Class 11

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 1.
रासायनिक आबन्ध के बनने की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
परमाणुओं के संयोग से अणु का बनना उनके बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करता है। जब परमाणु आपस में संयोग करते हैं तो वे पास-पास आते हैं। संयोग करने के बाद उनकी निकाय की ऊर्जा धारिता सबसे कम हो जाती है और निकाय का स्थायित्व बढ़ जाता है।

अतः एक अणु के दो परमाणुओं को एक साथ बाँधे रह सकने की आकर्षण बल क्षमता को रासायनिक आबन्धन कहते हैं।
कॉसेल-लुइस के अनुसार एक परमाणु के बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉन दूसरे परमाणु के बाह्य कोश में स्थानान्तरित होकर अपना अष्टक पूरा करते हैं। जिससे वैद्युत संयोजक बंध बन जाता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित तत्वों के परमाणुओं के लूइस बिन्दु प्रतीक लिखिए।
Mg, Na, B, O, N, Br
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 1

प्रश्न 3.
निम्नलिखित परमाणुओं तथा आयनों के लूइस बिन्दु प्रतीक लिखिए।
S और S2-, Al तथा Al3+ H और H
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 2

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अणुओं तथा आयनों की लुइस संरचना लिखिए।
H2S, SiCl4, BeF2, CO32-, HCOOH
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 3

प्रश्न 5.
अष्टक नियम परिभाषित कीजिए। इस नियम का महत्त्व तथा सीमाएँ बताइ।
उत्तर:
परमाणुओं के बाह्य कोश के इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण या सहभाजन द्वारा अष्टक पूरा करने को अष्टक नियम कहते हैं।
अष्टक नियम का महत्व –

  • कार्बनिक यौगिकों की संरचना समझने में अष्टक नियम महत्त्वपूर्ण है।
  • अधिकांश अणु बनने में अष्टक नियम का पालन करते हैं।

अष्टक नियम की सीमाएँ –

  • कुछ यौगिकों में केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर उपस्थित इलेक्ट्रॉन 8 से कम होते हैं। जैसे – BH3, BCl3
  • संक्रमण तत्वों में केन्द्रीय परमाणु के चारों ओर 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः ऐसे यौगिकों पर अष्टक नियम लागू नहीं होता है। जैसे SF6, PCl5 आदि।

अष्टक नियम की कुछ अन्य कमियाँ Some Other Demerits of Octel Rule:-
(1) जीनॉन के यौगिक (Compounds of xenone)-अष्टक नियम के अनुसार उत्कृष्ट गैसें यौगिक नहीं बनाती हैं, परन्तु Xe ऑक्सीजन तथा फ्लुओरीन के साथ यौगिक बनाती है जो कि काफी स्थायी होते हैं। उदाहरण- XeF2, XeF4, XeF6, XeOF2, XeOF4 आदि।

(2) अणुओं की आकृति (Shapes of molecules)-अणुओं की आकृति के सम्बन्ध में अष्टक नियम किसी भी प्रकार की व्याख्या नहीं करता है।

प्रश्न 6.
आयनिक बंध बनाने के लिए अनुकूल कारकों को लिखिये।
उत्तर:
निम्न कारक अनुकूल होते हैं –

  • आयनन एन्थैल्पी का मान कम से कम होना चाहिए ।
  • इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान अधिक ऋणात्मक होना चाहिए।
  • जालक ऊर्जा का परिमाण अधिक होने पर आयनिक बंध का स्थायित्व अधिक होगा।

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प्रश्न 7.
निम्नलिखित अणुओं की आकृति की व्याख्या VSEPR सिद्धान्त के अनुरूप करें।
BeCl2, BCl3, SiCl4, AsF5, H2S, PH3
उत्तर:
(1) BeCl2 में दो आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = रेखीय

(2) BCl3 में तीन आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = त्रिकोणीय समतलीय

(3) SiCl4 में चार आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = चतुष्फलकीय

(4) AsF5 में पाँच आबन्धी युग्म हैं, अतः आकृति = त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय

(5) H2S में दो आबन्धी युग्म तथा दो एकाकी युग्म हैं।
अतः आकृति = बंकित अणु या मुड़ी हुयी

(6) PH3 में तीन आबन्धी युग्म तथा एक एकाकी युग्म
है, अत: आकृति = पिरामिडी

प्रश्न 8.
यद्यपि NH3 तथा H2O दोनों अणुओं की ज्यामिती विकृत चतुष्फलकीय होती है। तथापि जल में आबन्ध कोण अमोनिया की अपेक्षा कम होता है। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
NH3 तथा H2O में sp³ संकरण होता है। अतः इन अणुओं की आकृति चतुष्फलकीय होनी चाहिए। परन्तु NH3 में एक एकाकी युग्म N पर होता है जबकि H2O अणु में 0 पर दो एकाकी युग्म उपस्थित रहते हैं। VSEPR सिद्धान्त के अनुसार H2O में एकाकी युग्मों में प्रतिकर्षण अधिक होता है। अत: NH3 में आबन्ध कोण (107°) H2O के आबन्ध कोण (104.5) से अधिक होता है।

प्रश्न 9.
आबन्ध प्रबलता को आबन्ध कोटि के रूप में किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
उत्तर:
आबन्ध प्रबलता ∝ आबन्ध कोटि
अर्थात् आबन्ध कोटि जितना अधिक होगी, आबन्ध स्थायित्व उतना ही अधिक होगा।
उदाहरण-

अणुआबन्ध कोटि या आबन्ध क्रमआबन्ध स्थायित्व या आबन्ध वियोजन ऊर्जा (kJ/mol)
(1) नाइट्रोजन अणु (N2)3945
(2) ऑक्सीजन (O2)2498
(3) फ्लुओरीन अणु (F2)1158

प्रश्न 10.
आबन्ध लम्बाई की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी अणु में आबन्धित परमाणुओं के नाभिकों के बीच साम्यावस्था दूरी आबन्ध लम्बाई कहलाती है। इसे पिकोमीटर (1 pm = 10-12 m) में व्यक्त करते हैं।

‘आबन्ध लम्बाई’ कहलाती है। आबन्ध लम्बाई या सहसंयोजक आबन्ध की लम्बाई को स्पेक्ट्रमी, एक्स-किरण विवर्तन तथा इलेक्ट्रॉन विवर्तन (Electron Diffraction) आदि विधियों के द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।

आबन्धित युग्म का प्रत्येक परमाणु आबन्ध की लम्बाई में योगदान करता है। सहसंयोजी आबन्ध में प्रत्येक परमाणु का योगदान उस परमाणु की सहसंयोजी त्रिज्या कहलाती है। वास्तव में सहसंयोजक आबन्ध आबन्धित परमाणुओं की सहसंयोजक त्रिज्या का योग होता है।
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R = rA + rB
यहाँ R = आबन्ध लम्बाई है तथा rA एवं rB क्रमश: A व B परमाणुओं की सहसंयोजी त्रिज्यायें है । वाण्डर वाल त्रिज्या अनाबन्धित अवस्था में संयोजी कोश सहित परमाणु का समग्र आकार निरूपित करती है । वाण्डर वाल त्रिज्या ठोस अवस्था में विभिन्न अणुओं के दो समरूप परमाणुओं के बीच की दूरी की आधी होती है।
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आबन्ध लम्बाई का मान सामान्यतया पिकोमीटर (1 pm = 10-12 m) में व्यक्त करते हैं। आबन्ध लम्बाई को प्रभावित करने वाले कारक निम्न प्रकार हैं-
(1) परमाणु का आकार (Size of Atom) – आबन्ध लम्बाई परमाणु के आकार से सीधे सम्बन्धित होती है।
आबन्ध लम्बाई ∝ परमाणु का आकार
उदाहरण – H – F < H – Cl < H – Br < H – I (आबन्ध लम्बाई) 2. आबन्धों की बहुलता (Multiplicity of Bonds) – आबन्धों की बहुलता बढ़ने पर आबन्ध लम्बाई कम हो जाती है क्योंकि परमाणु एक दूसरे के नजदीक आ जाते हैं।
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उदाहरण – C – C > C = C > C ≡ C

3. संकरण का प्रकार (Type of Hybridisation) – आबन्ध लम्बाई संकरण के द्वारा भी प्रभावित होती है। अणु में s-अभिलक्षण बढ़ने पर आबन्ध लम्बाई कम हो जाती है।
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उदाहरण – sp³ (C-H आबन्ध ( 111pm) > sp² C – H आबन्ध ( 110 pm ) > sp² – C – H आबन्ध (108 pm)
कुछ सामान्य तत्वों की आबन्ध लम्बाई निम्न सारणी में दी गयी है।
सारणी 4.1 : कुछ एकल, द्वि तथा त्रि आबन्धों की औसत लम्बाई

आबन्ध का प्रकारसहसंयोजी आबन्ध लम्बाई (pm)
1. H – H74
2. O – H96
3. C – H107
4. N – O136
5. C – O143
6. C – N143
7. C – C154
8. C = O121
9. N = O122
10. C = C133
11. C = N138
12. C ≡ N116
13. C ≡ C120

सारणी 4-2 : कुछ सामान्य अणुओं की आबन्ध लम्बाई

अणुआबन्ध लम्बाई (pm)
1. H2 (H-H)74
2. F2 (FF)144
3. Cl2 (Cl-CI)199
4. Br2 (Br – Br)228
5. I2 (I – I)267
6. N2 (N = N)109
7. O2 (0 = 0)121
8. HF (H – F)92
9. HCl(H – Cl)127
10. HBr (H-Br)141
11.  HI (H-I)160

सारणी 4.3 सहसंयोजी त्रिज्याएँ rcov(pm)

तत्व (आबन्ध प्रकृति)सहसंयोजी त्रिज्या rcov (pm)
1. H (एकल आबन्ध)37
2. C (एकल आबन्ध)77
3. C (द्विआबन्ध)67
4. C (त्रिआबन्ध)60
5. N (एकल आबन्ध)74
6. N (द्वि आबन्ध)65
7. N (त्रि आबन्ध)55
8. P (एकल आबन्ध)110
9. As (एकल आबन्ध)121
10. Sb (एकल आबन्ध)141
11. O (एकल आबन्ध)66
12. O (द्वि आबन्ध)57
13. S (द्वि एकल आबन्ध)104
14. S (द्वि आबन्ध)95
15. Se (एकल आबन्ध)104
16. Te (एकल आबन्ध)137
17. F (एकल आबन्ध)64
18. Cl (एकल आबन्ध)99
19. Br (एकल आबन्ध)114
20. I (एकल आबन्ध)133

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प्रश्न 11.
CO32- आयन के संदर्भ में अनुनाद के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लूइस संरचना के अनुसार तीन कार्बन-ऑक्सीजन आबन्धों की लम्बाई भिन्न होनी चाहिए, परन्तु CO32- आयन के तीनों कार्बन – ऑक्सीजन आबन्धों की लम्बाई समान होती है। अतः कार्बोनेट आयन को तीन विहित संरचनाओं (I II III) का अनुनादी संकर माना जाता है।
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प्रश्न 12.
नीचे दी गई संरचनाओं (I) और (II) द्वारा H3PO3 को प्रदर्शित किया जा सकता है। क्या ये दो संरचनाएँ H3PO3 के अनुनाद संकर के विहित (केनॉनीकल) रूप माने जा सकते हैं? यदि नहीं तो उसका कारण बताइये।
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उत्तर:
उपरोक्त संरचनायें (I) व (II) अनुनादी संरचनायें नहीं हैं क्योंकि अनुनाद के लिये सामान्य नियम है कि अनुनादी संरचनाओं में इलेक्ट्रॉन युग्मों की व्यवस्था में भिन्नता होनी चाहिये न कि परमाणुओं की। संरचनायें (I) तथा (II) विहित (Canonical ) संरचनायें नहीं है क्योंकि संरचना (I) में फॉस्फोरस परमाणु H (PH आबन्ध) से जुड़ा होता है जबकि संरचना (II) में यह OH समूह ( P – OH आबन्ध) से जुड़ा है।

प्रश्न 13.
SO3, NO2 तथा NO3 की अनुनाद संरचनाएँ लिखिए।
उत्तर:
SO3 की अनुनादी संरचना
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NO2 की अनुनादी संरचना
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NO3 की अनुनादी संरचना
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प्रश्न 14.
निम्नलिखित परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण द्वारा धनायनों तथा ऋणायनों में विरचन को लूइस बिन्दु प्रतीकों की सहायता से दर्शाइये
(क) K तथा S
(ख) Ca तथा O
(ग) AI तथा N
उत्तर:
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प्रश्न 15.
हालांकि CO2 तथा H2O दोनों त्रिपरमाणुक अणु हैं। परन्तु H2O अणु की आकृति बंकित होती है जबकि CO2 की रैखिक आकृति होती है। द्विध्रुव आघूर्ण के आधार पर इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
CO2 तथा H2O दोनों त्रिपरमाणुक अणु हैं। CO2 की आकृति रेखीय होती है। जबकि H2O की आकृति बंकित होती है। CO2 अणु में दो C = O आबन्ध ध्रुवित प्रकृति के होते हैं लेकिन दोनों का प्रभाव समान व विपरीत दिशा में होने के कारण निष्क्रिय हो जाता है। अतः CO2 का अणु रेखीय अणु है।
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H2O-H अणु में दो OH आबन्ध होते हैं। इनकी प्रकृति भी ध्रुवीय होती है। लेकिन आबन्ध रैखिक न होने के कारण द्विध्रुव आघूर्ण दर्शाते हैं इसलिये आकृति बंकित होती है।
H2O अणु का द्विध्रुव आघूर्ण मान
μ = 1.84D होता है।
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प्रश्न 16.
द्विध्रुव आघूर्ण के महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग बताएँ-
उत्तर:
(i) आबन्ध की घूर्णता ज्ञात करने में।

(ii) अणुओं की आण्विक संरचना ज्ञात करने में।

(iii) अणुओं की प्रकृति ज्ञात करने में।

(iv) आबन्धों की आयनिक प्रतिशतता ज्ञात करने में।
(1) द्विपरमाणुक अणु (Diatomic molecules) – द्विपरमाणुक अणुओं में आबन्ध की ध्रुवणता द्विध्रुब आघूर्ण के मान से सीधे सम्बन्धि होती है। यदि अणु का द्विध्रुव आघूर्ण मान अधिक है तो आबन्ध की ध्रुवणता भी उच्च होगी।
उदाहरण-
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(2) बहुपरमाणुक अणु (Polyatomic molecules) बहुपरमाणुक अणुओं में एक से अधिक सहसंयोजक बन्ध होते हैं तथा द्विध्रुव आघूर्ण का मान विभिन्न आबन्धों की ध्रुवता तथा उनके संगत आबन्ध कोणों पर निर्भर करता है।
(A) त्रिपरमाणुक अणु (Triatomic molecules) – ऐसे त्रिपरमाणुक अणु जिनमें द्विध्रुव आघूर्ण उपस्थित होता है उनमें एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म पाया जाता है। यहाँ पर आबन्ध ध्रुवता को निरस्त नहीं कर पाता है। ऐसे अणुओं की ज्यामिति मुड़ी हुयी या V-आकृति की होती है परन्तु ऐसे त्रिपरमाणुक अणु जिनमें एकाकी युग्म उपस्थित नहीं होता है।

ऐसे अणु में दो समान आबंध द्विध्रुव विपरीत दिशा में होते हैं तथा एक दूसरे के प्रभाव को समाप्त (Cancel) कर देते हैं। इनका द्विध्रुव आघूर्ण का मान शून्य होता है एवं ज्यामितीय रेखीय होती है।
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(B) चतुष्परमाणुक अणु (Tetraatomic molecule) – ऐसे अणु जिनमें द्विध्रुव आघूर्ण उपस्थित होता है तथा उनमें एकाकी युग्म होता है। यहाँ पर आबन्ध ध्रुवता को निरस्त नहीं कर पाते। इन अणुओं की ज्यामिति पिरामिडीय होती है।

जबकि शून्य द्विध्रुव आघूर्ण वाले अणुओं की ज्यामिति त्रिकोणीय होती है।
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NH3 तथा NF3 अणुओं के द्विध्रुव-आघूर्ण की तुलना :
NH3 तथा NF3 दोनों अणुओं की आकृति पिरामिडीय होती है। . जबकि दोनों अणुओं में नाइट्रोजनं परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है। हालाँकि फ्लुओरीन की विद्युत ऋणात्मकता नाइट्रोजन की अपेक्षा अधिक होती है परन्तु NH3 का परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण (4.9 × 10-30 cm) NF3 के द्विध्रुव आघूर्ण (0.80 x 10-30 cm) की अपेक्षा अधिक होता है। इसका कारण यह है कि NH3 में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का कक्षक द्विध्रुव आघूर्ण तीन N – F आबन्धों के द्विध्रुव आघूर्णों के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण की विपरीत दिशा में होता है। कक्षक का द्विध्रुव आघूर्ण एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण N – F आबन्ध आघूर्णो के परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण को कम कर देता है। अतः NF3 के अणु का द्विध्रुव आघूर्ण कम होता है।
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कुछ अणुओं के द्विध्रुव आघूर्ण तथा आकृति के नीचे दी गई सारणी में दर्शाया गया है-
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(3) प्रतिशत आयनिक गुण ज्ञात करने में (In determining the percentage ionic character) – किसी सहसंयोजक यौगिक में हम प्रतिशत आयनिक गुण को निम्न सूत्र की सहायता से ज्ञात कर सकते हैं।
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उदाहरण-HCI का प्रतिशत आयनिक लक्षण ज्ञात करो यदि HCI के द्विध्रुव आघूर्ण का प्रायोगिक मान 1.03D है तथा बन्ध लम्बाई 1-275 है।
हल:
यदि इलेक्ट्रॉन पूर्ण रूप से स्थानान्तरित हो रहा है। अर्थात् 100 प्रतिशत आयनिक अभिलक्षण के लिये H+ व Cl आयनों पर आवेश एक इकाई (4.8 x 10-10 esu) के बराबर होता है। यहाँ H-CI आबन्ध लम्बाई =1.275 A
= 1.275 x 10-8 cm
µ (आयनिक या सैद्धान्तिक )
= q x d
= 4.8 x 10-10 x 1.275 x 108 esu cm
= 6.12 × 10-18 esu cm
= 6.12D
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प्रश्न 17.
विद्युत ऋणात्मकता को परिभाषित कीजिए। यह इलेक्ट्रॉन बन्धुता से किस प्रकार भिन्न है।
उत्तर:
किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता अणु में उपस्थित साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता है। इसकी इकाई नहीं होती है। विद्युत ऋणात्मकता परमाणु की साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।

विद्युत ऋणात्मकता तथा इलेक्ट्रॉन बन्धुता में अन्तर

विद्युत ऋणात्मकताइलेक्ट्रॉन बन्धुता
1. यह सहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की किसी परमाणु की प्रवृत्ति होती है।1. यह किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा बाहय इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने पर मुक्त होने वाली ऊर्जा है।
2. यह परमाणु की सापेक्ष इलेक्ट्रॉन आकर्षण की प्रवत्ति है।2. यह परमाणु की परिशुद्ध आकर्षण प्रवृत्ति है।
3. यह आबंधित परमाणु का गुणधर्म है।3. यह विलगित परमाणु का गुणधर्म है।
4. इसकी कोई इकाई नहीं होती। यह केवल तुलनात्मक पैमाने द्वारा व्यक्त की जाती है।4. इसकी इकाई होती है। इसकी इकाई KJ या eV/परमाणु है।

प्रश्न 18.
ध्रुवीय सहसंयोजी आबन्ध से आप क्या समझते हो? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विषम परमाणुक अणु में सहसंयोजक बंध के इलेक्ट्रॉन युग्म अधिक ऋणात्मक परमाणु की ओर आकर्षित होकर विस्थापित हो जाते हैं। जिससे एक परमाणु पर धनावेश तथा दूसरे परमाणु पर ऋणावेश आ जाता है। अत: सह-संयोजक बंध ध्रुवीय हो जाता है। ऐसे बंध को ध्रुवीय सहसंयोजक बंध कहते हैं। उदाहरणार्थ-
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प्रश्न 19.
निम्नलिखित अणुओं को आबन्धों की बढ़ती आयनिक प्रकृति के क्रम में लिखिए-
LIF, K2O, N2, SO2 तथा CIF3
उत्तर:
अणुओं में आबन्धों की बढ़ती आयनिक प्रकृति का क्रम निम्न प्रकार है-
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प्रश्न 20.
CH3COOH की नीचे दी गई ढाँचा संरचना सही हैं परन्तु कुछ आबन्ध त्रुटि पूर्ण दर्शाए गए हैं। ऐसीटिक अम्ल की लूइस संरचना लिखिए-
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उत्तर:
उपरोक्त प्रश्न में दी गयी संरचना में केवल ढाँचा संरचना सही है, परन्तु यह लूइस संकल्पना के साथ-साथ कार्बन की चतुसंयोजी प्रकृति के अनुसार नहीं है। ऐसीटिक अम्ल की लूइस संरचना निम्नवत् होगी-
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प्रश्न 21.
चतुष्फलकीय ज्यामिति के अलावा CH4 अणु की एक और संभव ज्यामिति वर्ग समतली है जिसमें हाइड्रोजन के चार परमाणु एक वर्ग के चारों कोनों पर होते हैं। व्याख्या कीजिए कि CH4 का अणु वर्ग समतली नहीं होता है।
उत्तर:
CH4 की चतुष्फलकीय एवं वर्ग समतली संरचनायें निम्न प्रकार हैं-
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VSEPR सिद्धान्त के अनुसार, केन्द्रीय परमाणु पर स्थित इलेक्ट्रॉन युग्मों में प्रतिकर्षण कम करने के लिये उनके मध्य दूरी अधिक होनी चाहिये। CH4 की वर्ग समतली संरचना में चार C-H आबन्ध युग्म 90° कोण पर होते हैं। जबकि चतुष्फलकीय संरचना में C-H बन्ध युग्म 109.5° पर होते हैं। अतः चतुष्फलकीय संरचना में बन्ध कोण अधिक होने के कारण C-H आबन्ध युग्मों के मध्य प्रतिकर्षण भी कम होगा। अतः CH4 की ज्यामिति चतुष्फलकीय होती है न कि वर्ग समतलीय।

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प्रश्न 22.
यद्यपि Be-H आबन्ध ध्रुवीय है तथा BeH2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है, स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
BeH2 अणु में sp संकरण होता है जिससे अणु की आकृति रेखीय है। Be-H आबन्ध में Be तथा H की विद्युत ऋणात्मकता का अन्तर अधिक है। लेकिन BeH2 में द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है। क्योंकि दोनों आबन्ध एक-दूसरे के घूर्णन को समाप्त कर देते हैं।
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प्रश्न 23.
NH3 तथा NF3 में किस अणु का द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है और क्यों?
उत्तर:
NH3 अणु का द्विध्रुव आघूर्ण (1.46D) NF3 के द्विध्रुव आघूर्ण (0-24 D) से बहुत अधिक है । N और F परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकताओं का अन्तर (4.0-3.0 = 10 ) है जोकि N, और H परमाणु के अन्तर ( 3.0 – 2.1 = 09) के बराबर है। NH3 में N – H
आबन्ध घूर्णता समान दिशा में है जबकि NF3 में आबन्ध घूर्णता विपरीत दिशा में है । अत: NH3 अणु में द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है।
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प्रश्न 24.
परमाणु कक्षकों के संकरण से आप क्या समझते हैं? sp, sp², sp³ संकर कक्षकों की आकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संकरण समान ऊर्जा वाले कक्षकों के आपस में मिलकर ऊर्जा के पुनर्वितरण द्वारा समान ऊर्जा तथा आकार के कक्षकों के बनने की प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।
(i) sp संकरण – एक s तथा एक p कक्षक संकरित होकर दो सम sp संकरित कक्षक बनाते हैं। यहाँ संकरित कक्षक में 50% s – लक्षण तथा 50% p-लक्षण होता है।
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(ii) sp² संकरण – एक s तथा दो कक्षक संकरित होकर तीन सम sp² संकरित कक्षक बनाते हैं। इस sp² संकरित कक्षक में 33.34% s – लक्षण तथा 66.66% p- लक्षण होते हैं।
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(iii) sp³ संकरण – एक s तथा तीन p कक्षक संकरित होकर चार sp³ संकरित कक्षक बनाते हैं। sp³ संकरित कक्षक में 25% s- लक्षण तथा 75% p-लक्षण पाये जाते हैं।
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प्रश्न 25.
निम्नलिखित अभिक्रिया में Al परमाणु की संकरण अवस्था में परिवर्तन (यदि होता है तो) को समझाइये-
AlCl3 + Cl → [AlCl4]
उत्तर:
AlCl3 में, केन्द्रीय Al परमाणु sp² संकरित होता है। जबकि [AlCl4] आयन में यह sp³ संकरित होता है।
AlCl3 में संकरण = 3 + 3 × 7 = \(\frac { 24 }{ 8 }\) = 3 (sp² संकरण)
[AlCl4] में संकरण = 3 + 4 × 7 + 1
= \(\frac { 32 }{ 8 }\) = 4 (sp³ संकरण)

प्रश्न 26.
क्या निम्नलिखित अभिक्रिया के फलस्वरूप B और N परमाणुओं के संकरण में कोई परिवर्तन होता है?
BF3 + NH3 → [F3B.NH3]
उत्तर:
BF3 में B परमाणु sp² संकरित होता है जबकि NH3 में N परमाणु sp³ संकरित होता है | BF3 तथा NH, दोनों ही आपस में संयोग करके योगात्मक यौगिक बनाते हैं। योगात्मक यौगिक में NH3 एक इलेक्ट्रॉन युग्म BF3 को देता है, इस प्रकार B परमाणु का संकरण sp² से sp³ में परिवर्तित हो जाता है। जबकि N परमाणु के संकरण में कोई अन्तर नहीं होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 33

प्रश्न 27.
C2H4 तथा C2H4 अणुओं में कार्बन परमाणुओं के बीच क्रमशः द्वि-आबन्ध तथा त्रिआबन्ध के निर्माण को चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
C2H4
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 34

प्रश्न 28.
निम्नलिखित अणुओं में सिग्मा (σ) तथा पाई (π) आबन्धों की कुल संख्या कितनी है-
(क) C2H2
(ख) C2H4
उत्तर:
(क) C2H2
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 35
कुल तीन सिग्मा (σ) तथा दो पाई (π) बन्ध यहाँ उपस्थित हैं।

(ख) C2H4
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 36
यहाँ कुल 5 सिग्मा (σ) तथा 1 पाई (π) बन्ध उपस्थित हैं।

प्रश्न 29.
X- अक्ष को अन्तरनाभिकीय अक्ष मानते हुए बताइए कि निम्नलिखित में कौन से कक्षक सिग्मा (σ) आबन्ध नहीं बनाएँगे और क्यों? (क) 1s तथा 1s (ख) 1s तथा 2px (ग) 2py तथा 2py (घ) 1s तथा 2s.
उत्तर:
(क) 1s तथा 1s
(ख) 1s तथा 2px
(घ) 1s तथा 2s, σ आबन्ध बनाएँगे क्योंकि ये अक्षीय अतिव्यापन से बनते हैं। परन्तु
(ग) 2py तथा 2py सिग्मा आबन्ध नहीं बनायेगा।

प्रश्न 30.
निम्नलिखित अणुओं में कार्बन परमाणु कौन-से संकर कक्षक प्रयुक्त करते हैं।
(क) CH3 – CH3
(ख) CH3CH=CH3
(ग) CH3-CH2-OH
(घ) CH3CHO
(ङ) CH3COOH
उत्तर:
इन अणुओं में कार्बन परमाणुओं द्वारा प्रयुक्त संकर कक्षक इस प्रकार हैं –
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 37

प्रश्न 31.
इलेक्ट्रॉनों के आबन्धी युग्म तथा एकाकी युग्म से आप क्या समझते हैं। प्रत्येक को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
आबन्धी युग्म (Bond pair) तत्वों के परमाणुओं के मध्य उपस्थित इलेक्ट्रॉन का साझा युग्म आबन्धी युग्म कहलाता है।

एकाकी युग्म (Lone pair) – ये इलेक्ट्रॉन युग्म बन्ध निर्माण में प्रयुक्त नहीं होते हैं। उदाहरणार्थ – NH3
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 38

प्रश्न 32.
सिग्मा तथा पाई आबन्ध में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

सिग्मा बन्धपाई बन्ध
(1) सिग्मा आबन्ध परमाण्विक कक्षकों के अक्ष्रीय अतिव्यापन के कारण बनता है।(1) पाई आबन्ध परमाण्विक कक्षकों वे पाशर्व अतिव्यापन के कारण बनता है।
(2) यह s-s, s-p, p-p इत्यादि के अतिव्यापन द्वारा बन सकता है।(2) यह केवल p-कक्षकों के अतिव्यापन से बनता है।
(3) इस प्रकार के आबन्ध में अतिव्यापन अधिक होने के कारण आबन्ध प्रबल होता है।(3) इस प्रकार के आबन्ध में अतिव्यापन कम होता है। अतः यह आबन्ध तुलनात्मक रूप से थोड़ा दुर्बल होता है।
(4) इसमें कोई भी नोडल तल नहीं होता है।(4) इसमें एक नोडल तल पाया जाता है।
(5) σ-आबन्ध के चारों ओर परमाणुओं का मुक्त घूर्णन सम्भव होता है।(5) π-आबन्ध के चारों ओर परमाणुओं का मुक्त घूर्णन सम्भव नहीं हैं।
(6) यह कम क्रियाशील होता है।(6) यह अधिक क्रियाशील होता है।
(7) अन्तरानाभिकीय अक्ष के चारों ओर आण्विक कक्षक का इलेक्ट्रॉन अभ्र सममित होता है।(7) इलेक्ट्रॉन अभ्र असममित होता है।
(8) यह आबन्ध π-आबन्ध की अनुपस्थिति में भी बन सकता है।(8) यह आबन्ध σ आबन्ध की अनुपस्थिति में नहीं बनता है।
(9) यह अणु की आकृति निर्धारित करता है।(9) इसका अणुओं की आकृति पर कोई प्रभाव नहीं होता। यह बन्ध कोण को प्रभावित करता है।

प्रश्न 33.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के आधार पर H2 अणु के विरचन की व्याख्या कीजिये।
उत्तर:
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त:
इस सिद्धान्त का प्रतिपादन सर्वप्रथम हाइटलर और लण्डन (Heitler and London) ने सन् 1927 में किया था। बाद में इस सिद्धान्त का संशोधन पॉलिंग और उसके सहकर्मियों (Pauling and co-workers) ने किया था।

इस सिद्धान्त का विवेचन परमाणु कक्षकों, तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, कक्षकों के अतिव्यापन और संकरण तथा विचरण (Variation) एवं अध्यारोपण (Superposition) के सिद्धान्तों के ज्ञान पर आधारित है। इस सिद्धान्त के आधार पर हाइड्रोजन अणु के निर्माण की व्याख्या इस प्रकार है।

माना कि हाइड्रोजन के दो परमाणु A व B जिनके नाभिक क्रमशः NA व NB हैं तथा इनमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन eA और और हैं। जब ये दोनों हाइड्रोजन परमाणु HA तथा HB एक दूसरे की तरफ बन्ध बनाने के लिए बढ़ते हैं तो इन पर आकर्षण व प्रतिकर्षण दोनों प्रकार के बल कार्य करते हैं।

जब ये दोनों परमाणु एक-दूसरे से अत्यधिक दूरी पर होते हैं तब उनके बीच कोई भी अन्योन्य क्रिया नहीं होती है ज्यों-ज्यों वे एक-दूसरे के समीप आते जाते हैं त्यों-त्यों उनके मध्य आकर्षण व प्रतिकर्षण बल कार्य करने लगता है।

दोनों परमाणुओं के मध्य लगने वाला आकर्षण बल निम्न प्रकार उत्पन्न होता है-

  • एक परमाणु के नाभिक तथा उसके इलेक्ट्रॉनों के मध्य NA– eA, NB – eB
  • एक परमाणु के नाभिक तथा दूसरे परमाणु के इलेक्ट्रॉनों के मध्य NA – eB, NB – eA

इसी प्रकार प्रतिकर्षण बल निम्न कारण से उत्पन्न होता है।
(1) दोनों परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों के बीच eA – eB

(2) दोनों परमाणुओं के नाभिकों के बीच NA – NB
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 39
दोनों परमाणुओं के मध्य उत्पन्न आकर्षण बल दोनों को एक-दूसरे के पास लाते हैं। जबकि प्रतिकर्षण बल एक-दूसरे को दूर करने का प्रयास करते हैं। प्रयोग के द्वारा यह पाया गया है कि हाइड्रोजन अणु के बनने के दौरान नये आकर्षण बलों के मान, नये प्रतिकर्षण बलों के मान की तुलना में अधिक होते हैं। इसके परिणामस्वरूप दोनों परमाणु एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं। इससे उनकी स्थितिज ऊर्जा के मान में कमी आ जाती है।

अंत में एक ऐसी स्थिति आ जाती है कि कुल आकर्षण बल तथा कुल प्रतिकर्षण बल आपस में बराबर हो जाते हैं और निकाय की ऊर्जा निम्न स्तर पर पहुँच जाती है।

इस अवस्था में हाइड्रोजन के परमाणु आबन्ध बनाते हैं और एक स्थायी अ में परिवर्तित हो जाते हैं। यहाँ H2 अणु की आबन्ध लम्बाई का मान 74pm होता है।

हाइड्रोजन के परमाणुओं के मध्य आबन्ध बनने से ऊर्जा मुक्त होती है। इस कारण हाइड्रोजन अणु दो पृथक हाइड्रोजन परमाणुओं की अपेक्षा अधिक स्थायी होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मुक्त हुयी ऊर्जा को आबन्ध एन्थैल्पी (Bond enthalpy) के रूप में जाना जाता है।

हाइड्रोजन परमाणुओं से हाइड्रोजन अणु बनने का क्रम निम्न ग्राफ के द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 40
H2 अणु के सम्बन्ध में आरेख से यह निष्कर्ष निकलता है कि इसकी आबन्ध लम्बाई 74 pm तथा आबन्धन ऊर्जा का मान 435.8kJ/mol है। यह ऊर्जा या ऐन्थैल्पी ऊपर दिए गये आरेख में न्यूनतम के संगत होती है।

वहीं यदि H2 के एक मोल अणुओं के वियोजन के लिये इतनी ही ऊर्जा 435.8 kJ /mol की आवश्यकता होती है।
H2 (g) + 4358kJ /mol = H (g) + H (g)
ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी रासायनिक बन्ध का स्थायित्व बन्ध ऊर्जा से सम्बन्धित होता है । बन्ध ऊर्जा का मान जितना अधिक होता है आबन्ध का स्थायित्व उतना ही अधिक होगा।

उदाहरण के लिये, Cl – Cl(g) आबन्ध की आबन्ध ऊर्जा 239 kJ / mol है। जबकि H – H(g) आबन्ध की आबन्ध ऊर्जा 433kJ/mol है। इसका तात्पर्य यह है कि हाइड्रोजन परमाणुओं के मध्य आबन्ध क्लोरीन परमाणुओं के मध्य आबन्ध की अपेक्षा अधिक स्थायी है।

प्रश्न 34.
परमाणु कक्षकों के रैखिक संयोग से आण्विक कक्षक बनने के लिए आवश्यक शर्तों को लिखिए।
उत्तर:

  • संयोजी कक्षक समान ऊर्जा के होने चाहिये।
  • संयोजक कक्षक आण्विक कक्षक के साथ दिशात्मक गुण रखता है।
  • संयोग करने वाले कक्षक अधिक दूरी तक विरचन अतिव्यापन करें।

आण्विक कक्षक भाग लेने वाले परमाण्विक कक्षकों के तरंग फलनों (wave functions) के रेखीय संयोजन के फलस्वरूप बनते हैं । परमाण्वीय कक्षक योग (Addition ) या अन्तर (Subtraction) द्वारा संयोजित होते हैं।

माना कि संयोजन में भाग लेने वाले दो परमाण्विक कक्षक A व B के तरंग फलन या आयाम (Wave function or Amplitude) क्रमश: ψA व ψB हैं तो,
गणितीय रूप से आण्विक कक्षकों को परमाणु कक्षकों के रैखिक संयोग व्यक्तिगत परमाणु कक्षकों के तरंग फलनों WA तथा WB के योग या अन्तर द्वारा किया जाता है, जैसा नीचे दर्शाया गया है।
ψMO = ψA ± ψB
इस प्रकार दो आण्विक कक्षक ० तथा * प्राप्त होते हैं।
σ = ψA + ψB
σ* = ψA – ψB
परमाणु कक्षकों के योग से बनने वाले आण्विक कक्षक σ को आबंधन आण्विक कक्षक तथा परमाणु कक्षकों के अन्तर से बनने वाले आण्विक कक्षक σ* को प्रतिआबंधन (विपरीत बन्धी) आण्विक कक्षक कहते हैं।

बन्धी अणु कक्षक की ऊर्जा हमेशा कम जबकि विपरीत बन्धी अणु कक्षक की ऊर्जा सदैव अधिक होती है। आबन्धी तथा विपरीत बन्धी आण्विक कक्षकों का परमाण्वीय कक्षकों से बनना निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 41
यहाँ पर (+) और (-) चिन्ह इलेक्ट्रॉन तरंग के शिखर (Crest) और गर्त (troughs) को व्यक्त करते हैं।

प्रश्न 35.
आण्विक कक्षक सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि Be2 अणु का अस्तित्व क्यों नहीं होता।
उत्तर:
Be का परमाणु क्रमांक 4 है। इसके आण्विक कक्षक में 8 इलेक्ट्रॉन भरे जाएँगे । इसका आण्विक कक्षक विन्यास निम्न प्रकार है-
KK (σ2s)² (σ*2s)²
आबन्ध कोटि =\(\frac { 1 }{ 2 }\)(2 – 2) = 0
बन्ध कोटि शून्य होने से Be2 का अणु अस्तित्व में नहीं होता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 36.
निम्नलिखित स्पीशीज के आपेक्षिक स्थायित्व की तुलना कीजिए तथा उनके चुम्बकीय गुण इंगित कीजिए।
O2, O2+, O2– (सुपर ऑक्साइड) तथा O22- (परऑक्साइड)
उत्तर:
इन स्पीशीज की आबन्ध कोटि निम्न है।

स्पीशीजइलेक्ट्रॉनों की संख्याआबंध कोटि
(1) O2162.0
(2) O2+152.5
(3) O2171.5
(4) O22-181.0

इनका स्थायित्व का क्रम निम्न है-
O2+ > O2 > O2 > O22-
(i) O2 अनुचुम्बकीय है
(ii) O2+ अनुचुम्बकीय है
(iii) O2 अनुचुम्बकीय है
(iv) O22- प्रति चुम्बकीय है

प्रश्न 37.
कक्षकों के निरूपण में उपयुक्त धन (+) तथा ऋण (-) चिन्हों का क्या महत्त्व होता है।
उत्तर:
जब संयोजित होने वाले परमाणु कक्षकों की पालियों के चिन्ह समान (+ तथा + या तथा) होते हैं तब आबन्धी आण्विक कक्षक बनते हैं।

जब संयोजित होने वाले परमाणु कक्षकों की पालियों के चिन्ह (+ तथा -) होते हैं तब प्रतिआबन्धी आण्विक कक्षक बनते हैं। इसके अतिरिक्त + और चिन्ह को इलेक्ट्रॉन तरंगों की प्रकृति ज्ञात करने में उपयोग किया जाता है। धन (+ve) चिन्ह श्रृंग (crest ) को जबकि ऋण (-ve) चिन्ह गर्त (trough) को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 38.
PCl5 अणु में संकरण का वर्णन कीजिए। इसमें अक्षीय आबन्ध विषुवतीय आबन्धों की अपेक्षा अधिक लम्बे क्यों होते हैं?
उत्तर:
PCl5 में P का परमाणु क्रमांक 15 है। तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p6 3s² 3p³ है। यहाँ पर एक 3s कक्षक तीन 3p कक्षक व एक 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉन तीन 3p कक्षक व एक 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉन संकरण से sp³d संकरित कक्षक बनता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 42
VSEPR सिद्धान्त के अनुसार संकरित आर्बिटल त्रिकोणीय द्वि-पिरामिडी के शीर्षों की ओर दिष्ट होती है। इसके एक तल के तीन-तीन आबन्धों के परस्पर बंध कोण में से प्रत्येक 120° तथा शेष दो में से प्रत्येक उस तल के लम्बवत् 90° का कोण बनाते हैं।

चूँकि अक्षीय आबन्ध इलेक्ट्रॉन युग्मों में विषुवतीय आबन्धी युग्मों से अधिक प्रतिकर्षण अन्योन्य क्रियायें होती है अतः ये आबन्ध विषुवतीय आबन्धों से लम्बाई में कुछ अधिक तथा प्रबलता में कुछ कम होते हैं। इसलिये PCl5 अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 39.
हाइड्रोजन आबन्ध की परिभाषा दीजिए। ये वान डर वाल्स बलों की अपेक्षा प्रबल होते हैं या दुर्बल।
उत्तर:
हाइड्रोजन आबन्ध को उस आकर्षण बल के रूप में परिभाषित कर सकते हैं जोकि एक अणु के H-परमाणु को दूसरे अणु के विद्युत ऋणात्मक परमाणु (F,O,N) से बाँधता है। हाइड्रोजन आबन्ध वान डर वाल्स बलों की अपेक्षा अधिक प्रबल- होता है क्योंकि यह प्रबल द्विध्रुवीय अन्तः क्रिया को निरूपित करता है।

प्रश्न 40.
आबन्ध कोटि से आप क्या समझते हैं। निम्नलिखित आबन्ध कोटि का परिकलन कीजिए – N2, O2, O2+ तथा O2
उत्तर:
किसी अणु या आयन में दो परमाणुओं के बीच आबन्धों की संख्या आबन्ध कोटि कहलाती है।
आबन्ध कोटि =\(\frac { 1 }{ 2 }\) = (Nb – Na)
N2(14) : (σ1s)²(σ*1s)²(σ2s)²(σ*2s)² (π2px)²(π2py)²(σ2pz)²
आबन्ध कोटि =\(\frac { 1 }{ 2 }\)(10-4) = 6/23 = 3
O2 (16) : (σ 1s)² (σ*1s)² (σ*2s)² (π 2px)² (π 2py)² (π* 2px)1 (π* 2py)1
आबन्ध कोटि = \(\frac { 1 }{ 2 }\)(10 – 6) = 4/2 = 2
O2+(15) : (σ1s)² (σ*1s)² (σ2s)² (σ*2s)² (σ2pz)² (π2px)² (π2py)² (π*2px)1
आबन्ध कोटि = \(\frac { 1 }{ 2 }\)(10 – 5) = 5/2 = 2.5
O2 – ( 17 ) : (σ1s)² (σ*1s)² (σ2s)² (σ*2s)² (σ2pz)² (π2px)² (πpy)² (π 2px)² (π 2py)1
आबन्ध कोटि = 1/2 (10 – 7) = 3/2 = 1.5

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
उत्तर:
आवर्त सारणी में व्यवस्था का मूल आधार समान अभिलक्षणों (भौतिक एवं रासायनिक) वाले तत्त्वों को एक साथ वर्गीकृत करना है। जिससे कि इन लक्षणों का पालन करना काफी आसान हो जाये। चूँक ये अभिलक्षण मुख्यतः तत्त्वों के संयोजी कोश इलेक्ट्रॉंनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं इसलिये किसी समूह या वर्ग में स्थित तत्त्वों में समान संयोजी कोश इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की निश्चित अन्तरालों पर पुनरावृत्ति होती है।

प्रश्न 2.
मेण्डलीव ने किस गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया ? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाये ?
उत्तर:
मेण्डलीव ने परमाणु भार को अपनी आवर्त सारणी में तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया। मेण्डलीव ने एक नियम दिया जिसे मेण्डलीव का आवर्त नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार, “तत्त्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म उनकी द्रव्यमान संख्याओं या परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं।”

मेण्डलीव अपने इस सन्दर्भ पर दृढ़ बने रहे। उन्होंने प्रथम बार तत्त्वों को एक सारणी के रूप में व्यवस्थित किया, जहाँ उन्होंने आवर्त तथा समूह बनाये। नि:सन्देह बाद में इसमें कई कमियाँ पायी गयीं तथा वैज्ञानिकों ने वर्गीकरण के इस आधार को चुनौती भी दी थी।

प्रश्न 3.
मेण्डलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अन्तर क्या है ?
उत्तर:
मेण्डलीव के आवर्त नियम का आधार परमाणु भार है जबकि आधुनिक आवर्त नियम का मौलिक आधार परमाणु क्रमांक है।

प्रश्न 4.
क्वाण्टम संख्याओं के आधार पर सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होने चाहिए।
उत्तर:
छठा आवर्त छठवें कोश के अनुरूप होता है। छठवें कोश में 6s, 4f, Sp तथा 6d कक्षक उपस्थित होते हैं। इन कक्षकों में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या इस आवर्त में तत्त्वों की संख्या का निर्धारण करेगी। अत: छठवें आवर्त में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
कक्षक – 6s, 4f, 5p, 6d
इलेक्ट्रॉन – 2 + 14 + 6 + 10 = 32 इलेक्ट्रॉन
अतः छठे आवर्त में अधिकतम 32 तत्त्व उपस्थित होंगे।

प्रश्न 5.
आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइये कि Z = 14 कहाँ स्थित होगा?
उत्तर:
Z = 14 वाले तत्त्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न होगा – 1s², 2s², 2p6, 3s² 3p²
इस तत्त्व का आवर्त तृतीय है तथा यह p-ब्लॉक का तत्त्व है। तत्त्व के वर्ग का निर्धारण हम निम्न प्रकार कर सकते हैं।
p-ब्लॉक के लिये वर्ग = 10 + ns में e + np में e
= 10 + 2 + 2
= 14वें वर्ग का तत्त्व है तथा यह सिलिकॉन हैं।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

प्रश्न 6.
उस तत्त्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त में और 17वें वर्ग में स्थित होता है।
उत्तर:
यह तत्त्व क्लोरीन (CI) है जिसका परमाणु क्रमांक 17 है।

प्रश्न 7.
कौन से तत्त्व का नाम निम्नलिखित के द्वारा दिया गया?

  1. लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
  2. सीबोर्ग समूह द्वारा।

उत्तर:

  1. लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा लॉरेन्सियम (Lr) नाम दिया गया जिसका परमाणु क्रमांक 103 है।
  2. सीबोर्ग समूह द्वारा सीबोर्गियम (Sg) नाम दिया गया जिसका परमाणु क्रमांक 106 है।

प्रश्न 8.
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
उत्तर:
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान होते हैं क्योंकि इन परमाणुओं के संयोजी कोश में समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है। हालांकि इसके परमाण्वीय आकार भिन्न होते हैं जो कि वर्ग में नीचे आने पर बढ़ते जाते हैं। अतः किसी भी समूह या वर्ग में तत्त्वों के रासायनिक गुणधर्म तो समान होते हैं परन्तु इनके भौतिक लक्षणों में बहुत कम परिवर्तन होता है।

प्रश्न 9.
‘परमाणु त्रिज्या’ और ‘आयनी त्रिज्या’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) – किसी तत्त्व के परमाणु के नाभिक के केन्द्र से बाह्यतम कोश की प्रभावी दूरी, उस तत्त्व के परमाणु की परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) कहलाती है।

आयनी त्रिज्या (Ionic radius) – किसी आयन के नाभिक के केन्द्र से वह प्रभावी दूरी जहाँ तक नाभिक इलेक्ट्रॉन मेघ पर अपना प्रभाव छोड़ सके, आयनी त्रिज्या (ionic radius) कहलाती है।

परमाणु त्रिज्या के मापन के लिये अन्य त्रिज्याओं की आवश्यकता होती है। जैसे-सहसंयोजक त्रिज्या, वाण्डर वाल त्रिज्या, धात्विक त्रिज्या आदि । वर्ग में परमाणु त्रिज्या नीचे की ओर जाने पर बढ़ती है। ऐसा इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या बढ़ने तथा आवरण प्रभाव के परिमाण में वृद्धि कारण होता है। आवर्त में परमाणु त्रिज्या बायें से दायें जाने पर घटती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन समान कोश में भरते हैं तथा कोई भी नया कोश नहीं बनता है।

प्रश्न 10.
किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे ?
उत्तर:
किसी वर्ग में परमाणु त्रिज्या नीचे की ओर जाने पर बढ़ती है। क्योंकि वर्ग में नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है तथा आवरण प्रभाव (Shielding effect) का परिमाण बढ़ता जाता है।

आवर्त में परमाणु त्रिज्या बायें से दायें जाने पर घटती जाती है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन समान कोश में भरते हैं तथा कोई नया कोश नहीं बनता है। इस कारण नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है तथा आकार घट जाता है।

प्रश्न 11.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज का नाम लिखिए जो निम्नलिखित परमाणुओं या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी ?
(i) F
(ii) Ar
(iii) Mg2+
(iv) Rb+.
उत्तर:
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज में इलेक्ट्रॉन की संख्यायें समान होती हैं। प्रश्न में दी गई स्पीशीज के साथ निम्न समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज होगी-
(i) Na+
(ii) K+
(iii) Na+
(iv) Sr2+.

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

प्रश्न 12.
निम्नलिखित स्पीशीज पर विचार कीजिए – .
N3-, O2-, F, Na+, Mg2+ तथा Al3+.
(क) इनमें क्या समानता है?
(ख) इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
(क) ये सभी समइलेक्ट्रॉनिक हैं। इनमें प्रत्येक में 10 इलेक्ट्रॉन हैं।
(ख) Al3+ + < Mg2+ < Na+ < F < O² – < N3-.

प्रश्न 13.
धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
धनायन (Cation ) जनक परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन निकल जाने पर धनायन बनते हैं। धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन की संख्या कम होने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है जिससे अन्तरानाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है तथा आकार छोटा हो जाता है।
Na > Na+, Mg > Mg2+
ऋणायन (Anion ) ऋणायन जनक परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन के जुड़ने पर बनते हैं। ऋणायन हमेशा अपने जनक परमाणुओं से बड़े होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन की संख्या बढ़ जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है, जिससे अन्तरानाभिकीय आकर्षण बल कम होता है तथा आकार बढ़ जाता है।
Cl < CE, O < O2-

प्रश्न 14.
आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में विलगित गैसीय परमाणु तथा आद्य अवस्था पदों की सार्थकता क्या है?
उत्तर:
(i) विलगित गैसीय परमाणु की सार्थकता – जब कोई परमाणु गैसीय अवस्था में विलगित होता है तो इसकी इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति एवं ग्रहण करने की प्रवृत्ति दोनों प्रकृति में असीमित होती हैं। अर्थात् इनकी आयनन एन्थैल्पी एवं इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान अन्य परमाणुओं की उपस्थिति से प्रभावित नहीं होते हैं । परमाणुओं के द्रव एवं ठोस अवस्था में ऐसा होना सम्भव नहीं होता है।

(ii) आद्य अवस्था की सार्थकता – आद्य अवस्था से तात्पर्य है कि कोई विशेष परमाणु तथा इससे सम्बन्धित इलेक्ट्रॉन न्यूनतम ऊर्जा अवस्था में होते हैं। आद्य अवस्था परमाणु की सामान्य अवस्था में उपस्थित ऊर्जा को प्रदर्शित करती है। आयनन विभव तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्यैल्पी दोनों को परमाणु की आद्य अवस्था होने पर ही व्यक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 15.
हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 2.1 × 10-18 J है। परमाण्विक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी J mol-1 के पदों में परिकलित कीजिए।
हल:
यनन एन्थैल्पी हमेशा 1 मोल परमाणुओं के लिये व्यक्त की जाती है। अतः एक मोल परमाणु की आद्य अवस्था में ऊर्जा,
E(आद्य अवस्था) = (- 2.18 × 10-18) × 6.02 × 1023
= 1.312 x 106
आयनन एन्थैल्पी = E – E(आद्य अवस्था)
= 0 – (-1.312 × 106 J)
आयनन एन्थैल्पी = 1.312 x 106 J

प्रश्न 16.
द्वितीय आवर्त के तत्त्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है-
Li < B < Be < C < O < N < F < Ne
व्याख्या कीजिए कि-
(i) Be की ∆i, H, B से अधिक क्यों है?
(ii) O की ∆i, H, N और F से कम क्यों है?
उत्तर:
(i) Be (1s², 2s²) में बाह्यतम इलेक्ट्रॉन 2s कक्षक में उपस्थित है जबकि B(1s², 2s², 2p1) में 2p कक्षक में उपस्थित है। 2s इलेक्ट्रॉनों नाभिक का आकर्षण 2p कक्षक इलेक्ट्रॉनों की तुलना में अधिक होता है इसलिये 2s इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप Be के लिए ∆iH का मान B से ज्यादा होता है।

(ii) N का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (1s², 2s², 2p1x, 2p1y, 2p1z) है जिसमें 2p कक्षक अर्द्धपूरित अवस्था में है जबकि O (1s², 2s², 2p1x, 2p1y, 2p1z) में 2p कक्षक न तो अर्द्धपूरित है न ही पूर्णपूरित है। अर्द्धपूरित अवस्था के स्थायी होने के कारण N से इलेक्ट्रॉन को निकालना कठिन है। जिसके परिणामस्वरूप O के लिए ∆iH का मान N की तुलना में कम होता है। फ्लुओरीन के छोटे आकार व अधिक नाभिकीय आवेश (+ 9) के कारण इसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान की तुलना में अधिक होता है। इसलिये O की आयनन एन्थैल्पी N व F की तुलना में कम होती है।

प्रश्न 17.
आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी, मैग्नीशियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है किन्तु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्पी से अधिक है।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता 1
Mg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3s कक्षक में पूर्ण है अर्थात् स्थायी है जिससे इलेक्ट्रॉन निकालना Na के 3s कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालने की तुलना में कठिन है । अत: Na की प्रथम आयनन एन्थैल्पी Mg की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है परन्तु Na की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी Mg की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है क्योंकि Na से एक 3s इलेक्ट्रॉन निकलने के पश्चात् यह स्थायी विन्यास 1s², 2s², 2p6 प्राप्त कर लेता है जबकि मैग्नीशियम से इलेक्ट्रॉन निकालने के पश्चात् यह एक अस्थायी विन्यास 1s², 2s², 2p63s1 प्राप्त करता है। अतः मैग्नीशियम के 3p कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालना सोडियम की तुलना में सरल हो जाता है। अतः सोडियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है।

प्रश्न 18.
मुख्य समूह तत्त्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कौन-कौन से कारक हैं?
उत्तर:
मुख्य समूह तत्त्वों में आयनन एन्थैल्पी किसी समूह में नीचे जाने पर निम्न कारकों के कारण कम होती है-

  • समूह में नीचे जाने पर नये कोश बढ़ने से परमाणु आकार बढ़ जाता है।
  • समूह में नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन बढ़ने से बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर आवरण प्रभाव बढ़ जाता है।
  • समूह में नीचे जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

प्रश्न 19.
वर्ग-13 के तत्त्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol-1) में इस प्रकार हैं-

BAlGaInTl
801577579558589

सामान्य से इस विचलन की प्रवृत्ति की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
B से Al तक प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान का कम होना Al परमाणु के बड़े आकार के कारण है। Ga की प्रथम आयनन एन्थैल्पी Al से ज्यादा है। इसका कारण यह है कि Ga में 10 इलेक्ट्रॉन 3d – उपकोश में उपस्थित हैं ये 10 इलेक्ट्रॉन संयोजी कोश के इलेक्ट्रॉनों को पूर्ण रूप से परिरक्षित नहीं कर पाते, जिस कारण Ga का आकार Al से छोटा हो जाता है तथा प्रथम आयनन विभव का मान बढ़ जाता है। TI की अधिक प्रथम आयनन एन्थैल्पी यह प्रदर्शित करती है कि यहाँ प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बहुत अधिक है जो कि 4f- इलेक्ट्रॉनों के क्षीण या दुर्बल आवरण प्रभाव (Poor shielding effect) के कारण है।

प्रश्न 20.
तत्त्वों के निम्नलिखित गुणों में किस तत्त्व की इलेक्ट्रॉन ब्ध एन्थैपी अधिक ऋणात्मक होगी?
(i) O या F
(ii) F या Cl
उत्तर:
(i) F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है क्योंकि F का आकार ऑक्सीजन से छोटा होता है जिसके कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश अधिक होता है और जुड़ने वाला इलेक्ट्रॉन अधिक आकर्षण बल अनुभव करता है।

अतः अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण e अधिक आकर्षण बल का अनुभव करता है तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान बढ़ जाता है।

(ii) Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी क्योंकि F का आकार छोटा होता है। F परमाणु का अधिक उच्च आवेश घनत्व होने के कारण जुड़ने वाले इलेक्ट्रॉन प्रबल इलेक्ट्रॉन – इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अनुभव करते हैं। अतः F से एक इलेक्ट्रॉन जुड़ने पर ऊर्जा अवशोषित होती है तथा ऋणायन बनने पर निर्गत कुल ऊर्जा में कमी आ जाती है। यदि इलेक्ट्रॉन को बड़े p-कक्षक में जोड़ा जाता है तो इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अत्यन्त कम हो जाता है तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का उच्च मान प्रेक्षित होता है। इस प्रकार F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान क्लोरीन के मान से कम हो जाता है।

प्रश्न 21.
आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
ऑक्सीजन की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होगी। ऑक्सीजन परमाणु का आकार छोटा होता है और नाभिकीय आवेश उच्च होता है जिससे यह सरलता से इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लेता है और ऊर्जा निकलती है। इस प्रकार प्राप्त O(g) समान आवेशों के मध्य स्थिर विद्युत प्रतिकर्षण के कारण सरलता से इलेक्ट्रॉन प्राप्त नहीं कर सकता। अतः द्वितीय इलेक्ट्रॉन को O(g) में प्रवेश कराने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होगी। अतः प्रतिकर्षण समाप्त करने के लिए यह ऊर्जा इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से निकली ऊर्जा अर्थात् प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी से अधिक होती है।

अतः ऑक्सीजन की प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी ऋणात्मक तथा द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होती है।
O(g) + e → O(g) E. A. (1) = – ve
O(g) + e → O2-(g) E. A. (2) = + ve

प्रश्न 22.
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और वैद्युत ऋणात्मकता में क्या मूल अन्तर है?
उत्तर:

वैद्युत ऋणात्मकताइलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
1. इसमें परमाणु के सहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की प्रवृत्ति होती है।इसमें परमाणु के बाह्य इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति होती है।
2. इसमें परमाणु के सापेक्ष इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।इसमें परमाणु के असीमिति इलेक्ट्रॉन को आकर्षित करने की प्रवृत्ति है।
3. इसमें बन्धित परमाणु का गुण है।इसमें विलगित परमाणु का गुण है।
4. इसकी कोई भी इकाई नहीं होती है।इसकी इकाई KJ mol-1 तथा eV / atom होती है।

प्रश्न 23.
सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की ऋणात्मकता पॉउलिंग पैमाने पर 3.0 है। आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे ?
उत्तर:
पॉउलिंग पैमाने पर N की विद्युत ऋणात्मकता 3.0 है, जो यह प्रदर्शित करती है कि N पर्याप्त रूप से विद्युत ऋणात्मक है। परन्तु किसी तत्त्व की विद्युत ऋणात्मकता स्थिर नहीं होती है। यह परमाणु के किसी दूसरे तत्त्व के साथ बन्धन पर तथा संकरण की अवस्था पर निर्भर करती है। इसलिये यह कथन गलत है।

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प्रश्न 24.
उस सिद्धान्त का वर्णन कीजिए जो परमाणु की त्रिज्या से सम्बन्धित होता है-
(i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
(ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
उत्तर:
(i) परमाणु द्वारा इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने पर ऋणायन बनता है जिसके फलस्वरूप एक या अधिक इलेक्ट्रॉन परमाणु के संयोजी कोश में जुड़ जाते हैं। नाभिकीय आवेश जनक परमाणु के बराबर ही रहता है। संयोजी कोश में इलेक्ट्रॉन बढ़ने से इलेक्ट्रॉन द्वारा परिरक्षण की अधिकता होने से प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है जिससे आयनिक त्रिज्या बढ़ जाती है।
F < F-(त्रिज्या)
(2, 7) (2, 8)
72 pm 136 pm

(ii) इलेक्ट्रॉन त्यागने पर धनायन बनता है जो अपने जनक परमाणु से आकार में छोटा होता है। इसके दो कारण हो सकते हैं- (a) संयोजी कोश का समाप्त हो जाना जैसे सोडियम में। (b) प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि हो जाने से।
Na > Na+(त्रिज्या)
(2, 8, 1) (2, 8)
(157 pm) (95 pm)

प्रश्न 25.
किसी तत्त्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न ? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
आयनन एन्थैल्पी नाभिकीय आवेश के परिमाण एवं तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से सम्बन्धित होती है। चूँक किसी तत्त्व के समस्थानिकों में नाभिकीय आवेश एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होते हैं। इसलिए इनकी आयनन एन्थैल्पी समान होती है।

प्रश्न 26.
धातुओं तथा अधातुओं में मुख्य अन्तर क्या है?
उत्तर:
धातुओं तथा अधातुओं में अन्तर निम्न प्रकार है-

गुणधातुअधातु
1. भौतिक अवस्थाये कमरे के ताप पर ठोस होती हैं। (अपवाद -Hg कमरे के ताप पर द्रव होती है।)ये कमरे के ताप पर ठोस द्रव गैस कुछ भी हो सकती है। अर्थात् ये द्रव की सभी अवस्थाओं में पाई जाती है। ये सामान्यतः चमक रहित होती हैं। (अपवाद-ग्रेफाइट)
2. चमक
3. चालकताधातुएँ ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं।अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। (अपवाद-ग्रेफाइट)
4. कठोरताये मुख्यतः कठोर होती हैं।ये सामान्यतया मृदु होती हैं।
5. आघातवर्धनीयता एवं तन्यताधातुएँ आघतवर्धनीय एवं तन्य होती हैं।ये आघातवर्धनीय एवं तन्य नहीं होती हैं। ये भंगुर होती हैं।
6. गलनांक एवं क्वथनांकइनके गलनांक व क्वथनांक उच्च होते हैं व ये तीनों अवस्थाओं में पायी जाती हैं।इनके गलनांक व क्वथनांक उच्च नहीं होते हैं।

प्रश्न 27.
आवर्त सारणी का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) उस तत्त्व का नाम बताइए जिसके बाह्य कोश में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(ii) उस तत्त्व का नाम बताइए जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉन त्यागने की हो।
(iii) उस तत्त्व का नाम बताइए जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की हो।
(iv) उस वर्ग का नाम बताइए जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।
उत्तर:
(i) नाइट्रोजन N (7) = 2, 5
(ii) मैग्नीशियम Mg (12) = 2, 8, 2
(iii) ऑक्सीजन O (8) = 2, 6
(iv) प्रथम वर्ग में H अधातु गैस है, Cs द्रव है तथा Na, K ठोस धातु हैं।

प्रश्न 28.
प्रथम वर्ग के तत्त्वों के लिए अभिक्रिया-शीलता का बढ़ता हुआ क्रम इस प्रकार है-
Li < Na < K < Rb < Cs जबकि वर्ग 17 के तत्त्वों में क्रम F> Cl > Br > I है। इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रथम वर्ग में तत्त्वों की अभिक्रियाशीलता उनके इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति के कारण होती है। जिसे आयनन एन्थैल्पी से ज्ञात करते हैं। आयनन एन्थैल्पी वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर आने पर घटती है। अतः धातुओं की अभिक्रियाशीलता बढ़ती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता 2
हैलोजनों में अभिक्रियाशीलता ऋणायनों के बनने की प्रवृत्ति पर निर्भर करती है। अर्थात् इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के मान पर हैलोजनों की अभिक्रियाशीलता पर निर्भर करते हैं। वर्ग में नीचे आने पर इलेक्ट्रॉन – लब्धि एन्थैल्पी का मान घटता है तथा हैलोजनों की अभिक्रियाशीलता भी घटती है।

अधातुओं की अभिक्रियाशीलता ∝ इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी

प्रश्न 29.
s, p, d और f-ब्लॉकों के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:

  1. s-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns1 तथा ns² होता है ।
  2. p-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np1-6 होता है।
  3. d-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n – 1)d1-10 ns1-2 होता है।
  4. f-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (n – 2)f1-14 (n – 1)d0-1 ns² होता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 3 तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता

प्रश्न 30.
तत्त्व जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नलिखित है, का स्थान आवर्त सारणी में बताइए –
(i) ns² np4, जिसके लिए n = 3 है ।
(ii) (n – 1)d²ns², जब n = 4 है ।
(iii) (n – 2)f1(n – 1 )d1ns², जब n = 6 है ।
उत्तर:
(i) तत्त्व तीसरे आवर्त में स्थित है तथा वर्ग 16 (10 + 2 + 4 = 16) है।
(ii) तत्त्व चौथे आवर्त में तथा वर्ग 4 ( 2 + 2 = 4) में स्थित है।
(iii) तत्त्व छठवें आवर्त तथा वर्ग 3 में स्थित है।

प्रश्न 31.
कुछ तत्त्वों की प्रथम ∆iH1, और द्वितीय ∆iH2 आयनन एन्थैल्पी (kJ mol-1 में) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (∆egH) (kJ mol-1 में) निम्नलिखित है –

तत्त्वiH1iH2egH
I5207300-60
II4193051-48
III16813374-328
IV10081846-295
V23725251+48
VI7381451-40

ऊपर दिये गये तत्त्वों में कौन-सी-
(क) सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है।
(ख) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।
(ग) सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है।
(घ) सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है।
(ङ) ऐसी धातु है जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड जिसका सूत्र MX2 (X = हैलोजन) बनाती है।
(च) ऐसी धातु जो मुख्यत: MX (X = हैलोजन ) वाले स्थायी सहसंयोजी हैलाइड बनाती है।
उत्तर:
(क) तत्त्व V की आयनन एन्थैल्पी उच्चतम है। अतः यह सबसे कम अभिक्रियाशील धातु है।

(ख) न्यूनतम प्रथम आयनन एन्थैल्पी वाले तत्त्व सरलता से इलेक्ट्रॉन त्याग देते हैं। इसलिए ये अधिक अभिक्रियाशील होते हैं। तत्त्व II की प्रथम आयनन एन्थैल्पी न्यूनतम है अत: यह सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है।

(ग) अधातुओं की आयनन एन्थैल्पी उच्च तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होती है अतः तत्त्व III सबसे अधिक अभिक्रियाशील अधातु है।

(घ) तत्त्व IV सबसे कम अभिक्रियाशील अधातु है । क्योंकि इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी तो ऋणात्मक है पर आयनन एन्थैल्पी उच्च नहीं है।

(ङ) धातुओं की आयनन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है। वर्ग 2 के तत्त्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी वर्ग 1 के तत्त्वों की तुलना में उच्च होती है। चूँकि तत्त्व M सूत्र MX2 का एक स्थायी द्विअंगी हैलाइड बनाता है। अत: M को आवर्त सारणी के वर्ग 2 में होना चाहिए। वर्ग 2 के तत्त्वों के लिए प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी का योग इनके समीपवर्ती तत्त्वों की तुलना में कम होता है अतः तत्त्व VI ही वह धातु है जो सूत्र MX2 के द्विअंगी हैलाइड को बनाने की क्षमता रखती है।

(च) धातु जो मुख्यत: MX वाले स्थायी सह-संयोजक हैलाइड बनाती है तत्त्व I है, चूँकि वर्ग I में तत्त्वों के छोटे आकारों के कारण आयनन एन्थैल्पी उच्च होती है।

प्रश्न 32.
तत्त्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रागुक्ति कीजिए।
(क) लीथियम और ऑक्सीजन,
(ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन,
(ग) ऐलुमिनियम और आयोडीन,
(घ) सिलिकॉन और ऑक्सीजन,
(ङ) फास्फोरस और फ्लोरीन,
(च) 71वाँ तत्त्व व फ्लोरीन।
उत्तर:
(क) Li2O
(ख) Mg3N2
(ग) AlI3
(घ) SiO2
(ङ) PF5
(च) LuF2

प्रश्न 33.
आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्न में से किसको व्यक्त करता है?
(क) परमाणु संख्या
(ख) परमाणु द्रव्यमान
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
(घ) दिगंशी क्वाण्टम संख्या
उत्तर:
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या

प्रश्न 34.
आधुनिक आवर्त सारणी के लिए निम्नलिखित के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) p-ब्लॉक में 6 स्तम्भ हैं क्योंकि कोश के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ख) d-ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं क्योंकि d उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ग) प्रत्येक ब्लॉक में स्तम्भों की संख्या उपकोश में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
(घ) तत्त्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को भरते समय अन्तिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन का उपकोश उसकी दिगंशी क्वाण्टम संख्या को प्रदर्शित करता है।
उत्तर:
(ख) d-ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं क्योंकि d उपकोश के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। यह कथन गलत है। d ब्लॉक में 10 स्तम्भ होते हैं और d उपकोश के कक्षक भरने के लिए 10 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 35.
ऐसा कारक जो संयोजकता इलेक्ट्रॉन को प्रभावित करता हैं, उस तत्त्व की रासायनिक प्रवृत्ति भी प्रभावित करता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता?
(क) संयोजक मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ख) नाभिकीय आवेश (Z)
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान
(घ) क्रोड इलेक्ट्रॉन की संख्या
उत्तर:
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को प्रभावित नहीं करता है।

प्रश्न 36.
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज F, Ne और Na+ का आकार इनमें से किससे प्रभावित होता है ?
(क) नाभिकीय आवेश (Z)
(ख) मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ग) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया
(घ) ऊपर दिये गये कारणों में से कोई भी नहीं क्योंकि उनका आकार समान है।
उत्तर:
(क) समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज का आकार नाभिकीय आवेश (Z) द्वारा प्रभावित होता है।

प्रश्न 37.
आयनन एन्थैल्पी के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है-
(क) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन से आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है।
(ख) क्रोड उत्कृष्ट गैस के विन्यास से जब इलेक्ट्रॉन को निकाला जाता है तब आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है।
(ग) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करती है।
(घ) कम मान वाले कक्षकों से अधिक n मान वाले कक्षकों की तुलना में इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
उत्तर:
(घ) असत्य है।

प्रश्न 38.
B, Al, Mg, K तत्त्वों के लिए धात्विक अभिलक्षण का सही क्रम इनमें से कौन-सा है ?
(क) B > Al > Mg > K
(ख) Al > Mg > B > K
(ग) Mg > Al > K > B
(घ) K > Mg > Al > B
उत्तर:
(घ) K > Mg > Al > B क्रम सही है।

प्रश्न 39.
तत्त्वों B, C, N, F और Si के लिए अधातु अभिलक्षण का इनमें से सही क्रम कौन-सा है?
(क) B> C > Si > N > F
(ख) Si> C > B>N>F
(ग) F > N > C > B > Si
(घ) F > N > C > Si > B
उत्तर:
(ग) F > N > C > B > Si क्रम सही है।

प्रश्न 40.
तत्त्वों F, CI, O और N तथा ऑक्सीकरण गुणधर्मों के आधार पर उनकी रासायनिक अभिक्रिया- शीलता का क्रम निम्नलिखित में से कौन-से तत्त्वों में से है-
(क) F > Cl > O > N
(ख) F > O > Cl > N
(ग) Cl> F > O > N
(घ) O > F > N > Cl
उत्तर:
(ख) F > O > Cl > N क्रम सही है।

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 1.
(i) एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए।
(ii) एक मोल इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान और आवेश का परिकलन कीजिए।
हल:
(i) एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
= 9.1 × 1028 ग्राम
1 ग्राम भार = \(\frac{1}{9.1 \times 10^{-28}}\)
अतः एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉन की संख्या
= 1.099 × 1027 इलेक्ट्रॉन

(ii) एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
= 9.1 × 10-31 kg
1 मोल (6.023 × 1023) इलेक्ट्रॉन का भार
= 9.1 × 10-31 × 6.023 x 1023
= 5.48 × 10-7 kg
1 इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.602 x 10-19 कूलाम्ब
अतः एक मोल इलेक्ट्रॉन पर आवेश
= 1.602 × 10-19 x 6.023 x 1023
= 9.65 x 104 कूलाम्ब

प्रश्न 2.
(i) मेथेन के एक मोल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए।
(ii) 7mg14C में न्यूट्रॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27 kg मान लीजिए।
(iii) मानक ताप और दाब (STP) पर 34mg NH3 में प्रोटॉनों की (क) कुल संख्या और (ख) कुल द्रव्यमान बताइए। दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर परिवर्तित हो जाएगा।
हल:
(i) 1 मोल मेथेन में 1 कार्बन और 4 मोल हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
एक अणु CH4 में कुल इलेक्ट्रॉन = 6 + 4 = 10
मेथेन के एक मोल में इलेक्ट्रॉनों की संख्या
= 6 × 6.023 × 1023 + 4 x 6.023 x 1023 इलेक्ट्रॉन
= 3.614 x 1024 + 2.409 x 1024
= 6.023 x 1024 इलेक्ट्रॉन

(ii) (क) न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.675 x 10-27kg
14 ग्राम कार्बन में 1 मोल 14C परमाणु होते हैं।
14 ग्राम C-14 में न्यूट्रॉनों की संख्या
= 8 × 6.023 x 1023 न्यूट्रॉन
7 x 10-3 ग्राम C-14 में न्यूट्रॉनों की संख्या
= \(\frac{8 \times 6.023 \times 10^{23} \times 7 \times 10^{-3}}{14}\)
= 2.409 x 1021 न्यूट्रॉन

(ख) कुल न्यूट्रॉनों की संख्या = 2.409 × 1021
1 न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 × 10-27kg
∴ 2.409 x 1021 न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान
= 2.409 x 1021 x 1.675 x 10-27kg
अत: कुल न्यूट्रॉनों का द्रव्यमान
= 4.0347 × 10-6 kg

(iii) (क) 17 ग्राम NH3 में 1 मोल नाइट्रोजन तथा तीन मोल हाइड्रोजन परमाणु हैं।
1 मोल नाइट्रोजन परमाणु में प्रोटॉन = 7 मोल
3 मोल हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटॉन = 3 मोल
अतः अमोनिया के एक मोल में प्रोटॉन = 10 मोल
17 ग्राम NH3 में प्रोटॉन = 10 मोल प्रोटॉन
= 10 × 6.02 × 1023 प्रोटॉन
= 6.02 × 1024 प्रोटॉन
34 x 10-3 ग्राम NH3 में प्रोटॉन
= \(\frac{6.02 \times 10^{24} \times 34 \times 10^{-3}}{17}\)
= 1.2044 ×1022 प्रोटॉन

(ख) 34 x 10-3 ग्राम NH3 में प्रोटॉन की संख्या
= 1.2044 × 1022
∵ एक प्रोटॉन का द्रव्यमान = 1.675 x 10-27 kg
∴ 1022 प्रोटॉन का द्रव्यमान
= 1.675 × 10-27 × 1.2044 x 1022
= 2.015 × 10-5 kg
ताप व दाब परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं रहता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 3.
निम्नलिखित नाभिकों में उपस्थित न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या बताइए।
\({ }_6^{13} \mathrm{C},{ }_8^{16} \mathrm{O}, \quad{ }_{12}^{24} \mathrm{Mg},{ }_{26}^{56} \mathrm{Fe},{ }_{38}^{88} \mathrm{Sr}\)
हल:
\({ }_6^{13} \mathrm{C}\) में प्रोटॉनों की संख्या =6
न्यूट्रॉनों की संख्या = 13 – 6 = 7
\({ }_8^{16} \mathrm{O}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 8,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 16 – 8 = 8
\({ }_{12}^{24} \mathrm{Mg}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 12,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 24 – 12 = 12
\({ }_{26}^{56} \mathrm{Fe}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 26,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 56 – 26 = 30
\({ }_{38}^{88} \mathrm{Sr}\) में प्रोटॉनों की संख्या = 38,
न्यूट्रॉनों की संख्या = 88 – 38 = 50

प्रश्न 4.
नीचे दिये गये परमाणु द्रव्यमान (A) और परमाणु संख्या (Z) वाले परमाणुओं का पूर्ण प्रतीक लिखिए –
(i) Z = 17 A = 35
(ii) Z = 92 A = 233
(iii) Z = 4 A = 9
हल:
(i) \({ }_{17}^{35} \mathrm{Cl}\)
(ii) \({ }_{92}^{233} \mathrm{U}\)
(iii) \({ }_4^9 \mathrm{Be}\)

प्रश्न 5.
सोडियम लैम्प द्वारा उत्सर्जित पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ) 580 nm है। इसकी आवृत्ति (υ) और तरंग संख्या (\(\overline{\mathcal{V}}\)) का परिकलन कीजिए।
हल:
पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (λ) = 580nm
अतः υ = \(\frac{c}{\lambda}=\frac{3 \times 10^8}{580 \times 10^{-9}}\) = 5.17 x 1014s-1
(\(\overline{\mathcal{V}}\)) = \(\frac{1}{\lambda}=\frac{1}{580 \times 10^{-9}}\)
= 0.0172 × 108m-1
= 1.72 × 106m-1

प्रश्न 6.
प्रत्येक ऐसे फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए –
(i) जो 3 × 1015 Hz आवृत्ति वाले प्रकाश के संगत हो।
(ii) जिसकी तरंगदैर्ध्य 0.50 Å हो ।
हल:
(i) E = hυ = 6.626 × 10-34 × 3 × 1015
= 1.988 × 10-18 J

(ii) E = hυ = h\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{\left(0.5 \times 10^{-10} \mathrm{~m}\right)}\)
= 3.97 × 10-15J

प्रश्न 7.
2.0 x 10-10s काल वाली प्रकाश तरंग की तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, और तरंग संख्या की गणना कीजिए।
हल:
तरंग काल T = 2.0 × 10-10 s
आवृत्ति υ = \(\frac { 1 }{ T }\) = \(\frac{1}{2.0 \times 10^{-10}}\) = 5.0 x 109 s-1
तरंगदैर्ध्य λ = \(\frac { c }{ υ }\) = \(\frac{3 \times 10^8}{5 \times 10^9}\) = 6.0 x 10-2 m
तरंग संख्या (\(\overline{\mathcal{V}}\)) = \(\frac { 1 }{ λ }\) = \(\frac{1}{\left(6.0 \times 10^{-2}\right)}\)
= \(\frac { 100 }{ 6 }\)
= 16.66 m-1

प्रश्न 8.
ऐसा प्रकाश जिसकी तरंगदैर्ध्य 4000 pm हो और जो 1J ऊर्जा दे, में फोटॉनों की संख्या बताइए।
हल:
फोटॉन की ऊर्जा E = \(\frac { hc }{ λ }\) (h = 6.626 × 10-34 Js)
c = 3 ×108 ms-1
2 = 4000 pm = 4000 x 10-12 m
= 4 × 10-9 m
E = \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{4 \times 10^{-9}}\)
= 4.9687 × 10-17 J
= 4.97 × 10-17 J
4.97× 10-17 J ऊर्जा है = 1 फोटॉन की
1 J ऊर्जा होगी =\(\frac{1}{4.97 \times 10^{-17}}\) फोटॉन की
= 2012 × 10-16 फोटॉन

प्रश्न 9.
यदि 4 × 10-7m तरंगदैर्ध्य वाला एक फोटॉन 2.13 ev कार्यफलन वाली धातु की सतह से टकराता है तो –
(i) फोटॉन की ऊर्जा (eV) में,
(ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा और
(iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन के वेग का परिकलन कीजिए।
(1 eV = 1.6020 × 10-19 J)
हल:
(i) फोटॉन की ऊर्जा
E = \(\frac { hc }{ λ }\) = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{4 \times 10^{-7}}\)
= 4.97 × 10-19 J
= \(\frac{(1 \mathrm{eV}) \times 4.97 \times 10^{-19}}{1.6020 \times 10^{19} \mathrm{~J}}\)
फोटॉन की ऊर्जा 3.1eV

(ii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा = E – कार्यफलन
= 3.10 – 2.13
= 0.97 ev

(iii) उत्सर्जन की गतिज ऊर्जा (KE) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)
v² = \(\frac { 2 K.E. }{ m }\)
प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग
= v = \(\sqrt{\frac{2 \mathrm{KE}}{m}}\)
= \(\sqrt{\frac{2 \times 0.97 \times 1.602 \times 10^{-19}}{9.1 \times 10^{-31}}}\)
= 5.84 × 105 m/s

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 10.
सोडियम परमाणु के आयनन के लिए 242 m तरंगदैर्ध्य की विद्युत चुम्बकीय विकिरण पर्याप्त होती है। सोडियम की आयनन ऊर्जा kJmol-1 में ज्ञात कीजिए।
हल:
तरंगदैर्ध्य λ = 242 nm = 242 x 10-9 m
E = \(\frac { hc }{ λ }\) = \(\frac{6.626 \times 10^{-17} \times 3 \times 10^8}{242 \times 10^{-9}}\)
= 0.0821 × 10-17 J
सोडियम के 1 मोल के लिए आयनन ऊर्जा
E = \(\frac{0.0821 \times 10^{-12} \times 6.022 \times 10^{23}}{1000}\)
= 494 kJ mol-1

प्रश्न 11.
25 वाट का एक बल्ब 0.57 μm तरंगदैर्ध्य वाले पीले रंग का एक वर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है तो प्रति सेकेण्ड क्वाण्टा के उत्सर्जन की दर ज्ञात कीजिए।
हल:
फोटॉन की ऊर्जा
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना 1

प्रश्न 12.
किसी धातु की सतह पर 6800 Å तरंगदैर्ध्य वाली विकिरण डालने से शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति (υ0) और कार्यफलन (W0) ज्ञात कीजिए।
हल:
देहली आवृत्ति (υ0) = \(\frac{c}{\lambda_0}=\frac{3 \times 10^8}{6800 \times 10^{-10}}\)
= 4.41 × 1014 s-1
कार्यफलन W0 = hv0 = 6.626 × 10-34 × 4.41 × 1014 J
= 2.92 × 10-19 J

प्रश्न 13.
जब हाइड्रोजन परमाणु के n = 4 ऊर्जा स्तर से = 2 ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉन जाता है तो किस तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित करेगा ?
हल:
RH = 109677
\(\overline{\mathcal{υ}}\) = RH\(\left[\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right]\)
= 109677\(\left[\frac{1}{2^2}-\frac{1}{4^2}\right]\)
= 20564.4 cm-1
λ = \(\frac{1}{\bar{v}}=\frac{1}{20564 \cdot 4}\)
= 486 × 10-7 cm
= 486 × 10-9 m = 486nm

प्रश्न 14.
यदि इलेक्ट्रॉन n = 5 कक्षक में उपस्थित हो तो H परमाणु के आयनन के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी ? अपने उत्तर की तुलना हाइड्रोजन परमाणु की आयनन एन्थैल्पी से कीजिए। आयनन एन्थैल्पी n = 1 कक्षक में इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा होती है।
हल:
एक निश्चित ऊर्जा कक्षक में उपस्थित हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन के लिए ऊर्जा
En = \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-19} \mathrm{~J}}{n^2}\) परमाणु
n = 5 कक्षक में उपस्थित हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन के लिए आयनन ऊर्जा n1 = 5, n2 = ∞
∆E5 = E – E5
= 0 – \(\left(\frac{-2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{(5)^2}\right)\) J/atom
= \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{25}\) J / atom
= 8.72 × 10-20 J / atom
कक्षा n = 1 में उपस्थित हाइड्रोजन इलेक्ट्रॉन के लिये आयनन ऊर्जा
1 = E – E1
= 0 – \(\left(\frac{-2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{(1)^2}\right)\)
= 2.18 × 10-18 J / atom
तुलना करने पर,
\(\frac{\Delta \mathrm{E}_5}{\Delta \mathrm{E}_1}=\frac{8 \cdot 72 \times 10^{-20}}{2.18 \times 10^{-18}}\)
= 0.04

प्रश्न 15.
जब हाइड्रोजन परमाणु में उत्तेजित इलेक्ट्रॉन n = 6 से मूल अवस्था में जाता है तो प्राप्त उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या होगी?
हल:
उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या
= \(\frac{n(n-1)}{2}=\frac{6(6-1)}{2}\) = 15

प्रश्न 16.
(i) हाइड्रोजन के प्रथम कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा – 2.18 × 10-18 जूल / परमाणु है। पाचवें कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा बताइए। (ii) हाईड्रोजन परमाणु के पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या की गणन कीजिए।
हल:
(i) n कक्षक के लिए ऊर्जा
En = – \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{n^2}\) J
अतः पाँचवें कक्षक के लिए ऊर्जा
E5 = – \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{5^2}\)
= – 8.72 × 10-20 J

(ii) nवें कोश की त्रिज्या = ae
an = 52.9pm
= 52.9 × 10-12 x 25
= 1322.5 × 10-12 m
= 1.3225 nm

प्रश्न 17.
हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी में अधिकतम तरंगदैर्ध्य वाले संक्रमण की तरंग संख्या की गणना कीजिए।
हल:
बामर श्रेणी के लिए n1 = 2
अत:
\(\overline{\mathcal{V}}\) = RH\(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)\)
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac { 1 }{ λ }\)
अतः यदि \(\overline{\mathcal{V}}\) अधिकतम है तो छोटी होगी।
∴ \(\overline{\mathcal{V}}\) = (1.097 x 107)\(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{3^2}\right)\)
= 1097×107 x \(\frac { 5 }{ 56 }\) m-1
= 1.523 × 106 m-1

प्रश्न 18.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन को पहली कक्षा से पाँचवीं कक्षा तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा की जूल में गणना कीजिए। जब यह इलेक्ट्रॉन तलस्थ अवस्था में लौटता है तो किस तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित होता ? (इलेक्ट्रॉन की तलस्थ अवस्था ऊर्जा – 2.18 x 10-11 अर्ग है)।
हल:
तलस्थ अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 2.18 x 10-11 अर्ग अर्थात्
En = – \(\frac{2 \cdot 18 \times 10^{-11}}{n^2}\) अर्ग
∆E = E5 – E1 = 2.18 x 10-11\(\left(\frac{1}{1^2}-\frac{1}{5^2}\right)\)
= 2.18 x 10-11\(\frac { 24 }{ 25 }\)
= 209 × 10-11 अर्ग
= 2.09 × 10-18 जूल (1 अर्ग = 10-7 जूल)
जब इलेक्ट्रॉन तलस्थ अवस्था में लौटता है। (n = 1 में)
उत्सर्जित ऊर्जा = 2.09 10-11 अर्ग
∴ ∆E = hv = \(\frac { c }{ λ }\)
या λ = \(\frac { hc }{ ΔΕ }\)
= \(\frac{6626 \times 10^{-27} \times 3 \times 10^{10}}{2.09 \times 10^{-11}}\)
= 9.51 × 10-6 cm
= 951 × 10-8 cm
= 951 Å

प्रश्न 19.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा En = \(\frac{-2 \cdot 18 \times 10^{-18}}{n^2} \mathrm{~J}\) द्वारा दी जाती है। n = 2 कक्षा से इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। प्रकाश की सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य $(\mathrm{cm}$ में) क्या होगी जिसका प्रयोग इस। संक्रमण में किया जा सके?
हल :
∆E = E – E2
= 0 – \(\left[\frac{-2.18 \times 10^{-18}}{2^2}\right]\)
= 5.45 x 1-19 J atom-1
∆E = hv = h\(\frac { c }{ λ }\) या λ = \(\frac { hc }{ ΔΕ }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js} \times 3 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{5.45 \times 10^{-19} \mathrm{~J}}\)
= 3.647 × 10-7m
= 3.647 × 10-5 cm

प्रश्न 20.
2-05 × 107ms-1 वेग से गति कर रहे किसी इलेक्ट्रॉन का तरंगदैर्ध्य क्या होगा ?
हल:
डी-ब्रॉग्ली समीकरण द्वारा
λ = \(\frac { h }{ mv }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}}{\left(9.11 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}\right) \times 2.05 \times 10^7 \mathrm{~ms}^{-1}}\)
= 3.55 × 10-1m

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 21.
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 x 10-31 kg है। यदि इसकी गतिज ऊर्जा 3.0 x 10-25 J हो तो इसकी तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
गतिज ऊर्जा = \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv²
v = \(\sqrt{\frac{2 \mathrm{KE}}{m}}=\sqrt{\frac{2 \times 3.0 \times 10^{-25} \mathrm{~J}}{9 \cdot 1 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}}}\)
= 812 ms-1
λ = \(\frac { h }{ mv }\) = \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}}{\left(9.1 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}\right)\left(812 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}\)
= 8.967 × 10-7m
= 8967 A

प्रश्न 22.
निम्नलिखित में से कौन-से समआयनी स्पीशीज (isoelectronic) हैं? अर्थात् किनमें इलेक्ट्रॉनों की समान संख्या है।
Na+, K+, Mg2+, Ca2+, S2-, Ar
हल:
Na+ तथा Mg2+ समइलेक्ट्रॉनी हैं (इनमें 10 इलेक्ट्रॉन हैं)
K+, Ca2+, S2- तथा Ar समइलेक्ट्रॉनी हैं (इनमें 18 इलेक्ट्रॉन हैं)

प्रश्न 23.
(i) निम्नलिखित आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए-
(क) H
(ख) Na+
(ग) O2
(घ) F

(ii) उन तत्वों की परमाणु संख्या बताइए जिनके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को निम्नलिखित रूप में दर्शाया गया है
(क) 3s1
(ख) 2p³
(ग) 3p5

(iii) निम्नलिखित विन्यासों वाले परमाणुओं के नाम बताइए-
(क) (He) 2s1
(ख) (Ne) 3s² 3p³
(ग) (Ar) 4s² 3d1
हल:
(i) निम्नलिखित आयनों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-
(क) H = 1s²
(ख) Na+ = 1s², 2s², 2p6
(ग) O2- = 1s², 2s², 2p6
(घ) F = 1s², 2s², 2p6

(ii) :

बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यासपरमाणु क्रमांकपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(क) 3s1111s², 2s², 2p6 , 3s²
(ख) 2p³71s², 2s², 2p6
(ग) 3p5171s², 2s², 2p6, 3s² 3p5

(iii) :

इलेक्ट्रॉनिक विन्यासपरमाणु क्रमांकपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
(क) [He] 2s13लीथियम
(ख) [Ne] 3s² 3p³15फॉस्फोरस
(ग) [Ar] 4s² 3d121स्कैन्डियम

प्रश्न 24.
किस निम्नतम n मान द्वारा g कक्षक का अस्तित्व अनुमत होगा?
हल:
g उपकक्ष के लिये l = 4. l का मान 0 से (n – 1) होता है। अत: l = 4 तब n = 5 अत: n का निम्नतम मान = 5

प्रश्न 25.
एक इलेक्ट्रॉन 3d कक्षक में है इसके लिये n, l, m के सम्भव मान दीजिए।
हल:
n = 3 1=2
m = – 2, – 1, 0, +1, +2 (कोई भी एक मान)

प्रश्न 26.
किसी तत्व के परमाणु में 29 इलेक्ट्रॉन और 35 न्यूट्रॉन हैं (i) प्रोटॉनों की संख्या (ii) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बताइए।
हल:
Z = 29 अत: प्रोटॉन = 29
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = Z = 29
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1s², 2s², 2p6, 3s², 3p6, 4s1, 3d10

प्रश्न 27.
H2+, H2, और O2+ स्पीशीज में उपस्थित इलेक्ट्रानों की संख्या बताइए।
हल:
H2+ = 2 – 1 = 1, H2 = 2, O2+ = 16 – 1 = 15

प्रश्न 28.
(i) किसी परमाणु कक्षक का n = 3 है, इसके लिए l और m के सम्भव मान क्या होंगे?
(ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए m और l क्वाण्टम संख्याओं के मान बताइए।
(iii) निम्न में से कौन-से कक्षक सम्भव हैं-
1p, 2s, 2p 3f
हल:
(i) n = 3
l = 0 → (n – 1) = 0, 1, 2
1 = 0 m = 0
1 = 1 m = – 1, 0, + 1
1 = 2 m = – 2, – 1, 0, +1, +2

(ii) 3d कक्षक के लिए
l = 2 m = – 2, – 1, 0, +1, +2

(iii) 2s, 2p कक्षक सम्भव हैं।

प्रश्न 29.
s, p, d, f संकेतन द्वारा निम्नलिखित क्वाण्टम संख्याओं वाले कक्षकों को बताइए –
(क) n = 1, l = 0
(ख) n = 3 l = 1
(ग) n = 4 l = 2
(घ) n = 4 l = 3
हल:

l का मानकक्षक
0s
1p
2d
3F

अत: (क) 1s (ख) 3p (ग) 4d (घ) 4f

प्रश्न 30.
कारण देते हुए बताइए कि निम्नलिखित क्वाण्टम संख्या के कौन-से मान सम्भव नहीं हैं।
(क) n = 0 l = 0 m1 = 0 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ख) n = 1 l = 0 m1 = 0 ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ग) n = 1 l = 1 m1 = 0 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(घ) n = 2 l = 1 m1 = 0 ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ङ) n = 3 l = 3 m1 = -3 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(च) n = 3 l = 1 m1 = 0 ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
हल:
(क) सम्भव नहीं है क्योंकि n = 0 असम्भव हैं।
(ख) n = 1, l = 0, m1 = 0, ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\) (सम्भव है।)
(ग) n = 1, l = 1 असम्भव है क्योंकि 7 का मान 0 से (n – 1) तक होता है।
(घ) सम्भव है।
(ङ) n = 3, l = 3, m1 = 3, ms = + \(\frac { 1 }{ 2 }\)
असम्भव है क्योंकि यहाँ पर n तथा का मान समान नहीं हो सकता है।
(च) सम्भव है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 31.
किसी परमाणु में निम्नलिखित क्वाण्टम संख्याओं वाले कितने इलेक्ट्रॉन होंगे-
(क) n = 4, m, = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)
(ख) n = 3, l = 0
हल:
(क) n = 4 के लिए कुल सम्भव इलेक्ट्रॉन 2n² = 32 इलेक्ट्रॉन होंगे।
जिनमें 16 इलेक्ट्रॉन के लिए ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\)

(ख) n = 3, l = 0 केवल दो इलेक्ट्रॉन 3s कक्षक में सम्भव हैं।

प्रश्न 32.
यह दर्शाइए कि हाइड्रोजन परमाणु की बोर कक्षा की परिधि उस कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणक होती है।
उत्तर:
बोर के अनग्रहित द्वारा
mvr = \(\frac { nh }{ 2π }\) या 2πr = \(\frac { nh }{ mv }\) … (1)
डी-ब्रॉग्ली के अनुसार λ = \(\frac { h }{ mv }\) … (2)
समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर
2πr = nλ
अतः हाइड्रोजन परमाणु की बोर कक्षा की परिधि (2πr) उस कक्षा में गतिमान इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणक होती है।

प्रश्न 33.
He+ स्पेक्ट्रम के n = 4 से n = 2 बामर संक्रमण से प्राप्त तरंगदैर्ध्य के बराबर वाला संक्रमण हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में क्या होगा?
हल:
किसी परमाणु के लिए
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac { 1 }{ λ }\) = RHZ²\(\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)\)
He+ स्पेक्ट्रम के लिए
Z = 2, n2 = 4, n1 = 2
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac { 1 }{ λ }\) = RH x (2)² \(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{4^2}\right)=\frac{3 \mathrm{R}_{\mathrm{H}}}{4}\)
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के लिए
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac{3 R_H}{4}\) तथा Z = 1
\(\overline{\mathcal{V}}\) = \(\frac{1}{\lambda}=\mathrm{R}_{\mathrm{H}} \times 1\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)\)
= RH\(\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)=\frac{3 \mathrm{R}_{\mathrm{H}}}{4}\)
या \(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}=\frac{3}{4}\)
अर्थात् n1 = 1 तथा n2 = 2
अतः हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की स्थिति में संक्रमण n2 = 2 से n1 = 1 होगा।

प्रश्न 34.
He+ (g) → He2+ (g) + e
प्रक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। हाइड्रोजन परमाणु की तलस्थ अवस्था में आयनन ऊर्जा 2.18 × 1018 J atom-1 है।
हल:
H परमाणु के लिये E1 = – I.E. ( आयनन ऊर्जा )
= – 2.18 × 10-18 J
He+ के लिये E1 = E1 (H) × Z²
= – 2·18 × 10-18 × (2)² J
= – 8.72 × 10-18 J
दी गयी प्रक्रिया H+ के आयनन को प्रदर्शित कर रही है अतः He+ के आयनन के लिये आवश्यक ऊर्जा
= – E1 (He+)
= – (8-72 × 10-18 J)
= 8.72 × 10-18 J

प्रश्न 35.
यदि कार्बन परमाणु का व्यास 0.15 nm है तो उन कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए जिन्हें 20 cm स्केल की लम्बाई में एक-एक करके व्यवस्थित किया जा सकता है।
हल:
कार्बन परमाणु का व्यास
= 0-15 nm = 0.15 × 10 = 1.5 x 10-10m
रेखा की लम्बाई = 20cm = 20 x 10-2m = 2 x 10-1 m
20cm लम्बाई में रखे, कार्बन परमाणु जिनकी संख्या
= \(\frac{2 \times 10^{-1}}{1.5 \times 10^{-10}}\)
= 1.33 × 10o परमाणु

प्रश्न 36.
कार्बन के 2 x 108 परमाणु एक कतार में व्यवस्थित हैं। यदि इस व्यवस्था की लम्बाई 2-4 cm है तो कार्बन परमाणु के व्यास की गणना कीजिए।
हल:
कार्बन परमाणुओं की संख्या = 2 x 108
कतार की लम्बाई = 2.4 cm = 24 x 10-2m
कार्बन परमाणु का व्यास =\(\frac{2 \cdot 4 \times 10^{-2}}{2 \times 10^8}\)
= 12 × 10-10m

प्रश्न 37.
जिंक परमाणु का व्यास 2.6 Å है।
(क) जिंक की परमाणु त्रिज्या pm में तथा
(ख) 1.6cm की लम्बाई में कतार में लगातार उपस्थित परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए ।
हल:
(क) 1 Å = 10² pm
अतः व्यास \(\frac { 2.6 }{ 2 }\) = 1.3 Å = 1·3 × 10-10m
= 130 × 10-12 m = 130pm

(ख) दी हुई लम्बाई = 1.6 cm = 1.6 × 10-2m
परमाणु का व्यास = 26 Å = 2.6 x 10-10 m
1.6 लम्बाई में परमाणुओं की संख्या
= \(\frac{1.6 \times 10^{-2}}{2.6 \times 10^{-10}}\)
= 6.154 × 107

प्रश्न 38.
किसी कण का स्थिर विद्युत आवेश 2.5 x 10-16 C है। इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
कण का स्थिर विद्युत आवेश (q) = 2.5 x 10-16C
इलेक्ट्रॉन पर आवेश (e) = 1.602 × 10-19C
इलेक्ट्रॉन की संख्या \(\frac { q }{ e }\) = \(\frac{2.5 \times 10^{-16}}{1.602 \times 10^{-19}}\)
= 1560

प्रश्न 39.
मिलीकन के प्रयोग में तेल की बूँद पर चमकती X-किरणों द्वारा स्थैतिक विद्युत आवेश प्राप्त किया जाता है। तेल की बूँद पर यदि स्थैतिक विद्युत आवेश – 1.282 x 10-18C हो तो इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए ।
हल:
तेल की बूँद पर आवेश (q) = – 1.282 x 10-18 C
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश (e) = – 1.602 x 10-19 C
इलेक्ट्रॉन की संख्या = \(\frac { q }{ e }\)
= \(\frac{\left(-1.282 \times 10^{-18}\right)}{\left(-1.602 \times 10^{-19}\right)}\)
= 8

प्रश्न 40.
रदरफोर्ड के प्रयोग में सोने, प्लैटिनम आदि भारी परमाणुओं की पतली पन्नी पर – कणों द्वारा बमबारी की जाती है। यदि ऐल्यूमिनियम आदि जैसे हल्के परमाणु की पतली पन्नी ली जाये तो उपर्युक्त परिणामों में क्या अन्तर होगा ?
हल:
ऐल्यूमिनियम का नाभिक हल्का और छोटा तथा कम अव्यवस्थित होगा, अतः α-कण अपने पथ से कम विक्षेपित होंगे और सीधे निकल जायेंगे। इस प्रकार ऐल्यूमिनियम की पतली पन्नी लेने पर रदरफोर्ड के प्रयोग के परिणाम भिन्न होंगे।

प्रश्न 41.
\({ }_{35}^{79} \mathrm{Br}\) तथा 79Br प्रतीक मान्य है, जबकि \({ }_{35}^{79} \mathrm{Br}\) तथा
35 Br मान्य नहीं हैं। संक्षेप में कारण बताइये।
हल:
किसी भी तत्व का परमाणु क्रमांक स्थायी होता है। जबकि द्रव्यमान संख्या स्थिर नहीं होती है। प्रत्येक समस्थानिक के लिये भी द्रव्यमान संख्या का मान भिन्न-भिन्न होता है। अतः प्रत्येक समस्थानिक की द्रव्यमान संख्या भी व्यक्त करना अनिवार्य है। अतः \({ }_{35}^{79} \mathrm{Br}\) तथा 35 Br मान्य नहीं है क्योंकि 35Br में द्रव्यमान संख्या नहीं है। इस कारण \({ }_{79}^{35} \mathrm{Br}\) तथा 79Br प्रतीक मान्य है।

प्रश्न 42.
एक 81 द्रव्यमान संख्या वाले तत्व में प्रोटॉनों की तुलना में 31.7% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इसका परमाणु प्रतीक लिखिए।
हल:
द्रव्यमान संख्या (A) = 81, p + n = 81
यदि प्रोटॉन = x तब न्यूट्रॉन = x + \(\frac{31.7 \times x}{100}\) = 1.317x
∴ x + 1.317x = 81
या 2.317x = 81
x = \(\frac { 81 }{ 2.317 }\) = 35
अतः प्रोटॉन = 35; Z = 35
न्यूट्रॉन = 81 – 35 = 46
अतः प्रतीक \({ }_{35}^{81} \mathrm{Br}\) है।

प्रश्न 43.
37 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर ऋण आवेश की एक इकाई है। यदि आयन में इलेक्ट्रॉन की तुलना में न्यूट्रॉन 11.1% अधिक हैं तो आयन का प्रतीक लिखिए।
हल:
माना आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = x
प्रोटॉनों की संख्या = x – 1
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{11.1 \times x}{100}\)
आयन का द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
37 = (x – 1) + 1-11x
या 2.11x = 38
या x = \(\frac{38}{2.11}\) = 18
प्रोटॉन की संख्या = परमाणु क्रमांक = x – 1
= 18 – 1 = 17
अतः आयन की परमाणु संख्या = 17,
आयन का प्रतीक = \({ }_{37}^{17} \mathrm{Cl}\)

प्रश्न 44.
56 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर धनावेश 3 इकाई है और उसमें इलेक्ट्रॉन की तुलना में 30.4% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इस आयन का प्रतीक लिखिए।
हल:
आयन में इलेक्ट्रॉन की संख्या = x
अत: प्रोटॉन की संख्या = x 3
न्यूट्रॉन की संख्या = x + \(\frac{30.4 \times x}{100}\)
= 1.304 x
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या = x + 3
प्रोटॉन की संख्या = x + 3
न्यूट्रॉनों की संख्या = x + \(\frac{30.4 \times x}{100}\)
= x + 0.304x
आयन का द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
= (x + 3) + (x + 0.304x)
56 = (x + 3) + (x + 0.304x)
2.304x = 56 – 3 = 53
x = \(\frac{53}{2.304}\) = 23
परमाणु संख्या = 23 + 3 = 26
अतः आयन का प्रतीक = \({ }_{56}^{26} \mathrm{Fe}\)+3

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 45.
निम्नलिखित विकिरणों के प्रकारों को आवृत्ति के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(क) माइक्रोवेव ऑवन से विकिरण।
(ख) यातायात संकेत से त्रणमणि (amber) प्रकाश।
(ग) एफ. एम. रेडियो से प्राप्त विकिरण।
(घ) बाहरी दिक् से कॉस्मिक किरणें।
(ङ) X – किरणें।
हल:
बाहरी दिक् से कॉस्मिक किरणें < X – किरणें < त्रणमणि प्रकाश माइक्रोवेव < एफ. एम रेडियो से प्राप्त विकिरण।

प्रश्न 46.
नाइट्रोजन लेजर 337.1 nm की तरंगदैर्ध्य पर एक विकिरण उत्पन्न करती है। यदि उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 5.6 x 1024 हो तो इस लेजर की क्षमता की गणना कीजिए।
हल:
नाइट्रोजन लेजर की तरंगदैर्ध्य = 337.1nm
फोटॉनों की संख्या = 5.6 x 1024
E = Nhv = Nh\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{\left(5.6 \times 10^{24)}\left(6 \cdot 626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)\right.}{\left(337.1 \times 10^{-9} \mathrm{~m}\right)}\)
= 3.3 × 106 J

प्रश्न 47.
नियॉन गैस को सामान्यतः संकेत बोर्डों में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यह 616 nm पर प्रबलता से विकिरण उत्सर्जन करती है तो (क) उत्सर्जन की आवृत्ति (ख) 30 सेकेण्ड में इस विकिरण द्वारा तय की गई दूरी, (ग) क्वाण्टम की ऊर्जा तथा (घ) उपस्थित क्वाण्टम की संख्या की गणना कीजिए। (यदि यह 2J की ऊर्जा उत्पन्न करती है।)
हल:
λ = 616 x 10-9 m
(क) आवृत्ति υ = \(\frac { c }{ λ }\) = \(\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{616 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 4.87 × 10-14 s-1

(ख) विकिरण का वेग = 3.0 x 108 ms-1
∴ 30 सेकेण्ड में विकिरण द्वारा तय की गई दूरी = समय × वेग
= 30 × 3 × 108
= 9.0 x 108 m

(ग) E = hυ = h\(\frac { c }{ λ }\)
= υ = \(\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right) \times 3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{616 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 32.27 × 10-20 J

(घ) 2J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या
32-27 × 10-20 J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या = 1
2J ऊर्जा में क्वाण्टम की संख्या
= \(\frac{2}{32.27 \times 10^{-20}}\)
= 6.2 × 1018

प्रश्न 48.
खगोलीय प्रेक्षणों में दूरस्थ तारों से मिलने वाले संकेत बहुत कमजोर होते हैं। यदि प्रोटॉन संसूचक 600 nm के विकिरण से कुल 3-15 × 10-18 J प्राप्त करता है तो संसूचक द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
एक फोटॉन की ऊर्जा = hυ = h\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}{\left(600 \times 10^{-9} \mathrm{~m}\right)}\)
= 3.313 × 10-19 J
कुल प्राप्त ऊर्जा = 3.15 × 10-18 J
प्राप्त फोटॉनों की संख्या = \(\frac{3.15 \times 10^{-18}}{3.313 \times 10^{-19}}\)
= 9.51 ≈ 10

प्रश्न 49.
उत्तेजित अवस्थाओं में अणुओं के जीवनकाल का माप प्रायः लगभग नैनो सेकेण्ड परास वाले विकिरण स्रोत का उपयोग करके किया जाता है। यदि विकिरण स्रोत का काल 2ns और स्पंदित विकरण स्रोत के दौरान उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 2.5 x 1015 है तो स्रोत की ऊर्जा की गणना कीजि।
हल:
स्रोत में विकिरण की अवधि
T = 2 ns = 2 × 10-9 s
आवृत्ति = \(\frac{1}{2 \times 10^{-9}}\)
= 0.5 × 109 s-1
ऊर्जा = nhv = (2.5 x 1015) (6.626 x 10-34Js) (0.5 x 109 s-1)
= 8.28 ×10-10 J

प्रश्न 50.
सबसे लम्बी द्विगुणित तरंगदैर्ध्य जिंक अवशोषण संक्रमण 589 और 589-6nm पर देखा जाता है। प्रत्येक संक्रमण की आवृत्ति और दो उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा के अन्तर की गणना कीजिए।
हल :
λ1 = 589 nm = 589 x 10-9m
∴ υ = \(\frac { c }{ λ }\) = \(\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{589 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 5.093 × 1014 s-1
λ2 = 589.6nm = 589.6 × 10-9m
∴ υ2 = \(\frac { c }{ λ2 }\) = \(\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{589.6 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 5.008 × 1014 s-1
∆E = E2 – E1 = h (υ2 – υ1)
= (6.626 × 10-34 Js) (5.93 – 5.088) x 1014 s-1
= 3.31 × 10-22 J

प्रश्न 51.
सीजियम परमाणु का कार्य फलन 1-9 eV है तो
(क) उत्सर्जित विकिरण की देहली तरंगदैर्ध्य,
(ख) देहली आवृत्ति की गणना कीजिए।
यदि सीजियम तत्व को 500 nm की तरंगदैर्ध्य के साथ विकीर्णित किया जाये तो निकले हुए फोटो-इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और वेग की गणना कीजिए।
हल:
(क) कार्य फलन (W0) = hυ0
∴ υ0 = \(\frac{\left(W_0\right)}{h}=\frac{1.9 \times 1.602 \times 10^{-19} \mathrm{~J}}{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}}\)
= 4.59 × 1014 s-1

(ख) λ0 = \(\frac{c}{v_0}=\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{4.59 \times 10^{14} \mathrm{~s}^{-1}}\)
= 6.54 x 10-7 m
= 654 × 10-9 m
उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की K.E. = 654nm
= h(v-vo ) = hc\(\left(\frac{1}{\lambda}-\frac{1}{\lambda_0}\right)\)
= (6·626 × 10-34 Js) (3.0 x 108 ms-1)\(\left(\frac{1}{500 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}-\frac{1}{654 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\right)\)
= \(\frac{6.626 \times 3.0 \times 10^{-26}}{10^{-9}}\left(\frac{154}{500 \times 654}\right) \mathrm{J}\)
= 9.36 × 10-20 J
K.E.= \(\frac { 1 }{ 2 }\) mv² =9.36×10-20 J
∴ \(\frac { 1 }{ 2 }\) x (9.11 × 10-31 kg)v² = 9.36 × 10-20 kg m² s²
या v² = 2055 x 10-11 m² s-2
= 20.55 × 1010 m² s-2
या v = 4.53 × 105 ms-1

प्रश्न 52.
जब सोडियम धातु को विभिन्न तरंगदैर्ध्य के साथ विकीर्णित किया जाता है तो निम्नलिखित परिणाम प्राप्त होते हैं –

λ (nm)500450400
v × 10-5 (cm s-1)2.554.355.35

(क) देहली तरंगदैर्ध्य और (ख) प्लांक स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल:
माना कि देहली तरंगदैर्ध्य
= λ0 nm = λ0 x 10-9 m
h (v – v0) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv² या hc\(\left(\frac{1}{\lambda}-\frac{1}{\lambda_0}\right)\) = \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv²
तीनों परिणामों को जोड़ने पर –
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना 2
इस मान को समीकरण (iii) में रखने पर
= \(\frac{h \times\left(3 \times 10^8\right)}{10^{-9}}\left(\frac{1}{400}-\frac{1}{531}\right)\)
= \(\frac { 1 }{ 2 }\)(9.11 × 10-31)(5.20 × 105
h = 6.66 × 10-34 Js

प्रश्न 53.
प्रकाश विद्युत प्रभाव प्रयोग में सिल्वर धातु से फोटो इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन 0.35V की वोल्टता द्वारा रोका जा सकता है। जब 256.7 nm के विकिरण का उपयोग किया जाता है तो सिल्वर धातु के लिए कार्य फलन की गणना कीजिए।
हल:
विकिरण की ऊर्जा कार्य फलन +फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज
ऊर्जा
कार्यफलन = विकिरण ऊर्जा फोटो इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा E = hv = h\(\frac { c }{ λ }\)
= \(\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}{\left(256.7 \times 10^{-9} \mathrm{~m}\right)}\)
= 7.74 × 10-19 J
= 4·83 eV (1 eV = 1.602 × 10-19 J)
अत: इलेक्ट्रॉन की K. E. = 0.35 eV
∴ कार्य फलन = 4.83 eV – 0.35 ev
= 4.48 ev

प्रश्न 54.
यदि 150 pm तरंगदैर्ध्य का फोटॉन एक परमाणु से टकराता है और उसके अन्दर बंधा हुआ इलेक्ट्रॉन 1.5 x 107 ms-1 वेग से बाहर निकलता है तो उस ऊर्जा की गणना कीजिए। जिससे यह नाभिक से बंधा हुआ है।
हल:
फोटॉन की ऊर्जा
= \(\frac{h c}{\lambda}=\frac{\left(6.626 \times 10^{-34} \mathrm{Js}\right)\left(3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}{\left(150 \times 10^{-12} \mathrm{~m}\right)}\)
= 13.25 × 10-16 J
(150 × 10-12 m )
बाहर निकलने वाले इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा
= \(\frac { 1 }{ 2 }\)mv²
= \(\frac { 1 }{ 2 }\) (9.11 × 10-31 kg) (1.5 × 107 ms-1
= 1.025 × 10-16 J
इलेक्ट्रॉन की नाभिक से बंधे रहने की ऊर्जा = (टकराने वाले फॉटोन की ऊर्जा) – (गतिज ऊर्जा)
= 13.25 × 10-16 J – 1.025 × 10-16 J
= 12.225 × 10-16
= \(\frac{12.225 \times 10^{-16}}{1.602 \times 10^{-19}}\)eV
= 7.63 x 10 ev

प्रश्न 55.
पाश्चन श्रेणी का उत्सर्जन संक्रमण n कक्ष से आरम्भ होता है। कक्ष n = 3 में खत्म होता है तथा इसे v = 3.29 × 1015 (Hz) \(\left[\frac{1}{3^2}-\frac{1}{n^2}\right]\) से दर्शाया जा सकता है। यदि संक्रमण 1285nm पर प्रेक्षित होता है तो ” के मान की गणना कीजिए तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
हल:
v = \(\frac{c}{\lambda}=\frac{3.0 \times 10^8 \mathrm{~ms}^{-1}}{1285 \times 10^{-9} \mathrm{~m}}\)
= 3.29 × 1015\(\left[\frac{1}{3^2}-\frac{1}{n^2}\right]\)
\(\frac{1}{n^2}=\frac{1}{9}-\frac{3.0 \times 10^8}{1285 \times 10^{-9}} \times \frac{1}{3.29 \times 10^{15}}\)
= 0.111 – 0.071 = 0.04 =
n² = 25, n = 5
1285 nm का विकिरण स्पैक्ट्रम के अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में होता है।

प्रश्न 56.
उस उत्सर्जन संक्रमण के तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए जो 1.3225 nm त्रिज्या वाले कक्ष से आरम्भ और 211.6pm पर समाप्त होता है। इस संक्रमण की श्रेणी का नाम और स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
हल:
H-जैसे कणों के लिये nth कक्षक की त्रिज्या = \(\frac{0.529 n^2}{Z}\) = \(\frac{52 \cdot 9 n^2}{Z}\)pm
r1 = 1.3225 nm = 1322.5pm
= 52.9 n²1 pm
1 = \(\frac { 1322.5 }{ 52.9 }\) = 25
n1 = 5
r2 = 211·6 pm = 52.9 n²22 pm
2 = \(\frac { 211.6 }{ 52.9 }\) = 4
n2 = 2
अत: n2 = 2, n = 5
चूँकि संक्रमण पाँचवें से द्वितीय कक्ष में होता है। अतः यह बामर श्रेणी है।
\(\overline{\mathrm{υ}}\) = 1.097 × 107m-1\(\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{5^2}\right)\)
= 10-9 x \(\frac { 21 }{ 100 }\) x 107 m-1
या λ = \(\frac { 1 }{ υ }\)
= \(\frac{100}{1.097 \times 21 \times 10^7}\)m = 434 x 10-9m
यह दृश्य (Visible) स्पेक्ट्रम क्षेत्र में पड़ता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना

प्रश्न 57.
डी-ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित द्रव्य के दोहरे व्यवहार से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज हुई जिसे जैव अणुओं और अन्य प्रकार के पदार्थों की अति आवर्धित प्रतिबिम्ब के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस सूक्ष्मदर्शी में यदि इलेक्ट्रॉन का वेग 1.6 x 106ms-1 है तो इस इलेक्ट्रॉन से सम्बन्धित डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य
λ = \(\frac { h }{ mv }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{\left(9.11 \times 10^{-31} \mathrm{~kg}\right)\left(1.6 \times 10^6 \mathrm{~ms}^{-1}\right)}\)
= 4.55 ×10-10 m
= 455 pm

प्रश्न 58.
इलेक्ट्रॉन विवर्तन के समान न्यूट्रॉन विवर्तन सूक्ष्मदर्शी को अणुओं की संरचना के निर्धारण में प्रयुक्त किया जाता है। यदि यहाँ 800 pm की तरंगदैर्ध्य ली जाये तो न्यूट्रॉन से सम्बन्धित अभिलाक्षणिक वेग की गणना कीजिए।
हल:
तरंगदैर्ध्य λ = 800pm = 800 × 10-12 m
= 8 ×10-10 m
न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1675 x 10-27 kg
λ = \(\frac { h }{ mv }\) या v = \(\frac { h }{ mλ }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{1.675 \times 10^{-27} \mathrm{~kg} \times 8 \times 10^{-10} \mathrm{~m}}\)
= \(\frac{6.625}{1.675 \times 8}\)
= 4.94 × 10² ms-1

प्रश्न 59.
यदि बोर के प्रथम कक्ष में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.9 x 106 ms-1 है तो इससे सम्बन्धित डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए ।
हल:
बोर के प्रथम कक्ष में इलेक्ट्रॉन का वेग
= 2.9 × 106ms-1
h = 6-626 × 10-34m 2s-1
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9-11 × 10-31 kg
λ = \(\frac { h }{ mv }\)
= \(\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{9.11 \times 10^{-31} \times 2.9 \times 10^6}\)
= 3.32 ×10-10m = 332 pm

प्रश्न 60.
एक प्रोटॉन जो 1000 V के विभवान्तर में गति कर रहा है, से सम्बन्धित वेग 4.37 x 105 ms-1 है। यदि 0.1 kg द्रव्यमान की हॉकी की गेंद इस वेग से गतिमान है तो इससे सम्बन्धित तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए।
हल:
हॉकी की गेंद का वेग
v = 4.37 × 105 ms-1
गेंद का द्रव्यमान m = 0.1 kg
λ = \(\frac{h}{m v}=\frac{6.626 \times 10^{-34} \mathrm{~kg} \mathrm{~m}^2 \mathrm{~s}^{-1}}{0.1 \times 4.37 \times 10^5 \mathrm{~ms}^{-1}}\)
= 1·516 × 10-28 m

प्रश्न 61.
यदि एक इलेक्ट्रॉन की स्थिति को ± 0.002 nm की शुद्धता से मापा जाता है तो इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता की गणना कीजिए। यदि इलेक्ट्रॉन का संवेग h/4πm x 0.05nm है तो क्या इस मान को निकालने में कोई कठिनाई होगी?
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 2 परमाणु की संरचना 3
यह सम्भव नहीं है क्योंकि संवेग का मान अनिश्चितता के मान से बहुत कम है।

प्रश्न 62.
छ: इलेक्ट्रॉनों की क्वाण्टम संख्या नीचे दी गई है। इन्हें ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। क्या इनमें से किसी की ऊर्जा समान है?
1. n = 4 l = 2 ms = – 1 / 2 ml = 2
2. n = 3 l = 2 ms = + 1 / 2 ml = 1
3. n = 4 l = 1 ms = + 1 / 2 ml = 0
4. n = 3 l = 2 ms = – 1 / 2 ml = – 2
5. n = 3 l = 1 ms = + 1 / 2 ml = – 1
6. n = 4 l = 1 ms = – 1 / 2 ml = 0
हल:
इलेक्ट्रॉन कक्षक के क्रम इस प्रकार हैं-
(1) 4d (2) 3d (3) 4p (4) 3d (5) 3p तथा (6) 4p
संयोजन (2) तथा (4) की ऊर्जाएँ समान होंगी। इसी प्रकार (3) तथा (6) की ऊर्जाएँ समान होंगी।
ऊर्जा का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है –
(5) < 2 (4) < (6) = (3) < (1)

प्रश्न 63.
ब्रोमीन परमाणुओं में 35 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसके 2p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन, 3p कक्षक में छः इलेक्ट्रॉन तथा 4p कक्षक में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनमें से कौन-सा इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करता है।
हल:
जैसे-जैसे नाभिक से दूर जाते हैं नाभिकीय आवेश घटता जाएगा, अत: 4p कक्षक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन सबसे कम नाभिकीय आवेश अनुभव करता है। 4p अन्तिम कक्षक है। Br (35) : 1s², 2s²
2p6, 3s² 3p6 3d10, 4s² 4p5

प्रश्न 64.
निम्नलिखित में से कौन-सा कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
(i) 2s और 3s (ii) 4d और 5f तथा (iii) 3d और 3p
उत्तर:
(i) 2s इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे।
(ii) 4d इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे।
(iii) 3p इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे।

प्रश्न 65.
Al तथा Si में 3p कक्षक में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। कौन-सा इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
हल:
Al (13) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p1
Si (14) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3px1 3py1
सिलिकान (Si) में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉन अत्यधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेंगे। क्योंकि Si का परमाणु क्रमांक Al से अधिक है।

प्रश्न 66.
इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए-
(क) P (ख) Si (ग) Cr (घ) Fe (ङ) Kr
हल:
(क) P (15) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3px1 3py1 3pz1
3- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं

(ख) Si (14) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3px1 3py1
2- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

(ग) Cr (24) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p6 4s1 3d5
6- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

(घ) Fe (26) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p6 4s² 3a6
4- अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं।

(ड.) Kr (36) : 1s² 2s² 2p6 3s² 3p6 4s² 3d10 4p6
कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 67.
(क) n = 4 से सम्बन्धित कितने उपकोश हैं?
(ख) उस उपकोश में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित होंगे जिसके लिए
ms = – \(\frac { 1 }{ 2 }\) एवं n = 4 है।
हल:
(क) n = 4
l = 0, 1, 2, 3, (0 से (n – 1) तक)
l = 0 4s
l = 1 4p
l = 2 4d
l = 3 4f
चार उपकोश 4s, 4p, 4d, 4f होंगे।

(ख) n = 4 ms = 1/2 अत : कुल 16 इलेक्ट्रॉन होंगे।

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HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. मेथेन व एथेन को इससे एक पद अभिक्रिया में प्राप्त किया जाता है-
(1) C2H2
(2) CH3I
(3) CH3OH
(4) C2H5OH.
उत्तर:
(2) CH3I

2. द्रव हाइड्रोकार्बन को इसके द्वारा गैसीय हाइड्रोकार्बन मिश्रण में परिवर्तित किया जा सकता है-
(1) भंजन
(2) जल-अपघटन
(3) ऑक्सीकरण
(4) कम दाब पर आसवन।
उत्तर:
(1) भंजन

3. निम्नलिखित में से कौन जल के साथ अभिक्रिया द्वारा मेथेन गैस, उत्पन्न करता है?
(1) सिलिकौन कार्बाइड
(2) कैल्सियम कार्बाइड
(3) ऐलुमिनियम का कार्बाइड
(4) आयरन कार्वाइड।
उत्तर:
(3) ऐलुमिनियम का कार्बाइड

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

4. सिर्फ दो मोनो-क्लोरो व्युत्पन्न समावयवी संभव है-
(1) n-ब्यूटेन के
(2) 2, 4-द्वाइमेयिल पेन्टेन के
(3) बेंजीन के
(4) 2 -मेथिल प्रोपेन के।
उत्तर:
(1) n-ब्यूटेन के

5. C2H5Cl बनाने के लिए सबसे अच्छी अभिक्रिया दशाएँ हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 1
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 2

6. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक Conc. H2SO4 को गर्म करने पर भी नहीं घुलेगा ?
(1) ऐथिलीन
(2) बेंजीन
(3) हैक्सेन
(4) एनिलीन।
उत्तर:
(3) हैक्सेन

7. अधिकतम क्यथनांक है-
(1) आइसो ऑक्टेन
(2) n-ऑक्टेन
(3) 2, 2, 3, 3-टेट्रामेषिल ब्यूटेन
(4) n-ब्यूटेन।
उत्तर:
(2) n-ऑक्टेन

8. पैराफिन इसमें घुलता है-
(1) आसवित जल
(2) बेंजीन
(3) मेथेनॉल
(4) लवणीय जल।
उत्तर:
(2) बेंजीन

9. एल्किल हैलाइड पर Zn की अभिक्रिया द्वारा ऐल्केन बनने की क्रिया को कहते है-
(1) फ्रैंकर्सैं अभिक्रिया
(2) वुर्ट्ज अभिक्रिया
(3) कैनिजारो अभिक्रिया
(4) कोल्बे की अभिक्रिया।
उत्तर:
(1) फ्रैंकर्सैं अभिक्रिया

10. बन्द नली में मेषिल ब्रोमाइह को बिंक के साथ गर्म करने पर प्राप्त होता है-
(1) मेथेन
(2) ऐेथेन
(3) ऐथाइडलीन
(4) मेथेनॉल।
उत्तर:
(2) ऐेथेन

11. C2H6 में C-C-H है-
(1) 90°
(2) 109.5°
(3) 120°
(4) 180°
उत्तर:
(2) 109.5°

12. निम्न में से किसकी अभिक्रिया ग्रिगनार्ड अभिकर्मक के साध कराने पर हाइड्रोकार्बन बनता है-
(1) CH3CH2OH
(2) CH3CHO
(3) CH3COCH3
(4) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(1) CH3CH2OH

13. निम्नलिखित में से कौन-से यौगिक मुख्वतया प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देते हैं-
(1) ऐल्केन
(2) ऐल्कीन
(3) ऐल्काइन
(4) ये सभी।
उत्तर:
(1) ऐल्केन

14. किसके द्वारा भंजन प्रदर्शित होता है-
(1) ऐल्केन
(2) पेट्रोलियम
(3) ईथर
(4) बेंजीन।
उत्तर:
(1) ऐल्केन

15. किसी पदार्थ का जलीय विलयन विद्युत-अपघटन द्वारा ऐथेन देता है, वह पदार्थ है-
(1) एसीटिक अम्ल
(2) एसिटेमाइड
(3) पोटेशियम ऐसीटेट
(4) ऐथाइल ऐसीटेट।
उत्तर:
(3) पोटेशियम ऐसीटेट

16. ऐल्केनों का हैलोजनीकरण उदाहरण है-
(1) इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन का
(2) न्यूक्लिओफिलिक प्रतिस्थापन का
(3) मुक्त मूलक प्रतिस्थापन का
(4) ऑक्सीकरण का
उत्तर:
(3) मुक्त मूलक प्रतिस्थापन का

17. अभिक्रिया \(\mathrm{C}_{10} \mathrm{H}_{22} \stackrel{900 \mathrm{~K}}{\longrightarrow} \mathrm{C}_4 \mathrm{H}_8+\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_{14}\) का नाम है-
(1) एल्कलीकरण
(2) भंजन
(3) हिद्हड्रोजनीकरण
(4) आसवन।
उत्तर:
(2) भंजन

18. मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड तथा एथिल ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया में कार्बनिक उत्पाद है-
(1) मेथेन
(2) ऐथेन
(3) प्रोपेन
(4) व्यूटेन।
उत्तर:
(1) मेथेन

19. विकार्वांक्सिलीकरण निम्न में से किससे सम्बन्धित है-
(1) योगात्मक अभिक्रिया
(2) सोडालाइम
(3) ऐल्केनों की संरचना
(4) इंयर।
उत्तर:
(2) सोडालाइम

20. कौन जल-अपघटन पर मेथेन देता है-
(1) CaC2
(2) CH2Br
(3) Al4C3
(4) C2H5MgBr
उत्तर:
(3) Al4C3

21. जब सोडियम ऐसीटेट को सोडालाइम के साथ अभिकृत कराया जाता है तो पदार्थ बनता है-
(1) मेथेन
(2) एसिटाईलीन
(3) एधाइलीन
(4) ऐेथेन।
उत्तर:
(1) मेथेन

22. यौगिक जो CH3Mgl के साथ अभिक्रिया द्वारा मेथेन नहीं देता है-
(1) CH3CH2NH2
(2) C2H5OH
(3) (CH3)3N
(4) NH3
उत्तर:
(3) (CH3)3N

23. निम्नलिखित में से कौन हाइड्रोकार्बन का मिश्रण नहीं है-
(1) केंडल वैक्स
(2) कँरोसिन
(3) वनस्पति तेल
(4) पैराफिन तेल।
उत्तर:
(3) वनस्पति तेल

24. जब सोडियम प्रोपिओनेट को सोडालाइम के साय गर्म करते हैं जो उत्पाद बनात है-
(1) CH3
(2) C2H6
(3) C3H8
(4) C4H10
उत्तर:
(2) C2H6

25. ऐल्केन श्रेणी C1 से C4 तक के सदस्यों की जौतिक अवस्या है-
(1) टेस
(2) द्रव
(3) गैस
(4) इनमें से कोई नही।
उत्तर:
(3) गैस

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

26. मार्श गैस में मुख्यतः होता है।
(1) C2H2
(2) CH4
(3) H2S
(4) CO
उत्तर:
(2) CH4

27. पैराफिन इसमें विलेय है-
(1) आसुत जल
(2) बेन्जीन
(3) मेषेनॉल
(4) CO
उत्तर:
(2) बेन्जीन

28. मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड पर जल की क्रिया द्वारा हूमें प्राप्त होता है-
(1) CH4
(2) C2H6
(3) CH3OH
(4) C2H5OH
उत्तर:
(1) CH4

29. मेथेन एक आकार होता है-
(1) समचतुष्फलकीय
(2) अष्टफलकीय
(3) गोलीय
(4) वर्गाकार समतल।
उत्तर:
(1) समचतुष्फलकीय

30. किस यौगिक का क्वथनांक सर्वाधिक है-
(1) n-पेन्टेन
(2) 2-मेथिल ब्यूटेन
(3) 2, 2-डाइमेथिल प्रोपेन
(4) n-हेक्सेन।
उत्तर:
(4) n-हेक्सेन।

31. मेथेन बनाने में निम्न में से कौन-सा कार्बाइड प्रयुक्त होता है।
(1) CaC2
(2) Mg2C3
(3) Al4C3
(4) B4C
उत्तर:
(3) Al4C3

32. कार्बन शृंखला में कार्बन परमाणु बढ़ाने पर ऐल्केन का क्वथनांक-
(1) बढ़ता है
(2) घटता है
(3) अप्रभावित रहता है
(4) बढ़ या घट सकता है।
उत्तर:
(1) बढ़ता है

33. निम्न में से किसके जल अपघटन पर मेथेन प्राप्त होता है-
(1) Al4C3
(2) CaC2
(3) n-C3H7MgBr
(4) शुष्क बर्फ।
उत्तर:
(1) Al4C3

34. मेथेन व एथेन दोनों को अलग-अलग एक पद अभिक्रिया द्वारा निम्न से प्राप्त कर सकते हैं-
(1) C2H4
(2) CH3I
(3) CH2OH
(4) C2H2OH
उत्तर:
(2) CH3I

35. मेथेन बनाने की सबसे उचित विधि है-
(1) प्राकृतिक गैस का द्रवीकरण
(2) वुर्ट्ज अभिक्रिया
(3) CH2Cl2 का अपचयन
(4) इनपमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(2) वुर्ट्ज अभिक्रिया

36. CCl4 में बन्ध कोण का मान लगभग है-
(1) 90°
(2) 109°
(3) 120°
(4) 180°
उत्तर:
(2) 109°

37. आइसो पेन्टेन में कितने द्वितीयक (secondary) कार्बन परमाणु है-
(1) 1
(2) 2
(3) 3
(4) 4
उत्तर:
(1) 1

38. निम्न में से कौन-सा यौगिक सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर भी नहीं घुलता है।
(1) एधिलीन
(2) बेन्जीन
(3) हेक्सेन
(4) ऐनिलीन।
उत्तर:
(3) हेक्सेन

39. शुद्ध n-हेक्सेन को प्राप्त करने के लिये सोडियम की निम्न में से किस अभिकर्मक द्वारा क्रिया कराते हैं।
(1) एथिल ब्रोमाइड तथा n-ब्यूटिल ब्रोमाइड
(2) n-प्रोपित ब्रोमाइड
(3) मेथिल ब्रोमाइड तथा n-ऐमिल ब्रोमाइड
(4) एथिल क्लोराइड तथा n-ब्यूटिल क्लोराइड।
उत्तर:
(2) n-प्रोपित ब्रोमाइड

40. ऐल्केन के भिन्न-भिन्न कार्बन परमाणुओं से आबन्धित हाइड्रोजन परमाणुओं की क्रियाशीलता का क्रम है-
(1) 3° > 2° > 1°
(2) 1° > 2° > 3°
(3) 3° > 1° > 2°
(4) 2° > 1° > 3°
उत्तर:
(1) 3° > 2° > 1°

41. निम्न किसमें H2% अधिकतम है।
(1) CH4
(2) C2H4
(3) C6H6
(4) C2H2
उत्तर:
(1) CH4

42. ऐल्किल हैलाइड पर जिंक की अभिक्रिया द्वारा ऐल्केन का बनना कहलाता है-
(1) फ्रेंकलैण्ड अभिक्रिया
(2) कैनीजारो अभिक्रिया
(3) वुर्द्ज अभिक्रिया
(4) कोल्बे अभिक्रिया
उत्तर:
(1) फ्रेंकलैण्ड अभिक्रिया

43. ज्यामितीय समावयवता दर्शाने वाले यौगिक है-
(1) प्रोपीन
(2) 1-ब्यूटीन
(3) 2-क्यूटीन
(4) आइसो ब्यूटिलीन।
उत्तर:
(3) 2-क्यूटीन

44. संचयी हाईन का उदाहरण है-
(1) CH2 = CH-CH=CH2
(2) CH2 = C = CH-CH3
(3) CH3 = CH-CH2CH = CH2
(4) CH3 = CH-C = CH2
उत्तर:
(2) CH2 = C = CH-CH3

45. सी. एन. जी. में मुख्य रूप से होती है-
(1) मेथेन
(2) ऐधेन
(3) प्रोपेन
(4) ब्यूटेन।
उत्तर:
(1) मेथेन

46. यौगिक जिसके ओज्ञोनी अपघटन से ऐथेनेल प्राप्त होती है-
(1) ऐथीन
(2) ऐथाईन
(3) 2-ब्यूटीन
(4) 1-ब्यूटीन।
उत्तर:
(3) 2-ब्यूटीन

47. अमोनीकृत क्यूप्रस क्लोराइड विलयन के साथ अभिक्रिया कर लाल अवक्षेप देने वाला यौगिक है-
(1) प्रोषीन
(2) प्रोपाईन
(3) 2-व्यूटारन
(4) 2-ब्यूटीन।
उत्तर:
(2) प्रोपाईन

48. CH3CH = C = CH-CH3 अणु में sp संकरित कार्बन परमाणु है-
(1) C-2
(2) C-3
(3) C-4
(4) इनमें से कोई नही।
उत्तर:
(2) C-3

49. ऐथिलीन शीतल, तनु क्षारीय परमैगनेट बिलयन के साथ अभिक्रिया करके देता है-
(1) CH3CO
(2) CO3 के दो मोल
(3) CH3O के दो मोल
(4) C2H4(OH)2
उत्तर:
(2) CO3 के दो मोल

50. HBr का एट्टीमारकोनीकॉफ योग किसमें सम्भव नहीं है?
(1) प्रोपीन
(2) ब्यूटीन-1
(3) ब्यूट-2-ईन
(4) पेन्ट-2-इ्दन।
उत्तर:
(4) पेन्ट-2-इ्दन।

51. परॉक्साइड की उपस्थिति में ब्यूटीन-1 से HBr अणु के योग द्वारा उत्पन्न होता है-
(1) I-क्रोमो ब्यूटेन
(2) 2-ब्रोमो ब्यूटेन
(3) 1, 2-हाईं्रोमो ब्यूटेन
(4) n-ब्यूटेन।
उत्तर:
(1) I-क्रोमो ब्यूटेन

52. वह अभिक्रिया, जिसमें ऐल्कीन से जल के योग द्वारा ऐल्कोहॉल बनता है, कहलाती है-
(1) हाइड्रोजनीकरण
(2) जलयोजना
(3) जल-अपघटन
(4) संघनन।
उत्तर:
(2) जलयोजना

53. निम्न में से किस प्रकार की समावयवता ऐल्कीन में नहीं पायी जाती है-
(1) श्रृंखला समावयवता
(2) ज्यामितीय समावयवता
(3) मध्यावयवता
(4) स्थान समावयवता।
उत्तर:
(3) मध्यावयवता

54. ऐल्कीनों का सामान्य सूत्र है-
(1) CnH2n + 1
(2) CnH2n
(3) CnH2n + 2
(4) CnH2n – 2
उत्तर:
(3) CnH2n + 2

55. प्रोपिलीन में C-2 कार्बन परमाणु पर किस प्रकार का संकरण है-
(1) sp
(2) sp2
(3) sp3
(4) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(4) इनमें से कोई नहीं

56. CH3-CH = CH2 में C-C-C कोण कितना है-
(1) 90°
(2) 109.5°
(3) 120°
(4) 180°
उत्तर:
(3) 120°

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

57. निम्न में से कौन-सी ऐल्कीन ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित करती है-
(1) 1-ब्यूटीन
(2) 2-ब्यूटीन
(3) 2-मेथिलप्रोपीन
(4) प्रोपीन।
उत्तर:
(2) 2-ब्यूटीन

58. एथिलीन डाइब्रोमाइड के विहाइड्रोहैलोजनीकरण पर प्राप्त होता है-
(1) ऐथीन
(2) ऐथाइन
(3) ब्यूटाइन
(4) प्रोपाइन।
उत्तर:
(2) ऐथाइन

59. ऐथिलीन इस श्रेणी का सदस्य है-
(1) ऐल्काइन
(2) ओलिफिन
(3) पैराफिन
(4) ऐमीन।
उत्तर:
(2) ओलिफिन

60. ऐधिलीन निम्नलिखित किसके निर्जलीकरण पर प्राप्त होती है-
(1) CH3OH
(2) C2H5OH
(3) प्रोपिल ऐल्कोहॉल
(4) ऐथिल ऐसीटेट।
उत्तर:
(2) C2H5OH

61. ऐथिल ऐल्कोहॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म किया जाता है। प्राप्त पदार्थ है-
(1) CH3COOC2H5
(2) C2H6
(3) C2H4
(4) C2H2
उत्तर:
(3) C2H4

62. निम्न में से कौन-सा क्षारीय KMnO4 का रंग नष्ट करता है-
(1) C3H8
(2) C2H4
(3) CH4
(4) CCl4
उत्तर:
(2) C2H4

63. CH3CH = CH.CHO निम्न के अनुप्रयोग द्वारा CH3CH = CH-COOH में ऑक्सीकृत हो सकता है-
(1) भारीय परमैगनेट
(2) अमोनीकृत सिल्वर नाइट्टेट
(3) सेलीनिमय द्वाओक्साएड
(4) ऑस्मियम टेट्राऑक्साइह।
उत्तर:
(2) अमोनीकृत सिल्वर नाइट्टेट

64. ऐोयीन में H-C-H कोण है, लगभग-
(1) 90°
(2) 60°
(3) 180°
(4) 120°
उत्तर:
(4) 120°

65. ऐंघिलीन में कार्बन परमाणुओं के मध्य है-
(1) दो पाई बन्ध
(2) एक सिग्मा तथा एक पाई बन्ध
(3) दो सिम्मा बन्य
(4) एक सिग्मा तथा दो पाई बन्ध
उत्तर:
(2) एक सिग्मा तथा एक पाई बन्ध

66. C4H8 अणुसूत्र के कितने संरचनात्मक समावयवी है-
(1) 2
(2) 3
(3) 4
(4) 5
उत्तर:
(3) 4

67. 2 -ब्यूटीन में कितने समावयवी होते हैं-
(1) 1
(2) 2
(3) 3
(4) 4
उत्तर:
(2) 2

68. ऐेयेन, ऐेंिलीन तथा ऐेसीटिलीन श्रेणी में C-H बन्ध कर्जा होती है-
(1) तीनों यौगिकों में समान
(2) ऐथेन में सर्वाधिक
(3) ऐधिलीन में सर्वाधिक
(4) ऐसीटिसीन में सर्थांकिक
उत्तर:
(4) ऐसीटिसीन में सर्थांकिक

69. “योग अणु का ऋणात्मक भाग उस C- परमाणु से जुड़ता है जो कम H – परमाणुओं से जुड़ा है।” यह कथन कहलाता है—
(1) थीले सिद्धान्त
(2) बायर का विकृति सिद्धान्त
(3) मारकोनीकॉफ का नियम
(4) परॉक्साइड का प्रभाव ।
उत्तर:
(3) मारकोनीकॉफ का नियम

70. —C ≡ C— उपस्थित है—
(1) एथीन में
(2) ब्यूटीलीन में
(3) एथाइन में.
(4) ग्लिसरीन में।
उत्तर:
(3) एथाइन में.

71. निम्न में से कौन-सा सोडियम के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन दिस्थापित करता है?
(1) CH4
(2) C2H6
(3) C2H4
(4) C2H2
उत्तर:
(4) C2H2

72. आइसोप्रोपीन पदार्थों का उपयोग इनके संश्लेषण में किया जाता
(1) प्रोपेन
(2) द्रव ईंधन
(3) रबड़
(4) पेट्रोन।
उत्तर:
(3) रबड़

73. निम्न में किसमें क्लोरीन की सर्वाधिक प्रतिशत मात्रा है ?
(1) पायरीन
(2) पी. वी. सी
(3) क्लोरल
(4) ऐथिलिडीन क्लोराइड
(5) गैर्मेक्सीन।
उत्तर:
(2) पी. वी. सी

74. HBr का एन्टीमारकोनीकॉफ योग किसमें सम्भव नहीं है?
(1) प्रोपीन
(2) ब्यूटीन 1
(3) ब्यूट-2 ईन
(4) पेण्ट-2 ईन।
उत्तर:
(3) ब्यूट-2 ईन

75. अमोनियामय AgNO3 से अभिक्रिया करके ऐसीटिलीन देता है-
(1) सिल्वर दर्पण
(2) सिल्वर धातु
(3) सिल्वर ऐसीटेट
(4) सिल्वर ऐसीटिलाइड।
उत्तर:
(4) सिल्वर ऐसीटिलाइड।

76. ऐल्कोहॉलीय NaOH निम्न में किसका विशिष्ट अभिकर्मक है?
(1) निर्जलीकरण
(2) विहाइड्रोजनीकरण
(3) विहाइड्हैलोजनीकरण
(4) विहैलोजनीकरण ।
उत्तर:
(3) विहाइड्हैलोजनीकरण

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77. ऐसीटिलीन का औद्योगिक निर्माण निम्न में से किसके वातवरण में ग्रेफाइट इलैक्ट्रोड में विद्युत प्रवाहित करके किया जाता है?
(1) वायु
(2) N2
(3) H2
(4) CO2
उत्तर:
(3) H2

78. टेफ्लॉन इस एकलक का बहुलक है-
(1) मोनोफ्लुओरो ऐथेन
(2) डाइफ्लुओरो ऐथेन
(3) टेट्राफ्लुओरो ऐथीन
(4) टेट्राफ्लुओरो ऐथेन ।
उत्तर:
(3) टेट्राफ्लुओरो ऐथीन

79. एथिलीन में कौन-सा कोण लगभग सही है ?
(1) 60°
(2) 120°
(3) 90°
(4) 109.5°
उत्तर:
(2) 120°

80. 1, 3-ब्यूटाडाईन की ब्रोमीन के साथ संघनन अभिक्रिया से प्राप्त होगा—
(1) केवल 1, 2 संघनन उत्पाद
(2) केवल 1 4 संघनन उत्पाद
(3) केवल 1, 2 तथा 1 4 संघनन उत्पाद
(4) इनमें से कुछ नहीं।
उत्तर:
(3) केवल 1, 2 तथा 1 4 संघनन उत्पाद

81. प्रोपाइन तथा प्रोपीन को पहचान सकते हैं-
(1) सान्द्र H2SO4 द्वारा
(2) CCl4 में Bl2 द्वारा
(3) तनु KMnO4 द्वारा
(4) अमोनिया में AgNO3 द्वारा।
उत्तर:
(4) अमोनिया में AgNO3 द्वारा।

82. टेट्राब्रोमोऐथेन को जिंक चूर्ण के साथ गर्म करने पर प्राप्त होता है.—
(1) ऐथेन
(2) एथीन
(3) एथाइन
(4) एथिल ब्रोमाइड ।
उत्तर:
(3) एथाइन

83. अम्लीय हाइड्रोजन उपस्थित होते हैं—
(1) ऐथेन में
(2) एथीन में
(3) एथाहन में
(4) बेन्जीन में
उत्तर:
(3) एथाहन में

84. सल्फर मोनोक्लोराइड एथिलीन से अभिक्रिया करके उत्पन्न करता हैं—
(1) मस्टर्ड गैस
(2) ल्यूसाइट
(3) सैकरीन
(4) थायोफीन
उत्तर:
(1) मस्टर्ड गैस

85. बेन्जीन का नाइट्रीकरण है
(1) नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन
(2) इलेक्ट्रॉन-स्नेही प्रतिस्थापन
(3) नाभिक स्नेही योग
(4) इलेक्ट्रॉन स्नेही योग
उत्तर:
(2) इलेक्ट्रॉन-स्नेही प्रतिस्थापन

86. बेन्जीन में σ एवं π-इलेक्ट्रॉनों की संख्या है
(1) 24 σ इलेक्ट्रॉन एवं 6π इलेक्ट्रॉन
(2) 12 σ इलेक्ट्रॉन एवं 6π इलेक्ट्रॉन
(3) 12 σ इलेक्ट्रॉन एवं 3π इलेक्ट्रॉन
(4) 24 σ इलेक्ट्रॉन एवं 3π इलेक्ट्रॉन
उत्तर:
(1) 24 σ इलेक्ट्रॉन एवं 6π इलेक्ट्रॉन

87. निम्न में सबसे अधिक शक्तिशाली मेटा दैशिक है—
(1) -NO2
(2) -SO3H
(3) -CHO
(4)-COOH.
उत्तर:
(1) -NO2

88. BHC में द्विबन्धों की संख्या है—
(1) 1
(2) 2
(3) 3
(4) शून्य ।
उत्तर:
(4) शून्य ।

89. फ्रीडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया में शुष्क ऐल्यूमिनियम क्लोराइड का
कार्य है—
(1) जल अवशोषित करना
(2) हाइड्रोक्लोरीन अम्ल अवशोषित करना
(3) इलेक्ट्रॉन स्नेही उत्पन्न करना
(4) नाभिक स्नेही उत्पन्न करना ।
उत्तर:
(3) इलेक्ट्रॉन स्नेही उत्पन्न करना

90. HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 3
(1) बुर्टन-फिटिंग अभिक्रिया
(2) कोल्बे अभिक्रिया
(3) फ्रीडेल-क्राफ्टस अभिक्रिया
(4) रोजेनमुन्ड अभिक्रिया।
उत्तर:
(3) फ्रीडेल क्राफ्टस अभिक्रिया

91. बेन्जीन अणु में कार्बन परमाणुओं की संकरण अवस्था होती है-
(1) sp
(2) sp2
(3) sp3
(4) sp2 एवं sp3
उत्तर:
(2) sp2

92. निम्न यौगिकों की इलेक्ट्रॉन स्नेही से अभिक्रिया का सही क्रम है-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 4
(1) II > III > I
(2) III > I > II
(3) I > II > III
(4) I > II > III
उत्तर:
(3) I > II > III

93. बेन्जीन अणु में C—C दूरी है
(1) 1.54A°
(2) 1.39 A
(3) 1.34 A°
(4) 1.20 A°
उत्तर:
(2) 1.39 A

94. बेन्जीन के नाइट्रीकरण के लिए नाइट्रीकरण मिश्रण देता है
(1) NO3
(2) NO2+
(3) NO2
(4) NO2
उत्तर:
(3) NO2

95. सांद्र HNO3 एवं सांद्र H2SO4 के मिश्रण के उपयोग से बेन्जीन के द्वारा नाइट्रोबेन्जीन बनाई जा सकती है, नाइट्रीकरण मिश्रण में HNO3 कार्य करता है—
(1) क्षार की तरह
(2) अम्ल की तरह
(3) अपचायक की तरह
(4) उत्प्रेरक की तरह।
उत्तर:
(1) क्षार की तरह

96. बेन्जीन की खोज की थी
(1) केवेन्डिस ने
(2) फैराडे ने
(3) बर्जीलियमस ने
(4) बोहलर ने
उत्तर:
(2) फैराडे ने

97. बेन्जीन में C—C—C बन्ध कोण होता है लगभग
(1) 90°
(2) 109°
(3) 120°
(4) 108
उत्तर:
(3) 120°

98. निम्न से कौन-सा समूह ऑर्थो पैरा दैशिक है
(1) -NO2
(2) -CN
(3)-COOH
(4) -OH.
उत्तर:
(4) -OH.

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

99. बेन्जीन AICI3 की उपस्थिति में CH3COCl के साथ देती है
(1) C6H5Cl
(2) C6H5CO2Cl
(3) C6H5 – CH3
(4) C6H5 – COCH3
उत्तर:
(4) C6H5 – COCH3

100. निम्न में से किसमें कार्बोक्सिलिक समूह नहीं हैं-
(1) बेन्जोइक अम्ल
(2) पिकरिक अम्ल
(3) ऐस्परिन
(4) ऐथेनोइक अम्ल ।
उत्तर:
(2) पिकरिक अम्ल

101. बेन्जेल्डिहाइड एवं फार्मेल्डिहाइड का मिश्रण जलीय NaOH के साथ गर्म करने से देता है—
(1) बेन्जिल ऐल्कोहॉल एवं सोडियम
(2) सोडियम बेन्जोएट एवं मेथिल ऐल्कोहॉल
(3) सोडियम बेन्जोएट एवं सोडियम फॉर्मेट
(4) बेन्जिल ऐल्कोहॉल एवं मैथिल ऐल्कोहॉल |
उत्तर:
(1) बेन्जिल ऐल्कोहॉल एवं सोडियम

102. निम्न यौगिकों में इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन के प्रति क्रियाशीलता का घटता क्रम होता है—
C6H5—CH3, C6H6. C6H5 – CO – CH3, C6H5 – CF3
(1) III > I > II > IV
(2) IV > I > II > III
( 3 ) I > II > III > V
( 4 ) II > I > III > IV
उत्तर:
(1) III > I > II > IV

103. टॉलूईन के फ्रीडेल- क्राफ्ट संश्लेषण में शुष्क AlCl3 के अतिरिक्त अन्य अधिकर्मक होते हैं-
(1) C6H6 + CH4
(2) C6H6 + CH3Cl
(3) C6H5Cl + CH3Cl
(4) C6H5Cl + CH4
उत्तर:
(2) C6H6 + CH3Cl

104. सोडियम बेन्जोएट एवं सोडालाइम का मिश्रण गर्म करने पर देता
(1) बेन्जीन
(2) मेथेन
(3) सोडियम बेन्जोएट
(4) कैल्सियम बेन्जोएट ।
उत्तर:
(1) बेन्जीन

105. HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 5
(1) बेन्जोइक अम्ल
(2) सेलिसिलिक अम्ल
(3) फीनॉल
(4) ऐनिलीन।
उत्तर:
(4) ऐनिलीन।

106. फीनॉल Zn चूर्ण के साथ आसवन पर देता है—
(1) C6H6
(2) C6H5 – C6H5
(3) C6H12
(4) C6H5 – O – C6H5
उत्तर:
(1) C6H6

107. इलेक्ट्रान स्नेही नाइट्रीकरण के लिए सबसे अधिक क्रियाशील यौगिक
(1) बेन्जीन
(2) नाइट्रोबेन्जीन
(3) बेन्जोइक अम्ल
(4) टॉलूईन।
उत्तर:
(4) टॉलूईन।

108. निम्न में से किस पर इलेक्ट्रॉन स्नेही आक्रमण सबसे आसान होता
(1) C6H6
(2) C6H5 – Cl
(3) C6H5OH
(4) C6H5 – CH3
उत्तर:
(3) C6H5OH

109. C7H5OH से बेन्जीन रिंग युक्त कितने समायवी बनते हैं-
(1) 4
(2) 5
(3) 6
(4) 7
उत्तर:
(2) 5

110. क्रोमिल क्लोराइड द्वारा टॉलूईन के बेन्जोल्डिहाइड में ऑक्सीकरण को कहते हैं—
(1) रोजेनमुन्ठ अभिक्रिया
(2) बुर्ज अभिक्रिया
(3) इटार्ड अभिक्रिया
(4) फिटिंग अभिक्रिया ।
उत्तर:
(3) इटार्ड अभिक्रिया

111. HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 6
(1) 4- नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन
(2) 1 नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(3) 3- नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(3) 3- नाइट्रो क्लोरो बेन्जीन

112. कार्बोक्सिलिक अम्ल है-
(1) फीनॉल
(2) फेनिल बेन्जोएट
(3) फेनिल ऐसीटेट
(4) सैलोल।
उत्तर:
(1) फीनॉल

अति लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी ऐल्केन का पुन: संभवन क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
किसी ऐल्केन की ऑक्टेन संख्या में वृद्धि करने के लिए पुन: संभवन किया जाता है। पुनः संभवन क्रिया उच्च ताप व उच्च दाब (28-50 वायुमण्डल दाब) पर होती है।

प्रश्न 2.
2, 2-डाइमेथिल ब्यूटेन में कितने द्वितीयक कार्बन हैं ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 7

प्रश्न 3.
ऐथेन के ग्रस्त तथा सांतरित रूप साधारण ताप पर पृथक्कृत क्यों नहीं किए जा सकते हैं ?
उत्तर:
इन दोनों रूपों की ऊर्जाओं में अन्तर कम होने के कारण इन्हें साधारण ताप पर पृथक्कृत करना सम्भव नहीं होता।

प्रश्न 4.
ऐथेन के कितने संरूपण सम्भव हैं?
उत्तर:
असंख्य।

प्रश्न 5.
संरूपण क्या हैं?
उत्तर:
आबन्धों के विदलन के बिना एकल आबन्ध के परितः घूर्णन अथवा मरोड़न से प्राप्त संरचनाएँ संरूपण कहलाती हैं।

प्रश्न 6.
मेथेन को एथेन में परिवर्तित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 8

प्रश्न 7.
1, 2-डाइक्लोरोऐथेन के सांतरित रूप का न्यूमैन प्रक्षेपण खींचिए।
उत्तर-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 9

प्रश्न 8.
हाइड्रोकार्बन का मुब्य स्तोत बताइए।
उत्तर:
हाइड्रोकार्बन का मस्य रोत पेट्रोलियम है। घेट्टोलिखम चन्तनील विशेथ गन्थयकक्त गादे द्रव के रुप में पृथ्वी के नीचे कुछ विशेष स्तरों में पाबा जाता है। बह कार्बनिक पद्वार्थों के दौर्थकाल हक पृथ्वी के अन्दर द्वे रहने के कारण घनती है। पैट्टोलियम में भारी मात्रा में अनेक हाइड्रोकार्बन होते है। इन हाइड्रोकार्जन के साथ कूछ सोटोटिक बौगिक और नाइट्टोजन तथा सल्फर अदि की भी अल्प-मात्रा पाई जाती है। पेट्रोलियम के शोषन से प्राप्त कब्चे तेल्ल के प्रभाजी आसबन से हाइड्रोकार्बन प्राप्त हते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 10

प्रश्न 9.
सान्द्र H2SO4 ऐेघेन को सुखाने के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है, परन्तु ऐेखिलीन के लिए नही, समझाइए।
उत्तर:
क्यॉंकि ऐेषेन H2SO4 से कोई अभिक्रिजा नहाँ करती है, गबकि एधिलीन बान्द्र H2SO4 से अधिक्रिया करके एधिल हडड़्रोजन सल्फेट बनाती है।

प्रश्न 10.
ऐल्क्केन की क्रियाशीलता एल्कीनों एवं एल्काइ़ोनों से कम क्यों होती है।
उत्तर:
क्योंकि इनके C-C तथा C-H बन्ध क्रमशः अधुवीय एवं लगभग अपुवीय होते हैं। अतः भुवी आक्रमणकारी अभिकर्यक इन पर अक्रमण नहीं कर सकता है त्रबकि द्विबन्ध व त्रिबन्ध के π-इस्लेक्टॉन E+ को आकाषित कर लेते हैं।

प्रश्न 11.
मेखेन के सभी C-H बन्ध समान होते है, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि मेयेन में कार्बन परमाणु sp3 संकरित होता है तथा सभी C-H बन्ष sp+ – 5 के अतिव्यापन से बने सिम्मा बन्ध होते हैं।

प्रश्न 12.
निओपेन्टेन केवल एक मोनो प्रतिस्थापन समाबयवी बेता है, बस्यों ?
उत्तर:
क्योंकि निओपेन्टेन [(CH3)4C] में उप्वस्वित सभी H समान 1° के होते है।

प्रश्न 13.
यह्छपि F की विद्युत ऋणात्मकता Cl से अधिक है, किन्यु CH3Cl का द्विशुव आघूर्ण CH3F से अधिक है, क्यों ?
उत्तर:
क्चोंकि C-Cl बन्ध की लम्बाई अधिक हेती है।

प्रश्न 14.
COOH समूह के विकार्थोक्सिलीकरण अभिक्रिया में प्रयुक्त होने वासा अभिकर्मक लिखें।
उत्तर:
सोडा लाइम (NaOH + CaO) ।

प्रश्न 15.
क्या CH4 एक रेखीय अणु है।
उत्तर:
नहीं।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 16.
मेश्थेन के H-C-H कोण का मान बात्तए।
उत्तर:
109°28′

प्रश्न 17.
ऐल्केनों के दो अन्य सामान्य नाम बातइए।
उत्तर:

  1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन,
  2. पैराफीन।

प्रश्न 18.
उन ऐल्केनों के नाम लिखें जिनमें कोई समावयवता नहीं होती।
उत्तर:
मेथेन, ऐथेन, प्रोपेन।

प्रश्न 19.
मार्श गैस का रासायनिक नाम लिखें।
उत्तर:
मेथेन (CH4)।

प्रश्न 20.
कृत्रिम कपूर के रूप में प्रयोग होने वाले रसायन के सूत्र लिखें।
उत्तर:
C2Cl6 हेक्साक्लोरोऐोथेन।

प्रश्न 21.
मेध्रेन की खोज किसने की ?
उत्तर:
वोल्गा ने।

प्रश्न 22.
सूर्य के प्रकाश में एल्केनों के हैलोजनीकरण करने के लिए क्लोरीन, ब्रोमीन एवं आयोडीन में सर्बाधिक क्रियाशील हैलोजन कौन है?
उत्तर:
क्लोरीन।

प्रश्न 23.
ऐल्केन के उस न्यूनतम समजात्त का नाम लिखें जो प्रकाश समावयवता प्रदशिंत करता है
उत्तर:
3-मेधिरन हेक्सेन।

प्रश्न 24.
वे कौन से एल्केन हैं, जो किसी भी प्रकार की समावयवता को प्रदर्शित नहीं करते हैं?
उत्तर:
मेथेन, ऐथेन तथा प्रोपेन।

प्रश्न 25.
ऐल्केन की क्रियाशीलता एल्कीन तथा एल्काइनों से कम होती है। क्यों ?
उत्तर:
ऐल्केन में C-C तथा C-H आबन्ध लगभग अध्रुवीय होते है। जिसके कारण ध्रुवी आक्रमणकारी अभिकमक इन पर आक्रमण नहीं कर सकता है, जबकि प्विबन्ध व त्रिवन्ध के π-द्लेक्ट्रॉन E+ को आकर्षित कर लेते हैं।

प्रश्न 26.
सान्द्र H2SO4 के द्वारा एथेन को शुष्क किया ज्ञा सकता है, परन्तु एमीन को नहीं। क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि ऐथीन H2SO4 में अवशोषित हो जाती है तथा एथिलीन हाइड्रोजन सल्फेट बनाती है।

प्रश्न 27.
मेथेन के सभी C-H बन्ध समान होते हैं, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि मेथेन में कार्बन परमाणु sp2 संकरित होता है तथा सभी C-H बन्ध sp3s के अतिव्यापन से बने सिग्मा बन्ध होते हैं।

प्रश्न 28.
ब्यूटेन को घरेलू ईंधन के रूप में प्रयोग करते हैं, क्यों ?
उत्तर:
ब्यूटेन के दोनों समावयवी (n वे आइसो) आसानी से द्रवीकृत हो जाते हैं तथा इन्हें सिलिण्डर में रखा जा सकता है। इसके अलावा सिलिण्डर को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।

प्रश्न 29.
L.P.G. गैस के प्रमुख घटक बताइये।
उत्तर:
यह द्रवित प्रोपेन तथा ब्यूटेन का मिश्रण होती है।

प्रश्न 30.
कैलोरी गैस के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
कैलोरी गैस द्रवित ब्यूटेन (n-ब्यूटेन + आइसो ब्यूटेन) का मिश्रण होती है।

प्रश्न 31.
कम तापमान वाले तापमापी में कौन-सी ऐल्केन प्रयुक्त होती है?
उत्तर:
कम तापमान वाले तापमापी में पेन्टेन (C5H12) प्रयुक्त होती है।

प्रश्न 32.
लिण्डलार अभिकर्मक किसे कहते हैं?
उत्तर:
पैलेडियम तथा कार्बन Pd/C को लिण्डला उत्प्रेरक कहते हैं।

प्रश्न 33.
ब्यूटेन के दहन की क्रिया की समीकरण दीजिये।
उत्तर:
\(\mathrm{C}_4 \mathrm{H}_{10(\mathrm{~g})}+\frac{13}{2} \mathrm{O}_{2(\mathrm{~g})} \rightarrow 4 \mathrm{CO}_{2(\mathrm{~g})}+5 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_{(3)} \Delta \mathrm{H}=-n \mathrm{e}\)

प्रश्न 34.
ऐल्केन के दहन का सामान्य सूत्र दें।
उत्तर:
\(\mathrm{C}_n \mathrm{H}_{2 n+2}+\left(\frac{3 n+1}{2}\right) \mathrm{O}_2 \rightarrow n \mathrm{CO}_2+(n+1) \mathrm{H}_2 \mathrm{O}\)

प्रश्न 35.
प्रोपेन के नाइट्रीकरण से कौन-कौन से उत्पाद बनाते है?
उत्तर:
नाइट्रो मेथेन, नाइट्रो ऐथेन, 1-नाइट्रो प्रोपेन तथा 2-नाइट्रो प्रोपेन बनती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 11

प्रश्न 36.
ऐल्केन के नियन्त्रित ऑक्सीकरण की क्रिया दीजिये तथा बनने वाले उत्पाद का नाम भी बताइये।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 12

प्रश्न 37.
निओपेन्टेन केवल एक मोनो प्रतिस्थापन समावयवी देता है, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि निओ पेन्टेन [(CH3)4C] में उपस्थित सभी H समान (1° की) होती हैं।

प्रश्न 38.
n-पेन्टेन, आइसो ब्यूटेन व निओपेन्टेन के सूत्र लिखें।
उत्तर:
n-पेन्टेन-CH3CH2CH2CH2CH3
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 13

प्रश्न 39.
2-मेथिल ब्यूटेन में 1°, 2°, 3° हाइड्रोजन प्रदर्शित करें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 14

प्रश्न 40.
n-पेन्टेन तथा आइसो पेन्टेन में से किसका क्वधनांक उच्च है ? और क्यों ?
उत्तर:
n-पेन्टेन का क्वधनांक उच्च होता है क्योंकि इसका पृष्टीय क्षेत्रफल अधिक होता है।

प्रश्न 41.
तेलों के हाइड्रोजनीकरता से वनस्पति घी बनाने में किस ऊप्रेरक का उप्रयोग किया जाता है ?
उत्तर:
वेलों के हाइड्रोजनीकरण से वनस्पति घी के निर्माण की क्रिया निकिल उत्प्रेरक के माध्यम में होती है।

प्रश्न 42.
मेथेन और ऑक्सीजन के मिश्रण को गर्म MoO पर प्रवाहित करने से बनने वाले उत्पाद का नाम बताइये।
उत्तर:
मेथेन और औंक्सीजन के मिश्रण को गर्म MoO पर प्रवाहित करने पर मेथेनेल (HCHO) प्राप्त होता है।

प्रश्न 43.
C8H18 आणिबक सूत्र वाले उस ऐल्केन की संरचना बताइये जो क्लोरोनीकरण कराने पर मात्र एक मोनोक्लोरो व्युत्पन्न घनाती है।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 15

प्रश्न 44.
ऐथेन में C-C एकल बन्ध का घूर्णन मुक्त नहीं होता है। क्यों ?
उत्तर:
ऐेथेन में C-C एकल बन्ध का यूर्णन मुक्त नहीं होता है। ऐसा प्रतिकर्षण अन्योन्य क्रिया के कारण होता है। यह घूर्णन 1 से 20kJ mol-1 तक की ऊर्जा द्वारा बाधित ह्रेता है। यहाँ पर प्रतिकर्षण के बावनूद C-C एकल आबन्ध में घूर्णन होता हैं जिसके फलस्वरूप असंख्य संरूपण सम्भव हैं। इन असंख्य संरूपणों को संरूपणीय समावयव या घूर्णी समावयव भी कहते है।

प्रश्न 45.
नाभिकस्नेही व इलेक्ट्रॉनस्नेही स्पीशीज को छाँटें।
(1) H3CO,
(2) H3 C-C-O-,
(3) Cl,
(4) Cl2 C:,
(5) (H3C)3C+,
(6) Br,
(7) H3COH,
(8) R-NH-R
उत्तर:
नाभिक-स्नेही-
(1) H3CO-
(2) IMG – 16
(3) CH3-O-H
(4) RNHR
इलेक्ट्रॉन स्नेही- (1) Cl, (2) Cl2, C:, (3) (H3C)3 C+

प्रश्न 46.
2-मेथिल प्रोपेन के मोनोक्लोरीनीकरण के दौरान बनने वाले दोनों हाइड्रोकार्बन मूलक को लिखें व बतायें कि इनमें से कौन-सा अधिक स्थायी है ?
उत्तर:
2-मेथिल प्रोपेन से निम्न दो मूलक बनते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 17
मूलक (I) का स्थायित्व मूलक (II) से अधिक है क्योंकि मूलक (I) तृतीयक है जबकि मूलक (II) द्वितीयक है।

प्रश्न 47.
ऐथिलीन के प्रमुख उपयोगों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
ऐथिलीन का प्रयोग निम्नलिखित कार्यों में होता है-

  1. ग्लाइकॉल, ऐथिल, ऐल्कोहॉल, फॉर्मेल्डिहाइड, ऐथेन आदि के बनाने में।
  2. कच्चे फलों को कृत्रिक विधि से पकाने में।
  3. पॉलिथीन बहुलक बनाने में।
  4. निश्चेतक के रूप में तथा युद्ध में मारक (killer) मस्टर्ड गैस बनाने में।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 48.
किसी कार्बनिक यौगिक में आप असंतृप्तता की उपस्थिति की जाँच कैसे करेंगे?
उत्तर:
ब्रोमीन जल मिलाकर; यदि ब्रोमीन जल मिलाने पर यह रंगहीन हो जाता है तो यौगिक असंतृप्त है।

प्रश्न 49.
ऐल्कीन के प्रति HCl, HBr, HI तथा HF की क्रियाशीलता का घटता क्रम लिखिए।
उत्तर:
HI > HBr > HCl> HF

प्रश्न 50.
क्या होता है जब ऐथेनॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ 443K पर गर्म किया जाता है?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 18

प्रश्न 51.
HCI, HBr, HI एवं HF को एल्कीनों के साथ क्रियाशीलता के घटते क्रम में लिखें।
उत्तर:
HI > HBr > HCl > HF

प्रश्न 52.
ऐधिलीन और हाइपोक्लोरस अम्ल की अभिक्रिया लिखें।
उत्तर:
CH2 = CH2 + HOCl → HOCH2.Ch2Cl

प्रश्न 53.
उन ओलिफिनों के सूत्र लिखें जो ओजोनीकरण पर निम्न उत्पाद देती हों-
(1) 2-पेन्टेनॉन एवं ऐसीटेल्डिहाइड
(2) 2-पेन्टेनॉन केवल
(3) ऐसीटोन एवं 2-मेथिल प्रोपेनल
(4) ऐथेनेल एवं मेथेनल
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 19

प्रश्न 54.
हाइड्रोकार्बन का सूत्र C3H6 है। इसकी संरचना बताओ यदि –
(1) यह बॉयर अभिकर्मक का रंग उड़ा देती है।
(2) यह बॉयर अभिकर्मक का रंग नहीं उड़ाती है।
उत्तर:
(1) CH3CH = CH2
प्रोपीन
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 20

प्रश्न 55.
मस्टर्ड गैस का सूत्र लिखो।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 21

प्रश्न 56.
ऐथिलीन व ऐथेन में कैसे विभेद करेंगे ?
उत्तर:
ऐथिलीन बॉयर अभिकर्मक का रंग उड़ा देती है, जबकि ऐथेन नहीं।

प्रश्न 57.
2-क्लोरोप्रोपेने के समपक्ष एवं विपक्ष ज्यामितीय समावयवती प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 22

प्रश्न 58.
एक ऐल्कीन C4H8,HBr से योगात्मक अभिक्रिया पर ऑक्साइड की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति में एक ही उत्पाद देती है। एल्कीन बताओ।
उत्तर:
ऐल्कीन सममिति होनी चाहिए। अतः एल्कीन होगी,
CH3CH = CH-CH3

प्रश्न 59.
ऐल्कीन का सामान्य सूत्र लिखो।
उत्तर:
CnH2n

प्रश्न 60.
| के ओजोनीकरण से क्या प्राप्त होगा ?
उत्तर:
OHCCH2.CH2CHO.

प्रश्न 61.
ऐल्कीन में द्विआबन्ध की उपस्थिति की पहचान करने में प्रयुक्त हैलोजन का नाम बताइये।
उत्तर:
Br2

प्रश्न 62.
उस अभिक्रिया को बताइये जिसमें हैलोऐल्केन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म किया जाता है।
उत्तर:
विहाइड्रोहैलोजनीकरण।

प्रश्न 63.
ऐथाइन को एथीन में परिवर्तित करने के लिये प्रयुक्त होने वाले उत्त्रेरक का नाम बताइये।
उत्तर:
लिण्डलार उत्प्रेरक।

प्रश्न 64.
ब्यूट-2-ईन के ओजोनी अपघटन से प्राप्त होने वाले उत्पाद के नाम लिखें।
उत्तर:
केवल ऐथेनेल।

प्रश्न 65.
मारकोनीकॉफ नियम में प्रयुक्त क्रियाविधि की प्रकृति बताइये।
उत्तर:
मारकोनीकॉफ नियम में प्रयुक्त क्रियाविधि की प्रकृति आयनिक होती है।

प्रश्न 66.
ऐल्कीन में द्विआबन्ध की स्थिति कैसे निर्धारित करेंगे ?
उत्तर:
ओजोनी अपघटन के द्वारा।

प्रश्न 67.
क्या प्रोपीन से HCl के योग में परॉक्साइड प्रभाव प्रभावी है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 68.
तनु क्षारीय KMnO4 क्या कहलाता है?
उत्तर:
बेयर अभिकर्मक।

प्रश्न 69.
मारकोनीकॉफ का नियम बताइये।
उत्तर:
इसके अनुसार क्रियाकारक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु पर जाता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणु की संख्या न्यूनतम होती है।
उदाहरण:CH3—CH = CH2 + H – Cl→
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 23

प्रश्न 70.
खराश प्रभाव क्या कहा जाता है?
उत्तर:
इसे एन्टी मारकोनीकॉफ कहते हैं।
उदाहरण-
\(\mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2+\mathrm{H}-\mathrm{Br} \frac{\mathrm{O}_3}{\mathrm{H}_2 \mathrm{O}_2} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2 \mathrm{CH}_2 \mathrm{Br}\) 1- ब्रोमो प्रोपेन

प्रश्न 71.
प्रोपीन पर HBr का योग HCl तथा HI से भिन्न प्रकार का होता है?
उत्तर:
HBr बन्ध कमजोर होता है तथा यह टूट जाता है और मुक्त मूलक बनाता है जबकि HF, HCI तथा HI मुक्त मूलक नहीं बनाते हैं।

प्रश्न 72.
ऐथीन के बहुलकीकरण की व्याख्या करें।
उत्तर:
ऐथीन का बहुलकीकरण ताप द्वारा होता है तथा उत्पाद पॉलिथीन बनती है।
उदाहरण:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 24

प्रश्न 73.
निम्न अभिक्रिया को पूर्ण करें।
(1) \(\mathbf{C H}_3-\mathbf{C H}=\mathbf{C H}_2 \frac{(\mathrm{Ph}-\mathrm{CO}-\mathrm{O})_2}{\mathrm{HBr}}\)
(2) \(\mathbf{C H}_3-\mathbf{C H}=\mathbf{C H}_2 \stackrel{\mathrm{HBr}}{\longrightarrow}\)
उत्तर:
(1) \(\mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \frac{(\mathrm{PhCOO})_2}{\mathrm{HBr}} \rightarrow \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2 \mathrm{Br}\) एण्टी मारकोनीकॉफ का नियम

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 25

प्रश्न 74.
ऐल्कीन में ज्यामितीय समावयवता क्यों होती है ?
उत्तर:
ऐल्कीन में π-बन्ध पाया जाता है। इस π-बन्ध के परित: घूर्णन सम्भव नहीं होता। अतः ये ज्यामितीय समावयव बनते हैं।

प्रश्न 75.
ऐल्काइन से क्या समझते हैं?
उत्तर:
कार्बन – कार्बन त्रिबन्ध (C ≡ C) युक्त असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को ऐल्काइन कहते हैं।

प्रश्न 76.
ऐल्काइन का सामान्य सूत्र क्या है?
उत्तर:
CnH2n-2 अथवा R—C ≡ C—R

प्रश्न 77.
संगत ऐल्केन की अपेक्षा ऐल्काइनों में कितने हाइड्रोजन कम होते है ?
उत्तर:
चार हाइड्रोजन कम होते हैं।

प्रश्न 78.
ऐल्काइनों की संरचना कैसी होती है?
उत्तर:
ऐल्काइनों की संरचना रेखीय होती है।

प्रश्न 79.
ऐल्काइन श्रेणी का प्रथम सदस्य कौन-सा है ?
उत्तर:
ऐथाइन या ऐसीटिलीन

प्रश्न 80.
ऐल्काइनों में त्रिबन्ध से जुड़े दोनों कार्बनों में किस प्रकार का संकरण होता है?
उत्तर:
ऐल्काइनों में त्रिबन्ध से जुड़े दोनों कार्बन sp- संकरित होते है।

प्रश्न 81.
ऐल्काइनों में ≡ C—H (sp—s) बन्ध में $ लक्षण कितना होता है ?
उत्तर:
50%

प्रश्न 82.
त्रिबन्ध के प्रत्येक कार्बन परमाणु पर कितने असंकरित p-कक्षक होते हैं?
उत्तर:
दो असंकरित p-कक्षक py तथा pzहोते हैं।

प्रश्न 83.
त्रिबन्ध के प्रत्येक कार्बन परमाणु पर दो असंकरित p- कक्षक संपाश्विक अतिव्यापन से कितने बन्ध बनाते हैं?
उत्तर:
दो बन्ध बनाते हैं।

प्रश्न 84.
त्रिबन्ध के दोनों बन्धों की त्रिविम स्थिति किस प्रकार की होती है?
उत्तर:
प्रत्येक कार्बन पर उपस्थित दोनों p-कक्षक के अक्ष एक-दूसरे से तथा sp-संकरित कक्षकों से 90° का कोण बनाते हैं।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 85.
दो बन्ध के चारों पिण्डक नाभिकों को जोड़ने वाली रेखा के चारों ओर किस रूप से रहते हैं?
उत्तर:
दोनों बन्धों के चारों पिण्डक नाभिकों को जोड़ने वाली रेखा के चारों ओर एक बेलनाकार आच्छद (Cylindrical sheath) के रूप में स्थित रहते हैं।

प्रश्न 86.
CHI3 को चाँदी के साथ गर्म करने पर क्या पदार्थ बनता है?
उत्तर:
ऐसीटिलीन ।

प्रश्न 87.
अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन में ऐसीटिलीन प्रवाहित करने पर क्या बनता है?
उत्तर:
सिल्वर ऐसीटैलाइड बनता है।

प्रश्न 88.
ऐसीटिलीन के द्विलकीकरण से क्या बनता है?
उत्तर:
वाइनिल ऐसीटिलीन ।

प्रश्न 89.
प्रोपाइन के त्रिलकीकरण से क्या उत्पाद बनता है?
उत्तर:
मेसिटिलीन ।

प्रश्न 90.
कृत्रिम रबड़ का नाम है?
उत्तर:
नियोप्रीन रबड़ ।

प्रश्न 91.
ऐसीटिलीन के कार्बोनिलीकरण से क्या बनता है?
उत्तर:
ऐक्राइलिक अम्ल ।

प्रश्न 92.
C2H2 का क्रोमिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण करने पर क्या बनता है?
उत्तर:
ऐसीटिक अम्ल ।

प्रश्न 93.
ल्यूसाइट किस प्रकार प्राप्त होती हैं?
उत्तर:
ऐसीटिलीन पर आर्सेनिक क्लोराइड की क्रिया से ।

प्रश्न 94.
ऐथाइन को प्रोपाइन में परिवर्तित कीजिए ।
उत्तर:
HC ≡ CH+ NaNH2 → एथाइन
HC = CNa+ + Cl CH3 → HC ≡ C—CH3 + NaCl प्रोपाइन

प्रश्न 95.
ऐसीटिलीन के प्रमुख उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. ऐसीटिलीन से ऑक्सी-ऐसीटिलीन ज्वाला बनाई जाती है जिसे धातु को काटने एवं जोड़ने में प्रयोग किया जाता हैं
  2. कच्चे फलों को पकाने में।
  3. कार्बनिक यौगिकों; जैसे—बेन्जीन, कृत्रिम रबर, ऐसीटेल्डिहाइड, ऐसीटिक अम्ल आदि के निर्माण में ।

प्रश्न 96.
ऐसीटिलीन के H-अम्लीय होते हैं, किन्तु यह NaOH अथवा KOH से क्रिया नहीं करते हैं। क्यों ?
उत्तर:
यह अति दुर्बल अम्ल है तथा कुछ क्षारों जैसे- NaNH2 के साथ क्रिया करता है।

प्रश्न 97.
1-ब्यूटीन व 1- ब्यूटाइन में किसका द्विध्रुव आघूर्ण अधिक है और क्यों ?
उत्तर:
CH3CH2C ≡ CH व CH3CH3CH = CH2 में 1 – ब्यूटाइन का आघूर्ण अधिक होता है क्योंकि C ≡ C में sp2 संकरित होता है। sp- संकरित कक्षकों की विद्युतऋणात्मकता अधिक होने के कारण इसके बन्ध अधिक ध्रुवित होते हैं।

प्रश्न 98.
C–C, C = C में, C ≡ C में, C ≡ C की बन्ध लम्बाई न्यूनतम होती है क्यों?
उत्तर:
C ≡ C में σ बन्ध छोटे आकार की sp-sp कक्षकों के बीच बनता है। s- चरित्र घटने से संकरित कक्षक छोटे होते हैं। तथा अतिव्यापन की प्रकृति अधिक होती है।

प्रश्न 99.
यद्यपि ऐसीटिलीन के C–H बन्ध ऊर्जा ऐल्केन व ऐल्कीन के C–H बन्ध से अधिक हाती है, किन्तु ऐसीटिलीन अम्लीय है, क्यों?
उत्तर:
चूँकि ऐसीटिलीन के CH बन्ध की ध्रुवता अधिक होती है। यह बन्ध sp3 व sp2 से अधिक विद्युत ऋणात्मक कक्षकों के s-कक्षक के साथ अतिव्यापन से बनता है।

प्रश्न 100.
इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिक्रियाओं में ऐल्कीनों की क्रियाशीलता, ऐल्काइनों से अधिक क्यों होती है। ?
उत्तर:
क्योंकि ऐल्काइनों पर E+ के योग से बनने वाला ब्रिजयुक्त कार्बोधनायन, ऐल्कीनों पर योग से बनने वाले कार्बोधनायन से कम स्थायी है।

प्रश्न 101.
CH2 = CH- अधिक क्षारीय है, HC ≡ C से क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि संयुग्नी अम्ल CH ≡ CH, CH2 = CH2 से अधिक अम्लीय है।

प्रश्न 102.
ऐसीटिलीन श्रेणी के प्रथम तीन सदस्यों के सूत्र लिखें ?
उत्तर:
C2H2, C3H4, C4H6

प्रश्न 103.
-C ≡ C—बन्ध को क्या कहते हैं?
उत्तर:
ऐसीटिलीनिक बन्ध ।

प्रश्न 104.
दो कार्बन परमाणुओं से युक्त हाइड्रोकार्बन ‘क’ बॉयर अभिकर्मक का रंग उड़ा देता है। Cu2cl2/ NH4OH में प्रवाहित करने पर यह अवक्षेप देता है। इसकी प्रकृति बताइए ?
उत्तर:
यह ऐसीटिलीन है तथा इसमें त्रिबन्ध पाया जाता है।

प्रश्न 105.
ऐसीटिलीन के प्रमुख उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
PH3, H2S, AsH3, NH3 आदि।

प्रश्न 106.
ऐसीटिलीन की अम्लीय प्रकृति को सिद्ध करने के लिये एक रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
सोडियम के साथ यह ऐसीलाइड देता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 26

प्रश्न 107.
एथिलीन व ऐसीटिलीन कैसे विभेद करेंगे।
उत्तर:
सोडियम से क्रिया करके ऐसीटिलीन H2 मुक्त करती है, जबकि एथिलीन नहीं करती है।

प्रश्न 108.
त्रिक-बन्ध पर जुड़ा N परमाणु क्या कहलाता है तथा इसकी प्रकृति कैसी होती है?
उत्तर:
ऐसीटिलीनिक हाइड्रोजन अम्लीय प्रकृति ।

प्रश्न 109.
अधिकतम ऐसीटिलीनिक हाइड्रोजन की संख्या किसी यौगिक में कितनी हो सकती है तथा किसमें ।
उत्तर:
दो, ऐसीटिलीन में (CH ≡ CH)

प्रश्न 110.
मोनो प्रतिस्थापित एवं डाइप्रतिस्थापित ऐसीटिलीन को क्या कहते हैं? इनमें अम्लीय H कितने होते हैं।
उत्तर:
मोनो प्रतिस्थापित ऐसीटिलीन — RC ≡ CH—अम्लीय H = 1
डाई प्रतिस्थापित ऐसीटिलीन — RC ≡ CR—अम्लीय H = 0

प्रश्न 111.
ऐल्काइन का अपचयन NH3(3) में Na के साथ करने पर एक ट्रान्स- ऐल्कीन प्राप्त होती है क्या 2-ब्यूटाइन का अपचयन करने पर ब्यूटीन प्राप्त होगी।
उत्तर:
—CH3—C ≡ C—CH3
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 27
2- ब्यूटीन ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित कर सकती है।

प्रश्न 112.
ऐसीटिलीन से नाइट्रोबेन्जीन किस प्रकार बनायेंगे ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 28

प्रश्न 113.
ऐल्काइन ज्यामितीय समावयवता क्यों नहीं प्रदर्शित करती है ?
उत्तर:
ऐल्काइन की संरचना रेखीय होती है अतः यह ज्यामितीय समावयवता प्रदर्शित नहीं करती है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 114.
C5H10 के विभिन्न साइक्लो समावयव बनायें ।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 29
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH}+\mathrm{HC} \equiv \mathrm{CH} \frac{\mathrm{Cu}_2 \mathrm{Cl}_2}{\mathrm{CH}_4 \mathrm{OH}} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{CH}\) वाइनिल ऐसीटिलीन

प्रश्न 115.
संगलित वलय तथा विलगित वलय यौगिकों का एक-एक उदाहरण दीजिए तथा इनके संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
संगलित वलय उदाहरण नैफ्थलीन ।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 30
विलगित वलय उदाहरण – डाइफैनिल
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 31
डाइफैनिल

प्रश्न 116.
90% बेंजॉल के मुख्य घटक क्या-क्या हैं?
उत्तर:
बेंजीन (70%), टॉलूईन (24%), जाइलीन (थोड़ी मात्रा में ) ।

प्रश्न 117.
बेंजीन की संरचना बनाइए जो बायर और डेवार ने दी।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 32

प्रश्न 118.
बेंजीन, सल्फोनीकरण का रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 33

प्रश्न 119.
बेन्जीन m-डाइनाइट्रोबेन्जीन तथा टॉलूईन में से किसका नाइट्रीकरण आसानी से होता है और क्यों ?
उत्तर:
टॉलूईन का नाइट्रीकरण सरलता से होता है, क्योंकि-CH3 समूह इलेक्ट्रॉन विमुक्त समूह होता है। यह बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन- घनत्व बढ़ा देता है।

प्रश्न 120.
बेन्जीन के ऐथिलीकरण में निर्जल ऐलुमिनियम क्लोराइड के स्थान पर कोई दूसरा लुइस अम्ल सुझाइए ।
उत्तर:
फेरिक क्लोराइड (FeCl3) अन्य लुइस अम्ल है। जिसे प्रयोग किया जा सकता है यह इलेक्ट्रॉनस्नेही (C2H5+) उत्पन्न करने में सहायता करता है।

प्रश्न 121.
बेंजीन को ऐसीटोफीनोन में परिवर्तित करो ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 34

प्रश्न 122.
बेन्जीन से ब्रोमीन की संकलन अभिक्रिया कठिन क्यों होती है?
उत्तर:
π-इलेक्ट्रॉनों के विस्थानीकृत होने के कारण बेन्जीन से ब्रोमीन की संकलन अभिक्रिया कठिन होती है। इसमें परिशुद्ध द्विआबन्ध नहीं होते है।

प्रश्न 123.
क्या होता है जब बेन्जीन को सूर्य के प्रकार की उपस्थिति में क्लोरीन के अधिक्य से अभिकृत कराया जाता है। रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 35

प्रश्न 124.
बैन्जीन अंसतृप्त यौगिक होते हुये भी सामान्यतः योग अभिक्रियाएँ नहीं देता, क्यों?
उत्तर:
योग उत्पाद प्रति ऐरोमैटिक होने के कारण प्रतिस्थापन उत्पाद ( ऐरोमैटिक) से कम स्थायी होते हैं।

प्रश्न 125.
t- ब्यूटिल बैन्जीन, ऑक्सीकृत होकर बैन्जोइक अम्ल नहीं देता, क्यों?
उत्तर:
नाभिक से जुड़े C-परमाणु [-C(CH3)3] पर H-परमाणु नहीं है।

प्रश्न 126.
फेनिल समूह-1 प्रभाव प्रदर्शित करता है, किन्तु डाइफेनिल के दोनों नाभिक इलेक्ट्रॉन-स्नेही अभिक्रियाओं में बैन्जीन से अधिक क्रियाशील है, क्यों?
उत्तर:
फेनिल समूहों के M व + E प्रभाव के कारण।

प्रश्न 127.
साइक्लो ओक्टाटेटाईन, बैन्जीन से कम स्थायी क्यों है?
उत्तर:
हकेल के नियमानुसार, साइक्लो ओक्टा टेट्राईन प्रति ऐरामैटिक यौगिक है, जबकि बैन्जीन ऐरोमैटिक यौगिक है। अतः बेन्जीन अनुनाद प्रदर्शित करने के कारण अधिक स्थायी है।

प्रश्न 128.
फ्रीडल क्राफ्ट अभिक्रिया में मोनोएल्किल बैन्जीन बनाने के लिये बैन्जीन आधिक्य में लेते हैं, क्यों?
उत्तर:
बैन्जीन की कमी में बहुऐल्किलीकृत बैन्जीन प्राप्त होगी। अतः बहुऐल्किलीकरण को रोकने के लिये बैन्जीन को अधिक्य में लेते हैं।

प्रश्न 129.
बैन्जीन कपड़ों से वसा के दाग हटा देती है, क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि वसा अध्रुवित विलायक बैन्जीन में विलेय है।

प्रश्न 130.
कमरे के ताप पर O हाइड्रॉक्सी-बैन्जेल्डिहाइड द्रव है, जबकि p-हाइड्रॉक्सी बैन्जेल्ड़हाइड उच्च गलनांक का ठोस है, क्यों ?
उत्तर:
p-हाइड्रॉक्सी बैन्जेल्ड़्ड़ाइड में अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बन्ध बनते है, जबकि O हाइड्रॉक्सी बैन्जेल्डिहाइड में अन्तः हाइड्रोजन बन्ध बनते हैं, जो क्षीण होते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 36

प्रश्न 131.
आर्थो एवं पैरा दैशिक प्रभाव वाले समूह बैन्जीन नाभिक की सक्रियता बढ़ा देते हैं, क्यों?
उत्तर:
ये समूह इलेक्ट्रॉन मुक्त करने वाले होते हैं, जिनकी उपस्थिति में बैन्जीन नाभिक पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है तथा इसकी सक्रियता बढ़ जाती है।

प्रश्न 132.
ऐरोमैटिक शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?
उत्तर:
केकुले नै ।

प्रश्न 133.
एक यौगिक जलाने पर धुएँदार ज्वाला से जलता है। इसकी प्रकृति बताओ ?
उत्तर:
ऐरोमैटिक ।

प्रश्न 134.
बेन्जीन में C-C बन्ध की लम्बाई कितनी होती है।
उत्तर:
1.39A°।

प्रश्न 135.
नॉन-बैन्जीनाएड ऐरोमैटिक यौगिक क्या हैं?
उत्तर:
वे ऐरोमैटिक यौगिक जिनमें नाभिक नहीं होते हैं।

प्रश्न 136.
एक ऐरोमैटिक यौगिक जो धुएँदार ज्वाला से नहीं जलता, उसका नाम लिखें?
उत्तर:
बैन्जिल ऐल्कोहॉल |

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 137.
एरीन क्या हैं?
उत्तर:
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन ।

प्रश्न 138.
विषम चक्रीय ऐरोमैटिक यौगिक क्या हैं?
उत्तर:
वे ऐरोमैटिक यौगिक जिनके रिंग में कोई विषम परमाणु होता है। उदाहरणार्थ पिरिडीन ।

प्रश्न 139.
ऐरोमैटिक यौगिक किस प्रकार की अभिक्रियाएँ देते हैं।
उत्तर:
सामान्यतः इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ।

प्रश्न 140.
बैन्जीन की खोज किसने की।
उत्तर:
माइकल फैराडे ने।

प्रश्न 141.
B.H.C क्या है?
उत्तर:
बैन्जीन हैक्साक्लोराइड़ (B.H.C) एक कीटानाशक है।

प्रश्न 142.
आप कैसे सिद्ध करोगे कि
(i) बैन्जीन असंतृप्त यौगिक है।
(ii) इसमें तीन द्विबन्ध है।
(iii) ये बन्ध सामान्य द्विबन्ध से भिन्न हैं।
उत्तर:
(i) बेंजीन योग अभिक्रिया देता है।
(ii) यह अणु 3H2, 3Cl2 या 3O3 का योग करता है।
(iii) यह HOX या HX की अभिक्रियाओं को नहीं देता है।

प्रश्न 143.
बेन्जीन को निम्न में से कैसे परिवर्तित करोगे
(1) p- नाइट्रोनोमोबेन्जीन
(2) m-नाइट्रोनोमोबेन्जीन
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 37

प्रश्न 144.
निम्न यौगिकों को अभिक्रिया के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 38
उत्तर:
अभिक्रिया का घटता क्रम-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 39

प्रश्न 145.
अभिक्रिया पूर्ण करें-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 40
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 41

लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
1 मोल ब्यूटेन के पूर्ण दहन के लिए कितने मोल O2 की आवश्यकता होती है ?
उत्तर:
\(\frac { 13 }{ 2 }\) मोल O2 की
C4H10 + \(\frac { 13 }{ 2 }\) O2 → 4CO2 + 5H2O

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिक में 1°, 2°, 3° एवं 4° कार्बन छाँटिए।
(1) 3-ऐथिल-2-मेथिल हेक्सेन
(2) 2, 2, 4-ट्राईमेथिल पेन्टेन।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 42

प्रश्न 3.
क्या होता है जब-
(i) CH3COONa को सोड़ा लाइम के साथ गर्म करते हैं?
(ii) Al4C3 का जल अपघटन करते हैं?
(iii) मेथिल आयोडाइड को सोडियम व ईथर के साथ गर्म करते हैं?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 43

प्रश्न 4.
क्या होता है जब-
(i) ऐसीटिक अम्ल का उत्र्रेरकीय अपचयन कराया जाता है?
(ii) ऐल्केन को Cr2O3/Mo2O3 की उपस्थिति में गर्म किया जाता है।
(iii) कार्बन चूर्ण एवं हाइड्रोजन को Ni उत्त्रेरक की उपस्थिति में गर्म किया जाता है?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 44
(ii) ऐल्केन की क्रिया Cr2O3/Mo2O3 कराने पर ऐरोमैटिक व्युत्पन्न बनते हैं।
\(\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_{14} \stackrel{\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_3 / \mathrm{Mo}_2 \mathrm{O}_3}{\longrightarrow} \mathrm{C}_6 \mathrm{H}_6+4 \mathrm{H}_2\)

(iii) कार्बन चूर्ण को H2 के साथ Ni की उपस्थिति में गर्म करने पर मेथेन गैस प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 45

प्रश्न 5.
1-आयोडो-2-मेथिल प्रोपेन तथा 2-आयोडोप्रोपेन के मिश्रण की क्रिया सोडियम से कराने पर प्राप्त होने वाले उत्पादों की संरचना तथा नाम लिखें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 46

प्रश्न 6.
बुर्टज अभिक्रिया में एक प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड अभिक्रिया कर केवल एक ऐल्कल C8H18 बनाता है। इस ऐल्केन के मोनोब्रोमीनीकरण पर केवल एक तृतीयक ब्रोमाइड प्राप्त होता हैं। इस ऐल्केन की तथा तृतीयक ब्रोमाइड की संरचना लिखें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 47

प्रश्न 7.
निम्न अभिक्रिया के एक-एक उदाहरण दीजिए (केवल समीकरण दीजिए)-
(i) विकार्बोक्सीकरण
(ii) क्लीमेन्सन अपचयन
(iii) उत्प्रेरकी पुनःसंस्कार या हाइड्रोसम्भवन
(iv) ताप-अपघटन
(1) वुर्ट्ज अभिक्रिया।
उत्तर:
(i) विकार्बोक्सीकरण-
CH2COONa + NaOH → CH4 + Na2CO3
सोडियम
ऐसीटेट

(ii) क्लीमेन्सन अपचयन-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 48

प्रश्न 8.
क्या होता है जबकि (केवल रासायनिक समीकरण दीजिए –
(i) आइसोब्यूटेन की सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
(ii) ऐसीटोन की Zn-Hg + सान्द्र HCl के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
(iii) आइसोपेण्टेन की क्लोरीन के साथ 300°C पर अभिक्रिया कराई जाती है।
(iv) मेथेन की अमोनिया के साथ Al2O3 की उपस्थिति में गरम किया जाता है।
उत्तर:
(i) ब्यूटिल सल्फोनिक अम्ल बनता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 49
(iv) हाइड्रोजन सायनाइड बनता है।
\(\mathrm{CH}_4+\mathrm{NH}_3 \frac{\mathrm{Al}_2 \mathrm{O}_3}{700^{\circ} \mathrm{C}} \mathrm{H}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{N}+3 \mathrm{H}_2\)

प्रश्न 9.
क्या होता है जबकि (केवन रासायनिक समीकरण दीजिए) –
(i) प्रोपेन, SO2 तथा Cl2 के साथ सूर्य के प्रकाश में अभिक्रिया करती है।
(ii) ऐथिल आयोडाइड की लाल फॉस्पोरस तथा HI से अभिक्रिया कराई जाती है।
(iii) शुष्क इंघर में मेथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से कराई जाती है।
(iv) n-ब्यूटेन को निर्जल AlCl3 की उपस्थिति में गरम किया जाता है।
(1) सोडियम ऐसीटेट को NaOH तथा CaO के मिश्रण के साथ गरम किया जाता है।
उत्तर:
(i) प्रोपेन सल्फ्यूरिल क्लोराइड बनता है।
\(\mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3+\mathrm{SO}_2+\mathrm{Cl}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{CH}_3 \mathrm{CH}_2 \mathrm{CH}_2 \mathrm{SO}_2 \mathrm{Cl}+\mathrm{HCl}\)
प्रोपेन सल्फ्यूरिल क्लोराइड

(ii) ऐथेन प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 50
(iii) ऐथेन प्राप्त होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 51

प्रश्न 10.
n-ब्यूटेन के भंजन से कौन-कौन से उत्पाद प्राप्त होते हैं ?
उत्तर:
n-ब्यूटेन के भंजन से निम्न उपाद भिन्न-भिन्न तापक्रमों पर प्राप्त होते हैं-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 52

प्रश्न 11.
द्वितीयक ब्यूटिल ब्रोमाइड की ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ अभिक्रिया कराने पर कौन-कौन सी ऐल्कीनें बनती हैं तथा मुख्य उत्पाद कौन-सी ऐल्कीन हैं ?
उत्तर:
द्वितीयक ब्यूटिल ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलीय KOH के साथ गरम करने पर ब्यूटीन तथा 2-ब्यूटीन का मिश्रण बनता है। जिसमें 2 -ब्यूटीन की मात्रा अधिक होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 53

प्रश्न 12.
प्रोपीन पर HBr के योग से आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनता है न कि प्रोपिल ब्रोमाइड, क्यों ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 54
चूँकि द्वितीय कार्बोधनायन, प्राथमिक से अधिक स्थायी होने के कारण जल्दी प्राप्त होता है। अतः Br से संयोग के बाद आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड बनता है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 13.
2- ब्यूटीन के दो ज्यामितीय समावयव होते हैं, जबकि 1- ब्यूटीन के नहीं क्यों ?
उत्तर:
– 2 – ब्यूटीन में द्विबन्ध से जुड़े दोनों कार्बनों की शेष दो संयोजकताएँ भिन्न-2 समूहों द्वारा संतृप्त होती हैं, जबकि 1 ब्यूटीन में से एक कार्बन की दोनों संयोजकताएँ H – परमाणुओं से संतृप्त हैं। अतः 1- ब्यूटीन ज्यामितीय समावयव नहीं बनाते ।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 55

प्रश्न 14.
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, संतृप्त हाइड्रोकार्बन की तुलना में अधिक क्रियाशील होते हैं, क्यों?
उत्तर:
सभी ऐल्केनों में प्रबल C-C (σ) बन्ध होते हैं तथा C-H बन्ध भी प्रबल तथा कम ध्रुवीय प्रकृति के होते हैं। वहीं एल्कीन में C = C बन्ध में-बन्ध की उपस्थिति के कारण एल्कीन क्रियाशील होती है ।

प्रश्न 15.
एक दो कार्बन परमाणुओं वाला हाइड्रोकार्बन (A) एक प्रतिशत क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट का रंग उड़ा देता है। परन्तु अमोनिकल सिल्वर नाइट्रेट से अभिक्रिया नहीं करता है। यौगिक (A) का नाम एवं संरचना सूत्र लिखो ।
उत्तर:
हाइड्रोकार्बन (A) क्षारीय KMnO4 का रंग उड़ा देता है। इसलए यह असंतृप्त है, क्योंकि अमोनिकल AgNO3 से अभिक्रिया नहीं करता है। इसलिए यह ऐसीटिलीन नर एथिलीन है, क्योंकि इसमें दो ही कार्बन परमाणु हैं। अत: (A) : CH2 = CH2

प्रश्न 16.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण करें-
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प्रश्न 17.
ब्यूट-2 ईन-1, 4-डाइओइक अम्ल से बनने वाले दो ज्यामितीय समावयव बनाये। इनमें से किसका द्विध्रुव आघूर्ण अधिक होगा।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 57
Cis- समावयन के द्विध्रुव आघूर्ण का मान trans- से अधिक होगा।

प्रश्न 18.
निम्न में से कौन अध्रुवीय है?
ट्रान्स-ब्यूट – 2 – ईन ट्रान्स पेन्ट – 2 – ईन
उत्तर:
ट्रान्स-ब्यूट 2-ईन में दो C-CH3 बन्धों के द्विध्रुव आघूर्ण के मान समान तथा विपरीत है। अतः ये निरस्त हो जायेंगे। इस कारण ट्रान्स-2-ब्यूटीन अध्रुवीय है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 58

प्रश्न 19.
C2H2Cl2 के सभी सम्भव समावयव बनाये। इनमें से कौन-सा अध्रुवीय होगा ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 59

प्रश्न 20.
निम्न ऐल्कीनों को उनके स्थायित्व के घटते क्रम में व्यवस्थित करें।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 60
उत्तर:
स्थायित्व का क्रम I > III > II

प्रश्न 21.
उन सभी ऐल्कीनों की संरचना बनायें जो कि हाइड्रोजनीकरण पर मेथिल ब्यूटेन देते हैं।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 61

प्रश्न 22.
निम्न को पूर्ण करें
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 62
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 63

प्रश्न 23.
ऐल्काइनों की बहुलीकरण अभिक्रियाओं को समझाइए । उत्तर- ऐल्काइनों में बहुलीकरण की प्रवृत्ति बहुत कम पायी जाती
(1) द्वितीयकरण – जब 1- ऐल्काइन को 355 K ताप पर क्यूप्रस क्लोराइड एवं NH4OH के विलयन में प्रवाहित करते हैं, तो दो अणु आपस में मिलकर ऐल्कीनिल ऐल्काइन बनाते हैं।

(2) तृतीयकरण – जब ऐल्काइन को रक्त तप्त लोहे की नली में होकर प्रवाहित करते हैं, तो ऐल्काइन के तीन अणु आपस में संयुक्त होकर बेंजीन या बेंजीन व्युत्पन्न बनाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 64
(3) चतुष्कीकरण – जब ऐसीटिलीन को निकिल सायनाइड के विलयन में 340 K ताप तथा 200 वायुमण्डल दाब पर प्रवाहित किया जाता है, तो ऐसीटिलीन के चार अणु संयुक्त होकर साइक्लो ऑक्टाटेट्राईन बनाते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 65
(iv) बहुलीकरण – ऐसीटोन के बहुलीकरण से एक रेखीय पॉलीऐसीटिलीन प्राप्त होती है।
H—C ≡ CH + CH ≡ CH → —CH = CH—CH = CH—

प्रश्न 24.
निम्नलिखित को कैसे प्राप्त करोगे (केवल रासायनिक समीकरण लिखिए) –
(i) ऐसीटिलीन से मेथिल वाइनिल ईथर,
(ii) ऐसीटिलीन से वाइनिल सायनाइड,
(iii) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक अम्ल,
(iv) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक एस्टर ।
उत्तर:
(i) ऐसीटिलीन से मेथिल वाइलिन ईथर
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \underset{\mathrm{KOH}}{\stackrel{\mathrm{CH}_3 \mathrm{OH}}{\longrightarrow}} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{O}-\mathrm{CH}_3\)
ऐसीटिलीन मेथिल वाइनिल ईथर

(ii) ऐसीटिलीन से वाइनिल सायनाइड-
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \frac{\mathrm{HCN}}{\mathrm{Cu}_2 \mathrm{Cl}+\mathrm{HCl}} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{CN}\) वाइनिल सायनाइड

(iii) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक अम्ल-
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{CO}+\mathrm{H}_2 \mathrm{O}}{\longrightarrow} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{COOH}\)

(iv) ऐसीटिलीन से एक्रिलिक एस्टर–
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{CO}+\mathrm{ROH}}{\longrightarrow} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}-\mathrm{COOR}\)

प्रश्न 25.
ऐल्काइन के संगत ऐल्कीन तथा संगत ऐल्केन में परिवर्तन की क्रिया दीजिए।
उत्तर:
\(\mathrm{R}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{Pd}-\mathrm{CaCO}_3-\mathrm{PbO}}{\longrightarrow} \mathrm{R}-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2\) ऐल्कीन
\(\mathrm{R}-\mathrm{C} \equiv \mathrm{CH}+4 \mathrm{H} \frac{\mathrm{Ni} / \mathrm{H}_2}{200^{\circ} \mathrm{C}} \mathrm{R}-\mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}_3\) ऐल्केन

प्रश्न 26.
ऐथाइन से प्रोपाइन कैसे प्राप्त करोगे?
उत्तर:
\(\mathrm{CH} \equiv \mathrm{CH} \stackrel{\mathrm{NaNH}_2}{\longrightarrow} \mathrm{CH} \equiv \mathrm{C}-\mathrm{Na} \stackrel{\mathrm{CH}_3 \mathrm{Br}}{\longrightarrow}\) ऐल्केन

प्रश्न 27.
प्रोपाइन से मेसेटिलीन कैसे प्राप्त करोगे ?
उत्तर:
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प्रश्न 28.
ऐथाइन से डाइआयोडो ऐथाइन कैसे प्राप्त करोगे ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 67

प्रश्न 29.
औद्योगिक ऐसीटिलीन को ऐसीटोन में संग्रहीत करते हैं क्यों?
उत्तर:
ऐसीटिलीन को – 75°C पर द्रव अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है। 260 वायुमण्डलीय दाब पर इसे O°C पर ही द्रवीभूत किया जा सकता है। द्रव ऐसीटिलीन अत्यन्त विस्फोटक पदार्थ होता है। अतः द्रव ऐसीटिलीन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिये पहले इसे ऐसीटोन से भीगे किसी सरन्ध्र पदार्थ द्वारा अवशोषित करा लिया जाता है, क्योंकि C2H2 ऐसीटोन में अधिक मात्रा में घुल जाती है।

प्रश्न 30.
निम्नलिखित परिवर्तन को तीन पदों में कीजिए-
CH3CH2C ≡ CH → CH3CH2CH2COCH3
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 68

प्रश्न 31.
A, B, C, D, E, F तथा G पहिचानिए-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 69
उत्तर:
A ⇒ ME CH2C ≡ CNa
B ⇒ Me CH2C ≡ C—Et
C ⇒ CH ≡ CH
D ⇒ CH3CHO
E ⇒ CH3COOH
F ⇒ CH3COCl
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 70

प्रश्न 32.
निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण करो-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 71

प्रश्न 33.
एक ऐल्किल हैलाइड C5H11Br (A) ऐल्कोहॉलीय KOH से क्रिया करके एक ऐल्कीन (B) देता है जो कि Br2 से अभिक्रिया करके यौगिक ‘C’ देता है जिसका विहाइड्रोब्रोमीनीकरण करने पर ऐल्काइन ‘D’ प्राप्त होता है एक मोल ‘D’ द्रव अमोनिया में सोडियम धातु से क्रिया करके एक मोल D का सोडियम लवण तथा \(\frac { 1 }{ 2 }\) मोल हाइड्रोजन गैस देता है। D पूर्ण हाइड्रोजनीकरण करने पर एक अशाखित ऐल्केन प्राप्त होता है यहाँ A, B, C तथा D क्या है?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 72
अभिक्रिया बताती है कि ‘D’ एक terminal alkyne है। अत: इसकी सम्भव संरचना निम्न है-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 73

प्रश्न 34.
निम्न को परिवर्तित करें-
(1) ऐथाइन से मेथेन
(2) ऐथीन से ऐथाइन
(3) ऐथेन से ऐथाइन
(4) ऐथाइन से 2-ब्यूटाडाइन
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 74

प्रश्न 35.
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन को संक्षिप्त में समझाइए ।
उत्तर:
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (Aromatic hydrocarbon ) ऐसे हाइड्रोकार्बन जो हकेल नियम का अनुपालन करते हैं, ऐरोमँटिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ऐसे यौगिक सुगन्धित होते हैं। उदाहरण– बेंजीन । बेंजीन में 6 कार्बन परमाणु होते हैं, जो बन्द श्रृंखला में एकान्तर से एकल व द्विबन्ध में रहते हैं। ऐसे यौगिक जिनमें एक बेंजीन वलय पाई जाती हैं। उन्हें बेन्जीनॉयड (Benzenoid) ऐरोमैटिक यौगिक कहते हैं।
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ऐसे यौगिक जो एक से अधिक बेंजीन वलय से बने होते हैं बहुनाभिकीय (Polynuclear) हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
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प्रश्न 36.
केकुले सूत्र के दो प्रमुख दोष क्या हैं?
उत्तर:
(i) 1 : 2 तथा 1 : 6 दो ऑर्थो व्युत्पन्नों की सम्भावना- लैडनबर्ग (1889) के अनुसार, केकुले सूत्र से चार द्वि-प्रतिस्थापित यौगिकों की सम्भावना है।
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(ii) केकुले सूत्र द्वारा बेन्जीन के स्थायित्व को नहीं समझाया जा सकता है, यद्यपि इसमें तीन द्वि-आबन्ध हैं।

प्रश्न 37.
ऐरोमैटिक व ऐलिफैटिक यौगिकों में विभेद कीजिए।
उत्तर:
ऐरोमैटिक व ऐलिफैटिक यौगिकों में भेद

ऐरोमैटिक यौगिकऐलिफैटिक यौगिक
1. ये चक्रीय होते हैं।ये खुली श्रृंखला के यौगिक होते हैं।
2. इसमें कार्बन की प्रतिशतता अधिक होती है।इसमें कार्बन की प्रतिशता कम होती है।
3. ये धुएँदार लौ से जलते हैं।ये बिना धुएँ की लौ से जलते हैं। ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ आसानी से नहीं देते।
4. ये प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सुगमता से देते हैं।इनके हाइड्रॉक्सी यौगिक उदासीन होते हैं।
5. इनके हाइड्रॉक्सी यौगिक अम्लीय होते हैं।इनके हैलोजेन व्युत्पन्न अधिक क्रियाशील होते हैं।
6. इनके हैलोजेन व्युत्पन्न कम क्रियाशील होते हैं।ऐलिफैटिक यौगिक

प्रश्न 38.
निम्नलिखित समीकरणों की पूर्ति करो-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 78

प्रश्न 39.
निम्न में से कौन ऐरोमैटिक है? (हकेल के नियमानुसार)
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 79
उत्तर:

  1. इसमें 8-π इलेक्ट्रॉन है अतः यह हकेल के नियम का पालन नहीं करता है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रॉन conjugate form में नहीं है
  2. इसमें 6-π इलेक्ट्रॉन delocalised हैं अतः यह ऐरोमैटिक है।
  3. इसमें 6-π इलेक्ट्रॉन conjugate तो है परन्तु वलय में नहीं है अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।
  4. इसमें 10x इलेक्ट्रॉन हैं यहाँ प्रत्येक C-परमाणु sp2 संकरित है। तथा वलय planar है अतः यह ऐरामैटिक है।
  5. इसमें 8- इलेक्ट्रॉन हैं इसमें 8 में से 6-π इलेक्ट्रॉन delocalised है तथा एक planar वलय में है अतः यह ऐरोमैटिक है।
  6. 14-π electron हैं जो कि conjugate होने के साथ-साथ planar ring में है। परन्तु यह (4n + 2) π इलेक्ट्रॉन के नियम का पालन नहीं करते हैं अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।

प्रश्न 40.
एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन ‘A’ में दो H2 के अणु जुड़ सकते हैं। इसका ओजोन अपचयन करने पर यह ब्यूटेन 1, 4- डाई अलए ऐथेनेल तथा प्रोपेनोन देता है ‘A’ की संरचना बनायें।
उत्तर:
चूँकि दो अणु H2 से जुड़ रहे हैं अतः इसका अर्थ है कि ‘A’ या तो ऐल्काइन है या एल्काडाईईन है। ओजोनी अपघटन पर ‘A’ यह तीन यौगिक देता है जिसमें से एक डाईएल्डिहाइड है अतः अणु दो जगहों से टूट रहा है। इसका अर्थ है कि ‘A’ में दो द्विबन्ध है।

‘A’ ओजोनी अपघटन पर निम्न अणु दे रहा है—
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 80
IUPAC नाम – 2 – मेथिल ओक्ट-2, 6-डाईईन अभिक्रिया निम्न है अभिक्रिया निम्न है—
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 Img 81

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 1.
निम्नलिखित के लिये मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –
(i) H2O
(ii) CO2
हल:
(i) H2O का मोलर द्रव्यमान
= 2 × हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान + ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान
= 2 × 1 + 16
= 18 u

(ii) CO2 का मोलर द्रव्यमान
= कार्बन का परमाणु द्रव्यमान + (2 x ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान)
= 12 + 32
= 44 u

(iii) CH4 का मोलर द्रव्यमान
= कार्बन का परमाणु द्रव्यमान
+ (4 × हाइड्रोजन का परमाणु द्रव्यमान)
= 12 + 4 × 1
= 16 u

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 2.
सोडियम सल्फेट (Na2SO4) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।
हल:
सोडियम सल्फेट का आण्विक द्रव्यमान = (2 x सोडियम का परमाणु द्रव्यमान) + सल्फर का परमाणु द्रव्यमान + (4 x ऑक्सीजन का परमाणु द्रव्यमान)
= (2 x 23) + 32 + (4 x 16)
= 46 + 32 + 64
= 142 u
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 1

प्रश्न 3.
आयरन के उस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए, जिसमें द्रव्यमान द्वारा 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।
हल:

तत्वप्रतिशततापरमाणु द्रव्यमानप्रतिशतता / परमाणु द्रव्यमानसरल अनुपातपूर्ण अनुपात
Fe69.956\(\frac { 69.9 }{ 56 }\) = 1.25\(\frac { 1.25 }{ 1.25 }\) = 1.01.0 x 2 = 2
O30.116\(\frac { 30.1 }{ 16 }\) = 1.88\(\frac { 1.88 }{ 1.25 }\) = 1.51.5 x 2 = 3

मूलानुपाती सूत्र Fe2O3

प्रश्न 4.
प्राप्त कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा का परिकलन कीजिए।
जब
(i) 1 मोल कार्बन को वायु में जलाया जाता है और
(ii) 1 मोल कार्बन को 16 ग्राम ऑक्सीजन में जलाया जाता है।
हल:
(i) HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 2
अतः 1 मोल कार्बन को वायु में जलाने पर 44 g CO2 प्राप्त होगी ।

(ii) HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 3
32 g ऑक्सीजन को जलाने पर प्राप्त होता है।
= 44 g CO2
16 g ऑक्सीजन को जलाने पर प्राप्त होता है = \(\frac { 44×16 }{ 32 }\)
= 22 g CO2
अतः 16 ग्राम ऑक्सीजन का दहन कराने पर 22 g CO2 प्राप्त होगा।

प्रश्न 5.
सोडियम ऐसीटेट (CH3COONa) का 500ml, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी? सोडियम ऐसीटेट का मोलर द्रव्यमान 82.O245 ग्राम / मोल है।
हल:
दिया गया है,
विलेय का भार (WB) = ?
विलयन का आयतन (V) = 500ml
मोलरता (M) = 0.375 mol/L
विलेय का आण्विक द्रव्यमान
(MB) = 82.0245 g/mol
M = \(\frac{W_B \times 1000}{M_B \times V}\)
WB = \(\frac{\mathrm{M} \times \mathrm{W}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}}{1000}\)
= \(\frac{0.375 \times 82 \cdot 0245 \times 500}{1000}\)
= 15.38 g
विलेय का द्रव्यमान = 15.38 g

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 6.
सान्द्र नाइट्रिक अम्ल के उस प्रतिदर्श का मोल प्रति लीटर में सान्द्रता का परिकलन कीजिए, जिसमें उसका द्रव्यमान प्रतिशत 69% हो और जिसका घनत्व 1.41 g ml-1 हो।
हल:
दिया गया है,
द्रव्यमान प्रतिशत = 69%
घनत्व = 1.41 g/ml
विलेय (HNO3) का आण्विक द्रव्यमान = (हाइड्रोजन का परमाणु भार ) + ( नाइट्रोजन का परमाणु भार ) + (3 x ऑक्सीजन का परमाणु भार )
= 1 + 14 + 3 × 16
= 1 + 14 + 48
= 63 u
69% HNO3 का तात्पर्य है 69 g HNO3, 100 g उपस्थित है।
विलेय का भार (WB) = 69 g
विलायक का भार (WA) = 100 – 69 = 31 g
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 4

प्रश्न 7.
100 ग्राम, कॉपर सल्फेट (CuSO4) से कितना कॉपर प्राप्त किया जा सकता है?
हल:
कॉपर सल्फेट का आण्विक द्रव्यमान- = Cu का परमाणु भार + S का परमाणु भार + 4 × 0 का परमाणु भार
= 63.5+ 32+ 4 × 16
= 63.5+ 32+ 64
= 159.5 u
159.5 ग्राम CuSO4 देता है = 63.5 ग्राम Cu
100 ग्राम CuSO4 देता है = \(\frac { 63.5×100 }{ 159.5 }\)
= 39.81 ग्राम Cu
100 ग्राम CuSO4 से 39.81 ग्राम कॉपर प्राप्त होता है।

प्रश्न 8.
आयरन के ऑक्साइड का आण्विक सूत्र ज्ञात कीजिए जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत 69.9g तथा 30.1g है।
हल:

तत्वप्रतिशततापरमाणु द्रव्यमानप्रतिशतता / परमाणु द्रव्यमानसरल अनुपातपूर्ण अनुपात
Fe69.956\(\frac { 69.9 }{ 56 }\) = 1.25\(\frac { 1.25 }{ 1.25 }\) = 1.01 x 2 = 2
O30.116\(\frac { 30.1 }{ 16 }\) = 1.88\(\frac { 1.88 }{ 1.25 }\) = 1.51.5 x 2 = 3

मूलानुपाती सूत्र = Fe2O3
आण्विक सूत्र = n x मूलानुपाती सूत्र
= 1 × Fe2O3
= Fe2O3

प्रश्न 9.
निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर क्लोरीन के औसत परमाणु द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –
हल:
क्लोरीन का औसत परमाणु भार
= \(\frac{(75.77 \times 34.9689)+(24.23 \times 36.9659)}{75.77+24.23}\)
= \(\frac{2649 \cdot 5936+89568376}{100}\)
= \(\frac{3545 \cdot 2774}{100}\)
= 35.45 amu

प्रश्न 10.
ऐथेन (C2H6) के तीन मोलों में निम्नलिखित का परिकलन कीजिए-
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या।
हल:
(i) यहाँ 1 मोल एथेन (C2H6) में 2 मोल कार्बन परमाणु होते हैं। अत: 3 मोल एथेन में कार्बन के मोलों की संख्या
= 2 × 3 = 6 मोल

(ii) 1 मोल एथेन (C2H6) में 6 मोल हाइड्रोजन होते हैं । अतः 3 मोल एथेन में हाइड्रोजन के मोलों की संख्या
= 3 × 6 = 18 मोल

(iii) 1 मोल ऐथेन 6.022 x 1023 अणु ऐथेन होते हैं।
अत: 3 मोल एथेन में अणुओं की संख्या
= 3 × 6.022 x 1023
= 1·8069 × 1024 अणु

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ

प्रश्न 11.
यदि 20 ग्राम चीनी (C12H2O11) को जल की पर्याप्त मात्रा में घोलने पर उसका आयतन 2L हो जाए, तो चीनी के इस विलयन की सान्द्रता क्या होगी ?
हल:
विलेय का भार (WB) = 20 ग्राम
विलेय का अणु भार (C12H22O11)
= 12 × 12 + 1 × 22 + 11 × 16
= 144 +22 + 176
= 342 g/mol
आयतन (V) = 2000ml
मोलरता (M) = \(\frac{W_B \times 1000}{M_B \times V}\)
= \(\frac{20 \times 1000}{342 \times 2000}\)
= 0.029 मोल/लीटर

प्रश्न 12.
यदि मेथेनॉल का घनत्व 0.793 kg L-1 हो तो इसके 0.25 M के 2.5 L विलयन को बनाने के लिए कितने आयतन की आवश्यकता होगी?
हल:
विलेय का घनत्व (d) = 0.793 kg/L-1
मोलरता (M) = 0.25 M
आयतन (V) = 2.5 L
मेथेनॉल का आण्विक द्रव्यमान (MB) = CH3OH
= (कार्बन का परमाणु भार ) + (4 × हाइड्रोजन का परमाणु भार) + (ऑक्सीजन का परमाणु भार )
= 12 + 4 x 1 + 16
= 12+4+ 16
= 32 amu
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 5

प्रश्न 13.
दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। दाब का SI मात्रक नीचे दिया गया है-
1 Pa = 1 N/m²
यदि समुद्र तल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm-2 हो तो पास्कल में दाब का परिकलन कीजिए।
हल:
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प्रश्न 14.
द्रव्यमान का SI मात्रक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
हल:
द्रव्यमान का SI मात्रक किग्रा. है। यह अन्तर्राष्ट्रीय मानक किग्रा. के बराबर है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित पूर्व-लग्नों को उनके गुणांकों के साथ मिलाइए-

पूर्व लग्नगुणांक
(i) माइक्रो106
(ii) डेका109
(iii) मेगा10-6
(iv) गीगा10-15
(v) फेम्टो10

हल:
इसका सुमेल निम्न प्रकार है-

पूर्व लग्नगुणांक
(i) माइक्रो10-6
(ii) डेका10
(iii) मेगा106
(iv) गीगा109
(v) फेम्टो10-15

प्रश्न 16.
सार्थक अंकों से आप क्या समझते हैं?
हल:
सार्थक अंक (Significant Figure):
सार्थक अंक वे अर्थपूर्ण अंक होते हैं, जिनके द्वारा निश्चितता अंक को अंतिम अंक के रूप में लिखा जाता है। सार्थक अंक माप की विश्वसनीयता (reliability) सूचित करते हैं। किसी अभिलिखित माप में सार्थक अंकों की संख्या जितनी अधिक होती है उतना ही अधिक विश्वास (confidence) उस माप में हम रख सकते हैं।

अर्थात् जिस माप में सार्थक अंकों की संख्या जितनी अधिक होती है उसका मान उतना ही अधिक परिशुद्ध (Precise) होता है तथा जिस मान में सार्थक अंकों की संख्या कम होती है वह उतना ही कम परिशुद्ध (Precise) होता है।

सार्थक अंकों को निर्धारित करने के कुछ नियम होते हैं। यह नियम निम्न प्रकार हैं-
(1) सभी गैर शून्य अंक सार्थक होते हैं।
उदाहरण-
2856 = चार सार्थक अंक
5.35 = तीन सार्थक अंक

(2) प्रथम गैर शून्य अंक से पहले आने वाले शून्य सार्थक नहीं होते हैं। ऐसे शून्य केवल दशमलव की स्थिति को बताते हैं ।
उदाहरण-
0.03 = एक सार्थक अंक
0.0052 = दो सार्थक अंक

(3) दो गैर-शून्य अंकों के मध्य स्थित शून्य सार्थक होते हैं।
उदाहरण-
2.005 = चार सार्थक अंक
5.0032 = पाँच सार्थक अंक

(4) किसी अंक की दाँयीं ओर या अंत में आने वाले शून्यं सार्थक होते हैं, परन्तु उसके लिये यह शर्त है कि वे दशमलव की दाँयीं ओर स्थित हों।
उदाहरण-
0.300 तीन सार्थक अंक
0.8000 = चार सार्थक अंक
परन्तु दशमलव विहीन संख्याओं में दाँयीं ओर के शून्य सार्थक नहीं होते।
उदाहरण – 100 में केवल एक सार्थक अंक है तथा 1000 में चार सार्थक अंक हैं। अतः ऐसी संख्याओं को वैज्ञानिक संकेतन में प्रदर्शित करना उपयुक्त होता है अतः अंक 100 के लिए-
1 x 10² = एक सार्थक अंक
1.0 × 10² = दो सार्थक अंक
100 x 10² = तीन सार्थक अंक

(5) वस्तुओं की गिनती, उदाहरण के लिए 2 पेन्सिल, 20 सेबों में । सार्थक अंकों की संख्या अनंत है, क्योंकि ये दोनों ही यथार्थपरक संख्याएँ हैं और इनको दशमलव लिखकर उनके बाद अनंत शून्य लिखकर व्यक्त किया जा सकता है।
जैसे-
2 = 2.0000000 या
20 = 20.0000000

(6) वैज्ञानिक संकेतन में लिखी सभी संख्याओं के अंक सार्थक होते हैं।
उदाहरण – 4.01 x 10² = तीन सार्थक अंक
8.256 x 10-3 = चार सार्थक अंक

परिशुद्धता (Precision) – एक ही राशि के मान ज्ञात करने में उसी प्रयोग को बार-बार दोहराने (replicate) पर करीब-करीब एक से मान (concordancent value) प्राप्त हों तो इसे परिशुद्धता (Precision) कहते हैं ।

यथार्थता (Accuracy ) – किसी भी राशि की सही माप की तुलना मानक मान से करने को ही यथार्थता (Accuracy) कहते हैं।

किसी भी राशि का मान मापने के पश्चात् उसकी तुलना मानक मान से करने पर यदि दोनों के मान आपस में मेल खाते हैं, तो मान अधिक यथार्थ है।

उदाहरण के लिए-यदि किसी परिणाम का सही मान 2.00g है, और एक विद्यार्थी ‘क’ दो मापन करता है, उसे 1.95g और 1.93g परिणाम प्राप्त होते हैं। एक-दूसरे के बहुत पास होने के कारण ये मान परिशुद्ध हैं, परन्तु यथार्थपरक नहीं हैं। दूसरा विद्यार्थी ‘ख’ दो मापनों के लिए 1.94g और 2.05g परिणाम प्राप्त करता है। ये दोनों परिणाम न तो परिशुद्ध हैं और न ही यथार्थपरक । तीसरे विद्यार्थी ‘ग’ को इन मापनों के लिए 2.01g और 1.99g परिणाम प्राप्त होते हैं। ये मान परिशुद्ध भी है और यथार्थपरक भी ।

इसे निम्न सारणी द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं।

सारणी 1.4 : आँकड़ों की परिशुद्धता और यथार्थता का निरूपण

मापन (में)
1 मान2 मानऔसत (g)
छात्र ‘क’1.951.931.940
छात्र ‘ख’1.942.051.995
छात्र ‘ग’2.011.992.000

प्रायोगिक या परिकलित मानों में अनिश्चितता को सार्थक अंकों की संख्या द्वारा व्यक्त किया जाता है।

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प्रश्न 17.
पेय जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म, जो कैंसरजन्य है, से अत्यधिक संदूषित पाया गया। संदूषण का स्तर 15 ppm (द्रव्यमान के रूप में) था।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना
15 ppm से तात्पर्य है कि नमूने के 106 ग्राम में 15 ग्राम क्लोरोफॉर्म उपस्थित है।
विलेय का भार = 15 ग्राम
106 ग्राम नमूने में है = 15 ग्राम क्लोरोफॉर्म
100 ग्राम नमूने में है = \(\frac{15 \times 100}{10^6}\) = 15 x 10-4
अत: नमूने की द्रव्यमान प्रतिशतता = 15 x 10-4%

(ii) मोललता की गणना
विलेय क्लोरोफॉर्म का भार (WB) = 15 x 10-4 g
क्लोरोफॉर्म का अणुभार (MB)
= 12 + 1 + (3 x 35.-5)
= 119.5 g/mol
विलयन का द्रव्यमान = 100 g
विलायक का द्रव्यमान = 1000 – 0015
(WA) = 99.9985 g
मोललता (m) = \(\frac{W_B \times 1000}{\mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{W}_{\mathrm{A}}}\)
= \(\frac{0.0015 \times 1000}{119.5 \times 99.9985}\)
= 1.25 × 10-4 मोल/ किग्रा.
= 1.25 × 10-4 mol/kg

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को वैज्ञानिक संकेतन में लिखिए-
(i) 0.0048
(ii) 234,000
(iii) 8008
(iv) 500.0
(v) 6.0012
हल:
वैज्ञानिक संकेतन
(i) 0.0048 = 4.8 x 10-3
(ii) 234,000 = 2.34 × 105
(iii) 8008 = 8.008 × 103
(iv) 500.0 = 5.000 × 10²
(v) 6.0012 = 6.0012 × 100

प्रश्न 19.
निम्नलिखित में सार्थक अंकों की संख्या बताइए-
(i) 0.0025
(ii) 208
(iii) 5005
(iv) 126,000
(v) 500.0
(vi) 2.0034
हल:
सार्थक अंक
(i) 0.0025 = 2
(ii) 208 = 3
(iii) 5005 = 4
(iv) 126,000 = 6
(v) 500.0 = 3
(vi) 2.0034 = 5

प्रश्न 20.
निम्न का तीन सार्थक अंकों तक निकटतम मान ज्ञार कीजिए।
(i) 34.216
(ii) 10.4107
(iii) 0.04597
(iv) 2808
हल:
(i) 34.216 = 34.2
(ii) 10.4107 = 10.4
(iii) 0.04597 = 0.0460
(iv) 2808 = 2810

प्रश्न 21.
(क) जब डाईनाइट्रोजन और डाईऑक्सीजन आपस में अभिक्रिया करके भिन्न यौगिक बनाती हैं तो निम्न आँकड़े प्राप्त होते हैं –

डाईनाइट्रोजन का द्रव्यमानडाईऑक्सीजन का द्रव्यमान
(i) 14 ग्राम16 ग्राम
(ii) 14 ग्राम32 ग्राम
(iii) 28 ग्राम32 ग्राम
(iv) 28 ग्राम80 ग्राम

उपर्युक्त प्रायोगिक आँकड़ों से रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप है, बताइए।
हल:
डाईनाइट्रोजन का नियत द्रव्यमान 14 ग्राम लेने पर, डाइनाइट्रोजन के 14 ग्राम से संयोजित होने वाले डाइऑक्सीजन का (द्रव्यमानानुसार) अनुपात है –
16 : 32 : 16 : 40 या 2 : 4 : 2 : 5
चूँकि अनुपात एक सरल पूर्ण संख्याएँ हैं, अतः ये आँकड़े गुणित अनुपात के नियम का पालन करते हैं।
गुणित अनुपात का नियम – यह नियम डाल्टन ने सन् 1803 में दिया था।
इसके अनुसार,
“यदि दो तत्व संयोग करके एक से अधिक यौगिक बनाते हैं तो एक तत्व के साथ दूसरे तत्व के संयुक्त होने वाले द्रव्यमान सरल पूर्णांकों के अनुपात में होते हैं।”

(ख) निम्न रूपान्तरणों (Conversions) में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(i) 1 km = – mm = – pm
(ii) 1 mg = – kg = – ng
(iii) 1 mL = – L = – dm³
हल:
(i) 1 km = (1 km ) x \(\frac{(1000 \mathrm{~m})}{(1 \mathrm{~km})}\)
= (10³ m) x \(\frac{\left(10^3 \mathrm{~mm}\right)}{(1 \mathrm{~m})}\)
= 106 mm
1 km = (1 km ) x \(\frac{(1000 \mathrm{~m})}{(1 \mathrm{~km})}\)
= (10³ m) x \(\frac{\left(10^{12} \mathrm{pm}\right)}{(1 \mathrm{~m})}\)
= 1015 pm
अतः 1 km = 106 mm = 1015 pm

(ii) 1 mg = (1 mg) x \(\frac{\left(10^{-6} \mathrm{~kg}\right)}{(1 \mathrm{mg})}\)
= 10-6 kg
1 mg = (1 mg) x \(\frac{\left(10^{6} \mathrm{~kg}\right)}{(1 \mathrm{mg})}\)
= 10-6 kg
अतः 1 mg = 10-6 kg = 106 ng

(iii) 1 mL = (1 mL) × \(\frac{\left(10^{-3} \mathrm{~L}\right)}{(1 \mathrm{~mL})}\)
= 10-3 L
1 mL = (1 mL ) x \(\frac{\left(10^{-3} \mathrm{dm}^3\right)}{(1 \mathrm{~mL})}\)
= 10-3 dm³
अतः, 1 mL = 10-3 L = 10-3 dm³.

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प्रश्न 22.
यदि प्रकाश का वेग 300 x 108 m/s1 हो, तो 2.00ns में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा?
हल:
प्रकाश द्वारा 1 सेकेण्ड में तय दूरी
= 3.0 × 108 m
अर्थात् चाल = 3 x 108 m/s
समय = 2.00ns
= 2.0 × 10-9 s
चाल = \(\frac { दूरी }{ समय }\)
दूरी = चाल x समय
= 3 x 108 × 2 × 10-9
= 0.6m

प्रश्न 23.
किसी अभिक्रिया A + B → AB में निम्नलिखित अभिक्रिया मिश्रणों में सीमांत अभिकर्मकों, यदि कोई हो, तो ज्ञात कीजिए।
(i) A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
(ii) A के 2 मोल + B के 3 मोल
(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
(iv) A के 5 मोल + B के 2.5 मोल
(v) A के 2.5 मोल + B के 5 मोल
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 7
(i) प्रश्न के अनुसार, A के 300 परमाणु + B के 200 अणु
A के 1 परमाणु के साथ अभिक्रिया करने वाले B अणुओं की संख्या = 1
A के 300 परमाणु के साथ अभिक्रिया करने वाले B अणुओं की संख्या = 300
किन्तु B के वस्तुतः उपलब्ध अणुओं की संख्या = 200
अतः यहाँ B सीमान्त अभिकर्मक है।

(ii) 2 मोल A + B के 3 मोल B
A परमाणु के 1 मोल B के 1 मोल अणु के साथ अभिक्रिया करते A के 2 मोल परमाणु B2 के 2 मोल अणुओं के साथ ही क्रिया करेंगे। अतः यहाँ A सीमान्त अभिकर्मक है।

(iii) A के 100 परमाणु + B के 100 अणु
चूँकि A का 1 परमाणु B के 1 अणु के साथ अभिक्रिया करता है, अतः A के 100 परमाणु B के 100 अणु के साथ अभिक्रिया करेगा। इसलिए यहाँ पर कोई भी सीमान्त अभिकर्मक नहीं है।

(iv) A के 5 मोल तथा B के 2.5 मोल
चूँकि A का 1 परमाणु B के 1 अणु के साथ अभिक्रिया करता है, अत: 5 मोल A परमाणुओं के लिए 5 मोल B के अणुओं की आवश्यकता होगी। परन्तु B के केवल 2.5 मोल ही उपलब्ध है अत: यहाँ B सीमान्त अभिकर्मक है।

(v) A के 2.5 मोल + B के 5 मोल
A परमाणु के 1 मोल B के 1 मोल अणु के साथ अभिक्रिया करते हैं तो A के 2.5 मोल परमाणु B के 2.5 मोल अणु के साथ अभिक्रिया करेगा परन्तु यहाँ B के 5 मोल अणु उपलब्ध हैं। अतः यहाँ A सीमान्त अभिकर्मक हैं।

प्रश्न 24.
डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिखित रासायनिक समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाती हैं –
N2 (g) + 3H2(g) → 2NH3 (g)
(i) यदि 2.00 × 10³ g डाइनाइट्रोजन 100 x 10³ g डाइहाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करती है, तो प्राप्त अमोनिया के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिक्रियक शेष बचेगा ?
(iii) यदि हाँ, तो कौन.सा, उसका द्रव्यमान क्या होगा ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 8
28 g N2 को अभिक्रिया के लिये आवश्यकता है
= 6 g H2 की
2 × 10³ g N2 को अभिक्रिया के लिये आवश्यकता है
= \(\frac{6 \times 2 \times 10^3}{28}\)
= 428.6 g H2 की

(ii) किन्तु उपलब्ध हाइड्रोजन की मात्रा = 1 x 10³ g
= 1000 g
अर्थात् हाइड्रोजन अधिकता में है एवं हाइड्रोजन की शेष मात्रा
= 1000.428.6
= 571.4g H2

(iii) यहाँ डाइनाइट्रोजन सीमान्त अभिकर्मक है।
28 g N2 अभिक्रिया करके बनाती है = 34 g NH3
2000 g N2 अभिक्रिया करके बनाती है
= \(\frac{34 \times 2000}{28}\)
= 2428.6g NH3
अर्थात् 2428.6g NH3 बनेगी।

प्रश्न 25.
0.5 mol Na2CO3 और 0.50 M Na2CO3 में क्या अन्तर है?
हल:
Na2CO3 के मोलर द्रव्यमान
= 2 × 23 + 12 + 3 × 16
= 106 g/mol
0.5 मोल Na2CO3 = 0.50 × 106 = 53 g
जबकि 0.50 M Na2CO3 विलयन की मोलरता है। यह Na2CO3 की सान्द्रता को मोल/ली. में व्यक्त करती है। 0.5 mol Na2CO3 को विलयन में घोला गया है।

प्रश्न 26.
यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन डाइऑक्सीजन गैस के 5 आयतनों से अभिक्रिया करें तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 9
अतः 10 आयतन डाइहाइड्रोजन 5 आयतन डाइऑक्सीजन से क्रिया करके 10 आयतन जलवाष्प प्रदान करता है।

प्रश्न 27.
निम्नलिखित को मूल मात्रकों में परिवर्तित कीजिए –
(i) 28.7pm
(ii) 15.15pm
(iii) 25365mg
हल:
(i) 28.7pm = 2.87 × 10-11 m

(ii) 15.15 pm = 15.15 × 10-12
= 1.515 × 10-11 m

(iii) 25365 mg = 2.5365 × 10-2 kg

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी?
(i) 1g Au (s)
(ii) 1g Na (s)
(iii) 1 g Li (s)
(iv) 1g Cl2 (g)
हल:
(i) 1 g Au में (Au का परमाणु द्रव्यमान = 197g/mol)
197 g Au में उपस्थित परमाणु = 6·022 × 1023
1g Au में उपस्थित परमाणु =\(\frac{6022 \times 10^{23}}{197}\)
= 3.06 × 1021 परमाणु

(ii) 1g Na में (Na का परमाणु भार = 23 g/mol)
23 g Na में उपस्थित परमाणु = 6.022 x 1023
1 g Na में उपस्थित परमाणु =\(\frac{6022 \times 10^{23}}{23}\)
= 2.62 × 1022 परमाणु

(iii) 1 g Li में (Li का परमाणु भार = 6.9g/mol)
6.9 g Li में उपस्थित परमाणु = 6.022 × 1023
1 g Li में उपस्थित परमाणु =\(\frac{6022 \times 10^{23} \times 11}{6.9}\)
= 8.73 × 1022 परमाणु

(iv) 1 g Cl2 में (Cl का परमाणु भार = 35.5 g/mol)
71 g Cl2 में उपस्थित परमाणु = 2 x 6.022 × 1023
1 g Cl2 में उपस्थित परमाणु =\(\frac{2 \times 6022 \times 10^{23}}{71}\)
= 1.697 × 1022 परमाणु
अत: 1 g Li में सबसे अधिक परमाणु होंगे।

प्रश्न 29.
ऐथेनॉल के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए। जिसमें ऐथेनॉल का मोल. अंश 0.040 है। (मान लें कि जल का घनत्व 1 है ।)
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 10
अत: ऐथेनॉल की मोलरता = 2.31 मोल / लीटर है।

प्रश्न 30.
एक 12C कार्बन परमाणु का ग्राम (g) में द्रव्यमान का क्या होगा ?
हल:
कार्बन के 6.022 × 1023 परमाणुओं का द्रव्यमान = 12 g
कार्बन के 1 परमाणु का द्रव्यमान = \(\frac{12}{6.022 \times 20^{23}}\)
= 1.993 × 10-23g
अत: एक 12C कार्बन परमाणु का द्रव्यमान 1993 × 10-23g है।

प्रश्न 31.
निम्नलिखित परिकलनों के उत्तर में कितने सार्थक अंक उपस्थित होने चाहिये ?
(i) \(\frac{002856 \times 298.15 \times 0.112}{0.5785}\)
(ii) 5 × 5.364
(iii) 0.0125 +0.7864+0.0215
हल:
(i) न्यूनतम परिशुद्ध अंक (0.112) में 3 सार्थक अंक है। अतः उत्तर में तीन सार्थक अंक होने चाहिये।
(ii) दूसरे अंक (5.364) में चार सार्थक अंक हैं। अत: उत्तर में चार सार्थक अंक होने चाहिये।
(iii) चूँकि दशमलव के बाद चार अंक हैं अत: उत्तर में भी चार सार्थक अंक होने चाहिये।

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प्रश्न 32.
प्रकृति में उपलब्ध आर्गन के मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए-

समस्थानिकसमस्थानिक (मोलर द्रव्यमान)प्रचुरता
36Ar35.967550.337 %
38Ar37.962720.063 %
40Ar39.962499.600 %

हल:
आर्गन का औसत मोलर द्रव्यमान निम्न प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है,
औसत मोलर द्रव्यमान
= \(\begin{aligned}
& (0.337 \times 35.96755)+(0.063 \times 37.96272) \\
& \frac{+(99.600 \times 39.9624)}{99.600+0.337+0.063} \\
&
\end{aligned}\)
= \(\frac{12 \cdot 121064+2 \cdot 3916514+3980 \cdot 255}{100}\)
= 3994.7678/100
= 39.94 g/mol

प्रश्न 33.
निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए –
(i) 52 मोल Ar
(ii) 52 u He
(iii) 52g He
हल:
(i) 1 मोल Ar = 6.022 × 1023 परमाणु
52 मोल Ar = 52 × 6.022 x 1023 परमाणु
= 3.13 × 1025 परमाणु

(ii) 4 u He = 1 परमाणु
52u He = \(\frac { 52 }{ 4 }\) परमाणु
= 13 परमाणु He

(iii) He का परमाणु द्रव्यमान = 4gm
4 ग्राम He = 6.022 × 1023 परमाणु
52 ग्राम He = \(\frac{6 \cdot 022 \times 10^{23} \times 52}{4}\) परमाणु
= 78.286 × 1023 परमाणु
= 7.83 x 1024 परमाणु

प्रश्न 34.
एक वेल्डिंग ईंधन गैस (Welding fuel gas) में केवल कार्बन और हाइड्रोजन है। इसके नमूने की कुछ मात्रा ऑक्सीजन से जलाने पर 3.38g कार्बन डाईऑक्साइड, 0.690g जल के अतिरिक्त और कोई उत्पाद नहीं बनाती है। इस गैस के 10.0L (STP पर मापित) आयतन का भार 11.6 gm पाया गया। इसके –
(i) मूलानुपाती सूत्र,
(ii) अणु द्रव्यमान और
(iii) अणुसूत्र की गणना कीजिए।
हल:
प्रथम पद कार्बन व हाइड्रोजन की द्रव्यमान प्रतिशतता की गणना करना
44 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड में है = 12 g कार्बन
3.38 ग्राम कार्बन डाईऑक्साइड में होगा = \(\frac{12 \times 3.38}{44}\)
18 ग्राम जल में है = 2 g हाइड्रोजन
0.690 ग्राम जल में होगी = \(\frac{2 \times 0.690}{18}\)ग्राम हाइड्रोजन
= 0.0766 ग्राम हाइड्रोजन
अतः ईंधन का कुल द्रव्यमान = 0.9218 + 0.0766
= 0.9984 g
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 11
द्वितीय पद-ईंधन गैस का मूलानुपाती सूत्र
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 12
अतः ईंधन गैस का मूलानुपाती सूत्र = CH
तृतीय पद-ईंधन गैस का आण्विक द्रव्यमान
10 लीटर गैस का N.T.P पर भार= 11.6 g
22.4 लीटर गैस का N. T. P. पर भार = \(\frac { 11.6 }{ 10.0 }\) x 22.4
= 25.98 g
अतः ईंधन गैस का आण्विक द्रव्यमान = 25.98 ≈ 26.0g
चतुर्थ पद-गैस के आण्विक सूत्र की गणना
मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = 12 + 1 = 13 g
आण्विक द्रव्यमान = 26g
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 1 रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ 13
आण्विक सूत्र = n x मूलानुपाती सूत्र
= 2 × CH = C2H2
ईंधन गैस का आण्विक सूत्र C2H2 है एवं यह गैस ऐसिटिलीन

प्रश्न 35.
CaCO3 जलीय HCl के साथ निम्नलिखित अभिक्रिया कर CaCl2 और CO2 बनाता है।
CaCO3(s) + 2HCl(g) → CaCl2 (aq) + CO2 (g) + H2O(l)
0.75M HCl के 25ml के साथ पूर्णत: अभिक्रिया करने के लिये CaCO3 की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
हल:
(i) HCl के द्रव्यमान की गणना करना दिया गया है –
मोलरता (M) = 0.75M
मोलर द्रव्यमान (MB) = 1 + 35.5 = 36.5 g
आयतन (V) = 25ml
द्रव्यमान (WB) = ?
मोलरता (M) = \(\frac{W_B \times 1000}{M_B \times V}\)
WB = \(\frac{\mathrm{M} \times \mathrm{M}_{\mathrm{B}} \times \mathrm{V}}{1000}=\frac{0.75 \times 36.5 \times 25}{1000}\)
= 0.684g

(ii) CaCO3 के द्रव्यमान की गणना
CaCO3 (s) + 2 HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)
1 मोल = 2ml
100gm = 2 × 36.5 = 73g
73 g HCl से अभिक्रिया करने के लिये आवश्यक है
= 100 g CaCO3
0.684 g HCl से अभिक्रिया के लिये आवश्यक होगा
= \(\frac{100 \times 0.684}{73}\)
= 0.94g
अत: 0.94g CaCP3 की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 36.
प्रयोगशाला में क्लोरीन का विरचन मैग्नीज डाइऑक्साइड (MnO2) को जलीय HCI विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित समीकरण के अनुसार किया जाता है-
4 HCl(aq) + MnO2 (s) 2H2O(l) + MnCl2 (aq) + Cl2 (g) 5.0g मैंग्नीज डाइऑक्साइड के साथ HCI के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?
हल:
दी गई अभिक्रिया के अनुसार,
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87 ग्राम MnO2 से अभिक्रिया करने वाला HCl = 146 g
5 ग्राम MnO2 से अभिक्रिया करने वाला HCl = \(\frac { 146×5 }{ 87 }\)
= 8.39 g

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
कौन-सा कथन अशुद्ध है-
(a) द्रव के ऊपरी मुक्त तल पर द्रव का दाब शून्य होता है।
(b) किसी बर्तन में भरे द्रव का दाब सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।
(c) किसी क्षैतिज तल में द्रव का दाब सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।
(d) किसी तल पर द्रव का दाब क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता है।
उत्तर:
(b) किसी बर्तन में भरे द्रव का दाब सभी बिन्दुओं पर समान रहता है।

प्रश्न 2.
द्रव दाब निर्भर करता है-
(a) केवल गहराई पर
(b) केवल घनत्व पर
(c) केवल गुरुत्वीय त्वरण पर
(d) गहराई, घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण तीनों पर।
उत्तर:
(d) गहराई, घनत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण तीनों पर।

प्रश्न 3.
किसी बाह्य बल के कार्य न करने पर एक छोटी बूँद की आकृति निर्धारित होती है-
(a) द्रव के पृष्ठ तनाव से
(b) द्रव के घनत्व से
(c) द्रव की श्यानता से
(d) वायु के ताप से केवल ।
उत्तर:
(a) द्रव के पृष्ठ तनाव से

प्रश्न 4.
द्रव का पृष्ठ तनाव-
(a) क्षेत्रफल के साथ बढ़ता है
(b) क्षेत्रफल के साथ घटता है
(c) ताप के साथ बढ़ता है
(d) ताप के साथ घटता है।
उत्तर:
(d) ताप के साथ घटता है।

प्रश्न 5.
जल की बड़ी बूँद को छोटी-छोटी बूंदों में फुहारने की क्रिया में-
(a) ताप बढ़ता है
(b) ताप घटता है
(c) पृष्ठीय ऊर्जा घटती है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) ताप घटता है

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 6.
पेन्ट गन आधारित है-
(a) बरनौली के सिद्धान्त पर
(b) बॉयल के नियम पर
(c) आर्किमिडीज के सिद्धान्त पर
(d) न्यूटन के नियमों पर ।
उत्तर:
(a) बरनौली के सिद्धान्त पर

प्रश्न 7.
सीसे की गोली किसी श्यान द्रव में मुक्त रूप से गिर रही है। गोली का वेग-
(a) बढ़ जाता है
(b) घट जाता है
(c) सदैव समान रहता है
(d) बढ़ता है फिर गोली एक निश्चित वेग से गिरती रहती है।
उत्तर:
(d) बढ़ता है फिर गोली एक निश्चित वेग से गिरती रहती है।

प्रश्न 8.
त्रिज्या की एक छोटी गोली द्रव में गिर रही है। इसका सीमान्त वेग अनुक्रमानुपाती है-
(a) 1/r²
(b) 1/r
(c) r²
(d) r
उत्तर:
(c) r²

प्रश्न 9.
ताप बढ़ने पर गैस की श्यानता-
(a) बढ़ती हैं
(b) घटती है
(c) अपरिवर्तित रहती है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) बढ़ती हैं

प्रश्न 10.
बरनौली प्रमेय आधारित है-
(a) संवेग संरक्षण पर
(b) ऊर्जा संरक्षण पर
(c) द्रव्यमान संरक्षण पर
(d) इनमें से किसी पर नहीं।
उत्तर:
(b) ऊर्जा संरक्षण पर

प्रश्न 11.
किसी असमान त्रिज्या वाली नली में जल बह रहा है नली के प्रविष्टि तथा निकासी सिरों पर त्रिज्याओं का अनुपात 5:7 है। नली में प्रविष्ट करने वाले तथा बाहर निकलने वाले जल के वेगों का अनुपात होगा-
(a) 25 : 49
(b) 125 : 343
(c) 49 : 25
(d) 1 : 1.
उत्तर:
(c) 49 : 25

प्रश्न 12.
श्यान द्रव में सीमान्त वेग से गिरने वाले पिण्ड का त्वरण है-
(a) शून्य
(b) g
(c) g से अधिक
(d) g से कम।
उत्तर:
(a) शून्य

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 13.
असमान अनुप्रस्थ परिच्छेद के क्षैतिज पाइप में जल बह रहा है। पाइप में संकरे स्थान पर होगा-
(a) वेग अधिक दाब अधिक
(b) वेग कम दाब अधिक
(c) वेग अधिक दाब कम
(d) वेग कम दाब कम ।
उत्तर:
(c) वेग अधिक दाब कम

प्रश्न 14.
दो गोलों की त्रिज्याओं का अनुपात 1:2 है। वे एक श्यान दव में नीचे गिर रहे हैं। इनके सीमान्त वेगों का अनुपात होगा-
(a) 1 : 2
(b) 2 : 1
(c) 1 : 4
(d) 4 : 1.
उत्तर:
(c) 1 : 4

प्रश्न 15.
जल से भरे बर्तन में मुक्त तल से 3-2 मीटर गहराई पर एक छिद्र हो, तो जल का बहिःस्राव वेग है। यदि गुरुत्वीय त्वरण 10 ms-2 होगा-
(a) 5.7 m/s
(b) 7.5 m/s
(c) 8 m/s
(d) 32 m/s.
उत्तर:
(c) 8 m/s

प्रश्न 16.
मोम युक्त केशनली को जल में डुबाने पर उसमें जल-
(a) ऊपर चढ़ेगा
(b) नीचे गिरेगा
(c) ऊपर चढ़कर फब्बारों के रूप में गिरेगा
(d) पहले चढ़ेगा फिर गिरेगा ।
उत्तर:
(b) नीचे गिरेगा

प्रश्न 17.
एक द्रव ठोस की सतह को नहीं भिगोएगा, यदि स्पर्श कोण है-
(a) 0°
(b) अधिक कोण
(c) 450
(d) 60°
उत्तर:
(b) अधिक कोण

प्रश्न 18.
किसी केशिका में चड़े हुए पानी की ऊँचाई होगी-
(a) 4°C पर अधिकतम
(b) 2°C पर अधिकतम
(c) 4°C पर न्यनतम
(d) 0°C पर न्यूनतम ।
उत्तर:
(c) 4°C पर न्यनतम

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 19.
पृष्ठ तनाव के कारण गोलाकार मुड़े हुए पृष्ठ के भीतर दाब आधिक्य होता है-
(a) \(\frac{2T}{r}\)
(b) \(\frac{T}{2r}\)
(c) \(\frac{T}{r_1}+\frac{T}{r_2}\)
(d) \(\frac{T}{r_1}-\frac{T}{r_2}\)
उत्तर:
(c) \(\frac{T}{r_1}+\frac{T}{r_2}\)

प्रश्न 20.
जब पानी की सतह पर तेल डाल दिया जाये तो मच्छर प्रजनन नहीं कर सकते, क्योंकि-
(a) उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिलती है
(b) पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।
(c) श्यानता बढ़ जाती है
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।

प्रश्न 21.
ताप कम करने पर पृष्ठ तनाव होता है-
(a) बढ़ता है
(b) कम होता है
(c) अपरिवर्तित रहता है
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(a) बढ़ता है

प्रश्न 22.
रेनॉल्ड्स संख्या का विमीय सूत्र है-
(a) [M0L0T0]
(b) [M-1L0T1]
(c) [ML0T0]
(d) [MLT-2]
उत्तर:
(a) [M0L0T0]

प्रश्न 23.
वायु में अधिक ऊँचाई से जल की बूंद गिरती है। यदि बूँद h ऊँचाई से गिरे तो सीमान्त वेग है-
(a) h के समानुपाती
(b) √h के समानुपाती
(c) \(\frac{1}{h}\) के समानुपाती
(d) h पर निर्भर नहीं करता।
उत्तर:
(d) h पर निर्भर नहीं करता।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 24.
पृथ्वी पर एक केश नली में द्रव स्तम्भ की ऊँचाई h है। चन्द्रमा पर जहाँ गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी का है, यह ऊँचाई है-
(a) \(\frac{h}{6}\)
(b) 6 h
(c) h
(d) शून्य ।
उत्तर:
(b) 6 h

प्रश्न 25.
क्रान्तिक ताप पर पृष्ठ तनाव हो जाता है-
(a) अनन्त
(b) शून्य
(c) ऋणात्मक एवं निश्चित
(d) धनात्मक एवं निश्चित ।
उत्तर:
(b) शून्य

प्रश्न 26.
ताप बढ़ने पर द्रवों तथा गैंसों में श्यानता-
(a) दोनों में बढ़ती है
(b) दोनों में घटती है
(c) द्रवों में बढ़ती है तथा गैसों में घटती है।
(d) द्रवों में घटती है तथा गैसों में बढ़ती है।
उत्तर:
(d) द्रवों में घटती है तथा गैसों में बढ़ती है।

प्रश्न 27.
यदि एक काँच की छड़ को पारे में डुबोकर निकालें तो पारा छड़ से नहीं चिपकता है, क्योंकि-
(a) स्पर्श कोण बहुत छोटा होता है
(b) ससंजक बल अधिक है
(c) आसंजक बल अधिक है।
(d) पारे का घनत्व अधिक है।
उत्तर:
(b) ससंजक बल अधिक है

प्रश्न 28.
पृष्ठ तनाव के कारण बेलनाकार मुड़े हुए पृष्ठ के भीतर दाब आधिक्य होता है-
(a) \(\frac{2T}{r}\)
(b) \(\frac{T}{r}\)
(c) \(2T {\frac{T}{r_1}+\frac{T}{r_2}}\)
(d) \(4T {\frac{T}{r_1}-\frac{T}{r_2}}\)
उत्तर:
(b) \(\frac{T}{r}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 29.
चॉक द्वारा श्यामपट्ट पर लिखना किस गुण के कारण सम्भव है-
(a) ससंजक बल
(b) आसंजक बल
(c) पृष्ठ तनाव
(d) श्यानता।
उत्तर:
(b) आसंजक बल

प्रश्न 30.
बैरोमीटर को पहाड़ से खान में ले जाने पर पारे का तल-
(a) गिरेगा
(b) ऊपर उठेगा
(c) उतना ही रहेगा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(b) ऊपर उठेगा

प्रश्न 31.
वायुमण्डलीय दाब में अचानक कमी का संकेत मिलता
(a) तूफान
(b) वर्षा
(c) साफ मौसम
(d) शीत लहर
उत्तर:
(a) तूफान

प्रश्न 32.
संकीर्ण नली के लिये रेनॉल्ड्स संख्या का मान होता है-
(a) 10
(b) 100
(c) 1000
(d) 10000.
उत्तर:
(c) 1000

प्रश्न 33.
एक नली में दाब P पर प्रवाहित जल की दर Q है। यदि नली की त्रिज्या पहले से आधी कर दी जाये तथा दाब को 2P कर दिया जाये तो प्रवाह दर होगी-
(a) 4Q
(b) \(\frac{Q^2}{4}\)
(c) \(\frac{Q}{4}\)
(d) \(\frac{Q}{8}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{Q}{8}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
वायुमण्डलीय दाब के अचानक कम हो जाने पर क्या सूचना प्राप्त होती है ?
उत्तर:
तूफान आने की सूचना प्राप्त होती है।

प्रश्न 2.
सूटकेस के हत्थे चौड़े क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर: हत्थे चौड़े बनाने से क्षेत्रफल बढ़ जाता है जिससे दाव घट जाता है। यदि ऐसा न किया जाए तो हत्थे हाथ पर अधिक दबाव डालेंगे |

प्रश्न 3.
स्वस्थ मनुष्य का प्रकुंचन रक्त दाब कितना होता है ?
उत्तर:
स्वस्थ मनुष्य का प्रकुंचन रक्त दाब 120mm ऊँचाई वाले पारे के स्तम्भ के दाब के बराबर (120 टॉर) होता है।

प्रश्न 4.
क्या बहते हुए द्रव में दो धारा रेखाएँ एक-दूसरे को काट सकती हैं ?
उत्तर:
नहीं, दो धारा रेखाएँ एक-दूसरे को काटेंगी तो कटान बिन्दु पर द्रव के वेग की दो दिशाएँ होंगी जो कि असम्भव है।

प्रश्न 5.
द्रवों तथा गैसों की श्यानता पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
द्रवों की श्यानता ताप बढ़ाने पर घटती है जबकि गैसों की श्यानता ताप के बढ़ने पर बढ़ जाती है।

प्रश्न 6.
क्रिकेट तथा टेनिस के खेल में चक्रण करती हुई गेंद अपने मार्ग से घूम जाती है। इसकी व्याख्या किस सिद्धान्त या प्रमेव के आधार पर की जा सकती है ?
उत्तर:
क्रिकेट तथा टेनिस के खेल में चक्रण करती हुई गेंद के अपने मार्ग से घूम जाने की व्याख्या बरनौली प्रमेय के आधार पर की जा सकती है।

प्रश्न 7.
जल, वायु, रक्त तथा शहद को श्यानता के बढ़ते क्रम में लिखिए।
उत्तर:
वायु, जल, रक्त, शहद।

प्रश्न 8.
वर्षा की छोटी बूँदें जमीन पर नियत वेग से पहुँचती हैं, अथवा नियत त्वरण से।
उत्तर:
वायुमण्डल की श्यानता के कारण वर्षा की छोटी बूँदें नियत वेग से गिरती हैं।

प्रश्न 9.
नली में प्रवाहित द्रव की कौन-सी पर्त का वेग सबसे अधिक होता है ?
उत्तर:
नली के अक्ष पर स्थित पर्त का वेग सबसे अधिक होता है।

प्रश्न 10.
किस द्रव में पिण्ड का सीमान्त वेग कम होगा-जल में या ग्लिसरीन में ?
उत्तर:
ग्लिसरीन में, क्योंकि ग्लिसरीन की श्यानता अधिक होती है।

प्रश्न 11.
क्या बरनौली की प्रमेय विक्षुब्ध प्रवाह के लिए भी सत्य है ?
उत्तर:
नहीं, वरनौली की प्रमेय केवल धारा रेखीय प्रवाह के लिए ही सत्य है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 12.
यदि टंकी में ताजे जल के स्थान पर मिट्टी का तेल भर दें तो क्या मिट्टी के तेल का बाहर निकलने का वेग बदल जायेगा ?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि बहिःस्राव वेग द्रव के घनत्व पर निर्भर नहीं करता।

प्रश्न 13.
यदि हम धागे की रील के छेद में ऊपर से फूँक मारें तो उसके निचले सिरे पर रखा गत्ते का टुकड़ा नीचे नहीं गिरता, क्या कारण है ?
उत्तर:
रील व गत्ते के टुकड़े के बीच वायु वेग अधिक हो जाने से दाब वायुमण्डलीय दाब से कम हो जाता है।

प्रश्न 14.
जल के पृष्ठ तनाव को कैसे कम कर सकते हैं ?
उत्तर:
गर्म करके, तेल अथवा साबुन का घोल डालकर ।

प्रश्न 15.
कपड़े पर मोम रगड़ देने पर कपड़ा ‘वाटर प्रूफ’ हो जाता है, क्यों ?
उत्तर:
कपड़े के धागों में बनी केशनलियाँ समाप्त हो जाती हैं।

प्रश्न 16.
थर्मामीटर की नली (काँच) में पारे का भरना कठिन होता है, क्यों ?
उत्तर:
पारे तथा काँच का स्पर्श कोण अधिककोण है, अतः जब थर्मामीटर की नली के एक सिरे को पारे में डुबोते हैं तो उसमें पारे का तल नीचे गिरता है।

प्रश्न 17.
क्या वर्षा की सभी बूँदें (बड़ी और छोटी) एक ही अन्तिम वेग से पृथ्वी पर पहुँचती हैं ?
उत्तर:
नहीं, चूँकि vt ∝ r², अतः बड़ी बूंद का अन्तिम वेग अधिक होता है।

प्रश्न 18.
समान आकार की लोहे की गेंद और टेनिस की गेंद एक ऊँची मीनार की चोटी से गिराई जाती हैं वायु का अक्षेप तथा श्यानता को ध्यान में रखते हुए यह बताइए कि कौन सी गेंद पृथ्वी पर पहले पहुँचेगी ?
उत्तर:
पहले लोहे की गेंद पहुँचेगी।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 19.
एक बर्तन की तली में एक क्षैतिज केशनली जुड़ी है जिससे प्रति सेकण्ड प्रवाहित द्रव का आयतन Q है। अब यदि इस केशनली के साथ एक अन्य समान लम्बाई व समान त्रिज्या की केशनली को श्रेणीक्रम में जोड़ दिया जाये तो द्रव की प्रवाह दर क्या होगी ?
उत्तर:
\(Q=\frac{πpr^4}{8ηl}\), अत: लम्बाई दुगनी होने पर प्रवाह दर आधी अर्थात् \(\frac{Q}{2}\) रह जायेगी।

प्रश्न 20.
एक छोटी ठोस गोल गेंद किसी श्यान द्रव में छोड़ी जाती है। द्रव में इसके गमन के लिए वेग तथा चली दूरी में अनुमानित ग्राफ खींचिए ।
उत्तर:
वेग तथा चली दूरी के बीच ग्राफ चित्र के अनुसार होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -1

प्रश्न 21.
पॉस्कल नियम के दो अनुप्रयोग लिखिये ।
उत्तर:
द्रवचालिक ब्रेक, द्रवचालित लिफ्ट

प्रश्न 22.
जल के पृष्ठ तनाव को कैसे कम कर सकते हैं ?
उत्तर:
गर्म करके, तेल अथवा साबुन का घोल डालकर ।

प्रश्न 23.
खेतों में बरसात के तुरन्त बाद जुताई कर दी जाती है, क्यों ?
उत्तर:
जुताई करने से मिट्टी में बनी केशनलियों टूट जाती हैं, जिससे मिट्टी के अन्दर का पानी ऊपर चढ़कर वाष्पित नहीं हो पाता है।

प्रश्न 24.
गर्म सूप ठण्डे सूप की अपेक्षा स्वादिष्ट क्यों लगता है ?
उत्तर:
गर्म सूप का पृष्ठ तनाव कम होने से वह जीभ के अधिक पृष्ठ क्षेत्रफल पर फैल जाता है और स्वादिष्ट लगता है।

प्रश्न 25.
तापवृद्धि से स्पर्श कोण के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
स्पर्श कोण कम हो जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 26.
क्षैतिज नली के लिए बर्नूली सिद्धान्त क्या है ?
उत्तर:
(P1 – P2) = \(\frac{1}{2}\) ρ(v2² – v1²)

प्रश्न 27.
जल का पृष्ठ तनाव किस ताप पर अधिक होगा ?
उत्तर:
4°C पर ।

प्रश्न 28.
किस पदार्थ की केशनली में जल का नवचन्द्रक समतल होगा ?
उत्तर:
चाँदी की केशनली में।

प्रश्न 29.
पृष्ठ तनाव व पृष्ठ ऊर्जा में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
W = T.∆A

प्रश्न 30.
द्रव का पृष्ठ तनाव किस ताप पर शून्य हो जायेगा ?
उत्तर:
क्रान्तिक ताप पर ।

प्रश्न 31.
पृष्ठ तनाव की व्याख्या किन बलों के आधार पर करते
उत्तर:
अंतराणविक बलों के आधार पर।

प्रश्न 32.
फाउन्टेन पेन से अखबार के कागज की लिखावट अस्पष्ट हो जाती है क्या कारण है ?
उत्तर:
अखबार के कागज की केशनलियों से स्याही फैल जाती है।

प्रश्न 33.
श्यानता का CGS मात्रक लिखिए।
उत्तर:
प्वाइज या डाइन- से / सेमी²

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 34.
रेनॉल्डस संख्या से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
यह शुद्ध संख्या है जो पाइप में तरल के प्रवाह की प्रकृति को बताती है।

प्रश्न 35.
पृष्ठ तनाव के लिए उत्तरदायी बल कौन-सा है ?
उत्तर:
ससंजक बल ।

प्रश्न 36.
गर्मियों में सूती कपड़े अधिक आरामदायक होते हैं ?
उत्तर:
सूती कपड़ों में धागों के मध्य केशनलियाँ होती हैं जिनसे पसीना उनमें प्रवेश कर जाता है और वाष्प बनकर उड़ जाता है अतः शरीर को ठण्डक का अनुभव होता है।

प्रश्न 37.
द्रव में हवा का बुलबुला ऊपर क्यों उठता है ?
उत्तर:
क्योंकि हवा के बुलबुले का सीमान्त वेग ऋणात्मक होता है अतः वह ऊपर उठता है।

प्रश्न 38.
बहते हुए द्रव के वेग शीर्ष एवं दाब शीर्ष के सूत्र लिखिए।
उत्तर:
वेग शीर्ष- \(\frac{v^2}{2g}\)
दाब शीर्ष – \(\frac{ρ}{ρg}\)

प्रश्न 39.
भारहीनता की स्थिति में यदि केशनली को पानी में डुबोया जाये तो क्या होगा ?
उत्तर:
भारहीनता की स्थिति में द्रव नली की पूरी लम्बाई तक चढ़ जायेगा।

प्रश्न 40.
एक सुई साफ पानी में तैरती है, लेकिन साबुन के पानी में ‘डूब जाती है। क्यों ?
उत्तर:
साफ पानी का पृष्ठ तनाव साबुन मिले पानी से अधिक होता है, अतः साफ पानी का पृष्ठ तनाव सुई के भार को सन्तुलित कर सकता है।

प्रश्न 41.
किसी बेलनाकार नली में बहते हुए द्रव में किस पर्त का वेग सर्वाधिक होता है ?
उत्तर:
नली की अक्ष के अनुदिश पर्त का।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 42.
केशनली में पारा भरना कठिन क्यों है ?
उत्तर:
काँच के लिए पारे का स्पर्श कोण 135° है अतः यह केशनली में अवनमन दिखाता है।

प्रश्न 43.
यदि टंकी में ताजे जल के स्थान पर समुद्री जल भर दें तो क्या छिद्र से निकलने वाले जल का वेग बदल जाएगा ?
उत्तर:
नहीं, बहिस्राव वेग घनत्व पर निर्भर नहीं करता।

लघुत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल बराबर कैसे चढ़ता रहता है ?
उत्तर:
लालटेन की बत्ती के धागों के बीच में असंख्य केशनलियाँ होती हैं। जब मिट्टी के तेल में डुबोया जाता है तो मिट्टी का तेल इन केशनलियों में से ऊपर चढ़ जाता है।

प्रश्न 2.
दाबमापी में पारे का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
इसके निम्न कारण हैं-
(1) पारा केशनली की दीवारों से चिपकता नहीं है।
(2) पारे का घनत्व अधिक होने के कारण प्रयुक्त केशनली की लम्बाई कम होती है।
(3) पारे का वाष्प दाब कम होता है।

प्रश्न 3.
समुद्र की लहरों को शान्त करने के लिए लहरों पर तेल डाल देते हैं, क्यों ?.
उत्तर:
तेल डाल देने पर तेज हवा तेल को जल के पृष्ठ पर हवा की दिशा में दूर तक फैला देती है, बिना तेल वाले जल का पृष्ठ तनाव तेल वाले जल से अधिक होता है, अतः बिना तेल वाला जल, तेल वाले जल को वायु की विपरीत दिशा में खींचता है, जिससे समुद्र की लहरें शान्त हो जाती हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 4.
वायुयान लगभग 10 km की ऊंचाई पर ही उड़ाये जाते हैं जबकि इतनी ऊँचाई तक ले जाने में काफी ईंधन (Fuel) खर्च होता है, क्यों ?
उत्तर:
10 km से कम ऊँचाई पर वायुमण्डल सघन है, इसलिए 10 km से कम ऊँचाई पर वायु की श्यानता प्रभावी होती है। वायु की श्यानता के कारण वायुयान पर पीछे की ओर एक श्यान बल लगेगा, जो वायुवान के वेग के अनुक्रमानुपाती होगा। वायुयान का वेग अधिक होने के कारण श्यान बल भी अधिक होगा। इससे वायुवान गर्म हो जायेगा तथा ईंधन भी अधिक खर्च होगा, यही कारण है कि वायुयान 10 km से कम ऊँचाई पर नहीं उड़ाये जाते ।

प्रश्न 5.
एक असमान परिच्छेद वाले क्षैतिज पाइप में जल बह रहा है। जल का किसी बिन्दु P पर वेग एक अन्य बिन्दु Q पर जल के वेग का चार गुना है। बिन्दु P पर पाइप का व्यास बिन्दु Q के सापेक्ष कितना होगा ?
उत्तर:
सातत्य समीकरण से,
A1v1 = A2v2
πr1².v1 = πr2².v2
या \(\frac{\mathrm{D}_1^2}{4} \cdot v_1=\frac{\mathrm{D}_2^2}{4} \cdot v_2\)
या \(\mathrm{D}_1^2 \cdot 4 v_2=\mathrm{D}_2^2 v_2\)
या \(2 \mathrm{D}_1=\mathrm{D}_2 \Rightarrow \mathrm{D}_1=\mathrm{D}_2 / 2\)
अतः व्यास आधा होगा।

प्रश्न 6.
बरसात के बाद किसान भूमि की जुताई करते हैं, क्या कारण है ?
उत्तर:
खेत की जुताई कर देने से मिट्टी में बनी केशनलियाँ टूट जाती हैं, फलस्वरूप नीचे का जल पौधों के काम आता है। जुताई न करने पर मिट्टी में बनी केशनलियों में चढ़कर जल भूमि की सतह पर ऊपर आ जायेगा तथा वाष्प बन कर उड़ जायेगा।

प्रश्न 7.
यदि किसी द्रव व ठोस के बीच स्पर्श कोण 90° से कम हो तो क्या वह द्रव ठोस को भिगोयेगा ? उस ठोस से बनी केशनली में इसका पृष्ठ कैसा होगा ? क्या वह केशनली में चढ़ेगा ?
उत्तर:
भिगोयेगा, अवतल चढ़ेगा।

प्रश्न 8.
किसी ठोस के पृष्ठ और द्रव के बीच ‘स्पर्श कोण’ की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
स्पर्श कोण – “द्रव व ठोस के किसी स्पर्श विन्दु से द्रव के तल पर खींची गई स्पर्श रेखा तथा ठोस के तल पर द्रव के अन्दर की ओर खींची गई स्पर्श रेखा के बीच बने कोण को उस द्रव एवं ठोस के लिए स्पर्श कोण कहते हैं।

प्रश्न 9.
तेल में छोड़ी गई पानी की बूंद क्यों सिकुड़ जाती है?
उत्तर:
जल के अणुओं के बीच ससंजक बल, जल व तेल के अणुओं के बीच आसंजक बल की तुलना में अधिक शक्तिशाली होता है जब जल की बूँद तेल की सतह पर डाली जाती है तो जल के अणु ससंजक बलों के कारण परस्पर चिपके रहकर गोल आकृति ग्रहण किए रहते हैं तथा सतह पर नहीं फैलते हैं।

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प्रश्न 10.
पृष्ठ तनाव को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Surface Tension):

  • ताप का प्रभाव (Effect of temperature): ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव रेखीय रूप से घटता है।
    लेकिन पिघले ताँबे तथा कैडमियम के लिए ताप बढ़ाने पर पृष्ठ तनाव बढ़ता है।
  • संदूषण पर (On Contamination): जल की सतह पर मिट्टी के कण या चिकनाई युक्त पदार्थ उपस्थित होने पर जल का पृष्ठ तनाव घट जाता है।
  • विद्युतीकरण पर (On electrification): विद्युतीकरण के कारण द्रव का पृष्ठ तनाव घट जाता है क्योंकि इसके कारण द्रव के मुक्त पृष्ठ के लम्बवत् बाहर की तरफ बल लगता है।
  • विलेय पदार्थ का प्रभाव (Effect of solute): सामान्यतः किसी द्रव में विलेय पदार्थ घुला हो तो उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। जल में साबुन या फीनॉल डालने पर उसका पृष्ठ तनाव घट जाता है, परन्तु यदि विलेय पदार्थ बहुत घुलनशील है तो द्रव का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है।

प्रश्न 11.
चक्रण गति करती हुई गेंद के पथ में परिवर्तन का कारण समझाइए है ?
उत्तर:
मैगनस प्रभाव (Magnus Effect):
टेनिस या क्रिकेट के खिलाड़ी जब गेंद को स्पिन (spin) करते हुए फेंकते हैं तो गेंद वायु में एक सरल रेखा पर न चलकर एक वक्राकार पथ पर चलती है जिसे गेंद का स्विंग (swing) करना कहते हैं। इसका कारण यह है कि जब गेंद स्पिन करती है तो उसके साथ-साथ उसके चारों ओर की वायु भी v वेग से घूमती है । स्पिन करती हुई गेंद जब आगे बढ़ती है तो गेंद के आगे की वायु गेंद द्वारा छोड़े गए खाली स्थान को भरने के लिए u वेग से पीछे की ओर दौड़ती है। गेंद के ऊपर वायु की धारा रेखाओं की दिशा गेंद की स्पिन गति के विपरीत है, अतः गेंद के ऊपर वायु का परिणामी वेग (u – v) हो जाता है। गेंद के नीचे वायु की धारा रेखाओं की दिशा गेंद की स्पिन गति की दिशा में है, अतः गेंद के नीचे वायु का परिणामी वेग (u + v) हो जाता है ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -2

इस प्रकार गेंद के ऊपर वायु का वेग घट जाता है तथा नीचे बढ़ जाता है, अतः बर्नूली की प्रमेय के अनुसार गेंद के ऊपर वायुदाब अधिक तथा गेंद के नीचे वायुदाब कम हो जाता है। इस दाबान्तर के कारण गेंद सरल रेखा में न चलकर नीचे की ओर झुकते हुए वक्राकार पथ पर चलती है, इसे मैगनस प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 12.
जल की छोटी बूँदें फुहारने से ठण्डक क्यों उत्पन्न होती
उत्तर:
पृष्ठ तनाव पर आधारित दैनिक घटनाएँ (Events in Daily Life Based on Surface Tension):
(i) सीसे के छर्रे बनाना-सीसे के गोल छर्रे बनाने के लिए पिघलते हुए सीसे को धीरे: धीरे ऊँचाई से पानी पर गिराते हैं। पृष्ठ तनाव के कारण गिरते समय पिघला हुआ सीसा न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल घेरता हुआ गोलीय आकृति धारण कर लेता है तथा पानी में पहुँचने पर ठोस बन जाता है। इस प्रकार सीसे के छोटे-छोटे गोल छर्डे बन जाते हैं। छर्रा जितना अधिक बड़ा होगा, गुरुत्व बल उतना ही अधिक प्रभावी होगा तथा छर्रा भी उतना ही अधिक चपटा हो जायेगा।

(ii) जल की अपेक्षा साबुन के घोल के अधिक बड़े बुलबुले बनाए जा सकते हैं: साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव शुद्ध जल की अपेक्षा कम होता है। पृष्ठ तनाव कम होने का अर्थ है कि द्रव के पृष्ठ की न्यूनतम क्षेत्रफल घेरने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, अतः साबुन के घोल के अधिक बड़े बुलबुले बनाए जा सकते हैं जबकि जल के बड़े बुलबुले अधिक पृष्ठ तनाव के कारण टूट जाते हैं।

(iii) साबुन मिले हुए गरम जल से शुद्ध जल की अपेक्षा कपड़ों की धुलाई अधिक साफ होती है: साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव शुद्ध जल की अपेक्षा काफी कम होता है, अतः साबुन के घोल की एक बूँद शुद्ध जल की एक बूँद की अपेक्षा कपड़े के अधिक क्षेत्रफल को भिगोती है।
इस प्रकार साबुन का घोल कपड़े के बारीक छिद्रों में घुसकर, वहाँ जमे मैल को अपने साथ चिपकाकर बाहर निकाल लाता है (क्योंकि घोल व मैल के बीच आसंजक बल का मान, घोल के अपने ससंजक बल के मान से अधिक होता है); यदि घोल को गरम कर दिया जाए तो उसका पृष्ठ तनाव और भी कम हो जाता है। इस प्रकार साबुन मिले हुए गरम जल से शुद्ध जल की अपेक्षा कपड़ों की धुलाई अधिक साफ होती है।

(iv) काँच की नली के सिरों का गर्म होने पर गोल हो जाना: जब काँच की एक नली को बर्नर की ज्वाला में गर्म करते हैं तो काँच पिघलकर द्रव बन जाता है। इस द्रव का पृष्ठ कम-से-कम क्षेत्रफल घेरने का प्रयत्न करता है। चूँकि दिए हुए आयतन के लिए गोले का क्षेत्रफल न्यूनतम होता है, अतः पिघला हुआ काँच गोले की आकृति लेने का प्रयत्न करता है जिससे नली के सिरे गोल हो जाते हैं।

(v) फुहारने से ठण्डक उत्पन्न होती है: जब किसी द्रव को फुहारा जाता है तो उसकी असंख्य छोटी-छोटी बूँदें बन जाती हैं। जिससे द्रव का पृष्ठीय क्षेत्रफल बहुत बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया में द्रव के भीतर के अणु ऊपर उठकर बूँदों के पृष्ठ पर पहुँचते हैं जिसके लिए उन्हें ससंजक बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। इससे द्रव की आन्तरिक ऊर्जा कम हो जाती है और बूँदों का ताप गिर जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 13.
यदि कोई वस्तु असमरूपी होती है तो वस्तु तरल में घूमने क्यों लग जाती है ?
उत्तर:
यह इसलिए होता है क्योंकि गुरुत्व केन्द्र, उत्प्लावन केन्द्र के सम्पाती नहीं होता है। इस कारण वस्तु का भार तथा द्रव का उत्प्लावक बल एक बल युग्म का निर्माण करते हैं। इस बल युग्म का आघूर्ण ही वस्तु को घूर्णन गति कराने के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 14.
दोनों सिरों पर खुली केशनली को जल में डुबाने पर केशनली में जल कुछ ऊपर तक क्यों चढ़ जाता है ?
उत्तर:
केशनली के भीतर, अवतल जल पृष्ठ के नीचे दाब, पृष्ठ के ऊपर वाले दाब से 2T / R कम होता है,
अतः केशनली के बाहर जल का आधिक्य दाब, केशनली में अतिरिक्त जल भेजकर जल को कुछ ऊपर तक चढ़ा देता है।

प्रश्न 15.
वह कपास जिसमें चर्बी तथा चिकनाई अलग कर दी जाती है, अधिक जल अवशोषित करती है, क्यों ?
उत्तर:
जब कपास को जल में डुबाते हैं तो उसमें बनी केशिकाओं में पृष्ठ तनाव के कारण जल चढ़ता है जिसकी ऊँचाई पृष्ठ तनाव पर निर्भर करती है। चिकनी कपास के सम्पर्क में जल का पृष्ठ तनाव घट जाता है जिससे जल कम ऊपर चढ़ता है।

प्रश्न 16.
भारहीनता की अवस्था में (जैसे कृत्रिम उपग्रह में) यदि किसी केशनली को जल में डुबोया जाये तो उसमें जल का चढ़ना सामान्य अवस्था में जल के चढ़ने से किस प्रकार भिन्न होगा ?
उत्तर:
सामान्य अवस्था में पृष्ठ तनाव का बल (जिसके कारण जल केशनली में चढ़ता है) जब नली में चढ़े जल-स्तम्भ के भार के बराबर हो जाता है तो जल का चढ़ना रुक जाता है। भारहीनता की अवस्था में (g = 0) नली में चढ़ने वाले जल-स्तम्भ का प्रभावी भार शून्य होगा। अतः जल केशनली के दूसरे सिरे पर पहुँच जायेगा चाहे केशनली कितनी ही लम्बी क्यों न हो ?

प्रश्न 17.
गर्म सूप ठण्डे सूप की अपेक्षा अधिक स्वादिष्ट लगता है, क्यों ?
उत्तर:
द्रव का ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव कम हो जाता है जिस कारण गर्म सूप का पृष्ठ तनाव ठण्डे सूप की अपेक्षा कम हो जाता है पृष्ठ तनाव कम होने के कारण द्रव का क्षेत्रफल अधिक हो जाता है जिससे गर्म सूप जीभ के अधिक क्षेत्रफल में फैल जाता है और अधिक स्वादिष्ट लगता है।

प्रश्न 18.
आकाश में बादल तैरते क्यों दिखाई देते हैं ?
उत्तर:
जब वायु में उपस्थित जल की वाप्य धूल, धुएँ आदि के कणों पर संघनित होती है तो प्रारम्भ में बहुत छोटी बूँदें बनती हैं। जब ये बूँदें नीचे गिरती हैं तो वायु द्वारा इन पर ऊपर की ओर श्यान बल लगाया जाता है, अतः कुछ समय बाद ये बूँदें सीमान्त वेग से नीचे गिरने लगती हैं। चूँकि बूँदें बहुत ही छोटी होती हैं, अतः इनका सीमान्त वेग बहुत कम होता है। जिससे ये नीचे गिरने की बजाय आकाश में तैरती प्रतीत होती हैं, ऐसी अवस्था में इन्हें ‘बादल’ (clouds) कहते हैं।

प्रश्न 19.
फब्बारे के ऊपर हल्की गेंद क्यों टिकी रहती है ? नीचे क्यों नहीं गिर जाती ?
उत्तर:
गेंद फब्बारे की जल धारा पर ऊपर-नीचे नाचती रहती है, जल धारा से अलग होकर गिरती नहीं है, क्योंकि बरनौली प्रमेय के अनुसार जल फुहार का वेग अधिक होने के कारण वहाँ दाब कम रहता है, अतः जब भी गेंद जल धारा से बाहर आने की कोशिश करती है तो के दाब से जल धारा के भीतर कम दाब की ओर पुनः खिंच जाती है।

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प्रश्न 20.
आँधी में टीन की छतें क्यों उड़ जाती हैं ?
उत्तर:
आँधी में टीन की ऊपरी सतह पर से वायु का वेग अधिक होने के कारण बरनौली प्रमेय के अनुसार वायु की गतिज ऊर्जा बढ़ जाने से इसकी सतह पर वायु दाब टीन की निचली सतह पर वायु दाब की तुलना में कम हो जाता है। अतः टीन की नीचे की सतह के अधिक दाब के कारण टीन की छतें आँधी में उड़ जाती हैं।

प्रश्न 21.
वर्षां की बूंदें अन्त में नियत वेग से क्यों गिरती हैं ?
उत्तर:
जब वर्षा की बूँदें अपने भार के कारण पृथ्वी की ओर गिरती हैं तो वायु की श्यानता इनके गिरने का विरोध करती है। गुरुत्व के कारण जैसे-जैसे बूँदों के नीचे गिरने का वेग बढ़ता है, स्टोक्स के नियमानुसार वैसे-वैसे इसके विरुद्ध वायु का श्यान बल भी बढ़ता जाता है। एक विशेष स्थिति में विरोधी श्वान बल नीचे की ओर कार्य करने वाले प्रभावी गुरुत्व बल के बराबर हो जाता है। इस दशा में अन्त में बूँदें एक निश्चित सीमान्त वेग से गिरती हैं।

प्रश्न 22.
गहरा जल सदैव शान्त बहता है, कारण बताइए।
उत्तर:
बरनौली प्रमेय के अनुसार किसी द्रव के क्षैतिज प्रवाह के लिए P+ +2pv2 = नियतांक; अत: गहरे जल का दाब (P) अधिक होने से वेग ” का मान कम होता है।

प्रश्न 23.
जल की एक बड़ी बूँद को अनेक छोटी-छोटी बूँदों में विभाजित करने पर पृष्ठीय ऊर्जा में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर:
एक बड़ी बूँद को अनेक छोटी बूंदों में विभाजित करने पर, जल का मुक्त पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ेगा। अतः पृष्ठीय ऊर्जा भी बढ़ेगी।

प्रश्न 24.
वर्षा की बूँदे अनन्त से नियत वेग से क्यों गिरती है ?
उत्तर:
जब बूँद वायु में नीचे गिरती है तो उस पर 40 लगने वाले बल चित्र में दर्शाए हैं। इन बलों में दो बल नियत रहते हैं- (i) बूँद का भार mg एवं बूँद पर ऊपर उछाल U; लेकिन स्टोक्स बल F = 6πnrv का मान बूँद का वेग बढ़ने के साथ बढ़ता हैं एक स्थिति ऐसी आती है जब बूंद का भार ऊपर की ओर लगने वाले बलों के योग के बराबर हो जाता है तो परिणामी बल शून्य हो जाने के कारण बूँद नियत वेग से गिरने लगती है।

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प्रश्न 25.
हिमखण्ड जल पर क्यों तैरता है ?
उत्तर:
हिमखण्ड का घनत्व जल के घनत्व से कम होता है, जिससे हिमखण्ड के आयतन के बराबर जल का mig उत्क्षेप-बल हिमखण्ड के भार से अधिक हो जाता है और हिमखण्ड जल पर तैरता रहता है। तैरते समय हिमखण्ड का केवल उतना आयतन ही जल में डूबता है, जितने आयतन के द्वारा हटाये गये जल का भार हिमखण्ड के भार के बराबर होता है।

प्रश्न 26.
काँच की छड़ के सिरे को उच्च ताप पर गर्म करने पर सिरा गोल क्यों हो जाता है ?
उत्तर:
जब काँच को गर्म करते हैं तो वह पिघलकर द्रव बन जाता है। इस द्रव का पृष्ठ कम-से-कम क्षेत्रफल घेरने का प्रयत्न करता है। हम जानते हैं कि दिये हुए आयतन के लिये गोले के पृष्ठ का क्षेत्रफल सबसे कम होता है। अतः पिघला हुआ काँच गोले का रूप लेने का प्रयत्न करता है जिससे कि नली के किनारे गोल हो जाते हैं।

प्रश्न 27.
चिपकन रहित खाना पकाने के लिए बर्तन पर टेफ्लॉन की परत क्यों चढ़ाई जाती है ?
उत्तर:
बर्तनों पर टेफ्लॉन की परत चढ़ाई जाती है, क्योंकि टेफ्लॉन की परत तथा तेल आदि के बीच का स्पर्श कोण 90° से अधिक होता है। इसके कारण वर्तन चिपकन रहित हो जाता है।

प्रश्न 28.
पास-पास लटकी दो हल्की गेंदों के मध्य फूँक मारने पर वे एक-दूसरे की ओर आकर्षित होती हैं क्यों ?
उत्तर:
फूँक मारने पर गेंदों के बीच का वायु वेग बढ़ जाता है, अतः बरनौली के प्रमेय से इसका दाब कम हो जाता है। इसीलिए गेंद परस्परं आकर्षण बल का अनुभव करती है।

प्रश्न 29.
भारी वाहनों के पहियों के टायर अधिक चौड़े क्यों बनाये जाते हैं ?
उत्तर:
भारी वाहनों के पहियों के टायर चौड़े होने से सड़क अथवा जमीन पर लगने वाला दाब कम हो जाता है क्योंकि वाहन का भार अधिक क्षेत्रफल पर लगता है। इसलिये वाहन के पहिये सड़क पर भैंसने से बच जाते हैं।

प्रश्न 30.
धमनियों में बनूंली सिद्धान्त से रक्त के प्रवाहको समझने में किस प्रकार सहायता मिलती है ?
उत्तर:
धमनी की भीतरी दीवार पर प्लाक (Plaque) का जमाव होने के कारण धमनी भीतर से संकीर्ण हो जाती है इन संकरी धमनियों से रक्त प्रवाहित कराने के लिए हृदय की गतिविधि पर अधिक बोझ पड़ जाता है। इस क्षेत्र में रक्त के प्रवाह की चाल बढ़ जाती है और आन्तरिक दाब घट जाता है। बाहरी दाब के कारण धमनी दब जाती है। हृदय इस धमनी को खोलने के लिए रक्त को धक्का देता है। जैसे ही रक्त इसे खोलकर बाहर की ओर तीव्र गति से प्रवाहित होता है, आंतरिक दाब पुनः गिर जाता है और धमनी पुनः दब जाती है, इससे हार्ट अटैक हो सकता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 31.
चाय की केतली के ढ़क्कन में सुराख होता है, क्यों ?
उत्तर:
चाय की केतली के दक्कन में सुराख न होने पर चाय से भरी केतली के अन्दर का दाब वायुमण्डलीय दाब से कम होगा। स्पष्ट है, केतली को टेढ़ा करने पर उसकी टोंटी से चाय सरलता से नहीं निकलेगी क्योंकि बाहर का दाब केतली के अन्दर के दाब से अधिक होगा।

प्रश्न 32.
धारा रेखीय प्रवाह तथा विक्षुब्ध प्रवाह में अन्तर बताइये।
उत्तर:
धारा रेखीय प्रवाह व विक्षुब्ध प्रवाह में निम्नलिखित अन्तर हैं-

धारा रेखीय प्रवाहविक्षुब्ध प्रवाह
(1) यह द्रव का व्यवस्थित और नियमित रूप से प्रवाह है।यह द्रव का अव्यवस्थित व अनियमित प्रवाह है।
(2) धारा रेखीय प्रवाह में द्रव का वेग क्रांतिक वेग से कम होता है।इस प्रवाह में द्रव का वेग क्रान्तिक वेग से अधिक होता है।
(3) इस प्रवाह में द्रव के अन्दर भंवर धाराएँ उत्पन्न नहीं होती है।इस प्रवाह में द्रव के अन्दर भंवर धाराएँ उत्पन्न होती हैं।
(4) किसी बिन्दु से गुजरने वाले कणों के वेग की दिशा नियत रहती है।इस प्रवाह में किसी बिन्दु से गुजरने वाले कणों के वेग की दिशा परिवर्तित होती रहती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1.
बर्नूली प्रमेय का कथन लिखते हुए इसे सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
बर्नूली का सिद्धान्त (Bernoulli’s Theorem)
बर्नूली के सिद्धान्त के अनुसार, “जब कोई आदर्श द्रव (अश्यान एवं असंपीड्य) धारा रेखीय प्रवाह में बहता है तो प्रवाह के प्रत्येक स्थान पर द्रव की सम्पूर्ण ऊर्जा नियत रहती है अर्थात् द्वव की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा दाब ऊर्जा का योग नियत रहता है।” अर्थात्
दाब ऊर्जा + गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा = नियतांक
अतः एकांक आयतन के लिए,
P + \(\frac{1}{2}\)ρv² + ρgh = नियतांक
अथवा एकांक द्रव्यमान के लिए
\(\frac{{P}}{\rho}+\frac{1}{2} v^2+g h\) = नियतांक
अथवा
\(\frac{{P}}{\rho g}+\frac{v^2}{2 g}+h\) = नियतांक
जहाँ \(\frac{{P}}{\rho g}\) दाब शीर्ष, \(\frac{v^2}{2 g}\) वेग शीर्ष व h गुरुत्वीय शीर्ष है।

उपपत्ति (Derivation)
माना असमान परिच्छेद के क्षैतिज पाइप में एक आदर्श तरल का धारा रेखीय प्रवाह हो रहा है। पाइप के दो स्थानों {X} व {Y} पर पाइप का परिच्छेद क्षेत्रफल क्रमशः A1 व A2 है और इन स्थानों पर द्रव के वेग क्रमशः v1 व v2 हैं और इन स्थानों के गुरुत्वीय तल क्रमशः h1 व h2 हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -3
यदि एकांक समय में प्रवाहित द्रव का द्रव्यमान m हो तो अविरतता के सिद्धान्त से-
m = A1v1ρ = A2v2ρ
\(\frac{m}{ρ}\) = A1v1 = A2v2 …………..(11)
अतः विस्थापित द्रव पर किया गया कुल कार्य
\({W}={W}_1+{W}_2={P}_1 {~A}_1 v_1-{P}_2 {~A}_2 v_2\)
\({~W}=\frac{{P}_1 m}{\rho}-\frac{{P}_2 m}{\rho}\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -4
इस प्रकार बर्नूली के सिद्धान्त में ऊर्जा संरक्षण के नियम का उपयोग किया गया और यह माना गया है कि घर्षण के कारण कोई ऊर्जा क्षति नहीं होती। परन्तु वास्तव में, जब तरल प्रवाह करता है तो आन्तरिक घर्षण के कारण कुछ ऊर्जा की हानि हो जाती है। इसी व्युत्पत्ति तरल की विभिन्न परतों के भिन्न-भिन्न वेगों के कारण होती है। यह सतें एक-दूसरे पर घर्षण बल लगाती हैं और परिणामस्वरूप ऊर्जा का ह्रस होता है। अतः बर्नूली का समीकरण शून्य श्यानता पर लागू होता है। बर्नूली प्रमेय पर एक और प्रतिबन्ध है कि यह असंपीड्य तरलों पर ही लागू होता है, क्योंकि तरलों की प्रत्यास्थ ऊर्जा को नहीं लिया गया है। अस्थिर अथवा विक्षोभ प्रवाह में भी बर्नूली समीकरण काम नहीं आता क्योंकि इसमें वेग तथा दाब समय में लगातार अस्थिर रहते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 2.
किसी टंकी में पानी के धरातल से मीटर नीचे छिद्र से बहिःस्राव वेग का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। टॉरिसेली सिद्धान्त को भी समझाइये।
उत्तर:
टॉरिसेली प्रमेय : बहिःस्राव वेग (Torricelli’s Theorem : Velocity of Efflux) :
कथन (Statement): इसके अनुसार द्रव से भरे किसी टैंक में किसी गहराई पर बने छिद्र से निकलने वाले द्रव का वेग अर्थात् बहिःस्त्राव वेग उस वेंग के बराबर होता है जो द्रव अपने स्वतन्त्र तल से छिद्र तक स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने में प्राप्त कर लेता है। इसे बर्नूली-प्रमेय के आधार पर सिद्ध किया जा सकता है।

उपपत्ति (Proof): चित्र में एक बर्तन दर्शाया गया है जिसमें H ऊँचाई तक कोई द्रव भरा है। इसका घनत्व माना ρ है। बर्तन में द्रव के स्वतन्त्र तल से h गहराई पर एक छिद्र A है। माना A से निकलने वाले द्रव का बहि:स्राव वेग v है। द्रव के स्वतन्त्र तल पर गतिज ऊर्जा शून्य है, केवल स्थितिज ऊर्जा है। परन्तु A से निकलने वाले द्रव में स्थितिज
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -5
तथा गतिज दोनों ही प्रकार की ऊर्जाएँ हैं। द्रव के स्वतन्त्र तल तथा छ्दिध्र से बाहर निकलते द्रव जैट दोनों पर वायुमण्डलीय दांब P होगा। माना छिद्र से निकलने वाले द्रव का बहिःसाव वेग v है। बर्नूली प्रमेय के अनुसार, द्रव के स्वतन्त्र तल पर तथा छिद्र के प्रत्येक बिन्दु पर दाब तथा द्रव के एकांक आयतन की कुल ऊर्जा का योग बराबर होना चाहिए। अतः
\({P}+0+\rho g {H}={P}+\frac{1}{2} \rho v^2+\rho g({H}-h)\)
अथवा \(\frac{1}{2} \rho v^2=\rho g h\) अथवा \(v=\sqrt{(2 g h)}\)
इस सूत्र की स्थापना सर्वप्रथम सन् 1644 ई. में टॉरिसली ने की थी।

द्रव की परास (Range of Liquid): छिद्र से निकलने वाले द्रव द्वारा तय की गयी क्षैतिज दूरी को द्रव की परास कहते हैं।”
छिद्र से निकलने वाले द्रव का वेग क्षैतिज होता है जबकि वह (H-h) ऊर्ध्व ऊँचाई गुरुत्वीय त्वरण के अन्तर्गत गिरता है, अतः द्रव का मार्ग परवलयाकार हो जाता है।
माना (H-h) ऊँचाई तय करने में द्रव को लगा समय t हो तो u = 0, a = +g तथा s = H – h
s = ut + \(\frac{1}{2}\)at²
(H – h) = 0 + \(\frac{1}{2}\)gt²
\(t=\sqrt{\frac{2(H-h)}{g}}\) …………..(2)
चूँकि क्षैतिज दिशा में कोई बल कार्य नहीं करता है अतः उसका क्षैतिज वेग v ही रहता है।
अतः
R = v.t
= \(\sqrt{2 g h} \cdot \sqrt{\frac{2({H}-h)}{g}}\)
= \(2 \sqrt{h({H}-h)}\) ………..(3)
अतः इस सूत्र द्वारा स्पष्ट होता है कि h तथा (H-h) को आपस में बदल देने पर द्रव की परास में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसलिए क्षैतिज परास R समान रहता है।
अधिकतम परास के लिए,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -6

प्रश्न 3.
बेन्चयूरी प्रवाह मापी द्वारा नली में प्रति सेकण्ड बहने वाले द्रव की मात्रा के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।
उत्तर:
(ii) वैंटुरीमापी (Venturimeter):
यह बर्नूली प्रमेय पर आधारित वह युक्ति है, जिसकी सहायता से किसी नली में बहने वाले द्रव के प्रवाह की दर ज्ञात की जा सकती है।

उपकरण का वर्णन-इसमें एक क्षैतिज नली RST होती है जिसका बीच का भाग (S) संकरा है। R व S भागों पर दो ऊर्ध्वाधर नलियाँ E तथा F जुड़ी रहती हैं। दोनों ऊर्ध्वाधर नलियाँ R व S स्थानों पर द्रव दाब नापने के लिए काम में लायी जाती हैं। इसे वैंटुरीमीटर कहते हैं। इसे उस नली के साथ जोड़ देते हैं, जिससे द्रव दाब की गणना करनी है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -7
कार्यविधि (Working): जब द्रव नली RST में प्रवाह करता है तो अविरतता के सिद्धान्त से नली के चौड़े भाग {R} की अपेक्षा संकरे भाग (S) पर वेग अधिक होता है, अतः बरनौली प्रमेय से चौड़े भाग की अपेक्षा संकरे भाग ({S}) पर दाब कम होता है। इस दाबान्तर को नलियों {E} तथा {F} में चढ़े द्रव के अन्तर को पढ़कर ज्ञात किया जा सकता है।
माना नली में आदर्श द्रव का प्रवाह धारा रेखीय है, नली के {R} से {S} स्थानों पर क्रमशः नली के परिच्छेद क्षेत्रफल A1 व A2 हैं, द्रव के प्रवाह वेग v1 व v2 तथा दाब P1 व P2 हैं।
चूँकि नली क्षैतिज है, अतः बर्नूली प्रमेय से,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -8
इस प्रकार द्रव के प्रवाह की दर ज्ञात की जाती है।
इस सिद्धान्त पर मोटर वाहनों में काबुरिटर में नोजल काम करती है जिसमें तीव्र गति से वायु प्रवाहित होती है। संकरी गर्दन पर दाब कम होता है इसलिए पेट्रोल भीतर की ओर चैम्बर में चूस लिया जाता है ताकि दहन के लिए वायु तथा ईंधन का सही मिश्रण प्राप्त हो सके।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 4.
केशिकत्व क्या है ? केशनली में चढ़े जल स्तम्भ की ऊँचाई के लिए सूत्र प्रतिपादित कीजिए ।
उत्तर:
केशनली में द्रव के उन्नयन के लिए सूत्र (Formula For Capillary Rise of Liquid):
माना ρ घनत्व का कोई द्रव r त्रिज्या की केशनली में भरा है, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। द्रव का पृष्ठ तनाव T है। नली के अन्दर द्रव के वक्र तल की त्रिज्या R व स्पर्श कोण θ है। चढ़े हुए द्रव स्तम्भ की ऊँचाई h है। द्रव स्तम्भ के दाब में कमी \(\frac{2T}{R}\) है, अत:
द्रव स्तम्भ का दाब = दाब आधिक्य
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -9
स्पष्ट है कि r का मान जितना कम होगा अर्थात् नली जितनी संकीर्ण होगा, h का मान उतना ही अधिक होगा अर्थात् केशनली में द्रव का उन्नयन उतना ही अधिक होगा।

प्रश्न 5.
आन्तरिक बलों के आधार पर पृष्ठ तनाव की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव की आण्विक बलों के आधार पर व्याख्या (Explanation of Surface Tension Based on Molecular Forces);
लाप्लास (Laplace) ने पृष्ठ तनाव को अन्तराण्विक बलों के आधार पर समझाया। हम पढ़ चुके हैं कि जब अणुओं के बीच की दूरी आण्विक परास (≈ 10-9. मीटर) से अधिक होती है तो उनके बीच लगने वाला ससंजक बल नगण्य होता है तथा जब अणुओं के बीच की दूरी आण्विक परास से कम होती है तो उनके बीच ससंजक बल कार्य करता है। किसी अणु को केन्द्र मानकर आण्विक परास की त्रिज्या के बराबर खींचा गया गोला, ‘आण्विक सक्रियता का गोला’ कहलाता है।

चित्र में बर्तन में भरे किसी द्रव में तीन अणु A, B व C दिखाए गए हैं। इन अणुओं के चारों ओर आण्विक सक्रियता के गोले खींचे गए हैं। अणु A पूर्णतः द्रव के अन्दर, अणु B द्रव के पृष्ठ के ठीक नीचे तथा अणु C द्रव के पृष्ठ पर स्थित है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -10
अणु A के आण्विक सक्रियता का गोला पूर्णतः द्रव के भीतर है, अतः यह अणु अपने चारों ओर के अणुओं द्वारा सभी दिशाओं में समान बल से आकर्षित होता है। इस प्रकार इस अणु पर परिणामी ससंजक बल का मान शून्य होता है। अणु B के आण्विक सक्रियता के गोले का कुछ भाग द्रव के पृष्ठ के बाहर है। इस स्थिति में इस अणु के नीचे स्थित अणुओं की संख्या, ऊपर स्थित अणुओं की संख्या से अधिक होती है जिससे यह अणु नीचे की ओर अधिक आकर्षित होता है, अतः अणु B पर द्रव के भीतर की ओर परिणामी बल कार्य करता है। अणु C के आण्विक सक्रियता के गोले का आधा भाग द्रव के पृष्ठ के बाहर तथा आधा भाग द्रव के अन्दर है, इस गोले के निचले अर्धभाग में ही द्रव के अणु हैं, अतः अणु C पर एक परिणामी ससंजक बल द्रव के पृष्ठ के लम्बवत् नीचे की ओर कार्य करता है जिसका मान अधिकतम होता है (पृष्ठ के द्रव वाष्प के अणुओं के कारण आकर्षण बल को नगण्य माना जा सकता है।)

इस प्रकार द्रव के पृष्ठ पर स्थित प्रत्येक अणु पर नीचे की ओर अधिकतम आकर्षण बल कार्य करता है। द्रव के पृष्ठ नीचे जाने पर इस आकर्षण बल का मान कम हो जाता है। द्रव के पृष्ठ से आण्विक परास की दूरी से अधिक दूरी पर इस परिणामी बल का मान शून्य हो जाता है। अतः द्रव के स्वतन्त्र पृष्ठ से आण्विक परास ( 10 m ) की गहराई तक द्रव का भाग पृष्ठीय झिल्ली (surface film) कहलाता है। पृष्ठीय झिल्ली में स्थित सभी अणु द्रव के अन्दर की ओर आकर्षण बल का अनुभव करते हैं।

जब किसी अणु को द्रव के अन्दर से पृष्ठीय झिल्ली में लाया जाता है, तो द्रव के अन्दर की ओर लगने वाले आकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यह कार्य अणु में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। स्पष्ट है कि पृष्ठीय झिल्ली में स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा द्रव के भीतर स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा से अधिक होती है। इस प्रकार द्रव के स्वतन्त्र पृष्ठ पर स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है। यदि स्वतन्त्र पृष्ठ का क्षेत्रफल अधिक है तो उसमें स्थित अणुओं की संख्या भी अधिक होगी, अतः उसकी स्थितिज ऊर्जा भी अधिक होगी, परन्तु हम जानते हैं कि कोई भी निकाय (system) उस समय स्थायी साम्यावस्था में होता है जब उसकी स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होती है, अतः द्रव के पृष्ठ पर स्थित अणुओं की स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम होने के लिए पृष्ठ का क्षेत्रफल कम-से-कम होना चाहिए। इस प्रकार द्रव का स्वतन्त्र पृष्ठ एक तनी हुई झिल्ली की भाँति कार्य करता है। द्रव की इस प्रवृत्ति को पृष्ठ तनाव कहते हैं।

प्रश्न 6.
एक अनन्त विस्तार के श्यान द्रव में गिर रहे गोले के लिए अन्तिम वेग का सूत्र प्रतिपादित कीजिए।
उत्तर:
सीमान्त वेग (Terminal Velocity):
जब कोई गोलाकार वस्तु किसी श्यान माध्यम में स्वतन्त्रतापूर्वक गिरने दी जाती है तो वस्तु का वेग उसके भार (W) के कारण पहले बढ़ता है लेकिन वेग बढ़ने के साथ-साथ माध्यम द्वारा उस पर आरोपित घर्षण बल भी बढ़ता है जो गति के विपरीत दिशा में कार्य करता है। वस्तु के घर्षण बल का कारण यह है कि वस्तु के सम्पर्क में आने वाली परत वस्तु के साथ गति करना चाहती है अबकि दूर की अन्य परतें स्थिर रहती हैं। द्रव की परतों में इस आपेक्षिक गति के कारण परतों के मध्य आन्तरिक घर्षण बल उत्पन्न हो जाता है। यही श्यान बल होता है। एक स्थिति ऐसी आती है जब वस्तु का भार उस पर ऊपर की ओर लगने वाले उत्प्लावन बल एवं स्टोक्स बल के योग के बराबर हो जाता है तो वस्तु पर परिणामी बल शून्य हो जाता है और वह नियत वेग से गिरने लगती है। इसी नियत वेग को ‘सीमान्ते वेग’ या ‘ चरम वेग’ या ‘अधिकतम वेग’ या ‘अन्तिम वेग’ कहते हैं।

सीमान्त वेग के लिए सूत्र-माना r त्रिज्या एवं ρ घनत्व की एक गोलाकार वस्तु σ घनत्व एवं η श्यानता गुणांक वाले द्रव में स्वतन्त्रतापूर्वक गिर रही है। वस्तु पर लगने वाले बर्लों को चित्र में दिखाया गया है। इन बलों में केवल स्टोक्स बल वस्तु के वेग पर निर्भर करता है। अतः चरम वेग (vt) की अवस्था में,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -11
स्पष्ट है कि गोली का सीमान्त वेग (vt), गोली की त्रिज्या (r), गोली के घनत्व (ρ), माध्यम के घनत्व (σ) तथा माध्यम की श्यानता (η) पर निर्भर करता है।
यदि द्रव में गिरती हुई वस्तु के वेग एवं समय के मध्य ग्राफ खींचा जाये तो ग्राफ की भाँति मिलेगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -12

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 7.
कोशिका उन्नयन विधि द्वारा पृष्ठ तनाव ज्ञात करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोशिका उन्नयन विधि द्वारा जल का पृष्ठ तनाव ज्ञात करना
(Determination Of Surface Tensionof Liquid By Capillary Rise Method):
आवश्यक उपकरण-द्रत्र भरा बीकर, स्टैण्ड, एक समान व्यास की साफ केशनली तथा चल सूक्ष्मदर्शी।
आवश्यक सूत्र-द्रव का पृष्ठ तनाव \(\mathrm{T}=\frac{r h \rho g}{\cos \theta}\)
जहाँ r → केशनली की त्रिज्या
h → केशनली में चढ़े स्तम्भ की ऊँचाई
ρ → द्रव का घनत्व, g → गुरुत्वीय त्वरण
θ → स्पर्श कोण
प्रयोग विधि-प्रयोग के लिए काँच की केशनली को तनु नाइट्रिक अम्ल एवं कॉस्टिक सोडा के विलयन से साफ करके शुद्ध जल से धोकर सुखा लेते हैं। अब इस स्वच्छ नली को एक स्टैण्ड की सहायता से जल
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -13
से भरे बीकर में इस प्रकार डुबोया जाता है कि केशनली ऊर्ध्वाधर रहे । ऐसा करने पर केशनली में पृष्ठ तनाव के कारण (केशिकत्व) द्रव चढ़ने लगता है। जिस समय द्रव का चढ़ना बन्द हो जाए, केशनली में द्रव स्तम्भ की ऊँचाई चलायमान सूक्ष्मदर्शी की सहायता से नाप ली जाती है। नली की त्रिज्या भी सूक्ष्मदर्शी की सहायता से व्यास ज्ञात करके ज्ञात करते हैं। अब सूत्र में h व r के मान रखकर द्रव का पृष्ठ ज्ञात कर लेते हैं।

प्रायोगिक सावधानियाँ:

  • केशनली, बीकर, पैमाना सब बिल्कुल साफ होने चाहिए। जल भी स्वच्छ होना चाहिए। आसुत जल (distilled water) का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें कुछ-न-कुछ चिकनाई अवश्य मिली रहती है। थोड़ी-सी धूल अथवा चिकनाई पृष्ठ तनाव के मान को काफी बदल देती है।
  • केशनली की आन्तरिक त्रिज्या उसी स्थान पर नापनी चाहिए जहाँ तक द्रव नली में चढ़ा था। इसके लिए नली को उसी स्थान पर तोड़ लेना चाहिए।
  • प्रयोग में समस्त द्रव के ताप को अवश्य लिखना चाहिए क्योंकि पृष्ठ तनाव पर ताप का प्रभाव पड़ता है।
  • केशनली एकदम ऊर्ध्वाधर होनी चाहिए जिससे द्रव (पानी) के स्तम्भ की ऊँचाई ठीक-ठीक नापी जा सके।

प्रश्न 8.
किसी द्रव का क्षेत्रफल बढ़ाने में आवश्यक कार्य का पृष्ठ तनाव से सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव तथा पृष्ठीय ऊर्जा में सम्बन्ध (Relation between Surface Tension and Surface Energy):
माना PQRS एक तार का आयताकार छल्ला है, जिसकी भुजा QR अपने सम्पर्क वाली भुजाओं पर गति करने के लिए स्वतन्त्र है। यदि इस छल्ले में किसी द्रव की कोई फिल्म बनायी जाये तो पृष्ठ तनाव के कारण फिल्म के प्रत्येक भुजा पर अन्दर की ओर बल आरोपित करेगी। भुजा Q, R की लम्बाई यदि $l$ हो तो इस भुजा पर F = 2T. l बल लगेगा। चूँकि फिल्म में दो पृष्ठ होते हैं। अतः तार की प्रति एकांक लम्बाई पर दोनों पृष्ठ एक ही दिशा में T पृष्ठ तनाव बल लगायेंगी। इस प्रकार प्रति एकांक लम्बाई पर 2T बल लगेगा। इस बल F के प्रभाव में भुजा QR अन्दर की ओर गति करने लगेगी। अतः इसे अपने स्थान पर बनाये रखने के लिए इस पर बाहर की ओर इतना ही बल F’ लगाना होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -14
यदि F’ को थोड़ा बढ़ाकर QR भुजा को ∆x विस्थापन देकर Q’R’ स्थिति में पहुँचा दे तो इस क्रिया में पृष्ठ तनाव बल के विरुद्ध कृत कार्य

W =F . ∆x = 2T.l.∆x
W = F.2l.x
W = T.∆A
जहाँ ∆A = 2.l.∆x क्षेत्रफल में प्रभावी वृद्धि
यही कार्य बढ़े हुए पृष्ठ की पृष्ठीय ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगा। अतः पृष्ठीय ऊर्जा
Es = T.∆A
यदि ∆A =1 m² तो Es = T
“अर्थात् किसी द्रव के एकांक क्षेत्र की पृष्ठीय ऊर्जा उसके पृष्ठ तनाव के तुल्य होती है।”
\(\mathrm{T}=\frac{\mathrm{E}_s}{\Delta \mathrm{A}}=\frac{\mathrm{W}}{\Delta \mathrm{A}}\)

T का मात्रक- जूल / मी²
T का विमीय सूत्र- [M1L0T-2]

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 9.
पॉस्कल का नियम लिखिये और इसका सत्यापन कीजिये। इसके आधार पर कार्य करने वाले दो उपकरणों का नाम लिखिये । और उनका वर्णन कीजिये।
उत्तर:
पास्कल का नियम (Pascal’s Law)
इस नियम के अनुसार, “यदि गुरुत्व के प्रभाव को नगण्य मान लें तो किसी द्रव के किसी भाग पर लगाया गया दाब बिना क्षय हुए सम्पूर्ण द्रव में सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित हो जाता है। इसे द्रव के दाब का संचरण नियम भी कहते हैं।”

नोट-इस नियम का प्रतिपादन करने वाले वैज्ञानिक ब्लेज पास्कल थे। ब्लेज पास्कल के नाम पर इस नियम को जाना जाता है पास्कल के सम्मान में दाब का S.I. मात्रक ‘पास्कल’ (Pa) लिया जाता है।

व्युत्पत्ति (Derivation): चित्र में विराम स्थिति के किसी तरल के भीतर कोई अवयव दिखाया गया है यह ABC-DEF एक समकोण प्रिज्म के रूप में है। इस अवयव पर आरोपित बल शेष तरल के कारण हैं। तरल के कारण बल पृष्ठों के अभिलम्बवत् कार्य करते हैं। अवयव के फलकों BEFC, ADFC तथा ADEB पर बल क्रमशः Fa, Fb, Fc तथा दाब क्रमशः Pa, Pb, Pc हैं तथा इन फलकों के क्षेत्रफल क्रमशः Aa, Ab व Ac हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -15
चित्र में प्रदर्शित अवयव (ABC-DEF) अत्यन्त छोटा है ताकि गुरुत्व के प्रभाव की उपेक्षा की जा सके, लेकिन स्पष्टता के दृष्टिकोण से इसे बड़ा दिखाया गया है।
साम्यावस्था में बलों में निम्न सम्बन्ध होंगे-
Fb sin θ = Fc; Fb cos θ = Fa
तथा ज्यामिति से,
Ab sin θ = Ac; Ab cos θ = Aa
अतः भाग देने पर
\(\frac{F_b}{A_b}=\frac{F_c}{A_c}\) तथा \(\frac{F_b}{A_b}=\frac{F_a}{A_a}\)
या Pa = Pc तथा Pb = Pa
या Pa = Pb = Pc
अतः विरामावस्था में द्रव के अन्दर सभी दिशाओं में दाब समान रूप से कार्य करता है। यही पास्कल का नियम है।

प्रश्न 10.
द्रव के भीतर स्थित किसी बिन्दु पर दाब के व्यंजक को ज्ञात कीजिये और सिद्ध कीजिये कि P ∝ h होता है यदि द्रव के मुक्त पृष्ठ पर वायुमण्डलीय दाब Po हो तो द्रव के मुक्त पृष्ठ से / गहराई पर कुल दाब ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
दाब (Pressure):
किसी क्षेत्रफल पर लगने वाले बल का प्रभाव क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। क्षेत्रफल बदल जाने पर बल का प्रभाव भिन्न हो जाता है। उदाहरण के लिए यदि सुई पर थोड़ा भी बल लगाया जाये तो वह हमारी त्वचा में धँस जाती है जबकि चम्मच पर अधिक बल लगाने पर भी वह त्वचा में नर्ही धँसती है। इन दोनों घटनाओं में अन्तर क्षेत्रफल के कारण है। सुई की नोंक का सम्पर्क क्षेत्रफल अति अल्प जबकि चम्मच का सम्पर्क क्षेत्रफल अधिक होता है। स्पष्ट है क्षेत्रफल बढ़ाने पर बल का प्रभाव कम हो जाता है।

इन अनुभवों से स्पष्ट है कि बल के साथ-साथ वह क्षेत्रफल भी महत्त्वपूर्ण होता है जिस पर बल कार्य करता है। जब कोई पिण्ड किसी तरल में डूबा रहता है तो तरल द्वारा इस पिण्ड पर उसके पृष्ठ के लम्बवत् बल आरोपित किया जाता है। “एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित बल को दाब कहते हैं।” यदि पृष्ठ का क्षेत्रफल A एवं इस पर आरोपित अभिलम्बवत् बल F हो तो दाब
\(P=\frac{F}{A}\).
सैद्धान्तिक रूप में पिण्ड के क्षेत्रफल को अत्यन्त सूक्ष्म ले सकते है। तब
\(\mathrm{P}=\lim _{\Delta \mathrm{A} \rightarrow 0} \frac{\Delta \mathrm{F}}{\Delta \mathrm{A}}=\frac{d \mathrm{~F}}{d \mathrm{~A}}\)
यदि समान परिमाण का बल भिन्न-भिन्न क्षेत्रफलों के पृष्ठ पर आरोपित किया जाये तो कम क्षेत्रफल वाले पृष्ठ पर कार्यरत दाब अधिक होगा। दाब एक अदिश राशि है।
मात्रक एवं विमीय सूत्र
मात्रक- MKS मात्रक न्यूटन / मी² \left(N-m-2) या पॉस्कल CGS मात्रक- डाइन/सेमी²
दाब के अन्य मात्रक-
(i) वायुमण्डलीय दाब: 76 सेमी पारा स्तम्भ का दाबं 1 वायुमण्डलीय दाब (1 atm दाब) कहलाता है।
1 वायुमण्डलीय दाब = 0.76 × 13.6 × 103 × 9.8
& =1.013 × 105 N-m-2

(ii) बार-मौसम विज्ञान में दाब को बार या मिलीबार में व्यक्त
1 बार (bar)=105 Pa
विमीय सूत्र – [M1L-1T-2]

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 11.
पानी की बड़ी बूँद को छोटी बूंदों में फुहारने पर पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
जल की एक बड़ी बूँद को m छोटी बूँदों में फुहारने पर पृष्ठीय ऊर्जा में वृद्धि (Increase in Surface Energy on Spraying a Big Water Drop):
पानी की बड़ी बूँद को छोटी बूँदों में फुहारने पर पृष्ठ क्षेत्रफल का मान बढ़ता है, अतः पृष्ठ ऊर्जा में वृद्धि होती है। लेकिन इस कार्य में आन्तरिक ऊर्जा में कमी होती है। अतः ताप गिरने से ठण्डक उत्पन्न होती है जिसे हम दैनिक जीवन में फब्वारे के नीचे नहते समय अनुभव करते हैं।
माना R त्रिज्या की एक बड़ी बूँद है जिसे r त्रिज्या की n छोटी समान बूँदों में फुहारा जाता है। इस क्रिया में आयतन नियत रहता है। अत:
बड़ी बूँद का आयतन = n × छोटी बूँदों का आयतन
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 10 तरलों के यांत्रिकी गुण -16

प्रश्न 12.
गोलीय बूंद के लिए दाब आधिक्य Pex = \(\frac{2T}{R}\) का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
पृष्ठीय ऊर्जा (Surface Energy):
यदि किसी द्रव के पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ाया जाये तो कुछ अणु द्रव के अन्दर से द्रव के पृष्ठ पर आ जाते हैं। इन अणुओं को द्रव के पृष्ठ के ठीक नीचें वाले अणुओं के आकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यही कार्य नये पृष्ठ में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। इस प्रकार द्रव के पृष्ठ पर स्थित अणुओं के पास कुछ अतिरिक्त ऊर्जा को ही पृष्ठ ऊर्जा कहते हैं।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक व्यक्ति का भार 60 kg है तथा उसके प्रत्येक पैर का क्षेत्रफल 30 cm है। बताइए व्यक्ति द्वारा पृथ्वी पर कितना दाब डाला जायेगा यदि (i) वह एक पैर पर खड़ा है, (ii) दोनों पैरों पर खड़ा है।
उत्तर:
(i) 19.6 × 104 N/m²
(ii) 9.8 × 104 N/m²

प्रश्न 2.
एक बेलनाकार जार के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 50 cm² है। यह 20 cm ऊँचाई तक जल से भरा हुआ है। इसके पिस्टन का द्रव्यमान नगण्य है। जब इसके पिस्टन पर 1 kg द्रव्यमान रखा जाता है तो जार की तली में दाब की गणना कीजिए। वायुमण्डलीय दाब को नगण्य मानिए।
उत्तर:
3.92 × 10³ N/m²

आर्किमिडीज के सिद्धान्त पर आधारित

प्रश्न 3.
एक ठोस गेंद जिसका घनत्व जल के घनत्व का आधा है, 19.6m की ऊँचाई से गुरुत्वीय क्षेत्र में स्वतन्त्रता पूर्वक गिरकर जल के अन्दर प्रवेश करती है गेंद जल में कितनी गहराई तक जायेगी ? जल की सतह पर फिर दुबारा आने में इसे कितना समय लगेगा ? (g = 9.8 m/sec²) जल की श्यानता तथा वायु के अवरोध को नगण्य मान लीजिए।
उत्तर:
19.6 m, 4 sec

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 4.
समुद्र में एक हिम शैल स्थित है, (i) जल की सतह के नीचे हिम शैल का प्रभाग ज्ञात कीजिए, (ii) जल की सतह के ऊपर हिम शैल का प्रभाग ज्ञात कीजिए। दिया है, बर्फ का घनत्व = 917 kg/m³ और समुद्री जल का घनत्व 1.024 × 103 kg/m³
उत्तर:
(i) 89.7% (ii) 10.3%

प्रश्न 5.
अन्दर से खोखली एक ताँबे की गेंद का वायु में धार 264 ग्राम तथा जल में डुबाने पर भार 221 ग्राम है यदि ताँबे का घनत्व 8.8 ग्राम / सेमी हो, तो गेंद के खोखले भाग का आयतन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
13 सेमी³

श्यानता पर आधारित

प्रश्न 6.
10 cm × 10 cm की एक समतल प्लेट तथा बड़ी प्लेट के बीच 1 mm मोटी ग्लिसरीन की तह है। यदि ग्लिसरीन का श्यानता गुणांक 1.0 kg/m sec हो, तो प्लेट को 10 cm/sec के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए।
उत्तर:
1.0 न्यूटन

प्रश्न 7.
100 cm² क्षेत्रफल की एक समतल प्लेट तथा एक बड़ी प्लेट के बीच ग्लिसरीन की 1.0mm मोटी तह है, यदि ग्लिसरीन का श्यानता गुणांक 1.0 kg/m sec हो, तो प्लेट को 7.0 cm/sec के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए।
उत्तर:
0.70 न्यूटन

प्रश्न 8.
5 cm² क्षेत्रफल की एक चौरस प्लेट तथा एक बड़ी प्लेट के बीच ग्लिसरीन की 1 mm मोटी पर्त है यदि ग्लिसरीन का n = 10 प्वॉइज हो तो प्लेट को 7 cm/see के वेग से चलाने के लिए कितना बल चाहिए ?
उत्तर:
0.035 न्यूटन

प्रश्न 9.
पानी की दो समान्तर परतों में आपेक्षिक वेग 18.0 cms-1 है। यदि परतों के बीच की लम्बवत् दूरी 0.1 cm हो तो वेग प्रवणता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
180 s-1

सीमान्त वेग पर आधारित

प्रश्न 10.
जल की एक बूँद का व्यास 0.003 mm है। यह वायु से गिर रही है, बूंद का सीमान्त वेग ज्ञात कीजिए।
वायु का श्यानता गुणांक 1.8 × 10-5 kg/m see वायु का घनत्व उपेक्षणीय है।
उत्तर:
2.72 × 10 m/sec

प्रश्न 11.
यदि बूँद का अन्तिम वेग 12 cm/sec हो तो वायु में गिरती हुई पानी की बूंदों की त्रिज्या ज्ञात कीजिए, वायु की श्यानता 1.8× 10-4 वॉइज है तथा वायु का घनत्व 1.21 × 10-3 ग्राम / सेमी है।
उत्तर:
3.15 × 10³ cm

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

प्रश्न 12.
समान त्रिज्या की दो बूँदें वायु में गिर रही हैं। उनके क्रान्तिक वेग 10 cm/sec हैं। यदि बूँदें संयुक्त हो जाए तो क्रान्तिक वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
15.9 cm / sec

प्रश्न 13.
तेल की एक बूंद का वायु में सीमान्त वेग 5.0 × 10-4 m/sec है। बूँद की त्रिज्या क्या है ? यदि ऐसी ही दो बूँदें परस्पर मिल जायें तो परिणामी बूँद का सीमान्त वेग कितना होगा ? तेल का श्यानता गुणांक 1.8 × 10-3 kg/m-sec तथा घनत्व 9 × 10² kg/m² है। वायु का घनत्व तेल के सापेक्ष नगण्य है तथा (2)2/3 = 1.59, g = 9.8 m/sec²
उत्तर:
2.14 × 10-5m, 7.95 × 10-4 m / sec

अविरतता के समीकरण पर आधारित

प्रश्न 14.
8 × 10-3 m आन्तरिक व्यास वाली एक टोंटी से पानी सततः 4 × 10-1 m/sec के प्रारम्भिक वेग से बह रहा है। टोंटी के नीचे 2 × 10-1 m की दूरी पर पानी की धारा के व्यास की गणना कीजिए।
उत्तर:
3.56 × 10 m

प्रश्न 15.
हौज पाइप जिसका आन्तरिक व्यास 2.1 cm है, से जल 1.1m/sec की चाल से प्रवाहित हो रहा है नोजल का व्यास क्या होना चाहिए यदि इससे जल 4 m/sec की चाल से निकल रहा है ?
उत्तर:
1.1 cm

प्रश्न 16.
एक क्षैतिज पाइप लाइन के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल असमान है। इसमें जल 0.2m³/sec की दर से प्रवाहित हो रहा है उस बिन्दु पर जल के वेग की गणना कीजिए जहाँ पाइप के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 0.02 m² हो ।
उत्तर:
10 m/sec

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

बरनौली के प्रमेय तथा इसके अनुप्रयोगों (वेन्दुरीमीटर तथा बहिःस्राव वेग) पर आधारित

प्रश्न 17.
4 × 104 न्यूटन /मी दाब का जल 2 मीटर / सेकण्ड वेग से 0.02 मीटर² अनुप्रस्थ-परिच्छेद के पाइप से प्रवाहित होता है जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद घटकर 0.01 मी हो जाता है। पाइप के छोटे अनुप्रस्थ- परिच्छेद में कितना दाब है ?
उत्तर:
3.4 × 104 न्यूटन / मी²

प्रश्न 18.
हृदय से रुधिर को सिरे के शीर्ष (ऊर्ध्वाधर दूरी = 50 cm) तक पहुँचाने के लिए आवश्यक न्यूनतम दाब की गणना कीजिए। रुधिर का घनत्व 1.04 ग्रा. सेमी-3 है। घर्षण नगण्य है।
उत्तर:
5.096 × 104 डाइन / सेमी²

प्रश्न 19.
एक क्षैतिज पाइप जिसमें जल बह रहा है, उसके दो बिन्दुओं पर जल के दावों का अन्तर 1.4 cm पारे के स्तम्भ के बराबर है, यदि असमान परिच्छेद के कारण अधिक परिच्छेद वाले बिन्दु पर जल की चाल 60 cm/sec है, तो दूसरे बिन्दु पर जल की चाल की गणना कीजिए पारे का घनत्व 13.6 × 10 kg/m. तथा g = 9.8N/kg.
उत्तर:
2.02 m/sec

प्रश्न 20.
एक क्षैतिज नली के दो बिन्दुओं A व B पर अनुप्रस्थ क्षेत्रफल भिन्न-भिन्न हैं। A पर व्यास 4 cm तथा B पर 2 cm है। A तथा B पर दो मैनोमीटर भुजाएँ लगी हैं। जब 0.8 ग्राम / सेमी घनत्व का द्रव नली में से होकर बहता है तो मैनोमीटर की भुजाओं के बीच दावान्तर 8 cm है। नली में बहने वाले द्रव के प्रवाह की दर की गणना कीजिए। (g = 980 cm/sec²)
उत्तर:
406 cm³/sec

प्रश्न 21.
एक क्षैतिज सिरिंज में, जमीन से 1.25m की ऊँचाई पर, जल भरा है। प्लंजर का व्यास 8 mm एवं नोजिल का व्यास 2 mm है। प्लंजर को एक नियत चाल 0.25 m/sec से दबाया जाता है। जमीन पर सिरिंज से निकलने वाली जल धारा का क्षैतिज परास ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/sec²)
उत्तर:
2m

प्रश्न 22.
35m ऊँचाई तक भरे जल की एक टंकी में जल पृष्ठ से 7m नीचे टंकी की दीवार में 1 cm त्रिज्या का एक छेद है। ज्ञात कीजिए – (i) बहि:स्राव वेग, (ii) छेद से जल प्रवाह की दर, (iii) जल का परास, (iv) जल पृष्ठ से वह गहराई जहाँ टंकी में छेद करने पर परास का मान वही हो जो 7m गहराई पर है, (v) वह गहराई जहाँ छेद पर परास का मान अधिकतम हो, (vi) अधिकतम परास ।
उत्तर:
(i) 11.7m/sec.
(ii) 3.67 10m / sec
(iii) 28 m.
(iv) 28 m
(v) 17.5 m
(vi) 35 m

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प्वाइजली सूत्र पर आधारित

प्रश्न 23.
एक केशिकानली का व्यास 1 mm व लम्बाई 15 cm है। इसे एक क्षैतिज विधि से किसी पात्र से जोड़ दिया जाता है जो ऐल्कोहॉल से भरा हुआ है जिसका घनत्व 0.8 ग्राम/सेमी³ है। केशिकानली के केन्द्र की गहराई ऐल्कोहॉल के मुक्त पृष्ठ से 25 cm नीचे है। यदि ऐल्कोहॉल की श्यानता 0.12 प्वॉइज हो तो 5 min में बहने वाले द्रव की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
6,408 ग्राम

पृष्ठ तनाव तथा पृष्ठीय ऊर्जा पर आधारित

प्रश्न 24.
एक पतला तार 3.0 cm व्यास की रिंग के रूप में मोड़ा गया है। इस रिंग को साबुन के घोल में क्षैतिज स्थिति में रखकर, धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है रिंग व घोल के बीच बनी फिल्म को तोड़ने के लिए कितना उपरिमुखी (upward) बल चाहिए ? साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव = 3.0 × 10-2 N/m
उत्तर:
5.652 × 10-3 N

प्रश्न 25.
जल की R त्रिज्या की एक बड़ी बूँद को 8000 समान आयतन की छोटी बूँदों में विभाजित करने में 5.582 πR² जूल कार्य करना पड़ता है जल का पृष्ठ तनाव ज्ञात कीजिए
उत्तर:
7.3 × 10-2 N/m

प्रश्न 26.
दो सीधे 10 cm लम्बाई वाले समान्तर तारों के बीच जो 0.5 cm दूर हैं, जल की एक फिल्म बनाई जाती है। यदि तारों के बीच की दूरी 1 mm बढ़ाई जाये, तो कितना कार्य करना पड़ेगा ? जल का पृष्ठ तनाव 72 × 10-3 N/m
उत्तर:
1.44 × 10-5 जूल

प्रश्न 27.
जल की 1000 छोटी बूँदों को जिनमें से प्रत्येक की त्रिज्या 10-7 m है, आपस में मिलाकर एक बुड़ी बूँद बनाने पर मुक्त ऊर्जा ज्ञात कीजिए। जल का पृष्ठ तनाव 7 × 10-2 N/m.
उत्तर:
7,92 × 10-12 Joule

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 9 ठोसों के यांत्रिक गुण

दाब आधिक्य तथा केशिकत्व पर आधारित

प्रश्न 28.
साबुन के दो बुलबुलों की त्रिज्याएँ क्रमश: 0.5 cm व 1.0 cm है। इनके अन्दर दाबों का अन्तर 14 N/m² है। साबुन के घोल का पृष्ठ तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.035 N/m

प्रश्न 29.
1 mm व्यास की काँच की केशनली पारा भरे बीकर में ऊर्ध्वाधर खड़ी की जाती है। केशनली का निचला सिरा बीकर में पारे के पृष्ठ से 1 coin नीचे है। केशनली के निचले सिरे पर वायु का अर्द्धगोलीय बुलबुला . बनाने के लिए केशनली में वायु का गेज दाब क्या होना चाहिए ? पारे का पृष्ठ तनाव (0.465 N/m, तथा बुलबुले का व्यास केशनली के व्यास के बराबर मान लें।
उत्तर:
3193 N/m²

प्रश्न 30.
पारे के एक बैरोमीटर की नली का व्यास 3 mm है। पृष्ठ तनाव के कारण पाठ में क्या त्रुटि आयेगी ? स्पर्श कोण = 135° पारे का घनत्व = 13.5 × 10³ kg/m³ H T = 465 × 10-3 N/m.
उत्तर:
3.3 mm गिर जायेगा

प्रश्न 31.
एक U-नली की दोनों ऊर्ध्वाधर नलियों के व्यास क्रमश: 5.0 mm तथा 2.0 mm है। इसमें जल भरा है, नलियों में जल स्तम्भ की ऊँचाइयों में कितना अन्तर है ? जल का पृष्ठ तनाव = 7.3 × 10-2 N/ml
उत्तर:
8.94 mm

प्रश्न 32.
एक केशनली की लम्बाई 0.10 m है, जब इसे ऊर्ध्वाधर स्थिति में जल में रखा जाता है तो जल 0.06 m ऊँचाई तक चढ़ जाता है। यदि केशनली को ऊर्ध्वाधर स्थिति में 30° पर झुका दिया जाये तो केशनली में जल-स्तम्भ की लम्बाई क्या होगी ? यदि केशनली को बीचों-बीच से काट दिया जाये, तो केशनली में जल के पृष्ठ की स्थिति क्या होगी ? क्या जल फब्बारे के रूप में निकलने लगेगा ?
उत्तर:
6.94 cm, 0.05 m, जल पृष्ठ की वक्रता कम हो जायेगी।

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions )

प्रश्न 1.
ध्वनि तीव्रतम चलती है-
(a) वायु में
(b) जल में
(c) निर्वात में
(d) स्टील में
उत्तर:
(d) स्टील में

प्रश्न 2.
न्यूटन द्वारा दिये गये ध्वनि की चाल के सूत्र में लाप्लास संशोधन की आवश्यकता पड़ी क्योंकि गैस में ध्वनि तरंगें-
(a) अनुदैर्घ्य हैं
(b) समतापीय रूप में चलती हैं।
(c) रुद्धोष्म रूप में चलती हैं।
(d) अधिक तरंगदैर्घ्य की हैं।
उत्तर:
(c) रुद्धोष्म रूप में चलती हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 3.
समान ताप पर गैस में ध्वनि की चाल अधिकतम होगी-
(a) H में
(b) N में
(c) O में
(d) सभी में बराबर ।
उत्तर:
(a) H में

प्रश्न 4.
ध्वनि की चाल निर्भर नहीं करती है-
(a) आर्द्रता पर
(b) ताप पर
(c) दाब पर
(d) इनमें से किसी पर नहीं।
उत्तर:
(c) दाब पर

प्रश्न 5.
एक तनी हुई डोरी का तनाव बढ़ाकर चार गुना कर देने पर उसमें अनुप्रस्थ तरंग की चाल हो जाएगी-
(a) चार गुनी
(b) आठ गुनी
(c) दो गुनी
(d) आधी
उत्तर:
(c) दो गुनी

प्रश्न 6.
किसी गैस में उत्पन्न ध्वनि तरंगें होती हैं-
(a) अनुप्रस्थ
(b) अनुदैर्घ्य
(c) अप्रगामी
(d) विद्युत् चुम्बकीय।
उत्तर:
(b) अनुदैर्घ्य

प्रश्न 7.
सितार के तार में किस प्रकार के कम्पन्न उत्पन्न होते हैं-
(a) प्रगामी अनुप्रस्थ
(b) प्रगामी अनुदैर्घ्य
(c) अप्रगामी अनुप्रस्थ
(d) अप्रगामी अनुदैर्घ्य
उत्तर:
(c) अप्रगामी अनुप्रस्थ

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प्रश्न 8.
श्रोता, किस वेग से ध्वनि स्रोत की ओर चले कि उसकी आभासी आवृत्ति दुगुनी हो जाये, ध्वनि का वेग है-
(a) v
(b) v/2
(c) 2v
(d) 3v
उत्तर:
(a) v

प्रश्न 9.
अप्रगामी तरंगों में प्रस्पन्दों पर घनत्व –
(a) अधिकतम
(b) न्यूनतम
(c) अधिकतम परावर्तन
(d) न्यूनतम परिवर्तन।
उत्तर:
(d) न्यूनतम परिवर्तन।

प्रश्न 10.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग का वेग निर्भर नहीं करता है-
(a) घनत्व
(b) त्रिज्या
(c) तनाव
(d) लम्बाई
उत्तर:
(d) लम्बाई

प्रश्न 11.
ध्वनि की चाल किसमें अधिकतम होगी-
(a) पानी में
(b) लोहे में
(c) हवा में
(d) निर्वात में
उत्तर:
(d) निर्वात में

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प्रश्न 12.
जब ताप बढ़ता है तो आर्गन पाइप की आवृत्ति
(a) घट जाती है
(b) बढ़ जाती है
(c) स्थिर रहती है
(d) शून्य हो जाती है।
उत्तर:
(b) बढ़ जाती है

प्रश्न 13.
डॉप्लर प्रभाव लागू नहीं होता है-
(a) श्रव्य तरंगों के लिये
(b) पराश्रव्य तरंगों के लिए
(c) विद्युत चुम्बकीय तरंगों के लिए
(d) प्रघाती तरंगों के लिए।
उत्तर:
(d) प्रघाती तरंगों के लिए।

प्रश्न 14.
जब किसी स्वरित्र को कम्पित किया जाता है तो इसकी दोनों भुजाओं के कम्पनों में कलान्तर-
(a) शून्य
(b) π
(c) \(\frac{π}{2}\)
(d) \(\frac{π}{4}\)
उत्तर:
(b) π

प्रश्न 15.
एक 4 मीटर लम्बा तार अपने सिरे पर लगे 300 Hz के कम्पित के द्वारा कम्पनशील है तार चार खण्डों में कम्पन कर रहा है। तार में अनुप्रस्थ तरंगों की चाल है-
(a) 150 ms-1
(b) 300 ms-1
(c) 600 ms-1
(d) 200 ms-1
उत्तर:
(c) 600 ms-1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 16.
l तथा 2l लम्बाइयों वाले एक ही पदार्थ के बने समान त्रिज्या के दो तार क्रमशः 100 Hz तथा 150 Hz आवृत्ति के कम्पन करते हैं, उन पर लगे तनावों का अनुपात है-
(a) 1:9
(b) 3:2
(c) 2:3
(d) 1:3
उत्तर:
(a) 1:9

प्रश्न 17.
450 हर्ट्ज की ध्वनि देने वाली एक सीटी एक स्थिर श्रोता की ओर 33 मी/से की चाल से आ रही है। वायु में ध्वनि की चाल 330 मी/से है श्रोता द्वारा सुनी गई आवृत्ति हज में है-
(a) 409
(b) 429
(c) 517
(d) 500
उत्तर:
(c) 517

प्रश्न 18.
ध्वनि के डॉप्लर प्रभाव लागू होने की प्रमुख शर्त है-
(a) vs > v
(b) vs = v
(c) vs < V
(d) vs = ∞
उत्तर:
(b) vs = v

प्रश्न 19.
यदि आवृत्ति का ध्वनि स्रोत किसी स्थिर श्रोता से दूर v वेग से जा रहा हो तो श्रोता को सुनाई पड़ने वाली आवृत्ति होगी-
(a) \(\text { n. } \frac{\left(v-v_s\right)}{v}\)
(b) \(\text { n. } \frac{\left(v+v_s\right)}{2}\)
(c) \(\text { n. } \frac{\left(v-v_s\right)}{2}\)
(d) \(\text { n. } \frac{v}{\left(v+v_s\right)}\)
उत्तर:
(d) \(\text { n. } \frac{v}{\left(v+v_s\right)}\)

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प्रश्न 20.
एक गतिमान ध्वनि स्रोत के पीछे खड़े एक स्थिर श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति सुनाई देगी-
(a) मूल आवृत्ति से अधिक
(b) मूल आवृत्ति के बराबर
(c) मूल आवृत्ति से कम
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) मूल आवृत्ति से कम

प्रश्न 21.
एक स्थिर ध्वनि खोत की ओर एक श्रोता एकसमान वेग से गति कर रहा है। श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति के सापेक्ष होगी-
(a) कम
(b) अधिक
(c) समान
(d) कुछ भी हो सकती है।
उत्तर:
(b) अधिक

प्रश्न 22.
एक तारा पृथ्वी से दूर जा रहा है पृथ्वी पर प्रेक्षक को तारे की तरंगदैर्घ्य प्रतीत होगी-
(a) घटी हुई
(b) बढ़ी हुई
(c) अपरिवर्तित
(d) गिरती हुई।
उत्तर:
(d) गिरती हुई।

प्रश्न 23.
यदि आवृत्ति का एक ध्वनि स्रोत v/4 वेग से प्रेक्षक की तरफ गति करे तथा प्रेक्षक v/5 वेग से स्रोत की ओर गति करे तो आभासी आवृत्ति होगी-
(a) \(\frac{5}{8}\) n
(b) \(\frac{8}{5}\) n
(c) \(\frac{7}{5}\) n
(d) \(\frac{5}{7}\) n
उत्तर:
(b) \(\frac{8}{5}\) n

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
किसी गैस में ध्वनि की चाल का न्यूटन का सूत्र लिखिए। प्रयुक्त संकेतों के अर्थ बताइए ।
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{P}{d}}\) जहाँ P→ दाब, d → घनत्व

प्रश्न 2.
रेल की पटरी पर एक व्यक्ति चोट मारकर ध्वनि उत्पन्न करता है। इस स्थान से 1.0 किमी की दूरी पर कान लगाकर बैठे एक दूसरे व्यक्ति को दो ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। कारण बताइए।
उत्तर:
एक ध्वनि तरंग वायु में संचरित होकर तथा दूसरी ध्वनि तरंग रेल की पटरी से होकर श्रोता के कानों तक पहुँचती है। इसलिए दो ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।

प्रश्न 3.
किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता गुणांक E तथा घनत्व पर निर्भर करती है। ध्वनि की चाल का सूत्र E तथा d के पदों में लिखिए ।
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{E}{d}}\)

प्रश्न 4.
वायु का ताप 1°C बढ़ाने पर उसमें ध्वनि का वेग कितना बढ़ जाता है?
उत्तर:
वायु का ताप 1°C पर बढ़ाने से वायु में ध्वनि की चाल का मान 0.61 मी/सेकण्ड बढ़ जाता है।

प्रश्न 5.
तरंग गति में किसका स्थानान्तरण होता है ?
उत्तर:
तरंग गति में माध्यम के कम्पित कणों द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है।

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प्रश्न 6.
एक तनी हुई डोरी की लम्बाई दुगुनी तथा तनाव चार गुना कर दें तो नई आवृत्ति व पूर्व आवृत्ति में क्या सम्बन्ध होगा ?
उत्तर:
n1 = \(\frac{1}{2l} \sqrt{\frac{T}{m}}\) तथा n2 = \(\frac{1}{2 \times 2 l} \sqrt{\frac{4 \mathrm{~T}}{m}}=\frac{2}{2} \times \frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{T}}{m}}\)
या n2 = n1

प्रश्न 7.
कोणीय आवृत्ति, कोणीय तरंग संख्या तथा तरंग वेग में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
ω = 2πn ⇒ n = \(\frac{ω}{2π}\)
संचरण वेग k = \(\frac{2π}{λ}\) ⇒ λ = \(\frac{2π}{k}\)
तरंग वेग v = nλ = \(\frac{ω}{2π} \times \frac{2π}{k}\)
या v = \(\frac{ω}{k}\)

प्रश्न 8.
माध्यम के किसी कण द्वारा एक सेकण्ड में किये गये कम्पनों की संख्या को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
आवृत्ति ।

प्रश्न 9.
एक कम्पन करने में लिया गया समय क्या कहलाता है?
उत्तर:
आवर्तकाल ।

प्रश्न 10.
तरंग वेग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
तरंग वेग v = nλ, जहाँ n = आवृत्ति λ = तरंगदैर्घ्य है।

प्रश्न 11.
वायु में मानक ताप व दाब पर ध्वनि का वेग कितना होता है ?
उत्तर:
मानक ताप व दाब पर वायु में ध्वनि का वेग = 332 ms-1.

प्रश्न 12.
किसी तरंग का आयाम यदि आधा कर दिया जाये तो उसकी तीव्रता में क्या परिवर्तन आएगा ?
उत्तर:
तरंग की तीव्रता I ∝ (आयाम)²
या I ∝ a² या I = ka²
जब आयाम = \(\frac{a}{2}\) तीव्रता
I’ ∝ \(\frac{a^2}{2}\) या I’ = \(\frac{1}{4}\) ka² = \(\frac{1}{4}\)
I’ = \(\frac{I}{4}\) अर्थात् तीव्रता पहले की चौथाई रह जायेगी।
∴ \(\frac{P}{d}=\frac{RT}{M}\) = नियतांक |

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प्रश्न 13.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल की सूत्र लिखिए ।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
जहाँ T डोरी का तनाव एवं m = डोरी की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान ।

प्रश्न 14.
एक पूर्णतः दृढ़ छड़ में ध्वनि का वेग कितना होता है ?
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{Y}{d}}\) जहाँ Y = यंग प्रत्यास्थता गुणांक
तथा d = छड़ कर घनत्व ।

प्रश्न 15.
स्थिर ताप पर वायु का दाब चार गुना कर देने पर वायु में ध्वनि की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
कोई प्रभाव नहीं क्योंकि v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\) जिसमें दाब नहीं है।

प्रश्न 16.
ध्वनि तरंगों तथा ऊष्मीय तरंगों में क्या अन्तर है ?
उत्तर;
ध्वनि तरंगें यांत्रिक तरंगें’ हैं जबकि ऊष्मीय तरंगें ‘विद्युत् चुम्बकीय तरंगें’ हैं।

प्रश्न 17.
गैस, द्रव एवं ठोस माध्यमों में ध्वनि की चाल किसमें सबसे अधिक होगी ?
उत्तर:
ठोस माध्यम में; क्योंकि ठोसों के लिए v = \(\sqrt{\frac{Y}{d}}\) और Y का मान सबसे अधिक होता है।

प्रश्न 18.
किसी गैस के अणुओं की वर्गमाध्य मूल चाल ” एवं उसी में ध्वनि की चाल के मध्य क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
\(\frac{v}{v_{r m s}}=\frac{\sqrt{\frac{\gamma \mathrm{RT}}{\mathrm{M}}}}{\sqrt{\frac{3 \mathrm{RT}}{\mathrm{M}}}}=\sqrt{\frac{\gamma}{3}}\)
∴ \(v=v_{r m s} \cdot \sqrt{\frac{\gamma}{3}}\)

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प्रश्न 19.
समान लम्बाई की रबर तथा स्टील की दो डोरियों में एक सिरे पर ध्वनि उत्पन्न की जाये तो किस डोरी से दूसरे सिरे पर ध्वनि खुले पहुँचेगी ?
उत्तर:
स्टील की डोरी में।

प्रश्न 20.
किसी बिन्दु पर तरंग की तीव्रता और उसके आयाम तथा आवृत्ति में क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर:
I = 2π²n²a²ρv
जहाँ I = तरंग की तीव्रता; n = आवत्ति; a = आयाम; ρ = माध्यम का घनत्व; v = तरंग की चाल ।

प्रश्न 21.
किसी प्रगामी तरंग का समीकरण y(x,t) = A sin (ωt – kx) है। इसका वेग कितना होगा ?
उत्तर:
दिया है-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -1

प्रश्न 22.
कम्पन्न करते हुए किसी कण के कलान्तर तथा पथान्तर के बीच सम्बन्ध का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
पथान्तर के कारण कलान्तर
∆ϕ = \(\frac{2π}{λ}\) × ∆x
जहाँ ∆x = पथान्तर ।

प्रश्न 23.
समतल प्रगामी तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
X- अक्ष की धनात्मक दिशा में प्रगामी तरंग का समीकरण
y = asin \(\frac{2π}{λ}\) (vt – x)
जहाँ a = आयाम; λ = तरंगदैर्घ्य; v = तरंग वेग

प्रश्न 24.
कलान्तर एवं समयान्तर में सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
∆ϕ = \(\frac{2π}{λ}\) × ∆t
जहाँ T = आवर्तकाल; ∆t = समयान्तर।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 25.
गैसों में उत्पन्न तरंगें किस प्रकार की होती हैं ?
उत्तर:
अनुदैर्घ्य तरंगें।

प्रश्न 26.
क्या द्रवों में अनुप्रस्थ तरंगें सम्भव हैं ?
उत्तर:
हीं; केवल द्रव के तल पर ।

प्रश्न 27.
गैसों में अनुप्रस्थ तरंगें क्यों उत्पन्न नहीं की जा सकती हैं ?
उत्तर:
क्योंकि गैसों में दृढ़ता नहीं होती है।

प्रश्न 28.
एक समतल प्रगामी तरंग का आयाम A मीटर, v वेग मीटर / सेकण्ड तथा आवृत्ति vHz है। इस तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
y = A sin2π (t – \(\frac{x}{t}\))

प्रश्न 29.
किस माध्यम से परावर्तित होने पर परावर्तित तरंग की कला परिवर्तित हो जाती है ?
उत्तर:
जब तरंग सघन माध्यम से परावर्तित होती है तो तरंग की कला में का परिवर्तन हो जाता है।

प्रश्न 30.
400 व 402 आवृत्ति के स्वरित्र एक साथ कम्पित कराने पर विस्पन्द की आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर:
विस्पन्द आवृत्ति n = n1 ~ n2 = 400 ~ 402
या n = 2 विस्पन्द / सेकण्ड ।

प्रश्न 31.
समान लम्बाई के खुले व बन्द ऑर्गन पाइपों की मूल आवृत्तियों का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर- खुले पाइप की मूल आवृत्ति n = \(\frac{v}{2l}\)
बन्द पाइप की मूल आवृत्ति n’ = \(\frac{v}{4l}\)
या n’ = \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{v}{2l}\) = \(\frac{1}{2}\)n
∴ \(\frac{n^{\prime}}{n}=\frac{1}{2}\) या \(\frac{n}{n^{\prime}}=\frac{2}{1}\)
∴ n : n’ = 2 : 1

प्रश्न 32.
खुले या बन्द ऑर्गन पाइप में से किसमें केवल विषम सनादी ही उत्पन्न हो सकती है ?
उत्तर:
बन्द आर्गन पाइप में।

प्रश्न 33.
माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
आयाम।

प्रश्न 34.
क्या अप्रगामी तरंगों के माध्यम से ऊर्जा स्थानान्तरण होता है ?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 35.
अनुनादित वायु स्तम्भ में कौन-सी तरंगें उत्पन्न होती हैं ?
उत्तर;
अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें ।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 36.
एक प्रस्पन्द व उसके क्रमिक निस्पन्द के मध्य कितनी दूरी होती है?
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -2
उत्तर:
एक प्रस्पन्द व उसके क्रमिक निस्पन्द के मध्य दूरी = \(\frac{λ}{4}\)

प्रश्न 37.
ध्वनि के वेग पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
v ∝ √T अर्थात् ताप बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ जाता है। ताप के साथ परिवर्तन निम्न सूत्र से प्राप्त होता है-
vt = vo + 0.61t

प्रश्न 38.
कहा जाता है कि ध्वनि कम्पनों के कारण उत्पन्न होती है फिर सरल लोलक दोलनों की ध्वनि क्यों नहीं सुनाई देती है ?
उत्तर:
दोलनों की आवृत्ति कम (अपश्रव्य क्षेत्र में) होने के कारण सरल लोलक के दोलनों की ध्वनि सुनाई नहीं देती है।

प्रश्न 39.
अप्रगामी तरंगें बनने के लिए क्या बद्ध माध्यम होना आवश्यक है ?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 40.
अपग्रामी तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
y = 2a sin(\(\frac{2πx}{λ}\) cos (2πnt)
जहाँ a = अध्यारोपण करने वाली तरंगों के आयाम; λ = तरंगदैर्घ्य; n = आवृत्ति ।

प्रश्न 41.
आर्द्रता बढ़ने पर ऑर्गन पाइप से उत्पन्न स्वर की आवृत्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
आर्द्रता बढ़ने से वायु में ध्वनि का वेग बढ़ जाता है अतः पाइप की आवृत्ति बढ़ जाती है।

प्रश्न 42.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की मूल आवृत्ति का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
n = \(\frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{T}{m}}\), जहाँ T = डोरी का तनाव l = डोरी की लम्बाई तथा m = डोरी की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान ।

प्रश्न 43.
अप्रगामी तरंग में किसी निस्पन्द एवं उसके तुरन्त बाद वाले प्रस्पन्द के बीच कितना कलान्तर होता है ?
उत्तर:
π/2

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 44.
सोनोमीटर से किसी स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात करने के लिए सूत्र लिखिए।
उत्तर:
\(\frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{Mg}}{\pi r^2 \cdot d}}\)
जहाँ l = तार की लम्बाई; M = सोनोमीटर तार में तनाव लगाने के लिए लटकाया गया द्रव्यमान; r = तार की त्रिज्या; d = तार का घनत्व ।

प्रश्न 45.
किसी तार के तनाव को नौ गुना कर देने पर तरंग की चाल कितने गुना हो जायेगी ?
उत्तर:
∵ v a √T
∴ \(\frac{1}{2}\)
∴ v2 = 3v1

प्रश्न 46.
कम्पित स्वरित्र के प्रस्पन्दों एवं निस्पन्दों की स्थिति चित्र में प्रदर्शित कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -3
उत्तर:
कम्पित स्वरित्र के प्रस्यन्द एवं निस्पन्द संलग्न चित्र में दिखाए गये हैं।

प्रश्न 47.
स्वरित्र द्विभुज की पिच किन-किन कारकों पर निर्भर करती है ?
उत्तर:
पिच आवृत्ति पर निर्भर करती है और आवृत्ति स्वरित्र की लम्बाई के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती तथा मोटाई के अनुक्रमानुपाती होती है।

प्रश्न 48.
सितार में भिन्न-भिन्न आवृत्तियों के स्वर उत्पन्न होते हैं क्यों ?
उत्तर:
उत्पन्न अधिस्वरकों की भिन्नता के कारण।

प्रश्न 49.
डॉप्लर का प्रभाव ध्वनि तारत्व परिवर्तन के बारे में बताता है अथवा तीव्रता परिवर्तन के बारे में?
उत्तर:
तारत्व परिवर्तन के बारे में।

प्रश्न 50.
ध्वनि स्रोत तथा श्रोता एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिर हैं। यदि ध्वनि की चाल बदल जाये तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति तथा तरंगदैर्ध्य में किसमें परिवर्तन नहीं होगा ?
उत्तर:
आवृत्ति में परिवर्तन नहीं होगा।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 51.
एक ही दिशा में ध्वनि स्त्रोत एवं श्रोता समान वेग से चल रहे हैं। ध्वनि-स्रोत की आवृत्ति और श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति का अनुपात बताइये।
उत्तर:
1:1 क्योंकि स्रोत एवं श्रोता के मध्य सापेक्ष गति नहीं होती है अतः आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति के बराबर होगी।

प्रश्न 52.
कम्पित स्वरित्र को यदि दीवार की ओर तेजी से ले जायें तो क्या श्रोता को विस्पन्द सुनाई देंगे ? यदि हाँ तो क्यों ?
उत्तर:
हाँ क्योंकि दीवार से परावर्तित ध्वनि की आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से अधिक होगी।

प्रश्न 53.
यदि आप सड़क पर जा रहे हैं और कार पीछे से हॉर्न बजाती हुई आती है और क्रॉस करके निकल जाये तो आपको आवृत्ति में क्या परिवर्तन प्रतीत होगा ?
उत्तर:
कार के पास आते समय आवृत्ति बढ़ती हुई एवं क्रॉस करने बाद घटती हुई प्रतीत होगी।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य तरंगों में क्या अन्तर है? लिखिये ।
उत्तर:

अनुदैर्घ्य तरंगेंअनुप्रस्थ तरंगें
1. जिन तरंगों के संचरण के समय माध्यम के कण संचरण दिशा के अनुदिश गति करते हैं, उन तरंगों को अनुदैर्घ्य तरंगें कहते हैं।1. जब माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् गति करते हैं, उन तरंगों को अनुप्रस्थ तरंगें कहते हैं।
2. अनुदैर्घ्य तरंगें सम्पीडन एवं विरलन के रूप में गमन करती हैं।2. अनुप्रस्थ तरंगें श्रंग एवं गर्त के रूप में आगे बढ़ती हैं।
3. अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण के लिए माध्यम सम्पीडन होना चाहिए।3. अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम दृढ़ अथवा असंपीड्य होना चाहिए।

प्रश्न 2.
तरंग के दक्षतापूर्ण संचरण हेतु माध्यम में कौन-कौन से गुण होने चाहिए ?
उत्तर:
माध्यम में तरंग के दक्षतापूर्वक संचरण के लिए निम्न गुण देने चाहिए-

  1. माध्यम प्रत्यास्थ होना चाहिए ताकि विस्थापित कण अपनी माध्य स्थिति में लौट सके।
  2. माध्यम में जड़त्व का गुण होना चाहिए ताकि वह ऊर्जा को एकत्र कर सके।
  3. माध्यम का प्रतिरोध अल्प होना चाहिए ताकि कम्पित कण की ऊर्जा में क्षय न हो सके।

प्रश्न 3.
प्रत्यास्थ तरंगें किन्हें कहते हैं ?
उत्तर:
वे तरंगें जो प्रत्यास्थ माध्यम में उत्पन्न होती हैं, प्रत्यास्थ तरंगें कहलाती हैं। सभी यांत्रिक तरंगें प्रत्यास्थ तरंगों की श्रेणी में आती हैं क्योंकि इनके बनने एवं संचरण के लिए प्रत्यास्थ माध्यम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 4.
प्रगामी तथा अप्रगामी तरंगों की परिभाषा बताइये और उनमें अन्तर लिखो ।
उत्तर:
प्रगामी तरंगें : वे तरंगें जिनके द्वारा ऊर्जा का संचरण होता हैं, प्रगामी तरंगें कहलाती है।
अप्रगामी तरंगें : वे तरंगें जिनके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है, बल्कि ये अपने ही स्थान पर बनती और बिगड़ती रहती हैं, उन्हें अप्रगामी तरंगें कहते हैं।

प्रश्न 5.
तरंगों के अध्यारोपण से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

प्रश्न 6.
गैस में तरंग वेग व्यंजक हेतु लाप्लास संशोधन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल : न्यूटन सूत्र
(Velocity Of Sound In A medium : Newton’s Formula)
ध्वनि तरंगों या अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण को समझने एवं उनका वेग ज्ञात करने के लिए हम एक पिस्टन नली पर विचार करते हैं, जिसमें कोई सम्पीड्य तरल भरा हैं चित्र में समान्तर रेखाओं द्वारा तरल की परतों को प्रदर्शित किया गया है। सम्पीडन की स्थिति में ये समान्तर रेखाएँ सघन (पास-पास) हैं । यहाँ पर तरल का दाब एवं घनत्व दोनों अधिक हैं। जब दूर-दूर रेखाओं द्वारा व्यक्त विरलन की स्थिति में दाब एवं घनत्व दोनों कम हैं। यहाँ हम तरल को सतत् माध्यम मानेंगे और इस बात की अपेक्षा करेंगे कि वास्तव में यह अणुओं से मिलकर बना है जो भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न वेगों से गतिशील हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -7
यदि पिस्टन को नली के अन्दर की ओर धक्का दें तो इसके सम्पर्क से तरल का सम्पीडन होगा तथा इसका दाब एवं घनत्व बढ़ेगा। सम्पीडित तरल की यह परत आगे की ओर गति करेगी तथा अगली परत में सम्पीडन उत्पन्न करेगी। यदि पुनः पिस्टन को बाहर की ओर खींचे तो इसके सम्पर्क से तरल फैलेगा जिससे उसका दाब एवं घनत्व कम होगा। यही विरलन की स्थिति होती है। इस प्रकार यदि पिस्टन की सतत् रूप से अन्दर-बाहर गति दी जाये तो विक्षोभ नली में सम्पीडन एवं विरलन के रूप में आगे बढ़ता जायेगा और यह अनुदैर्घ्य तरंग की तरह व्यवहार करेगा।

माना पिस्टन को अन्दर की ओर धक्का देकर एक विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है, जो सम्पीडन के रूप में होता है तथा दायीं ओर वेग से गतिशील है। सरलता के लिए यह माना जाता है कि इस सम्पीडन क्षेत्र के अन्दर तरल का दाब व घनत्व एक समान है। अब यदि प्रेक्षक भी सम्पीडन की दिशा में समान वेग से गतिशील माना जाये तो तरल मध्यम ” वेग से सम्पीडन की विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होगा एवं प्रेक्षक के सापेक्ष सम्पीडन स्थिर होगा। इस स्थिति में जब तरल वेग से सम्पीडन क्षेत्र की ओर गति करता हुआ सम्पीडन क्षेत्र से टकराता है, तब इसके आगे के किनारे पर पीछे के किनारे से दाब कुछ अधिक होगा। माना इन दोनों किनारों पर दाबान्तर ∆P है। इस कारण इस क्षेत्र B में यह अल्पांश (तरल माध्यम) संपीडित होगा तथा इस क्षेत्र में इसका वेग कुछ कम (v – ∆v) होगा तथा जब यह अल्पांश इस सम्पीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा तो पुनः अपने प्रारम्भिक आयतन को प्राप्त कर लेगा तथा दावान्तर ∆P के कारण पीछे की ओर दाब आधिक्य होने के कारण त्वरित होगा अतः इसका वेग पुनः हो जायेगा।
इस प्रकार अल्पांश C स्थिति में पहुँच जायेगा।
जब तरल अल्पांश सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उस पर दाय और कार्यरत् परिणामी बल
बल = दाब × क्षेत्रफल
परिणामी बल,
F = (P + ∆P) A – PA = PA + ∆P.A – P.A
या F = ∆P.A ……….(1)
जहाँ A, नली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
सम्पीडन क्षेत्र के बाहर इस अल्पांश की लम्बाई v.Δt है जहाँ Δt अल्पांश को किसी बिन्दु से गुजरने में लगा समय है। अतः अल्पांश का आयतन (v.Δt × A) व द्रव्यमान v.Δt.A.ρ होगा जहाँ ρ तरल का सम्पीडन क्षेत्र से बाहर घनत्व है। जब यह सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अनुभव किया गया त्वरण
\(a=-\frac{\Delta v}{\Delta t}\) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न का प्रयोग $v$ घटने के कारण किया गया है।)
न्यूटन के द्वितीय नियम से
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -8.1
स्पष्ट है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों प्रत्यास्थता गुणांक तथा घनत्व पर निर्भर करता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 7.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ कम्पन के नियम लिखिए।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल
(Velocity Of Transverse Wave In A Stretched String):
तनी हुई डोरी में विक्षोभ से अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती है। अतः अनुप्रस्थ तरंग का वेग ज्ञात करने हेतु माना एक डोरी, जिसकी एकांक लम्बाई का द्रव्यमान m है तथा तनाव T है, में एक विक्षोभ बायीं ओर से दायीं ओर वेग से गतिशील है। हम यह मान सकते हैं कि प्रेक्षक विक्षोभ की दिशा में समान वेग v से गतिशील है तो प्रेक्षक को स्पन्द स्थिर प्रतीत होगा तथा डोरी विपरीत दिशा में गति करती हुई प्रतीत होगी।

अब डोरी के अल्पांश ∆l पर विचार करें तो विक्षोभ के कारण यदि डोरी में अल्प विस्थापन हो तो इस अल्पांश ∆l को चित्र की भाँति R त्रिज्या के वृत्तीय चाप के रूप में ले सकते हैं।
इस चाप का द्रव्यमान M = m. ∆l
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -14.1
इस अल्पांश पर केन्द्र की ओर लगने वाला कुल तनाव बल 2T sin θ ही आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करेगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -15
अर्थात् तरंग वेग डोरी के तनाव एवं डोरी की एकांक लम्बाई के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। यह तरंग वेग आयाम व तरंग दैर्ध्य पर निर्भर नहीं करता है। इस सूत्र की उपपत्ति में डोरी को आदर्श (पूर्णत: प्रत्यास्थ, समान घनत्व) माना गया है तथा कम्पन करते समय इसकी लम्बाई में कोई परिवर्तन नहीं होता है ।

प्रश्न 8.
सोनोमीटर में अप्रगामी तरंगों का निर्माण किस प्रकार होता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सोनोमीटर तार में तनाव उत्पन्न करके जब एक कम्पित स्वरित्र की मूँठ को सोनोमीटर के तख्ते पर ऊर्ध्वाधर खड़ा किया जाता है। तो तख्ते में प्रणोदित कम्पन (स्वरित्र की आवृत्ति से) प्रारम्भ होते हैं। ये कम्पन सेतुओं द्वारा तार में पहुँचते हैं, फलवरूप सेतुओं से समान आवृत्ति की एवं समान आयाम की दो तरंगें परस्पर विपरीत दिशाओं में चलकर अध्यारोपित होती हैं और तार में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें उत्पन्न हो जाती

प्रश्न 9.
ध्वनि के वेग पर ताप, दाब एवं आर्द्रता का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
दाब का प्रभाव v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\) में दाब P नहीं आता है, अतः यदि ताप नियत हो दाब P का ध्वनि के वेग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
ताप का प्रभाव : v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
एक ही माध्यम के लिए व M के मान नियत रहते हैं।
अतः v ∝ √T
अर्थात् किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के परम ताप के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात् ताप बढ़ने पर ध्वनि का वेग बढ़ जाता है।

आर्द्रता का प्रभाव : v = \(\sqrt{\frac{γP}{d}}\)
अर्थात् ν ∝ \(\frac{1}{\sqrt{d}}\)
शुष्क वायु एवं जल वाष्य के घनत्वों का अनुपात 8 : 5 में होता है। अतः जिस वायु में जलवाष्प मिली होती है। उसका घनत्व शुष्क वायु से कम होता है अतः आर्द्रवायु में ध्वनि का वेग अधिक होता है।

प्रश्न 10.
रेल की पटरी पर एक व्यक्ति चोट मारकर ध्वनि उत्पन्न करता है। इस स्थान से 1.0 km दूर कान लगाकर बैठे व्यक्ति को दो ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। कारण बताइये ।
उत्तर:
रेल की पटरी में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt{\frac{Y}{d}}\) वायु में ध्वनि की चाल v = \(\sqrt{\frac{γP}{d}}\) से अधिक होती है। इसलिए श्रोता को पटरी से हो Vd कर जाने वाली ध्वनि पहले एवं वायु से होकर आने वाली ध्वनि बाद में सुनाई देती है अर्थात् उसे दो ध्वनियाँ सुनाई देती है।

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प्रश्न 11.
सामान्य ताप व दाब पर वायु में ध्वनि की चाल 330 ms है। ताप स्थिर रखते हुए दाब को दोगुना करने पर ध्वनि की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? कारण बताइये।
v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
उत्तर:
इस सूत्र में दाब P नहीं है, अतः यदि ताप I नियत है तो ध्वनि की चाल पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है अतः दाब को नियत ताप पर दो गुना कर देने पर चाल अपरिवर्तित रहेगी।

प्रश्न 12.
किसी गैस में ध्वनि तरंग की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यदि गैस का परम ताप पहले का चार गुना कर दिया जाये ?
उत्तर:
ν ∝ √ T
∴ \(\frac{v_2}{v_1}=\sqrt{\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}}=\sqrt{\frac{4 \mathrm{~T}_1}{\mathrm{~T}_1}}=\sqrt{4}=2\)
या v2 = 2v1

प्रश्न 13.
समान ताप पर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन गैसों में ध्वनि तरंगों के वेगों का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर- :
v = \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
यदि ताप नियत रहे तो v ∝ \(\frac{1}{\sqrt{M}}\)
∴ \(\frac{v_{\mathrm{H}}}{v_{\mathrm{O}}}=\sqrt{\frac{\mathrm{M}_{\mathrm{O}}}{\mathrm{M}_{\mathrm{H}}}}=\sqrt{\frac{32}{2}}=\sqrt{\frac{16}{1}}=\frac{4}{1}\)
∴ vH : vO = 4 : 1

प्रश्न 14.
किसी तार के तनाव को चार गुना कर दें तो तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\), ∴ V ∝ √T
∴ \(\sqrt{\frac{γRT}{M}}\)
∴ v2 = 2v1

प्रश्न 15.
वायु की अपेक्षा कार्बन डाई ऑक्साइड में ध्वनि अधिक तीव्र सुनाई देती है, क्यों ?
उत्तर:
ध्वनि की तीव्रता (I =2π²n²a²ρv) माध्यम के घनत्व ρ के अनुक्रमानुपाती होती है। CO2 का घनत्व वायु के घनत्व से अधिक होता है इसीलिए CO2 में ध्वनि की तीव्रता व प्रबलता वायु की अपेक्षा अधिक रहती है।

प्रश्न 16.
चन्द्रमा पर एक व्यक्ति दूसरे की आवाज नहीं सुन सकता ? आवाज को सुनने के लिए किस प्रकार के सहायक यंत्र चाहिए ?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों के चरण के लिए माध्यम की आवश्यकता रहती है और चन्द्रमा पर वायुमण्डल नहीं है इसीलिए चन्द्रमा पर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की आवाज नहीं सुन सकता है। वहाँ पर आवाज सुनने के लिए ऐसे यंत्र की आवश्यकता होगी जिससे विद्युत् चुम्बकीय तरंगों का सूचन एवं प्रसारण हो सके।

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प्रश्न 17.
आकाश में बिजली की कड़क तथा दमक एक साथ सम्पन्न होती हैं, परन्तु बिजली की दमक पहले दिखाई देती है एवं कड़क बाद में सुनाई देती है क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि ध्वनि की चाल 332 ms-1 प्रकाश की चाल 108 ms-1 से कम होती है। इसीलिए बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और कड़क बाद में सुनाई देती है।

प्रश्न 18.
वर्षां के मौसम में मेढकों के बोलने की आवाज दूर-दूर तक स्पष्ट सुनी जाती है क्यों ?
उत्तर:
वर्षा के मौसम में वायु में आर्द्रता अधिक होती है और आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल अधिक होती है इसलिए मेड़कों के बोलने की आवाज दूर-दूर तक सुनी जाती है।

प्रश्न 19.
यदि हम दूर स्थित किसी फैक्ट्री के साइरन से अपनी घड़ी मिलाते हैं तो घड़ी सुस्त हो जाती है क्यों ?
उत्तर:
क्योंकि साइरन की ध्वनि को फैक्ट्री से हमारे पास तक आने कुछ समय लग जाता है, अतः घड़ी सुस्त हो जाती है।

प्रश्न 20.
सभी प्रकार की यांत्रिक तरंगों में कौन-सा गुण सर्वनिष्ठ है ?
उत्तर:
तरंगें माध्यम के कणों की सहायता से आगे बढ़ती हैं परन्तु माध्यम तरंग के साथ आगे नहीं बढ़ता है।

प्रश्न 21.
बद्ध माध्यम से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
बद्ध माध्यम से अभिप्राय एक निश्चित परिसीमा तथा उसकी सीमाएँ अन्य माध्यमों से स्पष्ट पृष्ठों द्वारा अलग होना है।

प्रश्न 22.
सन्नादी से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
वे स्वर जिनकी आवृत्तियाँ मूल स्वरक की पूर्ण गुणज होती. हैं, सन्नादी कहलाते हैं। सम गुणज को सम सन्नादी एवं विषम गुणज का विषम सन्नादी कहते हैं।

प्रश्न 23.
अप्रगामी तरंगों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
जब समान आवृत्ति एवं समान आयाम की दो तरंगें किसी बद्ध माध्यम में एक ही रेखा में विपरीत दिशाओं से आकर अध्यारोपण करती है, तो उत्पन्न हुई नई तरंग माध्यम में स्थिर प्रतीत होती है, अत: इसे ‘स्थावर तरंग’ (Standing wave ) या ‘अप्रगामी तरंग’ (Stationary wave) कहते हैं ये तरंगें अनुप्रस्थ व अनुदैर्घ्य दोनों प्रकार की होती हैं।
डोरियों में ‘अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें’ जबकि वायु स्तम्भों में अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें’ उत्पन्न होती हैं।

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प्रश्न 24.
क्या कारण है कि खुले पाइप का स्वर बन्द पाइप की अपेक्षा अधिक मधुर होता है ?
उत्तर:
किसी स्वर में सन्नादियों की संख्या जितनी अधिक होती है वह उतना ही अधिक मधुर होता है। चूँकि बन्द पाइप में केवल विषम सन्नादी एवं खुले पाइप में सम और विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं अतः खुले पाइप का स्वर अधिक मधुर होता है।

प्रश्न 25.
एक ध्वनि स्त्रोत की मूल आवृत्ति 200 Hz है तथा इससे सभी सन्नादी उत्पन्न होते हैं। बताइये कि यह ध्वनि स्रोत निम्न आवृत्तियों में से किस-किस के साथ अनुनाद कर सकता है ?
उत्तर:
अनुनाद के लिए प्रणोदित दोलनों की आवृत्ति कम्पित वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति या इसके पूर्व गुणज के बराबर होनी चाहिए। अतः अनुनादी आवृत्तियाँ 200 व 6000 Hz होगी।

प्रश्न 26.
व्यतिकरण तथा विस्पन्द में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यतिकरण तथा विस्पन्द में निम्न अन्तर हैं-
1. व्यतिकरण में दोनों तरंगों की आवृत्ति समान होती है, जबकि विस्पन्दों में आवृत्तियाँ लगभग समान होती हैं।
2. व्यतिकरण में एक स्थान पर तीव्रता समय के साथ नियत रहती है जबकि विस्पन्दों में एक ही स्थान पर तीव्रता समय के साथ बदलती रहती है।

प्रश्न 27.
विस्पन्द उत्पन्न होने के लिए आवश्यक शर्त बताइये।
उत्तर:
विस्पन्द उत्पन्न होने के लिए आवश्यक शर्तें निम्नलिखित

  • दोनों तरंगों की आवृत्तियाँ लगभग समान होनी चाहिए।
  • दोनों तरंगों के आयाम समान होने चाहिए।
  • दोनों तरंगें एक ही दिशा में तथा एक ही सरल रेखा में गति करनी चाहिए।
  • दोनों तरंगों के कम्पन तल समान होने चाहिए।

प्रश्न 28.
एक ध्वनि स्त्रोत ध्वनि के वेग से एक स्थिर श्रोता की ओर गतिमान है। श्रोता द्वारा सुनी गई आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर:
ध्वनि स्रोत पास आ रहा है, तो आभासी आवृत्ति –
n’ = \(\frac{v}{\left(v-v_s\right)}\).n
दिया है- स्रोत का वेग vs = v
n’ = \(\frac{v}{v-v}=\frac{v}{0}\) = ∞ (अनन्त)
या n’ = ∞ अनन्त
यह श्रोता की श्रव्य परास से अधिक है, अतः श्रोता को ध्वनि सुनाई। नहीं देगी।

प्रश्न 29.
ध्वनि तरंगों में डॉप्लर प्रभाव किन-किन पर निर्भर करता है ?
उत्तर:
ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव निम्न बातों पर निर्भर करता है-
1. श्रोता एवं स्रोत के मध्य आपेक्षिक वेग पर।
2. श्रोता एवं श्रोता के वेगों पर।
3. इस बात पर कि खोत एवं श्रोता में कौन गतिशील है ?
4. माध्यम (वायु) के प्रवाह वेग पर ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
तरंग गति से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए। प्रगामी तरंग समीकरण हेतु व्यंजक एवं तरंग का एक विमीय अवकल समीकरण प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंग गति (Wave Motion):
यदि हम तालाब में एक पत्थर का टुकड़ा डालें, तो हम देखेंगे कि जल में पत्थर के गिरने के स्थान पर विक्षोभ (Disturbance) उत्पन्न हो जाता है। यह विक्षोभ उसी रूप में व निश्चित चाल से आगे बढ़ता है और तालाब के किनारे पर पहुँच जाता है। इसी प्रकार यदि हम किसी रस्सी का एक सिरा किसी हुक से बाँधकर तथा दूसरे सिरे को हाथ में पकड़कर ऊपर-नीचे हिलायें, तो रस्सी में भी एक प्रकार का विक्षोभ उत्पन्न हो जाता है, जो एक निश्चित चाल से आगे बढ़ता है तथा दूसरे सिरे तक पहुँच जाता है।
इस प्रकार, “तरंग माध्यम में उत्पन्न वह विक्षोभ (Disturbance) है, जिसमें माध्यम के कण अपनी साम्यावस्था के इर्द-गिर्द दोलन करते रहते हैं और माध्यम के स्थानान्तरण के बिना ही ऊर्जा स्थानान्तरित हो जाती है।
तरंग गति में माध्यम में ऊर्जा तथा संवेग में परिवर्तन होता है व माध्यम के कणों की कला सतत रूप से परिवर्तित होती रहती है। • तरंग के संचरण के लिए माध्यम के आवश्यक गुण

  • तरंग संचरण के लिए माध्यम में अवस्था परिवर्तन का विरोध करने वाला अर्थात् जड़त्व का गुण होना चाहिए।
  • माध्यम में बल लगाने पर विस्थापित होने तथा बल हटाने पर प्रारम्भिक अवस्था में आ जाने का अर्थात् प्रत्यास्थता का गुण होना चाहिए।
  • तरंग संचरण के लिए माध्यम का प्रतिरोध कम-से कम होना चाहिए।

प्रगामी तरंग समीकरण (Progressive wave Equation):
वह तरंग जिसके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण एक स्थान से दूसरे स्थान तक होता है, प्रगामी तरंग कहलाती है। जब माध्यम में कोई प्रगामी तरंग संचरित होती है तो माध्यम के कण अपने स्थान पर सरल आवर्त गति करने लगते हैं। ये कण समान व अलग-अलग कलाओं में कम्पन करते रहते हैं।

माना कोई विक्षोभ बिन्दु O पर उत्पन्न होता है, जो प्रगामी तरंग के रूप में +X दिशा में आगे बढ़ता है। सबसे पहले O पर स्थित कण कम्पन आरम्भ करता है और उसके पश्चात् क्रमशः माध्यम के आगे वाले कण कम्पन आरम्भ करते जाते हैं। यदि O से x दूरी पर स्थित बिन्दु P पर कोई कण स्थित है, जो O पर स्थित कण की कला से ϕ पीछे होगा। अतः यदि किसी क्षण t पर कण O का विस्थापन समीकरण
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -5
y = a sin ωt
हो तो इसी क्षण कण P का विस्थापन समीकरण
y = a sin (ωt – ϕ) ……………….. (1)
होगा। यहाँ ϕ, बिन्दुओं O व P के मध्य कलान्तर है।
∵ पथान्तर के कारण
कलान्तर = \(\frac{2 \pi}{\lambda}[latex] × पथान्तर
∴ [latex]\phi=\frac{2 \pi}{\lambda} x\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -6
समी (2), (3) व (4) धनात्मक X-दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग समीकरण हैं। यदि तरंग X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में गतिशील है तो उक्त समीकरण
y = a sin (ωt + kx)
से व्यक्त होगा। समी (3) व (4) में भी (-x) के स्थान पर (+x) का प्रयोग करना होगा।

प्रश्न 2.
वायु में ध्वनि की चाल के लिए न्यूटन का सूत्र लिखिए। लाप्लास ने इसमें क्या संशोधन किया और क्यों ?
उत्तर:
विभिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल : न्यूटन सूत्र
(Velocity Of Sound In A medium : Newton’s Formula)
ध्वनि तरंगों या अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण को समझने एवं उनका वेग ज्ञात करने के लिए हम एक पिस्टन नली पर विचार करते हैं, जिसमें कोई सम्पीड्य तरल भरा हैं चित्र में समान्तर रेखाओं द्वारा तरल की परतों को प्रदर्शित किया गया है। सम्पीडन की स्थिति में ये समान्तर रेखाएँ सघन (पास-पास) हैं । यहाँ पर तरल का दाब एवं घनत्व दोनों अधिक हैं। जब दूर-दूर रेखाओं द्वारा व्यक्त विरलन की स्थिति में दाब एवं घनत्व दोनों कम हैं। यहाँ हम तरल को सतत् माध्यम मानेंगे और इस बात की अपेक्षा करेंगे कि वास्तव में यह अणुओं से मिलकर बना है जो भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न वेगों से गतिशील हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -7.1
यदि पिस्टन को नली के अन्दर की ओर धक्का दें तो इसके सम्पर्क से तरल का सम्पीडन होगा तथा इसका दाब एवं घनत्व बढ़ेगा। सम्पीडित तरल की यह परत आगे की ओर गति करेगी तथा अगली परत में सम्पीडन उत्पन्न करेगी। यदि पुनः पिस्टन को बाहर की ओर खींचे तो इसके सम्पर्क से तरल फैलेगा जिससे उसका दाब एवं घनत्व कम होगा। यही विरलन की स्थिति होती है। इस प्रकार यदि पिस्टन की सतत् रूप से अन्दर-बाहर गति दी जाये तो विक्षोभ नली में सम्पीडन एवं विरलन के रूप में आगे बढ़ता जायेगा और यह अनुदैर्घ्य तरंग की तरह व्यवहार करेगा।

माना पिस्टन को अन्दर की ओर धक्का देकर एक विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है, जो सम्पीडन के रूप में होता है तथा दायीं ओर वेग से गतिशील है। सरलता के लिए यह माना जाता है कि इस सम्पीडन क्षेत्र के अन्दर तरल का दाब व घनत्व एक समान है। अब यदि प्रेक्षक भी सम्पीडन की दिशा में समान वेग से गतिशील माना जाये तो तरल मध्यम ” वेग से सम्पीडन की विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होगा एवं प्रेक्षक के सापेक्ष सम्पीडन स्थिर होगा। इस स्थिति में जब तरल वेग से सम्पीडन क्षेत्र की ओर गति करता हुआ सम्पीडन क्षेत्र से टकराता है, तब इसके आगे के किनारे पर पीछे के किनारे से दाब कुछ अधिक होगा। माना इन दोनों किनारों पर दाबान्तर ∆P है। इस कारण इस क्षेत्र B में यह अल्पांश (तरल माध्यम) संपीडित होगा तथा इस क्षेत्र में इसका वेग कुछ कम (v – ∆v) होगा तथा जब यह अल्पांश इस सम्पीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा तो पुनः अपने प्रारम्भिक आयतन को प्राप्त कर लेगा तथा दावान्तर ∆P के कारण पीछे की ओर दाब आधिक्य होने के कारण त्वरित होगा अतः इसका वेग पुनः हो जायेगा।
इस प्रकार अल्पांश C स्थिति में पहुँच जायेगा।
जब तरल अल्पांश सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उस पर दाय और कार्यरत् परिणामी बल
बल = दाब × क्षेत्रफल
परिणामी बल,
F = (P + ∆P) A – PA = PA + ∆P.A – P.A
या F = ∆P.A ……….(1)
जहाँ A, नली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
सम्पीडन क्षेत्र के बाहर इस अल्पांश की लम्बाई v.Δt है जहाँ Δt अल्पांश को किसी बिन्दु से गुजरने में लगा समय है। अतः अल्पांश का आयतन (v.Δt × A) व द्रव्यमान v.Δt.A.ρ होगा जहाँ ρ तरल का सम्पीडन क्षेत्र से बाहर घनत्व है। जब यह सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अनुभव किया गया त्वरण
\(a=-\frac{\Delta v}{\Delta t}\) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न का प्रयोग v घटने के कारण किया गया है।)
न्यूटन के द्वितीय नियम से
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -8.2
स्पष्ट है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों प्रत्यास्थता गुणांक तथा घनत्व पर निर्भर करता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 3.
किसी गैस में ध्वनि की चाल पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है ? आवश्यक सूत्र का निगमन कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न माध्यम में ध्वनि की चाल : न्यूटन सूत्र (Velocity Of Sound In A medium : Newton’s Formula)
ध्वनि तरंगों या अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण को समझने एवं उनका वेग ज्ञात करने के लिए हम एक पिस्टन नली पर विचार करते हैं, जिसमें कोई सम्पीड्य तरल भरा हैं चित्र में समान्तर रेखाओं द्वारा तरल की परतों को प्रदर्शित किया गया है। सम्पीडन की स्थिति में ये समान्तर रेखाएँ सघन (पास-पास) हैं । यहाँ पर तरल का दाब एवं घनत्व दोनों अधिक हैं। जब दूर-दूर रेखाओं द्वारा व्यक्त विरलन की स्थिति में दाब एवं घनत्व दोनों कम हैं। यहाँ हम तरल को सतत् माध्यम मानेंगे और इस बात की अपेक्षा करेंगे कि वास्तव में यह अणुओं से मिलकर बना है जो भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न वेगों से गतिशील हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -7.2
यदि पिस्टन को नली के अन्दर की ओर धक्का दें तो इसके सम्पर्क से तरल का सम्पीडन होगा तथा इसका दाब एवं घनत्व बढ़ेगा। सम्पीडित तरल की यह परत आगे की ओर गति करेगी तथा अगली परत में सम्पीडन उत्पन्न करेगी। यदि पुनः पिस्टन को बाहर की ओर खींचे तो इसके सम्पर्क से तरल फैलेगा जिससे उसका दाब एवं घनत्व कम होगा। यही विरलन की स्थिति होती है। इस प्रकार यदि पिस्टन की सतत् रूप से अन्दर-बाहर गति दी जाये तो विक्षोभ नली में सम्पीडन एवं विरलन के रूप में आगे बढ़ता जायेगा और यह अनुदैर्घ्य तरंग की तरह व्यवहार करेगा।

माना पिस्टन को अन्दर की ओर धक्का देकर एक विक्षोभ उत्पन्न किया जाता है, जो सम्पीडन के रूप में होता है तथा दायीं ओर वेग से गतिशील है। सरलता के लिए यह माना जाता है कि इस सम्पीडन क्षेत्र के अन्दर तरल का दाब व घनत्व एक समान है। अब यदि प्रेक्षक भी सम्पीडन की दिशा में समान वेग से गतिशील माना जाये तो तरल मध्यम ” वेग से सम्पीडन की विपरीत दिशा में गति करता हुआ प्रतीत होगा एवं प्रेक्षक के सापेक्ष सम्पीडन स्थिर होगा। इस स्थिति में जब तरल वेग से सम्पीडन क्षेत्र की ओर गति करता हुआ सम्पीडन क्षेत्र से टकराता है, तब इसके आगे के किनारे पर पीछे के किनारे से दाब कुछ अधिक होगा। माना इन दोनों किनारों पर दाबान्तर ∆P है। इस कारण इस क्षेत्र B में यह अल्पांश (तरल माध्यम) संपीडित होगा तथा इस क्षेत्र में इसका वेग कुछ कम (v – ∆v) होगा तथा जब यह अल्पांश इस सम्पीडन क्षेत्र से बाहर निकलेगा तो पुनः अपने प्रारम्भिक आयतन को प्राप्त कर लेगा तथा दावान्तर ∆P के कारण पीछे की ओर दाब आधिक्य होने के कारण त्वरित होगा अतः इसका वेग पुनः हो जायेगा।
इस प्रकार अल्पांश C स्थिति में पहुँच जायेगा।
जब तरल अल्पांश सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उस पर दाय और कार्यरत् परिणामी बल
बल = दाब × क्षेत्रफल
परिणामी बल,
F = (P + ∆P) A – PA = PA + ∆P.A – P.A
या F = ∆P.A ……….(1)
जहाँ A, नली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।
सम्पीडन क्षेत्र के बाहर इस अल्पांश की लम्बाई v.Δt है जहाँ Δt अल्पांश को किसी बिन्दु से गुजरने में लगा समय है। अतः अल्पांश का आयतन (v.Δt × A) व द्रव्यमान v.Δt.A.ρ होगा जहाँ ρ तरल का सम्पीडन क्षेत्र से बाहर घनत्व है। जब यह सम्पीडन क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसके द्वारा अनुभव किया गया त्वरण
\(a=-\frac{\Delta v}{\Delta t}\) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न का प्रयोग $v$ घटने के कारण किया गया है।)
न्यूटन के द्वितीय नियम से
बल (F) = द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -8
स्पष्ट है कि तरंग का वेग माध्यम के गुणों प्रत्यास्थता गुणांक तथा घनत्व पर निर्भर करता है।

प्रश्न 4.
कोणीय आवृत्ति एवं तरंग संरचण नियतांक तथा तरंग बेग की परिभाषाएँ लिखिए और इनमें संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
तरंग से सम्बन्धित कुछ परिभाषाएँ (Definition Related To Waves):
तरंग गति से सम्बन्धित विभिन्न परिभाषाओं को समझने के लिए हमें विक्षोभ के कारण उत्पन्न कम्पन के कारण विस्थापन का अध्ययन करना होगा जिसके माध्यम से विक्षोभ या तरंग आगे बढ़ती है।

संलग्न चित्र में कणों की माध्य स्थिति से विस्थापन दर्शाए गये हैं। माना किसी कण की माध्य अवस्था में स्थिति A पर है तो विक्षोभ के कारण कम्पन करने के साथ इसका विस्थापन विक्षोभ (तरंग) की दिशा में बढ़ता है व अधिकतम विस्थापन की स्थिति में B बिन्दु पर जाकर पुनः माध्य स्थिति की ओर गति करता है। अतः विस्थापन पुनः कम होता है तथा C स्थिति पर कण माध्य स्थिति में आकार पुनः पूर्व गति की दिशा के विपरीत दिशा में विस्थापित होता है व अधिकतम विपरीत विस्थापन की स्थिति में D पर जाकर पुनः माध्य स्थिति की ओर गति करता है तथा स्थिति E पर पहुँचता है। इस प्रकार कम्पन्न गति का एक चक्र पूर्ण होता है व उत्तरोत्तर समय के साथ कण इस प्रकार की आवर्ती गति करता है।

1. आयाम (Amplitude) (A): “माध्य स्थिति के कण के अधिकतम विस्थापन को आयाम कहते हैं।” इसे सामान्यत: A से प्रदर्शित करते हैं। चित्र 15.3 (a) में BB’, DD, FF’ आदि द्वारा दर्शाया गया है। इसका मात्रक मीटर है।

2. आवृत्ति (Frequency) (n) : प्रगामी तरंग के संचरण के दौरान, “माध्यम के किसी कण द्वारा एक सेकण्ड में किये गये कम्पनों की संख्या को आवृत्ति कहते हैं।” इसे ” से व्यक्त करते हैं। आवृत्ति माध्यम के किसी बिन्दु से एक सेकण्ड में गुजरने वाली तरंगों की संख्या को बताती है। इसका मात्रक कम्पन / सेकण्ड या हर्ट्ज (Hz) है।

3. आवर्त काल (Time Period) (T) : प्रगामी तरंग संचरण के दौरान, “कण द्वारा एक कम्पन पूरा करने में लिया गया समय आवर्त काल कहलाता है ।” इसे T से व्यक्त करते हैं और इसका मात्रक सेकण्ड है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -9
यदि कम्पित कण की आवृत्ति ” एवं आवर्त काल T हो, तो इन दोनों में निम्न सम्बन्ध होता है-
T = \(\frac{1}{n}\) या n = \(\frac{1}{T}\)

4. तरंगदैर्घ्य (Wavelength) (λ): “एक आवर्तकाल में कण द्वारा तय की गई दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।” इसे λ से व्यक्त करते हैं इसका मात्रक है। तरंगदैर्घ्य की परिभाषा इस प्रकार भी कर सकते हैं। “समान कला के दो निकटतम बिन्दुओं के मध्य दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।” चित्र 15.3 में समान कला के दो निकटतम बिन्दुओं A व E अथवा B’ व F’ अथवा D व H आदि के मध्य दूरी तरंगदैर्घ्य λ के बराबर होगी।

अनुप्रस्थ तरंगों में दो क्रमागत शीर्षो (श्रंगों) अथवा दो क्रमागत गर्त के मध्य दूरी एवं अनुदैर्ध्य तरंगों में दो क्रमागत सम्पीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के मध्य दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं। अतः
∵ λ = एक आवर्त काल में तरंग द्वारा तय की गई दूरी
या λ = v.T
या λ = v.\(\frac{1}{n}\)
या v = nλ

5. तरंग संख्या (Wave Number) (\(\bar{v}\)) : “तरंगदैर्घ्य का व्युत्क्रम तरंग संख्या कहलाता है अर्थात् एकांक दूरी में तरंगों की संख्या को तरंग संख्या कहते हैं।” इसे से व्यक्त करते हैं।
∴ \(\bar{v}=\frac{1}{λ}\)

6. तरंगाग्र (Wavefront) : “समान कला में दोलन करने वाले कणों की निधि (Locus) तरंगाग्र कहलाती है अर्थात् वह तल, जिसमें मौजूद प्रत्येक कण समान कला में कम्पन करता है, तरंगाग्र कहलाता है।
तरंगाय निम्न प्रकार के हो सकते हैं-

  • समतल तरंगा (Plane Wavefront)
  • गोलाकार तरंगा (Spherical wavefront)
  • बेलनाकार तरंगा (Cylindrical Wavefront)

7. पथान्तर (Path Difference) : दो कम्पित कर्णो के साम्यावस्था से विस्थापन के अन्तर को पथान्तर कहते हैं।

8. कला (Phase) : प्रगामी तरंग में किसी क्षण कम्पन करते हुए कण की कला उस क्षण कण की स्थिति तथा गति की दिशा को प्रदर्शित करती है इसे प्रायः कोण के रूप में व्यक्त करते हैं। यदि माध्यम के दो कण किसी क्षण साम्य स्थिति से एक ही दिशा में समान दूरियों पर स्थित हों वे दोनों समान कला में कहलाते हैं तथा यदि दो कण साम्य स्थिति से बराबर दूरी पर परस्पर विपरीत दिशा में गतिशील हो तो वे विपरीत कला में होते हैं। कम्पित कण की साम्यावस्था एवं प्रारम्भिक स्थिति के मध्य कण को प्रारम्भिक कला कहते हैं। चित्र में बिन्दु A व E, B व F, C व G, D व H समान कला में होंगे।
इसी प्रकार A व C, B व D आदि विपरीत कला में होंगे।

9. कलान्तर (Phase Difference) : दो कणों अथवा एक ही कण की दो भिन्न स्थितियों के बीच कला के अन्तर को कलान्तर कहते हैं।
समान कला में कलान्तर 0, 2π, 4π, ….. होता है तथा विपरीत कला में कलान्तर = π, 3π, 5π, …..

10. कोणीय आवृत्ति (Angular Frequency) (ω) – समय के साथ कला कोण में परिवर्तन की दर कोणीय आवृत्ति कहलाती है। इसका मात्रक रेडियन सेकण्ड होता है।
चूँकि एक आवर्त काल (T) में कला में परिवर्तन 2π होता है अतः कोणीय आवृत्ति
ω = \(\frac{2π}{T}\) या ω = 2πn

11. तरंग संचरण नियतांक (Wave Propagation Constant ) (k) : कम्पन करते हुए कणों में एकांक दूरी पर स्थित कणों के मध्य कलान्तर को तरंग संचरण नियतांक कहते हैं।” इसे कोणीय तरंग संख्या भी जाता है। चूँकि λ दूरी पर स्थित कणों के मध्य कलान्तर 2π होता है अतः एकांक दूरी पर कलान्तर $\frac{2 \pi}{\lambda}$ होगा।
∴ \(k=\frac{2 \pi}{λ}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 5.
अनुदैर्घ्य तरंगों का संचरण समझाइये एवं उनके वेग के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंगों के प्रकार (Types Of Waves):
तरंगें निम्नलिखित तीन प्रकार की होती है-

  1. यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves)
  2. विद्युत् चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)
  3. द्रव्य तरंगें (Matter Waves)

(1) यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves) : यांत्रिक तरंग वह आवर्ती विक्षोभ है जिसमें संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है एवं जो बिना आकृति बदले माध्यम में एक नियत चाल से बढ़ती है। यह माध्यम के प्रत्यास्थ गुणों पर निर्भर करता है। उदाहरण- जल तरंगें, वायु में ध्वनि तरंगें तथा द्रवों में उत्पन्न तरंगें।

यांत्रिक तरंगों के प्रकार :
यांत्रिक तरंगें दो प्रकार की होती है-
(a) अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves): जब किसी माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लम्बवत् दोलन करते हैं तो इस तरंग को अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं।
उदाहरण के लिए – तनी हुई डोरी में उत्पन्न कोई विक्षोभ डोरी की लम्बाई के अनुदिश गति करता है लेकिन डोरी के कण लम्बाई के लम्बवत् कम्पन करते हैं। अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण के लिए माध्यम का संपीड्य होना आवश्यक है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -10
अनुप्रस्थ तरंग में ऊपर की ओर अधिकतम विस्थापन की स्थिति को श्रृंग व नीचे की ओर अधिकतम विस्थापन की स्थिति को गर्त कहा जाता है तथा श्रृंग एवं गर्त के रूप में आगे बढ़ती है। इसमें भी दो क्रमागत शृंगों अथवा दो क्रमागत गर्तों के मध्य दूरी अनुप्रस्थ तरंग की तरंगदैर्घ्य (2) कहलाती है।

(b) अनुदैर्घ्य तरंगें ( Longitudinal Waves) : “यदि माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के अनुदिश गति करते हैं तो इस तरंग को अनुदैर्घ्य तरंग कहते हैं।” उदाहरण के लिए वायु में ध्वनि तरंगें ठोस में अनुदैर्घ्य कम्पनों से उत्पन्न तरंगें स्प्रिंग में उत्पन्न संपीडन एवं विरलन आदि अनुदैर्घ्य तरंगों के संचरण के लिए माध्यम का संपीड्य होना आवश्यक है, क्योंकि इन तरंगों का संचरण संपीड़न एवं विरलन के रूप में ही होता है। माध्यम का घनत्व व दाव सम्पीडन के स्थान पर अधिक (कणों के पास आने के कारण) तथा विरलन पर दाब व घनत्व कम (कणों के दूर जाने के कारण होता है दो क्रमागत विरलनों अथवा सम्पीडनों के बीच की दूरी को अनुदैर्घ्य तरंग की तरंगदैर्घ्य (A.) कहते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -11
उपरोक्त तरंगों में माध्यम की प्रत्यास्थता अधिक होने पर तरंग की चाल बढ़ जाती है व जड़त्व अधिक होने पर तरंग की चाल कम हो जाती है।

2. विद्युत् चुम्बकीय तरंगें (Electro Magnetic Waves) : ये वे तरंगें हैं, जिनके संचरण के लिए भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है। इन तरंगों का संचरण निर्वात में सम्भव है। ये तरंगें प्रकाश के वेग अर्थात् 3 × 10<sup>8</sup> मी./से. की चाल से गति करती है। ऊष्मा विकिरण, दृश्य प्रकाश X किरणें, सूक्ष्म तरंगें पराबैंगनी किरणें इत्यादि सभी विद्युत् चुम्बकीय तरंगें हैं इनकी अनुप्रस्थ प्रकृति होती है।

3. द्रव्य तरंगें (Matter Waves) : डी ब्रॉली परिकल्पना के आधार पर गतिशील द्रव्य कणों के साथ तरंगों के अभिलाक्षणिक गुण सम्बद्ध होते हैं अर्थात् उनके साथ तरंगों का सम्बद्ध होना पाया जाता है। इन्हीं तरंगों को ‘द्रव्य तरंगें’ कहते हैं। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध द्रव्य तरंगों का उपयोग किया जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 6.
समतल प्रगामी तरंग का समीकरण स्थापित कीजिए एवं इसे दो स्वरूपों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
प्रगामी तरंग समीकरण (Progressive wave Equation):
वह तरंग जिसके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण एक स्थान से दूसरे स्थान तक होता है, प्रगामी तरंग कहलाती है। जब माध्यम में कोई प्रगामी तरंग संचरित होती है तो माध्यम के कण अपने स्थान पर सरल आवर्त गति करने लगते हैं। ये कण समान व अलग-अलग कलाओं में कम्पन करते रहते हैं।

माना कोई विक्षोभ बिन्दु O पर उत्पन्न होता है, जो प्रगामी तरंग के रूप में +X दिशा में आगे बढ़ता है। सबसे पहले O पर स्थित कण कम्पन आरम्भ करता है और उसके पश्चात् क्रमशः माध्यम के आगे वाले कण कम्पन आरम्भ करते जाते हैं। यदि O से x दूरी पर स्थित बिन्दु P पर कोई कण स्थित है, जो O पर स्थित कण की कला से ϕ पीछे होगा। अतः यदि किसी क्षण t पर कण O का विस्थापन समीकरण
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -5.1
y = a sin ωt
हो तो इसी क्षण कण P का विस्थापन समीकरण
y = a sin (ωt – ϕ) ……………….. (1)
होगा। यहाँ ϕ, बिन्दुओं O व P के मध्य कलान्तर है।
∵ पथान्तर के कारण
कलान्तर = \(\frac{2 \pi}{\lambda}[latex] × पथान्तर
∴ [latex]\phi=\frac{2 \pi}{\lambda} x\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -6.1
समी (2), (3) व (4) धनात्मक X-दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग समीकरण हैं। यदि तरंग X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में गतिशील है तो उक्त समीकरण
y = a sin (ωt + kx)
से व्यक्त होगा। समी (3) व (4) में भी (-x) के स्थान पर (+x) का प्रयोग करना होगा।

प्रश्न 7.
समतल प्रगामी तरंग के लिए विस्थापन- दूरी ग्राफ खींचकर आयाम, तरंगदैर्घ्य एवं कलान्तर प्रदर्शित करते हुए इनकी परिभाषाएँ लिखिए।
उत्तर:
प्रगामी तरंग समीकरण (Progressive wave Equation):
वह तरंग जिसके द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण एक स्थान से दूसरे स्थान तक होता है, प्रगामी तरंग कहलाती है। जब माध्यम में कोई प्रगामी तरंग संचरित होती है तो माध्यम के कण अपने स्थान पर सरल आवर्त गति करने लगते हैं। ये कण समान व अलग-अलग कलाओं में कम्पन करते रहते हैं।

माना कोई विक्षोभ बिन्दु O पर उत्पन्न होता है, जो प्रगामी तरंग के रूप में +X दिशा में आगे बढ़ता है। सबसे पहले O पर स्थित कण कम्पन आरम्भ करता है और उसके पश्चात् क्रमशः माध्यम के आगे वाले कण कम्पन आरम्भ करते जाते हैं। यदि O से x दूरी पर स्थित बिन्दु P पर कोई कण स्थित है, जो O पर स्थित कण की कला से ϕ पीछे होगा। अतः यदि किसी क्षण t पर कण O का विस्थापन समीकरण
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -5.2
y = a sin ωt
हो तो इसी क्षण कण P का विस्थापन समीकरण
y = a sin (ωt – ϕ) ……………….. (1)
होगा। यहाँ ϕ, बिन्दुओं O व P के मध्य कलान्तर है।
∵ पथान्तर के कारण
कलान्तर = \(\frac{2 \pi}{\lambda}[latex] × पथान्तर
∴ [latex]\phi=\frac{2 \pi}{\lambda} x\)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -6.2
समी (2), (3) व (4) धनात्मक X-दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग समीकरण हैं। यदि तरंग X-अक्ष की ऋणात्मक दिशा में गतिशील है तो उक्त समीकरण
y = a sin (ωt + kx)
से व्यक्त होगा। समी (3) व (4) में भी (-x) के स्थान पर (+x) का प्रयोग करना होगा।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 8.
अप्रगामी तरंगों से क्या अभिप्राय है ? किसी बद्ध माध्यम में इनका बनना चित्र द्वारा समझाइये।
उत्तर:
अप्रगामी तरंगें (Stationary Waves):
जब समान आवृत्ति एवं समान आयाम की दो प्रगामी तरंगें किसी बद्ध माध्यम में समान बाल से, एक ही रेखा में, परस्पर विपरीत दिशाओं से आकर अध्यारोपित होती हैं तो उत्पन्न हुई नई तरंग माध्यम में स्थिर प्रतीत होती है, अतः इस तरंग को प्रगामी स्थावर तरंग (standing waves) कहते हैं। इन तरंगों द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है अतः इन तरंगों को अप्रगामी तरंग कहते हैं।

अप्रगामी तरंगें दो प्रकार की होती हैं-
(i) अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें,
(ii) अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें।
(i) अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें : जब दो समान आवृत्ति एवं समान आयाम की अनुदैर्घ्य तरंगें एक ही सरल रेखा पर विपरीत दिशा में गति र करती हुई अध्यारोपित होती हैं तो माध्यम में इनके अध्यारोपण से अनुदैर्घ्य J अप्रगामी तरंगें बनाती हैं वायु स्तम्भों पर आधारित वाद्य यंत्रों जैसे बिगुल, बांसुरी, बीन आदि में अनुदैर्घ्य अप्रगामी तरंगें बनाती हैं।

(ii) अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें : जब दो समान आवृत्ति एवं समान आयाम की अनुप्रस्थ तरंगें एक सरल रेखा पर विपरीत दिशा में गति करती हुई अध्यारोपित होती है तो माध्यम में इनके अध्यारोपण से अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं। तनी हुई डोरी पर आधारित वाद्य यंत्रों जैसे सितार, वॉयलिन, इकतारा आदि की डोरियों में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं।

अप्रगामी तरंगें बनने की आवश्यक शर्ते :
अप्रगामी तरंगें बनने के लिए माध्यम सीमित होना चाहिए अर्थात् माध्यम बद्ध होना चाहिए क्योंकि इस प्रकार के माध्यम में संचरित कोई प्रगामी तरंग माध्यम की परिसीमा पर परावर्तित होकर अपने ही अनुरूप तथा विपरीत दिशा में संचरित तरंग उत्पन्न करती है। इन आपतित एवं परावर्तित तरंगों के अध्यारोपण के फलस्वरूप ही अप्रगामी तरंग बनती है। “इस प्रकार अप्रगामी तरंगों के बनने के लिए बद्ध माध्यम होना एक आवश्यक शर्त है।”

प्रश्न 9.
अप्रगामी तरंग के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
अप्रगामी तरंगों का गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis of Standing Waves)
माना धनात्मक X- अक्ष की दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग का समीकरण –
y1 = a sin (ωt – kx) ……..(1)
जब यह तरंग बद्ध माध्यम की परिसीमा से परावर्तित होती है तो परावर्तित तरंग का समीकरण-
y2 = ±a sin (ωt + kx) ……..(2)
इस समीकरण (+) चिह्न का प्रयोग तब होगा जब तरंग का परावर्तन मुक्त परिसीमा मुक्त है अर्थात् परावर्तन विरल माध्यम से हो रहा हो ओर दृढ़ परिसीमा अर्थात् सघन माध्यम से परावर्तन होने पर (-) चिह्न का प्रयोग होगा क्योंकि इस स्थिति में परावर्तित तरंग में का कलान्तर और उत्पन्न हो जायेगा। परावर्तित तरंग की दिशा X- अक्ष की ऋणात्मक दिशा में होगी अतः kx से पूर्व (+) चिह्न का ही प्रयोग होगा।

अब हम यह मानकर गणितीय विवेचना में आगे बढ़ते हैं कि परावर्तन सघन माध्यम से हो रहा है।
अध्यारोपण के सिद्धान्त से-
y = y1 + y2 ………..(3)
या y = a sin (ωt – kx) – asin(ωt + kx)
= a [sin (ωt – kx) – sin(ωt + kx)]
= a [{sin ωt cos kx – cos ωt sin kx} – {sin ωt cos kx + cos ωt sin kx}]
= a[sin ωt cos kx – cos ωt sin kx – sin ωt cos kx – cos ωt sin kx]
[ क्योंकि sin (A ± B) = sin Acos B ± cosA sinB]
या y = -2a cos ωt sin kx
या y = -2a sin kx cos ωt ………(4)
या y = A cos ωt ……….(5)
जहाँ y = A sin kx तरंग का आयाम है। ……….(6)
समी (4) एवं (5) परिणामी तरंग का समीकरण व्यक्त करते हैं। स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी आवर्ती तरंग है जिसकी कोणीय आवृत्ति (ω) अध्यारोपित होने वाली तरंगों की कोणीय आवृत्ति के समान है लेकिन इसका आयाम (A) नियत नहीं है बल्कि यह समी. (6) के अनुसार परिवर्तित होता है।
अब समी. ( 4 ) का अवकलन करने पर कणों का वेग
v = \(v=\frac{d y}{d t}=\frac{d}{d t}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\)
या v = 2aω sinkx win ωt …………(7)
तथा विकृति
\(\frac{d y}{d x}=\frac{d}{d x}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\) …………(8)
या \(\frac{d y}{d x}=2 a k \cos k x \cos \omega t\)

प्रश्न 10.
अप्रगामी तरंगों के सूत्र लिखिए और इसकी सहायता से प्रस्पन्दों एवं निस्पन्दों की स्थितियाँ प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
अप्रगामी तरंगों का निर्माण (Formation of Standing Waves):
अप्रगामी तरंगों के बनने की प्रक्रिया निम्न चित्र में प्रदर्शित हैं-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -11.1
प्रगामी तरंगों की भाँति अप्रगामी तरंगें भी अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्ध्य दोनों प्रकार की होती हैं। तनी हुई डोरियों में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें एवं वायु स्तम्भों में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं। सभी वाद्य यंत्रों से संगीत अप्रगामी तरंगों के बनने से ही उत्पनन होता है। सितार वायलिन, पियानो, गिटार, इकतारा आदि में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें तथा बाँसुरी, विगुल, सीटी, तबला आदि में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं।

वह माध्यम जिसमें तरंग एक नियत रेखा के अनुदिश गति करती है, रेखीय माध्यम कहलाता है तथा यदि रेखीय माध्यम की लम्बाई अनन्त नहीं है अर्थात् निश्चित है तो माध्यम ‘बद्ध माध्यम’ कहलाता है। रेखीय बद्ध माध्यम में प्रायः सीमा पर एक तरंग आपतित होती है एवं दूसरी तरंग पहली तरंग के परावर्तन से प्राप्त है (क्योंकि समान आवृत्ति व समान आयाम की दो तरंगों को दो भिन्न स्रोतो से प्राप्त करना काफी कठिन है)। इन दोनों तरंगों के अध्यारोपण से अप्रगामी तरंगें बनती हैं। इन तरंगों का बनना समझने के लिए चित्र का अध्ययन करते हैं।

यहाँ दो समान आवृत्ति तथा समान आयाम की तरंगों की दिशा में संचरित होते हुए दिखाया गया है। एक तरंग को बायीं ओर से तथा दूसरी को दायीं ओर से बायीं ओर क्रमशः सतत् रेखा तथा कित रेखा द्वारा दर्शाया गया है। सतत रेखा वाली तरंग बद्धमाध्यम परिसीमा पर आपतित तरंग है एवं बिन्दुकित रेखा से व्यक्त तरंग पर तरंग है ।

(i) प्रारम्भ में (t = 0) पर) दोनों तरंगें विपरीत कला में अध्यारोपित रही हैं अतः माध्यम के सभी कण माध्यस्थिति में है ।
(ii) t = \(\frac{T}{4}\) (जहाँ T दोनों तरंगों का आवर्तकाल है) समय के बाद दोनों तरंगें विपरीत दिशाओं में λ/4 दूरी से आगे बढ़ जाती हैं। अतिरिक्त λ/2 का पथान्तर (λ/4 + λ/4) या का उत्पन्न हो जाता है। अतः दोनों तरंगें समान कला में मिलता परिणामी के चित्र से स्पष्ट है इस स्थिति में कूछ [A1, A2, A3, A4, A5] का विस्थापन अधिकतम है जबकि कण [N1, N2, N3, N4] अभी भी माध्यम स्थिति में हैं।
(iii) t = \(\frac{T}{2}\) समय के पश्चात् पुनः तरंगें विपरीत कला में अध्यारोपित होती हैं अत: माध्यम के सभी कण पुनः अपनी माध्य स्थिति आ जाते हैं।
(iv) t = \(\frac{3T}{4}\) समय के पश्चात् पुनः तरंगें समान कला में हो जाती हैं और माध्यम के कणों A1, A2, A3, A4 व A5 का विस्थापन फिर अधिकतम हो जाता है लेकिन इनकी कला विपरीत हो जाती है। N1, N2, N3 व N4 अब माध्य स्थिति में ही रहते हैं ।
(v) t = T समय पश्चात् पुनः प्रारंभिक स्थिति प्राप्त हो जाती है।

उपरोक्त विवेचना से निम्नलिखित निष्कर्ण निकलते हैं-
1. माध्यम के कूछ कण (A1, A2, A3, A4, A5) सदैव अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर अधिकतम आयाम से कम्पन करते हैं, उन्हें ‘प्रस्पन्द’ (Antinodes ) कहते हैं। प्रस्पन्दों पर कणों का वेग (\(\frac{d y}{d t}\)) अधिकतम होता है तथा दाब या घनत्व परिवर्तन शून्य होता है (क्योंकि \(\frac{d y}{d x}=0\))

2. क्रमागत प्रस्पन्दों के बीच के कण (N1, N2, N3, N4) सदैव स्थिर रहते हैं। इन्हें ‘निस्पन्द’ (Nodes) कहते हैं। ये समान दूरियों पर स्थिर रहते हैं । निस्पन्दों पर कणों का वेग (\(\frac{d y}{d t}\)) शून्य होता है तथा दाब तथा घनत्व परिवर्तन अधिकतम होता है।

3. दो क्रमागत प्रस्पन्दों या दो क्रमागत निस्पन्दों के बीच की दूरी λ/2 होती है तथा एक निस्पन्द व उसके समीपस्थ प्रस्पन्द के बीच की दूरी λ/4 होती, जहाँ λ तरंग की तरंगदैर्ध्य है।

4. प्रस्पन्दों की ऊर्जा दोनों ओर के निस्पन्दों को स्थानान्तरित नहीं होती है अर्थात् इन तरंगों के द्वारा ऊर्जा का स्थानान्तरण नहीं होता है तथा तरंगें माध्यम में भी आगे नहीं बढ़ती हैं बल्कि अपने ही स्थान पर माध्यम की परिसीमाओं के बीच स्थिर रहकर फैलती व सिकूड़ती रहती है। इन्हीं गुणों के कारण इन तरंगों को अप्रगामी या स्थावर तरंगें कहा जाता है।

5. अप्रगामी तरंगों में प्रत्येक कण का आवर्तकाल (T) समान होता है परन्तु दो निस्पन्दों के मध्य प्रत्येक कण का आयाम भिन्न होता है। इसी प्रकार दो निस्पन्दों के मध्य सभी कण समान कला में दोलन करते हैं।

6. एक निस्पन्द के दोनों ओर के कण परस्पर विपरीत कला में दोलन करते हैं।

7. एक आवर्तकाल में दो बार माध्यम के कण एक साथ अपनी साम्यावस्था में आते हैं अर्थात् एक आवर्तकाल में दो बार सभी कणों का विस्थापन शून्य होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 11.
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त क्या है ? इसका उपयोग करते हुए दो तरंगों के अध्यारोपण से परिणामों तरंग के आयाम के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]:
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.1
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.2
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 12.
सिद्ध कीजिए कि तनी हुई डोरियों में सम एवं विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अप्रगामी तरंगें एवं कम्पन की विधाएँ तथा कम्पन के नियम
(STANDING WAVES IN STRETCHED STRING AND MODES OF VIBRATION AND LAWS OF VIBRATIONS)
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें बनती हैं। इसके लिए हम के मध्य तनी हुई डोरी में उत्पन्न अप्रग्रामी तरंगों पर विचार यदि डोरी में तनाव T, डोरी की लम्बाई / तथा डोरी की एकांक का द्रव्यमान यदि । हो तो डोरी में उत्पन्न तरंगों का वेग
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) ……….(1)
जब डोरी की लम्बवत् दिशा में थोड़ा खींचकर छोड़ा जाता है, तो इसके सिरों की ओर अनुप्रस्थ प्रगामी तरंगें चलने लगती हैं। ये तरंगें डोरी के दृढ़ सिरों से परावर्तित हो जाती हैं और आपतित तथा परावर्तित तरंगें अध्यारोपण करके अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें उत्पन्न करते हैं। ये तरंगें तब तक रहती हैं जब तक कि घर्षण इत्यादि कारणों से उनकी ऊर्जा नष्ट नहीं हो जाती है। डोरी के कसे हुए सिरों पर दोलन की स्वतन्त्रता न होने के कारण सदैव इन सिरों पर निस्पन्द बनते हैं। जब डोरी को मध्य बिन्दु से थोड़ा खींचकर छोड़ दिया जाता है तो डोरी एक खण्ड में कम्पन करती है। डोरी के दोनों सिरों पर निस्पन्द एवं मध्य बिन्दु पर प्रस्पन्द बनता है। यह तनी हुई डोरी में अप्रगामी तरंग की सबसे सरल विधा है जिसमें डोरी एक लूप में कम्पन्न करती है। इस अवस्था में डोरी न्यूनतम आवृत्ति का स्वर उत्पन्न करती है जिसे ‘मूल स्वरक’ कहते हैं। इस स्थिति में यदि
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -12
उत्पन्न, अप्रगामी तरंगों की तरंगदैर्ध्य λ1 हो तो
\(\frac{\lambda_1}{2}=l \Rightarrow \lambda_1=2 l\)
अतः मूल स्वर की आवृत्ति
\(n_1=\frac{v}{\lambda_1}=\frac{v}{2 l}\)
v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
∴ \(n_1=\frac{1}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{T}}{m}}\)
यदि डोरी के मध्य बिन्दु के पास B बिन्दु (एक सिरे से λ/ 4 दूरी पर स्थित बिन्दु) से थोड़ा खींचकर छोड़ दें तो डोरी चित्र अनुसार दो खण्डों में कम्पन करती है। इस स्थिति में λ2 = l, अतः उत्पन्न अप्रगामी तरंगों की आवृत्ति
\(n_2=\frac{v}{\lambda_2}=\frac{v}{t}=\frac{2 v}{2 l}\)
या n2 = 2n1 ……………….(3)
या \(n_2=\frac{2}{2 l} \sqrt{\frac{\mathrm{T}}{m}}\)
इसी प्रकार चित्र के अनुसार जब C बिन्दु पर डोरी को थोड़ा खींचकर छोड़ा जाता है तो डोरी तीन खण्डों में कम्पन करने लगती है। इन तरंगों की तरंगदैर्ध्य यदि λ3 हो तो
\(\lambda_3+\frac{\lambda_3}{2}=l \Rightarrow \frac{3 \lambda_3}{2}=l\)
या \(\lambda_3=\frac{2 l}{3}\)
इन तरंगों की आवृत्ति
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -13
मूल आवृत्ति से अधिक आवृत्तियों के स्वरकों को ‘अधिस्वरक’ (over tone) कहते हैं। आवृत्तियों n2, n3, n4 … आदि के स्वर क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय …… अधिस्वरक कहलाते हैं।

जिन अधिस्वरकों की आवृत्तियाँ मूल स्वरक की आवृत्ति की पूर्ण गुणज होती हैं उन्हें ‘सन्नादी’ (harmonics) कहते हैं। जिन स्वरकों को आवृत्ति मूलस्वरक की आवृत्ति की विषम गुणज होती है उन्हें ‘विषम सन्नादी’ (odd harmonic) कहते हैं और जिनकी आवृत्ति सम गुणज होती है उन्हें ‘सम सन्नादी’ (even harmonics) कहते हैं। समी. (2), (3), (5) आदि स्पष्ट है कि तनी हुई डोरियों में सम एवं विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 13.
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ कम्पनों के नियमों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
तनी हुई डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल (Velocity Of Transverse Wave In A Stretched String):
तनी हुई डोरी में विक्षोभ से अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती है। अतः अनुप्रस्थ तरंग का वेग ज्ञात करने हेतु माना एक डोरी, जिसकी एकांक लम्बाई का द्रव्यमान m है तथा तनाव T है, में एक विक्षोभ बायीं ओर से दायीं ओर वेग से गतिशील है। हम यह मान सकते हैं कि प्रेक्षक विक्षोभ की दिशा में समान वेग v से गतिशील है तो प्रेक्षक को स्पन्द स्थिर प्रतीत होगा तथा डोरी विपरीत दिशा में गति करती हुई प्रतीत होगी।

अब डोरी के अल्पांश ∆l पर विचार करें तो विक्षोभ के कारण यदि डोरी में अल्प विस्थापन हो तो इस अल्पांश ∆l को चित्र की भाँति R त्रिज्या के वृत्तीय चाप के रूप में ले सकते हैं।
इस चाप का द्रव्यमान M = m. ∆l
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -14
इस अल्पांश पर केन्द्र की ओर लगने वाला कुल तनाव बल 2T sin θ ही आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करेगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -15.1
अर्थात् तरंग वेग डोरी के तनाव एवं डोरी की एकांक लम्बाई के द्रव्यमान पर निर्भर करता है। यह तरंग वेग आयाम व तरंग दैर्ध्य पर निर्भर नहीं करता है। इस सूत्र की उपपत्ति में डोरी को आदर्श (पूर्णत: प्रत्यास्थ, समान घनत्व) माना गया है तथा कम्पन करते समय इसकी लम्बाई में कोई परिवर्तन नहीं होता है ।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 14.
बन्द वायु स्तम्भों में कम्पन की विधाओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वायु स्तम्भों में अप्रगामी तरंगें एवं कम्पन की विधाएँ
(Standing Waves In Air Columns And Mode Of Vibrations):
वायु स्तम्भों में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें बनती हैं। जब कोई कम्पित ध्वनि स्रोत जैसे स्वरित्र वायु स्तम्भ के पास लाया जाता है तो वायु स्तम्भ में सम्पीडन एवं विरलन उत्पन्न होते हैं और ये अनुदैर्ध्य प्रगामी तरंगें वायु स्तम्भ के दूसरे सिरे से परावर्तित होकर आपतित तरंगों के साथ अध्यारोपण हो जाती हैं। फलस्वरूप वायु स्तम्भ में अनुदैर्ध्य अप्रगामी तरंगें उत्पन्न होती है। वायु स्तम्भ दो प्रकार के होते हैं-
1. बन्द वायु स्तम्भ – वे वायु स्तम्भ एक सिरे पर खुले एवं दूसरे सिरे पर बन्द होते हैं।
2. खुले वायु स्तम्भ – ये वायु स्तम्भ दोनों सिरों पर खुले होते हैं।
वायु स्तम्भों में कम्पन की विधाओं का अध्ययन करने के लिए निम्न बातें ध्यान में रखने चाहिए-
(i) पाइप के बन्द सिरे पर दोलन की स्वतन्त्रता नहीं होती है, अतः इस सिरे पर सदैव निस्पन्द बनता है।
(ii) वायु स्तम्भ का खुला सिरा वायुमण्डल के सम्पर्क में होता है इसलिए इस सिरे पर घनत्व परिवर्तन लगभग शून्य होता है अर्थात् यहाँ विकृति शून्य होनी चाहिए और पाइप के खुले सिरे पर प्रस्पन्द होना चाहिए।
(iii) दो निस्पन्दों के मध्य एक प्रस्पन्द और दो प्रस्पन्दों के मध्य एक निस्पन्द होना चाहिए।

बन्द वायु स्तम्भ में कम्पन की विधाएँ (Modes of Vibrations in Closed Organ Pipes):
(i) मूलस्वरक (Fundamental Tone):
बन्द वायु के कम्पन की सरलतम विधा संलग्न चित्र में प्रदर्शित है। इसमें बन्द सिरे पर निस्पन्द एवं खुले सिरे पर प्रस्पन्द बनता है। इस स्थिति में उत्पन्न स्वरक को मूल स्वरक कहते हैं। चित्र से
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -16
\(\frac{\lambda_1}{4}=l \Rightarrow \lambda_1=4 l\)
अतः मूल स्वरक की आवृत्ति,
\(n_1=\frac{v}{\lambda_1}\)
या \(n_1=\frac{v}{4 l}\) ………(1)
यह आवृत्ति मूल आवृत्ति की एक गुनी है। अत: इसे प्रथम सन्नादी (first harmonic) भी कहते हैं।

(ii) प्रथम अधिस्वरक (First Overtone ): यदि कम्पन संलग्न चित्र की भाँति हो रहे हैं अर्थात् पाइप के सिरों पर प्रस्पन्द एवं निस्पन्द के अलावा मध्य में एक प्रस्पन्द व एक निस्पन्द और बनता है तो उत्पन्न स्वरक को ‘प्रथम अधिस्वरक’ कहते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -17
∵ n2 का मान n1 का तीन गुना है अतः इसे तृतीय सन्नादी (Third harmonic) कहते हैं।

(iii) द्वितीय अधिस्वरक (Second Overtone): द्वितीय अधिस्वरक की स्थिति में वायु स्तम्भ में कम्पन की विधा चित्र में प्रदर्शित है।
इस स्थिति में;
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -18
अतः बन्द वायु स्तम्भों में केवल विषम सन्नादी ही उत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 15.
सिद्ध कीजिए कि खुले ऑर्गन पाइप में सम एवं विषम दोनों प्रकार के सन्नादी उत्पन्न होते हैं।
उत्तर;
अप्रगामी तरंगों का गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis of Standing Waves)
माना धनात्मक X- अक्ष की दिशा में गतिशील प्रगामी तरंग का समीकरण –
y1 = a sin (ωt – kx) ……..(1)
जब यह तरंग बद्ध माध्यम की परिसीमा से परावर्तित होती है तो परावर्तित तरंग का समीकरण-
y2 = ±a sin (ωt + kx) ……..(2)
इस समीकरण (+) चिह्न का प्रयोग तब होगा जब तरंग का परावर्तन मुक्त परिसीमा मुक्त है अर्थात् परावर्तन विरल माध्यम से हो रहा हो ओर दृढ़ परिसीमा अर्थात् सघन माध्यम से परावर्तन होने पर (-) चिह्न का प्रयोग होगा क्योंकि इस स्थिति में परावर्तित तरंग में का कलान्तर और उत्पन्न हो जायेगा। परावर्तित तरंग की दिशा X- अक्ष की ऋणात्मक दिशा में होगी अतः kx से पूर्व (+) चिह्न का ही प्रयोग होगा।

अब हम यह मानकर गणितीय विवेचना में आगे बढ़ते हैं कि परावर्तन सघन माध्यम से हो रहा है।
अध्यारोपण के सिद्धान्त से-
y = y1 + y2 ………..(3)
या y = a sin (ωt – kx) – asin(ωt + kx)
= a [sin (ωt – kx) – sin(ωt + kx)]
= a [{sin ωt cos kx – cos ωt sin kx} – {sin ωt cos kx + cos ωt sin kx}]
= a[sin ωt cos kx – cos ωt sin kx – sin ωt cos kx – cos ωt sin kx]
[ क्योंकि sin (A ± B) = sin Acos B ± cosA sinB]
या y = -2a cos ωt sin kx
या y = -2a sin kx cos ωt ………(4)
या y = A cos ωt ……….(5)
जहाँ y = A sin kx तरंग का आयाम है। ……….(6)
समी (4) एवं (5) परिणामी तरंग का समीकरण व्यक्त करते हैं। स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी आवर्ती तरंग है जिसकी कोणीय आवृत्ति (ω) अध्यारोपित होने वाली तरंगों की कोणीय आवृत्ति के समान है लेकिन इसका आयाम (A) नियत नहीं है बल्कि यह समी. (6) के अनुसार परिवर्तित होता है।
अब समी. ( 4 ) का अवकलन करने पर कणों का वेग
v = \(v=\frac{d y}{d t}=\frac{d}{d t}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\)
या v = 2aω sinkx win ωt …………(7)
तथा विकृति
\(\frac{d y}{d x}=\frac{d}{d x}[-2 a \sin k x \cos \omega t]\) …………(8)
या \(\frac{d y}{d x}=2 a k \cos k x \cos \omega t\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 16.
सोनोमीटर किस सिद्धान्त पर कार्य करता है ? इसकी सहायता से स्वरित्र की अज्ञात आवृत्ति किस प्रकार ज्ञात की जाती है ?
उत्तर:
स्वरमापी (Sonometer)
तनी हुई डोरियों में अप्रगगमी तरंगों एवं अनुनाद के सिद्धान्त पर यह ऐसा उपकरण है जिसकी सहायता से किसी स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात की जा सकती है।

इसमें बढ़िया किस्म की मुलायम लकड़ी का बना एक आयताकार खोखला बक्सा है जिसे ‘ध्वनि बॉक्स’ (Sound Box) कहते हैं और इसे चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इसमें दो बड़े छेद होते हैं जिससे बॉक्स के अन्दर उत्पन्न ध्वनि बाहर सुनी जा सके। इसे ‘अनुनाद बॉक्स’ (Resonancl Box) भी कहते हैं। ध्वनि बॉक्स को दो ऊर्ध्वाधर स्टेण्डों पर रख दिया जाता है तथा इसकी ऊपरी सतह पर एक तार हुक से बंधा होता है जो सतुओं A, B, C के ऊपर से होता हुआ ध्वनि बॉक्स के दूसरे सिरे घिरनी पर होकर गुजरता है तार के दूसरे सिरे पर एक हैंगर लगा जिस पर चॉट चढ़ाकर तार में तनाव उत्पन्न किया जाता है। सेतुओं के दूरी ज्ञात करने के लिए बॉक्स के एक किनारे पर एक मीटर स्केल भी रहता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -19

जब तार को कर्षित (Plucked) किया जाता है तो उसमें अनुप्रस्थ प्रगामी तरंगे उत्पन्न होती हैं जो कर्षण बिन्दु के दोनों ओर तार के अनुदिश गति करती हैं और सेतुओं से परावर्तित होकर अध्यारोपण करती है। जिससे तार में अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगें उत्पन्न होती हैं ये तरंगें सेतुओं के माध्यम से ध्वनि बॉक्स में जाकर वायु को कम्पित करती हैं। अनुनाद की स्थिति में ध्वनि बॉक्स के छिद्रों से होकर तीव्र ध्वनि सुनाई देती है।

जब कोई तना हुआ तार मूल स्वर में (एक खण्ड) कम्पन करता है तो उसकी आवृत्ति निम्न सूत्र से दी जाती है।
n = \(\frac{1}{2} \sqrt{\frac{T}{m}}\) जहाँ T = Mg
m = तार की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान
l = कम्पित तार की लम्बाई
g = गुरुत्वीय त्वरण
M = हँगर सहित उस पर लटकाया गया द्रव्यमान
यदि स्वरमापी पर एक कम्पित स्वरित्र की मूठ रखी जाती है तो ता कम्पन करने लगता है जो सेतुओं के माध्यम से तार में पहुँचकर अनुप्रस्थ अप्रगामी तरंगे उत्पन्न करते हैं यदि सेतुओं के मध्य दूरी को समायोजित करके अनुनाद की स्थिति ज्ञात कर ली जाये तो-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -20

प्रश्न 17.
विस्पन्द विधि द्वारा स्वरित्र द्विभुज की अज्ञात आवृत्ति किस प्रकार ज्ञात की जा सकती है ?
उत्तर:
विस्पन्दों के अनुप्रयोग (Applications of Beats)
(i) विस्पंदों विधि द्वारा स्वरित्र की अज्ञात आवृत्ति ज्ञात करना
किसी दिये हुए स्वरित्र की आवृत्ति ज्ञात करने के लिए एक लगभग समान किन्तु ज्ञात आवृत्ति का स्वरित्र लिया जाता है, क्योंकि ध्वनि तरंगों के विस्पन्दों को प्रेक्षित करने के लिए यह आवश्यक है कि दोनों तरंगों की आवृत्ति में अन्तर अधिक नहीं होना चाहिए अन्यथा विस्पन्द इतनी शीघ्रता से बनेंगे कि उनका सुनना सम्भव न होगा। दोनों स्वरित्रों को एक साथ कम्पित करवाकर प्रति सेकण्ड विस्पन्दों की संख्या ज्ञात की जाती है माना स्वरित्र की आवृत्ति n व उत्पन्न विस्पन्द आवृत्ति ∆n हो, तो अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति (n + ∆n) या (n – ∆n) होगी।

यह निर्धारित करने के लिए अज्ञात स्वरित्र की आवृत्ति (n + ∆n) या (n – ∆n) है, अज्ञात आवृत्ति वाले स्वरित्र की भुजा पर थोड़ा मोम लगा देते हैं, जिससे भुजा का भार बढ़ जाने से उसकी आवृत्ति कम हो जायेगी। पुनः दोनों स्वरित्रों को एक साथ कम्पित कराकर विस्पन्दों की संख्या ज्ञात करते हैं। यदि विस्पन्द आवृत्ति पहले से अधिक मिलती है, आवृत्ति (n – ∆n) और विस्पन्द आवृत्ति कम होने पर अज्ञात आवृत्ति (n + ∆n) होगी।

(ii) वाद्ययंत्रों का स्वर मिलाना संगीतज्ञ दो वाद्य यंत्रों के मिलाने के लिए अर्थात् उनकी आवृत्तियों को समान करने के लिए विस्पन्द का उपयोग करते हैं। यदि दोनों की आवृत्तियों में थोड़ा-सा अन्तर हैं तो उन्हें अलग-अलग बजाकर समस्वरित नहीं किया जा सकता, परन्तु यदि दोनों वाद्य यन्त्रों को साथ-साथ बजाया जाए तो उनकी आवृत्तियों में थोड़ा-सा अन्तर होने पर विस्पन्द सुनाई देंगे। इस स्थिति में एक वाद्य यंत्र को इस प्रकार समायोजित करते हैं कि विस्पन्दों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगे तथा अन्त में विस्पन्द सुनाई देने बन्द हो जाएँ। इस प्रकार वाद्य यंत्र समस्वरित हो जाते हैं।

(iii) खानों में खतरनाक गैसों का पता लगाना- इसके लिए एक विशेष प्रकार का यंत्र प्रयोग में लाया जाता है। इसमें बिल्कूल समान आकार के दो छोटे पाइप होते हैं। एक पाइप में शुद्ध हवा तथा दूसरे पाइप में खान की हवा प्रवाहित की जाती है। यदि खान की हवा शुद्ध है तो दोनों पाइप समस्वरित (Tuned) होंगे अर्थात् दोनों पाइपों में एक ही आवृत्ति का स्वर निकलेगा, अतः विस्पन्द सुनाई नहीं देंगे। यदि खान की हवा में खतरनाक गैस का वेग बढ़ जाता है। इससे उत्पन्न ध्वनि स्वर की आवृत्ति बदल जाती है, अतः विस्पन्द सुनाई देने लगेंगे।

(iv) संकरण विधि से ध्वनि उत्पन्न करना इसके लिए दो विद्युत परिपथ तैयार किये जाते हैं। इनमें प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न की जाती है। ये धाराएँ दो लाउडस्पीकरों को दी जाती है। इनमें से एक धारा की आवृत्ति को समायोजित करके इच्छित आवृत्ति के विस्पन्द उत्पन्न किए जा सकते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 18.
डॉप्लर प्रभाव से आप क्या समझते हैं ? किस परिस्थिति में यह लागू नहीं होता है ?
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.3
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

सूत्र sin (A + B) = sin A cos B + cos A sin B का प्रयोग करने पर
या y = sin ωt (a cos α + b cos ß) + cos ωt (a sin α + b sin ß)
माना a cos α + b cos ß = r cos θ …………(3)
एवं a sin α + b sin ß = r sin θ ………..(4)
अतः y = r sin ωt cos θ + r cos ωt sin θ
या y = r sin(ωt + θ) ………(5)
यह परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी उसी आवृत्ति से गति करेगी जिससे अध्यारोपित होने वाली तरंगे करती है। समी (5) में θ परिणामी तरंग की प्रारम्भिक कला है।

परिणामी तरंग का आयाम : समी (3) व (4) के वर्गों को जोड़ने पर
r² cos² θ + r² sin² θ = (a cos α + b cos ß)² + (a sin α + b sin ß)²
या r²(cos² θ + sin² θ) = a² cos α + b² cos ß+ 2ab cos α cos ß + a² sin² α + b² sin² ß + 2ab sin α sin ß
या r² = a² (cos² α + sin² α) + b² (cos² ß + sin² ß) + 2ab(cos α cos ß + sin α sin ß)
या r² = a² + b² + 2ab cos (ß – α) ………..(6)
[क्योंकि cos (A – B) = cosA cosB + sinA sinB]
∴ r = \(\sqrt{a^2+b^2+2ab cos(ß-α)}\) …………(7)

परिणामी तरंग का कला कोण : समी (4) में (3) का भाग देने पर-
\(\tan \theta=\frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)
\(\theta=\tan ^{-1} \frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 19.
यदि ध्वनि स्त्रोत एवं श्रोता दोनों गतिमान है, तो आभासी आवृत्ति के लिए विभिन्न स्थितियों में सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.4
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

सूत्र sin (A + B) = sin A cos B + cos A sin B का प्रयोग करने पर
या y = sin ωt (a cos α + b cos ß) + cos ωt (a sin α + b sin ß)
माना a cos α + b cos ß = r cos θ …………(3)
एवं a sin α + b sin ß = r sin θ ………..(4)
अतः y = r sin ωt cos θ + r cos ωt sin θ
या y = r sin(ωt + θ) ………(5)
यह परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी उसी आवृत्ति से गति करेगी जिससे अध्यारोपित होने वाली तरंगे करती है। समी (5) में θ परिणामी तरंग की प्रारम्भिक कला है।

परिणामी तरंग का आयाम : समी (3) व (4) के वर्गों को जोड़ने पर
r² cos² θ + r² sin² θ = (a cos α + b cos ß)² + (a sin α + b sin ß)²
या r²(cos² θ + sin² θ) = a² cos α + b² cos ß+ 2ab cos α cos ß + a² sin² α + b² sin² ß + 2ab sin α sin ß
या r² = a² (cos² α + sin² α) + b² (cos² ß + sin² ß) + 2ab(cos α cos ß + sin α sin ß)
या r² = a² + b² + 2ab cos (ß – α) ………..(6)
[क्योंकि cos (A – B) = cosA cosB + sinA sinB]
∴ r = \(\sqrt{a^2+b^2+2ab cos(ß-α)}\) …………(7)

परिणामी तरंग का कला कोण : समी (4) में (3) का भाग देने पर-
\(\tan \theta=\frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)
\(\theta=\tan ^{-1} \frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें

प्रश्न 20.
डॉप्लर प्रभाव के उपयोग से पनडुब्बी का वेग किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर:
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धान्त [Principle Of Superposition Of Waves]
इस अनुच्छेद में हम इस बात पर विचार करेंगे कि यदि कई प्रगामी तरंगें समान दिशा में या विपरीत दिशा में गति करती हों तो इस स्थिति में क्या होगा ? इस परिस्थिति में कण के विस्थापन का अध्ययन करने हेतु हम निम्न चित्र के अनुसार एक तनी हुई डोरी में एक ही समय पर विपरीत दिशा में गतिशील दो विक्षोभों की गति पर विचार करते हैं। स्थिति (a) के अनुरूप दो विक्षोभ (समान कला में ) ।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 15 तरंगें -4.5
विपरीत दिशाओं से एक-दूसरे की ओर गतिशील हैं तथा इनके मिलने के स्थान पर कण का विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा तरंगों के समान कला में होने के कारण यह बढ़ जाता है और विक्षोभों के पुनः अपनी दिशाओं में आगे बढ़ने पर अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार स्थिति (b) के अनुसार विक्षोभों के विपरीत कला में अध्यारोपित होने पर भी परिणामी विस्थापन पूर्व विस्थापन से भिन्न है तथा जब समय के साथ विक्षोभ आगे बढ़ जाते हैं तो ‘पुन: विस्थापन अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त कर लेता है।

इस प्रकार हम देखते हैं कि जब किसी कण पर एक ही समय पर दो या अधिक तरंगे अध्यारोपित हों तो वे कण के विस्थापन को प्रभावित करती हैं अत: “किसी कण पर एक ही समय पर एक से अधिक तरंगों के आरोपित होने को तरंगों का अध्यारोपण कहा जाता है।”

तरंगों के अध्यारोपण के परिणाम स्वरूप तात्क्षणिक रूप से उस पर प्रभावित सभी तरंगों के संयुक्त परिणामी प्रभाव के अन्तर्गत गति करता है। तो परिणामी विस्थापन अध्यारोपण के सिद्धान्त के अनुसार दिया जाता है।

अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition ):
“जब किसी माध्यम में दो या दो से अधिक तरंगें एक साथ जाती हैं अर्थात् वे अध्यारोपण करती हैं तो माध्यम के प्रत्येक कण का किसी समय परिणामी विस्थापन उन विस्थापनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है जो वे तरंगे एक-दूसरे की अनुपस्थिति में अलग-अलग उत्पन्न करती हैं।” अर्थात्
y = y1 + y2 + …
यह योग अलग-अलग विस्थापनों के बीजीय योग के बराबर होता है।

दो सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण:
इस गति के दौरान माध्यम के कण सरल आवर्त गति करते हैं तथा विस्थापन में माना कोई दो समान आवृत्ति की तरंगें जिनके कारण कण का विस्थापन एक ही दिशा में हो तो कण का विस्थापन निम्न प्रकार दिया जाता है-
y1 = a sin (ωt + α) ……….(1)
y2 = b sin(ωt + ß) ……….(2)
जहाँ α व ß उन तरंगों की प्रारम्भिक कला है एवं a व b उनके आयाम हैं।
अतः अध्यारोपण के सिद्धान्त से परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2
या y = a sin (ωt + α) + b sin(ωt + ß)
= a sin ωt cos α + a cos ωt sin α + b sin ωt cos ß + b cos ωt sin ß

सूत्र sin (A + B) = sin A cos B + cos A sin B का प्रयोग करने पर
या y = sin ωt (a cos α + b cos ß) + cos ωt (a sin α + b sin ß)
माना a cos α + b cos ß = r cos θ …………(3)
एवं a sin α + b sin ß = r sin θ ………..(4)
अतः y = r sin ωt cos θ + r cos ωt sin θ
या y = r sin(ωt + θ) ………(5)
यह परिणामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम है। इस समीकरण से स्पष्ट है कि परिणामी तरंग भी उसी आवृत्ति से गति करेगी जिससे अध्यारोपित होने वाली तरंगे करती है। समी (5) में θ परिणामी तरंग की प्रारम्भिक कला है।

परिणामी तरंग का आयाम : समी (3) व (4) के वर्गों को जोड़ने पर
r² cos² θ + r² sin² θ = (a cos α + b cos ß)² + (a sin α + b sin ß)²
या r²(cos² θ + sin² θ) = a² cos α + b² cos ß+ 2ab cos α cos ß + a² sin² α + b² sin² ß + 2ab sin α sin ß
या r² = a² (cos² α + sin² α) + b² (cos² ß + sin² ß) + 2ab(cos α cos ß + sin α sin ß)
या r² = a² + b² + 2ab cos (ß – α) ………..(6)
[क्योंकि cos (A – B) = cosA cosB + sinA sinB]
∴ r = \(\sqrt{a^2+b^2+2ab cos(ß-α)}\) …………(7)

परिणामी तरंग का कला कोण : समी (4) में (3) का भाग देने पर-
\(\tan \theta=\frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)
\(\theta=\tan ^{-1} \frac{a \sin \alpha+b \sin \beta}{a \cos \alpha+b \cos \beta}\)

आंकिक प्रश्न (Numerical Problems )

तरंगदैर्ध्य व तरंग गति पर आधारित

प्रश्न 1.
एक रेडियो प्रसारण केन्द्र की आवृत्ति 60 MHz है। केन्द्र से प्रसारित तरंगों की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। (प्रकाश की चाल = 3 × 108 ms-1)
उत्तर:
5 m

प्रश्न 2.
एक दर्शक समुद्र के किनारे खड़ा होकर देखता है कि 1 मिनट में 70 तरंगें किनारे तक पहुंचती हैं। यदि तरंगदैर्घ्य 12m हो तो उनका वेग बताइये।
उत्तर:
14 ms-1

प्रश्न 3.
समुद्र की तरंगों में दो शृंगों के बीच की दूरी 12m है और प्रति मिनट 20 श्रृंग बनते हैं तो तरंगों की चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
4 ms-1

तनी डोरी में तरंग की चाल

प्रश्न 4.
4.0m लम्बे तार का द्रव्यमान 0.01 kg है, इसे 400N बल से खींचा जाता है। तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल कितनी है ?
उत्तर:
400 ms-1

यांत्रिक तरंगों की चाल पर आधारित

प्रश्न 5.
इस्पात के लिए प्रत्यास्थता गुणांक 2.9 × 1011 Nm-2 है एवं घनत्व 8 × 103 kg.m-3 है इस्पात में अनुदैर्घ्य तरंगों का वेग बताइये।
उत्तर:
6.02 × 103 ms-1

प्रश्न 6.
105 Nm-2 वायुमण्डलीय दाब पर वायु का घनत्व 1.29 kg. m-3 है। यदि वायु के लिए = 1.41 है तो वायु में ध्वनि की चाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
330.6 ms-1

प्रश्न 7.
जल में ध्वनि की चाल 1346 ms-1 है तथा जल का घनत्व 1.0 × 103 kg.m-3 है। जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए।
उत्तर:
1.81 × 109 N.m-2

प्रश्न 8.
105 Nm-2 दाब पर जल की आयतन विकृति 5 × 10-5 है। यदि जल का घनत्व 1 × 103 kg.m-3 हो, तो जल में ध्वनि की चाल की गणना कीजिए।
उत्तर:
1414.2 ms-1

गैसों में ध्वनि की चाल पर आधारित

प्रश्न 9.
0°C पर वायु में ध्वनि की चाल 330 ms-1 है। किस ताप पर ध्वनि की चाल 495 ms-1 होगी ?
उत्तर:
341.25°C

प्रश्न 10,
0°C व 1092K ताप पर ध्वनि की चालों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
1 : 2

प्रश्न 11.
किसी ताप पर वायु में ध्वनि की चाल 25°C ताप पर वायु में ध्वनि की चाल की 1.6 गुनी हो जायेगी ?
उत्तर:
489.9°C

प्रश्न 12.
किस ताप पर ऑक्सीजन में ध्वनि की चाल वही होगी जो कि 28°C पर नाइट्रोजन में है ? ऑक्सीजन व नाइट्रोजन के अणुभार क्रमशः 32 व 28 है।
उत्तर:
71°C

प्रगामी तरंगों पर आधारित

प्रश्न 13.
किसी तरंग का समीकरण y = 0.5 sin π (100x – 3t) है। इसमें y व x मीटर में तथा t सेकण्ड में है। इस तरंग का प्रसारण वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
300 ms-1

प्रश्न 14.
निम्नलिखित तरंग समीकरण से तरंगदैर्घ्यं ज्ञात कीजिए-
y = 0.4 sin (120πt – \(\frac{4π}{5}\)), जहाँ दूरी m में तथा समय सेकण्ड में दिया गया है।
उत्तर:
2.5m

प्रश्न 15.
एक प्रगामी तरंग का आयाम 0.05m; चाल 330 ms-1 तथा आवृत्ति 110 Hz है। इस तरंग का समीकरण लिखिए।
उत्तर :
y = 0.05 sin 2π (110t – \(\frac{x}{3}]/latex])।

प्रश्न 16.
एक माध्यम के दो कणों के बीच की दूरी 5 cm है। यदि इनका कलान्तर [latex]\frac{π}{3}\) हो तो तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.3 m

प्रश्न 17.
एक प्रगामी तरंग का समीकरण y = 0.04 sin (157 t – 3.14 x) है जहाँ दूरियाँ m में तथा t सेकण्ड में हैं। तरंग आयाम, आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए इसी प्रकार यदि किसी अन्य तरंग का समीकरण y’ = 0.30 sin (157t – 3.14 x + 3.14) हो तो उपर्युक्त दोनों तरंगों के मध्य कलान्तर ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.04 m; 25 Hz; 2m; π rad. या 180°

प्रश्न 18.
दो तरंगों के आयामों का अनुपात 2:3 है तरंगों की तीव्रताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
4 : 9

प्रश्न 19.
एक समतल प्रगामी तरंग का समीकरण y = 0.4sin 8π (t – \(\frac{x}{20}\)) है। यदि तरंग किसी तल से परावर्तित होती है एवं परावर्तित तरंग का आयाम पहले का आधा रह जाता है तो परावर्तित तरंग का समीकरण ज्ञात कीजिए यदि तरंग किसी (i) दृढ़ तल से (ii) मुक्त तल से परावर्तित हो।
उत्तर:
(i) y’ = 0.2 sin 8π (t + \(\frac{x}{20}\))
(ii) y” = 0.2 sin 8π (t + \(\frac{x}{20}\))

प्रश्न 20.
अप्रगामी तरंग का समीकरण y = 12 cos \(\frac{πx}{5}\) sin 20πt जहाँ x व y सेमी में तथा t सेकण्ड में है ज्ञात कीजिए-
(i) प्रगामी तरंगों की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति (ii) वेग तथा आयाम ।
उत्तर:
(i) 10 cm; 10 Hz
(ii) 100 cms; 6 cm

प्रश्न 21.
किसी बन्द ऑगंन नली में बनी अप्रगामी तरंग का समीकरण है y = 7 cos (\(\frac{πx}{6}\)) sin (30 πt) जिसमें x एवं y, cm में तथा t, s में है। है। इस तरंग को उत्पन्न करने वाली प्रगामी तरंगों की आवृत्ति, चाल, आयाम तथा तरंगदैर्घ्यं ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
15 Hz; 180 cms; 3.5 cm 12 cm

प्रश्न 22.
एक सिरे पर बन्द नली में मूल स्वर की आवृत्ति 200 Hz है। इसी प्रकार की इसी लम्बाई की, परन्तु दोनों सिरों पर खुली नली के मूल स्वर की आवृत्ति क्या होगी ?
उत्तर:
400 Hz

प्रश्न 23.
एक बन्द आर्गन पाइप के मूल अधिस्वरक की आवृत्ति एवं एक खुले पाइप के मूल अधिस्वरक की आवृत्ति समान हैं उनकी लम्बाइयों में क्या अनुपात है ?
उत्तर:
1 : 2

प्रश्न 24.
दो स्वरित्र A व B एक साथ कम्पन करने पर क्षय विस्पन्द प्रति सेकण्ड उत्पन्न करते हैं। 32 cm लम्बे बन्द ऑर्गन पाइप के साथ A तथा 33 cm लम्बे बन्द ऑर्गन पाइप के साथ B अनुनाद करता है। स्वरित्रों की आवृत्तियाँ ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
264 Hz; 256 Hz

प्रश्न 25.
341 Hz आवृत्ति के एक स्वरित्र को 1m लम्बी नली के ठीक ऊपर कम्पित कराया जाता है। नली में धीरे-धीरे जल भरा जा रहा है। जल की कितनी ऊँचाई अनुनाद के लिए आवश्यक होगी ? (वायु में ध्वनि की चाल = 341 ms2 )
उत्तर:
75cm; 25cm

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)

प्रश्न 1.
द्रव्यमान केन्द्र की गति का मुख्य कारण है-
(a) पारस्परिक बल
(b) नाभिकीय बल
(c) बाह्य बल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) बाह्य बल

प्रश्न 2.
एक तार जिकसी लम्बाई L तथा द्रव्यमान M है, को वृत्ताकार छल्ले में मोड़ा जाता है। इसका जड़त्व आघूर्ण केन्द्र से गुजरने वाली तथा तल के लम्बवत् अक्ष के परित: है-
(a) \(\frac{ML²}{8π²}\)
(b) 8π² ML²
(c) \(\frac{ML²}{4π²}\)
(d) π² ML²
उत्तर:
(c) \(\frac{ML²}{4π²}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 3.
द्रव्यमान केन्द्र वह बिन्दु है जिसके सापेक्ष किसी पिण्ड के लिए निम्न राशि का मान शून्य होता है-
(a) कोणीय आघूर्ण
(b) बलाघूर्ण
(c) द्रव्यमान आघूर्ण
(d) भार
उत्तर:
(c) द्रव्यमान आघूर्ण

प्रश्न 4.
द्रव्यमान केन्द्र हमेशा वह बिन्दु है-
(a) जो पिण्ड का ज्यामितीय केन्द्र है
(b) जहाँ से सभी कणों की दूरी समान है।
(c) जहाँ पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जा सके
(d) जो निर्देश तन्त्र का मूल बिन्दु है।
उत्तर:
(c) जहाँ पिण्ड का सम्पूर्ण द्रव्यमान केन्द्रित माना जा सके

प्रश्न 5.
यदि HCI अणु में H की द्रव्यमान केन्द्र से दूरी हो तो CI35 की दूरी होगी-
(a) 35x
(b) x
(c) \(\frac{36x}{35}\)
(d) \(\frac{x}{35}\)
उत्तर:
(d) \(\frac{x}{35}\)

प्रश्न 6.
बाह्य बल की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केन्द्र से सम्बद्ध राशि नियत रहती है-
(a) वेग
(b) त्वरण
(c) स्थिति
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(a) वेग

प्रश्न 7.
एक घूमती हुई चकती की त्रिज्या यकायक आधी कर दी जाये परन्तु द्रव्यमान स्थिर रहे तो उसका कोणीय वेग हो जायेगा-
(a) दोगुना
(b) आधा
(c) चार गुना
(d) अपरिवर्तित
उत्तर:
(c) चार गुना

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 8.
कोणीय संवेग का 2 घटक रैखिक संवेग के घटकों रूप में निम्न है-
(a) Lz =xpy – yPx
(b) Lz = ypy – xPx
(c) Lz = yPx – xPy
(d) Lz =xpx – ypz
उत्तर:
(a) Lz =xpy – yPx

प्रश्न 9.
ग्रहों की परिभ्रमण गति में नियत रहता है-
(a) गुरुत्वीय बल
(b) अभिकेन्द्र बल
(c) कोणीय संवेग
(d) कोणीय त्वरण
उत्तर:
(c) कोणीय संवेग

प्रश्न 10.
घूर्णन गति में किया गया कार्य होता है-
(a) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\alpha}\)
(b) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\theta}\)
(c) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\omega}\)
(d) \(\vec{L} \cdot \vec{\theta}\)
उत्तर:
(b) \(\vec{\tau} \cdot \vec{\theta}\)

प्रश्न 11.
केन्द्रीय बल क्षेत्र में नियत रहता है-
(a) रैखिक संवेग
(b) कोणीय संवेग
(c) गतिज ऊर्जा
(d) स्थितिज ऊर्जा
उत्तर:
(b) कोणीय संवेग

प्रश्न 12.
दो बिन्दु द्रव्यमान क्रमश: m1,m2 अपने परस्पर गुरुत्वीय आकर्षण बल के प्रभाव में गति करते हैं। यदि कोई अन्य बल नहीं लग रहा हो तो संरक्षित रहेगा-
(a) केवल रैखिक संवेग
(b) केवल कोणीय संवेग
(c) दोनों रैखिक एवं कोणीय संवेग
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(c) दोनों रैखिक एवं कोणीय संवेग

प्रश्न 13.
यदि दो द्रव्यमान m1 तथा m2 की द्रव्यमान केन्द्र से दूरी क्रमशः r1 तथा r2 हो तो का मान होगा-
(a) m1 / m2
(b) (m1 / m2
(c) m2 / m1
(d) (m2 / m1
उत्तर:
(c) m2 / m1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 14.
दो कण जिनके द्रव्यमान 10 तथा 30 किलोग्राम हैं और इनके स्थिति सदिश क्रमश: \((\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})\) तथा \((-\hat{i}-\hat{j}-\hat{k})\) है तो निकाय का द्रव्यमान केन्द्र होगा-
(a) \(– \frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{2}\)
(b) \(\frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{2}\)
(c) \(– \frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{4}\)
(d) \(\frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{4}\)
उत्तर:
(a) \(– \frac{(\hat{i}+\hat{j}+\hat{k})}{2}\)

प्रश्न 15.
एक समान वर्गाकार प्लेट ABCD के दो किनारों B व C पर एक-एक किग्रा के पिण्ड रखे हैं। एक तीसरे 2 किग्रा द्रव्यमान के पिण्ड को प्लेट पर कहाँ रखें कि प्लेट का द्रव्यमान केन्द्र वर्ग के केन्द्र 0 पर ही रहे?
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -1
(a) P
(b) 2
(c) R
(d) s
उत्तर:
(b) 2

प्रश्न 16.
जूल सेकण्ड मात्रक है-
(a) शक्ति का
(b) कोणीय संवेग का
(c) बल आघूर्ण का
(d) रैखिक संवेग का
उत्तर:
(b) कोणीय संवेग का

प्रश्न 17.
डिस्क की स्वयं की अक्ष के प्रति घूर्णन त्रिज्या है-
(a) R / 2
(b) R / √2
(c) R
(d) R√2
उत्तर:
(b) R / √2

प्रश्न 18.
लम्बाई तथा द्रव्यमान के एक पतले तार को अर्धवृतत के रूप में मोड़ा गया है। उसके स्वतन्त्र किनारों को मिलाने वाली रेखा के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण होगा-
(a) \(\frac{m l^2}{2 \pi^2}\)
(b) \(\frac{m l^2}{2}\)
(c) \(\frac{m l^2}{\pi^2}\)
(d) ml²
उत्तर:
(a) \(\frac{m l^2}{2 \pi^2}\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 19.
एक छल्ला किसी नत तल पर प्रथम बार बिना लुढ़के खिसकता है तथा दूसरी बार बिना खिसके लुढ़कता है तो दोनों परिस्थितियों में उत्पन्न त्वण का अनुपात है-
(a) 1 : 1
(b) 2 : 1
(c) 1 : 2
(d) 4 : 1
उत्तर:
(b) 2 : 1

प्रश्न 20.
एक पतला खोखला बेलन जिसका व्यास 0.3 मीटर है, 2 मीटर ऊँचे नत तल पर विरामावस्था से लुढ़कता है पैदे पर पहुँचने पर उसका रेखीय वेग होगा-
(a) 2g
(b) √2g
(c) g/2
(d) \(\frac{3g}{10}\)
उत्तर:
(b) √2g

प्रश्न 21.
बाह्य बल की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केन्द्र का वेग-
(a) शून्य है
(b) नियत रहेगा
(c) बढ़ेगा
(d) छटेगा।
उत्तर:
(b) नियत रहेगा

प्रश्न 22.
किसी पदार्थ के गोले के लिए उसके व्यास के जड़त्व आघूर्ण / का मान उसकी त्रिज्या R की किस घात के समानुपाती है?
(a) R²
(b) R²
(c) R4
(d) R²
उत्तर:
(b) R²

प्रश्न 23.
किसी ठोस गोले का व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण का मान I है तो गोले का उसकी स्पर्श रेखा के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण होगा-
(a) \(\frac{7}{2}\)I
(b) \(\frac{5}{2}\)I
(c) \(\frac{2}{5}\)I
(d) \(\frac{1}{2}\)I
उत्तर:
(a) \(\frac{7}{2}\)I

प्रश्न 24.
1 मीटर व 5 मीटर त्रिज्या की दो वलय एक नत तल पर एक साथ बिना फिसले प्रारम्भ करते हैं। पृथ्वी तल पर कौन-सी वलय पहले पहुंचेगी?
(a) बड़ी वलय
(b) छोटी वलय
(c) दोनों एक साथ
(d) कुछ नहीं कहा जा सकता।
उत्तर:
(c) दोनों एक साथ

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
दृढ़ पिण्ड की साम्यावस्था के लिए प्रतिबन्ध लिखिए।
उत्तर:
ΣF = 0 तथा Στ = 0

प्रश्न 2.
द्विपरमाणुक अणु के जड़त्व आघूर्ण के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
I = \(\frac{m_1m_2}{m_1+m_2}\)r² जहाँ दोनों परमाणुओं के मध्य दूरी।

प्रश्न 3.
क्या किसी पिण्ड की घूर्णन त्रिज्या अचर राशि है?
उत्तर:
नहीं; घूर्णन अक्ष बदलने पर जड़त्व आघूर्ण एवं घूर्णन त्रिज्या दोनों के मान बदल जाते हैं।

प्रश्न 4.
धनात्मक आघूर्ण व ऋणात्मक आघूर्ण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यदि बल की प्रवृत्ति पिण्ड को वामावर्त (Anticlockwise) दिशा में घुमाने की है तो उसका बल आघूर्ण धनात्मक आघूर्ण कहलाता है। इसके विपरीत पिण्ड को दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घुमाने की प्रवृत्ति रखने वाले बल का आघूर्ण ऋणात्मक आघूर्ण कहलाता है।

प्रश्न 5.
किसी गोले को पिघलाकर उसे चकती का स्वरूप प्रदान कर दिया जाता है तो उसके जड़त्व आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
चकती का जड़त्व आघूर्ण गोले के जड़त्व आघूर्ण से अधिक होगा।

प्रश्न 6.
क्या द्रव्यमान केन्द्र व गुरुत्व केन्द्र सम्पाती होते हैं?
उत्तर:
समरूप द्रव्यमान घनत्व वाली वस्तुओं में उक्त दोनों केन्द्र सम्पाती होते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 7.
पेंचकस का हत्या चौड़ा क्यों बनाया जाता है?
उत्तर:
पेंचकस के हत्थे पर अंगूठे एवं उँगलियों की सहायता से बलयुग्म लगाकर उसे घूर्णन गति प्रदान की जाती है और बलयुग्म का आघूर्ण τ = F × r
अतः r के मान को बढ़ाने के लिए पेंचकस का हत्था चौड़ा लिया जाता है ताकि कम बल (F) लगाने पर भी अधिक बलयुग्म का आघूर्ण (τ) प्राप्त हो सके और पेंच को आसानी से खोला या कसा जा सके।

प्रश्न 8.
किसी दृढ़ पिण्ड के समस्त कणों के कोणीय वेग एक समान होते हैं या भिन्न-भिन्न?
उत्तर:
दृढ़ पिण्ड के सभी कणों के कोणीय वेग समान होते हैं।

प्रश्न 9.
समान द्रव्यमान त्रिज्या तथा आकृति की खोखली तथा ठोस वस्तुओं में किसका जड़त्व अधिक होगा?
उत्तर:
खोखली वस्तुओं का जड़त्व अधिक होता है ।

प्रश्न 10.
क्या घर्षण रहित नत तल पर कोई वस्तु लोटनी गति कर सकती है?
उत्तर:
नहीं; वह फिसल जायेगी।

प्रश्न 11.
किसी पिण्ड के कोणीय संवेग J, जड़त्व आघूर्ण एवं कोणीय वेग 00 में क्या सम्बन्ध होता है?
उत्तर:
J = I.ω ।

प्रश्न 12.
किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
(i) घूर्णन अक्ष की स्थिति पर
(ii) घूर्णन अक्ष के सापेक्ष पिण्ड के द्रव्यमान वितरण पर ।

प्रश्न 13.
क्या यह आवश्यक है कि द्रव्यमान केन्द्र पर द्रव्यमान उपस्थित हो?
उत्तर:
नहीं। उदाहरण के लिए वलय का द्रव्यमान केन्द्र उसके केन्द्र पर होता है जहाँ द्रव्यमान नहीं होता है।

प्रश्न 14.
क्या द्रव्यमान केन्द्र एक वास्तविकता है?
उत्तर:
नहीं, यह केवल एक गणितीय अवधारणा है।

प्रश्न 15.
क्या रेखीय गति में वस्तु में कोणीय संवेग हो सकता है?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 16.
यदि पृथ्वी की त्रिज्या कम हो जाये तो दिन की लम्बाई में क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
पृथ्वी की त्रिज्या कम होने पर जड़त्व आघूर्ण (I) कम हो जायेगा। फलस्वरूप कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त के अनुसार (I.ω = नियतांक) उसका कोणीय वेग ω का मान बढ़ेगा और ω का मान बढ़ने से (ω = \(\frac{2π}{T}\)) आवर्तकाल T का मान कम होगा। परिणामस्वरूप दिन की लम्बाई घट जायेगी।

प्रश्न 17.
किस अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण न्यूनतम होता है?
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण न्यूनतम होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 18.
एक व्यक्ति घूर्णन कर रही मेज पर अपनी भुजाएं फैलाये हुए बैठा है। यदि वह भुजाएं सिकोड़ ले तो क्या होगा?
उत्तर:
भुजाएं सिकोड़ने पर उसका जड़त्व आघूर्ण कम होने से उसका कोणीय वेग बढ़ जायेगा।

प्रश्न 19.
एक पतली छड़ का द्रव्यमान M एवं इसकी लम्बाई L है तो छड़ के सिरे से छड़ के लम्बवत् गुजरने वाली अक्ष के सापेक्ष उसका जड़त्व आघूर्ण क्या होगा?
उत्तर:
I = \(\frac{ML^{2}}{3}\)

प्रश्न 20.
गतिशील वाहनों के पहिए बीच में खोखले एवं परिधि पर मोटे बनाये जाते हैं क्यों?
उत्तर:
ऐसा करने से पहिए का जड़त्व आघूर्ण बढ़ जाता है और वह गति पालक चक्र (Flywheel) की भाँति कार्य करने लगता है। फलस्वरूप इंजन बन्द कर देने पर भी वाहन अचानक नहीं रुकता है।

प्रश्न 21.
क्या पिण्ड के जड़त्व आघूर्ण का मान उसके कोणीय वेग पर निर्भर करता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 22.
M द्रव्यमान तथा / लम्बाई के एक खोखले बेलन की आंतरिक तथा बाह्य त्रिज्याएं क्रमश: R1 व R2 हैं। इसके केन्द्र से होकर जाने वाली तथा बेलन के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण कितना होता है?
उत्तर:
\(I=M\left[\frac{l^2}{12}+\frac{R_1^2+R_2^2}{4}\right]\)

प्रश्न 23.
कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर किस भौतिक राशि को प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
बल आघूर्ण को = \(\left[\tau=\frac{\Delta J}{\Delta t}\right]\)

प्रश्न 24.
बलयुग्म किस प्रकार की गति उत्पन्न करता है?
उत्तर:
केवल घूर्णन गति उत्पन्न करता है।

प्रश्न 25.
साइकिल के पहिए तानेंदार (spokes) क्यों बनाये जाते हैं?
उत्तर:
जड़त्व आघूर्ण बढ़ाने के लिए साइकिल के पहिए तानेदार बनाये जाते हैं।

प्रश्न 26.
जब कोई वस्तु क्षैतिज से θ कोण पर झुके तल पर फिसलती है तो उसका त्वरण क्या होता है?
उत्तर:
g sin θ

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प्रश्न 27.
समान कोणीय वेग से घूर्णन कर रहे एक वृत्ताकार प्लेटफार्म के किनारे के निकट एक व्यक्ति बैठा है। यदि वह अचानक प्लेटफार्म के केन्द्र की ओर चलना प्रारम्भ करता है तो प्लेटफार्म के कोणीय वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
केन्द्र की ओर व्यक्ति के चलने पर कुल जड़त्व आघूर्ण कम होगा फलस्वरूप कोणीय संरक्षण के सिद्धान्त से कोणीय वेग बढ़ जायेगा।

प्रश्न 28.
विलगित निकाय क्या होता है?
उत्तर:
वह निकाय जिस पर कोई बाह्य बल न लग रहा हो, विलगित निकाय कहलाता है।

प्रश्न 29.
यदि दो विभिन्न द्रव्यमान के तरबूज एक पुल से एक साथ ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर गिराये जायें तो तरबूजों के द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण क्या होगा?
उत्तर:
दोनों तरबूजों के द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण g होगा।

प्रश्न 30.
एक त्रिभुजाकार पटल के द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति क्या होगी?
उत्तर:
त्रिभुजाकार पटल की तीनों मध्यिकाओं का कटान बिन्दु ही पटल का द्रव्यमान केन्द्र होगा।

प्रश्न 31.
एक आयताकार पटल का द्रव्यमान M, लम्बाई l व चौड़ाई b है तो उसके तल के लम्बवत् तथा उसके द्रव्यमान केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष के परित: उसका जड़त्व लिखिए ।
उत्तर:
\(I=M\left[\frac{l^2+b^2}{12}\right]\)

प्रश्न 32.
ठोस गोले का उसके किसी व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण क्या होगा?
उत्तर:
I = \(\frac{2}{5}\) MR²,
जहाँ M = गोले का द्रव्यमान
R = गोले की त्रिज्या

प्रश्न 33.
किसी वलय का उसके व्यास के सापेक्ष जड़त्व आपूर्ण क्या होगा?
उत्तर:
I = \(\frac{1}{2}\) MR²
जहाँ M= वलय का जड़त्व आघूर्ण;
R = वलय की त्रिज्या

प्रश्न 34.
रेखीय गति में बल = द्रव्यमान × त्वरण होता है। इससे संगत घूर्णन गति का व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
बल आघूर्ण = जड़त्व आघूर्ण × कोणीय त्वरण

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प्रश्न 35.
पेन का ढक्कन दो अंगुलियों की सहायता से आसानी से खुल जाता है परन्तु एक अंगुली से नहीं, क्यों?
उत्तर:
पेन का ढक्कन खोलने के लिए बलयुग्म की आवश्यकता होती है जो दो अंगुलियों द्वारा ही सम्भव हो पाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

प्रश्न 1.
धातु की दो वृत्ताकार चकतियाँ A व B के द्रव्यमान व मोटाई समान हैं। 4 का घनत्व B के घनत्व का दो गुना है। चकती व B का इनके अक्षों के प्रति जड़त्व आघूर्णो का अनुपात क्या होगा ?
उत्तर:
चकती का जड़त्व आघूर्ण I = \(\frac{1}{2}\) Mr²
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प्रश्न 2.
जब ठोस गोला किसी नत तल पर लुढ़कता है तो घूर्णन ऊर्जा कुल ऊर्जा का कितना प्रतिशत होगी?
उत्तर:
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प्रश्न 3.
तीन वलय जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान M एवं त्रिज्या है, त्रिभुजाकार आकृति में व्यवस्थित है। इस निकाय का YY” अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
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उत्तर:
वलय का उसकी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण = MR²
वलय का व्यास के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण
Id = \(\frac{1}{2}\) MR²
अतः व्यास के समान्तर स्पर्शरेखीय अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण
IT = \(\frac{3}{2}\) MR²
अतः पूरे निकाय का YY’ अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण
IYY’ = I1 + I2 + I3
= \(\frac{3}{2}\) MR² + \(\frac{3}{2}\) MR² + \(\frac{1}{2}\) MR²
या IYY’ = \(\frac{7}{2}\) MR²

प्रश्न 4.
एक सीढ़ी दीवार के सहारे तिरछी लगी है। यदि वह फिसले तो उसका तात्क्षणिक घूर्णन केन्द्र कहाँ होगा?
उत्तर:
ऊपरी सिरे के स्पर्श बिन्दु पर दीवार के लम्बवत् तथा नीचे के स्पर्श बिन्दु पर जमीन के लम्ब के कटान बिन्दु पर होगा।

प्रश्न 5.
द्रव्यमान m का एक कण v वेग से X-दिशा में गतिशील है। जब वह बिन्दु (x,y,z) पर स्थित होता है तो उस पर मूल बिन्दु के परितः कण के कोणीय संवेग के घटक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
कण X- अक्ष के अनुदिश गतिशील है अतः उसका रेखीय संवेग
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प्रश्न 6.
समान पदार्थ के गोलों के लिए जड़त्व आघूर्ण तथा त्रिज्या का क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण
I = \(\frac{2}{5}\) MR²
∵ M = \(\frac{4}{3}\) πR³ . ρ
∴ I = \(\frac{2}{5}\) × \(\frac{4}{3}\) πR³ . ρ . R²
= \(\frac{8}{15}\) πρR5
∴ I ∝ R5 (क्योंकि \(\frac{8πρ}{15}\) = नियतांक)

प्रश्न 7.
एक वलय का उसकी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण मात्रक है। वलय का उसके तल में स्थित परितः अक्ष (अर्थात् वलय के तल में स्पशरिखीय अक्ष) के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर;
दिया है MR² = 8 मात्रक
∴ वलय के तल में स्थित स्पर्शरेखीय अक्ष के सापेक्ष वलय का जड़त्व आघूर्ण समान्तर अक्षों की प्रमेव से-
I = ICM + MR² = Id + MR² = \(\frac{1}{2}\)MR² + MR²
I = \(\frac{3}{2}\) MR²
= \(\frac{3}{2}\) × 8 = 12 मात्रक
या I = 12 मात्रक

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प्रश्न 8.
समान द्रव्यमान के ठोस गोले भिन्न-भिन्न पदार्थों के बनाये जाते हैं। गोलों के जड़त्व आघूर्ण का उनके घनत्व d के साथ क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर;
ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण I = \(\frac{1}{2}\)MR²
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प्रश्न 9.
यदि एक ठोस गोला जिसका द्रव्यमान M है, ऊर्ध्वाधर दिशा में एक नत तल पर से hm नीचे लुढ़ककर आ जाता है। गोले का वेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
नत तल पर लुढ़कने पर प्राप्त वेग,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -7

प्रश्न 10.
हेलिकॉप्टर में दो नोदक (Propellers) क्यों काम में लाये जाते हैं?
उत्तर:
हेलिकॉप्टर में केवल एक नोदक लगाने पर कोणीय संवेग संरक्षण के नियमानुसार हेलिकॉप्टर स्वयं नोदक के घूर्णन के विपरीत दिशा में घूम जायेगा। फलस्वरूप वह ऊपर नहीं उठ पायेगा। इस समस्या के निदान के लिए दो नोदक प्रयोग में लाये जाते हैं।

प्रश्न 11.
मोम की एक चकती को पिघलाकर ठोस गोले के रूप में डाल दिया जाता है। केन्द्र से गुजरने वाली उभयनिष्ठ अक्ष के प्रति जड़त्व आघूर्ण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
चकती को पिघलाकर गोले के रूप में डाल देने उसकी त्रिज्या (R) का मान काफी कम हो जायेगा अतः गोले का जड़त्व आघूर्ण (\(\frac{2}{5}\)MR1²) चकती के जड़त्व आघूर्ण (\(\frac{1}{2}\)MR²) से काफी कम हो जायेगा।

प्रश्न 12.
मूल बिन्दु से (\((2 \hat{i}-4 \hat{j}+2 \hat{k})\))m दूरी पर एक बिन्दु पर बल \((3 \hat{i}+2 \hat{j}-4 \hat{k})\) N कार्य कर रहा है। बल आघूर्ण का परिमाण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -8

प्रश्न 13.
समान द्रव्यमान के एवं समान त्रिज्या के एक ठोस व खोखले गोले को एक साथ समान कोणीय वेग से घुमाया जाता है तो कौन सा गोला पहले रुकेगा?
उत्तर:
ठोस गोला क्योंकि इसका जड़त्व आघूर्ण कम है अतः यह समान घूर्णन गति का विरोध कम करेगा।

प्रश्न 14.
m1, m2 तथा m3 द्रव्यमानों के तीन कण एक समबाहु त्रिभुज के तीन शीर्षो पर स्थित हैं। त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई a हो, तो इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण त्रिभुज की m1 द्रव्यमान से गुजरने वाली माध्यिका के परितः ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
द्रव्यमानों एवं माध्यिका की व्यवस्था संलग्न चित्र में प्रदर्शित है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -9

प्रश्न 15.
द्रव्यमान m व त्रिज्या r की एक ठोस चकती क्षैतिज तल पर कोणीय चाल ω से लुढ़क रही है। मूल बिन्दु O के परितः चकती का कोणीय संवेग ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -10
उत्तर:
OX अक्ष के सापेक्ष चकती का जड़त्व आघूर्ण
I = ICM + Mr² = \(\frac{1}{2}\)Mr² + Mr²
या I = \(\frac{3}{2}\) Mr²
∴ चकती का कोणीय संवेग,
J = I.ω = \(\frac{3}{2}\) Mr².ω

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प्रश्न 16.
समान द्रव्यमान तथा समान मोटाई की दो कतियाँ A व B भिन्न धातुओं की बनी हैं जिनके घनत्व ρA व ρBA > ρB) हैं। यदि उनके वृत्ताकार तलों के लम्बवत् तथा गुरुत्वीय केन्द्रों से पारित अक्षों के परितः जड़त्व आघूर्ण IA व IB हों तो IA व IB में कौन बड़ा होगा?
उत्तर:
चकती का उसकी अक्ष के सापेक्ष जड़त्व आघूर्ण I = \(\frac{3}{2}\) MR²
यदि चकतियों की मोटाई t हो तो चकती का द्रव्यमान
M = आयतन × घनत्व = πR².t.ρ
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प्रश्न 17.
यदि ध्रुवों पर जमी हुई बर्फ पिघल जाये तो दिन-रात, की अवधि पर क्या प्रभाव सम्भव है?
उत्तर:
ध्रुवों पर दिन रात की अवधि पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन गति पर निर्भर करती है। यदि ध्रुवों की बर्फ पिघल जाये तो यह पृथ्वी की सतह पर फैल जायेगी जिससे पृथ्वी का द्रव्यमान विस्तार बढ़ने से जड़त्व आघूर्ण बढ़ जायेगा और जड़त्व आघूर्ण बढ़ जाने पर कोणीय वेग घट जायेगा। अत: सूत्र (ω = \(\frac{2π}{T}\)) के अनुसार ω घटने से T (दिन-रात की अवधि) का मान बढ़ जायेगा अर्थात् दिन-रात की अवधि बढ़ जायेगी।

प्रश्न 18.
न्यूटन का गति विषयक नियम निकाय के अलग-अलग कणों के लिए लागू है, फिर भी निकाय की गति को न्यूटन के नियम द्वारा वर्णित किया जा सकता है। समझाइये।
उत्तर:
निकाय का सम्पूर्ण द्रव्यमान निकाय के द्रव्यमान केन्द्र पर संकेन्द्रित माना जा सकता है तथा सभी बाह्य बल भी द्रव्यमान केन्द्र पर लगे माने जा सकते हैं। तब न्यूटन के नियम के अन्तर्गत द्रव्यमान केन्द्र की गति निकाय की गति को व्यक्त करेगी।

प्रश्न 19.
एक बिल्ली गिरने पर अपने पैरों पर सुरक्षित उत्तर जाती है। क्यों?
उत्तर:
कोणीय संवेग संरक्षण के अनुसार,
Iω = नियतांक ⇒ ω ∝ \(\frac{1}{I}\)
जब बिल्ली नीचे गिरती है तो यह अपनी पूँछ एवं शरीर को तान लेती है जिससे बिल्ली का जड़त्व आघूर्ण बढ़ जाता है और फलस्वरूप उसका कोणीय वेग घट जाता है। इस प्रकार बिल्ली गिरने पर अपने पैरों पर सुरक्षित उतर जाती है।

प्रश्न 20.
गुरुत्व केन्द्र एवं द्रव्यमान केन्द्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए। क्या ये पिण्ड में एक ही बिन्दु पर होते हैं?
उत्तर:
\(\vec{r}_{C M}=\frac{\Sigma m_i \overrightarrow{r_i}}{\Sigma m_i}\) तथा \(\overrightarrow{r_{C G}}=\frac{\Sigma m_i g_i \overrightarrow{r_i}}{\Sigma m_i g_i}\)
अतः एक समान गुरुत्व केन्द्र में अर्थात् पिण्ड का आकार पृथ्वी की तुलना में बहुत छोटा होने पर, इसके प्रत्येक कण पर का मान समान होने से दोनों द्रव्यमान केन्द्र व गुरुत्व केन्द्र सम्पाती होंगे।

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प्रश्न 21.
घूर्णन गति करने वाली दो वस्तुओं 4 तथा B के जड़त्व आघूर्ण IA व IB हैं। यदि इनके कोणीय संवेग बराबर हों, तो किसकी गतिज ऊर्जा अधिक होगी? दिया है- IA > IB
उत्तर;
दिया है: JA = JB
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प्रश्न 22.
छोटी डोरी से एक पत्थर के टुकड़े को बाँधकर घुमाना आसान होता है जबकि बड़ी डोरी से बाँधकर इसे घुमाना कठिन है, क्यों?
उत्तर:
पत्थर का जड़त्व आघूर्ण I = mr²
यदि डोरी छोटी है, तो वृत्त की त्रिज्या (r) कम होगी अतः जड़त्व आघूर्ण कम होगा। इसके विपरीत डोरी बड़ी होने पर जड़त्व आघूर्ण अधिक होगा। घूर्णन गति के समीकरण τ = Iα के अनुसार समान कोणीय त्वरण उत्पन्न करने के लिए छोटी डोरी की स्थिति में कम व बड़ी डोरी की स्थिति में अधिक बल-आघूर्ण लगाना पड़ेगा। अतः छोटी डोरी से पत्थर को बाँधकर घुमाना आसान है।

प्रश्न 23.
चक्रवात में चक्करदार वायु के झोंके के अक्ष के निकट की परतों का वेग बहुत अधिक होता है। समझाइये क्यों?
उत्तर:
चक्रवात में वायु की आन्तरिक परतें अक्ष के बहुत निकट होती हैं जिससे वायु के कणों का जड़त्व आघूर्ण बहुत कम हो जाता है अतः कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त से इन आन्तरिक परतों का कोणीय वेग बहुत अधिक हो जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

प्रश्न 1.
दृढ़ पिण्ड से क्या अभिप्राय है? इसकी स्थानान्तरीय एवं घूर्णन गतियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दृढ पिण्ड (Rigid Body) :
“वे पिण्ड जिनकी आकृति बाह्य बल लगाने पर भी अपरिवर्तित रहती है अर्थात् जिनके कणों की आन्तरिक दूरियाँ अपरिवर्तित रहती हैं, दृढ़ पिण्ड कहलाते हैं।”
प्रकृति में कोई वस्तु पूर्णतः दृढ़ पिण्ड नहीं होती है क्योंकि उच्च दाब या बल लगाकर वस्तु में विकृति उत्पन्न की जा सकती है। अतः ऐसी वस्तुओं का अध्ययन करने के लिए आदर्श दृढ़ पिण्ड की कल्पना करते हैं जिसमें विकृतियाँ नगण्य रहती हैं। दृढ पिण्ड की गति में स्थानान्तरीय गति (Translational motion) तथा घूर्णन गति (Rotational motion) सम्मिलित होती है। यदि दृढ पिण्ड उससे गुजरने वाली स्थिर अक्ष के प्रति घूर्णन करती है, तो उसे पिण्ड की शुद्ध घूर्णन गति (Pure-rotational motion) कहते हैं तथा अक्ष घूर्णन अक्ष (axis of rotation) कहलाती है, उदाहरण के लिए छत से लटके पंखे की गति शुद्ध घूर्णन गति होती है। परन्तु कुछ स्थितियों में दृढ़ पिण्ड की गति के दौरान घूर्णन अक्ष स्थिर नहीं रहती है। इस स्थिति में पिण्ड में घूर्णन गति के साथ-साथ स्थानान्तरीय गति भी होती है। यदि गति के दौरान दृढ़ पिण्ड के कण परस्पर समान्तर पथ में गति करते हैं, तो वह स्थानान्तरीय गति कहलाती है । उदाहरण के लिए किसी पिण्ड का किसी तल पर फिसलना व्यक्ति का किसी तल पर चलना आदि।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -13

जब गति के दौरान दृढ़ पिण्ड के कण घूर्णन अक्ष के सापेक्ष अपनी स्थिति परिवर्तित करते हैं तो वह गति घूर्णन एवं स्थानान्तरीय गतियों का मिश्रण होती है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -14

दौरान दृढ पिण्ड का प्रत्येक कण घूर्णन अक्ष के परितः वृत्ताकार गति करता है। गति के दौरान घूर्णन अक्ष स्थिर या अपनी दिशा परिवर्तित कर सकती है। अतः “यदि दृढ़ पिण्ड का प्रत्येक बिन्दु वृत्ताकार पथ में गति करता हो तथा प्रत्येक वृत्त का केन्द्र एक उभयनिष्ठ रेखा पर स्थित हो, तो उस गति को शुद्ध घूर्णन गति कहते हैं तथा रेखा को घूर्णन-अक्ष कहते हैं।”
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -15

चित्र में पिण्ड की घूर्णन गति को दर्शाया गया है। चित्र में पिण्ड के तीन कण P, Q R दिखाये गये हैं जो घूर्णन अक्ष AB से क्रमशः r1, r2 व r3 दूरियों पर स्थित हैं। पिण्ड की घूर्णन गति के दौरान इन कणों के वृत्तीय पथों की त्रिज्याएं क्रमशः r1, r2 व r3 होगी और इन पथों के केन्द्र O, O’ और O” उभयनिष्ठ अक्ष AB पर होंगे। इन सभी कणों के कोणीय वेग एवं आवर्तकाल समान होंगे।

कुछ विशेष स्थितियों में दृढ़ पिण्ड के घूर्णन अक्ष की स्थिति में परिवर्तन होता रहता है परन्तु उसमें कोई स्थानान्तरण नहीं होता है। उदाहरण के लिए घूमते हुए लट्टू की गति। इस गति को शुद्ध पुरस्सरण गति (Pure Precessional motion) कहते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 2.
द्रव्यमान केन्द्र से क्या अभिप्राय है? इसके कार्तीय घटकों के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र (Centre of Mass) :
दृढ़ पिण्डों की जटिल गतियों, जिनमें वह स्थानान्तरीय गति के साथ-साथ घूर्णन गति भी करता है, को समझना गणितीय रूप से अत्यधिक कठिन होता है। इस प्रकार की गतियों को समझने के लिए यदि हम पिण्ड के एक विशेष बिन्दु पर ध्यान रखें तो गति का विश्लेषण करना अत्यधिक सरल हो जाता है। इस विशेष बिन्दु को द्रव्यमान केन्द्र कहते हैं। द्रव्यमान केन्द्र को निम्न प्रकार परिभाषित करते हैं-
“किसी दृढ़ पिण्ड अर्थात् कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र वह बिन्दु है जो इस प्रकार गति करता है कि मानों निकाय का समस्त द्रव्यमान वहाँ पर केन्द्रित हो और समस्त बाह्य बल इसी बिन्दु पर कार्यरत् हों।” उदाहरण के लिए ठोस गोले का केन्द्र ही द्रव्यमान केन्द्र होता है। सामान्यत: नियमित आकार के पिण्डों का द्रव्यमान केन्द्र उनका ज्यामितीय केन्द्र होता है।

दो कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र (Centre of Mass of a System of Two Particles) :
माना किसी निकाय में दो कण हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः m1 व m2 हैं तथा निर्देश बिन्दु O से जिनके स्थिति सदिश \(\overrightarrow{r_1}\) व \(\overrightarrow{r_2}\) हैं एवं इन कणों का आपस में तथा बाह्म वातावरण से सम्बन्ध है। इनके द्रव्यमान केन्द्र (C.M.) का स्थिति सदिश,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -16
उपपत्ति (Proof):
माना इन कणों पर कार्य करने वाले बाह्य बल क्रमश: \(\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}\) व \(\overrightarrow{F_{2 \mathrm{ext}}}\) तथा आन्तरिक बल क्रमश: \(\overrightarrow{F_{12}}\) व \(\overrightarrow{F_{21}}\) हैं। अतः कण A पर नेट बल,
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माना किसी क्षण पर द्रव्यमान केन्द्र के स्थिति सदिश, वेग तथा त्वरण क्रमशः \(\overrightarrow{r_{c m}} ; \overrightarrow{v_{c m}}\) एवं \(\overrightarrow{a_{c m}}\) हैं।
निकाय का कुल द्रव्यमान M = (m1 + m2)
∵ द्रव्यमान केन्द्र की अभिधारणा से कुल बाह्य बल \(\vec{F}=\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}+\vec{F}_{2 \mathrm{ext}}\) द्रव्यमान केन्द्र पर कार्य करता है तथा कुल द्रव्यमान भी द्रव्यमान केन्द्र पर केन्द्रित माना जाता है। अत: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -18

प्रश्न 3.
सतत् पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
दो कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र (Centre of Mass of a System of Two Particles) :
माना किसी निकाय में दो कण हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः m1 व m2 हैं तथा निर्देश बिन्दु O से जिनके स्थिति सदिश \(\overrightarrow{r_1}\) व \(\overrightarrow{r_2}\) हैं एवं इन कणों का आपस में तथा बाह्म वातावरण से सम्बन्ध है। इनके द्रव्यमान केन्द्र (C.M.) का स्थिति सदिश,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -16.1
उपपत्ति (Proof):
माना इन कणों पर कार्य करने वाले बाह्य बल क्रमश: \(\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}\) व \(\overrightarrow{F_{2 \mathrm{ext}}}\) तथा आन्तरिक बल क्रमश: \(\overrightarrow{F_{12}}\) व \(\overrightarrow{F_{21}}\) हैं। अतः कण A पर नेट बल,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -17.1

माना किसी क्षण पर द्रव्यमान केन्द्र के स्थिति सदिश, वेग तथा त्वरण क्रमशः \(\overrightarrow{r_{c m}} ; \overrightarrow{v_{c m}}\) एवं \(\overrightarrow{a_{c m}}\) हैं।
निकाय का कुल द्रव्यमान M = (m1 + m2)
∵ द्रव्यमान केन्द्र की अभिधारणा से कुल बाह्य बल \(\vec{F}=\vec{F}_{1 \mathrm{ext}}+\vec{F}_{2 \mathrm{ext}}\) द्रव्यमान केन्द्र पर कार्य करता है तथा कुल द्रव्यमान भी द्रव्यमान केन्द्र पर केन्द्रित माना जाता है। अत: न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से
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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 4.
सिद्ध कीजिए कि जब किसी तन्त्र पर बाह्य बल शून्य होता है तो उसका द्रव्यमान केन्द्र नियत वेग से गति करता है।
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र का रेखीय संवेग (Linear Momentum of Centre of Mass) :
माना कि एक निकाय n कणों से मिलकर बना है, जिसके कणों का द्रव्यमान क्रमशः \(m_1, m_2, m_3 \ldots . m_n\) तथा वेग क्रमशः \(v_1, v_2, v_3 \ldots . v_n\) है इसलिए इस निकाय का संवेग
\(\vec{p}=m \overrightarrow{v_1}+m \overrightarrow{v_2}+m \overrightarrow{v_3}+\ldots \ldots . .+m_n \overrightarrow{v_n}\)
लेकिन हम जानते हैं
\(\overrightarrow{v_cm}=\frac{1}{2}(m \overrightarrow{v_1}+m \overrightarrow{v_2}+m \overrightarrow{v_3}+\ldots \ldots . .+m_n \overrightarrow{v_n})\)
\(\vec{p}=M \vec{v_cm}\) ………….(1)
अर्थात् कणों के निकाय का कुल रेखीय संवेग, निकाय के कुल द्रव्यमान तथा द्रव्यमान केन्द्र के वेग के गुणनफल के बराबर होता है।
समी० (1) का समय t के सापेक्ष अवकलन करने पर
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अर्थात् जब किसी निकाय पर आरोपित बाह्य बलों का योग शून्य होता है तब उस निकाय का कुल रेखीय संवेग नियत अर्थात् संरक्षित रहता है। यह किसी निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का रेखीय संरक्षण नियम कहलाता है।
∴ \(\frac{d \vec{p}}{d t}=0\) होने पर
\(\frac{d}{d t}\left(M v_{c m}\right)=0\)
v cm= नियतांक ………….(4)
या \(m_A \overrightarrow{a_A}+m_B \overrightarrow{a_B}=0\)
यहाँ \(\overrightarrow{a_A}[latex] व [latex]\overrightarrow{a_B}\) क्रमश: A व B की गतियों में त्वरणों का मान है। यदि \(\overrightarrow{F_{A B}}\) एवं \(\overrightarrow{F_{B A}}\) क्रमशः A व B पर B व A के कारण लगने वाले आन्तरिक बल हैं, तो-
\(\overrightarrow{F_{A B}}+\overrightarrow{F_{B A}}=0\)
या \(\overrightarrow{F_{A B}}=-\overrightarrow{F_{B A}}\)
यह न्यूटन का क्रिया एवं प्रतिक्रिया का नियम है।

प्रश्न 5.
बल आघूर्ण की परिभाषा दीजिए एवं इसके लिए सूत्र प्राप्त कीजिए तथा दैनिक जीवन में बल आघूर्ण के उपयोग समझाइये।
उत्तर:
बल आघूर्ण (Torque) tau :
“घूर्णन गति में दिये गये घूर्णन अक्ष के सापेक्ष किसी कण पर कार्यरत् बल का आघूर्ण ही बल आघूर्ण कहलाता है।’ इसे \(\vec{\tau}\) (tau) से व्यक्त करते हैं।
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चित्र में एक कण P पर बल \(\vec{F}\) आरोपित है। जिससे वह O से गुजरने वाले घूर्णन अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करता है।
बल आघूर्ण = बल × बल की घूर्णन अक्ष से लम्बवत् दूरी
τ = F(OM)
= F r sin θ
τ = r F sin θ
सदिश गुणन के रूप में \(\vec{\tau}=\vec{r} \times \vec{F}\)
यहाँ पर \theta, \(\vec{r}\) और \(\vec{F}\) के मध्य कोण है। बल आघूर्ण की दिशा \(\vec{r}\) तथा \(\vec{F}\) के तल के लम्बवत् दक्षिणावर्ती पेंच नियम से ज्ञात करते हैं। चित्र में \(\vec{r}\) व \(\vec{F}\) X-Y तल में है अतः बल आघूर्ण Z अक्ष की धन दिशा में होगा।
बल आघूर्ण का मात्रक-न्यूटन-मीटर होता है तथा इसका विमीय सूत्र \(\left[\mathrm{M}^1 \mathrm{~L}^2 \mathrm{~T}^{-2}\right]\) होता है।

प्रश्न 6.
कोणीय वेग एवं कोणीय त्वरण की परिभाषा दीजिए तथा घूर्णन गति के समीकरणों की उपपत्ति दीजिए।
उत्तर:
कोणीय वेग (Angular Velocity) :
“समय के साथ कोणीय विस्थापन के परिवर्तन की दर को कोणीय वेग कहते हैं।” इसे ω से व्यक्त करते हैं। यह सदिश राशि है। यह एक अक्षीय सदिश है जिसकी दिशा पिण्ड की घूर्णन अक्ष के अनुदिश होती है। यदि दृढ़ पिण्ड वामावर्त (anti clockwise) दिशा में घूर्णन करता है, तो उसका कोणीय वेग घूर्णन अक्ष के अनुदिश पिण्ड के तल से बाहर की ओर होगा। अर्थात् यदि पिण्ड X-Y तल में वामावर्त (anti clockwise) दिशा में घूर्णन गति करता है तो कोणीय वेग +z दिशा में होगा। इसी प्रकार यदि पिण्ड दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में घूर्णन करता है तो कोणीय वेग -z दिशा के अनुदिश होगा।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -21
कोणीय वेग की दिशा को दाहिने हाथ के नियम से व्यक्त किया जाता है जैसा कि चित्र में प्रदर्शित किया गया है। कोणीय वेग की दिशा को ज्ञात करने के लिए दाहिने हाथ से घूर्णन अक्ष को इस पकड़े जाने की कल्पना करें कि अंगूठा अक्ष के समान्तर रहे तो यदि उँगलियों के घुमाव से पिण्ड के घूर्णन की दिशा व्यक्त होती है तो अँगूठे द्वारा कोणीय वेग की दिशा व्यक्त होगी। कोणीय वेग को rad.s-1 में मापा जाता है।
यदि समयान्तर ∆t = (t2 – t1 ) में कोणीय विस्थापन ∆θ = (θ2 – θ1 ) हो तो औसत कोणीय वेग
\(\omega_{a v}=\vec{\omega}=\frac{\Delta \theta}{\Delta t}=\frac{\left(\theta_2-\theta_1\right)}{\left(t_2-t_1\right)}\)
यदि ∆t का मान अत्यल्प हो अर्थात् ∆t → 0 तो पिण्ड के कोणीय वेग का तात्क्षणिक मान (Instantaneous Values of Angular Velocity) निम्न प्रकार व्यक्त होगा-
\(\omega=\lim _{\Delta t \rightarrow 0} \frac{\Delta \theta}{\Delta t}=\frac{d \theta}{d t}\) ………..(2)
\(\omega=\frac{d \theta}{d t}\)
इसी तात्क्षणिक कोणीय वेग को ‘कोणीय वेग’ के नाम से जाना जाता है। कोणीय वेग धनात्मक एवं ऋणात्मक हो सकता है लेकिन कोणीय चाल सदैव धनात्मक होती है।

कोणीय त्वरण (Angular Acceleration) :
जब किसी पिण्ड के कोणीय वेग का मान परिवर्तित होता है तो उसमें कोणीय त्वरण होता है। उदाहरण के लिए जब हम साइकिल चलाते हैं या उसको रोकते हैं तो दोनों स्थितियों में उसके कोणीय वेग में परिवर्तन होता है अर्थात् साइकिल पहियों में कोणीय त्वरण होता है। अतः “पिण्ड के कोणीय वेग में परिवर्तन की दर को कोणीय त्वरण कहते हैं।” इसे द्वारा प्रदर्शित करते हैं और यह एक सदिश राशि है और इसका मात्रक rad.s-2 होता है।
माना t2 एवं t1 क्षण पर दृढ पिण्ड के कोणीय वेग ω1 व ω2 हैं।
अतः पिण्ड का औसत कोणीय त्वरण
\(\alpha_{a v}=\bar{\alpha}=\frac{\omega_2-\omega_1}{t_2-t_1}=\frac{\Delta \omega}{\Delta t}\) ……(1)
कोणीय त्वरण की दिशा को दाँये हाथ के नियम से ज्ञात किया जा सकता है। α की दिशा पिण्ड के कोणीय वेग में वृद्धि की दिशा में होगी। अर्थात् यदि ω2 > ω1 तो कोणीय वेग में वृद्धि होने पर α का मान धनात्मक होगा एवं ω2 < ω1 होने पर कोणीय वेग में कमी होगी और फलस्वरूप α का मान ऋणात्मक होगा। अतः धनात्मक α त्वरण की दिशा कोणीय वेग ω की दिशा में एवं ऋणात्मक α की दिशा कोणीय वेग की विपरीत दिशा में होगी।
यदि ∆t का मान अत्यल्प हो अर्थात् ∆t → 0 तो पिण्ड के कोणीय त्वरण को तात्क्षणिक कोणीय त्वरण या केवल कोणीय त्वरण के नाम से जाना जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -22

प्रश्न 7.
निम्नलिखित राशियों में सम्बन्ध स्थापित कीजिए-
(i) रेखीय वेग, कोणीय वेग तथा त्रिज्या में।
(ii) रेखीय त्वरण एवं कोणीय त्वरण में ।
उत्तर:
रेखीय वेग तथा कोणीय वेग में संबंध (Relation between Linear Velocity and Angular Velocity) :
जब कोई दृढ़ पिण्ड अपनी स्थिर अक्ष के परितः घूर्णन करता है तो उसका प्रत्येक कण विभिन्न त्रिज्याओं के वृत्तीय पथों पर गति करता है। सभी पथों के केन्द्र घूर्णन अक्ष पर होते हैं और सभी का कोणीय वेग समान होता है लेकिन उनकी चाल घूर्णन अक्ष से उनकी दूरी अर्थात् उनके वृत्तीय पथों की त्रिज्या पर निर्भर करती है। दूरी बढ़ने पर चाल बढ़ जाती है। शुद्ध घूर्णी गति में कण की चाल का मान उसके कोणीय वेग के अनुक्रमानुपाती होता है। संलग्न चित्र (7.18) में दृढ़ पिण्ड का कण P त्रिज्या r के वृत्तीय पथ में घूर्णन गति कर रहा है। यदि किसी क्षण उसका कोणीय विस्थापन θ rad. हो तो, चाप PP’ की लम्बाई s निम्न प्रकार व्यक्त कर सकते हैं।
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शुद्ध घूर्णी गति में सभी कणों के लिए कोणीय वेग ω समान होता है अत: समी० (2) से स्पष्ट है कि घूर्णन अक्ष से दूरी (r) बढ़ने पर रेखीय वेग (v) उतना ही अधिक बढ़ जायेगा।
उक्त सम्बन्ध [समी० (2)] को सदिश गुणनफल में निरूपित करने के लिए माना कण P का t = 0 पर स्थिति सदिश \(\vec{R}=\overrightarrow{O P}\) है। अत: चित्र से-
\(\frac{r}{R}=\sin \phi \quad \text { या } \quad r=R \sin \phi\)
अत: समी० (2) से
\(v=\omega \cdot R \sin \phi\)
चूँकि \(\omega R \sin \phi\) कोणीय वेग ω के तल के लम्बवत् है, अत: उक्त समी० (2) को सदिश गुणनफल के रूप में निम्न प्रकार व्यक्त कर सकते हैं।
\(\vec{v}=\vec{\omega} \times \overrightarrow{\boldsymbol{R}}\)
यहाँ यह ध्यान देने योग्य कि \(\phi=\frac{\pi}{2} \mathrm{rad}\) की स्थिति में R का मान वृत्तीय पथ की त्रिज्या r के तुल्य होगा।

रेखीय त्वरण एवं कोणीय त्वरण में सम्बन्ध (Relation between Linear Acceleration and Angular Acceleration):
जब कोई कण वृत्तीय पथ पर नियत कोणीय वेग से गति करता है, तो उस पर केवल त्रिज्य त्वरण \(\vec{a}_{\mathrm{rad}}\) ही कार्य करता है, लेकिन कण की चाल (v) भी बदलती है, तो उसमें \(\vec{a}_{\mathrm{rad}}\) के साथ-साथ स्पर्श रेखीय त्वरण \(\vec{a}_{\mathrm{tan}}\) भी होता है। इन्हीं दोनों त्वरणों का परिणामी कण का त्वरण \(\overrightarrow{a_R}\) होता है। इन दोनों घटकों एवं परिणामी त्वरण \(\left(\overrightarrow{a_R}\right)\) को संलग्न चित्र 7.19 में दिखाया गया है। स्पर्श रेखीय त्वरण \(\left(\vec{a}_{\text {tan }}\right)\) की दिशा कण के रेखीय वेग \(\vec{v}\) की दिशा में होती है, क्योंकि इस त्वरण की उत्पत्ति रेखीय वेग \(\vec{v}\) के परिमाण में परिवर्तन से ही होती है। अत:
\(a_{\mathrm{tan}}=\frac{d v}{d t}=r \cdot \frac{d \omega}{d t}=r \cdot \alpha\)

यहाँ \(\alpha=\frac{d \omega}{d t}\) कण का कोणीय त्वरण है। कण के त्रिज्य त्वरण \(\left(a_{\mathrm{rad}}\right)\) का मान कण के रेखीय वेग की दिशा में परिवर्तन से सम्बन्धित होता है। अत:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -24
कण के रेखीय त्वरण व कोणीय त्वरण के सम्बन्ध को सदिश रूप में निम्न प्रकार व्यक्त करते हैं।
यदि कण का स्थिति सदिश \(\vec{R}\) हो तो चित्र से,
r =R sin ϕ
atan =αR sin ϕ
या \(\overrightarrow{a_{\tan }} \propto R \sin \hat{n}\)

जहाँ \(\hat{n}\) घूर्णन तल के लम्बवत् दिशा में एकांक सदिश को व्यक्त करता है। अत:

\(\vec{a}_{\mathrm{tan}}=\vec{a}=\vec{\alpha} \times \vec{R}\) ………………..(3)
यदि \(\phi=\frac{\pi}{2} \mathrm{rad} तो R \sin \phi=r\)
अतः a = α . r
यदि घूर्णन अक्ष स्थिर है तो कण के ω व α के मान स्थिर रहेंगे। कण पर परिणामी त्वरण
\(a_R=\sqrt{a_{\mathrm{rad}}^2+a_{\mathrm{tan}}^2} \text { क्योंकि } \vec{a}_{\mathrm{rad}} \perp \vec{a}_{\mathrm{tan}}\)

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प्रश्न 8.
जड़त्व आघूर्ण की परिभाषा दीजिए एवं दैनिक जीवन में इसके महत्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia):
न्यूटन के प्रथम नियम के अनुसार बाह्य बल की अनुपस्थिति में वस्तुएँ अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करती हैं अर्थात् यदि वस्तु विरामावस्था में है, तो वह गति में आने का विरोध करती हैं और यदि गतिशील हैं तो उसी दिशा में उसी वेग से चलती रहना चाहती है और वेग तथा वेग की दिशा में परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तुओं के इस गुण को जड़त्व (Inertia) कहते हैं जो कि पदार्थ का मूल गुण है। इसीलिए न्यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम भी कहते हैं।

इसी प्रकार यदि कोई वस्तु किसी अक्ष के परितः घूर्णन के लिए स्वतन्त्र हैं तो बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में वह अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करती है अर्थात् यदि विरामावस्था में है तो घूर्णन गति करने का विरोध करती है और यदि घूर्णन कर रही है तो कोणीय वेग में ‘ परिवर्तन का विरोध करती है। किसी अक्ष के परितः वस्तुओं के इस गुण को घूर्णन जड़त्व या ‘जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) कहते हैं। इसे प्रायः I से व्यक्त करते है “पिण्ड के किसी कण का घूर्णन अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण उस कण के द्रव्यमान तथा उसकी घूर्णन अक्ष से दूरी के वर्ग के गुनणनफल के बराबर होता है।” अर्थात्
I = mr²
I का मात्रक = kg.m²
तथा I का विमीय सूत्र = [M1L2T0] …(1)

1. कणों के निकाय का जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia of a System of Particles ) :
माना M द्रव्यमान का कोई दृढ पिण्ड (कणों का निकाय) चित्र में प्रदर्शित एक बिन्दु O से गुजरने वाली ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः घूर्णन के लिए स्वतन्त्र है और पिण्ड का इसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करना है। माना पिण्ड विभिन्न द्रव्यमानों m1, m2, m3 …………., mn के n कणों से मिलकर बना है और घूर्णन अक्ष से इन कणों की दूरियाँ क्रमश: r1, r2, r3 …………., rn हैं। इन सभी कणों के जड़त्व आघूर्णो का योग पूरे पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण प्रदान करेगा अर्थात्
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2. सतत् द्रव्यमान वितरण वाले पिण्ड या निकाय का जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia of a Block of Homogeneous Mass Distribution ) :
यदि किसी पिण्ड में कणों की संख्या अत्यधिक व अति पास-पास स्थित हो जैसे- बेलन, चकती, गोला, मीटर स्केल आदि तो ऐसे पिण्डों को या निकाय को सतत् द्रव्यमान वितरण वाले निकाय के रूप में जाना जाता है। इन पिण्डों के जड़त्व आघूर्ण ज्ञात करने के लिए समाकलन (Integration) विधि का उपयोग करते हैं।
माना dm द्रव्यमान का एक अल्पांश घूर्णन अक्ष से r दूरी पर स्थित है तो इस अल्पांश का जड़त्व आघूर्ण
dI = dm.r² …..(3)
अतः पूरे पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण उचित सीमाओं के अन्तर्गत समी० (3) का समाकलन ज्ञात करके ज्ञात करते हैं, अर्थात्
I = \(\int r^2 \cdot d m\) ………….(4)

जड़त्व आघूर्ण का भौतिक महत्व (Physical Significance of Moment of Inertia):
जब किसी वस्तु पर कोई बाह्य बल लगाया जाता है, तो यदि वह विरामावस्था में है अथवा सीधी रेखा में किसी वेग से गतिशील है, अपनी अवस्था परिवर्तन का विरोध करती है। वस्तुओं या पिण्डों के इस गुण को ‘जड़त्व’ कहते हैं। किसी पिण्ड का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसकी अवस्था परिवर्तन हेतु उतने ही अधिक बल की आवश्यकता होती है अतः किसी पिण्ड का द्रव्यमान ही उसके जड़त्व की माप है।

ठीक इसी प्रकार किसी पिण्ड को जो विरामावस्था में है, किसी अक्ष के परितः घुमाने के लिए अथवा घूर्णन गति कर रहे पिण्ड के कोणीय वेग में परिवर्तन के लिए उस पर बल आघूर्ण लगाने की आवश्यकता होती है। पिण्ड के इस गुण को ‘जड़त्व आघूर्ण’ कहते हैं। पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण जितना अधिक होता है, उसकी अवस्था परिवर्तन ( घूर्णन गति में) के लिए उतने ही अधिक बल आघूर्ण की आवश्यकता होती है।

उक्त विवेचना से स्पष्ट है कि “रेखीय गति में जो भूमिका द्रव्यमान की होती है, वही भूमिका घूर्णन गति में जड़त्व आघूर्ण की होती है। इसी प्रकार जो भूमिका रेखीय गति में बल की होती है वही भूमिका घूर्णन गति में बल आघूर्ण की होती है।”

जड़त्व तथा जड़त्व आघूर्ण में अन्तर (Difference between Inertia and Moment of Inertia):
पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण केवल पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर करता है परन्तु पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण पिण्ड के द्रव्यमान पर तो निर्भर करता ही है, साथ ही साथ पिण्ड की घूर्णन अक्ष से दूरी पर भी निर्भर करता है अर्थात् पूरे पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण इस तथ्य पर निर्भर करता है कि पूरे पिण्ड के द्रव्यमान का घूर्णन अक्ष के परितः वितरण कैसा है। पिण्ड के द्रव्यमान का जितना अधिक भाग घूर्णन अक्ष से दूर होगा, पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण उतना ही अधिक होगा।

जड़त्व आघूर्ण का दैनिक जीवन में महत्व :
(Importance of Moment of Inertia in Daily Life)
हमारे दैनिक जीवन में जड़त्व आघूर्ण की अहम् भूमिका है। स्कूटर, मोटर साइकिल, साइकिल, रिक्शा, ताँगा तथा बैलगाड़ी इत्यादि में पहिए का जड़त्व आघूर्ण बढ़ाने के लिए पदार्थ की अधिकतम मात्रा परिधि पर रखने का प्रयास किया जाता है परिधि का घेरा तानों द्वारा घूर्णन अक्ष से जुड़ा होता है। ऐसा करने से पहिये में ‘गतिपालक चक्र’ (Fly wheel) का गुण उत्पन्न हो जाता है अर्थात् साइकिल के पैडल चलाना बन्द कर देने पर भी साइकिल कुछ दूरी तक चलती रहती है।

जड़त्व आघूर्ण का व्यावहारिक एवं अच्छा उपयोग ऑटोमोबाइल क्षेत्र में होता है। ऑटोमोबाइल इंजन जो घूर्णी गति पैदा करता है, इसमें बहुत अधिक जड़त्व आघूर्ण वाली एक चकती लगी रहती हैं जिसे गतिपालक चक्र कहते हैं। जब शैफ्ट को घुमाने वाले बल आघूर्ण का मान घटता या बढ़ता है, तो गतिपालक चक्र अपने अधिक जड़त्व आघूर्ण के कारण लगभग एक समान चाल से घूमता रहता है जिससे झटके वाली स्थिति से बच जाते हैं।

बच्चों के खिलौने के मोटर के नीचे भी एक छोटा सा गतिपालक चक्र लगा रहता है। इसे जमीन से रगड़ कर घुमाकर छोड़ देते हैं। जड़त्व आघूर्ण के कारण मोटर कुछ देर तक चलती रहती है।

प्रश्न 9.
बल आघूर्ण एवं जड़त्व में सम्बन्ध स्थापित कीजिए और इसकी सहायता से जड़त्व आघूर्ण की परिभाषा कीजिए।
उत्तर:
बल आघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण एवं कोणीय त्वरण में सम्बन्ध (Relation between Torque, Moment of Inertia and Angular Acceleration) :
किसी घूर्णन अक्ष के सापेक्ष किसी बल का आघूर्ण बल एवं घूर्णन अक्ष से बल की क्रिया रेखा की लम्बवत् दूरी के गुणनफल से प्राप्त होता है; अर्थात्
बल आघूर्ण = बल × घूर्णन अक्ष से बल की क्रिया रेखा की लम्बवत् दूरी
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -26

या τ = F × r
∵ F = ma एवं a = r.a
जहाँ a रेखीय त्वरण एवं α कोणीय त्वरण है।
τ = ma × r = m × r α × r
या τ = mr²α
यदि पिण्ड बड़ा है तो उसे अनेक छोटे-छोटे द्रव्यमान कणों से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं जिनके द्रव्यमान क्रमश: \(m_1, m_2, \ldots, m_n\) हैं। सभी कणों का कोणीय त्वरण पिण्ड के कोणीय त्वरण α के बराबर होगा। इन सभी कणों पर लगने वाले बल आघूर्णों का योग पूरे पिण्ड का बल आघूर्ण प्रदान करेगा। अत:
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उक्त समीकरण में यदि α = 1 rad.s-2 तो τ = I “अर्थात् किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण उस बल आघूर्ण के तुल्य है जो पिण्ड में एकांक कोणीय त्वरण उत्पन्न कर दे।”

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प्रश्न 10.
घूर्णन ऊर्जा के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए एवं इसकी सहायता से जड़त्व आघूर्ण की परिभाषा कीजिए।
उत्तर:
घूर्णन गतिज ऊर्जा (Rotational Kinetic Energy):
घूर्णन गति में किसी कण की गतिज ऊर्जा ही घूर्णन गतिज ऊर्जा कहलाती है। इसे ER से व्यक्त करते हैं। यदि m द्रव्यमान का कण घूर्णन अक्ष के परितः r त्रिज्या के वृत्तीय मार्ग पर v चाल से घूर्णन गति करता है तो उसकी घूर्णन गतिज ऊर्जा
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -28
यदि पिण्ड बड़ा है तो उसे अनेक छोटे-छोटे द्रव्यमान कणों से मिलकर बना हुआ मान सकते हैं। इन कणों के द्रव्यमान क्रमशः \(m_1, m_2, m_3, \ldots, m_n\) एवं घूर्णन अक्ष से इनकी दूरियाँ क्रमश: \(r_1, r_2, r_3, \ldots, r_n\) हैं। चूँकि पूरा पिण्ड ω कोणीय वेग से घूर्णन गति करता है, अत: सभी कणों का कोणीय वेग ω होगा। सभी कणों की घूर्णन गतिज ऊर्जाओं का योग पूरे पिण्ड की घूर्णन गतिज ऊर्जा प्रदान करेगा; अर्थात्
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जहाँ I = Σmr² = पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण
समी० (1) एक समान घूर्णन गति में घूर्णन ऊर्जा का सूत्र है। स्पष्ट है कि जिस प्रकार किसी पिण्ड की रेखीय गतिज ऊर्जा (\(\frac{1}{2} m v^2\)) पिण्ड के द्रव्यमान m तथा रेखीय वेग के वर्ग v² के गुणनफल की आधी होती है; उसी प्रकार घूर्णन गतिज ऊर्जा (\(\frac{1}{2} I \omega^2\)) पिण्ड के जड़त्व आघूर्ण I एवं कोणीय वेग के वर्ग ω² के गुणनफल की आधी होती है।
समी० (1) में यदि ω = 1 rad.s-1
तो I = 2 Er
अर्थात् “किसी घूर्णन अक्ष के सापेक्ष किसी पिण्ड का जड़त्त आघूर्ण उसकी घूर्णन ऊर्जा के दोगुने के तुल्य है जो पिण्ड में एकांक कोणीय वेग की अवस्था में होती है।”
यदि कोई पिण्ड अपनी अक्ष पर घूमने के साथ-साथ सरल रेखा में भी गतिमान हो (जैसे चलते हुए वाहनों के पहिए) तो उसकी कुल गतिज ऊर्जा उसकी घूर्णन गतिज ऊर्जा एवं रेखीय गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होगी। अर्थात्
\(E_{\text {total }}=E_K+E_R[latex]
या [latex]E_{\text {total }}=\frac{1}{2} m v^2+\frac{1}{2} I \omega^2\) ………..(2)

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प्रश्न 11.
सिद्ध कीजिए
उत्तर:
द्रव्यमान केन्द्र की गति (Motion of Centre of Mass) :
माना एक निकाय n कणों से मिलकर बना है, जिसके द्रव्यमान \(m_1, m_2, m_3 \ldots . m_n\) हैं तथा स्थिति सदिश \(\overrightarrow{r_1}, \overrightarrow{r_2}, \vec{r}_3, \ldots . \vec{r}_n\) हैं। द्रव्यमान केन्द्र की परिभाषा के अनुसार इस निकाय के द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -30
न्यूटन के द्वितीय नियम से, पहले कण पर बल \(\vec{F}_1=m_1 \vec{a}_1\) तथा द्वितीय कण पर बल \(\overrightarrow{F_2}=m_2 \overrightarrow{a_2}\) तथा इसी प्रकार अन्य सभी कणों के लिए बल लेते हैं। अत:
\(M \overrightarrow{a c m}_{c m}=\vec{F}_1+\vec{F}_2+\ldots . \vec{F}_n=\sum_{i=1}^n \vec{F}_i\)
सभी कणों पर लगने वाले बाह्य बलों का योग \(\vec{F}=\sum_{i=1}^n \vec{F}_i\) है। कणों के मध्य लाने वाले आन्तरिक बल, बराबर तथा विपरीत युग्म में होते हैं। अत: वे परस्पर निरस्त हो जाते हैं। इस प्रकार
\(M \overrightarrow{a_{c m}}=\vec{F}=\overrightarrow{F_{\mathrm{ext}}}\)
अत: निकाय का द्रव्यमान तथा द्रव्यमान केन्द्र के त्वरण का गुणनफल निकाय पर आरोपित बाह्म बलों के सदिश योग के बराबर होता है।

प्रश्न 12.
दिखाइये कि क्षैतिज से 8 कोण पर झुके तल पर बिना फिसले लुढ़कने वाले पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र का त्वरण निम्न सम्बन्ध द्वारा दिया जाता है-
\(a=\frac{g \sin \theta}{1+\frac{K^2}{R^2}}\)
जहाँ गुरुत्वीय त्वरण; K पिण्ड की घूर्णन त्रिज्या एवं R त्रिज्या है।
उत्तर:
नत तल पर लोटनी गति (Rolling Motion on Inclined Plane):
जब आनत तल पर कोई पिण्ड बिना फिसले लुढ़कता है तो पिण्ड की इस गति को लोटनी गति कहते हैं। इस गति में पिण्ड अपने द्रव्यमान केन्द्र के परित: अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करती है तथा साथ ही वस्तु का द्रव्यमान केन्द्र भी आगे बढ़ता है। इस प्रकार लोटनी गति में स्थानान्तरीय एवं घूर्णन गति दोनों प्रकार की गति होती है। नत तल पर जब वस्तु नीचे की ओर लोटनी गति करती है तो पिण्ड की स्थितिज ऊर्जा कम होती है और गतिज ऊर्जा बढ़ती है।

माना एक नत तल θ° के कोण पर झुका है और तल के शीर्ष की ऊँचाई h है। शीर्ष से कोई पिण्ड स्वतन्त्रतापूर्वक नत तल पर छोड़ दिया जाता है तो लोटनी गति करते हुए नीचे आती है। तल के आधार पर पहुँचने पर पिण्ड की सम्पूर्ण स्थितिज ऊर्जा (M g h), पिण्ड की गतिज ऊर्जा \(\left(\frac{1}{2} M v^2\right)\) एवं घूर्णन ऊर्जा \(\left(\frac{1}{2} I \omega^2\right)\) में बदल जाती है। अत:
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -31

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 13.
कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धान्त उदाहरण सहित समझाइये।
उत्तर:
कोणीय संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Angular Momentum):
जब कोई पिण्ड एक बाह्य बल आघूर्ण के अन्तर्गत किसी अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति करता है तो पिण्ड के कोणीय संवेग परिवर्तन की दर उस पर लगने वाले बल आघूर्ण के बराबर होती है। अर्थात्
\(\vec{\tau}=\frac{d \vec{J}}{d t}\)
\(\text { यदि } \vec{\tau}=0 \text { तो } \frac{d \vec{J}}{d t}=0\)
\(\text { या } \vec{J}\text { नियतांक }\)
\(\text { या } J=I \omega\text { नियतांक }\)
अर्थात् “बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में कण या पिण्ड का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है। यही कोणीय संवेग संरक्षण का नियम है।”
बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में यदि घूर्णन गति के दौरान किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण I1 से बदलकर I1 कर दिया जाये तो माना उसका कोणीय वेग ω1 से ω2 में बदल जाता है। अतः कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धान्त से,
I1ω1 = I2ω2 …………(1)

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प्रश्न 14.
दृढ़ पिण्डों के संतुलन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
दृढ़ पिण्डों का संतुलन (Equilibrium of Rigid Bodies):
किसी पिण्ड पर आरोपित बल के कारण स्थानान्तरीय गति उत्पन्न होती है जिसके कारण पिण्ड के रेखीय संवेग में परिवर्तन होता है। रेखीय संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल के बराबर होती है। ठीक उसी प्रकार यदि पिण्ड पर बल आघूर्ण क्रिया करता है तो पिण्ड घूर्णन गति करता है, जिसके कारण पिण्ड के कोणीय संवेग में परिवर्तन होता है और कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल आघूर्ण के बराबर होती है।

यदि बाह्म बल का मान शून्य हो जाये तो रेखीय संवेग नियत हो जाता है और यदि बल आघूर्ण शून्य हो जाये तो कोणीय संवेग का मान नियत हो जाता है। अत: स्पष्ट है बाह्य बल एवं बल आघूर्ण दोनों शून्य होने पर पिण्ड का रेखीय त्वरण एवं कोणीय त्वरण दोनों शून्य हो जाते हैं।
” किसी दृढ़ पिण्ड को यांत्रिक संतुलन की अवस्था में तब कहा जाता है जब इसके रेखीय व कोणीय दोनों प्रकार के संवेग समय के साथ न बदलें।” अर्थात् पिण्ड में न तो रेखीय त्वरण हो और न ही कोणीय त्वरण हो। इस प्रकार किसी पिण्ड के यांत्रिक संतुलन के लिए-
(i) पिण्ड पर लगने वाले सभी बलों का सदिश योग शून्य होना चाहिए, अर्थात्
\(\vec{F}_1+\vec{F}_2+\ldots+\vec{F}_n=\sum_{i=1}^n F_i=0\) …………(1)
यदि पिण्ड पर लगने वाला कुल बल शून्य होगा तो उस पिण्ड के रेखीय संवेग में समय के साथ परिवर्तन नहीं होगा। समी० (1) को पिण्ड के स्थानान्तरीय संतुलन की शर्त कहते हैं।
समी० (1) को x, y व z घटकों के रूप में निम्न प्रकार लिख सकते
हैं-
\(\sum_{i=1}^n \vec{F}_{i x}=0 ; \sum_{i=1}^n \vec{F}_{i y}=0 ; \sum_{i=1}^n \vec{F}_{i z}=0\) ……….(2)

यहाँ Fix, Fiy व Fiz बल Fi के क्रमशः X, Y व Z दिशाओं में घटक हैं।

(ii) दृढ़ पिण्ड पर लगने वाले बल आघूर्णों का सदिश योग शून्य होना चाहिए, अर्थात्
\(\overrightarrow{\tau_1}+\overrightarrow{\tau_2}+\overrightarrow{\tau_3}+\ldots+\overrightarrow{\tau_n}=\sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_i}=0\) ………..(3)
यदि पिण्ड पर आरोपित कुल बल आघूर्ण शून्य है तो उसका कुल कोणीय संवेग समय के साथ नहीं बदलेगा। समीकरण (3) को पिण्ड के घूर्णी संतुलन की शर्त है। समी० (3) निम्न तीन समीकरणों के तुल्य हैं-
\(\sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_{i x}}=0 ; \sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_{i y}}=0 ; \sum_{i=1}^n \overrightarrow{\tau_{i z}}=0\)

जहाँ, τix, τiy व τiz क्रमशः X, Y व Z दिशाओं में τi के घटक हैं। समीकरण (2) व (4) किसी दृढ़ पिण्ड के यांत्रिक संतुलन के लिए आवश्यक छः ऐसी शर्तें बताते हैं जो एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करती हैं।

यदि किसी पिण्ड पर लगने वाले बल एक तल में हों तो पिण्ड के यांत्रिक संतुलन के लिए केवल तीनों शर्तों का पूर्ण होना आवश्यक होगा। इनमें से दो शर्तें स्थानान्तरीय संतुलन के संगत होंगी जिनके अनुसार सभी बलों के इस तल स्वच्छ चुनी गईं दो परस्पर लम्बवत् अक्षों के अनुदिश अवयवों का सदिश योग अलग-अलग शून्य होगा। तीसरी शर्त घूर्णी संतुलन के संगत है। बलों के तल के अभिलम्बवत् अक्ष के अनुदिश बल आघूर्णों का सदिश योग शून्य होगा।

एक पिण्ड आंशिक संतुलन में तभी हो सकता है अर्थात् दृढ़ पिण्ड स्थानान्तरीय संतुलन में तो हो, परन्तु घूर्णी संतुलन में न हो या फिर घूर्णी संतुलन में तो हो परन्तु स्थानान्तरीय संतुलन में न हो।

सुमेलन सम्बन्धित प्रश्न
(Matrix Matching Type Questions)

प्रश्न 1.
पृथ्वी की त्रिज्या व द्रव्यमान M है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या सिकुड़कर आधी हो जाये जबकि उसका द्रव्यमान परिवर्तित न हो तो स्तम्भ को स्तम्भ ।। से सुमेलित कीजिए ।

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) पृथ्वी का कोणीय वेग(P) दो गुना हो जायेगा
(B) पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन का परिक्रमण काल(Q) चार गुना हो जायेगा
(C) पृथ्वी की घूर्णन गतिज ऊर्जा(R) नियत रहेगा
(S) कोई नहीं

उत्तर:

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) पृथ्वी का कोणीय वेग(R) नियत रहेगा
(B) पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन का परिक्रमण काल(S) कोई नहीं
(C) पृथ्वी की घूर्णन गतिज ऊर्जा(Q) चार गुना हो जायेगा

प्रश्न 2.
सूची (A) तथा सूची (B) को सुमेलित कीजिए ।

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) वृत्ताकार वलय ( इसके केन्द्र से गुजरने वाली एवं इसके तल के लम्बवत् अक्ष)(P) \(I=\frac{2}{5} M R^2\)
(B) वृत्ताकार डिस्क (ज्यामितीय अक्ष)(Q) \(I=\frac{2}{3} M R^2\)
(C) ठोस गोला (व्यास)(R) \(I=\frac{1}{2} M R^2\)
(D) खोखला गोला (व्यास)(S) \(I=M R^2\)

उत्तर:

स्तम्भ – Iस्तम्भ – II
(A) वृत्ताकार वलय ( इसके केन्द्र से गुजरने वाली एवं इसके तल के लम्बवत् अक्ष)(S) \(I=M R^2\)
(B) वृत्ताकार डिस्क (ज्यामितीय अक्ष)(R) \(I=\frac{1}{2} M R^2\)
(C) ठोस गोला (व्यास)(P) \(I=\frac{2}{5} M R^2\)
(D) खोखला गोला (व्यास)(Q) \(I=\frac{2}{3} M R^2\)

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

आंकिक प्रश्न (Numerical Questions )

द्रव्यमान केन्द्र पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1.
1 kg तथा 3 kg के दो कण क्रमश: \((2 \hat{i}+3 \hat{j})\) तथा \((3 \hat{i}-4 \hat{j})\) ms-1 के वेग से गतिमान हैं। द्रव्यमान केन्द्र का वेग बताइये।
उत्तर:
\(\frac{1}{4}(11 \hat{i}-9 \hat{j})\)

प्रश्न 2.
तीन बिन्दु द्रव्यमान m1 = 1kg, m2 = 2 kg एवं m3 = 3 kg एक समबाहु त्रिभुज के तीनों शीर्षो पर स्थित हैं। त्रिभुज की प्रत्येक भुजा की लम्बाई ० है द्रव्यमान केन्द्र की स्थिति के सापेक्ष
उत्तर:
\(-\left(\frac{7}{12} a, \frac{3 \sqrt{3}}{12} a, 0\right)\)

प्रश्न 3.
दो कणों के एक निकाय में, कणों के द्रव्यमान क्रमशः 2 व 5 kg हैं। इनकी स्थितियाँ t = 0 पर क्रमश: \((4 \hat{i}+3 \hat{j})\) तथा \((6 \hat{i}-3 \hat{j}+7 \hat{k})\) m हैं तथा उनके वेग क्रमशः \((10 \hat{i}-6 \hat{k})\) तथा \((3 \hat{i}+6 \hat{j})\) ms-1 है। इस कण तन्त्र के द्रव्यमान केन्द्र का वेग ज्ञात कीजिए | समय t = 0 तथा t = 4 पर द्रव्यमान केन्द्र की स्थितियाँ क्या होंगी?
उत्तर:
\(v_{C M}=\frac{1}{7}(35 \hat{i}+30 \hat{j}-12 \hat{k}) \mathrm{ms}^{-1}\)
\(t=0 \text { पर } \overrightarrow{r_{C M}}=\frac{1}{7}(38 \hat{i}-29 \hat{j}+35 \hat{k}) \mathrm{m}\)
\(t=4 \text { पर } \overrightarrow{r_{C M}}=\frac{1}{7}(178 \hat{i}+91 \hat{j}-13 \hat{k}) \mathrm{m}\)

बल आघूर्ण, कोणीय संवेग तथा घूर्णन गति के नियमों पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 4.
m द्रव्यमान का एक कण वेग से क्षैतिज से 6 कोण पर फेंका जाता है जब कण महत्तम ऊँचाई पर पहुँचता हैं तब प्रक्षेपण बिन्दु के परितः कोणीय संवेग ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
\(\frac{m v^3 \sin ^2 \theta \cos \theta}{2 g}\)

प्रश्न 5.
0.05 kg.m² जड़त्व आघूर्ण वाला एक गतिमान पहिया 10 चक्कर / मिनट से अपने अक्ष के परितः घूर्णन कर रहा है। उसको 5 गुना तेजी से घुमाने के लिए और कितना कार्य करना पड़ेगा?
उत्तर:
0.6573 J

प्रश्न 6.
20 kg द्रव्यमान का एक पिण्ड 0.20m व्यास के वृत्ताकार पथ पर 3 सेकण्ड में 100 चक्कर की दर से घूम रहा है। ज्ञात कीजिए – (i) पिण्ड की घूर्णन गतिज ऊर्जा, (ii) पिण्ड का कोणीय संवेग, r = 9.86
उत्तर:
(i) 4.382×10³ J
(ii) 41.87 J.s.

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 7.
किसी वलय (ring) का जड़त्व आघूर्ण 0.40 kg.m² है। यदि यह प्रति मिनट 2100 चक्कर लगा रही हो तो इसे 2s में रोकने के लिए कितने बल आघूर्ण की आवश्यकता होगी?
उत्तर:
44 N.m

प्रश्न 8.
एक व्यक्ति अपने हाथों में 10-10 kg के गोले लेकर 2s में 1 चक्कर लगाने वाली घूमती मेज पर खड़ा है। उसकी भुजाएं फैली हैं तथा प्रत्येक गोला घूर्णन अक्ष से 3 m दूर है। यदि वह व्यक्ति गोलों को दूर फेंक दे तो मेज का नया कोणीय वेग क्या होगा? व्यक्ति सहित मेज का जड़त्व आघूर्ण 15 kg.m² है।
उत्तर:
6.5 चक्कर / सेकण्ड

प्रश्न 9.
5 × 10 kg.m-4 जड़त्व आघूर्ण की एक चकती अपनी अक्ष के परितः 40 चक्कर / मिनट लगा रही है। यदि 0.02 Kg की मोम की एक गोली अक्ष से 0.08m की दूरी पर धीरे से गिरा दी जाती है। तो अब वह कितने चक्कर प्रति मिनट करेगी?
उत्तर:
31.85 चक्कर / मिनट

प्रश्न 10.
25 cm त्रिज्या तथा 5000 g द्रव्यमान का ऊर्ध्वाधर ठोस पहिया अपनी क्षैतिज धुरी पर घूमने के लिए स्वतन्त्र है। पहिए पर एक डोरी लिपटी है। डोरी को 2 N के बल से 55 तक खींचा जाता है। गणना कीजिए कि पहिया किस कोणीय वेग से घूमने लगेगा? (धुरी घर्षण रहित है।)
उत्तर:
16 rad.s-1

संतुलन पर आधारित

प्रश्न 11.
समान घनत्व की एक मीटर लम्बी छड़ 40 cm के निशान पर कीलकित की जाती है। 10g द्रव्यमान एक ब्लॉक 10 cm के चिन्ह पर लटकाया जाता है। यदि छड़ सन्तुलित अवस्था में हो तो उसका द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -32
उत्तर:
30 g

प्रश्न 12.
एक छड़ जिसका भार W है, दो समान्तर क्षुरधारों A व B पर आधारित है, क्षैतिज स्थिति में संतुलित है। क्षुरधारों के बीच की दूरी d है। छड़ का द्रव्यमान केन्द्र क्षुरधार A से x दूरी पर है। बिन्दु A व B पर अभिलम्ब प्रतिक्रियाएं ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(R_A=\frac{W(d-x)}{d} ; R_B=\frac{W \cdot x}{d}\)

जड़त्व आघूर्ण, घूर्णन गतिज ऊर्जा तथा संरक्षण के नियमों पर आधारित

प्रश्न 13.
लकड़ी के हल्के मीटर पैमाने 18 पर 200 g व 300 g के भार क्रमश: 20 cm व 70 cm के चिन्हों पर रखे हैं। इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण (i) 0cm; (ii) 50 cm (iii) 100 cm वाले चिन्हों से गुजरने वाली तथा मीटर पैमाने के लम्बवत् अक्षों के परितः ज्ञात
कीजिए।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति -33
उत्तर:
(i) 15.5 × 105 g.cm²;
(ii) 3 × 105 g.cm²;
(iii) 5.9 × 105 g.cm²

प्रश्न 14.
एक वृत्ताकार चकती जिसका द्रव्यमान 49 kg तथा त्रिज्या 50 cm है, अपनी अक्ष के परितः 120 घूर्णन / मिनट की दर से घुमायी जाती है। चकती की गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
484J

प्रश्न 15.
एक मीटर लम्बी एक पतली छड़ पर पाँच बिन्दुवत् कण जिनमें प्रत्येक का द्रव्यमान 1 kg है, समान दूरी पर क्रमश: A, B, C, D और E पर चित्र के अनुसार स्थित हैं। छड़ का द्रव्यमान 0.5 है जो केन्द्रीय बिन्दु पर केन्द्रित माना गया है। इस निकाय का जड़त्व आघूर्ण से पारित एवं छड़ के लम्बवत् अक्ष के सापेक्ष ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
2 kg.m²

प्रश्न 16.
यदि पृथ्वी अचानक सिकुड़ जाती है जिससे इसकी त्रिज्या पूर्व त्रिज्या की एक तिहाई रह जाये तो अब दिन कितना छोटा हो जायेगा? यह मान लीजिए कि द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है।
उत्तर:
21 घंटे 20 मिनट

प्रश्न 17.
एक पुच्छल तारें की सूर्य से अधिकतम एवं न्यूनतम दूरी क्रमश: 1.4 × 1012 m एवं 7 × 1010 m है। यदि सूर्य के निकटतम इसका वेग 6 × 104 ms-1 है तो दूरस्थ स्थिति में इसका वेग ज्ञात कीजिए। पुच्छल तारे का पथ वृत्ताकार माना गया है।
उत्तर:
3 × 10³ ms-1

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 7 कणों के निकाय तथा घूर्णी गति

प्रश्न 18.
एक 500 kg द्रव्यमान एवं 1 m त्रिज्या वाला गतिपालक चक्र 500 घूर्णन प्रति मिनट की दर से घूम रहा है। यह मानते हुए कि उसका सम्पूर्ण द्रव्यमान इसकी परिधि पर रहा है, निम्नलिखित की गणना कीजिए।
(i) कोणीय वेग (ii) जड़त्व आघूर्ण (iii) घूर्णन ऊर्जा ।
उत्तर:
(i) 52.33 rad.s-1
(ii) 500 kg.m²;
(iii) 6.85 × 105 J

लोटनी गति पर आधारित

प्रश्न 19.
10 kg द्रव्यमान तथा 20 cm त्रिज्या का एक गोला 5 mis के रेखीय वेग से एक क्षैतिज पर बिना फिसले लुढ़क रहा है। इसकी कुल गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर;
175 J

प्रश्न 20.
एक वृत्ताकार चकती का द्रव्यमान 0.05 kg तथा त्रिज्या 0.01 m है। यह क्षैतिज तल पर 0.05 ms-1 के वेग से लुढ़कता है। कुल गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
9.4 × 10-5 J

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HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. सोडियम क्लोराइड के क्रिस्टल में हैं-
(1) सोडियम क्लोराइड अणु
(2) सोडियम और क्लोरीन परमाणु
(3) सोडियम आयन और क्लोराइड आयन
(4) (1) और (2) दोनों।
उत्तर:
(3) सोडियम आयन और क्लोराइड आयन

2. निम्न यौगिकों में वैद्युत संयोजक यौगिक कौन-सा है?
(1) HCl
(2) NH4Cl
(3) BCl3
(4) AlCl3 (निर्जल)।
उत्तर:
(2) NH4Cl

3. निम्न में से कौन-सा यौगिक अष्टक नियम का पालन नहीं करता है-
(1) कार्बन टेट्राक्लोराइड
(2) फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड
(3) कैल्सियम ऑक्साइड
(4) बेरियम नाइट्रेट
उत्तर:
(2) फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड

4. निम्न अणुओं में लुइस अम्ल कौन-सा है-
(1) CCl4
(2) BCl3
(3) PCl5
(4) NCl3
उत्तर:
(2) BCl3.

5. HE, HCl, HBr और HI के क्वथनांकों का सही क्रम है..
(1) HF > HCl > HBr > HI
(2) HI > HBr > HCl > HF
(3) HF >HI > HBr > HCl
(4) HCl > HBr > HI > HF
उत्तर:
(3) HF >HI > HBr > HCl

6. कार्बन, सिलिकन, मैग्नीशियम और ऐलुमिनियम के क्लोराइडों में उच्चतम गलनांक किस तत्व के क्लोराइड का है-
(1) C
(2) Si
(3) Mg
(4) Al
उत्तर:
(3) Mg

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

7. निम्न अणुओं में विषम इलेक्ट्रॉन अणु चुनिए-
(1) B2H6
(2) O2
(3) CO
(4) NO
उत्तर:
(4) NO

8. निम्न में से कौन-सा अणु अनुचुम्बकीय है-
(1) N2
(2) O2
(3) F2
(4) D2
उत्तर:
(2) O2

9. निम्न में से नाइट्रोजन अणु का सम इलेक्ट्रॉनी अणु कौन-सा है-
(1) NO
(2) CO
(3) H2O
(4) HCl
उत्तर:
(2) CO

10. निम्नलिखित में से किसमें आयनिक बन्ध है-
(1) CHCl3
(2) O2
(3) BaCl2
(4) CCl4
उत्तर:
(3) BaCl2

11. किस यौगिक में द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है-
(1) CIF
(2) PCl3
(3) SiCl4
(4) CHCl3
उत्तर:
(3) SiCl4

12. वह यौगिक जिसमें ऋणायन आकार तथा धनायन आकार अनुपात न्यूनतम है।
(1) CsI
(2) Lil
(3) LiF
(4) CsF
उत्तर:
(4) CsF

13. वह अणु जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है-
(1) CO
(2) NO
(3) O2
(4) CsF.
उत्तर:
(2) NO

14. निम्नलिखित में से सर्वाधिक आयनिक गुणों से युक्त यौगिक है-
(1) HCl
(2) HBr
(3) HF
(4) HI.
उत्तर:
(3) HF

15. निम्नलिखित में से किस अणु पर अष्टक का नियम लागू नहीं होता-
(1) CO2
(2) H2O
(3) O2
(4) CO.
उत्तर:
(2) H2O

16. किस यौगिक में सर्वाधिक द्विध्रुव आघूर्ण होता है-
(1) CH3Cl
(2) CCl4
(3) CHCl3
(4) CH2Cl2
उत्तर:
(1) CH3Cl

17. कौन-सा बन्ध सबसे अधिक ध्रुवीय है
(1) Cl – F
(2) Br – F
(3) 1 – F
(4) F – F
उत्तर:
(3) 1 – F

18. किस बन्ध की बन्ध ऊर्जा अधिकतम होगी-
(1) आयनिक बन्ध
(2) सहसंयोजी बन्ध
(3) धात्विक बन्ध
(4) हाइड्रोजन बन्ध
उत्तर:
(1) आयनिक बन्ध

19. सह-संयोजक अणुओं का क्रिस्टल संरचना में होने का कारण है-
(1) द्विध्रुव द्विध्रुव आकर्षण
(2) स्थिर वैद्युत आकर्षण
(3) हाइड्रोजन
(4) वाण्डर वाल्स आकर्षण।
उत्तर:
(4) वाण्डर वाल्स आकर्षण।

20. निम्नलिखित में से कौन परिवर्तित संयोजकता दिखाता है-
(1) H
(2) Na
(3) Fe
(4) O.
उत्तर:
(3) Fe

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

21. सहसंयोजक बन्ध में ध्रुवता का कारण है-
(1) इलेक्ट्रॉन बन्धुता
(2) आयनन विभव
(3) विद्युत ऋणात्मकता
(4) परमाण्वीय आकार।
उत्तर:
(3) विद्युत ऋणात्मकता

22. BCl3 अणु समतलीय है क्योंकि इस अणु में बोरॉन है-
(1) sp³ – संकरित
(2) sp² – संकरित
(3) sp – संकरित
(4) संकरित नहीं है।
उत्तर:
(2) sp² – संकरित

23. निम्न में से कौन-सा अणु मुडी हुई आकृति का है-
(1) CO2
(2) O3
(3) N2O
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(2) O3

24. PCl5 अणु निम्नलिखित संकरण का परिणाम है-
(1) sp²d²
(2) sp³d
(3) spd³
(4) sp²d³
उत्तर:
(2) sp³d

25. किस अणु में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है-
(1) NO
(2) CN
(3) O2
(4) CO
उत्तर:
(1) NO

26. निम्न में से किसकी संरचना रेखीय नहीं है–
(1) BeCl2
(2) SO2
(3) C2H2
(4) CO2.
उत्तर:
(2) SO2

27. NH3 का क्वथनांक PH3 की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि
(1) NH3 का अणु भार अधिक है।
(2) NH3 में छाता प्रतिलोमन होता है।
(3) NH3 में आयनिक बन्ध है जबकि PH3 में सहसंयोजक बन्ध है।
(4) NH3 हाइड्रोजन बन्ध बनाता है।
उत्तर:
(4) NH3 हाइड्रोजन बन्ध बनाता है।

28. नाइट्रोजन अणु (N ≡ N) में नाइट्रोजन परमाणुओं के मध्य स्थित त्रिबन्ध में होते हैं-
(1) तीन σ-बन्ध
(2) दो σ-बन्ध तथा एक π बन्ध
(3) एक σ-बन्ध तथा दो π- बन्ध
(4) दो π-प्रबन्ध
उत्तर:
(3) एक σ-बन्ध तथा दो π- बन्ध

29. p – p कक्षक का अतिव्यापन निम्न में से किस अणु में उपस्थित हैं-
(1) हाइड्रोजन
(2) क्लोरीन
(3) हाइड्रोजन क्लोराइड
(4) हाइड्रोजन ब्रोमाइड।
उत्तर:
(2) क्लोरीन

30. बर्फ में एक जल के अणु द्वारा बनने वाले अधिकतम हाइड्रोजन बन्धों की संख्या है-
(1) 4
(2) 3
(3) 2
(4) 1.
उत्तर:
(1) 4

31. H – C ≡ C – CH = CH2 में C – C एकल बन्ध के कार्बन परमाणुओं का संकरण है-
(1) sp³ – sp³
(2) sp² – sp²
(3) sp – sp²
(4) sp³ – sp.
उत्तर:
(3) sp – sp²

32. BF3 में केन्द्रीय परमाणु की ज्यामिति व ऑर्बिटल के संकरण का प्रकार है-
(1) रेखीय, sp
(2) समतल त्रिकोणीय, sp²
(3) चतुष्फलीय, sp³
(4) पिरैमिडी, sp³.
उत्तर:
(2) समतल त्रिकोणीय, sp²

33. निम्न में से कौन-से अणु के केन्द्रीय परमाणु में sp²- संकरण होता है-
(1) BeF2
(2) BCl3
(3) C2H2
(4) NH3
उत्तर:
(2) BCl3

34. NO2 में नाइट्रोजन ऑक्सीजन बन्ध कोटि है-
(1) 1
(2) 1.33
(3) 1.5
(4) 2.
उत्तर:
(3) 1.5

35. CH3CHCCH2 अणु में क्रमश: C – 1 और C – 2 कार्बन परमाणुओं पर किस प्रकार का संकरण है?
(1) sp², sp
(2) sp³, sp²
(3) sp², sp²
(4) sp², sp³.
उत्तर:
(1) sp², sp

36. निम्न अणुओं में से किस अणु के केन्द्रीय परमाणु पर sp³ संकरण है-
(1) CO2
(2) SO2
(3) H2O
(4) N2O.
उत्तर:
(3) H2O

37. निम्न में से कौन-सा लूइस क्षारक है-
(1) BF3
(2) CH4
(3) H2O
(4) SiCl4.
उत्तर:
(3) H2O

38. SF में सल्फर पर संकरण है-
(1) sp
(2) sp²
(3) sp³d
(4) dsp².
उत्तर:
(3) sp³d

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
NaCl अथवा KCl विद्युत संयोजी हैं, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि क्षार धातुओं (Na अथवा K) तथा Cl की विद्युत ऋणात्मकता में आयनिक बन्ध बनने के लिये पर्याप्त अन्तर होता है।

प्रश्न 2.
उस यौगिक का सूत्र लिखो जिसमें अष्टक प्रसार होता है।
उत्तर:
PCl5

प्रश्न 3.
BeCl2, MgCl2, CaCl2 को सहसंयोजक गुणों में वृद्धि के क्रम में लिखो-
उत्तर:
CaCl2 < MgCl2 < BeCl2

प्रश्न 4.
अमोनिया एक सह-संयोजी यौगिक है, इसे जल में घोलने पर प्राप्त विलयन विद्युत का सुचालक है। क्यों?
उत्तर:
NH3+ H2O → NH4OH
NH4OH → NH4+ + OH
अमोनिया के जलीय विलयन में NH4 तथा OH आयन प्राप्त होने से यह विलयन विद्युत का सुचालक है।

प्रश्न 5.
PF5 होता है NF5 नहीं होता है, क्यों?
उत्तर:
N में रिक्त d कक्षक अनुपस्थित होने के कारण इसमें अष्टक का प्रसार नहीं हो पाता है अत: NF नहीं पाया जाता है।

प्रश्न 6.
उन दो अणुओं के सूत्र लिखिये जिनमें अष्टक प्रसार होता है।
उत्तर:
PCI5 तथा SF6

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 7.
H2S रेखीय नहीं है जबकि BeH2 रेखीय है क्यों?
उत्तर:
H2S में s-परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म की उपस्थि के कारण इसकी संरचना रेखीय नहीं होती है जबकि BeH2 में Be-परमाणु पर कोई एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं होता है अतः इसकी संरचना रेखीय होती है।

प्रश्न 8.
हाइड्रोजन तथा क्लोरीन की सहसंयोजक त्रिज्यायें क्रमशः 0.37Å तथा 0.99Å हैं। गैसीय HCl की आबन्ध लम्बाई बताएँ।
उत्तर:
बन्ध लम्बाई (0.37 + 0.99)/2
= 0.68 Å

प्रश्न 9.
BeCl2 का गलनांक BaCl2 से कम क्यों है?
उत्तर:
BeCl2 सहसंयोजक यौगिक है जबकि BaCl2 यौगिक आयनिक है। अतः BeCl2 का गलनांक कम होता है।

प्रश्न 10.
द्विध्रुव आघूर्ण क्या होता है?
उत्तर:
किसी ध्रुवित सहसंयोजक यौगिकों के दोनों ध्रुवों के मध्य की दूरी का एक ध्रुव के आवेश से गुणा करने पर प्राप्त मान द्विध्रुव आघूर्ण कहलाता है। यह एक सदिश राशि है।
द्विध्रुव आघूर्ण (μ) = d x q यहाँ d = दूरी, q = आवेश

प्रश्न 11.
दो धनायन तथा दो ऋणायन बताइये जिनकी इलेक्ट्रॉनिक संरचनाएँ Ne के समान हों।
उत्तर:
धनायन – Na+ तथा Mg2+
ऋणायन – F तथा O2-

प्रश्न 12.
ठोस NaCl विद्युत का अचालक क्यों है?
उत्तर:
ठोस NaCl में Na+ तथा Cl गतिमान नहीं हो पाते हैं। जिससे इनमें विद्युत का प्रवाह नहीं हो पाता है।

प्रश्न 13.
संयोजकता इलेक्ट्रॉन क्या है?
उत्तर:
तत्व के परमाणु के बाह्य कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों को उस परमाणु के संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहते हैं। ये संयोजन अभिक्रिया में भाग लेते हैं।

प्रश्न 14.
आयनिक तथा सहसंयोजी यौगिकों में किसके गलनांक व क्वथनांक ऊँचे होते हैं तथा क्यों ?
उत्तर:
आयनिक यौगिकों के क्योंकि आयनिक यौगिकों में आयनों के बीच शक्तिशाली विद्युत स्थैतिक बल कार्य करते हैं।

प्रश्न 15.
विद्युत संयोजी यौगिक अवाष्पशील क्रिस्टलीय ठोस होते हैं क्यों?
उत्तर:
क्योंकि विद्युत संयोजी यौगिकों में आयनों के बीच शक्तिशाली विद्युत संयोजी बल होते हैं।

प्रश्न 16.
एकल बन्ध यौगिकों की अपेक्षा द्विबन्ध के यौगिक अधिक क्रियाशील होते हैं, क्यों?
उत्तर:
द्विबन्ध में π – बन्ध होता है जिसकी बन्धन ऊर्जा कम होती है, अतः यह अधिक क्रियाशील होते हैं।

प्रश्न 17.
ठोस सोडियम धातु में विद्युत प्रवाहित हो जाती है जबकि ठोस NaCl विद्युत कुचालक है, क्यों?
उत्तर:-
सोडियम धातु में गतिशील इलेक्ट्रॉन (mobile electrons) होते हैं जबकि ठोस NaCl में आयन गतिशील नहीं होते अतः यह विद्युत कुचालक है।

प्रश्न 18.
वैद्युत संयोजी यौगिकों का आयनन शीघ्र होता है क्यों?
उत्तर:
वैद्युत संयोजी यौगिकों के आयन वैद्युत स्थैतिक बलों के द्वारा बँधे रहते हैं। ध्रुवीय विलायक जब आयनों के बीच में आ जाता है तो विद्युत संयोजी बल क्षीण हो जाते हैं जिससे ये यौगिक आयनित हो जाते हैं।

प्रश्न 19.
निर्जल HCl विद्युत का कुचालक होता है जबकि जलीय HCl विद्युत का सुचालक होता है, क्यों ?
उत्तर:
जल की उपस्थिति में HCl का वियोजन H+ व Cl में हो जाता है जबकि निर्जल HCl सहसंयोजी यौगिक है।

प्रश्न 20.
BaO तथा MgO में से किसका गलनांक उच्च होता है।
उत्तर:
BaO का गलनांक उच्च होता है क्योंकि BaO अधिक आयनिक है।

प्रश्न 21.
जल आयनिक यौगिकों के लिये एक अच्छा विलायक है, क्यों?
उत्तर:
जल का परावैद्युत स्थिरांक उच्च (81) होता है।

प्रश्न 22.
CHF का द्विध्रुव आघूर्ण CH3Cl` से ज्यादा होता है, क्यों?
उत्तर:
C-F बन्ध का द्विध्रुव आघूर्ण C-Cl बंध से अधिक होता है क्योंकि F की विद्युत ऋणात्मकता Cl से अधिक है।

प्रश्न 23.
LiCl कार्बनिक विलायकों में विलेय है, क्यों?
उत्तर:
LiCl में सहसंयोजी गुण होते हैं इसलिये यह कार्बनिक विलायकों में विलेय होता है।

प्रश्न 24.
Mg+ आयन नहीं बनता है जबकि Mg 2+ आयन बनता है, क्यों ?
उत्तर:
Mg+ की तुलना में Mg2+ स्थायी है क्योंकि इसका विन्यास उत्कृष्ट गैसों के समान होता है तथा इसके बाह्य कोश में आठ इलेक्ट्रॉन (स्थायी विन्यास) होते हैं।

प्रश्न 25.
MgCl2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है जबकि SnCl2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य नहीं होता है क्यों?
उत्तर:
MgCl2 में कोई भी एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म नहीं होता है। इस कारण इसकी आकृति रेखीय होती है। यहाँ पर कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य हो जाता है। जबकि SnCl2 में एक एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण आकृति मुड़ी हुयी होती है तथा इस कारण कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य नहीं हो पाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 1

प्रश्न 26.
AlCl3 सह संयोजी होता है, जबकि AlF3 आयनिक होता है क्यों?
उत्तर:
Cl आयन F से बड़ा है अतः फैजान के नियमानुसार बड़े ऋणायन की आकृति धनायन के प्रभाव में अधिक विकृत होती है अतः इसमें सहसंयोजी गुण आ जाता है। इस कारण AlCl3 सहसंयोजी जबकि AlF3, आयनिक होते हैं।

प्रश्न 27.
BeCl2 सहसंयोजी है जबकि BaCl2 आयनिक, क्यों?
उत्तर:
Ba+ आयन Be2+ आयन से बड़ा है। अतः फौजान के ‘नियमानुसार छोटे धनयन की आकृति ऋणायन के प्रभाव में अधिक विकृत होती है। अतः सहसंयोजी गुण आ जाता है। इस कारण BeCl2 सहसंयोजी जबकि BaCl2 आयनिक है।

प्रश्न 28.
H परमाणु H2 अणु बनाता है जबकि He2 ज्ञात नहीं है, क्यों?
उत्तर:
H-परमाणु का बाह्य कक्षक अपूर्ण (1 इलेक्ट्रॉन) होता है जबकि He – परमाणु का बाह्य कक्षक पूर्ण (2 इलेक्ट्रॉन) होता है। इस कारण H2 ज्ञात है He2 नहीं।

प्रश्न 29.
MgCl2, AlCl3, BeCl2 तथा CCl4 को बढ़ते आयनिक लक्षण के क्रम में लिखें।
उत्तर:
CCl4 < AlCl3 < BeCl2 < MgCl2 (आयनिक लक्षण)

प्रश्न 30.
सूखी बर्फ (dry Ice) क्या है। यह किस प्रकार का ठोस है।
उत्तर:
सूखी बर्फ CO2(s) को कहते हैं। यह एक आण्विक ठोस है।

प्रश्न 31.
त्रिकेन्द्रीय द्वि-इलेक्ट्रॉन बन्ध रखने वाले अणु का सूत्र लिखो।
उत्तर:
B2H6(बोरेन)

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 32.
NaCl तथा CuCl में कौन अधिक सहसंयोजी है।
उत्तर:
CuCl अधिक सहसंयोजी है। यद्यपि Na+, Cu+ आयन से छोटा है किन्तु Cu+ की बाह्य कक्षा में 18 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

प्रश्न 33.
क्षारीय मृदा धातुओं के हैलाइडों को घटते गलनांक के क्रम में लिखो।
उत्तर:
BaX2 > SrX2 > CaX2 > MgX2 > BeX2 (गलनांक)

प्रश्न 34.
NO2+, NO2 तथा NO3, N-O बन्ध को लम्बाई के बढ़ते क्रम में लिखो।
उत्तर:
NO2+ < NO2 < NO3 (बन्ध लम्बाई)

प्रश्न 35.
उस बन्ध का नाम लिखें जो कि H2SO4 में तो है परन्तु H2O में नहीं है।
उत्तर:
उपसहसंयोजक बन्ध

प्रश्न 36.
NaCl, MgCl2 व AlCl3 को गलनांक के बढ़ते क्रम में लिखो।
उत्तर:
AlCl3 < MgCl2 < NaCl (गलनांक)

प्रश्न 37.
NaCl व CuCl में से जल में अधिक विलेय कौन है?
उत्तर:
NaCl जल में अधिक विलेय है क्योंकि यह आयनिक प्रकृति का है जबकि CuCl सहसंयोजक प्रकृति का है।

प्रश्न 38.
LiCl, LiBr, Lil, LiF को घटते सह संयोजी क्रम में लिखें।
उत्तर:
Lil > LiBr > LiCl > LiF (घटता सहसंयोजी क्रम)

प्रश्न 39.
LiCl, NaCl, KCl, RbCl, CsCl का घटता सहसंयोजी क्रम लिखें।
उत्तर:
LiCl > NaCl > KCl > RbCl > CsCl ( घटता सहसंयोजी क्रम)

प्रश्न 40.
SnCl3 व SnCl4 में से कौन अधिक सहसंयोजी है?
उत्तर:
फौजान के नियमानुसार जिस धनायन पर अधिक धनावेश होता है वह अधिक सहसंयोजी होगा। अत: SnCl4 अधिक सहसंयोजी है।

प्रश्न 41.
एक तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p6 3s² है। इसकी संयोजकता तथा इसके क्लोराइड का सूत्र लिखें।
उत्तर:
इस तत्व की संयोजकता = 2
क्लोराइड का सूत्र = MCl2

प्रश्न 42.
एक तत्व के उदासीन परमाणु में 17 इलेक्ट्रॉन व 18 न्यूट्रॉन होते हैं। इस परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तथा संयोजकता लिखिये।
उत्तर:
1s² 2s² 2p6 3s² 3p5 तथा इसकी संयोजकता 1 होगी।

प्रश्न 43.
निम्नलिखित अणुओं में से आयनिक व सहसंयोजी अणुओं को छाँटिये।
(a) MgF2
(b) ClBr
(c) CBr4
(d) Cus
(e) C2H4
(f) PH3
उत्तर:
आयनिक यौगिक – MgF2, CuS
सहसंयोजी यौगिक – ClBr, CBr4, C2H2, PH3

प्रश्न 44.
HCl, H2O, NH3 में किसका क्वथनांक सर्वाधिक होता है?
उत्तर:
H2O, क्योंकि O की विद्युत ऋणात्मकता N से उच्च होती है। अत: H2O में बना Hबन्ध, NH3 में बने H-बन्ध से शक्तिशाली होता जबकि HCl में H-बन्ध नहीं बनता है।

प्रश्न 45.
अष्टक का प्रसार किस यौगिक में होता है?
उत्तर:
PF5, SF6, IF7 आदि में अष्टक का प्रसार होता है।

प्रश्न 46.
अपूर्ण अष्टक वाले यौगिकों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. BF3 (6 es)
  2. MgCl2 (4 es)
  3. BH3(6 es)

प्रश्न 47.
एक संयोजी तथा द्विसंयोजी धनायनों वाले तत्वों को बताएँ ?
उत्तर:
एक संयोजी = Na+, K+
द्विसंयोजी = O2-, S2-.

प्रश्न 48.
सहसंयोजक आबन्ध का सिद्धान्त किस वैज्ञानिक ने दिया था?
उत्तर:
लैंग्म्यूर ने सहसंयोजक आबन्ध का सिद्धान्त दिया।

प्रश्न 49.
फॉर्मल आवेश ज्ञात करने का सूत्र लिखें।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 2

प्रश्न 50.
विषम इलेक्ट्रॉन युक्त अणुओं के उदाहरण लिखें।
उत्तर:
विषम इलेक्ट्रॉन युक्त अणु-
NO, NO2, ClO2, O2

प्रश्न 51.
निम्न की आबन्ध कोटि बताएँ-
(1) H2 अणु में
(2) O2 अणु में
(3) N2 अणु में
(4) Cl2 अणु में
(5) CO अणु में
उत्तर:
आबन्ध कोटि बन्ध पर आधारित होती है। यह अणु में उपस्थित बन्धों की संख्या बताती है।
(1) H2 अणु में एकल बन्ध होता है। (H-H) इस कारण इसकी बन्ध कोटि एक होती है।

(2) O2 अणु में द्विबन्ध होता है। (O = O) इस कारण इसकी बन्ध कोटि दो होती है।

(3) N2 अणु में त्रि आबन्ध होता है। (N ≡ N) इस कारण इसकी बन्ध कोटि तीन होती है।

(4) Cl2 अणु में एकल आबन्ध होता है। (Cl – Cl) इस कारण इसकी बन्ध कोटि एक होती है।

(5) CO अणु को \(\mathrm{C} \stackrel{\leftarrow}{=}\)O से प्रदर्शित करते हैं। इस कारण इसमें बन्ध कोटि तीन होती हैं।

प्रश्न 52.
निम्नलिखित यौगिकों की लूइस संरचना बनाइये।
उत्तर:
MgCl2 की लूइस संरचना
(1) MgCl2 (मैग्नीशियम क्लोराइड)
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 3

(2) MgO (मैग्नीशियम ऑक्साइंड)
उत्तर:
MgO की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 4

(3) Na2S (सोडियम सल्फाइड)
उत्तर:
Na2S की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 4a

(4) AlF3 (एल्यूमिनियम फ्लोराइड)
उत्तर:
AlF3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 5

(5) KCN (पोटैशियम सायनाइड)
उत्तर:
KCN की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 6

(6) NH4Cl (अमोनियम क्लोराइड)
उत्तर:
NH4Cl की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 7

(7) HCN (हाइड्रोजन सायनाइड)
उत्तर:
HCN की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 8

(8) H2O (जल)
उत्तर:
H2O की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 9

(9) O3 (ओजोन)
उत्तर:
O3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 10

(10) H2O2 (हाइड्रोजन परॉक्साइड)
उत्तर:
H2O2 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 11

(11) PCl3 (फॉस्फोरस ट्राईक्लोराइड)
उत्तर:
PCl3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 12

(12) CO (कार्बन मोनो ऑक्साइड)
उत्तर:
CO की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 13

(13) CO2 (कार्बन डाईऑक्साइड)
उत्तर:
CO2 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 14

(14) N2O (नाइट्रोजन (I) ऑक्साइड)
उत्तर:
N2O की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 15

(15) N2O3 (नाइट्रोजन (III) ऑक्साइड)
उत्तर:
N2O3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 16

(16) SO2 (सल्फर डाईऑक्साइड)
उत्तर:
SO2 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 17

(17) SO3 (सल्फर ट्राई ऑक्साइड)
उत्तर:
SO3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 18

(18) SO2Cl2 (सल्फ्यूरिल क्लोराइड)
उत्तर:
SO2Cl2 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 19

(19) H2 CO3 (कार्बोनिक अम्ल)
उत्तर:
H2CO3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 20

(20) HNO3 (नाइट्रिक अम्ल)
उत्तर:
HNO3 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 21

(21) H2 SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल)
उत्तर:
H2SO4 की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 22

(22) CO32- (कार्बोनेट आयन)
उत्तर:
CO32- की लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 23

(23) NO2+ (नाइट्रिल आयन)
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 24

(24) NO2 (नाइट्राइट आयन)
उत्तर:
लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 25

(25) NO3(नाइट्रेट आयन)
उत्तर:
लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 26

(26) SO42- (सल्फेट आयन)
उत्तर:
लूइस संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 27

प्रश्न 53.
तत्व की विद्युत संयोजकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वह संयोजकता जिसमें किसी यौगिक के निर्माण में दो असमान परमाणुओं में से एक परमाणु बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन त्यागकर दूसरे परमाणु के बाह्यतम कोश को दे देता है जिससे कि दोनों परमाणुओं का निकटतम अक्रिय गैस विन्यास प्राप्त हो जाता है।

उदाहरण – NaCl में वैद्युत संयोजकता 1 है।

प्रश्न 54.
सोडियम धातु की तुलना में NaCl कठोर होता है, क्यों ?
उत्तर:
NaCl में Na+ तथा CH आयनों के मध्य प्रबल आयनिक बन्ध उपस्थित होते हैं, जबकि सोडियम धातु में Na परमाणु के बीच दुर्बल धात्विक बल होते हैं। अत: NaCl कठोर होता है जबकि सोडियम धातु मुलायम उच्च होता है।

प्रश्न 55.
NaCl तथा MgO में किसकी जालक ऊर्जा का मान होती है।
उत्तर:
MgO की जालक ऊर्जा का मान उच्च होता है।

प्रश्न 56.
सहसंयोजी यौगिकों में होने वाली अभिक्रियायें सामान्यतः धीमी क्यों होती हैं ?
उत्तर:
सहसंयोजी यौगिकों की आबन्ध वियोजन ऊर्जा का मान उच्च होता है, इस कारण ये अभिक्रियायें धीमी होती हैं।

प्रश्न 57.
कार्बन – कार्बन आबन्ध में आबन्ध लम्बाई का क्या क्रम होता है ?
उत्तर:
C = C < C = C < C – C (आबन्ध लम्बाई)
1.20 Å     1.33 Å   1.54 Å

प्रश्न 58.
निम्न अभिक्रिया में आबंध कोटि (Bond order) पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(i) N2 → N2+ + e
(ii) O2 → O2+ + e
उत्तर:
(i) N2 → N2+ + e
इसमें N2 की बंध कोटि 3 तथा N+2 की बंध कोटि 2.5 है।

(ii) O2 → O2+ + e
यहाँ O2 की बंध कोटि 2 तथा O+2 की बंध कोटि 2.5 है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 59.
SO2 अणु में द्विध्रुव आघूर्ण होता है, क्या यह अणु रेखीय है ? कारण दें।
उत्तर:
नहीं यह अणु रेखीय नहीं हो सकता है क्योंकि यदि इसकी आकृति रेखीय होती तो इसके द्विध्रुव आघूर्ण का मान शून्य होता, जो कि नहीं है। अतः यह अणु रेखीय नहीं बंकित या मुड़ा हुआ होता है।

प्रश्न 60.
PCl5 तथा CH3+ में प्रत्येक पर फॉर्मल आवेश ज्ञात करो ?
उत्तर:
PCl5 में फॉर्मल आवेश
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 28
= 5 – 0 – \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 10
= 5 – 5
= 0
प्रत्येक Cl परमाणु पर फॉर्मल आवेश
= 7 – 6 – \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 2
= 7 – 6 – 1
= 0
CH3+ में फॉर्मल आवेश
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 28a
C-परमाणु पर फॉर्मल आवेश
= – 4 – 0 – \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 6
= 4 – 3
= 1
प्रत्येक H-परमाणु पर फॉर्मल आवेश
= 1 – 0 – \(\frac { 1 }{ 2 }\) x 2
= 1 – 1
= 0

प्रश्न 61.
N2 गैस को प्रायः अक्रिय वातावरण के रूप में उपयोग क्यों करते हैं?
उत्तर:
N2 गैस में त्रिबन्ध उपस्थित होता है जिस कारण इसकी बन्ध वियोजन ऊर्जा का मान भी अधिक होता है। चूँकि यह एक अति स्थायी गैस है अतः इसका उपयोग अक्रिय गैस के रूप में करते हैं।

प्रश्न 62.
NaCl, AgNO3 के साथ अवक्षेप देता है परन्तु CCl4 नहीं क्यों?
उत्तर:
NaCl एक आयनिक यौगिक है जबकि CCl4, एक सहसंयोजी यौगिक है। NaCl तथा AgNO3 को जल में घोलने पर दोनों ही आयनों में परिवर्तित हो जाते हैं जिसके कारण AgCl का श्वेत अवक्षेप आ जाता है परन्तु CCl4 जल में आयनीकृत नहीं होता अतः यह AgNO3 के साथ अवक्षेप नहीं देता है।

प्रश्न 63.
BaSO4 जल में अघुलनशील है यद्यपि यह एक आयनिक यौगिक है।
उत्तर:
BaSO4 की जालक ऊर्जा, जलयोजन ऊर्जा से अधिक होती है, इस कारण BaSO4 जल में आयनीकृत नहीं होता है और अघुलनशील है।

प्रश्न 64.
PCl5 में तीन P – Cl बन्ध की बन्ध वियोजन ऊर्जा अधिक है जबकि दो की कम क्यों ?
उत्तर:
PCl5 की आकृति त्रिभुजीय द्विपिरामिडी होती है। इसमें तीन P-Cl आबन्ध विषुवतीय तथा दो अक्षीय बन्ध होते हैं। अक्षीय आबन्ध विषुवतीय बन्धों की तुलना में लम्बे होते हैं। इस कारण दो अक्षीय आबन्धों की बन्ध ऊर्जा कम होती है।

प्रश्न 65.
N2, O2, Cl2, F2 को बढ़ती बन्ध ऊर्जा के क्रम में व्यवस्थित करें।
उत्तर:
F2 < Cl2 < O2 < N2 (बन्ध वियोजन ऊर्जा )

प्रश्न 66.
दो परमाणु आपस में मिलकर बन्ध क्यों बनाते हैं ?
उत्तर:
स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करने के लिये दो परमाणु आपस में मिलकर बन्ध बनाते हैं।

प्रश्न 67.
निम्न में प्रभावी आण्विक बलों को लिखें-
(i) KCIO3
(ii) हीरा
(iii) शुष्क बर्फ
(iv) ऐलुमिनियम
उत्तर:
(i) KClO3 – आयनिक बन्ध
(ii) हीरा – सहसंयोजक बन्ध
(iii) शुष्क बर्फ – वान डर वाल्स बल
(iv) ऐलुमिनियम – धात्विक बल ।

प्रश्न 68.
निम्न यौगिक में कुल σ तथा π बन्धों की संख्या बतायें-
(i) बेन्जीन (C6H6), (ii) C(CN)4, (iii) CH3COOH
उत्तर:
(i) HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 28b
कुल सिग्मा बन्ध = 12
कुल पाई बन्ध = 3

(ii) HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 28c
कुल सिग्मा बन्ध = 8
कुल पाई बन्ध = 8

(iii) CH3COOH
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 28d
कुल सिग्मा बन्ध = 7
कुल पाई बन्ध = 1

प्रश्न 69.
निम्नलिखित को बढ़ते स्थायित्व के क्रम में, बन्ध वियोजन ऊर्जा के क्रम में तथा आबन्ध लम्बाई के क्रम में व्यवस्थित करें।
O2, O2+, O2, O22-
उत्तर:
उपरोक्त अणुओं की बन्ध कोटि निम्न प्रकार है।
O2 = 2.0, O22- = 0.5, O2 = 1, O2+ = 25 अतः
(i) स्थायित्वका क्रम
O2+ > O2 > O2 > O22-
क्योंकि बन्ध कोटि α स्थायित्व

(ii) बन्ध वियोजन ऊर्जा का क्रम-
O2+ > O2 > O2 > O22-
क्योंकि बन्ध कोटि α बन्ध वियोजन ऊर्जा

(iii) आबन्ध लम्बाई का क्रम-
O22- > O2 > O2 > O2+
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 28e
बन्ध कोटि α \(\frac{1}{\text { आबन्ध लम्बाई }}\)

प्रश्न 70.
VSEPR सिद्धान्त के आधार पर निम्न अणुओं की आकृति बताइये तथा केन्द्रीय परमाणु का संकरण लिखिये-
(1) H2O
2 आबन्धी युग्म तथा 2 एकाकी युग्म,
अतः आकृति = v-आकृति या मुड़ी हुयी आकृति
संकरण (H2O) = 2 + 6 = \(\frac { 8 }{ 2 }\) = 4 (sp³ संकरण)

(2) NH3
तीन आबन्धी युग्म तथा एक एकाकी युग्म, अतः आकृति पिरामिडी
संकरण (NH3) = 5 + 3 = \(\frac { 8 }{ 2 }\) = 4 (sp³ संकरण)

(3) BF3
तीन आबन्धी युग्म, अतः आकृति त्रिकोणीय समतलीय
संकरण BF3 = 3 + 3 x 7 = \(\frac { 24 }{ 8 }\) = 3 (sp² संकरण)

(4) BeF2
दो आबन्धी युग्म अतः आकृति = रेखीय
संकरण BeF2 = 2 + 2 × 7 = \(\frac { 16 }{ 8 }\) = 2 (sp संकरण)

(5) SF4
4 आबन्धी युग्म तथा । एकाकी युग्म, अतः आकृति ढेकुली या सी सॉ आकृति
संकरण SF4 = 6 + 4 × 7 = \(\frac { 34 }{ 8 }\)
= (4 + \(\frac { 2 }{ 2 }\) = 1)
= 5 (sp³d संकरण)

प्रश्न 71.
हीरा तथा ग्रेफाइट (कार्बन के अपररूप) में संकरण क्या होता है ?
उत्तर:
हीरा-sp³ संकरण
ग्रेफाइट-sp² संकरण

प्रश्न 72.
CH4, C2H6 व C2H6 की ज्यामिति आकृति क्या है ?
उत्तर:
CH4 व C2H6 की आकृति चतुष्फलकीय है जबकि C2H4 समतलीय त्रिकोणीय होता है।

प्रश्न 73.
BeCl3, BF3 व CH4 के अणुओं का आबन्ध कोण बतायें।
उत्तर:
(1) BeCl2 – रेखीय आकृति, अतः 180° कोण
(2) BF3 – त्रिकोणीय समतलीय, अतः 120° कोण
(3) CH4 – चतुष्फलकीय, अतः 109.5° कोण या 109° 28′ कोण

प्रश्न 74.
निम्नलिखित में कौन-से धातु आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास उत्कृष्ट गैस के समान नहीं होता?
(i) CuCl, (ii) CdO, (iii) TiO2, (iv) NaF
उत्तर:
(i) CuCl तथा
(ii) Cdo

प्रश्न 75.
कमरे के ताप पर H2O द्रव है, क्यों ?
उत्तर:
अन्तराअणुक H-बन्ध के कारण H2O द्रव है।

प्रश्न 76.
N2 तथा N2+ का आण्विक कक्षक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बताएँ तथा दोनों की ऊर्जा, लम्बाई व स्थायित्व की तुलना करें।
उत्तर:
N2 का आण्विक कक्षक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (N2 में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 14 है)।
(σ1s)² (σ*1s)² (σ2s)² (σ*2s)² (π2px)² (π2py)² (σ2pz)2
N2+ का आण्विक कक्षक इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (N2+ में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 13 है)।
(σ1s)² (σ*1s)² (σ2s)² (σ*2s)² (π2px)² (π2py)² (σ2pz)1
N2 की आबन्ध कोटि = \(\frac { 10-4 }{ 2 }\)
= \(\frac { 6 }{ 2 }\) = 3
N2+ की आबन्ध कोटि = \(\frac { 9-4 }{ 2 }\)
= \(\frac { 5 }{ 2 }\) = 2.5
स्थायित्व का क्रम N2 > N2+
बन्ध वियोजन कर्जा N2 > N2+
आबन्ध दूरी N2+ > N2

प्रश्न 77.
क्या σ-आबन्ध की अनुपस्थिति में आबन्ध बन सकता है ?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 78.
निम्नलिखित आयनन प्रक्रम का C में आबन्ध कोटि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
C2 → C2+ + e
उत्तर:
C2 से C2+ होने पर आबन्ध कोटि का मान घटता है क्योंकि C2 की आबन्ध कोटि 2 है जबकि C2+ की आबन्ध कोटि 1.5 है।

प्रश्न 79.
H2+, H2 व H2 सदस्यों को स्थायित्व के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
उत्तर:
स्थायित्व का बढ़ता क्रम H2 > H2+ > H2

प्रश्न 80.
Na2, N2, N22- तथा N2+ सदस्यों को स्थायित्व के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
उत्तर:
N2 > N22-> N2 > N22- (बढ़ता स्थायित्व क्रम)

प्रश्न 81.
हाइड्रोजन बन्ध के बनने में लगभग कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है ?
उत्तर:
हाइड्रोजन बन्ध बनने में लगभग 6 से 10 kcal मोल ऊर्जा प्राप्त होती है।

प्रश्न 82.
हाइड्रोजन बन्ध की प्रबलता किस पर निर्भर करती है ?
उत्तर:
हाइड्रोजन बन्ध की प्रबलता तत्व की विद्युत ऋणात्मकता पर निर्भर करती है।

प्रश्न 83.
NH3 का क्वथनांक PH3 से अधिक है, क्यों?
उत्तर:
NH3 का क्वथनांक PH3 से अधिक होता है क्योंकि NH3हाइड्रोजन बन्ध बनाता है, परन्तु PH3 नहीं।

प्रश्न 84.
H2O द्रव है, जबकि H2S गैस है।
उत्तर:
H2O हाइड्रोजन बन्ध के द्वारा संगुणन करता है अतः यह कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाया जाता है।

प्रश्न 85.
वर्ग 14 के तत्वों के हाइड्राइडों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
उत्तर:
CH4 < SiH4 < GeH4 < SnH4

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 86.
वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइडों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
उत्तर:
NH3 >> PH3 < AsH3 < SbH3 (क्वथनांकों का बढ़ता क्रम)

प्रश्न 87.
वर्ग 16 के तत्वों के हाइड्राइडों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करे?
उत्तर:
H2O >> H2S < H2Se < H2Te

प्रश्न 88.
H2O की तुलना में HF में हाइड्रोजन बन्ध अधिक प्रबल होते हैं परन्तु फिर भी H2O का क्वथनांक (100°C), HF (19.5°C) से अधिक होता है, क्यों?
उत्तर:
HF में प्रत्येक F – परमाणु दो H – परमाणु से जुड़ता है परन्तु H2O में प्रत्येक O-परमाणु चार H-परमाणुओं से जुड़ता है। जिनमें दो हाइड्रोजन सहसंयोजक बन्ध द्वारा जबकि दो हाइड्रोजन H-बन्ध द्वारा जुड़ते हैं।

अत: H-F कम अणु जबकि H2O अधिक अणुओं द्वारा संगुणित होता है अत: H2O का क्वथनांक अधिक तथा HF का क्वथनांक कम होता है।

प्रश्न 89.
मेटा- जाइलीन में कितने सिग्मा तथा पाई बन्ध उपस्थित हैं।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 29

प्रश्न 90.
H2 एक स्थायी अणु है जबकि He2 एक अस्थायी अणु, क्यों?
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 व हीलियम का 1s² होता है जबकि H2 अणु में कुल दो इलेक्ट्रॉन होते हैं जो कि (σ1s) आण्विक कक्षक में भरते हैं, इस कारण इसकी बन्ध कोटि एक होती है।

हीलियम अणु में कुल चार इलेक्ट्रॉन होते हैं जो कि (σ1s) व (σ*1s) आण्विक कक्ष में प्रवेश करते हैं। इसकी बन्ध कोटि शून्य होती है। शून्य बन्ध कोटि यह बताती है कि He2 एक स्थाई अणु नहीं है।

प्रश्न 91.
निम्न में उस यौगिक को छाँटिये जिसके गुण (कोष्ठक में दिखाये गये) का मान अधिक है।
(1) NF3, NH3 (द्विध्रुव आघूर्ण)
(2) CO2, SiO2 (बन्ध कोण)
(3) NaCl, LiCl (आयनिक गुण)
(4) MgO, CaO (कठोरता)
(5) HF, HCl ( क्वथनांक)
उत्तर:
(i) NH3 > NF3 (द्विध्रुव आघूर्ण )
(ii) CO2 > SiO2 (बन्ध कोण)
(iii) NaCl > LiCI (आयनिक कोण)
(iv) MgO > CaO (कठोरता )
(v) HF > HCl ( क्वथनांक)

प्रश्न 92.
क्या π-बन्ध को घुमाना सम्भव है?
उत्तर:
π-बन्ध को घुमाना सम्भव नहीं है क्योंकि घुमाने पर बन्ध टूट जाता है।

प्रश्न 93.
निम्नलिखित दिये गये यौगिकों को उनके सही बन्ध क्रम के साथ जोड़िये।

यौगिकबन्ध कोण
BeCl2, H2O, BCl3, AlCl3, NH3, CCl4, SF6180°, 109°28’, 104.5°, 107°, 120°, 90°

उत्तर:
BeCl2 – 180°
H2O – 104.5°
BCl3 – 120°
AlCl3 – 120°
NH3 – 107°
CCl4 – 109°28′
SF6 – 90°

प्रश्न 94.
I2 गर्म करने पर ऊर्ध्वपातित हो जाती है क्यों?
उत्तर:
आयोडीन एक उच्च सहसंयोजी अध्रुवी यौगिक है, इसलिये इसका क्वथनांक तथा गलनांक बहुम कम होता है। इसलिये I2 गर्म करने पर ऊर्ध्वपातित हो जाती है।

प्रश्न 95.
H-बन्ध कितने प्रकार के होते हैं? इनमें से प्रबल हाइड्रोजन बन्ध कौन-सा है।
उत्तर:
H-बन्ध दो प्रकार के होते हैं।

  • अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्ध
  • अन्त: अणुक हाइड्रोजन आबन्ध

इनमें अन्तराअणुक हाइड्रोजन आबन्ध अधिक प्रबल होते हैं।

प्रश्न 96.
निम्नलिखित में किसका द्विध्रुव आघूर्ण उच्च होगा तथा क्यों?
1- ब्यूटीन अथवा 1- ब्यूटाइन
उत्तर:
1- ब्यूटाइन का द्विध्रुव आघूर्ण उच्च होगा, क्योंकि यह
अधिक ध्रुवी है, इसमें sp-संकरित कार्बन परमाणु होता है जो कि अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक है।

प्रश्न 97.
निम्नलिखित में कौन-सा बन्ध अधिक ध्रुवीय होगा ?
(a) B – Cl अथवा C – CI
(b) PF अथवा P – Cl
उत्तर:
(a) B – CI बन्ध अधिक ध्रुवीय है।
(b) P – F बन्ध अधिक ध्रुवीय है।

प्रश्न 98.
C6H4Br2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है। इसकी संरचना लिखें।
उत्तर:
C6H4Br2 एक p-समावयवी है। इसकी संरचना निम्न है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 30

प्रश्न 99.
HF, HCl, HBr को विद्युत संयोजी लक्षणों के घटते क्रम में लिखें। इनकी विद्युत ऋणात्मकतायें निम्न हैं।
H = 2.1, F = 4.0, Cl = 3.0, Br = 2.8
उत्तर:
(i) बन्ध H – F के लिये
विद्युत ऋणात्मकता में अन्तर (XF – XH)
= 4.0 – 2.11.9
प्रतिशत आयनिक गुण = [16 (1.9) + 3.5 (1.9)²]

(ii) बन्ध HCl के लिये
= 43%
विद्युत ऋणात्मकता में अन्तर (XCl – XH)
= 3.0 – 2.10 = 0.9

प्रतिशत आयनिक गुण = [16(0.9) + 3.5(0.9)²]
= 17·2%

(iii) बन्ध HBr के लिये
विद्युत ऋणात्मकता में अन्तर XBr – XH = 2.8 – 2.1 = 0.7
प्रतिशत आयनिक गुण = [(16 x 0.7) + 3.5 × (0.7)²] = 12.9%
अतः विद्युत संयोजी या आयनी गुण का घटता क्रम
HF > HCl > HBr (आयनी गुण)

प्रश्न 100.
H2SO4 की अधिक श्यानता का कारण क्या है?
उत्तर:
H2SO4 की श्यानता H-बन्ध होने के कारण अधिक होती है।

प्रश्न 101.
शहद गाढ़ा क्यों होता है?
उत्तर:
शहद के गाढ़ा होने का कारण H-बन्ध है।

प्रश्न 102.
Cl – Cl बन्ध, Br – Br बन्ध से शक्तिशाली होता है, क्यों ?
उत्तर:
Cl – Cl बन्ध 3p – 3p कक्षकों के बीच अतिव्यापन होने के कारण बनता है, जबकि Br – Br बन्ध 4p – 4p कक्षकों के बीच अतिव्यापन से बनता है। 4p – कक्षकों के इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक दूर होते हैं जिसके कारण बन्ध प्रबल नहीं बन पाते। यही कारण है कि Cl – CI बन्ध शक्तिशाली होते हैं।

प्रश्न 103.
O-नाइट्रोफीनॉल की अपेक्षा p-नाइट्रोफीनॉल कम वाष्पशील है, क्यों?
उत्तर:
O-नाइट्रोफीनॉल में अन्तः अणुक H-बन्ध होता हैं जबकि p-नाइट्रोफीनॉल में अन्तराअणुक H-बन्ध होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आयनिक बंध क्या है?
उत्तर:
आयनिक बंध विपरीत आवेशित आयनों के मध्य परस्पर लगने वाले आकर्षण बल के फलस्वरूप बने बन्ध को आयनिक बन्ध कहते हैं। आयनिक बंध को वैद्युत संयोजक बन्ध भी कहते हैं।

उदाहरण – मैग्नीशियम क्लोराइड का बनना।

जब मैग्नीशियम एवं क्लोरीन एक-दूसरे के सम्पर्क में आते हैं तो धनविद्युती तत्व मैग्नीशियम दो ऋण विद्युती तत्वों क्लोरीन को इलेक्ट्रॉन देकर धनायन एवं ऋणायन बनाता है इस प्रकार दोनों (धनायन एवं ऋणायन) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निकटतम उत्कृष्ट गैस के स्थायी विन्यास के समान हो जाता है।
Mg → Mg2+ + 2e1
(2, 8, 2)   (2,8)
Cl + e →Cl
(2, 8, 7) (2, 8, 8)
Mg2+ + 2Cl → MgCl2
अतः मैग्नीशियम एवं क्लोरीन आयन स्थिर वैद्युत आकर्षण बल द्वारा बंधित हो जाते हैं।

प्रश्न 2.
जालक ऊर्जा किसे कहते हैं? जालक ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
जालक ऊर्जा (Lattice Energy) – ऊर्जा की वह मात्रा जो अनन्त दूरी पर स्थित धनावन एवं ऋणायन गैसीय अवस्था से एक मोल ठोस में बदलने पर निकलती है, जालक ऊर्जा कहलाती है।
A+(g) + Be+(g) + AB(s) + U (जालक ऊर्जा)
मेडुलंग समीकरण के द्वारा जालक ऊर्जा का मान ज्ञात कर सकते है-
U = \(\frac{N_A Z_1 Z_2 e^2}{r_1}(1-1 / n)\)
यहाँ NA – आवागाद्रो संख्या
A = मेडुलंग स्थिरांक
Z1.Z2 = आयनिक आवेश
n = बोर्न घातांक
r = आयनों के मध्य दूरी
e = इलेक्ट्रॉन पर आवेश
जालक ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारण निम्नलिखित हैं-

  • आयनों का आकार
  • क्रिस्टल संरचना
  • आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
  • आयनिक आवेश
  • क्रिस्टल के सहसंयोजी गुण।

प्रश्न 3.
उपसहसंयोजक बंध से क्या समझते हो?
उत्तर:
उपसहसंयोजक बंध (Co-ordination Bond) – उपसहसंयोजक बंध में दो परमाणु साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म द्वारा आपस में बंधे रहते हैं, लेकिन साझे का इलेक्ट्रॉन युग्म केवल एक परमाणु द्वारा ही दिया जाता है। इलेक्ट्रॉन युग्म देने वाले परमाणु को दाता परमाणु कहते हैं। इसी कारण उपसहंयोजक बंध को अर्द्धध्रुवीय या दाता बंध (Dative bond) भी कहते हैं।
उपसहसंयोजक बर्ष को तीर (→) से प्रदर्शित करते हैं।
(इलेक्ट्रॉन युग्म दाता) + (इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही) → उपसहसंयोजक यौगिक

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना

प्रश्न 4.
बंधों के ध्रुवण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
बंधों का ध्रुवण (Polarisation of bonds) – समान आवेश वाले आयन एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, परन्तु विपरीत आवेश वाले आयन एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इसी कारण आयनों का आकार पूरी तरह गोलाकार न होकर विकृत हो जाता है अतः
“धनायन एवं ऋणायन के पारस्परिक आकर्षण एवं प्रतिकर्षण के कारण उनके आकार में होने वाली विकृति ध्रुवण कहलाती है।”
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 31
धनायन की त्रिज्या कम एवं नाभिकीय आवेश अधिक होने के कारण उसका इलेक्ट्रॉन अभ्र, नाभिक की ओर प्रबल रूप से आकर्षित अवस्था में होने के कारण ऋणायन को आसानी से ध्रुवित कर देता है।

प्रश्न 5.
ध्रुवण को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ध्रुवण को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
1. धनायन का आकार ऋणायन की विकृति धनायन के आकार पर निर्भर करती है। धनायन जितना छोटा होगा उतना ही अधिक प्रभावी ढंग से ऋणायन को विकृत करेगा।
उदाहरण-
BeCl2 < MgCl2 < CaCl < SrCl2 < BaCl2
गलनांक 405°C > 702°C > 772°C > 872°C < 960°C
धनायन का आकार कम होगा तो गलनांक भी कम होगा।

2. ऋणायन का आकार ऋणायन का आकार जितना छोटा होगा उसका ध्रुवण उतना ही कम होगा। ऋणायन का आकार छोटा होने पर गलनांक अधिक होता है।
उदाहरण-
CaF2 > CaCl2 > CaBr2 > Cal2
1372°C > 772°C > 730°C > 575°C

3. आयनों पर आवेश किसी भी आयन पर अधिक आवेश होने के कारण ध्रुवण अधिक होता है। यही कारण है कि Mg2+, Na+ से अधिक सहसंयोजक है।

4. आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास धनायन का विन्यास उत्कृष्ट गैस के तुल्य होने के कारण यह नाभिक के आकर्षण बल का प्रभावी ढंग से परिरक्षण कर सकता है जिसके कारण धनायन आकार में छोटा हो जायेगा, अतः ध्रुवण अधिक होगा।

प्रश्न 6.
CO32- में एवं आक्सीजन (O2) अणु में अनुनादी संरचनाएँ बनाइये।
उत्तर:
CO32- में
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 32

प्रश्न 7.
आयनिक एवं सह-संयोजक यौगिकों की तुलना कीजिए।
उत्तर:

आयनिक यौगिकसहसंयोजक यौगिक
1. आयनिक यौगिक प्राय: ठोस होते हैं।ये ठोस द्रव एवं गैस तीनों हो सकते हैं।
2. यह आयनों से मिलकर बना होता है।यह अणुओं से मिलकर बना होता है।
3. आयनिक बंध दिशात्मक नहीं होते हैं।सहसंयोजक बंध में दिशात्मक गुण पाये जाते हैं।
4. आयनिक यौगिक समांवयवता प्रदर्शित नहीं करते।सह-संयोजक यौगिक समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
5. आयनिक यौगिक कठोर एवं भंगुर प्रकृति के होते हैं।ये अपेक्षाकृत कमजोर, मृदु एवं गलनीय होते हैं।
6. इनके गलनांक एवं क्वथनांक उत्व होते हैं।इनके गलनांक एवं क्वथनांक निम्न होते हैं।
7. ये ध्रुवीय विलायकों में विलेय होते हैं।ये अध्रुवीय विलायकों में विलेय होते हैं।
8. इनकी अभिंक्रियाएँ तीव्र गति से होती हैं।इनकी अभिक्रियाएँ मन्द गति से होती हैं।

प्रश्न 8.
SiCl4 का जल अपघटन होता है CCl4 का नहीं। समझाइए।
उत्तर:
CCl4 का जल अपघटन नहीं होता है, जबकि SiCl4 जल में अपघटित हो जाता है, क्योंकि Si के परमाणु में रिक्त कक्षक होता है एवं Si की अधिकतम सहसंयोजकता 6 होती है। इस कारण Si जल के अणुओं से अतिरिक्त बंध बनाता है जिससे SiCl4 एवं जल के अणु के मध्य दूरी कम हो जाती है एवं HCl का अणु आसानी से बन जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 33
जबकि CCl4 के C के पास d कक्षक उपलब्ध नहीं रहते जिसके कारण C जल के साथ अतिरिक्त बंध नहीं बना सकता। इसलिए CCl4
जल में अविलेय रहता है।

प्रश्न 9.
ग्रेफाइट सहसंयोजक होते हुए भी विद्युत का सुचालक है, क्यों ?
उत्तर:
ग्रेफाइट की परतदार संरचना होती है। ग्रेफाइट की परत में प्रत्येक कार्बन परमाणु सहसंयोजक बंधों के द्वारा पास के तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा रहता है। प्रत्येक कार्बन परमाणु पर एक इलेक्ट्रॉन स्वतन्त्र रहता है। यह इलेक्ट्रॉन गतिशील (Mobile) होता है। इस गतिशील इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण ही ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक है।

प्रश्न 10.
BF3 की संरचना समतल त्रिभुजीय है जबकि NH3 की पिरामिडीय है क्यों?
उत्तर:
BF3 की संरचना समतल त्रिभुजीय होती है, क्योकि BF3 में एक s – कक्षक एवं दो p-कक्षक संकरित होकर तीन नये sp² संकरित कक्षक बनाते हैं। अणु में बंध कोण का मान 120° होता है। BF3 में B के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अनुसार-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 34
जबकि NH3में sp³ संकरण पाया जाता है। एक संकरित कक्षक में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण बंधी इलेक्ट्रॉन युग्म से प्रतिकर्षण बढ़ जाता है जिसके कारण बंध कोण 109°28′ के बजाय 106° 45′ हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 35

प्रश्न 11.
CO2 अध्रुवीय है, जबकि SO2 ध्रुवीय है, क्यों?
उत्तर:
CO2 ध्रुवीय बंध उपस्थित होने के बावजूद भी अध्रुवीय है, क्योंकि CO2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है जो यह प्रदर्शित करता है कि बंधों में ध्रुवणता होने के बावजूद भी सदिश योग के कारण एक द्विध्रुव, दूसरे द्विध्रुव को समाप्त कर देता है, जबकि SO2 में ऐसा नहीं होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 36

प्रश्न 12.
MgSO4 जल में विलेय है, जबकि BaSO4 अविलेय है, क्यों?
उत्तर:
MgSO4 की जल में विलेयता – MgSO4 के Mg 2+ आयन अपेक्षाकृत आकार में छोटे होते हैं जिसके कारण Mg2+ आयन प्रभावी क्रिस्टलन संकुचन के लिए जल के अणुओं से घिरा रहता है। जल के. अणुओं से घिरे होने कारण Mg2+ और SO42- के बीच लगने वाला आकर्षण बल अपेक्षाकृत कम हो जाता है। आकर्षण बल कम होने के कारण MgSO4 की जालक ऊर्जा, विलायक ऊर्जा से कम हो जाती है। अत: MgSO4 जल में विलेय होता है।

BaSO4 की अविलेयता – जब BaSO4 को जल में मिलाया जाता है तो जल की विलायक ऊर्जा, BaSO4 की जालक ऊर्जा की अपेक्षा कम होती है। इसी कारण BaSO4 जल में अविलेय है।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित परमाणुओं के बीच बनने वाले बन्धों के प्रकार को स्पष्ट करें-
(1) दो परमाणु जिनकी विद्युत ऋणात्मकता समान है।
(2) दो परमाणु जिनकी विद्युत ऋणात्मकता में सूक्ष्म अन्तर है ।
(3) दो परमाणु जिनकी विद्युत ऋणात्मकता में अधिक अन्तर है।
उत्तर:
(1) जब दो परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता समान होती है तो उनमें 100% सहसंयोजी बन्ध बनते हैं।

(2) जब दो परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता में सूक्ष्म अन्तर होता है तो ध्रुवीय सहसंयोजक बन्ध बनते हैं जिनमें कुछ आयनिक लक्षण भी होते हैं।

(3) जब दो परमाणुओं की विद्युत ऋणात्मकता में अधिक अन्तर होता है तो विद्युत संयोजी बन्ध बनते है जिसमें कुछ सहसंयोजी लक्षण भी होते हैं।

प्रश्न 14.
NH3 में आबन्ध कोण PH3 से अधिक होता है, क्यों?
उत्तर:
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NH3 तथा PH3 दोनों ही वर्ग 15 के तत्वों के हाइड्राइड हैं। नाइट्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता फॉस्फोरस से अधिक होती है। परिणामस्वरूप साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म NH आबन्ध में नाइट्रोजन तत्व की ओर ज्यादा है। जबकि P-H आबंध में यह फॉस्फोरस तत्व की ओर कम है। अधिक विद्युत ऋणात्मकता होने के कारण नाइट्रोजन तत्व के चारों ओर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है। इस कारण प्रतिकर्षण भी बढ़ जाता है।

अत: NH3 में H – N – H में बन्ध 107° जबकि H – PH में यह 91° होता है।

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प्रश्न 15.
एथेन का क्वथनांक मेथेन के क्वथनांक से अधिक होता है, क्यों ?
उत्तर:
एथेन अणुओं का आण्विक भार मेथेन से अधिक होता है। जिसका आण्विक भार अधिक होता है उसमें वाण्डर वाल आकर्षण बल भी अधिक होता है। इस कारण एथेन का क्वथनांक मेथेन से अधिक होता है।

प्रश्न 16.
निम्न युग्मों में से कौन अधिक सहसंयोजक है और क्यों ?
(1) CuO तथा Cus
(2) AgCl तथा AgI
(3) PbCl2 तथा PbCl4
(4) BeCl2 तथा MgCl2
उत्तर:
(1) CuS > CuO ; CuS अधिक सहसंयोजक है, S2- के बड़े आकार के कारण
(2) AgI > AgCl ; AgI अधिक सहसंयोजक है, I के बड़े आकार के कारण
(3) PbCl4 > PbCl2; PbCl4 अधिक सहसंयोजक है, Pb4+- के छोटे आकार के कारण
(4) BeCl2 > MgCl2; BeCl2 अधिक सहसंयोजक है, Be2+ के छोटे आकार के कारण

प्रश्न 17.
KCl का द्विध्रुव आघूर्ण 3.336 × 10-29कूलॉम – मीटर (C-m) है जो व्यक्त करता है कि यह एक उच्च ध्रुवी अणु है। इस अणु में K+ तथा Cl के बीच अन्तरपरमाण्विक दूरी 2.6 x 10-10m है। द्विध्रुव आघूर्ण की गणना कीजिए यदि प्रत्येक नाभिक पर एक मूलभूत इकाई के विपरीत आवेश स्थित हों। KCl की आयनिक प्रतिशतता का परिकलन भी कीजिए।
हल:
μ सैद्धान्तिक = q x d = 2.6 × 10-10 m × 1.602 × 10-19 C
= 4.1652 × 10-29 C-m
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 38

प्रश्न 18.
HF का द्विध्रुव आघूर्ण (1.98D), HCl के द्विध्रुव आघूर्ण (1.03D) से अधिक क्यों होता है?
उत्तर:
HCl की अपेक्षा HF अधिक ध्रुवी है; क्योंकि CI की अपेक्षा F अधिक विद्युत ऋणात्मक होता है। हम जानते हैं कि विद्युत ऋणात्मकता में अन्तर अधिक होने पर ध्रुवणता अधिक होती है अर्थात् द्विध्रुव आघूर्ण अधिक होता है।

प्रश्न 19.
LiH का द्विध्रुव आघूर्ण 1964 x 10-29Cm है तथा अणु में Li व H की अन्तरपरमाण्विक दूरी 1.596 Å है। LiH में आयनिक प्रतिशतता ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है,
= q x d
d = 1·596 Å = 1.596 × 10-10 m
q = 1.602 x 10-19 C
सैद्धान्तिक द्विध्रुव आघूर्ण = q x d
µ = 1.602 × 10-19 × 1.596 × 10-10
µ = 2.557 x 110-29C-m
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प्रश्न 20.
निम्नलिखित में प्रत्येक की ठोस अवस्था पर विचार कीजिए –
(i) मेथेन
(ii) सीजियम क्लोराइड
(iii) जर्मेनियम
(iv) लीथियम
(v) आर्गन
(vi) बर्फ।
इनमें से कौन-सा निम्नलिखित का एक उदाहरण होगा-
(क) उच्च गलनांक, संजाल ठोस
(ख) अचालक ठोस जो गलित अवस्था में अच्छा चालक बन जाता है
(ग) उच्च विद्युत तथा ऊष्मीय चालकता का ठोस
(घ) वाण्डर वाल्स बलों द्वारा जुड़ा एक निम्न गलनांक वाला ठोस
(ङ) हाइड्रोजन युक्त ठोस।
उत्तर:
(क) जर्मेनियम
(ख) सीजियम क्लोराइड
(ग) लीथियम
(घ) आर्गन
(ङ) बर्फ।

प्रश्न 21.
BF3 में संकरण बताइये व संरचना दीजिए।
उत्तर:
sp² संकरण होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 40

प्रश्न 22.
NH3 का विद्युत आघूर्ण NF3 से अधिक होता है, समझाइए।
उत्तर:
NH3 का विद्युत आघूर्ण NF3 से अधिक होता है, क्योंकि NH3 में N की विद्युत ऋणात्मकता अधिक होने के कारण N – H बंध का आघूर्ण N की ओर होता है एवं एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का आघूर्ण तीनों N – H बंधों के परिणामी आघूर्ण की तरफ होता है। जिसके कारण NH3 का द्विध्रुव अधिक होता है, परन्तु NF3 में N की विद्युत ऋणता F से कम है जिस कारण N – F का बंध आघूर्ण F की तरफ होता है। इसलिए एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का आघूर्ण N – F बंध आघूर्ण के विपरीत दिशा में होता है, जिसके कारण NF3 का द्विआघूर्ण कम होता है।

प्रश्न 23.
H2O द्रव है, जबकि HS गैस है तथा CO2 रेखीय एवं SO2 कोणीय हैं, क्यों?
उत्तर:
H2O के केन्द्रीय परमाणु पर उपस्थित बंधी इलेक्ट्रॉन युग्मों प्रतिकर्षण कम होता है। H2O में बंध कोण का मान 104°3′ होता है, जबकि H2S में बंधित इलेक्ट्रॉन युग्मों के मध्य अधिक प्रतिकर्षण होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक आबंधन तथा आण्विक संरचना 41
CO2 रेखीय है, क्योंकि CO2 के केन्द्रीय परमाणु C के चारों ओर बंध क्रम अधिकतम होता है, परन्तु SO2 में केन्द्रीय परमाणु S पर इलेक्ट्रॉन युग्मों की उपस्थिति के कारण उसकी संरचना कोणीय होती है।

प्रश्न 24.
निम्न को समझाइए।
(1) He2 अज्ञात है पर He2+ ज्ञात है, ऐसा क्यों?
उत्तर:
हम जानते हैं कि हीलियम परमाणु को 2He4 से प्रदर्शित करते हैं। He2+ का ज्ञात होने का तात्पर्य है कि हीलियम से दो इलेक्ट्रॉन निकलकर दूसरे किसी ग्राही तत्व के पास गये जबकि He2 का कोई तात्पर्य नहीं है।

(2) VSEPR में PCl5, ICl2 तथा NO3 की ज्यामिति का निर्धारण करो।
उत्तर:
VSEPR के अनुसार PCl5, ICl2 तथा NO3 की ज्यामिति निम्नलिखित है-
(i) PCl5, फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड अणु में एक फॉस्फोरस परमाणु व पाँच क्लोरीन परमाणु सामान्य सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़े हुए हैं।
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PCl5 की ज्यामिति पंचभुजीय द्विपिरामिडीय होगी एवं बंध कोण का मान 72° तथा 90° होगा।

(ii) ICl2 की ज्यामिति
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ICl2 का ज्यामिती रेखीय होगी।

(iii) NO3 की ज्यामिति-
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अत: NO3 की ज्यामिति समतल त्रिभुजाकार होगी।

प्रश्न 25.
SO2 में S की संकरण अवस्था तथा SO22- आयन की आकृति क्या होगी ?
उत्तर:
SO2 में सल्फर की संकरण अवस्था sp³ होगी एवं SO42- की ज्यामिति चतुष्फलकीय (tetrahedral) होगी।
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प्रश्न 26.
SF4 अणु की ज्यामिति ज्ञात कीजिए तथा इसमें एकाकी युग्म की स्थिति की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
SF4 अणु की ज्यामिति – S में संयोजकता कोश आंशिक रूप से भरा रहता है (3s², 3p², 3d0)। अत: पर उपस्थित एकाकी
इलेक्ट्रॉन युग्म पर प्रतिकर्षण कम होने के कारण इलेक्ट्रॉन युग्म में प्रतिकर्षण कम होगा। जिससे बंध कोण प्रभावित रहता है।

S की परिवर्ती संयोजकता + 4 व + 6 हैं। अतः SF4 अणु की ज्यामिति इस प्रकार होगी-
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एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म केवल एक परमाणु से सम्बन्धित होता है। इलेक्ट्रॉन युग्म त्रिविम में फैला रहता है। SF4 अणु में केन्द्रीय परमाणु S के पास इलेक्ट्रॉन युग्म की संख्या एक होगी।

अतः प्रतिकर्षण के कारण इस अणु के बंध कोण में कमी आ जाती है। SF4 में sp³d संकरण पाया जाता है।

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HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. निम्न में से वायु प्रदूषण का प्राकृतिक स्रोत है-
(1) मोटर वाहन
(2) जंगल की आग
(2) खनन कार्य
(4) युद्ध।
उत्तर:
(2) जंगल की आग

2. निम्न में से ग्रीन हाउस गैस नहीं है-
(1) कार्बन डाइ-ऑक्साइड
(2) मेथेन
(3) फॉस्जीन
(4) नाइट्रस ऑक्साइड।
उत्तर:
(3) फॉस्जीन

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

3. ओजोन परत के अपक्षय से सम्बन्धित निम्न में से कौन-सा प्रभाव सही नहीं है?
(1) त्वचा कैंसर होना
(2) पेड़-पौधों में प्रकाश-संश्लेषण की दर में वृद्धि
(3) ध्रुवीय बर्फ का पिघलना
(4) आनुवंशिक लक्षणों में परिवर्तन।
उत्तर:
(4) आनुवंशिक लक्षणों में परिवर्तन।

4. प्राकृतिक वायु में ऑक्सीजन की मात्रा-
(1) कार्बन डाइ-ऑक्साइड से कम परन्तु नाइट्रोजन से अधिक होती है
(2) मेथेन से अधिक परन्तु हाइड्रोजन से कम होती है
(3) जल वाष्प से कम परन्तु आर्गन से अधिक होती है
(4) हीलियम और आर्गन से अधिक परन्तु नाइट्रोजन से कम होती है।
उत्तर:
(4) हीलियम और आर्गन से अधिक परन्तु नाइट्रोजन से कम होती है।

5. निम्न में से जल का सर्वाधिक शुद्ध स्रोत है-
(1) तालाब का जल
(2) झरने का जल
(3) नदी का जल
(4) पर्वतों पर जमी बर्फ।
उत्तर:
(4) पर्वतों पर जमी बर्फ।

6. औद्योगिक बहि: स्राव से प्रभावित होंगे-
(1) भूमि, जल स्रोत तथा वायु
(2) भूमि तथा जल स्रोत
(3) जल स्रोत तथा वायु
(4) वायु तथा भूमि।
उत्तर:
(1) भूमि, जल स्रोत तथा वायु

7. वायुमण्डल के कौन-से भाग में मौसमी परिवर्तन होते हैं ?
(1) क्षोभमण्डल
(2) समतापमण्डल
(3) आयनमण्डल
(4) मध्यमण्डल।
उत्तर:
(1) क्षोभमण्डल

8. एक मनुष्य 24 घण्टे में कितनी बार साँस लेता है?
(1) 2200 बार लगभग
(2) 22,000 बार लगभग
(3) 12000 बार लगभग
(4) 28,0000 बार लगभग।
उत्तर:
(2) 22,000 बार लगभग

9. किस गैस की उपस्थिति में हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन वहन क्षमता की कमी हो जाती है ?
(1) SO2
(2) NO2
(3) CO
(4) इनमें से सभी।
उत्तर:
(3) CO

10. प्रकाश रासायनिक कोहरे का मुख्य अवयव कौन-सा है ?
(1) NO
(2) N2
(3) O2
(4) इनमें से सभी।
उत्तर:
(1) NO

11. आँखों में जलन मुख्यतया इस गैस की वजह से होती है-
(1) HCN
(2) COCl2
(3) NH3
(4) H2
उत्तर:
(4) H2

12. ओजोन परत में क्षरण का कारण है-
(1) CFCs का प्रयोग
(2) क्लोरोफॉर्म का प्रयोग
(3) हैलोजेन का प्रयोग
(4) इनमें से सभी।
उत्तर:
(4) इनमें से सभी।

13. निम्न में से कौन-सी गैस तीव्रता से हीमोग्लोबिन से संयोग करती है ?
(1) CO
(2) CO2
(3) NO
(4) NO2
उत्तर:
(1) CO

14. ओजोन परत पृथ्वीवासियों को संरक्षित करती है-
(1) UV किरणों से
(2) IR किरणों से
(3) कॉस्मिक किरणों से
(4) लेसर किरणों से।
उत्तर:
(1) UV किरणों से

15. वायु प्रदूषण कम किया जा सकता है-
(1) जल छिड़ककर
(2) यूरो मानक के वाहनों का प्रयोग करके
(3) हरे पेड़ लगाकर
(4) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(4) उपर्युक्त सभी।

16. मार्बल उद्योग को प्रमुख सिंक (Sink) माना गया है।
(1) अम्ल वर्षा का
(2) भूकम्प का
(3) धात्विक प्रदूषण का
(4) चक्रवात का।
उत्तर:
(1) अम्ल वर्षा का

17. सबसे अधिक प्रदूषण उत्पन्न करती है-
(1) CH4
(2) C2H6
(3) C3H8
(4) C4H10
उत्तर:
(1) CH4

18. पर्यावरण के क्षेत्र में सन् 2005 में नोबेल पुरस्कार विजेता घोषित किया गया-
(1) येज चाउविन
(2) आर. एच. ग्रुब्स
(3) आर. आर. श्रोक
(4) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(4) उपर्युक्त सभी।

अति लयु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
पर्याबरण शब्द का अर्थ क्या है ?
उत्तर:
पर्यावरण दो शब्द्धों से मिलकर बना है-परि + आवरण। परि का अर्थ है-चारों और से एवं आवरण का अर्थ है घेरना। अर्थात् पर्यावरण शब्द का अर्थ है-चार्यों ओर से घेरना।

प्रश्न 2.
पर्यांवरण के मुख्य दो प्रकार कौन-से हैं ?
उत्तर:
पर्यावरण मुख्यतया दो प्रकार के होते है-

  • भौतिक पर्यावरण,
  • जैविक पर्यावरण।

प्रश्न 3.
प्राकृतिक वायु में कौन-सी गैसें पायी जाती हैं ?
उत्तर:
प्राकृतिक बायु में नाइट्रोजन (78%), औक्सीजन (21%), कार्बन डाह-ऊँक्साइड (0.3%) तथा शेष निष्किय गैसें पायी जाती हैं।

प्रश्न 4.
जल प्रदूषण करने चाले पदार्थौ को किन चार भागों में बाँटा जा सकता है ?
उत्तर:
जल प्रदृषण करने बाले पदार्थों को निम्नलिखित चार भागों में बाँटा जा सकता है-

  • औदोगिक पदार्थ,
  • वाहित मल,
  • मृत शरीर एवं जीव,
  • खनन एवं परिवहन।

प्रश्न 5.
प्रदूषण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
वायु, जल तथा भूमि में उन अवांछित और अत्यधिक पदायों का इकट्डा हो जाना जिनसे प्राकृतिक पर्यावरण में प्रतिकूल परिवर्तन आ जाते हैं, प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 6.
प्रदूघण किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह पदार्थ या कारक जिसके कारण वायु, भूमि तथा जल के भौतिक, रासायनिक तथा औैविक लक्षणों में अवांछित परिवर्तन हो, प्रदूषण कहलाता है।

प्रश्न 7.
ओजोन अवक्षय के हानिकारक प्रभाव क्या होते हैं?
उत्तर:
ओजोन परत के छास से सूर्य की पराबँंगनी किरणों ( विकिरण) के अधिक मात्रा में पृथ्वी पर पहुँचने से औँखों तथा प्रतिरकी तन्त्र को क्षति होती है। इनके अतिरिक्त त्वबा का कैसर भी ओजोन अवक्षय का दुष्परिणाम है।

प्रश्न 8.
पेयजल के तीन लक्षण लिखिए।
उत्तर:

  • पेयजल पारदर्शी, रंगहीन तथा गन्धहीन होना चाहिए।
  • पेयजल में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन गैस घुली होनी चाहिए।
  • पेयजल हानिकारक रासायनों तथा जीवाणुओं से मुक्त होना चाहिए।

प्रश्न 9.
ओजोन परत को कौन-से रसायन नष्ट करते हैं ?
उत्तर:
मुख्यतः वातानुकूलित यन्त्रों, अग्निशामकों, विलायकों आदि के रूप में प्रयुक्त होने वाले रसायन जैसे-क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन, हैलोजेन, क्लोरोफॉर्म, NO आदि रसायन ओजोन परत को नष्ट करते हैं।

प्रश्न 10.
स्मॉग किन अवयवों से मिलकर बनता है ?
उत्तर:
स्मॉंग मुख्यतया धुआँ (Smoke) और कोहरा (Fog) का सम्मिलित रूप है।

प्रश्न 11.
अम्ल वर्षा के लिए कौन-से वायु प्रदूषक उत्तरदायी होते हैं?
उत्तर:
अम्ल वर्षा के लिए मुख्यतया कार्बन, नाइट्रोजन एवं सल्फर के ऑक्साइड जो कि वायुमण्डल में पाए जाते हैं, उत्तरदायी होते हैं।

प्रश्न 12.
मुख्य औद्योगिक वायु प्रदूषक कौन से हैं?
उत्तर:
उद्योगों से निकलने वाले धुएँ में मुख्यतया कार्बन मोनोक्साइड, सल्फर डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन के ऑक्साइड, वायु प्रदूषक के रूप में पाए जाते हैं।

प्रश्न 13.
दो गैसों के नाम लिखिए, जिनकी वायु में उपस्थिति ग्रीन हाउस प्रभाव देती है?
उत्तर:
CH2 एवं CO2

प्रश्न 14.
क्षोभमण्डल में पाई जाने वाली दो मुख्य गैसों के नाम लिखिए।
उत्तर:
नाइट्रोजन एवं ऑक्सीजन।

प्रश्न 15.
पृथ्वी के वायुमण्डल को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? उनके नाम भी लिखिए।
उत्तर:
पृथ्वी के वायुमण्डल को मुख्यतः चार भागों में बाँटा जा सकता है-

  • ओभमण्डल
  • समतापमण्डल
  • मध्यमण्डल
  • आयनमण्डल

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प्रश्न 16.
वायु प्रदूषण के कारण कौन-कौन सी बीमारी हो जाती है?
उत्तर:
वायु प्रदूषण के कारण श्वसन नली एवं फेफड़ों में जलन, छती में जकड़न, गले की खराश, टी.बी., अस्थमा आदि बीमारियाँ जन्म होती हैं।

प्रश्न 17.
पेट्टोल के दहन से निकला हुआ धुआँ खतरनाक होता है, क्यों ?
उत्तर:
पेट्रोल के दहन से निकलने वाले धुएँ में उपस्थित सीसे के कण लकवा, दमा, हड्डियों को गलाना एवं मस्तिष्क रोग सम्बन्धी बीमारियों का कारण होते है, इसलिए पेट्रोल से निकला धुआँ खतरनाक होता है।

प्रश्न 18.
रासायनिक दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध जल में क्या छ्केता है?
उत्तर:
रासायनिक दृष्टि से पूर्णंतः शुद्ध जल में दो भाग हाइड्रोजन एवं एक भाग और्सीजन होती है।

प्रश्न 19.
राजस्थान में दो स्थान जहाँ कपड़ा रंगाई उद्योग के कारण वहाँ का भूमिगत जल भी रंगीन हो गया है, कौन से हैं ?
उत्तर:
पाली एवं बालोतरा।

प्रश्न 20.
‘मलिन-जल’ किसे कहते हैं ?
उत्तर:
घरेलू अपशिष्ट पदाधों से युक्त जल ‘मलि-जल’ कहलाता है।

प्रश्न 21.
बी. ओ, डी, क्या है ?
उत्तर:
बी. ओ. ही. जल में विलेय ऑक्सीजन की वह मात्रा है जो सूर्म जीवों द्वारा कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों को ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक होती है।

प्रश्न 22.
ओजोन परत का क्या कार्य है ?
उत्तर:
ओजोन परत पृथ्वी के चारों ओर एक रक्षा कवच का कार्य करती है। यह सूर्य की पराबँगनी किरणों से पृथ्वी को बचाती है।

प्रश्न 23.
वायु प्रदूषण रोकने के लिए मोटर वाहनों में पेट्रोल व डीजल की जगह क्या प्रयोग हो रहा है ?
उत्तर:
वायु प्रदूषण रोकने के लिए मोटर वाहनों में पेट्रोल व डीजल की जगह सम्पीडित प्राकृतिक गैस (CNG) का प्रयोग हो रहा है।

प्रश्न 24.
ऐसे दो प्रदूषकों के नाम लिखो, जिनमें सल्फर होती है और वे वायु में उपस्थित रहते हैं।
उत्तर:
H2S, SO3

प्रश्न 25.
क्या होगा यदि CO2 वातावरण से खत्म हो जाये ?
उत्तर:
यदि CO2 खत्म हो जायेगी तो पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया नहीं कर सकेंगे। इससे ऑक्सीजन भी उत्पन्न नहीं होगी।

प्रश्न 26.
जीवाश्म ईंधन किस प्रकार का प्रदूषण उत्पन्न करता
उत्तर:
वायु प्रदूषण।

प्रश्न 27.
हरे पौधे प्रकाश ऊर्जा को किसमें परिवर्तित कर देते हैं।
उत्तर:
हरे पौधे प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 28.
जल प्रदूषण किस बीमारी को उत्पन्न करता है।
उत्तर:
हैजा, पेचिश, टाइफॉइड, आँतों का अल्सर आदि।

प्रश्न 29.
दो जैव व दो अजैव निम्नीकरण प्रदूषकों का नाम लिखें?
उत्तर:
जैव निम्नीकरण प्रदूषण-घर का कूड़ा-करकट, मल-मूत्र। अजैव निम्नीकरणी प्रदूषण-प्लास्टिक, पीडकनाशक।

प्रश्न 30.
जल प्रदूषक का ‘बिन्दु स्रोत’ क्या है।
उत्तर:
जो स्रोत जल प्रदूषकों को सीधे ही जल में प्रवाहित कर देते है, उन्हें बिन्दु स्रोत कहते हैं।

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प्रश्न 31.
पुन:चकण किये जा सकने वाले पदार्थ लिखें।
उत्तर:

  • प्लास्टिक,
  • धातु,
  • पॉलीथीन।

प्रश्न 32.
रासायनिक यौगिकों के नाम बताओ जो ओजोन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
उत्तर:
क्लोरोफ्लुओरो कार्बन, NO2 आदि।

प्रश्न 33.
उन गैसों के नाम लिखों जो अम्लीय वर्षा के कारक हैं।
उत्तर:
CO3, NO2, SO2, SO3.

प्रश्न 34.
वातावरण में धूल कणों की प्रशितता बढ़ने से पृथ्वी के ताप पर क्या प्रभाव पड़ता है।
उत्तर:
ताप बढ़ जाता है।

लयु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
वायु प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत कौन-से हैं ?
उत्तर:
वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत (Main Sources of Air Pollution)-वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं-

  • ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली गैसों (विषैली) व धूल से वायु प्रदूषित होती है।
  • उद्योगों से निकलने वाला धुँआ जो कि विषैली गैसों जैसेकार्बन मोनोक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया व मेथेन आदि का मिश्रण होता है, वायु प्रदूषण फैलाता है।
  • जनसंख्या वृद्धि व वनों का विनाश भी वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है।
  • रेडियो समस्थानिकों का बढ़ता उपयोग।
  • मोटर वाहनों से निकलने वाला धुँआ एवं तीव्र औद्योगीकरण।
  • खेती में कीटनाशकों एवं रासायनों का बढ़ता उपयोग।

प्रश्न 2.
पर्यावरण प्रदूषण की परिभाषा और प्रकार लिखिए।
उत्तर:
पर्यावरण प्रदूषण की परिभाषा-पर्यावरण प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है-पर्यावरण का दूषित होना या खराब होना। मनुष्य के क्रियाकलापों के कारण पर्यावरण में विनाशकारी अवांछित तत्व फैल जाते हैं, जो कि पर्यावरण के भौतिक एवं सजीव घटक दोनों के लिए हानिकारक होते हैं। पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाला कोई भी पदार्थ पर्यावरण प्रदूषक कहलाता है। पर्यावरण प्रदूषण वर्तमान विश्व के लिए एक कठिन समस्या है, जिसे सुलझाना अत्यन्त आवश्यक है। पर्यावरण प्रदूषण निम्न प्रकार का होता है-

(i) वायु प्रदूषण, (ii) जल प्रदूषण, (iii) भूमि प्रदूषण।

  • वायु प्रदूषण-वायु के नैसर्गिक गुण में आने वाला परिवर्तन जिससे जीवधारियों और पेड़-पौधों को हानि पहुँचती है, उसे वायु प्रदूषण (Air pollution) कहते हैं।
  • जल प्रदूषण-जल के अन्दर अपशिष्ट पदार्थ मिलने तथा प्राणियों के मृत शरीर एवं अन्य मानवीय गतिविधियों के कारण जल के गुणों में होने वाला परिवर्तन जल प्रदूषण (Water pollution) कहलाता है।

प्रश्न 3.
औद्योगिक बहिःस्त्राव क्या होता है तथा यह पर्यावरण को किस प्रकार प्रदूषित करता है ?
उत्तर:
औद्योगिक बहि:स्राव-उद्योगों में प्रयोग होने वाले जल को, उपयोग होने के बाद उद्योग परिसर से बाहर बहा देते हैं। प्रयोग के दौरान जल में रासायनिक पदार्थ मिल जाते हैं। यह प्रदूषित जल औद्योगिक बहिःस्राव कहलाता है। यह औद्योगिक बहि:साव उद्योग परिसर से बाहर निकलकर जल स्रोत, भूमि तथा वायु को प्रदूषित करता है। औद्योगिक बहि:स्राव में कार्बनिक तथा अकार्बनिक यौगिक मिले होते हैं।

रंगाई एवं वस्त्र उद्योग, कागज उद्योग, इस्पात उद्योग, चमड़ा उद्योग आदि से निकलने वाले बहिः-साव में अनेक हानिकारक पदार्थ पाए जाते हैं। इन हानिकारक पदार्थों में से अधिकांश का विघटन नहीं होता है जिससे यह जल को भारी मात्रा में प्रदूषित करते हैं। समुद्रों के किनारे स्थित उद्योगों के बहिःस्राव से समुद्री जल भी प्रदुषित होता है।

प्रश्न 4.
जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय क्या हैं? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
जल प्रदूषण की रोकथाम निम्नलिखित उपाय अपनाने से की जा सकती है-

  • औद्योगिक बहि:स्राव को बिना उपचार के पानी में न बहाने से।
  • उद्योगों की स्थापना आबादी वाले इलाकों से दूर करने पर।
  • जल का अनावश्यक उपयोग न करें, साबुन एवं अपमार्जकों का प्रयोग कम करें।
  • मृत जीवों को नदी में न डाला जाए।
  • जल प्रदूषण नियन्त्रण सम्बन्धी कानूनों का सख्ती से पालन किया जाए।
  • जल की पाइप लाइन को, सीवेज लाइन से दूर रखा जाए।

प्रश्न 5.
भूमि प्रदूषण मानव जीवन को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर:
भूमि प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव-भूमि प्रदूषण न केवल मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रभाव डालता है, बल्कि भूमि में पाए जाने वाले जीव-जन्तुओं, मानव जीवन एवं वनस्पति पर भी प्रभाव डालता है। भूमि प्रदूषित होने के कारण उसमें पायी जाने वाली फसलें भी हानिकारक पदार्थ भूमि से ग्रहण कर लेती हैं। यह फसलें हानिकारक पदार्थों को मानव तक पहुँचा कर अनेक रोगों को जन्म देती हैं।

उदाहरणार्थ – क्लोरीन युक्त हाइड्रोकार्बन (DDT) जल में अपघटित नहीं होते तथा जल एवं खनिजों के अवशोषण के साथ में प्रदूषक पौधे के शरीर में पहुँच जाते हैं। यह प्रदूषक खाद्य श्रृंखला में प्रविष्ट होकर मानव शरीर तक पहुँच जाते हैं तथा अनेक रोगों को जन्म देते हैं। भूमि प्रदूषण के कारण भूमि की उर्वरा शक्ति घट जाती है। इससे उत्पादन में भारी कमी आ जाती है।

प्रश्न 6.
वायुमण्डल में नाइट्रोजन और उसके ऑक्साइडों द्वारा की जाने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वायुमण्डल में नाइट्रोजन और उसके ऑक्साइडों द्वारा की जाने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
(1) वायुमण्डल में पायी जाने वाली नाइट्रोजन और ऑक्सीजन उच्च ताप (>1210°C) पर क्रिया करके नाइट्रिक ऑक्साइड बनाती है।
N2 → N + N
N + O2 → NO + O

(2) प्राप्त नाइट्रिक ऑक्साइड, O2 तथा O3 से ऑक्सीकृत होकर नाइट्रोजन हाइ-ऑक्साइड बनाती है जो अत्यन्त विषैली होती है।
2NO + O2 → 2NO2
NO + O3 → NO2 + O2
\(\mathrm{NO}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{NO}+\mathrm{O}\)

(3) NO2 जल से क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाती है।
2NO2 + H2O → HNO3 + HNO2

(4) NO2 प्रकाश अपघटन की क्रिया द्वारा ओजोन बनाती है।
\(\mathrm{NO}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{NO}+\mathrm{O}\)
O + O2 → O3

प्रश्न 7.
स्मॉंग किस प्रकार बनता है तथा इसके कुप्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
साधारणतया स्मॉग (Smog), धुँआ (Smoke) एवं कुहरे से मिलकर बना होता है। स्मॉग मुख्यतया दो प्रकार का होता है(i) अपचायक स्मॉग, (ii) ऑक्सीकारक स्मॉग।

(1) अपचायक स्मॉंग-जब SO2, अमोनियम सल्फेट आदि धुएँ एवं कोहरे के साथ मिलकर स्मॉग बनाते हैं, इसे अपचायक स्मॉग कहते हैं।
2SO2 + O2 → 2SO3
SO3 + H2O → H2SO4
प्रभाव-(i) अपचायक स्मॉग मानव स्वास्थ्य एवं वनस्पति पर विपरीत प्रभाव डालता है।
(ii) अपचायक स्मॉग से धातुओं का संक्षारण (Corrosion) होता है।

(2) ऑक्सीकारक स्मॉग-जब नाइट्रोजन के ऑक्साइड तथा हाइड्रोकार्बन धुएँ व कोहरे के साथ सम्मिलित होते हैं, तो इसे ऑक्सीकारक स्मॉग कहते हैं।
N2 + O2 → 2NO
2NO + O2 → 2NO2
\(\mathrm{NO}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{NO}+\mathrm{O}\)
प्रभाव-

  • यह हानिकारक कार्बनिक रासायनिक पदार्थ बनाते हैं, जो आँखों में जलन उत्पन्न करते हैं।
  • यह पदार्थ श्वसन वन्त्र के लिए भी हानिकारक हैं।
  • यह स्मॉग बनस्पतियों पर विपरीत प्रभाव डालता है।

प्रश्न 8.
अम्ल बर्षा का क्या अर्घ है तथा यह पर्यावरण प्रदूषण को किस प्रकार प्रभावित करती है?
उत्तर:
अम्ल वर्षा (Acid Rain)-वायु में पायी जाने वाले सल्फर एवं नाइट्रोजन के औक्साइड, वर्षा के जल में विलेय होकर वर्षा के जल को अम्लीय बना देते हैं। इस जल का वर्षा के रूप में पृथ्वी पर आना अम्ल वर्षा (Acid rain) कहलाता है। इस वर्षा के जल का pH मान लगभग 4.5 से 3.5 के मध्य होता है।
H2O + CO2 → H2CO3
\(\mathrm{H}_2 \mathrm{CO}_3 \rightleftharpoons 2 \mathrm{H}^{+}+\mathrm{CO}_3^{2-}\)
अम्ल वर्षा के प्रभाव – अम्ल बर्घा सजीव एवं निज्जीव पदायों पर विपरीत प्रभाव डालती है। अम्ल वर्षी के कारण भूमि की उर्वरा शक्ति क्षीज हो जाती है, क्योंकि जमीन में अम्लीयता बक जाती है। अम्ल वर्षा संगमरमर तथा चूने के पत्थर द्वारा बनी हृम्नारतों का क्षरण करती है क्योंकि H2SO4 तथा HNO3 दोनों ही CaCO3 को घोलकर क्रमशः कल्शियम सल्फेट तथा कैल्शिखम नाइट्रेट बनाते हैं।

प्रश्न 9.
वायुमण्डल में ओजोन परत का अपक्षय करने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को समझाइए।
उत्तर:
वायुमण्डल में ओजोन परत के अपक्षय के लिए क्लोरो-फ्लुओरो कार्वन (CFCs) गैसे उत्तरदायी हैं, जो कि मानव द्वारा ही निम्मित हैं। क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन का उपयोग रेफीजरेटरों, वातानुकूल संयन्त्रों आदि में किया जाता है। ओजोन परत के अपक्षाय में निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं-
(i) \(\mathrm{CF}_2 \mathrm{Cl}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \cdot \mathrm{Cl}+\cdot \mathrm{CF}_2 \mathrm{Cl}\)
(ii) O3 + .Cl → .ClO + O2
(iii) .ClO + O → .Cl + O2
अत: क्रियाओं से स्पष्ट है कि क्लोरो-फ्लोरो कार्बन से उत्पादित क्लोरीन मूलक, ओजोन के कई अणुओं को नष्ट कर सकता है। सुपरसोनिक वायुयानों से निकली नाइट्रिक ऑक्साइड भी ओजोन परत में पहुँचकर उसे नष्ट कर देती है।
NO + O3 → NO2 + O2

प्रश्न 10.
औद्योगिक वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
औद्योगिक वायु प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित है-
(1) ईंधन दहन-ईधन दहन से निकलने वाले गैसीय पदार्थ, जैसे-सल्फर के ऑक्साइड, कार्बन के ऑक्साइड, ऐल्डिहाइड, अम्ल, वायु प्रदूषण उत्पन्न करते हैं।

(2) औद्योगिक प्रक्रम-औद्योगिक प्रक्रमों में उत्पादन के लिए होने वाली भौतिक एवं रासायनिक क्रियाओं से निकलने वाले गैसीय उत्पाद व कणीय पदार्थ, वायु प्रदूषण का कारण होते हैं।

(3) औद्योगिक चिमनियों द्वारा प्रदूषण-उद्योगों एवं कारखानों की चिमनियों द्वारा अनेक हानिकारक गैसें व कणीय पदार्थ वायुमण्डल में छोड़े जाते हैं, जो कि वायु को प्रदूषित करते हैं। उदाहरण- CO, NO2, HCHO, गैसोलीन, CO2, SO2 इत्यादि।

(4) रेडियोधर्मी पदार्थों द्वारा वायु प्रदूषण-आण्विक हथियारों के परीक्षण के फलस्वरूप निकलने वाले रेडियोधर्मी पदार्थ वायुमण्डल को दूषित करते हैं। α, β, γ -विकिरण समस्त जीवधारियों के लिए अत्यन्त हानिकारक हैं।

(5) यातायात के साधन-यातायात के लिए प्रयुक्त होने वाले मोटर वाहनों के कारण भी वायुमण्डल में हानिकारक गैसें निकलती हैं, जो कि वायु को प्रदूषित करती हैं।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

प्रश्न 11.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिष्णी लिखिए-
(क) क्षोभमण्डल
(ख) समतापमण्डल
उत्तर:
(क) क्षोभमण्डल-क्षोभमण्डल, वायुमण्डल की सबसे निचली परत है। क्षोभमण्डल समुद्र तल से 10 किमी ऊपर तक फैला हुआ है। कोभमण्डल में ही नाइट्रोजन व ऑक्सीजन आदि कई गैसें पाई जाती हैं। मौसम में होने वाले सभी परिवर्तन इसी क्षोभमण्डल में होते हैं।

(ख) समतापमण्डल-वायुमण्डल में क्षोभमण्डल के बाद दूसरी परत समतापमण्डल है। समतापमण्डल समुद्र तल से 10 से 50 किमी तक ऊँचाई में फैला होता है। समतापमण्डल में ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान में भी वृद्धि होती है। सम्पूर्ण जल वाष्प एवं वायु का लगभग 80 प्रतिशत द्रव्यमान इस परत में पाया जाता है। ओजोन परत भी समतापमण्डल में पाई जाती है। समतापमण्डल में ओजोन परत सूर्य की पराबँंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती हैं। समतापमण्डल में प्रदूषकों के पहुँचने के कारण ही ओजोन परत का क्षरण होता है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-
(क) जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बी. ओ. डी.)
(ख) रासायनिक ऑक्सीजन आवश्यकता (सी. ओ. डी.)
उत्तर:
(क) जीव रसायनी ऑक्सीजन आवश्यकता:
कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों की प्रचुर मात्रा प्रदूषित -में उपलब्ध रहती है। जल में विलेय ऑक्सीजन के द्वारा सूक्ष्म जीव की उपस्थिति में यौगिक ऑक्सीकृत हो जाते हैं। अतः “जल में विलेय ऑक्सीजन की वहमात्रा जो सूक्ष्म जीवों द्वारा कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों को ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक होती है। उस जः की जैव रासायनक ऑक्सीजन मांग कहलाती है।”

(ख) रासायनिक ऑक्सीजन आवश्यकता (सी. ओ. डी.):
रासायनिक ऑक्सीजन आवश्यकता ज्ञात करने के लिए जल की ऑक्सीकारक की ज्ञात मात्रा से अभिक्रिया कराते हैं। यह ऑक्सीकारक 2 सभी कार्बनिक एवं अकार्बनिक यौगिकों को ऑक्सीकृत कर देता है। अपशिष्ट K2C2O7 को मोहर लवण द्वारा अनुमानित कर लेते हैं। इस क्रिया में प्रयुक्त K2C2O7 से ऑक्सीकरण के लिए उपयोग की गई ऑक्सीजन की मात्रा की गणना करते हैं। यह मान जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सी. ओ. डी.) कहलाती है।

प्रश्न 13.
वायुमण्डल में सल्फर और उसके ऑक्साइडों द्वारा की जाने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
वायुमण्डल में सल्फर और उसके ऑक्साइडों द्वारा की जाने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) SO2 स्वयं एक हानिकारक प्रदूषक है। SO2 प्रकाश की उपस्थिति में ऑक्सीकृत होकर SO3 में बदल जाता है।
\(2 \mathrm{SO}_2+\mathrm{O}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} 2 \mathrm{SO}_3\)

(ii) SO3, जल के साथ अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करती है।
SO3 + H2O → H2SO4

(iii) यह सल्फ्यूरिक अम्ल, अमोनिया के साथ क्रिया करके अमोनियम सल्फेट में बदल जाता है।
H2SO4 + 2NH3 → (NH4)2SO4

H2SO4 बनने के कारण अम्लीय वर्षा होती है। SO2 धुएँ के कण, (NH4)2SO4 तथा जल कोहरे के साथ मिलकर स्मॉग तैयार करते हैं।

प्रश्न 14.
वायुमण्डल के मुख्य प्रदूषकों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
वायुमण्डल के मुख्य प्रदूषणों के नाम निम्नलिखित हैं-
(i) सल्फर के ऑक्साइड – सल्फर के ऑक्साइड SO2, SO, मुख्य हानिकारक वायु प्रदूषक हैं। सल्फर के ऑक्साइड आँखों एवं श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक होते हैं तथा इन्हीं ऑक्साइड के कारण अपचायक धूम्र का निर्माण होता है।

(ii) नाइट्रोजन के ऑक्साइड – नाइट्रोजन के ऑक्साइड NO तथा NO2 हैं। ये ऑक्साइड हानिकारक प्रकाश रासायनिक धूम्र उत्पन्न करते हैं।

(iii) कार्बन के ऑक्साइड कार्बन के प्रमुख ऑक्साइड CO तथा CO2 हैं। CO एक प्राणघातक गैस है क्योंकि CO हीमोग्लोबिन के साथ संयोग करके ऑक्सीजन के परिवहन में रूकावट उत्पन्न करती है। CO पेड़-पौधों पर भी हानिकारक प्रभाव डालती है।

(iv) हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) – H2S के कारण आँखों और गले में जलन पैदा होती है।

(v) हाइड्रोजन सायनाइड (HCN ) – HCN शरीर की तंत्रिका कोशिकाओं पर बुरा प्रभाव डालती है।

(vi) फॉस्जीन – फॉस्जीन खाँसी तथा जलन उत्पन्न करती है। फॉस्जीन की अत्यधिक मात्रा अत्यन्त घातक होती है।

(vii) अमोनिया – अमोनिया श्वास सम्बन्धी रोगों को उत्पन्न करती हैं।

(vii) कणीय पदार्थ – कणीय पदार्थ आपस में मिलकर धुंध बनाते हैं, जिसके कारण वातावरण में स्पष्ट रूप से देखने में गतिरोध पैदा होता है।

प्रश्न 15.
क्षोभमण्डल में होने वाली सभी अभिक्रियायें लिखिए ।
(1) क्षोभमण्डल में होने वाली रासायनिक क्रियाएँ – पृथ्वी से वायुमण्डल की पहली परत क्षोभमण्डल है। क्षोभमण्डल में बिजली का चमकना तथा तूफानों का आना, ग्लोबल वार्मिंग एवं ग्रीन हाउस प्रभाव आदि क्रियाएँ होती हैं।
(a) नाइट्रोजन ऑक्साइडों से अभिक्रियाएँ-
(i) वायुमण्डल में पाए जाने वाली ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन उच्च ताप पर संयोग करके नाइट्रिक ऑक्साइड बनाती है।
N2 → N + N
N + O2 → NO + O

(ii) यह NO, O2 तथा O3 द्वारा शीघ्रता से ऑक्सीकृत होकर NO2 का निर्माण करती है।
2NO + O2 → 2NO2
NO + O3 → NO2 + O2

(iii) NO2, जल से अभिक्रिया करके नाइट्रिक अम्ल बनाती है।
2NO2 + H2O → HNO3 + HNO2

(iv) NO2, प्रकाश अपघटित होकर ओजोन का निर्माण भी करती
\(\mathrm{NO}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{NO}+\mathrm{O}\)
O + O2 → O3
(b) SO2 की अभिक्रियाएँ-
(i) SO2 सबसे हानिकारक गैसीय प्रदूषक है। यह स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती है। SO2 ऑक्सीकृत होकर SO3 में बदल जाती है।
\(2 \mathrm{SO}_2+\mathrm{O}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} 2 \mathrm{SO}_3\)

(ii) जल द्वारा अभिक्रिया कर SO3 सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है जो अमोनिया से क्रिया करके उसे अमोनियम सल्फेट में बदल देता है।
SO3 + H2O → H2SO4
H2SO4 + 2NH3 → (NH4)2SO4

प्रश्न 16.
समतापमण्डल में होने वाली सभी अभिक्रियाएँ लिखिए । साथ ही मध्य एवं आयन मण्डल में होने वाली अभिक्रियाएँ भी लिखें?
उत्तर:
(1) समतापमण्डल (Stratophere) में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ – क्षोभमण्डल के ऊपर वाला भाग समताप मण्डल है। इसमें ऑक्सीजन का प्रकाश रासायनिक (Photochemical) विघटन होता है। समतापमण्डल में होने वाली अभिक्रियाएं निम्न प्रकार है-
(i) परमाण्वीय ऑक्सीजन से ओजोन का निर्माण होता है।
O2 → O + O
O + O2 → O3

(ii) पृथ्वी से प्राप्त होने वाले प्रदूषण जैसे- क्लोरोफ्लुओरो कार्बन (CFCs) ओजोन परत का अपक्षय करते हैं।
\(\mathrm{CF}_2 \mathrm{Cl}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{CF}_2 \mathrm{Cl}+\mathrm{Cl}\)
Cl + O3 → ClO + O2
ClO + O3 → ClO2 + O2
ClO + O → Cl + O2

(2) मध्य मण्डल एवं आयन मण्डल में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ पृथ्वी के 85 km और उससे ऊपर \(\mathrm{O}_2^{+}\), O+, NO+, \(\mathrm{N}_2^{+}\) आदि आयन पाए जाते हैं। इन आयनों के मध्य होने वाली अभिक्रियाएँ निम्नलिखित है-
\(\mathrm{NO} \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{NO}^{+}+e^{-}\)
\(\mathrm{O}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{O}_2^{+}+e^{-}\)
\(\mathrm{N}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{N}_2^{+}+e\)
\(\mathrm{O} \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{O}^{+}+e^{-}\)
N2 + O+ → NO+ + N
NO+ + e → N + O
N2+ + O → NO+ + N
N2+ + O2 → N2 + O2+

प्रश्न 17.
स्मॉग क्या होता है? इसको किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है ? स्मॉग के दुष्प्रभाव क्या हैं ?
उत्तर:
स्मॉग (Smog) कोहरा (fog) एवं धुआँ (smoke) का मिश्रित रूप ही धूम्र होता है बड़े शहरों एवं औद्योगिक नगरों में प्रदूषण धूम्र के ही रूप में होता है।
धूम्र का वर्गीकरण (Classification of Smog)
संरचना की दृष्टि से धूम्र को मुख्यतया दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-

(i) सामान्य धूम्र या अपचायक धूम्र
(ii) प्रकाश रासायनिक या ऑक्सीकारक धूम्र

(i) सामान्य धूम्र या अपचायक धूम्र– यह स्मॉग ठण्डी एवं नम जलवायु में पाया जाता है। इस धूम्र के बनने का कारण है-ईंधन दहन के फलस्वरूप प्राप्त हुई SO2 की सान्द्रता में वृद्धि । अपचायक धूम्र मुख्यतया धुआँ, कोहरे से प्राप्त जल, SO2,(NH4)2SO4 आदि से मिलकर बना होता है। सूर्य के प्रकाश द्वारा SO2 ऑक्सीकृत होकर SO3 में परिवर्तित होती है यह SO3 जल से क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल का ऐरोसॉल बनाती है।
2SO2 + O2 → 2SO3
SO3 + H2O → H2SO4
अपचायक धूम्र के दुष्प्रभाव – अपचायक धूम्र मानव स्वास्थ्य एवं वनस्पति दोनों पर विपरीत प्रभाव डालता है यह धातुओं के संक्षारण के लिए भी उत्तरदायी होता है।

(ii) प्रकाश रासायनिक अथवा ऑक्सीकारक धूम्र-प्रकाश रासायनिक धूम्र मुख्यतया नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन और कुछ सल्फर यौगिकों से मिलकर बनी होती है।
पेट्रोल एवं डीजल में उच्च ताप पर N2 तथा O2 के संयोजन के फलस्वरूप NO बनता है जो वायु में ऑक्सीकृत होकर NO2 बनाता है। NO2 से विघटन के द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड बनता है।
N2 + O2 → 2NO
2NO + O2 → 2NO2
\(\mathrm{NO}_2 \stackrel{h v}{\longrightarrow} \mathrm{NO}+\mathrm{O}\)

ऑक्सीजन परमाणु O2 से संयोग करके ओजोन बनाते हैं।
O2 + O → O3
इस प्रकार O3, NO से क्रिया करके NO2 बनाता है।
O3+ NO → NO2 + O2

ऑक्सीकारक धूम्र के दुष्प्रभाव – ऑक्सीकारक धूम्र के फलस्वरूप बने कार्बनिक रसायन आँखों में जलन उत्पन्न करते हैं एवं यह श्वसन तन्त्र के लिए भी हानिकारक होते हैं। रबर, ओजोन के साथ अभिक्रिया करती है जिसके कारण उसमें दरार पड़ जाती हैं। इस प्रकार ऑक्सीकारक धूम्र भी वनस्पतियों पर विपरीत प्रभाव डालता है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 पर्यावरणीय रसायन

प्रश्न 18.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव-निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
जैवनिम्नीकरणीय पदार्थ निम्नांकित प्रकार से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-
(1) जैवनिम्नीकरण पदार्थों के विघटन से मुक्त विषाक्त एवं दुर्गन्धयुक्त गैसें वातावरण को प्रदूषित करती है।
(2) कार्बनिक जैवनिम्नीकरणीय पदार्थों की अधिकता से ऑक्सीजन की कमी हो जाने से सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, अपघटन प्रक्रिया प्रभावित होती है तथा वातावरण दुर्गन्धमय हो जाता है।

प्रश्न 19.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर:
अजैब निम्नीकरण पदार्थ निम्नांकित प्रकार से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-

(1) अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ लम्बे समय तक पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। ये पदार्थों के चक्रण (cycling) में बाधा पहुँचाते हैं।
(2) अनेक कीटनाशक एवं पीडकनाशक रसायन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जीवधारियों (मनुष्य) के शरीर में पहुँचकर उसे क्षति पहुँचाते हैं। प्रश्न 20. निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए– (1) अम्ल वर्षा

प्रश्न 20.
निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए–
(1) अम्ल वर्षा
(2) ओजोन की न्यूनता
(3) वैश्विक ऊष्मन या हरितगृह प्रभाव ।
उत्तर:
(1) अम्ल वर्षा (Acid Rain ) – अम्लवर्षा वायु में उपस्थित
नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड के कारण होती है। ये गैसीय ऑक्साइड वर्षा के जल के साथ मिलकर क्रमश: नाइट्रिक अम्ल तथा सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं। वर्षा के साथ ये अम्ल भी पृथ्वी पर नीचे आ जाते हैं। इसे ही अम्लवर्षा या अम्लीय वर्षा (acid rain) कहते हैं। इसके कारण अनेक ऐतिहासिक भवनों, स्मारकों, मूर्तियों का संक्षारण हो जाता है जिससे उन्हें काफी नुकसान पहुँचता है।

अम्लीय वर्षा के कारण, मृदा भी अम्लीय हो जाती है जिससे धीरे-धीरे उसकी उर्वरता कम हो जाती है। इस कारण वन तथा कृषि उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

(2) ओजोन की न्यूनता (Deficiency of Ozone) – विभिन्न स्रोतों जैसे- रेफ्रीजरेटर, अग्निशमन यन्त्र तथा ऐरेसॉल स्प्रे में उपयोग किए जाने वाले क्लोरोफ्लुओरोकार्बन (CFCs) से वायुमण्डल में ओजोन परत का ह्रास होता है।

हानियाँ (Losses) – ओजोन परत में ह्रास के कारण सूर्य से पराबैंगनी (UV) किरणें अधिक मात्रा में पृथ्वी पर पहुँचती हैं। पराबैंगनी विकिरण से आँखों तथा प्रतिरक्षी तन्त्र को नुकसान पहुँचता है। इससे त्वचा का कैंसर भी हो जाता है। ओजोन परत के ह्रास के कारण वैश्विक उष्मन पारिस्थितिक असन्तुलन तथा वैश्विक खाद्यान्नों की उपलब्धता पर भी प्रभाव पड़ता है।

(3) वैश्विक ऊष्मन या हरितगृह प्रभाव (Global Warming or Green House effect ) – जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम आदि) के जलने से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड तथा मेथेन जैसी गैसें पृथ्वी से होने वाले ऊष्मीय विकिरण को रोक लेती हैं। इस कारण पृथ्वी का ताप बढ़ता है, इस प्रभाव को हरितगृह प्रभाव कहते हैं जिससे मौसम में परिवर्तन के साथ-साथ समुद्र तल में भी वृद्धि हो रही है। ताप बढ़ने से पहाड़ों पर हिम से ढकी चोटियाँ तथा हिमखण्ड पिघलने लगेंगे जिससे बाढ़ आ सकती है।

प्रश्न 21.
सूर्य के प्रकाश का कौन-सा घटक हमारे लिए हानिकारक है ? सामान्यतः इसे हम तक पहुँचने से कैसे रोका जाता है? इस प्राकृतिक संरक्षक को किसके द्वारा नष्ट किया जा सकता हैं।
उत्तर:
सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। वायुमण्डल में उपस्थित ओजोन परत पराबैंगनी विकिरणों को हमारे पास आने से होते हैं। इस परत को नष्ट करने के लिए क्लोरोफ्लुओरो कार्बन (CFCs) उत्तरदायी होता है। ये यौगिक रेफ्रीजरेटर, अग्निशमन यन्त्र तथा ऐरोसॉल स्प्रे में प्रयोग किये जाते है।

प्रश्न 22.
ओजोन परत द्वारा अवशोषित की जाने वाली किरणों का नाम बताइए । ओजोन परत के क्षीण होने के कोई दो कारण बताइए। इस क्षीणता से होने वाली सम्भावित बीमारी का नाम भे बताइए ।
उत्तर:
पराबैंगनी किरणें ओजोन परत द्वारा अवशोषित की जाती हैं। कारण (Causes) — (i) क्लोरोफ्लुओरो कार्बन (CFC) ओजोन परत के क्षय के लिए उत्तरदायी है।
(ii) अत्यधिक क्रियाशाली धातुएँ भी ओजोन परत के क्षरण का कारण बन सकती हैं। सुपरसोनिक जेट भी ओजोन परत को क्षयित कर सकते हैं।
बीमारियाँ (Diseases) – (i) त्वचा का कैंसर हो सकता है तथा (ii) त्वचा जल सकती है।

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HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. एक अज्ञात गैस तथा ऑक्सीजन गैस की विसरण गतियों का अनुपात 8: 10 है। अज्ञात गैस का अणुभार है-
(1) 64
(2) 25
(3) 32
(4) 50
उत्तर:
(4) 50

2. अणुओं की न्यूनतम संख्या निम्न में से किसमें होगी-
(1) 0.1 मोल SO2 में
(2) 11 लीटर SO2 में
(3) 22 ग्राम CO2 में
(4) 22.4 × 103 मिली SO2 में।
उत्तर:
(1) 0.1 मोल SO2 में

3. निम्नलिखित गैस में किसकी विसरण गति अधिकतम होगी?
(1) O2
(2) CO2
(3) NH3
(4) N2
उत्तर:
(3) NH3

4. 27°C पर एक गैस का दाब 90 सेमी है। स्थिर आयतन व – 173°C ताप पर गैस का दाब होगा-
(1) 30 सेमी
(2) 40 सेमी
(3) 60 सेमी
(4) 68 सेमी।
उत्तर:
(1) 30 सेमी

5. गैस A, गैस B से चार गुना भारी है। A तथा B के विसरण की दरों का अनुपात होगा-
(1) 4:1
(2) 1:4
(3) 2:1
(4) 1:2
उत्तर:
(4) 1:2

6. अणुओं की अधिकतम संख्या होगी-
(1) 16 g O2 में
(2) 16 g NO2 में
(3) 7 g N2 में
(4) 2 g H2 में।
उत्तर:
(4) 2 g H2 में।

7. 27°C पर 2 मोल N2 की गतिज ऊर्जा होगी—
(1) 5491.6 J
(2) 6491.6 J
(3) 7491°6 J
(4) 8882·4 J.
उत्तर:
(3) 7491°6 J

8. वान्डर वाल वास्तविक गैस आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती है, किस शर्त पर –
(1) उच्च ताप, निम्न दाब पर
(2) निम्न ताप, उच्च दाब पर
(3) उच्च ताप, उच्च दाब पर
(4) निम्न ताप, निम्न दाब पर
उत्तर:
(1) उच्च ताप, निम्न दाब पर

9. CO2 के 1 मोल में निम्न में से क्या उपस्थित होता है-
(1) 6.02 x 1023 कार्बन परमाणु
(2) 6.02 x 1023 ऑक्सीजन परमाणु
(3) 18.1 × 1023 कार्बन डाई ऑक्साइड अणु
(4) कार्बन डाई ऑक्साइड के 5 ग्राम परमाणु।
उत्तर:
(1) 6.02 x 1023 कार्बन परमाणु

10. 0°C पर 1 लीटर के बल्ब में भरे 4 ग्राम O2 तथा 2 ग्राम H2 के मिश्रण का दाब है-
(1) 25.215 atm
(2) 31.205 atm
(3) 45.215 atm
(4) 15.210 atm.
उत्तर:
(1) 25.215 atm

11. गैस स्थिरांक ‘R’ निर्भर करता है-
(1) गैस के ताप पर
(2) गैस के आयतन पर
(3) गैस के मोलों की संख्या पर
(4) इनमें से किसी पर नहीं।
उत्तर:
(4) इनमें से किसी पर नहीं।

12. यदि गैस ‘A’ के विसरण की दर ‘B’ अपेक्षा पाँच गुंनी है तो A और B के घनत्व का अनुपात होगा-
(1) 1/25
(2) 1/5
(3) 25
(4) 5
उत्तर:
(1) 1/25

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

13. आदर्श गैस का सम्पीड्यता गुणांक होता है-
(1) 0
(2) 1
(3) 2
(4) 4.
उत्तर:
(2) 1

14. समान ताप और दाब पर निम्न गैसों में से किसकी सबसे अधिक प्रति मोल गतिज ऊर्जा होगी-
(1) H2
(2) O2
(3) CH4
(4) सबकी समान।
उत्तर:
(4) सबकी समान।

15. 300 K पर H2 की गतिज ऊर्जा X है। इस ताप पर D2 की गतिज ऊर्जा होगी-
(1) X
(2) X/2
(3) 2X
(4) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(1) X

16. गैसें आदर्श गैस व्यवहार से विचलित होती है क्योंकि उनके अण-‘
(1) नगण्य आयतन के होते हैं।
(2) उनमें आकर्षण बल होता हैं
(3) वे बहु- अणुक होते हैं
(4) एक-दूसरे से जुड़े नहीं होते।
उत्तर:
(2) उनमें आकर्षण बल होता हैं

17. निश्चित आयतन पर गैसों के निश्चित मोलों की संख्या के लिये, ताप में वृद्धि के साथ गैस के दाब में वृद्धि का कारण है-
(1) अणुओं के औसत वेग में वृद्धि
(2) मोलों की संख्या में वृद्धि
(3) अणुओं के आकर्षण में वृद्धि
(4) औसत मुक्त पक्ष में कमी।
उत्तर:
(1) अणुओं के औसत वेग में वृद्धि

18. निम्न में से गैस समीकरण है-
(1) \(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}=\frac{\mathrm{T}_1}{\mathrm{~T}_2}\)
(2) \(\frac{\mathrm{V}_1 \mathrm{~T}_2}{\mathrm{P}_1}=\frac{\mathrm{V}_2 \mathrm{~T}_1}{\mathrm{P}_2}\)
(3) \(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~T}_1}{\mathrm{~V}_1}=\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~T}_2}{\mathrm{~V}_2}\)
(4) \(\frac{\mathrm{V}_1 \mathrm{~T}_2}{\mathrm{~T}_1 \mathrm{~V}_2}=\mathrm{P}_1 \mathrm{P}_2\)
उत्तर:
(1) \(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}=\frac{\mathrm{T}_1}{\mathrm{~T}_2}\)

19. एक गैस आदर्श व्यवहार की तरफ बढ़ती है-
(1) कम T एवं उच्च P पर
(2) उच्च T एवं कम P पर
(3) कम T एवं कम P पर
(4) उच्च T एवं उच्च P पर।
उत्तर:
(2) उच्च T एवं कम P पर

20. 5 लीटर के एक बंद फ्लास्क में 10 ग्राम हाइड्रोजन को 300 से 600K तक गर्म किया जाता है, कौन सा कथन सत्य है-
(1) टक्करों की दर बढ़ती है
(2) गैसीय अणुओं की ऊर्जा बढती है
(3) गैसों के मोलों की संख्या बढ़ती है।
(4) गैस का दाब बढ़ता है।
उत्तर:
(3) गैसों के मोलों की संख्या बढ़ती है।

21. स्थिर आयतन पर एक गैस के निश्चित मोलों की संख्या के लिये गैस का दाब, ताप वृद्धि के साथ बढ़ता है। इसका कारण है-
(1) औसत आण्विक गति में वृद्धि
(2) अणुओं के टक्करों की दर में वृद्धि
(3) आण्विक आकर्षण में वृद्धि
(4) माध्य मुक्त पथ में वृद्धि।
उत्तर:
(1) औसत आण्विक गति में वृद्धि

22. निम्न में से कौन सा कथन आदर्श गैस के सन्दर्भ में सत्यं नहीं है-
(1) यह द्रव में परिवर्तित नहीं की जा सकती है
(2) गैस के सभी अणु समान गति से चलते है
(3) अणुओं के बीच कोई पारस्परिक क्रिया नहीं होती है
(4) दिये गये ताप पर PV, गैस की मात्रा के समानुपाती होता है।
उत्तर:
(2) गैस के सभी अणु समान गति से चलते है

23. यदि P, V, M, T तथा R क्रमशः दाब, आयतन, मोलर द्रव्यमान, ताप तथा गैस स्थिरांक हैं तो एक आदर्श गैस का घनत्व होगा-
(1) \(\frac { RT }{ PM }\)
(2) \(\frac { P }{ RT }\)
(3) \(\frac { PM }{ RT }\)
(4) \(\frac { M }{ V }\)
उत्तर:
(3) \(\frac { PM }{ RT }\)

24. निम्न में से कौन सा सूत्र स्थिर दाब पर चार्ल्स के नियम का पालन करता है-
(1) V ∝ \(\frac { 1 }{ T }\)
(2) V ∝ \(\frac { 1 }{ T² }\)
(3) V ∝ T
(4) V = d
उत्तर:
(3) V ∝ T

25. स्थिर ताप पर आदर्श गैस के निश्चित द्रव्यमान में-
(1) दाब व आयतन का गुणनफल सदैव स्थिर रहता है
(2) दाब व आयतन का अनुपात सदैव स्थिर रहता है
(3) आयतन सदैव स्थिर रहता है
(4) दाब सदैव स्थिर रहता है।
उत्तर:
(1) दाब व आयतन का गुणनफल सदैव स्थिर रहता है

26. एक आदर्श गैस के एक मोल की आन्तरिक ऊर्जा है-
(1) \(\frac { 3 }{ 2 }\) RT
(2) \(\frac { 3 }{ 2 }\)
(3) \(\frac { 1 }{ 2 }\) RT
(4) \(\frac { 1 }{ 2 }\) KT
उत्तर:
(1) \(\frac { 3 }{ 2 }\) RT

27. निम्न में से कौन-सा गैस मिश्रण डाल्टन के आशिंक दाब नियम का पालन नहीं करता है-
(1) HCl तथा NH3
(2) N2 तथा O2
(3) O2 तथा CO2
(4) CO2 तथा He.
उत्तर:
(1) HCl तथा NH3

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

28. स्थिर ताप पर गैस को प्रसारित करने पर –
(1) दाब घटता है
(2) अणु की गतिज ऊर्जा स्थिर रहती है
(3) अणु की गतिज ऊर्जा घटती है
(4) गैस के अणुओं की संख्या बढ़ती है।
उत्तर:
(1) दाब घटता है

29. गैस स्थिरांक R तथा बोल्ट्जमैन स्थिरांक K में क्या सम्बन्ध है- यदि (NA = आवोगाद्रो संख्या)
(1) R = KNA
(2) RK = NA
(3) R + K = NA
(4) K = RNA
उत्तर:
(1) R = KNA

30. किस ताप को परम शून्य ताप कहते हैं।
(1 ) – 273°C
(2) – 273.15°C
(3) 0°C
(4) 1/273°C.
उत्तर:
(2) – 273.15°C

31. जल का क्वथनांक अपेक्षाकृत अधिक होता है। इसका कारण है-
(1) जल का आयनिक होना
(2) जल का सह-संयोजक होना
(3) जल में हाइड्रोजन बन्ध की उपस्थिति
(4) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(3) जल में हाइड्रोजन बन्ध की उपस्थिति

32. अणुओं के मध्य सबसे अधिक आकर्षण बल पाया जाता है-
(1) ठोस अवस्था में
(2) द्रव अवस्था में
(3) गैस अवस्था में
(4) कोलॉइडी अवस्था में।
उत्तर:
(1) ठोस अवस्था में

33. अणुओं के मध्य सर्वाधिक दूरी पायी जाती है-
(1) ठोस अवस्था में
(2) द्रव अवस्था में
(3) गैस अवस्था में
(4) कोलॉइडी अवस्था में।
उत्तर:
(3) गैस अवस्था में

34. यदि स्थिर ताप पर किसी गैस का आयतन बढ़ जाये तो यह क्या दर्शाती है-
(1) अणुओं की गतिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता
(2) गैस के अणुओं की संख्या बढ़ जाती है।
(3) अणुओं की गतिज ऊर्जा में कमी आ जाती है
(4) गैस का दाब बढ़ जाता है।
उत्तर:
(1) अणुओं की गतिज ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता

35. निम्न में से किसका पृष्ठ तनाव सर्वाधिक है-
(1) ऐथेनॉल
(2) मेथेनॉल
(3) जल
(4) बेन्जीन।
उत्तर:
(3) जल

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दाब का मात्रक क्या है?
उत्तर:
पास्कल (Pa)

प्रश्न 2.
वायुमण्डलीय दाब पास्कल में व्यक्त दाब से किस प्रकार सम्बन्धित है।
उत्तर:
1 atm = 1.013 x 105 Pa

प्रश्न 3.
ताप का केल्विन पैमाना सेल्सियस पैमाने से किस प्रकार सम्बन्धित है?
उत्तर:
K = t° C + 273

प्रश्न 4.
किसी गैस का परमशून्य ताप क्यों प्राप्त नहीं किया जा सकता है?
उत्तर:
इस ताप पर आने से पहले ही गैस द्रवीत हो जाती है।

प्रश्न 5.
R का मान क्या हैं?
उत्तर:
R = 0.0821 L atm K-1 mol-1

प्रश्न 6.
वायु दाब क्या है? इसकी SI इकाई लिखें।
उत्तर:
बर्तन के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर गैस अणुओं द्वारा उत्पन्न बल वायु दाब – कहलाता है। इसकी SI इकाई पास्कल (Pa) है।

प्रश्न 7.
SI इकाई में गैस स्थिरांक R का मान बताइये।
उत्तर:
8.314 J K-1 mol-1

प्रश्न 8.
संपीड्यता गुणांक से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
Z = \(\frac { PV }{ RT }\)

प्रश्न 9.
वान डर वाल्स समीकरण लिखिये।
उत्तर:
\(\left[\mathrm{P}+\frac{a}{\mathrm{~V}_2}\right]\) (V – b) = 1 मोल के लिए
a तथा b वाण्डर वाल्स स्थिरांक हैं।

प्रश्न 10.
गैस मिश्रण के आंशिक दाब का गैस मिश्रण के कुल दाब से क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
P (कुल दाब) = P + P2 + P3 + ……..
इसका आंशिक दाब P1 = मोल अंश x कुल दाब।

प्रश्न 11.
वान डर वाल्स स्थिरांक तथा 6 का क्या महत्व है?
उत्तर:
स्थिरांक a की प्रबलता अन्तर- अणुक आकर्षण को बताती है। जबकि स्थिरांक 6 की प्रबलता गैस के अणुओं का आकार बताती है।

प्रश्न 12.
ऊँचाई के साथ (वायुमण्डल में) गुब्बारे का आकार क्यों बढ़ता है?
उत्तर:
ऊँचाई के बढ़ने पर वायुमण्डलीय दाब कम हो जाता है। अतः गुब्बारे की भीतरी वायु के आयतन प्रसार के कारण उसका आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 13.
कमरे के ताप पर He और हाइड्रोजन द्रवित नहीं होतीं, क्यों?
उत्तर:
इन गैसों का क्रान्तिक ताप कमरे के ताप से कम होता है।

प्रश्न 14.
क्रान्तिक ताप क्या है?
उत्तर:
वह ताप जिससे अधिक ताप पर कोई गैस द्रवित नहीं हो सकती दाब कितना भी अधिक हो, क्रान्तिक ताप कहलाता है।

प्रश्न 15.
क्रान्तिक दाब से क्या समझते हो?
उत्तर:
किसी गैस को उसके क्रान्तिक ताप पर द्रवित करने के लिये आवश्यक न्यूनतम दाब उस गैस का क्रान्तिक दाब कहलाता है।

प्रश्न 16.
क्रान्तिक आयतन से क्या समझते हो?
उत्तर:
क्रान्तिक दाब व क्रान्तिक ताप पर किसी गैस के 1 मोल का आयतन उस गैस का क्रान्तिक आयतन (V) कहलाता है।

प्रश्न 17.
श्यानता क्या है?
उत्तर:
द्रवों में होने वाले प्रवाह के विरूद्ध कार्यरत आवश्यक आन्तरिक प्रतिरोध द्रव की श्यानता कहलाती है।

प्रश्न 18.
जलीय तनाव क्या होता है?
उत्तर:
जल क्रिया न करने वाली गैसें (H2, O2, CH4) को जल के ऊपर संग्रहीत करने पर जार में वाष्प दाब भी उपस्थित रहता है। अतः हम शुष्क गैस का दाब ज्ञात नहीं करते हैं। बल्कि नम गैस का वाष्प दाब ज्ञात करते हैं। इस प्रकार जल वाष्प द्वारा लगाया गया दाब जलीय तनाव (aquous tension) कहलाता है।

प्रश्न 19.
आवोगाद्रो संख्या क्या है?
उत्तर:
समान ताप व दाब पर गैसों के समान आयतनों में उनके अणुओं की संख्या समान होती है। इसे NA से व्यक्त करते हैं। इसका मान 6.023 x 1023 होता है।

प्रश्न 20.
वास्तविक गैस का व्यवहार आदर्श गैस के समान कब होता है।
उत्तर:
कम वायु मण्डलीय दाब व उच्च तापमान पर।

प्रश्न 21.
त्रिक बिन्दु से क्या समझते हो?
उत्तर:
वह ताप जिस पर ठोस, द्रव तथा गैस एक साथ पाये जाते हैं, त्रिक बिन्दु कहलाता है।

प्रश्न 22.
किसी द्रव्य के गलनांक पर दाब का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
दाब बढ़ाने पर गलनांक बढ़ता है।

प्रश्न 23.
किस शर्त पर कोई गैस आदर्श व्यवहार में विचलन दर्शाती है?
उत्तर:
आदर्श गैस के व्यवहार विचलन कम ताप व उच्च दाब पर होता है।

प्रश्न 24.
H2 तथा He का द्रवीकरण बहुत जटिल है, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि इनका क्रान्तिक ताप बहुत कम होता है।

प्रश्न 25.
ताप का कैल्विन पैमाना क्या होता है?
उत्तर:
T(K) = (t°C) + 273

प्रश्न 26.
आदर्श गैस के लिये संपीडक गुणांक कितना होता है?
उत्तर:
Z = \(\frac { PV }{ RT }\)
आदर्श गैस के लिये PV= RT अत: Z = 1

प्रश्न 27.
किस परिस्थिति में वास्तविक गैसें से आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती हैं।
उत्तर:
कम दाब व उच्च ताप पर।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 28.
NH3, O2, CO2 तथा SO2 में किसकी विसरण दर अधिकतम होगी?
उत्तर:
NH3 की, क्योंकि इसका अणुभार सबसे कम है।

प्रश्न 29.
CO2 तथा N2O की विसरण गतियों में क्या अनुपात है?
उत्तर:
दोनों की विसरण गति समान होगी, क्योंकि दोनों का अणुभार समान है।

प्रश्न 30.
SO2, NH3, H2O तथा CO2 को द्रवीकरण की आसानी के घटते क्रम में लिखो?
उत्तर:
SO2 > NH3 > H2O > CO2

प्रश्न 31.
समताप रेखाएँ क्या हैं?
उत्तर:
स्थिर ताप पर P तथा V के बीच खींची गयी रेखायें।

प्रश्न 32.
मोलर आयतन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी ताप तथा दाब पर एक मोल गैस का आयतन मोलर आयतन कहलाता है। S. T.P पर इसका मान 22.4 लीटर होता है।

प्रश्न 33.
परम ताप पर गैसों का आयतन शून्य नहीं होता है, क्यों?
उत्तर:
परम ताप आने से पूर्व ही प्रत्येक गैस द्रवित हो जाती है। अत: गैसों के लिये PV = RT समीकरण परम ताप पर लागू नहीं होती है। इसके मान से कम होता है, क्यों?

प्रश्न 34.
अधिक दाब पर PV/RT का मान आदर्श गैसों के लिये
उत्तर:
क्षीण अन्तराणुक बलों के कारण।

प्रश्न 35.
CO तथा N2 की विसरण की दर समान होती है, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि दोनों के अणुभार समान हैं।

प्रश्न 36.
ऑक्सीजन अणुओं के मध्य लगने वाले वाण्डर वाल्स बल को कौन-सा वान डर वाल्स बल कहेंगे?
उत्तर:
ऑक्सीजन अणु अध्रुवीय है, अतः इनके मध्य लगने वाले बल प्रकीर्णन बल अथवा लंडन बल कहलाते हैं।

प्रश्न 37.
दो स्थायी द्विध्रुव रखने वाले अणुओं के मध्य आकर्षण बलों को क्या कहते हैं?
उत्तर:
स्थायी द्विध्रुव रखने वाले अणुओं के मध्य आकर्षण बलों को द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल कहते हैं।

प्रश्न 38.
Cl2, Br2 तथा I2 अणुओं के मध्य लगने वाले वान डर वाल्स बलों का घटता क्रम है।
उत्तर:
जिन अणुओं का अणुभार ज्यादा होता है उन पर लगने वाले वान्डर वाल्स बलों का मान भी अधिक होता है अतः बलों का घटता क्रम है।
I2 > Br2 > Cl2.

प्रश्न 39.
Ne, Ar तथा Kr में किसका क्वथनांक सबसे कम होगा एवं क्यों?
उत्तर:
इन तीनों में Ne का क्वथनांक सबसे कम होगा क्योंकि इसका अणुभार सबसे कम है जिस कारण इस पर लगने वाले वान डर वाल्स बल के मान भी कम होंगे अतः क्वथनांक भी सबसे कम होगा।

प्रश्न 40.
दो शून्य द्विध्रुव रखने वाले अणुओं के मध्य आकर्षण बल कौन सा होगा?
उत्तर:
शून्य द्विध्रुव आघूर्ण रखने वाले अणुओं के मध्य लगने वाला आकर्षण बल लंडन बल या प्रकीर्णन बल कहलाता है।

प्रश्न 41.
वान डर वाल्स बलों में उत्पन्न ऊर्जा अणुओं के मध्य दूरी से किस प्रकार सम्बंधित है?
उत्तर:
माना कि ऊर्जा ‘E’ तथा अणुओं के मध्य दूरी यदि ‘r’ है तो E ∝ \(\frac{1}{r^6}\)

प्रश्न 42.
बॉयल नियम को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
बॉयल का नियम स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
Ρ α \(\frac { 1 }{ V }\) (स्थिर T व n पर)

प्रश्न 43.
आयोगाद्रो संख्या क्या है? इसका मान लिखिए।
उत्तर:
किसी पदार्थ के एक मोल में उपस्थित पदार्थ के कणों की संख्या को आवोगाद्रो संख्या कहते हैं।
NA = 6.02 × 1023

प्रश्न 44.
आदर्श गैस समीकरण लिखें।
उत्तर:
PV = nRT

प्रश्न 45.
गैसों का अणु गति समीकरण लिखिए।
उत्तर:
गैसों का अण गति समीकरण
PV = \(\frac { 1 }{ 3 }\)mN\(\bar{u}\)²
यहाँ P = गैस का दाब
V= गैस का आयतन
m = गैस के अणु का द्रव्यमान
N = गैस के अणुओं की संख्या
\(\bar{u}\) = वर्ग माध्य मूल वेग।

प्रश्न 46.
वान्डर वाल्स समीकरण जो कि वास्तविक गैसों के लिये है, लिखें।
उत्तर:
\(\left(\mathrm{P}+\frac{a n^2}{\mathrm{~V}^2}\right)\) (V – nb) = nRT

प्रश्न 47.
वान डर वाल्स नियतांक ‘a’ तथा ‘b’ पर टिप्पणी दीजिए।
उत्तर:
‘a’ का मान गैस के अणुओं में अन्तराणुक आकर्षण का परिमाण है। ‘b’ का मान अपवर्जित आयतन को प्रदर्शित करता है जो कि गैस अणुओं के वास्तविक आयतन का चार गुना होता है।

प्रश्न 48.
गैसों के द्रवण में क्रान्तिक ताप का क्या महत्व है, समझाइये?
उत्तर:
वह ताप जिस पर या जिसके नीचे ताप पर किसी गैस को केवल दाब लगा कर द्रवित किया जा सकता हो, उसे गैस का क्रान्तिक ताप कहते हैं।
उदाहरण – CO2 का क्रान्तिक ताप 31°C है।

प्रश्न 49.
वाहनों के पहियों में गर्मियों में हवा का दबाव कम रख जाता है। क्यों?
उत्तर”
क्योंकि ताप अधिक होने पर गैस का दाब भी बढ़ जाता है।

प्रश्न 50.
जूल थॉमसन प्रभाव में आदर्श गैसों के ताप में कोई परिवर्तन नहीं होता, क्यों?
उत्तर:
क्योंकि आदर्श गैस के अणुओं के मध्य कोई भी आकर्षण बल नहीं होता है। इस कारण जूल थॉमसन प्रभाव में आदर्श गैसों के ताप में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

प्रश्न 51.
क्या सभी गैसीय अणुओं की चाल समान होती है?
उत्तर:
नहीं, अणुओं की चाल अणुओं के अणुभार पर निर्भर करती है।

प्रश्न 52.
‘R’ का मान J K-1 mol-1 में क्या होता है?
उत्तर:
‘R’ का मान 8.314 J K-1 mol-1 होता है।

प्रश्न 53.
आण्विक टक्करों की प्रकृति क्या होती है?
उत्तर:
आण्विक टक्करों की प्रकृति पूर्णतः प्रत्यास्थ होती है।

प्रश्न 54.
द्रव के पृष्ठ तनाव पर ताप का प्रभाव बताइये?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर द्रव का पृष्ठ तनाव घट जाता है।

प्रश्न 55.
द्रव के क्वथनांक पर दाब का प्रभाव बताइये?
उत्तर:
दाब बढ़ाने पर द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है।

प्रश्न 56.
द्रव की श्यानता पर ताप का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर द्रव की श्यानता घट जाती है।

प्रश्न 57.
R का मान cm³ bar K-1 mol-1 में बताएँ।
उत्तर:
R = 82.1 cm³ bar K-1 mol-1 होता है।

प्रश्न 58.
वास्तविक गैस क्या होती है?
उत्तर:
वे गैसें जो ताप एवं दाब की सभी परिस्थितियों में आदर्श गैस के व्यवहार को नहीं दर्शाती हैं, वास्तविक गैसें कहलाती हैं।

प्रश्न 59.
क्वथनांक को परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
वह ताप जिस पर द्रव की सतह का वाष्पदाब वायुमण्डलीय दाब के बराबर हो जाता है। क्वथनांक कहलाता है।

प्रश्न 60.
विभिन्न तापों पर आदर्श गैसों के P व V का गुणनफल समान होता है या नहीं।
उत्तर:
भिन्न-भिन्न होता है।

प्रश्न 61.
बॉयल ताप को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
वह ताप, जिस पर कोई वास्तविक गैस दाब की अधिकतम परास में आदर्श गैस के समान व्यवहार करती है, बॉयल ताप कहलाता है।

प्रश्न 62.
क्या क्वथन वाष्पीकरण के समान है?
उत्तर:
नहीं, क्वथन व वाष्पीकरण समान नहीं होते हैं।

प्रश्न 63.
किस प्रकार के गैसीय मिश्रण के लिये डाल्टन का नियम उपयुक्त होता है?
उत्तर
अक्रियाशील गैसीय मिश्रण के लिए डाल्टन का नियम उपयुक्त होता है।

प्रश्न 64.
किन परिस्थितियों में बॉयल का नियम लागू होता है।
उत्तर:
गैस का ताप निश्चित होने पर बॉयल का नियम लागू होता है।

प्रश्न 65.
क्या CO एवं O2, के मिश्रण पर डाल्टन का आंशिक दाब नियम लगा सकते हैं?
उत्तर:
नहीं यह नियम उन गैसों पर लागू नहीं होता है जो आपस में क्रिया कर लेती हैं। CO तथा O2 क्रिया करके CO2 बनाती हैं।

प्रश्न 66.
CO2, ऑक्सीजन व नाइट्रोजन दोनों से भारी होती है फिर भी यह वायुमण्डल की निचली परत में नहीं होती है, क्यों?
उत्तर:
गैसों का विसरण पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल से स्वतन्त्र होता है। CO2 के अणु पूरे वायुमण्डल में फैले हुए होते हैं। अत: CO2 की निचली परत नहीं बना पाते हैं।

प्रश्न 67.
यदि आण्विक टक्करें प्रत्यास्थ नहीं होती तो गैस की आण्विक गति पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर:
यदि गैस के अणुओं के मध्य टक्करें अप्रत्यास्थ होती तो प्रत्येक टक्कर के दौरान अणुओं की गतिज ऊर्जा में कमी आ जाती तथा बार-बार टक्करों से गतिज ऊर्जा लगातार कम होती रहती और अन्त में अणुगति रुक जाती।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 68.
गर्म चाय या कॉफी को प्लेट में डालकर पिया जाता है, क्यों?
उत्तर:
वाष्पीकरण से ठंडक प्राप्त होती है। किसी भी द्रव का पृष्ठीय क्षेत्रफल बढ़ाने से वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है। चूँकि ‘प्लेट का क्षेत्रफल अधिक होता है अतः चाय या कॉफी का वाष्पीकरण भी तेजी से होगा और चाय या कॉफी जल्द ठण्डी हो जायेगी।

प्रश्न 69.
द्रव की बूँद गोल आकार की क्यों होती है?
उत्तर:
द्रव की प्रकृति न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल रखने की प्रवृत्ति होती है। चूँकि दिये हुए आयतन के लिये गोल बूँद का पृष्ठ क्षेत्रफल निम्नतम होता है अतः द्रव की बूँद गोल आकार की होती है।

प्रश्न 70.
ग्लिसरीन तथा जल में कौन अधिक श्यान है?
उत्तर:
ग्लिसरीन व जल में ग्लिसरीन अधिक श्यान है क्योंकि इसके अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबंधों की संख्या, जल के अणुओं के मध्य हाइड्रोजन आबन्धों की संख्या से काफी अधिक है।

प्रश्न 71.
H2, N2, O2, F2, He, Ne आदि गैसों को विसरण गति के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
F2 < O2 < N2 < Ne < He <H2 (विसरण गति का बढ़ता क्रम)

प्रश्न 72.
ताप का केल्विन पैमाना सेल्सियस पैमाने की अपेक्षा अधिक बेहतर क्यों होता है?
उत्तर:
ताप का केल्विन पैमाना सेल्सियस पैमाने की अपेक्षा अधिक बेहतर है क्योंकि केल्विन पैमाने पर कोई भी ऋणात्मक ताप नहीं होता है।

प्रश्न 73.
मोल संख्या से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गैस के मोलों की संख्या
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 1

प्रश्न 74.
NH3 तथा N2 में से किसमें ‘a’ का मान अधिक होगा एवं किसमें ‘b’ का मान अधिक होगा?
उत्तर:
(1) NH3 में ‘a’ का मान अधिक होगा क्योंकि NH3 अणुओं में अन्योन्य क्रिया इनकी ध्रुवीय प्रकृति और अणुओं में उपस्थित अन्तरा – आण्विक हाइड्रोजन बन्ध के कारण अधिक उच्च होगी।

(2) N2 में ‘b’ का मान अधिक होगा क्योंकि N2 अणुओं का आकार NH3 अणुओं की अपेक्षा अधिक होता है।

प्रश्न 75.
सामान्य ताप तथा दाब की दशाओं में आदर्श गैस का मोलर आयतन क्या होगा?
उत्तर:
सामान्य ताप तथा दाब की दशाओं में आदर्श गैस का मोलर आयतन 22.4 dm³ होता है।

प्रश्न 76.
क्या किसी गैस को परम शून्य ताप तक ठण्डा करना सम्भव है?
उत्तर:
किसी भी गैस को परम शून्य ताप तक ठण्डा करना असम्भव है। क्योंकि इस ताप को प्राप्त करने से पहले ही गैस द्रव में बदल जायेगी।

प्रश्न 77.
निम्न युग्मों में से उच्च वाष्प दाब वाला द्रव कौन सा है?
(1) ऐल्कोहॉल तथा ग्लिसरीन
(2) पेट्रोल तथा कैरोसीन
(3) पारा, जल
(4) जल, शहद
(5) ईथर, ऐल्कोहॉल
उत्तर:
द्रव का वाष्प दाब अणुओं के मध्य अन्तरा आण्विक आकर्षण बल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अतः उच्च वाष्प दाब वाला पदार्थ है-
(1) ऐल्कोहॉल
(2) पेट्रोल
(3) जल
(4) जल
(5) ईथर।

प्रश्न 78.
किस परिस्थिती में वास्तविक गैस आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती है?
उत्तर:
उच्च ताप व कम दाब पर वास्तविक गैस आदर्श गैस की तरह व्यवहार करती है।

प्रश्न 79.
बर्फ, जल तथा भाप के भौतिक गुणों में बहुत अधिक भिन्नता होती है। इन तीनों अवस्थाओं में जल का रासायनिक संघटन क्या है?
उत्तर:
जल का रासायनिक संघटन सभी में समान होगा अर्थात् H2O होगा।

प्रश्न 80.
द्रव्य की भिन्न-भिन्न अवस्थाओं को विभिन्न भौतिक नियमों द्वारा समझा जा सकता है। आपके अनुसार, द्रव्य की अवस्थाओं को निर्धारित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं।
उत्तर:
दाब, ताप, द्रव्यमान तथा आयतन।

प्रश्न 81.
नाइट्रोजन तथा आर्गन का मोलर आयतन 273.15K तथा 1 atm दाब पर क्या होगा?
उत्तर:
22.4 L

प्रश्न 82.
दो भिन्न-भिन्न गैसें A तथा B को समान धारिता वाले दो भिन्न पात्रों में समान ताप तथा दाब पर भरा गया है। दाब को थोड़ा सा अधिक बढ़ाने पर गैस ‘A’ का द्रवीकरण हो जाता है परन्तु गैस B उच्च दाब लगाने पर भी द्रवित नहीं होती है। परन्तु यह ठंडी हो जाती है। इस प्रक्रम को समझायें
उत्तर:
गैस ‘A’ अपने क्रान्तिक ताप पर या उससे कम ताप पर है। परन्तु गैस ‘B’ अपने क्रान्तिक ताप से अधिक ताप पर उपस्थित है।

प्रश्न 83.
गैसों के अणु गतिक सिद्धान्त में एक तथ्य यह है कि गैसों के अणुओं के मध्य कोई भी आकर्षण बल नहीं होता है। यह तथ्य कहाँ तक सही है। क्या इस तथ्य के अनुसार आदर्श गैस का द्रवीकरण सम्भव है।
उत्तर:
यदि गैसों के अणुओं के मध्य कोई भी आकर्षण बल नहीं है तो आदर्श गैस का द्रवीकरण किसी भी प्रकार सम्भव नहीं है।

प्रश्न 84.
निम्न को उनके पृष्ठ तनाव के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें ।
जल, एल्कोहॉल, हेक्सेन
उत्तर:
हेक्सेन < एल्कोहॉल < जल

प्रश्न 85.
जलीय तनाव तथा सूखी गैस के दाब में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
Pसूखी गैस = Pकुल – जलीय तनाव

प्रश्न 86.
उस ऊर्जा का नाम लिखें जो पदार्थ के अणु या परमाणुओं की गति के कारण उत्पन्न होती है? इस ऊर्जा पर ताप बढ़ाने पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
ऊष्मीय ऊर्जा, ताप बढ़ाने पर ऊष्मीय ऊर्जा बढ़ जाती है।

प्रश्न 87.
उन दो अन्तराआण्विक बलों के नाम लिखें जो कि HF की द्रव अवस्था में अणुओं के मध्य उत्पन्न होते हैं।
उत्तर:

  1. द्विध्रुव – द्विध्रुव अन्योन्य क्रिया
  2. हाइड्रोजन आबन्ध।

प्रश्न 88.
किसी गैस का संपीड्यता गुणांक ‘Z’ = \(\frac { PV }{ nRT }\) होता है,
(i) आदर्श गैस के लिये Z का मान क्या होगा।
(ii) बॉयल ताप से ऊपर का मान वास्तविक गैस के लिये क्या है?
उत्तर:
(i) Z = 1 (आदर्श गैस के लिये)
(ii) बॉयल ताप से ऊपर Z > 1 (वास्तविक गैस के लिये)

प्रश्न 89.
CO2 का क्रान्तिक ताप व क्रान्तिक दाब क्रमशः 30.98°C तथा 73 atm है। क्या 32°C ताप तथा 80 atm दाब पर CO2 गैस का द्रवीकरण सम्भव है।
उत्तर:
32°C ताप पर CO2 गैस का द्रवीकरण सम्भव नहीं है चाहे दाब 80 atm की क्यों न हो क्योंकि यह ताप क्रान्तिक ताप से बड़ा है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पृष्ठ तनाव को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
पृष्ठ तनाव (Surface tension) – “किसी द्रव की सतह पर एकांक लम्बाई में लगने वाला लम्बवत् बल पृष्ठ तनाव कहलाता है,” इसे ग्रीक अक्षर (γ) गामा से प्रदर्शित करते हैं।
S. I. पद्धति में पृष्ठ तनाव की इकाई न्यूटन प्रति मीटर (Nm-1) है।

प्रश्न 2.
श्यानता गुणांक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
श्यानता गुणांक (Viscosity coefficient) – किसी द्रव का श्यानता गुणांक उसके प्रवाह के बीच उत्पन्न होने वाले अवरोध को कहते हैं।
यदि परतों का क्षेत्रफल A तथा वेग प्रवणता \(\frac { dV }{ dx }\), तो घर्षण बल F. ∝ A. \(\frac { dV }{ dx }\),
F = ηA. \(\frac { dV }{ dx }\),
η = समानुपातिक स्थिरांक है जिसे श्यानता गुणांक कहते हैं।

प्रश्न 3.
अक्रिस्टलीय ठोसों को अतिशीतित (Super cooled) द्रव मानते हैं। समझाइये।
उत्तर:
अक्रिस्टलीय ठोसों के अवयवी कण की कोई निश्चित आन्तरिक व्यवस्था या रचना न होने के कारण अक्रिस्टलीय ठोसों के अवयवी कण द्रवों की भाँति मन्द गति से बहते हैं रहते हैं। यही कारण है कि इन अक्रिस्टलीय ठोसों को अत्यधिक श्यानता वाला अतिशीतित (Super cooled) द्रव माना जाता है।

प्रश्न 4.
PV = nRT गैस समीकरण की व्युत्पति कीजिए।
उत्तर:
माना कि किसी ताप T तथा दाब P पर किसी गैस का आयतन V है।
बॉयल के नियम के अनुसार – स्थिर ताप पर
V ∝ \(\frac { 1 }{ P }\) या V = \(\frac { K }{ P }\)
यहाँ K = स्थिरांक
या PV = K … (i)
चार्ल्स के नियम के अनुसार – स्थिर दाब पर
V ∝ T V = KT
K = स्थिरांक
\(\frac { V }{ T }\) = K … (ii)
आवागाद्रो के नियम के अनुसार स्थिर ताप व दाब पर
V ∝ n
या \(\frac { V }{ n }\) = K स्थिरांक … (iii)
समीकरण (i), (ii) व (iii) को मिलाने पर
\(\frac { PV }{ nT }\) = स्थिरांक
तो \(\frac { PV }{ T }\) = nR
PV = RT यही समीकरण आदर्श गैस समीकरण है।
यहाँ R = स्थिरांक (गैस स्थिरांक या मोलर गैस स्थिरांक)

प्रश्न 5.
डाल्टन के आंशिक दाब नियम पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
डाल्टन का आंशिक दाब नियम (Dalton’s Law of Partial Pressure) – सन् 1801 में डाल्टन ने पारस्परिक रासायनिक अभिक्रिया न करने वाली गैसों को एक बन्द पात्र में लेकर गैसों के कुल दाब एवं उनके आंशिक दाबों में एक सम्बन्ध दिया जिसे डाल्टन का आंशिक दाब नियम कहा गया।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 2
इस नियम के अनुसार, “जब दो या अधिक गैसों को (पारस्परिक अभिक्रिया न करने वाली) स्थिर ताप पर एक बन्द पात्र में लिया जाता है, तो गैसों के मिश्रण का कुल दाब उन घटक गैसों के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है।
डाल्टन के नियम अनुसार – स्थिर ताप व आयतन पर
P = PA + PB + PC
डाल्टन का आंशिक दाब नियम केवल आदर्श गैसों पर पूर्ण रूप से लागू होता है।

प्रश्न 6.
गैस के क्रान्तिक स्थिरांकों को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
क्रान्तिक स्थिरांक – क्रान्तिक ताप, क्रान्तिक दाब एवं क्रान्तिक आयतन सामूहिक रूप से गैस के क्रान्तिक स्थिरांक कहलाते हैं। इन्हें क्रमश: TC, PC, VC से प्रदर्शित करते हैं।

क्रान्तिक ताप (Critical temperature)-वह निश्चित ताप जिसके ऊपर किसी गैस को द्रव में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है चाहे दाब कितना भी बढ़ा दिया जाये क्रान्तिक ताप कहलाता है।
उदाहरण – CO2 का क्रान्तिक ताप 31°C है।

क्रांतिक दाब (Critical Pressure) – क्रान्तिक ताप पर गैस जिस कम से कम दाब पर द्रवित हो जाती है, क्रान्तिक दाब कहलाता है। इसे PC से प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण – CO2 गैस का 31.1°C पर क्रान्तिक दाब 7.29 वायुमण्डल होता है।

क्रान्तिक आयतन (Critical volume) – क्रान्तिक ताप एवं दाब पर किसी गैस के एक मोल का आयतन क्रान्तिक आयतन कहलाता है। इसे VC से प्रदर्शित करते हैं।
उदाहरण – CO2 का क्रान्तिक आयतन 94 मि. लि. है।

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 7.
वाष्प दाब का क्वथनांक पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
वाष्प दाब का क्वथनांक पर प्रभाव – वाष्प दाब किसी भी द्रव के क्वथनांक पर प्रभाव डालता है।
उदाहरण – जल के सामान्य क्वथनांक पर जल का वाष्प दाब एक वायुमण्डलीय दाब के बराबर होता है। अगर बाहरी दाब एक वायुमण्डल दाब से कम है तो जल कम तापमान पर उबलेगा। यही कारण है कि पहाड़ों पर भोज्य पदार्थ कठिनाई से गलते हैं। प्रेशर कुकर में निकास पर वजन रखकर दाब को वायुमण्डलीय दाब से अधिक करके जल का क्वथनांक बढ़ा सकते हैं।

प्रश्न 8.
समझाइये कि किसी द्रव की श्यानता ताप के साथ क्यों घटती है?
उत्तर:
द्रव की श्यानता ताप बढ़ने के साथ घटती है, क्योंकि ताप बढ़ने के साथ अणुओं की गतिज ऊर्जा अधिक हो जाती है। गतिज ऊर्जा अधिक होने के कारण द्रव वेग अवरोधों को पार करके असानी से बहने लगते हैं। आर्हीनियस एवं गुजमान (Guzman) ने प्रयोगों के आधार पर द्रवों की श्यानता पर ताप के प्रभाव को प्रदर्शित करने के लिये समीकरण दिये हैं-
η = AeEa/RT
या \(\log \frac{\eta_1}{\eta_2}=\frac{E a}{2.303 R}\left[\frac{T_2-T_1}{T_1 T_2}\right]\)

प्रश्न 9.
जल काँच की सतह को गीला करता है, जबकि पारा नहीं करता समझाइये।
उत्तर:
पारा काँच की सतह को गीला नहीं करता क्योंकि पारे के अणुओं के मध्य लगने वाला अन्तराण्विक बल काँच की दीवार एवं पारे की सतह के मध्य लगने वाले आकर्षण बल से अधिक होता है। ऐसी दशा में पारा पात्र की दीवारों से दूर रहने की कोशिश करता है तथा केशिका नली में पारा नीचे गिरता है, इस प्रकार द्रव यानि पारा पात्र की दीवारों से नहीं चिपकता है।

प्रश्न 10.
द्रवित गैसों का उपयोग लिखिए।
उत्तर:
द्रवित गैसों का उपयोग (Uses of liquified gases) – द्रवित गैसों के उपयोग निम्नलिखित हैं-

  • प्रयोगशाला में न्यून ताप उत्पन्न करने के लिए द्रवित गैसों का उपयोग करते हैं।
  • द्रव फ्रीऑन (CCl2F2) आदि का उपयोग वातानुकूलन में प्रशीतक के रूप में किया जाता है।
  • द्रव वायु का उपयोग रॉकेट व जैट वायुयान में ऑक्सीजन के मुख्य स्रोत के रूप में होता है।
  • वेल्डिंग में द्रव ऑक्सीजन का उपयोग होता है।
  • Cl2 का उपयोग जल में कीटनाशक के रूप में होता है।
  • कुछ गैसों को मिश्रण से अलग करने के लिए द्रवण की सहायता ली जाती है।
    उदाहरण – Ne तथा Ar को वायु से अलग करते हैं।

प्रश्न 11.
जब केशनलिका को पारे में डुबोया जाता है तो बाहर की तुलना में अन्दर पारे का स्तर कम होता है। क्यों ?
उत्तर:
पारे के स्तर के कम होने का कारण हम ससंजक (Cohesive) एवं आसंजक (Adhesive) बलों के आधार पर समझा सकते हैं। समान अणुओं के मध्य लगने वाला बल ससंजक जबर्कि असमान अणुओं के मध्य लगने वाला बल आसंजक कहलाता है। पारे में आसंजक बल ससंजक बलों की तुलना में कम होते हैं। इस कारण पारा काँच की सतह से अलग हो जाता है। तथा इसका स्तर कम हो जाता है।

प्रश्न 12.
काँच की केशनली में पानी का स्तर (maniscus) अवतल (Convcave) जबकि पारे का उत्तल (Convex) होता है, क्यों?
उत्तर:
जैसा कि हम जानते हैं कि अन्तरा-आण्विक बल अणुओं को पास-पास रखता है, परन्तु ऊष्मीय ऊर्जा अणुओं को एक-दूसरे से दूर रखती है। द्रव्य की तीन अवस्थाएँ ठोस, द्रव व गैस अणुओं के इस अन्तरा-आण्विक बलों तथा ऊष्मीय ऊर्जा के मध्य संतुलन का परिणाम हैं।

यदि ठोस को ऊष्मीय ऊर्जा दी जाती है तो यह ऊर्जा अणुओं को एक दूसरे से दूर करती है। अर्थात् उनके मध्य आकर्षण बल घट जाता है, इस प्रकार ठोस द्रव में परिवर्तित हो जाता है। अर्थात् इससे सिद्ध होता है कि ठोस और द्रव अवस्थायें एवं ऊष्मीय ऊर्जा का सन्तुलन अणुओं के मध्य अन्तरा-अणुक आकर्षण बल का परिणाम है। इसी प्रकार द्रव को हम ठोस में परिवर्तित कर सकते हैं इसके लिये ताप को कम किया जाता है जिससे ऊष्मीय ऊर्जा कम हो जाती है और अन्तरा-आण्विक आकर्षण बल बढ़ जाता है और द्रव ठोस में बदल जाता है।

गैसों को केवल दाब लगाकर अर्थात् संपीडित करके द्रव में नहीं बदला जा सकता है। गैस पर दाब लगाने पर अणु निकट तो आ जाते हैं परन्तु उनको इसी स्थिति में बनाये रखने के लिये ताप को कम किया जाता है अर्थात् ऊष्मीय ऊर्जा को कम करते हैं। किसी भी गैस के लिये एक निश्चित ताप होता है जिसके ऊपर वह गैस द्रवित नहीं हो सकती, चाहे दाब कितना ही अधिक हो। गैसों का यह ताप क्रान्तिक ताप (Critical Temperature) कहलाता है।
गैस, द्रव व ठोस का एक-दूसरे में परिवर्तन निम्न प्रकार समझा जा सकता है।
गैस अवस्था → द्रव अवस्था → ठोस अवस्था
अन्तरा-आण्विक आकर्षण बल को बढ़ने पर उपरोक्त परिवर्तन होता है।
गैस अवस्था ← द्रव अवस्था ← ठोस अवस्था
ऊष्मीय ऊर्जा घटाने पर उपरोक्त परिवर्तन होता है।

प्रश्न 13.
ईथर व एल्कोहॉल को ठण्डी जगह पर रखा जाता है क्यों ?
उत्तर:
ईथर व एल्कोहॉल दोनों द्रव प्रकृति में वाष्पशील होते हैं। इस कारण इनका क्वथनांक काफी कम होता है। ये उच्च ताप पर आसानी से वाष्पीकृत हो जाते हैं। अतः इनके वाष्पन को कम करने के लिये इन्हें ठण्डी जगह पर रखते हैं।

प्रश्न 14.
द्रव अमोनिया की बोतल को खोलने से पहले ठण्डा किया जाता है। क्यों ?
उत्तर:
द्रव अमोनिया की बोलल में अमोनिया को उच्च दाव लगाकर भरा जाता है। यदि बोतस को बिना उण्डा किए ही खोल दिया आये तो दाब में अचानक कमी होने के कारण गैस के अणुओं की गतिज ऊर्जा बहु जायेगी एवं वे अचानक तेजी के साथ बोतल से बाहर निकल आयेंगे। परिणामस्वरूप बोतल फट सकती है तथा कोई भी दुर्घंटा घटित हो सकती है। यदि बोतल को ठण्डा कर दें तो अणुओं की गतिज ऊर्जा नहीं बढ़ेगी तथा गैस धींरे-धीरे बाहर आयेगी व दुर्घटना की सम्भावना कम हो जायेगी।

प्रश्न 15.
ऊँची पहाड़ियों पर जल का क्वथनांक घट जाता है, क्यों?
उत्तर:
जैसे-जैसे हम ऊँचाई की ओर जाते है, वायुमण्डलीय दाब कम हो जाता है। अतः जल के वाष्पदाब को वायुमण्डलीय दाब (जो कि ऊँचाई पर कम हो जाता है) के समान लाने के लिये कम ताप की आवश्यकता होगी तथा जल का क्वथनांक भी कम हो जायेगा।

प्रश्न 16.
प्रेशर कुकर में खाना शीच्र पकता है, क्यों ?
उत्तर:
प्रेशर कुकर में वाष्पदाय अत्यधिक होता है अतः जल का क्वथनांक अधिक हो जाता है। अथात् जल अधिक ताप ग्रहण कर सकता है और प्रेशर कुकर का ताप अधिक हो जाता है, परिणामस्वरूप अन्दर रखे खाइ पदार्थ भी शीच्र पक जाते है।

ब्रुले पात्र में दाल या सख्जी बनाते समय ताप किसी भी स्तिति में 100°C से अधिक नहीं हो पाता है। जबकि प्रेशर कुकर में ताप 100°C से काफी ऊँचा हो जाता है।

प्रश्न 17.
सोडा वाटर की बोतलों को गर्मीं में फ्रिज में ही रखा जाता क्यों ?
उत्तर:
सोडा वाटर, CO2 गैस का पानी में विलयन होता है। विलयन बनाने के लिए गैस को उच्छ दाब पर पानी में प्रवाहित किया जाता है। चूँंक गैस जल में अघुलनशील है अतः उच्च दाब पर गैस आसानी से घुल जाती है। गर्मियों में जल में गैस की घुलनशीलता कम हो जाती हैं क्योंकि ताप में अधिकता घुलनशीलता को कम कर देती है। अतः गर्मियों में काँच की बोतल की सतह पर अधिक गैस उपस्थित होती है। द्रससे बोतल के अन्दर का दाब बढ़ जाता है तथा यह दाब बोताल सहन नहीं कर सकती और फट सकती है। इससे बचाने के लिये इन बोतलौं को या तो फ्रिज में रखते हैं या फिर पानी के अन्दर रखते हैं। ऐसा करने पर ताप घट ज्ञाता है व गैस की घुलनशीलता जल में बढ़ जाती है।

प्रश्न 18.
शुष्क एवं आर्द्र वायु में से कौन-सी भारी होती है?
उत्तर:
शुष्क वायु मुख्यत्तया नाइट्रोजन व ऑकसीकन तथा कुछ अन्य मात्रा में गैसों के द्वारा बनी होती है। शुष्क वायु में कुछ मात्रा जल वाध्य की भी होती है। जल वाष्प का वाण्प घनत्व N2 तथा O2 से कम होता है क्योंकि N2 का अर्विक द्रव्यमान 28, O2 का 32 तथा जल का 18 होता है। आर्द्र वायु में नाइट्रोजन एवं ऑक्सीजन के भारी अणु जल वाध्य के द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते है। अतः शुष्क वायु, आद्र वायु से भारी होती है।

प्रश्न 19.
बॉयल के नियम का प्रायोगिक महत्व लिखें। अधवा बॉयल के नियम से बताइये कि दाब तथा घनत्व में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
मात्रात्मक रूप से बॉयल का प्रयोग यह सिद्ध करता है कि गैस अत्यधिक संपीडित होती है, गैसों के अणुओं के मध्य अन्तरा-आणिवक स्थान अधिक होता है अतः इनके दिये गये द्रव्यमान को संपीडित करना अत्यधिक सरल होता है। दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि उच्च दाब पर गैस अधिक सघन हो जाती है तथा कम दाब पर इसकी सघनता काफी कम होती है।

ऊँचाई पर अर्थात् पहाड़ों पर दाब कम हो जाता है। इस कारण वायु भी सघन हो जाती है तथा साँस लेने में कठिनाई होती है।
बॉयल के नियम की सहायता से दाब तथा घनत्व के मध्य निम्न सम्बन्ध स्थापित होता है।
d = \(\frac { M }{ V }\), V = \(\frac { m }{ d }\)
बॉल नियम से,
PV = K
P x \(\frac { m }{ d }\) = K = स्थिरांक
यदि गैस का दाब P1 पर घनत्व d1, तथा दाब P2 पर घनत्व d2 है तो
P1V1 = P2 V2 से
P1\(\frac{m_1}{d_1}\) = P2\(\frac{m_2}{d_2}\) = K
\(\frac{p_1}{d_1}=\frac{p_2}{d_2}\) = K
या \(\frac { P }{ d }\) = K या P ∝ d
“स्थिर ताप पर किसी एक गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके घनत्व के समानुपाती होता है।”

प्रश्न 20.
गैसीय अणुओं के आण्विक वेग बन्दूक की गोली के वेग के तुल्य होते हैं, परन्तु गैसीय अणुओं की गन्ध शीघ्रता से प्राप्त नहीं होती है, क्यों?
उत्तर:
यह सत्य है कि गैसीय अवस्था में अणुओं का वेग अत्यधिक होता है जो कि बन्दूक की गोली के वेग से गतिमान रहते हैं। परन्तु इनकी गति सीधी रेखा में नहीं होती है। ये अणु आड़े-तिरछे (Zig- Zag) पथ पर गति करते हैं तथा एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। इसी कारण गैसीय अणुओं की वास्तविक गति पर इनका हम तक पहुँचना सम्भव नहीं होता है। इस कारण इनकी गन्ध हम तक देर में पहुँचती है।

प्रश्न 21.
कारण स्पष्ट करें-
(1) द्रव की बूँद का आकार गोल होता है।
(2) केशिका नली को द्रव तल के सम्पर्क में लाने पर केशिका नली में द्रव चढ़ता अथवा उतरता है।
उत्तर:
(1) वर्षा की बूदों तथा मर्करी की बूदों का गोल आकार-बूँद का गोल आकार पृष्ठ तनाव (Surface Tension) के कारण ही होता है। यह तनाव द्रव पृष्ठीय क्षेत्रफल को कम करने की कोशिश करता है। तब द्रव का ऊर्जा स्तर निम्नतम होता है। यही कारण है कि वर्षा की बूँदे तथा मर्करी की बूँदे गोलाकार होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 3

(ii) केशनलिका में द्रव का चढ़ना-किसी द्रव को केशनलिका में भरने पर नली की दीवार तथा द्रव के मध्य लगने वाला आसंजक बल द्रव के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाने का प्रयास करता है। जबकि पृष्ठ तनाव सतही क्षेत्रफल को कम करने की कोशिश करता है। इसी कारण नली में द्रव चढ़ता है। किसी भी नली में द्रव तब तक ऊपर चढ़ता है जब तक कि आसंजक एवं ससंजक बल पर लग रहा गुरूत्वाकर्षण बल सन्तुलित न हो जाये।

प्रश्न 22.
सार्वत्रिक गैस नियतांक का मान विभिन्न इकाइयों में लिखें।
उत्तर:
(i) सार्वत्रिक गैस नियतांक (R) का मान लीटर वायुमण्डल प्रति केल्विन प्रति मोल में
= 0.0821 L-atm K-1 mol-1

(ii) (R) का मान अर्ग प्रति केल्विन प्रति मोल में
= 8.314 × 107 erg K-1 mol-1

(iii) (R) का मान जूल प्रति केल्विन प्रति मोल में = 8·314 J K-1 mol-1

(iv) (R) का मान घन सेमी- बार प्रति केल्विन प्रति मोल में = 82.1 cm³ bar K-1 mol-1

(v) (R) का मान ली. बार प्रति केल्विन प्रति मोल में = 0.0831 L-bar.K-1 mol-1

(vi) (R) का मान कैलोरी प्रति केल्विन प्रति मोल में = 2 Cal K-1 mol-1

प्रश्न 23.
अणु गति सिद्धान्त के कुछ मुख्य अभिग्रहितों में निहित तथ्यों की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
(1) अणु सीधे पथ पर गति नहीं करते
व्याख्या-अभिग्रहित के अनुसार गैसों के अणु निरन्तर गतिमान होते हैं। एक अणु सरल रेखा में गति करता हुआ दूसरे अणु के साथ टकराता है इससे पथ विचलित हो जाता है, चूँकि ये संघट्ट् बार-बार होते हैं; अतः अणु अपना मार्ग बदल देते हैं। इस कारण अणु सीधे पथ पर गति नहीं करते हैं।

(2) गैसों के अणुओं के मध्य प्रत्यास्थ संघट्ट होता है।
व्याख्या-प्रत्यास्थ संघट्ट का अर्थ होता है कि संघट्ट के पूर्व तथा पश्चात् अणुओं की ऊर्जा समान रहती है। संघट्ट में अणुओं के मध्य ऊर्जा का विनिमय (exchange) हो सकता है अर्थात् विशिष्ट अणु की ऊर्जा में परिवर्तन हो सकता है, परन्तु कुल ऊर्जा स्थिर बनी रहती है।

(3) गैसों के अणुओं के मध्य कोई अन्योन्य क्रिया नहीं होती है। व्याख्या कीजिए।
व्याख्या-सामान्य ताप एवं दाब पर गैस-कणों के मध्य कोई अन्योन्य क्रिया नहीं होती अर्थात् कणों के मध्य कोई आकर्षण तथा प्रतिकर्षण बल उपस्थित नहीं होता है। जब गैस का दाब और घटाया जाता है तथा ताप को स्थिर रखते हैं तो वह प्रसारित होती है। यह तभी सम्भव है जब अणुओं के मध्य आकर्षण एवं प्रतिकर्षण बल न हों। अत: गैसों के अणुओं के मध्य अन्योन्य क्रिया नहीं होती है।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
25°C पर एक गैस का आयतन 400 ml है। दाब स्थिर रखने पर किस ताप पर उसका आयतन 600 ml हो जायेगा।
हल:
दिया गया है,
चार्ल्स के नियम से,
T1 = 25 + 273 = 298 K
T2 = ?
V1 = 400 ml
V2 = 600 ml
\(\frac{\mathrm{V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{V}_2}{\mathrm{~T}_2}\) (स्थिर दाब पर)
\(\frac{400}{298}=\frac{600}{T_2}\)
T2 = \(\frac { 600×298}{ 400 }\)
T2 = 447 K
T2 = 447 – 273 = 174°C

प्रश्न 2.
किसी गैस का आयतन 100 cm³ है और इसे 30% बढ़ाना हो तो स्थिर दाब पर गैस को कितना गर्म करना पड़ेगा, यदि प्रारम्भिक ताप 20°C है।
हल:
आयतन में वृद्धि = 30%
प्रारम्भिक आयतन (V1) = 100 cm³
प्रारम्भिक आयतन में आवश्यक वृद्धि
= \(\frac { 100×30 }{ 100 }\) = 30 cm³
अन्तिम आयतन (V) = 100 + 30 = 130 cm³
V1 = 100 cm³
T1 = 20 + 273 = 293 K
V1 = 130 cm³
T2 = ?
चार्ल्स के नियमानुसार,
\(\frac{\mathrm{V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{V}_2}{\mathrm{~T}_2}\) (स्थिर दाब पर)
\(\frac{100}{293}=\frac{130}{T_2}\)
T2 = \(\frac{130 \times 293}{100}\)
= 380.9 K

प्रश्न 3.
यदि किसी गैस के गुब्बारे में लगभग 5 लीटर हाइड्रोजन गैस 22°C ताप पर भरी गयी। यदि ताप बढ़ाकर 25°C कर दिया गया तो गुब्बारे का आयतन कितना हो जायेगा।
हल:
दिया गया है,
V1 = 5 लीटर, V2 = ?
T1 = 22 + 273
= 295 K
T2 = 25 + 273
= 298 K
चार्ल्स के नियमानुसार,
\(\frac{\mathrm{V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{V}_2}{\mathrm{~T}_2}\) (स्थिर दाब पर)
\(\frac{5}{295}=\frac{V_2}{298}\)
V2 = \(\frac{5 \times 298}{295}\)
= 5.051 L

प्रश्न 4.
एक गैस का नमूना 298 K ताप और 1 bar दाब 75 dm³ आयतन घेरता है। यदि समान ताप पर गैस के आयतन को 10dm³ तक कम कर दिया जाये तो कितना अतिरिक्त दाब लगाना पड़ेगा। हल:
दिया गया है,
P1 = 1 bar
P2 = ?
V1 = 75 dm³
V2 = 10 dm³
बॉयल नियम से,
PV1 = P2V2 (स्थिर ताप पर )
1 × 75 = P2 × 10
P2 = \(\frac{1 \times 75}{10}\)
P2 = 7.5 bar
अतिरिक्त दाब = 7.5 – 1
= 6.5 bar

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 5.
रसोई गैस के एक सिलिण्डर में भरी गैस का दाब 25°C पर 11 bar है। यदि गैस सिलिण्डर की दाब वहन क्षमता 16 bar हो तो बताइये किस ताप पर सिलिण्डर फट जायेगा?
हल:
सिलिण्डर में गैस भरी है अतः गैस का आयतन स्थिर रहता है।
दिया गया है.
अधिकतम दाब ‘P1‘ = 16 bar
ताप ‘T1‘ = ?
गैस का दाब (P2) = 11 bar
ताप (T2) = 25 + 273 = 298 K
गै-लुसेक नियम से,
\(\frac{\mathrm{P}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{P}_2}{\mathrm{~T}_2}\) (स्थिर ताप पर)
\(\frac{16}{T_1}=\frac{11}{298}\)
T1 = \(\frac{16 \times 298}{11}\)
T1 = 433.45 K
= 433.45 – 273
T1 = 160.45°C

प्रश्न 6.
गैस के किसी दिये हुए नमूने पर कितना दाब लगाया जाये कि वह अपने मूल आयतन के तीन चौथाई भाग तक दब जाये।
हल:
दिया गया है,
V1 = V
P1 = P
V2 = \(\frac { 3 }{ 4 }\)V
P2 = ?
बॉयल नियम से, P1V1 = P2V2 (स्थिर ताप पर )
P x V = P2 = P2 = \(\frac { 3 }{ 4 }\)V
P2 = \(\frac { 4 }{ 3 }\)P
अर्थात् लगने वाला दाब मूल दाब \(\frac { 4 }{ 3 }\) गुना होता है।

प्रश्न 7.
एक गैस 0.92 bar दाब पर 0.6 dm³ आयतन घेरती है। उस दाब की गणना कीजिये जिस पर उस गैस का आयतन अपने मूल आयतन के 20 प्रतिशत तक घटेगा, जबकि ताप स्थिर है।
हल:
दिया गया है,
P1 = 0.92 bar
P2 = ?
V1 = 0.6 dm³
V2 = मूल आयतन का 20% घट जाये
20% घटाव = \(\frac{0.6 \times 20}{100}\)
V2 = मूल आयतन – 20% आयतन
= 0.6 – 0.12
= 0.48 dm³
बॉयल के अनुसार,
P1V1 = P2V2 (स्थिर ताप पर)
0.92 × 0.6 = P2 x 0.48
P2 = \(\frac{0.92 \times 0.6}{0.48}\)
= 1.15 bar

प्रश्न 8.
नाइट्रोजन की एक निश्चित मात्रा का 0.99 bar दाब और 25°C ताप पर आयतन 250 cm है उस ताप की गणना कीजिए जिस पर आयतन 150 cm³ और दाब 2 bar हो ।
हल:
दिया गया है.
P1 = 0.99 bar
P2 = 2 bar
V1 = 150 cm³
V1 = 250 cm³
T1 = 25+ 273
= 298K
T2 = ?
गैस समीकरण से,
\(\frac{P_1 V_1}{T_1}=\frac{P_2 V_2}{T_2}\)
\(\frac{0.99 \times 250}{298}=\frac{2 \times 150}{T_2}\)
T2 = \(\frac{2 \times 150 \times 298}{0.99 \times 250}\)
T2 = 361.21 K
T2 =361.21 – 273
= 88.21 °C
उत्तर-ताप 88.21 °C होगा।

प्रश्न 9.
423 K ताप तथा 0.987 bar दाब पर ऑक्सीजन गैस का आयतन 12.0 dm³ पाया गया है। ऑक्सीजन के द्रव्यमान की गणना कीजिये।
हल:
दिया गया है.
P = 0.987 bar
V = 12.0 dm³
R = 0.0831 bar dm³ K-1 mol-1
T = 423K
n = ?
आदर्श गैस समीकरण से,
PV = nRT
n = \(\frac { PV }{ RT }\)
= \(\frac{0.987 \times 12.0}{0.0831 \times 423}\)
n = 0.336 mol
ऑक्सीजन गैस का मोलर द्रव्यमान = 32 g mol-1
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 4
उत्तर-ऑक्सीजन गैस का द्रव्यमान 10.782 है।

प्रश्न 10.
PV= nRT सूत्र से 1 g हाइड्रोजन दाब पर आयतन की गणना कीजिए (R = 0.0821 L-atm K-1 mol-1)
हल:
प्रश्नानुसार, मानक दाब (P) = 1 atm
मान परमताप (T) = 273 K
मानक ताप और
R = 0.821 L-atm K-1 mol-1
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 5
∴ मा. ता. दाब पर 1g हाइड्रोजन का आयतन = 11.22 L

प्रश्न 11.
11 g कार्बन डाइऑक्साइड का मा. ता. दा. पर कितना आयतन होगा?
(R = 0.0821 L-atm K-1 mol-1)
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 6
∵ मानक दाब (P) = 1 atm
मानक ताप (T) = 273 K
अब आदर्श गैस समीकरण PV = RT से,
V = \(\frac { nRT }{ P }\)
= \(\frac{0.25 \times 0.821 \times 273}{1}\)
∴ मा. ता. दा. पर 11g कार्बन डाइऑक्साइड का आयतन = 5.6 L

प्रश्न 12.
एक लीटर के फ्लास्क में 7.6 x 10-10 mm (Hg) के दाब पर ऑक्सीजन गैस उपस्थित है। फ्लास्क में 0°C ताप पर ऑक्सीजन के अणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल:
आदर्श गैस समीकरण PV = nRT के लिए प्रश्नानुसार,
P = 7.6 x 10-10 mm (Hg)
= \(\frac{7 \cdot 6 \times 10^{-10} \mathrm{~mm}(\mathrm{Hg})}{760 \mathrm{~mm}(\mathrm{Hg})} \times 1 \mathrm{~atm}\)
= 1 × 10-12 atm
V = 1 L, R = 0.0821 L-atm K-1 mol-1
T = 0 + 273 = 273 K
∴ n = \(\frac { PV }{ RT }\)
= \(\frac{1 \times 10^{-12} \mathrm{~atm} \times 1 \mathrm{~L}}{0.0821 \mathrm{~L}-\mathrm{atm} \mathrm{K}^{-1} \mathrm{~mol}^{-1} \times 273 \mathrm{~K}}\)
= \(\frac{1 \times 10^{-12}}{0.0821 \times 273}\)
आवोगाद्रो के नियम के अनुसार 1 mol में अणुओं की संख्या = 6.022 x 1023
∴ ऑक्सीजन के अणुओं की संख्या
= n × 6.022 x 1023
= \(\frac{1 \times 10^{-12} \times 6.022 \times 10^{23}}{0.0821 \times 273}\)
= 2.69 x 1010
∴ ऑक्सीजन के अणुओं की संख्या = 2.69 × 1010

प्रश्न 13.
एक गैस 298 K ताप तथा 2 atm दाब पर 120 L आयतन घेरती है। जब इस गैस को 175 L निर्वातित कक्ष में स्थानान्तरित दें तो इस गैस के ताप की गणना कीजिये, यदि दाब प्रारम्भिक दाब का एक चौथाई हो जाता है।
हल:
दिया गया है,
T1 = 298 K
T2 = ?
P1 = 2 atm
P2 = 2 x \(\frac { 1 }{ 4 }\) = \(\frac { 1 }{ 2 }\) atm
V1 = 120 L
V2 = 175 L
गैस समीकरण से,
\(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}{\mathrm{~T}_2}\)
T2 = \(\frac{\mathrm{P}_2 \times \mathrm{V}_2 \times \mathrm{T}_1}{\mathrm{P}_1 \times \mathrm{V}_1}\)
= \(\frac{1 \times 175 \times 298}{2 \times 2 \times 120}\)
T2 = 108.64 K
T2 = 108.64 – 273
= – 164.35°C
उत्तर ताप 164.35 °C हो जायेगा।

प्रश्न 14.
27°C ताप पर 2.0 लीटर क्षमता के पात्र में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड के 1022 अणु भरे हुए हैं। पात्र में दाब की गणना कीजिये।
हल:
दिया गया है, T = 27 + 273 = 300 K
V = 2.0 L
R = 0.0821 L atm K-1 mol-1
P = ?
NO2 के मोलों की संख्या = \(\frac{10^{22}}{6.02 \times 10^{23}}\)
= \(\frac { 1 }{ 60.2 }\)
आदर्श गैस समीकरण से,
PV = nRT
P = \(\frac { nRT }{ V }\)
= \(\frac{1 \times 0.0821 \times 300}{60 \cdot 2 \times 2}\)
= 0.205 atm
उत्तर-पात्र में दाब 0.205 atm होगा।

प्रश्न 15.
एक गैस सिलेण्डर में शीतलक गैस भरी है। यह सिलेप्र 15 atm दाब सहन करने की क्षमता रखता है। इसका दाब मापक यन्त्र 27°C पर 12 atm दाब प्रदर्शित कर रहा है। भवन में अचानक आग
लग जाने से सिलेण्डर का ताप बढ़ने लगता है, किस ताप पर सिलेण्डर का विस्फोट हो जायेगा?
हल:
दिया गया है।
P1 = सिलेण्डर की क्षमता =15 atm
T1 = ? (वह ताप जिस पर सिलेण्डर फटेगा )
P2 = 12 atm
T2 = 27 + 273 = 300 K
हम जानते हैं।
\(\frac{P_1}{T_1}=\frac{P_2}{T_2}\)
\(\frac{15}{T_1}=\frac{12}{300}\)
T1 = \(\frac{300 \times 15}{12}\)
= 375 K
T1 = 375 – 273
= 102°C
उत्तर-विस्फोट का ताप 102°C

प्रश्न 16.
(i) किसी गैस के 3.8g ने 25°C ताप पर उतना ही आयतन ग्रहण किया जितना कि 0.18 g हाइड्रोजन ने 20°C ताप पर उसी दाब पर ग्रहण किया। उस गैस का अणुभार क्या है?
(ii) 27°C तथा 780cm दाब पर किसी गैस का आयतन 100 mL है तो N. T.P पर गैस का आयतन कितना होगा?
(iii) S. T.P पर किसी गैस के 0.2g का आयतन 55mL है तो इसका अणुभार बताएँ।
हल:
(i) दिया गया है,
w1 = 3.8 g
T1 = 25 + 273
= 298 K
W2 = 0.18g
T2 = 20 + 273
= 298 K
M2 = 2 g mol-1
हम जानते हैं कि,
PV = \(\frac { w }{ M }\)RT
यदि दाब व आयतन स्थिर है तो,
\(\frac{\mathrm{PV}}{\mathrm{R}}=\frac{w \mathrm{~T}}{\mathrm{M}}\) = स्थिरांक
अर्थात
\(\frac{w_1 \mathrm{~T}_1}{\mathrm{M}_1}=\frac{w_2 \mathrm{~T}_2}{\mathrm{M}_2}\)
\(\frac{3.8 \times 298}{\mathrm{M}_1}=\frac{0.18 \times 293}{2}\)
M1 = \(\frac{3.8 \times 298 \times 2}{0.18 \times 293}\)
M1 = 42.94 g mol-1
उत्तर-गैस का अणुभार 42.94g mol-1 है।

(ii) गैस समीकरण,
\(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}{\mathrm{~T}_2}\)
दिया गया है,
P1 = 780mm
P2 = 760 mm
T1 = 27 + 273 = 300 K
T2 = 273 K
V1 = 100ml
V2 = ?
V2 = \(\frac{\mathrm{P}_1 \times \mathrm{V}_1 \times \mathrm{T}_2}{\mathrm{P}_2 \times \mathrm{T}_1}\)
= \(\frac{780 \times 100 \times 273}{760 \times 300}\)
= 93.39 ml.
उत्तर-गैस का आयतन 93.39 ml होगा।

(iii) गैस के 55 ml का भार
= 0.2 g
S. T. P. पर गैस के 22400 ml का भार
= \(\frac{0 \cdot 2 \times 22400}{55}\)
= 81.45 g
S.T.P. पर 22400 mL गैस का भार = 1 ग्राम अणु भार
उत्तर-गैस का अणुभार = 81.45 g

HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ

प्रश्न 17.
एक गैस का ताप t K है किस ताप पर गैस का आयतन तथा दाब दोनों आधे हो जायेंगे। गणना कीजिये।
हल:
गैस समीकरण से,
\(\frac{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{~T}_1}=\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2}{\mathrm{~T}_2}\)
दिया गया
T1 = tK
T2 = ?
P1 = Pmm
P2 = P/2
V1 = VmL
V2 = V/2
मान रखने पर,
\(\frac{P_1 V_1}{T_1}=\frac{P_2 V_2}{T_2}\)
T2 = \(\frac{\mathrm{P}_2 \mathrm{~V}_2 \mathrm{~T}_1}{\mathrm{P}_1 \mathrm{~V}_1}\)
T2 = \(\frac{\mathrm{P} \times \mathrm{V} \times \mathrm{t}}{2 \times 2 \times \mathrm{P} \times \mathrm{V}}\)
T2 = \(\frac { t }{ 4 }\)
T2 = 0.25/K

प्रश्न 18.
एक गुब्बारे में 600 mL गैस भरी हुई है। गुब्बारे में पंक्चर हो जाने के कारण 2.5 घण्टे के बाद इसमें 155ml गैस शेष बची जिसका दाब 745mm पाया गया। पंक्चर होने से पूर्व गुब्बारे में गैस का दाब ज्ञात कीजिये।
हल:
दिया गया है,
पंक्चर के बाद P1 = 745mm V1 = 155mL.
पंक्चर के पूर्व P2 = ? V2 = 600mL.
बॉयल के नियम से,
P1V1 = P2V2(स्थिर ताप पर )
745 x 155 = P2 × 600
P2 = \(\frac{745 \times 155}{600}\)
= 192.46 mm
उत्तर-पंक्चर से पूर्व गुब्बारे का दाब 192.46 mm है।

प्रश्न 19.
एक बर्तन जिसका आयतन 2.461 लीटर है में 27°C पर 0.3 मोल N2, 0.5 मोल He तथा 6.2 मोल O2 है। मिश्रण में गैसों का आशिक दाब ज्ञात करो।
हल:
प्रथम विधि
आदर्श गैस समीकरण से,
P = \(\frac { nRT }{ V }\) = 27 + 273300K,
R = 0.0821 L atm K-1 mol-1
V = 2.461 L
नाइट्रोजन गैस का आंशिक दाब,
PN2 = \(\frac{0.3 \times 0.0821 \times 300}{2.461}\)
= 3.002 atm
हीलियम गैस का आंशिक दाब,
P’He = \(\frac{0.5 \times 0.0821 \times 300}{2.461}\)
= 5.004 atm
ऑक्सीजन गैस का आंशिक दाब
P’O2 = \(\frac{6.2 \times 0.0821 \times 300}{2.461}\)
= 62.050 atm
द्वितीय विधि
मिश्रण उपस्थित कुल मोलों की संख्या
= 0.3 + 0.5 + 6.2
= 7 मोल
कुल दाब ‘PT‘ = \(\frac{n \times \mathrm{R} \times \mathrm{T}}{\mathrm{V}}\)
= \(\frac{7 \times 0.0821 \times 300}{2.461}\)
= 70.06 atm
आंशिक दाब = कुल दाब x मोल प्रभाज
नाइट्रोजन गैस का आंशिक दाब
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 7
हीलियम गैसे का आंशिक दाब
P’He = \(\frac{70 \cdot 06 \times 0.5}{7}\)
= 5.004 atm
ऑक्सीजन गैस का आंशिक दाब
P’O2 = \(\frac{70.06 \times 6.2}{7}\)
= 62.050 atm

प्रश्न 20.
एक पात्र में भरी हुयी H2 और N2 गैस के मिश्रण का दाब 750 bar है। यदि मिश्रण में N2 का आंशिक दाब 150 bar हो तो मिश्रण में H2 और N2 के अणुओं का अनुपात क्या होगा ?’
उत्तर:
मिश्रण का कुल दाब – 750 bar
N2 का आंशिक दाब (PN2) = 150 bar
H2 का आंशिक दाब (PH2) = 750 – 150 = 600 bar
आदर्श गैस समीकरण के अनुसार,
PN2 = \(\frac{n_{\mathrm{N}_2} \mathrm{RT}}{\mathrm{V}}\) = 150 bar
PH2 = \(\frac{n_{\mathrm{H}_2} \mathrm{RT}}{\mathrm{V}}\) = 600 bar
चूँकि आयतन V तथा ताप T समान हैं।
\(\frac{\mathrm{P}_{\mathrm{H}_2}}{\mathrm{P}_{\mathrm{N}_2}}=\frac{n_{\mathrm{H}_2}}{n_{\mathrm{N}_2}}\)
\(\frac{600}{150}=\frac{n_{\mathrm{H}_2}}{n_{\mathrm{N}_2}}\)
\(\frac{4}{1}=\frac{n_{\mathrm{H}_2}}{n_{\mathrm{N}_2}}\)
nH2 : nN2 = 4 : 1

प्रश्न 21.
एक मिश्रण में गैस A के 20g और गैस B के 1.4 g मिश्रित किये गये हैं। यदि A तथा B के मोलर द्रव्यमान क्रमशः 120 और 90 हैं तथा मिश्रण का कुल दाब 0.921 bar हो तो A तथा B का आशिक दाब ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 8

प्रश्न 22.
पोटैशियम क्लोरेट (KClO3) की वह मात्रा ज्ञात कीजिये जिसे 28°C ताप तथा 750 mm of Hg दाब पर 2.5 लीटर ऑक्सीजन प्राप्त करने हेतु गर्म किया जाना चाहिये।
हल:
N.T.P. पर मुक्त ऑक्सीजन के आयतन की गणना।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 9
67.2 L O2 मुक्त करने के लिये आवश्यक KClO3 की
मात्रा = 245 g
1.0 L O2 मुक्त करने के लिये आवश्यक
KClO3 की मात्रा = \(\frac { 245 }{ 67.2 }\)g
2.34 L O2 मुक्त करने के लिये आवश्यक KClO3 की मात्रा
= \(\frac{245 \times 2.34}{67 \cdot 2}\)
= 8.53g

प्रश्न 23.
जब 0.5 g जिंक चूर्ण (जो कि ZnO तथा Zn) से बना हुआ है, को तनु H2SO4 में घोला जाता है तो N. T. P. पर 150ml H2 गैस मुक्त होती है। जिंक चूर्ण में जिंक की प्रतिशतता ज्ञात कीजिये।
(जिंक का परमाणु द्रव्यमान = 65 g mol-1)
हल:
जिंक चूर्ण में उपस्थित Zn तथा ZnO दोनों ही तनु H2SO4 के साथ क्रिया करते हैं। परन्तु केवल Zn ही H2 गैस को मुक्त करती।
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 10
22400 mL H2 मुक्त करने ठीक करे लिये आवश्यक Zn = 65 g 150 mL
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 11

प्रश्न 24.
10.0 g शुद्ध मार्बल को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ उपचारित करने पर 30°C ताप और 800mm पर CO2 का कितना आयतन प्राप्त होगा। यदि 30°C ताप पर जलीय तनाव 26.7 mm है।
हल:
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 12
100 g CaCO3 गर्म करने पर देता है
= 22400 mL CO2
10.0 g CaCO3 गर्म करने पर देगा
= \(\frac{22400 \mathrm{~mL} \times 10}{100}\) = 2240 ml
CO2 के आयतन की गणना-
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 13

प्रश्न 25.
वान्डर वाल स्थिराकों तथा के मान क्रमश: 1.32 dm6 bar mol-2 तथा 0.0312 dm³ mol-1 हों तो ऑक्सीजन के लिये क्रान्तिक ताप तथा क्रान्तिक दाब का मान ज्ञात करें।
हल:
a = 1.32 dm6 bar mol-2
b = 0.0312 dm³ mol-1
R = 0.0821 dm³ bar mol-1 K-1
ऑक्सीजन का क्रान्तिक ताप
(TC) = \(\frac{8 a}{27 \mathrm{R} b}\)
= \(\frac{8 \times 1.32}{27 \times 0.0821 \times 0.312}\)
= 152.69 K
ऑक्सीजन का क्रान्तिक दाव
(PC) = \(\frac{a}{27 b^2}\)
= \(\frac{1.32}{27 \times(0.0312)^2}\)
= 50.22 bar

प्रश्न 26.
एक मोल वान्डर वाल गैस का °C तथा 100 atm दाब पर संपीडक गुणांक 0.5 है। गैस के अणुओं का आयतन नगण्य मानते हुए वान्डर बाल स्थिरांक ‘a’ की गणना कीजिए।
हल:
संपीडक गुणांक (Z) = \(\frac { PV }{ RT }\)
0.5 = \(\frac{100 \times V}{0.0821 \times 273}\)
V = 0.112 लीटर
वान्डर वाल समीकरण के अनुसार,
\(\left(\mathrm{P}+\frac{a}{\mathrm{~V}^2}\right)\) (V – b) = RT
यदि b नगण्य है तो,
\(\left[100+\frac{a}{(0 \cdot 112)^2}\right]\) [0.112 – 0] = 0.0821 × 273
a = 1.253 ली.² मोल-2 वायुमण्डल

प्रश्न 27.
किसी गैस के 2 मोल 4 लीटर के फ्लास्क में 300 K पर 11 atm दाब दिखाते हैं। यदि ‘b’ का मान 0.05 लीटर / मोल है तो वान्डर वाल स्थिरांक ‘a’ का मान बताएँ।
हल:
दिया है,
P = 11 atm, V = 4, b = 0.05 L/mol, n = 2, T = 300 K
HBSE 11th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ 14

प्रश्न 28.
300 K तथा 40 atm दाब पर 1 मोल CO2, 0.4 लीटर आयतन घेरती है। इसका संपीडक गुणांक ज्ञात कीजिये ।
हल:
संपीडक गुणांक (Z) = \(\frac{\mathrm{PV}}{n \mathrm{RT}}\)
= \(\frac{40 \times 0 \cdot 4}{1 \times 0 \cdot 0821 \times 300}\)
Z = 0.65

प्रश्न 29.
एक निऑन-डाइऑक्सीजन मिश्रण में 70.6g डाइ-ऑक्सीजन तथा 167.5g निऑन है। यदि गैसों के मिश्रण का कुल दाब 25 bar हो तो मिश्रण में निऑन तथा डाइऑक्सीजन का आंशिक दाब क्या होगा ?
हल:
= \(\frac{70 \cdot 6 \mathrm{~g}}{32 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}\)
= 2.21 mol
निऑन के मोलों की संख्या
= \(\frac{167 \cdot 5 \mathrm{~g}}{20 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}\) = 8.375 mol
डाइऑक्सीजन के मोल अंश
= \(\frac{2 \cdot 21}{2 \cdot 21+8 \cdot 375}=\frac{2 \cdot 21}{10 \cdot 585}=0 \cdot 21\)
निऑन के मोल अंश
= \(\frac { 8.375 }{ 10.585 }\) = 0.79
(अन्य रूप में निऑन के मोल अंश = 1 – 0.21 = 0.79)
गैस का आंशिक दाब = मोल अंश x कुल दाब
ऑक्सीजन का आंशिक दाब
= 0.21× 25 bar = 5.25 bar
निऑन का आंशिक दाब
= 0.79 × 25 bar = 1975 bar

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