Author name: Bhagya

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक

बहुविकल्पीय प्रश्न 

1. पी.वी.सी. (पॉलि वाइनिल क्लोराइड) है एक-
(अ) योगात्मक बहुलक
(ब) संघनन बहुलक
(स) सहबहुलक
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) योगात्मक बहुलक

2. निम्नलिखित में से कौनसा जैव बहुलक है?
(अ) पॉलिथीन
(ब) नाइलॉन-66
(स) प्रोटीन
(द) टेफ्लॉन
उत्तर:
(स) प्रोटीन

3. PHBV है एक-
(अ) प्राकृतिक बहुलक
(ब) जैव बहुलक
(स) जैवनिम्ननीय बहुलक
(द) संश्लेषित बहुलक
उत्तर:
(स) जैवनिम्ननीय बहुलक

4. योगात्मक बहुलकीकरण है-
(अ) पद वृद्धि अभिक्रिया
(ब) शृंखला वृद्धि अभिक्रिया
(स) विलोपन अभिक्रिया
(द) संघनन अभिक्रिया
उत्तर:
(ब) शृंखला वृद्धि अभिक्रिया

5. निम्नलिखित में से कौनसा प्राकृतिक बहुलक नहीं है?
(अ) स्टार्च
(ब) ऊन
(स) रेशम
(द) नाइलॉन
उत्तर:
(द) नाइलॉन

6. एथिलीन ग्लाइकॉल तथा टेरेफ्थैलिक अम्ल के सहबहुलकीकरण से बना बहुलक है-
(अ) नाइलॉन
(ब) टेरीलीन या डेक्रॉन
(स) पॉलिस्टाइरीन
(द) बैकेलाइट
उत्तर:
(ब) टेरीलीन या डेक्रॉन

7. टैफ्लॉन के विशेष गुण निम्नलिखित में से किस तत्व के कारण होते हैं ?
(अ) क्लोरीन
(ब) नाइट्रोजन
(स) फ्लुओरीन
(द) फॉस्फोरस
उत्तर:
(स) फ्लुओरीन

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8. जब रबर को सल्फर के साथ गर्म किया जाता है तो इस प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(अ) गैल्वेनीकरण
(ब) सल्फोनीकरण
(स) बेसेमरीकरण
(द) वल्कनीकरण
उत्तर:
(द) वल्कनीकरण

9. निम्नलिखित में से किस बहुलक में हैलोजन नहीं होता है?
(अ) टेफ्लॉन
(ब) निओप्रीन
(स) नाइलॉन-6
(द) पी.वी.सी.
उत्तर:
(स) नाइलॉन-6

10. निम्नलिखित में से कौनसा तापदृढ़ बहुलक का उदाहरण है?
(अ) पॉलिस्टाइरीन
(ब) पॉलिथीन
(स) बैकेलाइट
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) बैकेलाइट

11. निम्नलिखित में से कौनसा रेखीय बहुलक नहीं है?
(अ) पॉलीएस्टर
(ब) पॉलीप्रोपिलीन
(स) बैकेलाइट
(द) पॉलिथीन
उत्तर:
(स) बैकेलाइट

12. निम्नलिखित में से कौनसा तापसुघट्य बहुलक नहीं है?
(अ) पॉलिथीन
(ब) पॉलिस्टाइरीन
(स) फ़ीनॉल-फार्मेल्डिहाइड रेजिन
(द) पॉलिवाइनिलक्लोरइड
उत्तर:
(स) फ़ीनॉल-फार्मेल्डिहाइड रेजिन

13. निम्नलिखित में से कौनसा बहुलक ऐरोमैटिक है?
(अ) नाइलॉन-66
(ब) टेफ्लॉन
(स) निओप्रीन
(द) पॉलिस्टाइरीन
उत्तर:
(द) पॉलिस्टाइरीन

14. निम्नलिखित में से किस प्रकार के बहुलक में सबसे प्रबल अन्तराणुक बल पाए जाते हैं?
(अ) रेशेदार बहुलक
(ब) प्रत्यास्थ बहुलक
(स) तापदृढ़ बहुलक
(द) तापसुघट्य बहुलक
उत्तर:
(स) तापदृढ़ बहुलक

15. वैद्युत स्विच बनाने में प्रयुक्त बहुलक होता है-
(अ) पॉलिप्रोपीन
(ब) ग्लिप्टल
(स) बैकेलाइट
(द) पॉलिस्टाइरीन
उत्तर:
(स) बैकेलाइट

16. बहुलक, ब्यूना-S में S किससे सम्बन्धित है?
(अ) सल्फर
(ब) सोडियम
(स) स्टाइरीन
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) स्टाइरीन

17. CF2 = CF2 निम्नलिखित में से किस बहुलक का एकलक है?
(अ) ग्लिप्टल
(ब) ब्यूना- N
(स) टैफ्लॉन
(द) नाइलॉन-6
उत्तर:
(स) टैफ्लॉन

18. बहुलक ऑरलॉन का एकलक है-
(अ) ग्लाइकॉल
(ब) क्लोरोप्रीन
(स) एक्रिलो नाइट्राइल
(द) वाइनिल क्लोराइड
उत्तर:
(स) एक्रिलो नाइट्राइल

19. निम्नलिखित में से कौनसा बहुलक पूर्णतः फ्लुओरीनीकृत है?
(अ) PAN
(ब) PTFE
(स) PVC
(द) PMMA
उत्तर:
(ब) PTFE

20. निम्नलिखित में से कौनसा सहबहुलक है?
(अ) PVC
(ब) प्राकृतिक बहुलक
(स) पॉलीप्रोपीन
(द) नाइलॉन-66
उत्तर:
(द) नाइलॉन-66

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रियात्मक समूह के आधार पर टैरीलीन किस प्रकार का बहुलक है?
उत्तर:
टैरीलीन, पॉलिएस्टर वर्ग का बहुलक है।

प्रश्न 2.
त्सीग्लर – नट्टा उत्प्रेरक क्या है? इसका उपयोग भी बताइए।
उत्तर:
ट्राइएथिल ऐलुमिनियम तथा टाइटेनियम टेट्राक्लोराइड का मिश्रण [(C2H5)3)Al+TiC4] त्सीग्लर नट्टा उत्प्रेरक होता है। यह एथीन तथा अन्य ऐल्कीनों के बहुलकीकरण में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 3.
ऐकिलन बहुलक बनाने में प्रयुक्त एकलक का सामान्य तथा IUPAC नाम बताइए।
उत्तर:
ऐक्रिलन (पॉलिएक्रिलोनाइट्राइल) बहुलक, ऐक्रिलोनाइट्राइल CH2 = CHCN) से बनता है। इसका IUPAC नाम प्रोपीननाइट्राइल है।

प्रश्न 4.
नॉनस्टिक (न चिपकने वाली) सतह से लेपित बर्तन बनाने में कौनसा बहुलक प्रयुक्त होता है?
उत्तर:
नॉनस्टिक सतह से लेपित बर्तन बनाने में प्रयुक्त बहुलक टेफ्लॉन होता है।

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प्रश्न 5.
अभंजनीय बर्तन बनाने में प्रयुक्त बहुलक किनसे बनता है?
उत्तर:
अभंजनीय बर्तन बनाने में मेलैमीन बहुलक काम में आता है। जो कि मेलैमीन तथा फॉर्मेल्डिहाइड से बनता है।

प्रश्न 6.
प्राकृतिक रबर में कौनसा यौगिक पाया जाता है? इसका सूत्र तथा नाम बताइए।
उत्तर:
प्राकृतिक रबर में आइसोप्रीन पाया जाता है। इसका सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 1है तथा इसका IUPAC नाम 2-मेथिल-1,3-ब्यूटाडाईन है।

प्रश्न 7.
ताप सुघट्य बहुलकों के दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
पॉलिप्रोपीन तथा पॉलिवाइनिल क्लोराइड ताप सुघट्य बहुलक हैं।

प्रश्न 8.
रेशेदार बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
नाइलॉन-6,6 तथा टैरीलीन रेशेदार बहुलक हैं।

प्रश्न 9.
ऐसे दो बहुलक बताइए जो संघनन बहुलकीकरण से बनते हैं तथा जिनमें तिर्यक बन्धन होता है।
उत्तर:
बैकेलाइट तथा मैलेमीन।

प्रश्न 10.
ताप दृढ़ बहुलकों के दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
बैकेलाइट तथा यूरिया फार्मेल्डिहाइड रेजिन।

प्रश्न 11.
बहुलकों के अणुभार ज्ञात करने के प्रकार बताइए तथा उनके सूत्र भी दीजिए।
उत्तर:
बहुलकों के अणुभार दो प्रकार से ज्ञात किए जाते हैं।

  • संख्या औसत अणुभार (\(\overline{M}\)n) = \(\frac{\sum \mathbf{n}_i \mathbf{M}_i}{\sum \mathbf{n}_i}\)
  • भार औसत अणुभार (\(\overline{M}\)w) = \(\frac{\sum \mathrm{n}_i \mathbf{M}_i^2}{\sum \mathrm{n}_i \mathbf{M}_i}\)

प्रश्न 12.
वल्कनीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
अपरिष्कृत रबर को 373K से 415K ताप पर सल्फर के साथ गरम करने पर इसकी प्रत्यास्थता तथा कठोरता में वृद्धि हो जाती है। इसे रबर का वल्कनीकरण कहते हैं।

प्रश्न 13.
रबर के वल्कनीकरण में सल्फर का क्या कार्य है?
उत्तर:
रबर के वल्कनीकरण में सल्फर, बहुलक श्रृंखलाओं के मध्य तिर्यक बन्ध बनाता है जिसके कारण ही इसकी प्रत्यास्थता बढ़ती है।

प्रश्न 14.
बबलगम का मुख्य अवयव कौनसा बहुलक होता है?
उत्तर:
SBR (स्टाइरीन ब्यूटाडाईन रबर)।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
(a) जैव बहुलक क्या होते हैं? इनके दो उदाहरण दीजिए।
(b) बहुलकीकरण की मात्रा क्या होती है ?
उत्तर:
(a) वे बहुलक जो जीवों (पौधे तथा जन्तुओं) में पाए जाते हैं उन्हें जैव बहुलक कहते हैं। प्रोटीन तथा पॉलिसैकैराइड (कार्बोहाइड्रेट) इनके उदाहरण हैं।

(b) बहुलकीकरण की प्रक्रिया में प्राप्त उत्पाद की मात्रा को बहुलकीकरण की मात्रा कहते हैं। इससे किसी बहुलक में उपस्थित एकलक इकाइयों की संख्या ज्ञात होती है।

प्रश्न 2.
रैखिक तथा शाखित श्रृंखला बहुलकों की सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
संरचना के आधार पर बहुलक तीन प्रकार के होते हैं-
(a) रैखिक बहुलक रैखिक बहुलकों में एकलक इकाइयाँ आपस में जुड़कर सीधी शृंखला बनाती हैं जो कि पास-पास व्यवस्थित होती हैं। अतः इनके घनत्व तथा गलनांक अधिक होते हैं तथा इनमें प्रबल अन्तराअणुक आकर्षण बल होता है। उदाहरण-उच्च घनत्व पॉलिथीन (HDP), पॉलीवाइनिल क्लोराइड (PVC) नाइलॉन तथा पॉलिएस्टर इत्यादि।

(b) शाखित शृंखला बहुलक-इन बहुलकों में रेखीय शृंखलाओं में कुछ शाखाएं जुड़ी होती हैं। इनके घनत्व व गलनांक कम होते हैं तथा इनमें आकर्षण बल अपेक्षाकृत दुर्बल होते हैं। उदाहरण-निम्न घनत्व पॉलिथीन (LDP)।

(c) तिर्यकबंधित या जालक्रम या नेटवर्क बहुलक-तिर्यक बंधित बहुलक सामान्यतः द्विक्रियात्मक तथा त्रिक्रियात्मक समूह युक्त एकलकों से बनते हैं। इनमें रेखीय बहुलक शृंखलाएँ तिर्यक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं तथा इन रेखीय बहुलक शृंखलाओं के मध्य प्रबल सहसंयोजक बन्ध होता है। इस कारण ये बहुलक कठोर, दृढ़ तथा भंगुर होते हैं। उदाहरण-बैकेलाइट तथा मैलैमीन इत्यादि।

प्रश्न 3.
जालक्रम या नेटवर्क बहुलक क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
तिर्यकबंधित या जालक्रम या नेटवर्क बहुलक-तिर्यक बंधित बहुलक सामान्यतः द्विक्रियात्मक तथा त्रिक्रियात्मक समूह युक्त एकलकों से बनते हैं। इनमें रेखीय बहुलक श्रृंखलाएँ तिर्यक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं तथा इन रेखीय बहुलक शृंखलाओं के मध्य प्रबल सहसंयोजक बन्ध होता है। इस कारण ये बहुलक कठोर, दृढ़ तथा भंगुर होते हैं। उदाहरण-बैकेलाइट तथा मैलैमीन इत्यादि।

प्रश्न 4.
प्रत्यास्थ तथा रेशेदार बहुलकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(a) प्रत्यास्थ बहुलक (Elastomers)-प्रत्यास्थ बहुलकों में बहुलक शृंखलाएँ आपस में दुर्बल अंतराआण्विक बलों द्वारा जुड़ी होती हैं। ये दुर्बल बल बहुलक को तनित होने देते हैं। शृंखलाओं के बीच कुछ ‘तिर्यकबंध’ भी होते हैं अतः ये बहुलक खींचने पर लम्बे हो जाते हैं तथा छोड़ देने पर पुनः अपनी पूर्व अवस्था में आ जासे हैं अर्थात् इनमें प्रत्यास्थता का गुण पाया जाता है। ये रबर के समान ठोस होते हैं जैसे वल्कनीकृत रबर। ब्यूना- N, ब्यूना-S तथा निओप्रीन भी प्रत्यास्थ बहुलकों के उदाहरण हैं।

(b) रेशे या रेशेदार बहुलक (Fibres or Fibrous Polymers)-रेशेदार बहुलकों में तनन सामर्थ्य उच्च होता है क्योंकि इनमें बहुलक शृंखलाओं के मध्य असंख्य प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाए जाते हैं। इसी कारण ये क्रिस्टलीय ठोस होते हैं तथा इनका गलनांक तीक्ष्ण होता है। ये बहुलक धागे बनाने में प्रयुक्त होते हैं। उदाहरण-पॉलिएस्टर (टैरीलीन) तथा पॉलिऐमाइड (नाइलॉन6,6) इत्यादि।

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प्रश्न 5.
धनायनिक तथा ऋणायनिक बहुलकीकरण को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
आयनिक क्रियाविधि-शृंखला वृद्धि बहुलकीकरण की क्रिया आयनिक क्रियाविधि द्वारा भी होती है। इसमें श्रंखला को प्रारम्भ करने के लिए सक्रिय आयन प्रयुक्त होते हैं। ये धनायन अथवा ऋणायन हो सकते हैं।
(i) धनायनिक बहुलकीकरण-धनायनिक बहुलकीकरण Al3 तथा BF3 इत्यादि (लुइस अम्ल) की उपस्थिति में या अम्लीय माध्यम (H2SO4) में होता है। इसमें सर्वप्रथम एकलक तथा अम्ल की क्रिया से धनायन बनता है जो कि बहुलकीकरण को आगे बढ़ाता है। उदाहरण-आइसोब्यूटिलीन से पॉलि आइसो ब्यूटिलीन का निर्माण।

(ii) ऋणायनिक बहुलकीकरण-ऋणायनिक बहुलकीकरण में ऋणावेशित आयन श्रृंखला वाहक का कार्य करते हैं जैसे \(\overline{N}\)H2 (NaNH2 से) उदाहरण-स्टाइरीन से पॉलिस्टाइरीन का निर्माण।

नोट-आयनिक क्रियाविधि का विस्तृत विवेचन आपके पाठ्यक्रम में नहीं है।

प्रश्न 6.
ऐल्कीन से बनने वाले बहुलकों के दो उदाहरण दीजिए तथा उनके बनाने का समीकरण भी लिखिए।
उत्तर:
पॉलिथीन तथा पॉलिप्रोपीन ऐल्कीनों से बनने वाले महत्त्वपूर्ण बहुलक हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 2a

प्रश्न 7.
निम्नलिखित बहुलकों को बनाने का समीकरण, उनके गुण तथा उपयोग दीजिए।
(i) पॉलिस्टाइरीन
(ii) निओप्रीन।
उत्तर:
(i) (a) पॉलिस्टाइरीन (Polystyrene)-इसे स्टाइरीन को परॉक्साइड की उपस्थिति में गरम करके बनाया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 2
पॉलिस्टाइरीन एक रंगहीन, पारदर्शी तथा सुदृढ़ प्लास्टिक होता है। इसे विद्युतरोधी के रूप में, खिलौने, रेडियो, टेलीविजन के केबिनेट बनाने में तथा रेफ्रिजरेटरों व एयरकन्डीशनरों में प्रयुक्त किया जाता है। इसे साँचे में ढले सामान बनाने में भी प्रयुक्त किया जाता है।

(b) पॉलिडाइईन बहुलक-पॉलिडाइईन बहुलकों को 1,3 डाईईनों अथवा उनके व्युत्पन्नों के योगात्मक बहुलकीकरण से अथवा कुछ अन्य असंतृप्त यौगिकों के साथ योगात्मक बहुलकीकरण से बनाया जाता है।
1. पॉलिआइसोप्रीन-पॉलिआइसोप्रीन को आइसोप्रीन के बहुलकीकरण से बनाया जाता है। इसके गुण प्राकृतिक रबर के समान होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 3
2. निओप्रीन अथवा पॉलिक्लोरोप्रीन-यह क्लोरोप्रीन के बहुलकीकरण से प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 4
निओप्रीन प्रत्यास्थ तथा अत्यन्त सुदृढ़ रबर होता है अतः यह जूतों के क्रेप सोल, गोताखोरों के सूट, पेन्ट, आसंजक इत्यादि के बनाने में उपयोगी होता है। यह वनस्पति तथा खनिज तेल के प्रति प्रतिरोधक होता है, अतः इसे गास्केट वाहक पट्टे तथा हौज बनाने में प्रयुक्त करते हैं।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित बहुलकों को किस प्रकार बनाया जाता है?
(i) टेफ्लॉन
(ii) पॉलिएक्रिलोनाइट्राइल
उत्तर:
टे फ्लॉन (पॉॅलिटे ट्राफ्लु ओरोएथीन) [Teflon (Polytetra-fluoroethenc)! (PTFE)-टेफ्लॉन, टेट्राफ्लुओरोएथीन को मुक्तमूलक अथवा परसल्फेट उत्प्रेरक के साथ उच्च दाब पर गर्म करके बनाया जाता है। यह रासायनिक रूप से अक्रिय तथा संक्षारक अभिकर्मकों के प्रति प्रतिरोधी होता है। अतः इसको तेल सीलों तथा गैस्केटों के निर्माण में एवं न चिपकने वाली (नॉन-स्टिक) सतह से लेपित बर्तन बनाने में उपयोग में लिया जाता है। टेफ्लॉन परत 573 K(300°C) से ऊपर ताप पर विघटित हो जाती है।
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पॉलिऐक्रिलेट बहुलक-पॉलिऐक्रिलेट बहुलकों को विभिन्न ऐक्रिलिक एकलकों के योगात्मक बहुलकीकरण द्वारा बनाया जाता है।

पॉलिऐक्रिलोनाइट्राइल (PAN) या ऑरलॉन (ORLON) या एक्रिलन-परॉक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐक्रिलोनाइट्राइल (वाइनिल सायनाइड) के योगात्मक बहुलकीकरण से पॉलिऐक्रिलोनाइट्राइल प्राप्त होता है।
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पॉलिऐक्रिलोनाइट्राल का उपयोग ऊन के प्रतिस्थापी के रूप में, औद्योगिक रेशे जैसे ऑरलॉन या ऐक्रिलन बनाने में होता है। ऐक्रिलन से बने रेशे, धब्बों, रसायनों, कीटों तथा कवक के प्रति प्रतिरोधी होते हैं।

प्रश्न 9.
यूरिया फार्मेल्डिहाइड रेजिन बनाने की विधि, गुण तथा उपयोग बताइए।
उत्तर:
यूरिया-फॉर्मैल्डिहाइड रेजिन-यूरिया तथा फॉर्मैल्डिहाइड को पिरिडीन या अमोनिया की अल्प मात्रा की उपस्थिति में गरम करने पर पहले मेथिलॉल यूरिया बनता है जिसके बहुलकीकरण से बैकेलाइट के समान तापदृढ़ बहुलक बनाता है जिसे यूरिया फॉर्मैल्डिहाइड रेजिन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 7
यूरिया-फॉर्मैल्डिहाइड रेजिन का उपयोग साँचे में ढले उपकरण, सुरक्षा कवच, कागज, आसंजक, न टूटने वाले कप तथा पटलित चादरें (laminated sheets) आदि के निर्माण में किया जाता है।

प्रश्न 10.
(a) प्रत्यास्थ बहुलक का एक उदाहरण बताइए।
(b) बहुलकीकरण की क्रियाविधि के आधार पर योगात्मक तथा संघनन बहुलकों के नाम बताइए।
उत्तर:
(a) वल्कनीकृत रबर, प्रत्यास्थ बहुलक का उदाहरण है।

(b) बहुलकीकरण की क्रियाविधि के आधार पर योगात्मक बहुलकों को श्रृंखला वृद्धि बहुलक तथा संघनन बहुलकों को पदशःवृद्धि बहुलक कहते हैं।

प्रश्न 11.
(a) PHBV का सम्पूर्ण नाम बताइए।
(b) नाइलॉन-2-नाइलॉन-6 बहुलक किस प्रकार का होता है तथा इसे कैसे बनाया जाता है?
उत्तर:
(a) PHBV का सम्पूर्ण नाम पॉलि ß-हाइड्रॉक्सीब्यूटिरेट-को-ß-हाइड्रॉक्सी वैलेरेट है।

(b) नाइलॉन-2-नाइलॉन 6 जैवनिम्ननीय बहुलक है जो कि ग्लाइसीन (H2N-CH2-COOH) तथा ऐमीनोकैप्रोइक अम्ल (H2N-(CH2)5-COOH) का एकान्तर पॉलिऐमाइड बहुलक है।

प्रश्न 12.
ब्यूना – N बहुलक के बनाने की विधि तथा उपयोग बताइए।
उत्तर:
1,3-ब्यूटाडाईन तथा एक्रिलोनाइट्राइल के सोडियम की उपस्थिति में सहबहुलकीकरण से ब्यूना – N प्राप्त होता है। यह पेट्रोल, स्नेह तेल तथा कार्बनिक विलायकों के प्रति प्रतिरोधी होता है, अतः इसे तेल सील तथा टंकियों के अस्तर इत्यादि बनाने में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 13.
बहुलकों के आण्विक द्रव्यमान सदैव औसत के रूप में व्यक्त किए जाते हैं। क्यों?
उत्तर:
बहुलकों के गुण उनके आण्विक द्रव्यमान, आकार तथा संरचना पर निर्भर करते हैं। बहुलकों की श्रृंखला की लंबाई उनके निर्माण के दौरान अभिक्रिया मिश्रण में उपस्थित एकलकों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। इस प्रकार, बहुलक के नमूने में विभिन्न लम्बाई की श्रृंखलाएं उपस्थित होती हैं, अतः बहुलक का आण्विक द्रव्यमान भी भिन्न-भिन्न होता है। इसलिए इनका आण्विक द्रव्यमान सदैव एक औसत के रूप में व्यक्त किया जाता है। बहुलकों के आण्विक द्रव्यमान को रासायनिक तथा भौतिक विधियों द्वारा ज्ञात किया जाता है।

बहुलनों के औसत अणुभार (आण्विक द्रव्यमान) दो प्रकार के होते हैं-

  • संख्या औसत अणुभार तथा
  • भार औसत अणुभार।

(a) संख्या औसत अणुभार (The Number Average Molecular Weight)-बहुलक में उपस्थित विभिन्न बहुलक अणुओं के अणुभारों के योग में कुल बहुलक अणुओं की संख्या का भाग देने पर प्राप्त अणुभार, संख्या औसत अणुभार कहलाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 8
माना कि बहुलक के नमूने में n1 संख्या M1 अणुभार वाले n2 संख्या M2 अणुभार वाले तथा n3 संख्या M3 अणुभार वाले बहुलक अणुओं की है तो बहुलक अणुओं का कुल भार W= n1M1 + n2M2 + n3M3
बहुलक अणुओं की कुल संख्या = n1 + n2 + n3
अतः \(\overline{M}\)n = \(\frac{\mathbf{n}_1 \mathbf{M}_1+\mathbf{n}_2 \mathbf{M}_2+\mathbf{n}_3 \mathbf{M}_3}{\mathbf{n}_1+\mathbf{n}_2+\mathbf{n}_3}\)
या \(\overline{M}\)n = \(\frac{\sum \mathrm{n}_i \mathbf{M}_i}{\sum \mathrm{n}_i}\)
यहाँ ni = i प्रकार के अणुओं की संख्या
तथा Mi = i प्रकार के अणुओं का अणुभार
उदाहरण (1) – एक बहुलक के तीन अणुओं के द्रव्यमान 1000, 5000 तथा 10,000 है तो इस बहुलक का संख्या औसत अणु भार ज्ञात कीजिए।
हल- \(\overline{M}\)n = \(\frac{(1000 \times 1)+(5000 \times 1)+(10,000 \times 1)}{1+1+1}\)
\(\overline{M}\)n = \(\frac{1000+5000+10,000}{3}\) = \(\frac { 16000 }{ 3 }\)
= 5333.3

(b) भार औसत अणुभार (Weight Average Molecular Weight) – बहुलक के नमूने में उपस्थित प्रत्येक बहुलक अणु के कुल भार को उसके अणुभार से गुणा करते हैं तथा प्राप्त सभी गुणकों को जोड़कर बहुलक नमूने में उपस्थित प्रत्येक प्रकार के बहुलक अणुओं के कुल भार से भाग देने पर प्राप्त अणुभार भार औसत अणुभार कहलाता है।
अतः भार औसत अणुभार (\(\overline{M}\)w) = \(\frac{W_1 M_1+W_2 M_2+W_3 M_3 \cdots}{W_1+W_2+W_3}\)
यहाँ W1, W2 तथा W3 विभिन्न प्रकार के बहुलक अणुओं के कुल भार हैं तथा M1, M2, तथा M3 क्रमशः उन बहुलक अणुओं के अणुभार हैं।
तो w1 = n1M1 , w2 = n2M2, w3 = n3M3
मान रखने पर
\(\overline{M}\)w = \(\frac{\mathrm{n}_1 \mathrm{M}_1^2+\mathrm{n}_2 \mathrm{M}_2^2+\mathrm{n}_3 \mathrm{M}_3^2}{\mathrm{n}_1 \mathrm{M}_1+\mathrm{n}_2 \mathrm{M}_2+\mathrm{n}_3 \mathrm{M}_3}\)
\(\overline{M}\)w = \(\frac{\sum \mathrm{n}_i \mathbf{M}_i^2}{\sum \mathrm{n}_i \mathbf{M}_i}\)
\(\overline{M}\)w का मान \(\overline{M}\)n से अधिक होता है।

उदाहरण (2) – बहुलक के एक नमूने में 25% अणुओं का अणुभार 30,000, 45% अणुओं का अणुभार 20,000 तथा शेष अणुओं का अणुभार 50,000 है तो इसके संख्या औसत अणुभार तथा भार औसत अणुभार ज्ञात कीजिए।

हन – (i) संख्या औसत अणुभार
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 9

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
संघनन बहुलकीकरण और योगात्मक बहुलकीकरण में अंतर स्पष्ट कीजिए। प्राप्त होने वाले प्रत्येक प्रकार के बहुलक का एक-एक उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
संकलन या योगात्मक बहुलकन (बहुलकीकरण) में समान अथवा भिन्न अंसतृप्त एकलक अणु मिल कर बृहत् बहुलक अणु बनाते हैं जबकि संघनन बहुलकन में दो अथवा अधिक प्रकार के द्विक्रियात्मक एकलक अणु संघनन अभिक्रिया द्वारा बहुलक बनाते हैं, इस प्रक्रिया में छोटे अणु जैसे जल, ऐल्कोहॉल इत्यादि का विलोपन होता है। उदाहरण-प्रोपीन (CH3CH = CH2) से पॉलिप्रोपीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 10का बनना संकलन बहुलकन है जबकि हैक्सा मेथिलीन डाइऐमीन (NH2-(CH2)6NH2) तथा ऐडिपिक अम्ल (HOOC- (CH2)4COOH) के बहुलकन से नाइलॉन 6,6 का बनना संघनन बहुलकन है। इसमें H2O का विलोपन होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 11

प्रश्न 2.
नाइलॉन – 6,6 में ‘6,6’ क्या संकेत करता है?
उत्तर:
नाइलॉन 6,6 ऐडिपिक अम्ल HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 12तथा हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन (H2N-(CH2)6-NH2) से बनता है। इन दोनों यौगिकों में 6 कार्बन परमाणु हैं अतः नाइलॉन – 6,6 में ‘6,6’ एकलक अणुओं में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या का संकेत करता है।

प्रश्न 3.
इनके एकलकों की आण्विक संरचनाएँ आरेखित कीजिए :
(i) PVC
(ii) टेफ्लॉन।
उत्तर:
(i) PVC का एकलक CH2 = CH-Cl ( वाइनिल क्लोराइड) होता है।
(ii) टेफ्लॉन का एकलक CF2 = CF2 टेट्राफ्लुओरो एथीन होता है।

प्रश्न 4.
पॉलिथीन के एकलक की संरचना बनाइए।
उत्तर:
पॉलिथीन की एकलक एथीन (CH2) = CH2) होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक

प्रश्न 5.
थर्मोप्लास्टिक (तापसुघट्य) और थर्मोसेटिंग (तापदृढ़) बहुलकों के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। प्रत्येक का एक- एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सभी प्रकार के अणुओं में अन्तराअणुक बल पाए जाते हैं लेकिन बहुलकों में ये बल आपस में मिलकर अधिक प्रभावी होते हैं जिससे इनमें विशिष्ट गुण उत्पन्न हो जाते हैं। जैसे-तनन सामर्थ्य, प्रत्यास्थता तथा चर्मलता। इन बलों द्वारा बहुलक शृंखलाएँ आपस में जुड़ी होती हैं। बहुलकों के यांत्रिक गुणों के आधार पर ही इन्हें दैनिक जीवन में विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग में लिया जाता है।
बहुलकों को उनमें उपस्थित अंतराआण्विक बलों के परिमाण के आधार पर इन्हें निम्नलिखित चार उपसमूहों में वर्गीकृत किया गया है-

(a) प्रत्यास्थ बहुलक (Elastomers) -प्रत्यास्थ बहुलकों में बहुलक शृंखलाएँ आपस में दुर्बल अंतराआण्विक बलों द्वारा जुड़ी होती हैं। ये दुर्बल बल बहुलक को तनित होने देते हैं। श्रृंखलाओं के बीच कुछ ‘तिर्यकबंध’ भी होते हैं अतः ये बहुलक खींचने पर लम्बे हो जाते हैं तथा छोड़ देने पर पुनः अपनी पूर्व अवस्था में आ जासे हैं अर्थात् इनमें प्रत्यास्थता का गुण पाया जाता है। ये रबर के समान ठोस होते हैं जैसे वल्कनीकृत रबर। ब्यूना- N, ब्यूना- S तथा निओप्रीन भी प्रत्यास्थ बहुलकों के उदाहरण हैं।

(b) रेशे या रेशेदार बहुलक (Fibres or Fibrous Polymers) -रेशेदार बहुलकों में तनन सामर्थ्य उच्च होता है क्योंक इनमें बहुलक शृंखलाओं के मध्य असंख्य प्रबल अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाए जाते हैं। इसी कारण ये क्रिस्टलीय ठोस होते हैं तथा इनका गलनांक तीक्ष्ण होता है। ये बहुलक धागे बनाने में प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरण-पॉलिएस्टर (टैरीलीन) तथा पॉलिऐमाइड (नाइलॉन 6,6) इत्यादि।

(c) तापसुघट्य बहुलक या ताप सुनम्य बहुलक (Thermoplastic Polymers) -ये बहुलक रेखीय अथवा अल्प शाखित लंबी श्रृंखला युक्त होते हैं, जिन्हें बार-बार गरम करने से मृदुल और ठंडा करने से कठोर हो जाते हैं अतः इन्हें साँचों में ढाला जा सकता है। इन बहुलकों में अंतराआण्विक आकर्षण बल प्रत्यास्थ बहुलकों से अधिक तथा रेशों से कम होता है। उदाहरण-पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन, पॉलिवाइनिल क्लोराइड, पॉलिप्रोपिलीन इत्यादि।

(d) तापदृढ़ बहुलक या थर्मोसेटिंग बहुलक (Thermosetting Polymers)-ये बहुलक तिर्यक बद्ध अथवा अत्यधिक शाखित होते हैं। इन्हें गर्म करने पर तिर्यक बन्धन बढ़ जाते हैं तथा इनकी संरचना त्रिविमीय जालक के समान हो जाती है अतः ये दुर्गलनीय (Infusible) हो जाते हैं। इसलिए इनका पुनः उपयोग नहीं किया जा सकता। ताप दृढ़ बहुलकों को सामान्यतः निम्न अणु भार वाले अर्ध तरल बहुलकों को गरम करके बनाया जाता है। उदाहरण-बैकेलाइट, यूरिया-फार्मेल्डिहाइड रेजिन इत्यादि।

प्रश्न 6.
नाइलॉन – 6 बहुलक की एकलक इकाई का नाम व सूत्र लिखिए।
उत्तर:
नाइलॉन – 6 बहुलक की एकलक इकाई कैप्रोलैक्टम है जिसका सूत्र निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 13

प्रश्न 7.
चार व पाँच कार्बनयुक्त कार्बोक्सिलिक अम्लों के सहबहुलकीकरण से बनने वाले जैव निम्ननीकृत बहुलक जिसका उपयोग औषधियों के नियंत्रित मोचन से होता है, के बनाने की समीकरण दीजिए।
उत्तर:
पॉलि ß-हाइड्रॉक्सीब्यूटिरेट-को-ß-हाइड्रॉक्सी वैलेरेट (PHBV)-यह एक ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर है। यह 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनॉइक अम्ल तथा 3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनॉइक अम्ल के सहबहुलकीकरण से बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 14
PHB V का उपयोग विशिष्ट पैकेजिंग, अस्थियों में प्रयुक्त युक्तियों (Devices) तथा औषधों के नियंत्रित मोचन (release) में होता है। पर्यावरण में PHBV का जीवाण्विक निम्नीकरण (Bacterial degradation) हो जाता है।

प्रश्न 8.
अंतराआण्विक बलों के मान के आधार पर निम्नलिखित बहुलकों को वर्गीकृत कीजिए-
बैकेलाइट, टेरीलीन, निओप्रीन, पॉलिथीन।
उत्तर:
अंतराआण्विक बलों के मान के आधार पर इन बहुलकों को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जाता है-

  • बैकेलाइट – तापदृढ़ बहुलक
  • टेरीलीन – रेशे बहुलक
  • निओप्रीन – प्रत्यास्थ बहुलक
  • पॉलिथीन – तापसुघट्य बहुलक।

प्रश्न 9.
नाइलॉन – 6, 6 को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलकों के नाम दीजिए ।
उत्तर:
नाइलॉन – 6, 6 को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक हैक्सा मेथिलीन डाइऐमीन तथा ऐडिपिक अम्ल हैं।

प्रश्न 10.
मुक्तमूलक योगज बहुलकीकरण में प्रयुक्त प्रारंभक का संरचना सूत्र व इसकी उपयोगिता दीजिए।
उत्तर:
मुक्तमूलक योगज बहुलकीकरण में प्रयुक्त प्रारम्भक का संरचना सूत्र निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 15
यह फेनिलमुक्त मूलक बनाकर अभिक्रिया को प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 11.
तापदृढ़ व तापसुघट्य बहुलकों में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:

  1. तापदृढ़ बहुलक तिर्यकबद्ध या अधिकशाखित होते हैं जबकि तापसुघट्य बहुलक रेखीय या अल्पशाखित होते हैं।
  2. तापदृढ़ बहुलकों को पुनः मृदु नहीं बनाया जा सकता जबकि तापसुघट्य बहुलकों को गर्म करके पुनः मृदु बनाया जा सकता है।

प्रश्न 12.
(अ) योगज बहुलक को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
(ब) संश्लेषित रबर के विरचन का समीकरण लिखिए।
(स) डेक्रॉन को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलकों के नाम दीजिए।
अथवा
(अ) संघनन बहुलक को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
(ब) ताप सुघट्य एवं ताप दृढ़ बहुलकों के एक-एक उदाहरण दीजिए।
(स) ब्यूना – N को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलकों के नाम दीजिए।
उत्तर:
(अ) योगज बहुलक या योगात्मक बहुलक – द्विबन्ध तथा त्रिबन्ध युक्त एकलक अणुओं के पुनरावृत्त योग से बने बहुलकों को योगज बहुलक कहते हैं। ये एकलक अणु समान या भिन्न होते हैं।
उदाहरण – एथीन से पॉलिथीन का बनना।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 16
(ब) निओप्रीन एक संश्लेषित रबर है। यह क्लोरोप्रीन के मुक्त मूलक बहुलकन से बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 17
(स) डेक्रॉन बनाने के लिए प्रयुक्त एकलक एथिलीन ग्लाइकॉल (एथेन-1,2-डाइऑल) तथा टेरेफ्थैलिक अम्ल (बेन्जीन-1,4डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल ) हैं।
अथवा
(अ) संघनन बहुलक-संघनन बहुलक दो भिन्न द्विक्रियात्मक अथवा त्रिक्रियात्मक एकलक इकाइयों के मध्य पुनरावृत्त संघनन अभिक्रिया से बनते हैं। इस बहुलकन अभिक्रिया में छोटे अणुओं जैसे जल, ऐल्कोहॉल, हाइड्रोजन क्लोरइड आदि का विलोपन होता है। उदाहरण-नाइलॉन- 6,6 हैक्सामेथिलीनडाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल के संघनन से बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 18

(ब) पॉलिस्टाइरीन एक ताप सुघट्य बहुलक है जबकि बैकेलाइट एक ताप दृढ़ बहुलक है।

(स) ब्यूना-N 1,3-ब्यूटाडाईईन तथा एक्रिलो नाइट्राइल एकलकों के सहबहुलकीकरण से प्राप्त होता है।

प्रश्न 13.
(i) संघनन बहुलक का एक उदाहरण दीजिए।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 19 एक समबहुलक है या सहबहुलक।
उत्तर:
(i) नाइलॉन- 6,6 संघनन बहुलक का उदाहरण है क्योंकि यह एडिपिक अम्ल तथा हैक्सा मेथिलीन डाइएमीन के संघनन से बनता है।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 20एक समबहुलक है क्योंकि यह केवल एक ही प्रकार के एकलक अणुओं से बना है।

प्रश्न 14.
प्लास्टिक की थैलियों पर प्रतिबन्ध के बाद एक स्कूल के विद्यार्थियों ने प्लास्टिक की थैलियों का पर्यावरण तथा यमुना नदी पर होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को सजग करने की योजना बनायी। इन्होंने दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों के साथ मिलकर रैली निकाली तथा सब्जी वालों एवं दुकानदारों को कागज से बनी थैलियाँ वितरित कीं तथा सभी विद्यार्थियों ने पॉलिथीन की थैलियों का प्रयोग नहीं करने की शपथ ली ताकि यमुना नदी को बचाया जा सके।
इस गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) विद्यार्थियों द्वारा किन मूल्यों का प्रदर्शन किया गया?
(ii) जैव निम्ननीय बहुलक क्या होते हैं ? एक उदाहरण दीजिए।
(iii) पॉलिथीन एक संघनन बहुलक है या योगात्मक बहुलक?
उत्तर:
(i) विद्यार्थी प्लास्टिक की थैलियों के पर्यावरण तथा यमुना नदी पर होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति सजग हैं।

(ii) जैव निम्ननीय बहुलक वे बहुलक होते हैं जो एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं द्वारा विघटित हो जाते हैं। उदाहरण पॉलि- ß हाइड्रॉक्सीब्यूटिरेट को- ß-हाइड्रॉक्सी वैलेरेट (PHB V)।

(iii) पॉलिथीन एक योगात्मक बहुलक है।

प्रश्न 15.
ताप दुढ़ बहुलक क्या हैं?
उत्तर:
ताप दृढ़ बहुलक तिर्यक बद्ध अथवा अत्यधिक शाखित होते हैं जिन्हें गर्म करने पर तिर्यक बन्धन बढ़ जाते हैं तथा इनकी संरचना त्रिविमीय जालक के समान हो जाती है। अतः ये दुर्गलनीय हो जाते हैं। उदाहरण-बैकेलाइट।

प्रश्न 16.
PHBV बहुलक के एकलकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
PHBV एक ऐलिफैटिक पॉलिएस्टर है तथा यह 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनॉइक अम्ल एवं 3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनॉइक अम्ल एकलकों के सहबहुलकीकरण से बनता है।

प्रश्न 17.
नाइलॉन 6,6 किस प्रकार प्राप्त किया जाता है? अभिक्रिया दीजिए।
उत्तर:
हेक्सामेथिलीनडाइऐमीन तथा ऐडिपिक अम्ल के उच्च दाब तथा उच्च ताप (553 K) पर संघनन से नाइलॉन- 6,6 प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक 21

प्रश्न 18.
समझाइए कि वल्कनीकृत रबड़ एक प्रत्यास्थ बहुलक होता है।
उत्तर:
वल्कनीकृत रबड़ में शृंखलाओं के मध्य कुछ तिर्यक बन्ध होते हैं अतः यह खींचने पर लंबा तथा छोड़ देने पर पुनः अपनी पूर्व अवस्था में आ जाता है अर्थात् इसमें प्रत्यास्थता का गुण होता है अतः यह एक प्रत्यास्थ बहुलक है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 15 बहुलक

प्रश्न 19.
योगात्मक तथा संघनन बहुलकीकरण में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:
योगात्मक तथा संघनन बहुलकीकरण में निम्नलिखित अन्तर हैं-
(i) योगात्मक बहुलकीकरण में समान अथवा भित्र असंतृप्त एकलक अणु आपस में मिल कर बृहद बहुलक अणु बनाते हैं जबकि संघनन बहुलकीकरण में दो अथवा अधिक प्रकार के द्विक्रियात्मक एकलक अणु संघनन अभिक्रियाओं द्वारा बहुलक बनाते हैं।

(ii) योगात्मक बहहुलकीकरण में किसी छोटे अणु का विलोपन नहीं होता जबकि संघनन बहुलकीकरण में छोटे अणु जैसे जल, ऐल्कोहॉल इत्यादि का विलोपन होता है। उदाहरण-पॉलिप्रोपीन योगात्मक बहुलक है जबकि नाइलॉन- 6,6 संघनन बहुलक है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों के नाम और उनकी संरचनाएँ लिखिए :
(i) नाइलॉन-6,6
(ii) बेकेलाइट
(iii) पॉलिस्टाइरीन।
उत्तर:
(i) नाइलॉन-6,6-इसे प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक हैक्सामेथिलीनडाइऐमीन (H2N – (CH2)6NH2) तथा ऐडिपिक अम्ल (HOOCl(CH2)4COOH है।

(ii) बैकेलाइट बहुलक के बनाने में प्रयुक्त होने वाले एकलक फार्मेल्डिहाइड (HCHO) और फीनॉल (C6H5OH) हैं।

(iii) पॉलिस्टाइरीन बहुलक बनाने के लिए प्रयुक्त एकलक स्टाइरीन (C6H5CH = CH2) है।

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए-
(i) स्थानिक आंकड़ों के लक्षण निम्नांकित स्वरूप में दिखाई देते हैं-
(क) अवस्थितिक
(ग) क्षेत्रीय
(ख) रैखिक
(घ) उपर्युक्त सभी स्वरूपों में
उत्तर:
(ग) क्षेत्रीय।

(ii) विश्लेषक मॉड्यूल सॉफ्टवेयर के लिए कौन-सा एक
प्रचालन आवश्यक है?
(क) आंकड़ा संग्रहण
(ग) आंकड़ा निष्कर्षण
(ख) आंकड़ा प्रदर्शन
(घ) बफरिंग।
उत्तर:
(ख) आंकड़ा प्रदर्शन।

(iii) चित्ररेखापुंज ( रैस्टर) आंकड़ा फॉरमेट का एक अवगुण क्या है?
(क) सरल आंकड़ा संरचना
(ख) सहज एवं कुशल उपरिशायी
(ग) सुदूर संवेदन प्रतिबिंब के लिए सक्षम
(घ) कठिन परिपथ चाल विश्लेषण।
उत्तर:
(घ) कठिन परिपथ चाल विश्लेषण।

(iv) संदिश ( वेक्टर) आंकड़ा फॉरमेट का एक गुण क्या है?
(क) समिश्र आंकड़ा संरचना
(ख) कठिन उपरिशायी प्रचालन
(ग) सुदूर संवेदन आंकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता
(घ) सघन आंकड़ा संरचना |
उत्तर:
(क) समिश्र आंकड़ा संरचना।

(v) भौगोलिक सूचना तंत्र कीट में उपयोग कर नगरीय परिवर्तन की पहचान कुशलतापूर्वक की जाती है-
(क) उपरिशायी प्रचालन
(ख) सामीप्य विश्लेषण
(ग) परिपथ जाल विश्लेषण
(घ) बफरिंग।
उत्तर:
(घ) बफरिंग।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) चित्ररेखापुंज एवं सदिश ( वेक्टर) आंकड़ा मॉडल के मध्य अंतर-
उत्तर:
चित्ररेखापुंज आंकड़ा मॉडल: चित्ररेखापुंज आंकड़े वर्गों के जाल के प्रारूप में आंकड़ों का ग्राफी प्रदर्शन करते हैं। एक चित्र लेखापुंज फाइल एक प्रतिबिंब का प्रदर्शन कागज की उपविभाजित कर छोटी आयतों के आथूह जिन्हें सेल कहते हैं के रूप में करेगी, एक ग्राफ पेपर की शीट की तरह आंकड़ा फाइल में प्रत्येक सेल के स्थान के रूप में बिल्कुल एक ग्राफ पेपर की सीट की तरह आंकड़ा फाइल में हर एक सेल का एक स्थान दिया जाता है।

सदिश आंकड़ा मॉडल: सदिश आंकड़े वस्तु का प्रदर्शन विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में करते हैं। हर एक बिंदु की अभिव्यक्ति दो तथा तीन संख्याओं के रूप में होती है। एक सदिश आंकड़ा मॉडल अपने यथार्थ निर्देशांकों द्वारा भंडारित बिंदुओं का प्रयोग करता है।

(ii) उपरिशायी विश्लेषण क्या है?
उत्तर:
उपरिशायी विश्लेषण GIS का हॉलमार्क है। इसका प्रयोग करके मानचित्रों के बहुगुणी स्तरों का समन्वय एक महत्त्वपूर्ण विश्लेषण क्रिया है। अन्य शब्दों में भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) उसी क्षेत्र के मानचित्रों के दो तथा अधिक विषयक स्तरों का अधिचित्रण करके नया मानचित्र स्तर प्राप्त करने को संभव बनाता है। इसके द्वारा प्रकाशीय पेज पर मानचित्रों के अनुरेखाणों का अधिचित्रण किया जाता है।

(iii) भौगोलिक सूचना तंत्र में हस्तचलित विधि के गुण क्या हैं?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तंत्र में हस्तचलित विधि के गुण इस प्रकार हैं-

  1. भौगोलिक सूचना तंत्र की सहायता से संचित भौगोलिक आँकड़ों, आवश्यकता के अनुरूप बने मानचित्रों एवं चयनित आँकड़ा आधार प्राप्त करने की सुविधा मिल जाती है।
  2. मानचित्रीय सूचना एक विशेष ढंग से प्रक्रमित और प्रदर्शित की गई होती है।
  3. एक मानचित्र एक तथा एक से अधिक पूर्व निर्धारित विषय वस्तुओं को दर्शाता है।
  4. स्थानिक प्रचालकों का समन्वित सूचनाधार पर अनुप्रयोग करके सूचनाओं के नए समुच्चय उत्पन्न किए जा सकते हैं।
  5. विशेष आंकड़ों के विभिन्न आइटम एक-दूसरे के साथ अंश अवस्थिति कोड की सहायता से जोड़े जा सकते हैं।

(iv) भौगोलिक सूचना तंत्र के महत्त्वपूर्ण घटक क्या हैं? उत्तर-भौगोलिक सूचना तंत्र के महत्त्वपूर्ण घटक हैं-

  1. हार्डवेयर,
  2. सॉफ्टवेयर
  3. आंकड़े,
  4. लोग,
  5. प्रक्रिया।

(v) भौगोलिक सूचना तंत्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि क्या है?
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तंत्र के कोर में स्थानिक सूचना तंत्र बनाने की विधि इस प्रकार हैं-

  1. स्थानिक आंकड़ा निवेश
  2. गुण न्यास की प्रविष्टि
  3. आंकड़ों का सत्यापन और संपादन
  4. स्थानिक और गुण न्यास आंकड़ों की सहलग्नता
  5. स्थानिक विश्लेषण।

(vi) स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?
उत्तर:
स्थानिक शब्द अंतरिक्ष से उत्पन्न हुआ है। इसका अर्थ भौगोलिक रूप से परिभाषित क्षेत्र जिसके भौतिक रूप से नाप योग्य आयास हैं पर लक्षणों और परिघटनाओं के वितरण से है। अधिकांश आँकड़े जिनका आज हम उपयोग करते हैं, वह स्थानिक घटक होते हैं, जैसे कि किसी नगरपालिका का पता तथा कृषि जोत की सीमाएँ इत्यादि। इस प्रकार स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी का संबंध स्थानिक सूचना के संग्रहण, भंडारण, प्रदर्शन, हेरफेर, प्रबंधन और विश्लेषण में प्रौद्योगिक निवेश के प्रयोग से होता है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए-
(i) चित्ररेखापुंज ( रैस्टर) एवं सदिश ( वेक्टर) आंकड़ा फॉरमेट को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
चित्ररेखापुंज (रैस्टर) आंकड़े वर्गों के जाल के रूप में आंकड़ों का ग्राफी प्रदर्शन करते हैं जबकि सदिश ( वेक्टर) आंकड़े वस्तु का प्रदर्शन विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में किया जाता है। कागज के एक पुर्जे पर तिरछी खींची हुई एक रेखा पर ध्यान दीजिए।

एक चित्रलेखापुंज फाइल इस प्रतिबिंब का प्रदर्शन कागज की उपविभाजित करकर छोटी आयतों के आधूह जिन्हें सेल कहते हैं के स्वरूप में करेगी, जैसे ही एक ग्राफ पेपर की सीट की तरह आंकड़ा फाइल में हर एक सेल को एक स्थान दिया जाएगा। इसी प्रकार एक ग्राफ पेपर की शीट की तरह आंकड़ा फाइल में हर एक सेल का एक स्थान होता है तो उस स्थान के गुणों के आधार पर मूल्य पाती हैं इसकी पंक्तियों तथा स्तंभों के निर्देशांक किसी भी व्यक्तिगत पिक्सेल की पहचान करते हैं।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी 1
सदिश आंकड़ा फॉमेटः तिरछी रेख का सदिश प्रदर्शन सिर्फ निर्देशकों के आरंभिक एवं अंतिम बिंदुओं की दर्ज कर रेखा की स्थिति की दर्ज करके होगा। हर एक बिंदु की अभिव्यक्ति दो तथा तीन संख्याओं के रूप में होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रदर्शन 2D तथा 3D, जिसे X, Y तथा X, YZ निर्देशांकों द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी 2

(ii) भौगोलिक सूचना तंत्र से संबंधित कार्यों को क्रमबद्ध रूप में किस प्रकार किया जाता है एक व्याख्यात्मक लेख प्रस्तुत
कीजिए।
उत्तर:
भौगोलिक सूचना तंत्र से संबंधित कार्यों को इस प्रकार क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत करते हैं-
(1) स्थानिक आंकड़ा निवेश-
इन्हें निम्नलिखित दो वर्गों में संक्षेपित किया जा सकता है-
(a) आंकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक आंकड़ा समुच्चय का प्रगहण वर्तमान में आंकड़ा आपूर्तिदाता आंकिक आंकड़ों को तैयार रूप में उपलब्ध कराते हैं, जो लघु-मापनी मानचित्रों से लेकर बृहत् मापनी प्लान करती है।

(b) क्रियात्मक स्तर पर यह निश्चित करने के लिए कि आंकड़े अपने अनुप्रयोग के साथ संगत हैं, प्रयोक्ता की उनकी निम्नलिखित विशेषताओं का ध्यान रखिए।

  • आंकड़ों की मापनी
  • प्रयोग में लाई गई भौगोलिक संदर्भ प्रणाली
  • प्रयोग में लाई गई आंकड़े संग्रहण की तकनीकें और निर्देशन सामरिकी
  • आंकड़ा निवेश की हस्तेन विधियाँ इस बात पर निर्भर करती हैं। कि क्या सूचनाधार की संस्थिति सदिश हैं।

(2) गुणन्यास की प्रविष्टि यह मूल न्यास स्थानिक सत्ता की विशेषताओं जिनका निपटान भौगोलिक सूचना का वर्णन करता है। प्रकाशित रिकार्डों, सरकारी जनगणनाओं इत्यादि से उपर्जित गुणन्यास को GIS सूचनाधार में या तो हस्तेन अथवा मानक स्थानांतरण फॉर्मेट का प्रयोग करते हुए आंकड़ों का आयात करके निवेश किया जाता है।

(3) आंकड़ों का सत्यापन तथा संपादन आंकड़ों की शुद्धता को सुनिश्चित करने हेतु त्रुटियों की पहचान और संशोधन के लिए भौगोलिक सूचना तंत्र में प्रग्रहित आंकड़ों की सत्यापन की आवश्यकता होती है।

(4) स्थानिक विश्लेषण भौगोलिक सूचना तंत्र की प्रबलता उसकी विश्लेषणात्मक सामर्थ्य में निहित हैं जो चीज भौगोलिक सूचना तंत्र को अन्य सूचना तंत्रों से अलग करती है वह हैं उसकी स्थानिक विश्लेषण की क्रियाएँ।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
संगणक से क्या अभिप्राय है? इसकी क्या विशेषताएं हैं?
उत्तर:
आधुनिक युग संगणक (Computer) का युग है। Computer शब्द अंग्रेज़ी भाषा के शब्द Compute से लिया गया है। जिसका अर्थ गणना है। अतः संगणक एक वैद्युत् यंत्रीय युक्ति (Electronic Device) है जो सूचनाओं की बड़ी तीव्रता एवं शुद्धता के साथ गणना करता है। संगणक द्वारा अरबों गणनाएं संपन्न की जा सकती हैं। यह अंकगणितीय संक्रियाएं (जैसे-जोड़ना, घटाना, गुणा तथा भाग करना) करने की क्षमता रखता है। एक संगणक सूचनाओं को वहन करने के लिए विद्युत् का उपयोग करता है।

संगणक की विशेषताएं-

  1. गति (Speed)-कंप्यूटर तीव्र गति से कार्य करने की क्षमता रखता है।
  2. संग्रहण क्षमता (Storage Capacity ) कंप्यूटर की संग्रहण क्षमता बहुत अधिक है। डिस्क तथा टेप के प्रयोग से बड़ी मात्रा में आँकड़ों का भंडारण किया जा सकता है।
  3. शुद्धता (Accuracy)- कंप्यूटर अपनी शुद्धता के कारण बहुत महत्त्वपूर्ण है। कोई अशुद्धि आने पर भी कंप्यूटर ग़लती को सुधारने का कार्य करेगा।
  4. कार्यों की विविधता (Variety of Jobs)-कंप्यूटर कई प्रकार के कार्य करने में सक्षम है, जैसे आँकड़ों का संग्रहण, पुनः प्राप्ति, विभिन्न डिज़ाइन बनाना, खेल आदि कार्य किए जा सकते हैं।
  5. स्वचालन (Automation )-कंप्यूटर अधिकतर कार्य स्वचालित रूप से करता है। कंप्यूटर विभिन्न कार्य विस्तारपूर्वक कर सकता है।

प्रश्न 2.
संगणक के दो आधारभूत अंग बताओ। यंत्र सामग्री की विभिन्न इकाइयों का वर्णन करो।
उत्तर:
संगणक प्रणाली के भाग (Parts of Computer System)
एक संगणक प्रणाली के दो आधारभूत अंग होते हैं-
1. यंत्र सामग्री (हार्डवेयर) (Hardware)
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी 3

2. प्रक्रिया सामग्री ( सॉफ्टवेयर) (Software)
1. यंत्र सामग्री (हार्डवेयर) (Hardware)-
यह संगणक प्रणाली का भौतिक भाग है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक, चुंबकीय तथा यांत्रिक उपकरण लगे होते हैं। एक संगणक प्रणाली में निम्नलिखित मुख्य हार्डवेयर इकाइयां होती हैं-
(1) केंद्रीय प्रक्रम इकाई (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट-सी० पी० यू० ) ( Central Processing Unit-CPU) यह किसी डिजिटल (आंकिक ) कंप्यूटर प्रणाली (Digital System) का तंत्रिका केंद्र (Nerve Centre) होता है। यह सभी अन्य इकाइयों की क्रियाओं का समन्वय एवं नियंत्रण करता है तथा प्रयोग किये जाने वाले आँकड़ों के लिए सभी अंकगणितीय एवं तार्किक प्रक्रमों को संपादित करता है। सी०पी०यू० में तीन पृथक् हार्डवेयर खंड होते हैं-

  • आंतरिक स्मृति (मेमोरी) (Internal Memory),
  • अंकगणितीय इकाई (Arithmetic Unit),
  • एक नियंत्रक खंड ( चिप ) ( Chip) (A Control Section)

एक पतली सिल्किन की पत्ती, जो समन्वित वैद्युत् परिपथ के वृहत् जाल को धारण करती है) संगणक को निर्मित करने वाला ब्लाक होता है तथा विभिन्न कार्यों का संपादन करता है, जैसे- गणितीय संक्रिया करना, संगणक की स्मृति (मेमोरी) के रूप में सहयोग करना या दूसरे चिपों पर नियंत्रण करना।

(2) दृश्य-प्रदर्शक इकाई (विजुअल डिसप्ले यूनिट वी० डी० यू० या टर्मिनल) (Visual Display Unit (VDU) or Terminal)-टेलीविजन की भाँति दृश्य इकाई में एक केथोड-
रे ट्यूब (छोटा पर्दा) लगा होता है जिस पर आँकड़ों को प्रदर्शित करने वाले रेखाचित्रों या विशेषताओं को संगणक की मुख्य स्मृति से पढ़कर प्रदर्शित किया जाता है।

3. निवेश एवं निर्गत उपकरण (Input and Output Devices)- निवेश उपकरण, जैसे ‘की बोर्ड’ (कुंजी-पटल) (Key Board) का प्रयोग आँकड़ों तथा कार्यक्रमों (प्रोग्रामों) को संगणक- स्मृति (मेमोरी) में भरने के लिए किया जाता है। इसी प्रकार चूंकि एक कंप्यूटर के भीतर सभी आँकड़ों कार्यक्रमों को कोड ( कूट) स्वरूप में वैद्युत्-धारा के रूप में संचित किया जाता है, निर्गत- उपकरणों जैसे प्रिंटर, प्लाटर आदि का प्रयोग इन आँकड़ों को सूचनाओं के रूप में (जैसे–विशेषताएं, ड्राइंग या ग्राफिक) बदलने के लिए किया जाता है जिनका मानव द्वारा उपयोग किया जा सके।

4. संग्रहक उपकरण (Storage Device )-एक कंप्यूटर में कई संग्राहक इकाइयाँ जैसे हार्डडिस्क, फ्लापी, टेप, मैगनेटों, आप्टिकल डिस्क, कांपेक्ट डिस्क (सीडी), कार्टिज आदि लगे होते हैं जिनका प्रयोग आँकड़ों तथा कार्यक्रम निर्देशों को संचित करने के लिए होता है। इन युक्तियों की आँकड़ा संग्रहण करने की क्षमता मेगाबाइट (MB) से जीगावाइट (GB) तक होती है।

प्रश्न 3.
संगणक के उपयोग के प्रमुख लाभ क्या हैं?
उत्तर:

  1. संगणक एक वैदयुत् यंत्रीय युक्ति है, जो सूचनाओं की बड़ी तीव्रता एवं शुद्धता के साथ गणना करता है।
  2. अत्यधिक शक्तिशाली संगणकों द्वारा कुछ पलों में, अरबों | गणनाएँ अथवा अंकगणितीय संक्रियाएँ संपन्न की जा सकती हैं।
  3. यह उपकरण समस्याओं के समाधान अथवा आँकड़ों की गणना प्रत्यक्ष प्राप्त कर अंकगणितीय संक्रियाएँ करके (गणितीय निर्देशों का प्रयोग करके जैसे जोड़ना, घटाना, गुणा तथा भाग करना) इन संक्रियाओं के परिणामों की आपूर्ति करने की क्षमता रखता है।
  4. सामान्यतः संगणक विभिन्न संख्याओं, शब्दों, स्थिर बों चलचित्रों एवं ध्वनियों (आवाज़ों) की प्रक्रियायें संपन्न कर सकता है।
  5. एक संगणक सूचनाओं को वहन करने के लिए विदमुत् का उपयोग करता है।
  6. अंक विहीन सूचनाओं जैसे शब्दों, चित्रों या ध्वनियों को एक संगणक में प्रयोग के योग्य बनाने के लिए सूचनाओं का आंकिक परिवर्तन आवश्यक है।

प्रश्न 4.
संगणक के उपयोग की क्या सीमाएं हैं?
उत्तर:
हमारे लिए यहाँ यह समझना आवश्यक है कि संगणक क्या नहीं कर सकता?

  1. एक संगणक हमारे लिए सोचने का कार्य नहीं कर सकता।
  2. संगणक मात्र हमारे द्वारा भरी गई सूचना पर आधारित निश्चित तार्किक चरणों का ही अनुसरण करता है।
  3. एक संगणक सिर्फ वही कार्य करता है जो उससे या तो निर्देशों के एक समूह (प्रोग्राम) द्वारा अथवा एक मानव संचालक द्वारा करवाया जाता है।

प्रश्न 5.
संगणक के मुख्य अंग बताओ।
उत्तर:
एक संगणक प्रणाली के दो आधारभूत अंग होते हैं-

  1. यंत्र सामग्री (हार्डवेयर)
  2. प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर)

यंत्र सामग्री (हार्डवेयर)-
यह संगणक प्रणाली का भौतिक भाग है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक, चुंबकीय तथा यांत्रिक उपकरण लगे होते हैं। एक संगणक प्रभाव में निम्नलिखित मुख्य हार्डवेयर इकाइयाँ होती हैं-

  1. केंद्रीय प्रक्रम इकाई (CPU)
  2. दृश्य प्रदर्शक इकाई (VDU)
  3. निवेश एवम् निर्गत उपकरण
  4. संग्रहक उपकरण।

प्रश्न 6.
केंद्रीय प्रक्रम इकाई (CPU) पर नोट लिखो।
[T.B.Q. 1 (3)]
उत्तर:
केंद्रीय प्रक्रम इकाई (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट-सी० पी० यू० )-यह किसी आंकिक (डिजिटल) संगणक प्रणाली का तंत्रिका केंद्र होता है। यह सभी अन्य इकाइयों की क्रियाओं का समन्वय एवं नियंत्रण करता है तथा प्रयोग किये जाने वाले आँकड़ों के लिए सभी अंकगणितीय एवं तार्किक प्रक्रमों को संपादित करता है। सी०पी०यू० में तीन पृथक हार्डवेयर खंड होते हैं-

  1. अतिरिक स्मृति (मेमोरी),
  2. अंकगणितीय इकाई एवं
  3. एक नियंत्रक खंड (चिप एक पतली सिल्किन की पत्ती, जो समन्वित वैद्युत परिपथ के वृहत् जाल को धारण करती है।)

संगणक को निर्मित करने वाला ब्लॉक होता है तथा विभिन्न कार्यों का संपादन करता है, जैसे- गणितीय संक्रिया करना, संगणक की स्मृति (मेमोरी) के रूप में सहयोग करना या दूसरे चियों पर नियंत्रण करना।

प्रश्न 7.
संगणक में कौन-कौन सी संग्रह युक्तियां होती हैं?
उत्तर:
संग्रहक उपकरण-एक संगणक में कई संग्राहक इकाइयाँ जैसे हार्ड डिस्क, फ्लापी, टेप, मैगनेटोआप्टिकल डिस्क, कांपेक्ट डिस्क (सीडी), कार्टिज आदि लगे होते हैं जिनका प्रयोग आँकड़ों तथा कार्यक्रम निर्देशों को संचित करने के लिए होता है। इन युक्तियों की आँकड़ा संग्रहण करने की क्षमता मेगाबाइट (MB) से गीगाबाइट (GB) तक होती है।

प्रश्न 8.
अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री (Application Software) पर नोट लिखो।
उत्तर:
अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री (एप्लीकेशन
सॉफ्टवेयर)-

अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री के भी दो प्रकार होते हैं-
(1) प्रथम प्रकार का अनुप्रयोग सॉफ्टवेटर आँकड़ा आधार या आँकड़ा संचय (डेटाबेस) प्रबंधन, लेखाचित्रों (ग्राफिक्स) तथा शब्दों के प्रक्रम से संबद्ध होता है जिसमें अधिकांश व्यावसायिक संस्थानों तथा व्यक्तियों द्वारा प्रयुक्त कार्यों का बृहत् समूहन होता है।

(2) द्वितीय प्रकार का अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री विशिष्ट, पेशेवर अथवा तकनीकी अनुप्रयोगों द्वारा विशिष्ट कार्यों हेतु प्रयोग करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया प्रक्रिया सामग्री होती है। उदाहरण के लिए, चिकित्सकों, दंत रोग विशेषज्ञों, वास्तु शिल्पियों तथा अभियंताओं द्वारा विशिष्ट कार्यों हेतु प्रयोग करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर)। विस्तृत परिसर वाली अनुप्रयोग प्रक्रिया सामग्री श्रेणी में व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक प्रयोग के लिए निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है-

  1. लेखा संबंधी सामान्य बही, वेतन बही, बीजक, रसीदें आदि।
  2. संचार संबंधी केंद्रीय कार्यालय के मुख्य संगणक से इलेक्ट्रॉनिक -डाक का वाणिज्यिक डेटा बैंकों तथा सूचना-सुविधाओं द्वारा प्रदत्त सेवाओं से अंतसंबधन।
  3. आँकड़ा संजय प्रबंधन ( डेटाबेस )-केंद्रीय पहुँच के लिए.. इसमें डेटा फाइलों की छटाई तथा नवीनीकरण, सांख्यिकी का संचय गणना, प्लाट-दिशा एवं बाजार विश्लेषणों हेतु प्रबंधन किया जाता है।
  4. शैक्षिक कार्यक्रम (प्रोग्राम )-खेलों, ट्यूटोरियल्स, अनुकरणों (सिमूलेशन्स) आदि द्वारा सीखने से संबंधित
  5. लेखाचित्रों (ग्राफिक्स)-रंगीन लेखाचित्रों तथा चार्टों के प्रदर्शन, रंगीन स्लाइड एवं अन्य दृश्य सहायक उपकरणों का निर्माण।
  6. कार्यक्रम निर्माण (प्रोग्रामिंग ) किसी एक समस्या (निर्मेय) को उसके भौतिक पर्यावरण से कंप्यूटर के समझने तथा आदेश पालन करने वाली भाषा में अनुवादित करना।

प्रश्न 9.
तंत्रात्मक प्रक्रिया सामग्री क्या है?
उत्तर:
तंत्रात्मक प्रक्रिया सामग्री ( सिस्टम सॉफ्टवेयर) यह उन प्रोग्रामों में महत्त्वपूर्ण है जो संगणक प्रणाली को चलाते हैं तथा प्रयोगकर्ता (प्रोग्रामर) को अपने कार्य को संपन्न करने में सहायता प्रदान करती हैं। तंत्रात्मक प्रक्रिया प्रणाली में निम्नलिखित समाहित होते हैं- क्रियात्मक प्रणाली (आपरेटिंग सिस्टम )-वह प्रक्रिया सामग्री जो संगणक प्रोग्राम के कार्य को नियंत्रित करती है और अनुसूचीकरण, डीबगिंग, निवेश तथा निर्गत के नियंत्रण, संचयीकरण, आँकड़ा प्रबंधन तथा उससे संबंधित सेवाएँ प्रदान करती है। प्रचलित प्रकार की ऑपरेटिंग प्रणाली में डॉस (डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम), यूनिक्स तथा इसके विभिन्न प्रकार, वी० एम० एस० (वर्चुअल मेमोरी सिस्टम) माइक्रोसाफ्ट विण्डोस आदि सम्मिलित हैं।

प्रश्न 10.
रैम (RAM) तथा रोम (ROM) पर नोट लिखो।
उत्तर:
यादृच्छिक अभिगम स्मृति- रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी )-वह स्मृति (मेमोरी) जिसमें आँकड़ों को लिखा तथा पढ़ा जा सके। केवल पठन स्मृति-रोम ( रीड ओनली मेमोरी )-सूचना धारण करने वाली स्मृति जो विद्यमान तथा स्थायी रूप से उपलब्ध है और जिसे लिखा नहीं जा सकता है, किंतु प्रोग्राम के माध्यम से मात्र पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 11.
रैस्टर के भू-संदर्भपरक तथा भू-कूट पर नोट लिखो।-रेखापुंजों (रैस्टर) चित्रों के भू-संदर्भपरक भू-कूट (जियोकोडिंग) बनाना
उत्तर:
क्रमवीक्षण (स्कैन किये गए रेखापुंज (रैस्टर) चित्रों तथा उपग्रह- चित्रों को एक चित्र में पड़ने वाले भू-नियंत्रक बिंदु (जी० सी० पी० ) से मिलाकर, उनकी विकृतियों में सुधार किया जाता है। भूनियंत्रक बिंदु ज्ञात धरातलीय अवस्थितियों के स्वरूप हैं जिन्हें हवाई-चित्रों अथवा उपग्रह चित्रों पर सही-सही अवस्थित किया जा सकता है। भूनियंत्रक बिंदु निर्देशांक विकृत चित्रों पर दोनों ही रूपों चित्र के रूप (कालम तथा पंक्ति संख्या)

में तथा उनके धरातलीय निर्देशांकों के रूप में अवस्थित होता है (मानचित्रों से मापित अथवा किसी निश्चित प्रक्षेप प्रणाली, जैसे बहु-शंकु प्रक्षेप पर अक्षांश-देशांतर के संदर्भ में धरातल पर निर्धारित) एक न्यून वर्ग प्रतिक्रमण विश्लेषण की सहायता से ज्यामितीय संशोधित (मानचित्र) निर्देशांकों एवं विकृत चित्र निर्देशांकों को अंतर्संबंधित किया जाता है। उसके बाद चित्र का सही ज्यामितीय संबंध प्राप्त करने के लिए संगत धरातलीय स्थिति के संदर्भ में इसका परिवेष्ठन किया जाता है।

प्रश्न 12.
आंकिक मानचित्रण क्या है?
उत्तर:
आंकिक स्पष्ट (फेयर) मानचित्रण भू-कूट वाले रेखापुंज चित्रों का प्रयोग, बिंदु, भू-स्वरूप रेखीय स्वरूपों एवं हवाई भू-दृश्यों की पृष्ठभूमि के रूप में आरेखित तथा समुचित चिह्नों एवं पठन सामग्री से सुसज्जित करने के लिए किया जाता है। विकल्प के रूप में, इन ऊपरी भूदृश्यों तथा रेखापुंज चित्रों को चिह्नों का प्रयोग किये बिना ही मानचित्रात्मक बनाने के लिए सीधे आंकिक किया जा सकता है। आंकिक मानचित्र स्वतः ही स्वचालित मानचित्रीय प्रक्रियाओं, जैसे सामान्यीकरण, वर्गीकरण आदि के अनुरूप हो जाते हैं।

प्रश्न 13.
मानचित्र विज्ञान के आधारभूत तत्व क्या हैं?
उत्तर:
संगणक और दूरसंचार के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के विकास द्वारा मूल रूप से संचालित मानचित्र कला में तीव्रगामी परिवर्तन हुए हैं।
आधुनिक मानचित्र विज्ञान को एक त्रिभुज द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। इस त्रिभुज की तीनों भुजाएँ तीन प्राथमिक तत्वों के महत्त्व को दर्शाती हैं-

  1. नियमन
  2. ज्ञान एवं विश्लेषण
  3. संचार

नियमन त्रिभुज का आधार है। यह मानचित्र उत्पादन के पक्ष को प्रदर्शित करता है। ज्ञान तथा विश्लेषण व संचार अन्य दो भुजाएं हैं। आजकल संगणक, बहुमाध्यम (मल्टीमीडिया) और दूरसंचार के क्षेत्र में तीव्र अभिनव विकास से मानचित्रकला को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानिक आँकड़ों के प्रक्रमण के लिए मानचित्रकार को अब संगणक और बहुमाध्यम का उपयोग करने के अधिक अवसर उपलब्ध हैं।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी 4
प्रतिवर्ष बहुत सी नई प्रक्रिया सामग्री (सॉफ्टवेयर) विकसित की जा रही है। भौगोलिक सूचना तंत्र तथा मानचित्रण के कुछ मुख्य सॉफ्टवेयर हैं- एप्पल, ऑर्क इन्फो, ऑटोकैड मैपइन्फो, ग्राम आदि।

प्रश्न 14.
मानचित्र विज्ञान में संगणक का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
मानचित्र विज्ञान में संगणक का प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से सहायता करता है-

  1. मानचित्रों का निर्माण शीघ्र होता है।
  2. उपयोग की आवश्यकता अनुसार मानचित्रों का निर्माण संभव।
  3. दक्ष मानचित्रकार के उपलब्ध न होने पर भी मानचित्र निर्माण सम्भव है।
  4. मानचित्रों के निर्माण में कम खर्च आता है।
  5. मानचित्रों को अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है।
  6. मानचित्रों की अनेक प्रतियां तुरंत बनाई जा सकती हैं।
  7. यदि आँकड़े आंकिक (डिजिटल) स्वरूप में उपलब्ध हैं तो मानचित्र में संशोधन किये जा सकते हैं।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का प्रभाव-
मानचित्र में कई प्रकार से परिवर्तन किए हैं। सॉफ्टकापी चित्रों ने अनेक प्रयोगों के लिए प्रकाशित मानचित्रों का स्थान ले लिया है। उत्पादन समय में अत्यधिक कमी आई है। सैन्य गुप्तचरी तथा विज्ञान के लिए सूक्ष्म नियोजन की आवश्यकता होने पर उच्च विभेदन वाले उपग्रह चित्र तुरन्त प्राप्त किए जा सकते हैं।

इसके लिए निकटवर्ती उपग्रह को प्रस्तावित स्थल के ऊपर नई कक्षा में लाना पड़ता है। मानचित्र में दिखाई जा सकने वाली सूचनाओं की गुणवत्ता और विविधता में स्वचालन से भी परिवर्तन आ रहा है। यही नहीं, भौगोलिक सूचना तंत्र स्थानिक मानचित्रण और निर्णय लेने में विश्लेषण की भूमिका का विस्तार कर रहा है।

प्रश्न 15.
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी पर नोट लिखो।
उत्तर:
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी किसी प्रदेश का संसाधन प्रबंधन या तो।

  1. हाथ से बने मानचित्रों को अध्यारोपित करके अथवा
  2. संगणक प्रौद्योगिकी द्वारा किया जा सकता है।

इस संगणक प्रौद्योगिकी में संख्यात्मक स्थानिक आँकड़ों के समूह या भू-आधारित फाइलों का उपयोग किया जाता है। पारदर्शी मानचित्रों को हाथ से अध्यारोपित करके बनाए गए बहुकालिक मानचित्रों की अपनी कुछ कमियाँ होती हैं। केवल कुछ ही मानचित्रों को एक साथ अध्यारोपित कर दृश्य विश्लेषण हो सकता है। संगणक सहायक विधि में सूचनाएँ आंकिक स्वरूप में प्राप्त होनी आवश्यक होती हैं। इस पद्धति में संसाधन स्वरूपों का ( गुण या कारक) अंतसंबंध संख्यात्मक रूपांतरण द्वारा संपन्न होता है।

आधुनिक आँकड़ा संग्रह तकनीकों तथा संगणक सहायक मानचित्रकला ने स्थानिक आँकड़ों के संग्रह एवं विनिमय को प्रोत्साहन दिया है। इसके साथ ही भौगोलिक सूचना तंत्र तथा आंकिक चित्र प्रक्रमण (डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग DIP) के सम्मिलित प्रयोग से भौगोलिक जाँच एवं पूर्वानुमान विस्तृत क्षेत्र पर सीमित समय में बेहतर तरीके से करते हैं। आगे आने वाले वर्षों में प्रभावकारी सार्वजनिक नीतियों के लिए पूर्वकथन मॉडल निर्धारण की क्षमता को विकसित करना सरल होगा।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 6 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी 5

प्रश्न 20.
भूमि उपयुक्तता विश्लेषण में भौगोलिक सूचना तंत्र के अनुप्रयोग पर नोट लिखो।
उत्तर-भौगोलिक सूचना तंत्र का अनुप्रयोग भूमि तथा वनाच्छादित क्षेत्रों में परिवर्तन, जल तथा वायु की गुणवत्ता का मूल्यांकन, मृदा अपरदन के खतरों का विश्लेषण, प्राकृतिक विपदाओं पर नजर रखना, वनीकरण योग्य क्षेत्रों का चुनाव, भूमि क्षमता एवं उपयुक्तता विश्लेषण एवं आँकड़ा विवरणिका अध्ययन जैसी समस्याओं के समाधान में भौगोलिक सूचना तंत्र का उपयोग करते हैं। विश्वस्तरीय अनुभवों से यह प्रदर्शित होता है कि सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना तंत्र संसाधन प्रबंधन के लिए अत्यंत ही प्रभावकारी युक्तियाँ हैं।

भौगोलिक सूचना तंत्र का एक निर्णय देने वाली प्रणाली के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। इसके द्वारा प्राकृतिक आपदाओं की पहचान, समन्वय, निगरानी और भविष्यवाणी करना संभव है। प्राकृतिक आपदाएं, भारत में अनुभव किए जाने वाले प्रमुख पर्यावरणीय खतरे हैं। समन्वित जल संभर प्रबंधन योजनाएं, हमें आशंकित करने वाले संकटों के दुष्प्रभावों को कम करने में मदद कर सकती हैं।

1. भूमि उपयोग परिवर्तन की निगरानी (Land use change Monitoring ) किसी प्रदेश के ग्रामीण तथा नगरीय संसाधनों की भौगोलिक निगरानी में भू-उपयोग एक महत्त्वपूर्ण निवेश होता है। सामान्य भू-आच्छादन, वर्गीकरण का निर्धारण, भूतकाल में भूमि उपयोग में हुए परिवर्तन द्वारा सामान्य रूप में तथा वनाच्छादन के रूप में विशेष रूप से किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, हिमाचल क्षेत्र में निर्वनीकरण एक गंभीर पारिस्थितिक समस्या है। दो समयों के वन वितरण मानचित्रों द्वारा वनाच्छादन में परिवर्तन की सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं। उपग्रही सुदूर संवेदन का भूमि उपयोग मानचित्रण और देश के भीतर वन ह्रास की प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रभावशाली ढंग से उपयोग किया जा सकता है। अत्यधिक तीव्रगति से परिवर्तन के कारण, परंपरागत विधियों से एकत्रित सूचनाएं शीघ्र ही पुरानी हो जाती हैं।

2. सामाजिक-आर्थिक नियोजन हेतु भूमि उपयुक्तता विश्लेषण (Land Suitability Analaysis) भूमि उपयोग उपयुक्तता विश्लेषण से भूमि विकास से संबंधित विभिन्न निर्णय लेने में सहायता मिलती है। भौगोलिक सूचना तंत्र विश्लेषण निम्नलिखित तीन प्रकार के मानचित्रों के निर्माण के लिए विभिन्न प्राकृतिक, मानवकृत एवं अंतर्क्रियात्मक कारकों को समन्वित करता है-
(i) पर्यावरणीय पर्यावरणीय प्रक्रियाओं में कम से कम परिवर्तन करने वाले भूमि उपयोग को दिखाने वाला मानचित्र।

(ii) किसी प्रस्तावित विकास की योजना के पर्यावरणीय प्रभावों के गुणात्मक- पूर्वानुमान को प्रदर्शित करने वाला मानचित्र-यह चलाई जाने वाली कुछ निश्चित परियोजनाओं तथा नियंत्रण हेतु विशेष पर्यावरणीय कार्ययोजना भी प्रदान करता है; और

(iii) इन कार्य योजनाओं के लिए सर्वोत्तम तथा सबसे कम उपयुक्त अवस्थिति को प्रदर्शित करने वाला मानचित्र-सीमांत प्रदेशों, जैसे हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मरुस्थल में भूमि उपयोग नियोजन हेतु ऐसे मानचित्रों की आवश्यकता पड़ती है। कृषि हेतु, उच्चभूमि के क्षेत्रों में कृषि के लिए भूमि उपयुक्ता विश्लेषण में मृदा- अपरदन, ढाल, ऊँचाई, जल उपलब्धता तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता आदि से संबंधित सूचना तथा मानचित्रों का निर्माण।

अनेक देशों तथा राज्य सरकारों द्वारा नगरपालिका के कार्यों के लिए भूमि तथा अन्य भौगोलिक सूचनाओं के संगणकीकरण का प्रयास किया गया है। विभिन्न विभागों द्वारा उपखंडीय मानचित्रों के स्वचालन का प्रयास किया है। पर्यावरणीय नियोजकों द्वारा भूमि उपयुक्तता क्षमता हेतु पर्यावरणीय कारकों के अध्यारोपण का प्रयास किया गया है।

ऐसी सूचनाओं में आधार मानचित्र पर्यावरणीय अभियांत्रिकी, मानचित्र (प्लान) पारिवका, अपवाह, फसलें, मार्ग या गली का पता संबंधी सारणीय आँकड़े, क्षेत्र सारणी आँकड़े, सड़क, मार्गतंत्र तथा सीमा क्षेत्र आदि सम्मिलित हैं। भौगोलिक सूचना तंत्र प्रक्रिया सामग्री उपकरण विभिन्न आँकड़ा समूहों को मानचित्र या सारणी रूप में प्रस्तुत कर, सुधार करने, अंतसंबंधित करने एवं अनेक प्रकार से वर्णन करने के योग्य बनाता है।

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
हाइड्रोजन परमाणु की लाइमैन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्ध्य हाइड्रोजन समान आयन की बामर श्रेणी की द्वितीय रेखा की तरंगदैर्घ्य के बराबर है। हाइड्रोजन समान आयन का परमाणु क्रमांक 2 है:
(अ) 2
(ब) 3
(स) 4
(द) 1
उत्तर:
(अ) 2

प्रश्न 2.
उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु में यदि बोर के सिद्धान्त के अनुसार इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (2h/2π) हो तो उसकी ऊर्जा होगी:
(अ) – 3.4 ev
(ब) + 3.4 eV
(स) – 13.6 ev
(द) + 13.6 ev
उत्तर:
(अ) – 3.4 ev

प्रश्न 3.
हाइड्रोजन परमाणु में स्पेक्ट्रम में किस श्रेणी में रेखायें दृश्य भाग में मिलती हैं:
(अ) लाइमन
(ब) बामर
(स) पाश्चन
(द) ब्रेकेट
उत्तर:
(ब) बामर

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु

प्रश्न 4.
प्रमुख क्वाण्टम संख्या 1 एवं बोर कक्षा की त्रिज्या rn में निम्न निर्भरता होती है:
(अ) rn α n1/2
(ब) rn α n2
(स) rn α n1/3
(द) rn α n
उत्तर:
(ब) rn α n2

प्रश्न 5.
हाइड्रोजन परमाणु में यदि इलेक्ट्रॉन तीसरी कक्षा से दूसरी कक्षा में संक्रमण करता है, तो उत्सर्जित हिरण की तरंगदैर्ध्य होगी:
(अ) \( \frac{5 R}{6}\)
(ब) \( \frac{R}{6}\)
(स) \( \frac{R}{36}\)
(द) \( \frac{5}{R}\)
उत्तर:
(स) \( \frac{R}{36}\)

प्रश्न 6.
लाइमैन तथा बामर श्रेणी की न्यूनतम तरंगदैर्घ्य का अनुपात होगा:
(अ) 1.25
(ब) 0.25
(स) 5
(द) 10
उत्तर:
(ब) 0.25

प्रश्न 7.
एक उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 3.4 eV है। बोर के सिद्धान्त के अनुसार उसका कोणीय संवेग होगा:
(अ) \(\frac{h}{2 \pi}\)
(ब) \(\frac{2h}{2 \pi}\)
(स) \(\frac{3h}{2 \pi}\)
(द) \(\frac{4h}{2 \pi}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{2h}{2 \pi}\)

प्रश्न 8.
बोर के अनुसार केवल वे कक्ष स्थायी होती हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग का मान होगा:
(अ)\(\frac{nh}{2 \pi}\)
(ब) \(\frac{nh}{\pi}\)
(स) \(\frac{2nh}{\pi}\)
(द) \(\frac{n}{2 \pi h}\)
उत्तर:
(अ)\(\frac{nh}{2 \pi}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु

प्रश्न 9.
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में जब इलेक्ट्रॉन किसी बाह्य कक्ष से तीसरी कक्षा में संक्रमण करता है, तब स्पेक्ट्रम की श्रेणी होगी:
(अ) लाइमैन श्रेणी
(ब) बॉमर श्रेणी
(स) पाश्चन श्रेणी
(द) ब्रेकेट श्रेणी।
उत्तर:
(स) पाश्चन श्रेणी

प्रश्न 10.
यदि बोर के प्रथम कक्ष की त्रिज्या है तो दूसरे कक्ष की त्रिज्या होगी:
(अ) r/2
(ब) √2r
(स) 2r
(द) 4r
उत्तर:
(द) 4r

प्रश्न 11.
सोडियम की पीली रेखा की तरंगदैर्ध्य 5896 À है। इसकी तरंग संख्या होगी:
(अ) 50883 x 1010 प्रति सेकण्ड
(ब) 16961 प्रति सेमी.
(स) 17581 प्रति सेमी.
(द) 5.883 प्रति सेमी.
उत्तर:
(ब) 16961 प्रति सेमी.

प्रश्न 12.
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की कौनसी श्रेणी पूर्ण तथा पराबैंगनी क्षेत्र में उपस्थित होती है:
(अ) लाइमन
(ब) बामर
(स) ब्रेकेट
(द) पाश्चन
उत्तर:
(अ) लाइमन

प्रश्न 13.
10 गुने आयनित सोडियम परमाणु की आयनन ऊर्जा होगी:
(अ) \(\frac{13.6}{11} \mathrm{eV}\)
(ब) \(\frac{13.6}{12} \mathrm{eV}\)
(स) 13.6 x (11)2 ev
(द) 13.6 ev
उत्तर:
(स) 13.6 x (11)2 ev

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प्रश्न 14.
उत्सर्जित आवृत्ति का मान का संक्रमण होता है:
(अ) n = 5 से n = 3
(ब) n = 6 से n = 2
(स) n = 2 से n = 0
(द) n = 0 से n = 2
उत्तर:
(स) n = 2 से n = 0

प्रश्न 15.
बोहर कक्षा की त्रिज्या r पूर्णांक n तथा नियतांक K में सम्बन्ध:
(अ) r = n2K
(ब) r = nK
(स) r = n/k2
(द) r = n/K
उत्तर:
(अ) r = n2K

प्रश्न 16.
हाइड्रोजन परमाणु के प्रथम कक्षा की त्रिज्या 0.53 À है तो उसकी चतुर्थ कक्षा की त्रिज्या होगी:
(अ) 0.193 A°
(ब) 4.24 A°
(स) 2.12 A°
(द) 8.48 A°
उत्तर:
(द) 8.48 A°

प्रश्न 17.
हाइड्रोजन परमाणु में त्रिज्या की कक्षा में चक्कर काट रहे इलेक्ट्रॉन के लिए गतिज ऊर्जा होगी:
(अ) \(\frac{e^2}{2 r}\)
(ब) \(\frac{e^2}{r^2}\)
(स) \(\frac{e^2}{r}\)
(द) \(\frac{\mathrm{e}^2}{2 \mathrm{r}^2}\)
उत्तर:
(अ) \(\frac{e^2}{2 r}\)

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प्रश्न 18.
एक उत्तेजित हाइड्रोजन परमाणु तरंगदैर्ध्य 2 के फोटोन को उत्सर्जित करने के पश्चात् मूल अवस्था में आ जाता है। उत्तेजित अवस्था की क्वाण्टम संख्या है-
(अ) \(\sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R-1}}\)
(ब) \(\sqrt{\frac{\lambda R-1}{\lambda R}}\)
(स) \(\sqrt{\lambda R-1}\)
(द) \(\sqrt{\frac{1}{\lambda R-1}}\)
उत्तर:
(अ) \(\sqrt{\frac{\lambda R}{\lambda R-1}}\)

प्रश्न 19.
यदि हाइड्रोजन परमाणु का आयनन विभव 13.6V है तो n = 3 पर इसकी लगभग ऊर्जा है:
(अ) – 1.14 ev
(ब) – 1.51 ev
(स) – 3.4 ev
(द) – 4.53 ev
उत्तर:
(ब) – 1.51 ev

प्रश्न 20.
बामर श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य 6563 À है लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य होगी:
(अ) 1215.4 A°
(ब) 2500 A°
(स) 7500 A°
(द) 600 A°
उत्तर:
(अ) 1215.4 A°

प्रश्न 21.
बामर श्रेणी की सीमा 3646 A है। इस श्रेणी के प्रथम सदस्य की तरंगदैर्घ्य होगी:
(अ) 6563 A°
(स) 7200 A°
(ब) 3646 A°
(द) 1000 A°
उत्तर:
(अ) 6563 A°

प्रश्न 22.
किसी हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में ऊर्जा En है। एकल आयनित हीलियम परमाणु की ऊर्जा होगी:
(अ) 4 En
(ब) \(\frac{E_n}{4}\)
(स) 2 En
(द) \(\frac{E_n}{2}\)
उत्तर:
(अ) 4 En

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प्रश्न 23.
हाइड्रोजन परमाणु के बोहर प्रतिरूप में इलेक्ट्रॉन की क्वान्टम में गतिज ऊर्जा तथा कुल ऊर्जा का अनुपात होगा:
(अ) 1
(ब) -1
(स) 2
(द) -2
उत्तर:
(ब) -1

प्रश्न 24.
हाइड्रोजन परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन n = 4 ऊर्जा स्तर से n = 1 स्तर तक संक्रमण करता है। उत्सर्जित हो सकने वाले फोटॉनों की अधिकतम संख्या होगी:
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 6
उत्तर:
(द) 6

प्रश्न 25.
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में चामर श्रेणी की अधिकतम तरंगदैर्घ्य का मान 6652 À है, इस श्रेणी की न्यूनतम तरंगदैर्ध्य है:
(अ) 304 Å
(ब) 3645 Å
(स) 1070 Å
(द) 10760 Å
उत्तर:
(ब) 3645 Å

प्रश्न 26.
बोर के सिद्धान्तानुसार इलेक्ट्रॉन की 1वीं कक्षा में कुल ऊर्जा होती है:
(अ) En = -13.6/n2ev
(ब) En = 13.6 n2 eV
(स) 136 ev
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) En = -13.6/n2ev

प्रश्न 27.
लाइमैन व बामर श्रेणी, हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में क्रमशः प्राप्त होती
(अ) पराबैंगनी व दृश्य क्षेत्र में
(ब) दृश्य व दृश्य क्षेत्र में
(स) पराबैंगनी व पराबैंगनी क्षेत्र में
(द) दोनों अवरक्त क्षेत्र में
उत्तर:
(अ) पराबैंगनी व दृश्य क्षेत्र में

प्रश्न 28.
जब बामर श्रेणी के लिए न्यूनतम और अधिकतम तरंगदैर्घ्य प्राप्त होते हैं, तब 12 के मान क्रमशः होंगे:
(अ) अनन्त व तीन
(ब) तीन व शून्य
(स) शून्य व तीन
(द) शून्य व शून्य
उत्तर:
(अ) अनन्त व तीन

प्रश्न 29.
रदरफोर्ड के कणों के प्रकीर्णन प्रयोग में धातुओं के पतली पन्नी से नाभिक का परमाणु क्रमांक बढ़ने पर प्रकीर्णन कोण का पथ होता है:
(अ) अपरिवर्तित रहता है
(ब) घटता है
(स) बढ़ता है
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) बढ़ता है

प्रश्न 30.
चिरसम्मत सिद्धान्त के अनुसार रदरफोर्ड मॉडल में इलेक्ट्रॉन
(अ) वृत्ताकार
(ब) सीधी रेखा में
(स) परवलय में
(द) सर्पिल वक्र में
उत्तर:
(द) सर्पिल वक्र में

प्रश्न 31.
H परमाणु में इलेक्ट्रॉन के प्रथम कक्ष की त्रिज्या A में होती है:
(अ) 0.529
(ब) 1.046
(स) 2.052
(द) 2.068
उत्तर:
(अ) 0.529

प्रश्न 32.
प्रकीर्णन प्रयोग में Q-कण कौनसे बल के कारण प्रकीर्णित होते हैं?
(अ) नाभिकीय बल
(ब) कूलॉम बल
(स) (अ) और (ब) दोनों
(द) गुरुत्वाकर्षण बल
उत्तर:
(ब) कूलॉम बल

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प्रश्न 33.
यदि हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था में आयनन ऊर्जा 13.6 eV हो तो प्रथम उत्तेजित अवस्था की आयनन ऊर्जा होगी:
(अ) शून्य
(ब) 6.8 ev
(स) 10.2 ev
(द) 3.4 ev
उत्तर:
(द) 3.4 ev

प्रश्न 34.
निम्न में से कौन-सी एक बोहर मॉडल के अनुसार हाइड्रोजन परमाणु द्वारा उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा सम्भव नहीं है?
(अ) 1.9 eV
(ब) 11.1 ev
(स) 13.6 ev
(द) 0.65 ev
उत्तर:
(ब) 11.1 ev

प्रश्न 35.
किसी अचल हाइड्रोजन परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन पाँचवें ऊर्जा स्तर से न्यूनतम स्तर को गमन करता है, तो फोटॉन उत्सर्जन के परिणामस्वरूप परमाणु द्वारा प्राप्त वेग होगा:
(अ) \(\frac{24hR}{25m}\)
(ब) \(\frac{25hR}{24m}\)
(स) \(\frac{24hR}{24m}\)
(द) \(\frac{25hR}{25m}\)
उत्तर:
(अ) \(\frac{24hR}{25m}\)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
परमाणु संरचना से सम्बन्धित रदरफोर्ड प्रयोग की कोई दो मुख्य कमियाँ लिखिए।
उत्तर:
(1) रेखीय वर्णक्रम की व्याख्या करने में असफल।
(2) परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या करने में असफल। नोट – (अन्य उचित कमियाँ भी मान्य)

प्रश्न 2.
α कण प्रकीर्णन प्रयोग में स्वर्ण-पत्र ही क्यों प्रयुक्त किये गये?
उत्तर:
सोने का नाभिक भारी होने के कारण Q-कण का विक्षेप अधिक होता है तथा इसके अत्यधिक बारीक पत्र बनाये जा सकते हैं।

प्रश्न 3.
रदरफोर्ड के ca-प्रकीर्णन प्रयोग से प्राप्त दो मुख्य निष्कर्ष लिखिए।
उत्तर:
(i) परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान तथा सम्पूर्ण आवेश परमाणु के अति सूक्ष्म स्थान में निहित है जिसे नाभिक कहते हैं।
(ii) नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या का लगभग (1/ 10000) वाँ भाग है।

प्रश्न 4.
हाइड्रोजन परमाणु में बोर कक्षा की त्रिज्या का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
rn = \(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~h}^2}{\pi \mathrm{mZe}}\)
n2, जहाँ n = कक्षा की संख्या है और सभी शेष प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।

प्रश्न 5.
प्लम पुडिंग मॉडल किसे कहा गया था?
उत्तर:
जे. जे. टॉमसन के पहले परमाणु मॉडल को कहा गया था। इसके अनुसार परमाणु का धन आवेश परमाणु में पूर्णतया एकसमान रूप से वितरित है तथा ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन इसमें ठीक उसी प्रकार अंतःस्थापित है जैसे किसी तरबूज में बीज इस मॉडल को चित्रमय रूप में प्लम पुडिंग मॉडल कहा गया।

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प्रश्न 6.
नाभिक किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी परमाणु का कुल धनावेश तथा अधिकांश द्रव्यमान एक सूक्ष्म आयतन में संकेन्द्रित होता है, जिसे नाभिक कहते हैं और इसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन उसी प्रकार परिक्रमा करते हैं जैसे सूर्य के चारों ओर ग्रह परिक्रमा करते हैं।

प्रश्न 7.
बोर की आवृत्ति का सूत्र लिखिए
उत्तर:
बाह्य कक्षा से आन्तरिक कक्षा में किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन के कूदने से उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति E = hv = E2 – E1
यहाँ पर E = इलेक्ट्रॉन की आंतरिक कक्षा में कुल ऊर्जा और E = बाह्य कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा।

प्रश्न 8.
निकटतम पहुँच की दूरी को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
वह न्यूनतम दूरी जहाँ तक नाभिक की दिशा में सीधा गतिशील एक ऊर्जायुक्त a कण तब तक आ सके जब तक कि वह अपने पथ पर पुनः न लौट जाये, निकटतम पहुँच की दूरी कहलाती है।
F = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{(2 \mathrm{e})(\mathrm{Ze})}{\mathrm{r}^2}\)
जहाँ ऐल्फा कण की नाभिक से दूरी है।

प्रश्न 9.
संघट्ट प्राचल की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
a- कण के वेग सदिश की नाभिक से अभिलम्ब दूरी जब यह परमाणु से बहुत दूर है, को संघट्ट प्राचल कहते हैं। इसे b से प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 10.
किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग के लिए बोर की क्वांटीकरण शर्त क्या है?
उत्तर:
mvr = \(\frac{\mathrm{nh}}{2 \pi}\) पूर्ण संख्या है।

प्रश्न 11.
निम्न घटना का कारण लिखिए अधिकांश -कण स्वर्ण पत्र के आर-पार बिना प्रभावित हुए सीधे ही निकल जाते हैं।
उत्तर:
क्योंकि परमाणु का अधिकांश भाग अन्दर से खोखला होता है।

प्रश्न 12.
a कणों के बड़े कोण से प्रकीर्णन के लिए परमाणु का नाभिक ही उत्तरदायी है, इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन Q-कण की तुलना में बहुत हल्का होता है इसलिए संवेग संरक्षण के सिद्धान्तानुसार वह Q-कण को बड़े कोण पर प्रकीर्णित नहीं कर सकता।

प्रश्न 13.
परमाणु की त्रिज्या तथा नाभिक की त्रिज्या की कोटि को लिखिए।
उत्तर:
क्रमशः 10-10 m 10-15 m

प्रश्न 14.
हाइड्रोजन परमाणु का व्यास लगभग कितना होगा?
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु में एक प्रोटोन युक्त नाभिक केन्द्र में तथा एक इलेक्ट्रॉन 0.53 À त्रिज्या की कक्षा में गति करता है अतः परमाणु का व्यास 1.06 À के लगभग होगा।

प्रश्न 15
अवशोषण तथा उत्सर्जन संक्रमण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
निम्नतम ऊर्जा स्तर से किसी भी उच्च ऊर्जा-स्तर में जाना अवशोषण संक्रमण तथा किसी उच्च ऊर्जा स्तर से किसी भी निम्न ऊर्जा स्तर में आना उत्सर्जन संक्रमण कहलाता है।

प्रश्न 16.
ऊर्जा स्तर क्या है? इसे कैसे प्रदर्शित करेंगे?
उत्तर:
किसी परमाणु की स्थायी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा को क्षैतिज रेखा से प्रदर्शित किया जा सकता है, जिसे ऊर्जा स्तर कहते हैं। इसे उचित ऊर्जा पैमाने के अनुसार क्षैतिज रेखा से प्रदर्शित कर सकते हैं।

प्रश्न 17.
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की उस श्रेणी का नाम लिखिए जो कि पराबैंगनी दृश्य क्षेत्र में स्थित है।
उत्तर:
लाइमन श्रेणी।

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प्रश्न 18.
हाइड्रोजन के रेखीय वर्णक्रम में पाई जाने वाली किन्हीं दो श्रेणियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
लाइमन तथा बामर श्रेणी।

प्रश्न 19.
क्या कोई हाइड्रोजन परमाणु उस फोटॉन जिसकी ऊर्जा बंधन ऊर्जा से अधिक हो, अवशोषित कर सकता है?
उत्तर:
हाँ, परन्तु परमाणु आयनीकृत हो जायेगा।

प्रश्न 20.
हाइड्रोजन परमाणु की ब्रेकेट श्रेणी की रेखाओं का अनुभूतिमूलक व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
V = RC \(\left(\frac{1}{4^2}-\frac{1}{n^2}\right)\) ; n = 5,6,7,

प्रश्न 21.
इलेक्ट्रॉन की कक्षाओं में कक्षा त्रिज्या तथा इलेक्ट्रॉन वेग में सम्बन्ध को लिखिए।
उत्तर:
r = \(\frac{e^2}{4 \pi \epsilon_0 m v^2}\)

प्रश्न 22.
हाइड्रोजन के परमाणु में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (K) और स्थितिज ऊर्जा U के मान लिखिए।
उत्तर:
k = \(\frac{e^2}{8 \pi \epsilon_0 r}\) तथा \(\frac{-e^2}{4 \pi \epsilon_0 r}\)

प्रश्न 23.
इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है। यह तथ्य क्या दर्शाता है? यदि धनात्मक होती तो यह क्या दर्शाता?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा का मान E = K + U = \(\frac{-\mathrm{e}^2}{8 \pi \epsilon_0 \mathrm{r}}\)
यहाँ पर ऋणात्मक तथ्य यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से परिबद्ध है। यदि E का मान धनात्मक होता तो इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर बन्द कक्ष में नहीं घूमता।

प्रश्न 24.
हाइड्रोजन के लिए स्पेक्ट्रम श्रेणी लाइमैन तथा पाश्चन के सूत्रों को लिखिए।
उत्तर:
लाइमैन श्रेणी \(\frac{1}{\lambda}\) = \(\frac{r1}{\lambda}\)
n = 2, 3, 4…..
पाश्चन श्रेणी \(\frac{1}{\lambda}\) = R
n = 4, 5, 6…..

प्रश्न 25.
बोर की कक्षा को ‘स्थायी कक्षा’ क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ऐसी किसी कक्षा में चक्कर काटते हुए इलेक्ट्रॉन न तो ऊर्जा उत्सर्जित करता है और न ही अवशोषित। अतः इन कक्षाओं को ‘स्थायी कक्षा’ कहते हैं।

प्रश्न 26.
रदरफोर्ड के प्रयोग में नाभिक के द्रव्यमान का महत्व क्यों नहीं है?
उत्तर:
रदरफोर्ड के प्रकीर्णन प्रयोग में नाभिक का आवेश प्रकीर्णन का कारण है। नाभिक के आवेश का वैद्युत क्षेत्र प्रकीर्णन का कारण है। अतः नाभिक के द्रव्यमान से प्रकीर्णन स्वतंत्र हैं।

प्रश्न 27.
कोणीय संवेग की बोर के क्वांटमीकरण के प्रतिबंध का उल्लेख कीजिए। द्वितीय कक्षा में इलेक्ट्रॉन के लिए इसका क्या मान है?
उत्तर:
इसके अनुसार इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग का
पूर्णांक गुणक है।
अर्थात् L=n. 2r 22 जहाँ n = 1, 2, 3,
द्वितीय क्रम की कक्षा के लिए n = 2,
∴ L = \(\frac{2 \mathrm{~h}}{2 \pi}\) = \(\frac{\mathrm{h}}{\pi}\) = \(\frac{6.63 \times 10^{-34}}{3.14}\)
= 2.11 × 10-34

प्रश्न 28.
हाइड्रोजन परमाणु के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों के नाम लिखिए। बताइए कि ये विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के किन-किन क्षेत्रों में पाई जाती हैं?
उत्तर:
लाइमैन श्रेणी- पराबैंगनी क्षेत्र में, बामर श्रेणी- दृश्य क्षेत्र में,
पाश्चन, ब्रेकेट तथा फुंट श्रेणी अवरक्त क्षेत्र में।

प्रश्न 29.
एक स्थायी कक्षा में घूमते इलेक्ट्रॉन की चाल मुख्य क्वांटम संख्या से कैसे संबंधित है?
उत्तर:
nth कक्षा में इलेक्ट्रॉन की चाल
अर्थात्
Vn = K.2πe2/nh से दिया जा 1

अर्थात् चाल मुख्य क्वांटम संख्या के व्युत्क्रमानुपाती है।

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प्रश्न 30.
विभिन्न स्थायी कक्षाओं की त्रिज्यायें मुख्य क्वांटम संख्या से कैसे संबंधित हैं?
उत्तर:
हम जानते हैं:
अर्थात्
rn = \(\frac{n^2 h^2}{\mathrm{Ke}^2 4 \pi^2 \mathrm{~m}}\)
एक कक्षा की त्रिज्या मुख्य क्वांटम संख्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती

प्रश्न 31.
यदि एक इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा शून्य हो, तो आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर:
शून्य ऊर्जा का अर्थ है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से अनन्त दूरी पर है या यह केवल स्वतंत्र है।

प्रश्न 32.
कुछ कणों के 90° से अधिक कोण पर प्रकीर्णन से क्या निष्कर्ष प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
(i) धनआवेशित a कणों के 90° से अधिक कोणों पर प्रकीर्णन के लिए आवश्यक है कि स्वर्ण पत्र के परमाणुओं में सूक्ष्म क्षेत्र में धनावेशित केन्द्रित है।
(ii) यह एक परमाणु के स्पेक्ट्रम को नहीं समझा सकता।

प्रश्न 33.
रिडबर्ग नियतांक R का मान ज्ञात करने का सूत्र लिखिए और इस नियतांक का मान कितना होता है?
उत्तर:
R = \(\frac{m e^4}{8 \in_0^2 h^3 c}\)
विभिन्न नियतांकों के मान प्रतिस्थापित करने पर R का मान होगा:
R = 1.03 x 107 m-1

प्रश्न 34.
परमाणु की सामान्य अवस्था के लिए क्वांटम संख्या n = 1 है आयनित अवस्था के लिए n का मान क्या है?
उत्तर:
n = ∞

प्रश्न 35.
उत्सर्जन स्पेक्ट्रम क्या है?
उत्तर:
जब किसी पदार्थ को गर्म किया जाता है तो उत्सर्जित प्रकाश से प्राप्त स्पेक्ट्रम को उत्सर्जन स्पेक्ट्रम कहते हैं।

प्रश्न 36.
रेखीय स्पेक्ट्रम पदार्थ की किस अवस्था में प्राप्त होता
उत्तर:
परमाण्वीय अवस्था में।

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प्रश्न 37.
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की कौन-सी श्रेणी पराबैंगनीं क्षेत्र में पड़ती है?
उत्तर:
लाइमैन श्रेणी

प्रश्न 38.
आयनन ऊर्जा को परिभाषित कीजिए। हाइड्रोजन परमाणु के लिए इसका मान क्या होता है?
उत्तर:
आयनन ऊर्जा- किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन को दी गई वह न्यूनतम ऊर्जा जिससे वह संक्रमण के द्वारा परमाणु से बाहर चला जाये, इस आवश्यक ऊर्जा को आयनन ऊर्जा कहते हैं। हाइड्रोजन परमाणु के आयनन ऊर्जा का मान 13.6 eV होता है।

प्रश्न 39.
हाइड्रोजन परमाणु के सबसे आन्तरिक कक्षा की त्रिज्या 5.3 x 1011m है। द्वितीय उत्तेजित स्तर की कक्षा की त्रिज्या क्या है?
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा की त्रिज्या
प्रश्नानुसार
rn = n2r1
r1 = 5.3 x 1011 m
∴ द्वितीय उत्तेजित स्तर के
लिए n = 3 होता है।
r3 = (3)2 × 5.3 x 1011
यहाँ दिया गया है- n= 3
इसलिए
= 9 × 5.3 × 1011
= 47.7 × 1011 m

प्रश्न 40.
α-कण के बड़े कोण के प्रकीर्णन के लिए परमाणु का नाभिक ही उत्तरदायी है, इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं?
उत्तर:
क्योंकि इलेक्ट्रॉन Q-कण की अपेक्षा बहुत हल्का होता है, इसलिए संवेग संरक्षण के सिद्धान्त के अनुसार यह a कण को बड़े कोण पर प्रकीर्णित नहीं कर सकता।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
α- प्रकीर्णन प्रयोग से गाइगर और उसके साथियों ने क्या प्रेक्षण किया?
उत्तर:
α- कण प्रकीर्णन प्रयोग से निम्न प्रेक्षण निकाले गये:
(i) अधिकांश a कण अविचलित सोने की पन्नी में से निकल जाते हैं।
(ii) कुछ a कण छोटे कोण पर निक्षेपित होते हैं।
(iii) कुछ a कण अधिक कोण ( > 90° ) पर विचलित होते हैं।
(iv) अत्यन्त अल्प मात्रा में Q-कण 180° से विक्षेपित होते हैं।
(v) पर्दे पर 6 कोण के अन्दर पहुँचने वाले प्रति एकांक क्षेत्रफल पर α- कणों की संख्या N(θ) = 1/sin4(θ/2) होती है।

प्रश्न 2.
किसी दिए हुए समयांतराल में विभिन्न कोणों पर प्रकीर्णित कुछ ऐल्फा- कणों की संख्या के प्रारूपिक आलेख को दर्शाइए।
उत्तर:
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प्रश्न 3.
बोर परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा का ऋणात्मक होना क्या प्रकट करता है?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक तथा गतिज ऊर्जा धनात्मक होती है स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा से अधिक होती है अतः कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है जो परमाणु के स्थायित्व को दर्शाती है तथा इससे इलेक्ट्रॉन बाहर निकालने के लिए बाहर से ऊर्जा देनी पड़ेगी।

प्रश्न 4.
स्वर्ण-पत्र पर आपतित कणों में से कुछ ऐसे भी हैं जो प्रकीर्णित होकर वापस अपने ही मार्ग पर लौट आते हैं। (कारण दीजिए)
उत्तर:
किसी भी परमाणु के भीतर एक अत्यन्त सूक्ष्म स्थान में धनावेश केन्द्रित रहता है जो a-कण पर इतना अधिक प्रतिकर्षण बल लगाता है कि a कण अपने ही मार्ग से वापस लौटता है।

प्रश्न 5.
पदार्थों के परमाण्वीय स्पेक्ट्रम की कुछ सुनिश्चित रेखायें ही प्राप्त होती हैं, क्यों?
उत्तर:
परमाणु की केवल सुनिश्चित तथा विविक्त ऊर्जा अवस्थायें ही होती हैं अतः परमाणु के संक्रमणों द्वारा उत्सर्जित विकिरणों की कुछ सुनिश्चित आवृत्तियाँ ही सम्भव हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु

प्रश्न 6.
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निम्नांकित सूत्र से व्यक्त की जाती है
En = \(-\left(\frac{13.6 \mathrm{eV}}{\mathrm{n}^2}\right)\)
जहाँ n = 1, 2, 3,
इस सूत्र का प्रयोग करते हुए सिद्ध कीजिए कि-
(a) हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 6.8 eV नहीं हो सकती। (b) हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम में संलग्न रेखाओं के बीच की दूरी n के बढ़ने के साथ-साथ घटती जाती है।
उत्तर:
सूत्र En = \(-\left(\frac{13.6 \mathrm{eV}}{\mathrm{n}^2}\right)\) में n = 1, 2, 3, …..∞
रखकर सरल करने पर,
E1 = \(-\left(\frac{13.6 \mathrm{eV}}{\mathrm{n}^2}\right)\) = -13.6eV
E2 = \(-\left(\frac{13.6}{2^2}\right)\)eV = \(\frac{-13.6}{4}\) = -3.4ev
E3 = \(-\left(\frac{13.6}{3^2}\right)\)ev = \(-\left(\frac{13.6}{9}\right)\) = -1.51ev
E4 = \(-\left(\frac{13.6}{3^4}\right)\) = \(-\left(\frac{13.6}{81}\right)\) = – 0.85ev
(a) अतः स्पष्ट है कि हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा – 6.8 eV नहीं हो सकती।
(b) यह भी स्पष्ट है कि n में वृद्धि के साथ दो संलग्न रेखाओं (ऊर्जा स्तरों) का ऊर्जा अन्तर घटता जाता है। अतः उनके बीच की दूरी भी घटती जाती है।

प्रश्न 7.
बोर के सिद्धान्त में कोणीय संवेग के क्वाण्टीकरण से सम्बन्धित परिकल्पना का उल्लेख कीजिये।
अथवा
हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की कक्षीय गति के लिए बोर का क्वाण्टम प्रतिबन्ध बताइए।
उत्तर:
बोर की द्वितीय परिकल्पना – इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जिनमें इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग
(L = mvr), का पूर्ण गुणक हो।
बोर की इस परिकल्पना के अनुसार
या
L = \(\frac{\mathrm{nh}}{2 \pi}\)
mvr = \(\frac{\mathrm{nh}}{2 \pi}\)
यहाँ पर 1 एक पूर्णांक है जिसके मान क्रमश: 1, 2, 3, हैं n को मुख्य क्वाण्टम संख्या एवं इस प्रतिबन्ध को बोर का क्वाण्टम प्रतिबन्ध कहते हैं। यह प्रतिबन्ध इलेक्ट्रॉन की गति को निश्चित सम्भव कक्षाओं में सीमित करता है। n को निर्धारित विभिन्न मान देने पर इलेक्ट्रॉन की विभिन्न त्रिज्या वाली स्थायी कक्षायें प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 8.
रदरफोर्ड परमाणु प्रतिरूप के दोषों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
रदरफोर्ड परमाणु प्रतिरूप की कमियाँ- रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में दो कमियाँ पायी गई-
(i) परमाणु के स्थायित्व के सम्बन्ध में नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉन में अभिकेन्द्र त्वरण होता है। विद्युत गति विज्ञान के अनुसार त्वरित आवेशित कण ऊर्जा उत्सर्जित करता है। अतः नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में घूमते इलेक्ट्रॉनों से विद्युत चुम्बकीय तरंगें लगातार उत्सर्जित होनी चाहिये। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा का हास होने के कारण उनके वृत्तीय पथ की त्रिज्या लगातार कम होती जानी चाहिये और अन्त में वे नाभिक में गिर जाने चाहिये। इस प्रकार परमाणु स्थायी (stable) ही नहीं रह सकता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु 2

(ii) रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या के सम्बन्ध में रदरफोर्ड मॉडल में इलेक्ट्रॉनों के वृत्तीय पथ की त्रिज्या के लगातार बदलते रहने से उनके घूमने की आवृत्ति भी बदलती रहेगी। इसके फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन सभी आवृत्तियों की विद्युत चुम्बकीय तरंगें उत्सर्जित करेंगे अर्थात् इन तरंगों का स्पेक्ट्रम संतत (continuous) होगा, परन्तु वास्तव में परमाणुओं के स्पेक्ट्रम संतत न होकर रेखीय होते हैं अर्थात् उनमें बहुत-सी बारीक रेखायें होती हैं तथा प्रत्येक स्पेक्ट्रम रेखा की एक निश्चित आवृत्ति होती है अतः परमाणु से केवल कुछ निश्चित आवृत्तियों की ही तरंगें उत्सर्जित होनी चाहिये सभी आवृत्तियों की नहीं इस प्रकार रदरफोर्ड मॉडल रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में असक्षम रहा।

प्रश्न 9.
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में कौनसी श्रेणी दृश्य स्पेक्ट्रम क्षेत्र में होती है? इस श्रेणी की विभिन्न रेखाओं की तरंग संख्यायें ज्ञात करने के लिये सूत्र लिखिये।
उत्तर:
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में बामर श्रेणी दृश्य स्पेक्ट्रम क्षेत्र में होती है। बामर श्रेणी, हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन जब किसी ऊँचे स्तरों n2 = 3, 4, 5….. से द्वितीय ऊर्जा स्तर n = 2 में संक्रमण करता है तो उत्सर्जित विकिरण की श्रृंखला को बामर श्रेणी कहते हैं।
\(\frac{1}{\lambda}\) = \(\mathrm{R}\left[\frac{1}{2^2}-\frac{1}{\mathrm{n}_2^2}\right]\)
जहाँ पर n 2 = 3, 4, 5 ……….. ∞ है इस श्रेणी की सबसे बड़ी तरंगदैर्ध्य 6563 Å तथा सबसे छोटी तरंगदैर्ध्य 3646 À है।

प्रश्न 10.
रदरफोर्ड के Q-कण के प्रयोग में यह देखने में आता है कि (i) अधिकतर a-कण लगभग बिना प्रकीर्णित हुए सीधे निकल जाते हैं, (ii) जबकि उनमें कुछ बड़ा कोण बनाते हुए प्रकीर्णित होते हैं तथा कुछ कण ऐसे भी हैं जो प्रकीर्णित होकर वापस अपने ही मार्ग पर लौट आते हैं। परमाणु की संरचना के विषय में इससे क्या सूचना प्राप्त होती है?
उत्तर:
(i) परमाणु के भीतर अधिकांश भाग खोखला है तथा
(ii) में धनावेश एक अत्यन्त सूक्ष्म स्थान (नाभिक) में संकेन्द्रित है।

प्रश्न 11.
एक α-कण V वोल्ट विभवान्तर से गुजरकर एक नाभिक से टकराता है। सिद्ध कीजिए कि यदि परमाणु संख्या Z हो, तो कण की नाभिक के पास पहुँचने की निकटतम दूरी 14.4 (Z/V) Å होगी।
(दिया है : 1/4r πE0 = 9.0 x 109 न्यूटन मीटर / कूलॉम’; तथा e = 1.6 x 10-19कूलॉम)
उत्तर:
α-कण की नाभिक के निकटतम पहुँचने की स्थिति में α-कण की गतिज ऊर्जा = α-कण नाभिक निकाय की वैद्युत
स्थितिज ऊर्जा
⇒ 2e x v = 1/4πE0(2e x Ze/r0)
⇒ 9 x 109(2e x Ze/r0)
⇒ 2ev = \(\frac{2 \times 9 \times 10^9 \times \mathrm{Ze}^2}{\mathrm{r}_0}\)
⇒ r0 = \(\frac{9 \times 10^9 \mathrm{Ze}}{\mathrm{V}}\) मीटर
मान रखने पर
9 x 109 1.6 x 10-19 मीटर
= 14.4 x 1010

प्रश्न 12.
किसी हाइड्रोजन परमाणु में प्रथम उत्तेजित स्तर तथा मूल स्तर के संगत कक्षाओं की त्रिज्याओं का अनुपात क्या होता है?
उत्तर;
हम जानते हैं rn α nn
मूल स्तर के लिए n = 1 तथा प्रथम उत्तेजित स्तर के लिए n = 2 होता है।
प्रथम उत्तेजित स्तर की त्रिज्या (5) मूल स्तर की त्रिज्या (i)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु 3

\(\frac{r_2}{r_1}\) = \(\frac{4}{1}\)
r2 : r1 = 4 : 1

प्रश्न 13.
क्या कारण है कि किसी परमाणु के अवशोषण संक्रमणों की संख्या उत्सर्जन संक्रमणों से कम होती है?
उत्तर:
इसका कारण है कि उत्सर्जन संक्रमण किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर से प्रारम्भ होकर उससे किसी भी निम्न ऊर्जा स्तर पर समाप्त हो सकते हैं, जबकि अवशोषण संक्रमण सदैव मूल ऊर्जा स्तर से ही प्रारम्भ होकर किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर पर समाप्त होते हैं।

प्रश्न 14.
हाइड्रोजन परमाणु में केवल एक ही इलेक्ट्रॉन है, परन्त उसके उत्सर्जन वर्णक्रम में कई रेखाएँ होती हैं। ऐसा कैसे होता है? कारण सहित समझाइए।
उत्तर:
प्रत्येक परमाणु के कुछ सुनिश्चित ऊर्जा स्तर होते हैं। सामान्य अवस्था में हाइड्रोजन परमाणु का इलेक्ट्रॉन निम्नतम ऊर्जा- स्तर में रहता है। जब परमाणु को बाहर से पर्याप्त ऊर्जा मिलती है तो इलेक्ट्रॉन निम्न ऊर्जा स्तर को छोड़कर किसी ऊँचे ऊर्जा स्तर में चला जाता है, अर्थात् उत्तेजित हो जाता है। लगभग 10 सेकण्ड में ही इलेक्ट्रॉन ऊँचे ऊर्जा स्तर को छोड़ देता है। अब यह सीधे निम्नतम ऊर्जा स्तर में भी लौट सकता है अथवा नीचे ऊर्जा स्तरों से होते हुए भी निम्नतम ऊर्जा स्तर में लौट सकता है। चूँकि किसी प्रकाश स्रोत (हाइड्रोजन लैम्प में असंख्य परमाणु हैं, अतः स्रोत में सभी सम्भव संक्रमण होने लगते हैं तथा स्पेक्ट्रम में अनेक रेखाएँ दिखाई पड़ती है।

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प्रश्न 15.
सतत परास की आवृत्ति वाले फोटॉन विरलित (rarefied) हाइड्रोजन नमूने में से गुजारे जाते हैं। चित्र में तीन अवशोषित रेखाएँ दर्शाई गई हैं।
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(i) ये रेखाएँ हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की किस श्रेणी से सम्बन्धित
(ii) इनमें से किसकी तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होगी?
उत्तर:
(i) I = लाइमैन श्रेणी II = बामर श्रेणी III = पाश्चन श्रेणी।
(ii) ∵ λ = hc/ΔΕ अधिकतम तरंगदैर्घ्य के लिए AE न्यूनतम होनी चाहिए। यह III रेखा के लिए है। अतः इसकी तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होगी।

प्रश्न 16.
H2 परमाणु में पहली बोहर कक्षा की त्रिज्या ro है। दूसरी कक्षा की त्रिज्या कितनी होगी? एकल आयनित हीलियम परमाणु की द्वितीय कक्षा की त्रिज्या कितनी होगी?
उत्तर:
H2 परमाणु के लिए r α n2; इसलिए इसकी दूसरी
कक्षा की त्रिज्या
r2 = 22r1 = 22 x ro = 4ro
H2 सदृश परमाणु के लिए r α (n2/Z) तथा एकल आयनित हीलियम परमाणु के लिए Z = 2
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= \(\frac{2^2 / 2}{2^2}\)
अतः एकल आयनित He परमाणु की द्वितीय कक्षा की त्रिज्या
= H2 परमाणु की द्वितीय कक्षा की त्रिज्या / 2
= 4r/2 = 2ro

प्रश्न 17.
हाइड्रोजन परमाणु को उत्तेजित करने वाले इलेक्ट्रॉन की न्यूनतम ऊर्जा कितनी हो कि हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में तीन स्पेक्ट्रमी रेखाएँ प्राप्त हों?
उत्तर:
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम तीन स्पेक्ट्रमी रेखाएँ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि परमाणु को उत्तेजित करने वाले इलेक्ट्रॉन में इतनी ऊर्जा हो कि उसको n = 1 से n = 3 में उत्तेजित कर सकें जिससे तीन उत्सर्जन संक्रमण = (3 → 2, 3 → 1, 2 → 1) प्राप्त हो जायेंगे।
इस स्थिति में सूत्र En = ( 13.6/n 2 ) eV. से.
अतः
E1 = -(13.6/12)ev = -13.6ev
E3 = -(13.6/32)ev = -1.5ev
आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा = E3 – E1
= – 1.5 eV – (- 13.6 eV)
= – 1.5 eV + 13.6 eV = 12.1 ev
यद्यपि परमाणु के अवशोषण स्पेक्ट्रम में तीन स्पेक्ट्रमी रेखाएँ : (1 → 2, 1 → 3, 1 → 4) प्राप्त करने के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा (E4 – E1) = 12.75 ev चाहिए।

प्रश्न 18.
बोर के सिद्धान्त की कमियों का उल्लेख कीजिये।
उत्तर:
बोर प्रतिरूप की कमियाँ
(1) बोर का सिद्धान्त एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु, जैसे- हाइड्रोजन या आयनित हीलियम के लिये ही उपयुक्त है। इसके द्वारा अन्य परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं की जा सकी।
(2) इस सिद्धान्त में नाभिक को स्थिर माना गया है, परन्तु यह तभी सम्भव है जब नाभिक का द्रव्यमान अनन्त हो।
(3) इसमें इलेक्ट्रॉन की कक्षायें वृत्ताकार मानी गयी हैं, जबकि यह अधिकतर दीर्घ वृत्ताकार होती हैं।
(4) इसके आधार पर स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तीव्रता की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
(5) कोणीय संवेग के क्वांटीकरण का कोई तर्कसंगत आधार नहीं दिया गया।
(6) इसके आधार पर स्पेक्ट्रमी रेखाओं की सूक्ष्म संरचना की व्याख्या नहीं की जा सकती।
(7) चुम्बकीय क्षेत्र प्रयुक्त करने पर स्पेक्ट्रमी रेखाओं में विपाटन (Splitting ) होता है, यह प्रभाव जेमान प्रभाव कहलाता है जिसकी व्याख्या बोर सिद्धान्त से नहीं हो सकी। इस तरह विद्युत क्षेत्र में स्पेक्ट्रमी रेखाओं का विपाटन प्रेक्षित होता है जिसे स्टार्क प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 19.
बोर के अभिगृहीतों के आधार पर हाइड्रोजन परमाणु की nवीं स्थाई कक्षा में इलेक्ट्रॉन के कक्षीय वेग के व्यंजक की व्युत्पत्ति कीजिए।
हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में ऊर्जा (-) Xev है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा कितनी होगी?
उत्तर:
बोर की प्रथम परिकल्पना – परमाणु में इलेक्ट्रॉन नामिक के चारों ओर विभिन्न स्थायी वृत्ताकार कक्षों में घूमते हैं। इलेक्ट्रॉन एवं नाभिक के आवेश के बीच कार्य करने वाला कूलॉम बल, इलेक्ट्रॉन की वृत्तीय कक्षा में घूमने के लिये आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल प्रदान करता है। अतः बोर की प्रथम परिकल्पना से
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बोर की द्वितीय परिकल्पना: इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जिनमें इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग ( L = mvr), h/2π का पूर्ण गुणक हो। बोर की इस परिकल्पना के अनुसार
L = nh/2π
या
mvr = n(h/2π) ….(2)
जहाँ h = प्लांक नियतांक तथा n = 1. 2. 3…. मुख्य क्वाण्टम
संख्यायें हैं।
समीकरण (1) से
mv2r = \(\frac{\mathrm{Ze}^2}{4 \pi \epsilon_0}\)
या mvrv = \(\frac{\mathrm{Ze}^2}{4 \pi \epsilon_0}\) ………(3)
समीकरण (2) से mvr का मान रखने पर
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(जहाँ n = 1. 2. 3….. )
समीकरण (4) स्थायी कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन के वेग का सामान्य व्यंजक है। इस सूत्र में e, E0 तथा h सार्वत्रिक नियतांक हैं। परमाणु
विशेष के लिये Z भी नियतांक है अतः v α 1/n
अर्थात् “स्थायी कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का वेग कक्षा की संख्या अर्थात् मुख्य क्वाण्टम संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है। ” इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा का मान
K =- (-) X ev
K = XeV

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प्रश्न 20.
एक ऐल्फा कण, जिसकी गतिज ऊर्जा 4.5 Mev है, Z = 80 के किसी नाभिक से टकराता है, रुकता है और अपनी दिशा उत्क्रमित करता है, तो निकटतम उपगमन की दूरी निर्धारित कीजिए।
उत्तर:
माना निकटतम उपगमन की दूरी है।
था
K = 4.5Mev
= 4.5 x 106 ev
Z = 80
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आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
गांइगर मार्सडन प्रयोग में Z = 80 नाभिक से निकटतम पहुँच की दूरी ज्ञात कीजिए जब 8 Mev ऊर्जा का Q-कण उसकी ओर प्रेक्षित किया जाता है जो क्षणभर के लिए विरामावस्था में आने से पहले उसकी दिशा प्रतिलोम हो जाती है। जब Q-कण की गतिज ऊर्जा दुगुनी कर दी जाये तो निकटतम पहुँच की दूरी कैसे प्रभावित होगी?
उत्तर:
निकटतम पहुँच की दूरी का सूत्र
r0 = K2Ze2/Ek
दिया है:
z = 80, E = 8 Mev
= 8 × 106 × 1.6 x 10-19 J
e = 1.6 x 10-19 कूलॉम
मान रखने पर
ro = \(\frac{9 \times 10^9 \times 2 \times 80 \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2}{8 \times 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{2304 \times 10^{-10}}{8 \times 10^6}\)
= 288 ×10-16
जब
= 28.8 × 10-15m
Ek = 2 × 8 MeV = 16 Mev
= 16 × 100 × 1.6 × 10-16J
तब
= \(\frac{9 \times 10^9 \times 2 \times 80 \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2}{16 \times 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{2304 \times 10^{-10}}{16 \times 10^6}\)
= 144 x 10-16
= 14.4 × 10-15m
यदि अल्फा कण की ऊर्जा दुगुनी कर दी जाये तो निकटतम पहुँच दूरी आधी हो जायेगी।

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प्रश्न 2.
हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम व द्वितीय बोर कक्षों की त्रिज्याएँ, वेग व ऊर्जा स्तरों की गणना कीजिए दिया है h = 6.6 x 10-14 जूल- सेकण्ड;
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m = 9.1 x 10-31 किलोग्रामः
e = 1.6 × 10-19 कूलॉम;
Eo = 8.85 × 10-12 कूलॉम / न्यूटन मीटर
उत्तर:
(i) कक्षा की त्रिज्या rn =\(\frac{\epsilon_0 n^2 h^2}{\pi m e^2}\)
अतः प्रथम कक्षा की त्रिज्या के लिए n = 1
∴ r1 = \(\frac{\epsilon_0 h^2}{\pi \mathrm{me}^2}\)
= \(\frac{8.85 \times 10^{-12} \times\left(6.6 \times 10^{-34}\right)^2}{3.14 \times 9.1 \times 10^{-31} \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2}\) मीटर
= 5.29 × 10-11 मीटर
= 0.529 ऐंग्स्ट्रम
(ii) द्वितीय कक्षा n = 2 के लिए r2 = n2r1
= 4 × 0.529 Å = 2.116 ऐंग्स्ट्रम

(iii) यदि प्रथम कक्षा में वेग V1 है, तो
= \(\frac{\mathrm{e}^2}{2 \epsilon_{\mathrm{o}} \mathrm{nh}}\)
= \(\frac{\left(1.6 \times 10^{-16}\right)^2}{2 \times 8.85 \times 10^{-12} \times 6.6 \times 10^{-34}}\)
= 2.2 × 106 मीटर/सेकण्ड

(iv) द्वितीय कक्षा में वेग V2
Vn = V1/n यहाँ n = 2
∴ V2 = \(\frac{\left(1.6 \times 10^{-16}\right)^2}{2 \times 8.85 \times 10^{-12} \times 6.6 \times 10^{-34}}\)
= 1.1 x 106मीटर / सेकण्ड

(v) nवीं कक्षा की ऊर्जा En = \(\frac{-m e^4}{8 \epsilon_0^2 h^2 n^2}\)
n = 1 रखने पर प्रथम कक्षा ( मूल स्तर) की ऊर्जा
E1 = \(\frac{-m e^4}{8 \epsilon_0^2 h^2}\)
= \(\frac{9.1 \times 10^{-31} \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^4}{8 \times\left(8.85 \times 10^{-12}\right)^2 \times\left(6.6 \times 10^{-34}\right)^2}\)
= – 2.179 × 1018 जूल
= \(\frac{-2.179 \times 10^{-18}}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= – 13.6 इलेक्ट्रॉन वोल्ट

(vi) दूसरे कक्षा की ऊर्जा En = E1/n2
(यहाँ n = 2)
∴ E2 = -13.6eV/4 = -3.4
इलेक्ट्रॉन वोल्ट

प्रश्न 3.
एक परमाणु का ऊर्जा स्तर आरेख चित्र में प्रदर्शित किया गया है। संक्रमण B तथा D से प्राप्त फोटॉनों के तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिये।
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उत्तर:
संक्रमण B के लिए
E1 = – 4.5 eV तथा E2 = 0 ev
E = E2 – E1 = 0 + 4.5 = 4.5 ev
अतः उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा ( फोटॉन की तरंगदैर्ध्य )
λ = hc/E
∴ λ = hc/4.5ev
मान रखने पर
λ = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{4.5 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
λ = \(\frac{6.62 \times 3 \times 10^{-34} \times 10^{27}}{4.5 \times 1.6}\)
= \(\frac{19.8 \times 10^{-7}}{7.2}\)
= 2.75 x 107 m
= 2750 × 10-10m = 2750 A
संक्रमण D के लिए
E1 = – 10 eV तथा E2 =- 2e V.
E = E2 – E से
= -2eV + 10 eV = 8 ev
अतः उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा ( फोटॉन की तरंगदैर्ध्य )
∴ λ = hc/E = hc/8ev
मान रखने पर
λ = \(\frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{8 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= 1.547 × 107 m
= 1547 x 10-10 m
= 1547 A

प्रश्न 4.
हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम उत्तेजित अवस्था में ऊर्जा – 3.4 V है। मूल अवस्था प्राप्त करने पर उत्सर्जित फोटॉन का तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिये उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज एवं गतिज ऊर्जाओं की गणना भी कीजिये।
उत्तर:
n वीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की गतिज एवं स्थितिज ऊर्जायें क्रमशः हैं (H-परमाणु के लिये )
है।
गतिज ऊर्जा Kn = 13.6/n2ev
और स्थितिज ऊर्जा Un = -27.2/n2 ev
n = 2, द्वितीय कक्षा जिसे हम प्रथम उत्तेजित अवस्था भी कहते
∴ n = 2 रखने पर K2 = 13.6/22eV = 3.4ev
U2 = -27.2/22ev = -6.8eV
हाइड्रोजन परमाणु के इलेक्ट्रॉन के प्रथम उत्तेजित अवस्था से मूल अवस्था में लौटने पर उसकी ऊर्जा में हुआ हास
13.6 + 3.4 = -10.2 ev
प्रश्नानुसार इसमें 3 तरंगदैर्घ्य का फोटॉन उत्सर्जित होता है।
hc/λ = 10.2 x 1.6 x 10-19
λ = \(\frac{h c}{10.2 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{10.2 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= 1.217 x 107 m
= 1217 A

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प्रश्न 5.
(i) चित्रानुसार जब कोई इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तर 2E से ऊर्जा स्तर E में संक्रमण करता है तो तरंगदैर्ध्य का फोटॉन उत्सर्जित होता है। यदि यह इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तर स्तर E में संक्रमण करता है तो उत्सर्जित फोटॉन ज्ञात कीजिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु 11
(ii) हाइड्रोजन परमाणु के प्रथम कक्ष की त्रिज्या 0.53है तो इसके दूसरे कक्ष की त्रिज्या कितनी होगी?
उत्तर:
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समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
\(\frac{\lambda_1}{\lambda}\) = \(\frac{3 R}{4 E^2}\) \(\frac{25 \mathrm{E}^2}{9 R}\)
\(\frac{\lambda_1}{\lambda}\) = \(\frac{25}{12}\)
λ = \(\frac{25}{12}\)

(ii) सूत्र rn = 0.53n2/Z
हाइड्रोजन के लिए Z = 1
∴ rn = 0.53n2 A
दूसरे कक्ष के लिए
n = 2
r2 = 0.53 × 22
= 0.53 × 4
= 2.12A

प्रश्न 6.
किसी परमाणु में ऊर्जा स्तर A से C में संक्रमण से 1000 ऐंग्स्ट्रम तथा संक्रमण B से C में 5000 ऐंग्स्ट्रम तरंगदैर्ध्य के विकिरण उत्सर्जित होते हैं, ऊर्जा स्तर A से B में संक्रमण के लिए उत्सर्जित विकिरण की तरंगदैर्ध्य कितनी होगी?
उत्तर:
हम जानते हैं कि
\(E_{n_2}-E_{n_1}=\frac{h c}{\lambda}\)
प्रश्नानुसार
EA – EC = \(\frac{\mathrm{hc}}{\lambda}\) यहाँ λ1 = 1000 Å
अतः
EA – EC = \(\frac{h c}{1000 Å}\) ……(1)
इसी प्रकार EB – EC = \(\frac{h c}{5000 Å}\) …..(2)
यदि A से B में संक्रमण से उत्सर्जित विकिरण (फोटॉन) की तरंगदैर्ध्य λ3 हो तो
EB – EC = \(\frac{\mathrm{hc}}{\lambda_3}\) …….(3)
समीकरण (1) में से समीकरण (2) घटाने पर
EA – EC = \(\frac{h c}{1000 Å}\) – \(\frac{h c}{5000 Å}\)
= \(\mathrm{hc}\left[\frac{(5000-1000) Å}{1000 \times 5000 Å \times Å}\right]\) ……(4)
समीकरण (4) में समीकरण (3) से मान रखने पर
\(\frac{\mathrm{hc}}{\lambda_3}\) = \(\frac{h c 4000}{1000 \times 5000} \frac{1}{Å}\)
या
λ3 = \(\frac{5000 Å}{4}\) = 1250 ऐंग्स्ट्रम

प्रश्न 7.
किसी तत्व का ऊर्जा स्तर आरेख नीचे चित्र में दिया गया है, आवश्यक गणना करके यह पहचानें कि कौनसा संक्रमण उत्सर्जन की स्पेक्ट्रमी रेखा का तरंगदैर्घ्य 102.7 nm के संगत है?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु 12
उत्तर:
संक्रमण A के लिए
E1 = – 1.5 eV और E2 = – 0.85 eV
∴ E = E2 – E1
= -0.85 (-1.5)
= – 0.85 + 1.5
E = 0.65 eV
= 0.65 x 1.6 x 10-19 J
अतः उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा की तरंगदैर्ध्य
λ = \(\frac{h c}{E}\) सूत्र से ज्ञात करेंगे
मान रखने पर
λ = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{0.65 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{19.86 \times 10^{-7}}{1.04}\) = 19.1 × 10-7
= 1910 nm
संक्रमण B के लिए
E1 = – 3.4 eV और E2 = – 0.85 ev
E = E2 – E1 = – 0.85 – (-3.4)
= – 0.85 + 3.4
E = 2.55 eV = 2.55 x 1.6 x 10-19 J
अतः उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा ( फोटॉन) की तरंगदैर्ध्य
λ = \(\frac{h c}{E}\) से ज्ञात करेंगे।
मान रखने पर
λ = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{2.55 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
19.86/4.08 x 10-7m
= 4.87 × 10-7m
= 487 nm
संक्रमण C के लिए
E1 = – 3.4 eV तथा E2 = -1.5 ev
E = E2 – E1 = – 1.5 – (-3.4)
= – 1.5 + 3.4
= 1.9 ev
अतः उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा ( फोटॉन) की तरंगैदर्घ्य का सूत्र
λ = \(\frac{h c}{E}\) से ज्ञात करेंगे।
λ = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{1.9 \times 1.6 \times 10^{-19}}\) मीटर
= 19.86/3.04 ×10-7 = 6.533 x 10-7 m
= 653.3 nm
संक्रमण D के लिए
E1 = – 13.6 eV और E2 = -1.5 ev
E = E2 – E1
= – 1.5 (- 13.6)
= 1.5+ 13.6
E= 12.1 ev
अतः उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा ( फोटॉन) की तरंगदैर्ध्य
λ = \(\frac{h c}{E}\) से ज्ञात करेंगे।
λ = \(\frac{h c}{E}\) = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{12.1 \times 1.6 \times 10^{-19}}m\)
λ = \(\frac{19.86}{13.6}\) x 10-7m
= 1.026 × 10-7 m
λ = 102.6nm
उपर्युक्त गणनाओं से यह ज्ञात होता है कि संक्रमण D से उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा की तरंगदैर्घ्य 102.6nm के संगत है।

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प्रश्न 8.
हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था में ऊर्जा -13.6 ev है, यदि एक इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तर 0.85 ev से -3.4 eV ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है तो उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए यह तरंगदैर्घ्य हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के किस श्रेणी में स्थित होती है?
उत्तर:
उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा
E = – 0.85 – (-3.4) = 0.85 + 3.4
E = 2.55 ev
= 2.55 × 1.6 x 10-19 J
उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा ( फोटॉन) की तरंगदैर्घ्य
λ = hc/E से ज्ञात करेंगे।
= \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{2.55 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{19.86}{4.08}\) x 10-7 m
= 4.8676 × 10-7m
= 486.76nm
= 4867.6 A
यह तरंगदैर्घ्य हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के बामर श्रेणी में स्थित होती है।

प्रश्न 9.
हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था ऊर्जा 13.6ev है तो
(i) द्वितीय उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा क्या है?
(ii) यदि इलेक्ट्रॉन द्वितीय उत्तेजित अवस्था से मूल अवस्था में कूदता है तो उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा के तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु में nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा होगी
En = \(\frac{-13.6}{n^2} e V\) …..(1)
(i) द्वितीय उत्तेजित अवस्था के लिए n = 3 लेने पर
∴ E3 = \(\frac{-13.6}{3^2} \mathrm{eV}\) = \(\frac{-13.6}{9}\) = -1.510V
(ii) द्वितीय उत्तेजित अवस्था (n = 3) से मूल अवस्था (n = 1) में इलेक्ट्रॉन के कूदने पर उत्सर्जित ऊर्जा
E = E3 – E1
= – 1.51 – (-13.6)
= – 1.51 + 13.6 = 12.09 ev
उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखा की तरंगदैर्घ्य का मान होगा
λ = \(\frac{h c}{E}\) = \(\frac{6.62 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{12.09 \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{19.86}{19.344}\)
= 1.027 × 10-7m
= 102.7 nm = 1027 A

प्रश्न 10.
किसी परमाणु के ऊर्जा स्तर A, B व C की ऊर्जाएँ क्रमशः EA, EB, Ec हैं तथा EA < EB < EC हैं। यदि C से B में, B से A में तथा C से A में इलेक्ट्रॉन के संक्रमण से प्राप्त फोटॉनों की तरंगदैर्ध्य क्रमशः λ1, λ2 λ3 हैं, तो सिद्ध कीजिए कि λ3 = \(\frac{\lambda_1 \lambda_2}{\lambda_1+\lambda_2}\)
उत्तर:
हम जानते हैं कि
∆E = hv = \(\frac{\mathrm{hc}}{\lambda}\)
अतः EC – EB= \(\frac{h c}{\lambda_1}\) …..(1)
EB – EA = \(\frac{h c}{\lambda_2}\) …..(2)
तथा EC – EA = \(\frac{h c}{\lambda_3}\) …..(3)
समीकरण ( 1 ) एवं समीकरण (2) के योग से
EC – EA = hc(\(\frac{1}{\lambda_1}\) + \(\frac{1}{\lambda_2}\)) ……..(4)
समीकरण (3) व समीकरण (4) से
\(\frac{h c}{\lambda_3}\) = hc\([\frac{1}{\lambda_1}+\frac{1}{\lambda_2}]\)
या \(\frac{1}{\lambda_3}\) = \(\frac{1}{\lambda_1}\) + \(\frac{1}{\lambda_2}\)
अतः
λ3 = \(\frac{\lambda_1 \lambda_2}{\lambda_1+\lambda_2}\)
यही सिद्ध करना था।

प्रश्न 11.
हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी की दूसरी रेखा की तरंगदैर्घ्य का मान 4861 ऐंग्स्ट्रम है। इस श्रेणी की चौथी रेखा के तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए।
उत्तर:
हाइड्रोज़न स्पेक्ट्रम की किसी भी रेखा के लिए n2 = n1+ P(P रेखा की संख्या है)। अतः इस श्रेणी की दूसरी रेखा के लिए n2 = 2 + 2 = 4 तथा चौथी रेखा के लिए n2= 2 + 4 = 6। इन रेखाओं की तरंगदैर्घ्य क्रमशः λ2 व λ4 हों तो
\(\frac{1}{\lambda_2}\) = R\(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{4^2}\)
\(\frac{1}{\lambda_2}\) = \(\frac{3}{16} R\) …….(1)
\(\frac{1}{\lambda_4}\) = R\(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{6^2}\)
इसी प्रकार \(\frac{1}{\lambda_4}\) = \(\frac{8R}{36}\) ………..(2)
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर
\(\frac{\lambda_4}{\lambda_2}\) = \(\frac{3 R}{16}\) \(\frac{36}{8 R}\) = \(\frac{27}{32}\)
∴ λ4 = \(\frac{27}{32}\) × λ2
= \(\frac{27}{32}\) × 4861A = 41015A

प्रश्न 12.
एक हाइड्रोजन परमाणु प्रारम्भ में मूल अवस्था में एक फोटॉन अवशोषित करता है, जिससे वह n = 4 स्तर तक उत्तेजित होता है। फोटॉन की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि फोटॉन की तरंगदैर्घ्य
\(\frac{1}{\lambda}\) = R\(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\)
\(\frac{1}{\lambda}\) = 1.09 × 107 \(\frac{1}{1_1^2}-\frac{1}{4_2^2}\)
\(\frac{1}{\lambda}\) = 1.09 × 107 \(1-\frac{1}{16}\)
= \(\frac{15}{16}\) 1.09 × 107m
था λ = = 980 × 10-10m
था λ = 980 × 10-10 = 980
इसलिए आवृत्ति
v = \(\frac{\mathbf{c}}{\lambda}\) = \(\frac{3 \times 10^8}{9.8 \times 10^{-8}}\)
= 3.06 × 10-15 per second

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु

प्रश्न 13.
यदि लाइमैन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य 1216 है तो बामर व पाश्चन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
लाइमैन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य λL बामर श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य λB तथा पाश्चन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य λp हो तो हम तरंगदैर्घ्य के समीकरण से जानते हैं
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 12 परमाणु 13

प्रश्न 14.
हाइड्रोजन परमाणु की मूल अवस्था की ऊर्जा -13.6eV है, इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज तथा स्थितिज ऊर्जायें क्या हैं?
उत्तर:
प्रश्नानुसार दिया है:
E1 = – 13.6ev
∵ Ek1 = \(\) तथा E1 = \(\)
∵Ek1 = -E1 = -(-13.6) = 13.6 ev
∵ Ek1 तथा E1 = \(\)
∵EP1 = 2E1 = 2 × (-13.6) = -27.2ev
अतः मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
Ek1 = 13.6ev
तथा स्थितिज ऊर्जा EP1 = -27.2ev

प्रश्न 15.
हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था मे ऊर्जा -13.6eV है। इस दशा में इलेक्ट्रॉन की गतिज़ ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा ज्ञात करें।
उत्तर:
यहाँ E1 = -13.6ev
इसलिये गतिज ऊर्जा k = -(E1) = -(-13.6ev)
k = 13.6ev
स्थितिज ऊर्जा U = 2E1 = 2 ×(-13.6ev)
= -27.2ev

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक आवेशित कण की समान चाल की गति से उत्पन्न होता है:
(अ) केवल विद्युत क्षेत्र
(ब) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(स) विद्युत व चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
(द) विद्युत व चुम्बकीय क्षेत्र के साथ विद्युत चुम्बकीय तरंगें।
उत्तर:
(स) विद्युत व चुम्बकीय क्षेत्र दोनों

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

प्रश्न 2.
एक इलेक्ट्रॉन त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर n चक्कर प्रति सेकण्ड की दर से परिक्रमण करता है। इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण होगा:
(अ) शून्य
(ब) πr2ne
(स) πr2n2e
(द) \(\frac{\mu_0 r^2 n e}{2 \pi}\)
उत्तर:
(ब) πr2ne

प्रश्न 3.
एक वृत्ताकार कुण्डली में प्रवाहित धारा के कारण इसके केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B है। इसी कुण्डली के अक्षीय बिन्दु पर, इसकी त्रिज्या के बराबर दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र B है तो
का मान होगा:
(अ) √2 : 1
(ब) 2√2 : 1
(स) 1 : 2√2
(द) 1 : √2
उत्तर:
(ब) 2√2 : 1

प्रश्न 4.
दो समरूप कुण्डलियों में समान विद्युत धारा बहती है। इनके केन्द्र उभयनिष्ठ तथा तल परस्पर लम्बवत् हैं। एक कुण्डली के कारण इसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र B है तो उभयनिष्ठ केन्द्र पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र होगा:
(अ) शून्य
(ब) \(\frac{B}{\sqrt{2}}\)
(स) √2 B
(द) 2B
उत्तर:
(स) √2 B

प्रश्न 5.
एक धारावाही वृत्ताकार त्रिज्या R की कुण्डली के कारण उसके अक्ष पर x दूरी (x >> R ) पर स्थित चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B की x पर निर्भरता होगी:
(अ) B ∝ \(\frac{1}{x^{\frac{3}{2}}}\)
(ब) B ∝ \(\frac{1}{x^2}\)
(स) B ∝ \(\frac{1}{\mathrm{x}^3}\)
(द) B ∝ \(\frac{1}{x^{\frac{1}{2}}}\)
उत्तर:
(स) B ∝ \(\frac{1}{\mathrm{x}^3}\)

प्रश्न 6.
L लम्बाई के तार से एक लूप की कुण्डली बनाई जाती है तथा बाद में इसी तार से 2 लूप की कुण्डली बनाई जाती है तो केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्रों का अनुपात होगा:
(अ) 1 : 4
(ब) 1 : 1
(स) 1 : 8
(द) 4 : 1
उत्तर:
(अ) 1 : 4

प्रश्न 7.
दो समान्तर तारों में प्रत्येक में 1A धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है और उनके मध्य दूरी 1m है तो परस्पर एकांक लम्बाई पर आकर्षण बल होगा:
(अ) 2 x 107 Nm-1
(ब) 4 x 10-7 Nm-1
(स) 8 x 10-7 Nm-1
(द) 10-7Nm-1
उत्तर:
(अ) 2 x 107 Nm-1

प्रश्न 8.
एक परिनालिका में धारा प्रवाह से उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B है। परिनालिका की लम्बाई व फेरों की संख्या को दुगुना करने पर, वहीं चुम्बकीय क्षेत्र प्राप्त करने के लिए प्रवाहित धारा करनी पड़ेगी:
(अ) 2i
(ब) i
(स) \(\frac{\mathrm{i}}{2}\)
(द) \(\frac{\mathrm{i}}{4}\)
उत्तर:
(ब) i

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प्रश्न 9.
निश्चित अनुप्रस्थ काट के धारावाही टोरॉइड के लिए चुम्बकीय क्षेत्र का मान होता है:
(अ) सम्पूर्ण काट क्षेत्रफल पर समान
(ब) बाहरी किनारे पर अधिकतम
(स) आन्तरिक किनारे पर अधिकतम
(द) अनुप्रस्थ काट के केन्द्र पर अधिकतम।
उत्तर:
(स) आन्तरिक किनारे पर अधिकतम

प्रश्न 10.
ऐम्पियर के नियम का सही गणितीय रूप है:
(अ) \(\oint \mathrm{B} \cdot \mathrm{d} l=\Sigma \mathrm{i}\)
(ब) \(\oint \mathrm{H} \cdot \mathrm{d} l=\Sigma \mathrm{i}\)
(स) \(\oint \mathrm{B} \mathrm{d} l=\frac{\Sigma_{\mathrm{i}}}{\mu_{\mathrm{o}}}\)
(द) \(\oint \mathrm{H} \cdot \mathrm{d} l=\mu_{\mathrm{o}} \Sigma \mathrm{i}\)
उत्तर:
(ब) \(\oint \mathrm{H} \cdot \mathrm{d} l=\Sigma \mathrm{i}\)

प्रश्न 11.
d दूरी पर स्थित दो समान्तर चालक तारों में समान धारा विपरीत दिशा में प्रवाहित हो रही है तो तारों के मध्य बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का मान होगा:
(अ) \(\frac{\mu_0 i}{2 \pi d}\)
(ब) \(\frac{2 \mu_0 \mathrm{i}}{\pi \mathrm{d}}\)
(स) \(\frac{\mu_0{ }^1}{\pi \mathrm{d}^2}\)
(द) शून्य।
उत्तर:
(ब) \(\frac{2 \mu_0 \mathrm{i}}{\pi \mathrm{d}}\)

प्रश्न 12.
1 टेसला, गाऊस के तुल्य है:
(अ) 107
(ब) 104
(स) 104
(द) 10-7
उत्तर:
(स) 104

प्रश्न 13.
किसी वृत्ताकार धारावाही चालक के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का मान होता है:
(अ) न्यूनतम
(ब) केवल धारा के समानुपाती
(स) अधिकतम
(द) त्रिज्या के समानुपाती।
उत्तर:
(स) अधिकतम

प्रश्न 14.
लम्बे सीधे चालक में स्थिर धारा प्रवाहित हो रही है तो उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B व दूरी के साथ परिवर्तन का ग्राफ है:

उत्तर:

प्रश्न 15.
एक धारावाही परिनालिका में चुम्बकीय क्षेत्र B है। फेरों की संख्या अपरिवर्तित रखते हुए यदि परिनालिका की लम्बाई तथा प्रवाहित धारा का मान दुगुना कर दिया जाये, तो परिनालिका में चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा:
(अ) B
(ब) 2B
(स) \(\frac{B}{4}\)
(द) 4B
उत्तर:
(ब) 2B

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प्रश्न 16.
किसी लम्बे धारावाही चालक के कारण किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा होती है:
(अ) धारा के समान्तर
(ब) धारा के विपरीत
(स) त्रिज्यीय बाहर की ओर
(द) चालक तथा बिन्दु को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् दक्षिण हस्त नियम के अनुसार।
उत्तर:
(द) चालक तथा बिन्दु को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् दक्षिण हस्त नियम के अनुसार।

प्रश्न 17.
अनन्त लम्बाई के एक तार में I धारा प्रवाहित हो रही है। तार पर चुम्बकीय क्षेत्र B है अग्र में से कौनसा से लम्बवत् दूरी सम्बन्ध सही है:
(अ) B ∝ \(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{r}^2}\)
(ब) B ∝ \(\frac{I}{r}\)
(स) B ∝\(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{r}^2}\)
(द) B ∝ \(\frac{\mathrm{I}}{\sqrt{\mathrm{r}}}\)
उत्तर:
(ब) B ∝ \(\frac{I}{r}\)

प्रश्न 18.
दो लम्बे सीधे तार समान्तर रखे गये हैं और उनके मध्य दूरी 2R है तथा प्रत्येक तार में विपरीत दिशा में धारा बह रही है। दोनों के मध्य एक बिन्दु पर जिसकी दूरी प्रत्येक तार से R है, चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण है:
(अ) शून्य
(ब) \(\frac{\mu_0 I}{4 \pi R}\)
(स) \(\frac{\mu_0 I}{2 \pi R}\)
(द) \(\frac{\mu_0 I}{\pi R}\)
उत्तर:
(द) \(\frac{\mu_0 I}{\pi R}\)

प्रश्न 19.
एक समान स्थिर चुम्बकीय क्षेत्र वाले प्रदेश में एक आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के प्रति समान्तर दिशा में अपने वेग के साथ प्रवेश करता है। इस कण की चाल होगी:
(अ) सीधी रेखा पथ में
(स) वृत्तीय पथ में
(ब) कुण्डलिनी पथ में
(द) दीर्घ वृत्तीय पथ में
उत्तर:
(अ) सीधी रेखा पथ में

प्रश्न 20.
टोरॉइड में प्रवाहित धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान:
(अ) अक्ष के सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
(ब) बाहर की ओर अधिकतम होता है।
(स) केन्द्र पर शून्य होता है।
(द) अक्ष के सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
उत्तर:
(अ) अक्ष के सभी बिन्दुओं पर समान होता है।

प्रश्न 21.
दो समान्तर सुचालक तारों में धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है तो वे:
(अ) एक-दूसरे को आकर्षित करेंगे
(ब) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करेंगे
(स) एक-दूसरे पर कोई बल नहीं लगायेंगे
(द) एक-दूसरे के लम्बवत् हो जायेंगे।
उत्तर:
(स) एक-दूसरे पर कोई बल नहीं लगायेंगे

प्रश्न 22.
परिनालिका के किसी आन्तरिक बिन्दु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान निर्भर करता है:
(अ) केवल परिनालिका में प्रवाहित होने वाली धारा पर
(ब) केवल परिनालिका की लम्बाई पर
(स) चक्करों की संख्या पर
(द) उपर्युक्त सभी पर।
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी पर।

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प्रश्न 23.
दो स्वतन्त्र समान्तर तार जिनमें धारा समान दिशा में प्रवाहित हो रही है तो वे:
(अ) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
(ब) प्रतिकर्षित करते हैं।
(स) एक-दूसरे को प्रभावित नहीं करते हैं।
(द) उनमें से किसी एक तार की धारा विलुप्त हो जाती है।
उत्तर:
(अ) एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

प्रश्न 24.
एक चल कुण्डली धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए उसके साथ:
(अ) एक कम प्रतिरोध को समान्तर क्रम में लगाना होगा
(ब) एक कम प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में लगाना होगा
(स) एक बड़े प्रतिरोध को समान्तर क्रम में लगाना होगा
(द) एक बड़े प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में लगाना होगा
उत्तर:
(द) एक बड़े प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में लगाना होगा

प्रश्न 25.
एकदिशीय धारा वाले दो समान्तर चालकों के बीच आकर्षण बल लगने का कारण है:
(अ) उनके बीच विद्युत वाहक बल
(ब) उनके बीच अन्योन्य प्रेरण
(स) उनके बीच विद्युत बल
(द) उनके बीच चुम्बकीय बल
उत्तर:
(द) उनके बीच चुम्बकीय बल

प्रश्न 26.
चल कुण्डली धारामापी में प्रवाहित धारा I और विक्षेप 6 में सम्बन्ध है:
(अ) I ∝ tan θ
(ब) I ∝ θ
(स) I = \(\frac{1}{\theta}\)
(द) I ∝ cotθ
उत्तर:
(ब) I ∝ θ

प्रश्न 27.
किसी चल कुण्डली धारामापी को वोल्टमीटर में रूपान्तरित किया जा सकता है:
(अ) उच्च प्रतिरोध समान्तर क्रम में जोड़कर
(ब) अल्प प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़कर
(स) उच्च प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़कर
(द) अल्प प्रतिरोध समान्तर क्रम में जोड़कर
उत्तर:
(स) उच्च प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़कर

प्रश्न 28.
टोराइड में प्रवाहित धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान:
(अ) अक्ष के सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
(ब) बाहर की ओर अधिकतम होता है।
(स) केन्द्र पर शून्य होता है।
(द) अक्ष के सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
उत्तर:
(अ) अक्ष के सभी बिन्दुओं पर समान होता है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक गतिमान आवेश (इलेक्ट्रॉन) कौन-कौनसे प्रकार के बल क्षेत्र उत्पन्न करता है? यदि इलेक्ट्रॉन स्थिर है तब किस प्रकार के क्षेत्र उत्पन्न करता है?
उत्तर:
गतिमान इलेक्ट्रॉन वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र दोनों प्रकार केबल क्षेत्र उत्पन्न करता है, जबकि स्थिर इलेक्ट्रॉन केवल वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।

प्रश्न 2.
कौनसी भौतिक राशि का मात्रक न्यूटन / ऐम्पियर मीटर है? क्या यह अदिश राशि है अथवा सदिश?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र का (सदिश)।

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प्रश्न 3.
ऑस्टैंड प्रयोग के निष्कर्ष लिखो।
उत्तर:
धारावाही चालक अपने चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, जिसका किसी बिन्दु पर परिमाण व दिशा चालक में प्रवाहित धारा के परिमाण व दिशा पर निर्भर करता है।

प्रश्न 4.
एक छल्ले को समान रूप से आवेशित किया गया है। छल्ले पर कुल आवेश q व उसकी त्रिज्या है यदि वह अपने अक्ष पर n चक्कर / सेकण्ड घूर्णन करे तो केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान कितना होगा?
उत्तर:
B = \(\frac{\mu_{\mathrm{o}} \mathrm{i}}{2 \mathrm{r}}\) = \(\frac{\mu_o q}{2 r T}\)
= \(\frac{\mu_0 \omega \mathrm{q}}{4 \pi \mathrm{r}}\)

प्रश्न 5.
एक लम्बी धारावाही ताम्बे की खोखली नली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 6.
CGS पद्धति में K का मान समीकरण db = \(\frac{\mathrm{Kid} l \sin \theta}{\mathrm{r}^2}\) में कितना होगा?
उत्तर:
K = 1

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प्रश्न 7.
एक चुम्बकीय क्षेत्र में रखे चालक तार में धारा प्रवाहित करने पर ही चुम्बकीय बल क्यों लगता है?
उत्तर:
धारा प्रवाह से चालक तार के मुक्त इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में अपवहन वेग से गति करने लगते हैं। इस कारण से चुम्बकीय बल लगने लगता है।
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = i\((\vec{L} \times \vec{B})\)

प्रश्न 8.
चित्र में बिन्दु O पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा?
उत्तर:
दोनों सीधे भागों के कारण शून्य होगा,
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व 3
अतः अर्द्धवृत्त के कारण जो कि परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र है,
B = \(\frac{\mu_o i}{4 r}\)

प्रश्न 9.
चित्र में O पर चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा?
उत्तर:
B = O (केन्द्र पर वृत्ताकार भाग के कारण परस्पर विपरीत दिशा में चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जिससे परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होगा)।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व 4

प्रश्न 10.
किसी वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र से गुजरने वाले आवेशित कण पर लगने वाले लॉरेन्स बल का सूत्र लिखिए ।
उत्तर:
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}=\mathrm{q}(\overrightarrow{\mathrm{E}}+\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}})\)

प्रश्न 11.
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को टायरॉइड के क्रोड में पूर्णतः परिरुद्ध किया जा सकता है, परन्तु इन्हें सीधी परिनलिका के भीतर परिरुद्ध नहीं किया जा सकता क्यों?
उत्तर:
एक टायरॉइड एक सिराहीन परिनलिका है इसलिए बल रेखायें बन्द होती हैं जिनकी न कोई शुरुआत होती है और न ही अन्त।

प्रश्न 12.
चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर लगने वाले चुम्बकीय लॉरेंज बल द्वारा आवेशित कण पर कोई कार्य नहीं किया जाता है। प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर:
चूँकि आवेशित कण पर लॉरेंज बल \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) की दिशा कण के वेग \(\vec{v}\) अर्थात् उसके विस्थापन के लम्बवत् होती है।
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = q\((\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}})\) अतः इस बल द्वारा किया गया कार्य W = \(\overrightarrow{\mathrm{F}}\). \(\overrightarrow{\mathrm{d}}\) = Fd cos 90° = 0 अर्थात् कोई भी कार्य नहीं किया जाता है।

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प्रश्न 13.
एक धारावाही परिनालिका को पृथ्वी के क्षैतिज तल में स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाने पर स्थिरावस्था में उसकी दिशा क्या होगी?
उत्तर:
उत्तर-दक्षिण।
∵ (धारावाही परिनालिका चुम्बक की भांति व्यवहार करती है)।

प्रश्न 14.
वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र तथा कुण्डली की त्रिज्या में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
B ∝ \(\frac{1}{\mathrm{R}}\)
∵ केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र B = \(\frac{\mu_0 \mathrm{NI}}{2 \mathrm{R}}\)

प्रश्न 15.
एक आवेशित कण समचुम्बकीय क्षेत्र में इसके समान्तर प्रवेश करता है तो कण का पथ कैसा होगा?
उत्तर:
ऋजुरेखीय। ∵ F = quBsinθ में θ = 0° होने पर बल शून्य होगा।

प्रश्न 16.
चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक वेबर है। इसका तुल्य विद्युत मात्रक बताइये।
उत्तर:
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प्रश्न 17.
किसी वृत्ताकार कुण्डली के व्यासाभिमुखी सिरों पर एक नियत वोल्टता की बैटरी संयोजित है। कुण्डली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र कितना होगा?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 18.
किसी N फेरों वाली R त्रिज्या की धारावाही कुण्डली को खोलकर सीधे लम्बे तार में बदलने पर इससे R दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान कुण्डली के केन्द्र पर मान का कितना गुना होगा?
उत्तर:
केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र
B = \(\frac{\mu_0 N I}{2 R}\) …..(1)
तथा लम्बे सीधे तार के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
B = \(\frac{\mu_0 I}{2 \pi R}\) ……….(2)
समीकरण (1) में समी (2) का भाग देने पर
\(\frac{B_0}{B}\) = \(\frac{\frac{\mu_0 N I}{2 R}}{\frac{\mu_0 I}{2 \pi R}}\) = Nπ

प्रश्न 19.
एक ऐम्पियर धारा की अन्तरराष्ट्रीय मात्रक पद्धति में परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
एक ऐम्पियर विद्युत धारा, वह धारा है जो निर्वात या वायु में परस्पर एक मीटर लाम्बिक दूरी पर स्थित दो लम्बे समान्तर व सीधे चालक तारों में प्रवाहित होने पर तारों की एक मीटर लम्बाई पर 2 x 102 न्यूटन / मीटर बल उत्पन्न करती है।

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प्रश्न 20.
एक परिनालिका के कोड की। मीटर लम्बाई पर 1000 फेरे हैं व उसमें 2A की धारा प्रवाहित हो रही है तो चुम्बकन क्षेत्र H का मान क्या होगा?
उत्तर:
दिया गया है:
N = 1000
L = 1m
I = 2A
चुम्बकन क्षेत्र H =\(\frac{\mathrm{NI}}{\mathrm{L}}\)
H = \(\frac{1000 \times 2}{1}\)
= 2000 A/m
= 2 × 103 A/m

प्रश्न 21.
किस दशा में चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर बल (1) अधिकतम, (ii) न्यूनतम होगा?
उत्तर:
बल F =qVB sin θ से
(i) जब θ = 90° तो F =qVB होगा जो कि अधिकतम मान है।
(ii) जब θ = 0 अथवा θ = 180° तो F = 0 होगा जो कि न्यूनतम मान है।
अतः जब आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् गति करता है तो उस पर लगने वाला बल अधिकतम तथा जब यह चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में अथवा विपरीत दिशा में गति करता है तो बल न्यूनतम (शून्य) होता है।

प्रश्न 22.
कोई इलेक्ट्रॉन किसी एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र वाले स्थान से गुजरते समय विक्षेपित नहीं होता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा इलेक्ट्रॉन के वेग की दिशा में अथवा इसकी विपरीत दिशा में है जिससे θ = 0° अथवा 180° अर्थात् F = evB sin θ = 0 इसलिए यह विक्षेपित नहीं होगा।

प्रश्न 23.
किसी धारामापी को उसी रूप में अमीटर की तरह उपयोग में क्यों नहीं लाते?
उत्तर:
क्योंकि उसकी कुण्डली का प्रतिरोध बहुत कम नहीं होता है तथा यह अपनी कुण्डली के अधिकतम सम्भव विक्षेप के संगम सीमित धारा को ही माप सकता है।

प्रश्न 24.
दो समान्तर तार एक-दूसरे के अति निकट स्थित हैं, ऊपर का तार स्थिर है तथा नीचे का तार मुक्त है। मुक्त तार को रोकने के लिये दोनों तारों में उपयुक्त मान की धारा किस दिशा में प्रवाहित की में जानी चाहिए? कारण दीजिये।
उत्तर:
समान दिशा में प्रवाहित की जानी चाहिए, आकर्षण बल के कारण।

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प्रश्न 25.
बायो- सावर्ट के नियम ( Biot Savart’s Law) से धारावाही चालक के किसी अल्पांश के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के व्यंजक को सदिश रूप में लिखिये।
उत्तर:
\(\overrightarrow{\delta B}\) = \(\frac{\mu_{\mathrm{o}} \mathrm{I}}{4 \pi \mathrm{r}} \frac{\overrightarrow{\delta l} \times \overrightarrow{\mathrm{r}}}{\mathrm{r}^3}\)
या
\(\overrightarrow{\delta B}\) = \(\frac{\mu_{\mathrm{o}} \mathrm{I}}{4 \pi \mathrm{r}} \frac{(\overrightarrow{\delta l} \times \hat{\mathrm{r}})}{\mathrm{r}^2}\)

प्रश्न 26.
दो समान्तर धारावाही चालकों के मध्य प्रतिकर्षण का बल उत्पन्न होता है। इनमें बहने वाली धाराओं की दिशा के बारे में क्या संकेत मिलता है?
उत्तर:
धारा परस्पर विपरीत दिशा में है।

प्रश्न 27.
किसी चालक में विद्युत धारा के कारण चालक के आस- पास कौनसा क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र

प्रश्न 28.
आवेश वाला कण \(\vec{v}\) वेग से चुम्बकीय क्षेत्र में गति कर रहा है। उस पर लगने वाले बल का मान क्या होगा?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर बल
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = q\((\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}})\)

प्रश्न 29.
चल कुण्डली धारामापी में एक मुलायम लोहे का क्रोड काम में क्यों लेते हैं?
उत्तर:
लोहे के क्रोड के कारण चुम्बकीय क्षेत्र तीव्र हो जाता है।

प्रश्न 30.
एक विद्युत लाइन में धारा उत्तर की ओर बह रही है। धारा के कारण विद्युत लाइन के ऊपर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा किधर होगी?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पूर्व की ओर होगी।

प्रश्न 31.
यदि किसी परिनालिका की लम्बाई, उसके कुल फेरों की संख्या तथा प्रवाहित धारा दुगुनी कर दी जाती है तो उसमें चुम्बकीय क्षेत्र कितना गुना हो जायेगा?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र दोगुना हो जायेगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

प्रश्न 32.
धारावाही परिनालिका के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र का मान कितना होता है?
उत्तर:
लगभग शून्य होता है।

प्रश्न 33.
B का मान दूरी पर निर्भर करता है के बढ़ने पर B का मान घटता है। यदि r = ∞ हो तो B का मान क्या होगा?
उत्तर:
शून्य होगा।

प्रश्न 34.
2r दूरी पर दो सीधे समान्तर तारों में समान दिशा में I धारा प्रवाहित की जाती है। दोनों तारों के मध्य बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता कितनी होगी?
उत्तर:
दोनों तारों के कारण चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर बराबर एवं विपरीत होने के कारण कुल चुम्बकीय क्षेत्र B = 0।

प्रश्न 35.
एक लम्बी तांबे की नली में धारा प्रवाहित की जाये तो नली के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र क्या होगा?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होगा।

प्रश्न 36.
लम्बे सीधे चालक में प्रवाहित धारा के कारण किसी बिन्दु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र तार प्रवाहित धारा पर किस प्रकार निर्भर करता है?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र B ∝ प्रवाहित धारा (i)।

प्रश्न 37.
किसी लम्बे सीधे धारावाही चालक के कारण किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा किधर होगी?
उत्तर:
चालक तथा बिन्दु को मिलाने वाली रेखा के लम्बवत् दक्षिण हस्त नियम के अनुसार होती है।

प्रश्न 38.
एक धारावाही टोरॉइड के किस भाग पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का मान अधिकतम होगा?
उत्तर:
भीतरी किनारे पर।

प्रश्न 39.
किसी लम्बे धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा क्या होती है?
उत्तर:
चालक के चारों ओर बन्द वृत्त के रूप

प्रश्न 40.
किसी सोलेनाइड के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र का मान कैसा होता है?
उत्तर:
समान होता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

प्रश्न 41.
चल कुण्डली धारामापी में स्प्रिंग (लटकाने वाला तार) निम्न ऐंठन नियतांक का होता है। क्यों?
उत्तर:
धारामापी की धारा सुग्राहिता और वोल्टता सुग्राहिता दोनों स्प्रिंग के ऐंठन नियतांक के व्युत्क्रमानुपाती होती हैं। अतः इस नियतांक का निम्न मान धारामापी की सुग्राहिता बढ़ाने के लिए रखा जाता है।

प्रश्न 42.
उन दो कारकों के नाम लिखिए जिनके द्वारा धारामापी की वोल्टता सुग्राहिता बढ़ाई जा सकती है।
उत्तर:
(i) कुण्डली में फेरों की संख्या N का मान बढ़ाकर।
(ii) स्प्रिंग का ऐंठन बल नियतांक C का मान कम करके।

प्रश्न 43.
एक ∝-किरण पुंज (+ X -अक्ष) के अनुदिश प्रक्षेपित किया जाता है। यह एक चुम्बकीय क्षेत्र के कारण + Y-अक्ष के अनुदिश बल का अनुभव करता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी?
उत्तर:
चूँकि ∝ धनावेशित कण है अतः इसकी गति की दिशा ही धारा की दिशा होगी इसलिए फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम अथवा दायें हाथ की हथेली के नियम 2 के अनुसार चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा – Z-अक्ष के अनुदिश होगी।
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प्रश्न 44.
यदि G प्रतिरोध के धारामापी को अमीटर में परिवर्तित करने पर धारामापी से मुख्य धारा का 1% प्रवाहित होता है तो शण्ट का प्रतिरोध क्या होगा?
उत्तर:
S = \(\left(\frac{i_g}{I-i_g}\right)\)
G = \(\left(\frac{\frac{1}{100} I}{I-\frac{1}{100} I}\right) G\)

प्रश्न 45.
दिये गए चित्रों में बिन्दु P पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ⊗ व के रूप में लिखिए।
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उत्तर:
A. ⊗ चूँकि कागज के तल में भीतर की ओर जाती विद्युत धारा अथवा विद्युत क्षेत्र को एक क्रॉस ⊗ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
B. चूँकि कागज के तल से बाहर की ओर निर्गत विद्युत धारा अथवा क्षेत्र (विद्युत अथवा चुम्बकीय) को एक बिन्दु द्वारा व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 46.
आयताकार आकृति का कोई समतलीय लूप किसी ऐसे एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान कराया जाता है जो इस लूप के तल के लम्बवत् है। इस लूप में प्रेरित धारा की दिशा और परिमाण क्या है?
उत्तर:
यदि कोई समतलीय लूप किसी ऐसे एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान कराया जाता है जो इस लूप के तल के लम्बवत् है: तब लूप में कोई भी धारा नहीं बहेगी। इस कारण से लूप में प्रेरित धारा की कोई भी दिशा नहीं होगी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी क्षेत्र से गुजरता एक इलेक्ट्रॉन विक्षेपित नहीं होता है। क्या यह संभव हो सकता है कि वहाँ कोई चुम्बकीय क्षेत्र नहीं हो? समझाइए।
उत्तर:
\(\vec{v}\) वेग से गतिमान इलेक्ट्रॉन पर चुम्बकीय क्षेत्र में कार्यरत बल
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = -e\((\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}})\)
या
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}\) = -evBsinθ
बल F का मान शून्य होगा यदि θ = 0°
या 180°
इसलिए इलेक्ट्रॉन चुम्बकीय क्षेत्र में विक्षेपित नहीं होगा यदि यह समानान्तर या प्रति समानान्तर गति करता हो। इस प्रकार हम नहीं कह सकते कि चुम्बकीय क्षेत्र अनुपस्थित है।

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प्रश्न 2.
यदि किसी वृत्ताकार कुण्डली में बहने वाली धारा दोगुनी एवं उसकी त्रिज्या आधी कर दी जाये तो कुण्डली के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
वृत्ताकार कुण्डली के केन्द्र पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
B = \(\frac{\mu_0 \mathrm{NI}}{2 \mathrm{R}}\)
यदि धारा I’ = 21 और त्रिज्या r’ = 1/2 तो चुम्बकीय क्षेत्र
B = \(\frac{\mu_0 \mathrm{NI}^{\prime}}{2 \mathrm{R}^{\prime}}\)
= \(\frac{\mu_0 \mathrm{~N}(2 \mathrm{I})}{2(\mathrm{R} / 2)}\)
∴ B’ = 4B
अर्थात् चुम्बकीय क्षेत्र चार गुना हो जायेगा।

प्रश्न 3.
चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{B}}\) में वेग \(\overrightarrow{\mathbf{v}}\) से गतिशील आवेश q पर लगने वाले बल \(\overrightarrow{\mathbf{F}}\) के लिए सदिश रूप में व्यंजक लिखिए। इस व्यंजक की सहायता से शर्तें प्राप्त कीजिए जब यह बल (i) अधिकतम एवं (ii) न्यूनतम हो।
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathbf{B}}\) में, वेग \(\overrightarrow{\mathbf{v}}\) से गतिशील आवेश q पर लगने वाला बल
\(\overrightarrow{\mathbf{F}}\) = q \((\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}})\)
(i) \(|\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}|\) = vBsinθ
जब θ = 90° अर्थात् जब \(\vec{v} \perp \overrightarrow{\mathrm{B}}\) तो sin θ = 1 जो कि sin θ का अधिकतम मान है। अर्थात् जब \(\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}\) तो \(|\vec{v} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}|\) अधिकतम
होगा। अतः \(\overrightarrow{\mathbf{F}}\) का मान भी अधिकतम होगा।

(ii) जब θ = 0° अर्थात् तो sinθ = 0
अतः
\(|\vec{v} \times \vec{B}|\) = 0
\(\overrightarrow{\mathbf{F}}\)
अर्थात् जब \(\vec{v}\) || \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) तो \(\vec{F}\) का मान न्यूनतम होगा।

प्रश्न 4.
समरूप चुम्बकीय क्षेत्र का मान न्यूनतम होगा। में गतिशील आवेशित कण की ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता है, समझाइए। क्यों?
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र में गतिशील आवेशित कण पर लगने वाला बल कण के वेग के लम्बवत् होता है अतः चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा कण पर कोई कार्य नहीं किया जाता है अतः कण की चाल नियत रहेगी और इस प्रकार कण की गतिज ऊर्जा भी अपरिवर्तित रहेगी।

प्रश्न 5.
α – कणों एवं प्रोटॉनों का एक पुंज समान चाल से एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। चुम्बकीय क्षेत्र में उनके वृत्तीय पथों की त्रिज्याओं के अनुपात की गणना कीजिए।
उत्तर:
चुम्बकीय क्षेत्र में किसी आवेशित कण के वृत्तीय पथ की त्रिज्या
r = \(\frac{\mathrm{mv}}{\mathrm{qB}}\)
α -कण के लिए
= \(\frac{m_\alpha v}{2 \mathrm{e} . \mathrm{B}}\)
प्रोटॉन के लिए
= \(\frac{m_{\mathrm{p}} \cdot v}{\mathrm{e} . \mathrm{B}}\)
\(\frac{r_\alpha}{r_p}\) = \(\frac{m_\alpha}{2 m_p}\) = \(\frac{4 m_p}{2 m_p}\)
∵ mα = 4mp
या
\(\frac{r_\alpha}{r_p}\) = 2
∴ rα : rp = 2 : 1

प्रश्न 6.
एक इलेक्ट्रॉन पुंज E तीव्रता के विद्युत क्षेत्र एवं B तीव्रता के चुम्बकीय क्षेत्रों के क्रॉसित क्षेत्र (crossed region) में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन की किस चाल के लिए इलेक्ट्रॉन पुंज अविचलित रहेगा?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन पुंज तब अविचलित रहेगा जब उस पर लगने वाले वैद्युत एवं चुम्बकीय बल परिमाण में समान हों और दिशा में विपरीत हों। इसलिए
Fe = Fm
या
Ee = evB
या
E = VB

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प्रश्न 7.
चल कुण्डली धारामापी में त्रिज्य चुम्बकीय क्षेत्र का क्या महत्व है?
उत्तर:
बल युग्म
τ = NIAB sinθ
जब त्रिज्य चुम्बकीय क्षेत्र में कुण्डली को लटकाया जाता है तो कुण्डली की प्रत्येक स्थिति में उसका तल किसी न किसी बल रेखा के अनुदिश होता है, अतः 6 = 90°
अतः
sin θ = 1
τ = NIAB
अब
τ α I
अर्थात् कुण्डली पर बल युग्म उसमें प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है। इस प्रकार धारामापी स्केल रेखीय बना सकते हैं।

प्रश्न 8.
दो परस्पर लम्बवत् धारावाही लम्बे सीधे तारों के कारण किसी बिन्दु पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र शून्य कब हो सकता है?
उत्तर:
यदि x y तल में स्थित बिन्दु P के निर्देशांक (x, y) हैं तो परस्पर लम्बवत् धारावाही चालक तारों के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
क्रमश:
B1 = \(\frac{\mu_0 i_1}{2 \pi x}\)
तथा
B2 = \(\frac{\mu_0 i_2}{2 \pi y}\)
जिनकी दिशायें Z अक्ष के अनुदिश होंगी।
यदि ये क्षेत्र बराबर तथा विपरीत हैं तो परिणामी क्षेत्र शून्य होने के लिये
B1 = B2
\(\frac{\mu_0 i_1}{2 \pi x}\) = \(\frac{\mu_0 i_2}{2 \pi y}\)
⇒ \(\frac{\mathrm{i}_1}{\mathrm{x}}\) = \(\frac{i_2}{y}\)
⇒ \(\frac{i_1}{\mathbf{i}_2}\) = \(\frac{x}{y}\)
जबकि ये धारायें मूल बिन्दु से बाहर की ओर इंगित हों।

प्रश्न 9.
ऐम्पियर की अन्तर्राष्ट्रीय परिभाषा को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ऐम्पियर की परिभाषा – दो लम्बे सीधे तथा समान्तर धारावाही चालक तारों के मध्य प्रति एकांक लम्बाई पर कार्यरत चुम्बकीय
बल
\(\frac{\delta \mathrm{F}}{\delta l}\) = \(\frac{\mu_o i_1 \mathrm{i}_2}{2 \pi \mathrm{d}}\)
यदि i = 12 = 1 A तथा d = 1m है तो
\(\frac{\delta \mathrm{F}}{\delta l}\) = \(\frac{\mu_o(1 \mathrm{~A})(1 \mathrm{~A})}{2 \pi(1 \mathrm{~m})}\)
= \(\frac{4 \pi \times 10^{-7}}{2 \pi}\)
\(\frac{\delta \mathrm{F}}{\delta l}\) = 2 × 107 न्यूटन/मी.
1 ऐम्पियर विद्युत धारा, वह धारा है जो निर्वात या वायु में परस्पर 1 मीटर लाम्बिक दूरी पर स्थित दो लम्बे समान्तर व सीधे चालक तारों में प्रवाहित होने पर तारों की 1 मीटर लम्बाई पर 2 × 107 न्यूटन / मीटर बल उत्पन्न करती है।

प्रश्न 10.
न्यूट्रॉन को साइक्लोट्रॉन द्वारा त्वरित नहीं किया जा सकता क्यों?
उत्तर:
न्यूट्रॉन अनावेशित कण है, इसलिए त्वरित नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 11.
वोल्टमीटर की परास बदलने के लिये क्या करते हैं?
उत्तर:
RH = \(\left(\frac{V}{i_g}\right)\)  – G
इस उच्च प्रतिरोध को अभीष्ट धारामापी के श्रेणीक्रम में संयोजित करने पर यह V परास का वोल्टमीटर बन जायेगा। गैल्वेनोमीटर के श्रेणीक्रम में निर्धारित उच्च प्रतिरोध RH लगने पर बने वोल्टमीटर का प्रभावी प्रतिरोध Ry = (RHG) बहुत अधिक (G की तुलना में बहुत अधिक) हो जाता है। इस प्रकार परिपथ के किसी भाग में विभवान्तर मापन हेतु समान्तर क्रम में संयोजित वोल्टमीटर का स्वयं का प्रतिरोध बहुत अधिक हो जाने के कारण यह परिपथ में प्रवाहित धारा के न्यूनतम अंश को अपने से गुजार कर परिपथ में बहने वाली लगभग पूर्ण धारा के अनुरूप उत्पन्न विभवान्तर का यथेष्ठ मापन कर देता है।

प्रश्न 12.
आपको एक निम्न प्रतिरोध R1, एक उच्च प्रतिरोध R2 व एक धारामापी दिये गये हैं। सुझाइए कि इनमें ऐसा उपकरण किस प्रकार बनायेंगे जो (i) धारा नाप सके, (ii) विभवान्तर नाप सके।
उत्तर:
(i) धारा मापने के लिए कम प्रतिरोध R1 को धारामापी के समान्तर क्रम में जोड़ना होगा।
(ii) विभवान्तर नापने के लिए उच्च प्रतिरोध R2 को धारामापी के श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।

प्रश्न 13.
अमीटर एवं मिली अमीटर दोनों धारामापी से बनाये जाते हैं। इन दोनों धारामापक उपकरणों में से किसका प्रतिरोध अधिक होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं:
S = \(\frac{I_g G}{I-I_g}\)
इस सूत्र से स्पष्ट है कि धारामापी को मिली अमीटर में बदलने के लिए बड़े प्रतिरोध के शण्ट S की आवश्यकता होती है अपेक्षाकृत अमीटर के शण्ट प्रतिरोध के
अमीटर का प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{G} . \mathrm{S}}{\mathrm{G}+\mathrm{S}}\)
स्पष्ट है कि “मिली अमीटर का प्रतिरोध अधिक होगा।”

प्रश्न 14.
अमीटर तथा वोल्टमीटर में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
अमीटर:
अमीटर वह उपकरण होता है जिसकी सहायता से किसी विधुत परिपथ मे प्रवाहित विधुत धारा का मापन करते है। धारामापी को अमीटर मे बदलने के लिए उसकी कुण्डली के साथ समांतर क्रम मे कम प्रतिरोध का तार जोड़ देते है। इस तार को शण्ट कहते है। तथा एक आदर्श अमीटर के प्रतिरोध को शून्य होना चाहिए।
वोल्टमीटर:
वोल्टमीटर वह उपकरण होता है जिसकी सहायता से विद्युत् परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के मध्य विभवान्तर ज्ञात करते हैं। धारामापी को वोल्टमीटर में बदलने के लिए उसकी कुण्डली के साथ श्रेणी क्रम में उच्च मान का प्रतिरोध तार जोड़ देते हैं। एक आदर्श वोल्टमीटर के प्रतिरोध को अनन्त होना चाहिए।

प्रश्न 15.
बायो- सावर्ट का नियम लिखिए।
एक इलेक्ट्रॉन की गति का पथ लिखिए जबकि वह चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है, उसके
(a) लम्बवत्
(b) θ कोण पर।
उत्तर:
बायो- सावर्ट का नियम (Biot Savart’s Law): जब किसी चालक से धारा प्रवाहित होती है तो चालक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता का किसी बिन्दु पर मान ज्ञात करने के लिये बायो तथा सावर्ट ने प्रयोगों के आधार पर एक नियम प्रतिपादित किया जिसे बायो- सावर्ट का नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार किसी धारावाही चालक के अल्पांश δl के कारण किसी बिन्दु P पर चुम्बकीय प्रेरण या चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता δB का मान
(i) धारा के मान के अनुक्रमानुपाती होता है।
(ii) धारा अल्पांश की लम्बाई 8/ के अनुक्रमानुपाती होता है।
(iii) धारा अल्पांश के सापेक्ष प्रेक्षण बिन्दु के स्थिति सदिश \(\underset{\mathrm{r}}{\vec{r}}\)
व धारा अल्पांश \(\overrightarrow{\delta l}\) के मध्य कोण θ की ज्या अर्थात् sin θ के अनुक्रमानुपाती होता है।
(iv) धारा अल्पांश से प्रेक्षण बिन्दु की दूरी r के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अर्थात्
δB ∝ \(\frac{I \delta l \sin \theta}{r^2}\)
निर्वात या अचुम्बकीय माध्यम से
δB = \(\left(\frac{\mu_0}{4 \pi}\right)\) \(\frac{I \delta l \sin \theta}{r^2}\)
जहाँ μo निर्वात की चुम्बकीय पारगम्यता कहलाती है। μo का मान 4 x 107 वेबर / ऐम्पियर या हेनरी / मी. होता है।
(a) वृत्ताकार
(b) सर्पिलाकार (कुण्डली के आकार में)।

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प्रश्न 16.
ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए। एक लम्बे सीधे वृत्ताकार काट (त्रिज्या a) के तार में स्थायी धारा प्रवाहित हो रही है। धारा तार में समान रूप से वितरित है तार के अन्दर क्षेत्र (r <a) पर चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कीजिए।
उत्तर:
ऐम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere’s Circular Law): “ऐम्पियर के नियम के अनुसार निर्वात (अथवा वायु) में किसी बन्द पथ के चुम्बकीय क्षेत्र में रेखा समाकलन का मान, निर्वात की चुम्बकशीलता (μ0) तथा उस बन्द पथ से गुजरने वाली धाराओं के बीजगणितीय योग के गुणनफल के बराबर होता है।”
अतः गणितीय रूप में
\(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{d} l}=\mu_0 \Sigma \mathrm{I}\)
जहाँ
μ0 = निर्वात की चुम्बकशीलता
\(\oint \overrightarrow{\mathrm{B}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{d} l}\) = चुम्बकीय क्षेत्र \((\overrightarrow{\mathbf{B}})\) का रेखीय समाकलन कहलाता है।
यहाँ पर r < a पर चुम्बकीय क्षेत्र की गणना करनी है। इसके लिये ऐम्पियर पाश वह वृत्त है जिस पर 1 अंकित है। इस पाश के लिये वृत्त की त्रिज्या r लेने पर

L = 2πr
अब यहाँ पर परिबद्ध विद्युत धारा Ie का मान I नहीं है। लेकिन यह इस मान से कम है। चूँकि विद्युत धारा का विवरण एक समान रूप से है अतः परिबद्ध विद्युत धारा के अंश का मान
Ie = \(I\left(\frac{\pi r^2}{\pi a^2}\right)\) = \(\frac{\mathrm{Ir}^2}{\mathrm{a}^2}\) ……….(1)
ऐम्पियर के नियम का उपयोग करने पर
B × 2πr = \(\frac{\mu_0 \mathbf{I r}^2}{\mathrm{a}^2}\)
⇒ B = \(\frac{\mu_0 \mathbf{I r}^2}{\mathrm{a}^2}\) × \(\frac{1}{2 \pi r}\)
B = \(\left(\frac{\mu_0 \mathrm{I}}{2 \pi \mathrm{a}^2}\right)\)

प्रश्न 17.
दो सीधे समान्तर धारावाही चालकों के बीच प्रति इकाई लम्बाई पर बल का व्यंजक प्राप्त कीजिए किस अवस्था में यह बल आकर्षण व प्रतिकर्षण का होता है? विद्युत धारा के मानक मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
दो समान्तर विद्युत धाराओं के बीच बल-ऐम्पियर (Force between Two Parallel Currents, the Ampere):
समान्तर धारावाही चालकों पर चुम्बकीय बल – चित्र में P1 तथा P2 दो अनन्त लम्बाई के धारावाही चालक हैं जो परस्पर d दूरी पर एक कागज के तल में स्थित हैं। दोनों तारों में धारा समान दिशा में i2 बह रही है, इस कारण से उनके चारों तरफ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होगा। यहाँ पर एक धारावाही चालक दूसरे धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में उपस्थित है।
P1 धारावाही चालक के कारण d दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
B1 = \(\frac{\mu_0 i_1}{2 \pi \mathrm{d}}\) …….(1)
इस चुम्बकीय क्षेत्र में उपस्थित धारावाही चालक P2 की लम्बाई / पर कार्यरत चुम्बकीय बल
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}_2\) = i2 \(\left(\vec{l} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}_1\right)\)
F2 = i2lB1 sinθ
F2 = i2lB1
∵ \(\vec{l} \perp \vec{B}_1\) …..(2)
समीकरण (1) से B का मान रखने पर
F2 = i2l x \(\frac{\mu_0 \mathrm{i}_1}{2 \pi \mathrm{d}}\)
F2 = \(\frac{\mu_0 \mathrm{i}_1 \mathrm{i}_2 l}{2 \pi \mathrm{d}}\) न्यूटन …..(3)
इस बल F2 की दिशा धारावाही चालक P2 तथा उस पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B1 के लम्बवत् है। इस प्रकार से यह बल चालक P1 की ओर तथा कागज के तल में है। बल की यह दिशा फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम से ज्ञात कर सकते हैं।
\(\frac{\mathrm{F}_2}{l}\) = \(\frac{\mu_o i_1 i_2}{2 \pi \mathrm{d}}\) न्यूटन / मीटर
यह धारावाही चालक P2 की इकाई लम्बाई पर कार्यरत चुम्बकीय बल है।
P2 धारावाही चालक के कारण दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
B2 = \(\frac{\mu_{\mathrm{o}} i_2}{2 \pi \mathrm{d}}\)
इसी प्रकार से P2 के कारण P1 की लम्बाई l पर कार्यरत चुम्बकीय बल
\(\overrightarrow{\mathrm{F}}_1=\mathrm{i}_1\left(\vec{l} \times \overrightarrow{\mathrm{B}}_2\right)\)
या F1 = i1lB2
या
F1 = \(\frac{\mathrm{i}_1 l \mu_0 \mathrm{i}_2}{2 \pi \mathrm{d}}\)
B2 = \(\frac{\mu_{\mathrm{o}} \mathrm{i}_2}{2 \pi \mathrm{d}}\)

या
F1 = \( \frac{\mu_{\mathrm{o}} \mathrm{i}_1 \mathrm{i}_2 l}{2 \pi \mathrm{d}}\)
या
\(\frac{F_1}{l}=\frac{\mu_0 i_1 i_2}{2 \pi \mathrm{d}}\) न्यूटन / मीटर …(4)
समीकरण (3) तथा (4) से
\(\frac{\mathrm{F}_1}{l}\) = \(\frac{F_2}{l}\) = \(\frac{\mu_0 i_1 i_2}{2 \pi d}\) न्यूटन/मी.
चित्र से स्पष्ट है, यदि दो समान्तर धारावाही चालकों में धारा एक ही दिशा में हो तो उनके मध्य आकर्षण बल कार्य करता है।
विशेष स्थितियाँ: (i) यदि धारा परस्पर विपरीत दिशा में हो तो प्रतिकर्षण होगा।

(ii) यदि धारा परस्पर एक ही दिशा में होती है तो आकर्षण होता है।

दो समान्तर धारावाही तारों के बीच प्रत्येक तार की प्रति मीटर लम्बाई पर कार्यकारी पारस्परिक बल
\(\frac{\mathrm{F}_1}{l}\) = \(\frac{\mu_0}{2 \pi} \left(\frac{i_1 i_2}{d}\right)\) न्यूटन / मीटर
परन्तु
μ0 = 4π x 10-7 न्यूटन / ऐम्पियर2
\(\frac{\mathrm{F}_1}{l}\) = \(\frac{4 \pi \times 10^{-7}}{2 \pi} \left(\frac{\mathrm{i}_1 \mathrm{i}_2}{\mathrm{~d}}\right)\)
= (2 × 10-7) \(\left(\frac{\mathrm{i}_1 \mathrm{i}_2}{\mathrm{~d}}\right)\) न्यूटन / मीटर
यदि i1 = i2 = i ऐम्पियर और d = 1 मीटर तब
= (2 x 10-7) i2 न्यूटन / मीटर
अतः यदि इन तारों के बीच प्रति मीटर लम्बाई पर लगने वाली बल
2 x 10-7न्यूटन / मीटर हो, तो 2 x 10-7 न्यूटन / मीटर = (2 x 10-7) i2 न्यूटन / मीटर अर्थात् = 1
अतः 1 ऐम्पियर वह वैद्युत धारा है जो वायु (या निर्वात) में एक-दूसरे से एक मीटर दूर स्थित दो सीधे लम्बे एवं समान्तर तारों में प्रवाहित होने पर प्रत्येक तार की प्रति मीटर लम्बाई पर 2 x 10-7 न्यूटन का बल आरोपित करती है।

प्रश्न 18.
एक इलेक्ट्रॉन त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में चाल से परिक्रमा कर रहा है। इसका घूर्णन चुम्बकीय अनुपात का व्यंजक प्राप्त कीजिए बोर मैग्नेट्रान किसे कहते हैं? इसका मान लिखिए।
उत्तर:
r त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में चाल से परिक्रमा कर रहे इलेक्ट्रॉन का घूर्ण चुम्बकीय अनुपात:
इलेक्ट्रॉन (एक ऋणावेशित कण) किसी धनावेशित नाभिक के चारों ओर ठीक उसी प्रकार परिक्रमा करता है जिस प्रकार कोई ग्रह सूर्य की परिक्रमा करता है। किसी स्थिर भारी नाभिक जिसका आवेश + Ze है, के चारों ओर (-e) आवेश का इलेक्ट्रॉन (e = 1.6 x 10-19 C) एक समान वर्तुल गति करता रहता है। इससे विद्युत धारा I बनती है।
I = \(\frac{e}{T}\) …..(1)
यहाँ पर T परिक्रमण का आवर्त काल है। यदि इलेक्ट्रॉन की कक्षा की त्रिज्या तथा कक्षीय चाल है, तो
T = \(\frac{2 \pi r}{v}\) ……(2)
समीकरण (1) में T का मान रखने पर
I = \(\frac{e v}{2 \pi r}\) ………(3)
चुम्बकीय आघूर्ण m = IA = Iπr2
∴ m = \(\left(\frac{\mathrm{ev}}{2 \pi \mathrm{r}}\right)\) πr2
m = \(\frac{e v r}{2}\) …..(4)
∵ m = \(\frac{\mathrm{evr}}{2}\)
इस परिसंचारी विद्युत धारा के साथ एक चुम्बकीय आघूर्ण सम्बद्ध होगा जिसे प्राय: μl द्वारा निर्दिष्ट करते हैं। इसका परिमाण है μl = Iπr2 = \(\frac{e v r}{2} \)

चित्र में इस चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा कागज के तल में भीतर की ओर है। [इस परिणाम पर हमें पहले वर्णन किए जा चुके दक्षिण- हस्त नियम तथा इस तथ्य के आधार पर पहुंचे हैं कि ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन वामावर्त गति कर रहा है जिसके फलस्वरूप विद्युत धारा दक्षिणावर्त है। उपरोक्त व्यंजक के दक्षिण पक्ष को इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान me से गुणा एवं भाग करने पर हमें प्राप्त होता है
हाइड्रोजन जैसे परमाणुओं के बोर मॉडल में ऋणावेश युक्त इलेक्ट्रॉन केंद्रस्थ धनादेश युक्त (+ Ze) नामिक के चारों ओर एकसमान चाल घूम रहा है। इलेक्ट्रॉन की एकसमान वर्तुल गति एक धारा लूप बनाती चुम्बकीय आघूणों की दिशा कागज के तल के लंबवत भीतर की ओर है तथा इसे पृथक् रूप चिन्ह ⊗ द्वारा निर्दिष्ट किया गया है।
μl = \(\frac{\mathrm{e}}{2 \mathrm{~m}_{\mathrm{e}}}\) (mevr)
= \(\frac{\mathrm{e}}{2 \mathrm{~m}_{\mathrm{e}}}\) …..(5)
यहाँ l केन्द्रीय नाभिक के परितः इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग का परिणाम है। सदिश रूप में
\(\overrightarrow{\mu_l}\)= \(-\frac{\mathrm{e}}{2 \mathrm{~m}_{\mathrm{e}}} \vec{l}\) ……….(6)
यहाँ ऋणात्मक चिन्ह यह संकेत देता है कि इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग की दिशा चुम्बकीय आघूर्ण की दिशा के विपरीत है। यदि हमने इलेक्ट्रॉन (जिस पर आवेश है) के स्थान पर ( +9) आवेश का कोई कण लिया होता तो कोणीय संवेग तथा चुम्बकीय आघूर्ण दोनों की एक ही दिशा होती अनुपात
\(\frac{\mu_l}{l}\)=\(\frac{e}{2 m_e}\) ………..(7)
इसे घूर्ण चुम्बकीय अनुपात कहते हैं तथा यह एक नियतांक है। इलेक्ट्रॉन के लिए इस अनुपात का मान 8.8 x 102 C/kg है जिसे प्रयोगों द्वारा सत्यापित किया जा चुका है।

बोहर मैग्नेट्रॉन (Bohr Magnetron ): बोहर के परमाणु सिद्धान्त के अनुसार किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में परिक्रमण कर सकता है जिनमें उनका कोणीय संवेग
\(\left(\frac{\mathrm{h}}{2 \pi}\right)\) का पूर्ण गुणक हो,
जहाँ h = प्लांक नियतांक
∴ mvr = n\(\left(\frac{\mathrm{h}}{2 \pi}\right)\)
अर्थात्
l = \(\frac{\mathrm{nh}}{2 \pi}\)
जहाँ n = 1,2…………
l का यह मान समीकरण (5) में रखने पर
μl = \(\frac{\mathrm{e}}{2 \mathrm{~m}_{\mathrm{e}}}\left(\frac{\mathrm{nh}}{2 \pi}\right)\)
अर्थात्
μl = \(\mathrm{n}\left(\frac{\mathrm{eh}}{4 \pi \mathrm{m}_{\mathrm{e}}}\right)\) …………..(8)
यह एक सामान्य समीकरण है जो किसी परमाणु में नाभिक के चारों ओर nर्वी कक्षा में परिक्रमण करते हुये इलेक्ट्रॉन के कक्षीय चुम्बकीय आघूर्ण को व्यक्त करती है।
प्रथम कक्षा के लिये n = 1 अतः μl का न्यूनतम मान = \(\frac{\text { eh }}{4 \pi \mathrm{m}_{\mathrm{e}}}\)
\(\overrightarrow{\mu_l}\) के इस न्यूनतम मान को ही बोहर मेग्नेट्रॉन कहते हैं। इसको से प्रदर्शित करते हैं।
अतः
μl = \(\frac{\text { eh }}{4 \pi \mathrm{m}_{\mathrm{e}}}\)
इसको निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है-
“परमाणु की प्रथम कक्षा में परिक्रमण करते हुये इलेक्ट्रॉन का कक्षीय चुम्बकीय आघूर्ण एक बोहर मैग्नेट्रॉन कहलाता है।” इसका मान μB = 9.27 x 1024 ऐम्पियर मीटर2

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
5 सेमी. त्रिज्या के वृत्ताकार लूप में 0.5 ऐम्पियर की धारा बह रही है। लूप के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
r = 5 सेमी = 5 x 10-2 मीटर
I = 0.5 ऐम्पियर
अतः लूप के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र
B = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\left(\frac{2 \pi \mathrm{I}}{\mathrm{r}}\right)\)
मान रखने पर
B = \(\frac{4 \pi \times 10^{-7}}{4 \pi}\left(\frac{2 \pi \times 0.5}{5 \times 10^{-2}}\right)\)
= 10-7 × 2 × 3.14 x 10
= 6.28 × 10-7 टेसला

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

प्रश्न 2.
एक लम्बे सीधे तार में 5 ऐम्पियर की धारा बह रही है। उससे 10 सेमी. की दूरी पर कितना चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होगा? क्षेत्र का दिशा निर्धारण किस नियम से होगा?
उत्तर:
यहाँ दिया है:
लम्बे सीधे तार में वैद्युत धारा I = 5 ऐम्पियर
तार से प्रेक्षण बिन्दु की दूरी r = 10 सेमी = 0.10 मीटर
अतः इसके कारण प्रेक्षण बिन्दु पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण
B = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\)\(\left(\frac{2 \mathrm{I}}{\mathrm{r}}\right)\)
मान रखने पर
= 10-7 \(\left(\frac{2 \mathrm{I}}{\mathrm{r}}\right)\)
[∵\(\frac{\mu_0}{4 \pi}\) = 10-7
B = 10-7 \(\left(\frac{2 \times 5}{0.10}\right)\) न्यूटन / ऐम्पियर मीटर
= 10-5 न्यूटन / ऐम्पियर मीटर
क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) की दिशा का निर्धारण दायें हाथ की हथेली के नियम दक्षिणावर्त पेच नियम अथवा दायें हाथ के नं. 1 अथवा मैक्सवेल के दक्षिणावर्त पेच नियम अथवा दायें हाथ के अंगूठे के नियम किसी के भी द्वारा किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
दो एक समान कुण्डलियाँ, प्रत्येक की त्रिज्या 8 सेमी. तथा फेरों की संख्या 100, समाक्षतः (coaxially) जिनके केन्द्र 12 सेमी. दूरी पर हैं, व्यवस्थित हैं। यदि प्रत्येक कुण्डली में 1 ऐम्पियर धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो तो अक्षीय रेखा पर ठीक मध्य में चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
a = 8 सेमी = 0.08 मीटर
n = 100, x = 6 सेमी = 0.06 मीटर
एक कुण्डली के केन्द्र से 0.06 मीटर की दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
B1 = \(\frac{\mu_0 \mathrm{nIa}^2}{2\left(\mathrm{a}^2+\mathrm{x}^2\right)^{3 / 2}}\)
मान रखने पर

= 4.02 x 104 टेसला
चूँकि दोनों कुण्डलियों में धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है अतः अक्षीय रेखा पर कुण्डलियों के ठीक मध्य बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान होगा-
B = 2B1 = 2 × 4.02 x 10-4
= 8.04 x 104 टेसला

प्रश्न 4.
N फेरों की एक कुण्डली को एक सर्पिल के रूप में कसकर लपेटा गया है, जिसकी आन्तरिक व बाह्य त्रिज्या क्रमशः r1 तथा r2 हैं। कुण्डली में I धारा प्रवाहित है तो इसके केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
माना कि सर्पिलाकार कुण्डली की स्वेच्छ त्रिज्या पर अत्यन्त सूक्ष्म मोटाई Sr का एक लूप है तो इस लूप के कारण केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र

प्रश्न 5.
एक ∝-कण 0.2 वेबर / मीटर के चुम्बकीय क्षेत्र में 6.0 x 105 मीटर / सेकण्ड की चाल से क्षेत्र के लम्बवत् प्रवेश करता है कण का त्वरण और पथ की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
∝-कण
∴ q = 2e = 2 × 1.6 x 10-19
= 3.2 x 10-19 कूलॉम
m = 4 x 1.67 × 10-27
= 6.68 × 10-27 किग्रा.
B = 0.2 वेबर / मी.2
v = 6.0 x 105 मी./से.
θ = 90°
चुम्बकीय क्षेत्र के कारण Q-कण पर बल
F = qvB sinθ
मान रखने पर:
= 3.2 × 10-19 x 60 x 105 x 0.2 x sin 90°
= 3.2 × 1.2 × 10-14 × 1
= 3.84 x 10-14 न्यूटन
कण का त्वरण a =
= 5.75 x 1012 मी./से2
∝-कण के पथ की त्रिज्या r =
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व 16

प्रश्न 6.
दो लम्बे समान्तर तार परस्पर 8 सेमी. दूरी पर हैं। इनमें क्रमशः i तथा 3i मान की धारायें एक ही दिशा में बह रही हैं। दोनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र कहाँ पर शून्य होगा?
उत्तर:
माना धारा वाले तार से x सेमी दूरी पर दोनों तारों के कारण चुम्बकीय क्षेत्र शून्य है तो 3i धारा वाले तार से उसकी दूरी (8 – x) सेमी. होगी। अतः i धारा वाले तार के कारण x दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र
B1 = \(\frac{\mu_0 \mathrm{i}}{2 \pi \mathrm{x}}\) …..(1)
तथा धारा वाले तार के कारण (8 – x ) दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र
B1 = \(\frac{\mu_0(3 \mathrm{i})}{2 \pi(8-\mathrm{x})}\) ….(2)
लेकिन प्रश्नानुसार B1 – B2 = 0
या
B1 = B1
अतः समीकरण (1) तथा (2) से
\(\frac{\mu_0 \mathrm{i}}{2 \pi \mathrm{x}}=\frac{\mu_0(3 \mathrm{i})}{2 \pi(8-\mathrm{x})}\)
या
\(\frac{1}{x}=\frac{3}{8-x}\)
या
8 – x = 3x
या
8 = 4x
या
X = = 2 सेमी.
अतः i धारा वाले तार से 2 सेमी. की दूरी पर दोनों धारावाही तारों के उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

प्रश्न 7.
एक साइक्लोट्रॉन की डीज की अधिकतम त्रिज्या 0.5 मीटर है जिसमें 1.7 टेसला का अनुप्रस्थ चुम्बकीय क्षेत्र कार्यरत है। इसमें प्रोटॉन द्वारा अर्जित अधिकतम गति ऊर्जा ज्ञात कीजिए। R = 0.5 मीटर
उत्तर:
प्रश्नानुसार,
R = 0.5 मीटर
B = 1.7 टेसला
तथा प्रोटॉन के लिए q = 1.6 x 10-19 कूलॉम
m= 1.67 x 10-27 किग्रा.
त्वरित प्रोटॉन द्वारा अर्जित अधिकतम ऊर्जा
Emax =\(\frac{1}{2}m\)\(\left(\frac{\mathrm{BqR}}{\mathrm{m}}\right)^2\) = \(\frac{B^2 q^2 R^2}{2 m}\)
मान रखने पर = \(\frac{(1.7)^2 \times\left(1.6 \times 10^{-19}\right)^2 \times(0.5)^2}{2 \times 1.67 \times 10^{-27}}\)
\(\frac{2.89 \times 2.56 \times 10^{-38} \times 0.25}{3.34 \times 10^{-27}}\)
= 0.554 × 10-11 = 5.54 x 10-12 जूल

प्रश्न 8.
एक परिनालिका में 500 फेरे / मीटर हैं तथा इसमें प्रवाहित धारा 5 ऐम्पियर है परिनालिका की लम्बाई 0.5 मीटर तथा त्रिज्या 1 सेमी. है। परिनालिका के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
यहाँ परिनालिका की एकांक लम्बाई में फेरों की संख्या n = 500 प्रति मीटर है।
परिनालिका में धारा I = 5 ऐम्पियर
∴ परिनालिका के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B = μ0nI
B = \(\left(\frac{\mu_0}{4 \pi}\right)\) 4πnI
अथवा
B = \(\frac{4 \pi \times 10^{-7} \times 4 \times 3.14 \times 500 \times 5}{4 \pi}\)
= 3.14 x 10-3 वेबर / मीटर2
नोट- B के उपर्युक्त सूत्र में परिनालिका की लम्बाई और त्रिज्या की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 9.
एक धारामापी का प्रतिरोध 30Ω है। इसमें 2mA की धारा पूर्ण स्केल विक्षेप देती है। इसका (0 – 0.3 A) परास का अमीटर बनाने के लिए आवश्यक प्रतिरोध की गणना कीजिए।
उत्तर:
दिया है:
G = 30Ω
Ig = 2 mA = 2 × 10-3 A
तथा I = 0.3A
इस धारामापी को (0 – 0.3A) परास का अमीटर बनाने के लिए आवश्यक इसके समान्तर क्रम में जोड़े जाने वाला शण्ट प्रतिरोध
S = \(\frac{I_g}{\left(I-I_g\right)} \cdot G\)
= \(\frac{\left(2 \times 10^{-3}\right) \times 30}{\left(0.3-2 \times 10^{-3}\right)}\)
= \(\frac{60 \times 10^{-3} \times 10^3}{(300-2)}\) = \(\frac{60}{298}\)
= 0.20Ω

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व

प्रश्न 10.
दो वृत्ताकार धारावाही कुण्डलियों की त्रिज्यायें संख्यायें क्रमशः r1 व r2 हैं। इन्हें श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है तब सिद्ध कीजिए कि इनके केन्द्रों पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्रों का अनुपात n1r2 : n2r1 होगा। यदि कुण्डलियाँ समान्तर क्रम में जुड़ी हों तो सिद्ध कीजिए कि केन्द्रों पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्रों का अनुपात (r2/r1)2 के तुल्य होगा।
उत्तर:
श्रेणीक्रम में जुड़े होने से कुण्डलियों में धारा I समान होगी। अतः इनके केन्द्रों पर चुम्बकीय क्षेत्र होंगे
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 4 गतिमान आवेश और चुंबकत्व 17
⇒ B1 : B2 = n1r2 : n2r1
समान्तर क्रम में जुड़े होने पर उनमें धाराओं का अनुपात उनके प्रतिरोधों R1 व R2 के अनुपात के व्युत्क्रमानुपाती होगा अर्थात्

प्रश्न 11.
एक लम्बे सीधे तार AB में 4A की धारा बह रही है। एक प्रोटॉन P तार के समान्तर 4 x 106 मी./से. के वेग से तार से 0.2 मीटर दूरी पर धारा की दिशा के विपरीत चित्र की भाँति गति करता है। प्रोटॉन पर आरोपित बल का परिमाण ज्ञात कीजिए। इसकी दिशा भी बताइए।
उत्तर:
कागज के तल में स्थित लम्बे सीधे तार के कारण इससे r = 0.2 मी. दूरी पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र
B = \(\frac{\mu_0}{4 \pi}\left(\frac{2 \mathrm{I}}{\mathrm{r}}\right)\)
= 4 x 106 वेबर / मी2

दायें हाथ की हथेली के नियम 2 के अनुसार \(\overrightarrow{\mathrm{B}}\) की दिशा कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर होगी अतः स्पष्ट है कि इस चुम्बकीय क्षेत्र में प्रोटॉन इसके लम्बवत् गतिशील है।
अतः इस पर कार्य करने वाला चुम्बकीय बल
F= qvB sin 90° = qvB
मान रखने पर:
F = 1.6 × 10-19 × ( 4 x 106) x 4 x 106
= 1.6 × 16 × 10-19
= 25.6 × 10-19 = 2.56 x 10-18 न्यूटन
फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियमानुसार प्रोटॉन पर बल की दिशा कागज के तल में तार के लम्बवत् इससे दूर अर्थात् दायीं ओर होगी।

प्रश्न 12.
एक प्रोटॉन पुंज इसकी दिशा के लम्बवत् क्रॉसित वैद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्रों में से अवक्षेपित गुजरता है। यदि वैद्युत तथा चुम्बकीय क्षेत्र के परिमाण क्रमश: 100kV/m तथा 50 mT हों तो ज्ञात कीजिए (i) प्रोटॉन पुंज का वेग v, (ii) वह बल जिससे यह पुंज पर्दे के किसी लक्ष्य पर टकराता है, जबकि प्रोटॉन पुंज धारा 0.80 mA है।
उत्तर:
दिया है:
B = 50 mT = 50 × 103 T
E = 100 kV/m = 100 x 103 V/m
(i) प्रोटॉन पुंज की अविक्षेपित दशा में, चुम्बकीय बल = वैद्युत बल
evB = e.E
अतः प्रोटॉन पुंज का योग v = \(\frac{E}{B}\)
= \(\frac{100 \times 10^3}{50 \times 10^{-3}}\)
= 2 × 106 m/s

(ii) प्रोटॉन पुंज धारा I = 0.80 x 10-3 ऐम्पियर
यदि पर्दे के लक्ष्य पर प्रति सेकण्ड टकराने वाले प्रोटॉन की
संख्या n हो, तो ne = I से
n = \(\frac{0.80 \times 10^{-3}}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= 5 × 1015
mp = 1.675 × 10-27 kg
अतः वह बल जिससे प्रोटॉन पुंज लक्ष्य से टकराता है
F = \(\frac{\Delta \mathrm{P}}{\Delta \mathrm{t}}\) = \(\frac{\left(m_p v\right) n}{1}\)
= 1.675 × 10-27 × 2 × 106 × 5 × 1015
= 1.675 × 10-5 N

प्रश्न 13.
किसी साइक्लोट्रॉन के दोलित्र की आवृत्ति 10 MHz है। प्रोटॉनों को त्वरित करने के लिए प्रचालन चुम्बकीय क्षेत्र क्या होना चाहिए? यदि इसकी ‘डीज’ की त्रिज्या 60 cm है, तो त्वरक द्वारा उत्पन्न प्रोटॉन पुन्ज की गतिज ऊर्जा (MeV में) परिकलित कीजिए।
उत्तर:
साइक्लोट्रॉन के दोलित्र की आवृत्ति, प्रोटॉन साइक्लोट्रॉन की आवृत्ति के बराबर होनी चाहिए। तब चुम्बकीय क्षेत्र,
B = \(\frac{2 \pi \mathrm{m} v}{\mathrm{q}}\)
= \(\frac{2 \times 3.14 \times 1.67 \times 10^{-27} \times 10^7}{1.6 \times 10^{-19}}\)
∵ आवृत्ति v = 10 MHz
= 0.66 T
v = r = r x 2πv
= 0.6 × 2 × 3.14 x 107
∵ r = 60 cm = 0.6m
= 3.78 × 107 m/s
इसलिये गतिज ऊर्जा
K = mv
= \(\frac{1}{2}\) × 1.67 × 10-27 × (3.78 × 107)2 J
= \(\frac{1}{2}\) × \(\frac{1.67 \times 10^{-27} \times 14.3 \times 10^{14}}{1.6 \times 10^{-19} \times 10^6}\) MeV
= 7.4 MeV

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
भारत में घरों में भेजे जाने वाली AC के लिये आवृत्ति व विभवान्तर है:
(अ) 50 Hz, 220 V
(ब) 60Hz, 220 v
(स) 60Hz, 110 v
(द) 50Hz, 110 v
उत्तर:
(अ) 50 Hz, 220 V

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 2.
प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा अमीटर से नहीं नापा जा सकता, क्योंकि
(अ) प्रत्यावर्ती धारा अमीटर में नहीं गुजर सकती
(ब) एक सम्पूर्ण चक्र के लिये धारा का औसत मान शून्य होता है
(स) प्रत्यावर्ती धारा की कुछ मात्रा अमीटर में नहीं हो जाती है।
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) एक सम्पूर्ण चक्र के लिये धारा का औसत मान शून्य होता है

प्रश्न 3.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा I = 5 sin (100t – \(\frac{\pi}{2}\) ) ऐम्पियर तथा प्रत्यावर्ती विभवान्तर V = 200 sin (100 t) वोल्ट है। परिपथ में व्यय शक्ति है-
(अ) 1000 वाट
(ब) शून्य वाट
(स) 40 वाट
(द) 20 वाट
उत्तर:
(ब) शून्य वाट

प्रश्न 4.
एक AC परिपथ में वोल्टता का अधिकतम मान 282 V है। इस परिपथ में वोल्टता का प्रभावी मान है:
(अ) 200 V
(ब) 300 V
(स) 400 V
(द) 564 V
उत्तर:
(अ) 200 V

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 5.
L, C एवं R क्रमशः भौतिक राशियाँ प्रेरकत्व, धारिता तथा प्रतिरोध को निरूपित करती हैं। निम्न में से कौन-सा संयोजन समय की विमा रखता है:
(अ) \(\frac{C}{L}\)
(ब) \(\frac{1}{RC}\)
(स) \(\frac{L}{R}\)
(द) \(\frac{RL}{C}\)
उत्तर:
(स) \(\frac{L}{R}\)

प्रश्न 6.
प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न की जाती है:
(अ) ट्रांसफॉर्मर से
(ब) चोक कुण्डली से
(स) डायनमो से
(द) बैटरी से
उत्तर:
(स) डायनमो से

प्रश्न 7.
प्रत्यावर्ती वोल्टता V = 200sin (100rt + \(\frac{\pi}{2}\)) में, वोल्टता का वर्ग माध्य मूल मान है:
(अ) 100 √2 v
(ब) 200 √2 v
(स) 200 v
(द) 100V
उत्तर:
(अ) 100 √2 v

प्रश्न 8.
किसी प्रतिरोध में 4 A की दिष्ट धारा प्रवाहित हो रही है। धारा का वर्ग माध्य मूल मान होगा:
(अ) 4 A
(ब) \(\frac{4}{\sqrt{2}} \mathrm{~A}\)
(स) 4√2A
(द) दिष्ट धारा का वर्ग माध्य मूल मान नहीं होता।
उत्तर:
(अ) 4 A

प्रश्न 9.
एक विद्युत बल्ब 12 v de पर कार्य करने के लिए निर्मित किया गया है। बल्ब को एक ac स्रोत के साथ लगाने पर यह सामान्य चमक देता है। ac स्रोत की शिखर वोल्टता क्या होगी:
(अ) 12 V
(ब) 17 V
(स) 24 V
(द) 8.4 V
उत्तर:
(ब) 17 V

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 10.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में आरोपित विभवान्तर V = 10 cos ωt है तथा प्रवाहित धारा I = 2 sin ωt है तो शक्ति क्षय का मान होगा:
(अ) शून्य
(ब) 10W
(स) 5 W
(द) 1.25 W
उत्तर:
(अ) शून्य

प्रश्न 11.
संलग्न चित्र में अनुनादी अवस्था को प्रदर्शित करने वाला बिन्दु
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 1
(अ) A
(ब) B
(स) C
(द) D
उत्तर:
(अ) A

प्रश्न 12.
उच्च आवृत्ति के लिये संधारित्र का प्रतिरोध-
(अ) उच्च होता है
(ब) निम्न होता है।
(स) शून्य
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) निम्न होता है।

प्रश्न 13.
एक धारित्र के साथ एक शुद्ध प्रतिरोध जुड़ा है तो परिपथ में कलान्तर θ की स्पर्शज्या (tan θ) का मान होगा:
(अ) \(\mathrm{C} \omega / \mathrm{R}\)
(ब) \(\mathrm{R} / \mathrm{C} \omega\)
(स) \(1 / \mathrm{C} \omega \mathrm{R}\)
(द) CωR
उत्तर:
(स) \(1 / \mathrm{C} \omega \mathrm{R}\)

प्रश्न 14.
प्रेरकत्व L और प्रतिरोध R वाले परिपथ की प्रतिबाधा प्रदर्शित करते हैं:
(अ) LR
(ब) \(\mathrm{L} / \mathrm{R}\)
(स) \(\sqrt{L^2 \omega^2+R^2}\)
(द) \(\sqrt{\mathrm{R}^2 \omega^2+\mathrm{L}^2}\)
उत्तर:
(स) \(\sqrt{L^2 \omega^2+R^2}\)

प्रश्न 15.
अनुनाद की अवस्था में LCR परिपथ का शक्ति गुणांक होता है:
(अ) शून्य
(ब) 40.5
(स) 1.0
(द) L, C व R के मानों पर निर्भर करता है।
उत्तर:
(स) 1.0

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 16.
एक श्रेणी LR परिपथ में आरोपित प्रत्यावर्ती वोल्टता का अधिकतम मान 5 V है। यदि प्रतिरोध के सिरों पर उत्पन्न अधिकतम वोल्टता 3V है तो प्रेरकत्व के सिरों पर उत्पन्न वोल्टता का अधिकतम मान होगा-
(अ) 2 V
(ब) 4V
(स) 5√2
(द) शून्य।
उत्तर:
(ब) 4V

प्रश्न 17.
एक श्रेणी LC – R परिपथ में प्रतिरोध, प्रेरकत्व तथा धारिता तीनों पर विभवान्तर का मान 100V है। यदि प्रतिरोध को लघुपथित कर दिया जाये तो परिपथ में धारा का मान होगा:
(अ) शून्य
(ब) अनन्त
(स) 10 A
(द) 20 A
उत्तर:
(ब) अनन्त

प्रश्न 18.
एक विद्युत हीटर को क्रमशः दिष्ट धारा तथा प्रत्यावर्ती धारा से गर्म करते हैं। दोनों धाराओं के लिए हीटर के सिरों पर लगाये गये विभवान्तर समान हैं। प्रति सेकण्ड उत्पन्न ऊष्मा अधिक होगी:
(अ) प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से गर्म करने पर
(ब) दिष्ट धारा स्रोत से गर्म करने पर
(स) दोनों से समान
(द) उपर्युक्त में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(स) दोनों से समान

प्रश्न 19.
प्रत्यावर्ती धारा तथा विद्युत वाहक बल के बीच कलान्तर \(\frac{\pi}{2}\) है। निम्नलिखित में से कौनसा परिपथ का अवयव नहीं हो सकता है?
(अ) L, C
(ब) केवल L
(स) केवल C
(द) R, L
उत्तर:
(द) R, L

प्रश्न 20.
श्रेणी परिपथ में किसी प्रेरक कुण्डली के सिरों पर वोल्टता व धारिता के सिरों पर वोल्टता के मध्य कलान्तर रेडियन में होता है:
(अ) π
(ब) \(\pi / 2\)
(स) शून्य
(द) 2π
उत्तर:
(अ) π

प्रश्न 21.
किसी परिपथ का प्रतिरोध 1252 तथा प्रतिबाधा 1552 है। परिपथ का शक्ति गुणांक होगा:
(अ) 0.4
(ब) 0.8
(स) 0.125
(द) 1.25
उत्तर:
(ब) 0.8

प्रश्न 22.
अर्द्ध शक्ति बिन्दु पर परिपथ में धारा का मान होता है:
(अ) Imax√2
(ब) Imax/√2
(स) 2Imax
(द) Imax/2
उत्तर:
(ब) Imax/√2

प्रश्न 23.
एक R-L-C परिपथ के लिए अनुनाद की स्थिति में प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति क्या होगी:
(अ) \(\frac{1}{2 \pi} \sqrt{\frac{L}{C}}\)
(ब) \(\sqrt{\frac{L}{C}}\)
(स) \(\frac{1}{\sqrt{\mathrm{LC}}}\)
(द) \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{\mathrm{LC}}}\)
उत्तर:
(द) \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{\mathrm{LC}}}\)

प्रश्न 24.
एक प्रत्यावर्ती परिपथ में धारा की कला वोल्टता की कला से कोण पीछे है तो परिपथ में अवयव है:
(अ) L तथा C
(ब) R तथा L
(स) R तथा C
(द) केवल R
उत्तर:
(ब) R तथा L

प्रश्न 25.
एक R – LC परिपथ का शक्ति गुणांक 1 होने के लिए क्या प्रतिबन्ध होगा:
(अ) R = Lω – \(\frac{1}{\mathrm{C} \omega}\)
(ब) Lω = \(\frac{1}{\mathrm{C} \omega}\)
(स) L = C
(द) R = 0
उत्तर:
(ब) Lω = \(\frac{1}{\mathrm{C} \omega}\)

प्रश्न 26.
LC परिपथ में L या C में से किसी को भी अधिक करने पर अनुनादी आवृत्ति:
(अ) बढ़ती है
(ब) घटती है
(स) वही रहती है।
(द) शंट प्रतिरोध पर निर्भर करती है।
उत्तर:
(ब) घटती है

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 27.
एक लैम्प जिसका प्रतिरोध 280 ओम है, 200 वोल्ट के प्रत्यावर्ती स्रोत से जोड़ा गया है। लैम्प में प्रवाहित धारा का शिखर मान होगा:
(अ) 1.0 ऐम्पियर
(ब) 2.0 ऐम्पियर
(स) 0.7 ऐम्पियर
(द) 1.4 ऐम्पियर
उत्तर:
(अ) 1.0 ऐम्पियर

प्रश्न 28.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में विभवान्तर V = 20 sin ωt वोल्ट तथा प्रवाहित धारा I = 5 cos ωt ऐम्पियर है, तो शक्ति क्षय का मान वाट में होगा-
(अ) शून्य
(ब) 10
(स) 5
(द) 100
उत्तर:
(अ) शून्य

प्रश्न 29.
ट्रांसफार्मर में क्रोड बनाने के लिए निम्नलिखित पदार्थों में से कौनसा अधिक उपयुक्त होता है:
(अ) नर्म लोहा
(ब) निकल
(स) ताँबा
(द) स्टेनलेस स्टील
उत्तर:
(अ) नर्म लोहा

प्रश्न 30.
एक ट्रांसफार्मर 220 वोल्ट प्रत्यावर्ती सप्लाई को बढ़ाकर 2200 वोल्ट करता है। यदि ट्रांसफार्मर के द्वितीयक कुण्डली में 2000 चक्कर हों, तो प्राथमिक कुण्डली में चक्कर की संख्या होगी:
(अ) 100
(ब) 50
(स) 200
(द) 30
उत्तर:
(स) 200

प्रश्न 31.
ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक तथा द्वितीयक कुण्डलियों में फेरों की संख्या क्रमशः 100 तथा 300 है। यदि निवेशी शक्ति 60 वाट हो, तो निर्गत शक्ति होगी:
(अ) 60W
(ब) 20 W
(स) 180W
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) 60W

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
समीकरण E = E0 sinωt प्रत्यावर्ती धारा विद्युत वाहक बल को प्रदर्शित करती है। इसकी आवृत्ति, आयाम तथा आवर्तकाल ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
कोणीय आवृत्ति ω = 2πf
आवृत्ति (f) = \(\frac{\omega}{2 \pi}\)
आयाम = वोल्टता का शिखर मान = E0
आवर्तकाल T = \(\frac{1}{\mathrm{f}}\) = \(\frac{2 \pi}{\omega}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 2.
एक प्रत्यावर्ती धारा I = Io sinωt किसी प्रतिरोध R में T = \(\frac{2 \pi}{\omega}\) समय में कुछ ऊष्मा H उत्पन्न करती है। उस दिष्ट धारा का मान लिखिये जो इसी प्रतिरोध में इतने ही समय में यही ऊष्मा उत्पन्न करे।
उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग माध्य मूल मान की परिभाषा से वांछित दिष्ट धारा = प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान
Irms = \(\frac{\mathrm{I}_0}{\sqrt{2}}\)
जहाँ पर I0 = प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान

प्रश्न 3
प्रत्यावर्ती वोल्टता के शिखर मान तथा वर्ग माध्य मूलमान में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
वर्ग माध्य मूल मान ErmS = \(\frac{\mathrm{E}_0}{\sqrt{2}}\)
जहाँ पर E = प्रत्यावर्ती वोल्टता का शिखर मान

प्रश्न 4.
एक पूर्ण चक्र में प्रत्यावर्ती धारा का औसत मान क्या होगा?
उत्तर:
शून्य।

प्रश्न 5.
शुद्ध प्रेरकत्व वाले दिष्ट धारा परिपथ में प्रेरणिक प्रतिघात का मान क्या होगा?
उत्तर:
शून्य, चूँकि XL = ωL तथा दिष्ट धारा में ω = 0

प्रश्न 6.
यदि किसी विद्युत परिपथ में धारा की कला, विभवान्तर की कला में 90° पश्चगामी है, तो परिपथ की प्रतिघात किस प्रकार की होगी?
उत्तर:
प्रेरणिक

प्रश्न 7.
क्या प्रत्यावर्ती धारामापी द्वारा प्रत्यावर्ती व दिष्ट दोनों धारायें मापी जा सकती हैं?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि यह ऊष्मीय सिद्धान्त पर कार्य करता है।

प्रश्न 8.
एक प्रत्यावर्ती धारा स्रोत एक संधारित्र को पूरे एक चक्र में कितनी औसत शक्ति देगी?
उत्तर:
संधारित्र में धारा तथा वोल्टता के बीच कलान्तर = 90° अतः औसत शक्ति P = Erms Irms cos ¢ = 0
∵ cos 90° = 0

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प्रश्न 9.
किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में तात्क्षणिक धारा तथा वोल्टता क्रमशः I = losin 300t ऐम्पियर तथा V = 200 sin 300 t वोल्ट से व्यक्त की गयी है। परिपथ में व्यय औसत शक्ति क्या है?
उत्तर:
दी गयी समीकरणों से स्पष्ट है कि धारा तथा वोल्टता के बीच कलान्तर
Φ = 0°
अतः
\(\overline{\mathrm{P}}\) = Vrms Irms cos ¢
= \(\frac{V_0}{\sqrt{2}}\) × \(\frac{I_0}{\sqrt{2}}\) × 0° = \(\frac{200}{\sqrt{2}}\) × \(\frac{10}{\sqrt{2}}\) × 1
= 1000 वाट

प्रश्न 10.
प्रेरणिक प्रतिघात (X), प्रत्यावर्ती स्रोत की आवृत्ति के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है? आलेख द्वारा प्रदर्शित करें।
उत्तर:
XL = ωL
X α ω
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प्रश्न 11.
L-C-R परिपथ के लिये अनुनादी अवस्था में शक्ति गुणांक का मान क्या होता है?
उत्तर:
1 (चूँकि L-C-R परिपथ के लिये अनुनादी अवस्था में धारा व विभवान्तर के बीच कलान्तर शून्य होता है)।

प्रश्न 12.
प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत से एक बल्ब तथा एक संधारित्र श्रेणीक्रम में जुड़े हैं स्रोत की आवृत्ति अधिक करने पर बल्ब के प्रकाश का क्या होगा?
उत्तर:
प्रकाश तीव्र हो जायेगा।
∵ आवृत्ति ० अधिक करने पर प्रतिघात Xc = \(\frac{1}{\omega C}\) जायेगा, जिससे बल्ब को अधिक धारा मिलेगी।

प्रश्न 13.
क्या प्रत्यावर्ती धारा से बैटरी चार्ज की जा सकती है?
उत्तर:
नहीं, प्रत्यावर्ती धारा में दिशा एकान्तर क्रम में बदलती रहती है।

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प्रश्न 14.
क्या प्रत्यावर्ती धारा से विद्युत अपघटन हो सकता है? प्रत्यावर्ती धारा में दिशा एकान्तर क्रम में बदलती
उत्तर:
नहीं, रहती है, जबकि विद्युत अपघटन में विद्युत धारा समय के सापेक्ष परिमाण व दिशा में परिवर्तित नहीं होती है।

प्रश्न 15.
एक प्रेरकत्व तथा एक प्रतिरोध किसी प्रत्यावर्ती स्रोत से श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इन दोनों के सिरों पर विभवान्तरों में कलान्तर क्या होगा?
उत्तर:
रेडियन।

प्रश्न 16.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ का शक्ति गुणांक 0.5 है। परिपथ में धारा तथा वोल्टता में कितना कलान्तर होगा?
उत्तर:
cos ¢ =0.5 = 1/2 = cos 60° = \(cos \frac{\pi}{3}\)
∵ अर्थात् कलान्तर \(\frac{\pi}{3}\) रेडियन होगा।

प्रश्न 17.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा तथा वोल्टता के तात्क्षणिक मान क्रमश: दिये गये हैं:
I = 10 sin 314 t ऐम्पियर तथा V = 50 sin (314t + cos \(\frac{\pi}{2}\) ) वोल्ट परिपथ में औसत शक्ति का व्यय क्या होगा ?
उत्तर:
दी गयी समीकरणों से स्पष्ट है कि धारा तथा वोल्टता
के बीच कलान्तर ¢ = \(\frac{\pi}{2}\)
अतः cos ¢ = cos \(\frac{\pi}{2}\) = 0
परिपथ में औसत व्यय \(\overline{\mathrm{P}}\) = Vrms Irms cos ¢
= Vrms x Irms x 0 = 0

प्रश्न 18.
समान वोल्टता की प्रत्यावर्ती तथा दिष्ट धारा में कौन- सी अधिक खतरनाक होगी?
उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा (चूँकि प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान विभव दिष्ट धारा विभव से ज्यादा होता है)।

प्रश्न 19.
श्रेणी अनुनादी L-C-R परिपथ में प्रतिबाधा का मान होता है।
उत्तर:
प्रतिरोध के बराबर।
∴ Z = \(\sqrt{R^2+\left(X_L-X_C\right)^2}\) में, अनुनाद स्थिति में XL = Xc
Z = R

प्रश्न 20.
एक चक्र में प्रत्यावर्ती धारा की दिशा बदलती है।
उत्तर:
दो बार।

प्रश्न 21.
L-C-R श्रेणी अनुनादी परिपथ में अनुनादी आवृत्ति से कम आवृत्ति पर परिपथ की प्रकृति क्या होगी?
उत्तर:
धारितीय, क्योंकि इस स्थिति में 1/ωC > ωL हो जायेगा।

प्रश्न 22.
प्रत्यावर्ती परिपथ में L-C-R श्रेणी अनुनाद की स्थिति में परिपथ की प्रतिबाधा होती है।
उत्तर:
न्यूनतम, क्योंकि अनुनाद में XL = XC तथा Z = R

प्रश्न 23.
L-C-R श्रेणी अनुनादी परिपथ में प्रेरकत्व तथा धारिता पर विभवान्तर के मध्य कलान्तर क्या होता है?
उत्तर:
180° या π

प्रश्न 24.
L-C-R श्रेणी परिपथ में क्या यह सम्भव है कि किसी परिपथ अवयव पर विभवान्तर का मान आरोपित प्रत्यावर्ती विभवान्तर के अधिकतम मान से अधिक हो सकता है?
उत्तर:
हाँ, प्रेरकत्व या संधारित्र पर।

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प्रश्न 25.
वैद्युत अवयव X जब किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ से जोड़ा जाता है तो इसके अन्दर धारा वोल्टता से \(\frac{\pi}{2}\) रेडियन अप्रगामी है। X को पहचानिये तथा इसके प्रतिघात के लिये व्यंजक लिखिये।
उत्तर:
अवयव X संधारित्र होगा जिसका प्रतिघात
= \(\frac{1}{\omega \mathrm{C}}\) = \(\frac{1}{2 \pi \mathrm{fC}}\)

प्रश्न 26.
यदि प्रत्यावर्ती परिपथ में R = 100Ω, X = 400Ω तथा Xc = 400Ω हो तो परिपथ की कुल प्रतिबाधा क्या होगी?
उत्तर:
प्रतिबाधा
Z = (R2 + (XL – XC)2)1/2
जब
XL = XC
तब प्रतिबाधा Z = (R2 + 0)1/2 = R
Z = 1002Ω

प्रश्न 27.
शुद्ध प्रेरकत्व या धारिता का शक्ति गुणांक का मान क्या होता है?
उत्तर:
शून्य। ∵ शुद्ध प्रेरकत्व या धारिता में कला कोण ± \(\frac{\pi}{2}\)

प्रश्न 28.
एक प्रतिरोध, प्रेरकत्व तथा धारिता को किसी दिष्ट धारा स्रोत के साथ जोड़ा गया है। परिपथ की प्रतिबाधा का मान क्या होगा?
उत्तर:
अनन्त।
∵ दिष्ट धारा में ω = 0
∴ प्रतिबाधा = \(\sqrt{\mathrm{R}^2+\left(\omega L-\frac{1}{\omega C}\right)^2}\)
∴ Z = ∞

प्रश्न 29.
किसी बल्ब के तन्तु से प्रवाहित होने वाली धारा प्रत्यावर्ती धारा है या दिष्ट धारा कैसे ज्ञात करोगे?
उत्तर:
चुम्बक निकट लाने पर यदि तन्तु में कम्पन होने लगे तो धारा प्रत्यावर्ती होगी।

प्रश्न 30.
एक श्रेणी L-R-C परिपथ में प्रेरक, संधारित्र तथा प्रतिरोध के सिरों के बीच वोल्टता क्रमशः 20V, 20V तथा 40V है। परिपथ में धारा तथा आरोपित वोल्टता के बीच कितना कलान्तर होगा?
उत्तर:
tan ¢ = \(\left(\frac{\mathrm{V}_{\mathrm{C}}-\mathrm{V}_{\mathrm{L}}}{\mathrm{V}}\right)\) = \(\sqrt{u_r \epsilon_r}\) = \(\left(\frac{20-20}{40}\right)\)
¢ = tan-1 (0) = 0

प्रश्न 31.
प्रत्यावर्ती वि.वा. बल का शिखर से शिखर तक का मान कितना होता है?
उत्तर:
धनात्मक शिखर मान और ऋणात्मक शिखर मान के परिमाण के योग के मान के बराबर होता है, अर्थात् वि.वा. बल का शिखर से शिखर तक का मान
= 2.Eg = 2√2Erms

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प्रश्न 32.
एक कुण्डली का प्रतिरोध 3 ओम है व उसका प्रतिघात 4 ओम है। कुण्डली का शक्ति गुणांक क्या होगा?
उत्तर:
शक्ति गुणांक = \(\frac{R}{Z}\)
लेकिन
Z = imm
= \(\sqrt{(3)^2+(4)^2}\) = 5
∴ शक्ति गुणांक = \(\frac{R}{Z}\) = \(\frac{3}{5}\)

प्रश्न 33.
एक 25 वाट का और एक 50 वाट का बल्ब श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। किससे अधिक प्रकाश प्राप्त होगा और क्यों?
उत्तर:
25 वाट के बल्ब से, क्योंकि दोनों में धारा समान प्रवाहित होगी और 25 वाट बल्ब के फिलामेंट का प्रतिरोध अधिक होने से उसमें अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी।

प्रश्न 34.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में तात्क्षणिक शक्ति और औसत शक्ति से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में किसी क्षण या समय पर शक्ति मान को तात्क्षणिक शक्ति कहते हैं प्रत्यावर्ती परिपथ में एक चक्र के लिये तात्क्षणिक शक्ति के औसत मान को औसत शक्ति कहते हैं।

प्रश्न 35.
यदि प्रत्यावर्ती धारा का शिखर मान l है तो
(i) धारा का वर्ग माध्य का मूल मान
(ii) औसत मान होगा।
उत्तर:
(i) धारा का वर्ग माध्य मूल मान
Irms = \(\frac{\mathrm{I}_0}{\sqrt{2}}\)
(ii) औसत धारा का मान
I = 0

प्रश्न 36.
एक प्रत्यावर्ती वि.वा. बल स्रोत से एक संधारित्र तथा एक बल्ब श्रेणी क्रम में जुड़े हैं। यदि प्रत्यावर्ती वि. वा. बल की आवृत्ति बढ़ा दी जाती है, तो परिपथ में क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
आवृत्ति बढ़ाने \(\frac{1}{\mathrm{C} \omega}\) संधारित्र का प्रतिघ घट जाता है, जिससे परिपथ में धारा का मान बढ़ जाता है एवं बल्ब की चमक बढ़ जाती है।

प्रश्न 37.
घरों में विद्युत लाइन 220 वोल्ट पर कार्य करती है तो वि.वा. बल का शिखर मान (आयाम) क्या होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं:
Er.m.s = \(\frac{E_0}{\sqrt{2}}\)
∴ E0 = \(\sqrt{2}\) Er.m.s
E0 = 1.414 × 220
= 310.2 वोल्ट

प्रश्न 38.
शुद्ध प्रतिरोध, शुद्ध प्रेरकत्व तथा शुद्ध धारिता में प्रत्यावर्ती वि.वा. बल एवं धारा के मध्य कलान्तर लिखो।
उत्तर:
कलान्तर ¢ = 0, वि. वा. बल से धारा \(\sqrt{u_r \epsilon_r}\) कोण से पीछे, वि. वा. बल से धारा कोण से आगे।

प्रश्न 39.
ट्रांसफॉर्मर किस सिद्धान्त पर कार्य करता है? क्या यह दिष्ट धारा परिपथ में प्रयुक्त हो सकता है?
उत्तर:
अन्योन्य प्रेरण के सिद्धान्त पर यह दिष्ट धारा परिपथ में कार्य नहीं कर सकती है, क्योंकि दिष्ट धारा ट्रांसफॉर्मर की क्रोड में ‘परिवर्ती’ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न नहीं कर सकती है।

प्रश्न 40.
व्यावहारिक ट्रांसफॉर्मर में ऊर्जा हानि के लिये उत्तरदायी कोई दो कारक बताइये।
उत्तर:
(i) फ्लक्स हानि
(ii) भँवर धारा हानि।

प्रश्न 41.
ट्रांसफॉर्मर में कौनसी राशि नियत रहती है? धारा, विभव, आवृत्ति शक्ति।
उत्तर:
आवृत्ति।

प्रश्न 42.
बड़े ट्रांसफॉर्मर कुछ समय तक कार्य करते रहने पर गर्म हो जाते हैं तथा तेल के संचरण से ठण्डे किये जाते हैं ट्रांसफॉर्मर के गर्म होने का कारण लिखिये।
उत्तर:
शैथिल्य हास तथा धारा का ऊष्मीय प्रभाव दोनों।

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प्रश्न 43.
उच्चायी ट्रांसफॉर्मर का क्या कार्य है?
उत्तर:
निम्न वोल्टता की प्रबल प्रत्यावर्ती धारा को उच्च वोल्टता की निर्बल प्रत्यावर्ती धारा में बदलना।

प्रश्न 44.
यदि किसी ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली को एक बैटरी में जोड़ा जाये तो क्या घटना घटित होगी?
उत्तर:
द्वितीयक कुण्डली में प्रारम्भ में क्षणिक धारा प्रवाहित होगी फिर कोई धारा प्रवाहित नहीं होगी।

प्रश्न 45.
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में होने वाले शक्ति क्षय की गणना करो जिसमें विभव एवं धारा के मान निम्न हैं:
V = 3000 sin (ωt + \(\frac{\pi}{2}\) ) एवं
I = 5 sin ωt
उत्तर:
∵ यहाँ पर ¢ = \(\frac{\pi}{2}\) है।
P = Erms Irms cos ¢
P = 0
∴ cos \(\frac{\pi}{2}\) = 0

प्रश्न 46.
निम्नलिखित की परिभाषा लिखिये:
(i) प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान।
(ii) विद्युत अनुनाद में गुणवत्ता गुणांक।
उत्तर:
(i) प्रत्यावर्ती धारा के तात्कालिक मान के वर्ग के माध्य के वर्गमूल को धारा का वर्ग माध्य मूल मान Irms कहते हैं।”
I2 = I2sin2 ωt
Irms = \(\frac{\mathrm{I}_0}{\sqrt{2}}\)
या Irms = 0.707 Io
प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान उसके शिखर (अधिकतम) को \(\frac{I}{\sqrt{2}}\) या 0.707 से गुणा करके प्राप्त होता है।

(ii) अनुनाद आवृत्ति और परिपथ की बैण्ड चौड़ाई को अनुपात के परिपथ का विशेषता गुणांक कहते हैं। इसे हम Q से प्रदर्शित करते है।
Q = IMM = \(\frac{\omega_r}{\omega_2-\omega_1}\) = \(\frac{f_r}{f_2-f_1}\) = \(\frac{\omega_{\mathrm{r}} \mathrm{L}}{\mathrm{R}}\)

प्रश्न 47.
किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में आरोपित वोल्टता 220 v है। यदि R = 8Ω, XL = XC = 6Ω है तो निम्न का मान लिखिए:
(a) वोल्टता का वर्ग माध्य मूल (rms) मान
(b) परिपथ की प्रतिबाधा।
उत्तर:
(a) Vrms = 220 v

(b) परिपथ की प्रतिबाधा Z =
यहाँ पर XL = XC तब Z = R होगा
अर्थात् परिपथ की प्रतिबाधा Z = 8Ω

प्रश्न 48.
प्रत्यावर्ती धारा के एक पूर्ण चक्र के लिए धारा का औसत मान लिखिए।
उत्तर:
एक सम्पूर्ण चक्र के लिये प्रत्यावर्ती धारा का औसत मान शून्य होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रत्यावर्ती धारा के वर्ग माध्य मूल मान को परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
वर्ग माध्य मूल मान- प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में एक सम्पूर्ण चक्र के लिए तात्क्षणिक धारा या वोल्टता के वर्ग (I2 या E2) के औसत मान के वर्गमूल को वर्ग माध्य मूल मान कहते हैं। प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल (r.m.s.) मान दिष्ट धारा के उस मान के तुल्य है जो कि उतना ही ऊष्मीय प्रभाव प्रदर्शित करता है, जितना कि प्रत्यावर्ती धारा। इसे Irms से प्रदर्शित किया जाता है।
Irms = \(\frac{\mathrm{I}_0}{\sqrt{2}}\) होता है।
Irms = 0.707I0 …..(1)
उपर्युक्त समीकरण (1) से स्पष्ट है कि प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान, धारा के शिखर मान (Im) का 70.7% होता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 2.
श्रेणी R-L-C परिपथ में अनुनादी अवस्था से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
R-L-C परिपथ को अनुनादी कहा जाता है जब किसी लगाये गये प्रत्यावर्ती वोल्टेज के लिये उसमें अधिकतम विद्युत धारा प्रवाहित हो, यह तब ही सम्भव होता है जब R-L-C परिपथ की प्रतिबाधा का मान न्यूनतम हो चूँकि R-LC परिपथ की प्रतिबाधा प्रत्यावर्ती वोल्टेज की कोणीय आवृत्ति पर निर्भर करती है। जिसके लिये परिपथ की प्रतिबाधा न्यूनतम हो।

प्रश्न 3.
अनुनाद की शर्तें लिखिए।
उत्तर:
अनुनाद की शर्तें:
(i) अनुनादी की स्थिति में परिपथ की प्रतिबाधा पूर्णतः प्रतिरोधीय होती है।
(ii) अनुनाद की स्थिति में धारा तथा वोल्टता एक ही दिशा में होते हैं। उनके बीच कलान्तर का मान शून्य होता है अर्थात् Φ = 0
(iii) अनुनाद की स्थिति में शक्ति गुणांक का मान अधिकतम अर्थात् एक के बराबर होता है।
(iv) अनुनाद की स्थिति में परिपथ में कुल प्रतिघात का मान शून्य होता है।
(v) अनुनाद की स्थिति में प्रतिबाधा का मान न्यूनतम होता है तथा इसका मान प्रतिरोध के मान के बराबर होता है।

प्रश्न 4.
शक्ति गुणांक क्या है? समझाइये।
उत्तर:
हम जानते हैं औसत शक्ति की समीकरण
\(\overline{\mathrm{P}}\) = Erms Irms cos Φ
जहाँ
cos Φ = \(\frac{\overline{\mathrm{P}}}{\mathrm{E}_{\mathrm{rms}} I_{\mathrm{rms}}}\)
cosΦ = \(\frac{\overline{\mathrm{P}}}{\mathrm{P}_{\mathrm{app}}}\)
Papp = आभासी शक्ति = Erms Irms
अर्थात् “औसत शक्ति तथा आभासी शक्ति (Papp) के अनुपात को शक्ति गुणांक कहते हैं।”
दूसरे शब्दों में “वि.वा. बल तथा धारा के मध्य के कलान्तर की कोज्या (cos Φ) को शक्ति गुणांक कहते हैं।”
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 3
अर्थात् शक्ति गुणांक, प्रतिरोध तथा प्रतिबाधा के अनुपात के तुल्य होता है।
यदि Φ = 0° हो तो cos Φ + 1 अधिकतम शक्ति गुणांक
यदि ¢ = 90° हो तो cos ¢ = 0 न्यूनतम शक्ति गुणांक।

प्रश्न 5.
प्रत्यावर्ती धारा एवं वोल्टता में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब किसी कुण्डली को प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तो कुण्डली से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में निरन्तर परिवर्तन होता है जिससे कुण्डली में वि.वा. बल प्रेरित होता है तथा प्रेरित धारा प्रवाहित होती है। प्रेरित वि.वा. बल तथा धारा का परिमाण तथा दिशा कुण्डली के घूर्णन के साथ परिवर्तित होते हैं। इस प्रकार की धारा को प्रत्यावर्ती धारा तथा वोल्टता को प्रत्यावर्ती वोल्टता कहते हैं। प्रत्यावर्ती धारा के वोल्टता का तात्क्षणिक मान निम्न समीकरण से प्रदर्शित करते हैं
E = E0 sin (ωt + ¢)
या
E= E0 cos (ωt + ¢)
यहाँ पर E को तात्क्षणिक मान E को शिखर मान = NBωA और (ωt + ¢) को कला कहते हैं।
इसी प्रकार प्रत्यावर्ती धारा के तात्क्षणिक मान को निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित करते हैं
I = I0 sin (ωt + ¢)
या
I = Io cos (ωt + ¢)
I = तात्कालिक मान और I0 शिखर मान इसका मान के बराबर होता है। जहाँ पर \(\frac{N \omega B A}{R}\) कुण्डली का प्रतिरोध है।

प्रश्न 6.
कार्यहीन तथा कार्यकारी धारा में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
जब किसी प्रतिबाधा वाले परिपथ पर प्रत्यावर्ती विभव लगाया जाता है तब परिपथ में से गुजरने वाली प्रत्यावर्ती धारा और परिपथ पर लगाये गये प्रत्यावर्ती विभव के बीच में कलान्तर होता है। यदि प्रत्यावर्ती धारा का वर्ग माध्य मूल मान Irms हो और प्रत्यावर्ती विभव और धारा के बीच कलान्तर Φ हो तब प्रत्यावर्ती धारा के विभव की दिशा और विभव के लम्बवत् दो घटक क्रमश: Irmscos Φ व Irms sinΦ होंगे। प्रत्यावर्ती धारा का वह घटक जो प्रत्यावर्ती विभव की दिशा में, यानी Irms cos Φ परिपथ में से गुजरने में कार्य करता है। इस घटक को कार्यकारी धारा कहते हैं। प्रत्यावर्ती धारा का वह घटक जो परिपथ पर लगाये गये प्रत्यावर्ती विभव लम्बवत् होता है, यानी Irms sinΦ, वह परिपथ में से गुजरने में उसे कोई कार्य नहीं करना पड़ता है। इसलिये धारा के इस घटक को कार्यहीन धारा कहते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 7.
ट्रांसफार्मरों में वे कौनसे कारण हैं जिनसे अल्प मात्रा में ऊर्जा क्षय होता है?
अथवा
वास्तविक ट्रांसफार्मर में अल्प ऊर्जा क्षय के कोई दो कारण समझाइये
उत्तर:
ट्रांसफार्मरों में निम्नलिखित कारणों में अल्प मात्रा में ऊर्जा क्षय होता है:
(i) फ्लक्स क्षरण – कुछ फ्लक्स हमेशा क्षरित होता ही रहता है अर्थात् क्रोड के खराब अभिकल्पन या इसमें रही वायु रिक्ति के कारण प्राथमिक कुण्डली का पूरा फ्लक्स द्वितीयक कुण्डली से नहीं गुजरता है। प्राथमिक और द्वितीयक कुण्डलियों को एक-दूसरे के ऊपर लपेटकर फ्लक्स क्षरण को कम किया जाता है।
(ii) कुण्डलनों का प्रतिरोध- कुण्डलियाँ बनाने में लगे हुए तारों का कुछ न कुछ प्रतिरोध होता ही है और इसलिए इन तारों में उत्पन्न ऊष्मा (I2R) के कारण ऊर्जा क्षय होता है। उच्च धारा, निम्न वोल्टता कुण्डलनों में मोटे तार का उपयोग करके इनमें होने वाली ऊर्जा क्षय को कम किया जा सकता है।
(iii) भँवर धाराएँ – प्रत्यावर्ती चुम्बकीय फ्लक्स लौह क्रोड में भँवर धाराएँ प्रेरित करके इसे गर्म कर देता है। स्तरित क्रोड का उपयोग करके इस प्रभाव को कम किया जाता है।
(iv) शैथिल्य – प्रत्यावर्ती चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा क्रोड का चुम्बकन बार-बार उत्क्रमित होता है। इस प्रक्रिया में व्यय होने वाली ऊर्जा क्रोड में ऊष्मा के रूप में प्रकट होती है। कम शैथिल्य वाले पदार्थ का क्रोड में उपयोग करके इस प्रभाव को कम रखा जाता है।

प्रश्न 8.
ट्रांसफॉर्मर आदर्श ट्रांसफॉर्मर कब कहलाता है?
उत्तर:
एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर में ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली से द्वितीय कुण्डली में ऊर्जा के हस्तान्तरण में ऊर्जा की कोई हानि नहीं होती है एवं तब प्राथमिक कुण्डली और द्वितीयक कुण्डली में शक्ति का मान भी समान होता है। ऐसे ट्रांसफॉर्मर की दक्षता 100% होनी चाहिये।

प्रश्न 9.
220v की प्रत्यावर्ती धारा 220V दिष्ट धारा की तुलना में अधिक खतरनाक क्यों है?
उत्तर:
हमारे घरों में प्रायः 220 वोल्ट पर प्रत्यावर्ती धारा बहती है इसका अर्थ यह हुआ कि प्रत्यावर्ती वोल्टेज का वर्ग माध्य-मूल मान 220 वोल्ट होता है।
अतः इसका शिखर मान होगा,
Eo = √2 x Erms
या
= √2 × 220 = 1.414 x 220
Eg = 311 वोल्ट
इस प्रकार कहा जा सकता है कि घरों में बहने वाली प्रत्यावर्ती धारा का वोल्टेज प्रत्येक चक्र में +311 वोल्ट से लेकर -311 वोल्ट तक परिवर्तित होता रहता है।
(एक चक्र में प्रत्यावर्ती वोल्टेज में होने वाला अधिकतम परिवर्तन 6.22 वोल्ट होता है।) यही कारण है कि 220 वोल्ट की प्रत्यावर्ती धारा (A.C.) 220 वोल्ट की दिष्ट धारा (D.C.) से अधिक खतरनाक है।

प्रश्न 10.
जब एक श्रेणी LR परिपथ के साथ एक संधारित्र श्रेणीक्रम में जोड़ दिया जाता है, तो परिपथ में प्रवाहित धारा बढ़ जाती है? समझाइये, क्यों?
उत्तर:
L-R परिपथ की प्रतिबाधा
Z1 = \(\sqrt{R^2+(\omega L)^2}\)
I1 = \(\frac{E}{Z_1}\)
संधारित्र को जोड़ देने पर L-C-R परिपथ की प्रतिबाधा
Z = \(\frac{\pi}{2}\)
∴ धारा I2 = \(\frac{E}{Z_2}\)
∴ \(\frac{I2}{I1}\) = \(\frac{Z1}{Z2}\)
∴ Z1 > Z2
∴ I2 > I1

प्रश्न 11.
LCR श्रेणी अनुनादी परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा का आवृत्ति के साथ परिवर्तन दर्शाने वाला वक्र खींचिए तथा बैण्ड चौड़ाई के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
प्रत्यावर्ती धारा का आवृत्ति के साथ वक्र
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 4
अर्द्धशक्ति बिन्दु या आवृत्तियाँ (Half Power Points or Frequencies) श्रेणी R-LC परिपथ में Irms तथा f के मध्य खींचे गये ग्राफ (चित्र) में अनुनादी आवृत्ति के दोनों ओर दो आवृत्तियाँ f1 व f2 इस प्रकार ज्ञात की जाती हैं कि इन आवृत्तियों पर धारा का वर्ग माध्य मूल मान अपने अधिकतम (IRMS)max का \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) होता हो या
शक्ति क्षय अपने अनुनादी मान का आधा होता है। इन आवृत्तियों (f) & f2) को अर्द्धशक्ति आवृत्तियाँ (half-power frequencies) कहते हैं। इन आवृत्तियों के संगत वक्र के बिन्दु A तथा B अर्द्धशक्ति बिन्दु कहलाते हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 5
बैण्ड चौड़ाई (Bandwidth β = ∆f): अर्द्धशक्ति बिन्दुओं Aव B के संगत आवृत्तियों के इस अन्तर (∆f = f2 – f1) को श्रेणी अनुनादी परिपथ की बैंड चौड़ाई कहा जाता है।
अतः बैण्ड चौड़ाई β या ∆f = f2 – f1
श्रेणी अनुनादी परिपथ का विशेषता गुणांक Q (Quality Factor ‘Q’ of a Series Resonant Circuit ) – अनुनादी आवृत्ति (f) तथा बैण्ड चौड़ाई (B) के अनुपात को परिपथ का विशेषता गुणांक कहते हैं।”
विशेषता गुणांक Q = \(\frac{f_r}{f_2-f_1}\)
इसका मात्रक इकाई रहित होता है।
अतः अर्द्ध शक्ति आवृत्तियाँ f1 व f2 के लिए:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 6
अर्द्धशक्ति बिन्दुओं A तथा B के बैण्ड चौड़ाई कहते हैं।

प्रश्न 12.
सुमेलित कीजिए:

कॉलम-Iकॉलम-II
अनुनादी आवृत्ति(a)   VI cos Φ
गुणवत्ता गुणांक(b) \(\frac{1}{2}\) LI2
औसत शक्ति(c) \(\frac{1}{\sqrt{\mathrm{LC}}}\)
प्रतिबाधा(d)\(\sqrt{R^2+\left(X_L-X_C\right)^2}\)
चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा(e) \(\frac{-E}{\left(\frac{\mathrm{dI}}{\mathrm{dt}}\right)}\)
स्वप्रेरण गुणांक(f) \(\frac{\omega_0 L}{R}\)

उत्तर:
(i) का सुमेलित (c) होगा।
(ii) का सुमेलित (f) होगा।
(iii) का सुमेलित (a) होगा।
(iv) का सुमेलित (d) होगा।
(v) का सुमेलित (b) होगा।
(vi) का सुमेलित (e) होगा।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 13.
सुनीता और उसकी सहेलियों ने एक प्रदर्शनी का भ्रमण किया। यहाँ खड़े सिपाही ने उन्हें धातु संसूचक (मेटल डिटेक्टर) से गुजरने के लिए कहा। सुनीता की सहेलियाँ पहले इससे भयभीत हुई। परन्तु फिर सुनीता ने धातु संसूचक से गुजरने का कारण बताया और उसकी कार्यप्रणाली की व्याख्या की। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) धातु संसूचक किस सिद्धान्त पर कार्य करता है?
(b) यदि उससे गुजरने वाले किसी व्यक्ति के पास कोई धातु की वस्तु है, तो यह संसूचक ध्वनि क्यों उत्पन्न करने लगता है?
(c) उन किन्हीं दो गुणों का उल्लेख कीजिए जिनका प्रदर्शन सुनीता ने संसूचक से गुजरने का कारण समझाते समय किया।
उत्तर:
(a) धातु संसूचक ac परिपथ में अनुनाद के सिद्धान्त पर कार्य करता है।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा बदलती है। परिपथ में परिणामी धारा का मान बदलता है यही कारण है कि संसूचक ध्वनि उत्पन्न करने लगता है।
(c) (i) ज्ञान (ii) वैज्ञानिक मनोदशा।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
चित्र में प्रेरक L तथा प्रतिरोध R के सिरों के बीच वोल्टता क्रमशः 120 वोल्ट तथा 90 वोल्ट है तथा धारा का वर्ग-माध्य-मूल मान 3A है गणना कीजिये:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 7
(i) परिपथ प्रतिबाधा
(ii) वोल्टता तथा धारा के बीच कलान्तर।
उत्तर:
(i) परिपथ की परिणामी वोल्टता यहाँ
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 8
VL = 120 वोल्ट
VR = 90 वोल्ट
तथा धारा I = 3 ऐम्पियर प्रतिबाधा
Z = ?
कलान्तर ¢ = ?
= 150 वोल्ट
परिपथ की प्रतिबाधा Z = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}\) = \(\frac{150}{3}\)
= 50 ओम

(ii) यदि वोल्टता तथा धारा के बीच कलान्तर हो, तो
tan ¢ = \(\frac{\mathrm{V}_{\mathrm{L}}}{\mathrm{V}_{\mathrm{R}}}\) = \(\frac{120}{90}\) = \(\frac{4}{3}\)
¢ = tan-1 \(\frac{4}{3}\)

प्रश्न 2.
एक 122 का प्रतिरोध, एक 1452 प्रतिघात का संधारित्र तथा 0.1 हेनरी प्रेरकत्व का एक शुद्ध प्रेरक श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं तथा इससे 200 V 50Hz की प्रत्यावर्ती धारा जोड़ दी गयी है। गणना कीजिये
(i) परिपथ में धारा,
(ii) धारा तथा वोल्टता के बीच कला कोण (x = 3 लीजिये)।
उत्तर:
यहाँ पर दिया गया है:
R = 15Ω, XC = 14Ω L = 0.1 हेनरी
Erms = 200 वोल्ट
f = 50 हर्ट्ज
XL = 2πfL = 2 × 3 × 50 x 0.1
= 30Ω
∴ परिपथ की प्रतिबाधा Z = \(\sqrt{\mathrm{R}^2+\left(X_L-X_C\right)^2}\)
Z = \(\sqrt{(12)^2+(30-14)^2}\)
= \(\sqrt{144+256}\)
= √400 = 2052
अतः (i) परिपथ में धारा
Irms = Erms
= \(\frac{200}{20}\)
= 10 ऐम्पियर

(ii)
tan ¢ = \(\frac{x_L-x_C}{R}\) = \(\frac{30-14}{12}\) = \(\frac{16}{12}\)
¢ = tan-1 \(\left(\frac{4}{3}\right)\)
अतः परिणामी वोल्टता धारा से tan-1 \(\left(\frac{4}{3}\right)\) कोण अग्रगामी होगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 3.
एक प्रत्यावर्ती धारा जनित्र 3 मी2 अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल तथा 100 फेरों वाली कुण्डली से बना है। जो 0.04 टेसला के चुम्बकीय क्षेत्र में 60 रेडियन/से. के नियत कोणीय वेग से घुमायी जा रही है। कुण्डली का प्रतिरोध 500 ओम है। गणना कीजिये: (i) जनित्र से प्राप्त अधिकतम धारा (ii) कुण्डली में व्यय हुई अधिकतम शक्ति है।
उत्तर:
दिया है।
A = 3 मी2, N = 100.
B = 0.04 टेसला, ω = 60 रेडियन/से.
R = 500 ओम
(i) जनित्र से प्राप्त अधिकतम धारा
Io = \(\frac{E_0}{R}\) = \(\frac{\mathrm{NBA} \omega}{\mathrm{R}}\)
= \(\left(\frac{100 \times 0.04 \times 3 \times 60}{500}\right)\)
= 1.44 ऐम्पियर

(ii) व्यय हुई अधिकतम शक्ति
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा 9

प्रश्न 4.
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ X तथा Y परिपथ अवयवों के श्रेणीक्रम संयोजन से बना है। धारा वोल्टता से कलान्तर अग्रगामी है। यदि अवयव X शुद्ध प्रतिरोध है जिसका मान 100Ω है, तो (i) परिपथ अवयव Y का नाम बताइये। (ii) यदि वोल्टता का वर्ग- माध्य-मूल मान 141 वोल्ट हो, तो धारा का वर्ग- माध्य-मूल मान ज्ञात कीजिये।
उत्तर:
(i)
∵ X-Y के श्रेणीक्रम संयोजन में X शुद्ध प्रतिरोध है और धारा वोल्टता से \(\frac{\pi}{4}\) व कलान्तर अग्रगामी है, अतः परिपथ Y संधारित्र होगा।
(ii)
cos ¢ = \(\frac{R}{Z}\)
Z = \(\mathrm{R} / \cos \phi\)
Z = \(\frac{100}{\cos \frac{\pi}{4}}\) = \(\frac{100}{\frac{1}{\sqrt{2}}}\) = \(100 \sqrt{2}\)
अतः
Irms = \(\frac{E_{\mathrm{rms}}}{Z}\) = \(\frac{141}{100 \sqrt{2}}\)
= \(\frac{141}{100 \times 1.414}\) ऐम्पियर

प्रश्न 5.
एक संधारित्र तथा एक प्रतिरोध एक प्रत्यावर्ती धारा स्रोत से श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। यदि C तथा R के सिरों के बीच वोल्टता क्रमशः 120 V, 90 V तथा धारा का वर्ग माध्य-मूल मान 3 A हो, तो ज्ञात कीजिये:
(i) प्रतिबाधा
(ii) परिपथ का शक्ति गुणांक
उत्तर:
दिया है:
(i) Vc = 120 वोल्ट, VR = 90 वोल्ट, Irms = 3 ऐम्पियर
Vrms = \(\sqrt{V_R^2+V_C^2}\)
= \(\sqrt{(120)^2+(90)^2}\)
= \(\sqrt{14400+8100}\)
= \(\sqrt{22500}\)
= 150 वोल्ट
Vrms = 150 वोल्ट या Erms = 150 वोल्ट
\(\frac{E_{\mathrm{rms}}}{I_{\mathrm{rms}}}\) = \(\frac{150}{3}\) = 50Ω

(ii) शक्ति गुणांक cos = \(\frac{\mathrm{V}_{\mathrm{R}}}{\mathrm{V}_{\mathrm{mms}}}\)
= \(\frac{90}{150}\) = 0.6

प्रश्न 6.
एक विद्युत बल्ब पर 220 V आपूर्ति एवं 100 वाट शक्ति अंकित है, तो
(a) बल्ब का प्रतिरोध
(b) स्रोत की शिखर वोल्टता एवं
(c) बल्ब में प्रवाहित होने वाली r.m.s. धारा।
उत्तर:
दिया है:
E = 220 V
P = 100W
बल्ब का प्रतिरोध R = ?
शिखर वोल्टता E0 = ?
r.m.s. धारा I<sub>rms</sub> = ?
(a) P = E x I = E x \(\frac{E}{R}\) = \(\frac{E^2}{R}\)
R = \(\frac{E^2}{R}\) = \(\frac{220 \times 220}{100}\)
R = 484Ω

(b) स्रोत की शिखर वोल्टता
E0 = √2E = 1.414 x 220
= 311.08 V = 311 V

(c) ∴ I या I<sub>rms</sub> = \(\frac{P}{E}\)
I = \(\frac{100}{220}\)
= 0.455 A

प्रश्न 7.
किस समय पर ज्यावक्रीय प्रत्यावर्ती धारा का मान अपने शिखर मान का (i) आधा (ii) \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) गुना होगा?
उत्तर:
माना समय पर ज्यावक्रीय प्रत्यावर्ती धारा का मान शिखर
मान का आधा रह जाता है। अतः
I = \(\frac{\mathrm{I}_0}{2}\)
= I0 sin ωt
या
\(\frac{1}{2}\) = sin ωt ⇒ sin \(\frac{\pi}{6}\) = sin ωt1
या
ωt1 = \(\frac{\pi}{6}\)
= t1 = sin \(\frac{\pi}{6 \omega}\)
t1 = \(\frac{\pi}{2 \pi \mathrm{f} \times 6}\) = \(\frac{T}{12}\) सेकण्ड
इसी प्रकार यदि t2 समय पर I = \(\frac{\mathrm{I}_0}{\sqrt{2}}\) होता है तो
\(\frac{\mathrm{I}_0}{\sqrt{2}}\) = Io sin ωt2
या
⇒ \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) = sin ωt2
⇒ sin ωt2 = sin \(\frac{\pi}{4}\)
या
ωt2 = \(\frac{\pi}{4}\)
या t2 = 4\(\frac{\pi}{4 \omega}\)
t2 = \(\frac{\pi}{4 \times 2 \pi \mathrm{f}}\)
= \(\frac{T}{8}\) सेकण्ड
∵ \(\frac{1}{f}\) = T

प्रश्न 8.
एक प्रत्यावर्ती परिपथ में आवृत्ति पर शक्ति गुणांक 0.707 है। आवृत्ति 120 हर्ट्ज हो जाये, तो शक्ति एक कुण्डली का 60 हर्ट्ज यदि प्रत्यावर्ती स्रोत की गुणांक क्या होगा?
उत्तर:
हम जानते हैं कि.
cos ¢ = \(\frac{\mathrm{R}}{\mathrm{Z}}\) = \(\frac{\mathrm{R}}{\sqrt{\mathrm{R}^2+\mathrm{X}_{\mathrm{L}}^2}}\)
दोनों तरफ वर्ग करने पर
cos2 ¢ = \(\frac{R^2}{R^2+X_L^2}\)
लेकिन दिया गया है cos ¢ = 0.707
(0.707)2 = \(\frac{\mathrm{R}^2}{\mathrm{R}^2+\mathrm{X}_{\mathrm{L}}^2}\)
0.5 = \(\frac{\mathrm{R}^2}{\mathrm{R}^2+\mathrm{X}_{\mathrm{L}}^2}\)
0.5 R2 + 0.5 XL2 = R2
0.5R2 = 0.5 XL2
R2 = XL2
∵ R = XL
cos ¢’= \(\frac{\mathrm{R}}{\sqrt{\mathrm{R}^2+\left(\mathrm{X}_{\mathrm{L}}{ }^{\prime}\right)^2}}\)
लेकिन दिया गया है XL = 2R
∵ अब आवृत्ति का मान दुगुना हो गया है।
cos ¢ = \(\frac{\mathrm{R}}{\sqrt{(\mathrm{R})^2+(2 \mathrm{R})^2}}\) = \(\frac{R}{\sqrt{5 R^2}}\)
cos ¢ = \(\frac{1}{\sqrt{5}}\) = \(\frac{\sqrt{5}}{5}\)
cos ¢ = 0.447
∵ शक्ति गुणांक cos ¢ = 0.447

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 7 प्रत्यावर्ती धारा

प्रश्न 9.
एक प्रत्यावर्ती परिपथ में किसी समय t पर विभव E = 200 sin 157 t cos 157 t वोल्ट और धारा I = sin ( 314t + \(\frac{\pi}{3}\) ) ऐम्पियर है। इस स्थिति में गणना कीजिये:
(अ) आवृत्ति
(स) परिपथ की प्रतिबाधा
उत्तर:
दिया गया है:
विभव E = 200 sin 157 t cos 157 t यहाँ Eo = 100 वोल्ट
E = 100 x 2 sin 157 t cos 157 t Io = I ऐम्पियर
हम जानते हैं कि:
sin 2t = 2 sin t cost
∴ E = 100 sin 2 x 157 t
¢ = \(\frac{\pi}{3}\) = 60°
E = 100 sin 314 वोल्ट

(अ) आवृत्ति f = \(\frac{\omega}{2 \pi}\) = \(\frac{314}{2 \times 3.14}\)
f = 50 हर्ट्ज
(ब) वर्ग माध्य मूल वोल्टता
Erms = \(\frac{E_0}{\sqrt{2}}\)
= 0.707 x 100
= 70.7 वोल्ट
Irms = \(\frac{I_0}{\sqrt{2}}\)
= 0.707 x 1
= 0.707 ऐम्पियर
(स) परिपथ की प्रतिबाधा
Z = \(\frac{E_{\text {r.m.s. }}}{\mathrm{I}_{\text {r.m.s. }}}\)
= \(\frac{70.7}{0.707}\)
= \(\frac{707 \times 1000}{707 \times 10}\)
Z = 100 ओम

(द) शक्ति गुणांक = cos ¢
cos 60° = \(\frac{1}{2}\) = 0.5

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HBSE 11th Class Physics Important Questions and Answers

Haryana Board HBSE 11th Class Physics Important Questions and Answers

HBSE 11th Class Physics Important Questions in Hindi Medium

HBSE 11th Class Physics Important Questions in English Medium

  • Chapter 1 Physical World Important Questions
  • Chapter 2 Units and Measurements Important Questions
  • Chapter 3 Motion in a Straight Line Important Questions
  • Chapter 4 Motion in a Plane Important Questions
  • Chapter 5 Laws of Motion Important Questions
  • Chapter 6 Work Energy and Power Important Questions
  • Chapter 7 System of Particles and Rotational Motion Important Questions
  • Chapter 8 Gravitation Important Questions
  • Chapter 9 Mechanical Properties of Solids Important Questions
  • Chapter 10 Mechanical Properties of Fluids Important Questions
  • Chapter 11 Thermal Properties of Matter Important Questions
  • Chapter 12 Thermodynamics Important Questions
  • Chapter 13 Kinetic Theory Important Questions
  • Chapter 14 Oscillations Important Questions
  • Chapter 15 Waves Important Questions

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन


बहुविकल्पीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
यदि बल, लम्बाई तथा समय मूल मात्रक हों तो द्रव्यमान का विमीय सूत्र होता है:
(a) [F1 L-1 T2]
(b) [F1 L1 T2]
(c) [F1 L1 T-1]
(d) [F1 l1 T1]
उत्तर:
(b) [F1 L1 T2]

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

प्रश्न 2.
एक ठोस गोले की त्रिज्या के आयतन मापन में 2% त्रुटि है, इसके मापन में 2% की त्रुटि है:
(a) 10%
(b) 20%
(c) 6%
(d) 8%
उत्तर:
(c) 6%

प्रश्न 3.
\(\frac{1}{\sqrt{\mu_0 \varepsilon_0}}\) का विमीय सूत्र है:
(a) [[M0L0T0]
(b) [M0L1T-1A-1]
(c) [M0L1T-1A-1]
(d) [M0LT-1]
उत्तर:
(d) [M0LT-1]

प्रश्न 4.
\(\frac{E}{B}\) का विमीय सूत्र है:
(a) [M0L0T0]
(b) [ML2T-2K-1]
(c) [M0LT-1]
(d) [MLT3A-1]
उत्तर:
(c) [M0LT-1]

प्रश्न 5.
एक प्रकाश वर्ष (ly) की दूरी का मान है:
(a) 9.46 x 1010 km
(b) 9.46 x 1012 km
(c) 9.46 x 1012m
(d) 9.46 x 1015 cm
उत्तर:
(b) 9.46 x 1012 km

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

प्रश्न 6.
किसी कण द्वारा तय की गई दूरी तथा समय में निम्न सम्बन्ध हैं:
x = At + Bt2 इनमें A व B की विमाएँ हैं:
(a) [M0L1T1][M0L1T-2]
(b) [M0L1T-1][M0L1T-2]
(c) [M0L1T1][M0L1T-2]
(d) [M0L1T1][M0L1T-1]
उत्तर:
(b) [M0L1T-1][M0L1T-2]

प्रश्न 7.
एक भौतिक राशि Y = MaLbT-c द्वारा व्यक्त की जाती है। यदि M, L व T के मापन में क्रमशः α%, β% व γ% त्रुटि हो, तो कुल प्रतिशत त्रुटि होगी-
(a) [aα – bβ + cγ]%
(b) [aα – bβ – cγ]%
(c) [aα + bβ – cγ]%
(d) [aα + bβ + cγ]?
उत्तर:
(d) [aα + bβ + cγ]?

प्रश्न 8.
कोणीय संवेग व रेखीय संवेग के अनुपात की विमा है:
(a) [M0LT0]
(b) [MLT-1]
(c) [ML2T-1]
(d) [M-1L-1T-1]
उत्तर:
(a) [M0LT0]

प्रश्न 9.
एक घन की लम्बाई और द्रव्यमान के मापन में अधिकतम प्रतिशत त्रुटि 2% और 3% है। घनत्व के मापन में अधिकतम प्रतिशत त्रुटि होगी:
(a) 9%
(b) 3%
(c) 27%
(d) 6%
उत्तर:
(a) 9%

प्रश्न 10.
1 सेकण्ड तुल्य है:
(a) क्रिप्टॉन घड़ी के 1650763.73 आवर्ती के
(b) क्रिप्टॉन घड़ी के 652189.63 आवर्ती के
(c) सीजियम घड़ी के 1650763.73 आवर्तों के
(d) सीजियम घड़ी के 9192631770 आवतों के
उत्तर:
(a) क्रिप्टॉन घड़ी के 1650763.73 आवर्ती के

प्रश्न 11.
गुरुत्वीय नियतांक G का विमीय सूत्र है:
(a) [M1L2T2]
(b) [M-1L3T-2]
(c) [M-1L2T-2]
(d) [M-1L1T-2]
उत्तर:
(b) [M-1L3T-2]

प्रश्न 12.
विमीय विश्लेषण विधि से निम्न सूत्र व्युत्पन्न नहीं किया जा सकता है:
(a) T = 2π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\)
(b) s = ut + at2
(c) F = 6πrv
(d) v = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
उत्तर:
(b) s = ut + at2

प्रश्न 13.
ताप का SI पद्धति में मात्रक है:
(a) सेण्टीग्रेड
(b) लम्बाई
(c) केल्विन
(d) रूमर
उत्तर:
(c) केल्विन

प्रश्न 14.
निम्न में से कौन सी राशि व्युत्पन्न है?
(a) द्रव्यमान
(b) फॉरेनहाइट
(c) समय
(d) वेग
उत्तर:
(d) वेग

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

प्रश्न 15.
एक वैज्ञानिक किसी प्रयोग में 100 प्रेक्षण लेता है। वह पुन: इस प्रयोग को दोहराता है तथा 400 प्रेक्षण लेता है, तो त्रुटि:
(a) अपरिवर्तित होगी
(b) आधी हो जायेगी
(c) चौथाई हो जायेगी
(d) चौगुनी हो जायेगी
उत्तर:
(c) चौथाई हो जायेगी

प्रश्न 16.
7000 में सार्थक अंकों की संख्या है:
(a) 1
(b) 2
(c) 3
(d) 4
उत्तर:
(a) 1

प्रश्न 17.
जूल सेकण्ड मात्रक है:
(a) बल आघूर्ण का
(b) कोणीय संवेग का
(c) ऊर्जा का
(d) शक्ति का
उत्तर:
(b) कोणीय संवेग का

प्रश्न 18.
धारा I = ktan θ सूत्र में का मात्रक होगा:
(a) ऐम्पियर
(b) रेडियन
(c) वोल्ट
(d) ओम
उत्तर:
(a) ऐम्पियर

प्रश्न 19.
तरंग संख्या k = \(\frac{2 \pi}{\lambda}\) का विमीय सूत्र होगा:
(a) [M0L-1T1]
(b) [M0L0T1]
(c) [M0L0T0]
(d) [M0L-1T0]
उत्तर:
(d) [M0L-1T0]

प्रश्न 20.
एक मोल गैस के लिए PV = RT समीकरण में R का विमीय सूत्र होगा:
(a) [M1L-2T-2K-1]
(b) [M1L2T2K-1]
(c) [M1L2T-2K-1]
(d) [M2L2T-2K]
उत्तर:
(c) [M1L2T-2K-1]

प्रश्न 21.
1 नैनोमीटर तुल्य है:
(a) 109 मीटर
(b) 106 मीटर
(c) 10-7 सेमी
(d) 10-9 सेमी
उत्तर:
(c) 10-7 सेमी

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

प्रश्न 22.
3.513 kg का एक पिण्ड 5.0 m/s की चाल से x- दिशा में संवेग का परिमाण रिकॉर्ड किया अनुदिश गतिमान है। इसके जायेगा:
(a) 17.56 kg ms-1
(b) 17.57 kg ms-1
(c) 17.6 kg ms-1
(d) 17.565 kg ms-1
उत्तर:
(c) 17.6 kg ms-1

प्रश्न 23.
यदि E = ऊर्जा, G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक l = आवेग तथा M द्रव्यमान, \(\frac{G I M^2}{E^2}\) तब की विमाएँ किस राशि को प्रदर्शित करती हैं?
(a) समय
(b) द्रव्यमान
(c) लम्बाई
(d) बल
उत्तर:
(a) समय

प्रश्न 24.
निम्नलिखित इकाइयों में से कौन-सी विमा दर्शाती है, जहाँ विद्युत आवेश दर्शाता है?
(a) \(\frac{\mathrm{Wb}}{\mathrm{m}^2}\)
(b) हेनरी (H)
(c) \(\frac{\mathrm{H}}{\mathrm{m}^2}\)
(d) वेबर (Wb)
उत्तर:
(b) हेनरी (H)

अति लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
माइक्रोन किस भौतिक राशि का मात्रक है?
उत्तर:
माइक्रोन दूरी अथवा लम्बाई का मात्रक है। (एक माइक्रोन = 10-6 मीटर)

प्रश्न 2.
रेडियन तथा स्टेरेडियन किसके मात्रक हैं?
उत्तर:
रेडियन समतलीय कोण का एवं स्टेरेडियन घन कोण का मात्रक है।

प्रश्न 3.
पूरक मात्रकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
रेडियन व स्टेरेडियन।

प्रश्न 4.
1 सेकण्ड में कितने नैनो सेकण्ड होते हैं?
उत्तर:
1 सेकण्ड में 109 नैनो सेकण्ड होते हैं।

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प्रश्न 5.
1 सेकण्ड माध्य सौर दिवस का कौन सा भाग होता है?
उत्तर:
1 सेकण्ड माध्य सौर दिवस का 86,400 वाँ भाग होता है।

प्रश्न 6.
mN, Nm तथा nm में क्या अन्तर है?
उत्तर:
mN मिली न्यूटन को, Nm न्यूटन मीटर को तथा nm नैनो मीटर को प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 7.
वेग प्रवणता का विमीय ‘सूत्र’ लिखिये।
उत्तर:
वेग प्रवणता =
अतः वेग प्रवणता का विमीय सूत्र
\(\frac{\left[\mathrm{M}^0 \mathrm{~L}^1 \mathrm{~T}^{-1}\right]}{\left[\mathrm{M}^0 \mathrm{~L}^1 \mathrm{~T}^0\right]}\) = [M0L0T-1 ]

प्रश्न 8.
S.I. पद्धति में प्रदीपन तीव्रता का मात्रक क्या होता है?
उत्तर:
S.I. पद्धति में प्रदीपन तीव्रता का मात्रक “कैण्डिला” (cd) होता है।

प्रश्न 9.
पदार्थ की मात्रा का मूल मात्रक क्या है?
उत्तर:
पदार्थ की मात्रा का मूल मात्रक ‘मोल’ (mol) है।

प्रश्न 10.
एक जूल ऊर्जा कितने अर्ग के बराबर होती है?
उत्तर:
1 जूल = 107 अर्ग।

प्रश्न 11.
प्लांक नियतांक का मात्रक क्या होता है?
उत्तर:
प्लांक नियतांक / का मात्रक ‘जूल सेकण्ड’ (Js) होता है।

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प्रश्न 12.
गुरुत्वीय त्वरण तथा सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) की विमाएं लिखिए।
उत्तर:
गुरुत्वीय त्वरण (g) का विमीय सूत्र = [M0L1T-2] तथा सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) का विमीय सूत्र = [M-1L3T-2]

प्रश्न 13.
उस भौतिक राशि का नाम बताइये, जिसकी विमा प्लाँक नियतांक की विमा के बराबर हो।
उत्तर:
कोणीय संवेग।

प्रश्न 14.
उन राशियों के नाम बताइये जिनका विमीय सूत्र [M1L2T-1] हो।
उत्तर:
कोणीय संवेग तथा प्लांक नियतांक।

प्रश्न 15.
उन राशियों के नाम बताइये जिनका विमीय सूत्र [M1L2T-1] हो।
उत्तर:
कार्य एवं बल आघूर्ण।

प्रश्न 16.
समीकरण E = at + bt2 में E ताप विद्युत् वाहक बल है एवं तापान्तर है तथा वb नियतांक है। यहाँ का मात्रक क्या होगा ?
उत्तर:
∵ at का मात्रक = E का मात्रक
∴ का मात्रक = \(\frac{E}{t}\) = imm वोल्ट / डिग्री।

प्रश्न 17.
पृष्ठ तनाव की विमा क्या होती है?
उत्तर:
[M1L0T-2]

प्रश्न 18.
एक मीटर में Kr 86 की कितनी तरंगदैर्ध्य होती हैं?
उत्तर:
1 मीटर में Kr86 की तरंग संख्या = 1,650,763.73

प्रश्न 19.
आवेग की विमा किसकी विमा के समान होती है?
उत्तर:
आवेग की विमा [M1L1T-1] ‘संवेग’ की विमा के समान होती है।

प्रश्न 20.
दो विमाहीन राशियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कोण, विकृति।

प्रश्न 21.
उन भौतिक राशियों के नाम लिखिये जिनके विमीय सूत्र [M1L-1 T-2] हैं।
उत्तर:
दाब, प्रतिबल, प्रत्यास्थता गुणांक।

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प्रश्न 22.
किसी ऐसी भौतिक राशि का नाम लिखिये जिसका मात्रक तो हो लेकिन विमाहीन हो।
उत्तर:
कोण

प्रश्न 23.
सूत्र \(T=2 \pi \sqrt{L Y}\) में T समय एवं L लम्बाई हो तो Y का विमीय सूत्र लिखिए।
उत्तर:
दिया है:
\(T=2 \pi \sqrt{L Y}\) ⇒ \(Y=\frac{T^2}{4 \pi^2 L}\)
∴ [y] = [M0L-1T-2]

प्रश्न 24.
बल, त्वरण, संवेग तथा शक्ति में न्यूटन सेकण्ड किसका मात्रक है?
उत्तर:
संवेग का।

प्रश्न 25.
क्या किसी भौतिक राशि की विमाएँ भिन्न-भिन्न पद्धतियों में भिन्न-भिन्न होती हैं?
उत्तर:
नहीं; किसी भौतिक राशि की विमाएँ सभी पद्धतियों में समान होती हैं।

प्रश्न 26.
भौतिक राशि Z की गणना सूत्र Z = \(\frac{a b^3}{c^6}\)द्वारा की जाती है। a, b तथा में से कौन सी राशि अधिक यथार्थता से नापी जानी चाहिए और क्यों?

उत्तर:
c क्योंकि c की घात अधिकतम है और त्रुटि में घात का गुणा किया जाता है।

प्रश्न 27.
प्लॉक के सार्वत्रिक नियतांक (h) का मात्रकं प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
फोटॉन की ऊर्जा, E = hv ⇒ h = \(\frac{E}{\mathrm{v}}\)
∴ h का मात्रक =
= जूल- सेकण्ड

प्रश्न 28.
किसी कोण की माप क्या लम्बाई के मात्रक पर निर्भर करती है?
उत्तर:
नहीं कोण दो लम्बाइयों का अनुपात होता है; अतः यह लम्बाई के मात्रक से स्वतन्त्र है।

प्रश्न 29.
X के मान में आपेक्षिक त्रुटि बताइये यदि X = \(\frac{A^4 B^{1 / 3}}{C \cdot D^{3 / 2}}\)
उत्तर:
X के मान में अधिकतम आपेक्षिक त्रुटि
\(\left|\frac{\Delta X}{X}\right|_{\max }=4 \frac{\Delta A}{A}+\frac{1}{3} \frac{\Delta B}{B}+\frac{\Delta C}{C}+\frac{3}{2} \frac{\Delta D}{D}\)

प्रश्न 30.
निम्न में सार्थक अंकों की संख्या बताइये:
1. 0.0020 × 104m;
2. 5.30 x 106 kg
उत्तर:

  1.  दो सार्थक अंक
  2. तीन सार्थक अंक

प्रश्न 31.
1 मिली सेकण्ड में कितने नैनो सेकण्ड होते हैं?
उत्तर:
1 ms = 10-3 s = 10-3 × 109 s = 106 ns.

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प्रश्न 32.
बल नियतांक का विमीय सूत्र लिखिये।
उत्तर:
बल नियतांक का विमीय सूत्र = [M1 L0T-2]

प्रश्न 33.
उन दो राशियों के नाम बताइये जिनके विमीय सूत्र [M1L0T-2] हों।
उत्तर:
बल नियतांक पृष्ठ तनाव।

प्रश्न 34.
आवेग का विमीय सूत्र लिखिए।
उत्तर:
आवेग = बल x समयान्तराल
= [M1L1T-2] × [T1] = [M1L1T-1]

प्रश्न 35.
किसी तार में अनुप्रस्थ तरंग की चाल V = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) है, जहाँ T तनाव बल है। यदि m तार की एकांक लम्बाई का द्रव्यमान kg-m-1 में हो तथा वेग 1, ms-1 में हो तो तनाव t का मात्रक बताइये
उत्तर:
सूत्र V = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\)
⇒ T = v2.m
∴ T का मात्रक = (ms-1)2 kg.m-1 = kg.m.s-2 या न्यूटन

प्रश्न 36.
कोणीय संवेग की विमा तथा मात्रक लिखिए।
उत्तर:
कोणीय संवेग L = Iω
∴ L का मात्रक = kg-m2 s-1 तथा विमीय सूत्र
= [M2L2T-1]

प्रश्न 37.
दो ऐसे नियतांकों के नाम बताइये जो विमाहीन न हों।
उत्तर:
प्लांक नियतांक; गैस नियतांक

प्रश्न 38.
श्यानता गुणांक की विमा लिखिये।
उत्तर:
[M1L-1T-1]

लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
मात्रक किसे कहते हैं तथा मात्रकों की कितनी पद्धतियाँ होती हैं?
उत्तर:
भौतिक राशि के मापन के लिए नियत किये मान को मात्रक कहते हैं। किसी भौतिक राशि के निश्चित वास्तविक मूल रूप को उस राशि का मानक मात्रक कहते हैं।
मात्रकों की निम्नलिखित तीन पद्धतियाँ हैं:

  1. C.GS. पद्धति अर्थात् सेन्टीमीटर ग्राम सेकण्ड पद्धति।
  2. M. KS. पद्धति अर्थात् मीटर किलोग्राम सेकण्ड पद्धति।
  3. F.P.S. पद्धति अर्थात् फुट पाउण्ड सेकण्ड पद्धति।

प्रश्न 2.
एक रेडियन की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
एक तलीय कोण
∆s = \(\frac{\Delta s}{r}\) rad
यदि
∆s = r तो ∆θ = 1 rad.
अर्थात् एक रेडियन वह तलीय कोण है जो वृत्त की त्रिज्या के बराबर चाप द्वारा वृत्त के केन्द्र पर अन्तरित किया जाता है।

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प्रश्न 3.
किसी माप की यथार्थता तथा परिशुद्धता में क्या अन्तर है?
उत्तर:
किसी माप की यथार्थता से अभिप्राय है कि राशि का मापित मान उसके वास्तविक मान के कितना निकट है, जबकि किसी माप की परिशुद्धता से अभिप्राय है कि राशि किस विभेदन सीमा तक मापी गयी।
माप की परिशुद्धता ∝

प्रश्न 4.
आपेक्षिक तथा निरपेक्ष त्रुटि से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
निरपेक्ष त्रुटि: किसी राशि के वास्तविक एवं मापित मान के अन्तर को निरपेक्ष या परम त्रुटि कहते हैं।
जब वास्तविक मान न दिया हो बल्कि मापन के पाठ्यांक दिये हों उनका माध्यमान ही वास्तविक मान मान लिया जाता है अर्थात्
\(\bar{a}=\sum_{i=1}^n \frac{a_i}{n}\)
अतः i वे माप की निरपेक्ष त्रुटि
∆a = \(\bar{a}-a_i\)
और कुल निरपेक्ष त्रुटि
∆\(\bar{a}=\frac{1}{n} \sum_{i=1}^n\left|\Delta a_i\right|\)
आपेक्षिक त्रुटि: माध्य परम त्रुटि एवं माध्यमान के अनुपात को आपेक्षिक त्रुटि कहते हैं।
∴ आपेक्षिक त्रुटि = \(\frac{\Delta \bar{a}}{a}\)

प्रश्न 5.
शून्य अंक किन परिस्थितियों में सार्थक माना जाता है?
उत्तर:
शून्य अंक निम्न परिस्थितियों में सार्थक माना जाता है:

  1. यदि यह दो अशून्य अंकों के मध्य हो।
  2. यदि यह दशमलव बिन्दु के आगे अशून्य अंक के बाद हो।
  3.  यदि शून्य युक्त पूर्ण संख्या मापन से प्राप्त होती है जैसे किसी छड़ की लम्बाई मापने पर 200 cm प्राप्त होती है तो इसके दोनो शून्य सार्थक हैं।

प्रश्न 6.
एक गोले की त्रिज्या के मापन में 2% की त्रुटि होती है। इसके आयतन के मापन में कितने प्रतिशत त्रुटि होगी?
उत्तर:
गोले का आयतन v = \(\frac{4}{3}\)πr3
∴ \(\frac{\Delta V}{V}\) x 100 = 3 \(\frac{\Delta r}{r}\) × 100 = 3 x 2% = 6%
∴ गोले के आयतन में प्रतिशत त्रुटि = 6%

प्रश्न 7.
3.27 मीटर तथा 3.25 मीटर का अन्तर 0.02 मीटर या 2 x 10-2 मीटर है। क्या इसे 2.00 × 102 मीटर लिख सकते हैं?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि 2 के बाद के अंक निश्चित नहीं है अतः इन अंकों को शून्य नहीं माना जा सकता है।

प्रश्न 8.
यदि किसी प्रयोग में विभिन्न मापों में सार्थक अंकों की संख्या भिन्न-भिन्न हो तो किस राशि को अधिक शुद्धता से मापना चाहिए तथा क्यों?
उत्तर:
जिस राशि में सार्थक अंकों की संख्या सबसे कम हो, उसको अधिक शुद्धता से मापना चाहिए क्योंकि इसके कारण प्रतिशत त्रुटि सबसे अधिक आती है।

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प्रश्न 9.
किसी कण का विस्थापन s = ct3 द्वारा प्रदर्शित है, जहाँ t समय है। c का विमीय सूत्र ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
विस्थापन s = ct3 ⇒ c =
∴ c का विमीय सूत्र = \(\frac{\left[\mathrm{M}^0 \mathrm{~L}^1 \mathrm{~T}^0\right]}{\left[\mathrm{M}^0 \mathrm{~L}^0 \mathrm{~T}^3\right]}\)
= [M0L1T-3]
= [M0L1T-3]

प्रश्न 10.
यदि वेग, बल एवं समय को मूल मात्रक मान लिया जाये तो ऊर्जा का विमीय सूत्र ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
∵ ऊर्जा = कार्य = बल x विस्थापन = बल x वेग x समय
∴ ऊर्जा का विमीय सूत्र = [F1V1t1]

प्रश्न 11.
S.I. पद्धति की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. यह मात्रकों की परिमेयकृत पद्धति है अर्थात् इस पद्धति में किसी एक भौतिक राशि के लिए एक ही मात्रक का उपयोग होता है।
  2.  इस पद्धति में मात्रक अचर तथा उपलब्ध मानकों पर आधारित हैं।
  3.  यह मात्रकों की सम्बद्ध पद्धति है अर्थात् इस पद्धति में सभी भौतिक राशियों के व्युत्पन्न मात्रक केवल मूल मात्रकों को गुणा एवं भाग करके प्राप्त हो सकते हैं।
  4.  ये सभी मात्रक सुपरिभाषित एवं पुन: स्थापित होने वाले हैं।
  5.  यह मीट्रिक या दशमलव पद्धति है।
  6.  S.I. पद्धति विज्ञान की सभी शाखाओं में प्रयोग की जा सकती है परन्तु M.K.S. पद्धति को केवल यांत्रिकी में प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 12.
विमीय विश्लेषण विधि के उपयोग बताइये।
उत्तर:
विमीय समीकरणों के निम्नलिखित उपयोग हैं:

  1.  किसी समीकरण की सत्यता की जाँच करना।
  2. विभिन्न भौतिक राशियों के मध्य सम्बन्ध स्थापित करना।
  3.  भौतिक राशियों के मात्रकों को मापन की एक पद्धति से दूसरी पद्धति में बदलना।

1. किसी समीकरण की सत्यता की जाँच करना (To Check the Truthfulness of an Equation):
जिस समीकरण की सत्यता की जाँच करनी होती है, उसके दोनों पक्षों की विमाओं की तुलना करते हैं। यदि दोनों पक्षों की विमाएं समान मिलती हैं तो समीकरण सही होगा अन्यथा गलत होगा। यदि समीकरण के किसी पक्ष में एक से अधिक पदों का योग अथवा अन्तर हो तो सत्यता की जाँच अर्द्ध-समीकरण बनाकर करते हैं। यदि सभी अर्द्ध समीकरण विमीय दृष्टि से सही मिलते हैं तो दिया गया समीकरण सही होगा, अन्यथा गलत होगा।

प्रश्न 13.
क्या विमाहीन एवं मात्रकहीन भौतिक राशि का अस्तित्व सम्भव है?
उत्तर:
विमाहीन राशियों का अस्तित्व सम्भव है जैसे – कोण, विकृति इसी प्रकार मात्रक विहीन राशियों का अस्तित्व भी संभव है जैसे – विकृति, अपवर्तनांक, आपेक्षिक घनत्व।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति में मात्रकों के नाम एवं संकेत लिखने के नियम लिखिए।
उत्तर:

  1. भौतिक राशियों को प्रतीक रूप में सामान्यतः अंग्रेजी वर्णमाला के किसी अक्षर से निरूपित करते हैं तथा इन्हें तिरछे अथवा ढालू टाइप में छपवाया जाता है तथापि जिस राशि के लिए दो अक्षरीय प्रतीक आवश्यक हों तो उन्हें दो प्रतीकों के गुणनफल के रूप में प्रदर्शित करना होता है परन्तु इन प्रतीकों को पृथक् दर्शाने के लिए कुछ स्थान छोड़ना आवश्यक होता है।
  2.  नामों अथवा व्यंजकों के संक्षिप्त रूपों, जैसे- Potential Energy के लिए P.E. का उपयोग भौतिक समीकरणों में नहीं किया जाता है। पाठ्य सामग्री में इन संक्षिप्त रूपों को साधारण रोमन (सीधे) टाइप में छपवाया जाता है।
  3.  सदिश राशियों को मोटे टाइप में तथा सीधे छपवाया जाता है।
  4.  दो भौतिक राशियों के गुणनफल को उनके बीच कुछ स्थान छोड़कर लिखा जाता है। एक भौतिक राशि को दूसरी राशि से विभाजित करना एक क्षैतिज दण्ड खींचकर अथवा सॉलिडस (अर्थात् तिरछा रेखा) के साथ निर्दिष्ट किया जा सकता है अथवा अंश तथा हर के प्रथम घात के व्युत्क्रम के (जैसे- m/s या ms) के रूप में गुणनफल लिख सकते हैं।
  5.  मात्रकों के मानक तथा अनुमोदित प्रतीकों को अंग्रेजी वर्णमाला के छोटे अक्षरों से आरम्भ करके रोमन (सीधे टाइप) में लिखा जाता है। मात्रकों के लघु उल्लेखों, जैसे- kg, m, s, cd आदि को प्रतीकों के रूप में लिखा जाता है, संक्षिप्त रूप में नहीं मात्रकों को केवल तभी बड़े अक्षर से लिखा जाता है जब प्रतीक को किसी वैज्ञानिक के नाम से व्युत्पन्न किया जाता है जैसे- न्यूटन (N), जूल (J), ऐम्पियर (A) आदि।
  6.  मात्रकों के प्रतीकों को उनके लिए अनुमोदित अक्षरों में लिखने के पश्चात् उनके अन्त में पूर्ण विराम नहीं लगाया जाता तथा मात्रकों के प्रतीकों के केवल एक वचन में ही लिखा जाता है बहुवचन में नहीं अर्थात् किसी मात्रक का प्रतीक बहुवचन में अपरिवर्तित रहता है।
  7.  सॉलिडस (Solidus) अर्थात् (l) के उपयोग का अनुमोदन केवल एक अक्षर के मात्रक प्रतीक के अन्य मात्रक प्रतीक द्वारा विभाजन का संकेतन करने के लिए किया गया है। एक से अधिक सॉलिडस का उपयोग नहीं किया जाता है।

प्रश्न 2.
विमीय समीकरणों के उपयोग से किसी समीकरण में नियतांकों एवं चरों की विमाएँ ज्ञात करने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
किसी समीकरण में नियतांकों एवं चरों की विमाएं ज्ञात करना (To Find the Dimensions of Constants and Variables in the Given Equation):
समीकरणों में नियतांकों और चरों की विमाएँ भी विमाओं की समांगता के नियम से ज्ञात की जा सकती हैं अर्थात् किसी भी भौतिक राशि में जोड़ी या घटाई जाने वाली राशियों की विमाएँ समान होती हैं तथा समीकरण के दोनों पक्षों की विमाएँ भी समान होती हैं।

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प्रश्न 3.
विमा, विमीय सूत्र, विमीय समीकरण एवं विमीय समांगता का सिद्धान्त विस्तार पूर्वक समझाइये।
उत्तर:
विमा (Dimensions and Dimensional Analysis):
“किसी भौतिक राशि की विमाएँ वे घातें होती हैं, जिन्हें उस भौतिक राशि के व्युत्पन्न मात्रक प्राप्त करने के लिए मूल मात्रकों पर चढ़ाया जाता है।” उदाहरणार्थ-

= (दूरी का मात्रक)1 x ( समय का मात्रक)-1
स्पष्ट है कि चाल का मात्रक प्राप्त करने के लिए हमें लम्बाई के मात्रक पर 1 की घात एवं समय के मात्रक पर (-1) की घात चढ़ानी होती है। चाल के मात्रक को विभिन्न पद्धतियों में लिख सकते हैं – मीटर / सेकण्ड, सेमी/सेकण्ड, फुट/सेकण्ड। अतः ये सभी मात्रक अलग-अलग हैं परन्तु प्रत्येक की विमा में दूरी की । घात एवं समय की (-1) घात है। अतः, “किसी भौतिक राशि की विमाएँ राशि को व्यक्त करने वाले मात्रकों पर निर्भर नहीं करती हैं।”

कुछ पदों की परिभाषा निम्न प्रकार की जा सकती है:
1. विमीय सूत्र (Dimensional Formula): वह पद जो यह प्रदर्शित करता है कि व्युत्पन्न मात्रक को बनाने के लिए कौन सी मूल राशियों के मात्रक प्रयुक्त किये गये हैं, और कौन सी घातें इस कार्य में प्रयुक्त हैं, इसे भौतिक राशि का विमीय सूत्र कहते हैं। विमीय सूत्रों को सदैव बड़े कोष्ठक में लिखा जाता है।
उदाहरणार्थ: बल का विमीय सूत्र [M1L1 T-2] है।

2. विमीय समीकरण (Dimensional Equation): भौतिक राशि के संकेत को उसके विमीय सूत्र के बराबर रखने पर प्राप्त समीकरण को विमीय समीकरण कहते हैं।
उदाहरणार्थ:
[बल] = [M1L1T-2]
या
[F] = [M1L1T-2]

3. विमाओं का समांगता का सिद्धान्त (Principle of Homogeneity of Dimensions): इस सिद्धान्त के अनुसार “किसी भौतिक सम्बन्ध के लिए दोनों ओर के सभी पदों की विमाएँ समान होनी चाहिए।”
उदाहरण के लिए:
v = u + at में,
v की विमाएँ = [L1T-1]
u की विमाएँ = [L1T-1]
at की विमाएँ = [L1 T-2][T]=[LT-1]
उपयुक्त भौतिक समीकरण के दोनों पक्षों के सभी पदों की विमाएँ समान हैं, जोकि विमाओं की समांगता के सिद्धान्त के अनुरूप है।
विमीय सूत्र ज्ञात करना-यदि हमें यह ज्ञात हो कि किसी भौतिक राशि में कौन-कौन सी मूल राशियाँ शामिल हैं तो उस राशि का विमीय सूत्र हम निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते हैं

प्रश्न 4.
किसी भौतिक राशि के संख्यात्मक मान तथा उसके मात्रक में क्या सम्बन्ध है? विमीय विधि में इस सम्बन्ध की क्या उपयोगिता है?
उत्तर:
भौतिक राशियों के मात्रकों को एक पद्धति से दूसरी पद्धति में बदलना (Conversion of Units of Physical Quantities from One to Another System):
किसी भौतिक राशि के आंकिक मान (n) तथा मात्रक (u) का गुणनफल नियत रहता है; अर्थात्
n. [u] = नियतांक …….(1)
माना किसी भौतिक राशि Q का विमीय सूत्र [MaLbTc] है। इस राशि का एक पद्धति में आंकिक मान n1 एवं मात्रक [Ma1Lb1T c1] तथा दूसरी पद्धति में आंकिक मान n2 एवं मात्रक [Ma2Lb2Tc2] है। अत: समीकरण (1) से
Q = n1u1 = n2u2
या Q = n1 [M4LT] = n2[M£LT′′]
या n2 = n \(\frac{\left[\mathrm{M}_1^a \mathrm{~L}_1^b \mathrm{~T}_1^c\right]}{\left[\mathrm{M}_2^a \mathrm{~L}_2^b \mathrm{~T}_2^c\right]}\)
या n2 = n1 \(\left[\frac{\mathrm{M}_1}{\mathrm{M}_2}\right]^a\left[\frac{\mathrm{L}_1}{\mathrm{~L}_2}\right]^b\left[\frac{\mathrm{T}_1}{\mathrm{~T}_2}\right]^c\)
इस सूत्र की सहायता से किसी भौतिक राशि के आंकिक मान को एक पद्धति से दूसरी पद्धति में बदला जा सकता है।

प्रश्न 5.
त्रुटि किसे कहते हैं? विभिन्न प्रकार की त्रुटियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(A) क्रमबद्ध त्रुटियाँ (Systematic Errors): ” वे त्रुटियाँ जो किसी क्रमबद्ध नियम से निर्धारित होती हैं, क्रमबद्ध त्रुटियाँ कहलाती हैं।” क्रमबद्ध त्रुटियों को निर्धारित करने वाले नियम का पता लगाया जा सकता है। इस नियम के ज्ञात होते ही क्रमबद्ध त्रुटि को न्यूनतम किया जा सकता है। क्रमबद्ध त्रुटियों के कुछ स्रोत निम्नलिखित हैं-
(a) उपकरणी त्रुटियाँ ( Instrumental Errors ): सभी उपकरणी त्रुटियाँ क्रमबद्ध त्रुटियों के अन्तर्गत आती हैं। इनके उदाहरण हैं

  1.  स्केल का त्रुटिपूर्ण अंशांकन: त्रुटिपूर्ण अंशांकन के कारण एक तापमापी द्वारा N. T.P. पर जल का क्वथनांक 100°C के स्थान पर 95°C पढ़ा जा सकता है।
  2.  उपकरण की शून्यांक त्रुटि: वर्नियर कैलीपर्स, पेंचमापी की शून्यांक त्रुटि प्रकाशिक बेंच की सूचक त्रुटि (index error) भी क्रमबद्ध त्रुटियाँ हैं। सुग्राही एवं उच्च गुणवत्ता के यंत्रों का उपयोग करके इस प्रकार की त्रुटि को कम किया जा सकता है।

(b) प्रायोगिक तकनीक में अपूर्णता (Imperfection in Experimental Technique): प्रयोग के दौरान बाह्य प्रतिबन्धों जैसे – ताप, आर्द्रता, वायु-वेग आदि में क्रमबद्ध परिवर्तन तथा मापन की अनुचित तकनीक ( Imperfect Technique) क्रमबद्ध त्रुटियों के अन्तर्गत आते हैं। उदाहरणार्थ: यदि किसी व्यक्ति का ताप कन्धे व भुजा के बीच तापमापी को दबाकर मापा जाये तो इसका पाठ वास्तविक ताप से कम होगा। ऊष्मा के प्रयोगों में कुछ ऊष्मा का विकिरण द्वारा ह्रास हो जाता है।

(c) व्यक्तिगत त्रुटियाँ (Personal Errors): ये त्रुटियाँ उपकरण की अनुचित व्यवस्था तथा प्रेक्षण के दौरान उचित सावधानी न बरतने के कारण उत्पन्न होती हैं।
निराकरण (Elimination): क्रमबद्ध त्रुटियों को दूर करने के लिए भिन्न-भिन्न स्थितियों में भिन्न-भिन्न विधियों प्रयुक्त की जाती हैं।

  1. कुछ स्थितियों में त्रुटियों का निर्धारण वास्तविक प्रयोग से पहले किया जाता है। उदाहरणार्थ: यंत्र की शून्यांक त्रुटि प्रयोग से पहले ज्ञात की जाती है तथा प्रत्येक माप से संगत संशोधन किया जाता है।
  2.  कुछ स्थितियों में त्रुटियों का निर्धारण प्रयोग के बाद किया जाता है। उदाहरणार्थ: ऊष्मा के प्रयोग में विकिरण के ह्रास का संशोधन विभिन्न समयों में लिए ताप के प्रेक्षण से किया जाता है।

(B) यादृच्छिक त्रुटियाँ (Random Errors): इस प्रकार की त्रुटियाँ अत्यधिक भिन्नता के कारण होती हैं। कभी-कभी इस प्रकार की त्रुटियाँ अवसरीय त्रुटि कहलाती हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने पाठ्यांकों की पुनरावृत्ति करे तो व्यक्ति प्रत्येक प्रेक्षण में त्रुटि करता है एवं इस प्रकार की त्रुटि को अंकगणितीय माध्य के द्वारा कम करके शुद्धतम मान प्राप्त किया जा सकता है।
माना किसी राशि के लिए लिये गये n पाठ्यांकों का मान क्रमश a1, a2, a3, ……….. an हो, तो शुद्ध मान निम्न होगा
या
स्पष्ट है कि प्रेक्षणों की संख्या n जितनी अधिक होगी, त्रुटि उतनी ही \(\left(\frac{1}{n}\right)\)
यदि 100 प्रेक्षणों के औसत मान में यादृच्छिक त्रूटि x है तो 500 प्रेक्षणों के औसत मान में यह त्रुटि \(\left(\frac{x}{5}\right)\) होगी।

(C) स्थूल त्रुटियाँ (Gross Errors): व्यक्ति की असावधानी के कारण मापन में जो त्रुटि हो जाती है, वह सम्पूर्ण अथवा स्थूल त्रुटि कहलाती है। इनके उत्पन्न होने के कारण निम्न हैं।

  1.  किसी उपकरण की उचित व्यवस्था किये बिना पाठ्यांक लेने के कारण।
  2.  गलत तरीके से पाठ्यांक लेना।
  3.   पाठ्यांक को लिखते समय गलत लिख लेना।
  4.  परिकलन में पाठ्यांक का मान गलत रख देना।

प्रश्न 6.
दो राशियों के गुणनफल तथा भागफल में होने वाली अधिकतम त्रुटियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राशियों के गुणनफल में त्रुटि (Error in Product of Quantities): माना कोई भौतिक राशि Z राशियों A व B के गुणनफल के बराबर है, अर्थात्
Z = A x B
माना ∆A = A राशि में परम त्रुटि
∆B = B राशि में परम त्रुटि
और ∆Z = Z के आंकलन में परम त्रुटि

∵ राशि \(\frac{\Delta A \cdot \Delta B}{A B}\) बहुत छोटी राशि है अत: इसे छोड़ने पर,
\(\pm \frac{\Delta Z}{Z}\) = \(\pm \frac{\Delta A}{A} \pm \frac{\Delta B}{B}\)
∴ अधिकतम भिन्नात्मक त्रुटि-
\(\left|\frac{\Delta Z}{Z}\right|_{\max }\) = \(\frac{\Delta A}{A}+\frac{\Delta B}{B}\)

वैकल्पिक विधि (Alternative Method):
∴ Z = A.B
दोनों ओर का लघुगुणक (log) लेने पर:
log Z = log A.B
या log Z = log A + log B
दोनों पक्षों का अवकलन करने पर,
\(\frac{\Delta Z}{Z}\) = \(\frac{\Delta A}{A}+\frac{\Delta B}{B}\)
∴ \(\left|\frac{\Delta Z}{Z}\right|_{\max }\) = \(\frac{\Delta A}{A}+\frac{\Delta B}{B}\)
अतः दो राशियों के गुणनफल में अधिकतम भिन्नात्मक त्रुटि, गुणक राशियों की भिन्नात्मक त्रुटियों के योग के बराबर होती है।

राशियों के भागफल में त्रुटि (Error in Division of Quantities): माना कोई भौतिक राशि Z दो राशियों A व B के बराबर है, अर्थात्
Z = \(\frac{A}{B}\)
माना ∆A = A के मापन में परम त्रुटि ∆B = B के मापन में परम त्रुटि
तथा ∆Z = Z के आंकलन में परम त्रुटि
अतः
Z = \(\frac{A}{B}\)
दोनों ओर का लघुगुणक लेने पर
log Z = log A – log B
दोनों पक्षों का अवकलन करने पर
\(\frac{\Delta Z}{Z}\) = \(\frac{\Delta A}{A}-\frac{\Delta B}{B}\)
अतः अधिकतम त्रुटि के लिए
\(\left|\frac{\Delta Z}{Z}\right|_{\max }\) = \(\frac{\Delta A}{A}+\frac{\Delta B}{B}\)
अतः दो राशियों के गुणनफल में अधिकतम भिन्नात्मक त्रुटि, गुणक राशियों की भिन्नात्मक त्रुटियों के योग के बराबर होती है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

प्रश्न 7.
अल्पतमांक से क्या अभिप्राय है? वर्नियर कैलिपर्स एवं स्क्रूगेज की अल्पतमांक का उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
(A) वर्नियर कैलीपर्स: “किसी उपकरण द्वारा मापी जा सकने वाली न्यूनतम माप को उस उपकरण की अल्पतमांक (Least Count) कहते हैं।” साधारण मीटर स्केल का अल्पतमांक 0.1 cm होता है। इससे छोटी दूरी के मापन के लिए फ्रान्सीसी वैज्ञानिक “पियरे वर्नियर” ने मुख्य पैमाने के साथ सरकने वाले एक सहायक पैमाने का विकास किया जिसे वर्नियर पैमाना कहते हैं। वर्नियर पैमाने के n भागों का मान मुख्य पैमाने के (n – 1) भागों के मान के बराबर होता है अर्थात् वर्नियर पैमाने के 1 खाने का मान मुख्य स्केल के 1 भाग के मान से छोटा होता है। इन दोनों के मानों में अन्तर ही अल्पतमांक कहलाता है।

वर्नियर पैमाने का उपयोग दो जबड़ों वाले कैलीपर्स के साथ करने से वर्नियर कैलीपर्स बनता है। वर्नियर कैलीपर्स का अल्पतमांक साधारणतः 0.01 cm होता है। वर्नियर पैमाने के 10 भागों का मान 9 mm होता है, अतः एक भाग का मान 0.9mm होगा।
∴ वर्नियर कैलीपर्स का अल्पतमांक
= 1mm – 0.9mm = 0.1mm
= 0.01 cm
इस प्रकार व्यापक रूप से वर्नियर कैलीपर्स का

वर्नियर कैलीपर्स का नामांकित आरेख संलग्न चित्र 2.7 में दर्शाया है।

(B) स्क्रूगेज अथवा पेंचमापी – यह उपकरण पेंच के सिद्धान्त पर कार्य करता है, इसलिए इसे पेंचमापी (Screw gauge) कहते हैं। पेंच में दो क्रमागत चूड़ियों के बीच की दूरी को चूड़ी अन्तराल (pitch) कहते हैं। पेंच को एक पूरा चक्कर घुमाने पर पेंच की नोंक का विस्थापन चूड़ी अन्तराल के बराबर होता है। पेंचमापी का नामांकित आरेख संलग्न चित्र 2.8 में दर्शाया है। इसमें एक वृत्ताकार पैमाना एक मुख्य पैमाने पर एक पेंच की सहायता से गति करता है।

प्रश्न 8.
सूक्ष्म दूरियों के मापन की स्पष्ट विवेचना कीजिए एवं उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
(A) सूक्ष्म दूरियों का मापन (Measurement of Very Small Distances): अणु का व्यास 108 m से 10-10m की कोटि का होता है। किसी भी सूक्ष्मदर्शी की एक सीमा होती है। प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शी में प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 5 x 10-7m होती है। ऐसा सूक्ष्मदर्शी 10-7 मी कोटि की तरंगदैर्ध्य के तुल्य विभेदन के लिए उपयोगी होता है इसलिए सूक्ष्मदर्शी से 100 मी कोटि के आकार वाले कणों की माप की जा सकती है। इलेक्ट्रॉन पुंज में भी तरंग गुण होते हैं एवं इलेक्ट्रॉन-तरंगों की तरंगदैर्ध्य 1A = 10-10 m की कोटि की होती है तथा इलेक्ट्रॉनों को वैद्युत् व चुम्बकीय क्षेत्रों द्वारा फोकसित भी किया जा सकता है। इसी आधार पर इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की रचना की गई है। इसके द्वारा परमाणुओं एवं अणुओं का विभेदन सम्भव है। जिससे इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी अणुओं के आंकलन के लिए उपयुक्त होता है। आजकल सुरंगन सूक्ष्मदर्शी (Tunnelling microscope) उपयोग किया जाता है। अतः अति सूक्ष्म लम्बाइयों के मापन के लिए कुछ परोक्ष विधियाँ भी उपयोगी होती हैं। यहाँ पर हम कुछ ऐसी विधियों का वर्णन करेंगे

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
विमीय विधि से निम्न समीकरण की सत्यता की जाँच कीजिए
v = \(\sqrt{\frac{2 G M}{r}}\) जहाँ v वेग; G गुरुत्वाकर्षण नियतांक एवं दूरी है।
उत्तर:
सत्या

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प्रश्न 2.
m द्रव्यमान का एक पिण्ड किसी स्प्रिंग के सिरे पर लटका हुआ दोलन करता है। स्प्रिंग का बल नियतांक K तथा दोलनकाल T है। विमीय विधि से ज्ञात कीजिए कि T = 2π \(\frac{m}{K}\) अशुद्ध है।
उत्तर:
अशुद्ध।

प्रश्न 3.
आइंस्टीन के अनुसार किसी पदार्थ की ऊर्जा उसके द्रव्यमान (m), तथा प्रकाश की चाल (c) पर निर्भर करती है। विमीय विधि से ऊर्जा के लिए सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
E = mc2

प्रश्न 4.
मान लीजिए किसी माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों की चाल (v), प्रत्यास्थता गुणांक (E) व घनत्व (p) पर निर्भर करती है। विमीय विधि से चाल (v) के लिए सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
v = \(\sqrt{\frac{E}{\rho}}\)

प्रश्न 5.
एक क्षैतिज तल में वृत्तीय कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। कण पर लगने वाला अभिकेन्द्र बल कण के द्रव्यमान (m), वृत्त की त्रिज्या (r) तथा कण की चाल (ρ) पर निर्भर करता है। विमीय विधि से अभिकेन्द्र बल के लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
F = \(\frac{m v^2}{r}\)

प्रश्न 6.
गुरुत्वीय त्वरण का मान 9.8 ms-2 है। इसका मान किलोमीटर/मिनट में विमीय विधि से ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
35.28 किमी / मिनट2

प्रश्न 7.
जल में ध्वनि की चाल 1440ms-1 है। यदि लम्बाई का मात्रक km तथा समय का मात्रक hr हो तो इसका मान क्या होगा?
उत्तर:
5184 km. hr-1

प्रश्न 8.
स्टील का यंग प्रत्यास्थता गुणांक 19 × 1010 Nm2 है। इसका मान dyne cm2 में ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
19 x 1011 dyne cm-2

प्रश्न 9.
पृथ्वी के दो व्यासतः अभिमुख बिन्दुओं A व B से चन्द्रमा को प्रेक्षित करने पर, प्रेक्षण दिशाओं के मध्य कोण θ का मान 1.54° प्राप्त होता है। पृथ्वी का व्यास 1.276 x 107 m लेते हुए पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी का आंकलन कीजिए।
उत्तर:
3.85 x 105 km

प्रश्न 10.
हाइड्रोजन परमाणु का आकार लगभग 0.4Å है। हाइड्रोजन परमाणु के एक मोल का कुल आयतन m3 में ज्ञात कीजिए। दिया है: 1 A = 10-10 m.
उत्तर:
1.6 x 107 m3

प्रश्न 11.
एक पेंचमापी की अल्पतमांक 0.001 cm है। इसके द्वारा तार का व्यास 0.225 cm मापा जाता है। इस माप में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.4%

प्रश्न 12.
एक वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक 0.01 cm है। इसके द्वारा किसी गोले कां व्यास 2.52 cm मापा जाता है। इस माप में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.39%

प्रश्न 13.
सरल लोलक के प्रयोग में लोलक की लम्बाई L नापने में 0.1% की त्रुटि तथा आवर्तकाल T नापने में 2% की त्रुटि होती है। इन प्रेक्षणों से प्राप्त L/T2 के मान में अधिकतम प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
4.1%

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 2 मात्रक और मापन

प्रश्न 14.
घनत्व नापने के प्रयोग में एक विद्यार्थी ने वस्तु का द्रव्यमान 7.34 g तथा आयतन 13.4 cm3 मापा उसके फल में कितने प्रतिशत अधिकतम सम्भावित त्रुटि है?
उत्तर:
0.88%

प्रश्न 15.
एक तनी हुई डोरी में ध्वनि की चाल = \(\sqrt{\frac{T}{m}}\) जहाँ T = Mg है। प्रयोग द्वारा M 2.0kg तथा m = 1.5g.m ज्ञात किया गया। के मान में अधिकतम सम्भावित प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए। उत्तर:
5.8%

प्रश्न 16.
एक घन के द्रव्यमान तथा उसकी एक भुजा की लम्बाई की मापों में अधिकतम त्रुटियाँ क्रमशः 3% तथा 2% हैं। घन के पदार्थ के परिकलित घनत्व में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
9%

प्रश्न 17.
एक भौतिक राशि तीन मापी गई भौतिक राशियों a, b व c से निम्न सूत्र द्वारा सम्बन्धित हैं:
\(s=\frac{a b^2}{c^3}\)
यदि a, b व c के मापन में क्रमशः 1, 2 और 3 प्रतिशत की त्रुटियाँ हों तो s के मान में अधिकतम सम्भावित त्रुटि क्या होगी?
उत्तर:
14%

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

बहुविकल्पीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी प्रक्षेप्य पर ऊँचाई y तथा क्षैतिज तल के अनुदिश दूरी x क्रमश: y = 8t – 5t2 तथा x = 6t है, जहाँ t सेकण्ड में तथा दूरियाँ मीटर में हैं। प्रक्षेप्य का प्रक्षेपण वेग होगा:
(a) 8 मीटर/सेकण्ड
(b) 6 मीटर/सेकण्ड
(c) 10 मीटर/सेकण्ड
(d) उपर्युक्त विवरण से प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
उत्तर:
(c) 10 मीटर/सेकण्ड

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

प्रश्न 2.
आकाश में उड़ता एक वायुयान क्षैतिज तल में मोड़ ले रहा है। ऐसा करते समय उसके पंख:
(a) क्षैतिज रहते हैं
(b) ऊर्ध्वाधर हो जाते हैं।
(c) भीतर की ओर झुक जाते हैं।
(d) बाहर की ओर झुक जाते हैं।
उत्तर:
(c) भीतर की ओर झुक जाते हैं।

प्रश्न 3.
यदि एक बन्दूक से वेग से छोड़ी गयी गोली की परास R हो, तो बन्दूक का क्षैतिज से झुकाव होगा।
(a) cos-1\(\frac{v^2}{R g}\)
(b) cos-1\(\frac{R g}{v^2}\)
(c) tan-1\(\frac{v^2}{R g}\)
(d) sin-1\(\frac{g R}{v^2}\)
उत्तर:
(d) sin-1\(\frac{g R}{v^2}\)

प्रश्न 4.
एक कण x y तल में गति कर रहा है और किसी बिन्दु पर उसके निर्देशांक, x = Asin ωt तथा y = Acosωt हैं, जहाँ ω एक नियत राशि है। कण का पथ है।
(a) सरल रेखा
(b) दीर्घ वृत्ताकार
(c) वृत्ताकार
(d) परवलयाकार
उत्तर:
(c) वृत्ताकार

प्रश्न 5.
एक नाव जिसकी शान्त जल में चाल 5 km/hr है, 1 km चौड़ी नदी को सबसे छोटे सम्भव मार्ग से 15 मिनट में पार करती है। नदी के जल का km/hr में वेग है।
(a) 1
(b) 3
(c) 4
(d) √41
उत्तर:
(b) 3

प्रश्न 6.
दो कण A व B एक दृढ़ छड़ AB द्वारा जुड़े हैं। छड़ लम्बवत् पटरियों पर फिसलती है, जैसा कि चित्र में प्रदर्शित है । कण 4 का बायीं ओर वेग 10 m/s है। जब कोण α = 60° है, तो कण B का वेग होगा।

(a) 5.8m/s
(b) 9.8m/s
(c) 10m/s
(d) 17.3m/s
उत्तर:
(a) 5.8m/s

प्रश्न 7.
एक कण एक समान चाल से वृत्ताकार पथ पर चक्कर लगाता है। कण का त्वरण है।
(a) वृत्त की परिधि के अनुदिश
(b) स्पर्श रेखा के अनुदिश
(c) त्रिज्या के अनुदिश
(d) शून्य।
उत्तर:
(c) त्रिज्या के अनुदिश

प्रश्न 8.
किसी प्रक्षेप्य का पथ होता है?
(a) सरल रेखीय
(b) परवलयिक
(c) दीर्घवृत्तीय
(d) अतिपरवलयिक
उत्तर:
(b) परवलयिक

प्रश्न 9.
एक प्रक्षेप्य से किस कोण से प्रक्षेपित किया जाये कि उसकी परास एवं अधिकतम ऊँचाई समान हो।
(a) tan-1 (√3)
(b) tan-1 (√2)
(c) tan-1 (4)
(d) tan-1 (√4)
उत्तर:
(c) tan-1 (4)

प्रश्न 10.
एक कण r त्रिज्या के वृत्तीय पथ में गति करता हैं। अर्द्धवृत्त पूर्ण करने पर उसका विस्थापन होगा।
(a) 2r
(b) \(\frac{r}{2}\)
(c) \(\frac{r}{4}\)
(d) r
उत्तर:
(a) 2r

प्रश्न 11.
एक गेंद को क्षैतिज θ कोण पर किसी वेग फेंका जाता है। उसकी क्षैतिज परास अधिकतम होने के लिए θ का मान होगा:
(a) 30°
(b) 0°
(c) 45°
(d) 60°
उत्तर:
(c) 45°

प्रश्न 12.
समान परास के लिए एक पिण्ड को समान चाल से कितनी दिशाओं में (कोणों पर) प्रेक्षित किया जा सकता है?
(a) 2
(b) 3
(c) 4
(d) 1
उत्तर:
(a) 2

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

प्रश्न 13.
एक प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई पर चाल उसकी प्रारम्भिक चाल की आधी है। प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास है।
(a) \(\frac{3 u^2}{g}\)
(b) \(\frac{\sqrt{3} u^2}{2 g}\)
(c) \(\frac{u^2}{2 g}\)
(d) \(\frac{2 u^2}{g}\)
उत्तर:
(b) \(\frac{\sqrt{3} u^2}{2 g}\)

प्रश्न 14.
एक मोटर कार 30 मीटर / सेकण्ड की चाल से 500 मीटर त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर गतिमान है। यदि इसकी चाल 2 मीटर/सेकण्ड2 की दर से बढ़ रही है तब इसका परिणामी त्वरण है।
(a) 2 मी/से2
(b) 2.2 मी/से2
(c) 2.7 मी/से2
(d) 3.8 मी/से2
उत्तर:
(c) 2.7 मी/से2

अति लघुत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
एकांक सदिश किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह सदिश जिसका परिमाण इकाई होता है, एकांक सदिश कहलाता है। इसका उपयोग सदिश को दिशा देने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 2.
X- अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश बताइये।
उत्तर:
X- अक्ष की दिशा में एकांक वेक्टर \(\hat{i}\), Y-अक्ष के अनुदिश \(\hat{j}\) तथा Z-अक्ष के अनुदिश \(\hat{k}\) होता है।

प्रश्न 3.
शून्य सदिश किसे कहते हैं?
उत्तर:
ऐसा सदिश जिसका परिमाण शून्य होता है, शून्य सदिश कहलाता है। इस सदिश की दिशा का निर्धारण सम्भव नहीं है।

प्रश्न 4.
सदिशों का वियोजन कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
सदिशों का वियोजन दो प्रकार का होता है:

  1.  द्विविमीय वियोजन
  2.  त्रिविमीय वियोजन।

प्रश्न 5.
क्या दो सदिशों के परिणामी सदिश का परिमाण दिये गये सदिशों में से किसी एक सदिश के परिमाण से कम हो सकता है?
उत्तर:
हाँ, यदि दोनों सदिशों के मध्य कोण 90° से अधिक हो।

प्रश्न 6.
निम्न भौतिक राशियों में से अदिश तथा सदिश राशियों को अलग-अलग कीजिए-
बल आघूर्ण, पृष्ठ तनाव, संवेग, ताप, ऊर्जा, वेग, त्वरण, चाल।
उत्तर:
अदिश राशियाँ: पृष्ठ तनाव, ताप, ऊर्जा, वेग, त्वरण चाल।
सदिश राशियाँ: बल आघूर्ण, संवेग।

प्रश्न 7.
क्या एक अदिश और एक सदिश राशि को जोड़ा जा सकता है?
उत्तर:
नहीं, क्योंकि एक सी प्रकार की राशियों का योग सम्भव है। और अदिश में दिशा नहीं होती है, जबकि सदिश में परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है।

प्रश्न 8.
यदि किसी सदिश राशि का एक घटक शून्य हो व अन्य घटक शून्य न हो, तो क्या वह सदिश राशि शून्य हो सकती है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 9.
दो सदिशों के सदिश गुणनफल से प्राप्त सदिश की दिशा क्या होती है?
उत्तर:
दो सदिशों के सदिश गुणनफल की दिशा (\(\hat{n}\)) दोनों सदिशों के तल की लम्ब दिशा में होती है।

प्रश्न 10.
दो समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल क्या होता है?
उत्तर:
यदि \(\vec{A} \| \vec{B}\) A x B = A. B. sin O \(\hat{n}\) = 0 (शून्य) अर्थात् दो समान्तर सदिशों का सदिश गुणनफल शून्य होता है।

प्रश्न 11.
क्या एक स्केलर को वेक्टर से गुंणा किया जा सकता
उत्तर:
हाँ ; बल \(\vec{F}=m \vec{a}\) एवं संवेग \(\vec{p}=m \vec{v}\) इसी के उदाहरण हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

प्रश्न 12.
क्या विभिन्न परिमाणों के दो सदिशों को ऐसे जोड़ा जा सकता है कि उनका परिणामी शून्य हों?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 13.
बल F एक स्थिर पिण्ड को दूरी तक विस्थापित करता है। इस क्रिया को सदिश संकेत से कैसे दिखायेंगे?
उत्तर:
W = \(\vec{F} \cdot \vec{d}\)
= F.d.cos θ

प्रश्न 14.
किस अवस्था में दो अशून्य सदिशों का स्केलर गुणनफल अधिकतम होता है?
उत्तर:
\(\vec{A} \cdot \vec{B}\)
= ABcos θ
जब
θ = 0° तो cos θ = 1
\((\vec{A} \cdot \vec{B})\)max = AB
अतः समान दिशा में होने पर स्केलर गुणनफल अधिकतम होगा।

प्रश्न 15.
किसी सदिश का ग्राफीय निरूपण कैसे किया जाता।
उत्तर:
तीर (Arrow) चिन्ह द्वारा।

प्रश्न 16.
क्या सदिशों की वियोजन संक्रिया में साहचर्य गुणधर्म लागू होता है?
उत्तर:
हाँ; क्योंकि \((\vec{P}+\vec{Q})-\vec{R}=\vec{P}+(\vec{Q}-\vec{R})\)

प्रश्न 17.
क्या चार असमतलीय सदिशों का परिणामी शून्य हो सकता है?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 18.
यदि a अदिश राशि है और b सदिश राशि हो तो ab किस प्रकार की राशि होगी?
उत्तर:
सदिश।

प्रश्न 19.
यदि \(\vec{P} \cdot \vec{R}=\vec{Q} \cdot \vec{R}\) तो क्या \(\overrightarrow{\boldsymbol{P}}\) और \(\overrightarrow{\boldsymbol{Q}}\) सदैव परस्पर बराबर होंगे?
उत्तर:
\(\vec{P}\) और \(\vec{Q}\) परस्पर तभी बराबर होंगे, जब दोनों में से प्रत्येक \(\vec{R}\) के साथ समान कोण बनाए।

प्रश्न 20.
दो अक्षीय सदिशों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कोणीय वेग, बल-आघूर्ण।

प्रश्न 21.
बल तथा दाब में कौन सी सदिश राशि है?
उत्तर:
बल।

प्रश्न 22.
क्या \(\vec{A}+\vec{B}\) का परिमाण वही है जो \(\vec{B}+\vec{A}\) का है?
उत्तर:
हाँ दोनों के परिमाण एवं दिशाएं समान हैं।

प्रश्न 23.
क्या \(\vec{A}-\vec{B}\) का परिमाण वही है जो \(\overrightarrow{\boldsymbol{B}}-\overrightarrow{\boldsymbol{A}}\) का है? क्या दोनों की दिशाएं भी समान हैं?
उत्तर:
\(\vec{A}-\vec{B}\) व \(\overrightarrow{\boldsymbol{B}}-\overrightarrow{\boldsymbol{A}}\) दोनों के परिमाण तो समान होंगे लेकिन दिशाएं परस्पर विपरीत होंगी।

प्रश्न 24.
दो सदिशों का योग कब अधिकतम व कब न्यूनतम होता है?
उत्तर:
जब दोनों सदिश एक ही दिशा में होते हैं (अर्थात् θ = 0) तो उनका योग अधिकतम होता है और जब परस्पर विपरीत दिशा में (अर्थात् θ = 180°) होते हैं तो उनका योग न्यूनतम होता है।

प्रश्न 25.
यदि किन्हीं दो सदिशों के पीरमाण को अपरिवर्तित रखते हुए केवल उनके बीच का कोण परिवर्तित कर दें तो उनके परिणामी सदिश पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
परिणामी सदिश के परिमाण व दिशा दोनों बदल जायेंगे।

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प्रश्न 26.
क्या किसी सदिश के वियोजित घटक का मान उस सदिश के मान से अधिक हो सकता है?
उत्तर:
नहीं; किसी सदिश के वियोजित घटक का अधिकतम मान सदिश के मान के बराबर हो सकता है।

प्रश्न 27.
क्या दो सदिशों का अदिश गुणन ऋणात्मक हो सकता है?
उत्तर:
हाँ, यदि दोनों सदिशों के मध्य कोण 90° से 270° के मध्य हों।

प्रश्न 28.
प्रक्षेप्य पथ के किस बिन्दु पर चाल न्यूनतम होती है?
उत्तर:
उच्चतम बिन्दु पर।

प्रश्न 29.
प्रक्षेप्य पथ किस प्रकार का होता है? क्या यह ऋजुरेखीय हो सकता है?
उत्तर:
प्रक्षेप्य पथ परवलयाकार होता है। प्रक्षेपण कोण θ = 90° के लिए यह ऋजुरेखीय होगा।

प्रश्न 30.
प्रक्षेप्य गति में अधिकतम परास के लिए प्रक्षेपण कोंण कितना होना चाहिए?
उत्तर:
45°

प्रश्न 31.
वायु के प्रतिरोध का प्रक्षेप्य के उड्डयन काल तथा परास क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
वायु के प्रतिरोध के कारण उड्डयन काल बढ़ जाता है। लेकिन परास घट जाता है।

प्रश्न 32.
किस प्रक्षेपण कोण के लिए महत्तम ऊँचाई एवं परास बराबर होते हैं?
उत्तर:
0 = tan-1(4) = 76°

प्रश्न 33.
जब प्रक्षेप्य को क्षैतिज के साथ किसी कोण (90° को छोड़कर) पर प्रक्षेपित किया जाता है तो गति के दौरान वेग का कौन सा घटक नियत रहता है?
उत्तर:
वेग का क्षैतिज घटक (ucosθ) नियत रहता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
दो बराबर सदिशों का परिणामी सदिश कब:
1. शून्य हो सकता है
2. प्रत्येक के बराबर हो सकता है?
उत्तर:

  1. परिमाण में समान दो सदिश के मध्य जब 180° का कोण होता है तो उनका परिणामी शून्य होगा।
  2. जब परिमाण में समान दो सदिश 120° के कोण पर होते हैं तो उनके परिणामी का परिमाण उनके परिमाण के बराबर प्राप्त होता है।

प्रश्न 2.
दो सदिश \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) इस प्रकार हैं कि \(\vec{A} \cdot \vec{B}\) = 0 \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) के विषय में क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर:
यदि \(\vec{A} \cdot \vec{B}\) = 0 तो निम्नलिखित दो सम्भावनाएँ हैं:

  1. \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) में कोई एक शून्य है।
  2.  \(\vec{A} \cdot \vec{B}\) = 0 या ABcosθ = 0

AB ≠ 0 या cos θ = 0
अतः θ = 90°
इस प्रकार \(\vec{A} \perp \vec{B}\) अर्थात् दोनों सदिश परस्पर लम्बवत् होंगे।

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प्रश्न 3.
यदि \(\vec{A} \cdot \vec{B}\) = AB तो \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) के विषय में क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर:
\(\vec{A} \cdot \vec{B}\) = AB
या
AB cosθ = AB
या
cos θ = 1
∴ θ = 0°
अर्थात् \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) परस्पर समान्तर होंगे।

प्रश्न 4.
यदि \(\vec{R}=\vec{A} \times \vec{B}\) तो
(i) R तथा 1 के बीच कोण क्या है?
(ii) में तथा 8 के बीच कोण क्या है?
उत्तर:
दिया है:
R = 1 x B
अतः की दिशा व के तल के लम्बवत् होगी।
∴ की दिशा व B दोनों के लम्बवत् होगी अर्थात् दोनों के साथ कोण 90° होगा।

प्रश्न 5.
क्या तीन असमतलीय सदिशों का परिणामी शून्य हो सकता है?
उत्तर:
नहीं; किन्हीं दो सदिशों का परिणामी उन सदिशों के तल में ही होता है, अतः यह तीसरे सदिश जो कि भिन्न तल में है, के प्रभाव को निरस्त नहीं कर सकता है।

प्रश्न 6.
जब सदिश \(\vec{A}\) का सदिश \(\vec{B}\) में की दिशा में घटक शून्य है तो आप दोनों सदिशों के बारे में क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर:
माना दो सदिशों \(\vec{A}\) का \(\vec{B}\) के मध्य कोण θ है। सदिश \(\vec{B}\) की दिशा में सदिश \(\vec{A}\) का घटक Acosθ होगा।
यदि यह घटक शून्य है अर्थात्
या
A cosθ = 0
cos θ = 0
⇒ θ = 90°
स्पष्ट है कि \(\vec{A} \perp \vec{B}\) अर्थात् दोनों सदिश परस्पर लम्बवत् होंगे।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

प्रश्न 7.
क्या शून्य सदिश (\(\overrightarrow{\mathbf{0}}\)) को सदिश कहना सही है?
उत्तर:
दो सदिशों का अन्तर भी सदिश होता है अत: \(\vec{R}-\vec{R}=\overrightarrow{0}\) अतः शून्य सदिश को सदिश कहना सही है।

प्रश्न 8.
यद्यपि बल \(\vec{F}\) है व विस्थापन \(\overrightarrow{\boldsymbol{S}}\) दोनों सदिश राशियाँ हैं, फिर भी इन दोनों के गुणन से प्राप्त कार्य अदिश राशि है क्यों? यदि
\(\overrightarrow{\boldsymbol{F}}\) व \(\overrightarrow{\boldsymbol{s}}\) शून्य न हों फिर भी W का मान शून्य हो सकता है, कब?
उत्तर:
दो सदिश राशियों का डॉट गुणनफल अदिश राशि होती है
और कार्य W = \(\vec{F}\)\(\vec{S}\) डे, अतः कार्य अदिश राशि है।
पुन:
W = \(\vec{F}\)\(\vec{S}\) = F S cosθ
स्पष्ट है कि जब cosθ = 0 तो W = 0 होगा।
अर्थात्
θ = 90° हो \(\overrightarrow{\boldsymbol{F}}\) व \(\overrightarrow{\boldsymbol{s}}\) के अशून्य होने पर भी W का मान शून्य होगा।

प्रश्न 9.
सदिशों के योग का समान्तर चतुर्भुज नियम लिखिए।
उत्तर:
सदिशों के संयोजन का समान्तर चतुर्भुज नियम (Law of Parallelogram of Vectors Addition): इस नियम की सहायता से हम दो सदिशों को जोड़ सकते हैं। इस नियम के अनुसार, “यदि दो सदिशों को परिमाण व दिशा दोनों में किसी समान्तर चतुर्भुज की दो आसन्न भुजाओं द्वारा व्यक्त किया जा सके तो उनका परिणामी परिमाण व दिशा दोनों में चतुर्भुज के उस विकर्ण द्वारा प्रदर्शित होगा जो उन भुजाओं के कटान बिन्दु से होकर जाता है। ”

“चित्र 4.15 में माना दो सदिश व परिमाण व दिशा दोनों में समान्तर चतुर्भुज OABC की आसन्न भुजाओं OA व OB द्वारा व्यक्त किये जाते हैं तो इनका परिणामी विकर्ण OB द्वारा व्यक्त होगा अर्थात्

प्रश्न 10.
सदिशों के योग के लिए बहुभुज नियम लिखिए।
उत्तर:
(C) सदिशों के संयोजन का बहुभुज नियम (Law of Polygon of Vectors Addition): इस नियम की सहायता से दो से अधिक सदिशों को जोड़ा जा सकता है। इस नियम के अनुसार, यदि (n-1) सदिशों को भुजाओं वाले बहुभुज की (n-1) क्रमागत भुजाओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सके तो उनका परिणामी बहुभुज की अन्तिम (n वीं) भुजा द्वारा नियमित क्रम में प्रदर्शित होगा।” सदिशों के बहुभुज नियम को दूसरे शब्दों में इस प्रकार भी व्यक्त कर सकते हैं, “यदि दो से अधिक सदिशों को परिमाण व दिशा दोनों में एक खुले बहुभुज की भुजाओं द्वारा एक क्रम में निरूपित किया जा सके तो बहुभुज को बन्द करने वाली भुजा द्वारा परिमाण व दिशा दोनों में उनका परिणामी व्यक्त होगा।”

विधि – बहुभुज नियम द्वारा सदिश योग ज्ञात करने के लिए उचित पैमाना मानकर योग की क्रिया किसी एक सदिश को खींचकर प्रारम्भ करते हैं, फिर उसके शीर्ष पर दूसरे सदिश का पुच्छ रखकर दूसरा सदिश खींचते हैं। इसी प्रकार दिये गये सभी सदिश क्रमशः खींच लेते हैं। प्रथम सदिश के पुच्छ एवं अंतिम वेक्टर के शीर्ष को मिला देते हैं। यही परिणामी वेक्टर होता है। इसे नापकर पैमाने का गुणा करके परिणामी का परिमाण ज्ञात करं – लेते हैं।
उदाहरणार्थ: माना चार सदिश A, B, C, D का योग बहुभुज नियम द्वारा ज्ञात करना है।

सत्यापन: त्रिभुज नियम के आधार पर

प्रश्न 11.
निम्न कथन की विवेचना कीजिए।
विस्थापन सदिश मूलतः स्थिति सदिश है।
उत्तर:
संलग्न चित्र में A व B के स्थिति सदिश क्रमशः \(\overrightarrow{r_A}\) व \(\overrightarrow{r_B}\) हैं। यदि कोई वस्तु A से B तक विस्थापित होती है तो विस्थापन सदिश

यदि प्रारम्भिक बिन्दु A मूल बिन्दु पर हो तो \(\overrightarrow{r_A}\) = 0 होगा, अतः
\(\overrightarrow{\Delta r}\) = \(\overrightarrow{r_B}\) जो कि B का स्थिति सदिश है।
स्पष्ट है कि विस्थापन सदिश मूलतः स्थिति सदिश है।

प्रश्न 12.
क्या सदिश को अदिश से गुणा करने पर इसकी प्रकृति बदल जाती है?
उत्तर:
बदल भी सकती है और नहीं भी उदाहरण के लिए जब एक सदिश शुद्ध अंक (जैसे, 1, 2, 3….. ) से गुणा करते हैं तो सदिश की प्रकृति नहीं बदलती है लेकिन यदि सदिश को अदिश भौतिक राशि से गुणा करते हैं तो सदिश की प्रकृति बदल जाती है। उदाहरण के लिए जब वेग \(\vec{v}\) सदिश को द्रव्यमान (m) अदिश से गुणा करते हैं तो सदिश राशि संवेग \(\vec{p}\) प्राप्त होता है जिसकी प्रकृति वेग से भिन्न है।

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प्रश्न 13.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित एक समतल से सम्बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स (अदिश), समतल के क्षेत्रफल तथा चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता (सदिश) के गुणनफल के बराबर होता है। बताइये कि समतल का क्षेत्रफल सदिश है या अदिश?
उत्तर:
दो सदिश राशियों का स्केलर गुणनफल एक अदिश राशि होता है।
चुम्बकीय फ्लक्स Φ = \(\vec{B}\) . \(\vec{A}\)
अतः समतल का क्षेत्रफल सदिश राशि (\(\vec{A}\)) है।

प्रश्न 14.
क्या परिमाण व दिशा दोनों वाली राशियाँ निश्चित रूप से सदिश राशियाँ होती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नहीं; क्योंकि परिमाण व दिशा वाली राशियाँ यदि सदिश योग के नियम का पालन करती हैं तो वे सदिश राशियाँ होती हैं परन्तु यदि वे सदिश योग के नियम का पालन नहीं करती हैं तो वे अदिश राशि की श्रेणी में आती हैं; उदाहरणार्थ – विद्युत् धारा, समय आदि।

प्रश्न 15.
एक गेंद को वेग से ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकने पर यह ऊँचाई तक जाती है। यदि वेग को दोगुना (2u) कर दें तो ऊँचाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
गेंद का वेग उच्चतम बिन्दु पर शून्य हो जायेगा, अत: सूत्र
v2 = u2 + 2as’
से
0 = u2 – 2gh
या
2gh = u2
h = \(\frac{u^2}{2 g}\)
यदि वेग (2u) कर दिया जाये तो माना ऊँचाई ‘ हो जाती है अतः
h = \(\frac{(2 u)^2}{2 g}\) = \(\frac{4 u^2}{2 g}\) = \(4 \times\left(\frac{u^2}{2 g}\right)\)
या
h = 4h
अर्थात् वेग दो गुना कर देने पर ऊँचाई चार गुनी हो जायेगी।

प्रश्न 16.
प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रक्षेप्य गति: जब किसी वस्तु को क्षैतिज से किसी कोण पर ऊर्ध्वाधर तल में किसी प्रारम्भिक वेग से प्रक्षेपित की जाती है तो फेंके जाने के पश्चात् यह वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में गति करती है। इस प्रकार की गति को प्रक्षेप्य गति कहा जाता है। इस गति के दौरान वस्तु परवलयाकार पथ का अनुसरण करती है।

प्रश्न 17.
क्रिकेट का एक खिलाड़ी किसी गेंद को 100 मी० की अधिकतम क्षैतिज दूरी तक फेंक सकता है। वह खिलाड़ी उसी गेंद को जमीन से ऊपर कितनी ऊँचाई तक फेंक सकता है?
उत्तर:
दिया है, Rmax = 100 मी०
किसी प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई
⇒ \(Y=\frac{T^2}{4 \pi^2 L}\)
= 100 मी०
\(h_m=\frac{v_0^2 \sin ^2 \theta_0}{2 g} \)
\(\left(h_m\right)_{\max }=\frac{v_0^2}{2 g} \)
जबकि θ° = 90°
H = \(\frac{1}{2}\) x \(\frac{v_0^2}{g}\)
= \(\frac{1}{2}\) x 100 मी० = 50 मी०

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प्रश्न 18.
एक प्रक्षेप्य की महत्तम ऊँचाई H तथा उड्डयन काल T है। सिद्ध कीजिए कि 8H = gT2
उत्तर:
महत्तम ऊँचाई, H = \(\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2g}\)
एवं उड्डयन काल T = \(\frac{2 u \sin \theta}{g}\)
∴ \(\frac{H}{T^2}=\frac{\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}}{\frac{4 u^2 \sin ^2 \theta}{g^2}}=\frac{g}{8}\)
∴ 8H = gT2

प्रश्न 19.
सिद्ध कीजिए H ऊँचाई (महत्तम ऊँचाई) तक पहुँचाने के लिए प्रक्षेपण वेग u = \(\frac{\sqrt{2 g H}}{\sin \theta}\) होगा।
उत्तर:
प्रक्षेप्य द्वारा प्राप्त महत्तम ऊँचाई
\(H=\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}\)
u2 sin2 θ = 2Hg
या
u2 = \(\frac{2 H g}{\sin ^2 \theta}\) ⇒ u = \(\sqrt{\frac{2 H g}{\sin ^2 \theta}}\)
या
u = \(\frac{\sqrt{2 H g}}{\sin \theta}\)

प्रश्न 20.
यदि प्रक्षेप्य का परास एवं महत्तम ऊँचाई बराबर हों तो प्रक्षेपण कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
∵ क्षैतिज परास = महत्तम ऊँचाई
\(\frac{u^2 \sin 2 \theta}{g}=\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}\)
या
sin 2θ = \(\frac{\sin ^2 \theta}{2}\)
या
2sinθ.cosθ = \(\frac{\sin ^2 \theta}{2}\)
या
2cos θ = \(\frac{\sin \theta}{2}\)
या
4 = \(\frac{\sin \theta}{\cos \theta}\)
= tan θ
∴ θ = tan-1 (4) = 75.96°

प्रश्न 21.
समान ऊँचाई से एक ही क्षण एक गोली 4 स्वतन्त्रता पूर्वक गिराई जाती है तथा दूसरी गोली B क्षैतिज दिशा में फेंकी जाती है। यदि वायु का प्रतिरोध नगण्य हो तो बताइये।
1. कौन सी गेंद जमीन पर पहले टकरायेगी?
2. जमीन से टकराते समय किस गोली का ऊर्ध्वं वेग अधिक होगा?
3. क्या गोलियाँ एक ही स्थान पर गिरेंगी?
4. गोली B का क्षैतिज परास किस बात पर निर्भर करेगा?
उत्तर:

  1. दोनों गोलियाँ एक साथ जमीन से टकरायेंगी।
  2.  दोनों का ऊर्ध्व वेग समान होगा।
  3. नहीं।
  4.  ऊँचाई तथा क्षैतिज वेग पर।

प्रश्न 22.
सभी दिशाओं में, वेग से कई गोलियाँ दागी जाती हैं. पृथ्वी तल पर वह अधिकतम क्षेत्रफल क्या होगा। जिस पर ये गोलियाँ फैल जायेंगी?
उत्तर:
वह क्षेत्रफल जिसमें गोलियाँ फैलेगी = πr2
जहाँ r = अधिकतम परास Rmax = \(\frac{u^2}{g}\)
यहाँ
u = v
∴ r = \(\frac{v^2}{g}\)
(जब θ = 45°)
अतः प्रभावित क्षेत्रफल = πr2 = π \(\left(\frac{v^2}{g}\right)^2\) = \(\frac{\pi v^4}{g^2}\)

प्रश्न 23.
वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय त्वरण क्या होता है? इसके लिए सूत्र प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
अभिकेन्द्रीय त्वरण (Centripetal Acceleration):
चित्र 4.30 के अनुसार हम एक कण की वृत्ताकार गति पर विचार करते हैं। किसी भी क्षण t पर कण बिन्दु P पर है जिसकी कोणीय स्थिति θ है। अब P बिन्दु पर एक एकांक सदिश \(\overrightarrow{P A}=\hat{e_r}\) वृत्त की त्रिज्या के बाहर की ओर की दिशा में खींचते हैं तथा एक एकांक सदिश \(\overrightarrow{P B}=\hat{e_t}\) इस बिन्दु P पर स्पर्श रेखा की ओर कोण θ के बढ़ने की दिशा में खींचते हैं। \(\hat{e_r}\) को हम त्रिज्या एकांक सदिश तथा \(\hat{e_t}\) को स्पर्श रेखीय एकांक संदिश कहते हैं।

अब X- अक्ष के समान्तर PX’ एवं Y-अक्ष के समान्तर PY’ रेखाएं खींचते हैं। अब चित्र 4.30 से स्पष्ट है
\(\overrightarrow{P A}=P A \cdot \cos \theta \hat{i}+P A \sin \theta \hat{j}\)
या
\(\frac{\overrightarrow{P A}}{P A}=\hat{i} \cos \theta+\hat{j} \sin \theta\)
या
\(\hat{e}_r=\hat{i} \cdot \cos \theta+\hat{j} \sin \theta\) ……(1)
यहाँ PA = \(|\overrightarrow{P A}|\) = 1 तथा \(\hat{i}\) एवं \(\hat{j}\) क्रमश: X – एवं Y अक्षों की दिशाओं में एकांक सदिश हैं।
इसी प्रकार
\(\frac{\overrightarrow{P B}}{P B}=-\hat{i} \sin \theta+\hat{j} \cos \theta\)
या
\(\overrightarrow{e_t}=-\hat{i} \sin \theta+\hat{j} \cos \theta\) ……(2)
अब समय t पर कण का स्थिति सदिश
\(\vec{r}=\overrightarrow{O P}\)
या
\(\vec{r}=\hat{i} \cdot r \cos \theta+\hat{j} r \sin \theta\)
या
\(\vec{r}=r(\hat{i} \cdot \cos \theta+\hat{j} \sin \theta)\) ……..(3)
समीकरण (3) का समय के साथ अवकलन करने पर हमें किसी भी
समय t पर कण का वेग ज्ञात होता है।
अतः कण का वेग
\(\vec{v}=\frac{d \vec{r}}{d t}=\frac{d}{d t}[r(\hat{i} \cos \theta+\hat{j} \sin \theta)]\)
= \(\left[\hat{i}\left(-\sin \theta \cdot \frac{d \theta}{d t}\right)+\hat{j}\left(\cos \theta \cdot \frac{d \theta}{d t}\right)\right]\)
= rω[-\(\hat{i}\)sinθ +[-\(\hat{j}\)cosθ] ……….(4)
क्योंकि
\(\frac{d \theta}{d t}\) = ω
या
\(\vec{v}\) = rω.\(\hat{e_t}\) ……..(5)
[समी० (2) से]
उपरोक्त समी० (5) से हम देखते हैं कि पद rω किसी भी समय t पर कण की चाल है और इसकी दिशा \(\hat{e}_t\) की ओर अर्थात् स्पर्श रेखा की ओर है।
किसी समय t पर कण का त्वरण समी० (4) को समय t के सापेक्ष अवकलन करके ज्ञात किया जा सकता है। अतः कण का त्वरण

या \(\vec{a}\) = -ω2.r.\(\hat{e}_r\) + rα\(\hat{e}_t\) ………..(6)
यहाँ पर सभी ० (1) व (2) का उपयोग किया गया है। समी० (6) से हम देखते हैं कि एक कण की सामान्य वृत्तीय गति में त्वरण \(\vec{a}\) के दो घटक होते हैं
(i) \(\vec{a}\) = -ω2 r\(\hat{e}_r\), जिसकी दिशा (-\(\hat{e}_r\)) की ओर अर्थात् वृत्त के केन्द्र की ओर होती है। अतः इसे ‘अभिकेन्द्रीय त्वरण’ (centripetal acceleration) कहते हैं होती है अत: ‘स्पर्श रेखीय त्वरण’ (tangential acceleration) कहते हैं। इसका मान होगा। एक कण की असमान वृत्तीय गति में ये दोनों त्वरण होंगे। एक कण की एक समान वृत्तीय
ω नियत रहता है (क्योंकि v = rω)।
अत: \(\frac{d v}{d t}\) = \(r \frac{d \omega}{d t}\) = 0
अतः स्पर्श रेखीय त्वरण \(\vec{a}_t\) का मान शून्य होगा। अत: समी० (6) से अभिकेन्द्रीय त्वरण
\(\vec{a}_r\) = -ω2.r.\(\hat{e}_r\) ………..(7)
इस त्वरण की दिशा केन्द्र की ओर होगी। इस त्वरण का परिणाम
ar = ω2.r = \(\frac{\omega^2 r^2}{r}\) = \(\frac{v^2}{r}\) ……..(8)
यहाँ यह ध्यान रखने की बात है कि एक समान वृत्तीय गति में कण की चाल तो नियत रहती है, परन्तु वेग की दिशा प्रति क्षण बदलने से वेग परिवर्तित होता रहता है। इसीलिए कण में अभिकेन्द्र त्वरण होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
निम्न की परिभाषा दीजिए:
1. एकांक सदिश
2. समान या तुल्य सदिश
3. विपरीत सदिश
4. शून्य सदिश
5. समान्तर संदिश।
उत्तर:
1. तुल्य या समान सदिश (Equivalent Vectors): वे सदिश जिनके परिमाण एवं दिशाएँ समान होते हैं, समान वेक्टर या तुल्य सदिश कहलाते हैं।

संलग्न चित्र में प्रदर्शित दो वेक्टर \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) बराबर वेक्टर हैं अर्थात्
\(\vec{A}\) = \(\vec{B}\)
तथा
A = B

2. असमान सदिश (Unequal Vectors): यदि दो सदिशों के परिमाण समान हों परन्तु दिशाएँ भिन्न हों अथवा परिमाण भिन्न हों किन्तु दिशाएँ समान हों अथवा परिमाण व दिशाएँ दोनों भिन्न हों तो दोनों सदिश असमान सदिश कहलाते हैं। चित्र 4.6 में असमान सदिशों की उक्त तीनों स्थितियाँ प्रदर्शित की गई हैं-

3. विपरीत सदिश (Opposite Vectors): जब दो सदिशों के परिमाण तो समान हों किन्तु दिशाएँ विपरीत हों तो वे परस्पर विपरीत सदिश कहलाते हैं। संलग्न चित्र 4.7 में दो सदिश \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) दिये हैं तो

\(\vec{A}\) = \(\vec{B}\)
अथवा
\(\vec{B}\) = –\(\vec{A}\)

4. एकांक सदिश (Unit Vectors): वह सदिश जिसका परिमाण इकाई अर्थात् 1 होता है, एकांक सदिश कहलाता है।
एकांक सदिश को किसी सदिश की दिशा प्रदर्शित करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरणार्थ: माना किसी सदिश का परिमाण है एवं सदिश की दिशा में एकांक सदिश है। [ एकांक सदिश को व्यक्त करने के लिए कैप (^) का प्रयोग किया जाता है।]
\(\vec{r}\) = r.r
या
\(\hat{r}=\frac{\vec{r}}{r}=\frac{\vec{r}}{|\vec{r}|}\)

5. समकोणिक एकांक सदिश (Orthogonal Unit Vectors): X- अक्ष, Y-अक्ष एवं Z अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश क्रमश: \hat{i} \hat{j} एवं \hat{k} समकोणिक एकांक सदिश कहलाते हैं। संलग्न चित्र 4.8 में इन एकांक सदिशों को प्रदर्शित किया गया है।

6. सरेखीय सदिश (Collinear Vectors): ऐसे सदिश जो एक ही रेखा के अनुदिश होते हैं, संरेखीय सदिश कहलाते हैं। ये सदिश दिशीय अथवा विपरीत दिशीय हो सकते हैं जैसा कि संलग्न चित्र 4.9 में प्रदर्शित है।

7. शून्य सदिश (Zero Vectors): वह सदिश जिसका परिमाण शून्य हो, शून्य सदिश कहलाता है। इसकी दिशा का निर्धारण नहीं किया जा सकता है। यह निम्न स्थितियों में प्राप्त किया जाता है:

  1. \(\vec{A}\) व –\(\vec{A}\) सदिशों को जोड़ने पर \(\vec{A}\) + –\(\vec{A}\) = \(\overrightarrow{0}\)
  2. सदिश \(\vec{A}\) को शून्य से गुणा करने पर \(\vec{A}\) .0 = \(\overrightarrow{0}\)
  3.  वस्तु गति करने के पश्चात् अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट आती है तो उसका ‘शून्य सदिश’ अर्थात् \(\overrightarrow{0}\) होता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

प्रश्न 2.
कार्तीय निर्देशांक पद्धति में, एक विमीय, द्विविमीय एवं त्रिविमीय सदिशों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कार्तीय निर्देशांक पद्धति में एक विमीय, द्विविमीय एवं त्रिविमीय सदिश (One Dimensional, Two Dimensional and Three Dimensional Vectors in Cartesian Coordinate System):
किसी बिन्दु की स्थिति को पूर्णतः व्यक्त करने के लिए मूल बिन्दु एवं तीन परस्पर लम्बवत् अक्षों से निर्मित तन्त्र कार्तीय निर्देशांक तन्त्र कहलाता है। कार्तीय निर्देशांक तन्त्र में क्रमश: धनात्मक एवं Z – अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश क्रमश: \(\hat{i}\) \(\hat{j}\) व \(\hat{k}\) X- अक्ष, Y-अक्ष होते हैं। संलग्न

चित्र 4.10 में बिन्दु P (x, y, z) की स्थिति मूल बिन्दु 0 तथा परस्पर लम्बवत् अक्षों X, Y व Z के सापेक्ष बताई गयी है। निर्देश तन्त्र में मूल बिन्दु 0 तथा किसी एक अक्ष का चयन स्वच्छ है, शेष दो अक्षों का निर्धारण क्रमागत वामावर्त (Anticlockwise) दिशा में स्वतः हो जाता है।

(i) एक विमीय सदिश (One Dimensional Vectors): वह सदिश जिसकी दिशा केवल एक अक्ष (X- अक्ष अथवा Y अक्ष अथवा Z-अक्ष) के अनुदिश हो तो उसे एक विमीय सदिश कहते हैं।
निम्न चित्र 4.11 में तीन दिशाओं में एक विमीय सदिश की स्थितियाँ दर्शायी गई हैं।

(i) यदि सदिश X- अक्ष की दिशा में है तो \(\vec{r}\) = x\(\hat{i}\)
(ii) यदि सदिश – अक्ष की दिशा में है तो \(\vec{r}\) = y\(\hat{j}\)
(iii) यदि सदिश Z-अक्ष की दिशा में है तो \(\vec{r}\) = z\(\hat{k}\)

(ii) द्विविमीय सदिश (Two Dimensional Vectors): वह सदिश जो एक तल में स्थित होता है, द्विविमीय सदिश कहलाता है। द्विविमीय सदिश का प्रभाव किन्हीं दो दिशाओं अथवा दो अक्षों के अनुदिश होता है। इस प्रकार के सदिश की निम्न तीन स्थितियाँ सम्भव हैं।
(a) यदि कोई सदिश \(\vec{r}\), X-Y तल में स्थित है तो,
\(\vec{r}\) = (x\(\hat{i}\) + y\(\hat{j}\)) चित्र 4.12 (a)
(b) यदि कोई सदिश X-Z तल में है तो,
\(\vec{r}\) = (x\(\hat{i}\) + z\(\hat{k}\)) चित्र 4.12(b)
(c) यदि कोई सदिश Y-Z तल में है तो,
\(\vec{r}\) = (y\(\hat{j}\) + z\(\hat{k}\)) चित्र 4.12(c)

(iii) त्रिविमीय सदिश (Three Dimensional Vector):
वह सदिश जो आकाश (Space) में स्थित हो, त्रिविमीय सदिश कहलाता है। इस सदिश का प्रभाव तीनों अक्षों के अनुदिश होता है। चित्र (4.13) में ऐसा ही एक सदिश प्रदर्शित है जिसका प्रारम्भिक बिन्दु मूलबिन्दु 0 एवं शीर्ष बिन्दु P (x, y, z) है। अतः यह सदिश,

प्रश्न 3.
सदिशों के संयोजन के लिए त्रिभुज नियम क्या है? इस नियम का उपयोग करके परिणामी के परिमाण व दिशा के लिए सूत्र स्थापित कीजिए।
उत्तर:
(i) दो सदिशों के परिणामी सदिश का परिमाण ज्ञात करना (To Determine the Magnitude of Resultant Vector of Two Vectors): त्रिभुज नियम का उपयोग करके यदि दो सदिशों \(\vec{A}\) व \(\vec{B}\) को जोड़ा जाये तो उनका परिणामी \(\vec{R}\) चित्र 4.17(b) की भाँति प्राप्त होगा। माना दोनों सदिशों के बीच कोण है। परिणामी का परिमाण ज्ञात करने के लिए आधार ON आगे बढ़ाते हैं और इस पर Q से OP लम्ब डालते हैं।

∴ समकोण त्रिभुज NPQ में,
sin α = \(\frac{Q P}{N Q}\)=\(\frac{Q P}{B}\)
QP = B sinα …(1)
तथा
cos α = \(\frac{N P}{N Q}\)=\(\frac{N P}{B}\)
∴NP = Bcosα …(2)
अब त्रिभुज OPQ में,
OP = ON + NP = A + B cosα …(3)
पाइथागोरस प्रमेय से
समकोण ∆OPQ में
या
(OQ)2 = (OP)2 + (QP)2
(R)2 = (A + B cosα)2 + (Bsinα)2
या R2 = A2+ 2 AB cosα + B2 cos2α + B2 sin2α
या
R2 = A2 + B2 (cos2α + sin2α ) + 2AB cosα
या
R2 = A2 + B2 + 2ABcosα
या
R = \(\sqrt{A^2+B^2+2 A B \cos \alpha}\) …(4)
उपरोक्त समीकरण को कोज्या का नियम कहते हैं।

प्रश्न 4.
सदिशों के द्विविमीय वियोजन की विस्तार से व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सदिशों का वियोजन (Resolution of Vectors):
व्यापक रूप से एक सदिश को अनेक स्वैच्छ घटकों में वियोजित किया जा सकता है परन्तु यहाँ हम केवल दो या तीन समकोणिक घटकों में वियोजन का अध्ययन करेंगे। इस प्रकार के वियोजन के लिए कार्तीय निर्देशांक पद्धति का उपयोग करेंगे। वियोजन की क्रिया योग की क्रिया की विपरीत क्रिया है। इस क्रिया में एक सदिश को दो या तीन घटकों (Components) में वियोजित किया जाता है। सदिश के घटकों का योग करने पर योगफल के रूप में मूल सदिश ही प्राप्त होता है। सदिश वियोजन की निम्न दो विधियाँ हैं।
(i) द्विविमीय निर्देश तन्त्र में वियोजन (Resolution in Two Dimensions):

माना X-Y तल में स्थित \(\vec{A}\) जो X- अक्ष के साथ 6 कोण बनाता है, का दो लम्बवत् घटकों में वियोजन करता है। सदिश \(\vec{A}\) के शीर्ष P से X व Y- अक्षों पर लम्ब क्रमश: PM व PN खींचे तो OM सदिश \(\vec{A}\) का X- अक्ष के अनुदिश घटक \(\overrightarrow{A_x}\) होगा और ON, Y-अक्ष के अनुदिश घटक \(\overrightarrow{A_y}\) होगा।
अतः त्रिभुज ∆OPM में त्रिभुज नियम से संयोजन करने पर
\(\overrightarrow{O P}=\overrightarrow{O M}+\overrightarrow{M P}\)
या
\(\vec{A}=\overrightarrow{A_x}+\overrightarrow{A_y}\) …(1)
(क्योंकि \(\overrightarrow{M P}\) = \(\overrightarrow{O N}\) = \(\overrightarrow{A_y}\))
यदि X व Y – अक्षों के अनुदिश एकांक सदिश क्रमशः \(\hat{i}\) व \(\hat{j}\) हों तो,
\(\overrightarrow{A_x}\) = Ax\(\hat{i}\) ……..(2)
एवं
\(\overrightarrow{A_y}\) = Ay\(\hat{j}\) …….(3)
अतः समी० (1) को निम्न प्रकार लिख सकते हैं:
\(\vec{A}\) = Ax\(\hat{i}\) + Ay\(\hat{j}\) ……..(4)

वेक्टर \(\vec{A}\) के घटकों के परिमाण निम्न प्रकार ज्ञात करते हैं:
समकोण त्रिभुज OMP से
cos θ = \(\frac{A_x}{A}\)
अतः
Ax = A.cosθ …(5)
तथा
sin θ = \(\frac{A_Y}{A}\)
अतः
Ay = A sinθ ……(6)
घटकों के पदों में सदिश \(\vec{A}\) का परिमाण
समी० (5) व (6) के वर्गों को जोड़ने पर:
AxA2 + 4 = ( A cosθ)2 + (Asinθ)2
= A2cos2θ + A2 sin2θ
= A2 [cos2θ + sin2θ] = A2
या
A2 = AxA2 + AyA2
∴ A = \(\sqrt{A_x^2+A_y^2}\)
घटकों के पदों में 8 का मान
पुन: समी० (5) व (6) से
\(\frac{A_y}{A_x}=\frac{A \sin \theta}{A \cos \theta}\) = tanθ
या
tanθ = \(\frac{A_y}{A_x}=\frac{A \sin \theta}{A \cos \theta} \)
∴ θ = tan-1 \(\frac{A_y}{A_x}=\frac{A \sin \theta}{A \cos \theta}\)
स्पष्ट है कि यदि किसी सदिश के घटक ज्ञात हों तो उसका परिमाण समी० (7) की सहायता एवं उसकी दिशा समी० (8) की सहायता से ज्ञात कर सकते हैं।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 4 समतल में गति

प्रश्न 5.
सदिशों के सदिश गुणनफल की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सदिश गुणनफल या क्रॉस गुणनफल (Vector Product or Cross Product): सदिशों का यह गुणनफल सदिश राशि होता है अत: इसे सदिश गुणनफल कहते हैं और इसे व्यक्त करने के लिए क्रॉस (x) चिन्ह का उपयोग किया जाता है, अतः इसे क्रॉस गुणनफल या वज्रीय गुणनफल भी कहते हैं। दो सदिशों का सदिश गुणनफल दोनों सदिशों के परिमाणों व उनके मध्य कोण की ज्या के गुणनफल के बराबर होता है एवं परिणामी सदिश की दिशा उन दोनों सदिशों के तल के लम्बवत् दक्षिणावर्त पेंच नियम द्वारा निर्धारित दिशा में होती है।
दो सदिशों का सदिश गुणनफल निम्न सूत्र से प्राप्त होता है:
\(\vec{A} \). \(\vec{B} \) = A.Bsinθ. \(\hat{n}\) …..(1)
जहाँ
A = | \(\vec{A} \)| = \(\vec{A} \) का परिमाण
B = | \(\vec{B} \) | = \(\vec{B} \) का परिमाण
तथाव के तल के लम्बवत् दिशा में एकांक वेक्टर
सदिश गुणनफल \(\vec{A} \times \vec{B} \) की दिशा निम्न दो नियमों से प्राप्त कर सकते हैं।

(i) दायें हाथ का नियम (Right Hand Rule): इस नियम के अनुसार, यदि हम दाँयें हाथ की अंगुलियों को इस प्रकार मोड़ें कि ये सदिश \(\vec{A} \) से सदिश \(\vec{b} \) की ओर रहे तथा उनके बीच के लघु कोण की ओर घूमने की दिशा को प्रदर्शित करें तो अंगूठा सदिश \(\vec{A} \times \vec{B} \) की दिशा को व्यक्त करेगा [चित्र 4.20 (a)]

(ii) दक्षिणावर्त पेंच का नियम (Right Hand Screw Rule): इस नियम के अनुसार, “यदि हम अपने दाँये हाथ से पेंच को सदिश \(\vec{A} \) से \(\vec{B} \) की ओर उनके बीच के लघु कोण की ओर घुमाएँ तो पेंच की नोंक की गति की दिशा \(\vec{A} \times \vec{B} \) की दिशा होगी [चित्र 4.20 (b)]।

प्रश्न 6.
सिद्ध कीजिए कि प्रक्षेप्य की गति का पथ परवलय होता है।
उत्तर:
प्रक्षेप्य का पथ (Path of Projectile):
माना कोई प्रक्षेप्य क्षैतिज के साथ 6 के कोण पर ऊपर की ओर प्रक्षेपित किया जाता है। प्रक्षेप्य के वेग का क्षैतिज घटक
ux = ucosθ ……(1)

एवं ऊर्ध्व घटक,
uy = usinθ …(2)
गति के दौरान वस्तु पर केवल गुरुत्वीय त्वरण कार्य करता है, जो कि ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर होता है, अतः त्वरण के क्षैतिज व ऊर्ध्व घटक, ax = 0 तथा ay = -g होंगे।
माना प्रक्षेप्य पथ पर कोई बिन्दु P (x,y,t) स्थित है तो सूत्र
s = ut + \(\frac{1}{2}\) का प्रयोग करने पर
x = ux.t + 0 = ucosθ.t
x = ucosθ.t …(3)
y = uyt + \(\frac{1}{2}\)ayt2
या
y = usinθ.t – \(\frac{1}{2}\)gt2 …(4)
समी० (3) से,
x = \(\frac{x}{u \cos \theta}\)
समय का यह मान समी० (4) में रखने पर
y = usinθ x \(\frac{x}{u \cos \theta}-\frac{1}{2} g \frac{x^2}{u^2 \cos ^2 \theta}\)
या
y = tanθ.x – \(\left(\frac{g}{2 u^2 \cos ^2 \theta}\right) \cdot x^2\)
या
y = ax – bx2 …..(5)
जहाँ
a = tanθ एवं b = \(\frac{g}{2 u^2 \cos ^2 \theta}\)
समीकरण (5) एक परवलय का समीकरण है अतः “प्रक्षेप्य पथ परवलयाकार होता है।”

प्रश्न 7.
प्रक्षेप्य की गति हेतु उड्डयन काल (T), प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (H) व प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास (R) हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
प्रक्षेप्य का उड्डयन काल (T) (Time of Flight of Projectile):
प्रक्षेप्य जितने समय तक वायु में रहता है अर्थात् प्रक्षेपण के बाद भूमि से टकराने तक प्रक्षेप्य को जितना समय लगता है, उसे प्रक्षेप्य का उड्डयन काल कहते हैं। इसे 7 से व्यक्त करते हैं।
प्रक्षेप्य जब अपने पथ के उच्च बिन्दु पर पहुँचता है तो ऊर्ध्व वेग घटक uy = 0 हो जाता है; अतः यदि इस आधी यात्रा का समय : मान लें तो ऊर्ध्व वेग घटक के लिए सूत्र
v = u + at
0 = usinθ – gt
या
gt = usinθ
∴ t = \(\frac{u \sin \theta}{g}\)
वायु के प्रतिरोध को यदि नगण्य मान लें तो जितना समय प्रक्षेप्य ऊपर जाने में लेता है ठीक उतना ही समय नीचे आने में लेता है। अतः प्रक्षेप्य का उड्डयन काल
T = t + t = 2t
या
T = \(\frac{2 u \sin \theta}{g}\) …….(6)

प्रक्षेप्य की महत्तम ऊँचाई (H) (Maximum Height of Projectile):
प्रक्षेप्य पथ के उच्चतम बिन्दु के संगत प्रक्षेप्य की ऊँचाई को महत्तम ऊँचाई कहते हैं। इसे H से व्यक्त करते हैं। सूत्र
v2 = u2 + 2as से के लिए
ऊर्ध्वं वेग घटक uy के लिए,
या
0 = (usinθ)2 + 2(-g) H = u2sin2θ – 2gH
2gH = u2 sin2θ
H = \(\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}\) ………(7)
प्रक्षेप्य को अधिकतम ऊँचाई प्रदान करने के लिए sin2θ का मान
अधिकतम अर्थात् 1 होना चाहिए। अतः के लिए,
sin2θ = 1 => sinθ = 1
अधिकतम ऊँचाई के लिए,
=> θ = 90°
स्पष्ट है कि अधिकतम ऊँचाई तक फेंकने के लिए प्रक्षेप्य को 90° के प्रक्षेपण कोण पर अर्थात् ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेंकना होगा।
Hmax = \(\frac{u^2}{2 g}\) ………(8)

प्रक्षेप्य की क्षैतिज परास (R) (Horizontal Range of a Projectile):
प्रक्षेप्य द्वारा सम्पूर्ण उड्डयन काल के दौरान तय की गई क्षैतिज दूरी को प्रक्षेप्य का परास कहते हैं। इसे R से व्यक्त करते हैं।
यदि वायु के घर्षण को नगण्य मान लें तो प्रक्षेप्य के क्षैतिज वेग में कोई परिवर्तन नहीं होता है अतः प्रक्षेप्य का क्षैतिज परास,
R = क्षैतिज वेग x उड़ान का समय
= ucosθ x T
= ucosθ x \(\frac{2 u \sin \theta}{g}\)
या
R = \(\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}\) ……(9)
(i) अधिकतम क्षैतिज परास के लिए,
sin2θ = 1 ⇒ 2θ = 90°
θ = 45°
अतः अधिकतम परास के लिए प्रक्षेपण कोण 45° होना चाहिए।
Rmax = \(\frac{u^2}{g}\) …….(10)

(ii) θ प्रक्षेपण कोण के लिए परास
R = \(\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}\)
यदि प्रक्षेपण कोण (90° – θ) हो तो परास,
R’ = \(\frac{u^2}{g}\)sin2( 90°- θ)
या R = \(\frac{u^2}{g}\) sin (180° – 2θ) = \(\frac{u^2 \sin ^2 \theta}{2 g}\)
या
R = R
अर्थात् प्रक्षेपण कोण θ हो या (90° – θ) हो; दोनों स्थितियों में परास का मान समान होगा लेकिन महत्तम ऊँचाई भिन्न होगी।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
यदि \(\vec{a}\) तथा \(\vec{b}\) एकांक सदिश हों तो सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
\(\sin \left(\frac{\theta}{2}\right)=\frac{1}{2}|(\vec{a}-\vec{b})\)

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प्रश्न 2.
30 N तथा 40 N के दो बल एक ही बिन्दु पर परस्पर 60° के कोण पर कार्य कर रहे हैं। इन बलों का परिणामी बल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
60.83 NJ

प्रश्न 3.
एक कण पर दो बल 5 N तथा 10 N एक साथ कार्यरत् हैं। उनके बीच का कोण 120° है। इन बलों का परिणामी बल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
8.66 N

प्रश्न 4.
क्षैतिज से 30° के कोण पर कार्यरत एक बल का ऊर्ध्व घटक 200 N है। आरोपित बल का मान बताइये।
उत्तर:
400N

प्रश्न 5.
घास के रोलर के हत्थे को 50N के बल से खींचा जाता है। यदि हत्था क्षैतिज से 30° का कोण बनाए तो बल के क्षैतिज एवं ऊर्ध्व घटक बताइये।
उत्तर:
43.3 N; 25 N

प्रश्न 6.
किसी बिन्दु पर बल \(\vec{F}=(2 \hat{i}-3 \hat{j}+4 \hat{k})\) न्यूटन \(\vec{s} = (3 \hat{i}+2 \hat{j}+3 \hat{k})\) मीटर है। इसके बल आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर:
\((17 \hat{i}-6 \hat{j}-13 \hat{k})\)N-m

प्रश्न 7,
यदि वेक्टर \(\vec{A}=(2 \hat{i}+2 \hat{j}-2 \hat{k})\) और \(\overrightarrow{\boldsymbol{B}}= \hat{i}-5 \hat{j}+2 \hat{k}\) हों, तो \(\vec{A} \times \vec{B}\) का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\(-6 \hat{i}-18 \hat{j}-24 \hat{k}\)

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प्रश्न 8.
यदि \(\vec{A}=(2 \hat{i}+2 \hat{j}-2 \hat{k})\) तथा \(\vec{B}=-5 \hat{i}-5 \hat{j}+5 \hat{k}\) तो \(\vec{A} \times \vec{B}\) का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
\((15 \hat{i}-20 \hat{j}-5 \hat{k}\)

प्रश्न 9.
एक मीनार से तीन गोलियाँ A, B व C क्रमश: 0.5 ms-1; 1ms-1 तथा 2ms-1 के क्षैतिज वेग से फेंकी जाती है। सबसे पहले कौन सी गोली पृथ्वी से टकरायेगी? कौन सी गोली मीनार के आधार पर सबसे अधिक दूर टकरायेगी?
उत्तर:
तीनों गोलियाँ एक साथ पृथ्वी से टकरायेंगी C गोली सबसे अधिक दूरी तय करेगी।

प्रश्न 10.
40m ऊँची मीनार की चोटी से एक गोला क्षैतिज में 20ms-1 के वेग से छोड़ा जाता है। यह कितने समय पश्चात् तथा मीनार से कितनी क्षैतिज दूरी पर पृथ्वी से टकरायेगा ? (g = 9.8ms-2)
उत्तर:
2.88 s; 57.14m

प्रश्न 11.
एक हवाई जहाज 1960 m की ऊंचाई पर 500/3 ms-1 के क्षैतिज वेग से उड़ रहा है। जब जहाज पृथ्वी के किसी स्थान 4 के ठीक ऊपर होता है, तो उससे एक बम छोड़ा जाता है जो पृथ्वी तल पर किसी बिन्दु Q पर टकराता है। बम की प्रक्षेपण बिन्दु से टकराने के बिन्दु तक की क्षैतिज दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
3.333km

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प्रश्न 12.
एक गेंद 30ms-1 के वेग से क्षैतिज से 60° का कोण बनाते हुए फेंकी जाती है। ज्ञात कीजिए
1. उड़ान का समय,
2. अधिकतम ऊँचाई,
3. परास,
4. पृथ्वी से टकराने पर गेंद के वेग का परिमाण व दिशा।
उत्तर:

  1.  5.2s,
  2. 33.75m,
  3. 78m,
  4. 30ms-1, क्षैतिज के साथ 60° नीचे की ओर

प्रश्न 13.
एक पुल से एक पत्थर क्षैतिज से नीचे की ओर 30° के कोण पर 20 ms-1 के वेग से फेंका जाता है। यदि पत्थर 2.0s में जल से टकराता है तो जल के तल से पुल की ऊँचाई क्या है? (g = 9:8 ms-2)
उत्तर:
39.6m

प्रश्न 14.
0.1 kg द्रव्यमान के एक पत्थर को 1.0m लम्बी डोरी के एक सिरे पर बाँधकर \(\frac{10}{\pi}\) चक्कर प्रति सेकण्ड की दर से एक क्षैतिज वृत्त में घुमाया जाता है। डोरी में तनाव ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
40N

प्रश्न 15.
एक डोरी के सिरे पर बँधी हुई 1kg द्रव्यमान की एक वस्तु 0.1m त्रिज्या के क्षैतिज वृत्त में 3 चक्कर प्रति सेकण्ड के वेग से घुमायी जा रही है। गुरुत्व का प्रभाव नंगण्य मानकर
1. वस्तु का रेखीय वेग,
2. अभिकेन्द्रीय त्वरण
3. डोरी में तनाव का परिकलन कीजिए।
4. यदि डोरी टृट जाये तो क्या होगा?
उत्तर:

  1. 1.88 ms-1
  2. 35.34ms-2
  3. 35.34N
  4. यदि डोरी टूट जाती है तो डोरी टूटने पर तनाव समाप्त हो जायेगा, फलस्वरूप वस्तु स्पर्श रेखा की दिशा में गति करने लगेगी।

प्रश्न 16.
0.10kg द्रव्यमान का पिण्ड 1.0m व्यास के वृत्तीय पथ पर 31.4s में 10 चक्कर की दर से घूम रहा है। पिण्ड पर लगने वाले
उत्तर:
0.2N

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न:

प्रश्न 1.
एक P-N संधि के अवक्षय क्षेत्र में होते हैं:
(अ) केवल इलेक्ट्रॉन
(ब) केवल होल
(स) इलेक्ट्रॉन तथा होल दोनों
(द) निश्चल आयन
उत्तर:
(द) निश्चल आयन

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

प्रश्न 2.
एक NPN ट्रांजिस्टर को प्रवर्धक की तरह उपयोग में लाया जा रहा है तो:
(अ) इलेक्ट्रॉन आधार से संग्राहक की ओर चलते हैं
(ब) होल उत्सर्जक से आधार की ओर चलते हैं
(स) होल आधार से उत्सर्जक की ओर चलते हैं
(द) इलेक्ट्रॉन उत्सर्जक से आधार की ओर चलते हैं।
उत्तर:
(द) इलेक्ट्रॉन उत्सर्जक से आधार की ओर चलते हैं।

प्रश्न 3.
परम शून्य ताप पर नैज जर्मेनियम तथा नैज सिलिकॉन होते
(अ) अतिचालक
(ब) अच्छे अर्धचालक
(स) आदर्श कुचालक
(द) चालक
उत्तर:
(स) आदर्श कुचालक

प्रश्न 4.
एक कुचालक में संयोजकता बैण्ड और चालन बैण्ड के मध्य वर्जित ऊर्जा अन्तराल निम्नलिखित कोटि का होता है:
(अ) 1 ev
(ब) 6 ev
(स) 20 ev
(द) 0.01 ev
उत्तर:
(ब) 6 ev

प्रश्न 5.
वे पदार्थ जिनके संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड लगभग अतिव्यापन की स्थिति में होते हैं, वे होते हैं:
(अ) चालक
(ब) विद्युतरोधी
(स) अर्धचालक
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(अ) चालक

प्रश्न 6.
P प्रकार के अर्धचालक बनाने के लिए सिलिकॉन में-
(अ) पंचम समूह का पदार्थ मिलाते हैं
(ब) तृतीय समूह का पदार्थ मिलाते हैं
(स) चतुर्थ समूह का पदार्थ मिलाते हैं।
(द) किसी भी समूह का पदार्थ मिला सकते
उत्तर:
(ब) तृतीय समूह का पदार्थ मिलाते हैं

प्रश्न 7.
P-N संधि पर अग्र बायस स्थापित करने पर इसका व्यवहार होगा:
(अ) चालक की तरह
(ब) अर्धचालक की तरह
(स) यांत्रिक वाल्व की तरह
(द) अतिचालक की तरह
उत्तर:
(अ) चालक की तरह

प्रश्न 8.
दिष्टकारी का कार्य है:
(अ) धारा का प्रवर्धन करना
(ब) वोल्टता का प्रवर्धन् करना
(स) दिष्ट धारा को प्रत्यावर्ती धारा में बदलना
(द) प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में बदलना
उत्तर:
(द) प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में बदलना

प्रश्न 9.
जीनर डायोड का उपयोग किया जाता है:
(अ) दोलित्र के रूप में
(ब) प्रवर्धक के रूप में
(स) वोल्टता नियंत्रण के रूप में
(द) प्रकाश उत्सर्जन के लिए
उत्तर:
(स) वोल्टता नियंत्रण के रूप में

प्रश्न 10.
ट्रान्जिस्टर प्रचालन के लिए आवश्यक है:
(अ) उत्सर्जक संधि अग्र तथा संग्राहक संधि उत्क्रम बायस पर
(ब) उत्सर्जक संधि उपक्रम तथा संग्राहक संधि अग्र बायस पर
(स) उत्सर्जक तथा संग्राही दोनों संधियाँ अग्र बायस पर
(द) उत्सर्जक तथा संग्राहक दोनों संधियाँ उत्क्रम बायस पर
उत्तर:
(अ) उत्सर्जक संधि अग्र तथा संग्राहक संधि उत्क्रम बायस पर

प्रश्न 11.
निम्न में से गलत कथन है:
(अ) अपद्रव्य अर्धचालक को बाह्य अर्धचालक कहते हैं
(ब) होल व इलेक्ट्रॉन दोनों ही आवेश वाहक हैं
(स) P प्रकार के अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक आवेश वाहक होते हैं
(द) P प्रकार के अर्धचालक में होल अल्पसंख्यक आवेश वाहक होते हैं
उत्तर:
(द) P प्रकार के अर्धचालक में होल अल्पसंख्यक आवेश वाहक होते हैं

प्रश्न 12.
एक N टाइप अर्द्धचालक होता है:
(अ) ऋणावेशित
(ब) धनावेशित
(स) उदासीन
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(स) उदासीन

प्रश्न 13.
तापमान बढ़ाने पर एक अर्द्धचालक का विशिष्ट प्रतिरोध:
(अ) बढ़ता है
(ब) घटता है
(स) अपरिवर्तित रहता है
(द) पहले घटता है और बाद में बढ़ता है
उत्तर:
(ब) घटता है

प्रश्न 14.
शुद्ध अर्द्धचालक जरमेनियम में आर्सेनिक की अशुद्धि मिलाने पर उपस्थित होगा:
(अ) P प्रकार का अर्द्धचालक
(ब) N प्रकार का अर्द्धचालक
(स) चालक
(द) P-N संधि
उत्तर:
(ब) N प्रकार का अर्द्धचालक

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

प्रश्न 15.
आदर्श P-N संधि को प्रयुक्त किया जा सकता है:
(अ) प्रवर्धक के रूप में
(ब) दिष्टकारी के रूप में
(स) दोलित्र के रूप में
(द) मोड्यूलेटर के रूप में
उत्तर:
(ब) दिष्टकारी के रूप में

प्रश्न 16.
निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(अ) अर्ध चालक का प्रतिरोध ताप के बढ़ने पर कम होता है
(ब) विद्युत क्षेत्र में होल का विस्थापन इलेक्ट्रॉन के विस्थापन के विपरीत दिशा में होता है
(स) ताप बढ़ने पर एक सुचालक का प्रतिरोध कम होता है
(द) सभी प्रकार के अर्ध चालक अनावेशित होते हैं
उत्तर:
(स) ताप बढ़ने पर एक सुचालक का प्रतिरोध कम होता है

प्रश्न 17.
अर्धचालकों की चालकता:
(अ) ताप पर निर्भर नहीं करती
(ब) ताप वृद्धि से घटती है
(स) ताप वृद्धि से बढ़ती है
(द) पहले घटती है फिर बढ़ती है
उत्तर:
(स) ताप वृद्धि से बढ़ती है

प्रश्न 18.
अर्धचालकों में आबन्ध होते हैं:
(अ) आयनिक
(ब) धात्विक
(स) वान्डरवाल
(द) सहसंयोजी
उत्तर:
(द) सहसंयोजी

प्रश्न 19.
ताप वृद्धि से अर्धचालकों की चालकता:
(अ) अपरिवर्तित रहती है
(ब) घटती है
(स) बढ़ती है
(द) पहले घटती है फिर बढ़ती है।
उत्तर:
(ब) घटती है

प्रश्न 20.
नैज अर्धचालकों में सामान्य ताप पर इलेक्ट्रॉन व होल की संख्या का अनुपात है:
(अ) 1 : 2
(ब) 2 : 1
(स) 1 : 1
(द) 1 : 3
उत्तर:
(स) 1 : 1

प्रश्न 21.
P प्रकार के अर्धचालकों के लिये अशुद्धि तत्त्व के रूप में उपयोग करते हैं:
(अ) आर्सेनिक
(ब) फॉस्फोरस
(स) बोरोन
(द) बिस्मथ
उत्तर:
(स) बोरोन

प्रश्न 22.
P-N संधि डायोड में अग्र तथा उत्क्रम बायस व्यवस्थाओं में प्रतिरोधों का अनुपात होता है:
(अ) 102 : 1
(ब) 10-2 : 1
(स) 1 : 104
(द) 1 : 10-4
उत्तर:
(स) 1 : 104

प्रश्न 23.
P-N डायोड है:
(अ) रेखीय युक्ति
(ब) अरेखीय युक्ति
(स) तापीय युक्ति
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) अरेखीय युक्ति

प्रश्न 24.
निम्नलिखित में से कौनसा परमाणु दाता अशुद्धि है:
(अ) Al
(ब) B
(स) Ga
(द) P
उत्तर:
(द) P

प्रश्न 25.
अर्धचालकों में चालन होता है:
(अ) एकल ध्रुवीय
(ब) द्विध्रुवीय
(स) त्रिध्रुवीय
(द) अध्रुवीय
उत्तर:
(ब) द्विध्रुवीय

प्रश्न 26.
संलग्न चित्र में दिये गये परिपथ के लिये बूलीय समीकरण होगा:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 1
(अ) Y = A + \(\overline{\mathrm{B}}\)
(ब) Y = \(\overline{\mathrm{A} \cdot \mathrm{B}}\)
(स) Y = \(\overline{\mathrm{A}}\) + B
(द) Y = \(\overline{\mathrm{A}}\) B
उत्तर:
(स) Y = \(\overline{\mathrm{A}}\) + B

प्रश्न 27.
किसी एन्ड द्वार’ के लिये तीन निवेशी क्रमश: A, B व C हैं तो इसका निर्गत Y होगा:
(अ) Y = A.B + C
(ब) Y = A + B + C
(स) Y = A + B.C
(द) Y = A. B. C
उत्तर:
(द) Y = A. B. C

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

प्रश्न 28.
NOR गेट किन दो गेटों से मिलकर बनता है?
(अ) NOT + AND गेट
(ब) OR + NOT गेट
(स) OR + AND गेट
(द) NOR + AND गेट।
उत्तर:
(ब) OR + NOT गेट

प्रश्न 29.
XOR गेट के लिए कौनसा समीकरण प्रयोग में लिया जाता है?
(अ) Y = A B
(ब) Y = A + B
(स) Y = AB
(द) Y = A – B
उत्तर:
(स) Y = AB

प्रश्न 30.
(A + B). (RS) समीकरण के लिये परिपथ में कम से कम कितने गेट की आवश्यकता होगी?
(अ) दो
(ब) चार
(स) छः
(द) एक।
उत्तर:
(द) एक।

प्रश्न 31.
निम्न परिपथ का आउटपुट होगा:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 2
(अ) 0
(ब) 1
(स) 2
(द) 10
उत्तर:
(ब) 1

प्रश्न 32.
लोजिक समीकरण A. (B + C) का क्या मान होगा, यदि A = 1, B = 1, C = 1
(अ) 0
(ब) 2
(स) 11
(द) 1
उत्तर:
(द) 1

प्रश्न 33.
यदि A = 1, B = 0, C = 1 हो तो AB का मान होगा:
(अ) 1
(ब) 0
(स) 2
(द) 11
उत्तर:
(अ) 1

प्रश्न 34.
निम्न में से किस चित्र में डायोड उत्क्रम अभिनति में है?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 3
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 4

प्रश्न 35.
निम्न चित्र में दिखाये गये तार्किक द्वार का नाम है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 5
(अ) ऐण्ड (AND) द्वार
(ब) नौर (NOR) द्वार
(स) ओर (OR) द्वार
(द) नेण्ड (NAND) द्वार
उत्तर:
(ब) नौर (NOR) द्वार

प्रश्न 36.
चित्र में प्रदर्शित लॉजिक परिपथ के निवेश तरंग रूप A तथा B भी इसके साथ इसी चित्र में प्रदर्शित हैं। सही निर्गम का चयन कीजिए।

उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 8

प्रश्न 37.
चित्र में प्रदर्शित विभवान्तर V का वर्ग माध्य मूल मान है:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 9
(अ) Vo√3
(ब) Vo
(स) V1√2
(द) Vo/2
उत्तर:
(स) V1√2

प्रश्न 38.
चित्र में प्रदर्शित लॉजिक परिपथ के निर्गम के लिए बुलियन व्यंजक होगा-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 10
(अ) A (B + C)
(ब) A • (B • C)
(स) (A+B) • (A+C)
(द) A + B + C
उत्तर:
(स) (A+B) • (A+C)

प्रश्न 39.
चित्र में दिये गये परिपथ से निर्गम Y = 1 प्राप्त करने के लिए निवेश होना चाहिए-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 11

ABC
(अ) 010
(ब)  001
(स) 101
(द) 100

उत्तर:

ABC
010
001
101
100

प्रश्न 40.
एक डायोड दिष्टकारी के रूप में बदलता है:
(अ) दिष्टधारा की प्रत्यावर्ती धारा में
(ब) प्रत्यावर्ती धारा को दिष्टधारा में
(स) उच्च वोल्टता को निम्न वोल्टता या निम्न वोल्टता को उच्च वोल्टता में
(द) परिवर्ती दिष्टधारा को नियत दिष्टधारा में
उत्तर:
(ब) प्रत्यावर्ती धारा को दिष्टधारा में

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प्रश्न 41.
यदि A = 1 तथा B = 0 हो, तो बुलियन बीजगणित के अनुसार AA + B का मान होगा-
(अ) A
(ब) B
(स) A2 + B
(द) A + B
उत्तर:
(अ) A

प्रश्न 42.
डायोड में जब संतृप्त धारा प्रवाहित होती है तब प्लेट प्रतिरोध rp:
(अ) शून्य
(ब) अनन्त
(स) एक निश्चित संख्या
(द) आँकड़े अपर्याप्त हैं
उत्तर:
(ब) अनन्त

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
प्रकाश उत्सर्जक डायोड व जेनर डायोड के प्रतीक चिन्ह बनाइये।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
ट्रांजिस्टर के लिये धारा प्रवर्धन गुणांकों α व β में सम्बन्ध लिखिये।
उत्तर:
β = \(\frac{\alpha}{1-\alpha}\)

प्रश्न 3.
क्या किसी अनअभिनत P-N संधि पर उपस्थित रोधिका विभव को संधि के सिरों के मध्य वोल्टमीटर जोड़कर नापा जा सकता है?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 4.
ट्रांजिस्टर को प्रवर्धक के रूप में काम लाने के लिये कौनसी संधि पश्च बायसित की जाती है?
उत्तर:
आधार संग्राहक संधि।

प्रश्न 5.
उस ट्रांजिस्टर के लिये α का मान क्या होगा जिसके लिये β = 19 है।
उत्तर:
α = \(\frac{\beta}{1+\beta}\) = \(\frac{19}{1+19}\) = 0.95

प्रश्न 6.
चित्र में प्रदर्शित डायोड किस अभिनति में है ?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 13
उत्तर:
पश्च अभिनति।

प्रश्न 7.
P तथा N प्रकार के अर्धचालकों में बहुसंख्यक आवेश वाहक होते हैं-
(i) …………………
(ii) ………………………
उत्तर:
(i) होल (ii) इलेक्ट्रॉन

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प्रश्न 8.
निम्न में से कौनसा अर्धचालक है:
(i) तांबा
(ii) गैलियम आर्सेनाइड
(iii) गन्धक?
उत्तर:
गैलियम आर्सेनाइड (Ga As)

प्रश्न 9.
फोटोडायोड के दो उपयोग लिखिये।
उत्तर:
(i) प्रकाश के संसूचन में
(ii) प्रकाश चलित स्विच में

प्रश्न 10.
दो संधियों वाली अर्धचालक युक्ति को क्या कहते हैं?
उत्तर:
ट्रांजिस्टर

प्रश्न 11.
जरमेनियम में गैलियम की अशुद्धि मिलाने पर किस प्रकार का अर्धचालक प्राप्त होता है?
उत्तर:
P प्रकार का।

प्रश्न 12.
नैज अर्धचालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों तथा होल्स की संख्या का अनुपात लिखिये।
उत्तर:
1 : 1

प्रश्न 13.
नैज अर्धचालक किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्राकृतिक रूप से प्राप्त अर्धचालकों को नैज अर्धचालक कहते हैं।

प्रश्न 14.
नैज अर्धचालक के दो उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
जर्मेनियम (Ge), सिलिकॉन (Si )।

प्रश्न 15.
किन्हीं दो अर्धचालक मिश्र धातुओं के नाम बताइये।
उत्तर:
(1) गैलियम फॉस्फाइड (Ga P)
(2) गैलियम आर्सेनाइड फॉस्फाइड (Ga As P )

प्रश्न 16.
होल पर आवेश का मान व प्रकृति बताइये।
उत्तर:
1.6 x 10-19, धनावेश।

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प्रश्न 17.
डोपिंग किसे कहते हैं?
उत्तर:
नैज अर्धचालक के वैफर में अशुद्धि परमाणु मिलाने की क्रिया डोपिंग कहलाती है।

प्रश्न 18.
N प्रकार का अर्धचालक प्राप्त करने हेतु अशुद्धि परमाणु आवर्त सारणी के किस वर्ग से संबंधित है?
उत्तर:
पंचम वर्ग से।

प्रश्न 19.
P प्रकार का अर्धचालक बनाने हेतु अशुद्धि परमाणु किस वर्ग से लिये जाते हैं?
उत्तर:
तृतीय वर्ग से।

प्रश्न 20.
शुद्ध Si क्रिस्टल को इण्डियम (In) से मांदित (डोपिंग) कराने पर किस प्रकार का अर्धचालक प्राप्त होगा?
उत्तर:
P प्रकार का।

प्रश्न 21.
शुद्ध Ge क्रिस्टल को P से मांदित (डोपिंग) कराने पर प्राप्त अर्धचालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक कौन है?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 22.
शुद्ध Ge क्रिस्टल को Al से मांदित (डोपिंग) कराने पर प्राप्त अर्धचालक में अल्पसंख्यक आवेश वाहक कौन होते हैं?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन।

प्रश्न 23.
अवक्षय क्षेत्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
P-N संधि के निकट स्थित आवेश वाहकहीन क्षेत्र को अवक्षय क्षेत्र कहते हैं।

प्रश्न 24.
P-N संधि में संधि तल के पास P- भाग में कौनसा विभव होता है?
उत्तर:
ऋणात्मक विभव।

प्रश्न 25.
अग्र अभिनति की अवस्था में एक P-N संधि डायोड का P सिरा बैटरी के किस टर्मिनल से जोड़ा जाता है?
उत्तर:
धनात्मक

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प्रश्न 26.
उत्क्रम बायस की अवस्था में संधि तल क्या व्यवहार करता है?
उत्तर:
विद्युतरोधी की तरह।

प्रश्न 27.
अर्धचालक डायोड के परिपथ संकेत में तीर का चिन्ह किससे, किसकी ओर होता है?
उत्तर:
P से N की ओर।

प्रश्न 28.
जीनर प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर:
निश्चित उत्क्रम वोल्टता के बाद उत्क्रम धारा में अचानक वृद्धि के प्रभाव को जीनर प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 29.
गतिज उत्क्रम बायस प्रतिरोध का मान जीनर वोल्टता के बाद क्या होता है?
उत्तर:
बहुत कम।

प्रश्न 30.
प्रकाश उत्सर्जक डायोड क्या होता है?
उत्तर:
यह P-N जंक्शन (Junction ) डायोड होता है। जिसमें अग्र अभिनति विद्युत धारा प्रवाहित होने पर विद्युत ऊर्जा प्रकाश ऊर्जा में परिवर्तित होकर उत्सर्जित होती है।

प्रश्न 31.
नैज अर्धचालक की क्रिस्टल संरचना का नाम लिखिए।
उत्तर:
Si (सिलिकॉन), Ge ( जरमेनियम )।

प्रश्न 32.
फोटो डायोड के कोई दो उपयोग लिखिए।
उत्तर:
फोटो डायोड के उपयोग:
(1) फिल्मों में ध्वनि के पुनः उत्पादन में
(2) प्रकाश चलित स्विचों में

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प्रश्न 33.
ओर द्वार के लिये सत्यता सारणी बनाइये।
उत्तर:

ABY = A + B
000
101
011
111

प्रश्न 34.
उस तर्क द्वार का नाम लिखिये जिसमें निर्गत तब ही 1 होता है जब सभी निवेशी 1 होते हैं।
उत्तर:
AND द्वार।

प्रश्न 35.
दी गई सत्यता सारणी से संबंधित तार्किक द्वार का नाम लिखिए:

निवेशीनिर्गत
Y
AB
000
101
011
111

उत्तर:
ओर अथवा अपि द्वार

प्रश्न 36.
किन्हीं दो यौगिक (कार्बनिक ) अर्धचालक के नाम लिखिए।
अथवा
कोई दो कार्बनिक यौगिक अर्द्धचालकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) एंथ्रासीन (ii) मांदित (Doped) थैलोस्यानीस।

प्रश्न 37.
डायोड को अग्र बायस एवं उत्क्रम बायस स्थिति में जोड़ने पर अक्षय परत पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर:
(i) अग्र बायस में अवक्षय परत की मोटाई घटती है।
(ii) उत्क्रम बायस स्थिति में अवक्षय परत की मोटाई बढ़ती है।

प्रश्न 38.
नीचे दिये गये चित्र में निवेश तरंग रूप को किसी युक्ति ‘X’ द्वारा निर्गत तरंग रूप में परिवर्तित किया गया है। इस युक्ति का नाम लिखिए और इसका परिपथ आरेख बनाइए।
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उत्तर:
(i) पूर्णतरंग दिष्टकारी
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प्रश्न 39.
चित्र में दिखाये गये लॉजिक गेट का नाम लिखिए और इसके लिए सत्यमान सारणी बनाइए।
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उत्तर:
(i) AND GATE
(ii)

INPUTOUTPUT
ABY
000
010
100
111

प्रश्न 40.
जीनर डायोड में भंजन वोल्टता समझाइए।
उत्तर:
भंजन वोल्टता – एक P-N सन्धि डायोड जब पश्च बायसित अवस्था में हो तो निश्चित मान की वोल्टता पर धारा के मान में एक उच्च मान तक अचानक वृद्धि दर्शाई जाती है, इस विभव को भंजन वोल्टता अथवा जीनर वोल्टता कहा जाता है। यह उच्च मान की धारा साधारण P-N सन्धि को नष्ट कर सकती है।

प्रश्न 41.
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ABYY
0001
0110
1010
1110

चित्र P एवं सारणी Q से सम्बन्धित तार्किक द्वारों के नाम
उत्तर:
(P) AND
(Q) NOR

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प्रश्न 42.
NOR गेट का तार्किक प्रतीक दीजिए।
उत्तर:
NOR का तार्किक प्रतीक निम्न होता है:
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प्रश्न 43.
P-N संधि की अवक्षय परत की चौड़ाई का क्या होता है जब इसे
(i) अग्रदिशिक बायसित
(ii) पश्चदिशिक बायसित किया जाता है?
उत्तर:
(i) P-N संधि के अग्रदिशिक बायसित अवस्था में अवक्षय परत की चौड़ाई कम हो जाती है।
(ii) P-N संधि के पश्चदिशिक बायसित अवस्था में अवक्षय परत की चौड़ाई बढ़ जाती है।

प्रश्न 44.
सौर सेल बनाने के लिए सामान्यतया GaAs का उपयोग किया जाता है क्यों? कारण बताइए।
उत्तर:
सौर सेल बनाने के लिए सामान्यतया GaAs का उपयोग किया जाता है क्योंकि इसका अवशोषण गुणांक अपेक्षाकृत अधिक होने से यह आपतित सौर विकिरण से अपेक्षाकृत अधिक मात्रा की ऊर्जा अवशोषित करता है।

प्रश्न 45.
किसी तार्किक गेट की सत्यमान सारणी नीचे दी गई है। इस गेट का नाम बताइए तथा इसकी प्रतीक बनाइए।

ABY
001
010
100
110

उत्तर:
तार्किक गेट NOR गेट है तथा उसकी प्रतीक निम्न है:
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प्रश्न 46.
नैज अर्द्धचालक की क्रिस्टल संरचना का नाम
उत्तर:
समचतुष्फलकीय।

प्रश्न 47.
निम्न में से एक दाता अशुद्धि छाँटिए- बोरॉन (B), ऐलुमिनियम (Al) एवं आर्सेनिक (As)
उत्तर:
आर्सेनिक (As)

लघुत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
धातुओं, चालकों तथा अर्धचालकों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
चालकता के आधार पर विद्युत चालकता (σ) अथवा प्रतिरोधकता (p = 1/σ) के सापेक्ष मान के आधार पर ठोस पदार्थों का निम्न प्रकार से वर्गीकरण किया जाता है
(i) धातु इनकी प्रतिरोधकता बहुत कम (अथवा चालकता बहुत अधिक) होती है।
P- 10-2 – 10-8 Ωm
σ – 10-2 – 108 Sm
(ii) अर्धचालक – इनकी प्रतिरोधकता या चालकता धातुओं तथा विद्युतरोधी पदार्थों के बीच की होती है।
P 10-5 – 10-6 Ωm
σ – 105 10-6 Sm-1
(iii) विद्युतरोधी – इनकी प्रतिरोधकता बहुत अधिक (अथवा चालकता बहुत कम होती है।
P 1011 – 1019 Ωm
σ – 10-11 – 10-19 Sm-1
ऊपर दिए गए p तथा σ के मान केवल कोटि मान के सूचक हैं और दिए गए परिसर के बाहर भी जा सकते हैं।

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प्रश्न 2.
तात्विक अर्धचालक (Elemental Semiconduc- tor) और यौगिक अर्धचालक के उदाहरण देकर बताइए।
उत्तर:
तात्विक अर्धचालक और यौगिक अर्धचालक के उदाहरण निम्न हैं:
(i) तात्विक अर्धचालक (Elemental Semiconductors)- Si और Ge
(ii) यौगिक अर्धचालक:
उदाहरण हैं
अकार्बनिक – Cas, GaAs, CdSe, InP आदि।
कार्बनिक – एंथ्रासीन, मांदित (Doped) थैलोस्यानीस आदि।
कार्बनिक बहुलक (Organic polymers ) – पॉलीपाइरोल, पॉलीऐनिलीन, पॉलीथायोफीन आदि।

प्रश्न 3.
C, Si तथा Ge की जालक (Lattice) संरचना समान होती है फिर भी क्यों C विद्युतरोधी है जबकि Si व Ge नैज अर्धचालक (intrinsic semiconductor) हैं?
उत्तर:
C, Si तथा Ge के परमाणुओं के चार बंधित इलेक्ट्रॉन क्रमशः द्वितीय, तृतीय तथा चतुर्थ कक्षा में होते हैं अतः इन परमाणुओं से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा (आयनिक ऊर्जा Eg) सबसे कम Ge के लिए इससे अधिक Si के लिए और सबसे अधिक C के लिए होगी। इस प्रकार Ge व Si में विद्युत चालन के लिए स्वतंत्र इलेक्ट्रॉनों की संख्या सार्थक होती है जबकि C में यह नगण्य होती है।

प्रश्न 4.
क्या P-N संधि बनाने के लिए हम P प्रकार के अर्धचालक की एक पट्टी को N प्रकार के अर्धचालक से भौतिक रूप से संयोजित कर P-N संधि प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
नहीं! कोई भी पट्टी, चाहे कितनी ही समतल हो, अंतर- परमाण्वीय क्रिस्टल अंतराल (~ 2 से 3 Ā) से कहीं ज्यादा खुरदरी होगी और इसलिए परमाण्वीय स्तर पर अविच्छिन्न संपर्क (अथवा संतत संपर्क) संभव नहीं होगा प्रवाहित होने वाले आवेश वाहकों के लिए संधि एक विच्छिन्नता की तरह व्यवहार करेगी।

प्रश्न 5.
यह ज्ञात है कि पश्चदिशिक बायस की धारा (माइक्रो ऐम्पियर) की तुलना में अग्रदिशिक बायस की धारा (मिली ऐम्पियर) अधिक होती है तो फिर फोटोडायोड को पश्चदिशिक बायस में प्रचालित करने का क्या कारण है?
उत्तर:
N प्रकार के अर्धचालक पर विचार करें। स्पष्टतया बहुसंख्यक वाहकों का घनत्व (n) अल्पांश होल घनत्व p से बहुत अधिक है (n >> p)। मान लीजिए प्रदीप्त करने पर दोनों प्रकार के वाहकों की संख्या में वृद्धि क्रमश: ∆n तथा ∆p है, तब
n’ = n + ∆n
p’ = p + ∆p
यहाँ पर n’ तथा p’ क्रमशः किसी विशिष्ट प्रदीप्त पर इलेक्ट्रॉन तथा होल सांद्रताएँ हैं तथा n व p उस समय की वाहक सांद्रताएँ हैं जब कोई प्रदीप्त नहीं है।

प्रश्न 6.
ऊर्जा बैण्ड की अवधारणा को चित्र सहित समझाइये
उत्तर:
ऊर्जा बैण्ड- जब किसी ठोस के दो परमाणु पास-पास आते हैं तो अन्योन्य क्रिया के फलस्वरूप प्रत्येक ऊर्जा स्तर दो भिन्न ऊर्जा के ऊर्जा स्तरों में विभक्त हो जाता है जिनमें से एक स्तर की ऊर्जा मूल ऊर्जा स्तर से अधिक व दूसरे ऊर्जा स्तर की ऊर्जा मूल स्तर से कम होती है। इनमें ऊर्जा अंतर बहुत कम होता है। इसी तरह N परमाणुओं के निकाय में अन्योन्य क्रिया के फलस्वरूप प्रत्येक परमाणु के ऊर्जा स्तर N-भिन्न ऊर्जा के ऊर्जा स्तरों में विभक्त हो जाते हैं। इन ऊर्जा स्तरों में ऊर्जा स्तर अत्यंत अल्प होने के कारण इनमें विभेदन संभव नहीं है। अतः ऊर्जा बैण्ड का निर्माण हो जाता है, इस प्रकार प्रत्येक ऊर्जा स्तर के संगत ऊर्जा बैण्ड बन जाता है।
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प्रश्न 7.
संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड क्या होते हैं? वर्जित ऊर्जा अन्तराल की परिभाषा बताइये।
उत्तर:
संयोजी बैण्ड-ठोस की साम्यावस्था में परमाणुओं के मध्य निश्चित संतुलित दूरी होती है। इस दूरी पर बाह्य ऊर्जा स्तर बैण्ड का रूप धारण कर लेते हैं। ठोस के परमाणुओं की संयोजी कक्षा से बने बैण्ड को संयोजी बैण्ड कहते हैं। चालन बैण्ड-संयोजी बैण्ड के ऊपर एक ओर अनुमत बैण्ड होता है, जिसे चालन बैण्ड कहते हैं।
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वर्जित ऊर्जा अन्तराल संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड के मध्य ऊर्जा अन्तराल को वर्जित ऊर्जा अन्तराल कहते हैं। इस वर्जित ऊर्जा बैण्ड में इलेक्ट्रॉन नहीं रह सकता है। वर्जित ऊर्जा अन्तराल (∆E) चालन बैण्ड के निम्नतम स्तर की ऊर्जा E व संयोजी बैण्ड के उच्चतम स्तर की ऊर्जा E के अंतर के बराबर होता है।
∆Eg = Ec – Ev

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प्रश्न 8.
ऊर्जा बैण्ड सिद्धान्त के आधार पर अर्धचालकों को परिभाषित कीजिये अर्धचालक में आवेश वाहक कौन-कौनसे होते हैं? परम शून्य ताप पर अर्धचालक किसकी तरह व्यवहार करने लग जाते हैं?
उत्तर:
अर्धचालक-वे पदार्थ जिनके लिए वर्जित ऊर्जा अन्तराल का मान लगभग 1eV होता है, उन्हें अर्धचालक कहते हैं। उदाहरण के लिये, Si के लिये यह अन्तराल 1.1 eV, Ge के लिये 0.7 eV तथा गैलियम आर्सेनाइड के लिये 1.3 eV होता है। अर्धचालकों में इलेक्ट्रॉन तथा होल आवेशवाहक का कार्य करते हैं। अर्धचालकों की प्रतिरोधकता व चालकता चालकों व कुचालकों के मध्य होती है। कक्ष ताप पर कुछ इलेक्ट्रॉन तापीय ऊर्जा से उत्तेजित होकर संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में चले जाते हैं व विद्युत धारा का निश्चित मात्रा में चालन करते हैं। परम शून्य ताप पर इलेक्ट्रॉन की तापीय ऊर्जा शून्य होती हैं, अतः इनकी गति अवरुद्ध हो जाती है। अतः अर्धचालक बाह्मीय विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में धारा चालन नहीं कर पाता है एवं कुचालक की तरह व्यवहार करता है। अर्धचालकों का प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है।

प्रश्न 9
बाहरी वि. क्षेत्र की उपस्थिति में अर्धचालकों में धारा प्रवाह को सचित्र समझाइये।
उत्तर:
कक्ष ताप पर अर्ध चालकों के कुछ इलेक्ट्रॉन सह- संयोजी आबन्ध तोड़कर संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में संक्रमण कर
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जाते हैं। सहसंयोजी बन्ध के टूटने से वहाँ रिक्त स्थान हो जाता है, इसे होल कहते हैं। इलेक्ट्रॉन के संक्रमण के कारण उत्पन्न यह होल धनावेशित कण की तरह व्यवहार करता है। इस तरह होल धनावेशित धारावाहक का कार्य करता है। सहसंयोजी आबंध स्थल से मुक्त इलेक्ट्रॉन के स्थान पर उत्पन्न होल की तरफ अन्य किसी सह- संयोजी आबंध स्थल से इलेक्ट्रॉन संक्रमण करता है व होल द्वितीय सहसंयोजी आबंध स्थल की ओर गति करता है। इस प्रकार होल व इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे से विपरीत दिशा में यादृच्छिक गति करते हैं। बाह्य वि. क्षे. आरोपित करने पर इनकी गति नियमित हो जाती है। जिसमें इसे वि. क्षे. की दिशा में व होल वि. क्षे. के विपरीत दिशा में गति करते हैं व धारा का चालन करते हैं।

प्रश्न 10.
अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन व होल एक-दूसरे से विपरीत दिशा में गति करते हैं कैसे? सचित्र समझाइये।
उत्तर:
अर्धचालक में कुछ इलेक्ट्रॉन कक्ष ताप पर तापीय ऊर्जा प्राप्त कर उत्तेजित होकर संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में संक्रमण कर जाते हैं। इलेक्ट्रॉन के चले जाने के कारण उत्पन्न रिक्त स्थान को ‘होल’ कहते हैं। होल धनावेशित कण की तरह व्यवहार करता है।
(i) सहसंयोजी आबंध स्थल A से इलेक्ट्रॉन के संक्रमण कर – जाने पर उत्पन्न होल की तरफ किसी अन्य सह-संयोजी आबंध स्थल B पर स्थित इलेक्ट्रॉन तापीय ऊर्जा ग्रहण करके संक्रमण करता है। इससे होल A से B पर पहुँच जाता है।
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(ii) B स्थल पर किसी अन्य स्थल C पर स्थित इलेक्ट्रॉन के संक्रमण कर जाने पर होल C पर पहुँच जाता है अतः इस तरह इलेक्ट्रॉन CBA दिशा में व होल ABC दिशा में संक्रमण करता है।
इस तरह होल व इलेक्ट्रॉन परस्पर विपरीत दिशा में गति करते हैं।

प्रश्न 11.
बाह्य अर्धचालक किसे कहते हैं? डोपिंग क्रिया को समझाइये।
उत्तर:
बाह्य अर्धचालक कक्ष ताप पर नैज अर्धचालकों की चालकता बहुत कम होती है अतः चालकता बढ़ाने के लिये नैज अर्धचालक में अल्प मात्रा में तीसरे या पांचवें ग्रुप का निश्चित तत्त्व मिलाया जाता है। इस प्रकार प्राप्त अर्धचालक को अपद्रव्य अर्धचालक या बाह्य अर्धचालक कहते हैं। डोपिंग नै अर्धचालक में अशुद्धि परमाणु मिलने की क्रिया को मांदन या डोपिंग कहते हैं। बाह्य अर्धचालक प्राप्त करने के लिये नैज अर्धचालक में लगभग (10) से (10) 10 परमाणुओं में एक परमाणु अशुद्धि तत्त्व का होता है।

प्रश्न 12.
N प्रकार के अर्धचालक किन्हें कहते हैं? इनकी चालकता नैज अर्धचालकों से अधिक होती है क्यों? सचित्र समझाइये।
उत्तर:
N प्रकार के अर्धचालक नैज अर्धचालक में पंचम वर्ग के तत्त्व, जैसे – As, Sb P आदि अपद्रव्य परमाणु के रूप में मिला देने पर प्राप्त अर्धचालक को N प्रकार का अर्धचालक कहते हैं। फॉस्फोरस, आर्सेनिक या एन्टीमनी की संयोजकता कक्षा में पाँच इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः जब एक पंच संयोजी अशुद्धि का परमाणु चतुःसंयोजी Ge या Si को प्रस्थापित करता है तो इसके चार संयोजकता इलेक्ट्रॉन तो निकटवर्ती चार परमाणुओं के साथ सह-संयोजी आबंध बना लेते हैं, परन्तु एक संयोजकता इलेक्ट्रॉन शेष रह जाता है। इस पर अशुद्धि परमाणु से बंधन अत्यन्त दुर्बल होने के कारण यह लगभग मुक्त रहता है। अतः सामान्य ताप पर ही यह मुक्त इलेक्ट्रॉन चालन बैण्ड में संक्रमण कर जाता है। इस प्रकार पंचम वर्ग के अशुद्धि तत्त्व का प्रत्येक परमाणु एक मुक्त इलेक्ट्रॉन, आवेश वाहक के रूप में प्रदान करता है। इस कारण से आवेश वाहकों की संख्या में वृद्धि के फलस्वरूप चालकता भी बढ़ जाती है।

प्रश्न 13.
ताप बढ़ाने पर अर्धचालकों की चालकता कैसे बढ़ती है?
उत्तर:
अर्धचालकों पर ताप का प्रभाव – अर्धचालकों का ताप बढ़ाने पर तापीय ऊर्जा से उत्तेजित होकर अधिक मात्रा में इलेक्ट्रॉन संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में संक्रमण करते हैं। अतः अधिक मात्रा में होल उत्पन्न होते हैं इस तरह ताप बढ़ाने पर आवेश वाहकों की संख्या बढ़ जाने से चालकता बढ़ती है। अर्धचालकों का प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है परम शून्य ताप पर अर्धचालक कुचालक की तरह व्यवहार करते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

प्रश्न 14.
अर्धचालक पर बाह्य विद्युत क्षेत्र आरोपित करने पर कौन-कौनसी धारायें उत्पन्न होती हैं?
उत्तर:
जब किसी अर्धचालक पर बाह्य विद्युत क्षेत्र आरोपित किया जाता है तो आवेश वाहक दो तरह की धारायें उत्पन्न करते हैं
(1) अपवाह धारा – यह धारा आवेश वाहकों की बाह्य वि. क्षे. के अनुदिश गति के फलस्वरूप उत्पन्न होती है।
(2) विसरण धारा- यह धारा अर्धचालक में मुक्त आवेश वाहकों की उच्च सान्द्रता क्षेत्र से निम्न सान्द्रता क्षेत्र की ओर गति के कारण उत्पन्न होती है।

प्रश्न 15.
N तथा P प्रकार के अर्धचालकों में धारा प्रवाह समझाइये।
उत्तर:
N प्रकार के अर्धचालकों में क्रिस्टल के अन्दर तथा बाह्य परिपथ दोनों में धारा इलेक्ट्रॉनों के माध्यम से बहती है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 24
P- प्रकार के अर्धचालकों में अर्धचालक क्रिस्टल के अन्दर धारा होल्स के माध्यम से तथा बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉनों के माध्यम से बहती है।

प्रश्न 16.
P-N संधि किसे कहते हैं ? P-N संधि बनाने की विधियों का नाम लिखिये P-N संधि बनाने की विसरण विधि को समझाइये
उत्तर:
P-N संधि-P तथा N प्रकार के अर्धचालकों को आपस में जोड़कर इस प्रकार रखा जाये कि सम्पर्क तल के परमाणु आपस में एक-दूसरे से मिल जायें तो इस प्रकार बने सम्पर्क तल को P-N संधि कहते हैं। P-N संधि बनाने की तीन विधियाँ हैं:
(1) वर्धन (2) विसरण (3) धातु मिश्रण
P-N संधि बनाने की विसरण विधि इसमें उच्च ताप पर मफल भट्टी में नैज अर्धचालक के वैफर को उचित अशुद्धि को वाष्प के सम्पर्क में लाकर अपद्रव्य अर्धचालक का निर्माण किया जाता है।
इस प्रकार से प्राप्त अपद्रव्य अर्धचालक को अब विपरीत अशुद्धि परमाणुओं (P-प्रकार के अर्धचालक को V वर्ग के तत्त्व से तथा N- प्रकार के अर्धचालक को III वर्ग के तत्त्व से) के सम्पर्क में लाकर विसरण कराया जाता है। विसरण की मात्रा गहराई के साथ कम होती जाती है। फलस्वरूप क्रिस्टल में जहाँ तक अशुद्धि होती है, वहाँ तक संधि उपस्थित हो जाती है।

प्रश्न 17.
आदर्श P-N संधि डायोड के लिये सम्पूर्ण I-V अभिलाक्षणिक वक्र बनाइये। अग्र बायस अवस्था में गतिक प्रतिरोध परिभाषित कीजिये।
उत्तर:
एक अग्रदिशिक अभिनत P-N संधि डायोड के VI अभिलाक्षणिक प्राप्त किये जाने के लिये प्रायोगिक परिपथ व्यवस्था को चित्र में प्रदर्शित किया गया है।HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 25

यहाँ पर विभव भाजक व्यवस्था के द्वारा डायोड पर आरोपित विभवान्तर V को परिवर्तित किया जाता है जिसे डायोड के समान्तर क्रम में लगे वोल्टमीटर द्वारा पढ़ा जा सकता है। विभव के अलग- अलग मानों के संगत डायोड में बहने वाली धारा को मिली. अमीटर द्वारा नोट किया जाता है। इस प्रकार से V तथा I के मानों में खींचा गया वक्र चित्रानुसार प्राप्त होता है।
अग्र गतिक प्रतिरोध: परिभाषा से अग्र गतिक प्रतिरोध
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 26
चित्र में बिन्दु C के निकट अग्र प्रतिरोध की गणना के लिये. ∆V तथा I को दर्शाया गया है। यदि ∆V व ∆I अत्यल्प हैं तो बिन्दु C पर गतिक प्रतिरोध इस बिन्दु पर वक्र पर खींची गयी स्पर्श रेखा (tangent ) के बाल (slope ) के मान का व्युत्क्रम होगा। अग्र गतिक प्रतिरोध का मान सामान्यतः अल्प (1 से 100 ओम) का होता है।

प्रश्न 18.
सौर सेलों के लिए Si और GaAs अधिक पसंद वाले पदार्थ क्यों हैं?
उत्तर:
हमें प्राप्त होने वाला सौर विकिरण स्पेक्ट्रम नीचे चित्र में दिखाया गया है। अधिकतम तीव्रता 1.5 इलेक्ट्रॉन बोल्ट के पास है। प्रकाश- उत्तेजन के लिए hu> Eg इसलिए ऐसे अर्धचालकों जिनका बैंड अंतराल 1.5 इलेक्ट्रॉन वोल्ट या उससे कम हो, के लिए सौर ऊर्जा के रूपांतरण की दक्षता अच्छी होने की संभावना है। सिलिकॉन के लिए Eg ~ 1.1 eV (इलेक्ट्रॉन वोल्ट) जबकि GaAs के लिए यह इलेक्ट्रॉन वोल्ट है। वास्तव में अपेक्षाकृत अधिक अवशोषण गुणांक के कारण GaAs (अधिक बैंड अंतराल होने पर भी) Si से ज्यादा अच्छा है। यदि हम Cds या Cd Se (Eg 2.4 eV) जैसे पदार्थों को चुनें तो प्रकाश रूपांतरण के लिए हम सौर ऊर्जा के केवल उच्च ऊर्जा घटक का इस्तेमाल कर सकते हैं और ऊर्जा के एक सार्थक भाग का कोई उपयोग नहीं हो पाएगा प्रश्न यह उठता है कि हम PbS (Eg 0.4 इलेक्ट्रॉन वोल्ट) जैसे पदार्थ क्यों नहीं उपयोग करते, जो सौर विकिरण के स्पेक्ट्रम के तदनुरूपी उच्चिष्ठ के लिए ho> Eg का प्रतिबंध संतुष्ट करते हैं? यदि हम ऐसा करेंगे तो सौर विकिरण का अधिकांश भाग सौर सेल की ऊपरी परत पर ही अवशोषित हो जाएगा और हासी क्षेत्र में या उसके पास नहीं पहुँचेगा। संधि क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन होल के प्रभावी पृथकन के लिए हम चाहते हैं कि प्रकाश जनन केवल संधि क्षेत्र में ही हो।
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प्रश्न 19.
LED से उत्सर्जित प्रकाश की (i) आवृत्ति, (ii) तीव्रता का निर्धारण करने वाले कारक क्या हैं?
उत्तर:
(i) LED से उत्सर्जित प्रकाश की आवृत्ति LED में प्रयुक्त अर्द्ध-चालक पदार्थ पर निर्भर करती है, जैसे GaP सन्धि पर अधिकांश ऊर्जा लाल तथा हरे प्रकाश के रूप में उत्सर्जित होती है। GaAsP सन्धि नीला तथा पीला प्रकाश उत्सर्जित करती है।
(ii) LED से उत्सर्जित प्रकाश की तीव्रता प्रयुक्त अर्द्धचालक के वर्जित ऊर्जा बैण्ड अन्तराल पर निर्भर करती है।

प्रश्न 20.
तर्क द्वार से आप क्या समझते हैं? AND द्वार का प्रतीक चिन्ह बनाते हुये इसकी सत्यता सारणी दीजिये।
उत्तर:
तर्क द्वार – तार्किक या लोजिक गेट अंकीय इलेक्ट्रॉनिक परिपथ के आधारभूत भाग हैं। एक तार्किक द्वार ऐसा तर्कसंगत परिपथ होता है जिसमें एक या अधिक निवेशी टर्मिनल किन्तु केवल एक निर्गत टर्मिनल होता है। निर्गत टर्मिनल पर केवल उसी समय निर्गत संकेत प्राप्त होता है जब निवेशी टर्मिनल पर कुछ प्रतिबंध संतुष्ट हो रहे होते हैं अर्थात् निवेशी संकेत ( या संकेतों) के मध्य एक तर्कसंगत सम्बन्ध होता है। मूल तार्किक द्वार निम्न होते हैं-
(i) ओर द्वार (OR Gate)
(ii) एन्ड द्वार (AND Gate)
(iii) नॉट द्वार (NOT Gate)
AND द्वार का प्रतीक चिन्ह:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 28
सत्य सारणी:

निवेशी(Input)निर्गत
Y
AB
000
101
011
111

जब कोई भी निवेश (Input) A या B या दोनों O अवस्था में होते हैं तो निर्गत X भी ‘O’ अवस्था में होता है, परन्तु जब निवेश A और B दोनों ‘1’ अवस्था में होते हैं तो निर्गत Y भी ‘1’ अवस्था में होता है।

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प्रश्न 21.
दो संधि डायोड काम लेते हुये बनाये जाने वाले OR द्वार का परिपथ चित्र बनाइये तथा इसकी सत्यता सारणी दीजिये।
उत्तर:
OR द्वार का परिपथ चित्र:
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सत्य सारणी:

निवेशी(Input)निर्गत
Y
AB
000
101
011
111

प्रश्न 22.
चित्र में दिये गये तार्किक परिपथ के लिये बूलीय व्यंजक लिखिये। इस परिपथ के लिए सत्यता सारणी भी बनाइये।
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उत्तर:

AB\(\overline{\mathrm{A}}\)\(\overline{\mathrm{B}}\)\(\overline{\mathrm{A} \cdot \mathrm{B}}\)
00111
10011
01101
11000

प्रश्न 23.
किसी P-N संधि में हासी स्तर (अवक्षय परत) के बनने की व्याख्या कीजिए।
अथवा
एक परिपथ आरेख की सहायता से किसी ट्रांजिस्टर प्रवर्धक को दोलित्र के रूप में उपयोग करने के कार्यकारी सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अवक्षय परत: जब P तथा N प्रकार के अर्धचालकों को आपस में जोड़कर इस प्रकार रखा जाये कि सम्पर्क तल के परमाणु आपस में एक-दूसरे से मिल जायें तो इस प्रकार बने सम्पर्क तल को P-N संधि कहते हैं।
P-N संधि तल पर क्रिया: P-N संधि में P की ओर होल सांद्रता व N की ओर इलेक्ट्रॉन सांद्रता अधिक होने के कारण सांद्रता प्रवणता तथा होल- इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता के प्रभाव से N भाग से कुछ इलेक्ट्रॉन P की ओर तथा P भाग से कुछ होल N भाग की ओर विसरित होते हैं। विपरीत ध्रुवीय होल व इलेक्ट्रॉन आपस में संयोग कर उदासीन हो जाने से संधि से N के निकटस्थ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन तथा P के निकटस्थ क्षेत्र में होल्स की कमी हो जाती है।

इस मुक्त धारावाहक रहित क्षेत्र को अवक्षय क्षेत्र तथा मुक्त आवेशरहित इस परत को अवक्षय परत कहते हैं। इसकी मोटाई 10 m से 10m तक होती है। अवक्षय परत के N की ओर के स्थिर धन आयन P की ओर से आने वाले होल्स को तथा P की ओर के स्थिर ऋण आयन N की ओर से आने वाले इलेक्ट्रॉनों को प्रतिकर्षित करते हैं। अतः संधि तल के पास P भाग में ऋण आवेश की अधिकता से ऋण विभव तथा N भाग में धन आवेश की अधिकता से धन विभव उत्पन्न हो जाते हैं। इस प्रकार से अवक्षय परत के सिरों पर उत्पन्न वि. वा. बल को अवरोधी या सम्पर्क विभव कहते हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 31
यदि अवरोधी विभव (Vcont.) हो तथा अवक्षय क्षेत्र की मोटाई d हो तो अवरोधी विभव से उत्पन्न विद्युत् क्षेत्र EB का मान होगा
EB = Vcont/d
यह विद्युत् क्षेत्र गतिशील होल व इलेक्ट्रॉन को अवक्षय परत पर P की ओर से आने वाले होलों को पुनः P क्षेत्र में तथा N की ओर से आने वाले इलेक्ट्रॉनों को पुनः N क्षेत्र में लौटाता है। अवक्षय परत को रुकावट क्षेत्र भी कहते हैं। इस क्षेत्र की प्रतिरोधकता शेष N व P क्षेत्र की तुलना में बहुत अधिक होती है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 32
कार्यविधि – चित्र में ट्रांजिस्टर के दोलित्र के रूप में उपयोग का परिपथ चित्र प्रदर्शित किया गया है। जब कुंजी बन्द करते हैं तो क्षीण मान की संग्राहक धारा I बहती है और इस कारण L से पारित चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है जिससे उत्पन्न प्रेरित वोल्टता उत्सर्जक आधार सन्धि को अग्रबायस प्रदान करती है। इस प्रकार बढ़ी हुई उत्सर्जक धारा, संग्राहक धारा को बढ़ा देती है। जिससे L’ से पारित चुम्बकीय फ्लक्स में वृद्धि होती है और वह संग्राहक धारा में और वृद्धि कर उसे संतृप्त धारा की स्थिति में ला देती है। जब संतृप्त अवस्था में धारा एवं चुम्बकीय फ्लक्स की अवस्था में परिवर्तन होते हैं तो उत्सर्जक धारा घटती है जो संग्राहक धारा का मान कम कर देती है। घटी हुई संग्राहक धारा विपरीत दिशा में प्रेरित वोल्टता उत्पन्न करती है, जब तक कि उसका मान न्यूनतम न हो जावे। इस तरह से इस चक्र की पुनरावृत्ति होने से उत्पन्न अवमंदित दोलन की आवृत्ति निम्न सूत्र द्वारा दी जाती है
V = \(\frac{1}{2 \pi \sqrt{L C}}\)

प्रश्न 24.
दो निवेशी तर्क द्वार की निम्नांकित सत्यमान सारणी में निर्गत संकेत दिया गया है:
(i) दिये गये द्वार की पहचान कर प्रतीक चित्र खींचिये।
(ii) यदि इस द्वार के निर्गत को ‘NOT’ द्वार में निवेश किया जाये तो नवनिर्मित द्वार का नाम बताइए।

निवेशनिर्गम
ABY
001
101
011
110

उत्तर:
(i) दिया गया द्वार NAND है। इसका प्रतीक चित्र निम्न
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 33
(ii) यदि इस द्वार के निर्गत को ‘NOT’ द्वार में निवेश किया जाये तो नवनिर्मित द्वार AND द्वार में परिवर्तित हो जाता है।

InputOutput
10
10
10
01

प्रश्न 25.
ठोसों में ऊर्जा बैंड के आधार पर चालक, कुचालक एवं अर्ध चालक के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा बैंड के आधार पर चालक, कुचालक एवं अर्ध- चालक के मध्य अन्तर को निम्न प्रकार से बाँटा गया है
(i) चालक-वे पदार्थ जिनके लिए वर्जित ऊर्जा अन्तराल Eg प्रायः शून्य होता है, चालक पदार्थ कहलाते हैं। इनमें संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड परस्पर अतिव्यापित रहते हैं।
(ii) कुचालक-वे पदार्थ जिनके लिए संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड के मध्य स्थित वर्जित ऊर्जा अन्तराल ∆Eg का मान 6eV या इससे अधिक होता है, इन्हें कुचालक या विद्युतरोधी पदार्थ कहते हैं।
(iii) अर्ध-चालक-वे पदार्थ जिनके लिए संयोजी बैण्ड व चालन बैण्ड के मध्य स्थित वर्जित ऊर्जा अन्तराल का मान 1eV के लगभग होता है, उन्हें अर्द्धचालक पदार्थ कहते हैं।

प्रश्न 26.
LED का विस्तृत अर्थ बताइए। उन कारकों को बताइए जो LED द्वारा उत्सर्जित प्रकार की (i) आवृत्ति, (ii) तीव्रता को निर्धारित करते हैं।
उत्तर:
LED का विस्तृत रूप Light Emitting Diode है, जिसका अर्थ है प्रकाश उत्सर्जक डायोड इसके द्वारा उत्सर्जित प्रकाश की (i) आवृत्ति LED में प्रयुक्त अर्द्धचालक की ऊर्जा बैण्ड रिक्ति पर निर्भर करती है। (ii) तीव्रता अर्द्धचालक के मादन स्तर पर निर्भर करती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ

प्रश्न 27.
सामान्य ट्रांजिस्टर की तुलना में यदि इसका आधार क्षेत्र चौड़ा बना दिया जाये तो इससे निम्न पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (i) संग्राहक धारा (ii) धारा लब्धि
उत्तर:
यदि आधार क्षेत्र चौड़ा बना दिया जाये तो उत्सर्जक से आने वाले अधिकांश आवेश वाहक आधार में उदासीन हो जायेंगे (इलेक्ट्रॉन – कोटर संयोग प्रक्रिया द्वारा) अतः इसके परिणामस्वरूप (i) संग्राहक धारा घट जायेगी, (ii) अतः धारा लब्धि भी घट जायेगी।

प्रश्न 28.
P-N संधि डायोड के अग्रदिशिक बायस (अभिनति) में V- I अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की कार्यविधि का वर्णन कीजिए। प्रायोगिक व्यवस्था का परिपथ चित्र बनाइए।
उत्तर:
किसी डायोड के V – I अभिलाक्षणिक (अनुप्रयुक्त की गई वोल्टता के फलन के रूप में धारा का विचरण) का अध्ययन करने के लिए आरेख चित्र (a) में दिखाया गया है। डायोड से वोल्टता को एक पोटेंशियोमीटर (या धारा नियंत्रक) से होकर जोड़ा जाता है जिससे डायोड पर अनुप्रयुक्त की गई वोल्टता को परिवर्तित किया जा सकता है। वोल्टता के विभिन्न मानों के लिए धारा का मान नोट किया जाता है। V तथा I के बीच एक ग्राफ चित्र (b) में दिखाया गया है।

यहाँ पर अग्रदिशिक बायस मापन के लिए हम मिलीमीटर का उपयोग करते हैं क्योंकि अपेक्षित धारा अधिक है। जैसा कि चित्र में देख सकते हैं कि अग्रदिशिक बायस में आरम्भ में धारा उस समय तक बहुत धीरे-धीरे लगभग नगण्य बढ़ती जब तक कि डायोड पर वोल्टता एक निश्चित मान से अधिक न हो जाये। इस अभिलाक्षणिक वोल्टता के बाद डायोड बायस वोल्टता में बहुत थोड़ी-सी ही वृद्धि करने से डायोड धारा में सार्थक (चरघातांकी) वृद्धि हो जाती है। यह वोल्टता देहली वोल्टता (Threshold Voltage) या कट इन वोल्टता कहलाती है। इस वोल्टता का मान जरमेनियम डायोड के लिए 0.2 वोल्ट तथा सिलिकॉन डायोड के लिए 0.7 वोल्ट है।
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प्रश्न 29.
दिये गये परिपथ चित्र में प्रयुक्त युक्ति D का नाम बताइए जो कि एक वोल्टता नियामक के रूप में प्रयुक्त की गई है। इसका संकेत भी दीजिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 35
उत्तर:
जीनर डायोड इसका संकेत चित्र-
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प्रश्न 30.
p-n संधि के निर्माण के लिए दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के नाम लिखिए। इसमें हासी क्षेत्र (अवक्षय क्षेत्र) एवं रोधिका विभव को परिभाषित कीजिए।
अथवा
दो सार्वत्रिक तार्किक द्वारों के नाम लिखिए। एकीकृत परिपथ किसे कहते हैं? इसके दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
किसी संधि के निर्माण के समय दो महत्वपूर्ण
प्रक्रियायें होती हैं-
(1) विसरण (Diffusion)
(2) अपवाह
हासी क्षेत्र (Depletion Region): जब कोई होल सान्द्रता प्रवणता के कारण pn की ओर विसरित होता है तो वह अपने पीछे एक आयनित ग्राही (ऋणात्मक आवेश) छोड़ देता है जो निश्चल होता है। जैसे-जैसे होल विसरित होते हैं, ऋणात्मक आवेश (ऋणात्मक स्पेस चार्ज क्षेत्र) की एक परत संधि के p-फलक पर विकसित होती जाती है। संधि के दोनों फलकों पर विकसित इस स्पेस चार्ज क्षेत्र को हासी क्षेत्र (Depletion Region ) कहते हैं।
रोधिका विभव (Barrier Potential)-n क्षेत्र से इलेक्ट्रॉनों की हानि तथा p-क्षेत्र में होलों की प्राप्ति के कारण दोनों क्षेत्रों की सन्धि के आर-पार एक विभवान्तर उत्पन्न हो जाता है। इस विभव की ध्रुवता इस प्रकार होती है कि यह आवेश वाहकों की ओर प्रवाह का विरोध करता है जिसके फलस्वरूप साम्यावस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसमें n पदार्थ ने इलेक्ट्रॉन खोए हैं तथा p-पदार्थ ने इलेक्ट्रॉन अर्जित किये हैं। इस प्रकार p-पदार्थ के सापेक्ष n पदार्थ धनात्मक है। चूँकि विभव n-क्षेत्र से p-क्षेत्र की ओर इलेक्ट्रॉन की गति को रोकने का प्रयास करता है, अतः इस विभव को प्रायः रोधिका विभव (Barrier Potential ) कहते हैं।
अथवा
(1) NAND gate
(2) NOR gate
एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) – आधुनिक युग के परिपथ में कई तर्कसंगत गेट अथवा परिपथों को एक एकल चिप’ में एकीकृत करते हैं, जिन्हें एकीकृत परिपथ (IC) कहते हैं।
लाभ:
(1) यह बहुत ज्यादा मात्रा (Bulk) में बनते हैं इसलिये ये सस्ते पड़ते हैं।
(2) इनमें ऊर्जा की खपत कम होती है चूँकि इनका आकार छोटा होता है।

प्रश्न 31.
(a) NAND गेट को सार्वत्रिक गेट (सार्व प्रायोजक गेट) भी कहते हैं, क्यों?
(b) OR गेट का तर्क प्रतीक बनाइए।
(c) दिए गये परिपथ में निर्गत y का मान लिखिए:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 37
(d) वोल्टता नियमन में प्रयुक्त डायोड का नाम लिखिए।
उत्तर:
(a) NAND गेटों को सार्वत्रिक गेट या सार्व प्रायोजक गेट भी कहते हैं, क्योंकि इन गेटों के प्रयोग से आप अन्य मूलभूत गेट जैसे OR, AND तथा NOT प्राप्त कर सकते हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 38
(c) यहाँ NAND गेट के दोनों निवेशी टर्मिनल एक साथ जोड़ दिये गये हैं। इस प्रकार एक निवेश के लिये एक ही निर्गत Y है। अतः दिये गये परिपथ की सत्यापन सारणी के द्वारा लिखा जा सकता है:

AB = AA.BY = \(\overline{\bar{A}} \cdot \overline{\bar{B}}\)
1110

अतः Y = 0 होगा।
(d) जेनर डायोड

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प्रश्न 32.
दो NOT गेटों के निर्गतों से किसी NOR गेट का भरण किया जाता है। इन गेटों के संयोजन का लॉजिक (तर्क) परिपथ चिए। इसकी सत्यमान सारणी लिखिए। इस परिपथ के तुल्य गेट की पहचान कीजिए।
उत्तर:
G1 का आउटपुट = \(\overline{\mathrm{A}}\)
G2 का आउटपुट = \(\overline{\mathrm{B}}\)
गेट G3, NOR गेट है, इसका इनपुट \(\overline{\mathrm{A}}\) और \(\overline{\mathrm{B}}\) है।
इसलिए G3 का आउटपुट Y = \(\overline{\overline{\mathrm{A}}+\overline{\mathrm{B}}}\) = \(\overline{\overline{\mathrm{A}}} \cdot \overline{\overline{\mathrm{B}}}\) = AB
यह AND गेट के लिए बूलन व्यंजक है।
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प्रश्न 33.
आपको आरेख में दर्शाए अनुसार दो परिपथ (a) और (b) दिए गए हैं जो NAND गेटों के बने हैं। इन दोनों के द्वारा कार्यान्वित लॉजिक (तर्क) प्रचालन पहचानिए। प्रत्येक के लिए सत्यमान सारणी लिखिए। इन दोनों परिपथों के तुल्य गेटों को पहचानिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 14 अर्द्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ 40
उत्तर:
परिपथ (a)
प्रथम गेट C का आउटपुट = \(\overline{\mathrm{A} \cdot \mathrm{B}}\)
Y का आउटपुट = \(\overline{\text { C.C C }}\) = \(\overline{\mathrm{C}}\) = \(\overline{\mathrm{A} \cdot \mathrm{B}}\) = AB

ABY
000
100
010
111

यह AND गेट के लिए बूलन व्यंजक है।

परिपथ (b)
आउटपुट C= \(\overline{\mathrm{A}}\), आउटपुट D = \(\overline{\mathrm{B}}\)
आउटपुट Y = \(\overline{\bar{A}} \cdot \overline{\bar{B}}\) = \(\overline{\overline{\mathrm{A}}}+\overline{\overline{\mathrm{B}}}\) = A + B

ABY
000
101
011
110

यह ओर गेट के लिए बूलन व्यंजक है।

आंकिक प्रश्न:

प्रश्न 1.
किसी नैज अर्धचालक के लिए वर्जित ऊर्जा अन्तराल Eg इलेक्ट्रॉन वोल्ट है तो इस अर्धचालक द्वारा किस अधिकतम तरंगदैर्ध्य के आपतित प्रकाश का अवशोषण किया जा सकता है?
उत्तर:
यदि आपतित प्रकाश के फोटॉन की आवृत्ति v है तो इन फोटॉन की ऊर्जा hu होगी। यदि आपतित फोटॉन की ऊर्जा का मान अर्धचालक के वर्जित ऊर्जा अन्तराल से अधिक है तो अर्धचालक के संयोजकता बैण्ड में उपस्थित इलेक्ट्रॉन इन फोटॉनों को अवशोषित कर चालन बैण्ड में पहुँच सकेंगे। (यह प्रक्रिया प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन-होल युग्म उत्पादन कहलाती है।) अतः फोटॉन की अवशोषण योग्य न्यूनतम आवृत्ति vmin सूत्र
hvmin = Eg
द्वारा दी जायेगी। यदि फोटॉन की अवशोषण योग्य अधिकतम तरंगदैर्घ्य λmax है तो
\(\frac{\mathrm{hc}}{\lambda_{\max }}\) = Eg या λmax = \(\frac{\mathrm{hc}}{\mathrm{E}_{\mathrm{g}}}\)
hc = 12400 eV Å तथा Eg को eV मात्रक में लेने पर
λmax = \(\frac{12400}{E_g}\)

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प्रश्न 2.
किसी संधि डायोड में अग्रिम बायस में विभव के मान में 1.5 वोल्ट से 2.0 वोल्ट का परिवर्तन करने से धारा का मान 6.0 मिली ऐम्पियर 16.0 मिली ऐम्पियर हो जाता है इसी डायोड पर उत्क्रम बायस का मान 10 वोल्ट से 15 वोल्ट किया जाता है तो धारा का मान 25.0 माइक्रोऐम्पियर से 50.0 माइक्रोऐम्पियर हो जाता है संधि डायोड का दोनों स्थितियों में गतिज प्रतिरोध ज्ञात करो।
उत्तर:
अग्रिम बायस पर
तथा
∆Vf = 2.0 – 1.5 = 0.5 वोल्ट
∆lf = ( 16.0 – 6.0) x 10-3 ऐम्पियर
= 10 x 10-3 ऐम्पियर
अतः अग्रिम बायस प्रतिरोध
Rf = \(\frac{\Delta V_{\mathrm{f}}}{\Delta \mathrm{I}_{\mathrm{f}}}\) = \(\frac{0.5}{10 \times 10^{-3}}\)
= 50 ओम
उत्क्रम बायस पर
∆Vr = 15 – 10 = 5 वोल्ट
∆L = 50 x 106 – 25 x 106 = 25 x 10-6 ऐम्पियर
उत्क्रम बायस प्रतिरोध
R,= \(\frac{\Delta V_{\mathrm{r}}}{\Delta \mathrm{I}_{\mathrm{f}}}\) = \(\frac{0.5}{25 \times 10^{-6}}\) ओम
= 2 × 105 ओम

प्रश्न 3.
किसी P-N संधि डायोड की अग्रदशिक अभिनति को 1.0 वोल्ट से बढ़ाकर 1.5 वोल्ट करने पर अग्र धारा का मान 6.5 मिली ऐम्पियर से 16.5 मिली ऐम्पियर हो जाता है। इसी डायोड की उत्क्रम अभिनति का मान 5 वोल्ट से 10 वोल्ट करने पर उत्क्रम धारा का मान 25 माइक्रोऐम्पियर से बढ़कर 50 माइक्रोऐम्पियर हो जाता है। इस डायोड का दोनों स्थितियों में गतिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(i) प्रश्नानुसार, अग्र अभिनति में
∆Vf = 1.5 – 1.0 = 0.5 V
तथा अग्रदिशिक धारा में परिवर्तन
∆lf = 16.5 – 6.5 = 10mA
अतः अग्रदिशिक गतिक प्रतिरोध
Rf = \(\frac{\Delta V_{\mathrm{f}}}{\Delta \mathrm{I}_{\mathrm{f}}}\) = \(\frac{0.5 \mathrm{~V}}{10 \mathrm{~mA}}\)
= \(\frac{0.5 \mathrm{~V}}{10 \times 10^{-3}}\)
= 0.5 × 102
= 50 ओम
(ii) उत्क्रमित अभिनति के लिए
∆Vr = 10 – 5 = 5V
तथा संगत धारा परिवर्तन
∆I = 50 – 25 = 25 PA
अतः उत्क्रमित गतिक प्रतिरोध
Rr = \(\frac{\Delta \mathrm{V}_{\mathrm{r}}}{\Delta \mathrm{I}_{\mathrm{r}}}\)
= \(\frac{5 \mathrm{~V}}{25 \mu \mathrm{A}}\) = \(\frac{5}{25 \times 10^{-6}}\) = \(\frac{1}{5}\) x 106
= 0.2 x 106 ओम
= 0.2 मेगा ओम

प्रश्न 4.
किसी P-N संधि डायोड का अग्रअभिनति की स्थिति में गतिक प्रतिरोध 25 ओम है अग्र अभिनत विभव में कितना परिवर्तन किया जाये कि अप्रदिशिक धारा में 2 मिली ऐम्पियर का परिवर्तन हो जाये?
उत्तर:
अग्रदिशिक प्रतिरोध
Rf = \(\frac{\Delta \mathrm{V}_{\mathrm{f}}}{\Delta \mathrm{I}_{\mathrm{f}}}\)
और
∆Vf = Rf. ∆lf
= (25) × (2 × 103)
∵ ∆lf = 2 mA = 2 × 10-3 A
Rf = 25 ओम
= 50 x 10-3 v
= 50 मिली वोल्ट
अतः 50 mV का परिवर्तन करना होगा।

प्रश्न 5.
यदि बूलियन व्यंजक \((\overline{\mathbf{A}+\mathbf{B}})(\overline{\mathbf{A} . \mathbf{B}})\) = 1 तो निवेश A व B के मान क्या होंगे?
उत्तर:
माना \((\overline{\mathrm{A}+\mathrm{B}})\) = y1 एवं \((\overline{\text { A.B }})\) = y2
अतः (A + B). (A.B) = y1. Y2 = 1
या y1 .y2 = 1
यह तभी सम्भव होगा जब
Y1 = 1 एवं y2 = 1
या \((\overline{\mathrm{A}+\mathrm{B}})\) = 1 एवं \((\overline{\text { A.B }})\) = 1
या A + B = 0 एवं AB = 0
यह तभी सम्भव होगा जब
A = 0, B = 0

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions 3 विद्युत धारा

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. एक विद्युत परिपथ में आदर्श बैटरी को बाह्य प्रतिरोध से जोड़ने पर उसमें धारा प्रवाहित होती है। यदि उसी प्रकार की एक अन्य बैटरी को बैटरी के समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाये तो प्रतिरोध में बहने वाली धारा का मान हो जायेगा-
(अ) 2i
(ब) i
(स) \( \frac{\mathrm{i}}{2}\)
(द) शून्य
उत्तर:
(ब) i

2. किसी विद्युत परिपथ के किसी बिन्दु से 0.5 सेकण्ड में 10 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो रहा है तो परिपथ में विद्युत धारा का मान ऐम्पियर में होगा —
(अ) 10
(ब) 20
(स) 0.005
(द) 0.05
उत्तर:
(ब) 20

3. चालक का प्रतिरोध निर्भर करता है-
(अ) केवल चालक की लम्बाई पर
(ब) केवल चालक के अनुप्रस्थ काट पर
(स) केवल चालक के पदार्थ पर
(द) उपर्युक्त सभी पर
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी पर

4. एक चालक प्रतिरोध को बैटरी से जोड़ा गया है। शीतलन प्रक्रिया से चालक के ताप को परिवर्तित किया जाये तो प्रवाहित धारा का मान-
(अ) बढ़ेगा
(ब) घटेगा
(स) स्थिर रहेगा
(द) शून्य होगा
उत्तर:
(अ) बढ़ेगा

5. किसी चालक की प्रतिरोधकता व चालकता का गुणनफल निर्भर करता है-
(अ) काट क्षेत्रफल पर
(स) लम्बाई पर
(ब) ताप पर
(द) किसी पर नहीं
उत्तर:
(द) किसी पर नहीं

6. एक 40 ओम प्रतिरोध के समरूप काट क्षेत्रफल वाले तार को चार समान भागों में काटकर समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाता है। संयोजन का तुल्य प्रतिरोध होगा-
(अ) 10 ओम
(ब) 4 ओम
(स) 2.5 ओम
(द) 40 ओम
उत्तर:
(स) 2.5 ओम

7. दो समान आकार के तारों, जिनकी प्रतिरोधकता P1 तथा P2 हैं, को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। संयोजन की तुल्य प्रतिरोधकता होगी-
(अ) \(\sqrt{\rho_1 \rho_2}\)
(ब) 2 (p1 + p2)
(स) \(\frac{\rho_1+\rho_2}{2}\)
(द) p1 + p2
उत्तर:
(द) p1 + p2

8. चित्र में दो भिन्न-भिन्न तापों पर एक चालक के V- i वक्रों को दर्शाया गया है। यदि इन तापों के संगत प्रतिरोध क्रमशः R1 R2 हों तो निम्न में से कौनसा कथन सत्य है-
(अ) T1 = T2
(ब) T1 > T2
(स) T1 < T2
(द) इनमें से कोई नहीं
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 1
उत्तर:
(स) T1 < T2

9. अपवाह वेग vd की आरोपित विद्युत क्षेत्र E पर निर्भरता होगी-
(अ) vd नियत रहेगी
(ब) vd ∝ E
(स) vd ∝ \(\frac{1}{E}\)
(द) vd ∝ E
उत्तर:
(ब) vd ∝ E

10. धातुओं में यादृच्छिक गति में मुक्त इलेक्ट्रॉन के माध्य तापीय वेग Vsub>° की तुलना में अपवाह वेग vd का मान रहेगा-
(अ) vd ≈ V°
(ब) vd >> V°
(स) vd << V°
(द) अनिश्चित
उत्तर:
(स) vd << V°

11. ओम के नियम के अनुसार धारा घनत्व j व विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E में सम्बन्ध होता है-
(अ) j = \(\frac{\mathrm{I}}{\sigma \mathrm{E}}\)
(ब) E = σj
(स) j = \(\frac{\sigma}{E}\)
(द) j = σE
उत्तर:
(द) j = σE

12. एक-समान n प्रतिरोधों के मान में कितनी गुणा बढ़ोतरी की जाये, ताकि श्रेणीक्रम को उसी तुल्य प्रतिरोध के समान्तर क्रम के संयोजन में बदला जा सके?
(अ) √n
(ब) n
(स) n2
(द) n-2
उत्तर:
(स) n2

13. 2R के प्रतिरोध में (चित्र में दिये परिपथ में) प्रवाहित धारा का मान होगा-
(अ) 2E/R
(ब) 2E/7R
(स) E/7R
(द) E/R
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 2
उत्तर:
(ब) 2E/7R

14. किसी बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध r है तथा विद्युत वाहक बल E है। बैटरी के सिरों को R = r ओम के बाह्य प्रतिरोध से सम्बन्धित करने पर उसके सिरों के मध्य विभवान्तर होगा-
(अ) 2E वोल्ट
(ब) E वोल्ट
(स) \(\frac{E}{2}\) वोल्ट
(द) \(\frac{E}{4}\) वोल्ट
उत्तर:
(स) \(\frac{E}{2}\) वोल्ट

15. एक वर्ग एक तार का बना हुआ है, जिसकी प्रत्येक भुजा का प्रतिरोध R ओम है। विकर्ण के सिरों पर बिन्दुओं के मध्य प्रभावी प्रतिरोध होगा-
(अ) R/2 ओम
(ब) R ओम
(स) 2R ओम
(द) 4R ओम
उत्तर:
(ब) R ओम

16. 10 ओम के चार प्रतिरोध चित्र मे दिखाये अनुसार जोड़े गये हैं। संयोजन का तुल्य प्रतिरोध होगा-
(अ) शून्य
(ब) 10 ओम
(स) 20 ओम
(द) 40 ओम
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 3
उत्तर:
(ब) 10 ओम

17. किसी तार की प्रतिरोधकता निर्भर करती है-
(अ) उसकी लम्बाई पर
(ब) उसके काट के क्षेत्रफल पर
(स) उसके पदार्थ पर
(द) उसकी आकृति पर
उत्तर:
(स) उसके पदार्थ पर

18. चित्र में बताये प्रतिरोध का मान मेगा ओम में होगा-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 4
(अ) 5.6 MΩ ± 10%
(ब) 4.7 MΩ ± 10%
(द) 17 MΩ ± 5%
(स) 4.10 MΩ 5%
उत्तर:
(स) 4.10 MΩ 5%

19. प्रतिरोध मापन के लिए उपयोग में आने वाला उपकरण है-
(अ) प्रतिरोध
(ब) गेल्वेनोमीटर
(स) व्हीटस्टोन सेतु
(द) वोल्टमीटर
उत्तर:
(स) व्हीटस्टोन सेतु

20. दो प्रतिरोध तार A, B एक ही पदार्थ के बने हुए हैं। तार A की कुल लम्बाई व त्रिज्या B से दुगुनी है। A और B के प्रतिरोधों का अनुपात होगा-
(अ) 1 : 2
(ब) 1 : 1
(स) 2 : 1
(द) 4 : 1
उत्तर:
(अ) 1 : 2

21. ताँबे तथा जरमेनियम को कमरे के ताप से 30°K तक ठण्डा किया जाता है। इस क्रिया में प्रतिरोध का मान-
(अ) दोनों के लिए घटेगा
(ब) दोनों के लिए बढ़ेगा
(स) ताँबे का बढ़ेगा तथा जरमेनियम का घटेगा
(द) ताँबे का घटेगा तथा जरमेनियम का बढ़ेगा
उत्तर:
(द) ताँबे का घटेगा तथा जरमेनियम का बढ़ेगा

22. सेलों को समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है, जबकि सेल का आन्तरिक प्रतिरोध है-
(अ) बाह्य प्रतिरोध के बराबर
(स) बाह्य प्रतिरोध से कम
(ब) बाह्य प्रतिरोध से अत्यधिक
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) बाह्य प्रतिरोध से अत्यधिक

23. एक ही पदार्थ के दो तार दिये हैं, पहले की लम्बाई और व्यास दूसरे से क्रमशः दुगुने के बराबर है। पहले का प्रतिरोध है, दूसरे के प्रतिरोध के
(अ) बराबर
(ब) दुगुना
(स) आधा
(द) चार गुना
उत्तर:
(ब) दुगुना

24. धारा (i) और अपवहन वेग vd में सम्बन्ध है-
(अ) i = neA vd
(ब) i = \(\frac{\text { neA }}{\mathrm{v}_{\mathrm{d}}}\)
(स) i = \(\frac{\text { nev }_{\mathrm{d}}}{\mathrm{A}}\)
(द) i = \(\frac{\text { ne }}{\mathrm{Av}_{\mathrm{d}}}\)
उत्तर:
(अ) i = neA vd

25. यदि एक चालक तार की लम्बाई दुगुनी एवं अनुप्रस्थ काट आधी कर दी जाए तो परिवर्तित तार के पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध-
(अ) अपरिवर्तित रहेगी
(ब) दुगुना हो जायेगा
(स) चार ग्ना हो जायेगा
(द) अपरिवर्तित रहता है।
उत्तर:
(द) अपरिवर्तित रहता है।

26. व्हीटस्टोन ब्रिज में बैटरी व धारामापी की स्थितियाँ परस्पर परिवर्तित करने पर नयी संतुलन स्थिति-
(अ) अपरिवर्तित रहेगी
(ब) परिवर्तित होगी
(स) बदल भी सकती है और नहीं भी, यह धारामापी व बैटरी के प्रतिरोधों पर निर्भर करेगा
(द) कुछ नहीं कहा जा सकता।
उत्तर:
(अ) अपरिवर्तित रहेगी

27. एक चालक में 2 ऐम्पियर की धारा 10 सेकण्ड तक प्रवाहित करने पर 80 J ऊष्मा उत्पन्न होती है। चालक का प्रतिरोध होगा-
(अ) 0.5 ओम
(ब) 2 ओम
(स) 4 ओम
(द) 4 ओम
उत्तर:
(ब) 2 ओम

28. मीटर ब्रिज का तार बना होता है-
(अ) लोहे का
(ब) कॉन्सटेन्टन का
(स) ताँबे का
(द) इस्पात तथा ऐलुमिनियम की मिश्रित धातु का
उत्तर:
(ब) कॉन्सटेन्टन का

29. R प्रतिरोध के तार में I ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करने पर उत्पन्न ऊष्मा की दर (जूल में) होगी-
(अ) IR
(ब) \(\frac{\mathrm{R}}{\mathrm{I}} \)
(स) \(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{R}} \)
(द) I2R
उत्तर:
(द) I2R

30. निम्न कथन में से कौनसा कथन गलत है?
(अ) 1 वोल्ट व 1 कूलॉम का गुणा 1 जूल है।
(ब) 1 वोल्ट व 1 ऐम्पियर का गुणा 1 जूल / सेकण्ड है।
(स) 1 वोल्ट व 1 वाट का गुणा 1 अश्वशक्ति है।
(द) वाट आवर को इलेक्ट्रॉन वोल्ट के पदों में भी मापा जा सकता है ।
उत्तर:
(स) 1 वोल्ट व 1 वाट का गुणा 1 अश्वशक्ति है।

31. विभिन्न मान के प्रतिरोध तारों को श्रेणीक्रम में जोड़कर उन्हें विद्युत स्रोत से सम्बद्ध करने पर प्रत्येक प्रतिरोध में-
(अ) धारा और विभवान्तर का मान भिन्न-भिन्न होता है।
(ब) धारा और विभवान्तर का मान समान होता है।
(स) धारा समान बहती है लेकिन प्रत्येक का विभवान्तर भिन्न- भिन्न होता है।
(द) धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है लेकिन सभी पर विभवान्तर समान होता है।
उत्तर:
(अ) धारा और विभवान्तर का मान भिन्न-भिन्न होता है।

32. दो ओम के तीन प्रतिरोध तारों को किस प्रकार संयोजित करें कि उनका परिणामी प्रतिरोध 3 ओम हो जाये?
(अ) तीनों को समान्तर क्रम में
(ब) तीनों को श्रेणीक्रम में
(स) दो को समान्तर क्रम में तथा एक को श्रेणीक्रम में
(द) दो श्रेणीक्रम में तथा एक समान्तर क्रम में
उत्तर:
(स) दो को समान्तर क्रम में तथा एक को श्रेणीक्रम में

33. विभिन्न मान के प्रतिरोधकों के समान्तर क्रम में जोड़ने पर
(अ) प्रत्येक प्रतिरोध में धारा समान होती है परन्तु विभवान्तर प्रत्येक पर भिन्न होता है।
(ब) धारा और विभवान्तर प्रत्येक प्रतिरोध में समान होता है।
(स) धारा और विभवान्तर प्रत्येक प्रतिरोध में भिन्न होते हैं।
(द) प्रत्येक प्रतिरोध में भिन्न मान की धारा प्रवाहित होती है परन्तु विभवान्तर सभी के लिए समान होता है।
उत्तर:
(द) प्रत्येक प्रतिरोध में भिन्न मान की धारा प्रवाहित होती है परन्तु विभवान्तर सभी के लिए समान होता है।

34. चित्र में दर्शाये गये परिपथ में बिन्दु और b के मध्य विभवान्तर का मान होगा-
(अ) R2 – R1
(ब) R1 – R2
(स) \(\frac{\mathrm{R}_1 \mathrm{R}_2}{\mathrm{R}_1+\mathrm{R}_2}\)
(द) शून्य
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 5
उत्तर:
(ब) R1 – R2

35. किरचॉफ का धारा नियम आधारित हाता ह-
(अ) ऊर्जा संरक्षण नियम पर
(ब) संवेग संरक्षण नियम पर
(स) कोणीय संवेग संरक्षण नियम पर
(द) आवेश संरक्षण नियम पर ।
उत्तर:
(द) आवेश संरक्षण नियम पर ।

36. किरचॉफ के नियमानुसार किसी विद्युत परिपथ में किसी सन्धि पर-
(अ) धाराओं का बीजगणितीय योग नगण्य होता है।
(ब) धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
(स) धाराओं का बीजगणितीय योग अनन्त होता है।
(द) धारा का मान शून्य होता है।
उत्तर:
(ब) धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।

37. किरचॉफ का द्वितीय नियम किसी बन्द परिपथ में प्रदर्शित करता है-
(अ) ऊर्जा संरक्षण का नियम
(ब) आवेश के संरक्षण का नियम
(स) धारा के संरक्षण का नियम
(द) संवेग के संरक्षण का नियम
उत्तर:
(अ) ऊर्जा संरक्षण का नियम

38. किरचॉफ के द्वितीय नियम से निम्न में से कौनसा कथन सत्य है?
(अ) किसी बन्द परिपथ में प्रत्येक प्रतिरोध तथा उसमें से प्रवाहित धारा के गुणनफल का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
(ब) किसी बन्द परिपथ में निश्चित दिशा में चलते हुए वोल्टताओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
(स) किसी बन्द परिपथ में प्रत्येक प्रतिरोध तथा उसमें से प्रवाहित धारा के गुणनफल का बीजगणितीय योग अनन्त होता है।
(द) किसी बन्द परिपथ में प्रत्येक प्रतिरोध से प्रवाहित धारा का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
उत्तर:
(ब) किसी बन्द परिपथ में निश्चित दिशा में चलते हुए वोल्टताओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।

39. यदि किसी चालक में प्रवाहित धारा का मान दुगुना कर दिया जावे तो अब इसमें उत्पन्न ऊष्मा पहले से-
(अ) दुगुनी होगी
(स) चार गुनी होगी
(ब) आधी होगी
(द) वही रहेगी
उत्तर:
(स) चार गुनी होगी

40. यदि एक चालक का प्रतिरोध आधा व धारा का मान दुगुना कर दिया जाये तो उत्पन्न ऊष्मा-
(अ) उतनी ही रहेगी
(स) दुगुनी होगी
(ब) आधी होगी
(द) चार गुनी होगी
उत्तर:
(स) दुगुनी होगी

41. किसी चालक तार में ऐम्पियर धारा 1 सेकण्ड तक प्रवाहित होती है। यदि चालक का प्रतिरोध R ओम हो तो जूल के नियम के अनुसार उत्पन्न ऊष्मा का जूल में मान होता है-
(अ) I2Rt
(ब) IR2t
(स) \(\frac{t}{I^2 R}\)
(द) \(\frac{I^2 R}{t}\)
उत्तर:
(अ) I2Rt

42. दो समरूप सेलों को चाहे समान्तर क्रम में जोड़ा जाये अथवा श्रेणीक्रम में, 2 ओम के बाह्य प्रतिरोध द्वारा धारा समान रहती है। प्रत्येक सेल का आन्तरिक प्रतिरोध है-
(अ) 1 ओम
(ब) 2 ओम
(स) 0.15 ओम
(द) 10 ओम
उत्तर:
(ब) 2 ओम

43. एक सुग्राही व्हीटस्टोन ब्रिज में, संतुलन की स्थिति से अल्प विचलन होने पर धारामापी में धारा होनी चाहिये-
(अ) शून्य
(ब) अधिक
(स) कम
(द) नगण्य
उत्तर:
(ब) अधिक

44. एक विभवमापी की विभव प्रवणता है-
(अ) तार के प्रति एकांक काट-क्षेत्र पर विभव का पतन
(ब) तार की एकांक लम्बाई पर विभव पतन
(स) एकांक काट-क्षेत्र के तार की एकांक लम्बाई पर विभव पतन
(द) तार के सिरों के बीच विभव पतन
उत्तर:
(ब) तार की एकांक लम्बाई पर विभव पतन

45. विभवमापी के तार पर शून्य विक्षेप बिन्दु प्राप्त करने के लिए प्राथमिक परिपथ में प्रयुक्त स्रोत का वि. वा. बल द्वितीयक परिपथ में प्रयुक्त सेल के वि.वा. बल से होना चाहिए-
(अ) थोड़ा अधिक
(स) थोड़ा कम
(ब) बहुत अधिक
(द) बहुत कम
उत्तर:
(अ) थोड़ा अधिक

46. यदि प्राथमिक परिपथ में धारा व विभवमापी के तार की लम्बाई की नियत रखकर उसकी त्रिज्या प्रवणता का मान हो जायेगा-
(अ) अपरिवर्तित रहेगा
(ब) एक-चौथाई
(स) आधा
(द) दुगुना
उत्तर:
(ब) एक-चौथाई

47. विभवमापी के प्रयोग में E विद्युत वाहक बल एक सिरे से L लम्बाई पर सन्तुलित होता है। दूसरा सेल जिसका विद्युत वाहक बल भी E है, प्रथम सेल के समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है, संतुलन लम्बाई का मान होगा-
(अ) 2L
(ब) L
(स) \(\frac{\mathrm{L}}{2}\)
(द) \(\frac{L}{4}\)
उत्तर:
(ब) L

48. विभवमापी के तार पर विद्यमान विभव प्रवणता निर्भर करती है-
(अ) तार में प्रवाहित धारा के मान पर
(ब) तार की इकाई लम्बाई के प्रतिरोध पर
(स) प्रयुक्त तार की धातु पर
(द) उपर्युक्त सभी पर
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी पर

49. एक सूक्ष्मग्राही विभवमापी में-
(अ) तार की लम्बाई कम होनी चाहिये।
(ब) मुख्य बैटरी का वि. वा. बल अधिक होना चाहिये।
(स) तार की विभव प्रवणता अधिक होनी चाहिये।
(द) तार की विभव प्रवणता कम होनी चाहिये ।
उत्तर:
(द) तार की विभव प्रवणता कम होनी चाहिये ।

50. विभवमापी एक आदर्श वोल्टमीटर है क्योंकि-
(अ) इसमें सूक्ष्मग्राही धारामापी होता है।
(ब) यह एक विस्तृत व्यवस्था है।
(स) इसका प्रभावी आंतरिक प्रतिरोध अनन्त होता है।
(द) इसका प्रभावी आंतरिक प्रतिरोध शून्य होता है।
उत्तर:
(स) इसका प्रभावी आंतरिक प्रतिरोध अनन्त होता है।

51. आदर्श विभवमापी में प्रयुक्त तार के पदार्थ का प्रतिरोध ताप गुणांक होना चाहिए-
(अ) उच्च
(ब) न्यून
(स) शून्य
(द) अनन्त।
उत्तर:
(स) शून्य

52. किसी प्राथमिक सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का सन्तुलित लम्बाई के रूप में सूत्र होता है-
(अ) r = \(\left(\frac{l_2-l_1}{l_1}\right)\) R
(ब) \(\left(\frac{l_1-l_2}{l_2}\right)\)R
(स) r = \(\frac{l_2-l_1}{l_2 \mathrm{R}}\)
(द) r = \(\frac{l_1-l_2}{l_2 \mathrm{R}}\)
उत्तर:
(ब) \(\left(\frac{l_1-l_2}{l_2}\right)\)R

53. विभवमापी का उपयोग उस समय सम्भव नहीं होता है, यदि विभवमापी के सिरों पर विभवान्तर-
(अ) अज्ञात विभवान्तर से कम हो
(ब) अज्ञात विभवान्तर से अधिक हो
(स) अज्ञात विभवान्तर के बराबर हो
(द) अज्ञात विभवान्तर से दुगुना हो
उत्तर:
(अ) अज्ञात विभवान्तर से कम हो

54. यदि विभवमापी तार की लम्बाई दुगुनी कर दी जाये तो अविक्षेप बिन्दु प्राप्त करने की सुग्रहिता-
(अ) बढ़ती है
(स) घटती है
(ब) अपरिवर्तित रहती है
(द) निश्चित नहीं है
उत्तर:
(अ) बढ़ती है

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
वैद्युत धारा में ऐम्पियर की परिभाषा कीजिए।
उत्तर:
यदि किसी चालक से होकर एक सेकण्ड में प्रवाहित आवेश एक कूलॉम हो, तो चालक में प्रवाहित धारा का मान एक ऐम्पियर होता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 52

प्रश्न 2.
वैद्युत धारा की दिशा की क्या अभिधारणा है?
उत्तर:
धात्वीय चालकों में वैद्युत धारा की दिशा इनमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की गति की दिशा के विपरीत ली जाती है। द्रवों तथा गैसों में धारा की दिशा धनआवेश वाहनों की गति की दिशा में अथवा ऋण आवेश वाहकों की गति की दिशा के विपरीत ली जाती है। धारा प्रवाह करने पर उसमें कितना

प्रश्न 3.
एक चालक तार में आवेश होता है ?
उत्तर:
शून्य, जितना आवेश चालक में प्रवेश करता है उतना ही आवेश चालक में से बाहर निकल जाता है।

प्रश्न 4.
एक पदार्थ की आकृति में विकृति उत्पन्न करने पर प्रतिरोध व प्रतिरोधकता के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
प्रतिरोध परिवर्तित जायेगा क्योंकि प्रतिरोध पदार्थ की भौतिक अवस्था पर निर्भर करता है। परन्तु प्रतिरोधकता वही रहेगी क्योंकि प्रतिरोधकता पदार्थ की केवल प्रकृति पर निर्भर करती है।

प्रश्न 5.
किसी प्रतिरोध का ताप बढ़ाने पर तापीय प्रसार के कारण प्रतिरोध पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर:
ताप के अल्प परिवर्तन से तापीय प्रसार का प्रतिरोध के मान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता परन्तु प्रतिरोध के ताप में अधिक परिवर्तन करने से लम्बाई व काट क्षेत्रफल का अनुपात कम होगा जिससे प्रतिरोध का मान प्रभावित हो जाता है।

प्रश्न 6.
प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में जोड़ने पर परिपथ में कुल प्रतिरोध का मान घटता है या बढ़ता है?
उत्तर:
कुल प्रतिरोध का मान घटता है।

प्रश्न 7.
ओम के नियम के प्रभावी होने के लिये आवश्यक प्रतिबन्ध क्या है ?
उत्तर:
चालक की भौतिक अवस्था (ताप, लम्बाई, काट का क्षेत्रफल) स्थिर होनी चाहिये ।

प्रश्न 8. ओम का नियम लिखिये।
उत्तर:
किसी चालक की भौतिक अवस्था (ताप, लम्बाई, अनुप्रस्थ काट) स्थिर रहे तो उस चालक के सिरों का विभवान्तर V का मान उस चालक में प्रवाहित धारा I के अनुक्रमानुपाती होता है।
V ∝ 1
V = IR
∴ I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\)
इसका मात्रक (R) ओम होता है।

प्रश्न 9.
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या, इनके ऊष्मीय वेग, अनुगमन वेग तथा श्रांतिकाल का मान किस कोटि का होता है?
उत्तर:
मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या ≅ 1029, ऊष्मीय वेग ≅ 105 मी./से. अपवाह वेग = 10-4 मी./से. तथा श्रान्तिकाल ≅ 10-14 सेकण्ड ।

प्रश्न 10.
यदि एक विद्युत सुचालक का ताप
(i) बढ़ता है
(ii) घटता है तो इसमें इलेक्ट्रॉनों का श्रान्तिकाल किस प्रकार परिवर्तित होगा?
उत्तर:
(i) घटेगा (ii) बढ़ेगा।

प्रश्न 11.
प्रतिरोधकता किसे कहते हैं ? इसका मात्रक लिखिये ।
उत्तर:
किसी 1 मीटर लम्बे व 1 वर्ग मीटर अनुप्रस्थ काट वाले चालक का प्रतिरोध उसकी प्रतिरोधकता के बराबर होता है इसका मात्रक ओम मीटर या ओम सेमी. होता है।

प्रश्न 12.
धारा घनत्व किसे कहते हैं? इसका सूत्र लिखिये।
उत्तर:
एकांक काट क्षेत्रफल के अभिलम्बवत् दिशा में प्रवाहित धारा के मान को धारा घनत्व J कहते हैं।
धारा घनत्व J = \(\frac{\mathrm{i}}{\Delta \mathrm{S}}\), यहाँ ∆S काट क्षेत्रफल है।
यदि आवेश के प्रवाह की दिशा क्षेत्रफल के अभिलम्ब से θ कोण बनाती है तो
धारा घनत्व J = \(\frac{i}{\Delta S \cos \theta}\) या ∆S काट क्षेत्रफल है।

प्रश्न 13.
τ को विश्रान्तिकाल ( relaxation time) कहते हैं। इसका मान किस पर निर्भर करता है और किस पर निर्भर नहीं करता है ? बताइये |
उत्तर:
विश्रान्तिकाल का मान चालक पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है और विद्युत क्षेत्र के परिमाण पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 14.
गतिशीलता किसे कहते हैं? इसका सूत्र लिखिये ।
उत्तर:
किसी चालक के लिये अपवहन वेग व चालक के अन्दर विद्युत क्षेत्र का अनुपात दिये गये ताप पर स्थिर रहता है। इस स्थिर राशि को धारावाहक (इलेक्ट्रॉन) की गतिशीलता (µ ) कहते हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 6

प्रश्न 15. अपवहन वेग किसके अनुक्रमानुपाती होता है और किस पर निर्भर नहीं करता है ?
उत्तर:
अपवहन वेग चालक छड़ पर आरोपित विभवान्तर के अनुक्रमानुपाती होता है और चालक में इलेक्ट्रॉनों का अपवहन वेग चालक की लम्बाई पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 16.
किसी चालक के सिरों पर भिन्न-भिन्न विभवान्तर आरोपित कर उनके संगत धारा का मान प्राप्त कर आरेख खींचा जाये तो यह किस प्रकार का प्राप्त होता है ?
उत्तर:
यह एक सरल रेखा के रूप में प्राप्त होता है।

प्रश्न 17.
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग तथा आंतिकाल में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर:
vd = \(\left(\frac{e \tau}{m l}\right)\)V

प्रश्न 18.
ताप में वृद्धि के साथ किसी धात्विक चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग बढ़ेगा या घटेगा?
उत्तर:
अपवाह वेग vd = \(\frac{\mathrm{eV} \tau}{\mathrm{m} l}\)
=> vd ∝ τ तथा τ = \(\frac{\lambda}{\mathrm{V}_{\mathrm{rms}}}\)
ताप वृद्धि से मुक्त माध्य पथ λ घटने तथा Vrms बढ़ने से श्रान्तिकाल τ घटेगा। अतः अपवाह वेग बढ़ेगा।

प्रश्न 19.
यदि किसी चालक के सिरों का विभवान्तर V से 3V कर दिया जाये तो इलेक्ट्रॉन का अपवाह वेग किस प्रकार परिवर्तित होगा ?
उत्तर:
चूँकि अपवाह वेग Vd = \(\left(\frac{\mathrm{e} \tau}{\mathrm{m} l}\right)\)V
=> Vd ∝ V
(चालक के सिरों पर आरोपित विभवान्तर) अतः विभवान्तर को V से 3V करने पर अपवाह वेग तीन गुना हो जायेगा।

प्रश्न 20.
ताप बढ़ने पर श्रान्तिकाल पर क्या प्रभाव पड़ता है? इसका मुक्त इलेक्ट्रॉन के अपवहन वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर श्रान्तिकाल तथा अपवहन वेग दोनों बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 21.
किसी अर्ध चालक का चालकत्व ( Conductance) ताप में वृद्धि के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है?
उत्तर:
उत्तर-चूँकि ताप में वृद्धि के साथ अर्ध-चालक का प्रतिरोध घटता है, अतः उसका चालकत्व = \(\left(\frac{1}{R}\right)\) ताप वृद्धि के साथ बढ़ेगा।

प्रश्न 22.
किसी विद्युत अपघट्य की विशिष्ट चालकता पर ताप वृद्धि का क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
ताप बढ़ाने से विद्युत अपघट्य में आयनों की संख्या तथा उनकी गतिशीलता बढ़ने के कारण प्रतिरोधकता घटने से उसकी विशिष्ट चालकता बढ़ जायेगी।

प्रश्न 23.
वह शर्त लिखिए जबकि किसी बैटरी की टर्मिनल वोल्टता तथा इसका विद्युत वाहक बल बराबर होंगे।
उत्तर:
जब बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध शून्य हो अथवा यह खुले परिपथ में हो अर्थात् इससे कोई वैद्युत धारा न ली जा रही हो।

प्रश्न 24.
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध किसे कहते हैं?
उत्तर:
सेल में प्रयुक्त विद्युत अपघट्य पदार्थ के आयनों द्वारा आवेश के प्रवाह में उत्पन्न किया गया अवरोध, सेल का आन्तरिक प्रतिरोध कहलाता है ।

प्रश्न 25.
सेलों का समान्तर संयोजन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
सेलों का ऐसा संयोजन जिसमें प्रत्येक सेल के एक जैसी ध्रुवता वाले टर्मिनल एक साथ जुड़े हों, उसे सेलों का समान्तर संयोजन कहते हैं।

प्रश्न 26.
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 7

प्रश्न 27.
एक कार्बन प्रतिरोध पर तीन रंगीन बैण्ड क्रमशः लाल, हरे तथा पीले हैं। इसके प्रतिरोध का मान लिखिए ।
उत्तर:
25 × 104 Ω = 0.25 × 106Ω = 0.25 MΩ

प्रश्न 28.
एक कार्बन प्रतिरोध का मान 47 KΩ है। इस पर बैण्ड के रंगों का क्रम क्या होगा?
उत्तर:
47 KΩ = 47 × 103
अतः रंगों का क्रम पीला, बैंगनी तथा नारंगी होगा।

प्रश्न 29.
यदि p प्रतिरोधकता वाले एक तार को खींचकर उसकी लम्बाई तीन गुनी कर दी जाये तो दूसरी नई प्रतिरोधकता क्या होगी?
उत्तर:
नई प्रतिरोधकता p ही रहेगी। चूँकि प्रतिरोधकता चालक के पदार्थ पर निर्भर करती है, उसकी विमाओं पर नहीं।

प्रश्न 30.
दिये गये चित्र में धारा I का मान क्या होगा ?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 8
उत्तर:
किरचॉफ के प्रथम नियम से प्रवेश कर रही धाराओं का योग निकल रही धाराओं के योग के बराबर होगा।
0.7 A + 1.2 A = 0.1 A + 0.8 A + 1
⇒ 1.9 A = 0.9 A + 1
⇒ I = 1.9 A – 0.9 A = 1.0 A

प्रश्न 31.
विद्युत परिपथ सम्बन्धी किरचॉफ के नियमों का क्या महत्व है?
उत्तर:
जटिल विद्युत परिपथों जिनमें एक से अधिक विद्युत वाहक बल स्रोत उपस्थित हों, ओम का नियम प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है। ऐसे परिपथों में केवल किरचॉफ के नियम ही प्रयुक्त किये जा सकते हैं।

प्रश्न 32.
मीटर ब्रिज किस सिद्धान्त पर कार्य करता है?
उत्तर:
व्हीटस्टोन ब्रिज के सिद्धान्त पर।

प्रश्न 33.
मीटर ब्रिज को इस नाम से क्यों जाना जाता है?
उत्तर:
क्योंकि इसमें 1 मीटर लम्बे तार का उपयोग होता है।

प्रश्न 34.
क्या व्हीटस्टोन ब्रिज की सहायता से कार की बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात किया जा सकता है?
उत्तर:
नहीं, चूँकि कार की बैटरी का प्रतिरोध बहुत कम होता है।

प्रश्न 35.
क्या किरचॉफ के नियम A. C. और D. C. दोनों तरह के परिपथों पर लागू होते हैं?
उत्तर:
हाँ।

प्रश्न 36.
मीटर सेतु का तार समान अनुप्रस्थ काट का क्यों होना चाहिये? इसका तार ताँबे का क्यों नहीं लेते हैं?
उत्तर:
(i) मीटर सेतु का तार समान अनुप्रस्थ काट का होने पर ही R ∝ l वाली शर्त लगती है।
(ii) ताँबे का प्रतिरोध बहुत कम होता है तथा प्रतिरोध का तापीय गुणांक अधिक होता है। इसलिये नहीं लेते हैं।

प्रश्न 37.
मीटर सेतु की कार्यप्रणाली का क्या सिद्धान्त है?
उत्तर:
मीटर सेतु की कार्यप्रणाली का सिद्धान्त व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धान्त पर आधारित है, जिसके अनुसार
\(\frac{P}{Q}=\frac{R}{S}\)
⇒ S = \(\left(\frac{\mathrm{Q}}{\mathrm{P}}\right)\)R

प्रश्न 38.
व्हीटस्टोन सेतु कब सन्तुलित कहलाता है?
उत्तर:
जब व्हीटस्टोन सेतु में सेल तथा धारामापी दोनों की कुंजियाँ बन्द होने पर धारामापी में कोई विक्षेप नहीं आता अर्थात् इसकी भुजा में कोई धारा प्रवाहित न हो तो सेतु सन्तुलित कहलाता है।

प्रश्न 39.
किसी बन्द विद्युत परिपथ में प्रयुक्त बैटरियों के विद्युत वाहक बलों के बीजगणितीय योग का मान कितना होता है ?
उत्तर:
परिपथ में लगे प्रतिरोधों के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तरों के योग के तुल्य ।

प्रश्न 40.
किरचॉफ के संधि नियम का गणितीय रूप लिखिये ।
उत्तर:
∑i = 0 “अर्थात् किसी संधि पर मिलने वाली धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।”

प्रश्न 41.
व्हीटस्टोन सेतु से संचायक सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात नहीं किया जा सकता। क्यों?
उत्तर:
संचायक सेल का आन्तरिक प्रतिरोध 1 ओम से भी कम का होता है जिसको व्हीटस्टोन ब्रिज द्वारा ज्ञात नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 42.
किरचॉफ का प्रथम नियम तथा द्वितीय नियम किन संरक्षण नियमों पर आधारित है?
उत्तर:
प्रथम नियम आवेश के संरक्षण का नियम; द्वितीय नियम ऊर्जा के संरक्षण का नियम।

प्रश्न 43.
व्हीटस्टोन सेतु के सर्वाधिक सुग्राही होने की शर्त क्या है?
उत्तर:
इसकी चारों भुजाओं में लगे प्रतिरोध एक ही क्रम के होने चाहिए।

प्रश्न 44.
मीटर सेतु की सुग्राह्यता सर्वाधिक कब होती है?
उत्तर:
जब शून्य विक्षेप स्थिति मीटर सेतु के तार के मध्य बिन्दु के लगभग प्राप्त होती है।

प्रश्न 45.
किस स्थिति में किसी द्वितीयक सेल के सिरों पर टर्मिनल वोल्टता उसके विद्युत वाहक बल के तुल्य होती है?
उत्तर:
जब सेल खुले परिपथ में हो या सेल से बाह्य परिपथ में धारा न प्रवाहित हो रही हो।

प्रश्न 46.
सेल की टर्मिनल वोल्टता एवं विद्युत वाहक बल में अन्तर लिखिए ।
उत्तर:
टर्मिनलों के मध्य विभवान्तर सेल का विद्युत वाहक बल E कहलाता है तथा जब सेल बन्द परिपथ में हो तो उस समय सेल के टर्मिनलों के मध्य विभवान्तर को सेल की टर्मिनल वोल्टता (V) कहते हैं।

प्रश्न 47.
एक विद्युत स्रोत वाले परिपथ में किसी बिन्दु पर विद्युत धाराओं का बीजीय योग शून्य है तो वह बिन्दु क्या है?
उत्तर:
सन्धि ।

प्रश्न 48.
किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध क्यों होता है?
उत्तर:
क्योंकि सेल के अन्दर आयनों की गति अपघट्य के अणुओं से टक्कर के कारण अवरुद्ध होती है।

प्रश्न 49.
मीटर ब्रिज में सन्तुलन बिन्दु आमतौर पर मध्य भाग में क्यों प्राप्त करना चाहिये ? समझाइये |
अथवा
मीटर ब्रिज में संतुलन बिन्दु सामान्यतया मध्य भाग में क्यों प्राप्त करना चाहिये ? समझाइये |
उत्तर:
मीटर ब्रिज के तार के सिरे तांबे की पट्टिका से टांकों द्वारा जुड़े होते हैं। इसलिये तार के सिरों पर तार के प्रतिरोध के अलावा टांकों का भी प्रतिरोध होता है जिनका मान ज्ञात नहीं होता है मीटर ब्रिज के तार पर प्रतिरोध के प्रभाव को कम करने के लिये हम संतुलन बिन्दु तार के मध्य प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 50.
विभवमापी के प्राथमिक परिपथ में धारा का मान स्थिर रखा जाता है। क्यों?
उत्तर:
विभव प्रवणता का मान प्राथमिक परिपथ में धारा के मान पर निर्भर करता है अतः इसका स्थिर रहना आवश्यक है।

प्रश्न 51.
जॉकी कुंजी को दबाकर विभवमापी की तार पर नहीं खिसकाना चाहिये क्यों?
उत्तर:
दबाकर तार पर खिसकाने से उस जगह का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बदलेगा और एक समान नहीं रहेगा, जबकि विभवमापी में तार का प्रत्येक स्थान पर अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल समान होना चाहिये।

प्रश्न 52.
क्यों सेल का वि. वा. बल मापने के लिये वोल्टमीटर की तुलना में विभवमापी ज्यादा अच्छा उपकरण है?
उत्तर:
किसी विद्युत स्रोत का वि. वाहक बल मापते हैं तब संतुलन की अवस्था में स्रोत से उसमें कोई धारा नहीं बहती है और स्रोत का विभव नहीं बदलता है। इस कारण विभवमापी उसका सही विभव मापता है जबकि वोल्टमीटर से जब मापते हैं, तब स्रोत से विक्षेप के लिये उसमें से धारा प्रवाहित होती है, जिससे उसका विभव कम हो जाता है और वह कम हुए विभव को ही मापता है।

प्रश्न 53.
विभवमापी तार लम्बी क्यों ली जाती है?
उत्तर:
विभवमापी की विभव प्रवणता
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 9

विभवमापी के तार पर लगाया गया विभवान्तर वही रखकर यदि उसके तार की लम्बाई बढ़ायें तो उसकी विभव प्रवणता का मान कम हो जाता है। इससे उसकी सुग्राहिता बढ़ जायेगी. इसलिये विभवमापी तार लम्बी ली जाती है।

प्रश्न 54.
E विद्युत वाहक बल तथा आन्तरिक प्रतिरोध वाली सेल के आर-पार एक प्रतिरोध R जोड़ा गया है। अब एक विभवमापी सेल के सिरों का विभवान्तर V मापता है। E, V तथा R के पदों में के लिए व्यंजक लिखिए ।
उत्तर:
r = \(\left[\frac{E}{V}-1\right]\)R

प्रश्न 55.
विभवमापी के तार में वैद्युत धारा अधिक समय के लिए क्यों प्रवाहित नहीं करनी चाहिए ?
उत्तर:
क्योंकि अधिक समय तक धारा प्रवाहित करने से तार के गर्म होने से इसका प्रतिरोध बढ़ जायेगा। अतः तार की विभव प्रवणता का मान बदल जायेगा।

प्रश्न 56.
X = 4Ω एवं Y = 48 × 10-8 Ωm के चालकों की लम्बाई आधी करने पर X व Y के लिए संगत मान लिखिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि प्रतिरोध लम्बाई के अनुक्रमानुपाती होता है R ∝ l लम्बाई आधी करने पर प्रतिरोध का मान भी आधा हो जायेगा अर्थात् X’ = 2Ω
Y = 48 × 10-8 Ω-m है अर्थात् यह प्रतिरोधकता का मान है। प्रतिरोधकता किसी तार की लम्बाई व उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती है। अतः Y’ = 48 × 10-8 Ω-m या समान होगा।

प्रश्न 57.
एक कार्बन प्रतिरोधक का मान 62 × 103Ω तथा सह्यता 5% है। इसके वर्ण कोड के नाम क्रम से लिखिए।
उत्तर:
वर्ण कोड के नाम क्रम से इस प्रकार से होंगे- नीला, लाल, नारंगी और सोना।

प्रश्न 58.
चित्र में एक ही धातु के दो चालकों की प्रतिरोधकता क्रमश: p1Ω-m एवं p2Ω-m है। p1 व p2 का मान लिखिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 10
उत्तर:
हम जानते हैं कि प्रतिरोधकता चालक के पदार्थ पर निर्भर करती है। यहाँ पर दोनों चालक एक ही धातु के हैं। इसलिये p1 व p2 का अनुपात 1 : 1 होगा।

प्रश्न 59.
किसी धातु के तार के दो विभिन्न तापों T1 और T2 पर V – I ग्राफ चित्र में दर्शाए अनुसार है। इन दोनों तापों में से कौन-सा उच्च है और क्यों?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 11
उत्तर:
V- I ग्राफ का ढाल \frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}} = R । इसका अर्थ यह हुआ कम ढाल पर प्रतिरोध का मान अधिकतम होगा। किसी धातु का ताप बढ़ाने पर उस धातु का प्रतिरोध बढ़ता है तब T1 >T2

लघुत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
किसी चालक में इलेक्ट्रॉन बराबर गतिशील रहते हैं। और फिर भी चालक में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती जब तक उसके सिरों पर वैद्युत स्रोत न लगाया जाये। कारण दीजिए ।
उत्तर:
चालक में इलेक्ट्रॉन की गति अनियमित होने के कारण किसी निश्चित दिशा में इलेक्ट्रॉन प्रवाह की नेट दर शून्य हो जाने के कारण चालक में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती। इसके सिरों के बीच विभवान्तर लगने से चालक में एक वैद्युत क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है, जिसके कारण इलेक्ट्रॉनों पर एक बल वैद्युत क्षेत्र की दिशा के विपरीत लगाने से ये एक निश्चित दिशा में गति कर जाते हैं तथा चालक में धारा प्रवाहित होने लगती है।

प्रश्न 2.
एक चालक में I ऐम्पियर की धारा बह रही है। यही धारा अर्द्धचालक में भी बह रही है। यदि दोनों का ताप बढ़ा दिया जाये तो उनमें बहने वाली धारा के मान में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
चालक में धारा का मान घटेगा जबकि अर्द्धचालक में बढ़ेगा।

प्रश्न 3.
ताँबे के तार के विशिष्ट प्रतिरोध पर क्या प्रभाव पड़ेगा जबकि।
(i) लम्बाई को तिगुना कर दिया जाये?
(ii) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल को तीन गुना कर दिया जाये?
(iii) त्रिज्या को तीन गुना कर दिया जाये?
(iv) ताप बढ़ा दिया जाये?
उत्तर:
हम जानते हैं कि विशिष्ट प्रतिरोध
p = \(\frac{m}{n e^2 \tau}\) से स्पष्ट है कि
(i) लम्बाई बढ़ाने से अपरिवर्तित,
(ii) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बढ़ाने से अपरिवर्तित
(iii) त्रिज्या परिवर्तन से विशिष्ट प्रतिरोध अपरिवर्तित
(iv) ताप बढ़ाने से विशिष्ट प्रतिरोध बढ़ जायेगा क्योंकि
p ∝ \(\frac{1}{\tau}\) ताप बढ़ाने पर τ घटता है।

प्रश्न 4.
धातु इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग का मान अति लघु क्यों होता है?
उत्तर:
यदि हम किसी धातु चालक के सिरों के बीच पर कोई विद्युत विभव लगाते हैं तब उसके एक सिरे से दूसरे सिरे के बीच की तरफ उसमें एक विद्युत क्षेत्र स्थापित हो जाता है और हर मुक्त इलेक्ट्रॉन पर विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में बल लगता है, उसके कारण उसमें वेग उत्पन्न होता है। उसका वेग बढ़ता रहता है। तब तक गति करता रहता है, जब तक वह अपने मार्ग में आने वाले किसी धातु आयन से नहीं टकराता। धातु आयन से टकराने पर उसका वेग शून्य हो जाता है और इलेक्ट्रॉन पर बल लगाने के कारण उसका वेग बढ़ता रहता है। शून्य से अगली टक्कर तक और अगली टक्कर किसी इलेक्ट्रॉन के होने पर फिर शून्य हो जाता है। यदि इलेक्ट्रॉन की एक टक्कर से अगली टक्कर तक की चली गई मध्यमान दूरी λ हो और उसमें लगा समय τ हो तो तब-
अपवाह वेग (Vd) = \(\frac{\lambda}{\tau}\)
यहाँ पर λ का मान τ की अपेक्षा बहुत ही छोटा है। इसलिये अपवाह वेग का मान अति लघु होता है।

प्रश्न 5.
धातु की चालकता व गतिशीलता में सम्बन्ध लिखिये। उत्तर-किसी चालक के लिये अपवहन वेग व चालक के अन्दर विद्युत क्षेत्र का अनुपात दिये गये ताप पर स्थिर रहता है। इस स्थिर राशि को धारावाहक (इलेक्ट्रॉन) की गतिशीलता (µ) कहते हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 12

प्रश्न 6.
एक बेलनाकार चालक में स्थायी धारा बह रही है। क्या चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र है?
उत्तर:
चालक में धारा तभी बहती है जब चालक के भीतर स्थापित विद्युत क्षेत्र प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर बल आरोपित करता है। अतः चालक के भीतर विद्युत क्षेत्र है।

प्रश्न 7.
एक धात्वीय तार के लिए दो विभिन्न तापों T1 व T2 पर I – V ग्राफ चित्र में प्रदर्शित है। इनमें से किस तार का ताप ऊँचा है तथा क्यों?
उत्तर:
T2 ताप खींचे गये वक्र के ढाल \(\left(\frac{1}{V}\right)\) का मान कम है।
अतः परन्तु प्रतिरोध =
अतः इस ताप पर प्रतिरोध अधिक होगा। चूँकि ताप वृद्धि के साथ प्रतिरोध भी बढ़ता है, अतः T2 ताप ऊँचा होगा।

प्रश्न 8.
किसी ताँबे के तार में प्रवाहित धारा को समान मोटाई के लोहे के तार से प्रवाहित करने पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवहन वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
I = neAvd ⇒ vd = \(\frac{1}{\text { neA }}\)
यहाँ पर e व A तथा I नियत है।
इसलिए vd ∝ \(\frac{1}{n}\)
ताँबे की तुलना में लोहे में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व n कम होने के कारण ताँबे की अपेक्षा लोहे में अपवहन वेग अधिक होगा।

प्रश्न 9.
समान व्यास परन्तु भिन्न-भिन्न पदार्थों के दो चालक X तथा Y श्रेणीक्रम में एक बैटरी से जुड़े हैं। यदि X में इलेक्ट्रॉनों की संख्या घनत्व Y से दोगुना है तो इन दो तारों में इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेगों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
I = neA vd से vd = \(\frac{1}{\text { neA }}\)
यहाँ पर दोनों तारों के व्यास समान होने से दोनों के लिए A नियत चूँकि दोनों तार एक ही बैटरी से श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इसलिए दोनों में समान धारा I बहेगी अर्थात् दोनों के लिए I नियत एवं e सार्वत्रिक नियतांक है, अतः अपवाह वेग
vd ∝ \(\frac{1}{n}\)
(यहाँ पर 1 इलेक्ट्रॉनों की संख्या घनत्व)
\(\frac{\left(v_{\mathrm{d}}\right)_{\mathrm{x}}}{\left(v_{\mathrm{d}}\right)_{\mathrm{y}}}=\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{y}}}{\mathrm{n}_{\mathrm{x}}}=\frac{\mathrm{n}_{\mathrm{y}}}{2 \mathrm{n}_{\mathrm{y}}}=\frac{1}{2}\)
∵ nx = 2ny दिया है।
अतः (vd)x : (vd)y = 1 : 2

प्रश्न 10.
R1 तथा R2 प्रतिरोध के दो तापक तारों को जब नियत V वोल्टता के संभरण से क्रमशः जोड़ा जाता है तो प्रयुक्त
शक्तियाँ क्रमश: P1 तथा P2 हैं। जब इन तारों को क्रमशः
(i) श्रेणीक्रम में
(ii) समान्तर क्रम में परस्पर जोड़कर क्रमशः उसी सप्लाई से जोड़ा जाता है तो प्रयुक्त शक्तियों के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए।
उत्तर:
यहाँ पर
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 13

प्रश्न 11.
एक ही पदार्थ के बने दो धात्विक तारों A व B की लम्बाई समान है परन्तु उनके अनुप्रस्थ काट 1 : 2 के अनुपात में हैं। इनको (i) श्रेणीक्रम में तथा (ii) समान्तर क्रम में जोड़ दिया जाता है। उपर्युक्त दोनों संयोजनों में दोनों तारों में इलेक्ट्रॉनों के अपवहन वेगों की तुलना कीजिए।
उत्तर:
दिया है-
A1 : A2 = 1 : 2
तथा l1 = l2 = 1
(i) श्रेणीक्रम में जोड़ने पर वैद्युत धारा समान होती है।
अतः IA = IB
⇒ neA1(vd)1 = neA2(vd)2
⇒ \(\frac{\left(v_{\mathrm{d}}\right)_1}{\left(v_{\mathrm{d}}\right)_2}=\frac{\mathbf{A}_2}{\mathrm{~A}_1}=\frac{2}{1}\) = 2 : 1
(ii) समान्तर क्रम में विभवान्तर समान रहता है।
अतः VA = VB ⇒ IA × RA = IB × RB
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 14

प्रश्न 12.
किसी चालक का प्रतिरोध किन-किन बातों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
हम जानते हैं-
R = \(\frac{\mathrm{m} l}{\mathrm{ne}^2 \mathrm{~A} \tau}\)
से स्पष्ट है कि किसी चालक का प्रतिरोध R निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है-
(i) चालक की लम्बाई 1 पर (R ∝ l)
(ii) चालक के अनुप्रस्थ परिच्छेद A पर \(\left(\mathrm{R} \propto \frac{1}{\mathrm{~A}}\right)\)
(iii) चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व n पर ( R ∝ n)
(iv) मुक्त इलेक्ट्रॉन के श्रान्तिकाल पर \(\left(\mathrm{R} \propto \frac{1}{\tau}\right)\)
चूँकि आन्तिकाल ताप पर निर्भर करता है अतः वैद्युत प्रतिरोध भी ताप पर निर्भर करता है ताप बढ़ाने पर श्रांतिकाल घटता है, अतः ताप बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ेगा।

प्रश्न 13.
यूरेका के तार के प्रतिरोध में क्या परिवर्तन होगा, यदि इसकी त्रिज्या आधी तथा लम्बाई एक-चौथाई पर कर दी जाये?
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 15

प्रश्न 14.
दिये गये परिपथ में यदि R1 तथा R2 प्रतिरोधों में शक्ति क्षय क्रमश: P1 तथा P2 है तो दिखाइए P1 : P2 = R2 : R1
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 16
उत्तर:
दिये गये परिपथ में R1 तथा R2 परस्पर समान्तरबद्ध हैं।
अतः इनके सिरों का विभवान्तर समान होगा जो आरोपित बैटरी के विभवान्तर V के बराबर होगा।
\(\frac{\mathrm{P}_1}{\mathrm{P}_2}=\frac{\mathrm{V}^2 / \mathrm{R}_1}{\mathrm{~V}^2 / \mathrm{R}_2}=\frac{\mathrm{R}_2}{\mathrm{R}_1}\)
⇒ p1 : p2 = R2 : R1

प्रश्न 15.
किसी चालक के प्रतिरोध एवं प्रतिरोधकता हेतु व्यंजक, चालक में प्रति एकांक आयतन मुक्त इलेक्ट्रॉन की संख्या व विश्रान्ति काल के पदों में प्राप्त करें।
उत्तर:
हम जानते हैं,
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 17

प्रश्न 16.
दो प्रतिरोध R1 व R2 का श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध Rs व समान्तर क्रम में तुल्य प्रतिरोध Rp है। सिद्ध कीजिये-
RpRs = R1R2
उत्तर:
जब दो प्रतिरोध R1 तथा R2 को श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं तो उनका तुल्य प्रतिरोध Rs को निम्न सूत्र से दिया जाता है-
Rs = R1 + R2 ………(1)
जब दो प्रतिरोध R1 तथा R2 को समान्तर क्रम में जोड़ते हैं तो उनका तुल्य प्रतिरोध Rp को निम्न सूत्र के द्वारा जोड़ते हैं-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 18

प्रश्न 17.
धातुओं की प्रतिरोधकता ताप में वृद्धि से बढ़ती है, जबकि अर्द्धचालकों की प्रतिरोधकता घटती है, कारण स्पष्ट कीजिये ।
उत्तर:
कुछ मिश्र धातुयें, जैसे- मँगनिन, कान्सटेन्टन ऐसी हैं जिन पर ताप का प्रभाव बहुत ही कम होता है, अर्थात् इनका प्रतिरोध ताप गुणांक नगण्य है। इन मिश्र धातुओं का विशिष्ट प्रतिरोध अधिक और ताप गुणांक नगण्य होने के कारण ही प्रामाणिक प्रतिरोध, प्रतिरोध बॉक्स आदि बनाने में इन्हीं के तार का उपयोग किया जाता है। कार्बन, अभ्रक, शीशा, रबर तथा अर्द्धकुचालक, जैसे- सिलिकन व जरमेनियम की प्रतिरोधकता ताप के बढ़ने पर घटती है, अर्थात् इनका प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है। अर्द्धचालकों में ताप वृद्धि से आवेश वाहकों की संख्या बढ़ जाती है जिससे प्रतिरोधकता घट जाती है।

प्रश्न 18.
श्रेणीक्रम तथा समान्तर क्रम में जब प्रतिरोधों को जोड़ते हैं तो धारा, विभवान्तर तथा प्रतिरोध की तुलना कीजिये ।
उत्तर:
श्रेणीक्रम तथा समान्तर क्रम में संयोजन की तुलना-

राशिश्रेणी संयोजनसमान्तर संयोजन
1. धारापरिपथ में लगे प्रत्येक प्रतिरोध में बहने वाली धारा का मान समान होता है।समान्तर क्रम में लगे प्रत्येक प्रतिरोध में बहने वाली धारा का मान अलग-अलग होता है।
2. विभवान्तरप्रत्येक प्रतिरोध के सिरे पर विभवान्तर अलग-अलग होता है।प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर समान होता है।
3. प्रतिरोधतुल्य प्रतिरोध का मान अलग-अलग प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।तुल्य प्रतिरोध का मान सबसे कम प्रतिरोध से भी कम होता है।

प्रश्न 19.
वर्ण संकेत के आधार पर 0. 45 Ω ± 5% मान के कार्बन प्रतिरोधकों के लिये चारों रंगीन पट्टियों के क्रमिक रंगों के नाम ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
0.45 Ω ± 5%
⇒ 45 × 102 ± 5%
प्रथम सार्थक अंक 4 के लिये पीली पट्टी, द्वितीय सार्थक अंक 5 के लिये हरी पट्टी, गुणांक 10-2 के लिये चाँदीसा पट्टी, ± 5% सह्यता अंक के लिये सुनहरी पट्टी
अतः वर्ण संकेत के आधार पर 0.45 Ω ± 5% को प्रदर्शित करने के लिये पट्टियों के क्रम निम्न होंगे-
पीला, हरा, चाँदीसा तथा सुनहरी ।

प्रश्न 20.
विभव प्रवणता से आप क्या समझते हैं? यह किन कारकों पर निर्भर करती है?
अथवा
विद्युत परिपथ के लिए किरचॉफ के नियमों को लिखिए ।
उत्तर:
विभवमापी के तार की एकांक लम्बाई पर विभव पतन को विभव प्रवणता कहते हैं इसे x द्वारा व्यक्त करते हैं।

विभव प्रवणता का मान निम्न कारकों पर निर्भर करता है-
(अ) प्राथमिक परिपथ के सेल Ep के विद्युत वाहक बल एवं धारा नियंत्रक के प्रतिरोध पर
(ब) विभवमापी के तार की लम्बाई पर
(स) विभवमापी के तार के अनुप्रस्थ काट पर
(द) विभवमापी के तार की धातु पर
(य) विभवमापी के तार के ताप पर
अथवा
प्रथम नियम (सन्धि नियम ) – किसी बन्द विद्युत परिपथ के किसी बिन्दु (सन्धि) पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
अर्थात्
∑I = 0
द्वितीय नियम (लूप नियम ) – इस नियम के अनुसार किसी विद्युत परिपथ के किसी बन्द भाग (लूप) की धाराओं तथा प्रतिरोधों के गुणनफलों का बीजगणितीय योग, परिपथ के उस भाग (लूप) में कार्यरत विद्युत वाहक बलों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
अर्थात् ∑E = ∑V = ∑IR

प्रश्न 21.
विभवमापी के उपयोग में लाने पर सावधानियाँ लिखिये ।
उत्तर:
(i) प्राथमिक परिपथ में लगाये गये वि.वा. बल का मान द्वितीयक परिपथ में लगाये गये वि. वा. बल या विभवान्तर के मानों से हमेशा अधिक होना चाहिये।
(ii) प्राथमिक तथा द्वितीयक परिपथ में जुड़े विभवान्तरों या वि. वा. बलों के सभी धन सिरे एक बिन्दु A पर जुड़े होने चाहिये जहाँ परिपथ के सभी धन सिरे जुड़े होते हैं।
(iii) संतुलित लम्बाई का मान हमेशा A सिरे से मापा जाना चाहिये।

प्रश्न 22.
विभवमापी तथा वोल्टमीटर में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
विभवमापी तथा वोल्टमीटर में अन्तर

विभवमापीवोल्टमापी
(1) यह अविक्षेप विधि पर आधारित(1) यह विक्षेप विधि पर आधारित है।
(2) यह बहुत ही सुग्राही होता है(2) यह कम सुग्राही होता है।
(3) यह वि.वा. बल का मापन कम शुद्धता से करता है।(3) यह वि. वा. बल का मापन बहुत शुद्धता से करता है।
(4) इसके द्वारा वि.वा. बल के पाठ्यांक लेते समय सेल से कोई धारा नहीं ली जाती है।(4) इसके द्वारा वि. वा. बल का मापन में सेल से कुछ धारा ली जाती है।

प्रश्न 23.
अपवाह वेग के आधार पर ओम के नियम का समीकरण \(\overrightarrow{\mathbf{J}}=\sigma \vec{E}\)
(जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं)
उत्तर:
लम्बाई के चालक पर विचार कीजिये जिसका क्षेत्रफल A है। इस चालक में प्रति इकाई आयतन आवेश वाहक मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या, अर्थात् संख्या घनत्व, n है अतः चालक में स्थित आवेश वाहकों की संख्या nAl होगी, जहाँ Al चालक का आयतन है यदि प्रत्येक आवेश वाहक पर आवेश है और इन आवेश वाहकों का अपवाह वेग (Drift Velocity) Vd है, तो चालक के आयतन में आवेश वाहकों का कुल आवेग होगा-
∆q = nAle जो ∆t = \(\frac{l}{v_{\mathrm{d}}}\) समय में
इस चालक के अनुप्रस्थ काट-क्षेत्र से गुजरेगा। इसलिये चालक में प्रवाहित धारा का मान होगा
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 19

प्रश्न 24.
दो सेलों के विद्युत वाहक बल E1 व E2 तथा आन्तरिक प्रतिरोध क्रमशः r1 व r2 हैं। इन्हें श्रेणीक्रम में जोड़ने पर तुल्य वि.वा. बल तथा तुल्य आन्तरिक प्रतिरोध का मान प्राप्त कीजिए ।
उत्तर:
सामने चित्र में E1 व E2 तथा आन्तरिक प्रतिरोध r1 तथा r2 वाले दो सेलों का श्रेणी संयोजन दिखाया गया है। इसके अन्त सिरों को एक बाह्य प्रतिरोध
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 20
R से जोड़ा गया है। यदि सेलों के संयोजन से प्रतिरोध R में प्रवाहित धारा का मान I है तो ओम के नियम से V = IR ……….(1)
तथा संयोजन के अन्त बिन्दुओं a व b के मध्य विभवान्तर का मान दोनों सेलों की टर्मिनल वोल्टता के योग के तुल्य होगा, अर्थात्
Va b = (E1 – Ir1) + (E2 – Ir2) ………..(2)
सिद्धान्त से टर्मिनल वोल्टता; प्रतिरोध R के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर V के बराबर होगी, अतः
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 21

यहाँ E0 = E1 + E2 सेलों के कुल वि.वा. बलों का मान तथा r0 = (r1 + r2) सेलों का कुल आन्तरिक प्रतिरोध है, इससे स्पष्ट है-
(i) श्रेणी संयोजन में कुल विद्युत वाहक बल का मान संयोजित सेलों के वि.वा. बलों के योग के तुल्य होता है।
(ii) यदि संयोजन में समान विद्युत वाहक बल व आन्तरिक प्रतिरोध के n सेल जुड़े हुए हों तो बाह्य प्रतिरोध R में प्रवाहित धारा का मान-
I = \(\frac{n E}{R+n r}=\frac{E}{r+\frac{R}{n}}\) …………(4)
अर्थात् बाह्य परिपथ में प्रवाहित धारा का मान एक सेल के कारण प्राप्त धारा के मान से अधिक होता है।
(iii) संयोजन में यदि एक बैटरी की ध्रुवता को उलट दिया जाये तो तुल्य वि.वा. बल का मान
(E1 – E2) या (E2 – E1) प्राप्त होता है।

प्रश्न 25.
मीटर सेतु द्वारा किसी अज्ञात प्रतिरोध का मान ज्ञात करने की विधि लिखकर आवश्यक सूत्र की व्युत्पत्ति कीजिए। परिपथ चित्र बनाइए।
उत्तर:
मीटर सेतु द्वारा किसी अज्ञात प्रतिरोध का मान-यह अज्ञात प्रतिरोध को मापने के लिये बनाया गया एक उपकरण है। इसका कार्य सिद्धान्त ह्हीट स्टोन सेतु के सिद्धान्त पर आधारित है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 21
व्हीटस्टोन ब्रिज के चार प्रतिरोधों में से दो प्रतिरोध ( R तथा S ) तो खाली स्थानों में लगे रहते हैं तथा बाकी दो प्रतिरोध ( P व Q) तार AC पर (जोकी) के B बिन्दु के इधर-उधर होते हैं। R के किसी मान के लिए ‘जोकी’ को तार AC पर विभिन्न स्थितियों में रखकर उसकी नोक को दबाते हैं। जब इसकी किसी स्थिति पर धारामापी में कोई विक्षेप नहीं आता है तो हम कह सकते हैं कि ब्रिज संतुलित स्थिति में है ।

‘जोकी’ की यह स्थिति चित्र में ‘B’ बिन्दु द्वारा दर्शाई गई है। व्हीटस्टोन ब्रिज के P तथा Q प्रतिरोध अब क्रमश: AB और BC लम्बाई के तार के प्रतिरोध के बराबर होते हैं। यदि तार की एकांक लम्बाई का प्रतिरोध हो और AB की लम्बाई l हो तो P = pl तथा Q = p (100- l) होगी।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 23
प्रयोग द्वारा R व l का मान ज्ञात करके अज्ञात प्रतिरोध S का मान समीकरण (1) की सहायता से ज्ञात कर लेते हैं। प्रतिरोध बॉक्स से भिन्न-भिन्न प्रतिरोध निकालकर कई प्रेक्षण लेते हैं और प्रत्येक प्रेक्षण के लिए S का मान ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद अज्ञात प्रतिरोध S तथा प्रतिरोध बॉक्स के स्थानों को आपस में बदलकर प्रयोग को दोहराते हैं। इस दशा में R के पूर्व मान के लिए ही यदि अविक्षेप बिन्दु B तार की l1 लम्बाई पर आये तो इस स्थिति में
R = \(\mathbf{S}\left(\frac{100-l_1}{l_1}\right)\)
⇒ S = R \( \left(\frac{l_1}{100-l_1}\right)\) ………(2)
अतः समीकरण (2) के सूत्र से भी S का मान ज्ञात कर लेते हैं। गणना में दोनों बार के प्रेक्षणों से प्राप्त S के मानों का औसत ज्ञात कर लेते हैं। यही अज्ञात प्रतिरोध का मान होगा।

प्रश्न 26.
(a) विभव प्रवणता को परिभाषित कीजिए ।
(b) किरखोफ का संधि नियम लिखिए।
दिए गये चित्र में धारा I का मान लिखिए-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 24
उत्तर:
(a) विभव प्रवणता (Potential Gradient) विभवमापी के तार की एकांक लम्बाई पर विभव पतन को विभव प्रवणता कहते हैं । इसे x द्वारा व्यक्त करते हैं। इसका मान निम्न पर निर्भर करता है
(i) प्राथमिक परिपथ के सेल Ep के विभवान्तर एवं धारा नियंत्रक के प्रतिरोध पर
(ii) विभवमापी के तार की लम्बाई, अनुप्रस्थ काट तार की धातु व तार के ताप पर निर्भर करता है।
(b) किरखोफ का संधि नियम—किसी बन्द विद्युत परिपथ के किसी बिन्दु (सन्धि ) पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
अर्थात् ∑I = 0
दिये गये चित्र में धारा I का मान निकालने के लिये किरखोफ का प्रथम नियम (संधि नियम) का प्रयोग करने पर,
5 + 2 – I – 4 = 0
⇒ I = 3 ऐम्पियर

प्रश्न 27.
एक परिवर्ती प्रतिरोधक R विद्युत वाहक बल ( emf), ६ तथा आन्तरिक प्रतिरोध के सेल के सिरों से आरेख में दर्शाए अनुसार संयोजित है R के फलन के रूप में (i) टर्मिनल वोल्टता, V तथा (ii) धार, I में विचरण को दर्शाने के लिए ग्राफ खींचिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 25

प्रश्न 28.
लम्बाई L तथा व्यास D के किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर V अनुप्रयुक्त किया गया है। इस चालक में आवेश वाहकों के अपवाह वेग पर क्या प्रभाव होगा जब (i) V को आध् कर दिया जाए, (ii) L को दुगुना कर दिया जाए तथा (iii) D को आधा कर दिया जाए?
उत्तर:
अपवाह वेग
(i) V को आधा करने पर अपवाह वेग Vd का मान भी आधा हो जाता है।
(ii) l को दुगुना करने पर Vd का मान भी दुगुना हो जायेगा।
(iii) यदि D को आधा कर दिया जाये तो अपवाह वेग का मान अपरिवर्तित रहता है। चूँकि अपवाह वेग Vd का मान D पर निर्भर नहीं करता है।

आंकिक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार कक्षा में 6 × 1015 बार प्रति सेकण्ड घूमता है। लूप में धारा का मान ज्ञात कीजिए।
हल- इलेक्ट्रॉन के एक बार वृत्ताकार कक्षा में घूमने में प्रवाहित
आवेश = e
∴ N = 6 × 1015 बार घूमने में प्रवाहित आवेश
q = Ne
q = (6 × 1015) × 1.6 × 1019 कूलॉम घूमने में लिया गया समय t = 1 सेकण्ड
अतः लूप में धारा
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 26

प्रश्न 2.
एक तार की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1.0 × 10-7 मीटर2 तथा तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2 x 1028 प्रति मीटर है। तार में 3.2 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। ज्ञात कीजिए (i) तार में धारा घनत्व (ii) मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अपवहन वेग।
हल- दिया है – तार की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A
= 1.0 × 10-7 मीटर2
तार में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व n = 2 × 1028 तथा तार में धारा I = 3.2 ऐम्पियर
(i) तार में धारा घनत्व j = I/A = 3.2 ऐम्पियर/ 1.0 × 10-7 मीटर2 = 3.2 × 107 ऐम्पियर / मीटर2
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 27

प्रश्न 3.
0.24 मीटर लम्बे चालक के सिरों के बीच 6 वोल्ट का विभवान्तर लगाया गया है। इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन (अपवाह) वेग ज्ञात कीजिए। इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता 5.6 × 10-6 मीटर2 वोल्ट2 सेकण्ड-1 है।
चालक की लम्बाई L= 0.24 मीटर
इसके सिरों का विभवान्तर V = 12 वोल्ट
अतः चालक के अन्दर वैद्युत क्षेत्र E = \(\frac{V}{L}\)
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 28

प्रश्न 4.
ताँबे का मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व 8.5 × 1028 मीटर3 है। 0.1 मीटर लम्बे, 1 मिमी2 अनुप्रस्थ काट वाले ताँबे के तार में धारा ज्ञात कीजिए, जबकि इनके सिरों के बीच 3 वोल्ट की बैटरी जुड़ी है। ( दिया है, इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता 4.5 × 10-6 मीटर2 – वोल्ट-1 सेकण्ड-1p तथा इलेक्ट्रॉन पर आवेश e = 1.6 × 10-19 कूलॉम)
हल दिया है-
मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व n = 8.5 × 1028/मीटर3
तार की लम्बाई L= 0.1 मीटर
अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A = 1 मिमी.2
= (10 )2 मीटर2
= 10-6 मीटर2
तार के सिरों के बीच वोल्टता V = 3 वोल्ट
इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता μe = 4.5 × 10-6
मीटर2-वोल्ट1 – सेकण्ड-1
आवेश e = 1.6 × 10-19 कूलॉम
तार में वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{L}}=\frac{3 \text { वोल्ट }}{0.1}\)
E = 30 वोल्ट / मीटर
∵ वैद्युत धारा I= neAμeE
मान रखने पर-
I= (8.5 × 1028) (1.6 x 1019)
(10-6) (4.5 × 10-6) × 30
= 0.918 ऐम्पियर
= 918 × 10-3 ऐम्पियर
= 918 मिली ऐम्पियर ।

प्रश्न 5.
4 × 10-6 m-6 m2 काट-क्षेत्र के तार में 5A धारा प्रवाहित हो रही है। यदि तार में आवेश वाहकों (मुक्त इलेक्ट्रॉनों) का संख्या घनत्व 5 × 1026 m-3 ” है तो इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग ज्ञात कीजिए ।
हल दिया गया है-
अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A = 4 × 10-6 m2
धारा I = 5 ऐम्पियर
मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व n = 5 × 1026 m-3
इसलिए Vd = \(\frac{\mathrm{I}}{\mathrm{nAe}}=\frac{5}{5 \times 10^{26} \times 4 \times 10^{-6} \times 1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{1}{64}\) m/s

प्रश्न 6.
ताँबे का एक तार जिसकी त्रिज्या 0.1 मिमी. तथा प्रतिरोध 2 KΩ है एक 40 वोल्ट के संभरण (supply) से जोड़ दिया गया है। ज्ञात कीजिए – (a) संभरण तथा तार के एक सिरे के बीच प्रति सेकण्ड कितने इलेक्ट्रॉन हस्तानान्तरित होते हैं? (b) तार का धारा घनत्व क्या होगा?
हल दिया है-
तार की त्रिज्या r = 0.1 मिमी.
= 0.1 × 10-3 मीटर
r = 10-4 मीटर
तार का प्रतिरोध R = 2 kΩ = 2 × 103
तार के सिरों पर आरोपित वोल्टता V = 40 वोल्ट
(a) ओम के नियम से
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 29

प्रश्न 7.
ऐलुमिनियम की एक छड़, जिसका काट क्षेत्रफल 4.00 × 10-6 मीटर2 है; में 5.00 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है छड़ में इलेक्ट्रॉन का अपवहन वेग ज्ञात कीजिए। ऐलुमिनियम का घनत्व 2.70 × 103 किप्रा./ मीटर3 तथा परमाणु भार 27 है तथा मान लीजिए कि प्रत्येक ऐलुमिनियम परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त होता है।
हल-यहाँ काट क्षेत्रफल A = 4.00 × 10-6 m2, धारा I = 5.00 A,
घनत्व d = 2.7 × 103 kg/m3 तथा M = 27 × 10-3 kg
छड़ में इलेक्ट्रॉन घनत्व n = \(\frac{N}{V}\)
यहाँ N = छड़ में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 30

प्रश्न 8.
चित्र में असमान काट क्षेत्रफल का एक धारावाही चालक दर्शाया गया है। किन बिन्दुओं पर मान अधिकतम होगा।
(अ) धारा का
(ब) धारा घनत्व का तथा
(स) अपवहन वेग का।
हल-(अ) चालक में प्रवाहित धारा का परिमाण प्रत्येक बिन्दु पर समान होगा।
(ब) धारा घनत्व चालक के काट क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अतः बिन्दु B पर धारा घनत्व का मान अधिकतम होगा।
(स) चालक के प्रत्येक भाग में प्रवाहित धारा का मान समान होता है। सिद्धान्ततः यह तभी सम्भव है जब कम क्षेत्रफल काट के भाग में विद्युत क्षेत्र की तीव्रता अधिक हो। अतः बिन्दु B पर अपवहन वेग का मान अधिकतम होगा क्योंकि (vd ∝ E) होता है।

प्रश्न 9.
चित्र में एक आयताकार पदार्थ को दर्शाया गया है। जिसकी लम्बाई 1, चौड़ाई 0.5l व मोटाई 0.25l है। इसके प्रतिरोध का मापन करने के लिए विभवान्तर को दो प्रकार से आरोपित किया जाता है। [चित्र (अ) तथा (ब)] किस व्यवस्था में पदार्थ का प्रतिरोध अधिक होगा ?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 32
यद्यपि पदार्थ का प्रतिरोध विभवान्तर व धारा पर निर्भर नहीं करता है परन्तु पदार्थ के जिस काट भाग से धारा प्रवेश करती है उसके क्षेत्रफल पर अवश्य निर्भर करता है।

प्रश्न 10.
एक धातु के तार की लम्बाई l मीटर और काट क्षेत्रफल A वर्ग मीटर है। ज्ञात कीजिए कि यदि तार को खींचकर इसकी लम्बाई दुगुनी कर दी जाये तो इसके प्रतिरोध में कितनी प्रतिशत वृद्धि होगी?
हल-हम जानते हैं-तार का प्रतिरोध R = \(p\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
तार को खींचने पर इसकी लम्बाई में वृद्धि के साथ उसके काट क्षेत्रफल में कमी होगी लेकिन दोनों स्थितियों में द्रव्यमान समान रहेगा,
अतः Ald = (A) (2l)d जहाँ d पदार्थ का घनत्व है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 34

प्रश्न 11.
दो तारें A तथा B समान धातु की बनी हैं। इनके अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल भी समान हैं तथा लम्बाइयों का अनुपात 2 : 1 है। यदि प्रत्येक तार की लम्बाई के सिरों पर समान विभवान्तर आरोपित किया जाए, तो दोनों तारों में प्रवाहित होने वाली धाराओं का अनुपात क्या होगा?
हल-समान विभवान्तर होने पर
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 35

प्रश्न 12.
किसी तार को खीचकर इसका व्यास आधा कर दिया जाता है। इसका नया प्रतिरोध का मान क्या होगा?
हल- माना वास्तविक लम्बाई = l1
वास्तविक व्यास = d1
नयी लम्बाई = l2
नया व्यास = d2
खींचने के बाद तार का आयतन (या घनत्व) समान ही रहता है अर्थात्
A1l1 = A2l2
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 36

प्रश्न 13.
एक 15 Ω के मोटे तार को खींचकर इसकी लम्बाई को तीन गुना कर दिया जाता है। यह मानते हुए कि खींचने पर इसका घनत्व अपरिवर्तित रहता है। नए तार के प्रतिरोध की गणना कीजिए।
हल-माना तार का खींचने से पहले अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल =A1 है और उसकी वास्तविक लम्बाई = l1
खींचने के पश्चात् तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल =A2 है । और तार की नयी लम्बाई = l2 है।
चूँकि खींचने पर तार का घनत्व अपरिवर्तित रहता है, अतः खींचने से पहले का आयतन = खींचने के बाद का आयतन

प्रश्न 14.
एक कार्बन प्रतिरोधक जिस पर प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय छल्ले क्रमशः आसमानी, काले तथा पीले रंग के हैं, के आर-पार 30 वोल्ट की वोल्टता आरोपित की गई है। प्रतिरोधक में प्रवाहित वैद्यूत धारा ज्ञात कीजिए।
हल-चूँकि
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 38

प्रश्न 15.
एक सेल जिसका विद्युत वाहक बल 2 वोल्ट तथा आन्तरिक प्रतिरोध 0.1 ओम है, एक 3.9 ओम के बाह्य प्रतिरोध से जोड़ी गई है। सेल का टर्मिनल विभवान्तर ज्ञात कीजिए।
हल-दिया है-
E = 2 वोल्ट
सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r = 0.1 ओम
R = 3.9 ओम
अतः सेल से प्राप्त धारा I = \(\frac{E}{R+r}\)
मान रखने पर
I = \(\frac{2}{3.9+0.1}\) = \(\frac{2}{4}\) = \(\frac{1}{2}\)
= 0.5 ऐम्पियर
इसलिए सेल का टर्मिनल विभवान्तर
V = E – Ir = 2 – 0.5 × 0.1
= 2 – 0. 05 = 1. 95 वोल्ट
अथवा V = IR = 0.5 × 3.9
= 1. 95 वोल्ट

प्रश्न 16.
दो प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर उनका समतुल्य प्रतिरोध 18Ω तथा समान्तर क्रम में जोड़ने पर समतुल्य प्रतिरोध 4Ω है। दोनों प्रतिरोधों का मान ज्ञात कीजिए।
हल-दिया गया है- Rs = 18 Ω
Rs = R1 + R2 से
18 = R1 + R2 ………..(1)
समान्तर क्रम में जोड़ने पर समतुल्य प्रतिरोध Rp = 4Ω
अतः
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 39
समीकरण (1) तथा (2) को जोड़ने पर
2R1 = 24 Ω
⇒ R1 = 12 Ω
समीकरण (1) में मान रखने पर
12 + R2 = 18
या R2 = 18 – 12 = 6 Ω
अतः R1 = 12 Ω तथा R2 = 6 Ω

प्रश्न 17.
एक विद्यार्थी के पास दो प्रतिरोध तार हैं जिनका वह अलग-अलग तथा एक साथ प्रयोग करके, 3,4,12 व 16 ओम के प्रतिरोध प्राप्त कर सकता है। तारों के प्रतिरोध क्या होंगे?
हल-माना कि दो तारों का प्रतिरोध r1 ओम व r2 ओम है। यहाँ पर दो तारों का सबसे कम प्रतिरोध 3 ओम है। इसलिये दो तारों को समान्तर क्रम में जोडा गया है।
∴\(\frac{\mathrm{R}_1 \times \mathrm{R}_2}{\mathrm{R}_1+\mathrm{R}_2}\) = 3 ………(1)
इन्हीं दो तारों से अधिकतम प्रतिरोध 16 ओम प्राप्त किया गया है।
∴ यह तार श्रेणीक्रम में जोड़े गये हैं।
R1 + R2 = 16 ………….. (2)
समी. (2) का मान (1) में रखने पर
∴ \(\frac{\mathrm{R}_1 \mathrm{R}_2}{16}c\) = 3
∴ R1R2 = 48 ………… (3)
वह समीकरण जिसके r1 व r2 मूल हैं, वह है-
x2 – (मूलों का योग) x + मूलों का गुणनफल = 0
x2 – (R1 + R2) x + r1r2 = 0
x2 – (16)x + 48 = 0
(x – 12) (x – 4) = 0
x = 12, 4
अतः दो तार 4 ओम व 12 ओम के हैं

प्रश्न 18.
दिए गये चित्र में यदि हीटस्टोन सेतु संतुलित है तो अज्ञात प्रतिरोध X का मान ज्ञात कीजिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 40

प्रश्न 19.
चित्र में दर्शाये गये जालक के भाग में प्रवाहित धारा i का मान ज्ञात कीजिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 41
हल-यदि शाखा AB व BC में प्रवाहित धारायें क्रमशः x व y हों तो किरचॉफ के संधि नियम से
संधि A पर x + 2.0 + 2.5 = 0
या x = -(2.0 + 2.5) = -4.5A
अर्थात् 4.5 A धारा, A से B की ओर प्रवाहित होगी।
पुनः संधि B पर
4.5 – 1.0 + y = 0 या y = – 3.5A
अर्थात् B से C की ओर प्रवाहित धारा 3.5A होगी।
इसी प्रकार संधि C पर, 3.5 – 1.5 – i = 0 या i = 2.0A

प्रश्न 20.
चित्र में एक विद्युत परिपथ के एक भाग ABC को दर्शाया गया है। बिन्दु A,B व C के विभवों का मान क्रमश: VA, VB व VC हैं। बिन्दु O पर विभव का मान ज्ञात कीजिए।
हल-बिन्दु O पर संधि नियम से
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 42
-i1 -i2 -i3 = 0
या i1 + i2 + i3 = 0 ………(1)
यदि बिन्दु O पर विभव का मान V0 है तो ओम के नियमानुसार भिन्न-भिन्न शाखाओं में प्रवाहित धाराओं का मान क्रमशः होगा
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 43

प्रश्न 21.
चित्र में दर्शाये गये जालक के बिन्दु a व b के मध्य तुल्य प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए।
हल-माना टर्मिनल a व b के मध्य V विभवान्तर की एक बैटरी को जोड़ा गया है। बैटरी से टर्मिनल a में i धारा प्रवेश करती है तथा इतनी ही धारा b से निर्गत होती है। बिन्दु O पर धारा का मान; तीन प्रतिरोधों में समान मात्रा
\(\left(\frac{1}{3}\right)\)
में विभक्त हो जायेगा। अतः a व b के मध्य विभवान्तर
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 51
V = Va0 + V0b = iR + \(\frac{1}{3}\)R
अतः तुल्य प्रतिरोध Req = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{i}}\) = \(\frac{4}{3}\)R

प्रश्न 22.
चित्र में बिन्दु A शून्य विभव पर है। B पर विभव ज्ञात करने के लिए किरचॉफ के नियमों का प्रयोग कीजिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 44
हल-संधि D पर किरचॉफ के प्रथम नियम से पाश BDCQ की भुजा DC में प्रवाहित धारा = (2 – 1) ऐम्पियर = 1 ऐम्पियर
शाखा ACDB में
VA – VB = (VA – VC) + (VC – VD) + (VD – VB)
VA – VB = (-1) + (-2) +2
0 – VB = -1
VB = 1 Volt

प्रश्न 23.
एक सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के विभवमापी के प्रयोग में जब सेल से 2 ओम के प्रतिरोध में धारा प्रवाहित करते हैं तो सेल तार की 3.75 मीटर लम्बाई पर सन्तुलित होती है। जब सेल से 4 ओम प्रतिरोध में धारा प्रवाहित करते हैं, तो संतुलन बिन्दु 5.00 मीटर पर प्राप्त होता है। सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिये।
हल-सेल का आंतरिक प्रतिरोध
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 45

प्रश्न 24.
विभवमापी के प्रयोग में एक 5V विद्युत वाहक बल तथा नगण्य आन्तरिक प्रतिरोध की प्रामाणिक सेल इसके 5 मीटर लम्बे तार में स्थायी धारा देती है। E1 तथा E2 विद्युत वाहक बल वाली दो प्राथमिक सेल श्रेणीक्रम में जोड़ी गई हैं-(i) समान ध्रुवता के साथ, (ii) विपरीत धुवता के साथ। यह संयोजन एक धारामापी तथा सर्पी कुंजी के माध्यम से विभवमापी के तार से जोड़ा गया है। उक्त दोनों स्थितियों में सन्तुलन लम्बाइयाँ क्रमशः 350 सेमी. तथा 50 सेमी. प्राप्त होती हैं। (a) आवश्यक परिपथ आरेख खीचिए। (b) दोनों सेलों के विद्युत वाहक बलों के मान ज्ञात कीजिए।
हल-(a) आवश्यक परिपथ आरेख नीचे दर्शाये गये आरेख की भाँति होगा।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 46

प्रश्न 25.
IF Stage (मध्य आवृत्ति) (a) मीटर सेतु की सन्तुलन अवस्था में दिए गए परिपथ चित्र में अज्ञात प्रतिरोध S का मान ज्ञात कीजिए।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 48
(b) दिए गये परिपथ में X व Y के मध्य परिणामी प्रतिरोध का मान लिखिए यदि कुंजी K
(i) खुली हो
(ii) बन्द हो।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 49

(b) (i) परिणामी प्रतिरोध ज्ञात करना जबकि कुंजी K खुली हो प्रतिरोध 6Ω और 4Ω आपस में श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, अतः इसका कुल प्रतिरोध
R1 = 6 + 4 = 10Ω
इसी तरह से 3Ω और 12Ω के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं, अतः इसका कुल
R2 = 3Ω + 12Ω
= 15Ω
अतः X व Y के मध्य परिणामी प्रतिरोध का मान
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 3 विद्युत धारा 50

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HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 12 Heron’s Formula

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 12 Heron’s Formula Notes.

Haryana Board 9th Class Maths Notes Chapter 12 Heron’s Formula

Introduction
In previous classes, we have studied about various plane figures such as squares, rectangles, triangles, quadrilaterals etc. We have also learnt the formula for finding the areas and the perimeters of these figures like rectangle, square, triangle etc. as given below:
1. Triangle :
(i) \(\frac{1}{2}\) × Base × Height
\(\frac{1}{2}\) × BC × AD
(ii) Perimeter = sum of the sides of a triangle
= AB + BC + CA
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2. Right angled triangle:
(i) Area = \(\frac{1}{2}\) × base × height
= \(\frac{1}{2}\) × BC × AB
(ii) Perimeter = AB + BC + CA
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3. Equilateral triangle: Let each side of an equilateral triangle be a units.
(i) Area = \(\frac{1}{2}\) × base × height
= \(\frac{1}{2}\) × BC × AD
[∵ AD = \(\sqrt{a^2-\frac{a^2}{4}}\)
⇒ AD = \(\sqrt{\frac{3 a^2}{4}}\)
⇒ AD = \(\frac{\sqrt{3} a}{2}\) ]
= \(\frac{1}{2}\) × a × \(\frac{\sqrt{3} a}{2}\)
(ii) Perimeter = a + a + a
3a = 3 × side
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4. Parallelogram:
(i) Area = base x height
= AB × DE
(ii) Perimeter = sum of the sides of ||gm
= AB + BC + CD + AD
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5. Square: (i)
Area = side × side = side2
or Area = \(\frac{1}{2}\) × d2
(where d = diagonal of a square)
(ii) Perimeter = side + side + side + side
= 4 × side
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HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 12 Heron’s Formula

6. Rectangle :
(i) Area = base × height
= length × breadth
(ii) Perimeter = AB + BC + CD + DA
= L + B + L + B
= 2L + 2B
= 2(L + B)
where L = length of a rectangle
and B = breadth of a rectangle
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7. Rhombus :
(i) Area = base × height
or Area = \(\frac{1}{2}\) × d1 × d2
where d1 and d2 are the diagonals of a rhombus.
(ii) Perimeter = side + side + side + side
= 4 × side
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8. Trapezium:
(i) Area = \(\frac{1}{2}\) × (sum of parallel sides) × distance between them
= \(\frac{1}{2}\) × (AB + DC) × DE
(ii) Perimeter = AB + BC + CD + AD
Unit of measurement for length, breadth, height and perimeter is taken as metre (m) or centimetre (cm), milimetre (mm) etc.
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Units measurement of Perimeter
1 m = 10 dm, 1 m = 100 cm, 1 m = 1000 mm, 1 km = 10 hm, 1 km = 100 dakm, 1 km = 1000 m Unit of measurement for area of any plane figure is taken as square metre (m2) or square centimetre (cm2) or square millimetre (mm2) etc.
Units measurement of Area
1 km2 = 1 km × 1 km = 10 hm × 10 hm = 100 hm2
1 km2 = 1 km × 1 km = 1000 m × 1000 m = 1000000 m2 = 106 m2
1 hectare = 10000 m2
1 m2 = 1m × 1m = 100 cm × 100 cm = 10000 cm2
1m2 = 1m × 1m = 10 dm × 10 dm = 100 dm2 etc.

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Key Words
→ Area: The area of a triangle or a polygon is the measure of the surface enclosed by its sides.

→ Perimeter: The perimeter of a plane figure is the length of its boundary.
OR
A perimeter is the sum of lengths of sides of a polygon.

→ Right angled triangle: A triangle with one angle a right angle (90°) is called a right angled triangle.

→ Scalene triangle: If all three sides of a triangle are unequal or different, it is called scalene triangle.

→ Isosceles triangle: If at least two sides of a triangle are equal, it is called isosceles triangle.

→ Equilateral triangle: If all three sides of a triangle are equal, it is called. equilateral triangle.

→ Quadrilateral: A plane figure bounded by four line segments is called a quadrilateral.

→ Parallelogram: A quadrilateral in which opposite sides are parallel and equal is known as a parallelogram.

→ Square: A quadrilateral whose each angle is 90° and all sides are equal to each other is known as a square.

→ Rectangle: A quadrilateral each of whose angles is 90° is called a rectangle.

→ Rhombus: A quadrilateral having all the four sides equal is called a rhombus.

→ Trapezium: A quadrilateral in which one pair of opposite sides are parallel is called a trapezium.

→ Diagonal: A line joining any two vertices of a polygon that are not connected by an edge and which does not go outside the polygon.

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Basic Concepts
Area of a Triangle by Heron’s Formula: Heron was born in about 10 AD possibly in Alexandria in Egypt. He worked in applied mathematics and wrote three books on mensuration. Book I deals with the area of rectangles, squares, triangles, trapezia, various other specialized quadri- laterals, regular polygons, circles, surfaces of cylinders, cones and spheres etc.
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He derived the famous formula for finding the area of a triangle in terms of its three sides.
The formula for finding the area of a triangle was given by Heron is stated as below:
Area of a triangle = \(\sqrt{s(s-a)(s-b)(s-c)}\),
where a, b and c are the sides of a triangle and s = semi-perimeter of the triangle, ie.,
\(\frac{a+b+c}{2}\)
This formula is helpful where it is not possible to find the height of the triangle.

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Application of Heron’s Formula in Finding Areas of Quadrilaterals: In this section, we have studied the areas of such figures which are the shape of a quadrilaterals. We need to divide the quadrilateral in two triangles and then use the formula 12.25 area of the triangle.

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