Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Maths Solutions Chapter 6 अवकलज के अनुप्रयोग विविध प्रश्नावली

Haryana State Board HBSE 12th Class Maths Solutions Chapter 6 अवकलज के अनुप्रयोग विविध प्रश्नावली Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Maths Solutions Chapter 6 अवकलज के अनुप्रयोग विविध प्रश्नावली

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

विनिर्माण उद्योग Important Questions Geography HBSE 10th Class प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दीजिए

(क) उद्योगों की स्थिति के प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारकों के नाम बताइए।
उत्तर-
उद्योगों की स्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक हैं-

  1. कच्चे माल की उपलब्धता।
  2. शक्ति के साधन व जल की सुलभता।
  3. अनुकूल जलवायु।

(ख) उद्योगों की स्थिति को नियंत्रित करने वाले किन्हीं तीन मानवीय कारकों के नाम बताइए।
उत्तर-
उद्योगों की स्थिति को नियंत्रित करने वाले तीन मानवीय कारक हैं-

  1. उपलब्ध श्रमिक
  2. पूंजी व परिवहन सुविधाएँ
  3. सरकारी नीतियाँ।

(ग) महाराष्ट्र के चार महत्त्वपूर्ण सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. मुम्बई
  2. शोलापुर
  3. पुणे
  4. वर्धा।

(घ) भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण दो चीनी उत्पादक राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर-
भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण चीनी उत्पादक राज्य हैं-(1) उत्तर प्रदेश (2) महाराष्ट्र।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

(ङ) कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के दो-दो लोहा और इस्पात संयंत्रों के नाम बताइए।
उत्तर-
कर्नाटक के दो लोहा और इस्पात संयंत्र हैं-

  • विजय नगर,
  • भद्रावती।

पश्चिम बंगाल के दो लोहा और इस्पात संयंत्र हैं-

  • दुर्गापुर,
  • बर्नपुर।

(च) भारत में इलेक्ट्रोनिक सामान के पाँच उत्पादक राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर-

  1. बंगलौर
  2. मुंबई
  3. हैदाराबाद
  4. दिल्ली
  5. चेन्नई।

HBSE 10th Class विनिर्माण उद्योग Important Questions Geography प्रश्न 2.
उन स्थानों के नाम लिखिए जहाँ सवारी गाड़ी के डिब्बे बनाये जाते हैं।
उत्तर-

  • पेराम्बूर
  • बंगलौर
  • कपुरथलए
  • कोलकता।

Chapter 6 विनिर्माण उद्योग Important Questions HBSE 10th Class प्रश्न 3.
भारत का पहला उर्वरक संयंत्र कब और कहाँ स्थापित किया गया था?
उत्तर-
सन् 1906 में रानीपेट (तमिलनाडु) में।

प्रश्न 4.
कौनसा स्थान इलेक्ट्रोनिक उद्योग की राजधानी के रूप में जाना जाता है।
उत्तर-
बंगलौर को इलेक्ट्रोनिक उद्योग की राजधानी के रूप में जाना जाता है।

प्रश्न 5.
उद्योगों से निकलने वाली दो हानिकारक गैसों का नाम बताएँ।
उत्तर-

  1. कार्बन मानोऑक्साइड
  2. सल्फर डाईऑक्साइड।

प्रश्न 6.
सिंदरी उर्वरक संयंत्र कब और किसके द्वारा स्थापित किया गया?
उत्तर-
सिंदरी उर्वरक संयंत्र की स्थापना 1951 में भारतीय उर्वरक निगम द्वारा की गइ।

प्रश्न 7.
भारत में लोहा और इस्पात का बड़े पैमाने पर उत्पादन कब प्रारंभ हुआ।
उत्तर-
भारत में लोहा और इस्पात का बड़े पैमाने पर सन् 1907 में जमशेदपुर में कारखाने की स्थापना के साथ हुआ।

प्रश्न 8.
भारत में कृत्रिम वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र कौन-कौन-से हैं?
उत्तर-
भारत में कृत्रिम वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र हैं-मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, दिल्ली, अमृतसर, ग्वालियर ओर कोलकाता।

प्रश्न 9.
चीनी उद्योग के दक्षिणी राज्यों में स्थापित होने की स्पष्ट प्रवृति दिखाई पड़ने लगी हैं। इसका प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर-
चीनी उद्योग के दक्षिणी राज्यों में स्थापित होने का सबसे प्रमुख कारण यह है कि देश के उत्तरी राज्यों की तुलना में दक्षिणी राज्यों के गन्ने में चीनी तत्व का अधिक पाया जाना है।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

प्रश्न 10.
मानव निर्मित रेशे कहाँ से प्राप्त किए जाते हैं?
उत्तर-
मानव निर्मित रेशे, लुगदी, कोयला, और पेट्रालियम से प्राप्त किए जाते हैं।

प्रश्न 11.
खेतड़ी स्थित तांबा प्रगलन संयंत्र को तांबा अयस्क की आपूर्ति कहां से की जाती है?
उत्तर-
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित मलंजखंड खान से।

प्रश्न 12.
भारत में औषधि निर्माण की क्या स्थिति है?
उत्तर-
भारत में औषधि निर्माण का पूरे उद्योग क्षेत्र में 14% का योगदान है। निर्यात भी में औषधियों का योगदान 14% का है।

प्रश्न 13.
भारत में पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग कब लगाया गया था? औपनिवेशिक काल में हमारे परंपरागत उद्योगों को हानि क्यों हुई?
उत्तर-

  1. प्रथम सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुंबई में लगाया गया।
  2. प्राचीन भारत में सूती वस्त्र को हाथ से कताई और हथकरघा बुनाई तकनीकों द्वारा बनाये जाने का प्रचलन था। अठारहवीं शताब्दी के बाद विद्युतीय करघों का उपयोग होने लगा। औपनिवेशिक काल के दौरान हमारे परंपरागत उद्योगों को बहुत नुकसान हुआ क्योंकि हमारे उद्योग. इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाये।

प्रश्न 14.
आज भारत में कितनी सूती तथा कृत्रिम रेशे की मिले हैं? इनमें निजी क्षेत्र का हिस्सा क्या है?
उत्तर-
आज भारत में लगभग 1600 सूती तथा कृत्रिम रेशे की कपड़ा मिले हैं। इनमें से 80% निजी क्षेत्र में तथा शेष सार्वजनिक व सहकारी क्षेत्र में हैं। इनके अंतर्गत कई हजार छोटी इकाइयाँ हैं जिनमें 4 से 10 हथकरघे हैं।

प्रश्न 15.
आरभिक वर्षों में सूती वस्त्र उपयोग महाराष्ट्र तथा गुजरात के कपास उत्पादक क्षेत्रों तक ही सीमित क्यों थे?
अथवा
सूती वस्त्र उद्योग को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन हैं?
उत्तर-
आरम्भिक वर्षों में सूती वस्त्र उद्योग महाराष्ट्र तथा गुजरात के कपास उत्पादन क्षेत्रों तक ही सीमित थे। कपास की – उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की निकटता, श्रम, नमीयुक्त जलवायु आदि कारकों ने इसके स्थानीयकरण को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 16.
सूती वस्त्र उद्योग का कृषि से निकट संबंध है। कैसे? .
उत्तर-

  1. सूती वस्त्र उद्योग का कृषि से निकट का संबंध है और कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिजाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को यह जीविका प्रदान करता है।
  2. इस उद्योग के कारण रसायन रंजक मिल-स्टोर तथा पैकेजिंग सामग्री और इंजीनियरिंग उद्योग की माँग वृद्धि होती है परिणामस्वरूप इन उद्योगों का विकास होता है।

प्रश्न 17.
भारत किन देशों को सूत या सूती वस्त्रों का निर्यात,करता है?
उत्तर-
भारतं जापान को सूत का निर्यात करता है। भारत में निर्मित सूती वस्त्र के अन्य आयातक देश संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, रूस, फ्रांस, पूर्वी यूरोपीय देश, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका तथा अफ्रीका के देश हैं।

प्रश्न 18.
पटसन उद्योग में कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है?
उत्तर-
पटसन उद्योग प्रत्यक्ष रूप से 2.61 लाख श्रमिकों को और जूट व मेस्टा की खेती करने वाले अन्य 40 लाख छोटे व सीमांत कृषकों को रोजगार मुहैया कराता है। इस उद्योग से अन्य अनेक लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

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प्रश्न 19.
पटसन उद्योग की मुख्य चुनौतियाँ क्या है?
उत्तर-

  1. इस उद्योग की चुनौतियों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कृत्रिम वस्त्रों से और बांग्लादेश, ब्राजील फिलीपीन्स, मिश्र तथा थाईलैंड जैसे अन्य देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा शामिल है।
  2. यद्यपि पटसन पैंकिंग की अनिवार्य प्रयोग की सरकारी नीति के कारण इसकी घरेलू माँग बढ़ी है फिर भी माँग बढ़ाने हेतु उत्पाद में विविधता भी आवश्यक है।

प्रश्न 20.
2005 ई. में बने राष्ट्रीय पटसन नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
सन् 2005 में राष्ट्रीय पटसन नीति अपनाई गई जिसका मुख्य उद्देश्यः

  • पटसन का उत्पादन बढ़ाना,
  • गुणवत्ता में सुधार,
  • पटसन उत्पादक कृषकों को अच्छा मूल्य दिलाना
  • प्रति हैक्टेयर उत्पादकता को बढ़ना करना था।

प्रश्न 21.
भारत किन देशों को पटसन निर्यात करता है?
उत्तर-
भारत अमेरिका, कनाडा, रूस, अरब देश, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया को पटसन का निर्यात करता है।

प्रश्न 22.
जूट उत्पादों को पुनः किन कारणों से अवसर मिला है?
उत्तर-
बढ़ते वैश्विक पर्यावरण अनुकूलन, जैवनिम्नीकरणीय पदार्थों के लिए विश्व की बढ़ती जागरूकता ने पुनः जूट उत्पादों के लिए अवसर प्रदान किया है।

प्रश्न 23.
चीनी उद्योग को गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में ही क्यों स्थापित होना चाहिए?
उत्तर-

  1. क्योंकि इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल भारी होता है।
  2. ढुलाई में इसके सूक्रोस की मात्रा घट जाती है।

प्रश्न 24.
पिछले कुछ वर्षों में चीनी मिलों की संख्या दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में बढ़ी है। इसका कारण है?
उत्तर-

  • पिछले कुछ वर्षों से इन मिलों की संख्या दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में विशेषकर महाराष्ट्र में बढ़ी है। इसका मुख्य कारण यहाँ के गन्ने में अधिक सूक्रोस की मात्रा
  • अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु भी लाभप्रद है।
  • इसके अलावा इन राज्यों में सहकारी समितियों न भी सफलता प्राप्त की है।

प्रश्न 25.
भारत में पहला पटसन कारखाना कब स्थापित किया गया? देश विभाजन के तुरंत बाद इस उद्योग को किस समस्या का सामना करना पड़ा?
उत्तर-

  • भारत में पहला पटसन उद्योग कोलकाता के समीप रिशरा में 1859 में लगाया गया।
  • 1947 में देश के विभाजन के पश्चात् पटसन मिलें तो भारत में रह गईं परंतु तीन-चौथाई जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान अर्थात् बांग्लादेश में चले गए।

प्रश्न 26.
इस्पात उद्योग को एक आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है?
उत्तर-
लोहा तथा इस्पात उद्योग एक आधारभूत (basic) उद्योग है क्योंकि अन्य समस्त भारी, हल्के और मध्यम उद्योग : इनसे निर्मित मशीनरी पर निर्भर हैं। विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफोन वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण हेतु इस्पात की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 27.
कच्चा इस्पात उत्पादन और स्पंज लौह उत्पादन में विश्व में भारत का क्या स्थान हैं?
उत्तर-

  • भारत 328 लाख टन इस्पात का विनिर्माण कर विश्व में कच्चा इस्पात उत्पादकों में नवें स्थान पर है।
  • यह स्पंज (Sponge) लौह का सबसे बड़ा उत्पादक है।

प्रश्न 27(i).
लौह-इस्पात उद्योग की क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर-
(क) कच्चे माल की सीमित उपलब्धता
(ख) उच्च लागत
(ग) कम श्रमिक उत्पादकता,
(घ) ऊर्जा की अनियमित पूर्ति

प्रश्न 28.
मिनी इस्पात संयंत्र किसे कहते हैं?
उत्तर-
मिनी इस्पात उद्योग छोटे संयंत्र हैं जिनमें विद्युत भट्टी, रद्दी इस्पात व स्पंज आयरन का प्रयोग होता है। इनमें ‘रि-रोलर्स होते हैं जिनमें इस्पात सिल्लियों का प्रयोग किया जाता है। ये हल्के स्टील या निर्धारित अनुपात के मृदु व मिश्रित इस्पात का उत्पादन करते हैं।

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प्रश्न 29.
संकलित इस्पात संयंत्र क्या है?
उत्तर-
एक संकलित इस्पात संयंत्र एक बड़ा संयंत्र होता है। जिसमें कच्चे माल को एक स्थान पर इकट्ठा करने से लेकर इस्पात बनाने उसे ढालने और उसे आकार देने तक की प्रत्येक क्रिया की जाती है।

प्रश्न 30.
अधिकांश लोहा और इस्पात उद्योग छोटा नागपुर के पठारी क्षेत्र में संकेद्रित क्यों हैं?
उत्तर-

  • छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग संकेंद्रित हैं। इस प्रदेश में इस उद्योग के विकास हेतु अधिक अनुकूलसापेक्षिक परिस्थितियाँ हैं।
  • इनमें लौह अयस्क की अल्प लागत,
  • उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता,
  • सस्ते श्रमिक और स्थानीय बाजार में इनके माँग की बड़ी संभावना सम्मिलित है।

प्रश्न 31.
किन कारकों ने लौह-इस्पात उद्योग को प्रोत्साहन दिया है?
उत्तर-
निजी क्षेत्र में उद्यमियों के प्रयत्न से तथा उदारीकरण व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ने इस्पात उद्योग को प्रोत्साहित दिया है।

प्रश्न 32.
एल्यूमिनियम उद्योग का क्या महत्त्व हैं?
उत्तर-

  • भारत में एल्यूमिनियम प्रगलन दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है।
  • यह हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर बनाया जा सकता है।
  • हवाई जहाज बनाने में, बर्तन तथा तार बनाने में इसका _प्रयोग किया जाता है।
  • कई उद्योगों में इसकी महत्ता इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होने से बढ़ी है।

प्रश्न 33.
एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग की स्थापना के लिए दो महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ क्या हैं?
उत्तर-
एल्यूमिनियम उद्योग की स्थापना की दो महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं- नियमित ऊर्जा की पूर्ति तथा कम कीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता।

प्रश्न 34.
रसायन उद्योग में भारत की विश्व में क्या स्थिति है?
उत्तर-
रसायन उद्योग एशिया का तीसरा बड़ा तथा विश्व में आकार की दृष्टि से 12वें स्थान पर है।

प्रश्न 35.
निम्न दंड आरेख का अध्ययन कीजिए और अपना निष्कर्ष बताइए।
उत्तर-
1950 के दशक में भारत तथा चीन ने लगभग एक समान मात्रा में इस्पात उत्पादितत किया था। आज चीन इस्पात का सबसे बड़ा उत्पादक है।

प्रश्न 36.
कुछ प्रमुख अकार्बनिक रसायनों के नाम लिखिए।
उत्तर-
अकार्बनिक रसायनों में सलफ्यूरिक अम्ल (उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन, डाई आदि के निर्माण
में प्रयुक्त), नाइट्रिक अम्ल, क्षार, सोडा ऐश (soda ash), (काँच, साबुन, शोधक या अपमार्जक, कागज़ में प्रयुक्त होने वाले रसायन) तथा कास्टिक सोडा आदि शामिल हैं।

प्रश्न 37.
कार्बनिक रसायनों का प्रयोग कहाँ होता है?
उत्तर-
कार्बनिक रसायनों में पेट्रोरसायन सम्मिलित हैं जो कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबर, प्लास्टिक, रंजक पदार्थ, दवाईयाँ, औषध रसायनों के बनाने में प्रयोग किये जाते हैं।

प्रश्न 38.
रसायन उद्योग आपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है। कैसे
उत्तर-
रसायन उद्योग स्वयं में एक बड़ा उपभोक्ता भी है। आधारभूत रसायन एक प्रक्रिया द्वारा अन्य रसायन उत्पन्न करते हैं जिनका उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोग, कृषि अथवा उपभोक्ता बाजारों के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 39.
इलैक्ट्रोनिक उद्योग के अंतर्गत आने वाले उत्पादों की एक सूची बनाइए।
उत्तर-
इलैक्ट्रोनिक उद्योग के अंतर्गत आने वाले उत्पादों में ट्रांजिस्टर से लेकर टी.वी., टेलीफ़ोन, सेल्यूलर टेलीकॉम टेलीफोन एक्सचेंज, पेज़र, राडार, कंप्यूटर तथा दूरसंचार उद्योग हेतु उपयोगी अनेक अन्य उपकरण आते हैं।

प्रश्न 40.
किस प्रदुषण को फैलाने की जिम्मेदारी उद्योगों पर हैं?
उत्तर-

  • वायु प्रदुषण
  • जल प्रदुषण
  • भूमि प्रदुषण
  • ध्वनि प्रदुषण। .

प्रश्न 41.
वायु प्रदुषण का क्या कारण हैं?
उत्तर-
वायु में सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड आदि गैसों की अधिक अनुपात में विद्यमान रहने के कारण वायु प्रदूषण फैलता है।

प्रश्न 42.
स्थल प्रदुषण का कारण बताइए।
उत्तर-

  • हानिकारक रसायन,
  • औद्योगिक अपशिष्ट,
  • कुड़ा-करकट और मलबों का ढेर।

प्रश्न 43.
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों के योगदान पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-

  • राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उद्योगों का योगदान-पिछले दो दशकों से समस्त घरेलू उत्पाद में विनिर्माण उद्योग का योगदान 27% में से 17% ही है क्योंकि 10% भाग खनिज खनन, गैस तथा विद्युत ऊर्जा का योगदान रहा है।
  • पिछले एक दशक से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में 7% प्रति वर्ष की दर से वृद्धि हुई है। वृद्धि का यह प्रतिशत अगले दशक में 12% अपेक्षित है।
  • वर्ष 2003 से विनिर्माण क्षेत्र का विकास 9 से 10% _प्रति वर्ष की दर से हुआ है।
  • उपयुक्त सरकारी नीतियों तथा औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के नए प्रयासों से अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि विनिर्माण उद्योग अगले एक दशक में अपना लक्ष्य पूर्ण करने में समर्थ है। इस उद्देश्य से राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धा परिषद् (National Manufacturing Competitiveness Council) की स्थापना की गयी है।

प्रश्न 44.
उद्योगों की आदर्श अवस्थिति के लिए किन कारकों का होना अनिवार्य है?
उत्तर-

  • उद्योगों की स्थापना कच्चे माल की उपलब्धता, श्रमिक, पूँजी, शक्ति के सामान तथा बाज़ार आदि की उपलब्धता से प्रभावित होती है।
  • इन सभी कारकों का एक स्थान पर पाया जाना लगभग असंभव है। परिणामस्वरूप विनिर्माण उद्योग की स्थापना हेतु वही स्थान उचित हैं जहाँ ये कारक उपलब्ध हों अथवा जहाँ इन्हें कम मूल्य पर उपलब्ध करना संभव हो।
  • किसी उद्योग की अवस्थिति का निर्धारण उसकी न्यूनतम उत्पादन लागत से निर्धारित होता हैं
  • सरकारी नीतियों तथा निपुण श्रमिकों का उपलब्धता __ भी उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करती है।

प्रश्न 45.
औद्योगिक प्रक्रिया के प्रारंभ होने के साथ-साथ नगरीकरण प्रारंभ होता है। स्पष्ट कीजिए।
अथवा
‘समूहन बचत’ से आपका क्या तात्पर्य हैं?
उत्तर-
औद्योगिक प्रक्रिया के प्रारंभ होने के साथ-साथ नगरीकरण प्रारंभ होता है। कभी-कभी उद्योग शहरों में या उनके समीप लगाए जाते हैं। इस प्रकार औद्योगीकरण तथा नगरीकरण साथ-साथ चलते हैं। नगर उद्योगों को बाज़ार तथा सेवाएँ जैसे – बैंकिंग, बीमा, परिवहन, श्रमिक तथा वित्तीय सलाह आदि उपलब्ध कराते हैं। नगर केंद्रों द्वारा दी गई सुविधाओं से लाभांवित, कई बार अधिकता उद्योग नगरों के आस पास ही केंद्रित हो जाते हैं जिसे ‘समूहन बचत’ (Agglomeration economies) कहते हैं। ऐसे स्थानों पर धीरे-धीरे बड़ा औद्योगिक समूहन स्थापित हो जाता है।

प्रश्न 46.
भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का क्या महत्त्व है?
उत्तर-

  • भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का अपना पृथक महत्व है क्योंकि इसका औद्योगिक उत्पादन में महत्त्वपूर्ण (14 प्रतिशत)
  • योगदान है। यह लगभग 350 लाख व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध करवाकर कृषि के पश्चात् दूसरा वृहत् उद्योग है तथा लगभग 24.6% विदेशी मुद्रा उपार्जित करता है।
  • सकल घरेलू उत्पाद में इसकी भागीदारी लगभग 4% है।
  • देश का यह एकमात्र उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।

प्रश्न 47.
भारत की अधिकांश जूट मिलें पश्चिम बंगाल में क्यों स्थित हैं?
उत्तर-
भारत में अधिकांश जूट मिलें पश्चिम बंगाल में हुगली नदी के किनारे स्थित है। इसके निम्नलिखित मुख्य कारण हैं

  1. जूट उत्पादक क्षेत्रों की निकटता,
  2. सस्ता जल परिवहन,
  3. जूट को संसाधित करने के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता।
  4. सस्ते श्रमिक।
  5. बैंक व बीमा सुविधा।
  6. निर्यात के लिए पत्तन सुविधा।

प्रश्न 48.
भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के महत्त्व पर प्रकाश डालिए
उत्तर-

  • भारत में सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (Software Technology parks), जो सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों को एकल विंडो सेवा तथा उच्च आँकड़े संचार (High data communication) सुविधा प्रदान करते हैं।
  • इस उद्योग का प्रमुख महत्त्व रोजगार उपलब्ध करवाना भी है। 31 मार्च 2005 तक, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में संलग्न व्यक्तियों की संख्या 10 लाख से अधिक थी। अगामी 3 से 4 वर्षों में यह संख्या 8 गुणा होने की संभावना है।
  • यह क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में लगभग 30% स्त्रियाँ हैं।
  • पिछले दो या तीन वर्षों से यह उद्योग विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बन गया है। जिसका कारण तीव्रता से बढ़ता व्यवसाय प्रक्रिया बाह्यस्रोतीकरण (Business Processes Outsourcing – BPO) है।

प्रश्न 49.
प्रदुषण नियंत्रण के लिए में राष्ट्रीय ताप-विद्युत ग्रह (NT PC) के प्रयासों की जानकारी दीजिए।
उत्तर-
राष्ट्रीय ताप विद्युतग्रह (NTPC) द्वारा दिखाया गया मार्ग भारत में राष्ट्रीय ताप विद्युतगृह कारपोरेशन विद्युत प्रदान करने वाली मुख्य निगम है। इसके पास पर्यावरण प्रबंधनतंत्र (EMS) 14001 के लिए आई एस ओ (ISO) प्रमाण पत्र है। यह निगम प्राकृतिक पर्यावरण और संसाधन जैसे जल, खनिज तेल, गैस तथा ईंधन संरक्षण नीति का हिमायती है तथा इन्हें ध्यान में रखकर ही विद्युत संयंत्रों की स्थापना करता है। ऐसा निम्नलिखित उपायों द्वारा संभव है –

  • आधुनिकतम तकनीकों पर आधारित उपकरणों का उचित उपयोग करके तथा विद्यमान उपकरणों में सुधार।
  • अधिकतम राख का प्रयोग कर अपशिष्ट पदार्थों का न्यून उत्पादन।
  • पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने हेतु हरित क्षेत्र की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना।
  • तरल अपशिष्ट प्रबंधन, राख युक्त जलीय पुनर्चक्रण तथा राख-संग्रह (Ash pond) प्रबंधन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।

प्रश्न 50.
किस प्रकार औद्योगिक प्रदुषण, पर्यावरण को क्षरित करता है?
उत्तर-
आज के आधुनिक युग में उद्योगों का अपना अतीव महत्त्व है। उद्योग के बिना न तो आधुनिक विश्व की कल्पना की जा सकती है और न ही विकास की। परंतु वह भी सत्य है कि आधुनिक विश्व पर्यावरण के क्षतिग्रस्त होने में उद्योगों का एक बहुत बड़ा हाथ है। (क) वायु प्रदूषण (ख) जलप्रदूषण (ग) भूमि प्रदूषण (घ) ध्वनिप्रदूषण।

वायु प्रदूषण -अधिक अनुपात में अनचाही गैसों की उपस्थिति जैसे सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड वायु प्रदूषण का कारण है। रसायन व कागज़ उद्योग, ईंटों के भमके, तेल शोधनशालाएँ, प्रगलन उद्योग, जीवाश्म ईंधन दहन तथा छोटे-बड़े कारखाने प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हुए धुआँ निष्कासित करते हैं। विषैली गैसों का रिसाव बहुत भयंकर तथा दूरगामी प्रभावों वाला हो सकता है। वायु प्रदूषण, मानव स्वास्थ्य, पशुओं, पौधों, इमारतों तथा पूरे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं।

जल प्रदूषण -उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता हैं।
जल प्रदूषण के प्रमुख कारक – कागज, लुग्दी, रसायन, वस्त्र, तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधन शालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलैक्ट्रोप्लेट्रिग उद्योग हैं जो रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण तथा भारी व स्थूल धातुएँ जैसे सीसा, पारा, कीटनाशक, उर्वरक, कार्बन, प्लास्टिक और रबर सहित छत्रिम रसायन आदि जल में प्रवाहित करते हैं।

तापीय प्रदूषण-जब कारखानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है।

परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के अपशिष्ट व परमाणु शस्त्र उत्पादक कारखानों से कैंसर, जन्मजात विकार तथा अकाल प्रसव जैसे रोग पैदा होते हैं। मिट्टी व जल प्रदूषण नुकसानदायक संबंधित हैं। मलबे का ढेर विशेषकर काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण तथा कूड़ा-कर्कट मिट्टी को अनुपजा। बनाता है। वर्षा जल के साथ ये प्रदूषक जमीन से रिसते हुए भूमिगत जल तक पहुँच कर उसे भी प्रदूषित कर देते हैं।

ध्वनि प्रदूषण -ध्वनि प्रदूषण से खिन्नता तथा उत्तेजना ही नहीं अपितु श्रवण असक्षमता, दय गति, रक्त चाप तथा अन्य कायिक व्यथाएँ भी बढ़ती हैं। अनचाही ध्वनि, उत्तेजना व मानसिक चिंता का स्रोत है। औद्योगिक तथा निर्माण कार्य, कारखानों के उपकरण, जेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत डिल भी अधिक ध्वनि उत्पन्न करते है।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

प्रश्न 51.
किसी देश के निर्माण में उद्योगों की क्या भूमिका है?
अथवा
आधुनिक युग में उद्योगों के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर-
उद्योग किसी देश की अर्थव्यवस्था और उस देश के लोगों के जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वस्तुतः उद्योगों के बिना आधुनिक विश्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आधुनिक युग में किसी देश के निर्माण में उद्योगों के महत्त्व को निम्न बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं।

  • औद्योगीकरण देश की अर्थव्यवस्था का विकास होता है।
  • उद्योगों से लोगों को दैनिक जीवन में काम आनेवाली वस्तुएँ सुगमता से मिल जाती हैं।
  • उद्योगों के कारण लोगों का जीवन सुख व सुविधा से परिपूर्ण हो सका है।
  • किसी भी देश के लोगों के जीवन स्तर की दशा उस देश के औद्योगिकरण की सीमा पर ही निर्भर है।
  • उद्योगों के कारण विदेशी मुद्रा अर्जन संभव हो पाता है।
  • उद्योगों के कारण रोजगार के अवसरों का सृजन होता है। जिससे बेरोजगारी व गरीबी की समस्या का समाधान होता
  • इस प्रकार आधुनिक समय में उद्योगा किस भी देश की अर्थव्यवस्था में धूरी का काम करते हैं।

प्रश्न 52.
उत्पादों के आधार पर उद्योगों को कैसे वर्गीकृत किया जा सकता है?
अथवा
प्राथमिक उद्योग तथा गौण व तृतीयक उद्योग में अंतर बताइए।
उत्तर-
उत्पादों के आधार पर उद्योगों को प्रमुखतः निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है

  • प्राथमिक उद्योग-इसका तात्पर्य उन उद्योगों से हैं जो प्रकृति द्वारा प्रदान की गई वस्तुओं को प्रयोग के लिए एकत्र करने से संबंधित विभिन्न कार्यों को सम्पिदित करते हैं। उदाहरण के लिए-कृषि, मत्स्यन, खनन आदि।
  • गौण उद्योग-इन्हें द्वितीयक उद्योग भी कहते हैं। ये वे उद्योग हैं जिनमें कच्चे माल अथवा प्राथमिक उत्पादों को मानव के लिए उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। उदाहरण के लिए–चीनी उद्योग, काजग उद्योग, वस्त्र उद्योग आदि।
  • तृतीयक उद्योग-इनका आशय उन उद्योगों से है जिनकी विविध क्रियाएँ उद्योगों को सरलता पूर्वक चलाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये उद्योग सेवा क्षेत्र को भी अपने में सम्मिलित करते हैं। जैसे-यातायात, संचार, बैंक, शिक्षा,बीमा आदि।

प्रश्न 53.
कृषि आधारित उद्योगों से आपका क्या तात्पर्य है? भारत में कृषि उत्पादों पर आधारित किन्हीं चार प्रमुख उद्योगों के नाम लिखिए।
अथवा
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि पर आधारित उद्योगों का क्या महत्त्व है?
अथवा
स्पष्ट कीजिए कि भारतीय उद्योग मुख्यतः कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योग हैं?
उत्तर-
कृषि आधारित उद्योगों का तात्पर्य उन उद्योगों से है जो मुख्यत: कृषि पर आधारित है। जैसे चीनी उद्योग, कपड़ा उद्योग, पटसन उद्योग आदि। भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ अधिकांश लोग कृषि में लगे हुए हैं। भारत में विभिन्न उद्योगों के लिए कृषि से कच्चा माल प्राप्त है। इस प्रकार के सभी उद्योग जिनका कच्चा माल कृषि के माध्यम से प्राप्त होता है कृषि आधारित उद्योग कहलाते हैं। चाहे वनस्पति तेल के उद्योग हों या कागज उद्योग, रबड़ उद्योग हो या डेरी व्यवसाय, सभी कृषि पर आधारित उद्योगों के ही उदाहरण हैं। कृषि आधारित उद्योगों का भारत की अर्थव्यवस्था में विशेष महत्त्व है। इनके महत्त्व को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है –

  • इन उद्योगों के माध्यम से दैनिक जीवन में काम आने वाली अनेक वस्तुओं का निर्माण किया जाता है जिससे लोगों की दैनिक आवश्कताओं की पूर्ति संभव हो पाती है।
  • भारत जैसे विकासशील देश के लिए कृषि आधारित उद्योगों का महत्त्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे कच्चा माल देश में ही उपलब्ध हो जाता है। इससे कच्चे माल पर कम व्यय करके तैयार माल पर अधिक-से-अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है। इससे आय में कई गुना बढ़ोतरी हो जाती है।
  • इस प्रकार के उद्योग देश के करोड़ों लोंगों का रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं।
  • इस प्रकार के उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों के तीव्र विकास में सहयोग मिलता हैं
  • कृषि आधारित उद्योगों से निर्मित वस्तुओं के माध्यम से विदेशी मुद्रा का अर्जन संभव है।

प्रश्न 54.
रसायन उद्योग से आपका क्या आशय हैं?
अथवा
रसायन उद्योग का महत्त्व अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
रसायन उद्योग का तात्पर्य उन उद्योगों से है जिनके द्वारा अनेक प्रकार के उत्पाद जैसे-औषधियाँ, रंगाई का सामान, कीटनाशक, दवाएँ, प्लास्टिक, पेंट आदि का उत्पादन किया जाता है।

महत्त्व-आज रसायन उद्योग भारत का एक अति प्रमुख उद्योग है। वस्तुतः लोहा और इस्पात, इंजीनियरिंग तथा वस्त्र उद्योग के पश्चात् आज हमारे दशे में रसायन उद्योग चौथे स्थान पर है। भारत में अनेक प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उत्पादन किया जाता है। जैसे-दवाइयाँ, कीटनाशक, रंग, प्लास्टिक आदि। कीटनाशक दवाओं का कृषि के क्षेत्र में अपना विशेष महत्त्व है। आज देश मूलभूत और व्यापक औषधियों के निर्माण में बिल्कुल आत्मनिर्भर बन गया है। आज विभिन्न प्रकार की औषधियों के निर्यात के माध्यम से भारत प्रतिवर्ष कई करोड़ विदेशी मुद्रा का अर्जन कर रहा है।

प्रश्न 55.
सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्रों के नाम बताइए
उत्तर-
सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्रों के नाम निम्नलिखित हैं-

प्रदेश — स्थान
महाराष्ट्र — मुंबई, शोलापुर, पूणे, वर्धा, नागपुर, औरंगाबाद, जलगाँव।
गुजरात — अहमदाबाद, बड़ोदरा, सूरत, पोदबंदर।
पश्चिम बंगाल — हावड़ा, मुर्शिदाबाद, हुगली, श्रीरामपुर।
उत्तर प्रदेश — कानपुर, मुरादाबाद, आगरा, मोदीनगर।
मध्यप्रदेश — ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, देवास।
तमिलनाडु . — कोयम्बटूर, चैन्नई, मदुरै।

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प्रश्न 56.
उद्योगों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
अथवा
प्रयुक्त कच्चे माल, प्रमुख भूमिका, पूँजी निवेश, स्वामित्व, तथा कच्चे और तैयार माल की मात्रा व भार के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर-
उद्योगों का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है –

1. प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर-

  • कृषि आधारित – सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशम वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, कॉफी तथा वनस्पति तेल उद्योग।
  • खनिज आधारित-लोहा तथा इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औज़ार तथा पेट्रोरासायन उद्योग।

2. प्रमुख भूमिका के आधार पर –

  • आधारभूत उद्योग – जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर अन्य उद्योग निर्भर हैं जैसे-लोहा इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग।
  • उपभोक्ता उद्योग-जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीमो उपयोग हेतु करते हैं जैसे-चीनी, दंतमंजन, कागज, पंखे, सिलाई मशीन आदि।

3. पूँजी निवेश के आधार पर-एक लघु उद्योग को परिसंपत्ति की एक इकाई पर अधिकतम निवेश मूल्य के परिप्रेक्ष्य में परिभाषित किया जाता है। यह निवेश सीमा, समय के साथ परिवर्तित होती रहती है। अधिकतम स्वीकार्य निवेश के आधार पर की जाती है। यह निवेश मूल्य समय के साथ बदला गया है। वर्तमान में अधिकतम निवेश एक करोड़ रूपये तक रखी गई है। यदि किसी उद्योग में यह निवेश एक करोड़ रुपये से अधिक है तो उसे बृहत् उद्योग कहा जाएगा।

4. स्वामित्व के आधार पर –

  • सार्वजनिक क्षेत्र ऐसे उद्योग जो, सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित तथा सरकार द्वारा संचालित होते हैं – जैसे भारत हैवी इलैक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL) तथा स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) आदि।
  • निजी क्षेत्र के उद्योग-जिनका एक व्यक्ति के स्वामित्व में और उसके द्वारा संचालित अथवा लोगों के स्वामित्व में या उनके द्वारा संचालित है। टिस्को, बजाज ऑटो लिमिटेड, डाबर उद्योग आदि।
  • संयुक्त उद्योग-वैसे उद्योग जो राज्य सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयास से चलाये जाते हैं। जैसे – ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL)
  • सहकारी उद्योग-जिनका स्वामित्व कच्चे माल की पूर्ति करने वाले उत्पादकों, श्रमिकों या दोनों के हाथों में होता है। संसाधनों का कोष संयुक्त होता है तथा लाभ-हानि का विभाजन भी अनुपातिक होता है जैसे-महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, केरल के नारियल पर आधारित उद्योग आदि।

5. कच्चे तथा तैयार माल की मात्रा व भार के आधार पर-

  • भारी उद्योग जैसे लोहा तथा इस्पात आदि।
  • हल्के उद्योग जो कम भार वाले कच्चे माल का प्रयोग कर हल्के तैयार माल का उत्पादन करते हैं जैसे-विद्युतीय उद्योग।

प्रश्न 57.
लोहा और इस्पात उद्योग केवल प्रायद्वीपीय भारत में ही क्यों स्थित हैं?
उत्तर-
भारत में लोहा और इस्पात उद्योग मूलत5 1830 में पोर्टोनोवा में शुरू हुआ था लेकिन यह कुछ समय बाद बंद हो गया। इसके बाद कुल्टी में 1864 में लोहा एवं इस्पात संयंत्र की स्थापना की गई।
लेकिन आधुनिक लोहा एवं इस्पात उद्योग की वास्तविक और बड़े पैमान पर शुरुआत 1907 में जमशेपुर में टाटा स्टील एंड आयरन फैक्ट्री की स्थापना के साथ हुई।

लोहा और इस्पात उद्योग एक भारी उद्योग है। इस उद्योग के मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भाग में ही केन्द्रित होने के निम्नलिखित कारण हैं-

  • इस उद्योग में भारी तथा अधिक स्थान घेरने वाले कच्चे माल का उपयोग होता है।
  • इस उद्योग में कच्चे माल के रूप में लौह, अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर और मैंगनीज आदि का प्रयोग होता है।
  • प्रायद्वीपीय भागों में इन सभी कच्चे मालों की उपलब्ध ता प्रचुर मात्रा में सुलभ है।
  • इस उद्योग का उत्पादित माल भी भारी होता है। इसके लिए उत्तम परिवहन व्यवस्था वांक्षनीय है।

प्रश्न 58.
भारतीय वस्त्र उद्योग के विषय में आप क्या जानते हैं?
अथवा
भारतीय सूती वस्त्र उद्योग के विकास से संबंधित तथ्यों पर प्रकाश डालें।
अथवा
मिश्रित कपड़ा मिल और कताई मिल में क्या अंतर
अथवा
भारतीय सूती वस्त्र उद्योग में हथकरघा, शक्ति चालित करघा, मिश्रित वस्त्र मिलों तथा कताई मिलों की भूमिका समझाइए।
अथवा
भारतीय सूती वस्त्र उद्योग के मुंबई में स्थानीयकरण के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालें।
उत्तर-
प्राचीनकाल से ही भारतीय वस्त्र उद्योग से परिचित हैं। सूती कपड़ा उद्योग भारत का सबसे पुराना वस्त्र उद्योग है। प्राचीन काल से ही भारत में हाथ खड्डी और चरखा के माध्यमे से सूत काता जाता है। आधुनिक भारत में वस्त्र उद्योग की स्थापना कोलकता में 1818 ई. में कारखाने की स्थापना के साथ हुई। परंतु इसका वास्तविक प्रारंभ मुंबई में कपास उद्योग के शुरु होने के साथ हुआ। कपडों मिलें मुखयतः दो प्रकार की होती हैं-

  1. मिश्रित कपड़ा मिल।
  2.  कताई मिल।

मिश्रित कपड़ा मिलों में कातने और बुनने का काम किया जाता है। जबकि कताई मिलों में केवल कातने का काम किया जाता है।
हाथ से काता गया धागा खादी उद्योग के काम आता है जबकि मशीनों से काता हुआ धागा प्रायः मिश्रित वस्त्र मिलों में काम आता है। अपने देश में 1986 तक लगभग 1014 कपड़ा मिलें थी। इनमें से 282 मिश्रित कपड़ा मिलें थी जबकि 732 कताई मिलें थीं। 1997 ई. तक कताई मीलों की संख्या बढ़कर1719 तक पहुँच गई।

सूती वस्त्र उद्योग सबसे प्रमुख रूप से भारत के दो राज्यों में केन्द्रित हैं (1) महाराष्ट्र (2) गुजरात। महाराष्ट्र में जहाँ सबसे प्रमुख केन्द्र मुम्बई है वहीं गुजरात में सबसे प्रमुख केन्द्र है अहमदाबाद।

सूतीवस्त्र उद्योग के मुख्य रूप से इन्हीं स्थानों पर केन्द्रित होने के प्रमुख कारण निम्नवत हैं-

  1. ये क्षेत्र कपास उत्पादक क्षेत्रों के समीप स्थित हैं।
  2. यहाँ की जलवायु आर्द्र है।
  3. यहाँ सस्ते दर पर कुशल मजदूर उपलब्ध है।
  4. यहाँ परिवहन की अच्छी सुविधा उपलब्ध हैं
  5. ये क्षेत्र रेल व सड़क मार्गों से पूरे देश से जुड़े हुए हैं।
  6. इन क्षेत्रों में जनसंख्या का अच्छा भाग निवास करता है इससे स्थानीय मण्डी उपलब्ध हो जाती हैं
  7. इन क्षेत्रों से सूती वस्त्र आयात करने वाले देशों जैसे-अफ्रीका, यूरोप और सऊदी अरब आदि में पहुँचाना अधि क सुगम है।

इनके अलावा कानपुर, नागपुर, शोलापुर, दिल्ली, कोलकाता, कोयम्बटूर आदि स्थानों पर भी उस उद्योग के केंद्र है।।
भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा उपलब्ध कराने वाला दूसरा वस्त्र उद्योग पटसन वस्त्र उद्योग है। हमारे देश में पटसन मिल की स्थापना सबसे पहले कोलकाता के पास 1859 में की गई थी। वर्तमान समय में भारत में लगभग 66 पटसन के कारखाने हैं जिनमें लगभग 1.39 मिलियन टन पटसन का सामान तैयार किया जाता है। हालांकि पटसन उद्योग प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल में केन्द्रित हैं फिर भी इसके कुछ कारखाने बिहार, तमिलनाडु और उत्तर प्रेदश में भी स्थित है।

भारत में ऊनी वस्त्र उद्योग मुख्यतः अमृतसर, धारीवाल, कानपुर, मुम्बई, श्रीनगर, बंगलौर, लुधियाना, और जामनगर में स्थित हैं।
भारत में रेशमी वस्त्रों की भी संसार भर में धाक है। रेशमी वस्त्र उद्योग मुख्यतः मैसूर, कांचीपुरम, वाराणासी, श्रीनगर, तथा अमृतसर में स्थित हैं।

प्रश्न 59.
उन स्थानों के नाम बतायें जहाँ निम्नलिखित उद्योग प्रमुखतः केन्द्रित हैं
(1) सूती वस्त्र उद्योग (2) रेलवे इंजन (3) भारी इंजीनियरी और मशीनरी (4) मालगाड़ी के डिब्बे (5) पोत निर्माण (6) सवारी गाड़ी के डिब्बे (7) परिवहन उपकरण (8) वायुयान निर्माण (9) उर्वरक उद्योग ( 10 ) सीमेंट उद्योग (11) पेट्रो-रसायन उद्योग ( 12 ) तेल परिष्करण (13) औषधि निर्माण (14) इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ (15) जूट वस्व।
उत्तर-
उद्योग — प्रमुख केन्द्र
(1) सूती वस्त्र उद्योग — मुम्बई, अहमदाबाद, शोलापुर, पूणे, वर्धा, नागपुर, औरंगाबाद, कानपुर, राजकोट, मुर्शिदाबाद, हुगली, कोयम्बटूर।
(2) रेलवे इंजन — चितरंजन, वाराणासी, जमशेदपुर।
(3) भारी इंजीनियरी और मशीनरी — रांची, बंगलौर, पिंजौर, हैदराबाद, कालामसेरी।
(4) मालगाड़ी के डिब्बे — चेन्नई के निकट, विभिन्न रेल कारखानों में।
(5) पोत निर्माण — विशाखापट्टनम्, कोलकाता, मुम्बई, कोच्चि, मुरमूगाव।
(6) सवारी गाड़ी के डिब्बे — पैराम्बूर, बंगलौर, कपूरथला, कोलकता।
(7) परिवहन उपकरण — मुम्बई, लखनऊ, पूणे, दिल्ली, गुडगांव, चेन्नई, कोलकाता, जमशेदपुर, हैदराबाद, बंगलौर।
(8) वायुयान निर्माण — बंगलौर, कानपुर, नासिक, कारेपुट, हैदराबाद, लखनऊ।
(9) उर्वरक उद्योग — तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, केरल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, – उड़ीसा, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, पं. बंगाल, मध्यप्रदेश गोवा असम।
(10) सीमेंट उद्योग — कर्नाटक, मध्यप्रदेश, असम, हिमाचल, प्रदेश, आंध्रप्रदेश।
(11) पेट्रो-रसायन उद्योग — बड़ोदरा, मुंबई, व निकटवर्ती क्षेत्र।
(12) तेल परिष्करण — डिगबोई, विशाखपटनम, ट्राम्बे, नूनमती, बरौनी, कोयली, चेन्नई, कोचीन, मथूरा, करनाल।
(13) औषधि निर्माण — ऋषिकेश, हैदारबाद, चेन्नई, दिल्ली।
(14) इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ — भोपाल, झाँसी, बंगलौर, हैदराबाद, पूणे, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई, कानपुर, लखनऊ, दिल्ली।
(15) जूट वस्त्र। — पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, त्रिपुरा।

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प्रश्न 60.
ज्ञान आधारित उद्योग से आपका क्या आशय है? भारत में इसका उद्योग की स्थिति कैसी है?
उत्तर-
ज्ञान आधारित उद्योग का आशय सूचना औद्योगिकी से है। इसके विकास ने देश की अर्थव्यवस्था तथा लोगों की जीवन शैली को बहुत ही प्रभावित किया है। इसके कारण देश और देशवासियों के लिए उन्नति के उसके द्वार खुल गये। भारत में सॉफ्टवेयर उद्योग अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र के रूप में उभरा है। पिछले दशक में इसकी मिश्रित वार्षिक वृद्धि दर 50% से अधिक थी। सन् 1989-90 में इस उद्योग का कुल व्यापार 3.45 अरब रुपयों का था। सन् 2000- 01 में यह बढ़कर 377.50 अरब रुपयों का हो गया। अत: यह सॉफ्टवेयर उद्योग इलैक्ट्रोनिक्स हार्डवेयर उत्पादन से आगे निकल गया।

सूचना प्रौद्योगिकी, सॉफ्टवेयर और सेवा उद्योग की भारत के सकल घरेलु उत्पाद में कुल 2% भागीदारी है।
सन् 2000-01 में भारत के कुल निर्यात में इस उद्योग का 12% का योगदान था। भारत के सॉफ्टवेयर व्यावसायिकों ने विश्व बाजार में अपने माल की गुणवत्ता की धाक जमा दी। भारत के सॉफ्टवेयर उद्योग ने उत्कृष्ट कोटि के उत्पादन तैयार करने में उल्लेखनीय विशिष्टता प्राप्त कर ली है। भारत की अनेक सॉफ्टवेयर कंपनियों अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाण पत्र प्राप्त करने में प्राप्त करने में सफल रही है।

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने वाली अधिकतर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने सॉफ्टवेयर विकास केन्द्र या अनुसंधान विकास केन्द्र खोल रखे हैं।

प्रश्न 61.
औद्योगिक इकाइयों के आधार पर भारत को किन-किन प्रदेशों में बाँटा गया है?
उत्तर-
औद्योगिक इकाइयों तथा उद्योग समूहों के आधार पर भारत को निम्नलिखित प्रदेशों में बांटा गया है- ..

1. मुबई-पूणे औद्योगिक प्रदेश-इसमें थाणे से पुणे और नासिक से शोलापुर तक का क्षेत्र विस्तृत हैं इस प्रदेश का विकास मुबंई से सूती वस्त्र उद्योग की उपस्थिति के साथ हीस प्रारंभ हुआ। 1869 में स्वेज नहर के खुलने के बाद मुंबई पत्तन को बहुत प्रोत्साहन मिला। उद्योगों की आवश्यकता का पूरा करने के लिए पश्चिमी घाट में जल-विद्युत का भी विकास किया गया। यहाँ सूती वस्त्र के साथ ही रसायन उद्योग भी विकसित हुआ।

2. हुगली औद्योगिक प्रदेश-यह हुगली नदी के दोनों किनारों पर उत्तर में बंसवेरिया से दक्षिण में बिड़ला नगर तक 100 किमी. की दूरी में विस्तृत है। कोलकता (हावड़) इस प्रदेश का हृदय स्थल है। इस प्रदेश का विकास 17वीं शताब्दी में हुगली पर नदीय पत्तन के विकास के साथ हुआ। 1855 में रिशरा में जूट की पहली मिल के स्थापित होने के साथ ही इस प्रदेश में आधुनिक औद्योगिक समूहन के युग का आरंभ हुआ।

3. बंगलौर-तमिलनाडु औद्योगिक प्रदेश-इस प्रदेश का विकास स्वतंत्रता के बाद हुआ। सन् 1960 तक उद्योग मात्र बंगलौर, सेलम और महुरै जिलों तक ही सीमित थे लेकिन अब इनका विस्तार तमिलनाडु तक हो चुका है। . इस प्रदेश के विकास का आरंभ 1932 में निर्मित पाइकरा जल-विद्युत संयंत्र के साथ हुआ। इस प्रदेश में सबसे पहले सूती वस्त्र उद्योग ने अपने पैर जमाये।

4. गुजरात औद्योगिक प्रदेश-इस प्रदेश का केन्द्र अहमदाबाद और बड़ोदरा के मध्य है। इस प्रदेश का विस्तार बलसाड़ और सूरत से लेकर जामा नगर तक है। इसका विकास भी सन् 1860 में सूती वस्त्र उद्योग के विकास के साथ हुआ।

5. छोटानागपुर प्रदेश-यह प्रदेश झारखंड, उत्तरी उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल तक विस्तृत है। यह अपने धातुकर्मी उद्योगों के लिए विख्यात हैं इस प्रदेश के विकास का आधार दामोदर घाटी में कोयले तथा झारखंड और उत्तरी उड़ीसा में ध त्विक और अधात्विक खनिजों की खोज है।

6. विशाखापट्टनम-गुंटूर प्रदेश-यह विशाखापट्टनम जिले से कुर्नूल और प्रकाशम जिलों तक विस्तृत है। गोदावरी श्रेणी के कोयला क्षेत्र इस प्रदेश को शक्ति और ऊर्जा प्रदान करते हैं

7. गुड़गांव-दिल्ली-मेरठ प्रदेश-यह प्रदेश खनिज और शक्ति के स्त्रोतों से दूर है अतः यहाँ हल्के और बाजारोन्मुख उहोग स्थापित किये गये हैं। इस प्रदेश के मुख्य उद्योग हैं-(1) इलेक्ट्रोनिक्स (2) इंजीनियरी के हल्के सामान, (3) बिजली का सामान। इनके अलावा-सूती, ऊनी, कृत्रिम वस्त्रा, हौजरी, चीनी, सीमेंट, मशीनी उपकरण, ट्रैक्टर, साइकिल, कृषीय उपकरण, रसायन, वनस्पति और सॉफ्टवेयर उद्योग का प्रमुख स्थान है।

8. कोल्लम-तिरुवनन्तपुरम प्रदेश-इस औद्योगिक प्रदेश के आधार प्रदान किया है-रोपण कृषि और जल-विद्युत परियोजनाओं ने। इस प्रदेश के मुख्य औद्योगिक केन्द्र हैं-

  • कोल्लम,
  • तिरुवनन्तपुरम
  • अलावए
  • कोच्चि
  • अलप्पुजा।

मानचित्र

प्रश्न 1.
भारत के मानचित्र पर सूती, उनी, तथा रेशमी वस्त्र उद्योगों का वितरण दशाईए।
उत्तर-
HBSE 10th Class Social Science Solutions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग 3

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. सही उत्तर का चयन कीजिए।

प्रश्न 1.
चीनी से गन्ना बनाना किस क्षेत्रक का उदाहरण है।
(क) प्राथमिक
(ख) द्वितीयक
(ग) तृतीयक
(घ) सेवा
उत्तर-
(ख) द्वितीयक

प्रश्न 2.
जी.डी.पी. में विनिर्माण उद्योग का योगदान कितना
(क) 17%
(ख) 27%
(ग) 10%
(घ) 30%
उत्तर-
(क) 17%

प्रश्न 3.
सूती वस्त्र किस पर आधारित उद्योग है?
(क) पूँजी
(ख) स्वामित्व
(ग) कृषि
(घ) पोटाश
उत्तर-
(ग) कृषि

प्रश्न 4.
ऑयल इंडिया लिमिटेड किस क्षेत्र का उदाहरण है?
(क) सार्वजनिक
(ख) निजी
(ग) संयुक्त
(घ) सहकारी
उत्तर-
(घ) सहकारी

प्रश्न 5.
वस्त्र उद्योग का औद्योगिक उत्पादन में क्या योगदान है?
(क) 14%
(ख) 18%
(ग) 21%
(घ) 32%
उत्तर-
(ग) 21%

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

प्रश्न 6.
जी.डी.पी में वस्त्र उद्योग की कितनी भागीदारी है?
(क) 2%
(ख) 3%
(ग) 4%
(घ) 7.5%
उत्तर-
(क) 2%

प्रश्न 7.
वस्त्र उद्योग में लगातार कितने लोगों को रोजगार मिला हुआ है?
(क) 350 लाख
(ख) 125 लाख
(ग) 500 लाख
(घ) 1 करोड़
उत्तर-
(ग) 500 लाख

प्रश्न 8.
विश्व में पटसन तथा पटसन निर्मित सामान का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन है?
(क) बांगलोदश
(ख) श्रीलंका
(ग) ब्राजील
(घ) भारत
उत्तर-
(क) बांगलोदश

प्रश्न 9.
भारत में कितने पटसन उद्योग हैं?
(क) 60
(ख) 70
(ग) 98
(घ) 110
उत्तर-
(ग) 98

प्रश्न 10.
पटसन निर्यात में भारत को कौन सा स्थान प्राप्त है?
(क) प्रथम
(ख) द्वितीय
(ग) तृतीय
(ग) पंचम
उत्तर-
(ख) द्वितीय

प्रश्न 11.
पटसन उद्योग प्रत्यक्ष रूप से कितने लोगों को रोजगार दिलाती है?
(क) 2.61 लाख
(ख) 3.50 लाख
(ग) 51 लाख
(ग) 6.75 लाख
उत्तर-
(ख) 3.50 लाख

प्रश्न 12.
राष्ट्रीय पटसन नीति कब अपनाई गई?
(क) 2001
(ख) 2002
(ग) 2005
(घ) 2007
उत्तर-
(क) 2001

प्रश्न 13.
1947 ई. में देश विभाजन के कितना जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान में चला गया?
(क) 1/2
(ख) 1/3
(ग) 2/3
(घ) 3/4
उत्तर-
(ग) 2/3

प्रश्न 14.
भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में कौन सा स्थान है?
(क) पहला
(ख) दुसरा
(ग) तीसरा
(घ) चौथा
उत्तर-
(घ) चौथा

प्रश्न 15.
विश्व में गुड़ और खंडसारी उत्पादन में किस देश को प्रथम स्थान प्राप्त है?
(क) अमेरिका
(ख) इंग्लैण्ड
(ग) मेक्सिको
(घ) भारत
उत्तर-
(ख) इंग्लैण्ड

प्रश्न 16.
इस्पात के उत्पादन के लिए लौह अयस्क, कोकिंग कोल तथा चूना पत्थर का अनुपात क्या होना चाहिए?
(क) 4 : 2 : 1
(ख) 5 : 3 : 1
(ग) 7 : 5 : 4
(घ) 10 : 12 : 4
उत्तर-
(घ) 10 : 12 : 4

प्रश्न 17.
इस्पात को कठोर बनाने के लिए किस खनिज का इस्तेमाल होता है?
(क) चाँदी
(ख) ताँबा
(ग) मैंगनीज
(घ) अभ्रक
उत्तर-
(ग) मैंगनीज

प्रश्न 18.
भारत में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष इस्पात की खपत कितनी है?
(क) 50 किग्रा.
(ख) 105 किग्रा.
(ग) 200 किग्रा.
(घ) 32 किग्रा.
उत्तर-
(क) 50 किग्रा.

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Geography Chapter 6 विनिर्माण उद्योग

प्रश्न 19.
विश्व में स्पंज आइरन का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन है?
(क) श्रीलंका
(ख) जर्मनी
(ग) भारत
(घ) फ्रांस
उत्तर-
(ग) भारत

प्रश्न 20.
वर्ष 2004 में इस्पात निर्यात के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की हिस्सेदारी कितनी थी?
(क) 2.25%
(ख) 3.50%
(ग) 5%
(घ) 6.25%
उत्तर-
(घ) 6.25%

प्रश्न 21.
एल्यूमिनियम प्रगलन का मुख्य कच्चा माल क्या है?
(क) बॉक्साइट
(ख) लोहा
(ग) कोयला
(घ) अभ्रक
उत्तर-
(ख) लोहा

प्रश्न 22.
रसायन उद्योग का जी.डी.पी. में कितनी भागीदारी है?
(क) 2%
(ख) 4%
(ग) 6%
(घ) 3%
उत्तर-
(ग) 6%

प्रश्न 23.
कौनसा उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है?
(क) सीमेंट
(ख) एल्यूमिनियम
(ग) रसायन
(घ) चीनी
उत्तर-
(क) सीमेंट

प्रश्न 24.
भारत में पहला सीमेंट उद्योग कब लगाया गया था?
(क) 1857
(ख) 1895
(ग) 1904
(घ) 1907
उत्तर-
(ख) 1895

प्रश्न 25.
भारत में कितने सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क हैं?
(क) 15
(ख) 18
(ग) 25
(घ)75
उत्तर-
(क) 15

2. सत्य कथनों के आगे (√) तथा असत्य कथनों के आगे (x) का चिह्न लगायें

(i) भारत में औषधि उत्पादन का पूरे उद्योग क्षेत्र में 14% का योगदान हैं
(ii) भारत में पहला उर्वरक संयंत्र कुल्टी में लगया गया।
(iii) वाराणासी में रेल इंजनों का निर्माण होता है।
(iv) वर्तमान में भारत में पोत निर्माण के सभी प्रमुख केन्द्र निजी क्षेत्रों में हैं।
(v) जयपुर और इंदौर मे सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क स्थित नहीं है।
(vi) एल्यूमिनियम विद्युत तथा ऊष्मा का सूचालक है।
(vii) भारत में प्राप्त तांबा कुल आवश्यकता का केवल – 50% भाग ही है।
उत्तर-
(i) √
(ii) x
(iii) √
(iv) x
(v) x
(vi) √
(vii) √

3. निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति करें।

(क) भारत जाम्बिया, चिली, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाड़ा से …….. आयात करता है। (तांबा/लोहा)
(ख) इस समय भारत में ……… समन्वित लोहा और इस्पात संयंत्र है। ( 10/15)
(ग) कुल्टी ……… में स्थित है। (पश्चिम बंगाल/ तमिलनाडु)
(घ) मानव निर्मित रेशों को रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से लुगदी, कोयला तथा ……. से प्राप्त किया जाता है। (पेट्रोलियम/विद्युत)
(ङ) जूट का पहला कारखाना ……… में लगाया गया। (कुल्टी/ रिशरा)
(च) सेलम इस्पात संयंत्र ……… में स्थित है।
उत्तर-
(क) तांबा
(ख) 10
(ग) पश्चिम बंगाल
(घ) पेट्रोलियम
(ङ) रिशरा
(च) तमिलनाडु।

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4. निम्नलिखित वाक्यों को पूरा करें।

(i) एक टन अल्यूमिनियम के लिए लगभग 6 टन ……….. तथा 18,600 किलोवाट ……… की आवश्यकता होती है।
(ii) घाटशिला ………. राज्य में स्थित है।
(iii) भारत में लगभग ………… लाख किलोग्राम रेशम का धागा तैयार होता है।
(iv) आयल एक …………. उद्यम है।
(v) जर्मनी के सहयोग से स्थापित इस्पात संयंत्र ….. ..में है।
उत्तर-
(i) बॉक्साइट विद्युत
(ii) झारखंड
(iii) 8.5
(iv) संयुक्त
(v) राउरकेला।

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 5 जन-संघर्ष और आंदोलन

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 5 जन-संघर्ष और आंदोलन Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 5 जन-संघर्ष और आंदोलन

जन-संघर्ष और आंदोलन प्रश्न उत्तर HBSE 10th Class प्रश्न-1.
क्या हड़तालें, धरने, प्रदर्शन व बंद भारत में इसलिए होते हैं कि हमारा देश लोकतंत्र में परिपक्व नहीं हुआ? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 60)
उत्तर-
हड़ताल, प्रदर्शन बंद आदि का सम्बन्ध लोकतंत्र के परिपक्व होने से नहीं है। जहाँ लोकतंत्र होता है, वहाँ भी हड़ताले होती हैं। यह सब जन-जागृति के साधन हैं।

जन-संघर्ष और आंदोलन के प्रश्न उत्तर HBSE 10th Class प्रश्न-2.
लामबंदी क्या होती है? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ :62)
उत्तर-
लामबन्दी लोगों को मात्र एकत्रित करना नहीं होता। यह आलू की बोरी नहीं है। यह लोगों में चेतना जगाने व उन्हें किसी आन्दोलन व संघर्ष के लिए एक-जुट करना होता है।

प्रश्न-3.
2006 में नेपाल में किस प्रकार का आन्दोलन हुआ था?
उत्तर-
एक विलक्षण प्रकार का जन-आन्दोलन, लोकतंत्र की वापसी के लिए।

प्रश्न-4.
नेपाल लोकतंत्र के मामले में किस लहर के देशों में एक है?
उत्तर-
तीसरी लहर के देशों का एक देश।

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प्रश्न-5.
अप्रैल, 2004 को नेपाल के आन्दोलनकारियों ने राजा को कैसा अल्टीमेटम दिया था?
उत्तर-
देश में लोकतंत्र की बहाली का अल्टीमेटम।

प्रश्न-5(i).
माओवादी कौन हैं?
उत्तर-
नेपाल के वह साम्यवादी जो चीन गणराज्य के नेता माओ के विचारों से प्रभावित हुए तथा जो सशस्त्र तरीकों से क्रान्ति चाहते थे।

प्रश्न-6.
बोलिविया के लोगों ने किस कारण संघर्ष किया था?
उत्तर-
बोलिवया के लोगों ने (2000 में) पानी के निजीकरण के विरुद्ध संघर्ष किया था। इसे जलयुद्ध भी कहा जाता है।

प्रश्न- 7.
‘मार्शल ला’ किसे कहते हैं?
उत्तर-
सैनिकों के शासन जो सैनिक कानूनों द्वारा चलता है। सैनिकों के कानून को मार्शल ला कहा जाता है।

प्रश्न-8.
‘फेडेकोर’ क्या है?
उत्तर-
बोलिविया में पानी के निजीकरण के विरुद्ध आन्दोलन की अगुआई इंजीनियरों, पर्यावरणवादियों व कामकाजी लोगों के संगठन ने की थी। इसे फेडेकोर कहते हैं।

प्रश्न-9.
दबाव-समूह का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
अपनी माँगों के लिए सरकार व अधिकारियों पर जोर डालने वाले संगठित समूह को दबाव-समूह कहते हैं।

प्रश्न- 10.
‘बामसेफ’ क्या है?
उत्तर-
पिछड़ी जाति व अल्पसंख्यक सामुदायिक कर्मचारियों का एक संगठन जो अपने साथ अनेकों समूहों को माँगों की पूर्ति के लिए एकत्रित कर लेते हैं।

प्रश्न-11.
क्या दबाव-समूह व जन-आन्दोलन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं?
उत्तर-
कुछ सीमा तक, ऐसे समूह व आन्दोलन लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। यह शासकों पर दबाव डाल कर लोकहित के कार्य करने का साधन होते हैं।

प्रश्न-12.
क्या दबाव-समूहों का सम्बन्ध किसी विशेष तबके से होता है अथवा पूरे समान से?
उत्तर-
किसी विशेष तबके से।

प्रश्न-13.
नेपाल में 2006 में चले आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर-
नेपाल के राजा बीरेन्द्र के रहस्यमय कत्लेआम के बाद नए राजा ज्ञानेन्द्र ने सत्ता सम्भाली। वह नेपाल में चल रहे लोकतांत्रिक शासन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार की अलोकप्रियता और कमजोरी का उन्होंने फायदा उठाया। सन् 2005 की फरवरी में राजा ज्ञानेन्द्र ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को अपदस्थ करके जनता द्वारा निर्वाचित सरकार को भंग कर दिया। 2006 की अप्रैल में जो आन्दोलन उठ खड़ा हुआ उसका लक्ष्य शासन की बागडोर राजा के हाथ से लेकर दोबारा जनता के हाथों में सौंपना था।

प्रश्न-14.
बोलिविया में जलसंकट की चर्चा कीजिए। वहाँ जल संघर्ष क्यों भड़का?
उत्तर-
बोलिविया लातिनी अमेरिका का एक गरीब देश है। विश्व बैंक ने यहाँ की सरकार पर नगरपालिका द्वारा की जा रही जलापूर्ति से अपना नियंत्रण छोड़ने के लिए दबाव डाला। सरकार ने कोचबंबा शहर में जलापूर्ति के अधिकार एक बहुराष्ट्रीय कंपनी को बेच दिए। इस कंपनी ने आनन-फानन में पानी की कीमत में चार गुना इजाफा कर दिया। अनेक लोगों का पानी का मासिक बिल 100 रुपये तक जा पहुँचा जबकि बोलिविया में लोगों की औसत आमदनी 5000 रुपये महीना है। इसके फलस्वरूप स्वतरुस्फूर्त जन-संघर्ष भड़क उठा।

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प्रश्न-15.
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी संघर्ष के पीछे संगठन किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं?
उत्तर-
एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी संघर्ष के पीछे बहुत से संगठन होते हैं। पर संगठन दो तरह से अपनी भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक दलों के निर्माण द्वारा ऐसे संगठन राजनीति में प्रत्यक्ष भागीदारी करते हैं, चुनाव लड़ते हैं, सरकार बनाते हैं, विपक्ष सशक्त करते हैं। दूसरी भूमिका यह होती है कि दबाव-समूहों जैसे संगठन बनाकर लोग अप्रत्यक्ष रूप से अपने हितों की पूर्ति करते हैं।

प्रश्न-16.
दबाव-समूहों व जन-आन्दोलनों में क्या अंतर होता है?
उत्तर-
दबाव-समूहों की भांति जन-आन्दोलन भी चुनावी मुकाबले में सीधे भाग नहीं लेते। परन्तु वह दबाव-समूहों की भांति राजनीति को प्रभावित करने को कोशिश करते हैं। लेकिन, दबाव-समूहों के विपरीत आन्दोलनों में संगठन ढीला-ढाला होता है। आन्दोलनों में फैसले अनौपचारिक ढंग से लिए जाते हैं और ये फैसले लचीले भी होते हैं। आन्दोलन जनता की स्वतःस्फूर्त भागीदारी पर निर्भर होते हैं न कि दबाव-समूह पर।

प्रश्न-17.
जन-सामान्य के हित-समूहों अर्थात कल्याणकारी समूहों के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर-
दबाव-समूहों में कुछेक जन-सामान्य समूह भी होते हैं। इन्हें कल्याणकारी समूह कहा जाता है। ऐसे संगठन किसी विशेष हित की बजाए सामूहिक हित का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस का लक्ष्य अपने सदस्यों की नहीं बल्कि किन्हीं और की मदद करना होता है। मिसाल के लिए हम बँधुआ मजदूरी के खिलाफ लड़ने वाले समूहों का नाम ले सकते हैं। ऐसे समूह अपनी भलाई के लिए नहीं बल्कि बँधुआ मजदूरी के बोझ तले पिस रहे लोगों के लिए लड़ते हैं। कुछ मामलों में संभव है कि जन-सामान्य के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ऐसे उद्देश्य को साधने के लिए आगे आएँ जिससे बाकियों के साथ-साथ उन्हें भी फायदा होता हो। उदाहरण के लिए ‘बामसेफ’ (बैकवर्ड एंड मायनॉरिटी कम्युनिटी एम्पलाइज फेडरेशन-BAMCEF) का नाम लिया जा सकता है!

प्रश्न-18.
नेपाल में लोकतंत्र की वापसी हेतु चले आन्दोलन की सक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर-
राजा ज्ञानेन्द्र की अलोकतांत्रिक नीतियों के विरुद्ध में नेपाल में चलाया गया आन्दोलन नेपालवासियों द्वारा एक महत्त्वपूर्ण आन्दोलन था। संसद की सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने एक-सेवेन पार्टी अलायंस’ (सप्तदलीय गठबंधन-एस.पी.ए. ) बनाया और नेपाल की राजधानी काठमांडू में चार दिन के ‘बंद’ का आह्वान किया। इस प्रतिरोध ने जल्दी ही अनियतकालीन ‘बंद’ का रूप ले लिया और इसमें माओवादी बागी तथा अन्य संगठन भी साथ हो गए। लोग कप! तोड़कर सड़कों पर उतर आए। तकरीबन एक लाख लोग रोजाना एकजुट होकर लोकतंत्र की बहाली की माँग कर रहे थे और लोगों की इतनी बड़ी तादाद के आगे सुरक्षा बलों की एक न चल सकी। 21 अप्रैल के दिन आन्दोलनकारियों की संख्या 3-5 लाख तक पहुँच गई और आन्दोलनकारियों ने राजा को ‘अल्टीमेटम’ दे दिया। राजा ने आधे-अधूरे मन से कुछ रियासत देने की घोषणा की जिसे आन्दोलन के नेताओं ने स्वीकार नहीं किया। नेता अपनी मांगों पर अडिग रहे कि संसद को बहाल किया जाए; सर्वदलीय सरकार बने तथा एक नयी संविधान सभा का गठन हो।

24 अप्रैल अल्टीमेटम का अंतिम दिन था। इस दिन राजा तीनों माँगों को मानने के लिए बाध्य हुआ। एस.पी.ए. ने गिरिजा प्रसाद कोईराला को अंतिम सरकार का प्रधानमंत्री चुना। संसद फिर बहाल हुई और इसने अपनी बैठक में कानून पारित किए, इन कानूनों के सहारे राजा की अधिकांश शक्तियाँ वापस ले ली गईं। नयी संविधान-सभा के निर्वाचन के तौर-तरीकों पर एस.पी. ए. और माओवादियों के बीच सहमति बनी।’ इस संघर्ष को नेपाल का ‘लोकतंत्र के लिए दूसरा आन्दोलन’ कहा जाता है। नेपाल के लोगों का यह संघर्ष पूरे विश्व के लोकतंत्र-प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

प्रश्न-19.
बोलिविया में सन् 2000 में चले जलयुद्ध की चर्चा कीजिए।
उत्तर-
बोलिविया में जल आपूर्ति को निजीकरण के विरुद्ध वहाँ के लोगों ने जो संघर्ष किया था, उसे जलयुद्ध भी कहा जाता है। सन् 2000 की जनवरी में श्रमिकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तथा सामुदायिक नेताओं के बीच एक गठबंधन ने आकार ग्रहणकिया और इस गठबंधन ने शहर में चार दिनों की कामयाब आम हड़ताल की। सरकार बातचीत के लिए राजी हुई और हड़ताल वापस ले ली गई। फिर भी, कुछ हाथ नहीं लगा। फरवरी में फिर आन्दोलन शुरू हुआ लेकिन इस बार पुलिस ने बर्बरतापूर्वक दमन किया। अप्रैल में एक औरप हड़ताल हुई और सरकार ने ‘मार्शल लॉ’ लगा दिया। लेकिन, जनता की ताकत के आगे बहुराष्ट्रीय कंपनी के अधिकारयों को शहर छोड़कर भागना पड़ा। सरकार को आन्दोलनकारियों की सारी माँगें माननी पड़ी। बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ किया गया करार रद्द कर दिया गया और जलापूर्ति दोबारा नगरपालिका को सौंपकर पुरानी दरें कायम कर दी गईं।

प्रश्न-20.
नेपाल के जन-आन्दोलन व बोलिविया के जल-युद्ध से निकलने वाले परिणामों का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर-
नेपाल के जन-आन्दोलन व बोलिविया के जल-युद्ध से निकलने वाले सामान्य निष्कर्ष निम्नलिखित बताए जा सकते
(i) लोकतंत्र का जन-संघर्ष के जरिए विकास होता है। यह भी संभव है कि कुछ महत्त्वपूर्ण फैसले आम सहमति से हो जाएँ और ऐसे फैसलों के पीछे किसी तरह का संघर्ष न हो। फिर भी, इसे अपवाद ही कहा जाएगा। लोकतंत्र की निर्णायक बड़ी अमूमन वही होती है जब सत्ताधारियों और सत्ता में हिस्सेदारी चाहने वालों के बीच संघर्ष होता है। ऐसी घड़ी तब आती है जब कोई देश लोकतंत्र की ओर कदम बढ़ा रहा हो; उस देश में लोकतंत्र का विस्तार हो रहा हो अथवा वहाँ लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होने की प्रक्रिया में हों।
(ii) लोकतांत्रिक संघर्ष का समाधान जनता की व्यापक लामबंदी के जरिए होता है। संभव है, कभी-कभी इस संघर्ष का समाधान मौजूदा संस्थाओं मसलन संसद अथवा न्यायपालिका के जरिए हो जाए। लेकिन, जब विवाद ज्यादा गहन होता है तो ये संस्थाएँ स्वयं उस विवाद का हिस्सा बन जाती है। ऐसे में समाध न इन संस्थाओं के जरिए नहीं बल्कि उनके बाहर यानी जनता के माध्यम से होता है।
(ii) ऐसे संघर्ष और लामबंदियों का आधार राजनीतिक संगठन होते हैं। यह बात सच है कि ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं में स्वतःस्फूर्त होने का भाव भी कहीं-न-कहीं जरूर मौजूद होता है लेकिन जनता की स्वतःस्फूर्त सार्वजनिक भागीदारी संगठित राजनीति के जरिए कारगर हो पाती है। संगठित राजनीति के कई माध्यत हो सकते हैं। ऐसे माध्यमों में राजनीतिक दल, दबाव-समूह और आन्दोलनकारी समूह शामिल हैं।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 5 जन-संघर्ष और आंदोलन

प्रश्न-21.
क्या आप सोचते हैं कि दबाव-समूहों व आन्दोलनों के कारण लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती हैं?
उत्तर-
दबाव-समूहों व आन्दोलनों के कारण लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती है। शासकों व अधिकारियों के ऊपर दबाव डालना लोकतंत्र में कोई अहितकर गतिविधि नहीं बशर्ते इसका अवसर सबको प्राप्त होना चाहिए। सरकारें अक्सर थोड़े से ध नी और ताकतवर लोगों के अनुचित दबाव में आ जाती हैं। जन-साधारण के हित-समूह तथा आन्दोलन इस अनुचित दबाव के प्रतिकार में उपयोगी भूमिका निभाते हैं और आम नागरिक की जरूरतों तथा सरोकारों से सरकार को अवगत कराते हैं।

विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में सही व गलत का चयन कीजिए।
(i) नेपाल के सम्राट बीरेन्द्र ने अपना शासन खुशी से ज्ञानेन्द्र को सौंप दिया था। .. (ii) ज्ञानेन्द्र ने नेपाल में लोकतंत्र की बहाली का विरोध किया।
(iii) बोलिविया में जलयुद्ध पानी की आपूर्ति में कमी के कारण हुआ।
(iv) दबाव-समूह सरकार की सत्ता प्राप्त करने हेतु कार्यरत रहते हैं।
(v) कर्नाटक सरकार के पल्पवुड कम्पनी को कुछेक अधि कार दिए थे।
उत्तर-
(i) गलत,
(ii) सही,
(iii) सही,
(iv) गलत,
(v) सही।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों को उपयुक्त शब्दों से भरिए
(i) कर्नाटक सरकार ने एक पल्पवुड कम्पनी को …….. के पेड़ लगाने की अनुमति दी।
(ii) दबाव-समूह किन्हीं माँगों के लिए सरकार व अधि कारियों पर …………. डालते हैं।
(iii) नेपाल का जन-आन्दोलन ………. की बहाली के लिए चलाया गया था।
(iv) केन्या में हरित पट्टी हेतु …….. करोड़ पेड़ लगाए गए।
(v) सूचना कानून भारत की ………… ने याद किया है।
उत्तर-
(i) युक्लिप्टस,
(ii) दबाव,
(iii) लोकतंत्र,
(iv) तीन,
(v) संसद।

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 2 संघवाद

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 2 संघवाद Important Questions and Answers.

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संघवाद Important Questions Civics HBSE 10th Class प्रश्न 1.
भारत की शासन-व्यवस्था को क्या नाम दिया जाए; एकात्मक, संघात्मक अथवा केन्द्रीकृत। (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 14)
उत्तर-
संघात्मक।

HBSE 10th Class संघवाद Important Questions Civics प्रश्न 2.
संघीय व्यवस्था जब सिर्फ बड़े देशों के अनुकूल है तो बेल्जियम ने इसे क्यों अपनाया? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 15)
उत्तर-
बेल्जियम एक छोटा देश है। परन्तु जातीय समूहों में एकता बनाए रखने के लिए वहाँ संघात्मक व्यवस्था अपनायी गयी है।

Chapter 2 संघवाद Important Questions HBSE 10th Class प्रश्न 3.
क्या यह कुछ अजीब बात नहीं है? क्या हमारे संविधान निर्माताओं को मालूम नहीं था कि संघीय व्यवस्था क्या होती है या वे इसके बारे में कहने से बचना चाहते थे? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ 16)
उत्तर-
वस्तुतः इनमें कोई बात नहीं थी। हमारे संविधान निर्माताओं ने ‘संघ’ के स्थान पर ‘यूनियन’ शब्द का प्रयोग जानबूझ कर किया थाः वह देश की एकता व अखण्डता को बनाए रखने हेतु सशक्त केन्द्र बनाना चाहते थे, परन्तु रूप में संघात्मक।

प्रश्न 4.
अगर कृषि और वाणिज्य राज्य के विषय हैं तो केन्द्र में कृषि और वाणिज्य मंत्री क्यों बनाए जाते हैं? (इन्टैक्सट प्रश्नः पृष्ठ : 17)
उत्तर-
कृषि व वाणिज्य मामलों में एकरूपता बनाए रखने तथा उनकी सामान्य समस्याओं के समाधान हेतु केन्द्र में कृषि व वाणिज्य मंत्री बनाए जाते हैं।

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प्रश्न 5.
क्या आपका गाँव या शहर आजादी के बाद में एक ही प्रांत के अंतर्गत रहा है? अगर नहीं तो इससे पहले के राज्य का क्या नाम था? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठः 19)
उत्तर-
हमारा शहर हरियाणा राज्य में है। स्वतंत्रता से पूर्व यह शहर पंजाब का एक हिस्सा था।

प्रश्न 6.
क्या आप 1947 के तीन राज्यों के ऐसे नामों को याद कर सकते हैं जो आज बदल गए हैं? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 19)
उत्तर-
मैसूर, हैदराबाद, मुम्बई।

प्रश्न 7.
तीन ऐसे राज्यों की पहचान करें जिन्हें बड़े राज्यों को काटकर बनाया गया है। (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 19)
उत्तर-
(1) उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश से) (2) छत्तीसगढ़ (मध्य प्रदेश से) । (3) झारखंड (बिहार से)

प्रश्न 8.
हिन्दी ही क्यों बांग्ला या तेलुगु क्यों नहीं? (इन्टैक्सट प्रश्नः पृष्ठ : 20)
उत्तर-
बांग्ला व तेलुगु भाषाओं की अपेक्षा हिन्दी अधिक लोगों द्वारा बोली, समझी व लिखी जाती है।

प्रश्न 9.
क्या यह आप कह रहे हैं कि क्षेत्रवाद लोकतंत्र के लिए अच्छा है? क्या आप गंभीतरा से ऐसा कह रहे हैं? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 21)
उत्तर-
क्षेत्रवाद लोकतंत्र के लिए अच्छा होता है। यह विविधताओं को नष्ट नहीं करता अपितु उन्हें विकसित करता है जो अन्नतः लोकतंत्र में “विविधताओं में एकता” पैदा करतो है।

प्रश्न 10.
जिला का शासन कलक्टर या जिलाधीश क्यों चलाते हैं? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 25)
उत्तर-
कलक्टर व जिलाधीश राजस्व व कानून-व्यवस्था आदि क्रमशः से सम्बन्धित शासन करते हैं। जिला के विकास के कार्य ग्रामीण व शहरी चुने पदाधिकारियों द्वारा चलाया जाता

प्रश्न 11.
बेल्जियम की केन्द्रीय सरकार संघात्मक व्यवस्था के दायरे में ताकतवर हैं अथवा कमजोर?
उत्तर-
बेल्जियम के संविधान में दिए गए संशोधनों के फलस्वरूप वहाँ की केन्द्रीय सरकार की शक्तियाँ कम कर दी गयी थीं। अतः वह कमजोर सरकार है।

प्रश्न 12.
बेल्जियम ने कब संघात्मक व्यवस्था अपनायी थी?
उत्तर-
1993 में।

प्रश्न 13.
किसी ऐसे राज्य का नाम बताइए जो आकार व जनसंख्या की दृष्टि से एक बड़ज्ञ राज्य है परन्तु वहाँ एकात्मक व्यवस्था अपनायी गयी है?
उत्तर-
जनवादी चीन का गणराज्य।

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प्रश्न 14.
संसार में अधिकतर बड़े देश संघीय हैं। कोई अपवाद बताइए।
उत्तर-
जनवादी चीन का गणराज्य।

प्रश्न 15.
संघीय व्यवस्था में संघीय सरकार के पास प्रायः कौन-से विषय कारण बनाने के लिए होते हैं?
उत्तर-
वह विषय जो राष्ट्रीय महत्त्व के हों।

प्रश्न 16.
संघीय व्यवस्था के गठन तथा नामकरण के लिए दो प्रमुख तत्व क्या हैं?
उत्तर-
(i) विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच सत्ता का बँटवारा।
(ii) इन स्तरों की सरकारों को एक-दूसरे पर भरोसा कि _वह अपने-अपने अधिकार-क्षेत्र में रहेंगे।

प्रश्न 17.
आदर्श संघीय राज्य के दो पक्ष बताइए।
उत्तर-
सरकारों को एक-दूसरे पर परस्पर भरोसा तथा साथ रहने पर सहमति।

प्रश्न 18.
संघीय व्यवस्था बनाने की केन्द्रोन्मुखी तरीका क्या है?
उत्तर-
दो अथवा दो से अधिक स्वतंत्र राज्यों का एक साथ मिलकर एक बड़ी इकाई गठित करना।

प्रश्न 19.
संघीय व्यवस्था के गठन के केन्द्रोन्मुखी तरीके की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
(i) अपनी अलग-अलग पहचान को बनाए रखने की इच्छा; (ii) अपनी सुरक्षा व खुशहाली बढ़ज्ञने की लालसा। .

प्रश्न 20.
संघीय व्यवस्था बनाने का केन्द्रविमुखी तरीका क्या है?
उत्तर-
एक बड़े राज्य का अपने आपको कुछ राज्यों में बदलने के बाद संघीय व्यवस्था बनाना।

प्रश्न 21.
भारतीय संघीय व्यवस्था में संघीय सूची में कुल कितने विषय हैं? किन्हीं पाँच विषयों के नाम बताइए।
उत्तर-
97 विषय : प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, बैंकिंग, संचार, मुद्रा।

प्रश्न 22.
राज्य सूची में कुल कितने विषय हैं? किन्हीं पाँच विषयों के नाम बताइए।
उत्तर-
66 विषय : पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि, सिंचाई।

प्रश्न 23.
समवर्ती सूची के कुल विषयों की संख्या बताइए किन्हीं पाँच विषयों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
47 विषयः शिक्षा, वन, मजदूर संघ, विवाह, गोद लेना।

प्रश्न 24.
अवशेष शक्तियों का कोई एक उदाहरण बताइए। ऐसे विषयों पर कौन कानून बना सकता है?
उत्तर-
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर अवशेष शक्तियों पर कानून बनाने का अधिकार केन्द्रीय सरकार के पास होता है।

प्रश्न 25.
संघीय सरकार संघीय सूची पर तथा राज्य सरकारें राज्य सूची पर कानून बनाती हैं? समवर्ती सूची के विषयों पर कौन कानून बनाता है?
उत्तर-
समवर्ती सूची के विषयों पर केन्द्र सरकार कानून बनाती है तथा राज्य भी ऐसे विषयों पर कानून बना सकते हैं। परन्तु यदि दोनों सरकारें अमुक समवर्ती विषय पर कानून बना लेती हैं तो संघीय कानून मान्य होता है।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 2 संघवाद

प्रश्न 26.
भारतीय राज्यों में कौन-सा एकमात्र राज्य हैं जिसका अपना अलग संविधान है? नाम बताइए।
उत्तर-
जम्मू-कश्मीर।

प्रश्न 27.
भारत में राज्य का गठन किन आधारों पर किया गया है?
उत्तर-
आरम्भ में भाषायी आधार पर, परन्तु शीघ्र ही अन्य आधार जैसे-संस्कृति, भूगोल अथवा जातीयताओं के आधार पर।

प्रश्न 28.
भारत में वास्तविक विकेन्द्रीकरण की ओर कब एक प्रयास किया गया?
उत्तर-
1992 में जब ग्रामीण व शहरी स्वशासी निकायों को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ था।

प्रश्न 29.
संघीय शासन व्यवस्था की जानकारी दीजिए।
उत्तर-

  1. संघीय शासन व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता केन्द्रीय. सरकार व राज्यों की सरकार में बंटी होती है।
  2. ऐसी व्यवस्था में प्रायः सरकार दो स्तर की होती है।
  3. केन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों पर तथा राज्य सरकारें प्रान्तीय महत्त्व के मामलों पर कानून बनाती है।
  4. दोनों प्रकार की सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र होकर अपना-अपना कार्य करती हैं।

प्रश्न 30.
भारत की संघीय व्यवस्था में संघ सूची पर कौन कानून बना सकता है? इस सूची के कुछेक विषयों की जानकारी दीजिए।
उत्तर-
i) प्रतिरक्षा, (ii) विदेशी मामले, (iii) बैंकिंग, (iv) . संचार, (v) मुद्रा, जैसे राष्ट्रीय महत्त्व के पास तो होते हैं। मामलों पर एकरूपता की जरूरत होती है, वह विषय संघीय सूची में सम्मिलित होते हैं। इन पर कानून का अधिकार संघीय सरकार का होता है।

प्रश्न 31.
राज्य सूची के मुख्य विषय बताइए। ऐसे विषयों पर कौन कानून बना सकता है?
उत्तर-
राज्य सूची में पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि और सिंचाई जैसे प्रान्तीय व स्थानीय महत्त्व के विषय होते हैं। इन पर कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकारों का होता है। किन्हीं विशेष परिस्थितियों में संघीय सरकार राज्य सूची ने विषय पर कानून बना सकती है जैसे राज्य में राष्ट्रपति राज लागू होने की स्थिति में।

प्रश्न 32.
समवर्ती सूची के मुख्य विषयों का वर्णन कीजिए। इस सूची पर कौन कानून बना सकता है?
उत्तर-
समवर्ती सूची में शिक्षा, वन, मजदूर संघ, विवाह, गोद लेना और उत्तराधिकार जैसे विषय हैं। इन विषयों पर राज्य व संघ सरकारें कानून बना सकती हैं। यदि जब दोनों सरकारों के कानूनों में टकराव हो तो केन्द्र सरकार द्वारा बनाया कानून ही मान्य होता है। समवर्ती सूची में वह विषय सम्मिलित होते हैं जिन पर संघ व राज्य सरकार, दोनों की रूचि होती है।

प्रश्न 33.
अवशेष शक्तियाँ क्या होती हैं? उन पर कानून बनाने का अधिकार किसका होता है?
उत्तर-
वह सभी विषय जो भारत में शक्तियों की बाँट के अंतर्गत किसी भी सूची (अर्थात संघीय, राज्य व समवर्ती सूची) में सम्मिलित नहीं होते, वह अवशेष शक्तियों में सम्मिलित होते हैं। उदाहरणार्थ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर ऐसा ही एक विषय है। ऐसे विषयों पर संघ सरकार को कानून बनाने की शक्ति है।

प्रश्न 34.
केन्द्र व राज्यों के बीच सत्ता की बाँट में कैसे बदलाव लाया जा सकता है?
उत्तर-
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता का यह बँटवारा हमारे संविधान की बुनियादी बात है। अधिकारों के इस बँटवारे में बदलाव करना आसान नहीं है। अकेले संसद इस व्यवस्था में बदलाव नहीं कर सकती। ऐसे किसी भी बदलाव को पहले संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से मंजूर किया जाना होता है। फिर कम से कम आधे राज्यों की विधान सभाओं से उसे मंजूर करवाना होता है।

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प्रश्न 35.
भारत में राज्यों के गठन में क्या-क्या आधार अपनाए गए थे?
उत्तर-
नए राज्यों को बनाने के लिए 1950 के दशक में भारत के कई पुराने राज्यों की सीमाएँ बदली गयीं थीं। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि एक भाषा बोलने वाले लोग एक राज्य में आ जाएँ। इसके बाद कुछ अन्य राज्यों का गठन भाषा के आधार पर नहीं बल्कि संस्कृति, भूगोल अथवा जातीयताओं (एथनीसिटी) की विभिन्नता को रेखांकित करने और उन्हें आदर देने के लिए भी किया गया। इनमें नगालैंड, उत्तराखंड और झारखंड जैसे राज्य शामिल हैं।

प्रश्न 36.
भारत में गठबंधनीय सरकारों की रचना कैसे
उत्तर-
1990 के पश्चात भारत में सिथति ऐसे बनी कि किसी एक दल को लोकसभा में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को क्षेत्रीय दलों समेत अनेक पार्टियों का गठबंधन बनाकर सरकार बनानी पड़ी। इससे सत्ता में साझेदारी और राज्य सरकारों की स्वायत्तता का आदर करने की नई संस्कृति पनपी। इस प्रवृत्ति को सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े फैसले से भी बल मिला। इस फैसले के कारण राज्य सरकार को मनमाने ढंग से भंग करना केंद्र सरकार के लिए मुश्किल हो गया।

प्रश्न 37.
संघीय व्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
संघीय व्यवस्था की कुछेक महत्त्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन निम्नलिखित किया जा सकता है

  1. यहाँ सरकार दो या अधिक स्तरों वाली होती है।
  2. अलग-अलग स्तर की सरकारें एक ही नागरिक समूह पर शासन करती हैं पर कानून बनाने, कर वसूलने और प्रशासन का उनका अपना-अपना अधिकार-क्षेत्र होता है।
  3. विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार-क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से वर्णित होते हैं इसलिए संविधान सरकार के हर स्तर के अस्तित्व और प्राधिकार की गारंटी और सुरक्षा देता है।
  4. संविधान के मौलिक प्रावधानों को किसी एक स्तर की सरकार अकेले नहीं बदल सकती। ऐसे बदलाव दोनों स्तर की सरकारों की सहमति से ही हो सकते हैं।
  5. अदालतों को संविधान और विभिन्न स्तर की सरकारों के अधिकारों की व्याख्या करने का अधिकार है। विभिनन स्तर की सरकारों के बीच अधिकारों के विवाद की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय निर्णायक की भूमिका निभाता है।
  6. वित्तीय स्वायत्तता निश्चित करने के लिए विभिन्न स्तर की सरकारों के लिए राजस्व के अलग-अलग स्रोत निर्धारित हैं।
  7. इस प्रकार संघीय शासन व्यवस्था के दोहरे उद्देश्य हैं: देश की एकता की सुरक्षा करना और उसे बढ़ावा देना तथा इसके साथ ही क्षेत्रीय विविधताओं का पूरा सम्मान करना। इस कारण संघीय व्यवस्था के गठन और कामकाज के लिए दो चीजें सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच सत्ता के बँटवारे के नियमों पर सहमति होना चाहिए और इनका एक-दूसरे पर भरोसा होना चाहिए कि वे अपने-अपने अधिकार-क्षेत्रों को मानेंगे। आदर्श संघीय व्यवस्था में ये दोनों पक्ष होते हैं: आपसी भरोसा और साथ रहने पर सहमति।

प्रश्न 38.
संघीय शासन व्यवस्थाओं का कैसे गठन किया जाता है?
उत्तर-
संघीय शासन व्यवस्थाएँ आमतौर पर दो तरीकों से गठित होती हैं। पहला तरीका है दो या अधिक स्वतंत्र राष्ट्रों को साथ लाकर एक बड़ी इकाई गठित करने का। इसमें दोनों स्वतंत्र राष्ट्र अपनी संप्रभुता का त्याग करते हैं, अपनी अलग-अलग पहचान को भी बनाए रखते हैं और अपनी संप्रभुता का त्याग करते हैं, अपनी अलग-अलग पहचान को भी बनाए रखते हैं और अपनी सुरक्षा तथा खुशहाली बढ़ाने का रास्ता अख्तियार करते हैं। साथ आकर संघ बनाने के उदाहरण हैं-संयुक्त राज्य अमरीका, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया वगैरह। इस तरह की संघीय व्यवस्था वाले मुल्कों में आमतौर पर प्रांतों को समान अधिकार होता है और वे केंद्र से ज्यादा ताकतवर होते हैं।

संघीय शासन व्यवस्था के गठन का दूसरा तरीका है बड़े देश द्वारा अपनी आंतरिक विविधता को ध्यान में रखते हुए राज्यों का गठन करना और फिर राज्य और राष्ट्रीय सरकार के बीच सत्ता का बँटवारा कर देना। भारत, बेल्जियम और स्पेन इसके उदाहरण हैं। इस दूसरी श्रेणी वाली व्यवस्था में राज्यों की अपेक्षा केंद्र सरकार से ज्यादा ताकतवर हुआ करती है।

प्रश्न 39.
भारत में संघीय व्यवस्था की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
भारत में संघीय व्यवस्था की विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है-

  1. भारत में सरकारों के अनेक स्तर हैं: केन्द्रीय प्रान्तीय व स्थानीय स्वशासी निकाय।
  2. सत्ता बाँट संविधान द्वारा की गयी है। कानून बनाने का अधिकार क्षेत्र संघीय सरकार का भी है, राज्य सरकारों का भी तथा स्थानीय (पंचायत) व नगरीय निकाय इकाईयों का भी है।
  3. सत्ता बाँट में परिवर्तन लाने हेतु संघ विधानपालिका व राज्यों की विधानपालिकाओं में निहित हैं।
  4. सत्ता बाँट में विवाद होने पर उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालयों का निर्णय देने का अधिकार है।
  5. संघ, राज्य व स्थानीय स्वशासी निकायों के पास कर लगाने के अपने-अपने अधिकार हैं।
  6. संविधान के अंतर्गत बनी इन विभिन्न स्तरों की सरकारें अपने-अपने क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।

प्रश्न 40.
भारत में अपनायी गयी भाषा-नीति का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
हमारे संविधान में किसी एक भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं दिया गया। हिन्दी को राजभाषा माना गया पर हिन्दी सिर्फ 40 फीसदी (लगभग) भारतीयों की मातृभाषा है इसलिए अन्य भाषाओं के संरक्षण के अनेक दूसरे उपाय किए गए। संविधान में हिन्दी के अलावा अन्य 21 भाषाओं को अनुसूचित भाषा का दर्जा दिया गया है। केंद्र सरकार के सिी पद का उम्मीदवार इनमें से किसी भी भाषा में परीक्षा दे सकता है बशर्ते उम्मीदवार इसको विकल्प के रूप में चुने। राज्यों की भी अपनी राजभाषाएँ हैं। राज्यों का अपना अधिकांश काम अपनी राजभाषा में ही होता है। हमारे देश के नेताओं ने हिन्दी के उपयोग को बढ़ावा देने के मामले में बहुत सावधानी भरा व्यवहार किया। संविधान के अनुसार सरकारी कामकाज की भाषा के तौर पर अंग्रेजी का प्रयोग 1965 में बद हो जाना चाहिए था पर अनेक गैर-हिन्दी भाषी प्रदेशों ने मांग की कि अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखा जाए। राजभाषा के रूप में हिन्दी को बढ़ावा देने की भारत सरकार की नीति बनी हुई है पर बढ़ावा देने का मतलब यह नहीं कि केंद्र सरकार उन राज्यों पर भी हिन्दी को थोप सकती है जहाँ लोग कोई और भाषा बोलते हैं।

ब्राजील का एक अनूठा प्रयोग ब्राजील के शहर पोतों एलग्रे ने विकेंद्रीकरण और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी वाले लोकतंत्र के मेल का एक प्रयोग किया है। इस शहर के नगर-परिषद् के समांतर एक संगठन खड़ा किया गया और अपने शहर के बारे में वास्तविक फैसले करने का अधिकार स्थानीय निवासियों को दिया गया है। इस शहर के करीब 13 लाख लोग अपने शहर का बजट तैयार करने में भागीदारी करते हैं। शहर को अनेक उप-क्षेत्रों में बाँटा गया है-लगभंग, वैसे ही जिन्हें हम वार्ड कहते हैं। हर उप-क्षेत्र की अपनी-अपनी बैठक होती है जिसका स्वरूप ग्राम सभा की तरह है और इसमें उस इलाके के सभी नागरिक भाग ले सकते हैं। फिर, कुछ बैठकें पूरे शहर को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर होती हैं और उसमें शहर को कोई भी नागरिक भाग ले सकते हैं। फिर. कुछ बैठकें पूरे शहर को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर होती हैं और उसमें शहर को कोई भी नागरिक भाग ले सकता है। इसमें शहर के बजट पर चर्चा होती है। इसके बाद इन प्रस्तावों को नगरपालिका के सामने पेश किया जाता है जो अंतिम फैसला लेती है।

हर साल फैसले लेने की इस प्रक्रिया में करीब 20,000 लोग हिस्सा लेते हैं। इस तरीके को अपनाने से यह सुनिश्चित हो गया है कि बजट को सिर्फ अमीर लोगों की बस्तियों में ही खर्च नहीं किया जाएगा। अब सभी गरीब बस्तियों तक बसें जाती हैं और पुनर्वास का इंतजाम किए बगैर भवन-निर्माता झुग्गी वालों को उजाड़ नहीं सकते। अपने देश में भी केरल के कुछ इलाकों में ऐसे प्रयोग किए गए हैं। वहाँ आम लोगों ने अपनी बतियों के विकास की योजना तैयार करने में भागीदारी की।

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प्रश्न 41.
1992 में हुए विकेन्द्रीकरण के अंतर्गत स्थानीय स्वशासन निकायों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
भारत में विकेन्द्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम 1992 में उठाया गया। संविधान में संशोधन करके लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के इस तीसरे स्तर को ज्यादा शक्तिशाली और प्रभावी बनाया गया।

  1. अब स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनाव नियमित रूप से कराना संवैधानिक बाध्यता है।
  2. निर्वाचित स्वशासी निकायों के सदस्य तथा पदाधिकारियों के पदों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ी जातियों के लिए सीटें आरक्षित हैं।
  3. कम-से-कम एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
  4. हर राज्य में पंचायत और नगरपलिका चुनाव कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग नामक स्वतंत्र संस्था का गठन किया गया है।
  5. राज्य सरकारों को अपने राजस्व और अधिकारों का कुछ हिस्सा इन स्थानीय स्वशासी निकायों को देना पड़ता है। सत्ता में भागीदारी की प्रकृति हर राज्य में अलग-अलग है।

विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रिक्त स्थान को उचित शब्दों से भरिए
(i) 1993 में …….. को संघीय शासन घोषित किया गया। । (ब्राजील, बेल्जियम)
(ii) भारत में अपनायी गयी संघीय व्यवस्था में एक संघीय सरकार हैं तथा दूसरी सरकारें। (केन्द्रीय, राज्य)
(iii) विश्व में 192 राज्यों में केवल …….. राज्यों में संघ है। (25, 30)
(iv) भारत में राज्य का प्रशासन ………. चलाते हैं। (मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री)
(v)……… को बिहार से क्षेत्र लेकर बनाया गया। (उत्तराखंड, झारखंड)
उत्तर-
(i) बेल्जियम,
(ii) राज्य,
(iii) 25,
(iv) मुख्यमंत्री
(v) झारखंड।

प्रश्न 2.
सही विकल्प का चयन कीजिए।

(1) (i) भारत में 7 राज्य व 28 संघीय प्रदेश हैं।
(ii) भारत में 28 राज्य व सात संघीय प्रदेश हैं।
कूट (क) (i) ठीक है
(ख) (ii) ठीक है।
(ग) (i) ठीक है, (ii) गलत है
(घ) (i) तथा (ii) दोनों ठीक हैं।
उत्तर-
(ख) (ii) ठीक है।

(2) भारत में सत्ता हेतु शासन-शक्तियों को निम्न सूचियों में बाँटा गया है
(क) एक सूची में
(ख) दो सूचियों में
(ग) तीन सूचियों में
(घ) चार सूचियों में।
उत्तर-
(ग) तीन सूचियों में

(3) निम्नलिखित में एकात्मक व्यवस्था है-
(क) जनवादी चीन में
(ख) भारत में
(ग) संयुक्त राज्य अमेरिका में
(घ) ऑस्ट्रेलिया में।
उत्तर-
(क) जनवादी चीन में

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(4) निम्नलिखित में संघात्मक व्यवस्था है
(क) बेल्जियम,
(ख) ब्रिटेन,
(ग) जनवादी चीन
(घ) फ्रांस
उत्तर-
(क) बेल्जियम,

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 3 लोकतंत्र और विविधता

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 3 लोकतंत्र और विविधता Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 3 लोकतंत्र और विविधता

लोकतंत्र और विविधता प्रश्न उत्तर HBSE 10th Class प्रश्न-1.
क्या सामाजिक विभाजन भारत जैसे गरीब देशों में ही होता है? (इन्टैक्सट प्रश्न : पृष्ठ : 36)
उत्तर-
सामाजिक विभाजन तो किसी भी देश में किसी एक अथवा दूसरे कारण से हो सकता है। भारत कोई अपवाद नहीं

लोकतंत्र और विविधता के प्रश्न उत्तर HBSE 10th Class प्रश्न-2.
क्या एक बड़े विभाजन को जगह अनेक छोटे विभाजन लाभकर होते हैं? क्या राजनीति एकता पैदा करने वाली शक्ति है?
उत्तर-
सामाजिक विभाजन तो विभाजन ही है : छोटे व बड़े दोनों ही सामाजिक विभाजन हानिकारक हो सकते हैं। राजनीति (बेल्जियम का उदाहरण) एकता पैदा कर सकती है।

Loktantra Or Vividhata Question Answer HBSE 10th Class प्रश्न-3.
टॉमी स्मिथ तथा जान कार्लोस कौन थे तथा किस देश से उनका सम्बन्ध था?
उत्तर-
अमेरिकन खिलाड़ी। दोनो एफ्रो-अमरीकी मूल के सदस्य थे।

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प्रश्न-4.
क्या चीज एफ्रो-अमरीकनों के लिए आत्म-गौरव का प्रतीक हुआ करता था?
उत्तर-
काला मफलर

प्रश्न-5.
सामाजिक विभाजन कब होते हैं?
उत्तर-
सामाजिक विभाजन तब होते हैं जबकि सामाजिक अंतर दूसरी अनेक विफलताओं से ऊपर व बड़े हो जाते हैं।

प्रश्न-6.
संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी एक सामाजिक विभाजन का उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
संयुक्त राज्य अमेरिका में श्वेतों व अश्वतों में अंतर सामाजिक विभाजन का एक उदारहण है।

प्रश्न-7.
‘अप्रकट रंग भेद’ क्या होता है?
उत्तर-
वह रंग भेद जो स्पष्ट दिखायी ने : जब ऐसा लिखा हुआ मिले : “यहाँ हर जाति के लोगों को पानी पीने की अनुमति है।” स्पष्ट है कि लोग अनेक जातियों में बंटे हुए हैं।

प्रश्न-8.
उत्तरी आयरलैंड में कैथोलिकों ने कौन-से राजनीतिक दल बनाये हुए हैं?
उत्तर-
नेशनलिस्ट पार्टियाँ।

प्रश्न-9.
उत्तरी आयरलैंड में प्रोटेस्टेंटों ने कौन-से दल बनाए हुए हैं?
उत्तर-
यूनियनिस्ट पार्टियाँ।

प्रश्न-10.
राजनीतिक दल विभिन्न सामाजिक समूहों से अलग-अलग वायदे क्यों करते हैं?
उत्तर-
उन्हें अपने वोट बैंक को बनाए रखना होता है।

प्रश्न-11.
‘अपनी पहचान के प्रति आग्रह की भावना’ क्यों सामाजिक तनाव पैदा करती है?
उत्तर-
अपनी पहचान के प्रति आग्रह की भावना से लोग अपने आपको दूसरों से अलग समझने लगते हैं और इस कारण सामाजिक तनाव बढ़ते हैं।

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प्रश्न-12.
क्या राजनीतिक दलों व सामाजिक विभाजनों का मेल विस्फोटक होता है?
उत्तर-
पहली नजर में तो राजनीति और सामाजिक विभाजनों का मेल बहुत खतरनाक ओर विस्फोटक लगता है। लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के बीच प्रतिद्वंद्विता का माहौल होता है। इस प्रतिद्वंद्विता के कारण कोई भी समाज फूट का शिकार बन सकता है। अगर राजनीतिक दल समाज में मौजूद विभाजनों के हिसाब से राजनीतिक होड़ करने लगे तो इससे सामाजिक विभाजन राजनीतिक विभाजन में बदल सकता है और ऐसे में देश विखंडन की तरफ जा सकता है। ऐसा कई देशों में हो चुका है। परन्तु यदि बुद्धिमता से काम लिया जाए तो राजनीति सामाजिक एकता पैदा करने में सहायक बन सकती है।

प्रश्न-13.
क्या कार्लोस व स्मिथ द्वारा अमरीकी समाज के आन्तरिक मामलों को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर उठाना सही था? अमेरिका में इन दोनों खिलाड़ियों के साथ क्या व्यवहार किया गया?
उत्तर-
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ ने कार्लोस और स्मिथ द्वारा राजनीतिक बयान देने की इस युक्ति को ओलंपिक भावना के विरुद्ध बताते हुए उन्हें दोषी करार दिया और उनके पदक वापस ले लिए गए। नार्मन को भी अपने फैसले की कीमत चुकानी पड़ी और अगले ओलंपिक में उन्हें ऑस्ट्रेलिया की टीम में जगह नहीं दी गई पर इनके फैसलों ने अमरीका में बढ़ते नागरिक अधिकार आन्दोलन के प्रति दुनिया का ध्यान खींचने में सफलता प्राप्त की।

प्रश्न-14.
कालोस व स्मिथ द्वारा उठाई गयी आवाज का क्या प्रभाव हुआ?
उत्तर-
रंगभेद के विरुद्ध कार्लोस व स्मिथ द्वारा उठायी गयी आवाज की सकारात्मक प्रतिक्रिया हुई। हाल में सैन होज स्टेट विश्वविद्यालय ने, जहाँ इन दोनों ने पढ़ाई की थी, इन दोनों का अभिनंदन किया गया और विश्वविद्यालय के भीतर उनकी मूर्ति लगवाई गई। जब 2006 में नार्मन की मौत हुई तो उनकी अरथी को कंधा देने वालों में स्मिथ और कार्लोस भी थे।

प्रश्न-15.
स्पष्ट कीजिए कि सामाजिक विभाजन जन्म पर आधारित होता है।
उत्तर-
सामाजिक विभाजन अधिकांशतः जन्म पर आध रित होता है। सामान्य तौर पर अपना समुदाय चुनना हमारे वश में नहीं होता। हम सिर्फ इस आधार पर किसी खास समुदाय के सदस्य हो जाते हैं कि हमारा जन्म उस समुदाय के एक परिवार में हुआ होता है। हम अपने चारों ओर जन्म पर आधारित सामाजिक विभाजन देखते हैं।

प्रश्न-16.
उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए कि हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं होती।
उत्तर-
हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती। सामाजिक विभिन्नताएँ लोगों के बीच बँटवारे का एक बड़ा कारण होती जरूर हैं लेकिन यही विभिन्नताएँ कई बार अलग-अलग तरह के लोगों के बीच पुल का काम भी करती हैं। विभिन्न सामाजिक समूहों के लोग अपने समूहों की सीमाओं से परे भी समानताओं और असमानताओं का अनुभव करते हैं। कार्लोस और स्मिथ तो एक हिसाब से समान थे (दोनों एफ्रो अमरीकी थे) जबकि नार्मन श्वेत थे। पर इन तीनों में एक समानता थी कि वे सभी नस्ल आधारित भेदभाव के खिलाफ थे।

प्रश्न-17.
सामाजिक विभाजन की स्थिति क्यों पैदा होती है? समझाइए।
उत्तर-
सामाजिक विभाजन तब होता है जब कुछ सामाजिक अंतर दूसरी अनेक विभिन्नताओं से ऊपर और बड़े हो जाते हैं। अमरीका में श्वेत और अश्वेत का अंतर एक सामाजिक विभाजन बन जाता है क्योंकि अश्वेत लोग आमतौर पर गरीब हैं, बेघर हैं, भेदभाव का शिकार हैं। हमारे देश में भी दलित आमतौर पर गरीब और भूमिहीन हैं। उन्हें भी अक्सर भेदभाव और अन्याय का शिकार होना पड़ता है। जब एक तरह का सामाजिक अंतर अन्य अंतरों से ज्यादा महत्त्वपूर्ण बन जाता है
और लोगों को यह महसूस होने लगता है कि वे दूसरे समुदाय के हैं तो इससे एक सामाजिक विभाजन की स्थिति पैदा होती

प्रश्न-18.
आयरलैंड व नीदरलैंड का उदाहरण देते हुए बताइए कि क्यों नीदरलैंड से तनाव नहीं होते और उत्तरी आयरलैंड में तनाव होते हैं?
उत्तर-
उत्तरी आयरलैंड और नीदरलैंड दोनों ही ईसाई बहुल देश हैं। यहाँ के लोग प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक खेमे में बँटे हैं। उत्तरी आयरलैंड में वर्ग और धर्म के बीच गहरी समानता है। वहाँ का कैथोलिक समुदाय गरीब है। लंबे समय से उनके साथ भेदभाव होता आया है। नीदरलैंड में वर्ग और धर्म के बीच ऐसा मेल दिखाई नहीं देता। वहाँ कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट, दोनों अमीर और गरीब हैं। परिणाम यह है कि उत्तरी आयरलैंड में कैथोलिकों और प्रोटेस्टेंटों के बीच भारी मारकाट चलती रही है, परन्तु नीदरलैंड में ऐसा नहीं होता। जब सामाजिक विभिन्नताएँ एक-दूसरे से गुंथ जाती है तो एक गहरे सामाजिक विभाजन की जमीन तैयार होने लगती है। जहाँ ये सामाजिक विभिन्नताएँ एक साथ कई समूहों में विद्यमान होती हैं वहाँ उन्हें सँभालना अपेक्षाकृत आसान होता है।

प्रश्न-19.
मैक्सिको नगर में ओलंपिक मुकाबलों में नागरिक अधिकार आन्दोलन घटना का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
मैक्सिको नगर में ओलंपिक मुकाबलों (1968) में नागरिक अधिकार आन्दोलन की एक प्रमुख घटना का वर्णन मिलता है। 200 मीटर दौड़ के पदक समारोह के दौरान अमरीकी राष्ट्रगान बज रहा है और सिर झुकाए तथा मुट्ठी ताने हुए दो खिलाड़ी खड़े हैं, वे हैं अमरीकी धावक टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस। ये एफ्रो-अमरीकी हैं। इन्होंने क्रमशः स्वर्ण और कांस्य पदक जीता था। उन्होंने जूते नहीं पहने थे। सिर्फ मोजें चढ़ाए पुरस्कार लेकर दोनों ने यह जताने की कोशिश की कि अमरीकी अश्वेत लोग गरीब हैं। स्मिथ ने अपने गले में एक काला मफलर जैसा परिधान भी पहना था जो अश्वेत लोगों के आत्म-गौरव का प्रतीक है। कार्लोस ने मारे गए अश्वेत लोगों की याद में काले मनकों की एक माला पहनी थी। अपने इन प्रतीकों और तौर-तरीकों से उन्होंने अमरीका में होने वाले रंभेद के प्रति अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान खींचने की कोशिश की। काले दस्ताने और बँधी हुई मुट्ठियाँ अश्वेत शक्ति का प्रतीक थीं। रजत पदक जीतने वाले ऑस्ट्रेलियाई धावक पीटर नार्मन ने पुरस्कार समारोह में अपनी जर्सी पर मानवाधिकार का बिल्ला लगाकर इन दोनों अमरीकी खिलाड़ियों के प्रति अपना समर्थन जताया।

प्रश्न-20.
उत्तरी आयरलैंड में हो रहे टकराव का कारण क्या था? टकराव कैसे समाप्त हुआ?
उत्तर-
उत्तरी आयरलैंड ग्रेट ब्रिटेन का एक हिस्सा है। यह हिस्सा एक लम्बे समय से हिंसा, जातीय कटुता और राजनीतिक टकराव की गिरफ्त में रहा है। यहाँ की आबादी मुख्यतः ईसाई लोगों का ही है पर वह इस धर्म के दो प्रमुख पंथों में बुरी तरह बँटी है। 53 फीसदी आबादी प्रोटेस्टेंट है जबकि 44 फीसदी रोमन कैथोलिक। कैथोलिकों का प्रतिनिधित्व नेशनलिस्ट पार्टियाँ करती हैं। उनकी मांग है कि उत्तरी आयरलैंड को आयरलैंड गणराज्य के साथ मिलाया जाए जो कि मुख्यतः कैथोलिक बहुल है। प्रोटेस्टेंट लोगों का प्रतिनिधित्व यूनियनिस्ट पार्टियाँ करती हैं जो ग्रेट ब्रिटेन के साथ ही रहने के पक्ष में हैं क्योंकि ब्रिटेन मुख्यतः प्रोटेस्टेंट देश है। यूनियनिस्टों और नेशनलिस्टों के बीच चलने वाले हिंसक टकराव में ब्रिटेन के सुरक्षा बलों सहित सैकड़ों लोग और सेना के जवान मारे जा चुके हैं। 1998 में ब्रिटेन की सरकार और नेशनलिस्टों के बीच शांति समझौता हुआ जिसमें दोनों पक्षों ने हिंसक आन्दोलन बंद करने की बात स्वीकार की।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Civics Chapter 3 लोकतंत्र और विविधता

प्रश्न-21.
सामाजिक विभिन्नताएँ किस प्रकार लोकतंत्र को सुदृढ़ करती हैं?
उत्तर-
सामाजिक विभिन्नताएँ लोकतंत्र को सुदृढ़ कर सकती हैं। लोकतंत्र में सामाजिक विभाजन की राजनीतिक अभिव्यक्ति एक सामान्य बात है और यह एक स्वस्थ राजनीति का लक्षण भी है। इसी से विभिन्न छोटे सामाजिक समूह, हाशिये पर पड़ी जरूरतों और लक्षण भी है। इसी से विभिन्न छोटे सामाजिक समूह, हाशिये पर पड़ी जरूरतों और परेशानियों को जाहिर करते करते हैं और सरकार का ध्यान अपनी तरफ खींचते हैं। राजनीति में विभिन्न तरह के सामाजिक विभाजनों की
भी करती हैं। इसके चलते कोई भी सामाजिक विभाजन एक हद से ज्यादा उग्र नहीं हो पाता। इस स्थिति में लोकतंत्र मजबूत ही होता है।

विकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में सही व गलत की पहचान कीजिए।
(i) रोमानी लोग बातूनी होते हैं-ऐसा विचार गणेश का था।
(ii) महाश्वेता का मानना है कि भारत में रोमानी लोगों की भाँति लोग नहीं रहते।
(iii) इमराना की बहन का नाम नईमा है।
(iv) राजनीति में सामाजिक विभिन्नता में सामंजस्य पैदा हो सकता है।
(v) यूगोस्लाविया जातीय व धार्मिक टुकड़ों में बँटा हुआ है।
उत्तर-
(i) सही, (ii) गलत, (iii) सही, (iv) सही, (v) सही।

प्रश्न 2.
सही विकल्प का चयन कीजिए।

(अ) (i) नस्ल का आधार जीवशास्त्रीय होता है।
(ii) जाति का सम्बन्ध जन्म से होता है।

कूट (क) (i) ठीक है, (ii) गलत है
(ख) (ii) ठीक है, (i) गलत है
(ग) दोनों ठीक है
(घ) दोनों गलत हैं।
(ब) निम्नलिखित में से सही का चयन कीजिए।
(क) गरीबी व अपराधीकरण का कोई सम्बन्ध नहीं होता।
(ख) नीदरलैंड में कैथोलिकों व प्रोटेस्टेंटों में काफी टकराव रहता है।
(ग) उत्तरी आयरलैंड के लोग आयरलैंड गणराज्य के सदस्य हैं।
(घ) यूगोस्लाविया जातीय व धार्मिक टुकड़ों में बँटा है।
उत्तर-
‘अ’, ‘ग’ सही है; ‘ब’, ‘घ’ सही है।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों को सही शब्द से भरिए।

(i) कार्लोस व स्मिथ का सम्बन्ध …………. से था।
(ii) पीटर नार्मन एक ……….. खिलाड़ी था।
(iii) सर मार्टिन लूथर जूनियर का सम्बन्ध ……… नागरिक अधिकार आन्दोलन से था।
उत्तर-
(i) एफ्रो-अमरीकी,
(ii) ऑस्ट्रेलियाई,
(iii) अमरीकी।

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