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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों में प्रत्येक कार्बन की संकरण अवस्था बताइये-
(i) CH2 = C = O
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 1
(ii) CH3CH=CH2
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 2
(iii) (CH3)2CO
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(iv) CH2 = CHCN
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 4
(v) C6H6
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 5
निष्कर्ष-
(1) यदि कार्बन परमाणु चार एकल बन्ध से जुड़ा है तो संकरण sp3 होगा।
(2) यदि कार्बन परमाणु पर दो एकल एक द्विबन्ध है, तो संकरण sp2 होगा।
(3) यदि कार्बन परमाणु पर एक एकल बन्ध तथा एक त्रिबन्ध है तो संकरण sp होगा।
(4) यदि कार्बन परमाणु पर दो द्विबन्ध उपस्थित हैं तो संकरण sp होगा।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अणुओं में σ तथा π-आबन्ध दर्शाइए C6H6, C6H12, CH2Cl2,
CH2=C=CH2,CH3NO2,HCONHCH3
उत्तर:
(i) C6H6
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 6
(ii) C6H12
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 7
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 8

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों के आबन्ध-रेखा-सूत्र लिखिएआइसोप्रोपिल ऐे पेहॉल, 2, 3-डाइमेथिल ब्यूटेनल, हेप्टेन-4-ओन
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 9

प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 10
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 11

प्रश्न 5.
निम्नलिखित यौगिकों में से कौन-सा नाम IUPAC पद्धति के अनुसार सही है ?
(क) 2, 2-डाइमेथिलपेण्टेन अथवा 2-डाइमेथिलपेण्टेन
(ख) 2,4,7-ट्राइमेथिलऑक्टेन अथवा 2,5,7-ट्राइमेथिल ऑक्टेन
(ग) 2-क्लोरो-4-मेथिलपेण्टेन अथवा 4-क्लोरो-2-मेथिलपेण्टेन
(घ) ब्यूट-3-आइन-1-ऑल अथवा ब्यूट-4-ऑल-1-आइन
उत्तर:
(क) 2,2 -डाइमेथिलपेन्टेन सही है :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 12
(ख) 2,4,7-ट्राइमेथिलऑक्टेन सही है :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 13
(ग) 2-क्लोरो-4-मेथिलपेण्टेन सही है :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 14
(घ) ब्यूट-3-आइन-1-ऑल सही है :
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 15

प्रश्न 6.
निम्नलिखित दो सजातीय श्रेणियों में से प्रत्येक के प्रथम पाँच सजातों के संरचना-सूत्र लिखिए-
(क) H – COOH
(ख) CH3COCH3
(ग) H – CH = CH2
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 16
(ख) CH3COCH3
प्रोपेन-2-ओन
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 17
(ग) H – CH = CH2
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 18

प्रश्न 7.
निम्नलिखित के संघनित और आबन्ध रेखा-सूत्र लिखिए तथा यदि कोई क्रियात्मक समूह हो तो उसे पहचानिए-
(क) 2, 2, 4-ट्राइमेथिल पेण्टेन
(ख) 2-हाइड्रॉक्सी-1, 2,3 -प्रोपेनट्राइकार्बोक्सिलिक अम्ल
(ग) हेक्सेनडाइएल
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 19

प्रश्न 8.
निम्नलिखित यौगिकों में क्रियात्मक समूह पहचानिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 20
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 21
क्रियात्मक समूह-इस यौगिक में ऐल्कोहॉल, ईथर, ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 22
क्रियात्मक समूह-इस यौगिक में ऐमीनो, एस्टर, तृतीय-ऐमीन समूह उपस्थित हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 23
क्रियात्मक समूह-इस यौगिक में नाइट्रो एवं द्विबन्ध समूह उपस्थित हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से कौन अधिक स्थायी है तथा क्यों ?
O2NCH2CH2O और CH3CH2O
उत्तर:
दिये गये दोनों आयनों में से O2NCH2CH2O अधिक स्थायी हैं क्योंकि यहाँ पर -I प्रभाव वाला -NO2 समूह जुड़ा हुआ है, जो ऋणायन पर ऋण आवेश को घटा देता है जिससे आयन का स्थायित्व बढ़ जाता है। जबकि दूसरे आयन CH3CH2O में एक +I प्रभाव वाला CH3 समूह जुड़ा हुआ है, जो ऋणायन पर ऋण आवेश की मात्रा को बढ़ा देता है जिससे वह अस्थायी हो जाता है।

प्रश्न 10.
π-निकाय से आबन्धित होने पर ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन दाता की तरह व्यवहार प्रदर्शित क्यों करते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
ऐल्किल समूह sp3 संकरित होता है तथा जब यह π-निकाय से आबन्धित होता है तो इसमें sp2 संकरण हो जाता है। हम जानते हैं कि जैसे-जैसे s-गुण या s की प्रतिशतता बढ़ती है वैसे-वैसे विद्युत ऋणात्मकता बढ़ जाती है अतः π-निकाय से आबन्धित होने पर यह इलेक्ट्रॉन दाता की तरह व्यवहार करने लगता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित यौगिकों की अनुनाद संरचना लिखिए तथा इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन मुड़े तीरों की सहायता से दर्शाइए-
(क) C6H5OH
(ख) C6H5NO2
(ग) CH3CH = CHCHO
(घ) C6H5-CHO
(ङ) C6H5-CH2+
(च) CH3CH = CHC+H2
उत्तर:
(क) C6H5OH की अनुनाद संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 24
(ख) C6H5NO2 की अनुनाद संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 25
(ग) CH3CH=CHCHO की अनुनाद संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 26
(घ) C6H5CHO की अनुनाद संरचना
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(ङ) \(\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_5 \mathrm{CH}_2^{+}\) की अनुनाद संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 28
(च) CH2CH = \(\mathrm{CHCH}_2^{+}\) की अनुनाद संरचना
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 29

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

प्रश्न 12.
इलेक्ट्रॉन स्नेही तथा नाभिक स्नेही क्या है ? उदाहरण सहित समझाइए ?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन स्नेही अभिकर्मक (Electro philic reagent) – ऐसे अभिकर्मकों के एक परमाणु पर इलेक्ट्रॉन की कमी रहती है। इलेक्ट्रॉन की कमी वाले परमाणु की उपस्थिति की वजह से यह ऐसे स्रोतों के साथ अभिक्रिया करते हैं, जहाँ इलेक्ट्रॉन की अधिकता रहती है। इस कारण इन्हें इलेक्ट्रॉन स्नेही (Electrophiles) कहा जाता है।

(A) इलेक्ट्रॉनिक स्नेही अभिकभेक के प्रकार –

  • धनात्मक इलेक्ट्रॉन स्नेही (E+) – इनमें इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है एवं इनके ऊपर धनात्मक आवेश होता है। जैसे-कार्बोनियम आयन, क्लोरोनियम आदि। इनके बाह्मतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं एवं इनमें दो इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है।
    HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 30
  • उदासीन इलेक्ट्रॉन स्ने ही (E) – इनके ऊपर कोई भी आवेश नहीं होता है परन्तु इनमें इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है। जैसे- BF3, AlCl3, SO3, FeCl3 आदि। इलेक्ट्रॉन स्नेही सदैव अभिकारक के इलेक्ट्रॉन समूह वाले केन्द्र पर आक्रमण करते हैं।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित समीकरणों में रेखांकित अभिकर्मकों को नाभिकस्नेही तथा इलेक्ट्रॉनस्नेही में वर्गीकृत कीजिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 31
उत्तर:
(क) OH नाभिकस्नेही है क्योंकि इस पर ऋण आवेश है तथा हाइड्रोजन से संयोग कर H2O बनाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 32
(ख) CN नाभिकस्नेही है क्योंकि इस पर ऋण आवेश है तथा यह कार्बन से संयोग करता है जिस पर धनावेश उत्पन्न होता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 33
(ग) CH3CO+ इलेक्ट्रॉनस्नेही हैं क्योंकि इस पर धनावेश है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 34

प्रश्न 14.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को वर्गीकृत कीजिए-
(क) CH3CH2Br + HS → CH3CH2SH + Br
(ख) (CH3)2C = CH2 + HCl → (CH3)2ClC – CH3
(ग) CH3CH2Br + HO → CH2 = CH2 + H2O + Br
(घ) (CH3)3C – CH2OH + HBr → (CH3)2CBrCH2CH3 + H2O
उत्तर:
(क) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया।
(ख) इलेक्ट्रॉनस्नेही संकलन अभिक्रिया।
(ग) द्विआण्विक निराकरण अभिक्रिया
(घ) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (पुर्नव्यवस्थापन सहित)

प्रश्न 15.
निम्नलिखित युग्मों में सदस्य-संरचनाओं के मध्य कैसा सम्बन्ध है? क्या ये संरचनाएँ संरचनात्मक या ज्यामितीय समावयवी अथवा अनुनाद संरचनाएँ हैं ?
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 35
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 36
ये ज्यामितीय समावयवी हैं। इसमें एक सिस समावयवी तथा एक ट्रान्स समावयवी है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 37

प्रश्न 16.
निम्नलिखित आबन्ध विदलनों के लिए इलेक्ट्रॉन विस्थापन को मुड़े तारों द्वारा दर्शाएँ तथा प्रत्येक विदलन को समांश अथवा विषमांश में वर्गीकृत कीजिए। साथ ही निर्मित सक्रिय मध्यवर्ती उत्पादों में मुक्त-मूलक, कार्बधनायन तथा कार्बत्रणायन पहचानिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 38
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 39

प्रश्न 17.
प्रेरणिक तथा इलेक्ट्रोमेरिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए। निम्नलिखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता का सही क्रम कौन-सा इलेक्ट्रॉन-विस्थापन वर्णित करता है ?
(क) Cl3CCOOH>Cl2CHCOOH>ClCH2COOH
(ख) CH3CH2COOH>(CH3)2CHCOOH>(CH3)3C.COOH
उत्तर:
जब सह-संयोजन बन्ध दो भिन्न विद्युत ऋणात्मकता वाले परमाणुओं के मध्य होता है तो साझे का इलेक्ट्रॉन युग्म दोनों परमाणुओं के मध्य न रहकर यह अधिक विद्युत ऋणी परमाणु की तरफ विस्थापित हो जाता है। इसी विस्थापन के फलस्वरूप अधिक विद्युत ऋणी परमाणु के ऊपर आंशिक ऋणावेश एवं कम विद्युत ऋणी परमाणु पर आंशिक धनावेश उत्पन्न हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 40
कार्बन श्रंखला में यह आवेश निम्न प्रकार उत्पन्न होता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 41
इस प्रभाव को I द्वारा प्रदर्शित करते है। यह दो प्रकार का होता है-
(A) प्रकार (Types) यह दो प्रकार का होता है।
(i) + I प्रभाव (+ I Effect) – जब कार्बन के साथ कोई इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षित करने वाला समूह जुड़ा रहता है तो साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म कार्बन की तरफ विस्थापित हो जाते हैं। इसी प्रभाव को +I या धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव कहते हैं। ऐल्किल समूह के द्वारा + I प्रभाव प्रदर्शित किया जाता है।

विभिन्न ऐल्किल समूहों द्वारा उत्पन्न प्रभाव की तीव्रता का क्रम निम्नलिखित है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 42

(ii) -I प्रभाव (-I Effect) – जब कार्बन के साथ इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने वाला समूह जुड़ा रहता है तो साझे का इलेक्ट्रॉन युग्म कार्बन परमाणु से दूर विस्थापित हो जाता है। इसी प्रभाव को – I प्रभाव या ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव कहते हैं। ऋणात्मक प्रेरणिक प्रभाव उत्पन्न करने वाले कुछ समूहों के उदाहरण एवं उनकी तीव्रता का क्रम इस प्रकार है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 43

(B) प्रेरणिक प्रभाव की विशेषताएँ – प्रेरणिक प्रभाव बन्धों में ध्रुवता करता है। इसकी निम्न विशेषताएँ हैं-
(i) C-H बन्ध में कार्बन एवं हाइड्रोजन की विद्युत ऋणात्मकता का मान लगभग समान होता है। अत: C-H बन्ध के मध्य प्रेरणिक प्रभाव नहीं होता है।
(ii) प्रेरणिक प्रभाव सदैव कार्बन परमाणु एवं एक विद्युत ऋणी परमाणु या समूह के मध्य केवल एक इलेक्ट्रॉन युग्म के साझे से उत्पन्न होता है।
(iii) कार्बन श्रृंखला की लम्बाई बढ़ने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉन विस्थापन घटता जाता है अर्थात् C-X बंध से दूरी बढ़ने के साथ कार्बन परमाणुओं पर आने वाला आवेश घटता जाता है तथा तीसरे कार्बन के बाद यह प्रभाव नगण्य हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 44
यह प्रभाव तीर HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 45 के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है जो कि अधिक विद्युत ऋणी की ओर रहता है।

(C) प्रेरणिक प्रभाव के अनुप्रयोग (Uses of Inductive Effect) – प्रेरणिक प्रभाव के मुख्य अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं-

  • यह कार्बनिक यौगिकों के सहसंयोजक बंधों के मध्य ध्रुवता की व्याख्या करता है।
  • अभिक्रिया मध्यवर्तियों जैसे-कार्बोनियम आयन, कार्बेनायन इत्यादि की स्थायित्व की भी व्यख्या करता है।
  • यह अम्लों एवं क्षारों की प्रबलता भी स्पष्ट करता है।

इलेक्ट्रोमेरिक पभाव: ऐसे यौगिक जिनमें द्विबंध या त्रिक बंध (double bond or triple bond) होता है, के π इलेक्ट्रॉन आक्रमणकारी अभिकर्मक (attacking reagent) की उपस्थिति में अधिक विद्युत ऋणी तत्त्व पर स्थानान्तरित हो जाते हैं तथा यौगिक में पूर्ण धन एवं ऋण आवेश उत्पन्न हो जाता है। इस प्रभाव को इलेक्ट्रोमेरिक (Electromeric effect) प्रभाव कहते हैं।

उदाहरण – जब CN कार्बोनिल समूह (> C = O) के कार्बन पर आक्रमण करता है तो π बंध का इए न्ट्रॉन युग्म ऑक्सीजन परमाणु पर पूर्णतया स्थानान्तरित हो जाता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 78
अतः द्विबंध या त्रिक बंध में उपस्थित साझे के इलेक्ट्रॉन युग्मों का आक्रमणकारी अभिकर्मक की उपस्थिति में अधिक विद्युत ऋणी तत्त्व पर स्थानान्तरित हो जाने की क्रिया को इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (Electromeric Effect) कहते हैं। यह प्रभाव आक्रमणकारी अभिकर्मक की उपस्थिति तक ही रहता है, अतः यह प्रभाव अस्थायी होता है।
इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव दो प्रकार का होता है।
(i) +E प्रभाव
(ii) – E प्रभाव

(i) धनात्मक इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (+ E प्रभाव) – इस प्रभाव में बहुआबंध के π – इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण उस परमाणु पर होता है, जिससे आक्रमणकारी अभिकर्मक बंधित होता है। उदाहरणार्थ-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 46
(ii) ऋणात्मक इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव (- E प्रभाव)—इस प्रभाव में बहुआबंध के π – इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण उस परमाणु पर होता है, जिससे आक्रमणकारी अभिकर्मक बंधित नहीं होता है। उदाहरणार्थ-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 47
इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव के आधार पर द्विबंध या त्रिकबंध युक्त यौगिकों के विभिन्न योग अभिक्रियाओं की व्याख्या की जा सकती है।
उदाहरण-ऐथीन(CH2 = CH2) की क्रिया HBr से निम्न प्रकार होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 48
जब प्रेरणिक तथा इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव एक-दूसरे की विपरीत दिशाओं में कार्य करते हैं, तब इलेक्ट्रोमेरिक प्रभाव प्रबल होता है।

(क) हैलेजेन परमाणुओं की संख्या घटने पर समग्र – I प्रभाव घटता है तथा अम्लीय सामर्थ्य घटती है।
Cl3CCOOH>Cl2CHCOOH>ClCH2COOH

(ख) ऐल्किल समूहों की संख्या बढ़ने पर +I प्रभाव बढ़ता है तथा अम्लीय सामर्थ्य घटती है।
CH3CH2COOH>(CH3)2CHCOOH>(CH3)3C.COOH
यह इलेक्ट्रॉन दाता प्रेरणिक प्रभाव (+1) दर्शाता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

प्रश्न 18.
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रमों के सिद्धान्तों का संक्षिप्त विवरण दीजिए-
(क) क्रिस्टलन,
(ख) आसवन,
(ग) क्रोमेटोग्राफी।
उत्तर:
(क) क्रिस्टलन:
ठोस कार्बनिक पदार्थों के शोधन के लिये इस विधि को प्रयोग में लाया जाता है। यह विधि कार्बनिक यौगिक तथा अशुद्धि की किसी एक उपयुक्त विलायक में इनकी विलेयताओं में निहित अंतर पर आधारित होती है। अशुद्ध यौगिक को किसी एक ऐसे विलायक में घोलते हैं जिसमें यौगिक सामान्य ताप पर अल्प-विलेय परन्तु उच्च ताप पर अधक विलेय होता है। यौगिक को घोलने के पश्चात् उसे सान्द्रित करते हैं तथा इतना सान्द्रित करते हैं कि विलयन संतृप्त हो जाये। अब विलयन को ठण्डा करने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टलित हो जाता है, जिसे मातृ द्रव से पृथक् कर लेते हैं।

बचे हुये मातृ द्रव में अशुद्धियों तथा यौगिक की अल्प मात्रा रह जाती है। यदि यौगिक किसी एक विलायक में अत्यधिक विलेय तथा अन्य में अल्प विलेय होता है तब की उचित मात्रा में इन विलायकों को मिश्रित करके किया जाता है। सक्रियित काष्ठ कोयले की सहायता से बने हुये विलयन में से रंगीन अशुद्धियों को दूर किया जाता है। इस प्रकार बार-बार क्रिस्टलन करके यौगिक को शुद्ध किया जाता है।

उदाहरणार्थ-कार्बनिक पदार्थ। जैसे- कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCl4), बेन्जीन (C6H6), ऐल्कोहॉल, ऐसीटोन, क्लोरोफॉर्म (CHCl3) आदि। क्रिस्टलन में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों को निम्न चित्रों दिखाया गया है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 49

(ख) आसवन:
द्रव कार्बनिक यौगिकों का शोधन प्रायः आसवन विधियों द्वारा किया जाता है। “किसी द्रव को गर्म करके वाष्प में परिवर्तन करने तथा वाष्प को ठण्डा करके फिर से द्रव में बदलने की क्रिया को आसवन कहते हैं। आसवन में वाष्पन तथा संघनन दोनों प्रक्रियाएँ होती हैं।”

आसवन = वाष्पन + संघनन

ऐसे कार्बनिक पदार्थ, जो सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में होते हैं या जिनके क्वथनांक बहुत कम या बहुत अधिक नहीं होते हैं, का शोधन एवं पृथक्करण आसवन विधि द्वारा किया जाता है। केवल उन्हीं पदार्थों को उनके मिश्रण से अलग किया जाता है, जो परस्पर विलेय होते हैं। इसकी निम्न विधियाँ होती है।

  • साधारण आसवन
  • प्रभाजी आसवन
  • भाप आसवन
  • निर्वात आसवन या कम दाब पर आसवन

(1) साधारण आसवन (Simple Distillation)-इस विधि की सहायता से ऐसे दो द्रवों का लिश्रण जिनके हो, को पृथक् कर सकते हैं। भिन्न ववधनांक। बाले द्रव भिन्न ताष पर वाष्पित होते हैं। वाष्पों को ठण्डा करने से प्राप्त द्रवों को अलग-अलगं एकत्र कर लेते हैं। क्लोरोफार्म (क्वथनांक 334K) और ऐनिलीन (क्वथनांक 457K) का साधारण आसवन विधि द्वारा आसानी से पृथक् कर सकते हैं।

विधि-द्रव-मिश्रण को चित्रानुसार एक गोल पेंदे के फ्लास्क में लेकर बर्नर की सहायता से धीरे-धीरे गरम करते हैं। उबालने प्र कम क्वथनांक वाले द्रव की वाष्प पहले बनती है। वाष्प को संघनित्र की सहायता से संघनित करके प्राप्त द्रव को ग्राही में एकत्र कर लेते हैं। उच्च क्वथनांक वाले घटक के वाष्प बाद में बनते हैं। इनमें संघनन से प्राप्त द्रव को दूसरे ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 50

(2) प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) – यह द्रवों के क्वथनांकों की भिन्नता पर आधारित है, यदि दो या दो से अधिक द्रवों के क्वथनांक काफी समीप होते हैं तथा उन्हें शुद्ध रूप में प्राप्त करना होता है और वे स्थिर क्वाथी मिश्रण भी नहीं होते तो उन्हें प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक् करते हैं। इस विधि की यह विशेषता है कि इसके द्वारा ऐसे यौगिकों को भी पृथक् किया जा सकता है जिनके क्वथनांकों में 10°C से उच्च या 50°C से कम का अन्तर होता है।

इस विधि द्वारा ऐसीटोन (50°C) तथा मेथिल ऐल्कोहॉल (65°C) या बेन्जीन व टॉलूईन आदि के मिश्रण को पृथक् किया जा सकता है।

विधि (Method) – सर्वप्रथम एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क में प्रभाजक स्तम्भ लगा देते हैं तथा इसका दूसरा सिरा संघनित्र से जोड़ देते हैं (जब मिश्रण में उपस्थित द्रवों के क्वथनांकों में अधिक अन्तर न हो या आसवन केवल एक ही बार कराना चाहते हैं तो हम यहाँ पर प्रभाजक स्तम्भ का प्रयोग करते हैं)। संघनित्र का दूसरा सिरा ग्राही में लगा दिया जाता है जिसका बल्ब स्तम्भ में पारर्व नली के पास होता है। फ्लास्क में प्रेथिल ऐल्कोहलल एवं ऐसीटोन या उन द्रवों को जिन्हें अलग करना होता है, भर लेते हैं तथा मिश्रण को गर्म करते हैं। गर्म करने पर कणष खनती है नी र की ओर उठती है।

इन गर्म वाष्प के मार्ग में प्रभाजक स्तम्भ रुकावट डालते हैं। इस रुकावट के कारण कम वाष्पशील द्रव अर्थात् यहाँ पर लिये गये द्रवों में से मेथिल एल्कोहॉल
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 51
की वाष्प ठण्डी होकर पुनः द्रव में बदल जाती है और द्रव धीरे-धीरे फ्लास्क में नीचे लौट आता है। जैसे-जैसे यह द्रव नीचे खिसकता है और नीचे से ऊपर आने वाली वाष्प के सम्पर्क में आता है तो यह उसमें उपस्थित कम वाष्पशील द्रव की वाष्प को द्रवित कर देता है। यह वाष्प द्रवित होकर फ्लास्क में वापस आ जाती है। इस प्रकार जैसे-जैसे वाष्प ऊपर उठती है, उसमें से कम वाष्पशील द्रव की वाष्प द्रवित होकर पुनः फ्लास्क में वापस आ जाती है। केवल अधिक वाष्पशील द्रव की वाष्प ही संघनित्र तक पहुँचती है। यह वाष्प अब संघनित्र द्वारा द्रवित हो जाती है और उसे ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।

अन्त में केवल कम वाष्पशील द्रव आसवन फ्लास्क में रह जाता है और अधिक वाष्पशील द्रव ग्राही में आ जाता है। आसवन फ्लास्क तथा ग्राही से प्राप्त द्रवों का फिर से प्रभाजी आसवन किया जाता है तथा इस प्रकार दो तीन बार प्रभाजी आसवन कराने पर दोनों वाष्पशील द्रव पूर्णतया पृथक् हो जाते हैं।

(3) भाप आसवन (Steam Distillation) – यह विधि उन कार्बनिक यौगिकों के शोधन में प्रयुक्त की जाती है। जोकि जल में अविलेय होते हैं परन्तु भाप के द्वारा आसानी से वाष्पीकृत हो जाते हैं। जो वाष्पशील कार्बनिक यौगिक अपने क्वथनांक पर अपघटित नहीं होते हैं, उनके लिये भाप आसवन एक कारगर विधि है। उदाहरण को लिये ऐनिलीन, नाइट्रोबेंजीन, ऑर्थों नाइट्रोफिनॉल, क्लोरोबेंजीन आदि को इस विधि द्वारा ही शुद्ध किया जाता है क्योंक ये सभी यौगिक भाप की उपस्थिति में शीघ्र ही वाष्पीकृत हो जाते हैं।

क्वथनांक (Boiling Point)-किसी द्रव का क्वथनांक वह ताप है जिस पर उसका वाष्प दाब, वायुमण्डलीय दाब के बराबर हो जाता है।

भापीय आसवन में कार्बनिक द्रव को वाष्प अवस्था में बदलने के लिये भाप प्रवाहित की जाती है। इस अवस्था में जल वाष्प की दाब (P1) तथा द्रवों के वाष्प की दाब P2 एवं वायुमण्डलीय दाब (P) है तो,
P = P1 + P2
उपरोक्त लिखे सूत्र से यह स्पष्ट हो जाता है कि जल तथा कार्बनिक द्रव के क्वथनांक शुद्ध जल तथा शुद्ध कार्बनिक द्रवों के मिश्रणों का क्वथनांकों से कम होता है। अतः भाप आसवन में कार्बनिक द्रव अपने क्वथनांक से कम ताप पर बिना अपघटित हुये ही आसवित अर्थात् वाष्प में परिवर्तित हो जाती है।

भाप आसवन की विधि के लिये चित्र 12.13 के अनुसार उपकरण का संयोजन किया जाता है जिस पदार्थ का आसवन करना होता है। उस फ्लास्क को धीरे-धीरे लगभग 80°C से 90°C तक गर्म किया जाता है। अब इस फ्लास्क को भाप पात्र से जोड़ देते हैं जिससे भाप तेजी से प्रवाहित होती है। भाप वाष्पशील यौगिक को अपने साथ उड़ाकर संघनित्र में पहुँचा देती है। यहाँ संघनित्र दोनों की वाष्प को ठण्डा कर देता है तथा दोनों अर्थात् जल एवं कार्बनिक यौगिक द्रव में परिवर्तित हो जाते हैं। जिसे ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।
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चूँकि वाष्पशील यौगिक जल में अविलेय है तो यहाँ दोनों की अलग-अलग पर्त सी बन जाती है। अर्थात् यदि यौगिक ठोस है तो उसे जल से छानकर पृथक् कर लेते हैं, यदि वे निलम्बित अवस्था में है तो द्रव को एक पृथक्कारी फलन में ले लेते हैं और पृथक् कर देते हैं। कुछ समय पश्चात् द्रव व जल की दो पर्त बन जाती है, यदि जल उपस्थित रहता है तो उन्हें पुनः पृथक्कारी फलन से पृथक् कर देते हैं और शुद्ध यौगिक प्राप्त कर लेते हैं।

(4) निर्वात आसवन या कम दाब पर आसवन (Vacuum Distilation or Distillation at Low Pressure)-इस विधि का प्रयोग उन द्रवों पर किया जाता है, जो अपने क्वथनांक से पूर्व ताप पर अपघटित होते हैं, किसी द्रव का क्वथनांक वह ताप होता है जिस पर उसका दाब वायुमण्डल के दाब के बराबर हो जाता है। यदि किसी प्रकार द्रव का दाब कम कर दिया जाये तो उसका क्वथनांक भी कम हो जाता है। यदि ऐसे द्रव का आसवन कराना हो क्वथनांक से पूर्व ताप पर अपघटित होता है तो उस पर दाब कम करके उसको इस तरह उबालते हैं कि ये अपघटित नहीं होता है।

चित्र 12.14 में दिखाये गये उपकरण की भाँति सभी अवयवों को व्यवस्थित कर लेते हैं। ग्राही को जो कि एक फ्लास्क है, निर्वात पम्प से जोड़ देते हैं। इस निर्वात पम्प की सहायता से दाब को कम किया जाता है। ग्राही व पम्प के मध्य एक मैनोमीटर लगाया जाता है। अब एक फ्लास्क में अशुद्ध कार्बनिक द्रव लिया जाता है तथा उसको कम दाब पर उबालते हैं। कम दाब होने के कारण द्रव अपने सामान्य क्वथनांक से नीचे की उबलने लगता है तथा उबलने पर वाष्प बनती है, इस वाष्प को संघनित्र में प्रवाहित करके द्रव में परिवर्तित कर लिया जाता है और शुद्ध द्रव को कम दाब पर ग्राही में एकत्र कर लेते हैं।
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(ग) क्रोमेटोग्राफी:
यह एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है, जिसका उपयोग यौगिकों के शोधन करने में होता है। इसका उपयोग सर्वप्रथम पादपों में पाये जाने वाले रंगीन पदार्थों को पृथक् करने में किया गया था। यह ‘क्रोमेटोग्राफी’ राब्द ग्रीक शब्द ‘क्रोमा’ से बना है जिसका अर्थ ‘रंग’ है। इसमें दो प्रावस्था पायी जाती है। एक स्थिर प्रावस्था तथा दूसरी गतिशील प्रावस्था। यौगिकों के मिश्रण को स्थिर प्रावस्था पर अधिशोषित कर दिया जाता है।

स्थिर प्रावस्था ठोस या द्रव हो सकती है। अंब स्थिर प्रावस्था में से उपयुक्त विलायक, गैस या विलायकों के मिश्रण को धीरे-धीरे प्रवाहित किया जाता है। इस प्रकार मिश्रण के अवयव क्रमश : एक दूसरे से पृथक् हो जाते हैं। यहाँ गति करने वाली प्रावस्था को ‘गतिशील प्रावस्था’ कहा जाता है। इसे निसालक (eluennt) भी कहते हैं। विभिन्न सिद्धान्तों के आधार पर क्रोमेटोग्राफी को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है। इनमें से दो निन्न प्रकार हैं-

(1) अधिशोषण वर्ण लेखन या अधिशोषण क्रोमेटोग्राफी (Adsorption Chromatography)-इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी में एक विशिष्ट प्रकार के अधिशोषक पर विभिन्न यौगिक भिन्न अंशो में अधिशोषित होते हैं। यहाँ पर प्रयोग होने वाले अधिशोषक ऐलुमिना तथा सिलिका जेल है। स्थिर प्रावस्था अर्थात् अधिशोषक पर गतिशील प्रावस्था प्रवाहित करने के उपरान्त मिश्रण के अवयव स्थिर प्रावस्था पर अलग-अलग दूरी तय करते हैं। इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी दो प्रकार की होती हैं।

(a) कॉलम क्रोमेटोग्राफी या कॉलम-वर्णलेखन या स्तम्भ वर्ण लेखन (Column Chromatography)-इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी में काँच की एक लम्बी नली में स्थिर प्रावस्था या अधिशोषक भरा जाता है। यहाँ प्रयुक्त होने वाला अधिशोषक प्राय: सिलिका जेल या ऐलुमिना होता है, नली के निचले सिरे पर रोधनी लगी रहती है। यौगिक के मिश्रण को उपयुक्त विलायक की न्यूनतम मात्रा में घोलकर कॉलम के ऊपरी
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भाग में अधिशोषित कर देते हैं। तत्पश्चात् एक उपर्युक्त विक्षालक या गतिशील प्रावस्था या इलुएन्ट जो कि द्रव या द्रवों का मिश्रण होता है, को कॉलम में धीमी गति से नीचे की ओर बहने दिया जाता है। विभिन्न यौगिकों के अधिशोषण की मात्रा के आधार पर उसका आंशिक या पूर्ण पृथक्करण हो जाता है। अधिक अधिशोषित यौगिक कॉलम में विभिन्न दूरी तक अधिशोषित होकर नीचे आ जाते हैं। अब लम्बी काँच की नली में लगे रोधन को हटाकर हम विभिन्न यौगिकों को प्राप्त कर लेते हैं। चूंकि यहाँ काँच की लम्बी नली को कॉलम की तरह प्रयोग करते हैं अतः इसको कॉलम स्तम्भ क्रोमेटोग्राफी कहते हैं।

(b) पतली पर्त वर्ण लेखन (Thin Layer Chromatography)-यह एक अधिशोषण क्रोमेटोग्राफी का प्रकार है। यहाँ अधिशोषक या स्थिर प्रावस्था की पतली पर्त का मिश्रण के अवयवों का पृथक्करण होता है। इस प्रकार की वर्ण लेखन में काँच की उपयुक्त आमाप की प्लेट पर अधिशोषक की पतली लगभग 0.2mm की पर्त फैला दी जाती है। यहाँ उपयोग होने वाले अधिशोषक सिलिका जेल या ऐलुमिना होते हैं। इस काँच पर छोटा-सा बिन्दु प्लेट के एक सिरे से लगभग 2 सेमी ऊपर लगाते हैं। प्लेट को अब कुछ ऊँचाई तक विलायक से भरे हुये एक बंद जार में खड़ा कर देते हैं, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

गतिशील प्रावस्था या निक्षालक जैसे-जैसे प्लेट पर आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे मिश्रण के अवयव भी निक्षालक या विलायक या गतिशील प्रावस्था के साथ-साथ प्लेट पर आगे बढ़ते हैं, परन्तु अधिशोषण की तीव्रता के आधार पर ऊपर बढ़ने की उनकी गति भिन्न अधिशोषण को धारण गुणक (retention factor) अर्थात् Rf मान द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
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रंगीन यौगिकों के बिन्दुओं को, जो प्लेट पर विभिन्न अधिशोषक क्षमता के आधार पर प्राप्त हुये हैं, बिना कठिनाई के देखा जा सकता है, परन्तु रंगहीन एवं प्रतिदीप्त होने वाले यौगिकों के बिन्दुओं को प्लेट पर पराबैंगनी प्रकाश के नीचे रखकर देखते हैं। इसके अलावा जार में कुछ आयोडीन के क्रिस्टल रखकर भी रंगहीन बिन्दुओं को देखा जा सकता है।

जो यौगिक आयोडीन अवशोषित करते हैं। उनके बिन्दु भूर रंग के दिखाई देते हैं। कभी-कभी उपर्युक्त अभिकर्मक के विलयन को जिसे दर्शनीय अभिकर्मक (visualizing reagent) कहा जाता है, भी प्लेट पर छिड़क कर बिन्दुओं को देखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए ऐमीनों अम्ल को देखने के लिए बिन्दुओं की प्लेट पर निनहाइड्रिन विलयन छिड़कते हैं जिससे ऐमीनो अम्ल के यौगिक रंगीन दिखाई देने लगते हैं।
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(2) वितरण क्रोमेटोग्राफी (Partition Chromatography)- इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी स्थिर तथा गतिशील प्रावस्थाओं के मध्य मिश्रण के अवयवों के सतत विभेदी वितरण पर आधारित है। इसका मुख्य उदाहरण पेपर क्रोमेटोग्राफी है। इसमें एक विशिष्ट प्रकार के क्रोमेटोग्राफी कागज का प्रयोग किया जाता है। इस कागज के छिद्रों में जल के अणु पारित रहते हैं, जोकि स्थिर प्रावस्था का कार्य करते हैं।

(a) पेपर क्रोमेटोग्राफी या कागज वर्णलेखन (Paper Chromatography) – यह वितरण क्रोमेटोग्राफी का एक प्रकार है। यहाँ एक विशिष्ट प्रकार के कागज का प्रयोग करते हैं। जिसमें जल के अणु पारित रहते हैं तथा स्थिर प्रावस्था का कार्य करते हैं। इस पेपर को क्रोमेटोग्राफी पेपर कहा जाता है।

क्रोमेटोग्राफी पेपर की सर्वप्रथम एक पट्टी काट ली जाती है जो लगभग 4 सेमी. चौड़ी तथा 25 सेमी. लम्बी होती है। इस पट्टी के आधार पर मिश्रण का बिन्दु लगाकर उसे जार में लटका देते हैं। जार में उपयुक्त ऊँचाई तक एक विलायक भरा होता है अर्थात् जार में गतिशील प्रावस्था भरी होती है। कोशिका क्रिया के कारण पेपर की पट्टी पर विलायक ऊपर की ओर चढ़ता है तथा बिन्दु पर प्रवाहित होता है। विभिन्न यौगिकों का दो प्रावस्थाओं में अधिशोषण वितरण भिन्न-भिन्न होने के कारण वे अलग-अलग दूरी तक आगे की ओर चढ़ते हैं। इस प्रकार प्राप्त क्रोमेटोग्राफी पट्टी को क्रोमेटोग्राम कहा जाता है।
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प्रश्न 19.
ऐसे दो यौगिक, जिनकी विलेयताएँ विलायक S में भिन्न हैं, को पृथक् करने की विधि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
ऐसे यौगिकों को क्रिस्टल विधि से पृथक् करते हैं। इसमें सर्वप्रथम अशुद्ध यौगिक को किसी एक ऐसे विलायक में घोलते हैं, जिसमें यौगिक सामान्य ताप पर कम विलेय तथा उच्च ताप पर अधिक विलेय हो। इसके पश्चात् विलयन को सान्द्रित करते हैं जिससे वह संतृप्त हो जाता है। ठंडा करने पर विलयन में से अल्प विलेय घटक पहले क्रिस्टलीय होता है तथा विलयन को पुन: गरम करके ठंडा करने पर अधिक विलेय घटक क्रिस्टलीकृत हो जाता है। विलयन में उपस्थित रंगीन अशुद्धियों को दूर करने के लिए सक्रियित काष्ठ कोयले की सहायता ली जाती है। विलयन का बार-बार क्रिस्टलन करने पर शुद्ध यौगिक प्राप्त होता है।

प्रश्न 20.
आसवन, निम्न दाब पर आसवन तथा भाप आसवन में क्या अन्तर है ? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आसवन:
क्वथनांक में अधिक अन्तर वाले द्रवों को पृथक् करने के लिए इसका प्रयोग करते हैं।

निम्न दाब पर:
इसका प्रयोग उन यौगिकों पर होता है जो अपने साधारण क्वथनांक पर या उससे नीचे अपघटित हो जाते हैं।

भाप आसवन:
इसका प्रयोग उन यौगिकों पर होता है, जो भाप में वाष्प-शील होते हैं। परन्तु जल में अमिश्रणीय होते हैं।

प्रश्न 21.
लैसग्ने-परीक्षण का रसायन सिद्धान्त समझाइए।
उत्तर:
किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित नाइट्रोजन, सल्फरर, हैलोजेन तथा फॉस्फोरस की पहचान ‘लैसग्ने-परीक्षण’ (Lassaigne’s Test) द्वारा दी जाती है। यौगिक को सोड्डियम धातु के साथ संगलित करने पर ये वत्व सहसंयोजी सूप से आयनिक रूप में परिवर्तित हो जाते है। इनमें निम्नलिखित अभिक्रियाएँ होती हैं-
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C, N, S तथा X कार्बनिक यौगिक में उपस्थित तत्व हैं। सोडियम संगलन से प्राप्त अवशेष को आसुत जल के साथ उबालने पर सोडियम सायनाइड, सल्फाइड तथा हैलाइ्ड जल में घुल जाते हैं। इस निष्कर्ष को ‘सोडियम संगलन निष्कर्ष’ (Sodium Fusion Extract) कहते है।

प्रश्न 22.
किसी कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन के आकलन की (i) इ्यूमा विधि तथा (ii) कैल्डॉल विधि के सिद्धान्त की रूप-रेखा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
(i) ड्यूमा विधि
(ii) कैल्डॉल विधि

(i) ड्यूमा विधि (Duma’s Method)-जब किसी नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक यौगिक को CuO के साथ गर्म करने पर नाइट्रोजन मुक्त होती
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है। कार्बन तथा हाइड्रोजन क्रमशः कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल में परिवर्तित हो जाते हैं।
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अल्प मात्रा में बने नाइट्रोजन ऑक्साइडों को गरम कॉपर तार पर प्रवाहित कर नाइट्रोजन में अपचयित कर दिया जाता है। इस प्रकार प्राप्त गैसीय मिश्रण को हाइड्रॉक्साइड पोटैशियम के जलीय विलयन पर एकत्र कर लिया जाता है। कार्बन डाइऑक्साइड पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड द्वारा अवशोषित हो जाती है तथा बची हुयी N2 गैस को जल के ऊपर एकत्र कर लेते हैं। अब N2 का आयतन वायुमण्डल के दाब तथा ताप पर नोट कर लेते हैं तथा इसे NTP पर परिवर्तित कर लेते हैं।

मान लिया, m g कार्बनिक याँगिक से N.T.P. पर x मिली नाइट्रोजन प्राप्त होती है।
∵ N.T.P. पर 22,400 मिली नाइट्रोजन (N2) की मात्रा = 28 g (N2 का g अणुभार)
∴ N.T.P. पर x मिली नाइट्रोजन (N2) की मात्रा = \(\frac { 28x }{ 22,400 }\) g
∵ m g कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन (N2) की मात्रा = \(\frac { 28x }{ 22,400 }\) g
∴ 100 g कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन (N2) की मात्रा = \(\frac{28 x \times 100}{22,400 \times m} \mathrm{~g}\)
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(ii) (ii) कैल्डाल विधि (Kjeldahl’s Method) – जब किसी नाइट्रोजन युक्त कार्बनिक यौगिक को K2SO4 की उपस्थित में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गर्म करते हैं तो उसमें उपस्थित नाइट्रोजन पूर्ण रूप से अमोनियम सल्फेट में परिवर्तित हो जाता है। इस अमोनियम सल्फेट को जब सान्द्र NaOH विलयन के साथ गर्म करते हैं तो अमोनियम गैस निकलती है जिसको ज्ञात सान्द्रण वाले H2SO4 के निश्चित आयतन में अवशोषित कर लेते हैं। इस अम्ल का मानक NaOH के साथ अनुमापन करके गणना द्वारा अवशोषित हुई अमोनिया की मात्रा ज्ञात कर ली जाती है। फिर अन्त में नाइट्रोजन के आयतन की गणना कर लेते हैं।
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माना कि,
कार्बनिक यौगिक का भार = m
प्रयुक्त अम्ल का आयतन = vmL
प्रयुक्त अम्ल की नॉर्मलता = N
V mL N नॉर्मलता का अम्ल = V mL N नॉर्मलता की अमोनिया 1000 mL N नॉर्मलता वाली अमोनिया में 17 g अमोनिया या 14 g नाइट्रोजन होती है।
V mL N NH3 में नाइट्रोजन की मात्रा = \(\frac { 14 }{ 1000 }\) × V × N = 0.014 NV g

इसलिए m ग्राम कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन की मात्रा = 0.014 NV g
100 ग्राम कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन की मात्रा
= \(\frac{0.014 \times \mathrm{N} \times \mathrm{V} \times 100}{m}\) = \(\frac{1.4 \mathrm{NV}}{m}\) g
अत :
कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन की प्रतिशत मात्रा (%)
1.4 × प्राप्त NH3 की नॉर्मलता × प्राप्त NH3 का
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प्रश्न 23.
किसी बौगिक में हैलोजेन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के आंकलन के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
(i) सल्फर एवं नाइट्रोजन का संयुक्त परीक्षण (Combined Test for Sulphur and Nitrogen)-परखनली में सोडियम निष्कर्ष लेकर उसे HCl की सहायता से अम्लीय कर लेने के बाद, उसमें फेरिक क्लोराइड विलयन मिलाते हैं, विलयन का रंग रक्त के समान लाल हो जाता है।
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(ii) फॉस्फोरस का परीक्षण (Detection of Phosphorous)ऑक्सीकारक के साथ गरम करने पर यौगिक में उपस्थित फॉस्फोरस, फॉस्फेट में परिवर्तित हो जाता है। विलयन को नाइट्रिक अम्ल के साथ उबालकर अमोनियम मॉलिब्डेट मिलाने पर पीला अवक्षेप बनता है, जो फॉस्फोरस की उपस्थित को निश्चित करता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 65

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

प्रश्न 24.
पेपर क्रोमेटोग्राफी के सिद्धान्त को समझाइए।
उत्तर:
(iii) यह एक महत्त्वपूर्ण तकनीक है, जिसका उपयोग यौगिकों के शोधन करने में होता है। इसका उपयोग सर्वप्रथम पादपों में पाये जाने वाले रंगीन पदार्थों को पृथक् करने में किया गया था। यह ‘क्रोमेटोग्राफी’ राब्द ग्रीक शब्द ‘क्रोमा’ से बना है जिसका अर्थ ‘रंग’ है। इसमें दो प्रावस्था पायी जाती है। एक स्थिर प्रावस्था तथा दूसरी गतिशील प्रावस्था। यौगिकों के मिश्रण को स्थिर प्रावस्था पर अधिशोषित कर दिया जाता है।

स्थिर प्रावस्था ठोस या द्रव हो सकती है। अंब स्थिर प्रावस्था में से उपयुक्त विलायक, गैस या विलायकों के मिश्रण को धीरे-धीरे प्रवाहित किया जाता है। इस प्रकार मिश्रण के अवयव क्रमश : एक दूसरे से पृथक् हो जाते हैं। यहाँ गति करने वाली प्रावस्था को ‘गतिशील प्रावस्था’ कहा जाता है। इसे निसालक (eluennt) भी कहते हैं। विभिन्न सिद्धान्तों के आधार पर क्रोमेटोग्राफी को विभिन्न वर्गों में बाँटा जाता है। इनमें से दो निन्न प्रकार हैं-

(1) अधिशोषण वर्ण लेखन या अधिशोषण क्रोमेटोग्राफी (Adsorption Chromatography)-इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी में एक विशिष्ट प्रकार के अधिशोषक पर विभिन्न यौगिक भिन्न अंशो में अधिशोषित होते हैं। यहाँ पर प्रयोग होने वाले अधिशोषक ऐलुमिना तथा सिलिका जेल है। स्थिर प्रावस्था अर्थात् अधिशोषक पर गतिशील प्रावस्था प्रवाहित करने के उपरान्त मिश्रण के अवयव स्थिर प्रावस्था पर अलग-अलग दूरी तय करते हैं। इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी दो प्रकार की होती हैं।

(a) कॉलम क्रोमेटोग्राफी या कॉलम-वर्णलेखन या स्तम्भ वर्ण लेखन (Column Chromatography)-इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी में काँच की एक लम्बी नली में स्थिर प्रावस्था या अधिशोषक भरा जाता है। यहाँ प्रयुक्त होने वाला अधिशोषक प्राय: सिलिका जेल या ऐलुमिना होता है, नली के निचले सिरे पर रोधनी लगी रहती है। यौगिक के मिश्रण को उपयुक्त विलायक की न्यूनतम मात्रा में घोलकर कॉलम के ऊपरी
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भाग में अधिशोषित कर देते हैं। तत्पश्चात् एक उपर्युक्त विक्षालक या गतिशील प्रावस्था या इलुएन्ट जो कि द्रव या द्रवों का मिश्रण होता है, को कॉलम में धीमी गति से नीचे की ओर बहने दिया जाता है। विभिन्न यौगिकों के अधिशोषण की मात्रा के आधार पर उसका आंशिक या पूर्ण पृथक्करण हो जाता है। अधिक अधिशोषित यौगिक कॉलम में विभिन्न दूरी तक अधिशोषित होकर नीचे आ जाते हैं। अब लम्बी काँच की नली में लगे रोधन को हटाकर हम विभिन्न यौगिकों को प्राप्त कर लेते हैं। चूंकि यहाँ काँच की लम्बी नली को कॉलम की तरह प्रयोग करते हैं अतः इसको कॉलम स्तम्भ क्रोमेटोग्राफी कहते हैं।

(b) पतली पर्त वर्ण लेखन (Thin Layer Chromatography)-यह एक अधिशोषण क्रोमेटोग्राफी का प्रकार है। यहाँ अधिशोषक या स्थिर प्रावस्था की पतली पर्त का मिश्रण के अवयवों का पृथक्करण होता है। इस प्रकार की वर्ण लेखन में काँच की उपयुक्त आमाप की प्लेट पर अधिशोषक की पतली लगभग 0.2mm की पर्त फैला दी जाती है। यहाँ उपयोग होने वाले अधिशोषक सिलिका जेल या ऐलुमिना होते हैं। इस काँच पर छोटा-सा बिन्दु प्लेट के एक सिरे से लगभग 2 सेमी ऊपर लगाते हैं। प्लेट को अब कुछ ऊँचाई तक विलायक से भरे हुये एक बंद जार में खड़ा कर देते हैं, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

गतिशील प्रावस्था या निक्षालक जैसे-जैसे प्लेट पर आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे मिश्रण के अवयव भी निक्षालक या विलायक या गतिशील प्रावस्था के साथ-साथ प्लेट पर आगे बढ़ते हैं, परन्तु अधिशोषण की तीव्रता के आधार पर ऊपर बढ़ने की उनकी गति भिन्न अधिशोषण को धारण गुणक (retention factor) अर्थात् Rf मान द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
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रंगीन यौगिकों के बिन्दुओं को, जो प्लेट पर विभिन्न अधिशोषक क्षमता के आधार पर प्राप्त हुये हैं, बिना कठिनाई के देखा जा सकता है, परन्तु रंगहीन एवं प्रतिदीप्त होने वाले यौगिकों के बिन्दुओं को प्लेट पर पराबैंगनी प्रकाश के नीचे रखकर देखते हैं। इसके अलावा जार में कुछ आयोडीन के क्रिस्टल रखकर भी रंगहीन बिन्दुओं को देखा जा सकता है। जो यौगिक आयोडीन अवशोषित करते हैं। उनके बिन्दु भूर रंग के दिखाई देते हैं। कभी-कभी उपर्युक्त अभिकर्मक के विलयन को जिसे दर्शनीय अभिकर्मक (visualizing reagent) कहा जाता है, भी प्लेट पर छिड़क कर बिन्दुओं को देखा जा सकता है।

उदाहरण के लिए ऐमीनों अम्ल को देखने के लिए बिन्दुओं की प्लेट पर निनहाइड्रिन विलयन छिड़कते हैं जिससे ऐमीनो अम्ल के यौगिक रंगीन दिखाई देने लगते हैं।
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(2) वितरण क्रोमेटोग्राफी (Partition Chromatography)- इस प्रकार की क्रोमेटोग्राफी स्थिर तथा गतिशील प्रावस्थाओं के मध्य मिश्रण के अवयवों के सतत विभेदी वितरण पर आधारित है। इसका मुख्य उदाहरण पेपर क्रोमेटोग्राफी है। इसमें एक विशिष्ट प्रकार के क्रोमेटोग्राफी कागज का प्रयोग किया जाता है। इस कागज के छिद्रों में जल के अणु पारित रहते हैं, जोकि स्थिर प्रावस्था का कार्य करते हैं।

(a) पेपर क्रोमेटोग्राफी या कागज वर्णलेखन (Paper Chromatography) – यह वितरण क्रोमेटोग्राफी का एक प्रकार है। यहाँ एक विशिष्ट प्रकार के कागज का प्रयोग करते हैं। जिसमें जल के अणु पारित रहते हैं तथा स्थिर प्रावस्था का कार्य करते हैं। इस पेपर को क्रोमेटोग्राफी पेपर कहा जाता है।

क्रोमेटोग्राफी पेपर की सर्वप्रथम एक पट्टी काट ली जाती है जो लगभग 4 सेमी. चौड़ी तथा 25 सेमी. लम्बी होती है। इस पट्टी के आधार पर मिश्रण का बिन्दु लगाकर उसे जार में लटका देते हैं। जार में उपयुक्त ऊँचाई तक एक विलायक भरा होता है अर्थात् जार में गतिशील प्रावस्था भरी होती है। कोशिका क्रिया के कारण पेपर की पट्टी पर विलायक ऊपर की ओर चढ़ता है तथा बिन्दु पर प्रवाहित होता है। विभिन्न यौगिकों का दो प्रावस्थाओं में अधिशोषण वितरण भिन्न-भिन्न होने के कारण वे अलग-अलग दूरी तक आगे की ओर चढ़ते हैं। इस प्रकार प्राप्त क्रोमेटोग्राफी पट्टी को क्रोमेटोग्राम कहा जाता है।
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प्रश्न 25.
‘सोडियम संगलन निष्करर्ष’ में हैलोजेन के परीक्षण के लिए सिल्वर नाइट्रेट मिलाने से पूर्व नाइट्रिक अम्ल ब्यों मिलाया जाता है।
उत्तर:
सोडियम संगलन निफ्कर्ष में हैलोजेन के परीक्षण के लिये सिल्वर नाइट्रेट मिलाने से पूर्व नाइट्रिक अम्ल मिलाया जाता है क्योंकि यदि यौगिक में हैलोजेन के अलावा नाइट्रोजन अथवा सल्फर उपस्थित होते है तो ये नाइट्रिक अम्ल से क्रिया करके सायनाइड तथा सल्फाइड में विघटित हो जाते हैं तथा हैलोजेन के सिल्वर नाइट्रेट परीक्षण में बाधा उत्पन्न नहीं करते हैं।

NaCN + HNO3 → NaNO3 + HCN↑
Na2S + 2NaNO3 + H2S ↑

यदि नाइट्रिक अम्ल न डाले तो NaCN तथा Na2S, AgNO3 से क्रिया करके अवक्षेप देते हैं तथा हैलोजन के परीक्षण में बाधा उत्पन्न करेंगे।
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प्रश्न 26.
नाइट्रोजन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के परीक्षण के लिए सोडियम के साथ कार्बनिक यौगिक का संगलन क्यों किया जाता है ?
उत्तर:
नाइट्रोजन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के परीक्षण के लिए सोडियम के साथ कार्बनिक यौगिक का संगलन किया जाता है क्योंकि सोडियम के साथ ये तत्व अपने सोडियम लवण में जैसे- NaCN, Na2S, Na3PO4 में परिवर्तित हो जाते हैं। ये यौगिक आयनिक होते हैं एवं अत्यधिक क्रियाशील भी होते हैं जिसके कारण इन्हें उपर्युक्त अभिकर्मक

प्रश्न 27.
कैल्सियम सल्फेट तथा कपूर के मिश्रण के अवयवों को पृथक् करने के लिए एक उपयुक्त तकनीक बताइए।
उत्तर:
इसके लिए ऊर्ध्वपातन तकनीक उपयुक्त है क्योंक कपूर का ऊर्ध्वपातन हो सकता जबकि कैल्सियम सल्फेट का नहीं।

प्रश्न 28.
भाप आसवन करने पर एक कार्बनिक द्रव अपने क्वथनांक से निम्न ताप पर वाष्पीकृत क्यों हो जाता है?
उत्तर:
भाप आसवन वास्तव में निम्न दाब पर आसवन होता है। आसवन फ्लास्क में रखे जल वाष्प तथा कार्बनिक द्रव दोनों के वाष्प दाबों का योग वायुमण्डलीय दाब के बराबर होना चाहिए। इसका तात्पर्य यह है कि दोनों अपने सामान्य क्वथनांक से कम ताप पर ही वाष्पीकृत हो जाएँगे।

प्रश्न 29.
क्या CCl4 सिल्वर नाइट्रेट के साथ गर्म करने पर AgCl का श्वेत अवक्षेप देगा ? अपने उत्तर को कारण सहित समझाइए।
उत्तर:
नहीं; क्योंकि CCl4 अध्रुवी यौगिक है तथा जलीय विलयन में Cl आयन नहीं देता है, जबकि सिल्वर नाइट्रेट आयनिक प्रवृत्ति का यौगिक है। इसलिए ये परस्पर अभिक्रिया नहीं करेंगे तथा सिल्वर क्लोराइड का श्वेत अवक्षेप प्राप्त नहीं होगा।

प्रश्न 30.
किसी कार्बनिक यौगिक में कार्बन का आकलन करते समय उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने के लिए पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड विलयन का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
ऐसा इसलिए किया जाता है; क्योंकि पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड प्रबल क्षार है तथा CO2 का पूर्णतया अवशोषण कर सकता है। इस प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण करके पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड विलेय पोटैशियम कार्बोनेट बना लेता है जिसका आकलन किया जा सकता है।

2KOH + CO2 → K2CO3 + H2O

प्रश्न 31.
सल्फर के लेड ऐसीटेट द्वारा परीक्षण में ‘सोडियम संगलन निष्कर्ष’ को ऐसीटिक अम्ल द्वारा उदासीन किया जाता है, न कि सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा। क्यों ?
उत्तर:
सोडियम संगलन निष्कर्ष को ऐसीटिक अम्ल द्वारा अम्लीकृत कर लेड ऐसीटेट मिलाने पर यदि लेड सल्फाइड का काला अवक्षेप बनता है तो सल्फर की उपस्थिति की पुष्टि होती है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 71
परन्तु ऐसीटिक अम्ल के स्थान पर सल्फ्यूरिक अम्ल का प्रयोग किया जाए तो लेड ऐसीटेट सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया करके लेड सल्फेट का सफेद अवक्षेप देगा जो सल्फर के परीक्षण में बाधा उत्पन्न कर देता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 कार्बनिक रसायन : कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

प्रश्न 32.
एक कार्बनिक यौगिक में 69% कार्बन, 4.8% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। इस यौगिक के 0.20g के पूर्ण दहन के फलस्वरूप उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल की मात्राओं की गणना कीजिए।
उत्तर:
उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा की गणना-
यौगिक का द्रव्यमान = 0.20g
कार्बन का प्रतिशत = 69%
कार्बन का प्रतिशत
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 72
उ्पन्न जल की मात्रा की गणना –
यौगिक का द्रव्यमान = 0.20g
हाइड्रोजन का प्रतिशत = 4.8%
हाइड्रोजन का प्रतिशत
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 73

प्रश्न 33.
0.50g कार्बनिक यौगिक को कैल्डाल विधि के अनुसार उपचारित करने पर प्राप्त अमोनिया को 0.5 M H2SO4 के 50 mL में अवशोषित किया गया। अवशिष्ट अम्ल के उदासीनीकरण के लिए 0.5 M NaOH के 50 mL की आवश्यकता हुई। यौगिक में नाइट्रोजन प्रतिशतता की गणना कीजिए।
हल : अवशिष्ट अम्ल के आयतन की गणना –
NaOH विलयन का आवश्यक आयतन = 50 mL
NaOH विलयन की मोलरता = 0.5 M
H2SO4 विलयन की मोलरता = 0.5 M
अवशिष्ट अम्ल के आयतन की गणना के लिए मोलरता समीकरण का प्रयोग करना होगा।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 74
प्रयुक्त अम्ल के आयतन की गणना-
मिलाए गए अम्ल का आयतन = 50 mL
अवशिष्ट अम्ल का आयतन = 25 mL
प्रयुक्त अम्ल का आयतन = (50 – 25) = 25 mL

नाइट्रोजन की प्रतिशतता की गणना-
यौगिक की मात्रा = 0.50 g
प्रयुक्त अम्ल का आयतन = 25 mL
प्रयुक्त अम्ल की मोलरता = 0.5 M
नाइट्रोजन की प्रतिशतता
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 75

प्रश्न 34.
केरियस आकलन में 0.3780 g कार्बनिक क्लोरो यौगिक से 0.5740 g सिल्वर क्लोराइड प्राप्त हुआ। यौगिक में क्लोरीन की प्रतिशतता की गणना कीजिए।
हल : यौगिक का द्रव्यमान = 0.3780 g
सिल्वर क्लोराइड का द्रव्यमान = 0.5740 g
क्लोरीन की प्रतिशतता
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 76
= \(\frac { 35.5 }{ 143.5 }\) × \(\frac { 0.5740 }{ 0.3780 }\) × 100
= \(\frac { 2037.7 }{ 54.243 }\) = 37.57%

प्रश्न 35.
केरियस विधि द्वारा सल्फर के आकलन में 0.468 g सल्फर युक्त कार्बनिक यौगिक से 0.668 g बेरियम सल्फेट प्राप्त हुआ। दिए गए कार्बन यौगिक में सल्फर की प्रतिशतता की गणना कीजिए।
उत्तर:
बेरियम सल्फेट की मात्रा = 0.668 g
सल्फर की प्रतिशतता
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 12 Img 77
= \(\frac { 32 }{ 233 }\) × \(\frac { 0.668 }{ 0.468 }\) × 100 = \(\frac { 2137.6 }{ 109.044 }\) = 19.60%

प्रश्न 36.
CH2 = CH-CH2-CH2-C ≡CH, कार्बनिक यौगिक में C2 – C3 आबन्ध किन संकरित कक्षकों के युग्म से निर्मित होता है ?
(क) sp – sp2
(ख) sp – sp3
(ग) sp2 – sp3
(घ) sp3 – sp3
उत्तर:
(ग) sp2 – sp3

प्रश्न 37.
किसी कार्बनिक यौगिक में लैसेग्ने-परीक्षण द्वारा नाइट्रोजन की जाँच में प्रश्शियन ब्लू रंग निम्नलिखित में से किसके कारण प्राप्त होता है ?
(क) Na4[Fe(CN)6]
(ख) Fe4[Fe(CN)6]3
(ग) Fe2[Fe(CN)6]
(घ) Fe3[Fe(CN)6]4
उत्तर:
(ख) Fe4[Fe(CN)6]3

प्रश्न 38.
निम्नलिखित कार्बधनायनों में से कौन-सा सबसे अधिक स्थायी है ?
(क) \(\left(\mathrm{CH}_3\right)_3 \stackrel{+}{\mathrm{C}} \cdot \mathrm{CH}_2\)
(ख) \(\left(\mathrm{CH}_3\right)_3 \stackrel{+}{\mathrm{C}}\)
(ग) \(\mathrm{CH}_3 \mathrm{CH}_2 \stackrel{+}{\mathrm{C}} \mathrm{H}_2\)
(घ) \(\mathrm{CH}_3 \stackrel{+}{\mathrm{C}} \mathrm{HCH}_2 \mathrm{CH}_3\)
उत्तर:
(ख) \(\left(\mathrm{CH}_3\right)_3 \stackrel{+}{\mathrm{C}}\)

प्रश्न 39.
कार्बनिक यौगिकों के पृथक्करण और शोधन की सर्वोत्तम तथा आधुनिकतम तकनीक कौन-सी है ?
(क) क्रिस्टलन
(ख) आसवन
(ग) ऊर्ध्वपातन
(घ) क्रोमेटोग्राफी
उत्तर:
(घ) क्रोमेटोग्राफी

प्रश्न 40.
CH3CH2I + KOH(aq) → CH3CH2OH+KI अभिक्रिया को नीचे दिए गए प्रकार में वर्गीकृत कीजिए-
(क) इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन
(ख) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन
(ग) विलोपन
(घ) संकलन
उत्तर:
(ख) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन

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HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

Haryana State Board HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 1.
मेथेन के क्लोरीनीकरण के दौरान ऐथेन कैसे बनती है ? आप इसे कैसे समझाएँगे।
उत्तर:
जब मेथेन का क्लोरीनीकरण होता है तो मुक्त मूलक बनता है यह मुक्त मूलक आपस में मिलकर ऐथेन बनाता है एवं प्रृंखला समापन पद का कार्य करता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के I.U.P.A.C. नाम लिखिए-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 2
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 3

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों, जिनमें द्विआबन्ध तथा त्रिआबन्ध की संख्या दशाई गई है, के सभी सम्भावित स्थिति समावयवियों के संरचना सूत्र एवं I.U.P.A.C. नाम दीजिए-
(क) C4H8 (एक द्विआबन्ध)
(ख) C5H8 (एक त्रिआबन्ध)
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 4

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 4.
निम्नलिखित यौगिकों के ओजोनी- अपघटन के पश्चात् बनने वाले उत्पादों के नाम लिखिए-
(i) पेन्ट-2-ईन
(ii) 3, 4-डाईमेथिल-हेप्ट-3-ईन
(iii) 2-एथिल ब्यूट-1-ईन
(iv) 1-फेनिल ब्यूट-1-ईन
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 5

प्रश्न 5.
एक ऐल्कीन ‘A’ के ओजोनी अपघटन से पेन्टेन-3ओन तथा ऐथेनेल का मिश्रण प्राप्त होता है। ‘A’ का I.U.P.A.C. नाम तथा संरचना दीजिए।
उत्तर:
ऐल्कीन ‘A’ 3 -ऐथिल पेन्ट-2-ईन है। इसकी संरचना तथा होने वाली ओजोनी अपघटन अभिक्रिया निम्नलिखित है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 6

प्रश्न 6.
एक ऐल्कीन A में तीन C-C, आठ C-H सिग्मा-आबन्ध तथा एक C-C पाई आबन्ध हैं। A ओजोनी अपघटन से दो अुण एल्डिहाइड, जिनका मोलर द्रव्यमान 44 है, देता है। A का आई. यू. पी. ए. सी. नाम लिखिए।
उत्तर:
एल्डिहाइड, जिसका मोलर द्रव्यमान 44 है एवं जो ओजोनी अपघटन से प्राप्त होता है, CH3CHO (ऐथेनेल) है। चूँकि एक ही एल्डिहाइड ऐथेनेल के दो मोल, ऐल्कीन ‘A ‘ से बनते है, अतः ऐल्कीन का अणुसूत्र है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 7

प्रश्न 7.
एक ऐल्कीन, जिसके ओजोनी अपघटन से प्रोपेनेल तथा पेन्टेन-3-ओन प्राप्त होते हैं, का संरचनात्मक सूत्र क्या है?
उत्तर:
ऐल्कीन का नाम 3 -ऐथिल हेक्स-3-ईन है। इसका संरचनात्मक सूत्र तथा ओजोनी अपघटन अभिक्रिया निम्नलिखित है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 8

प्रश्न 8.
निम्नलिखित हाइड्रोकार्बनों के दहन की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए-
(1) ब्यूटेन,
(2) पेन्टीन,
(3) हेक्साइन,
(4) टॉलूईन।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 9

प्रश्न 9.
हेक्स-2-ईन की समपक्ष (सिस) तथा विपक्ष (ट्रांस) संरचनाएँ बनाइये। इनमें से कौन-से समावयव का क्वथनांक उच्च होता है और क्यों ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 10
यहाँ समपक्ष का क्वथनांक उच्च होता है, जोकि उच्च द्विध तुव-आघूर्ण के कारण होता है। द्विध्रुव आघूर्ण अधिक होने के कारण तुवणता अधिक होती है जिससे अधिक बान्डर-वाल्स आकर्षण बल उत्पन्न हो जाता है।

प्रश्न 10.
बेन्जीन में तीन द्वि-आबन्ध होते हैं, फिर भी यह अत्यधिक स्थायी है, क्यों ?
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 11
बेन्जीन में अनुनाद पाया जाता है एवं यह विभिन्न अनुनादी संरचना को प्रदर्शित करता है। केकुले ने उपरोक्त दिखाई गयी संरचनाओं को दिया। चूँक अनुनाद के कारण बेन्जीन में सभी बन्धों की लम्बाई एकसमान होती है और वह द्वि-आबन्ध एवं एकल आबन्ध के मध्य की होती है। जिसके कारण इन संरचनाओं का स्थायित्व बढ़ जाता है और यह अधिक स्थायी हो जाता है।

प्रश्न 11.
किसी निकाय द्वारा ऐरोमैटिकता प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक शर्तें क्या हैं?
उत्तर:
ऐरोमैटिकता प्रदर्शित करने के लिए निम्न गुण होने आवश्यक हैं-

  1. वे चक्रीय एवं समतलीय होने चाहिए।
  2. इनमें एक या इससे अधिक द्विबन्ध उपस्थित होने चाहिए। द्विबन्ध उपस्थित होने के बावजूद ये योगात्मक अभिक्रियाओं की तुलना में प्रतिस्थापना
    अभिक्रियाओं को प्राथमिकता देते हैं।
  3. ये समतलीय होने चाहिए।
  4. वलय में (4n + 2)π इलेक्ट्रॉन होने चाहिए। जहाँ n एक पूर्णांक है।
  5. यौगिक में अनुनाद प्रदर्शित करने की क्षमता होनी चाहिए।

प्रश्न 12.
इनमें से कौन से निकाय ऐरोमैटिक नहीं हैं? कारण स्पष्ट कीजिए।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 12
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 13
इसमें (4n + 2)π इलेक्ट्रॉन = 6π इलेक्ट्रॉन
परन्तु ये इलेक्ट्रॉन विस्थानीकृत नहीं होते हैं अतः यह ऐरोमैटिक नहीं हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 14
इसमें (4n + 2)π इलेक्ट्रॉन = 6 होने चाहिए। परन्तु इसमें केवल 4π इलेक्ट्रॉन हैं अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 15
इसमें (4n + 2)π इलेक्ट्रॉन = 6 होने चाहिए, परन्तु इसमें 8π इलेक्ट्रॉन है। अतः यह ऐरोमैटिक नहीं है।

प्रश्न 13.
बेन्जीन को निम्न में परिवर्तित कैसे करोगे-
(1) p – नाइट्रोबेन्जीन
(2) m – नाइट्रोक्लोरो बेन्जीन
(3) p – नाइट्रोटॉलूईन
(4) ऐसीटोफिनोन
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 16

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 14.
ऐल्केन CH3 – CH2 – C(CH3)2 – CH2 – CH(CH3)2 में 1°, 2° तथा 3° कार्बन परमाणुओं की पहचान कीजिए तथा प्रत्येक कार्बन से आबन्धित कुल हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या भी बताइए।
उत्तर:
अगर कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन से जुड़ा हो तो उसे 1° कार्बन परमाणु कहते हैं।
अगर कार्बन परमाणु दो हाइड्रोजन से जुड़ा हो तो उसे 2° कार्बन परमाणु कहते हैं।
अगर कार्बन परमाणु एक हाइड्रोजन से जुड़ा हो तो उसे 3° कार्बन परमाणु कहते हैं।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 17

प्रश्न 15.
क्वथनांक पर ऐल्केन की श्वृंखला के शाखन का क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के साथ-साथ ऐल्केनों के क्वथनांक बढ़ जाते हैं क्योंकि वान्डरवाल का आकर्षण बल बढ़ जाता है। जैसे-जैसे ऐल्केन को शृंखला में वृद्धि होती है इनका क्वथनांक कम हो जाता है क्योंकि शृंखलाओं की संख्या बढ़ने से अणु की आकृति लगभग गोल हो जाती है। इन गोलाकार अणुओं में कम आपसी सम्पर्क स्थल तथा दुर्बल आन्तराण्विक आकर्षण बल होता है।
उदाहरण-
क्वथनांक CH3CH2CH2CH2CH3>
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 18

प्रश्न 16.
प्रोपीन पर HBr के संकलन से 2 -ब्रोमोप्रोपेन बनता है, जबकि बेंजॉयल परॉक्साइड की उपस्थिति में यह अभिक्रिया 1-ब्रोमोप्रोपेन देती है। क्रियाविधि की सहायता से इसका कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रथम स्थिति-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 19
इस स्थिति में क्रियाविधि निम्नानुसार दर्शाई जा सकती है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 20

प्रश्न 17.
1, 2-डाइमेथिलबेन्जीन (o-जाइलीन) के ओजोनी अपघटन को फलस्वरूप निर्मित उत्पादों को लिखिए। यह परिणाम बेन्जीन को केकुले संरचना की पुष्टि किस प्रकार करता है?
उत्तर:
O-जाइलीन का ओजोनीकरण निम्न प्रकार होता है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 21
उपरोक्त लिखित सभी उत्पाद वलय में एकान्तर क्रम में उपस्थित द्विआबन्धी की उपस्थिति के कारण हैं। चूँकि दोनों दी गई o-जाइलीन की सरचना ककुले को अनुनाद संरचना है जिससे भिन्न उत्पाद बन रहे हैं। अतः ओजोनीकरण से हम केकुले की संरचना की पुष्टि कर सकते हैं।

प्रश्न 18.
बेन्जीन, n-हैक्सेन तथा ऐथाइन को घटते हुए अम्लीय व्यवहार के क्रम में व्यवस्थित कीजिए एवं इस व्यवहार का कारण भी बताइए।
उत्तर:
अम्लीय व्यवहार – ऐथाइन > बेन्जीन n हेक्सेन
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 22
एथाइन में कार्बन sp संकरित है, जो कि सर्वाधिक s-प्रकृति होने के कारण अत्यधिक विद्युत ऋणी है और यह इलेक्ट्रॉनों के साझे युग्म को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है, जिसके कारण सरलता से H+ को मुक्त भी कर सकता है। अतः सर्वाधिक अम्लीय प्रकृति का होता है। बेन्जीन में कार्बन sp2 संकरित है या कम विद्युत ऋणी है, अतः कम सरलता से H+ मुक्त करेगा, जबकि n-हेक्सेन में कार्बन sp3 संकरित होने के कारण न्यूनतम विद्युत ऋणी है और सरलता से H+ को मुक्त नहीं करेगा। अतः n-हेक्सेन सबसे कम अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 19.
बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदशित करती हैं, जबकि उसमें नाभिकरनेहीं प्रतिस्थापन कठिन होता है।
उत्तर:
बेन्जीन में वलय के तल के ऊपर तथा नीचे 6π इलेक्ट्रॉनों का इलेक्ट्रॉन अभ्र (electron cloud) होता है। यह इलेक्ट्रॉनों का धनी स्रोत होता है। जब यह इलेक्ट्रॉनरागियों को अपनी ओर आकर्षित करता है, परिणामस्वरूप बेंजीन आसानी से इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ देती है, जबकि नाभिकरागी प्रतिस्थापन कठिनाई से होता है।

प्रश्न 20.
आप निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जीन में कैसे परिवर्तित करेंगे?
(1) ऐथाइन
(2) सेथीन
(3) हेक्सेन।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 23

प्रश्न 21.
उन सभी ऐल्कीनों की संरचनाएँ लिखिए, जो हाइड्रोजनीकरण करने पर 2-मेथिल ब्यूटेन देती हैं।
उत्तर:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 24

प्रश्न 22.
निम्नलिखित यौगिकों को उनकी इलेक्ट्रॉनस्नेही (E+) के प्रति घटती आपेक्षित क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए-

(क) क्लोरोबेन्जीन , 2, 4-डाइनाइट्रोक्लोरोबेन्जीन , p-नाइट्रोक्लोरोबेन्जीन
(ख) टॉलूईन, p-H3C-C6H4-NO2, p-O2N-C6H4-NO2
उत्तर:
(क) इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति घटती क्रियाशीलता का सही क्रम निम्नलिखित है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 25
व्याख्या- NO2 समूह एक आक्रय समूह है एव यह बन्जान वलय पर इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन को अक्रिय कर देता है। अतः NO2-समूह की अधिक संख्या में उपस्थिति इलेक्ट्रॉन स्नेही प्रतिस्थापन को कम कर देती है।

(ख) घटती क्रियाशीलता का सही क्रम निम्नलिखित है-
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 26
व्याख्या-मेथिल समूह एक सक्रिय समूह है जबकि NO2 – समूह एक अक्रिय समूह है अतः उपरोक्त क्रम सही है।

प्रश्न 23.
बेन्जीन, m-डाईनाइट्रोबेन्जीन तथा टॉलूईन में से किसका नाइट्रीकरण आसानी से होता है और क्यों ?
उत्तर:
टॉलूईन का नाइट्रीकरण आसानी से होता है क्योंकि मेथिल समूह एक सक्रिय या इलेक्ट्रॉन विमुक्तन समूह होता है एवं यह बेन्जीन वलय पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ा देता है।

HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 हाइड्रोकार्बन

प्रश्न 24.
बेन्जीन के ऐथिलीकरण में निर्जल AlCl3 के स्थान पर कोई दूसरा लुइस अम्ल सुझाइए।
उत्तर:
FeCl3 (फेरिक क्लोराइड) ।

प्रश्न 25.
क्या कारण है कि वुर्ट्ज अभिक्रिया विषम कार्बन परमाणु वाले विशुद्ध ऐल्केन बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं की जाती ? उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
विषम संख्या कार्बन परमाणु वाले ऐल्केन बनाने के लिए दो भिन्न हैलो ऐल्केन की आवश्यकता होती है जिसमें एक सम संख्या एवं एक विषम संख्या कार्बन परमाणु वाला हैलो ऐल्केन होता है।
उदाहरण:
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 27
परन्तु यहाँ पेन्टेन के साथ-साथ कुछ अन्य ऐल्केन भी बनेगे। उदाहरण-ब्रोमोऐथेन, ब्यूटेन देता है तथा 1 -ब्रोमोप्रोपेन हेक्सेन देता है।
HBSE 11th Class Chemistry Solutions Chapter 13 Img 28
अतः ब्यूटेन, पेन्टेन तथा हेक्सेन का मिश्रण प्राप्त होगा। इस मिश्रण से प्रत्येक घटक को पृथक् करना अत्यधिक कठिन कार्य होगा।

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HBSE 12th Class Economics Solutions Haryana Board

Haryana Board HBSE 12th Class Economics Solutions

HBSE 12th Class Economics Solutions in Hindi Medium

HBSE 12th Class Economics Part 1 Microeconomics (व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (भाग-1))

HBSE 12th Class Economics Part 2 Macroeconomics (समष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (भाग-2))

HBSE 12th Class Economics Solutions in English Medium

HBSE 12th Class Economics Part 1 Microeconomics

  • Chapter 1 Micro Economics: An Introduction
  • Chapter 2 Theory of Consumer Behaviour
  • Chapter 3 Production and Costs
  • Chapter 4 Theory of the Firm Under Perfect Competition
  • Chapter 5 Market Equilibrium
  • Chapter 6 Non-Competitive Markets

HBSE 12th Class Economics Part 2 Macroeconomics

  • Chapter 1 Macro Economics: An Introduction
  • Chapter 2 National Income Accounting
  • Chapter 3 Money and Banking
  • Chapter 4 Determination of Income and Employment
  • Chapter 5 Government Budget and The Economy
  • Chapter 6 Open Economy: Macro Economics

HBSE 12th Class Economics Question Paper Design

Class: 12th
Subject: Economics
Paper: Annual or Supplementary
Marks: 80
Time: 3 Hours

1. Weightage to Objectives:

ObjectiveKUASTotal
Percentage of Marks504055100
Marks40324480

2. Weightage to Form of Questions:

Forms of QuestionsESAVSAO/MapTotal
No. of Questions387119
Marks Allotted1832141680
Estimated Time47703924180

3. Weightage to Content:

Units/Sub-UnitsMarks
1. विषय प्रवेश (व्यष्टि अर्थशास्त्र भाग-1)4
2. उपभोक्ता का व्यवहार और मांगें10
3. उत्पादक का व्यवहार और आपूर्ति6
4. बाजार संरचना के विभिन्न प्रतिमान और कीमत निर्धारण10
5. प्रतिस्पर्धा रहित बाजार10
6. विषय प्रवेश (समष्टि अर्थशास्त्र भाग-2)4
7. राष्ट्रीय आय और संबंधित समुच्चय10
8. आय और रोजगार का निर्धारण5
9. मुद्रा और बैंक व्यवस्था8
10. सरकारी बजट और अर्थव्यवस्था7
11. भुगतान शेष6
Total80

4. Scheme of Sections:

5. Scheme of Options: Internal Choice in Long Answer Question i.e. Essay Type in two questions.

6. Difficulty Level:
Difficult: 10% Marks
Average: 50% Marks
Easy: 40% Marks

Abbreviations: K (Knowledge), U (Understanding), A (Application), S (Skill), E (Essay Type), SA (Short Answer Type), VSA (Very Short Answer Type), O (Objective Type)

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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

1. ऑक्सीकीय फॉस्फेटीकरण होता है-
(A) क्लोरोप्लास्ट में
(B) माइटोकॉण्ड्रिया में
(C) परऑक्सीसोम में
(D) सेन्ट्रिओल में
उत्तर:
(B) माइटोकॉण्ड्रिया में

2. जब ATP ADP में परिवर्तित होता है तो-
(A) ऊर्जा निकलती है।
(B) ऊर्जा शोषित होती है
(C) विकर बनता है।
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(A) ऊर्जा निकलती है।

3. ऑक्सीजन के EMP पथ के मध्य कुल ATP का उत्पादन होता है-
(A) 24 ATP
(B) 8 ATP
(C) 38 ATP
(D) 6 ATP
उत्तर:
(B) 8 ATP

4. सुमेलित करके सही कूट चुनिए –

1. C4 चक्र के प्रतिपादनकर्ता(a) बारवर्ग
2. फोटोफॉस्फोरिलेशन के खोजकर्ता(b) ब्लैकमेन
3. C3 चक्र के प्रतिपादनकर्ता(c) केल्विन व बेन्सन
4. सीमाकारक नियम के प्रस्तुतकर्ता(d) आर्नन
5. क्लोरेला पर प्रयोग(e) हैच व स्लैक

कूट
(A) 1 (a), 2. (b), 3. (c), 4. (d), 5. (e)
(B) 1. (e), 2. (d), 3. (c), 4. (b), 5. (a)
(C) 1. (a), 2. (b), 3. (e), 4. (d), 5. (c)
(D) 1. (c), 2. (b), 3. (d), 4. (a), 5. (e)
उत्तर:
(B) 1. (e), 2. (d), 3. (c), 4. (b), 5. (a)

5. कौन-सा युग्म सही नहीं है ?
(A) C3 – मक्का
(B) केल्विन चक्र – PGA
(C) हैच- स्लेक चक्र – OAA
(D) C4 – ब्रॉन्ज शारीरिकी
उत्तर:
(A) C3 – मक्का

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

6. केरोटीन पौधों को बचाता
(A) प्रकाश ऑक्सीकरण से
(B) निर्जलीकरण से
(C) प्रकाश श्वसन से
(D) प्रकाश संश्लेषण से
उत्तर:
(C) प्रकाश श्वसन से

7. कौन- इलेक्ट्रॉन संवहन में भाग नहीं लेता है-
(A) CO2
(B) Fa-S
(C) ATP
(D) NAD+
उत्तर:
(C) ATP

8. कौन-सा C4 पौधा है-
(A) प्याज
(B) चौलाई
(C) आलू
(D) सरसों
उत्तर:
(B) चौलाई

9. प्रकाश तंत्र-1 में पहला इलेक्ट्रॉन पाही है-
(A) एक- आयरन सल्फर प्रोटीन
(B) फैरोडॉक्सिन
(C) साइटोक्रोम
(D) प्लास्टोसायनिन
उत्तर:
(A) एक- आयरन सल्फर प्रोटीन

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

10. प्रकाश संश्लेषण में O निकलती है-
(A) CO2 से
(C) जल से
(B) ATP से
(D) भोजन से
उत्तर:
(C) जल से

11. ग्लूकोज के संश्लेषण में आवश्यक हाइड्रोजन का स्रोत है –
(A) NADPH2
(B) FADH2
(C) H2O
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) NADPH2

12. मण्ड संचित करने वाला लवक होता है-
(A) एमाइलोप्लास्ट
(B) ल्यूकोप्लास्ट
(C) क्लोरोप्लास्ट
(D) क्रोमोप्लास्ट
उत्तर:
(B) ल्यूकोप्लास्ट

13. सूर्य की ऊर्जा किस रूप में रासायनिक ऊर्जा में संचित होती है ?
(A) ATP
(B) RNA
(C) DNA
(D) खाद्य रूप में
उत्तर:
(A) ATP

14. प्रकाश संश्लेषण की दर सर्वाधिक होती है-
(A) लाल प्रकाश में
(B) नीले प्रकाश में
(C) अवरक्त प्रकाश में
(D) हरे प्रकाश में
उत्तर:
(A) लाल प्रकाश में

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

15. DCMU
(A) ऑक्सीजन को मुक्त होने से रोकता है।
(B) ऑक्सीजन का मुक्त होना उद्दीपित करता है।
(C) CO2 का स्थिरीकरण निरुद्ध करता है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) ऑक्सीजन को मुक्त होने से रोकता है।

16. केल्विन चक्र पाया जाता है-
(A) क्लोरोप्लास्ट में
(B) माइटोकॉन्ड्रिया में
(C) गॉल्सीका में
(D) केन्द्रक में
उत्तर:
(A) क्लोरोप्लास्ट में

17. प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश-
(A) पत्ती को गर्म करता है
(B) इलेक्ट्रॉनों को ऊर्जा देता है
(C) ATP में संचित होता है
(D) जल अपघटन करता है
उत्तर:
(D) जल अपघटन करता है

18. प्रकाश कर्म-11 में होता है –
(A) CO2 स्थिरीकरण
(B) CO2 अपचयन
(C) HO2 विखण्डन
(D) ये सभी
उत्तर:
(B) CO2 अपचयन

19. वॉयलेकॉइड होते हैं-
(A) माइटोकॉण्ड्रिया में
(B) हरित लवक में
(C) गॉल्जीकार्य में
(D) तारक काय में
उत्तर:
(B) हरित लवक में

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20. प्रकाश संश्लेषण में प्रमुख सीमाकारी है-
(A) जल
(B) O2
(C) CO2
(D) N2
उत्तर:
(C) CO2

21. प्रकाश कर्म-1 में अभिक्रिया केन्द्र है-
(A) P-680
(B) P – 700
(C) P-650
(B) P – 700
(D) P-670
उत्तर:
(B) P – 700

22. O18 का प्रयोग करके किसने बताया कि O2 जल से निकलती है-
(A) केल्विन तथा बेन्सन ने
(B) इमर्सन तथा अरनॉल्ड ने
(C) हिल तथा बेहाल ने
(D) रुबेन तथा कामेन ने
उत्तर:
(D) रुबेन तथा कामेन ने

23. क्लोरोफिल ‘ए’ का सूत्र है-
(A) C55 H70O6N4 Mg
(B) C55 H72O5N4 Mg
(C) C55 H48O2N4 Mg
(D) C55 H70O5N6 Mg
उत्तर:
(B) C55 H72O5N4 Mg

24. प्रकाशीय क्रिया के दौरान नहीं होता है-
(A) जल का प्रकाशीय अपघटन
(B) H की विमुक्ति
(C) O2 की विमुक्ति
(D) इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण
उत्तर:
(D) इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण

25. फोटोसिस्टम-11 में उपयोग होने वाले आयन है-
(A) Mn+ और Cl
(B) Mg+2 और NO
(C) Fe++ और Cl
(D) K+ और Na+
उत्तर:
(A) Mn+ और Cl

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26. हरित लवक में NADPH2 का निर्माण किस समय होता है ?
(A) अचक्रीय प्रकाशीय फॉस्फोरिलेशन
(B) चक्रीय प्रकाशीय फॉस्फोरिलेशन
(C) ऑक्सकीय फॉस्फोरिलेशन
(D) सबस्ट्रेट लेबल फॉस्फोरिलेशन
उत्तर:
(B) चक्रीय प्रकाशीय फॉस्फोरिलेशन

27. प्रकाश संश्लेषण में प्रथम CO2 पाही है-
(A) फॉस्फोरिक अम्ल
(B) राहबुलोज फॉस्फेट
(C) ग्लूकोज
(D) राहबुलोज 1, 5-बाइफॉस्फेट
उत्तर:
(D) राहबुलोज 1, 5-बाइफॉस्फेट

28. केल्विन चक्र की खोज में प्रयोग किया गया था-
(A) स्पाइरोगाइरा
(C) क्लेमाइडोमोनास
(B) वॉलवॉक्स
(D) क्लोरेला
उत्तर:
(D) क्लोरेला

29. C4 पौधों में CO2 का प्रथम प्राही है-
(A) फॉस्फोइनोल पाइरुवेट
(B) रिबुलोज-1, 5-बाईफॉस्फेट
(C) आक्सेलोएसीटिक एसिड
(D) फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल
उत्तर:
(A) फॉस्फोइनोल पाइरुवेट

30. प्रकाश संश्लेषण के दौरान –
(A) उत्पन्न O2 CO2 से आती है
(B) ATP बनते हैं
(C) ATP नहीं बनते हैं
(D) H2O माध्यम आवश्यक है किन्तु प्रकाश संश्लेषण में भाग नहीं लेता
उत्तर:
(B) ATP बनते हैं

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31. C4 पाया जाता है-
(A) अंजीर में
(B) आम में
(C) गन्ना में
(D) इनमें से किसी में नहीं
उत्तर:
(C) गन्ना में

32. RuBP पाया जाता है –
(A) ETS में
(B) केल्विन चक्र में
(C) C, पौधे में
(D) फ्रेम में
उत्तर:
(B) केल्विन चक्र में

33. प्रकाश श्वसन के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं-
(A) अधिक O2 तथा कम CO2
(B) कम O2 तथा अधिक CO2
(C) अधिक तापमान तथा अधिक CO2
(D) अधिक आईता तथा कम तापमान
उत्तर:
(A) अधिक O2 तथा कम CO2

34. गन्ना CO2 स्थिरीकरण की उच्च दक्षता दर्शाता है क्योंकि होता है –
(A) केल्विन चक्र
(B) हैच-स्लैक चक्र
(C) TCA
(D) उच्च सूर्य प्रकाश
उत्तर:
(B) हैच-स्लैक चक्र

35. क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोफिल स्थित होते हैं-
(A) बाह्य झिल्ली में।
(B) आन्तरिक झिल्ली में
(C) पॉयलेॉइड में
(D) स्ट्रोमा में
उत्तर:
(C) पॉयलेॉइड में

36. C4 पादपों में प्रकाश-संश्लेषण वातावरणीय CO2 के कारण अन्य सीमित होता है क्योंकि –
(A) CO2 बंडलाच्छद कोशिका में प्रभावी पम्पिंग
(B) C4 पौधों में रुविस्को को CO2 के प्रति उच्च बन्धुता
(C) CO2 स्थिरीकरण का प्राथमिक उत्पाद 4 कार्बन यौगिक
(D) CO2 का प्राथमिक स्थिरीकरण PEP के मध्यस्थ होकर
उत्तर:
(D) CO2 का प्राथमिक स्थिरीकरण PEP के मध्यस्थ होकर

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37. C4 पादपों में CO2 स्थिर करने वाला एन्जाइम है-
(A) PEP कार्बोक्सिले
(C) RuBP ऑक्सिलेज
(B) RuBP कार्बोक्सिलेज
(D) लाइगेज
उत्तर:
(D) लाइगेज

38. प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा को कौन-सा पदार्थ ग्रहण करता है ?
(A) पर्णहरित
(B) जल का अणु
(C) O2
(D) RUBP
उत्तर:
(A) पर्णहरित

39. सीमाकारी कारकों का नियम किसने दिया-
(A) लीबिग
(B) ब्लैकमैन ने
(C) केल्विन ने
(D) आर्नन ने
उत्तर:
(B) ब्लैकमैन ने

40. प्रकाश कर्म-II के उत्तेजित क्लोरोफिल अणु से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन का प्रथम ग्राही है-
(A) सायटोक्रोम
(B) आयरन-सल्फर प्रोटीन
(C) फैरीडॉक्सिन
(D) क्वीनोन
उत्तर:
(D) क्वीनोन

41. उच्च पादपों में हरित लवक के स्ट्रोमा में उपस्थित होते हैं-
(A) प्रकाश-स्वतन्त्र अभिक्रिया के एन्जाइम
(B) प्रकाश-निर्भर अभिक्रिया के एन्जाइम
(C) राइबोसोम
(D) पर्णहरिम
उत्तर:
(A) प्रकाश-स्वतन्त्र अभिक्रिया के एन्जाइम

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42. चक्रीय प्रकाश फास्फोरिलीकरण द्वारा निर्मित होते हैं-
(A) NADPH
(B) ATP तथा NADPH
(C) ATP, NADPHO2
(D) ATP.
उत्तर:
(D) ATP.

43. C3 पादपों में प्रकाश-संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया का प्रथम स्थाई उत्पाद है-
(A) PGAL
(B) RuBP
(C) PGA
(D) OAA.
उत्तर:
(C) PGA

44. चक्रीय प्रकाश फास्फोरिलीकरण ह्षोता है-
(A) प्रकाश तन्न्र-I में
(B) प्रकाश तन्त्र-II में
(C) A तथा B दोनों में
(D) केल्विन-चक्र में।
उत्तर:
(A) प्रकाश तन्न्र-I में

45. क्राँज शरीरिकी (Kranz anatomy) अभिलक्षण है-
(A) जलोद्भिदों का
(B) मरुद्भिदों का
(C) C3 पादपों का
(D) C4 पादपों का।
उत्तर:
(D) C4 पादपों का।

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46. निम्नलिखित में से किसमें प्रकाश-संश्लेषण के दौरान प्रथम CO2 स्थिरीकरण उत्पाद के रूप में PGA की खोज की गई-
(A) बायोफाइटा
(B) अनावृतबीजी
(C) आवृतबीजी
(D) शैवाल।
उत्तर:
(D) शैवाल।

47. कैम (CAM) पौधों की सहायता करता है –
(A) द्वितीयक वृद्धि में
(B) रोग प्रतिरोधकता में
(C) प्रजनन में
(D) जल संरक्षण में।
उत्तर:
(D) जल संरक्षण में।

48. कुल और विकिरण में PAR अनुपात होता है-
(A) लगभग 60 %
(B) 50 % से कम
(C) 80% से अधिक
(D) लगभग 70%
उत्तर:
(B) 50 % से कम

49. प्रकाश-संश्लेषण में प्रथम अभिक्रिया होती है-
(A) जल का प्रकाश अपघटन
(B) पर्णहरिम अणु का उत्तेजन
(C) ATP का निर्माण
(D) CO2 का स्थिरीकरण
उत्तर:
(B) पर्णहरिम अणु का उत्तेजन

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50. हरित लवक के स्ट्रोमा लैमेली में प्रकाश अभिक्रिया के फलस्वसूप निर्मित होता है-
(A) NADPH2
(B) ATP, NADPHN2
(C) ATP
(D) O2
उत्तर:
(B) ATP, NADPHN2

51. प्रकाश-श्वसन निम्नलिखित पौधों का अभिलक्षण है-
(A) C3-पादप
(B) C4-पादप
(C) वायवीय श्वसन करने वाले पादप
(D) इनमें कोई नहीं
उत्तर:
(A) C3-पादप

52. C3 तथा C4 पादपों के मध्य महत्वपूर्ण अन्तर करने वाली प्रक्रिया है-
(A) वाष्पोत्सर्जन
(B) ग्लाइकोलाइसिस
(C) प्रकाश संश्लेषण
(D) प्रकाश-श्वसन
उत्तर:
(D) प्रकाश-श्वसन

53. प्रकाश-श्वसन के दौरान कोशिकांगों का सही क्रम है-
(A) हरितलवक-गाल्जीकाय-माइटोकॉण्ड्रिया
(B) हरितलवक-रुक्ष अन्तःप्रद्रव्यी जालिका-डिक्टियोसोम्स
(C) हरितलवक-माइटोकॉण्ड्रिया-परॉक्सीसोम्स
(D) हरितलवक-रिक्तिका-परॉक्सीसोम्स
उत्तर:
(C) हरितलवक-माइटोकॉण्ड्रिया-परॉक्सीसोम्स

54. आरेख में दिए गए तीन कक्ष तीन मुख्य जैव संश्लेषण मार्गकों को निरूपित करते हैं। तीर सकल अभिकारक या उत्याद को निरूपित कसते हैं।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 1
4,8 और 12 संख्यांकित तीर क्या हो सकते हैं ?
(A) NADH
(B) ATP
(C) H2O
(D) FAD+ या FADH2
उत्तर:
(B) ATP

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55. अनॉक्सी प्रकाश संश्लेषण किसका अभिलधे है?
(A) स्पाइरोगाइरा
(B) क्लेमाइडोमोनास
(C) अल्वा
(D) रोडोस्पाइरिलम।
उत्तर:
(D) रोडोस्पाइरिलम।

(B) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer type Quesitons)

प्रश्न 1.
प्रकाश संश्लेषण सम्बन्धी शोध में प्रयुक्त शैवाल का नाम लिखिए।
उत्तर:
डार क्लोरेला (Chlorella)

प्रश्न 2.
ऐसे स्वपोषी जीव का नाम बताइए जिसमें हरित लवक नहीं पाया
उत्तर:
सायनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria)

प्रश्न 3.
कॉज शारीरिकी किन पौधों में पायी जाती है ?
उत्तर:
C, पौधों में

प्रश्न 4.
C. चक्र को किसने प्रस्तावित किया ?
उत्तर:
एम. डी. हेच तथा सौ. आर. स्लैक ने

प्रश्न 5.
प्रकाशिक अभिक्रिया की 2 स्कीम किसने प्रस्तुत की ?
उत्तर:
रोबिन हिल एवं बेन्डाल (R. Hill & Bendall 1960) ने

प्रश्न 6.
हरित लवक के किस भाग में प्रकाश अभिक्रिया होती है ?
उत्तर:
मेना (Grana) में।

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प्रश्न 7.
हरित लवक के किस भाग में अन्धकार अभिक्रिया होती है ?
उत्तर:
स्ट्रोमा (Stroma) में।

प्रश्न 8.
प्रकाश अभिक्रिया के दोनों प्रक्रमों के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रकाशकर्म-1 तथा प्रकाशकर्म-II ।

प्रश्न 9.
ऐसे दो पौधों के नाम लिखिए जिनमें रात्रि में रन्ध खुलते हैं ?
उत्तर:
नागफनी (Opuntia) तथा अगेव (Agave)

प्रश्न 10.
प्रकाश अनिर्भर अभिक्रिया के लिए ऊर्जा कहाँ से आती है ?
उत्तर:
प्रकाश अभिक्रिया में उत्पन्न ATP से।

प्रश्न 11.
हिल अभिक्रिया के तीन उत्पादों के नाम लिखिए।
उत्तर:
ऑक्सीजन, ATP तथा NADPH,

प्रश्न 12.
क्वांटम लब्धि किसे कहते हैं ?
उत्तर:
अवशोषित प्रकाश की प्रति क्वांटा में विमोचित ऑक्सीजन अणुओं की संख्या क्वांटम लब्धि (Quantum yield) कहलाती है।

प्रश्न 13.
NADP का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
निकोटिनामाइड एडीनीन डाह न्यूक्लियोटाइड फॉस्फेट

प्रश्न 14.
C पौधों में CO2 माही कौन होता है ?
उत्तर:
रियुलोज वा फॉस्फेट ( RUBP)।

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प्रश्न 15.
C2 पौधों में CO2 पाही कौन होता है ?
उत्तर:
फास्फोइनोल पाइरुविक अम्ल (PEP)। प्रश्न 16. किन्हीं दो C, पौधों के नाम लिखिए। उत्तर—गन्ना, मक्का ।

प्रश्न 17.
CAM चक्र किन पौधों में पाया जाता है ?
उत्तर:
मांसल पौधों में।

प्रश्न 18.
किसी प्रकाश संश्लेषी जीवाणु का नाम लिखिए।
उत्तर:
क्लोरोबियम (Chlorobium) ।

प्रश्न 18.
वायुमण्डल में गैसीय CO का सान्द्रण कितना होता है ?
उत्तर:
0.039% से 0.04% 1

प्रश्न 20.
जलीय पौधे किस रूप में सामान्य सतह से कार्बन का अवशोषण करते हैं ?
उत्तर:
बाइकार्बोनेट्स ।

प्रश्न 21.
जन्तुओं तथा मनुष्यों में कौन-सा वर्णक विटामिन A में बदलता
उत्तर:
B-कैरोटिन।

प्रश्न 22.
उस एन्जाइम का नाम लिखिए जो राज्युलोस-1, 5-बाइफॉस्फेट को 3- फॉस्फोलिसारिक अम्ल तथा 2- फॉस्फोग्लाइकोलिक अम्ल में तोड़ता है।
उत्तर:
राइबुलोस बाइफॉस्फेट ऑक्सीजनेस ।

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प्रश्न 23.
प्रकाश संश्लेषण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण सीमाकारी कारक कौन सा है ?
उत्तर:
कार्बन डाइ ऑक्साइड।

प्रश्न 24.
केल्विन चक्र में कौन-सा यौगिक कार्बोहाइड्रेट को हाइड्रोजन दान करता है ?
उत्तर:
NADPH

प्रश्न 25.
C4 चक्र में प्रथम स्थायी उत्पाद कौन सा होता है ?
उत्तर:
ऑक्सेलो ऐसीटिक अम्ल ।

(C) लघु उत्तरीय प्रश्न-1 (Short Answer Type Questions-I)

प्रश्न 1.
प्रकाश का गुण किस प्रकार प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को प्रभावित करता है ?
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषी वर्णक दृश्य स्पैक्ट्रम की तरंगदैर्धा (400 mp-800mji) को अवशोषित कर सकते हैं हरे पौधों में लाल प्रकाश में अधिकतम प्रकाश संश्लेषण होता है लाल शैवालों में अधिकतम प्रकाश संश्लेषण नीले प्रकाश में होता है।

प्रश्न 2.
रेड ड्राप किसे कहते हैं ?
उत्तर:
रॉबर्ट इमर्सन (Robert Emerson) ने पता लगाया कि जब पौधों को 680 m से अधिक की तरंगदैर्ध्य (लाल रंग) दी जाती है, तब क्वांटम लब्धि में कमी आ जाती है, इसे रेड ड्राप (Red drop) कहते हैं।

प्रश्न 3.
सोलेराइजेशन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
अत्यधिक तीव्र प्रकाश में पर्णहरित (Chlorophylli) का प्रकाशीय ऑक्सीकरण होने लगता है, इस स्थिति को सोलेराइजेशन (Solarization) कहते हैं। इसमें प्रकाश संश्लेषण की दर अत्यधिक गिर जाती है।

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प्रश्न 4.
श्वसन तथा प्रकाश श्वसन में अन्तर बताइए।
उत्तर:
(i) श्वसन सभी पौधों में पाया जाता है, जबकि प्रकाश श्वसन केवल C2 पौधों में पाया जाता है।
(ii) श्वसन क्रिया में ग्लूकोज प्रयुक्त होता है, जबकि प्रकाश श्वसन में ग्लाइकोलेट प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 5.
कन्येन्सेसन विन्दु क्या है ?
उत्तर:
संतुलन प्रकाश तीव्रता (Compensation point)- शाम एवं सुबह के समय पौधों के लिए एक ऐसा समय आता है जब पत्तियों और वायुमण्डल के बीच गैसों का आदान-प्रदान नहीं होता अर्थात् कम प्रकाश प्रखरता के कारण प्रकाश संश्लेषण एवं श्वसन दरें समान होती हैं। इस समय CO2 व O का वायुमण्डल से विनिमय (Exchange) नहीं होता है, इसे कम्पेन्सन बिन्दु (Compensation point) कहते हैं।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न-II (Short Answer type Questions-II)

प्रश्न 1.
प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक प्रक्रिया के सारांश को प्रदर्शित करने वाले निम्न समीकरण की व्याख्या कीजिए-
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 2
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण एक उपचयी ( anabolic) क्रिया है। इसमें वायुमण्डलीय CO2 तथा अवशोषित जल का उपयोग करके क्लोरोफिल (chlorophyll) तथा प्रकाश की उपस्थिति में ग्लूकोज (शर्करा) का निर्माण होता तथा O2 उपोत्पाद के रूप में निकलती है। हिल (1941) स्वेन तथा कामेन (1943) आदि ने अपने प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध किया कि प्रकाश संश्लेषण में O2 जल के प्रकाशीय अपघटन से प्राप्त होती है। उपरोक्त समीकरण में ग्लूकोज (Glucose) के एक अणु के निर्माण के लिए 6 अणु CO2 क्रे तथा 12 अणु जल के प्रयुक्त होते हैं और साथ ही 6 अणु जल के तथा 6 अणु O2 के निकल जाते हैं।

प्रश्न 2.
प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रकाश संश्लेषण में CO2 की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
CO2 प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बोहाइड्रेट के निर्माण में होती हैं। यह ज्ञात करने के लिए कि इस प्रक्रिया में CO की आवश्यकता होती है, घोल की आधी पत्ती का प्रयोग (Mohl’s half leaf experiment) किया जा सकता है। एक चौड़े मुंह वाली बोतल लेकर कार्क (Cork) को दो भागों में काटकर इसके बीच गमले में लगे पौधे की एक स्वस्थ पत्ती फँसाकर इसे कार्क सहित बोतल के मुंह में फिट कर देते हैं। बोतल में पहले से ही थोड़ी मात्रा में KOH रखा होता है। उपकरण को चित्रानुसार तैयार करके धूप में रख देते हैं। कुछ समय पश्चात् पत्ती को बाहर निकाल कर इसका मण्ड परीक्षण करते हैं। परीक्षण स
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 3
ज्ञात होता है कि पत्ती का वह भाग जो बोतल के अन्दर है, को CO2 प्राप्त नहीं हुई ( क्योंकि KOH CO2 का अवशोषण कर लेता है) जिससे उसमें मण्ड (Starch) का निर्माण नहीं हुआ। अतः स्पष्ट है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए CO2 आवश्यक है।

प्रश्न 3.
कैसे सिद्ध करोगे कि प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन निकलती है?
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में CO2 तथा जल प्रयुक्त होकर शर्करा तथा ऑक्सीजन का निर्माण होता है।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 4
यह सिद्ध करने के लिए कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में O2 उत्पन्न होती है एक सरल प्रयोग किया जा सकता है। कोई जलीय पौधा जैसे हाइड्रिला (Hydrilla) काँच की एक फनल में लेकर इसे जल से भरे बीकर में उल्टा करके रख देते हैं । फनल के ऊपर जल से भरी एक परखनली उलट देते हैं । उपकरण को धूप में रख देते हैं। कुछ समय बाद हम देखते हैं कि परखनली में जल का स्तर नीचे गिरने लगता है और इसके स्थान पर पौधे से बुलबुलों के रूप में निकली एक गैस एकत्र होने लगती है। यह प्रदर्शित करने के लिए कि यह गैस ऑक्सीजन है परखनली के भरने पर इसे अंगूठे से बन्द करके बाहर निकाल लेते हैं। अब एक जलती हुई तीली नली के मुख के पास लाते हैं। यह तीली तेजी से जलने लगती है। इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश संश्लेषण में O2 निकलती है।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 5

प्रश्न 4.
कैसे सिद्ध करोगे कि प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश की आवश्यकता होती है ?
उत्तर:
यह सिद्ध करने के लिए कि प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश की आवश्यकता होती है एक सरल प्रयोग किया जा सकता है। गमले में लगा एक स्वस्थ पौधा लेकर पहले
इसे 48 घंटे के लिए अंधेरे में रख देते हैं जिससे पत्तियों में संचित मण्ड समाप्त हो जाए। अब इस पौधे की किसी पत्ती पर दोनों ओर काले कागज की चौकोर पट्टी क्लिप (Clip) की सहायता से लगाते हैं। पौधे को धूप में रख देते हैं। जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है कुछ घंटे बाद उस पत्ती को तोड़कर उसका मण्ड परीक्षण करते हैं। परीक्षण (Strach Test) से ज्ञात होता है कि पत्ती में कागज लगाए गए भाग को प्रकाश न मिलने के कारण मण्ड (Starch) का निर्माण नहीं हुआ जबकि पत्ती के शेष भाग ने मण्ड परीक्षण (Starch) दिया।
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प्रश्न 5.
प्रकाश फॉस्फेटीकरण किसे कहते हैं ?
उत्तर:
प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Photo Phosphorylation):
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में हरित लवक के अन्दर उपस्थित हरित कण प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करते हैं। यह ऊर्जा प्रकाश रासायनिक क्रिया में ADP द्वारा उच्च ऊर्जा बन्धों के रूप में एकत्र की जाती है तथा उच्च ऊर्जा अणु ATP का निर्माण होता है। आर्नन ने इसे फोटोसिन्थेटिक फॉस्फोराइलेशन (Photosynthetic Phosphorylation) कहा तथा ATP को प्रकाश संश्लेषण की स्वांगीकरण शक्ति (Assimilatory power) माना। प्रकाश फॉस्फेटीकरण की क्रिया दो वर्णक तंत्रों में उपस्थित भिन्न-भिन्न वर्णकों द्वारा होती हैं। इस प्रक्रिया में दो चक्र कार्य करते हैं। इन्हें चक्रीय फास्फेटीकरण (cyclic phosphorylation) तथा अचक्रीय फॉस्फेटीकरण (Noncyclic phosphorylation) कहते हैं।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण

प्रश्न 6.
प्रकाश संश्लेषण की चक्रिक फॉस्फेटीकरण अभिक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चक्रिक प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Cyclic Photophosphorylation):
प्रकाश कर्म-1 के वर्णक तंत्र I के अणु प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण करके इसे अभिक्रिया केन्द्र P-700 पर स्थानान्तरित कर देते हैं। P-700 ऊर्जा प्राप्त करके 4e बाहर निकालता है। उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन एक आयरन सल्फर प्रोटीन माही A(FeS) द्वारा प्रहण कर लिए जाते हैं। यहाँ से इलेक्ट्रान क्रमशः फैरीडाक्सिन (Ferridoxin) तथा FAD द्वारा महण किये जाते हैं। यहाँ पर इलेक्ट्रान तथा प्रकाश जल अपघटन द्वारा उत्पन्न Ht के संयोग से FADH2 का निर्माण होता है। FADH2 से इलेक्ट्रान व H+ आयन्स NADP पर स्थानान्तरित होकर NADPH बनता है। ये NADPH2 अंधकार प्रक्रिया में CO2 स्थिरीकरण में भाग लेते हैं। यदि अपचयित A (FeS) से आगे का कोई इलेक्ट्रॉन माही e को ग्रहण नहीं कर पाता तो ये e एक अन्य पथ द्वारा वापस Cyt – bof कॉम्प्लैक्स से में पहुँच जाते हैं। इस पथ में ATP का निर्माण होता
होते हुए पुन P – 700 है। इस प्रक्रिया को चक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Cyclic Phosphorylation) कहते हैं।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 7

प्रश्न 7.
अचक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण को समझाइए।
उत्तर:
अचक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Non-cyclic Pho Photophosphorylation ):
प्रकाश कर्म – II के वर्णक तंत्र से उत्सर्जित इलेक्ट्रान क्रमशः फिओफाइटिन (Phaeophytin) प्लास्टोक्वीनोन (Plastoquinone), cyt-bo f समिश्र तथा प्लास्टोसायनिन (Plastocyanin) से होते हुए प्रकाश कर्म-1 के अभिक्रिया केन्द्र P-700 पर पहुँचते हैं। ये इलेक्ट्रॉन वापस वर्णक तंत्र I के अभिक्रिया केन्द्र P-680 में वापस नहीं लौटते हैं। इस
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 8
पथ में भी एक ATP अणु का निर्माण होता है। इसे अचक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण कहते हैं।

प्रश्न 8.
प्रकाश कर्म-1 तथा प्रकाश कर्म-11 में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
प्रकाश कर्म । तथा प्रकाश कर्म | में अन्तर

प्रकाश कर्म-I (Photo act-I)प्रकाश कर्म-II (Photo act-II)
इसका अभिक्रिया केन्द्र P-700 होता है।इसका अभिक्रिया केन्द्र P-680 होता है।
प्रकाश तंत्र-I स्ट्रोमा थाइलेकॉइड की झिल्ली तथा इसके दृश्य भाग में होता है।यह प्रेना थाइलेकॉइड (Thylakoid) के दृश्य भाग की केवल झिल्ली में होता है।
यह प्रकाश फॉस्फेटीकरण के चक्रीय तथा अचक्रीय दोनों पदों में भाग लेता है।यह केवल अचक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण में भाग लेता है।
यह PS-II से इलेक्ट्रॉन प्रहण करता है।यह प्रकाश जल अपघटन से इलेक्ट्रॉन लेता है।
यह इलेक्ट्रॉन NADP को देता है।यह P-700 को इलेक्ट्रॉन देता है।

प्रश्न 9.
टिप्पणी लिखिए पत्तियाँ सौर संग्राहक हैं।
उत्तर:
सभी हरे पौधे अपना भोजन सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में स्वयं बना लेते हैं। इन पौधों की पत्तियों में हरित लवक पाया जाता है। हरित लवक (Chloroplast) में विभिन्न प्रकार के वर्णक मिलते हैं। ये वर्णक सूर्य के प्रकाश की विभिन्न तरंगदैयों (Wave length) का अवशोषण करते हैं। इसीलिए पत्तियों को सौर संग्राहक कहते हैं। हरित लवक का मुख्य वर्णक क्लोरोफिल होता है। यह CO2 व जल द्वारा प्रकाश की उपस्थिति में शर्करा का निर्माण करते हैं। पौधों द्वारा अवशोषित सौर ऊर्जा (Solar energy) का केवल 3-5% भाग ही प्रकाश संश्लेषण में प्रयुक्त होता है। शेष का परावर्तन कर दिया जाता है।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 13 उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण - 9

प्रश्न 10.
प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक तथा अप्रकाशिक अभिक्रियाओं में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
प्रकाशिक व अप्रकाशिक अभिक्रिया में अन्तर (Difference between Light and Dark Reaction)

प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction):अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction):
इसके लिए प्रकाश आवश्यक है।इसके लिए प्रकाश की उपस्थिति आवश्यक नहीं होती है।
हरित लवक के म्रेना (grana) में होती है।हरितलवक के स्ट्रोमा (Stroma) में होती है।
प्रकाशीय ऊर्जा का अवशोषण होता है तथा रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन कर ATP का निर्माण होता है। इसे प्रकाश फॉस्फेटीकरण कहते हैं।प्रकाशीय क्रिया से प्राप्त ऊर्जा का प्रयोग CO2 स्वांगीकरण में होता है तथा कार्बोहाइड्रेट बनता है ।
जल का अपघटन होता है जिससे O2 उप-उत्पाद के रूप में मिलती है तथा H+ व e मिलते हैं।H+ का उपयोग CO2 के अपचयन में होता है।
ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है। वर्णक तन्नों की आवश्यकता होती है।CO2 प्रयुक्त होती है ।

प्रश्न 11.
रसो- परासरणी परिकल्पना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। रसो- परासरणी परिकल्पना
उत्तर:
रसो- परासरणी परिकल्पना (Chemi-osmotic Hypothesis)
हरित लवक में ATP का संश्लेषण होता है। ATP संश्लेषण का वर्णन रसोपरासरणी (Chemi-osmotic) परिकल्पना के आधार पर किया जा सकता है। ATP का संश्लेषण क्लोरोप्लास्ट के थायलेकॉइड झिल्लियों के आर-पार प्रोटोन प्रवणता (Proton gradint) के कारण होता है। प्रोटॉन का संचय झिल्ली के अन्दर अर्थात् गुहा (Lumen) की ओर होता है। प्रोटॉन का झिल्ली की गुहा में संचय निम्नलिखित कारणों से होता है –
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(क) जल के अणु का अपघटन झिल्ली के अन्दर होता है, अतः जल के अपघटन से मुक्त H+ अथवा थायलेकॉइड गुहा में संचित होते हैं।

(ख) इलेक्ट्रॉन के प्रकाश तंत्र के माध्यम से गति करते ही प्रोटॉन झिल्ली के पार चला जाता है। क्योंकि इलेक्ट्रॉन माही झिल्ली के बाहर स्थित होता है। इलेक्ट्रॉन का स्थानान्तरण H+ ग्राही को किया जाता है। अतः e प्रवाह के समय यह अणु स्ट्रोमा से एक प्रोटॉन ले लेता है, जब यह अणु अपने इलेक्ट्रॉन को झिल्ली के भीतरी ओर स्थित इलेक्ट्रॉन वाहक (elctron carrier) को देता है, तब प्रोटॉन को झिल्ली के अन्दर की ओर मुक्त कर देता है।

(ग) NADP रिडक्टेज विकर ( enzyme) झिल्ली के स्ट्रोमा की ओर होता है। प्रकाश प्रक्रम I के इलेक्ट्रॉन ग्राही आने वाले इलेक्ट्रॉन के साथ-साथ प्रोटीन NADP को NADPH में अपचयित करने के लिए आवश्यक होता है। ये प्रोटॉन स्ट्रोमा से प्राप्त होते हैं। अतः स्ट्रोमा में प्रोटॉन की संख्या घटती है और झिल्ली के भीतर (गुहा में) प्रोटॉन का संचय होता है। इस प्रकार झिल्ली के आर-पार प्रोटॉन प्रवणता उत्पन्न होती है। प्रोटॉन प्रवणता के टूटने से ऊर्जा मुक्त होती है। ATPase विकर की उपस्थिति में ADP ऊर्जा महण करके ATP का निर्माण करता है।

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प्रश्न 12.
CAM पौधों में CO2 का स्थिरीकरण किस प्रकार होता है ?
उत्तर:
अनेक मांसल, मरुद्भिद (xerophytic) पादपों जैसे नागफनी (Opuntia), भीक्वार (Agave) आदि को कैम (CAM) पौधे कहते हैं। इन पौधों में CO2 स्थिरीकरण विशेष प्रकार से होता है। इन पौधों में वाष्पोत्सर्जन रोकने के लिए रन्ध्र दिन के समय बन्द रहते हैं तथा रात्रि के समय खुलते हैं। दिन के समय पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए CO2 उपलब्ध नहीं होती । रात्रि के समय CO2 स्थिरीकरण C2 पौधों की भांति होता है। CO2 पहले फॉस्फोइनोल पाइरुविक अम्ल (PEP) से क्रिया करके ऑक्सेलोऐसीटिक अम्ल (OAA) बनाती है। यह मैलिक अम्ल में अपचयित (Reduce) हो जाता है। मैलिक अम्ल कोशिका रस में संचित हो जाता है।

इस क्रिया को अम्लीकरण कहते हैं। प्रात:काल रन्ध्र (Stomata) बन्द होने पर मैलिक अम्ल विघटित होकर CO2 मुक्त करता है। CO2 केल्विन चक्र में प्रवेश करके RuBP से मिलकर 3- फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल बनाती है। दिन के समय मैलिक अम्ल में विघटन से CO2 के मुक्त होने की क्रिया को विअम्लीकरण कहते हैं। इस प्रकार अम्लीकरण की क्रिया को कैम (CAM-Crassulacean Acid Metabolism) कहते हैं। कैम तथा C2 पौधों में CO2 का स्थिरीकरण दो बार होता है लेकिन कैम पौधों में यह क्रिया पर्णमध्योतक कोशिकाओं (Mesophyll cells) में होती है। और अलग-अलग समय पर होती है C2 पौधों में CO2 का स्थिरीकरण अलग-अलग कोशिकाओं में दिन के समय ही होता है।

(E) निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
प्रकाश संश्लेषण को परिभाषित कीजिए। प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis ) – प्रकाश संश्लेषण हरे पादपों में होने वाली एक जटिल जैव रासायनिक क्रिया है। सुकेन्द्री (Eukaryotic) पादपों में यह क्रिया हरित लवक में होती है। इस सम्पूर्ण क्रिया में पौधे मृदा से जल व वायुमण्डल से CO2 महण करके सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हरित लवक की सहायता से शर्करा (sugar) का निर्माण करते हैं। अतः वह उपचय क्रिया जिसमें हरे पौधे CO2 व जल का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हरित लवक की सहायता से भोज्य पदार्थ व O2 बनाते हैं प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) कहलाती है।
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दो चरणों में पूर्ण होती है –
I. प्रकाश निर्भर अभिक्रिया या प्रकाश रासायनिक प्रतिक्रिया।
II. अन्धकार अभिक्रिया या ब्लैकमैन प्रतिक्रिया।
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1. प्रथम प्रकाश रासायनिक आयाक्रया (First Step Photo Chemical Reaction):
यह अभिक्रिया हरित लवक के मेना में होती है। सर्वप्रथम हरित लवक में हरिम कण अणु प्रकाश की निश्चित तरंगदैर्ध्य का अवशोषण करके उत्तेजित अवस्था में आ जाते हैं। प्रकाश की इस ऊर्जा से जल के अणुओं का अपघटन OH+ तथा H+ आयनों में होता है। OH आयन संयुक्त होकर पानी तथा O2 बनाते हैं H+ आयन NADP2 द्वारा ग्रहण कर लिये जाते हैं। उत्पन्न ऑक्सीजन की कुछ मात्रा कोशिकीय श्वसन में प्रयुक्त हो जाती है तथा शेष वातावरण में मुक्त हो जाती है। इस क्रिया में इलेक्ट्रानों की उत्पत्ति होती है जो विभिन्न पथों से गुजरते हुए ATP का निर्माण करते हैं। इस प्रकार प्रकाश अभिक्रिया के तीन उत्पाद होते हैं – ATP NADP H2 तथा O2

II. द्वितीय चरण अंधकार अभिक्रिया या ब्लैकमैन अभिक्रिया (Second Step Dark reaction or Blackmann reaction ) – इस प्रक्रिया के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है। यह हरित लवक के स्ट्रोमा में होती है। इसमें प्रकाश अभिक्रिया में उत्पन्न ATP तथा NADPH का प्रयोग करके CO2 का अवकरण होकर शर्करा का निर्माण होता है। इस क्रिया में स्ट्रोमा (Stroma) में पहले से उपस्थित 5 कार्बन वाला पदार्थ रिबुलोज डाई फास्फेट ( Ru BP) कार्बन डाइ ऑक्साइड के एक अणु को प्राप्त करके 6 कार्बन वाला एक अस्थाई यौगिक बनाना है जो बाद में 3 कार्बन वाले फॉस्फोग्लिसरिक अम्ल (3-PGA) के अणुओं में टूट जाते हैं। यहाँ पर NADPH2 प्रयुक्त होकर अन्ततः 6 कार्बन परमाणु वाले यौगिक ग्लूकोज का निर्माण करते हैं।

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प्रश्न 2.
0प्रकाश संश्लेषण के दो वर्णक तंत्रों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सिद्ध कीजिए कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दो वर्णक तंत्रों में पूर्ण होती है।
उत्तर:
इमरसन (Emerson) ने क्लोरेला (Chlorella) नामक शैवाल पर किये गए प्रयोगों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि प्रकाश अवशोषण करने के लिए वर्णकों के कम से कम दो समूह होते हैं। एक समूह के वर्णक लघु तरंगदैर्ध्य वाली प्रकाश किरणों को अवशोषित करते हैं तथा दूसरे समूह के वर्णक दीर्घ तरंगदैर्ध्य की प्रकाश किरणों को अवशोषित करते हैं। वर्णकों के ये समूह क्रमश: प्रकाश कर्म-1 (Photosystem I) तथा प्रकाश कर्म-11 (Photosystem II ) को संचालित करते हैं।

वर्णक तंत्र-I (Pigment system-1 ) यह प्रकाश कर्म-1 को संचालित करता है। इसमें पर्णहरिम ‘8’ के विभिन्न अणु जैसे Chl ‘a’ 660, Chl ‘a’ 670, Chla 690, Chl ‘a’ 700 होते हैं। ये सभी विभिन्न तरंगदैर्ध्य वाली प्रकाश किरणों का अवशोषण करते हैं। इनमें से Chl ‘a’ 700 अभिक्रिया केन्द्र का कार्य करता है। इसके शेष क्लोरोफिल अणु एन्टीना का कार्य करते हैं और अवशोषित ऊर्जा को अभिक्रिया केन्द्र पर स्थानान्तरित करते हैं। Chl’a’ 700 को P-700 भी कहते हैं। इसी से उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉनों (High energy electron) का स्थानांतरण होता है। यह प्रकाश कर्म चक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Cyclic Photophosphorylation) तथा अचक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण (Non-cyclic Photophosphorylation) दोनों में कार्य करता है।

वर्णक तंत्र-II (Pigment system-II) – यह प्रकाश कर्म-11 को संचालित करता है। इसमें क्लोरोफिल ‘४’ के विभिन्न अणु जैसे Chl ‘a’ 660, Chl-‘a’ 670, Chl ‘a’ 678 तथा Chl ‘b’ 650 होते हैं। इनमें से एक विशिष्ट अणु क्लोरोफिल a-680 (Chlorophyll] ‘a’ 680) भी होता है। यह अभिक्रिया केन्द्र का कार्य करता है। इसे P-680 भी कहते हैं। प्रकाशकर्म-II तथा वर्णक तंत्र-II केवल अचक्रीय प्रकाश फॉस्फेटीकरण में भाग लेता है।

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HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए

1. एकाधिकार में-
(A) वस्तु के कई निकट स्थानापन्न होते हैं
(B) वस्तु का कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता
(C) वस्तु विभेद पाया जाता है
(D) कीमत विभेद नहीं होता
उत्तर:
(B) वस्तु का कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता

2. एकाधिकारी फर्म को अल्पकाल संतुलन में-
(A) न्यूनतम हानि हो सकती है
(B) असामान्य लाभ हो सकते हैं
(C) सामान्य लाभ हो सकते हैं ।
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

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3. दीर्घकाल में एकाधिकार फर्म को-
(A) हानि होती है
(B) असामान्य लाभ मिलते हैं
(C) सामान्य लाभ मिलते हैं
(D) पूर्ण प्रतिस्पर्धा की तुलना में कम हानि होती है
उत्तर:
(B) असामान्य लाभ मिलते हैं

4. एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की अवस्था में फर्म को अल्पकाल में संतुलन की स्थिति में-
(A) अधिकतम लाभ प्राप्त होते हैं
(B) न्यूनतम हानि होती है
(C) सामान्य लाभ प्राप्त होते हैं
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

5. एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाल में फर्म को संतुलन की अवस्था में केवल-
(A) सामान्य लाभ प्राप्त होते हैं
(B) असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं
(C) न्यूनतम हानि प्राप्त होती है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) सामान्य लाभ प्राप्त होते हैं

6. एकाधिकार में कीमत-
(A) सीमांत लागत से अधिक होती है
(B) सीमांत लागत के बराबर होती है
(C) सीमांत लागत से कम होती है
(D) सीमांत लागत से कम या अधिक होती रहती है
उत्तर:
(A) सीमांत लागत से अधिक होती है

7. एकाधिकार में किस समय अवधि में फर्म को केवल असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं?
(A) अति अल्पकाल में
(B) अल्पकाल में
(C) दीर्घकाल में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) दीर्घकाल में

8. एकाधिकार के अंतर्गत फर्म के माँग वक्र का स्वरूप क्या है?
(A) पूर्ण लोचदार
(B) पूर्ण बेलोचदार
(C) कम लोचदार
(D) अधिक लोचदार
उत्तर:
(C) कम लोचदार

9. एकाधिकारी प्रतियोगिता में किस समय-अवधि में फर्म को केवल असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं?
(A) अल्पकाल में
(B) अति-अल्पकाल में
(C) दीर्घकाल में
(D) अति-दीर्घकाल में
उत्तर:
(A) अल्पकाल में

10. निम्नलिखित में से एकाधिकारी बाज़ार की विशेषता नहीं है
(A) फर्मों के प्रवेश व निकासी की स्वतंत्रता
(B) निकटतम स्थानापन्न का अभाव
(C) एक विक्रेता
(D) कीमत विभेद की संभावना
उत्तर:
(A) फर्मों के प्रवेश व निकासी की स्वतंत्रता

11. वस्तु विभेद किस बाज़ार की प्रमुख विशेषता है?
(A) एकाधिकार की
(B) पूर्ण प्रतिस्पर्धा की
(C) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की

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12. गैर-कीमत प्रतियोगिता सर्वाधिक पाई जाती है
(A) एकाधिकार में
(B) पूर्ण प्रतिस्पर्धा में
(C) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में ..
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में

13. अपूर्ण प्रतिस्पर्धा में बाज़ार की कौन-सी अवस्था हो सकती है?
(A) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
(B) अल्पाधिकार
(C) द्वि-अधिकार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

14. किस बाज़ार के लिए फर्म के लिए कीमत रेखा क्षैतिज सरल रेखा होती है?
(A) एकाधिकारी
(B) पूर्ण प्रतिस्पर्धा
(C) एकाधिकारी प्रतियोगिता
(D) अल्पाधिकार
उत्तर:
(B) पूर्ण प्रतिस्पर्धा

15. किस बाज़ार में विक्रय लागतों का बहुत अधिक महत्त्व होता है?
(A) पूर्ण प्रतियोगी बाज़ार में
(B) अल्पाधिकार बाज़ार में
(C) अपूर्ण प्रतियोगिता बाज़ार में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अपूर्ण प्रतियोगिता बाज़ार में

16. एकाधिकार में सीमांत संप्राप्ति वक्र का आकार कैसा होता है?
(A) धनात्मक ढलान वाला
(B) OX-अक्ष के समानांतर
(C) OY-अक्ष के समानांतर
(D) ऋणात्मक ढलान वाला
उत्तर:
(D) ऋणात्मक ढलान वाला

17. अल्पकाल में एकाधिकार के संतुलन की अवस्था में निम्नलिखित में से कौन-सी अवस्था हो सकती है?
(A) असामान्य लाभ
(B) सामान्य लाभ
(C) न्यूनतम हानि
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

18. एकाधिकार होता है
(A) कीमत-निर्धारक
(B) कीमत स्वीकार करने वाला
(C) (A) तथा (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) कीमत-निर्धारक

B. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. पूर्ण प्रतियोगिता में वस्तुएँ ……………… होती हैं। (भिन्न, समरूप)
उत्तर:
समरूप

2. एकाधिकारी बाज़ार में एकाधिकारी कीमत …………… होता है। (निर्धारक, स्वीकारक)
उत्तर:
निर्धारक

3. विज्ञापन लागते ……………. में अधिक महत्त्वपूर्ण होती हैं। (एकाधिकार, एकाधिकारी प्रतियोगिता)
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतियोगिता

4. ……………… एकाधिकार बाज़ार की मुख्य विशेषता होती है। (वस्तु विभेद, कीमत विभेद)
उत्तर:
कीमत विभेद

5. ‘अल्पाधिकार’ में ………………… विक्रेता पाए जाते हैं। (बहुत अधिक, कुछ)
उत्तर:
कुछ

6. ‘एकाधिकार’ की तुलना में ‘एकाधिकारी प्रतियोगिता’ में AR तथा MR वक्र सापेक्षिक ……………… लोचदार होते हैं। (कम, अधिक)
उत्तर:
अधिक

7. एकाधिकारी प्रतियोगिता (प्रतिस्पर्धा) में AR तथा MR वक्र एक-दूसरे के ……………….. होते हैं। (बराबर, भिन्न)
उत्तर:
भिन्न

8. द्वयाधिकार बाज़ार में वस्तु के ……………. विक्रेता पाए जाते हैं। (एक, दो)
उत्तर:
दो

9. विक्रय लागते ……………. बाज़ार में अधिक उपयोगी होती हैं। (एकाधिकार, एकाधिकारी प्रतियोगिता)
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतियोगिता

10. गैर-कीमत प्रतियोगिता सर्वाधिक ………………. में पाई जाती है। (पूर्ण प्रतियोगिता, एकाधिकारी प्रतियोगिता)
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतियोगिता

11. एकाधिकारी प्रतियोगिता में एक फर्म दीर्घकाल में …………. लाभ प्राप्त करती है। (सामान्य, असामान्य)
उत्तर:
सामान्य

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C. बताइए कि निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत-

  1. सर्वाधिक गैर कीमत प्रतियोगिता एकाधिकारी प्रतियोगिता में पाई जाती है।
  2. एकाधिकारी कीमत सदैव ऊँची होती है।
  3. एकाधिकार के अंतर्गत कीमत 10 रु० होगी यदि सीमांत लागत 10 रु० है।
  4. एकाधिकारी प्रतियोगिता में फर्मों के आने व छोड़कर जाने की स्वतंत्रता नहीं होती।
  5. एकाधिकार में कीमत, सीमान्त लागत के समान होती है।
  6. एक एकाधिकारी प्रतियोगी फर्म को दीर्घकाल में असामान्य लाभ प्राप्त होंगे।
  7. एकाधिकारी दीर्घकाल में असामान्य लाभ प्राप्त नहीं कर सकता।
  8. एकाधिकार में औसत आगम (AR) वक्र तथा सीमांत आगम (MR) वक्र एक-समान होते हैं।
  9. पूर्ण प्रतियोगिता में औसत आगम (AR) वक्र तथा सीमांत आगम (MR) वक्र एक-दूसरे के बराबर नहीं होते।
  10. एकाधिकारी बाजार में एकाधिकारी कीमत निर्धारक होता है।
  11. एकाधिकार में कीमत विभेद संभव होता है।
  12. एकाधिकारी प्रतियोगिता में AR तथा MR वक्र एक-दूसरे के भिन्न होते हैं।
  13. अल्पाधिकार में दो विक्रेता पाए जाते हैं।
  14. द्वयाधिकार बाज़ार में वस्तु के दो विक्रेता पाए जाते हैं।
  15. विज्ञापन लागतें एकाधिकारी प्रतियोगिता में अधिक महत्त्वपूर्ण होती हैं।

उत्तर:

  1. सही
  2. गलत
  3. गलत
  4. गलत
  5. गलत
  6. गलत
  7. गलत
  8. गलत
  9. गलत
  10. सही
  11. गलत
  12. सही
  13. गलत
  14. सही
  15. सही।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
बाज़ार किसे कहते हैं?
उत्तर:
बाज़ार का अर्थ किसी विशेष स्थान से नहीं है बल्कि किसी वस्तु की मात्रा के क्रय-विक्रय से है।

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प्रश्न 2.
बाज़ार के मुख्य रूप कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  • पूर्ण प्रतियोगिता
  • एकाधिकार
  • एकाधिकारी प्रतियोगिता
  • अल्पाधिकार।

प्रश्न 3.
एकाधिकार (Monopoly) क्या है?
उत्तर:
एकाधिकार बाज़ार की वह स्थिति है जिसमें वस्तु का एक ही विक्रेता होता है और उस वस्तु का कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता।

प्रश्न 4.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा (Monopolistic Competition) क्या है?
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार की वह स्थिति है जिसमें वस्तु के बहुत-से विक्रेता लगभग एक-जैसी विभेदीकृत वस्तुओं (Differentiated Goods) के रूप में बेचने की प्रतिस्पर्धा करते हैं।

प्रश्न 5.
गठबंधन प्रतियोगिता और गैर-गठबंधन प्रतियोगिता में अंतर बताहए।
अथवा
गठबंधन अल्पाधिकार तथा गैर-गठबंधन अल्पाधिकार से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
गठबंधन प्रतियोगिता या अल्पाधिकार-गठबंधन प्रतियोगिता अल्पाधिकार बाजार की वह स्थिति है जिसमें सभी फर्मे एक-दूसरे के सहयोग से अपनी वस्तुओं की कीमतों को निर्धारित करती हैं। ये एक-दूसरे से किसी भी प्रकार की कोई प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं। गैर-गठबंधन प्रतियोगिता या अल्पाधिकार-गैर-गठबंधन प्रतियोगिता अल्पाधिकार बाजार की वह स्थिति है जिसमें सभी फर्मे स्वतंत्र रूप से अपनी वस्तुओं की कीमतों को निर्धारित करती हैं और इनमें प्रतिस्पर्धा होती है।

प्रश्न 6.
अल्पाधिकार की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
अल्पाधिकार बाज़ार की वह स्थिति है जिसमें वस्तु के कुछ उत्पादक होते हैं। वाटसन के अनुसार, “अल्पाधिकार वह बाजार अवस्था है जिसमें समरूप अथवा विभेदीकृत वस्तुएँ बेचने वाली थोड़ी-सी फर्मे होती हैं।”

प्रश्न 7.
कीमत विभेद किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक ही वस्तु को विभिन्न क्रेताओं को भिन्न-भिन्न कीमतों पर बेचना कीमत विभेद कहलाता है।

प्रश्न 8.
विभेदीकृत उत्पादों (Differentiated Products) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विभेदीकृत उत्पादों से अभिप्राय उन उत्पादों से है जिनकी प्रकृति एक-समान होती है, परंतु जिन्हें ब्रांड नाम, आकार, रंग, डिज़ाइन, गुण, सेवा आदि के आधार पर अन्य वस्तुओं से विभेदित किया जाता है।

प्रश्न 9.
वस्तु विभेद (Product Differentiation) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वस्तु विभेद से अभिप्राय उस प्रक्रिया से है जिसके अंतर्गत एक-समान स्वभाव वाली वस्तुओं को विज्ञापन, पैकिंग, ब्रांड आदि के आधार पर अन्य वस्तुओं से भिन्न बनाया जाता है।

प्रश्न 10.
विक्रय लागते (Selling Costs) क्या होती हैं?
उत्तर:
विक्रय लागतों से अभिप्राय उन लागतों से है जिन्हें फर्म की बिक्री बढ़ाने के लिए व्यय किया जाता है।

प्रश्न 11.
विज्ञापन लागतें क्या होती हैं?
उत्तर:
विज्ञापन लागतें वे लागतें होती हैं जो एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा फर्मे अपनी-अपनी वस्तुओं के प्रचार पर बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से व्यय करती हैं।

प्रश्न 12.
पेटेंट अधिकार क्या होते हैं?
उत्तर:
पेटेंट अधिकार वे अधिकार हैं जिनमें धारक को ही एक विशेष उत्पादन विधि या नए उत्पाद का प्रयोग करने का अधिकार होता है और अन्य किसी भी उत्पादक को धारक से लाइसेंस पाए बिना इसके उत्पादन या प्रयोग करने का अधिकार नहीं होता।

प्रश्न 13.
संगुट विरोधी (Anti Trust) कानून क्या होते हैं?
उत्तर:
संगुट विरोधी कानून ऐसे कानून हैं जो उन सभी प्रकार के विलय (Merger), अधिग्रहण (Acquisition) और व्यावसायिक गतिविधियों को सीमित करते हैं जिनके कारण दक्षता में नाममात्र की वृद्धि परंतु बाज़ार पर नियंत्रण की संभावना अधिक होती है।

प्रश्न 14.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में दीर्घकाल में फर्म असामान्य लाभ अर्जित क्यों नहीं कर पाती?
उत्तर:
क्योंकि दीर्घकाल में अन्य फळं बाजार में प्रवेश करके असामान्य लाभ को सामान्य लाभ में बदल देती हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एकाधिकार बाज़ार की कोई चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
एकाधिकार बाज़ार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. एक विक्रेता-एकाधिकार बाज़ार में वस्तु का केवल एक ही विक्रेता होता है। अतः इस बाज़ार में फर्म तथा उद्योग का अंतर समाप्त हो जाता है।
  2. निकट स्थानापन्न का न होना-एकाधिकार बाजार जिस वस्तु का उत्पादन या विक्रय करता है, उसका कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता।
  3. प्रवेश पर प्रतिबंध-एकाधिकार बाजार में नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है। इसलिए एकाधिकारी का कोई प्रतियोगी नहीं होता।
  4. पूर्ति पर प्रभावी नियंत्रण वस्तु की पूर्ति पर एकाधिकारी बाज़ार का पूर्ण नियंत्रण होता है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

प्रश्न 2.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की कोई चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. फर्मों की अधिक संख्या एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्मों की संख्या अधिक होती है। इस प्रकार विक्रेताओं में प्रतिस्पर्धा पाई जाती है।

2. वस्तु विभेद-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अनेक फर्मे मिलती-जुलती वस्तुओं का उत्पादन करती हैं। उन वस्तुओं में रंग, रूप, आकार, डिज़ाइन, पैकिंग, ब्रांड, ट्रेडमार्क, सुगंध आदि के आधार पर वस्तु विभेद (Product Variation) किया जाता है; जैसे पेप्सोडेंट, कोलगेट, फोरहन्स, क्लोज़अप आदि टूथपेस्ट। इन पदार्थों में एकरूपता तो नहीं होती, लेकिन वे एक-दूसरे के निकट स्थानापन्न (Close Substitutes) होते हैं।

3. फर्मों के निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार में नई फर्मों के बाज़ार में प्रवेश करने और पुरानी फर्मों को बाजार छोडने की पूर्ण स्वतन्त्रता होती है।

4. विक्रय लागतें-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार में प्रत्येक फर्म को अपनी वस्तु का प्रचार करने के लिए विज्ञापनों पर बहुत व्यय करना पड़ता है। अतः एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्मों में अपनी-अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए कीमत प्रतियोगिता तो नहीं पाई जाती, बल्कि गैर-कीमत प्रतिस्पर्धा (Non-Price Competition) पाई जाती है।

प्रश्न 3.
उन कारकों की व्याख्या करें जिनके कारण एकाधिकार बाज़ार अस्तित्व में आया।
उत्तर:
एकाधिकार बाज़ार के अस्तित्व में आने के कारण निम्नलिखित हैं
1. सरकारी प्रतिबंध कई बार किसी क्षेत्र विशेष में अन्य किसी फर्म के प्रवेश करने पर सरकार प्रतिबंध लगा देती है। उदाहरण के लिए, रेल परिवहन के क्षेत्र में भारत सरकार ने अन्य किसी के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। अतः रेलवे परिवहन पर सरकार का एकाधिकार है।

2. लाइसेंस-सरकार द्वारा केवल एक कंपनी को किसी वस्तु या सेवा के उत्पादन का लाइसेंस देना किसी क्षेत्र या उद्योग में एकाधिकार फर्म को जन्म दे सकता है।

3. पेटेंट अधिकार-पेटेंट अधिकार के कारण भी एकाधिकार स्थापित हो सकता है। जब किसी एक फर्म अथवा उत्पादक को यह सरकारी मान्यता मिल जाती है कि उसके अलावा अन्य कोई भी फर्म उस वस्तु का उत्पादन अथवा उस तकनीक का प्रयोग नहीं कर सकती, जिसका विकास अथवा आविष्कार इस फर्म ने किया है तो इसे पेटेंट अधिकार कहते हैं। यह फर्मों को अन्वेषण एवं विकास के कार्य करते रहने हेतु प्रोत्साहित करने और जोखिम की पूर्ति के लिए दिया जाता है।

4. व्यापार गुट (कार्टेल) कभी-कभी किसी एक विशेष वस्तु के उत्पादक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हुए अधिकतम लाभ कमाने के लिए एकत्रित होकर एक संगठन बना लेते हैं, इसे व्यापार गुट (कार्टेल) कहा जाता है। वे इस संस्था के माध्यम से एकाधिकारी की तरह ही अपनी उत्पादन एवं कीमत नीति को लागू करते हैं।

प्रश्न 4.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धी फर्म का माँग वक्र अधिक लोचदार क्यों रहता है?
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धी फर्म द्वारा उत्पादित वस्तु की कई निकट प्रतिस्थापक वस्तुएँ बाज़ार में उपलब्ध होती हैं। जिस वस्तु की जितनी अधिक प्रतिस्थापक वस्तुएँ उपलब्ध होंगी उस वस्तु की माँग उतनी ही अधिक लोचदार होगी। इसलिए एक एकाधिकारी प्रतिस्पर्धी फर्म का माँग वक्र अधिक लोचदार रहता है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
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प्रश्न 5.
एकाधिकार और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में से किस बाज़ार में फर्म का माँग वक्र अधिक लोचशील होता है और क्यों?
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा और एकाधिकार दोनों ही अवस्थाओं में फर्मों का माँग वक्र अथवा औसत आगम वक्र दाईं ओर नीचे को झुका हुआ होता है। इसका अर्थ यह है कि दोनों प्रकार की फर्मों को अधिक मात्रा में वस्तु बेचने के लिए कीमत कम करनी पड़ती है। लेकिन एक एकाधिकारी फर्म का माँग वक्र कम लोचशील होता है क्योंकि इस अवस्था में वस्तु की कोई निकट स्थानापन्न वस्तु नहीं होती। इसके विपरीत, एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में एक फर्म का माँग वक्र अधिक लोचशील होता है क्योंकि उस वस्तु की कई निकट स्थानापन्न वस्तुएँ बाज़ार में उपलब्ध होती हैं। एकाधिकार और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्म के माँग वक्र को निम्नांकित रेखाचित्रों द्वारा दिखाया जाता है
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 2

प्रश्न 6.
बताइए कि एकाधिकारी फर्म का सीमांत आगम औसत आगम से कम क्यों रहता है?
उत्तर:
एकाधिकारी फर्म पूरे बाज़ार में एकमात्र वस्तु का अकेला विक्रेता होता है। एकाधिकारी फर्म का वस्तु की पूर्ति पर पूर्ण नियंत्रण होता है। लेकिन उसका वस्तु की माँग पर कोई नियंत्रण नहीं होता। अतः एकाधिकारी फर्म अधिक लाभ कमाने के लिए वस्तु को अधिकतम मूल्य पर बेचने का प्रयास करेगी। विक्रेता को वस्तु की अधिकाधिक इकाइयाँ बेचने के लिए कीमत कम करनी पड़ती है। इसलिए फर्म का सीमांत आगम औसत आगम से कम रहता है। सीमांत आगम और औसत आगम दोनों वक्रों का ढाल ऊपर से नीचे की ओर होता है लेकिन सीमांत आगम औसत आगम से सदैव कम होता है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 3

प्रश्न 7.
माँग की कीमत लोच और सीमांत आगम के बीच संबंध को एक | रेखाचित्र से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
माँग की कीमत लोच (eD) और सीमांत संप्राप्ति (आगम) (MR) के बीच निकट संबंध रहता है। जैसे कि
(i) जब MR धनात्मक है तो कीमत लोच 1 से अधिक होती है।

(ii) जब MR शून्य होती है तो कीमत लोच 1 के बराबर होती है।

(iii) जब MR ऋणात्मक होता है तो कीमत लोच 1 से कम होती है। यह संबंध संलग्न रेखाचित्र द्वारा दर्शाया गया है।
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प्रश्न 8.
द्वि-अधिकार बाज़ार की कोई चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
द्वि-अधिकार बाज़ार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें केवल दो ही उत्पादक होते हैं।
  2. दोनों लगभग समान वस्तु का विक्रय करते हैं।
  3. दोनों ही अपने उत्पादन कार्य में स्वतंत्र होते हैं तथा दोनों ही वस्तुएँ एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करती हैं।
  4. प्रत्येक प्रतिस्पर्धी को स्वयं अपनी नीति का निर्धारण करने में दूसरे प्रतिस्पर्धी की नीति को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

प्रश्न 9.
शून्य उत्पादन लागत वाली एकाधिकार फर्म के संतुलन को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
कभी-कभी एक एकाधिकारी फर्म की लागत शून्य होती है, क्योंकि उसे उत्पाद के लिए कोई कीमत नहीं चुकानी पड़ती। ऐसी स्थिति में फर्म का संतुलन उस बिंदु पर होगा जहाँ MC =MR है। एक फर्म की संतुलन स्थिति को हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं
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संलग्न रेखाचित्र में, X-अक्ष ही औसत व सीमांत लागत वक्र है, क्योंकि लागत शून्य है। E बिंदु पर MR=MC है इसलिए यह संतुलन बिंदु है, जहाँ फर्म को OPAE लाभ प्राप्त हो रहा है जो अधिकतम लाभ है। चूँकि हम जानते हैं कि जब MR = 0 होता है, तो TR अधिकतम होता है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

प्रश्न 10.
एकाधिकार फर्म के लिए माँग वक्र ही संरोध (Con-straint) कैसे बन जाता है?
उत्तर:
एकाधिकार फर्म पूरे बाज़ार में एकमात्र वस्तु का विक्रेता होता है। एकाधिकार फर्म का बाज़ार में वस्तु की पूर्ति पर पूरा नियंत्रण होता है। लेकिन कीमत प्रक्रिया के दूसरे पहलू माँग पर फर्म का कोई नियंत्रण नहीं होता क्योंकि माँग उपभोक्ताओं द्वारा की जाती है। एक फर्म अधिक लाभ कमाने के लिए वस्तु को अधिकतम कीमत पर बेचने का प्रयास करती है परंतु अधिकतम कीमत पर माँग कम होगी। अतः वस्तु की अधिक मात्रा बेचने के लिए फर्म को कीमत कम करनी पड़ती है। इस प्रकार फर्म के लिए माँग वक्र ही संरोध बन जाता है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 6
संलग्न रेखाचित्र में हम देखते हैं कि OP कीमत पर वस्तु की माँग केवल OQ है। OQ1 मात्रा बेचने के लिए फर्म को वस्तु की कीमत OP से कम करके OP1 करनी पड़ेगी।

प्रश्न 11.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा क्या होती है? क्या ऐसे बाज़ार में एक विक्रेता कीमत को प्रभावित कर सकता है? समझाइए।
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार की वह स्थिति है जिसमें एक बड़ी संख्या में फर्मे लगभग एक जैसी किंतु विभेदीकृत वस्तुओं को बेचने की प्रतिस्पर्धा करती हैं।

एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में यहाँ एक ओर फर्मों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर फर्मों को वस्तु विभेद के कारण कुछ सीमा तक एकाधिकारी शक्ति भी प्राप्त होती है। इसलिए एक विक्रेता कीमत को प्रभावित कर सकता है। यहाँ एक विक्रेता कीमत निर्धारक होता है, कीमत स्वीकारक नहीं।

प्रश्न 12.
एकाधिकार व एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में औसत संप्राप्ति (AR) तथा सीमांत संप्राप्ति (MR) वक्र बनाइए।
उत्तर:
एकाधिकार तथा एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की अवस्थाओं में फर्म अपनी स्वतंत्र कीमत नीति अपना सकती है। फर्म कीमत को कम करके अधिक माल बेच सकती है तथा कीमत में वृद्धि करने पर फर्म का कम माल बिकेगा। अतः इन दोनों स्थितियों में औसत संप्राप्ति वक्र तथा सीमांत संप्राप्ति (आगम) वक्र गिरते हुए होते हैं और जब औसत संप्राप्ति गिर रही होती है तो सीमांत संप्राप्ति औसत संप्राप्ति से कम रहती है अर्थात् इन दोनों में मुख्य अंतर यह है कि एकाधिकार में आगम वक्र कम लोचदार (Less Elastic) और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अधिक लोचदार (More Elastic) होते हैं।
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इसका अभिप्राय यह है कि यदि एकाधिकारी फर्म कीमत बढ़ा देती है, तो फर्म की कुल माँग पर कम प्रभाव पड़ता है क्योंकि एकाधिकार में वस्तु के स्थानापन्न (Substitutes) उपलब्ध नहीं होते जबकि एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा वाली फर्म यदि वस्तु की कीमत बढ़ा देती है तो उसकी माँग पर अधिक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में वस्तु के स्थानापन्न उपलब्ध होते हैं।

प्रश्न 13.
एक प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार में सीमांत संप्राप्ति (आगम) तथा कुल संप्राप्ति (आगम) का संबंध तालिका व रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
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एक प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार के कुल संप्राप्ति और सीमांत संप्राप्ति के संबंध को निम्न तालिका व रेखाचित्र से दिखा सकते हैं-

बेची गई इकाइयाँप्रति इकाई कीसतकुल आगमसीमांत आगम
1101010
29188
38246
47284
56302
65300
7428-2
8324-4

तालिका तथा रेखाचित्रों से यह स्पष्ट होता है कि कुल आगम उस समय तक बढ़ता है जब तक कि सीमांत आगम धनात्मक अर्थात् शून्य से ऊपर है। कुल आगम वहाँ अधिकतम है जहाँ सीमांत आगम शून्य है। कुल आगम उस समय घटने लगता है जब सीमांत आगम ऋणात्मक अर्थात् शून्य से कम होता है। उपर्युक्त तालिका से यह स्पष्ट है कि सीमांत आगम पाँचवीं इकाई तक धनात्मक है।

अतः कुल आगम बढ़ रहा है। छठी इकाई पर कुल आगम अधिकतम है क्योंकि सीमांत आगम शून्य है। छठी इकाई के पश्चात् सीमांत आगम ऋणात्मक होने लगता है और कुल आगम घटने वाले होते हैं।

प्रश्न 14.
कुल संप्राप्ति (आगम) (TR) तथा सीमांत संप्राप्ति (MR) में संबंध तालिका एवं रेखाचित्र की सहायता से बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 9

बेची गई इकाइयाँTRMR
110
2188
3246
4284
5302
6300
728– 2

(i) जब MR धनात्मक होता है तो TR बढ़ता है।
(ii) जब MR शून्य होता है, तो TR अधिकतम होता है।
(iii) जब MR ऋणात्मक होता है, तो TR गिरना शुरू कर देता है।
(iv) TR बढ़ती दर से बढ़ता है, जब तक MR बढ़ता है तथा TR घटती दर से बढ़ता है, जब तक MR गिरता है।

प्रश्न 15.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा के अंतर्गत कुल संप्राप्ति, औसत संप्राप्ति और सीमांत संप्राप्ति के बीच संबंध बताइए। रेखाचित्र का प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 10
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में एक फर्म कीमत निर्धारक होती है। एक फर्म अपनी वस्तु की बिक्री को तभी बढ़ा सकती है जब वह वस्तु की कीमत में कमी करे। इसलिए फर्म के AR और MR वक्र गिरते हुए सीधी रेखा के रूप में होते हैं। कुल संप्राप्ति वक्र का आकार उल्टे ‘U’ आकार का होता है, क्योंकि कुल संप्राप्ति पहले बढ़ती है, बाद में कम होती है। यह वस्तु की मात्रा संलग्न रेखाचित्र में दर्शाया गया है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
द्वि-अधिकार (Duopoly) की परिभाषा दीजिए। इसकी विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
द्वि-अधिकार का अर्थ-द्वि-अधिकार से अभिप्राय बाजार की उस स्थिति से है जिसमें किसी एक ही सर्वथा समान अथवा लगभग समान वस्तु के दो उत्पादक होते हैं। दोनों ही अपने उत्पादन कार्य में स्वतंत्र होते हैं एवं दोनों की वस्तुएँ एक-दूसरे से पर्धा करती हैं। यदि एक विक्रेता अपनी उपज तथा कीमत संबंधी नीति में परिवर्तन करता है तो दूसरे की ओर से इसकी बलशाली प्रतिक्रिया होती है। इस प्रकार दोनों विक्रेताओं में से कोई भी बिना दूसरे की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखे उत्पादन की मात्रा अथवा कीमत को निश्चित नहीं कर सकता।

द्वि-अधिकार बाजार की विशेषताएँ-द्वि-अधिकार बाजार की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं-

  • यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें केवल दो ही उत्पादक होते हैं।
  • दोनों सर्वथा समान अथवा लगभग समान वस्तु का विक्रय करते हैं।
  • दोनों ही अपने उत्पादन कार्य में स्वतंत्र होते हैं तथा दोनों ही वस्तुएँ एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करती हैं।
  • अतः प्रत्येक प्रतिस्पर्धी को स्वयं अपनी नीति का निर्धारण करने में दूसरे प्रतिस्पर्धी की नीति को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

द्वि-अधिकार आवश्यक रूप से अपूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति नहीं होती, क्योंकि यदि दोनों विक्रेता परस्पर मिलकर उत्पादन करने लगे, तब द्वि-अधिकार की स्थिति समाप्त हो जाएगी। इसके विपरीत, यह भी संभव है कि कंठ-छेदी प्रतिस्पर्धा (Cut-throat competition) के कारण पूर्ण प्रतिस्पर्धा की सी दशाएँ उत्पन्न हो जाएँ।

प्रश्न 2.
कुल संप्राप्ति (TR) और कुल लागत (TC) वक्रों की सहायता से एक एकाधिकारी फर्म (Monopoly Firm) के संतुलन को समझाइए।
उत्तर:
कुल संप्राप्ति (आगम) तथा कुल लागत विधि द्वारा एकाधिकारी फर्म का संतुलन-एकाधिकार वस्तु की उस मात्रा को बेचकर अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकता है जिस पर कुल संप्राप्ति (आगम) (Total Revenue) तथा कुल लागत (Total Cost) का अंतर अधिकतम होता है। एकाधिकार वस्तु की विभिन्न कीमतें निर्धारित करके अथवा वस्तु की पूर्ति में परिवर्तन लाकर यह जानने का प्रयास करता है कि उत्पादन के किस स्तर पर कुल संप्राप्ति (TR) तथा कुल लागत (TC) का अंतर अधिकतम है। उत्पादन की उस मात्रा पर जिसके उत्पादन से एकाधिकार को अधिकतम लाभ प्राप्त होंगे, एकाधिकार संतुलन की स्थिति में होगा। इसे संलग्न रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है

रेखाचित्र में TC कुल लागत वक्र है, जो उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ लागत में स्थिर दर से होने वाली वृद्धि को दर्शाता है। TR कुल संप्राप्ति वक्र है जो आरंभ में ऊपर की ओर बढ़ता है, बाद में चपटा (Flat) होता है और अंत में नीचे की ओर गिरता है जो एक निश्चित बिंदु के पश्चात कुल प्राप्तियों में गिरावट का प्रतीक है। TP कुल लाभ की रेखा है। यह Rबिंद से आरंभ होती है जो यह दर्शाती है कि प्रारंभिक स्थिति में फर्म को ऋणात्मक लाभ (Negative Profits) मिलते हैं। रेखाचित्र से यह स्पष्ट होता है कि जैसे-जैसे फर्म उत्पादन बढ़ाती है वैसे-वैसे कुल संप्राप्ति TR बढ़ती जाती है। आरंभ में TR < TC है। परिणामस्वरूप TR वक्र का RC भाग यह दिखाता है कि फर्म को हानि हो रही है। K बिंदु पर TR = TC है जो यह स्पष्ट करती है कि फर्म को न लाभ है और न ही हानि। जैसाकि TP के C बिंदु से स्पष्ट हो रहा है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 11

K बिंदु ‘समविच्छेद बिंदु’ (Break Even Point) कहलाता है। जब फर्म K बिंदु से अधिक उत्पादन करती है तो TR > TC है। C बिंदु के बाद TP वक्र भी दाएँ ऊपर की ओर बढ़ता है। यह इस बात का प्रतीक है कि फर्म लाभ प्राप्त कर रही है। जब TP वक्र अपने उच्चतम बिंदु E पर पहुँचता है तब फर्म अधिकतम लाभ कमा रही होती है। इसलिए OQ उत्पादन की मात्रा संतुलन मात्रा कहलाती है। यदि फर्म संतुलन मात्रा से अधिक उत्पादन करती है तो TR और TC वक्रों का अंतर कम होता जाता है जो कि दोबारा K1 बिंदु पर एक-दूसरे को काटते हैं। पुनः TR = TC हो जाते हैं। इसका अभिप्राय यह है कि फर्म के लाभ घटते जाते हैं और D बिंदु पर फर्म को न लाभ न हानि होती है। इस प्रकार बिंदु K1 भी ‘समविच्छेद बिंदु’ (Break Even Point) कहलाता है। यदि फर्म इससे भी अधिक मात्रा का उत्पादन करती है तो TR < TC हो जाता है और फर्म को हानि होने लगती है।

सारांश में फर्म E बिंदु पर अधिकतम लाभ प्राप्त करेगी। अधिकतम लाभ का अनुमान लगाने के लिए TR और TC वक्रों पर दो स्पर्श रेखाएँ (Tangents) खींची गई हैं। जिन बिंदुओं पर स्पर्श रेखाएँ समानांतर (Parallel) हैं, वहीं TR और TC का अंतर अधिकतम होता, है। जैसाकि रेखाचित्र में A और B बिंदुर चूँकि स्पर्श रेखाएँ परस्पर समानांतर हैं, इसलिए यहाँ TR और TC का अंतर अधिकतम है। इसी स्थिति में फर्म को अधिकतम लाभ प्राप्त होता है जो TP वक्र के E बिंदु से स्पष्ट है और E बिंदु ही फर्म का संतुलन बिंदु है।

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प्रश्न 3.
सीमांत संप्राप्ति (MR) और सीमांत लागत (MC) विधि द्वारा एक एकाधिकारी फर्म की संतुलन स्थिति को समझाइए।
अथवा
एक एकाधिकारी किस प्रकार अपनी कीमत और मात्रा निर्धारित करता है? रेखाचित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
सीमांत संप्राप्ति (आगम) तथा सीमांत लागत विधि द्वारा एकाधिकारी फर्म की संतुलन स्थिति-एकाधिकार की स्थिति उत्पादन तथा संतुलन स्थिति का निर्धारण सीमांत आगम और सीमांत लागत विधि द्वारा भी कर सकती है। इस विधि के अनुसार एकाधिकारी उस समय संतुलन स्थिति में होता है जहाँ निम्नलिखित दो शर्ते पूरी होंगी

  • सीमांत संप्राप्ति (आगम) (MR) = सीमांत लागत (MC) हो
  • सीमांत लागत (MC) वक्र सीमांत संप्राप्ति (MR) वक्र को नीचे से काटता हो।

एकाधिकार में कीमत, उत्पादन तथा संतुलन निर्धारण दिए गए रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया गया है रेखाचित्र में औसत लागत, तथा सीमांत लागत वक्र को माँग (औसत संप्राप्ति) वक्र तथा सीमांत संप्राप्ति वक्र के साथ दर्शाया गया है। रेखाचित्र से स्पष्ट है कि q0 के नीचे उत्पादन स्तर पर सीमांत संप्राप्ति स्तर सीमांत लागत स्तर से ऊँचा है। तात्पर्य यह है कि वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के विक्रय से प्राप्त कुल संप्राप्ति में वृद्धि उस अतिरिक्त इकाई की उत्पादन लागत में वृद्धि से अधिक होती है। इसका अर्थ यह है कि उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई से अतिरिक्त लाभ का सृजन होगा। चूँकि लाभ में परिवर्तन = कुल संप्राप्ति में परिवर्तन – कुल लागत में परिवर्तन। अतः यदि फर्म q0 से कम स्तर पर वस्तु का उत्पादन कर रही है, तो वह अपने उत्पादन में वृद्धि लाना चाहेगी, क्योंकि इससे उसके लाभ में बढ़ोतरी होगी। जब तक सीमांत संप्राप्ति (MR) वक्र सीमांत लागत (MC) वक्र के ऊपर स्थित है, तब तक उपर्युक्त D = AR तर्क का अनुप्रयोग होगा। अतः फर्म अपने उत्पादन में वृद्धि करेगी। इस प्रक्रम में तब रुकावट आएगी, जब उत्पादन का स्तर q0 पर प. प. पहुँचेगा, क्योंकि इस स्तर पर सीमांत संप्राप्ति (MR) और सीमांत उत्पादन (निर्गत) MR लागत (MC) दोनों समान होंगे और उत्पादन में वृद्धि से लाभ में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं होगी।
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दूसरी ओर, यदि फर्म q0 से अधिक मात्रा में वस्तु का उत्पादन करती है तो सीमांत लागत (MC) सीमांत संप्राप्ति से अधिक होती है। अभिप्राय यह है कि उत्पादन की एक इकाई कम करने से कुल लागत में जो कमी होती है, वह इस कमी के कारण कल संप्राप्ति में हुई हानि से अधिक होती है। अतः फर्म के लिए यह उपयुक्त है कि वह उत्पादन में कमी लाए। यह तर्क तब तक ठीक साबित होगा जब तक सीमांत लागत (MC) वक्र सीमांत संप्राप्ति वक्र के ऊपर स्थित होगा और फर्म अपने उत्पादन में कमी को जारी रखेगी। एक बार उत्पादन स्तर के q0 पर पहुँचने पर सीमांत लागत (MC) और सीमांत संप्राप्ति (MR) के मूल्य समान हो जाएँगे और फर्म अपने उत्पादन में कमी को रोक देगी।

वार्य रूप से उत्पादन स्तर पर पहुँचती है, इसलिए इस स्तर को उत्पादन का संतुलन स्तर कहते हैं। चूंकि उत्पादन के उस संतुलन स्तर पर सीमांत संप्राप्ति (MR) सीमांत लागत के बराबर होती है तथा सीमांत लागत (MC) वक्र सीमांत संप्राप्ति वक्र को नीचे से काट रही है और इस बिंदु पर एकाधिकार फर्म की संतुलन की शर्ते पूरी हो रही हैं।

q0 उत्पादन के स्तर पर औसत लागत dq0 है। चूंकि कुल लागत, औसत लागत और उत्पादित मात्रा q0 के गुणनफल के बराबर होती है, इसलिए इसे आयंत Oq0dc के द्वारा दर्शाया गया है।

रेखाचित्र में कीमत बिंदु a द्वारा दर्शायी गई है जहाँ q0 से शुरू होकर उदग्र रेखा बाजार माँग वक्र D से मिलती है।। इससे aq0 की ऊँचाई द्वारा दर्शाई गई कीमत प्राप्त होती है। चूंकि फर्म द्वारा प्राप्त कीमत उत्पादन की प्रति इकाई संप्राप्ति होती है, अतः यह फर्म के लिए औसत संप्राप्ति है। कुल संप्राप्ति, औसत संप्राप्ति और उत्पादन q0 के स्तर का गुणनफल होती है, इसलिए इसे आयत Oq0ab के क्षेत्रफल के रूप में दर्शाया गया है। आरेख से स्पष्ट है कि आयत Oq0ab का क्षेत्रफल आयत Oq0dc के क्षेत्रफल से बड़ा है अर्थात् कुल संप्राप्ति कुल लागत से अधिक है। आयत cdab का क्षेत्रफल इनके बीच का अंतर है अतः लाभ = कुल संप्राप्ति – कुल लागत को cdab के क्षेत्रफल से प्रदर्शित किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
शून्य लागत की स्थिति में एक एकाधिकारी फर्म के संतुलन स्थिति को रेखाचित्र की सहायता से सुस्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शून्य लागत की स्थिति में एकाधिकार फर्म का संतुलन कभी-कभी एक एकाधिकार फर्म की वस्तु की उत्पादन लागत शून्य होती है, क्योंकि उसे अपने उत्पाद के लिए कोई कीमत चुकानी नहीं पड़ती। ऐसी स्थिति में भी एक फर्म का संतुलन उस बिंदु पर होगा, जहाँ MC = MR है और चूँकि हमने माना है कि MC = 0 है तो संतुलन की शर्त होगी (MR = MC = 0)। हम यह भी जान चुके हैं कि जब MR = 0 होता है तो TR अधिकतम होता है। एक फर्म की संतुलन स्थिति को हम निम्नलिखित उदाहरण व संलग्न रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कर सकते हैं

उदाहरण (Example) मान लीजिए कि कोई गाँव अन्य गाँवों से काफी दूरी पर स्थित है। इस गाँव में एक ही कुआँ है जिसमें पानी उपलब्ध होता है। सभी निवासी जल की आवश्यकता के लिए पूर्ण रूप से इसी कुएँ पर निर्भर हैं। कुएँ का स्वामी एक ऐसा व्यक्ति है जो अन्य लोगों को कुएँ से जल निकालने के लिए रोकने में समर्थ है सिवाय इसके कि कोई जल का क्रय करे। इस कुएँ से जल का क्रय करने वाले स्वयं ही जल निकालते हैं। हम इस एकाधिकार की स्थिति का विश्लेषण बिक्री जहाँ लागत शून्य है इस जल की मात्रा और उसकी कीमत जिस पर बेची जाती है, का निर्धारण करने के लिए करेंगे।

रेखाचित्र में कुल संप्राप्ति (TR), औसत संप्राप्ति (AR) और सीमांत संप्राप्ति (MR) वक्रों को दर्शाया गया है। फर्म का लाभ कुल संप्राप्ति – कुल लागत के बराबर होता है अर्थात
π = TR – TC.

रेखाचित्र से स्पष्ट है कि जब कुल उत्पादन OQ है, तो कुल लागत शून्य है। चूंकि इस स्थिति में कुल लागत शून्य है, जब कुल संप्राप्ति सर्वाधिक है। लाभ सर्वाधिक है तो जैसा कि हमने पहले देखा है कि यह स्थिति तब होती है, जब उत्पादन मात्रा OQ इकाइयाँ हों। यह स्तर तब प्राप्त होता है जब MR शून्य के बराबर होती है। लाभ का परिणाम ‘a’ से समस्तरीय अक्ष तक के उदग्र रेखा की लंबाई के द्वारा स्पष्ट है।

जिस कीमत पर उत्पाद की इस मात्रा का विक्रय होगा जिसे उपभोक्ता समग्र रूप से भुगतान करने को तैयार होंगे। इसे बाजार माँग वक्र D द्वारा दिया गया है। OQ इकाई के उत्पादन के स्तर पर कीमत P रु० है। चूँकि एकाधिकार फर्म के लिए बाजार माँग वक्र ही औसत संप्राप्ति (AR) वक्र है, इसलिए फर्म के द्वारा प्राप्त औसत संप्राप्ति P है। उत्पादन (निर्गत) Q MR कुल संप्राप्ति को औसत संप्राप्ति और बिक्री मात्रा के गुणनफल अर्थात् Px OQ इकाइयाँ = OQRP के द्वारा दिखाया गया है। यह छायांकित आयत के द्वारा चित्रित किया गया है।

पूर्ण प्रतिस्पर्धा से तुलना-उपरोक्त स्थिति में एकाधिकारी फर्म को अधिसामान्य लाभ प्राप्त होंगे। अब यदि हम यह मान लें कि बाजार में पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति है और गाँव में जल के अनगिनत कुएँ हैं, जिनके स्वामी भी अलग-अलग हैं, तब उनमें परस्पर प्रतिस्पर्धा होगी। दूसरे स्वामी कीमत को कम करेंगे और कीमत असीमित रूप से नीचे की ओर गिरेगी और तब तक गिरेगी जब तक शन्य न हो जाए और लाभ भी शून्य न हो जाए। अतः इस प्रकार पूर्ण प्रतिस्पर्धा लाभ के कारण कम कीमत पर अधिक मात्रा की बिक्री होती है तथा लाभ AR सामान्य (शून्य) होते हैं।
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प्रश्न 5.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्म के अल्पकालीन संतुलन की स्थिति समझाइए। MC, MR विधि का प्रयोग करें।
उत्तर:
अल्पकालीन संतुलन (Short Run Equilibrium) अल्पकाल समय की वह अवधि है, जिसमें माँग के बढ़ने पर उत्पादन उत्पादन (निर्गत) को केवल वर्तमान क्षमता (Existing Capacity) तक ही बढ़ाया जा सकता है। उत्पादन के स्थिर साधनों; जैसे मशीनरी, प्लांट आदि में परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इस समय अवधि में एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा फर्म का संतुलन तो उसी बिंदु पर निर्धारित होता है, जिस पर MC = MR हो तथा MC, MR को नीचे से काटे, परंतु संतुलन की अवस्था में फर्म को उत्पादन करने में (i) असामान्य लाभ, (ii) सामान्य लाभ या (iii) हानि उठानी पड़ सकती है। इनका विवरण दिए गए रेखाचित्रों की सहायता से किया जा सकता है।

1. असामान्य लाभ-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्म को असामान्य लाभ (Supermormal Profit) उस समय होते हैं, जब फर्म की औसत संप्राप्ति (आगम) (AR) औसत लागत से अधिक होती है (AR > AC)। संलग्न रेखाचित्र में संतुलन बिंदु E है, जिस पर MC = MR है तथा MC वक्र, MR वक्र को नीचे से काट रहा है। इस स्थिति में संतुलन उत्पादन OQ है तथा संतुलन कीमत QP = OP1 है। OQ उत्पादन की प्रति इकाई कीमत (QP) औसत लागत (OC) से अधिक है। इसलिए फर्म को PP1C1C छाया वाले भाग के बराबर असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं।
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2. सामान्य लाभ-अल्पकाल में एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्म को सामान्य लाभ उस समय प्राप्त होते हैं, जब औसत संप्राप्ति (आगम) (AR) तथा औसत लागत (AC) एक-दूसरे के बराबर होती है। (AR = AC)। संलग्न रेखाचित्र में संतुलन बिंदु .E है, जिस पर MC = MR है तथा MC वक्र, MR वक्र को नीचे से काट रहा है। अतः संतुलन उत्पादन OQ है तथा संतुलन कीमत qP = OP1 निर्धारित होती है। OQ संतुलन उत्पादन की औसत संप्राप्ति (AR) तथा औसत लागत (AC) बराबर है (OP = QP1)। अतः फर्म को केवल सामान्य लाभ (Normal Profit) प्राप्त हो रहे हैं।
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3. न्यूनतम हानि-अल्पकाल में एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में उत्पादन (निर्गत) काम कर रही फर्म को हानि भी हो सकती है। हानि उस समय होती है जब फर्म की औसत संप्राप्ति (AR) औसत (AC) से कम होती है अर्थात् जब AR1 निर्धारित होती है। औसत लागत QC है, जो कि कीमत अथवा औसत संप्राप्ति से अधिक है। इसलिए फर्म को PC प्रति इकाई हानि हो रही है, परंतु संतुलन उत्पादन की कीमत औसत परिवर्ती लागत (AVC) के बराबर है, क्योंकि बिंदु P पर AR वक्र AVC वक्र को छू रहा है। इस स्थिति में उत्पादन (निर्गत) x फर्म को कुल हानि CC1P1P के बराबर हो रही है, जो कि बँधी लागत के बराबर है, इसलिए P बिंदु उत्पादन बंद बिंदु (Shut-down Point) है।

प्रश्न 6.
अल्पाधिकार क्या है? अल्पाधिकार में कीमत निर्धारण की समस्या की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अल्पाधिकार (Oligopoly) से अभिप्राय बाजार की उस स्थिति से है, जब उद्योग में समरूप वस्तु का उत्पादन करने वाली अथवा निकट स्थानापन्न वस्तुओं का उत्पादन करने वाली फर्मों की संख्या अल्प (3, 4, 5……) परंतु बहुत अधिक नहीं होती।
अल्पाधिकार में कीमत निर्धारण की समस्याएँ (Problems of Price Determination Under Oligopoly)-अल्पाधिकार में कीमत तथा उत्पादन निर्धारण की समस्या वास्तव में एक गंभीर समस्या है। इस समस्या का समाधान सरल व निश्चित नहीं है।
अल्पाधिकार में कीमत तथा उत्पादन निर्धारण की समस्या से सम्बन्धित निम्नलिखित पहलू महत्त्वपूर्ण हैं-
1. एक सामान्य सिद्धांत की रचना कठिन-अल्पाधिकार विभिन्न प्रकार की बाजार स्थितियाँ हो सकती हैं। अल्पाधिकार की गैर-लचीली अवस्था (Tight Oligopoly) भी हो सकती है, जिसमें दो या तीन फर्मे सारे बाजार को नियंत्रित करती हैं। लचीली अवस्था (Loose Oligopoly) भी हो सकती है, जिसमें छह या सात फर्मे बाजार के अधिक भाग को नियंत्रित करती हैं। इसके अंतर्गत वस्तु-विभेदीकरण (Product Differentiation) अथवा समरूप उत्पाद (Homogeneous Product) भी पाए जा सकते हैं। इसमें फर्मों का गठबंधन. (Collusion) अथवा गैर-गठबंधन (Non-Collusion) भी हो सकता है। इसलिए अर्थशास्त्र में ऐसा कोई सर्वमान्य सिद्धांत नहीं है, जो सभी प्रकार की अल्पाधिकार स्थितियों में कीमत तथा उत्पादन निर्धारण की व्याख्या कर सके।

2. अल्पाधिकार में माँग वक्र का अनिश्चित होना अल्पाधिकार में कीमत तथा उत्पादन के अनिर्धारण का एक अन्य कारण माँग का अनिर्धारित होना है। अल्पाधिकार में एक फर्म के निर्णय दूसरी फर्मों के निर्णयों पर निर्भर करते हैं। इसलिए अल्पाधिकारी फर्म की माँग वक्र का निर्धारण संभव नहीं होता, क्योंकि प्रतिद्वन्द्वियों की क्रियाओं के फलस्वरूप उसका खिसकाव होता रहता है। अतः प्रतिद्वन्द्रियों की क्रियाएँ तथा प्रतिक्रियाएँ अल्पाधिकारी माँग वक्र को अनिर्धारित बना देती हैं।

3. अल्पाधिकारी फर्म का उद्देश्य केवल अधिकतम लाभ प्राप्त करना ही नहीं होता-अल्पाधिकारी का उद्देश्य केवल लाभों को अधिकतम करना नहीं होता। चूंकि पूर्ण प्रतिस्पर्धा तथा एकाधिकार की स्थिति में फर्मों का उद्देश्य लाभ को अधिकतमं करना होता है। फलस्वरूप, ऐसे बाजारों में उत्पादन की कीमतें तथा मात्रा निर्धारित करना संभव हो जाता है, परंतु अल्पाधिकार में फर्मों के कई अन्य उद्देश्य जैसे बिक्री को अधिकतम करना अथवा दीर्घकाल तक उचित मात्रा में स्थायी लाभों को प्राप्त करना आदि हो सकते हैं। इन विभिन्न उद्देश्यों के कारण भी अल्पाधिकार में कीमत तथा उत्पादन मात्रा अनिर्धारित रह जाती है।

4. व्यवहार में भिन्नता अल्पाधिकार में परस्पर निर्भरता के फलस्वरूप फर्मों के व्यवहार में भिन्नता पाई जाती है। जैसे कि-
(i) एक तो यह कि फर्मे आपस में मिल-जुलकर अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने का निर्णय कर सकती हैं अथवा दूसरी सीमा यह है कि वे जीवन-पर्यंत एक-दूसरे से लड़ते रहें। यदि वे आपस में समझौते भी करते हैं तो ये कुछ शीघ्र ही टूट जाते हैं।
(ii) दूसरा, फर्मे अपने में से एक को नेता चुनकर कीमत तथा उत्पादन निर्धारण कर सकती हैं, परंतु इस अवस्था में भी कोई ऐसा सरल समाधान नहीं है कि जिससे यह पता चले कि फर्म अपनी कीमत व उत्पादन का निर्धारण किस प्रकार से करेगी। अतः स्पष्ट है कि अल्पाधिकार में कीमत तथा उत्पादन-निर्धारण संबंधी समस्या का कोई निश्चित समाधान नहीं है। इसका कारण प्रतिस्पर्धी फर्मों की प्रतिक्रिया में अनिश्चितता है।

अतः अल्पाधिकार में, परस्पर निर्भरता के फलस्वरूप फर्मों के व्यवहार में विभिन्नता संभव होती है। प्रतिद्वन्द्वी फर्मे परस्पर सहयोग भी कर सकती हैं अथवा स्वतन्त्र रहकर प्रतिस्पर्धा भी कर सकती हैं। वे समझौते कर सकती हैं या समझौते तोड़ सकती हैं। अतएव अल्पाधिकार में फर्मों के व्यवहार संबंधी इतनी अनिश्चितताएँ होती हैं जिस कारण से उनके बारे में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जा सकता। कुछ अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अल्पाधिकारियों में प्रतिस्पर्धा की तुलना ‘ताश के खेल’ (Playing Cards) से की जा सकती है। जिस प्रकार ताश के खेल का परिणाम अनिश्चित होता है, उसी प्रकार अल्पाधिकार में उत्पादन की कीमत तथा मात्रा निर्धारण का कोई समाधान नहीं होता, इसलिए उन्हें अनिर्धारित कहा जाता है।

यहाँ यह भी स्पष्ट कर देना अनिवार्य है कि यद्यपि अल्पाधिकार में, कीमत तथा उत्पादन निर्धारण की समस्या महत्त्वपूर्ण है। इन बाधाओं के होते हुए भी अल्पाधिकार की स्थिति में कीमत निर्धारण की दो मुख्य विशेषताएँ हैं-
1. अल्पाधिकार में कीमतें दृढ़ होती हैं इस स्थिति में बाजार की अन्य अवस्थाओं; जैसे पूर्ण प्रतिस्पर्धा, एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की तुलना में कीमतों में बहुत कम परिवर्तन होता है।
2. यदि अल्पाधिकार की स्थिति में, कीमतों में परिवर्तन होता है तो सभी फर्मों की कीमतों में परिवर्तन होगा, जिससे एक प्रकार का कीमत युद्ध (Price War) सा छिड़ जाता है। यह विशेषता भी अन्य बाजारों में नहीं पाई जाती।

इस प्रकार उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि अल्पाधिकार में कीमत तथा उत्पादन-निर्धारण का कोई निश्चित समाधान नहीं है।

प्रश्न 7.
द्वि-अधिकार क्या है? द्वि-अधिकार में फर्म की कीमत तथा उत्पादन मात्रा निर्धारण संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
द्वि-अधिकार का अर्थ-जब बाज़ार में किसी वस्तु का उत्पादन या विक्रय करने वाली केवल दो फर्मे होती हैं, तो उसे द्वि-अधिकार कहते हैं।
द्वि-अधिकार के अंतर्गत कीमत तथा उत्पादन-मात्रा निर्धारण (Price and Output Determination under Duopoply) यद्यपि द्वि-अधिकार के अंतर्गत कीमत तथा उत्पादन मात्रा के निर्धारण की समस्या अत्यंत जटिल होती है तथापि द्वि-अधिकार में कीमत निर्धारण की संभावित दशाओं का विश्लेषण निम्नलिखित प्रकार किया जा सकता है-
(1) समझौता हो जाने पर यदि दोनों विक्रेता आपस में समझौता करके बाज़ारों का बँटवारा कर लेते हैं तो दोनों विक्रेता अपने-अपने बाज़ारों में एकाधिकारी के समान कीमत निश्चित करने की स्थिति में हो जाते हैं। बाज़ारों का बँटवारा हो जाने के पश्चात् दोनों विक्रेता स्वतंत्र रूप से अपने-अपने क्षेत्रों में लागत-स्थितियों तथा माँग के अनुसार समायोजन करके कीमत निश्चित कर लेते हैं। यदि दोनों एकाधिकारियों की लागत-स्थितियाँ समान हों तथा दोनों की वस्तुओं की माँग की लोच समान हो तो दोनों बाज़ारों में कीमत भी समान होगी अन्यथा उनमें अंतर होने की संभावना बनी रहेगी।

(2) प्रतिस्पर्धा की स्थिति में यदि दोनों फर्मों के बीच कोई समझौता नहीं है तो उनमें प्रतिस्पर्धा रहेगी और कीमत युद्ध (Price War) छिड़ने की संभावना रहेगी। प्रत्येक विक्रेता अपने उत्पाद की कीमत घटाकर दूसरे विक्रेता के ग्राहकों को अपनी ओर खींचने का प्रयत्न करेगा तथा यह कीमत घटाने का क्रम तब तक चलेगा जब तक कि दोनों विक्रेताओं की कीमत उनकी सीमांत लागत के बराबर नहीं हो जाती है। यदि दोनों विक्रेताओं की वस्तुएँ समरूप नहीं हैं तो दोनों की कीमत में अंतर बना रह सकता है। व्यवहार में द्वि-अधिकारी फर्मे कीमत-युद्ध से बचने के लिए मूल्य नेतृत्व और आपसी समझौते का सहारा लेती हैं। इसलिए कहा जाता है कि द्वि-अधिकार का अंतिम हल कीमत नेतृत्व एवं गुटबंदी में निहित होता है।

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प्रश्न 8.
बाजार संरचना (Market Structure) का अर्थ बताते हए इसको निर्धारित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
उत्तर:
बाज़ार संरचना का अर्थ बाज़ार संरचना से अभिप्राय उद्योग में काम कर रही फर्मों की संख्या, फर्मों के बीच प्रतियोगिता का स्वरूप और वस्तु की अपनी प्रकृति से है।
बाज़ार संरचना को निर्धारित करने वाले कारक-बाज़ार संरचना को निर्धारित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
1. वस्तु के क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या-क्रेताओं और विक्रेताओं की अधिक संख्या होने का अर्थ यह है कि कोई भी क्रेता या विक्रेता अपने स्वतंत्र व्यवहार से बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता। पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार की यह पहली शर्त य है जिसमें प्रत्येक विक्रेता और क्रेता कुल उत्पादन का एक सूक्ष्म भाग बेचता या खरीदता है। बाज़ार में केवल एक विक्रेता होने को एकाधिकार बाज़ार कहते हैं जबकि अधिक विक्रेता होने को एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार कहते हैं, क्योंकि वे अपनी वस्तु के ट्रेडमार्क व ब्रांड आदि से कीमत को प्रभावित करते हैं।

2. वस्तु की प्रकृति यदि बाज़ार में बेची जाने वाली वस्तु समरूप व मानकीकृत है अर्थात् उसमें भेद नहीं किया जा सकता तो वस्तु की कीमत एक (या समान) रहेगी। कोई भी विक्रेता ऐसी वस्तु को अधिक कीमत पर नहीं बेच सकता। यह पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाज़ार की दूसरी शर्त या विशेषता है। यदि वस्तु; जैसे टूथपेस्ट में नाम, ब्रांड, आकृति, गुण आदि के आधार पर भेद किया जा सकता है तो फर्म अपने ब्रांड की वस्तु की कीमत अधिक वसूल कर सकती है। ऐसी स्थिति एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार में पाई जाती है।

3. फर्मों का निर्बाध प्रवेश व बहिर्गमन-इससे अभिप्राय है कि फर्म को उद्योग में आने या इससे बाहर जाने की पूर्ण स्वतंत्रता है या नहीं। यदि किसी उद्योग में अधिक लाभ के आकर्षण के कारण नई फर्मों को प्रवेश करने की स्वतंत्रता है तो उस उद्योग में असामान्य लाभ समाप्त हो जाएंगे। इसी प्रकार यदि उद्योग में घाटा उठाने वाली फर्मों को उद्योग छोड़ने की पूरी छूट है तो घाटा (Loss) भी समाप्त हो जाएगा। संक्षेप में फर्मों के निर्बाध प्रवेश व बहिर्गमन से पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन जाएगी। यह भी देखना होगा कि वस्तुओं और साधनों (जैसे श्रम, पूँजी उद्यम आदि) की गतिशीलता है या नहीं अर्थात् वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने या साधनों को एक धंधे से दूसरे धंधे में जाने की पूरी स्वतंत्रता है या नहीं।

उपर्युक्त कारकों के आधार पर बाज़ार को प्रायः चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है-(i) पूर्ण प्रतिस्पर्धा, (ii) एकाधिकार, (iii) एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा और (iv) अल्पाधिकार। अंतिम तीन श्रेणियाँ अपूर्ण प्रतिस्पर्धा के रूप हैं।

प्रश्न 9.
एकाधिकार की परिभाषा दीजिए। इसकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

एकाधिकार बाज़ार का अर्थ-एकाधिकार बाज़ार (Monopoly Market) बाज़ार की वह अवस्था है जिसमें वस्तु का केवल एक ही विक्रेता होता है तथा उसका वस्तु की पूर्ति पर पूर्ण नियंत्रण होता है। एकाधिकार उस वस्तु का उत्पादन करता है, जिसका कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता।
एकाधिकार बाज़ार की विशेषताएँ एकाधिकार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. एक विक्रेता-एकाधिकार बाज़ार में वस्तु का केवल एक ही विक्रेता होता है। अतः इस बाज़ार में फर्म तथा उद्योग का अंतर समाप्त हो जाता है।

2. निकट स्थानापन्न का न होना-एकाधिकार बाज़ार जिस वस्तु का उत्पादन या विक्रय करता है, उसका कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता।

3. प्रवेश पर प्रतिबंध एकाधिकार बाज़ार में नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता है। इसलिए एकाधिकारी का कोई प्रतियोगी नहीं होता।

4. पूर्ति पर प्रभावी नियंत्रण-वस्तु की पूर्ति पर एकाधिकारी बाज़ार का पूर्ण नियंत्रण होता है।

5. स्वतंत्र कीमत नीति-एकाधिकार बाज़ार का वस्तु की कीमत पर पूर्ण नियंत्रण होता है। वह स्वतंत्र कीमत नीति अपना सकता है। वह अपनी इच्छानुसार वस्तु की कीमत में वृद्धि या कमी कर सकता है। वह कीमत निर्धारण करने वाला होता है, न कि कीमत स्वीकार करने वाला। अतः क्रेताओं को वह कीमत देनी पड़ती है, जो एकाधिकारी तय करता है और चूँकि एकाधिकारी को वस्तु का मूल्य निर्धारण करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है, इसलिए उसे असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं।

6. कीमत विभेद-एकाधिकारी अपनी वस्त की विभिन्न क्रेताओं से तथा विभिन्न बाज़ारों में विभिन्न कीमतें ले सकता है।

7. विभिन्न औसत एवं सीमांत आगम वक्र-एकाधिकार में औसत और सीमांत आगम वक्र अलग-अलग होते हैं; जैसाकि संलग्न रेखाचित्र में दिखाए गए हैं। एकाधिकार उत्पादन (निर्गत) फर्म का औसत आगम (AR) वक्र अथवा माँग-वक्र बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुकते हैं जो यह बताते हैं कि कम कीमत पर अधिक और अधिक कीमत पर कम वस्तु बेची जा सकती है। सीमांत आगम (MR) वक्र भी औसत आगम (AR) की तरह नीचे को ढालू होता है और औसत आगम (AR) वक्र के नीचे रहती है।
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प्रश्न 10.
अल्पाधिकार में कीमत अनम्यता क्या है? इसके कारण पर प्रकाश डालें। रेखाचित्र का प्रयोग करें।
उत्तर:
अल्पाधिकार में कीमत अनम्यता अथवा कीमत-दृढ़ता का अर्थ-जैसाकि पहले भी स्पष्ट किया जा चुका है, अल्पाधिकार में चूँकि सभी विक्रेताओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है तथा उनके समक्ष सदैव कीमत की अनिश्चितता की स्थिति बनी रहती है, इसलिए प्रायः सभी विक्रेता कीमत के ऐसे संतोषजनक स्तर को स्वीकार कर लेते हैं जो सभी के लिए लाभदायक हो। इस कीमत-स्तर को स्वीकार करके प्रायः सभी फर्मे इस कीमत-स्तर को बनाए रखने का प्रयास करती हैं जिससे इस बाज़ार-स्थिति में कीमत में स्थिरता पाई जाती है। इसका एक कारण और भी होता है कि यदि कोई फर्म अपनी कीमत कम करती है तो सभी फर्मे अपनी कीमतें कम करती हैं, लेकिन यदि कोई फर्म कीमत में वृद्धि करती है तो अन्य फर्मों द्वारा कीमत में वृद्धि आवश्यक नहीं है। परिणामस्वरूप कीमत में दृढ़ता अथवा स्थिरता दिखाई पड़ती है तथा एक फर्म की माँग रेखा विकुंचित (Kinked) हो जाती है अर्थात् अल्पाधिकार के अंतर्गत वस्तु के माँग वक्र में एक कोना होता है जो वर्तमान मूल्य से संबंधित होता है। उसी बिंदु पर कीमतें स्थिर रहती हैं, न घटती हैं, न बढ़ती हैं। अतः अल्पाधिकार के अंतर्गत कीमतों में स्थिरता होती है।

कीमत अनम्यता/कीमत-दृढ़ता के कारण-कीमत अनम्यता के कारण निम्नलिखित हैं-
अल्पाधिकारी, चूँकि वर्तमान स्तर से कीमत घटाकर माँग में अधिक वृद्धि नहीं कर सकता और वर्तमान स्तर से कीमत बढ़ाने पर उसकी बिक्री बहुत कम हो जाने पर वह वर्तमान कीमत में परिवर्तन लाने का इच्छुक नहीं होगा। अन्य शब्दों में, चूँकि वर्तमान कीमत को बदलने में कोई लाभ नहीं है, इसलिए अल्पाधिकारी वर्तमान कीमत पर ही अपनी वस्तु को बेचता रहेगा। इस प्रकार दृढ़ कीमतों की विकुंचित माँग वक्र सिद्धांत की सहायता से व्याख्या की जा सकती है। रेखाचित्र में वर्तमान कीमत MP है जिस पर माँग वक्र DD विकुंचित है। बाज़ार में MP कीमत स्थिर या दृढ़ रहेगी, क्योंकि अल्पाधिकारी स्थिति में कोई भी उत्पादक कीमत को कम अथवा अधिक करने से लाभान्वित नहीं होगा। इस पर ध्यान देना चाहिए कि यदि वर्तमान कीमत MP कीमत अन्मयता MP औसत लागत से अधिक होगी तो उत्पादकों को जो लाभ प्राप्त होंगे, वे सामान्य लाभ से अधिक होंगे। इस स्थिति में कीमत में-
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  • प्रतियोगी विक्रेताओं की प्रतिक्रियाओं की अनिश्चितताओं के कारण कोई भी फर्म कीमत को कम करने को तैयार नहीं होती है।
  • फर्मे यह निष्कर्ष निकाल चुकी होती हैं कि कीमत-युद्ध से कोई उत्पादन लाभ नहीं है।
  • फर्मे गैर-कीमत प्रतिस्पर्धा को अधिक पसंद करने लगती हैं।
  • यदि फर्मों को ऐसा आभास हो कि कीमत कम करने से पारस्परिक समझौते भंग हो जाएँगे और फर्म को कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

इन कारणों से कीमत में स्थिरता तथा दृढ़ता पाई जाती है तथा एक फर्म का माँग वक्र मोड़दार हो जाता है। इस प्रकार कोमेदार माँग कीमत-स्थिरता के कारणों पर प्रकाश डालती है परंतु यह स्थिर-कीमत किस प्रकार निश्चित की जाती है, इसके संबंध में कोनेदार माँग प्रकाश नहीं डालती। साथ-ही-साथ इसके द्वारा इस बात पर भी प्रकाश नहीं पड़ता कि नई कीमत पर नया कोना कैसे बनता है?

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प्रश्न 11.
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की परिभाषा दीजिए। इसकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा का अर्थ एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा (Monopolistic Competition) बाज़ार की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें बहुत-सी फर्मे मिलती-जुलती वस्तुओं का उत्पादन व विक्रय कर रही होती हैं। ये वस्तुएँ बिल्कुल एक जैसी (Exactly Identical) तो नहीं होतीं, किंतु मिलती-जुलती (Similar) अवश्य होती हैं अर्थात् इनका प्रयोग एक-जैसा होता है तथा ये एक-दूसरे के निकट स्थानापन्न (Close Substitutes) होती हैं और इनमें ब्रांड, ट्रेडमार्क, गुण, रंग, रूप, सुगन्ध आदि के अंतर के कारण वस्तु विभेद (Product Differentiation) पाया जाता है; जैसे लक्स, हमाम, रेक्सोना, लिरिल आदि नहाने के साबुनों (Toilet Soaps) का उत्पादन करने वाली अनेक फळं एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की उदाहरण हैं।

संक्षेप में, एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार की वह अवस्था होती है जहाँ छोटे-छोटे अनेक विक्रेता पाए जाते हैं जो विभेदीकृत परंतु निकट प्रतिस्थापन्न वस्तुएँ बेचते हैं।

एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की विशेषताएँ-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. फर्मों की अधिक संख्या-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्मों की संख्या अधिक होती है। इस प्रकार विक्रेताओं में प्रतिस्पर्धा पाई जाती है।

2. वस्तु विभेद-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अनेक फर्मे मिलती-जुलती वस्तुओं का उत्पादन करती हैं। उन वस्तुओं में रंग, रूप, आकार, डिज़ाइन, पैकिंग, ब्रांड, ट्रेडमार्क, सुगंध आदि के आधार पर वस्तु विभेद (Product Variation) किया जाता है; जैसे पेप्सोडेंट, कोलगेट, फोरहन्स, क्लोज़अप आदि टूथपेस्ट। इन पदार्थों में एकरूपता तो नहीं होती, लेकिन वे एक-दूसरे के निकट स्थानापन्न (Close Substitutes) होते हैं।

3. फर्मों के निर्बाध प्रवेश और बहिर्गमन-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में नई फर्मों के बाज़ार में प्रवेश करने और पुरानी फर्मों को बाज़ार छोड़ने की पूर्ण स्वतन्त्रता होती है।

4. विक्रय लागतें-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा बाज़ार में प्रत्येक फर्म को अपनी वस्तु का प्रचार करने के लिए विज्ञापनों पर बहुत व्यय करना पड़ता है। अतः एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्मों में अपनी-अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए कीमत प्रतियोगिता तो नहीं पाई जाती, बल्कि गैर-कीमत प्रतिस्पर्धा (Non-Price Competition) पाई जाती है।

5. प्रत्येक फर्म अपनी वस्तु के लिए एकाधिकारी है प्रत्येक फर्म का अपनी वस्तु पर एकाधिकार होता है अर्थात् उस नाम की वस्तु कोई अन्य फर्म नहीं बना सकती; जैसे लक्स (Lux) साबुन के उत्पादन पर हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड का एकाधिकार है। इस बाज़ार में उपभोक्ता भी कुछ विशेष वस्तुओं के लिए अपनी-अपनी पसंद रखते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ लोग ब्रुक ब्राड चाय अधिक पसंद करते हैं, जबकि कुछ ताज चाय। ऐसे क्रेताओं के लिए उत्पादक एकाधिकारी ही होता है।

6. उद्योग व ग्रुप में अंतर-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अनेक फर्मे एक समान वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती, अपितु मिलती-जुलती वस्तुओं का उत्पादन करती हैं। ऐसी विभिन्न फर्मों के समूह को उद्योग न कहकर ग्रुप (Group) कहा जाता है।

7. आगम (संप्राप्ति) वक्र या माँग वक्र-एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में हर फर्म की अपनी कीमत नीति होती है। इसमें फर्म के औसत तथा सीमांत संप्राप्ति वक्र एकाधिकारी बाज़ार की तरह दाईं ओर नीचे को झुके हुए होते हैं, जैसाकि संलग्न रेखाचित्र में दिखाया गया है। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक फर्म को अधिक वस्तु बेचने के लिए कीमत कम करनी पड़ती है। फर्म का औसत संप्राप्ति (AR) वक्र ही फर्म का माँग वक्र होता है। ध्यान रहे कि एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में माँग वक्र पूर्ण प्रतिस्पर्धा की भाँति समस्तरीय (पूर्ण लोचदार) भी नहीं होता क्योंकि एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में किसी विशेष फर्म के उत्पाद के प्रति निष्ठावान होते हुए भी यदि मिलती-जुलती वस्तुओं की कीमत में अंतर अधिक हो जाए तो उपभोक्ता सस्ते ब्रांड की ओर शिफ्ट होंगे क्योंकि इस बाज़ार में वस्तुएँ निकट स्थानापन्न होती हैं। इसलिए माँग उत्पादन (निर्गत) अथवा औसत आगम वक्र एकाधिकार की तुलना में, अधिक लोचदार होता है।
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प्रश्न 12.
अल्पाधिकार (Oligopoly) परिभाषित कीजिए। इसकी मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
अल्पाधिकार का अर्थ-अपूर्ण प्रतिस्पर्धा का यह एक महत्त्वपूर्ण रूप है जहाँ चंद (कुछ) फर्मों में प्रतिस्पर्धा (प्रतियोगिता) होती बाजार में अल्प अर्थात कछ ही फर्मों का अधिकार होता है। इस प्रकार यह एकाधिकार (जिसमें केवल एक विक्रेता होता है) और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा (जिसमें अधिक फमें होती हैं) के बीच की स्थिति प्रकट करती है।
अल्पाधिकार की विशेषताएँ-अल्पाधिकार बाज़ार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. कुछ बड़ी फर्मे फर्मों का अल्प या कम होना इसकी प्रमुख विशेषता है। अल्प होने का अर्थ यह है कि फर्म कीमत और उत्पादन की मात्रा का निर्णय लेते समय प्रतियोगी फर्मों की प्रतिक्रिया (Reaction) को ध्यान में रखती हैं। इस दृष्टि से फर्मे अंतर्निभर (Interdependent) होती हैं, क्योंकि प्रत्येक फर्म द्वारा कुल उत्पादन का एक बड़ा भाग पैदा किया व बेचा जाता है जिससे वस्तु की कीमत निश्चित रूप से प्रभावित होती है। प्रत्येक फर्म अपनी क्रिया से दूसरी फर्म को प्रभावित करती है।

2. समरूप व विभेदीकृत पदार्थ-अल्पाधिकार बाज़ार में बिकने वाले पदार्थ समरूप भी हो सकते हैं; जैसे इस्पात, उर्वरक आदि और विभेदीकृत पदार्थ भी हो सकते हैं जिन्हें ब्रांड, आकार, गुण, रंग, पैकिंग आदि के आधार पर विभेदीकृत भी किया जा सकता है; जैसे कारें, टी०वी० सेट, मोटर साइकिल, स्कूटी आदि।

3. नई फर्मों का प्रवेश कठिन-एक ही वस्तु का निर्माण करने व बेचने वाली फर्मे कुछ (जैसे पाँच या सात) ही होती हैं जो आपसी मेल-जोल व सामूहिक व्यवहार से नई फर्म का प्रवेश रोकने का भरसक प्रयास करती हैं। इसके अतिरिक्त फर्मों में परस्पर निर्भरता पाई जाती है।

4. बिक्री लागते-चाहे फर्मों की संख्या सीमित होती हो फिर भी वे अपनी वस्तु लोकप्रिय बनाने व बिक्री बढ़ाने के लिए समाचार पत्रों व रेडियो, टी.वी. आदि पर विज्ञापन, मुफ्त नमूने बाँटने व सेल्समैन आदि रखने पर व्यय करती हैं जिन्हें बिक्री लागते कहते हैं।

5. माँग वक्र की अनिश्चितता-यहाँ कीमत अधिकतर अपरिवर्तित रहती है, क्योंकि कोई भी फर्म ग्राहकों से वंचित होने के डर से कीमत नहीं बढ़ाती और न ही कीमत कम करती है कि कहीं दूसरी फर्मे कीमत ज्यादा गिराकर ग्राहक आकर्षित न कर लें। इसलिए किसी भी फर्म को यह अनुमान नहीं होता कि कीमत बढ़ाने या घटाने से माँग पर क्या प्रभाव पड़ेगा। फलस्वरूप माँग वक्र का स्वरूप अनिश्चित होता है।

प्रश्न 13.
पूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार में अंतर बताइए।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता और एकाधिकार में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतर का आधारपूर्ण प्रतियोगिताएकाधिकार
1. फर्मों की संख्यापूर्ण प्रतियोगिता में फर्मों की संख्या बहुत अधिक होती है।एकाधिकार में केवल एक ही फर्म बाज़ार में होती है।
2. वस्तु की प्रकृतिपूर्ण प्रतियोगिता में वस्तु समरूप होती है।एकाधिकार में वस्तुएँ समरूप अथवा विभेदीकृत हो सकती हैं।
3. माँग वक्रपूर्ण प्रतियोगिता में फर्म का माँग वक्र पूर्णतया लोचदार होता है। माँग वक्र X-अक्ष के समानांतर सीधी रेखा होती है।एकाधिकार में फर्म का माँग वक्र लोचदार होता है। माँग वक्र ऊपर से नीचे गिरता हुआ अर्थात् ऋणात्मक ढाल वाला होता है।
4. कीमतपूर्ण प्रतियोगिता में पूरे बाज़ार में वस्तु की एक ही कीमत पाई जाती है।एकाधिकारी फर्म विभिन्न क्रेताओं से एक-समान कीमत अथवा विभिन्न कीमतें वसूल कर सकती है।
5. स्वतंत्रतापूर्ण प्रतियोगिता में फर्मों के प्रवेश तथा बहिर्गमन की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।एकाधिकार में नई फर्मों के प्रवेश पर प्रतिबंध होता हैं।
6. विक्रय लागतेंपूर्ण प्रतियोगिता में विक्रय लागतें नहीं होती।एकाधिकार में मामूली-सी विक्रय लागतें हो सकती है।

प्रश्न 14.
पूर्ण प्रतिस्पर्धा (प्रतियोगिता) और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अंतर बताइए।
उत्तर:
पूर्ण प्रतिस्पर्धा और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतर का आधारपूर्ण प्रतिस्पर्धाएकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
1. फर्मों की संख्यापूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्मों की संख्या बहुत अधिक होती है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्मों की संख्या सीमित होती है।
2. कीमतपूर्ण प्रतिस्पर्धा बाज़ार में एक ही कीमत पाई जाती है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में वस्तु की विभिन्न कीमतें पाई जाती हैं।
3. वस्तु की प्रकृतिपूर्ण प्रतिस्पर्धा में वस्तुएँ समरूप होती हैं। अर्थात् विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुओं में कोई अंतर नहीं होता।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुओं में वस्तु विभेद पाया जाता है।
4. बाज़ार का ज्ञानपूर्ण प्रतिस्पर्धा में क्रेताओं और विक्रेताओं को बाज़ार की स्थिति का ज्ञान होता है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में क्रेताओं और विक्रेताओं को बाज़ार की स्थिति का पर्याप्त ज्ञान नहीं होता।
5. मूल्य सापेक्षतापूर्ण प्रतिस्पर्धा में माँग की पूर्ण मूल्य सापेक्षता पाई जाती है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में माँग की मूल्य सापेक्षता कम होती है
6. विक्रय लागतेपूर्ण प्रतिस्पर्धा में विक्रय लागतों का अभाव पाया जाता है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में फर्मों की विक्रय लागते अधिक होती हैं।

प्रश्न 15.
एकाधिकार और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अंतर बताइए।
उत्तर:
एकाधिकार और एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतर का आधारएकाधिकारएकाधिकारी प्रतिस्पर्धा
1. विक्रेताओं की संख्याएकाधिकार में वस्तु का केवल एक विक्रेता होता है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में वस्तुओं की संख्या अधिक होती है।
2. वस्तु की किस्मएकाधिकार में एक ही किस्म की वस्तु का विक्रय किया जाता है और उस वस्तु का कोई निकट स्थानापन्न नहीं होता।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में वस्तु विभेद के कारण वस्तु की अनेक किस्में पाई जाती हैं।
3. फर्म का माँग वक्रएकाधिकार में फर्म का माँग वक्र सामान्यतया बेलोचदार या कम लोचदार होता है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में एक फर्म का माँग वक्र अधिक लोचदार होता है।
4. कीमतएकाधिकार में एक विक्रेता होता है जिसके कारण वस्तु की कीमत सामान्यतया ऊँची होती है।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में अनेक विक्रेता होते हैं और उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण वस्तु की कीमत सामान्यतया कम होती है।
5. लाभएकाधिकार में एक फर्म को असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में केवल अल्पकाल में ही फर्म को असामान्य लाभ प्राप्त होते हैं।
6. फर्मों का प्रवेशएकाधिकार में नई फर्मों के प्रवेश पर अनेक रुकावटें पाई जाती हैं।एकाधिकारी प्रतिस्पर्धा में नई फर्मों को बाज़ार में प्रवेश की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।

संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दी गई जानकारी के आधार पर संतुलन वाले उत्पादन स्तर का निर्धारण कीजिए। सीमांत लागत (MC), सीमांत आगम (MR) विधि का प्रयोग करें। सकारण उत्तर दीजिए।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 20
हल:
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार 21
उत्पादन की संतुलन स्थिति उत्पादन की छठी इकाई में प्राप्त होती है क्योंकि उत्पादन के इस स्तर पर उत्पादन की संतुलन दशा को संतुष्ट करने वाली निम्नलिखित दो शर्ते पूरी हो जाती हैं
(i) सीमांत लागत (7 रुपए) सीमांत आगम (7 रुपए) के बराबर है।
(ii) इस स्तर पर उत्पादन के बाद MC >MR हैं अर्थात् सीमांत आगम संप्राप्ति से अधिक आती है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

प्रश्न 2.
दी गई सारणी में एक एकाधिकारी प्रतिस्पर्धी फर्म की कुल लागत एवं कुल आगम सारणी दी गई है। संतुलन उत्पादन की मात्रा ज्ञात कीजिए-

इकाइयाँकुल लागत (रु०)कुल संप्राप्ति (रु०)
1810
21519
32127
42834
53640
64545
75549

हल:

इकाइयाँकुल लागत (रु०)कुल संप्राप्ति (रु०)कुल लाभ (रु०)
181010 – 8 = 2
2151919 – 15 = 4
3212727 – 21 = 6
4283434 – 28 = 6
5364040 – 36 = 4
6454545 – 45 = 0
7554949 – 55 = -6

उपर्युक्त तालिका के अनुसार एकाधिकारी फर्म का कुल लाभ = 6 प्रतिस्पर्धा फर्म के संतुलन उत्पादन की मात्रा 4 इकाइयाँ हैं चूंकि इस स्थिति में फर्म का कुल लाभ = 6 सर्वाधिक है।

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HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Exercise 3.3

प्रश्न 1.
निम्नलिखित रैखिक समीकरण युग्म को प्रतिस्थापन विधि से हल कीजिए-
(i) x + y = 14
x – y = 4
(ii) s – t = 3
\(\frac{s}{3}+\frac{t}{2}\) = 6
(iii) 3x – y = 3
9x – 3y = 9
(iv) 0.2x + 0.3y = 1.3
0.4x + 0.5y = 2.3
(v) √2x + √3y = 0
√3 x – √8y = 0
(vi) \(\frac{3 x}{2}-\frac{5 y}{3}\) = -2
\(\frac{x}{3}+\frac{y}{2}=\frac{13}{6}\)
हल :
(i) यहाँ पर
x + y = 14 ……….. (i)
y = 14-x
तथा x – y = 4 ………….. (ii)
y = 14 – x को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
x – (14 – x) = 4
या x – 14 + x = 4
या 2x = 4 + 14
या 2x = 18
या x = \(\frac{18}{2}\) =9
x का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
9 + y = 14
y = 14 – 9 = 5
अतः अभीष्ट हल x = 9 व y = 5

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3

(ii) यहाँ पर s – 1 = 3… (i)
s = 3+t
तथा \(\frac{s}{3}+\frac{t}{2}\) = 6 … (ii)
2s + 3t = 36 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर) … (ii)

s = 3 + t को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर, .
2 (3 + t) + 3t = 36
6 + 2t + 3t = 36
5t = 36 – 6
5t = 30
या t = \(\frac{30}{5}\) = 6
t का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
s – 6 = 3
या s = 3 + 6 = 9
अतः अभीष्ट हल s = 9 व 1 = 6

(iii) यहाँ पर 3x – y = 3 … (i)
y = 3x – 3
तथा 9x – 3y = 9 … (ii)
y = 3x – 3 को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
या 9x – 3 (3x – 3) = 9
या 9x – 9x + 9 = 9
9 = 9
यह कथन x के प्रत्येक मान के लिए सत्य है।
अतः समीकरण (i) व (ii) के अपरिमित रूप से अनेक हल हैं।

(iv) यहाँ पर
0.2x + 0.3y = 1.3… (i)
x = \(\frac{1.3-0.3 y}{0.2}\)1.3 – 0.3y
तथा 0.4x + 0.5y = 2.3… (ii)
x = [atex]\frac{1.3-0.3 y}{0.2}[/latex] को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
0.4( [atex]\frac{1.3-0.3 y}{0.2}[/latex] ) + 0.5y = 2.3
या 2 (1.3 – 0.3y) + 0.5y = 2.3
या 2.6 – 0.6y + 0.5y = 2.3
या -0.1y = 2.3 – 2.6
या – 0.1y = – 0.3
या y =[atex]\frac{-0.3}{-0.1}[/latex] = 3
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
या 0.2x + 0.3 (3) = 1.3
या 0.2x + 0.9 = 1.3
या 0.2x = 1.3 – 0.9
या 0.2x = 0.4
या x = \(\frac{0.4}{0.2}\) = 2
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y = 3

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3

(v) यहाँ पर
√2x- √3y = 0 ……(i)
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3 1

या -3y – 4y = 0 [दोनों ओर √2 से गुणा करने पर]
या -7y = 0
या y = [ltex]\frac{0}{7}[/latex] = 0
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
√2x + √3 (0) = 0
या √2x + 0 = 0
√2x = 0
x = \(\frac{0}{\sqrt{2}}\)
अतः अभीष्ट हल x = 0 व y = 0

(vi) यहाँ पर
\(\frac{3 x}{2}-\frac{5 y}{3}\) = -2
9x – 10y = -12 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर) …(i)
x = \(\frac{10 y-12}{9}\)
तथा \(\frac{x}{3}+\frac{y}{2}=\frac{13}{6}\)
2x + 3y = 13 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर) ………………(ii)
x = \(\frac{10 y-12}{9}\)को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
\(2\left(\frac{10 y-12}{9}\right)\) + 3y = 13

या \(\frac{20 y-24}{9}\) + 3y = 13
या 20y – 24 + 27y = 117 (दोनों ओर 9 से गुणा करने पर)
या 47 y= 117 + 24
या y = \(\frac{141}{47}\) = 3
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
9x – 10 (3) = – 12
9x = – 12 + 30
9x = 18
x = \(\frac{18}{9}\)= 2
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y =3

प्रश्न 2.
2x + 3y = 11 और 2x-4y = -24 को हल कीजिए और इससे ‘m’ का वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए y= me +3 हो।
हल :
यहाँ पर 2x + 3y = 11 …………… (i)
x = \(\frac{11-3 y}{2}\)
तथा 2x–4y = – 24 …. (ii)
x = \(\frac{11-3 y}{2}\) को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
2(\(\frac{11-3 y}{2}\)) – 4y = – 24
या 11 – 3y – 4y = – 24
या  -7y = – 24-11
या y = \(\frac{-35}{-7}\) = 5
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
2x + 3 (5) = 11
या  2x = 11-15
या x = \(\frac{-4}{2}\) =-2
अब x = – 2 व y = 5 को y = mx + 3 में प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त होगा,
या 5 = m (-2)+3
या 5 = – 2m +3
या 2m = 3-5
या m = \(\frac{-2}{2}\) = -1
अतः अभीष्ट हल x = – 2, y= 5 व m = – 1

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3

प्रश्न 3.
निम्नलिखित समस्याओं में रैखिक समीकरण युग्म बनाइए और उनके हल प्रतिस्थापन विधि द्वारा ज्ञात कीजिए-
(i) दो संख्याओं का अंतर 26 है और एक संख्या दूसरी संख्या की तीन गुनी है। उन्हें ज्ञात कीजिए।
(ii) दो संपूरक कोणों में बड़ा कोण छोटे कोण से 18 डिग्री अधिक है। उन्हें ज्ञात कीजिए।
(iii) एक क्रिकेट टीम के कोच ने 7 बल्ले तथा 6 गेदें 3800 रु० में खरीदीं। बाद में, उसने 3 बल्ले तथा 5 गेंदें 1750 रु० में खरीदी। प्रत्येक बल्ले और प्रत्येक गेंद का मूल्य ज्ञात कीजिए।
(iv) एक नगर में टैक्सी के भाड़े में एक नियत भाड़े के अतिरिक्त चली गई दूरी पर भाड़ा सम्मिलित किया जाता है। 10 km दूरी के लिए भाड़ा 105 रु० है तथा 15 km के लिए भाड़ा 155 रु० है। नियत भाड़ा तथा प्रति km भाड़ा क्या है? एक व्यक्ति को 25 km यात्रा करने के लिए कितना भाड़ा देना होगा?
(v) यदि किसी भिन्न के अंश और हर दोनों में 2 जोड़ दिया जाए, तो वह \(\frac{9}{11}\) हो जाती है। यदि अंश और हर दोनों में 3 जोड़ दिया जाए, तो वह \(\frac{5}{6}\) हो जाती है। वह भिन्न ज्ञात कीजिए।
(vi) पाँच वर्ष बाद जैकब की आयु उसके पुत्र की आयु से तीन गुनी हो जाएगी। पाँच वर्ष पूर्व जैकब की आयु उसके पुत्र की आयु की सात गुनी थी। उनकी वर्तमान आयु क्या है?
हल :
(i) यहाँ पर
माना बड़ी संख्या = x .
व छोटी संख्या = y
प्रश्नानुसार रैखिक युग्म होंगे, x -y = 26 …………(1)
तथा x = 3y ………(ii)
x = 3y को समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
3y – y =
या 2y = 26
या y = \(\frac{26}{2}\) = 13
y का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
x = 3(13)
x = 39
अतः अभीष्ट संख्याएँ = 39 व 13

(ii) यहाँ पर
माना बड़ा कोण = x
व छोटा कोण = y
प्रश्नानुसार रैखिक युग्म होंगे, x = y + 18° ……(i)
तथा x+ y = 180°(:: संपूरक कोणों का योग 180° होता है) …………… (ii)
x =y + 18° को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
(y+ 18°) + y = 180°
या 2y = 180° – 18°
या y = \(\frac{162^{\circ}}{2}\) = 81°
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
x = 81° + 18° = 99°
अतः अभीष्ट कोण = 99° व 81°

(iii) यहाँ पर
माना क्रिकेट के 1 बल्ले का मूल्य = x रु०
तथा क्रिकेट की 1 गेंद का मूल्य = y रु०
प्रश्नानुसार रैखिक युग्म होंगे, 7x+ 6y = 3800 ………….(i)
तथा 3x + 5y = 1750 ………………(ii)
x = \(\frac{1750-5 y}{3}\)
x = \(\frac{1750-5 y}{3}\) को समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
7( \(\frac{1750-5 y}{3}\)) + 6y = 3800
या 7(1750 – 5y) + 18y = 11400 (दोनों ओर 3 से गुणा करने पर)
या 12250-35y + 18y = 11400
या – 17y = 11400-12250
या y = \(\frac{-850}{-17}\) = 50
y का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
3x + 5(50) = 1750
या 3x = 1750 – 250
या x = \(\frac{1500}{3}\) = 500
अतः क्रिकेट के एक बल्ले का मूल्य = 500 रु०
तथा क्रिकेट की एक गेंद का मूल्य = 50 रु०

(iv) यहाँ पर
माना टैक्सी का नियत भाड़ा = x रु०
तथा अतिरिक्त प्रति कि०मी० भाड़ा = y रु०
प्रश्नानुसार रैखिक युग्म होंगे,
x + 10y = 105 ………….(i)
तथा x + 15y = 155 …………..(ii)
x = 155 – 15y
x = 155-15y को समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
155 – 15y + 10y = 105
या -5y = 105 – 155
या y = \(\frac{-50}{-5}\) = 10
y का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
x + 15(10) = 155
या x = 155-150 = 5
अतः टैक्सी का नियत भाड़ा = 5 रु० ।।
तथा अतिरिक्त प्रति कि०मी० का भाड़ा = 10 रु०
25 कि०मी० यात्रा करने के लिए दिया जाने वाला भाड़ा = x + 25y
= [5+ 25 (10)] रुपए
= [5+ 250] रुपए
= 255 रुपए

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3

(v) यहाँ पर
माना भिन्न का अंश = x
व भिन्न का हर = y
तो भिन्न = x/y
प्रश्नानुसार रैखिक युग्म होंगे, \(\frac{x+2}{y+2}=\frac{9}{11}\)
11x + 22 = 9y+ 18
11x – 9y = 18 – 22
11x – 9y = -4 ………….(i)
तथा \(\frac{x+3}{y+3}=\frac{5}{6}\)
6x + 18 = 5y + 15
6x-5y = 15-18
6x – 5y = -3
= 5y-3
x =\(\frac{5 y-3}{6}\) ……………(ii)
x = \(\frac{5 y-3}{6}\)को समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
11 (\(\frac{5 y-3}{6}\)) -9y = -4
या 11(5y – 3) – 54y = – 24 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर)
या 55y – 33 – 54y = -24
या y = 33 – 24 = 9

y का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
6x – 5(9) = -3
या 6x = 45 -3
या x = \(\frac{42}{6}\) = 7
अतः अभीष्ट भिन्न = \(\frac{7}{9}\)

(vi) यहाँ पर
माना जैकब की वर्तमान आयु = x वर्ष
पुत्र की वर्तमान आयु = y वर्ष
प्रश्नानुसार रैखिक युग्म होंगे,
x + 5 = 3 (y+5)
x + 5 = 3y + 15
x = 3y + 15 – 5
x = 3y + 10……………(i)
x – 5 = 7(y – 5)
x – 5 = 7y – 35
x = 7y – 35 + 5
x = 7y – 30 ……………(ii)

x = 7y – 30 को समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
या 7y – 30 = 3y + 10
या 7y – 3y = 10+30
या 4y = 40
या y = 40/4 = 10

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.3

y का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर
x = 7(10)-30
= 70 – 30 = 40
जब की वर्तमान आयु = 40 वर्ष
व पुत्र की वर्तमान आयु = 10 वर्ष

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु

प्रश्न 14.1.
मोनोसैकैराइड क्या होते हैं?
उत्तर:
वे कार्बोहाइड्रेट जिनको पॉलिहाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड अथवा टोन के और अधिक सरल यौगिकों में जल अपघटित नहीं कर सकते, उन्हें मोनोसैकैराइड कहते हैं। लगभग 20 मोनोसैकैराइड प्रकृति में ज्ञात हैं। जैसे- ग्लूकोस, फ्रक्टोस, राइबोस आदि ।

प्रश्न 14.2.
अपचायी शर्करा क्या होती है?
उत्तर:
वे कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक या फेलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं। इनमें स्वतंत्र ऐल्डिहाइड या समूह होता है। जैसे-ग्लूकोस, फ्रक्टोस, माल्टोस तथा लैक्टोस ।

प्रश्न 14.3.
पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो, मुख्य कार्यों को कीटोन लिखिए।
उत्तर:

  • कार्बोहाइड्रेट, वनस्पतियों में स्टार्च के रूप में पाए जाते हैं।
  • पौधों की कोशिका भित्ति सेलुलोस से बनी होती है जो कि एक कार्बोहाइड्रेट है।

प्रश्न 14.4.
निम्नलिखित को मोनोसैकैराइड तथा डाइसैकैराइड में वर्गीकृत कीजिए – राइबोस, 2 – डीऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलैक्टोस, फ्रक्टोस तथा लैक्टोस ।
उत्तर:
मोनोसैकैराइड – राइबोस, 2 – डीऑक्सीराइबोस, गैलैक्टोस तथा फ्रक्टोस ।
डाइसैकैराइड – माल्टोस तथा लैक्टोस।

प्रश्न 14.5.
ग्लाइकोसाइडी बंध से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ओलिगोसैकैराइडों तथा पॉलिसैकैराइडों में दो मोनोसैकैराइड इकाई ऑक्साइड या ईथर बंध द्वारा जुड़ी होती हैं जो कि जल के एक अणु के निष्कासन से बनता है, इसे ग्लाइकोसाइडी बंध कहते हैं। इस प्रकार दो मोनोसैकैराइडों के मध्य ऑक्सीजन परमाणु से बने बन्ध को ग्लाइकोसाइडी बंध कहते हैं।

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प्रश्न 14.6.
ग्लाइकोजन क्या होता है तथा यह स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर:
प्राणियों के शरीर में कार्बोहाइड्रेट, ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहित रहता है। इसकी संरचना ऐमिलोपेक्टिन के समान होती है, अतः इसे प्राणी स्टार्च भी कहते हैं लेकिन यह ऐमिलोपेक्टिन से अधिक शाखित होता है। यह यकृत, मांसपेशियों तथा मस्तिष्क में उपस्थित होता है। जब शरीर को ग्लूकोस की आवश्यकता होती है, एन्जाइम, ग्लाइकोजन को ग्लूकोस में तोड़ देते हैं। ग्लाइकोजन यीस्ट तथा कवक में भी मिलता है।

स्टार्च के दो घटक होते हैं – एमिलोस तथा ऐमिलोपेक्टिन । एमिलोस, α-D- ग्लूकोस का रेखीय बहुलक है जबकि ऐमिलोपेक्टिन α-D-ग्लूकोस का शाखित बहुलक है।

प्रश्न 14.7.
(अ) सूक्रोस तथा (ब) लैक्टोस के जल अपघटन से कौनसे उत्पाद प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
(अ) सूक्रोस के जल अपघटन से α-D- ग्लूकोस तथा ß-D- फ्रक्टोस बनते हैं।
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(ब) लैक्टोस के जल अपघटन से ß-D-ग्लूकोस तथा ß-D-गैलैक्टोस प्राप्त होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु 2

प्रश्न 14.8.
स्टार्च तथा सेलुलोस में मुख्य संरचनात्मक अंतर क्या है?
उत्तर:
स्टार्च -ग्लूकोस का बहुलक है तथा इसमें दो घटक ऐमिलोस तथा ऐमिलोपेक्टिन होते हैं । ऐमिलोस 200-1000 α-D (+) – ग्लूकोस इकाइयों की अशाखित श्रृंखला होती है जो कि C1 – C4 ग्लाइकोसाइडी बंध द्वारा जुड़ी होती हैं।

ऐलोपेक्टिन में α-D-ग्लूकोस इकाइयों से बनी शाखित श्रृंखला होती है, जिसमें C1-C4 ग्लाइकोसाइडी बंध होते हैं तथा शाखन C1 – C6 ग्लाइकोसाइडी बंध द्वारा होता है जबकि सेलुलोस, ß-D-ग्लूकोस से बना रेखीय शृंखलायुक्त पॉलिसैकैराइड है जिसमें एक ग्लूकोस इकाई के C1 तथा दूसरी ग्लूकोस इकाई के C4 के मध्य ग्लाइकोसाइडी बंध बनता है।

प्रश्न 14.9.
क्या होता है जब D – ग्लूकोस की अभिक्रिया निम्नलिखित अभिकर्मकों से करते हैं?
(i) HI
(ii) ब्रोमीन जल
(iii) HNO3
उत्तर:
(i) HI से अभिक्रिया – ग्लूकोस को HI के साथ लंबे समय तक गरम करने पर यह अपचयित होकर n – हैक्सेन देता है। इससे सिद्ध होता है कि इसमें सभी छः कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु 3

(ii) ब्रोमीन जल से अभिक्रिया – ग्लूकोस ब्रोमीन जल द्वारा ऑक्सीकृत होकर ग्लूकोनिक अम्ल बनाता है। इससे सिद्ध होता है कि ग्लूकोस का कार्बोनिल समूह ऐल्डिहाइड समूह के रूप में होता है ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु 4

(iii) HNO3 से अभिक्रिया – ग्लूकोस का नाइट्रिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण कराने पर एक डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल, सैकैरिक अम्ल बनता है। इससे ग्लूकोस में प्राथमिक ऐल्कोहॉलिक समूह की उपस्थिति की पुष्टि होती है ।
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प्रश्न 14.10.
ग्लूकोस की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला ( खुली श्रृंखला) संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकतीं।
उत्तर:
ग्लूकोस की निम्नलिखित अभिक्रियाएँ इसकी विवृत श्रृंखला संरचना द्वारा नहीं समझाई जा सकती-

  • ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होते हुए भी ग्लूकोस 2,4-DNP परीक्षण तथा शिफ परीक्षण नहीं देता। यह NaHSO के साथ भी क्रिया नहीं करता।
  • ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट, हाइड्रॉक्सिलऐमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता जो मुक्त -CHO समूह की अनुपस्थिति को दर्शाता है।
  • ग्लूकोस दो भिन्न क्रिस्टलीय रूपों में पाया जाता है जिन्हें o तथा B ग्लूकोस कहते हैं।

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प्रश्न 14.11.
आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वे ऐमीनो अम्ल जो हमारे शरीर में संश्लेषित हो जाते हैं, उन्हें अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहते हैं; जैसे-ग्लाइसीन तथा ऐलानिन एवं वे ऐमीनो अम्ल जो हमारे शरीर में संश्लेषित नहीं होते तथा जिनको भोजन में लेना आवश्यक होता है, उन्हें आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहते हैं; जैसे-वैलीन तथा ल्यूसीन आवश्यक ऐमीनो अम्लों की संख्या दस होती है।

प्रश्न 14.12.
प्रोटीन के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए-
(i) पेप्टाइड बंध
(ii) प्राथमिक संरचना
(iii) विकृतीकरण
उत्तर:
(i) पेप्टाइड बंध- वह बन्ध जिसके द्वारा विभिन्न – ऐमीनो अम्ल आपस में जुड़कर प्रोटीन बनाते हैं, उसे पेप्टाइड बंध कहते हैं। पेप्टाइड बंध को – CONH से दर्शाते हैं जो कि – ऐमीनो अम्ल के एक अणु के – COOH समूह तथा दूसरे अणु के – NH2 समूह से जल के निकलने से बनता है।

(ii) प्रोटीन की प्राथमिक संरचना- प्रोटीनों में एक या अधिक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं उपस्थित होती हैं किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट तथा निश्चित क्रम में जुड़े होते हैं। ऐमीनो अम्लों के इस विशिष्ट क्रम को ही प्रोटीनों की प्राथमिक संरचना कहते हैं। प्राथमिक संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन होने पर अर्थात् ऐमीनो अम्लों के क्रम में परिवर्तन से भिन्न प्रोटीन बनते हैं।

(iii) प्रोटीन का विकृतीकरण – जैविक तंत्र में पायी जाने वाली विशिष्ट त्रिविम संरचना तथा जैविक सक्रियता वाले प्रोटीन, प्राकृतिक प्रोटीन कहलाते हैं। जब प्राकृतिक प्रोटीन के ताप तथा pH में परिवर्तन (भौतिक या रासायनिक परिवर्तन) किया जाता है तो हाइड्रोजन बन्धों की व्यवस्था बिगड़ जाती है जिसके कारण प्रोटीन की गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हैलिक्स अकुंडलित हो जाती है इससे प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देता है, इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं उबालने पर अंडे की सफेदी का स्कंदन विकृतीकरण का एक उदाहरण है तथा दूध का जमकर दही बनना भी विकृतीकरण है जो कि दूध में उपस्थित बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल उत्पन्न होने के कारण होता है।

प्रश्न 14.13.
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
उत्तर:
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना इनकी आकृति से सम्बन्धित होती है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं उपस्थित होती हैं ये दो प्रकार की संरचनाओं में पायी जाती है-
(i) α-हैलिक्स तथा

(ii) प्रोटिन α-ऐमीनो अम्लों के बहुलक होते हैं जो आपस में पेप्यइड बंध द्वारा जुड़े ह्रेते हैं। ऐमीनो अम्लों के एक अणु के -COOH तथा दूसरे अणु के NH2 समूह के मध्य अभिक्रिया होकर जल के अणु से निकलने से बने बन्ध को पेप्टाइड बन्ध कहते हैं जिसे -CONH- द्वार दर्शाया जाता है।
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प्रोटीनों में α-ऐमीनो अम्ल समान तथा भिन्न भी हो सकते हैं। जब बनने वाला उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों से बनता है तो इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरण, ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलानीन के ऐमीनो समूह के साथ क्रिया करता है तो एक डाइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलानिन बनता है। अतः डाइपेप्टइड में एक पेप्यइड बन्ध होता है।

जब तीसरा ऐमीनो अम्ल, डाइपेप्टाइड के साथ क्रिया करता है तो बने उत्पाद को ट्राइपेप्टाइड कहते हैं। अतः एक ट्राइपेप्टाइड में तीन ऐमीनो अम्ल दो पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं। इसी प्रकार चार, पाँच तथा छः ऐमीनो अम्लों के आपस में जुड़ने से बने उत्पादों को टेट्रापेप्टाइड पेन्टापेप्टाइड तथा हेक्सापेप्टाइड कहते हैं। बहुत से ऐमीनो अम्लों ( 10 से अधिक) के आपस में संघनन द्वारा बने पेप्टाइडों को पॉलिपेप्टाइड कहते हैं।

वे पॉलिपेप्टाइड जिनमें असंख्य ( 100 से अधिक) भिन्न-भिन्न ऐमीनो अम्ल होते हैं तथा जिनका आण्विक द्रव्यमान 10,000 µ से अधिक होता है, उन्हें प्रोटीन कहते हैं। यद्यपि पॉलिपेप्टाइड तथा प्रोटीन में विभेद अधिक स्पष्ट नहीं है। 100 से कम ऐमीनो अम्लों वाले पॉलिपेप्यइडों को भी प्रोटीन कहा जाता है यदि उनमें प्रोटीन जैसा स्पष्ट संरूपण (conformation) हो। उदाहरण-इन्सुलिन 51 ऐमीनो अम्लों से मिलकर बना होता है।

प्रोटीनों के सामान्य गुण:

  • प्रोटीन रंगहीन तथा अक्रिस्टलीय होते हैं लेकिन इन्सुलिन क्रिस्टलीय होती है।
  • प्रोटीन के गंलनांक तथा क्वथनांक अनिश्चित होते हैं।
  • प्रोटीन सामान्यतः जल, ऐल्कोहॉल तथा ईथर इत्यादि में अविलेय होते हैं।
  • प्रोटीन, बहुलक होते हैं जिनका आण्विक द्रव्यमान अधिक होता है, अतः ये जल में कोलाइडों के रूप में पाए जाते हैं।
  • प्रोटीन उभयधर्मी होते हैं जिनके समविभव बिन्दु निश्चित होते हैं।

प्रश्न 14.14.
प्रोटीन की α-हैलिक्स संरचना के स्थायीकरण में कौनसे आबंध सहायक होते हैं?
उत्तर:
प्रोटीन की α-हैलिक्स संरचना में प्रत्येक ऐमीनो अम्ल का – NH समूह, कुंडली के अगले मोड़ पर स्थितHBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 14 जैव-अणु 6 समूह के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता है जो इनके स्थायीकरण में सहायक होता है।

प्रश्न 14.15.
रेशेदार तथा गोलिकाकार (Globular) प्रोटीन को विभेदित कीजिए।
उत्तर:

  • रेशेदार प्रोटीन में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर होती हैं तथा हाइड्रोजन एवं डाइसल्फाइड बंधों द्वारा जुड़कर रेशों जैसी संरचना बनाती हैं जबकि गोलिकाकार प्रोटीन में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं कुंडली बनाकर गोलाकार आकृति बना लेती हैं।
  • रेशेदार प्रोटीन जल में अविलेय होते हैं जबकि गोलिकाकार प्रोटीन जल में विलेय होते हैं।
  • रेशेदार प्रोटीन के उदाहरण किरेटिन (बाल, ऊन तथा रेशम में उपस्थित) तथा मायोसिन (मांसपेशियों में उपस्थित) हैं तथा गोलिकाकार प्रोटीन के उदाहरण इन्सुलिन व ऐल्यूमिन हैं।

प्रश्न 14.16.
ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति को आप कैसे समझाएंगे ?
उत्तर:
ऐमीनो अम्ल लवण के समान व्यवहार करते हैं क्योंकि इनके एक ही अणु में अम्लीय (कार्बोक्सिल समूह) तथा क्षारकीय ( ऐमीनो समूह ) समूह होते हैं। जलीय विलयन में कार्बोक्सिल समूह एक प्रोटॉन दान कर सकता है जबकि ऐमीनो समूह एक प्रोटॉन ग्रहण कर सकता है जिसके कारण एक द्विध्रुवीय आयन बनता है जिसे ज्विटर आयन अथवा उभयाविष्ट आयन या आन्तरिक लवण कहते हैं। यह उदासीन होता है लेकिन इसमें धनावेश तथा ऋणावेश दोनों ही उपस्थित होते हैं।
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उभयाविष्ट आयन के रूप में ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी प्रकृति दर्शाते हैं क्योंकि ये अम्लों तथा धारकों दोनों के साथ अभिक्रिया करते हैं।
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प्रश्न 14.17.
एन्जाइम क्या होते हैं?
उत्तर:
सजीवों में होने वाली जैव रासायनिक अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाले जैव उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहते हैं। एन्जाइम प्रोटीनयुक्त पदार्थ होते हैं।

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प्रश्न 14.18.
प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
प्रोटीन के विकृतीकरण से इसकी प्राथमिक संरचना प्रभावित नहीं होती लेकिन द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, विकृत प्रोटीन की जैविक सक्रियता नष्ट हो जाती है। जैसे अण्डे को उबालने पर विलेय गोलिकाकार प्रोटीन का स्कंदन होकर वह अविलेय रेशेदार प्रोटीन में परिवर्तित हो जाती है।

प्रश्न 14.19.
विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए।
उत्तर:
विटामिनों का वर्गीकरण- जल तथा वसा में विलेयता के आधार पर विटामिनों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है-

  • वसा विलेय विटामिन
  • जल में विलेय विटामिन

(i) वसा विलेय विटामिन- ये विटामिन वसा तथा तेल में विलेय होते हैं लेकिन जल में अविलेय होते हैं। ये विटामिन A, D, E तथा K हैं। ये यकृत तथा ऐडिपोस (वसा को संग्रहित करने वाला) ऊतक में संग्रहित रहते हैं।

(ii) जल में विलेय विटामिन B वर्ग के विटामिन तथा विटामिन C जल में विलेय होते हैं। जल में विलेय विटामिनों की पूर्ति हमारे आहार में नियमित रूप से तथा पर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए क्योंकि ये मूत्र के साथ आसानी से उत्सर्जित हो जाते हैं। इस कारण ये हमारे शरीर में (विटामिन B12 के अतिरिक्त) संचित नहीं हो पाते हैं।

रक्त का थक्का जमने के लिए विटामिन K जिम्मेदार होता है।

प्रश्न 14.20.
विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्वपूर्ण स्त्रोत दीजिए।
उत्तर:
विटामिन A की कमी से रतौंधी (रात्रि अंधता) तथा ज़िॲपिथेमिया (आँख के कॉर्निया का कठोर होना) नामक रोग हो जाते हैं। तथा विटामिन C की कमी से स्कर्वी (मसूड़ों से रक्तस्राव) तथा दंत क्षय रोग हो जाता है अतः विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक हैं।

विटामिन A के स्रोत – गाजर, पालक, पपीता, मक्खन, दूध, मछली के यकृत का तेल तथा अंडे की जर्दी।

विटामिन C के स्रोत सिट्रस फल ( नींबू, संतरा, मौसमी), आँवला, हरे पत्तेदार सब्जियाँ, अमरूद, टमाटर तथा बेर।

प्रश्न 14.21.
न्यूक्लिक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
उत्तर:
न्यूक्लिक अम्ल, न्यूक्लिओटाइडों की लम्बी श्रृंखलायुक्त बहुलक होते हैं जो एक धारक, एक पेन्टोस शर्करा तथा फॉस्फेट से मिलकर बनते हैं। ये वे जैव अणु हैं जो प्रोटीन के साथ मिलकर क्रोमोसोम बनाते हैं। न्यूक्लिक अम्ल, जनक से संतति में गुणों के स्थानान्तरण के लिए जिम्मेदार होते हैं। न्यूक्लिक अम्ल के कार्य न्यूक्लिक अम्ल के दो महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं-

  • स्वप्रतिकृति तथा
  • प्रोटीन संश्लेषण पर नियंत्रण।

प्रश्न 14.22.
न्यूक्लिओसाइड तथा न्यूक्लिओटाइड में क्या अंतर होता है?
उत्तर:
किसी क्षारक (प्यूरीन या पिरीमिडीन) के पेन्टोस शर्करा की 1′ स्थिति से जुड़ने पर बनी इकाई को न्यूक्लिओसाइड कहते हैं तथा न्यूक्लिओसाइड जब शर्करा की 5′ स्थिति पर फॉस्फोरिक अम्ल से जुड़ता है तो न्यूक्लिओटाइड बनता है। अतः न्यूक्लिओसाइड में केवल पेन्टोस शर्करा तथा क्षारक होता है जबकि न्यूक्लिओटाइड में इनके अतिरिक्त फॉस्फेट समूह भी होता है।

प्रश्न 14.23.
DNA के दो रज्जुक (Strands) समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक (Complimentary) होते हैं। समझाइए |
उत्तर:
DNA की द्विकुंडलनी संरचना होती है। इसमें न्यूक्लिक अम्ल की दो श्रृंखलाएं आपस में कुंडलित होती हैं तथा क्षारक युग्मों के मध्य हाइड्रोजन बंध द्वारा आपस में जुड़ी रहती हैं। दोनों रज्जुक श्रृंखलाएं एक-दूसरे की पूरक होती हैं क्योंकि धारकों के विशिष्ट युग्मों के मध्य ही हाइड्रोजन बंध बनते हैं जैसे- ऐडेनीन, थायमीन के साथ तथा साइटोसीन, ग्वानीन के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता है। अतः DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते बल्कि एक-दूसरे के पूरक होते हैं।

प्रश्न 14.24.
DNA तथा RNA में महत्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अंतर लिखिए।
उत्तर:
DNA तथा RNA में संरचनात्मक अंतर निम्नलिखित हैं-

  • DNA कोशिका के नाभिक में स्थित क्रोमोसोम में पाया जाता है जबकि RNA मुख्यतः कोशिका द्रव्य में पाया जाता है।
  • DNA में B-D-डीऑक्सीराइबोस शर्करा होती है जबकि RNA में B-D राइबोस शर्करा होती है।
  • पिरीमिडीन क्षारक, थायमीन केवल DNA में होता है जबकि यूरेसिल केवल RNA में होता है।
  • DNA की द्विकुंडलनी संरचना होती है जबकि RNA की एकल कुंडलनी संरचना होती है।

DNA तथा RNA में क्रियात्मक अन्तर – DNA में स्वप्रतिकरण का गुण होता है तथा यह आनुवांशिक गुणों के स्थानान्तरण को नियंत्रित करता है, जबकि RNA प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 14.25.
कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौनसे हैं ?
उत्तर:
कोशिका में पाए जाने वाले RNA तीन प्रकार के होते हैं जिनके कार्य भिन्न-भिन्न हैं। संदेशवाहक RNA (m-RNA), राइबोसोमल RNA (r-RNA) तथा अंतरण या स्थानान्तरण RNA (t-RNA) हैं।

HBSE 12th Class Chemistry जैव-अणु Intext Questions

प्रश्न 14.1.
ग्लूकोस तथा सूक्रोस जल में विलेय हैं जबकि साइक्लोहैक्सेन अथवा बेन्जीन (सामान्य छः सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अविलेय होते हैं। समझाइए।
उत्तर:
ग्लूकोस तथा सूक्रोस के अणुओं में -OH समूह उपस्थित होने के कारण ये जल के साथ अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध बना लेते हैं अतः ये जल में विलेय हैं जबकि साइक्लोहैक्सेन तथा बेन्जीन हाइड्रोकार्बन हैं तथा ये अध्रुवीय यौगिक हैं अतः ये जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना सकते इसलिये ये जल में अविलेय होते हैं।

प्रश्न 14.2.
लैक्टोस के जल अपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?
उत्तर:
लैक्टोस के जल अपघटन से D-(+) गेलेक्टेस तथा D-(+) ग्लूकोस बनते हैं। यह जल अपघटन तनु HCl या एन्जाइम की उपस्थिति में किया जात्म है।
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प्रश्न 14.3.
D-ग्लूकोस के पेन्टाऐसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति को कैसे समझाएँगे?
उत्तर:
D-ग्लूकोस के पेन्ट्राऐसीटेट में ऐल्डिहाइड समूह स्वतंत्र न होकर हेमीऐसिटैल के रूप में होता है। इसी कारण ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट हाइड्रोंक्सिल ऐमीन के साथ क्रिया नहीं करता।

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प्रश्न 14.4.
ऐमीनो अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यतः संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए।
उत्तर:
ऐमीनो अम्लों में एक ही अणु में अम्लीय तथा क्षारीय दोनों समूह उपस्थित होने के कारण ये ज्विटर आयन (NH3CHRCOO)के रूप में पाए जाते हैं अतः ये क्रिस्टलीय ठोस के समान व्यवहार करते हैं, इसलिए इनका गलनांक उच्च होता है तथा इनकी ध्रुवीय प्रकृति के कारण ये जल के साथ अंतराअणुक हाइड्रोजन बन्ध बना लेते हैं अतः ये जल में अत्यधिक विलेय भी होते हैं जबकि हैलो अम्लों में ज्विटर आयन नहीं बनते इसलिए इनके गलनांक तथा जल में विलेयता ऐमीनो अम्लों से कम होती है।

प्रश्न 14.5.
अंडे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?
उत्तर:
अंडे को उबालने पर उसमें उपस्थित गोलाकार प्रोटीन विकृत हो जाती है। इस प्रक्रिया में जल का अवशोषण होता है अतः इसमें उपस्थित जल गायब हो जाता है।

प्रश्न 14.6.
हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता?
उत्तर:
विटामिन C जल में विलेय होता है। अतः यह जलीय विलयन के रूप में हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है। इस कारण यह हमारे शरीर में संचित नहीं होता।

प्रश्न 14.7.
यदि DNA के थायमीन युक्त न्यूक्लिओटाइड का जल अपघटन किया जाए तो कौन-कौनसे उत्पाद बनेंगे?
उत्तर:
DNA के थायमीनयुक्त न्यूक्लिओटाइड का जल अपघटन करने पर पेन्टोस शर्करा (β-D-2 डिऑक्सीराइबोस) फॉस्फोरिक अम्ल तथा थायमीन क्षारक ( नाइट्रोजनयुक्त विषमचक्रीय यौगिक ) प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 14.8.
जब RNA का जल अपघटन किया जाता है तो प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई संबंध नहीं होता। यह तथ्य RNA की संरचना के विषय में क्या संकेत देता है?
उत्तर:
RNA की संरचना में विभिन्न क्षारक युग्मों के मध्य निश्चित हाइड्रोजन बन्ध नहीं होता है तथा RNA की संरचना में कुण्डलनी केवल एक स्ट्रेण्ड से ही बनी होती है। अतः इसके जल अपघटन से प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई संबंध नहीं होता।

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HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन Textbook Exercise Questions and Answers.

प्रश्न 13.1.
निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके आईयूपीएसी नाम लिखिए-
(i) (CH3),CHNH2
(ii) CH3(CH2)2NH2
(iii) CH3NHCH(CH3)2
(iv) (CH3)3CNH2
(v) C6H5NHCH3
(vi) (CH3CH2)2NCH3
(vii) HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 1
उत्तर:
(i) प्रोपेन 2-ऐमीन (1°)
(ii) प्रोपेन- 1- ऐमीन (1°)
(iii) N मेथिल प्रोपेन-2-ऐमीन (2°)
(iv) 2- मेथिल प्रोपेन 2- ऐमीन (1°)
(v) N-मेथिलबेन्जीनेमीन या N – मेथिलऐनिलीन (2°)
(vi) N. एथिल – N मेथिलएथेनेमीन (3°)
(vii) 3 ब्रोमोऐनिलीन या 3 – ब्रोमोबेन्जीनेमीन (1°)

प्रश्न 13.2.
निम्नलिखित युगलों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए-
(i) मेथिलऐमीन एवं डाइमेथिलऐमीन
(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन
(iii) ऐथिलऐमीन एवं ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन एवं बेन्जिलऐमीन
(v) ऐनिलीन एवं N मेथिलऐनिलीन ।
उत्तर:
(i) मेथिलऐमीन CH3-NH2 (1°) हिन्सबर्ग अभिकर्मक (C6H5 SO2Cl) से क्रिया करता है तथा बना उत्पाद क्षार में विलेय होता है। जबकि डाइमेथिलऐमीन CH3-NH-CH3(2°) की हिन्सबर्ग अभिकर्मक (बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड) से क्रिया द्वारा बना उत्पाद धार में अविलेय होता है।

(ii) द्वितीयक ऐमीन (R2NH) हिन्सवर्ग अभिकर्मक से क्रिया करते हैं तथा बना उत्पाद धार में अविलेय होता है जबकि तृतीयक ऐमीन हिन्सबर्ग अभिकर्मक से क्रिया नहीं करते।

(iii) ऐथिलऐमीन बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड से क्रिया करके ऐजो रंजक (Azo dye) नहीं बनाता जबकि ऐनिलीन, बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड से क्रिया करके एजोरंजक (पीला) बनाती है।

(iv) ऐनिलीन, बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड (C6H5N2Cl) से क्रिया करके एजोरंजक बनाती है लेकिन बेन्जिलऐमीन ऐसा नहीं करती।

(v) ऐनिलीन (1°), CHCl3 तथा क्षार के साथ कार्बिलऐमीन परीक्षण देता है जबकि N मेथिल ऐनिलीन (2°) कार्बिल ऐमीन परीक्षण नहीं देती।

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प्रश्न 13.3.
निम्नलिखित के कारण बताइए-
(i) ऐनिलीन का pKb मेथिलऐमीन की तुलना में अधिक होता
(ii) ऐथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं।
(iii) मेथिलऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देता है।
(iv) यद्यपि ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थों एवं पैरा निर्देशक होता है फिर भी ऐनिलीन नाइट्रोकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनीलीन देती है।
(v) ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलीफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं।
(vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है।
उत्तर:
(i) मेथिल ऐमीन (CH3-NH2) में मैथिल समूह के +I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव ) के कारण नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

इसलिए इसका क्षारीय गुण अधिक होता है जबकि ऐनिलीन HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 2 में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद (+M प्रभाव) करता है जिससे इसके नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति कम हो जाती है इसलिए इसका क्षारीय गुण कम होता है। इसी कारण ऐनिलीन का pKb मेथिलऐमीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि क्षारीय गुण ∝ \(\frac{1}{\mathrm{pK}_{\mathrm{b}}} \propto \mathrm{K}_{\mathrm{b}}\) (क्षार वियोजन स्थिरांक)

(ii) ऐथिलऐमीन (C2H5NH2) जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाती है जबकि ऐनिलीन के C.H, समूह (अध्रुवीय) के बड़े आकार के कारण इसमें जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती अतः ऐथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं।

(iii) मैथिलऐमीन जलीय विलयन में OH आयन देता है जो FeCl3 (जलीय) के साथ क्रिया करके पहले हाइड्रॉक्साइड तथा वह फिर जलयोजित ऑक्साइड का अवक्षेप देता है। अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 3

(iv) ऐमीनों समूह इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के लिए ऑर्थो तथा पैरा निर्देशी होता है लेकिन ऐनिलीन के नाइट्रीकरण में यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोऐनिलीन बनती है क्योंकि प्रबल अम्लीय माध्यम में ऐनिलीन प्रोटॉन ग्रहण करके ऐनिलीनियम आयन बनाती है जो कि मेटा निर्देशक है (-I प्रभाव के कारण)।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 4
इस अभिक्रिया में पैरा 51% तथा आर्थो उत्पाद (2%) भी बनते हैं।

(v) ऐनिलीन फ्रिडेल क्राफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती क्योंकि इस अभिक्रिया में प्रयुक्त उत्प्रेरक AlCl3 (ऐलुमिनियम क्लोराइड) लुइस अम्ल है अतः यह ऐनिलीन (लुईस क्षार) के साथ लवण बना लेता है। लवण बनने के कारण ऐनिलीन का नाइट्रोजन, धन आवेश प्राप्त कर लेता है जो कि प्रबल विसक्रियणकारी समूह है अतः इसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 5a

(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइएजोनियम लवण, ऐलीफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं क्योंकि इनमें अनुनाद के कारण स्थायित्व आ जाता है। C6H5N2+ की अनुनादी संरचनाएँ निम्न प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 5
ऐरीन डाइएजोनियम लवण विलयन में निम्न ताप पर (273-278K) कुछ समय के लिए ही स्थायी होते हैं।

(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण में R X से R-NH2 बनता है जिसमें शुद्ध प्राथमिक ऐमीन बनती है तथा अन्य कोई सहउत्पाद प्राप्त नहीं होते क्योंकि अभिक्रिया से प्राप्त थैलिक अम्ल पुनः प्रयुक्त हो जाता है जबकि अन्य अभिक्रियाओं में उत्पादों का मिश्रण बनता है। अतः प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण में गैब्रिएल थैलिमाइड अभिक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है।

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प्रश्न 13.4.
निम्नलिखित को क्रम में लिखिए-
(i) pK, मान के घटते क्रम में-
C2H5NH2, C6H5NHCH3, (C2H5)2NH एवं C6H5NH2
(ii) क्षारकीय प्राबल्य के घटते क्रम में-
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C2H5)2NH एवं CH3NH2
(iii) क्षारकीय प्राबल्य के बढ़ते क्रम में-
(क) ऐनिलीन, पैरा-नाइट्रोऐनिलीन एवं पैरा-टॉलूडीन
(ख) C6H5NH2, C6H5NHCH3, C6H5CH2NH2
(iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारकीय प्राबल्य के क्रम में-
C2H5NH2, (C2H5)2NH, (C2H5)3N एवं NH3
(v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में-
C2H5OH, (CH3)2NH, C2H5NH2
(vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में-
C6H5NH2, (C2H5)2NH, C2H5NH2
उत्तर:
(i) C6H5NH2 > (C6H5NHCH3 > C2H5NH2 > (C2H5)2NH (pKb मान का घटता क्रम अर्थात् क्षारीय प्रबलता का बढ़ता क्रम)

(ii) (C2H5)2NH > CH3-NH2 > C6H5N (CH3)2 > CH, NH (क्षारीय प्रबलता (प्राबल्य) का घटता क्रम )

(iii) (क) p-नाइट्रोऐनिलीन < ऐनिलीन < p-टॉलूडीन (क्षारीय प्रबाल्य का बढ़ता क्रम )
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 6a

(ख) C6H5NH2 < C6H5NHCH3 < C6H5CH2NH2

(iv) (C2H5)3N > (C2H5)2NH > C2H5NH2 > NH3
(गैसीय अवस्था में शारकीय प्राबल्य का घटता क्रम )

(v) (CH3)2NH < C2H5NH<sub2 < C2H5OH ( क्वथनांक का बढ़ता क्रम )

(vi) C6H5NH2 < (C2H5)2NH < C2H5NH2 (जल में विलेयता का बढ़ता क्रम)

प्रश्न 13.5.
इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे-
(i) एथेनॉइक अम्ल को मेथेनेमीन में
(ii) हैक्सेननाइट्राइल को 1- ऐमीनापेन्टेन में
(iii) मेथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में
(iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में
(v) एथेनॉइक अम्ल को प्रोपेनॉइक अम्ल में
(vi) मेथेनेमीन को एथेनेमीन में
(vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में
(viii) प्रोपेनॉइक अम्ल को एथेनॉइक अम्ल में ?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 6

प्रश्न 13.6.
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
उत्तर:
प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान निम्नलिखित विधियों से की जाती है-
कार्बिलऐमीन अभिक्रिया – ऐलिटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफ़ार्म तथा एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर तीक्ष्ण दुर्गंधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कर्बिलऐमीन बनता है। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन में यह अभिक्रिया नहीं होती ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 7

प्रश्न 13.7.
निम्न पर लघु टिप्पणी लिखिए-
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया
(ii) डाइऐजोकरण (डाइऐजोटीकरण).
(iii) हॉफमान ब्रोमाइड अभिक्रिया
(iv) युग्मन अभिक्रिया
(v) अमीनो अपघटन
(vi) ऐसीटिलन
(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण।
उत्तर:
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया – ऐलिटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफ़ार्म तथा एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर तीक्ष्ण दुर्गंधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कर्बिलऐमीन बनता है। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन में यह अभिक्रिया नहीं होती ।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 7

(ii) डाइऐजोकरण या डाइऐजोटीकरण (Diazotisation ) – 273-278 K (निम्न ताप) ताप पर प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन की NaNO, तथा HCI से अभिक्रिया कराने पर एरीन डाइएजोनियम लवण बनते हैं। इस अभिक्रिया को डाइऐजोटीकरण कहते हैं।
ऐनीलीन की अभिक्रिया से बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड बनता है। यह अस्थायी होता है अतः इसका प्रयोग तुरन्त कर लिया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 8
(iii) हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया (Hoffmann Bromamide Rcaction ) इस अधिक्रिया में किसी ऐमाइड की NaOH या KOH के जलीय अथवा ऐथेनॉलिक विलयन में ग्रोमीन से अभिक्रिया करते हैं तो प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 9

(iv) युग्मन अभिक्रिया ( Coupling Reaction ) – बेन्जीन डाइरजोनियम क्लोराइड, फ़ीनॉल से अभिक्रिया करके इसकी पैरा स्थिति पर युग्मित होकर पैरा हाइड्रॉक्सीऐजोबेन्जीन देता है। इस अभिक्रिया को युग्मन अभिक्रिया कहते हैं। इसी प्रकार डऐजोनियम लवण की ऐनोलीन से अभिक्रिया द्वारा पैशाऐमीनोऐजोबेन्जीन बनती है। यह एक इलेक्ट्रॉननेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। प्राप्त यौगिक रंगीन होते हैं तथा ये ऐजो रंजक होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10

(v) अमोनी अपघटन (Ammonolysis ) – 373 K ताप पर एक बन्द नली में ऐल्किल अथवा बेन्जिल हैलाइडों की क्रिया एथ्रेनॉलिक अमोनिया के साथ करवाने पर हैलोजन परमाणु का प्रतिस्थापन ऐमीनों समूह द्वारा हो जाता है तथा प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है। यह एक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है। अमोनिया द्वारा ऐल्किल हैलाइड के कार्बन हैलोजन बन्ध के विखण्डन की इस प्रक्रिया को अमोनी अपघटन कहा जाता है। इस अभिक्रिया में प्राप्त प्राथमिक ऐमीन पुनः ऐल्किल हैलाइड से क्रिया करके 2° तथा 3° ऐमीन एवं अन्त में चतुष्क अमोनियम लवण बना देती है अतः यहाँ यौगिकों का मिश्रण बनता है। इस अभिक्रिया के लिए ऐल्किल हैलाइडों की क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10a
अभिक्रिया द्वारा प्राप्त ऐमीन, HX के साथ क्रिया करके लवण बना देती है जिसकी क्रिया प्रबल क्षार के साथ करवाने पर पुनः ऐमीन प्राप्त हो जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10b
(i) इस अभिक्रिया द्वारा मुख्य उत्पाद के रूप में प्राथमिक ऐमीन प्राप्त करने के लिए अमोनिया को आधिक्य में लिया जाना चाहिए।

(ii) इस अभिक्रिया द्वारा ऐनिलीन बनाना मुश्किल होता है क्योंकि क्लोरो बेन्जीन में +M प्रभाव के कारण कार्बन क्लोरीन बन्ध में द्विबन्ध के गुण आ जाते हैं अतः इसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है। इस कारण ऐनिलीन बनाने के लिए निम्नलिखित विशिष्ट विधियों का प्रयोग किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10c
(vi) ऐसिलीकरण – ऐलीफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक एवं ऐसिलीकरण-द्वितीयक ऐमीन, ऐसिड क्लोराइड तथा एसिड एनहाइड्राइड के साथ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं तो इसे ऐसिलीकरण अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में -NH2 अथवा > NH समूह में उपस्थित हाइड्रोजन परमाणु का ऐसिल समूह द्वारा प्रतिस्थापन होता है। इस अभिक्रिया में CH3COCl लेने पर इसे ऐसिटिलीकरण (Acetylation) कहते हैं तथा यह अभिक्रिया पिरौडीन की उपस्थिति में की जाती है जिससे प्राप्त HCI का अवशोषण होकर साम्य अग्र दिशा में विस्थापित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10d
जब ऐमीनों की अभिक्रिया बेन्जॉयल क्लोराइड से करवाते हैं तो इस अभिक्रिया को बेन्जॉयलीकरण ( Benzoylation) कहते हैं तथा वैज्ञानिक के नाम के आधार पर इसे शॉटन बॉमन अभिक्रिया कहा जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10e
ऐमीन कमरे के ताप पर कार्बोक्सिलिक अम्लों के साथ क्रिया करके लवण बनाती हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 10f

(vii) गैब्रिल थैलिमाइड संश्लेषण द्वारा (By Gabriel Pthallimide Synthesis) – ऐलिफैटक ऐमीन बनाने की यह एक उत्तम विधि है। इस विधि में थैलिमाइड की क्रिया एथेनॉलिक KOH से करवाते हैं तो इसका पोटैशियम लवण बनता है जिसे ऐल्किल हैलाइड के साथ गरम करके क्षारीय जल अपघटन कराने पर प्राथमिक ऐमीन बनते हैं। इस अभिक्रिया द्वारा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन, जैसे ऐनिलीन, सुगमता से नहीं बनती, क्योंकि ऐरिल हैलाइडों की क्रियाशीलता ऐल्किल हैलाइडों से कम होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 11a

प्रश्न 13.8.
निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए-
(i) नाइट्रो बेन्जीन से बेन्ज़ोइक अम्ल
(ii) बेन्जीन से m ब्रोमोफ़ीनॉल
(iii) बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन
(iv) ऐनिलीन से 2,4, 6- ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
(v) बेन्जिल क्लोराइड से 2 फ्रेनिलएथेनेमीन
(vi) क्लोरोबेन्ज़ीन से p-क्लोरोऐनिलीन
(vii) ऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन
(viii) बेन्ज़एमाइड से टॉलुईन
(ix) ऐनीलीन से बेन्ज़ाइल ऐल्कोहॉल।
उत्तर:
(i) नाइट्रोबेन्जीन से बेन्जोइक अम्ल-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 11
(ii) बेन्जीन से m ब्रोमोफ़ीनॉल
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 12
(iii) बेन्जोइक अम्ल से ऐनिलीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 13
(iv) ऐनिलीन से 2,4, 6- ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 14
(v) बेन्जिल क्लोराइड से 2 फ्रेनिलएथेनेमीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 15
(vi) क्लोरोबेन्ज़ीन से p-क्लोरोऐनिलीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 16
(vii) ऐनिलीन से p-ब्रोमोऐनिलीन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 17
(viii) बेन्ज़एमाइड से टॉलुईन
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 18
(ix) ऐनीलीन से बेन्ज़ाइल ऐल्कोहॉल।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 19

प्रश्न 13.9.
निम्न अभिक्रियाओं में A, B तथा C की संरचना दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 20
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 21

प्रश्न 13.10.
एक ऐरोमैटिक यौगिक ‘A’ जलीय अमोनिया के साथ गरम करने पर यौगिक ‘B’ बनाता है जो Br, एवं KOH के साथ गरम करने पर अणु सूत्र C. H, N वाला यौगिक ‘C’ बनाता है। A, B एवं C यौगिकों की संरचना एवं इनके आईयूपीएसी नाम लिखिए।
उत्तर:
अभिक्रिया तथा A, B, C व उनके नाम अग्र प्रकार हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 22

प्रश्न 13.11.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
(i) C6H5NH2 + CHCl3 + ( ऐल्कोहॉली) KOH →
(ii) C6H5N2Cl + H3PO2 + H2O →
(iii) C6H5NH2 + H2SO4 सांद्र
(iv) C6H5N2Cl + C2H5OH →
(v) C6H5NH2 + Br2 (aq) →
(vi) C6H5NH2 + (CH3CO)2 O
(vii) C6H5N2Cl HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 23
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 24

प्रश्न 13.12.
एैरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण से क्यों नहीं बनाया जा सकता?
उत्तर:
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण से नहीं बना सकते क्योंकि ऐरिल हैलाइड में अनुनाद (+M प्रभाव) के कारण कार्बन हैलोजन आंबन्ध में द्विआबन्ध के गुण आ जाते हैं अतः वह प्रबल हो जाता है। इस कारण ऐरिल हैलाइड थैलिमाइड से प्राप्त ऋणायन के साथ नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 13.13.
ऐलिफैटिक एवं ऐरोमैटिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया’ द्वारा मुख्यतः ऐल्कोहॉल देते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 25
ऐरोमैटिक अम्ल नाइट्रस अम्ल (NaNO2 + HCl) से क्रिया करके डाइएजोनियम लवण बनाते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 26

प्रश्न 13.14.
निम्नलिखित में प्रत्येक का संभावित कारण बताइए-
(i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है।
(ii) प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलीफैटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं।
उत्तर:
(i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है क्योंकि ऐमीनों में – NH बन्ध की ध्रुवता ऐल्कोहॉलों के – O-H बन्ध की ध्रुवता से कम होती है क्योंकि ऑक्सीजन की विद्युतऋणता, नाइट्रोजन से अधिक है अतः ऐमीनों में ऐल्कोहॉलों की तुलना में H देने की प्रवृत्ति कम होती है।

(ii) प्राथमिक ऐमीनों में नाइट्रोजन पर दो हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हैं जिनके कारण इनमें प्रबल अन्तराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध होता है जिससे
आण्विक सगुणन (Molecular association) अधिक होता है जबकि तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन पर हाइड्रोजन परमाणु नहीं होने के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनता अतः प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 27

(iii) ऐलिफैटिक ऐमीन में ऐल्किल समूह के + I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) के कारण नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः – NH2 समूह की इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है अतः ये अधिक क्षारीय होते हैं जबकि ऐरोमैटिक ऐमीन में – NH2 के नाइट्रोजन परमाणु का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद करता है (+M प्रभाव) जिससे इस पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है तथा इसकी इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति कम हो जाती है अतः ये कम क्षारीय होते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry ऐमीन Intext Questions

प्रश्न 12.1.
निम्न यौगिकों की संरचना लिखिए-
(i) α-मेथॉक्सीप्रोप्रिऑनऐल्डिहाइड
(ii) 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल
(iii) 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन कार्बैल्डिहाइड
(iv) 4-ऑक्सोपेन्टेनैल
(v) डाइ-द्वितीयकब्यूटिल कीटोन
(vi) 4-क्लोरोऐसीटोफीनॉन
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों की संरचना निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 28

प्रश्न 12.2
निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 29
उत्तर:
उपरोक्त अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना अग्र प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 30

प्रश्न 12.3.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
CH3CHO, CH3CH2OH, CH3OCH3, CH3CH2CH3
उत्तर:
CH3-CH3-CH3 < CH3-O-CH3 < CH3-CHO< CH3-CH2-OH
क्वथनांकों का बढ़ता क्रम

प्रश्न 12.4.
निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी योगात्मक (Addition) अभिक्रियाओं में उनकी बढ़ती हुई अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
(क) एथेनैल, प्रोपेनैल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन
(ख) बेन्जैल्डिहाइ ड, p-टॉलू ऐल्डिहाइ ड, p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड, ऐसीटोफीनोन।
संकेत-त्रिविम प्रभाव व इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव को ध्यान में रखें।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों की नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रियाओं में बढ़ती हुई क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार है-
(क) ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपेनैल < एथेनैल
(ख) ऐसीटोफ़ीनोन <p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्जैल्डिहाइड <p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड।

HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन

प्रश्न 12.5.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 31
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 32

प्रश्न 12.6.
निम्नलिखित यौगिकों के आईयूपीएसी नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 33
उत्तर:
उपरोक्त यौगिकों के आईयूपीएसी नाम निम्न प्रकार हैं-
(i) 3-फेनिलप्रोपेनॉइक अम्ल
(ii) 3-मेथिलब्यूट-2-इनोइक अम्ल
(iii) 2-मेथिलसाइक्लोपेन्टेनकार्बोक्सिलिक अम्ल
(iv) 2,4,6-ट्राईनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल

प्रश्न 12.7.
निम्नलिखित यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में कैसे परिवर्तित किया जा सकता है?
(i) एथिलबेन्जीन
(ii) ऐसीटोफीनोन
(iii) ब्रोमोबेन्जीन
(iv) फेनिलएथीन (स्टाइरीन)।
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों को बेन्जोइक अम्ल में निम्न प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 34

प्रश्न 12.8.
नीचे प्रदर्शित अम्लों के प्रत्येक युग्म में कौनसा अम्ल अधिक प्रबल है ?
(i) CH3CO2H अथवा CH2FCO2H
(ii) CH2FCO2H अथवा CH2ClCO2H
(iii) CH2FCH2CH2CO2H अथवा CH2CHFCH2CO2H
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 35
उत्तर:
उपर्युक्त युग्मों में से अधिक प्रबल अम्ल निम्नलिखित हैं-
(i) CH2FCOOH
(ii) CH2FCOOH
(iii) CH2CHFCH2COOH
HBSE 12th Class Chemistry Solutions Chapter 13 ऐमीन 36

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HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Exercise 3.5

प्रश्न 1.
निम्नलिखित रैखिक समीकरणों के युग्मों में से किसका एक अद्वितीय हल है, किसका कोई हल नहीं है या किसके अपरिमित रूप से अनेक हल हैं। अद्वितीय हल की स्थिति में, उसे वज्र-गुणन विधि से ज्ञात कीजिए।
(i) x – 3y – 3 = 0
3x – 9y – 2 = 0
(ii) 2x + y =5
3x + 2y = 8
(iii) 3x – 5y = 20
6x – 10y = 40
(iv) x – 3y – 7 = 0
3x – 3y – 15 = 0
हल :
(i) यहाँ पर x – 3y – 3 = 0 ….(i)
3x – 9y – 2 = 0 ….(ii)
a1 = 1; b1 = -3; c1 = -3
a2 = 3; b2 = – 9; c2 = -2
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 1

इसलिए दिए गए रैखिक समीकरण युग्म का कोई हल नहीं है।

(ii) यहाँ पर
2x + y-5 = 0
व 3x + 2y – 8 = 0
a1 = 2; b1 = 1; c1 = -5
a2 = 3; b2 = 2; c2 = – 8
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 2
इसलिए दिए गए रैखिक समीकरण युग्म का अद्वितीय हल है।

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5

अब वज्र-गुणन विधि से हल करने के लिए
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 3
x = 2 और y =1
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y=1

(iii) यहाँ पर
3x – 5y – 20 = 0 …………….(i)
6x – 10y – 40 = 0 …………….(ii)
a1 = 3; b1 = -5; c1 = – 20
a2 = 6; b2 = – 10; c2 = – 40
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 4
इसलिए दिए गए रैखिक समीकरण युग्म के अपरिमित रूप से अनेक हल हैं।

(iv) यहाँ पर
x – 3y – 7 = 0
3x – 3y – 15 = 0
a1 = 1; b1 = -3; c1 = – 7
a2 = 3; b2 = -3; c2 = – 15
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 5
इसलिए दिए गए रैखिक समीकरण युग्म का अद्वितीय हल है।

अब वज्र-गुणन विधि से हल करने के लिए
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 6
x = 4 और y = -1
अतः अभीष्ट हल x = 4 व y = – 1

प्रश्न 2.
(i) a और b के किन मानों के लिए, निम्न रैखिक समीकरणों के युग्म के अपरिमित रूप से अनेक हल होंगे?
2x + 3y = 7
(a – b)x + (a + b)y = 3a + b -2

(ii) k के किस मान के लिए, निम्न रैखिक समीकरणों के युग्म का कोई हल नहीं है?
3x + y = 1
(2k – 1)x + (k – 1)y = 2k + 1
हल :
(i) यहाँ पर 2x + 3y – 7 = 0 …………..(i)
व . (a – b)x + (a + b)y – (3a + b – 2) = 0 …………..(ii)
a1 = 2; b1 = 3; c1 = -7 .
a2 = a – b; b2 = a + b; c2 = – (3a + b -2)
दिए गए रैखिक समीकरण युग्म के अपरिमित रूप से अनेक हल के लिए आवश्यक है कि,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 7
2(a + b) = 3(a – b) व -2 (3a + b – 2) = -7(a – b)
या 2a + 2b = 3a-36 व -6a-2b + 4 = – 7a + 7b
या 3a – 3b – 2a – 2b = 0 व – 6a – 2b + 4 + 7a – 7b = 0
या a – 5b = 0 व a – 9b + 4 = 0
अर्थात् a – 5b = 0 …………(1)
व a – 9b + 4 = 0…(ii)

अब वज्र-गुणन विधि से हल करने के लिए
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 8
a = 5 व b = 1
अतः अभीष्ट मान a = 5 व b = 1 के लिए रैखिक समीकरण युग्म के अपरिमित रूप से अनेक हल होंगे।

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5

(ii) यहाँ पर
3x + y – 1 = 0 …(i)
व (2k – 1)x + (k – 1) – (2k + 1) = 0 …(ii)
41 = 3; b1 = 1; csub>1 = -1
a2 = 2k- 1; b2 = k- 1; c2 = – (2k + 1)
दिए गए रैखिक समीकरण युग्म के कोई भी हल न होने के लिए आवश्यक है कि,
\(\frac{a_{1}}{a_{2}}=\frac{b_{1}}{b_{2}} \neq \frac{c_{1}}{c_{2}}\)
\(\frac{3}{2 k-1}=\frac{1}{k-1}\)
या 3(k – 1) = 1(2k– 1)
या 3k – 3 = 2k – 1
या 3k – 2k = -1 +3
या k = 2
अतः अभीष्ट मान k = 2 के लिए रैखिक समीकरण युग्म का कोई भी हल नहीं होगा।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित रैखिक समीकरणों के युग्म को प्रतिस्थापन एवं वज्र-गुणन विधियों से हल कीजिए। किस विधि को आप अधिक उपयुक्त मानते हैं?
8x + 5y = 9
3r + 2y = 4
हल :
यहाँ पर
8x + 5y – 9 = 0 ………………..(i)
3x + 2y – 4 = 0 ………………….(ii)
प्रतिस्थापन विधि से हल करने के लिए समीकरण (i) से y = \(\frac{9-8 x}{5}\)
y = \(\frac{9-8 x}{5}\) को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
3x + 2(\(\frac{9-8 x}{5}\)) -4 = 0
या 15x + 2(9 – 8x) – 20 = 0 (दोनों ओर 5 से गुणा करने पर)
या 15x + 18 – 16x – 20 = 0
या -x – 2 = 0
या x = -2
x का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
8(-2) + 5y – 9 = 0
या 5y = 9 + 16
या y =\(\frac{25}{5}\) = 5
अतः अभीष्ट हल x = -2 व y = 5

वज्र-गुणन विधि से हल करने के लिए-
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 9
अतः अभीष्ट हल x = -2 व y = 5
अतः वज्र-गुणन विधि अधिक उपयुक्त है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित समस्याओं में रैखिक समीकरणों के युग्म बनाइए और उनके हल (यदि उनका अस्तित्व हो) किसी बीजगणितीय विधि से ज्ञात कीजिए
(i) एक छात्रावास के मासिक व्यय का एक भाग नियत है तथा शेष इस पर निर्भर करता है कि छात्र ने कितने दिन भोजन लिया है। जब एक विद्यार्थी A को, जो 20 दिन भोजन करता है, 1000 रु० छात्रावास के व्यय के लिए अदा करने पड़ते हैं, जबकि एक विद्यार्थी B को, जो 26 दिन भोजन करता है छात्रावास के व्यय के लिए 1180 रु० अदा करने पड़ते हैं। नियत व्यय और प्रतिदिन के भोजन का मूल्य ज्ञात कीजिए।
(ii) एक भिन्न \(\frac{1}{3}\) हो जाती है, जब उसके अंश से 1 घटाया जाता है और वह \(\frac{1}{4}\) हो जाती है। जब हर में 8 जोड़ दिया जाता है। वह भिन्न ज्ञात कीजिए।
(iii) यश ने एक टेस्ट में 40 अंक अर्जित किए, जब उसे प्रत्येक सही उत्तर पर 3 अंक मिले तथा अशुद्ध उत्तर पर 1 अंक की कटौती की गई। यदि उसे सही उत्तर पर 4 अंक मिलते तथा अशुद्ध उत्तर पर 2 अंक कटते, तो यश 50 अंक अर्जित करता। टेस्ट में कितने प्रश्न थे?
(iv) एक राजमार्ग पर दो स्थान A और B, 100 km की दूरी पर हैं। एक कार A से तथा दूसरी कार B से एक ही समय चलना प्रारंभ करती है। यदि ये कारें भिन्न-भिन्न चालों से एक ही दिशा में चलती हैं, तो वे 5 घंटे पश्चात मिलती हैं और यदि ये विपरीत दिशा में चलती हैं तो वे 1 घंटे पश्चात् मिलती हैं। दोनों कारों की चाल ज्ञात कीजिए।
(v) एक आयत का क्षेत्रफल 9 वर्ग इकाई कम हो जाता है, यदि उसकी लंबाई 5 इकाई कम कर दी जाती है और चौड़ाई 3 इकाई बढ़ा दी जाती है। यदि हम लंबाई को 3 इकाई और चौड़ाई को 2 इकाई बढ़ा दें, तो क्षेत्रफल 67 वर्ग इकाई बढ़ जाता है। आयत की विमाएँ ज्ञात कीजिए।
हल :
(i) यहाँ पर
माना छात्रावास का मासिक नियत व्यय = x रु०
व छात्र के प्रतिदिन के भोजन का व्यय = y रु०
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण युग्म होंगे,
x + 20y = 1000 (विद्यार्थी A के लिए) …………….(i)
x + 26y = 1180 (विद्यार्थी B के लिए) ………..(ii)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 10
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
x + 20(30) = 1000
x = 1000 – 600 = 400
अतः छात्रावास का मासिक नियत व्यय = 400 रु०
व छात्र के प्रतिदिन के भोजन का व्यय = 30 रु०

(ii) यहाँ पर
माना भिन्न = \(\frac{x}{y}\)
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण युग्म होंगे,
\(\frac{x-1}{y}=\frac{1}{3}\)
3x – 3 = y
3x – y = 3 …………………(i)
\(\frac{x}{y+8}=\frac{1}{4}\)
या 4x = y +8
या 4x -y = 8
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 11
या x = 5

x = 5 x का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
3(5) – y = 3:
या -y = 3 – 15
या -y = – 12
या y = 12
अतः अभीष्ट भिन्न = \(\frac{5}{12}\)

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5

(iii) यहाँ पर
माना यश के टेस्ट में सही उत्तरों की संख्या = x
व यश के टेस्ट में अशुद्ध उत्तरों की संख्या = y
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण युग्म होंगे,
3x – y = 40 ……………(i)
व 4x – 2y = 50
2x – y = 25
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 12
x का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
3(15) – y = 40
या -y = 40 – 45
या -y = -5
या y = 5
अतः   प्रश्नों की कुल संख्या = x +y = 15 + 5 = 20

(iv) यहाँ पर
माना स्थान A से चलने वाली कार की चाल = u km/h
व स्थान B से चलने वाली कार की चाल = v km/h
स्थान A से चलने वाली कार द्वारा 5 घंटे व 1 घंटे में क्रमशः तय दूरी = 5u km व u km
स्थान B से चलने वाली कार द्वारा 5 घंटे व 1 घंटे में क्रमशः तय दूरी = 5v km व v km
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण युग्म होंगे,
5u – 5v = 100
या u – v = 20 (दोनों ओर 5 से भाग करने पर) …………..(i)
u + v = 100 …..(ii)
समीकरण (i) व समीकरण (ii) को जोड़ने पर
2u = 120
या u = \(\frac{120}{2}\) = 60
u का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
60 +v = 100
या v = 100 -60 = 40
अतः स्थान A से चलने वाली कार की चाल = 60 km/h
व स्थान B से चलने वाली कार की चाल = 40 km/h

(v).यहाँ पर
माना आयत की लंबाई = x इकाई
तथा आयत की चौड़ाई = y इकाई
तो आयत का क्षेत्रफल = xy वर्ग इकाई
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण युग्म होंगे, ..
(x -5) (y + 3) = xy – 9
या xy + 3x – 5y – 15 = xy – 9
या xy + 3x – 5y-xy = – 9 + 15
या 3x – 5y = 6 …………(i)
(x + 3) (y + 2) = xy + 67
या xy + 2x + 3y + 6 = xy + 67
या xy + 2x + 3y – xy = 67 – 6
या 2x + 3y = 61 …………..(ii)
समीकरण (i) को 3 से तथा समीकरण (ii) को 5 से गुणा करके परस्पर जोड़ने से,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.5 13
या x = \(\frac{323}{19}\) = 17
x का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
2(17) + 3y = 61
या 3y = 61 – 34
या y = \(\frac{27}{3}\) = 9
अतः आयत की लंबाई = 17 इकाई
व आयत की चौड़ाई = 9 इकाई

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