :
आठवीं कक्षा के 30 विद्यार्थियों के रक्त समूह की बारंबारता सारणी निम्न होगी-
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 1
विद्यार्थियों में सामान्य रक्त समूह = O
विद्यार्थियों में विरलतम रक्त समूह = AB उत्तर

प्रश्न 2.
40 इंजीनियरों की उनके आवास से कार्य-स्थल की (किलोमीटर में) दूरियां ये हैं :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 2
0-5 को (जिसमें 5 सम्मिलित नहीं है) पहला अंतराल लेकर ऊपर दिए हुए आंकड़ों से वर्ग-माप 5 वाली एक वर्गीकृत बारंबारता बंटन सारणी बनाइए। इस सारणी बद्ध निरूपण में आपको कौन-से मुख्य लक्षण देखने को मिलते हैं?
हल :
आंकड़ों की वर्गीकृत बारंबारता सारणी अग्रांकित है-
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 3
मुख्य अभिलक्षण :
(1) 20 कि०मी० से कम दूरी तय करने वाले अभियन्ता = 5 + 11 + 11 + 9 = 36
(2) 20 कि०मी० से अधिक दूरी तय करने वाले अभियन्ता = 1 + 1 + 2 = 4

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2

प्रश्न 3.
30 दिन वाले महीने में एक नगर की सापेक्ष आर्द्रता (% में) यह रही है :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 4
(i) वर्ग 84-86, 86-88 आदि लेकर एक वर्गीकृत बारंबारता बंटन बनाइए।
(ii) क्या आप बता सकते हैं कि ये आंकड़े किस महीने या ऋतु से संबंधित हैं?
(iii) इन आंकड़ों का परिसर क्या है?
हल :
दिए गए आंकड़ों को दी गई वर्ग बारंबारता के अनुसार वर्गीकृत करने पर प्राप्त बारंबारता बंटन निम्न होगा-
(i)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 5
(ii) ये आंकड़े वर्षा ऋतु में लिए हुए प्रतीत होते हैं क्योंकि सापेक्ष आर्द्रता बहुत अधिक है।
(iii) आंकड़ों का परिसर = 99.2 – 84.9 = 14.3 उत्तर

प्रश्न 4.
निकटतम सेंटीमीटरों में मापी गई 50 विद्यार्थियों की लंबाइयां ये हैं :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 6
(i) 160-165, 165-170 आदि का वर्ग अंतराल लेकर ऊपर दिए गए आंकड़ों को एक वर्गीकृत बारंबारता बंटन सारणी के रूप में निरूपित कीजिए।
(ii) इस सारणी की सहायता से आप विद्यार्थियों की लंबाइयों के संबंध में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
हल :
दिए गए आंकड़ों को दिए गए वर्ग अंतरालों के अनुसार बांटने पर निम्न बारंबारता बंटन सारणी प्राप्त होगी-
(i)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 7
(ii) इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष निकलता है कि 35 बच्चे ऐसे हैं जिनकी लंबाई 165 सें०मी० से कम है। अर्थात 70% विद्यार्थियों की लंबाई 165 सें०मी० से कम है।

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2

प्रश्न 5.
एक नगर में वायु में सल्फर डाइ-ऑक्साइड का सांदण भाग प्रति मिलियन [parts per million (ppm)] में ज्ञात करने के लिए एक अध्ययन किया गया। 30 दिनों के प्राप्त किए गए आंकड़े ये हैं :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 8
(i) 0.00-0.04, 0.04-0.08 आदि का वर्ग अंतराल लेकर इन आंकड़ों की एक वर्गीकृत बारंबारता बंटन सारणी बनाइए।
(ii) सल्फर डाइ-ऑक्साइड की सांद्रता कितने दिन 0.11 भाग प्रति मिलियन से अधिक रही?
हल :
दिए गए वर्ग अंतरालों के अनुसार दिए गए आंकड़ों की बारंबारता बंटन सारणी निम्न होगी-
(i)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 9
(ii) जितने दिन सल्फर डाइ-ऑक्साइड की सांद्रता 0.11 भाग प्रति मिलियन से अधिक रही = 2 + 4 + 2 = 8 दिन

प्रश्न 6.
तीन सिक्कों को एक साथ 30 बार उछाला गया। प्रत्येक बार चित (Head) आने की संख्या निम्न है :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 10
ऊपर दिए गए आंकड़ों के लिए एक बारंबारता बंटन सारणी बनाइए।
हल :
दिए गए आंकड़ों की बारंबारता बंटन सारणी निम्न है-
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 11

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2

प्रश्न 7.
50 दशमलव स्थान तक शुद्ध π का मान नीचे दिया गया है : [B.S.E.H. March, 2019]
3.14159265358979323846264338327950288419716939937510
(i) दशमलव बिंद्र के बाद आने वाले 0 से 9 तक के अंकों का एक बारंबारता बंटन बनाइए।
(ii) सबसे अधिक बार और सबसे कम बार आने वाले अंक कौन-कौन से हैं?
हल :
दिए गए π के मान में 0 से 9 तक के अंकों की बारंबारता बंटन सारणी निम्न होगी-
(i)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 12
(ii) सबसे अधिक बार आने वाले अंक = 3 व 9
सबसे कम बार आने वाले अंक = 0.

प्रश्न 8.
तीस बच्चों से यह पूछा गया कि पिछले सप्ताह उन्होंने कितने घंटों तक टी.वी. के प्रोग्राम देखे। प्राप्त परिणाम ये रहे हैं-
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 13
(i) वर्ग-चौड़ाई 5 लेकर और एक वर्ग अंतराल को 5-10 लेकर इन आंकड़ों की एक वर्गीकृत बारंबारता बंटन सारणी बनाइए।
(ii) कितने बच्चों ने सप्ताह में 15 या अधिक घंटों तक टेलीविजन देखा?
हल :
(i) दिए गए वर्ग-अंतरालों के अनुसार दिए गए आंकड़ों की बारंबारता सारणी अग्रांकित होगी-
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 14
(ii) जितने बच्चों ने सप्ताह में 15 घंटे या 15 घंटे से अधिक टेलीविजन देखा = 2

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2

प्रश्न 9.
एक कंपनी एक विशेष प्रकार की कार-बैट्री बनाती है। इस प्रकार की 40 बैट्रियों के जीवन-काल (वर्षों में) ये रहे हैं :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 15
0.5 माप के वर्ग-अंतराल लेकर तथा अंतराल 2-2.5 से प्रारंभ करके इन आंकड़ों की एक वर्गीकृत बारंबारता बंटन सारणी बनाइए।
हल :
दिए गए वर्ग-अंतरालों के अनुसार दिए गए आंकड़ों की बारंबारता बंटन सारणी निम्न होगी-
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 16

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.2 Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.1

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Exercise 14.1

प्रश्न 1.
उन आंकड़ों के पांच उदाहरण दीजिए जिन्हें आप अपने दैनिक जीवन से एकत्रित कर सकते हैं।
हल :
हमारे दैनिक जीवन में एकत्रित किए जाने वाले आंकड़ों के पांच उदाहरण निम्नलिखित हैं-

  • अपनी कक्षा में छात्रों की संख्या।
  • अपने विद्यालय में पंखों की संख्या।
  • पिछले दो वर्षों के घर की बिजली का बिल।
  • टेलीविजन या समाचार पत्रों से प्राप्त चुनाव के परिणाम।
  • शैक्षिक सर्वेक्षण से प्राप्त साक्षरता दर के आंकड़े।

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.1

प्रश्न 2.
ऊपर दिए गए प्रश्न 1 के आंकड़ों को प्राथमिक आंकड़ों या गौण आंकड़ों में वर्गीकृत कीजिए।
हल :
1. प्राथमिक आंकड़े : अन्वेषक द्वारा स्वयं एकत्रित किए गए आंकड़े प्राथमिक आंकड़े (Primary Data) कहलाते हैं। इसलिए प्रश्न (1) में (i), (ii) व (iii) प्राथमिक आंकड़ें हैं।
2. गौण आंकड़े : किसी अन्य स्रोत से प्राप्त किए गए आंकड़े गौण आंकड़े (Secondary data) कहलाते हैं। इसलिए प्रश्न (1) में (iv) व (v) गौण आंकड़े हैं।

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 14 सांख्यिकी Ex 14.1 Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Exercise 15.1

प्रश्न 1.
एक क्रिकेट मैच में, एक महिला बल्लेबाज खेली गई 30 गेदों में 6 बार चौका मारती है। चौका न मारे जाने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
कल संभाव्य परिणामों की संख्या = 30
कुल अनुकूल परिणामों की संख्या = 6
इसलिए चौका मारने की प्रायिकता = P (E) = \(\frac{6}{30}\) = \(\frac{1}{5}\)
P(चौका न मारा जाना) = 1 – \(\frac{1}{5}\)
= \(\frac{5-1}{5}=\frac{4}{5}\) उत्तर

प्रश्न 2.
2 बच्चों वाले 1500 परिवारों का यदृच्छया चयन किया गया है और निम्नलिखित आंकड़े लिख लिए गए हैं :

परिवार में लड़कियों की संख्या210
परिवारों की संख्या475814211

यदृच्छया चुने गए उस परिवार की प्रायिकता ज्ञात कीजिए, जिसमें
(i) दो लड़कियां हों
(ii) एक लड़की हो
(iii) कोई लड़की न हो
साथ ही, यह भी जांच कीजिए कि इन प्रायिकताओं का योगफल 1 है या नहीं।
हल :
(i) यहां पर,
कुल संभाव्य परिणामों (कुल परिवारों) की संख्या = 475 + 814 + 211 = 1500
दो लड़कियों वाले परिवारों (अनुकूल परिणामों) की संख्या = 475
P (दो लड़कियों वाले परिवार) = \(\frac{475}{1500}=\frac{19}{60}\) उत्तर

(ii) यहां पर,
कुल संभाव्य परिणामों (कुल परिवारों) की संख्या = 475 + 814 + 211 = 1500
1 लड़की वाले परिवारों (अनुकूल परिणामों) की संख्या = 814
P (एक लड़की वाले परिवार) = \(\frac{814}{1500}=\frac{407}{750}\) उत्तर

(iii) यहां पर,
कुल संभाव्य परिणामों (कुल परिवारों) की संख्या = 475 + 814 + 211 = 1500
0 लड़की वाले परिवारों (अनुकूल परिणामों) की संख्या = 211
P (कोई लड़की न हो) = \(\frac{211}{1500}\) उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1

प्रश्न 3.
अध्याय 14 के अनुच्छेद 14.4 का उदाहरण 5 लीजिए। कक्षा के किसी एक विद्यार्थी का जन्म अगस्त में होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल :
प्रश्नानुसार,
वर्ष में जन्में कुल विद्यार्थी (संभाव्य परिणामों की संख्या) = 40
अगस्त मास में जन्में विद्यार्थी (अनुकूल परिणामों की संख्या) = 6
∴ P (अगस्त में जन्म लेने वाला विद्यार्थी) = \(\frac{6}{40}=\frac{3}{20}\) उत्तर

प्रश्न 4.
तीन सिक्कों को एक साथ 200 बार उछाला गया है तथा इनमें विभिन्न परिणामों की बारंबारताएं ये हैं :

परिणाम3 चित2 चित1 चितकोई भी चित नहीं
बारंबारता23727728

यदि तीनों सिक्कों को पुनः एक साथ उछाला जाए, तो दो चित के आने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए। [B.S.E.H. March, 2017, 2020]
हल :
यहां पर,
कुल संभाव्य परिणामों की संख्या = 200 (23 + 72 + 77 + 28)
दो चित आने के अनुकूल परिणामों की संख्या = 72
∴ P (दो चित आएं) = \(\frac{72}{200}=\frac{9}{25}\) उत्तर

प्रश्न 5.
एक कंपनी ने यदृच्छया 2400 परिवार चुनकर एक घर की आय स्तर और वाहनों की संख्या के बीच संबंध स्थापित करने के लिए उनका सर्वेक्षण किया। एकत्रित किए गए आंकड़े नीचे सारणी में दिए गए हैं :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1 1
मान लीजिए एक परिवार चुना गया है। प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि चुने गए परिवार
(i) की आय ₹ 10000 – 13000 प्रति माह है और उसके पास ठीक-ठीक दो वाहन हैं।
(ii) की आय प्रति माह ₹ 16000 या इससे अधिक है और उसके पास ठीक 1 वाहन है।
(iii) की आय ₹ 7000 प्रति माह से कम है और उसके पास कोई वाहन नहीं है।
(iv) की आय ₹ 13000 – 16000 प्रति माह है और उसके पास 2 से अधिक वाहन हैं।
(v) जिसके पास 1 से अधिक वाहन नहीं है।
हल :
कुल संभाव्य परिणामों की संख्या = 2400
(i) ₹ 10000 – 13000 प्रति माह कमाने वाले परिवारों में 2 वाहनों वाले परिवारों (अनुकूल परिणामों) की संख्या = 29
∴ P (₹ 10000 – 13000 प्रति माह कमाने वाले 2 वाहनों वाले परिवार) = \(\frac{29}{2400}\) उत्तर

(ii) ₹ 16000 या इससे अधिक प्रति माह कमाने वाले परिवारों में 1 वाहन वाले परिवारों (अनुकूल परिणामों) की संख्या = 579
∴ P (₹ 16000 या इससे अधिक प्रतिमाह कमाने वाले 1 वाहन वाले परिवार) = \(\frac{579}{2400}\) उत्तर

(iii) ₹ 7000 प्रति माह से कम कमाने वाले परिवारों में कोई वाहन न होने वाले परिवारों (अनुकूल परिणाम) की संख्या = 10
∴ P (₹ 7000 प्रति माह से कम कमाने वाले शून्य वाहन वाले परिवार) = \(\frac{10}{2400}=\frac{1}{240}\)

(iv) ₹ 13000 – 16000 प्रति माह कमाने वाले परिवारों में 2 से अधिक वाहनों वाले परिवारों (अनुकूल परिणाम) की संख्या = 25
∴ P(₹ 13000 – 16000 प्रति माह कमाने वाले 2 से अधिक वाहन वाले परिवार) = \(\frac{25}{2400}=\frac{1}{96}\)

(v) 1 से अधिक वाहन न रखने वाले परिवारों की संख्या
(अनुकूल परिणाम) = 10 + 0 + 1 + 2 + 1 + 160 + 305 + 535 + 469 + 579 = 2062
∴ P (1 से अधिक वाहन न रखने वाले परिवार) = \(\frac{2062}{2400}=\frac{1031}{1200}\) उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1

प्रश्न 6.
अध्याय 14 की सारणी 14.7 लीजिए।
(i) गणित की परीक्षा में एक विद्यार्थी द्वारा 20 से कम अंक प्राप्त करने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
(ii) एक विद्यार्थी द्वारा 60 या इससे अधिक अंक प्राप्त करने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।

अंकविद्यार्थियों की संख्या
0-207
20-3010
30-4010
40-5020
50-6020
60-7015
70 – और इससे अधिक8
कुल योग90

हल :
(i) यहां पर,
कुल विद्यार्थियों की संख्या (संभाव्य परिणाम) = 90
20 से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी (अनुकूल परिणाम) = 7
∴ P (20 से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी) = \(\frac{7}{90}\) उत्तर

(ii) 60 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी
(अनुकूल परिणाम) = 15 + 8 = 23
∴ P (60 या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी) = \(\frac{23}{90}\) उत्तर

प्रश्न 7.
सांख्यिकी के बारे में विद्यार्थियों का मत जानने के लिए 200 विद्यार्थियों का सर्वेक्षण किया गया। प्राप्त आंकड़ों को नीचे दी गई सारणी में लिख लिया गया है : [B.S.E.H. March, 2019]

मत

विद्यार्थियों की संख्या

पसंद करते हैं135
पसंद नहीं करते हैं65

प्रायिकता ज्ञात कीजिए कि यदृच्छया चुना गया विद्यार्थी
(i) सांख्यिकी पसंद करता है
(ii) सांख्यिकी पसंद नहीं करता है।
हल :
यहां पर,
कुल विद्यार्थियों की संख्या (संभाव्य परिणाम) = 135 + 65 = 200
(i) सांख्यिकी पसंद करने वाले विद्यार्थी (अनुकूल परिणाम) = 135
∴ P (सांख्यिकी पसंद करने वाले विद्यार्थी) = \(\frac{135}{200}=\frac{27}{40}\) उत्तर

(ii) सांख्यिकी पसंद न करने वाले विद्यार्थी (अनुकूल परिणाम) = 65
∴ P (सांख्यिकी पसंद न करने वाले विद्यार्थी) = \(\frac{65}{200}=\frac{13}{40}\)

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1

प्रश्न 8.
प्रश्नावली 14.2 का प्रश्न 2 देखिए। इसकी आनुभविक प्रायिकता क्या होगी कि इंजीनियर :
(i) अपने कार्यस्थल से 7 कि०मी० से कम दूरी पर रहते हैं?
(ii) अपने कार्यस्थल से 7 कि०मी० या इससे अधिक दूरी पर रहते हैं?
(iii) अपने कार्यस्थल से \(\frac{1}{2}\) कि०मी० या इससे कम दूरी पर रहते हैं?
हल :
कल इंजीनियरों की संख्या (संभाव्य परिणाम) = 40
(i) अपने कार्यस्थल से 7 कि०मी० से कम दूरी पर रहने वाले इंजीनियरों की संख्या = 9
∴ P (एक इंजीनियर अपने कार्यस्थल से 7 कि०मी० से कम दूरी पर रहता है) = \(\frac{9}{40}\) उत्तर

(ii)
अपने कार्यस्थल से 7 कि०मी० या इससे अधिक दूरी पर रहने वाले इंजीनियरों की संख्या = 31
∴ P (एक इंजीनियर 7 कि०मी० या इससे अधिक दूरी पर रहता है) = \(\frac{31}{40}\) उत्तर

(iii) अपने कार्यस्थल से \(\frac{1}{2}\) कि०मी० या इससे कम दूरी पर रहने वाले इंजीनियरों की संख्या = 0
∴ P (एक इंजीनियर अपने कार्यस्थल से \(\frac{1}{2}\) कि०मी० या इससे कम दूरी पर रहता है) = \(\frac{0}{40}\) = 0 उत्तर

प्रश्न 9.
क्रियाकलाप : अपने विद्यालय के गेट के सामने से एक समय-अंतराल में गुजरने वाले दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों की बारंबारता लिख लीजिए। आप के द्वारा देखे गए वाहनों में से किसी एक वाहन का दो पहिया वाहन होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।
हल :
विद्यार्थी स्वयं हल करें।

प्रश्न 10.
क्रियाकलाप : आप अपनी कक्षा के विद्यार्थियों से एक 3 अंक वाली संख्या लिखने को कहिए। आप कक्षा से एक विद्यार्थी को यदृच्छया चुन लीजिए। इस बात की प्रायिकता क्या होगी कि उसके द्वारा लिखी गई संख्या 3 से भाज्य है? याद रखिए कि कोई संख्या 3 से भाज्य होती है, यदि उसके अंकों का योग 4 से भाज्य हो।
हल :
विद्यार्थी स्वयं हल करें।

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1

प्रश्न 11.
आटे की उन ग्यारह थैलियों में, जिन पर 5 कि०ग्रा० अंकित है, वास्तव में आटे के निम्नलिखित भार (कि०ग्रा० में हैं:
4.97 5.05 5.08 5.03 5.00 5.06 5.08 4.98 5.04 5.07 5.00
यदृच्छया चुनी गई एक थैली में 5 कि०ग्रा० से अधिक आटा होने की प्रायिकता क्या होगी?
हल :
यहां पर,
आटे की कुल थैलियों की संख्या (संभाव्य परिणाम).= 11
5 कि०ग्रा० से अधिक भार वाली थैलियों की संख्या (अनुकूल परिणाम) = 7
P(5 कि०ग्रा० से अधिक भार वाली थैली) = \(\frac{7}{11}\) उत्तर

प्रश्न 12.
प्रश्नावली 14.2 के प्रश्न 5 में आपसे 30 दिनों तक एक नगर की प्रति वायु में सल्फर डाई-ऑक्साइड की भाग प्रति मिलियन में सांद्रता से संबंधित एक बारंबारता बंटन सारणी बनाने के लिए कहा गया था। इस सारणी की सहायता से इनमें से किसी एक दिन अंतराल (0.12-0.16) में सल्फर डाई-ऑक्साइड के सांदण होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।

(ppm) में सल्फर डाई-ऑक्साइड का सांद्रणबारंबारता
0.00-0.044
0.04-0.089
0.08-0.129
0.12-0.162
0.16-0.204
0.20-0.242
कुल योग30

हल :
सारणी के अनुसार दिनों की कुल संख्या (संभाव्य परिणाम) = 30
जितने दिन (0.12 – 0.16) सांद्रता रही (अनुकूल परिणाम) = 2
∴ P (जितने दिन 0.12 – 0.16 सांद्रता रही) = \(\frac{2}{30}=\frac{1}{15}\) उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1

प्रश्न 13.
प्रश्नावली 14.2 के प्रश्न 1 में आपसे एक कक्षा के 30 विद्यार्थियों के रक्त-समूह से संबंधित बारंबारता बंटन सारणी बनाने के लिए कहा गया था। इस सारणी की सहायता से इस कक्षा से यदृच्छया चुने गए विद्यार्थी का रक्त-समूह AB होने की प्रायिकता ज्ञात कीजिए।

रक्त-समूहविद्यार्थियों की संख्या
A9
B6
O12
AB3
कुल योग30

हल :
सारणी के अनुसार विद्यार्थियों की कुल संख्या (संभाव्य परिणाम) = 30
AB रक्त-समूह वाले विद्यार्थियों की संख्या (अनुकूल परिणाम) = 3
∴ P (AB रक्त-संमूह वाला विद्यार्थी) = \(\frac{3}{30}=\frac{1}{10}\) उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 प्रायिकता Ex 15.1 Read More »

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

Haryana State Board HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

HBSE 6th Class Science पौधों को जानिए InText Questions and Answers

पहेली/बूझो

प्रश्न 1.
पहेली जानना चाहती है कि मनीप्लांट, सेम, लौकी तथा अंगूर के तने किस प्रकार के हैं? इनमें से कुछ पौधों को देखिए। ये शाक, झाड़ी और पेड़ से किस प्रकार भिन्न हैं। आपके विचार से इनमें से कुछ को ऊपर चढ़ने के लिए सहारे की आवश्कयता क्यों होती है?
उत्तर:
ये पौधे, शाक, झाड़ी तथा पेड़ों से विभिन्न होते हैं क्योंकि इनका तना कोमल एवं कमजोर होता है। ये पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते हैं और भूमि पर फैल जाते हैं। इसलिए इन्हें विसपी लताएँ कहते हैं। जबकि कुछ पौधे आस-पास में ढाँचे की सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं। ऐसे पौधे आरोही पौधे कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
बूझो के मस्तिष्क में अजब विचार आया। यदि वह जानना चाहता है कि पौधे की जड़ किस प्रकार की होगी, तो उसे पौधे को उखाड़ने की आवश्यकता नहीं है। वह पौधे की पत्तियों को देखकर इसका उत्तर दे सकता है।
उत्तर:
पौधे की पत्ती के शिराविन्यास को देखकर पौधे की जड़ का पता लगाया जा सकता है। समान्तर शिरा विन्यास पत्ती वाले पौधे की जड़ रेशेदार होती है। जबकि जालिकावत् शिराविन्यास वाले पौ? की जड़ें मूसला होती है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

HBSE 6th Class Science पौधों को जानिए Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न कश्चनों को ठीक करके लिखिए
(क) मा मिट्टी सेजल एवं खनिज अवशोषित करता है।
(ख) पत्तियाँ पौधे को सीधा खड़ा रखती हैं।
(ग) जड़ें जल को पत्तियों तक पहुँचाती हैं।
(घ) पुष्य में पुंकेसरों एवं पंखुड़ियों की संख्या सदा समान होती है।
(ङ) यदि किसी पुष्प के बाह्य दल परस्पर जुड़े हो तो उसकी पंखुड़ियाँ भी आपस में जुड़ी होंगी।
(च) यदि किसी पुष्प की पंखुड़ियाँ परस्पर जुड़ी हो तो स्त्रीकेसर पंखुड़ियों से जुड़ा होगा।
उत्तर:
(क) जड़ें मिट्टी से जल एवं खनिज अवशोषित करती हैं।
(ख) तना पौधे को सीधा खड़ा रखता है।
(ग) तना जल को पत्तियों तक पहुँचाता है।
(घ) पुष्प में पुंकेसरों एवं पंखुड़ियों की संख्या सदा समान नहीं होती है।
(ङ) यदि किसी पुष्प के बाह्यदल परस्पर जुड़े हों तो उसका पखुड़िया पृथक् होगा, परस्पर जुड़ा नहीं होगा।
(च) यदि किसी पुष्प की पंखुड़ियाँ परस्पर जुड़ी हों तो स्त्रीकेसर आवश्यक रूप से पंखुड़ियों से जुड़ा नहीं होगा।

प्रश्न 2.
निम्न के चित्र बनाइए
(क) पत्ती
(ख) मूसला जड़
(ग) एक पुष्प जिसका उपरोक्त सारणी में अध्ययन किया हो।
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -1

प्रश्न 3.
क्या आप अपने घर के आस-पास ऐसे पौधे को जानते हैं जिसका तना लम्बा परन्तु दुर्बल हो? इसका नाम लिखिए। आप इसे किस वर्ग में रखेंगे?
उत्तर:
हाँ, काशीफल का पौधा, इसे सहारे की आवश्यकता होती है। यह विसी लता है।

प्रश्न 4.
पौधे में तने का क्या कार्य है?
उत्तर:
1. तना पौधे को सहारा देता है।
2. तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से जड़ों को व अन्य भागों को भोजन पहुँचाया जाता है।

प्रश्न 5.
निम्न में से किन पत्तियों में जालिका रूपी शिरा विन्यास पाया जाता है
गेहूँ, तुलसी, मक्का, घास, धनिया, गुड़हल।
उत्तर:
तुलसी, धनिया, गुड़हल।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 6.
यदि किसी पौधे की जड़ रेशेदार हो तो उसकी पत्ती का शिरा विन्यास किस प्रकार का होगा?
उत्तर:
समान्तर शिराविन्यास।

प्रश्न 7.
यदि किसी पौधे की पत्ती में जालिका रूपी शिरा विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होगी?
उत्तर:
मूसला जड़।

प्रश्न 8.
क्या आप पत्तियों को देखे बिना उनकी पहचान कर सकते हैं?
उत्तर;
1. हाँ, पत्ती की छाप लेकर।
2. पत्ती के ऊपर एक कागज रखिये। पेंसिल को तिरछा पकड़िए तथा इसकी नौक से कागज के उस भाग को जिसके नीचे पत्ती है, धीरे-धीरे रगड़िए। आपको कुछ रेखाओं के साथ छाप दिखाई देगी।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -2
चित्र : पत्ती की छाप लेना

प्रश्न 9.
किसी पुष्प के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।
उत्तर:
पुष्य के विभिन्न भागों के नाम

  1. पुष्प वृन्त,
  2. बाह्य दल,
  3. पंखुड़ियाँ,
  4. पुंकेसर,
  5. परागकोष,
  6. स्त्रीकेसर,
  7. वर्तिका,
  8. वर्तिकान।

प्रश्न 10.
निम्न में से किन पौधों के फूल आपने देखे हैं
घास, मक्का , गेहूँ, टमाटर, तुलसी, पीपल, शीशम,
बरगद, आम, जामुन, अमरूद, अनार, पपीता, केला, नीबू, गन्ना, आलू, मूंगफली।
उत्तर:
हमने सभी पौधों को देखा है। इनमें से फूलों वाले पौधे हैं।
जामुन टमाटर अनार अमरूद
तुलसी केला पपीता नीबू
आम मिर्च

प्रश्न 11.
पौधों के उस भाग का नाम लिखिए जो अपना भोजन बनाता है। इस प्रक्रम को क्या कहते हैं?
उत्तर:
पत्तियाँ भोजन बनाती हैं। इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

प्रश्न 12.
पुष्प के किस भाग में अंडाशय मिलता है?
उत्तर:
अंडाशय स्त्रीकेसर का सबसे निचला एवं फूला हुआ भाग है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 13.
ऐसे दो पुष्यों के नाम लिखिए जिनमें से प्रत्येक में संयुक्त और अलग-अलग पंखुड़ियाँ हों।
उत्तर:
1. संयुक्त पंखुड़ियाँ – धतूरा, कनेर।
2. अलग-अलग पंखुड़ियाँ – कमल, सरसों।

HBSE 6th Class Science पौधों को जानिए Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पी प्रश्न : निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा पौधा झाड़ी है?
(क) गेहूँ
(ख) मेंहदी
(ग) पालक
(घ) पीपल
उत्तर:
(ख) मेंहदी

2. फलक भाग होता है
(क) जड़ का
(ख) तने का
(ग) पत्ती का
(घ) फल का
उत्तर:
(ग) पत्ती का

3. शिरा विन्यास पाया जाता है
(क) पत्तियों में
(ख) तने में
(ग) जड़ों में
(घ) पुष्यों में
उत्तर:
(क) पत्तियों में

4. पौधों द्वारा जल को वाष्प के रूप में उड़ाना कहलाता है
(क) प्रकाश संश्लेषण
(ख) संवहन
(ग) प्रकीर्णन
(घ) वाष्पोत्सर्जन
उत्तर:
(घ) वाष्पोत्सर्जन

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

II. रिक्त स्थान : निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए

1. हरे एवं कोमल तने वाले पौधे …………….. कहलाते हैं।
2. पत्ती के चपटे हरे भाग को …………….. कहते हैं।
3. पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को …………….. कहते हैं।
4. पुष्प के केन्द्र में स्थित भाग को …………….. कहते हैं।
उत्तर:
1. शाक
2. फलक
3. शिराविन्यास
4. स्त्रीकेसर

III. सुमेलन : कॉलम ‘A’ के शब्दों का मिलान कॉलम ‘B’ के शब्दों से कीजिए-

कॉलम ‘A’कॉलम ‘B’
(क) प्रकाश संश्लेषण(i) तना
(ख) जल संवहन(ii) जड़
(ग) पौधे का स्थिरक(iii) पुंकेसर व स्त्रीकेसर
(घ) पुष्प के जननांग(iv) पत्ती

उत्तर:

कॉलम ‘A’कॉलम ‘B’
(क) प्रकाश संश्लेषण(iv) पत्ती
(ख) जल संवहन(i) तना
(ग) पौधे का स्थिरक(ii) जड़
(घ) पुष्प के जननांग(iii) पुंकेसर व स्त्रीकेसर

IV. सत्य/असत्य : निम्नलिखित वाक्यों में सत्य एवं असत्य कथन छोटिए

(i) पीपल की पत्ती में जालिकावत् शिरा विन्यास पाया जाता
(ii) हम पौधे के उन भागों को खाते हैं जिनमें भोजन संचित होता है।
(iii) पुष्प पौधे का निरर्थक एवं अनाकर्षक भाग है।
(iv) अण्डाशय में छेटी-छेटी गोल संरचनाएं बीजाण्ड कहलाती है।
उत्तर:
1. सत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पौधों को कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है? नाम लिखिए।
उत्तर:
तीन वर्गों में शाक, झारा था वृक्ष।

प्रश्न 2.
पौधे के दो मुख्य भाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

जड़
तना।

प्रश्न 3.
खरपतवार क्या होता है?
उत्तर:
खेतों में बिना बोए उगने वाले (अनचाहे) पौधे खरपतवार कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
आरोही पौधे किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
कमजोर तने वाले पौधे जो आगे बढ़ने के लिए किसी का सहारा लेते हैं, आरोही पौधे कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
विसपी लताएं किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
ऐसे पौधे जो भूमि पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं, विसी लताएँ कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
किसी शाक के पत्तियोंयुक्त तने को लाल स्याही से रंगीन जल के गिलास में थोड़ी देर तक रखने पर आप क्या देखते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
तने का कुछ भाग, पत्तियाँ तथा पत्तियों की शिराएँ लाल दिखाई देती हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 7.
पत्तियों और शिराओं में लाल रंग कैसे पहुँचता (क्रियाकलाप)
उत्तर:
तने में उपस्थित महीन नलिकारूपी संरचनाओं द्वारा।

प्रश्न 8.
तने का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर:
जल तथा इसमें घुले खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाना तथा पत्तियों में बने भोजन को जड़ों तक पहुँचाना।

प्रश्न 9.
पत्ती क्या होती है?
उत्तर:
पौधे के तने पर लगा चपटा, चौड़ा एवं हरा भाग पत्ती कहलाता है।

प्रश्न 10.
पत्ती के मुख्य भागों के नाम लिखिए।
उत्तर:
1. पर्णवृन्त तथा
2. पटल।

प्रश्न 11.
पत्ती तने से कैसे जुड़ी होती है।
उत्तर:
पत्ती तने से पर्णवृन्त द्वारा जुड़ी होती है।

प्रश्न 12.
किसी जल सिंचित पौधे को दिन के समय पॉलीथीन से ढक देने पर आप पॉलीथीन में क्या देखते हैं और क्यों? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
पॉलीथीन की भीतरी सतह पर जल की बूंदें एकत्र हो जाती हैं। ये जल की बूंदें पत्तियों द्वारा वाष्प के रूप में जल के निष्कासन द्वारा बनी हैं।

प्रश्न 13.
वाष्पोत्सर्जन किसे कहते हैं?
उत्तर:
पौधों के हरे भागों से जल का वाष्य के रूप में उड़ना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है।

प्रश्न 14.
एक जड़युक्त पौधे तथा एक जड़ कटे पौधे को अलग-अलग गमलों में लगाकर नियमित रूप से पानी दिया गया गया। कौन सा पौधा स्वस्थ रहेगा और क्यों? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
जड़युक्त पौधा स्वस्थ रहेगा। क्योंकि जड़विहीन पौधा जल ग्रहण नहीं कर पाया और वह सूख गया।

प्रश्न 15.
दो ऐसे पौधों के नाम बताइए जिनमें मूसला जड़ें मिलती हैं।
उत्तर:

  • सरसों
  • चना।

प्रश्न 16.
दो ऐसे पौधों के नाम बताइए जिनमें रेशेदार जड़ें मिलती हैं।
उत्तर:

  • मक्का
  • गेहूँ।

प्रश्न 17.
दो ऐसी जड़ों के नाम लिखिए जिन्हें हम खाते हैं।
उत्तर:

  • गाजर
  • मूली।

प्रश्न 18.
बिना खिले पुष्प में पंखुड़ियाँ कहाँ बन्द रहती हैं? (क्रिया कलाप)
उत्तर:
बाह्य दलों के अन्दर।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 19.
अण्डाशय की काट पर जल की बूँद क्यों जाती है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
अण्डाशय की काट को सूखने से बचाने के लिए।

प्रश्न 20,
अण्डाशय की काट को आवर्धक लेंस द्वारा देखने पर आपको क्या दिखाई देता है। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
छोटी-छोटी गोल संरचनाएँ जिन्हें बीजाण्ड कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
शाक, झाड़ी तथा वृक्ष के दो-दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
शाक-गेहूँ, धनिया। झाड़ी-मेंहदी, गुड़हल।
वृक्ष-आम, बरगद।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण दीजिए-
(क) दो विसपी लताओं के नाम
(ख) दो जड़ों के नाम जिन्हें हम खाते हैं।
उत्तर:
(क)
(i) लौकी
(ii) कद्दू ।

(ख)
(i) गाजर
(ii) शकरकन्द।

प्रश्न 3.
जड़ तथा तने के दो-दो कार्य लिखिए।
उत्तर:
(क) जड़ के कार्य-

  • पौधे को भूमि में साधे रखना।
  • भूमि से जल एवं खनिज लवण अवशोषित करना।

(ख) तने के कार्य-

  • पत्नियों, पुष्पों व फलों को धारण करना।
  • जल एवं भोज्य पदार्थों का स्थानान्तरण करना।

प्रश्न 4.
एक सामान्य पत्ती का चित्र बनाकर उसके दो भागों के नाम व कार्य लिखिए।
उत्तर:
1. पर्ण वृन्त- यह पटल पत्ती को तने से जोड़ता है।
2. फलक- यह भोजन निर्माण करता है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -3

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 5.
आपके द्वारा अध्ययन किये गये कुछ खरपतवारों के नाम, इनमें जड़ों एवं शिरा विन्यास के प्रकार को दर्शाने के लिए एक तालिका बनाइए।
उत्तर:
जड़ के प्रकार एवं पत्तियों में शिरा-विन्यास के प्रकार

पौधों के नामशिरा विन्यास का प्रकारजड़ का प्रकार
1. बथुआजालिकावत्मूसला
2. जईसमान्तररेशेदार
3. सहूँसमान्तररेशेदार
4. चौलाईजालिकावत्मूसला

प्रश्न 6.
वाष्योत्सर्जन क्या होता है? हम यह कैसे पता करेंगे कि पौधे वाष्योत्सर्जन क्रिया में जलवाष्य निष्कासित करते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
पौधे की पत्तियों द्वारा अतिरिक्त जल को जल वाष्प के रूप में निष्कासित करना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। एक स्वस्थ पौधे को गमले में लेकर इसमें पर्याप्त पानी देकर इसे पॉलीथीन से पूर्णत: ढक देते हैं। अब इसे धूप में रख देते हैं। कुछ देर पश्चात हम पॉलीथीन की भीतरी सतह पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें देखते हैं। ये जल की बूंदें पत्तियों द्वारा वाष्पोत्सर्जन के फलस्वरूप बनती हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 7.
प्रकाश संश्लेषण क्या होता है?
उत्तर:
यह पौधों के हरे भागों (विशेषकर पत्तियों) में होने वाली एक प्रक्रिया है। इसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हरे रंग के पदार्थ द्वारा, कार्बन डाइऑक्साइड व जल ग्रहण करके अपना भोजन बनाते हैं। इस क्रिया में ऑक्सीजन मुक्त होती है।

प्रश्न 8.
मक्का और चने के बीजों को नम रुई पर उगाया गया। कुछ दिनों बाद दोनों नवोद्भिदों की जड़ों का निरीक्षण किया गया।
(i) चित्र में पहचानिए कौन-सी जड़ चना की है तथा कौन-सी मक्का की।
(i) दोनों जड़ों में एक समानता तथा अन्तर बताइए। (क्रिया कलाप)
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -4
(i) (a) मक्का की जड़
(b) चने की जड़

(ii) समानता : दोनों नीचे की ओर निकलती हैं।
अन्तर : मक्का की जड़ अशाखित है, जबकि चने की जड़ शाखित हैं।

प्रश्न 9.
मूसला जड़ एवं रेशेदार जड़ें किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
मूसला जड़-वे जड़ें जिनमें एक मुख्य जड़ होती है तथा इससे अनेक पार्श्व जड़ें निकलती हैं, मूसला जड़ कहलाती हैं।
रेशेदार जड़-ऐसी जड़ें जिनमें एक ही स्थान से धागे के समान अनेक जड़े निकलती हैं, रेशेदार जड़ें कहलाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी पौधे के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ आरेख चित्र बनाइए।
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -5

प्रश्न 2.
पौधों को उनकी लम्बाई, कोमल एवं कठोर गुण तथा शाखाओं के आधार पर कितने भागों में बाँटा गया है? सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उपरोक्त आधार पर पौधों को तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है-
1. शाक : ये कम लम्बाई वाले पौधे होते हैं। इनके तने कोमल तथा शाखाएँ छोटी होती हैं।
जैसे- गेहूँ, बथुआ, चना, मटर।

2. झाड़ी : ये पौधे मध्यम ऊँचाई के होते हैं। इन पौधों में कोई एक मुख्य तना नहीं होता है। अनेक तने एक ही स्थान से निकलते दिखाई देते हैं।
जैसे- मेंहदी, गुड़हल, बाँस आदि।

3. वृक्ष : ये अधिक ऊँचाई वाले पौधे होते हैं। इनमें एक मुख्य स्तम्भ होता है जो ऊपर जाकर काफी शाखित हो जाता है। इनका तना कठोर होता है।
जैसे- बरगद, आम, पीपल।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -6
चित्र : (a) शाक, (b) झाड़ी, () वृक्ष

प्रश्न 3.
आपके द्वारा देखे गए कुछ पौधों को शाक, झाड़ी अथवा वृक्ष संवर्ग में निम्नानुसार सारणी में वर्गीकृत कीजिए।
(i) ऊँचाई (स्वयं की लम्बाई से तुलना करके)
(ii) तना (हरा, कोमल, मोटा, कठोर)
(iii) शाखाएँ कहाँ से निकलती हैं (तने के आधार से या तने के ऊपर से)
(iv) पौधे का संवर्ग (शाक, झाड़ी या वृक्ष) (क्रियाकलाप)
उत्तर:
सारणी : पौधों के संवर्ग
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -7

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 4.
किसी क्रिया कलाप द्वारा स्पष्ट कीजिए कि पत्तियों में मण्ड का निर्माण होता है। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
आवश्यक सामग्री : पत्ती, स्प्रिट, बीकर, परखनली, बर्नर, जल, प्लेट एवं आयोडीन विलयन।
परखनली में एक पत्ती रखिए तथा उसमें पर्याप्त मात्रा में स्प्रिट डालें, जिससे पत्ती उसमें पूर्णत: डूबी रहे। अब इस परखनली को जल से आधे भरे बीकर में रखिए। बीकर को उस समय तक गर्म करते रहें जब तक पत्ती से हरा रंग पूर्णत: बाहर नहीं निकल जाता। अब पत्ती को परखनली से सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर जल से भली-भाँति धोएँ। इसे प्लेट में रखकर आयोडीन विलयन की कुछ बूंदें डालिए।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -8
पत्ती से हरा रंग बाहर निकल कर स्प्रिट में घुल जाता है और पत्ती रंगहीन दिखाई देती है। इस पत्ती पर आयोडीन की बूंदें डालने पर इसका रंग नीला-काला हो जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि पत्ती में मण्ड उपस्थित है।

प्रश्न 5.
किसी बगीचे या खेत में जाकर विभिन्न प्रकार के पौधों (खरपतवारों) को उखाड़कर देखिए तथा उनके नामांकित चित्र बनाइए। चित्र में जड़ों के प्रकार भी बताइए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -9

प्रश्न 6.
किसी पुष्प का नामांकित चित्र बनाकर उसके भागों के नाम अंकित कीजिए। स्त्रीकेसर तथा पुंकेसर के चित्र बनाकर उनका कार्य लिखिए।
उत्तर:
पुष्प के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ चित्र-
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -10
स्त्रीकेसर: यह पुष्प का मादा भाग है। इसका फूला हुआ नीचे का भाग अण्डाशय कहलाता है। इसके ऊपर का सँकरा भाग वर्तिका तथा वर्तिका के ऊपर धुंडी जैसा भाग वर्तिकान कहलाता है।
कार्य: अण्डाशय के अन्दर बीज का निर्माण होता है तथा यह फूलकर फल बनाता है।

पुंकेसर: यह पुष्प का नर अंग है। इसका लम्बा पतला भाग तंतु तथा ऊपर का फूला भाग परागकोष कहलाता है।
कार्य: परागकोष के अन्दर परागकण बनते हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -11

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 7.
पुष्प के अण्डाशय की आन्तरिक संरचना का अध्ययन कैसे किया जाता है? अण्डाशय की आन्तरिक संरचना का चित्र बनाइए।
उत्तर:
अण्डाशय स्त्रीकेसर का सबसे निचला फूला हुआ भाग है। इसकी आन्तरिक संरचना के अध्ययन के लिए इसे काटना पड़ता है। अण्डाशय को दो प्रकार से काटा जा सकता है जैसा कि नीचे दिये गये चित्रों में दर्शाया गया है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -12
अलग-अलग पुष्पों से दो अण्डाशय लेते हैं। दोनों अण्डाशयों को प्लेट पर रखकर चित्र के अनुसार काट सकते हैं। अण्डाशय की काट को सूखने से बचाने के लिए प्रत्येक काट पर जल की एक बूंद रखिए।
आवर्धक लैंस की सहायता से अण्डाशय की आन्तरिक रचना का अध्ययन कीजिए। आपको अण्डाशय के अन्दर छोटी-छोटी गोल रचनाएँ दिखाई देती हैं, जिन्हें बीजाण्ड कहते हैं।

प्रश्न 8.
विभिन्न पौधों के पुष्पों का अवलोकन करके निम्न प्रश्नों के उत्तर सारणीबद्ध कीजिए
उत्तर:
बाह्य दल एवं पंखुड़ियों का भली-भाँति अवलोकन कीजिए तथा निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1. इसमें कितने बाह्य दल है?
2. क्या ये आपस में जुड़े हैं?
3. बाह्य दल एवं पंखुड़ियाँ किन रंगों की हैं?
4. आपके फूल में पंखुड़ियों की संख्या कितनी है?
5. क्या वे एक-दूसरे से जुड़ी हैं अथवा स्वतन्त्र हैं?
6. क्या जुड़े हुए बाह्य दल वाले पुष्प की पंखुड़ियाँ अलग-अलग है या संयुक्त ? अपनी कक्षा के सभी विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न पुष्पों के अध्ययन सम्बन्धी प्रेक्षण सारणी में लिखिए।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -14

प्रश्न 9.
निम्न ग्रिड में पौधे के विभिन्न भागों के नाम छिपे हुए हैं। ऊपर, नीचे, दाएँ, बाएँ और तिर्यक दिशा में जाकर उन नामों को ढ़ँढिए। नाम का घेरा लगाइए।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -15
उत्तर:
(i) Ovule
(ii) Filament
(iii) Flower
(iv) Stem
(v) Stamen
(vi) Sepal
(vii) Midrib
(viii) Fruit
(ix) Vein
(x) Herb
(xi) Ovary
(xii) Petal

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

पौधों को जानिए Class 6 HBSE Notes in Hindi

→ सामान्यतः पौधों का वर्गीकरण उनकी ऊँचाई, तने एवं शाखाओं के आधार पर शाक, झाड़ी तथा वृक्ष में किया जाता है।
→ पौधे का जमीन के अन्दर का भाग जड़ तंत्र तथा जमीन के बाहर का भाग प्ररोह तंत्र कहलाता है। प्ररोह तंत्र में तना, शाखाएँ एवं पत्तियाँ होती हैं।
→ तने पर पत्तियाँ, पुष्प तथा फल बनते हैं।
→ सामान्यत: पत्ती में पर्णवृन्त तथा फलक होते हैं।
→ पत्ती में शिराओं का प्रतिरूप शिराविन्यास कहलाता है।
→ यह दो प्रकार का होता है- जालिका रूपी तथा समान्तर।
→ पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा जलवाष्प को वायु में निष्कासित करती हैं।
→ हरी पत्तियों सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु एवं जल से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन बनाती है।
→ जड़ें मिट्टी से जल एवं खनिज पदार्थों का अवशोषण करती है तथा पौधों को मिट्टी में दृढ़ता से जमाए रखती हैं।
→ जड़ें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं मूसला जड़ एवं रेशेदार जड़ा।
→ जालिका रूपी शिराविन्यास युक्त पत्तियों वाले पौधों की जड़ें मूसला जड़ होती हैं, जबकि समान्तर शिराविन्यास युक्त पत्तियों वाले पौधों की जड़ें रेशेदार होती हैं।
→ तने द्वारा जड़ों से पत्तियों और अन्य भागों को जल और पत्तियों से भोजन पौधे के अन्य भागों तक पहुँचता है।
→ पुष्प के विभिन्न भाग हैं बाह्य दल, पंखुड़ी, पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर।
→ शाक – हरे एवं कोमल तने वाले पौधे शाक कहलाते हैं।
→ झाड़ी – ऐसे मध्यम ऊँचाई के पौधे जिनमें एक समान कई तने जमीन से निकल कर झाड़ बनाते हैं।
→ वृक्ष – ऐसे बड़े पौधे जिनमें एक मुख्य तना होता है।
→ विसपी लताएँ – कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और ये भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसी लता कहते हैं।
→ आरोही – ऐसे कमजोर पौधे जो किसी सहारे के द्वारा ऊपर बढ़ते हैं, आरोही कहलाते हैं।
→ पर्ण वृन्त – पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा पत्ती तने से जुड़ी रहती है।
→ फलक – पत्ती का चौड़ा हरा भाग। शिरा-पत्ती में उपस्थित नाड़ियाँ।
→ मध्य शिरा – पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है।
→ शिराविन्यास – पत्ती में शिराओं की व्यवस्था।
→ जालिकावत् शिराविन्यास – पत्ती में जब सभी शिराएँ मिलकर एक जाल-सा बनाती हैं तो इसे जालिकावत् शिरा विन्यास कहते हैं।
→ समान्तर शिराविन्यास – पत्ती में जब सभी शिराएँ एक-दूसरी के समान्तर फैली होती हैं तो इसे समान्तर शिरा विन्यास कहते हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

→ वाष्पोत्सर्जन – पत्तियों द्वारा जल को वाष्प के रूप में निकालने की प्रक्रिया।
→ प्रकाश संश्लेषण – पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश में भोजन बनाने की प्रक्रिया।
→ मूसला जड़ – मुख्य जड़ जिससे पार्श्व जड़ें निकलती है।
→ रेशेदार जड़ – जिन पौधों में कोई एक मुख्य जड़ नहीं होती और सभी जड़ें एक समान दिखाई देती हैं तथा एक ही स्थान से निकलती हैं, इन्हें झकड़ा जड़ें या रेशेदार जड़ें कहते हैं।
→ पार्श्व जड़ – मुख्य मूसला जड़ से निकली जड़ें पार्श्व जड़ें कहलाती हैं।
→ संवहन – तने द्वारा जल एवं खनिजों का स्थानान्तरण संवहन कहलाता है।
→ बाह्यदल – फूल की कलिका छटी-छोटी हरी पत्तियों जैसी रचना से ढकी होती है जिन्हें बाह्यदल कहते हैं।
→ पंखुड़ियाँ – फूलों के बाह्यदल से घिरा आकर्षक प्रमुख रंगीन भाग।
→ पुंकेसर – पुष्प के नर भाग जो परागकण उत्पन्न करते हैं।
→ स्त्री-केसर – पुष्प के मादा भाग जो बीजाण्ड उत्पन्न करते हैं।
→ बीजाण्ड – अण्डाशय में छोटी-छोटी गोल संरचनाएँ जो बीज बनाती हैं।

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Exercise 13.4

[नोट- जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।

प्रश्न 1.
निम्न त्रिज्या वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए :
(i) 10.5 सें०मी०
(ii) 5.6 सें०मी०
(iii) 14 सें०मी०
हल :
(i) यहां पर,
गोले की त्रिज्या (r) = 10.5 सें०मी० = \(\frac{105}{10}\) सें०मी० = \(\frac{21}{2}\) सें०मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4 × \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{2} \times \frac{21}{2}\) सें०मी०
= 1386 सें०मी०2 उत्तर

(ii) यहां पर,
गोले की त्रिज्या (r) = 5.6 सें०मी० = \(\frac{56}{10}\) सें०मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4 × \(\frac{22}{7} \times \frac{56}{10} \times \frac{56}{10}\) सेमी
= \(\frac{39424}{100}\) में.मी०2
= 394.24 सें०मी० उत्तर

(iii) यहां पर,
गोले की त्रिज्या (r) = 14 सें०मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 14 सें०मी०2
= 2464 सें०मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 2.
निम्न व्यास वाले गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए :
(i) 14 सें०मी०
(ii) 21 से०मी०
(iii) 3.5 मी०
हल :
(i) यहां पर,
गोले का व्यास (d) = 14 सें०मी०
गोले की त्रिज्या (r) = \(\frac{14}{2}\) सें०मी० = 7 सें०मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 सें०मी०
= 616 सें०मी०2 उत्तर

(ii) यहां पर,
गोले का व्यास (d) = 21 सें०मी०
गोले की त्रिज्या (r) = \(\frac{21}{2}\) सें०मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4 × \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{2} \times \frac{21}{2}\) सें०मी०2
= 1386 सें०मी०2 उत्तर

(iii) यहां पर,
गोले का व्यास (d) = 3.5 मी० = \(\frac{35}{10}\) मी० = \(\frac{7}{2}\) मी०
गोले की त्रिज्या (r) = \(\frac{7}{2 \times 2}\) मी० = \(\frac{7}{4}\) मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4 × \(\frac{22}{7} \times \frac{7}{4} \times \frac{7}{4}\) मी०2
= \(\frac{77}{2}\) मी०2
= 38.5 मी०2 उत्तर

प्रश्न 3.
10 सें०मी० त्रिज्या वाले एक अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए।)
हल :
यहां पर,
अर्धगोले की त्रिज्या (r) = 10 सें०मी०
∴ अर्धगोले का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 3πr2
= 3 × 3.14 × 10 × 10 सें०मी०2
= 942 सें०मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 4.
एक गोलाकार गुब्बारे में हवा भरने पर, उसकी त्रिज्या 7 सें०मी० से 14 सें०मी० हो जाती है। इन दोनों स्थितियों में, गुब्बारे के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
पहली अवस्था में गुब्बारे की त्रिज्या (r1) = 7 सें०मी०
पहली अवस्था में गुब्बारे का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr12
= 4 × \(\frac{22}{7}\) × 7 × 7 सें०मी०2
= 616 सें०मी०2
दूसरी अवस्था में गुब्बारे की त्रिज्या (r2) = 14 सें०मी०
दूसरी अवस्था में गुब्बारे का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr22
=4 × \(\frac{22}{7}\) × 14 × 14 सें०मी०2
= 2464 सें०मी०2
दोनों अवस्थाओं में पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = क्षेत्रफल I : क्षेत्रफल II
= 616 : 2464
= 1 : 4 उत्तर

प्रश्न 5.
पीतल से बने एक अर्धगोलाकार कटोरे का आंतरिक व्यास 10.5 सें०मी० है। ₹ 16 प्रति 100 सें०मी० की दर से इसके आंतरिक पृष्ठ पर कलई कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
अर्धगोलाकार कटोरे का अंतः व्यास (d) = 10.5 सें०मी० = \(\frac{105}{10}\) सें०मी० = \(\frac{21}{2}\) सें०मी०
अर्धगोलाकार कटोरे की अंतः त्रिज्या (r) = \(\frac{21}{2 \times 2}\)सें०मी० = \(\frac{21}{4}\) सें०मी०
∴ अर्धगोलाकार कटोरे का अंतः वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πr2
= 2 × \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{4} \times \frac{21}{4}\) × सें०मी०2 = \(\frac{693}{4}\) सें०मी०2
100 सें०मी०2 क्षेत्र पर कलई कराने का व्यय = ₹ 16
1 सें०मी०2 क्षेत्र पर कलई कराने का व्यय = ₹ \(\frac{16}{10}\)
\(\frac{693}{4}\) सें०मी०2 क्षेत्र पर कलई कराने का व्यय = \(\frac{693 \times 16}{4 \times 100}\) = ₹ \(\frac{2772}{100}\)
= ₹ 27.72 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 6.
उस गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए जिसका पृष्ठीय क्षेत्रफल 154 सें०मी० है। [B.S.E.H. March, 2020]
इल:
माना गोले की त्रिज्या = r सें०मी०
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 154 सें०मी०2
⇒ 4πr2 = 154
या 4 × \(\frac{22}{7}\)r2 = 154
या \(\frac{88}{7}\)r2 = 154
या r2 = \(\frac{154 \times 7}{88}=\frac{49}{4}\)
या r = \(\sqrt{\frac{49}{4}}\)
या r = \(\frac{7}{2}\) सें०मी० = 3.5 सें०मी०
अतः गोले की त्रिज्या = 3.5 सें०मी० उत्तर

प्रश्न 7.
चंद्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक-चौथाई है। इन दोनों के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल :
माना पृथ्वी का व्यास = 2x मी०
पृथ्वी की त्रिज्या = \(\frac{2 x}{2}\) = x मी०
पृथ्वी का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4πx2 मी०2
प्रश्नानुसार,
चंद्रमा का व्यास = \(\frac{2 x}{4}\) = मी०
चंद्रमा की त्रिज्या = \(\frac{2 x}{2 \times 4}=\frac{x}{4}\) मी०
∴ चंद्रमा का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2
= 4π × \(\frac{x}{4} \times \frac{x}{4}\) मी०2
= \(\frac{\pi x^2}{4}\) मी०2
चंद्रमा और पृथ्वी के पृष्ठीय क्षेत्रफलों का अनुपात = \(\frac{\pi x^2}{4}: \frac{4 \pi x^2}{1}\)
= πx2 : 16πx2
= 1 : 16 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4

प्रश्न 8.
एक अर्धगोलाकार कटोरा 0.25 सें०मी० मोटी स्टील से बना है। इस कटोरे की आंतरिक त्रिज्या 5 सें०मी० है। कटोरे का बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल : यहां पर,
अर्धगोलाकार कटोरे की अंतः त्रिज्या (r) = 5 सें०मी०
अर्धगोलाकार कटोरे की बाह्य त्रिज्या (R) = 5 + 0.25 = 5.25 सें०मी०
= \(\frac{525}{100}\) सें.मी० = \(\frac{21}{4}\) सें०मी०
अतः अर्धगोलाकार कटोरे का बाह्य वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πR2
= 2 × \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{4} \times \frac{21}{4}\) सें०मी०2 = \(\frac{693}{4}\) सें०मी०2
= 173.25 सें०मी०2 उत्तर

प्रश्न 9.
एक लंब वृत्तीय बेलन त्रिज्या r वाले एक गोले को पूर्णतया घेरे हुए है (देखिए आकृति)। ज्ञात कीजिए:
(i) गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(ii) बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल,
(iii) ऊपर (i) और (ii) में प्राप्त क्षेत्रफलों का अनुपात।
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 1
हल :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 2
(i) यहां पर,
गोले की त्रिज्या = r
∴ गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4πr2 उत्तर

(ii) यहां पर,
बेलन की त्रिज्या = r
बेलन की ऊंचाई = 2r
अतः बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2πr × 2r
= 4πr2 उत्तर

(iii) (i) तथा (ii) से प्राप्त क्षेत्रफलों का अनुपात = 4πr2 : 4πr2
= 1 : 1 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.4 Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Exercise 13.3

[नोट-जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।]

प्रश्न 1.
एक शंकु के आधार का व्यास 10.5 सें०मी० है और इसकी तिर्यक ऊंचाई 10 सें०मी० है। इसका वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
शंकु के आधार का व्यास (d) = 10.5 सें०मी० = \(\frac{105}{10}\) सें०मी० = \(\frac{21}{2}\) सें०मी०
शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac{21}{2 \times 2}=\frac{21}{4}\) सें०मी०
शंकु की तिर्यक ऊंचाई (l) = 10 सें०मी०
शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl
= \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{4}\) × 10 सें०मी०2
= 165 सें०मी०2 उत्तर

प्रश्न 2.
एक शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए, जिसकी तिर्यक ऊंचाई 21 मी० है और आधार का व्यास 24 मी० है।
हल :
यहां पर
शंकु के आधार का व्यास (d) = 24 मी०
शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac{24}{2}\) = 12 मी०
शंकु की तिर्यक ऊंचाई (l) = 21 मी०
∴ शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr (l + r)
= \(\frac{22}{7}\) × 12 × (21 + 12) मी०2
= \(\frac{22}{7}\) × 12 × 33 मी०2
= \(\frac{8712}{7}\) मी०2
= 1244.57 मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

प्रश्न 3.
एक शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 308 सें०मी०2 है और इसकी तिर्यक ऊंचाई 14 सें०मी० है। ज्ञात कीजिए:
(i) आधार की त्रिज्या,
(ii) शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल।
हल :
(i) यहां पर,
शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = ?
शंकु की तिर्यक ऊंचाई (l) = 14 सें०मी०
शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 308 सें०मी०2
⇒ πrl = 308
या \(\frac{22}{7}\) × r × 14 = 308
या 44r = 308
या r = \(\frac{308}{44}\) = 7 सें०मी०
अतः शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = 7 सें०मी० उत्तर

(ii) शंकु का कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = πr(l + r)
= \(\frac{22}{7}\) × 7 × (14 + 7) सें०मी०2
= 22 × 21 सें०मी०2
= 462 सें०मी०2 उत्तर

प्रश्न 4.
शंकु के आकार का एक तंबू 10 मी० ऊंचा है और उसके आधार की त्रिज्या 24 मी० है। ज्ञात कीजिए :
(i) तंबू की तिर्यक ऊंचाई,
(ii) तंबू में लगे केनवास (canvas) की लागत, यदि 1 मी०2 केनवास की लागत ₹ 70 है।
हल :
(i) यहां पर,
शंकु के आकार के तंबू के आधार की त्रिज्या (r) = 24 मी०
शंकु के आकार के तंबू की ऊंचाई (h) = 10 मी०
शंकु के आकार के तंबू की तिर्यक ऊंचाई (l) = \(\sqrt{(h)^2+(r)^2}\)
= \(\sqrt{(10)^2+(24)^2}\) मी०
= \(\sqrt{100+576}\) मी०
= \(\sqrt{676}\) मी०
= 26 मी० उत्तर

(ii) तंबू में लगे केनवास का क्षेत्रफल = πrl
= \(\frac{22}{7}\) × 24 × 26 मी०2
= \(\frac{13728}{7}\) मी०2
1 मी०2 केनवास की लागत = ₹ 70
\(\frac{13728}{7}\) मी०2 केनवास की लागत = \(\frac{13728}{7}\) × 70.
= ₹ 137280 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

प्रश्न 5.
8 मी० ऊंचाई और आधार की त्रिज्या 6 मी० वाले एक शंकु के आकार का तंबू बनाने में 3 मी० चौड़े तिरपाल की कितनी लंबाई लगेगी ? यह मानकर चलिए कि इसकी सिलाई और कटाई में 20 सें०मी० तिरपाल अतिरिक्त लगेगा। (π = 3.14 का प्रयोग कीजिए।)।
हल :
यहां पर, शंकु के आकार के तंबू के आधार की त्रिज्या (r) = 6 मी०
शंकु के आकार के तंबू की ऊंचाई (h) = 8 मी०
शंकु के आकार के तंबू की तिर्यक ऊंचाई (l) = \(\sqrt{(h)^2+(r)^2}\)
= \(\sqrt{(8)^2+(6)^2}\) मी०
= \(\sqrt{64+36}\) मी०
= \(\sqrt{100}\) मी०
= 10 मी०
तंबू में लगे तिरपाल का क्षेत्रफल = πrl
= 3.14 × 6 × 10 मी०2
= 188.4 मी०2
तिरपाल की चौड़ाई = 3 मी०
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3 1
जितनी तिरपाल सिलाई व कटाई में व्यर्थ गई = 20 सें०मी० = \(\frac{20}{100}\)मी०
= 0.2 मी०
अतः तिरपाल की कुल आवश्यक लंबाई = (62.8 + 0.2) मी०
= 63 मी० उत्तर

प्रश्न 6.
शंकु के आकार की एक गुंबद की तिर्यक ऊंचाई और आधार व्यास क्रमशः 25 मी० और 14 मी० हैं। इसकी वक्र पृष्ठ पर ₹ 210 प्रति 100 मी०2 की दर से सफेदी कराने का व्यय ज्ञात कीजिए। [B.S.E.H. March 2019]
हल :
यहां पर,
शंकु के आकार की गुंबद के आधार का व्यास (d) = 14 मी०
शंकु के आकार की गुंबद के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac{14}{2}\) = 7 मी०
शंकु के आकार की गुबंद की तिर्यक ऊंचाई (l) = 25 मी०
∴ शंकु के आकार की गुंबद का चक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl
= \(\frac{22}{7}\) × 7 × 25 मी०
= 550 मी०2
100 मी०2 क्षेत्रफल पर सफेदी कराने का व्यय = ₹ 210
1 मी०2 क्षेत्रफल पर सफेदी कराने का व्यय = ₹\(\frac{210}{100}\)
550 मी०2 क्षेत्रफल पर सफेदी कराने का व्यय = ₹ \(\frac{210}{100}\) × 550
= ₹ 1155 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3

प्रश्न 7.
एक जोकर की टोपी एक शंकु के आकार की है, जिसके आधार की त्रिज्या 7 सें०मी० और ऊंचाई 24 सें०मी० है। इसी प्रकार की 10 टोपियां बनाने के लिए आवश्यक गत्ते का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए। [B.S.E.H. March, 2017]
हल :
यहां पर,
जोकर की शंकु के आकार की टोपी के आधार की त्रिज्या (r) = 7 सें०मी०
जोकर की शंकु के आकार की टोपी की ऊंचाई (h) = 24 सें०मी०
जोकर की शंकु के आकार की टोपी की तिर्यक ऊंचाई (l)
= \(\sqrt{(r)^2+(h)^2}\)
= \(\sqrt{(7)^2+(24)^2}\) सें०मी०
= \(\sqrt{49+576}\) सें०मी०
= \(\sqrt{625}\) सें०मी०
= 25 सें०मी०
1 टोपी को बनाने में लगे गत्ते का क्षेत्रफल = πrl
\(\frac{22}{7}\) × 7 × 25 सें०मी०2
= 550 सेंमी०2
10 टोपियों को बनाने में लगे गत्ते का क्षेत्रफल = 550 × 10 सें०मी०2
= 5500 सें०मी०2 उत्तर

प्रश्न 8.
किसी बस स्टाप को पुराने गत्ते से बने 50 खोखले शंकुओं द्वारा सड़क से अलग किया हुआ है। प्रत्येक शंकु के आधार का व्यास 40 सें०मी० है और ऊंचाई 1 मी० है। यदि इन शंकुओं की बाहरी पृष्ठों को पेंट करवाना है और पेंट की दर ₹ 12 प्रति मी०2 है, तो इनको पेंट कराने में कितनी लागत आएगी ? (π = 3.14 और \(\sqrt{1.04}\) = 1.02 का प्रयोग कीजिए।)
हल :
यहां पर,
शंकु के आधार का व्यास (d) = 40 सें०मी० = 0.4 मी०
शंकु के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac{0.4}{2}\) = 0.2 मी०
शंकु की ऊंचाई (h) = 1 मी०
शंकु की तिर्यक ऊंचाई (l) = \(\sqrt{(r)^2+(h)^2}\) मी०
= \(\sqrt{(0.2)^2+(1)^2}\) मी०
= \(\sqrt{0.04+1}\) मी०
= \(\sqrt{1.04}\) मी०
= 1.02 मी०
1 शंकु का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = πrl
= 3.14 × 0.2 × 1.02 मी०2
= 0.64056 मी०2
50 शंकुओं का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 0.64056 × 50 मी०2
= 32.028 मी०2
1 मी०2 क्षेत्रफल पर पेंट करवाने का व्यय = ₹ 12
32.028 मी०2 क्षेत्रफल पर पेंट करवाने का व्यय = ₹ (32.028 × 12)
= ₹ 384.34 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.3 Read More »

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

Haryana State Board HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

HBSE 6th Class Science शरीर में गति InText Questions and Answers

बूझो/पहेली

प्रश्न 1.
बुझो पौधों की गति को लेकर आश्चर्यचकित है। वह जानता है कि पौधे एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति नहीं करते, परन्तु क्या वे किसी दूसरे प्रकार की गति प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर:
हाँ, पौधे रोशनी की ओर झुकते हैं।

प्रश्न 2.
जन्तु एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे गमन करते हैं?
उत्तर:
सारणी-एक स्थान से दूसरे स्थान तक जन्तुओं का गमन-

जन्तुगमन में प्रयुक्त होने वाला भाग/अंगजन्तु कैसे गमन करते हैं?
(i) गायपैर पैरचलकर
(ii) मनुष्यसम्पूर्ण शरीरचलकर
(iii) साँपपंखरेंगकर
(iv) पक्षीपंखउड़कर
(v) कीटपंख/चप्रूउड़कर
(vi) मछलीपादतैरकर
(vii) घोंघाशूकरेंगकर
(viii) केंचुआगमन में प्रयुक्त होने वाला भाग/अंगरेंगकर

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

HBSE 6th Class Science शरीर में गति Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) अस्थियों की संधियाँ शरीर को …………… में सहायता करती हैं।
(ख) अस्थियाँ एवं उपास्थि संयुक्त रूप से शरीर का …………… बनाते हैं।
(ग) कोहनी की अस्थियाँ …………… संधि द्वारा जुड़ी होती हैं।
(घ) गति करते समय …………… के संकुचन से अस्थियाँ खिंचती हैं।
उत्तर:
(क) गति करने
(ख) कंकाल
(ग) हिंज
(घ) पेशियों।

प्रश्न 2.
निम्न कथनों के आगे सत्य (T) तथा असत्य (F) को इंगित कीजिए
(क) सभी जन्तुओं की गति एवं चलन बिल्कुल एक समान होता है। ( )
(ख) उपास्थि अस्थि की अपेक्षा कठोर होती है।। ( )
(ग) अंगुलियों की अस्थियों में संधि नहीं होती। ( )
(घ) अग्रभुजा में दो अस्थियाँ होती हैं। (ङ) तिलचट्टों में बाह्य कंकाल पाया जाता है। ( )
उत्तर:
(क) असत्य
(ख) असत्य
(ग) असत्य
(घ) सत्य
(ङ) सत्य।

प्रश्न 3.
कॉलम 1 में दिए गए शब्दों का संबंध कालम 2 के एक अथवा अधिक कथन से जोड़िए

कॉलम – 1कॉलम – 2
ऊपरी जबड़ाशरीर पर पंख होते हैं।
मछलीबाह्य-कंकाल होता है।
पसलियाँहवा में उड़ सकता है।
घोघाएक अचल संधि है।
तिलचट्टाहृदय की सुरक्षा करती है।
बहुत धीमी गति से चलता है।
का शरीर धारा रेखीय होता है।

उत्तर:
ऊपरी जबड़ा – एक अचल संधि है।
मछली – शरीर पर पंख होते हैं। इस का शरीर धारा रेखीय होता है।
पसलियाँ – हृदय की सुरक्षा करती हैं।
घोंघा – बहुत धीमी गति से चलता है।
तिलचट्टा – बाह्य कंकाल होता है, हवा में उड़ सकता है।

प्रश्न 4.
निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए
(क) कंदुक-खल्लिका संधि क्या है?
(ख) कपाल की कौन-सी अस्थि गति करती है?
(ग) हमारी कोहनी पीछे की ओर क्यों नहीं मुड़ सकती?
उत्तर:
(क) एक अस्थि का गेंद वाला हिस्सा दूसरी अस्थि की कटोरी रूपी गुहिका में घुसा हुआ होता है। इस प्रकार की संधि सभी दिशाओं में गति प्रदान करती है।
(ख) निचला जबड़ा।
(ग) कोहनी पीछे की ओर नहीं मुड़ सकती क्योंकि इसमें हिन्ज संधि होती है जिसमें केवल आगे और पीछे एक ही दिशा में गति हो सकती है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

HBSE 6th Class Science शरीर में गति Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पी प्रश्न : निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए

1. संधियाँ जोड़ती हैं-
(क) हड्डियों को हड्डियों से
(ख) त्वचा को हड्डी से
(ग) पेशियों को
(घ) त्वचा से बालों को
उत्तर:
(क) हड्डियों को हड्डियों से

2. दरवाजे के कब्जे की भाँति कार्य करती है-
(क) कन्दुक खल्लिका संधि
(ख) धुराग्र संधि
(ग) हिन्ज संधि
(घ) अचल संधि
उत्तर:
(ग) हिन्ज संधि

3. ऊपरी जबड़े एवं कपाल के बीच संधि होती है-
(क) सचल संधि
(ख) अचल संधि
(ग) हिन्ज संधि
(घ) ये सभी
उत्तर:
(ख) अचल संधि

4. पसली पिंजर पाया जाता है, हमारे
(क) कपाल भाग में
(ख) वक्ष भाग में
(ग) उदर भाग में
(घ) श्रोणि भाग में
उत्तर:
(ख) वक्ष भाग में

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

II. रिक्त स्थान : निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए

1. गर्दन तथा सिर को जोड़ने वाली संधि ………. है।
2. धुराग्र संधि में …………. एक छल्ले में घूमती है।
3. शरीर की समस्त अस्थियाँ मिलकर हमारा आंतरिक …………… बनाती है।
4. हमारे वक्ष भाग में लम्बी अस्थियों का शंकुरूपी बक्सा ……………कहलाता है।
उत्तर:
1. धुराग्र संधि,
2. बेलनाकार अस्थि
3. कंकाल
4. पसली पिंजर।

III. सुमेलन : कॉलम ‘A’ के शब्दों का मिलान कॉलम ‘B’ के शब्दों से कीजिए-

कॉलम ‘Aकॉलम ‘B’
1. मेरूदण्ड(क) वक्षीय भाग में अस्थियों का बना बॉक्स
2. पसली पिंजर(ख) अस्थि जैसे नर्म अंग
3. उपास्थि(ग) संकुचन एवं शिथिलन करने वाली रचना
4. पेशी(घ) छोटी-छोटी अस्थियों से बनी संरचना

उत्तर:

कॉलम ‘Aकॉलम ‘B’
1. मेरूदण्ड(घ) छोटी-छोटी अस्थियों से बनी संरचना
2. पसली पिंजर(क) वक्षीय भाग में अस्थियों का बना बॉक्स
3. उपास्थि(ख) अस्थि जैसे नर्म अंग
4. पेशी(ग) संकुचन एवं शिथिलन करने वाली रचना

IV. सत्य/असत्य : निम्नलिखित वाक्यों में सत्य एवं असत्य कथन छाँटिए

1. जांघ की अस्थि हमारे शरीर की सबसे लम्बी अस्थि होती
2. हमारी कोहनी में हिन्ज संधि होती है।
3. एक शिशु में मेरुदण्ड 33 कशेरुकाओं का बना होता है।
4. कपाल अस्थियों का बना होता है।
उत्तर:
1. सत्य
2. सत्य
3. सत्य
4. सत्य।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जब आप अपनी नोटबुक पर लिखते हैं, तब आपके शरीर के कौन से भाग गति करते हैं?
उत्तर:
अंगुलियां, अंगूठा, कलाई, आँखें।

प्रश्न 2.
अपनी कोहनी के जोड़ पर पैमाना बाँधकर क्या आपकी कोहनी गति कर सकती है? (क्रियाकलाप)
उत्तर;
नहीं, हम कोहनी को नहीं मोड़ पाते हैं।

प्रश्न 3.
संधि किसे कहते हैं?
उत्तर:
शरीर के विभिन्न भागों को उसी स्थान से मोड़ अथवा घुमा सकते हैं, जहाँ पर दो हिस्से एक-दूसरे से जुड़े हो, उन स्थानों को सन्धि कहते हैं।

प्रश्न 4.
संधियाँ कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
संधियाँ दो प्रकार की होती हैं- चल संधि तथा अचल संधि।

प्रश्न 5.
कंधे और भुजा के बीच कौन-सी संधि पायी जाती है?
उत्तर:
कंदुक-खल्लिका संधि।

प्रश्न 6.
गर्दन तथा सिर को जोड़ने वाली संधि का नाम लिखिए।
उत्तर:
धुरान संधि।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

प्रश्न 7.
कोहनी में हिंज जोड़ होता है। क्या आप ऐसे जोड़ों के अन्य दो उदाहरण दे सकते हैं?
उत्तर:
घुटने की संधि, उँगलियों की संधि।

प्रश्न 8.
हिंज संधि की गति कन्दुक-खल्लिका संधि से किस प्रकार भिन्न है? (क्रियाकलाप)
उत्तर;
हिंज संधि में केवल दो दिशाओं में गति होती है, जबकि कन्दुक खल्लिका संधि में विभिन्न दिशाओं में गति होती है।

प्रश्न 9.
अचल संधि किसे कहते हैं? ये कहाँ पायी जाती हैं?
उत्तर:
जब संधि वाली अस्थियाँ हिल नहीं सकती तो ऐसी संधि अचल संधि कहलाती है। जैसे-खोपड़ी की संधियाँ।

प्रश्न 10.
अचल संधि का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ऊपरी जबड़े तथा कपाल की संधि।

प्रश्न 11.
ऊपरी जबड़े एवं कपाल के बीच कौन-सी संधि होती?
उत्तर:
अचल संधि होती है।

प्रश्न 12.
हमें शरीर की अस्थियों का कैसे पता चलता है?
उत्तर:
एक्स-रे द्वारा हमें शरीर की अस्थियों का पता चलता है।

प्रश्न 13.
गहरी सांस भरकर इसे कुछ समय तक रोकिए, अपने वक्ष और पीठ को हल्के से दबाकर अपनी अस्थियों का अनुभव करके बताइए कि आपकी पसलियों की संख्या कितनी है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
12 जोड़ी।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

प्रश्न 14.
घोंघा के चलन अंग का नाम लिखिए।
उत्तर:
पेशीय पाद घोंघा के चलन अंग होते हैं।

प्रश्न 15.
केंचुए के चलन अंग क्या हैं?
उत्तर:
शूक केंचुए के चलन अंग होते हैं।

प्रश्न 16.
अस्थि को कौन गति प्रदान करता है?
उत्तर:
पेशियाँ अस्थि को गति प्रदान करती हैं।

प्रश्न 17.
केंचुआ चिकनी सतह पर गति क्यों नहीं कर (क्रियाकलाप)
उत्तर;
चिकनी सतह पर केंचुआ के शूक बैस नहीं पाते, जिससे वह गति करने में असमर्थ होता है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार की संधियों के नाम तथा उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
संधियाँ दो प्रकार की होती हैं-
1. अचल संधि-जैसे-खोपड़ी की संधियाँ।

2. चल संधि-ये निम्न प्रकार की होती हैं

  • कंदुक खल्लिका संधि – बाँह के साथ कंधे की संधि।
  • हिन्ज संधि – कोहनी का जोड़।
  • धुराग्र संधि – गर्दन तथा सिर की संधि।

प्रश्न 2.
कंकाल किसे कहते हैं? इसमें कौन-कौन सी अस्थियाँ होती हैं? कंकाल के कार्य लिखिए।
उत्तर:
शरीर के अन्दर अनेक अस्थियों से मिलकर बना एक ढाँचा जो शरीर को एक आकार देता है, कंकाल कहलाता है। कंकाल में खोपड़ी, पसलियाँ, उरोस्थि, मेरुदण्ड, भुजाओं की अस्थियाँ तथा पैरों की अस्थियाँ सम्मिलित हैं।
कार्य-कंकाल शरीर को एक निश्चित आकृति प्रदान करता है तथा अन्दरूनी अंगों की रक्षा करता है।

प्रश्न 3.
कंदुक खल्लिका संधि क्या है ? चित्र बनाकर उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
जब किसी अस्थि का गेंद वाला भाग दूसरी अस्थि की/ कटोरी जैसी आकृति में फंसा होता है तो ऐसी संधि को कंदुक खल्लिका संधि कहते हैं। श्रोणिमेखला में जाँघ की अस्थि इसी प्रकार जुड़ी होती है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -1

प्रश्न 4.
धुराग्र सन्धि किसे कहते हैं? यह संधि कहाँ पायी जाती है?
उत्तर:
गर्दन तथा सिर को जोड़ने वाली संधि धुराग्र संधि होती है। इस प्रकार की संधि में एक अस्थि स्थिर होती है तथा इस पर दूसरी अस्थि इधर-उधर या आगे-पीछे गति कर सकती है। इसी संधि के कारण हम अपना सिर इधरउधर घुमा सकते हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

प्रश्न 5.
हिन्ज संधि क्या है? इसका चित्र बनाकर उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हिन्ज संधि एक कब्जे की तरह कार्य करती हैं। इस सन्धि में अस्थियाँ केवल एक ही दिशा में गति कर सकती हैं। कोहनी तथा घुटने में इसी प्रकार की संधियाँ होती हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -2

प्रश्न 6.
मानव कंकाल का चित्र बनाइए।
उत्तर:
मानव का कंकाल
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -3
चित्र: मानव कंकाल

प्रश्न 7.
उपास्थि किसे कहते हैं? कुछ ऐसे अंगों के नाम लिखिए जिनमें उपास्थि पायी जाती है।
उत्तर:
उपास्थि कंकाल के अतिरिक्त कुछ अन्य अंग भी हैं, जो हड्डियों जितने कठोर नहीं होते और जिन्हें मोड़ा जा सकता है, उन्हें उपास्थि कहा जाता है।
बाह्य कर्ण, नासा गुहा, पसलियों के किनारे आदि अंगों में उपास्थि पायी जाती है।

प्रश्न 8.
पेशी किसे कहते हैं? पेशियाँ कैसे कार्य करती हैं? चित्र बनाकर लिखिए।
उत्तर:
पेशी विशेष प्रकार के मांस तन्तु होते हैं, जो विभिन्न अंगों के बीच गति को आसान बनाते हैं। उदाहरण के लिए जब हमें अपना हाथ मोड़ना होता है तो हाथ की पेशियाँ सिकुड़ती हैं और जब हाथ को फैलाना होता है तो पेशियाँ फैलती हैं जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -4
चित्र : अस्थि को गति प्रदान करने में दो पेशियाँ संयुक्त रूप से कार्य करती हैं।

प्रश्न 9.
पक्षियों के कंकाल की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
पक्षियों का शरीर उड़ने, चलने एवं जल पर तैरने के अनुकूल होता है। उनकी अस्थियों में वायु प्रकोष्ठ होते हैं, जिनके कारण उनकी अस्थियाँ हल्की परन्तु मजबूत होती हैं। पश्चपाद की अस्थियाँ चलने व बैठने के लिए अनुकूलित होती हैं। अग्रपाद की अस्थियाँ रूपान्तरित होकर पक्षी के पंख बनाती हैं। कंधे की अस्थियाँ मजबूत होती हैं। वक्ष की अस्थियाँ उड़ने वाली पेशियों को जकड़े रखने के लिए विशेष रूप से रूपान्तरित होती हैं तथा पंखों को ऊपर-नीचे करने में सहायक होती हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

प्रश्न 10.
मछलियों में गति किस प्रकार होती है ? चित्र द्वारा दर्शाइए।
उत्तर:
मछलियों का शरीर धारा-रेखीय होता है अर्थात् मछली का सिर व पूँछ उसके मध्य भाग की अपेक्षा पतला एवं नुकीला होता है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -4.1
चित्र : मछली में गति

इस विशेष आकृति के कारण जल इधर-उधर निकल जाता है और मछली जल में सरलता से तैर सकती है। तैरने की प्रक्रिया में शरीर का अग्न भाग एक ओर मुड़ जाता है तथा पूँछ विपरीत दिशा में जाती है। यह क्रिया मछली में बार-बार होती है जिससे वह आगे बढ़ती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमारे शरीर के विभिन्न भागों की गतियों का विवरण सारणीबद्ध कीजिए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
तालिका – हमारे शरीर में गतियाँ
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -5

प्रश्न 2.
आप कागज और प्लास्टिक की गेंद से कन्दुक खल्लिका संधि कैसे बना सकते हैं? समझाइए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
कागज़ की एक पट्टी को एक बेलन (सिलिंडर) के रूप में मोड़िए। रबड़ अथवा प्लास्टिक की एक पुरानी गेंद में एक छेद करके (किसी के निरीक्षण में) उसमें मोड़े हुए कागज के बेलन को डालिए, जैसा कि चित्र में दशोया गया है। आप कागज के बेलन को गेंद पर भी चिपका सकते हैं। गेंद को एक छोटी कटोरी में रखकर चारों ओर घुमाने का प्रयास कीजिए। क्या गेंद कटोरी में स्वतंत्र रूप से घूमती है। यह कन्दुक-खल्लिका संधि की भांति ही कार्य करती है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -6

प्रश्न 3.
मनुष्य का पसली-पिजर तथा मेरुदण्ड का चित्र बनाकर संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
मनुष्य का पसली-पिंजर-
मनुष्य के वक्ष भाग में पसलियों का बना हुआ बक्से जैसा भाग पसली-पिंजर कहलाता है। इसमें हृदय, फेफड़े, यकृत आदि अंग सुरक्षित रहते हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -7
मनुष्य का मेरुदण्ड-
यह गर्दन से प्रारम्भ होकर पीठ के नीचे तक फैली एक दण्ड समान संरचना होती है। यह छोटी-छोटी अनेक हड्डियों की बनी होती है। पसली-पिंजर भी वक्ष क्षेत्र में इन अस्थियों से जुड़ा रहता है। मेरुदण्ड शरीर को सीधा खड़ा रखने तथा शरीर को मोड़ने में सहायता करता है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -8
चित्र : मेरुदण्ड

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के चित्र बनाकर इनका कार्य लिखिए
(क) कंधे की अस्थियाँ
(ख) श्रोणि अस्थियाँ
(ग) मानव खोपड़ी।
उत्तर;
(क) कंधे की अस्थियाँ : ये हाथ की अस्थियों को जोड़ती हैं तथा अनेक अंगों की रक्षा करती हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -9
कंधे की अस्थियाँ

(ख) श्रोणि अस्थियाँ : ये पादों की अस्थियों को जोड़ती हैं तथा उदर के अंगों की रक्षा करती हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -10
श्रोणि अस्थियाँ

(ग) मानव खोपड़ी : यह मस्तिष्क की रक्षा करती है तथा अनेक मुखीय अंग इसमें स्थित होते हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -11
चित्र : मानव खोपड़ी

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

प्रश्न 3.
सर्प कैसे गति करते हैं? चित्र द्वारा दर्शाइए।
उत्तर:
सर्प का मेरुदण्ड लम्बा होता है। शरीर की पेशियाँ क्षीण एवं असंख्य होती हैं। वे परस्पर जुड़ी होती हैं
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति -12
चाहे वे दूर क्यों न हों। पेशियों मेरुदण्ड, पसलियों एवं त्वचा को भी जोड़ती हैं। सर्प का शरीर अनेक वलय में मुड़ा होता है। इसी प्रकार सर्प का प्रत्येक वलय उसे आगे की ओर धकेलता है। इसका शरीर अनेक वलय बनाता है और प्रत्येक वलय आगे को धक्का देता है। इस कारण सर्प बहुत तेज गति से आगे की ओर चलता है परन्तु सरल रेखा में नहीं चलता।

→ हमारे शरीर में स्वतः ही अनेक गतियाँ निरन्तर होती रहती हैं। चलना, टहलना, दौड़ना, उड़ना, रेंगना, तैरना, कूदना इत्यादि जन्तुओं के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के कुछ तरीके हैं।
→ हमारे शरीर की ये गतियाँ कंकाल एवं पेशियों द्वारा सम्पन्न होती हैं।
→ अस्थि एवं उपास्थि मानव का कंकाल बनाते हैं। कंकाल शरीर का पिंजर बनाता है और एक आकृति भी देता है। कंकाल चलने में सहायक है और आंतरिक अंगों की सुरक्षा करता है।
→ मानव कंकाल खोपड़ी, मेरुदण्ड, पसलियों, वक्ष की अस्थि, कंधे एवं श्रोणि मेखला तथा हाथ एवं पैर की अस्थियों से बनता है।
→ पेशियों के जोड़े के एकान्तर क्रम में सिकुड़ने एवं फैलने से अस्थियाँ गति करती हैं।
→ अस्थियाँ एक-दूसरे से विभिन्न प्रकार की संधियों द्वारा जुड़ती हैं।
→ अस्थियों की संधियाँ अनेक प्रकार की होती हैं। यह संधियाँ अस्थि की प्रकृति एवं गति की दिशा पर निर्भर करती हैं।
→ पक्षियों की दृढ़ पेशियाँ तथा हल्की अस्थियाँ मिलकर उन्हें उड़ने में सहायता करती हैं। पक्षी पंखों को फड़फड़ा कर उड़ते हैं।
→ मछली शरीर के दोनों ओर एकान्तर क्रम में वलय बनाकर जल में तैरती है।
→ सर्प अपने शरीर के दोनों ओर एकान्तर क्रम में वलय बनाते हुए भूमि पर वलयाकार गति करता हुआ आगे की ओर फिसलता है। बहुत सारी अस्थियाँ एवं उसमें जुड़ी पेशियाँ शरीर को आगे की ओर धक्का देती हैं।
→ तिलचट्टे का शरीर एवं पैर कठोर आवरण से ढंके होते हैं जो बाह्य कंकाल बनाता है। वक्ष की पेशियाँ तीन जोड़ी पैरों एवं दो जोड़ी पंखों से जुड़ी होती हैं जो तिलचट्टे को चलने एवं उड़ने में सहायता करती हैं।
→ केंचुए में गति शरीर की पेशियों के बारी-बारी से विस्तारण एवं संकुचन से होती है। शरीर की अधः सतह पर शूक केंचुए को भूमि पर पकड़ बनाने में सहायक है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति

शरीर में गति Class 6 HBSE Notes in Hindi

→ घोंघा पेशीय पाद की सहायता से चलता है।
→ संधि – दो हड्डियों के जुड़ने के स्थान को संधि कहते हैं।
→ कंदुक खल्लिका संधि – एक अस्थि का गेंद वाला गोल हिस्सा दूसरी अस्थि की कटोरी रूपी गुहिका में फँसा हुआ हो तो वह कंदुक खल्लिका संधि कहलाती है। इस प्रकार की संधि – सभी दिशाओं में गति कर सकती है।
→ धरान संधि – गर्दन तथा सिर को जोड़ने वाली संधि।
→ हिन्ज संधि – अस्थियों का ऐसा जोड़ जो केवल एक दिशा में गति होने देता है जैसे-कोहनी की संधि।
→ अचल संधि – अस्थियों का जोड़ जो गति नहीं कर सकता
→ कंकाल – हमारे शरीर की सभी अस्थियाँ शरीर को एक निश्चित ढाँचा प्रदान करती हैं। इस ढाँचे को कंकाल कहते हैं।
→ पसली पिंजर – पसलियाँ, वक्ष की अस्थि एवं मेरुदण्ड से जुड़कर एक बक्से की रचना करती हैं। इस शंकुरूपी बक्से को पसली पिंजर कहते हैं।
→ मेरुदण्ड – गर्दन से लेकर पीठ से नीचे की ओर जाने वाली छोटी-छोटी अस्थियों से मिलकर बनी एक लम्बी दण्ड रूपी संरचना मेरुदण्ड कहलाती है।
→ कंधे की अस्थियाँ – कंधों के समीप दो उभरी हुई अस्थियाँ कंधे की अस्थियाँ कहलाती हैं।
→ श्रोणि अस्थियाँ – यह बॉक्स के समान एक ऐसी संरचना होती है जो उदर के नीचे के अंगों की रक्षा करती है।
→ उपास्थि – अस्थि के समान किन्तु मुलायम कंकाल।
→ पेशी – अस्थियों को गति प्रदान करने में सहायक संरचनाएँ।
→ जन्तुओं की चाल – जन्तुओं का चलने का तरीका।
→ शूक – बाल जैसी सख्त संरचना।
→ बाह्य कंकाल – मनुष्य के नाखून, तिलचट्टे का कठोर आवरण, गाय के सींग बाह्य कंकाल होते हैं।
→ धारारेखीय – शरीर की ऐसी आकृति जिसमें सिर एवं पूँछ मध्य भाग की अपेक्षा पतला एवं नुकीला होता है।

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 8 शरीर में गति Read More »

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Exercise 13.2

[नोट-जब तक अन्यथा न कहा जाए, π = \(\frac{22}{7}\) लीजिए।]

प्रश्न 1.
ऊंचाई 14 सें०मी० वाले एक लंब वृत्तीय बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 88 सें०मी०’ है। बेलन के आधार का व्यास ज्ञात कीजिए। [B.S.E.H. March, 2018]
हल :
यहां पर,
माना बेलन के आधार का व्यास (d) = 2r सें०मी०
बेलन के आधार की त्रिज्या (r) = r सें०मी०
बेलन की ऊंचाई (h) = 14 सें०मी०
बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 88 सें०मी०2
⇒ 2πrh = 88
या 2 × \(\frac{22}{7}\) × r × 14 = 88
या 88r = 88
या r = \(\frac{88}{88}\) = 1 सें०मी०
अतः बेलन के आधार का व्यास (d) = 2 × 1 = 2 सें०मी० उत्तर

प्रश्न 2.
धातु की एक चादर से 1 मी० ऊंची और 140 सें०मी० व्यास के आधार वाली एक बंद बेलनाकार टंकी बनाई जानी है। इस कार्य के लिए कितने वर्ग मीटर चादर की आवश्यकता होगी ?
हल :
यहां पर,
बेलनाकार टंकी का व्यास (d) = 140 सें०मी०
बेलनाकार टंकी की त्रिज्या (r) = \(\frac{140}{2}\) = 70 सें०मी० = 0.7 मी०
बेलनाकार टंकी की ऊंचाई (h) = 1 मी०
∴ बेलनाकार टंकी का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2 πr (r + h)
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 0.7 [0.7 + 1] मी०2
= 2 × 22 × 0.1 × 1.7 मी०2
= 7.48 मी०2
अतः टंकी बनाने के लिए आवश्यक चादर = 7.48 मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

प्रश्न 3.
धातु का एक पाइप 77 सें०मी० लंबा है। इसके एक अनुप्रस्थकाट का आंतरिक व्यास 4 सें०मी० है और बाहरी व्यास 4.4 सें०मी० है (आकृति अनुसार) ज्ञात कीजिए :
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2 1
(i) आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(ii) बाहरी वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल
(iii) कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल
हल :
(i) यहां पर,
पाइप का आंतरिक व्यास (dl) = 4 सें०मी०
पाइप की आंतरिक त्रिज्या (r) = \(\frac{4}{2}\) = 2 सें०मी०
पाइप की ऊंचाई (h) = 77 सें०मी०
∴ पाइप का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 2 × 77 सें०मी०2
= 968 सें०मी०2 उत्तर

(ii) पाइप का बाह्य व्यास (d2) = 4.4 सें०मी०
पाइप की बाह्य त्रिज्या (R) = \(\frac{4.4}{2}\) = 2.2 सें०मी०
पाइप की ऊंचाई (h) = 77 सें०मी०
∴ पाइप का बाह्य वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πRh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 2.2 × 77 सें०मी०2
= 1064.8 सें०मी०2 उत्तर

(iii) पाइप के दोनों सिरों का क्षेत्रफल = 2π(R2 – r2)
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × [(2.2 )2 – (2)2] सें०मी०2
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × [4.84 – 4] सें०मी०2
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 0.84 सें०मी०2 = 5.28 सें०मी०2
पाइप का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = [968 + 1064.8 + 5.28 ] सें०मी०2
= 2038.08 सें०मी०2 उत्तर

प्रश्न 4.
एक रोलर (roller) का व्यास 84 सें०मी० है और लंबाई 120 सें०मी० है। एक खेल के मैदान को एक बार · समतल करने के लिए 500 चक्कर लगाने पड़ते हैं। खेल के मैदान का मी० में क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
रोलर का व्यास (d) = 84 सें०मी०
रोलर की त्रिज्या (r) = \(\frac{84}{2}\) = 42 सें०मी०
रोलर की लंबाई (h) = 120 सें०मी०
∴ रोलर का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 42 × 120 सें०मी०2
= 31680 सें०मी०2
रोलर द्वारा 1 चक्कर लगाने में जितना क्षेत्रफल तय होता है = 31680 सें०मी०2
रोलर द्वारा 500 चक्कर लगाने में जितना क्षेत्रफल तय होता है = 31680 × 500 सें०मी०2
= \(\frac{31680 \times 500}{100 \times 100}\)मी०2
= 1584 मी०2
अतः खेल के मैदान का क्षेत्रफल = 1584 मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

प्रश्न 5.
किसी बेलनाकार स्तंभ का व्यास 50 सें०मी० है और ऊंचाई 3.5 मी० है। ₹ 12.50 प्रति m2 की दर से इस स्तंभ के वक्र पृष्ठ पर पेंट कराने का व्यय ज्ञात कीजिए।
हल :
यहां पर,
बेलनाकार स्तंभ का व्यास (d) = 50 सें०मी०
बेलनाकार स्तंभ की त्रिज्या (r) = \(\frac{50}{2}\) सें०मी० = 25 सें०मी० = \(\frac{25}{100}\) m = \(\frac{1}{4}\)m
बेलनाकार स्तंभ की ऊंचाई (h) = 3.5 मी० = \(\frac{35}{10}\)m
बेलनाकार स्तंभ का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × \(\frac{1}{4}\) × \(\frac{35}{10}\) × 275 मी०2
= \(\frac{55}{10}\) = 5.5 मी०2
1 मी०2स्तंभ पर पेंट करने का व्यय = ₹ 12.50
5.5 मी०2 स्तंभ पर पेंट करने का व्यय = ₹ (5.5 × 12.50)
= ₹ 68.75 उत्तर

प्रश्न 6.
एक लंब वृत्तीय बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल 4.4 मी०2 है। यदि बेलन के आधार की त्रिज्या 0.7 मी० है, तो उसकी ऊंचाई ज्ञात कीजिए। [B.S.E.H. March, 2020]
हल :
यहां पर,
लंब वृत्तीय बेलन की त्रिज्या (r) = 0.7 मी०
लंब वृत्तीय बेलन की ऊंचाई (h) = ?
लंब वृत्तीय बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 4.4 मी०2
⇒ 2πrh = 4.4
या 2 × \(\frac{22}{7}\) × 0.7 × h = 4.4
या 4.4h = 4.4
या h = \(\frac{4.4}{4.4}\) = 1 मी०
अतः लंब वृत्तीय बेलन की ऊंचाई = 1 मी० उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

प्रश्न 7.
किसी वृत्ताकार कुएं का आंतरिक व्यास 3.5 मी० है और यह 10 मी० गहरा है। ज्ञात कीजिए :
(i) आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल।
(ii) ₹ 40 प्रति m2 की दर से इसके वक्र पृष्ठ पर प्लास्टर कराने का व्यय।
हल :
यहां पर,
(i) कुएं का आंतरिक व्यास (d) = \(\frac{35}{10}\) मी० = \(\frac{7}{2}\) मी०
कुएं की आंतरिक त्रिज्या (r) = \(\frac{7}{2}\) × \(\frac{1}{2}\) = \(\frac{7}{4}\) मी०
कुएं की ऊंचाई (h) = 10 मी०
∴ कुएं का आंतरिक वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × \(\frac{7}{4}\) × 10 मी०2
= 110 मी०2 उत्तर

(ii) 1 मी०2 वक्र पृष्ठ पर प्लास्टर कराने का व्यय = ₹ 40
110 मी०2 वक्र पृष्ठ पर प्लास्टर कराने का व्यय = 110 × 40
= ₹ 4400 उत्तर

प्रश्न 8.
गरम पानी द्वारा गरम रखने वाले एक संयंत्र में 28 मी० लंबाई और 5 सें०मी० व्यास वाला एक बेलनाकार पाइप है। इस संयंत्र में गर्मी देने वाला कुल कितना पृष्ठ है ?
हल :
यहां पर, बेलनाकार पाइप का व्यास (d) = 5 सें०मी० = \(\frac{5}{100}\)मी० = \(\frac{1}{20}\)मी०
बेलनाकार पाइप की त्रिज्या (r) = \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{1}{20}\) मी० = \(\frac{1}{40}\) मी०
बेलनाकार पाइप की ऊंचाई (h) = 28 मी०
बेलनाकार पाइप का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × \(\frac{1}{40}\) × 28 मी०2
= 4.4 मी०2
अतः संयन्त्र में गर्मी देने वाला कुल पृष्ठ = 4.4 मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

प्रश्न 9.
ज्ञात कीजिए:
(i) एक बेलनाकार पेट्रोल की बंद टंकी का पार्श्व या वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल, जिसका व्यास 4.2 मी० है और ऊंचाई 4.5 मी० है।
(ii) इस टंकी को बनाने में कुल कितना इस्पात (steel) लगा होगा, यदि कुल इस्पात का \(\frac{1}{12}\) भाग बनाने में नष्ट हो गया है?
हल :
यहां पर,
(i) बेलनाकार टंकी का व्यास (d) = 4.2 मी०
बेलनाकार टंकी की त्रिज्या (r) = \(\frac{4.2}{12}\) = 2.1 m = \(\frac{21}{10}\) m
बेलनाकार टंकी की ऊंचाई (h) = 4.5 मी० = \(\frac{45}{10}\) मी०
बेलनाकार टंकी का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7} \times \frac{21}{10} \times \frac{45}{10}\) मी०2
= 59.4 मी०2 उत्तर

(ii) बेलनाकार टंकी का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2π(r + h)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2 2
= 87.12 मी०2 उत्तर
माना आवश्यक कुल इस्पात = x मी०2
जितना इस्पात बनाने में नष्ट हुआ = x × \(\frac{1}{12}\) = \(\frac{x}{12}\) मी०2
= x – \(\frac{x}{12}\) = 87.12
या 12x – x = 87.12 × 12
या 11x = 87.12 × 12
या x = \(\frac{87.12 \times 12}{11}\) = 95.04 मी०2
अतः टंकी को बनाने के लिए आवश्यक इस्पात = 95.04 मी०2 उत्तर

प्रश्न 10.
आकृति में, आप एक लैंपशेड का फ्रेम देख रहे हैं। इसे एक सजावटी कपड़े से ढका जाना है। इस फ्रेम के आधार का व्यास 20 सें०मी० है और ऊंचाई 30 सें०मी० है। फ्रेम के ऊपर और नीचे मोड़ने के लिए दोनों ओर 2.5 सें०मी० अतिरिक्त कपड़ा भी छोड़ा जाना है। ज्ञात कीजिए कि लैंपशेड को ढकने के लिए कुल कितने कपड़े की आवश्यकता होगी।
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 15 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2 3
हल :
यहां पर,
फ्रेम के आधार का व्यास (d) = 20 सें०मी०
फ्रेम के आधार की त्रिज्या (r) = \(\frac{20}{2}\) = 10 सें०मी०
फ्रेम की ऊंचाई = 30 सें०मी०
फ्रेम को लपेटने के लिए आवश्यक कपड़े की लंबाई (h) = (30 + 2.5 + 2.5) सें०मी०
= 35 सें०मी०
∴ आवश्यक कपड़े का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल = 2πrh
= 2 × \(\frac{22}{7}\) × 10 × 35 सें०मी०2
= 2200 सें०मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2

प्रश्न 11.
किसी विद्यालय के विद्यार्थियों से एक आधार वाले बेलनाकार कलमदानों को गत्ते से बनाने और सजाने की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कहा गया। प्रत्येक कलमदान को 3 सें०मी० त्रिज्या और 10.5 सें०मी० ऊंचाई का होना था। विद्यालय को इसके लिए प्रतिभागियों को गत्ता देना था। यदि इसमें 35 प्रतिभागी थे, तो विद्यालय को कितना गत्ता खरीदना पड़ा होगा?
हल :
यहां पर,
कलमदान के आधार की त्रिज्या (r) = 3 सें०मी०
कलमदान की ऊंचाई (h) = 10.5 सेंमी० = \(\frac{105}{10}\) सें०मी०
1 कलमदान बनाने के लिए आवश्यक गत्ता = वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल + आधार का क्षेत्रफल
= 2πrh + πr2
= [2 × \(\frac{22}{7}\) × 3 × \(\frac{105}{10}\) + \(\frac{22}{7}\) × 3 × 3] सें०मी०2
= \(\left[\frac{198}{1}+\frac{198}{7}\right]\) सें०मी०2
= \(\left[\frac{1386+198}{7}\right]\) सें०मी०2
= \(\frac{1584}{7}\) सें०मी०2
35 कलमदान बनाने के लिए आवश्यक गत्ता = 35 × \(\frac{1584}{7}\) सें०मी०2
= 7920 सें०मी०2
अतः विद्यालय को जितना गत्ता खरीदना पड़ेगा = 7920 सें०मी०2 उत्तर

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन Ex 13.2 Read More »

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

Haryana State Board HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

अति लघु उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1. (A)
वस्तुओं पर आई० एस० आई० (ISI) मार्क होने का क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
आई० एस० आई० मार्क भारतीय मानक संस्थान (Indian Standard Institute) द्वारा किसी वस्तु की उत्तमता के लिए दिया गया प्रमाण-पत्र है।

प्रश्न 1. (B)
खाद्य-पदार्थों के अतिरिक्त दस (चार) ऐसी वस्तुओं के नाम लिखिए जिन पर आई० एस० आई० मार्क लगा हो।
अथवा
उन चार वस्तुओं के नाम लिखो जिन पर आई० एस० आई० चिह्न लगाया जाता
उत्तर :
खाद्य-पदार्थों के अतिरिक्त दस वस्तुओं के नाम जिन पर आई० एस० आई० का मार्क होता है, निम्नलिखित हैं –

  1. गैस स्टोव
  2. गैस सिलेण्डर
  3. कुकिंग रेन्ज
  4. हेलमेट
  5. ब्लेड
  6. तराजू
  7. बाट
  8. विद्युत् प्रेस
  9. गीजर
  10. विद्युत् हीटर।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 2.
कोई भी चार मानकीकरण चिह्न बताएं।
उत्तर :
I.S.I., एगमार्क, हालमार्क, F.P.O., वूलमार्क।

प्रश्न 3.
औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम क्या है ?
उत्तर :
औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम 1940 में बनाये गये। इस अधिनियम के अन्तर्गत देश में तैयार की गई अथवा आयात की गई औषधियों तथा मादक पदार्थों के गुणों की जाँच की जाती है। इस नियम में समय-समय पर आवश्यकतानुरूप संशोधन किया जाता है।

प्रश्न 4.
औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम में क्या-क्या संशोधन किये गये ?
उत्तर :
सन् 1955, 1961, 1969 में इस अधिनियम में अनेक महत्त्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं तथा उपनियम बनाए गए हैं। इस अधिनियम के अनुसार यदि किसी औषधि अथवा मादक पदार्थ में प्रमाणित स्तर से नीचे के गुण पाए जाते हैं, तो उसे उसके निर्माता से उसके निर्माण का अधिकार छीन लेने के साथ-साथ उसके मालिक को एक वर्ष के कारावास का दण्ड भी दिया जाता है। इस अधिनियम में यह भी व्यवस्था है कि जो औषधियाँ एवं मादक पदार्थ बाजार में बिकने के लिए आएं उन पर लेबल लगा होना चाहिए और इस लेबल पर उपयुक्त सूचनाएं होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
एगमार्क क्या है ?
उत्तर :
एगमार्क, भारत सरकार के बिक्री एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा खाद्य-पदार्थों की उत्तमता के लिए दिया गया प्रमाण है।

प्रश्न 6.
I.S.I. मार्क क्या है ? इसकी स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
I.S.I. मार्क प्रयोग में लाये जाने वाले उपकरणों की उत्तमता का प्रमाण है। इसकी स्थापना 1947 में हुई।

प्रश्न 7.
पैकिंग के क्या लाभ हैं ?
उत्तर :

  1. पैकिंग करने से वस्तुएं खराब नहीं होती।
  2. वस्तुएँ टूटने से बचती हैं।
  3. उसमें मिलावट नहीं होती।
  4. उनकी मात्रा कम नहीं होती।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 8.
P.F.A. और F.P.O. का पूरा नाम बताएं।
उत्तर :
P.F.A. Prevention of Food Adulteration act. F.P.O. Food Product Order.

प्रश्न 9.
(A) एगमार्क का चिह्न किन पदार्थों पर लगाया जाता है ?
(B) चार वस्तुओं के नाम लिखें जिन पर एगमार्क चिह्न लगाया जाता है।
उत्तर :
एगमार्क का चिह्न निम्नलिखित पदार्थों पर लगाया जाता है-खाने के तेल, मक्खन, घी, अण्डों, मसालों आदि पर।

प्रश्न 10.
स्वेटर पर लगा वुलमार्क का लेबल हमें क्या सूचना देता है ?
उत्तर :
इससे पता चलता है कि स्वेटर की क्वालटी अच्छी है।

प्रश्न 11.
विज्ञापन उपभोक्ता की किस प्रकार मदद करते हैं ?
उत्तर :
विज्ञापन द्वारा उपभोक्ता को पदार्थ की सूचना, उपयोगिता का पता चलता है तथा उपभोक्ता की गलतफहमी दूर होती है।

प्रश्न 12.
उपभोक्ता शिक्षण का अर्थ समझाएं।
अथवा
उपभोक्ता शिक्षा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर :
उपभोक्ता शिक्षा का अर्थ है उपभोक्ता को अपने अधिकारों, हितों, अनहितों तथा सरकार द्वारा उसके हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में शिक्षित करना है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 13.
ईको लेबल किन वस्तुओं पर लगाया जाता है ?
उत्तर :
जो वस्तुएं वातावरण के अनुकूल हैं उन पर यह लेबल लगाया जाता है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान 1

प्रश्न 14.
उपभोक्ता की किन्हीं दो समस्याओं का उदाहरण सहित उल्लेख करें।
उत्तर :
उपभोक्ता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे विभिन्न वस्तुओं में मिलावट तथा दुकानदार द्वारा मानक बाटों के स्थान पर पत्थर आदि से बनाए बाटों का प्रयोग करना। खाद्य पदार्थों तथा और पदार्थों पर लेबल न लगे होना जैसे सरसों के तेल में आरगीमोन के तेल का मिला होना। जैसे गैस स्टोव पर आई० एस० आई० का चिहन न लगा होना।

प्रश्न 15.
समझदार उपभोक्ता के किन्हीं दो उत्तरदायित्वों का उल्लेख करें।
उत्तर :
देखें लघु उत्तरीय प्रश्न 2 का उत्तर।

प्रश्न 16.
स्तरता के चिहन क्या होते हैं ? किन्हीं दो चिहनों के नाम लिखें व बताएं कि ये किन उत्पादकों पर पाए जाते हैं ?
उत्तर :
स्तरता चिह्नों का प्रयोग वस्तुओं के उचित स्तर को बताने के लिए किया जाता है जैसे आई० एस० आई० तथा एगमार्क, एफ० पी० ओ० आदि।
1. एगमार्क कृषि से सम्बन्धित खाद्य पदार्थों के लिए।
2. आई० एस० आई० चिह्न कारखानों में बने पदार्थ उपकरणों के लिए।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 17.
मिलावट से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
किस स्थिति में भोज्य पदार्थ को मिलावटी कहा जाता है ?
उत्तर :
मिलावट से अर्थ है कि किसी खाद्य पदार्थ में कुछ ऐसा मिला देना जो सस्ता हो तथा उसी पदार्थ जैसा दिखे जैसे असली घी में वनस्पति घी की मिलावट। कई बार खाद्य पदार्थ में से कुछ पदार्थ निकाल दिया जाता है यह भी एक प्रकार की मिलावट है जैसे दूध में से क्रीम निकालकर दूध को पूरे मूल्य पर बेचना। कई बार कुछ दुकानदार अधिक पैसे कमाने के लालच में सेहत के लिए हानिकारक पदार्थ भी मिला देते हैं जैसे सरसों में आरगीमोन के बीज।

प्रश्न 18.
उपभोक्ता की उपलब्ध कोई चार सहायक सामग्री बतायें।
उत्तर :
विज्ञापन, मानकीकरण चिह्न, पर्चे, लेबल, पैकिंग आदि।

प्रश्न 19.
उपभोक्ता किसे कहते हैं ?
उत्तर :
जो भी व्यक्ति बाज़ार से या कहीं से वस्तुओं अथवा सेवाओं को खरीदता है तथा इनके बदले पैसे देता है तथा उपभोग करता है वह उपभोक्ता कहलाता है।

प्रश्न 20.
मानकीकरण चिहन उपभोक्ता की किस प्रकार मदद करते हैं ?
उत्तर :
उपभोग की विभिन्न वस्तुओं पर मानकीकरण चिह्न लगे रहते हैं जैसे F.P.O., एगमार्क, आई० एस० आई०, पी० एफ० ए०, वूल मार्क आदि। ये चिन सरकार द्वारा विभिन्न निर्माताओं को उचित जांच परख के बाद ही दिए जाते हैं। कोई भी निर्माता इन चिह्नों का गलत प्रयोग नहीं कर सकता। इस प्रकार यदि वस्तु पर मानकीकरण चिह्न लगा है तो उपभोक्ता बिना किसी हिचकिचाहट के वस्तु को खरीद सकता है। एगमार्क कृषि सम्बन्धी पदार्थों पर लगाया जाता है। ISI का मार्क प्रोसेस तथा पैक किए खाद्य पदार्थ जैसे बिस्कुट, सेवियां, पाऊडर दूध, बेकिंग पाऊडर आदि तथा उपकरणों जैसे प्रेशर कुक्कर, बिजली की प्रेस, गीजर, केतली, गैस चूल्हा आदि पर लगता है। यदि मानकीकरण चिहन लगा हो तो उपभोक्ता के मन को तसल्ली रहती है कि उसके पैसे का ठीक प्रयोग हुआ है। उपभोक्ता को इतनी वस्तुओं में से गुणवत्ता के आधार पर चयन की सुविधा हो जाती है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 21.
ISI मार्क क्या है ? यह किन चीज़ों पर लगाया जाता है ?
उत्तर :
देखें उपरोक्त प्रश्नों में।

लघु उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
दुकानदार किन विधियों से सामान कम तोलकर उपभोक्ताओं को ठगते हैं ?
अथवा
चार ऐसे तरीके बताएं जिनसे दुकानदार नापने व तौलने में गड़बड़ करते हैं ?
उत्तर :
सामान्यत: दुकानदार निम्नलिखित तरीकों से सामग्री कम तोलकर उपभोक्ताओं को ठगते हैं –
1. मिठाइयों को डिब्बे सहित, मांस को वेष्टित किए गए कागज़ के साथ तथा फलों एवं सब्जियों को पत्तों सहित तोलकर मुख्य वस्तु की कम मात्रा देते हैं। कुछ दुकानदार डिब्बे के एक ढक्कन को वज़न के साथ एक-दूसरे हिस्से में मिठाई आदि रखकर तोलते हैं और इस प्रकार से तोल के सही होने का भ्रम पैदा करते हैं जबकि वस्तुस्थिति यह होती है कि माल के साथ तोले जाने वाले डिब्बे का हिस्सा वज़न में भारी होता है तथा बाट के साथ रखा गया हिस्सा वज़न में कम होता है।

2. मानक बाटों के स्थान पर देशी बाटों या पत्थर आदि से बनाए गए घरेलू बाटों का प्रयोग करके।
3. घिसे हुए पुराने बाटों का प्रयोग करके।
4. तरल पदार्थों को लीटर के माप द्वारा मापने के स्थान पर तोल द्वारा बेचकर।
5. हाथ वाले तराजू का प्रयोग करते समय डंडी मारकर।
6. पैमाने वाले तराजू को दोषपूर्ण रखकर।
7. कुछ दुकानदार तराजू के जिस पलड़े में तोलने के लिए सामग्री रखी जाती है इसके नीचे चुम्बक रख देते हैं और इस प्रकार यह पलड़ा चुम्बक द्वारा नीचे की ओर खींच लिया जाता है। इस प्रकार उपभोक्ता को कम सामग्री प्राप्त होती है।

1. (क) दुकानदार नाप-तोल में गड़बड़ी कैसे करते हैं ?
उत्तर :
देखें प्रश्न 1 का उत्तर।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 2.
एक उपभोक्ता के रूप में आप अपने हक को सुरक्षित रखने के लिए किन-किन ज़िम्मेदारियों व कर्तव्यों को निभाने का प्रयास करेंगे ?
उत्तर :
एक उपभोक्ता के रूप में अपने हक को सुरक्षित रखने के लिए निम्नलिखित कर्तव्यों को निभाने का प्रयास करना चाहिए –
1. यदि यह भ्रम हो कि वस्तु में जान-बूझकर मिलावट की गई है, तो इस बात को नजरअन्दाज न कर उस मिलावट की रोकथाम की भरपूर कोशिश करनी चाहिए। इसकी जानकारी सम्बन्धित अधिकारियों को स्वयं जाकर, टेलीफोन द्वारा या पत्रों द्वारा देनी चाहिए।
2. उपभोक्ताओं को खाद्य-पदार्थ के निरीक्षकों की मिलावटी पदार्थों के नमूने लेने में सहायता करनी चाहिए तथा ऐसे प्रकरणों में गवाही देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
3. उपभोक्ताओं को अपूर्ण लेबल वाली वस्तुएं नहीं खरीदनी चाहिएं तथा अन्य परिचित लोगों को भी इन वस्तुओं को खरीदने की मनाही करनी चाहिए।
4. नकली वस्तुओं की खरीद से बचने के लिए वस्तुएं विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदनी चाहिए।
5. नकली वस्तुओं की बिक्री कम करने के लिए असली वस्तुओं के बारे में स्वयं जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ अपने परिचितों को भी इसकी जानकारी देनी चाहिए।
6. असत्य विज्ञापनों पर रोक लगवानी चाहिए। यदि विज्ञापन वस्तु विशेष से ताल मेल नहीं खाता तो इसकी सूचना सम्बन्धित विभाग को देनी चाहिए।
7. दोष-युक्त माप-तोल के साधनों के प्रयोग पर रोक लगानी चाहिए।

प्रश्न 2.
(A) उपभोक्ताओं के कोई तीन उत्तरदायित्व लिखें।
(B) उपभोक्ता के किसी एक मुख्य अधिकार के बारे में लिखिए।
(C) उपभोक्ता के चार कर्त्तव्य बताएं।
(D) उपभोक्ता के चार कर्तव्य लिखिए।
उत्तर :
देखें उपरोक्त प्रश्नों में।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 3.
नाम-पत्र या लेबल क्या होते हैं ? एक अच्छे नाम-पत्र में कौन-कौन से गुण होने चाहिएं ?
अथवा
एक अच्छे लेबल में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?
उत्तर :
किसी भी वस्तु को खरीदते समय उस वस्तु को तैयार करने में प्रयुक्त हुए पदार्थों की मात्रा, वस्तु का परिमाण एवं गिनती, तैयार पदार्थ की उत्तमता प्रयोग-विधि, गुणवत्ता मूल्य आदि को जानने का साधन उसकी पैकिंग पर चिपका हुआ नाम-पत्र या लेबल (Label) होता है। यही कारण है कि प्रत्येक उत्पादनकर्ता के लिए निर्मित पदार्थ की पैकिंग पर एक ऐसा लेबल चिपका होना जरूरी होता है जिससे उपभोक्ता को ये सारी सूचनाएं मिल सकें। इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि निर्माता अथवा उत्पादक द्वारा किसी वस्तु पर चिपकाए गए लेबल में दी गई सारी सूचनाएं सही हों। यदि इस प्रकार का कोई बन्धन न हो तो बेईमान वस्तु निर्माता लेबल पर गलत सूचना देकर उपभोक्ता को गुमराह कर सकता है। भारतीय मानक संस्थान ने तैयार खाद्य-पदार्थों पर चिपकाए गए लेबलों में निम्नलिखित गुणों का होना ज़रूरी बताया है –

1. खाद्य-पदार्थों पर चिपकाया गया लेबल स्पष्ट होना चाहिए जिसे पढ़कर उपभोक्ता को वस्तु की गुणवत्ता आदि के बारे में कोई धोखा न हो।
2. दूसरे पदार्थों से मिलते-जुलते नामों, चित्रों, संकेतों आदि का नाम प्रयोग नहीं होना चाहिए अन्यथा उपभोक्ता को धोखा हो सकता है।
3. लेबल पर किसी ऐसे अधिनियम, नियम अथवा निर्देश का उल्लेख नहीं होना चाहिए जिसके फलस्वरूप लेबल पर दिए गए विवरणों एवं गुणवत्ता में बदलाव आ जाए।
4. चिपकाए गए लेबल पर अग्रलिखित सूचनाएं होनी चाहिए –

  • खाद्य-पदार्थ का नाम।
  • खाद्य-पदार्थ तैयार करने के लिए प्रयुक्त किए गए पदार्थों के नाम और उनकी मात्रा।
  • सामग्री की मात्रा।
  • उत्पादक, निर्माता का नाम एवं पता।
  • उस देश का नाम जहाँ पर वह पदार्थ तैयार किया गया है।
  • बैच नम्बर अथवा कोड नम्बर।
  • निर्माण की तिथि।
  • प्रयोग-अवधि अर्थात् सामग्री का उपयोग किस तिथि तक किया जा सकता है (Expiry date)।
  • भण्डार (Storage) के लिए निर्देश।
  • उपभोक्ता द्वारा दिए जाने वाला अधिकतम मूल्य (स्थानीय करों को छोड़कर)।

प्रश्न 4.
एगमार्क (Agmark) कौन-कौन सी वस्तुओं पर लगाया जाता है ? किसी वस्तु पर एगमार्क लगे होने से उपभोक्ता को क्या लाभ होता है ?
उत्तर :
एगमार्क मानक भारत सरकार के बिक्री एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा कृषि के माध्यम से उत्पादित खाद्य-पदार्थों की विभिन्न किस्मों के निमित्त निर्धारित किए गए हैं। अनाज, मसाले, तिलहन, तेल, मक्खन, घी, अण्डे आदि की विभिन्न किस्मों को कृषि उपज के श्रेणीकरण अधिनियम, 1937 (Grading and Marketing of Agricultural Products Act 1937) में परिभाषित किया गया है। विभिन्न खाद्य-पदार्थों के रंग-रूप, भार संरचना आदि के आधार पर उन्हें चार विभिन्न वर्गों क्रमश: 1-2-3-4 में वर्गीकृत किया गया है। यह वर्ग क्रमशः अतिउत्तम, उत्तम, अच्छा व सामान्य के सूचक हैं। एगमार्क सम्बन्धी मानक निर्धारित करते समय इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि विभिन्न खाद्य-पदार्थों को वेष्टित (Wrapped) करते समय किस प्रकार के वेष्टन (Wrapper) का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान 2

किसी भी खाद्य-पदार्थ पर एगमार्क का होना उस वस्तु के उपभोक्ताओं के लिए बहुत लाभप्रद होता है। इससे उसे निम्नलिखित सूचनाएं सहज ही प्राप्त हो जाती हैं –

  1. खाद्य-पदार्थ लाइसेंस प्राप्त निर्माता द्वारा निर्मित है।
  2. खाद्य-पदार्थ तैयार करते समय स्वच्छता सम्बन्धी पूरी सावधानी रखी गई है।
  3. नाप-तोल सम्बन्धी विवरण प्रमाण पुष्ट है।
  4. खाद्य-पदार्थ का मानक मूल्य क्या है।
  5. खाद्य-पदार्थ किस्म की दृष्टि से वर्गीकृत श्रेणियों में से किस श्रेणी का है।

इस जानकारी के उपलब्ध होने से उपभोक्ता के लिए किसी वस्तु की सही किस्म का चुनाव करने में सरलता हो जाती है और उसके पैसे का सदुपयोग हो पाता है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 5.
आई० एस० आई० मार्क क्या है ? यह प्रमाण-पत्र कौन-कौन सी शर्ते पूरी होने पर दिया जाता है ?
उत्तर :
आई० एस० आई० (ISI) मार्क भारतीय मानक संस्थान (Indian Standard Institute) द्वारा किसी वस्तु की उत्तमता के लिए दिया गया प्रमाण-पत्र है। भारतीय मानक संस्थान राष्ट्रीय स्तर का संगठन है। इसकी स्थापना सन् 1947 में हुई थी। इसका मुख्य कार्य विभिन्न खाद्य-पदार्थों यथा फल तथा सब्जियों से तैयार किए गए संरक्षित खाद्य-पदार्थों, संघनित दूध (Condensed Milk), पाश्विक खाद्य-पदार्थ, मसाले, शिशु-आहार (Baby food) आदि की किस्म को उत्तम बनाए रखना है। इस कार्य को सम्पन्न करने के लिए यह संस्थान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के परामर्श एवं सक्रिय सहयोग के विभिन्न खाद्य-पदार्थों के मानक तैयार करता रहता है।

ये मानक तैयार करते समय खाद्य-पदार्थों की संरचना, बाह्य रूप-रंग आदि विभिन्न बातों का ध्यान रखा जाता है। सन् 1952 में लागू किए गए तथा सन् 1961 में संशोधित किए आई० एस० आई० सर्टिफिकेशन मार्क अधिनियम (ISI) (Certification Mark Act) के अन्तर्गत इस संस्थान द्वारा विभिन्न खाद्य-पदार्थों के उत्पादकों को आई० एस० आई० मार्क के इस्तेमाल की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन इसके इस्तेमाल के लिए खाद्य-पदार्थों के निर्माताओं की संस्थान से सम्पर्क स्थापित करके लाइसेंस (Licence) लेना पड़ता है। यह लाइसेंस निम्नलिखित शर्ते पूरी करने पर ही दिया जाता है

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान 3

1. खाद्य – पदार्थ भारतीय मानक संस्थान द्वारा निर्धारित मानकों (Standards) के अनुरूप हो।
2. खाद्य – पदार्थ के संरक्षण, डिब्बाबन्दी आदि की विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान संस्थान द्वारा प्रस्तावित प्रविधियों का प्रयोग हुआ हो।।
3. खाद्य – पदार्थों को भारतीय मानक संस्थान से उत्तमता का प्रमाण-पत्र हासिल करने के लिए भेजे जाने से पूर्व निर्माता द्वारा उन खाद्य-पदार्थों के स्तर निर्धारण की जाँच आई० एस० आई० के निरीक्षकों द्वारा प्रस्तावित विधि के अनुसार की गई हो।
4. खाद्य – पदार्थ तैयार करने की विधि, स्थान, तैयार सामग्री का निरीक्षण भी आई० एस० आई० के निरीक्षकों द्वारा किया जा सकता है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 6.
भार और माप अधिनियम सबसे पहले कब पास हुआ ? इसमें कब-कब संशोधन किए गए ?
उत्तर :
स्वतन्त्रता से पूर्व हमारे देश में नाप-तोल के लिए कहीं मन, सेर, छटांक का चलन था, कहीं कच्चा सेर तथा पक्का सेर चलता था, कहीं रत्ती, तोला काम में लाए जाते थे, कहीं कुड़ों और पायली चलते थे। सभी उपभोक्ताओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रयुक्त होने वाले बाटों की समुचित जानकारी नहीं होती थी। व्यापारी कम तोल कर उपभोक्ता का भरपूर फायदा उठाता था। यदि कोई उपभोक्ता पूछता था तो उसे कोई मनगढंत उत्तर देकर चुप करा दिया जाता था। बाजारों में सुधार लाने तथा उनका नियमन करने के लिए सरकार ने 28 मार्च, 1939 को स्टैंडर्ड ऑफ़ वेट एक्ट (Standard of Weight Act) पास किया।

लेकिन इस बीच द्वितीय विश्व महायुद्ध प्रारम्भ हो गया जिसके परिणामस्वरूप इस ओर विशेष ध्यान नहीं दिया जा सका। यह अधिनियम पहली जुलाई, 1942 से ही लागू हो पाया। इसके बाद टकसाल अधिकारी द्वारा प्रमाणित वज़न या बाट तैयार किए गए और पूरे देश में इन्हें वितरित किया गया। पहले दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई आदि बड़े-बड़े शहरों में इनका चलन हुआ। स्वतन्त्रता के बाद तोल एवं माप के साधनों के एकीकरण की दिशा में गम्भीरतापूर्वक विचार किया गया।

अप्रैल सन् 1955 में भारतीय संसद् ने मानक नाप-तोल के लिए देश में मीट्रिक पद्धति तथा दशमलव प्रणाली अपनाए जाने का प्रस्ताव रखा। सन् 1956 में मानकमाप एवं तोल अधिनियम पास हुआ तथा पहली अक्तूबर, 1960 में यह पूरे देश में लागू हो गया। इस अधिनियम के अन्तर्गत विक्रेता द्वारा मीट्रिक बाटों का प्रयोग न करना एक कानूनी अपराध है। समय-समय पर माप व तोल ब्यूरो (Weight and Measure Bureau) के निरीक्षक इस बात की जाँच करते हैं कि विक्रेता इस अधिनियम का पालन कर रहा है अथवा नहीं।

किसी पदार्थ को उसके वैष्टन (Wrapper) अथवा उनके डिब्बों (Containers) सहित तोलना भी एक कानूनी अपराध है। यदि कोई व्यापारी ऐसा करता है तो उपभोक्ता इसकी सूचना माप व तोल ब्यूरो (Weights and Measures Bureau) को दे सकता है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 7.
खाद्य कानून के क्या उद्देश्य हैं ?
उत्तर :
खाद्य कानून उपभोक्ताओं तक सुरक्षित तथा पौष्टिक खाद्य-पदार्थ पहुँचाने का कार्य करता है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं –

  1. मिलावटी खाद्य-पदार्थ के हानिकारक प्रभाव से उपभोक्ता की रक्षा करना।
  2. उचित व्यापार-आचरण को बढ़ावा देना तथा लागू करना।
  3. उपभोक्ता की रक्षा के लिए निम्नलिखित कानून पारित किए गए हैं
    • Prevention of Food Adulteration Act (P.F.A.)
    • Food Product Order (F.P.O.)
    • मांस उत्पाद नियन्त्रण आदेश।

प्रश्न 8.
औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम का मूल उद्देश्य क्या है ? इस अधिनियम में क्या-क्या संशोधन किए गए ?
उत्तर :
औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम 1940 में बनाया गया। इस अधिनियम के अन्तर्गत देश में तैयार की गई अथवा आयात की गई औषधियों तथा मादक पदार्थों के गुणों की जांच की जाती है। इस अधिनियम में समय-समय पर आवश्यकतानुरूप अनेक संशोधन किए जाते हैं। सन् 1955, 60, 61, 69 में इस अधिनियम में अनेक महत्त्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं तथा उपनियम बनाए गए हैं। इस अधिनियम के अनुसार यदि किसी औषधि अथवा मादक पदार्थ में प्रमाणित स्तर से नीचे के गुण पाए जाते हैं तो उसके निर्माता से उसके निर्माण का अधिकार छीन लेने के साथ-साथ उसके मालिक को एक वर्ष के कारावास का दण्ड भी दिया जाता है। इस अधिनियम में यह भी व्यवस्था है कि जो औषधियाँ एवं मादक पदार्थ बाज़ार में बिकने के लिए आएं उन पर लेबल लगा होना चाहिए और इस लेबल पर निम्नलिखित सूचनाएँ होनी चाहिएं –

  1. निर्माता का नाम, पता तथा निर्माण के अधिकार।
  2. बैच नम्बर।
  3. निर्माण की तिथि और अवसान तिथि (Expiry date) अर्थात् उसे कब तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  4. औषधि-निर्माण के समय प्रयुक्त किए गए मिश्रणों के नाम ।
  5. उपभोग की विधि।

प्रश्न 9.
एक अच्छे लेबल में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?
अथवा
लेबल पर दी जाने वाली अपेक्षित जानकारी की कोई चार बातें बताएं।
उत्तर :
एक अच्छे लेबल में निम्नलिखित गुण होने चाहिए –

  1. लेबल सही ढंग से खाद्य-पदार्थों पर चिपका हुआ होना चाहिए।
  2. पात्र ऐसा बनाया गया हो जो खाद्य-पदार्थ की मात्रा के बारे में धोखा नहीं दे या भ्रम नहीं उत्पन्न करे।
  3. लेबल पर लिखा हुआ विवरण आसानी से पढ़ा और समझा जा सके।
  4. लेबल पर खाद्य-पदार्थ में प्रयोग किए गए कृत्रिम रोगों अथवा रासायनिक परिरक्षकों का उल्लेख हो।
  5. वह खाद्य-पदार्थ जिसके स्तर की परिभाषा दी गई है, स्टॉक के अनुसार हो।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 10.
उपभोक्ता सहायक सामग्री क्या होती है ? उपभोक्ताओं को उपलब्ध किन्हीं तीन प्रकार की सहायक सामग्री का उल्लेख करें।
उत्तर :
उपभोक्ता सहायक सामग्री उपभोक्ता को वस्तुओं के चयन में सहायता प्रदान करती हैं। विभिन्न उपभोक्ता सहायक सामग्री हैं-मानकीकरण चिह्न, लेबल, पैकिंग, विज्ञापन, पर्चे, पुस्तकें, उपभोक्ता फोरम आदि।

1. लेबल-लेबल द्वारा उपभोक्ताओं को वस्तु की गुणवत्ता, कीमत आदि का पता चलता है। लेबल पर निम्न जानकारी होती है –

  • वस्तु का नाम
  • वस्तु में प्रयुक्त सामग्री
  • बनने की तारीख
  • ट्रेड मार्क
  • मानकीकरण चिह्न
  • बैच लाईसेंस नम्बर
  • गारण्टी
  • प्रयोग तथा सम्भाल के दिशानिर्देश आदि।।

2. विज्ञापन – निर्माता द्वारा वस्तु को बेचने के लिए विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों द्वारा उपभोक्ता को जानकारी दी जाती है। विज्ञापन, समाचार-पत्र, टी०वी०, रेडियो आदि पर सुन देख कर उपभोक्ता को वस्तु के बारे में जानकारी मिलती है तथा आवश्यकता होने पर उसे खरीदना आसान रहता है।

3. पर्चे – उपभोक्ता को वस्तु की जानकारी देने के लिए निर्माता पर्चे छपवाकर समाचार-पत्रों में डलवा देते हैं या अपने नौकरों द्वारा लोगों के घरों में फेंकवा दिए जाते हैं। इन पर वस्तु के बारे में पूर्ण जानकारी देने की कोशिश की जाती है। इस पर तकनीकी जानकारी या अन्य कोई भी आवश्यक जानकारी विस्तार से होती है।

प्रश्न 12.
उपभोक्ता को खरीददारी करते समय किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ? इनमें से किसी एक के बारे में लिखिए।
अथवा
उपभोक्ता को खरीददारी करते समय किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ? कोई चार कठिनाइयों को बताइए।
उत्तर :
उपभोक्ता की खरीददारी करते समय कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जैसे –

  1. मूल्यों में परिवर्तन
  2. वस्तुओं का न मिलना
  3. धोखाधड़ी
  4. मिलावट
  5. गलत विज्ञापन
  6. गलत लेबल
  7. अपूर्ण तथा गलत जानकारी
  8. घटिया वस्तुएं
  9. मानकीकरण चिहन का गलत प्रयोग आदि।

मूल्यों में परिवर्तन-कई दुकानदार वस्तु पर लिखे अधिकतम मूल्य से अधिक पैसे मांगते हैं, कई बार फ्री होम डिलवरी के नाम पर वस्तु का मूल्य बढ़ा दिया जाता है। कई छोटे दुकानदार अधिकतम मल्य से कुछ कम पैसे लेकर भी वस्तु बेच देते हैं इससे उपभोक्ता क्नफयूज़ हो जाता है कि एक ही वस्तु के भिन्न-भिन्न मूल्य क्यों है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 13.
कोई भी चार खाद्य पदार्थों के नाम इनमें पाई जाने वाली मिलावट के साथ लिखें।
उत्तर :

क्रमांकखाद्य पदार्थमिलावट
1.हल्दीलेड क्रोमेट
2.देसी घीवनस्पति घी
3.बादाम की गिरीखुमानी की गिरी
4.शहदचीनी
5.गेहूँ का आटावासी पीसी हुई रोटी

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
परिवार के लिए आवश्यक वस्तुओं का चुनाव करते समय गृहिणी को किस-किस प्रकार के निर्णय लेने पड़ते हैं ? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।
अथवा
विभिन्न वस्तुओं के चयन के समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
उत्तर :
अपने परिवार की आवश्यकताओं के अनुसार उचित प्रकार की विभिन्न वस्तुओं का चुनाव करने के लिए गृहिणी को कई निर्णय लेने पड़ते हैं जिनमें से मुख्य निम्नलिखित प्रकार हैं –
1. क्या खरीदें – उचित स्तर की वस्तुओं को खरीदने के लिए सबसे पहले यह निर्णय लेना पड़ता है कि क्या खरीदा जाए। उपभोक्ता को सर्वप्रथम यह देखना चाहिए कि, क्या खरीदी जाने वाली वस्तु की वास्तविक रूप से ज़रूरत है अथवा नहीं। अपने पारिवारिक बजट तथा पारिवारिक मापदण्ड, मूल्यों तथा लक्ष्यों के आधार पर गृहिणी तथा अन्य सदस्यों को भी यह देखना चाहिए कि आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए क्या खरीदना है।

2. कहाँ से खरीदें – “क्या खरीदा जाए” इस बात का निश्चय कर लेने के बाद उपभोक्ता को यह निश्चित करना पड़ता है कि वस्तुएँ कहाँ से खरीदी जाएँ। इसके लिए यह समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविज़न आदि पर आने वाले विज्ञापनों से भी जानकारी प्राप्त कर सकता है। वस्तुओं की खरीददारी करने से पहले उसे विभिन्न बाजारों तथा दुकानों का ज्ञान होना आवश्यक है, क्योंकि प्रायः किसी एक विशेष प्रकार की अच्छी किस्म की वस्तु कम मूल्यों पर किसी विशेष बाज़ार में ही मिलती है, जैसे फर्नीचर की कोई भी वस्तु हमें लकड़ी या फर्नीचर के थोक-बाज़ार में ही बढ़िया व सस्ती मिल सकती है।

किस बाजार से खरीदनी है इस बात को निश्चित कर लेने के बाद उपभोक्ता को इस बात का निर्णय करना चाहिए कि किस दुकान से सामान खरीदा जाए। कई बार यह देखा गया है कि एक ही बाज़ार में विभिन्न दुकानों में एक ही प्रकार की वस्तु के लिए अलग-अलग दाम होते हैं। कई बार दुकानदार उपभोक्ताओं को कई एक अतिरिक्त सुविधाएँ या उपहार भी देते हैं। जैसे-खरीदी गई वस्तुओं को घर पर मुफ्त पहुंचाने की ज़िम्मेदारी या फिर दुकान से मुफ्त टेलीफोन करने की सुविधा या छोटे-मोटे उपहार आदि।

कई बार दुकानों को इस आकर्षक ढंग से सजाया जाता है ताकि उपभोक्ता खुद इसकी सजावट को देखकर दुकान की ओर खिंचा चला आए। परन्तु ऐसी दुकानों के भाव अन्य दुकानों के भाव से अधिक होंगे। क्योंकि इन सब सुविधाओं आदि का खर्चा निकालने के लिए वस्तुओं आदि का भाव बढ़ा दिया जाता है अथवा वस्तु का स्तर कुछ गिरा दिया जाता है। अत: वस्तुएँ खरीदने से पहले दो या तीन दुकानों से वस्तुएँ तथा उनके भाव देखकर ही निश्चय करना चाहिए।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

3. कब खरीदें – वस्तुओं को कब खरीदा जाए, यह निर्भर करता है उसकी प्रकृति पर। कुछ वस्तुएँ ऐसी होती हैं जो केवल किसी मौसम में ही उपलब्ध होती हैं। उदाहरणार्थ विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ तथा फल इत्यादि। ये वस्तुएँ मौसम में न केवल उपलब्ध ही होती हैं, अपितु सस्ती तथा उत्तम किस्म की भी होती हैं। इन वस्तुओं को मौसम में ही खरीदना चाहिए। इसके विपरीत कुछ अन्य वस्तुओं, जैसे कि पंखे, कूलर, रेफ्रीजरेटर, हीटर, गीजर इत्यादि की आवश्यकता विशेष मौसम में होने के कारण ये अपने मौसम में महँगी होती हैं। अतः जहाँ तक इस प्रकार की वस्तुओं को मौसम से पहले या मौसम के बाद अर्थात् ऑफ़ सीजन (Off Season) में ही खरीदना चाहिए जिससे उचित डिस्काउन्ट (Discount) मिल सके तथा वस्तु की कीमत कम देनी पड़े।

4. कितना खरीदें – गृहिणी को परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं के आधार पर यह निश्चय कर लेना चाहिए कि वस्तु कितनी मात्रा में खरीदी जानी है। चूंकि प्रत्येक परिवार में साधन सीमित होते हैं अतः साधनों को ध्यान में रखकर ही वस्तु खरीदनी चाहिए, अन्यथा वस्तु उत्तम स्तर की नहीं खरीदी जा सकती तथा आवश्यकता की कोई एक-दो वस्तु अवश्य ही छूट जाती है। इसके अतिरिक्त अगर वस्तुएं इकट्ठी अधिक मात्रा में खरीदी जाती हैं तो सस्ती पड़ती हैं। ऐसा विशेषकर संयुक्त परिवार या ऐसे परिवार जिसमें सदस्यों की संख्या अधिक होते ही किया जाता है। इकट्ठी वस्तुएँ खरीदना बहुत लाभकारी रहता है, परन्तु ऐसा करते समय ध्यान रखें कि परिवार की आवश्यकता से अधिक मात्रा में वस्तुएँ न खरीदी जाएँ क्योंकि ऐसे में व्यर्थ ही धन की हानि होगी और वस्तु भी व्यर्थ जाएगी।

5. कितना व्यय करें – वस्तुओं की कीमत उसकी किस्मत, स्तर, मौसम तथा दुकान पर बहुत निर्भर करती है। उपभोक्ता को वस्तुओं की कीमत का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। व्यय सदा बजट के अनुसार ही किया जाना चाहिए। यह उपभोक्ता की सामर्थ्य तथा आवश्यकता पर निर्भर करता है कि वह किस वस्तु के लिए कितना व्यय करना चाहता है। यह कुछ हद तक उसकी रहन-सहन के स्तर पर ही निर्भर करता है।

इस प्रकार उपभोक्ता, विशेषकर गृहिणी को खरीददारी करने से पहले इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि उसे कौन-सी किस्म की वस्तुएँ कब और कहाँ से खरीदनी हैं। उसे उस दुकानदार से ही वस्तु खरीदनी चाहिए जिस पर उसे पूर्ण विश्वास हो तथा जो वस्तु की अच्छी किस्म की पूरी ज़िम्मेदारी ले। गृहिणी को चाहिए कि वह इस बात की ओर पूर्णतः सावधान रहे कि दुकानदार उसे किसी भी प्रकार का धोखा न दें। एक अच्छे उपभोक्ता को बाजार में बिकने वाली वस्तुओं का पूरी तरह से ज्ञान होना चाहिए।

अक्सर कई बार यह देखा गया है कि विक्रेता, उपभोक्ता को धोखा देने की कोशिश करते हैं, विशेषकर जब उपभोक्ता को सही ज्ञान न हो। उचित खरीद के लिए उपभोक्ता को विभिन्न वस्तुओं की किस्मों तथा उनके दामों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। विक्रेता की धोखाधड़ी से बचने के लिए तथा विक्रेता को किसी भी प्रकार का गलत काम करने से रोकने में उपभोक्ताओं का बहुत बड़ा योगदान है। जिसे हर उपभोक्ता को अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए पूर्ण रूप से निभाना चाहिए।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 2.
उत्पादनकर्ता या विक्रेता उपभोक्ताओं को किस प्रकार धोखा देने की कोशिश करते हैं ? उनसे बचने के लिए उपभोक्ताओं को क्या-क्या कदम उठाने चाहिएं ?
उत्तर :
प्राय: यह देखने में आता है कि अधिकतर उपभोक्ता बाजार से पूरी तरह वाकिफ नहीं होता। उसे विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की किस्म के अनुसार दाम का सही ज्ञान नहीं होता। उपभोक्ता की इस कमज़ोरी का फायदा दुकानदार या विक्रेता उठा लेते हैं और वे कई तरीकों से उपभोक्ता को धोखा देने की कोशिश करते हैं। अधिक मुनाफा कमाने के लिए विक्रेता अक्सर कई गलत चालों का सहारा लेते हैं। जैसे ही उनको पता चलता है कि उनकी किसी भी वस्तु की माँग बहुत अधिक बढ़ गई है और वस्तु बाज़ार में अधिक उपलब्ध नहीं है तो वह अपनी वस्तु का दाम बढ़ा देते हैं। ऐसा भी देखने में आता है कि विक्रेता अपनी वस्तुओं के महत्त्व को बढ़ाने के लिए उसकी कृत्रिम कमी भी उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार विक्रेताओं को अधिक-से-अधिक लाभ कमाने का मौका मिल जाता है। इसके अतिरिक्त विक्रेता उपभोक्ता को धोखा देने के लिए कई नए-नए ढंग भी अपनाने लगे हैं जिनकी चर्चा नीचे की जा रही है।

1. वस्तुओं में मिलावट करके – बाज़ार में बेचे जाने वाले कई खाद्य पदार्थों में अक्सर मिलावट की जाती है। अक्सर यह मिलावट जान-बूझकर की जाती है। कई खाद्य-पदार्थों के रंग-रूप को बढ़ाने के लिए कई घटिया किस्म के कृत्रिम रंग मिला दिये जाते हैं जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक सिद्ध होते हैं। खाद्य-पदार्थों में मिलावट दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जिसका मुख्य कारण है-वस्तुओं की कम उपलब्धि और दिन-प्रतिदिन होने वाली कीमतों में बढ़ोतरी ।

इस प्रकार की धोखाधड़ी को रोकने के लिए भारत सरकार ने 1954 में खाद्य-पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए एक कानून-पी० एफ० ए० (Prevention of Food Adulteration Act, PFA) बनाया जिसे 1955 में लागू किया गया। इस कानून के अन्तर्गत बाज़ार में बिकने वाले प्रायः सभी खाद्य-पदार्थों के लिए न्यूनतम मान्य मापदण्ड दिए गए हैं जिन्हें अपनाना आवश्यक है। यदि कोई खाद्य-पदार्थ इन मापदण्डों को पूरा नहीं कर पाता तो उसे मिलावटी खाद्य-पदार्थ कहा जाता है।

इस मिलावट को रोकने के लिए उपभोक्ता महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान कर सकते हैं। उन्हें चाहिए कि जैसे ही उन्हें मालूम हो कि किसी खाद्य-पदार्थ में मिलावट है तो तुरन्त इसकी सूचना सम्बन्धित अधिकारियों को दी जाए। इसके अतिरिक्त उपभोक्ता को चाहिए कि वे खुली वस्तुएँ नहीं खरीदें क्योंकि इनमें मिलावट की ज्यादा सम्भावना होती है। मान्यता प्राप्त खाद्य-पदार्थ ही खरीदने चाहिए जैसा कि आई० एस० आई० (ISI), एगमार्क (Agmark) या एफ० पी० ओ० (F. P. O.) मार्क वाले पदार्थ।

सामान्यतः उपभोक्ताओं द्वारा प्रयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं में खाद्य-पदार्थ ही अक्सर मिलावट के शिकार होते हैं। फिर भी कुछ दूसरी वस्तुएँ इससे वंचित नहीं रह पातीं, जैसे टेरीकाट या टैरीवूल कपड़े। यदि इन पर अच्छी ‘मिल’ का पूरी जानकारी देने वाला मार्क न हो, तो विक्रेता कपडे में टेरीलीन तथा ‘काटन’ या ‘वल’ की % मात्रा गलत बताकर उपभोक्ता को आसानी से धोखा दे सकता है। इसी प्रकार मकान बनाते समय प्रयोग में लाए जाने वाले सीमेंट में विक्रेता अक्सर रेत मिलाकर उपभोक्ता को धोखा देने की कोशिश करता है।

अतः प्रयोग में लाई जाने वाली सभी प्रकार की वस्तुओं में की जाने वाली मिलावटों से बचने के लिए उपभोक्ताओं को चाहिए कि वस्तुएँ सदा विश्वसनीय से ही खरीदें। साथ ही यह देख लें कि उन पर सही मार्का हो और जहाँ तक हो सके मान्यता प्राप्त वस्तुएँ जैसे आई० एस० आई० मार्क वाली ही खरीदें। आई० एस० आई० मार्क न केवल खाद्य-पदार्थों पर ही लगाए जाते हैं अपितु आजकल प्रयोग में लाई जाने वाली लगभग हर वस्तुओं पर लगाए जाते हैं।

आई० एस० आई० मार्क लगे होने पर, यह न केवल वस्तु की उत्तम किस्म को ही प्रदर्शित करता है परन्तु साथ ही उपभोक्ताओं को वस्तुओं के चयन में सहायता करता है और उन्हें इस बात की भी सन्तुष्टि देता है कि उन्होंने अपने पैसे का सही उपयोग किया है। आई० एस० आई० मार्क लगी वस्तुओं के कुछ उदाहरण हैं-बिजली के उपकरणों, जैसे – मिक्सी, फ्रिज, गीजर, पंखा, प्रैस, बल्ब, ट्यूब तथा बिजली की तारें आदि। इसी प्रकार रसोई घर के कुछ उपकरणों; जैसे-तेल, स्टोव, गैस का चूल्हा, कुकिंग-रेंज, गैस का सिलेण्डर, प्रेशर कुकर आदि पर आई० एस० आई० मार्क होता है जो इनकी उत्तम किस्म को तो दर्शाता ही है साथ ही इन्हें प्रयोग करते समय गृहिणी अपने आपको सुरक्षित भी महसूस करती है। इनके अतिरिक्त प्रयोग में लाई जाने वाली अन्य बहुत-सी वस्तुएँ, जैसे-रंग-रोगन, स्याही, गोंद, ब्लेड, हैलमेट इत्यादि पर भी आई० एस० आई० का मार्क होता है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

2. अपर्याप्त लेबल-लेबल एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा उपभोक्ता को उस पदार्थ के बारे में जानकारी दी जाती है। लेबल से हमें निम्नलिखित बातें पता चलती हैं – (i) पदार्थ क्या हैं, (ii) पदार्थ बनने की तारीख, (iii) पदार्थ का भार, (iv) उत्पादनकर्ता का पता तथा (v) पदार्थ का मूल्य। लेबल पर दी गई जानकारी के द्वारा उपभोक्ता अपनी आवश्यकतानुसार वस्तु को खरीद सकता है। परन्तु ऐसा भी देखा गया है कि व्यापारी अपूर्ण लेबल लगाकर उपभोक्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं को भारतीय मानक संस्थान द्वारा निर्धारित अच्छे लेबल के गुणों का ज्ञान होना आवश्यक है जिसमें पूर्ण जानकारी वाला लेबल न होने पर किसी पदार्थ को झूठे मार्का वाला समझा जाएगा। उपभोक्ता को अपूर्ण लेबल बाली वस्तुओं को नहीं खरीदना चाहिए। उसको चाहिए कि वह मान्यता प्राप्त पदार्थ की खरीदे जो कि अच्छी किस्म के होते हैं।

3. त्रुटिपूर्ण माप और तोल के साधन – सन् 1956 ई० में मानक माप व तोल अधिनियम पास किया गया था। इस अधिनियम के अन्तर्गत मानक माप व तोल के साधनों की आवश्यकता और इनके बारे में पूर्ण जानकारी दी गई है। इसके साथ ही उनके डिज़ाइन और आधारित पदार्थ के बारे में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। कई बार ऐसा देखने में आता है कि विक्रेता अक्सर पदार्थों को तोलने के लिए मानक बाटों (Weights) का प्रयोग नहीं करते अपितु कोई ईंट-पत्थर आदि को बाटों के स्थान पर इस्तेमाल कर लेते हैं, जिसके फलस्वरूप वे आसानी से तोल में हेरा-फेरी कर लेते हैं। विक्रेता कई बार खाद्य-पदार्थों को उनके डिब्बे सहित तोल देते हैं तथा तराजू के पलड़ों को बराबर किए बिना ही पदार्थों को तोल कर उपभोक्ता को कम वस्तु दे देते हैं। कुछ विक्रेता मान्यता प्राप्त तराजू का प्रयोग न करके भी उपभोक्ताओं को छलने की कोशिश करते हैं। विशेषकर हाथ से पकड़कर तोलने वाले तराजू से तो वे तोल में हेरा-फेरी करते हैं।

इन दोषयुक्त तोल व माप के साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए उपभोक्ताओं को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए –

(i) उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे हाथ वाले तराजू के प्रयोग को बढ़ावा न दें।
(ii) वस्तुओं को तोलने से पहले तराजू की जाँच कर लेनी चाहिए। हाथ की तराजू में डण्डी देख लेना चाहिए। पैमाने वाले तराजू में भी यह देख लेना चाहिए कि उसकी सूई शून्य पर है या नहीं। इस प्रकार अगर तराजू में कोई त्रुटि हो तो उसे विक्रेता से सूचित करते हुए उस त्रुटि को दूर करवा लेना चाहिए।
(iii) बाटों तथा मापक का भली प्रकार निरीक्षण कर लेना चाहिए जिससे इस बात का पता लग जाता है कि प्रयोग में लाए जा रहे माप व तोल के साधन मानक अधिनियम के अनुसार हैं या नहीं।
(iv) डिब्बों या शीशियों में पैक किए गए पदार्थ खरीदने से पहले उनके लेबल पर दिए गए भार या मात्रा का भली-भाँति निरीक्षण कर लेना चाहिए।
(v) उपभोक्ता को गलियों में घूमने वाले या फेरी वालों से सामान खरीदते समय अत्यधिक सावधान रहना चाहिए क्योंकि उनके वाट अक्सर मानक अधिनियम के अनुसार नहीं होते।
(vi) किसी भी विक्रेता द्वारा यदि कम तोलने या मापने का भ्रम हो, तो शीघ्र ही माप व तोल कार्यालय को सूचित करना चाहिए।
अगर उपभोक्ता ऊपर दी गई इन बातों का ध्यान रखेंगे तो वह हर प्रकार की धोखा धड़ी को रोकने में महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान कर सकते हैं। उन्हें ऐसा करने में अपने ऊपर किसी प्रकार का बोझ न समझकर इसे अपना कर्त्तव्य समझना चाहिए।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

4. असत्य विज्ञापनों द्वारा – आज के युग में एक ही प्रकार की वस्तु विभिन्न उत्पादकों द्वारा बनाई जाने लगी है और बाज़ार में कई नई-नई वस्तुएँ आने लगी हैं। अत: उत्पादनकर्ता अपने पदार्थों की बिक्री बढ़ाने के लिए कई प्रकार के विज्ञापनों का सहारा लेते हैं। इन विज्ञापनों का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके पदार्थों की सूचना देना, उन पदार्थों की विशेषताएँ बताना तथा उन पदार्थों की बिक्री बढ़ाना है।

इस प्रकार के विज्ञापन देने के लिए उत्पादनकर्ता या विक्रेता कई माध्यमों का प्रयोग करते हैं। जैसे-अखबार, पत्रिकाएँ, पोस्टर, रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा रील, सिनेमा स्लाइड्स आदि। विज्ञापनों पर उत्पादनकर्ता को काफ़ी खर्च करना पड़ता है। अतः इन विज्ञापनों पर किए गए खर्चों को निकालने के लिए उत्पादनकर्ता को अपनी वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। इस प्रकार यह कहना उचित नहीं होगा कि विज्ञापनों पर हुए खर्च का भार भी उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है।

अक्सर देखा गया है कि विज्ञापनों में उत्पादनकर्ता अपनी वस्तुओं की विशेषताओं को काफ़ी बढ़ा-चढ़ाकर देते हैं जिससे अधिक उपभोक्ता उनकी वस्तुओं की ओर आकर्षित होकर उनका प्रयोग करना शुरू कर दें। इस प्रकार के असत्य विज्ञापन उपभोक्ताओं को पदार्थ के बारे में सही जानकारी न देकर उन्हें धोखे में रखते हैं और ऐसे में एक सामान्य उपभोक्ता के लिए पदार्थों की खरीद के बारे में निर्णय लेना काफ़ी कठिन हो जाता है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे वस्तुओं को खरीदते समय विज्ञापनों की सहायता तो अवश्य लें परन्तु केवल विज्ञापन के आधार पर ही वस्तुओं के खरीद का निर्णय कर लें। यदि उपभोक्ता केवल विज्ञापनों से आकर्षित होकर कोई भी ऐसी वस्तु खरीदता है जोकि उसके प्रयोग में न आ सके तो ऐसे में वह अपने धन को बेकार ही गँवाता है।

5. घटिया किस्म की वस्तुओं की बिक्री – विक्रेता कई बार बिना बताए ही उपभोक्ताओं को अच्छी वस्तुओं के स्थान पर घटिया किस्म की वस्तुएँ बेचकर उन्हें धोखा देने की कोशिश करते हैं। जैसे – मिलों द्वारा घोषित घटिया किस्म के कपड़े को अच्छी किस्म के कपड़े के स्थान पर बेचना, फर्नीचर की भीतरी सतहों पर घटिया किस्म की लकड़ी लगाना, लोहे की अलमारी या दूसरे फर्नीचर बनाने में घटिया किस्म की चादर का प्रयोग करके ऊपर से अच्छा रंग-रोगन आदि करके उन्हें महँगे दामों पर बेचना आदि। इस प्रकार की धोखाधड़ी से बचने के लिए उपभोक्ताओं को चाहिए कि वह सदा विश्वसनीय दुकानों से ही वस्तुएँ खरीदें।

6. नकली वस्तुओं की बिक्री – सौन्दर्य प्रसाधनों के असली पैकिंग में नकली चीजें भरकर बेचना तो इस प्रकार एक आम उदाहरण है जैसे-पाउडर, शैम्पू, क्रीम, लिपिस्टिक, सैंट इत्यादि। ऐसी नकली वस्तुओं की बिक्री को रोकने के लिए उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे नकली वस्तुओं के उत्पादन को प्रोत्साहित न करें। अक्सर नकली और असली वस्तुओं के बीच जाँच करना भी काफ़ी कठिन हो जाता है। अत: उपभोक्ताओं को सदा विश्वसनीय दुकानों से ही वस्तुएँ खरीदनी चाहिए। इस प्रकार विक्रेताओं द्वारा की जाने वाली सब प्रकार की धोखाधड़ी को अगर उपभोक्ता चाहें तो रोकने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 2.
(A) विक्रेता उपभोक्ता को किस प्रकार धोखा देने की कोशिश करते –
(B) दोषयुक्त तोल व माप के साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए उपभोक्ता को चाहिए कि वह किन चीज़ों के प्रयोग को बढ़ावा दें ?
उत्तर :
देखें प्रश्न 2 का उत्तर।

प्रश्न 3.
उपभोक्ता को सूचना देने वाले नाम-पत्र या लेबल कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक प्रकार के बारे में महत्त्वपूर्ण बातें बताइए।
उत्तर :
उपभोक्ता को सूचना देने के लिए पदार्थों पर चिपकाए गए लेबल (Labels) को मोटे तौर पर चार वर्गों में बाँटा जा सकता है। ये निम्नलिखित हैं
1. पदार्थों की विशेषताओं का परिचय देने वाले लेबल (Informative Labelling)-इस प्रकार के लेबल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह सूचना देना है कि निर्मित पदार्थ को तैयार करने में कौन-कौन सी वस्तुएँ इस्तेमाल में लाई गई हैं। कच्चे पदार्थ (Raw Material), संरक्षणीय पदार्थ (Preservatives), रंग (Colours), पदार्थ के स्वाद को बढ़ाने वाले एसेंस (Essence), एकस्ट्रेक्ट (Extract), भण्डारण की विधि, प्रयोग विधि आदि सूचनाएँ देकर निर्माता अपनी ईमानदारी जतलाता हुआ उपभोक्ता का पूरा विश्वास अर्जित कर लेना चाहता है। वह जानता है कि यदि वह उपभोक्ता का विश्वास अर्जित कर लेगा तो उपभोक्ता उसके माल को हमेशा खरीदता रहेगा। वह दूसरों से भी उसके माल की तारीफ करेगा और वही माल खरीदने के लिए प्रेरित करेगा। ऐसा करने से उसके माल की बिक्री बढ़ेगी और बिक्री बढ़ने से साख बढ़ेगी एवं अधिक लाभ होगा।

2. ब्रांड की सूचना देने वाले लेबल (Brand Labelling) – प्रत्येक निर्माता एवं उत्पादक अपने पदार्थों को एक खास नाम से प्रचारित करता है। जैसे-ब्रुक ब्राण्ड चाय (Brook Bond Tea), डालडा घी, पोस्टमैन तेल, लिज्जत पापड़, विमल सूटिंग, हाकिंस प्रेशर कुकर, केलवीनेटर फ्रिज, ई० सी०, टेलीविज़न, फिलिप्स रेडियो, एवन साइकिल आदि। उत्पादक या निर्माता द्वारा अपने यहाँ उत्पादित या निर्मित होने वाले पदार्थों को कोई नाम दे देने से विज्ञापन में सुविधा रहती है। उपभोक्ता भी दुकानदार से उत्पादक, निर्माता द्वारा प्रचारित नाम की वस्तु माँग करके किसी वस्तु की गुणवत्ता सम्बन्धी अपनी पसन्द को व्यक्त करता है।

3. ट्रेड मार्क की सूचना देने वाले लेबल (Trade Mark Labelling) – वस्तु उत्पादक अथवा निर्माता अपने माल को दूसरे उत्पादकों अथवा कम्पनियों से पृथक् करने के लिए जहाँ एक ओर ब्राण्ड का सहारा लेता है वहीं दूसरी ओर वह ट्रेड-मार्क का भी आश्रय लेता है। ट्रेड-मार्क के रूप में किसी शब्द का इस्तेमाल भी किया जा सकता है और किसी चित्र, प्रतीक आदि का भी। उदाहरण के लिए दिल्ली क्लाथ मिल ने वानस्पतिक घी के लिए जहाँ ब्राण्ड के रूप में ‘रथ’ नाम का इस्तेमाल किया है वहाँ रथ का चित्र एक ट्रेड मार्क के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

4. गुणवत्ता की श्रेणी की सूचना देने वाले लेबल (Grade Labelling) – इस वर्ग के अन्तर्गत वे लेबल आते हैं जिन पर यह सूचना छपी होती है कि वह पदार्थ गुणवत्ता की दृष्टि से किस स्तर का है। इसका उद्देश्य यह बताना होता है कि उपभोग की दृष्टि से किस पदार्थ की गुणवत्ता को सर्वोत्तम, उत्तम, अच्छा, सामान्य आदि कई वर्गों में बाँटा जा सकता है। हमारे देश में इस प्रकार के लेबल का कोई विशेष चलन नहीं है। केवल एगमार्क मानक ही खाद्य-पदार्थों को उनके रंग, रूप, भार, संरचना आदि के आधार पर पर चार वर्गों यथा अति उत्तम, अच्छा एवं सामान्य में बाँटकर 1,2,3,4 अंकों से स्थिति को सूचित करता है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 4.
एक अच्छे उपभोक्ता में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?
अथवा
विभिन्न वस्तुओं के चयन के समय क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए ?
अथवा
एक अच्छे उपभोक्ता के कोई भी तीन गुण बताएँ।
उत्तर :
विभिन्न वस्तुओं के चयन के समय उपभोक्ता को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए –
1. विज्ञापनों के प्रभाव में न आना – आज का युग विज्ञापन का युग है। विभिन्न प्रकार की वस्तुओं के निर्माता पत्र-पत्रिकाओं, दूरदर्शन (T.V.) रेडियो, पोस्टर आदि के माध्यम से अपनी वस्तु का भरपूर प्रचार करते हैं और अपनी वस्तु को सर्वश्रेष्ठ होने का दावा करते हैं। लेकिन बुद्धिमान उपभोक्ता को विज्ञापनों में दिए गए इस प्रकार के दावों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उसे अपनी सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए और अच्छी कम्पनी की अच्छी वस्तु ही खरीदनी चाहिए।

2. खरीदी गई वस्त के लेबल को ध्यान से पढना बहत – से वस्त निर्माता किसी लोकप्रिय ब्रांड के नाम से मिलता-जुलता नाम रखकर ग्राहकों को गुमराह करने का प्रयत्न करते हैं। उदाहरण के लिए बॉम्बे डाइंग की चादरें कम्पनी से बनी बनाई आती हैं, जबकि बहुत-से दुकानदार उस पर बॉम्बे डाइंग के कपड़े से निर्मित (Made from Bombay Dyeing Cloth) की मोहर लगाकर बॉम्बे डाइंग के नाम से ही बेच देते हैं। विम, सर्फ, फिनायल, साबुन आदि बहुत-सी ऐसी घरेलू वस्तुएँ हैं जिनके लोकप्रिय ब्रांडों के नामों से मिलते-जुलते नाम रख देने से उपभोक्ता को धोखा हो जाता है। अतएव यह ज़रूरी है कि जो भी वस्तु खरीदी जाए उसके लेबल को ध्यान से पढ़ लिया जाये। जब दुकानदार को यह पता चल जाता है कि आप हर वस्तु देखभाल कर खरीदती हैं तब वह मिलते-जुलते नामों वाली वस्तुएं देकर ठगने का प्रयत्न नहीं करता।

3. जल्दबाजी में न खरीदना – जब दुकानदार को यह पता होता है कि आप जल्दी में हैं तो वह उसका अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करने से नहीं चूकता। ऐसी स्थिति में वह उपभोक्ता को घटिया माल दे देता है। कभी-कभी तोल में हेरा-फेरी कर देता है या पैसों के हिसाब में गड़बड़ी कर देता है।

4. दिन में खरीदना – बहुत सी वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिनके दोष रात को ठीक तरह से दिखाई नहीं देते। उदाहरण के लिए कपड़ों के रंग आदि की जाँच रात को ठीक तरह से नहीं हो पाती। अतएव ऐसी वस्तुएँ हमेशा दिन में ही खरीदनी चाहिए।

5. खरीदी जाने वाली वस्तुओं की सूची बनाना – खरीददारी के लिए बाजार में जाने से पहले उन सब वस्तुओं की सूची बना लेनी चाहिए जो आप खरीदना चाहती हैं। सूची बनाते समय यह भी लिख लेना चाहिए कि उसकी कितनी मात्रा चाहिए। इससे यह लाभ होता है कि कोई ज़रूरी चीज़ खरीदने से छूटती नहीं है तथा कोई भी वस्तु अधिक नहीं खरीदी जाती।

6. आई० एस० आई० अथवा एगमार्क वाली वस्तुएँ खरीदना – भारतीय मानक संस्थान (ISI) बहुत-से वस्तुओं के गुण, स्तर आदि की जाँच अपनी मोहर लगाती है। इसी प्रकार खाद्य सामग्रियों पर एगमार्ग की मोहर उनकी उत्तमता की प्रतीक होती है। अतएव जहाँ तक सम्भव हो सके वहाँ तक आई० एस० आई० अथवा एगमार्क की मोहर वाले खाद्य-पदार्थ खरीदने चाहिए।

7. दुकानदार से सामान तौलवाते समय सावधान रहना – बहुत-से दुकानदार तोल में हेरा-फेरी करके भी उपभोक्ताओं को ठगते हैं। इसके लिए वे विभिन्न प्रकार के तरीके काम में लाते हैं। घिसे हुए बाटों को प्रयोग, लिफाफे अथवा डिब्बे समेत वस्तुएँ तोलता आदि कुछ बहुप्रचलित विधियाँ हैं। अतएव प्रबुद्ध उपभोक्ता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दुकानदार कोई वस्तु तौलते समय इस प्रकार की कोई बेईमानी न करने पाए।

प्रत्येक नागरिक का यह महत्त्वपूर्ण कर्त्तव्य है कि वह दुकानदारों द्वारा की जाने वाली बेइमानी से उपभोक्ताओं की रक्षा करने में सरकार की सहायता करे। खाद्य-पदार्थ में मिलावट का पता लगाने पर खाद्य एवं स्वास्थ्य निरीक्षक को इसकी शिकायत करनी चाहिए। PFA 1954 ऐसा ही कानून है जिसके अन्तर्गत मिलावट करना अपराध माना गया है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 5.
PFA क्या है ? इसका संशोधन किन-किन वर्षों में किया गया ? अन्तिम संशोधन में कौन-कौन सी नई व्यवस्थाएँ जोड़ी गई हैं ?
उत्तर :
PFA का पूरा नाम है Prevention of Food Adulteration Act अर्थात् खाद्य अपमिश्रण (मिलावट) निवारण अधिनियम। भारत सरकार ने सन् 1954 में कोडेक्स ऐलिमेण्टेरियस कमीशन (Codex Alimentarius Commission) द्वारा विभिन्न खाद्य-पदार्थों के लिए निर्धारित गुण सम्बन्धी मानकों तथा नियमों को अपने देश की जलवायु एवं परिस्थितियों के अनुरूप परिवर्तित करते हुए खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (Prevention of Food Adulteration Act-PFA) बनाया। यह अधिनियम पहली जून, 1955 से जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर सारे देश में लागू किया गया। सन् 1968, 1973 तथा 1979 में इस अधिनियम में संशोधन किए गए।

इस अधिनियम के अन्तर्गत वैज्ञानिकों, रसायन-विश्लेषकों, चिकित्सकों, पोषण-विशेषज्ञों तथा व्यावसायिकों के प्रतिनिधियों की समिति ने बाजार में बिकने वाले सभी खाद्य-पदार्थों के गुण सम्बन्धी न्यूनतम मानक निर्धारित किए हैं। आहारीय मानकों की केन्द्रीय समिति (Central Committee for Food Standards-CCFS) द्वारा इन मानकों में समय-समय पर आवश्यकतानुसार सुधार लाया जाता है। बाजार में बिकने वाले सभी खाद्य-पदार्थों को इन मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। इस अधिनियम के अनुसार किसी एक ब्रांड के खाद्य-पदार्थों से मिलते-जुलते ब्रांड वाले खाद्य-पतार्थों को आयात करना, रखना एवं बेचना प्रतिबन्धित है।

कतिपय रंगों, रासायनिक संरक्षणीय पदार्थों, कृत्रिम मिठासयुक्त पदार्थों यथा सेकीन का प्रयोग प्रतिबन्धित है तथा जिन रंगों एवं संरक्षणीय पदार्थों के प्रयोग की अनुज्ञा प्राप्त है, वे भी केवल निर्धारित मात्रा के अनुसार ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसी प्रकार से केसरी दाल (Keshri Dal) तथा अपने आप मर जाने वाले पशुओं एवं पक्षियों के मांस की बिक्री भी प्रतिबन्धित है। यदि कोई विक्रेता निर्धारित मानकों एवं नियमों के अनुसार खाद्य-पदार्थ नहीं बेचता है तो उसे सजा दी जाती है। सन् 1979 में संशोधित हुए इस अधिनियम के अनुसार इस अधिनियम का पालन न करने वाले विक्रेता को 3 मास से 6 वर्ष तक का कारावास और ₹ 500 से ₹ 2000 तक जुर्माना किया जा सकता है।

किसी विक्रेता को कितना दण्ड दिया जाए यह उस विक्रेता द्वारा किए गए अपराध की गम्भीरता पर निर्भर करता है। यदि कोई विक्रेता ऐसा अपराध करता हुआ पकड़ा जाता है तो उसे पहले से भी कड़ी सजा दी जाती है। उसका लाइसेंस जब्त किया जा सकता है। उसके अपराध का विवरण देते हुए उसका नाम एवं पता स्थानीय अखबारों में मुद्रित कराया जा सकता है और इस कार्य पर हुआ व्यय विक्रेता को ही उठाना पड़ता है। यदि किसी विक्रेता द्वारा बेचे गए खाद्य-पदार्थ मानक स्तर एवं नियमों के अनुकूल न होने के कारण किसी उपभोक्ता का जीवन संकट में पड़ जाता है अथवा उसकी मृत्यु हो जाती है तो विक्रेता को आजीवन कारावास की सज़ा भी दी जा सकती है।

बाज़ार में बेचे जाने वाले खाद्य – पदार्थ के गुण निर्धारित मानक के अनुरूप हों इसकी व्यवस्था के लिए पी० एफ० ए० (PFA) के अतिरिक्त फूड प्रोडक्ट आर्डर (FPO) के माध्यम से एक अन्य व्यवस्था भी की गई है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 6.
खाद्य अपमिश्रण निवारण नियम क्या है ? यह कब बना ? इस नियम के अनुसार किन स्थितियों में भोज्य-पदार्थों को मिलावटी या अपमिश्रित कहा जाता है ?
अथवा
उपभोक्ता मिलावट निवारण नियम कब बना ? इस नियम के अनुसार भोज्य पदार्थों को किन स्थितियों में मिलावटी कहा जाता है ?
उत्तर :
उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की दशा के लिए भारत सरकार ने खाद्य मिलावट निवारण नियम (Prevention of Food Adulteration Act-PFA) 1954 ई० में बनाया।
इस अधिनियम के अन्तर्गत दण्ड का प्रावधान है। अधिनियम 1976 के संशोधन के अनुसार दोषी पाए जाने पर कम-से-कम 6 माह का सश्रम कारावास तथा एक हजार रुपए का जुर्माना है, यदि मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक न हो। मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्रमाणित हो तो 6 वर्ष सश्रम कारावास के अलावा ₹ 2000 (दो हज़ार रुपए) तक जुर्माना हो सकता है। यदि किसी खाद्य-पदार्थ के उपयोग से किसी की मृत्यु हो जाने की सम्भावना हो या शरीर में ऐसी हानि हो जाए जिससे खतरनाक आघात लग जाए तो दण्ड आजन्म कारावास और कम-से-कम ₹ 5000 (पाँच हजार रुपए) का जुर्माना होगा।
इस नियम के अनुसार निम्नलिखित स्थितियों में भोज्य पदार्थों को मिलावटी कहा जाता है –

  1. जब भोज्य-पदार्थ अपने वास्तविक रंग-रूप वाले नहीं रहते हैं।
  2. जब भोज्य-पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्त्वों से युक्त हों।
  3. जब भोज्य-पदार्थ से उसके कुछ भोज्य तत्त्व निकाल दिए जाते हों, जैसे-दूध में से क्रीम।
  4. जब भोज्य-पदार्थों में घटिया या कम दाम वाले पदार्थ मिला दिए जाते हों, जैसे-देसी घी में वनस्पति घी।
  5. जब भोज्य-पदार्थों में हानिकारक विषैले तत्त्व मिला दिए जाते हों, जैसे-पीसी हुई हल्दी में लेड क्रोमेट।
  6. जब भोज्य-पदार्थों को ऐसे धातु के बर्तन में रखा जाता है जिसके सम्पर्क से भोज्य-पदार्थ दूषित हो जाते हों।
  7. जब भोज्य-पदार्थ रोगी पशु या पक्षी द्वारा प्राप्त होते हैं।
  8. जब भोज्य-पदार्थों में न खाने योग्य रासायनिक पदार्थ या वर्जित रंग मिला दिए गए हों।
  9. जब भोज्य-पदार्थ दूषित स्थान पर दूषित हाथ से बनाए जाते हों, डिब्बे में बन्द किए जाते हों या बिक्री के लिए रखे जाते हों।
  10. जब भोज्य पदार्थो में संरक्षण के लिए निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में रंग या संरक्षक पदार्थ मिलाए गए हों।
  11. जब भोज्य पदार्थों के गुणों एवं शुद्धता का गलत विवरण उनके डिब्बों पर दिया गया हो।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 7.
F.P.O. (एफ० पी० ओ०) क्या है ? यह कब लागू हुआ ? इसके अन्तर्गत क्या व्यवस्था की गई ?
उत्तर :
फल व सब्जियों से तैयार किए गए खाद्य-पदार्थों तथा जैम, जैली, स्क्वैश, डिब्बाबन्द खाद्य-पदार्थ आदि की स्वच्छता, न्यूनतम मान्य मानक, खाद्य-पदार्थों के वेष्टन (Wrapper) तथा उन पर लगाये जाने वाले लेबल (Label) आदि के सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश देने के लिए भारत सरकार ने सन् 1946 में फूड प्रोडक्ट आर्डर (Food Product Order) F.P.O की घोषणा की। सन् 1955 में अनिवार्य पदार्थों के अधिनियम की धारा तीन के अन्तर्गत इसमें संशोधन किया गया है। इस नियम के अनुसार बाज़ार में बिक्री के लिए फल व सब्जी से खाद्य-पदार्थ तैयार करने से पहले प्रत्येक निर्माता के लिए एफ० पी० ओ० (E.P.O.) लाइसेंस लेना ज़रूरी है। इसके साथ ही उसे खाद्य-पदार्थ तैयार करते समय इस कानून में दिए गए नियमों का पालन करना भी अनिवार्य है। यदि कोई निर्माता इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके द्वारा तैयार किये गये माल को घटिया (Substandard) घोषित कर दिया जाता है। यदि वह दुबारा इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे कानून में दिए गए प्रावधान के अनुसार दण्डित किया जाता है।

F.P.O. के अन्तर्गत –
(i) फल तथा सब्जियों से बने खाद्य-पदार्थों की किस्म के निम्न स्तर निर्धारित किए गए हैं।
(ii) कारखानों में काम करने के स्वच्छता तथा स्वास्थ्य के न्यूनतम स्तर निर्धारित किए गए हैं।
(iii) खाद्य-पदार्थों को पैक करने तथा उसके पात्रों पर लेबल लगाने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य-पदार्थ निर्माताओं (FPO) के लिए एफ० पी० ओ० (F.P.0.) सम्बन्धी नियमों का पालन करने के अतिरिक्त संग्रहण के लिए प्रयोग में लाये गये डिब्बों, बोतलों आदि पर चिपकाये गये लेबल (Label) पर एफ० पी० ओ० का निम्नलिखित सूचनाएँ देना आवश्यक होता है –

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान 4

  1. संरक्षित खाद्य-पदार्थ का नाम।
  2. खाद्य-पदार्थ तैयार करने के लिए प्रयुक्त सामग्री की सूची मात्रा सहित।
  3. प्रयुक्त किए गए रंगों, सुगंधियों तथा संरक्षकों के नाम।
  4. संरक्षित खाद्य-सामग्री की पैकिंग के समय मात्रा।
  5. संरक्षित खाद्य-पदार्थ का मूल्य।
  6. डिब्बा बन्दी की तिथि।
  7. वस्तु के इस्तेमाल की अवधि यदि कोई हो तो।
  8. मानक नियन्त्रण संस्थान का नाम जैसे F.P.O., I.S.I., Agmark आदि।
  9. बैच नम्बर अथवा कोड नम्बर।
  10. खाद्य-पदार्थ खराब होने की अंदेशित तिथि अथवा प्रयोग की विधि।
  11. खाद्य-पदार्थ को संगृहीत करने के लिए आवश्यक निर्देश।
  12. निर्माता का नाम एवं पता।
  13. उस प्रदेश का नाम जहाँ वह खाद्य-पदार्थ तैयार किया गया है।
  14. तैयार करने की विधि।

इस प्रकार स्पष्ट है कि एफ० पी० ओ० (F.P.O.) के अनुसार बाजार में बेचे जाने वाले विभिन्न खाद्य-पदार्थों में गुणों की न्यूनतम निर्धारित मात्रा का होना ज़रूरी है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 8.
उपभोक्ता के किन्हीं तीन मुख्य अधिकारों के बारे में लिखिए।
उत्तर :
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्तर्गत उपभोक्ता के अधिकार इस प्रकार हैं –
1. मूलभूत आवश्यकताएं – सभ्य जीवन के लिए आवश्यकताओं की पूर्ति जैसे रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, जल, चिकित्सा आदि उपभोक्ता का अधिकार हैं।
2. चयन अथवा चुनाव का अधिकार – उपभोक्ता का अधिकार है कि वह बेचने वाले से उचित गुणवत्ता तथा उचित कीमत वाली वस्तुओं का चयन करे।
3. सुनवाई – उपभोक्ता को अधिकार है कि वह वस्तुओं को निर्माताओं को अपने विचार प्रकट करे तथा निर्माता उनके विचारों को प्राप्त करें तथा उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करें।
4. जागरुक होना – उपभोक्ता का अधिकार है कि वह वस्तु की जानकारी मांग सकता है तथा निर्माता को उचित जानकारी प्रदान करनी पड़ेगी।
5. क्षतिपूर्ति – यदि वस्तु में किसी प्रकार से उचित नहीं है तो उपभोक्ता को उसका उचित परिशोधन या मुआवजा मिलना अधिकार क्षेत्र में आता है। उपभोक्ता उस वस्तु के निर्माता से मुआवज़ा लेने का अधिकारी है।

एक शब्द/एक वाक्य वाले प्रश्न –

(क) एक शब्द में उत्तर दें –

प्रश्न 1.
फूड प्रोडक्ट आर्डर की घोषणा कब की गई ?
उत्तर :
1946 में।

प्रश्न 2.
हैलमेट पर कौन-सा मार्क लगेगा ?
उत्तर :
ISI.

प्रश्न 3.
P.F.A. कब लागू किया गया ?
उत्तर :
1954.

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 4.
ISI की स्थापना कब हुई ?
उत्तर :
1947.

प्रश्न 5.
वातावरण के अनुसार अनुकूल वस्तुओं पर कौन-सा मार्क लगेगा ?
उत्तर :
ईको लेबल।

प्रश्न 6.
शुद्ध सोने के गहनों पर कौन-सा मार्क लगेगा?
उत्तर :
हॉल मार्क।

प्रश्न 7.
गैस स्टोव पर कौन-सा मार्क लगेगा ?
उत्तर :
ISI.

प्रश्न 8.
खाने के तेलों पर कौन-सा चिन्ह लगाया जाता है ?
उत्तर :
एगमार्क।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 9.
स्वेटर पर कौन-सा मार्क लगेगा ?
उत्तर :
वूलमार्क।

प्रश्न 10.
औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम कब बनाया गया ?
उत्तर :
1940.

प्रश्न 11.
विद्युत् प्रेस पर कौन-सा मार्क लगा होता है ?
उत्तर :
ISI.

(ख) रिक्त स्थान भरो –
1. विद्युत् प्रेस पर ………… मार्क लगेगा।
2. FPO का पूरा नाम …………. है।
3. सप्रेटा दूध सस्ता बेचना ………… नहीं है।
4. कूलर व हीटर आदि मौसम के ………… खरीदने चाहिए।
5. भारतीय मानक संस्थान द्वारा ………… मार्क दिया गया है।
उत्तर :
1. ISI
2. Fruit Product Order
3. मिलावट
4. पहले या बाद
5. ISI.

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

(ग) निम्न में गलत या ठीक बताएं –
1. जलेबी में रंग डालना मिलावट है।
2. एगमार्क कृषि सम्बन्धी पदार्थों के लिए है।
3. पैकिंग करने से वस्तुएं टूटती नहीं।
4. ISI मार्क कारखानों में बने पदार्थ उपकरण के लिए है।
5. FPO का मतलब Food Product Order.
6. PFA का मतलब Production of Food Adulteration Act.
7. एगमार्क प्रेस पर लगेगा।
उत्तर :
1. ठीक
2. ठीक
3. ठीक
4. ठीक
5. ठीक
6. ठीक
7. गलत।

बहु-विकल्पीय प्रश्न –

प्रश्न 1.
निम्न में से ISI मार्क नहीं लगेगा ?
(A) बिजली की तारें
(B) बिजली के पंखे
(C) ब्लेड
(D) मसाले।
उत्तर :
मसाले।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 2.
उपकरणों की उत्तमता के लिए लगने वाला मार्क है –
(A) ISI
(B) AGMARK
(C) FPO
(D) PFA.
उत्तर :
ISI.

प्रश्न 3.
FPO का पूरा नाम है –
(A) फ्रूट प्रोडक्ट आर्डर
(B) फ्रूट प्रोडक्ट आफिस
(C) फूड प्रोडक्ट आर्डर
(D) फूड प्रोडक्ट आफिस।
उत्तर :
फ्रूट प्रोडक्ट आर्डर।

प्रश्न 4.
एगमार्क लगाते हैं –
(A) सील बंद मसाले
(B) अनाज व दालें
(C) आटा
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर : उपरोक्त सभी।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 5.
एक जैम के पैक पर चिन्ह होता है –
(A) I.S.I.
(B) F.P.O.
(C) AGMARK
(D) उपरोक्त सभी।
उत्तर :
F.P.O.

प्रश्न 6.
एगमार्क लगाया जाता है –
(A) संसाधित भोजन पर
(B) अनाज और दालों पर
(C) पैक भोजन पर
(D) फल पदार्थों पर।
उत्तर :
अनाज और दालों पर।

प्रश्न 7.
एगमार्क ……… द्वारा दिया जाता है –
(A) भारतीय संसद् द्वारा
(B) भारत सरकार के बिक्री एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा
(C) भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा
(D) भारतीय मानकीकरण संस्थान द्वारा।
उत्तर :
भारत सरकार के बिक्री एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 8.
मानक माप एवं तोल अधिनियम पूरे देश में कब लागू हुआ ?
(A) 1950
(B) 1960
(C) 1965
(D) 1970
उत्तर :
1960.

प्रश्न 9.
Standard of Weight Act कब लागू हुआ –
(A) 1 अगस्त, 1940
(B) 1 जुलाई, 1942
(C) 1 मार्च, 1944
(D) 1 नवम्बर, 1946.
उत्तर :
1 जुलाई, 1942.

प्रश्न 10.
कूलर और हीटर आदि कब खरीदने चाहिएं ?
(A) मौसम के पहले
(B) मौसम में
(C) मौसम के पहले या बाद
(D) उपरिलिखित सभी।
उत्तर :
मौसम के पहले या बाद।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 11.
किस स्थिति में भोज्य पदार्थ को मिलावटी कहा जाता है ?
(A) वास्तविक रंग-रूप वाले न हों
(B) हानिकारक तत्त्वों से युक्त हों
(C) घटिया या कम दाम वाले पदार्थ मिला दिए जाएं
(D) उपरिलिखित सभी।
उत्तर :
उपरिलिखित सभी।

प्रश्न 12.
दोषयुक्त तोल व माप के साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए उपभोक्ता को चाहिए कि वह ……………. के प्रयोग को बढ़ावा दें।
(A) डिजिटल तोलने वाली मशीन
(B) हाथ वाले तराजू
(C) तराजू
(D) उपरिलिखित सभी।
उत्तर :
डिजिटल तोलने वाली मशीन।

प्रश्न 13.
विद्युत् प्रेस पर कौन-सा मार्क लगा होता है-
(A) ISI
(B) FPO
(C) Agmark
(D) Woolmark.
उत्तर :
ISI.

प्रश्न 14.
ISI मार्क किस संस्था द्वारा दिया जाता है –
(A) भारतीय मानक संस्थान
(B) भारतीय माप संस्थान
(C) अंतर्राष्ट्रीय मानक संस्थान
(D) कोई भी नहीं।
उत्तर :
भारतीय मानक संस्थान।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 15.
ISI मार्क किन चीज़ों पर लगाया जाता है –
(A) विद्युत् उपकरणों पर
(B) खाद्य पदार्थों पर
(C) कपड़ों पर
(D) अण्डों पर।
उत्तर :
विद्युत् उपकरणों पर।

प्रश्न 16.
वूलमार्क का लेबल हमें क्या सूचना देता है –
(A) क्वालिटी खराब है
(B) क्वालिटी नकली है
(C) क्वालिटी अच्छी है
(D) क्वालिटी सामान्य है।
उत्तर :
क्वालिटी अच्छी है।

प्रश्न 17.
P.F.A. का पूरा नाम बताएं –
(A) Prevention of Food Act
(B) Prevention of Food Adulteration Act
(C) Product Food Act
(D) Product of Food Adulteration Act.
उत्तर :
Prevention of Food Adulteration Act

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 18.
Agmark का चिन्ह किन पदार्थों पर लगाया जाता है ?
(A) खाने के तेलों पर
(B) सब्जियों पर
(C) दालों पर
(D) कपड़ों पर।
उत्तर :
खाने के तेलों पर।

प्रश्न 19.
ISI मार्क की स्थापना कब हुई ?
(A) 1940
(B) 1947
(C) 1942
(D) 1950.
उत्तर :
1947.

प्रश्न 20.
एगमार्क का चिह्न……… की उत्तमता के लिए दिया गया प्रमाण है।
(A) खाद्य पदार्थों
(B) उपकरणों
(C) ऊन
(D) घी।
उत्तर :
घी।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

प्रश्न 21.
P.F.A. का पूरा नाम ……………… है।
(A) प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्टरेशन एक्ट
(B) प्रिवेंशन ऑफ फ्रूट अडल्टरेशन एक्ट
(C) प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्टरेटड एक्ट
(D) प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्टरेटड एक्ट।
उत्तर :
प्रिवेंशन ऑफ फूड अडल्टरेशन एक्ट।

प्रश्न 22.
खाने के तेलों पर कौन-सा चिन्ह लगाया जाता है ?
(A) एगमार्क
(B) एफ०पी०ओ०
(C) आई०एस०आई०
(D) वूल मार्क।
उत्तर :
एगमार्क।

प्रश्न 23.
बिजली की तारों पर कौन-सा चिह्न लगाया जाता है ?
(A) एगमार्क
(B) एफ० पी० ओ०
(C) आई०एस०आई०
(D) वूल मार्क।
उत्तर :
आई०एस०आई०।

उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान HBSE 10th Class Home Science Notes

ध्यानार्थ तथ्य :

→ ISI मार्क भारतीय मानक संस्थान द्वारा किसी वस्तु की उत्तमता के लिए दिया गया प्रमाण पत्र है।

→ I.S.I. प्रयोग में लाए जाने वाले उपकरणों की उत्तमता का प्रमाण है इसकी स्थापना 1947 में हुई।

→ एगमार्क, भारत सरकार के बिक्री एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा खाद्य-पदार्थों की उत्तमता के लिए दिया गया प्रमाण है।

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान

→ एगमार्क का चिन्ह निम्नलिखित पदार्थों पर लगाया जाता है-खाने के तेल, घी, मक्खन, मसाले आदि।

→ दुकानदार कई तरह से उपभोक्ताओं को ठगते हैं – जैसे-घिसे बाट का प्रयोग करके, तराजू के पलड़े पर चुम्बक लगाकर आदि।।

→ उपभोक्ताओं के रूप में हमें अपने हक को सुरक्षित रखने के लिए कुछ कर्तव्यों को निभाने का प्रयास करना चाहिए। जैसे-दोष युक्त माप तोल के साधनों के प्रयोग पर रोक लगाएं, अपूर्ण लेबल वाली वस्तुएं न लें, नकली वस्तुओं की खरीद से बचें, यदि मिलावट वाली वस्तुओं का अनुमान हो तो सम्बन्धित अधिकारियों को सूचित करें।

→ 1940 में औषधि तथा मादक पदार्थ अधिनियम बनाया गया। इसके अनुसार यदि किसी औषधि अथवा मादक पदार्थ में प्रमाणित स्तर से नीचे के गुण पाए जाते हैं तो उसके निर्माता से उसके निर्माण का अधिकार छीन कर उसके मालिक को एक वर्ष के कारावास का दण्ड भी दिया जाता है।

→ परिवार के लिए आवश्यक वस्तुओं का चुनाव करते समय गृहिणी को कई निर्णय लेने पड़ते हैं; जैसे क्या खरीदें, कहां से खरीदें, कब खरीदें, कितना खरीदें आदि।

→ विक्रेता उपभोक्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं; जैसे – वस्तुओं में मिलावट करके, अपर्याप्त लेबल लगाकर त्रुटिपूर्ण माप और तोल द्वारा, असत्य विज्ञापनों द्वारा नकली वस्तुओं की बिक्री द्वारा।

→ उपभोक्ताओं को सूचना देने वाले लेबल चार प्रकार के होते हैं; जैसे – पदार्थों की विशेषताओं का परिचय देने वाले, ब्रांड की सूचना देने वाले, ट्रेड मार्क की सूचना वाले, गुणवत्ता की श्रेणी की सूचना वाले।

→ एक अच्छे उपभोक्ता के निम्नलिखित गुण होने चाहिएं –
विज्ञापनों के प्रभाव में न आना, जल्दबाजी में न खरीदना, खरीदी जाने वाली वस्तुओं की सूची बनाना, आई० एस० आई० अथवा एगमार्क वाली वस्तुएं खरीदना।

→ PFA – Prevention of Food Adulteration Act
CCFS – Central Committee for Food Standards
FPO – Food Product Order.

HBSE 10th Class Home Science Solutions Chapter 6 उपभोक्ता अधिकारों का ज्ञान Read More »