Author name: Bhagya

HBSE 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 2 विविधता एवं भेदभाव

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 2 विविधता एवं भेदभाव Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 2 विविधता एवं भेदभाव

HBSE 6th Class Civics विविधता एवं भेदभाव Textbook Questions and Answers

विविधता की समझ प्रश्न उत्तर HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
निम्नलिखित कथनों का मेल कराइए। रूढिबद्ध धारणाओं को कैसे चुनौती दी जा रही है, इस पर चर्चा कीजिए :

स्तंभ “क”स्तंभ “ब”
(क) दो डॉक्टर खाना खाने बैठे थे और उनमें से एक ने मोबाइल पर फोन करके1. दमा का पुराना मरीज है।
(ख) जिस बच्चे ने चित्रकला प्रतियोगिता जीती, वह मंच पर2. एक अन्तरिक्ष यात्री बनने का सपना अंततः पूरा हुआ।
(ग) संसार के सबसे तेज धावकों में से एक3. अपनी बेटी से बात की जो उसी समय स्कूल से लौटी थी।
(घ) वह बहुत अमीर नहीं थी, लेकिन उसका4. पुरस्कार लेने के लिए एक पहियोंवाली कुर्सी पर गया।

उत्तर:
(क) – 3
(ख) – 4
(ग) – 1
(घ) – 2

विविधता की समझ class 6 HBSE Social Science प्रश्न 2.
लड़कियाँ माँ-बाप के लिए बोझ हैं, यह रूढिबद्ध धारणा एक लड़की के जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती है? उसके अलग-अलग पाँच प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
“बालिकाएँ अपने माता-पिता पर भार स्वरूप हैं” रूढ़ि का पुत्रियों (बालिकाओं) के व्यक्तित्व पर प्रभाव:
1. यह भ्रमित धारणा माता-पिता और समाज द्वारा दुहराई जाती है। बालिकाएँ जब कई लोगों के मुंह से ऐसा सुनेंगी तो उनका सरल मन सबसे पहले ‘भार’ का अर्थ खोजने लगेगा और जब यह पता लगेगा कि भार से व्यक्ति को मानसिक बेचैनी, अनिद्रा जैसी पीड़ाएँ होती हैं तो वे बचपन से ही अपने को माता-पिता के अहसान से दबी महसूस करेंगी और “कुलदीपक” कहे जाने वाले अपने भाईयों से अपने को तुच्छ मानने लगेंगी।

2. बालिकाओं का व्यक्तित्व अन्तर्मुखी बनने लगेगा। वे अल्पायु में ही अपनी बालसुलभ चेष्टाओं को भूल जाएँगी और -धीरे-धीरे आत्म-विश्वास खोने लगेंगी।

3. वे अपने को किसी भार (गठरी) की तरह निर्जीव समझेंगी तथा घर-परिवार, समाज तथा सार्वजनिक स्थलों से पूर्णत: दूर केवल एक कमरे के दायरे में समेट लेगी और मानसिक-वेदना बढ़ने से उनके शरीर की सहज वृद्धि भी रूक जाएगी।

4. उनमें आत्म-रक्षा का बल और इच्छा-शक्ति क्षीण होने लगेगी। इसकी अनुपस्थिति में हमेशा भय और संशय की भावना घर करने लगेगी। इसका उनके शरीर को स्वाभाविक वृद्धि, मानसिक शक्तियों के विकास और भावात्मक शुद्धता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

5.”ओह! बेचारे की फिर से पुत्री हो गई-बस अब तो भार से दबकर मर जाएगा।” तथा “आह! बड़ी खुशी की बात है कि आपके घर पुत्र-रत्न का जन्म हुआ है” जैसी भ्रांत-धारणाओं का बखान-जो हमारे समाज में किसी न किसी रूप में आज भी होता रहता है-पालने (हिडोले) से ही पुत्रियों को कायर, अस्थिर, अबला और निरूपाय बनने का पाठ पढ़ाने लगता है।

ऐसी रूढिबद्ध धारणाओं के रहने पर भी भारत की बालिकाओ ने विगत दशक में 2001 की जनगणना के अनुसार 53.60 प्रतिशत के स्तर तक साक्षरता प्राप्त की है अर्थात् भारत की बाईस करोड़
इकतालीस लाख महिलाएँ साक्षर हो चुकी हैं। 1981-1991 के दशक और 1991-2001 के दशक की तुलना करने पर स्पष्ट हो जाता है कि महिलाओं का साक्षरता वृद्धि प्रतिशत पुरुषों से आगे बढ़ा है। हालांकि इसमें कुछ प्रभाव लिंग-अनुपात में कमी आने के कारण भी पड़ा है।

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विविधता की समझ प्रश्न उत्तर कक्षा 6 HBSE Social Science प्रश्न 3.
भारत का संविधान समानता के बारे में क्या कहता है? आपको यह क्यों लगता है कि सभी लोगों में समानता होना जरूरी है?
उत्तर:
संविधान कहता है कि धर्म, जाति, वर्ग, या लिंग पर आधारित किसी तरह का विशेषाधिकार नहीं हैं और न इस आधार पर किसी तरह का भेदभाव किया ही जाता है। सरकारी नौकरियों के मामले में अन्य दृष्टि से योग्य रहने पर राज्य सभी लोगों को समान अवसर प्रदान करता है। अस्पृश्यता निवारण करके सामाजिक समानता को सुरक्षित किया गया है। आर्थिक समानता समान कार्य के लिए समान वेतन नियत करके लाई गई है।

सभी लोगों का समान रहने से तात्पर्य केवल एक ही जाति, वंश, लिंग या योग्यता का रहना नहीं है बल्कि इन विविधताओं के बाद भी देश में राजकीय स्तर पर किसी तरह का भेदभाव न किया जाना ही समानता है। उदाहरणार्थ-कार्य/संचालन आदि की योग्यता रहने पर किसी भी नागरिक को अपनी जाति, धर्म, लिंग या वर्ण के आधार पर उसके पद/स्थान से हटाया नहीं जा सकता है या नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

एसी समानता के रहने से लोगों में-
1. देश प्रेम
2. नियम और मर्यादाओं का पालन करने की प्रवृत्ति
3. सबके हित में ही अपना हित समझने की बुद्धि
4. सहानुभूति और
5. धार्मिक सहिष्णुता की भावना जागेगी। इस भावना और बुद्धि से सींची गई भूमि पर ही अखंड संप्रभुता संपन्न राष्ट्र रूपी वृक्ष चिरंजीवी रह सकता है।

विविधता की समझ HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 4.
कई बार लोग हमारी उपस्थिति में ही पूर्वाग्रह से भरा आचरण करते हैं। ऐसे में अक्सर हम कोई विरोध करने की स्थिति में नहीं रहते, क्योंकि मुंह पर तुरंत कुछ कहना मुश्किल जान पड़ता है। अपनी कक्षा को दो समूहों में बाँटिए और प्रत्येक समूह इस पर चर्चा करे कि दी गई परिस्थिति में वे क्या करेंगे:
(क) गरीब होने के कारण एक सहपाठी को आपका दोस्त चिड़ा रहा है।
(ख) आप अपने परिवार के साथ टी.वी. देख रहे हैं और उनमें से कोई सदस्य किसी खास धार्मिक समुदाय पर पूर्वाग्रहग्रस्त टिप्पणी करता है।
(ग) आपकी कक्षा के बच्चे एक लड़की के साथ मिलकर खाना खाने से इंकार कर देते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि वह गंदी है।
(घ) किसी समुदाय के खास उच्चारण का मजाक उड़ाते हुए कोई आपको चुटकुला सुनाता है।
(ङ) लड़के लड़कियों पर टिप्पणी कर रहे हैं कि लड़कियाँ उनकी तरह नहीं खेल सकतीं।
उत्तर:
इन दशाओं पर प्रत्येक समूह का अपना अलग विचार रहेगा और कक्षा में वार्ता के समय भी प्रत्येक समूह अपने विचार को महत्त्व देगा। यह प्रश्न छात्र के नितांत वैयक्तित्व विचार और कक्षा में प्रस्तावित एक कार्यक्रम की प्रवृत्ति का है। अतः दस-दस छात्रों के समूह बनाकर प्रश्नानुसार कार्य-विधि का पालन कीजिए और अन्त में निष्कर्ष लीजिए। निष्कर्ष संकेत इस तरह दिया जा सकता है:

(क) उसी समय प्रतिक्रिया करके दोस्त को समझाना कठिन रहेगा क्योंकि आप दोस्त को खो देंगे। किसी अन्य समय एकांत में उसको समझाना होगा कि ऐसा करना अपराध की कोटि में आता है। “सहपाठी” शब्द उसको हम सभी को बराबर में खड़ा करता है अत: निर्धन होने के कारण उस सहपाठी को छेड़ना विधि-विरुद्ध

(ख) इस स्थिति में भी तुरंत प्रतिक्रिया करना उचित नहीं है। टिप्पणी करने वाला हमारा बड़ा भाई, पिता या माता भी हो सकता है अत: किसी अन्य उचित समय को चुनकर उनके साथ विस्तार से इस विषय पर बात करनी उचित रहेगी। यह सर्वधर्म समभाव वाली सांविधिक प्रतिष्ठा का अवमान है। यदि परिवार के सभी सदस्य एकमत से टिप्पणी करने लगें और अपने समुदाय में भी उन्होंने इस रूढिबद्ध धारणा को जमाने की कोशिश की तो निश्चित है कि कभी न कभी सांप्रदायिक हिंसा का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

(ग) इस दशा में बच्चों को समझाया जाता है कि ऐसे व्यवहार से उन बच्चों के मन में ठस लगेगी और समाज के प्रति घृणा का भाव जगने पर आगे चलकर वह बनाया समाजिक अशांति और उपद्रव का कारण बन सकता है।

(घ) किसी समुदाय विशेष का उपहास करने के प्रयोजन से गढ़ा गया चुटकुला आगे चलकर समुदायों के बीच कलह और अशांति का कारण बन सकता है। यह किसी समुदाय के तौर-तरीकों पर सीधा प्रहार है अतः अनुचित है। ..

(ङ) यह स्थिति लड़कियों के मन में लड़कों के प्रति घृणा की भावना जगाती है। संभव है कि आगे चलकर व्यंग करने वाले लड़कों को उन लड़कियों के क्रोध का शिकार बनना पड़े। खेल में प्रवीणता अभ्यास से आती है और ऐसे अपवाद भी सामने हैं जिनमें लड़कियों ने खेलों में लड़कों से अधिक प्रवीणता दिखाई है।

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HBSE 6th Class Civics विविधता की समझ Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

विविधता की समझ प्रश्न उत्तर HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
द्वेष या पूर्वाग्रह से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
अपने धर्म, जाति और वर्ग को दूसरों से श्रेष्ठ समझने की मिथ्या-धारणा।

प्रश्न 2.
“दलित” शब्द को संविधान में क्या प्रभाव दिया गया है?
उत्तर:
अनुसूचित जाति या जनजाति।

प्रश्न 3.
भिन्नता और पूर्वाग्रह में क्या अन्तर है?
उत्तर:
भिन्नता सर्वव्यापी है जबकि पूर्वाग्रह अज्ञान और संकीर्ण मनोवृत्ति का परिचायक है।

प्रश्न 4.
द्वेष को मिथ्या धारणा क्यों कहते हैं?
उत्तर:
द्वेष एक आम-जनसमूह द्वारा बनाई गई धारणा है जो वास्तविक परीक्षा और जाँच करने पर आधारहीन पाई जाती है। उदाहरणार्थ-शहरी लोगों को भ्रष्ट और ठग मानना। वास्तविकता यह है कि सभी शहरी ऐसे नहीं होते और कुछ भ्रष्ट और ठग तथा कुछ सज्जन और विश्वसनीय लोग सर्वत्र पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
ऊँच-नीच या द्वेष की धारणा क्या परिणाम लाती है?
उत्तर:
समाज का विघटन, आंतरिक अशांति और बाहरी शक्तियों की “फूट डालो और राज्य करो” नीति के लिए खुला स्थान।

प्रश्न 6.
अंग्रेजी को श्रेष्ठ और अन्य भाषाओं को नेष्ट मानना क्या है?
उत्तर:
अन्य भाषाओं की उपेक्षा (अज्ञानता के कारण) और पूर्वाग्रह (अंग्रेजों का श्रेष्ठ होना) के साथ चिपकी हुई क्षीण बुद्धि। भाषा, विचार-विमर्श का माध्यम है अत: न श्रेष्ठ है और न नेष्ट।

प्रश्न 7.
किसी के बात करने के ढंग का उपहास करना क्या है?
उत्तर:
पूर्वाग्रह से ग्रसित मानसिकता।

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प्रश्न 8.
पूर्वाग्रह और तथ्य के बीच क्या अंतर है?
उत्तर:
पूर्वाग्रह किसी जन-समूह द्वारा किसी अन्य समूह या स्थान के लिए बनाई गई मिथ्या धारणा अथवा द्वेष की भावना है क्योंकि तथ्य का अर्थ-किसी निश्चित बात या सत्य को व्यक्त करना है। उदाहरणार्थ-2001 में भारत की जनसंख्या एक अरब तीन करोड़ तक पहुंच गई थी-एक तथ्य है जिसको एक वैज्ञानिक जनानिकी पद्धति का अनुसरण करके ज्ञात किया गया है।

प्रश्न 9.
पूर्वाग्रह या द्वेष की भावना कैसे बनती है?
उत्तर:
किसी व्यक्ति या स्थान के बारे में एक व्यक्ति के कटु-अनुभव या बुरी भावना जब उसके संपर्कगत लोगों के बीच व्यक्त होती है तो वे इसको जाँच किए बिना ही अपने मन में अंकित कर लेते हैं तथा उस व्यक्ति या समूह की बात उठते ही तुरंत इस द्वेष भावना को व्यक्त करने लग जाते हैं।

प्रश्न 10.
हमारे संविधान में समाज के कौन-से वर्ग को विशेष संरक्षण दिया गया है?
उत्तर:
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का वर्णन संविधान की अनुसूची में होने के कारण यह नाम दिया गया है अन्यथा इन्हें “दलित” एवं “हरिजन” कहा जाता है।

प्रश्न 11.
संविधान में नागरिकों को कितने मूल अधिकार दिए गए हैं?
उत्तर:
छः अधिकार।

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प्रश्न 12.
संविधान क्या है?
उत्तर:
देश की व्यवस्था चलाने के लिए आवश्यक नियमों का एक संकलन अथवा पुस्तक।

प्रश्न 13.
हमारे संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों को प्रविष्ट करने का लक्ष्य क्या था?
उत्तर:
भारत के नागरिकों को आर्थिक और सामाजिक न्याय प्रदान करना।

प्रश्न 14.
संविधान में मूल कर्त्तव्यों को क्यों सम्मिलित किया गया है?
उत्तर:
नागरिक अपने अधिकारों के प्रति सजग होने के साथ ही उन कार्यों की जानकारी भी प्राप्त कर सकें जिनके करने पर ही उन्हें संविधान में वर्णित अधिकार स्वतः मिलते रहते हैं। ये संख्या में हैं और अनुच्छेद 51 (ए) के “4-अ” भाग में वर्णित हैं।

प्रश्न 15.
हमारे संविधान निर्माताओं ने नीति-निर्देशक सिद्धांतों को कहाँ से उद्धृत किया?
उत्तर:
आयरलैंड के संविधान से।

प्रश्न 16.
किन्हीं पाँच मूल कर्तव्यों को लिखिए।
उत्तर:
1. आवश्यकता पड़ने पर देश की प्रतिरक्षा के लिए प्राण-न्यौछावर करने को तत्पर रहना।
2. लोगों में समन्वय तथा भाईचारा बढ़ाना।
3. सार्वजनिक संपत्ति की परिरक्षा करना।
4. आदर्श (श्रेष्ठ) विचारों का अनुसरण करना।
5. भारत की एकता और अखंडता को कायम रखना।

प्रश्न 17.
मूल-अधिकारों को लिखिए।
उत्तर:
1. समानता का अधिकार
2. स्वतंत्रता का अधिकार
3. शोषण के विरूद्ध अधिकार
4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
5. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार तथा
6. संवैधानिक उपचार का अधिकार।

प्रश्न 18.
विविधता विभेद का स्रोत कैसे बनती है?
उत्तर:
जब रूड़ि और द्वेष की भावना विविधता के साथ जुड़ती है अर्थात् स्वयं को दूसरे से श्रेष्ठ मानने की भ्रांत धारणा।

प्रश्न 19.
विभेद क्या है?
उत्तर:
धर्म, जाति, वर्ण, कुल आदि आधार पर स्वयं को श्रेष्ठ तथा दूसरे को तुच्छ मानकर रूढ़ियाँ बनाने तथा झगड़ा करने की प्रवृत्ति।

प्रश्न 20.
“विभेद” किन-किन आधारों पर उत्पन्न हो सकता है?
उत्तर:
भाषा, क्षेत्र, धर्म, जाति, परंपरा, रहन-सहन, जीवन-स्तर आदि के आधार पर।

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लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संविधान की उद्देशिका में किन-किन बातों का उल्लेख है? इससे क्या पता लगता है?
उत्तर:
भारत का संविधान वस्तुतः नियमों की एक पुस्तक है जिसके प्राक्कथन रूप में उद्देशिका को दिया गया है। यह उद्देशिका संपूर्ण विषय-वस्तु का सार व्यक्त करती है। इसमें भारत एक संप्रभुता संपन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणतंत्र होने, नागरिकों को मूल कर्त्तव्य और अधिकार देने तथा केन्द्र के साथ ही राज्यों में भी संसदीय शासन व्यवस्था को अंगीकार किए जाने की बात की गई है। इसमें स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर विशेष बल दिया गया है।

प्रश्न 2.
मूल अधिकारों का क्या महत्त्व है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मूल अधिकारों का महत्त्व:
1. मानव के सहज विकास हेतु ऐसे अधिकारों का रहना आवश्यक है। ये मनुष्य की भौतिक/शारीरिक वृद्धि और बौद्धिक एवं नैतिक विकास सुनिश्चित करते हैं।वातावरण प्रदान करते हैं।
2. इन अधिकारों के बिना हम अपने जीवन को सुखी तथा समृद्ध नहीं बना पाते हैं।
3. भारत के संविधान द्वारा इन अधिकारों को कानूनी बल दिया जाता है। इससे भी इनकी महत्ता स्वयं प्रकट हो जाती है।

प्रश्न 3.
राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का महत्त्व बताइए।
उत्तर:
नीति-निर्देशक सिद्धांतों का महत्त्व:
1. भारत के सभी नागरिकों के लिए आर्थिक और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करते हैं।
2. सभी लोगों के बीच आर्थिक और सामाजिक स्तरों पर समानता लाने के लिए चेष्टावान हैं।
3. अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को प्रोन्नत करने का लक्ष्य रखते हैं।
4. भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करने के लक्ष्य की ओर उन्मुख करते हैं।

प्रश्न 4. राज्य के अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से संबंधित नीति-निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
1. राज्य अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सचेष्ट रहेगा।
2. राष्ट्रों देशों के बीच न्यायपूर्ण और सौहार्दमय संबंध को कायम रखेगा।
3. अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को माध्यस्थम विधि (मध्यस्थता) से परस्पर परिचर्चा करके, निपटाने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करेगा।
4. अन्तर्राष्ट्रीय विधि के लिए सम्मान की भावना जगाएगा।

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प्रश्न 5.
राज्य के संविधान में वर्णित महत्त्वपूर्ण नीति-निर्देशक सिद्धांतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रमुख नीति-निर्देशक सिद्धांत:
1. धन का समान वितरण (आर्थिक समानता) तथा महिला और पुरुष दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।
2. चौदह वर्ष की आयु तक सभी बच्चों को निःशुल्क बुनियादी शिक्षा दी जाए।
3. कृषि और पशुपालन को आधुनिक तथा वैज्ञानिक पद्धति से संचालित उद्योग बनाया जाए।
4. मादक पेय और औषधियों के सेवन को प्रतिषिद्ध किया जाए।
5. सभी को रोजगार देने वाली सक्षम व्यवस्था की जाए।
6. सभी नागरिकों को आजीविका के समुचित साधन उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था बनाई जाए।
7. समाज के कमजोर वर्ग को विशेष संरक्षण देते हुए स्वास्थ्य उपचार की समुचित सुविधाएँ सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था की जाए।
8. ग्राम पंचायत को समुचित शक्ति सौंपी जाए।

प्रश्न 6.
राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में गाँधीजी के कौन से सिद्धांतों का सार समाया है?
उत्तर:
राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में गाँधी जी के सिद्धांतों का सार:
1. स्थानीय स्व-शासन को एक इकाई के रूप में ग्राम पंचायत का गठन करना।
2. कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
3. समुदाय के कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों के बढ़ावा देना।
4. मादक पेय और औषधियों के सेवन को निषिद्ध प्रतिषिद्ध करवाना।
5. पशुओं का परिरक्षण और वंश-संवर्धन करना तथा उसके वध को प्रतिषिद्ध ठहराना।
6. कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति से संगठित करना।

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प्रश्न 7.
भारतीय संविधान की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत का संविधान विश्व के सभी देशों से आकार और पृष्ठों की दृष्टि से बड़ा और लिखित संविधान है। यहाँ के नागरिक ही अपनी सरकार बनाते हैं। यहाँ पर ऐतिहासिक गण/संघ पद्धति से शासन व्यवस्था सुस्थापित है। केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण संघ सूची और राज्य सूची में सुस्पष्ट किया गया है।

इसमें न्यायापालिका को कार्यपालिका के हस्तक्षेप में मुक्त रखा गया है। न्यायपालिका को कार्यपालिका पर अंकुश रखने की शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। तात्पर्य यह है कि एक स्वतंत्र और संप्रभु न्यायपालिका है। इसमें राज्य के किसी अपने धर्म की बात नहीं की गई है अर्थात् भारत को धर्म निरपेक्ष राज्य बनाया गया है। अट्ठारह वर्ष की आयु को प्राप्त समस्त नागरिकों को मताधिकार दिया गया है। नागरिक के व्यष्टि अधिकारों का किसी तरह का हनन न हो-इसके लिए छ: मूल अधिकारों में से एक साविधिक उपचार का अधिकार भी दिया गया है।

प्रश्न 8.
कुछ अधिकारों को मूल अधिकार क्यों कहते
उत्तर:
“मूल” का अर्थ है- जड़। वनस्पति (जीव) की जड़ भूमि की सतह से भी अधिक गहरी जाकर ठोस आधार बनाती है और इसके उपरांत ही तना और पत्ते बनते हैं-यह सार्वभौमिक सत्य है। अत: मानव के यथार्थ आधार को ले पाने का वातावरण तैयार करने के लिए समानता, स्वतंत्रता, शोषण विरूद्ध अधिकार, सांविधिक उपचार जैसे अधिकार दिए जाने-एक वृक्ष की जड़ों जैसे आवश्यक अंग हैं। इसीलिए ये मूल अधिकार हैं अर्थात् मानव व्यक्तित्व के ऐसे निर्माणी अधिकार लोकतंत्र में रहने आवश्यक हैं।

प्रश्न 9.
‘अस्पृश्यता’ की उत्पत्ति कहाँ से हुई? इसके मूल हेतुकों को बताइए।
उत्तर:
उत्तर वैदिक काल में तत्समय आवश्यक समाज व्यवस्था के अनुसार कार्य संघ बनाए गए और कार्य संघ अलग-अलग स्थानों पर समुदाय बनाकर रहने लगे। कालांतर में कार्यों का विश्लेषण किया गया और योग्यताओं के आधार पर बने हुए कार्य-संघों को चार वर्गों में बाँटा गया जो ब्राह्मण (अध्ययन, अध्यापन, वेद-पाठ, धर्म प्रचार, समाजोपयोगी विचारों का प्रचार-प्रसार), क्षत्रिय (तीक्ष्ण बुद्धि, साहसी, पराक्रमी, रणनीति विशेषज्ञ), वैश्य (कृषि, व्यापार, संचार, कारोबार, वणिकवृत्ति) और शूद्र (भौतिक दृष्टि से निरूपयोगी चीजों को भी उपयोगी पाने में सक्षम सभी शिल्पी, वास्तुकार, अभियंता, चर्मकार, लोहार, सुनार, स्वच्छक, केशकर्त्तक आदि) के।

आरंभ में कार्य-आधार पर समाज में स्वीकृत यह व्यवस्था आगे की पीढ़ियों में जन्म का आधार पकड़ गई जैसा कि शिक्षित, अच्छे स्कूल का छात्र आदि योग्यताओं के रहने पर भी स्टेशन मास्टर की रूढ़ि ने डा. अम्बेडकर को कटु अनुभव कराया। यात्रियों के प्रति अपने प्रशासकीय कर्तव्य को भी उसने तिलांजलि दे दी थी। रूढ़ियों के कारण ही संविधान में भी इन्हें अनुसूची में आबद्ध करना पड़ा है अर्थात् विशेष सरकारी संरक्षण प्रदान किया गया है।

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विविधता एवं भेदभाव Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. विविध धर्म, स्वभाव के लोग आपस में उपहास, व्यंग्य क्यों करते हैं?: अपने धर्म को दूसरों के धर्म से श्रेष्ठ समझने का अज्ञान रहने के कारण।
2. विश्व में कुल कितने धर्म हैं?: आठ
3. लघु-संसार (जगत) भारत में कितनी भाषाएं प्रचलित हैं? 1600
4. भारत के संविधान में संशोधन करके वर्ष 2003 से कौन सी भाषाओं को अधिसूचित किया गया है?: थोड़ो, डोगरी, मैथिली और संथाली भाषाएँ।
5. वर्ष 2003 के संशोधन पश्चात् भारत के संविधान में अनुसूचित भाषाएँ कितनी है? बाईस ।
6. कुछ लोगों को हम अजनबी और अपरिचित क्यों लगते हैं?: तौर-तरीकों और आचार-विचार में भिन्नता के कारण।
7. आत्म-ज्ञान क्या है? अपने आहार, आश्रय-स्थल, जीवन स्तर, भाषा और बोली, मनो-विनोद, खेल-कूद, त्योहार आदि से भली-भांति परिचित होना।
8. हम अपने को सुरक्षित किन लोगों के बीच पाते हैं?: जिनकी कद-काठी, विचार-बातें, पहनावा और मुख मुद्रा हमारी जैसी होती है।
9. पिछड़ा, गंदा, भ्रष्ट, धूर्त, धनलोलुप जैसे शब्दों के स्थान पर अग्रणी, स्वच्छ, सच्चरित्र, विद्वान, उदार जैसे शब्दों का प्रयोग करना सधार लाएगा या नहीं?: अवश्य लाएगा। ये सभी शब्द गहन जाँच करने के बाद ही विशेष प्राधिकारी (भाषाविद्) द्वारा प्रयोग किए जाने वाले शब्द हैं।
10. यदि किसी वस्ती का एक व्यक्ति सच्चरित्र नहीं है तो क्या समूची बस्ती और उसके लोगों को भ्रष्ट मानना उचित है?: कदापि नहीं। ऐसी धारणा विघटनकारी है।
11, पूर्वाग्रह क्या है?: किसी घटना की पूर्ण जाँच किए बिना ही भीड़ का एक अंग बनकर किसी व्यक्ति या समाज के प्रति अच्छी/बुरी धारणा बना लेना।

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12. वर्ण-भेद (काला-गोरा) क्या है?: शरीर की चमड़ी के आधार पर घृणा या प्रेम की धारणा बनाना।
13. पूर्वाग्रह क्यों बनते हैं?: किसी एक व्यक्ति के अच्छा या बुरा होने पर उसके समूचे परिवार, समुदाय और बस्ती को वैसा ही मान लेने की भ्रामक धारणा।
14. रूढ़ियाँ/कुंठा ग्रंथियाँ कैसे बनती हैं?: किसी एक वर्ग, वंश, लिंग आदि को दूसरे से श्रेष्ठ समझने, व्यक्त करने और समय-समय पर उच्चारित करने से।
15. रूढ़ियाँ उत्पन्न न हों-इसके लिए भाषा/ बोली पर नियंत्रण किस इकाई द्वारा लगाया जाना चाहिए?: परिवार नामक इकाई द्वारा उदाहरणार्थ-माता-पिता द्वारा लड़के को “बहादुर” और लड़की को “डरपोक” (कायर) न कहें।
16, क्या लड़कियाँ जन्म से ही कमजोर परन्तु अच्छे व्यवहार की होती हैं और लड़के शक्तिशाली और निर्दयी होते हैं? नहीं, यह समाज ही उनको ऐसा बनाता है क्योंकि इसके अपवाद भी हैं। उदाहरणार्थ-कहीं-कहीं लड़कियाँ बहादुरी का जबरदस्त प्रदर्शन करती देखी गई हैं।
17. रूढ़ियाँ कौन सी परिस्थिति में नहीं बनेंगी?: जब प्रत्येक विषय का तर्कपूर्ण विचार करने की प्रवृत्ति का जन्म होगा।
18. रूढ़िवादी कौन है?: ऐसे व्यक्ति या समुदाय जो किसी एक व्यक्ति के दोषी या गुणी होने से उसके संपूर्ण समूह, परिवार, संघ आदि को आरोपित या सम्मानित करते हैं।
19. असमानता क्या है?: आर्थिक असमानता, जाति और सामाजिक असमानता आदि। अर्थात् भौतिक और मानसिक स्तर की भिन्नता।
20. विभेद क्या है?: मिथ्या धारणा या रूढ़ि अथवा पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर कार्य करना।
21. धोबी; नाई, कबाड़ी अपने को अस्पृश्य के स्थान पर “दलित”शब्द से क्यों संबोधित करते हैं?: उनका भी यह अपने प्रति पूर्वाग्रह है और संवैधानिक संरक्षण चाहने की एक तृष्णा है।
22. स्तंभ (21) के लोगों को संविधान में किस शब्द से संबोधित किया गया है?: ‘अनुसूचित जाति’ से।
23. कक्षा में निम्न जाति के बच्चों को अलग बैठाना क्या है?: पूर्वाग्रह के कारण जाति-भेद।
24. भेदभाव से पीड़ित व्यक्ति अपने को क्या सोचता होगा?: आत्महीन एवं निरर्थक और निरूद्देश्य जीवन जीने वाला।
25. डा. अम्बेडकर के प्रति स्टेशन मास्टर और बैलगाड़ी वालों की घोर उपेक्षा क्या दर्शाती है? मानव-अधिकार का घोर दमन और समाज की संकीर्ण मनोवृति।
26. स्टेशन मास्टर की प्रतिक्रिया का बालक भीमराव के मन पर क्या प्रभाव पड़ा होगा?: उन्हें लगा होगा कि “जाति-नाम” एक ऐसा गंदा आरोप है कि सभी लोग कतराने लगते हैं।
27. स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले दलित, महिलाओं, आदिवासियों और किसानों का मूल-प्रेरक क्या था?: असमानता की स्थिति से संघर्ष करना और समानता लाना।
28. समानता के अधिकार और संविधानिक उपचारों के अधिकार देने के बाद भी इसमें अनुसूचियों को उपरिका प्रभाव देना क्या दर्शाता है?: संविधान निर्माताओं का पूर्वाग्रह अथवा रूढ़ि।
29. हमारा देश एक “धर्म निरपेक्ष” कैसे है?: भारत सरकार/संघ का अपना कोई विशेष धर्म नहीं है। संविधान में “सर्व-धर्म-समभाव” की भावना का प्रतिरूपण किया गया है।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 विविधता की समझ

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 विविधता की समझ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 विविधता की समझ

HBSE 6th Class Civics विविधता की समझ Textbook Questions and Answers

विविधता की समझ HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
अपने इलाके में मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहारों की सूची बनाइए। इनमें से कौन-से त्योहार सभी समुदायों द्वारा मनाए जाते हैं ?
उत्तर :
यह नितान्त व्यष्टिपरक प्रश्न है। अतः छात्र को ही उत्तर देना होगा।
संकेत : हिन्दू त्योहार : विजयादशमी, होली, दीपावली, रक्षाबंधन, भैया-दूज, बसंतपंचमी।
मुस्लिम त्योहार : ईद-उल-फितर, बकरा ईद, मुहर्रम (ताजिया), रमजान, शहादते हजरत अली, जिल्लहिज्ज।
सिख त्योहार : गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती, गुरु तेगबहादुर जयन्ती, गुरु अर्जुन देव जयन्ती, गुरु हरगोबिन्द सिंह जयन्ती, गुरु परब।
ईसाईयों के त्यौहार : गुड फ्राई डे, ईस्टर आदि।
सार्वजनिक त्योहार : दीवाली, रक्षाबंधन, विजयादशमी, जैसे त्योहार और स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गाँधी जयन्ती, शिक्षक दिवस जैसे राष्ट्रीय त्योहारों को भारत के लगभग सभी धर्मावलम्बी मनाते हैं।

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विविधता की समझ प्रश्न उत्तर HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 2.
आपके विचार में भारत की समृद्ध एवं विविध विरासत आपके जीवन को कैसे बेहतर बनाती है ?
उत्तर :
भारत को एक लघुसंसार माना गया है क्योंकि यहाँ विश्व की सभी संस्कृतियाँ और भाषाएँ प्रचलित हैं। यहाँ की भौगोलिक विविधता-विविध-व्यंजनों, खाद्य पदार्थों, वेश-भूषा, आवास-गृह आदि से परिचित कराती है। एक ही मौसम में लेह (कश्मीर) की शीत जलवायु और रेगिस्तान की कृष्ण जलवायु का आनंद मिलता है।

मिश्रित संस्कृति वाले भारतवासी विश्व-मानव और विश्व-बंधुत्व का पाठ सीखते हैं। विविध धर्मों, आचार-विचार, व्यवहार, रीति-रिवाज, कला-कौशल, मनोवृत्ति आदि का सप्रमाण अध्ययन करने का अवसर भारत में ही मिल सकता है। सहिष्णुता, धैर्य, शांति, सौहार्द, समन्वय-बुद्धि और विवेक इसी विविधता से मिल सकता है। भूमंडलीकरण का वर्ष 1990 से चल रहा दौर केवल भौतिक स्वरूप का है जबकि इस भौतिक स्वरूप को नियंत्रित, संवर्धित और प्रोन्नत करने वाली अन्त:करण की शक्ति भारत की विविधताओं का अध्ययन, मनन, चिन्तन और अनुसरण करने से ही प्राप्त हो सकती है।

यह अलग बात है कि लगातार और लम्बी अवधि तक इस भूमि पर विदेशियों का राजतंत्र, तानाशाही, साम्राज्यवाद आदि का मंचन होने से व्यक्तित्व में विकार उत्पन्न हुए हैं और भारतीय अपनी पुरातन गरिमा को भूला बैठे हैं। विश्व विजयी सिकंदर को सिन्ध प्रांत में ही भारत की संप्रभुता का बोध हो गया था और वह युद्ध किए बिना ही वापस लौट गया था लेकिन आधुनिक विश्व-शक्ति समझे जाने वाले देश का राष्ट्राध्यक्ष यहाँ चार हजार पाँच सौ किमी. लम्बी संचार व्यवस्था लाने और भविष्य में इसको सामरिक क्षेत्र बनाने की धृष्टता भी हमारे आमंत्रण का लाभ लेकर ही कर रहा है।

विविधता की समझ प्रश्न उत्तर कक्षा 6 HBSE Social Science प्रश्न 3.
आपके अनुसार ‘अनेकता में एकता’ का विचार भारत के लिए कैसे उपयुक्त है? भारत की खोज किताब से लिए गए इस वाक्यांश में नेहरू भारत की एकता के बारे में क्या कहना चाह रहे हैं?
उत्तर :
भारत के प्रसंग में उक्त वाक्यांश एकदम सही है। भू-आकृतियों की भिन्नता (रेगिस्तान, मैदान, घाटी, पर्वत आदि) से लेकर धर्म, जाति, संप्रदाय, कार्य, विचार, आचार, व्यवहार, वेशभूषा आदि सभी कुछ यहाँ विविध हैं।

हालाँकि इस विविधता में भी एकता समाई हुई है। उदाहरणार्थ-सभी धर्मों के छात्रों का एक ही विद्यालय और पाठ्यक्रम से पढ़ाई करना, राज्य का धर्मनिरपेक्ष रहमा, सभी धर्मों और संस्कृतियों का समान संरक्षण, समता और न्याय का सिद्धांत, समान कार्य के लिए समान वेतन आदि सभी इस विविधता की एकता को दर्शाते हैं। बाहरी शत्रु का सामना यहाँ के लोग सभी तरह का भेद-भाव भुलाकर और संगठित होकर करते हैं। यहाँ के लोग विनयशील, धर्मसहिष्णु और सभ्य हैं। ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं जब संकट के समय भिन्न-भिन्न धर्म के समुदाय एक-दूसरे की सहायता करते हैं। यहाँ की विविधता-राष्ट्र-भक्ति और राष्ट्रीयता की भावना के एक ही धागे में भिन्न-भिन्न मनकों की तरह पिरोई गई है। हिन्दुस्तान सबका है और सभी हिन्दुस्तानी हैं।

नेहरु जी उक्त वाक्य में यह कहना चाहते हैं कि धर्म और रीति-रिवाजों की सहिष्णुता, समादर तथा परस्पर प्रोत्साहन भारत के अंत:करण में गहराई से समाया है। इसको बाहरी शक्ति या भय दिखाकर थोपा नहीं गया है बल्कि सर्वधर्मसमभाव की यह भावना अनुस्यूत और अन्त:सलिला है-नैसर्गिक है। अर्थात “धर्म, रूप और पंथ हैं भिन्न-फिर भी हम सब हैं अभिन्न” अथवा अखंडता एवं एकता का स्वर प्रत्येक भारतीय के हृदय में गूंजता है।

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HBSE 6th Class Social Science विविधता की समझ प्रश्न 4.
जलियाँवाला बाग हत्याकांड के ऊपर लिखे गए गाने की उस पंक्ति को चुनिए जो आपके अनुसार भारत की एकता को निश्चित रूप से झलकाती है।
उत्तर :
शिकारी ने इस उपवन/उद्यान के सभी किस्म के पुष्प रौंद डाले हैं। हिन्दुओं और मुसलमानों के रक्त की धारा आज आपस में मिलकर बह रही है। इस रक्त-रजित भूमि में अपने वस्त्र रंग लो- इस गाने में भारत की एकता का दर्शन कराने वाली पक्ति है। तात्पर्य यह है कि विविधता में निहित इस एकता की भावना को अपने अन्तःकरण में दृढ़ता से बना लो ताकि पुन: कोई विदेशी शक्ति फूट डालकर हमें अलग न कर सके।

प्रश्न 5.
लद्दाख एवं केरल की तरह भारत का कोई एक क्षेत्र चुनिए और अध्ययन कीजिए कि कैसे उस क्षेत्र की विविधता को ऐतिहासिक और भौगोलिक कारकों ने प्रभावित किया है। क्या वे ऐतिहासिक एवं भौगोलिक कारक आपस में जुड़े हुए हैं? कैसे ?
1. गुजरात
उत्तर :
(क) ऐतिहासिक घटक :
1. पुरा-पाषाणकाल (लगभग 10 लाख वर्ष पहले) के मानव की बस्तियों के अवशेष गुजरात और मध्य प्रदेश की सीमा के पास रोजडी और आदमगढ़ में पाए जाते हैं।
2. हड़प्पा नगर सभ्यता के अवशेष-लोथल (काँदला बन्दरगाह), रंगपुर, आम्री, लखबावल और रोजड़ी में पाए गए हैं।
3. अवस्थान (विस्तार) : उत्तर में राजस्थान, पूर्व में मध्य प्रदेश, दक्षिण में महाराष्ट्र और उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान।
4. भाषा-हिन्दी, गुजराती और उर्दू।

(ख) भौगोलिक घटक :
1. क्षेत्रफल : 196,000 वर्ग किमी, 1600 किमी. तट रेखा।
2. जनसंख्या (2001 जनगणना) : 5.06 करोड़।
3. फसलें : गन्ना, मक्का, मूंगफली, बाजरा आदि।
4. खनिज : पैट्रोलियम उत्पाद (कलोल और बलोल में)।
5. जलवायु : शीतऋतु-27° से. – 12° से. ग्रीष्मऋतु- 48° से. – 43° से. वर्षा- 150 सेमी. प्रति वर्ष नदियाँ-नर्मदा, तापी, साबरमती एवं माही।

2. तमिलनाडु
(क) ऐतिहासिक घटक :
1. पाषाण और लौह युग के अवशेष पाए गए हैं।
2. चालीस लाख दो हजार वर्ष पूर्व द्रविड़ (अनार्य) लोगों ने शासन किया। इन्हें आर्यों ने 4000 वर्ष से लेकर 3500 वर्ष पहले यहाँ से भगा दिया था।
3. चोल, पाय तथा चेर वंश के शासकों ने राज्य किया।
4. अवस्थान (विस्तार) : उत्तर में पश्चिमी घाट और नीलगिरि की पहाड़ियाँ तथा दक्षिण में पलानी, इलायची और अन्नामलाई की पहाड़ियाँ।
5. पल्लव राजाओं का राज्य और विजयनगर साम्राज्य भी यहीं था।
6. भाषा – तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़।

(ख) भौगोलिक घटक :
1. क्षेत्रफल : 106,000 वर्ग किमी.
2. जनसंख्या (2001 जनगणना) : 6.24 करोड़
3. फसलें : चावल, गन्ना, मूंगफली, कपास, केला, चाय, इलायची, कालीमिर्च, अदरक, आलू।
उद्योग : मछली मारने का उद्यम-बड़े पैमाने पर नियांत आय, चीनी उद्योग, सूती वस्त्र उद्योग, चर्म उद्योग, वाहन विनिर्माण उद्योग, खाद उद्योग आदि।
4. खनिज : ग्रेनाइट की खानें
5. जलवायु : पर्वतों का बृष्टि-छाया क्षेत्र है। पश्चिमी भाग में शुष्क जलवायु, वर्षा – 75 सेमी.
6. नदियाँ : कावेरी नदी, तंजावूर नामक डेल्टा क्षेत्र बहुत उपजाऊ है।
सिंचाई : टैंकों (सरोवरों) से होती है। मैसूर बाँध (एक हजार हेक्टेयर से भी अधिक बड़े भू-भाग का कृत्रिम जलाशय बनाकर) 1926 में बनाया गया था।

इन विविधताओं में एकता के स्वर निम्नलिखित तथ्यों से उभरते हैं:
1. दोनों ही भारतवर्ष राष्ट्र की एकल-नागरिकता प्राप्त राज्य

2. राष्ट्र प्रधान केवल एक व्यष्टि (भारत का राष्ट्रपति) है। राज्यों के राज्यपाल वस्तुतः राष्ट्रपति और संसद के प्रतिनिधि हैं (गुप्तकाल की प्रणाली का प्रभाव)।

3. दोनों राज्य हमारे देश के वैदेशिक आयात-निर्यात के पश्चिमी और पूर्वी छोर (तट) हैं। उल्लेखनीय है कि गुजरात के भृगुकच्छ/भड़ौच (कांदला) और तमिलनाडु के कावेरीपत्तनम, काँचीपुरम बंदरगाह, उत्तर-वैदिक काल से लेकर आज तक भारत के प्रसिद्ध बंदरगाह रहे हैं। यहाँ से भारतीय माल का विदेशों को और, विदेशी माल का भारत में क्रमश: निर्यात और आयात किया जाता है।

(iv) दोनों राज्यों में मूंगफली और गन्ना जैसी नकदी फसलें उगाई जाती हैं।

5. अधिकारी तंत्र, न्याय तंत्र, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था आदि से संबंधित आदेश और निर्देश भारतीय संसद ही देती है, अर्थात-प्रशासनिक व्यवस्था अखंड या एक है एवं सभी राज्यों की अनावृत्त (खुली) सीमा है अर्थात् भारत का नागरिक इनमें स्वतंत्रता से आवागमन कर सकता है।

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HBSE 6th Class Civics विविधता की समझ Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विविधता क्या है ?
उत्तर :
“विविधता” शब्द का अर्थ है-परस्पर अत्यधिक भिन्न वाले कई लोगों या चीजों का पाया जाना। वस्तुतः विविधता शरीर के अंगों जैसी है। उल्लेखनीय है कि सभी अंग भिन्न-भिन्न आकार, प्रकार के होते हैं लेकिन इन सभी के मिलने से एक शरीर बनता है।

प्रश्न 2.
क्या सभी तरह की भिन्नताएँ विविधता का ही एक हिस्सा हैं ?
उत्तर :
हाँ, क्योंकि वे एक ही राष्ट्र के नागरिकों की भिन्न-भिन्न आदतों, आस्थाओं, विचारों और रीति-रिवाजों को प्रकट करती हैं।

प्रश्न 3.
भिन्नताएँ हमारे जीवन को सुख और दुःख क्यों पहुँचाती हैं ?
उत्तर :
भिन्नताओं में भी हमेशा एकता और अखंडता का ध्यान रखना सुखदाई है जबकि इस मुख्य धारा से हट जाना दु:खदाई बनता है।

प्रश्न 4.
विविधता कौन-कौन सी पाई जाती हैं ?
उत्तर :
भिन्न-भिन्न धर्म, जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र आदि।

प्रश्न 5.
क्या परस्पर भिन्नता वाले लोग एक दूसरे के मित्र बनते हैं ?
उत्तर :
वस्तुतः भिन्न-भिन्न स्वभाव के लोगों की मित्रता ही स्थिर और चिरस्थाई रहती है। भिन्नता ही उन्हें परस्पर जोड़ती है और वे पूर्णता की अनुभूति करते हैं।

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प्रश्न 6.
भारत की राजभाषा एवं राष्ट्रभाषा क्या है ?
उत्तर :
देवनागरी (हिन्दी)। अधिसंख्यक जनता हिन्दी भाषा का ही प्रयोग करती है। देववाणी (संस्कृत) की सहज-लिपि ही देवनागरी-हिन्दी है।

प्रश्न 7.
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने उन्नति का मूल किसको कहा है ?
उत्तर :
“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति का मूल” मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा एक और अखंड हैं। इस अखंड या पूर्ण ऊर्जा को प्राप्त कर ही राष्ट्रीय (नागरिक) जन-प्रिय और जन-हितैषी बन पाता है। प्रशासन की पारदर्शिता भी इसी भाषा में निहित है। उन्नति मूल का अर्थ है-उन्नति का सारभूत तत्व।

प्रश्न 8.
लोगों के पूजा करने के कुछ भिन्न-भिन्न तौर-तरीके बताइए।
उत्तर :
1. श्लोकों का पाठ करके
2. यज्ञ-हवन करके
3. संगीत के सुरों में भजन, कीर्तन आदि।।

प्रश्न 9.
लोगों के विवाह करने के कुछ तरीके/पद्धतियाँ लिखिए।
उत्तर :
1. ब्राह्म विवाह पद्धति (कन्यादान पद्धति): इसमें परंपरागत वैदिक कार्य-विधि के अनुसार विवाह संपन्न किया जाता है। बारात आती है तथा कन्या विदा की जाती है।
2. न्यायालय के पंजीयन अभिलेख पर हस्ताक्षर करके (निर्णीत या गांधर्व विवाह)।
3. प्राजापत्य विवाह : इसमें वर-वधू विवाह-पूर्व प्रेम करते है और अंत में दोनों के अभिभावक विवाह की स्वीकृति दे देते हैं।

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प्रश्न 10.
कुछ राज्यों में महिलाओं की वेशभूषा की भिन्नता को बताइए।
उत्तर :
उत्तरांचल राज्य में महिलाएँ साड़ी-ब्लाउज पहनती हैं जबकि पंजाब में सलवार-कमीज और मणिपुर में फनीक पहनी जाती है।

प्रश्न 11.
भिन्न-भिन्न भाषाओं, खाद्य-पदार्थों (व्यंजनों), संगीत, धर्म आदि का सम्मिश्रण कैसे हुआ होगा?
उत्तर :
मनुष्य की हर क्षण नया कुछ करने की जन्मजात प्रकृति उसको नए स्थानों पर जाने, वहाँ नए कार्यों को सीखने, नए समाज के साथ संपर्क बनाने की ओर प्रेरित करती है। इस प्रवृत्ति और परिस्थितियों ने ही इन विविध चीजों का सम्मिश्रण संभव बनाया।

प्रश्न 12.
भिन्न-भिन्न जगहों का इतिहास क्या बताता है ?
उत्तर :
यह बताता है कि उन जगहों में बहुत सी संस्कृतियों के प्रभाव से मानव जीवन और संस्कृति ने कैसा स्वरूप लिया है। भिन्न-भिन्न जगहों के इस इतिहास में भी भिन्नता है।

प्रश्न 13
भौगोलिक विविधता के कारण लोगों में क्या विविधता दिखाई पड़ती है?
उत्तर :
वेश-भूषा, उत्सव-त्योहार, दिनचर्या और कार्यों की विविधता।

प्रश्न 14.
नगरों का जन-जीवन अपने भौतिक परिवेश के साथ संबंध को क्यों भूल जाता है ?
उत्तर :
1. अत्यधिक जनसंख्या घनत्व
2. हरित-पट्टी का अभाव
3. वाहनों का आवागमन
(iv) प्राकृतिक दृश्यों की शून्यता के कारण ही शहरों का जन-जीवन, वन, पशु-पक्षी, नदियाँ, पर्वत आदि के साथ अपने साहचर्य और सीधे-संबंध को बहुधा भूल. जाता है।

प्रश्न 15.
लद्दाख कहाँ है ?
उत्तर :
जम्मू-कश्मीर राज्य के एक जिले लेह का शुष्क रेगिस्तान-बर्फ से ढका।।

प्रश्न 16.
लोग लहाख में पानी कैसे पीते हैं ?
उत्तर :
बर्फ की शिलाओं को गलाकर।

प्रश्न 17.
लद्दाख में लोगों का व्यवसाय क्या है?
उत्तर :
बकरी, गाय, भेड़ और याक जैसे पशुओं का पालन किया जाता है।

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प्रश्न 18,
लद्दाख के लोग क्या खाते हैं ?
उत्तर :
माँस तथा दूध के उत्पाद (पनीर, मक्खन आदि)।

प्रश्न 19.
लद्दाख प्राचीन काल का व्यापार मार्ग कैसे था ?
उत्तर :
लद्दाख में बहुत से दरें हैं जिनसे होकर तिब्बत तक पहुँचा जाता है।

प्रश्न 20,
लहाख से तिब्बत जाने वाले व्यापारी कौन-कौन सी चीजों को ले जाते थे ?
उत्तर :
वस्त्र, मसाले, कच्चा रेशम तथा दरियाँ-कालीनें।

प्रश्न 21.
लद्दाख को लघु तिब्बत क्यों कहते हैं ?
उत्तर :
तिब्बत में प्रचलित धर्म, आस्था, रहन-सहन, खान-पान एवं संस्कृति ही लद्दाख के जन-जीवन में भी दिखाई पड़ती है। यह तिब्बत के सन्निकट है।

प्रश्न 22.
केरल कहाँ स्थित है?
उत्तर :
भारत के दक्षिण-पश्चिमी कोने पर।

प्रश्न 23.
केरल में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती हैं ?
उत्तर :
मुख्यत: कालीमिर्च, लौंग तथा इलायची जैसे मसालों की फसलें।

प्रश्न 24.
केरल में सबसे पहले कौन लोग आए।
उत्तर :
ईसा मसीह का धर्म प्रचारक संत थॉमस। इन्होंने भारत में सबसे पहले ईसाई धर्म की नींव रखी।

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प्रश्न 25.
केरल में कौन-कौन से धर्म प्रचलित हैं ?
उत्तर :
1. यहूदी
2. इस्लाम
3. ईसाई
4. हिन्दू और
5. बौद्ध धर्म।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समीर-एक और समीर-दो परस्पर भिन्न कैसे थे?
उत्तर :
(अ) धर्म की भिन्नता : समीर-एक का धर्म-हिन्दू और समीर-दो का धर्म-इस्लाम।

(ब) सामाजिक स्तर की भिन्नता : समीर-एक के माता पिता थे जबकि समीर-दो विधवा का पुत्र था।

(स) आर्थिक विविधता : समीर-एक शहरी परिवार का संपन्न बच्चा था जबकि समीर-दो निम्न स्तरीय ग्रामीण परिवार का था।

(द) कार्यात्मक भिन्नता : समीर-एक छात्र था और उसके भावी-जीवन के साथ बहुत सी संभावनाएँ एवं आशाएँ जुड़ी थी। जबकि समीर-दो बालसुलभ स्वभाव को खोकर परिवार के कर्तव्य बोझ से दब गया था। उसका भावी-जीवन अज्ञात और अंधकार से ढका हुआ था। जीवन के प्रति निराशा का दृष्टिकोण उसके दुबले-पतले हाथों से झलक रहा था।

प्रश्न 2.
केरल के लोग ‘ओणम’ त्योहार के दिन “नावों की दौड़” प्रतियोगिता का आयोजन क्यों करते होंगे ?
उत्तर :
भू-आकृति और भौगोलिक परिस्थितियाँ उस स्थान पर रहने वाले लोगों के कार्य और मनोविनोद दोनों साधनों को नियत कर देती हैं। अवस्थान के दृष्टिकोण से केरल भारत का सीमांत दक्षिण-पश्चिमी तट है। एक ओर अरब सागर और दूसरी ओर अन्नाईमुडी और मुन्नार जैसी पहाड़ियों से घिरा हुआ है अर्थात् जल-पिंड सामने रहने से मनुष्य के आजीविका का प्रमुख कार्य मछली मारने का आरंभ हुआ। आजीविका अथवा अनन्य कार्य में नवीनता/नवरस लाने के लिए त्योहार आयोजित किए जाते हैं। ऐसा ही केरलवासी भी करते हैं। जलजात् खाद्यान्न (चावल) और जलोत्पाद (मछली) जैसे आहार के साथ इनकी जीभ (स्वाद) भी अनुकूलन कर चुकी है।

प्रश्न 3.
केरल और लद्दाख की विविधताओं में एकता क्या है ?
उत्तर :
1. लद्दाख की शाल और केरल के मसाले के कारण दोनों क्षेत्रों में चीन और अरब देशों के व्यापारियों का प्रभाव रहा।

2. दोनों क्षेत्रों की संस्कृति पर समान प्रभाव पड़ा है। लद्दाख में मुसलमान और बौद्ध मिलकर तिब्बत के राष्ट्रीय महाकाव्य “केसर सांग” के अंशों का नाटक मंचन करते हैं और उसमें वर्णित गीतों को गाते हैं। केरल में चीनी मिट्टी, “चीनवाला” नामक खाद्य-पदार्थ भूनने के बर्तन और मछली मारने का जाल प्रयोग करते हैं। यहूदी, मुसलमान, ईसाई, हिन्दू और बौद्ध सभी मिलजुल कर एक राज्य की मर्यादा का पालन करते हैं।

3. दोनो क्षेत्रों के नागरिक भारत की एकल-नागरिकता प्राप्त

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प्रश्न 4.
“इडियन पीपुल्स थियेटर एशोसियन” की कविता में जलियाँवाला बाग कांड में जनसमुदाय का वर्णन कैसे किया गया है ?
उत्तर :
13 अप्रैल, 1919 को रौलेट ट तथा डा. सफीउद्दीन किचलू एवं डा. सत्यपाल को बिना किसा सिद्ध-दोष गिरफ्तार करने का विरोध करने की योजना बनाने हेतु की गई शांतिपूर्वक बैठक (सभा) में उपस्थित समुदाय को गोलियों से भून दिया गया और जो जीवित बचे, जीवन भर जेल में सड़ते रहे। यह बाग

प्रश्न 5.
कविता रक्त की नदी में अपने कपड़े रंगने को क्यों कहती है ?
उत्तर :
एक उपनिवेश की व्यवस्था में देश के नागरिक अधिकार किस सीमा तक कुचल दिए जाते हैं-इस तथ्य को मन में अंकित करके सचेष्ट, देश-प्रेमी .और राष्ट्रभक्त बनने को कहती है।

प्रश्न 6.
इस कविता में निहित केन्द्रीय भाव क्या हैं?
उत्तर :
यह ‘स्मृति गीत’ है और राष्ट्र के नागरिकों को दृढ-संकल्पी, आत्म-निरीक्षक और दूरदर्शी बनने की प्रेरणा देता है। “रक्त की नदी में वस्त्र रंग लो” से तात्पर्य है कि जलियाँवाला बाग के चित्र को अन्तःकरण में महसूस करो और आत्मनिरीक्षण करो कि देश की स्वतंत्रता के लिए शहीद होने वाले उन क्रांतिकारियों और आपमें देशभक्ति, राष्ट्रहित और जन-कल्याण की श्रेणियाँ (भौतिक, मानसिक एवं भावात्मक स्तर पर) क्या हैं ? उनकी अन्तर्भावना के प्रति आपके मन में कितना सम्मान है?

प्रश्न 7.
“हिन्दू और मुसलमान दोनों का रक्त मिलकर बहने लगा”-वाक्य की विवेचा कीजिए।
उत्तर :
यह वाक्य संकेत करता है कि क्रांतिकारी हिन्दू और मुसलमान दोनों थे तथा डा. सफीउद्दीन किचलू और डा. सत्यपाल की रौलेट एक्ट के अधीन गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन की योजना बनाने के लिए उस बाग में एकत्रित हुए थे। तात्पर्य यह है कि देश में संकट के समय हिन्दू एवं मुसलमान हमेशा संगठित रहे हैं और इस बाग की घटना को याद रखकर हमेशा अखंड या एक रहने चाहिए।

प्रश्न 8.
जलियाँवाला बाग में दीपक जलाने और आँसू बहाने से क्या अभिप्रेत है ?
उत्तर :
दीपक जलाने से तात्पर्य है कि इतिहास की इस घटना की चेतना को हमेशा बनाए रखने और आँसू बहाने का तात्पर्य “सुने जाने का अधिकार” भी समाप्त कर देने वाले रौलेट एक्ट (काला विधेयक) के प्रकोप को झेलकर भी सांविधिक उपचारों (शांतिपूर्वक प्रदर्शन एवं धरने) को अपनाकर विरोध जताने वाले धैर्यशाली क्रांतिकारियों की दयनीय दशा पर पुनः विचार करने से है। उल्लेखनीय है कि आँसू अनुस्मरण के समय किसी व्यक्ति/घटना/जीवनी के पुनः दर्शन की दशा में ही निकलते हैं और उस घटना के पूर्वावरण को हटाकर एक नई धारणा उत्पन्न करते हैं।

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प्रश्न 9.
जलियाँवाला बाग में पुष्प लगाने से क्या अर्थ अभिप्रेत है ?
उत्तर :
मानवता पर अत्याचार की इस घटना की पुनरावृत्ति रोकने में सक्षम नागरिकों को तैयार करें तथा देशहित के विषयों पर जाति, वर्ग, वंश, कुल, संप्रदाय, पंथ, धर्म जैसे अल्पविराम, अर्धविराम और पूर्ण-विराम लगाने वाले अवरोधों को उखाड़ फेंके। यह विश्व मानव और “वसुधैव कुटुम्बकम” भावना वाले व्यष्टि बनने के अर्थ में प्रयुक्त है।

विविधता की समझ Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. क्या कक्षा का कोई बच्चा एकदम आप जैसा है ? नहीं, क्योंकि प्रत्येक के चेहरे, कद आदि में भिन्नता रहती है।
2. भिन्न-भिन्न पृष्ठभूमि वाले भिन्न-भिन्न लोग भारत को रोचक क्यों बनाते हैं ? यहाँ मिश्रित संस्कृति बनती है।
3. भिन्नताएँ हमारे जीवन को समृद्ध क्यों बनाती हैं ? हमें विभिन्न भाषाओं, तौर-तरीकों, रहन-सहन और आहार-व्यवहार का ज्ञान मिलता है।
4. भारत के लोग कई भाषाएँ, कार्य और कलाएँ क्यों जानते हैं ? विविधता के कारण।
5. क्या आप घर और बाहर एक सी भाषा बोलते हैं ? नहीं, घर में क्षेत्रीय भाषा और बाहर हिन्दी या अंग्रेजी में बोलते
6. स्कूल में पूछे गए प्रश्न का उत्तर सभी एक भाषा में देते हैं या भिन्न-भिन्न भाषाओं में ? एक ही भाषा में।
7. स्कूल पढ़ने वाले बच्चों के बारे में निरक्षर बच्चा क्या सोचता है ? वह सोचता है कि स्कूल में केवल अंग्रेजी पढ़ाई जाती है-हिन्दी नहीं।
8. “समीर” को हनुमान-पिता कहने वाला बालक कैसे स्वभाव का होगा ? गंभीर और चिन्तनशील।
9. मुसलमान और हिन्दुओं के बीच संघर्ष क्यों होता है ? अपने धर्म को श्रेष्ठ और दूसरे के धर्म को तुच्छ समझने की भावना के कारण।
10. भिन्न-भिन्न भाषाओं को जानने का क्या लाभ है ? हम भिन्न-भिन्न लोगों को अपने विचारों से अवगत करा सकते हैं।
11. समीर (एक) कौन से त्योहार मनाता है ? रक्षाबंधन, रामलीला, होली, दीवाली, वैशाखी आदि।
12.. समीर स्कूल क्यों नहीं जाता है ? वह निर्धन है।
13. क्या कुछ बच्चों का स्कूल जाना और कुछ अन्य का न जाना आपकी दृष्टि में अच्छा है ? : नहीं, इससे समाज में असमानता और विभेद बढ़ने की संभावना रहती है।

HBSE 6th Class Social Science Solutions Civics Chapter 1 विविधता की समझ

14. स्कूल न पढ़ने के प्रमुख कारण क्या हो सकते हैं ? परिवार का निर्धन होना, धनी-निर्धन का भेदभाव, आय की असमानता आदि।
15. भूखा रहना, रहने को घर न होना जैसी परिस्थितियाँ विविधता हैं या कुछ और ? नहीं, ये विविधता नहीं बल्कि असमानता हैं।
16, जाति-प्रथा क्या करती है ? समाज का समान विकास नहीं होने देती है। व्यक्ति विविध कार्यों का बोध नहीं ले पाता।
17. विविधता के क्या लाभ हैं ? कई तरह के रहन-सहन की जानकारी, भाषा-ज्ञान, मनोविनोद के साधनों का बोध।
18. कहानी-लेखक भिन्न-भिन्न विचारों को कहाँ से प्राप्त करता है ? भिन्न-भिन्न स्थानों की पुस्तकों, वहाँ के यथार्थ जीवन और कल्पना से।
19. एक वनवासी कथाकार किन विषयों में लिखेगा ? पशुओं की किस्में, उनके बीच युद्ध, उनकी प्रजातियों आदि के बारे में।
20, भारतीयों के तौर-तरीके भिन्न परन्तु कार्य एक जैसे क्यों हैं? क्योंकि अन्ततः सभी मनुष्य हैं और मनुष्य के क्रिया-कलाप-खाना-पीना, खेलना, काम-काज, मनोरंजन करना आदि हैं।
21. हवाई जहाज, रेल और बस आदि परिवहन के साधनों के न रहने पर लोग भ्रमण कैसे करते थे ? जलयानों, घोड़ों, ऊँटों, बैलगाड़ियों में चढ़कर था पैदल।
22. प्राचीन काल के लोग भ्रमण क्यों करते थे और दूसरे स्थानों पर क्यों बस जाते थे ? विद्यमान स्थान में अकाल, सूखा, बाढ़, भूकंप आदि दैवी-आपदाएँ आने, व्यापार बढ़ाने, नए स्थानों की खोज करने में रूचि आदि के कारण।
23. नए स्थानों में जाकर लोग बदल क्यों जाते हैं ? भू-आकृति, जलवायु, तापमान आदि की भिन्नता एवं भाषा, रहन-सहन, तौर-तरीकों आदि की भिन्नता के साथ अनुकूलन करने के लिए।
24. मिश्रित संस्कृति क्यों पनपती है ? भिन्न-भिन्न भाषा, धर्म, जाति के लोगों का मिलन होने और परस्पर संबंध बनने के कारण।
25. शहरी लोगों का भौतिक परिवेश बदलता क्यों रहता है ? उन्हें खाने-पीने की सभी चीजें बाजार से खरीदनी होती हैं अतः मूल्य और प्रास्थिति के आधार पर भिन्नता दिखाई पड़ती है।
26. लद्दाख में पश्मीने क्यों बनाए जाते हैं और केरल में मसाले क्यों पैदा होते हैं ? लद्दाख में घास के मैदान और केरल में मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जलवायु, तापमान आदि के कारण।
27. केरल में यहूदी और अरब के व्यापारी क्यों आए होंगे ? समुद्र-तट का क्षेत्र होने से।
28. ईसामसीह का पट्टशिष्य (प्रचारक) केरल में कब आया ? लगभग 2000 वर्ष पूर्व।
29. केरल में लोगों के कौन-कौन से धर्म हैं ? ईसाई, यहूदी. इस्लाम, हिन्दू और बौद्ध-धर्म।
30. लद्दाख और केरल में क्या समानता हैं ? दोनो क्षेत्रों में चीन और अरब की संस्कृति का प्रभाव है। मसाले और ऊन इन संस्कृतियों के वाहक बने।
31. भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का प्रभाव क्यों पड़ता है ? भिन्न-भिन्न लोगों के साथ रहने, कार्य करने, तथा परस्पर व्यवहार करने के कारण।
32. भारत की विविधता में एकता का क्या प्रमाण है ? भारत का स्वतंत्रता संग्राम जिसमें सभी विभेदों को भुलाकर लोग एकजुट हुए और अंग्रेजों को भारत से बाहर खदेड़ दिया।
33. क्या जलियाँ वाला बाग काण्ड में मरने वाले केवल एक धर्म और संस्कृति के थे ? नहीं, वे भारत में मौजूद सभी धर्मावलम्बी और संस्कृतियों के लोग थे।
34. “भारत की खोज’ पुस्तक किसने लिखी ? पंडित जवाहर लाल नेहरु ने।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 11 नए साम्राज्य और राज्य

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 11 नए साम्राज्य और राज्य Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 11 नए साम्राज्य और राज्य

HBSE 6th Class History नए साम्राज्य और राज्य Textbook Questions and Answers

कल्पना करो:

प्रश्न हर्षवर्धन की सेना अगले हफ्ते तुम्हारे गाँव आने वाली है। तुम्हारे माता-पिता इसके लिए तैयारी कर रहे हैं। वर्णन करो कि वे क्या-क्या बोल रहे हैं और क्या कर रहे हैं?
उत्तर:
उर (सभा) के मुखिया ने कल बताया है कि हर्षवर्धन की रसद, खानसामों, अस्त्र-शस्त्रों, संगीतज्ञों (ढोल वादकों), तुरही वादकों आदि से सज्जित विशाल सेना हमारे गाँव में अगले सप्ताह आने वाली है। मैंने स्कूल से घर पहुंचने के बाद अपनी बस्ती और घर में माता-पिता सभी को जब यह सूचना दी तो लोग बताए गए रास्तों के आस-पास निर्मित गौशाला, घर आदि को अचानक खाली करने लगे। पालतू पशुओं को मार्ग से 1000 मी. की दूरी पर पहुँचाने लगे। हमारे कोल्हू में गुड़ बनाया जाने लगा। पूरे गाँव के लोगों में हडकंप या भय समा गया। लोग कानाफसी कर रहे थे कि पिछले वर्ष सेना के इस गाँव से कूच करने पर उन्हें पशुओं, खेतों, फसलों, अनाज, गुड आदि की क्षति और खर्चा दोनों झेलने पड़े थे। कुछ लोग सेना की ज्यादतियों के शिकार भी हुए थे-ऐसा मैंने सुना। गाँव की दिनचर्या सामान्य से विशेष और उत्तेजित सीमा तक दिखाई देने लगी।

माताजी इस तैयारी और चिन्ता में हम भाई-बहनों को भोजन कराना भी भूल जाती थीं और ध्यान आने पर कहती थीं कि-‘बच्चो! मुझे माफ करना, तुम लोग भूखे मत रहना, कच्चे चावल उबाल कर उनमें दूध और गुड़ मिलाना, सरल काम है। अत: खा लेना। एक सप्ताह बाद फिर मैं ऐसा कभी नहीं होने दूंगी।” पिताजी भी संगठन के सदस्यों के साथ उसमें भाग लेने रोज चले जाते थे। आकर कहते थे कि “प्रत्येक घर से 40 गुड़ की भेलियाँ, छ: किलो घी, बीस फूल माला और 10 हाँडी दही तथा चालीस मन घास की व्यवस्था करनी होगी और इन सभी चीजों को तीन दिन पहले ही सराय में उरू-अध्यक्ष को सौंपना होगा।” पिताजी हम भाई-बहनों के दूध में भी कटौती करने को कहने लगे। हर्षवर्धन के सैनिकों का आगमन गाँव की विपत्ति जैसा था और बच्चों को भूखा भी रहना पड़ता था।

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आओ याद करें:

नए साम्राज्य और राज्य HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
सही या गलत बताओ:
(क) हरिषेण ने गौमती पुत्र श्री सातकर्णी की प्रशंसा में प्रशस्ति लिखी।
(ख) आर्यावर्त के शासक समुद्रगुप्त के लिए भेंट लाते थे।
(ग) दक्षिणापथ में बारह शासक थे।
(घ) गुप्त शासकों के नियंत्रण में दो महत्वपूर्ण केन्द्र तक्षशिला और मदुरै थे।
(ङ) ऐहोल पल्लवों की राजधानी थी।
(च) दक्षिण भारत में स्थानीय सभाएँ सदियों तक काम करती रहीं।
उत्तर:
(अ) असत्य
(ब) असत्य
(स) सत्य
(द) असत्य
(य) असत्य
(र) सत्य।

HBSE 6th Class Social Science नए साम्राज्य और राज्य प्रश्न 2.
ऐसे तीन लेखकों के नाम बताओ, जिन्होंने हर्षवर्धन के बारे में लिखा।
उत्तर:
1. स्वेनसांग
2. बाणभट्ट
3. रविकीर्ति।

प्रश्न 3.
इस काल में सैन्य संगठन में क्या बदलाव हुए?
उत्तर:
1. इस काल की सेना चतुरांगिनी अर्थात् पैदल, घुडसवार, गजाररूढ़ और रथारूढ़ थी।
2. जागीरदारों द्वारा अपना खर्च पर तैयार किया गया सैन्य संगठन था।
3. विविध राज्यों के सैनिक अलग-अलग वाहिनीयों में संगठित थे।

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प्रश्न 4.
इस काल की प्रशासनिक व्यवस्था में तुम्हें क्या-क्या नई चीजें दिखती है?
उत्तर:
1. कुछ महत्त्वपूर्ण पदों को आनुवांशिक कर दिया गया अर्थात् पिता के पश्चात् पुत्र को स्वतः ही पिता का घर मिल जाता था। उदाहरणार्थ-पिता का महादण्डनायक पद उसके पुत्र हरिषेण को दिया गया।
2. किसी व्यक्ति को एक से अधिक विभागों का कार्यभार सौंपा गया। उदाहरणार्थ: समद्रगुप्त ने हरिषेण को महादण्डनायक, कुमार आमात्य और संधि विग्रह अमात्य जैसे तीन मंत्रालय एवं पदों का कार्य एक साथ सौपा था।
3. स्थानीय प्रशासन के लिए नगरश्रेष्ठि (नगर का मुख्य बैंकर या वाणिक), सार्थवाह (व्यापारियों के काफिले का मुखिया), प्रथम कुलिक (बढ़ई संघ का मुखिया) और कायस्थों (लेखकों) का मुखिया जिम्मेदार बनाया गया था।
4. अस्पृश्यता का विशेष बल मिला। उदाहरणार्थ-अस्पृश्य को आदेश था कि जब वह बाजार या सार्वजनिक क्षेत्र में प्रवेश करें तो दो डंडों को आपस में टकराता हुआ चले ताकि समाज के अन्य लोग उसके स्पर्श से बच सकें।
5. सेना के विशेषाधिकार दिए गए, सैनिकों को जनता से उपहार प्राप्त करने के स्वतंत्र अधिकार दिए गए। उनके कूच करते समय होने वाली क्षति की शिकायत नहीं की जा सकती थी और न मुआवजा ही दिया जाता था।

आओ चर्चा करें:

प्रश्न 5.
तुम्हें क्या लगता है कि समुद्रगुप्त की भूमिका अदा करने के लिए अरविन्द को क्या-क्या करना पड़ेगा?
उत्तर:
चूँकि समुद्रगुप्त महान योद्धा, पराक्रमी और युद्ध-प्रिय शासक था। अत: उसका अभिनय करने के लिए प्रसिद्ध है। शरीर में स्थान-स्थान पर परशु, भाले, तीर, गदा, तलवार, बरछा आदि के घाव दिखाने होंगे। जैसा कि हरिषेण ने प्रशस्ति में लिखा है। उसने एक संगीत-वादक के वस्त्र पहनकर और वीणा हाथ में लेकर भी बैठना होगा तथा सर-संगति करनी होगी क्योंकि समुद्रगुप्त एक कशल वीणवादक भी था। तात्पर्य यह है कि अरविन्द ने यद्ध के लिए तत्पर राजा और एक अति दयावान तथा संगीतप्रेमी राजा दोनों का एक साथ अभिनय करना होगा।

प्रश्न 6.
क्या प्रशस्तियों को पढ़कर आम लोग समझ लेते होंगे? अपने उत्तर के कारण बताओ।
उत्तर:
इन प्रशस्तियों को संस्कृत भाषा में लिख गया था। हरिषेण, बाणभट्ट और रविकीर्ति सभी संस्कृत के विद्वान थे। संस्कृत आम-जनता की भाषा नहीं थी। फिर इस काल में जाति एवं वर्ण व्यवस्थाएँ बहुत कठोर हो गई थी। जैसा कि हवेनसांग ने लिखा है-“एक अस्पृश्य जाति के लोगों को गाँव की सीमान्त भूमियों में रखा जाता था और शहर तथा बाजार आदि सार्वजनिक स्थानों में प्रवेश करने पर वे लकड़ी के दो टुकड़ों को परस्पर बजाते हुए चलते थे। ताकि सवर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य) उसके स्पर्श से दूर रह सकें। संस्कृत भाषा को पढ़ने का अधिकार भी केवल सवर्णों को दिया गया था। महिलाएँ, दास, सेवक और शूद्र इस अधिकार से वंचित थे। ऐसी दशाओं में यह कहना कठिन है कि आम-आदमी इन प्रशस्तियों को पढ़ और समझ पाता होगा।

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आओ करके देखें:

प्रश्न 7.
अगर तुम्हें अपनी वंशावली बनानी हो, तो तुम उसमें किन लोगों को शामिल करोगे? कितनी भावी पीढ़ियों को तुम इसमें शामिल करना चाहोगे? एक चार्ट बनाओ और उसे भरो।
उत्तर:
यह प्रश्न नितान्त छात्र के व्यष्टि वंश का है। अतः इसको केवल वही हल कर सकते हैं। वंशक्रम में पीढ़ियाँ आती हैं। एक वंश में प्रपितामह (परदादा), प्रपितामही (परदादी), उनके भाई-बहन, भाई-बहनों के परिवार, पितामह, पितामही, उनके भाई-बहन, भाई-बहनों के परिवार, पिता, माता, अपने भाई-बहनों एवं चचेरे भाई-बहनों आदि के नाम लिखे जाते हैं।
प्रपितामह एवं प्रपितामही (एक वंश)

बच्चे एवं उनके भाई-बहन

पितामह एवं पितामही एवं उनके भाई-बहन
बच्चे

पिता-माता, चाचा-चाची

सन्तानें (आप एवं आपके भैया-बहिन, चाचाओं के पुत्रऔर पुत्रियाँ)

वंश-क्रम को वंश-वृक्ष के रूप में भी दिखाया जाता है। इसमें जड़ में मूल पुरुष और क्रमशः तना और शाखाएँ अनुवर्ती पीढ़ियाँ रहती हैं।
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प्रश्न 8.
आज युद्ध का असर जनसाधारण पर किस तरह पड़ता है?
उत्तर:
1. सामान्य जन-सुविधाएँ यथा-बिजली, पानी, खाद्यान्न आदि की आपूर्ति गड़बड़ हो जाती है। बाजार में चीजों के मूल्य ऊँचे हो जाते हैं और सभी तरह के मौसमी रोजगारों पर नियंत्रण लग सकता है।
2. प्रत्येक नागरिक के मन में युद्ध से उत्पन्न होने वाले खतरों को आशंका छा जाती है। इस दशाओं में घरेलू, कारखानों एवं कार्यालय में कहीं भी सुचारु कार्य नहीं हो जाता है।
3. आम नागरिकों (श्रमिकों, दिहाड़ी पर कार्य करने वालों) का आजीविका साधन समाप्त हो जाता है क्योंकि पर्यटन, परिवहन और लोगों के आवगमन पर रोक लगा दी जाती है।
4. सीमा क्षेत्र के लोगों को सेना के कुँच करने, डेरा डालने, शिविर लगाने आदि के कारण कई तरह की राजनीतिक और मानव अधिकार से संबंधित समस्याएँ झेलनी पड़ती है। बम, गोलों, प्रक्षेपास्त्रों आदि से कई गाँव पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं।

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HBSE 6th Class History नए साम्राज्य और राज्य Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रशस्तियाँ क्या हैं? इनकी भाषा क्या है?
उत्तर:
राजाओं के युद्ध कौशल और प्रशासन की प्रशंसा में उत्कीर्ण शिलालेख, इनकी भाषा संस्कृत हैं।

प्रश्न 2.
समुद्रगुप्त कौन था?
उत्तर:
गुप्तवंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त (प्रथम) का पुत्र और महान विजेता।

प्रश्न 3.
समुद्रगुप्त के शरीर में विभिन्न अस्व-अस्त्रों के घाव बताकर हरिषेण क्या सिद्ध करना चाहता है?
उत्तर:
हरिषेण समुद्रगुप्त को महान योद्धा, विजेता और शक्तिशाली शासक सिद्ध करना चाहते हैं।

प्रश्न 4.
युद्ध में समुद्रगुप्त की सेना कौन-कौन से अस्त्र-शस्त्रों से लड़ती थी?
उत्तर:
सेना के अस्त्र-शस्त्र थे-परशु, गदा, भाले, कृपाण, बरछा, तलवार, पाश, कंटीले बाण आदि।

प्रश्न 5.
आर्यावर्त में कितने राज्य थे? उन साधनों के नाम लिखिए।
उत्तर:
नौ राज्य: बुंदेलखण्ड, मालवा, राजपूताना, दोआब (गंगा-यमुना का मैदान), रुहेलखंड और बंगाल। यहाँ नागवंश का शासन था।

प्रश्न 6.
दक्षिणापथ में कितने राज्य थे?
उत्तर:
बारह राजा।

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प्रश्न 7.
समुद्रगुप्त ने कौन-कौन से गण-संघों को पराजित किया?
उत्तर:
वैशाली, सुश्रीनगर, श्रावस्ती, अयोध्या, कन्नौज आदि नाम राज्यों को।

प्रश्न 8.
समुद्रगुप्त ने किन लोगों के साथ मैत्री-संबंध बनाया?
उत्तर:
कुषाण एवं शक राजवंशों के और श्रीलंका के शासक के साथा श्रीलंका के शासक ने उसके साथ अपनी पुत्री का विवाह किया था।

प्रश्न 9.
गुप्त शासकों के महत्त्वपूर्ण नगर कौन से थे?
उत्तर:
प्रयाग (इलाहाबाद), उज्जैन और पाटलिपुत्र (पटना)।

प्रश्न 10.
समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त और दक्षिणापथ के राजाओं से कैसा व्यवहार किया? .
उत्तर:
आर्यावर्त के शासकों की हत्या करने उनका राज्य गुप्त साम्राज्य में मिला लिया। दक्षिणापथ के राजाओं ने उसके आगे समर्पण कर दिया था। अत: गुप्त साम्राज्य की अधीनता में उन्हें पूर्ववत शासन करने की अनुमति दी गई।

प्रश्न 11.
आर्यावर्त्त और दक्षिणापथ के राजाओं के साथ भिन्न व्यवहार क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
आर्यावर्त के राजाओं ने समुद्रगुप्त के साथ युद्ध किया जबकि दक्षिणापथ के राजाओं ने आत्मसमर्पण और संधि कर ली थी।
(i) आर्यावर्त के राज्य समुद्रगुप्त की राजधानी पाटलिपुत्र के निकट थे अत: वहाँ पर प्रत्यक्ष शासन किया जा सकता था जबकि दक्षिणापथ के राज्य बहुत दूर थे। अतः वहाँ करद/अधीनस्थ राज्याओं के माध्यम से ही प्रशासन कार्य किया जा सकता था।

उक्त कारणों से ही समुद्रगुप्त ने आर्यावर्त्त के राजाओं को अपने साम्राज्य में मिला लिया था परंतु दक्षिणापथ के राजाओं को अपना करद/अधीनस्थ बना लिया था।

प्रश्न 12.
समुद्रगुप्त के परदादा, दादा, पिता और माता कौन थीं?
उत्तर:
ये क्रमशः श्रीगुप्त घटोत्कच गुप्त, चन्द्रगुप्त (प्रथम) और कुमारदेवी थे। उसकी माता कुमारदेवी लिच्छवी गण की थी और पिता प्रथम महाराजाधिराज थे। उसके दादा और दादी केवल महाराज ही रहे थे।

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प्रश्न 13.
चन्द्रगुप्त (द्वितीय) को शकारि विक्रमादित्य क्यों कहा जाता था?
उत्तर:
उसने शकों का समूल विनाश कर दिया था और विक्रम संवत् चलाया था।

प्रश्न 14.
चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के राज-दरबार में कौन-कौन विद्वान रहते थे?
उत्तर:
कालिदास और आर्यभट्ट। कालिदास महान नाटककार और आर्यभट्ट खगोलशास्त्री था। वराहमिहिर भी उसी के दरबारी विद्वान थे।

प्रश्न 15.
गुप्तकाल के साहित्यकारों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कालिदास, विशाखादत्त, मास, शूद्रक, भट्टी, दंडी, मर्तृहरि, हरिषेण और अमरसिंह आदि।

प्रश्न 16.
गुप्तकाल. के दार्शनिक कौन-कौन थे?
उत्तर:
ईश्वर, कृष्ण, वात्स्यायन, असंग, सुबंधु-धर्मपाल, शंकरस्वामी, चन्द्रकीर्ति आदि।

प्रश्न 17.
कालिदास ने कौन-कौन से ग्रंथ लिखे?
उत्तर:
(क) नाटक: अभिज्ञानशांकुतलम, मालविकानिमिगम, विक्रमोर्दशी।
(ख) महाकाव्य: रघुवंश और कुमारसंभव।
(ग) गीतिकाव्य: मेघदूत और ऋतुसंहार।

प्रश्न 17.
वाणभट्ट कौन था? उसने कौन-कौन से ग्रंथ लिखे?
उत्तर:
हर्षवर्धन का दरबारी कवि था। कादंबरी, हर्षचरित और अष्टांगदृश्य आदि ग्रंथ लिखे।

प्रश्न 18.
हर्ष अपने पिता और ज्येष्ठ भ्राता की मृत्यु के पश्चात् गद्दी पर क्यों बैठा होगा?
उत्तर:
उस काल में राजतंत्र था। राजा का पद अनुवांशिक होने के कारण उस पर पहला अधिकार ज्येष्ठ पुत्र का होता था।

प्रश्न 19.
हर्ष ने कौन-कौन से राज्य जीते?
उत्तर:
पंजाब, कन्नौज (कानपुर), बंगाल, बिहार, उड़ीसा, बल्लभी (गुजरात), कामरूप (असम), सिंध, नेपाल और कश्मीर राज्य जीते थे।

प्रश्न 20.
चालुक्य और पल्लव राजा आपस में लड़ते क्यों रहते थे?
उत्तर:
ये दोनों राज्य तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र-प्रदेश के बीच में होने से इनकी सीमाएँ सुनिश्चित करनी कठिन थी। कोई प्राकृतिक भू-आकृति ऐसी नहीं थी जो इन्हें अलग-अलग पहचान देती हो। राज्य विस्तार के लिए इनमें युद्ध होना स्वाभाविक था।

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प्रश्न 21.
चालुक्य और पल्लव राजाओं के बाद दक्षिण भारत में कौन से राजवंश उदय हुए?
उत्तर:
राष्ट्रकूट और चोल वंश।

प्रश्न 22.
सामन्त कौन थे?
उत्तर:
राजा की ओर से विशाल जागीर उपहार में प्राप्त करने वाले सेनापति। इन्हें जागीर से कर/लगान वसूल करने एक बड़ी सेना का प्रबंध स्वयं करना पड़ता था।

प्रश्न 23.
गुप्तकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
राजनैतिक एकीकरण, केन्द्र सरकार की स्थापना, राज्य व्यवस्था में सुधार, साहित्य, विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति के आधार पर ही इस काल को स्वर्ण युग कहा जाता है।

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लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
गुप्त काल में धर्म तथा आचार-विचार में कौन से परिवर्तन हुए?
उत्तर:
गुप्तकाल में हिन्दू-धर्म बहुत शक्तिशाली बन गया था। इस युग में शिव और विष्णु की उपासना की जाती थी। धार्मिक कर्मकाण्ड और ब्राह्मणों को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। रामायण, महाभारत और पुराण इसी काल में लिखे गए। मूर्ति-पूता को विशेष समर्थन मिला अतः देवालयों और देवमूर्तियों की स्थान-स्थान पर स्थापना की गई।

प्रश्न 2.
गुप्तकाल की विज्ञान, गणित और चिकित्सा के क्षेत्र की उपलब्धियाँ लिखिए।
उत्तर:
गुप्तकाल में गणित, विज्ञान तथा औषधियों (चिकित्सा) के क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति हुई। भारतीय गणितज्ञों ने “दशमलव पद्धति” का श्रीगणेश किया। उन्हें शून्य का ज्ञान भी था। यहाँ की संख्या पद्धति अन्य देशों की पद्धति से भिन्न थी। आर्यभट्ट और बराहमिहिर जैसे गणितज्ञ और खगोलशास्त्री नई-नई खोजों में लगे थे। आर्यभट्ट ने यह बताया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। आयुर्वेद की पुस्तकें यथा-शरीरशास्त्र, चरकसंहिता आदि लिखी गई।

प्रश्न 3.
गुप्तकाल में कला के क्षेत्र में क्या उपलब्धियाँ रहीं?
उत्तर:
1. अनेक हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और गौतम बुद्ध की मूर्तियाँ बनाई गई।
2. बौद्ध विहार तथा मंदिरों में सुन्दर चित्रकारियों की गई। देवगढ़ (साँची) का मंदिर और सारनाथ का बौद्ध -विहार गुप्तकाल में ही बनाया गया है।

प्रश्न 4.
प्राचीनकाल के राजा प्रशस्तियाँ क्यों लिखवाने होंगे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रशस्ति लिखवाने का कारण:
1. उस काल में सूचना और प्रौद्योगिकी विकसित नहीं थी। अत: राजकीय आदेशों, अध्यादेशों, आज्ञाओं, घोषणाओं को संबंधित राजा का परिचय देते हुए लिखा जाता था।
2. आनुवांशिक पद होने से राजा अपनी वंशावली से भावी पीढ़ी को परिचित कराने के लिए प्रमाणस्थल ऐसा किया करते थे।
3. चूँकि कवि, विद्वान एवं कलाकारों को इस काल के राजाओं ने विशेष संरक्षण दिया था। अतः हो सकता है कि राजा का गुणगान करने के लिए उन्हें प्रशस्ति लिखने का स्वयं विचार आया हो।
4. आम-प्रजा और पड़ोसी राजाओं पर प्रभाव जमाने के लिए भी ऐसा किया गया होगा।
5. हो सकता है कि उस काल में राज वैभव और प्रभाव का प्रचार-प्रसार करने की यही प्रथा हो।

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प्रश्न 5.
गुप्तकाल में व्यापार की उन्नति के क्या कारण रहे होंगे?
उत्तर:
जैसा कि हम जानते हैं कि व्यापार करने के लिए साम्राज्य में शांति-व्यवस्था, बड़ी बाजार, राजकीय प्रोत्साहन और परिवहन के उन्नत साधनों का रहना आवश्यक होता है। गुप्त वंश के शासकों ने इन सभी बातों का ध्यान दिया था। समुद्रगुप्त ने अपना राजय लगभग समूचे भारत में फैला दिया था। वहीं उसके करद राजा थे तो कहीं मित्र राज्य थे। आर्यावर्त के सभी 9 राज्यों को जीत कर साम्राज्य में मिला लिया गया था। भृगुकच्छ, ताम्रलिपि जैसे बंदरगाह उसके अधीन थे।

अपने जीते हुए राज्यों को उसने चार तरीकों से व्यवस्थित किया था। सर्वत्र सुख-शांति थी। गुप्त शासकों ने सड़कें बनवाई, उनके किनारें छायादार वृक्ष लगवाए और विभिन्न सरायों का निर्माण करवाया। विदेशों से आने वाले व्यापारियों को पूरी, सुरक्षा और सुविधाएँ दी जाती थीं। भारत के पश्चिमी और पूर्वी दोनों तटों से व्यापार मार्ग थे। रेशम-मार्ग भी पूर्णतः खोल दिया गया था। इन कारणों से ही गुप्तकाल में व्यापार की अभूतपूर्व उन्नति हुई होगी।

प्रश्न 6.
ह्वेनसांग ने तत्कालीन प्रशासन, शिक्षा, सामाजिक दशा और धार्मिक मान्यताओं के बारे में क्या लिखा हैं?
उत्तर:
स्वेनसांग चीनी तीर्थयात्री था। वह भारत में पन्द्रह वर्ष रहा। उसने लिखा है कि शायद सभी कार्यों के लिए अंतिम रूप से जिम्मेदार था। दण्ड-व्यवस्था अत्यधिक कठोर थी। किसानों से उत्पादन का 1/6वाँ हिस्सा लगान के रूप में लिया जाता था। अन्य कर बहुत कम थे। चिकित्सा आदि की समुचित व्यवस्था थी। देश में शांति-व्यवस्था थी। व्यापार उन्नति पर था एवं प्रजा सुखी और संपन्न थी। शिक्षा निःशुल्क थी क्योंकि लगान की एक निश्चित राशि शिक्षालयों को दान दी जाती थी।

लोग शिक्षित थे और सत्कर्म की ओर ध्यान देते थे। जाति-भावना उग्र रूप में थी, सती प्रथा प्रचलित थी। हिन्दू धर्म का अग्रणी विकास हो रहा था। हिन्दू, बौद्ध और जैन तीन धर्म प्रचलन में थे। चीन तथा ईरान आदि लोगों के साथ व्यापार होता था। लोगों का प्रमुख धंधा कृषि कार्य था। पशुपालन, शिल्पकार्य, लेखन और व्यापार अन्य काम-धन्धे एवं व्यवसाय थे।

प्रश्न 7.
“सेना में सामन्त पद्धति अपनाना गुप्त वंश के शासकों हेतु खतरनाक सिद्ध हुआ।” इस कथन का औचित्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शासन की इस महाराजाधिराज व्यवस्था में प्रत्यक्ष और परोक्ष शासन सम्मिलित हो गया था। साम्राज्य विस्तार अत्यधिक होने के कारण गुप्त शासकों को विशाल सेनाएँ रखनी पड़ती थी। उन्होंने शक्तियों के विकेन्द्रीकरण की नीति, सैन्य व्यवस्था में भी अपनाई। इसके अनुसार सेनानायकों को बहुत बड़ा सूबा या प्रांत अनुदान में दे दिया जाता था। इस सूबे से सेनानायक भूमि, राजस्व वसूल करते थे और राज्य के आदेश अनुसार सेना की व्यवस्था तथा अस्त्र-शस्त्र की आपूर्ति स्वयं ही करते थे। कुछ काल तक सब कुछ ठीक चलता था लेकिन धीरे-धीरे ये सामन्त (सेनानायक) अपने को स्वतंत्र घोषित करने लगे तथा इन्होंने सैन्य विद्रोह करना आरंभ किया। आगे चलकर यह सामंती व्यवस्था गुप्त वंश के पतन का कारण बनी।

प्रश्न 8.
स्थानीय सभाएं कौन-कौन सी थीं? और उनके क्या कार्य थे?
उत्तर:
स्थानीय सभाएँ-ब्राह्माणों की समिति, इस सभा की उप-समितियाँ, उरू (ब्राह्माणों से भिन्न वर्ण) अर्थात् ग्राम समिति तथा व्यापारियों का संघ नगरम थी। संक्षेप में- (i) समिति, (ii) उपसमितियाँ, (10 उरू (ग्रामीण समिति), (iv) नगरम (व्यापारियों की समिति/संघ)। समिति ने सिंचाई, कृषि-कार्यों, सड़कों के निर्माण और स्थानीय मंदिर निर्माण करने के लिए अनेक-अनेक उप-समितियाँ बनाई थी। अब्राह्मणों सकायों से बनी उस गाँव की व्यवस्था देखती थी और नगरम को व्यापार प्रबंध देखना होता था।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 11 नए साम्राज्य और राज्य

नए साम्राज्य और राज्य Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. अरविन्द का आश्चर्य क्यों हुआ?: पूर्व-कल्पना के विपरीत वीणा वादक राजा का अभिनय करने में।
2. प्रशस्ति क्या है?: राजाओं की प्रशंसा में शिला स्तंभों पर उत्कीर्ण की गई संस्कृत कविता।
3. समुद्रगुप्त की प्रशस्ति किसने लिखी थी?: हरिषेण कवि ने।
4. समुद्रगुप्त के पिता का नाम क्या था?: चन्द्रगुप्त (प्रथम)।
5. भिन्न-भिन्न किस्म के राजाओं के नाम क्या थे?: आर्यावर्त के राजा, दक्षिणापथ के राजा, पड़ोसी राजा और दूरस्थ राजा।
6. गुप्त शासन काल के महत्त्वपूर्ण नगर कौन थे?: प्रयाग (इलाहाबाद), पाटलिपुत्र (पटना) तथा उज्जैन।
7. चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के बारे में किन चीजों से जानकारी मिलते हैं?: उस काल के शिलालेखों और सिक्कों से, कालिदास और आर्यभट्ट की कृतियों से।
8. “हर्ष चरित” किसने लिखा?: हरिषेण नामक कवि ने।
9. हर्ष का साम्राज्य विस्तार बताइए?: उत्तर में पंजाब, पश्चिम में सौराष्ट्र (गुजरात), पूर्व में पश्चिम बंगाल, असम तथा दक्षिण में मध्य प्रदेश।
10. दक्षिण भारत में राजवंश कौन थे?: पल्लव और चालुक्य राजवंश।
11. पल्लवों की राजधानी कहाँ थी?: कांचीपुरम (कोची), तमिलनाडु।
12. चालुक्यों की राजधानी कहाँ थी?: एहोल (कर्नाटक) में।
13. कृष्ण, कावेरी और तुंगभद्रा नदियाँ किस शासन की सीमाएँ थीं? चालुक्य वंश के शासकों की।
14. रविर्कीति कौन था?: चालुक्य शासक पुलकेशिन (द्वितीय) की प्रशस्ति रचना करने वाला कवि।
15. “पुलकेशिन ने जब हर्षवर्धन को पराजित किया तो वह हर्ष नहीं रह गया।” किसने लिखा है?: रविकीर्ति ने।
16. चालुक्य प्रशासन की विशेषता क्या थी?: इसमें आर्थिक, सामाजिक या राजनैतिक और सैन्य शक्ति वाले जनसमूह, संगठन आदि को विशेषाधिकार दिए गए थे।
17. चालुक्य प्रशासन का पतन क्यों हुआ?: विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग द्वारा शक्तियों का दुरूपयोग किए जाने एवं स्वयं को स्वतंत्र घोषित करने के कारण।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 11 नए साम्राज्य और राज्य

18. “उर” क्या था? उन क्षेत्रों में स्थापित एक “सभा” जहाँ जमींदार ब्राह्माण नहीं थे।
19. सभा क्या थी?: ब्राह्माण जमींदारों की सभा/संगठन/ समिति।
20. नगरम क्या था?: व्यापारियों का एक संघ या संगठन।।
21. शकन्तुला की अंगूठी को राजा तक पहुँचने वाले मछुआरे को सुरक्षा व्यवस्था (चौकीदार) और पुलिस विभाग (जाँच अधिकारी) का दुर्व्यवहार क्यों झेलना पड़ा?: पद का दुरुपयोग करके अनुचित लाभ पाने की सेवक तंत्र (Bureaucracy) की शाश्वत चेष्टा के कारण।
22. क्या आज की अगूंठी की रिपोर्ट पुलिस में देने पर मछुवारे के साथ वैसा ही दुर्व्यवहार होता?: उससे भी अधिक क्योंकि भौतिक आवश्यकताएँ और सुख-साधन पहले से अधिक बढ़ गए हैं।
23. बाणभट्ट क्यों कहता है कि समूचा संसार धूल में ढक गया?: शासक की विशाल सेना के कूच करने की प्रशंसा करता है।
24. अरबवासियों का विश्व इतिहास में क्या महत्त्व है?: यूरोप और भारत के बीच समुद्र मार्ग खोजने वाले थे।
25. इस्लाम धर्म का सार क्या हैं?: मानवीय गुणों में ओत-प्रोत मनुष्य को क्षमा करने तथा जीवन में महान उपलब्धियाँ देने के लिए अल्लाह (ईश्वर, परमात्मा) हर समय तत्पर हैं।

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HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 Surface Areas and Volumes Ex 13.8

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 Surface Areas and Volumes Ex 13.8 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 13 Surface Areas and Volumes Exercise 13.8

Assume π = \(\frac{22}{7}\), unless stated otherwise.

Question 1.
Find the volume of a sphere whose radius is :
(i) 7 cm
(ii) 0.63 m.
Solution:
(i) We have,
Radius of sphere (r) = 7 cm
∴ Volume of sphere = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(7)^3\)
= \(\frac{88 \times 49}{3}\)
= \(\frac{4312}{3}\)
= 4312\(\frac{1}{3}\) cm3.
Hence,volume of the spher = 4312\(\frac{1}{3}\) cm3.

(ii) We have,
Radius of the sphere (r) = 0.63 m
∴ Volume of the sphere = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(0.63)^3\)
= 88 × 0.03 × 0.3969
= 1.0478 m3 = 1.05 m3
Hence,volume of the sphere = 1.05 m3.

Question 2.
Find the amount of water displaced by a solid spherical ball of diameter :
(i) 28 cm
(ii) 0.21 m.
Solution:
(i) We have,
Diameter of spherical ball = 28 cm
∴ Radius of the spherical ball (r) = \(\frac{28}{2}\)
= 14 cm
Amount of water displaced by spherical ball = Volume of spherical ball
= \(\frac{4}{3} \pi r^3=\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(14)^3\)
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times 14 \times 14 \times 14\)
= \(\frac{88 \times 2 \times 196}{3}\)
= \(\frac{34496}{3}\)
= 11498\(\frac{2}{3}\) cm3
Amount of water displaced by spherical ball
=11498\(\frac{2}{3}\) cm3

(ii) We have,
Diameter of spherical ball = 0.21 m
∴ Radius of spherical ball (r) = \(\frac{0.21}{2}\)
= 0.105 m
Amount of water displaced by spherical ball = Volume of spherical ball
= \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(0.105)^3\)
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) × 0.105 × 0.105 × 0.105
= 88 × 0·005 × 0.011025
= 0.004851 m3
Hence, amount of water displaced by spherical ball = 0.004851 m3.

Question 3.
The diameter of a metallic ball is 4.2 cm. What is the mass of the ball, if the density of the metal is 8.9 g per cm3?
Solution:
We have,
Diameter of ball = 4.2 cm
∴ Radius of the ball (r) = \(\frac{4.2}{2}\) = 2.1 cm
Since, ball is in the shape of sphere, therefore we need to calculate the volume of sphere for its mass.
∴ Volume of spherical ball = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(2.1)^3\)
= \(\frac{88}{21}\) × 2.1 × 2.1 × 2.1
= 8.8 × 4.41 = 38.808 cm3
mass of the ball = volume × density
= 38.808 × 8.9
= 345.39 grams (approx.)
Hence,mass of the ball = 345.39 grams (approx.)

Question 4.
The diameter of the moon is approximately one-fourth of the diameter of the earth. What fraction of the volume of the earth is the volume of the moon?
Solution:
Let the diameter of the earth be 2x.
∴ Radius of the earth (R) = \(\frac{2 x}{2}\) = x
According to question,
Diameter of the moon = \(\frac{1}{4}\) of diameter of the earth = \(\frac{1}{4}\) × 2x = \(\frac{x}{2}\)
∴ Radius of the moon (r) = \(\frac{x}{4}\)
Volume of the earth = \(\frac{4}{3}\)πr3 = \(\frac{4}{3}\)πx3
Volume of the moon = \(\frac{4}{3}\)πr3 = \(\frac{4}{3} \pi\left(\frac{x}{4}\right)^3\)
= \(\frac{4}{3} \pi \frac{x^3}{64}\)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 Surface Areas and Volumes Ex 13.8 1
⇒ Volume of the moon = \(\frac{1}{4}\) × volume of the earth
Hence, \(\frac{1}{64}\) fraction of volume of earth is volume of the moon.

Question 5.
How many litres of milk can a hemispherical bowl of diameter 10.5 cm hold.
Solution:
We have,
Diameter of hemispherical bowl = 10.5 cm
∴ Radius of hemispherical bowl (r) = \(\frac{10.5}{2}\)
= 5.25 cm
∴ Volume of the hemispherical bowl
= \(\frac{2}{3} \pi r^3\)
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times(5.25)^3\)
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7}\) × 5.25 × 5.25 × 5.25
= 44 × 0.25 × 27.5625
= 303.1875 cm3
= 0.3031875 litres
= 0.303 litres (approx.)
Hence, hemispherical bowl, can hold 0.303 litres (approx.) of milk.

Question 6.
A hemispherical tank is made up of an iron sheet 1 cm thick. If the inner radius is 1 m, then find the volume of the iron used to make the tank.
Solution:
We have,
Inner radius of the hemispherical tank (r) = 1 m
Thickness of the iron sheet = 1 cm
= 0.01 m
∴ Outer radius of the hemispherical tank
(R) = 1 + 0.01 = 1.01 m
Volume of the iron used to make the tank = External volume – Internal volume
= \(\frac{4}{3}\)πR3 – \(\frac{2}{3}\)πr3
= \(\frac{2}{3}\)π[R3 – r3]
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7}\)[(1.01)3 – (1)3]
= \(\frac{44}{21}\)(1.030301 – 1)
= \(\frac{44}{21}\) × 0.030301
= 0·06348 m3 (approx.)
Hence, volume of the iron used to make the tank = 0·06348 m3 (approx.)

Question 7.
Find the volume of a sphere whose surface area is 154 cm2.
Solution:
Let the radius of sphere be r сm.
Surface area of the sphere = 154 cm2 (given)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 Surface Areas and Volumes Ex 13.8 2
Hence,volume of the sphere = 179\(\frac{2}{3}\) cm3.

Question 8.
A dome of a building is in the form of a hemisphere. From inside, it was whitewashed at the cost of Rs. 498.96. If the cost of the white-washing is Rs. 2.00 per square metre, find the :
(i) inside surface area of the dome,
(ii) volume of the air inside the dome.
Solution:
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 13 Surface Areas and Volumes Ex 13.8 3
Let inner radius of dome be r m.
We have, Rate of white washed = Rs. 2.00 per m2
Total cost of white washed = Rs. 498.96
(i) Inside curved surface area of the dome
= \(\frac{\text { Total cost }}{1 m^2 \cos t}=\frac{498.96}{2}\)

(ii) We have,
Inside C.S.A. of the dome = 249.48
2πr2 = 249.48
2 × \(\frac{22}{7}\) × r2 = 249.48
r2 = \(\frac{249.48 \times 7}{22 \times 2}\)
r2 = 39.69
r = \(\sqrt{39.69}\)
r = 63 m.
Volume of air inside the dome = \(\frac{2}{3}\)πr3
= \(\frac{2}{3} \times \frac{22}{7} \times(6.3)^3\)
= \(\frac{2 \times 22}{21}\) × 6.3 × 6.3 × 6.3
= 44 × 0.3 × 39.69
= 523.908 m3
= 523.9 m3 (approx.)
Hence, (i) Curved surface area of the dome = 249.48 m2
(ii) Volume of air inside the dome = 523.9 m3 (approx.)

Question 9.
Twenty seven solid iron spheres, each of radius r and surface area S are melted to form a sphere with surface area S’. Find the :
(i) radius r’ of the new sphere,
(ii) radio of S and S’.
Solution:
We have,
Twenty seven spheres, each of radius r and surface area S are melted to form a sphere with surface area S’.
(i) Then S = 4πr2 …..(i)
Volume of one sphere = \(\frac{2}{3}\)πr3
Volume of 27 spheres = 27 × \(\frac{2}{3}\)πr3
Volume of new sphere = Volume of 27 spheres
⇒ \(\frac{4}{3} \pi r^{\prime} 3=27 \times \frac{4}{3} \pi r^3\)
⇒ \(r^{\prime 3}=\frac{27 \times \frac{4}{3} \pi r^3}{\frac{4}{3} \pi}\)
⇒ r’3 = 27r3 = (3r)3
⇒ r’= 3r
(ii) Surface area of new sphere (S’) = 4πr’2
= 4π × (3r)2 = 4π × 9r2
= 36πr2
Now, \(\frac{S}{S^{\prime}}=\frac{4 \pi r^2}{36 \pi r^2}\)
⇒ \(\frac{S}{S^{\prime}}=\frac{1}{9}\)
⇒ S : S’ = 1 : 9
Hence (i)Radius of new sphere (r’) = 3r
(ii) S : S’ = 1 : 9.

Question 10.
A capsule of medicine is in the shape of a sphere of diameter 3.5 mm. How much medicine (in mm3) is needed to fill this capsule?
Solution:
We have,
Diameter of spherical capsule = 3.5 mm
∴ Radius of spherical capsule (r) = \(\frac{3.5}{2}\)
= 1.75 mm
Volume of the capsule = \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7} \times(1.75)^3\)
= \(\frac{4}{3} \times \frac{22}{7}\) × 1.75 × 1.75 × 1.75
= \(\frac{88 \times 0.25 \times 3.0625}{3}\)
= \(\frac{67.375}{3}\)
= 22.46 mm3 (approx.)
Hence, volume of medicine in the capsule = 22.46 mm3 (approx.)

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री

HBSE 6th Class History व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री Textbook Questions and Answers

कल्पना करो:

तुम्हारे पास कोई पाण्डुलिपि है, जिसे एक चीनी तीर्थयात्री अपने साथ ले जाना चाहता है। उसके साथ अपनी बातचीत का वर्णन करो।
उत्तर:
चीनी यात्री: अरे बालक! यह तो गौतम बुद्ध रचित त्रिपिटक है। मैं इसी को कई दिनों से इधर-उधर खोज रहा था।
बालक: हाँ! इसमें बौद्ध संघ के नियमों को विस्तार से दिया गया है। लेकिन आप इसके लिए इतने परेशान क्यों थे?

चीनी यात्री: वस्तुतः मैं बौद्ध धर्म का अनुयायी हूँ और भगवान बुद्ध में विशेष आस्था रखता हूँ। यह सोचिए कि इस धर्म का समाज में प्रचार करने कि लिए मैंने अपना जीवन समर्पित किया है। आप तो छात्र हैं और ऐसा लगता है कि आपके दादाजी को पढ़ने का शौक रहा होगा।
बालक: हाँ! हम हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं लेकिन मेरे दादाजी पुस्तकालयध्यक्ष थे और विविध धर्मों, संस्कृतियों आदि की जानकारी प्राप्त करने में उनकी बहुत रूचि थी। यही कारण है कि आप इस पुस्तक को यहाँ देख रहे हैं।

यात्री: यदि आप बुरा न मानें तो कृपया इस ग्रंथ को मुझे दे दें। इसका आप जो भी मूल्य लेना चाहें, मैं देने को तैयार हैं।
बालक: क्षमा कीजिए श्रीमान्! यह हमारे दादा जी की धरोहर है और जहाँ तक मैं समझता हूँ हिंदू धर्म और इस ग्रंथ की शिक्षाओं में कोई विशेष अंतर नहीं है। यहाँ धर्मशाला एवं मठ हैं तो बौद्ध धर्म में भी संघाराम और विहार हैं। इन कारणों से मैं इसको देना नहीं चाहूँगा।

यात्री: यदि ऐसा है तो कृपया मार्ग-दर्शन करें कि यह पुस्तक कहाँ से प्राप्त हो सकती है?
बालक: अरे! श्रीमान आपको तो विशेष राज्याश्रय प्राप्त है। शासक तक आपकी अच्छी पहुंच है। मैं तो मात्र एक किशोर हूँ। इस संबंध में आप शासक से चर्चा कीजिए या फिर कश्मीर जाकर वहाँ की महासभा में भाग लीजिए।

यात्री: ओह! आप शायद सही कहते हैं। वस्तुत: मुझे अश्वघोष आदि विद्वानों से वार्ता करने, इस पाण्डुलिपि को पाने अथवा इसमें अन्तर्निहित विषय-वस्तु को ‘इंडिका’ में उद्धृत करने की चेष्टा करनी चाहिए। धन्यवाद! अच्छा अब चलता हूँ।
बालक: श्रीमान, भोजन का समय हो रहा है अतः आग्रह करना चाहूँगा कि किंचित विश्राम करके भोजन करें और फिर अपने मार्ग में आगे बढ़ें।
यात्री: ठीक है, ऐसा ही कीजिए। धन्यवाद।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री

आओ याद करें:

व्यापारी राजा और तीर्थयात्री Class 6th History HBSE प्रश्न 1.
निम्नलिखित का सुमेल कीजिए:
(i) दक्षिणापथ के स्वामी – (क) बुद्धचरित
(ii) मुवेन्दार – (ख) महायान बौद्ध धर्म
(iii) अश्वघोष – (ग) सातवाहन शासक
(iv) बोधिसत्व – (घ) चीनी यात्री
(v) श्वैन त्सांग – (ङ) चोल, चेर, पांड्य
उत्तर:
(i) – (ङ)
(ii) – (ग)
(iii) – (ख)
(iv) – (क)
(v) – (घ)

Class 6th History HBSE व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री प्रश्न 2.
राजा सिल्क रूट पर अपना नियंत्रण क्यों कायम करना चाहते थे?
उत्तर:
इस मार्ग पर नियंत्रण से रेशम के व्यापारियों पर कर लगाया जा सकता था। नजराना एवं उपहार प्राप्त किया जा सकता था। इन करों को चुकाने वाले व्यापारियों के लिए सुरक्षा के प्रबंध किए जाते थे।

व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री प्रश्न उत्तर Class 6th History HBSE प्रश्न 3.
व्यापार और व्यापारिक रास्तों के बारे में जानने के लिए इतिहासकार किन-किन साक्ष्यों का उपयोग करते हैं?
उत्तर:
1. बंदरगाहों की उपस्थिति
2. नगरों में पाए जाने वाले विदेशी चीजों यथा-सिक्के, वस्त्र, बर्तन, काँच का सामान आदि
3. जलयानों एवं नावों के अवशेष
4. रेशम तथा इससे बनी हुई चीजों के अवशेष (देश-विदेश में), (१) प्रमुख नगरों की एक निश्चित दिशा में स्थापना की जाती।

प्रश्न 4.
भक्ति की प्रमुख विशेषताएँ क्या थी?
उत्तर:
1. यह “भज” नामक संस्कृत शब्द से व्युत्पन्न हैं। इसका अर्थ है-बॉटना या विभाजित करना। ।
2. यह देवता और उपासक के बीच उभय-संबंधों की निकटता दर्शाता है।
3. भागवत् या भक्त का अपने भगवान के साथ संबंध जोड़ना ही भक्ति है।
4. भक्तं अपने भगवान या ईष्ट का भाग प्राप्त करता है।
5. वर्ण, जाति, धर्म, आस्था, शारीरिक सामर्थ्य, दीनता आदि से परे भक्ति में सभी का भाग (हिस्सा) है। ‘भक्ति’ किसी मानदण्ड को नहीं देती है। सर्वसमर्पक या मान-त्यागना ही भक्ति है।
6. इसके बलिदान और कठोर तप एवं कर्म-काण्ड को महत्त्व नहीं दिया जाता है।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री

आओ चर्चा करें:

प्रश्न 5.
चीनी तीर्थयात्री भारत क्यों आए? कारण बताओ
उत्तर:
चीनी यात्रियों के भारत आगमन के कारण:
1. भगवान बुद्ध का जन्म और कर्मभूमि भारत ही रही।
2. चीनी यात्री वस्तुतः बौद्ध धर्म के अनुयायी एवं भक्त थे।
3. चीनी यात्री गौतम बुद्ध के जीवन और कार्य पर शोध कर
4. उस समय बौद्ध धर्म की शिक्षा देने वाला एक मात्र नालन्दा विश्वविद्यालय भारत के बिहार राज्य में था।
5. चीनी यात्री अपने साथ गौतमक बुद्ध के जीवन और उपदेशों पर लिखे गए ग्रंथों, बौद्ध विद्वानों की कृतियों और विविध बौद्ध-मूर्तियों को अपने संघ चीन वापस ले जाना चाहते थे।
6. अधिकतर चीनी-यात्री धर्मोपरेक्षक एवं धर्म-प्रचारक ही ‘थे। वे संस्कृत में लिखे गए ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद करके वहाँ के बुद्ध धर्म का प्रसार करने के इच्छुक थे।
7. जुवांग-जंग और अन्य चीनी तीर्थयात्रियों में बौद्ध मठ नालन्दा में प्रवेश लिया तथा वहाँ कई वर्षों तक अध्ययन किया। उनकी यह जिज्ञासा भी भारत आने का कारण बना।

प्रश्न 6.
साधारण लोगों का भक्ति के प्रति आकर्षित होने का कौन सा कारण होता है?
उत्तर:
हमारी ऐसी धारणा बनाने के आधार निम्नलिखित हैं:
(i) भक्ति के लिए किसी तरह का प्रतिबंध, नियम, शर्ते आदि नहीं थी। इसमें शिक्षा के स्तर को भी मानदण्ड नहीं बनाया गया था। अतः लोगों के लिए इस ओर आकर्षित होना स्वाभाविक था।

(ii) भक्ति में निराकर परमात्मा को दुर्गा, शिव, विष्णु, गणेश आदि काल्पनिक प्रतिभाओं में साकार देखने की परिकल्पना थी। आम लोगों के लिए प्रतिमा का स्मरण कर ईश्वर का ध्यान करना कठिन नहीं था।

(iii) भक्ति के कोई विशेष श्लोक या मंत्र नहीं थे बल्कि सीधी-सादी, सरल प्राकृत भाषा में राम, कृष्ण, शिव, दुर्गा आदि नामों का जप, भजन और स्तुतियाँ थी। अपने-अपने कार्य करते हुए आम लोगों ऐसा भजन गुनगुना सकते थे।

(iv) भक्तियों में सगुण या साकार ज्ञान समाया हुआ था। भजन करने के लिए किसी समारोह, उत्सव, मुहर्थ आदि का आयोजन करने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

(v) इसमें सभी कार्यों का त्याग कर स्वयं को ईश्वर में समर्पित करने का सच्चा और सहज आवाह्न समाया था।

आओ करके देखें:

प्रश्न 7.
तुम बाजार से क्या-क्या सामान खरीदती हो उनकी एक सूची बनाओ। बताओ कि तुम जिस शहर या गाँव में रहती हो, वहाँ इनमें से कौन-कौन सी चीजें बनी थीं और किन चीजों को व्यापारी बाहर से लाए थे?
उत्तर:
रबर, कागज, स्याही, खाद्यान्न, समाचार-पत्र।
1. हमारे नगर (दिल्ली) में बनाई जाने वाली चीज: समाचार पत्र।
2. अन्य क्षेत्रों से व्यापारियों द्वारा लाई गई चीजें: रबर (केरल), कागज (मध्य प्रदेश एवं लुधियाना), स्याही (झारखंड), खाद्यान्न (हरियाणा)।

प्रश्न 8.
आज भारत में लोग बहुत तीर्थयात्राएँ करते हैं। उनमें से एक के विषय में पता करो और एक संक्षिप्त विवरण दो। (संकेत: तीर्थयात्रा में स्त्री, पुरुष या बच्चों में से कौन जा सकते हैं? इसमें कितना वक्त लगता है? लोग किस तरह यात्रा करते हैं? वे अपनी यात्रा के दौरान क्या-क्या ले जाते हैं? तीर्थ स्थानों पर पहुंचकर वे क्या करते हैं? क्या वे वापस आते समय कुछ लाते हैं?)
उत्तर:
भारत के सात प्रमुख तीर्थस्थल हैं-हरिद्वार, मथुरा, अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन, द्वारिका और कांचीपुरम। सात पवित्र नदियाँ हैं-गंगा, यमुना, सिन्धु, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी। चार धाम हैं-बद्रीनाथ, पुरी, रामेश्वरम और द्वारिका। यहाँ की यात्रा पुरुष, महिला और बच्चे सभी करते हैं। हरिद्वार तक पहुंचने के साधन सड़क मार्ग और रेलमार्ग दोनों हैं। यात्रा में केवल मौसम अनुसार पहनने के वस्त्र, खर्च के लिए धन एवं शीतऋतु में ऊनी शाल आदि ले जाते हैं।

दिल्ली से हरिद्वार की दूरी 110 कि. मी. हैं। हरि का अर्थ विष्णु भी होता है। अत: इसको विष्णु फाटक भी कहते हैं। यहाँ विष्णु के पद-चिह्न माने जाते हैं। यहाँ बारह वर्ष में कुंभ और छ: वर्ष में अर्धकुंभ लगता है। यह स्थान शिवालिक पर्वत श्रेणी के आधार पर स्थित है। इस महाखड्ड से निकलकर गंगा नदी मैदानी भाग की 2000 किमी. यात्रा करती है। चीनी यात्री हवेनसांग ने भी अपने यात्रा वृत्त में हरिद्वार का उल्लेख किया है। हरिद्वार के प्रसिद्ध स्थल-हर-की-पौड़ी (श्रीविष्णु का पैर), मनसा देवी मंदिर, कनखल। इस तीर्थस्थल में लोग गंगा-जल भर कर लाते हैं। बच्चे अपनी पसंद की कौड़ियाँ, सीपी, खिलौने लाते हैं और महिलाएँ शृंगारिक प्रसाधनों को खरीदकर लाती हैं और घर वापस लौटकर पड़ोसियों तथा संबंधियों के बीच बाँटती हैं।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री

HBSE 6th Class History व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
यामिनी को गाँव के मेले में क्या अच्छा लगता था?
उत्तर:
स्टील के चमचमाते बर्तन को छूना, चमकीली प्लास्टिक की बाल्टियों को देखना तथा अनेकं फूलों के चित्र वाले रंगीन वस्त्र, भिन्न-भिन्न खिलौने वगैरह को छूकर देखना।

प्रश्न 2.
मेले में वस्त्र आदि चीजें कहाँ से आती थीं?
उत्तर:
नगरों से।

प्रश्न 3.
नगरों से माल लाकर गाँव के मेलों में बेचने बाले लोग कौन-कौन थे?
उत्तर:
व्यापारी, फेरीवाले, दुकानदार आदि।

प्रश्न 4.
व्यापारियों के लिए बसों या कारों में आना जरूरी क्यों था?
उत्तर:
परिवहन के इन साधनों से वे बहुत शीघ्र मेला स्थलों पर पहुंच जाते थे और पैदल चलने वाले समय की बचत करके अधिक से अधिक मेलों में जाकर चीजें बेच सकते थे।

प्रश्न 5.
काले एवं लाल रंग के मृद-भांड (मिट्टी के बर्तन) भारत के पुरातत्व स्थल पर क्यों पाए जाते हैं? इन्हें कौन लाया होगा?
उत्तर:
भारत के व्यापारियों का रोम के व्यापारियों के साथ वस्तु-विनिमय या व्यापार संबंध रहने के कारण, चूँकि ये भांड इटली आदि देशों में बनते थे, अत: निश्चित है कि इन्हें रोम के व्यापारी ही लाए होंगे।

प्रश्न 6.
दक्षिण भारत की कौन-कौन सी चीजें लोकप्रिय थीं?
उत्तर:
स्वर्ण, मसाले (विशेषकर काली मिर्च) और कीमती रत्ना

प्रश्न 7.
स्थल मार्ग से व्यापार कैसे होता था.?
उत्तर:
व्यापारी एक काफिले में अपना सामान घोड़ों, – खच्चरों एवं ऊंटों पर लादकर ले जाते थे। वे स्थान-स्थान पर ठहरते थे।

प्रश्न 8.
आज से 2300 वर्ष पूर्व दक्षिण भारत में कौन-कौन से राजवंश विकसित हुए?
उत्तर:
चोल, चेर और पांड्य (मुवेन्दर)।

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प्रश्न 9.
इस काल के शासकों के पास धन कहाँ से आता था?
उत्तर:
(i) लोगों से सीधे धन की मांग करके
(i) जनता से प्राप्त उपहार
(ii) दूसरे राज्यों पर युद्ध करके संपत्ति हथियाना,
(iv) आस-पास के अधीनस्थ राजाओं से नजराना लेकर।

प्रश्न 10.
राजकोष में संचित धन का निवेश/वितरण कैसे होता था?
उत्तर:
स्रोतों से प्राप्त धन का कुछ भाग राजकोष में रखकर शेष का वितरण राज-परिवार के सदस्यों, सैनिकों, समर्थकों और दरबारी कवियों के बीच किया जाता था।

प्रश्न 11.
संगम-साहित्य की एक कविता में दरबारी कवियों की आय के बारे में क्या लिखा गया है?
उत्तर:
उन्हें राज-संरक्षण प्राप्त था और वेशकीमती पत्थर (मणि), स्वर्ण, घोड़े, हाथी, रथ तथा सुन्दर वस्त्र उन्हें उपहार पुरस्कार में दिए जाते थे।

प्रश्न 12.
पश्चिमी भारत में सातवाहन वंश का उद्धव/उदय कब हुआ?
उत्तर:
आज से लगभग 2100 वर्ष पूर्व।

प्रश्न 13.
गौतमी पुत्र शातकर्णि के बारे में जानकारी किस स्रोत से प्राप्त होती है?
उत्तर:
उसकी माँ गौतमी बालाश्री द्वारा जारी किए गए एक शिलालेख से।

प्रश्न 14.
दक्षिणापथ के स्वामी से क्या तात्पर्य हैं?
उत्तर:
दक्षिणापथ राज्य का विस्तार सूचक शब्द है। इसके अन्तर्गत संपूर्ण दक्षिण भारत आता है। इसका अर्थ है-“समूचे दक्षिण भारत का शासक”।

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प्रश्न 15.
गौतमी पुत्र श्री शातकर्णिय बंदरगाहों पर आधिपत्य करने की इच्छा क्यों रखता था?
उत्तर:
बंदरगाहों में रोम व्यापारी अपना माल उतारते और यहाँ के माल को लादकर ले जाते थे। उन्हें व्यापार माल का एक निश्चित अंश स्वर्णमुद्रा में देना होता था। संक्षेप में यह कहा जाता है कि बंदरगाह आयात और निर्यात कर से राजकोष को भरने में सक्षम थे।

प्रश्न 16.
रेशम का उत्पादन कैसे करते थे?
उत्तर:
शहतूत के पेड़ों में रेशम के कीड़ों को पालकर । इनके कोया (Cocoon) को कातकर धागा तैयार किया जाता था। इस धागे से ही जुलाहे रेशमी वस्त्र बुनते थे।

प्रश्न 17.
रेशम बनाने की प्राविधि का विकास सबसे पहले कहाँ और कब हुआ?
उत्तर:
चीन में आज से लगभग 7000 वर्ष पूर्व।

प्रश्न 18.
रेशम मार्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
चीन के लोगों द्वारा आज से 6000 वर्ष पूर्व जिस स्थल-मार्ग से घोड़ों, ऊँटों, काफिलों (पैदल) से बाहर के देशों में रेशम का व्यापार किया गया-वह मार्ग ही रेशम मार्ग कहलाया।

प्रश्न 19.
रेशम मार्ग पर अपना नियंत्रण रखने वाले शासक कौन थे?
उत्तर:
कुषाण, कनिष्क इस राजवंश का लोकप्रिय शासक था। मथुरा और पेशावर में रेशम के व्यापारियों से एक निश्चित राशि वसूल की जाती थी।

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प्रश्न 20.
बौद्ध धर्म की उन्नति के लिए कनिष्क ने क्या किया?
उत्तर:
एक बौद्ध परिषद्/सभा/ सम्मेलन का आयोजन किया।

प्रश्न 21.
मूर्ति शिल्प की दृष्टि से मथुरा और तक्षशिला क्यों प्रसिद्ध हैं?
उत्तर:
इन्हें मूर्ति शिल्प की मथुरा और गांधार शैली कम जाता है। मथुरा शैली विशुद्धतः भारतीय है जबकि गांधार शैली में यूनानी शैली मिश्रित हो गई है।

प्रश्न 22.
बौधिसत्व कौन थे?
उत्तर:
वे बौद्ध भिक्षु जिन्होंने ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात् एकान्तवास नहीं किया बल्कि समाज के साथ घुल-मिलकर उनके सुख-दुःख में सहारा बने तथा उन्हें बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ दीं।

प्रश्न 23.
भगवद् गीता क्या हैं और किस महाकाव्य का अंश हैं?
उत्तर:
भगवद् गीता हिन्दुओं का धर्मग्रंथ है। जिसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन का व्यक्तित्व निर्माण के उपदेश दिए हैं। यह महाभारत का एक अंश है।

प्रश्न 24.
भक्ति मार्ग में किस बात पर बल दिया जाता
उत्तर:
देवी या देवता की व्यष्टि उपासना और समर्पण भाव पर।

प्रश्न 25.
भगवद् गीता को भक्तिमार्ग ग्रंथ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
इसमें अर्जुन को उपदेश देते हुए-‘सर्वधर्मान परित्यज्य मामेक शरणं ब्रजः’ अर्थात् सभी धर्मों का त्याग करके मुझमें (श्रीकृष्ण) आश्रय मांगो-कहा गया है।

प्रश्न 26.
ऐरन (मध्य प्रदेश) में विष्णु की कैसी मूर्ति पाई गई है?
उत्तर:
बराह अवतार मूर्ति। इसमें सूअर (बराह) को अपनी थूधन पर महिला रूपी पृथ्वी को समुद्र से ऊपर उठाते हुए दिखाया गया है।

प्रश्न 27.
हिन्दू शब्द की उत्पति कैसे हुई?
उत्तर:
इंडस (सिन्धु) नदी के पूर्व की ओर रहने वाले लोगों को उन्होंने ‘इन्डोस’ कहा जो कालांतर में हिन्दू हो गया। ‘इंडिया’ शब्द भी इंडस (सिन्धु नदी) के नाम पर रखा गया है।

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प्रश्न 28.
ईसा मसीह का जन्म कहाँ हुआ था?
उत्तर:
पश्चिम एशिया के बेथलहम शहर में जो उन दिनों रोम साम्राज्य के अधीन था।

प्रश्न 29.
ईसा मसीह का पहला उपदेश क्या था?
उत्तर:
दूसरे लोगों के साथ प्रेम और विश्वास उस सीमा तक करो जितना आप चाहते हैं कि दूसरे आपके साथ और आपके ऊपर करें।

प्रश्न 30.
ईसा मसीह की स्वयं के प्रति क्या मान्यता थी?
उत्तर:
संसार के उद्धार करने हेतु उनका जन्म हुआ है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मथुरा और गांधार की मूर्तिकला में क्या अन्तर
उत्तर:
मथुरा शैली की मूर्तियों में गौतम बुद्ध के पार्थिव चित्र नहीं बनाए गए है। उदाहरणार्थ-उनकी बोध प्राप्ति को पीपल का वृक्ष और उसके नीचे एक रिक्त आसान को दिखाया गया है। गांधार शैली में बुद्ध के पार्थिव चित्र (आसन में बैठे हुए बुद्ध, बुद्ध के जीवन से जुड़ी घटनाओं के चित्र)) है।

प्रश्न 2.
व्यापार और व्यापारियों के बारे में जानकारी कैसे जुटाई जा सकती है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
(i) विश्व के विभिन्न देशों में एक ही काल में बनी हुई विशेष चीजों का किसी एक देश के स्थान विशेष पाया जाना। उदाहरणार्थ-रोम में बने काँच का सामान का भारत में पाया जाना।
(ii) विदेशी यात्रियों की डायरी, संस्करण या यात्रा-वृत्तों से।
(iii) व्यापार में सिक्कों का आदान-प्रदान होता है। अतः व्यापार करने वाले लोगों के देश में इन सिक्कों का पाया जाना। इनमें वर्णित समय, मूल्य आदि से भी अर्थव्यवस्था के कई पहलुओं की जानकारी मिलती है।
(iv) भवन निर्माण (वास्तुशिल्प) एवं मूर्ति शिल्प में आई नई तब्दीलियों से।

प्रश्न 3.
रेशमी वस्त्रों को शाही-शान क्यों माना जाता था?
उत्तर:
1. अत्यधिक कीमती होने के कारण इसको आम-आदमी नहीं खरीद सकता था।
2. रोम जैसे देश इसका चीन से आयात करते थे। इनके बीच पर्याप्त दूरी रहने और मार्ग में व्यापारियों पर कई करों का दायित्व रहने के कारण रोम पहुँचने तक यह सर्वाधिक महँगी वस्तु हो जाती थी।
3. रेशम के व्यापार का स्थल मार्ग था जिसमें कठोर चट्टानों, उबड़-खाबड़ रास्तें, रेगिस्तान आदि पड़ते थे।
4. रोम आदि देशों में रेशम एक दुर्लभ अर्थात् न्यूनतम आपूर्ति वाली चीज थी अत: माँग अत्यधिक रहने और लागत आदि आने के कारण यह मात्र शासकों के उपयोग की वस्तु बनकर रह गई थी।

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प्रश्न 4.
बौद्ध धर्म के महायान और हीनयान में क्या अन्तर है? बौद्ध धर्म मध्य एशिया और चीन कैसे पहुँचा?
उत्तर:
कनिष्क के शासन काल में बौद्ध-धर्म दो संप्रदायों-(i) हीनयान और (ii) महायान में बँट गया। महायान में अनेक धार्मिक रीतियाँ तथा कर्मकांड थे। इनमें बहुत से साधु-संतों की पूजा का विधान या व्यवस्था थी। इस संप्रदाय के भिक्षु शक्तिशाली थे। हीनयान संप्रदाय के लोग धार्मिक रीति-रिवाजों तथा कर्मकांडों में आस्था नहीं रखते थे। इस संप्रदाय के लोग महात्मा बुद्ध के बताए हुए मार्ग पर चलते थे।

एशिया और चीन में बौद्ध धर्म: महायान संप्रदाय के कुछ भिक्षुक व्यापारियों के साथ चीन चले गए। वहाँ जाकर उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार किया। इन्हीं के प्रयत्नों से बौद्ध धर्म मध्य एशिया तथा चीन में पहुंचा।

प्रश्न 5.
दक्षिण भारत के शासकों का रोमवासियों के साथ व्यापार कैसा रहा?
उत्तर:
रोम में भारत की काली मिर्च ने धूम मचा दी थी। यह इतनी लोकप्रिय हो गई थी कि लोग इसको काला सोना कहने लगे। रोम साम्राज्य भूमध्य सागर के सभी देशों तक विस्तार हो चुका था। इसी कारण रोम साम्राज्य के व्यापारियों को सबसे पहले भारत की अवस्थिति और यहाँ उत्पन्न होने वाली वस्तुओं की जानकारी मिली।

मसाले, कपड़े, हीरे-मोती तथा भोग-विलास की वस्तुएँ (इत्र, सुगंधित द्रव्य, जड़ी-बूटियाँ, मूंगे, माणिक आदि) रोम में ऊंची कीमतों में बिकने लगी। रोम के व्यापारी स्वयं मालाबार तट और अरिकामेडू (तमिलनाडु) तक अपने जलयान लाते थे। वे भारतीय माल का सोने में भुगतान करते थे और माल को स्वयं लादकर ले जाते थे। इस तरह भारतीय व्यापारियों को घर बैठे ऊंचा लाभ मिलता था। राजाओं को भी इन वयापारियों से नजराने की आय होती थी। जैसा कि उज्जैयिनी, तक्षशिला, मथुरा आदि में व्यापारिक माल पर रोम के व्यापारियों से कर लिया जाता था।

प्रश्न 6.
कनिष्क ने अपने राज्य को किस प्रकार विशाल और शक्तिशाली बनाया? बौद्ध धर्म के प्रति उसका दृष्टिकोण क्या था?
उत्तर:
कनिष्क कुषाण वंश का प्रसिद्ध और महत्त्वकांक्षी शासक था। उसके समय में कुषाण वंश अपनी चरम सीमा पार पहुंच गया। उसने मगध तथा कश्मीर को अपने आधिपत्य में ले लिया। उसने मध्य एशिया तक साम्राज्य विस्तार किया और उज्जयिनी के शकों तथा कुषाणों को हराया। कनिष्क आरंभ में हिन्दू था लेकिन कालांतर में उसने बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली। उसने अपने शासन काल में बौद्ध भिक्षुओं को मध्य एशिया, चीन, कोरिया तथा जापान में धर्म प्रचार के लिए भेजा। उसने बौद्ध धर्म में उत्पन्न मतभेदों को दूर करने के लिए चौथी बौद्ध सभा का आयोजन किया। कश्मीर, पेशावर, मथुरा तथा तक्षशिला में बौद्ध स्तूप तथा विहार बनवाए और खुलकर धन खर्च किया।

प्रश्न 7.
गौतमी पुत्र श्री शातकर्णि कौन था? उसके विजय अभियानों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिण में द्रविड़ देश है। यह कभी मौर्य साम्राज्य का ही एक हिस्सा था। मौर्य साम्राज्य का पतन होने के बाद में स्वतंत्र हो गए। सातवाहन राजवंश का शक्तिशाली शासक गौतमी पुत्र श्री शातकर्णि था। महान विजेता होने के कारण उसको ‘दक्षिणापथ का स्वामी’ (समूचे दक्षिण भारत का शासक) कहा जाता था। उसने कलिंग, काठियावाड़, कृष्णा नदी के डेल्टा क्षेत्रों के राजाओं के साथ युद्ध किया और अपने साम्राज्य में मिला लिया।

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व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. व्यापारी कौन है?: विनिर्माण स्थल से विक्रय स्थल तक वस्तुओं और चीजों को लाने-पहुँचाने वाले।
2. मेले क्यों लगाए जाते हैं?: दैनिक कार्यों को उकताहट से दूर मनोविनोद-मनोरंजन करने तथा लोगों के सामूहिक मिलान एवं संगति के लिए।
3. व्यापारी एक स्थान से दूसरे स्थान पर क्यों घूमते रहते हैं?: उपभोक्ता वस्तुओं या माल को बेचने तथा लाभांश कमाने के लिए।
4. रोम का कांच का सामान, चमकीले अरेंटीना, बर्तन आदि भारत में किसने पहुँचाएँ होंगे और कैसे?: जल अथवा स्थल मार्ग से यात्रा करके व्यापारियों ने।
5. दक्षिण भारत में निर्यात होने वाली चीजें कौन-कौन थीं?: सोना, मसाले (विशेषकर काली मिर्च) तथा वेशकीमती रत्न और मणियाँ।
6. काला-सोना किसको कहा जाता था?: काली मिर्च को।
7. भारत की सर्वाधिक बाजार कौन-सी थी?: रोग
8. कावेरीपत्तनम (पुहार ) बंदरगाह पर कौन-कौन सी चीजें लाई जाती थीं?: घोड़े, काली-मिर्च रत्न, सोना, जड़ी-बूटी, चन्दन, मोती, मूंगा, खाद्यान्न, भाँडे-बर्तन, खाने की वस्तुएँ।
9. यात्री/व्यापारी मानसूनी पवनों का सहारा क्यों लेते थे?: उनके पालवाले जलयान, मानसूनी पवनों की शक्ति पाकर भारत में तीव्र वेग से पहुंचते थे।
10. व्यापारी अपने जलयानों को विशेष मजदूत क्यों बनाते होंगे?: मजबूत जलयान मानसूनी पवनों के बल को झेलते हुए आगे बढ़ने में सहायक होते हैं।
11. भारतीय उपमहाद्वीप का दक्षिणी आधा भाग कैसी भू-आकृति वाला है?: लम्बी तटीय रेखा, पहाड़ी, पठार और नदी घाटियों वाला।
12. कौन सी नदी घाटी सर्वाधिक उपजाऊ थी?: कावेरी नदी की घाटी।
13. मुकेन्दर कौन थे?: तीन राजवंश अर्थात् चोल, चेर और पांड्या
14, पुहार या कावेरीपत्तनम किस शासक के अधीन था?: चोल राजा के अधीन।
15. मदुराई किसकी राजधानी थी?: पाय राजाओं के।
16. कुषाणों की शक्ति के दो प्रमुख केन्द्र कौन थे?: पेशावर और मथुरा।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 10 व्यापारी, राजा और तीर्थयात्री

17. रेशम मार्ग से बैलगाड़ियों का जाना मुश्किल क्यों था?: उबड़-खाबड़, चट्टानी, दुर्गम, रेगिस्तानवाला मार्ग होने के कारण।
18. चीन से रोम तक का स्थल/रेशम मार्ग कैसा था?: अत्यधिक दुर्गम और कठोर चट्टानों वाला।
19. इतिहास में सबसे पहले सोने के सिक्के जारी करने वाला राजवंश कौन था?: कुषाण वंश।
20. बुद्ध चरित का लेखक कौन था?: अश्वघोष (कवि)।
21. बौद्ध धर्म में क्या परिवर्तन हुए?: महायान संघ का उद्भव, ज्ञान प्राप्ति के अश्वघोष शिल्प चित्र के पीपल वृक्ष और उसके नीचे खाली अमन दिखाकर एवं बुद्ध की प्रतिमाएँ बनाकर। बोधिसत्व में आस्था।
22. बोधिसत्व कौन थे?: साधारण लोग जिन्होंने ज्ञान प्राप्त होने के पश्चात् अन्य लोगों की सहायता और उन्हें अच्छी शिक्षा
23. बोधिसत्व की उपासना कहाँ प्रचलित थी?: मध्य एशिया के देशों, चीन तथा कोरिया एवं जापान में।
24. भिक्षुओं के रहने के लिए क्या बनाए गए?: गुफा-गृह।
25. गुफा-गृह बहुधा कहाँ बनवाए गए?: पश्चिमी घाट से पार जाने वाले दरों के आस-पास।
26. थिरवाद स्वरूप वाले बौद्ध धर्म ने कहाँ प्रसार किया?: श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैण्ड, इंडोनेशिया तथा दक्षिण पूर्व एशिया के विभिन्न देश।
27. चीन वापस लौटते समय समुद्री तूफान के समय भी फाहियान अपनी पुस्तकों और बौद्ध-मूर्तियों को साथ क्यों चिपकाए रहा?: पुस्तकें और बौद्ध मूर्तियों ही उसका जीवन था। अत: उन्हें त्यागने का अर्थ था जीवन-त्याग करना।
28. जुवांग जंग कौन था?: जुवान जंग भी फाहियान की तरह ही चीनी यात्री था। उसने बौद्ध ग्रंथों का संस्कृत से चीनी भाषा में अनुवाद किया।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

HBSE 6th Class History अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया Textbook Questions and Answers

कल्पना करो:

Class 6th History HBSE अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया प्रश्न 1.
तुम कलिंग में रहती हो और तुम्हारे माँ-बाप को युद्ध में काफी क्षति दुख उठाने पड़े हैं। अभी अभी अशोक के दूत धम्म के नए विचारों को लेकर आए हैं। आप अपने माता-पिता और संदेशवाहकों के बीच बातचीत का वर्णन करो।
उत्तर:
मेरे माता-पिता ने धम्म प्रचारकों की बातों को सुनने में पहले कोई रुचि नहीं ली। जब धम्म प्रचारकों ने कहा कि अब अशोक ने युद्ध का परित्याग कर दिया है और भविष्य में कभी भी पुनः युद्ध न करने की प्रतिज्ञा की है तो क्षण-मात्र को वे हतप्रभ हो गए और सोचने लगे कि अभी कुछ दिन पूर्व ही यहाँ पर मार-काट और हिंसा का वीभत्स दृश्य उपस्थित करने वाला सम्राट अचानक कैसे बदल गया है? उन्हें अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ।

धम्म से जुड़े लोगों ने मेरे माता-पिता को अशोक के घोषणा-पत्र की प्रति भी दिखाई और अशोक द्वारा युद्ध के दौरान मारे गए लोगों के प्रति व्यक्त सांत्वना-संदेश को भी पढ़कर सुनाया। अब मेरे माता-पिता को विश्वास हो गया कि वस्तुतः अशोक में अब बौद्ध धर्म के तत्व आ गए हैं। धर्म प्रचारक ने बताया कि अनुष्ठान और विविध कर्मकांड व्यर्थ हैं। मनुष्य ने अपने दासों और नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। बड़ों का आदर करना चाहिए। वह सभी जीवों पर दया करें तथा ब्राह्मणों और श्रमणों को दान दें। एक-दूसरे के धर्मों का आदर करना चाहिए और प्रत्येक धर्म की अच्छी बातों को ग्रहण करना चाहिए। अशोक के इन उपदेशों तथा उसकी घोषणा ने मेरे माता-पिता को बहुत प्रभावित किया।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

आओ याद करें:

HBSE 6th Class Social Science अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया प्रश्न 1.
मौर्य सम्राज्य में विभिन्न काम-धंधों में लगे हुए लोगों की सूची बनाएँ।
उत्तर:
मौर्य साम्राज्य में निम्नलिखित व्यवसायी और उद्यमी लोग थे:
1. लेखक
2. शिल्पी
3. चित्रकार
4. श्रमिक
5. राजगीर
6. किसान,
7. पशुपालक
8. शिकारी
9. आभूषणकार
10. धम्म महामात्य
11. जासूस
12. जुलाहे आदि।

अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों को भरो:
(क) जहाँ पर सम्राटों का सीधा शासन था वहाँ अधिकारी ……………. वसूलते थे।
(ख) राजकुमारों को अक्सर प्रांतों में ……………. के रूप में भेजा जाता था।
(ग) मौर्य शासक आवागमन के लिए महत्त्वपूर्ण ……………. और ……………. पर नियंत्रण रखने का प्रयास करते थे।
(घ) प्रदेशों में रहने वाले लोग मौर्य अधिकारियों को ……………. दिया करते थे।
उत्तर:
(क) कर
(ख) राज्यपाल
(ग) मार्गों, नदियों
(घ) नजराना।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

प्रश्न 3.
बताओ कि निम्नलिखित वाक्य सही हैं या गलत:
(क) उज्जैन उत्तर-पश्चिम की तरफ आवागमन के मार्ग पर था।
(ख) आधुनिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इलाके मौर्य साम्राज्य के अंदर थे।
(ग) चन्द्रगुप्त के विचार अर्थशास्त्र में लिखे गए हैं।
(घ) कलिंग बंगाल का प्राचीन नाम था।
(ङ) अशोक के ज्यादातर अभिलेख ब्राह्मी लिपि में हैं।
उत्तर:
(क) गलत
(ख) सही
(ग) सही
(घ) गलत
(ङ) सही

आओ चर्चा करें:

प्रश्न 4.
उन समस्याओं की सूची बनाएँ जिसका समाधान अशोक धर्म द्वारा करना चाहता था।
उत्तर:
(i) धार्मिक मतभेद
(ii) पशु बलि
(iii) अनुष्ठान और कर्मकाण्डजनित समस्या
(iv) हिंसा
(v) अनुदारता और
(vi) दुर्व्यवहार की समस्या।

प्रश्न 5.
धम्म के प्रचार के लिए अशोक ने किन साधनों का प्रयोग किया?
उत्तर:
(i) धम्म महामात्य की नियुक्ति
(ii) कई स्थानों पर शिलाओं और स्तंभों पर अपने संदेश खुदवाए.
(iii) अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्तंभों पर उत्कीर्ण संदेशों को पढ़कर जनता को सुनाएँ
(iv) विदेशों में धम्म प्रचारक और प्रतिनिधियों को भेजा।

प्रश्न 6.
तुम्हारे अनुसार दासों और नौकरों के साथ बुरा व्यवहार क्यों किया जाता होगा? क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि सम्राट के आदेशों से उनकी स्थिति में सुधार हुआ होगा? अपने जवाब के लिए कारण बताएँ।
उत्तर:
मेरे विचार से दासों को भरपेट भोजन नहीं दिया जाता होगा। उन्हें वस्त्र, आश्रय आदि भी सामान्य मनुष्य के पहनने, रहने योग्य नहीं दिए जाते होंगे। उनसे इच्छानुसार कार्य लिया जाता होगा। बीमार होने पर उनकी चिकित्सा व्यवस्था की ओर शायद ही ध्यान दिया जाता होगा। कमोवेश यही चीज सेवकों के साथ भी होती होगी। उन्हें सेवा का उचित पारिश्रमिक/वेतन नहीं दिया जाता होगा। उन्हें अपने परिवार और समाज में प्रचलित रीति-रिवाजों को सम्पन्न करने का समय नहीं दिया जाता होगा। उन्हें कार्यसमय में कटु बोल और धिकदंड (अपमान) का भागी बनाना पड़ता होगा। ऐसा व्यवहार दासों को राजनैतिक अधिकार न दिए जाने के कारण और वर्ण व्यवस्था के कारण किया जाता होगा।

सम्राट के आदेशों से उनकी स्थिति में अवश्य सुधार आया होगा क्योंकि:
(i) ये आदेश जीवों पर दया करने, सर्वधर्म समभाव की प्रेरणा देते हैं।

(ii) परस्पर मैत्री-भावना और एकात्मभाव से रहकर जीवन-यापन करने की जीवन-दिशा देते हैं।

(iii) आदेश अधिकारियों द्वारा जनता को पढ़कर सुनाए जाते थे। इस कारण भी जन-जागृति आई होगी और आम जनता ने अपने अधिकार को समझा होगा।

(iv) इन आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि लोग अपने दासों और नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार करें, शिला-स्तंभों में खुदवाने से अशोक के यह आदेश या राजाज्ञाएँ सार्वजनिक आधार प्राप्त थी, पीड़ित होने पर ये वादी को सम्राट के समक्ष अपनी फरियाद सुनाने का खुला आमंत्रण देते थे।

(v) ब्राहमणों और श्रमणों को दान देने के संदेश भी अशोक स्तंभ में उत्कीर्ण हैं। उल्लेखनीय है कि श्रमपूर्वक अर्जित धन या संपत्ति ही समाज के इस वर्ग को दान में जाती है। किसी को दान करने का विचार का उस मनुष्य में ही आएगा जो उदार मना होगा-निष्ठुर या निदय मन का व्यक्ति नहीं। जो दयावान है-वह व्यक्ति दास और सेवक ही नहीं बल्कि संसार के सभी जीवों का अस्तित्वअधिकार समझेगा और उन्हें यथोचित आदर एवं सेवाएँ प्रदान करेगा।

अशोक के आदेशों/ राजाज्ञाओं/ संदेशों उक्त में यह तथ्य छिपा हुआ है कि व्यक्ति सत्य, सहिष्णु, समभावी, शांत, निवर, परिश्रमी तथा सेवाभावी गुणों को धारण करे। इन गुणों के आने पर व्यक्ति में स्वतः ही विश्व-मानव का पवित्र व्यक्तित्व अभ्युदय लेता है। ऐसी मन:स्थिति में किसी को दास या सेवक समझने की भावना ही समाप्त हो जाएगी। इन संदेशों/राजाज्ञाओं ने जनता एवं अधिकारियों का हृदय परिवर्तन अवश्य किया होगा।

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आओ करके देखें:

प्रश्न 7.
रौशन को यह बताते हुए कि हमारे रुपयों पर शेर क्यों दिखाए गए हैं एक पैराग्राफ लिखो। कम से कम एक और चीज का नाम लें जिन पर इन्हीं शेरों के चित्र बने
उत्तर:
संभवतः
पराक्रम और वीरता का प्रतीक होने के कारण इन शेरों को लिया गया है। पराक्रम का अनुज पुरूषार्थ अर्थात मेहनत भी है। शेर जंगल का राजा है अत: यह राजमुद्रा का प्रतीक है। परिश्रम या पुरूषार्थ से कमाया गया धन ही कल्याणकारी कार्यों में खर्च होता है, जो व्यक्ति को अधिक पुरूषार्थ करने के लिए पुन: ऊर्जा प्रदान करता है तथा परिश्रमी व्यक्ति क्रमशः प्रगति करता जाता है।

इन शेरों के चित्र सारनाथ (वाराणसी) स्थित बौद्ध स्तूप के ऊपर गाड़े गए एक स्तंभलेख में हैं। वस्तुतः वहीं से इन चित्रों प्रतीकों को हमारे संविधान ने अंगीकार किया है। सरकारी कार्यालयों, दस्तावेजों, न्यायापालिका, राजस्व विभाग, पुलिस विभाग आदि में इन शेरों के प्रतीक को देखा जा सकता है।

प्रश्न 8.
अगर तुम्हारे पास अपना अभिलेख जारी करने की शक्ति होती तो तुम कौन-सी चार राजाज्ञाएँ देते?
उत्तर:
मेरी परिकल्पित राजाज्ञाएँ:
(i) अच्छे विचार और कर्म वही हैं जिनसे प्राणीमात्र (संपूर्ण जैव परिस्थितिकी) का कल्याण होता है।

(ii) आलस्य के स्थान पर चेष्टा बल, भीरूता के स्थान पर साहस/ विक्रम, षडयंत्र के स्थान पर सुनीति/रणनीति (युक्ति) प्रतीति के स्थान पर प्रमाण और विवाद के स्थान पर वार्ता करें-राजमार्ग स्वतः ही मिल जाएगा।

(iii) दूसरों का अनुकरण आत्महत्या है लेकिन अनुसरण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया (प्रेक्षण, निरीक्षण, प्रयोग एवं निष्कर्ष) है-अनुसरण करें-अनुकरण (नकल) नहीं।

(iv) मस्तिष्क चेतना का घर है-इसके परिसर और कक्षों को प्रतिदिन विचारों की विशुद्ध सामग्री देकर सुवासित, सुरम्य और स्वच्छ रखें। आत्मनिरीक्षण, विश्लेषण और सामान्यीकरण से सुंपुष्ट बोध को आसन दें और उसके प्रकाश में सर्व हितकारी कार्यों को संपन्न करें।

(v) बृहत्तर आकार के समाज की एक व्यवस्था शासन है जिसका उद्देश्य समाज की इकाई (व्यष्टि) को ध्यान में रखकर संपूर्ण समाज को परस्पर सौहार्द, समन्वय और एकात्मता के साथ जीवन व्यतीत करने का अवसर परिस्थितियाँ/दशाएँ प्रदत्त करने का है। इस अर्थ में “शासक” वस्तुतः “जन-शासित” है। जनता की सेवार्थ चुना गया है। “सभी में और सभी के साथ” ही शासक शब्द का गूढार्थ है।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

HBSE 6th Class History अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय रुपये में तीन शेरों के चित्र क्यों छापे गए हैं?
उत्तर:
भारत-सरकार द्वारा सारनाथ के स्तंभ में प्रकीर्ण इस प्रतीक को राजमुद्रा प्रतीक के रूप में अंगीकार दिया गया है। इसके विभिन्न सरकारी मंत्रालय, कार्यालयों, सभा-गृहों आदि के दस्तावेजों, आसनों, आवरणों आदि के ऊपर सज्जित देखा जा सकता है। त्याग की भावना से परिपूर्ण अशोक स्तंभ को सम्मान देने तथा इन चित्रों को गूढार्थ रहने से इस चित्र को स्वीकार किया गया।

प्रश्न 2.
“शेर” एक वन्य पशु किस अन्तर्जात गुण का प्रतीक है?
उत्तर:
पराक्रम, साहस और ऊर्जा का।

प्रश्न 3.
क्या सारनाथ के स्तंभ में भी तीन शेर दिखाए गए हैं?
उत्तर:
नहीं, इसमें एक शेर का मुख पीछे की ओर है जिसको मुद्रण में नहीं दिखाया जा सका है। इस प्रकार चार शेर हैं जो चतुर्दिक पराक्रम, आभा (प्रभाव) और सतर्कता गुणों (अन्तर्जात) के प्रतीक हैं।

प्रश्न 4.
नोटों में शेरों के साथ और क्या-क्या हैं?
उत्तर:
स्तंभ में शीर्षफलक के ऊपर ये शेर हैं। शीर्ष फलक के बीच में धर्मचक्र (24 तीलियाँ अथवा मानव व्यक्तित्व के अपेक्षित गुण), बाँई ओर घोड़ा तथा दाई ओर बैल है। शीर्षफलक के आधार पर “सत्यमेव जयते” उत्कीर्ण है। इस सुभाषित (सुकथन) को मुण्डकोपनिषद् से उद्धृत किया गया है।

प्रश्न 5.
अशोक स्तंभ के ऊपर शेर कैसे बनाए गए हैं?
उत्तर:
अशोक स्तंभ पत्थर का बहुत बड़ा खम्भा है। इसके ठीक उपर पत्थरों में खुदवाकर (उत्कीर्ण करके) शेरों के चित्र बनाए गए हैं।

प्रश्न 6.
स्तंभों के माध्यम से अशोक क्या कहना चाहता था?
उत्तर:
वह शासक था अतः धर्मराज्य (लोकहितकारी नियमों वाले शासकीय नियम एवं व्यवस्था) की स्थापना करना चाहता था। एक ऐसा धर्मराज्य जिसमें शासक के अपनी प्रजा के साथ पिता-पुत्र जैसे भावात्मक संबंध बन सकें और द्वेष, दुर्भावना, ईर्ष्या, हिंसा आदि का राज्य से सर्वथा उन्मूलन किया जा सके।

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प्रश्न 7.
‘गण’ के पश्चात् ‘साम्राग्य’ व्यवस्था क्या एक क्रमिक विकास है?
उत्तर:
हाँ. “गण” में सामूहिक शासन व्यवस्था थी। कालांतर में स्वाभाविक है कि नियमों का उल्लघन होने से इनमें संघर्ष हुआ होगा और शासकों का मन व्यष्टि राजवंश स्थापित करने का बना होगा। इस दिशा में उनका चिन्तन ही “साम्राज्य व्यवस्था” या “आनुवांशिक राजवंश व्यवस्था” को अस्तित्व में लाया होगा।

प्रश्न 8.
अशोक के राज्य को साम्राज्य क्यों कहा जाता.
उत्तर:
साम्राज्य “गण” की तुलना में काफी अधिक विस्तारवाला होता है। साम्राज्य में एक ही राजवंश कई पीढ़ियों तक शासन करता है। शासन प्रणाली राजतंत्र की होती है।

प्रश्न 9.
राजवंश से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब एक ही परिवार की कई पीढ़ियाँ क्रमशः राजा के पद को विभूषित करती हैं तो ऐसे परिवार को राजवंश कहा जाता है। उदाहरणार्थ-मौर्य वंश, गुलाम वंशा

प्रश्न 10.
मौर्य साम्राज्य के प्रमुख शासकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार एवं अशोक।

प्रश्न 11.
अशोक के स्तंभ लेख कहाँ-कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर:
(i) सन्मति (कर्नाटक).
(ii) मसीद (तमिलनाडु),
(iii) ब्रहमगिरि (महाराष्ट्र).
(iv) ईरावदी (आंध्र-प्रदेश),
(v) साँची (मध्य प्रदेश).
(vi) रूपनाथ (छत्तीसगढ़).
(vii) बहापुर (दिल्ली),
(viii) मेरठ,
(ix) रामपुरवा (नेपाल), लौरिया, नंदनगढ़ (बिहार) सोपारा (महाराष्ट्र) तथा गिरनार (गुजरात)।

प्रश्न 12.
मौर्यकाल के प्रमुख नगरों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) उज्जैन
(ii) तक्षशिला
(iii) पाटलिपुत्र
(iv) कलिंग।

प्रश्न 13.
उज्जैन कहाँ था?
उत्तर:
उत्तर से दक्षिण की ओर जाने के मार्ग पर आधुनिक मध्य प्रदेश में।

प्रश्न 14.
राज्यों से साम्राज्य किस अर्थ में भिन्न थे?
उत्तर:
(i) राज्यों की तुलना में साम्राज्यों का क्षेत्र विस्तृत था।
(ii) साम्राज्य में राज्यों की तुलना में अधिक बड़ी सेना आवश्यक थी।
(iii) संसाधनों को एकत्रित करने के लिए उन्हें कर वसूली करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों की बड़ी संख्या में नियुक्ति करनी पड़ती थी।

प्रश्न 15.
साम्राज्य का शासन कैसे चलाया जाता था?
उत्तर:
साम्राज्य दो भागों में बंटा था – (i) केन्द्र और (ii) प्रांत। केन्द्र में राजा था और अपनी सहायता के लिए विविध अधिकारियों, कर्मचारियों, सैनिकों, गुप्तचरों आदि की नियुक्ति करता था। प्रांत में राज्यपाल शाही खानदान के व्यक्ति बनाए जाते थे। तात्पर्य यह है कि शक्तियों का विकेन्द्रीकरण किया गया था।

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प्रश्न 16.
मौर्यों की केन्द्रीय और प्रांतीय राजधानियाँ कहाँ थी?
उत्तर:
केन्द्रीय राजधानी पाटलिपुत्र में और प्रांतीय राजधानी तक्षशिला एवं उज्जैन में।

प्रश्न 17.
क्या प्रांतों पर केन्द्र का नियंत्रण भी रहता था?
उत्तर:
हाँ। राजा के गुप्तचर एवं अन्य अधिकारी प्रांतों में होने वाली गतिविधियों की सूचना राजा को देते रहते थे।

प्रश्न 18.
प्रांतों का शासन किस आधार पर चलाया जाता था?
उत्तर:
प्रांतों में प्रचलित रीति-रिवाज और सामाजिक नियमों के अनुसार।

प्रश्न 19.
केन्द्र और राज्यों के बीच मौर्य शासकों का नियंत्रण किस पर रहता था?
उत्तर:
सड़कों (मागों) और नदियों पर। यहाँ से माल की डुलाई व्यापारिक प्रयोजनों से की जाती थी।

प्रश्न 20.
कर और नजराने में क्या अन्तर है?
उत्तर:
कर की वसूली एक निश्चित अवधि में निरंतर की जाती थी लेकिन नजराना अधीनस्थ राज्य के राजा आदि से किसी भी समय मिल सकता था। कर राशि मुद्रा या वस्तु रूप में होती थी जबकि नजराना स्वेच्छा से विविध वस्तुओं के रूप में उपहारस्वरूप दिया जाता था।

प्रश्न 21.
क्या मौर्यों का वन-क्षेत्रों पर भी नियंत्रण था?
उत्तर:
हाँ। क्योंकि अर्थशास्त्र के विवरण अनुसार मौर्य शासक वनों में रहने वाले लोगों से हाथी, ईमारती लकड़ी, शहद और मोम. को कर के रूप में लेते थे।

प्रश्न 22.
चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में मैगस्थनीज को राजदूत बनाकर किसने भेजा था?
उत्तर:
सेल्युकस निकेटर ने।

प्रश्न 23.
मैगस्थानीज का नाम इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:
मैगस्थनीज ने मौर्य शासन काल का संपूर्ण विवरणअपनी एक पुस्तक ‘इण्डिका’ में संकलित किया है।

प्रश्न 24.
आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि राजा का भोजन चखने वाला एक सेवक भी रहा होगा?
उत्तर:
मैगस्थनीज के विवरण से पता चलता है कि राजा सार्वजनिक स्थानों पर विशेष अंगरक्षकों, तथा प्रशिक्षित लोगों के साथ पालकी में जाता था। वह स्वभाव से कायर किस्म का एवं शंकाल व्यक्ति था। शत्रु भोजन में किसी युक्ति से विष न मिला दें अत: विष प्रभाव को परीक्षा के लिए वह किसी सेवक से उसे चखवाता था।

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प्रश्न 25.
अशोक मौर्य वंश का सर्वाधिक लोकप्रिय शासक कैसे बना?
उत्तर:
वह अपने राजवंश के अन्य राजाओं से भिन्न मनोवृत्ति वाला शासक था। वह शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, समता और न्याय को आदर्श शासन का सार समझता था। प्रजा के अन्तर्जात गुणों को उज्ज्वल बनाने के लिए उसने पत्थर की ऊंची-ऊँची लाटों (स्तंभों) पर अपनी राजाज्ञाएँ उत्कीर्ण कराई कि जीवों पर दया करो, अपने लिए जो प्रतिकूल हो उसको दूसरे के लिए न करो। जन-कल्याणकारी ‘विविध कार्य करने से ही वह जन या लोकप्रिय शासक बना। उसको “प्रजानाम् प्रियदर्शी” उपनाम भी दिया गया है।

प्रश्न 26.
अशोक अपनी भावी पीड़ी से युद्ध के स्थान पर धर्म (धम्म) के विस्तार की दिशा में विचार करने की अपेक्षा क्यों रखता होगा?
उत्तर:
युद्ध, आक्रामक मानसिकता का प्रतीक है। ऐसी आक्रामकता अज्ञान के अति-अंधकार में जन्म लेती है और दिन के प्रकाश में क्षत-विक्षत शरीरों, घायलों की चीख-पुकार, आश्रितों का मान्तक विलाप आदि के दर्शन कराती है। इसके विपरीत धर्म जीवन को किसी नियमित क्रम, उपक्रम, दर्शन, प्रेक्षण, चिन्तन और अन्ततः अभिव्यक्ति (वाचिक एवं व्यावहारिक) के साथ जोड़ता है। अतः यह सृजनकारी और लोकहितकारी है। प्रत्येक बुजुर्ग अपनी भावी पीढ़ी के अपने से अधिक विकासोन्मुख रहने की भावना रखता है। ऐसी ही कुछ भावना अशोक के कलिंग युद्ध के उपरांत के स्तंभ-लेख से परिलक्षित होती है।

प्रश्न 27.
धर्म क्या है? अशोक का धम्म क्या था?
उत्तर:
धर्म या धम्म शालीन, संयमित एवं नियमित मानव जीवन की एक कार्य-विधि है। अशोक का धम्म बौद्ध था अतः अहिंसा, दया, प्रेम, मानवता एवं त्याग के गुणों से परिपूरित और प्रेरणादाई था।

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प्रश्न 28.
अशोक के कल्पित धर्म-राज्य का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
अशोक ऐसा धम्म राज्य चाहता था जिसमें परिवार से लेकर देश तक समस्त नागरिक सभ्यता और शिष्टाचार का पालन करें। संतान अपने माता-पिता की आज्ञाकारिणी हो, पड़ोसी, सेवक, दास किसी को मानसिक ठेस या अपमान की अनुभूति न हो, सभी लोग सौहार्दमय यूथचारिता से एकात्मवादी बनें तथा उनमें राष्ट्रप्रेम परिपूरित रहे और किसी तरह के कलह, क्लेश, द्वंद, दुःख, प्रपीड़न, उत्पीड़न, दमन जैसे कुकृत्य पूर्णत: निःशेष हो जाएँ।

प्रश्न 29.
स्तंभ लेखों को पढ़वाने के लिए कर्मचारी क्यों नियुक्त किए गए होंगे?
उत्तर:
आम-जनवा साक्षर नहीं होती अत: लिखी हुई चीजों को पढ़ नहीं पाती है। इसके लिए उन्हें ऐसे कर्मचारी स्तंभ-स्थल पर एकत्रित करके बताते थे कि अशोक का धम्म राज्य क्या है? और वह अपनी प्रिय जनता के हित में क्या सोचता है।? वस्तुतः यह प्रभावशाली अनुप्रेरणा कला थी जिसने अशोक को ‘प्रजानां प्रियदी’ बनाया।

प्रश्न 30.
‘धर्म महामात्य’ पद क्या है? अशोक ने एक नए पद का सृजन क्यों किया होगा?
उत्तर:
“अमात्य” संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है-मन्त्री। महामात्य का अर्थ हुआ-महामंत्री। स्पष्ट है कि अशोक ने एक मंत्रालय राज्य-धर्म का भी स्थापित करवाया था। यह मंत्रालय तथा इसके कई विभाग एवं अनुभाग भारत तथा विदेशों तक विस्तृत थे। धर्म प्रचार ही इसका मुख्य कार्य था।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
परिस्थितियों की कौन सी पृष्ठभूमि में अशोक के “धम्म” का जन्म हुआ? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सिंहासन पर बैठने के पश्चात् अशोक ने देखा कि राज्य के प्रत्येक परिवार अन्तर्कलहओं और आपसी झगड़ों में लिप्त हैं। दासों और नौकरों के साथ बहुत ही अभद्र व्यवहार किया जा रहा है तथा पड़ोसी आपस में छोटी-छोटी बातों पर झगड़ रहे हैं। धर्मों के मामले में समाज के टुकड़े हो रहे हैं। इस दृश्यावली का सर्वेक्षण, आँकडा संकलन आदि करके ही अशोक ने धम्म प्रचार का संकल्प लिया होगा। इस पृष्ठभूमि की अशोक कई स्तंभलेख संपुष्टि करते हैं। वस्तुतः अशोक के “धम्म” की जन्मदाता परिस्थितियाँ यही थी।

प्रश्न 2.
कलिंग युद्ध के पश्चात् अशोक के कार्य क्या थे?
उत्तर:
(i) सर्वजनहितकारी धम्म की संकल्पना को सिद्धांत रूप में ग्रहण
(ii) धम्म को राजसंरक्षण
(iii) धम्म प्रचार
(iv) राजमार्ग, कुँओं, विहारों आदि का निर्माण
(v) मानव स्वास्थ्य की दिशा में कार्य यथा-मनुष्य और जीव-जंतुओं (पेड़-पौधे और पशु-पक्षी) के लिए चिकित्सालयों का निर्माण एवं उचित चिकित्सा व्यवस्था। चूँकि ये सभी कार्य श्रेष्ठ हैं, सभी लोगों के लिए हितकर हैं इसीलिए अशोक को “महान” संज्ञा से विभूषित किया जाता है। उसके धम्म अथवा धारणा का ही यह व्यावहारिक एवं सर्वदर्शी रूप है।

प्रश्न 3.
अशोक का अपनी प्रजा को क्या संदेश था?
उत्तर:
संतान के जन्म, विवाह, रूग्णता या किसी यात्रा पर जाने के समय लोग तरह-तरह के अनुष्ठान करते हैं। ये अनुष्ठान उपयोगी नहीं हैं। यदि इनके स्थान पर लोग अपने दासों और सेवकों के साथ मृदु व्यवहार करते, अपने से वरिष्ठ जनों को सम्मान देते, सभी जीवों पर दया करते, ब्राह्मण और भिक्षुओं को उदारतापूर्वक दान देते, सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता का भाव रखते तथा दूसरों के धर्मों का भी आदर करते तो निश्चित ही इन्हें श्रेष्ठ अनुष्ठान कहा जाता।

प्रश्न 4.
भारतीय मुद्रा में धर्म-चक्र सहित तीन शेरों और महात्मा गाँधी का चित्र नागरिकों से क्या अपेक्षा रखता है?
उत्तर:
सत्यमेव जयते:
‘सत्य ही विजयी होता है।’ के अंकन सहित धर्म-चक्र की 24 तीलियाँ मानवीय 24 गुणों की परिचायक हैं और तीन शेर (मूलतः चार है) पराक्रम, पुरुषार्थ तथा धैर्य के प्रतीक हैं। शीर्षफलक पर बाँई ओर घोड़ा और दाई ओर बैल क्रमशः ऊर्जा और परिश्रम के प्रतीक हैं। मुद्रा किसी न किसी संव्यवहार के अन्तर्गत ही विनिमय का माध्यम है अत: नागरिक को इन गुणों का निरंतर ध्यान दिलाती है।

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प्रश्न 5.
सिकंदर ने भारत पर कब आक्रमण किया?
उत्तर:
सिकंदर यूनान का शासक था। वह बहुत महत्त्वाकांक्षी था। वह विश्व-विजेता का संकल्प लेकर निरंतर युद्ध कर रहा था। उसने सबसे पहले ईरान के सम्राट को हराकर उसका साम्राज्य अपने अधिकार में ले लिया। उसने भारत पर लगभग 2326 वर्ष पूर्व आक्रमण किया था। उसने भारत में पंजाब और कुछ अन्य प्राप्तों को भी जीत लिया था, परन्तु मौर्य शासक की धाक सुनकर उसने – आगे बढ़ना छोड़ दिया और वापस लौट पड़ा। लगभग 2323 वर्ष पूर्व उसकी मृत्यु हुई।

प्रश्न 6.
पंजाब प्रांत को अधिकार में लेने की चन्द्रगुप्त मौर्य की युक्ति का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चन्द्रगुप्त मौर्य के राजा बनने के समय पंजाब पर सिकंदर का सेनापति सेल्युकस निकेटर राज्यपाल की हैसियत से शासक था। चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्युकस के विरूद्ध युद्ध छेड़ दिया और भीषण संग्राम के पश्चात् उसने सेल्युकस को पराजित कर दिया। संधि में सेल्युकस ने चन्द्रगुप्त को अपनी पुत्री ब्याह कर दामाद बना लिया था। इस तरह आधुनिक अफगानिस्तान वाला क्षेत्र मौर्य साम्राज्य में मिला लिया गया।

प्रश्न 7.
सर्वाधिक साम्राज्य विस्तार करनेवाले मौर्य शासक का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अशोक ही मौर्य साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार करने वाला शासक था। उसने अपने शासन काल में कलिंग राज्य को जीतकर साम्राज्य का सीमा विस्तार किया। उसके पितामह चन्द्रगुप्त मौर्य ने मगध के साथ ही भारत के एक विशाल भू-भाग तक साम्राज्य विस्तार किया था। उसके पिता बिन्दुसार ने इस साम्राज्य की सीमा- दक्षिण में मैसूर तक पहुँचाई थी। अशोक के शासन काल में कलिंग (उड़ीसा) तक पुनः विस्तार होने से हम अशोक को ही सर्वाधिक साम्राज्य विस्तार करने वाला शासक या सर्वाधिक बड़े साम्राज्य का शासक कह सकते हैं।

प्रश्न 8.
मैगस्थनीज द्वारा वर्णित चन्द्रगुप्त मौर्य कालीन भारत की राजनैतिक, सामाजिक और आर्थिक दशा को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
मैगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में चन्द्रगुप्त के शासन काल की बातें संकलित की हैं। इस पुस्तक के अनुसार:
(i) चन्द्रगुप्त:
एक योग्य और शक्तिशाली शासक था। उसके पास विशाल सेना थी और वैभवपूर्ण जीवन व्यतीत करता था। स्तंभ लेखों के अनुसार प्रजा हित में कार्य करने को उसने अपना दायित्व स्वीकार किया था।

(ii) राजधानी:
चन्द्रगुप्त की राजधानी पाटलिपुत्र थी। यह एक सुंदर नगर था जिसके चारों ओर मजबूत दीवारें बनी हुई थी। राजमहल लकड़ी से निर्मित था और नक्काशीदार पत्थरों से अलंकृत किया गया था।

(iii) बरबार:
चन्द्रगुप्त के दरबार के बाहर फाटक में एक घंटी लटकी रहती थी और पीड़ित व्यक्ति (फरियादी) किसी भी समय उसको खींचकर शासक से न्याय की मांग कर सकता था। शासक इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरतता था।

(iv) आम-जनता और उद्योग-धंधे:
प्रजा का अधिसंख्यक वर्ग कृषक था। वे अपनी भूमि या राजा की भूमि पर खेती करते थे। नगरों में शिल्पी, लेखक, बढ़ई, लोहार और कम्मकार (कर्मकार) आदि दस्तकार एवं श्रमजीवी रहते थे। व्यापार की दशा उन्नत थी। समाज का एक बहुत बड़ा भाग सेना में भर्ती था क्योंकि मौर्य शासकों की विशाल सेना थी। सर्वत्र सुख-शांति थी, अपराध बहुत कम होते थे क्योंकि दण्ड-व्यवस्था बहुत ही कठोर थी।

प्रश्न 9.
अशोक ने प्रजा की भलाई के लिए कौन-2 से कार्य किए?
उत्तर:
अशोक को इतिहास में एक महान सम्राट कहा गया है। वह प्रजा को अपनी संतान जैसा मानता था। एक अच्छे पिता की तरह उसने प्रजा की भलाई के निम्नलिखित कार्य किए:
(क) रोगी मनुष्यों और पशुओं के लिए औषधालय और अस्पताल बनवाए।
(ख) यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखा, लंबी-लंबी सड़कों का निर्माण कराया तथा उनके दोनों ओर छायादार वृक्ष लगवाए।’ . (ग) मार्ग में कुएँ. बाबड़ी और जलाशयों का निर्माण कराया।
(घ) स्थान-स्थान पर धर्मशालाएँ, अतिथि-गृह, विश्राम-गृह आदि का निर्माण कराया।
(ङ) अहिंसा और धर्म का प्रचार करने के लिए धर्म महामात्यों की नियुक्ति की।
(च) भिक्षु और भिक्षुणियों के रहने हेतु संघाराम और विहार बनवाए।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 8 अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

प्रश्न 10.
अशोक की शासन व्यवस्था में अधिकारी तन्त्र को कौन-कौन से कार्य सौंपे गए थे?
उत्तर:
अशोक के शासन काल में अधिकारीतंत्र/वर्ग को निम्नलिखित कार्य सौंपे गए थे:
(क) कर इकट्ठा करना: कुछ अधिकारी गाँव-गाँव घूमकर कर-संग्रह करते थे। वे कर का पूरा हिसाब-किताब रखते थे।

(ख) न्याय करना: इसके लिए न्यायाधीशों की नियक्ति की गई थी। मामले की गहरी छान-बौन करवाकर ही वे फैसला सुनाते थे। अशोक के काल में दण्ड व्यवस्था अत्यधिक कठोर नहीं

(ग) लेखा रखना: पशुओं और लोगों की निश्चित समय पर गणना करने के लिए भी कुछ अधिकारी नियुक्त किए गए थे। इस विभाग की शाखायें गाँव-गाँव तक फैली थी।

(घ) धर्म प्रचार करना: एक मंत्रालय की स्थापना और उसके अधिपति धम्म महामात्य की नियुक्ति करना धर्म-प्रचारको की बड़ी संख्या में नियुक्ति की गई थी। वे राज्य में घूम-घूम कर लोगों को धर्म का सार समझाते थे। वे ही ग्रामीणों एवं अन्य नागरिकों की शिकायतें सुनकर उनका उपयुक्त फैसला भी करते थे। अधिकारी प्रजा में एकता, आत्मीयता, एकात्मता और देश-प्रेम जगाने की दिशा में चेष्टा करते थे।

अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. भारतीय नोटों में गाँधी जी का मुस्कराता चित्र क्यों दिया गया होगा?: राष्ट्र नागरिकों को कर्मवीर और संकल्प वीर राष्ट्रपिता की स्मृति कराने हेतु।
2. भारतीय मुद्रा में अंगीकार किया गया तीन सिहों का चित्र कहाँ से लिया गया है?: गौतम बौद्ध के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ (इलाहाबाद) के स्तूप से।
3. सिहों का मुद्रांकन किस वस्तु पर किया गया है?: एक ऊँचे पाषाण स्तंभ पर उत्कीर्ण है।
4. मौर्य वंश की नींव किसने रखीं?: चन्द्रगुप्त मौर्य ने।
5. चन्द्रगुप्त का संरक्षक, प्रधानमंत्री एवं गुरू कौन था?: विष्णुगुप्त। इन्हें गुरूकुल के प्राचार्य-चणक का पुत्र होने के कारण चाणक्य कहा गया है।
6. चाणक्य रचित पुस्तक का नाम: अर्थशास्त्र।
7. मौर्य वंश के प्रभावशाली एवं प्रतापी राजा कौन थे?: चन्द्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार, अशोक-आनुवांशिक पद।
8. तक्षशिला राजधानी क्यों प्रसिद्ध थी?: पश्मिोत्तर भारत और मध्य एशिया का संपर्क स्थल।
9. ग्रामीणों और पशुपालकों की बस्तियाँ कहाँ थी?: मध्य भारत में।
10. मौर्यकाल के प्रमुख अधिकारी: कर-समहर्ता, राजदूत गुप्तचर, राज परिवार के सदस्य, राज्यपाल।
11. पाटलिपुत्र नगर की क्या विशेषताएँ हैं?: मोटी दीवारों वाली चारदीवारी, 570 गुंबद और 64 फाटक, लकड़ी और कच्ची इंटों के घर, पत्थर की नक्काशीवाला काष्ठ निर्मित राजमहल तथा उद्यान एवं उपवन।
12. युद्ध त्याग की प्रेरणा क्या थी?: राज्य को युद्ध और जन-संहार से जीतने की बजाए धम्म से मानव हृदय को जीतना अधिक श्रेयस्कर है।
13. धम्म क्या है?: संस्कृत शब्द धर्म का प्राकृत भाषा में पर्याय।
14. अशोक के संदेश कैसे प्रसारित हुए?: इन्हें चट्टानों और स्तंभों में उत्कीर्ण कराया गया।
15. अशोक ने कौन-कौन से देशों में बौद्ध धर्म का प्रचार कराया?: सीरिया, मिन, यूनान और श्रीलंका।
16. अशोक क्यों चाहता था कि कर्मकांडों पर आस्था न रखें बल्कि जीवों पर दया करें?: वह बौद्ध धर्म का अनुयायी था और इसमें अहिंसा तथा प्रेम पर बल दिया गया है।
17. अन्य धर्मों के बारे में अशोक का क्या विचार था? सहिष्णुता और उनके अच्छे अंशों को समझने की चेष्टा।
18. ब्राह्मी लिपि से किन-किन लिपियों का उद्भव हुआ है?: देवनागरी, बंगाली, मलयालम् और तमिल।
19. चीन की दीवार कितनी लंबी है?: 6400 किमी.

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कल्पना करो:

अगर तुम्हारे पास जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा हो तो तुम उसमें कौन-सी फसल उगाओगी। बीज कहाँ से मिलेंगे? और तुम उन्हें कैसे बोओगी? अपने पौधों की देखभाल तुम कैसे करोगी? और कैसे यह समझोगी कि अब फ़सल काटने लायक हो गई है?
उत्तर:
संकेत –
छात्र सबसे पहले यह देखें कि वे कौन-से क्षेत्र में निवास करते हैं। वहाँ की जलवायु, तापमान, ऋतु-परिवर्तन प्रभाव आदि को झेलने में सक्षम या अनुकूलन सामर्थ्य रखने वाली फसलें कौन सी हैं? कृषि विज्ञान से हमें यह जानकारी प्राप्त होगी। आप दिल्ली में हैं तो मुखजन के साथ पूसा रोड स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान में जाएँ तथा वहाँ के संबंधित प्राधिकारी से अपनी जिज्ञासाएँ शांत करवाएँ। टेलीफोन डायरेक्टरी के हरेपन्ने प्राधिकारियों के विशेष फोन नम्बर रखते हैं। इसलिए व्यष्टि संपर्क साध कर भी अपनी जिज्ञासा का शमन कराया जा सकता है। इस जानकारी के पश्चात् प्रयोग करें-अपने पिछवाड़े बगीचे में/पार्क में अनुमति लेकर विद्यालय प्रांगण की क्यारियों में। उदाहरणार्थ-रबी की फसलें नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह में बोई जाती हैं तथा मई माह में काटी जाती हैं। खरीफ की फसलें (मोटे अनाज की फसलें) मई माह के अंत में बोई और सितम्बर के अन्तिम सप्ताह में काटी जाती हैं।

रखवाली करने के लिए किलों के चारों ओर ऊंची दीवार, जाली-आवरण, रखवाले की नियुक्ति/प्रतिदिन स्वनिरीक्षण तथा कृषि विज्ञान में वर्णित साधनों का समय-समय पर अनुप्रयोग करते हुए पौधों के पोषण और वर्धन की दिशा में प्रयास।

आओ याद करें:

भोजन संग्रह से उत्पादन तक प्रश्न उत्तर HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
खेती करने वाले लोग एक ही स्थान पर लंबे समय तक क्यों रहते थे?
उत्तर:
फसलों को उगाने की एक निश्चित ऋतु होती है। ऋतु आधार पर फसलों को खरीफ, जायद और रबी की फसल ऋतु में बाँटा गया है। बागवानी के वृक्ष यथा-सेब, आडू, आम, अमरूद, अनार आदि को उगाने के लिए कई वर्ष तक केवल परिश्रम करना पड़ता है और फिर लगातार प्रतिवर्ष, छ: माह, चार माह आदि के क्रम में बीसियों वर्ष तक फल देते रहते हैं। इन्हीं कारणों से फसल उगाने वाले लोगों या कृषकों को व्यवस्थित जीवन जीना पड़ता है। अब वे इधर-उधर घूम नहीं सकते थे।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 3 भोजन : संग्रह से उत्पादन तक

bhojan sangrah se utpadan tak HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 2.
एन.सी.ई.आर.टी.की पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 25 की तालिका को देखो। नुओ अगर चावल खाना चाहती है, तो उसे किन स्थानों पर जाना चाहिए।
उत्तर:
उत्तर प्रदेश में स्थित महागड़ नामक स्थानों में से किसी एक में।

HBSE 6th Class Social Science भोजन संग्रह से उत्पादन तक प्रश्न उत्तर प्रश्न 3.
पुरातत्त्वविद् ऐसा क्यों मानते हैं कि मेहरगढ़ के लोग पहले केवल शिकारी थे, और बाद में उनके लिए पशुपालन ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो गया?
उत्तर:
पुरातत्व स्थलों में से एक स्थल मेहरगढ़ वर्तमान ।पाकिस्तान में पड़ता है। यह बोलन दर के पास है। तीन स्तरों में प्राप्त सामग्री में पहले स्तर पर जंगली पशुओं (हिरन और सूअर) – की हड्डियाँ पाई गई हैं और बाद में भेड़ और बकरी की हड्डियाँ पाई गई हैं। इससे पता लगता है कि आदिमानव ने सबसे पहले शिकार करके पेट भरा होगा और बाद में पशुपालक बना होगा। खोदते समय सबसे नीचे जो चीजें प्राप्त होती थीं उन्हें पुरा-पाषाण काल की चीजें माना गया और क्रमशः ऊपरी पत्तों की चीजें अनुवर्ती समय की मानी गईं।

प्रश्न 4.
सही या गलत बताओ।
(अ) हल्लूर में ज्वार-बाजरा मिला है।
(ब) बुर्जाहोम में लोग आयताकार घरों में रहते थे।
(स) चिरौंद कश्मीर का एक पुरास्थल है।
(द) जेडाइट, जो दाओजली हेडिंग में मिला है.चीन से लाया गया होगा।
उत्तर:
(अ) सत्य
(ब) असत्य
(स) असत्य
(द) सत्य

आओ चर्चा करें:

प्रश्न 5.
कृषकों-पशुपालकों का जीवन शिकारी-खाद्य संग्राहकों के जीवन से कितना भिन्न था, तीन अंतर बताओ।
उत्तर:
कृषकों-पशुपालको और शिकारी-खाद्य संग्राहकों के जीवन में विभेद:
(i) आखेटक-संग्राहक जीवन भ्रमणशील था जबकि कृषक-पशुपालक जीवन व्यवस्थित था।
(ii) आखेटक-संग्राहक जीवन में मनुष्य असुरक्षा रहित, प्रकृति के प्रकोप से पीड़ित और छोटे-छोटे समुदायों में भटकता रहता था जबकि कृषक-पशुपालक जीवन के उपरांत परिवार, समुदाय, समाजश् संगठन आदि बनने लगे।
(iii) खेटकसंग्राहक जीवन व्यक्ति-जीवन को प्रत्येक आदिमानव सभी क्रियाओं के लिए स्वयं ही उत्तरदायी था। जबकि कृषक-पशुपालक जीवन में कार्यों का विकेन्द्रीकरण या विभाजन एवं जिम्मेदारियों का हस्तांतरण होने लगा था। व्यष्टि प्रबंधन की परिगति सामूहिक प्रबंधन में तब्दील हो गई थी।

प्रश्न 6.
एन.सी.आर.टी.की पाठ्यपुस्तक पृष्ठ संख्या 25 की तालिका में दिए गए जानवरों की एक सूची बनाओ और यह भी बताओ कि इनका उपयोग किस रूप में किया जाता था।
उत्तर:
चौपाए पशु: हाथी, घोड़ा, गाय, बैल, बकरी, कुत्ता, भैंस, ऊँट, भेड़। । हाथी, ऊँट तथा घोड़ा: भार-वहन और जुताई आदि करने, प्रामान ढोने में। गाय, बैल: बैलों का प्रयोग हल जोतने, अनाज की मैड़ाई करने, सामान ढोने में। गाय का उपयोग दूध प्राप्त करने, गोबर से खाद बनाने आदि में।
बकरी और भेड़: दूध दुहने और गोश्त खाने में।
भैंस: दुध-दुहने, हल जोतने और उनके चमड़े से कृषि एवं बर के बहुत से उपकरण एवं पैरों के जूते तैयार करने में।
कुत्ता: घर की रखवाली के लिए।

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आओ करके देखें:

प्रश्न 7.
तुम जिन अनाजों को खाते हो उनकी एक सूची बनाओ।
उत्तर:
खाद्यान्नों का वर्गीकरण:
(i) अनाज
(ii) दालें
(iii) तिलहन
(iv) मसाले
(v) मेवे आदि में किया जाता है।

(i) अनाज: अनाज भी दो प्रकार के होते हैं:

  • मोटे अनाज: मक्का, ज्वार, बाजरा, कोदो , जई, जौ आदि।
  • अन्य पौष्टिक अनाज: चावल, गेहूँ आदि।

(ii) दालें: मसूर, अरहर, उड़द, मूंग, मल्का , चना, कुल्पी आदि।
(iii) तिलहन: सरसों, तिल, मूंगफली, सूर्यमुखी, कमल-बीज, कुसुम्भा
(iv) मसाले: काली मिर्च, लौंग, इलायची, धनिया, सौंफ, जौरा, राई, दालचीनी, अदरक, लहसुन, हींग, अजवाइन आदि।
(v) मेवे: काजू, किशमिश, बादाम, छुहारे, खजूर, मुनक्का आदि।

प्रश्न 8.
प्रश्न 7 के उत्तर में लिखे अनाजों को क्या तुम स्वयं उगाते हो? अगर हाँ, तो एक तालिका बनाकर उसकी खेती की विभिन्न अवस्थाओं को दिखाओ। अगर नहीं, तो एक तालिका बनाकर दिखाओ कि ये अनाज किसान से लेकर तुम्हारे पास तक कैसे पहुँचे।
उत्तर:
प्रश्न 7 में वर्णित सभी खाद्यान्न एक ही स्थल पर उगाए जाने असंभव हैं क्योंकि उनके लिए उपयुक्त भूमि, तापमान, जल एवं वायु एक ही स्थान पर मिल पाना असंभव है। उदाहरणार्थ: इलायची को नीलगिरि की पहाड़ियों (इलायची की पहाड़ियों) में उगाया जाता है, जहाँ का तापमान, वर्षा, मिट्टी आदि उत्तर प्रदेश के उस मैदानी भाग से एकदम भिन्न है जहाँ गेहूँ और चावल उगाए जाते हैं। यहाँ पर हम केवल गेहूँ उगाने की अवस्थाओं वाली तालिका को नमूने के रूप में दे सकते हैं:
(अ) गेहूँ उगाने की अवस्थाएँ:
1. खेतों की जुताई कम से कम दो बार करना और उसमें कंपोस्ट खाद मिलाना।
2. तीसरी जुताई में छिटककर बीज बोना।
3. तीन सप्ताह पश्चात् पहली सिंचाई करना और पोटेशियम फास्फेट का छिड़काव करना।
4. अंकुरण पश्चात दो माह के भीतर निराई करना एवं खरपतवार को हटाना।
5. आवश्यकतानुसार फाल्गुन मास में वर्षा न होने पर दूसरी सिंचाई करना।
6. मई मास में फसल को काटना और माँड़ना।

(ब) खाद्यान्नों का किसानों से हम तक पहुँचना:
(i) गेहूँ की सहकारी समिति द्वारा किसानों के पास जाकर कोठारों से गेहूँ का (Procurement) करना और उन्हें निश्चित मुल्य का भुगतान करना। अथवा-किसान द्वारा स्वयं मंडी में जाकर भाव-ताव तय करना और आढ़ती को गेहूँ आदि बेचना।
(ii) ट्रक, ट्राली आदि में खाद्यान्न का बाजार पहुँचना।
(iii) बाजार से खाद्यान्नों की उन स्थानों के लिए डुलाई करना जहाँ उन्हें नहीं उगाया जाता है। ढुलाई के साधन रेल, सड़क परिवहन आदि हैं।

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HBSE 6th Class History भोजन : संग्रह से उत्पादन तक Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हमारा आधुनिक भोजन कहाँ से आता है?
उत्तर:
सुदूर गाँवों से जहाँ व्यवस्थित कृषि की जाती है और पशु पाले जाते हैं।

प्रश्न 2.
कृषक वर्ग से भिन्न द्वितीयक, ततीयक और चतुर्थक कार्य करने वाले लोगों को भोजन कैसे मिल पाता है?
उत्तर:
देश में एक व्यवस्थित विनियम दर रहने, मुद्रा में प्रत्येक उत्पादन इकाई की कीमत के पारदर्शी नियमन रहने और घरेलू बाजार तथा परिवहन व्यवस्था अत्यधिक त्वरित रहने के कारण। श्रम मूल्य में खाद्यान्नों को खरीदने की सामर्थ्य निहित रहती

प्रश्न 3.
खाद्यान्नों की एक फसल स्थानविशेष में ही क्यों होती है?
उत्तर:
तापमान, जलवायु, वर्षा, सूर्य के प्रकाश, वाय-विक्षोभ एवं दाब आदि के भिन्न-भिन्न रहने के कारण।

प्रश्न 4.
पहाड़ों की सूखी और उबड़-खाबड़ चोटियों के आस-पास केवल भेड़-बकरी ही अधिक क्यों पाए जाते हैं?
उत्तर:
ये पशु शरीर से कम भारी रहने और अत्यधिक फुर्तीले रहने के कारण ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों पर चढ़कर वहाँ की घास खाने में कुशल होते हैं। बड़े पशुओं के लिए अधिक घास अपेक्षित रहती है और वे ऊबड़-खाबड़ भूमि पर अपने भारी शरीर को लेकर चढ़ भी नहीं पाते हैं।

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प्रश्न 5.
कृषि करने से पहले आदिमानव ने क्या-क्या जानकारियाँ हासिल की?
उत्तर:
(i) स्थानविशेष पर उगने वाली खाद्यान्न-फसल का चयन
(ii) उगने और परिपक्व होने के समय (ऋतु)
(iii) जल, सूर्य के प्रकाश, मिट्टी, खाद आदि की जाँच
(iv) फसल बोने और काटने के तरीके
(v) मोड़ने और उनका भंडारण करने के तरीके।

प्रश्न 6.
आदिमानव ने सबसे पहले कौन से पशु को पाला?
उत्तर:
कुत्ते को।

प्रश्न 7.
कुत्ते के पश्चात् कौन-कौन से पशु पाले गए?
उत्तर:
भेड़, बकरी, गाय, बैल, भैंस आदि सभी पशु जो घास खाकर जीवित रहने वाले तथा स्वभाव से कुछ शांत थे।

प्रश्न 8.
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि सबसे पहले कुत्ते को ही क्यों पाला गया होगा?
उत्तर:
(i) शिकार करते समय कुत्तों के स्वभाव से परिचित होने के कारण उदाहरणार्थ-हिरन के गोश्त का टुकड़ा फेंकने के बाद कुत्तों का आक्रमण न करना।
(ii) कुत्ता का आदिमानव की गुफाओं के आस-पास अधिकतर मँडराते रहना और उनके साथ संगत बैठाने की चेष्टा में रहना।
(iii) कुत्तों की रखवाली करने की बुद्धि को देख एवं परख करके।
(iv) शिकार करते समय मग, बकरी आदि का पीछा करने में सहायक होने के कारण।

प्रश्न 9.
आविमानव ने जिन पौधों को उगाने की पहल की-वे अन्य जंगली वनस्पतियों से भिन्न कैसे थे?
उत्तर:
(i) सर्वथा स्वस्थ पौधों का चयन करने के कारण
(ii) अधिक अन्न उत्पादन में समर्थ पौधों की जाँच करके
(iii) मजबूत इंठल वाले और पवनों व बीजों का भार झेलने में सक्षम पौधों को चुनने में
(iv) इन फसलों के बीजों का संग्रह और सही ऋत में पुन: बयन (बुआई) करने से।

प्रश्न 10.
आदिमानव ने छोटे दाँत और सींग वाले पशु ही क्यों पाले होंगे?
उत्तर:
अपने बचाव के लिए मनुष्य हमेशा सजग रहता है। लंबी दाढ़ी और सींगों वाले पशु स्वभाव से निर्दय होंगे-इस बात को आदिमानव ने समझ लिया था। यही कारण है कि उसने अपने सहज नियंत्रण और सेवा-शुश्रूषा से प्रसन्न होने वाले पशुओं को ही पालना आरंभ किया।

प्रश्न 11.
पशु-पालन उद्योग कब से शुरू हुआ?
उत्तर:
आज से लगभग 12000 वर्ष पूर्व नव-पाषाण काल

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प्रश्न 12.
कृषि ने मनुष्य को व्यवस्थित जीवन कैसे दिया?
उत्तर:
कृषि के अंतर्गत खाद्यान्न-फसलों का उगाना सम्मिलित है। फसल उगाने के लिए उसको बोने, गुड़ाई करने, माँड़ने, काटने के साथ ही उचित रखवाली करने, खाद् देने, जुताई करने आदि की आवश्यकता निश्चित समय पर महसूस होती रहती है। किसी एक बात का ध्यान न रखने पर फसल खराब हो जाती है। शायद यही कारण था कि आदि-मानव ने घुमंतू जीवन का त्याग कर एक ही स्थान पर स्थाई तौर पर रहना आरंभ किया।

प्रश्न 13.
आविमानव अपनी फसलों का भंडारण कैसे करता था?
उत्तर:
ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार आदि ।मानव मिट्टी के बड़े-बड़े बर्तनों, टोकरियों (कोठारों) अथवा भूमि में गड्ढा खोदकर उसमें अनाज का भंडार करता था।

प्रश्न 14.
क्या आप यह समझते हैं कि आखेटक-संग्राहक जीवन व्यतीत करते समय भी आदिमानव को भाँडे-बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई होगी?
उत्तर:
नहीं। क्योंकि उसका आहार-क्रम अस्थाई किस्म का था। उसको आग जलाना नहीं आता था। अत: कच्चा माँस ही खाता था। वनस्पतियों को भी वह कच्चे रूप में ही ग्रहण करता था। यदि उसके पास बर्तन होते भी तो इधर-उधर भ्रमण करने में वे असुविधा ही उत्पन्न करते। असल में चलता-फिरता खान-पान रहने की वजह से उसके मन में बर्तनों के अभाव का विचार ही नहीं आया होगा।

प्रश्न 15.
पालतू पशुओं को खाद्य-भंडार क्यों कहा जा सकता है?
उत्तर:
पालतू पशुओं की वंश-वृद्धि प्राकृतिक व्यवस्था से स्वतः होती रहती है। उचित चारा, दाना, आश्रय की दशा में उनसे पर्याप्त मात्रा में अण्डे एवं माँस मिलता है एवं कई तरह के कृषि कार्यों में उनका प्रयोग किया जाता है। वस्तुत: पकाई जाने वाली वस्तुएँ देर तक रहने के बाद सड़ने लगती हैं, दुर्गध देती हैं लेकिन पशु-धन के भंडार में ऐसा कुछ नहीं होता। विलम्ब से काटने की दशा में इनसे अधिक माँस ही प्राप्त होता है। इसके अलावा गोबर आदि एकत्रित कराने में पशु-धन का भंडार एक द्वितीयक उत्पादक भूमिका भी निभाता है। इस आधार पर पशुधन एक तरह से खाद्य भंडार ही है।

प्रश्न 16.
पुरातत्वविद् यह निष्कर्ष कैसे लेते हैं कि अमुक स्थान पर आदि मानव ने कृषक और पशु पालक का जीवन व्यतीत किया होगा?
उत्तर:
(i) पेड़-पौधे की किस्में
(ii) बीज आदि के अवशेष (उदाहरणार्थ- जले हुए बीजों की पहचान)
(iii) पशुओं की हड्डियाँ (जिनसे उनके पालतू होने के प्रमाण मिलते हैं)।

प्रश्न 17.
आदि मानव कैसे घर बनाता था?
उत्तर:
प्राप्त प्रमाणों के आधार पर यह ज्ञात हुआ है कि बुर्जाहोम (कश्मीर) नामक पुरातत्व स्थल में भू-गुहा वाले घरों के अवशेष हैं। ये भूमि में गहरे खोदे गए गड्ढे हैं जिन्हें ऊपर से बासफूस से ढका जाता था और भूतल में बने इन घरों तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। इनके पार्श्व भाग में चूल्हे भी बने हैं।

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प्रश्न 18.
पुरातत्ववेत्ताओं ने औजारों के अवशेष देखकर क्या अनुमान लगाया होगा?
उत्तर:
उन्होंने देखा कि कृषक और पशुपालक की अवस्था में आने पर आदिमानव के औजारों में बहुत सी तब्दीलियाँ आ गई थीं। वे अब बेहतर तराशे हुए, नोक और धारदार, हड्डी या काष्ठ की मूठों वाले थे। इस आधार पर इस अवस्था के आदिमानव का जीवन-काल नवपाषाणकाल की अवधि में सम्मिलित किया गया।

प्रश्न 19.
नवपाषाणकाल के आदिमानव की किन विशेषताओं का बोध होता है?
उत्तर:
नवपाषाणकाल का आदिमानव:
(i) कृषि के औजार, गत्रुओं के रक्षा के अस्त्र-शस्त्र और भाँडे-बर्तन बनाने में कुशल था।
(ii) उसको इनका विविध तरह से उपयोग करना आता था।
(iii) वह वस्त्र भी पहनने लगा था (सूती कपड़े के टुकड़े प्रमाणित करते हैं)।
(iv) ललित कला यथा-चित्रकला की ओर भी रुचि लेने लगा था (मटका एवं अन्य बर्तनों पर की गई चित्रकारी)।

प्रश्न 20.
आदिमानव के समाज को जन-जाति की श्रेणी क्यों दी गई होगी?
उत्तर:
दो या तीन पीढ़ियों का एक बस्ती में मिल-जुल कर रहना। समाज की यह अवस्था प्रारंभिक है और राजनैतिक, प्रशासनिक व्यवस्थाओं से रहित है। संभवतः पुरातत्ववेत्ताओं ने उनके समाज को जन-जाति इसीलिए कहा होगा।

प्रश्न 21.
आदिमानव के बच्चे क्या काम करते थे?
उत्तर:
पेड़-पौधों की देख-रेख करना, इनको पशु-पक्षियों द्वारा होने वाली क्षति से बचाना तथा गाय, बकरी आदि को चराना व उनकी रखवाली करना।

प्रश्न 22.
इस काल की महिलाएँ क्या काम करती थीं?
उत्तर:
खेतों की निराई, गुड़ाई, बुआई, सिंचाई और कटाई करना, अनाज के कूटने और पीसने का काम भी करती थीं।

प्रश्न 23.
महिला और पुरुष मिल-जुलकर किन कार्यों को करते थे?
उत्तर:
भाँडे-बर्तन, औजार, यंत्र बनाने, टोकरियाँ बुनने, पशुओं को नहलाने-धुलाने, दुध-दुहने, झोपड़ी बनाने, उन्हें सजाने के आजीविका और जीवन-रक्षक कार्य तथा संगीत, गायन एवं नृत्य जैसे मनोरंजन/मनोविनोद मिल-जुलकर ही होते थे।

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प्रश्न 24.
नव पाषाणकाल के पुरुष क्या कार्य करते थे?
उत्तर:
पशुओं के झुंड की व्यवस्था एवं निरीक्षण तथा नए चरागाहों की खोज।

प्रश्न 25.
आदि मानव के प्रमुख व्यवसाय क्या थे?
उत्तर:
शिकार करना, भोजन इकट्ठा करना, खेती करना, पशुपालन और मछली मारना।

प्रश्न 26.
जन-जातियों की क्या विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
अपनी भिन्न-भाषा, संगीत, कहानी और चित्रकारी तथा चित्र परम्परा उनके देवी-देवता भी जनजाति क्रम में भिन्न-भिन्न थे।

प्रश्न 27.
आदि मानव के गाँव की क्या विशेषता थी?
उत्तर:
गाँव के समस्त निवासी खाद्यान्नों के उत्पादन में लगे रहते थे। भूमि, वन, घास के मैदान और जलाशय ही उनकी संपत्ति

प्रश्न 28.
मेहरगढ़ (पाकिस्तान) के पुरातत्व स्थल में घर कैसे बनाए गए हैं?
उत्तर:
अवशेषों से यह पता चलता है कि वहाँ आयताकार – या वर्गाकार घर बने थे। प्रत्येक घर में चार या इससे अधिक कमरे थे। कुछ कमरे खाद्यान्न आदि के भंडारण में प्रयोग किए जाते थे।

प्रश्न 29.
कैसे पता लगता है कि आदि मानव पुनर्जन्म ।में विश्वास करता था?
उत्तर:
मेहरगढ़ से प्राप्त कब्रों में मनुष्य-कंकाल के साथ ही ।बकरियों के कंकाल भी मिले हैं। शायद लोग मृतात्मा के पुनः जन्म लेकर भोजन करने के लिए ऐसी खाद्य सामग्री रखी जाती थी।

प्रश्न 30.
सिल-बट्टा कौन से पुरातत्व स्थल पर मिला
उत्तर:
ब्रहमपुत्र घाटी के निकट की चीन तथा म्यांमार की ओर जाने वाले मार्ग की पहाड़ी पर स्थित दाउजली हेडिंग नामक पुरातत्व स्थल में।

प्रश्न 31.
दाउजली हेडिंग में कौन सा पत्थर मिला है?
उत्तर:
संगयशब पत्थर, इसको यहाँ चीन से लाया गया है।

प्रश्न 32.
केटल हुयूक नामक टर्की के पुरातत्वस्थल में क्या मिला है?
उत्तर:
सीरिया का चकमक पत्थर, लाल सागर की कौडियाँ तथा भूमध्य सागर की सीपियाँ आदि।

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प्रश्न 33.
कौड़ियाँ और सीपियाँ किस उपयोग में लाई जाती रही होंगी?
उत्तर:
आभूषण बनाने, गिनती करने और घरों की सजावट में।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
दाउजली हेंडिग कहाँ हैं और यहाँ कौन सी विशेष चीजें मिली हैं?
उत्तर:
चीन और म्यांमार जाने के रास्ते पर ब्रहमपुत्र घाटी के पास की पहाड़ियों पर। यहाँ-सिल-बट्टा, संगयशब पत्थर, जीवाश्म (किसी युग के वृक्ष भूमि में दबने के कारण रासायनिक क्रिया के बाद कठोर बने हुए पेड़-पौधे), निर्मित औजार आदि मिले हैं। इससे संकेत मिलता है कि लोग यहाँ खेती करते थे और अनाज को सिल पर पीस कर भोजन पकाते थे वे लोग संगयशव पत्थर के आभूषण पहनने के शौकीन भी थे।

प्रश्न 2.
खुदाई करते समय पुरातत्ववेत्ता इस बात का पता कैसे लगाते होंगे कि कौन सी चीज प्राचीनतम-प्राचीनतर और कौन-सी प्राचीन है?
उत्तर:
पुरातत्ववेत्ता यह धारणा बनाते हैं कि पहले सतह पर लोग रहते होगें, उनके द्वारा भूमि पर कुडा-करकट फेंके जाने.पत्थर आदि इकट्ठा किये जाने से पृथ्वी की सतह ऊँची उठी होगी। दूसरे काल में लोगों ने इस पर घरों का पुनर्निर्माण किया और अन्तत: यह स्थान एक टीले का रूप ले चुका होगा। इस पर पुनः घरों का निर्माण कराया गया होगा। इस प्रकार खुदाई के समय जो चीज सबसे नीचे के तल पर मिलती है उसको पुरा-पाषाणकाल, दूसरे सतह पर मिलने वाली चीज को मध्य-पाषाणकाल एवं सबसे ऊपरी सतह पर सबसे पहले प्राप्त चीज को नव-पाषाणकाल की चीज मान लिया गया है।

प्रश्न 3.
आदिमानव के कृषक समुदाय का डाँचा कैसा था? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आदि मानव का कृषक समुदाय-“जनजाति” की परिभाषा के अन्तर्गत आता है। प्रत्येक समुदाय (जिसमें दो से लेकर तीन पीढ़ियों तक जन्मे सदस्य थे) के सदस्य अपनी भिन्न भाषा, संस्कृति, खान-पान, आचार-व्यवहार, रीति-रिवाज, चित्रकारी, संगीत, कथाओं आदि के जानकार थे। भाषा एवं रीति-रिवाज भेद के आधार पर ही उन्हें जनजाति माना गया है। समुदाय का मुखिया-उसका बुजुर्ग, अनुभवी, युवा योद्धा या पुरोहित होता था। वृद्ध महिलाओं को भी उनकी बुद्धि और अनुभव के आधार पर सम्मान प्राप्त था। भूमि, वन, घास के मैदान और जल को जनजाति अपना धन मानते थे। वे मिलकर इन संसाधनों का उपयोग करते

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प्रश्न 4.
आदिमानव के रीति-रिवाज और आचार-व्यवहार के विषय में पुरातत्वविदों ने निष्कर्ष कैसे लिया होगा?
उत्तर:
पुरातत्वविदों ने इसके लिए वर्तमान में कुछ ऐसे किसानों के आचार-व्यवहार और रीति-रिवाजों का अध्ययन किया जो सहज ढंग से कृषि कार्य करते हैं। इस गहन अध्ययन के पश्चात् उन्होंने उत्खनन से प्राप्त चीजों, घरों की बनावट, चित्रकारी के बंग आदि का प्रेक्षण किया और इससे उन्हें यह निष्कर्ष लेने में कठिनाई नहीं हुई कि आदिमानव के समुदायों में कौन से रीति-रिवाज प्रचलित रहे होंगे। उदाहरणार्थ-आज भी कई आदिवासी किसान अपने मृतकों के साथ भेड़ और बकरियाँ तथा भाँडे-बर्तन एवं अनाज को भी कब्र में गाड़ देते हैं। उत्खनन में कलें भी प्राप्त हुई और उनमें नर-कंकाल के साथ ही पशु-कंकाल भी मिले। इससे स्पष्ट हो गया कि आदिमानव की आस्था पुनर्जन्म में रही होगी तथा वे मृतकों को कब्र में दफनाते होंगे।

प्रश्न 5.
आदि-मानव मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किन-किन कार्यों में करता होगा?
उत्तर:
पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार मिट्टी के बड़े-बड़े बड़े मिले हैं जिनमें यह निष्कर्ष लिया जाता है कि आदि मानव इनमें खाद्यान्नों का भंडारण करता था। छोटे बर्तन भोजन आदि पकाने के काम आते थे क्योंकि चावल, गेहूँ, मसूर आदि अनाजों के अवशेष यह सिद्ध करते हैं कि आदि मानव का समुदाय बहुधा इन्हीं अनाजों को उगाता और खाता था। छोटे बर्तन इन्हें पकाने में ही प्रयोग किए गए होंगे।

प्रश्न 6.
आग की खोज ने आदिमानव की किस प्रकार मदद की?
उत्तर:
आग के उपयोग:
(1) जंगली पशुओं से रक्षा: गुफा के दरवाजे पर जलती हुई आग को देखकर हिंसक पशु भाग जाते थे और आदि मानव पर आक्रमण करने का साहस नहीं कर पाते थे। वह निर्भीक होकर गुफा के अन्दर विश्राम कर सकता था।
(ii) सर्दी से बचाव: जाड़े की ठंडी तथा तूफानी रातों में आग ही उसके आराम और रक्षा का साधन थी। वह आग जलाकर अपने शरीर को गर्म करके सुख का अनुभव करता था।
(iii) भोजन की सुविधा: आदिमानव पहले कच्चा माँस खाता था। आग की खोज के पश्चात् वह माँस को भूनकर खाने लगा।
(iv) प्रकाश की प्राप्ति: रात के अंधकार को दूर करने के लिए गुफा में प्रकाश का साधन केवल आग ही थी।

प्रश्न 7.
आदिमानव ने औजारों का प्रयोग कौन कौन से उद्देश्यों को पूरा करने में किया?
उत्तर:
(i) जंगली पशुओं से बचाव करने
(ii) वन्य पशुओं का शिकार करने
(iii) पेड़ों को बहाकर जमीन खोदने
(iv) फलों, पत्तियों, डंठलों आदि को छीलने, काटने आदि में
(v) पत्थरों को धारदार और नुकीला बनाने में।

भोजन : संग्रह से उत्पादन तक Class 6 HBSE Notes in Hindi

1.भिन-भिन पौधे भिन्न-भिन्न दशाओं में क्यों उगते हैं?: पौधों की विशिष्ट प्रजाति में अद्वितीय जीनी गुण रहने के कारण।
2.घर के पिछवाड़े की लौकी का साग “नैनुओ” को सैर-सपाटे के दौरान प्राप्त लौकी के साग से भिन्न क्यों लगा होगा?: व्यष्टि स्तर पर स्वयं की प्रकृति के अनुसार पोषित लौकी व्यवसाय भावना से उगाई गई लौकी के अन्तनिहित गुणों (instincts) का अनुकूलन (adaptation) नहीं कर पाती।
3.बकरी और भेड़ जैसे चौपाए पशु शुष्क क्षेत्र (अवर्षण क्षेत्र) में जीवित क्यों नहीं रहते?: शुष्क क्षेत्रों में उनके भोजन और उपापचय का पूरक साधन ‘हरी घास’ न रहने और पेय जल का अभाव रहने के कारण।
4.लगभग 12000 वर्ष पूर्व जलवायु के उष्णकटिबंधी बनने के समय कौन से प्रमख परिवर्तन दृष्टिगोचर हए?: वनस्पति और जन्तु जगत दोनों की नई प्रजातियों ने पृथ्वी के नग्न आँचल को ढक दिया और सर्वत्र हरियाली छा गई।
5.आदिमानव ने कृषक बनने से पहले प्रकृति का कौन सा चमत्कार देखा?: खाद्य पेड़-पौधों के पुष्पित, फलित होने, बीज में परिपुष्ट और फलों चटक कर भूमि पर दानों की वर्षा का चमत्कार।
6.आरंभ में भेड़, बकरी, गाय, हिरन आदि पशु ही क्यों पाले गए होंगे? इन पशुओं का स्वभाव झुंड में रहने और आदि मानव की झोपड़ी के आस-पास घूमने लगे थे और मनुष्य के साथ अनुकूलन शीघ्र करने को लालायित दिखाई दिए।
7.दाँतों की कौन सी श्रेणी जंगली सूअर और कौन सी श्रेणी कुत्ते के दाँतों जैसी है?: कृन्तक (सामने के दाँत) और खदंत (किनारे के दाँत)।
8.जंगली पशुओं की तुलना में पालतू पशुओं के कौन से अंग भिन्न होते हैं?: दाँत और सींग।
9.पशु-पालन की चेतना आदिमानव को कब मिली?: आज से लगभग बारह हजार वर्ष पूर्व नव पाषाण काल में।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 3 भोजन : संग्रह से उत्पादन तक

10.पालतू पशुओं के दाँत और सींग कैसे होते हैं?: इनके सींग तथा दाँतों का आकार जंगली पशुओं से छोटा और भिन्न बनावट का रहता है।
11.घुमंतू आदिमानव को व्यवस्थित जीवन जीने के लिए किसने प्रेरित किया?: वनस्पति ने, क्योंकि वृक्षों के लगाने। तरुणावस्था प्राप्त करने और फल एवं फूल प्रदान करने की अवधि लंबी होती है, अत: वह अपने लगाए फल खाने के लिए एक ही स्थान पर स्थाई रूप से रखा गया।
12.सबसे पहले कौन से पशु पाले गए?: भेड़ और बकरी।
13.कौन से स्थलों पर पुरातत्ववेत्ताओं को आदिमानव के कृषि कर्म के प्रमाण मिले?: कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान आदि।
14.पुरातत्ववेत्ताओं को आदि मानव द्वारा बोई जाने वाली फसल के बीज किस रूप में मिले?: जली हुई अवस्था में (कार्बनीकृत)।
15.मेहरगढ़ (पाकिस्तान ) में कौन-कौन से अनाज और किन पशुओं की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं?: अनाज-गेहूँ, जौ, .जीवाश्म-भेड़, बकरी और चौपाए पशुओं की हड्डियाँ
16.पेयमपल्ली (आंध्र प्रदेश) नामक पुरातत्वीय स्थल से क्या प्राप्त हुआ है?: अनाज-काला चना, ज्वार, बाजरा जैसे मोटे अनाज। जीवाश्म पशु-चौपाए, पशु, भेड़ और सूअर की हड्डियाँ।
17.बुर्जाहोम कहाँ है और पुरातत्वीय स्थल क्यों है?: आधुनिक कश्मीर ही पाषाणयुग का बुर्जाहोम था। यहाँ पुरातत्ववेत्ताओं को गेहूँ और मसूर के जले हुए बीज तथा चौपाए पशुओं, भेड़, बकरी तथा भैस की हड्डियाँ प्राप्त हुई हैं।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 4 आरंभिक नगर

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 4 आरंभिक नगर Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 4 आरंभिक नगर

HBSE 6th Class History आरंभिक नगर Textbook Questions and Answers

कल्पना करो:

तुम अपने माता-पिता के साथ 4000 साल पहले लोथल से मोहनजोदड़ों की यात्रा कर रहे हो। यह बताओ कि तुम यात्रा कैसे करोगे, तुम्हारे माता-पिता यात्रा के लिए अपने साथ क्या-क्या ले जाएँगे? और मोहनजोदड़ों में तुम क्या देखोगे?
उत्तर:
लोथल से मोहनजोदड़ों की यात्रा:
लोथल के बंदरगाह से हम एक नाव/जलपोत में बैठेंगे और अरब सागर के रास्ते सोत्वाकोह पहुंचेंगे। यहाँ पर हमारा जलपोत एक घंटा रुकेगा और हम भोजन आदि से निवृत्त होंगे। इसके पश्चात हम चहुँदड़ों के लिए सिन्धु नदी के रास्ते नाव पर जाएंगे और अंतत: मोहनजोदड़ों पहुँचकर विश्राम करेंगे।

यात्रा में साथ ले जाने योग्य सामान:
लोथल में यज्ञ-मण्डप हैं और देवी-देवताओं की पत्थर की मूर्तियाँ यहाँ बहुत सुन्दर हैं। काले रंग से चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन, माला के मनके ताँबे के औजार और पत्थर की लंबी धारदार पत्तियाँ, पट्टियाँ आदि सामान को हम लोथल से खरीद कर ले जाएंगे।

मोहनजोदड़ों की वर्शनीय चीजें:
मैं मोहनजोदड़ों में अपने माता-पिता के साथ पहुँच कर पूरे सात दिन वहाँ की सुन्दर चीजों को मैं देखना चाहूँगा। यहाँ का महान स्नानगार देखने लायक हैं। यहाँ के भवन, गली और सड़के बहुत सुंदर है। नालियाँ ढकी हुई हैं और जगह-जगह पर जल की रुकावट को दूर करने के लिए मेन-होल बने हुए हैं। यहाँ माला के बहुमूल्य पत्थरों के मनके और सोने-चांदी के आभूषण भी बहुत सुन्दर हैं। मेरी माताजी ने यहाँ से अपने सभी जेवर खरीदे है। अपने सहपाठियों को दिखाने के लिए मैं यहाँ मोहरे भी खरीद कर ला रहा

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 4 आरंभिक नगर

आओ याद करें:

आरंभिक नगर प्रश्न उत्तर HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
पुरातत्वविदों को कैसे ज्ञात हुआ कि हड़प्पा सभ्यता के दौरान कपड़े का उपयोग होता था?
उत्तर:
(i) उन्होंने एक प्रस्तर मूर्ति को कड़ाईदार वस्त्र के पहरावे में तराशा हुआ देखा।
(ii) उन्हें इस बात के प्रमाण मिले कि आज से लगभग 7000 वर्ष पूर्व मेहरगढ़ (पाकिस्तान) में कपास का उत्पादन होता था।
(iii) उन्हें कातने में प्रयुक्त तकली, तकुए, अटेरन आदि जैसे उपकरणों के अवशेष भी मिले।
(iv) चाँदी के एक कलश के ढक्कन से लिपटे हुए कपड़े के टुकड़े दिखाई दिए।

उक्त आधारों पर ही उन्होंने यह निष्कर्ष लिया कि हड़प्पा सभ्यता में वेश-भूषा का प्रचलन था। लोग वस्त्र धारण करना सीख चुके थे।

Bhojan Sangrah Se Utpadan Tak HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 2.
निम्नलिखित का सुमेल कीजिए:
(i) तांबा – (अ) गुजरात
(ii) सोना – (ब) अफगानिस्तान
(ii) टिन – (स) राजस्थान
(iv) बहुमूल्य पत्थर – (द) कर्नाटक
उत्तर:
(i) – (स)
(ii) – (द)
(iii) – (ब)
(iv) – (अ).

HBSE 6th Class Social Science आरंभिक नगर प्रश्न उत्तर प्रश्न 3.
हड़प्पा के लोगों के लिए धातुएँ, लेखन, पहिया और हल क्यों महत्त्वपूर्ण थे?
उत्तर:
(क) धातुओं का उपयोग: हड़प्पा के लोग अपने औजार, हथियार, आभूषण और भाँडे-बर्तन बनाने में ताँबे और काँसे का प्रयोग करते थे। चाँदी, लाल पत्थर, रत्न और सोने से वे माला, कर्णफूल, चूड़ियाँ और छोटी-छोटी उपयोग की वस्तुएं बनाते

(ख) लिखना: हड़प्पा सभ्यता के मोहनजोदड़ो, लोथल, मेहरगढ़, चहुंदडों, कालीबंगन, गणवेरीवाला, ढोलबीरा, सुरकोटड़ा, सोतकाकोह आदि में पाइ गई मोहरों, मुद्रांकन आदि के अवशेष दर्शाते हैं कि लिखने का कार्य हड़प्पा सभ्यता वालों के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण था। चीजों के ऊपर उनकी शुद्धता के प्रमाणन हेतु मोहर लगाई जाती थी और पैक करने के बाद उसके ऊपर ताजी लाल मिट्टी रखकर मुद्रांकन किया जाता था। कई तरह की मोहरें इस काल में बनाई गई।

(ग) चक्र का उपयोग: इस नगर सभ्यता की बुनियाद ही चक्र के अविष्कार पश्चात् पड़ी। हाथगाड़ियाँ, बैलगाड़ियाँ आदि बनाने में इसका उपयोग किया गया। तकली से लेकर भवनों की गोलाकार मेहराब्वें चक्र ज्ञान पर ही आधारित थी।

(घ) हल: हड़प्पा सभ्यता वस्तुतः कृषि सभ्यता थी। इसमें कृषक वर्ग को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था। गेहूँ, जौ, कई दालें, मटर, चावल, तिल, अलसी और सरसों जैसी खाद्यान्न, तिलहन
और दलहन की फसलें उगाई जाती थीं। कपास की खेती भी इस काल में प्रारंभ हो गई थी क्योंकि मनुष्य वस्त्र विनिर्माण सीख चुका था। इन सभी कार्यों के लिए हल की प्रमुख भूमिका थी।

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आओ चर्चा करें:

प्रश्न 4.
इस अध्याय में पक्की मिट्टी (टेराकोटा) से बने सभी खिलौनों की सूची बनाओ। इनमें से कौन-से खिलौने बच्चों को ज्यादा पसंद आए होंगे? .
उत्तर:
1. रीछ
2. मैंस
3. बैल
4. सूअर
5. गुड़िया
6. याक
7. बैलगाड़ी।
इनमें बच्चों ने सर्वाधिक गुड़िया को पसंद किया होगा। वह नृत्य मुद्रा में दिखाई गई है तथा उसके वस्त्रों को भी विशेष आलेखनों से अलंकृत किया गया है। उसके सिर पर घड़े जैसी कोई चीज है। संभवतः टोपी हो इस आकार की हो।

प्रश्न 5.
हड़प्पा के लोगों की भोजन सामग्री की सूची बनाओ। आज इनमें से तुम क्या-क्या खाते हो? निशान लगाकर बताओ।
उत्तर:
हड़प्यावासियों के खाद्य पदार्थ:
(अ) अनाज: गेहूँ, जौ, चावल, रागी, कोदो, साँवा और ज्वार।
(ब) दालें: कई किस्म की दालें, मटर, सेम।
(स) तिलहन: अलसी और सरसों।
उक्त से स्पष्ट होता है कि हड़प्पावासी लगभग उन्हीं चीजों को अपने भोजन में लेते थे जिन्हें हम आज भी लेते हैं।

प्रश्न 6.
हड़प्पा के किसानों और पशुपालकों का जीवन क्या उन किसानों से भिन्न था, जिनके बारे में तुमने पिछले अध्याय में पढ़ा है? अपने उत्तर में इसका कारण बताओ।
उत्तर:
नव-पाषाणकाल और हड़प्पा की नगरीय सभ्यता के किसानों तथा पशुपालकों की स्थिति में बहुत भिन्नता थी क्योंकि:
1. नव-पाषाणकाल में पहिए का आविष्कार न होने के कारण खाद्यान्नों की आपूर्ति दूरस्थ स्थानों में करना कठिन था। जलयान और नावों का आविष्कार भी नहीं हुआ था।

2. नव-पाषाणकाल में केवल दो या तीन पीढ़ियों के लोगों जन-जाति कहलाता था। इससे बड़ा सामाजिक संगठन नहीं था जबकि हड़प्पा की नगर सभ्यता के अवशेष दर्शाते हैं कि इस काल में समाज का विकास शासक और राज्य व्यवस्था तक हो गया था।

3. हड़प्पा की नगरीय सभ्यता में किसान विविध फसलों को उगाकर उन्हें अन्न-कोठारों में रखते थे तथा विपणन व्यवस्था रहने के कारण नगरों में निवास करने वाले शासक, प्रशासक, दस्तकार, शिल्पी. पुरोहित आदि वर्ग की सेवाएँ अनाज के बदले प्राप्त करते थे। वस्तुओं की पैकिंग के बाद भी उन पर गीली मिट्टी से मुद्रांकन (मोहर लगाना) की पद्धति इस तथ्य को स्पष्ट करती है।

4. नव पाषाणकाल के किसान और पशुपालक सभ्यता की प्राथमिक पाठशाला से आगे बढ़ रहे थे जबकि हड़प्पा नगर का सभ्यता काल उन्हें चरम विकास की पाठशाला में दर्शाता है। उदाहरणार्थ-नव-पाषाण काल के गड्डेनुमा घर (मतगृह) जबकि हड़प्पा के महल, स्थापत्य कला, नाली-प्रबंध, सड़कें, पक्के मकान आदि पाए गए हैं।

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आओ करके देखें:

प्रश्न 7.
अपने शहर या गाँव की तीन महत्वपूर्ण इमारतों का ब्यौरा दो। क्या वे बस्ती के महत्वपूर्ण इलाके में बनी हैं। इन इमारतों का उपयोग किसलिए किया जाता है?
इस प्रश्न का सीधा संबंध छात्र से है। वे स्वयं ही अपने गाँव या शहर के भवनों का वर्णन कर सकते हैं। यहाँ पर कुछ संकेत
संकेत:
(क) गाँव के महत्त्वपूर्ण भवन: विद्यालय, डाकघर, पंचायत घर, प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र, ग्राम सभापति का कार्यालय, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर, सहकारी समिति का क्रय केन्द्र, धर्मशाला, बारातघर आदि।

(ख) शहर के महत्त्वपूर्ण भवन: नगरपालिका कार्यालय, अस्पताल, निदान-गृह, स्कूल एवं कॉलेज, प्राविधिक और प्रौद्योगिक शिक्षा संस्थानों के भवन, बाजार, दुकानें, क्रय-विक्रय केन्द्र, सामुदायिक भवन, विविध सरकारी कार्यालया।

वस्तुतः ये सभी भवन सार्वजनिक अर्थात् आम नागरिकों के इच्छानुसार विहार और उपयोग करने वाले भवन तथा स्थान हैं। इनका आबादी के बीचों-बीच रहना ही जनता के लिए सुविधाजनक होता है। इसीलिए ये गाँव या शहर के मध्य बनाए जाते हैं। ये आम घरों जैसे नहीं होते हैं बल्कि कार्य अनुसार इनकी बनावट और स्थापत्य कला अथवा भवन शिल्प अलग-अलग होता है। । उदाहरणार्थ-मंदिर, गुरुद्वारा, कार्यालय, स्कूल आदि भवन एक-दूसरे से आकार, बनावट, क्षेत्रफल आदि में कार्य या मूल भावना आस्थानुसार भिन्न-भिन्न होते हैं। उक्त में से किन्हीं तीन भवनों को लेकर उनके कार्यों के बारे में लिखा जा सकता है।

प्रश्न 8.
तुम्हारे इलाके में क्या कोई पुरानी इमारत है? यह पता करो कि वह कितनी पुरानी है और उनकी देखभाल -कौन करता है।
उत्तर:
यह प्रश्न भी छात्र के साथ सीधा संबंध रखता है। प्रत्येक प्रांत, जिले, शहर में कई ऐतिहासिक भवन स्थित हैं। छात्र जिस जिले या प्रांत अथवा शहर में रहता है, उसमें विद्यमान ऐसे भवनों की जानकारी पुस्तकालय, ग्राम-पंचायत के कार्यालय, नगर-निगम, सामान्य ज्ञान की पुस्तक आदि से प्राप्त करके उनके निर्माण किए जाने की तिथि एवं अवधि का भी पता लगाया जा सकता है। उदाहरणार्थ-दिल्ली का लाल किला, जामा मस्जिद आदि भवन मुगल सम्राट शाहजहाँ ने बनवाए। इनके निर्माण की अवधि लगभग 356 वर्ष पूर्व की है क्योंकि शाहजहाँ का शासनकाल 1627 से आरंभ होकर 1659 ई. तक था। . ऐसे सभी प्राचीन भवनों का संरक्षण और परिरक्षण का दायित्व हमारे देश के पुरातत्व विभाग का रहता है।

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HBSE 6th Class History आरंभिक नगर Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक जीर्ण-शीर्ण भवन को बच्चे भूतहा घर क्यों कहते हैं?
उत्तर:
समाज में प्रचारित अफवाह, माता-पिता द्वारा डराने के लिए उनका ऐसा परिचय दिया जाना आदि ही पुराने भवन को भूतहा घर कहने की प्रेरणा देते हैं।

प्रश्न 2.
यदि आपको कोई बहुत प्राचीन भवन, मंदिर या कोई स्तंभ दिखाई देगा तो आप क्या करेंगे?
उत्तर:
अपने जिले या शहर में स्थापित पुरातत्व विभाग के शाखा-कार्यालय में जाकर सूचना देंगे अथवा समाचार पत्रों में चित्र देकर उसका विवरण प्रसारित करायेंगे।

प्रश्न 3.
प्राचीन भवनों को ऐतिहासिक और पुरातत्व स्थल क्यों समझा जाता है?
उत्तर:
इन ढाँचों के भीतर किसी युग या काल विशेष में किए जाने वाले सभी मानवीय क्रियाकलापों, तौर-तरीकों, रहन-सहन आदि के अवशेष प्राप्त होते हैं अथवा इनकी दीवारों के चित्र, स्थापत्य और भवन-निर्माण शिल्प इनकी निश्चित काल-गणना करने में सहायक बनते हैं। इसीलिए ये पुरानी या पूर्व युग की बातों को जानने के स्थल समझे जाते हैं।

प्रश्न 4.
हड़प्पा कहाँ है और इसकी खोज कब हुई?
उत्तर:
हड़प्पा नामक नगरीय सभ्यता का पुरातत्व स्थल (नगर) पाकिस्तान के राज्य क्षेत्र (पंजाब) में स्थित है। आज से 150 वर्ष पूर्व रेल की लाइन बिछाते समय इसका पता लगा लेकिन पुरातत्व विभाग की जाँच आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व ही शुरू हुई।

प्रश्न 5.
हड़प्पा नगर आज से कितने वर्ष पूर्व बसा होगा?
उत्तर:
4700 वर्ष पूर्व।

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प्रश्न 6.
हड़प्पा की नगर सभ्यता और सिंधु-घाटी की सभ्यता में क्या भिन्नता है?
उत्तर:
दोनों एक ही हैं क्योंकि सिन्धु घाटी की सभ्यता हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चहुँदडो, लोथल आदि नगरों की सभ्यता ही थी।

प्रश्न 7.
कई बार पुराने भवन जीर्ण-शीर्ण होकर ढह जाते हैं। आपके विचार से इनका जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए या नहीं?
उत्तर:
अवश्य। क्योंकि ये हमारे अतीत के स्मारक हैं और इतिहास के ज्वलंत एवं दृश्यमान साक्ष्य हैं। संक्षेप में, हमारी पुरातात्विक विरासत हैं।

प्रश्न 8.
हड़प्पा नगर के दो भाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
पश्चिम की ओर का हिस्सा गढ़ या दुर्ग था। यह ऊँचाई वाली भूमि पर बनाया गया था। दूसरा हिस्सा निम्नतर नगर था। यह क्षेत्रफल में बड़ा परंतु कम ऊंचाई वाली भूमि पर निर्मित था।

प्रश्न 9.
विशेष भवन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ऐसे भवन जिनमें व्यष्टि-स्तर पर ही नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उपयोग करने योग्य सुविधाएँ रहें यथा-मोहनजोदड़ो में पाया गया विशाल स्नानागार।

प्रश्न 10.
भवनों को जल-प्रतिरोधी कैसे बनाया जाता था?
उत्तर:
भवनों की दीवारों को चिनते समय ईंटों के बीच में – प्राकृतिक डामर (तारकोल) की एक परत चुपड़ दी जाती थी।

प्रश्न 11.
विशाल या सार्वजनिक स्नानागार में पानी की आपूर्ति कहाँ से होती थी?
उत्तर:
आस-पास में स्थित कुंओं से कुल्या खोदकर इस स्थान तक जल पहुंचाया जाता था।

प्रश्न 12.
हवन कुंड कहाँ मिले हैं?
उत्तर:
कालीबंगन (द. प्र. और लोथल (गुजरात) में।

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प्रश्न 13.
हवन-कुंडों से किस बात की जानकारी मिलती
उत्तर:
नगरीय सभ्यता के ये लोग वैदिक अनुष्ठान एवं देवी-देवताओं की उपासना करने में अग्रणी थे।

प्रश्न 14.
हड़प्या की सभ्यता के जल-निकास प्रबंध की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
1. नगर के सभी घर और भवन नालियों के जाल से आवृत्त थे।
2. नालियाँ भू-गत और हल्का ढलान लिए हुए थौं।
3. स्थान-स्थान पर बड़े छिद्र छोड़े गए थे जो कि ढके हुए थे। इनसे नाली के अवरुद्ध होने पर सफाई की जा सकती थी।
4. समूचे नगर को घेरती हुई नालियाँ अन्तत: नगर सीमा से दूर एक नाले में मल-जल का विर्सजन करती थीं।।

प्रश्न 15.
हड़प्पा के नगरों में क्या-क्या कार्य होते थे?
उत्तर:
वस्तुओं का आयात-निर्यात, क्रय-विक्रय, मुद्रांकन, भवन निर्माण की योजना, शहरी सुधार कार्यक्रम, कारीगर और विविध शिल्प कार्य।

प्रश्न 16.
हड़प्पा के नगरों में खिलौने किस चीज के बनते थे?
उत्तर:
पक्की मिट्टी या टेराकोटा के।

प्रश्न 17.
क्या मेहरगढ़ जैसे गाँवों में भी दस्तकार, कारीगर और शिल्पी थे?
उत्तर:
नहीं। वे सभी साधारण लोग के और अपनी जरूरतों को जोड़-तोड़ लगाकर पूरा करते थे।

प्रश्न 18.
आप यह कैसे जानते हैं कि हड़प्पा के नगरों में चित्रलिपि प्रचलित थी?
उत्तर:
यहाँ से प्राप्त मुहरों के ऊपर पशुओं के चित्र और विशेष संकेतों का उत्कीर्ण रहना।

प्रश्न 19.
हड़प्पा के नगरों की चीजें कौन सी कच्ची सामग्री से बनती थीं?
उत्तर:
पत्थर, कौड़ी, सीप तथा ताँबा, काँसा, सोना और चाँदी जैसी धातुओं से।

प्रश्न 20.
हड़प्पा के नगरों की दर्शनीय चीजें क्या हैं?
उत्तर:
माला के मनके, पत्थर के बाँट और छुरियाँ। बाँट चकमक पत्थर जैसे स्फटिक के बने पाए गए।

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प्रश्न 21.
बाँटों का किस काम में उपयोग होता था?
उत्तर:
धातुओं तथा कीमती रत्नों को तोलने के लिए।

प्रश्न 22.
हड़प्पा से पाई गई मोहरें किस चीज की बनी
उत्तर:
आयताकार पत्थर की। इन पर पशुओं के चित्र उकेरे गए हैं।

प्रश्न 23.
क्या आदिमानव की जनजातियाँ भी धातु का प्रयोग करती थीं?
उत्तर:
चूंकि यह नव पाषाण काल था अतः जन-जातियों को धातुओं की जानकारी नहीं थी।

प्रश्न 24.
हड़प्पा के वासी अपने बर्तनों को कैसे चमकाते
उत्तर:
रेगमाल से । रेत या बिल्लौर के चूरे को गोंद से चिपकाकर धातु की किसी पत्ती पर जमाया जाता था और फिर इससे बर्तनों को रगड़ा जाता था।

प्रश्न 25.
हड़प्पा नगरवासी कौन-कौन सी चीजों का आयात करते थे?
उत्तर:
ताँबा, टिन, सोना, चाँदी और कीमती रत्नों का।

प्रश्न 26.
ताँबा, सोना, टिन और कीमती रत्नों को कहाँ से मँगाया जाता था?
उत्तर:
ताँबे को राजस्थान और पश्चिम एशिया के ओमान देश से, टिन और कीमती रत्नों को अफगानिस्तान और ईरान से और सोने को कर्नाटक प्रदेश से।

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प्रश्न 27.
हल का प्रयोग किस उद्देश्य से किया जाता था?
उत्तर:
मिट्टी की सतह को खोदकर पलटने और बीज बोने के लिए।

प्रश्न 28.
हड़प्पावासियों के प्रमुख पालतू पशु कौन-कौन से थे?
उत्तर:
चौपाए पशु, भेड़, बकरी और भैंस।

प्रश्न 29.
ढोलवीरा नामक नगर कौन-कौन से भागों में बँटा था?
उत्तर:
तीन भागों में:
(i) दुर्ग
(ii) बाजार क्षेत्र और
(iii) सामान्य लोगों की बस्तियों वाला क्षेत्र।
ये तीनों भाग चारदीवारी से घिरे थे और प्रत्येक में केवल फाटकों से ही प्रवेश किया जा सकता

प्रश्न 30.
हड़प्पा नगर की लिपि और ढोलवीरा (गुजरात) के पुरातत्व स्थल की लिपि में क्या अंतर था?
उत्तर:
हड़प्पा नगर की लिपि छोटे अक्षरों की थी जबकि ढोलाबीरा में पाई गई लिपि के अक्षर बड़े और साथ-साथ थे। हड़प्पा की लिपि, मोहर जैसी छोटी चीजों पर उत्कीर्ण थी जबकि ढोलवीरा में लिपि को श्वेत-पत्थर और लकड़ी के तख्तों पर उकेरा गया था।

प्रश्न 31.
जहाजी माल-घाट कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
खंभात की खाड़ी के निकट गुजरात राज्य के लोथल नगर में।

प्रश्न 32.
हड़प्पा की नगर सभ्यता का विनाश कैसे हुआ?
उत्तर:
इसके बारे में पुरातत्वविद् सुस्पष्ट नहीं हुए हैं। कुछ विद्वान् नदियों के सूख जाने को इसका कारण मानते हैं, जबकि कुछ अन्य कहते हैं कि हड़प्पावासियों ने ईटों की भट्टी के आस-पास का पूरा वन क्षेत्र झोंक दिया था। बाढ़, पशुओं के अति चरने और ताँबे के अयस्क से ताँबा निकालने के लिए गलन भट्टी में ईंधन की अत्यधिक जरूरत के कारण वन-विनाश भी शायद इस सभ्यता के विनाश के लिए जिम्मेदार थे।

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लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नव पाषाण काल के लोगों और हड़प्पा सभ्यता कालीन लोगों के घरों में क्या अंतर था?
उत्तर:
नव-पाषाण काल
(i) इस काल के घर भू-गत या गर्तगृह थे।
(ii) इन घरों में वायु एवं जल निकास के कोई साधन नहीं थे।
(iii) यह गृह-निर्माण का आरंभिक काल था।
(iv) यह गृह-निर्माण का विकसित काल था।
(v) इन घरों के चारों ओर दीवार और आगे तथा पीछे आंगन और प्रांगण थे।
(v) इन घरों में स्नानगृह थे।
(vi) ये घर पक्की ईंटों की दुहरी चिनाई के बने थे।

प्रश्न 2.
नील नदी की घाटी वाली सभ्यता कौन सी है? सुस्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह मिन की आज से 5000 वर्ष पूर्व की सभ्यता है। यहाँ के राजाओं ने सोने, चाँदी, हाथी दाँत का सामान, इमारती लकड़ी तथा वेशकीमती रत्नों को सुदूर स्थानों से एकत्रित करवाने के लिए अपनी सेना भेजी। इन्होंने पिरामिड कहे जाने वाले विशाल गुंबदों का निर्माण भी कराया। इन पिरामिडों में वे भली-भाँति परिरक्षित शव को खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ, वस्त्र, आभूषण, भाँडे बर्तन, संगीत वाद्य,हथियार और पशुओं तथा दास-दासियों के साथ गाड़ देते थे। यहाँ पर पिरामिडों से प्राप्त बहुत से पश और पनुष्यों के कंकाल इस तथ्य को प्रमाणित करते हैं।

प्रश्न 3.
किन प्रमाणों के आधार पर पुरातत्वविद् इस निष्कर्ष पर पहुँचे होंगे कि हड़प्पा नगर सभ्यता में लोग बस्व धारण करने लगे थे?
उत्तर:
पुरातत्वविदों को प्राप्त अवशेष:
1. मेहरगढ़ में खुदाई के दौरान उन्होंने यह पाया कि यहाँ पर कपास की खेती आज से 7000 वर्ष पूर्व होती थी।
2. मोहनजोदड़ो में उन्हें चाँदी के कलश के ऊपर लिपटे हुए कपड़े के टुकड़े मिले।
3. उन्हें तकली के चक्र भी मिले हैं। ये पक्की मिट्टी (टेराकोटा) और बिल्लौर (रेगमाल) से बने हुए हैं। इनसे ही कपास का धागा काता गया होगा।
4. मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक व्यक्ति के बुत पर कढ़ाईदार वस्त्र की डिजाइन का रहना।।

उपुर्यक्त प्रमाणों (अवशेषों) के आधार पर पुरातत्वविदों ने यह निष्कर्ष लिया कि इस सभ्यता के लोग वस्त्र धारण करते थेऔर उन्हें कढ़ाईदार वस्त्रों के विनिर्माण की दक्षता भी प्राप्त थी।

प्रश्न 4.
किन प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष लिया पाया होगा कि हड़प्पा नगर वासी स्वच्छता- प्रिय, प्रकृति-प्रेमी, वेशभूषा के शौकीन, आभूषण-प्रिय और दूरदर्शी थे?
उत्तर:
निष्कर्ष के प्रमुख आधार:
(i) स्वच्छता-प्रिय: मोहनजोदड़ों में विशाल स्नानागार के अवशेष, प्रत्येक घर में एक कमरा स्नान के लिए पृथक दिखाई पड़ना, भू- गत नालियों की विशेष योजना एवं प्रबंध, नगरों का दुर्ग और निम्नतर शहर (कस्या) में सुचारु विभाजन।

(ii) प्रकृति प्रेमी: विविध मोहरों पर सूर्य, चन्द्रमा, वृक्ष, पशु आदि के चित्रों का रहना, विविध किस्म के पक्की मिट्टी के खिलौनों की बनावट।

(iii) वेशभूषा के शौकीन: मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रस्तर मूर्ति के शरीर भाग में सुंदर एवं आकर्षक कढ़ाईदार वस्त्रों की चित्रकारी।

(iv) आभूषण प्रिय: रेगमाल से माला के मनकों को चमकाना, सोने, चाँदी, ताँबे, काँसे के मनके मिले हैं। चूड़ियाँ, कर्णफूल आदि का प्राप्त होना।

(v) दूरदर्शी: अफगानिस्तान, ईरान, ओमान आदि देशों की घातुओं और वेशकीमती पत्थरों (रत्नों) का यहाँ मिलना। नगर योजना, नाली-प्रबंधन, ताँबे की गलन भट्टियाँ और ईटों की भट्टियों के अवशेष, विशाल स्नानागार की दीवारों में ईट की प्रत्येक तह के ऊपर तारकोल का पुता रहना (जल प्रतिरोधक दीवार)।

प्रश्न 5.
किन बातों से यह पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग वणिकवृत्ति करने वाले या व्यापारी रहे होंगे?
उत्तर:
1. स्फटिक जैसे पत्थर (कट) के आयताकार या वर्गाकार बाँटों का मिलना।
2. गाँव (निचले कस्बे वाला भाग) से खाद्यान्न और पेय पदार्थों की आपूर्ति दुर्ग कहे जाने वाले नगर के हिस्से को होना।
3. मोहरें ओर मोहरबंदी (मुद्रांकण) की कार्यविधि का दिखाई पड़ना। प्रत्येक माल के आंतरिक आवरण पर मुहर या बाह्य आवरण पर गीली लाल मिट्टी रखकर उसके ऊपर प्रामाणिकता का मुद्रांकन रहना।
4. अफगानिस्तान, ईरान और ओमान जैसे देशों के वेशकीमती पत्थरों, टिन, ताँबे आदि धातुओं का यहाँ पाया जाना।

प्रश्न 6.
पुरातत्ववेत्ताओं ने राखीगढ़ी, कालीबंगन, गाँवेडीवाला, मोहनजोदड़ो, सोतकाकोह जैसे कई नगरों को खोजा परंतु इस सभ्यता को केवल हड़प्या नगरीय सभ्यता कहा। ऐसा क्यों?
उत्तर:
इसके निम्नलिखित कारण थे:
1. हड़प्पा नगर का सबसे पहले खोजा जाना।
2. इस नगर में अन्य सभी नगरों के संपूर्ण नमूनों का मिलना। उदाहरणार्थ यहाँ खाद्यान्नों, वस्त्र, कपास, औजार, आभूषण, भवन-निर्माण, मूर्ति शिल्प, आभूषण, कीमती पत्थर आदि सभी मिले हैं। तात्पर्य यह है कि यह नगर सभ्यता के सभी अवशेषों को समेटे हुए है।
3. सभी नगरों से प्राप्त अवशेष एक ही सभ्यता का संकेत देते हैं। चूँकि सभी नगरों के नाम एक साथ देना उपयुक्त नहीं है इसलिए केवल एक नगर के नाम से ही इस सभ्यता को अभिव्यक्त करना पुरातत्वविदों ने उचित समझा होगा।

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प्रश्न 7.
विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो) के भग्नावशेषों से किन-किन बातों का पता चलता है?
उत्तर:
1. यहाँ के लोग स्वच्छतापसंद थे।
2. इन लोगों द्वारा कुछ त्योहार आदि उत्सव और सामूहिक जौर पर मनाए जाते थे।
3. लोगों में परस्पर बन्धुत्व, एकता और अपनत्व के भाव
4. किन्हीं विशेष अवसरों पर ये लोग सामूहिक स्नानादिक कार्य करते थे।
5. जल संसाधन के बेहतर उपयोग की जानकारी रखते थे।

प्रश्न 8.
किसी एक चीज के मिलने पर पुरातत्वविद् अन्य चीजों की उपस्थिति का अनुमान कैसे लगा लेते हैं? सुस्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य के उपयोग की चीजें स्वयं में सर्वाग नहीं होती बल्कि कई अवयवों में विभाजित रहती हैं। अर्थात् एक कार्य के पूरा होने के लिए बहुत से साधन, युक्ति, पदार्थ आदि की अनिवार्य आवश्यकता रहती है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि जिस चीज के एक अंश की जानकारी मिली है उसके सभी अंश उस समय विशेष में अवश्य रहे होंगे। उदाहरणार्थ-जब पुरातत्ववेत्ताओं ने एक पत्थर की मूर्ति पर कढ़ाईदार वस्त्रों की चित्रकारी को देखा तो उन्होंने यह अनुमान लगा लिया कि यहाँ के लोग वस्त्र विनिर्माण की जानकारी रखते थे। मेहरगढ़ में कपास उगाने के प्रमाण मिलने पर यह अनुमान और अधिक पुष्ट हो गया था। इस मूर्ति में दाढ़ी, मुखाकृति आदि की चित्रकारी से उन्होंने यह अनुमान लगाया कि इस काल के लोग मूर्ति शिल्प और चित्रकारी में निपुण थे। तथ्यों का संकलन, अन्वेषण करने और निष्कर्ष लेने की यह आसान विधि है जिसके आधार पर सामान्यीकरण तक पहुंचा जाता है।

प्रश्न 9.
पुरातत्वविदों को कैसे ज्ञात हुआ कि हड़प्प सभ्यता के दौरान कपड़े का उपयोग होता था?
उत्तर:
इस जलयान माध्यम की यात्रा को हम मोहनजोदड़ो से लोथल स्थित बंदरगाह (गोदी) तक करते। हमारे माता-पिता मोहनजोदड़ो के विशाल भंडारगृहों से हड़प्पाकालीन ताँचे, काँसे, सोने, चाँदी निर्मित सजावट की बहुत सी चीजों को अपने साथ ले जाते। पक्की मिट्टी (टेरीकोटा) से निर्मित खिलौने, नक्काशीदार -वर्तन, कीमती रत्न, माला के मनके (लाल पत्थर), कढ़ाईदार वस्त्र, तकलियाँ और पत्थर की मानक मूर्तियाँ भी वहाँ से लाई जा सकती हैं।

मोहनजोदड़ो में हम कढ़ाईदार वस्त्र पहने हुए पत्थर की मूर्तियाँ, कई तरह के आभूषण, नक्काशीदार चीजें, भाँडे-बर्तन, मोहरें, चित्रकारी, पक्की ईंटों से निर्मित सुन्दर घरों, नालियों के जल निकास और गलियों की व्यवस्था को देखते। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि हम मोहनजोदड़ो नगर की सुन्दर योजना, वस्तुशिल्प, मूर्तिशिल्प, कलाकृति, चित्रकारी, आभूषण विनिर्माण, शिल्प और वस्त्र विनिर्माण का दर्शन करते।

प्रश्न 10.
हड़प्पा के नगरों में रहने वाले लोगों की एक सूची बनाइए और बताइए कि वर्तमान नगरों में रहने वाले लोग इनसे कितने भिन्न हैं।
उत्तर:
हड़प्पा में रहने वाले लोग:
1. वास्तुविद
2. अभियंता
3. चिकित्सक, वैद्य
4. स्वच्छक
5. कई संस्थाएँ
6. व्यापारी
7.शासक
8. पुरोहित
9. लेखक
10. स्वर्णकार
11. आभूषणकार
12. उद्योगपति/उद्यमी
13. जुलाहे
14. चित्रकार
15. संगीतज्ञ
16. ठठेरे आदि।
आधुनिक नगरों में भी कमोवेश ऐसे ही लोग रहते हैं। सूचना, प्रौद्योगिकी विज्ञान, प्राविधि आदि में अत्यधिक विकास होने के कारण औद्योगीकरण, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोग इसमें जुड़ गए हैं। संक्षेप में हड़प्पा की सभ्यता स्वयं में पूर्णतम निखार प्राप्त नगरीय सभ्यता है। उनकी नालियों से जल-निकास एवं भवन योजना आधुनिक काल से भी बेहतर थी।

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आरंभिक नगर Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. पुराने और खंडहर भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार क्यों करते हैं?: ये हमारी विरासत हैं तथा इनसे हमें अतीत के शिल्प और अन्य भी बहुत सी बातों की जानकारी मिलती है।
2. पुराने भवनों की देखरेख और संरक्षण करने वाला विभाग कौन सा है?: पुरातत्व विभाग।
3. हड़या नामक पुरातत्व स्थल का पता कब लगा?: लगभग 150 वर्ष पूर्व पंजाब (पाकिस्तान) में रेल की लाइनें बिछाने के समय।
4. पुरातत्ववेत्ताओं को हड़प्या स्थल का पता कब लगा?: आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व।
5. लोथल, मोहनजोदड़ो आदि सभी नगरों से प्राप्त अवशेषों को हड़प्पा संस्कृति के अवशेष क्यों कहते हैं?: सबसे पहले हड़प्पा नामक स्थल का पता लगने के कारण।
6. हड़प्पा के नगर कब बसे?: लगभग 4700 वर्ष पूर्व।
7. नगर का पश्चिमी बुर्ज जैसा छोटा हिस्सा क्या कहा गया?: दुर्ग।
8. ईंटों की चिनाई कैसे की गई है?: अन्त:पाशन विधि से (दोहरी चिनाई)।
9. दुर्ग में निर्मित विशेष चीज क्या है?: विशाल स्नानागार।
10. हवनकुंड कहाँ पाए गए?: कालीबंगन और लोथल में।
11. विशाल भंडार-गृह कहाँ पाए गए?: मोहनजोदड़ो और लोथल में।
12. जल-निकास की कैसी व्यवस्था थी?: बंद नालियों का जाल सा बिछा हुआ था जो अन्ततः-शहर से दूर नाले में खुलती थीं।
13. हडप्पा नगर के भवन क्या दर्शाते हैं?: यहाँ राजधानी रही होगी।
14. हड़प्पा में कौन-कौन से शिल्पकार रहते थे?: चित्रकार, मूर्ति-शिल्पी, भवन-शिल्पी, लेखक, मोहरें (मुद्रा) बनाने वाले।
15. क्या हड़प्पा से प्राप्त लिपि का अर्थ लगा लिया गया है?: नहीं, अभी तक नहीं लगाया जा सका है।
16. इन नगरों में पाई गई वस्तुएँ किन चीजों से बनी हैं?: पत्थर, सीप, धातु, ताँबा, काँसा, सोना और चाँदी से।

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17. पत्थर की मोहरें कैसी हैं?: आयताकार।
18. कपास कहाँ उगाया जाता था?: मेहरगढ़ (पाकिस्तान)में आज से 5000 वर्ष पूर्व।
19. लोग रेगमाल को कैसे तैयार करते थे?: रेत या बिल्लौर के बारीक चूर्ण को वस्तु की सतह पर गोंद के साथ मिलाकर।
20. चमकाई गई चीज का रंग कैसा दिखाई पड़ता था?: नीला या समुद्री हरा।
21. रेगमाल का प्रयोग किन चीजों को चमकाने में होता था?: माला के मोती, चूड़ियाँ, कान की बालियाँ और छोटे-छोटे वर्तनों को।
22. हड़प्या वासी ताँबे को कहाँ से आयात करते थे?: राजस्थान और पश्चिमी एशिया के देश ओमान से।
23. टिन का आयात कहाँ से होता था?: अफगानिस्तान से।
24. ढोलबीरा स्थल कहाँ है?: कच्छ की खाड़ी स्थित खादिर वेयट (गुजरात) में
25. लोथल नगर कहाँ है?: गुजरात में (खंभात की खाड़ी के पास)।
26. लोचल में क्या है?: शिल्पिों की कार्यशाला और विशाल भंडार गृह के अवशेष।
27. मिन के पिरामिड क्यों बनाए गए थे?: मृतकों को गाड़ने और उनकी स्मृति को लम्बे समय तक बनाए रखने के लिए।
29. मिन के पिरामिडों में किन-किन चीजों के अवशेष मिले हैं?: खाद्य सामग्री, वस्त्र, आभूषण, भाँडे-बर्तन, संगीत वाद्य, अस्त्र-शस्त्र, पशु, शवों के कंकाल जिनमें शासक और उसके सेवादारों के कंकाल भी एक साथ हैं।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

HBSE 6th Class History क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें Textbook Questions and Answers

कल्पना करो :

तुम 3000 वर्ष पहले के इनामगाँव में रहती हो। पिछली रात सरदार की मृत्यु हो गई। आज, तम्हारे माता-पिता दफन की तैयारी कर रहे हैं। यह बताते हुए सारे दृश्य का वर्णन करो कि अंतिम संस्कार के लिए कैसे भोजन तैयार किया जा रहा है। तुम्हें क्या लगता है, खाने में क्या दिया जाएगा?
उत्तर:
हमारे समुदाय के मुखिया का कल देहान्त हो गया। आज सुबह से ही समुदाय के सभी आवाल-वृद्ध बनितादिक शव के चारों ओर घर के प्रांगण में एकत्रित हो गए हैं। गाँव के मध्य एक पाँच कमरों वाला घर पहले ही बना दिया गया था। इस घर के सामने दुब का एक प्रांगण है तथा एक पिछवाडा भी है। मैं देख रहा हूँ कि मृतक के स्वजनों ने शव को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए हैं। अब शव को कफन ओढ़ाकर गाँव के मध्य बने पाँच कक्ष वाले घर में लाया गया। पूरी भीड़ अपने मुखिया के मृत शव के साथ वहाँ चली। वहाँ जाकर कुछ लोगों ने मकान के पिछवाडे एक बहुत चौड़ा गड्ढा खोदा. इसमें पानी छिड़का गया और शव को मिट्टी के एक बहुत बड़े मर्तबान में सीधा उत्तर की ओर सिर करके लिटा दिया गया है। उसकी टाँगों को आपस में फंसा (X) दिया गया है। कई पकवानों से भरे मिट्टी के पात्र और जल के घड़े शव के पास रख दिये गए हैं। अब गड्ढे को मिट्टी से ढक दिया गया है। मकान के एक कमरे में अनाज का कोठार कई तरह के खाद्यान्नों से भर दिया गया है।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

आओ याद करें:

क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 1.
निम्नलिखित स्तंभों का सुमेल कीजिए:
(i) सूक्त – (क) सजाए गए पत्थर
(ii) रथ – (ख) अनुष्ठान
(iii) यज्ञ – (ग) अच्छी तरह से बोला गया
(iv) दास – (घ) युद्ध में प्रयोग किया जाता था
(v) महापाषाण – (ङ) गुलाक
उत्तर:
(i) – (ग).
(ii) – (घ).
(iii) – (ख),
(iv) – (ङ).
(४) – (क)

What Books And Burials Tell Us Extra Questions And Answers HBSE Class 6 प्रश्न 2.
वाक्यों को पूरा करो।
(क) ————— के लिए दासों का इस्तेमाल किया जाता था।
(ख) ————— में महापाषाण पाए जाते हैं।
(ग) ज़मीन पर गोले में लगाए गए पत्थर या चट्टान ————— का काम करते थे।
(घ) पोर्ट होल का इस्तेमाल ————— के लिए होता था।
(ङ) इमामगाँव के लोग ————— खाते थे।
उत्तर:
(क) इच्छित कार्यों में
(ख) दक्षिण भारत (कर्नाटक, आंध्र, तमिलनाडु, केरल). दक्कन (मालवा, विन्ध्य, नागपुर) और कश्मीर
(ग) कब्र
(घ) परिवार के अन्य मृत सदस्यों के शवों
(ङ) गेहूँ, जौ, चावल, दालें, मोटा अनाज, मटर, तिल और भेड़, बकरी, सूअर, सांभर, चीतल, कृष्ण मृग, बारहसिंघा, खरगोश, विविध पक्षी, कछुए, केकड़ा और मछली का माँसा

आओ चर्चा करें :

What Books And Burials Tell Us Question Answer HBSE Class 6 प्रश्न 3.
आज हम जो किताबें पड़ते हैं वे ऋग्वेद से कैसे भिन्न हैं ?
उत्तर:

आधुनिक (आज की) पुस्तकेंऋग्वेद
(i) आकर्षक लिपि एवं शैली में छपी रहती हैं।(i) भूर्ज (भोज) की छाल और ताड़पत्रों पर लिखा गया है।
(ii) अनेक भाषाओं में प्रकाशित होती हैं।(ii) केवल संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
(iii) तद्भव शब्दों वाली लिपि (मिश्रित/प्रक्षेपित) रहती है।(iii) विशुद्ध तत्सम शब्दों वाली लिपि है।
(iv) विविध विषयों में प्रकाशित की जाती हैं।(iv) इसमें केवल इतिहास, ‘धर्मशास्त्र, समाजशास्त्र, आयुर्वेद, भूगोल और भू-विज्ञान का उल्लेख है।

History Class 6 What Books And Burials Tell Us HBSE प्रश्न 4.
पुरातत्त्वविद् कब्रों में दफनाए गए लोगों के बीच सामाजिक अंतर का पता कैसे लगाते है?
उत्तर:
(i) कुछ कब्रों के ऊपर छोटी शिलाएँ खड़ी की गई हैं-इन्हें समाज के निम्न स्तर के लोगों की कब्र माना गया है।

(ii) कुछ कब्रों यथा-ब्रहमगिरि (आंध्रप्रदेश) में एक कब्र के पास सोने के मनके, चूड़ियाँ आदि बड़ी संख्या में मिली हैं-इससे संकेत मिलता है कि यह समाज के धनाढ्य और उच्च वर्ग का मृतक रहा होगा। जिन कब्रों में खाद्यान्न, आभूषण आदि कम पाए गए हैं उन्हें निर्धन वर्ग की कब्र माना गया है। इनामगाँव में तो एक कत्र को पाँच कमरों वाला अनाज कोठार से भरा मकान ही सौंपा गया है। यह शायद समुदाय के मुखिया की कब्र है।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

क्या बताती है हमें किताबें और HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 5.
एक राजा का जीवन दास या दासी के जीवन से कैसे भिन्न होता था ?
उत्तर:
(i) ऋग्वेद के इस वर्णन से कि राजा युद्ध करते थे और युद्धबंदियों को अपना दास बनाते थे।
(ii) ऋग्वेद में कार्य अनुसार ही नाम दिया गया था। दास का अर्थ है:पूर्णतः परतंत्र एक गुलाम, जिसकी अपनी कोई इच्छा नहीं और अपना कोई जीवन नहीं, जिसको स्वामी के आदेश का प्राणापन से पालन करना है।
(iii) ऋग्वेद कहता है कि दास और दासी अपने स्वामियों की संपत्ति समझे जाते थे और स्वामी उनसे किसी भी तरह के कार्य करा सकता था। आओ करके देखें:

प्रश्न 6.
पता करो कि तुम्हारे विद्यालय के पुस्तकालय में धर्म के विषय पर किताबें हैं या नहीं। उस संग्रह से किन्हीं पाँच पुस्तकों के नाम बताओ।
उत्तर:
सामान्यतया विद्यालय के पुस्तकालय में धर्मग्रंथों के सार, पुस्तिकाएँ, संस्मरण आदि ही होते हैं क्योंकि राज्य धर्म निरपेक्ष शिक्षा का पक्षधर है। फिर भी अन्तर्राष्ट्रीय, ख्यातिलब्ध ग्रंथ-रामायण, महाभारत, हितोपदेश, कल्याण, कुरान की आयतें, बाइबल, गुरुग्रंथ साहिब, याज्ञवल्क्य स्मृति, विदुर नीति. चाणक्य नौति, विविध चालीसाएँ (दुर्गा, शिव, हनुमान, गणेश: सूर्य, सरस्वती) आदि का संग्रह अवश्य देखा जा सकता है। इनमें से किन्हीं पाँच पुस्तकों के नाम लिखे जा सकते हैं।

प्रश्न 7.
एक याद की हुई कविता या गीत लिखो। तुमने उस कविता या गीत को सुनकर याद किया था या पढ़कर ?
उत्तर:
“उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है।
जो सोवत है सो खोवत है, जो जागत है सो पावत है।
टुक नींद से आँखयाँ खोल जरा और अपने प्रभु को ध्यान में ला।
यह प्रीत करन की रौत नहीं, प्रभु-जागत हैं तू सोवत है।
नादान भुगत करनी अपनी, क्यों करनी पर पछताता है।
जब पाप की गठरी शीश धरी, फिर शीश पकड़ क्यों रोवत
यह गीत राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी द्वारा रचित है। इस गीत को मेरी दादी-माँ प्रात:काल नित्यकर्म के समय गुनगुनाती रहती थी। आरंभ में मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया लेकिन चौथी कक्षा में पहुँचने तक मुझे यह स्वतः ही कंठाग्र हो गया था।

नोट:छात्र इसी तरह स्वयं को कंठाग्र कविता तथा उसके कंठाग्र होने के स्रोत को लिख सकते हैं। यह केवल संकेत मात्र है।

प्रश्न 8.
ऋग्वेद में लोगों का वर्गीकरण उनके कार्य या उनकी भाषा के आधार पर किया जाता है। नीचे की तालिका में तुम छ: परिचित लोगों के नाम भरो। इनमें तीन पुरुष और तीन महिला होने चाहिए। प्रत्येक का पेशा और भाषा लिखो। क्या तुम उस विवरण में कुछ और जोड़ना चाहोगी।
उत्तर:

नामकार्य नामभाषाअन्य वितरण
(i) मनोजडॉक्टर, वैद्यहिन्दी (औपचारिक), अंग्रेजी (अनौपचारिक)यह अंग्रेजी शब्द है। इसके लिए वैद्य शब्द प्रयोग किया जाता था। भेषजज्ञ भी कहा जाता है।
(ii) रामफलहिन्दीयदि केरल का है तो मलयालम, उड़ीसा का है तो उड़िया बोलेगा।
(iii) रामचन्द्रआभूषणकार, सुनारहिन्दीस्थानीय बोली भी बोल सकता है।
(iv) सावित्री देवीमाता (संतान की उत्पत्ति और पालन-पोषण)हिन्दीस्थानीय भाषा भी। समस्त घरेलू कार्य माँ ही संपन्न करती है।
(v) धनवंतीनर्स (प्रसव-काल की परिचा/ हिन्दी शुश्रूषा और संतान पालन में सहायिका)हिन्दीस्थानीय भाषा भी। धाय अधिकतर अस्पतालों में माताओं का प्रसव कराती है। इन्हें औषधि-जान भी होता है।
(vi) सुलक्षणा रायअध्यापिका (विद्यालय में छात्र-छात्राओं को शिक्षा देना)हिन्दी (औपचारिक), अंग्रेजी (अनौपचारिक)प्राचीन काल में संस्थागत सेवारत केवल शिक्षक ही हुआ करते थे। महिलाओं के लिए नगण्य स्थान था।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

HBSE 6th Class History क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
घंटी बजने पर अध्यापक ने बच्चों से अपने पीछे आने को क्यों कहा?
उत्तर:
अध्यापक बच्चों को पहली बार पुस्तकालय और पुस्तकों से परिचित कराना चाहते थे।

प्रश्न 2.
वेद कितने प्रकार के हैं और इन्हें कब लिखा गया था ?
उत्तर:
वेद चार प्रकार के हैं:
1. ऋग्वेद
2. सामवेद
3. पजुर्वेद और
4. अथर्ववेद।
इन्हें आज से लगभग 3500 वर्ष पूर्व ऋषि-मुनियों ने लिखा था।

प्रश्न 3.
ऋग्वेद में कितने श्लोक हैं और उन्हें क्या कहा जाता है ?
उत्तर:
एक हजार से अधिक श्लोक हैं। इन्हें सूक्त कहा जाता है।

प्रश्न 4.
सूक्त का क्या अर्थ है?
उत्तर:
कही गई अच्छी बात या सु+उक्ति। यह लोकोक्ति भी हो सकती है।

प्रश्न 5.
श्लोकों के माध्यम से क्या अभिव्यक्ति की गई
उत्तर:
बहुधा इनमें देवी-देवताओं की स्तुति या प्रार्थना है।

प्रश्न 6.
ऋग्वेद की पांडुलिपि कब और कहाँ मिली ?
उत्तर:
कश्मीर में लगभग 150 वर्ष पूर्व। यह भूर्ज वृक्ष की छाल पर लिखा गया है। यह अब पुणे (महाराष्ट्र) के पुस्तकालय में सुरक्षित है।

प्रश्न 7.
संस्कृत क्या है ?
उत्तर:
भारोपीय कहे जाने वाले भाषा-परिवार का एक हिस्सा।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

प्रश्न 8.
भारोपीय भाषा परिवार में कुल कितनी भाषाएँ सम्मिलित हैं ?
उत्तर:
संस्कृत, असमी, गुजराती, हिन्दी, कश्मीरी, सिन्धी (भारतीय भाषाएँ) और अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, यूनानी, इतालवी और स्पैनिश (यूरोपीय)।

प्रश्न 9.
ऋग्वेद के अध्ययन से पुरातत्वविदों को क्या जानकारी मिलती है?
उत्तर:
(i) उस काल का साहित्य विशुद्ध संस्कृत में लिखा गया था और कथोपकथन के माध्यम से विषय-वस्तु को विस्तार दिया गया है।
(ii) प्रकृति की चीजों (नदी आदि) को उपासना की जाती थी।

प्रश्न 10.
ऋग्वेद काल में रथं क्यों महत्त्वपूर्ण थे?
उत्तर:
(i) भूमि, वन, चरागाह आदि पर कब्जा करने के लिए लगातार युद्ध करने की प्रवृत्ति।
(ii) परिवहन के साधन।

प्रश्न 11.
युद्ध में लूटी गई संपत्ति एवं धन का वितरण कैसे होता था ?
उत्तर:
(i) शासक या मुखिया
(ii) पुरोहित और शेष
(iii) आम जनता के बीच।

प्रश्न 12.
यज्ञ या बलिदान क्यों किए जाते थे?
उत्तर:
इनको प्रकृति की उपासना का एक अभिन्न अंग समझा जाता था। अभिलाषाओं की पूर्ति होने के पश्चात् विविध कामना-यज्ञ किए जाते थे। अज्ञात परंतु सर्वोच्च शक्ति (ईश्वर) के अस्तित्व का बोध था।

प्रश्न 13.
क्या ऋग्वेद काल में आज की तरह पृथक सैन्य-संगठन थे?
उत्तर:
नहीं। वहाँ पर सभाएँ आयोजित करके निश्चय लिए जाते थे। आम-नागरिकों को ही युद्ध में अपने मुखिया के साथ भाग लेना पड़ता था।

प्रश्न 14.
ब्राह्मणों का कार्य-नाम क्या था ?
उत्तर:
पुरोहिता

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

प्रश्न 15.
उस काल के राजा कौन थे और क्या करते थे ?
उत्तर:
समुदाय या संगठन का अनुभवी एवं बुद्धिमान वृद्ध अथवा साहसी और वीर एवं युद्धप्रिय नवयुवक सभा के द्वारा राजा चुना जाता था। वह एक गणतंत्र का प्रधान था। सभा सर्वोपरि थी और किसी को भी किसी समय राजा बना सकती थी। वे युद्ध करते और विजित धन-संपत्ति का कुछ भाग अपने पास रखते थे। कुछ भाग पुरोहित को और शेष समस्त धन-संपत्ति आम जनता में बाँटी जाती थी।

प्रश्न 16.
ऋग्वेद के श्लोकों की रचना करने वालों ने स्वयं को क्या कहा है ?
उत्तर:
आर्य।

प्रश्न 17.
आर्यों के प्रतिद्वंदी कौन थे?
उत्तर:
दस्यु या दास (अनार्य) जो भिन्न भाषाएँ बोलते थे और यज्ञ अनुष्ठान नहीं करते थे।

प्रश्न 18.
ऋग्वेद कहाँ लिखा गया ?
उत्तर:
भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग (सिन्धु नदी के घाटी क्षेत्र) में लिखा गया क्योंकि इसमें सिन्धु और उसकी सहायक नदियों का बार-बार उल्लेख हुआ है।

प्रश्न 19.
महापाषाण क्या थे?
उत्तर:
पत्थरों की विशाल शिलाएँ जो कनगाह या श्मशान स्थल का संकेत देती थीं।

प्रश्न 20.
महापाषाण की कब्रगाहें किस-किस रूप में पाई गई हैं ?
उत्तर:
(i) कहीं केवल एक विशाल शिला को जमीन में खड़ा किया गया है
(ii) कहीं कब्र के ऊपर कई शिलाओं को वृत्ताकार पंक्ति में गाड़ा गया है।

प्रश्न 21.
महापाषाणी कब्रों को तैयार करते समय दक्षिण भारत के लोग किस क्रम में कार्य करते थे?
उत्तर:
1. अनुकूल शिलाओं को ढूँढना
2. शिलाओं को तोड़ना
3. उन्हें कब्रस्थल पर ढोकर लाना
4. उचित आकार देना
5. खड्ड खोदना, शव को गाड़ना
6. शिलाओं को सही स्थान पर रखना
7. उन्हें सही आकार देने की कोशिश करना।

प्रश्न 22.
सभी महापाषाणी कब्रों में एक जैसी बातें क्या देखी गई हैं ?
उत्तर:
1. शवों को काली और लाल मिट्टी के पात्रों के साथ गाड़ा गया है।
2. लौह-औजार और हथियार, घोड़े के कंकाल, उसकी लगाम, काठी आदि तथा पत्थर और सोने के आभूषण रखे गए हैं।

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प्रश्न 23.
क्या हड़प्पा के नगरों की सभ्यता काल में लोहे की खोज हो चुकी थी?
उत्तर:
नहीं। यह खोज वैदिक काल में ही हुई।

प्रश्न 24.
ब्रह्मगिरि (आंध्रप्रदेश) के पुरातत्व स्थल पर पाई गई महापाषाणी कब्र में कौन-कौन सी चीजें मिली हैं ? इससे आप क्या अनुमान लगा सकते हैं ?
उत्तर:
सोने की माला के 33 मनके पत्थर की माला के दो मनके, ताँबे के चार कंगन और एक शंख। इससे जानकारी मिलती है कि यह कन किसी मुखिया, सरदार जैसे समाज प्रमुख की होगी। हाँ यह नहीं कहा जा सकता कि वह पुरुष था या महिला क्योंकि चूड़ी महिलाएं पहनती हैं तो कंगन / कड़े पुरुष भी पहनते हैं।

प्रश्न 25.
एक परिवार के मृतकों को एक ही महापाषाण की कब्र में कैसे दफनाया जाता होगा?
उत्तर:
पुरातत्वविदों को ऐसी महापाषाण शिलाएँ मिली हैं कि जिनके बीच में एक मूका (खिड़कीनुमा) रिक्त स्थान रखा गया संभवत: इसी मूका के रास्ते कब तल तक उतरकर वे लोग परिवार के अन्य शवों को गाड़ते तथा उनके खाने-पीने का सामान, आभूषण आदि रखते थे।

प्रश्न 26,
पाषाणों को एक वृत्ताकार परिपथ में क्यों रखा जाता होगा?
उत्तर:
सही कब्रस्थल की पहचान के लिए। इस पहचान के आधार पर बाद में ठीक उसी कब्र पर पहुँचा जा सकता था जो परिवार के पहले मृतक के लिए बनाई गई थी।

प्रश्न 27.
भीमा नदी की सहायक नदी ‘घोड़’ के किनारे इनामगाँव (महाराष्ट्र) नामक पुरातत्व स्थल में लोग कितनी अवधि तक रहे ?
उत्तर:
इस पुरातत्व स्थल पर लोगों का आगमन आज से 3600 वर्ष पूर्व हुआ और 2700 वर्ष पूर्व तक वे वहाँ रहे अर्थात् 3600-2700 = 900 वर्ष की अवधि तक यहाँ प्राचीन लोगों की आबादी रही।

प्रश्न 28.
इनामगाँव में कितने तरह की को पाई गई हैं ?
उत्तर:
1. घर के भीतर बनाई गई कब्र
2. घर के पिछवाड़े बनाई गई कब्र और
3. कई कमरों वाले घर के पिछवाड़े बनाई गई कब्रा

प्रश्न 29.
बच्चे और वयस्क मृतक के कंकाल को कैसे पहचाना गया ?
उत्तर:
बच्चे के कंकाल वयस्क के पूर्ण विकसित कंकाल की तुलना में छोटे होते हैं।

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प्रश्न 30.
पुरुष और महिला मृतक की कन को कैसे पहचानते हैं ?
उत्तर:
1. चूड़ियाँ और अन्य अंगारिक सामान
2. महिलाओं की उरोस्थि (नितम्ब की हड्डी) पुरुष की तुलना में अधिक चौड़ी और मोटी होती है।

प्रश्न 31.
चरक नामक प्राचीन चिकित्सक के अनुसार मनुष्य के शरीर में हड्डियों की संख्या कितनी है?
उत्तर:
360 हड्डियाँ (आधुनिक शरीर-रचना विज्ञान के अनुसार 206 हड्डियाँ)।

प्रश्न 32.
चरक ने आधुनिक शरीर-रचना विज्ञान की तुलना में मानव शरीर की हड्डियाँ अधिक क्यों बताई होगी?
उत्तर:
संभवत: चरक ने दाँत, सन्धियों और उपास्थि (यथा नाक और कान की लोचदार हड्डी) की संख्या भी स्थूल हड्डियों में जोड़ दी होगी।

प्रश्न 33.
चरक संहिता कब लिखी गई?
उत्तर:
आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व।

प्रश्न 34.
इनामगाँव (महाराष्ट्र) के लोगों का मुख्य भोजन क्या था ?
उत्तर:
उनका मुख्य भोजन माँस था। वे भैंस, बकरी, भेड़, कुत्ता, घोड़ा, गधा, सूअर, सांभर, चीतल, कृष्णमृग, बारहसिंघा, खरगोश, नकुल, विविध पक्षियों, मगरमच्छ, कछुआ, केकड़ा और मछली का गोश्त खाते थे। बेर, जामुन, आँवला, खजूर तथा कई तरह के सरस फल भी उनके भोजन में सम्मिलित थे।

प्रश्न 35.
लेखन-कला का आरंभ कब और कहाँ हुआ ?
उत्तर:
चीन में। आज से 3500 वर्ष पूर्व।

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प्रश्न 36.
लेखन-कला के आरंभिक रूप की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
1. राजाओं द्वारा हड्डियों पर प्रश्न लिखाए जाते थे।
2. ऐसे प्रश्न भविष्य की जिज्ञासा वाले थे।
3. इन्हें आग में डाला जाता था और फिर बाहर निकाल कर चटके हुए अक्षरों एवं शब्दों के आधार पर भविष्य कथन किया जाता था।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पुस्तक और श्मशान अतीत को जानने के महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए यह उल्लेख करना आवश्यक है कि पुस्तक वस्तुतः संबंधित व्यक्ति के अपने जीवन-काल में भोगे गए पदार्थ, समाज, समुदाय, देश, राज्य, राजनीति, धर्मनीति (Ethics), अपनी मनोदशा और मनोविचार, रुचियाँ, किसी विषय विशेष की दिशा में किए गए कार्य आदि का विवरण है।

इसी विवरण के आधार पर अतीत की संपूर्ण गतिविधियाँ, स्थिति और परिस्थिति का परिरक्षण, विविध पुस्तकों का अध्ययन, परिशीलन, चिन्तन और निष्कर्ष आधार पर किया जाता है। श्मशान/कब्रगाह वस्तुत: व्यष्टि के सामाजिक संबंध, प्रचलित आस्था और विश्वास, रहन-सहन के तौर-तरीके, आर्थिक परिस्थिति, भावात्मक संज्ञान आदि के साक्ष्य प्रस्तुत करने वाला दीर्घावधि तक संचित कोष हैं। उदाहरणार्थ-महापाषाणी कब्रगाहों से पुरातत्वविदों को प्राप्त विविध जानकारी।

प्रश्न 2.
वेदों के बारे में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
वेद संख्या में चार हैं:
1. ऋग्वेद
2. यजुर्वेद
3. सामवेद और
4. अथर्ववेद।
इन चारों वेदों में देवी-देवताओं और प्रकृति के विविध स्वरूपों यथा-पेड़-पौधों, महत्त्वपूर्ण पशु (गाय आदि) की उपासना के मंत्र और स्तुतियाँ लिखी गई हैं। ऋग्वेद विश्व का सबसे प्राचीनतम और पहला संस्कृत में लिपिबद्ध ग्रंथ है। आज से लगभग 150 वर्ष पूर्व कश्मीर में इसकी भूर्ज छाल पर अंकित पांडुलिपि प्राप्त हुई। इसको अब पुणे (महाराष्ट्र) के संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। इसी पांडुलिपि के आधार पर इसका अनुवाद अब हिन्दी, अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में किया जा चुका है।

प्रश्न 3.
ऋग्वेद काल के राजा और लगभग 3500 वर्ष पूर्व के चीन के शासकों के बीच क्या अंतर था?
उत्तर:

ऋग्वेद काल के राजाचीन के शासक
(i) ये वस्तुतः एक जन (गणतंत्र) के मुखिया थे।(i) ये अनुवांशिक पद वाले राजा थे।
(ii) इन गणतंत्रों में सभा के पास सर्वोच्च शक्ति थी। वह प्रयोजन अनुसार राजा का चयन करती थी।(ii) यहाँ के राजा का एकछत्र  और अनन्य शासन था। उसको  सर्वोच्च शक्तियाँ प्राप्त थीं।
(iii) ये वीर, साहसी और युद्धप्रिय थे।(iii) ये स्वभाव से कायर प्रतीत होते हैं क्योंकि अपने भविष्य को हड्डियों में प्रश्न लिखकर तथा उन्हें जलाकर जानने की चेष्टा करते थे।
(iv) ये लोहे के विविध उपयोग और प्रयोग करते थे।(iv) इन्हें लोहे की जानकारी नहीं थी।
(v) ये युद्ध जीतने से प्राप्त थे धन-संपत्ति को तीन भागों में वितरित करते थे। जनता भी इस धन में हिस्सा पाती थी। सादगीपूर्ण जीवन जीवन व्यतीत करते थे।(v) ये निरंकुश शासक और जनता का शोषण करके अतुल संपत्ति का संचय किया करते थे। ये विलासितापूर्ण व्यतीत करते थे।

प्रश्न 4.
ऋग्वेद के श्लोकों को ‘सूक्त’ क्यों कहते होंगे?
उत्तर:
वस्तुतः ‘सूक्त’ शब्द सु + उक्ति अर्थात् सर्वहित/लोकहित करने वाली बातें या कथन के अर्थ में अभिप्रेत है। इसमें नदियाँ, झीलें, सागर, जीव-जन्तु, स्थावर और जंगम संपदा (अर्थात् चल और अचल), समस्त प्राकृतिक, मानवीय, पुरातात्विक ससाधन आदि का पूजनीय/ सम्मानित स्थान दिया गया है। सर्वसमभाव, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, समष्टि में व्यष्टि एवं व्यष्टि तथा समष्टि के भावात्मक, अध्यात्मिक संबंध आदि का सुन्दर निरूपण है।

वस्तुत: पारिस्थितिक तंत्र और जैव पारिस्थितिकी का ऋग्वेद के रचनाकारों को विशद अनुभव रहा होगा। वेदों को श्रुति भी कहते हैं क्योंकि इसके श्लोकों का पाठ, चिन्तन, अभ्यास, प्रयोग (कार्य) तत्कालीन पुरोहितों द्वारा सार्वजनिक स्थलों, गुरुकुलों, सभा-भवनों आदि में नियमित रूप से कराया जाता था एवं उन पर ‘प्रश्नोत्तर सत्र’ भी संपन्न किया जाता था। निरंतर अभ्यास से ये श्लोक लोगों को कंठस्थ हो जाते थे।

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प्रश्न 5.
संस्कृत भाषा को भारोपीय क्यों कहा जाता है ?
उत्तर:
भारोपीय शब्द में भारत एक यूरोप अन्तर्निहित है। कालांतर में भाषाविदों ने विविध भाषाओं को सही तरह समझ पाने के लिए उनके समूह बनाए। आदिकाल की भाषा संस्कृत है और भारत की अन्य भाषाएँ-असमी, गुजराती, हिन्दी, कश्मीरी (डोगरी) तथा सिन्धी हैं। यूरोप महाद्वीप के देशों की भाषाएँ देश के नाम के आधार पर फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, आंग्ल (अंग्रेजी), इतालवी आदि हैं। इन सभी भाषाओं को एक समूह में रखा गया है और उस समूह को भारोपीय भाषा समूह नाम दिया गया है।

इन भाषाओं का एक समूह बनाने का आधार इनके बहुत से शब्दों का उच्चारण, अर्थ, अभिप्रेत/आशयित अर्थ आदि में समरूपता के लिया गया है। उदाहरणार्थ-मातृ (संस्कृत), माँ (हिन्दी) और मदर (mother) अंग्रेजी।

प्रश्न 6.
वैदिक काल में समाज की संगठन व्यवस्था कैसी थी? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वैदिक काल का सामाजिक संगठन :
(i) यह एक गणतंत्र जैसी व्यवस्था थी। इसमें मुखिया या प्रधान को वीरता, साहस, अनुभव, श्रेष्ठता आदि मानदंडों के आधार पर चुना जाता था। यह आनुवांशिक पद नहीं था। इस काल में ‘सभा’ या ‘परिषद’ को सर्वोच्च शक्ति प्राप्त थी। परिषद के सदस्य समाज के सभी वर्गों के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते थे। परिषद चाहे तो मुखिया को किसी भी समय हटा सकती थी। बहुधा कार्य। प्रयोजन के आधार पर मुखिया का तदर्थ चयन भी किया जाता था।

(ii) इस संगठन में धन-संपत्ति (सकल आय) को तीन भागों में वितरित किया जाता था। एक भाग शासक (मुखिया) वर्ग, दूसरा पुरोहित वर्ग और तीसरा भाग जनता में बाँटा जाता था। संपत्ति की प्राप्ति बहुधा युद्धों से होती थी। अच्छे चरागाहों, उपजाऊ भूमियों, जल-स्रोत आदि पर कब्जा करने तथा युद्धबंदियों को दास बनाकर कार्य लेने के लिए ऐसे युद्ध होते थे। इन गणतंत्रों के मुखिया का कोई महल, राजधानी, नगर या सैन्य संगठन नहीं होता था। ‘सभा’ या ‘परिषद्’ ही कार्य के अनुसार आम नागरिकों में से सैनिकों का चयन करती थी। तात्पर्य यह है कि मुखिया या प्रशासक को किसी तरह के विशेषाधिकार प्राप्त नहीं थे।

प्रश्न 7.
महापाषाणी कब्रों की क्या विशेषताएँ थीं ? इन्हें तैयार करते समय तत्कालीन लोगों की क्या धारणा रही होगी?
उत्तर:
महापाषाणी कब्रों की विशेषताएँ :
(i) कत्रों को पहचानने में ये संकेतक का कार्य करती थी।

(ii) कि एक परिवार के मृतक एकं ही श्मशान क्षेत्र (महापाषाणों की वृत्ताकार परिधि) के भीतर दफन किए जाते थे अतः ऐसे क्षेत्र की एकदम सही जानकारी बाद में ये भी आवश्यक थी इसी कारण ऐसी विशेष कनें बनी।

(iii) मिन की एक महापाषाणी कब्र में मानव कंकाल के साथ ही बेशकीमती कंगन, सोना, ताँबा आदि धातुओं के बर्तन और आभूषण तथा खाद्य सामग्री प्राप्त हुई है। यह भी इन कब्रों की ही विशेषता है।

(iv) नामंगाँव की एक कब्र ऐसी है जिसमें पाँच कमरों का एक घर ही कब्र को समर्पित है। इस घर के सभी कमरों में खाद्यान्न, अस्त्र-शस्त्र, वस्त्र, आभूषण आदि का प्रचुर भंडार है तथा कब्र को पिछवाड़े खोदा गया है। एक पक्की मिट्टी से निर्मित मर्तबान की बनावट वाले पात्र में मृतक का कंकाल मिला है। शहर के एकदम मध्य में रहने से यह अनुमान लगाया गया है कि यह कन किसी नगराधीश, नगर-प्रमुख जैसे भद्र-पुरुष की रही होगी।

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प्रश्न 8.
इनामगाँव (महाराष्ट्र) पुरातत्व स्थल के लोग क्या-क्या कार्य-व्यवसाय करते थे? सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महाराष्ट्र में भीमा नदी की सहायक घोड़ नदी के किनारे यह पुरातत्व स्थल खोजा गया है। यहाँ के लोगों का कार्य-व्यवसाय निम्नलिखित स्वरूपों का था:
(i) पशुपालन एवं कृषि कार्य
(ii) आखेट (पशु, पक्षी, जलचर)
(iii) मछली पकड़ना
(iv) खाद्य संग्रह कर्म।

(i)पशुपालन एवं कृषि कर्म के प्रमाण:
गेहूँ, जौ, चावल विविध दालें, मोटा अनाज (ज्वार, कोदो, बाजरा), मटर (फलियों वाले पौधे) एवं तिल के बीज पाए गए हैं। भैंस, बकरी, भेड़, कुत्ता, घोड़ा, गधा, सूअर, सौभर, चीतल, कृष्ण मृग, बारहसिंघा, खरगोश और नेवला जैसे चौपाए पशुओं के कंकाल, कई प्रजाति के पक्षियों, मगरमच्छ, कछुआ, केकड़ा और मछली जैसे जलचरों की विविध प्रजातियों के कंकाल भी मिले हैं। इससे प्रमाणित होता है कि वे लोग पशुपालन व्यवसाय करते थे।

(ii) आखेट:उक्त पशु-पक्षियों, जलचरों के कंकाल स्वत: ही बताते हैं कि लोग मांसाहारी थे तथा इनका शिकार किया करते थे।

(iii) मछली पकड़ना:मछली मारने के काँटे, विशेष किस्म की मच्छीमार नावें आदि एवं मछलियों के कंकाल प्रकट करते हैं कि लोग मछली मारने का व्यवसाय भी करते थे।

(iv) खाद्य संग्रह कर्म:
बेर, आँवला, जामुन, खजूर और विविध किस्म के रसदार फलों के बीजों का मिलना दर्शाता है कि इन जंगली फलों की महाराष्ट्र में उत्पत्ति होती थी और वैदिक काल का एक मानव-वर्ग पुरापाषाण काल से प्रचलित इस प्राथमिक कार्य को भी करता था। यह यायावर (घुमंतू) लोगों का वर्ग था जो एक स्थान से दूसरे स्थान को लगातार भ्रमण करते थे एवं घर-द्वार रहित थे।

क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. पुस्तकालय क्या है ?:वह स्थान जहाँ विश्व की विविध भाषाओं की पुस्तकें, अनेक विषयों में अध्ययन हेतु उपलब्ध रहती है।
2. पुस्तकालयों का क्या महत्त्व है ?:ये अतीत की घटनाओं, आविष्कारों, खोजों, प्रशासन, समाज, आहार-व्यवहार आदि की जानकारी पुस्तकों के माध्यम से देते हैं।
3. वेदों को श्रुति क्यों कहते हैं ?:एक पीड़ी से दूसरी पीढ़ी तक श्लोकों को मौखिक रूप से सुना, समझा और याद कराकर पहुँचाने के कारण।
4, तीन देवता कौन-कौन से हैं ?:अग्नि, इन्द्र और सोम (एक पौधा जिससे सोमपेय पदार्थ तैयार किया जाता था)
5. ऋग्वेद में कितने श्लोक हैं ?:एक हजार से अधिक।
6. भारोपीय भाषा परिवार की सदस्य भाषाएँ कौन-कौन सी हैं?:असमी, गजराती, हिन्दी, कश्मीरी, सिन्धी, और संस्कृत (भारतीय भाषाएँ) एवं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, यूनानी, इटालवी, स्पेनिश (यूरोपीय भाषाएं)।
7. तिब्बत-वर्मा परिवार की भाषाएँ:भारत के उत्तर-पूर्व में बोली जाने वाली भाषाएँ।
8. द्रविड़ परिवार की भाषाएँ:तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम।
9. आस्ट्रो-एशियाई भाषाएँ:झारखंड और मध्य भारत में बोली जाने वाली भाषाएँ।
10, वैदिक साहित्य का केवल पाठ और श्रवण क्यों होता होगा ?:मुद्रण कला का आविष्कार उस समय तक न होने के कारण।
11. ऋग्वेद में किन नदियों का नाम नहीं लिया गया है ?:महानदी, तापी, नर्मदा, चंबल, सोन, गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार, कावेरी।
12. ऋग्वेद की पांडुलिपि कहाँ और कब प्राप्त हुई ?:कश्मीर के आज से लगभग 180 वर्ष पूर्व।
13. यज्ञ में आहुति किन-किन चीजों की दी जाती थी ?:घी, खाद्यान्न, तिलहन और यदा-कदा पशुओं की।
14. युद्ध से प्राप्त धन का वितरण कैसे होता था ?:शासक, पुरोहित और जनता में वितरित होता था।
15. युद्ध करने का क्या प्रयोजन था?:चौपाए पशुओं को पकड़ने, कृषि और चरागाह भूमि पर कब्जा करने, जल संसाधन तथा लोगों को अपने अधीन करने के लिए।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 5 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

16. क्या वैदिक काल में राजा का पद पैतृक था ?:नहीं।
17. “जन” और “विश” शब्दों का प्रयोग किसके लिए किया गया है ?:गणतंत्र स्वरूप के राज्यों हेतु।
18. ‘दास’ या ‘दस्यु’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है ?:अपने विरोधी राज्य या शत्रु गणतंत्र के लिए।
19. महापाषाण/बृहत् पाषाण क्या हैं ?:दक्कन और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों की प्राचीनतम कब्रगाह। श्मशान स्थला
20. महापाषाण खड़ा करने की परंपरा कब आरंभ हुई?:आज से लगभग 3000 वर्ष पूर्व।
21. महापाषाणी कब्रगाहें कहाँ पाई गई हैं ? आदिचनाल्लूर (केरल), पेचमपल्ली (तमिलनाडु), ब्रहमगिरि (आंध्र प्रदेश), हुस्गी (महाराष्ट्र), हल्लूर (महाराष्ट्र), दाउजली हेडिंग (त्रिपुरा)
22. काली और लाल मिट्टी के बर्तन कहाँ पाए गए हैं ? महापाषाणी कब्रगाहों में गड़े हुए।
23. ब्रहमगिरि की एक महापाषाणी कब्रगाह में क्या-क्या चीजें मिली हैं? एक मानव कंकाल, 33 सोने के मनके, 2 पत्थर निर्मित मनके, 4 ताँबे की चूड़ियाँ और एक शंख।
24. एक ही कन में कई नर कंकाल मिलने से क्या अनुमान लगाया गया है? एक ही परिवार के सदस्यों के शव अलग-अलग _ समय पर गाड़े गए होंगे।
25. कन्नगाह के ऊपर वृत्ताकार विशाल पत्थर क्यों रखा जाता होगा?:कब्र की पहचान के लिए ताकि बाद में भी उसके दर्शन करने आया जा सके।
26. इनामगाँव में कितनी तरह की कनें पाई गई हैं ?:

  • सिर उत्तर की ओर रखकर शव के शरीर को पूरी लंबाई में पृथ्वी में गाड़ना
  • घर के ही एक हिस्से में शव गाड़ना,
  • घर के पिछवाड़े मिट्टी के बहुत बड़े पात्र में शव को रखकर गाड़ना।

27. कब्र में महिला का शव है या पुरुष का कैसे पता चलता रहा होगा?:

  • कंकाल के साथ आभूषणों का रहना
  • कंकाल की उरोस्थि अधिक चौड़ी मिलने की दशा में महिला का शव होना।

28, ‘चरक संहिता’ किसने और कब लिखी ?:लगभग 2000 वर्ष पूर्व चरक नामक बौद्ध अनुयायी ने (आयुर्वेद विशेषज्ञ)।
29. इनामगाँव (महाराष्ट्र) के लोग कौन-कौन से फल खाते थे ? बेर, आँवला, जामुन, खजूर, तथा कई अन्य सरस फल।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

HBSE 6th Class History क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें Textbook Questions and Answers

कल्पना करो:

वैशाली के उस सभागार में तुम अंदर झाँक रहे हो जहाँ मगध के राजाओं द्वारा आक्रमण का सामना करने के विषयों पर चर्चा की जा रही है। तुमने क्या सुना?
उत्तर:
वैशाली के सभा-भवन में हमें यह सुनाई देगा कि आठ गणों वाले वज्जि परिसंघ पर मगध का अजातशत्रु आक्रमण करने वाला है। सभासदों में से कुछ ने परामर्श दिया कि मल्ल और काशी के नौ-नौ गणों वाले परिसंघों की सहायता लेकर अजातशत्र का मुकाबला किया जाए। तुरंत दूत भेजा जाए और सहयोग वार्ता के लिए उक्त दोनों परिसंघों के राजाओं को आमंत्रित किया जाए।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

आओ याद करें:

Class 6th History Chapter 6 HBSE राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य प्रश्न 1.
सही या गलत बताओ:
(क) अश्वमेध के घोड़े को अपने राज्य से गुजरने की छूट देने वाले राजाओं को यज्ञ में आमंत्रित किया जाता था।
(ख) राजा के ऊपर सारथी पवित्र जल का छिड़काव करता
(ग) पुरातत्वविदों को जनपदों की बस्तियों में महल मिले हैं।
(घ) चित्रित-धूसर पात्रों में अनाज रखा जाता था।
(अ) महाजनपदों में बहुत से नगर किलाबंद थे।
उत्तर:
(अ) सत्य
(ब) असत्य
(स) असत्य
(द) असत्य:
(य) सत्य

HBSE 6th Class Social Science राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य प्रश्न 2.
नीचे दिए गए खानों में निम्नलिखित शब्द भरो:
शिकारी-संग्राहक, कृषक, व्यापारी, शिल्पकार, पशुपालक
HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य-1
उत्तर:
(i) कृषक
(ii) शिल्पकार
(ii) पशुपालक
(iv) व्यापारी
(v) शिकारी संग्राहक।

राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 3.
समाज के वे कौन-से समूह थे, जो गणों की संभाओं में हिस्सा नहीं ले सकते थे?
उत्तर:
शूद्रों, महिलाओं, दासों और कर्मकार समूहों को।

आओ चर्चा करें:

प्रश्न 1.
महाजनपद के राजाओं ने किले क्यों बनवाए?
उत्तर:
किले बनाने के कारण:
1. अन्य राजाओं के आक्रमण से प्रतिरक्षा के लिए।
2. अपने वैभव और समृद्धि का प्रभाव जमाने के लिए।
3. किले के भीतर की भूमि और जनता पर सुगमता से नियंत्रण रखने के लिए।
4. भूमिहीन बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए।
5. भवन-निर्माण शिल्प को प्रोत्सहित के लिए।
6. युद्ध के समय कुशल रणनीति बनाने के लिए।

प्रश्न 2.
आज के शासकों के चुनाव की प्रक्रिया जनपदों के चुनाव से किस तरह भिन्न थी?
उत्तर:
जनपदों के शासक तदर्थ आधार पर कार्य-प्रयोजन से चुने जाते थे जबकि आधुनिक चुनाव प्रक्रिया निधारित कार्य-अवधि (सामान्यतः पाँच वर्ष) की है। जनपदों की सभा के समस्त सदस्यों के बहुमत से शासकों का चयन होता था जबकि आधुनिक निर्वाचन सर्वजन मत (वयस्क मताधिकार) के आधार पर होता है।

जनपदों की चुनाव प्रक्रिया में व्यक्ति के साहसिक, वीरतापूर्ण, युक्तिपूर्ण कार्यों की पृष्ठभूमि के आधार पर चयन होता था लेकिन |आज पच्चीस वर्ष के प्रत्येक नागरिक को चुनाव लड़ने का हक है। यह अलग बात है कि सामाजिक प्रभाव न रहने की दशा में

उसकी जमानत ही जब्त हो जाए। नागरिक की शिक्षा, संस्कार, । पारिवारिक पृष्ठभूमि, आधार आदि की सर्वथा उपेक्षा कर दी जाती है। इससे राजनीति का अपराधीकरण और समाज का उत्पीड़न बढ़ता है। शासकों का कोई महल नहीं होता था और न कोई विशेषाधिकार ही उन्हें दिया जाता था। वे आम नागरिक थे और समिति के नियंत्रण से राजकाज चलाते थे। इसके विपरीत आज के शासकों (प्रतिनिधियों) को विविध सुख-सुविधाएँ, विशेषाधिकार प्राप्त हैं तथा अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में जाने के लिए उन्हें प्रक्षेपास्त्र प्रतिरोधक (bullet proof) वाहन और कवच (jacker) जैसी आत्मरक्षक चीजें भी उपलब्ध हैं।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

आओ करके देखें:

प्रश्न 3.
तुम्हारी पुस्तक के अंत में दिए गए राजनीतिक मानचित्र में अपना राज्य ढूँढ़ो। क्या वहाँ प्राचीन जनपद थे? अगर हाँ तो उनके नाम लिखो। अगर नहीं, तो अपने राज्य के सबसे नजकदा पड़ने वाले जनपदा के नाम बताओ।
उत्तर:
यह प्रश्न नितांत छात्र के व्यष्टि अवस्थान से संबंध रखता है अतः छात्र ही इसका सही उत्तर दे सकते हैं। कुछ संकेत निम्नवत् दिए जा सकते हैं
संकेत:
यदि आप दिल्ली में रहते हैं तो यहाँ का पुराना किला प्राचीन जनपद था। इसके उत्तर में कुरु, दक्षिण में अवन्ति, पूर्व में कोशल और पश्चिम में गाँधार (पाकिस्तान) नामक जनपद था। एकदम पास-पास वाले जनपद पांचाल, कौशाम्बी और सूरसेन आदि थे।

प्रश्न 4.
प्रश्न 2 के उत्तर में बताए गए समूहों में से कौन से समूह आज भी कर देते हैं।
उत्तर:
करदाता समूह हैं –
1. व्यापारी
2. शिल्पकार
3. पशुपालका

प्रश्न 5.
प्रश्न 3 के उत्तर में बताए गए समूहों में किन-किन को आज मतदान का अधिकार प्राप्त है?
उत्तर:
महिलाओं सहित सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। कर्मकार (भूमिहीन श्रमिक) भी मतदान करते हैं और आज के युग में दास एवं दासी वर्ग नहीं है।

HBSE 6th Class History राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अश्वमेध क्यों किया जाता था?
उत्तर:
यह एक राजा के शक्ति परीक्षण और राज्य-विस्तार की कार्यविधि थी। यह राजा के चुनाव की प्रक्रिया भी थी।

प्रश्न 2.
अश्वमेघ यज्ञ में सम्मिलित होने वाले कौन-कौन – से वर्ग थे?
उत्तर:
1. अश्वमेध करने
2. वाला राजा
3. अधीनस्थ राजा
4. पुरोहित
5. सारथी
6. वैश्य
7. सैनिक।

प्रश्न 3.
उत्तर वैदिक ग्रंथों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद एवं अन्य ब्राह्मण ग्रंथ।

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प्रश्न 4.
उत्तर वैदिक ग्रंथों की क्या विशेषता है?
उत्तर:
ये ग्रंथ पूर्व-वैदिक काल के ऋग्वेद की तरह स्तुतिगान तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनमें सामाजिक नियमों, विविध अनुष्ठानों एवं उनकी कार्य-विधियों का उल्लेख है।

प्रश्न 5.
उत्तर वैदिक काल का धनी वर्ग कौन था?
उत्तर:
पुरोहित, योद्धा, कृषक और व्यापारी वर्ग।

प्रश्न 6.
उत्तर वैदिक काल में निर्धन वर्ग कौन था?
उत्तर:
पशुपालक, शिल्पकार, श्रमिक, मछली पकड़ने वाले, शिकारी और भोजन संग्राहक।

प्रश्न 7.
ब्राह्मणों और क्षत्रियों का क्या कार्य था?
उत्तर:
ब्राह्मणों का कार्य वेदों का अध्ययन और यज्ञ करना था जबकि क्षत्रियों का कार्य युद्ध करना और लोगों की रक्षा करने का था।

प्रश्न 8.
वैश्य और शूद्र वर्ग का क्या कार्य था?
उत्तर:
वैश्यों का कार्य खेती करना, पशुपालन और व्यापार करने का था। शूद्रों का कार्य ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य (तीन वर्ण) की सेवा करने का था।

प्रश्न 9.
वर्ण क्या थे और किस आधार पर बनाए गए
उत्तर:
समाज का अलग-अलग वर्ग-विभाजन ही वर्ण थे। इनको कार्य के अनुसार विभाजित किया गया था लेकिन आगे चलकर इनका आधार जन्म को मान लिया गया।

प्रश्न 10.
वेदों के अध्ययन का अधिकार किन्हें नहीं दिया गया था?
उत्तर:
महिलाओं तथा शूद्रों को।

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प्रश्न 11.
अछूत या अस्पृश्य वर्ग किनका था?
उत्तर:
1. शिल्पकार
2. शिकारी
3. भोजन-संग्राहक और
4. श्मशान घाट के चंडाल (शवदाह करने वाले)।

प्रश्न 12.
वर्ण-व्यवस्था का विरोध करने के क्या आधार थे?
उत्तर:
1. कुछ राजाओं का स्वयं को पुरोहितों से श्रेष्ठ समझना
2. जन्म-आधार पर वर्ण का निर्धारण उचित न होना
3. व्यवसाय को भेदभाव का आधार न मानना
4. यज्ञ आदि संपन्न करने में कुछ लोगों की उपेक्षा करना अनुचित
5. छुआछूत से समाज का विघटन हो सकता था।

प्रश्न 13.
कुछ जनपदों की बस्तियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
हस्तिनापुर (मेरठ), अतरंजीखेड़ा (एटा) और पुराना किला (दिल्ली)।

प्रश्न 14.
जनपदों के लोगों का क्या व्यवसाय था?
उत्तर:
ये पशुपालक और कृषक थे।

प्रश्न 15.
जनपदों का कृषक वर्ग कौन-कौन सी फसलें उगाता था?
उत्तर:
चावल, गेहूँ, जौ, धान, कई तरह की दालें, गन्ना, तिल तथा सरसों।

प्रश्न 16.
उत्खनन से प्राप्त मिश्रित धूसर (स्लेटी) बर्तनों की बनावट कैसी है?
उत्तर:
ज्यामितीय आकार के हैं। इनमें ज्यादातर थालियाँ और कटोरियाँ ही मिली हैं। वे बहुत ही पतली सतह के और चिकने हैं।

प्रश्न 17.
महाजनपद क्या थे?
उत्तर:
महाजनपद वस्तुत: सरकार की जनपद से बड़ी संस्था थी। इनकी एक राजधानी होती थी और चारों ओर से किलेबंदी अथवा लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊँची चारदीवारी होती थी। प्रत्येक महाजनपद में उसकी अपनी नियमित सेना होती थी।

प्रश्न 18.
महाजनपदों के राजा ऋग्वेद में वर्णित राजाओं से किस प्रकार भिन्न थे?
उत्तर:
ऋग्वेद में वर्णित राजा केवल समिति/सभा द्वारा तदर्थ चुने गए मुखिया होते थे जबकि महाजनपदों के राजा अश्वमेध यज्ञ के द्वारा चुने जाते थे और उनके अधीन जनपदों के कई राजा रहते थे। ऋग्वेद में वर्णित राजाओं द्वारा जनता पर कर नहीं लगाए जाते थे जबकि महाजनपदों के राजा कर लगाते थे।

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प्रश्न 19.
महाजनपदों में कौन-कौन से कर लगाए गए थे?
उत्तर:
1. कृषि उत्पाद पर
2. वृत्ति कर
3. शिल्प कर
4. पशु कर
5. बिक्री कर.
6. वन्य उत्पाद कर
7. वन्य पशु आखेट कर ।

प्रश्न 20.
शिकारी तथा खाद्य-संग्राहक लोग कर के रूप में राजा को क्या देते थे?
उत्तर:
शिकारी को वर्ष में किए गए शिकार की एक निश्चित मात्रा और खाद्य-संग्राहकों को वन से प्राप्त वस्तुओं की एक निश्चित मात्रा राजा को देनी पड़ती थी।

प्रश्न 21.
उत्तर वैदिक काल की कृषि में दो महत्त्वपूर्ण परिवर्तन क्या आए?
उत्तर:
1. लकड़ी की फाल के स्थान पर लोहे की फाल लगाकर जुताई की जाने लगी.
2. धान की बीज छिटककर बुआई के स्थान पर रोपाई की जाने लगी!

प्रश्न 22.
धान की रोपाई का कार्य कौन करते थे?
उत्तर:
दास, दासियों एवं कर्मकार (भूमिहीन खेतिहर मजदूर)।

प्रश्न 23.
महाजनपद के राजाओं ने कृषि के इन परिवर्तनों को बढ़ावा क्यों दिया होगा?
उत्तर:
1. जुताई का कायं पहले से अच्छा और सुगम हो गया था। कठोर भूमि भी खोदी जा सकती थी।
2. बुआई में बीजों की बर्बादी रुक गई थी और पैदावार भी अधिक होने लगी थी।

प्रश्न 24.
मगध कहाँ था और यहाँ कौन-कौन सी नदियाँ बहती थीं?
उत्तर:
आधुनिक बिहार ( गया, पटना और शाहाबाद जिलों तक विस्तृत भू भाग) में। यहाँ गंगा और सोन नदियाँ बहती थीं।

प्रश्न 25.
उत्तर वैदिक काल में मगध की राजधानी कहाँ थी?
उत्तर:
राजगृह (आधुनिक राजगीर), बिहार में।

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प्रश्न 26.
मगध को एक शक्तिशाली महाजनपद बनाने में किन प्राकृतिक संसाधनों का हाथ रहा होगा?
उत्तर:
1. नदियों से जल की पर्याप्त आपूर्ति
2. सघन वनों के पशु (हाथी) और लकड़ी (घर, बैलगाड़ी, रथ आदि बनाने हेतु) की प्रचुरता और
3. लौह अयस्क की खोज (हथियार और औजार बनाने हेतु) का।

प्रश्न 27.
आप किस आधार पर यह कह सकते हैं कि मगध अत्यधिक शक्तिशाली महाजनपद था?
उत्तर:
मकदुनिया का राजा सिकंदर आज से लगभग 2300 वर्ष पूर्व जब उत्तर में व्यास नदी के पास पहुंचा तो उसको मगध की विजयगाथा सुनकर इतना भय हुआ कि उसने आगे कदम नहीं रखे।

प्रश्न 28.
जनपदों की सेना और ऋग्वेद में वर्णित सेना में क्या अंतर था?
उत्तर:
जनपदों की सेना प्रशिक्षित और नियमित थी जबकि ऋग्वेद में वर्णित सेना में आम नागरिकों को तदर्थ आधार पर चुना जाता था। वे अप्रशिक्षित होते थे। जनपदों की सेना चार भागों में विभाजित थी – (i) पैदल, (ii) अश्वारोही, (iii) गजारूढ़ और (iv) रथारूड़ सेना। ऋग्वेद वर्णित सेना केवल पैदल, अश्वारोही और रथारूड़ थी। जनपदों की सेना के सैनिक मासिक वेतन पाते थे जबकि ऋग्वेद में वर्णित सैनिक अवैतनिक थे।

प्रश्न 29.
वज्जि (बिहार) की शासन व्यवस्था कैसी थी?
उत्तर:
गण या सघ कहा जाने वाली शासन व्यवस्था। यह राज्यों के एक परिसंघ जैसी थी। इसमें कई राजा एक-साथ शासन करते थे।

प्रश्न 30.
दीघ निकाय क्या है?
उत्तर:
बौद्ध धर्म का एक लोकप्रिय ग्रंथा

प्रश्न 31.
वज्जि संघ और अन्य जनपदों में क्या अंतर था?
उत्तर:
1. इसमें सामूहिक शासन कार्य होता था जबकि जनपदों में केवल एक राजा ही शासक था।
2. इसमें महिलाओं को सम्मान दिया जाता था जबकि जनपदों में उन्हें दासी बनाए जाने का वर्णन है।
3. वन्जि में नियमित रूप से सभाएँ आयोजित की जाती थीं जबकि जनपदों में केवल विशेष कार्य के लिए ही सभा का आयोजन होना था।

प्रश्न 32.
पहली लोकतंत्र या गणतंत्र व्यवस्था कब और कहाँ स्थापित हुई?
उत्तर:
एथेन्स (यूनान) में लगभग 2500 वर्ष पहले।

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प्रश्न 33.
एथेन्स में महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का तरीका क्या था?
उत्तर:
लाटरी डाली जाती थी।

प्रश्न 34.
एथेन्स में गणतंत्र या प्रजातंत्र में कौन लोग नागरिक अधिकारों से वंचित थे?
उत्तर:
1. विदेशी व्यापारी और शिल्पकार तथा
2. खानों, खेतो. घरों व कार्यशालाओं में कार्यरत दास।

प्रश्न 35.
क्या आप यह कहेंगे कि एथेन्स में गणतंत्र अपने विशुद्ध रूप में था?
उत्तर:
नहीं। एक विशुद्ध गणतंत्र में किसी भी मनुष्य को दास = रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसमें नियुक्तियाँ योग्यता के आधार पर की जाती हैं, लॉटरी आधार पर नहीं। महिला और पुरुष को समान नागरिक अधिकार रहते हैं। एथेन्स में महिलाओं को नागरिक अधिकारों से वंचित किया गया था।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विचार कीजिए कि उत्तर वैदिक काल में पशुपालक, शिल्पकार, श्रमिक, मछली पकड़ने वाले, शिकारी और भोजन-संग्राहक निर्धन क्यों रहे होंगे।
उत्तर:
1. समाज के इन व्यवसायों पर कर लगाए जाते थे।
2. ये वर्ग उपेक्षित थे और यज्ञ, अनुष्ठान, सभा-समिति आदि में भाग नहीं ले सकते थे।
3. इन लोगों को किसी तरह की राजकीय सहायता और प्रोत्साहन प्राप्त नहीं था।
4. इनके साथ दासों जैसा व्यवहार किया जाता था।

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प्रश्न 2.
वर्ण-व्यवस्था आरंभ में कार्य-आधारित थी लेकिन कालांतर में जन्म-आधारित क्यों बनी होगी?
उत्तर:
संभवत: इसके निम्नलिखित कारण रहे होंगे:
(1) कार्य के साथ मनुष्य के संस्कारों का अन्तर्गन्थन रहता है। उदाहरणार्थ-अध्यापक की वाणी, व्यवहार आदि लगातार अभ्यास के कारण स्कूल के बाहर, घर और समाज में भी उपदेश, निर्देश वाली बन जाती है।
(2) एक कार्य विशेष को करने वाले व्यक्ति का शिशु आरंभ से ही उस कार्य के संस्कारों को ग्रहण करने लगता है।
(3) उत्तर वैदिक काल में राज्य स्तर पर व्यावसायिक प्रशिक्षण, सार्वजनिक शिक्षा. बुनियादी शिक्षा आदि अवसरों का अभाव रहने और श्रम-संघों का परस्पर कोई संबंध न रहने के कारण बच्चों में विविध रुचियाँ नहीं जाग पाई वे केवल अपने पैतृक व्यवसाय तक सीमित रह गए।
(4) ब्राह्मणों को विशिष्टता वाले उस समाज में कई कार्यो को तुच्छ समझा जाता था और उन कार्यों को करने वाले लोगों को भी समाज से दूर रखा जाता था। इस कारण भी भावी-पीड़ी में नए संस्कारों का प्रस्फुटन न हो पाया।

प्रश्न 3.
राजतंत्र और गणराज्य में क्या अंतर है?
उत्तर:
राजतंत्र:
1. इसमें शासन की सारी शक्तियाँ राजा के पास रहती थीं। वह निरंकुश होता था।
2. इसमें राजा का पैतृक पद होता था। गणराज्य
3. इसमें शासन की शक्ति जनता में निहित रहती है। राजा का चुनाव भी जनता ही करती है।
4. इसमें राजा का पैतृक पद नहीं रहता और जनता अपनी इच्छा से किसी भी व्यक्ति को राजा चुन सकती है।

प्रश्न 4.
विनिमय प्रणाली के क्या दोष थे? व्यापार के विस्तार में मुद्रा (आहत सिक्के) की क्या भूमिका रही?
उत्तर:
एक वस्तु देकर उसके बदले में दूसरी वस्तु लेने को विनिमय प्रणाली (लेन-देन) कहा जाता है। उत्तर वैदिक काल की विनिमय प्रणाली में निम्नलिखित दोष थे:
(क) वस्तुओं के लेन-देन में कठिनाई: वस्तुओं को बेचने और खरीदने में कठिनाई होती थी। उदाहरणार्थ-गुजरात का नमक ढोकर पंजाब लाना और यहाँ से गेहूँ ले जाना।

(ख) अधिक वस्तुएँ न रहना:
प्रत्येक व्यक्ति आत्मनिर्भर नहीं था। उसके पास इतनी वस्तुएँ नहीं होती थी, कि उन्हें देकर वह इच्छानुसार आवश्यकता की अन्य वस्तु को ले सके। व्यापार के विस्तार में मुद्रा (आहत सिक्कों) का प्रभाव !: मुद्रा के प्रचलन ने व्यापार को आसान बना दिया था। अब वस्तुओं को दूर तक ढोकर विनिमय करने की आवश्यकता नहीं रह गई थी। व्यापारियों की संख्या भी बढ़ गई थी क्योंकि सिक्कों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना अपेक्षाकृत आसान था।

प्रश्न 5.
करों का क्या महत्त्व है? उत्तर वैदिक काल में कर किस प्रकार लगाए और वसूल किए जाते थे?
उत्तर:
करों का महत्त्व:
किसी राज्य की उन्नति, समृद्धि और सुरक्षा के लिए उसके पास संसाधनों का रहना आवश्यक है। राज्य के प्रशासन कार्यों में धन की आवश्यकता होती है। उदाहरणार्थ-सैनिकों तथा कर्मचारियों का वेतन, सभा आदि आयोजन के खर्च आदि न रहने पर राज्यकार्य कर पाना असंभव हो जाता कर लगाने और वसूली करने का ढंग: वस्तुओं के सभी उत्पादक राजा को कर भुगतान करते थे। कृषक अपनी उपज का 1/6 भाग कर के रूप में देते थे।

बुनकर, लोहार या सुनार को राजा के लिए वर्ष में 12 दिन काम करना होता था। व्यापारी माल की खरीद और बिक्री पर कर देते थे। शिकारियों और संग्राहकों को जंगल से प्राप्त वस्तुएँ देनी होती थीं और पशुपालकों को जानवरों या उनके उत्पाद को कर रूप में देना होता था।

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प्रश्न 6.
पूर्व वैदिक और उत्तर वैदिक काल के बारे में जानकारी के स्रोत बताइए।
उत्तर:
पूर्व वैदिक और उत्तर वैदिक काल के जानकारी स्रोत:
1. वेद: वेदों से हमें तत्कालीन लोगों के रहन-सहन, सामजिक संगठन, आचार-व्यवहार, आस्था और धर्म की जानकारी मिलती है।
2. अवशेष: धूसर मिट्टी के चित्रकारी वाले बर्तन, किलों के भग्नावशेष आदि बहुत सी चीजें उक्त काल के सामाजिक और राजनीति परिवेश की जानकारी कराती हैं।
3. प्राचीन कस्बे: जन, जनपद, महाजनपद और गण या संघ शासन व्यवस्था में विद्यमान किलाबंदी (चारदीवारी) वाले शहरों के अवशेष भी उस काल की बहुत सी जानकारियाँ देते हैं।
4. जैन तथा बौद्ध धर्म: इन दोनों धर्मों के प्रसिद्ध धर्मग्रन्थ यथा-दीध निकाय (प्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ) उस काल के जन-जीवन और शासन व्यवस्था पर समुचित प्रकाश डालते हैं।

प्रश्न 7.
उत्तर वैदिक काल में जाति प्रथा की क्या मुख्य विशेषताएँ थीं?
उत्तर:
इस काल में जाति प्रथा की निम्नलिखित विशेषताएँ थीं:
(i) विभिन्न जातियों के लोग एक दूसरे के साथ बैठकर भोजन नहीं कर सकते थे।
(ii) जातियाँ चार भागों में विभाजित थीं-

  • ब्राह्मण
  • क्षत्रिय
  • वैश्य और
  • शूद्र।

(iii) चूँकि पुत्र अपने पिता के व्यवसाय को अपनाने लगे थे अत: जाति का आधार कार्य न रहकर जन्म बन गया।
(iv) प्रत्येक जाति के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए थे। नियमों की अवहेलना करने वाले को दण्डित किया जाता था।
(v) अलग-अलग व्यवसाय करने वालों की अपनी अलग-अलग उपजातियाँ बन गई थीं।

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प्रश्न 8.
मगध में ऐसी कौन सी प्राकृतिक सुविधाएँ थीं जिनके कारण वह एक शक्तिशाली और समृद्ध जनपद बना?
उत्तर:
मगध को प्राप्त ऐसी प्राकृतिक सुविधाएँ निम्नलिखित थीं:
(i) कच्चे लोहे की प्रचुर उपलब्धि: मगध राज्य छोटा नागपुर के पठार तक विस्तृत था। यहाँ लोहे की खदानें थी और प्रचुर मात्रा में कच्चा लोहा प्राप्त होता था। इससे औजार और अस्त्र-शस्त्र बनाने में सहायता मिली और युद्ध जीते गए तथा राज्य-विस्तार किया गया।

(ii) व्यापार की उन्नति: मगध गंगा और सोन नदियों की घाटी में था अतः इन नदियों ने नौकायन और नौ-यात्रा की सुविधा प्रदान की। इसके फलस्वरूप व्यापार का प्रचुर उत्कर्ष हुआ। मगध सम्राट बिम्बिसार ने अंग राज्य पर अधिकार कर लिया जिससे चंपा के बंदरगाह पर भी उसका नियंत्रण हो गया।

(iii) गंगा का उपजाऊ मैदान: मगध राज्य गंगा और सोन नदी की घाटी में होने के कारण इसमें जलोड़ उपजाऊ मिट्टी थी। इसमें खाद्यान्नों की फसलें प्रचुर मात्रा में उगाई जाती थीं।

प्रश्न 9.
राजा शासन किस तरह चलाता था? वह राज-काज के खर्च हेतु धन कहाँ से प्राप्त करता था?
उत्तर:
राजा द्वारा शासन-कार्य पुरोहित और मंत्रियों की सहायता से किया जाता था। कई अधिकारी भी नियुक्त किए जाते थे। राज-काज का खर्च पूरा करने के लिए राजा किसानों से उपज का 1/6 भाग लगान के रूप में वसूल करता था। लोहार राजा के लिए मुफ्त में औजार बनाते थे। बढ़ई वेतन लिए बिना ही राजा के लिए रथ तैयार करते थे। जुलाहे एक निश्चित लंबाई का वस्त्र राजा को दिया करते थे। करों की वसूली से प्राप्त आय सेना के वेतन, सड़कों, नहरों और कुंओं आदि के निर्माण पर खर्च की जाती थी।

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राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. मतदान के कर्तव्य को सर्वोपरि समझना क्यों आवश्यक है?: मतदान से ही सर्वोच्च संस्था सरकार बनती है और योग्य जन-प्रतिनिधियों को चुना जाता है।
2. पूर्व वैदिक काल के राजाओं को कौन चुनता था?: जन या जनता।
3. अश्वमेध क्या था?: एक युद्ध अभियान इसमें एक घोड़े को सैनिकों के साथ स्वतंत्र छोड़ा जाता था और घोड़ा पकड़ने वाले शासक के साथ युद्ध किया जाता था। अंत में घोड़े की बलि दी जाती थी।
4. अश्वमेध के घोड़े को न रोकने वाले राजा को क्या समझा जाता था? अधीनता को स्वीकार कर लेना/ पराजित राजा।
5. अश्वमेध में उपस्थित होने वाले लोग कौन-कौन थे?: पराजित/ अधीनस्थ राजा, पुरोहित, विजयी राजा, रानी. उसका पुत्र, सारथी, राजकुल के रिश्तेदार, आम जनता।
6. अश्वमेघ में उपस्थित होने की अनुमति समाज के किस वर्ग को नहीं थी?: शूद्रों को।
7. ऋग्वेद के पश्चात् रचित ग्रन्थों को क्या कहा गया?: उत्तर वैदिक ग्रंथा।
8. उत्तर वैदिक ग्रंथ किसने लिखे?: ब्राह्मणों ने।।
9. उत्तर वैदिक काल के समाज समूह कौन थे?: पुरोहित, योद्धा, किसान, पशुपालक, व्यापारी, दस्तकार, श्रमिक, मछुवारे तथा जंगली लोग।
10. वर्ण विभाजन का आधार क्या था?: कार्य/व्यवसाय। कालांतर में जन्म आधार पर।
11. वैश्य कौन थे?: किसान, पशुपालक तथा व्यापारी।
12. शूद्र कौन थे?: तीनों उच्च वर्गों के सेवक। इसमें महिलाएं भी सम्मिलित थीं।
13. अस्पृश्य कौन थे?: दस्तकार, आखेटक, खाद्य-संग्राहक, श्मशान घाट में चिता लगाने वाले (चंडाल)।
14, अश्वमेध करने वाले राजा कौन से संगठन के थे?: जनपद के।।
15, जनपद कौन-कौन से थे?: कुरु, हस्तिनापुर, कोशल, कौशाम्बी, अंग।
16. उत्तर वैदिक काल में कौन सी नई फसल उगाई जाने लगी?: गन्ने की फसल।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 6 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

17. महाजनपद कौन थे?: समाज का जनपद से बड़ा और राजधानी नगर वाला संगठन। उदाहरणार्थ-मगध, गाँधार।
18. किले क्यों बनाए जाते थे?: बाहरी आक्रमणकारियों से प्रतिरक्षा और अपनी समृद्धि का प्रदर्शन करने के लिए।
19. आहत-मुद्रा का परिचलन कौन से संगठन में हुआ?: महाजनपद में।
20. स्थाई सैन्य संगठन कौन सी व्यवस्था में था?: महाजनपद में।
21. कौन-कौन सी चीजों पर कर लगाए गए?: फसलों, शिल्प, पशुपालन, माल की बिक्री और वन्य उत्पादों पर।
22. कार स्वरूप नकद भुगतान का था या वस्तु की वसूली का?: वस्तु की वसूली का।
23. धान की रोपाई किनसे कराई जाती थी?: दास, दासियों, कर्मकारों से।
24. मगध के शक्तिशाली शासक कौन थे?: बिम्बिसार और अजातशत्रु।
25. मगध की राजधानी कहाँ थी? राजगृह।
26. वज्जि में सरकार का कौन सा स्वरूप था?: गण या संघ।
27. सिकंदर ने भारत पर कब आक्रमण किया? आज से लगभग 2300 वर्ष पूर्व।
28. गण के राजा कितने थे?: हजारों की संख्या में, सामूहिक प्रशासन।
28. गण का क्या अर्थ है?: कई सदस्यों वाला एक समूह।
29. संघ का क्या अर्थ है?: संगठन या संसद।
30. सरकार का गण या संघ स्वरूप कब समाप्त हुआ?: आज से 1500 वर्ष पूर्व, गुप्त वंश के पदार्पण पश्चात्।
31. लोकतंत्र सरकार सबसे पहले कहाँ बनी?: यूनान में। आज से 2500 वर्ष पूर्व।

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HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 7 नए प्रश्न नए विचार

Haryana State Board HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 7 नए प्रश्न नए विचार Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Social Science Solutions History Chapter 7 नए प्रश्न नए विचार

HBSE 6th Class History नए प्रश्न नए विचार Textbook Questions and Answers

कल्पना करो:

तुम लगभग 2500 वर्ष पूर्व के एक उपदेशक को सुनने जाना चाहती हो। वहाँ जाने की अनुमति लेने के लिए तुम अपने माता-पिता को कैसे सहमत करोगी, इसका वर्णन करो।
उत्तर:
चूंकि लगभग 2500 वर्ष पूर्व के उपदेशक गौतम बुद्ध और वर्धमान महावीर थे अतः हम गौतम बुद्ध के उपदेश सुनने जाना चाहेंगे। हम अपने माता-पिता को बताएंगे कि गौतम बुद्ध ने राजकुमार और गृहस्थी होने के बाद भी इन सभी सुखों का त्याग कर दिया है। वे समाज का उद्धार करने के लिए आए हुए हैं। उनका कहना है कि हममें आत्मसंयम रखकर शांति से जीने की कला का आना आवश्यक है। आप लोग जानते ही हैं कि ब्राह्मणों ने वर्ण-व्यवस्था का आश्रय लेकर समाज के टुकड़े-टुकड़े कर दिए हैं। लोग आपस में हुआछूत और भेदभाव रखते हैं जिसके कारण हम सभी असुरक्षित हैं तथा बाहर की शक्ति हमें कभी भी अपना गुलाम (दास) बना सकती है। बुद्ध की भाषा भी हम आम-लोगों की है। अतः हमें आसानी से समझ में आ जाएगी, आपको यह भी बता दें कि बुद्ध समाज के लोगों से यह नहीं कह रहे हैं कि वे घर-द्वार छोड़कर उनके साथ आ जाएँ बल्कि वे तो घर पर रहकर ही सादा जीवन, उच्च विचार रखने को कह रहे हैं। सभी धर्मों और वर्णों के लोग उनके उपदेश सुनने जा रहे हैं अत: कृपया हमें भी अनुमति दीजिए।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 7 नए प्रश्न नए विचार

आओ याद करें:

Class 6th History Chapter 7 HBSE नए प्रश्न नए विचार प्रश्न 1.
बुद्ध ने लोगों तक अपने विचारों का प्रसार करने के लिए किन-किन बातों पर जोर विया?
उत्तर:
बौद्ध धर्म के सिद्धांतों की प्रसार-विधि:
(i) प्राकृत या जन-सामान्य की भाषा का प्रयोग: युद्ध ने अपने उपदेश स्थान-विशेष के लोगों की अपनी सरल भाषा में दिए। इस कारण लोगों को उनकी बातें आसानी से समझ में आने लगी और वे बौद्ध-धर्म अपनाने लगे।

(ii) निरन्तर भ्रमण: बौद्ध धर्म में दीक्षित भिक्षु और भिक्षुणी पूरे वर्ष स्थान-स्थान पर भ्रमण करते रहते थे और बुद्ध के उपदेशों को जन-मानस में समाविष्ट करते रहते थे। स्वयं बुद्ध भी कभी एक स्थान पर टिके नहीं रहे।

(iii) मठों और विहारों का निर्माण: अपने पतियों से अनुमति लेकर आने वाली महिलाओं, स्वामियों को अनुमति प्राप्त सेवक, कर्जदार अपने देनदार की अनुमति लेकर बौद्ध धर्म में दीक्षित होते थे और उनके निवास करने के लिए विहार बनाए गए। ये आम-लोगों को शिक्षा देते और उनकी यथायोग्य सहायता करते थे। आपसी लड़ाई का निपटारा भी वे सभा आयोजित करके किया करते थे।

(iv) विवेकपूर्ण व्यवहार: मृत पुत्र को जीवित करवाने की लालसा से आई एक महिला को बुद्ध ने कहा कि वह ऐसे घर से सरसों माँग कर लाए जहाँ आज तक किसी की मृत्यु न हुई हो। वह महिला जब असफल रही तो बुद्ध ने उसको सान्त्वना देते हुए कहा कि मृत्यु पर किसी का नियंत्रण नहीं है। अतः व्यर्थ में मृतक के लिए शोक न करे। यह सत्य को समझाने का एक विचित्र तरीका था।

(v) भेद-भाव रहित प्रवेश: बौद्ध-धर्म में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, चण्डाल, अस्पृश्य, नाई. वेश्या, महिलाएँ, दास आदि दीक्षित किए जा सकते थे। इस भेद-भाव रहित व्यवस्था के कारण ही बौद्ध-धर्म का आशातीत प्रचार-प्रसार हा पाया।

HBSE 6th Class Social Science नए प्रश्न नए विचार प्रश्न 2.
“सही” व “गलत” वाक्य बताओ:
(क) बुद्ध ने पशु बलि को बढ़ावा दिया।
(ख) बुद्ध द्वारा प्रथम उपदेश सारनाथ में देने के कारण इस जगह का बहुत महत्व है।
(ग) बुद्ध ने शिक्षा दी कि कर्म का हमारे जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
(घ) बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया।
(ङ) उपनिषदों के विचारकों का मानना था कि आत्मा और ब्रह्म वास्तव में एक ही है।
उत्तर:
(क) गलत
(ख) सही
(ग) गलत
(घ) सही
(ङ) सही

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 7 नए प्रश्न नए विचार

नए प्रश्न नए विचार HBSE 6th Class Social Science प्रश्न 3.
उपनिषदों के विचारक किन प्रश्नों का उतर देना चाहते थे?
उत्तर:
1. पुनर्जन्म
2. यज्ञ की उपयोगिता
3. मृत्यु पश्चात अस्तित्व में रहने वाली चीज आदि पर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देना चाहते थे।

प्रश्न 4.
महावीर की प्रमुख शिक्षाएँ क्या थीं?
उत्तर:
1. जीव हत्या मत करो
2. सदाचारपूर्ण जीवन व्यतीत करो
3. शुभ कर्म करके संसार से मुक्ति पाओ
4. जाति-पाति, छोटा-बड़ा और ऊँच-नीच का भेदभाव व्यर्थ है।
5. तपस्या तथा ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करो।

आओ चर्चा करें:

प्रश्न 5.
अनघा की माँ क्यों चाहती थी कि उसकी बेटी बुद्ध की कहानी से परिचित हो? तुम्हारा इसके बारे में क्या कहना है?
उत्तर:
बुद्ध के जीवन की कहानी प्रत्येक मनुष्य को-
(i) अपने लक्ष्य-मार्ग पर अडिग रहने
(ii) कठोर परिश्रम करने
(iii) तृष्णा और इच्छाओं का दमन करने तथा
(iv) सुख-शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत करने की प्रेरणा देती है। प्रकृति के सभी जीवों (वनस्पतियों, पशु-पक्षी आदि) पर दया करने की शिक्षा बुद्ध ने दी है। एक राजकुमार और गृहस्थ होने पर भी उन्होंने इन सुखों का त्याग कर दिया था।

शायद अनघा में कुछ आदतें अच्छी न हों उदाहरणार्थ-वह भाई-बहनों से झगड़ती हो। आवश्यकता से अधिक इच्छा करने वाली हो या पढ़ाई में परिश्रम न करती हो। यह भी हो सकता है कि वह गौतम बुद्ध के बारे में विस्तार से जानना चाहती हो और अपनी इच्छा स्वयं व्यक्त करने में संकोच कर रही हो इसीलिए माँ के माध्यम से अध्यापिका को कहला रही हो।

प्रश्न 6.
क्या तुम सोचते हो कि दासों के लिए संघ में प्रवेश करना आसान रहा होगा, तर्क सहित उत्तर दो।
उत्तर:
उन दासों के लिए संघ में प्रवेश करना आसान रहा होगा जिनके स्वामी-
1. बौद्ध-धर्म के उपदेशों को सुन चुके होंगे और इसका स्वीकार कर लिया होगा:

2. स्वामियों ने इस शर्त का अनुमोदन अवश्य किया होगा एवं स्वयं को गौरवान्वित समझा होगा।

3. बौद्ध धर्म में भेदभाव के लिए कोई स्थान न रहने के कारण स्वामियों की बुद्धि में सुधार अवश्य आया होगा और लोगों को अपना दास बनाकर उनसे इच्छानुसार कार्य लेने की उनकी प्रवृत्ति पर अंकुश लगा होगा अर्थात् उनमें सर्वजन समभाव आया होगा और दासों को मुक्त करके उन्होंने बौद्ध धर्म में दीक्षित होने की अनुमति अवश्य दी होगी।

4. बौद्ध धर्म के अनुयायी एवं भिक्षु-भिक्षुणी घर-घर जाकर उपदेश देते थे और उनकी जानकारी में वे घर अवश्य आए होंगे, जहाँ लोगों को दास बनाया गया होगा। वहाँ गौतम बुद्ध ने स्वयं जाकर अपनी विलक्षण बुद्धि से ‘अंगुलिमाल डाकू’ की तरह उनके स्वामियों का हृदय परिवर्तन किया होगा।

HBSE 6th Class Social Science Solutions History Chapter 7 नए प्रश्न नए विचार

आओ करके देखें:

प्रश्न 7.
इस अध्याय में उल्लिखित कम से कम पाँच विचारों तथा प्रश्नों की सूची बनाओ। उनमें से किन्हीं तीन का चुनाव कर चर्चा करो कि वे आज भी क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
विचार तथा प्रश्न

(क) प्रश्न
(i) मानव जीवन क्या है?
(ii) मृत्यु क्यों होती है?
(iii) मनुष्य को रोग, वृद्धावस्था और मानसिक विकार क्यों घेरते हैं?
(iv) मनुष्य के दु:खी रहने का कारण क्या है?
(v) मृत्यु के बाद मनुष्य का क्या होता है?

(ख) विचार:
(i) मानव जीवन कष्ट और दुःखों से परिपूर्ण है।
(ii) मोक्ष ही मनुष्य जीवन का चरम लक्ष्य है।
(iii) शुभ-कर्म करने से ही मनुष्य को दु:खों से छुटकारा (मोक्ष) मिलना संभव है।
(iv) आत्मा अजर और अमर है।
(v) समस्त जीवों पर दया करना, तृष्णा (तन्हा) पर नियंत्रण रखना, ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रयास करना और सादगी को अपनाना ही शुभ-कर्म हैं।

आधुनिक युग में प्रासांगिकता:
(i) जीवों पर दया करना:
जैव-पारिस्थितिकी और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ने के कारण ही आज मौसम में अचानक परिवर्तन होने लगे हैं. भूमण्डलीय तापमान बढ़ रहा है, सागरों का जल-स्तर अत्यधिक तेजी से बढ़ रहा है (इन्दिरा प्वांइट इब चुका है) और प्राकृतिक आपदाएँ (भूस्खलन, बाढ़, सुनामी, चक्रवात आदि) आ रही हैं। मनुष्य ने वनों का विनाश कर दिया है। वनस्पति आवरण लगातार घटता जा रहा है। वन्य पशुओं का निर्ममता से हत्या की जा रही है। इसी कारण यह असुंतलन बढ़ता जा रहा है।

(ii) ज्ञान प्राप्ति का प्रयास:
आज की अत्याधुनिक सभ्यता में बुद्धि का चरम विकास हो चुका है लेकिन ज्ञान (मूल्य आधारित शिक्षा) का पूर्णतः अभाव होता जा रहा है। “शिक्षा क्या स्वर साध सकेगी यदि नैतिक शृंगार नहीं है।” ज्ञान या विवेक वैज्ञानिक निष्कर्ष पर आधारित है जो केवल भौतिक भोग की वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समष्टि में संतुलित और चिर-निर्वाह की स्थिति को प्राप्त कराता है। भौतिक सोच से हटकर आज जीवों के अस्तित्व को बनाए रखने की दिशा में चिंतन करने की आवश्यकता है।

(iii) सादगीपूर्ण जीवन:
आधुनिक प्रसंग में सादगीपूर्ण – जीवन को अपनाना अति आवश्यक हो गया है। पाश्चात्य भोग-भावना और संस्कृति ने आज हमारी वैज्ञानिक, अनुसंधान, शोध की शक्तियों को अत्यधिक प्रभावित किया है और हम कभी तृप्त न होने वाले भौतिक साधनों को तृष्णा की ओर केन्द्रित हो चुके हैं। अत्यधिक फैशन और व्यसनों का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सीता, सावित्री और अनुसूया जैसी धर्मपरायण और सच्चरित्र महिलाओं के इस देश में पुरुषों की बुद्धि अब सम्मान भावना को छोड़कर बलात्कार, हत्या, अपहरण जैसे कुकृत्यों को अंजाम देने लगी है। इसका मूल कारण हमारा भोगवादी जीवन बिताना ही है।

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प्रश्न 8.
आज दुनिया का त्याग करने वाले स्त्रियों और पुरुषों के बारे में और अधिक जानने का प्रयास करो। ये लोग कहाँ रहते हैं, किस तरीके के कपड़े कपड़े पहनते हैं तथा क्या खाते हैं? ये दुनिया का त्याग क्यों करते हैं?
उत्तर:
दुनिया का त्याग करने वाले संन्यासी कहलाते हैं। ये लोग मठों और मंदिरों में रहते हैं। इनके वस्त्र गेरुए रंग के होते हैं। इनके हाथ में कमंडल और भिक्षापात्र होता है। कई साधु त्रिशूल भी धारण करते हैं। संन्यासी महिला और पुरुष कई पंथों के होते हैं। प्रत्येक पंथ या संप्रदाय के अपने अलग-अलग नियम होते हैं। कई लोग वन के कंदमूल, फल खाते हैं और निर्जन वन या पहाड़ों के शिखरों में कुटिया बनाकर रहते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो गाँव एवं बस्ती की धर्मशालाओं में रहते हैं तथा ग्रामीण लोगों के साथ उनका

सीधा संपर्क होता है। शहरों में भी बहुत से साधु-संन्यासी रहते हैं। ये लोग आम लोगों जैसा भोजन अर्थात दाल, रोटी-सब्जी आदि खाते हैं। दुनिया का त्याग करने के पीछे इनकी, अपनी-अपनी रुचियाँ, परिस्थितियाँ और विवशताएँ होती हैं। कुछ लोग ज्ञान-प्राप्ति के लिए योगी बनते हैं। कुछ की पत्नी या पति की मृत्यु हो जाने पर घर की आर्थिक दशा खराब हो जाने के कारण और कुछ लोग कामचोर तथा आलसी होने के कारण भी संन्यास ले लेते हैं। कारणों के अनुसार ही ये लोग समाज को कष्ट या सुख प्रदान करते हैं।

HBSE 6th Class History नए प्रश्न नए विचार Important Questions and Answers

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अनघा की माँ ने अध्यापिका से बच्चों को सारनाथ दिखाने का आग्रह क्यों किया होगा?
उत्तर:
भगवान गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति के पश्चात् अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था। बच्चों का संबंध भी ज्ञान-प्राप्ति के साथ होता है। अत: ज्ञान की प्राप्ति और उसके आचरण में परिणित होने की कामना से ऐसा आग्रह किया गया होगा।

प्रश्न 2.
गौतम बुद्ध के जन्म के समय समाज में कौन-कौन से परिवर्तन हो रहे थे?
उत्तर:
समाज में बड़े संगठन यथा-जन, जनपद, महाजनपद और संघ या गण बन रहे थे। लोगों को बोध हो गया था कि सुरक्षित जीवन के लिए उन्हें अपनी सरकार बनानी चाहिए। नगरीय जीवन की शुरुआत भी हो रही थी।

प्रश्न 3.
गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति के लिए महल, परिवार और संतान का त्याग क्यों करना पड़ा होगा?
उत्तर:
प्रखर मानसिक शक्ति के बालक बाल्यकाल में उन चीजों का गूढ़ अर्थ लेते हैं जो सामान्य घटनाएँ होती हैं यथा-बूढ़े व्यक्ति को देखना, मृतक की शव यात्रा देखना। उनका मस्तिष्क अनन्य रूप से एकल विषय पर केन्द्रित हो जाता है अत: भौतिक संबंधों से परे हो जाता है।

प्रश्न 4.
तपस्या से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी मानसिक या भौतिक विषय पर पूर्ण एकाग्न शक्ति को किसी निश्चित समयावधि तक लगाना तपस्या कहलाता है। उदाहरणार्थ-छात्र का पाठ्यक्रम एवं शैक्षिक विषय का सुरुचि और स्वरुचि से अध्ययन करना।

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प्रश्न 5.
ज्ञान-प्राप्ति के पश्चात् उसके प्रसार के लिए भ्रमण क्यों करते होंगे?
उत्तर:
ज्ञान एक दिशा विशेष (भौतिक या मानसिक स्वरूप) में सिद्धि प्राप्ति या अद्वितीय एवं लोकहितकारी विचार एवं कर्म को उत्पन्न करता है। इस तरह मनुष्य में मनःशक्ति या मनो-ऊर्जा इतनी संचित हो जाती है कि अभिव्यक्ति के लिए छटपटाने लगती है और ज्ञानी पुरुष जन-कल्याण के लिए भ्रमण करते हैं।

प्रश्न 6.
बुद्ध की शिक्षाओं का मूल सार क्या था?
उत्तर:
यह संसार कष्टों से परिपूर्ण है और ऐसे कष्ट और दुःख हमारी कभी पूरी न हो सकने वाली इच्छाओं या तृष्णा (तन्हा) के कारण महसूस होते हैं।

प्रश्न 7.
बुद्ध के अनुसार दुःखों से कैसे उबरा जा सकता
उत्तर:
जब हम अपने मन पर नियंत्रण लगाएँ और यथार्थ के उजाले में स्वयं को पहचानें व अपनी तृष्णा (तन्हा) पर संतुलन की सीमा तक नियंत्रण लगाएँ।

प्रश्न 8.
‘कर्म’ से बुद्ध का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
बुद्ध के अनुसार कर्म या कार्य हमारी अन्तर्जात भावना (अन्त:करण) के प्रेक्षण, निरीक्षण के अंतर्गत प्रयोग (व्यवहार) से संपन्न होता है। उदाहरणार्थ- किसी के लिए अपशब्द (गाली) का प्रयोग करने से बहुत पहले किसी तृष्णा (तन्हा) को चोट पहुंचने पर अहंकार (क्रोध) हमारे मन में उत्पन्न हो चुका होता है। कार्य और परिणाम’ का ‘कर्तव्य और अधिकार’ की तरह चोली-दामन का साथ होने से उसको अवश्य भोगना/झेलना पड़ता है।

प्रश्न 9.
बुद्ध ने ऐसा क्यों कहा होगा कि हमारे कर्मों के अच्छे या बुरे परिणाम वर्तमान जीवन के साथ ही बाद के जीवन को भी प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
कार्य चाहे जो भी किया जाए उसके स्नायु तंत्र में प्रभाव पड़ते हैं और उसकी पुनरावृत्ति तथा लगातार अभ्यास होने लगता है। चूँकि अन्त:करण में सबसे पहले जन्म लेने वाली धारणा या विचार का नेत्रदर्शी रूप नहीं होता अतः यह वर्तमान जीवन के बाद अथवा पुनर्जन्म में भी चेतन या सक्रिय रहता है।

प्रश्न 10.
बुद्ध के अनुसार अच्छे कर्म क्या हैं?
उत्तर:
वह कार्य जिससे किसी भी जीव एवं पदार्थ का अहित, दुरुपयोग, हिंसा, पीड़ा, हानि आदि का परिणाम न दिखाई देता हो।

प्रश्न 11.
वेदों की रचना किस भाषा में हुई और बुद्ध के उपदेश किस भाषा में थे?
उत्तर:
वेदों की रचना संस्कृत में हुई जो जन-सामान्य के लिए बोधगम्य नहीं थी जबकि बुद्ध के उपदेश प्राकृत भाषा (तत्समय प्रचलित सामान्य लोगों की बोली) में थे जो आसानी से समझ में आ जाते थे।

प्रश्न 12.
बुद्ध ने ऐसा क्यों कहा कि लोग किसी शिक्षा को उनका उपदेश मानकर नहीं बल्कि अपने विवेक से उसकी परीक्षा/जाँच करके ग्रहण करें?
उत्तर:
बुद्ध के अनुसार उपदेश केवल सुझाव के स्वरूप का है- एक आदेश नहीं। सुझाव को समझकर मानसिक एवं बौद्धिक विश्लेषण करने के पश्चात् ही निष्कर्ष पर पहुँचना बुद्धिमानी है क्योंकि चिन्तन के समय हमारी चेतना सर्वांगीण जागती है। इससे चिन्तन विषय व्यवहार में शत-प्रतिशत और स्थाई रूप में आ जाता

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प्रश्न 13.
किसागौतमी की कहानी से क्या संकेत मिलता
उत्तर:
उपदेशक के जन-मानस में प्रवेश कर उसे स्वयं अनुभव का अवसर दिलाने वाली कला किसगौतमी को सरसों के बीज माँगते समय मृत्यु के चिरंतन सत्य का स्वयं ज्ञान प्राप्त हुआ।

प्रश्न 14.
उपनिषद् शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर:
गुरु के समीप बैठना अर्थात् गुणीजन के साथ वार्तालाप के माध्यम से यथार्थ ज्ञान प्राप्त करना।

प्रश्न 15.
उपनिषद की विषय-वस्तु क्या है?
उत्तर:
पुनर्जन्म और यज्ञों के महत्त्व का विशुद्ध वर्णन प्रश्नोत्तर क्रम म। .

प्रश्न 16.
उपनिषदों की विषय-वस्तु कहाँ से ली गई है?
उत्तर:
सांसारिक जीवन की आम-घटनाओं से। उदाहरणार्थ-बुद्धिमानी भिखारी।

प्रश्न 17.
उपनिषदों में वार्ताकार कौन-कौन हैं?
उत्तर:
जाति, वर्ग, लिंग आदि के भेदभाव से परे सभी विद्वान् पुरुष, महिलाएं, दास एवं निम्न कुलोत्पन्न व्यक्ति।

प्रश्न 18.
उपनिषदों में आत्मा और ब्रह्म दोनों को एक क्यों माना गया है?
उत्तर:
आत्मा एवं ब्रह्म ही सार्वभौम आत्मा (सभी प्राणियों में मौजूद चेतन तत्व) है।

प्रश्न 19.
बुद्ध के उपवेश और उपनिषद् की अभिव्यक्ति शैली एक जैसी क्यों है?
उत्तर:
“बुद्धिमान भिखारी” के दृष्टांत की तरह ये दोनों आम-जीवन की घटनाओं का विशेष प्रसंग में उल्लेख करते हैं। बुद्ध के उपदेश प्रसंग में हम “अँगुलिमाल” की कहानी को ले सकते हैं।

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प्रश्न 20.
पाणिनी नामक प्राचीन विद्वान् की लोकप्रियता किस कारण है?
उत्तर:
उन्होंने संस्कृत भाषा के प्रयोग नियम अर्थात् लघु सूत्र (लगभग 3000) लिखे। स्वर और व्यंजनों को विशेष क्रम में रखकर उनके प्राथमिक सूत्र बनाए अर्थात् संस्कृत व्याकरण के रचयिता थे।

प्रश्न 21.
वर्धमान महाबीर कौन थे? उन्होंने अपने उपवेश कौन सी भाषा में दिए?
उत्तर:
वर्धमान महावीर वज्जि संघ के लिच्छवि कुल में उत्पन्न राजकुमार थे। उन्होंने अपने उपदेश बुद्ध की तरह ही प्राकृत भाषा में दिए।

प्रश्न 22.
जैन धर्म में कौन से नियम प्रचलित थे?
उत्तर:
1. भिक्षा माँगकर अत्यंत सरल और सादा जीवन बिताना
2. अस्तेय (चोरी न करना)
3. ब्रह्मचर्य पालन,
4. दिगम्बर (वस्त्रहीन) एवं सर्वत्यागी रहना।

प्रश्न 23.
जैन धर्म की शिक्षाओं का मूल सार क्या था?
उत्तर:
अहिंसा और क्षमा।

प्रश्न 24.
जैन धर्म के अनुयायी किस कोटि के थे?
उत्तर:
कुछ अनुयायी भिक्षु-भिक्षुणी बनकर संपूर्ण त्यागमय जीवन बिताने लगे जबकि कुछ अन्य गृहस्थ में रहकर भिक्षु-भिक्षुणी आदि को भोजनादि सुविधाएँ प्रदान करने लगे।

प्रश्न 25.
जैन धर्म के समर्थक कौन थे?
उत्तर:
मुख्यत: व्यापारी क्योंविः किसानों के लिए इस सीमा तक अहिंसा का पालन करना कठिन था। उदाहरणार्थ-उनसे कई कीड़े-मकोड़ों की हिंसा संभावित थी।

प्रश्न 26.
विनयपिटक में क्या उल्लेख है?
उत्तर:
घर-द्वार त्यागने वाले अनुयायियों के लिए संघ बनाए गए थे जिनमें महिलाओं और पुरुषों के निवास की अलग-अलग व्यवस्थाएँ थीं।

प्रश्न 27.
संघ में प्रवेश की शर्ते क्या थी?
उत्तर:
1. महिला एवं पुरुष वर्ण, जाति आदि के भेदभाव से परे संघ में प्रवेश ले सकते थे।
2. बच्चों को अपने माता-पिता, दासों को अपने स्वामी, राजसेवकों को राजा और कर्जदारों को अपने लेनदारों की अनुमति प्राप्त करनी होती थी।

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प्रश्न 28.
बहुधा किस तरह के लोग संघ में प्रवेश लेते थे?
उत्तर:
ब्राह्मण, क्षत्रिय, व्यापारी, मजदूर, नाई, वेश्याएँ और

प्रश्न 29.
संघाराम क्या थे?
उत्तर:
उद्यानों में अनुयायियों द्वारा बनवाए गए कृत्रिम निवास स्थल अथवा पहाड़ी क्षेत्रों की प्राकृतिक गुफाएँ।

प्रश्न 30.
बौद्ध भिक्षु संघाराम में निवास कब करते थे?
उत्तर:
वर्षा ऋतु में। क्योंकि इस दौरान भ्रमण कर पाना कठिन हो जाता था।

प्रश्न 31.
विहार क्या थे?
उत्तर:
परिष्कृत संघाराम ही विहार थे। ये ईंट और पत्थरों से निर्मित विशाल इमारतें थीं। लकड़ी से बनाए गए संघाराम भी

प्रश्न 32.
क्या संघों में वेद वर्णित चारों वर्गों को प्रवेश की अनुमति थी?
उत्तर:
हाँ। इन संघों में वर्ण-भेद बिल्कुल भी नहीं था।

प्रश्न 33.
जराथुष्ट्र कौन थे? जराथुष्ट्र की शिक्षाओं का सार क्या है?
उत्तर:
एक ईरानी पैगम्बर थे। इस धर्म की शिक्षाओं का सार ‘सद्विचार, सद्वचन और सद्कार्य’ है।

प्रश्न 34.
जराथुष्ट्र धर्म की शिक्षाएँ कौन से ग्रंथ में संकलित हैं?
उत्तर:
‘अवेस्ता’ नामक ग्रंथ में।

प्रश्न 35.
भारत में जराथुष्ट्र धर्म के अनुयायी कहाँ हैं?
उत्तर:
गुजरात और महाराष्ट्र के पश्चिमी तट क्षेत्रों में।

प्रश्न 36.
जराथुष्ट्र धर्म को पारसी धर्म क्यों कहा जाता
उत्तर:
फारस से तात्पर्य ईरान से है और ईरान के लोगों का धर्म फारसी या जराथुष्ट्र धर्म ही है।

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लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“किसागौतमी की कहानी” का संदर्भ लेकर गौतम बुद्ध को उपदेश-कला पर प्रकाश डालिये।
उत्तर:
इस दृष्टांत के आठ विभाग हैं:
1. एक महिला के पुत्र की मृत्यु होना
2. सड़क पर पुत्र की मृत देह लेकर विलाप करना
3. लोगों से उसको पुनर्जीवित करने का आग्रह करना
4. एक व्यक्ति का उस महिला को गौतम बुद्ध के पास ले जाना
5. क मुट्ठी सरसों मांगकर लाने को कहना
6. ऐसे घर से माँगना जहाँ मृत्यु न हुई हो
7. महिला का द्वार-द्वार भटकना परंतु ऐसा घर न मिलना
8. महिला को इस सत्य का ज्ञान होना कि सभी की मृत्यु होती है।

इसमें हम देखते हैं कि मनुष्य में तृष्णा (तन्हा) का जन्म कैसे होता है, वह किस तरह भटकता है और अंतत: गुणी पुरुष किस युक्ति से उसको सत्य का स्वयं एहसास कराता है। यह आत्मनिरीक्षण और आत्मावलोकन वाली उपदेश शैली है जिसमें उपदेश को सिद्धांत नहीं बल्कि व्यवहार का विषय बनाया जाता है। गौतम बुद्ध स्वयं ही कहते हैं कि उपदेशों का तुरंत पालन करने के स्थान पर उनकी अपने विवेक से जाँच करो, यथार्थ उभरकर सामने आ जाएगा।

प्रश्न 2.
उस युग में सत्यकाम जाबाल के अलावा अन्य निर्धन व्यक्ति धर्म चर्चाओं में भाग क्यों नहीं लेते थे? सुस्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निर्धन व्यक्तियों के वाताओं में भाग न लेने के निम्नलिखित कारण रहे होंगे:
(i) साधनों का अभाव: निर्धन व्यक्ति का मन और मस्तिष्क केवल अपनी आजीविका तक सीमित रहता होगा जैसा कि प्रमाण मिलते हैं। इस युग में शिल्प पर भी कर वसूली होती थी। व्यक्तियों के पास इतना समय ही न रहता होगा कि वे आजीविका के अलावा कुछ और करने की सोच भी सकें।

(ii) ग्रंथों को खरीदने के लिए धन का अभाव: धर्म परिचर्चा करने में सक्षम वही व्यक्ति हो सकता था जिसने वेद, उपनिषद् आदि ग्रंथों का अध्ययन किया हो और मन में मंथन के पश्चात किसी विषय विशेष के बारे में उसकी जिज्ञासा जागी हो। निर्धन व्यक्ति के पास इन ग्रंथों को खरीदने के लिए धन नहीं था

इसलिए वह इन चर्चाओं में रुचि नहीं लेता था। उदाहरणार्थ-भिखारी का शौनक मुनि से भीख माँगना परंतु विद्वान होने पर भी उनके द्वारा भी उसकी उदर पूर्ति न कराई जानी। इससे संकेत मिलता है कि उस युग में भिखारी भी बड़ी संख्या में थे। ऐसी दशा में वे क्या धर्मचर्चा कर सकते थे।

प्रश्न 3.
केवल व्यापारी वर्ग ही जैन धर्म का अनुयायी क्यों बना होगा, कृषक वर्ग क्यों नहीं? सकारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
इस प्रश्न के संदर्भ में सबसे पहले यह उल्लेख करना समीचीन रहेगा कि जैन धर्म में अहिंसा, अस्तेय (चोरी न करना) और क्षमा जैसे गुणों पर बल दिया गया था। व्यापारी वर्ग का कार्य द्वितीयक व्यवसाय के रूप का होता है। उसको केवल दुकान पर लाए गए खाद्यान्नों, वस्त्रों तथा अन्य माल की बिक्री करनी होती है। अत: इस कार्य में उक्त नियमों का पालन करना संभव है।

इसके विपरीत जब हम किसान की बात करते हैं तो वह कृषि में कई जीवों यथा-चूहा, साँप, चींटी, जंगली पशु, टिड्डी. खरगोश आदि की जान-बूझकर हत्या करता है। ऐसा न करने पर उसकी फसल बर्बाद हो जाएगी। गाय या भैंस के बछड़ों का हिस्सा (दूध) स्वयं छीनकर वह चोरी भी करता है। बकरी, भेड़ आदि पशुओं को हत्या करने के लिए ही पालता है। इन कारणों से किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन रहा होगा।

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प्रश्न 4.
“घर-बाहर के त्याग” को सुस्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
घर-बाहर से तात्पर्य केवल मिट्टी, पत्थर से बने भवन से नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्ते (भाई, बहन, माता-पिता) और सामाजिक रिश्ते (परिजन तथा विविध व्यवसायरत लोगों के साथ संबंध) भी है। इन संबंधों को शारीरिक, मानसिक, भावात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर बाधक बनने से रोकने की मनोवृत्ति ही त्याग है। देह-चेतना से उठकर मनश्चेतना के स्तर तक पहुँचने की एक तपस्या सिंचित प्रक्रिया या अनुक्रिया ही त्याग है। संक्षेप में एक ही अग्रता (एकाग्रता) वाली तपस्या ही मानसिक लक्ष्य तक पहुँचाती है।

प्रश्न 5.
वैदिक काल के ‘संघ’ और जैन तथा बौद्ध धर्म के ‘संघों’ में विभेद सुस्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

वैदिक काल के संघधर्म-संघ
(i) ये राजनैतिक संगठन थे।(i) ये धर्म-संगठन थे।
(ii) इनमें कई राजा मिलकर एक सभा बनाते थे जिनमें सामूहिक निर्णय लिया जाता था।(ii) ये घर-द्वार त्याग कर ज्ञान की सच्ची जिज्ञासा वाले विचारकों हेतु बनाए गए।
(iii) इनका स्वरूप दृष्ट था अर्थात् राजा, जनता, समितियाँ, सभाएँ आदि सभी प्रत्यक्ष देखी जाने वाली व्यवस्थाएँ और उन व्यवस्थाओं के वाहक थे।(iii) ये भावात्मक संगठन थे। संघ किसी इमारत या भवन का नाम नहीं बल्कि विशेष मनोदशा और मानसिक चिंतन का नाम था। इसका इष्टस्वरूप नहीं था।
(iv) इनके नियमों में प्रत्यक्ष लाभ, भौतिक प्राप्ति उपलब्धि आदि की दिशा में कार्य-प्रवाह था।(iv) इनका कार्य-प्रवाह सत्य के अनुसंधान की ओर था। समस्त त्याग के साथ जीवन के भौतिक कष्टों को झेल कर यथार्थ सुख की ओर बढ़ना ही धर्म संघ का उद्देश्य है।

प्रश्न 6.
उत्तर वैदिक काल के बाद बौद्ध और जैन धर्म की नई विचारधाराएँ क्यों आ गई होंगी?
उत्तर:
उत्तर वैदिक काल वस्तुत: सिन्धु घाटी की सभ्यता की तरह क्रमिक विकास के बीच का एक स्फुलिंग अथवा स्फुरण चमत्कार जैसा था। इसके सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद जैसे वेदों में सामाजिक नियमों के कठोर से कठोरतम होने का उल्लेख है। यह संकेत देता है कि पूर्व वैदिक काल (ऋग्वेद रचना काल) तक मनुष्य क्रमिक विकास का अवलंबन लिए हुए था जबकि उत्तर वैदिक काल में राजा और पुरोहित के बीच विशिष्ट संबंध बनने के कारण पुरोहितवाद का सृजन हुआ। इसने समूचे समाज की पीड़ा बढ़ा दी।

संस्कृत शिक्षित विशिष्ट वर्ग के अलावा अन्य वर्ग द्रविड़ बन गया और भाषा का यह संघर्ष आरंभ हो गया। प्राकृत भाषा आम लोगों की बोली थी जिसके द्वारा उन्हें उचित दिनचर्या, उचित खान-पान, उचित कार्य-चयन आदि से परिचित कराने वाले उपदेश गौतम बुद्ध और वर्धमान महावीर द्वारा दिए गए। समाज की इस आवश्यकता को देखते हुए उपनिषद् (गुरु के पास बैठना) लिखे जाने लगे। इनमें प्रश्नोत्तर के क्रम में आम-मानव की बौद्धिक जिज्ञासाओं का शमन किया गया है।

इनकी भाषा भी सहज प्रवाहमय और सरल है। वेदों की गूळ संस्कृत इनमें व्याख्यात्मक (स्पष्टीकरण) रूप में पाई जाती है। छांदोग्य उपनिषद् की बुद्धिमान भिखारी वाली कहानी और गौतम बुद्ध के “किसागौतमी की कहानी” में तत्कालीन उपदेशकों की आत्मनिरीक्षण शैली के एक समान दर्शन होते हैं। इस युग के मानव को अपनी ही चेष्टा (शारीरिक, मानसिक, भावात्मक) से उपदेशित सत्य को पहचानने की शैली अपेक्षित थी और यह शैली उपनिषद एवं जैन और बौद्ध धर्म ग्रंथों में दिखाई पड़ती है। वर्ण-भेद से उत्पन्न विकारों का भी इस युग में शमन करने की चेष्टा की गई।

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नए प्रश्न नए विचार Class 6 HBSE Notes in Hindi

1. सारनाथ कहाँ है?: वाराणसी में।
2. बुद्ध का जन्म कब हुआ?: लगभग 2500 वर्ष पूर्व।
3. लोगों के जीवन में क्या परिवर्तन हो रहे थे?: समाज-व्यवस्था, नगरों का विकास, सरकार की स्थापना आदि।
4. बोधगया कहाँ है?: आधुनिक बिहार में।
5. गौतम बुद्ध का मृत्यु स्थल: कुशी नगर।
6. संतुष्ट न होने की मनुष्य की प्रवृत्ति को क्या कहते हैं?: तन्हा (तृष्णा)।
7. प्राकृत भाषा क्या थी?: तत्समय प्रचलित आम लोगों की बोली।
8. जीवन का अटल सत्य क्या है?: प्रत्येक जीव की मृत्यु।
9. उपनिषद का क्या अर्थ है?: गुरु के निकट बैठना।
10. मृत्यु उपरांत भी शेष रहने वाली चीज क्या है?: आत्मा।
11. सत्यकाम जाबाल किसके पुत्र थे?: एक दासी के।
12. संस्कृत भाषा के व्याकरण का रचनाकार कौन था?: आचार्य पाणिनी।
13. वर्धमान महावीर कौन थे?: वज्जि संघ और लिच्छवी कुल के एक राजकुमार।
14. जैन धर्म का मुख्य उपदेश क्या था?: जीवों की हिंसा न करो।
15. मगध राज्य में बोली जाने वाली प्राकृत भाषा को क्या कहते थे?: मागधी।
16. किसानों के लिए जैन-धर्म का पालन कठिन क्यों था?: उन्हें फसल की रक्षा के लिए कीड़े-मकोड़ो को मारना पड़ता था जिसका धर्म में निषेध था।
17. संघ क्या था?: घर-बार त्याग कर बनाया गया धर्म दीक्षित भिक्षु और भिक्षुणियों का एक संगठन।
18. मठ क्या थे?: भिक्षु और भिक्षुणियों के लिए बनाए गए शरण-स्थल या विहार।
19. आश्रम व्यवस्था का विकास किसने किया?: ब्राह्मणों ने।
20. भिक्षुओं के नियम कौन से ग्रंथ में वर्णित हैं?: विनयपिटक में।

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