Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नांकित चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए –
(i) केंद्रीय प्रवृत्ति का जो माप चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है वह है ?
(क) माध्य
(ख) माध्य तथा बहुलक
(ग) बहुलक
(घ) माध्यिका
उत्तर:
(क) माध्य।

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(ii) केंद्रीय प्रवृत्ति का वह माप जो किसी वितरण के उभरे भाग से हमेशा संपाती होगा वह है –
(क) माध्यिका
(ग) माध्य
(ख) माध्य तथा बहुलक
(घ) बहुलक।
उत्तर:’
(ख) माध्य तथा बहुलक।

(iii) ऋणात्मक सहसंबंध वाले प्रकीर्ण अंकन में अंकित मानी के वितरण की दिशा होगी –
(क) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ
(ख) नीचे बाएँ से ऊपर दाएँ
(ग) बाएँ से दाएँ
(घ) ऊपर दाएँ से नीचे बाएँ।
उत्तर:
(क) ऊपर बाएँ से नीचे दाएँ।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) माध्य को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
माध्य इसे औसत मान भी कहा जाता है। यह एक औसत कई मात्राओं के योग का निरूपक होता है। यह एक ऐसी संख्या होती है जो न्यूनाधिक रूप में संख्याओं की श्रृंखला को निरूपित या प्रदर्शित करती हैं। अतः औसत को कुल जनसंख्या के एक मध्यवर्ती मान या प्रवृत्ति के रूप में लिया जा सकता है इसका मूल्य अधिकतम तथा न्यूनतम मूल्य के बीच होता है।

(ii) बहुलक के उपयोग के क्या लाभ हैं? उत्तर – बहुलक के उपयोग के लाभ इस प्रकार हैं –
1. बहुलक की गणना सरलता से निरीक्षण विधि द्वारा की जा सकती है।
2. बहुलक पर श्रृंखला के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता।
3. किसी श्रृंखला में सबसे अधिक बार आने के कारण, यह उसका सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
4. अंकों के प्रभाव की हालत में भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता
5. बहुलक की व्यावहारिक उपयोगिता अधिक है किसी वस्तु की अधिक मात्रा के कारण उसका उत्पादन अधिक होता है।
6. बहुलक को रेखाचित्र द्वारा भी प्रदर्शित करके इसे सरल रूप दिया जा सकता है।

(iii) अपकिरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
अपकिरण केंद्रीय प्रवृत्तियों के अंकों के बिखराव के मापन से संबंधित है अपरिकण किसी हदों के मापन के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है जो किसी व्यक्तिगत विषय तथा संख्यात्मक आंकड़ों की प्रवृत्ति के बदलाव अथवा औसत मूल्य के फैलाव से संबंधित है। इसलिए हम कह सकते हैं कि अपकिरण एक डिग्री है। जो फैलाव या प्रकीर्ण अथवा केंद्रीय मानक मापन के फेरबदल से संबंधित है।

(iv) सहसंबंध किसे कहते हैं?
उत्तर:
सहसंबंध (Correlation ) –
दो भिन्न प्रकार के चरों के एक बंटन को दविचरीय वितरण कहते हैं, ये दोनों चर उस अवस्था में आपस में सह-संबंधित कहलाते हैं जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर में संगती परिवर्तन उत्पन्न होता है। प्रथम चर जिसके कारण दूसरे चर में परिवर्तन होता है स्वतंत्र (x) कहलाता है जबकि दूसरा चर आश्रित चर (v) के रूप में जाना जाता है। दो चरों के मध्य साहचर्य की मात्रा तथा दिशा का आंकलन सरल अथवा द्विचर सह संबंध कहलाता है सह संबंध की माप का सर्वाधिक प्रचलित स्वरूप पियर्सन का गुणन आघूर्ण सह संबंध गुणांक (r) है। का मूल्य +1 से 1 के बीच प्रसारित होता है।

(v) पूर्ण सहसंबंध किसे कहते हैं?
उत्तर:
पूर्ण सहसंबंध दो चरों के मध्य विशिष्ट साहचार्य को दर्शाने के लिए प्रयोग होता है यह दो मानों के बिखराव अथवा प्रकीर्णन दर्शाते हैं। इसे प्रकीर्ण आरेख अथवा प्रकीर्ण अंकन भी कहते हैं जब एक सरल रेखा प्रकीर्ण आरेख के निचले बाएँ से ऊपरी दाएँ भाग की ओर जाती है तो वह पूर्ण धनात्मक सहसंबंध कहलाता है। सहसंबंध को अधिकतम सीमाएँ 1 (एक) होती है। यह 1 से ज्यादा कभी भी नहीं हो सकती। सहसंबंध 1 को पूर्ण सहसंबंध कहते हैं।

(vi) सहसंबंध की अधिकतम सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर:
सहसंबंध की अधिकतम सीमाएँ (एक) होती है। यह 1 से ज्यादा कभी भी नहीं हो सकती।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए –
(i) आरेखों की सहायता से सामान्य तथा विषम वितरणों में माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की सापेक्षिक स्थितियों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
केन्द्रीय प्रवृत्ति के तीनों मापों की तुलना सामान्य वितरण वक्र की सहायता से आसानी से की जा सकती है। यह इस प्रकार है –
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सामान्य वितरण की एक विशेषता होती है। इसमें माध्य, माध्यिका तथा बहुलक का मान समान होता है क्योंकि वितरण सामान्य सममित होता है। ज्यादातर इकाइयाँ वितरण के माध्य में अथवा माध्य के निकट होती है। ज्यादा उच्च तथा ज्यादा निम्न मूल्यों की बारंबारता अधिक नहीं होता तथा विरले ही होते हैं। अगर आंकड़े किसी प्रकार विषम और विकृत हो तो माध्य, माध्यिका और बहुलक संपाती नहीं होंगे और विषम आंकड़ों के प्रभाव पर विचार करने की जरूरत है।
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(ii) माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
माध्य, माध्यिका तथा बहुलक काफी उपयोगी हैं इनकी विशेषता इस प्रकार है-

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माध्य –
1. सरलता – समांतर माध्य सभी केंद्रीय प्रवृत्तियों में से उत्तम है जिसे समझना सरल है।
2. प्रतिनिधि मूल्य- माध्य सभी मूल्यों का प्रतिनिधि मूल्य है।
3. निश्चित मूल्य – समांतर माध्य सदा एक ही रहता है जिसका निश्चित मूल्य होता है।
4. स्थिर मूल्य- माध्यम का स्थिर मूल्य होता है। किसी श्रेणी के निर्देशन में परिवर्तन से प्रभाव नहीं पड़ता। यह संतुलित मूल्य है।

माध्यिका –
1. माध्यिका ज्ञात करना एक सरल विधि है।
2. माध्यिका चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती है।
3. अपूर्ण आँकड़ों के बावजूद इसकी गणना की जा सकती है।4. खुले सिरे वाली श्रृंखला में माध्यिका का मूल्य सुगमता से प्राप्त हो जाता है।
5. माध्यिका का मूल्य ग्राफ की सहायता से भी ज्ञात किया जा सकता है।
6. माध्यिका का मूल्य सदैव निश्चित होता है।

बहुलक –
1. बहुलक की गणना सरलता से निरीक्षण विधि द्वारा की जा सकती है।
2. बहुलक पर श्रृंखला के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता।
3. किसी शृंखला में सबसे अधिक बार आने के कारण, यह उसका सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
4. अंकों के अभाव की हालत में भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।
5. बहुलक की व्यावहारिक उपयोगिता अधिक है। किसी वस्तु की अधिक मात्रा के कारण उसका उत्पादन अधिक होता है।

(iii) एक काल्पनिक उदाहरण की सहायता से मानक विचलन के गणना की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
विचलन के माप की दूसरी विधि, जो औसत माध्य का प्रयोग कर प्राप्त की जाती है मानक विचलन कहलाती है। इसे वर्ग माध्य-मूल विचलन भी कहते हैं। मानक विचलन किसी श्रेणी के | विभिन्न मूल्यों के समांतर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है। इसे ग्रीक भाषा के अक्षर (σ) सिगमा से प्रकट किया जाता है।

(σ) सिगमा
मानक विचलन की गणना की प्रक्रिया। निम्नलिखित उदाहरण की सहायता से मानक विचलन की गणना की जाती है –
(सिगमा) σ = \(\sqrt{\frac{\sum(x-\bar{x})^2}{N}}\) यहाँ σ = मानक विचलक (S.D)
\(\sum(x-\bar{x})^2\) = Sum total of squares of Deviation
N = Numbers of items.
उपरोक्त विधि अधिक उबाऊ बन जाती है अगर x की कीमत दशमलव पाइंट में तथा प्रेक्षणों की संख्या बहुत बड़ी हो। इस हालात में हम निम्नलिखित shortcut method का प्रयोग कर सकते हैं-
\(\sqrt{\frac{\sum x^2}{N}-\left(\frac{\sum \bar{x}}{N}\right)^2}\)

उदाहरण:
निम्नलिखित तालिका हमें वर्षा के पिछले दस सालों के आंकड़े पेश करता है। मानक विचलक की गणना –
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(iv) प्रकीर्णक का कौन-सा माप सबसे अधिक अस्थिर है तथा क्यों ?
उत्तर:
यह देखा जाता है कि माध्य दो आंकड़ों के समूहों से प्राप्त किया जाता है। जैसे कि इन तालिकाओं में दिखाया गया है –
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इन तालिकाओं में माध्य एकसमान है जो 50 है। तालिका में उच्चतम व निम्नतम मान क्रमशः 55 तथा 45 हैं। तालिका में दिए गए वितरण में ये अधिकतम तथा न्यूनतम मान क्रमश: 98 तथा 00 हैं। यहां पर दोनों ही वितरणों का माध्य एकसमान है। तथा द्वितीय वितरण जो कि अधिक अस्थिर तथा विषम है कि अपेक्षा प्रथम वितरण स्थिर और समरूप हैं। इससे हमें वितरण या श्रेणी के संघटन की प्रकृति का ज्ञान होता है तथा इसकी सहायता से दिए हुए वितरण की तुलना स्थिरता अथवा समरूपता के आधार पर हो जाती है।

(v) सहसंबंध की गहनता पर एक विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जब सहसंबंध की दिशा ऋणात्मक तथा धनात्मक के विषय में संदर्भ आ जाता है तो स्वाभाविक तौर पर यह जानने के लिए जिज्ञासा जागृत होती है कि दोनों चरों में अनुरूपता तथा साहचर्य की गहनता की मात्रा कितनी है। इस साहचर्य की गहनता की मात्रा गणितीय दृष्टि से अधिकतम 1 (एक) तक होती हैं। इस मात्रा में सहसंबंध की दिशा का पहलू जोड़ने पर इसका अधिकतम विस्तार – 1 से शून्य की ओर होते हुए +1 तक होता है। इसका मान किसी भी स्थिति में एक से ज्यादा नहीं हो सकता।

(vi) कोटि सहसंबंध की गणना से विभिन्न चरण कौन-से हैं ?
उत्तर:
निम्नलिखित चरणों के द्वारा कोटि सहसंबंध की गणना की जा सकती है –
(1) आंकड़े के अनुकरण से संबंधित X-Y परिवर्ती या जो कि अभ्यास में दी गयी है अथवा उनकी पहले तथा दूसरे कॉलम में रखकर तालिका बना ली।
(2) दोनों परिवर्तीयों की अलग-अलग दर्जों में दो-दो । X – दर्जी की परिवर्ती को तीसरे चरण में रिकार्ड कर XR (Rank dx ) शीर्षक दिया जाए। इसी प्रकार रैंक Y- परिवर्ती (YR) को चौथे चरण में रखा जाए।
(3) अब दोनों XR अथवा YR को प्राप्त करने के बाद दोनों ही सैटों के रैंक का रिकार्ड करके पांचवें चरण में रखा जाए।
(4) इस प्रकार के हर मतभेद के चौकोर और अन्य कॉलमों को प्राप्त किया जाए और इनके मान को छठवें कॉलम में लिखा जाए।
(5) इसके बाद रैंक सहसंबंध की संगणना की जाए, निम्नलिखित समता का प्रयोग करके –
\(\mathrm{P}=1-\frac{6 \sum \mathrm{D}^2}{\mathrm{~N}\left(\mathrm{~N}^2-1\right)}\) यहाँ पर P = Rank Correlation
ED2 = Sura of the squares of the difference between two sets of Ranks
N = The number of pairs of X-Y.

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अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
केंद्रीय प्रवृत्तियों के माप से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
केंद्रीय प्रवृत्तियों के माप – ‘केंद्रीय प्रवृत्ति के माप’ सांख्यिकी विश्लेषण की एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है। कई बार संपूर्ण आँकड़ों के लिए एक प्रतिनिधि मान को प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है। यह मान विभिन्न आँकड़ों के बीच तुलना करने में सहायक होते हैं। यह माप सभी आँकड़ों के मध्य या केंद्र में होता है, इसलिए इसे केंद्रीय प्रवृत्ति के माप कहते हैं। ऐसे सारांश मान जो विभिन्न बंटन – निरूपकों को दर्शाते हैं, उनको केंद्रीय प्रवृत्ति के मापक कहते हैं। (The summary values that are representative of the various distributions are known as measures of central tendency.) इन मापों में प्रमुख निम्नलिखित माप हैं –
(i) माध्य अथवा औसत (Average or Mean)
(2) माध्यिका (Median)
(3) बहुलक (Mode)

प्रश्न 2.
माध्य किसे कहते हैं ? इसके प्रकार बताओ।
उत्तर:
माध्य (Mean ):
इसे औसत मान भी कहा जाता है। माध्य या औसत कई मात्राओं के योग का निरूपक होता है। यह एक ऐसी संख्या होती है जो न्यूनाधिक रूप में संख्याओं की श्रृंखला को निरूपित या प्रदर्शित करती है। अतः औसत को कुल जनसंख्या के एक मध्यवर्ती मान या प्रवृत्ति के रूप में लिया जा सकता है। इसका मूल्य अधिकतम तथा न्यूनतम मूल्य के बीच होता है।

माध्य तीन प्रकार के होते हैं –
(1) अंकगणितीय माध्य
(2) ज्यामितीय माध्य
(3) हरात्मक (हारमोनिक) माध्य।

प्रश्न 3.
अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean) से क्या अभिप्राय है ? यह किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर;
अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean ):
केंद्रीय प्रवृत्ति के माप का सबसे सरल रूप माध्य है, सभी भिन्न-भिन्न मानों के योग की कुल संख्या से भाग देने पर माध्य ज्ञात होता है।
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उदाहरण – किसी गांव के पांच विभिन्न परिवारों की मासिक आय ₹100, ₹80, ₹120, ₹90 और ₹60 हैं तो इन परिवारों की माध्य आय =
(1) यह एक सरल विधि है।
(2) श्रेणी के सभी मदों को जोड़ कर ज्ञात करें।
(3) सभी मदों की गिनती ज्ञात करें।
\(\bar{X}=\frac{100+80+120+90+60}{5}=\frac{450}{5}=₹ 90\)
माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\sum x}{n}\)

1. अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए (For Ungrouped Data) –
किसी भी क्षेत्र में कृषक परिवारों की संख्या तथा X1, X2, X3,………… Xn क्रमश: पहले, दूसरे, तीसरे और वें किसान परिवार की आय को प्रकट करें तो माध्य
\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\mathrm{X}_1+\mathrm{X}_2+\mathrm{X}_3 \ldots \ldots \ldots \mathrm{X}_n}{n}\) = \(\frac{\Sigma X}{n}\)
(जबकि \(\overline{\mathrm{x}}\) = माध्य ∑X = प्रेक्षणों का योग n = संख्या)

2. वर्गीकृत आँकड़ों के लिए (For Grouped Data):
इस अवस्था में माध्य निकालने की दो विधियां हैं –
(1) प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
(2) लघु विधि (Short-cut Method)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों के आधार पर माध्य निकालो-
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उत्तर:
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method):
(1) यह एक सरल विधि है। इसमें मदों के साथ आवृत्ति (x) भी दी जाती है।
(2) प्रत्येक मद का मध्यमान (x) ज्ञात करो। इसे आवृत्ति (f) से गुणा करके f (x) ज्ञात करो।
(3) सभी मदों के f (x) का योग ज्ञात करो तथा इसे मदों की संख्या से भाग दें।
\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\sum f(x)}{n}\)
माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f x}{n}=\frac{390}{30}\) = 13 acres.

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2. लघु विधि (Short-cut Method):
(1) प्रत्येक मद (वर्ग) का माध्य मूल्य (x) ज्ञात करो।
(2) एक मद को कल्पित माध्य (अस्थायी माध्य) मान लो (A)
(3) प्रत्येक माध्य मूल्य (x) से कल्पित मूल्य (A) घटा कर विचलन (dx) ज्ञात करो ।
(4) प्रत्येक मद की आवृत्ति (f) को विचलन से गुणा करो तथा इनका योग ∑f (dx) ज्ञात करें।
\(\overline{\mathrm{X}}=\mathrm{A}+\frac{\Sigma f d \overline{\mathrm{X}}}{n}\)

अस्थायी माध्य A =12.5 acres
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\(\overline{\mathrm{X}}=\mathrm{A}+\frac{\Sigma f d x}{n}\) = 12.5 + \(\frac {15}{30}\) = 13acres

प्रश्न 5.
निम्नलिखित तालिका में दिए गए आँकड़ों का माध्य निकालो।
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उत्तर:
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method):
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\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f x}{n}=\frac{3000}{100}\) = 30 Marks

2. लघु विधि (Short-cut Method) –
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माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\mathrm{A}+\frac{\sum f d x}{n}\) = 25 + \(\frac {500}{100}\) = 30 marks.

प्रश्न 6.
निम्नलिखित तालिका में किसी स्थान की वर्षा के आँकड़े दिए गए हैं। माध्य ज्ञात करो ।
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उत्तर:
1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method)
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माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f \cdot x}{n}=\frac{4595}{90}\) = 51.06m.m

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2. अप्रत्यक्ष विधि (Indirect method):
अस्थायी (कल्पित) माध्य = A = 50
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माध्य = \(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f \cdot x}{n}=\frac{4595}{90}\)
= 50 + \(\frac {95}{90}\)
= 50 + 1.06 = 51.06 m. m

प्रश्न 7.
50 छात्रों द्वारा प्राप्त अंकों का प्रतिशत निम्नलिखित है। माध्य ज्ञात करो।
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उत्तर:
अंकगणितीय माध्यम की गणना निम्न चरणों में की जाएगी –
चरण (Step):
1. न्यूनतम मान (L) और अधिकतम मान (H) की प्राप्ति।
(यहां L = 46 तथा H = 96)

चरण (Step) 2.
परिसर की गणना करने के लिए अधिकतम से न्यूनतम को घटाएं।
परिसर R = अधिकतम न्यूनतम (R =H – L) = 96 – 46 = 50

चरण (Step) 3.
परिसर को इच्छित संख्या के वर्गों (N) से विभाजित कर वर्ग अंतराल (C. I.) निर्धारित करें।
वर्ग अंतराल C. I. = \(\frac {परिसर}{वर्ग N}\)
5 वर्ग (N) लेने पर अंतराल = \(\frac {50}{5}\) = 10
वर्गों की यह संख्या न तो बहुत अधिक होनी चाहिए और नही बहुत कम।

चरण (Step) 4.
वर्ग सीमा का निर्धारण करें। (निचली तथा ऊपरी सीमा) इसके लिए वर्ग अंतराल को न्यूनतम मान (L) के साथ उतनी बार जोड़ें जब तक कि अधिकतम मान (H) प्राप्त न हो जाए।
इस प्रकार न्यूनतम सीमा अगली सीमा अगली सीमा
इस प्रकार न्यूनतम सीमा = 46 (निम्नतम मान L )
अगली सीमा = 46 + (10 × 1 ) = 56
अगली सीमा = 46 + (10 × 2) = 66
अगली सीमा = 46 + (10 × 3 ) = 76
अगली सीमा = 46 + (10 × 4 ) = 86
और अधिकतम सीमा = 46 + (10 × 5 ) = 96 (अधिकतम मान H )
अतः
प्रथम I वर्ग होगा – 46 से 56
II वर्ग होगा – 56 से 66
III वर्ग होगा – 66 से 76
IV वर्ग होगा – 76 से 86
वर्ग होगा – 86 से 96

चरण (Step) 5.
आँकड़ों को बारंबारता सारणी में 5 वर्गों सहित मिलान चिह्नों की सहायता से व्यवस्थित करें।
सारणी-अंकों का बारंबारता बंटन
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चरण (Step) 6.
अब बारंबारता को उनके संगत मानों से गुणा करें, उन्हें जोड़कर प्राप्त करते हैं। ∑fxm

चरण (Step) 7.
अंकगणितीय माध्य की गणना सूत्र का प्रयोग करें,
\(\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma f x m}{\Sigma f}\) = \(\frac{3750}{50}\) = 75
नोट – बारंबारता की संकल्पना का प्रयोग अन्य प्रकार के औसतों/ माध्यों की गणना से भी किया जाता है।

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प्रश्न 8.
समांतर माध्य के गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
समांतर माध्य (Arithmatic Mean) के गुण (Merits) –
1. सरल (Simple)-समांतर माध्य सभी केंद्रीय प्रवृत्तियों में से सरल है जिसे समझना बहुत सरल है।
2. प्रतिनिधि मूल्य (Representative Value )-माध्य सभी मूल्यों का प्रतिनिधि मूल्य है।
3. निश्चित मूल्य (Certain Value )-समांतर माध्य सदा एक ही रहता है जिसका निश्चित मूल्य होता है।
4. स्थिर मूल्य (Stable Value )-माध्यम का स्थिर मूल्य होता है। किसी श्रेणी के निर्देशन ( Sample) में परिवर्तन से प्रभाव नहीं पड़ता। यह संतुलित मूल्य है।
5. समूह की तुलना (Comparison )-माध्य की सहायता से अंकों के समूहों की तुलना करना आसान है।
n = 90 ∑f.dx = 95

दोष (Demerits) –
1. चरम मूल्यों का माध्य पर प्रभाव (Effect of Extreme Values)-बहुत बड़ी या बहुत छोटी संख्या माध्य पर प्रभाव डालती है।
उदाहरण:
एक कम्पनी के मैनेजर का मासिक वेतन ₹50,000 है तथा अन्य तीन क्लर्कों का वेतन ₹3,500, 1,500, 1,000 है।
औसत वेतन = \(\frac{50,000+3,500+1,500+1,000}{4}\) = ₹14,000 यह वेतन प्रतिनिधि मूल्य नहीं है।
2. अप्रतिनिधि तथा अवास्तविक – समांतर माध्य श्रेणी में उपस्थित नहीं होता।
3. हास्यप्रद परिणाम – समांतर माध्य से कई बार हास्यप्रद तथा असंगत परिणाम निकलते हैं।
4. भ्रमात्मक निष्कर्ष कई बार समांतर माध्य की सहायता से प्राप्त निष्कर्ष भ्रमात्मक होते हैं।

प्रश्न 9.
गुणोत्तर माध्य किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट करो।
उत्तर:
गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean):
n मानों का गुणोत्तर माध्य उदाहरणतः x1,x2,x3,x4, ……………. xn मानों के भागफल के वें वर्गमूल के रूप में परिभाषित किया जाता है। अतः इसे गणितीय रूप में निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है –
गुणोत्तर माध्य = \(\left(x_1, x_2, x_3, x_4, \ldots \ldots \ldots x_n\right)^{\frac{1}{n}}\)
= \(\left(x_1 x_2 x_3 \ldots \ldots \ldots x_n\right)^{\frac{1}{n}}\) निम्नलिखित उदाहरण की सहायता से गुणोत्तर माध्य की गणना की जा सकती है।
उदाहरण:
अर्थव्यवस्था में चार वर्षों की वृद्धि दर को क्रमशः 4, 8, 8 तथा 16 प्रतिशत दिया गया है।
अतः गुणोत्तर माध्य = \((4 \times 8 \times 8 \times 16)^{\frac{1}{4}}\)
यहां n = 4 है क्योंकि मदों की संख्या 4 है।
= 4 × 8 × 8 × 16 = 4096
= 4096 का चतुर्थ मूल 8 प्रतिशत।

गुणोत्तर माध्य के उपयोग-गुणोत्तर माध्य अधिक उपयोगी औसत होता है अगर आँकड़े अनुपात के रूप में हों। अगर आँकड़े परिवर्तन के रूप में हो तो असंगत परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

प्रश्न 10.
माध्यिका किसे कहते हैं ? इसे किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर:
माध्यिका (Median ) – यह केंद्रीय प्रवृत्ति का एक मुख्य माप है। इसका अर्थ है-मध्य मूल। किसी भी श्रेणी की माध्यिका वह मूल्य है जो श्रेणी को दो बराबर भागों में बांटता है। एक भाग में वे मूल्य होते हैं, जो माध्यिका से अधिक होते हैं तथा दूसरे भाग में वे मूल्य होते हैं, जो माध्यिका से कम होते हैं। उदाहरण के लिए 40, 42, 38, 45, 50, 52, 55 की माध्यिका 45 है। माध्यिका किसी दी हुई श्रृंखला के मानों का औसत होता है। इस पर श्रृंखला की चरम सीमाओं का प्रभाव नहीं पड़ता है।

माध्यिका ज्ञात करना –
अवर्गीकृत आँकड़ों के लिए (For Ungrouped Data):
(1) माध्यिका प्राप्त करने के लिए हम पहले आँकड़ों को आरोही तथा अवरोही क्रम में रखते हैं।
(2) इस प्रकार श्रृंखला के मध्य में जो मूल्य आता है, वहा माध्य कहलाता है।
(3) जब आँकड़ों की संख्या विषय ( odd ) हो तो माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र –
M = \(\text { Size of }\left(\frac{N+1}{2}\right) \text { th item }\)
M = माध्यिका
N = मदों की संख्या

(4) जब आँकड़ों की संख्या सम (Even) हो तो माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र
M = \(\frac{1}{2}\left(\frac{\mathrm{N}}{2} \text { th Item }+\frac{\mathrm{N}}{2}+1 \text { th item }\right)\)
मान लो किसी श्रेणी में 8 संख्याएं हैं तो \(\frac {N}{2}\) संख्या 4th संख्या होगी तथा \(\frac {N}{2}\) + 1 संख्या 5th संख्या होगी। इस प्रकार चौथी तथा पाँचवीं संख्या का औसत ही माध्यिका होगी।

माध्यिका वह मान है जो श्रृंखला को दो बराबर भागों में इस प्रकार बाँटता है कि माध्यिका के चरों के सही-सही केंद्रीय स्थान या स्थिति वाले मान के रूप में लगभग आधे मान इससे नीचे या कम और शेष आधे इसके ऊपर या अधिक होते हैं।
उदाहरण:
पाँच व्यक्तियों, अ ब स द य जिनकी आयु क्रमश: 20, 21, 19, 23 तथा 22 वर्ष दी गई है, के लिए माध्यिका की गणना कीजिए, माध्यिका की गणना निम्नलिखित चरणों में होगी –

चरण 1.
आँकड़ों को एक आरोही या अवरोही क्रम में सारणीबद्ध कीजिए।
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चरण 2.
मध्यवर्ती संख्या का मान ही माध्यिका है।

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प्रश्न 11.
किसी बस्ती के 12 परिवारों की मासिक आय नीचे दी गई है, इसकी माध्यिका ज्ञात करो –
परिवारों की आय (₹ में)
140, 150, 130, 135, 170, 190, 500, 210, 205, 195, 290, 200
उत्तर:
आँकड़ों को आरोही क्रम में लिखने पर –
130, 135, 140, 150, 170, 190, 195, 200, 205, 210, 290, 500

आँकड़ों को अवरोही क्रम में लिखो
500, 290, 210, 205, 200, 195, 190, 170, 150, 140, 135, 130
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 22
माध्यिका (M) =
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 20

प्रश्न 12.
निम्नलिखित सारणी में दिल्ली के मासिक तापमान के आँकड़े दिए गए हैं। दिल्ली के तापमान की माध्यिका ज्ञात करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 21
उत्तर:
तापमान के आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम –
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 19
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 23
माध्यिका (M) = \(\frac {N+1}{2}\) वीं मद = \(\frac {12+1}{2}\) = 6.5 वीं मद
6.5 वीं मद का आकार = \(\frac {6वीं मद + 7वीं मद}{2}\) = \(\frac{26+28}{2}=\frac{54}{2}\) = 27°C

प्रश्न 13.
माध्यिका के गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
माध्यिका के गुण (Merits) –
1. सरल विधि-माध्यिका ज्ञात करना एक सरल विधि है।
2. चरम मूल्यों का निम्नतम प्रभाव-माध्यिका चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती है।
3. आँकड़ों के अभाव में प्रयोग-अपूर्ण आँकड़ों के बावजूद इसकी गणना की जा सकती है।
4. खुले सिरे वाली शृंखला में उपयोग-खुले सिरे वाली शृंखला में माध्यिका का मूल्य सुगमता से प्राप्त हो जाता है।
5. ग्राफिक विधि-माध्यिका का मूल्य ग्राफ की सहायता से भी ज्ञात किया जा सकता है।
6. निश्चित मूल्य-माध्यिका का मूल्य सदैव निश्चित होता है।
7. माध्यिका शृंखला के मूल्यों का प्रतिनिधि होता है। यह संपूर्ण बंटन के लिए गुरुत्व का केन्द्र होता है। यह गुणात्मक तथ्यों (सुन्दरता, ईमानदारी आदि) का अध्ययन करने के लिए सर्वोत्तम है।

माध्यिका के दोष (Demerits) –
(1) समंकों को आरोही तथा अवरोही क्रम में रखना आवश्यक है जिस पर अधिक समय लगता है।
(2) माध्यिका श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित नहीं होती। यह केवल अनुमानित तथा स्थिति संबंधी माध्य है।
(3) यह एक उपयुक्त माध्य नहीं है क्योंकि यह चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होती।
(4) सम संख्याओं की दशा में यह दो संख्याओं के मध्य एक अनुमानित संख्या होती है।
(5) यह अनियमित आँकड़ों के लिए उपयुक्त विधि नहीं है।
(6) अधिक आँकड़े होने पर माध्यिका ज्ञात करना कठिन होता है।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 14.
बहुलक (Mode) किसे कहते हैं ? इसे किस प्रकार ज्ञात किया जाता है ? उसके गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
बहुलक (Mode) – आँकड़ों का वह मूल्य है जो सबसे अधिक बार आता है, बहुलक कहलाता है। इस विशेष मान के चारों ओर आँकड़ों का सबसे अधिक संकेंद्रण होता है। यह मूल्य श्रेणी का प्रतिनिधि मूल्य है तथा सबसे अधिक लोकप्रिय होता है। निरीक्षण विधि (Inspection Method) द्वारा बहुलक ज्ञात करने की विधि-इस विधि में यह निश्चित करना पड़ता है कि कौन-सा मद सबसे अधिक बार आ रहा है अर्थात् जिस मूल्य की आवृत्ति सबसे अधिक होती है उसे बहुलक कहते हैं। जब खंडित श्रेणी की आवृत्तियां नियमित रूप से बढ़ती या घटती हैं तो अधिकतम आवृत्ति बिल्कुल स्पष्ट हो जाती है।

उदाहरण:
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 24
उपर्युक्त श्रृंखला से स्पष्ट है कि ₹ 40 की आवृत्ति 8 है जो सबसे अधिक है। इसलिए बहुलक (Z = ₹ 40) है।
उदाहरण:
निम्नलिखित बंटन से बहुलक ज्ञात करें। 2,10,5,7,9,2,7,11,17,7,8 बहुलक का मान निम्नलिखित चरणों में प्राप्त किया जा सकता है –

चरण 1.
आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करके सारणीबद्ध करो।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 25

चरण 2.
आरोही एवं अवरोही दोनों ही क्रमों में ‘ 7 ‘ का मान सबसे अधिक बार अर्थात् 3 बार आता है।
अत: बहुलक =7
बहुलक के गुण (Merits) –
(1) बहुलक की गणना सरलता से निरीक्षण विधि द्वारा की जा सकती है।
(2) बहुलक पर शृंखला के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता।
(3) किसी शृंखला में सबसे अधिक बार आने के कारण, यह उसका सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
(4) अंकों के अभाव की हालत में भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।
(5) बहुलक की व्यावहारिक उपयोगिता अधिक है। किसी वस्तु की अधिक मात्रा के कारण उसका उत्पादन अधिक होता है।
(6) बहुलक को रेखाचित्र द्वारा भी प्रदर्शित करके इसे सरल रूप दिया जा सकता है।

बहुलक के दोष (Demerits) –
(1) दो से अधिक समंकों की बारंबारता समान होने के कारण, बहुलक एक अनिश्चित व अस्पष्ट माध्य है।
(2) बहुलक सभी मदों पर आधारित नहीं होता।
(3) बहुलक कभी-कभी असत्य और भ्रमात्मक भी हो सकता है।
(4) बहुलक ज्ञात करने में चरम मूल्यों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
(5) अधिक संख्याएं न होने पर बहुलक एक महत्त्वपूर्ण माप नहीं है।
(6) वर्ग विस्तार बदलने पर बहुलक भी बदल जाता है।

प्रश्न 15.
विचलन की माप क्या है ? इसके प्रकार बताओ।
उत्तर:
विचलन की माप (Measures of Deviation) –
विचलन या विक्षेपण का सामान्य अर्थ चरों का एक केंद्रीय मान से बिखराव या विभिन्नता होता है। विचलन के चार वैकल्पिक मानों को हम लेंगे –
(1) परिसर (Range)
(2) माध्य विचलन (Mean Deviation)
(3) मानक विचलन (Standard Deviation)
(4) चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation)

प्रश्न 16.
परिसर से क्या भाव है ? उदाहरण सहित स्पष्ट करो कि माध्य विचलन कैसे ज्ञात किया जाता है ?
उत्तर:
परिसर (Range) –
परिवर्तनशीलता का सबसे सरल माप परिसर है। यह माप किसी शृंखला में अधिकतम $(\mathrm{H})$ एवं न्यूनतम $(\mathrm{L})$ मानों में अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है।
Range = Highest – Lowest

उदाहरण:
निम्नलिखित 5 विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त प्रतिशत अंकों के आधार पर परिसर ज्ञात कीजिए। पांच विद्यार्थियों द्वारा प्राप्तांक क्रमशः $83,96,72,46$ और 68 है। परिसर की गणना निम्नवत् होगी –
चरण 1. (Step 1) –
दिए ग़ए उदाहरण में अधिकतम (H) एवं न्यूनतम (L) को ज्ञात करें।
H = 96
L = 46

चरण 2. (Step 2) –
निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग कर हम परिसर की गणना करेंगे-
R = H – L
R = 96 – 46 = 50%
परिसर विचलन की माप का अपरिष्कृत (Crude) मापन है क्योंकि इसमें परिसर के अंतर्गत मानों के वितरण (बंटन) के स्वरूप की कोई सूचना उपलब्ध नहीं होती। परिसर ज्ञात करना आसान है क्योंकि यह केवल दो चरम अंकों पर आधारित है।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

माध्य विचलन एवं निरपेक्ष वितरण (Mean Deviation) –
माध्य विचलन (MD) माध्य (X) से निरपेक्ष विचलन (उनके चिह्नों ±) पर ध्यान दिए बिना) होता है। गणितीय सूत्र के रूप में माध्य विचलन (MD) को निम्नवत लिखा जा सकता है –
M.D = \(\frac{\sum|x-\bar{x}|}{N}\)
जहां
x = जनसंख्या का कोई मान
\(\bar{x}\) = जनसंख्या का माध्य
N = जनसंख्या की कुल संख्या

माध्य विचलन एक वैज्ञानिक माप है क्योंकि यह समांतर माध्य से विभिन्न मानों के बीच विचलनों का औसत है। उदाहरण-निम्नलिखित जनसंख्या के लिए माध्य विचलन की गणना कीजिए –
6,8,4,12,5
माध्य विचलन की गणना निम्नवत करते हैं –
(1) सभी मदों को (X) मान लो।
(2) समांतर माध्य \(((\overline{\mathrm{X}})\) ज्ञात करो।
(3) प्रत्येक मद में से \(\overline{\mathrm{X}}\) घटाओ। \((\mathrm{X}-\overline{\mathrm{X}}=d)\)
(4) प्रत्येक विचलन को जोड़ कर ∑d ज्ञात करें।
(5) विचलनों के योग को मदों की संख्या (N) से भाग दो।

चरण (Step) 1.
औसत माध्य \(((\overline{\mathrm{X}})\) की गणना कीजिए –
\(((\overline{\mathrm{X}})\) (अंकिक माध्य) = \(\frac{6+8+4+12+5}{5}\) = \(\frac{35}{5}\)= 7

चरण (Step) 2.
सारणी स्वरूप में प्रत्येक चर अंक में से माध्य मान को घटाइए –
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 26
चरण (Step) 3. अत: निरपेक्ष माध्य विचलन होगा
= \(\frac{1}{N} \Sigma|X \pm \bar{X}|=\frac{12}{5}\) = \(\frac{\sum|X-\bar{X}|}{N}=\frac{12}{5}\) = 2.4

प्रश्न 17.
मानक विचलन तथा चतुर्थक विचलन से क्या अभिप्राय है ? इन्हें ज्ञात करने की विधि बताओ।
उत्तर:
मानक विचलन (Standard Deviation) –
विचलन के माप की दूसरी विधि, जो औसत माध्य [(A.M. (7)] का प्रयोग कर प्राप्त की जाती है मानक विचलन (σ) कहलाती है। इसे वर्ग माध्य-मूल विचलन भी कहते हैं। मानक विचलन किसी श्रेणी के विभिन्न मूल्यों के समांतर माध्य से निकाले गए विचलनों के वर्गों के माध्य का वर्गमूल होता है। इसे ग्रीक भाषा के अक्षर (σ) सिग्मा से प्रकट किया जाता है। गणितीय सूत्र में इसे निम्नवत रखा जाता है –
\(\left.\underset{(\text { सिग्मा) }}{\sigma}=\sqrt{\left[\Sigma{ }^{(\mathrm{X}-\overline{\mathrm{X}})^2}\right.}\right]\)

उदाहरण:
निम्नलिखित बंटन का मानक विचलन ज्ञात करें।
6,8,4,2,5
मानक विचलन की गणना निम्न चरणों में होगी –

चरण (Step) 1.
औसत माध्य A.M. \((\overline{\mathrm{X}})\) ज्ञात करें –
\((\overline{\mathrm{X}})\) = \(\frac{6+8+4+2+5}{5}\) = \(\frac{25}{5}\) = 5

चरण (Step) 2.
सारणी स्वरूप में A.M. से वर्ग विचलन का निर्धारण करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 27
इसलिए
σ = \(\sqrt{\frac{20}{5}}\) = \(\sqrt{4}\) = 2
इस प्रकार उपरोक्त बंटन का मानक विचलन σ = 2 होगा।

चतुर्थक विचलन (Q.D.) (Quartile Deviation) –
माध्यिका द्वारा संपूर्ण बंटन दो बराबर भागों में विभक्त होता है किंतु चतुर्थक द्वारा संपूर्ण बंटक चार बराबर भागों में विभक्त करता है। चतुर्थक वह मूल्य है जो किसी श्रेणी को चार समान भागों में बांटता है इसे विभाजन मूल्य (Partition Value) कहते हैं। किसी भी श्रेणी में तीन चतुर्थक होते हैं।
(1) Q1 = पहला चतुर्थक या न्यून चतुर्थक (The Lower Quartile)
(2) Q2 = दूसरा चतुर्थक या मध्य चतुर्थक (The Middle Quartile)
(3) Q3 = तीसरा चतुर्थक या ऊपरी चतुर्थक (The Upper Quartile)

(i) न्यून चतुर्थक (Q1) –
यह कुल बंटन का \(\frac{1}{4}\) या एक चौथाई भाग इससे कम होगा जबकि कुल बंटन का \(\frac{3}{4}\) भाग इसके ऊपर या अधिक होगा।

(ii) मध्य चतुर्थक (Q2) – इस प्रकार कुल बंटन का \(\frac{1}{2}\) होगा जिसमें आधा भाग इसके नीचे व शेष आधा इसके ऊपर या अधिक होगा। इस प्रकार मध्य चतुर्थक (Q2) – कुछ नहीं बल्कि माध्यिका ही होता है।

(iii) ऊपरी चतुर्थक (Q3) – शृंखला को इस प्रकार बांटता है कि \(\frac{3}{4}\) भाग इससे नीचे तथा केवल \(\frac{1}{4}\) भाग इसके ऊपर या अधिक होता है। चतुर्थक विचलन Q.D. को अन्तचतुर्थक का परिसर भी कहा जाता है, जिसे निम्नवत प्रदर्शित करते हैं-
Q.D = \(\frac{\mathrm{Q}_3-\mathrm{Q}_1}{2}\)
उदाहरण:
उदाहरण-निम्नलिखित बंटन के लिए चतुर्थक विचलन का निर्धारण कीजिए –
46,32,25,50,72,35,75,65 तथा 58

चतुर्थक विचलन को निम्नवत निर्धारित किया जाता है –

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

चरण (Step) 1.
बंटन को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें तथा उन्हें क्रमानुसार कोटि प्रदान करें जैसा कि नीचे दिया गया है- 25
32,35,46,50,58,65,72,75
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 28

चरण (Step) 2.
मध्य चतुर्थक (Q2) अथवा माध्यिका (Mc) सही-सही माध्य की संख्या है। जैसे-
\(\frac{n+1}{2}=\frac{9+1}{2}\) = 5वीं (चूंकि n = 9)

चरण (Step) 3.
निम्न चतुर्थक (Q3) निम्न आद्धर्ध (Mc) का आधा होता है, जैसे कि
\(\frac{5}{2}\) = 2.5 वीं संख्या
∴ Q1 = \(\frac{32+35}{2}=\frac{67}{2}\) = 33.5

चरण (Step) 4.
ऊपरी चतुर्थक Q3 उत्तरार्ध का आधा होता है। जैसे कि
\(\frac{7+8}{2}\) = 7.5 वीं संख्या
∴ Q3 = \(\frac{65+72}{2}=\frac{137}{2}\) = 68.5

चरण (Step) 5.
चतुर्थक विचलन की गणना निम्नसूत्र Q.D. द्वारा की जाती है।
Q.D = \(\frac{\mathrm{Q}_3-\mathrm{Q}_1}{2}\) = \(\frac{68.5-33.5}{2}\) = \(\frac{35}{2}\) = 17.5

प्रश्न 18.
सह-संबंध से क्या अभिप्राय है ? सह-संबंध गुणांक की गणना कैसे की जाती है ?
उत्तर:
सहसंबंध (Correlation) –
दो भिन्न प्रकार के चरों के एक बंटन को द्विचरीय वितरण कहते हैं, ये दोनों चर उस अवस्था में आपस में सह-संबंधित कहलाते हैं जब एक चर में परिवर्तन दूसरे चर में संगती परिवर्तन उत्पन्न होता है। प्रथम चर जिसके कारण दूसरे चर में परिवर्तन होता है स्वतंत्र (x) कहलाता है जबकि दूसरा चर आश्रित चर (y) के रूप में जाना जाता है। दो चरों के मध्य साहचर्य की मात्रा तथा दिशा का आंकलन सरल अथवा द्विचर सह-संबंध कहलाता है। सह-संबंध की माप का सर्वाधिक प्रचलित स्वरूप पियर्सन का गुणन आघूर्ण सह-संबंध गुणांक (r) है। r का मूल्य +1 से -1 के बीच प्रसारित होता है।

इस प्रकार जब –
(i) r +1 हो तो सहसंबंध पूर्ण तथा धनात्मक होता है,
(ii) r = 0 हो तो कोई सह-संबंध नहीं या शून्य सहसंबंध, तथा
(iii) r = -1 हो तो सह-संबंध ऋणात्मक होता है।
गुणन आघूर्ण सह-सम्बन्ध गुणांक (r) को गणितीय सूत्र में निम्नवत लिखा जाता है –
r = \(\frac{N \Sigma x y-\Sigma x, \Sigma y}{\sqrt{\left[N \Sigma x^2-(\Sigma x)^2\right]}\left[N \Sigma y^2-(\Sigma y)^2\right]}\)

जिसमें
x = स्वतंत्र चर
y = आश्रित चर
N = बंटन की कुल संख्या है

उदाहरण:
निम्नलिखित आँकड़ों “खखेत का आकार और विक्रय मूल्य” के आधार पर पियर्सन सह-संबंध गुणांक की गणना करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 29

अग्रवत सारणी रूप में पियर्सन के सह-संबंध गुणांक की गणना की जा सकती है।
चरण (Step) 1.
दोनों चरों को अलग-अलग प्रदर्शित करते हुए आँकड़ों को क्रमानुसार व्यवस्थित करें व फिर उन्हें अलग-अलग जोड़ें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 30

चरण (Step) 2.
x को y से गुणा करें व फिर उन्हें जोड़ें, इस प्रकार, ∑x = 95, ∑y = 380, ∑x y = 7895 होगा तथा ∑x-2 = 1985 व ∑y2 = 31700 होगा

चरण (Step) 3.
सूत्र का प्रयोग कर पियर्सन के गुणक आघूर्ण सहसंबंध गुणांक की गणना करते हैं।
r = \(\frac{N \Sigma x y-\Sigma x \Sigma y}{\sqrt{\left[N \Sigma x^2-(\Sigma x)^2\right]\left[N \Sigma y^2-(\Sigma y)^2\right]}}\)
r = \(\frac{5 \times 7895-95 \times 380}{\sqrt{\left[5 \times 1985-(95)^2\right]\left[5 \times 31700-(380)^2\right]}}\)
r = \(\frac{39475-36100}{\sqrt{(9925-9325)(158900-144400)}}\)
= \(\frac{3375}{356230}\) = + 0.95
इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि “भूमि का मूल्य खेत के आकार के सशक्त एवं प्रत्यक्ष रूप से सहसंबंधित हैं।” सारणी स्वरूप में और माध्य से वर्ग विचलन ज्ञात करें-
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 31

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 19.
दिए गए आँकड़ों की सहायता से मानक विचलन की गणना कीजिए।
15,18,20,12,10,12,11
उत्तर:
औसत माध्य \((\overline{\mathrm{X}})\)
ज्ञात करो – \((\overline{\mathrm{X}})\) = \(\frac{\sum x}{N}\)
\((\overline{\mathrm{X}})\) = \(\frac{15+18+20+12+10+12+11}{7}\)= \(\frac{98}{7}\) = 14m
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 33

मानक विचलन
(S.D) (σ) = \(\sqrt{\frac{\Sigma(x-\bar{x})^2}{N}}\) = \(\sqrt{\frac{86}{7}}=\sqrt{12.28}\) = 3.5

प्रश्न 20.
निम्न सारणी में शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के बीच संबंध को दर्शाया गया है। शिक्षकों व विद्यार्थियों के बीच सहसंबंध प्रकृति ज्ञात कीजिए।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 34
उत्तर:
चरण 1-दोनों चरों को अलग-अलग प्रदर्शित करते हुए X को Y से गुणा करें।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 35
सहसंबंध गुणांक
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण - 36

मौखिक परीक्षा के प्रश्न (Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
आँकड़ों का प्रयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाता है ?
उत्तर:
मानचित्र, प्रतिवेदन, वैज्ञानिक लेखों तथा पुस्तकें तैयार करने के लिए।

प्रश्न 2.
आँकड़ों के प्रक्रमण के दो महत्त्वपूर्ण घटक बताओ।
उत्तर:
सारणीयन तथा विश्लेषण।

प्रश्न 3.
आँकड़ों के सारणीयन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
सारणीयन आँकड़ों को एक व्यवस्थित तथा क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करने की विधि है।

प्रश्न 4.
एक अच्छी सारणी के क्या गुण होते हैं ?
उत्तर:
सरल, सघन, पूर्ण तथा स्वयं विश्लेषणात्मक होना।

प्रश्न 5.
एक सारणी के प्रमुख क्रियात्मक अंग बताओ।
उत्तर:
सांख्यिकीय सारणी के 8 अंग होते हैं –
(1) संख्या
(2) शीर्षक
(3) शीर्ष-टिप्पणी
(4) प्रतिपर्ण
(5) कक्ष-शीर्ष
(6) मुख्य भाग
(7) पाद-टिप्पणी
(8) स्रोत-टिप्पणी।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 6.
आवृत्ति क्या होती है ?
उत्तर:
किसी शृंखला-श्रेणी में कोई मद कितनी बार आती है, उसे उस पद की आवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 7.
वर्ग अंतराल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
आँकड़ों को वर्ग में बांट देने के पश्चात् उनकी ऊपरी तथा निम्न सीमा के अंतर को वर्ग अंतराल कहते हैं-जैसे 30-40 वर्ग में 40-30 =10 वर्ग अंतराल है।

प्रश्न 8.
केंद्रीय प्रवृत्ति के 3 प्रमुख माप बताओ।
उत्तर:
(1) माध्य
(2) माध्यिका
(3) बहुलक।

प्रश्न 9.
समांतर माध्य ज्ञात करने का सूत्र बताओ।
उत्तर:
माध्य \(=\overline{\mathrm{X}}=\frac{\Sigma \mathrm{x}}{\mathrm{N}}\) जबकि \(\Sigma \mathrm{x}=\) कुल मानों का योग तथा N = मानों की संख्या

प्रश्न 10.
माध्य से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
कई संख्याओं के योग का औसत ही माध्य है।

प्रश्न 11.
माध्यिका से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
माध्यिका वह संख्या है जो किसी शृंखला को दो बराबर भागों में बांटती है।

प्रश्न 12.
माध्यिका ज्ञात करने का सूत्र बताओ।
उत्तर:
माध्यिका = M = N Size Of \(\left(\frac{\mathrm{N}+1}{2}\right)\) th item जबकि N = मदों की संख्या।

प्रश्न 13.
बहुलक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बहुलक चरों का वह मान होता है जो शृंखला में सबसे अधिक बार आता है।

प्रश्न 14.
माध्य विचलन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
माध्य विचलन माध्य से निरपेक्ष विचलन होता है।

प्रश्न 15.
माध्य विचलन ज्ञात करने का सूत्र बताओ।
उत्तर:
माध्य विचलन = M.D. = \(\frac{\Sigma(\mathrm{x}-\overline{\mathrm{x}})}{\mathrm{N}}\)
X = संख्या
X = माध्य
N = मदों की संख्या।

प्रश्न 16.
मानक विचलन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
विचलनों के वर्गों के माध्य के वर्ग मूल को मानक विचलन कहते हैं।

प्रश्न 17.
चतुर्थक विचलन (Q.D.) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
जब संपूर्ण बंटन को चार बराबर भागों में विभक्त करते हैं तो उसे चतुर्थक विचलन कहते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 2 आंकड़ों का प्रक्रमण

प्रश्न 18.
सहसंबंध से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
विभिन्न चरों के बीच संख्यात्मक संबंध को सहसंबंध कहते हैं।

प्रश्न 19.
सह-संबंध के दो प्रकार बताओ।
उत्तर:
धनात्मक तथा ऋणात्मक।

प्रश्न 20.
सहसंबंध ज्ञात करने की विधि किस वैज्ञानिक ने बनाई ?
उत्तर:
कार्ल पियर्सन ने।

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HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
यदि cos θ = \(\frac {8}{17}\) हो तो कोण θ के अन्य पाँच त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात करो ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 1
माना ΔABC में कोण B समकोण है तथा ∠A = θ तो
cos θ = \(\frac{8}{17}=\frac{\mathrm{AB}}{\mathrm{AC}}\)
⇒ AB = 8 इकाई
AC = 17 इकाई
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 2

प्रश्न 2.
यदि ∠B और ∠Q ऐसे न्यून कोण हों जिससे कि sin B = sin Q, तो सिद्ध कीजिए कि ∠B = ∠Q
हल :
माना दो समकोण त्रिभुज ABC और PQR जहाँ sin B = sin Q
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 3
समीकरण (i) और (ii) से हमें प्राप्त होता है,
\(\frac{A C}{P R}=\frac{A B}{P Q}=\frac{B C}{Q R}\)
⇒ ΔACB ~ ΔPRQ
अतः ∠B = ∠Q

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 3.
यदि sec α = \(\frac {5}{4}\) हो तो \(\frac {1 – tanα}{1 + tanα}\) का मान ज्ञात कीजिए।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 4
माना ΔABC में कोण ∠B समकोण है तथा ∠A = α तो
sec α = \(\frac{5}{4}=\frac{A C}{A B}\)
⇒ AC = 5 इकाई
AB = 4 इकाई
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 5

प्रश्न 4.
यदि sin (A + B) = \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) और sin (A – B) = \(\frac{1}{\sqrt{2}}\), 0° < A + B ≤ 90°, A > B, तो A और B का मान ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
sin (A + B) = \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)
⇒ sin (A + B) = sin 60°
⇒ A + B = 60° ………….(i)
तथा sin (A – B) = \(\frac {1}{2}\)
⇒ sin (A – B) = sin 30°
⇒ A – B = 30° ………….(ii)
समीकरण (i) और (ii) को जोड़ने पर,
2A = 90° या A = \(\frac {90°}{2}\) = 45°
A का मान समीकरण (i) में रखने पर,
45° + B = 60°
⇒ B = 60° – 45° = 15°
अतः A = 45° व B = 15°

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 5.
निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए-
(i) \(\frac{\tan 65^{\circ}}{\cot 25^{\circ}}\)
(ii) \(\frac{\cot 50^{\circ}}{\tan 40^{\circ}}\)
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 6

प्रश्न 6.
दर्शाइए कि \(\frac {cosec 39°}{sec 51°}\) = 1
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 7

प्रश्न 7.
cot 85° + cos 75° को 0° और 17° के बीच के कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
cot 85° + cos 75°
= cot (90° – 5°) + cos(90° – 15°)
= tan 5° + sin 15°

प्रश्न 8.
मान निकालिए-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 8
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 9

प्रश्न 9.
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 10
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 11

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 10.
सिद्ध कीजिए :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 12
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 13

प्रश्न 11.
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 14
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 15

प्रश्न 12.
7 sec2 B – 7 tan2 B का मान ज्ञात कीजिए
हल :
यहाँ पर, 7 sec2 B – 7 tan2 B
= 7(1 + tan2 B) – 7 tan2 B
= 7 + 7 tan2 B – 7 tan2 B
= 7

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 13.
सिद्ध कीजिए कि sin6 θ + cos6 θ + 3sin2θ cos2θ = 1
हल :
यहाँ पर,
बायाँ पक्ष = sin6 θ + cos6 θ + 3sin2θ cos2θ
= (sin2θ)3 + (cos2θ)3 + 3 sin2θ cos2θ (sin2θ + cos2θ) [∵ sin2θ + cos2θ = 1]
= (sin2 θ + cos2 θ)3 [∵ a3 + b3 + 3ab (a + b) = (a + b)3]
= (1)3
= 1 = दायाँ पक्ष

प्रश्न 14.
यदि a cosθ + b sinθ = m तथा a sinθ – b cosθ = n है, तो सिद्ध कीजिए कि a2 + b2 = m2 + n2
हल :
यहाँ पर,
m = a cosθ + b sinθ
n = a sinθ – b cosθ
दायाँ पक्ष = m2 + n2
= (a cos θ + b sin θ)2 + (a sin θ – b cos θ)2
= a2 cos2θ + b2 sin2θ + 2ab sinθ cosθ + a2 sin2 θ + b2 cos2 θ – 2 ab sinθ cosθ
= a2 cos2θ + a2 sin2 + b2 sin2 θ + b2 cos2 θ
= a2 (cos2 θ + sin2 θ) + b2 (sin2 θ + cos2 θ)
= a2 + b2 [∵ sin2 θ + cos2 θ = 1]
= बायाँ पक्ष

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प्रश्न 15.
θ का मान ज्ञात कीजिए, यदि sin (θ +36°) = cos θ, जहाँ θ + 36°, एक न्यून कोण है।
हल :
यहाँ पर दिया गया है।
sin (θ + 36°) = cos θ
या cos [90° – (θ + 36°)] = cos θ
⇒ 90° – (θ +36°) = θ
या 90° – θ – 36° = θ
या 54° = θ + θ
या 2θ = 54°
या θ = 27°

प्रश्न 16.
सिद्ध कीजिए कि-
sin4θ – cos4θ = sin2θ – cos2θ = 2sin2θ – 1 = 1 – 2cos2θ
हल :
बायाँ पक्ष = sin4θ – cos4θ
= (sin2θ)2 – (cos2θ)2
= (sin2θ – cos2θ) (sin2θ + cos2θ)
= (sin2θ – cos2θ) × 1
= sin2θ – cos2θ
पुनः sin2θ – cos2θ = sin2θ – [1 – sin2θ]
= sin2θ – 1 + sin2θ
= 2sin2θ – 1
इसी प्रकार sin2θ – cos2θ = (1 – cos2θ) – cos2θ
= 1 – cos2θ – cos2θ
= 1 – 2cos2θ = दायाँ पक्ष

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प्रश्न 17.
सिद्ध कीजिए कि tan 6° tan 12°tan 78° tan 84° = 1
हल :
यहाँ पर
बायाँ पक्ष = tan 6° tan 12° tan 78° tan 84°
= tan 6° tan 12° tan (90° – 12°) tan (90° – 6°)
= tan 6° tan 12° cot 12° cot 6° [∵ tan (90° – θ) = cot θ]
= tan 6° tan 12° \(\frac{1}{\tan 12^{\circ}} \cdot \frac{1}{\tan 6^{\circ}}\) [∵ cot θ = \(\frac {1}{tan θ}\)]
= 1 = दायाँ पक्ष

प्रश्न 18.
दर्शाइएा कि sin26° + sin2 12° + sin2 78° + sin2 84° = 2
हल :
यहाँ पर,
बायाँ पक्ष = sin26° + sin2 12° + sin2 78° + sin2 84°
= sin2 6° + sin2 12° + [sin (90° – 12°)]2 + [sin (90° – 6°)]2
= sin2 6° + sin2 12° + cos2 12° + cos2 6° [∵ sin (90° – θ) = cos θ]
= (sin2 6° + cos2 6°) + (sin2 12° + cos2 12°)
= 1 + 1 [∵ sin2θ + cos2θ = 1]
= 2 = दायाँ पक्ष

प्रश्न 19.
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 16
हल :
यहाँ पर,
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 17

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 20.
यदि cos 4A = sin (A – 20°), जहाँ 4A एक न्यूनकोण है, तो A का मान ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
cos 4A = sin (A – 20°)
⇒ sin(90° – 4A) = sin (A – 20°)
⇒ 90° – 4A = A – 20°
या 90° + 20° = A + 4A
या 5A = 110°
या A = \(\frac {110°}{5}\) = 22°

प्रश्न 21.
सिद्ध कीजिए कि cos 35°. cosec 55° = 1
हल :
यहाँ पर,
बायाँ पक्ष = cos 35°. cosec 55°
= cos 35°. cosec (90° – 35°)
= cos 35°. sec 35° [∵ cosec (90°- θ) = sec θ]
= cos 35° . \(\frac {1}{cos 35°}\) [∵ sec θ = \(\frac {1}{cos θ}\)]
= 1 = दायाँ पक्ष

प्रश्न 22.
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 18
हल :
यहाँ पर,
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 19

प्रश्न 23.
यदि A = 30°, तो बताइए कि sin 3A = 3 sin A – 4 sin3 A
हल :
यहाँ पर,
A = 30° के लिए
बायाँ पक्ष = sin 3A = sin 90° = 1 …………….(i)
दायाँ पक्ष = 3 sin A – 4 sin3 A
= 3 sin 30° – 4 sin3 30°
= 3 (\(\frac {1}{2}\)) – 4 (\(\frac {1}{2}\))3
= \(\frac{3}{2}-4\left(\frac{1}{8}\right)=\frac{3}{2}-\frac{1}{2}=\frac{3-1}{2}=\frac{2}{2}\)
= 1 …………….(ii)
अतः समीकरण (i) और (ii) से स्पष्ट है कि बायाँ पक्ष = दायाँ पक्ष

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प्रश्न 24.
यदि sin (A – B) = \(\frac {1}{2}\), cos (A + B) = \(\frac {1}{2}\), 0° < A + B ≤ 90°, A > B, तो A और B ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर,
sin (A – B) = \(\frac {1}{2}\)
⇒ sin (A – B) = sin 30°
⇒ A – B = 30° ……………….(i)
तथा cos (A + B) = \(\frac {1}{2}\)
⇒ cos (A + B) = cos 60°
⇒ A + B = 60° ……………….(ii)
समीकरण (i) और (ii) को जोड़ने पर,
2A = 90° या A = \(\frac {90°}{2}\) = 45°
A का मान समीकरण (i) में रखने पर,
45° – B = 30°
⇒ B = 45° – 30° = 15°
अतः A = 45° व B = 15°

प्रश्न 25.
ΔOPQ में, जिसका कोण P समकोण है, OP = 7 cm और OQ – PQ = 1 cm | sin Q और cos Q के मान ज्ञात कीजिए ।
हल :
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 20
समकोण ΔOPQ से हमें प्राप्त होता है।
OQ2 = OP2 + PQ2
⇒ (1 + PQ)2 = OP2 + PQ2
⇒ 1 + PQ2 + 2PQ = OP2 + PQ2
⇒ 1 + 2PQ = (7)2
⇒ 2PQ = 49 – 1
⇒ PQ = \(\frac {48}{2}\) = 24cm और OQ = 1 + PQ = 1 + 24 = 25 cm
अत: sin Q = \(\frac {7}{25}\) और cos Q = \(\frac {24}{25}\)

बहुविकल्पीय प्रश्न :

प्रश्न 1.
संलग्न समकोण त्रिभुज POQ में sin 6 का मान होगा-
HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय - 21
(A) \(\frac {PQ}{OP}\)
(B) \(\frac {OQ}{OP}\)
(C) \(\frac {PQ}{OQ}\)
(D) \(\frac {OP}{PQ}\)
हल :
(A) \(\frac {PQ}{OP}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 2.
प्रश्न 1 की आकृति में cos θ का मान होगा-
(A) \(\frac {PQ}{OP}\)
(B) \(\frac {OQ}{OP}\)
(C) \(\frac {PQ}{OQ}\)
(D) \(\frac {OP}{OQ}\)
हल :
(B) \(\frac {OQ}{OP}\)

प्रश्न 3.
\(\frac{\sin 20^{\circ}}{\cos 70^{\circ}}\) का मान होगा :
(A) 2 sin 20°
(B) 0
(C) – 1
(D) 1
हल :
(D) 1

प्रश्न 4.
sin2 30° + cos2 30° का मान है :
(A) 0
(B) 1
(C) -1
(D) 2 cos2 30°
हल :
(B) 1

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 5.
यदि cos θ = \(\frac {12}{13}\) हो, तो sin θ का मान है :
(A) \(\frac {13}{12}\)
(B) \(\frac {12}{5}\)
(C) \(\frac {5}{13}\)
(D) 1
हल :
(C) \(\frac {5}{13}\)

प्रश्न 6.
रिक्त स्थान भरें : cosec2θ = ………………. + cot2θ
(A) 1
(B) sin2θ
(C) tan2θ
(D) – 1
हल :
(A) 1

प्रश्न 7.
\(\frac{2 \tan 45^{\circ}}{1+\tan ^2 45^{\circ}}\) का मान है :
(A) cos 90°
(B) tan 90°
(C) sin 90°
(D) sin 45°
हल :
(C) sin 90°

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 8.
यदि tan A = \(\frac {5}{12}\), तो cos A का मान है :
(A) \(\frac {5}{13}\)
(B) \(\frac {12}{5}\)
(C) \(\frac {13}{5}\)
(D) \(\frac {12}{13}\)
हल :
(D) \(\frac {12}{13}\)

प्रश्न 9.
यदि cot A = \(\frac {7}{24}\), तो sin A का मान है :
(A) \(\frac {24}{7}\)
(B) \(\frac {24}{25}\)
(C) \(\frac {25}{24}\)
(D) \(\frac {7}{25}\)
हल :
(B) \(\frac {24}{25}\)

प्रश्न 10.
\(\frac{2 \tan 60^{\circ}}{1+\tan ^2 60^{\circ}}\) का मान है :
(A) sin 60°
(B) cos 60°
(C) tan 30°
(D) sin 30°
हल :
(A) sin 60°

प्रश्न 11.
\(\frac {1}{tan θ}\) को कहा जाता है-
(A) cosec θ
(B) sec θ
(C) cot θ
(D) sin θ
हल :
(C) cot θ

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 12.
cos2θ + sin2θ का मान सदैव होता है-
(A) शून्य
(B) 1
(C) 2
(D) 3
हल :
(B) 1

प्रश्न 13.
यदि cos A = \(\frac {7}{25}\) हो, तो tan A का मान होगा :
(A) \(\frac {25}{7}\)
(B) \(\frac {24}{7}\)
(C) \(\frac {24}{25}\)
(D) \(\frac {25}{24}\)
हल :
(B) \(\frac {24}{7}\)

प्रश्न 14.
\(\frac {cosec 32°}{sec 58°}\) का मान क्या है ?
(A) 0
(B) -1
(C) 1
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(C) 1

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प्रश्न 15.
व्यंजक sin θ (cosec θ – sin θ) का सरल रूप होगा-
(A) sin2 θ
(B) tan2 θ
(C) cot2 θ
(D) cos2 θ
हल :
(D) cos2 θ

प्रश्न 16.
tan4 A + tan2 A को sec A के रूप में लिखा जा सकता है-
(A) sec4 A – sec2 A
(B) sec4 A + sec2 A
(C) sec4 A . sec2 A
(D) sec4 A – sec4 A
हल :
(A) sec4 A – sec2 A

प्रश्न 17.
3 cot2 A – 3 cosec2 A का मान होगा-
(A) शून्य
(B) -6
(C) -3
(D) 3
हल :
(C) – 3

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प्रश्न 18.
cosec (90° – θ) का मान है –
(A) sec θ
(B) sin θ
(C) 1
(D) 0
हल :
(A) sec θ

प्रश्न 19.
\(\frac{1-\tan ^2 30^{\circ}}{1+\tan ^2 30^{\circ}}\) का मान है :
(A) cos 60°
(B) tan 60°
(C) sin 60°
(D) tan 30°
हल :
(A) cos 60°

प्रश्न 20.
यदि tan θ = \(\frac {15}{8}\) हो, तो sin θ का मान होगा :
(A) \(\frac {15}{17}\)
(B) \(\frac {17}{8}\)
(C) \(\frac {8}{15}\)
(D) 1
हल :
(A) \(\frac {15}{17}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 21.
रिक्त स्थान भरें : sec2θ – tan2θ = ………………. .
(A) 1
(B) -1
(C) 0
(D) 2sec2θ
हल :
(A) 1

प्रश्न 22.
(1 + sin θ) (1 – sin θ) का सरल रूप होगा-
(A) sin2θ
(B) cos2θ
(C) tan2θ
(D) sec2θ
हल :
(B) cos2θ

प्रश्न 23.
(1 + cos θ) (1 – cosθ) का सरल रूप होगा-
(A) sin2θ
(B) cos2θ
(C) tan2θ
(D) cosec2θ
हल :
(A) sin2θ

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 24.
3 sin 30° – 4 sin3 30° का मान है :
(A) sin 60°
(B) sin 90°
(C) 0
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) sin 90°

प्रश्न 25.
(A) 1
(B) – 1
(C) 0
(D) \(\frac {1}{2}\)
हल :
(D) \(\frac {1}{2}\)

प्रश्न 26.
sin A . cosec A बराबर है :
(A) 2 sec A
(B) cos2A
(C) 1
(D) 0
हल :
(C) 1

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प्रश्न 27.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है ?
(A) tan (90° – θ) = cot θ
(B) cot (90° – θ) = tan θ
(C) sec (90° – θ) = cosec θ
(D) cosec (90° – θ) = sin θ
हल :
(D) cosec (90° – θ) = sin θ

प्रश्न 28.
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है ?
(A) cosec (90° – θ) = sec θ
(B) cosec (90° – θ) = sin θ
(C) cosec (90° – θ) = cot θ
(D) cosec (90° – θ) = tan θ
हल :
(A) cosec (90° – θ) = sec θ

प्रश्न 29.
यदि cosec θ = 2 हो तो tan θ का मान होगा :
(A) \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)
(B) \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)
(C) \(\frac {1}{2}\)
(D) \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)
हल :
(B) \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)

प्रश्न 30.
sin 39° – cos 51° का मान होगा :
(A) 0
(B) 1
(C) 2
(D) -1
हल :
(A) 0

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प्रश्न 31.
यदि 2 sin θ = \(\sqrt{3}\) हो तो θ का मान होगा-
(A) 60°
(B) 45°
(C) 30°
(D) 0°
हल :
(A) 60°

प्रश्न 32.
यदि sin A = \(\frac {5}{13}\), तो sec A का मान है :
(A) \(\frac {13}{5}\)
(B) \(\frac {13}{12}\)
(C) \(\frac {12}{13}\)
(D) \(\frac {12}{5}\)
हल :
(B) \(\frac {13}{12}\)

प्रश्न 33.
cosec 25° – sec 65° का मान होगा-
(A) -1
(B) 0
(C) 1
(D) 2
हल :
(B) 0

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प्रश्न 34.
\(\frac{\tan 64^{\circ}}{\cot 26^{\circ}}\) का मान होगा :
(A) 0
(B) 1
(C) – 1
(D) 2 tan 64°
हल :
(B) 1

प्रश्न 35.
sin 60°. cos 30° बराबर है :
(A) 1
(B) \(\frac{2 \sqrt{3}}{4}\)
(C) \(\frac {4}{3}\)
(D) \(\frac {3}{4}\)
हल :
(D) \(\frac {3}{4}\)

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प्रश्न 36.
cos 45° – sin 45° का मान होगा-
(A) -1
(B) 0
(C) 1
(D) 2
हल :
(B) 0

प्रश्न 37.
6sec2θ – 6tan2θ बराबर है :
(A) 1
(B) – 6
(C) 6
(D) 0
हल :
(C) 6

प्रश्न 38.
\(\frac{\cos 20^{\circ}}{\sin 70^{\circ}}\) + \(\frac{\cos \theta}{\sin \left(90^{\circ}-\theta\right)}\) का मान होगा-
(A) 1
(B) – 1
(C) 2
(D) – 2
हल :
(C) 2

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प्रश्न 39.
sin θ. cos (90° – θ) + cos θ. sin (90° – θ) का मान होगा-
(A) – 1
(B) 1
(C) 2
(D) -2
हल :
(B) 1

प्रश्न 40.
cos θ. cos (90° – θ) – sin θ sin (90° – θ) का मान होगा-
(A) – 1
(B) 1
(C) 2
(D) शून्य
हल :
(D) शून्य

प्रश्न 41.
ΔABC में, जिसका कोण B समकोण है AB = 24 cm और BC = 7 cm है। cos A का मान है-
(A) \(\frac {7}{25}\)
(B) \(\frac {24}{25}\)
(C) \(\frac {7}{24}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) \(\frac {24}{25}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 42.
sin 81° + tan 71° को 0° और 45° के कोणों के बीच में निरूपित किया जा सकता है-
(A) sin 9° + tan 19°
(B) cos 9° + cot 19°
(C) tan 9° + cot 19°
(D) sec 9° + cosec 19°
हल :
(B) cos 9° + cot 19°

प्रश्न 43.
ΔABC में, जिसका कोणं B समकोण है, AB = 24 cm और BC = 7 cm है। cos C का मान है-
(A) \(\frac {7}{25}\)
(B) \(\frac {7}{24}\)
(C) \(\frac {24}{25}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) \(\frac {7}{25}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 44.
रिक्त स्थान भरें : tan2θ = ……………….. – 1
(A) cot2θ
(B) sec2θ
(C) cosec2θ
(D) cos2θ
हल :
(B) sec2θ

प्रश्न 45.
\(\frac{\cos ^2 20^{\circ}+\cos ^2 70^{\circ}}{\sin ^2 59^{\circ}+\sin ^2 31^{\circ}}\) का मान होगा-
(A) 2
(B) – 2
(C) 1
(D) – 1
हल :
(C) 1

प्रश्न 46.
ΔABC में, जिसका कोण B समकोण है, AB = 24 cm और BC = 7 cm है । sin A का मान है-
(A) \(\frac {7}{25}\)
(B) \(\frac {7}{24}\)
(C) \(\frac {24}{25}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) \(\frac {7}{25}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 47.
ΔABC में, जिसका कोण B समकोण है, AB = 24 cm और BC = 7 cm है। sin C का मान है-
(A) \(\frac {24}{25}\)
(B) \(\frac {7}{25}\)
(C) \(\frac {7}{24}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) \(\frac {24}{25}\)

प्रश्न 48.
\(\frac{\cos \left(90^{\circ}-\theta\right)}{\sin \theta}+\frac{\sin \theta}{\cos \left(90^{\circ}-\theta\right)}\) का मान होगा-
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
हल :
(B) 2

प्रश्न 49.
sin 60° – cos 30° का मान होगा-
(A) -1
(B) 1
(C) 0
(D) 2
हल :
(C) 0

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 8 त्रिकोणमिति का परिचय

प्रश्न 50.
cos θ × sec θ बराबर है :
(A) -1
(B) 1
(C) 0
(D) 2 cos
हल :
(B) 1

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HBSE 10th Class Science Notes Chapter 16 Management of Natural Resources

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Notes Chapter 16 Management of Natural Resources Notes.

Haryana Board 10th Class Science Notes Chapter 16 Management of Natural Resources

What Happens When we Add Our Waste to the Environment?

Natural resources:

  • The resources which occur naturally, and which cannot be created by man, are called natural resources. The components of the atmosphere, hydrosphere and lithosphere which are used for the maintenance of life are called natural resources.
  • Water, land, air, forests, minerals, plants and animals are also natural resources.

Five R’s for saving the environment:
Refuse:
Refuse refers to the concept of saying No to things that people offer you but you do not need. In other words one must refuse unnecessary things. Example: Refuse to use single-use plastic carry bags.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 16 Management of Natural Resources

Reduce:
Reduce means to use less. One can reduce the burden on environment by reducing consumption. Example: Instead of washing the car with pipes wipe it with wet cloth. Reducing wastage of food

Reuse:
The method of reuse refers to using an item again and again rather than throwing it away. Example: Rather than using plastic bags, buy proper shopping bags made out of cloth.

Repurpose:
At times when a product cannot be used further for its original purpose than use it for some other use. This is called repurpose. Example: We can make cloth bags from old trousers.

Recycle:
The action or process of converting waste into reusable material is called recycling.
Under recycling one can collect material such as plastic, paper, glass and metal items and recycle them to make required things instead of synthesizing or extracting fresh plastic, paper, glass or metal.

Sustainable development:
Economic development done without depleting the natural resources is called sustainable development.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 16 Management of Natural Resources

Biodiversity:
The diversity of plant and animal life in a particular habitat or in the world as a whole is called biodiversity.

Stakeholder:
A person with an interest or concern in something is called the stake holder.

Stakeholders of forests:

  • People who live in or around forests are dependent on forest produce for various aspects of their life.
  • The Forest Department of the Government which owns the land and controls the resources from forests.
  • The industrialists. All the industrialists covering those who use ‘tendu’ leaves to make bidis to the ones who owns paper mills. All those who use various forest produce, but are not dependent on the forests of any one area. In other words, they may source raw material from any forest.
  • The wildlife and nature enthusiasts who want to conserve nature in its pristine form.

Dependency on water:

  • Usually man depends upon fresh water for fulfilling his daily requirements.
  • Irregularities in the rainfall may create flood or drought, thus imbalancing the quantity of fresh water on earth and causing disasters. Thus, life on earth is fully dependent on fresh water.

Construction of large dams is criticized mainly because of the following three problems:

  • Social problems: Construction of large dams requires displacing large number of peasants and tribals residing nearby without paying them adequate compensation or rehabilitation. This leads to social problems.
  • Economic problems: Such dams swallow huge amount of public money and do not generate proportionate benefits.
  • Environmental problems: Massive construction of dams leads to large scale deforestation and huge loss to biological diversity.
  • People who have been displaced by various development projects are largely poor tribals. They face dual loss – first they have to give their land and access to forests without receiving proper compensation and second they do not even get any benefit from such projects.

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Watershed:
Any surface area from which draining of water resulting from rainfall is collected and drained through a common point is called a watershed. Watershed is similar to drainage basin or catchment area.

Watershed management:
The process of adopting practices of ‘land use’ and ‘water management’ in order to protect and improve the quality of the water and other natural resources within a watershed is known as watershed management.

Water-harvesting:
In general, water harvesting is the activity of collecting the water directly. The rainwater so collected can be stored for direct use or can be recharged into the groundwater.

Coal and petroleum:
Coal and petroleum are fossil fuels. Thesewere formed due to the degradation of bio mass millions of years ago. It is estimated that petroleum discovered so far will last for about 40 years and coal for about 200 years. Hence, it is utmost important to preserve them. Methods of conserving fossil fuels.

  • Making maximum use of renewable energy
  • Using public transport, constructing efficient building, etc.
  • Developing more efficient engines for the vehicles
  • Protecting fossil fuels from accidental fires

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HBSE 10th Class Science Notes Chapter 15 Our Environment

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Notes Chapter 15 Our Environment Notes.

Haryana Board 10th Class Science Notes Chapter 15 Our Environment

What Happens When we Add Our Waste to the Environment?

Environment:

  • The air, water and land in or on which people, animals and plants live is called environment.
  • Biotic components such as plants and animals and abiotic components such as air, water, soil,etc. are the two components of environment.

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Waste:
Unwanted or unusable items, remains or leftovers or by-products of household garbage together are termed as waste.

Biodegradable and non-biodegradable waste:
The waste materials, which are broken down to simpler substances by biological processes, are called biodegradable wastes, while those which cannot be broken down to simpler substances are called non-biodegradable wastes. For example, vegetables and fruits are biodegradable, while glass, plastics and polythene, etc. are non-biodegradable.

Ecosystem – What are its Components?

Food Chains and Webs

Food chain:
Living organisms of an ecosystem depend on each other for their food requirement and form a chain which is known as food chain.

In a food chain, the producers are at the first trophic level, the primary consumers (herbivores) at second, small carnivores i.e. secondary consumers at the third level and large carnivores or tertiary consumers at the fourth trophic level. The flow of energy in an ecosystem is always unidirectional.

Food web:

  • The network of interconnected food chains functioning in an ecosystem is called food web.
  • The relationship among individuals in the food chain is not represented by a straight line but as a series of branching lines which together form the food web.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 15 Our Environment

Biological magnification:
When harmful chemicals and pesticides such as DOT, BHC, etc. enter in the food chain, level. The phenomenon is called biological magnification. Humans occupy the top level of any food chain. Hence, there is maximum concentration of harmful chemicals in humans. In other words blo-magnification is highest at the human level.

Ozone:

  • Ozone (O3) is a gaseous molecule formed by three atoms of oxygen. It is a deadly poisonous gas. Ozone layer is located at the higher levels of the atmosphere i.e. in stratosphere.
  • The ozone layer absorbs harmful ultraviolet rays coming from the sun and protects us. Unfortunately, this layer is depleting and this is posing a serious problem for our planet.

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.1.
निम्न अभिक्रियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए-
(i) 3NO (g) → N2O(g); वेग = k[NO]2
(ii) H2O2 (aq) + 3I (aq) + 2H+ → 2H2O(I) + I3; वेग = k[H2O2][I]
(iii) CH3CHO (g) → CH4 (g) + CO(g); वेग = k[H2CHO]3/2
(iv) C2H5Cl (g) → C2H4 (g) + HCl(g); वेग = k[C2H5Cl]
उत्तर:
(i) वेग = k[NO]2
अतः अभिक्रिया की कोटि = 2
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 1
अतः k की इकाई = L mol-1 s-1

(ii) वेग = k[H2O2][I]
अभिक्रिया की कोटि = 1 + 1 = 2
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 2
अतः K की इकाई = L mol-1 s-1

(iii) वेग = k [CH3CHO]3/2
अभिक्रिया की कोटि = 1.5
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 3

(iv) अभिक्रिया की कोटि = 1
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 4

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.2.
अभिक्रिया 2A + B → A2B के लिए वेग = k[A][B]2 यहाँ k का मान 2.0 × 10-6 mol-2 L2s-1 है। प्रारंभिक वेग की गणना कीजिए; जब [A] = 0.1 mol L-1 एवं [B] = 0.2 mol L-1 हो तथा अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए; जब [A] घटकर 0.06mol L -1 रह जाए।
उत्तर:
अभिक्रिया 2A + B A2B के लिए प्रारंभिक वेग = k[A][B]2
k = 2.0 × 10-6 mol-2L2s-1,
दिया है – [A] = 0.1 mol L-1 तथा [B] = 0.2 mol L-1
अतः प्रारंभिक वेग = 2.0 × 10-6 × 0.1 × (0.2)2
= 2 × 10-6 × 0.1 × 0.04
= 8 × 10-9 mol L-1s-1
जब A की सांद्रता घटकर 0.06 mol L-1 रह जाती है अर्थात् 0.1 मोल A में से 0.04 मोल क्रिया करता है तो अभिक्रिया की रससमीकरणमिति के अनुसार, 2A + B → A2B
प्रारम्भिक सांद्रता 0.1 0.2
t समय पर सांद्रता (0.1 0.04) (0.2 – 9.02)
अतः [A] = 0.06M तथा [B] = 0.18 M
इस स्थिति में अभिक्रिया का वेग = k[A] [B]2
= 2 × 10-6 × 0.06 × (0.18)2
वेग = 3.888 × 109 = 3.89 × 10-9 mol L-1s-1

प्रश्न 4.3.
प्लैटिनम सतह पर NH3 का अपघटन शून्य कोटि की अभिक्रिया है । N2 एवं H2 के उत्पादन की दर क्या होगी जब k का मान 2.5 × 10-4 mol L-1s-1 हो?
उत्तर:
अमोनिया के विघटन की अभिक्रिया निम्न प्रकार होती है- 2NH3 → N2 + 3H2
अभिक्रिया का वेग = \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = k [सांद्रता]°
क्योंकि अभिक्रिया की कोटि = शून्य
अतः = \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = 2.5 × 10-4 mol L-1s-1 × 1
अतः N2 के बनने की दर
= \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = 2.5 × 10-4 mol L-1s-1
तथा H2 के बनने की दर
= \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{H}_2\right]}{\mathrm{dt}}\) = 3 × \(\frac{\mathrm{d}\left[\mathrm{N}_2\right]}{\mathrm{dt}}\)
=3 × 2.5 × 10-4 mol L-1s-1
= 7.5 × 10-4 mol L-1s-1

प्रश्न 4.4.
डाइमेथिल ईथर के अपघटन से CH4, H2 तथा CO बनते हैं। इस अभिक्रिया का वेग निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता है-
वेग= k[CH3OCH3]3/2
अभिक्रिया के वेग का अनुगमन बंद पात्र से बढ़ते दाब द्वारा किया जाता है, अतः वेग समीकरण को डाइमेथिल ईथर के आंशिक दाब के पद में भी दिया जा सकता है। अतः
वेग = \(\left(\mathrm{p}_{\mathrm{CH}_3 \mathrm{OCH}_3}\right)^{3 / 2}\) यदि दाब को bar में तथा समय को मिनट में मापा जाये तो अभिक्रिया के वेग एवं वेग स्थिरांक की इकाइयाँ क्या होंगी?
उत्तर:
डाइमेथिल ईथर के अपघटन की अभिक्रिया निम्न प्रकार होगी-
CH3 – O – CH3 → CH4 + H2 + CO
अभिक्रिया का वेग k = \(\left(\mathrm{p}_{\mathrm{CH}_3 \mathrm{O}-\mathrm{CH}_3}\right)^{3 / 2}\)
अतः वेग की इकाई = bar min-1 या = bar s-1
वेग स्थिरांक, HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 5
अतः वेग स्थिरांक की इकाई bar-1/2 s-1 होगी।

प्रश्न 4.5.
रासायनिक अभिक्रिया के वेग पर प्रभाव डालने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं-
(i) अभिकारकों की प्रकृति
(ii) अभिकारकों की सांद्रता (गैसों के संदर्भ में दाब )
(iii) ताप
(iv) उत्प्रेरक ।

(i) अभिकारकों की सान्द्रता – द्रव्यअनुपाती क्रिया के नियम के अनुसार अभिकारकों की सान्द्रता बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है। अभिक्रिया वेग को अभिकारकों की सान्द्रता के पदों में व्यक्त करना वेग नियम (Rate Law) या वेग व्यंजक या वेग समीकरण कहलाता है। गैसीय अभिक्रियाओं में दाब बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग उस दिशा में बढ़ता है जिस तरफ गैसीय अणुओं की संख्या कम होती है।

(ii) अभिकारकों की सांद्रता – अभिक्रिया मिश्रण का विलोडन करने पर अणुओं के मध्य समागम बढ़ता है जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ता है।

(iii) ताप – सामान्यतः ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है क्योंकि ताप बढ़ाने पर क्रियाकारकों की गतिज ऊर्जा बढ़ती है जिसके कारण ऊर्जित अणुओं की सान्द्रता बढ़ती है अतः प्रति सेकण्ड प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ती है। प्रयोगों से ज्ञात हुआ है कि 10°C ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग 2 से 3 गुना हो जाता है। अभिक्रिया वेग पर ताप के प्रभाव की व्याख्या आरेनियस के सिद्धान्त से की जाती है, जिसका विस्तृत अध्ययन आगे खण्ड 4.5 में करेंगे।

(iv) उत्प्रेरक – उत्प्रेरक वे पदार्थ होते हैं जिनमें स्वयं में कोई स्थायी रासायनिक परिवर्तन के बिना, अभिक्रिया वेग को बढ़ाते हैं । वह पदार्थ जो अभिक्रिया के वेग को बढ़ा देता है लेकिन वह स्वतः रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहता है उसे उत्प्रेरक कहते हैं तथा इस क्रिया को उत्प्रेरण कहते हैं ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 30
वे पदार्थ जो अभिक्रिया के वेग को कम करते हैं उन्हें निरोधक (Inhibitor) कहते हैं।

प्रश्न 4.6
किसी अभिक्रियक के लिए एक अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। अभिक्रिया का वेग कैसे प्रभावित होगा; यदि अभिक्रियक की सांद्रता-
(i) दुगुनी कर दी जाए
(ii) आधी कर दी जाए।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया के लिए कोटि 2 है अतः अभिक्रिया का वेग = k [सांद्रता]2
(i) अभिक्रियक की सांद्रता दुगुनी करने पर,
वेग = k [2 सांद्रता]2
वेग = 4k [सांद्रता]2
अतः अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है।

(ii) अभिक्रियक (Reactant) की सांद्रता आधी कर दी जाए तो
वेग = k[\(\frac { 1 }{ 2 }\) – सांद्रता]2
वेग = \(\frac { 1 }{ 4 }\) [सांद्रता]2
अतः अभिक्रिया का वेग एक चौथाई अर्थात् \(\frac { 1 }{ 4 }\) गुना हो जाता है।

प्रश्न 4.7.
वेग स्थिरांक पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? ताप के इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप से कैसे प्रदर्शित कर सकते हैं?
उत्तर:
सामान्यतः ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है। अभिक्रिया का वेग, वेग स्थिरांक के रूप में व्यक्त किया जाता है। अतः ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान बढ़ जाता है।
किसी रासायनिक अभिक्रिया के ताप में 10°C की वृद्धि करने पर वेग स्थिरांक लगभग दुगुना हो जाता है।
अतः ताप गुणांक = \(\frac{k_{(t+10)}}{k_t} \approx 2\)
अभिक्रिया के वेग की ताप पर निर्भरता को आर्रेनिअस समीकरण से समझा सकते हैं।
k = Ae-Ea/RT
यहाँ A आर्रेनिअस गुणक अथवा आवृत्ति गुणक है, इसे पूर्व – चरघातांकी गुणक भी कहते हैं। यह किसी विशिष्ट अभिक्रिया के लिए स्थिरांक होता है। यहाँ R गैस स्थिरांक है तथा Ea सक्रियण ऊर्जा है जिसे J mol-1 में व्यक्त करते हैं।
अभिकारक तथा उत्पाद के मध्य सक्रियित संकुल बनता है जिसके बनने के लिए आवश्यक ऊर्जा को सक्रियण ऊर्जा (Ea) कहते हैं।

प्रश्न 4.8.
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया के निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 6
30 से 60 सेकंड समय अंतराल में औसत वेग की गणना कीजिए ।
उत्तर:
औसत वेग = (rav) = – \(\frac{\Delta[\mathrm{R}]}{\Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{c_2-c_1}{\Delta t}\)
= – \(\frac{(0.17-0.31)}{60-30}\) = – \(\frac{(-0.14)}{30}\)
= 4.666 × 10-3
= 4.67 × 10-3 mol L-1 s-1

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प्रश्न 4.9.
एक अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है
(i) अवकल वेग समीकरण लिखिए।
(ii) B की सांद्रता तीन गुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(iii) A तथा B दोनों की सांद्रता दुगुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
यह अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति द्वितीय कोटि की है अतः
(i) अवकल वेग समीकरण-
वेग = k [A]1 [B]2
अतः अभिक्रिया की कुल कोटि = 1 + 2 = 3

(ii) B की सांद्रता तीन गुनी करने पर –
वेग = k[A]1 [3B]2
|वेग = 9k[A]1 [B]2
अतः अभिक्रिया का वेग 9 गुना हो जाता है।

(iii) A तथा B दोनों की सांद्रता दुगुनी करने पर –
वेग = k[A]1 [B]2
वेग = k[2A]1 [2B]2
वेग = 8k [A]1 [B]2
अतः अभिक्रिया का वेग 8 गुना हो जाता है।

प्रश्न 4.10.
A और B के मध्य अभिक्रिया में A और B की विभिन्न प्रारंभिक सांद्रताओं के लिए प्रारंभिक वेग (r0) नीचे दिए गए हैं।
A और B के प्रति अभिक्रिया की कोटि क्या है?
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 7
उत्तर:
माना कि A के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि = a तथा B के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि = b
अतः वेग = k[A]a[B]b
पाठ्यांक (Reading) (1) तथा (2) से
5.07 × 10-5 = k [0.20]a [0.30]b …..(1)
5.07 × 10-5 = k [0.20]a [0.10]b …..(2)
समीकरण (2) में समीकरण (1) का भाग देने पर,
\(\frac{5.07 \times 10^{-5}}{5.07 \times 10^{-5}}\) = \(\frac{\mathrm{k}[0.20]^a[0.10]^b}{\mathrm{k}[0.20]^{\mathrm{a}}[0.30]^{\mathrm{b}}}\)
या 1 = \(\left(\frac{0.10}{0.30}\right)^b\) या b = 0

पाठ्यांक (2) से,
वेग = 5.07 × 10-5 = k [0.20]a [0.10]b
5.07 × 10-5 = k [0.20]a × 1 ….(3)
(∵ b = 0)

पाठ्यांक (3) से,
वेग = 1.43 × 10-4 = k[0.40]a [0.05]b ….(4)
= k[0.40]a × 1

समीकरण (4) को समीकरण (3) से भाग देने पर,
\(\frac{1.43 \times 10^{-4}}{5.07 \times 10^{-5}}\) = \(\frac{k[0.40]^a}{k[0.20]^a}\) = \(\left[\frac{0.4}{0.2}\right]^{\mathrm{a}}\) = (2)a
(2)a = 2.820
a log 2 = log 2.820
a = \(\frac{\log 2.820}{\log 2}\) = \(\frac{0.4490}{0.3010}\)
a = 1.49 = 1.5
अतः A के लिए अभिक्रिया की कोटि, 1.5 तथा B के लिए अभिक्रिया की कोटि शून्य है।

प्रश्न 4.11.
2A + B → C + D अभिक्रिया की बलगतिकी अध्ययन करने पर निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए। अभिक्रिया के लिए वेग नियम तथा वेग स्थिरांक ज्ञात कीजिए ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 8
उत्तर:
अभिक्रिया 2A + B → C + D के लिए वेग व्यंजक-
वेग k[A]a[B]b
यहाँ a तथा b, A व B के संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि है।
प्रयोग I तथा IV से-
वेग = 6.0 × 10-3 = k[0.1]a [0.1]b ….(1)
2.4 × 10-2 = k[0.4]a [0.1]b ….(2)
समीकरण ( 2 ) में समीकरण (1) का भाग देने पर,

\(\frac{2.4 \times 10^{-2}}{6.0 \times 10^{-3}}\) = \(\left(\frac{0.4}{0.1}\right)^{\mathrm{a}}\)
4 = 4a अतः a = 1
प्रयोग II तथा III से-
वेग 7.2 × 10-2 = k(0.3)a (0.2)b ….(3)
2.88 × 10-1 = k(0.3)a (0.4)b ….(4)

समीकरण (4) में समीकरण (3) का भाग देने पर,
\(\frac{2.88 \times 10^{-1}}{7.2 \times 10^{-2}}\) = \(\frac{k(0.3)^l(0.4)^b}{k(0.3)^l(0.2)^b}\)
4 = (2)b अतः b = 2
अतः a तथा b के मान से इस अभिक्रिया के लिए वेग नियम इस प्रकार लिखा जा सकता है-
a = 1 तथा b = 2

वेग नियम = k[A]1[B]2
अतः अभिक्रिया की कोटि = 1 + 2 = 3
प्रयोग I के अनुसार,
वेग = 6 × 10-3 = k[0.1]a[0.1]b, (a = 1, b = 2)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 9
अतः वेग स्थिरांक k = 6.0 M-2 min-1

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.12.
A तथा B के मध्य अभिक्रिया A के प्रति प्रथम तथा B के प्रति शून्य कोटि की है निम्न तालिका में रिक्त स्थान भरिए ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 10
उत्तर:
A तथा B के मध्य अभिक्रिया में A के संदर्भ में अभिक्रिया प्रथम कोटि तथा B के संदर्भ में अभिक्रिया शून्य कोटि की है।
अतः इसके लिए वेग समीकरण
= k[A]1 [B]0
= k[A]
(i) प्रयोग से.
वेग = 2.0 × 10-2 = k[0.1]
अतः वेग नियतांक, k = \(\frac{2.0 \times 10^{-2}}{0.1}\) = 0.2 min-1

(ii) प्रयोग II से,
वेग = k[A]
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 11

(iii) प्रयोग III से,
वेग = k[A]
= 0.2 × 0.4
= 0.08 M min-1
= 8.0 × 10-2 2M min-1

(iv) प्रयोग IV से,
वेग = K[A]
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 12

अतः रिक्त स्थानों की पूर्ति के पश्चात् सम्पूर्ण तालिका निम्न प्रकार होगी-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 13

प्रश्न 4.13.
नीचे दी गई प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के ar स्थिरांक से अर्धायु की गणना कीजिए-
(i) 200 s-1
(ii) 2 min-1
(iii) 4 year-1
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए-
अर्धायु, t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)

(i) वेग नियतांक, k = 200s-1
अतः t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ 200 }\) = 0.003465
= 3.465 × 10-3 s
= 3.47 × 10-3 s

(ii) k = 2 min-1 तो t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ 2 }\)
= 0.3465 min
= 0.35 min

(iii) k = 4 year-1 तो t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ 4 }\) = 0.1732 year
t1/2 = 0.173 year

प्रश्न 4.14.
14C रेडियोएक्टिव क्षय की अर्धायु 5730 वर्ष है। एक पुरातत्व कलाकृति की लकड़ी में, जीवित वृक्ष की लकड़ी की तुलना में 80% 14C की मात्रा है। नमूने की आयु का परिकलन कीजिए ।
उत्तर:
अर्धायु, t1/2 = 5730 वर्ष
अतः वेग नियतांक (क्षयांक), k या λ = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
k = \(\frac{0.693}{5730}\)
k = 1.209 × 10-4 वर्ष-1
चूँकि रेडियोएक्टिव विघटन की अभिक्रिया प्रथम कोटि की होती है
अतः वेग नियतांक या क्षयांक
k = \(\frac{2.303}{t}\) log \(\frac{\left[R_0\right]}{[R]}\)
चूँकि 20% विघटन हो रहा है अतः t पर 14C है = 80%
[R0] = 100 तथा [R] = 80
अतः t = \(\frac{2.303}{k}\) log \(\frac { 100 }{ 80 }\)
t = \(\frac{2.303}{1.209 \times 10^{-4}}\) log 1.25
t = \(\frac{2.303}{1.209 \times 10^{-4}}\) × (0.0969)
= 0.1845 × 104 = 1845 वर्ष

प्रश्न 4.15.
गैस प्रावस्था में 318K पर N2O5 के अपघटन की [2N2O5 → 4NO2+O2] अभिक्रिया के आँकड़े आगे दिए गए हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 14
(i) [N2O5] एवं t के मध्य आलेख खींचिए ।
(ii) अभिक्रिया के लिए अर्धायु की गणना कीजिए ।
(iii) log [N2O5] एवं t के मध्य ग्राफ खींचिए ।
(iv) अभिक्रिया के लिए वेग नियम क्या है?
(v) वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
(vi) k की सहायता से अर्धायु की गणना कीजिए तथा इसकी तुलना (ii) से कीजिए ।
उत्तर:
(i) N2O5 की सांद्रता [N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ खींचने पर निम्न प्रकार का ग्राफ प्राप्त होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 15
(ii) इस अभिक्रिया के लिए अर्धायु वह समय है जब N2O5 की सांद्रता 1.63 × 10-2 M से आधी अर्थात् 0.815 × 10-2 M हो जाए ग्राफ से 1420 वर्ष आता है अतः इस अभिक्रिया की अर्धायु 1420 वर्ष है।

(iii) log[N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ खींचने के लिए पहले N2O5 के विभिन्न मानों का log लेते हैं जो निम्न प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 16
फिर, समय (t) तथा log [N2O5] के मध्य ग्राफ खींचते हैं जो निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 17

(iv) log [N2O5] तथा t के मध्य ग्राफ एक सीधी रेखा है अतः अभिक्रिया प्रथम कोटि की है इसलिए वेग नियम K[N2O5]

(v) ढाल = – \(\frac { k }{ 2.303 }\) = \(\frac { -0.295 }{ 1420s }\)
अतः वेग स्थिरांक, k = \(\frac{0.295 \times 2.303}{1420 \mathrm{~s}}\)
k = 4.784 × 10-4s-1
k =4.8×10-4s-1

(vi) अर्धायु, t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\) = \(\frac{0.693}{4.8 \times 10^{-4}}\)
t1/2 = 0.1443 x 104 = 1443 s
यह अर्धायु, (ii) से प्राप्त अर्धायु के लगभग समान है।

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प्रश्न 4.16.
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक 60 s-1 है। अभिक्रियक को अपनी प्रारंभिक सांद्रता से 1/16 वाँ भाग रह जाने में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
अभिक्रिया का वेग स्थिरांक = 60 s-1
अभिकारक प्रारंभिक सांद्रता का 1/16 वाँ भाग रह रहा है अर्थात् इसका 5/16 भाग क्रिया कर रहा है।
प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग स्थिरांक,
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
माना, [R0] = 1 तो [R] = \(\frac { 1 }{ 16 }\)
अतः t = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\) log\(\frac { 1 }{ 1/16 }\)
t = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\) log\(\frac { 16 }{ 1 }\)
t = 0.03838 (1.2041)
t = 0.046s = 4.6 × 10-2 सेकंड

प्रश्न 4.17.
नाभिकीय विस्फोट का 28.1 वर्ष अर्धायु वाला एक उत्पाद 90Sr होता है। यदि कैल्सियम के स्थान पर 1 pg. Sr नवजात शिशु की अस्थियों में अवशोषित हो जाए और उपापचयन से ह्रास न हो तो इसकी 10 वर्ष एवं 60 वर्ष पश्चात् कितनी मात्रा रह जाएगी ?
उत्तर:
यहाँ नाभिकीय विखण्डन हो रहा है तथा नाभिकीय विखण्डन की सभी अभिक्रियाएँ प्रथम कोटि की होती हैं अतः
क्षयांक या वेग स्थिरांक, λ या k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
k = \(\frac { 0.693 }{ 28.1 }\) = 0.02466 = 0.02467 वर्ष-1

(i) 10 वर्ष बाद 90Sr की बची हुई मात्रा –
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
दिया गया है – [R]0 = प्रारंभिक पदार्थ है- 1 μg = 1 × 10-6 g
0.02467 = \(\frac { 2.303 }{ 10 }\) log\(\frac{\left[1 \times 10^{-6}\right]}{[\mathrm{R}]}\)
log \(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = \(\frac{10 \times 0.02467}{2.303}\)
log \(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = \(\frac{0.2467}{2.303}\) = 0.10707 = 0.1071
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = Antilog 0.1071 = 1.279
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[R]}\) = 1.279
अतः [R] = \(\frac{1 \times 10^{-6}}{1.279}\) = 0.7818 × 10-6 g
[R] = 0.7818 μg

(ii) 60 वर्ष पश्चात् 90Sr की बची हुई मात्रा
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
0.02467 = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\) log\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\)
log\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = \(\frac{0.02467 \times 60}{2.303}\) = 0.6427
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = Antilog 0.6427
\(\frac{1 \times 10^{-6}}{[\mathrm{R}]}\) = 4.392
[R] = \(\frac{1 \times 10^{-6}}{4.392}\) = 0.227 × 10-6 g = 0.227 μg
अतः 10 वर्ष के बाद 90Sr, 0.7818 μg बचेगा तथा 60 वर्ष के 0.227 μg बचेगा।

प्रश्न 4.18.
दर्शाइए कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाले समय से दुगुना होता है।
उत्तर:
किसी प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए समय,
t = \(\frac { 2.303 }{ 2 }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t समय बाद, R = 0.01 [R0] क्योंकि 99% अभिक्रिया हो रही है। 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय-
t0.99 = \(\frac { 2.303 }{ k }\) = log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{0.01[\mathrm{R}]_0}\) = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log 102
90% अभिक्रिया पूर्ण होने पर, [R] = 0.1 [R0]
अतः 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय
t0.90 = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{0.1[\mathrm{R}]_0}\) = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log 10
अतः \(\frac{\mathrm{t}_{0.99}}{\mathrm{t}_{0.90}}\) = \(\frac { 2.303 }{ k }\) log 102 × \(\frac { k }{ 2.303 }\) × \(\frac { l }{ log 10 }\)
\(\frac{\mathrm{t}_{0.99}}{\mathrm{t}_{0.90}}\) = \(\frac{\log 10^2}{\log 10}\) = \(\frac { 2 }{ 1 }\)
\(\frac{\mathrm{t}_{0.99}}{\mathrm{t}_{0.90}}\) = \(\frac { 2 }{ 1 }\)
इससे सिद्ध होता है कि प्रथम कोटि की अभिक्रिया में 99% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगा समय, 90% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगने वाले समय से दुगुना होता है।

प्रश्न 4.19.
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया 30% में वियोजन होने में 40 मिनट लगते हैं। t1/2 की गणना कीजिए ।
उत्तर:
अभिक्रिया 30% हो रही है। अतः [R]0 = 1 मानने पर,
[R] = 1 – 0.3 = 0.7 तथा t = 40 मिनट
अतः वेग स्थिरांक, k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
k = \(\frac { 2.303 }{ 40 }\) log\(\frac { 1 }{ 0.7 }\)
k = 0.05757 log\(\frac { 10 }{ 7 }\)
k = 0.05757 (log 10 – log 7)
k = 0.05757 (1 – 0.8451)
k = 0.05757 × (0.1549)
k = 8.917 × 10-3 मिनट-1
k = 8.92 × 10-3 मिनट-1
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\) = \(\frac{0.693}{8.92 \times 10^{-3}}\)
t1/2 = 07769 × 103 मिनट
t1/2 = 77.7 मिनट

प्रश्न 4.20.
543K ताप पर एजो आइसोप्रोपेन के हेक्सेन तथा नाइट्रोजन में विघटन के निम्न आँकड़े प्राप्त हुए। वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 18
उत्तर:
एजोआइसोप्रोपेन का विघटन निम्न प्रकार होता है-
A → B + C
(CH3)2 CH – N = N – CH (CH3)2 N2 + C6H14
माना t = 0 पर प्रारंभिक दाब = Pi
तथा t समय पर दाब में कमी = x atm
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 19
कुल दाब = Pt
अतः t समय पर कुल दाब Pt = ( Pi – x) + x + x
Pt = Pi + x या x = Pt – Pi
यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः
वेग स्थिरांक, k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
k = \(\frac{2.303}{t}\) log\(\frac{P_i}{P_i-x}\)
k = \(\frac{2.303}{t}\) log\(\frac{P_i}{P_i-\left(P_t-P_i\right)}\)
k = \(\frac{2.303}{t}\) log\(\frac{P_i}{2 P_i-P_t}\)
Pi = 35 mm Hg Pt = 54.0 mm Hg (t = 360 s पर)

मान रखने पर,
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 0.5 }{ 0.4 }\)
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 35 }{ 16 }\)
k = 0.006397 (log 2.1875)
k = 0.006397 × 0.3399
k = 2.17 × 10-3 = 2.20 × 10-3 s-1

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प्रश्न 4.21.
स्थिर आयतन पर SO2Cl2 के प्रथम कोटि के ताप अपघटन पर निम्न आँकड़े प्राप्त हुए-
SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl2(g)
अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए जब कुल दाब 0.65 atm हो ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 20
उत्तर:
अभिक्रिया SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl(g) माना प्रारंभिक दाब = Pi तथा t समय पर दाब में कमी x atm प्रश्नानुसार-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 21
कुल दाब, Pt = 0.5 – x + x + x = 0.5 + x atm
t समय पर कुल दाब = 0.6 atm.
अतः 0.6 = 0.5 + x, x = 0.1 atm
इसलिए t समय (100 s) पर, SO2Cl2 का दाब
= 0.5 – x = 0.5 – 0.1 = 0.4 atm
यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\) के अनुसार
वेग स्थिरांक, HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 22
मान रखने पर,
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 0.5 }{ 0.4 }\)
k = 0.02303 log 1.25
k = 0.02303 × 0.0969
k = 2.23 × 10-3 s-1
कुल दाब = 0.65 atm पर अभिक्रिया का वेग-
कुल दाब 0.65 atm पर SO2Cl2 का आंशिक दाब, = 0.5 – x
चूँकि कुल दाब = 0.5 + x
अतः 0.65 = 0.5 + x
x = 0.65 – 0.5 = 0.15
अतः 0.5 – x 0.5 – 0.15 = 0.35
वेग = k (PSO2Cl2)
वेग = 2.23 × 10-3 × 0.35
वेग = 7.8 × 10-4 atm s-1

प्रश्न 4.22.
विभिन्न तापों पर N2O5 के अपघटन के लिए वेग स्थिरांक नीचे दिए गये हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 23
In k एवं 1/T के मध्य ग्राफ खींचिए तथा A एवं Ea की गणना कीजिए। 30°C तथा 50°C पर वेग स्थिरांक को प्रागुक्त (Predict) कीजिए।
उत्तर:
ln k तथा 1/T के मध्य ग्राफ बनाने के लिए सर्वप्रथम दिए गए मानों से निम्न प्रकार सारणी तैयार करते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 24
फिर log k तथा 1/T के मध्य ग्राफ खींचने पर निम्नलिखित प्रकार का ग्राफ प्राप्त होता है जो कि एक सीधी रेखा है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 25
समीकरण, In k = – \(\frac{E_a}{\mathrm{RT}}\) + In A
या log k = – \(\frac{E_a}{\mathrm{2.303RT}}\) + log A के अनुसार इस ग्राफ काढाल
= – \(\frac{E_a}{\mathrm{2.303R}}\) होगा तथा अन्तःखण्ड = log A होगा।
ग्राफ से ढाल = –\(\frac { 2.4 }{ 0.00047 }\) = –\(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{2.303 \mathrm{R}}\)
अतः सक्रियण ऊर्जा, Ea = \(\frac{2.4 \times 2.303 \times R}{0.00047}\)
Ea = \(\frac{2.4 \times 2.303 \times 8.314}{0.00047}\)
= 97772.64 J mol-1
Ea = 97.772 kJ mol-1
ग्राफ से अंतःखण्ड ज्ञात करके log A ज्ञात कर लेते हैं जिसका Antilog लेने पर A प्राप्त हो जाएगा जो कि लगभग 1.585 × 106 टक्कर आता है।

ग्राफ से 30°C (303K) तथा 50°C (323K ) पर log K पर ज्ञात करके, Antilog लेने पर K के मान प्राप्त हो जाते हैं जो कि लगभग 6.31 × 10-5 s-1 (303K पर ) तथा 1.585 x 10-3 s-1 (323K पर) है।

प्रश्न 4.23
546 K ताप पर हाइड्रोकार्बन के अपघटन में वेग स्थिरांक 2.418 × 10-5 s-1 है। यदि सक्रियण ऊर्जा 179.9 kJ/mol हो तो पूर्व- घातांकी गुणन का मान क्या होगा?
उत्तर:
In k = –\(\frac{E_a}{R T}\) + In A
In A = In k + \(\frac{E_a}{R T}\)
दिया है : log A = log k + \(\frac{E_a}{2.303 \mathrm{RT}}\)
Ea = 179.9 kj/mol
= 179900 J mol-1
k = 2.418 × 10-5 s-1
R = 8.314 Jk-1 तथा T = 546k
मान रखने पर,
log A = log 2.418 × 10-5 + \(\frac{179900}{2.303 \times 8.314 \times 546}\)
log A = log 10-5 + log 2.418 + \(\frac { 179900 }{ 10,454.339 }\)
log A = – 5 log10 + 0.3834) + 17.208
log A = – 5 + 0.3834 + 17.21
log A = – 4.6166 + 17.21
log A = 12.5934
A = Antilog 12.5934
A = 3.921 × 1012
अतः पूर्व घातांकी गुणन, A = 3.9 × 1012 s-1

प्रश्न 4.24.
किसी अभिक्रिया A → उत्पाद के लिए k = 2.0 × 10-2 s-1 है। यदि A की प्रारंभिक सांद्रता 1.0 mol L-1 हो तो 100s के पश्चात् इसकी सांद्रता क्या रह जाएगी ?
उत्तर:
दिए गए समीकरण के अनुसार अभिक्रिया प्रथम कोटि की है
अतः k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
k = 2.0 × 10-2 s-1, t = 100s,
[R]0 = 1.0 mol L-1, [R] = ?
मान रखने पर,
2.0 × 10-2 = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) log\(\frac { 1 }{ [R] }\)
log\(\frac { 1 }{ [R] }\) = \(\frac{2 \times 10^{-2} \times 100}{2.303}\)
log\(\frac { 1 }{ [R] }\) = \(\frac { 2 }{ 2.303 }\) = 0.8684
\(\frac { 1 }{ [R] }\) = Antilog 0.8684
\(\frac { 1 }{ [R] }\) = 7.386
[R] = 7.386
[R] = \(\frac { 1 }{ 7.386 }\) = 0.135 M
अतः 100s के पश्चात् A की सांद्रता, 0.135M रह जायेगी ।

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प्रश्न 4.25.
अम्लीय माध्यम में सूक्रोस का ग्लूकोस एवं फ्रक्टोज़ में विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है । इस अभिक्रिया की अर्धायु 3.0 घंटे है। 8 घंटे बाद नमूने में सूक्रोस का कितना अंश बचेगा ?
उत्तर:
C12H12O11 + H2O → C6H12O6 + C6H12O6
सूक्रोस (आधिक्य में) ग्लूकोस फ्रक्टोस
यह प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः इसके लिए अर्धायु
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\) = \(\frac{0.693}{3.0 \mathrm{hr}}\)
k = 0.231 hr-1
माना सूक्रोस की प्रारंभिक सांद्रता [R]0 = 1 mol
t = 8hr तथा k = 0.231 hr-1
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\) log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
0.231 = \(\frac { 2.303 }{ 8 }\) log\(\frac { 1}{ [R] }\)
log\(\frac { 1}{ [R] }\) = \(\frac{0.231 \times 8}{2.303}\) = \(\frac { 1.848 }{ 2.303 }\)
log\(\frac { 1}{ [R] }\) = 0.8024
log\(\frac { 1}{ [R] }\) = Antilog 0.8024
\(\frac { 1}{ [R] }\) = 6.345
R = \(\frac { 1}{ 6.345 }\) = 0.1576M
अतः 8 घंटे के बाद सूक्रोस का बचा अंश = 0.158 M

प्रश्न 4.26.
हाइड्रोकार्बन का विघटन निम्न समीकरण के अनुसार होता है। Ea की गणना कीजिए ।
k = (4.5 × 1011 s-1)e-28000K/T
उत्तर:
आर्रेनिअस समीकरण के अनुसार
k = A·e ̄Ea / RT ….(1)
दिया गया है, k = (4.5 × 10-11s-1)e-28000K/T ….(2)
समीकरण (1) तथा (2) की तुलना करने पर,
– \(\frac{E_a}{R T}\) = \(\frac{-28000 K}{T}\)
या \(\frac{E_a}{R}\) = 28000K
Ea = R × 28000 K
Ea = 8.314 JK-1 mol-1 × 28,000 K
Ea = 232792 J mol-1
अतः सक्रियण ऊर्जा Ea = 232.79 kJ mol-1

प्रश्न 4.27.
H2O2 के प्रथम कोटि के विघटन को निम्न समीकरण द्वारा लिख सकते हैं-
log k = 14.34 – 1.25 × 104 K/T
इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए कितने ताप पर इस अभिक्रिया की अर्धायु 256 मिनट होगी?
उत्तर:
आरेंनिअस समीकरण के अनुसार-
k = Ae -Ea/RT
log लेने पर, log k = log A – \(\frac{E_a}{2.303 R T}\) ….(1)
दिया गया है- log k = 14.34 – 1.25 × 104 K/T ….(2)
समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर,
\(\frac{E_a}{2.303 R}\) = 1.25 × 104

Ea = 2.303 × R × 1.25 × 104
Ea = 2.303 × 8.314 × 1.25 × 104
Ea = 23.9339 × 104 J mol-1
Ea = 23.9339 J mol-1
अतः सक्रियण ऊर्जा, Ea = 23.9339 kJ mol-1
H2O2 का विघटन प्रथम कोटि अभिक्रिया है अतः
अर्घायु, t1/2 = \(\frac{0.693}{k}\)
t1/2 = 256 min = 256 × 60 s
k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\) = \(\frac{0.693}{256 \times 60}\)
वेग स्थिरांक k = 4.51 × 10-5 s-1
दिया गया है : log k = 14.34 – 1.25 × 104 K/T
मान रखने पर,
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 26
अतः 668.8K ताप पर अभिक्रिया की अर्धायु 256 मिनट होगी ।

प्रश्न 4.28.
10°C ताप पर A के उत्पाद में विघटन के लिए k का मान 4.5 × 103s-1 तथा सक्रियण ऊर्जा 60kJ mol-1 है, किस ताप पर k का मान 1.5 × 104s-1 होगा?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 27

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.29.
298K ताप पर प्रथम कोटि की अभिक्रिया के 10% पूर्ण होने का समय 308K ताप पर 25% अभिक्रिया पूर्ण होने में लगे समय के बराबर है। यदि A का मान 4 × 1010 s-1 हो तो 318K ताप पर k तथा Ea की गणना कीजिए ।
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 28

प्रश्न 4.30.
ताप में 293K से 313K तक वृद्धि करने पर किसी अभिक्रिया का वेग चार गुना हो जाता है । इस अभिक्रिया के लिए सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिवर्तित नहीं होता ।
उत्तर:
आर्रेनिअस समीकरण से,
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 Img 29

HBSE 12th Class Chemistry रासायनिक बलगतिकी Intext Questions

प्रश्न 4.1.
R → P, अभिक्रिया के लिए अभिकारक की सांद्रता 0.03M से 25 मिनट में परिवर्तित होकर 0.02M हो जाती है। औसत वेग की गणना सेकण्ड तथा मिनट दोनों इकाइयों में कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया का औसत वेग = \(\frac{-\Delta[\mathrm{R}]}{\Delta \mathrm{t}}\)
∆R = [R2] – [R1] = 0.02M – 0.03M – 0.01M (a) ∆t = 25 मिनट
अतः औसत वेग = \(\frac{-(-0.01)}{25}=\frac{0.01}{25}\)
= 0.0004 M min-1

(b) ∆t = 25 x 60 = 1500 सेकण्ड
अतः औसत वेग = \(\frac { 0.01 }{ 1500 }\) = 6.66 x 10-6 ms-1
= 6.66 x 10-6 mol L-1 s-1

प्रश्न 4.2.
2A → उत्पाद, अभिक्रिया में A की सांद्रता 10 मिनट में 0.5mol L-1 से घट कर 0.4mol L-1 रह जाती है। इस समयांतराल के लिए अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए।
उत्तर:
2A → उत्पाद के लिए
अभिक्रिया का वेग = – \(\frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{2 \mathrm{dt}}\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी 1
A की सांद्रता में परिवर्तन = 0.4 – 0.5mol L-1
d[A] = – 0.1mol L -1
dt = 10 मिनट
अतः अभिक्रिया का वेग = \(\frac{-(-0.1)}{2 \times 10}=\frac{0.1}{20}\)
अभिक्रिया का वेग = A के विलुप्त होने की दर
= 0.005 mol L-1 min-1

प्रश्न 4.3.
एक अभिक्रिया A + B → उत्पाद, के लिए वेग नियम r = k[A]1/2[B]² से दिया गया है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
उत्तर:
वेग नियम r = k[A]1/2[B]² के अनुसार अभिक्रिया की कोटि 2.5 है, क्योंकि अभिक्रिया के वेग नियम व्यंजक में सांद्रता के घातांकों का योग 2.5 है जो कि अभिक्रिया की कोटि होती है।

प्रश्न 4.4.
अणु X का Y में रूपांतरण द्वितीय कोटि की बलगतिकी के अनुरूप होता है। यदि X की सांद्रता तीन गुनी कर दी जाए तो Y के निर्माण होने के वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रश्नानुसार अभिक्रिया X → Y के लिए
अभिक्रिया का वेग = k [X]² … (1)
अतः अभिक्रिया की कोटि = 2
X की सांद्रता को तीन गुनी कर देने पर
अभिक्रिया का वेग = k [3X] ²
= k = 9[X]² … (2)
अतः अभिक्रिया का वेग 9 गुना हो जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.5.
एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 1.15 x 10-3s-1 है। इस अभिक्रिया में अभिकारक की 5g मात्रा को घटकर 3g होने में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए
वेग स्थिरांक k = \(\frac{2.303}{\mathrm{t}} \log \frac{\left[\mathrm{R}_0\right]}{[\mathrm{R}]}\)
t = \(\frac{2.303}{k} \log \frac{\left[R_0\right]}{[\mathrm{R}]}\)
t = समय, k = वेग स्थिरांक = 1.15 x 10-3s-1
[Ro] = अभिकारक की प्रारंभिक सान्द्रता = 5 g
[R] = अभिकारक की t समय पर सांद्रता = 3 g
अतः t = \(\frac{2.303}{1.15 \times 10^{-3}} \log \frac{5}{3}\)
t = 2 × 10³ (log 5 – log 3 )
t = 2 × 10³ (0.6990 – 0.4771)
t = 2 × 10³ (0.2219)
t = 443.8
t = 444 s

प्रश्न 4.6.
SO2Cl2 को अपनी प्रारंभिक मात्रा से मात्रा में वियोजित होने में 60 मिनट का समय लगता है। यदि अभिक्रिया प्रथम कोटि की हो तो वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया में प्रारंभिक मात्रा से आधी मात्रा वियोजित हो रही है-
अतः t = 60 मिनट = अर्ध आयुकाल
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
वेग स्थिरांक,
K = \(\frac{0.693}{\mathrm{t}_{1 / 2}}\)
t1/2 = 60 x 60 = 3600 s
k = \(\frac { 0.693 }{ 3600 }\)
= 1.925 x 10-4 s-1

प्रश्न 4.7.
ताप का वेग स्थिरांक पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
सामान्यतः ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान बढ़ता है। यह पाया गया है कि किसी रासायनिक अभिक्रिया में 10°C ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक लगभग दुगुना हो जाता है। लेकिन ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में ताप बढ़ाने पर वेग स्थिरांक का मान कम हो जाता है। ताप बढ़ाने पर अणुओं के मध्य प्रभावी टक्करें बढ़ती हैं जिससे अभिक्रिया का वेग भी बढ़ जाता है।

प्रश्न 4.8.
परमताप, 298 K में 10 K की वृद्धि होने पर रासायनिक अभिक्रिया का वेग दुगुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 4.9.
581K ताप पर अभिक्रिया 2HI(g) → H2(g) + I2(g) के लिए सक्रियण ऊर्जा का मान 209.5 kJ mol-1 है। अणुओं के उस अंश की गणना कीजिए जिसकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर अथवा इससे अधिक है।
उत्तर:
अणुओं का वह अंश (x) जिसकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर अथवा इससे अधिक है = \(\mathrm{e}^{-\mathrm{E}_2 / R T}\) लोग (लघुगणक) लेने पर,
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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

(A) बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Type Questions

1. होंमोन होता है-
(A) एन्जाइम
(B) रासायनिक सन्देशवाहक
(C) ग्रन्थिल स्नाव
(D) उत्सर्जी पदार्थ
उत्तर:
(B) रासायनिक सन्देशवाहक

2. वृद्धि हॉर्मोन का स्राव किससे होता है ?
(A) एड्रीनल
(B) थायरॉइड
(C) पिट्यूटरी
(D) थाइमस
उत्तर:
(C) पिट्यूटरी

3. शरीर में तालमेल स्थापित करने वाले तन्र होते हैं-
(A) अन्त स्रावी
(B) रुधि परिवहन
(C) तन्त्रिकीय
(D) तन्त्रिकीय एवं अन्तःर्तावी
उत्तर:
(D) तन्त्रिकीय एवं अन्तःर्तावी

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

4. शरीर की कोशिकाओं में आधारी उपापचय दर का संचालन कौन करता है ?
(A) पैराथाइरॉइड
(B) थाइरॉइड
(C) पिट्यूटरी
(D) थाइमस
उत्तर:
(B) थाइरॉइड

5. रुधिर दमब तथा हृदय स्पन्दन किस हॉर्मोन द्वारा बढ़ जाते हैं ?
(A) ऐड्रीनेलिन
(B) थाइरॉक्सिन
(C) सीक्रिटिन
(D) गैस्ट्रिन
उत्तर:
(A) ऐड्रीनेलिन

6. गोनेडोट्रॉपिन हॉमोन का स्रावण कहाँ से होता है ?
(A) एड्रीनल कर्टेक्स
(B) एड्रीनल मेड्यूला
(C) थाइरॉइड
(D) ऐडीनोहाइपोफाइसिस
उत्तर:
(D) ऐडीनोहाइपोफाइसिस

7. ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करने धाला हॉर्मोन स्र्रावित होता है-
(A) पिट्यूटरी
(B) थाइमस
(C) अग्न्याशय
(D) थाइरॉइड
उत्तर:
(C) अग्न्याशय

8. पीयूष ग्रन्थि या पिट्यूटरी कहाँ स्थित होती है ?
(A) जनद
(B) मस्तिष्क
(C) श्वास नाल के इधर-उधर
(D) अगन्याशय
उत्तर:
(B) मस्तिष्क

9. एण्ड्रोजन किससे खावित होता है ?
(A) पीयूष ग्रन्थि
(B) वृषण
(C) अण्डाशय
(D) थाइरॉइड
उत्तर:
(B) वृषण

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

10. मधुमेह का सम्बन्ध किससे है ?
(A) पेयर के गुच्छे
(B) ग्लिसन कोष
(C) लैंगर हैन्स की द्वीपिकाएँ
(D) प्रॉफियन पुटिकाएँ।
उत्तर:
(C) लैंगर हैन्स की द्वीपिकाएँ

11. शरीर की मास्टर ग्रन्थि किसे कहा जाता है ?
(A) पीयूष मन्थि
(B) थाइरॉइड
(C) थाइमस
(D) रड्रीनल
उत्तर:
(A) पीयूष मन्थि

12. न्यूरोहाइपोफाइसिस से क्या खावित होता है ?
(A) वेसोप्रेसिन
(B) ऑक्सीटोसिन
(C) ऑक्सीटोसिन व प्रोलेक्टिन
(D) बेसोप्रेसिन व ऑक्सीटोसिन
उत्तर:
(D) बेसोप्रेसिन व ऑक्सीटोसिन

13. ग्लूकागॉन का खावण कहाँ से होता है
(A) लोडिग कोशिकाएँ
(B) लैंगर हेन्स की द्वीपिकाएँ
(C) कॉर्पस ल्यूटियम
(D) ग्लिसन कोष
उत्तर:
(B) लैंगर हेन्स की द्वीपिकाएँ

14. ग्लूकागॉन के अतिवावण से हो जाता है-
(A) टैटनी
(B) उदकमेह
(C) एकोमिगेली
(D) ग्लाइकोरिया
उत्तर:
(D) ग्लाइकोरिया

15. लैगरहेन्स की द्वीपिकाएँ कहाँ स्थित होती हैं ?
(A) यकृत
(B) तिल्ली
(C) अग्न्याशय
(D) पीयूष मन्थि
उत्तर:
(C) अग्न्याशय

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

16. TSH का पूरा नाम क्या है ?
(A) थाइरॉक्सिन स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन
(B) टायरोसीन स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन
(C) टायरोसीन स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन
(D) धायरॉइड स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन
उत्तर:
(D) धायरॉइड स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन

17. कौन-सी प्रति वहिःस्रावी तथा अन्तःस्रावी दोनों का कार्य करती है ?
(A) पीयूष ग्रन्थि
(B) यकृत
(C) थाइरॉइड
(D) अग्न्याशय
उत्तर:
(D) अग्न्याशय

18. महाकायता व अप्रातिकायता किस कारण होते हैं ?
(A) पीयूष पन्थि का अतिस्रावण
(B) पीयूष ग्रन्थि का अल्पस्रावण
(C) थाइरॉइड मन्थि का अतिस्रावण
(D) थायरॉइड पन्थि का अल्पखावण
उत्तर:
(A) पीयूष पन्थि का अतिस्रावण

19. लीडिंग कोशिकाओं का कार्य होता है-
(A) शुक्राणु जनन
(B) प्रोजेस्टेरॉन का स्त्रावण
(C) टेस्टोस्टेरॉन का खावण
(D) शुक्राणु का पोषण
उत्तर:
(C) टेस्टोस्टेरॉन का खावण

20. मनुष्य में पैराथॉर्मोन की कमी से -कौन-सा रोग हो जाता है ?
(A) हाइपरकेल्सिमिया
(B) हाइपोकैल्सिमिया
(C) घेंघा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) हाइपोकैल्सिमिया

21. गोनेडोट्रॉपिन का वायण कहाँ होता है ?
(A) वृषण में
(B) अण्डाशय में
(C) पीयूष मन्थि में
(D) थाइमस में
उत्तर:
(C) पीयूष मन्थि में

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 22 रासायनिक समन्वय तथा एकीकरण

22. लंगरहैन्स की द्वीपिकाएँ, जिनसे ग्लूकागॉन हॉर्मोन स्रावित होता है कहलाती है-
(A) अल्फा कोशिकाएँ
(B) बीटा कोशिकाएँ
(C) डेल्टा कोशिकाएँ
(D) मीटा और डेल्टा कोशिकाएँ
उत्तर:
(A) अल्फा कोशिकाएँ

23. पीयूष ग्रन्थि का नियंत्रण कौन करता है ?
(A) एड्रीनल ग्रन्थि
(B) हाइपोथैलेमस
(C) पीनियल काय
(D) थाइरॉइड ग्रन्थि
उत्तर:
(B) हाइपोथैलेमस

24. आपातकालीन हॉमॉन है-
(A) थाइरॉक्सिन
(B) पेड्रीनेलिन
(C) इन्सुलिन
(D) प्रोजेस्टेरॉन
उत्तर:
(B) पेड्रीनेलिन

25. कौन-सी अन्तःस्रावी ग्रन्थि वृद्ध आयु में निष्क्रिय हो जाती है ?
(A) एड्रीनल
(C) थाइमस
(B) पीनियल काय
(D) पीयूष ग्रन्थि
उत्तर:
(C) थाइमस

26. अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के खावण को कहते हैं-
(A) हॉर्मोन्स
(B) फीरोमोन्स
(C) एन्जाइम्स
(D) म्यूकॉइड्स
उत्तर:
(A) हॉर्मोन्स

27. मेड़क के टैडपोल में कायान्तरण किस हॉर्मोन द्वारा प्रेरित होता है ?
(A) थायरॉक्सिन
(C) ग्लूकागॉन
(B) इन्सुलिन
(D) एड्रीनेलिन
उत्तर:
(A) थायरॉक्सिन

28. किस हॉर्मोन के कारण रुधिर दाव एवं हृदय गति में वृद्धि होती है ?
(A) एड्रिनेलिन
(C) सीक्रिटिन
(B) थायरॉक्सिन
(D) गैस्ट्रिन
उत्तर:
(A) एड्रिनेलिन

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29 नलिकाविहीन प्रतियों के स्राव को कहते हैं-
(A) एन्जाइम
(C) म्यूकस
(B) फीरोमोन
(D) हॉर्मोन
उत्तर:
(D) हॉर्मोन

30. किस हॉर्मोन के अत्यस्राव के कारण मूत्रलता उत्पन्न होती है ?
(A) वेसोप्रेसिन
(C) कैल्सिटोनिन
(B) थायरॉक्सिन
(D) ऑक्सीटोसिन
उत्तर:
(A) वेसोप्रेसिन

31. मनुष्य में आयोडीन की कमी से होने वाला रोग है-
(A) मिक्सिडिमा
(C) ऐक्रोमिगेली
(B) ऐडीसन रोग
(D) पेघा
उत्तर:
(D) पेघा

32. कैल्सियम व फॉस्फोरस उपापचय का नियन्त्रण करने वाला हॉमॉन कहाँ से स्वावित होता है ?
(A) थाइमस
(B) थाइरॉइड
(C) पैराथाइरॉइड
(D) अग्न्याशय
उत्तर:
(C) पैराथाइरॉइड

33. लैंगर हैन्स की द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाओं द्वारा स्रावित हॉर्मोन है –
(A) ग्लूकागॉन
(B) इन्सुलिन
(C) सोमेटोस्टेटिन
(D) मिलैटोनिन
उत्तर:
(B) इन्सुलिन

34. संकटकालीन परिस्थितियों में मनुष्य को लड़ने, डरने तथा पलायन को प्रेरित करने वाली ग्रन्थि है –
(A) एड्रीनल
(B) थाइमस
(C) भाइरॉइड
(D) पीयूष
उत्तर:
(A) एड्रीनल

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35. त्वचा में उपस्थित रंग का कारण हैं –
(A) स्ट्रेटम मन्यूलोसम परत में पाया जाने वाला क्रेटाहापलिन
(B) उपत्वचीय परत में पाया जाने वाला संयोजी ऊतक
(C) डर्मिस में उपस्थित मेलेनिन
(D) (A) व (B) दोनों।
उत्तर:
(C) डर्मिस में उपस्थित मेलेनिन

36. स्तन प्रवियों व्युत्पन है –
(A) स्वेद मन्थियों से
(C) हेयर फॉलिकल से
(B) वसीय ऊतक से
(D) सिबेसियस ग्रन्धि से।
उत्तर:
(A) स्वेद मन्थियों से

37. DCT में H20 का अवशोषण नियन्त्रित होता है –
(A) ADH द्वारा
(B) ACTH द्वारा
(C) LH द्वारा
(D) ऑक्सीटोसिन द्वारा।
उत्तर:
(A) ADH द्वारा

38. ACTH का स्रावण होता है –
(A) थाइरॉइड से
(B) थाइमस से
(C) पिट्यूटरी से
(D) लैंगर हैंस की द्वीपिकाओं से
उत्तर:
(C) पिट्यूटरी से

39. घेंघा ( goiter) सम्बन्धित है –
(A) ग्लूकेगॉन से
(B) थाइरॉक्सिन से
(C) प्रोजेस्ट्रान से
(D) टेस्टोस्टीरॉन से।
उत्तर:
(B) थाइरॉक्सिन से

40. नोरएपी नेफ्रीन का कार्य है-
(A) रुधिर दाब बढ़ाना
(B) मूत्र निर्माण
(C) एड्रिनेलिन का स्राव बढ़ाना
(D) इनमें कोई नहीं।
उत्तर:
(A) रुधिर दाब बढ़ाना

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41. अमीनो अम्ल व्युत्पन्न हार्मोन हैं –
(A) इंसुलिन
(B) ऑक्सीटोसिन
(C) एरीथ्रोपोएटिन
(D) धाइरॉक्सिन।
उत्तर:
(D) धाइरॉक्सिन।

42. कौन-सा गोनेडोट्रोपिक हार्मोन है –
(A) GH
(B) MSH
(C) ADH
(D) FSH व LH
उत्तर:
(D) FSH व LH

43. आमाशयी रस का स्त्राव नियन्त्रित होता है –
(A) गेल्ट्रिन द्वारा
(B) कोलिस्टो काइनिन द्वारा
(C) एन्टीरोगोस्ट्रिन द्वारा
(D) इनमें कोई नहीं।
उत्तर:
(A) गेल्ट्रिन द्वारा

44. थाइरोक्सिन हार्मोन का कार्य है-
(A) वृद्धि में सहायक
(B) विकास में सहायक
(C) स्वप्रतिरक्षित
(D) उपापचयी नियन्त्रण।
उत्तर:
(D) उपापचयी नियन्त्रण।

45. स्टीरॉइड हार्मोन जो ग्लूकोज उपापचय का नियमन करता है –
(A) कार्टिसोल
(C) 11-डि कोर्टिकोस्टेरॉन
(B) कोर्टिकोस्टेरॉन
(D) कॉटिसोन।
उत्तर:
(A) कार्टिसोल

46. जब चूहे के दोनों अण्डाशयों को हटा दिया जाए तो रुचिर में कौन से हार्मोन की कमी होगी –
(A) ऑक्सिटोसिन
(B) प्रोलैक्टिन
(C) एस्ट्रोजन
(D) गोनेडीट्रोपिक रिलीजिका कारक
उत्तर:
(C) एस्ट्रोजन

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47. मुख्य रूप से कौन से हार्मोन मानव मासिक चक्र को निर्धारित करते हैं-
(A) FSH
(B) LH
(C) FSH, LH, एस्ट्रोजन
(D) प्रोजेस्ट्रोन।
उत्तर:
(C) FSH, LH, एस्ट्रोजन

48. स्तनीय थाइमस ग्रन्थि सम्बन्धित है –
(A) ताप नियन्त्रण से
(B) वृद्धि नियन्त्रण से
(C) प्रतिरक्षा से
(D) थाइरोट्रोपिन स्त्रावण से।
उत्तर:
(A) ताप नियन्त्रण से

49. वयस्क मानव में सबसे बड़ी अन्त: स्रावी ग्रन्थि है –
(A) थाइमस
(B) यकृत
(C) थाइरॉइड
(D) अग्न्याशय।
उत्तर:
(C) थाइरॉइड

50. फेरोमोन्स होते हैं –
(A) अन्तःस्रावी ग्रन्थि उत्पाद
(B) संप्रेषण रसायन
(C) संदेशवाहक RNA
(D) प्रोटीन
उत्तर:
(B) संप्रेषण रसायन

51. सबसे छोटी अन्तस्रावी ग्रन्थि हैं –
(A) थाइरॉइड
(B) पैराथाइरॉइड
(C) पीयूष
(D) एड्रीनल।
उत्तर:
(C) पीयूष

52. स्तनधारियों के अण्डाशय का कौन-सा भाग अण्डोत्सर्ग के बाद अन्तःस्रावी ग्रन्थि का कार्य करने लगता हैं-
(A) माफियन फैलिकल
(B) पीठिका
(D) पीतकी झिल्ली।
(D) प्रोटीन
उत्तर:
(A) माफियन फैलिकल

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(B) अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अन्तःस्रावी तन्त्र का सर्वोच्च कमाण्डर कौन कहलाता है ?
उत्तर:
हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) को अन्तःस्रावी तंत्र का सर्वोच्च कमाण्डर (supreme commander of endocrine system) कहा जाता है।

प्रश्न 2.
लैंगर हैन्स की डीपिकाएँ शरीर में कहाँ पायी जाती हैं ?
उत्तर:
सैगरहैन्स की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans) अग्न्याशय ग्रन्थि (pancreas) की पालियों के बीच-बीच में उपस्थित संयोजी ऊतकों में पायी जाती हैं।

प्रश्न 3.
शरीर की सबसे बड़ी अन्तःस्रावी ग्रन्थि का नाम लिखिए।
उत्तर:
शरीर की सबसे बड़ी अन्तःसावी मन्थि थायरॉइड (thyroid) होती

प्रश्न 4.
थाइरॉक्सिन हॉर्मोन के अधिक स्राव के कारण होने वाले रोग का नाम लिखिए।
उत्तर:
थाइरॉक्सिन (thyroxin) हॉर्मोन के अधिक स्राव के कारण नेत्रोत्सेधी गलगण्ड ( exophthalmic goiter ) तथा प्लूमर का रोग (Plummer’s Disease) हो जाते हैं।

प्रश्न 5.
पैराथॉमॉन के विपरीत रूप में कार्य करने वाले हॉमोन का नाम लिखिए।
उत्तर:
थाइरॉइड (thyroid) ग्रन्थि द्वारा सावित कैल्सिटोनिन (calcitonin) पैराथॉमॉन (parathormone) के विपरीत कार्य करता है।

प्रश्न 6.
किस प्रन्थि को लिम्फोसाइट्स का प्रशिक्षण केन्द्र कहा जाता है ?
उत्तर:
थाइमस ग्रन्थि (thymus gland) को T- लिम्फोसाइट्स का प्रशिक्षण केन्द्र कहा जाता है।

प्रश्न 7.
शरीर में लैंगिक जैविक घड़ी की भाँति कार्य करने वाली ग्रन्थि का नाम लिखिए।
उत्तर:
पीनियल काय (pineal body) शरीर में लैंगिक जैविक घड़ी (sexual biological clock) की भांति कार्य करती है।

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प्रश्न 8.
यदि लैंगर हैन्स द्वीपिकाएँ कार्य करना बन्द कर दें तो किन हॉर्मोन्स की कमी होगी ?
उत्तर:
यदि लैंगरहैन्स द्वीपिकाएँ कार्य करना बन्द कर दें तो इन्सुलिन ( insulin) हॉर्मोन की कमी होगी।

प्रश्न 9.
जीवन रक्षक हॉर्मोन्स किस अन्तःस्रावी ग्रन्थि द्वारा खावित होते हैं ?
उत्तर:
जीवन रक्षक हॉर्मोन्स अधिवृक्क प्रन्थि अथवा एड्रीनल ग्रन्थि (adrenal gland) द्वारा स्लावित होते हैं।

प्रश्न 10.
कॉर्पस ल्युटियम द्वारा स्त्रावित हॉर्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर:
कॉर्पस ल्युटियम (corpus luteum) द्वारा प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन (progesterone hormone) का स्राव होता है।

प्रश्न 11.
हॉर्मोनी क्रिया में द्वितीय सन्देशवाहक का कार्य कौन करता
उत्तर:
हॉर्मोनी क्रिया में द्वितीय सन्देशवाहक का कार्य साइक्लिक एडीनोसीन मोनो फॉस्फेट या साइक्लिक AMP या cAMP (cyclic AMP) द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 12.
यदि भोजन में आयोडीन की कमी हो तो कौन-सा हॉर्मोन नहीं बनेगा ?
उत्तर:
यदि भोजन में आयोडीन की कमी हो तो थाइरॉक्सिन हॉर्मोन नहीं बनेगा।

प्रश्न 13.
यदि अधिवृक्क ग्रन्थि को काटकर निकाल दें तो क्या होगा ?
उत्तर:
अधिवृक्क मन्धि को काटकर निकाल देने से कॉर्टिकॉइड्स तथा एड्रीनलीन हॉर्मोन्स नहीं बन सकेंगे और इनके अभाव में कई जैविक क्रियाएँ नहीं हो सकेंगी तथा जीव की मृत्यु हो जायेगी।

प्रश्न 14.
मिक्सीडिमा रोग किन दशाओं में होता है ?
उत्तर:
मिक्सीडिमा रोग प्रौढ़ व्यक्तियों में थाइरॉइड के द्वारा थाइरॉक्सिन (thyroxin) के अल्पस्रावण से होता है।

प्रश्न 15.
लैंगर हैन्स की द्वीपिकाएँ कहाँ पायी जाती हैं और किन हॉर्मोन्स का स्वायण करती हैं ?
उत्तर:
लैंगर हैन्स की द्वीपिकाएँ अग्न्याशय (pancreas) में पायी जाती हैं। इसकी 8 कोशिकाएँ इन्सुलिन (insulin) तथा अल्फा कोशिकाएँ ग्लूकागॉन (glucagon) का स्रावण करती हैं।

प्रश्न 16.
उस हॉर्मोन का नाम बताइए जो थाइरॉक्सिन की मात्रा को नियन्त्रित करता है।
उत्तर:
पीयूष ग्रन्थि से निकलने वाला थाइरोट्रापिन हॉर्मोन थाइरॉक्सिन की मात्रा को नियन्त्रित करता है।

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प्रश्न 17.
यदि बाल्यावस्था में ही थाइरॉक्सिन की कमी हो जाये तो बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
थाइरॉक्सिन (thyroxin) की कमी बच्चा अवटुवामन अथवा बौना रह जायेंगा।

प्रश्न 18.
घेंघा रोग किस हॉर्मोन की कमी से हो जाता है ?
उत्तर:
भोजन में आयोडीन की कमी से थाइरॉइड मन्धि फूल जाती है तथा थाइरॉक्सिन (thyroxin) का स्राव बहुत कम हो जाता है। अतः थाइरॉक्सिन की कमी से घेंघा या गलगण्ड रोग हो जाता है।

प्रश्न 19.
इन्सुलिन किस प्रकार का हॉर्मोन है ? इनका निर्माण किन कोशिकाओं द्वारा होता है ?
उत्तर:
इन्सुलिन (insulin) दो पॉलिपेप्टाइड (polypeptide ) श्रृंखलाओं से बना हॉर्मोन है। इसका स्रावण लैंगर हैन्स की द्वीपिकाओं (islets of langerhans) की बीटा कोशिकाओं (B cells) द्वारा होता है।

प्रश्न 20.
किस हॉर्मोन की कमी से ग्लाइकोसूरिया नामक रोग हो जाता है ?
उत्तर:
इन्सुलिन (insulin) की कमी से ग्लाइकोसूरिया (glycosuria) रोग हो जाता है।

प्रश्न 21.
पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) से निकलने वाले हॉर्मोन्स का नाम लिखिए।
उत्तर:
पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) से प्रोजेस्टेरॉन (progesteron) हॉर्मोन का स्त्रावण होता है।

प्रश्न 22.
पीयूष ग्रन्थि की पश्च पालि से स्वावित होने वाले दो हॉर्मोन्स के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) वेसोप्रेसिन (vasopressin) तथा
(ii) ऑक्सीटोसिन (oxytocin )।

प्रश्न 23.
एकोमिक्रिया रोग क्या है और किन में तथा क्यों हो जाता है ?
उत्तर:
एक्रोमिक्रिया रोग वामन व्यक्तियों में वृद्धि हॉर्मोन्स की अधिकता से उत्पन्न हुए अनुपातहीन वृद्धि को कहते हैं।

प्रश्न 24.
स्नूकागॉन हॉर्मोन्स कौन-सी द्वीपिकाओं से स्वावित होता है ? इसका क्या कार्य है ?
उत्तर:
ग्लूकागॉन (glucagon) हॉर्मोन लेंगरहेन्स की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) की अल्फा कोशिकाओं (a cells) से स्त्रावित होता है तथा यह यकृत में वसीय अम्लों तथा अमीनों अम्लों से ग्लूकोज के स्त्रावण को प्रेरित करता है तथा आवश्यकता के समय संचित ग्लाइकोजन को विखण्डित करके ग्लूकोज बनाने की क्रिया को प्रेरित करता है।

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प्रश्न 25.
अन्तः:वावी प्रन्थियों के अध्ययन को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
अन्तः सांवी मन्दियों के अध्ययन को अन्तःस्रावी विज्ञान अथवा एण्डोक्राइनोलॉजी (endocrinology) कहते हैं।

प्रश्न 26.
कौन-सा हॉर्मोन वृक्क नलिकाओं में जल अवशोषण का नियमन करता है ?
उत्तर:
एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (antidiuretic Hormone ADH) वृक्क नलिकाओं में जल अवशोषण का नियमन करता है।

प्रश्न 27.
रक्त में कैल्सियम तथा फॉस्फोरस की मात्रा का नियमन कौन करता है ?
उत्तर:
रक्त में कैल्सियम तथा फॉस्फोरस की मात्रा का नियमन पैराथॉमन (parathormone) करता है।

प्रश्न 28.
बाँझपन व नपुंसकता किस हॉमॉन की कमी के कारण होती
उत्तर:
बांझपन एस्ट्रोजन ( estrogen) की कमी से तथा नपुंसकता एण्ड्रोजन्स (endrogens) हॉर्मोन्स की कमी से हो जाती है।

प्रश्न 29.
हॉर्मोन्स शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया था ?
उत्तर:
हॉर्मोन (hormone) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग स्टरलिंग (sterling) ने किया था।

प्रश्न 30.
शरीर की मास्टर ग्रन्थि किसे कहते हैं ?
उत्तर:
पीयूष मन्थि (pituitary gland) को शरीर की मास्टर प्रन्थि कहते

(C) लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अन्तःस्रावी तथा वहिःस्रावी प्रन्थियों में उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अन्तःस्रावी तथा वहिःस्रावी ग्रन्थियों में अन्तर

अन्त:स्रावी ग्रन्धियाँ:बहिस्तावी ग्रन्थियाँ:
ये नलिका विहीन होती हैं।ये नलिका युक्त होती हैं।
इनमें संश्लेषित होने वाला स्राव सीधे ही रुधिर में मुक्त होकर शरीर के विभिन्न अंगों में पहुँचता है।इनमें संश्लेषित होने वाला स्राव नलिकाओं द्वारा किसी निश्चित अंग या शरीर की सतह पर पहुँचता है।
इनसे स्तावित पदार्थों को हॉर्मोन्स कहते हैं।इनमें स्रावित पदार्थों को हॉमोन्स नहीं कहते हैं। इनमें कोई भी रसायन हो सकता है।
उदाहरण-पीयूष ग्रन्थि, थाइाॉयड प्रन्थि, एड्रीनल मन्थि आदि।उदाहरण-यकृत, स्नेह मन्थियाँ, दुग्ध मन्थियाँ आदि।

प्रश्न 2.
हाइपोथैलेमस द्वारा स्त्रावित मोचक तथा निरोधी हॉर्मोन्स का ना लिखिए।
उत्तर:
हाइपोथैलेमस की तन्त्रिका स्रावी कोशिकाओं (neurosecretar cells) से लगभग 10 तन्त्रिका हॉर्मोन्स (neurohormones) का स्राव होत है जो पीयूष ग्रन्थि की अप्र व पश्चपालियों से हॉर्मोन्स के स्राव का नियम- करते हैं। ये न्यूरोहॉर्मोन्स दो प्रकार के होते हैं –

(I) मोचक हॉर्मोन्स (Releasing Hormones) – ये हॉर्मोन्स पीयू ग्रन्थि से हॉर्मोन्स के स्राव या मोचन को उद्दीपित करते हैं। ये निम्नलिखित होत
(1) थाइरोट्रॉपिन मोचन कारक या थाइरोट्रॉपिन मोचक हॉर्मोन्स (Thyrotropin-Releasing Factor: TRF)
(2) एंड्रीनोकॉर्टिकोट्रॉपिन मोचक हॉर्मोन (Adrenocorticotropin Releasing Hormone : ACTRH)
(3) ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन मोचक हॉर्मोन (Luteinizing Hormone Releasing Hormone: LHRH)
(4) फॉलिकल उद्दीपन हॉर्मोन मोचक हॉर्मोन (Follicle stimulating Hormone-Releasing Hormone: FSHRH)
(5) वृद्धि हॉर्मोन या सोमेटोट्रॉपिन-मोचक हॉर्मोन (Growth Hormone or Somatotropin-Releasing Hormone)
(6) प्रोलेक्टिन मोचक हॉर्मोन (Prolactin Releasing Hormone : PRH)
(7) मिलेनोसाइट उद्दीपन हॉर्मोन मोचक हॉर्मोन (Melanocyte stimulating Hormone-Releasing Hormone: MSHRH)

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(II) निरोधी हॉर्मोन्स (Inhibiting Hormones : IH ) – ये हॉर्मोन्स पीयूष ग्रन्थि से कुछ हॉर्मोन्स के स्राव को रोकते हैं।
ये निम्नलिखित होते हैं –
(1) वृद्धि हॉर्मोन्स निरोधी हॉर्मोन (Growth Hormone Release-Inhibiting Hormone: GHR-IH)
(2) प्रोलेक्टिन मोचन -निरोधी हॉर्मोन (Prolactin Release-Inhibiting Hormone: PR-IH)
(3) मिलेनोसाइट उद्दीपन हॉर्मोन मोचन निरोधी हॉर्मोन (Melanocyte Hormone-Release Inhibiting Hormone stimulating MSH-RIH)

प्रश्न 3.
पीयूष ग्रन्थि के वृद्धि हॉर्मोन के अतिस्राव के कारण होने वाले रोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पीयूष पन्थि (pituitary gland) के वृद्धि हॉर्मोन (growth hormones) के अतिस्राव (hypersecretion ) से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं –
(1) अतिवृद्धि (Gigantism) – बाल्यकाल में वृद्धि हॉमोंन की अधिकता से बहुत लम्बे तथा हृष्टपुष्ट भीमकाय (giant) व्यक्तियों का विकास होता है । इन्हें पिट्यूटरी जायण्ट (pituitary giants) कहते हैं।
(2) अप्रातिकायता (Acromegaly ) वृद्धिकाल के बाद वृद्धि हॉर्मोन की अधिकता से गोरिल्ला के समान कुरूप भीमकाय व्यक्ति बनते हैं। क्योंकि हड्डियों की लम्बाई में वृद्धि सम्भव नहीं होती तो शरीर लम्बाई में नहीं बढ़ पाता है, अतः हाथ, पाँव, चेहरे के कुछ भाग जबड़े आदि अधिक लम्बे हो जाते हैं। हड्डियाँ मोटाई में बढ़ती हैं, जिससे चेहरा व शरीर भद्दा हो जाता है। इस अवस्था को एक्रोमेगैली (acromegaly) कहते हैं।
(3) काइफोसिस (Kyphosis) – कभी-कभी कशेरुक दण्ड के झुक जाने से व्यक्ति कुबड़ा हो जाता है।

प्रश्न 4.
क्या कारण है कि प्रायः घेंघा की बीमारी पहाड़ी क्षेत्र पर रहने वाले मनुष्यों में ज्यादा होती है ?
उत्तर:
पहाड़ी क्षेत्र में उपलब्ध जल एवं मिट्टी में आयोडीन की कमी होती है। अतः भोजन व पेयजल में आयोडीन की कमी से इस क्षेत्र के लोगों में प्रायः घेंघा रोग हो जाता है। इस रोग में गले की ‘थाइरॉइड ग्रन्थि’ फूल जाती है, जिससे गर्दन कुरूप हो जाती है। आयोडीन की उपयुक्त मात्रा सेवन करने से यह रोग ठीक हो जाता है। इस रोग से बचने के लिए भोजन के साथ आयोडीनयुक्त नमक का सेवन करना चाहिए।

प्रश्न 5.
थायरॉक्सिन हॉर्मोन के कार्यों को समझाइए।
उत्तर:
थायरॉक्सिन हॉर्मोन (thyroxin hormone) के निम्नलिखित कार्य होते हैं –

  1. थाइरॉक्सिन सभी उपापचय क्रियाओं की गति का नियमन करता है। यह ऊर्जा उत्पन्न करने वाली ऑक्सीकृत प्रक्रियाओं की गति को बढ़ाता है।
  2. यह आन्त्र में ग्लूकोज अवशोषण, कोशिकाओं में ग्लूकोज की खपत, हृदय स्पन्दन दर, प्रोटीन संश्लेषण की गति व शरीर के ताप आदि में वृद्धि है करता है।
  3. यह शरीर के तापमान को बढ़ाता है।
  4. थाइरॉक्सिन वृद्धि एवं भिन्नन (growth and differentiation) के लिए अति आवश्यक है। यह अधिवृक्क वल्कुट (adrenal cortex) तथा जनदों की क्रिया को उत्तेजित करता है।
  5. न्यूरोस्स्रावी रसायन ऐड्रीनेलिन ( adrenalin) तथा नॉरऐड्रीनेलिन (nor adrenalin) की क्रिया विधि को बढ़ाता है।
  6. कायान्तरण में इसकी विशेष भूमिका होती है। इसकी कमी से कायान्तरण नहीं होता।
  7. शीत रुधिर या अनियततापी कशेरुकी प्राणियों में थाइरॉइड हॉर्मोन परासरण नियमन (osmoregulation) तथा निर्मोचन (moulting) का नियन्त्रण करता है।

प्रश्न 6.
लैंगर हैन्स की द्वीपिकाओं द्वारा स्रावित हॉर्मोनों के कार्यों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लैंगरहैन्स की द्वीपिकाओं में तीन प्रकार की अन्तःस्रावी कोशिकाएँ पायी जाती हैं –
बीटा कोशिकाएँ – cells, अल्फा कोशिकाएँ (c-cells) तथा डेल्टा कोशिकाएँ (D-cells)। इनके द्वारा क्रमशः इन्सुलिन ( Insulin), ग्लूकागॉन (glucagon) तथा सोमेटोस्टेटिन (somatostatin) हॉर्मोन्स का स्त्राव किया जाता है।

इनके कार्य निम्नलिखित हैं –
(A) इन्सुलिन के कार्य (Functions of Insulin) –

  •  कार्बोहाइड्रेट (carbohydrate) के पाचन से बने ग्लूकोज (Glucose) को ग्लाइकोजन (glycogen) में बदल देता है और यकृत (liver) एवं पेशियों (muscles) में संगृहीत करता है।
  • ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ऊर्जा विमुक्त होती है।
  • रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा निश्चित बनाये रखता है।
  • कोशिकाओं की आधारी उपापचयी दर (Basal Metabolic Rate : BMR) को प्रभावित करता है।
  • वसा ऊतकों में वसा संश्लेषण अर्थात् लाइपोजेनेसिस ( lipogenesis) को प्रभावित करता है।

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(B) ग्लूकैगॉन के कार्य (Function of Glucagon ) –
(1) यह यकृत (liver) में ऐमीनो अम्लों तथा वसा से ग्लूकोज के संश्लेषण अर्थात् लूकोजीनोलाइसिस (gluconeogenesis) को प्रेरित करता है।
(2) वसा ऊतक में वसा के विघटन अर्थात् लाइपोलाइसिस (lypolysis ) को प्रेरित करता है।
(3) यकृत में ग्लूकोज को बनाने (glycogenalysis) को प्रेरित करता है।

(C) सोमेटोस्टेटिन के कार्य (Functions of Somatostatin) – यह हॉर्मोन पचे हुए भोजन के स्वांगीकरण की अवधि बढ़ाता है। इससे शरीर में भोजन की उपयोगिता अधिक समय तक रहती है।

प्रश्न 7.
हॉर्मोनी क्रिया में CAMP की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कुछ हॉर्मोनी क्रियाओं में साइक्लिक एडीनोसिन मोनो फॉस्फेट (Cyclic Adenosine Monophosphate) द्वितीयक सन्देशवाहक (Second messenger) की भाँति कार्य करता है। कुछ हॉर्मोन (hormone) के अणु बड़े होते हैं जिस कारण ये लक्ष्य कोशिका की कोशिका कला से पारगमित नहीं हो पाते हैं। इन लक्ष्य कोशिकाओं की कला में हॉर्मोन माही प्रोटीन होती है। यह हॉर्मोन माही प्रोटीन प्रथम सन्देशवाहक कहलाती है। माही प्रोटीन के हॉर्मोन से क्रिया करने पर कोशिका कला की G प्रोटीन सक्रिय हो जाती है जो कि कोशिका कला में उपस्थित एडीनिलेट साइक्लेस (adenylate cyclase) एन्जाइम को उद्दीपित कर देता है। यह उद्दीपित एन्जाइम अणु ATP को CAMP (एडीनोसिन ट्राइ फॉस्फेट को चक्रीय एडीनोसीन मोनो फॉस्फेट) में बदल देता है।

चक्रीय एडीनोसीन मोनो फॉस्फेट (Cyclic Adensosine Monophosphate cAMP) के सक्रिय अणु प्रोटीन काइनेस एन्जाइम्स (protein kinase enzymes) को सक्रिय कर देते हैं जो कि कोशिकाओं की उपापचयी क्रियाओं को उत्प्रेरित करता है। अतः उपरोक्त हॉर्मोनी क्रियाओं में CAMP एक मध्यस्थ दूत या द्वितीयक दूत (second messenger) की भाँति कार्य करता है।

प्रश्न 8.
हॉर्मोन्स एवं एन्जाइम में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
हॉर्मोन एवं एन्जाइम में अन्तर –

हॉर्मोन (Hormone)एन्जाइम (Enzyme)
हॉर्मोन किसी क्रिया को उत्तेजित या उद्दीप्त करते हैंएन्जाइम किसी क्रिया में उत्र्रेरक का कार्य करते हैं और पुनः दूसरी क्रिया में काम करते हैं।
हॉर्मोन ‘रोटीन व स्टीरॉइड, वसा अम्ल, टायरोसिन के समान प्रकृति के होते हैं।सभी एन्जाइम्स प्रोटीन के बने होते हैं।
हॉर्मोन का अणुभार कम और अणु छोटे होते हैं।एन्जाइम के अणु बड़े और इनका अणुभार अधिक होता है।
ये रासायनिक अभिक्रियाओं में विधटित हो जाते हैं और ये इनमें पुन: भाग नहीं ले सकते हैं।ये रासायनिक अभिक्रियाओं में विघटित नहीं होते हैं और इनमें ये पुन: भाग ले सकते हैं।
हॉर्मोन्स अन्तःावी ग्रन्थियों में स्रावित होते हैं तथा इनका कार्यक्षेत्र उत्पत्ति स्थान से दूर होता है।एन्जाइम कोशिका व बहिंस्रावी ग्रन्थियों में बनते हैं तथा इनका कार्यक्षेत्र उत्पत्ति स्थान के पास होता है।
ये शरीर में संचित नहीं हो सकते।ये कुछ समय के लिए शरीर में संचित हो सकते हैं।

प्रश्न 9.
एस्ट्रोजन एवं एड्रीनेलिन हॉर्मोन के स्रोत तथा कार्य लिखिए।
उत्तर:
(1) एस्ट्रोजन (Estrogen) यह अण्डाशय की मैफियन पुटिकाओं की धीका इण्टरना कोशिकाओं से स्त्रावित होता है। यह सभी सहायक जननांगों अण्डवाहिनी, गर्भाशय, योनि लेबिया, क्लाइटोरिस आदि एवं द्वितीयक लैंगिक लक्षणों यथा दुग्ध-प्रन्थियों के विकास को प्रेरित करता है। स्त्रियों में रजोधर्म इसी के प्रभाव से प्रारम्भ होता है।

(2) एड्रीनेलिन ( Adrenaline ) – यह एड्रीनल अन्थि के मैड्यूला से स्त्रावित होता है। यह व्यक्ति को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करता है, इसके प्रमुख कार्य है-भय, क्रोध, पीड़ा, अपमान, दुर्घटना, अत्यधिक ठण्ड या गर्मी के प्रभाव का नियन्त्रण व नियमन, हृदय, यकृत, कंकाल पेशियों व मस्तिष्क की रुधिर वाहिनियों का प्रसार हृदय की स्पन्दन दर रुधिर दाब, श्वास दर व उपापचय दर में वृद्धि पुतलियों का प्रसार आदि।

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प्रश्न 10.
अप्रातिकायता, घेघा एडीसन का रोग तथा हाइपोग्लाइसीमिया रोग से कौन-से हॉर्मोॉन सम्बन्धित हैं ?
उत्तर:

रोग का नामसम्बन्यित हॉरोंन
अमातिकायता (Acromegaly)सोमेटोट्रॉपिन का अतिस्रावण (Hypersecretion of Somatotropin)
घेंघा (Goiter)थाइर्र्क्सिन का अल्पस्नावण (Hyposecretion of Thyroxin)
एडीसन का रोग (Addison’s disease)ग्लूकोकॉर्टिकायड्स हॉर्मोन का अल्प सूवण (Hyposecretion Glucocorticoids Hormone)
हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia)ग्लूकोकॉर्टिकायड्स की कमी (Hyposecretion of Glucocorticoids)

प्रश्न 11.
जनद ग्रन्थियों में उपस्थित अन्तःस्रावी प्रवियों द्वारा स्त्रावित हॉर्मोन्स का शरीर में महत्व लिखिए।
उत्तर:
जनद प्रन्थियों में उपस्थित अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ जनद प्रन्थियाँ जनन कोशिकाएँ बनाने के अतिरिक्त अन्तःस्रावी मन्धियों के समान कार्य करती हैं जनद ग्रन्थियों में उपस्थित अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ व उनके हॉर्मोन्स निम्नलिखित है –
(i) वृषण एवं नर हॉर्मोन्स (Testes and Male Hormones) वृषणों में अन्तराली कोशिकाएं ( interstitial cells) या लीडिंग कोशिकाएँ (Leydig’s cells) नर हॉर्मोन्स के रूप में एण्ड्रोजन्स का स्त्रावण करती है। प्रमुख नर हॉर्मोन्स हैं –
(i) एण्ड्रोजन टेस्टोस्टेरॉन
(ii) एण्ड्रोस्टेरॉन
ये नर में पुरुषोचित लैंगिक लक्षणों के परिवर्धन तथा यौन आचरण को प्रेरित करते। इनके अतिरिक्त टेस्टोस्टेरॉन शुक्राणु जनन को प्रेरित करता है।

(ii) अण्डाशय एवं मादा हॉर्मोन्स (Ovary and Female Hormones) – स्तनियों के अण्डाशय के स्ट्रोमा के कॉर्टेक्स भाग में अनेक विकासशील वैफियन पुटिकाएँ (graffian follicles) पायी जाती हैं। मैफियन पुटिकाओं की थीका इण्टरना (theca interna) एस्ट्रोजन (estrogen) हॉर्मोन का लावण करती है। यह हॉर्मोन यौवनावस्था प्रारम्भ से लेकर रजोनिवृत्ति की आयु तक साबित होता है।

कॉर्पस ल्यूटियम से भी दो हॉर्मोन्स –
(i) प्रोजेस्टेरॉन तथा
(ii) रिलैक्सिन स्त्रावित होते हैं।
(a) एस्ट्रोजन जननांगों व स्तनों के विकास को प्रेरित करता है।
(b) प्रोजेस्टेरॉन रजोचक्र का नियमन करता है, भ्रूण का रोपण करता है तथा गर्भधारण के बाद गर्भाशय के संकुचन को भी रोकता है।
(c) रिलैक्सिन शिशु जन्म के समय श्रोणि मेखला के प्यूबिक सिम्फाइसिस तथा पेशियों के शिथिलन का नियमन करता है।

प्रश्न 12.
अप्रातिकायता (Acromegaly) किसे कहते हैं ? यह किन परिस्थितियों में होता है ? इस रोग के लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अप्रातिकायता (acromegaly ) – पीयूष ग्रन्थि की अग्र पालि से सावित वृद्धि हॉर्मोन (growth hormone /GH) या सोमेटोट्रॉपिक हॉर्मोन (somatotropic hormone / STH) के आधिक्य से शरीर की कोशिकाओं में अमीनो अम्ल आवश्यकता से अधिक पहुँचने लगते हैं। इसके फलस्वरू कंकाल एवं अन्य ऊतकों की अतिवृद्धि हो जाती है और व्यक्ति की ऊँचाइ औसत से अधिक (7 फुट या इससे अधिक) हो जाती है। ऐसे व्यक्तियों को महाकाय तथा रोग को महाकाय या अतिकायता (gigantism) कहते हैं। यदि इस हॉर्मोन का स्राव वयस्कावस्था प्राप्त करने के बाद या कंकालीय वृद्धि पूरी होने के बाद बढ़ा हो तो रोग को अप्रातिकायता कहते हैं।

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अश्रातिकायता रोग के लक्षण-इस रोग के लक्षण निम्नलिखित हैं –

  • कंकाल की सभी अस्थियों में आनुपातिक वृद्धि नहीं हो पाती है।
  • हाथ व पैर लम्बे हो जाते हैं।
  • निचला जबड़ा आगे की ओर निकल आता है।
  • गालों की अस्थियाँ उभर आती हैं।
  • शरीर बेडौल, बड़ा व लम्बा हो जाता है।

प्रश्न 13.
अप्डाशय के हॉमोंस के नाम तथा कार्य बतताइए।
उत्तर:
अण्डाशय के हॉर्मोन्स व उनके कार्य खियों के अण्डाशय से तीन प्रकार के हॉमोन्स स्रावित होते हैं-
(1) एट्टोजन (Estrogen)-यह अण्डाशय की मैफियन पुटिकाओं की थीका इण्टरना कोशिकाओं से यौवनावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति की आयु (लगभग 48 वर्ष) तक स्वावित होता है। यह सभी सहायक जननांगों एवं द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास को प्रेरित करता है। स्तियों में रजोधर्म इसी के प्रभाव से – प्रारम्भ होता है। इसे नारी विकास ‘होंमोंन’ भी कहते हैं। इस हॉमोंन का नियन्तण पीयूष मन्थि के दो हॉर्मोन्स FSH तथा LH द्वारा होता है।

(2) प्रोजेस्टेरॉन (Progesterone)-यह् अण्डाशय की मैफियन पुटिका कोशिकाओं से अप्डोत्सर्ग के बाद बनी पीले रंग के पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) नामक प्रन्थियों से स्रावित होता है। यह स्तियों में मासिक-चक्र का नियमन करके गर्भाधान के लिए आवश्यक दशाओं के विकास को प्रेरित करता है। गर्भधारण के समय होने वाले परिवर्तन का नियन्त्रण इसी हॉर्मोन द्वारा किया जाता है। इसके प्रभाव से गर्भकाल में स्तन अधिक विकसित हो जाते हैं और दुग्ध-ग्रन्थियाँ सक्रिय होकर बड़ी हो जाती हैं। प्रोजेस्टेरॉन का स्रावण पीयूष प्रन्थि के हॉम्योंन LH दूारा नियान्तित होता है।

(3) रिलैक्सिन (Relaxin)-इस हॉमोंन का स्रावण भी पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) द्वारा गर्भावस्था की समाप्ति पर शिशु-जन्म के समय होता है। यह हाँरोन शिशु-जन्म के समय जघन सन्धान (pubic symphysis) नामक जोड़ व इससे सम्बन्धित प्रेियों का शिथिलन करके शिशु-जन्म को सुगम बनाता है।

प्रश्न 14.
मधुमेह (Diabetes) किसे कहते हैं ? यह रोग क्यों हो जता है ? इसके लक्षणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
इन्सुलिन के अनियमित स्रावण से कौन-से रोग उत्पन्न हो जाते हैं ?
उत्तर:
इन्सुलिन की अनियमितता से उत्पन्न रोग
(क) अल्पस्रावण (Hypoinsulinism) का प्रभाव मधुमेह या डाइबिटीज (Diabetes) रोग-यह रोग इन्तुलिन हॉर्मोन के अल्प या न्यून स्रावण के कारण उत्पन्न होता है। इन्दुलिन के अल्पस्रावण के कारण शरीर की कोशिकाएँ रुधिर से ग्लूकोज को नहीं ले पाती हैं। इससे रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा में वृद्धि हो जाती है। अधिक वृद्धि हो जाने पर ग्लूकोज मूत्र में उत्सर्जित होने लगता है। अन्त में जब रुधिर और मात्र में ग्लूकोज की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है तो मधुमेह का रोग हो जाता है।

4 % मनुष्यों में यह रोग आनुवंशिक होता है। इस रोग में बहुमूत्रता के कारण शरीर में निर्जलीकरण एवं प्यास की शिकायतें हो जाती हैं। शरीर की कोशिकाएँ रुधिर से ग्लूकोज प्रहण न कर पाने के कारण ऊर्जा उत्पादन हेतु अपनी प्रोटीन्स का विखण्डन करने लगती हैं। इससे शरीर कमजोर हो जाता है। वसा ऊतकों में वसा के अपूर्ण विखण्डन से कीटोन काय (ketone bodies) बनने लगते हैं। ये मीठे, अम्लीय तथा विषाक्त होते हैं। धीरे-धीरे शरीर में इनकी मात्रा और अम्लीयता में वृद्धि हो जाने से रोगी बेहोश होने लगता है और शीष्र ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। मधुमेह के रोगियों को इन्सुलिन के इंजेक्शन देने से लाभ होता है।

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(ख) अतिस्नावण (Hyperinsulinism) का प्रभाव हाइपोम्लाइसीमिया (Hypoglycemia) रोग-यह रोग इन्सुलिन के अधिक स्रावण के कारण उत्पन्न होता है। इन्सुलिन के अतिस्रावण के कारण शरीर-कोशिकाएँ रुधिर से अधिक मात्रा में ग्लूकोज लेने लगती हैं, जिससे रुधिर में इसकी मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण आवश्यक ऊर्जा प्राप्ति हेतु तन्त्रिका कोशिकाओं, नेत्रों की रेटिना व जननिक एपीथीलियम की कोशिकाओं की ग्लूकोज की आवश्यकता पूरी नहीं हो पाती है। अतः रोगी का दृष्टि ज्ञान एवं जनन क्षमता कम हो जाती है। मस्तिष्क की कोशिकाओं में अत्यधिक उत्तेजना से थकान, मूर्च्छा व ऐंठन अनुभव होती है और अन्त में मृत्यु हो जाती है। एश्रीनेफ्रीन, वृद्धि हॉमोंन, कॉर्टीसोल ग्लूकागॉन देने से इस रोग में लाभ होता है।

प्रश्न 15.
अन्त स्वावी विज्ञान के जनक कौन शे ? हॉर्मोंस का रासायनिक स्वभाव क्या होता है ?
उत्तर:
अन्तःसावी विझान के जनक धॉमस ए्ड़सन थे। होमोंन्स का रासायनिक स्वभाव-हॉर्मोन्स जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं, जिनका स्वभाव भिन्न-भिन्न हो सकता है यथा-
(1) अमीनो अम्ल (Amino acids) – कुछ हॉमोंन अमीनो अम्ल या इनके व्युत्पन्न पदार्थ होते हैं। जैसे-धाइर्रॉक्सन हॉर्मोन।
(2) प्रोटीन या पॉलीपेप्टाइ्ड्स (Proteins or Polypeptides) – ये कम अणुभार वाले प्रोटीन या इससे व्युत्पन्न पदार्थ होते हैं; जैसे पीयूष ग्रन्यि के हॉमोंस्स।
(3) स्टीरॉइडस (Steroids) – इनका आधार पदार्थ कलेस्ट्रॉल होता है जैसे लिंग होंगोन्स अधिवृक्क गन्थि के कुछ होंगोन्स।
(4) कैटेकोलेमीन्स (Catecholamines)-जैसे- एड़नेलिन। हॉर्मोन्स रासायनिक उत्रेरक के रूप में कार्य करते हैं। ये रासायनिक क्रियाओं का नियन्न्रण करने में सहयोग देते हैं। अधिकतर हॉमोंन्स उपापचयिक अभिक्रियाओं में सीधे भाग न लेकर इनकी क्रियाशीलता के स्तर को प्रभावित करते हैं। ये जल में विलेय होते हैं।

प्रश्न 16.
कौन-सी ग्रन्थियाँ निम्नलिखित हॉमोन्स का स्रावण करती हैं-
(1) वृद्धि हॉमोन
(2) ऑक्सीदोसि
(3) बाइरॉक्सि
(4) कैस्तिटोनिन
(5) धाइमोसिन
(6) इन्सुलिन
(7) ग्लूकाग्नों
(8) ग्लूकोकर्टिकॉयड्स
(9) ऐडीनेलिन
(10) टेस्टोस्टेरॉन।
उत्तर:

हॉमोंनअन्त:स्तावी ग्रन्यि
वृद्धि हॉर्मोन (Growth hormone)एडीनोहाइपोफाइसिस (Adenohypophysis)
ऑक्सीटोसिन (Oxytocin or Pitocin)न्यूरोहापोफाइसिस (Neurohypophysis)
थाइरॉक्सिन (Thyroxin)थाइरॉइड ग्रन्थि (Thyroid gland)
कैल्सिटॉनिन (Calcitonin)थाइरॉइड ग्रन्थि (Thyroid gland)
थाइमोसिन (Thymosin)थाइमस प्रन्थि (Thymus gland)
इन्सुलिन (Insulin)अग्याशय (Pancreas) में उपस्थित लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans)
ग्लूकागॉन (Glucagon)अग्याशय (Pancreas) में उपस्थित लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans)
ग्लूकोकॉर्टिकॉयड्स (Glucocorticoids)एड्रीनल कॉर्टेक्स (Adrenal cortex)
ऐड्रीनेलिन (Adrenalin)एड्रीनल मैड्यूला (Adrenal Medulla)
टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone)वृषण (Testes)

प्रश्न 17.
मनुष्य में उपस्थित अन्य अन्तःस्रावी अंगों का वर्णन कीजिए। उत्तर – मनुष्य में अन्तःस्रावी ग्रन्थियों (Endocrine glands) के अतिरिक्त कुछ अन्य अंग भी हॉर्मोन्स उत्पन्न करते हैं जो शरीर की क्रियाओं पर अपना प्रभाव डालते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख अंग निम्न हैं –

(1) वृक्क की जक्स्टा मेड्यूलरी जटिल कोशिकाएँ (Complex cells of Juxta Medullary Nephrons) वृक्क की जक्स्टा मेड्यूलरी जटिल कोशिकाओं द्वारा रेनिन (renin) नामक हॉर्मोन का स्राव होता है जो कि बुक्क नलिकाओं (nephrons) में परानिस्यन्दन (ultrafiltration) तथा एल्डोस्टेरॉन (aldosteron) हॉर्मोन के स्त्रावण को प्रेरित करता है तथा रक्त दाब में वृद्धि है।

(2) त्वचा (Skin) त्वचा में उपस्थित तैल पन्थियों की कोशिकाएँ विटामिन डी का स्त्रावण करती हैं जो कि आन्त्र द्वारा कैल्सियम के अवशोषण तथा अस्थि निर्माण को प्रेरित करता है।
(3) अपरा या जरायु (Placenta ) अपरा या जरायु की कोरियोनिक उपकला (chorionic epithelium) द्वारा ऐस्टूडियॉल (Estradiol) हॉर्मोन जो कि गर्भाशय की पेशियों के संकुचन का नियन्त्रण करता है तथा प्रोजेस्टेरॉन (progesterone) हॉर्मोन, जोकि गर्भावस्था को बनाये रखता है का स्त्रावण किया जाता है। इसके द्वारा कोरियोनिक गोनेडोट्रोपिन्स (chorionic gonado tropic hormone) का स्त्रावण किया जाता है जो कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus luteum) के विकास का नियन्त्रण करता है। अपरा लैक्टोजन (Placental lactogen) द्वारा दुग्ध मन्धियों के विकास को प्रेरित किया जाता है।

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प्रश्न 18.
तंत्रिकीय एवं अन्तःस्रावी संचार में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तंत्रिका तंत्र एवं अन्तःस्रावी तंत्र ये दोनों ही शारीरिक क्रियाओं का नियंत्रण, नियमन एवं समन्वयन करते हैं। इन दोनों ही तंत्रों की क्रियाविधि में अग्रलिखित अंतर होते हैं –
तंत्रिकीय एवं अन्तःस्त्रावी संचार में अन्तर –

तंत्रिकीय संचार (Nervous Communication):अन्त:सावी संचार (Endocrine Communication):
तंत्रिकाएँ जिस अंग की क्रियाओं को प्रभावित करती हैं, उनके सम्पर्क में रहती हैं।अन्त:सावी भन्थि किसी अंग से सम्बन्धित नहीं होती हैं। इनसे स्रावित होने वाले हॉर्मोन्स रक्त के माध्यम से अंग या लक्ष्य कोशिका तक पहुँचते हैं।
तंत्रिकीय नियंत्रण अतिशीघ्र होता है। इसका प्रभाव तत्काल होता है। जिस अंग तक प्रेरणा पहुँचती है, उसमें तत्काल सम्बन्धित क्रिया सम्पन्न होती है ।अन्त:स्रावी नियंत्रण धीमी गति से होता है। इसका प्रभाव तत्काल नहीं होता है। हॉमोंन उपापचयी क्रिया को प्रभावित करके प्रभाव डालते हैं।
तंत्रिका तंत्र बाहरी सूचनाओं (या उह्दीपनों) को प्रहण करके संगृहीत कर सकता है और भविष्य में उनका उपयोग कर सकता है।अंतःन्नावी तंत्र में इस प्रकार सूचनाएँ संगृहीत करने की कोई व्यवस्था नहीं होती है।

(D) निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions )

प्रश्न 1.
अन्तःस्रावी ग्रन्थियों क्या हैं ? मनुष्य में पाये जाने वाली अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के नाम, स्थिति तथा प्रत्येक से उत्पन्न हॉर्मोन्स के नाम लिखिए तथा उनके कार्य बताइए।
उत्तर:
हॉर्मोन्स-परिभाषा एवं विशेषताएँ (Hormones-Definition and Properties):
हॉर्मोन (Hormone) -ये अन्तस्रावी प्रन्थियों में बनने वाले ऐसे सक्रिय तथा कार्यकारी जटिल कार्बनिक पदार्थ हैं, जो रुधिर द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचकर विशेष अंगों की कोशिकाओं की कार्यिकी को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार ये रासायनिक उत्रेरक का कार्य करते हैं। रासायनिक दृष्टि से ये स्टीरॉइड्स या प्रोटीन या प्रोटीन से व्युत्पन्न होते हैं।

हॉमोंस की विशेष्ताएँ (Properties of Hormones):

  1. हार्मोन्स कार्बनिक रासायनिक पदार्थ (Organic Chemical Substances) होते हैं, जिनका निर्माण कोशिकाओं द्वारा होता है।
  2. हॉंमॉन्स अन्तस्रावी प्रन्थियों द्वारा रुधिर में स्रावित किए जाते हैं।
  3. हॉमॉन्स का संमहण नहीं किया जाता है। ये तीव्र विसरणशील होते हैं।
  4. हॉम्मोन्स जल में घुलनशील होते हैं।
  5. ये उत्पत्ति स्थल से दूर जाकर क्रिया करते हैं अर्थात् इनके लक्ष्य निश्चित होते हैं।
  6. हॉमोन्स का अणुभार एन्जाइम्स की तुलना में कम होता है।
  7. हॉर्मोंस का निर्माण प्रोटीन्स या स्टीरॉइड्स से होता है।
  8. हॉर्मोन्स अल्प मात्रा में स्रावित होकर शरीर की उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।

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मनुष्य की अन्त: व्वावी ग्रन्थियाँ (Endocrine glands of Human):
मनुष्य के शरीर में भिन्न-भिंन्न स्थानों पर निम्नलिखित अन्त्रावी मन्थियाँ स्थित होती है-
(1) हाइपोथैलेमस (Hypothalamus)
(2) थाइॉॉइड प्रन्थि (Thyroid gland)
(3) पैराथाइडॉइड प्रन्थि (Parathyroid gland)
(4) थाइमस प्रन्थि (Thymus gland)
(5) अधिवृक्क भ्रन्थि (Adrenal gland)
(6) पीयूू मन्थि (Pituitary gland)
(7) पीनियल काय (Pineal body)
(8) अग््याशय यन्थि (Pancreas)
(9) वृषण (Testes)
(10) अण्डाशय (Ovaries)।
(11) अन्य (Others) – प्लेसेन्टा (Placenta), कार्पसल्यूटियस (Corpus Leutium), आहारनाल (Alimentary canal), यकृत (liver), वृक्क आदि (kidney) ।
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प्रश्न 2.
पीयूष ग्रन्थि का नामांकित चित्र बनाते हुए एडीनोहाइपोफाइसिस तथा न्यूरोहाइपोफाइसिस द्वारा स्वावित हॉमोंनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पीयूष ग्रन्थि/हाइपोफाइसिस (Pituitary Gland/ Hypophysis):
पीयूष ग्रन्थि एक जटिल ग्रन्थि होती है। यह अग्रमस्तिष्क के पश्च भाग-डाइएनसेफेलॉन (diencephalon) की आधारभित्ति हाइपोथैलेमस (hypothalamus) से एक छोटे से वृन्त इन्फण्डीबुलम (infundibulum) द्वारा जुड़ी रहती है। पीयूष ग्रन्थि को हाइपोफाइसिस सेरीब्राइ (hypophysis cerebri) भी कहते हैं। इसका आकार मटर के दाने के बराबर होता है। इसका भार 5-6 ग्राम होता है। स्रियों में यह कुछ अधिक बड़ी होती है तथा गर्भावस्था में इसका आकार बढ़ जाता है।

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रचना तथा कार्य की दृष्टि से यह दो भागों में बँटी होती है –
(1) एडीनोहाइपोफाइसिस (Aden- ohypophysis) – यह पीयूष प्रन्थि का अगला गुलाबी भाग है जो कुल प्रन्थि का $75 \%$ है। यह भूरूण की मसनी (pharynx) से राथके कोष्ठ (Rathke pouch) के रूप में एक्टोडर्म से विकसित होता है। इसे पीयूष यन्थ का अप्रपिण्ड या अप्र पालि भी कहते हैं। यह स्वयं तीन भागों से मिलकर बना होता है-
(a) इन्फण्डीबुलर बृन्त से लिपटी समीपस्थ पालि (pars infundibularis or tuberalis)
(b) बड़ी फूली हुई गुलाबी-सी दूरस्थ पालि (pars distalis)
(c) संकरी पट्टीनुमा मध्य पालि (pars intermedia or intermediate lobe)।

(2) ग्यूरोहाइपोफाइसिस (Neurohypophysis) – यह हाइपोथैलेमस के इन्मण्डीबुलम से विकसित होता है। इसे पश्चपालि (posterior lobe) या तन्त्रिकीय पिण्ड (pars nervosa) भी कहते हैं। यह पीयूष प्रन्थि का एक-चौथाई भाग बनाता है। एडीनोहाइपोफाइसिस द्वारा स्रावित हॉम्मोन्स (Hormones of Adenohypophysis)
(1) सोमेटोटॉंपिक होंमोन अथवा वृद्धि होंमोंन (Somatotropic Hormone or Growth Hormone) – यह शरीर की वृद्धि को प्रभावित करता है। यह ऊतकों के क्षय को रोकता है, कोशिका के विभाजन, हहुुियों व पेशियों के विकास तथा संयोजी ऊतक की वृद्धि को प्रोत्साहित करता है। यकृत में ऐमीनो अम्लों से ग्लूकोज तथा ग्लूकोज से ग्लाइकोजन के संश्लेषण को बढ़ाता है। वसा के विघटन को प्रेरित करता है। इसकी कमी से व्यक्ति बौना रह जाता है तथा अधिकता से भीमकायता (acromegaly) हो जाता है।
कार्य –

  • शारीरिक वृद्धि के नियमन करता है।
  • कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा के उपापचय का नियमन करता है।
  • अग्याशय से इन्सुलिन व ग्लूकेगॉन हार्मोन का स्रावण उद्दीपित करता है।
  • यह यूरिया उत्सर्जन व मूत्र निष्कासन में वृद्धि करता है।
  • स्तनियों में दुग्ध हावण को उद्दीपित करता है।
  • कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
  • ग्लूकोनियोजिनोसिस तथा ग्लाइकोजिनेसिस को प्रेरित करता है।

(2) गोनेडोट्रॉपिक हॉम्नोस्स (Gonadotropic Hormones: GTH) – यह हॉर्मोन नर तथा मादा में क्रमशः वृषण तथा अण्डाशय को उत्तेजित करता है। ये हॉर्मोन जनन ग्रन्थियों तथा अन्य सहायक जननांगों की सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ये मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं –
नलिकाओं (seminiferous tubules) तथा शुक्राणु निर्माण (sperm formation) प्रेरित करता है तथा स्रियों में अण्डाशयी पुटिकाओं की वृद्धि एवं एस्ट्रोजन (estrogens) के स्रावण को प्रेरित करता है।
(ब) ल्युटिनाइर्जिं हॉर्मोन अथवा अन्तराली कोशिका प्रेरक हॉर्मोन (Lutenizing Hormone : LH, or Interstitial Cell Stimulating Hormone : CSH – स्त्रियों में यह कॉर्पस ल्यूटिनम (corpus leutium) कोशिकाओं को प्रोजस्टेरॉन (Progesteron) हॉर्मोन के स्राव को प्रेरित करता है तथा पुरुषों में एण्ड्रोजन्स के स्राव को प्रेरित करता है।
(3) थाइ्रॉइड उस्तेजक होर्मोन (Thyroid Stimulating Hormone : TSH) – यह एक ग्लाइकोप्रोटीन (Glycoprotein) हॉर्मोन है जो थाइरॉइड ग्रन्थि की वृद्धि एवं स्रावण क्रिया को उत्तेजित करता है।
(4) ऐड्रिनोकोर्टिकोट्रॉपिक हॉर्मोन (Adrenocorticotropic Hormone : ACTH) – यह एड्रीनल प्रन्थि (adrenal gland) के वल्कुट भाग (cortex) को हॉर्मोन स्रावण के लिए प्रेरित करता है।

कार्य –

  • यह एड्रीनल प्रन्थि के कारेक्स भाग से स्रावित हॉर्मोन के उत्पादन व स्रावण को उत्रेरित करता है।
  • वसा अपघटनीय एन्जाइमों को सक्रिय करता है।
  • मेलेनिन के संश्लेषण को उत्रेरित करता है।

(5) लैक्टोजेनिक या प्रौलैक्टिन अथवा मैमोर्ट्रोपिक होंरोंन (Lactogenic Hormone : LTH)-यह हॉर्मोन स्त्रियों में गर्भावस्था के समय अधिक मात्रा में स्रावित होकर स्तनों की वृद्धि को प्रेरित करता है। शिशु जन्म के बाद दुग्ध स्राव को प्रेरित करता है।

(6) मिलैनोसाइट प्रेरक हॉर्मोन (Melanocyte Stimulating Hormone : MSH) – यह मध्यपिण्ड द्वारा स्रावित हॉर्मोन है जो त्वचा की वर्णकता का नियमन करता है। मानव में यह तिल बनने तथा चकत्ते बनने को प्रेरित करता है।

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न्यूरोहाइपोफाइसिस द्वारा स्तावित हॉर्मोन्स (Hormones of Neurohypophysis):
(1) वेसाप्रेसिन या पिट्रोसिन या एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (Vasopressin or Pitrossin or Antidiuretic Hormone- ADH) – यह वृक्क नलिकाओं के दूरस्थ भागों एवं संग्रह नलिकाओं से जल के पुनरावशोषण को बढ़ाता है जिससे मूत्र की मात्रा कम हो जाती है। अतः इसे मूत्ररोधी या प्रतिमूत्रल हॉंमोन भी कहते हैं। यह शरीर के कुछ भागों की रुधिर वाहिनियों को सिकोड़कर रुधिर दाब को बढ़ाता है।

(2) ऑक्सीटोसिन (Oxytocin-OT) या पिटोसिन (Pitocin)-यह हॉर्मोन स्त्रियों में प्रसव पीड़ा उत्पन्न करके शिशु जन्म को आसान बनाता है। शिशु जन्म के बाद गर्भाशय को सामान्य अवस्था में लाता है। स्तनों में दुग्ध स्राव को प्रेरित करता है। यह गर्भाधान क्रिया को सुगम बनाता है।
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वृद्धि हॉर्मोन GH के अति स्रावण से होने वाले रोग पीयूष म्रन्थि (Pituitary gland) के वृद्धि हॉमोंन (growth hormones) के अतिस्नाव (hypersecretion) से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं –
(1) अतिवृद्धि (Gigantism) – बाल्यकाल में वृद्धि हॉर्मोन की अधिकता से बहुत लम्बे तथा छष्टपुष्ट भीमकाय (giant) व्यक्तियों का विकास होता है। इन्हें पिट्यूटरी आयण्ट (pituitary giants) कहते हैं।

(2) अश्रातिकायता (Acromegaly) – वृद्धिकाल के बाद वृद्धि हॉमोंन की अधिकता से गोरिल्ला के समान कुरूप भीमकाय व्यक्ति बनते हैं। क्योंकि हडुदुयों की लम्बाई में वृद्धि सम्भव नहीं होती तो शरीर लम्बाई में नहीं बढ़ पाता है, अत: हाथ, पाँव, चेहरे के कुछ भाग जबड़े आदि अधिक लम्बे हो जाते हैं। हडुद्याँ मोटाई में बढ़ती हैं जिससे चेहरा व शरीर भद्दा हो जाता है। इस अवस्था को एकोमेगैली (acromegaly) कहते हैं।

(3) काइफोसिस (Kyphosis) – कभी-कभी कशेरुक दण्ड के झुक जाने से व्यक्ति कुबड़ा हो जाता है।

वृद्धि हॉमोंन GH के अल्पस्तावण से होने वाले रोग –
1. बाल्यकाल में STH या GH के अल्प स्रावण से व्यक्ति बौना रह जाता है। इस प्रकार के व्यक्ति नपुसंक या बाँझ (sterile) होते हैं। पिट्टयूटरी से होने वाले बौनेपन को एटिओलिसिस (ateolisis) तथा ऐसे व्यक्तियों को मिगेद्स (midgets) कहते हैं। सरकस में काम करने वाले बौने मिगेद्स होते हैं। साइमण्ड रोग (Simonds’ Disease) – यह रोग वृद्धिकाल के बाद STH की कमी के कारण होता है। इसके कारण शरीर से ऊतक क्षतिग्रस्त होने लगते हैं, जिससे व्यक्ति दुर्बल हो जाता है।
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प्रश्न 3.
थाइरॉइड ग्रन्थि के द्वारा स्त्रावित हॉर्मोन्स व उनके अनियमित स्वाव के कारण उत्पन्न रोगों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
थाइरॉइड ग्रन्थि (Thyroid gland):
थाइरॉइड प्रन्थि (thyroid gland) शरीर की सबसे बड़ी अन्त.स्रावी (endocrine gland) है जो कि गर्दन में श्वास नली के अगले भाग पर स्वरयन्त्र (larynx) के नीचे स्थित होती है। वयस्क मनुष्य में यह लगभग 5 सेमी लम्बी तथा 3 सेमी चौड़ी होती है। इसका भार लगभग 25-30 प्राम होता है। स्तियों में यह अपेक्षाकृत बड़ी होती है।
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थाइरॉइड प्रन्थि अनेक छोटे-छोटे गोलाकार फॉलिकल्स (follicles) के समूहों की बनी होती है जो संयोजी ऊतक द्वारा आपस में बँधे रहते हैं। ये संयोजी ऊतक स्ट्रोमा (stroma) कहलाते हैं। इनमें कहीं-कहीं पर कोशिकाओं के ठोस गुच्छे पाये जाते हैं। इन्हें पैरापुटिकीय कोशिकाएँ (parafollicular cells या C- cells) कहते हैं।

थाइरॉइड ग्रन्थि द्वारा स्त्रावित हॉर्मोन्स थाइरॉइड ग्रन्थि से तीन हॉर्मोन्स का स्राव होता है –
(1) थाइरॉक्सिन या टेट्रा आयोडोथाइरोनिन (Thyroxin or Tetraiodo-thyronine : T4)
(2) ट्राइआयोडोथाइरोनिन (Tri-iodothyronine T3)
(3) कैल्सिटोनिन (Calcitonin)।

(1) टेट्रा आयोडो थाइरोनिन (Tetra lodothyronine, T4 ) – इस हार्मोन का नियमन पीयूष ग्रन्थि के TSH हार्मोन द्वारा किया जाता है। इसकी कुल मात्रा 65 से 90% तक होती है। इसे थायरॉक्सिन हार्मोन के नाम से जाना जाता है। इसका निर्माण आयोडीन व टायरोसिन के द्वारा होता है। यह अपेक्षाकृत कम सक्रिय होता है। प्रत्येक टेट्रा आयोडोथाइरोनिन में टाइरोसीन के दो अणु तथा आयोडीन के चार परमाणु (T2 + T2 = T4)होते हैं।

(2) ट्राई- आयोडो थाइरोनिन (Tri- lodothyronine, T3 ) – यह भी आयोडीन युक्त हार्मोन है लेकिन यह T4 की तुलना में अत्यधिक सक्रिय व शक्तिशाली होता है। यह कुल हॉर्मोन का 10% भाग बनाता है। प्रत्येक ट्राइ आयडोथाइरोनिन में दो अणु टाइरोसीन के तथा आयोडीन के तीन परमाणु (T2 + T1 + होते हैं। T4 व T3 दोनों थाइरॉइड ग्रन्थि में बनने वाले आयोडीन युक्त हार्मोन हैं। इन दोनों के निर्माण में टाइरोसीन अमीनो अम्ल का उपयोग होता है।

इन दोनों हार्मोन्स का संग्रह पुटिकाओं की गुहा में उपस्थित कोलॉइड पदार्थ करता है। T4 व T3 हार्मोन्स पुटिका कोशिकाओं से मुक्त होकर रक्त में पहुंच जाते हैं। जब रक्त से यह हार्मोन्स ऊतक द्रव में जाते हैं तब अधिकांश T4 अणुओं का आयोडीन हरण या डीआयोडीनेशन होने पर T3 अणु बनते हैं । प्रत्येक T4 अणु से एक आयोडीन अणु पृथक् हो जाता है जिससे वह T3 में बदल जाता है। T3 तथा T4 को सम्मिलित रूप में थायरॉइड हार्मोन कहते हैं।

(3) कैल्सिटोनिन (Calcitonin ) – इस हार्मोन का स्त्रावण थायरॉइड ग्रन्थि की C-कोशिकाओं के द्वारा किया जाता है। ये पैरापुटिका कोशिकाएँ या “C” कोशिकाएँ थाइरॉइड ग्रन्थि की पीठिका / स्ट्रोमा में पाई जाती हैं। इस हार्मोन को थाइरोकैल्सिटोनिन भी कहते हैं। यह आयोडीन रहित हार्मोन है। यह हार्मोन मूत्र में कैल्सियम (Ca+2) के उत्सर्जन में वृद्धि तथा अस्थियों के विघटन को कम करने का कार्य करता है। यह हार्मोन पैराथायरॉइड ग्रन्थि के पैराथारमोन (PTH) के विपरीत कार्य करता है।

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थाइरॉक्सिन के कार्य –
1. आधारी उपापचयी दर (BMR Basal Metabolic Rate) में वृद्धि करता है। जिससे ऊर्जा उत्पादन बढ़ता है इससे “जीवन की रफ्तार” ( Tempo of life) भी बढ़ती है।
2. यह सभी उपापचयी क्रियाओं का नियमन करता है।
3. यह कोशिकीय श्वसन दर को भी बढ़ाता है।
4. देह के तापक्रम को नियमित करता है।
5. मेढ़क के टेडपोल लार्वा के कायान्तरण में सहायक होता है।

गुडरनैश (Gudrnatsch; 1912 ) ने उभयचरों के टेडपोल लार्वा के कायान्तरण का अध्ययन कर यह बताया कि थायरॉक्सिन हार्मोन कायान्तरण (metamorphosis ) हेतु आवश्यक होता है। यदि टेडपोल की थाइरॉइड ग्रन्थि निष्क्रिय हो जाये या निकाल दी जाये या जल में आयोडीन की कमी हो तो टैडपोल लार्वा में कायान्तरण नहीं होता है तथा टेडपोल शारीरिक वृद्धि कर आकार में बड़ा हो जाता है। उत्तरी अमेरिका के पहाड़ी क्षेत्रों में ऐक्सोलोटल लार्वा (Axolotal Larva) बहुतायत से मिलता है।

यह लार्वा एम्बीस्टोमा (Ambistoma) नामक पुच्छयुक्त उभयचर का होता । जल में आयोडीन की कमी के कारण लार्वा की थायरॉइड ग्रन्थि का विकास नहीं हो पाता है। इस कारण थायरॉक्सिन हार्मोन नहीं बन पाता है। फलस्वरूप लार्वा में कायान्तरण नहीं होता है। यह ऐक्सोलोटल लार्वा शारीरिक वृद्धि कर बड़ा हो जाता है। इससे जननांग विकसित हो जाते हैं तथा ये पीडोजेनेटिक (pedogenetic) हो जाता है। इसी अवस्था में यह जनन प्रारम्भ कर देता है। यह प्रक्रिया नियोटिनी (neotiny) कहलाती है।

6. यह एड्रीनल कोर्टेक्स व जनदों की क्रिया को उत्तेजित करता है ।
7. जल सन्तुलन में सहायक होता है।
४. यह शीत रक्तधारी प्राणियों में त्वचा के निर्मोचन को नियन्त्रित करता है 1
9. यह शरीर की वृद्धि व विभेदन को प्रेरित करता है।
10. यह हृदय स्पन्दन व श्वसन दर को बढ़ाता है।
11. यह विद्युत अपघट्यों का नियमन भी करता है।
12. यह RBCs निर्माण में भी सहायक होता है।
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13. लक्ष्य कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया की संख्या और माप बढ़ जाता है। ATP का अधिक उत्पादन होता है। ग्लूकोज व ऑक्सीजन का उपयोग बढ़ जाता है। इसे हार्मोन का कैलोरीजनिक प्रभाव कहते हैं।

थाइरॉइड ग्रन्थि की अनियमितताएँ एवं उत्पन्न होने वाले रोग
शरीर में थाइरॉक्सिन हॉर्मोन के अनियमित स्रावण से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं –
(क) अल्पस्त्रावण (Hypothyroidism) का प्रभाव थाइरॉइड में हॉर्मोन्स का अल्पस्रावण आनुवंशिक दोष या भोजन में आयोडीन की कमी, मूत्र में आयोडीन के अधिक उत्सर्जन आदि के कारण होता है।

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इससे निम्नलिखित रोग हो सकते हैं –
(1) जड़-वामनता (Cretinism ) – यह रोग बच्चों में थाइरॉक्सिन हॉर्मोन की कमी से हो जाता है। आधारी उपापचय दर (BMR), हृदय गति, शारीरिक ताप, उपापचय, ऑक्सीजन की खपत, अस्थियों की वृद्धि आदि की दर घट जाने से शरीर व मस्तिष्क की वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है। ऐसे बच्चे बौने और कुरूप हो जाते हैं। इनके ओंठ मोटे, जीभ निकली हुई, त्वचा मोटी व शुष्क, उदर भाग बाहर निकला हुआ और जननांग अपूर्ण विकसित होने से प्रजनन के अयोग्य होते हैं। ये मानसिक रूप से अल्प विकसित होते हैं।

(2) मिक्सिडिमा (Myxeedema ) – यह रोग वयस्कों में थाइरॉक्सिन की कमी से हो जाता है। इस रोग में त्वचा फूल जाती है, उपापचय की दर घट जाती है तथा प्रोटीन संश्लेषण के कम हो जाने से शरीर भारी किन्तु कमजोर और सुस्त हो जाता है। समय से पूर्व ही बुढ़ापे की सी कमजोरी, क्षीण रुधिर दाब, बालों का झड़ना व सफेद हो जाना, त्वचा का पीलापन, आवाज धीमी व भारी, मस्तिष्क व पेशियों की कमजोरी, ठण्ड सहन-क्षमता का घट जाना एवं प्रजनन क्षमता की कमी आदि लक्षण दिखायी देने लगते हैं। ऐसे रोगी को थाइरॉक्सिन को दवा के रूप में देने से रोग नष्ट हो जाता है।

(3) सामान्य घेंघा रोग या गलगण्ड (Simple Goitre) – यह रोग भोजन व पेयजल में आयोडीन की कमी से हो जाता है । थाइरॉक्सिन की कमी को पूरा करने के लिए थाइरॉइड ग्रन्थि अधिक स्त्रावण हेतु बड़ी होकर फूलने लगती है। इससे गर्दन . फूलकर मोटी और कुरूप हो जाती है। इसे घेंघा रोग या गलगण्ड कहते हैं। यह रोग उन पहाड़ी क्षेत्रों में, जहाँ जल व मिट्टी में आयोडीन की कमी होती है, अधिकांश मनुष्यों में हो जाता है।
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नेत्रोत्सेधी गलगंड (Exophthalmic Goitre)

(4) हाशीमोटो रोग (Hashimoto’s Disease) – इस रोग में थाइरॉक्सिन की अत्यधिक कमी हो जाती है पर इसकी आपूर्ति हेतु दी गयी दवाएँ स्वयं शरीर में विष या ऐण्टीजेन्स का कार्य करने लगती हैं। इससे शरीर में प्रतिविष या एण्टीबॉडी बनने लगते हैं जो कि ग्रन्थि को ही नष्ट कर देते हैं।
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सामान्य घेंघा (Simple Goitre)

(ख) अतिस्रावण (Hyperthyroidism) का प्रभाव थाइरॉक्सिन हॉर्मोन के अतिस्रावण से उपापचय दर, रुधिर दाब, हृदय की स्पन्दन – दर, आन्त्र में ग्लूकोज का अवशोषण, ऑक्सीजन की खपत आदि में वृद्धि हो जाती है। माइटोकॉण्ड्रिया में अत्यधिक ऊर्जा बनने से यह ATP में संचित न होकर ऊष्मा के रूप में मुक्त होने लगती है। अतः शरीर में अनावश्यक उत्तेजना, थकान, उच्चताप, घबराहट, चिड़चिड़ापन एवं कम्पन हो जाता है और अत्यधिक पसीना निकलने लगता है।

थाइरॉक्सिन के अतिस्रावण से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं –
(1) नेत्रोत्सेधी गलगण्ड (Exophthalmic Goitre) – इस रोग में नेत्र गोलकों के नीचे श्लेष्म एकत्रित हो जाने से गोलक बाहर की ओर उभर आते हैं, जिससे नेत्र चौड़े हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति की दृष्टि घूरती हुई-सी व भयावह होती है।
(2) प्लूमर रोग (Plummer’s Disease) – इस रोग में थाइरॉइड ग्रन्थि में जगह-जगह गाँठें बन जाने से यह फूल जाती है
(3) ग्रेवी रोग (Grave’s Disease) – इस रोग में थाइरॉइड ग्रन्थि असमान रूप से वृद्धि करके फूल जाती है।

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प्रश्न 4.
एड्रीनल ग्रन्थि के द्वारा स्त्रावित विभिन्न हार्मोनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal gland):
प्रत्येक वृक्क के अगले सिरे पर एक-एक पीले भूरे रंग की टोपी के समान अधिवृक्क या एड्रीनल प्रन्थि (adrenal gland) लगी रहती है। इसका वजन 4-5 माम होता है। इसका बाहरी भाग कर्टेक्स (cortex) तथा केन्द्रीय भाग मेडूला (medulla) कहलाता है।
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(A) तडीनल कर्टिक्स (Adrenal Cortex) – यह एड़ीनल का परिधीय भाग है। यह पीला-सा होता है तथा कुल प्रन्थि का 80-90% भाग बनाता
है। यह धूरण की मीसोडर्म से बनता है। इस भाग की कोशिकाएँ लगभग 50 हार्मोन्स का स्रावण करती हैं। इनको सामूहिक रूप से कॉर्टिककोस्टिरॉएड्स (corticosteroids) कहते हैं। कार्य की दृष्टि से इनको तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-
(I) ग्लूकोज नियन्रण हॉर्मोन्स या ग्लूकोकॉर्टिकोस्टीरॉयइस (Glucocorticosteroids)-इनमें कॉर्टिसोल (cortisol) तथा कॉर्टिकोस्टीरोन (corticosterone) मुख्य हैं। ये शरीर में निम्नलिखित कार्य करते हैं-
(1) यकृत में प्रोटीन संश्लेषण, यूरिया संश्लेषण, ग्लाइकोजेनेसिस तथा ग्लूकोनिओजेनेसिस तथा ग्लूकोनिओजेनेसिस की क्रिया को प्रेरित करना।
(2) इन्सुलिन के विपरीत कार्य करके रुधिर में ग्लूकोज, ऐमीनो अम्लों तथा वसा अम्लों की मात्रा में वृद्धि करना।
(3) लसिका ऊतकों, वसाकायों, अस्थियों एवं आहारनाल में प्रोटीन संश्लेषण तथा ग्लूकोज के उपयोग को रोकना।
(4) ग्लूकोकॉर्टिकोस्टिरॉइड्स प्रतिरक्षी निषेधात्मक (Immuno suppressors) होते हैं। अतः एलर्जीं के उपचार में तथा अंगों के प्रत्यारोपण को सफल बनाने के लिए इनका इंजेक्शन दिया जाता है।
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(5) ये लाल रुधिराणुओं की संख्या को बढ़ाते हैं तथा श्वेत रुधिराणुओं की संख्या को घटाता है।
(II) खन्जि नियन्तक होमोन्स या मिनरेलो-कॉर्टिकोस्टिरॉइस्स (Mineralocoticosteroids) – ये हॉम्मोन्स रुधिर में खनिज आयनों की सान्द्रता को नियन्त्रित रखते हैं। इनमें एल्डोस्टेरॉन (aldosterone) मुख्य है। यह वृक्क नलिकाओं द्वारा Na+तथा Cl-ऑयन के अवशोषण को तथा K+ आयनों का उत्सर्जन बढ़ा देता है।
(III) लिंग हॉर्मोन्स (Sex Hormones) – एड्रीनल कर्टेक्स से कुछ मात्रा में लिंग हॉर्मोन्स भी स्रावित होते हैं। इनमें नर हॉर्मोन एण्ड्रोजन्स (Androgens) तथा मादा हॉमोंन ऐस्ट्रोजेन्स (estrogens) स्रावित होकर पेशियों तथा जननांगों के विकास को प्रेरित करते हैं।

(B) एड़्रिक मेडुला (Adrenal Medulla) – यह एड्रीनल का केन्द्रीय भाग है। यह भूरे लाल रंग का होता है। यह रूपान्तरित तन्त्रिका कोशिकाओं का बना होता है। यह अधिवृक्क म्नन्थि का लगभग 10% भाग बनाता है। ये अनुकम्पी स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र की ही रूपान्तरित कोशिकाएँ होती हैं। एड्रीनल मेड्यूला द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स (Hormones Secreted From Adrenal Medulla) इस भाग में क्रोमेफिन कोशिकाएँ टाइरोसीन अभीनो अम्ल से दो हॉर्मोस्स बनाती हैं, जो कैटेकोलेमीन होते हैं। ये निम्न हैं –

(1) ऐरीनेलिन या एपीनैक्रीन (Adrenaline or Epine-phrine)- मैड्यूला से स्रावित इस हॉमोन का 80% भाग ऐड्रीनेलिन होता है। यह व्यक्ति को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

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इसके प्रमुख कार्य हैं –
(i) भय, क्रोध, पीड़ा, अपमान, दुर्घटना, व्यम्रता, बेचैनी, मानसिक तनाव, जल जाने, अचानक कोई रोग हो जाने, जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने, विषाक्त पदार्थों के शरीर में पहुँच जाने, अधिक ठण्ड या गर्मी लगने आदि आकस्मिक संकटकालीन दशाओं में अनुकम्पी प्रेरणा के फलस्वरूप ऐड्रीनेलिन का स्राव बढ़ जाता है, जिससे इन दशाओं का सामना करने हेतु उचित कदम उठाने का निर्णय लिया जा सकता है।
(ii) यह शरीर की समस्त रुधिर वाहिनियों को सिकोड़कर रुधिर दाब को बढ़ाता है।
(iii) यह कंकाल पेशियों, हदय, यकृत, मस्तिष्क आदि की रुधिर वाहिनियों को फैलाकर इनमें रुधिर संचार को बढ़ाता है।
(iv) यह हृदय स्पन्दन की दर, श्वास दर, आधारी उपापचय दर तथा रुधिर में पोषक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि करता है।
(v) इसके प्रभाव से तिल्ली संकुचित होकर संचित रुधिर को मुक्त कर देती है। पुतलियाँ फैल जाती हैं। रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मस्तिष्क व संवेदांग अधिक सक्रिय हो जाते हैं। त्वचा पीली पड़ जाती है। लार के कम निकलने से मुख सूखने लगता है। रुधिर के थक्का जमने का समय कम हो जाता है।

(2) नॉरएड़ीनेलिन या नॉरएपीनैफ्रीन (Noradrenaline or Norepinephrine)- मेड्यूला से स्तावित हॉर्मोन का यह $20 \%$ भाग होता है। यह सम्पूर्ण शरीर की रुधि वाहिनियों को संकुचित करके रुधि दाब को बढ़ाता है। ऐड्रीनल स्रावण की अनियमितताएँ एवं उत्पन्न रोग एड्रीनल प्रन्थि के अनियमित स्राव से निम्नलिखित रोग हो सकते हैं –

(क) अल्पस्नावण (Hyposecretion) का प्रभाव:
(1) एडीसन रोग (Addison’s Disease) – यह रोग ऐड्रीनल प्रन्थि के ग्लूकोकॉर्टिकॉएड्स से अल्पस्नाव (कमी) से हो जाता है। इस रोग में सोडियम तथा जल की अधिक मात्रा का मूत्र के साथ उत्सर्जन हो जाने से शरीर का निर्जलीकरण (dehydration) हो जाता है और रुधिर दाब (blood pressure) घट जाता है। चेहर, गर्दन व हाथ की त्वचा में चकते पड़ जाते हैं।
(2) हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) – ग्लूकोकॉर्टि-कॉएड्स की कमी से रुधिर में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिससे हृदय की पेशियों, यकृत एवं मस्तिष्क की क्रियाएँ शिथिल हो जाती हैं। आधारी उपापचय दर (BMR) और शरीर-ताप घट जाते हैं। भूख की कमी, मिचली व घबराहट आदि होने लगती है। ठण्ड, गर्मी व संक्रमण आदि के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
(3) कान्स रोग (Conns’ Disease) – यह रोग मिनरेलोकॉर्टिकॉएड्स की कमी से उत्पन्न होता है। इसमें सोडियम तथा पोटैशियम का सन्तुलन बिगड़ जाता है, जिससे तन्त्रिकाओं में अव्यवस्था हो जाने से पेशियों में अकड़न हो जाती है। रोगी प्रायः कुछ दिनों में मर जाता है।

(ख) अतित्रावण (Hypersecretion) का प्रभाव:
(1) हाइपरफ्लाइसीमिया (Hyperglycemia) – यह रोग एड्रीनेलिन के अति स्रावण के कारण होता है। इसमें रुधिर में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मधुमेह (Diabetes) हो सकता है।
(2) इ्डीमा (Edema)- ऐड्रीनेलिन के अतिस्रावण से रुधर में सोडियम व जल की मात्रा बढ़ जाने से रुधिर दाब बढ़ जाता है और जगह-जगह से शरीर फूल जाता है। इसके साथ ही शरीर में पोटैशियम की अत्यधिक कमी हो जाने से पेशियों व तन्त्रिका तन्त्र के कार्य अव्यवस्थित हो जाते हैं। इससे लकवा (Paralysis) भी हो सकता है। इसे इडीमा रोग कहते हैं।
(3) कुर्शिग का रोग (Cushing’s Disease) – इस रोग में वक्षस्थल में वसा का असामान्य जमाव हो जाने से शरीर बेडौल हो जाता है।
(4) ऑस्टियोपोरोस्सि (Osteoporosis) – इस रोग में अस्थियाँ गलने लगती हैं।
(5) ऐड़ीनल विरलिज्म (Adrenal virilism) – इसमें लड़कियों में लड़कों जैसे लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं; जैसे-आवाज का भारी हो जाना, चेहरे पर दाढ़ी-मूँछों का आ जाना आदि। लड़कियों में बाँझपन (sterility) हो जाता है। लड़कों में लैंगिक परिपक्वता समय से पूर्व ही (शीघ्र) हो जाती है।
एल्डोस्टेरॉन के प्रभाव:

एल्डोस्टेरॉन की अधिकताएल्डोस्टेरॉन की कमी
नेफ्रोन में Na+ तथा Cl T के अवशोषण का बढ़ना।नेफ्रोन में Na+ अवशोषण कम होना।
K+ का कम अवशोषण।K+ का अधिक अवशोषण।
रुधिर में Na+ की मात्रा का बढ़ना तथा K+ की मात्रा घटना।इससे रुधिर में Na+ की मात्रा का कम होना तथा K+ की मात्रा का बढ़ना।

प्रश्न 5.
एड्रीनल ग्रन्थि अनियमित स्त्रावण के फलस्वरूप होने वाले रोगों को संक्षिप्त में समझाइए ।
उत्तर:

अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal gland):
प्रत्येक वृक्क के अगले सिरे पर एक-एक पीले भूरे रंग की टोपी के समान अधिवृक्क या एड्रीनल प्रन्थि (adrenal gland) लगी रहती है। इसका वजन 4-5 माम होता है। इसका बाहरी भाग कर्टेक्स (cortex) तथा केन्द्रीय भाग मेडूला (medulla) कहलाता है।
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(A) तडीनल कर्टिक्स (Adrenal Cortex) – यह एड़ीनल का परिधीय भाग है। यह पीला-सा होता है तथा कुल प्रन्थि का 80-90% भाग बनाता
है। यह धूरण की मीसोडर्म से बनता है। इस भाग की कोशिकाएँ लगभग 50 हार्मोन्स का स्रावण करती हैं। इनको सामूहिक रूप से कॉर्टिककोस्टिरॉएड्स (corticosteroids) कहते हैं। कार्य की दृष्टि से इनको तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है-
(I) ग्लूकोज नियन्रण हॉर्मोन्स या ग्लूकोकॉर्टिकोस्टीरॉयइस (Glucocorticosteroids)-इनमें कॉर्टिसोल (cortisol) तथा कॉर्टिकोस्टीरोन (corticosterone) मुख्य हैं। ये शरीर में निम्नलिखित कार्य करते हैं-
(1) यकृत में प्रोटीन संश्लेषण, यूरिया संश्लेषण, ग्लाइकोजेनेसिस तथा ग्लूकोनिओजेनेसिस तथा ग्लूकोनिओजेनेसिस की क्रिया को प्रेरित करना।
(2) इन्सुलिन के विपरीत कार्य करके रुधिर में ग्लूकोज, ऐमीनो अम्लों तथा वसा अम्लों की मात्रा में वृद्धि करना।
(3) लसिका ऊतकों, वसाकायों, अस्थियों एवं आहारनाल में प्रोटीन संश्लेषण तथा ग्लूकोज के उपयोग को रोकना।
(4) ग्लूकोकॉर्टिकोस्टिरॉइड्स प्रतिरक्षी निषेधात्मक (Immuno suppressors) होते हैं। अतः एलर्जीं के उपचार में तथा अंगों के प्रत्यारोपण को सफल बनाने के लिए इनका इंजेक्शन दिया जाता है।
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(5) ये लाल रुधिराणुओं की संख्या को बढ़ाते हैं तथा श्वेत रुधिराणुओं की संख्या को घटाता है।
(II) खन्जि नियन्तक होमोन्स या मिनरेलो-कॉर्टिकोस्टिरॉइस्स (Mineralocoticosteroids) – ये हॉम्मोन्स रुधिर में खनिज आयनों की सान्द्रता को नियन्त्रित रखते हैं। इनमें एल्डोस्टेरॉन (aldosterone) मुख्य है। यह वृक्क नलिकाओं द्वारा Na+तथा Cl-ऑयन के अवशोषण को तथा K+ आयनों का उत्सर्जन बढ़ा देता है।
(III) लिंग हॉर्मोन्स (Sex Hormones) – एड्रीनल कर्टेक्स से कुछ मात्रा में लिंग हॉर्मोन्स भी स्रावित होते हैं। इनमें नर हॉर्मोन एण्ड्रोजन्स (Androgens) तथा मादा हॉमोंन ऐस्ट्रोजेन्स (estrogens) स्रावित होकर पेशियों तथा जननांगों के विकास को प्रेरित करते हैं।

(B) एड़्रिक मेडुला (Adrenal Medulla) – यह एड्रीनल का केन्द्रीय भाग है। यह भूरे लाल रंग का होता है। यह रूपान्तरित तन्त्रिका कोशिकाओं का बना होता है। यह अधिवृक्क म्नन्थि का लगभग 10% भाग बनाता है। ये अनुकम्पी स्वायत्त तन्त्रिका तन्त्र की ही रूपान्तरित कोशिकाएँ होती हैं। एड्रीनल मेड्यूला द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स (Hormones Secreted From Adrenal Medulla) इस भाग में क्रोमेफिन कोशिकाएँ टाइरोसीन अभीनो अम्ल से दो हॉर्मोस्स बनाती हैं, जो कैटेकोलेमीन होते हैं। ये निम्न हैं –

(1) ऐरीनेलिन या एपीनैक्रीन (Adrenaline or Epine-phrine)- मैड्यूला से स्रावित इस हॉमोन का 80% भाग ऐड्रीनेलिन होता है। यह व्यक्ति को संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

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इसके प्रमुख कार्य हैं –
(i) भय, क्रोध, पीड़ा, अपमान, दुर्घटना, व्यम्रता, बेचैनी, मानसिक तनाव, जल जाने, अचानक कोई रोग हो जाने, जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने, विषाक्त पदार्थों के शरीर में पहुँच जाने, अधिक ठण्ड या गर्मी लगने आदि आकस्मिक संकटकालीन दशाओं में अनुकम्पी प्रेरणा के फलस्वरूप ऐड्रीनेलिन का स्राव बढ़ जाता है, जिससे इन दशाओं का सामना करने हेतु उचित कदम उठाने का निर्णय लिया जा सकता है।
(ii) यह शरीर की समस्त रुधिर वाहिनियों को सिकोड़कर रुधिर दाब को बढ़ाता है।
(iii) यह कंकाल पेशियों, हदय, यकृत, मस्तिष्क आदि की रुधिर वाहिनियों को फैलाकर इनमें रुधिर संचार को बढ़ाता है।
(iv) यह हृदय स्पन्दन की दर, श्वास दर, आधारी उपापचय दर तथा रुधिर में पोषक पदार्थों की मात्रा में वृद्धि करता है।
(v) इसके प्रभाव से तिल्ली संकुचित होकर संचित रुधिर को मुक्त कर देती है। पुतलियाँ फैल जाती हैं। रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मस्तिष्क व संवेदांग अधिक सक्रिय हो जाते हैं। त्वचा पीली पड़ जाती है। लार के कम निकलने से मुख सूखने लगता है। रुधिर के थक्का जमने का समय कम हो जाता है।

(2) नॉरएड़ीनेलिन या नॉरएपीनैफ्रीन (Noradrenaline or Norepinephrine)- मेड्यूला से स्तावित हॉर्मोन का यह $20 \%$ भाग होता है। यह सम्पूर्ण शरीर की रुधि वाहिनियों को संकुचित करके रुधि दाब को बढ़ाता है। ऐड्रीनल स्रावण की अनियमितताएँ एवं उत्पन्न रोग एड्रीनल प्रन्थि के अनियमित स्राव से निम्नलिखित रोग हो सकते हैं –

(क) अल्पस्नावण (Hyposecretion) का प्रभाव:
(1) एडीसन रोग (Addison’s Disease) – यह रोग ऐड्रीनल प्रन्थि के ग्लूकोकॉर्टिकॉएड्स से अल्पस्नाव (कमी) से हो जाता है। इस रोग में सोडियम तथा जल की अधिक मात्रा का मूत्र के साथ उत्सर्जन हो जाने से शरीर का निर्जलीकरण (dehydration) हो जाता है और रुधिर दाब (blood pressure) घट जाता है। चेहर, गर्दन व हाथ की त्वचा में चकते पड़ जाते हैं।
(2) हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) – ग्लूकोकॉर्टि-कॉएड्स की कमी से रुधिर में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिससे हृदय की पेशियों, यकृत एवं मस्तिष्क की क्रियाएँ शिथिल हो जाती हैं। आधारी उपापचय दर (BMR) और शरीर-ताप घट जाते हैं। भूख की कमी, मिचली व घबराहट आदि होने लगती है। ठण्ड, गर्मी व संक्रमण आदि के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है।
(3) कान्स रोग (Conns’ Disease) – यह रोग मिनरेलोकॉर्टिकॉएड्स की कमी से उत्पन्न होता है। इसमें सोडियम तथा पोटैशियम का सन्तुलन बिगड़ जाता है, जिससे तन्त्रिकाओं में अव्यवस्था हो जाने से पेशियों में अकड़न हो जाती है। रोगी प्रायः कुछ दिनों में मर जाता है।

(ख) अतित्रावण (Hypersecretion) का प्रभाव:
(1) हाइपरफ्लाइसीमिया (Hyperglycemia) – यह रोग एड्रीनेलिन के अति स्रावण के कारण होता है। इसमें रुधिर में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे मधुमेह (Diabetes) हो सकता है।
(2) इ्डीमा (Edema)- ऐड्रीनेलिन के अतिस्रावण से रुधर में सोडियम व जल की मात्रा बढ़ जाने से रुधिर दाब बढ़ जाता है और जगह-जगह से शरीर फूल जाता है। इसके साथ ही शरीर में पोटैशियम की अत्यधिक कमी हो जाने से पेशियों व तन्त्रिका तन्त्र के कार्य अव्यवस्थित हो जाते हैं। इससे लकवा (Paralysis) भी हो सकता है। इसे इडीमा रोग कहते हैं।
(3) कुर्शिग का रोग (Cushing’s Disease) – इस रोग में वक्षस्थल में वसा का असामान्य जमाव हो जाने से शरीर बेडौल हो जाता है।
(4) ऑस्टियोपोरोस्सि (Osteoporosis) – इस रोग में अस्थियाँ गलने लगती हैं।
(5) ऐड़ीनल विरलिज्म (Adrenal virilism) – इसमें लड़कियों में लड़कों जैसे लक्षण उत्पन्न होने लगते हैं; जैसे-आवाज का भारी हो जाना, चेहरे पर दाढ़ी-मूँछों का आ जाना आदि। लड़कियों में बाँझपन (sterility) हो जाता है। लड़कों में लैंगिक परिपक्वता समय से पूर्व ही (शीघ्र) हो जाती है।
एल्डोस्टेरॉन के प्रभाव:

एल्डोस्टेरॉन की अधिकताएल्डोस्टेरॉन की कमी
नेफ्रोन में Na+ तथा Cl T के अवशोषण का बढ़ना।नेफ्रोन में Na+ अवशोषण कम होना।
K+ का कम अवशोषण।K+ का अधिक अवशोषण।
रुधिर में Na+ की मात्रा का बढ़ना तथा K+ की मात्रा घटना।इससे रुधिर में Na+ की मात्रा का कम होना तथा K+ की मात्रा का बढ़ना।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(A) थाइमस मन्दि
(C) पीनियल ग्रन्थि
उत्तर:
(A) थाइमस ग्रन्थि (Thymus Gland):
यह मन्थि हृदय के आगे स्थित चपटी व गुलाबी रंग की द्विपिण्डकीय संरचना होती है। ये पिण्ड संयोजी ऊत्तक से ढंके रहते हैं। यह प्थन्थि जन्म के समय विकसित होती है और 8-10 वर्ष या यौवनावस्था तक बड़ी होती रहती है। इसके बाद आकार में घटने लगती है और वृद्धावस्था में एक तन्तुकीय डोरी के रूप में रह जाती है। इसकी बाहरी सतह पर लिम्फोसाइट्स जमा रहती है, जो शिशुओं में जीवाणुओं के संक्रमण से शरीर की रक्षा करती है थाइमस म्रन्थि थाइमोसीन (Thymosin) नामक हॉर्मोन का स्राव करती है। थाइमोसीन लिम्फोसाइट्स को जीवाणुओं या इनके द्वारा मुक्त प्रतिजन पदार्थों (एण्टीजेन्स) को नष्ट करने की प्रेरणा देता है। इसके बाद लिम्फोसाइट विभाजित होकर प्लाज्मा में आ जाती है और प्रतिरक्षी (antibodies) बनाकर शरीर की रक्षा करती है।

पैराथाइरॉइड ग्रन्थि (Parathyroid Gland):
पैराथाइॉॉडड प्रन्थि मटर के दाने के बराबर चार छोटी एवं गोल रचनाएँ हैं। ये थाइॉइड प्रन्थि की पृष्ठ सतह में धँसी रहती हैं। मनुष्य में प्रत्येक प्रन्थि 6-7 मिमी लम्बी एवं 3-4 मिमी चौड़ी होती है। इसका भार 0.01 से 0.03 प्राम तक होता है। पैराथाइॉॉडड ग्रन्थि से दो हॉमोंन स्नावित होते हैं –
(1) पैराथॉमोन (Parathormone) – इसे कॉलिप हॉमोंन (Colip’s hormone) भी कहते हैं। इसके निम्नलिखित कार्य हैं-
(a) फॉस्फेट के उत्सर्जन में वृद्धि करता है।
(b) आन्त्र द्वारा कैल्सियम के अवशोषण तथा वृक्क द्वारा इसके पुनरावशोषण में वृद्धि करता है।
(c) यह अस्थियों की वृद्धि तथा दाँतों के निर्माण का नियमन करता है।
(d) नई अस्थियों के अनावश्यक भागों को विघटित करता है।
(e) पेशियों को क्रियाशील रखता है।

(I) रुधिर में कैल्सियम तथा फॉस्फेट आयनों की मात्रा का नियमन करके शरीर के अन्तःवातावरण में होमियोस्टेसिस को बनाये रखता है।
(2) कैल्सिटोनिन होंमोंन (Calcitonin Hormone) – यह पैराथॉमोंन के विपरीत कार्य करता है। यह अस्थियों के विघटन को कम करता है।
पैराथॉम्रोन की कमी से हाइपोपैराथाइरिडिज्म (Hypopara-thyroidism), टिटेनी (Tetany), हाइपोकैल्सीमिया (Hypocalcemia) तथा गुर्दें में पथरी Kidney stones) बनने लगती है। आन्त्र एवं आमाशय में रुधिर स्राव की आशंका रहती है।

(C) पीनियल काय (Pineal Body)
यह प्रन्थि अप्र मस्तिष्क में डायनसिफेलॉन (diencephalon) के मध्य पृष्ठ तल पर स्थित होती है। इसे एपीफाइसिस सेरीबाई (epiphysis ceribri) भी कहते हैं।
यह एक छोटी, सफेद व चपटी रचना होती है और एक खोखले वृन्त पर स्थित रहती है। इसका भार 150 मिलीग्राम होता है। यह उत्तक पिण्डों में बँटी होती है। इसकी उत्पत्ति न्यूरल एक्टोडर्म से होती है। इसमें दो प्रकार की कोशिकाएँ होती है –
(i) पीनिपलोसाइटस तथा
(ii) न्यूरोग्लियल कोशिकाएँ।
इस ग्रन्थि के द्वारा स्वावित हॉर्मोन को मिलैटोनिन हॉमोंन (melatonin hormone) कहते हैं।

मिलैटोनिन हॉमोंन के कार्य-इस हॉर्मोन के कार्य अग्रलिखित हैं –

  • निम्नकोटि के कशेरुकियों में इसके प्रभाव से त्वचा का रंग हल्का हो जाता है।
  • स्तनियों में जननांग के विकास एवं उनके कार्यों का अवरोधन करता है।
  • यह प्रन्थि लैंगिक आचरण को प्रकाश की विभिन्नताओं के अनुसार नियन्त्रित करके एक ‘जैविक घड़ी’ का कार्य करती है।
  • जन्म से अन्धे बच्चों में प्रकाश प्रेरणा के अभाव में मिलैटोनिन का यथोचित स्रावण न होने से यौवनावस्था शीघ ही आ जाती है।

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(D) अग्याशय ग्रन्थि (Pancreas)
अग्याशय मुख्यतः एक पाचक मन्थि (digestive gland) है जो भोजन के पाचन के लिए अग्याशयी रस स्रावित करती है। इसकी लम्बाई लगभग 15 सेमी तथा वजन लगभग 8.5 ग्राम होता है। यह अन्त सावी (endocrine) तथा बहिख्रावी (exocrine) प्रन्थि (मिश्रित ग्नि्थि) का कार्य करती है। इस मन्थि की पालियों में उपस्थित संयोजी ऊतक में अन्त:्रावी कोशिकाओं के समूह पाये जाते हैं जिन्हें लैंगरहैन्स की द्वीपिकाएँ (Islets of Langerhans) कहते हैं। इनमें तीन प्रकार की अन्तःावी कोशिकाएँ (endocrine cells) होती हैं –

(1) बीटा कोशिकाएँ (Beta beta or cells) – ये कोशिकाएँ आकार में बड़ी व संख्या में सर्वाधिक होती हैं। इनके द्वारा इन्सुलिन हॉर्मोंन का सावण किया जाता है। रुधर में ग्लूकोज का सामान्य स्तर बनाये रखता है तथा आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज को यकृत एवं पेशियों में ग्लाइकोजन में बदलने की क्रिया को प्रेरित करता है।

(2) अल्का कोशिकाएँ (Alpha or (alpha) cells) – ये कोशिकाएँ मध्यम आकार की एवं संख्या में लगभग 25% होती हैं। इन कोंशिकाओं द्वारा ग्लूकागॉन (glucagon) हॉर्मोन का स्ताव होता है जो ग्लाइकोजन (glycogen) को ग्लूकोज (glucose) में परिवर्तित करता है। यह वसा अम्लों एवं अमीनो अम्लों से ग्लूकोनियोजेनेसिस (gluconeogensesis) क्रिया द्वारा ग्लूकोज के संश्लेषण को प्रेरित करता है।
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(3) डेल्टा कोशिकाएँ (Delta or delta-cells) – ये संख्या में सबसे कम या छोटी कोशिकाएँ होती हैं, जो सोमेटोस्टेटिन (somatostatin) का स्राव करती हैं। यह इन्सुलिन (insulin) तथा ग्लूकागॉन (glucagon) की क्रिया में अवरोध उत्पन्न करता है तथा पचे हुए भोजन के स्वांगीकरण की अवधि को बढ़ाता है। अन्याशयी प्रन्यि द्वारा स्रावित ह्वार्मोन्स एवं उनके कार्य- लैंगरहैन्स की द्वीपिकाओं में तीन प्रकार की अन्त.्रावी कोशिकाएँ पायी जाती हैं-बीटा कोशिकाएँ beta-cells), अल्फा कोशिकाएँ alpha-cells तथा डेल्टा कोशिकाएँ (delta-cells) इनके द्वारा क्रमशः इन्सुलिन (Insulin), ग्लूकागॉन (Glucagon) तथा सोमेटोस्टेटिन (Somatostain) हॉमोंन्स का स्राव किया जाता है। इनके कार्य हैं –

I. इन्सुलिन के कार्य (Functions of Insulin) –

  • कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) के पाचन से बने ग्लूकोज (Glucose) को ग्लाइकोजन (glycogen) में बदल देता है और यकृत (liver) एवं पेशियों (muscles) में संगृहीत करता है।
  • ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ऊर्जा विमुक्त होती है।
  • रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा निश्चित बनाये रखता है।
  • कोशिकाओं की आधारी उपापचयी दर (Basal Metabolic Rate : BMR) को प्रभावित करता है।
  • वसा ऊतकों में वसा संश्लेषण अर्थात् लाइपोजेनेसिस (lipogenesis) को प्रभावित करता है।

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इन्सुलिन की अनियमितता से उत्पन्न रोग –
(क) अल्पस्तावण (Hypoinsulinism) का प्रभाव मधुमेह या डाइबिटीज (Diabetes) रोग-यह रोग इन्सुलिन हॉर्मोन के अल्प या न्यून स्रावण के कारण उत्पन्न होता है। इन्सुलिन के अल्पस्रावण के कारण शरीर की कोशिकाएँ रुधिर से ग्लूकोज को नहीं ले पाती हैं। इससे रुधिर में ग्लूकोज की मात्रा में वृद्धि हो जाती है। अधिक वृद्धि हो जाने पर ग्लूकोज मूत्र में उत्सर्जित होने लगता है। अन्त में जब रुधिर और मूत्र में ग्लूकोज की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है तो मधुमेह का रोग हो जाता है। $4 \%$ मनुष्यों में यह रोग आनुवंशिक होता है।

इस रोग में बहुमूत्रता के कारण शरीर में निर्जलीकरण एवं प्यास की शिकायतें हो जाती हैं। शरीर की कोशिकाएँ रुधिर से ग्लूकोज ग्रहण न कर पाने के कारण ऊर्जा उत्पादन हेतु अपनी प्रोटीन्स का विखण्डन करने लगती हैं। इससे शरीर कमजोर हो जाता है। वसा ऊतकों में वसा के अपूर्ण विखण्डन से कीटोन काय (Ketone bodies) बनने लगते हैं। ये मीठे, अम्लीय तथा विषाक्त होते हैं। धीरे-धीरे शरीर में इनकी मात्रा और अम्लीयता में वृद्धि हो जाने से रोगी बेहोश होने लगता है और शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। मधुमेह के रोगियों को इन्सुलिन के इंजेकशन देने से लाभ होता है।

(ख) अतिस्तावण (Hyperinsulinism) का प्रभाव:
हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) रोग-यह रोग इन्सुलिन के अधिक स्रावण के कारण उत्पन्न होता है। इन्सुलिन के अतिस्रावण के कारण शरीर-कोशिकाएँ रुधिर से अधिक मात्रा में ग्लूकोज लेने लगती हैं जिससे रुधिर में इसकी मात्रा कम होने लगती है। इसके कारण आवश्यक ऊर्जा प्राप्ति हेतु तन्त्रिका कोशिकाओं, नेत्रों की रेटिना व जननिक एपीथीलियम की कोशिकाओं की ग्लूकोज की आवश्यकता पूरी नहीं हो पाती है। अतः रोगी का दृष्टि ज्ञान एवं जनन क्षमता कम हो जाती है। मस्तिष्क की कोशिकाओं में अत्यधिक उत्तेजना से थकान, मूच्छा व ऐंठन अनुभव होती है और अन्त में मृत्यु हो जाती है। एप्रीनेक्रीन, वृद्धि हॉर्मोन, कॉर्टीसोल ग्लूकागॉन देने से इस रोग में लाभ होता है।

II. ग्लूकैगॉन के कार्य (Function of Glucagon) –
(1) यह यकृत (liver) में ऐमीनो अम्लों तथा वसा से ग्लूकोज के संश्लेषण अर्थात् ग्लूकोजीनोलाइसिस (Gluconeogenesis) को प्रेरित करता है।
(2) वसा ऊतक में वसा के विघटन अर्थात् लाइपोलाइसिस (lypolysis) को प्रेरित करता है।
(3) यकृत में ग्लूकोज को बनाने अर्थात् ग्लाइकोजीनोलाइसिस (glycogenolysis) को प्रेरित करता है।

III. सोमेटोस्टेटिन के कार्य (Functions of.Somatostatin) – यह हॉर्मोन पचे हुए भोजन के स्वांगीकरण की अवधि बढ़ाता है। इससे शरीर में भोजन की उपयोगिता अधिक समय तक रहती है।

प्रश्न 7.
हाइपोथैलेमस से स्वावित कीजिए।
उत्तर:
हाइपोथैलेमस (Hypothalamus):
हाइपोथैलेमस अममस्तिष्क पश्च के डाएनोसिफेलॉन की गुहा, डायोसील (diocoel) अर्थात तृतीय निलय का फर्श बनाता है। इसके श्वेत पदार्थ में धूसर पदार्थ के अनेक क्षेत्र बिखरे रहते हैं। इन्हें हाइपोथेलेमिक बेण्ड कहते हैं। इनके न्यूरॉन्स विशेष हॉर्मोन्स का संश्लेषण करते हैं। ये हॉर्मोन्स हाइपोथैलेमस से निकलकर रुधिर द्वारा एडिनोहाइपोफाइसिस में पहुँचकर पिट्टयूटरी ग्रन्थि की अप्रपालि को विभिन्न हॉमोन्स के स्रावण के लिए उद्दीपित करते हैं।

पिट्टयूटरी ग्रन्थि एक छोटे से वृन्त द्वारा हाइपोथेलेमस से निकले कीपनुमा इन्फन्डीबुलम से जुड़ी होती है। हाइपोथेलेमस की तंत्रिकास्रावी कोशिकाएँ अग्र पिट्टयुटरी को हाइपोथेलेमो हाइपोफाइसियल निवाहिका शिराओं के रुधिर द्वारा अपने हॉर्मोन्स पहुँचाती हैं और उसकी अंतःस्रावी कोशिकाओं से हॉर्मोन्स के स्राव को नियन्त्रित करती हैं।

हाइपोथेलेमस तन्त्रिका कोशकाओं के एक्सॉन्स द्वारा पश्च पिट्टयूटरी से सम्बन्धित होता है। हाइपोथेलेमस एवं पिट्यूटरी ग्रन्थि के घनिष्ठ सम्बन्ध से तंत्रिका एवं अन्तःस्रावी तन्त्रों के बीच समाकलन (integration) का पता चलता है। इस प्रकार पिट्टयूटरी ग्रन्थि के माध्यम से हाइपोथेलेमस शरीर की अधिकांश क्रियाओं का नियमन करता है। हॉर्मोन्स – हाइपोथैलेमस की तन्त्रिका स्रावी कोशिकाओं (neurosecretary cells) से लगभग 10 तन्त्रिका – हॉर्मोन्स (neurohormones) का स्त्राव होता है, जो पीयूष ग्रन्थि की अप्र व पश्चपालियों से हॉर्मोन्स के स्त्राव का नियमन करते हैं।

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ये न्यूरोहॉर्मोन्स दो प्रकार के होते हैं –
(I) मोचक हॉर्मोन्स (Releasing Hormones) – ये हॉर्मोन्स पीयूष ग्रन्थि से हॉर्मोन्स के स्त्राव या मोचन को उद्दीपित करते हैं। ये निम्नलिखित होते हैं –

  • थाइरोट्रॉपिन मोचन कारक या थाइरोट्रॉपिन मोचक हॉर्मोन्स (Thyrotropin Releasing Factor : TRF)
  • एड्रीनोकॉर्टिकोट्रॉपिन मोचक हॉर्मोन (Adrenocorticotropin Releasing Hormone : ACTRH)
  • ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन मोचक हॉर्मोन (Luteinizing Hormone Releasing Hormone LHRH)
  • फॉलिकल उद्दीपन हॉर्मोन मोचक हॉर्मोन (Follicle stimulating Hormone Releasing Hormone : FSHRH)
  • वृद्धि हॉर्मोन या सोमेटोट्रॉपिन मोचक हॉर्मोन (Growth Hormone or Somatotropin Releasing Horemone)
  • प्रोलेक्टिन मोचक हॉर्मोन (Prolactin Releasing Hormone : PRH)
  • मिलेनोसाइट उद्दीपन हॉर्मोन मोचक हॉर्मोन (Melanocyte stimulating Hormone Releasing Hormone : MSHRH)

(II) निरोधी हॉर्मोन्स (Inhibiting Hormones : IH) – ये हॉर्मोन्स पीयूष ग्रन्थि से कुछ हॉर्मोन्स के स्राव को रोकते हैं। ये निम्नलिखित होते हैं-
(1) वृद्धि हॉर्मोन्स निरोधी हॉर्मोन (Growth Hormone Release Inhibiting Hormone : GHR-IH)
(2) प्रोलेक्टिन मोचन -निरोधी हॉर्मोन (Prolactin Release – Inhibiting Hormone : PR-IH)
(2) प्रोलेक्टिन मोचन -निरोधी हॉर्मोन (Prolactin Release-Inhib )
(3) मिलेनोसाइट उद्दीपन हॉर्मोन – मोचन निरोधी हॉर्मोन (Melanocyte stimulating Hormone-Release Inhibiting Hormone : MSH-RIH) पिट्ट्यूटरी ग्रन्थि की पश्च पालि से स्रावित हॉर्मोन्स वास्तव में हाइपोथेलेमस के न्यूरॉन्स में संश्लेषित होते हैं एवं इनके एक्सॉन सिरों एवं पश्च पालि में संग्रहीत हो जाते हैं तथा आवश्यकतानुसार मोचित होते हैं। हाइपोथैलेमिक-पिट्ट्यूटरी तन्त्र समस्थापन के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होता है, क्योंकि शरीर में यह अधिकांश शरीर क्रियात्मक क्रियाओं का नियममन करता है। यह अन्तःस्रावी तन्त्र तथा तन्त्रिका तन्त्र के निकटवर्ती सम्बन्धों को भी इंगित करता है।

प्रश्न 8.
वृद्धि हार्मोन (GH) के अल्पखावण व अतिस्रावण के प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
पीयूष (Pituitary Gland/Hypophysis)
पीयूष ग्रन्थि एक जटिल प्रन्थि होती है। यह अप्रमस्तिष्क के पश्च भाग – डाइएनसेफेलॉन (diencephalon) की आधारभित्ति हाइपोथैलेमस (hypothalamus) से एक छोटे से वृन्त इन्फण्डीबुलम (infundibulum) द्वारा जुड़ी रहती है। पीयूष ग्रन्थि को हाइपोफाइसिस सेरीब्राइ (hypophysis cerebri) भी कहते हैं। इसका आकार मटर के दाने के बराबर होता है। इसका भार 5 -6 ग्राम होता है। स्यियों में यह कुछ अधिक बड़ी होती है तथा गर्भावस्था में इसका आकार बढ़ जाता है। रचना तथा कार्य की दृष्टि से यह दो भागों में बँटी होती है –

(1) एडीनोहाइपोफाइसिस (Aden- ohypophysis) – यह पीयूष प्रन्थि का अगला गुलाबी भाग है जो कुल प्रन्थि का $75 \%$ है। यह भ्रूण की प्रसनी (pharynx) से राथके कोष्ठ (Rathke pouch) के रूप में एक्टोडर्म से विकसित होता है। इसे पीयूष यन्थि का अप्रपिण्ड या अप्र पालि भी कहते हैं।

यह स्वयं तीन भागों से मिलकर बना होता है –
(a) इन्फण्डीबुलर वृन्त से लिपटी समीपस्थ पालि (pars infundibularis or tuberalis)
(b) बड़ी फूली हुई गुलाबी-सी दूरस्थ पालि (pars distalis)
(c) संकरी पट्टीनुमा मध्य पालि (pars intermedia or intermediate lobe)।

(2) न्यूरोहाइपोफाइसिस (Neurohypophysis) – यह हाइपोथैलेमस के इन्फण्डीबुलम से विकसित होता है। इसे पश्चपालि (posterior lobe) या तन्त्रिकीय पिण्ड (pars nervosa) भी कहते हैं। यह पीयूष प्रन्थि का एक-चौथाई भाग बनाता है। एडीनोहाइपोफाइसिस द्वारा स्तावित हॉमोन्स (Hormones of Adenohypophysis)
(1) सोमेटोटोंपिक हॉर्मोन अथवा वृद्धि हॉमोंन (Somatotropic Hormone or Growth Hormone)-यह शरीर की वृद्धि को प्रभावित करता है।
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यह ऊतकों के क्षय को रोकता है, कोशिका के विभाजन, हुुद्यों व पेशियों के विकास तथा संयोजी ऊतक की वृद्धि को प्रोत्साहित करता है। यकृत में ऐमीनो अम्लों से ग्लूकोज तथा ग्लूकोज से ग्लाइकोजन के संश्लेषण को बढ़ाता है। वसा के विघटन को प्रेरित करता है। इसकी कमी से व्यक्ति बौना रह जाता है तथा अधिकता से भीमकायता (acromegaly) हो जाता है।
कार्य –

  • शारीरिक वृद्धि के नियमन करता है।
  • कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा के उपापचय का नियमन करता है।
  • अग्याशय से इन्सुलिन व ग्लूकेगॉन हार्मोन का स्रावण उद्दीपित करता है।
  • यह यूरिया उत्सर्जन व मूत्र निष्कासन में वृद्धि करता है।
  • स्तनियों में दुग्ध स्तावण को उद्दीपित करता है ।
  • कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
  • ग्लूकोनियोजिनोसिस तथा ग्लाइकोजिनेसिस को प्रेरित करता है।

(2) गोनेडोट्रॉपिक हॉमॉन्स (Gonadotropic Hormones: GTH) – यह हॉर्मोन नर तथा मादा में क्रमशः वृषण तथा अण्डाशय को उत्तेजित करता है। ये हॉर्मोन जनन ग्रन्थियों तथा अन्य सहायक जननांगों की सक्रियता के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

(अ) पुटिका प्रेरक हॉर्मोन (Follicle Stimulating Hormone : FSH) – पुरुषों में यह शुक्रजनन नलिकाओं (seminiferous tubules) तथा शुक्राणु निर्माण (sperm formation) प्रेरित करता है तथा स्तियों में अण्डाशयी पुटिकाओं की वृद्धि एवं एस्ट्रोजन (estrogens) के स्रावण को प्रेरित करता है।

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(ब) ल्युटिनाइजिंग होंमोन अथवा अन्नराली कोशिका प्रेरक होंमोन (Lutenizing Hormone : LH, or Interstitial Cell Stimulating Hormone : ICSH)-स्तियों में यह कॉर्पस ल्यूटिनम (corpus leutium) कोशिकाओं को प्रोजेस्टेरॉन (Progesteron) हॉर्मोन के स्राव को प्रेरित करता है तथा पुरुषों में एण्ड्रोजन्स के त्राव को प्रेरित करता है।

(3) थाइरॉइड उतेजक हॉर्मोन (Thyroid Stimulating Hormone : TSH) – यह एक ग्लाइकोप्रोटीन (Glycoprotein) हॉर्मोन है जो थाइॉइड ग्रन्थि की वृद्धि एवं स्रावण क्रिया को उत्तेजित करता है।
(4) ऐड़िनोकोर्टिकोट्रोंपिक होंरोंन (Adrenocorticotropic Hormone : ACTH) – यह एड्रीनल यन्थि (adrenal gland) के वल्कुट भाग (cortex) को हॉमोंन स्रावण के लिए प्रेरित करता है।
कार्य –

  • यह एड्रीनल प्रन्थि के कारेंक्स भाग से स्रावित हॉर्मोन के उत्पादन व स्रावण को उत्रेरित करता है।
  • वसा अपषटनीय एन्जाइमों को सक्रिय करता है।
  • मेलेनिन के संश्लेषण को उत्रेरित करता है।

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(5) लैक्टोजेनिक या प्रौलैक्टिन अथवा मैमोट्रोंपिक होंरोंन (Lactogenic Hormone : LTH)-यह हॉर्मोन स्रियों में गर्भावस्था के समय अधिक मात्रा में स्रावित होकर स्तनों की वृद्धि को प्रेरित करता है। शिशु जन्म के बाद दुग्ध स्राव को प्रेरित करता है।

(6) मिलैनोसाइट प्रेरक होंमोन (Melanocyte Stimulating Hormone : MSH ) – यह मध्यपिण्ड द्वारा स्रावित हॉमोंन है जो त्वचा की वर्णकता का नियमन करता है। मानव में यह तिल बनने तथा चकते बनने को प्रेरित करता है। न्यूरोहाइपोफाइसिस द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स (Hormones of Neurohypophysis)

(1) वेसाप्रेसिन या पिट्रोसिन या एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (Vasopressin or Pitrossin or Antidiuretic Hormone- ADH) – यह वृक्क नलिकाओं के दूरस्थ भागों एवं संप्रह नलिकाओं से जल के पुनरावशोषण को बढ़ाता है जिससे मूत्र की मात्रा कम हो जाती है। अतः इसे मूत्ररोधी या प्रतिमून्रल होंमोंन भी कहते हैं। यह शरीर के कुछ भागों की रुधिर वाहिनियों को सिकोड़कर रुधिर दाब को बढ़ाता है।

(2) ऑक्सीटोसिन (Oxytocin-OT) या पिटोसिन (Pitocin) – यह हॉर्मोन स्तियों में प्रसव पीड़ा उत्पन्न करके शिशु जन्म को आसान बनाता है। शिशु जन्म के बाद गर्भाशय को सामान्य अवस्था में लाता है। स्तनों में दुग्ध स्राव को प्रेरित करता है। यह गर्भाधान क्रिया को सुगम बनाता है।
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वृद्धि हॉर्मान GH के अति स्रावण से होने वाले रोग पीयूष प्रन्थि (Pituitary gland) के वृद्धि हॉमोंन (growth hormones) के अतिस्नाव (hypersecretion) से निम्नलिखित रोग हो जाते हैं –
(1) अतिवृद्धि (Gigantism)-बाल्यकाल में वृद्धि हॉर्मोन की अधिकता से बहुत लम्बे तथा छष्टपुष्ट भीमकाय (giant) व्यक्तियों का विकास होता है। इन्हें पिट्यूटरी जायण्ट (pituitary giants) कहते हैं।
(2) अप्रातिकायता (Acromegaly) – वृद्धिकाल के बाद वृद्धि हॉमोंन की अधिकता से गोरिल्ला के समान कुरूप भीमकाय व्यक्ति बनते हैं। क्योंकि हहुुुयों की लम्बाई में वृद्धि सम्भव नहीं होती तो शरीर लम्बाई में नहीं बढ़ पाता है, अत: हाथ, पाँव, चेहरे के कुछ भाग जबड़े आदि अधिक लम्बे हो जाते हैं। हरुदुयाँ मोटाई में बढ़ती हैं जिससे चेहरा व शरीर भद्दा हो जाता है। इस अवस्था को एक्रोमेगैली (acromegaly) कहते हैं।
(3) काइफोसिस (Kyphosis) – कभी-कभी कशेरुक दण्ड के झुक जाने से व्यक्ति कुबड़ा हो जाता है।

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वृद्धि हॉर्मोंन GH के अल्पस्वावण से होने वाले रोग –
1. बाल्यकाल में STH या GH के अल्प स्रावण से व्यक्ति बौना रह जाता है। इस प्रकार के व्यक्ति नपुसक या बाँझ (sterile) होते हैं। पिट्टयूटरी से होने वाले बौनेपन को एटिओलिसिस (ateolisis) तथा ऐसे व्यक्तियों को मिगेद्स्स (midgets) कहते हैं। सरकस में काम करने वाले बौने मिगेद्स होते हैं। साइमण्ड रोग (Simonds’ Disease) – यह रोग वृद्धिकाल के बाद STH की कमी के कारण होता है। इसके कारण शरीर से ऊतक क्षतिग्रस्त होने लगते हैं, जिससे व्यक्ति दुर्बल हो जाता है।
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प्रश्न 9.
वृषण एवं अण्डाशय से स्त्रावित हॉर्मोन्स का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वृषण (Testes):
स्तनधारियों में वृषण, उदर गुहा के बाहर स्क्रोटल कोषों (scrotal sacs) में स्थित होते हैं क्योंकि शुक्राणु जनन के लिए कम ताप की आवश्यकता होती है। वृषण की शुक्र जनन नलिकाओं के बीच के स्थान में भरे संयोजी ऊत्तक में अन्तराली कोशिकाएँ या लेडिग कोशिकाएँ (interstitial cells or Leydig cells) होती हैं। ये कोशिकाएँ नर हार्मोन्स बनाती हैं जिन्हें एड्ड्रोजन्स (Androgens) कहते हैं।

एन्ड्रोजन्स (Androgens) – ये मुख्य रूप से टेस्टोस्टीरॉन (testosteron) तथा एण्ड्रोस्टीरोन (Androsteron) हैं। ये स्टीरॉइड हामोंन हैं और वसा में घुलनशील हैं। ये नर में गौण लैंगि लक्षणों (secondary sexual characters) के लिए उत्तरदायी होते हैं। यह हार्मोन पौरुष विकास हार्मोन (masculiniqation hormone) कहलाते हैं। इस हाम्मोन का नियन्त्रण पीयूष य्यन्थि के LH व ICSH द्वारा होता है।

कार्य –
(i) ये स्क्रोटल कोष, एपीडिडाइमिस, शुक्रवाहनियों, शुक्राशयों तथा सहायक जनन ग्रन्थियों के विकास को प्रेरित करते हैं।
(ii) इनके प्रभाव से गौंण लैंगिक लक्षणों जैसे-दाढ़ी-मूँछ, भारी आवाज, सुदृढ़ अस्थियों एवं पेशियों का विकास, शरीर पर बालों का उगना, आक्रामक रवैया, उत्साह, मैथुन इच्छा के विकास को प्रेरित करता है।
(iii) शुक्राणु जनन (spermatogenesis) की प्रक्रिया को पूरा करने में सहायक हैं। बधियाकरण या आकीडिक्टोमी (Castration or Archidectomy) यह वृषणों को काटकर हटा देने की क्रिया है। यौवनारम्भ से पूर्व बधिया कर कर देने से अतिरिक्त लैंगिक लक्षणों का विकास नहीं होता है और व्यक्ति नपुंसक या हिजड़ा (eunch) हो जाता है। इससे आक्रमणशीलता कम हो जाती है तथा ये मृदु स्वभाव के हो जाते हैं। बधिया घोड़े गेर्डिंग (Gelding), बधिया मुर्गे केपॉन (Capon) तथा बधिया बैल स्टीयर (Steer) कहलाते हैं।

अण्डाशय (Ovary):
स्तनधारियों की उदर गुहा में एक जोड़ी अण्डाशय (ovaries), गर्भाशय (uterus), के दोनों ओर एक-एक स्थित होते हैं। ये मीसेन्ट्री द्वारा गर्भाशय की दीवार से जुड़े होते हैं। बाल्यावस्था में बालिकाओं के अण्डाशयों से हार्मोन स्वावित नहीं होते हैं। किशोरावस्था में (11-13 वर्ष की आयु में) अण्डाशय सक्रिय हो जाता है। अब इससे विभिन्न हार्मोन्स का स्राव होता है।
स्तियों के अण्डाशय से तीन प्रकार के हॉर्मोन्स स्वावित होते हैं –

(1) एस्ट्रोजन (Estrogen) – यह अण्डाशय की ग्रैफियन पुटिकाओं की थीका इण्टरना कोशिकाओं से यौवनावस्था से लेकर रजोनिवृत्ति की आयु (लगभग 48 वर्ष) तक स्नावित होता है। यह सभी सहायक जननांगों एवं द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास को प्रेरित करता है। स्तियों में रजोधर्म इसी के प्रभाव से प्रारम्भ होता है। इसे नारी विकास ‘हॉर्मों’ भी कहते हैं। इस हॉर्मोन का नियन्त्रण पीयूष प्रन्थि के दो हॉम्मोन्स FSH तथा LH द्वारा होता है।

(2) प्रोजेस्टेरॉन (Progesterone) – यह अण्डाशय की प्रैफियन पुटिका कोशिकाओं (grafian follicle cells) से अण्डोत्सर्ग के बाद बनी पीले रंग के पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) नामक प्रन्थियों से स्वावित होता है। यह स्तियों में मासिक-चक्र का नियमन करके गर्भाधान के लिए आवश्यक दशाओं के विकास को प्रेरित करता है। गर्भधारण के समय होने वाले परिवर्तन का नियन्त्रण इसी हॉमोन द्वारा किया जाता है। इसके प्रभाव से गर्भकाल में स्तन अधिक विकसित हो जाते हैं और दुग्-ग्रन्थियाँ सक्रिय होकर बड़ी हो जाती हैं। प्रोजेस्टेरॉन का स्रावण पीयूष प्रन्थि के हॉर्मोन LH द्वारा नियन्त्रित होता है।

(3) रिलैक्सिन (Relaxin)-इस हॉमोंन का स्रावण भी पीत पिण्ड (कॉर्पस ल्यूटियम) द्वारा गर्भावस्था की समाप्ति पर शिशु-जन्म के समय होता है। यह हॉर्मोन शिशु-जन्म के समय जघन सन्धान (Pubic symphysis) नामक जोड़ व इससे सम्बन्धित पेशियों का शिथिलन करके शिशु-जन्म को सुगम बनाता है।

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प्रश्न 10.
हार्मोन्स की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर:
हार्मोन्स की क्रिया-विधि (Mechanism of Hormone):
हॉमोन्स अति सूक्ष्म मात्रा में स्रावित किये जाते हैं, इनकी अतिसूक्ष्म मात्रा भी कोशिकाओं की क्रियाशीलता को प्रभावित करती है। एक ही हॉर्मोन की लक्ष्य कोशिकाएँ कई प्रकार की हो सकती हैं। हॉर्मोन्स कोशिकाओं की सक्रियता बढ़ाने का कार्य निम्नलिखित तीन विधियों से करते हैं –
(1) जीन स्तर पर प्रोटीन संश्लेषण को प्रभावित करके।
(2) द्वितीयक सन्देशवाहक के माध्यम से कोशिका की कार्यिकी को प्रभावित करके।
(3) कोशिका कला की पारगम्यता बदलकर कोशिका की कार्यिकी को प्रभावित करके।
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(1) जीनस्तर पर उपापचयी परिवर्तन (Change of Metabolism at gene level) – स्टेरॉइड हॉर्मोन्स तथा थाइरॉइड प्रन्थि के हॉर्मोन्स लिपिड में घुलनशील होते हैं। ये लक्ष्य कोशिकाओं की कोशिका कला से पारित होकर कोशिकाद्रव्य में पहुँच जाते हैं। जहाँ ये ग्राही प्रोटीन के अणु से मिलकर हॉर्मोन + ग्राही प्रोटीन
संकर का निर्माण करते हैं। यह संकर केन्द्रक में पहुँचकर सुप्त जीन्स को सक्रिय कर देते हैं। इससे बने m-RNA अणु कोशिका में विशिष्ट प्रोटीन्स का संश्लेषण प्रारम्भ करके कोशिका के उपापचय को प्रभावित करते हैं।

(2) द्वितीय सन्देशवाहक के माध्यम से कोशिकीय उपापचयी परिवर्तन (Changes in cells matabolism through Second messenger) – कुछ हॉमोंन्स के अणु बड़े होते हैं, ये लक्ष्य कोशिका की कोशिका कला को पार नहीं कर पाते हैं। अतः इन हॉर्मोन्स के लिए लक्ष्य कोशिका की कोशिका कला पर प्राही प्रोटीन स्थित होती है। हॉर्मोन तथा प्राही प्रोटीन संकर बनते ही G-प्रोटीन सक्रिय हो जाती है।
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यह ऐडेनिलेट साइक्लेस (Adenylate cyclase) के एक अणु को उद्दीपित करता है। यह कोशिकाद्रव्य में उपस्थित ऐडीनोसीन ट्राइ फॉस्फेट (Adenosin tri phosphate : ATP) के जलीय अपघटन को प्रेरित करता है जिससे साइक्लिक एडीनोसिन मोनो फॉस्पेट (Cyclic Adenosin Monophosphate : cAMP) के कई अणु बनते हैं जो प्रोटीन काइनेस एन्जाइम (Protein kinase enzyme) को सक्रिय करते हैं। जिससे कोशिका का एन्जाइम तन्त सक्रिय हो जाता है तथा कोशिका की उपापचयी क्रियाओं को उत्रेरित करता है। उपर्युक्त क्रिया में cAMP एक मध्यस्थ दूत या द्वितीय दूत (Second messenger) की भाँति कार्य करता है।

(3) कोशिकाकला की पारगम्यता को बदलने में उपापचयी परिवर्वन (Change in Metabolism by changing Membrane Permeability) – कुछ हॉर्मोन्स कोशिका कला की पारगम्यता को प्रभावित करते हैं। इन हॉमोंन्स के प्राही प्रोटीन्स भी लक्ष कोशिकाओं की कोशिका कला में पाये जाते हैं। ये गाही प्रोटीन्स भी कोशिका कला के आर-पार दोनों सतहों पर निकले रहते हैं। सोडियम, पोटैशियम, कैल्सियम आदि के आयनों का आवागमन भी इन्हीं प्रोटीन्स के द्वारा होता है। हॉमोंस्स इन प्रोटीन्स के साथ संयोग करके इन आयनों के आवागमन को रोक देते हैं जिससे कोशिका कला की पारगम्यता बदल जाती है। पारगम्यता बदलने से कोशिका की उपापचय प्रक्रिया में भी परिवर्तन आ जाता है।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Haryana Board

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन Textbook Exercise Questions and Answers.

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प्रश्न 2.1.
विलयन को परिभाषित कीजिए। कितने प्रकार के विभिन्न विलयन संभव हैं? प्रत्येक प्रकार के विलयन के संबंध में एक उदाहरण देकर संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
विलयन (Solution) – दो या दो से अधिक पदार्थों (अवयवों) का समांगी मिश्रण विलयन कहलाता है।
समांगी मिश्रण का अर्थ है कि मिश्रण के सभी भागों का संघटन (composition) तथा गुण समान हैं। विलायक की भौतिक अवस्था के आधार पर विलयन मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं-
(1) गैसीय विलयन
(2) द्रव विलयन
(3) ठोस विलयन |
इन्हें पुनः वर्गीकृत किया जा सकता है जो कि विलेय की भौतिक अवस्था के आधार पर होता है। अतः विलयन वास्तव में 9 प्रकार के होते हैं, जो निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 1

प्रश्न 2.2.
एक ऐसे ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए जिसमें विलेय कोई गैस हो ।
उत्तर:
हाइड्रोजन का पैलेडियम में विलयन ।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.3.
निम्न पदों को परिभाषित कीजिए-
(i) मोल – अंश
(ii) मोललता
(iii) मोलरता
(iv) द्रव्यमान प्रतिशत ।
उत्तर:
(i) मोल अंश (Mole fraction ) (x) – एक मिश्रण में उपस्थित किसी अवयव का मोल अंश उस अवयव के मोल तथा मिश्रण में उपस्थित सभी अवयवों के कुल मोलों का अनुपात होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 2

(ii) मोललता (Molality) (m) – 1000 g (1 kg) विलायक में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोललता कहते हैं।
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(iii) मोलरता (Molarity) (M) – एक लीटर (1 क्यूबिक डेसीमीटर) विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता कहते हैं।

(iv) द्रव्यमान प्रतिशत ( Mass Percentage ) – किसी विलेय के भार भागों की वह संख्या जो विलयन के 100 भार भागों में उपस्थित होती है, उसे द्रव्यमान प्रतिशत कहते हैं।
विलयन में किसी अवयव का द्रव्यमान %

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प्रश्न 2.4.
प्रयोगशाला कार्य के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला सांद्र नाइट्रिक अम्ल द्रव्यमान की दृष्टि से नाइट्रिक अम्ल का 68% जलीय विलयन है। यदि इस विलयन का घनत्व 1.504 gmL-1 हो तो अम्ल के इस नमूने की मोलरता क्या होगी ?
उत्तर:
68% (द्रव्यमान) HNO3 का अर्थ है 68g HNO3, 100 g विलयन में उपस्थित है।
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विलेय ( HNO3) का भार = 68g HNO3, विलेय का मोलर द्रव्यमान = 1 + 14 + 48 = 63
विलयन का आयतन = 66.49 ml
∴ M = \(\frac{68 \times 1000}{63 \times 66.49}\)
M = 16.23
अतः HNO3 के इस नमूने की मोलरता = 16.23 M इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा भी ज्ञात किया जा सकता है-
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प्रश्न 2.5.
ग्लूकोस का एक जलीय विलयन 10% (w/w) है । विलयन की मोललता तथा विलयन में प्रत्येक घटक का मोल- अंश क्या है? यदि विलयन का घनत्व 1.2 gmL-1 हो तो विलयन की मोलरता क्या होगी ?
उत्तर:
10% (w/ w) ग्लूकोस विलयन का अर्थ है कि 10g ग्लूकोस 100g विलयन में उपस्थित है जिसमें 90 ग्राम जल है।
(1) अतः विलयन की मोललता (m)
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m = \(\frac{10}{180 \times 90 \times 10^{-3}}\)
मोललता: = 0.617m
यहाँ ग्लूकोस का मोलर द्रव्यमान ( C6H12O6) = 180
विलायक की द्रव्यमान = 90g = 90 × 10-3 kg

(2) ग्लूकोस के मोल = 10/180
जल के मोल = \(\frac { 90 }{ 18 }\) = 5
अतः ग्लूकोस का मोल अंश = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 9
ग्लूकोस का मोल अंश = \(\frac { 0.055 }{ 5.055 }\) = 0.01
अतः जल का मोल अंश = 1 – 0.01 = 0.99
(3) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 10

प्रश्न 2.6.
यदि 1 g मिश्रण में Na2CO3 एवं NaHCO3 के मोलों की संख्या समान हो तो इस मिश्रण से पूर्णतः क्रिया करने के लिए 0.1 M HCl के कितने mL की आवश्यकता होगी ?
उत्तर:
माना 1 g मिश्रण में Na2CO3 का द्रव्यमान = x g
Na2CO3 का मोलर द्रव्यमान = (2 × 23 ) + 12 + (3 × 16 ) = 106
अतः Na2CO3 के मोल (n1) = \(\frac { x }{ 106 }\) mol
अतः मिश्रण में NaHCO3 का द्रव्यमान = (1 – x)g
NaHCO3 का मोलर द्रव्यमान = 23 + 1 + 12 + 48 = 84
अतः NaHCO3 के मोल (n2) = \(\frac{1-x}{84}\) mol
Na2CO3 तथा NaHCO3 की HCl से क्रिया के संतुलित समीकरण निम्नलिखित हैं-
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चूंकि दिए गए मिश्रण में Na2CO3 तथा NaHCO3 के मोलों की संख्या समान है अतः
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 16
Na2CO3 तथा NaHCO3 दोनों से क्रिया के लिए आवश्यक HCl के मोल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 17
यदि आवश्यक HCl का आयतन V है तो
मोलरता × आयतन (L) = मोल
0.1 × V(L) = 0.01578
V (लीटर) = 0.1578 L
अतः HCl का आवश्यक आयतन = 157.8mL

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प्रश्न 2.7.
द्रव्यमान की दृष्टि से 25% विलयन के 300g एवं 40% के 400g को आपस में मिलाने पर प्राप्त मिश्रण का द्रव्यमान प्रतिशत सांद्रण निकालिए ।
उत्तर:
25% (w/w), 300 g विलयन में विलेय का भार = (25 × 3) 75g
40% (w/w), 400g विलयन में विलेय का भार = (40 × 4) = 160 g
दोनों विलयनों को मिलाने पर विलेय का कुल भार = 75 + 160 = 235 g
तथा विलयन का कुल भार= 300 + 400 = 700 g
अतः मिश्रण में विलेय का द्रव्यमान
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प्रश्न 2.8.
222.6g एथिलीन ग्लाइकॉल, C2H4(OH)2 तथा 200g जल को मिलाकर प्रतिहिम मिश्रण बनाया गया । विलयन की मोललता की गणना कीजिए। यदि विलयन का घनत्व 1.072 g mL-1 हो तो विलयन की मोलरता निकालिए।
उत्तर:
(i) मोललता (m) =HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 19
एथिलीन ग्लाइकॉल (विलेय) का द्रव्यमान = 222.6 g
एथिलीन ग्लाइकॉल [C2H4(OH)2] का मोलर द्रव्यमान = 62
विलायक (जल) का द्रव्यमान = 200g = 0.2 kg
अतः m = \(\frac{222.6}{62 \times 0.2}\) = 17.95 mol Kg-1

(ii) विलयन की मोलरता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 11
विलयन का कुल द्रव्यमान = 200 + 222.6 = 422.6
विलयन का घनत्व = 1.072 g mL-1
अतः विलयन का आयतन (V) = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 12
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 20

प्रश्न 2.9.
एक पेय जल (drinking water) का नमूना क्लोरोफॉर्म (CHCl3) से, कैंसरजन्य समझे जाने की सीमा तक बहुत अधिक संदूषित (Contaminated) है। इसमें संदूषण की सीमा 15 ppm (द्रव्यमान में ) है –
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशत में व्यक्त कीजिए ।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
(i) 15 ppm CHCl3 का अर्थ है कि 106 भाग विलयन में 15 भाग CHCl3 है।
अतः विलेय का द्रव्यमान (भार) = 15 g
विलयन का द्रव्यमान = 106 g
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द्रव्यमान % = \(\frac{15 \times 100}{10^6}\) = 15 × 10-4 = 1.5 × 10-3%

(ii) विलायक का द्रव्यमान = विलयन का द्रव्यमान – विलेय का द्रव्यमान
= 106 – 15 = 999985g
= 9.99985 × 105
विलयन की मोललता (m)
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CHCl3 का मोलर द्रव्यमान = 12 + 1 + (3 × 35.5)
= 119.5 g mol-1
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m = 0.0125 × 10-2
m = 1.25 x 10-4
अतः जल के नमूने में CHCl3 की मोललता = 1.25 x 10-4 m

प्रश्न 2.10.
ऐल्कोहॉल एवं जल के एक विलयन में आण्विक अन्योन्य क्रिया (Molecular Interaction) की क्या भूमिका है?
उत्तर:
ऐल्कोहॉल एवं जल का विलयन धनात्मक विचलन दर्शाता है। क्योंकि ऐल्कोहॉल तथा जल दोनों में अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध होते हैं। लेकिन दोनों को मिलाने पर ऐल्कोहॉल तथा जल के मध्य बना हाइड्रोजन बन्ध, शुद्ध जल के हाइड्रोजन बन्ध की तुलना में दुर्बल होता है।
अतः इस विलयन के लिए △H(मिश्रण) = +ve तथा △V (मिश्रण) = +ve होंगे। अतः मिश्रण का वाष्प दाब अधिक होगा तथा क्वथनांक कम होगा। इसलिए यह राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन का उदाहरण है।

प्रश्न 2.11.
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में, हमेशा कमी आने की प्रवृत्ति क्यों होती है ?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता कम होती है क्योंकि घोले जाने पर गैसों के अणु द्रव प्रावस्था में विलीन होकर उसमें उपस्थित होते हैं अतः यह संघनन अभिक्रिया के समान है तथा इस प्रकिया में ऊष्मा उत्सर्जित (ऊष्माक्षेपी प्रक्रम) होती है। गैसों की द्रव में विलेयता गतिक साम्य है अतः ले – शातैलिए के नियम के अनुसार ताप बढ़ने पर विलेयता घटेगी अर्थात् साम्य पश्च दिशा में जाएगा।

प्रश्न 2.12.
हेनरी का नियम तथा इसके कुछ महत्वपूर्ण अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर:
हेनरी का नियम-
(i) स्थिर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता, उस गैस के दाब के समानुपाती होती है। किसी द्रवीय विलयन में गैस की विलेयता गैस के आंशिक द पर निर्भर करती है तथा विलयन में गैस की विलेयता को मोल अंश में व्यक्त किया जाता है।

(ii) किसी विलयन में गैस का मोल अंश, उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है ।

(iii) किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब (p), उस विलयन में गैस के मोल अंश (x) के समानुपाती होता है।
p = KHX जहाँ KH = हेनरी स्थिरांक
हेनरी के नियम के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग — इसके लिए पाठ्यपुस्तक का भाग संख्या 2.3.2 देखें।

प्रश्न 2.13.
6.56 × 10-3 g एथेन युक्त एक संतृप्त विलयन में एथेन का आंशिक दाब 1 bar है। यदि विलयन में 5.00 × 10-2 g एथेन हो तो गैस का आंशिक दाब क्या होगा ?
उत्तर:
हेनरी के नियम के अनुसार p = KH x
गैस का मोल अंश उसके द्रव्यमान (m) के समानुपाती होता है।
अतः m ∝ x
अतः हेनरी के नियम का वैकल्पिक रूप
m = KHP
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प्रश्न 2.14.
राउल्ट के नियम से धनात्मक एवं ऋणात्मक विचलन का क्या अर्थ है तथा △मिश्रण H के चिह्न इन विचलनों से कैसे सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
जब कोई विलयन सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन नहीं करता तो वह अनादर्श विलयन (Non Ideal Solution) कहलाता है। इन विलयनों का वाष्पदाब राउल्ट के नियम द्वारा परिकलित किए गए वाष्प दाब से या तो अधिक होता है या कम । यदि यह अधिक होता है तो राउल्ट नियम से धनात्मक विचलन प्रदर्शित करता है और यदि यह कम होता है तो ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करता है।
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प्रश्न 2.15.
विलायक के सामान्य क्वथनांक पर एक अवाष्पशील विलेय के 2% जलीय विलयन का 1.004 bar वाष्प है । विलेय का मोलर द्रव्यमान क्या है?
उत्तर:
शुद्ध जल का वाष्प दाब (p10) = 1.013 bar होता है।
विलयन का वाष्प दाब (p1) = 1.004 bar
विलेय का 2% जलीय विलयन है अतः
W2 = 2 gm तथा (W1+ W2) = 100g.
W1 = 98g
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प्रश्न 2.16.
हेप्टेन एवं ऑक्टेन एक आदर्श विलयन बनाते हैं। 373 K पर दोनों द्रव घटकों के वाष्प दाब क्रमश: 105.2 kPa तथा 46.8 kPa हैं। 26.0g हेप्टेन एवं 35.0g ऑक्टेन के मिश्रण का वाष्प दाब क्या होगा ?
उत्तर:
हेप्टेन (C7H16) का मोलर द्रव्यमान = (7 × 12) + 16 = 100
ऑक्टेन का मोलर द्रव्यमान ( C8H18 ) = (8 × 12 ) +18 = 114
हेप्टेन के मोल (n1) = \(\frac { 26 }{ 100 }\) = 0.26
ऑक्टेन के मोल (n2) = \(\frac { 35 }{ 114 }\) = 0.307
हेप्टेन की मोल भिन्न (x1) = \(\frac{0.26}{0.26+0.307}\)
x1 = \(\frac{0.26}{0.567}\) = 0.458

ऑक्टेन की मोल भिन्न (x2) = 1 – x1
= 1 – 458 = 0.542
विलयन में हेप्टेन का वाष्प दाब (P1) = P10x1
= 105.2 × 0.458 (P10 = 105.2k Pa) = 48.18 kPa

विलयन में ऑक्टेन का वाष्प दाब (P2) = P20x2
P2 = 46.8 × 0.542 = 25.36kPa (p) (P02 = 46.8k Pa)

मिश्रण का कुल वाष्प दाब (p) = P1 + P2
p = 48.18 + 25.36
p = 73.54 kPa

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.17.
300K पर जल का वाष्प दाब 12.3 kPa है। इसमें बने अवाष्पशील विलेय के एक मोलल विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
शुद्ध जल का वाष्प दाब p10 (H2O) = 12.3kPa
चूंकि 1 मोलल विलयन है अतः विलेय के मोल (n2) = 1 मोल
विलायक (H2O) के मोल (n1) = \(\frac { 1000 }{ 18 }\) = 55.5
जल की मोल भिन्न (x1) = \(\frac { 55.5 }{ 55.5 + 1 }\) = 0.982
विलयन का वाष्प दाब (P1) = x1 × P10
P1 = 0.982 × 12.3
P1 = 12.08 k Pa
अतः विलयन का वाष्प दाब = 12.08 pk Pa

प्रश्न 2.18
114 g ऑक्टेन में किसी अवाष्पशील विलेय (मोलर द्रव्यमान 40 g mol-1) की कितनी मात्रा घोली जाए कि ऑक्टेन का वाष्प दाब घट कर मूल का 80% रह जाए ?
उत्तर:
विलयन का वाष्प दाब (P1) = P10 का 80% है।
अतः P1 = P10 × 0.8
माना विलेय का द्रव्यमान = w g,
मोलर द्रव्यमान = 40g mol-1
विलेय के मोल = \(\frac { w }{ 40 }\)
ऑक्टेन (C8H18) का मोलर द्रव्यमान = 114 g mol-1
विलेय का द्रव्यमान = 114 g
ऑक्टेन (विलायक) के मोल = \(\frac { 114 }{ 114 }\) = 1 mol
विलेय की मोल भिन्न (x2)
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प्रश्न 2.19.
एक विलयन जिसे एक अवाष्पशील ठोस के 30g को 90g जल में विलीन करके बनाया गया है। उसका 298K पर वाष्प दाब 2.8 kPa है । विलयन में 18 g जल और मिलाया जाता है जिससे नया वाष्प दाब 298K पर 2.9 kPa हो जाता है। निम्नलिखित की गणना कीजिए-
(i) विलेय का मोलर द्रव्यमान
(ii) 298 K पर जल का वाष्प दाब।
उत्तर:
(i) विलेय का द्रव्यमान = 30g तथा माना विलेय का मोलर द्रव्यमान = M
अतः विलेय के मोल (n2) = \(\frac { 30 }{ M }\)
विलायक (H2O) का द्रव्यमान = 90 g,
मोलर द्रव्यमान: = 18 g mol-1
अतः विलायक के मोल = \(\frac { 90 }{ 18 }\) = 5
\(\frac{5}{5+(\tilde{3} 0 / \mathrm{M})}\) = \(\frac{5 \mathrm{M}}{5 \mathrm{M}+30}\)
x1 = \(\frac{M}{6+M}\)
विलयन का आंशिक दाब, P1 = P10x1
2.8 = P10 × \(\frac{M}{6+M}\) …..(1)

विलयन में 18 g (1 मोल) जल और मिलाया जाता है
तब जल के मोल = 5 + 1 = 6
इस स्थिति में विलायक (H2O) की मोल भिन्न
x1 = \(\frac{6}{6+(30 / \mathrm{M})}\) = \(\frac{M}{5+M}\)
विलयन का आंशिक दाब, (P11) = P01x11
2.9 = P10 × \(\frac{M}{5+M}\) …..(2)
समीकरण (2) में समीकरण (1) का भाग देने पर,
\(\frac { 2.8 }{ 2.9 }\) = \(\frac { 5 + M }{ 6 + M }\)
2.8 (6 + M) = 2.9 (5 + M)
16.8 + 2.8 M = 14.5 + 2.9 M
0.1M = 2.3
M = 23 g mol-1
अतः विलेय का मोलर द्रव्यमान = 23g mol-1

(ii) समीकरण (2) में M का मान रखने पर
2.9 = P10 × \(\frac { 23 }{ 5 + 23 }\)
2.9 = \(\frac{p_1^0 \times 23}{28}\)
23P10 = 2.9 × 28
23P10 = 81.2
P10 = 81.2/23 = 3.53KPa
अतः 298 K पर जल का वाष्प दाब = 3.53 kPa

प्रश्न 2.20
शक्कर के 5% (द्रव्यमान) जलीय विलयन का हिमांक 271K है। यदि शुद्ध जल का हिमांक 273.15K है तो ग्लूकोस के 5% जलीय विलयन के हिमांक की गणना कीजिए ।
उत्तर:
हिमांक अवनमन (△Tf) = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
शक्कर के 5% (द्रव्यमान) विलयन का अर्थ है 5 g शक्कर + 95g H2O
△Tf = 273.15 – 271 = 2.15
शक्कर का द्रव्यमान (W2) =5g
W1 = 95 g.
M2 = शक्कर का (C12H22O11) मोलर द्रव्यमान = 342
Kf = ?
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प्रश्न 2.21.
दो तत्व A एवं B मिलकर AB2 एवं AB4 सूत्र वाले दो यौगिक बनाते हैं। 20g बेन्जीन में घोलने पर 1 g AB2 हिमांक को 2.3K अवनमित ( कम ) करता है। जबकि 1.0g AB4 से 1.3K का अवनमन होता है। बेन्जीन के लिए मोलर अवनमन स्थिरांक 5.1 K kg mol-1 है । A एवं B के परमाण्वीय द्रव्यमान की गणना कीजिए ।
उत्तर:
हिमांक अवनमन-
△Tf = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
मोलर द्रव्यमान, M2 = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\Delta \mathrm{T}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_1}\)
M2 = MAB2 = AB2 का मोलर द्रव्यमान = ?
Kf = 5.1 K kg mol-1
w2 = 1g, w1 = 20g, △Tf = 2.3K
MAB2 = \(\frac{5.1 \times 1 \times 1000}{2.3 \times 20}\) = 110.869
MAB2 = 110.87g mol-1
इसी प्रकार AB4 का मोलर द्रव्यमान –
MAB4 = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 1000}{\Delta \mathrm{T}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_1}\)
△Tf = 1.3K
MAB4 = \(\frac{5.1 \times 1 \times 1000}{1.3 \times 20}\) = 196.15
MAB4 = 196.15 g mol-1
माना x तथा y, A तथा B के परमाणु द्रव्यमान हैं।
तो MAB2 = x + 2y
110.87 = x +2y …………..(1)
MAB4 = x + 4y
196.15 = x + 4y
समीकरण ( 2 ) में से समीकरण (1) घटाने पर,
196.15 – 110.87 = 2y
85.28 = 2y
У = 42.64 u

y का मान समीकरण (1) में रखने पर,
110.87 = x + 2 × 42.64
110.87 = x + 85.28
x = 110.87 – 85.28
x = 25.59 u
अतः A का परमाणु द्रव्यमान = 25.59 u तथा
B का परमाणु द्रव्यमान = 42.64 u

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.22.
300K पर 36 g प्रति लीटर सांद्रता वाले ग्लूकोस के विलयन का परासरण दाब 4.98 bar है। यदि इसी ताप पर विलयन का परासरण दाब 1.52 bar हो तो उसकी सांद्रता क्या होगी ?
उत्तर:
परासरण दाब (Π) = CRT
चूंकि R तथा T नियत हैं अतः
Π ∝ C
अतः किसी पदार्थ के दो विभिन्न सान्द्रता वाले विलयनों के लिए
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ग्लूकोस (C6H12O6) का मोलर द्रव्यमान = 180
C1 = \(\frac{36}{180 \times 1}\) = 0.2mol L-1
अब Π1 = 4.98bar, Π2 = 1.52bar
C1 = 0.2 mol L-1, C2 = ?

उपर्युक्त सूत्र में Π1, Π2 तथा C2 का मान रखने पर
\(\frac{4.98}{1.52}\) = \(\frac{0.2}{C_2}\)
C2 = \(\frac{1.52 \times 0.2}{4.98}\) = 0.061mol L-1
अतः द्वितीय स्थिति में विलयन की सान्द्रता = 0.061 mol L-1

प्रश्न 2.23.
निम्नलिखित युग्मों में उपस्थित सबसे महत्वपूर्ण अतंरआण्विक आकर्षण बलों का सुझाव दीजिए-
(i) n – हेक्सेन तथा n – ऑक्टेन
(ii) I2 तथा CCl4
(iii) NaClO4 तथा H2O
(iv) मेथेनॉल तथा ऐसीटोन
(v) ऐसीटोनाइट्राइल (CH3CN) तथा ऐसीटोन (C3H6O)
उत्तर:
(i) n – हेक्सेन व n ऑक्टेन- ये दोनों ही अध्रुवीय अणु हैं। अतः इनके मध्य वान्डरवाल बल होता है जो कि प्रकीर्णन बल (Dispersion force) या लण्डन बल है। इसे तात्कालिक द्विध्रुव-प्रेरित द्विध्रुव आकर्षण बल भी कहते हैं।

(ii) I2 तथा CCl4 के मध्य भी उपर्युक्त प्रकार का वान्डरवाल बल ही पाया जाता है।

(iii) NaClO4 तथा H2O के मध्य आयन- द्विध्रुव आकर्षण बल होता है। क्योंकि NaClO4, Na+ तथा CIO4 में वियोजित हो जाता है।

(iv) मेथेनॉल तथा ऐसीटोन के मध्य द्विध्रुव- द्विध्रुव आकर्षण बल पाया जाता है तथा इनमें कुछ मात्रा में हाइड्रोजन बन्ध भी होता है।

(v) ऐसीटोनाइट्राइल (CH3CN) तथा ऐसीटोन (CH3COCH3) के मध्य भी द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल होता है।

प्रश्न 2.24.
विलेय-विलायक आकर्षण के आधार पर निम्नलिखित को n ऑक्टेन में विलेयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए – KCI, CH3OH, CH3CN, साइक्लोहेक्सेन ।
उत्तर:
n- ऑक्टेन, अध्रुवीय विलायक है अतः विलेयता के सामान्य सिद्धान्त “समान, समान को घोलता है,” के अनुसार जब विलेय की ध्रुवता कम होगी तो n – ऑक्टेन में उसकी विलेयता बढ़ेगी। अतः उपर्युक्त यौगिकों की n – ऑक्टेन में विलेयता का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार होगा-
KCI < CH3OH < CH3CN < साइक्लोहेक्सेन

प्रश्न 2.25.
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिकों में से कौनसे जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं-
(i) फीनॉल
(ii) टॉलूईन
(iii) फार्मिक अम्ल
(iv) एथिलीन ग्लाइकॉल
(v) क्लोरोफॉर्म
(vi) पेन्टेनॉल
उत्तर:
जल, एक ध्रुवीय विलायक है जिसमें अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है।
(a) (ii) टॉलूईन तथा (v) क्लोरोफॉर्म जल में अविलेय हैं क्योंकि ये. सहसंयोजी यौगिक हैं, अतः ये जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाते।

(b) (i) फीनॉल तथा (vi) पेन्टेनॉल जल में आंशिक रूप से विलेय हैं क्योंकि इन यौगिकों में ध्रुवता होती है लेकिन इनका अध्रुवीय भाग बड़ा है। अतः ये जल के साथ बहुत दुर्बल हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं।

(c) (iii) फार्मिक अम्ल तथा (iv) एथिलीन ग्लाइकॉल जल में अत्यधिक विलेय हैं क्योंकि ये जल के साथ प्रबल हाइड्रोजन बन्ध बनाते हैं।

प्रश्न 2.26.
यदि किसी झील के जल का घनत्व 1.25 g mL-1 है तथा उसमें 92 g Na+ आयन प्रति किलोग्राम जल में उपस्थित हैं, तो झील में Na+ आयन की मोललता ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 31
= \(\frac { 92 }{ 23 }\) = 4
अतः m = \(\frac { 4 }{ 1 }\) = 4
अतः Na+ आयन की मोललता = 4 m.

प्रश्न 2.27.
अगर CuS का विलेयता गुणनफल 6 × 10-16 है तो जलीय विलयन में उसकी अधिकतम मोलरता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
CuS का विलेयता गुणनफल (ksp) = [Cu2+][s2-] Cus की अधिकतम मोलरता = CuS की विलेयता
CuS का ksp = 6 × 10-16
तथा इसके लिए (Ksp) = S2
S = mol L-1 में विलेयता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 32
अतः जलीय विलयन में CuS की अधिकतम विलेयता = 2.45 × 10-8 M

प्रश्न 2.28.
जब 6.5g, ऐस्पिरीन (C9H8O4) को 450 g ऐसिटोनाइट्राइल (CH3CN) में घोला जाए तो ऐस्पिरीन का ऐसीटोनाइट्राल में भार प्रतिशत (द्रव्यमान प्रतिशत) ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
भार प्रतिशत = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 33 × 100
अवयव (ऐस्पिरीन) का भार = 6.5 g
विलायक का भार = 450 g
विलयन का कुल भार = 450 + 6.5 g = 456.5 g
अतः ऐस्पिरीन का भार % = \(\frac { 6.5 }{ 456.5 }\) × 100 = 1.4238 = 1.424%

प्रश्न 2.29.
नैलॉफ़न (C19H21NO3) जो कि मॉर्फीन जैसी होती है, का उपयोग स्वापक उपभोक्ताओं (narcotic users) द्वारा स्वापक छोड़ने से उत्पन्न लक्षणों को दूर करने में किया जाता है। सामान्यतया नैलॉफ़न की 1.5 mg खुराक दी जाती है। उपर्युक्त खुराक के लिए 1.5 × 10-3 m जलीय विलयन का कितना द्रव्यमान आवश्यक होगा?
उत्तर:
मोललता (m)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 34
विलेय का भार = 1.5 mg =1.5 × 10-3(g)
विलेय (C19H21NO3) का मोलर द्रव्यमान
=(12×19)+(1×21) +14+ (3×16) =228 +21+14 + 48 =311
m = 1.5 × 10-3, विलायक का द्रव्यमान = ?
मान रखने पर,
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 35
विलायक का द्रव्यमान = 3.215 g
विलयन का द्रव्यमान = 3.215(g) + 1.5 × 10-3 (g)
= 3.215 + 0.0015
= 3.2165 = 3.217(g)

प्रश्न 2.30.
बेन्जोइक अम्ल का मेथेनॉल में 250 mL, 0.15 M विलयन बनाने के लिए आवश्यक मात्रा की गणना कीजिए।
उत्तर:
मोलरता (M) = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 36
विलेय का द्रव्यमान = ?
विलेय [बेन्जोइक अम्ल (C6H5COOH)] का मोलर द्रव्यमान
=(6 × 12) + 5 + 12 + 16 + 16 + 1 = 122
M = 0.15
अतः 1.15 = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 37
विलेय का द्रव्यमान = \(\frac{0.15 \times 250 \times 122}{1000}\)
विलेय का द्रव्यमान = 4.575 g

प्रश्न 2.31.
ऐसीटिक अम्ल, ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल एवं ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल की समान मात्रा से जल के हिमांक में अवनमन इनके उपर्युक्त दिए गए क्रम में बढ़ता है। संक्षेप में समझाइए |
उत्तर:
हिमांक अवनमन कणसंख्यक अणुसंख्यक गुण है अर्थात् कणों की संख्या बढ़ने पर हिमांक अवनमन भी बढ़ेगा।

ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH), ट्राइक्लो रो ऐसीटिक अम्ल (CCl3COOH) एवं ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल (CF3COOH) का यह क्रम अम्लीय गुण का बढ़ता क्रम है अर्थात् वियोजन का भी बढ़ता क्रम है अतः कणों की संख्या बढ़ेगी। इसलिए उपर्युक्त क्रम ही हिमांक में अवनमन का बढ़ता क्रम है।

प्रश्न 2.32.
CH3 – CH2 – CHCl – COOH के 10g को 250 g जल में मिलाने से होने वाले हिमांक का अवनमन परिकलित कीजिए। ( Ka = 1.4 × 10-3, Kf = 1.86K kg mol-1 तथा विलयन का घनत्व = 0.904g mL-1 )
उत्तर:
विलयन की मोलरता
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विलयन का द्रव्यमान = 250 + 10 = 260 g

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 39
(V) = 287.6 mL
CH3 – CH2 – CHCl – COOH (C4H7O2Cl) का मोलर
द्रव्यमान = 36 +7 32 + 35.5 = 122.5
∴ M = \(\frac{10 \times 1000}{122.5 \times 287.6 \mathrm{~mL}}\)
M = 0.2838 = 0.284mol L-1
वान्ट हॉफ गुणांक (i) ज्ञात करना-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 40

प्रश्न 2.33.
CH2FCOOH के 19.5 g को 500g H2O में घोलने पर जल के हिमांक में 1.0°C का अवनमन देखा गया। फ्लुओरोऐसीटिक अम्ल का वान्ट हॉफ गुणक तथा वियोजन स्थिरांक परिकलित कीजिए, यदि Kf = 1.86 K kg mol-1 तथा विलयन का घनत्व = 1.124 g mL-1
उत्तर:
(i) विलयन की मोललता = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 41
विलेय का भार = 19.5g
CH2FCOOH का मोलर द्रव्यमान = 12 + 2 + 19 + 12 + 16 + 16 + 1 = 78
विलायक का द्रव्यमान = 500 g
अतः m = \(\frac{19.5 \times 1000}{78 \times 500}\) = 0.5
हिमांक अवनमन △Tf = 1.0°

(ii) △Tf = i × Kf × m
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 42
वान्ट हॉफ गुणक (i) = 1.0753

(iii) अम्ल की वियोजन की मात्रा α = \(\frac{i-1}{n-1}\)
α = \(\frac{1.0753 – 1}{2 – 1}\) = 0.0753

(iv) वियोजन की मात्रा (α) = \(\sqrt{\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{C}}}\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 43

प्रश्न 2.34.
293 K पर जल का वाष्प दाब 17.535 mm Hg है। यदि 25 g ग्लूकोस को 450 g जल में घोलें तो 293 K पर जल का वाष्प दाब परिकलित कीजिए।
उत्तर:
जल का वाष्प दाब p10 = 17.535mm Hg
माना विलयन का वाष्प दाब = P1
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन = \(\frac{p_1^0-p_1}{p_1^0}\) = x2
n1 = विलायक (जल) के मोल = \(\frac{450}{18}\)
ग्लूकोस (C6H12O6) का मोलर द्रव्यमान = 180
n2 = विलेय के मोल = \(\frac{25}{180}\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 44

प्रश्न 2.35.
298K पर मेथेन की बेन्जीन में मोललता का हेनरी स्थिरांक 4.27 × 105 mm Hg है । 298K तथा 760 mm Hg दाब पर मेथेन की बेन्जीन में विलेयता परिकलित कीजिए।
उत्तर:
दिया हुआ है KH = 4.27 × 105 mm Hg,
p = 760mm Hg
हेनरी के नियम के अनुसार p = KH.x
मेथेन की मोल भिन्न (x) = \(\frac{\mathrm{p}}{\mathrm{K}_{\mathrm{H}}}\)
x = \(\frac{760}{4.27 \times 10^5}\)
x = 177.9 × 10-5
x = 178 × 10-5
अतः मेथेन की बेन्जीन में विलेयता (मोल भिन्न के रूप में) = 178 × 10-5

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन

प्रश्न 2.36.
100g द्रव A (मोलर द्रव्यमान 140 gmol-1) को 1000 g द्रव B ( मोलर द्रव्यमान 180gmol- 1 ) में घोला गया। शुद्ध द्रव B का वाष्प दाब 500 Torr पाया गया। शुद्ध द्रव A का वाष्प दाब तथा विलयन में उसका वाष्प दाब परिकलित कीजिए यदि विलयन का कुल वाष्प दाब 475 Torr हो ।
उत्तर:
माना द्रव A का शुद्ध अवस्था में वाष्प दाब = PA0 तथा शुद्ध
अवस्था में द्रव B का वाष्प दाब PB0 = 500 Torr
द्रव A के मोल
(nA) = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 45 = \(\frac { 100 }{ 140 }\) = 0.714
द्रव B के मोल
(nB) = \(\frac { 1000 }{ 180 }\) = 5.55
द्रव A की मोल भिन्न
(xA) = \(\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{n}_{\mathrm{A}}+\mathrm{n}_{\mathrm{B}}}\)
xA = \(\frac{0.714}{0.714+5.55}\)
xA = \(\frac { 0.714 }{ 6.264 }\) = 0.1139 = 0.114

द्रव B की मोल भिन्न
(XB) = (1 − xA) = (1 − 0.114) = 0.886
डाल्टन के आंशिक दाब के नियम से
कुल दाब (p) = PA + PB
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 46

प्रश्न 2.37.
328 K पर शुद्ध ऐसीटोन एवं क्लोरोफॉर्म के वाष्प दाब क्रमशः 741.8 mm Hg तथा 632.8 mm Hg हैं। यह मानते हुए कि संघटन के सम्पूर्ण परास में ये आदर्श विलयन बनाते Pकुल’ Pक्लोरोफॉर्म, तथा Pऐसीटोन को X ऐसीटोन के फलन के रूप में
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 47
उपर्युक्त आंकड़ों को भी उसी ग्राफ में आलेखित कीजिए और इंगित कीजिए कि क्या इसमें आदर्श विलयन से धनात्मक अथवा ऋणात्मक विचलन है?
उत्तर:
दिए गए आंकड़ों से कुल दाब ज्ञात करके विभिन्न आंकड़ों के लिए प्राप्त सारणी निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 48
यहाँ कुल दाब (Pकुल) = Pऐसीटो + PCHCl3
इन आंकड़ों से xऐसीटोन के फलन के रूप में (x अक्ष पर), Pकुल, Pक्लोरोफॉर्म तथा Pऐसीटोन (y अक्ष पर) को आलेखित करने पर प्राप्त ग्राफ निम्नलिखित प्रकार का होता है। (ग्राफ बनाते समय, दोनों अक्षों के लिए भिन्न-भिन्न पैमाना माना जाता है)-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 49
ग्राफ से यह ज्ञात होता है कि सभी संघटनों पर विलयन का कुल दाब, आदर्श विलयन के वाष्प दाब से कम है अतः इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि विलयन ऋणात्मक विचलन दर्शाता है। जिसके लिए
ΔΗमिश्रण = -ve तथा △Vमिश्रण = -ve

प्रश्न 2.38.
संघटनों के सम्पूर्ण परास (Range) में बेन्जीन तथा टॉलूईन आदर्श विलयन बनाते हैं। 300 K पर शुद्ध बेन्जीन तथा टॉलूईन का वाष्प दाब क्रमश: 50.71 mm Hg तथा 32.06 mm Hg है। यदि 80g बेन्जीन को 100g टॉलूईन में मिलाया जाये तो वाष्प अवस्था में उपस्थित बेन्जीन के मोल-अंश परिकलित कीजिए ।
उत्तर:
माना वाष्प अवस्था में बेन्जीन का मोल अंश = Y2 तो
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 50
टॉलूईन (C7H8) का मोलर द्रव्यमान = 92
अतः टॉलूईन के मोल (n1) = \(\frac { 100 }{ 92 }\) = 1.086
विलयन में बेन्जीन का मोल अंश
x2 = \(\frac{n_2}{n_1+n_2}\) = \(\frac{1.025}{1.086+1.025}\)
x2 = \(\frac{1.025}{2.111}\) = 0.485
टॉलूईन का मोल अंश (x1) = 1 – x2
x1 = 1 – 0.485
x1 = 0.515
वाष्प अवस्था में बेन्जीन का मोल अंश
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 51
अतः वाष्प अवस्था में बेन्जीन का मोल अंश
(y2) = 0.60
तथा वाष्प अवस्था में टॉलूईन का मोल अंश
(y1) = 1 – y2 = 1 – 0.60 = 0.40

प्रश्न 2.39.
वायु अनेक गैसों की मिश्रण है। 298 K पर आयतन में मुख्य घटक ऑक्सीजन और नाइट्रोजन लगभग 20% एवं 79% के अनुपात में हैं। 10 वायुमंडल दाब पर जल वायु के साथ साम्य में है। 298 K पर यदि ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन के हेनरी स्थिरांक क्रमश: 3.30 × 107 mm तथा 6.51 × 107 mm है, तो जल में इन गैसों का संघटन ज्ञात कीजिए ।
उत्तर:
माना 1 मोल वायु का 10 वायुमण्डल दाब ( atm P) पर आयतन = V
वायु में 20% O2 (आयतन से) है,
अतः O2 का आयतन = \(\frac{V \times 20}{100}\) = 0.2V
N2 का वायु में प्रतिशत (आयतन से) = 79%
अतः N2 का आयतन = \(\frac{\mathrm{V} \times 79}{100}\) = 0.79V
किसी गैस का आंशिक दाब = HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 52 × कुल दाब
O2 का आंशिक दाब, PO2 = \(\frac{0.2 \mathrm{~V}}{\mathrm{~V}}\) × 10 = 2atm
N2 का आंशिक दाब, PN2 = \(\frac{0.79 \mathrm{~V}}{\mathrm{~V}}\) × 10 = 7.9atm
अतः विलयन में O2 की विलेयता (मोल अंश के रूप में)
हेनरी के नियम से :
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 53
अतः जल में O2 की विलेयता ( मोल भिन्न) = 4.606 × 10-5
तथा N2 की विलेयता (मोल भिन्न) = 9.22 × 10-5

प्रश्न 2.40.
यदि जल का परासरण दाब 27° C पर 0.75 वायुमण्डल हो तो 2.5 लीटर जल में घुले CaCl2 (i= 2.47 ) की मात्रा परिकलित कीजिए।
उत्तर:
परासरण दाब (Π) = iCRT
Π = 0.75atm. i = 2.47
C=?, R = 0.0821 L atm mol-1 K-1
T = 27°C = 27°C + 273.15 = 300.15K
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 54
विलेय के मोल = मोलरता (सान्द्रता ) × आयतन (L)
= 0.0123 × 2.5L = 0.030
अतः 2.5 लीटर जल में घुले CaCl2 की मात्रा = 0.030 मोल

प्रश्न 2.41.
2 लीटर जल में 25°C पर K2SO4 के 25 mg, को घोलने पर बनने वाले विलयन का परासरण दाब, यह मानते हुए ज्ञात कीजिए कि K2SO4 पूर्णतः वियोजित हो गया है।
उत्तर:
K2SO4 का पूर्ण वियोजन माना गया है अतः
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 55
अतः आयनन से प्राप्त आयनों की संख्या (i) = 3
परासरण दाब (π) = iCRT
R = 0.0821 L atm mol-1 K-1
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 Img 56

HBSE 12th Class Chemistry विलयन Intext Questions

प्रश्न 2.1.
यदि 22 g बेन्जीन 122g कार्बनटेट्राक्लोराइड में घुली हो तो बेन्जीन एवं कार्बन टेट्राक्लोराइड के द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
उत्तर:
किसी अवयव का द्रव्यमान
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 57
विलयन में बेन्जीन का द्रव्यमान = 22 g
कार्बन टेट्राक्लोराइड का द्रव्यमान = 122 g
(i) अतः बेन्जीन का द्रव्यमान प्रतिशत = \(\frac { 22 }{ 122+22 }\) x 100
= \(\frac { 22 }{ 144 }\) × 100
= 15.277%
= 15.28%

(ii) कार्बनटेट्राक्लोराइड का द्रव्यमान प्रतिशत = \(\frac { 122 }{ 144 }\) x 100
= 84.72%
अतः बेन्जीन का द्रव्यमान %= 15.28% तथा कार्बनटेट्राक्लोराइड का द्रव्यमान % = 84.72% है।

प्रश्न 2.2.
एक विलयन में बेन्जीन का 30% द्रव्यमान कार्बन टेट्राक्लोराइड में घुला हुआ हो तो बेन्जीन के मोल- अंश की गणना कीजिए।
उत्तर:
विलयन में किसी अवयव का मोल अंश (Mole fraction) (x)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 58
बेन्जीन का 30% द्रव्यमान कार्बन टेट्राक्लोराइड में घुला हुआ है। जिसका अर्थ है कि 30 g बेन्जीन (C6H6), 70g कार्बनटेट्राक्लोराइड (CC14) में घुली हुई है।
किसी पदार्थ के मोलों की संख्या
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 59
(i) C6H6 का मोलर द्रव्यमान
= 78gmol-1 (C = 12,H = 1)
CCl4 का मोलर द्रव्यमान
= 154 g mol<sup<-1 (Cl = 35.5)
C6H6 के मोल (nb = \(\frac { 30 }{ 78 }\) = 0.3846 mol
C4H4 के मोल (nc = \(\frac { 70 }{ 154 }\) = 0.4545 mol
कुल मोल = nb + nc = 0.3846 + 0.4545 = 0.8391

(ii) बेन्जीन का मोल अंश (xb) = \(\frac{n_b}{n_b+n_c}\)
xb = \(\frac{0.3846}{0.8391}\) = 0.459
कार्बनटेट्राक्लोराइड का मोल अंश
(xc) = \(\frac{0.4545}{0.8391}\)
= 0.54165
= 0.541
अतः C6H6 का मोल अंश = 0.459
CCl4 का मोल अंश = 0.541

प्रश्न 2.3.
निम्नलिखित प्रत्येक विलयन की मोलरता की गणना कीजिए-
(क) 30 g, Co (NO3)2.6H2O 4.3 लीटर विलयन में घुला हुआ हो
(ख) 30mL 0.5M H2SO4 को 500 ml तक तनु करने पर।
उत्तर:
(क) किसी विलयन की मोलरता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 60
Co(NO3)2.6H2O का द्रव्यमान 30 g
तथा इसका मोलर द्रव्यमान = 297 g mol-1 होता है।
अतः Co(NO3)2.6H2O के मोल = \(\frac{30 \mathrm{~g}}{297 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1}}\)
विलयन का आयतन = 4.3 लीटर
अतः Co(NO3)2.6H2O की मोलरत
(M) = \(\frac{30 \mathrm{~g}}{297 \mathrm{~g} \mathrm{~mol}^{-1} \times 4.3 \mathrm{~L}}\)
M = 0.02349 = 0.0235 = 0.024
अतः विलयन की मोलरता = 0.024 M.

(ख) किसी विलयन को तनु करने पर उसकी परिणामी मोलरता निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात कर सकते हैं-
M1V1 = M2V2
30ml 0.5 H2SO को 500ml तक त किया गया है अतः
M1 = 0.5. V1 = 30ml, V2 = 500mL, M2 = ?
\(\frac{\mathrm{M}_1 \mathrm{~V}_1}{\mathrm{~V}_2}=\frac{0.5 \times 30}{500}\) = 0.03
अतः H2SO4 के विलयन की परिणामी मोलरता 0.03M

प्रश्न 2.4
यूरिया (NH2CONH2) के 0.25 मोलर, 2.5 kg जलीय विलयन को बनाने के लिए आवश्यक यूरिया के द्रव्यमान की गणना कीजिए।
उत्तर:
जल का घनत्व \(\simeq\) 1 g cm-3
अतः 2.5 kg जलीय विलयन = 2500 g विलयन
= 2500 mL विलयन = 2.5 L विलयन
चूंकि विलयन अति है (0.25) अतः विलयन का घनत्व, जल के घनत्व के समान मान सकते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 60a

प्रश्न 2.5.
20% ( w / w ) जलीय KI का घनत्व 1202 gm-1 हो तो KI विलयन की (क) मोललता, (ख) मोलरता, (ग) मोल अंश की गणना कीजिए।
उत्तर:
(क) विलयन की मोललता
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 61
20% w/w जलीय KI विलयन का अर्थ है कि 20 g KI, 80 g जल में विलेय है
KI का मोलर द्रव्यमान = 39 + 127 = 166
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 62
20% w/w जलीय KI विलयन का अर्थ है कि 20 g KI, 80 g जल में विलेय है
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 63

प्रश्न 2.6.
सड़े हुए अंडे जैसी गंध वाली विषैली गैस H2 गुणात्मक विश्लेषण में उपयोग की जाती है। यदि H2S गैस की जल में STP पर विलेयता 0.195 M हो तो हेनरी स्थिरांक की गणना कीजिए।
उत्तर:
हेनरी के नियमानुसार p = KH.x
KH = हेनरी स्थिरांक
p = दाब = 1bar (STP)
x = विलेय की मोल भिन्न
H2S के मोल = 0.195M
तथा जल का मोल = 55.5 होता है।
अतः
xH2s = \(\frac{0.195}{0.195+55.5}\)
= \(\frac{0.195}{55.695}\) = 0.0035 = 3.5 x 10-3
हेनरी स्थिरांक KH = \(\frac { P }{ x }\)
= \(\frac{1 \text { bar }}{3.5 \times 10^{-3}}\) = 285.7 bar
अतः H2S के लिए हेनरी स्थिरांक (KH) = 285.7 bar

प्रश्न 2.7.
298K पर CO2 गैस की जल में विलेयता के लिए हेनरी स्थिरांक का मान 1.67 x 108 Pa है। 500mL सोडा जल 2.5 atm दाब पर बंद किया गया। 298K ताप पर घुली हुई CO2 की मात्रा की गणना कीजिए।
उत्तर:
हेनरी के नियम के अनुसार
X = \(\frac{\mathrm{p}}{\mathrm{K}_{\mathrm{H}}}\)
p = 2.5 atm, KH = 1.67 × 108 Pa
CO2 की मोल भिन्न (x) = \(\frac{2.5 \mathrm{~atm}}{1.67 \times 10^8 \mathrm{~Pa}}\)
चूंकि 1 atm = 101325 Pa
अतः XCO2 = \(\frac{2.5 \times 101325 \mathrm{~Pa}}{1.67 \times 10^8 \mathrm{~Pa}}\)
= 1.516 x 10-3
XCO2= 1.516 x 10-3
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 65
हेनरी का नियम अति तनु विलयन पर ही लागू होता है अतः nCO2 << nH2O
इस प्रकार
XCO2 = \(\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{CO}_2}}{\mathrm{n}_{\mathrm{H}_2 \mathrm{O}}}\)
चूंकि जल का मोल = 55.5 होता है
तथा XCO2 = 1.516 × 10-3
1.516 × 10-3 = \(\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{CO}_2}}{55.5}\)
nCO2 = 1.516 x 10-3 x 55.5
= 84.13 x 10-3 L-1
चूंकि विलयन का आयतन = 500mL
अतः CO2 के 500mL विलयन (0.5L) में उपस्थित मोल = \(\frac{84.13 \times 10^{-3}}{2}\)
= 42.06 x 10-3
CO2 का द्रव्यमान = मोल x मोलर द्रव्यमान
CO2 का मोलर द्रव्यमान 12 + (2 x 16) = 44
अतः CO2 का द्रव्यमान = 42.06 x 10-3 x 44
CO2 का द्रव्यमान = 1.85 g

प्रश्न 2.8.
350 K पर शुद्ध द्रवों A एवं B के वाष्पदाब क्रमश: 450 एवं 750mm Hg हैं। यदि कुल वाष्पदाब 600 mm Hg हो तो द्रव मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए। साथ ही वाष्प प्रावस्था का संघटन भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
मिश्रण का कुल वाष्प दाब = Pकुल = PA + PB
PA = xAA, PB = xBB
अतः Pकुल = xAA + xBB
Pकुल = 600mm Hg, p°A = 450mm Hg
तथा p°B = 750 mm Hg.
अतः Pकुल= 450xA + 700xB (xB =1 – xA)
600 = 450xA + 700 (1 – xA)
600 = 450xA + 700 – 700xA
200xA= 100
xA = \(\frac { 100 }{ 250 }\) = 0.4
xA + xB = 1
अतः xB = 1 – 0.4 = 0.6
अतः द्रव मिश्रण का संघटन = xA = 0.4, xB = 0.6
वाष्प अवस्था में
PA = yAPकुल
yA = \(\frac{\mathrm{p}_{\mathrm{A}}}{\mathrm{y}_{\text {कुल }}}=\frac{\mathrm{x}_{\mathrm{A}} \mathrm{p}_{\mathrm{A}}^{\mathrm{o}}}{\mathrm{p}_{\text {कुल }}}=\frac{450 \times 0.4}{600}\)
yA = 0.3
yB = 1 – yA = 1 – 0.3 = 0.7
अतः वाष्प अवस्था में मिश्रण का संघटन
= YA = 0.3, yB = 0.7

प्रश्न 2.9.
298 K पर शुद्ध जल का वाष्पदाब 23.8 mm H है। 850g जल में 50g यूरिया (NH2CONH2) घोला जाता है। इस विलयन के लिए जल के वाष्पदाब एवं इसके आपेक्षिक अवनमन का परिकलन कीजिए।
उत्तर:
वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन विलेय की मोल अंश के बराबर होता है।
\(\frac{\mathrm{p}_1^0-\mathrm{p}_1}{\mathrm{p}_1^0}=\frac{\mathrm{n}_2}{\mathrm{n}_1+\mathrm{n}_2}\)
n2 = विलेय के मोल
= \(\frac { 50g }{ 60 }\)(यूरिया का मोलर द्रव्यमान = 60)
n1 = विलायक के मोल = \(\frac { 850 g }{ 18 }\)
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 2 विलयन 66
शुद्ध जल का वाष्प दाब p°1 = 23.8mm Hg
अतः p1 = 23.8 x 0.983 = 23.39mm Hg
अतः
इस विलयन के लिए जल का वाष्प दाब
= 23.39 mm Hg
= 23.4 mm Hg
तथा वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन = 0.017

प्रश्न 2.10
750 mm Hg दाब पर जल का क्वथनांक 99.63°C है। 500 g जल में कितना सुक्रोस मिलाया जाए कि इसका 100° C पर क्वथन हो जाए।
उत्तर:
क्वथनांक उन्नयन ∆Tb = 100 – 99.63 = 0.37°
क्वथनांक उन्नयन ∆Tb = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{b}} \times 1000 \times \mathrm{w}_2}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
Kb = क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक ( मोलल उन्नयन स्थिरांक)
= 0.52 kg mol-1
M2 = विलेय का मोलर द्रव्यमान = 342 (सुक्रोस) C12H22O11
w2 = विलेय का भार = ?
w1 = विलायक का भार = 5000 g
∆Tb = 0.37 = \(\frac{0.52 \times 1000 \times \mathrm{w}_2}{342 \times 500}\)
w2 = \(\frac{0.37 \times 342 \times 500}{0.52 \times 1000}\)
w2 = 121.67 g
अतः 121.67g सुक्रोस मिलाना पड़ेगा।

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प्रश्न 2.11.
ऐस्कार्बिक अम्ल (विटामिन C, C6H8O6) के उस द्रव्यमान का परिकलन कीजिए, जिसे 75g ऐसीटिक अम्ल में घोलने पर उसके हिमांक में 1.5°C की कमी हो जाए। Kf = 3.9 K kg mol-1
उत्तर:
हिमांक अवनमन, ∆Tf = \(\frac{\mathrm{K}_{\mathrm{f}} \times \mathrm{w}_2 \times 100}{\mathrm{M}_2 \times \mathrm{w}_1}\)
∆Tf = 1.5°C, Kf = 3.9 K kg mol-1 w2 = ?
w1 = 75g, M2 = 176 (C6H8O6)
1.5 = \(\frac{3.9 \times w_2 \times 1000}{176 \times 75}\)
w2 = \(\frac{1.5 \times 176 \times 75}{3.9 \times 1000}\)
w2 = 5.0769 g
अतः ऐस्कॉर्बिक अम्ल का द्रव्यमान 5.077g

प्रश्न 2.12.
185,000 मोलर द्रव्यमान वाले एक बहुलक के 1.0 g को 37°C पर 450 mL जल में घोलने से उत्पन्न विलयन के परासरण दाब का पास्कल में परिकलन कीजिए।
उत्तर:
परासरण दाब II = CRT
II = \(\frac{\mathbf{n}_2}{\mathrm{~V}}\)RT
II = परासरण दाब
n2 = पदार्थ के मोल = 1.0 g/185000
R = 0.083 L bar mol-1K-1
T = 37°C + 273.15 = 310.15
V = 450mL = 0.45L
परासरण दाब (II) = \(\frac{1.0 \times 0.083 \times 310.15}{0.450 \times 185,000}\) = 3.09 x 10-4
= 3.09 × 10-4 x 101325 Pa
= 31.309 Pa

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परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित AP के लिए प्रथम पद a और सार्व अंतर d लिखिए-
(i) -225, -425, -625, -825,
(ii) \(\frac{3}{2}, \frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{3}{2}\), ………………..
हल :
(i) यहाँ पर AP = – 225, – 425, – 625, – 825, ………..
अतः प्रथम पद (a) = – 225
और सार्व अंतर (d) = – 425 – (225)
= – 425 + 225 = – 200

(ii) यहाँ पर AP = \(\frac{3}{2}, \frac{1}{2},-\frac{1}{2},-\frac{3}{2}\), …………….
अतः प्रथम पद (a) = \(\frac{3}{2}\)
और सार्व अंतर (d) = \(\frac{1}{2}-\frac{3}{2}\)
= \(\frac{1-3}{2}\)
= \(\frac{-2}{2}\) = – 1

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 2.
AP का सार्व अंतर ज्ञात कीजिए और उसके अगले दो पद लिखिए-
(i) 51, 59, 67, 75, …………
(ii) 75, 67, 59, 51, ………..
हल :
(i) यहाँ पर
AP = 51, 59, 67, 75, ……….
⇒ प्रथम पद (a1) = 51
सार्व अंतर (d) = 59 – 51 = 8
∴ a5 = a4 + d = 75 + 8 = 83
a6 = a5+ d = 83 + 8 = 91

(ii) यहाँ पर
⇒ प्रथम पद (a1) = 75
सार्व अंतर (d) = 67 – 75 = – 8
∴ a5 = a4 + d = 51 + (-8) = 51 – 8 = 43
a6 = a5 + d = 43 + (-8) = 43 – 8 = 35

प्रश्न 3.
समांतर श्रेढ़ी 2, 4, 6, 8, 10, …………… का 15वाँ पद ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर दिया गया अनुक्रम है-
2, 4, 6, 8, 10, …….
प्रथम पद (a) = 2
और सार्व अंतर (d) = 4 – 2 = 2
∵ an = a + (n – 1)d
a15 = a + (15 – 1)d
= 2 + 14 × 2
= 2 + 28 = 30

प्रश्न 4.
उस AP का 12 वाँ पद ज्ञात कीजिए जिसका –
(i) प्रथम पद 9 और सार्व अंतर 10 है ।
(ii) प्रथम पद – 20 और सार्व अंतर 4 है ।
हल :
(i) यहाँ पर
प्रथम पद (a) = 9
सार्व अंतर (d) = 10
∴ a12 = a + 11d
= 9 + 11 × 10
= 9 + 110
= 119

(ii) यहाँ पर
प्रथम पद (a) = – 20
सार्व अंतर (d) = 4
∴ a12 = a + 11d
= – 20 + 11 × 4
= – 20 + 44
= 24

प्रश्न 5.
समांतर श्रेढ़ी 7, 3, -1, -5, -9, …………. का n वाँ पद ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर दिया गया अनुक्रम है-
7, 3, -1, -5, -9, ……….
प्रथम पद (a) = 7
सर्व अंतर (d) = 3 – 7 = – 4
an = a + (n – 1)d
= 7 + (n – 1) (-4)
= 7 – 4n + 4 = 11 – 4n

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 6.
प्रथम 1000 धन – पूर्णांकों का योग ज्ञात कीजिए।
हल :
यहाँ पर प्रथम 1000 धन पूर्णांक = 1, 2, 3, 4, …………, 1000
∴ a = 1
l = 1000
n = 1000
A.P. के प्रथम n पदों का योगफल (Sn) = \(\frac {n}{2}\)(a + l)
⇒ S1000 = \(\frac {1000}{2}\)(1 + 1000)
= 500 × 1001
= 500500

प्रश्न 7.
उस समांतर श्रेढ़ी का पता करें जिसका तीसरा पद 16 और सातवाँ पद 40 है ।
हल :
माना समांतर श्रेढ़ी = a, a + d, a + 2d, …………….
तो an = a + 2d
तथा a7 = a + 6d
प्रश्नानुसार,
a3 = 16
⇒ a + 2d = 16 ………(i)
तथा a7 = 40
⇒ a + 6d = 40 …….(ii)
समीकरण (i) को समीकरण (ii) में से घटाने पर,
4d = 24
या d = \(\frac {24}{4}\) = 6
d का मान समीकरण (i) में रखने पर,
a + 2(6) = 16
या a = 16 – 12 = 4
∵ समांतर श्रेढ़ी का प्रथम पद 4 और इसका सार्व अंतर 6 है ।
∴ समांतर श्रेढ़ी = 4, 10, 16, 22, 28, 34, …………….

प्रश्न 8.
क्या संख्याओं की सूची 5, 11, 17, 23, …………. का कोई पद 301 है, क्यों?
हल :
यहाँ पर सूची = 5, 11, 17, 23, ……………
a2 – a1 = 11 – 5 = 6
a3 – a2 = 17 – 11 = 6
a4 – a3 = 23 – 17 = 6
क्योंकि दो क्रमागत पदों के बीच अंतर समान है, इसलिए दी गई सूची A . P . है ।
⇒ प्रथम पद (a) = 5
सार्व अंतर (d) = 11 – 5 = 6
माना AP का n वाँ पद 301 है तो
an = a + (n – 1)d
301 = 5 + (n – 1) × 6
(n – 1) = \(\frac{301-5}{6}=\frac{296}{6}=\frac{148}{3}\)
n = \(\frac {148}{3}\) + 1 = \(\frac{148+3}{3}=\frac{151}{3}\)
क्योंकि एक धनात्मक पूर्णांक नहीं है, इसलिए दी गई A. P. कोई पद 301 नहीं हो सकता ।

प्रश्न 9.
एक A. P. का 8वाँ पद – 23 है तथा 12वाँ पद – 39 है। A. P. ज्ञात कीजिए ।
हल :
माना A.P. = a, a + d, a + 2d, ……………..
तो a8 = a + 7d
तथा a12 = a + 11d
प्रश्नानुसार,
a8 = – 23
⇒ a + 7d = – 23 (i)
तथा a12 = – 39
⇒ a + 11d = – 39 (ii)
समीकरण (i) को समीकरण (ii) में से घटाने परं
4d = – 16
या d = \(\frac {-16}{4}\) = – 4
d का मान समीकरण (i) में रखने पर
a + 7 (- 4) = – 23
या a = – 23 + 28 = 5
∵ A.P. a = 5 तथा d = – 4
∴ A.P. = 5, 1, -3, -7.

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प्रश्न 10.
किसी AP का प्रथम पद 5 और 100वाँ पद – 292 है । इस A. P. का 50वाँ पद ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर दी गई समांतर श्रेढ़ी के लिए-
प्रथम पद (a) = 5
100 वाँ पद (a100) = – 292
⇒ a + 99d = – 292
या 5 + 99d = – 292
या 99d = – 292 – 5
या 99d = – 297
या d = \(\frac {- 297}{99}\) = – 3
अतः समांतर श्रेढ़ी का 50 वाँ पद (a50) = a + 49d
= 5 + 49 (-3)
= 5 – 147 = – 142

प्रश्न 11.
उस AP के पहले 50 पदों का योगफल ज्ञात करें जिसका दूसरा पद 14 और 5वाँ पद 26 है।
हल :
माना
AP का प्रथम पद = a
और सार्व अंतर = d
प्रश्नानुसार
a2 = 14
⇒ a + d = 14 …………(i)
तथा a5 = 26
⇒ a + 4d = 26 …………..(ii)
समीकरण (i) को समीकरण (ii) में से घटाने पर,
3d = 12
या d = \(\frac {12}{3}\) = 4
d का मान समीकरण (i) में रखने पर,
a + 4 = 14
या a = 14 – 4 = 10
हम जानते हैं कि
Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
⇒ S50 = \(\frac {50}{2}\)[2(10) + (50 – 1) (4)]
= 25[20 + 196]
= 25 × 216 = 5400

प्रश्न 12.
यदि एक A. P. के पहले 6 पदों का योग 12 और पहले 10 पदों का योग 60 है, तो उस A. P. के n पदों का योग ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर, A. P. के लिए
S6 = 12
S10 = 60
Sn = ?
हम जानते हैं कि Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
S10 = \(\frac {10}{2}\) [2a + (10 – 1) d]
60 = 5 [2a + 9d] ………..(i)
2a + 9b = 12
तथा S6 = \(\frac {6}{2}\)[2a + (6 – 1)]d
⇒ 12 = 3[2a + 5d]
⇒ 2a + 5d = 4 ……..(ii)

समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
4d = 8
या d = \(\frac {8}{4}\) = 2
d का मान समीकरण (i) में रखने पर,
2a + 9(2) = 12
या 2a = 12 – 18
या a = \(\frac {-6}{2}\) = – 3
अब Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
= \(\frac {n}{2}\)[2(-3) + (n – 1)(2)]
= \(\frac {n}{2}\)[-6 + 2n – 2]
या Sn = \(\frac {n}{2}\)(2n – 8)
= n2 – 4n

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 13.
समांतर श्रेढ़ी – 4, – 1, 2, 5, 8,………………. के पहले 8 पदों और पदों का योग ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर दी हुई समांतर श्रेढ़ी है-
-4, -1, 2, 5, 8, ……….
∴ प्रथम पद (a) = – 4
और सार्व अंतर (d) = – 1 – (-4) = – 1 + 4 = 3
हम जानते हैं कि Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
⇒ S8 = \(\frac {8}{2}\)[2(-4) + (8 – 1)(3)]
= 4[-8 + 21]
= 4 × 13 = 52
और S12 = \(\frac {12}{2}\)[2(-4) + (12 – 1)(3)]
= 6[-8 + 33] = 6 × 25 = 150

प्रश्न 14.
योगफल ज्ञात कीजिए प्रथम –
(i) 100 प्राकृत संख्याओं का ।
(ii) n प्राकृत संख्याओं का ।
हल :
(i) यहाँ पर दी हुई समांतर श्रेढ़ी है-
1, 2, 3, 4, …… 100
∴ प्रथम पद (a) = 1
और सार्व अंतर (d) = 2 – 1 = 1
पदों की संख्या (n) = 100
हम जानते हैं कि
Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1) d]
⇒ S100 = \(\frac {100}{2}\)[2 × 1 + (100 – 1) × 1]
= 50[2 + 99]
= 50 × 101 = 5050

(ii) यहाँ पर दी हुई समांतर श्रेढ़ी है–
1, 2, 3, 4, ……. n
∴ प्रथम पद (a) = 1
सार्व अंतर (d) = 2 – 1 = 1
पदों की संख्या = n
हम जानते हैं कि
Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1) d]
⇒ Sn = \(\frac {n}{2}\)[2 × 1 + (n – 1) (1)]
= \(\frac {n}{2}\)[2 + n – 1]
= \(\frac {n}{2}\)[n + 1]

प्रश्न 15.
दो अंकों वाली कितनी संख्याएँ 3 से विभाज्य हैं?
हल :
हम जानते हैं कि
3 से विभाज्य दो अंकों की सबसे छोटी संख्या = 12
3 से विभाज्य दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या = 99
अतः AP = 12, 15, 18, ………….. 99
प्रथम पद (a) = 12
सार्व अंतर (d) = 3
हम जानते हैं कि an = a + (n – 1)d
⇒ 99 = 12 + (n – 1) × 3
⇒ n – 1 = \(\frac{99-12}{3}\)
⇒ n – 1 = \(\frac {87}{3}\)
⇒ n = 29 + 1
⇒ n = 30
अतः दो अंकों वाली 3 से विभाज्य संख्याओं की संख्या = 30

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 16.
योगफल ज्ञात कीजिए – (-5) + (-8) + (-11) + ………………. + (-230)
हल :
यहाँ पर दी हुई समांतर श्रेढ़ी है-
(-5) + (-8) + (-11) + ……… + (-230)
∴ प्रथम पद (a) = – 5
और सार्व अंतर (d) = (-8) – (-5) = – 8 + 5 = – 3
अंतिम पद (l) = – 230
हम जानते हैं कि
l = a + (n – 1) d
⇒ – 230 = 5 + (n – 1) (-3)
या – 230 = – 5 – 3n + 3
या – 230 + 5 – 3 = – 3n
या – 3n = – 228
या n = \(\frac {-228}{-3}\) = 76
अतः Sn = \(\frac {n}{2}\)(a + l)
⇒ S76 = \(\frac {76}{2}\)[- 5 – 230]
= 38 × (- 235) = – 8930

प्रश्न 17.
यदि A. P. के पहले 6 पदों का योग 96 है और पहले 10 पदों का योग 240 है, तो उस A. P. के n पदों का योग ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर, A. P. के लिए S6 = 96
S10 = 240
Sn = ?
हम जानते हैं कि Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1) d]
⇒ S10 = \(\frac {10}{2}\)[2a + (10 – 1)d]
240 = 5[2a + 9d]
2a + 9d = 48 ……………..(i)
तथा S6 = \(\frac {6}{2}\) = 2[2a + (6 – 1)d]
96 = 3[2a +5d]
2a + 5d = 32 ……………..(ii)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर प्राप्त होता है,
4d = 16
d = \(\frac {16}{4}\) = 4
d का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
2a + 9(4) = 48
या 2a = 48 – 36
या a = \(\frac {12}{2}\) = 6
अब Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
= \(\frac {n}{2}\)[2(6) + (n – 1)4]
= \(\frac {n}{2}\)[12 + 4n – 4]
= \(\frac {n}{2}\)[4n + 8] = 2n2 + 4n

प्रश्न 18.
यदि A. P. के पहले 10 पदों का योग -60 और पहले 15 पदों का योग -165 है, तो उसके पहले n पदों का योग ज्ञात कीजिए ।
हल :
यहाँ पर, A.P. के लिए
S10 = -60
S15 = -165
Sn = ?
हम जानते हैं कि Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
⇒ S10 = \(\frac {10}{2}\)[2a + (10 – 1)d]
⇒ – 60 = 5[2a + 9d]
⇒ 2a + 9d = – 12 ……………(i)
तथा S15 = \(\frac {15}{2}\)[2a + (15 – 1)d]
⇒ – 165 × \(\frac {2}{15}\) = 2a + 14d
⇒ 2a + 14d = – 22 …………… (ii)
समीकरण (i) को समीकरण (ii) में से घटाने पर प्राप्त होता है,
5d = – 10
या d = – 2
d का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
2a + 9(-2) = -12
या 2a = – 12 + 18
या 2a = 6
या a = \(\frac {6}{2}\) = 3
अब Sn = \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
= \(\frac {n}{2}\)[2(3) + (n – 1)(-2)]
= \(\frac {n}{2}\)[6 – 2n + 2]
= \(\frac {n}{2}\)[8 – 2n]
= 4n – n2

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रीना ने एक पद के लिए आवेदन किया और उसका चयन हो गया। उसे यह पद 8000 रु० के मासिक वेतन और 500 रु० वार्षिक की वेतन वृद्धि के साथ दिया गया। इसके लिए (रुपयों में) उचित स मांतर श्रेढ़ी (AP) होगी –
(A) 8000, 8500, 9000, ……..
(B) 8000, 7500, 7000, ……….
(C) 8500, 9000, 9500, ……….
(D) 8500, 8000, 7500, ……….
हल :
(A) 8000, 8500, 9000, ………..

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 2.
एक सीढ़ी के डंडों की लंबाइयाँ नीचे से ऊपर की ओर एक समान रूप से 2cm घटती जाती हैं। सबसे नीचे वाला डंडा लंबाई में 45cm है। नीचे से, पहले, दूसरे, तीसरे, ……. डंडों की लंबाइयाँ (cm में) क्रमशः होगी-
(A) 45, 47, 49, 51, …………..
(B) 45, 43, 41, 39, …………
(C) 45, 41, 37, 33, …………..
(D) 45, 49, 53, 57, ………….
हल :
(B) 45, 43, 41, 39, …………..

प्रश्न 3.
किसी बचत योजना में, कोई धनराशि प्रत्येक 3 वर्षों के बाद स्वयं की \(\frac {5}{4}\) गुनी हो जाती है। 8000 रु० के निवेश की 3, 6, 9 और 12 वर्षों के बाद परिपक्वता राशियाँ (रुपयों में) क्रमशः होंगी-
(A) 10000, 30000, 90000 और 2,70000
(B) 10000, 7500, 5000 और 4000
(C) 10000, 12500, 15625 और 19531.25
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
हल :
(C) 10000, 12500, 15625 और 19531.25

प्रश्न 4.
शकीला अपनी पुत्री की गुल्लक में 100 रु० तब डालती है, जब वह एक वर्ष की हो जाती है तथा प्रत्येक वर्ष इसमें 50 रु० की वृद्धि करती जाती है। उसके पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, ……………. जन्म दिवसों पर उसकी गुल्लक में डाली गई राशियाँ (रुपयों में) क्रमशः होगी-
(A) 200, 250, 300, 350, ………..
(B) 50, 100, 150, 200, ………….
(C) 100, 200, 300, 400, …………
(D) 100, 150, 200, 250, ………..
हल :
(D) 100, 150, 200, 250, …………

प्रश्न 5.
इनमें से कौन-सी A. P. श्रेणी है?
(A) 2, 4, 8, 12, ……..
(B) 0.2, 0.22, 0.222, ……..
(C) – 10, – 6, – 2, 2 ………….
(D) 1, 3, 9, 27, ……..
हल :
(C) – 10, – 6, – 2, 2 ………

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 6.
समांतर श्रेढ़ी 7, 3, – 1, – 5, – 9 का सार्व अंतर है-
(A) 4
(B) – 4
(C) \(\frac {3}{7}\)
(D) \(\frac {7}{3}\)
हल :
(B) – 4

प्रश्न 7.
इनमें से कौन-सी A. P. श्रेणी है?
(A) a, a2, a3, ……………
(B) 12, 32, 52, 72, ………
(C) a, 2a, 3a, 4a, ………….
(D) 1, 3, 9, 27, …………
हल :
(C) a, 2a, 3a, 4a, ……..

प्रश्न 8.
समांतर श्रेढ़ी 12, 2, – 8, – 18 ………. का सार्व अंतर है-
(A) -10
(B) 10
(C) \(\frac {3}{7}\)
(D) – 4
हल :
(A) – 10

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम समांतर श्रेढ़ी में नहीं है ?
(A) 3, 3, 3, 3, ……..
(B) 2, 2, 2, 2, ………..
(C) 3, 5, 8, 12, 20, ………
(D) 5, 5, 5, 5, ………..
हल :
(C) 3, 5, 8, 12, 20 ……..

प्रश्न 10.
एक समांतर श्रेढ़ी संख्याओं की एक ऐसी सूची होती है जिसमें प्रत्येक पद (पहले पद के अतिरिक्त) अपने पद में एक …………. संख्या जोड़ने पर प्राप्त होता है ।
(A) निश्चित
(B) विषम
(C) सम
(D) अभाज्य
हल :
(A) निश्चित

प्रश्न 11.
एक समांतर श्रेढ़ी संख्याओं की एक ऐसी सूची होती है जिसमें प्रत्येक पद (पहले पद के अतिरिक्त) अपने पद में एक निश्चित संख्या जोड़ने पर प्राप्त होता है । यह निश्चित संख्या AP का क्या कहलाती है?
(A) प्रथम पद
(B) अंतिम पद
(C) सार्व अंतर
(D) n वाँ पद
हल :
(C) सार्व अंतर

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 12.
प्रथम पद a तथा सार्व अंतर d वाली समांतर श्रेढ़ी का n वाँ पद होगा-
(A) \(\frac {n}{2}\)(a + l)
(B) a + (n – 1)d
(C) d + (n – 1)a
(D) \(\frac {n}{2}\)(a + d)
हल :
(B) a + (n – 1) d

प्रश्न 13.
समांतर श्रेढ़ी – 5 – 1, 3, 7 का सार्व अंतर है-
(A) – 4
(B) 4
(C) 6
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) 4

प्रश्न 14.
समांतर श्रेढ़ी p, p + 90, p + 180, p + 270, ……… [ जहाँ p = (999)999] का सार्व अंतर है –
(A) 90
(B) – 90
(C) p
(D) शून्य
हल :
(A) 90

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 15.
समांतर श्रेढ़ी – 125, – 325, – 525, – 725 ………… का सार्व अंतर है-
(A) – 125
(B) 125
(C) 200
(D) – 200
हल :
(D) – 200

प्रश्न 16.
प्रथम पद f तथा सार्व अंतर d वाली समांतर श्रेढ़ी का p वाँ पद होगा-
(A) f + (n – 1) d
(B) \(\frac {n}{2}\) (f + d)
(C) d + (p – 1) f
(D) f + (p – 1) d
हल :
(D) f + (p – 1 ) d

प्रश्न 17.
समांतर श्रेढ़ी 2.8, 3.0, 3.2, 3.4, …………. के अगले दो पद होंगे-
(A) 3.8 व 4.0
(B) 2.8 व 3.0
(C) 3.0 व 3.2
(D) 3.6 व 3.8
हल :
(D) 3.6 व 3.8

प्रश्न 18.
उस समांतर श्रेढ़ी (AP) के प्रथम 51 पदों का योगफल क्या होगा जिसके दूसरे और तीसरे पद क्रमशः 14 और 18 हैं?
(A) 5410
(B) 5510
(C) 5610
(D) 5710
हल :
(C) 5610

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 19.
A.P. 13, 15\(\frac {1}{2}\), 18, 20\(\frac {1}{2}\), ……………. का 11वाँ पद है :
(A) 38
(B) 40\(\frac {1}{2}\)
(C) 43
(D) 45\(\frac {1}{2}\)
हल :
(A) 38

प्रश्न 20.
समांतर श्रेढ़ी 10.0, 10.5, 11.0, 11.5, …………… का 10वाँ पद होगा-
(A) 15.5
(B) 14.0
(C) 14.5
(D) 15.0
हल :
(C) 14.5

प्रश्न 21.
यदि एक समांतर श्रेढ़ी में Sn = 256, a = 1 और d = 2 तो n का मान होगा-
(A) 18
(B) 14
(C) 15
(D) 16
हल :
(D) 16

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 22.
यदि A.P. का तीसरा पद 5 और 7 वाँ पद 13 है, तो उसका सार्व अंतर (common difference) है :
(A) 1
(B) 2
(C) 3
(D) 4
हल :
(D) 16

प्रश्न 23.
समांतर श्रेढ़ी (A.P.) – 11, – 7, – 3, ……………….. का सार्व अन्तर (common difference) है-
(A) 4
(B) – 4
(C) – 11
(D) – 18
हल :
(A) 4

प्रश्न 24.
A.P. 5, 6\(\frac {1}{2}\), 8, 9\(\frac {1}{2}\), ……………. का 15 वाँ पद है :
(A) 15\(\frac {1}{2}\)
(B) 14\(\frac {1}{2}\)
(C) 26
(D) 27\(\frac {1}{2}\)
हल :
(C) 26

प्रश्न 25.
समांतर श्रेढ़ी 4, 10, 16, 22, ……………. के अगले दो पद होंगे-
(A) 26 व 32
(B) 28 व 34
(C) 34 व 40
(D) 28 व 32
हल :
(B) 28 व 34

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 26.
समांतर श्रेढ़ी 1, – 1, – 3, – 5, ………………. के अगले दो पद होंगे-
(A) – 7 व – 9
(B) – 7 व – 8
(C) – 9 व – 11
(D) – 7 व – 11
हल :
(A) – 7 व – 9

प्रश्न 27.
संख्याओं की निम्नलिखित सूची में से कौन-सी सूची AP नहीं है ?
(A) 2, 8, 14, 20, …………….
(B) 1, 2, 3, 4, ……………..
(C) 2, 2, 2, 2, ……………..
(D) 1, 1, 2, 2, 3, 3, …………..
हल :
(D) 1, 1, 2, 2, 3, 3, …………..

प्रश्न 28.
यदि एक A.P. का तीसरा पद 12 और 10 वाँ पद 26 है, तो उसका 20वाँ पद है :
(A) 46
(B) 52
(C) 50
(D) 44
हल :
(A) 46

प्रश्न 29.
प्रथम पद 4 तथा सार्व अंतर – 3 वाली AP के प्रथम दो पद होंगे-
(A) 4 व 1
(B) 4 व 7
(C) 4 व – 2
(D) 4 व 10
हल :
(A) 4 व 1

प्रश्न 30.
प्रथम पद – 2 तथा सार्व अंतर 0 वाली AP के प्रथम चार पद होंगे-
(A) -2, -4, -6, -8
(B) -2, -2, -2, -2
(C) -2, 0, 2, 4
(D) 0, 0, 0, 0
हल :
(B) -2, -2, -2, -2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 31.
AP : 3, 1, – 1, – 3, ………. के प्रथम पद व सार्व अंतर क्रमशः होंगे-
(A) 3 व 2
(B) 3 व 4
(C) 3 व – 2
(D) – 2 व 3
हल :
(C) 3 व – 2

प्रश्न 32.
A.P. 0.6, 1.7, 2.8, 3.9, …………… का 14 वाँ पद है :
(A) 14.9
(B) 16.0
(C) 17.1
(D) 18.2
हल :
(A) 14.9

प्रश्न 33.
दी हुई A. P. का a = 10 तथा d = 10 है, तो इस A. P. का द्वितीय पद ……………. है ।
(A) 10
(B) 20
(C) 30
(D) 40
हल :
(B) 20

प्रश्न 34.
AP : \(\sqrt{m}\), \(\sqrt{m}\), \(\sqrt{m}\), \(\sqrt{m}\), ………… का सार्व अंतर होगा-
(A) \(\sqrt{6}\)
(B) 2
(C) \(\sqrt{2}\)
(D) \(\sqrt{4}\)
हल :
(C) \(\sqrt{2}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 35.
A. P. 13, 15\(\frac {1}{2}\), 18, 20\(\frac {1}{2}\), …………… का 11 वाँ पद है :
(A) 38
(B) 40\(\frac {1}{2}\)
(C) 43
(D) 45\(\frac {1}{2}\)
हल :
(A) 38

प्रश्न 36.
यदि किसी A. P. का तीसरा पद 4 और 9वाँ पद – 8 है, तो उनका सार्व अंतर (common difference) है :
(A) – 2
(B) 2
(C) 4
(D) – 8
हल :
(A) – 2

प्रश्न 37.
यदि किसी समांतर श्रेढ़ी (AP) का प्रथम पद \(\frac {1}{2}\) और सार्व अंतर \(\frac {1}{12}\) हो तो उसका 12 वाँ पद होगा-
(A) \(\frac {17}{12}\)
(B) \(\frac {15}{12}\)
(C) \(\frac {16}{12}\)
(D) \(\frac {13}{12}\)
हल :
(A) \(\frac {17}{12}\)

प्रश्न 38.
\(\frac{1}{3}, \frac{5}{3}, \frac{9}{3}, \frac{13}{3}\) …………….. A. P. के लिए, निम्न से सार्वअन्तर ज्ञात कीजिए ।
(A) \(\frac {-4}{3}\)
(B) \(\frac {2}{3}\)
(C) \(\frac {4}{3}\)
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(C) \(\frac {4}{3}\)

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 39.
-0.1, -0.2, -0.3, …………… A. P. का 10वा पद हैं-
(A) – 0.9
(B) – 0.8
(C) – 1.0
(D) – 1.1
हल :
(C) – 1.0

प्रश्न 40.
A. P. 2, 7, 12, ………. का 10वाँ पद है-
(A) -47
(B) 47
(C) 57
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(B) 47

प्रश्न 41.
दी हुई A. P. का a = – 2 तथा d = 0 है, तो इस A. P. का द्वितीय पद ……………. है-
(A) – 2
(B) 0
(C) 2
(D) 4
हल :
(A) – 2

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 42.
A.P. – 10, – 6, – 2, 2, …………… का 20वाँ पद है :
(A) 66
(B) – 66
(C) 77
(D) इनमें से कोई नहीं
हल :
(A) 66

प्रश्न 43.
यदि 11, x, 5 किसी AP के पद हों तो x का मान होगा-
(A) 6
(B) 7
(C) 8
(D) 9
हल :
(C) 8

प्रश्न 44.
A.P. \(\frac{1}{3}, \frac{5}{3}, \frac{9}{3}, \frac{13}{3}\), ……………. का 15 वाँ पद है :
(A) \(\frac {61}{3}\)
(B) 6
(C) 5
(D) 19
हल :
(D) 19

प्रश्न 45.
समांतर श्रेढ़ी 18, 15 \(\frac {1}{2}\), 13, ………. – 47 में पदों की संख्या होगी-
(A) 27
(B) 28
(C) 29
(D) 30
हल :
(A) 27

प्रश्न 46.
दी हुई A. P. का a = 4 तथा d = – 3 है, तो इस A. P. का द्वितीय पद ……………… है :
(A) 4
(B) 1
(C) – 2
(D) – 5
हल :
(B) 1

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 47.
समांतर श्रेढ़ी 25, 50, 75, 100, …………. का कौन-सा पद 1000 होगा ?
(A) 37वाँ
(B) 38वाँ
(C) 39वाँ
(D) 40वाँ
हल :
(D) 40वाँ

प्रश्न 48.
34 + 32 + 30 +…………………+ 10 का मान है :
(A) 294
(B) 289
(C) 286
(D) 386
हल :
(C) 286

प्रश्न 49.
समांतर श्रेढ़ी (AP) – 6, 0, 6, ……………. के प्रथम 13 पदों का योगफल होगा-
(A) 390
(B) 396
(C) 402
(D) 408
हल :
(A) 390

प्रश्न 50.
2 + 4 + 6 + …….. + 200 का योगफल होगा-
(A) 1010
(B) 10100
(C) 101000
(D) 101
हल :
(B) 10100

प्रश्न 51.
(-5) + (-8) + (-11) + …… + (-230) का योगफल होगा-
(A) -8730
(B) -8830
(C) -8930
(D) -9030
हल :
(C) – 8930

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 52.
प्रथम 100 प्राकृत संख्याओं का योगफल होगा-
(A) 5050
(B) 4950
(C) 5150
(D) 5250
हल :
(A) 5050

प्रश्न 53.
यदि किसी AP का प्रथम पद a तथा सार्व अंतर d हो तो इसके n पदों का योग होगा-
(A) \(\frac {n}{2}\)[a + (n – 1)d]
(B) \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]
(C) \(\frac {n}{2}\)[4a+ (n – 1)d]
(D) \(\frac {n}{2}\)[3a + (n – 1)d]
हल :
(B) \(\frac {n}{2}\)[2a + (n – 1)d]

प्रश्न 54.
AP : 8, 3, -2, …………. के प्रथम 22 पदों का योग होगा-
(A) – 969
(B) – 974
(C) – 979
(D) – 984
हल :
(C) – 979

प्रश्न 55.
प्रथम n धन पूर्णांकों का योग होगा-
(A) \(\frac{(n-1)(n+1)}{2}\)
(B) \(\frac{n(n-1)}{2}\)
(C) \(\frac{n(n+2)}{2}\)
(D) \(\frac{n(n+1)}{2}\)
हल :
(D) \(\frac{n(n+1)}{2}\)

प्रश्न 56.
(A) – 24
(B) – 30
(C) – 36
(D) – 42
हल :
(B) – 30

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 57.
किसी अनुक्रम का n वाँ पद 9 – 5n है,
(A) 4, – 1, – 6, – 11, ……….
(B) 5, 4, 3, 2, 1, …………..
(C) 7, 9, 11, 13, ………….
(D) 7, 11, 15, ……………
हल :
(A) 4, – 1, – 6, – 11, ……….

प्रश्न 58.
यदि किसी समांतर श्रेढ़ी का 9वाँ तथा 5वाँ पद क्रमशः 28 और
16 हो तो इस श्रेढ़ी के 15 पदों का योग होगा-
(A) 325
(B) 350
(C) 375
(D) 400
हल :
(C) 375

प्रश्न 59.
किसी AP का सार्व अंतर वही जो एक अन्य AP का, इनमें से एक का प्रथम पद 3 और दूसरी का 8 है । इनके चौथे पदों में अंतर होगा-
(A) 3
(B) 11
(C) 5
(D) 4
हल :
(C) 5

प्रश्न 60.
प्रथम पद f और अंतिम पद l वाली समांतर श्रेढ़ी के m पदों का योगफल होगा-
(A) \(\frac {l}{2}\)(m + f)
(B) \(\frac {m}{2}\)(f + l)
(C) \(\frac {f}{2}\) (m + l)
(D) f + (m – 1)l
हल :
(B) \(\frac {m}{2}\)(f + l)

प्रश्न 61.
यदि किसी AP में a = 5, d = 3, an = 50 ह्ये तो n का मान होगा-
(A) 16
(B) 15
(C) 17
(D) 18
हल :
(A) 16

HBSE 10th Class Maths Important Questions Chapter 5 समांतर श्रेढ़ियाँ

प्रश्न 62.
यदि किसी AP में a12 = 37 व d = 3 हो तो a का मान होगा-
(A) 6
(B) 5
(C) 4
(D) 3
हल :
(C) 4

प्रश्न 63.
यदि किसी AP में a = 8, an = 62, n = 6 हो तो d का मान होगा-
(A) \(\frac {51}{5}\)
(B) \(\frac {52}{5}\)
(C) \(\frac {53}{5}\)
(D) \(\frac {54}{5}\)
हल :
(D) \(\frac {54}{5}\)

प्रश्न 64.
अनुक्रम an = 3n + 2 का तीसरा पद होगा-
(A) 8
(B) 11
(C) 14
(D) 17
हल :
(B) 11

प्रश्न 65.
अनुक्रम an = (-1)n-1 . 2n का चौथा पद होगा-
(A) 8
(B) – 8
(C) – 16
(D) 16
हल :
(C) – 16

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HBSE 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy Notes.

Haryana Board 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy

What is a Good Source of Energy

Source of energy:
A source from which useful energy can be extracted either directly or indirectly by means of a conversion or transformation is known as the source of energy. For example, sources of energy to provide us heat for cooking are LPG, kerosene, sunlight, etc.

Factors to consider while selecting an energy source:
The source of energy should be

  • Availability,
  • Output,
  • Accessibility
  • Transportation and storage and
  • Economical.

 HBSE 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy

Conventional (Non-renewable) source of energy:
A source of energy which we cannot regenerate or reuse once we have used it is called a conventional or non-renewable source of energy. For example, coal, petroleum and natural gas, thermal power plants, hydro power plants, bio-mass and wind energy.

Non-conventional (Renewable) source of energy:
Those sources of energy which are inexhaustible or say can be renewed are called non-conventional (renewable) sources of energy. For example, solar energy, tidal energy, wind energy, geothermal energy, etc.

Fossil fuels:
Fuels such as coal natural gas and petroleum formed in the earth crust due to decaying of plants and animal remains millions of years ago are known as fossil fuels.

Disadvantages of fossil fuels:

  • Produces smoke
  • Cause severe air pollution,
  • Causes acid rain.
  • Causes global warming.

Thermal power plant:
Thermal power plant is a set-up which converts heat energy into electrical energy on a large scale basis.

 HBSE 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy

Hydropower plant:
Hydropower or hydroelectric plants use the potential energy of water stored at height (in dams) and the kinetic energy of the falling water for generating electricity. The power produced is called hydroelectricity or hydel electricity.

Disadvantages:

  • Dams can be constructed only in some hilly areas,
  • People living in low areas have to be relocated.
  • Large ecosystems get destroyed
  • Methane gas gets produced in large quantity.

Biomass:
The waste material from plants or animals such as cattle dung, dried leaves, etc. which is not used for food or feed is called biomass.

Biogas:
The gas prepared by decomposing cow dung, plant residue such as dead plants, dried leaves, residue obtained after harvesting a crop, vegetable waste and sewage in a pit is called biogas or gobar gas.

Advantages:

  • An excellent fuel used for cooking and lightening
  • Burns without smoke and leaves no residue
  • High thermal capacity
  • The slurry is an excellent manure

Biogas can also be used for lightening the villages.

Wind:
Moving air is called wind. Wind possesses kinetic energy. This kinetic energy can be used to do work or obtain electricity through a machine called wind mill.

Advantages:

  • Does not cause any pollution
  • It is renewable,
  • Does not cause any recurring expense.

 HBSE 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy

Limitations:

  • Wind farm can be established only at those places where wind blows for most of the year that too with a minimum speed of 15 km/h
  • Requires power back-up facility
  • Required large area,
  • Initial set-up cost is quite high,so is the maintenance.

Alternetive or Non-conventional Sources of Energy

Alternate (non-conventional) sources of energy:
Sources of energy which we have not yet started using on a regular and routine basis are called non-conventional sources of energy. Example: Solar energy, oceanic energy, geothermal energy and nuclear energy.

Solar energy.
The energy obtained from the sun is called solar energy. This energy is available in two forms namely, light and heat.

Solar appliances and their uses:

Solar applianceUse
1. Solar cookerTo prepare food such as rice, dal, pulses and vegetables.
2. Solar water heaterFor heating water in houses, hotels, etc.
3. Solar cellsIn artificial satellites, calculators, toys, etc., In remote areas in street lights and in running radio and T.V., For operating traffic signals and in research centres, In cars at experimental levels.

Energy from sea:
Tidal energy:
The level of ocean water rises and falls due to the gravitational pull of moon on the earth. The difference ¡n the tides give us energy which is called tidal energy.

Wave energy:
The winds blowing over ocean produces waves. These waves possess large amount of kinetic energy. Several devices have been developed to trap wave energy for rotating the turbine and hence producing electricity.

Ocean Thermal Energy Conversion (OTEC):
The energy available due to the difference in the temperature of water at the surface of the ocean and at deeper levels of the ocean is called Ocean Thermal Energy (OTE). The plant set-up to harnass this energy is called Ocean Thermal Energy Conversion (OTEC) Plant.

Geothermal energy:
The deep interior region of the earth where magma is found is very hot. The energy utilized from this heat is called geothermal energy. At some places, steam and hot water ooze out on their own through cracks of the rocks. Such sites serve as hot water springs or natural geysers.

 HBSE 10th Class Science Notes Chapter 14 Sources of Energy

Nuclear energy:

  • When the nucleus of a heavy atom (such as uranium, plutonium or thorium) is bombarded with low-energy neutrons, it gets split into lighter nuclei. This process is called nuclear fission.
  • During the splitting of nucleus, tremendous amount of energy is released. This energy is called nuclear energy.

Advantages:

  • Produces 10 million times the energy produced by the combustion of an atom of carbon from coal,
  • The nuclear fuel can itself go on chain reaction and release energy at a controlled rate.

Limitations:

  • The biggest problem is the storage and disposal of used nuclear fuel.
  • In case of accident if the radiations leak, they can cause very large and widespread effect.
  • The installation cost is very high.

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