Class 12

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 2 पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 2 पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 2 पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. फ्लोरीकल्चर (Floriculture) से क्या तात्पर्य है ?
(अ) आटे को गूंथना
(ब) फर्श की सफाई
(स) पुष्पों की खेती
(द) शहद निकालना
उत्तर:
(स) पुष्पों की खेती

2. काली मिर्च में बीजाण्डकाय का कुछ बचा हुआ भाग एक झिल्ली के रूप में रहता है जिसे कहते हैं-
(अ) भ्रूणकोष
(ब) परिभ्रूणपोष
(स) भ्रूणपोष
(द) निलम्बस
उत्तर:
(ब) परिभ्रूणपोष

3. लैंगिक जनन की आधारभूत आवश्यकताएँ हैं-
(अ) अर्द्धसूत्री विभाजन
(ब) युग्मक संलयन
(स) ‘अ’ व ‘ब’ दोनों
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) ‘अ’ व ‘ब’ दोनों

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4. आर्कटिक टुंड्रा में प्राप्त किसके बीज थे-
(अ) ल्यूपाइन
(ब) फोयेनिक्स
(स) डैक्टीलीफेरा
(द) पाइनस
उत्तर:
(अ) ल्यूपाइन

5. निम्फिया (Nymphea) जलीय पादप है इसमें किसके द्वारा परागण होता है ?
(अ) जल द्वारा
(ब) कीट द्वारा
(स) वायु द्वारा
(द) पक्षी द्वारा
उत्तर:
(ब) कीट द्वारा

6. खिलाड़ियों एवं धावक अश्वों (घोड़ों) की कार्यदक्षता में वृद्धि करता है-
(अ) अण्डप गोलियां
(ब) बीजाण्ड की गोलियां
(स) वर्तिकाग्र गोलियां
(द) पराग गोलियां
उत्तर:
(द) पराग गोलियां

7. निम्न में से आभासी फल है-
(अ) अनार
(ब) काजू
(स) बादाम
(द) अखरोट
उत्तर:
(द) अखरोट

8. यदि एक पौधे की लघुबीजाणु मातृ कोशिका में 12 गुणसूत्र हैं तो भ्रूणपोष में कितने गुणसूत्र होंगे-
(अ) 6
(ब) 12
(स) 18
(द) 20
उत्तर:
(स) 18

9. निम्न में से किस पुष्प समूह में चमगादड़ द्वारा पर- परागण होता है ?
(अ) कदम्ब व कचनार
(ब) वेलिसनेरिया व निम्फिया
(स) निकोटिआना व कोमेलाइना
(द) युका व एमोरफोफेलस
उत्तर:
(अ) कदम्ब व कचनार

10. बीजाण्ड में अर्ध-सूत्री विभाजन कहाँ होता है-
(अ) बीजाण्डकाय
(ब) गुरुबीजाणु मातृ कोशिका
(स) गुरुबीजाणु
(द) भ्रूणकोश
उत्तर:
(ब) गुरुबीजाणु मातृ कोशिका

11. परागण के समय परागकण होते हैं-
(अ) चार- कोशिकीय
(ब) त्रि – कोशिकीय
(स) द्वि- कोशिकीय
(द) बहुकोशिकीय
उत्तर:
(स) द्वि- कोशिकीय

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12. आवृतबीजी पादपों के मादा युग्मकोद्भिद में सामान्यतः कितने विभाजन होते हैं-
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
उत्तर:
(स) तीन

13. बीजावरण का विकास होता है-
(अ) अध्यावरण से
(ब) बीजाण्डकाय से
(स) बीजाण्डवृन्त से
(द) नाभिका से
उत्तर:
(अ) अध्यावरण से

14. त्रि-संलयन के फलस्वरूप विकसित होता है-
(अ) भ्रूण
(ब) भ्रूणकोश
(स) भ्रूणपोष
(द) बीज
उत्तर:
(स) भ्रूणपोष

15. अनुन्मील्यता का उदाहरण है-
(अ) वायोला
(ब) मिराबिलिस
(स) पपीता
(द) ग्लोरिओसा
उत्तर:
(अ) वायोला

16. परागकण किसका प्रतीक है-
(अ) नर युग्मकोद्भिद
(ब) मादा युग्मकोद्भिद
(द) पुंकेसर
(स) लघुबीजाणुधानी
उत्तर:
(अ) नर युग्मकोद्भिद

17. प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक होता है-
(अ) n
(ब) 2n
(स) 3n
(द) 4n
उत्तर:
(स) 3n

18. पुष्पीय पौधों के भ्रूणकोश में कितने केन्द्रक होते हैं-
(अ) पांच
(ब) चार
(स) सात
(द) आठ
उत्तर:
(द) आठ

19. 100 परागकणों के निर्माण हेतु कितने अर्ध-सूत्री विभाजनआवश्यक हैं-
(अ) 100
(ब) 50
(स) 25
(द) 20
उत्तर:
(स) 25

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20. 80% परागण होता है-
(अ) मधुमक्खियों से
(ब) चिड़ियों से
(स) चमगादड़ से
(द) घोंघों से
उत्तर:
(अ) मधुमक्खियों से

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
मादा युग्मकोद्भिद का अन्य नाम बताइये ।
उत्तर:
भ्रूणकोश (embryo sac) ।

प्रश्न 2.
यदि वर्तिकाग्र की सतह से पोषक पदार्थों का स्राव न हो तो निषेचन की क्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
परागकण के अंकुरण हेतु उचित माध्यम प्राप्त नहीं होता । फलस्वरूप अंकुरण नहीं होगा।

प्रश्न 3.
परागकणों के जीवाश्म रूप में परिरक्षित पाये जाने का कारण बताइये।
उत्तर:
परागकण के बाह्यचोल में उपस्थित स्पोरोपोलेनिन के कारण परागकण जीवाश्म रूप में परिरक्षित रहते हैं ।

प्रश्न 4.
अण्ड समुच्चय क्या होता है?
उत्तर:
भ्रूणकोश में बीजाण्डद्वार की ओर अण्ड समुच्चय या अण्ड उपकरण होता है जिसमें एक अण्ड कोशिका तथा दो सहायक कोशिकाएँ होती हैं।

प्रश्न 5.
द्वितीयक केन्द्रक कैसे बनता है?
उत्तर:
भ्रूणकोश में प्रत्येक ध्रुव से एक-एक केन्द्रक आकर केन्द्र में संयुक्त होकर द्विगुणित द्वितीयक केन्द्रक बनाते हैं ।

प्रश्न 6.
एक किसान को अपने खेत में काम करके लौटने के बाद लगातार छींक आती रही तथा शरीर पर खुजली भी होने लगी, इसका सम्भावित कारण लिखिए।
उत्तर:
पराग एलर्जी के कारण छींक व शरीर पर खुजली होने लगी ।

प्रश्न 7.
मादा युग्मकोद्भिद का विकास किस कोशिका से होता है?
उत्तर:
क्रियाशील गुरुबीजाणु मातृ कोशिका से ।

प्रश्न 8.
बीजाण्ड अपने लिये भोज्य पदार्थ किससे प्राप्त करता है ?
उत्तर:
बीजाण्ड अपने लिये भोज्य पदार्थ बीजाण्डासन से प्राप्त करता है।

प्रश्न 9.
स्वपरागण किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक ही पुष्प के परागकणों का उसी पुष्प की वर्तिका पर या उसी पौधे के अन्य पुष्प की वर्तिकाग्र पर पहुँचने की क्रिया को स्वपरागण कहते हैं ।

प्रश्न 10.
अनुन्मील्य पुष्प किसे कहते हैं ? उदाहरण बताइये ।
उत्तर:
द्विलिंगी पुष्प जो कभी नहीं खुलते हैं, अनुन्मील्य पुष्प कहलाते हैं; जैसे- कोमेलाइना ।

प्रश्न 11.
अनिषेकजनन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बिना निषेचन के अण्डाशय फल में विकसित होता है। ऐसा फल अनिषेक फल तथा फल बनने की इस प्रक्रिया को अनिषेकजनन कहते हैं।

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प्रश्न 12.
लघुबीजाणुधानी की सबसे भीतरी पर्त का क्या नाम है ? इसका क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
सबसे भीतरी पर्त टेपीटम होती है, यह विकसित होते हुये परागकणों को पोषण प्रदान करती है ।

प्रश्न 13.
पुष्प के दल का क्या कार्य है ?
उत्तर:
सबसे बाहरी हरे रंग के बाह्य दल जो पुष्प की रक्षा व पुष्प के अन्य भागों को बांधे रहते हैं तथा इसके अन्दर का दूसरा चक्र दलपुंज होता है जो नाना प्रकार के रंगों से बना होने के कारण परागण क्रिया हेतु जीवों को आकर्षित करता है।

प्रश्न 14.
निम्न शब्दों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित कीजिए – परागकण, लघुबीजाणु जनन ऊतक, लघुबीजाणु चतुष्टक, लघुबीजाणु मातृ कोशिका ।
उत्तर:
लघुबीजाणु जनन ऊतक, लघुबीजाणु मातृकोशिका, लघुबीजाणु चतुष्टक, परागकण ।

प्रश्न 15.
बहुभ्रूणता क्या है ?
उत्तर:
पौधों के बीजों में एक से अधिक भ्रूणों के विकसित होने की प्रक्रिया को बहुभ्रूणता कहते हैं। उदा. सिट्स, आम ।

प्रश्न 16.
निम्न शब्दों को सही विकासीय क्रम में व्यवस्थित कीजिए- चतुष्क गुरुबीजाणु, गुरुबीजाणु मातृ कोशिका, बीजाण्डकाय कोशिकाएँ, क्रियाशील गुरुबीजाणु ।
उत्तर:
बीजाण्डकाय कोशिकाएँ, गुरुबीजाणु मातृ कोशिका, चतुष्क गुरुबीजाणु क्रियाशील गुरुबीजाणु ।

प्रश्न 17.
परागकण के बाह्य चोल में पाये जाने वाले कठोर प्रतिरोधक कार्बनिक पदार्थ का नाम बताइये ।
उत्तर:
परागकण के बाह्य चोल में पाये जाने वाले कठोर प्रतिरोधक कार्बनिक पदार्थ का नाम स्पोरोपोलेनिन (Sporopollenin) है।

प्रश्न 18.
पार्थेनियम पादप से विकसित कौन-सी रचना मानव में ‘एलर्जी’ रोग उत्पन्न करती है ?
उत्तर:
पार्थेनियम पादप के परागकण मानव में श्वसनी वेदना एवं एलर्जी रोग उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 19.
वायु परागण होने वाले पुष्पों में क्या लक्षण मिलते हैं?
उत्तर:
प्राय: सफेद रंग, बहुत छोटे तथा परागकण अधिक संख्या में बनते हैं।

प्रश्न 20.
कोई दो उदाहरण बताइये जिनके फलों में बहुत अधिक संख्या में बीज बनते हैं।
उत्तर:
ओरोबैंकी तथा स्ट्राइगा।

प्रश्न 21.
पुष्पी पादपों में भ्रूणपोष की सूत्रगुणिता क्या होती है ?
उत्तर:
त्रिगुणित ।

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लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
एक प्रारूपिक पुष्प के लम्बवत् काट का आरेखीय चित्र बनाते हुये उसके विभिन्न अंगों को बताइए।
उत्तर:
एक पुष्प में चार चक्र होते हैं। सबसे बाहरी चक्र हरे रंग का व छोटा होता है जिसे बाह्यदल पुंज (calyx) कहते हैं, इसके प्रत्येक सदस्य को बाह्यदल (sepal) कहा जाता है। दूसरा चक्र बड़ा व विविध रंगों से बना दलपुंज (corolla) होता है, जिसके प्रत्येक सदस्य को पंखुड़ी या दल (petal) कहते हैं। बाह्यदलपुंज व दलपुंज पुष्प के सहायक चक्र (accessory whorl) होते हैं, जो पुष्प के अन्दर के चक्रों की रक्षा करते हैं ।

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पुष्प के अन्दर दो चक्र जनन अंगों का होता है, जो पुष्प के परमावश्यक चक्र या जनन चक्र ( essential whorl or reproductive whorl) होते हैं। इनमें से बाहर का चक्र पुमंग (androecium) होता है जिसके प्रत्येक सदस्य को पुंकेसर (stamen ) कहते हैं। यह नर जनन अंग होता है। प्रत्येक पुंकेसर में तंतु (filament) व परागकोश (anther lobe) होता है। सबसे अन्दर का चक्र जायांग (gynoecium) होता है। इसके एक सदस्य को अंडप (Carpel) कहते हैं, प्रत्येक अंडप में अंडाशय (ovary), वर्तिका ( style) व वर्तिका ( stigma ) होता है।

प्रश्न 2.
परागकण हानिप्रद व लाभप्रद दोनों ही होते हैं, समझाइए ।
उत्तर:
परागकण नर जननांग से सम्बन्धित हैं, इसी से नर युग्मक बनते हैं। परागकणों के कारण ज्वर (hay fever) तथा विभिन्न प्रकार के पराग एलर्जी (pollen allergy ) रोग उत्पन्न हो जाते हैं। उदाहरणार्थ, चीनोपोडियम ( Chenopodium ) व कांग्रेस घास (Parthenium hysterophorous) तथा ज्वार ( Sorghum vulgare), ये सभी मानव में एलर्जी रोग उत्पन्न करते हैं।

वर्तमान में परागकण अध्ययन हेतु विज्ञान की एक पृथक् शाखा परागकण विज्ञान (Palynology) है। भारत में आयातित गेहूँ के साथ कांग्रेस या गाजर घास (पार्थेनियम) आकर सर्वव्यापी हो चुका है जो मानव में दमा तथा श्वसनी शोथ उत्पन्न करता है। पार्थेनियम पौधा छोटे-छोटे श्वेत पुष्पों वाला होता है जो वर्षा के दिनों में घरों के आस-पास बहुतायत से उग जाता है।

उपर्युक्त हानिप्रद प्रभावों के अतिरिक्त ये लाभप्रद भी हैं। अन्य पौधों के परागकण पोषण से भरपूर होते हैं । हाल कुछ ही वर्षों से आहार संपूरकों के रूप में पराग गोलियों (tablets) के लेने का प्रचलन बढ़ा है। पश्चिमी देशों में तो भारी मात्रा में पराग उत्पाद गोलियों एवं सीरप के रूप में बाजारों में उपलब्ध है। यह बताया गया है कि पराग की गोलियाँ खिलाड़ियों तथा धावक अश्वों (घोड़ों) की कार्यदक्षता को बढ़ाती हैं।

प्रश्न 3.
क्या होगा यदि अपरिपक्व परागकोश से टेपीटम का अपह्रास कर दिया जाये ?
उत्तर:
परागकोश की भित्ति की सबसे अन्दर वाली परत टेपीटम होती है। इनकी कोशिकाओं में जीवद्रव्य गाढ़ा तथा केन्द्रक बड़ा व
सुस्पष्ट होता है। परागकण परिवर्धन में टेपीटम की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। यह विकासशील परागकणों को पोषण प्रदान करती है। यदि परागकोश में परागकणों के विकास के पूर्व ही टेपीटम ह्रास हो जाता है। तो उसके परागकण बन्ध्यता ( sterility ) या रुद्ध ( abortine) वृद्धि प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 4.
स्व- परागण हेतु पुष्पों में पाए जाने वाले दो अनुकूलन बताइये ।
उत्तर:
स्व- परागण प्रक्रिया के लिए पादपों में निम्न अनुकूलन पाये जाते हैं-
(i) उभयलिंगता ( Bisexuality) – ऐसे पौधों में उभयलिंगी (Bisexual) पुष्प पाए जाते हैं।

(ii) समकालपक्वता (Homogamy) – ऐसे पौधों के पुष्पों में पुमंग एवं जायांग एक साथ परिपक्व होते हैं अर्थात् इनमें समकालपक्वता (Homogamy) पाई जाती है। परागकण एवं वर्तिकाग्र एक ही समय परिपक्व होने की पूरी संभावना रहती है। उदाहरण – मिराबिलिस (Mirabilis), कैथेरैन्थस (Catharanthus) ।

(iii) अनुन्मील्यता (Cleistogamy) – कुछ पौधों के पुष्प बंद ही रहते हैं, अर्थात् ये कभी नहीं खुलते। अतः इनमें आवश्यक रूप से स्वपरागण होता है। उदाहरण- कनकौआ ( Commelina), वायोला (Viola), आग्जेलिस (Oxalis), ड्रॉसेरा (Drosera) इत्यादि ।

प्रश्न 5.
परागनलिका का भ्रूणकोश में प्रवेश कहाँ से होता है? उत्तर- परागनलिका वर्तिका से होती हुई अण्डाशय क्षेत्र में पहुँच जाती है। रसायनुवर्ती कारक के फलस्वरूप परागनलिका की वृद्धि अण्डाशय की ओर होती है। परागनलिका का बीजाण्ड में प्रवेश तीन प्रकार से होता है-
(क) बीजाण्डद्वारी प्रवेश
(ख) निभागी प्रवेश
(ग) अध्यावरणी प्रवेश ।
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(क) बीजाण्डद्वारी प्रवेश ( Porogamy) – बीजाण्ड में परागनलिका का प्रवेश बीजाण्ड द्वार (Micropyle) से होता है। अधिकांश पौधों में बीजाण्डद्वारी प्रवेश पाया जाता है।

(ख) निभागी प्रवेश (Chalazogamy) – बीजाण्ड में परागनलिका का प्रवेश निभाग छोर (Chalazal end) से होता है। उदाहरण- कैजुराइना, बिटुला, जुगलैन्स आदि ।

(ग) अध्यावरणी प्रवेश (Mesogamy) – इसमें पराग नलिका अध्यावरण (Integuments) को बेधती हुई बीजाण्ड में प्रवेश करती है। उदाहरण- कुकरबिटा, पोपुलस आदि ।

प्रश्न 6.
द्विनिषेचन क्या होता है?
उत्तर:
आवृतबीजियों में निषेचन के समय एक नर युग्मक का संलयन अण्ड से होता है तथा दूसरा संलयन दूसरे नर युग्मक व द्वितीयक केन्द्रक के बीच होता है। इस प्रकार दो बार निषेचन होने को द्विनिषेचन कहते हैं।

प्रश्न 7.
त्रिक् संलयन का महत्त्व बताइये ।
उत्तर:
आवृतबीजी पादपों में द्विनिषेचन की क्रिया होती है। द्विनिषेचन क्रिया में एक नर युग्मक, अण्ड से संयोजित होकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है जिससे भ्रूण का निर्माण होता है। दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केन्द्र (जो दो ध्रुवीय केन्द्रकों के संयोजन से बनता है) से संयोजित होकर त्रिगुणित भ्रूणपोष केन्द्रक बनाता है, इसे त्रिक् संलयन कहते हैं। भ्रूणपोष केन्द्रक से भ्रूणपोष का निर्माण होता है। भ्रूणपोष परिवर्द्धित होते हुए भ्रूण को पोषण प्रदान करता है। भ्रूणपोष के अभाव में पूर्ण भ्रूण का निर्माण नहीं हो पाता है ।

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प्रश्न 8.
भ्रूणपोष का महत्त्व समझाइए ।
उत्तर:
द्विनिषेचन के फलस्वरूप युग्मनज (Zygote = 2n) एवं भ्रूणपोष केन्द्रक (Endosperm nucleus = 3n) का निर्माण होता है। भ्रूणपोष केन्द्रक विकसित होकर भ्रूणपोष का निर्माण करता है । यह त्रिगुणित (triploid) होता है एवं इसमें नर एवं मादा दोनों के गुणसूत्र उपस्थित होते हैं, अत: यह संकर ओज (Hybrid vigour) का प्रदर्शन करते हैं । भ्रूणपोष का प्रमुख कार्य विकसित हो रहे भ्रूण ( embryo) को पोषण प्रदान करना होता है। इसमें भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक पोषक प्रदान करता है। अतः भ्रूण के विकास के लिए भ्रूणपोष का निर्माण होना अत्यन्त आवश्यक होता है।

प्रश्न 9.
बीजाण्ड से बीज किस प्रकार बनता है?
उत्तर:
वास्तव में, बीज के निर्माण के अन्तर्गत भ्रूण विकास, भ्रूणपोष विकास व बीजाण्ड में होने वाले परिवर्तन आते हैं। इन सबके कारण बीजाण्ड (Ovule), बीज में परिवर्तित हो जाता है। दोनों अध्यावरण बीजावरण (Seed Coats) बना देते हैं जिसमें बाहर वाला बीज चोल (Testa) व अन्दर वाला टेगमेन ( Tegmen) कहलाता है। बीजाण्डवृन्त बीज का वृन्त बनाता है।

नाभिका (Hilum ), बीजाण्डद्वार (Micropyle ), रैफी ( Raphe) और निभाग (Chalaza) में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता है। विकास के समय बीजाण्डकाय (Nucellus) पूर्णरूप से प्रयोग में आ जाता है किन्तु कुछ बीजों में भ्रूणपोष शेष रहकर एक पतली झिल्ली (Membrane) के रूप में रह जाता है जिसे परिभ्रूणपोष (Perisperm) कहते हैं ।

प्रश्न 10.
आवृतबीजी पादपों में पाये जाने वाले भ्रूण तथा भ्रूणपोष में अन्तर स्पष्ट कीजिये ।
उत्तर:
भ्रूण व भ्रूणपोष में अन्तर-

भूरण (Embryo)भ्रूणपोष (Endosperm)
1. यह निषेचित अण्ड से बनता है।यह द्वितीयक केन्द्रक से त्रिसंलयन (Triple Fusion) के बाद बनता है।
2. यह नए पौधे का जन्मदाता है।यह बढ़ने वाले भूरू का केवल पोषण करता है।
3. भ्रूणपोष की अनुपस्थिति में भ्रूण मर जाता है।भूरणपोश की अनुपस्थिति में भूरण नहीं मरता है।
4. इसमें से बीजपत्र, मूलांकुर तथा प्रांकुर बनते हैं।इसमें ऐसी कोई संरचना नहीं बनती है।
5. बीज में भ्रूण पाया जाता है।केवल भूणपोश बीजों में ही भ्रूणपोश मिलता है अन्यथा यह बीज बनने के साथ-साथ समाप्त हो जाता है।

प्रश्न 11.
आवृतबीजी भ्रूणकोश में पाये जाने वाली अण्ड कोशिका तथा द्वितीयक केन्द्रक में अन्तर बताइये ।
उत्तर:
अण्ड कोशिका व द्वितीयक केन्द्रक में अन्तर-

अण्ड कोशिका (Egg Cell)द्वितीयक केन्द्रक (Secondary Nucleus)
यह अण्डद्वार (Micropyle) के पास स्थित होता है।यह भ्रूणकोष (Embryo-sac) के मध्य में स्थिर होता है।
अण्ड सामान्यतः दो सहायक कोशिकाओं (Synergids) द्वारा घिरा रहता है।इसमें ऐसा नहीं होता है।
इसमें केवल एक केन्द्रक (Nucleus) होता है।इसमें दो केन्द्रक होते हैं अथवा दो के न्द्रको का संयोजन (Fusion) होता है।
गुणसूत्र की संख्या आधी (Haploid) होती है।गुणसूत्र की संख्या द्विगुणित (Diploid) होती है।
एक नर युग्मक (Male Gamete) के साथ संलयन कर यह द्विगुणित (Diploid) भूरूण बनाता है।एक नर युग्मक के साथ संलयन कर यह त्रिगुणित (Triploid) भूरणपोश (Endosperm) बनाता है।

प्रश्न 12.
आवृतबीजियों में परागण तथा निषेचन क्रिया में अन्तर बताइये ।
उत्तर:
परागण व निषेचन क्रिया में अन्तर-

परागण (Pollination)निषेचन (Fertilization)
1. परागकणों (Pollengrains) का एक पुष्प के परागकोश से उसी जाति के उसी पुष्प अथवा किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचने की क्रिया को परागण कहते हैं।बीजाण्ड में स्थित भ्रूणकोश (Embryosac) में अण्ड कोशिका (Egg Cell) तथा नर युग्मक के संलयन को निषेचन (Fertilization) कहते हैं।
2. यह क्रिया निषेचन से पूर्व होती है।यह क्रिया परागण के पश्चात् होती है।
3. इस क्रिया को पूर्ण करने में किसी न किसी बाहरी माध्यम; जैसे कीट, पानी, वायु आदि की आवश्यकता होती है।इस क्रिया में कोई बाहरी माध्यम प्रयोग में नहीं आता है।
4. इसमें परागनली नहीं बनती है।परागनली बनती है जिसमें से होकर नर युग्मक अण्ड कोशिका तक पहुँचते हैं।
5. यह क्रिया पुष्प के बाह्य भाग में सम्पन्न होती है, अतः बाह्य क्रिया है।यह क्रिया पुष्प के भीतर होती है, अतः आन्तरिक क्रिया है।

प्रश्न 13.
युग्मक संलयन व द्विनिषेचन को समझाइये।
उत्तर:
[ संकेत- अण्डकोशिका तथा एक नर युग्मक के संलयन को युग्मक संलयन ( gametic fusion or syngamy) या सत्य निषेचन (true fertilization) कहते हैं। यह पहला निषेचन होता है। संलयन के फलस्वरूप द्विगुणित युग्मनज ( diploid zygote) बनता है। आवृतबीजी पादपों में निषेचन की प्रक्रिया दो बार होती है। एक नर युग्मक व अण्ड कोशिका से तथा दूसरा नर युग्मक का द्वितीयक केन्द्रक से संलयन होता है। अतः इसे द्विनिषेचन ( double fertilization) कहते हैं। द्विनिषेचन व त्रिसंलयन केवल मात्र आवृतबीजी पादपों की ही विशेषता है।]

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प्रश्न 14.
बीजाण्ड से बीज बनने के दौरान में होने वाले प्रमुख परिवर्तनों को सारणी बनाकर बताइये ।
उत्तर:
भूरण (Embryo)-
वैज्ञानिक हैन्सटीन ने द्विबीजपत्री भ्रूण के विकास का अध्ययन कैप्सेला बर्सा पैस्टोरिस (Capsella bursa pastories) में किया। इसमें युग्मनज (zygote) का प्रथम विभाजन अनुप्रस्थ होता है जिससे एक शीर्षस्थ (apical) कोशिका तथा एक आधारीय (basal) कोशिका बनती है। शीर्षस्थ कोशिका निभाग की ओर तथा आधारीय कोशिका बीजाण्डद्वार की ओर बनती है।

आधारीय कोशिका में अनुप्रस्थ तथा शीर्षस्थ कोशिका में अनुदैर्घ्य विभाजन होता है। अनुदैर्घ्य विभाजन से शीर्ष पर बनी दोनों कोशिकाओं में फिर से अनुदुर्घ्य विभाजन होता है। इससे चार कोशिकायें या चतुष्टांशक (quadrant) बनता है, इसमें अनुप्रस्थ विभाजन होने से अष्टांशक (octant) बनता है।

अष्टांशक की प्रत्येक कोशिका में परिनत विभाजन से एक बाह्य परत डर्मेटोजन (dermatogen) तथा एक आन्तरिक परत बनती है। डर्मेटोजन से भूरण की त्वचा (epidermis) बनती है। आन्तरिक कोशिकाओं से बीजपत्राधार (hypocotyl), बीजपत्रों (cotyledons) के भरण विभज्योतक (ground meristem) तथा प्राक्एधा तंत्र (procambial system) बनते है।

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आधारीय कोशिकां में अनेक अनुप्रस्थ विभाजनों से 7 से 10 कोशिकीय लम्बा निलम्बक (suspensor) बनता है। निलम्बक की अन्तिम कोशिका फूल कर चूषकांग कोशिका बनाती है जो भूरणोष से खाद्य पदार्थों के अवशोषण का कार्य करती है। शीर्षस्थ कोशिका से बनी कोशिकाओं में निरन्तर विभाजन से भ्रूण हृदयाकार (heart shape) हो जाता है।

इसकी दोनों पालियाँ बीजपत्र बनाती हैं तथा खाँच (notch) में प्रांकुर (plumule) का विकास होता है। इनमें प्रांकुर शीर्षस्थ तथा बीजपत्र पाश्वीय होते हैं। परिपक्व भूरण में भूर्णीय अक्ष पर दो बीजपत्र लगे होते हैं। भूरण अक्ष का बीजपत्रों के स्तर से ऊपर का भाग बीजपत्रोपरिक (epicotyl) तथा नीचे का भाग बीजपत्राधार (hypocotyl) कहलाता है।

एकबीजपत्री में भ्रूण का विकास (Development of monocot embryo)-
इनमें प्रारम्भिक विकास द्विबीजपत्री के जैसे ही होता है। परिपक्व भूरण में एक बीजपत्र होता है जिसे वरुथिका या स्कुटेलम (scutellum) कहते हैं। बीजपत्र शीर्षस्थ व प्रांकुर पाश्व्वीय स्थिति में होते हैं। भूर्णीय अक्ष को बीजपत्रोपरिक (epicotyl) कहते हैं  तथा इसके आधारी भाग को मूलांकुर चोल (coleorhiza) व शीर्ष भाग को प्रांकुर चोल (coleoptile) कहते हैं।
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प्रश्न 15.
परागण प्रक्रिया के अन्तर्गत उदाहरण सहित किसी सह-संबंध को बताइये ।
उत्तर:
इसका उदाहरण शलभ की एक प्रजाति प्रोनुबा युक्का सेल्ला (Pronuba yuccasella) तथा युक्का (Yucca) पादप के मध्य मिलता है। इन दोनों में सह-सम्बन्ध (symbiosis) होता है। यहाँ दोनों ही प्रजाति-शलभ एवं पादप युक्का बिना एक-दूसरे के अपना जीवन-चक्र नहीं पूरा कर सकते हैं। इसमें शलभ (Moth) अपने अंडे पुष्प के अंडाशय के कोष्ठक में देती है। जबकि इसके बदले में वह शलभ द्वारा परागित होता है। शलभ का लारवा (larva) अण्डे से बाहर तब आता है जब बीज विकसित होना प्रारंभ होता है।

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प्रश्न 16.
कुछ इस प्रकार के फलों का वर्णन कीजिये जिनमें अधिक संख्या में बीजों का निर्माण होता है।
उत्तर:
प्रायः फलों में एक या इससे अधिक बीज मिलते हैं परन्तु अनेक ऐसे पौधे हैं जिनमें असंख्य छोटे-छोटे बीज उत्पन्न होते हैं। आर्किड (Orchid ) के फल में 1000 से भी अधिक लघु बीज बनते हैं। परजीवी प्रजाति के फल जैसे ओरोबैंकी (Orobanche) व स्ट्राइगा (Striga) में असंख्य लघु बीजों का निर्माण होता है। फाइकस (Ficus अर्थात् अंजीर) के फलों में भी छोटे-छोटे असंख्य बीज होते हैं और इनके छोटे बीज से विशालकाय पादप का विकास होता है।

प्रश्न 17.
बीजों की जीवन क्षमता को समझाइये |
उत्तर:
एक बीज कितने समय तक जीवित रह सकता है ? इस प्रश्न का निश्चित उत्तर नहीं है क्योंकि विभिन्न प्रजातियों के बीजों की जीवन क्षमता अलग-अलग होती है। कुछ प्रजातियों के बीज अपनी जीवन क्षमता कुछ महीनों में ही खो देते हैं किन्तु अनेक प्रजातियों के बीज अनेक वर्षों तक जीवनक्षम रहते हैं। यहाँ तक कि कुछ पौधों के बीज अनेक वर्षों तक जीवनक्षम रहते हैं।

उदाहरण के तौर पर ल्युपिनस आर्कटीकस (Lupinus arcticus) को आर्कटिक टुंड्रा पर खुदाई से प्राप्त किया गया था जो अनुमानित रिकार्ड 10,000 वर्ष की प्रसुप्ति के पश्चात् बीज अंकुरित व पुष्पित हुआ था। वर्तमान में एक रिकार्ड 2000 वर्ष पुराने खजूर के जीवन क्षम बीज – फोयेनिक्स डैक्टीलीफेरा (Phoenix dactylifera) का है जिसे मृत सागर के पास किंग हैराल्ड के महल की पुरातात्विक खुदाई के दौरान पाया गया था।

प्रश्न 18.
स्वपरागण तथा पर परागण में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
स्व-परागण तथा पर-परागण में अन्तर-

स्व-परागण (Self-pollination)पर-परागण (Cross-pollination)
1. इस प्रक्रिया में किसी एक पुष्प के परागकणों का स्थानान्तरण उसी पुष्प के या उसी पौधे में उपस्थित किसी अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर होता है।एक पौधे के पुष्प के परागकण उसी जाति के किसी दूसरे पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरित होते हैं।
2. पुष्प प्रायः सुगन्धरहित, अनाकर्षक, छोटे तथा मकरन्दरहित होते हैं।पुष्प प्रायः ( वायु परागित पुष्पों के अतिरिक्त) गन्धयुक्त, आकर्षक, बड़े या छोटे दो समूह में तथा मकरन्दयुक्त होते हैं।
3. इस प्रक्रिया में पुष्पों का द्विलिंगी या उभयलिंगी होना आवश्यक है।आवश्यक नहीं है।
4. इसमें परागकण व्यर्थ नहीं होते।इस प्रक्रिया में परागकण बहुत अधिक व्यर्थ होते हैं।
5. इस क्रिया हेतु किन्हीं कर्मकों की आवश्यकता नहीं होती है।इसके लिये कर्मकों की आवश्यकता होती है तभी परागण सम्भव होता है।
6. इसमें नर तथा मादा जनन अंग साथ-साथ परिपक्व होते हैं।अलग-अलग समय पर परिपक्व होते हैं।
7. इस प्रकार के परागण से पौधों की शुद्धता बनी रहती है परन्तु विभिन्नता व विकास की सम्भावनाएँ कम होती हैं।शुद्धता न रहकर दोनों जनकों के लक्षणों का मिश्रण होता है, विभिन्नताएँ व विकास की सम्भावनाएँ अधिक होती हैं।
8. बार-बार स्वपरागण के फलस्वरूप बनने वाले पौधे दुर्बल व अस्वस्थ तथा बीज छोटे व हल्के होते हैं।पौधे स्वस्थ होते हैं तथा बीज भारी व बड़े होते हैं।

प्रश्न 19.
परागण से क्या तात्पर्य है? स्वयुग्मन ( आटोगेमी ) हेतु आवश्यक कोई दो अनुकूलनों को उदाहरण सहित समझाइए ।
उत्तर:
परागण – पुंकेसर के परागकोष से पुष्प के जायांग की वर्तिका पर परागकणों के स्थानान्तरण को परागण कहते हैं । स्वयुग्मन के निम्नलिखित दो अनुकूलन होते हैं-
1. समकालपक्वता (Homogamy) – इस प्रकार के पौधों में पुष्पों में स्थित पुमंग व जायांग एक साथ परिपक्व होते हैं। परागकण तथा वर्तिकाग्र एक ही समय परिपक्व होने की पूर्ण संभावना रहती है। अतः स्वयुग्मन के अवसर बढ़ जाते हैं, उदा. मिराबिलिस, कैथेरैन्थस आदि।

2. अनुन्मील्यता (Celestogamy) – कुछ पौधों में पुष्प सदैव बन्द ही रहते हैं, इस कारण इनमें आवश्यक रूप से स्वयुग्मन होता है। उदा. – कनकोआ (Commelina), वायोला ( Viola), आक्जेलिस (Oxalis), जंक्स (Juncus) तथा ड्रॉसेरा (Drosera) आदि ।

प्रश्न 20.
परागण किसे कहते हैं? वेलिसनेरिया तथा समुद्री घासों में परागण की क्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परागकणों का स्त्रीकेसर के वर्तिकाग्र तक स्थानान्तरण या संचारण को परागण कहा जाता है। वेलिसनेरिया पादप जल में डूबा रहता है, इसके नर व मादा पौधे अलग-अलग होते हैं। नर में पुष्प छोटे व असंख्य होकर स्थूलमंजरी (spadix ) पुष्पक्रम में लगे होते हैं। पुष्पक्रम जल-निमग्न होता है। नर पुष्प पृथक् होकर जल की सतह पर तैरते रहते हैं।

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मादा पुष्प एकल तथा इसका लम्बा, कुण्डलित वृन्त पुष्प के परिपक्व होने पर खुल जाता है व पुष्प जल की सतह पर पहुँच जाता हैं तैरते हुए नर पुष्प जब मादा पुष्पों के सम्पर्क में आते हैं तो उनके परागकोश झटके से फट जाते हैं तथा परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँच जाते हैं। अतः जल की सतह पर, जल के माध्यम से वेलिसनेरिया में जल परागण होता है। समुद्री घासों (सीग्रासेस) में मादा पुष्प जल की सतह के नीचे ही पानी में डूबा रहता है और परागकणों को जल के अन्दर ही अवमुक्त किया जाता है।

प्रश्न 21.
25 प्राथमिक शुक्र कोशिकाओं तथा 25 प्राथमिक अण्ड कोशिकाओं से बनने वाले शुक्राणुओं तथा अण्डाणुओं का अनुपात कितना होगा? कारण सहित समझाइए ।
उत्तर:
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प्रश्न 22.
उन्मील परागणी पुष्प एवं अनुन्मील परागणी पुष्प अन्तर लिखिए ।
उत्तर:
उन्मील परागणी पुष्प (Chasmogamous Flowers ) – ये सामान्य पुष्पों के समान होते हैं, इनके परागकोश एवं वर्तिकाग्र अनावृत होते हैं। इनमें सामान्य पुष्पों की जैसे परागण होता है।

अनुन्मील्य परागणी पुष्प (Cleistogamous Flowers) – ये पुष्प सदैव बन्द रहते हैं। इन पुष्पों में परागकोश (anther) एवं वर्तिकाग्र (stigma) एक-दूसरे के बिल्कुल नजदीक स्थित होते हैं। जब पुष्प कलिका में परागकोश स्फुटित होते हैं तब परागण क्रिया सम्पन्न होती है। इनमें सदैव स्वपरागण होता है, क्योंकि इनके वर्तिकानों पर अन्य पुष्पों के परागकण नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे पुष्पों में बीज निर्माण प्रक्रिया सुनिश्चित होती है। उदाहरण- वायोला, कोमेलीना आदि ।

प्रश्न 23.
भ्रूणपोष किसे कहते हैं? मुक्त केन्द्रकी भ्रूणपोष एवं कोशिकीय भ्रूणपोष का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
द्वि- निषेचन ( double fertilization) तथा त्रिसंलयन (triple fusion) के फलस्वरूप भ्रूणकोष में बने हुए त्रिगुणित केन्द्रक से एक पोषक संरचना का परिवर्द्धन होता है। इसे भ्रूणपोष कहते हैं। यह विकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है ।

केन्द्रकीय भ्रूणपोष (Nuclear endosperm ) – इस प्रकार के भ्रूणपोष में परिवर्द्धन के समय भ्रूणपोष केन्द्रक स्वतन्त्र रूप से विभाजित होता रहता है और विभाजनों के साथ भित्तियों (walls) का निर्माण नहीं होता है। विभाजन के फलस्वरूप बने केन्द्रक भ्रूणकोष (embryo sac ) में परिधि से केन्द्र की ओर विन्यसित हो जाते हैं। अन्त में परिधि से केन्द्र की ओर कोशिका भित्ति का निर्माण प्रारम्भ हो जाता है। उदाहरण- कैप्सेला ( Capsella)।

कोशिकीय भ्रूणपोष ( Cellular endosperm ) – भ्रूणपोष केन्द्रक के प्रत्येक बार विभाजन के पश्चात् कोशिका भित्ति का निर्माण होता है। इस प्रकार पूरा भ्रूणपोष अनियमित व्यवस्था वाली कोशिकाओं का एक ऊतक होता है। जैसे एडोक्सा ( Adoxa) ।

प्रश्न 24.
पराग – स्त्रीकेसर संकर्षण (पारस्परिक क्रिया) को विस्तार से समझाइए ।
उत्तर:
पुष्पी पादपों के पुष्प के वर्तिकाग्र पर पराग अवस्थित होने से लेकर बीजाण्ड में पराग नलिका के प्रविष्ट होने तक की सभी घटनाओं को परागस्त्रीकेसर संकर्षण के नाम से सम्बोधित किया जाता है। परागण क्रिया के द्वारा परागकणों का स्थानान्तरण तो होता है परन्तु यह सुनिश्चित नहीं होता है कि उसी प्रजाति का सुयोग्य पराग वर्तिकाग्र तक पहुँचे।

कभी-कभी गलत प्रकार के पराग भी उसी वर्तिकाग्र पर आ जाते हैं (जिसमें ये या तो उसी पादप से होते हैं या फिर अन्य पादप से) । स्त्रीकेसर में यह सक्षमता होती है कि वह पराग को पहचान सके कि वह उसी वर्ग के सही प्रकार का पराग (सुयोग्य ) है या फिर गलत प्रकार का ( अयोग्य) है। यदि पराग सही प्रकार का होता है तो स्त्रीकेसर उसे स्वीकार कर लेता है तथा परागण पश्च घटना हेतु प्रोत्साहित करता है जो कि निषेचन की ओर बढ़ता है।

यदि पराग गलत प्रकार का होता है तो स्त्रीकेसर वर्तिकाग्र पर पराग अंकुरण या वर्तिका में पराग नलिका वृद्धि रोककर पराग को अस्वीकार कर देता है। पराग को पहचानने की यह क्षमता स्त्रीकेसर तथा पराग के रासायनिक घटकों के संकर्षण द्वारा होती है। वैज्ञानिकों ने स्त्रीकेसर एवं पराग के घटकों को जानकर उनके बीच संकर्षण (परस्पर क्रिया) को स्वीकृति या अस्वीकृति के रूप में जाना है ।

सुयोग्य परागकण होने पर, परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर जनन छिद्र के माध्यम से एक परागनलिका उत्पन्न करते हैं। परागनलिका वर्तिकाग्र तथा वर्तिका के ऊतकों के माध्यम से वृद्धि करती है और अण्डाशय तक पहुँचती है। अण्डाशय में पहुँचकर बीजाण्ड द्वार के माध्यम से बीजाण्ड में प्रवेश करती है।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
परागण के विभिन्न अभिकर्मकों को विस्तार से बताइये ।
उत्तर:
परागण (Pollination)-
परागकणों के परागकोश से मुक्त होकर जायांग के वर्तिकाग्र (stigma) तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं। परागण मुख्यतः दो प्रकार से होता है-

  1. स्व-परागण तथा
  2. पर-परागण।

1. स्वपरागण (Self-pollination)-इस प्रक्रिया के अन्तर्गत किसी एक पुष्प के परागकणों का स्थानान्तरण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर होता है। यह दो प्रकार से हो सकता है-

  • स्वयुग्मन (Autogamy)-इसमें एक पुष्प के परागकण उसी पुष्य के वर्तिकाग्र पर पहुंचते हैं। अतः यह क्रिया केवल द्विलिंगी (bisexual) पुष्यों में ही हो सकती है।
  • सजातपुष्पी परागण (Geitonogamy)-जब एक पुष्प के परागकण उसी पौधे में उपस्थित किसी दूसरे पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुंचते हैं। सजातपुष्पी परागण एक ही पौधे में उपस्थित दो अलगअलग पुष्पों के बीच होता है।

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स्वपरागण हेतु अनुकूलन (Adaptations for selfpollination)-जिन पादपों में स्वपरागण होता है उनमें कुछ विशेषताएँ होती हैं जो निम्न प्रकार से हैं-

  • उभयलिंगता (Bisexuality)-इस प्रकार के पादपों में द्विलिंगी (bisexual) पुष्प लगते हैं।
  • समकालपक्वता (Homogamy)-इस प्रकार के पौधों में पुमंग व जायांग एक साथ परिपक्व होते हैं, इस लक्षण को समकालपक्वता कहते हैं। परागकण एवं वर्तिकाग्र एक ही समंय परिपक्व होने के कारण स्वपरागण होने की पूरी सम्भावना रहती है। उदा.-मिराबिलिस (गुलब्वास), कै थेरैन्थस।
  • अनुन्मील्यता (Cleistogamy)-कुछ पौधों में पुष्प सदैव बन्द रहते हैं। ऐसे पुष्पों को अनु न्मील्य पुष्प (cle istog a mous flowers) कहते हैं। अत: इनमें आवश्यक रूप से स्वपरागण होता है। ऐसे पुष्प सुगन्ध व मकरन्द रहित, अनाकर्षक तथा छोटे होते हैं।

उदा.-कनकोआ (Commelina), वायोला (Viola), ऑक्जे लिस (Oxalis)। कनकोआ में अनुन्मील्य पुष्प भमिगत होते हैं। इसी पौधे के वायवीय भाग पर सामान्य पुष्प या उन्मील परागणी या कै जमोगेमस (Chasmogamous) अर्थात् खुले पुष्प होते हैं।
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स्वपरागण के लाभ (Advantages of self-pollination)-

  • इस परागण की सफलता निश्चित होती है क्योंकि इसमें किसी बाहरी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
  • सन्तति में जाति के गुण वही रहते हैं। अतः लक्षणों की शुद्धता रहती है। इसमें लक्षणों की शुद्धता को आगामी पीढ़ियों में बनाये रखा जा सकता है क्यों कि इससे प्राप्त पादप समयुग्मजी (Homozygous) होते हैं।
  • इस प्रकार के परागण के लिये अधिक परागकण उत्पन्न करने की जरूरत नहीं होती है, अतः यह एक मितव्ययी विधि है।
  • इसमें परागण अभिकर्त्तां (agents) को आकर्षित करने के लिये रंग, गन्ध या मकरन्द आदि उत्पन्न नहीं करना पड़ता है।
  • पौधों के उपयोगी लक्षणों को असीमित काल के लिये संरक्षित किया जा सकता है।

स्वपरागण से हानियाँ (Disadvantages of self-pollination)-

  • स्वपरागण के द्वारा पौधों में विभिन्नताएँ नहीं आतीं अतः पौधों की नई किस्मों या प्रजातियों का उद्भव नहीं होता है।
  • इससे बने बीज अच्छे नहीं होते व बनने वाला पौधा भी दुर्बल व कम प्रतिरोधक क्षमता वाला होता है।
  • पौधों की जीवन क्षमता का भी निरन्तर ह्रास होता जाता है।
  • पौधों की उत्पादन क्षमता निरन्तर आने वाली पीढ़ियों में कम होती जाती है।

2. पर-परागण (Cross-pollination)-इस विधि में एक पौधे के पुष्प के परागकण उसी जाति के किसी अन्य पौधे के पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानान्तरित होते हैं, तो इसे पर-परागण कहते हैं। परपरागण को एलोगेमी (Allogamy) या जीनोगेमी (Xenogamy) भी कहते हैं। इस प्रकार पर-परागण में दो भिन्न पौधों के नर एवं मादा युग्मकों में निषेचन होता है। पौधों में पर-परागण क्रिया द्वारा पुनर्योंजन (recombination) एवं विभिन्नताएँ (variations) उत्पन्न होने की सम्भावनाएँ रहती हैं।

पर-परागण के लिये अनुकूलन (Adaptations for cross pollination)-
(i) स्वबन्ध्यता (Self-sterlity)-कुछ पादपों में यदि पुष्प के परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर पहुँच जाते हैं तो वे अंकुरित नहीं होते, इसे स्वबन्ध्यता कहते हैं। उदा.-राखीबेल या झुमकलता (Passiflora), अंगूर, आलू, तम्बाकू, चाय तथा सेब (Malus) इत्यादि।

(ii) एकलिंगता (Unisexuality)-कुछ पौधों में पुष्प एकलिंगी होते हैं। इन पुष्पों में नर या मादा दोनों में से कोई एक प्रकार के जनन अंग होते हैं। अतः इनमें पर-परागण ही होता है। यदि नर व मादा दोनों प्रकार के पुष्प एक ही पौधे पर मौजूद हों तो पौधे को उभयलिंगाश्रयी (monoecious) कहते हैं अथवा नर व मादा पुष्म अलग-अलग पौधों पर उपस्थित होते हैं तो पौधे को एकलिंगाश्रयी (dioecious) कहा जाता है, उदा -पपीता।

(iii) भिन्नकालपक्वता (Dichogamy)-कुछ पादपों के पुष्पों में परागकोश व वर्तिकाग्र के परिपक्व होने का समय अलग-अलग होता है, जैसे साल्विया (Salvia) में परागकोश वर्तिकाग्र से पूर्व परिपक्व होते हैं। इस लक्षण को पुंपूर्वता (protandry) कहते हैं। बैंगन, मक्का व ब्रैसीकेसी (Brassicaceae) कुल के पौधों में वर्तिकाग्र परागकोश से पूर्व परिपक्व होते हैं, इसे स्त्रीपूर्वता (protogyny) कहा जाता है।
दोनों जनन अंगों के परिपक्व होने का समय अलग-अलग होने से परपरागण ही होता है।

(iv) बन्धन युति या हरकोगेमी (Herkogamy)-कुछ पौधों के पुष्पों में वर्तिकाग्र एवं परागकोश के बीच प्राकृतिक संरचनात्मक अवरोध (structural barrier) होता है। उदा.- कै रियोफिलेसी (Caryophyllaceae) कुल के पादपों में वर्तिका की लम्बाई पुंकेसर से काफी अधिक होने के कारण इनके बीच परागण संभव नहीं हो पाता है। आक या मदार (Calotropis) में परागकण परागपिण्डां (pollinia) में व्यवस्थित रहते हैं। इन परागपिण्डों को कीट द्वारा ही हटाया जाता है। अतः पर-परागण ही सम्भव होता है।

(v) विषमवर्तिकात्व (Heterostyly)-कुछ पुष्पों में वर्तिका की लम्बाई अलग-अलग प्रकार की होती है। प्रिमुला (Primula) पादप में दो प्रकार के पुष्प होते हैं-एक जिसमें वर्तिका लम्बी तो पुंकेसर छोटे होते हैं, दूसरे जिनमें वर्तिका छोटी तो पुंकेसर लम्बे होते हैं। इस प्रकार पौधे में द्विरूपी (dimorphic) पुष्प लगते हैं। अतः इनमें स्वपरागण सम्भव न होकर पर-परागण ही होता है।

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पर-परागण से लाभ (Advantages of Cross-pollination)-

  • इस प्रक्रिया से नवीन संयोजन या पुनयर्रेजन (recombination) विकसित होते हैं, इससे अगली पीढ़ियों में विभिन्नताएँ (variations) आती हैं।
  • पुनर्योजन व विभिन्नताओं द्वारा नवीन व उन्नत किस्में विकसित होती हैं तथा विकास एवं अनुकूलन की अधिक सम्भावना होती है।
  • पर-परागण से संतति पीढ़ियों में जीवन क्षमता, रोग प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है। पौधे सबल, स्वस्थ व उत्तम गुण वाले होते हैं।
  • इस प्रक्रिया द्वारा हानिप्रद लक्षणों को अग्रिम पीढ़ियों में हटाया जा सकता है व इनमें बीजों की संख्या भी अधिक होती है।

पर-परागण से हानियाँ (Disadvantages of crosspollination)-

  • इस प्रक्रिया में असंख्य परागकण बनते हैं तथा अधिकतर व्यर्थ व नष्ट हो जाते हैं।
  • यह प्रक्रिया सुनिश्चित न होकर संयोग मात्र की है।
  • यह प्रक्रिया विभिन्न माध्यमों के द्वारा होती है, अतः कीटों व प्राणियों को आकर्षित करने के लिये पुष्पों में रंग, गंध, मकरंद आदि उत्पन्न करने की आवश्यकता होती है।
  • पर-परागण विधि द्वारा लाभदायक गुणों को संरक्षित नहीं किया जा सकता। इसमें आगे की पीढ़ियों में हानिकारक या अनिच्छित गुण प्रविष्ट हो सकते हैं।

पर-परागण के अभिकर्मक या कारक (Agents of Crosspollination)
पर-परागण में परागकणों को एक पुष्य से दूसरे पौधे पर उपस्थित पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित करने के लिये बाहरी साधनों की आवश्यकता होती है। पर-परागण के ये साधन कर्मक कहलाते हैं। ये साधन जीवीय या अजीवीय हो सकते हैं। अधिकतर पौधे पर-परागण के लिये जीवीय कारकों का उपयोग करते हैं, अजीवीय कारकों का कम उपयोग होता है। इन साधनों के आधार पर पर-परागण अग्र प्रकार का हो सकता है-

(i) वायु परागण (Anemophily)-परागकणों का स्थानान्तरण वायु के द्वारा होता है। इस प्रकार के परागण में परागकण का वर्तिकाग्र के सम्पर्क में आना महज संयोगात्मक घटना है। इनमें परागकणों का उत्पादन अधिक संख्या में होता है तथा परागकण छोटे, हल्के, चिकने व शुष्क होते हैं। वायु परागित पुष्पों में वर्तिकाग्र में अनुकूलन पाए जाते हैं।

इसमें परागकण सरलता से वायु में उड़ते हैं तथा मादा पुष्प वृहद व पिच्छ वर्तिकाग्र युक्त होते हैं ताकि सरलता से वायु में उड़ते हुए परागकणों को आबद्ध किया जा सके। घास में वर्तिकाग्र पक्ष्माभी (feathery), टाइफा (Typha) में ब्रश की भांति होते हैं। मक्का में वायु परागण होता है। इसके वायु में उड़ते परागकण रेशमी वर्तिकाग्रों (भुट्टे से निकले हुए अनेक रेशमी बाल जैसे) द्वारा पकड़ लिये जाते हैं।

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(ii) जल परागण (Hydrophily)-जल में डूबे हुये पौधों में अधोजल परागण होता है। उदा.-समुद्री घास या जोस्टेरा (Zostera), सिरेटोफिलम (Ceratophyllum)। अनेक जलीय पादपों के पुष्प जल की सतह पर रहकर परागित होते हैं तो इसे अधिजल परागण कहते हैं। उदा.-वेलिस्नेरिया (Vallisnaria), पोटेमोजिटोन (Potamogeton) में परागण वायु द्वारा होता है। निम्फिया (Nymphaea) भी जलीय पादप है परन्तु इसमें कीट परागण होता है।

(iii) कीट परागण (Entomophily)-मधुमक्खियाँ (bees), मक्खियाँ (flies), पतंगा (moth), तितली (butter fly), वैस्प (wasp), बीटल (beetle) आदि कीट परागण में सहायता करते हैं। यह माना जाता है कि 80% कीट परागण मधुमक्खियों के द्वारा होता है। जिन पौधों के पुष्पों में कीट परागण होता है वे रंगीन, चमकदार, गंधयुक्त तथा मकरंदयुक्त होते हैं।

(iv) पक्षी परागण (Ornithophily)-विभिन्न प्रकार के उण्ण कटिबंधीय (tropical) पौधों में पक्षी परागण होता है। इनके पुष्म प्यालेनुमा (उदा.-कैलीस्टेमोन), नलिकाकार (उदा –निकोटिआना) या कुंभाकार (उदा,-एरीकेसी कुल के पादप) होते है। इन पौधों के पुष्य चमकदार, आकर्षक तथा मकरंदयुक्त होते हैं। मकरंद से आकर्षित होकर आए पक्षियों की चोंच व शरीर से पराग कण चिपक जाते हैं तथा इनके साथ ही अन्य पौर्धों वक पहुँच जाते हैं।

(v) चमगादड परागण (Cheiropterophily)-कुछ पाद्पों में पुष्म रात्रि में खिलते हैं तथा अत्यधिक माग्रा में मकरंद स्रावित करते हैं। चमगादड़ निशाचर (nocturnal) प्रवृत्ति के होने के कारण इन पौधों के परागण में सहायक होते हैं। उदा.-कचनार (Bauhinia), गोरख इमली (Adansonia), कदम्ब (Anthocephalus), बालमखीरा (Kiglia) इत्यादि। इसके अतिरिक्त सर्पवृक्ष (Arisaema) और ऑरिक्ड (Orchid) में घोंघे के द्वारा तथा गुलमोहर व सेमल में गिलहरी के द्वारा परागण होता है।

नोट-कीट परागण के अन्तर्गत कुछ इस प्रकार के उदाहरण भी हैं जो अंडा देने का सुरक्षित स्थान बना लेते हैं। उदा,-एमोरफोफेलस (Amorphophallus) में पुष्य बहुत लम्बा (लगभग 6 फुट) होता है, जिसमें अंड्रा सुरक्षित रहता है। इसी प्रकार शलभ की एक जाति प्रोनूबा (Pronuba yuccasella) व युक्का (Yucca) में सह-संबंध होता है। प्रोनूबा की मादा परागण हेतु विशेष कार्य करती है।

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युक्का के पुष्य घंटाकार व उल्टे लटके हुए होते हैं। वर्तिका पुंकेसरों से लम्बी तथा वर्तिकाग्र प्याले की जैसे तथा नीचे की ओर लटके रहते हैं। इस प्रकार से इस पुष्य के परागकण इसी के वर्तिकाग्र पर नहीं गिर सकते हैं। मादा शलभ परागकण अपने सुँह में एकत्रित कर, पुष्प के अन्दर घुसकर पुष्म के अप्डाशय के भीतर अपने अण्डे रखती है। अण्डे रखने के बाद शलभ वर्तिका से होती हुई वर्तिकाग्र पर पहुँच कर अपने हुँह में रखे परागकणों को उगल देती है।

पर-परागण के उदाहरण-
(i) बैलिस्नेरिया में जल परागण (Hydrophily in Vallisneria)-वैलिस्नेरिबा जल में उगने वाला निमग्न पादप है। इसमें नर व मादा पौधे अलग-अलग होते हैं अर्थात् यह एक एकलिंगाश्रयी (dioecious) पादप होता है। नर पौधे में पुंकसेरी पुष्प फीते के आकार की पत्तियों के कक्ष में स्थूलमंजरी (spadix) में लगते हैं। इसमें अपरिपक्व अवस्था में स्पेथ के टूट जाने से नर पुष्प पुष्पक्रम से पृथक् होकर जल की सतह पर तैरने लगते हैं।

मादा पौधों में स्त्री पुष्प एकल लगते हैं, परन्तु इनका पुष्पवृन्त इतना लम्बा होता है कि पुष्प जल की सतह पर आ जाते हैं। नर पुष्प के परिपक्व होने पर इनसे परागकण मुक्त होकर जल की लहरों पर तैरते हुए, मादा पुष्पों के वर्तिकाग्र के सम्पर्क में आ जाते हैं। परागकण प्राप्त करने के पश्चात् मादा पुष्पों का पुष्पवृन्त कुण्डलित होकर पुष्प को जल के अन्दर पत्तियों के बीच में खींच लेता है तथा फल भी अन्दर ही बनता है।

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(ii) साल्विया में कीट परागण (Entomophily in Salvia)-साल्विया तुलसी कुल का पादप है। इसका पुष्प द्विओष्ठी (bilabiate) होता है। इसमें से एक ओष्ठ ऊपर एवं दूसरा नीचे की ओर होता है। पुष्प की विशेष बनावट के कारण प्रायः एक ही प्रकार के कीट, जैसे बर्र (vasps) इस पुष्प में पर-परागण कर सकते हैं। पुष्प का ऊपरी ओष्ठ दो दलों से बना होता है तथा ऊपर की ओर उठा हुआ व अन्दर की ओर मुड़ा रहता है। इसी मुड़े हुए हिस्से में पुंकेसर व वर्तिका स्थित होते हैं।

पुष्प का निचला ओष्ठ कीट के लिए मंच का कार्य करता है। साल्विया के पुष्प पुंपूर्वी (protandrous) होते हैं। इसके पुष्प में दो पुंकेसर होते हैं। प्रत्येक पुंकेसर की योजी (connective) अधिक लम्बी होती है जिससे परागकोश (anther) की दोनों पालियाँ अलग हो जाती हैं। इसकी ऊपरी पाली में परागकण उत्पन्न होते हैं किन्तु निचली पाली बन्ध्य (sterile) होती है। पुंकेसर का पुतन्तु (filament) योजी से परागकोश की बन्ध्य पाली के पास जुड़ा होता है।

इस कारण पुंकेसर एक लीवर (lever) की तरह कार्य करता है। जब कोई कीट मकरन्द की तलाश में पुष्प की ओर आकर्षित होकर दलपुंज द्वारा बने मंच पर बैठकर दलपुंज की नली में अपने सिर को डालता है तो इससे बन्ध्य पाली के पीछे की ओर धकेल दी जाती है, इस कारण योजी के ऊपरी सिरे पर लगा परागकोश झटके के साथ नीचे झुक कर कीट की पीठ से टकराकर परागकण बिखेर देता है। जैसे ही यह कीट किसी अन्य पुष्प पर जाकर पुष्प के अन्दर प्रवेश करने का प्रयत्न करता है, उस समय झुका हुआ वर्तिकाग्र कीट की पीठ पर रगड़ जाता है। पीठ पर पहले से ही परागकण होते हैं अतः पुष्प में परागण सम्पन्न हो जाता है।
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परागकण-जायांग संकर्षण या पारस्परिक क्रिया (Pollen grainpistil interaction)-
एक ही प्रजाति के परागकण उसी प्रजाति के जायांग के वर्तिकाग्र पर अंकुरित होते हैं। वर्तिकाग्र इतनी सक्षम होती है कि वह अन्य प्रजाति के परागकण को स्वीकार नहीं करती है। सहीं या सुयोग्य परागकण होने पर परागकण का वर्तिकाग्र पर अंकुरण होता है। परागकण के जनन छिद्र से पराग नलिका बनकर वह वर्तिकाग्र तथा वर्तिका के ऊतकों के माध्यम से वृद्धि करती हुई अंडाशय तक पहुँचती है। ये सभी प्रक्रियाएँ परागकण-जायांग संकर्षण होती हैं।

कृत्रिम संकरण (Artificial hybridization)-
कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए पाद्प प्रजनक भिन्न प्रजातियों के बीच क्रॉसिंग करवाते हैं। क्रॉसिंग करवाने के लिये दोनों जनक उत्तम गुणवत्ता वाले लिये जाते हैं। क्रॉसिंग करवाते समय इच्छित पाद्प के परागकण मादा के वर्तिकाग्र पर डाले जाते हैं तथा वर्तिकाग्र को संदूषण (अनापेक्षित पराग कणों) से बचाया जाता है।

इसके लिये बोरावस्त्र तकनीक (bagging technique) तथा विपुंसन (emasculation) का उपयोग किया जाता है। यदि कोई मादा जनक में द्विलिंगी पुष्प होता है तो उसके परागकोशों को कलिका स्थिति में ही चिमटी से पकड़कर हटा दिया जाता है, इस क्रिया को विपुंसन कहते हैं।

विपुंसित पुष्यों को उपयुक्त आकार की थैली (बटर पेपर से बनी हुई) से ढक देते हैं ताकि अनापेक्षित परागकणों से बचाया जा सके। इस प्रक्रिया को बोरावस्त्राकरण (Bagging) कहते हैं। जैसे ही बैगिंग पुष्प का वर्तिकाग्र सुग्राही होता है त्योंही नर जनक से एकत्रित किये गये परागकणों को इस वर्तिकाग्र पर छिड़क देते हैं तथा पुनः थैली ओढ़ाकर फल विकसित होने तक छोड़ दियां जाता है। एकलिंगी पुष्पों में विपुंसन की आवश्यकता तो नहीं होती किन्तु इसे संदूषण से बचाने के लिये थैली से ढकना पड़ता है।

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प्रश्न 2.
आवृतबीजी पादप में नर युग्मकोद्भिद के परिवर्धन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पुंकेसर, लघुबीजाणुधानी तथा परागकण (Stamen, microsporangium and pollen grain)
पुष्पों में नर जनन अंग पुमंग (androecium) होता है जिसके एक सदस्य को पुंकेसर (stamen) कहते हैं। प्रायः एक पुंकेसर के दो भाग होते हैं -परागकोश (anther) तथा पुतन्तु (filament) । एक पुं के सर का परागकोश प्रायः दो पालियों (lobes) से बना होता है।

दोनों पालियाँ या परागकोश आपस में तथा पुतन्तु के साथ योजी (connective) नामक ऊतक से जुड़ी होती हैं। पुंकेसर का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग परागकोश है। जिस पुंके सर में दो पराग पालियाँ होती हैं, उसे द्वि कोष्ठी या द्विपालित (dithecous or bilobed) कहते हैं। परन्तु मालवेसी कुल के सदस्यों जैसे भिंडी या गुड़हल के पुंकेसरों में केवल एकपाली या एककोष्ठी (unilobed or monothecous) स्थिति होती है।

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लघुबीजाणुधानी की संरचना (Structure of microsporangium)-एक प्रारूपिक पुंकेसर के परिपक्व परागकोश के अनुप्रस्थ काट का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि परागकोश की एक पाली में दो प्रकोष्ठ (chambers) होते हैं, इन प्रकोष्ठों को परागपुटी या लघुबीजाणुधानी (Pollen sacs or microsporangium) कहते हैं। इस प्रकार एक परागकोश में चार परागपुटी या लघुबीजाणुधानी होती हैं। अतः एक परिपक्व परागकोश भित्ति तथा पराग प्रकोष्ठ (Pollen chamber) से मिलकर बना होता है।

1. परागकोश की भित्ति (Wall of anther)-परागकोश चार भिन्न परतों से आवरित होता है-
(i) बाह्य त्वचा,
(ii) अन्तस्थीसियम,
(iii) मध्य परतें तथा
(iv) टेपीटम

(i) बाह्य त्वचा (Epidermis)-यह सबसे बाहरी एक कोशिकीय परत होती है तथा इसका कार्य सुरक्षा करना होता है।

(ii) अन्तस्थीसियम (Endothecium)-यह बाह्यत्वचा के नीचे अरीय (radially) प्रकार से लम्बी कोशिकाओं की एकस्तरीय परत होती है। इनकी कोशिकाओं में α -सैल्यूलोज ( α-cellulose) के जम जाने से रेशेदार पट्टियाँ (fibrous bands) बन जाती हैं। इन पट्टियों के कारण अन्तस्थीसियम कोशिकाओं की प्रकृति आर्द्रताग्राही हो जाती है। ये पट्टियाँ परागकोश के स्फुटन में सहायक होती हैं। इनके बीच कुछ कोशिकाओं में इस प्रकार की पद्टियाँ नहीं पायी जाती हैं, इन्हें स्टोमियम (stomium) कहते हैं। परांगकोश का स्फुटन इन स्थानों से होता है।

(iii) मध्य परतें (Middle layers)-अन्तस्थीसियम के नीचे लगभग 3-4 पतली भित्ति वाली परतें पाई जाती हैं। परिपक्व परागकोश में ये परतें सामान्यतः नष्ट हो जाती हैं तथा विकसित होते हुए लघुबीजाणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
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(iv) टेपीटम (Tapetum)-यह परागकोश की भित्ति की सबसे अन्दर की परत होती है। टेपीटम की कोशिकाओं का जीवद्रव्य गाढ़ा तथा केन्द्रक बड़ा व सुस्पष्ट होता है। परिपक्व टेपीटम की कोशिकायें प्राय: बहुकेन्द्रकी हो जाती हैं। इसका मुख्य कार्य विकसित होते हुए लघुबीजाणु मातृ कोशिकाओं का पोषण प्रदान करना होता है। टेपीटम की कोशिकाओं से एन्जाइम और हार्मोन, दोनों का निर्माण होता है। आवृतबीजी (angiosperms) पादपों में टेपीटम दो प्रकार के होते हैं-

(अ) अमीबीय अथवा पैरिप्लाज्मोडियल (Amoeboid or Periplasmodial)-इस प्रकार के टेपीटम की कोशिकाओं की कोशिका भित्ति टूट जाती है तथा इनके जीवद्रव्य बीजाणु मातृ कोशिकाओं के बीच विचरण कर वृद्धिशील परागकणों को पोषण प्रदान करते हैं। उदा.-ट्रेडस्केंशिया (Tradescantia), टाइफा (Typha) आदि।

(ब) सावी अथवा ग्रन्थिल टेपीटम (Secretory or glandular tapetum)-आवृतबीजी पादपों में प्रायः इस प्रकार का टेपीटम पाया जाता है। इस प्रकार के टेपीटम की कोशिकाओं की आन्तरिक सतह से खाद्य पदार्थों का स्रावण होता है, इससे वृद्धिशील परागकणों को पोषण प्राप्त होता है। स्रावी प्रकृति के टेपीटम की कोशिकाओं में लिपिड प्रकृति की गोलाकार संरचनाएँ मिलती हैं, जिन्हें प्रोयूबिश काय (proubish bodies) कहते हैं। इनके चारों ओर स्पोरोपोलेनिन (sporopollenin)नामक जटिल पदार्थ जम जाता है। इससे परागकणों की बाहरी सतह अर्थात् बाह्यचोल (exine) का निर्माण होता है।

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परागकणों के बनने के समय टेपीटम सबसे अधिक विकसित होता है तथा परागकणों के परिवर्धन में टेपीटम महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह इन्हें पोषण प्रदान करता है। यदि किसी परागकोश में परागकणों के विकास से पूर्व ही टेपीटम नष्ट हो जाता है तो इसके परागकण बन्ध्य (sterile) या रुद्ध (abortive) होते हैं।

2. बीजाणुजन कोशिकाएँ (Sporogenous cells)-जैसा कि पूर्व में बताया गया है कि प्रत्येक परागकोश में चार पालियाँ होती हैं। प्रत्येक पाली भित्ति परतों से आवरित होती है तथा सबसे अन्दरी परत टेपीटम के अन्दर सजातीय कोशिकाओं का समूह होता है। इस समूह को प्राथमिक बीजाणुजन कोशिकायें (primary sporogenous cells) कहते हैं। ये कोशिकाएँ लघुबीजाणु या पराग मातृ कोशिकाएँ (microspore or pollen mother cells) बनाती हैं।

लघुबीजाणुजनन (Microsporogenesis)-परागकोश के विकास के साथ-साथ प्रत्येक सक्रिय लघुबीजाणु मातृ कोशिका अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा चार लघुबीजाणु (microspores) बनाती है। लघुबीजाणु मातृ कोशिका से लघुबीजाणु बनने की प्रक्रिया को लघुबीजाणुजनन कहते हैं। चारों लघुबीजाणु चतुष्क (tetrad) के रूप में व्यवस्थित रहते हैं।

विभिन्न प्रकार के पौधों में लघुबीजाणुओं की व्यवस्था के क्रम के अनुसार चतुष्क निम्न प्रकार के हो सकते हैं-

  • चतुष्फलकीय (Tetrahedral)-ये अधिकतर द्विबीजपत्री पौधों में पाए जाते हैं। इनके एक ओर से देखने पर केवल तीन लघुबीजाणु दिखाई देते हैं और चौथा लघुबीजाणु इन तीनों के पीछे की ओर स्थित होता है। सबसे अधिक पादपों में यह व्यवस्था होती है।
  • समद्विपार्शिवक (Isobilateral)-प्रायः ये एकबीजपत्रियों में पाये जाते हैं। इनमें चारों लघुबीजाणु एक ही तल में होते हैं।
  • क्रॉसित (Decussate)-इनमें दो-दो लघुबीजाणु एकदूसरे से 90° का कोण बनाते हैं।
  • रैखिक (Linear)-सभी लघुबीजाणु एक सीधी रेखा में व्यवस्थित होते हैं।
  • T- आकार (T-Shaped)-इनमें दो लघुबीजाणु अनुप्रस्थ रूप में तथा दो लम्बवत् रूप में विन्यासित रहते हैं।

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B. समद्विपाश्वक, C. क्रॉसित, D. T- आकार तथा E. रैखिक। लघुबीजाणुओं के बीच में कैलोज की बनी हुई भित्ति होती है। इस भित्ति के घुल जाने पर लघुबीजाणु स्वतन्त्र हो जाते हैं। चतुष्क से मुक्त होने के पश्चात् ये गोलाकार हो जाते हैं तथा इन्हें परागकण (pollen grain) कहते हैं। एक लघुबीजाणुधानी में अनेक परागकण स्वतन्त्र रूप से बिखरे रहते हैं। परागकोश के परिपक्व होने पर टेपीटम तथा मध्य भित्ति परतें धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। अन्त में केवल बाह्यत्वचा व अन्तस्थीसियम (endothecium) ही रह जाती हैं।

दोनों ओर के दो पराग पुटों के मध्य का पट नष्ट हो जाता है। इस प्रकार से एक ओर के परागपुट एक-दूसरे से सम्पर्क में आ जाते हैं। परिपक्व होने पर अंतःस्थीसियम से जल का ह्रास होता है, जिसके कारण इन कोशिकाओं की भित्तियों के अन्दर की ओर सिकुड़ने से ओष्ठ कोशिकाओं या स्टोमियम (stomium) पर दाब पड़ता है। अतः ये एकदूसरे से पृथक् हो जाते हैं तथा परागकण बाहर निकल जाते हैं। परागकोश के परिपक्व होने पर टेपीटम तथा मध्य भित्ति परतें धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

अन्त में केवल बाह्यत्वचा व अन्तस्थीसियम (endothecium) ही रह जाती हैं। दोनों ओर के दो पराग पुटों के मध्य का पट नष्ट हो जाता है। इस प्रकार से एक ओर के परागपुट एक-दूसरे से सम्पर्क में आ जाते हैं। परिपक्व होने पर अंतःस्थीसियम से जल का ह्रास होता है, जिसके कारण इन कोशिकाओं की भित्तियों के अन्दर की ओर सिकुड़ने से ओष्ठ कोशिकाओं या स्टोमियम (stomium) पर दाब पड़ता है। अतः ये एकदूसरे से पृथक् हो जाते हैं तथा परागकण बाहर निकल जाते हैं।
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परागकण की संरचना (Structure of Pollen grain)परागकोश की लघुबीजाणुधानियों में लघुबीजाणु या परागकण बनते हैं। परागकणों के निर्माण से पूर्व अर्द्धसूत्री विभाजन होता हैं, अतः ये अगुणित होते हैं। इस प्रकार लघुबीजाणु या परागकण नर युग्मकोद्भिद् पीढ़ी की प्रथम अवस्था या कोशिका होती है। परागकण एककोशीय, एक केन्द्रीय व अगुणित संरचना होती है। परागकण की भित्ति द्विस्तरीय होती है। बाहरी स्तर बाह्यचोल (exine) तथा भीतरी स्तर अन्तश्चोल (intine) होती है। परागकण की आकृति, संख्या व बाहरी सतह अलग-अलग पादपों में भिन्न प्रकार की होती है।

(i) बाह्यचोल (Exine)-इसकी सतह पर विभिन्न प्रकार के अलंकरण (ornamentations) मिलते हैं।
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ये जालिकावत्, धारीदार या कांटेदार इत्यादि हो सकते हैं। बाह्यचोल सख्त प्रतिरोधी व मोटी होती है। इस परत में एक विशेष रासायनिक पदार्थ स्पोरोपोलेनिन (sporopollenin) होता जो कै रिटिनॉ ड् स का ऑक्सीकारी बहुलक (polymer) होता है। इसी कारण ये गहरे रंग के होते हैं, प्रायः इनका पीला रंग होता है। स्पोरोपोलेनिन सबसे अधिक प्रतिरोधक कार्बनिक पदार्थ है जो उच्च ताप व सान्द्र अम्लों व क्षारों को भी सह सकने में सक्षम होता है।

स्पोरोपोलेनिन के कारण बाह्यचोल का भौतिक व जैविक अपघटन नहीं हो पाता है। इस पदार्थ की प्रतिरोधक क्षमता के गुण के फलस्वरूप परागकण लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं। स्पोरोपोलेनिन के कारण ही जीवाश्मी प्रारूपों में परागकण संरक्षित रहते हैं। बाह्यचोल पर छोटी-छोटी छिद्रनुमा संरचना भी होती है, जिसे जनन छिद्र (germ pores) कहते हैं। द्विबीजपत्री पादपों के परागकण पर तीन जनन छिद्र होते हैं परन्तु एकबीजपत्री पादप के परागकण में एक जनन छिद्र होता है।

(ii) अन्तश्चोल (Intine)-बाह्यचोल के ठीक नीचे पतली, कोमल, पेक्टोसेलूलोज से बनी अन्तश्चोल होती है। यह परागकण के कोशिका द्रव्य को ढके रखती है। अंकुरण के समय अन्तश्चोल जनन छिद्र में से होकर एक अतिवृद्धि के रूप में जनन नली (germ tube) बनाती है तथा आगे जाकर यह जनन नली, परागनलिका (pollen tube) के रूप में विकसित हो जाती है।

पराग उत्पाद (Pollen product)-पोषणता की दृष्टि से परागकण उपयुक्त होते हैं। वर्तमान में आहार में रही कमी की पूर्ति के लिये पराग गोलियों (pollen tablets) के उपयोग का प्रचलन बढ़ता जा रहा हैं। पश्चिमी देशों में तो इनका उपयोग अधिक किया जाता है तथा अत्यधिक मात्रा में पराग उत्पाद की गोलियाँ व सीरप (syrup) बाजार में  उपलब्ध होती हैं। पराग उत्पाद खिलाड़ियों व धावकों में अत्यधिक कार्यदक्षता की वृद्धि करते हैं।
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परागकण जीवन क्षमता (Pollen viability)-परागकण जैसे ही परागकोश से बाहर आते हैं तो यह प्रश्न उठता है कि उसकी जीवन क्षमता कितने समय की होती है। परागकण की जीवन क्षमता तापमान व आर्द्रता कारक पर निर्भर करती है। परागकण जीवन क्षमता के सम्बन्ध में विविधताएँ हैं। कुछ परागकण तो कुछ मिनटों, कुछ दिनों, कुछ महीनों तक जीवन क्षमता वाले होती हैं।

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परन्तु विभिन्न प्रजातियों के परागकणों को कृत्रिम रूप से द्रव नाइट्रोजन (-196°C) में अनेक वर्षों तक भण्डारित कर सकते हैं। इस प्रकार फसल प्रजनन कार्यक्रम के लिये पराग भण्डारों का उपयोग किया जाता है। लघुयुग्मक जनन या नर युग्मकोद्भिद् का विकास (Microgametogenesis or development of male gametophyte)-पराग कण से पूर्ण विकसित नर युग्मकोद्भिद् बनने तक के क्रम को लघुयुग्मकजनन कहते हैं। वस्तुतः नर युग्मकोद्भिद् का विकास परागकोश के अन्द्र ही प्रारम्भ हो जाता है।

लघुयुग्मकजनन के दौरान होने वाले सभी केन्द्रकीय विभाजन सूत्री विभाजन (mitosis) होते हैं। प्रारम्भ में लघुबीजाणु का जीवद्रव्य गाढ़ा एवं केन्द्रक सुस्पष्ट होता है। जैसे ही ये चतुष्क से पृथक् होते हैं, वैसे ही परागकण का आकार तेजी से बढ़ता है जिससे रसधानियाँ (vacuoles) उत्पन्न हो जाती हैं। परागकण में समसूत्री विभाजन होने से दो असमान कोशिकायें बनती हैं। इसमें बड़ी कोशिका कायिक कोशिका (vegetative cell) तथा छोटी कोशिका जनन कोशिका (generative cell) होती है।

कायिक एवं जनन कोशिका की संरचना (Structure of vegetative and generative cell)-
कायिक कोशिका (Vegetative cell)-इसका केन्द्रक बड़ा, गोलाकार, अनियमित होता है। कोशिका का आकार बड़ा होता है तथा रसधानियाँ नहीं होतीं। केन्द्रक में केन्द्रिक (nucleolus) का अभाव होता है तथा RNA व प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। जनन कोशिका (Generative cell)-प्रारम्भ में यह कोशिका मसूराकार (lenticular) होती है परन्तु धीरे-धीरे यह लम्बी होकर कृमिरूपी (vermiform) दिखाई देने लगती है। इसमें कोशिका द्रव्य की मात्रा कम होती है।

परागकण में उपस्थित कायिक व जनन कोशिका इसकी दोकोशिकीय अवस्था है। प्रायः आवृतबीजियों में परागकण दो-कोशिकीय अवस्था में ही परागकोश से मुक्त होते हैं। कुछ में तीन-कोशिकीय अवस्था में भी मुक्त होते हैं। परागकण स्वतन्त्र होने पर परागण क्रिया के अन्तर्गत जाते हैं। परागकणों के परागकोश से मुक्त होकर जायांग के वर्तिकाग्र (stigma) तक पहुंचने की प्रक्रिया को परागण (pollination) कहते हैं। परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है।

अतः अन्तःचोल किसी एक जनन छिद्र से निकलकर जनन नलिका बनाती है। यही नलिका वृद्धि करके पराग नलिका (pollen tube) बनाती है। पराग नलिका में आगे कायिक या नलिका कोशिका (vegetative or tube cell) होती है तथा इसके पीछे जनन कोशिका होती है। कभी-कभी जनन कोशिका परागकण में ही विभाजित हो जाती है, यदि वहाँ विभाजन नहीं हुआ हो तो इसका विभाजन पराग नलिका में होता है। जनन कोशिका का समसूत्री विभाजन होने से दो नर युग्मक  बनते हैं। यह अंकुरित परागकण जिसमें पराग नलिका व दो नर-युग्मक होते हैं, इस सम्पूर्ण संरचना को नर-युग्मकोद्भिद् कहते हैं।
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प्रश्न 3.
आवृतबीजी पादप में मादा युग्मकोद्भिद के परिवर्धन का सचित्र वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
स्त्रीके सर, गुरुबीजाणुधानी ( बीजांड ) तथा भूणकोश (Pistil, Megasporangium (ovule) and embryo-sac)
पुष्य में स्थित जायांग मादा या स्त्री जनन अंग होता है। जायांग एक (एकाण्डपी) या अनेक अण्डपों (बहुअण्डपी) का बना होता है। जायांग में जब एक से अधिक अण्डप होते हैं तो वे आपस में स्वतन्त्र (वियुक्ताण्डपी) या आपस में जुड़े (युक्ताण्डपी) होते हैं (चित्र 2.10 ब, स)। प्रत्येक स्त्रीकेसर का निचला फूला हुआ भाग अण्डाशय (ovary) होता है जो कि अन्तस्थ घुण्डी के समान संरचना वर्तिकाग्र (stigma) से, एक पतली नली के समान वर्तिका (style) द्वारा जुड़ा होता है।
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बीजाण्ड या गुरुबीजाणुधानी की संरचना (Structure of ovule or Megasporangium)-
स्त्रीकेसर के अण्डाशय के अन्दर अनेक छोटी-छोटी अण्डाकार संरचनाएँ पाई जाती हैं। इन संरचनाओं को बीजाण्ड या गुरुबीजाणुधानी (megasporangium) कहते हैं। प्रत्येक बीजाण्ड एक वृन्त जैसी संरचना द्वारा अण्डाशय की भीतरी भित्ति पर उपस्थित उभार अथवा बीजाण्डासन (placenta) से जुड़ा रहता है। बीजाण्ड के वृन्त को बीजाण्डवृन्त (funicle) कहते हैं। वह स्थान जहाँ बीजाण्डवृन्त बीजाण्ड के साथ जुड़ता है, हाइलम (hilum) कहलाता है। कभी-कभी बीजाण्डवृन्त के जुड़ने के स्थान पर एक उभरी हुई संरचना होती है जिसे रेफी (raphe) कहते हैं।
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एक प्रारूपिक परिपक्व बीजाण्ड लगभग गोल संरचना होती है। इसका मुख्य शरीर सजीव मृदूतकीय कोशिकाओं से बना होता है जिसे बीजाण्डकाय (nucellus) कहते हैं। प्रायः बीजाण्डकाय एक या दो आवरणों द्वारा घिरा होता है जिन्हें अध्यावरण (integuments) कहते हैं। बाहरी आवरण को बाह्य अध्यावरण (outer integument) तथा आंतरिक आवरण को अंतः अध्यावरण (inner integument) कहते हैं।

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अध्यावरणों की संख्या दो होने पर बीजाण्ड द्विअध्यावरणी (bitegmic) तथा एक होने पर एकअध्यावरणी (unitegmic) कहलाते है। अध्यावरण अनुपस्थित होने पर बीजाण्ड अध्यावरण रहित (ategmic) कहलाता है। बीजाण्ड के शीर्ष भाग पर एक छिद्र होता है जिसे बीजाण्डद्वार (micropyle) कहते हैं। बीजाण्ड के आधार भाग को निभाग (chalaza) कहते हैं। बीजाण्डकाय में बीजाण्डद्वार के पास भ्रूणकोश (embryo) होता है।

गुरुबीजाणुजनन (Megasporogenesis)-
आवृतबीजी पादपों में बीजाण्ड वस्तुतः गुरुबीजाणुधानी (megasporangium) होता है। बीजाण्ड के मुख्य शरीर बीजाण्डकाय (nucellus) में गुरुबीजाणु का विकास होता है। अतः गुरुबीजाणु मातृ कोशिका (megaspore mother cell) से गुरुबीजाणुओं (megaspores) के बनने की प्रक्रिया को गुरुबीजाणुजनन कहते हैं। विकास के दौरान बीजाण्डकाय में से एक कोशिका आकृति में बड़ी, सघन जीवद्रव्ययुक्त व स्पष्ट केन्द्रक वाली हो जाती है, जिसे गुरुबीजाणु मातृ कोशिका कहते हैं।

गुरुबीजाणु मातृ कोशिका अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा चार अगुणित गुरुबीजाणु बनाती है। चारों गुरुबीजाणु रैखिक क्रम में व्यवस्थित होते हैं। इन चार में से प्रायः एक ही गुरुबीजाणु सक्रिय होता है जिससे मादा युग्मकोद्भिद् बनता है, शेष तीन गुरुबीजाणु नष्ट होकर सक्रिय गुरुबीजाणु को पोषण प्रदान करते हैं।

मादा युग्मकोद्भिद् या भूणकोश (Female gametophyte or Embryo-sac) –
सक्रिय गुरुबीजाणु विकसित, होकर मादा युग्मकोद्भिद् अर्थात भूरक्रोश का निर्माण करता है। एक अकेले गुरुबीजाणु से भूगकोश के बनने की विधि को एक-बीजाणुज (monosporic) विकास कहते हैं। सक्रिय गुरुबीजाणु अगुणित तथा मादा युग्मकोद्भिद् की प्रथम कोशिका है।

प्रायः रैखिक चतुष्क में तीन गुरुबीजाणु जो बीजाण्ड द्वार की ओर होते हैं, नष्ट हो जाते हैं परन्तु निभाग की ओर स्थित गुरुबीजाणु सक्रिय होता है। सक्रिय गुरुबीजाणु आकार में बड़ा होने लगता है तथा इसे भ्रूणकोश मातृ कोशिका कहते हैं क्योंकि इसी से भ्रूणकोश का विकास होता है। गुरुबीजाणु के केन्द्रक में तीन सूत्री विभाजन होते हैं जिसके फलस्वरूप आठ केन्द्रक बनते हैं।

प्रथम विभाजन द्वारा बने दो केन्द्रकों में से एक-एक केन्द्रक विपरीत ध्रुवों (बीजाण्ड-द्वार तथा निभाग की ओर) पर स्थित हो जाते हैं। प्रत्येक केन्द्रक पुन: दो बार विभाजित होता है जिसके फलस्वरूप प्रत्येक ध्रुव पर अब चार-चार (कुल आठ) केन्द्रक होते हैं। गुरुबीजाणु अब एक थैले की आकृति ले लेता है, जिसे भ्रूणकोश कहते हैं।

प्रत्येक ध्रुव पर उपस्थित चार केन्द्रकों में से एक-एक केन्द्रक (कुल दो केन्द्रक) कोशिका के केन्द्र  की ओर आकर ध्रुवीय केन्द्रक (polar nuclei) बनाते हैं। कोशिका के मध्य में आकर दोनों केन्द्रक संयुक्त होकर द्विगुणित केन्द्रक बनाते हैं जिसे द्वितीयक केन्द्रक (secondary nucleus) कहते हैं।
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दोनों ध्रुवों पर शेष तीन-तीन केन्द्रक अपने चारों ओर कोशिका द्रव्य एकत्रित करके कोशिकाओं का निर्माण करते हैं। इसमें बीजाण्डद्वार की ओर स्थित तीन कोशिकायें अण्ड समुच्चय या अण्ड उपकरण (egg apparatus) का निर्माण करती हैं। इनमें से मध्य भाग में स्थित अण्ड कोशिका (egg cell), दो सहायक कोशिकाओं (synergids) से घिरी होती हैं।

अण्ड कोशिका में बीजाण्ड द्वार की ओर रिक्तिका (vacuole) और नीचे की ओर केन्द्रक स्थित होता है। इसके दोनों पाश्वों पर स्थित दो सहायक कोशिकाओं में से प्रत्येक में एक तन्तुरूप उपकरण (filiform apparatus) होता है। यह पराग नलिका को अपनी ओर आकर्षित करता है। सहायक कोशिका में केन्द्रक ऊपर की ओर व रिक्तिका नीचे की ओर होती है। दूसरे ध्रुव पर (निभाग की ओर) बनने वाली तीन कोशिकायें प्रतिमुखी या प्रतिव्यासांत (antipodal cell) कहलाती हैं।

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इस प्रकार से, एक प्ररूपी आवृतबीजी भ्रूणकोश परिपक्व होने पर 8 केन्द्रीय तथा 7 कोशिकीय अवस्था का होता है। इस प्रकार का भ्रूणकोश 70% आवृतबीजी पादपों में पाया जाता है। इस प्रकार के भ्रूणकोश को “पॉलीगोनम प्रकार” (Polygonum type) का कहते हैं क्योंकि इसे सबसे पहले पॉलीगोनम-डाइवेरीकेटम (Polygonum divaricatum) में स्ट्रासबर्गर के द्वारा 1879 में वर्णित किया गया था।

प्रश्न 4.
बीज कितने प्रकार के होते हैं? इनकी संरचना को समझाइये |
उत्तर:
बीजपत्र के आधार पर बीज दो प्रकार के होते हैं-

  • एकबीजपत्री तथा
  • द्विबीजपत्री।

भ्रूणपोष की उपस्थिति व अनुपस्थिति के आधार पर भी बीज दो प्रकार के होते हैं-

  • भ्रूणपोषी बीज तथा
  • अभ्रूणपोषी बीज ।

एकबीजपत्री बीज (Monocot seed)- इनमें केवल एकबीजपत्र होता है। घास परिवार में बीजपत्र को प्रशल्क ( scutellum) कहते हैं तथा यह ढाल के आकार का होता है। प्रशल्क भ्रूणीय अक्ष के एक तरफ (पाश्र्व की ओर) स्थित होता है। इसके निचले सिरे पर भ्रूणीय अक्ष में एक गोलाकर और मूल आवरण एक बिना विभेदित पर्त से आवृत होता है जिसे मूलांकुर चोल (coleorrhiza ) कहते हैं।

प्रशल्क (scutellum ) के जुड़ाव के स्तर से ऊपर, भ्रूणीय अक्ष के भाग को बीजपत्रोपरिक (epicotyl) कहते हैं। बीजपत्रोपरिक में प्ररोह शीर्ष तथा कुछ आदिकालिक पर्ण होते हैं, जो एक खोखली पर्णीय संरचना को घेरते हैं, जिसे प्रांकुरचोल (coleoptile ) कहते हैं। द्विबीजपत्री बीज (Dicot seed) – बीज एक या दो आवरणों से ढका होता है, जिन्हें बीजावरण या बीजचोल (seed coat) कहते हैं। बाह्य बीजावरण को टेस्टा (testa) व अन्त: बीजावरण को टेगमेन (tegmen) कहते हैं।

कुछ बीजों में केवल एक ही बीजचोल मिलता है। बाहरी आवरण मोटा व कठोर जो प्रतिकूल परिस्थितियों और प्रसुप्ति काल में भ्रूण की सुरक्षा करता है। टेगमेन या अन्तः चोल पतला होता है। द्विबीजपत्री बीज में दो बीजपत्र होते हैं। दोनों बीजपत्र भ्रूणाक्ष (embryo axis) के साथ पार्श्व में लगे होते हैं और भ्रूणाक्ष मध्य में होता है। बीजपत्र के स्तर से ऊपर भ्रूणीय अक्ष या भ्रूणाक्ष का भाग पत्रोपरिक (epicotyl) होता है जो प्रांकुर ( plumule ) या स्तम्भ शीर्ष (shoot apex ) बनाता है।

बीजपत्रों के स्तर से नीचे भ्रूणीय अक्ष का भाग बीजपत्राधार ( hypocotyl ) होता है जिससे मूल शीर्ष या मूलांकुर (root tip or radical) बनता है। उन बीजपत्रों में जिनमें भ्रूणपोष नहीं पाया जाता है, बीजपत्र भ्रूणपोष को सोख कर मोटे और गूदेदार हो जाते हैं। कुछ बीजों में बीजपत्र अंकुरण काल में भूमि से ऊपर आ जाते हैं और हरे होकर, प्रथम पत्तियों के बनने तक प्रकाश- संश्लेषण कर पादप के लिये खाद्य बनाते हैं।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 2 पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन 20

भ्रूणपोषी व अभ्रूणपोषी बीज (Endospermic and Non- endospermic seed)
कुछ बीजों में भ्रूण एक विशेष प्रकार के मृदूतकी ऊतक द्वारा परिबद्ध रहता है। इस ऊतक की कोशिकाओं में प्रचुर मात्रा में खाद्य संग्रहित रहता है। यह खाद्य विकसित होकर भ्रूण को पोषण प्रदान करता है, इसी कारण इसे भ्रूणपोष कहते हैं। इस प्रकार के बीज जिनमें भ्रूणपोष उपस्थित रहता है, उन बीजों को भ्रूणपोषी या एल्बुमिनिस बीज (endospermic or albuminous seed) कहते हैं।

अधिकांश एकबीजपत्री पौधों जैसे गेहूँ, मक्का, धान, बाजरा और कुछ द्विबीजपत्री बीज जैसे अरण्ड आदि भ्रूणपोषी बीज होते हैं। बीज के अंकुरण के समय प्रथम मूल व प्रथम पर्णों के बनने तक श्रूण को पोषण भ्रूणपोष से मिलता है। कुछ पौधों जैसे-चना, मटर, सेम, लौकी, इमली, अमरूद व सूर्यमुखी के बीजों में भ्रूणपोष का अभाव होता है, क्योंकि इनका भूर विकास के दौरान सम्पूर्ण भूरणपोष का उपयोग कर लेता है। ऐसे बीजों को अभ्रूणपोषी या गैर-एल्बुमिनिस बीज (Non-endospermic or ex-albuminous seed) कहते हैं। अभ्रूणपोषी बीजों में खाद्य का संग्रह बीजपत्र में होता है, अतः ये मोटे व गूदेदार होते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. पादप का वह भाग कौन-सा है जिसमें दो पीढ़ी एक पीढ़ी दूसरे के अन्दर होती है- (NEET-2020)
(1) परागकोश के अन्दर परागकण
(2) दो नर युग्मकों वाली अंकुरित परागकण
(3) फल के अन्दर बीज
(4) बीजाण्ड के अन्दर भ्रूणकोष
(अ) (1), (2) और (3)
(ब) (3) और (4)
(स) (1) और (4)
(द) केवल (1)
उत्तर:
(स) (1) और (4)

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 2 पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजनन

2. बीजाण्ड का पिण्ड, बीजाण्ड वृन्त से कहाँ पर संलयित होता है? (NEET-2020)
(अ) बीजाण्ड द्वार
(ब) बीजाण्ड काय
(स) निभाग
(द) नाभिका
उत्तर:
(द) नाभिका

3. जलकुम्भी और जललिली में परागण किसके द्वारा होता है? (NEET-2020)
(अ) केवल जल धाराओं द्वारा
(ब) वायु और जल द्वारा
(द) कीट या वायु द्वारा
(स) कीट और जल द्वारा
उत्तर:
(द) कीट या वायु द्वारा

4. पुष्पी पादपों में निषेचन के पश्चात् विकास के विषय में निम्नलिखित में से कौनसा कथन गलत है? (NEET-2019)
(अ) बीजाण्ड, भ्रूणकोश में विकसित होते हैं ।
(ब) अण्डाशय, फल में विकसित होता है।
(स) युग्मनज, भ्रूण में विकसित होता है।
(द) केन्द्रीय कोशिका भ्रूणपोश में विकसित होती है
उत्तर:
(अ) बीजाण्ड, भ्रूणकोश में विकसित होते हैं ।

5. निम्नलिखित में से कौन-सा परागकण को जीवाश्मों के रूप में परिरक्षित करने में सहायक साबित हुआ?
(अ) तैलीय अवयव
(ब) सेलुलोज वाला अन्त: चोल
(स) पराग किट
(द) स्पोरोलिन
उत्तर:
(द) स्पोरोलिन

6. सपक्ष परागकण किसमें होते हैं? (NEET-2018)
(अ) आम
(ब) साइकस
(स) सरसों
(द) पाइनस
उत्तर:
(स) सरसों

7. परागकणों को कई वर्षों तक द्रव नाइट्रोजन में संरक्षित रखा जा सकता है, जिसका तापमान होता है। (NEET-2018)
(अ) – 196°C
(ब) – 80°C
(स) – 120°C
(द) – 160°CGyT
उत्तर:
(अ) – 196°C

8. एक आवृतबीजी पादप में कार्यशील गुरुबीजाणु क्या विकसित होता है? (NEET-2017)
(अ) बीजाण्ड
(ब) भ्रूणपोष
(स) भ्रूण कोष
(द) भ्रूण
उत्तर:
(स) भ्रूण कोष

9. सम्मोहक और पारितोषिक किसके लिए आवश्यक होते हैं ?(NEET-2017)
(अ) वायु परागण
(ब) कीट परागण
(स) जल परागा
(द) अनुन्मुल्य परागण
उत्तर:
(ब) कीट परागण

10. वे पुष्प, जिनमें अण्डाशय में एक बीजाण्ड होता है और वे एक पुस्पक्रम में बंधे रहते हैं, सामान्यतः किसके द्वारा परागित होते हैं- (NEET-2017)
(अ) जल
(ब) मधुमक्खी
(स) वायु
(द) चमगादड़
उत्तर:
(स) वायु

11. एकलिंगाश्रयी पुष्पी पादप निम्नलिखित में किन दोनों को रोकते हैं? (NEET-2017)
(अ) स्वयुग्मन और परानिषेचन
(ब) स्वयुग्मन और सजात पुष्पी परागण
(स) सजात पुष्पी परागण और परानिषेचन
(द) अनुन्मील्य परागण और परानिषेचन
उत्तर:
(ब) स्वयुग्मन और सजात पुष्पी परागण

12. जल हायसिन्थ और जल कुमुदिनी में परागण किसके द्वारा होता है? (NEET-2016)
(अ) पक्षी
(ब) चमगादड़
(स) जल
(द) कीट या पवन
उत्तर:
(द) कीट या पवन

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13. अधिकांश आवृतबीजी पादपों में – (NEET-II 2016)
(अ) अर्धसूत्री विभाजन, गुरुबीजाणु मातृ कोशिकाओं में होता है।
(ब) भ्रूणकोष में एक लघु केन्द्रीय कोशिका होती है।
(स) अण्ड में तंतुरूप समुच्वय होता है।
(द) बहुत-सी प्रतिव्यासांत कोशिकाएँ होती हैं।
उत्तर:
(अ) अर्धसूत्री विभाजन, गुरुबीजाणु मातृ कोशिकाओं में होता है।

14. पुष्पी पादपों में बिना निषेचन के बीज बनना निम्नलिखित में से कौनसी प्रक्रिया है? (NEET-2016)
(अ) कायिक संकरण
(ब) असंगजनन
(स) बीजाणुकजनन
(द) मुकुलन
उत्तर:
(ब) असंगजनन

15. पुंकेशर के तन्तु का समीपस्थ छोर किससे जुड़ा होता है?
(अ) प्लेसेन्टा
(ब) पुस्पाषन या पुष्पदल
(स) परागकोश
(द) संयोजी
उत्तर:
(ब) पुस्पाषन या पुष्पदल

16. आवृतबीजी पादपों में नरयुग्मकोद्भिद् क्या बनाता है? (NEET-2015)
(अ) एक शुक्राणु और एक कायिक कोशिका
(ब) एक शुक्राणु और दो कायिक कोशिकाएँ
(स) तीन शुक्राणु
(द) दो शुक्राणु और एक कायिक कोशिका
उत्तर:
(द) दो शुक्राणु और एक कायिक कोशिका

17. पराग गोलियां बाजार में किस लिए उपलब्ध हैं? (NEET-2014)
(अ) पात्र निषेचन के लिए
(ब) प्रजनन योजनाओं के लिए
(द) बाह्यस्थाने संरक्षण के लिए
(स) आहार सम्पूरक के लिए
उत्तर:
(स) आहार सम्पूरक के लिए

18. सजातपुष्पी परागण में क्या होता है? (NEET-2014)
(अ) एक पुष्प का निषेचन उसी पादप के दूसरे पुष्प के पराग से
(ब) एक पुष्प का निषेचन उसी पुष्प के पराग से
(स) एक पुष्प का निषेचन उसी समष्टि के दूसरे पादप के पुष्प के पराग से
(द) एक पुष्प का निषेचन दूरस्थ समष्टि के दूसरे पादप के पुष्प के पराग से
उत्तर:
(अ) एक पुष्प का निषेचन उसी पादप के दूसरे पुष्प के पराग से

19. अनुन्मील्य परागण का क्या लाभ है?
(अ) उच्चतर आनुवंशिक विविधता
(ब) अधिक प्रबल संतान
(स) परागण कारकों पर निर्भरता नहीं
(द) सजीवप्रजकता ।
उत्तर:
(स) परागण कारकों पर निर्भरता नहीं

20. गुरुबीजाणुधानी किसके समतुल्य है? (NEET-2013)
(अ) भ्रूणकोष
(ब) फल के
(स) बीजाण्ड काय
(द) बीजाण्ड
उत्तर:
(स) बीजाण्ड काय

21. जनन छिद्र का क्या कार्य है? (NEET-2012, CBSE PMT-2012)
(अ) मूलांकुर का निकलना
(ब) बीजांकुरण हेतु जल का अवशोषण
(स) परागनली का आरम्भन
(द) नर युग्मकों को बाहर आने देना ।
उत्तर:
(स) परागनली का आरम्भन

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22. वह कौनसा ऑर्गेनिक (कार्बनिक) पदार्थ है जो चरम पर्यावरणों को सहन कर सकता है तथा किसी भी एंजाइम द्वारा निम्नीकरण नहीं किया जा सकता है। (NEET-2012)
(अ) क्यूटिकल
(ब) स्पोरोलैनिन
(स) लिग्निन
(द) सेलुलोज
उत्तर:
(ब) स्पोरोलैनिन

23. यदि किसी पौधे की जड़ की कोशिका में गुण सूत्र संख्या 14 हैं तो उसके बीजण्ड की सहायक कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या होगी- (BHU-2012)
(अ) 7
(स) 21
(ब) 14
(द) 28
उत्तर:
(अ) 7

24. नारियल का पानी तथा इसका खाया जाने वाला भाग किसके तुल्य होता है? (CBSE PMT (Pre)-2012)
(अ) भ्रूणपोष
(स) मीजोकार्प
(ब) एण्डोकार्प
(द) भ्रूण
उत्तर:
(अ) भ्रूणपोष

25. वायु परागण सामान्यतः किसमें होता है ? (NEET 2011)
(अ) शिंबों में
(स) घासों में
(ब) लिलियों में
(द) आर्किडस में
उत्तर:
(स) घासों में

26. कायिक जनन तथा असंगजनन के बीच क्या समानता है? (Mains 2011, CBSE PMT (Mains)-2011)
(अ) दोनों पैतृक के समान सन्तति उत्पन्न करते हैं।
(ब) दोनों केवल द्विबीजपत्री पादपों में ही लागू है
(स) दोनों पुष्पन अवस्था को टालते हैं।
(द) दोनों सम्पूर्ण वर्ष होते हैं।
उत्तर:
(अ) दोनों पैतृक के समान सन्तति उत्पन्न करते हैं।

27 आवृतबीजी पौधों के नर युग्मक इनके विभाजन द्वारा बनते हैं- (CBSE PMT-2007, MP PMT-2010, RPMT-2010)
(अ) कायिक कोशिका के
(ब) जनन कोशिका के
(स) लघु बीजाणु के
(द) लघु बीजाणु मातृ कोशिका ।
उत्तर:
(ब) जनन कोशिका के

28. भ्रूणकोष स्थित होता है- (CPMT-2010)
(अ) बीज में
(ब) भ्रूण में
(स) बीजाण्ड में
(द) भ्रूणपोष में
उत्तर:
(स) बीजाण्ड में

29. एन्जियोस्पर्म का अण्ड उपकरण किससे मिलकर बना होता है- (AFMC-2009, DUME-2010, Orissa-2010)
(अ) एक अण्डकोशिका तथा दो सहायक कोशिकाएँ
(ब) एक अण्डकोशिका, 2 सहायक कोशिकाएँ तथा तीन प्रतिमुख कोशिकाएँ
(स) 3 प्रतिमुखी कोशिकाएँ
(द) द्वितीयक केन्द्रक तथा अण्ड कोशिका
उत्तर:
(अ) एक अण्डकोशिका तथा दो सहायक कोशिकाएँ

30. परागकोष का सबसे भीतरी स्तर टेपीटम का कार्य है- (RPMT-2002, DPMT-2006, CPMT-2009)
(अ) स्फुटन
(ब) यांत्रिकीय
(स) सुरक्षात्मक
(द) पोषक
उत्तर:
(द) पोषक

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31. भ्रूण का विकास के दौरान किस बीज का एण्डोस्पर्म पूर्णतया उपयोग हो जाता है- (CBSE PMT 2008, AMW ( Med) – 2009)
(अ) मटर
(ब) मक्का
(स) नारियल
(द) केस्टर
उत्तर:
(अ) मटर

32. हरे नारियल का दूधिया पानी है- (RPMT-2006, Orissa JEE-2009)
(अ) तरल भ्रूण
(ब) तरल भ्रूणपोष
(स) मादा युग्मकोद्भिद् का तरल पदार्थ
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) तरल भ्रूणपोष

33. परागकण की बाह्य भित्ति बनी होती है- (MP PMT 2009)
(अ) सेल्यूलोज से
(ब) स्पोरोपोलेनिन से
(स) पेक्टोसेल्यूलोज से
(द) लिग्निन से
उत्तर:
(ब) स्पोरोपोलेनिन से

34. निम्न में से किसमें क्लिस्टोगेमस पुष्प पाये जाते हैं- (J&K CET-2008)
(अ) सूरजमुखी
(ब) वेलिसनेरिया
(स) कॉमेलाइना
(द) केलोट्रोपिस
उत्तर:
(स) कॉमेलाइना

35. एंजियोस्पर्म (पुष्पीय पौधों) में भ्रूणपोष है- (RPMT-2006, Orissa JEE-2008)
(अ) एकगुणित
(ब) द्विगुणित
(स) त्रिगुणित
(द) बहुगुणित
उत्तर:
(स) त्रिगुणित

36. बीजाण्ड में अर्धसूत्री विभाजन कहा होता है- (AIPMT-2008)
(अ) बीजाण्ड काय
(ब) गुरुबीजाणु मातृकोशिका
(स) गुरुबीजाणु
(द) भ्रूणकोष
उत्तर:
(ब) गुरुबीजाणु मातृकोशिका

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37. पुष्पीय पौधों में नर युग्मक किसके विभाजन से बनते हैं- (CBSE PMT 2007, MP PMT – 2007 )
(अ) लघुबीजाणु
(ब) जनन कोशिका
(स) कार्यक कोशिका
(द) लघुबीजाणु मातृकोशिका
उत्तर:
(ब) जनन कोशिका

38. निम्नलिखित में से कौन एक केलोस भित्ति द्वारा घिरा रहता है- (CBSE PMT-2007, NEET-2007, NEET 2002)
(अ) नर युग्मक
(ब) अण्ड
(स) परागकण
(द) लघुबीजाणु मातृकोशिका
उत्तर:
(द) लघुबीजाणु मातृकोशिका

39. बिना निषेचन के फल का निर्माण कहलाता है- (RPMT-2006)
(अ) बहुभ्रूणता
(ब) बहुबीजाणुकता
(स) अनिषेकजनन
(द) अनिषेकफलन
उत्तर:
(द) अनिषेकफलन

40. द्विबीजपत्री पौधों के सामान्य भ्रूणकोश में केन्द्रकों की क्या व्यवस्था होती है- (NEET-2006)
(अ) 2 + 4 + 2
(ब) 3 + 2 + 3
(स) 2 + 3 + 3
(द) 3 + 3 + 2
उत्तर:
(ब) 3 + 2 + 3

41. परागकण का निर्माण होता है- ( Haryana PMT-2005)
(अ) एन्थर में
(ब) स्टिगमा में
(स) फिलामेंन्ट में
(द) परागकोष में
उत्तर:
(ब) स्टिगमा में

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42. त्रिसंलयन विशिष्ट लक्षण है- (Kerala PMT-2004)
(अ) थैलोफाइटस का
(ब) ब्रायोफाइटस का
(स) टेरिडोफाइटस का
(द) जिम्नोस्पर्म का
उत्तर:
(ब) ब्रायोफाइटस का

43. मक्के के बीज में स्क्यूटेलम को बीजपत्र माना गया है क्योंकि यह- (AIEEE Pharmacy-2004)
(अ) भ्रूण की रक्षा करता है
(ब) भ्रूण के लिए भोजन रखता है
(स) भोज्य पदार्थ को अवशोषित कर भ्रूण को आपूर्ति करता है।
(द) स्वयं ही मोनोकोट की पत्ती में परिवर्तित हो जाता है।
उत्तर:
(स) भोज्य पदार्थ को अवशोषित कर भ्रूण को आपूर्ति करता है।

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. अणु सूत्र C3H8O से सम्बन्धित ऐल्कोहॉल हो सकते हैं-
(अ) केवल प्राथमिक
(ब) केवल द्वितीयक
(स) प्राथमिक एवं द्वितीयक
(द) प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक
उत्तर:
(स) प्राथमिक एवं द्वितीयक

2. निम्नलिखित में से किस यौगिक से सोडियम धातु की क्रिया नहीं होती ?
(अ) CH3-OH
(ब) CH3COOH
(स) C6H5OH
(द) CH3-O-CH3
उत्तर:
(द) CH3-O-CH3

3. 413K ताप पर एथेनॉल के आधिक्य को सान्द्र H2SO4 साथ गर्म करने पर प्राप्त यौगिक है-
(अ) CH2 = CH2
(ब) C2H5 – O – C2H5
(स) C2H5HSO4
(द) (C2H5)2 SO4
उत्तर:
(ब) C2H5 – O – C2H5

4. फ़ीनॉल पर KOH तथा CHCl3 की अभिक्रिया का नाम है-
(अ) डाइऐजोटीकरण
(ब) नाइट्रोसोकरण
(स) फार्मिलीकरण
(द) कार्बोक्सिलीकरण
उत्तर:
(स) फार्मिलीकरण

5. मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉलों का सामान्य सूत्र है-
(अ) CnH2n+1O2
(ब) CnH2n+2
(स) CnH2n+2O
(द) CnH2nOH
उत्तर:
(स) CnH2n+2O

6. C2H5MgCl + CH3CHO → HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 1
उपरोक्त अभिक्रिया से प्राप्त यौगिक Y है-
(अ) ब्यूटेन- 1-ऑल
(ब) ब्यूटेन-2-ऑल
(स) 2-मेथिल-ब्यूटेन-2-ऑल
(द) 2-मेथिल-ब्यूटेन- 1 – ऑल
उत्तर:
(ब) ब्यूटेन-2-ऑल

7. एथेनॉल को सान्द्र H2SO4 के साथ 443K ताप पर गर्म करने पर प्राप्त यौगिक है-
(अ) ईथर
(ब) एथिल हाइड्रोजन सल्फेट
(स) एथीन
(द) प्रोपीन
उत्तर:
(ब) एथिल हाइड्रोजन सल्फेट

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

8. ऐल्कोहॉल की निम्नलिखित में से किसके साथ क्रिया द्वारा एस्टर बनाता है?
(अ) RCOOH
(ब) RCOCl
(स) (RCO)O2
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

9. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक जल में विलेय है?
(अ) CHCl3
(ब) C2H5-O-C2H5
(स) CCl4
(द) CH3-CH2-OH
उत्तर:
(द) CH3-CH2-OH

10. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 2 का IUPAC नाम है-
(अ) 1- मेथॉक्सी प्रोपेन
(ब) मेथॉक्सी मेथिल एथेन
(स) 2- मेथॉक्सी प्रोपेन
(द) आइसोप्रोपिल मेथिल ईथर
उत्तर:
(स) 2- मेथॉक्सी प्रोपेन

11. ईथरों में निम्न में से कौनसी समावयवता नहीं होती ?
(अ) श्रृंखला
(ब) प्रकाशिक
(स) ज्यामितीय
(द) स्थिति समावयवता
उत्तर:
(स) ज्यामितीय

12. 1 – मेथॉक्सीप्रोपेन निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्रियात्मक समूह समावयवी है?
(अ) ब्यूटेन- 1-ऑल
(ब) प्रोपेन 1-ऑल
(स) ब्यूटेनैल
(द) ब्यूटेनॉन
उत्तर:
(अ) ब्यूटेन- 1-ऑल

13. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक एक द्वितीयक ऐल्कोहॉल है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 3
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 4

14 कैटिकॉल का सूत्र है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 5
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 6

15. कीटोनों के अपचयन से बनने वाला यौगिक है-
(अ) प्राथमिक ऐल्कोहॉल
(ब) द्वितीयक ऐल्कोहॉल
(स) तृतीयक ऐल्कोहॉल
(द) फ़ीनॉल
उत्तर:
(ब) द्वितीयक ऐल्कोहॉल

16. निम्नलिखित में से किस ऐल्कोहॉल की हाइड्रोजन आयन देने की प्रवृत्ति अधिकतम है ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 7
उत्तर:
(ब) CH3-O-H

17. सैलिसिलिक अम्ल के एसिटिलीकरण से बना यौगिक है-
(अ) सेलॉल
(ब) ऐस्पिरिन
(स) पिक्रिक अम्ल
(द) पैरासिटामोल
उत्तर:
(ब) ऐस्पिरिन

18. इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन में फ़ीनॉल का – OH समूह है-
(अ) m-निर्देशी
(ब) p-निर्देशी
(स) o, p निर्देशी
(द) 0-निर्देशी
उत्तर:
(स) o, p निर्देशी

19. फ़ीनॉल की यशद रज (Zn dust) के साथ अभिक्रिया से बना उत्पाद है-
(अ) टॉलुईन
(ब) बेन्जीन
(स) नाइट्रोबेन्जीन
(द) एनीलीन
उत्तर:
(ब) बेन्जीन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

20. शीरे (मोलैसेज) के किण्वन में शर्करा (सुक्रोस) से ग्लूकोस तथा फ्रक्टोज के बनने में प्रयुक्त एन्जाइम है-
(अ) जाइमेज
(ब) इनवर्टेज
(स) माल्टेज
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ब) इनवर्टेज

21. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 8 की HI से अभिक्रिया के उत्पाद हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 9
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 10

22. निम्नलिखित में से कौनसा समूह फ़ीनॉल के अम्लीय गुण में वृद्धि करता है?
(अ) -CH3
(ब) -OCH3
(स) – NO2
(द) OH
उत्तर:
(स) – NO2

23. तृतीयक ऐल्कोहॉल को Cu या ZnO के साथ 573 K ताप पर गर्म करने से प्राप्त उत्पाद होगा-
(अ) कीटोन
(ब) ऐल्डिहाइड
(स) ऐल्कीन
(द) अम्ल
उत्तर:
(स) ऐल्कीन

24. निम्नलिखित में से मिश्रित ईथर कौनसा है?
(अ) CH3-O-CH3
(ब) CH3-O-CH2-CH3
(स) C2H5-O-C2H5
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ब) CH3-O-CH2-CH3

25. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक NaHCO3 के साथ क्रिया करता है?
(अ) CH3-OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 11
(स) CH3COOH
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(स) CH3COOH

26. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 12 का IUPAC नाम है-
(अ) 3,3 – डाइमेथिल साइक्लोहेक्सेन -1-ऑल
(ब) 1,1 – डाइमेथिल – 3 – हाइड्रॉक्सी साइक्लोहेक्सेन
(स) 1,1 – डाइमेथिल – 3 – साइक्लो हेक्सेनॉल
(द) 3,3 – डाइमेथिल- 1- हाइड्रॉक्सी साइक्लोहेक्सेन
उत्तर:
(अ) 3,3 – डाइमेथिल साइक्लोहेक्सेन -1-ऑल

27. अणुसूत्र C5H11-OH द्वारा कितने प्राथमिक ऐल्कोहॉल संभव हैं?
(अ) 4
(ब) 3
(स) 5
(द) 6
उत्तर:
(अ) 4

28. अणुसूत्र C4H10O से कुल कितने संरचना समावयवी संभव हैं?
(अ) 4
(ब) 7
(स) 6
(द) 5
उत्तर:
(ब) 7

29. फीनॉल की NaOH तथा CO2 के साथ क्रिया का मुख्य उत्पाद निम्नलिखित में से कौनसा है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 13
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 14

30. अभिक्रिया HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 15 में निम्न में से कौनसा इलेक्ट्रॉनस्नेही बेन्जीन वलय पर आक्रमण करता है?
(अ) \(\stackrel{+}{\mathrm{C}}\)HO
(स) \(\stackrel{+}{\mathrm{C}}\)HCl2
(ब) :CHCl2
(द) \(\stackrel{+}{\mathrm{C}}\)Cl3
उत्तर:
(स) \(\stackrel{+}{\mathrm{C}}\)HCl2

31. निम्नलिखित में से किस ऐल्कोहॉल की जल में विलेयता सर्वाधिक होती है?
(अ) आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल
(ब) तृतीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल
(स) द्वितीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल
(द) n ब्यूटिल ऐल्कोहॉल
उत्तर:
(ब) तृतीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल

32. प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐल्कोहॉल को विभेदित किया जा सकता है-
(अ) राइमर टीमान अभिक्रिया द्वारा
(ब) टॉलेन अभिकर्मक द्वारा
(स) ल्यूकास अभिकर्मक द्वारा
(द) लैसोनें परीक्षण द्वारा
उत्तर:
(स) ल्यूकास अभिकर्मक द्वारा

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

33. p और m – नाइट्रो फीनॉलों की अपेक्षा ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल जल में कम घुलनशील होता है क्योंकि-
(अ) ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल भाप में m और p- समावयवियों की अपेक्षा अधिक वाष्पशील है।
(ब) ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल अन्तरआण्विक H-बन्धन दर्शाता है।
(स) ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल अन्तः आण्विक H-बन्धन दर्शाता है।
(द) ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल का गलनांक अपेक्षाकृत m और p- समावयवियों से कम होता है।
उत्तर:
(स) ऑर्थो नाइट्रोफीनॉल अन्तः आण्विक H-बन्धन दर्शाता है।

34. निम्नलिखित में से किस यौगिक का निर्जलीकरण अत्यधिक सरलता से होगा?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 16
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 17

35. बेन्जीन को बेन्जोइक अम्ल को X के साथ गर्म करके अथवा फीनॉल को Y के साथ गर्म करके प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ, X तथा Y क्रमशः हैं-
(अ) जिंक चूर्ण तथा सोडालाइम
(ब) सोडालाइम तथा जिंक चूर्ण
(स) जिंक चूर्ण तथा NaOH
(द) सोडालाइम तथा कॉपर
उत्तर:
(ब) सोडालाइम तथा जिंक चूर्ण

36. ईथर के लिये कुछ अभिक्रियाएँ दी गई हैं। इनमें से कौनसी सही नहीं है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 18
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 19

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ईथर में ऑक्सीजन पर कौनसा संकरण होता है?
उत्तर:
ईथर में ऑक्सीजन पर sp³ संकरण होता है।

प्रश्न 2.
सर्बिटॉल, किस प्रकार का ऐल्कोहॉल होता है?
उत्तर:
सर्बिटॉल एक पॉलिहाइड्रिक ऐल्कोहॉल है जिसमें 1° तथा 2° – OH समूह उपस्थित होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 20

प्रश्न 3.
अणुसूत्र C5H12O द्वारा कुल कितने ऐल्कोहॉल संरचना समावयवी संभव हैं?
उत्तर:
आठ।

प्रश्न 4.
ब्यूटेन- 1- ऑल तथा 2-मेथिल प्रोपेन- 1- ऑल के युग्म कौनसी समावयवता है?
उत्तर:
श्रृंखला समावयवता।

प्रश्न 5.
m – क्रीसॉल का एक क्रियात्मक समूह समावयवी बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 21

प्रश्न 6.
ईथर में मध्यावयवता का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 22
आपस में मध्यावयवता दर्शाते हैं।

प्रश्न 7.
साबुनीकरण क्या होता है?
उत्तर:
किसी एस्टर के क्षारीय जल अपघटन को साबुनीकरण कहते हैं।

प्रश्न 8.
एथिल ऐमीन की नाइट्स अम्ल के साथ अभिक्रिया दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 23

प्रश्न 9.
300°C पर V2O5, की उपस्थिति में बेन्जीन का ऑक्सीकरण करने पर बना उत्पाद बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 24

प्रश्न 10.
एक यौगिक जो सोडियम के साथ क्रिया करता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण भी देता है उसका नाम तथा सूत्र बताइए।
उत्तर:
CH3-CH2-OH (एथिल ऐल्कोहॉल)

प्रश्न 11.
किस प्रकार के ऐल्कोहॉल, विक्टरमेयर परीक्षण से नीला रंग देते हैं?
उत्तर:
द्वितीयक ऐल्कोहॉल।

प्रश्न 12.
फीनॉल की ऐसीटिल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 25

प्रश्न 13.
ब्यूटेन- 1- ऑल के निर्जलीकरण से प्राप्त मुख्य ऐल्कीन कौनसी होती है?
उत्तर:
CH3-CH = CH-CH3 (ब्यूट-2-ईन)

प्रश्न 14.
ल्यूकास अभिकर्मक किसे कहते हैं तथा इसका उपयोग भी बताइए।
उत्तर:
निर्जल ZnCl2 तथा सान्द्र HCl के मिश्रण को ल्यूकास अभिकर्मक कहते हैं तथा इससे 1°, 2° तथा 3° ऐल्कोहॉलों में विभेद किया जाता है।

प्रश्न 15.
डायस्टेस एन्जाइम का कार्य बताइए।
उत्तर:
डायस्टेस एन्जाइम, स्टार्च को माल्टोस में परिवर्तित करता है।

प्रश्न 16.
फीनॉल से एनिसॉल तथा फेनिटोल बनाने के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 26

प्रश्न 17.
पेन्टेन- 1- ऑल (I), 2- मेथिल ब्यूटेन – 2 – ऑल (II) तथा पेन्टेन-2-ऑल (III) की जल में विलेयता का क्रम बताइए।
उत्तर:
(II) > (III) > (I)

प्रश्न 18.
एथेनॉल (I), प्रोपेन (II) तथा मेथॉक्सी मेथेन (III) के क्वथनांक का बढ़ता क्रम लिखिए।
उत्तर:
(II) < (III) < (I)

प्रश्न 19.
C2H5OH जल में विलेय है लेकिन C2H5O C2H5 नहीं, क्यों?
उत्तर:
C2H5OH, जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बना लेता है। लेकिन C2H5 O C2H5 जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना सकता। अतः C2H5OH जल में विलेय है, C2H5 O C2H5 नहीं।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 27
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 28

प्रश्न 21.
एथॉक्सीएथेन के दहन का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
C2H5 O C2H5 + 6O2 → 4CO2 + 5H2O

प्रश्न 22.
विवृत श्रृंखलायुक्त संतृप्त ईथरों का सामान्य सूत्र बताइए।
उत्तर:
CnH2n+2O

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 23.
ईथर की विभिन्न हैलोजन अम्लों के साथ क्रियाशीलता का क्रम लिखिए।
उत्तर:
HI > HBr > HCl

प्रश्न 24.
CH3OH, CH3OCH3 तथा C6H5OH को बन्ध कोण के बढ़ते क्रम में रखिए।
उत्तर:
CH3OH < C6H5OH < CH3-O-CH3

प्रश्न 25.
किसी कार्बनिक यौगिक में उपस्थित – OH समूह की पहचान कैसे करेंगे कि यह ऐल्कोहॉलिक है या फीनॉलिक?
उत्तर:
कार्बनिक यौगिक की उदासीन FeCl3 विलयन के साथ क्रिया से गहरा बैंगनी रंग आता है तो यह – OH समूह फीनॉलिक है अन्यथा ऐल्कोहॉलिक।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
(a) बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड से फीनॉल कैसे बनाया जाता है?
(b) सैलिसिलिक अम्ल को फीनॉल में किस प्रकार परिवर्तित किया जाता है ?
उत्तर:
(a) बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड को जल के साथ उबालने पर फीनॉल प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 29

(b) सैलिसिलिक अम्ल को सोडालाइम के साथ गर्म करने पर विकार्बोक्सिलीकरण होकर फीनॉल बनता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 30

प्रश्न 2.
निम्नलिखित यौगिकों के अपचयन द्वारा ऐल्कोहॉल बनाने के समीकरण दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 31
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 32

प्रश्न 3.
अम्ल के विभिन्न व्युत्पन्नों के अपचयन से ब्यूटेन1-ऑल कैसे बनाते हैं ?
उत्तर:
अम्ल के विभिन्न व्युत्पन्नों का लीथियम ऐलुमिनियम हाइड्राइड द्वारा अपचयन कराने पर प्राथमिक ऐल्कोहॉल बनते हैं। इस विधि द्वारा ब्यूटेन-1-ऑल निम्न प्रकार बनाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 33

प्रश्न 4.
कार्बोनिल यौगिकों की ग्रीन्यार अभिकर्मक के साथ क्रिया द्वारा ऐल्कोहॉल बनाने की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्रीन्यार अभिकर्मकों की कार्बोनिल यौगिकों से क्रिया द्वारा (By the reaction of Grignard reagents with carbonyl compounds) – ग्रीन्यार अभिकर्मकों की विभिन्न ऐल्डिहाइड और कीटोन के साथ अभिक्रिया से संगत ऐल्कोहॉल बनते हैं।

अभिक्रिया के प्रथम पद में कार्बोनिल समूह पर ग्रीन्यार अभिकर्मक का नाभिकरागी (नाभिकस्नेही) योग होकर योगोत्पाद बनता है जिसके जल अपघटन से ऐल्कोहॉल प्राप्त होते हैं। मेथेनैल (HCHO) से प्राथमिक ऐल्कोहोल, किसी अन्य ऐल्डिहाइड (RCHO) से द्वितीयक ऐल्कोहॉल तथा कीटोन (RCOR) से तृतीयक ऐल्कोहॉल प्राप्त होते हैं।

अभिक्रिया की सामान्य रूपरेखा को निम्न प्रकार प्रदशित किया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 34
विभिन्न ऐल्डिहाइडों एवं कीटेनों की ग्रीन्यार अभिकर्मक से अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 35

प्रश्न 5.
ऐस्टरों के जल अपघटन से ऐल्कोहॉल बनाने की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एस्टरों (ऐल्किल ऐल्केनॉएट) के जल अपघटन द्वारा [By the Hydrolysis of Esters (Alkyl Alkanoate)] – एस्टरों के जल अपघटन से संगत कार्बोक्सिलिक अम्ल तथा ऐल्कोहॉल प्राप्त होते हैं। यह जल अपघटन भाप द्वारा, अम्लीय माध्यम में, क्षारीय माध्यम में या एन्जाइम (हाइड्रोलेस) की उपस्थिति में किया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 36
यह अभिक्रिया उत्क्रमणीय है अतः इसमें ऐल्कोहॉल की लब्धि कम होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 37
जलीय KOH या NaOH द्वारा जल अपघटन से R COO Na बनते हैं तथा इस अभिक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 38

प्रश्न 6.
बेन्जीन से फीनॉल बनाने की राशिग विधि को समझाइए।
उत्तर:
बेन्जीन से (From Benzene)-ताम्रलौह उत्प्रेरक की उपस्थिति में बेन्जीन की HCl तथा वायु (ऑक्सीजन) के साथ क्रिया करवाने पर पहले क्लोरोबेन्जीन बनती है जिसका SiO2 की उपस्थिति में जल अपघटन करवाने पर फीनॉल प्राप्त होता है। इसे राशिग प्रक्रम कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 39

प्रश्न 7.
एथिल ऐल्कोहॉल की सान्द्र H2SO4 के साथ क्रिया से बना उत्पाद अभिक्रिया की परिस्थिति पर निर्भर करता है। इस कथन की व्याख्या विभिन्न समीकरणों द्वारा कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न परिस्थितियों में एथिल ऐल्कोहॉल की सान्द्र H2SO4 के साथ क्रिया से प्राप्त उत्पाद निम्नलिखित हैं-
(i) 0°C तथा उच्च दाब पर-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 40

(ii) 80-100°C पर-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 41

(iii) एथिल ऐल्कोहॉल के आधिक्य में 140°C पर –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 42

(iv) सान्द्र H2SO4 के आधिक्य में 170° C पर-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 43

प्रश्न 8.
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रमों में X, Y तथा Z की पहचान कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 44
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 45

प्रश्न 9.
एक यौगिक (X) PCl5 से क्रिया करके यौगिक Y बनाता है। यौगिक Y की क्रिया मैग्नीशियम के ईथरी विलयन से कराने से प्राप्त यौगिक (Z) की क्रिया प्रोपेनॉन के साथ कराकर जल अपघटन करने से 2 – मेथिल प्रोपेन-2- ऑल बनता है। यौगिक X तथा Y क्या हैं तथा अभिक्रियाओं के समीकरण भी दीजिए।
उत्तर:
प्रश्नानुसार,
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 46
अन्तिम उत्पाद चार कार्बन का 3° ऐल्कोहॉल है जो कि प्रोपेनॉन की यौगिक (Z) से क्रिया कराने पर प्राप्त हो रहा है। अतः यौगिक Z एक कार्बनयुक्त ग्रीन्यार अभिकर्मक है इसलिए प्रारम्भिक यौगिक X एक कार्बन का ऐल्कोहॉल होगा तथा अभिक्रया अनुक्रम निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 47

प्रश्न 10.
एक कार्बनिक यौगिक X (C4H10O) की HCl से क्रिया कराने पर यौगिक Y (C4H9Cl) बनता है जिसके अपचयन सेब्यूटेन प्राप्त होता है। यौगिक X के ऑक्सीकरण से पहले एक कार्बोनिल यौगिक (Z) प्राप्त होता है इसके पश्चात् उतने ही कार्बन का कार्बोक्सिलिक अम्ल (P) बनता है। X, Y Z तथा P का सूत्र बताइए तथा अभिक्रिया अनुक्रम भी लिखिए।
उत्तर:
प्रश्नानुसार यौगिक X, n ब्यूटिल ऐल्कोहॉल है क्योंकि इसके ऑक्सीकरण का अन्तिम उत्पाद उतने ही कार्बन का कार्बोक्सिलिक अम्ल है। इन अभिक्रियाओं के समीकरण निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 48

प्रश्न 11.
एक कार्बनिक यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है तथा यह सोडियम धातु के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस भी देता है तथा इसके ऑक्सीकरण का अन्तिम उत्पाद एथेनॉइक अम्ल है तो यह यौगिक कौनसा है? समीकरणों सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रश्नानुसार यौगिक आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है अतः यह ऐल्कोहॉल या कार्बोनिल यौगिक होना चाहिए लेकिन कार्बोनिल यौगिक सोडियम धातु के साथ क्रिया नहीं करते तथा इस यौगिक के ऑक्सीकरण का अन्तिम उत्पाद एथेनॉइक अम्ल है अतः यह यौगिक एथेनॉल होगा। अभिक्रियाओं के समीकरण निम्न हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 49

प्रश्न 12.
फीनॉल के अम्लीय गुण पर प्रतिस्थापियों के प्रभाव की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
फीनॉल के अम्लीय गुण पर प्रतिस्थापियों का प्रभाव- फीनॉल में इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह ( – I प्रभाव) जुड़ने पर इसके अम्लीय गुण में वृद्धि होती है। ये समूह जब आर्थो तथा पैरा स्थितियों पर होते हैं तो अम्लीय गुण अधिक बढ़ता है क्योंकि इनसे फीनॉक्साइड आयन के ऋणावेश का विस्थापन अधिक मात्रा में होता है। लेकिन इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी (+ I प्रभाव ) समूहों (जैसे CH3-, C2H5-) के कारण फीनॉल का अम्लीय गुण कम हो जाता है, क्योंकि ये फीनॉक्साइड आयन के स्थायित्व में कमी करते हैं जिससे -O-H बन्ध का आयनन कम हो जाता है। + I प्रभाव वाले समूहों की संख्या बढ़ने पर अम्लीय गुण में कमी होती है।

उदाहरण –
फीनॉल की तुलना में क्रीसॉलों को अम्लीय गुण कम होता है तथा इनके om – तथा p- समावयवियों के अम्लीय गुणका क्रम – निम्न प्रकार होता है-
m > p ≈ O
फीनॉल की तुलना में नाइट्रोफीनॉल अधिक अम्लीय होते हैं तथा इनके o, m तथा p- समावयवियों के अम्लीय गुण का क्रम निम्न है – p > 0 > m
फीनॉल में – OR समूह जुड़ने पर इसके अम्लीय गुण में सामान्यतः कमी होती है क्योंकि OR समूह +M प्रभाव दर्शाता है जिससे फीनॉल का आयनन कम हो जाता है।

इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूहों की संख्या बढ़ने पर भी फीनॉल के अम्लीय गुण में वृद्धि होती है अतः 2 – नाइट्रोफीनॉल की तुलना में 2, 4- डाइनाइट्रोफीनॉल अधिक अम्लीय होता है तथा 2, 4, 6 ट्राइनाइट्रोफीनॉल (पिक्रिक अम्ल) का अम्लीय गुण तो कार्बोक्सिलिक अम्लों के समतुल्य हो जाता है।

फनॉल तथा प्रतिस्थापित फीनॉलों के Pka मान निम्नलिखित सारणी में दिए गए हैं जिससे इनके अम्लीय गुणों की तुलना की जा सकती है।

क्रम सं.यौगिकPka मान
1.p-नाइट्रोफीनॉल7.1
2.0-नाइट्रोफीनॉल7.2
3.m-नाइट्रोफीनॉल8.3
4.फीनॉल10.0
5.m-क्रीसॉल10.1
6.o-क्रीसॉल10.2
7.p-क्रीसॉल10.2

नोट – Pka मान बढ़ने पर अम्लीय गुण में कमी होती है।

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प्रश्न 13.
C2H5OH की निम्नलिखित अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए –
(i) शॉटन बोमान अभिक्रिया
(ii) सान्द्र HNO3 से क्रिया
(iii) NH, के आधिक्य से क्रिया
(iv) लाल P तथा HI से अपचयन।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 50

प्रश्न 14.
C2H5OH की निम्नलिखित यौगिकों के साथ अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) CH2N2 (डाइएजोमेथेन )
(ii) कीटीन
(iii) HC = CH (एथाइन)
(iv) CH3NCO (मेथिल – आइसोसायनेट)
(v) CH3CHO (एथेनैल)
(vi) 0°C पर सान्द्र H2SO4
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 51

प्रश्न 15.
निम्नलिखित को समझाइए –
(a) हैलोफॉर्म अभिक्रिया
(b) तृतीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल की फेन्टन अभिकर्मक से क्रिया।
उत्तर:
(a) हैलोफॉर्म अभिक्रिया (Haloform Reaction) – HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 52समूह, युक्त ऐल्कोहॉलों की क्षार की उपस्थिति में हैलोजन से क्रिया करवाने पर हैलोफॉर्म बनते हैं, इसे हैलोफॉर्म अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 53
इस अभिक्रिया नं क्लोरीन के स्थान पर आयोडीन लेने पर आयोडोफॉर्म (CH3 बनता है जो कि पीला अविलेय ठोस होता है। इसे आयोडोफॉर्म परीक्षण कहते हैं।

(b) फेन्टन अभिकर्मक से अभिक्रिया (Reaction with Fenton’s Reagent) – फेन्टन अभिकर्मक (FeSO4 + H2O2) से ऐल्कोहॉलों का ऑक्सीकारक संघनन द्वितीयकरण होकर ऐल्केन डाइऑल बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 54

प्रश्न 16.
मेथेनॉल तथा एथेनॉल में विभेद कीजिए।
उत्तर:
मेथेनॉल (CH3OH) तथा ऐथेनॉल (C2H5OH) में विभेद (Difference in Methanol and Ethanol)- दोनों ही प्राथमिक ऐल्कोहॉल श्रेणी के प्रथम तथा द्वितीय सदस्य हैं फिर भी इनमें निम्नलिखित विभेद हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 55
ऐल्कोहॉलों में अन्तर्परिवर्तन (Interconversions in Alcohols)
(1) निम्न ऐल्कोहॉल से उच्च ऐल्कोहॉल बनाना
उदाहरण – CH-OH से C2H5OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 56

(2) उच्च ऐल्कोहॉल से निम्न ऐल्कोहॉल बनाना
CH3-CH2-CH2-OH से CH3CH2OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 57

(3) 1° – ऐल्कोहॉल से 2° – ऐल्कोहॉल बनाना-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 58

प्रश्न 17.
फीनॉल की सल्फोनीकरण अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सल्फोनीकरण (Sulphonation)-कक्ष ताप पर फीनॉल की सान्द्र H2SO4 से क्रिया कराने पर o – तथा p-फीनॉल सल्फोनिक अम्लों का मिश्रण बनता है। इस अभिक्रिया में उच्च ताप (100°C) पर p-समावयवी तथा निम्न ताप (25°C) पर o- समावयवी अधिक मात्रा में बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 59

प्रश्न 18.
फीनॉल की फीडेल क्राफ्ट अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
(i) ऐल्किलीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 60

(ii) ऐसिटिलीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 61

प्रश्न 19.
फीनॉल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड
(ii) एसीटोन
(iii) थैलिक एन्टाइ
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 62

प्रश्न 20.
लेडेरर मानेसे अभिक्रिया क्या होती है ? समझाइए।
उत्तर:
फार्मेल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया (लेडेरर मानेसे अभिक्रिया) [Reaction with Formaldehyde (Lederer Manese Reaction)]-तनु अम्ल या क्षार की उपस्थिति में फीनॉल तथा फार्मेल्डिहाइड की क्रिया द्वारा o – तथा p – हाइड्रॉक्सी बेन्जिल ऐल्कोहॉल बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 63a
फीनॉल के साथ फॉर्मेल्डिहाइड को अधिक मात्रा में लेकर गर्म करने पर संघनन बहुलकीकरण द्वारा एक त्रिविमीय बहुलक बैकेलाइट बनता है। बैकेलाइट एक ताप सुदृढ़ प्लास्टिक होता है जिसे विद्युत रोधन में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 21.
फीनॉल की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाएँ लिखिए-
(i) PCl5 के साथ
(ii) NH3 के साथ
(iii) हिन्सबर्ग अभिकर्मक
(iv) हाइड्रोजन।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 63

प्रश्न 22.
t-ब्यूटिल मेथिल ईथर की सान्द्र HI के साथ अभिक्रिया लिखिए तथा इसकी क्रियाविधि भी बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 64
इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN1 होती है।

प्रश्न 23.
CH3O C2H5 की HI से क्रिया द्वारा बने उत्पाद बताइए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 65

प्रश्न 24.
CH3O C2H5 के साथ अभिक्रिया की क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर:
हैलोजन अम्लों के साथ क्रिया – डाइऐल्किल ईथर की क्रिया, हैलोजन अम्लों के आधिक्य से करवाने पर ऐल्किल हैलाइड के दो मोल बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 66
HX की क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-HI > HBr > HCl तथा यह अभिक्रियां सान्द्र HI या HBr द्वारा उच्च ताप पर होती है।
ईथर में एक तृतीयक ऐल्किल समूह उपस्थित होने पर तृतीयक ऐल्किल हैलाइड बनता है।
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 67
इस अभिक्रिया में तृतीयक ऐल्किल हैलाइड बनने का स्पष्टीकरण अभिक्रिया की क्रियाविधि (SN1) से हो जाता है।
पद – I – ईथर का प्रोटोनीकरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 68
पद – II
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 69
पद – III
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 70
पद II में CH3OH तथा t – ब्यूटिल कार्बोकैटायन (3°) बनता है जो कि अधिक स्थायी होता है जिस पर आयोडाइड (I) की क्रिया से t – ब्यूटिल आयोडाइड बनता है अतः यह SN1 अभिक्रिया है।

एथिल मेथिल ईथर की HI के एक मोल के साथ अभिक्रिया से मेथिल ऐल्कोहॉल तथा एथिल आयोडाइड बनते हैं। लेकिन HI का आधिक्य लेने पर मेथिल आयोडाइड तथा एथिल आयोडाइड बनते हैं।
CH3 – O – C2H5 + HI → CH3OH + C2H5I
CH3O C2H5 + 2HI → CH3I + C2H5I +H2O
इस अभिक्रिया से प्राप्त उत्पादों की व्याख्या इसकी क्रियाविधि से की जा सकती है।
क्रियाविधि –
पद – I – ईथर का प्रोटोनीकरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 71
पद I से प्राप्त ऑक्सोनियम आयन के कम प्रतिस्थापित कार्बन पर I के आक्रमण से ऐल्किल आयोडाइड तथा ऐल्कोहॉल बनते हैं तथा इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN2 होती है।
पद – II
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 72

अतः दो भिन्न-भिन्न ऐल्किल समूह युक्त मिश्रित ईथर से बनने वाले ऐल्कोहॉल तथा ऐल्किल आयोडाइड, ऐल्किल समूहों की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। जब ईथर में प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्किल समूह उपस्थित होते हैं तो छोटा ऐल्किल समूह ऐल्किल आयोडाइड बनाता है।

पद – III – जब HI के आधिक्य में उच्च ताप पर अभिक्रिया की जाती है तो एथेनॉल, HI के दूसरे अणु के साथ क्रिया करके C2H5I दूसरा अणु बना देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 73
चक्रीय ईथर, HBr तथा HI के साथ क्रिया करके डाइलो एल्केन बनाते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 74
मिश्रित एरोमैटिक ईथर जैसे ऐनिसॉल में C-O बन्ध अधिक स्थायी होता है अतः ऐल्किल समूह के कार्बन तथा ऑक्सीजन के मध्य बन्ध का विदलन होकर फीनॉल एवं ऐल्किल हैलाइड बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 75
इस अभिक्रिया में ऐनिसोल के प्रोटोनीकरण द्वारा मेथिलफेनिल ऑक्सोनियम आयन IMG बनता है। फेनिल समूह के कार्बन की sp² संकरित अवस्था तथा (O – C6H5) समूह के आंशिक द्विबंध के गुण के कारण O-C6H5 आबंध O-CH3 आबन्ध की तुलना में प्रबल होता है। इसलिए I- आयन के आक्रमण से O – CH3 आबंध टूटकर CH3I बनता है तथा फीनॉल पुनः अभिक्रिया करके C6H5I नहीं देते क्योंकि फीनॉल Tsp संकरित कार्बन नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं दर्शाता जो कि CHI में परिवर्तन के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 25.
एक मिश्रित ईथर जिसमें प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्किल समूह उपस्थित हैं, की एक मोल HI से क्रिया कराने पर आयोडाइड आयन (I) कौनसे ऐल्किल समूह से जुड़ता है तथा क्यों?
उत्तर:
प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्किल समूह युक्त मिश्रित ईथर की क्रिया HI के साथ कराने पर आयोडाइड आयन कम प्रतिस्थापित कार्बन या छोटे ऐल्किल समूह पर जुड़ता है क्योंकि इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN होती है जिसमें संक्रमण अवस्था बनती है। आयोडाइड के बड़े आकार के कारण यह बड़े या अधिक प्रतिस्थापित ऐल्किल समूह से नहीं जुड़ता क्योंक उस पर त्रिविम विन्यासी बाधा के कारण प्रतिकर्षण होता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 26.
एनिसॉल की HI के साथ क्रिया द्वारा फीनॉल तथा मेथिल आयोडाइड बनते हैं न कि आयोडोबेन्जीन तथा मेथिल ऐल्कोहॉल। इस कथन की व्याख्या कारण सहित कीजिए।
उत्तर:
हैलोजन अम्लों के साथ क्रिया – डाइऐल्किल ईथर की क्रिया, हैलोजन अम्लों के आधिक्य से करवाने पर ऐल्किल हैलाइड के दो मोल बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 66
HX की क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-HI > HBr > HCl तथा यह अभिक्रियां सान्द्र HI या HBr द्वारा उच्च ताप पर होती है।
ईथर में एक तृतीयक ऐल्किल समूह उपस्थित होने पर तृतीयक ऐल्किल हैलाइड बनता है।
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 67
इस अभिक्रिया में तृतीयक ऐल्किल हैलाइड बनने का स्पष्टीकरण अभिक्रिया की क्रियाविधि (SN1) से हो जाता है।
पद – I – ईथर का प्रोटोनीकरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 68
पद – II
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 69
पद – III
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 70
पद II में CH3OH तथा t – ब्यूटिल कार्बोकैटायन (3°) बनता है जो कि अधिक स्थायी होता है जिस पर आयोडाइड (I) की क्रिया से t – ब्यूटिल आयोडाइड बनता है अतः यह SN1 अभिक्रिया है।

एथिल मेथिल ईथर की HI के एक मोल के साथ अभिक्रिया से मेथिल ऐल्कोहॉल तथा एथिल आयोडाइड बनते हैं। लेकिन HI का आधिक्य लेने पर मेथिल आयोडाइड तथा एथिल आयोडाइड बनते हैं।
CH3 – O – C2H5 + HI → CH3OH + C2H5I
CH3O C2H5 + 2HI → CH3I + C2H5I +H2O
इस अभिक्रिया से प्राप्त उत्पादों की व्याख्या इसकी क्रियाविधि से की जा सकती है।
क्रियाविधि –
पद – I – ईथर का प्रोटोनीकरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 71
पद I से प्राप्त ऑक्सोनियम आयन के कम प्रतिस्थापित कार्बन पर I के आक्रमण से ऐल्किल आयोडाइड तथा ऐल्कोहॉल बनते हैं तथा इस अभिक्रिया की क्रियाविधि SN2 होती है।
पद – II
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 72

अतः दो भिन्न-भिन्न ऐल्किल समूह युक्त मिश्रित ईथर से बनने वाले ऐल्कोहॉल तथा ऐल्किल आयोडाइड, ऐल्किल समूहों की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। जब ईथर में प्राथमिक या द्वितीयक ऐल्किल समूह उपस्थित होते हैं तो छोटा ऐल्किल समूह ऐल्किल आयोडाइड बनाता है।

पद – III – जब HI के आधिक्य में उच्च ताप पर अभिक्रिया की जाती है तो एथेनॉल, HI के दूसरे अणु के साथ क्रिया करके C2H5I दूसरा अणु बना देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 73
चक्रीय ईथर, HBr तथा HI के साथ क्रिया करके डाइलो एल्केन बनाते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 74
मिश्रित एरोमैटिक ईथर जैसे ऐनिसॉल में C-O बन्ध अधिक स्थायी होता है अतः ऐल्किल समूह के कार्बन तथा ऑक्सीजन के मध्य बन्ध का विदलन होकर फीनॉल एवं ऐल्किल हैलाइड बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 75
इस अभिक्रिया में ऐनिसोल के प्रोटोनीकरण द्वारा मेथिलफेनिल ऑक्सोनियम आयन IMG बनता है। फेनिल समूह के कार्बन की sp² संकरित अवस्था तथा (O – C6H5) समूह के आंशिक द्विबंध के गुण के कारण O-C6H5 आबंध O-CH3 आबन्ध की तुलना में प्रबल होता है। इसलिए I- आयन के आक्रमण से O – CH3 आबंध टूटकर CH3I बनता है तथा फीनॉल पुनः अभिक्रिया करके C6H5I नहीं देते क्योंकि फीनॉल Tsp संकरित कार्बन नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं दर्शाता जो कि CHI में परिवर्तन के लिए आवश्यक है।

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिक का IUPAC नाम बताइए-
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 76

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अवलोकनों की व्याख्या कीजिए-
(i) एथेनॉल का क्वथनांक मेथॉक्सीमेथेन के क्वथनांक से उच्च होता है।
(ii) फीनॉल एथेनॉल से अधिक अम्लीय होता है।
(iii) o- और p- नाइट्रोफीनॉल अपेक्षाकृत फीनॉल से अधिक अम्लीय होते हैं।
उत्तर:
(i) एथेनॉल में अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जबकि मेथॉक्सी मेथेन में द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण (वान्डरवाल बल) पाया जाता है। अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध की प्रबलता, द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण से अधिक होती है। अतः एथेनॉल का क्वथनांक, मेथॉक्सी मेथेन की तुलना में उच्च होता है।

(ii) फीनॉल के आयनन से प्राप्त C6H5O, अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है जबकि C2H5O में ऐसा नहीं होता। अतः फीनॉल (C6H5OH) की H+ देने की प्रवृत्ति अधिक होती है इसलिए यह ऐथेनॉल से अधिक अम्लीय होता है।

(iii) o-नाइट्रोफ़ीनॉल अंतःअणुक हाइड्रोजन बन्ध (Intramolecular H-bond) के कारण भाप में वाष्पशील है क्योंकि इसमें अन्तराअणुक बल, p- समावयवी की तुलना में दुर्बल होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 77

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिक की अणु संरचना लिखिए जिसका आई.यू.पी.ए.सी. (IUPAC) पद्धति अनुसार नाम इस प्रकार है-
1- फेनिलप्रोपेन-2-ऑल
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 78

प्रश्न 4.
निम्नलिखित का रूपांतर कैसे करेंगे :
(i) फीनॉल का बेन्जोक्विनोन में
(ii) प्रोपेनोन का 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल में या मेथिल मैग्नीशियम
ब्रोमाइड से 2 – मेथिल प्रोपेन-2-ऑल
(iii) प्रोपीन का प्रोपेन- 2 – ऑल में ।
उत्तर:
(i) फीनॉल का ऑक्सीकरण क्रोमिक अम्ल (Na2Cr2O7 + H2SO4) द्वारा करवाने पर बेन्जोक्विनोन प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 79

(ii) प्रोपेनॉन की क्रिया मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड (CH3MgBr) से करवाने पर पहले योगोत्पाद बनता है जिसके जल अपघटन से 2- मेथिल प्रोपेन 2- ऑल प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 80

(iii) प्रोपीन की तनु H2SO4 से क्रिया करवाने पर जलयोजन होकर प्रोपेन- 2 – ऑल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 81

प्रश्न 5.
एथेनॉल को एथीन में आप कैसे रूपांतरित करेंगे?
उत्तर:
एथेनॉल को 443 K पर सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर एथीन प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया में निर्जलीकरण होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 82

प्रश्न 6.
एक ऐल्कीन के अम्ल उत्प्रेरित जलयोजन से सम्बद्ध ऐल्कोहॉल बनाने की क्रियाविधि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एथीन का जलयोजन-तनु अम्ल (HCl, H2SO4) की उपस्थिति में एल्कीन की जल के साथ अभिक्रिया से ऐल्कोहॉल बनता है तथा असममित ऐल्कीनों में योगात्मक अभिक्रिया मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होती है।
एथीन का जलयोजन निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 83
क्रियाविधि-इस अभिक्रिया की क्रियाविधि में निम्नलिखित तीन पद होते हैं-
पद 1-H3O+ के इलेक्ट्रॉनस्नेही के आक्रमण के द्वारा ऐल्कीन के प्रोटोनीकरण (Protonation) से कार्बोकैटायन बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 84
पद 2-कार्बोकैटायन पर जल का नाभिकस्नेही (Nucleophyllic) आक्रमण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 85
पद 3-विप्रोटोनीकरण (deprotonation) जिससे ऐल्कोहोल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 86

प्रश्न 7.
निम्नलिखित व्यवहारों की व्याख्या कीजिए-
(i) तुलनीय आण्विक द्रव्यमानों के हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक घुलनशील होते हैं।
(ii) ऑर्थो – मेथॉक्सीफीनॉल की अपेक्षा ऑर्थो – नाइट्रोफीनॉल अधिक अम्लीय होता है।
उत्तर:
(i) ऐल्कोहॉलों में ध्रुवीय -OH समूह उपस्थित होने के कारण ये जल के साथ आसानी से हाइड्रोजन बन्ध बना लेते हैं जबकि हाइड्रोकार्बन, जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना सकते। अतः समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा ऐल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं।

(ii) ऑर्थो-नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो-मेथॉक्सी फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय होती है क्योंकि – NO2 समूह का इलेक्ट्रॉन-आकर्षी अनुनाद प्रभाव ( -I तथा – M) फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ाता है जबकि – OCH3 ( मेथॉक्सी) समूह का इलेक्ट्रॉन-प्रतिकर्षी प्रभाव फीनॉक्साइड आयन के स्थायित्व को कम करता है। फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ने से फीनॉल का वियोजन अधिक होता है अतः अम्लीय प्रबलता बढ़ती है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर

प्रश्न 8.
शर्करा के किण्वन से एथेनॉल बनाते समय हम प्रभाजी आसवन विधि से 95% से अधिक सान्द्रता का एथेनॉल क्यों नहीं बना सकते हैं?
उत्तर:
शर्करा के किण्वन से एथेनॉल बनाते समय प्रभाजी आसवन विधि से 95% से अधिक सान्द्रता का एथेनॉल नहीं बना सकते क्योंकि 95% एथेनॉल तथा 5% जल का मिश्रण स्थिर क्वथनांकी मिश्रण होता है, जिसका प्रभाजी आसवन सम्भव नहीं है क्योंकि इसका क्वथनांक निश्चित होता है।

प्रश्न 9.
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 87
उपर्युक्त अभिक्रिया में बने उत्पाद X व Y के रासायनिक सूत्र तथा नाम लिखो। X तथा Y को वाष्पीय आसवन विधि से पृथक् क्यों किया जा सकता है?
उत्तर:
फीनॉल की तनु HNO3 से क्रिया निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 88
उपर्युक्त अभिक्रिया से प्राप्त दोनों समावयवियों को वाष्पीय आसवन से पृथक् कर सकते हैं क्योंकि o- नाइट्रोफीनॉल अंतः अणुक (intra- molecular H-bond) हाइड्रोजन बन्ध के कारण भाप में वाष्पशील होता है तथा इसमें अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध, p-समावयवी की तुलना दुर्बल है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 89

प्रश्न 10.
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 90 उपर्युक्त अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए एवं अभिक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।
उत्तर:
एथेनॉल को 443 K ताप पर सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर इसका निर्जलीकरण होकर एथीन बनती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 91
एथेनॉल के निर्जलीकरण (Dehydration) की क्रियाविधि में निम्नलिखित पद होते हैं-
क्रियाविधि-
I. प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल का बनना-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 92
II. कार्बोकैटायन का बनना (Formation of Carbocation )यह सबसे धीमा पद है अतः यह वेग निर्धारक पद है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 93
III. विप्रोटोनीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 94
पद 1 में प्रयुक्त अम्ल, पद 3 में स्वतंत्र हो जाता है। इस अभिक्रिया में साम्य को दाईं ओर विस्थापित करने के लिए, एथीन को बनते ही निकाल लिया जाता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में A, B, C व D को पहचानिए –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 95
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 96

प्रश्न 12.
निम्नलिखित के कारण दीजिए-
(अ) ऐथिल ऐल्कोहॉल से फीनॉल अधिक अम्लीय है।
(ब) प्रोपेनॉल का क्वथनांक ब्यूटेन से अधिक है।
उत्तर:
(अ) फीनॉलों का अम्लीय गुण तथा ऐल्कोहॉल के अम्लीय गुण से इसकी तुलना-फीनॉल का अम्लीय गुण, ऐल्कोहॉल की तुलना में अधिक होता है तथा फीनॉल एथेनॉल से लगभग दस लाख गुना अधिक अम्लीय होता है। इसकी पुष्टि इसकी जलीय NaOH के साथ क्रिया द्वारा भी होती है।

फीनॉल के अधिक अम्लीय गुण की व्याख्या निम्न प्रकार की ज़ा सकती है-
फीनॉल में -OH समूह, बेन्जीन वलय के sp² संकरित कार्बन से जुड़ा होता है जिसकी विद्युत ऋणता अधिक होने के कारण यह इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह की तरह कार्य करता है जिसके कारण फीनॉल में अनुनाद होता है एवं इसकी ऑक्सीजन धनावेशित होकर -O-H बन्ध की ध्रुवता बढ़ा देती है जिससे ऐल्कोहॉल की तुलना में फीनॉल का आयनन अधिक होता है। फीनॉल की अनुनादी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 97
ऐल्कोहॉल तथा फीनॉल का आयनन निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 98
ऐल्कॉक्साइड आयन में ऋणावेश ऑक्सीजन पर ही स्थायीकृत (Localised) रहता है जबकि फीनॉक्साइड आयन में अनुनाद के कारण ऋणावेश का विस्थानीकरण (Delocalisation) हो जाता है जिससे इसका स्थायित्व अधिक होता है। इसी कारण फीनॉल का आयनन, ऐल्कोहॉल की तुलना में अधिक होता है जो इसके अधिक अम्लीय गुण के लिए उत्तरदायी है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 99
फीनॉल में भी अनुनाद के द्वारा आवेश का विस्थानीकरण (delocalisation) होता है लेकिन इसकी अनुनादी संरचनाओं में आवेशों का पृथक्करण (Separation) होता है अत: फीनॉक्साइड आयन की तुलना में फीनॉल कम स्थायी होता है।

(ब) प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक होता है क्योंकि प्रोपेनॉल में प्रबल अंतराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है जिसे तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है; जबकि ब्यूटेन में अणुओं के मध्य दुर्बल वान्डरवाल बल पाया जाता है जिसे तोड़ने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 13.
हिन्सबर्ग अभिकर्मक का रासायनिक नाम एवं सूत्र लिखिए।
उत्तर:
ऐरिल सल्फोनिल क्लोराइड को हिन्सबर्ग अभिकर्मक कहते हैं, जैसे- बेन्जीन सल्फोनिल क्लोराइड
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 100

प्रश्न 14.
(अ) द्वितीयक – ब्यूटिल ऐल्कोहॉल का IUPAC नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए।
(ब) निम्नलिखित यौगिकों से फीनॉल विरचन के समीकरण दीजिए-
(i) बेन्जीन
(ii) ऐनिलीन।
(स) फीनॉल की अनुनादी संरचनाएँ लिखिए।
अथवा
(अ) मेथिल n प्रोपिल ईथर का IUPAC नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए।
(ब) निम्नलिखित अभिक्रियाओं द्वारा ईथर विरचन के समीकरण दीजिए-
(i) ऐल्कोहॉल के निर्जलन द्वारा
(ii) विलियम्सन संश्लेषण द्वारा।
(स) ऐल्कॉक्सी बेन्जीन की अनुनादी संरचनाएँ लिखिए।
उत्तर:
(अ) द्वितीयक ब्यूटिल ऐल्कोहॉल का संरचना सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 101 होता है तथा इसका IUPAC नाम
(ब)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 102
(स) फीनॉल की अनुनादी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 103
अथवा
(अ) मेथिल n. प्रोपिल ईथर का संरचना सूत्र CH3-O-CH2-CH2-CH3 होता है तथा इसका IUPAC नाम 1 मेथॉक्सी प्रोपेन है।

(ब) (i) ऐल्कोहॉल का निर्जलन-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 104

(ii) विलियम्सन संश्लेषण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 105

(स) ऐल्कॉक्सी बेन्जीन (C6H5OR) की अनुनादी संरचनाएँ प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 106

प्रश्न 15.
निम्नलिखित अभिक्रिया की क्रियाविधि की व्याख्या कीजिये –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 107
उत्तर:
एथेनॉल को 443 K ताप पर सान्द्र H2SO4 के साथ गर्म करने पर इसका निर्जलीकरण होकर एथीन बनती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 91
एथेनॉल के निर्जलीकरण (Dehydration) की क्रियाविधि में निम्नलिखित पद होते हैं-
क्रियाविधि-
I. प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल का बनना-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 92
II. कार्बोकैटायन का बनना (Formation of Carbocation )यह सबसे धीमा पद है अतः यह वेग निर्धारक पद है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 93
III. विप्रोटोनीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 94
पद 1 में प्रयुक्त अम्ल, पद 3 में स्वतंत्र हो जाता है। इस अभिक्रिया में साम्य को दाईं ओर विस्थापित करने के लिए, एथीन को बनते ही निकाल लिया जाता है।

प्रश्न 16.
विलियम्सन ईथर संश्लेषण में सन्निहित अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
विलियम्सन ईथर संश्लेषण में सन्निहित अभिक्रिया निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 108
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 109

प्रश्न 17.
(i) निम्नलिखित में से कौनसा समावयवी अधिक वाष्पशील है : o – नाइट्रोफीनॉल या p- नाइट्रोफीनॉल।
(ii) निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में A, B तथा पहचानिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 110
उत्तर:
(i) o-नाइंट्रेफीनॉल, p-नाइट्रोफीनॉल से अधिक वाष्पशील होता है क्योंकि इसमें अन्तःअणुक हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है। अतः इसमें अन्तराअणुक हाइड्रोजन बन्ध p-नाइट्रोफीनॉल की तुलना में दुर्बल होता है।

(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 111

प्रश्न 18.
आप फिनॉल को बेन्जीन में परिवर्तित कैसे करेंगे?
उत्तर:
फीनॉल को यशदरज (जिंक चूर्ण) के साथ गर्म करने पर यह बेन्जीन में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 112

प्रश्न 19.
जब एथेनॉल की क्रिया सान्द्र H2SO4 के साथ 413K पर कराई जाती है, तब मुख्य उत्पाद क्या बनता है?
उत्तर:
एथेनॉल की सान्द्र H2SO4 के साथ 413 K पर क्रिया कराने पर मुख्य उत्पाद ईधर प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 113

प्रश्न 20.
क्या होता है जब 19 एवं 2° पृथक् ऐल्कोहॉलों का निर्जल क्रोमियम ट्राइऑक्साइड (CrO3) द्वारा ऑक्सीकरण किया जाता है? रासायनिक समीकरणें लिखिए।
उत्तर:
निर्जल क्रोमियम ट्राइऑक्साइड (CrO3) द्वारा प्राथमिक ऐल्कोहॉलों के ऑक्सीकरण से ऐल्डिहाइड तथा द्वितीयक ऐल्कोहॉलों के ऑक्सीकरण से कीटोन प्राप्त होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 114

प्रश्न 21.
(अ) अधोलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
(i) CH2 = CH – CH2 – OH
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 115

(ब) निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(i) फीनॉल की CS2 की उपस्थिति में ब्रोमीन के साथ
(ii) एथेनॉल को Cu की उपस्थिति में 573 K ताप पर गरम करने पर।
अथवा
(अ) अधोलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 116

(ब) निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए –
(i) फीनॉल की सान्द्र HNO3 के साथ
(ii) फीनॉल की यशद रज के साथ।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 117

प्रश्न 22.
दिए गए यौगिक का आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिए:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 118
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 119
इस यौगिक का आई.यू.पी.ए.सी. नाम 2 2 – डाईमेथिल प्रोपेन -1- ऑल है।

प्रश्न 23.
निम्नलिखित के लिए कारण दीजिए :
(i) p- मेथिलफीनॉल की अपेक्षा p- नाइट्रोफीनॉल अधिक अम्लीय है।
(ii) फीनॉल में C-O आबन्ध लम्बाई अपेक्षाकृत छोटी है मेथेनॉल में के उसी आबन्ध से।
(iii) सोडियम मेथॉक्साइड (N\(\stackrel{+}{a}\)\(\stackrel{-}{O}\) CH3) के साथ अभिक्रिया करने पर (CH3)3C – Br मुख्य उत्पाद के रूप में ऐल्कीन देता है न कि ईथर |
उत्तर:
(i) p- मेथिल फीनॉल की अपेक्षा p-नाइट्रोफीनॉल अधिक अम्लीय है क्योंकि – NO2 समूह का – I तथा M प्रभाव फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ाता है जबकि मेथिल ( – CH3) समूह का + I प्रभाव फीनॉक्साइड आयन के स्थायित्व को कम करता है। फीनॉक्साइड आयन का स्थायित्व बढ़ने से फीनॉल का वियोजन अधिक होता है, अतः अम्लीय प्रबलता बढ़ती है।

(ii) इस प्रश्न के उत्तर के लिए अभ्यास 11.1 में लघुत्तरात्मक प्रश्न संख्या 1 (b) का उत्तर देखें ।

(iii) सोडियम मेथॉक्साइड (N\(\stackrel{+}{a}\)\(\stackrel{-}{O}\) CH3) के साथ अभिक्रिया करने पर (CH3)3C – Br मुख्य उत्पाद के रूप में ऐल्कीन देता है न किं ईथर, क्योंकि सोडियम मेथॉक्साइड एक प्रबल नाभिक स्नेही एवं प्रबल क्षारक है अतः विलोपन अभिक्रिया, प्रतिस्थापन अभिक्रिया से अधिक प्रभावी होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फीनॉल एवं ईथर 120

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन Textbook Exercise Questions and Answers.

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अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से किसने संयुक्त अरब अमीरात के लिंग-अनुपात को निम्न किया है?
(A) पुरुष कार्यशील जनसंख्या का चयनित प्रवास
(B) पुरुषों की उच्च जन्म-दर
(C) स्त्रियों की निम्न जन्म-दर
(D) स्त्रियों का उच्च उत्प्रवास
उत्तर:
(C) स्त्रियों की निम्न जन्म-दर

2. निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या जनसंख्या के कार्यशील आयु-वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है?
(A) 15 से 65 वर्ष
(B) 15 से 66 वर्ष
(C) 15 से 64 वर्ष
(D) 15 से 59 वर्ष
उत्तर:
(D) 15 से 59 वर्ष

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

3. निम्नलिखित में से किस देश का लिंग-अनुपात विश्व में सर्वाधिक है?
(A) लैटविया
(B) जापान
(C) संयुक्त अरब अमीरात
(D) फ्रांस
उत्तर:
(A) लैटविया

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या संघटन जनसंख्या के उस पक्ष को प्रदर्शित करता है जिसको मापा जा सकता है। जनसंख्या के मात्रात्मक पक्ष; जैसे-लिंग, आयु, श्रम शक्ति, आवास, कार्यशील और आश्रित जनसंख्या तथा साक्षरता आदि तथ्यों का वर्गीकरण और अध्ययन जनसंख्या संघटन कहलाता है।

प्रश्न 2.
आयु-संरचना का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
आयु संरचना जनसंख्या संघटन का महत्त्वपूर्ण सूचक है। यह विभिन्न आयु वर्गों में लोगों की संख्या को प्रदर्शित करती है। इसके अंतर्गत किसी देश की जनसंख्या को तीन आयु वर्गों में बाँटा जाता है- 0-14 आयु वर्ग, 15-59 आयु वर्ग और 60 से ऊपर का आयु वर्ग। इसके द्वारा ही देश की जनसंख्या की जन्म-दर, उत्पादकता, मानव क्षमता, रोजगार की स्थिति तथा आश्रित जनसंख्या आदि का पता चलता है। इससे ही भविष्य में जनसंख्या वृद्धि का अनुमान होता है।

प्रश्न 3.
लिंग-अनुपात कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
जनसंख्या में पुरुषों और स्त्रियों की संख्या के बीच के अनुपात को लिंग-अनुपात कहा जाता है। भारत में यह अनुपात प्रति हजार पुरुषों और स्त्रियों की संख्या के रूप में दर्शाया जाता है।
HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन 1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जनसंख्या के ग्रामीण-नगरीय संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आवास के आधार पर जनसंख्या को दो वर्गों में बाँटा गया है-(i) ग्रामीण जनसंख्या तथा (ii) नगरीय जनसंख्या।
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या की अपनी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं तथा इनको अपने अलग-अलग व्यवसाय, संरचना, जीवन-पद्धति आदि के आधार पर पहचाना जा सकता है। गांव के लोग साधारण, सामाजिक संबंधों से ओत-प्रोत तथा अधिकतर कृषि-कार्यों में संलग्न रहते हैं। उनके आचार-विचार तथा सांसारिक दृष्टिकोण नगर में रहने वाले लोगों से भिन्न होते हैं। इसके विपरीत, नगरों में रहने वाले लोग उद्योग तथा व्यापार में संलग्न रहते हैं। इनके आपसी सामाजिक संबंध औपचारिक होते हैं तथा इनका दृष्टिकोण अपेक्षतया भिन्न होता है।

विश्व में ग्रामीण जनसंख्या सबसे अधिक एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों में पाई जाती है जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में नगरीय जनसंख्या अधिक पाई जाती है। सामान्यतया औद्योगिक दृष्टि से विकसित राष्ट्रों में नगरीय जनसंख्या का अनुपात अधिक पाया जाता है जबकि कृषि प्रधान देशों में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात अधिक पाया जाता है। कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत किसी देश के आर्थिक विकास का सूचक होता है। इसका कारण है नगरों में उपलब्ध सुविधाएँ और रोजगार की संभावनाएँ। यही कारण है कि विकसित राष्ट्रों में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत अधिक होता है। विश्व में प्रतिवर्ष नगरीय जनसंख्या में लगभग 6 करोड़ की वृद्धि हो रही है।

विश्व में नगरीय जनसंख्या में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं-

  • नगरीय क्षेत्रों में स्त्रियों की संख्या अधिक होने का कारण ग्रामीण क्षेत्रों से स्त्रियों का नौकरियों हेतु शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवास करना है।
  • विकासशील देशों में कृषि संबंधी कार्यों में स्त्रियों की सहभागिता दर काफी ऊँची है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों का कृषि पर प्रभुत्व है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 2.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों तथा व्यावसायिक संरचना की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना से अभिप्राय विभिन्न आयु-वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। इसे एक विशेष प्रकार के रेखाचित्र द्वारा दर्शाया जाता है जिसकी आकृति पिरामिड से मिलती है। इस कारण इसे आयु-लिंग अथवा जनसंख्या पिरामिड कहा जाता है। विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं-
1. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं। सामान्यतया जन्म के समय प्रत्येक 104 से 107 नर बच्चों के अनुपात में 100 मादा बच्चे होते हैं।

2. स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर-विकसित देशों में जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है इसके विपरीत विकासशील देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में मृत्यु-दर अधिक होती है।

3. प्रवास-अधिकांश विकासशील देशों, विशेषतया एशियाई तथा अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में पुरुष ग्रामीण इलाकों से नगरों की ओर आजीविका की तलाश में प्रवास करते हैं। विकसित देशों में नगरीय लिंगानुपात स्त्रियों के पक्ष में अधिक होता है क्योंकि वहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के काम में पुरुषों की संख्या ज्यादा होती है स्त्रियाँ नगरों में नौकरी की तलाश में प्रवास करती है।

व्यावसायिक संरचना किसी क्षेत्र की विशिष्ट आर्थिक क्रियाओं में लगे जनसंख्या के अनुपात को व्यावसायिक संरचना कहते हैं। व्यावसायिक संरचना को चार मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

  1. प्राथमिक व्यवसाय इन व्यवसायों में आखेट, मत्स्यपालन, फल संग्रहण, कृषि संग्रहण, कृषि तथा वानिकी इत्यादि आते हैं।
  2. द्वितीयक व्यवसाय-इन व्यवसायों में विनिर्माण उद्योग तथा शक्ति उत्पादन इत्यादि आते हैं।
  3. तृतीयक व्यवसाय-इन व्यवसायों के अंतर्गत परिवहन, संचार, व्यापार, सेवाएँ आदि शामिल किए जाते हैं।
  4. चतुर्थक व्यवसाय-इनके अंतर्गत चिंतन, शोध योजना तथा विचारों के विकास से जुड़े अत्याधिक बौद्धिकतापूर्ण व्यवसायों को रखा जाता है।

जनसंख्या संघटन HBSE 12th Class Geography Notes

→ नगरीकरण (Urbanisation) : वे प्रक्रियाएँ जिनसे नगर की जनसंख्या बढ़ती है; जैसे-प्राकृतिक वृद्धि, प्रवास व निकटवर्ती गाँवों के शहर में सम्मिलित होने पर।

→ लिंगानुपात (Sex Ratio) : प्रति हज़ार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या (भारत के संदर्भ में)।

→ आयु संरचना (Age Composition) : विभिन्न आयु वर्गों में जनसंख्या का वर्गीकरण।

→ श्रमजीवी (कार्यरत) जनसंख्या (Working Population) : जनसंख्या में वे लोग जो किसी आर्थिक लाभ के कार्यों में संलग्न हैं।

→ सहभागिता दर (Participation Rate) : कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत अनुपात।

→ आश्रित जनसंख्या (Dependent Population) : देश की कुल जनसंख्या का वह भाग जिसमें 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चे तथा 60 वर्ष व इससे ऊपर की आयु के वृद्ध आते हैं।

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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. किस रोग में फुप्फुस (lungs) के वायु कोष्ठ (एलव्यूलाई) संक्रमि हो जाते हैं-
(अ) टाइफाइड
(ब) न्यूमोनिया
(स) जुकाम
(द) हैजा
उत्तर:
(ब) न्यूमोनिया

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

2. निम्न में से मलेरिया के लिए उत्तरदायी है-
(अ) प्लै. वाइबैम्स
(ब) फ्लै. मेलिरिआई
(स) प्लै. फैल्सीपेरम
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

3. मलेरिया परजीबी को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए निम्न में से किस परपोषी की जरूरत पड़ेगी?
(अ) मनुष्य
(ब) मादा एनाफिलिज
(स) प्रोटोओओआ
(द) (अ) व (ब) दोनों
उत्तर:
(अ) मनुष्य

4. विषाणु संक्रमित कोशिकाएँ निम्न में से किस प्रोटीन का स्रावण करती है-
(अ) इंटरफेरॉन
(ब) टाइकोफाइटॉन
(स) एपिड्रोर्मोफाइटान
(द) क्लोस्ट्रम
उत्तर:
(अ) इंटरफेरॉन

5. ऐलर्जी, मास्ट कोशिकाओं से किस रसायन के निकलने से होती है
(अ) सीरोटोनिन
(ब) मीरोटोनिन
(ख) टौरोटोनिन
(द) लीरोटोनिन
उत्तर:
(अ) सीरोटोनिन

6. निम्न में से द्वितीयक लसीकाभ अंग है-
(अ) प्लीहा
(ब) टांसिल
(स) परिशेषिका
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

7. संक्रमण होने एवं एड्स के लक्षप प्रकट होने के बीच अव्वधि होती है
(अ) 1 से 3 वर्ष
(ब) 5 से 10 वर्ष
(स) 12 से 15 वर्ष
(द) 3 माह से 9 माह तक
उत्तर:
(ब) 5 से 10 वर्ष

8. रक्त परिसंचरण की खोज करने वाले वैज्ञानिक हैं-
(अ) विलियम हार्चे
(ब) राबर्ट हुक
(स) श्लाईडेन एवं श्वान
(द) राबर्ट श्राउन
उत्तर:
(अ) विलियम हार्चे

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

9. खमीर से बनने वाला टीका है-
(अ) चेचक का टीका
(ब) यकृत शोथ-बी का टीका
(स) खसरे का टीका
(द) फ्लू का टीका
उत्तर:
(ब) यकृत शोथ-बी का टीका

10. तंबाकू में पाया जाने वाला रासायनिक पदार्थ है-
(अ) निकोटिन
(ब) कोकीन
(स) क्रैक
(द) बार्बीट्यूरेट
उत्तर:
(अ) निकोटिन

11. मलेरिया की रोकधाम के लिए मच्छर के लार्वा का भक्षण करने वाली मछली है-
(अ) बारबस
(ब) लेबियो
(स) गेम्बुसिया
(द) एक्सोसीट्स
उत्तर:
(स) गेम्बुसिया

12. ऐल्कोहॉल के चिरकारी उपयोग से सबसे ज्याद्रा शरीर के किस अंग की क्षति होती है-
(अ) आमाशय
(ब) मलाशाय
(स) फेफड़े
(द) यकृत
उत्तर:
(द) यकृत

13. हमारे शरीर में प्रतिरक्षा की पहली पंक्ति है-
(अ) फेफड़े
(ब) इ्वसन
(स) त्वचा
(द) मेक्रोफैजेज कोशिकायें
उत्तर:
(स) त्वचा

14. अर्बुद को नह करने में सहायक है-
(अ) Y – इन्टरफेरोन
(ब)) Z – इन्टरफेरोन
(स) X – इन्टरफेरोन
(द) Z – इन्टरफेरोन
उत्तर:
(अ) Y – इन्टरफेरोन

15. दुर्दम अबुर्द प्रयुरोद्भवी कोशिकाओं का पुंज कहलाता है-
(अ) कटिक्ट इसहिखिसन
(ब) नियोप्लास्टिक
(स) एलीसा एंजाइमा
(द) इम्यूनोजारवेट
उत्तर:
(ब) नियोप्लास्टिक

16. तम्बाकू के धुएँ में वपस्थित रासायनिक कैंसरजन किस अंग के कैसर के मुख्य कारण है-
(अ) यकृत
(ब) प्लीहा
(स) फेफड़े
(द) जननांग
उत्तर:
(स) फेफड़े

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

17. कैंसर उत्पन्न करने वाले विषाणु (वायरस) कहलाते हैं-
(अ) आंकोजोनिक वायरस
(ब) प्रोटो आंकोजेनिक बायरस
(स) मैटास्टेसिस वायरस
(द) कीटो आंकोजेनिक वायरस
उत्तर:
(अ) आंकोजोनिक वायरस

18. निम्न में से कौनसे बिषाणु फैक्ट्री (Factory) की तरह काम करते हैं-
(अ) पोलियो वाइरस
(ब) आर्थोमिम्सो वाइरस
(स) एच.आई. वाइरस
(द) पैरामिम्सो वाइरस
उत्तर:
(स) एच.आई. वाइरस

19. प्राकृतिक केनिबिनॉइड कैनेबिस सैटाइवा पौधे के किस भाग से प्राप्त किया जाता है-
(अ) जड़
(ब) पुष्पक्रम
(स) पुष्मासन
(द) तने
उत्तर:
(ब) पुष्पक्रम

20. मलेरिया रोगी में कंपकंपी का कारण है-
(अ) हीमोजॉइन
(ब) हिप्पनोटोक्सिन
(स) हीमेटिन
(द) मीरोजोइट्स
उत्तर:
(अ) हीमोजॉइन

21. साल्मोनेला टाइफा एक रोगजनक जीवाणु जिससे कौनसा ज्वर होता है-
(अ) न्यूमोनिया ज्वर
(ब) टाइफाइड ज्वर
(स) सामान्य जुकाम ज्वर
(द) मलेरिया ज्वर
उत्तर:
(ब) टाइफाइड ज्वर

22. असंक्रामक रोगों में मृत्यु का प्रमुख कारण है-
(अ) कैंसर
(ब) मलेरिया
(स) एड्स
(द) न्यूमोनिया
उत्तर:
(अ) कैंसर

23. हमारे रक्त में प्रोटीनों की सेना उत्पन्न करते हैं-
(अ) बी-लसीकाणु
(ब) टी-मारक कोशिका
(स) टी-निरोधी कोशिकाएँ
(द) टी-सहायक कोशि
उत्तर:
(अ) बी-लसीकाणु

24. किशोरावस्था माना जा सकता है-
(अ) 8 से 10 वर्ष
(ब) 12 से 18 वर्ष
(स) 19 से 22 वर्ष
(द) 23 से 25 वर्ष
उत्तर:
(ब) 12 से 18 वर्ष

25. ड्रग या एल्कोहल की नियमित मात्रा अचानक बंद कर वि पर किस सिन्द्रोम के रूप में व्यक्त होती है?
(अ) विद्ड्रावल सिन्ड्रोम
(ब) टर्नर सिन्ड्रोम
(स) क्लाइनफेल्टर सिन्ड्रोम
(द) डाउन सिन्ड्रोम
उत्तर:
(अ) विद्ड्रावल सिन्ड्रोम

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

26. ड्रगों की अत्यधिक मात्रा से होता है-
(अ) श्वसन पात (रेस्पाइरेटरी फेल्योर)
(ब) हृद्य पात (हार्ट फेल्योर)
(स) प्रमस्तिष्क रक्त स्राव (सरेब्रल हेमरेज)
(द) उपरोक सभी
उत्तर:
(द) उपरोक सभी

27. महिलाओं में उपचयी स्टेराइडों के सेवन से होता है-
(अ) मैस्कुलिनाइजेसन (यानी पुरुष जैसे लक्षण)
(ब) विनिवर्तन संलक्षण
(स) सुदम अर्बुद
(द) संस्पर्श सदमन
उत्तर:
(अ) मैस्कुलिनाइजेसन (यानी पुरुष जैसे लक्षण)

28. अमापन एलीसा किस रोग से सम्बन्धित है-
(अ) चेचक
(ब) कैंसर
(स) टायफाइड
(द) एडस
उत्तर:
(द) एडस

29. कौनसा अर्बुद सामान्यतया अपने मूल स्थान तक सीमित रहता है-
(अ) सुदम अर्बुद
(ब) दुर्दम अर्बुद
(स) अदुर्दम अर्बुद
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) सुदम अर्बुद

30. निम्न में से प्राथमिक लसिकाय अंग है-
(अ) आमाशय
(ब) यकृत
(स) अस्थिमज्ञा
(द) फुफ्फुस
उत्तर:
(स) अस्थिमज्ञा

31. प्लाजमोडियम की कौनसी जाति मनुष्य के लिए मृत्युजनक है-
(अ) प्लाजमोडियम फैल्सीपेरम
(ब) प्लाजमोडियम मैलेरी
(स) प्लाजमोडियम ऑवेल
(द) प्लाजमोडियम वाइवेक्स
उत्तर:
(अ) प्लाजमोडियम फैल्सीपेरम

32. मैरी मैलान पेशे से क्या थी?
(अ) मोची
(ब) धोबी
(स) रसोईया
(द) स्वीपर
उत्तर:
(स) रसोईया

33. मलेरिया का वाहक है-
(अ) मादा एनोफिलीज
(ब) नर क्यूलेक्स
(स) मादा क्यूलेक्स
(द) नर एनोफिलीज
उत्तर:
(अ) मादा एनोफिलीज

34. प्राकृतिक कैनिबिनाइड कैनेबिस सैटाइवा पौधे के किस भाग से प्रास किया जाता है-
(अ) जड़
(ब) पुष्प क्रम
(स) पुष्पाषन
(द) तना
उत्तर:
(ब) पुष्प क्रम

35. हमारे शरीर में एण्टीबॉडीज (प्रतिपिंड) किसके सम्मिश्र होते हैं?
(अ) लाइपोप्रोटीन्स
(ब) स्टेरायड्स
(स) प्रोस्टेग्लेंडिन्स
(द) ग्लोइकोप्रोटीन्स
उत्तर:
(ब) स्टेरायड्स

36. निम्नलिखित में से कौन मनुष्य के शरीर में सूक्ष्मजीवी के प्रवेश के विरुद्ध कार्यिकीय अवरोध (Physiological barrier) का कार्य करता है?
(अ) आँसू
(ब) मोनोसाइट्स
(स) त्वचा
(द) मूत्र जनन मार्ग की उपकला
उत्तर:
(अ) आँसू

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
फाइलेरिएसिस से पीड़ित व्यक्ति के पैरों में सूजन किसके द्वारा होती है ?
उत्तर:
पैरों की लिम्फेटिक नलिकाओं में फाइलेरिया कृमि, वुचेरिया बैक्राफ्टी के द्वारा फाइलेरिया रोग होता है ।

प्रश्न 2.
मैरी मैलॉन का उपनाम क्या है?
उत्तर:
मैरी मैलॉन का उपनाम टाइफाइड मैरी है।

प्रश्न 3.
मनुष्य के शरीर में प्रवेश करने के पश्चात् (HIV) जिन दो कोशिकाओं में गुणित होता है, उनके नाम लिखिए ।
उत्तर:
मैक्रोफेजेज तथा सहायक T – लिम्फोसाइट्स ।

प्रश्न 4.
न्यूमोनिया रोग में शरीर के कौनसे अंग संक्रमित होते हैं ?
उत्तर:
न्यूमोनिया रोग में फुफ्फुस (Lungs) के वायुकोष्ठ (Alveoli) संक्रमित होते हैं।

प्रश्न 5
तीव्र ज्वर, भूख की कमी, पेट में दर्द तथा कब्ज से पीड़ित लक्षणों के आधार पर चिकित्सक किस प्रकार पुष्टि करेगा कि व्यक्ति को टायफायड है, अमीबिएसिस नहीं ।
उत्तर:
टायफाइड रोग की पुष्टि विडाल परीक्षण के द्वारा की जाती है।

प्रश्न 6.
कुछ ऐलर्जनों (प्रत्यूर्जकों) से छींकों का आना तथा हाँफना शुरू हो जाता है। शरीर में इस प्रकार की अनुक्रिया न होना किससे होता है ?
उत्तर:
शरीर में इस प्रकार की अनुक्रिया ऐलर्जनों के प्रति एलर्जी (Allergy) के कारण होती है।

प्रश्न 7
संक्रामक रोग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से संचारित होते हैं संक्रामक रोग कहलाते हैं।

प्रश्न 8.
एल. एस. डी. का पूरा नाम लिखिए ।
उत्तर:
लाइसार्जिक अम्ल डाइएथिल एमाइड्स।

प्रश्न 9.
कैंसर उत्पन्न करने वाले विषाणु क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
कैंसर उत्पन्न करने वाले विषाणु अर्बुदीय विषाणु ( आंकोजेनिक वाइरस) कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
विशिष्ट इम्यूनिटी को प्राप्त करने के लिए आवश्यक दो मुख्य कोशिकाओं के समूहों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • T – लिम्फोसाइट्स
  • B लिम्फोसाइट्स |

प्रश्न 11.
हेरोइन क्या है? इसका शरीर पर पड़ने वाले एक प्रभाव को बताइए ।
उत्तर:
हेरोइन एक तीव्र स्वापक (narocotic) नशा है। इससे शरीर में आलस्य व उदासीनता आती है ।

प्रश्न 12.
लसीकाभ अंग किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे अंग जिनमें लसीकाणुओं की उत्पत्ति, परिपक्वन एवं प्रचुरोद्भवन होता है लसीकाभ अंग कहते हैं ।

प्रश्न 13.
अस्थिमज्जा और थामइस टी- लसीकाणुओं के परिवर्धन एवं परिपक्वन के लिए क्या मुहैया कराते हैं?
उत्तर:
अस्थिमज्जा और थाइमस टी- लसीकाणुओं के परिवर्धन एवं परिपक्वन के लिए सूक्ष्म-पर्यावरण मुहैया कराते हैं।

प्रश्न 14.
कोकिन किस पादप से प्राप्त की जाती है एवं यह पौधा मूल रूप से किस देश का है?
उत्तर:
कोकिन एरिप्रोजाइलम कोका से प्राप्त की जाती है। यह पौधा मूल रूप से दक्षिण अमेरिका का है।

प्रश्न 15.
एक चिकित्सक के द्वारा यह पुष्टि की गयी कि किसी व्यक्ति के शरीर का प्रतिरोधी तंत्र (Immune System) अवरोधित हो गया है। व्यक्ति को कौनसा रोग है तथा इसका कारक क्या है?
उत्तर:
व्यक्ति को एड्स रोग है। इसका कारक HIV (Human Immuno Deficiency Virus) है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

प्रश्न 16.
वर्तमान में देश के विभिन्न भागों में चिकनगुनिया रोग की पुष्टि हुई है। इस रोग के लिए उत्तरदायी (बैक्टर) वाहक का नाम लिखिए।
उत्तर:
चिकनगुनिया रोग के लिए उत्तरदायी (बैक्टर) वाहक का नाम एडीज मच्छर है।

प्रश्न 17.
बचपन और प्रौढ़ता को जोड़ने वाले पुल का नाम लिखिए।
उत्तर:
बचपन और प्रौढ़ता को जोड़ने वाले पुल का नाम किशोरावस्था है।

प्रश्न 18.
प्रतिरक्षा कितने प्रकार की होती है ? नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है, जिन्हें क्रमशः सहज प्रतिरक्षा एवं उपार्जित प्रतिरक्षा कहते हैं।

प्रश्न 19.
वयस्क कृमि (वूचेरिया) कहाँ पाया जाता है?
उत्तर:
वयस्क कृमि लिम्फ ग्रंथियां व लिम्फ मार्ग में पाया जाता है।

प्रश्न 20.
अर्बुद कितने प्रकार के होते हैं? नाम लिखिए।
उत्तर:
अर्बुद दो प्रकार के होते हैं-

  • सुदम (बिनाइन)
  • दुर्दम (मैलिग्नेंट)।

प्रश्न 21.
विषाणुओं का कौनसा समूह है जो मानव में सबसे ज्यादा संक्रामक रोग सामान्य जुकाम (Common Cold) फैलाता है ?
उत्तर:
नासा विषाणुओं का समूह (Rhinoviruses – राइनोवाइरस) जो मानव में सबसे ज्यादा संक्रामक रोग सामान्य जुकाम फैलाता है।

प्रश्न 22.
रिंगवर्म ( दाद) के लिए कौनसा कवक उत्तरदायी है? केवल एक नाम लिखिए।
उत्तर:
रिंगवर्म (दाद) के लिए माइक्रोस्पोरम नामक कवक उत्तरदायी है।

प्रश्न 23.
मलेरिया परजीवी को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए कितने परपोषियों की आवश्यकता पड़ती है? नाम लिखिए।
उत्तर:
मलेरिया परजीवी को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दो परपोषियों की आवश्यकता पड़ती है-

  • मनुष्य
  • मच्छर (मादा एनोफिलीज) ।

प्रश्न 24.
चोट लगने के स्थान पर लाल रंग हो जाता है, इसका कारण बताइये ।
उत्तर:
चोट लगने के स्थान पर लाल रंग सक्रिय प्रतिरक्षा के कारण होता है।

प्रश्न 25.
भांग पीने वाला व्यक्ति हँसता है तो हँसता रहता है और रोता है तो रोता जाता है, क्यों?
उत्तर:
भांग सोचने व समझने की क्षमता को समाप्त कर मस्तिष्क को अनियंत्रित कर देती है जिसके कारण व्यक्ति इस प्रकार का व्यवहार करता है।

प्रश्न 26.
एड्स रोग से शरीर को कौनसी प्रमुख हानि होती है?
उत्तर:
एड्स रोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता नष्ट हो जाती है।

प्रश्न 27.
गुटका सेवन करने वाले व्यक्ति के जबड़े की मांसपेशियाँ कठोर हो जाने के कारण उसका जबड़ा ठीक से नहीं खुलता है। संभावित रोग का नाम बताइये।
उत्तर:
सबम्यूकस फाइब्रोसिस रोग होता है।

प्रश्न 28.
डी पी टी टीके का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
डिफ्थीरिया पर्टुसिस टिटेनस ।

प्रश्न 29.
कैंसर में दी जाने वाली दवाओं व उपचार के अनुषंगी प्रभाव (Side effect) बताइये ।
उत्तर:
बालों का झड़ना एवं एनिमिया ।

प्रश्न 30.
NAC का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ।

प्रश्न 31
मरीजुआना किस पौधे का सत्व (Extract) है? नाम बताइये ।
उत्तर:
भांग ( केनाविस सेटाइवा ) ।

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प्रश्न 32.
अफीम, मार्फीन, हेरोइन, पेथीडीन तथा मेथेडोन को सामूहिक रूप से क्या कहते हैं?
उत्तर:
ओपिमेट नारकोटिक्स ।

प्रश्न 33.
दो तकनीकी विधियों के नाम लिखिए जिनके द्वारा जीवाणु या विषाणु संक्रमित रोग के लक्षण शरीर पर प्रकट होने से पहले चिन्हित कर लिये जाते हैं।
उत्तर:

  1. रिकॉम्बिनेन्ट डी एन ए तकनीकी
  2. एन्जाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बन्ट एसे ( ELISA ) ।

प्रश्न 34.
मनुष्य में मैलिग्नेंट मलेरिया उत्पन्न करने वाले पैथोजन का वैज्ञानिक नाम लिखिए ।
उत्तर:
मनुष्य में मैलिग्नेंट मलेरिया उत्पन्न करने वाले पैथोजन का वैज्ञानिक नाम प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम |

प्रश्न 35.
AIDS के दो लक्षण बताइए ।
उत्तर:

  • बार-बार बुखार आना
  • वजन में कमी आना।

प्रश्न 36.
निकोटिन के क्या प्रभाव हैं?
उत्तर:
निकोटिन के निम्न प्रभाव हैं –

  1. रुधिर वाहिकाओं के संकीर्णन को बढ़ाता है।
  2. धड़कन, रक्तदाब की दर को बढ़ाता है।
  3. पेशियों को विश्रान्त करता है।

प्रश्न 37.
दो लैंगिक संचारित रोगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • एड्स
  • सिफिलिस ।

प्रश्न 38.
मेटास्टेसिस से क्या समझते हैं?
उत्तर:
अर्बुद की विभाजनशील कोशिकाएँ शरीर के किसी स्थान विशेष में सीमित न रहकर या लसिका में मिलकर शरीर के अन्य भागों में पहुँच जाती है तथा वहां अर्बुद उत्पन्न करती है। ऐसे अर्बुद को दुर्दम अर्बुद कहते हैं। इसको मेटास्टेसिस कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
स्वास्थ्य को किस प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है? स्वास्थ्य किन बातों से प्रभावित होता है? लिखिए।
उत्तर:
स्वास्थ्य का अर्थ है मात्र रोग की अनुपस्थिति अथवा शारीरिक स्वस्थता नहीं है। इसे पूर्णरूपेण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

स्वास्थ्य निम्न बातों से प्रभावित होता है –

  1. आनुवंशिक विकार ( Genetic Disorders) – वे अपूर्णताएं जिनको लेकर बच्चा जन्मता है और वे अपूर्णताएँ जो बच्चे को जन्म से ही माता-पिता से वंशागत रूप से मिलती हैं ।
  2. संक्रमण और
  3. हमारी जीवन शैली जिसमें जो खाना हम खाते हैं और जो पानी हम पीते हैं, जो विश्राम हम शरीर को देते हैं और जो व्यायाम हम करते हैं, जो स्वभाव हमारे भीतर है और जिनकी हम में कमी है आदि शामिल हैं।

प्रश्न 2.
निम्न को परिभाषित कीजिए-
(i) प्रतिरक्षा
(ii) एन्टीजन
(iii) एन्टीबॉडी
(iv) टॉक्साइड
(v) प्रतिरक्षा तंत्र |
उत्तर:
(i) प्रतिरक्षा (Immunity ) – शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रतिरक्षा कहलाती है।

(ii) एन्टीजन (Antigen ) – शरीर में प्रवेश करने वाले जीवाणुओं, विषाणुओं एवं विषैले पदार्थों को प्रतिजन (Antigen) कहते हैं। इनको सीधे अथवा विशेष प्रतिरक्षी पदार्थों, एन्टीबॉडीज के द्वारा नष्ट किया जाता है। एन्टीजन, एन्टीबॉडीज के उत्पादन को उद्दीप्त प्रेरित करने वाले रसायन एन्टीजन कहलाते हैं।

(iii) एन्टीबॉडी (Antibody) – शरीर में एन्टीजन के प्रवेश होने पर इस एन्टीजन के विरुद्ध शरीर की B लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा स्रावित ग्लाइको प्रोटीन पदार्थ एन्टीबॉडी (Antibody) कहलाते हैं।

(iv) टॉक्साइड (Toxoid) – यह एक बैक्टीरियल बाह्य विष होता है जो एक विशिष्ट प्रक्रिया द्वारा अविष (Detoxication) में परिवर्तित किया जाता है तथा जो इम्यूनाइजेशन में रोगों के विरुद्ध सावधानीपूर्वक कार्य करते हैं।

(v) प्रतिरक्षा तंत्र ( Immune system) – शरीर का वह तंत्र जो शरीर को बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है, प्रतिरक्षा तंत्र कहलाता है ।

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प्रश्न 3.
इन्टरफेरॉन्स तथा प्रतिरक्षी में कोई चार अंतर लिखिए।
उत्तर:
इन्टरफेरॉन्स तथा प्रतिरक्षी में अन्तर (Difference between Interferons and Antibodies)

इन्टरफेरॉन्स (Interferons)प्रतिरक्षी (Antibodies)
1. ये तीव्र प्रतिक्रिया दर्शाते हैं।जबकि ये धीमी क्रिया वाले होते हैं।
2. ये अस्थाई सुरक्षा प्रदान करते हैं।ये दीर्घकालीन सुरक्षा प्रदान करते हैं।
3. ये शरीर का द्वितीय रक्षा स्तर बनाते हैं।ये शरीर का तीसरा स्तर बनाते हैं।
4. इन्टरफेरान्स कोशिकाओं के अंदर क्रिया करते हैं।जबकि प्रतिरक्षी कोशिका के बाहर क्रिया करते हैं।
5. ये सूक्ष्म जीव से संक्रमित किसी भी कोशिका से स्रावित होते हैं।जबकि ये केवल प्लाज्मा (Plasma) की B-कोशिकाओं से उत्पन्न होते हैं।
6. संक्रमित कोशिका से समीपवर्ती स्वस्थ कोशिका में प्रवेश कर उन्हें संक्रमणरोधी बनाते हैं।प्रतिजन (Antigen) से लड़ने के लिए रक्त (Blood) लसीका (Lymph) में भ्रमण करते हैं।

प्रश्न 4.
मानव में सबसे ज्यादा कौनसा संक्रामक रोग फैलता है ? इस रोग का संक्रमण एवं लक्षण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव में सबसे ज्यादा संक्रामक रोग सामान्य जुकाम (Common Cold) फैलता है। इस रोग का रोगकारक राइनोवायरस (Rhinoviruses) है। संक्रमण-ये नाक और श्वसन पथ को संक्रमित करते हैं। संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींकों से निकले बिंदुक (Droplets) जब स्वस्थ व्यक्ति द्वारा श्वास लेने पर अंदर जाते हैं अथवा पेन, किताबों, प्यालों, दरवाजे के हत्थे, कम्प्यूटरों के की-बोर्ड (Key Board) या माउस आदि जैसी संदूषित हुई वस्तुओं के संपर्क में आता है, तो उसे भी संक्रमण हो जाता है। रोग के लक्षण – नासीय संकुलता (Nasal congestion) और आस्राव (Discharge), कंठदाह ( Sore throat), स्वरुक्षता अर्थात् फटी आवाज, खाँसी (Cough), सिर दर्द, थकावट आदि । ये लक्षण प्रायः 3-7 दिन तक रहते हैं।

प्रश्न 5.
कैंसर किसे कहते हैं? अर्बुद के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कैंसर (Cancer) – कोशिकाओं में होने वाला अनियंत्रित विभाजन जिसके कारण गाँठ या ट्यूमर का निर्माण होता है, कोशिकाओं का यह समूह कैंसर कहलाता है।
अर्बुद (Tumour) दो प्रकार के होते हैं –
(1) सुदम अर्बुद (Benign Tumour) – ये हानिकारक नहीं होते हैं एवं स्थानीय होते हैं अर्थात् शरीर के दूसरे भागों या आस-पास की कोशिकाओं में नहीं फैलते हैं। इस कारण इसे नॉन मेटास्टेसिस (Non Metasis) कहते हैं। स्थान विशेष पर अर्बुद बनती है जो आकार में धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इसे शल्य क्रिया द्वारा शरीर से अलग करने पर रोग से मुक्ति मिल जाती है।

(2) दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumour) – इसमें विभाजनशील कोशिकाएँ शरीर के किसी स्थान विशेष में सीमित न रहकर या लसिका में मिलकर शरीर के अन्य भागों में पहुँच जाती हैं तथा वहाँ अर्बुद उत्पन्न करती हैं। ऐसे अर्बुद को दुर्दम अर्बुद कहते हैं। इसको मेटास्टेटिस (Metasis) कहते हैं। ऐसे अर्बुद खतरनाक होते हैं जिसके कारण मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।

प्रश्न 6.
ऐल्कोहॉल क्या है? इसके सेवन से होने वाले प्रभाव लिखिये ।
उत्तर:
ऐल्कोहॉल (Alcohol) – यह मदिरा का मुख्य संघटक है. जो कि प्रतिरोधी एवं विलायक के रूप में उपयोगी है।
ऐल्कोहॉल के प्रभाव –

  1. इसके सेवन से विकृत सोच, उत्तेजनशीलता, उच्चारण अस्पष्टता एवं निद्राजनक प्रभाव उत्पन्न होते हैं।
  2. ऐल्कोहॉल के सेवन से सेरीबेलम भाग प्रभावित होता है। इससे पेशीय समन्वय नहीं हो पाता है। इससे व्यक्ति लड़खड़ाने लगता है।
  3. याददाशत में कमी आ जाती है।
  4. ऐल्कोहॉल के सेवन से आमाशय की भित्ति में सूजन आ जाती है।
  5. रुधिर में ऐल्कोहॉल की अत्यधिक मात्रा यकृत में वसा के संश्लेषण को बढ़ा देती है और यह वसा, यकृत कोशिकाओं तथा पित्त नली में जमा होने लगती है। इसे फेटी लिवर सिन्ड्रोम कहते हैं। फेटी लिवर तथा लिवर सिरोसिस हो जाता है।

प्रश्न 7.
निम्न रोगों के रोगकारक, संक्रमण एवं लक्षणों का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
(i) अमीबा
(ii) हैजा
(iii) मलेरिया ।
उत्तर:

रोग का नामकारकसंक्रमणलक्षण
1. अमीबता (Amoebiasis)एन्ट अमीबा (हिस्टोलिटिका)दूषित जल और भोजन द्वारा, बिना धुली सक्जियों द्वारा एवं मक्खियों द्वाराउद्रीय दर्द, प्रतिदिन 5 से 6 रक्त युक्त एवं रक्त श्लेष्मल युक्त मल का आना।
2. हैजा (Cholera)जीवाणु (बिब्रियो कोलेरी)दूषित भोजन व जल रोगी के मल में उपस्थित रोगाणुओं सेपतले दस्त, पेशी ऐंठन एवं वमन निर्जलीकरण।
3. मलेरिया (Malaria)मलेरिया परजीवी (प्लाजमोडियम)मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने परएक-दो दिन छोड़-छोड़कर तेज बुखार का आना, शरीर में ठण्ड लगकर कंपकंपी आना, सिर-दर्द प्लीहा एवं यकृत का बढ़ना।

प्रश्न 8.
प्रतिजन व प्रतिरक्षी में विभेद कीजिए ।
उत्तर:
प्रतिजन व प्रतिपक्षी में विभेद (Difference between Antigen and Antibody)

प्रतिजन (Antigen)प्रतिरक्षी (Antibody)
1. शरीर में प्रवेश करने वाले जीवाणुओं, विषाणुओं एवं विषैले पदार्थों को प्रतिजन (Antigen) कहते हैं।शरीर में एन्टीजन के प्रवेश होने पर एन्टीजन के विरुद्ध शरीर की B – लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा स्रावित ग्लाइको प्रोटीन पदार्थ प्रतिरक्षी (Antibody) कहलाते हैं।
2. ये रोग उत्पन्न करते हैं।ये रोग उत्पन्न नहीं करते बल्कि रोगाणुओं को नष्ट करते हैं।
3. ये मेक्रोफेजेज से संयुक्त होकर T- सहायक कोशिका को सक्रिय कर प्रतिरक्षा उत्पन्न करते हैं।ये सीधे ही प्रतिजन पर आक्रमण कर समिश्र बनाते हैं और प्रतिजन को नष्ट कर देते हैं।
4. एन्टीजन बाहर से प्रवेश करते हैं।जबकि प्रतिरक्षी शरीर के अंदर बनते हैं।
5. ये सूक्ष्म जीवों के शरीर की सतह पर या स्वतंत्र अवस्था में पाये जाते हैं।ये रक्त प्लाज्मा कोशिका की सतह पर या शरीर के ऊतक द्रव्य में पाये जाते हैं।
6. ये विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे-जीवाणु, विषाणु प्रोटोजोअल, परागकण, दवाइयां, विष आदि।जबकि ये पाँच प्रकार के होते हैं-
IgM, IgG, IgA, IgE, IgD.

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प्रश्न 9.
तंबाकू का प्रयोग किस रूप में किया जाता है? इससे होने वाले दुष्प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
धूम्रपान से तीव्र ड्रगों के सेवन का रास्ता खुल जाता है। इससे क्या तात्पर्य है? समझाइए ।
उत्तर:
तंबाकू का प्रयोग मनुष्य चार सौ वर्षों से भी अधिक समय से करता आ रहा है। तंबाकू (धूमपान ) पीया जाता है, चबाया जाता है या सूंघा जाता है। तंबाकू में बहुत से रासायनिक पदार्थ होते हैं जिनमें एक एल्केलाइड भी शामिल है, जिसे निकोटिन (Nicotine) कहते हैं। निकोटीन अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) को उद्दीपित करता है जिसके फलस्वरूप अधिवृक्क ग्रंथि से एड्रिनलीन (Adrenaline) और नॉर एड्रिनलीन (Nor Adrenaline) का स्रावण रक्त परिसंचरण (Blood circulation) किया जाता है।

ये दोनों हार्मोन रक्तचाप (Blood pressure) एवं हृदय के स्पंदन ( Heart beat ) की दर को बढ़ाते हैं। धूम्रपान फुफ्फुस, मूत्राशय और गले के कैंसर, श्वसनी शोध (Bronchitis), वातस्फीति (Emphysema), हृदय रोग, जठर व्रण (Gastric Ulcer) से संबद्ध है। धूम्रपान से रक्त में कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और हीमआबद्ध ( Heambound ) ऑक्सीजन की सांद्रता घट जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

प्रश्न 10.
B- कोशिकाओं तथा T – कोशिकाओं में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
B- कोशिकाओं तथा T- कोशिकाओं में अंतर (Difference between B-cells and T-cells)

B-कोशिकाएँ (B-cells)T-कोशिकाएँ (T-cells)
1. इन कोशिकाओं का निर्माण प्लाज्मा कोशिकाओं के विभाजन के फलस्वरूप होता है।जबकि इनका लिम्फोलाइट, मारक, सहायक तथा निरोधक कोशिकाओं के विभाजन से होता है।
2. प्लाज्मा कोशिकाओं में प्रतिरक्षा दमन की क्षमता नहीं होती है।निरोधक कोशिकाओं में दमन की क्षमता होती है।
3. प्लाज्मा कोशिकाएँ संक्रमण स्थल पर नहीं जाती हैं।जबकि लिम्फोब्लास्ट संक्रमण स्थल पर पहुँच जाती है।
4. ये कोशिकाएँ तरल या संचारी माध्यित प्रतिरक्षा तंत्र बनाती हैं।जबकि ये कोशिकाएं माध्यित प्रतिरक्षा तंत्र बनाती हैं।
5. ये कोशिकाएँ प्रमुख रूप से पेयर्ज पेचेज, फीटल यकृत एवं टॉन्सिल में ही सीमित रहती हैं।ये थाइमस ग्रंथि में विभेदित होती हैं।
6. प्लाज्मा कोशिकाएँ केंसर (Cancer) कोशिकाओं से नहीं लड़तीं।जबकि मारक कोशिकाएँ केंसर कोशिकाओं से लड़ती हैं।
7. प्लाज्मा कोशिकाएँ प्रतिरक्षी (Antibody) का स्रावण करती हैं जो रुधिर व लसीका द्वारा संक्रमण स्थल पर पहुँचकर एंटीजन से लड़ती हैं।मारक कोशिका संक्रमण स्थल पर पहुँचकर सूक्ष्म जीवों की कोशिका को भेदकर उन्हें नष्ट करती हैं।

प्रश्न 11.
सामुदायिक स्वास्थ्य किसे कहते हैं? सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा किए जाने वाले किन्हीं सात महत्वपूर्ण कार्यों को लिखिए।
उत्तर:
सामुदायिक स्वास्थ्य सरकार अथवा स्थानीय संगठनों द्वारा लोगों का स्वास्थ्य बनाए रखने की गतिविधियाँ, सामुदायिक स्वास्थ्य कहलाती हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा किए जाने वाले सात महत्त्वपूर्ण कार्य निम्न हैं –

  1. स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करना ।
  2. खाद्य पदार्थों का मानक बनाए रखना, खाद्य भंडारों, मांस व दुग्ध केन्द्रों का नियमित निरीक्षण करना ।
  3. स्वच्छ व रोगाणुरहित पेयजल उपलब्ध कराना ।
  4. बस्तियों के कचरे का निकास व उचित स्वच्छता का प्रबंधन ।
  5. हानिकारक कीटों के विनाश के लिए कीट रसायनों का छिड़काव करना ।
  6. किसी बीमारी के फैलने का खतरा उत्पन्न होने पर विभिन्न प्रतिरक्षाकरण कार्यक्रमों तथा कई अन्य स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को चलाना ।
  7. मच्छरों का प्रजनन रोकने के लिए खुली नालियों का ढकाव व रुके हुए पानी की सतह पर कैरोसिन तेल का डालना ।

प्रश्न 12.
टाइफॉइड ज्वर के रोगजनक का नाम बताइए। इस रोग का संचरण एवं लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
टाइफॉइड ज्वर ( Typhoid fever) का रोगजनक साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) नामक जीवाणु है। रोग का संचरण यह रोगजनक आमतौर से संदूषित ( Contaminated) भोजन और पानी द्वारा छोटी आंत में प्रवेश कर जाता है और वहाँ से रुधिर द्वारा शरीर के अंगों में पहुँच जाता है। आयुर्विज्ञान में एक चिरप्रतिष्ठित मामला मैरी मैलान (उपनाम टाइफाइड मैरी) का है। वह पेशे से रसोइया थी जो खाना वह बनाती थी, उसके द्वारा वर्षों तक टाइफॉइड वाहक ( Typhoid Carrier) के रूप में टाइफॉइड फैलाती रही।

रोग के लक्षण –

  1. रोगी को लगातार उच्च ज्वर (39° से 40° सेंटी.) आना
  2. कमजोरी आना
  3. आमाशय में पीड़ा
  4. कब्ज
  5. सिर दर्द
  6. भूख न लगना ।
    गंभीर मामलों में आंत्र में छेद और मृत्यु भी हो सकती है।

प्रश्न 13.
वेस्टर्न ब्लाट परीक्षण से किस रोग का निदान किया जाता है? इस रोग के रोगजनक का वैज्ञानिक नाम व चार लक्षण लिखिए।
उत्तर:
वेस्टर्न ब्लाट परीक्षण से एड्स रोग का निदान किया जाता है। इस रोग के रोगजनक का वैज्ञानिक नाम ह्यूमन इम्यूनो- डेफीशियन्सी वायरस (HIV) है।
इस रोग के चार लक्षण निम्न हैं-

  1. रोगी को लगातार बुखार आना।
  2. लंबे समय तक लगातार खाँसी होना।
  3. शरीर का भार कम होना।
  4. लसीका गाँठों में सूजन आना ।

प्रश्न 14.
सहज प्रतिरक्षा किसे कहते हैं? इसमें पाये जाने वाले रोधों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सहज प्रतिरक्षा (इनेट इम्यूनिटी) एक प्रकार की अविशिष्ट रक्षा है जो जन्म के समय मौजूद होती है। यह प्रतिरक्षा हमारे शरीर में बाह्य कारकों के प्रवेश के सामने विभिन्न प्रकार के रोध खड़ा करने से हासिल होती है। सहज प्रतिरक्षा में चार प्रकार के रोध होते हैं।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

जैसे –
(1) कार्यिकीय रोध (फीजियोलॉजिकल बैरियर) – आमाशय अम्ल, मुँह में लार, आँखों में आँसू, ये सभी रोगाणीय वृद्धि को रोकते हैं।

(2) शारीरिक रोध (फिजिकल बैरियर) – हमारे शरीर पर त्वचा मुख्य रोध है जो सूक्ष्मजीवों के प्रवेश को रोकता है। श्वसन, जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल) और जननमूत्र पथ को आस्तरित करने वाली एपिथीलियम का श्लेष्मा आलेप (म्यूकस कोटिंग) भी शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं को रोकने में सहायता करता है।

(3) कोशिकीय रोध (सेल्युलर बैरियर) – हमारे शरीर के रक्त में बहुरूप केंद्रक श्वेताणु उदासीनरंजी (पी.एम.एन.एल., न्यूट्रोफिल्स) जैसे कुछ प्रकार के श्वेताणु और एककेंद्रकाणु (मोनासाइट्स) तथा प्राकृतिक, मारक लिंफोसाइट्स के प्रकार एवं ऊतकों में वृहत् भक्षकाणु (मैक्रोफेजेज) रोगाणुओं का भक्षण करते और नष्ट करते हैं।

(4) साइटोकाइन रोध-विषाणु संक्रमित कोशिकाएँ इंटरफेरॉन नामक प्रोटीनों का स्रावण करती हैं जो असंक्रमित कोशिकाओं को और आगे विषाणु संक्रमण से बचाती हैं। लिखिए ।

प्रश्न 15.
एलर्जन से आप क्या समझते हैं? इसके दो उदाहरण ( माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2007)
उत्तर:
एलर्जन-जिन पदार्थों के प्रति एलर्जी होती है, उनको एलर्जन कहते हैं। जैसे- कार्बन कण, पराग कण, धूल कण आदि ।
कभी-कभी एलर्जन पदार्थ अत्यन्त तीव्र, उग्र व घातक प्रकार की प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। ऐसे एलर्जन को तीव्रग्राहिता कहते हैं। उदाहरण- पेनिसिलीन, इन्सुलिन तथा कुछ भोज्य पदार्थ, जैसे-मछली, अण्डे आदि ।

प्रश्न 16.
प्लाज्मोडियम की विभिन्न जातियों के नाम लिखिए। इनमें सबसे घातक जाति कौनसी है और क्यों?
उत्तर:
प्लाज्मोडियम (Plasmodium) की निम्न जातियाँ हैं-
(1) प्लाज्मोडियम वाइवैक्स (Plasmodium vivax)
(2) प्लाज्मोडियम मेलिरिआई (Plasmodium malariae)
(3) प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) मलेरिया परजीवी अथवा प्लाज्मोडियम की सबसे घातक जाति प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) है। इसके द्वारा उत्पन्न मलेरिया ज्वर प्रत्येक 36 और 46 घंटे बाद आता है। इस प्रकार के मलेरिया से मनुष्य की मृत्यु दर अधिक होती है। इसलिए यह सबसे घातक मलेरिया है। इस मलेरिया से संक्रमित RBC रुधिर कोशिकाओं को अवरुद्ध कर देती है जिससे रक्त प्रवाह रुक जाता है। और रोगी की मृत्यु हो जाती है ।

प्रश्न 17.
प्लाज्मोडियम को परपोषी की आवश्यकता क्यों होती है? उत्तर – प्लाज्मोडियम को अपना जीवन चक्र पूरा करने हेतु परपोषी की आवश्यकता होती है। प्लाज्मोडियम के दो परपोषी (Host) हैं-

  1. मनुष्य
  2. मादा एनोफिलीज ।

मनुष्य प्राथमिक ( Primary ) एवं मादा एनोफिलीज द्वितीयक परपोषी (Secondary Host) है। यदि दोनों में से एक भी परपोषी नहीं मिलता है तो इसका जीवन समाप्त हो जायेगा । प्लाज्मोडियम एक अन्त: परजीवी (Endoparasite) है जो भोजन के लिए इन परपोषियों पर निर्भर है।

प्रश्न 18.
अच्छा स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए क्या आवश्यक है? अच्छे स्वास्थ्य के कोई चार लाभ लिखिए।
उत्तर:
अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए निम्न आवश्यक हैं-

  1. संतुलित आहार
  2. व्यक्तिगत स्वच्छता
  3. नियमित व्यायाम
  4. संक्रामक रोगों के प्रति टीकाकरण
  5. अपशिष्टों का समुचित निपटान
  6. नियमित रूप से योग का अभ्यास
  7. रोग एवं शरीर के विभिन्न प्रकार्यों पर उनके प्रभाव के बारे में जागरूकता
  8. रोगवाहकों का नियंत्रण
  9. खाने-पीने के संसाधनों का स्वच्छ रख-रखाव अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक ।

अच्छे स्वास्थ्य के लाभ-

  1. व्यक्ति स्वस्थ होते हैं तो वे काम में अधिक सक्षम होते हैं।
  2. इससे उत्पादकता बढ़ती है।
  3. आर्थिक संपन्नता आती है।
  4. आयुकाल बढ़ता है।
  5. शिशु तथा मातृ मृत्युदर में कमी होती है।

प्रश्न 19.
आदर्श टीके की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
आदर्श टीके की विशेषताएँ निम्न हैं-

  1. टीका प्रयोग करने में नितांत सुरक्षित होना चाहिए।
  2. आदर्श रूप में एक बार लगाने पर ही प्रभावी होना चाहिए।
  3. टीका प्रतिरक्षित प्राणी में जीवनपर्यन्त प्रतिरोधकता क्षमता प्रदान करने में सक्षम होना चाहिए।
  4. टीका सुगमतापूर्वक उपलब्ध हो व उत्पादन लागत अधिक न हो ।

प्रश्न 20.
कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा व तरल माध्यित प्रतिरक्षा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा व तरल माध्यित प्रतिरक्षा में अंतर (Difference between Cell Mediate Immunity \& Humoral Mediate Immunity)

कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा (Cell Mediate Immunity)तरल माध्यित प्रतिरक्षा (Humoral Mediate Immunity)
1. टी-कोशिकायें माध्यित प्रतिरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं।तरल या संचारी माध्यित प्रतिरक्षा के लिए B – लिम्फोसाइट कोशिकायें जिम्मेदार हैं।
2. ये कोशिकायें ऐसे पदार्थों का स्रावण करती हैं, जो कि लक्ष्य कोशिकाओं की कोशिका कला को घोल कर इसमें छिद्र उत्पन्न कर नष्ट कर देते हैं।प्रविष्ट होने वाले विभिन्न पदार्थों के लिए भिन्न-भिन्न B -लिम्फोसाइट्स होती हैं जो नष्ट करने का कार्य करती हैं।
3. सक्रिय लसिका कोशिकाओं से लिम्फोकाइन्स नियमनकारी प्रोटीन्स मुक्त किये जाते हैं।किसी विशिष्ट प्रकार के आक्रमण जीव या विष को नष्ट करने के लिए विशिष्ट एन्टीबॉडी का निर्माण किया जाता है।
4. यह नियमनकारी प्रोटीन्स अथवा लिम्फोकाइन्स वृहत् भक्षकाणुओं की कोशिका भक्षण किया, इनकी संख्या एवं समूहन क्षमता में वृद्धि करती है। जिसके फलस्वरूप संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।यह एन्टीबॉडी रुधि लसिका तथा ऊतक द्रव्य में संचरित होकर रोगकारी जीवों या विष पदार्थों को नष्ट करती है।
5. तपेदिक, कैंसर, कोढ़ आदि रोगों से यह सुरक्षा करती है।यह टिटनेस, जुकाम, चेचक, खसरा, हैजा आदि रोगों से रक्षा करती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

प्रश्न 21.

  • संलग्न दिये गये आरेख में क्या चीज दर्शायी गई है?
  • ‘a’ तथा ‘b’ नामांकित भागों के नाम लिखिए।
  • इस अणु को बनाने वाले कोशिका प्रारूप का नाम लिखिए ।

उत्तर:
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 1

  • एण्टीबॉडी (Antibody) अणु की संरचना ।
  • ‘a’ प्रतिजन बंधक स्थल (Antigen Binding site ) तथा b – भारी श्रृंखला का परिवर्ती क्षेत्र ।
  • यह B – लिम्फोलाइट (Lymphocyte) से बनता है।

प्रश्न 22.
(i) मलेरिया परजीवी के उस स्वरूप का नाम लिखिए जिसमें वह क्रमश:
(a) मानव शरीर में तथा
(b) मादा ऐनाफिलीज के शरीर में प्रवेश करता है।

(ii) उन परपोषियों का नाम लिखिए जिनके भीतर मलेरिया परजीवी का क्रमशः लैंगिक एवं अलैंगिक जनन होता है।

(iii) मानव में मलेरिया के रोग लक्षण प्रकट करने वाले उत्तरदायी टॉक्सिन का नाम लिखिए। ये रोग लक्षण आवर्ती प्रकार के क्यों हुआ करते हैं?
उत्तर:
(i) (a) मानव शरीर में स्पोरोजोइट (Sporozoite)
(b) मादा ऐनाफिलीज के शरीर में गेमीटोसाइट (Gametocyte)

(ii) मनुष्य – अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) मादा एनोफिलीज – लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

(iii) मानव में मलेरिया के रोग लक्षण प्रकट करने वाले उत्तरदायी टॉक्सिन का नाम हीमोज्वाइन (Haemozoin) है। इस रोग के लक्षण आवर्ती होते हैं। अर्थात् स्पोरोजोइट RBC पर आक्रमण करके उन्हें नष्ट कर देता है। इसे रुधिर कोशिका चक्र (Erythocytic cycle) कहते हैं। एक चक्र के पूरा होने में जितना समय लगता है उसके बाद उस रोग के लक्षण दिखाई देते हैं।

प्रश्न 23.
सुद ट्यूमर तथा दुर्दम ट्यूमर में अंतर बताइए ।
उत्तर:
सुद ट्यूमर तथा दुर्दम ट्यूमर में अंतर

सुदम ट्यूमर (Benign Tumour)दुर्दम ट्यूमर (Malignant Tumour)
1. ये हानिकारक नहीं होते हैंये खतरनाक व हानिकारक होते हैं।
2. ये स्थानीय होते हैंभ्रमणशील होते हैं।
3. इन्हें नॉन मेटास्टेसिस कहते हैं।इन्हें मेटास्टेटिस कहते हैं।
4. इनसे कैंसर रोग नहीं होता हैइन ट्यूमर से कैंसर रोग होता है।
5. इनकी वृद्धि धीरे-धीरे होती है।इनकी वृद्धि तेजी से होती है।

प्रश्न 24.
एन्टीबॉडी किसे कहते हैं? एन्टीबॉडी (प्रतिरक्षी ) अणु की संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एन्टीबॉडी (Antibody ) – शरीर में एन्टीजन के प्रवेश होने पर इस एन्टीजन के विरुद्ध शरीर की B लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा स्रावित ग्लाइको प्रोटीन पदार्थ प्रतिरक्षी अथवा एन्टीबॉडी कहलाते हैं । एन्टीबॉडी की संरचना (Structure of Antibody) – यह जटिल ग्लाइको प्रोटीन से मिलकर बना अणु होता है।

जिसमें चार पोलीपेप्टाइड श्रृंखलायें दो भारी (440 अमीनो अम्ल) तथा दो हल्की श्रृंखला (220 अमीनो अम्ल) आपस में डी – सल्फाइड बंध द्वारा जुड़कर Y आकृति बनाती हैं, देखिए नीचे चित्र में एन्टीबॉडी को H2L2 के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। यह अणु शीर्ष पर उपस्थित दो बिंदुओं पर एंटीजन (बड़ा और जटिल बाह्य अणु, मुख्य रूप से प्रोटीन जो विशिष्ट प्रतिरक्षा को सक्रिय करता है)

से ताला कुंजी (Lock & Key) के सिद्धांत के अनुसार. जुड़कर एंटीजन एंटीबॉडी कॉम्पलेक्स बनाता है। एंटीबॉडी का पुच्छीय भाग (Tail portion) भारी श्रृंखला से बना होता है, यह स्थिर खण्ड कहलाता है। हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार के एंटीबॉडी उत्पन्न किये जाते हैं जिनमें से कुछ निम्न हैं- IgA, IgM, IgE एवं IgG।
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प्रश्न 25.
निम्नलिखित औषधियाँ किन पादपों से प्राप्त की जाती हैं? केवल नाम लिखिए।
(i) एल एस डी
(ii) कैफीन
(iii) अफीम
(iv) कोकेन
(v) चरस ।
उत्तर:

औषधि का नामपौधे जिससे औषधि प्राप्त की जाती है
1. एल एस डीक्लैविसेप्स परप्यूरिया
2. कैफीनकोफिआ अंरैबिका
3. अफीमपापी के अपरिपक्व कैम्पसूल
4. कोकेनकोफिआ अरैबिका
5. चरसकैनाविनस सैटाइवा

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प्रश्न 26.
कैंसर को परिभाषित कीजिए। इसके प्रमुख कोई पाँच लक्षण लिखिए ।
उत्तर:
कैंसर की परिभाषा – कोशिकाओं में होने वाला अनियंत्रित विभाजन जिसके कारण गाँठ या ट्यूमर का निर्माण होता है, कोशिकाओं का यह समूह कैंसर कहलाता है।
कैंसर के प्रमुख लक्षण-

  1. किसी ठोस कारण के बिना वजन में कमी होना ।
  2. कोई तिल या मस्सा जो बढ़ता जा रहा हो व उसमें खुजली या रक्तस्राव होता हो।
  3. लगातार पुनरावृत्त होने वाला तीव्र सिरदर्द ।
  4. कोई छाला, घाव या चकत्ता जो तीन सप्ताह में भी ठीक नहीं हो पा रहा हो।
  5. लगातार गले में खराश व बलगम में खून आना।
  6. स्तनों में गांठें व उनमें विरूपता ।
  7. मल-मूत्र विसर्जन के स्वभाव में परिवर्तन आना।
  8. योनि द्वारा रक्तस्राव व मासिक चक्र के बीच-बीच में रक्तस्राव होना ।
  9. वृषणों की आकृति एवं आकार में परिवर्तन होना ।

प्रश्न 27.
औषधि निर्भरता को समझाइये |
उत्तर:
औषधि निर्भरता (Drug Dependence ) – कुछ औषधियों के लंबे समय तक गैर-चिकित्सकीय प्रयोग के कारण व्यक्ति धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुँच जाता है कि उस औषधि के प्रयोग को बंद करने से उसकी शारीरिक एवं मानसिक क्रियाएँ सामान्य रूप से संचालित नहीं हो पाती हैं तथा वह व्यक्ति उस विशेष औषधि का सेवन करने का प्रयास करता है। ऐसी स्थिति को औषधि निर्भरता कहते हैं । औषधि निर्भरता शारीरिक या मानसिक या दोनों प्रकार की हो सकती है, किंतु मानसिक औषधि निर्भरता अधिक चिंतनीय होती है व इसका समाधान मुश्किल होता है।

प्रश्न 28.
उपार्जित प्रतिरोधकता के विशिष्ट लक्षण लिखिये ।
उत्तर:
उपार्जित प्रतिरोधकता के विशिष्ट लक्षण निम्न हैं-
(1) प्रतिजनी विशिष्टता (Antigenic Specificity) – यह प्रत्येक रोगकारक जीवाणु, विषाणु तथा रोग के लिए विशिष्ट होती है। तथा अलग-अलग रोगकारक पर अलग-अलग प्रकार से प्रक्रिया कर उन्हें विशिष्ट रूप से नष्ट करती है।

(2) विविधता (Diversity) – इनमें अनेक प्रकार के रोगकारकों को पहचानने की आश्चर्यजनक विविधता पाई जाती है।

(3) प्रतिरक्षात्मक स्मृति ( Immunological Memory) – प्रतिरक्षित तंत्र द्वारा एक बार किसी प्रतिजन का अभिज्ञान होने व उसके प्रति प्रतिरक्षी अनुक्रिया दर्शाने के बाद जीव में उस विशिष्ट प्रतिजन के लिए स्मृति स्थापित हो जाती है। यदि इस विशिष्ट प्रतिजन का भविष्य में पुनः संक्रमण होता है तो प्रतिरक्षात्मक स्मृति के कारण प्रतिरक्षित तंत्र अनुक्रिया पूर्व की प्रतिक्रिया की तुलना में अधिक तीव्र होती है।

(4) दीर्घकालिकता (Longevity) – किसी विशेष रोग की विशिष्ट प्रतिरक्षियाँ उत्पादित होने के बाद व्यक्ति विशेष को उस खास रोग से दीर्घकालीन सुरक्षा प्रदान करती हैं। क्योंकि ये प्रतिरक्षियाँ लंबी अवधि तक शरीर में बनी रहती हैं।

(5) अपने एवं पराये (Self & Non-self)- यह सिद्धांत फ्रेंक मैक़फारलेन बर्नेट ने प्रतिपादित किया। उपार्जित असंक्राम्यता प्रणाली विजातीय या पराये अणुओं की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दर्शाने में समर्थ होती है। दूसरी तरफ स्वयं के शरीर में उपस्थित अणुओं के प्रति अनुक्रिया नहीं प्रदर्शित करती है।

प्रश्न 29.
सक्रिय एवं निष्क्रिय प्रतिरक्षा को समझाइए।
उत्तर:
जब परपोषी प्रतिजनों (एंटीजेंस) का सामना करना है तो शरीर में प्रतिरक्षी पैदा होते हैं। प्रतिजन, जीवित या मृत रोगाणु या अन्य प्रोटीनों के रूप में हो सकते हैं। इस प्रकार की प्रतिरक्षा सक्रिय प्रतिरक्षा ( एक्टिव इम्यूनिटी) कहलाती है। सक्रिय प्रतिरक्षा धीमी होती है और अपनी पूरी प्रभावशाली अनुक्रिया प्रदर्शित करने में समय लेती है। प्रतिरक्षीकरण (इम्यूनाइजेशन) के दौरान जानबूझकर रोगाणुओं का टीका देना अथवा प्राकृतिक संक्रमण के दौरान संक्रामक जीवों का शरीर में पहुँचना सक्रिय प्रतिरक्षा को प्रेषित करता है।

जब शरीर की रक्षा के लिए बने बनाए प्रतिरक्षी सीधे ही शरीर को दिए जाते हैं तो यह निष्क्रिय प्रतिरक्षा (पैसिव इम्यूनिटी) कहलाती है। दुग्धस्रावण ( लैक्टेशन) के प्रारंभिक दिनों के दौरान माँ द्वारा स्रावित पीले से तरल पीयूष (कोलोस्ट्रम) में प्रतिरक्षियों (IgA) की प्रचुरता होती है जो शिशु की रक्षा करता है। सगर्भता (प्रेग्नेंसी) के दौरान भ्रूण को भी अपरा (प्लेसेंटा) द्वारा माँ से कुछ प्रतिरक्षी मिलते हैं। ये निष्क्रिय प्रतिरक्षा के कुछ उदाहरण हैं।

प्रश्न 30.
T सहायक कोशिकाओं व T-मारक कोशिकाओं. में अंतर समझाइए |
उत्तर:
T- सहायक कोशिकाओं व T-मारक कोशिकाओं में अंतर

T-सहायक कोशिकाएंT-मारक कोशिकाएं
1. ये कोशिकाएं इन्टरल्यूकिन्स पदार्थ का स्रावण कर टी-मारक कोशिकाओं तथा सुग्राहित टी-कोशिकाओं की क्रियाशीलता बनाती है।जबकि ये कोशिकाएं सूक्ष्म जीवों के संपर्क में आने के बाद एक साइटोटाक्सिक पदार्थ का स्रावण सीधे ही सूक्ष्म जीव के शरीर से कर इसे नष्ट करती हैं।
2. ये वृहत् भक्षकाणुओं को कोशिकाभक्षी क्रिया हेतु उद्दीपित करती हैं। एड्स विषाणु इन कोशिकाओं को ही निष्क्रिय या नष्ट करके प्रतिरक्षा प्रणाली को पंगु बना देते हैं।ये मारक कोशिकाएं विषाणुओं से संक्रमित ऊतक कोशिकाओं का भी भक्षण करती हैं।

प्रश्न 31.
स्वाभाविक प्रतिरक्षा के अंतर्गत किस प्रकार से सुरक्षात्मक प्रक्रियाओं के द्वारा स्वतः वातावरणीय कीटाणुओं से सुरक्षा की जाती है?
अथवा
स्वाभाविक प्रतिरक्षा में बाह्य रोगकारी कारकों के प्रवेश को किस प्रकार रोकते हैं? समझाइये।
उत्तर:
इससे निम्नलिखित सुरक्षात्मक प्रक्रिया द्वारा स्वतः वातावरणीय कीटाणुओं से सुरक्षा होती रहती है-

  1. त्वचा सतत रूप से विभिन्न कीटाणुओं के प्रवेश को रोकती है ।
  2. रक्त में WBC व एन्टीबॉडीज विभिन्न विषैले पदार्थों को नष्ट करते रहते हैं।
  3. ऊतकों में मैक्रोफेज कोशिकायें जीवाणुओं का भक्षण करती रहती हैं।
  4. जठर रस का HCL तथा इसके पाचक रस कीटाणुओं को नष्ट करते रहते हैं।

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प्रश्न 32.
मनुष्य के शरीर पर मलेरिया से होने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य के शरीर पर मलेरिया का प्रभाव –

  1. इरिथ्रोसाइटिक चक्रों के परिणामस्वरूप RBC की संख्या घट जाती है। इससे रक्तक्षीणता (anaemia) की उत्पत्ति होती है।
  2. प्रीइरिथ्रोसाइटिक व एक्सोइरिथ्रोसाइटोसिस के परिणामस्वरूप यकृत कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं।
  3. हीमोग्लोबिन के नष्ट होने से बिलिरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है व पीलिया (Jaundice) हो जाता है।
  4. प्लीहा का आकार बड़ा हो जाता है व इससे लाइसोलेसिथन का स्रावण होता है जिससे RBC नष्ट होती है। कभी- कभी प्लीहा फट जाता है।
  5. परजीवी द्वारा हीमोलाइसिन का स्रावण होता है जो हीमोलाइसिस के लिये उत्तरदायी है।
  6. प्लीहा का बढ़ना स्पलीनोमिगेली व यकृत का बढ़ना हिपेटोमिगेली (Hepatomegaly) कहलाती है।
  7. थ्रोम्बोसिस (Thrombosis) हो जाता है। यह प्रभाव प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम में देखने को मिलता है।
  8. प्लाज्मोडियम की उपस्थिति में अनिद्रा (insomnia) उत्पन्न होती है।
  9. शरीर में लिम्फोसाइट्स की संख्या भी बढ़ जाती है।

प्रश्न 33.
अमिबिएसिस रोग के विशिष्ट लक्षण क्या-क्या हैं? सूची बनाइए। इसके उत्पन्नकर्ता जीव का नाम लिखिए । उत्तर- अमिबिएसिस रोग के लक्षण-

  1. कोष्ठबद्धता (कब्ज)
  2. उदरीय पीड़ा
  3. ऐंठन
  4. अत्यधिक श्लेष्मल और रक्त के थक्के वाला मल । इस रोग के उत्पन्नकर्ता जीव का नाम एन्ट अमीबा हिस्टोलाइटिका (Ent Amoeba Histolytica) है।

प्रश्न 34.
तम्बाकू का प्रयोग किसी भी रूप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। समझाइए ।
उत्तर;
तम्बाकू का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, क्योंकि-

  1. तम्बाकू में उपस्थित निकोटिन रक्त चाप (Blood Pressure) एवं हृदय के स्पंदन (Heartbeat ) की दर को बढ़ाता है।
  2. तम्बाकू को चबाने से मुख का कैंसर हो जाता है।
  3. धूम्रपान से रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है अर्थात् हाइपोक्सिया (Hypoxia) हो जाता है।
  4. धूम्रपान फेफड़ों की जैव क्षमता (Vital Capacity) को कम करता है।
  5. खाँसी एवं ब्रोंकाइटिस हो जाता है।
  6. आमाशय एवं डयूडोनम में अल्सर हो जाते हैं।

प्रश्न 35.
पोषक तथा स्थान बताइए जहाँ मलेरिया परजीवी के जीवन चक्र में निम्नलिखित अवस्थाएँ होती हैं-
(a) गेमिटोसाइट का निर्माण
(b) गेमिटोसाइट का संलयन ।
उत्तर:
(a) गेमिटोसाइट ( Gametocytes) का निर्माण मनुष्य की RBC में होता है।
(b) मादा एनाफिलिज मच्छर के आमाशय में संलयन होता है।

प्रश्न 36.
(i) फाइलेरिएसिस पैदा करने वाले फाइलेरिआई कृमियों की दो स्पंशीज के वैज्ञानिक नाम लिखिए।
(ii) संक्रमित व्यक्तियों के शरीर को ये किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
(iii) यह रोग किस प्रकार फैलता है?
उत्तर:
(i) (a) वुचेरिया ब्रैकाँफ्टी
(b) वुचेरिया मैलेगी।

(ii) इस कृमि के अधिक संक्रमण से मनुष्य की लसिका ग्रन्थियाँ एवं वाहिनियों में जीवित एवं मृत कृमि एकत्रित होने लग जाते हैं और अन्त में लसिका वाहिनियाँ तथा ग्रन्थियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं। जिसके कारण हाथ-पैर तथा जनन अंगों में सूजन आ जाती है।

(iii) क्यूलेक्स या ऐडीज मच्छर वाहक का कार्य करते हैं।

प्रश्न 37.
नीचे दी गई तालिका में a, b, c तथा d की पूर्ति कीजिए-
उत्तर:

ड्रूग का नामपादप स्रोतप्रभावित अंग का नाम
1. aपॉपी पौधाb
2. मैरिजुआनाcd

(a) मार्फीन
(b) केन्द्रीय तन्त्रिका तंत्र
(c) कैनाबिस सटाइवा
(d) कॉर्डियोवेस्कुलर तन्त्र ।

प्रश्न 38.
तम्बाकू का प्रयोग किसी भी रूप में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है? समझाइए ।
उत्तर:
इनके सेवन करने से मनुष्य पर घातक दुष्प्रभाव होता है क्योंकि ये पदार्थ शारीरिक उपापचयी क्रियाओं, अंगों, येशियों व मानसिक क्रियाओं को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। शीघ्र ही सेवनकर्ता व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य खराब हो जाता है। खेद की बात है कि आज की युवा पीढ़ी में नशीले पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति निरंतर बढ़ती जा रही है।

आज युवा वर्ग विज्ञापन संस्कृति से प्रभावित होकर मुख्य रूप से तंबाक युक्त पदार्थ जैसे बीड़ी, सिगरेट, सिगार, चिलम, खाने वाला तंबाकू, पान मसाले के विभिन्न रूप जो पुड़िया में मिलते हैं। इनके अतिरिक्त शराब, अफीम, हिरोइन, मार्फिन, स्मैक, गांजा, भांग, हशीश, चरस, मैरिजुआना आदि कई नशीले पदार्थों (डूग्स) का उपयोग करने लगा है। ये नशीले पदार्थ देश की युवा पीढ़ी को नशे का गुलाम व अकर्मण्य बना रहे हैं।

आम तौर पर जिन ड्रगों का कुप्रयोग किया जा रहा है वे निम्न हैं –
(1) ओपिऑइड्स (Opioids)
(2) कैनेबिनाइड्स (Canabinoids)
(3) कोका एल्कैलाइड्स (Coca-alkaloids)

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(1) ओपिऑइड्स (Opioids)-ओपिऑइड्स ऐसे ड्रग हैं जो हमारे केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) और जठरांत्र पथ (Gastrointestinal tract) में उपस्थित विशिष्ट ओपिऑइ इ्स ग्राहियों से जुड़ जाते हैं। सामान्यतः स्मैक (Smack) के नाम से मशहृर  हिरोइन (Heroin),

रासायनिक रूप से ड T इ एसिटि ल मार्फीन (Diacetyl morphin) है जो एक सफेद, गंधहीन, तीखा रवेदार यौगिक है। यह मार्फीन के एसीटिलीकरण से देखिए सामने चित्र में मॉर्फीन की रासायनिक संरचना है। जो पोस्त के पौधे पैपेवर सोम्नीफेरम (Papaver Somniferum) के लेटेक्स के निष्कर्षण द्वारा प्राप्त किया जाता है देखिए आगे चित्र में।
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हिरोइन (Heroin) सबसे ज्यादा खतरनाक ओपिएट है और चिकित्सीय उपयोग के लिए प्रतिबंध लगा हुआ है। यह बहुत ज्यादा व्यसनी बना देने वाला ड्रग है। हिरोइन को गैर कानूनी तरीके से बनाया और बेचा जाता है क्योंकि इसमें पैसे का बहुत ज्यादा लाभ होता है। महंगी होने के कारण इसमें अव्सर हानिकारक पदार्थों की मिलावट कर दी जाती है। जिससे दूसर किस्म की बीमारियां हो जाती हैं।

ड्रग्स लेने वाले अपनी लूइयों के लिए लापरवाह होते हैं जिसके कारण उन्हें रक्त के विषावतन, सीरम हिपिटाइटिस तथा एड्स का खतरा होता है। हिरोइन का प्रयोग मुख द्वारा, सूंघकर या इंजेक्शन के द्वारा किया जाता है। यह आलस्य एवं निद्रा लाने वाला ड्रिग है। यह मनुष्य व नशेड़ी में अवसाद उत्पन्न करती है। इसके साथ ही शारीरिक क्रियाओं व प्रकार्यों को धीमा कर देती है जिससे स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है।

(2) कैनेबिनॉइड (Canabinoids)-कैनेबिनॉइ ड्स रसायनों का समूह है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क में मौजूद कैनेबिनॉइड्स ग्राहि यों से पारस्परिक क्रिया करते हैं। देखिए चित्र कैनेबिनॉइड्स अणु की संरचना। पाक् ति क कै नेंबनाइ ड कैनेबिस सैटाइला (Canabis sativa) पौधे के पुध्यक्रम (Inflorescences) से प्राप्त किया जाता है।

भांग के फूलों के शीर्ष, पत्तियाँ और राल (Resin) के विभिन्न संयोजन से मैरिजुआना (Marijuana), हशीश (Hashish), चरस (Charas) और गाँजा (Ganja) बनाने के काम आते हैं। देखिए सामने चित्र में कैनेबिस सैटाइवा (भांग) की पत्तियाँ। आमतौर पर अंतःश्वसन और मुँह द्वारा खाए जाने वाले मादक द्रव्य (Drugs) शरीर के हृदय वाहिका तंत्र (Cardio vascular system) को प्रभावित करते हैं।
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(3) कोका एल्कैलाइड्स (Coca-alkaloids)-कोका एल्कैलाइड्स या कोकेन कोका पादप ऐरिथ्रोज़ाइलम कोका (Erythroxylum Coca) से प्राप्त किया जाता है। यह मूलरूप से दक्षिणी अमेरिका का पौधा है। यह तंत्रिकाप्रेषक (Neurotransmeter) डोपेमीन के परिवहन में बाधा डालता है। कोकेन जिसे सामान्यतः कोक (Coke) या क्रेक (Crack) कहते हैं, यह एक सफेद रंग का क्रिस्टलीय कड़वा पाउडर होता है। यह एक वाहिनी संकुचकन कारक है। इसके प्रयोग से स्थायी चेतना शून्यता के लिए प्रयोग किया जाता है।
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कोकेन का प्रयोग चबाकर, खाकर पेय पदार्थ में डालकर किया जाता है। इसको इंजेक्शन के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसके पाउडर को जोर से श्वास लेकर अंदर खींचा जाता है। जिसके फलस्वरूप केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) पर जोरदार उद्दीपक असर पड़ता है, जिससे सुख की अनुभूति होती है।

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कोकेन की अत्यधिक मात्रा से विभ्रम (Hallucination) हो जाता है। अन्य प्रसिद्ध पादप जिनमें विभ्रम उत्पन्न करने का गुण है, जैसे एट्रोपा बेलेडोना और धतूरा हैं। देखिए ऊपर चित्र में। वर्तमान में विभिन्न खेलों के कुछ खिलाड़ी भी इन कैनेबिनाइडों का दुरुपयोग कर रहे हैं ताकि स्पर्धा में विजेता को हासिल कर सकें।

लाइसर्जिक अम्ल डाइएथिल एमाइड्स (एल एस डी)-यह एक प्रबल हैल्यूसिनोजन है। इसे क्लेविसेप्स परफ्यूरिया (Claviceps perfuria) नामक कवक के फलनकाय (Fruiting body) से प्राप्त किया जाता है। इसका उपयोग व्यक्ति धूम्र के रूप में करते हैं। इसके प्रभाव से व्यक्ति भ्रमित हो जाता है एवं इसमें मानसिक रूप से उत्तेजना आ जाती है अर्थात् मानसिकता गड़बड़ा जाती है। वैसे एल एस डी का प्रयोग गर्भाशय की पेशियों के संकुचन को प्रेरित करने एवं हेमरेज को रोकने के लिए इसे औषधि के रूप में किया जाता है।

यह सबसे ज्यादा लत पड़ने वाली ड्रूग है। अधिक सेवन से निम्न प्रभाव हो सकते हैं –

  1. मचलियाँ आना
  2. उल्टियाँ
  3. दस्त
  4. क्रोमोसोमो में विंपथन
  5. गर्भ में असामान्यताएँ
  6. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति
  7. अचेतनता और यहां तक कि मृत्यु तक हो सकती है।

एम्फीटेमिन्स (Amphetamins)-इसे अनिद्रा औषधि कहते हैं। इसके सेवन से नींद नहीं आती है। यह एक संश्लेषित औरधि है जिसे सामान्यतया पेप पिल्स (Pep Pills) भी कहते हैं। इस औरधि का दुरुपयोग रात्रिकालीन कर्मचारी, ट्रक ड्राइवर, छात्र आदि जागने के लिए करते हैं। लेकिन इसके प्रभाव से निर्णय शक्ति एवं आंखें कमजोर हो जाती हैं।

एम्फीटेमिन्स का उपयोग खाँसी व अस्थमा के लिए इन्हेलेन्ट स्ट्रे के बनाने में औरधि के रूप में काम में लिया जाता है। बर्बिट्यूरेट (Barbiturates), बें जोडायजे पीन (Benzodiazepin) आदि औरधियों का उपयोग ऐसे लोग जो नशा छोड़ने में असमर्थ होते हैं तथा व्यक्ति अवसाद् (डिप्रेशन) एवं अनिद्रा (इनसोम्नीया) एवं मानसिक रोगों से ग्रसित हो उनके लिए फायदेमंद है। लेकिन इनका भी कुप्रयोग नशे के लिए किया जाने लगा है।

विभमी गुणों वाले अनेक पौधे, फल, बीजों का विश्व भर में लोक औषधि, धार्मिक उत्सवों और अनुष्ठानों में सैकड़ों वर्षों से उपयोग हो रहा है। जब ये औषधियाँ चिक्रित्सा के बजाय दूसरे उद्देश्य से ली जाती हैं या इतनी मात्रा में ली जाती हैं कि व्यक्ति की शारीरिक कार्यिकी अथवा मनोवैज्ञानिक प्रकार्यों को असंतुलित कर देती हैं तो यह ड्रगों का कुप्रयोग बन जाता है।

तम्बाकू (Tobacco)-प्रयोग में लिये जाने वाला तम्बाकू निकोटिआना टोबेकम (Nicotiana tobacum) एवं निकोटिआना रस्तिका (Nicotiana Rustica) नामक पौधे की सूखी पत्तियाँ हैं। जिनका प्रयोग मनुष्य चार सौ वर्षों से भी अधिक समय से करता आ रहा है। तंबाकू (धूम्रपान) पीया जाता है, चबाया जाता है या सूंघा जाता है। तंबाकू में बहुत से रासायनिक पदार्थ होते हैं जिनमें एक एल्केलाइड भी शामिल है, जिसे निकोटिन (Nicotine) कहते हैं।

निकोटिन के प्रभाव (Effect of Nicotine)-
(i) निकोटीन अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) को उद्दीपित करता है जिसके फलस्वरूप अधिवृक्क ग्रंथि से एड्रिनलीन (Adrernaline) और नॉरएड्रिनलीन (Nor-Adrenaline) का स्रावण रक्त परिसंचरण (Blood circulation) में किया जाता है। ये दोनों हार्मोन रक्तचाप (Blood pressure) एवं हृदय के स्पंदन (Heart beat) की दर को बढ़ाते हैं।

  • पेशियों में शिथिलन आ जाता है।
  • तंत्रिका आवेगों का प्रवाह तीव्र हो जाता है।
  • रुधिर वाहिकाओं के संकीर्णन को बढ़ाता है।

धूम्रपान और रोग (Tobaco Smoking and Disease)तम्बाकू के निरंतर सेवन से निम्नांकित रोग होने की संभावना रहती है –

  • फुफ्फुस, मूत्राशय और गले का कैंसर
  • वातस्फीति (Emphysema)
  • हदय रोग
  • आमाशय एवं ड्यूडोनम में अल्सर
  • खाँसी एवं ब्रोंकाइटिस
  • धूम्रपान से रक्त में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और हीमआबद्ध (Heambound) ऑक्सीजन की सांद्रता घट जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है अर्थात् हाइपोक्सिया (Hypoxia) हो जाता है।
  • धूम्रपान फेफड़ों की जैव क्षमता (Vital Capacity) को कम करता है।
  • गर्भवती स्त्रियों द्वारा धूम्रपान करने से गर्भ में स्थित शिशु के विकास पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

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इसके उपयोग को रोकने हेतु 31 मई को विश्व में तम्बाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारे देश में 1 दिसंबर 2004 को लागू किया गया कि शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में कोई भी तंबाकू का विक्रय नहीं होना चाहिये। इसी प्रकार सिगरेट एवं तम्बाकू के प्रत्येक पैकिट पर भी वैधानिक चेतावनी अनिवार्य रूप से अंकित होती है। वर्तमान में हमारे देश में तम्बाकू एवं तम्बाकू से बनी सभी वस्तुओं के सार्वजनिक विजापन पर प्रतिबंध है।

प्रश्न 39.
(i) मानवों में टाइफॉयड (मियादी बुखार) के पैदा करने वाले कर्ता का नाम लिखिए।
(ii) इस रोग की पुष्टि करने वाले परीक्षण का नाम लिखिए।
(iii) इसका रोगजनक मानव शरीर में किस प्रकार प्रवेश करता है? इसके नैदानिक रोग लक्षण लिखिए और गम्भीर मामलों में शरीर का जो अंग इससे प्रभावित होता है, उसका नाम लिखिए।
उत्तर:

  • साल्मोनेला टाइफी ( Salmonella Typhi)
  • विडाल परीक्षण (Widal Test)
  • संदूषित (Contaminated) भोजन और पानी द्वारा रोगजनक छोटी आन्त्र में प्रवेश करते हैं।

रोग के लक्षण

  • रोगी को लगातार उच्च ज्वर आना
  • कमजोरी आना
  • आमाशय में पीड़ा
  • कब्ज
  • सिरदर्द
  • भूख न लगना
  • गम्भीर अवस्था में आंत्र में छेद। प्रभावित अंग-आंत्र की दीवार।

निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न पर टिप्पणियाँ लिखिए-
(1) कोकेन
(2) दाद
(3) एस्केरिएसिस
(4) तरल प्रतिरक्षा अनुक्रिया।
उत्तर:
(1) कोका एल्केलाइड या कोकेन कोका पादप ऐरिथ्रोजाइलम कोका (Erythroxylum coca) से प्राप्त किया जाता । यह मूल रूप से दक्षिणी अमेरिका का पौधा है। यह तंत्रिकाप्रेषक Neurotransmitter) डोपेमीन के परिवहन में बाधा डालता है। कोकेन जिसे सामान्यतः कोक (Coke) या क्रैक (Crack) कहते हैं। इसे जोर से श्वास द्वारा खींचा जाता है।

इसका केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central nervous system) पर जोरदार उद्दीपक असर पड़ता है जिससे सुख की अनुभूति (Euphoria) एवं ऊर्जा में वृद्धि की अनुभूति होती है। कोकेन की अत्यधिक मात्रा से विभ्रम (Hallucinations) हो जाता है। अन्य प्रसिद्ध पादप जिनमें विभ्रम उत्पन्न करने का गुण है। जैसे एट्रोपा बेलेडोना एवं धतूरा। देखिए सामने चित्र में। रोग
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(2) दाद (Ringworm) – यह माइक्रोस्पोरम (Microsporum), ट्राइको फाइटॉन (Trichophyton) और एपिडर्मोफाइटॉन (Epidermophyton) आदि वंश के कवक के द्वारा होता है। यह एक मनुष्य में सामान्य संक्रामक रोग हैं। शरीर के विभिन्न भागों जैसे त्वचा, नाखून और शिरोवल्क (Scalp) पर सूखी, शल्की विक्षतियां (Scaly lesions ) इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

इन विक्षतियों में तेज खुजली होती है। उष्मा और नमी इन कवकों को त्वचा के वलनों, जैसे ग्रोइन अथवा पादंगुलियों के बीच पनपने में मदद करती है। दाद आमतौर पर मिट्टी से या संक्रमित व्यक्तियों के कपड़े, तौलिए या कंघे तक का प्रयोग करने से हो जाता है।

(3) एस्केरिएसिस (Ascariasis) – यह रोग एस्केरिस नामक गोलकृमि (roundworms) के द्वारा होता है। यह कृमि मनुष्य की आंत्र में पाया जाने वाला परजीवी है। आंतरिक रक्तस्राव, पेशीय पीड़ा (muscular pain), ज्वर, अरक्तता ( anemia) एवं आंत्र का अवरोध होना इस रोग के लक्षण हैं। इस परजीवी (ऐस्केरिस) के अंडे संक्रमित व्यक्ति के मल के साथ बाहर निकलते हैं और मिट्टी, जल, पौधों आदि को संदूषित कर देते हैं। स्वस्थ व्यक्ति में संक्रमण जल, शाक-सब्जियों, फलों आदि के सेवन से हो जाता है।
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(4) तरल प्रतिरक्षा अनुक्रिया (Humoral Immune Response) – इस प्रकार की प्रतिरक्षा में शरीर में प्रवेश होने वाले विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं, विषाणुओं तथा विषैले पदार्थों के प्रभाव को नष्ट करने हेतु अलग-अलग प्रकार की बी लसीका कोशिका निर्धारित होती है। किसी विशिष्ट प्रकार के आक्रमणकारी जीव या विष पदार्थ को नष्ट करने के लिए विशेष प्रकार की लसिकाणु विशिष्ट ग्लोब्यूलिन प्रोटीन उत्पन्न करती है।

यह प्रोटीन रुधिर, लसीका तथा ऊतक द्रव्य में से होकर रोगकारी जीवों या विष पदार्थों का नाश करती है। ऐसी प्रोटीन्स प्रतिरक्षी ग्लोब्यूलिन्स प्रकृति की होती है व प्रतिरक्षी या प्रतिपिंड कहलाती है। चूंकि इन प्रतिपिंडों एवं प्रतिजनों के मध्य विशिष्ट अंतर्क्रिया सामान्यतः रक्त या लसीका जैसे तरल माध्यम में होती है इसलिए इसे तरल या संचारी माध्यित प्रतिरक्षा अथवा तरल प्रतिरक्षा अनुक्रिया कहते हैं।

प्रश्न 2.
प्रतिरक्षा किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती है ? सहज प्रतिरक्षा का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हमारे शरीर में प्रतिदिन वातावरण में उपस्थित कई प्रकार के रोगाणुओं जैसे जीवाणुओं, विषाणुओं, परजीवी जन्तुओं तथा कवकों इत्यादि का आक्रमण होता रहता है। इसके अलावा कई विषैले पदार्थ भी वातावरण से शरीर में पहुँच जाते हैं। शरीर के ही रोगग्रस्त ऊतकों तथा आक्रमणकारी जीवों द्वारा विषैले पदार्थ मुक्त होते रहते हैं। शरीर में प्रविष्ट होने वाले ऐसे रोगकारक विघैले पदार्थ प्रतिजन (Antigen) कहलाते हैं।

जन्तु शरीर में विभिन्न प्रतिजनी पदार्थों के निरन्तर प्रवेश करने के बावजूद भी सामान्यतः शरीर रोगग्रस्त नहीं होता है। ऐसा जन्तुओं में उपस्थित एक विशेष क्षमता के कारण होता है जो रोगकारी प्रतिजन पदार्थों को सीधे अथवा विशेष प्रतिरक्षी पदार्थों (Antibodies) के द्वारा नष्ट कर शरीर को सुरक्षित रखती है। जन्तुओं की क्षमता को प्रतिरोधक क्षमता या असंक्राम्यता अथवा प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं।

वे समस्त संरचनाएँ जो रोगप्रतिरोधक क्षमता से संबंधित होती हैं प्रतिरक्षित तन्त्र (Immune System) का निर्माण करती हैं। प्रतिरक्षित तन्त्र के अध्ययन को प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology) कहा जाता है। इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के कारण एमिल वॉन बेरिंग (Emil Von Behring) को पतिरक्षा विज्ञान का जनक (Father of Immunology) कहा जाता है।

प्रतिरक्षा प्रमुखतः दो प्रकार की होती है –

  • सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity)
  • उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity)

सहज प्रतिरक्षा (Innate Immunity):
इसे प्राकृतिक एवं स्वाभाविक प्रतिरक्षा के नाम से भी जाना जाता है। यह शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली होती है जो कि जन्मजात (Inborn) उपस्थित होती है। इसमें वे सभी अवरोध शामिल हैं जो बाह्य रोगकारी कारकों के प्रवेश को रोकते हैं। यदि किसी प्रकार से रोगकारक शरीर में प्रविष्ट होने में सफल भी हो जाते हैं तो सहज प्रतिरक्षा के घटक जैसे वृहत् भक्षाणु उन्हें समाप्त कर देते हैं। अतः यह जीवों की सुरक्षा हेतु प्रथम रक्षा पंक्ति (First Line of Defence) बनाती है।

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सहज प्रतिरक्षा में चार प्रकार के रोध होते हैं –
(i) सहज रोध (Physical Barriers)-इस प्रकार का अवरोध रोगाणुओं को शरीर में अन्दर प्रवेश होने से रोकता है। त्वचा की बाह्य परत किरैटिन की बनी होती है और रोगाणुओं के लिये लगभग अभेद्य होती है। त्वचा की तैल ग्रन्थियां लैक्टिक अम्ल उत्पन्न करके अम्लीय वातावरण का निर्माण करती हैं जो रोगाणुओं को नष्ट करता है।

श्वसन तन्त्र जठरांत्र (Gastrointestinal) और जनन मूत्र पथ को आस्तरित करने वाली एपिथीलियम का श्लेष्मा (Mucous) आवरण भी शरीर में प्रवेश करने वाले रोगाणुओं को रोकने में सहायता करता है। इसी प्रकार शरीर के साव जैसे पसीना भी रोगाणुओं को दूर बनाये रखता है ।

(ii) कार्यिकीय रोध (Physiological Barriers)-जंतु शरीर का ताप, विभिन्न अंगों द्वारा स्रावित पदार्थ एवं पी.एच. (pH) प्रमुख कार्यिकीय अवरोधकों का कार्य करते हैं। आमाशय की ग्रंथियों द्वारा स्रावित HCl, निम्न (pH) माध्यम उत्पन्न करता है जो कि भोजन के साथ प्रविष्ट सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देता है।

जंतु कोशिकाओं व ऊतकों द्वारा उत्पन्न अन्य विलेय कारक जैसे श्लेष्म एवं अश्रुस्राव में उपस्थित लाइसोजाइम, रक्त सीरम में मिलने वाले संपूरक कारक तथा वायरस संक्रमित कोशिकाओं द्वारा उत्पन्न इंटरफेरॉन्स (Interferons) प्रोटीन भी कार्यिकी अवरोधों का कार्य करते हैं। लाइसोजाइम जलअपघटनी क्रिया द्वारा जीवाणुओं की कोशिका भित्ति में उपस्थित पेप्टाइडोग्लाइकन स्तर को विघटित कर देते हैं। इन्टरफेरॉन प्रोटीन्स कोशिकाओं को विषाणुओं के संक्रमण से सुरक्षित रखती है।

(iii) भक्षकाणिवक अवरोध (Phogocytic Barriers)-शरीर में उपस्थित विशिष्ट कोशिकाएँ जैसे रक्त की मोनोसाइट्स (Monocytes), न्यूट्रोफिल्स (Neutrophils) कोशिकाओं व ऊतकों को वृहत् भक्षकाणु जंतुओं के अंदर प्रवेश करने वाले बाह्य कोशिकीय कणिकीय पदार्थों जैसे रोगजनक सूक्ष्मजीवों को कोशिकाशन (Phagocytosis) द्वारा नष्ट करते रहते हैं।

कोशिकाशन (Phagocytosis) एक महत्वपूर्ण स्वाभाविक प्रतिरक्षी क्रिया है। इसके अतिरिक्त ऊतकों में उपस्थित प्राकृतिक मारक कोशिकाएँ शरीर में उपस्थित अर्बुद कोशिकाओं एवं विषाणु संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं। भक्षकाणु कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं, जिन्हें सूक्ष्म भक्षकाणु (Microphase) और महाभक्षकाणु (Macrophase) कहते हैं।

सूक्ष्मभक्षकाणु (Microphase)-ऐसी श्वेत रक्त कोशिकाएँ हैं जिनमें दो या दो से अधिक पाली वाला केन्द्रक होता है। ये आकार में छोटी और अल्प-जीवी होती हैं। महाभक्षकाणु (Macrophase)-एककेन्द्री भक्षक कोशिकाएं होती हैं जो आकार में बड़ी और दीर्घ जीवी होती हैं। ये लगभग सभी अंगों और ऊतकों में पायी जाती हैं। लेकिन विशेष रूप से ये फेफड़ों, यकृत व प्लीहा में पायी जाती हैं।

(iv) शोथ अवरोध (Inflammatory Barriers)-शरीर के ऊतकों के घाव, चोट या रोगजनक सूक्ष्मजीवों के आक्रमण से क्षतिग्रस्त होने की अवस्था में कई जटिल व क्रमबद्ध प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न होती हैं जिन्हें संयुक्त रूप से शोथ अनुक्रिया कहते हैं। इस अनुक्रिया में क्षतिग्रस्त ऊतकों की मास्ट कोशिकाओं (Mast cells) द्वारा उत्पन्न हिस्टामीन व प्रोस्टाग्लेंडिन एवं रक्त प्लाज्मा में उपस्थित काइनिन्स प्रमुख मध्यस्थ अणुओं का कार्य करते हैं।

इस अनुक्रिया के फलस्वरूप प्रभावित ऊतकों व अंगों में लाली, दर्द, सूजन व गर्माहट के लक्षण उत्पन्न होते हैं। मेश्नीकॉफ ने इसे एक सुरक्षात्मक (Protective) अनुक्रिया बताया। इस क्रिया के माध्यम से हानिकारक कारकों के प्रभाव को प्रभावित ऊतकों तक ही सीमित रखकर ऊतकों की मरम्मत एवं सुरक्षा की जाती है।

प्रश्न 3.
ड्रगों का दुरुपयोग खिलाड़ियों के द्वारा क्यों किया जाता है? इन ड्रगों के अनुषंगी प्रभावों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
ड्रगों का दुरुपयोग कुछ खिलाड़ियों द्वारा अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने के लिए किया जाता है। वे खेलों में स्वापक पीड़ाहर (narcotic analgesics), उपचयी स्टेराइडों (anabolic steroids), मूत्रल दवाओं (Diuretics) एवं कुछ हार्मोन का कुप्रयोग, मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाने और आक्रामकता को बढ़ाने और फलस्वरूप खेल प्रदर्शन के लिए करते हैं। ड्रगों के अनुषंगी प्रभाव (Side-effects of Drugs) – महिलाओं में उपचयी स्टेराइडों के सेवन के अनुषंगी प्रभाव निम्न हैं –

  1. पुंस्त्वन (Masculinisation) अर्थात् पुरुष जैसे लक्षण
  2. बढ़ी आक्रामकता (Increased aggresiveness)
  3. भावदशा में उतार-चढ़ाव
  4. अवसाद
  5. असामान्य आर्तव चक्र
  6. मुँह तथा शरीर पर बालों की अत्यधिक वृद्धि
  7. आवाज का भारी होना।

पुरुषों में ड्रगों के सेवन से निम्न अनुषंगी प्रभाव होते हैं-

  1. पुरुषों में मुँहासे
  2. बढ़ी आक्रामकता
  3. भावदशा में उतार-चढ़ाव
  4. अवसाद
  5. वृषणों (Testis) के आकार में कमी
  6. शुक्राणु उत्पादन में कमी
  7. यकृत (Liver) एवं वृक्क (Kidney) की संभावित दुष्क्रियता
  8. स्तनों में वृद्धि
  9. समय से पूर्व गंजापन
  10. प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि ।

लंबे समय तक सेवन करने से उक्त प्रभाव स्थायी हो सकते हैं । युवा पुरुष या महिलाओं में मुँह और शरीर के सख्त मुँहासे और लंबी अस्थियों के वृद्धि केन्द्रों के समय पूर्व बंद होने के फलस्वरूप वृद्धि रुक जाती है।

प्रश्न 4.
व्यसन किसे कहते हैं? ड्रग ऐल्कोहॉल के कुप्रयोग के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्यसन और निभरंरता (Addiction and Dependence):
व्यक्ति की किसी भी पदार्थ पर जैसे कि तम्बाकू, ऐेल्कोहॉल तथा ड्रूस पर शारीरिक तथा मान्नसक निर्भरता व्यसन (Addiction) कहलाती है । ड्रग्स का उपवोग करने वाले व्यक्ति की मानसिक तथा शारीरिक दशा बदल जाती है। इसके लगातार ग्रहण करने से व्यक्ति इूस के लिए व्यसनी (लती) हो जाता है क्योंकि इ्रगों के ब्यार-बार उपबोग से हमारे शरीर में उपस्थित ग्राहियों का सद्ध स्तर बढ़ जाता है।

इसके फलस्वरूप ग्राही, इूगों या ऐल्कोहॉल की केक्ल उध्तम मात्रा के प्रति अनुक्रिया करते हैं, जिसके कारण अधिकाधिक मात्रा में लेने की लत पड़ जाती है अथात् निर्भर हो जाता है एवं इनके बिना उसका नीना कटिन हो जाता है। जब किसी आदतन ड्रग/ऐल्कोहॉल लेने वाले ख्यक्ति की नियमित मात्रा को अचानक बंद कर दिया जाता है तो उसे शई प्रकार के सम्मिलित जटिल प्रभावों युक्त लक्षणों का आभास होता है। ये लक्षण विनिवरंन संलक्षण (Withdrawal Syndrome) करलाते हैं। ऐसे सक्षण निम्न हैं –

  1. ड्रास्स के बार-बार उपयोग करने की मारसिक इ्चा
  2. हल्के कंषन
  3. प्रबल दौरे
  4. उद्धेग
  5. तरित बेहोशी
  6. पसीना आन्ता
  7. बिंता
  8. मिचली आना
  9. ब्दय की गति बढ़ जाना
  10. सहनता (शारीर में ड्रग्स की बढ़ती जाती सहनता के कारण व्यसनी को उसकी और ज्यादा मात्रा का चाहना)
  11. ड़स्स से कुछ समब दूर रहने के बाद भी ड्रग का व्यसन।

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कई बार यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है व पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। अनः वापसी अबधि चिकित्सकीय देख-रेख में होनी चाहिए। प्रयोग की जा रही ड्राग को अचानक बंद करने या परिवर्जन (Abstinence) के कारण वह्ठ व्यक्ति याचना करने लगता है। ऐसे व्यक्ति को मानसिक सहारा (Psychological Support) की अत्बन्त आवश्यकता होती है तधा ऐसे संमय में परिवार के सद्स्यों एवं मित्रों का सकारान्मक सहियोग होना चाहिये।

ड्रग/ऐल्कोहॉल कुप्रयोग के प्रभाव (Impact of Drug) Alcohol Abuse):
इूगों की अत्यधिक मात्रा के सेबन से श्वसन पात्त (Respiratory Failure), हदय पात (Heart Faliure) अथवा प्रमस्तिष्क रक्तम्नांव (Cerebral bemorrhage) के कारण व्यक्ति कोमा में चला जाता है अन्ततः मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। विशेष तौर से किशोरों के इस व्यसनों की चपेट में आने के मुख्य कारण अग्र हैं –

  1. शैक्षिक क्षेत्र में प्रदर्शन में कमी,
  2. बिना किसी स्पष्ट कारण के विद्यालय अथवा महाविद्यालय (College) से अनुपस्थिति,
  3. व्यक्तिगत स्वच्छता की रुचि में कमी,
  4. विनिवर्तन,
  5. एकाकीपन,
  6. अवसाद, थकावट,
  7. आक्रमणशील और विद्रोही व्यवहार,
  8. परिवार और मित्रों से बिगड़ते संबंध,
  9. शौक की रुचि में कमी,
  10. सोने और खाने की आदतों में परिवर्तन,
  11. भूख और वजन में कमी अथवा बढ़ना।

ड्रग अथवा ऐल्कोहॉल के कुप्रयोग के दूरगामी परिणाम भी हो सकते हैं। व्यक्ति (व्यसनी) अपने परिवार व मित्रों के लिए भी मानसिक संताप का कारण बन जाता है। अपना शौक पूरा करने के लिए ड्रग व ऐल्कोहॉल के लिए चोरी करना, घर का सामान बेचना, घर को बेचना आदि कृत्य करता है।

जो लोग (व्यसनी) सूई (Injection) से नशा करते हैं उनमें HIV/AIDS या यकृत शोथ (Hepatitis) होने व उसके स्थानान्तरण का खतरा अधिक होता है क्योंकि व्यसनी एक-दूसरे के सूई (Injection) का इस्तेमाल करने अथवा संक्रमित सूई द्वारा ड्रगग लेने से एक-दूसरे से वायरस (Virus) स्थानान्तरित हो जाते हैं। अधिक ऐल्कोहॉल पीने से यकृत (Liver) में ग्लाइकोजन (Glycogen) का संचय होने की बजाय वसा का संचय होता है, जिससे वसा-यकृत सिन्ड्रोम की दशा बन जाती है जिससे सिरोसिस (Cirrhosis) बन जाता है।

(यकृत कड़ा हो जाता है तथा सूख जाता है)। अधिक सांद्रता वाले ऐल्कोहॉल के सेवन से आमाशय में दर्द युक्त प्रदाह होता है। इसे गेस्ट्राइटिस (Gastritis) कहते हैं। गर्भावस्था के दौरान ऐल्कोहॉल अथवा ड्रगों का उपयोग गर्भ पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। आजकल खिलाड़ी अपनी मांसपेशियों की थकान दूर करने एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन हेतु ड्रगों का दुरुपयोग करते हैं।

इन ड्रग्स में स्वापक पीड़ानाशक (Narcotic Analgesic), स्टीरॉइड्स (Steroids), मूमल ड्रग्स एवं विभिन्न प्रकार के हार्मोन होते हैं। स्त्रियों में उपचयी स्टेरॉइडों के प्रयोग से स्त्रियों में पुरुषों के लक्षण (masculinisation) विकसित हो जाते हैं, इसके अतिरिक्त निम्न लक्षण प्रकट हो जाते हैं –

  • भावदशा में उतार-चढ़ाव
  • असामान्य आर्तव चक्र (menstrual cycle)
  • मुंह और चेहरे पर बालों की अत्यधिक वृद्धि
  • भगशेफ (Clitoris) का बढ़ जाना
  • आवाज गहरा होना
  • बड़ी आक्रामकता, अवसाद आदि।

पुरुषों में इन ड्रग्स को लेने से उत्पन्न लक्षणों में वृषणों (Testis) के आकार का घटना, शुक्राणुओं (Sperms) के उत्पादन में कमी, स्तनों (Mammary Glands) का आकार में बढ़ना, प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate gland) का बढ़ना, समय से पहले बाल उड़ना (गंजापन), चेहरे पर मुंहासे, बढ़ी आक्रामकता भावदशा में उतार-चढ़ाव, अवसाद, वृक्क (Kidney) की संभावित अक्रियाशीलता आदि शामिल हैं। लंबे समय तक सेवन से ये प्रभाव स्थायी हो सकते हैं।

प्रश्न 5.
स्वप्रतिरक्षा किसे कहते हैं? मानव में स्वप्रतिरक्षा रोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वप्रतिरक्षा (Auto Immunity):
प्रतिरक्षा तंत्र में आत्मस्थ (अपने) घटक तथा आत्मेतर (पराया) घटकों के बीच भेद कर सकने की क्षमता होती है। सामान्यतः आत्मस्थ घटकों के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं होती यानी अपने ही ऐन्टीजनों को सहन कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया को स्वःसहायता कहते हैं। कभी-कभी शरीर में अपने ही ऊतकों के प्रति शरीर द्वारा एंटीबॉडी माध्यित (तरलीय) अथवा कोशिका माध्यित आक्रमण होने लगता है जिससे स्वप्रतिरक्षा पैदा हो जाती है। इससे कोशिका अथवा ऊतक क्षति होती है या इनके कार्यों में अंतर आ जाता है।

इस प्रकार पैदा होने वाले दोषों को स्वप्रतिरक्षा दोष अथवा रोग कहते हैं। ऐसी एंटीबॉडियों, जो आत्मस्थ घटकों अथवा आत्मस्थ ऐंटीजनों (स्व एंटीजनों) के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं, को स्व एंटीबॉडी कहते हैं। स्वप्रतिरक्षा रोग 5-10 प्रतिशत मानव जनसंख्या को प्रभावित करते हैं। ये रोग चिरकालिक कमजोरी समस्याओं के बाद आ जाते हैं। पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में स्वप्रतिरक्षा ज्यादा होती है। मानव में स्वप्रतिरक्षा रोग निम्न हैं-

  • मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis)-पेशियों का स्वयं नष्ट होना।
  • जीर्ण रक्ताल्पता (Chronic Anaemia)-स्वयं की लाल रुधिर कणिकाओं (RBC) का नष्ट होना।
  • हाशिमोटो रोग (Hashimoto disease)-इसे थाइरॉइड की आत्महत्या भी कहते हैं।
  • जीर्ण यकृत शोथ (Chronic hepatitis)-यकृत द्वारा स्वयं की कोशिकाओं को नष्ट करना।
  • आमावाती संधिशोथ (रुमेटोयाड आर्थाइटिस), इंसुलिननिर्भरता मधुमेह एवं बहुस्थानिक स्क्लेरोसिस आदि।

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प्रश्न 6.
पश्चविषाणु (रेट्रोवायरस) किसे कहते हैं? पश्चविषाणु की प्रतिकृति को चित्र की सहायता से प्रदर्शित कीजिए ।
उत्तर:
पश्चविषाणु (रेट्रोवायरस ) – एड्स एक विषाणु रोग है जो मानव में प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु (एच. आई. वी. ह्यूमन इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस) के कारण होता है। एच. आई. वी. विषाणुओं के उस समूह में आता है जिसे पश्चविषाणु रेट्रोवायरस कहते हैं, जिनमें आर.एन.ए. जीनोम को ढकने वाला आवरण होता है। देखिए आगे चित्र में।
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प्रश्न 7.
टीकाकरण और प्रतिरक्षीकरण पर लेख लिखिए।
उत्तर:
टीकाकरण और प्रतिरक्षीकरण (Vaccination and Immunisation):
किसी अनुग्र (Non-virulent) या मृत (killed) सूक्ष्मजीवों या उनके द्वारा आविषों (Toxins) की अति सूक्ष्म मात्रा को शरीर में प्रविष्ट कराना टीकाकरण कहलाता है तथा जो पदार्थ प्रविष्ट कराया जाता है उसे टीका कहते हैं। इस क्रिया द्वारा जीव में किन्हीं विशिष्ट रोगों के प्रति प्रतिरोधकता विकसित हो जाती है। एडवर्ड जेनर ने गो-चेचक का प्रयोग करके 1796 में चेचक से प्रतिरक्षण का टीका (Vaccine) प्रारंभ किया। इस उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें प्रतिरक्षण का जनक (Father of Immunisation) कहा जाता है।

टीकाकरण या प्रतिरक्षण क्रिया सिद्धांत प्रतिरक्षा तंत्र की स्मृति कोशिकाओं के ऊपर आधारित है। टीकाकरण के द्वारा प्रविष्ट विशिष्ट प्रतिजनी पदार्थ शरीर में पहुँचकर प्राथमिक प्रतिरक्षा अनुक्रिया उत्पन्न करता है व साथ ही स्मृति B व T कोशिकाएँ उत्पन्न होती हैं। भविष्य में वह व्यक्ति या जीव यदि उसी विशिष्ट रोगकारक द्वारा संक्रमित होता है तो वहां उपस्थित B व T कोशिकाएं उस रोगकारक को तुरंत पहचान कर प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर शरीर को सुरक्षा प्रदान करती हैं।

एक आदर्श टीके (Vaccine) में निम्न विशेषताएं होनी चाहिए –

  • टीका प्रतिरक्षित प्राणी में जीवनपर्यंत प्रतिरोधकता क्षमता प्रदान करने में सक्षम होना चाहिए।
  • टीका सुगमतापूर्वक उत्पन्न हो सके व उत्पादन लागत अधिक न हो।
  • आदर्श रूप में एक बार लगाने पर ही प्रभावी होना चाहिए।
  • टीका प्रयोग करने में नितांत सुरक्षित होना चाहिए।

टीके के प्रकार (Types of Vaccines)-सामान्यतः टीके निम्नलिखित प्रकार के होते हैं –

  • आविषाभ टीके (Toxoids)-आविषाभ (Toxoids) एक रासायनिक व भौतिक रूप से परिष्कृत जीव-विष है जो कि हानिकारक तो नहीं होता है किंतु इसकी प्रतिरोग क्षमताजनकता बनी रहती है। उदाहरण-डिफ्थीरिया एवं टिटेनस के टीके।
  • जीवाणुजन्य टीके (Bacterial Vaccines)-इन टीकों के निर्माण में मारे गये जीवाणुओं का प्रयोग किया जाता है। उदाहरणटायफाइड, हैजा, कुकर खाँसी, तपेदिक, प्लेग के टीके।
  • विषाणुजन्य टीके (Viral Vaccines)-इन टीकों के निर्माण में जीवित क्षीणीकृत (Living attenuated) अथवा मारे गये विषाणुओं का उपयोग किया जाता है। उदाहरण-खसरा, चेचक, इन्फ्लुएंजा (Influenza) व पोलियो के टीके।
  • न्यूक्लिक अम्ल टीके (Nucleic acid Vaccines)-इन टीकों के निर्माण में नग्न डी.एन.ए. का उपयोग किया जाता है अर्थात् ये नग्न DNA से निर्मित होत्रे हैं। उदाहरण-हिपेटाइटिस-बी का टीका।
  • संयुग्मित टीके (Conjugated Vaccines)-ये प्रोटीन अणुओं से योजित पॉलिसैकेराइड्स से निर्मित होते हैं। उदाहरणन्यूमोनिया के टीके।

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प्रश्न 8.
मानव में विभिन्न प्रकार की प्रतिरक्षी ग्लोब्यूलिन्स का विवरण दीजिये ।
उत्तर:
तालिका – मानव में विभिन्न प्रकार की प्रतिरक्षी ग्लोब्यूलिन्स का विवरण

प्रतिरक्षियों का वर्गकुल मात्राप्रमुख लक्षण एवं उपस्थितिकार्य
1. IgA10नवदुग्ध (Colostrum) में उपस्थित प्राथमिक प्रतिरक्षी; अणु भार 1,60,000; लार, श्लेष्मा व अन्य बाह्य स्रावों में उपस्थितश्लेष्मी कलाओं (Mucous Membranes), देह की बाह्य सतह की सुरक्षा तथा निःश्वसित (Inhaled) एवं अन्तर्रहित रोगाणुओं से सुरक्षा प्रदान करना
2. IgD1-3अति सूक्ष्म मात्रा में रक्त में लसिका कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित; अणुभार -1,85,000बी-लसिका कोशिकाओं का सक्रियण, प्रतिरक्षी अभिक्रिया के विकास एवं परिपक्वन में भूमिका
3. IgE0.05अत्यन्त कम मात्रा में उपस्थित; मास्ट कोशिकाओं व बेसोफिल्स से विशिष्ट सहलग्नता दर्शाने वाली; अणुभार- 2,00,000मास्ट कोशिकाओं का उत्तेजन, प्रत्यूर्जता (Allergy) अभिक्रियाओं से संबंधित परजीवियों से सुरक्षा
4. IgG75-80सर्वाधिक प्रचुरता में मिलने वाली; ऑवल (Placenta) से पार होने की क्षमता युक्त, अणुभार -1,50,000 रक्त एवं अंतराली द्रवों का प्रमुख प्रतिरक्षी ग्लोब्यूलिनसंपूरक तंत्र को उत्तेजित करना, मानव भ्रूण को रोग क्षमता प्रदान करना, भक्षाणु कोशिकाओं से भक्षाणुनाशन हेतु विशिष्ट सहलग्नता
5. IgM5-10प्रतिजन की अनुक्रिया में उत्पन्न प्रथम प्रतिरक्षी; रक्त प्लैज्मा व अंतराली द्रवों प्रतिरक्षी; रक्त प्लैज्मा व अंतराली द्रवों में उपस्थित; अणुभार -9,00,000 पेन्टामर के रूप में; सर्वाधिक वृहत् प्रकार का प्रतिरक्षी ग्लोब्यूलिन।जीवाणुओं से सुरक्षा की प्रथम पंक्ति बनाते हैं, समूहन क्रिया का प्रभावीकरण, संपूरक स्थिरन व प्रतिजन के स्कन्दन में प्रभावी।

प्रश्न 9.
कैंसर क्या है? कैंसर के प्रमुख प्रकार लिखिए। कैंसर के कम से कम तीन घातक संकेतों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कोशिकाओं में होने वाला अनियंत्रित विभाजन जिसके कारण गाँठ या ट्यूमर का निर्माण होता है, कोशिकाओं का यह समूह कैंसर कहलाता है।
अर्बुद या ट्यूमर (Tumour) दो प्रकार के होते हैं –
(1) सुदम अर्बुद (Benign Tumour)
(2) दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumour)
(1) सुदम अर्बुद (Benign Tumour)-ये हानिकारक नहीं होते हैं एवं स्थानीय होते हैं अर्थात् शरीर के दूसरे भागों या आस-पास की कोशिकाओं में नहीं फैलते हैं। इस कारण इसे नॉनमेटास्टेसिस (non-metasis) कहते हैं। स्थान विशेष पर अर्बुद बनती है जो आकार में धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इसे शल्य-क्रिया द्वारा शरीर से अलग करने पर रोग से मुक्ति मिल जाती है।

(2) दुर्दम अर्बुद (Malignant Tumour)-इसमें विभाजनशील कोशिकायें शरीर के किसी स्थान विशेष में सीमित न रहकर या लसिका में मिलकर शरीर के अन्य भागों में पहुँच जाती हैं तथा वहाँ अर्बुद उत्पन्न करती हैं। ऐसे अर्बुद को दुर्दम अर्बुद कहते हैं। इसको मेटास्टेटिस (Metasis) कहते हैं। ऐसे अर्बुद खतरनाक होते हैं जिसके कारण मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।

कैंसर के प्रकार (Types of Cancer)-कैंसर निम्न प्रकार का होता है –

  • कार्सीनोमास (Carcinomas)-कैंसर का यह प्रकार सर्वाधिक रूप में पाया जाता है। यह मुख्य रूप से उपकला ऊतकों में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि का परिणाम है। उदाहरण के लिए छाती का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, अग्न्याशय का कैंसर तथा आमाशय का कैंसर।
  • सारकोमास (Sarcomas)-यह पेशी व लसीका ग्रंथियो का कैंसर है। भ्रूणीय मीसोडर्म से व्युत्पन्न संयोजी ऊतकों में होने वाली दुर्दम वृद्धि सारकोमा कहलाती है।
  • ल्यूकीमिआ (Leucaemia)-रुधिर तथा अस्थिमज्जा की कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से विभाजित होकर ल्यूकीमिआ कैंसर उत्पन्न करती हैं। इस रोग से ग्रसित रोगी में ल्यूकोसाइट की संख्या में अधिक मात्रा में वृद्धि हो जाती है। उदाहरण के लिए-रक्त कैंसर।
    इसके अतिरिक्त कभी-कभी छोटे बच्चों में नेत्र, वृक्क तथा प्रमस्तिष्क में अति दुर्दम ट्यूमर पाये गये हैं।

उपर्युक्त के अतिरिक्त कैंसर के कुछ अन्य प्रकार निम्न हैं-

  1. मायोमा (Myoma)-पेशी ऊतकों का कैंसर
  2. एडीनोमा (Adenoma)-ग्रंथियों का कैंसर
  3. मैलानोमा (Melanoma)-त्वचा की वर्णक कोशिकाओं का कैंसर
  4. लिम्फोमा (Lymphoma)-लसिका ऊतकों का कैंसर
  5. ग्लियोमा (Glioma)-केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र की ग्लियल कोशिकाओं का कैंसर।

मनुष्य में सबसे अधिक प्रकार का कैंसर फेफड़ों का होता है जो द्वितीय स्थान के कैंसर त्वचा कैंसर की तुलना में लगभग दो गुणा व्यक्तियों को प्रभावित करता है। महिलाओं में स्तन कैंसर सर्वाधिक होता है। (भारत में मनुष्यों में मुख, गला कैंसर एवं महिलाओं में गर्भाशयी सर्विक्स कैंसर सामान्य कैंसर हैं।)

कैंसर के कारण (Causes of Cancer)-सामान्य कोशिकाओं का कैंसर कोशिकाओं में परिवर्तन भौतिक, रासायनिक अथवा जैविक कारकों के द्वारा होता है। इन कारकों को कैंसरजन (Carcinogens) कहते हैं। आयनकारी विकिरण जैसे एक्स किरणें, गामा किरणें और अनायनकारी विकिरण जैसे पराबैंगनी विकिरण DNA को नष्ट कर नवद्रव्यी अथवा कैंसर कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। रासायनिक कैंसरजन (Carcinogen) तंबाकू के धुएँ में पाया जाता है जो कि फेफड़ों के कैंसर के लिए उत्तरदायी है।

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कैंसर उत्पन्न करने वाले वायरस को अर्बुदीय विषाणु (Oncopgenic Viruses) कहते हैं। इनमें पायी जाने वाली जीन को विषाणुवीय अर्बुदजीन (Viral oncogenes) कहते हैं। इसके अतिरिक्त सामान्य कोशिकाओं में कई जीनों का पता चला है जिन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों में सक्रिय किए जाने पर वे कोशिकाओं का कैंसरजनी रूपान्तरण कर देते हैं। ये जीन कोशिकीय अर्बुदजीन (Cellular oncogenes) अथवा आदि अर्बुदजीन (Proto oncogenes) कहलाते हैं।

कैंसर का प्रसार (Spread of Cancer)-कैंसर शरीर में निम्न प्रकार से फैलता है-

  • किसी स्थान विशेष पर कैंसर कोशिकाएं विभाजन करके अर्बुद (Tumor) बना लेती हैं। अब यह अर्बुद समीपवर्ती ऊतकों के ऊपर फैलकर उन्हें नष्ट कर देती है।
  • कभी-कभी कैंसर कोशिकाएं अर्बुद से पृथक् होकर लसीका संचरण के साथ शरीर के अन्य भागों में पहुँच कर विभाजन कर देती हैं। इन्हें द्वितीयक वृद्धि या मेटास्टेसिस कहते हैं। इस प्रकार का कैंसर सबसे घातक होता है। एक बार मेटास्टेसिस बनना प्रारंभ होने पर उसका निवारण असंभव होता है। अंततः रोगी की मृत्यु का कारण बनते हैं।
  • अस्थि मज्जा तथा संयोजी ऊतक में उत्पन्न कैंसर अर्बुद की कोशिकाएँ रुधिर के साथ तीव्रता से शरीर के अन्य भागों में स्थानान्तरित होती हैं।

कैंसर रोग के प्रमुख लक्षण –

  1. शरीर के वजन में तेजी से कमी होना
  2. घाव का लंबे समय तक नहीं भरना
  3. बारंबार तेज सिरदर्द का होना
  4. लगातार पेटदर्द् रहना
  5. वृषणकोष/ स्तन ग्रंथियों की आकृति में परिवर्तन
  6. मूत्र के साथ बिना दर्द के रक्त निकलना
  7. तिल में परिवर्तन होना
  8. छाती में गांठ का होना
  9. लगातार खाँसी होना
  10. स्त्रियों में रजोधर्म के समय अधिक रुधिर आना
  11. सूजन आना, गले का प्राय: दुखना
  12. पाचन तथा शौच आदतों में लगातार परिवर्तन होना।

कैंसर का अभिज्ञान एवं निदान (Cancer detection and diagnosis)-कैंसर का अभिज्ञान ऊतकों की जीवूतिपरीक्षा (Biopsy) और ऊतक विकृति (Histopathological) अध्ययनों तथा बढ़ती कोशिका गणना के लिए रुधिर (Blood) तथा अस्थिमज्जा (Bonemarrow) पर आधारित है। जैसा कि अधिश्वेतरक्तता (Lukemias) के मामले में होता है।

जीवूतिपरीक्षा (biopsy) में जिस ऊतक पर शंका होती है, उसका एक टुकड़ा लेकर पतले अनुच्छेदों (Sections) में काटकर अभिरं जित कर के रोगविज्ञानी (Pathologist) परीक्षण किया जाता है। आंतरिक अंगों (Internal organs) के कैंसर का पता लगाने के लिए विकिरण चित्रण (Radiography), अभिकलित टोमोगफफी (Computed Tomography) एवं चुम्बकीय अनुनादी इमेजिंग (MRIMagnetic resonance imaging) तकनीकें बहुत उपयोगी हैं।

अभिकलित टोमोग्राफी एक्स किरणों का उपयोग करके किसी अंग के भीतरी भागों की त्रिविम प्रतिबिंब (Three-dimensional image) बनाती है। जीवित ऊतकों में वैकृतिक (Pathological) और कार्यिकीय (Physiological) परिवर्तनों का सही पता लगाने के लिए एम-आरआई में तेज चुंबकीय क्षेत्रों और अनायनकारी विकिरणों का उपयोग किया जाता है। कुछ कैंसरों का पता लगाने के लिए कैंसर विशिष्ट प्रतिजनों के विरुद्ध प्रतिरक्षियों (Antibodies) का भी उपयोग किया जाता है।

कुछ कैंसरों के प्रति वंशागत सुग्राहिता वाले व्यक्तियों में जीनों का पता लगाने के लिए आण्विक (Molecular) जैविकी की तकनीकों को काम में लाया जाता है। ऐसे जीनों की पहचान, जो किसी व्यक्ति को विशेष कैंसरों के प्रति प्रवृत्त (Predispose) करते हैं, कैंसर की रोकथाम के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को कुछ ऐसे विशेष कैंसरजनों से, जिनके प्रति वे सुग्राही हैं, जैसे फुफ्फुस कैंसर में तंबाकू के धुएँ से बचने की सलाह देनी चाहिये।

कैंसरों का उपचार (Treatment of Cancer)-

  • आमतौर पर कैंसरों के उपचार के लिए शल्यक्रिया (Surgery), विकिरण चिकित्सा (Radiation therapy) एवं प्रतिरक्षा चिकित्सा (Immuno therapy) का उपयोग किया जाता है।
  • सामान्यतः रोगग्रस्त भाग को शल्यक्रिया द्वारा निकाला जाता है।
  • कैंसर कोशिकाओं को विकिरण द्वारा नष्ट कर दिया जाता है (Radiotherapy)।
  • कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने हेतु अनेक रसोचिकित्सीय (Chemotherapeutic) औरधियों का उपयोग किया जाता है। इनमें से कुछ औषधियाँ विशेष अर्बुद के लिए विशिष्ट होती हैं।
  • अधिकांश कैंसर का उपचार शल्यकर्म, विकिरण चिकित्सा और रसोचिकित्सा के संयोजन से किया जाता है।
  • अर्बुद कोशिकाएँ प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा पता लगाए जाने और नष्ट किए जाने से बचती हैं। इसलिए रोगी को ऐसे पदार्थ दिये जाते हैं जिन्हें जैविक अनुक्रिया रूपांतरण (Biological response modifiers) कहते हैं। जैसे Y- इंटरफेरॉन, जो उनके प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय करता है एवं अर्बुद को नष्ट करने में सहायता करता है।

प्रश्न 10.
प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र का चित्र बनाकर संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र की विभिन्न अवस्थाओं का नामांकित चित्र बनाकर संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र (Life cycle of Plasmodium ) – जब संक्रमित मादा एनोफेलीज मनुष्य को काटती है तो प्लाज्मोडियम जीवाणुज अथवा स्पोरोजॉइट्स (Sporozoites) के रूप में मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। स्पोरोजॉइट्स संक्रामक रूप है। प्रारंभ में परजीवी यकृत में अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं और फिर लाल रुधिर कणिकाओं (RBC) पर आक्रमण करते हैं जिसके फलस्वरूप लाल रुधिर कणिकाएँ फट जाती हैं। RBC के फटने के साथ ही एक विषैला पदार्थ भी निकलता है जिसे हीमोजोइन (Haemozoin) कहते हैं।

इस पदार्थ के रुधिर में मुक्त होते ही यह मनुष्य के रुधिर के प्लाज्मा में घुल जाता है तथा इसकी वजह से ही मनुष्य को जाड़ा व कंपकंपी देकर मलेरिया बुखार चढ़ने लगता है जब मादा एनोफेलीज मच्छर किसी संक्रमित मनुष्य को काटती है। तब परजीवी उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उनका आगे का परिवर्धन मादा एनोफेलीज में होता है।

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ये परजीवी मादा एनोफेलीज में बहु संख्यात्मक रूप से बढ़ते रहते हैं और स्पोरोजोइट्स (Sporozoites) बन जाते हैं जो मादा एनोफेलीज की लार ग्रंथियों (Salivary glands) में जमा हो जाते हैं अब यह मादा एनोफेलीज किसी स्वस्थ मनुष्य को काटती है तो स्पोरोजोइट्स उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं एवं मनुष्य को संक्रमित कर देते हैं।

इस प्रकार मलेरिया परजीवी अर्थात् प्लाज्मोडियम अपना जीवन चक्र पूरा करता है। इस प्रकार प्लाज्मोडियम को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दो परपोषियों की आवश्यकता होती है जिन्हें मनुष्य एवं मादा एनोफेलीज़ कहते हैं। मनुष्य प्राथमिक एवं मादा एनोफेलीज द्वितीयक परपोषी होते हैं। मादा एनोफेलीज रोगवाहक (Transmitting agent ) का कार्य करती है।
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प्रश्न 11.
मानव में पाये जाने वाले प्रतिरक्षा तंत्र का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) निम्न रचनाओं से मिलकर बना होता है-

  1. लसीकाभ अंग ( Lymphoid organs)
  2. कोशिकाएँ (Cells)
  3. ऊतक (Tissues )
  4. घुलनशील अणु जैसे प्रतिरक्षी ( Soluble molecule like antibodies)

प्रतिरक्षा तंत्र विजातीय प्रतिजनों को पहचानता है, इनके प्रति अनुक्रिया करता है और इन्हें याद रखता है। प्रतिरक्षा तंत्र एलर्जी प्रतिक्रियाओं (allergic reactions ), स्व-प्रतिरक्षा रोगों (auto- immune diseases) और अंग प्रतिरोपण (Organ transplantation) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लसीकाभ अंग (Lymphoid Organs) – ये वे अंग हैं जिनमें लसीकाणुओं की उत्पत्ति अथवा परिपक्वन और प्रचुरोद्भन होता है।

लसीकाभ अंग दो प्रकार के होते हैं –

  1. प्राथमिक लसीकाभ अंग ( Primary Lymphoid Organs) – ऐसे अंग जिनमें अपरिपक्व लसीकाणु, प्रतिजन संवेदनशील लसीकाणुओं में विभेदित होते हैं, प्राथमिक लसीकाभ अंग कहलाते हैं। उदाहरण- अस्थिमज्जा एवं थाइमस ।
  2. द्वितीयक लसीकाभ अंग (Secondary Lymphoid Organs) – परिपक्वन के पश्चात् लसीकाणु द्वितीयक लसीकाभ अंगों में चले जाते हैं।

जहाँ लसीकाणुओं की प्रतिजन के साथ पारस्परिक क्रिया होती है जो बाद में प्रचुर संख्या में उत्पन्न होकर प्रभावी कोशिकाएँ बन जाते हैं। उदाहरण – प्लीहा, लसीका ग्रंथियाँ, टांसिल क्षुद्रांत्र के पेयर पेंच एवं परिशेषिका। मानव के शरीर में लसीकाभ अंगों की स्थिति हेतु देखिए चित्र में। अस्थिमज्जा (Bonemarrow) एक मुख्य लसीकाभ अंग है जिसमें लसीकाणुओं एवं सभी रुधिर कोशिकाओं का निर्माण होता है। थाइमस (Thymus) एक पालियुक्त अंग है जो हृदय के पास उरोस्थि (Sternum) के नीचे स्थित होती है।

जन्म से थाइमस काफी बड़ी होती है लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे इसका आकार घटता जाता है और यौवनावस्था आने पर यह बहुत छोटे आकार की रह जाती है। अस्थि मज्जा एवं थामइस दोनों ही टी- लसीकाणुओं के परिवर्धन और परिपक्वन के लिए सूक्ष्म पर्यावरण (Micro environment) उपलब्ध करवाते हैं।
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प्लीहा (Spleen) की आकृति सेम के बीज के समान होती है। एवं आकार में बड़ा होता है। इसमें मुख्य रूप से लसीकाणु (Lymphocytes) और भक्षकाणु (Phagocytes) पाये जाते हैं। यह रुधिर में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म जीवों को फांसकर रुधिर निस्यंदक ( Filter) के रूप में कार्य करते हैं। प्लीहा लाल रुधिर कणिकाओं (RBC) का भण्डार होता है।

लसीका ग्रंथियाँ लसीका तंत्र पर भिन्न- भिन्न स्थलों पर स्थित होती हैं। ये लसीका ग्रंथियाँ आकार में छोटी एवं ठोस होती हैं। लिम्फ ग्रंथियाँ जो सूक्ष्म जीव या दूसरे प्रतिजन लसीका एवं ऊतक तरल में आ जाते हैं, उन्हें फाँस लेती हैं। लसीका ग्रंथियों में फंसे प्रतिजन वहाँ उपस्थित लसीकाणुओं के सक्रियण और प्रतिरक्षा अनुक्रिया के लिए उत्तरदायी हैं।

श्लेष्म संबद्ध लसीकाभ ऊतक – प्रमुख पथों जैसे श्वसन, पाचन और जननमूत्र पथ आदि के आस्तरों के भीतर लसीकाभ ऊतक स्थित होते हैं जिन्हें श्लेष्म संबद्ध लसीकाभ ऊतक (Mucosal Associated Lymphoid Tissue) कहते हैं। यह मानव शरीर के लसीकाभ ऊतक का लगभग पचास प्रतिशत है।

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प्रश्न 12.
डिफ्थीरिया रोग का कारक, रोग लक्षण एवं बचाव के उपाय लिखिए।
उत्तर:
डिफ्थीरिया (Diphtheria)-इस रोग का रोगजनक कॉर्निबैक्टीरियम डिफ्थेरी (Cornybacterium diphtherea) है।
यह रोग प्राय: 1 से 5 वर्ष के बच्चों से होता है। संक्रमण अथवा संचरण वायु द्वारा होता है। इसकी उद्भवन अवधि 2-4 दिन की है।

रोग के लक्षण-

  1. हल्का ज्वर
  2. गले में दर्द
  3. गले में अर्ध ठोस पदार्थ का निकलना जो एक कठोर झिल्ली के रूप में बदल जाता है।
  4. इस झिल्ली से वायु पथ अवरुद्ध हो जाने से मृत्यु हो जाती है।

रोकथाम एवं उपचार-

  1. शिशुओं को डीपीटी का टीका लगाना चाहिये
  2. संक्रमित शिशु के थूक (कफ), मुख व नासिका स्रावों का निस्तारण किया जाना चाहिये।
  3. संक्रमित शिशु को अलग रखना चाहिये।
  4. चिकित्सक की देखरेख में एंटीबायोटिक औषधियाँ दी जा सकती हैं।

प्रश्न 13.
एड्स के HIV वायरस की संरचना बनाते हुए इसके संचरण, लक्षण व उपचार दीजिए।
अथवा
HIV का नामांकित चित्र बनाइए। इसकी संरचना का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
एड्स का पूरा नाम उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) इसका अर्थ है प्रतिरक्षातंत्र की न्यूनता, जो व्यक्ति के जीवन काल में उपार्जित होती है। 1981 में सबसे पहले एड्स का पता चला और पिछले 25 वर्षो में सारे संसार में फैल गया। इस रोग के कारण 2 करोड़ पचास लाख व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। एड्स एक विषाणु (Virus) जनित रोग है जो मनुष्य में प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु (Human Immuno- deficiency Virus, HIV) के कारण होता है। एचआईवी RNA से निर्मित रिट्रोवायरस (Retrovirus) श्रेणी का वायरस है।

एच.आई.वी. की संरचना (Structure of HIV)-वायरस की सतह चारों ओर से फॉस्फोलिपिड (Phospholipid) की दो परतों से बनी होती है। जिसमें दो प्रकार की ग्लाइकोप्रोटीन्स, जी पी- 120 एवं जीपी -41 धँसी रहती हैं। विषाणु के मध्य में एक सूत्रीय आर एन ए के दो अणु पाये जाते हैं जिनसे रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज (Reverse transcriptase) अणु जुड़े होते हैं।

आर एन ए अणु दो प्रोटीन आवरणों से घिरे होते हैं। जिनमें अंत आवरण (Inner coat) P-24 प्रोटीन्स से तथा बाह्य आवरण (Outer coat) P-17 प्रोटीन्स से निर्मित होता है। देखिए आगे चित्र में। रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एन्जाइम की सहायता से एच आई वी RNA से DNA का निर्माण कर सकता है। एच आई वी दो प्रकार के होते हैं-

  1. एच आई वी-1
  2. एच आई वी-2

एच आई वी-1 (HIV-1) को एड्स रोग के लिए वर्तमान में जिम्मेदार मानते हैं।
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रोग का संचरण एच आई बी संचरण (Transmission of HIV)-एच आई वी सामान्यतः संक्रमित व्यक्ति के रक्त, बीर्य एवं योनि स्रावों में उपस्थित रहते हैं। अतः इनका संचरण ऐसी क्रियाओं के माध्यम से होता है जिनसे ये द्रव स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आते हैं सामान्यतः रोग का संचरण लैंगिक तथा रक्त संपर्क से होता है।

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एच आई वी का संचरण निम्न माध्यमों द्वारा होता है –

  1. समलैंगिक व्यक्तियों के बीच गुदा मैथुन क्रिया द्वारा
  2. संक्रमित व्यक्ति के रक्त आधान
  3. एक ही सुई द्वारा नशीले पदार्थों का उपयोग
  4. माता से शिशु में प्लेसेन्टा द्वारा
  5. संक्रमित व्यक्ति का किस (Kiss) लेने से HIV का संचरण हो जाता है जिसके मुंह में घाव होता है
  6. संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क

एड्स एक संक्रामक रोग है लेकिन यह छूत का रोग नहीं है। एड्स ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाने, उसके कपड़े उपयोग में लाने, शुष्क चुम्बन, बर्तनों के प्रयोग से, टॉयलेट सीट के माध्यम से, पूर्ण निर्जर्मीकृत सूइयों का प्रयोग कर रक्ताधान तथा रोगी की देखभाल से एड्स का संक्रमण नहीं होता है।

रोगजनकता एवं लक्षण-एड्स विषाणु अर्थात् एच आई वी शरीर में प्रवेश करने पर मुख्यतः सहायक टी लसीका कोशिकाओं को संक्रमित करता है। इन लसीका कोशिकाओं पर सी डी -4 ग्राही अणु उपस्थित होते हैं जिनसे विषाणु जुड़ जाते हैं। अब ये विषाणु इन कोशिकाओं (T4 Cells) को नष्ट करने लगते हैं।

चूंकि T- सहायक कोशिकाओं का कार्य अन्य लसीका कोशिकाओं को प्रतिरक्षा क्रिया के लिए सक्रिय करने का होता है, अतः T- सहायक कोशिकाओं की निरंतर कमी के कारण संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्णतः शिथिल हो जाती है व रोगी कई प्रकार के गंभीर संक्रमणों का शिकार होकर अंततः मृत्यु को प्राप्त होता है।

संक्रमण होने और एड्स के लक्षण प्रकट होने की अवधि कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों (प्राय: 5-10 वर्ष) की हो सकती है। अतः संभव है कि संक्रमित व्यक्ति कई वर्षों तक स्वयं रोगग्रस्त न हो किंतु वह एच आई वी के संचरण का माध्यम बना रह सकता है जबकि कुछ अन्य अपेक्षाकृत कम अवधि में ही रोगग्रस्त हो जाएँ व कुछ वर्षो बाद मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। एड्स दरअसल में कोई एक रोग नहीं है किंतु एक ऐसी दशा है जिसमें एड्स विषाणु संक्रमित व्यक्ति की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को समाप्त कर देता है। जिससे वह कई रोगों से ग्रसित हो जाता है।

जिसके फलस्ववरूप निम्न लक्षण प्रकट होते हैं –

  • बार-बार बुखार आना
  • वजन में कमी आना
  • लसीका गांठों का फूलना
  • लंबे समय तक लगातार खाँसी होना
  • अतिसार के लक्षण उत्पन्न होना
  • त्वचा पर कैंसर के लक्षण।

एड्स वास्तव में रोग की अंतिम अवस्था है जिसमें सर्वाधिक प्रमुख लक्षणों में न्यूमोसिस्टिस कैरीनाई न्यूमोनिया तथा कैपोसी का सार्कोमा (Kaposi’s Sarcoma) शामिल है। निदान-संक्रमण के पश्चात् छः से आठ सप्ताह के अंदर शरीर में प्रतिरक्षी अनुक्रिया प्रकट होना प्रारंभ हो जाती है।

इसके परीक्षण हेतु निम्नलिखित तीन परीक्षण किये जाते हैं –

  • एलाइजा परीक्षण (Enzyme Linked Immunosorbent Assay)-इसमें AIDS-KIT का प्रयोग करते हैं जो कि HIV प्रतिंजन से युक्त होती है।
  • वेस्टर्न ब्लाड परीक्षण (Western Blod Test)-यह परीक्षण महंगा नहीं होता है। इसके साथ ही यह विश्वसनीय व सटीक परीक्षण है। इस परीक्षण में समय भी कम लगता है।
  • लार परीक्षण (Saliva Test)-यह परीक्षण लार (Saliva) का परीक्षण है व ऐसी मान्यता पर आधारित है कि एड्स का संचरण लार द्वारा होता है।

उपचार (Treatment)-एड्स के उपचार की कोई निश्चित रूपरेखा नहीं है। संक्रमण जो बढ़ते हैं या हो गये हैं, का उपचार संभव है। सामान्य प्रबंध, जाँच व विशिष्ट एंटी HIV एजेंट का उपयोग किया जाता है। मौकापरस्त संक्रमणों व अर्बुदों का उपचार प्राथमिक अवस्था में लाभदायक होता है एवं रोगी सामान्य जीवन लंबे समय तक व्यतीत करने योग्य बना रहता है। विषाणुओं को नष्ट करने योग्य औष्षधियां जैसे इंटरफेरॉन, रोबाविरीन, सूरामिन, फासकारनेट आदि उपयोग में लायी जा रही हैं।

जीडोव्यूडीन AZT विशेष तौर पर उपयोगी पाई गयी है। दो न्यूक्लिओक्साइड एनालोग AZT अर्थात् जीडोब्यूडीन (3 azido-3′ deoxy thymidine) तथा लेमीब्यूडीन (3 TC) एवं एक प्रभावी प्रोटीएज अवरोधक (Inhibitor) इन्डिनेविर (Indinavir) द्वारा रक्त में विषाणु की मात्रा 20,000 से 10 Lac RNA की प्रतियां प्रति 1 मिलि प्लाज्मा में घटने के प्रमाण मिले हैं। यह कमी 90% रोगियों में लगभग एक वर्ग तक बनी रहती है।

इसके अतिरिक्त एड्स के उपचार के लिए प्रभावी टीके (Vaccines) के निर्माण में वैज्ञानिक प्रयासरत हैं। कुछ टीके जैसे HIV-HiG बायोसिन आदि का विकास संभव हो पाया है। किंतु व्यावहारिक तौर पर अभी तक कोई भी टीका एड्स से पूर्ण बचाव करने में सक्षम नहीं है।

ऐसी स्थिति में जबकि एड्स का कोई संपूर्ण व प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है. व इसके कारकों से बचाव ही रोग से बचने के उपाय हैं तो सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं के द्वारा व्यापक स्तर पर जनसाधारण को इसकी समुचित जानकारी देना व संक्रमण से बचने के उपायों के अनुरूप जीवन पद्धति अपनाने को प्रेरित करना अत्यन्त महत्वपूर्ण व आवश्यक है।

निम्नलिखित उपाय एड्स से बचाव करने में उपयोगी हैं-

  1. सदैव निर्जर्मीकृत सुई का प्रयोग करना चाहिये।
  2. रक्त आधान में एच.आई.वी. मुक्त रक्त ही स्थानान्तरित करना चाहिये।
  3. वेश्यावृत्ति को नकारा जाना चाहिये।
  4. समलैंगिकता को नकारा जाना चाहिये।
  5. एक से अधिक स्त्री या पुरुष से शारीरिक संबंध स्थापित नहीं करने चाहिए।
  6. नशीली दवाओं के रुधिर के माध्यम से प्रयोग पर रोक लगानी चाहिये।
  7. आम जनता को इस रोग के बारे में शिक्षित कर उससे बचाव हेतु जागरूक बनाना चाहिये।

हमारे देश में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संघटन (National AIDS Control Organisation) और अन् गैर सरकारी संगठन (NGO) लोगों को एड्स के बारे में शिक्षित करने के लिए बहुत कार्य कर रहे हैं। एच आई वी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किये।

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इन कार्यक्रमों में निम्नलिखित पर ध्यान दिया जा रहा है-

  • निरोधों (कण्डोम) का निःशुल्क वितरण।
  • सुरक्षित यौन संबंधों पर जोर।
  • सार्वजनिक एवं निजी अस्पतालों में केवल डिस्पोजेबल सुइयाँ या सीरिज का ही उपयोग हो।
  • रुधिर एवं रुधि उत्पादों का अनिवार्य रूप से एच आई वी मुक्त होना।
  • एच आई वी के लिए नियमित जाँच को बढ़ावा देना।
  • ड्रग के कुप्रयोगों को नियंत्रित करना।

प्रश्न 14.
व्यसन एवं निर्भरता से आप क्या समझते हैं? व्यसनी बनाने वाली किसी एक ड्रग का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
व्यसन और निर्भरता (Addiction and Dependence):
व्यक्ति की किसी भी पदार्थ पर जैसे कि तम्बाकू, ऐल्कोहॉल तथा ड्रग्स पर शारीरिक तथा मानसिक निर्भरता व्यसन (Addiction) कहलाती है। ड्रग्स का उपयोग करने वाले व्यक्ति की मानसिक तथा शारीरिक दशा बदल जाती है। इसके लगातार ग्रहण करने से व्यक्ति ड्रग्स के लिए व्यसनी (लती) हो जाता है क्योंकि ड्रगों के वार-बार उपयोग से हमारे शरीर में उपस्थित ग्राहियों का सह़्ा स्वर बढ़ जाता है।

इसके फलस्वलूप ग्राही, ड्रगों या ऐल्कोहॉल की केवल उच्चतम मात्रा के प्रति अनुक्रिया करते हैं, जिसके कारण अधिकाधिक मात्रा में लेने की लत पड़ जाती है अर्थात् निर्भर हो जाता है एवं इनके बिना उसका जीना कठिन हो जाता है। जब किसी आदतन ड्रग/ऐल्कोहॉल लेने वाले व्यक्ति की नियमित माश्रा को अचानक बंद कर दिया जाता है तो उसे कई प्रकार के सम्मिलित जटिल प्रभावों युक्त लक्षणों का आभास होता है। ये लक्षण विनिवर्तन संलक्षण (Withdrawal Syndrome) कहलाते हैं। ऐसे लक्षण निम्न हैं-

  • ड्रत्स के बार-बार उपयोग करने की मानसिक इच्छा
  • हल्के कंपन
  • प्रबल दौरे
  • उद्वेग
  • त्वरित बेहोशी
  • पसीना आना
  • घिंता
  • मिचली आना
  • हुदय की गति बढ़ जाना
  • सहनता (शरीर में ड्रग्स की बढ़ती जाती सहनता के कारण व्यसनी को उसकी और ज्यादा मात्रा का घाहना)
  • ड्रग्ल से कुछ समय दूर रहने के बाद भी डूग का व्यसन।  सकारात्मक सहयोग होना चाहिये।

कई बार यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है व पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। अतः वापसी अवधि चिक्रिसकीय देख-रेख में होनी चाहिए। प्रयोग की जा रही ड्रग को अचानक बंद करने या परिवर्जन (Abstinence) के कारण वह व्यक्ति याचना करने लगता है। ऐसे व्यक्ति को मानसिक सहारा (Psychological Support) की अत्यन्त आवश्यकता होती है तथा ऐसे समय में परिवार के सदस्यों एवं मित्रों का।

प्रश्न 15.
उपार्जित असंक्राम्यता की परिभाषा दीजिए तथा इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity):
यह एक प्रतिरोध है जो व्यक्ति विशेष को जीवन के दौरान प्राप्त होता है। यह सूक्ष्म जीवों के संपर्क के प्रभाव से उत्पन्न होता है। इस प्रकार की प्रतिरक्षा केवल कशेरुकों में पायी जाती है। इसे विशिष्ट प्रतिरक्षा भी कहते हैं। यह प्रतिरक्षा जन्म के पश्चात् व्यक्ति द्वारा अर्जित की जाती है तथा इसके द्वारा किसी भी जीवाणु के शरीर में प्रवेश करने पर पहचान कर विशिष्ट क्रिया द्वारा नष्ट किया जाता है।

उपार्जित प्रतिरक्षा के विशिष्ट लक्षण –

  1. प्रतिजनी विशिष्टता (Antigenic Specificity)-यह प्रत्येक रोगकारक जीवाणु, विषाणु तथा रोग के लिए विशिष्ट होती है तथा अलग-अलग रोगकारक पर अलग-अलग प्रकार से प्रक्रिया कर उन्हें विशिष्ट रूप से नष्ट करती है।
  2. विविधता (Diversity)-इनमें अनेक प्रकार के रोगकारकों को पहचानने की आश्चर्यजनक विविधता पाई जाती है।
  3. प्रतिरक्षात्मक स्मृति (Immunological Memory)प्रतिरक्षित तंत्र द्वारा एक बार किसी प्रतिजन का अभिज्ञान होने व उसके प्रति प्रतिरक्षी अनुक्रिया दर्शाने के बाद जीव में उस विशिष्ट प्रतिजन के लिए स्मृति स्थापित हो जाती है। यदि इस विशिष्ट प्रतिजन का भविष्य में पुनः संक्रमण होता है तो प्रतिरक्षात्मक स्मृति के कारण प्रतिरक्षित तंत्र अनुक्रिया पूर्व की प्रतिक्रिया की तुलना में अधिक तीव्र होती है ।
  4. दीर्घकालिकता (Longevity)-किसी विशेष रोग की विशिष्ट प्रतिरक्षियाँ उत्पादित होने के बाद व्यक्ति विशेष को उस खास रोग से दीर्घकालीन सुरक्षा प्रदान करती है। क्योंकि ये प्रतिरक्षियाँ लंबी अवधि तक शरीर में बनी रहती हैं।
  5. अपने एवं पराये (Self & Non-self)-यह सिद्धांत फ्रेंक मैकफारलेन बर्नेट ने प्रतिपादित किया। उपार्जित प्रतिरक्षा प्रणाली विजातीय या पराये अणुओं की पहचान कर उनके विरुद्ध प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया दर्शाने में समर्थ होती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

दूसरी तरफ स्वयं के शरीर में उपस्थित अणुओं के प्रति अनुक्रिया नहीं प्रदर्शित करती है प्रतिरक्षा तंत्र की कोशिकाएं (Cells of Immunne System) –
(1) लसीका कोशिकाएं (Lymphocytes)-ये सभी आरंभ में अस्थिमज्ञा की रुधिर उत्पन्न करने वाली, स्टेम सेल अथवा वृंत कोशिकाओं से व्युत्पन्न होती हैं। वृन्त कोशिकाओं का अर्थ अविभेदित कोशिकाओं से है जिनमें असीमित विखंडन हो सकता है और जो एक या अनेक प्रकार की कोशिकाओं को उत्पन्न कर सकती हैं।

अस्थि मज्जा स्टेम कोशिकाएं बंट कर लाल रुधिर कणिकाएँ (erythrocytes), रक्त बिम्बाणु (blood platelets), एककणिकीय श्वेत रुधि कोशिकाएं (Granulocytes) व श्वेत रक्त कोशिकाएं (Monocytes) बनाती हैं। ये श्वेत रुधिर कोशिकाओं से व्युत्पन्न होती हैं। प्रतिरक्षण कार्य करने के लिए उत्तरदायी मुख्य कोशिकीय प्रकार लसीका कोशिकाएं हैं। लगभग 1012 लसीका कोशिकाएं परिपक्व लसीका प्रणाली का निर्माण करती हैं।

कार्य के अनुसार इन्हें दो भागों में बांटा गया है-
(क) B कोशिकाएं या B लसीका कोशिकाएं
(ख) T कोशिकाएं या T लसीका कोशिकाएं
आकृति के आधार पर इन कोशिकाओं में भेद नहीं किया जा सकता है लेकिन क्रियात्मक रूप से ये भिन्न होती हैं। प्रतिरक्षा तंत्र की कोशिकाओं में विशिष्ट कोशिका सतही संकेतक की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर भेद किया जा सकता है ।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 18

(क) B कोशिकाएं (B-लसीका कोशिकाएं एवं इनकी उत्पत्ति)
‘B’ Bursa बर्सा (श्लेषपुटी) के लिए प्रयुक्त होता है। पक्षियों पर किये गये अध्ययन से पता चलता है कि पक्षियों में पाया जाने वाला फेब्रिसियस की श्लेषपुटी पश्च आहार नली का लसीका अंग एंटीबॉडी कोशिकाओं के आरंभिक विकास का स्थान था। इन कोशिकाओं को B-कोशिकाएं कहा जाता है। (B की व्युत्पत्ति Bursa of Fabricius से हुई है)।

B- कोशिकाएं अस्थिमज्जा में परिपक्व होती हैं और तत्पश्चात् रक्त द्वारा परिधीय लसीका अंगों को ले जायी जाती हैं। स्तनधारियों में B-कोशिका वंश आरंभ में भ्रूणीय यकृत में उत्पन्न होते हैं। यह प्रक्रिया मानव गर्भावस्था के आठवें सप्ताह में प्रारंभ होती है। भ्रूणीय यकृत B- कोशिकाओं के उत्पादन का प्रमुख स्थान है और गर्भावस्था के 4 से 6 माह तक बना रहता है। स्टेम कोशिकाएं फिर अस्थि मज्ञा में बस जाती हैं। इसके बाद उम्र भर B- कोशिकाएं अनवरत रूप से अस्थि मज्ञा में उत्पन्न होती रहती हैं।

B कोशिकाओं के प्रमुख कार्य –

  • एन्टीबॉडी माध्यमित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रारंभ करना
  • एन्टीबॉडी बनाने वाली प्लाज्मा कोशिकाओं में रूपान्तरित होना।

कोशिकाओं के विशिष्ट लक्षण :

  1. B कोशिकाएं इम्यूनोग्लोब्यूलिन को अपनी कोशिका झिल्ली के एकीकृत प्रोटीन के रूप में दर्शाती हैं।
  2. यह सतही इम्यूनोग्लोब्यूलिन (एंटीबॉडी) इसके विशिष्ट (ऐन्टीजन) प्रतिजन के लिए अभिग्राहक का काम करती है।
  3. B कोशिकाएं एंटीबॉडी के निर्माण के लिए उत्तरदायी हैं। सक्रियत B कोशिकाएं प्लाज्मा कोशिकाओं में परिवर्तित होती हैं।
  4. B-कोशिकाओं की कुछ संततियां प्लाज्मा-कोशिकाओं में विभेदित नहीं होती हैं, वरन् स्मृति कोशिकाएं (Memory Cells) बन जाती हैं जो प्रतिजन के भविष्य में पुनः प्रकट होने की स्थिति में ऐंटीबॉडी बनाती हैं।
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(ख) T-कोशिकाएँ (T-लसीका-कोशिकाएँ )-Bकोशिकाओं के विपरीत दूसरी लसीका कोशिकाएं भूणीय अवस्था या जीवन की आरंभिक अवस्था में अस्थि मज्ञा छोड़ देती हैं। ये थाइमस में ले जायी जाती हैं। इस अंग में परिपक्व होती हैं तदुपरांत परिधीय लसीका (लिम्फ) अंगों की ओर गमन करती हैं। ये कोशिकाएं द्वितीय लसीका कोशिकीय वर्ग का निर्माण करती हैं जिन्हें T- लसीका कोशिकाएँ या T-कोशिकाएँ कहते हैं। T की व्युत्पत्ति थाइमस (Thymus) से हुई है। लेकिन B-कोशिकाओं की भाँति इनका भी परिधीय लसीका-अंगों में सूत्री विभाजन होता है और संतति कोशिकाएँ मूल T कोशिकाओं के समरूप होती हैं।

T-कोशिकाओं के कार्य –

  1. प्रतिरक्षण प्रतिक्रिया का नियमन
  2. कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा-अनुक्रिया की मध्यस्थता।
  3. प्रतिरक्षा बनाने के लिए B कोशिकाओं को प्रेरित करना।

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T कोशिकाओं को उनकी क्रियाशीलता के अनुसार तीन वर्गों में विभाजित किया गया है –

  1. सहायक T कोशिकाएँ (TH) -B कोशिकाओं की अनुक्रिया को बढ़ाती हैं जिससे ऐंटीबॉडी का निर्माण होता है। अन्य T कोशिकाओं को क्रियाशील बनाती हैं।
  2. कोशिका विष T कोशिकाएं (TC) – ये विषाणुओं से संक्रमित व अबुर्द कोशिकाओं को नष्ट करती हैं।
  3. संदमक T कोशिकाएं (TS) – ये सहायक T कोशिकाओं और संभवतः B कोशिकाओं का दमन करती हैं और B कोशिकाओं की क्रियाशीलता का नियमन करती हैं।

इस प्रकार हम देखते हैं कि T कोशिकाएँ दो सामान्य प्रकार के प्रतिरक्षी कार्य करती हैं –

  • प्रभावकारक
  • नियामक

संरचनात्मक रूप से, T कोशिकाओं को कुछ विशिष्ट सतही अणुओं (T कोशिका अभिग्राहकों) की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर विभेदित किया जाता है। B कोशिकाएं व T कोशिकाएं एकदूसरे के लिए सहयोगी हैं।

उपार्जित प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है –
(1) कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा-कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा के लिए T कोशिकाओं का एक उपसमूह T मारक कोशिकाएं अथवा कोशिका विष T कोशिकाएं जिम्मेदार हैं। T- मारक कोशिकाएं एक ऐसे पदार्थ का निर्माण करती हैं जो पर्फोरिन्स प्रोटीन से निर्मित होता है। इसकी सहायता से लक्ष्य कोशिकाओं की कोशिका कला को घोल कर उसमें छिद्र उत्पन्न करके नष्ट कर दिया जाता है ।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 20
किसी रोगजनक परजीवी या प्रतिजन के किसी जंतु की कोशिका को संक्रमित करने पर विशिष्ट प्रकार की T संवेदी कोशिका उस प्रतिजन के प्रतिजनी निर्धारक स्थलों के संपर्क में आती है। यह कोशिका अब क्लोन बनाने का कार्य प्रारंभ कर देती है। सक्रिय लसीका कोशिकाओं द्वारा लिम्फोकाइन्स पदार्थ मुंक्त किये जाते हैं।

इन लिम्फोकाइन्स को इन्टरल्यूकिन्स भी कहते हैं। ये लिम्फोकाइन्स नियमनकारी प्रोटीन्स होते हैं जो वृहत् भक्षकाणुओं की कोशिका भक्षण क्रिया, इनकी संख्या एवं समूहन क्षमता में वृद्धि करते हैं जिसके फलस्वरूप संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इस प्रतिरक्षा की सहायता से धीरे-धीरे बढ़ने वाले रोगों से सुरक्षा की जाती है जैसे कैंसर, तपेदिक, कुष्ठ, ब्रुसैलोसिर्स, कैन्डीडियासिस, रिकैटशिया आदि।

(2) तरल या संचारी माध्यित प्रतिरक्षा-इस प्रकार की प्रतिरक्षा में शरीर में प्रवेश होने वाले विभिन्न प्रकार के जीवाणुओं, विषाणुओं तथा विषैले पदार्थों के प्रभाव को नष्ट करने हेतु अलग-अलग प्रकार की B-लसीका कोशिका निर्धारित होती हैं। किसी विशिष्ट प्रकार के आक्रमणकारी जीव या विष पदार्थ को नष्ट करने के लिए विशेष प्रकार की लसिकाणु विशिष्ट ग्लोब्यूलिन प्रोटीन उत्पन्न करती है।

ये प्रोटीन रुधि, लसीका तथा ऊतक द्रव्य में से होकर रोगकारी जीवों या विष पदार्थों का नाश करती हैं। ऐसी प्रोटीन्स प्रतिरक्षी ग्लोब्यूलिन्स प्रकृति की होती हैं व प्रतिरक्षी या प्रतिपिंड कहलाती हैं।

चूंकि इन प्रतिपिंडों एवं प्रतिजनों के मध्य विशिष्ट अंतक्रिया सामान्यतः रक्त या लसीका जैसे तरल माध्यम से होती है इसलिए इसे तरल या संचारी माध्यित प्रतिरक्षा कहते हैं। प्रतिरक्षी अणु ( एंटीबॉडी) की संरचना (Structure of Antibody)-यह जटिल ग्लाइको प्रोटीन से मिलकर बना अणु होता है जिसमें चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ दो भारी ( 440 अमीनो अम्ल) तथा दो हल्की श्रृंखला ( 220 अमीनो अम्ल) आपस में डी-सल्फाइड बंध द्वारा मुड़कर Y आकृति बनाती हैं, देखिए नीचे चित्र में। एंटीबॉडी को H2 L2 के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
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यह अणु शीर्ष पर उपस्थित दो बिंदुओं पर एंटीजन (बड़ा और जटिल बाह्य अणु, मुख्य रूप से प्रोटीन जो विशिष्ट प्रतिरक्षा को सक्रिय करता है) से ताला-कुंजी (Lock \& Key) के सिद्धांत के अनुसार जुड़कर एंटीजन एंटीबॉडी कॉम्पलेक्स बनाता है। एंटीबॉडी का पुच्छीय भाग (Tail portion) भारी श्रृंखला से बना होता है, यह स्थिर खण्ड कहलाता है। हमारे शरीर में विभिन्न प्रकार के एंटीबॉडी उत्पन्न किये जाते हैं जिनमें से कुछ निम्न हैं- IgA IgM}, IgE एवं lg।

अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplanation)-जब शरीर के किसी अंग का संतोषजनक रूप से काम करना बंद कर दे अथवा दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण, एकमात्र उपचार प्रत्यारोपण होता है। इन अंगों के स्थान पर किसी उपयुक्त दाता से प्राप्त स्वस्थ अंग को आरोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया को अंग प्रत्यारोपण कहते हैं।

हृदय, नेत्र, वृक्क, यकृत, अग्नाशय, फेफड़े आदि अंगों का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जाता है। अंग प्रत्यारोपण की सफलता शरीर कोशिकाओं पर उपस्थित मुख्य ऊतक संयोज्यता प्रतिजनों के मध्य उचित मिलान (Proper matching) होने पर निर्भर करती है।

मानव में ये प्रतिजनी पदार्थ मानव श्वेताणु प्रतिजन कहलाते हैं। मानव श्वेताणु प्रतिजन जीन के युग्मविकल्पी सहप्रभावी होते हैं। इन जीन्स के उत्पाद दाता व ग्राही के ऊतकों के मध्य ऊतक संयोज्यता का निर्धारण करते हैं। अंग प्रत्यारोपण को कई बार ग्राही द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है क्योंकि ग्राही के प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा प्रत्यारोपित अंग को प्रोटीन्स की पराये या विजातीय की तरह पहचान की जाती है व

ग्राही का प्रतिरक्षा तंत्र उसके विरुद्ध प्रतिपिंड (Antibodies) उत्पन्न करने लगता है और कोशिका माध्यित प्रतिरक्षा द्वारा प्रत्यारोपित अंग को अस्वीकार कर दिया जाता है। ऊतक अस्वीकार्यता को रोकने हेतु ग्राही को प्रतिरक्षी क्रिया दमनक औषधियाँ (Immuno Suppressive drugs) दी जाती हैं। वृक्क, हदय एवं यकृत प्रत्यारोपण के समय साइक्लोस्पोरीन नामक औषधि दी जाती है जो कि T कोशिकाओं की क्रियाशीलता को रोकती है।

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प्रश्न 16.
‘टाइफॉयड’ रोग का निम्नांकित शीर्षकों के अन्तर्गत वर्णन कीजिए-
(i) रोगजनक का नाम
(ii) रोग की पुष्टि हेतु परीक्षण का नाम
(iii) संक्रमण का तरीका
(iv) रोग के चार प्रमुख लक्षण
(v) प्रतिरक्षी अणु की संरचना का चित्र ।
उत्तर:
(i) साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi)
(ii) विडाल परीक्षण ( Widal test)
(iii) यह रोगजनक आमतौर से संदूषित (contaminated) भोजन और पानी द्वारा छोटी आंत में प्रवेश कर जाता है और वहाँ से रुधिर द्वारा शरीर के अंगों में पहुँच जाता है।
(iv) रोग होने पर निरन्तर उच्च ज्वर (39 से 40 सेंटी.) आना, कमजोरी, आमाशय में पीड़ा, कब्ज, सिरदर्द, भूख न लगना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। गंभीर अवस्था में आंत्र में छेद और मृत्यु भी हो सकती है ।
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प्रश्न 17.
‘एड्स’ रोग का निम्नांकित शीर्षकों के अन्तर्गत वर्णन कीजिए-
(i) रोगजनक का नाम
(ii) रोग की पुष्टि हेतु परीक्षण का नाम
(iii) रोग के चार प्रमुख लक्षण
(iv) रोकथाम के चार उपाय
(v) पश्च विषाणु की प्रतिकृति का चित्र |
उत्तर:
(i) यह रोग HIV के कारण होता है। HIV का पूरा नाम Human immuno deficiency Virus विषाणु है।
(ii) एड्स परीक्षण हेतु एलीसा टेस्ट (Elisa test) किया जाता मानव प्रतिरक्षा न्यूनता हैं।
(iii) (क) शरीर में प्रतिरक्षा क्षमता कम हो जाती है।
(ख) संक्रमित व्यक्ति में थकावट, ज्वर, सिरदर्द, खांसी आदि प्रारम्भिक लक्षण होते हैं।
(ग) लिम्फ ग्रन्थियों (Lymph glands) में सूजन आ जाती है।
(घ) सामान्य उपचार के बाद ठीक न होना।

(iv) (क) रुधिर आधान के समय यह जाँच कर लेनी चाहिए कि रुधिर HIV मुक्त हो ।
(ख) लैंगिक सम्बन्ध स्थापित करने में सावधानी रखनी चाहिए, कण्डोम का उपयोग करना चाहिए।
(ग) दाढ़ी बनाने के लिए सदैव अपना ही ब्लैड प्रयुक्त करना चाहिए।
(घ) इंजेक्शन की सुई का प्रयोग एक बार ही करना चाहिए।
(v) पश्चविषाणु की प्रतिकृति का चित्र [नोट- यह चित्र निबन्धात्मक प्रश्न संख्या 6 के उत्तर में देखें ।]

प्रश्न 18.
प्रतिरक्षा ( इम्यूनिटी) से क्या तात्पर्य है ? सहज प्रतिरक्षा के चार रोध कौन-कौन से हैं? समझाइए । प्रतिरक्षी अणु की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
प्रतिरक्षा (Immunity) – शरीर में रोग या रोगाणुओं से लड़कर स्वयं को रोग से सुरक्षित बनाये रखने की क्षमता को प्रतिरक्षा (Immunity) कहते हैं। सहज प्रतिरक्षा में चार प्रकार के रोध होते हैं। जैसे-
(1) कार्यिकीय रोध (फीजियोलॉजिकल बैरियर) – आमाशय में अम्ल, मुँह में लार, आँखों में आँसू, ये सभी रोगाणीय वृद्धि को रोकते हैं।

(2) शारीरिक रोध (फिजिकल बैरियर) – हमारे शरीर पर त्वचा मुख्य रोध है जो सूक्ष्मजीवों के प्रवेश को रोकता है। श्वसन, जठरांत्र (गैस्ट्रोइंटेटाइनल) और जननमूत्र पथ को आस्तरित करने वाली एपिथीलियम का श्लेष्मा आलेप (म्यूकस कोटिंग) भी शरीर में घुसने वाले रोगाणुओं को रोकने में सहायता करता है।

(3) कोशिकीय रोध (सेल्युलर बैरियर) – हमारे शरीर के रक्त में बहुरूप केंद्रक श्वेताणु उदासीनरंजी (पी एम एन एल- न्यूट्रोफिल्स) जैसे कुछ प्रकार के श्वेताणु और एककेंद्रकाणु (मोनासाइट्स) तथा प्राकृतिक, मारक लिंफोसाइट्स के प्रकार एवं ऊतकों में वृहत् भक्षकाणु (मैक्रोफेजेज) रोगाणुओं का भक्षण करते और नष्ट करते हैं।

(4) साइटोकाइन रोध-विषाणु संक्रमित कोशिकाएँ इंटरफेरॉन नामक प्रोटीनों का स्रवण करती हैं जो असंक्रमित कोशिकाओं को और आगे विषाणु संक्रमण से बचाती हैं।

प्रश्न 19.
एड्स शब्द का पूरा नाम लिखिए। इस रोग के कारक वाइरस को किस नाम से जाना जाता है? एड्स रोग के लक्षण व रोकथाम के उपाय बताइये। एड्स वाइरस की प्रतिकृति का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
एड्स शब्द का पूरा नाम उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता संलक्षण (एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिसियेंसी सिन्ड्रोम) है। इस रोग के कारक वाइरस को एच आई वी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस) के नाम से जाना जाता है। एड्स रोग में व्यक्ति की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता समाप्त हो जाती है जिससे वह कई गम्भीर रोगों से ग्रसित हो जाता है।

जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति में निम्न लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं –

  • रोगी को लगातार बुखार आना ।
  • लम्बे समय तक लगातार खाँसी आना ।
  • शरीर का भार कम होना ।
  • लसीका गांठों में सूजन आना।
  • अतिसार के लक्षण उत्पन्न होना ।

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एड्स रोग के रोकथाम के उपाय –

  • एच आई वी संक्रमण से युक्त व्यक्ति के साथ कोई भी यौन सम्पर्क नहीं होना चाहिए।
  • डिस्पोजल ( एक बार प्रयोगी) सूइयों का उपयोग किया जाना चाहिये।
  • जरूरतमंद व्यक्ति के लिए चढ़ाया जाने वाला रक्त, HIV रोगाणु मुक्त होना चाहिए।
  • वेश्यागमन तथा समलैंगिकता से बचना चाहिए।
  • कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए ।
  • एड्स पीड़ित स्त्री को माँ नहीं बनने देना चाहिए।
  • समष्टि में एच आई वी के लिए नियमित जाँच को बढ़ावा देना ।
  • इस रोग के फैलाव को समाज और चिकित्सक वर्ग के सम्मिलित प्रयास से रोका जा सकता है।

पश्चविषाणु (रेट्रोवायरस ) – एड्स एक विषाणु रोग है जो मानव में प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु (एच. आई. वी. ह्यूमन इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस) के कारण होता है। एच. आई. वी. विषाणुओं के उस समूह में आता है जिसे पश्चविषाणु रेट्रोवायरस कहते हैं, जिनमें आर.एन.ए. जीनोम को ढकने वाला आवरण होता है। देखिए आगे चित्र में।
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प्रश्न 20.
(i) प्रतिरक्षा किसे कहते हैं?
(ii) सक्रिय प्रतिरक्षा एवं निष्क्रिय प्रतिरक्षा में अन्तर लिखिए ।
(iii) निष्क्रिय प्रतिरक्षीकरण को समझाइए ।
(iv) मच्छर परपोषी में प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र की अवस्थाओं का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(i) प्रतिरक्षा (Immunity ) – शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रतिरक्षा कहलाती है।
(ii) सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा में अन्तर (Difference between Active and Passive Immunity)-

सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity)निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity)
1. जब परपोषी प्रतिजनों (एंटीजेंस) का सामना करता है तो शरीर में प्रतिरक्षी पैदा होते हैं। प्रतिजन जीवित या मृत रोगाणुओं या अन्य प्रोटीनों के रूप में हो सकते हैं। इस प्रकार की प्रतिरक्षा सक्रिय प्रतिरक्षा कहलाती है।1. जब शरीर की रक्षा के लिए बने बनाए प्रतिरक्षी सीधे ही शरीर को दिए जाते हैं तो यह निष्क्रिय प्रतिरक्षा कहलाती है।
2. सक्रिय प्रतिरक्षा धीमी होती है।2. जबकि निष्क्रिय प्रतिरक्षा तेज होती है।
3. यह अपनी पूरी प्रभावशाली अनुक्रिया प्रदर्शित करने में समय लेती है।3. यह अपनी पूरी प्रभावशाली अनुक्रिया प्रदर्शित करने में समय नहीं लेती है।
4. यह पूरे जीवन कार्य करती है। उदाहरण-मानव में चेचक रोग के प्रति प्रतिरक्षा।4. इसका प्रभाव कुछ समय के लिए होता है। उदाहरण-मानव में सांप के जहर (वेनम), टिटेनस, रैबीज रोग के टीकाकरण द्वारा प्रतिरक्षा।

(iii) निष्क्रिय प्रतिरक्षीकरण (Passive Immunity) – कुछ रोगों से बचाव के लिए प्रयोगशाला में उपयुक्त एण्टीबॉडीज तैयार करके, रोग की सम्भावना से पहले ही शरीर में इंजैक्ट कर दिये जाते हैं। ये कुछ समय के लिए शरीर में सक्रिय बने रहते हैं। यदि इस बीच सम्बन्धित रोगाणु या एण्टीजेन्स शरीर में पहुंच जाते हैं तो ये एण्टीबॉडीज इन्हें नष्ट कर देते हैं। इसे शरीर की निष्क्रिय प्रतिरक्षा कहते हैं ।

यह विधि टिटेनस, पोलियो, हिपैटाइटिस से प्रतिरक्षा में काम आती है। माता के रुधिर परिसंचरण से एण्टीबॉडीज ऑवल या अपरा (placenta ) द्वारा गर्भस्थ शिशु को प्राप्त होती है। नवजात शिशु को माता के दुग्धपान द्वारा निष्क्रिय प्रतिरक्षा मिलती है। इसमें IgA एण्टीबॉडीज होती है।

शिशु जन्म के पश्चात् पहली बार बच्चे को दूध जैसा पदार्थ कोलस्ट्रम (colstrum) इसीलिए दिया जाता है कि उसमें IgA एण्टीबॉडीज प्रचुर मात्रा में उपस्थित होती है। ये शिशु की किसी भी रोग के रोगाणुओं के संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षा सुरक्षा प्रदान करती है। इस प्रकार निष्क्रिय प्रतिरक्षा उपार्जित प्रतिरक्षा होती है।

(iv) मच्छर परपोषी में प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र की अवस्थाओं का नामांकित चित्र-
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 9

(i) कैंसर रोग के कारण लिखिए।
(ii) कैंसर अभिज्ञान को समझाइए ।
(iii) लसीका तंत्र का आरेखीय चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(i) कैंसर रोग के कारण (Causes of Cancer) – इस रोग में कोशिका विभाजन अनियन्त्रित, अनियमित तथा तीव्र गति से होता है। ये कोशिकाएँ न तो क्रियाकारी (functional) होती हैं और न इनका विभेदीकरण (differentiation) होता है। ये कोशिकाएँ अन्य कोशिकाओं को पोषक पदार्थों को ग्रहण नहीं करने देतीं, जिससे उनकी मृत्यु होने लगती है। इस प्रकार के तीव्र कोशिका विभाजन से उस स्थान विशेष पर गाँठ या अर्बुद (tumour) बन जाती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

शरीर में कोशिका वृद्धि तथा विभेदन अत्यन्त नियमित एवं नियन्त्रित क्रिया विधि के द्वारा होता है। प्रसामान्य कोशिकाओं में यह गुण जिसे संस्पर्श संदमन (contact inhibition) कहते हैं, दूसरी कोशिकाओं की अनियन्त्रित वृद्धि को संदमित करता है। कैंसर कोशिकाओं में इस प्रकार का संदमन समाप्त हो जाता है।

कैंसर का कारण कोशिकाओं में उपस्थित ऑन्कोजीन्स (onchogenes) का सक्रिय होना माना जाता है। यद्यपि ऑन्कोजीन्स सभी कोशिकाओं में होती हैं, किन्तु सामान्यतः ये निष्क्रिय होती हैं। किसी विशेष कारण से वे सक्रिय हो सकती हैं। इन कारणों में क्रोमियम, निकिल, एस्बेस्टॉस, धुआँ, कोलतार, तम्बाकू अथवा कुछ विषाणु आदि कारक हो सकते हैं।

(ii) कैंसर का अभिज्ञान (Cancer detection) – कैंसर का अभिज्ञान ऊतकों का जीवतिपरीक्षा (Biopsy) और ऊतक विकृति (Histopathological) अध्ययनों तथा बढ़ती कोशिका गणना के लिए रुधिर (Blood) तथा अस्थिमज्जा (Bonemarro) पर आधारित है। जैसाकि अधिश्वेतरक्तता (Lukemias) के मामले में होता है जीवूतिपरीक्षा (biopsy) में जिस ऊतक पर शंका होती है, उसका एक टुकड़ा लेकर पतले अनुच्छेदों (Sections) में काटकर अभिरंजित करके रोगविज्ञानी (Pathologist) परीक्षण किया जाता है।

आन्तरिक अंगों (Internal organs) के कैंसर का पता लगाने के लिए विकिरण चित्रण (Radiography), अभिकलित टोमोग्राफी (Computed Tomography) एवं चुम्बकीय अनुनादी इमेजिंग (MRI- Magnetic resonance imaging) तकनीकें बहुत उपयोगी हैं। अभिकलित टोमोग्राफी एक्स किरणों का उपयोग करके किसी अंग के भीतरी भागों की त्रिविम प्रतिबिंब (Three-dimensional image) बनाती है।

जीवित ऊतक में वैकृतिक (Pathological) और कार्यिकीय (Physiological) परिवर्तनों का सही पता लगाने के लिए एम.आर.आई. में तेज चुम्बकीय क्षेत्रों और अनायनकारी विकिरणों का उपयोग किया जाता है। कुछ कैंसरों का पता लगाने के लिए कैंसर विशिष्ट प्रतिजनों के विरुद्ध प्रतिरक्षियों (Antibodies) का भी उपयोग किया जाता है।

कुछ कैंसरों के प्रति वंशागत सुग्राहिता वाले व्यक्तियों में जीनों का पता लगाने के लिए आण्विक (Molecular) जैविकी की तकनीकों को काम में लाया जाता है। ऐसे जीनों की पहचान, जो किसी व्यक्ति को विशेष कैंसरों के प्रति प्रवृत्त (Predispose) करते हैं, कैंसर की रोकथाम के लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को कुछ ऐसे विशेष कैंसरजनों से, जिनके प्रति वे सुग्राही हैं, जैसे फुफ्फुस कैंसर में तंबाकू के धुएँ से बचने की सलाह देनी चाहिये।

(iii) लसीका तंत्र का आरेखीय चित्र-
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 10

प्रश्न 21.
पश्च विषाणु की प्रतिकृति का चित्र बनाइए। एड्स रोगजनक का पूरा नाम लिखिए। इसका संकरण कैसे होता है? मानव शरीर में एड्स के लक्षणों को समझाइए।
उत्तर:
पश्चविषाणु (रेट्रोवायरस ) – एड्स एक विषाणु रोग है जो मानव में प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु (एच. आई. वी. ह्यूमन इम्यूनो डिफिसिएंसी वायरस) के कारण होता है। एच. आई. वी. विषाणुओं के उस समूह में आता है जिसे पश्चविषाणु रेट्रोवायरस कहते हैं, जिनमें आर.एन.ए. जीनोम को ढकने वाला आवरण होता है। देखिए आगे चित्र में।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 5
एड्स रोगजनक का नाम-
HIV =  Human Immuno Deficiency Virus प्रतिरक्षा न्यूनता विषाणु
रोग का संचरण – एचआईवी सामान्यतः संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य एवं योनि स्त्रावों में उपस्थित रहते हैं। अतः इनका संचरण ऐसी क्रियाओं के माध्यम से होता है जिनसे ये द्रव स्वस्थ व्यक्ति के संपर्क में आते हैं। सामान्यतः रोग का संचरण लैंगिक तथा रक्त संपर्क से होता है। एचआईवी का संचरण निम्न माध्यमों द्वारा होता है –

  • समलैंगिक व्यक्तियों के बीच गुदा मैथुन क्रिया द्वारा।
  • संक्रमित व्यक्ति के रक्त आधान।
  • एक ही सुई द्वारा नशीले पदार्थों का उपयोग।
  • माता से शिशु में प्लेसेन्टा द्वारा।
  • संक्रमित व्यक्ति के मुँह में घाव होता है अतः ऐसे व्यक्ति का किस (Kiss ) लेने से HIV का संचरण हो जाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति से यौन संपर्क।

एड्स एक संक्रामक रोग है परन्तु यह छूत का रोग नहीं है। एड्स ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाने, उसके कपड़े उपयोग में लाने, शुष्क चुम्बन, बर्तनों के उपयोग से, टॉयलेट सीट के माध्यम से, पूर्ण निर्जर्मीकृत सूइयों का प्रयोग कर रक्ताधान तथा रोगी की देखभाल से एड्स का संक्रमण नहीं होता है।

मानव शरीर में एड्स के लक्षण- एड्स वास्तव में कोई एक रोग नहीं है किंतु एक ऐसी दशा है जिसमें एड्स विषाणु संक्रमित व्यक्ति की रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता को समाप्त कर देता है। जिससे वह कई रोगों से ग्रसित हो जाता है जिसके फलस्वरूप अग्र लक्षण प्रकट होते हैं –

  • बार-बार बुखार आना
  • वजन में कमी आना
  • लसीका गांठों का फूलना
  • लंबे समय तक लगातार खाँसी होना
  • अतिसार के लक्षण उत्पन्न होना
  • त्वचा पर कैंसर के लक्षण।

अथवा
टाइफाइड के रोगजनक का नाम दीजिए। मलेरिया परजीवी के जीवन चक्र को नामांकित चित्र की सहायता से समझाइए । उत्तर- टाइफाइड ज्वर का रोगजनक साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) नामक जीवाणु है। मलेरिया परजीवी या प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र – जब संक्रमित मादा एनोफेलीज मनुष्य को काटती है तो प्लाज्मोडियम जीवाणुज अथवा स्पोरोजॉइट्स (Sporozoites) के रूप में मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। स्पोरोजॉइट्स संक्रामक रूप है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग

प्रारंभ में परजीवी यकृत में अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं और फिर लाल रुधिर कणिकाओं (RBC) पर आक्रमण करते हैं जिसके फलस्वरूप लाल रुधिर कणिकाएँ फट जाती हैं। RBC के फटने के साथ ही एक विषैला पदार्थ भी निकलता है जिसे हीमोजोइन (Haemozoin) कहते हैं। इस पदार्थ के रुधिर से मुक्त होते ही यह मनुष्य के रुधिर के प्लाज्मा में घुल जाता है तथा इसकी वजह से ही मनुष्य को जाड़ा व कंपकंपी देकर मलेरिया बुखार चढ़ने लगता है।

जब मादा एनोफेलीज मच्छर किसी संक्रमित मनुष्य को काटती है। तब परजीवी उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उनका आगे का परिवर्धन मादा एनोफेलीज में होता है। ये परजीवी मादा एनोफेलीज में बहु संख्यात्मक रूप से बढ़ते रहते हैं और स्पोरोजोइट्स (Sporozoites) बन जाते हैं जो मादा एनोफेलीज की लार ग्रंथियों (Salivary glands) में जमा हो जाते हैं।

अब यह मादा एनोफेलीज किसी स्वस्थ मनुष्य को काटती है तो स्पोरोजोइट्स उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं एवं मनुष्य को संक्रमित कर देते हैं। इस प्रकार मलेरिया परजीवी अर्थात् प्लाज्मोडियम अपना जीवन चक्र पूरा करता है। इस प्रकार प्लाज्मोडियम को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए दो परपोषियों की आवश्यकता होती है जिन्हें मनुष्य एवं मादा एनोफेलीज कहते हैं। मनुष्य प्राथमिक एवं मादा एनोफेलीज द्वितीयक परपोषी होते हैं। मादा एनोफेलीज रोगवाहक ( Transmitting agent ) का कार्य करती है।
(चित्र के लिए अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नों के निबन्धात्मक प्रश्न संख्या 10 को देखिए।)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. प्लाज्मोडियम की संक्रामक अवस्था जो मानव शरीर में प्रवेश करती है- (NEET-2020)
(अ) जीवाणुज (स्पोरोजॉइट)
(स) नर युग्मकजनक
(ब) मादा युग्मकजनक
(द) पोषाणु
उत्तर:
(अ) जीवाणुज (स्पोरोजॉइट)

2. निम्न रोगों को उनके पैदा करने वाले जीवों के साथ मिलान कर सही विकल्प का चयन करो। (NEET-2020)

स्तम्भ-Iस्तम्भ-II
(1) टाइफाइड(i) वुचैरिया
(2) न्यूमोनिया(ii) प्लाज्मोडियम
(3) फाइलेरिएसिस(iii) साल्मोनेला
(4) मलेरिया(iv) हीमोफिलस
कूट :(1)(2)(3)(4)
(अ)(iii)(iv)(i)(ii)
(ब)(ii)(i)(iii)(iv)
(स)(iv)(i)(ii)(iii)
(द)(i)(iii)(ii)(iv)

उत्तर:

(ब)(ii)(i)(iii)(iv)

3. प्रतिरक्षा के संदर्भ में गलत कथन को पहचानिये- (NEET-2020)
(अ) जब बने बनाये प्रतिरक्षी प्रत्यक्ष रूप से दिए जाते हैं, इसे ‘निष्क्रिय प्रतिरक्षा’ कहते हैं।
(ब) सक्रिय प्रतिरक्षा जल्दी होती है और पूर्ण प्रतिक्रिया देती है।
(स) श्रूण माता से कुछ प्रतिरक्षी प्राप्त करता है यह निष्क्रिय प्रतिरक्षा का उदाहरण है
(द) जब परपोषी का शरीर (जीवित अथवा मृत) प्रतिजन के सम्पर्क में आता है और उसके शरीर में प्रतिरक्षी उत्पन्न होते हैं। इसे सक्रिय प्रतिरक्षा कहते हैं।
उत्तर:
(ब) सक्रिय प्रतिरक्षा जल्दी होती है और पूर्ण प्रतिक्रिया देती है।

4. दुग्ध स्रावण के आरम्भिक दिनों में माता द्वारा स्रावित पीला तरल कोलोस्ट्रेम नवजात में प्रतिरक्षा प्रदान करने के लिए अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि इसमें होती है- (NEET-2019)
(अ) इम्युनोग्लोबुलिन A
(ब) प्राकृतिक मारक कोशिकाएँ
(स) एक केन्द्रकाणु
(द) भक्षाणु
उत्तर:
(अ) इम्युनोग्लोबुलिन A

5. ‘हेरोइन’ नामक ड्रग कैसे संश्लेषित की जाती है? (Kerala PMT-2009, NEET-2019)
(अ) मार्फिन के नाइट्रीकरण से
(ब) मार्फिन के मिथाइलीकरण से
(स) मार्फिन के एसीटाइलीकरण से
(द) मार्फिन के ग्लाइकोसीकरण से
उत्तर:
(स) मार्फिन के एसीटाइलीकरण से

6. निम्नलिखित में से कौनसा स्वप्रतिरक्षा रोग नहीं है- (NEET-2018)
(अ) एल्जाइमर
(ब) रूमेटी संधिशोथ
(स) सोरिऐसिस
(द) विटिलिगो
उत्तर:
(अ) एल्जाइमर

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7. “स्मैक” नामक ड्रगग पोस्त पौधे के किस भाग से प्रास होती है- (NEET-2018)
(अ) जड़ों से
(ब) लैटेक्स से
(स) फूलों से
(द) पत्तियों से
उत्तर:
(ब) लैटेक्स से

8. ऊतकों/अंगों का प्रतिरोपण अधिकतर रोगी के शरीर द्वारा अस्वीकृति के कारण असफल हो जाता है। इस प्रकार के निराकरण के लिए कौनसी प्रतिरक्षी अनुक्रिया उत्तरदायी है? (NEET-2017)
(अ) स्व-प्रतिरक्षा अनुक्रिया
(ब) कोशिका-मध्यित प्रतिरक्षा अनुक्रिया
(स) हॉर्मोनल प्रतिरक्षा अनुक्रिया
(द) कार्यिकीय प्रतिरक्षा अनुक्रिया
उत्तर:
(ब) कोशिका-मध्यित प्रतिरक्षा अनुक्रिया

9. रोगों का निम्नलिखित में से कौनसा समूह जीवाणुओं द्वारा संक्रमित होता है? (NEET II-2016)
(अ) टिटेनस और गलसुआ
(ब) हर्पीज और इन्फ्लुएंजा
(स) हैजा और टिटेनस
(द) टाइफाइड और चेचक (स्मॉलॉॉक्स)
उत्तर:
(स) हैजा और टिटेनस

10. यदि आप किसी व्यक्ति में प्रतिरक्षियों की गंभीर कमी का अनुमान लगा रहे हैं तो आप पुष्टि के निम्नलिखित में से किससे प्रमाण प्रात्त करेंगे? (NEET-2015)
(अ) सीरम एल्ब्यूमिन
(ब) हीमोसाइट
(स) सीरम ग्लोब्यूलिन
(द) प्लाज्मा में फाइब्रोनोजन
उत्तर:
(स) सीरम ग्लोब्यूलिन

11. निम्नलिखित में से कौनसा रोग प्रोटोजोआ के कारण होता है? (NEET-2015)
(अ) इन्फ्लूएंजा
(ब) बैबसिओसिस
(स) ब्लास्टोमाइकोसिस
(द) सिफलिस
उत्तर:
(ब) बैबसिओसिस

12. वह कौनसा विशेष प्रकार का मादक द्रव्य है जो उस पौधे से प्रास होता है जिसकी एक पुष्पित शाखा नीचे दिखाई गई है? (NEET-2014)
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 11
(अ) हेलुसिनोजन
(ब) अवनमक
(स) उद्दीपक
(द) दर्द-निवारक
उत्तर:
(अ) हेलुसिनोजन

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13. एस्केरिस का संक्रमण सामान्यतः किसके कारण होता है? (NEET-2013)
(अ) एस्केरिस के अण्डों से युक्त जल के पीने के कारण
(ब) अपूर्ण रूप से पकाए गये सूअर के मांस को खाने के कारण
(स) सेट्सी मक्खी द्वारा
(द) मच्छर के काटने से
उत्तर:
(अ) एस्केरिस के अण्डों से युक्त जल के पीने के कारण

14. मानव शरीर में कोशिका-मध्यित प्रतिरक्षा किसके द्वारा कार्यान्वित होती है? (NEET-2013)
(अ) T – लिम्फोसाइट्स द्वारा
(ब) B – लिम्फोसाइट्स द्वारा
(स) श्रोम्बोसाइट्स द्वारा
(द) रक्ताणुओं द्वारा
उत्तर:
(अ) T – लिम्फोसाइट्स द्वारा

15. यकृत (जिगर) का सिरोसिस रोग किसके लगातार सेवन से होता है? (NEET-2012)
(अ) अफीम
(ब) एल्कोहॉल
(स) तम्बाकू (चबाना)
(द) कोकीन
उत्तर:
(ब) एल्कोहॉल

16. नीचे दिखाये जा रहे अणुओं (A) तथा (B) को पहचानिये तथा उनके स्रोत एवं उपयोग के विषय में सही विकल्प चुनिये- (Mains-2012)
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 8 मानव स्वास्थ्य तथा रोग - 12

विकल्प :आद्नस्रोतउपयोग
(अ)(A) कोकीनएरिथ्रोजायलम कोकाडोपैमीन के परिवहन को तीव्रतर बना देती है।
(ब)(B) हेरोइनकैनेबिस सैटाइवाशामक तथा देह कार्यों को धीमा करती है।
(स)(C) कैनेबिनॉइडऐट्रेपा बेलाडोनाविभ्रम पैदा करता है।
(द)(D) मॉर्फीनपैपेवर सोम्नीफेरमशामक तथा पीड़ानाशक

उत्तर:

(द)(D) मॉर्फीनपैपेवर सोम्नीफेरमशामक तथा पीड़ानाशक

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17. विडाल टेस्ट द्वारा किसकी पहचान की जाती है- (NEET-2012)
(अ) मलेरिया
(ब) मधुमेह
(स) HIV/AIDS
(द) टाइफाइड ज्वर
उत्तर:
(द) टाइफाइड ज्वर

18. सामान्य जुकाम प्रतिजैविकों द्वारा सही नहीं होती है क्योंकि यह- (NEET-2011)
(अ) संक्रमण रोग नहीं है
(ब) विषाणु द्वारा होती है
(स) ग्राम – धनात्मक जीवाणु द्वारा होता है
(द) ग्राम – ऋणात्मक जीवाणुओं द्वारा होता है
उत्तर:
(ब) विषाणु द्वारा होती है

19. एक रोगी के एक्वायर्ड इम्यूनो डेफीशिएन्सी सिण्डूरम से पीड़ित होने का संदेह है। इसकी पुष्टि हेतु आप किस नैदानिक तकनीक का सुझाव देंगे? CBSE, 2011)
(अ) MRI
(ब) अल्ट्रासाठण्ड
(स) विडाल
(द) ELISA
उत्तर:
(द) ELISA

20. मलेरिया परजीवी के स्पोरोजॉएट (Sporozoites) हेतु आप कहाँ देखेंगे? (CBSE, 2011)
(अ) मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति की लाल रुधिर कणिकाओं में
(ब) संक्रमित मनुष्य की प्लीहा में
(स) ताजे निर्मोचित मादा एनॉफिलीज मच्छर की लार ग्रंथियों में
(द) संक्रमित मादा एनॉफिलीज मच्छर की लार में
उत्तर:
(द) संक्रमित मादा एनॉफिलीज मच्छर की लार में

21. निम्नलिखित में से किसके निदान हेतु विडाल परीक्षण का प्रयोग किया जाता है? (CBSE, 2010)
(अ) मलेरिया
(ब) न्यूमोनिया
(स) ट्यूबरकुलोसिस
(द) टायफॉइड
उत्तर:
(द) टायफॉइड

22. एड्स के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही है? (CBSE, 2010)
(अ) एच आई वी किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन करने से संचारित हो सकता है।
(ब) ड्राग्स के आदी व्यक्ति एच आई वी संक्रमण के प्रति सबसे कम सुग्राह्य होते हैं।
(स) उचित देखभाल तथा पोषण के द्वारा एड्स के रोगियों का पूर्ण रूप से शत प्रतिशत उपचार किया जा सकता है।
(द) रोगकारी एच आई वी रिट्रोविषाणु सहायक टीलिम्फोसाइटस में प्रवेश कर जाता है तथा उनकी संख्या को घटा देता है।
उत्तर:
(द) रोगकारी एच आई वी रिट्रोविषाणु सहायक टीलिम्फोसाइटस में प्रवेश कर जाता है तथा उनकी संख्या को घटा देता है।

23. निम्नलिखित कथनों में से सही कथन का चयन कीजिए- (CBSE, 2010)
(अ) जब अपराधियों को शमनकारक औषधियाँ दी जाती हैं तो वे सत्य बोलने लगते हैं।
(ब) ऐसे व्यक्ति जिनकी शल्य-चिकित्सा की गई हो, उन्हें दर्द-निवारक के रूप में प्रायः मॉर्फीन दी जाती है।
(स) तम्बाकू चबाने से रक्त दाब तथा हुदय दर कम हो जाते हैं।
(द) शल्य चिकित्सा के उपरांत रोगी को कोकेन दिया जाता है, क्योंकि यह स्वास्थ्य की पुनः प्राप्ति (Recovery) को प्रेरित करता है।
उत्तर:
(ब) ऐसे व्यक्ति जिनकी शल्य-चिकित्सा की गई हो, उन्हें दर्द-निवारक के रूप में प्रायः मॉर्फीन दी जाती है।

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24. ट्यूबरकुलोसिस (Tuberculosis) के लिए कौनसा टीका प्रयुक्त किया जाता है? (AFMC, 2010)
(अ) BCG
(ब) DPT
(स) TT
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) BCG

25. मनुष्य में दाद (Ringworm) नामक रोग उत्पन्न होता है- (CBSE, 2010)
(अ) जीवाणु द्वारा
(ब) कवक द्वारा
(स) निमेटोड द्वारा
(द) विषाणु द्वारा
उत्तर:
(ब) कवक द्वारा

26. निम्नलिखित में से किसमें प्रति हिस्टेमाइन तथा स्टीरॉएड का प्रयोग तुरन्त आराम देता है? (CBSE, 2009)
(अ) एलर्जी
(ब) मतली
(स) खाँसी
(द) सिरदर्द
उत्तर:
(अ) एलर्जी

27. एण्ट अमीबा हिस्टोलाइटिका की संक्रामक अवस्था होती है- (RPMT, 2009)
(अ) ट्राफोज्वॉइट अवस्था
(ब) द्विकेन्द्रकीय पुटी अवस्था
(स) चतुष्केन्द्रकीय पुटी अवस्था
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) चतुष्केन्द्रकीय पुटी अवस्था

28. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म विषाणु जनित रोगों को प्रदर्शित करता है? (CBSE, 2009)
(अ) दाद एड्स
(ब) सामान्य शीत, एड्स
(स) अतिसार, सामान्य शीत
(द) टायफॉइड ट्यूबरकुलोसिस
उत्तर:
(ब) सामान्य शीत, एड्स

29. शिशु को कोलोस्ट्रम (colostrum) देने पर कौनसी प्रतिरक्षा प्रणाली उत्पन्न होगी- (AMU, 2009)
(अ) ऑटो प्रतिरक्षा
(ब) अक्रिय प्रतिरक्षा
(स) सक्रिय प्रतिरक्षा
(द) स्वाभाविक प्रतिरक्षा
उत्तर:
(ब) अक्रिय प्रतिरक्षा

30. निम्नलिखित में से कौनसा कथन सत्य है? (CBSE, 2009)
(अ) शल्य चिकित्सा वाले रोगियों को दर्द निवारण हेतु कैनेबिनाएँड दिये जाते हैं।
(ब) बेनाइन ट्यूमर, मेटास्टेसिस दर्शाते हैं।
(स) हेरोइन शरीर क्रियाओं में वृद्धि करती है।
(द) मैलिग्नेण्ट ट्यूमर मेटास्टेसिस प्रदर्शित करते हैं।
उत्तर:
(द) मैलिग्नेण्ट ट्यूमर मेटास्टेसिस प्रदर्शित करते हैं।

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31. एच.आई ,वी. घटाता है- (BHU 2000, 2008)
(अ) केवल T- सहायक कोशिकाओं को
(ब) सभी T- कोशिकाओं को
(स) केवल B-कोशिकाओं को
(द) दोनों B एवं T- कोशिकाओं को
उत्तर:
(अ) केवल T- सहायक कोशिकाओं को

32. मनुष्य में कार्डियोवेस्कुलर प्रभाव को बढ़ाने में उपयोगी ड्रग है- (J\&KCET, 2008)
(अ) कोकीन
(ब) बार्बीट्यूरेट
(स) बेजोडायजेपिन
(द) इन्सुलिन
उत्तर:
(अ) कोकीन

33. मुँह की लार तथा आँखों से निकले आँसू, सहज प्रतिरक्षा के अन्तर्गत किस रोधी प्रारूप के वर्ग में आते हैं? (NEET-2008)
(अ) कार्यिकी रोधी
(ब) भौतिक रोधी
(स) साइटोकाइनिन रोधी
(द) कोशिकीय रोधी
उत्तर:
(अ) कार्यिकी रोधी

34. किसी विशिष्ट मनोवृत्ति औषधि के विषय में निम्नलिखित में से कौनसा एक कथन सही है? (NEET-2008)
(अ) मार्फीन से भ्रांतियाँ पैदा होती हैं एवं गलत भावनाएँ आने लगती हैं
(ब) बार्बिट्यूरेटा से विश्रांति तथा अस्थाई सुख-बोध पैदा होता है
(स) भांग से अनुबोध अवगम तथा विभ्रम पैदा होता है
(द) अफीम से तंत्रिका तंत्र उत्तेजित होता है तथा विभ्रम पैदा होता है
उत्तर:
(स) भांग से अनुबोध अवगम तथा विभ्रम पैदा होता है

35. कैंसर की कोशिकाएं आसानी से विकिरणों द्वारा नष्ट की जा सकती हैं, इसका कारण है- (RPMT, 2007)
(अ) तीव्र कोशिका विभाजन
(ब) पोषण की कमी
(स) तेज परिवर्तन
(द) ऑक्सीजन की कमी
उत्तर:
(स) तेज परिवर्तन

36. यदि आपको किसी व्यक्ति में प्रतिपिण्डों (एण्टीबॉडीज) के बड़े अभाव का शक है तो आप निम्नलिखित में से किसका पुष्टीकरण प्रमाण जानना चाहेंगे? (CBSE, 2007)
(अ) सीरम एल्बुमिनो का
(ब) सीरम ग्लोब्यूलिनो का
(स) प्लाज्मा में फाइब्रिनोजेन का
(द) रुधिराणुओं का
उत्तर:
(ब) सीरम ग्लोब्यूलिनो का

37. उपार्जित प्रतिरक्षा की विशेषता है- (DPMT, 2007)
(अ) एण्टीजन की विशेषता
(ब) विभेदन करना (सेल्फ तथा नॉन-सेल्फ एण्टीजन)
(स) स्मृति को बनाये रखना
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

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38. कुछ खास ऋतुओं में बढ़ते जाते दमा रोग का सम्बन्ध किससे होता है? (NEET-2007)
(अ) घटता तापमान
(ब) गर्म एवं नमी वाला पर्यावरण
(स) टिन के डिब्बों में परिलक्षित फलों का खाना
(द) ऋतुपरक पराग का सांस द्वारा भीतर जाना
उत्तर:
(द) ऋतुपरक पराग का सांस द्वारा भीतर जाना

39. हमारे शरीर में एंटीबॉडीज (प्रतिपिण्ड) किसके सम्मिश्र होते हैं? (NEET-2006)
(अ) लाइपोप्रोटीन्स
(ब) स्टेरॉयड्स
(स) प्रोस्टेलैडिन्स
(द) ग्लाइकोप्रोटीन्स
उत्तर:
(द) ग्लाइकोप्रोटीन्स

40. एस्केरिस पाया जाता है- (RPMT, 2004)
(अ) देहगुहा में
(ब) लिम्फनोड में
(स) ऊतक में
(द) आहार नाल में
उत्तर:
(द) आहार नाल में

41. ह्यूमोरल प्रतिरक्षा का कारण होता है। (Orrisa PMT, 2004)
(अ) B – लिम्फोसाइट्स
(ब) T- लिम्फोसाइट्स
(स) L – {लिम्फोसाइट्स}
(द) P-लिम्फोसाइट्स
उत्तर:
(अ) B – लिम्फोसाइट्स

42. प्लाज्मोडियम की मानव को संक्रमित करने वाली अवस्था है- (RPMT, 2004)
(अ) स्पोरोज्वॉइट
(ब) ट्रोफोज्वॉइट
(स) गैमीटोसाइट्स
(द) मीरोज्वाइट
उत्तर:
(अ) स्पोरोज्वॉइट

43. T – कोशिकायें एक प्रकार की लिम्फोसाइट्स होती हैं जो कि कोशिकीय प्रतिरक्षा उत्पन्न करती हैं। ये कोशिकाएँ किससे उत्पन्न होती हैं- (MP PMT, 2003)
(अ) थाइमस
(ब) यकृत
(स) प्लीहा
(द) रक्त वाहिनियों की एण्डोथीलियम
उत्तर:
(अ) थाइमस

44. निम्न में से कौन एस्केरिस संक्रमण हेतु प्रभावी है- (RPMT, 2003)
(अ) क्लोरोक्वीन
(ब) सिनकोना
(स) कोल्चीकम
(द) चीनोपोडियम का तेल
उत्तर:
(द) चीनोपोडियम का तेल

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45. एड्स दिवस कब होता है- (RPMT, 2003)
(अ) 1 जून
(ब) 1 मई
(स) 1 दिसम्बर
(द) 20 दिसम्बर
उत्तर:
(स) 1 दिसम्बर

46. हीमोज्वॉइन क्या है? (RPMT, 2002)
(अ) प्लाज्मोडियम की ट्राफोज्वाइट द्वारा रुधिर का अपचयित भाग
(ब) एनोफिलीज का रुधिर वर्णक
(स) मीरोज्वाइट में विखण्डित रुधिर
(द) संक्रमित मनुष्य के रुधिर में अणु
उत्तर:
(अ) प्लाज्मोडियम की ट्राफोज्वाइट द्वारा रुधिर का अपचयित भाग

47. एल.एस.डी. है- (NEET-2001)
(अ) विभ्रामक
(ब) सेडेटिव
(स) उत्तेजनात्मक
(द) ट्रांसक्वेलाइजर
उत्तर:
(अ) विभ्रामक

48. कौनसा सबसे अधिक संक्रमणकारी रोग है? (NEET-2001)
(अ) हीपेटाइटिस-B
(ब) एड्स
(स) खाँसी तथा जुकाम
(द) मलेरिया
उत्तर:
(अ) हीपेटाइटिस-B

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49. ‘सक्रिय इम्यूनिटी’ का अर्थ है- (CBSE PMT, 1999)
(अ) रोग के पश्चात् उत्पन्न प्रतिरोध
(ब) रोग के पूर्व उत्पन्न प्रतिरोध
(स) हृदय गति दर में प्रतिरोध
(द) रक्त मात्रा में वृद्धि
उत्तर:
(अ) रोग के पश्चात् उत्पन्न प्रतिरोध

50. कैंसर सम्बन्धित है-
(अ) ऊतकों की अनियंत्रित वृद्धि से
(ब) नॉन-मेलिगनेन्ट ट्यूमर से
(स) ऊतकों के नियंत्रित विभाजन से
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) ऊतकों की अनियंत्रित वृद्धि से

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. प्रथम संक्रमण श्रेणी का कौनसा तत्व उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है?
(अ) Ni
(ब) Fe
(स) Mn
(द) Cr
उत्तर:
(स) Mn

2. निम्नलिखित में से कौनसे आयन का जलीय विलयन रंगीन नहीं होगा?
(अ) Mn2+
(ब) Fe2+
(स) Zn2+
(द) Cr2+
उत्तर:
(स) Zn2+

3. निम्नलिखित में से किस आयन का चुम्बकीय आघूर्ण अधिकतम होता है?
(अ) V3+
(ब) Fe3+
(स) Co3+
(द) Cr3+
उत्तर:
(ब) Fe3+

4. संक्रमण धातुओं का युग्म है-
(अ) Lu, Cu
(ब) Lu, Zn
(स) Cu, Zn
(द) Au, Cu
उत्तर:
(द) Au, Cu

5. निम्नलिखित में से कौनसा तत्व +8 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है?
(अ) Pt
(ब) Mn
(स) Os
(द) Cu
उत्तर:
(स) Os

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

6. किसी संक्रमण तत्व की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था किसके बराबर हो सकती है?
(अ) ns इलेक्ट्रॉन
(ब) (n-1)d इलेक्ट्रॉन
(स) (n-1)d + ns इलेक्ट्रॉन
(द) (n+1) d इलेक्ट्रॉन
उत्तर:
(स) (n-1)d + ns इलेक्ट्रॉन

7. निम्नलिखित में से कौनसे आयन में अनुचुम्बकीय गुण सर्वाधिक होगा?
(अ) Cu2+
(ब) Mn2+
(स) Zn2+
(द) Ti+2
उत्तर:
(ब) Mn2+

8. d खण्ड के अन्य तत्वों की भाँति Zn परिवर्तनशील संयोजकता नहीं दर्शाता, क्योंकि-
(अ) यह नर्म धातु है।
(ब) इसमें d कक्षक पूर्ण भरा है।
(स) इसका गलनांक कम है।
(द) इसके बाह्यतम कक्षक में दो इलेक्ट्रॉन हैं।
उत्तर:
(ब) इसमें d कक्षक पूर्ण भरा है।

9. निम्नलिखित में से कौनसा तत्व केवल एक ही प्रकार की ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है-
(अ) Mn
(ब) Zn
(स) Cr
(द) Ni
उत्तर:
(ब) Zn

10. संक्रमण धातुओ के लवण सामान्यतः रंगीन होते हैं, क्योंकि-
(अ) इनमें पूर्ण भरे d कक्षक होते हैं।
(ब) ये पराबेंगनी प्रकाश को अवशोष्तित करते हैं।
(स) इनमें d-d संक्रमण होता है।
(द) ये विद्युत चुम्बक्जीय विकिएगों से ऊर्जा का अवशोषण करते हैं।
उत्तर:
(स) इनमें d-d संक्रमण होता है।

11. कौनसे युग्म की धातुओं का आकार लगभग समान है?
(अ) Cd, Hg
(ब) Cu, Zn
(स) Sc, Ti
(द) Cr, Mo
उत्तर:
(अ) Cd, Hg

12. लैन्थेनॉयड श्रेणी के तत्वों की सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था कौनसी है?
(अ) +1
(ब) +3
(स) +2
(द) +5
उत्तर:
(ब) +3

13. K2Cr2O7 के जलीय विलयन में SO2 गैस प्रवाहित करने पर Cr की ऑक्सीकरण अवस्था में क्या परिवर्तन होगा?
(अ) +3 से +1
(ब) +6 से +3
(स) +3 से +6
(द) +6 से +4
उत्तर:
(ब) +6 से +3

14. निम्नलिखित में से किस धातु का घनत्व अधिकतम होता है?
(अ) Pd
(ब) Hg
(स) Os
(द) Pt
उत्तर:
(स) Os

15. निम्नलिखित में से कौनसा ऑक्साइड उभयधर्मी है?
(अ) CoO
(ब) ZnO
(स) FeO
(द) CrO2
उत्तर:
(ब) ZnO

16. निम्नलिखित में से कौनसे आयन प्रतिचुंककीय हैं?
(अ) Cu2+
(ब) Ti3+, Co2+
(स) Ni2+, Mn2+
(द) Sc3+
उत्तर:
(द) Sc3+

17. निम्नलिखित में से आयनों के किस युग्म में निम्न (Lower) ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थायी है?
(अ) Tl+2 , Tl3+
(ब) Cu+1, Cu2+
(स) Cr2+, Cr3+
(द) Mn+2, Mn+4
उत्तर:
(द) Mn+2, Mn+4

18. लैन्थेनॉयड संकुचन के कारण होने वाला प्रभाव है-
(अ) Zr तथा Nb की समान ऑक्सीकरण अवस्था
(ब) Zr तथा Hf का लगभग समान परमाणु आकार
(स) Zr तथा Y का लगभग समान परमाणु आकार
(द) Zr तथा Zn की समान ऑक्सीकरण अवस्था
उत्तर:
(ब) Zr तथा Hf का लगभग समान परमाणु आकार

19. La3+ (परमाणु क्रमांक = 57) की त्रिज्या 1.06 Å है तो Lu3+ (परमाणु क्रमांक =Lu) की त्रिज्या का मान (लगभग) होगा-
(अ) 1.40 Å
(ब) 1.06 Å
(स) 0.85 Å
(द) 1.60 Å
उत्तर:
(स) 0.85 Å

20. Ce+4 के स्थायित्व का कारण है-
(अ) 4f7 विन्यास
(ब) 4f0 विन्यास
(स) 4f14
(द) 4f76s2
उत्तर:
(ब) 4f0 विन्यास

21. f-ब्लॉक के तत्वों के लिए कौनसा कथन सत्य नहीं है?
(अ) ये आन्तरिक संक्रमण तत्व कहलाते हैं।
(ब) ये सभी तत्व रेडियोधर्मी होते हैं।
(स) इनमें इलेक्ट्रॉन सामान्यतः 4f तथा 5f में भरे जाते हैं।
(द) लैन्थेनॉयडों की तुलना में ऐक्टिनॉयडों में परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अधिक होती हैं।
उत्तर:
(ब) ये सभी तत्व रेडियोधर्मी होते हैं।

22. प्रथम संक्रमण श्रेणी में किस धातु का गलनांक उच्चतम होता है?
(अ) Mn
(ब) Cr
(स) Fe
(द) Cu
उत्तर:
(ब) Cr

23. \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}\) क्षारीय माध्यम में बनाता है-
(अ) CrO3
(ब) \(\mathrm{CrO}_4^{2-}\)
(स) CrO2
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) \(\mathrm{CrO}_4^{2-}\)

24. अम्लीय पोटेशियम परमैंगनेट विलयन की ऑक्सेलेट आयन से क्रिया कराने पर प्राप्त उत्पाद है-
(अ) \(\mathrm{CO}_3^{2-}\)
(ब) CO2
(स) KHCO3
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ब) CO2

25. क्षारीय माध्यम में पोटैशियम परमैंगनेट कितने इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है?
(अ) 5
(ब) 4
(स) 3
(द) 2
उत्तर:
(स) 3

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26. निम्नलिखित में से किस तत्व की तृतीय आयनन एन्थैल्पी सर्वाधिक होती है?
(अ) Mn
(ब) Cr
(स) Fe
(द) V
उत्तर:
(अ) Mn

27. निम्नलिखित में से अम्लीय ऑक्साइड कौनसा है?
(अ) MnO
(ब) Mn2O3
(स) MnO2
(द) Mn2O7
उत्तर:
(द) Mn2O7

28. K2Cr2O7 का तुल्यांकी भार क्या होगा यदि अणुभार = M हो?
(अ) M
(ब) M/3
(स) M/6
(द) M/2
उत्तर:
(स) M/6

29. लोहचुम्बकीय धातुओं का समूह है-
(अ) Cu, Ag, Au
(ब) Cr, Mo, W
(स) Fe, CO, Ni
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) Fe, CO, Ni

30. रंगहीन आयनों का युग्म है-
(अ) Cu+, Zn2+
(ब) Cu2+, Zn2+
(स) V3+, Cr3+
(द) Mn3+, Fe3+
उत्तर:
(अ) Cu+, Zn2+

31. Cr, Mn, Fe तथा Co के लिए \(\mathrm{E}_{\mathrm{M}^{3+} / \mathrm{M}^{2+}}\) मान क्रमशः -0.41, + 1.57, 0.77 तथा +1.97V हैं। इनमें से किस धातु की ऑक्सीकरण अवस्था सुगमतापूर्वक +2 से +3 हो जायेगी?
(अ) Cr
(ब) Mn
(स) Fe
(द) Co
उत्तर:
(अ) Cr

32. निम्नलिखित बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले परमाणुओं में से सर्वाधिक ऑक्सीकरण संख्या किस परमाणु द्वारा प्रदर्शित होती है?
(अ) (n – 1) d8ns2
(ब) (n – 1) d5ns1
(स) (n – 1) d3ns2
(द) (n – 1) d5ns2
उत्तर:
(द) (n – 1) d5ns2

33. Ti3+ आयन का प्रभावी चुम्बकीय आघूर्ण है-
(अ) 1.73 BM
(ब) 270 BM
(स) 5.92 BM
(द) 2.83 BM
उत्तर:
(अ) 1.73 BM

34. Ti(22), V(23), Cr(24) तथा Mn(25) की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के घटते मानों का सही क्रम है-
(अ) Cr > MN > V > Ti
(ब) V > Mn > Cr > Ti
(स) Mn > Cr > Ti > V
(द) Ti > V > Cr > Mn
उत्तर:
(अ) Cr > MN > V > Ti

35. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक रंगीन नहीं है?
(अ) TiCl3
(ब) TiCl4
(स) K2Cr2O7
(द) KMnO4
उत्तर:
(ब) TiCl4

36. K2Cr2O7 का जलीय विलयन H2S के साथ अम्लीय परिस्थिति में क्रिया करके हरा उत्पाद (A) देता है। (A) है-
(अ) Cr2(SO4)3
(ब) CrSO4
(स) K2CrO4
(द) CrO3
उत्तर:
(अ) Cr2(SO4)3

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
Ni2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
Ni2+ = 1s2 2s2 2p6 3s6 3p6 3d8 4s0

प्रश्न 2.
प्रथम संक्रमण श्रेणी के उन तत्वों के नाम बताइए जो केवल एक ही प्रकार की ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाते हैं।
उत्तर:
Sc तथा Zn

प्रश्न 3.
MnO की प्रकृति बताइए।
उत्तर:
MnO क्षारीय प्रकृति का होता है।

प्रश्न 4.
संक्रमण हत्वों की 3d श्रेणी की सामान्य औक्सीकरण अवस्था कौनसी होती है?
उत्तर:
संकमण तत्चों की 3d क्रेणी की सामान्य औंकसीकरण अवस्थ +2 होती है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से किस औँक्साह्ड में सक्तंयोजी गुण अभिकतम होगा? Sc2O3, TiO2, Mn2O7 तथा V2O5
उत्तर:
Mn2O7

प्रश्न 6.
Cu+ तथा Cu+2 में कौनसी अवस्था अधिक स्थायी होती है?
उत्तर:
Cu2+ अवस्था अधिक स्थ्युी होती है।

प्रश्न 7.
d-ब्लॉक में वाध्यशील धातुएं कौनसी होती हैं तथा क्यों?
उत्तर:
d-क्लांक में Zn. Cd तथा Hg वाप्मशौल धातुएँ होती हैं क्योंकि इनके गलनांक तथा क्वथनांक कम क्षोते हैं।

प्रश्न 8.
CrO, Cr2O3, CrO2 तध CrO3 को अम्लीय गुण के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर:
CrO < Cr2O3 < CrO2 < CrO3

प्रश्न 9.
Cu, Ag तथा Au में d10 विन्यास है फित्र भी ये संक्रमण तथव हैं। क्यों?
उत्तर:
Cu, Ag तथा Au के धनायनों में d10 विन्यास नरी रहत़ा है अतः ये संक्रमण तत्व है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 10.
संक्रमण कत्वों में किसका गलनांक न्यूनतम होता है?
उत्तर:
संक्रमण तत्बों में मकंरी (Hg) का गलनांक न्यूनतम होत है।

प्रश्न 11.
संक्रमण हत्वों में अधिकत गलनांक वाला धातु कौनसा है?
उत्तर:
टंस्ट्टन (W)

प्रश्न 12.
CuSO4.5 H2O तथा ZnSO4 में से कौनसा यौगिक रेगहीन है?
उत्तर:
ZnSO4

प्रश्न 13.
संक्रमण धातुएं, मित्र धातु बनाती हैं, क्यों?
उत्तर:
संक्रमण तत्वों की त्रिज्या में समानता तथा इ्नके अभिलाषणिक गुणों के कारण ये मिक्ष धातु आसानी से बना लेती हैं।

प्रश्न 14.
मिश्र धातु, पीतल किन धातुओ से बनती है?
उत्तर:
कॉपर तथा जिक।

प्रश्न 15.
कोंपर की दो मिश्र धातुओं के नाम बताइए।
उत्तर:
काँस तथा पीतल।

प्रश्न 16.
Zn2+ प्रतिचुम्बकीय होता है जबकि Cu2+ अनुचुम्बकीय, क्यों?
उत्तर:
Zn+2(3d10) में एक भी अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है जबकि Cu2+ (3d9) में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होता है अतः Zn2+ प्रतिचुम्बकीय होता है लेकिन Cu2+ अनुचुम्बकीय होता है।

प्रश्न 17.
MnVI के असमानुपातन का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 1

प्रश्न 18.
\(\mathrm{CrO}_4^{2-}\) आयन की संरचना कैसी होती है?
उत्तर:
\(\mathrm{CrO}_4^{2-}\) की संरचना चतुष्फलकीय होती है।

प्रश्न 19.
K2Cr2O2 के नारंगी क्लियन में प्रबल क्षार (NaOH या KOH) मिलाने पर विलयन पीला हो जाता है। क्यों?
उत्तर:
K2Cr2O7 के नारंगी विलयन में प्रब्ल क्षार मिलाने पर क्रोमेट बन जाता है अतः विलयन पीला हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 2

प्रश्न 20.
KI विलयन की क्रिया अम्लीय तथा क्षारीय KMnO4 से कराने पर बने उत्पाद्ध बताइए।
उत्तर:
KI विलयन की क्रिया अम्लीय KMnO4 के साथ कराने पर आयोडीन (I2) तथा क्षारीय KMnO4 से कराने पर पोटैशेशिय आयोडेट (KIO3) प्राप्त होता है।

प्रश्न 21.
बेयर अभिकर्मक का उपयोग बताइए।
उत्तर:
बेयर अभिकमंक (1% क्षारीय KMnO4) से असंतृप्तत का परीक्षण किया जाता है।

प्रश्न 22.
डाइक्रोमेट आयन की हाइड्रोजन परॉक्साइड से अभिक्रिया कराने पर बने उत्पादों को दर्शाने वाले समीकरण लिखिए।
उत्तर:
\(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}+4 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}_2+2 \stackrel{+}{\mathrm{H}} \rightarrow 2 \mathrm{CrO}_5+5 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}\)

प्रश्न 23.
लेन्थेनॉयडों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
सैन्थेनॉयडों को दुर्लभ मृदा धातु के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 24.
लैन्थेनोंयड संकुचन किसे कहते हैं?
उत्तर:
La से Lu तक परमाणु क्रमांक बढने पर परमाणु कथा आयनिक त्रिज्याओ में कमी होती है, इसे लैन्थेनॉयड संकुचन कहते हैं।

प्रश्न 25.
Lu(OH)3 की तुलना में La(OH)3 अधिक क्षारीय होता है, क्यों?
उत्तर:
La से Lu तक हाइ्ड्रोंक्साइडों की धारीय प्रकृति कम होती है क्यांकि इनकी आयनिक त्रिज्या में कमी होती है अतः Lu(OH)3 की तुलना में La(OH)3 अधिक क्षारीय होता है।

प्रश्न 26.
ऐक्टनोंयडों द्वारा प्रदर्शित अधिकतम औक्सीकरण अवस्था बताइए।
उत्तर:
ऐक्टनॉयड अधिकतम +7 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदार्शित करते हैं।

प्रश्न 27.
परायूरेनियम तत्व किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
\(\begin{aligned}
& U \\
& 92
\end{aligned}\) के बाद के रैडियोसक्रिय तथा कूत्रिम तत्वों को परायूरोनियम तत्व कहते हैं।

प्रश्न 28.
d-ब्लॉक के तत्वों में किसका गलनांक न्यूनतम होता है?
उत्तर:
मर्करी (Hg)

प्रश्न 29.
शल्य चिकित्सा में उपयोग में आने वाले उपकरणों को KMnO4 द्वारा साफ किया जाता है, क्यों?
उत्तर:
KMnO4 के जर्मनाशी गुण के कारण इसे शल्य चिकित्सा में उपयोग में आने वाले उपकरणों को साफ करने में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 30.
ऐक्टिनॉयड संकुचन, लैन्थेनॉयड संकुचन की तुलना में अधिक होता है, क्यों?
उत्तर:
5f इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव के कारण ऐक्टिनॉयड संकुचन, लैन्थेनॉयड संकुचन की अपेक्षा अधिक होता है।

प्रश्न 31.
सिक्का धातु कौनसे होते हैं?
उत्तर:
कॉपर, सिल्वर तथा गोल्ड।

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
(a) CuI2 अस्थायी होता है। क्यों?
(b) मैंग्नीज, फ्लुओरीन के साथ उच्चतम +4 ऑक्सीकरण अवस्था (MnF4) दर्शाता है जबकि ऑक्सीजन के साथ + (Mn2O7) क्यों?
उत्तर:
(a) CuI2 में आयोडीन के बड़े आकार के कारण बन्ध दुर्बल होता है तथा Cu2+, I को I2 में ऑक्सीकृत कर देता है अतः CuI2 अस्थायी होता है।
2Cu2+ + 4I → Cu2I2(s) + I2

(b) मैंगनीज (Mn), फ्लुओरोन के साथ अच्वतम ऑक्सीकरण अवस्था + 4(MnF4) ही दर्शाता है जबकि ऑक्सीजन के साथ यह उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था + 7(Mn2O7) दर्शाता है, क्योंकि फ्लुओरीन की अपेक्षा ऑक्सीजन की उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाओं को स्थायित्व प्रदान करने की क्षमता अधिक होती है जिसका कारण ऑक्सीजन की धातुओं के साथ बहबन्ध बनाने की क्षमता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 2.
(a) \(\stackrel{+}{\mathbf{C}} \mathbf{u} \overline{\mathbf{X}}\) अस्थायो होता है, क्या?
अथवा
जलीय विलयन में Cu+ की तुलना में Cu2+ अधिक स्थायी होता है, क्यों?
(b) Mn2O7 तथा \(\mathrm{MnO}_4^{-}\) की संरचना बताइए।
उत्तर:
(a) \(\mathrm{Cu}^{+} \mathrm{X}^{-}\) अस्थायी होता है क्योंक जलीय विलयन में Cu+ का असमानुपातन हो जाता है-
\(2 \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{+} \longrightarrow \mathrm{Cu}_{(\mathrm{aq})}^{2+}+\mathrm{Cu}_{(\mathrm{s})}\)

अतः जलीय विलयन में Cu+ की तुलना में Cu2+ अधिक स्थायी होता है क्योंकि Cu2+ की जलयोजन एन्थैल्पी का मान Cu+ की तुलना में बहुत अधिक ऋणात्मक होता है जो कि Cu+ से Cu2+ बनाने के लिए आवश्यक ऊर्जा (द्वितीय आयनन एन्थैल्पी) को आसानी से संतुलित कर देती है।

(b) Mn2O7 में प्रत्येक Mn परमाणु चतुष्फलकीय रूप से ऑक्सीजन परमाणुओं से घिरा होता है तथा इसमें एक Mn-O-Mn सेतुबन्ध भी पाया जाता है तथा \(\mathrm{MnO}_4\) की संरचना भी चतुष्फलकीय होती है।

प्रश्न 3.
चुम्बकीय गुण कितने प्रकार के होते हैं? पदार्थों में चुम्बकीय गुण उत्पन्न होने का कारण भी बताइए।
उत्तर:
पदार्थों में चुम्बकीय गुण मुख्यतः इलेक्ट्रॉनों के कारण ही होता है तथा इलेक्ट्रॉन स्वयं एक बहुत छोटे चुम्बक के समान कार्य करता है। किसी पदार्थ पर चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर कई प्रकार के चुम्बकीय व्यवहार प्रदर्शित होते हैं लेकिन इनमें से निम्नलिखित तीन गुण मुख्य होते हैं-
(i) प्रतिचुम्बकत्व
(ii) अनुचुम्बकत्व तथा
(iii) लोहचुम्बकत्व।
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ वे होते हैं जो प्रयुक्त चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं लेकिन अनुचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं। वे पदार्थ जो चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रबलता से आकर्षित होते हैं, उन्हें लोहचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। वास्तव में लोहचुम्बकत्व, अनुचुम्बकत्व का ही अधिकतम रूप है।
पदार्थों में चुम्बकीय गुणों के उत्पन्न होने का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनों की दो प्रकार की गति है-

(i) कक्षीय गति (Orbital motion) तथा (ii) चक्रण गति (Spin motion)
अतः किसी पदार्थ का चुम्बकीय आघूर्ण (Magnetic moment) कक्षीय कोणीय संवेग (orbital angular momentum) तथा चक्रण कोणीय संवेग (spin angular momentum) के सम्मिलित प्रभाव के कारण होता है। संक्रमण तत्वों में (n – 1)d उपकोश के इलेक्ट्रॉन सतह पर ही स्थित होते हैं अतः ये बाहरी वातावरण से अधिक प्रभावित होते हैं।

इस कारण इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति बहुत सीमित हो जाती है तथा कक्षीय कोणीय संवेग का योगदान अधिक प्रभावी नहीं रहता इसलिए यह महत्त्वपूर्ण नहीं है अतः चुम्बकीय आघूर्ण का मान केवल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर ही ज्ञात किया जाता है। चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र दिया गया है तथा इसे चक्रण मात्र (spin only) सूत्र कहते हैं-

चुम्बकीय आघूर्ण (µ)= \(\sqrt{n(n+2)}\), n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
चुम्बकीय आघूर्ण का मात्रक बोर मैग्नेटॉन (BM) होता है।
1 BM = \(\frac { eh }{ 4πmc }\)

यहाँ e = इलेक्ट्रॉन का आवेश, h = प्लांक स्थिरांक, m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान तथा c = प्रकाश का वेग है।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने पर चुम्बकीय आघूर्ण का मान भी बढ़ता है। अतः प्रेक्षित (observed) चुम्बकीय आघूर्ण मानों से परमाणुओं, अणुओं या आयनों में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का संकेत प्राप्त हो जाता है। विभिन्न चुम्बकीय गुणों का विस्तृत विवरण अग्र प्रकार है-

(i) प्रतिचुम्बकत्व (Diamagnetism) – वे परमाणु, अणु या आयन जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, उनमें प्रतिचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है। ये इलेक्ट्रॉन एक-दूसर के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं, जिससे पदार्थ का कुल चुम्बकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है। इन्हें प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं तथा इन पर चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर, कक्षीय आघूर्ण लगाए गए क्षेत्र की विपरीत दिशा में प्रेरित हो जाता है अतः ये पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 3
प्रतिचुम्बकत्व का गुण लगभग सभी पदार्थों द्वारा दर्शाया जाता है लेकिन अनुचुम्बकत्व की तुलना में इसका प्रभाव बहुत कम होता है, अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युक्त पदार्थों में इसका अनुभव नहीं होता इसलिए उनमें अनुचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है। प्रतिचुम्बकत्व ताप पर निर्भर नहीं करता। उदाहरण- Sc3+, Ti+4 तथा Zn2+ इत्यादि।

(ii) अनुचुम्बकत्व (Paramagnetism) -वे परमाणु, अणु या आयन जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं, उनमें अनुचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है तथा इन्हें अनुचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। इन पदार्थों को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर ये चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं लेकिन चुम्बकीय श्वेत्र हटा लेने पर इनका चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाता है। अनुचुम्बकत्व, ताप के व्युक्क्रमानुपाती होता है, अर्थात् ताप बढ़ाने पर यह गुण कम हो जाता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने पर पदार्थ का अनुचुम्बकीय गुण बढ़ता है। इन पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण कभी शून्य नहीं होता। उदाहरण- Ti3+, Co2+, Cu2+ इत्यादि।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 4
(iii) लोहचुम्बकत्व (Ferromagnetism) – यह उच्चतम कोटि का अनुच्बकत्व होता है। लोहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रबलता से आकर्षित होते हैं तथा इनके छोटे-छोटे आण्विक चुम्बक एक ही दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे इनका चुम्बकीय ग्रुण बढ़ जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र हटा लेने पर भी ये स्थायी चुम्बक की तरह व्यवहार करते हैं। चोट मारने पर या ताप में परिवर्तन से इनके आण्विक चुम्बकों की व्यवस्था परिवर्तित हो जाती है, जिससे इनका चुम्बकीय गुण भी नष्ट हो जाता है या परिवर्तित हो जाता है।

Fe, Co तथा Ni लोहचुम्बकीय तत्वों के उदाहरण हैं। चुम्बकीय आघूर्णों के प्रायोगिक मान सामान्यतः विलयन में उपस्थित. जलयोजित आयनों अथवा ठोस अवस्था के लिए ज्ञात किए जाते हैं। प्रथम संक्रमण श्रेणी के आयनों के परिकलित तथा प्रेक्षित चुम्बकीय आघूर्णों के मान निम्नलिखित प्रकार होते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 5

प्रश्न 4.
चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात करने के लिए आवश्यक सूत्र लिखिए तथा बताइए कि इसे ज्ञात करने के लिए चक्रण मात्र सूत्र ही क्यों प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
पदार्थों में चुम्बकीय गुण मुख्यतः इलेक्ट्रॉनों के कारण ही होता है तथा इलेक्ट्रॉन स्वयं एक बहुत छोटे चुम्बक के समान कार्य करता है। किसी पदार्थ पर चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर कई प्रकार के चुम्बकीय व्यवहार प्रदर्शित होते हैं लेकिन इनमें से निम्नलिखित तीन गुण मुख्य होते हैं-
(i) प्रतिचुम्बकत्व
(ii) अनुचुम्बकत्व तथा
(iii) लोहचुम्बकत्व।
प्रतिचुम्बकीय पदार्थ वे होते हैं जो प्रयुक्त चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं लेकिन अनुचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आकर्षित होते हैं। वे पदार्थ जो चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रबलता से आकर्षित होते हैं, उन्हें लोहचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। वास्तव में लोहचुम्बकत्व, अनुचुम्बकत्व का ही अधिकतम रूप है।
पदार्थों में चुम्बकीय गुणों के उत्पन्न होने का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनों की दो प्रकार की गति है-

(i) कक्षीय गति (Orbital motion) तथा (ii) चक्रण गति (Spin motion)
अतः किसी पदार्थ का चुम्बकीय आघूर्ण (Magnetic moment) कक्षीय कोणीय संवेग (orbital angular momentum) तथा चक्रण कोणीय संवेग (spin angular momentum) के सम्मिलित प्रभाव के कारण होता है। संक्रमण तत्वों में (n – 1)d उपकोश के इलेक्ट्रॉन सतह पर ही स्थित होते हैं अतः ये बाहरी वातावरण से अधिक प्रभावित होते हैं। इस कारण इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति बहुत सीमित हो जाती है तथा कक्षीय कोणीय संवेग का योगदान अधिक प्रभावी नहीं रहता इसलिए यह महत्त्वपूर्ण नहीं है अतः चुम्बकीय आघूर्ण का मान केवल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर ही ज्ञात किया जाता है। चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र दिया गया है तथा इसे चक्रण मात्र (spin only) सूत्र कहते हैं-

चुम्बकीय आघूर्ण (µ)= \(\sqrt{n(n+2)}\), n = अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
चुम्बकीय आघूर्ण का मात्रक बोर मैग्नेटॉन (BM) होता है।
1 BM = \(\frac { eh }{ 4πmc }\)

यहाँ e = इलेक्ट्रॉन का आवेश, h = प्लांक स्थिरांक, m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान तथा c = प्रकाश का वेग है।
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने पर चुम्बकीय आघूर्ण का मान भी बढ़ता है। अतः प्रेक्षित (observed) चुम्बकीय आघूर्ण मानों से परमाणुओं, अणुओं या आयनों में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का संकेत प्राप्त हो जाता है। विभिन्न चुम्बकीय गुणों का विस्तृत विवरण अग्र प्रकार है-

(i) प्रतिचुम्बकत्व (Diamagnetism) – वे परमाणु, अणु या आयन जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, उनमें प्रतिचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है। ये इलेक्ट्रॉन एक-दूसर के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं, जिससे पदार्थ का कुल चुम्बकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है। इन्हें प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं तथा इन पर चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर, कक्षीय आघूर्ण लगाए गए क्षेत्र की विपरीत दिशा में प्रेरित हो जाता है अतः ये पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं।
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प्रतिचुम्बकत्व का गुण लगभग सभी पदार्थों द्वारा दर्शाया जाता है लेकिन अनुचुम्बकत्व की तुलना में इसका प्रभाव बहुत कम होता है, अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युक्त पदार्थों में इसका अनुभव नहीं होता इसलिए उनमें अनुचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है। प्रतिचुम्बकत्व ताप पर निर्भर नहीं करता। उदाहरण- Sc3+, Ti+4 तथा Zn2+ इत्यादि।

(ii) अनुचुम्बकत्व (Paramagnetism) -वे परमाणु, अणु या आयन जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं, उनमें अनुचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है तथा इन्हें अनुचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। इन पदार्थों को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर ये चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं लेकिन चुम्बकीय श्वेत्र हटा लेने पर इनका चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाता है। अनुचुम्बकत्व, ताप के व्युक्क्रमानुपाती होता है, अर्थात् ताप बढ़ाने पर यह गुण कम हो जाता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने पर पदार्थ का अनुचुम्बकीय गुण बढ़ता है। इन पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण कभी शून्य नहीं होता। उदाहरण- Ti3+, Co2+, Cu2+ इत्यादि।
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(iii) लोहचुम्बकत्व (Ferromagnetism) – यह उच्चतम कोटि का अनुच्बकत्व होता है। लोहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रबलता से आकर्षित होते हैं तथा इनके छोटे-छोटे आण्विक चुम्बक एक ही दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे इनका चुम्बकीय ग्रुण बढ़ जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र हटा लेने पर भी ये स्थायी चुम्बक की तरह व्यवहार करते हैं। चोट मारने पर या ताप में परिवर्तन से इनके आण्विक चुम्बकों की व्यवस्था परिवर्तित हो जाती है, जिससे इनका चुम्बकीय गुण भी नष्ट हो जाता है या परिवर्तित हो जाता है।

Fe, Co तथा Ni लोहचुम्बकीय तत्वों के उदाहरण हैं। चुम्बकीय आघूर्णों के प्रायोगिक मान सामान्यतः विलयन में उपस्थित. जलयोजित आयनों अथवा ठोस अवस्था के लिए ज्ञात किए जाते हैं। प्रथम संक्रमण श्रेणी के आयनों के परिकलित तथा प्रेक्षित चुम्बकीय आघूर्णों के मान निम्नलिखित प्रकार होते हैं-
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प्रश्न 5.
प्रतिचुम्बकत्व क्या होता है? समझाइए।
उत्तर:
प्रतिचुम्बकत्व (Diamagnetism) – वे परमाणु, अणु या आयन जिनमें सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, उनमें प्रतिचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है। ये इलेक्ट्रॉन एक-दूसर के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं, जिससे पदार्थ का कुल चुम्बकीय आघूर्ण शून्य हो जाता है। इन्हें प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं तथा इन पर चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर, कक्षीय आघूर्ण लगाए गए क्षेत्र की विपरीत दिशा में प्रेरित हो जाता है अतः ये पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं।
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प्रतिचुम्बकत्व का गुण लगभग सभी पदार्थों द्वारा दर्शाया जाता है लेकिन अनुचुम्बकत्व की तुलना में इसका प्रभाव बहुत कम होता है, अतः अयुग्मित इलेक्ट्रॉन युक्त पदार्थों में इसका अनुभव नहीं होता इसलिए उनमें अनुचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है। प्रतिचुम्बकत्व ताप पर निर्भर नहीं करता। उदाहरण- Sc3+, Ti+4 तथा Zn2+ इत्यादि।

प्रश्न 6.
अनुचुम्बकत्च की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अनुचुम्बकत्व (Paramagnetism) -वे परमाणु, अणु या आयन जिनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं, उनमें अनुचुम्बकत्व का गुण पाया जाता है तथा इन्हें अनुचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। इन पदार्थों को चुम्बकीय क्षेत्र में रखने पर ये चुम्बकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं लेकिन चुम्बकीय श्वेत्र हटा लेने पर इनका चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाता है। अनुचुम्बकत्व, ताप के व्युक्क्रमानुपाती होता है, अर्थात् ताप बढ़ाने पर यह गुण कम हो जाता है। अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने पर पदार्थ का अनुचुम्बकीय गुण बढ़ता है। इन पदार्थों का चुम्बकीय आघूर्ण कभी शून्य नहीं होता। उदाहरण- Ti3+, Co2+, Cu2+ इत्यादि।
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प्रश्न 7.
लोहचुम्बकत्व का गुण क्या होता है ? समझाइए।
उत्तर:
लोहचुम्बकत्व (Ferromagnetism) – यह उच्चतम कोटि का अनुच्बकत्व होता है। लोहचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रबलता से आकर्षित होते हैं तथा इनके छोटे-छोटे आण्विक चुम्बक एक ही दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे इनका चुम्बकीय ग्रुण बढ़ जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र हटा लेने पर भी ये स्थायी चुम्बक की तरह व्यवहार करते हैं।

चोट मारने पर या ताप में परिवर्तन से इनके आण्विक चुम्बकों की व्यवस्था परिवर्तित हो जाती है, जिससे इनका चुम्बकीय गुण भी नष्ट हो जाता है या परिवर्तित हो जाता है। Fe, Co तथा Ni लोहचुम्बकीय तत्वों के उदाहरण हैं। चुम्बकीय आघूर्णों के प्रायोगिक मान सामान्यतः विलयन में उपस्थित. जलयोजित आयनों अथवा ठोस अवस्था के लिए ज्ञात किए जाते हैं। प्रथम संक्रमण श्रेणी के आयनों के परिकलित तथा प्रेक्षित चुम्बकीय आघूर्णों के मान निम्नलिखित प्रकार होते हैं-
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प्रश्न 8.
निर्जल CuSO4 श्वेत होता है लेकिन जलयोजित CuSO4 नील्ना होता है जबकि दोनों में ही Cu2+ आयन होते हैं। क्यों?
उत्तर:
निर्जल CuSO4 तथा CuSO4 . 5H2O (जलयोजित कपर सल्फेट) दोनों में ही Cu+2 है जिसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रांन (3d9) है लेकिन निजल CuSO4 में H2O (लिगन्ड) के बिना d-कक्षकों का विपाटन t2g तथा eg कक्षकों में विपाटन नहीं हो पाता अतः d-d संक्रमण नहीं होता है इसलिए यह रंगहीन होता है। जबकि जलयोजित CuSO4 में d-d संक्रमण हो जाता है, अतः यह नीला होता है।

प्रश्न 9.
(a) Mn का वह लवण कौनसा है जो KClO4 के समसंरचनात्मक होता है?
(b) मैंगनेट तथा परमेंगनेट आयनों की संरचना तथा चुम्बकीय गुण बताइए।
उत्तर:
(a) KMnO4 (पोटैशियम परमें गनेट) KClO4 (पोंटेशियम क्लोरेद) के समसंरचनात्मक होता है अर्थात् दोनों की संरचना समान होती है।

(b) मैंगनेट तथा परमैंगनेट आयन चतुष्फलकीय ह्रोते हैं जिनमें आवसीजन के p-कथक तथा Mn के d कथकों के मध्य अंत्यापन, से π-बन्ध बनता है तथा इनमें Mn पर sp3 संकरण होता है। इनकी संरचना निम्न प्रकार होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 12
परमैंगनेट आयन प्रतिचुम्बकीय होता है जिसे 513 K पर गर्म करने पर यह मैंगनेट आयन में परिवर्तित हो जाता है जो कि अनुचुंबकीय होता है क्योंकि इसमें एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉंन होता है।

प्रश्न 10.
परमैंगनेट आयन \(\left(\mathrm{MnO}_4^{-}\right)\) हाइड्रोजन आयनों की भिन्न-भिन्न सान्द्रताओं प्रर भिन्न-भिन्न अपचयन उत्पाद् देता है, इनके समीकरण लिखिए।
उत्तर:
परमैंगनेट आयन की अपचयन अभिक्रिया से बने उत्पाद हाइ्ड्रोजन आयन की संद्रता पर निभर करते हैं। H+ की विभिन्न सान्द्रताओं पर होने वाली अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार हैं-
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[H+] = 1 पर परमैंगनेट आयन द्वारा जल का आंक्सीकरण होना चाहिए लेकिन यह अभिक्रिया बहुत धीमी गति से होती है लोकिन इसमें Mn2+ आयन उत्त्रेसक के रूप में प्रयुक्त करने पर या ताप बन्ढ़ने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 11.
क्रोमिल क्नोराइड परीक्षणा को समझाइए।
उत्तर:
(vi) क्रोमिल क्लोराइड परीक्षण-यह क्लोराइड आयन का निश्चयात्मक परीक्षण है। जब किसी क्लोराइड लवण को प्रबल अम्लीय माध्यम (सान्द्र H2SO4) में K2Cr2O7 के साथ गर्म किया जाता है तो क्रोमिल क्लोराइड (CrO2Cl2) की नारंगी धूम बनती है।
K2Cr2O7 + 6H2SO4 + 4KCl → 2CrO2Cl2 + 6KHSO4 + 3H2O

प्रश्न 12.
एथीलीन की बेयर अभिकर्मक से क्रिया को समझाइए।
उत्तर:
एथिलीन की क्रिया 1% क्षारीय KMnO4 (बेयर अभिकर्मक) से करवाने पर एथिलीन ग्लाइकॉल बनता है जिसके कारण विलयन गुलाबी से रंगहीन हो जाता है। इस अभिक्रिया की सहायता से असंतृप्तता C = C या (C ≡ C) का परीक्षण किया जाता है तथा इसे बेयर परीक्षण कहते हैं।
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प्रश्न 13.
(i) Ce+4 प्रबल ऑक्सीकारक होता है, क्यों?
(ii) Eu2+ प्रबल अपचायक होता है, क्यों?
उत्तर:
(i) Ce+4 में उंत्कृष्ट गैस विन्यास होते हुए भी यह प्रचल ऑक्स्रीकारक होता है क्योंक Ce+4/Ce+3 के लिए मानक इलेबट्रॉड विभव का मान उच्च होता है अतः यह आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहृण करके Ce+3 (सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था) बना लेता है। अतः यह जल को भौ ऑंक्सीकृत कर द्तेता है।

(ii) Eu2+ प्रबल अपचायक होता है क्योंक यह इलेक्ट्रॉन त्यागकर लैन्थेनॉयडों की सामान्य औक्सीकरण अवस्था +3 में परिवर्तित हो ज्ञात है।

प्रश्न 14.
लैन्थेनॉयडों के रंग तथा चुम्बकीय गुणों को समझाइए।
उत्तर:
रंग तथा चुम्बकीय गुण (Colour and Magnetic Property)一लैन्थेनॉयडों में कुछ त्रिसंयोजी आयन ठोस अवस्था तथा विलयन में रंगीन होते हैं। इन आयनों का रंग f इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण होता है। La3+ तथा Lu3+ आयन रंगहीन हैं परन्तु शेष लैन्थेनॉयड आयन रंगीन होते हैं। लेकिन f स्तर पर (f-f संक्रमण) ही उत्तेजना के कारण अवशोषण बैंड संकीर्ण (narrow) होते हैं। कुछ आयनों का रंग समान होता है। जैसे- Pr3+ व Tm+3 हरे रंग के तथा Nd3+ व Er3+ गुलाबी होते हैं। 4f0 (La3+ तथा Ce4+) एवं 4f14(Yb2+ तथा Lu3+) विन्यास के अतिरिक्त अन्य सभी विन्यासयुक्त लैन्थेनॉयड आयन अनुचुंबकीय होते हैं तथा नियोडिमियम का अनुचुंबकीय गुण अधिकतम होता है।

प्रश्न 15.
लैन्थेनॉयडों के अपचायक गुण का कारण तथा क्रम बताइए।
उत्तर:
अपचायक गुण (Reducing Property) – अर्धअभिक्रिया \(\operatorname{Ln}_{(a q)}^{3+}+3 \mathrm{e}^{-} \rightarrow \operatorname{Ln}_{(s)}\) के लिए E0 के मान लगभग – 2.2 से – 2.4 V तक होते हैं। E0 के इन उच्च ऋणात्मक मानों से ज्ञात होता है कि लैन्थेनॉयड प्रबल अपचायक होते हैं तथा आसानी से Ln3+ बना देते हैं। La से Lu तक E0 के मान कम ऋणात्मक होते जाते हैं अतः इनका अपचायक गुण कम होता जाता है। अपचायक गुण के कारण ही ये धातुएँ विद्युत धनी होती हैं।

प्रश्न 16.
ऐक्टिनॉयडों के परमाणु तथा आयनिक आकार को समझाइए।
उत्तर:
ऐक्टिनॉयडों में परमाणु तथा आयनिक आकार की सामान्य प्रवृत्ति लैन्थेनॉयडों के समान ही होती है। श्रेणी में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार तथा आयनिक आकार (M+3) में क्रमिक कमी होती है, इसे ऐक्टिनॉयड संकुचन कहते हैं। आकार में यह कमी एक तत्व से दूसरे तत्व में उत्तरोत्तर बढ़ती है, जिसका कारण 5f इलेक्ट्रॉनों का दुर्बल परिरक्षण प्रभाव है।

बोर्ड परीक्षा के दुष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) \(\mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+\mathrm{C}_2 \mathrm{O}_4^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq}) \rightarrow\)
(ii) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{Fe}^{2+}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq}) \rightarrow\)
उत्तर:
(i) \(2 \mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+5 \mathrm{C}_2 \mathrm{O}_4^{2-}(\mathrm{aq})+16 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq}) \rightarrow 2 \mathrm{Mn}^{2+}(\mathrm{aq})+8 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(\mathrm{l})+10 \mathrm{CO}_2(\mathrm{~g})\)

(ii) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+14 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+6 \mathrm{Fe}^{2+}(\mathrm{aq}) \rightarrow 2 \mathrm{Cr}^{3+}(\mathrm{aq})+6 \mathrm{Fe}^{3+}(\mathrm{aq})+7 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l)\)

प्रश्न 2.
आप निम्नलिखित के क्या कारण समझते हैं-
(i) बहुत से संक्रमण तत्व और उनके यौगिक अच्छे उत्प्रेरकों का कार्य करते हैं।
(ii) संक्रमण तत्वों की तीसरी (5d) श्रेणी के तत्चों की धात्विक त्रिज्याएँ लगभग वही होती हैं जो दूसरी श्रेणी के तत्सम्बन्धी तत्वों की होती हैं।
(iii) ऐक्टिनॉयडों में उपचयन अवस्थाओं (ऑक्सीकरण अवस्थाओं) का परास लैन्थेनॉयडों की अपेक्षा अधिक होता है।
उत्तर:
(i) संक्रमण तत्य और उनके यौगिक अच्छे उत्त्रेरक होते हैं क्योंकि इनमें परिवर्तनशील औंक्सीकरण अवस्था, अयुग्मित इ्लेक्ट्रॉन एवं रिक्त $d$ कक्षक पाए जाते हैं अतः ये आसानी से मध्यवर्तो यौगिक बना लेते हैं।

(ii) संक्रमण तात्वों की तीसरी श्रेणी (5d) के तत्वों की धात्थिक त्रिज्याएँ लगभग वही होती हैं जो दूसरी श्रेणी के संग्त तत्वों की होती है क्योंकि इल्लेक्ट्रॉन, 5d से पहले 4f कक्षकों में भर जाते हैं जिनके कारण परमाणु आकार में होने वाली वृद्धि का प्रभाव 4f के 14 तत्वों के नाभिकीय आवेश द्वारा संतुलित हो जाता है।

(iii) ऐक्टिनायडों में उपचयन अवस्थाओं का परास लैन्थेनोंयडों की अपेक्षा अधिक होता है क्यांकि इनमें 5f, 6d तथा 7s उपकोशों की ऊर्जा लमभग समान होती है। अतः इनके इलेकर्रोन बन्ध बनाने में भाग लेते हैं।

प्रश्न 3.
(a) निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}_2 \mathrm{~S}(\mathrm{~g})+\mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq}) \rightarrow\)
(ii) \(\mathrm{Cu}^{2+}(\mathrm{aq})+\mathbf{I}^{-}(\mathrm{aq}) \rightarrow\)

(b) निम्नलिखित को कारण लिखकर स्पष्ट कीजिए-
(i) ऑक्सोत्रुणायनों की ऑक्सीकरण क्षमता \(\mathrm{VO}_2^{+}<\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}<\mathrm{MnO}_4^{-}\) के क्रम में होती है।
(ii) मैंगनीज (Z = 25) की तृतीय आयनन एन्थैल्पी अनअपेक्षित: उच्च्च होती है।
(iii) Cr2+ अपेक्षाकृत Fe2+ के अधिक प्रबल अपचायक है।
अथवा
(a) निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) \(\mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+\mathrm{S}_2 \mathrm{O}_3^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l) \rightarrow\)
(ii) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{Fe}^{2+}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq}) \rightarrow\)

(b) निम्नलिखित अवलोकनों की व्याख्या कीजिए-
(i) La3+ (Z = 57) और Lu3+ (Z = 71) विलयनों में कोई रंग नहीं दर्शांते।
(ii) प्रथम श्रेणी के संक्रमण तत्वों के द्विसंयोजन धनायनों में मैंगनीज सर्वाधिक अनुचुम्बकत्व प्रदर्शित करता है।
(iii) जलीय विलयनों में Cu+ आयन का अस्तित्व नहीं जाना जाता।
उत्तर:
(a) (i) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}_2 \mathrm{~S}(\mathrm{~g})+8 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq}) \rightarrow 2 \mathrm{Cr}^{+3}(\mathrm{aq})+7 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(\mathrm{l})+3 \mathrm{~S}(\mathrm{~s})\)
(ii) \(2 \mathrm{Cu}^{2+}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{I}^{-}(\mathrm{aq}) \rightarrow \mathrm{Cu}_2^{+2}(\mathrm{aq})+\mathrm{I}_2\)

(b) (i) ऑक्सोत्रशणायनों की ऑँक्सीकरण क्षमता \(\mathrm{VO}_2^{+}<\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}<\mathrm{MnO}_4^{-}\) के क्रम में होने का कारण धातु की ऑक्सीकरण अवस्था बट़ना है। इनमें V, Cr तथा Mn की आंक्सीकरण अवस्थाएँ क्रमशः + 5, + 6 तथा +7 है जिससे इलेक्ट्रॉंनों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति बढ़ती है तथा इनके अपचयन के बाद प्राप्त उत्पादों का स्थायित्व बढ़ता है।

(ii) मैंगनीज की तृतीय आयनन एन्थैल्पी अनअपेक्षितः उच्च होती है क्योंकि दो इलेक्ट्रॉन निकलने के पश्चात् स्थायी अर्धपूरित (3d5) विन्यास प्राप्त हो जाता है जिसमें से तीसरा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

(iii) पाड्यानिहित प्रश्न 8.7 का उत्तर देखें।
अथवा
(a) (i) \(8 \mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{~S}_2 \mathrm{O}_3^{2-}(\mathrm{aq})+\mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l) \rightarrow 8 \mathrm{MnO}_2(\mathrm{~s})+6 \mathrm{SO}_4^{2-}(\mathrm{aq})+2 \mathrm{OH}^{-}(\mathrm{aq})\)

(ii) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}(\mathrm{aq})+14 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+6 \mathrm{Fe}^{2+}(\mathrm{aq}) \rightarrow 2 \mathrm{Cr}^{+3}(\mathrm{aq})+6 \mathrm{Fe}^{3+}(\mathrm{aq})+7 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l)\)

(b) (i) La3+ तथा Lu3+ विलयनों में कोई रंग नहीं दर्शाते क्योंकि इन आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्रमशः 4f0 तथा 4f14 है जिनमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है अतः इनमें इलेक्ट्रॉनों का संक्रमण (f–f संक्रमण) नहीं हो सकता।

(ii) प्रथम श्रेणी के संक्रमण तत्वों के द्विसंयोजक धनायनों में मैंगनीज (Mn2+) सर्वीधिक अनुचुम्बकत्व दर्शाता है क्योंकि इसमें सर्वाधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (5) पाए जाते हैं।

(iii) Fe2+ की तुलना में Cr2+ एक प्रबल अपचायक पदार्थ है, क्योंकि Cr2+ से Cr3+ बनने में d4 का d3 में परिवर्तन होता है किन्तु Fe2+ से Fe3+ बनने में d6 का d5 में परिवर्तन होता है तथा जल जैसे माध्यम में d5 की तुलना में d3 अधिक स्थायी है। इसका कारण \(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}{ }^3\) विन्यास का अधिक स्थायी होना है तथा इनके E0 मानों से भी यह स्पष्ट हो जाता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित को कारण सहित स्पष्ट कीजिए-
(i) Cr2+ एक अपचायक है जबकि समान d-ऑर्बिटल विन्यास (d4) के साथ Mn3+ एक उपचायक (ऑक्सीकारक) होता है।
(ii) संक्रमण धातुओं की किसी श्रेणी में, जो तत्व सर्वाधिक संख्या में उपचयन अवस्थाएँ (ऑक्सीकरण अवस्थाएँ) प्रदर्शित करने वाला है, वह श्रेणी के मध्य में पाया जाता है।
उत्तर:
(i) Cr2+ एक अपचायक है; क्योंकि इसका विन्यास d4 से d3 में परिवर्तित होता है जिसमें अर्ध-पूरित t2g स्तर (\(\left(t_{2 g}^3\right)\)) होता है। दूसरी ओर Mn3+ से Mn2+ में परिवर्तन से अर्धपूरित (d5) स्थायी विन्यास प्राप्त होता है जो इसे अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है जिसके कारण यह ऑक्सीकारक होता है।

(ii) संक्रमण धातुओं की किसी श्रेणी में मध्य में पाए जाने वाला तत्व सर्वाधिक संख्या में उपचयन अवस्थाएँ दर्शाता है क्योंक इसमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होती है अतः इसमें साझेदारी या त्यागने के लिए अधिक इलेक्ट्रॉन उपलब्ध हैं तथा साझेदारी के लिए d कक्षक भी अधिक संख्या में पाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
तत्वों की 3d श्रेणी में Cr3+, Mn2+, Fe3+ और बाद में M2+ आयनों के विपरीत 4d और 5d श्रेणियों के धातु सामान्यतः ऐसे स्थायी धनायनी स्पीशीज नहीं बनाते।
उत्तर:
4d तथा 5d श्रेणियों के धातु 3d श्रेणी के तत्वों के समान निम्न ऑक्सीकरण अवस्था नहीं दर्शाते क्योंकि इनमें उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अधिक स्थायी होती हैं जबकि 3d श्रेणी के तत्वों के उच्च ऑक्सीकरण अवस्था के यौगिक अपचयित हो जाते हैं।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
(i) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}+\mathrm{I}^{-}+\mathrm{H}^{+} \rightarrow\)
(ii) \(\mathrm{MnO}_4^{-}+\mathrm{NO}_2^{-}+\mathrm{H}^{+} \rightarrow\)
उत्तर-
(i) \(\mathrm{Cr}_2 \mathrm{O}_7^{2-}+6 \mathrm{I}^{-}+14 \mathrm{H}^{+} \rightarrow 2 \mathrm{Cr}^{3+}+7 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}+3 \mathrm{I}_2\)
(ii) \(2 \mathrm{MnO}_4^{-}+5 \mathrm{NO}_2^{-}+6 \mathrm{H}^{+} \rightarrow 2 \mathrm{Mn}^{2+}+5 \mathrm{NO}_3^{-}+3 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}\)

प्रश्न 7.
निम्नलिखित को आप कारण सहित कैसे स्पष्ट करेंगे-
(i) लैन्थेनॉयडों में Ln(III) यौगिक प्रमुख होते हैं। परन्तु कभी-कभी विलयनों अथवा ठोस यौगिकों में, +2 और +4 आयन भी पाए जाते हैं।
(ii) \(\mathbf{E}_{\mathbf{M}^{2+} / \mathbf{M}}^{\circ}\) का मान कॉपर के लिए धनात्मक (0.34 V) है। संक्रमण तत्वों के प्रथम श्रेणी में ऐसा व्यवहार दिखाने वाली कॉपर अकेली धातु है।
उत्तर:
(i) लैन्थेनॉयडों की मुख्य ऑक्सीकरण अवस्था +3(Ln3+) होती है। इसके अतिरिक्त ठोस अवस्था में या विलयन में कुछ यौगिकों में + 2 तथा + 4 अवस्था भी पाई जाती है। इसका कारण इनमें उपस्थित रिक्त (f0), अर्धपूरित (f7) तथा पूर्ण पूरित (f14) f-कक्षकों का अधिक स्थायित्व है।

(ii) कॉपर के लिए \(\mathbf{E}_{\mathbf{M}^{2+} / \mathbf{M}}^{\circ}\) का मान धनात्मक होता है क्योंकि कॉपर की क्रियाशीलता कम होती है तथा Cu2+ बनने के लिए 3d10 पूर्णपूरित स्थायी विन्यास में से इलेक्ट्रॉन निकलता है जिसके लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 8.
(i) लैन्थेनॉयड संकुचन किसे कहते हैं?
(ii) क्रोमाइट अयस्क से पोटैशियम डाइक्रोमेट प्राप्त करने की रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
(i) लैन्थेनॉयड संकुचन (Lanthanoid Contraction)लैन्थेनॉयडों में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर La से Lu (लैन्थेनम से ल्यूटीशियम) तक परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में समग्र (over all) कमी होती है, इसे लैन्थेनॉयड संकुचन कहते हैं।

परमाणु त्रिज्याओं के मानों में यह कमी नियमित नहीं होती है जैसा कि M+3 आयनो में नियमित रूप से कमी होती है। यह संकुचन भी सामान्य संक्रमण श्रेणियों के समान ही है तथा इसका कारण भी समान है अर्थात् एक ही उपकोश में एक इलेक्ट्रॉन का दूसरे इलेक्ट्रॉन द्वारा परिरक्षण प्रभाव अपूर्ण होता है। फिर भी श्रेणी में नाभिकीय आवेश बढ़ने पर एक d-इलेक्ट्रॉन पर दूसरे d-इलेक्ट्रॉन के परिशक्षण प्रभाव की तुलना में, एक 4f इलेक्ट्रॉन का दूसरे 4f इलेक्ट्रॉन पर परिरक्षण प्रभाव कम होता है तथा f-कक्षकों की आकृति भी इसके लिए अनुकूल नहीं है।

अतः श्रेणी में बढ़ते हुए नाभिकीय आवेश के कारण परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु आकार में एक नियमित कमी पायी जाती है, लेकिन Eu की परमाणु त्रिज्या अधिक होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 15
(ii) पोटैशियम डाइक्रोमेट (Potassium dichromate) (K2Cr2O7)
बनाने की विधि- K2Cr2O7 को क्रोमाइट अयस्क (FeCr2O4) से बनाया जाता है।
क्रोमाइट अयस्क से K2Cr2O7 बनाने में निम्नलिखित पद प्रयुक्त होते हैं-(i) पहले क्रोमाइट अयस्क को वायु की उपस्थिति में सोडियम कार्बोनेट के साथ संगलित किया जाता है, तो क्रोमेट प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 16

प्रश्न 9.
Ni2+ आयन का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
Ni2+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 3d8
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 17
अतः अयुग्मित इलेक्ट्रोंनों की संख्या, n = 2
चुम्बकीय आघूर्ण
(µ) = \(\sqrt{n(n+2)}\) BM
µ = \(\sqrt{2(2+2)}\) =
√8 = 2.82 BM

प्रश्न 10.
कारण दीजिए-
(अ) संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी में Mn अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है।
(ब) Cr2+ तथा Mn3+ दोनों का d4 विन्यास है, परन्तु Cr2+ अपचायक और MnCr3+ ऑक्सीकारक है।
उत्तर:
(अ) संक्रमण तत्वों की 3d श्रेणी में Mn सबसे अधिक संख्या में ऑक्सीकरण अवस्थाएँ (+2 से +7) दर्शाता है क्योंकि इसमें सर्वाधिक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।

(ब) Cr2+ एक अपचायक है; क्योंकि इसका विन्यास d4 से d3 में परिवर्तित होता है जिसमें अर्ध-पूरित t2g स्तर (\(t_{2 \mathrm{~g}}^3\)) होता है। दूसरी और Mn3+ से Mn2+ में परिवर्तन से अर्धपूरित (d5) स्थायी विन्यास प्राप्त होता है जो इसे अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है जिसके कारण यह ऑक्सीकारक होता है।

प्रश्न 11.
Zn, Cd एवं Hg को संक्रमण तत्व नहीं माना जाता है। कारण दीजिए।
उत्तर:
Zn, Cd एवं Hg की मूल अवस्थाओं तथा सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाओं में d-कक्षक पूर्ण भरे होते हैं अतः इन्हें संक्रमण तत्व नहीं माना जाता है। संक्रमण तत्वों में मूल अवस्था अथवा सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में d-कक्षक अपूर्ण होते हैं।

प्रश्न 12.
क्रोमेट आयन की आकृति केसी होती है? इसकी संरचना बनाइए।
उत्तर:
क्रोमेट आयन \(\left(\mathrm{CrO}_4^{2-}\right)\) कौ अकृति चतुण्फलकीय होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 18

प्रश्न 13.
Ti4+ आयन संगहीन होता है। कारण बताइए।
उत्तर:
Ti4+ आयन का बहातम इलेक्ट्रानिक विन्यास 3d0 है जिसमें कोई अयुग्मित इ्लेक्टान नहीं है अत्ता इसमें इलेक्टौन का उत्तेजन सम्भग नहीं है। इसकिए Ti4+ आयन रेगहीन होता है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित के कारण दीजिए-
(1) (a) Mn3+ एक अच्छा अंबसीकास्क है।
(b) संक्रमण तत्वो की प्रथम श्रेणी में \(\mathbf{E}_{\mathbf{M}^{2+}, \mathbf{M}}^{\circ}\) के मान नियमित नहीं हैं।
(c) यद्वापि फ्लुओरीन की विद्युतक्रणता औंक्सीजन से अधिक होती है फिर भी Mn का उच्चतम फ्लुओराइड MnF4 है जबकि इसका उच्चतम ऑक्साइड Mn2O7 है।

(ii) निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 19
उत्तर:
(i) (a) Mn3+/Mn2+ के लिए E° का मन उच्च धनात्मक है अन्तः Mn3+ आसानी से Mn2+ सें अपचयित हो सकता है तथा Mn2+ में अर्धपरित (3d5) स्थायी विन्बास है इसलिए वह Mn+3 से अंक र्थ्यायी है। इसी कारण Mn3+ एक अच्छ कौनसीकारक है।

(b) प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं के लिए E0(Mn2+/M) के मान नियमित नहीं हैं। E0 मान आयनन एन्थैल्पी में अनियमित परिवर्तन (△iH1+△iH2) तथा ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी पर निर्भर करता है। V तथा Mn के लिए आयनन एन्थैल्पी तथा ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी अपेक्षाकृत कम होती है, अतः E0 के मान अनियमित हो जाते हैं।

(c) अन्य मकत्वपूर्ण प्रश्न (लमूतरत्मक) संख्या lb का उतर देखें।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 20

प्रश्न 15.
(i) निम्नलिखित को कैसे बनाएंगे? केवल समीकरण बीजिए।
(a) MnO2 से K2MnO4
(b) Na2CrO4 से Na2Cr2O7
(ii) +3 ऑक्सीकरण अवस्था में ऑक्सीकृत होने के सन्दर्ध गें Mn2+, Fe+2 की तुलना में अधिक स्थायी होता है, क्यों ?
(iii) ऐकिटनॉयडों में ऑवसीकरण अवस्थाओं की परास अधिक होती है, क्यों?
उत्तर:
(i) (a) 2MnO2 + 4KOH + O2 → 2K2MNO4 + 2H2O
(b) 2Na2CrO4 + \(2 \stackrel{+}{\mathrm{H}}\) → Na2Cr2O7 + \(2 \mathrm{Na}^{+}\)

(ii) जिंक में 3d कक्षकों के इलेक्ट्रॉन धात्विक बन्ध बनाने में प्रयुक्त नहीं होते हैं क्योंकि इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3d104s2 होता है जबकि 3d श्रेणी के अन्य सभी धातुओं के d कक्षक अपूर्ण भरे होने के कारण ये इलेक्ट्रॉन धात्विक बनाने में प्रयुक्त होते हैं। अतः Zn में धात्विक बन्ध दुर्बल होता है इसलिए इसकी कणन एन्थैल्पी (परमाणुकरण की एन्थैल्पी) सबसे कम होती है।

(iii) ऐक्टिनायडों में उपचयन अवस्थाओं का परास लैन्थेनोंयडों की अपेक्षा अधिक होता है क्यांकि इनमें 5f, 6d तथा 7s उपकोशों की ऊर्जा लमभग समान होती है। अतः इनके इलेकर्रोन बन्ध बनाने में भाग लेते हैं।

प्रश्न 16.
कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही क्यों प्रदर्शित करती है?
उत्तर:
ऑक्सीजन तथा फ्लुओरोन की उच्च विद्युत्तरणता तथा इनके छोटे आकार के कारण ये धातुओं को उचतम ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत कर देते हैं अतः कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही प्रद्रार्शित करती है।

प्रश्न 17.
(अ) सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण भरित d-कक्षक (4 d10) हैं, फिर भी यह एक संक्रमण तत्व है। कैसे?
(ब) ऐक्टिनॉयड आकुंचन समझाइए।
उत्तर:
(अ) सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण भरित d कक्षक (4 d10) होते हुए भी यह एक संक्रमण तत्व है क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था (Ag2+) में d-कक्षक अपूर्ण हो जाते हैं।

(ब) ऐक्टिनॉयड श्रेणी में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार तथा आयनिक आकार (M+3) में धीरे-धीरे क्रमिक कमी होती है, इसे ऐक्टिनॉयंयड आकुंचन कहते हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 d- एवं f-ब्लॉक के तत्व

प्रश्न 18.
(अ) लैन्थेनॉयड आकुंचन किसे कहते हैं?
(ब) अंतराकाशी यौगिक किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
(स) M2+ (जलीय) आयन (Z = 29) के लिए ‘प्रचक्रण मात्र’ चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।
उत्तर:
(अ) लैन्थेनॉयडों में La से Lu (लैन्थेनम से ल्यूटीशियम ) तक परमाणु क्रमांक बढ़ने पर परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में कमी होती है, इसे लैन्थेनॉयड आकुंचन (संकुचन ) कहते हैं।

(ब) संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल में परमाणुओं के निबिड़ संकुलित होने के बाद भी उनके मध्य छोटे-छोटे रिक्त स्थान बच जाते हैं, जिन्हें अन्तराकाश कहते हैं। इन रिक्त स्थानों में छोटे अधातु परमाणु जैसे H. B, C तथा N आदि आ जाते हैं तो इस प्रकार बने यौगिकों को अन्तराकाशी यौगिक कहते हैं। उदाहरण- Fe3H

(स) परमाणु क्रमांक (Z) = 29 के M2+ आयन (Cu2+) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है-
Cu2+ = [Ar] 3d9
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 8 Img 21
यहाँ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या n = 1, अतः प्रचक्रण मात्र चुम्बकीय आघूर्ण
(µ) = \(\sqrt{n(n+2)}\) BM
µ = \(\sqrt{1(1+2)}\) BM
µ = √3 BM
µ = 1.732 BM

प्रश्न 19.
संक्रमण तत्त्व परिवर्तनशील उपचयन अवस्थाएँ क्यों दिखलाते हैं? d-ब्लॉक की उपचयन अवस्थाएँ p-ब्लॉक के तत्त्वों की उपचयन अवस्थाओं से कैसे भिन्न होती हैं?
उत्तर:
संक्रमण तत्त्व परिवर्तनशील उपचयन (ऑक्सीकरण) अवस्थाएँ प्रदर्शित करते हैं क्योंकि इनके (n – 1) d तथा ns कक्षकों की ऊर्जा में अन्तर बहुत कम होता है तथा इनके d-कक्षकों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन भी पाए जाते हैं। अतः इनमें ns इलेक्ट्रॉनों के साथ (n – 1)d इलेक्ट्रॉन भी बन्ध बनाने में प्रयुक्त होते हैं।

d-ब्लॉक की उपचयन अवस्थाओं में एक का अन्तर होता है। जैसे Mn,+ 2,+ 3,+ 4,+ 5,+ 6 तथा +7 अवस्था दर्शाता है जबकि p-ब्लॉक के तत्त्वों में उपचयन अवस्थाओं में सदैव दो का अन्तर होता है। जैसें- Sn,+2 तथा + 4 अवस्था दर्शाता है।

प्रश्न 20.
(i) Mn3+/Mn2+ युग्म के लिए E0 का मान धनात्मक (+1.5 V) है जबकि Cr3+/Cr2+ के लिए यह ऋणात्मक (- 0.4 V) है। क्यों?
(ii) संक्रमण धातुएँ यौगिक बनाती हैं। क्यों?
(iii) निम्नलिखित समीकरण को पूर्ण कीजिए-
\(2 \mathrm{MnO}_4^{-}+16 \mathrm{H}^{+}+5 \mathrm{C}_2 \mathrm{O}_4^{2-} \rightarrow\)
उत्तर:
(i) Mn3+/Mn2+ युग्म के लिए E0 का मान धनात्मक है जबकि Cr3+/Cr2+ के लिए यह ऋणात्मक है क्योंकि Mn3+ से Mn2+ में परिवर्तन से अर्धपूरित (d5) स्थायी विन्यास प्राप्त होता है जबकि Cr+3 से Cr+2 में परिवर्तन से अधिक स्थायी अर्धपूरित t2g स्तर (\(\left(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}^3\right)\)) कम स्थायी \(\left(\mathrm{t}_{2 \mathrm{~g}}^2\right)\) विन्यास में परिवर्तित होता है।

(ii) संक्रमण धातुओं के यौगिक सामान्यतः रंगीन होते हैं क्योंकि इनमें अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जिससे दृश्य प्रकाश द्वारा d-d संक्रमण (t2g से eg) आसानी से हो जाता है। लिगन्ड (जल इत्यादि) की उपस्थिति में d कक्षक दो भागों में विभाजित हो जाते हैं- t2g तथा eg । इसी कारण इनका रंग जलीय विलयन या जलयोजित अवस्था में ही प्रेक्षित होता है।

(iii) \(2 \mathrm{MnO}_4^{-}(\mathrm{aq})+16 \mathrm{H}^{+}(\mathrm{aq})+5 \mathrm{C}_2 \mathrm{O}_4^{2-}(\mathrm{aq}) \rightarrow 2 \mathrm{Mn}^{2+}(\mathrm{aq})+8 \mathrm{H}_2 \mathrm{O}(l)+10 \mathrm{CO}_2(\mathrm{~g})\)

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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. आपातकालिक गर्भनिरोधक मैथुन के कितने घण्टे के भीतर लेनी चाहिए-
(अ) 72 घण्टे
(ब) 82 घण्टे
(स) 92 घण्टे
(द) 100 घण्टे
उत्तर:
(अ) 72 घण्टे

2. जनसंख्या दिवस मनाया जाता है-
(अ) 11 जुलाई
(ब) 21 जुलाई
(स) 31 जुलाई
(द) 11 अगस्त
उत्तर:
(ब) 21 जुलाई

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

3. जो दम्पति बच्चे के इच्छुक हैं उनके लिए संतान प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय है-
(अ) टेस्ट ट्यूब बेबी
(ब) गोद लेकर
(स) पात्रे निषेचन
(द) कृत्रिम गर्भाशय वीर्य सेचन
उत्तर:
(ब) गोद लेकर

4. जनन स्वास्थ्य शब्द से क्या तात्पर्य है-
(अ) शारीरिक स्वास्थ्य
(ब) व्यवहारात्मक स्वास्थ्य
(स) भावात्मक स्वास्थ्य
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

5. रोध (बैरियर) विधि कौन-सी है?
(अ) निरोध
(ब) गर्भाशय ग्रीवा टोपी
(स) डायफ्राम
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

6. कौनसी तकनीकी पुरुषों से सम्बन्धित है?
(अ) मुखीय गोली
(ब) वैसक्टोमी
(स) ट्यूबेक्टोमी
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) वैसक्टोमी

7. सिफलिस (Syphillis) रोग का रोगजनक है-
(अ) ट्राइकोमोनास वेजाइनेलिस
(ब) मानव पैपिलोमा वायरस
(स) ट्रिपोनिमा पैलिडम
(द) निसेरिया गोनोही
उत्तर:
(स) ट्रिपोनिमा पैलिडम

8. निम्न में से ऐसा कौनसा रोग है जो उपचार योग्य नहीं है-
(अ) यकृत शोध (बी)
(ब) जननिक परिसर्प
(स) एच.आई.वी. संक्रमण
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

9. विद्यालयों में यौन शिक्षा की पढ़ाई क्यों जरूरी है?
(अ) सुरक्षित और स्वच्छ यौन क्रियाओं के लिए
(ब) यौन संचारित रोगों एवं एड्स की जानकारी के लिए
(स) यौन सम्बन्धी गलत धारणाओं से छुटकारा पाने के लिए
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

10. परखनली के सम्बन्ध में सत्य है-
(अ) मादा के जननांग में निषेचन तथा परखनली में वृद्धि
(ब) जननांगों से बाहर निषेचन तथा गर्भाशय में परिवर्धन
(स) निषेचन तथा परिवर्धन गर्भाशय के बाहर
(द) जन्मपूर्व शिशु को इन्क्यूबेटर में रखना
उत्तर:
(ब) जननांगों से बाहर निषेचन तथा गर्भाशय में परिवर्धन

11. औषधि रहित आई यू डी निम्न में से कौन-सी है?
(अ) लिप्पेस लूप
(ब) कॉपर-टी
(स) सी यू
(द) प्रोजेस्टासर्ट
उत्तर:
(अ) लिप्पेस लूप

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

12. उल्बवेधन (ऐमीनोसेंटेसिस) जाँच क्या है?
(अ) गर्भनिरोधक परीक्षण
(ब) बंध्यता परीक्षण
(स) भ्रूणीय लिंग परीक्षण
(द) यौन संचारित रोग परीक्षण
उत्तर:
(स) भ्रूणीय लिंग परीक्षण

13. जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम किस नाम से प्रसिद्ध है?
(अ) एस.सी.एच.
(ब) एच.सी.एच.
(स) आर.सी.एच.
(द) एफ.सी.एच.
उत्तर:
(स) आर.सी.एच.

14. ऐसे मामले में जहाँ स्त्रियाँ अण्डाणु उत्पत्न नहीं कर सकतीं, लेकिन उनके लिए एक विधि अपनाई जाती है, जिसमें दाता से अंडाणु लेकर उन स्त्रियों की फैलोपी नलिका में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। इस तकनीक को क्या कहते हैं?
(अ) जी.आई.एफ.टी.
(ब) ए.आर.टी.
(स) ई.टी.
(द) उत्तर:जेड.आई .एफ.टी.
उत्तर:
(अ) जी.आई.एफ.टी.

15. मानव जनसंख्या की अत्यधिक वृद्धि का कारण है-
(अ) औसत आयुकाल में वृद्धि
(ब) अच्छी चिकित्सीय सुविधाएँ
(स) मृत्युदर में कमी
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

16. परिवार नियोजन की शुरुआत भारत में कब हुई?
(अ) सन् 1951
(ब) सन् 1961
(स) सन् 1941
(द) सन् 197
उत्तर:
(अ) सन् 1951

17. दम्पति के बंध्य होने का कारण हो सकता है-
(अ) शारीरिक
(ब) जन्मजात
(स) रोगजन्य
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

18. निम्न में से यौन संचारित रोग है-
(अ) तपेदिक
(ब) पीलिया
(स) सुजाक
(द) जुकाम
उत्तर:
(स) सुजाक

19. जनन स्वास्थ्य को एक लक्ष्य के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर जननात्मक स्वस्थ समाज को प्राप्त करने की कार्य योजना बनाने वाला विश्व का पहला देश कौनसा था?
(अ) इंग्लैण्ड
(ब) भारत
(स) रूस
(द) अमेरिका
उत्तर:
(ब) भारत

20. स्तनपान अनार्तव विधि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा कितने माह की अवधि तक कारगर मानी गई है?
(अ) 6 माह
(ब) 8 माह
(स) 10 माह
(द) 12 माह
उत्तर:
(अ) 6 माह

21. प्रति हजार व्यक्तियों में जन्म लेने वाली संख्या को क्या कहते हैं?
(अ) वृद्धि दर
(ब) लगभग (crude) जन्म दर
(स) गर्भधारण दर
(द) प्रजनन दर
उत्तर:
(ब) लगभग (crude) जन्म दर

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

22. मुखीय गर्भनिरोधक निम्न में से किसके विभित्न संयोग से बनता है?
(अ) प्रोजेस्ट्रेरॉन-एस्ट्रोजन
(ब) ऑक्सीटोसिन
(स) रिलेक्सीन
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) प्रोजेस्ट्रेरॉन-एस्ट्रोजन

23. सासाहिक रूप से खाने वाली गर्भ निरोधक गोली का व्यापारिक नाम है-
(अ) माला
(ब) सहेली
(स) माला ए
(द) माला डी
उत्तर:
(ब) सहेली

24. दैनिक रूप से खाने वाल गर्भ निरोधक गोली कौनसी है?
(अ) माला C
(ब) माला N तथा माला D
(स) माला A
(द) माला D
उत्तर:
(ब) माला N तथा माला D

25. महिलाओं के लिए एक नया ओरल गर्भ ‘सहेली’ वैज्ञानिकों ने किस संस्थान पर विकसित किया?
(अ) सी.डी.आर.आई.-लखनऊ
(ब) आई.आई .एससी.-बैंगलोर
(स) सी.एस.आई.आर.-नई दिल्ली
(द) आई.सी.एम.आर.-नई दिल्ली
उत्तर:
(अ) सी.डी.आर.आई.-लखनऊ

26. निम्न में से लोगों की जनन सम्बन्धी समस्या है-
(अ) सगर्भता
(ब) गर्भपात
(स) प्रसव
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

27. यौन संचारित रोग का लक्षण है-
(अ) गुसांग में खुजली
(ब) तरल स्राव आना
(स) हल्का दर्द तथा सूजन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

28. यौन संचारित रोगों का समय पर उपचार न होने पर निम्न में से कौनसी जटिलता पैदा हो सकती है-
(अ) श्रोणि-शोथज रोग (पी.आई.डी.)
(ब) अस्थानिक सगर्भता
(स) जनन मार्ग का केंसर
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

29. गर्भनिरोधक विधियों के सम्भावित दुष्प्रभाव हैं-
(अ) मतली
(ब) उदरीय पीड़ा
(स) अनियमित आर्तव रक्तस्राव
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

30. महिलाओं द्वारा मुँह से लेने वाली गोलियाँ 21 दिन तक प्रतिदिन ली जाती हैं। इन्हें क्या कहते हैं?
(अ) पिल्स
(ब) विल्स
(स) किल्स
(द) मिल्स
उत्तर:
(अ) पिल्स

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

31. नीचे एक स्तम्भ में गर्भनिरोध प्राप्त करने की चार रीतियाँ (1-4) और दूसरे स्तम्भ में उनके कार्य करने की चार विधियाँ (i-iv) दी गई हैं। इन रीतियों और उनकी कार्य विधियों के सही मिलान को चुनिये-

स्तम्भ-I ( रीतियाँ )स्तम्भ-II ( कार्य विधियाँ)
1. गोली(i) शुक्रणुओं को सर्विक्स में पहुँचने से रोकना
2. कंडोम(ii) अंतर्रोपण को न होने देना
3. शुक्रवाहिका छेदन(iii) अण्डोत्सर्ग न होने देना
4. कॉपर-T(iv) वीर्य में शुक्राणुओं का न होना।

मिलान

(अ)1-(iii)2-(iv)3-(i)4-(ii)
(ब)1-(ii)2-(iii)3-(i)4-(iv)
(स)1-(iii)2-(i)3-(iv)4-(ii)
(द)1-(iv)2-(i)3-(ii)4-(iii)

उत्तर:

(स)1-(iii)2-(i)3-(iv)4-(ii)

32. प्रतिनिधि माँ (सरोगेट मदर) का उपयोग के लिए होता है।
(अ) दुगध स्त्रावण के प्रेरण
(ब) कृत्रिम वीर्यसेचित मादा
(स) प्रत्यारोपित भ्रूण वाली भविष्य की माँ
(द) कृत्रिम वीर्यसेचन।
उत्तर:
(स) प्रत्यारोपित भ्रूण वाली भविष्य की माँ

33. एम्नियोसेन्टेसिस विधि में द्रव कहाँ से निकाला जाता है?
(अ) भूण के रक्त से
(ब) माता के रक्त से
(स) माता के शरीर के द्रव से
(द) श्रूण को घेरे हुए द्रव से।
उत्तर:
(द) श्रूण को घेरे हुए द्रव से।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1
सेन्ट्रल ड्रग रिसर्च इन्स्टीट्यूट (CDRI) कहाँ अवस्थित है ?
उत्तर:
सेन्ट्रल ड्रग रिसर्च इन्स्टीट्यूट (CDRI) लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में अवस्थित है ।

प्रश्न 2.
परिवार नियोजन को अब किस नाम से जाना जाता है ?
उत्तर:
परिवार नियोजन को अब परिवार कल्याण के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 3.
कंडोम के उपयोग से कोई एक लाभ लिखिए।
उत्तर:
गर्भधारण के अलावा यौन संचारित रोगों से बचाव जैसा लाभ है।

प्रश्न 4.
उल्बभेदन (Amniocentesis) का एक धनात्मक तथा एक ऋणात्मक अनुप्रयोग बताइये ।
उत्तर:

  • धनात्मक अनुप्रयोग – यह भ्रूणावस्था में आनुवंशिक रोग की जाँच में प्रयुक्त किया जाता है।
  • ऋणात्मक अनुप्रयोग – यह मादा भ्रूण हत्या को बढ़ावा देता है।

प्रश्न 5.
हफ्ते में एक बार लेने वाली गर्भनिरोधक गोली का नाम लिखिए।
उत्तर:
हफ्ते में एक बार लेने वाली गर्भनिरोधक गोली का नाम सहेली है।

प्रश्न 6.
आई. यू. डी. गर्भाशय के अन्दर कॉपर (सी.यू.) का आयन मोचित होने के कारण शुक्राणुओं पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
आई. यू. डी. गर्भाशय के अन्दर कॉपर (सी.यू.) का आयन मोचित होने के कारण शुक्राणुओं की भक्षकाणुक्रिया (Phagocytosis) बढ़ा देती है जिससे शुक्राणुओं की गतिशीलता तथा उनके निषेचन की क्षमता को कम करती है।

प्रश्न 7.
मुँह द्वारा ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों (पिल्स) में कौनसा हार्मोन पाया जाता है ?
उत्तर:
मुँह द्वारा ली जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों (पिल्स) में प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन नामक हार्मोन पाया जाता है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

प्रश्न 8.
जो औरतें गर्भावस्था में देरी या बच्चों के जन्म में अंतराल चाहती हैं, उनके लिए कौनसी युक्ति आदर्श गर्भनिरोधक है?
उत्तर:
जो औरतें गर्भावस्था में देरी या बच्चों के जन्म में अंतराल चाहती हैं, उनके लिए आई यू डी आदर्श गर्भनिरोधक युक्ति है।

प्रश्न 9.
चिकित्सीय सगर्भता समापन किसे कहते हैं?
उत्तर:
गर्भावस्था पूर्ण होने से पहले जानबूझकर या स्वैच्छिक रूप से गर्भ के समापन को चिकित्सीय सगर्भता समापन ( एम.टी.पी.) कहते हैं।

प्रश्न 10.
IUCD का पूर्ण रूप लिखिए।
उत्तर:
इन्ट्रा यूटेराइन कान्ट्रासेप्टिव डिवाइस |

प्रश्न 11.
दो वर्ष तक मुक्त या असुरक्षित सहवास के बावजूद गर्भाधान न हो पाने की स्थिति को क्या कहते हैं?
उत्तर:
दो वर्ष तक मुक्त या असुरक्षित सहवास के बावजूद गर्भाधान न हो पाने की स्थिति को बंध्यता ( Infertility) कहते हैं।

प्रश्न 12.
महिला नसबंदी से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर;
महिला के उदर में छोटा-सा चीरा लगाकर अथवा योनि द्वारा डिंबवाहिनी नली का छोटा भाग निकाल या धागे से बाँधने की क्रिया को महिला नसबंदी अथवा नलिका उच्छेदन (टूबैक्टोमी) कहते हैं।

प्रश्न 13.
चिकित्सीय सगर्भता समापन ( एम. टी. पी.) को कानूनी स्वीकृति कब प्रदान की गई ?
उत्तर:
चिकित्सीय सगर्भता समापन ( एम. टी. पी.) को कानूनी स्वीकृति सन् 1971 ई. में प्रदान की गई।

प्रश्न 14.
STD का सम्पूर्ण रूप लिखिए।
उत्तर:
यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) |

प्रश्न 15.
स्तनपान अनार्तव विधि के दौरान गर्भधारण शून्य होता है, क्यों?
उत्तर:
स्तनपान अनार्तव विधि के दौरान अण्डोत्सर्ग और आर्तव चक्र शुरू नहीं होता है। इसलिए गर्भधारण शून्य होता है।

प्रश्न 16.
पुरुषों के लिए कंडोम का मशहूर ब्रांड नाम क्या है जो काफी लोकप्रिय है ?
उत्तर:
पुरुषों के लिए कंडोम का मशहूर ब्रांड नाम निरोध (Nirodh) काफी लोकप्रिय है 1

प्रश्न 17.
विवाह की वैधानिक आयु स्त्री तथा पुरुष के लिए क्या सुनिश्चित है ?
उत्तर:
विवाह की वैधानिक आयु स्त्री के लिए 18 वर्ष तथा पुरुष के लिए 21 वर्ष सुनिश्चित है।

प्रश्न 18.
दो STD के नाम लिखिए जो संदूषित रक्त से संचारित होते हैं।
उत्तर:

  • एड्स
  • हिपेटाइटिस – B

प्रश्न 19.
गर्भाशय वीर्य सेचन ( Intrauterine insemination) किसे कहते हैं?
उत्तर:
पति या स्वस्थ दाता से शुक्र लेकर कृत्रिम रूप से या तो स्त्री की योनि (Vagina) में अथवा गर्भाशय ( Uterus) में प्रविष्ट कराना गर्भाशय वीर्य सेचन कहलाता है ।

प्रश्न 20.
माहवारी चक्र में 10वें से 17वें दिन के बीच की अवधि को क्या कहते हैं एवं क्यों?
उत्तर:
माहवारी चक्र में 10वें से 17वें दिन के बीच की अवधि को निषेच्य अवधि (Fertile period) कहते हैं। क्योंकि इस अवधि में निषेचन एवं गर्भधारण के अवसर अधिक होते हैं।

प्रश्न 21.
पुरुष साथी स्त्री को वीर्यसेचित कर सकने योग्य नहीं है अथवा जिसके स्खलित वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत ही कम है, ऐसे दोष का निवारण किस तकनीक से किया जा सकता है?
उत्तर:
कृत्रिम वीर्य सेचन ( Artificial Insemination)।

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प्रश्न 22.
सहेली नामक गर्भनिरोधक गोली की खोज भारत के किस संस्थान में की गई?
उत्तर:
सहेली नामक गर्भनिरोधक गोली की खोज भारत में लखनऊ स्थित केन्द्रीय औषध अनुसंधान संस्थान (CDRI) में की गई।

प्रश्न 23.
लैंगिक सम्पर्क से होने वाले कोई दो रोग बताइए ।
उत्तर:

  • सूजाक (Gonorrhoea)
  • सिफिलिस (Syphilis)

प्रश्न 24.
छोटे परिवार को प्रोत्साहन देने हेतु गर्भ निरोधक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित नारा ‘हम दो हमारा एक’ गाँव में ज्यादा लोकप्रिय है या शहर में ?
उत्तर:
शहरों में कामकाजी युवा दम्पतियों ने ‘हम दो हमारा एक’ का नारा अपनाया है।

प्रश्न 25.
HIV एवं AIDS का सम्पूर्ण रूप लिखिए।
उत्तर:
HIV- ह्यूमन इम्यूनो डेफीसिएन्सी वाइरस । AIDS – एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिन्ड्रोम ।

प्रश्न 26.
दो घटनाओं के नाम लिखिए जो मनुष्य में गर्भधारण से रोकथाम के लिए मुखीय गर्भनिरोधक गोलियों का प्रयोग करने से होती हैं ?
उत्तर:
मुखीय गर्भनिरोधक गोलियों से अण्डोत्सर्ग की क्रिया परिवर्तित होती है तथा रोपण की क्रिया नहीं होती है। इसके अलावा सर्वाइकल म्यूकस की गुणवत्ता को रूपान्तरित करती है जिससे शुक्राणुओं का प्रवेश बाधित हो जाता है।

प्रश्न 27.
डायफ्राम एवं वाल्ट क्या है? इसका क्या उपयोग है?
उत्तर:
डायफ्राम एवं वाल्ट रबर से बने रोधक उपाय हैं। इनका उपयोग स्त्री के जनन मार्ग में सहवास के पूर्व गर्भाशय ग्रीवा को ढकने में किया जाता है।

प्रश्न 28.
ZI FT का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर:
युग्मनज अन्तः डिम्बवाहिनी स्थानान्तरण (Zygote Intra Fallopian Transfer)

प्रश्न 29.
लिंग अनुपात किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी समष्टि में प्रति एक हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या लिंग अनुपात कहलाता है।

प्रश्न 30.
जनसंख्या की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
एक विशिष्ट स्थान पर एक समय में पाये जाने वाले एक जाति के सदस्यों के समूह को जनसंख्या कहते हैं ।

प्रश्न 31.
STD क्या है? इसके दो रोगों को बताइए ।
उत्तर:
वे रोग जो मैथुन (Sexual Inter Course) द्वारा संचारित होते हैं, उन्हें सामूहिक तौर पर यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases, STD ) कहते हैं। इन्हें रति रोग अथवा जनन मार्ग संक्रमण (Reproductive Tract Infection) भी कहते हैं।
दो रोग –

  • सुजाक (Gonorrhoea)
  • सिफलिस (Syphilis ) ।

प्रश्न 32.
परखनली शिशु क्या है?
उत्तर:
परखनली शिशु ( Test Tube baby) – कुछ महिलाएँ गर्भधारण नहीं कर पाती हैं। इन महिलाओं के अण्डाणु को कृत्रिम माध्यम पर शुक्राणु द्वारा निषेचित कराकर पुनः भ्रूण को गर्भाशय में रोपित कर दिया जाता है जहाँ भ्रूण का सामान्य विकास होता है। सामान्य प्रसव के बाद जो शिशु जन्म लेता है इसे परखनली शिशु कहते हैं ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
एक वर्ष की पुत्री की माता अपने दूसरे बच्चे में अन्तर रखना चाहती है। उसकी डाक्टर ने उसे Cu – T की सलाह दी। इसके गर्भनिरोधक प्रभाव को समझाइए ।
अथवा
Cu-T किस प्रकार महिलाओं के लिए एक असरकारक गर्भनिरोधक है?
उत्तर:
कॉपर-टी एक कॉपर आयन मुक्त करने वाली अन्तः गर्भाशयी युक्ति है। इससे निकलने वाले कॉपर आयन शुक्राणुओं ( Sperms) के लिए भक्षाणुओं की तरह कार्य कर उन्हें समाप्त कर देते हैं इससे शुक्राणुओं की गतिशीलता व निषेचन की क्षमता समाप्त हो जाती है। जिसके परिणामस्वरूप निषेचन (Fertilization ) एवं. गर्भधारण की क्रिया नहीं होती है।

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प्रश्न 2.
आदर्श गर्भनिरोधक किसे कहते हैं? गर्भनिरोधक उपायों के संभावित कोई पाँच दुष्प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
एक आदर्श गर्भनिरोधक प्रयोगकर्ता के हितों की रक्षा करने वाला, आसानी से उपलब्ध, प्रभावी तथा जिसका कोई दुष्प्रभाव नहीं हो या हो भी तो बहुत ही कम । इसके साथ ही यह उपयोगकर्ता की कामेच्छा, प्रेरणा तथा मैथुन में बाधक न हो उसे एक आदर्श गर्भनिरोधक ( Ideal Contraceptive ) कहते हैं।
गर्भनिरोधक उपायों के संभावित पाँच दुष्प्रभाव निम्न हैं-

  • मतली (Nausea)
  • उदरीय पीड़ा (Abdominal pain)
  • बीच-बीच में रक्तस्राव ( Breakthrough bleeding).
  • अनियमित आर्तव रक्तस्राव (Irregular menstrual bleeding)
  • स्तन कैंसर (Breast Cancer) ।

प्रश्न 3.
भारत में गर्भनिरोधक दूसरी प्रभावी और लोकप्रिय विधि कौनसी है? इसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में दूसरी प्रभावी और लोकप्रिय विधि अंतः गर्भाशयी युक्ति (Intra Uterine Device) है ये युक्तियाँ डाक्टरों एवं अनुभवी नसों द्वारा योनि मार्ग से गर्भाशय ( Uterus) में लगाई जाती हैं। आजकल विभिन्न प्रकार की अंत: गर्भाशयी युक्तियाँ उपलब्ध हैं; जैसे कि औषधिरहित आई यू डी (उदाहरण- लिप्पेस लूप), तांबा मोचक आई यू डी (कॉपर-टी, कॉपर-7 मल्टी लोड 375 कॉपर टी) तथा हार्मोन मोचक आई यू डी (प्रोजेस्टासर्ट, एल एन जी -20) आदि।

आई यू डी गर्भाशय के अन्दर कॉपर (सीयू) का आयन मोचित होने के कारण शुक्राणुओं की भक्षकाणुक्रिया (Phagocytosis) बढ़ा देती है जिससे शुक्राणुओं की गतिशीलता तथा उनकी निषेचन क्षमता को कम करती है। इसके अलावा आई यू डी हार्मोन को गर्भाशय में भ्रूण के रोपण के लिए अनुपयुक्त बनाते तथा गर्भाशय ग्रीवा को शुक्राणुओं का विरोधी बनाते हैं जो औरतें गर्भावस्था में देरी या बच्चों के जन्म में अंतराल चाहती हैं, उनके लिए आई यू डी आदर्श गर्भनिरोधक (Ideal Contraceptives) है।

प्रश्न 4.
कभी-कभी गुणकारी खोज भी हानिकारक हो जाती है। समझाइए ।
उत्तर:
वैज्ञानिकों द्वारा मनुष्य के लाभ के लिए अनेक युक्तियों की खोज की जाती है। विभिन्न बीमारियों के इलाज की विधियाँ खोजी जाती हैं परन्तु मनुष्य अपने स्वार्थवश उनका दुरुपयोग करने लगता है जिसका परिणाम अति भयंकर होता है। उदाहरण के लिए उल्चवेधन ऐसी युक्ति है जिसमें माँ के गर्भ में पल रहे शिशु या गर्भ में उत्पन्न आनुवंशिक कमियों तथा उसकी स्थिति का पता लगाया जा सकता है परन्तु लालची मनुष्य ने इस युक्ति का प्रयोग लिंग की पहचान करने में प्रारम्भ कर दिया है।

लिंग का पता करके मनुष्य अवांछित भ्रूण को गर्भपात द्वारा नष्ट करा देता है। खासकर मानव समाज में लड़की के जन्म को हेय दृष्टि से देखा जाता है और उनकी इस युक्ति से पहचान कर गर्भ में हत्या कर दी जाती है। इसे भ्रूण हत्या कहते हैं। यह एक अमानवीय व्यवहार है। इससे यह सिद्ध होता है कि कभी-कभी गुणकारी खोज भी हानिकारक हो जाती है।

प्रश्न 5.
पिल्स क्या है? यह गर्भनिरोधक के रूप में किस प्रकार कार्य करती है? समझाइए ।
उत्तर:
महिलाओं के द्वारा खाया जाने वाला गर्भनिरोधक प्रोजेस्टोजन अथवा प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजन का संयोजन है जिसे थोड़ी मात्रा में मुँह द्वारा लिया जाता है। यह मुँह से टिकिया (Tablets) के रूप में ली जाती है और यह पिल्स (Pills) के नाम से लोकप्रिय है। ये गोलियाँ ( Pills ) 21 दिन तक प्रतिदिन ली जाती हैं और इन्हें आर्तव चक्र (Menstrual cycle) के प्रथम पाँच दिनों, मुख्यत: पहले दिन से ही शुरू करना चाहिये। गोलियाँ (Pills)

समाप्त होने के सात दिनों के अंतर के बाद जब पुन: आर्तव चक्र शुरू होता है, फिर से वैसे ही लिया जाता है और यह क्रम तब तक जारी रहता है जब तक गर्भनिरोधक की आवश्यकता होती है । ये अण्डोत्सर्जन (Ovulation) और रोपण (Implantation ) को रोकने के साथ गर्भाशय ग्रीवा की श्लेष्मा गुणता को बदल देती हैं, जिससे शुक्राणुओं के प्रवेश पर रोक लग जाती है, या उनकी गति धीरे अथवा मंद हो जाती है।

ये गोलियाँ ( Pills) बहुत ही प्रभावशाली तथा बहुत कम दुष्प्रभाव वाली होती हैं। महिलाओं द्वारा ये खूब स्वीकार्य हैं । सहेली (Saheli) नामक नयी गर्भनिरोधक गोली है । यह हफ्ते में एक बार ली जाने वाली गोली है। इसके दुष्प्रभाव बहुत कम तथा यह उच्च निरोधक क्षमता वाली होती है।

प्रश्न 6.
जन्मदर व मृत्युदर में कोई चार अन्तर लिखिए ।
उत्तर:
जन्मदर तथा मृत्युदर में कोई चार अन्तर-

जन्मद्रमृत्युदर
1.प्रति हजार जनसंख्या में प्रतिवर्ष जन्म लेने वाले प्राणियों की संख्या को जन्मदर कहते हैं।प्रति ह जार जनसंख्या में प्रतिवर्ष मरने वाले प्राणियों की संख्या को मृत्युदर कहते हैं।
2. जन्मदर को नियंत्रित करने वाले कारक निम्न हैं-आर्थिक विकास एवं मानव महत्वाकांक्षाएँ।जबकि मृत्युदर को निम्न कारकों से कम किया जा सकता है -प्राकृ तिक आपदाओं से रक्षा, भण्डारण की सुविधा, कृषि का विकास आदि।
3. जन्मदर के बढ़ने से जनसंख्या घनत्व का मान भी बढ़ जाता है ।मृत्युदर के बढ़ने से जनसंख्या घनत्व के मान में कमी आती है ।
4. जन्मदर के बढ़ने से जनसंख्या में वृद्धि होती है।मृत्युदर के बढ़ने से जनसंख्या में कमी आती है।

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प्रश्न 7.
गर्भनिरोध की शल्यक्रिया विधि को नामांकित चित्र की सहायता से समझाइए ।
उत्तर:
शल्यक्रिया विधियाँ (Surgical methods ) – इन्हें बंध्यकरण (Sterilisation) भी कहते हैं । प्रायः यह उन लोगों को सुझाई जाती है, जिन्हें बच्चा नहीं चाहिये तथा इसे स्थाई माध्यम के रूप में (पुरुष / स्त्री में से एक) अपनाना चाहते हैं। शल्यक्रिया द्वारा युग्मक ( Gametes) के परिवहन को रोक दिया जाता है, जिसके फलस्वरूप गर्भाधान नहीं होता है । बंध्यकरण (Sterilisation) प्रक्रिया को पुरुषों के लिए शुक्रवाहक – उच्छेदन (Vasectomy) तथा महिलाओं के लिए डिंबवाहिनी नलिका उच्छेदन ( Tubectomy) कहा जाता है।

जनसाधारण इन क्रियाओं को पुरुष नसबंदी या महिला नसबंदी के नाम से जानते हैं। शुक्रवाहक- उच्छेदन में अंडकोष (Scrotum) शुक्रवाहक में चीरा मार कर छोटा-सा भाग काटकर निकाल या बाँध दिया जाता है।  (अ) को। जबकि स्त्री के उदर में छोटा- सा चीरा मारकर या योनि द्वारा डिंबवाहिनी नली (Fallopian Tube) का छोटा-सा भाग निकाल या बाँध दिया जाता है। देखिए चित्र (ब) को । ये तकनीकें बहुत ही प्रभावशाली होती हैं पर इनमें पूर्व स्थिति लाने की गुंजाइश बहुत ही कम होती है।
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प्रश्न 8.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जनन स्वास्थ्य का अर्थ क्या है? जनन स्वास्थ्य कार्य योजनाओं के उद्देश्यों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनन स्वास्थ्य का अर्थ विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जनन के सभी पहलुओं सहित एक सम्पूर्ण स्वास्थ्य अर्थात् शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारात्मक तथा सामाजिक स्वास्थ्य है । इसलिए ऐसे समाज को जननात्मक रूप से स्वस्थ समाज कहा जा सकता है, जिसमें लोगों के जनन अंग शारीरिक रूप से प्रकार्यात्मक रूप से सामान्य हों, यौन संबंधी सभी पहलुओं में जिनकी भावनात्मक और व्यावहारिक पारस्परिक क्रियाएँ सामान्य हों।

जनन स्वास्थ्य कार्ययोजनाओं के उद्देश्य – राष्ट्रीय स्तर पर जननात्मक स्वस्थ समाज को प्राप्त करने की कार्ययोजनाएँ बनाई गई हैं। ये सारी कार्ययोजनाएँ वर्तमान में जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम के अन्तर्गत आगे बढ़ाई जा रही हैं। जनन स्वास्थ्य हासिल करने की दिशा में लोगों के बीच जनन अंगों, किशोरावस्था एवं उससे जुड़े बदलावों, सुरक्षित एवं स्वच्छतापूर्ण यौन प्रक्रियाओं, एच.आई.वी.एड्स सहित यौन संचारित रोगों के बारे में परामर्श देना एवं जागरूकता पैदा करना इस दिशा में पहला कदम है।

चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा आर्तव (ऋतुस्राव) में अनियमितताएँ, सगर्भता संबंधी पहलुओं, प्रसव चिकित्सीय सगर्भता समापन आदि से जुड़ी समस्याओं की देखभाल, इनके लिए चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना और जन्म नियन्त्रण, प्रसवोत्तर शिश् एवं माता की देखभाल एवं प्रबंधन आदि आर. सी. एच. कार्यक्रम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलू हैं ।

प्रश्न 9.
गर्भनिरोधक किसे कहते हैं? महिलाओं द्वारा उपयोग में लिए जाने वाले किन्हीं दो गर्भनिरोधक का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
प्राकृतिक तथा यांत्रिक विधियों द्वारा निषेचन को रोकना तथा गर्भनिरोधक विधियों द्वारा अण्डे और शुक्राणुओं के संलयन को रोका जाता है।
महिलाओं द्वारा उपयोग किये जाने वाले दो गर्भनिरोधक निम्न हैं-

  1. गर्भनिरोधक गोलियाँ (Contraceptive Pills ) – गर्भनिरोधक गोलियों को रोज खाना पड़ता है, जिनसे महिला में अण्डोत्सर्ग नहीं होता है। इन गोलियों से केवल अण्डोत्सर्ग नहीं हो सकता है और रजचक्र की रक्तस्राव एवं गर्भाशय की दीवार के अस्तर का उतरना सामान्य रूप से होता रहता है।
  2. डायाफ्राम ( Diaphragm ) – इसे चिकित्सक द्वारा गर्भाशय के मुख (Cervix) पर फिट किया जाता है जिससे शुक्राणु सर्विक्स नलिका में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न 10.
चिकित्सीय सगर्भता समापन से क्या तात्पर्य है? इसका क्यों एवं कब उपयोग करना चाहिए? समझाइए ।
उत्तर:
चिकित्सीय सगर्भता समापन (Medical Termination of Pregnancy ) – गर्भावस्था पूर्ण होने से पहले जान- बूझकर या स्वैच्छिक रूप से गर्भ के समापन ( abortion ) को चिकित्सीय सगर्भता समापन कहते हैं। इसे प्रेरित गर्भपात (Induced abortion) भी कहते हैं। हमारे देश में चिकित्सीय सगर्भता समापन को वैधानिक मान्यता प्राप्त है।

सामान्य रूप से चिकित्सीय सगर्भता का उपयोग बलात्कार जैसे मामलों से हुई अनचाही सगर्भता तथा सामान्य या कभी-कभार के यौन संबंधों आदि से पैदा हुई सगर्भता को समाप्त कराने हेतु किया जाता है ऐसे मामलों में भी चिकित्सीय सगर्भता समापन (medical termination of pregnancy) किया जाता है जहाँ बार – बार की सगर्भता माँ अथवा भ्रूण अथवा दोनों के लिए हानिकारक हो सकती है।

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सगर्भता 12 सप्ताह तक की अवधि में कराया जाने वाला चिकित्सीय सगर्भता समापन अपेक्षाकृत काफी सुरक्षित माना जाता है। इसके बाद द्वितीय तिमाही में गर्भपात बहुत ही घातक होता है। अधिकतर चिकित्सीय सगर्भता समापन ( एम टी पी) गैर-कानूनी रूप से अकुशल नीम-हकीमों से कराए जाते हैं जो कि न केवल असुरिक्षत होते हैं, बल्कि जानलेवा भी सिद्ध हो सकते हैं । आजकल शिशु के लिंग निर्धारण के लिए उल्बवेधन (Amniocentesis) का दुरुपयोग उच्च स्तर पर हो रहा है।

यह प्रवृत्ति शहरी क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है। दम्पति को मादा भ्रूण का पता लगने पर शीघ्र ही एम.टी.पी. करा लिया जाता है जो पूरी तरह से गैरकानूनी है। इस प्रकार की प्रवृत्ति से बचना चाहिये क्योंकि यह युवा माँ और भ्रूण दोनों के लिए खतरनाक है। इसके साथ ही जनसंख्या में लिंग अनुपात ( Sex Ratio in Population) में अन्तर आ जायेगा जो सामाजिक दृष्टि में अच्छा नहीं रहेगा एवं इससे भविष्य में कई प्रकार की विषमताएँ उत्पन्न हो जायेंगी ।

प्रश्न 11.
सहेली क्या है? सहेली एवं मल्टी लोड 375 में कोई तीन विभेद लिखिए।
उत्तर:
सहेली – यह एक गर्भनिरोधक गोली एक गैर-स्टेराइड (Non-steroid) पदार्थ वाली होती है। इसे हफ्ते में एक बार लिया जाता है। इसकी निरोधक क्षमता उच्च तथा दुष्प्रभाव कम होता है।

सहेलीमल्टी लोड 375
1. यह प्रोजेस्ट्रोन व एस्ट्रोजन हार्मोन युक्त होती है।इसमें उक्त हार्मोन का अभाव होता है।
2. यह मुख द्वारा खायी जाती है।जबकि इसे स्त्री की योनि मार्ग द्वारा गर्भाशय में लगाया जाता है।
3. इसके द्वारा अण्डोत्सर्ग व रोपण कार्य को रोका जाता है।इसके द्वारा मोचित कॉपर आयन शुक्राणुओं की गतिशीलता को कम कर निषेचन क्रिया को रोकती है।

प्रश्न 12.
IUD क्या है? ये कितनी प्रकार की होती है? औषधि रहित IUD का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
IUD का पूरा नाम अन्तः गर्भाशयी युक्ति ( Intra Uterine Device) है। इसे अनुभवी चिकित्सकों द्वारा स्त्री के योनि मार्ग में गर्भाशय में लगाया जाता है। जब तक यह युक्ति गर्भाशय में रहती है, भ्रूण का रोपण गर्भाशय में नहीं होता है। इस प्रकार की युक्तियाँ शुक्राणुओं को गर्भाशय में पहुँचने से रोकती हैं।
IUD (अन्तः गर्भाशयी युक्तियाँ) तीन प्रकार की होती हैं-

  1. औषधि रहित IUD
  2. ताँबा मोचक IUD
  3. हार्मोन मोचक IUD

औषधिरहित IUD (Non-medicated IUDs) – इसमें कोई किसी प्रकार की औषधि नहीं होती है इसलिए इसे औषधिरहित IUD कहते हैं। केवल अण्डवाहिनी (Oviduct ) में लिप्पेस लूप (Lippes Loops) बनाकर अण्डाणु व शुक्राणु के संयोजन (Fertilization) को रोका जाता है। उदाहरण- लिप्पेस लूप ।

प्रश्न 13.
निम्नलिखित वाक्यों में से बताइए कि कौन-सा वाक्य सत्य है और कौन-सा गलत है?
1. पात्रे – निषेचन के बाद भ्रूण स्थानान्तरण के द्वारा महिला के जनन मार्ग में भ्रूण को स्थापित करके संतान प्राप्त की जाती है। यह एक सामान्य विधि है जिसे टेस्ट ट्यूब बेबी कार्यक्रम कहा जाता है।
उत्तर:
सत्य ।

2. माला-डी गर्भनिरोधक गोली स्टीरॉएड युक्त होती है ।
उत्तर:
सत्य ।

3. एल एन जी -20 एक औषधि रहित IUD है।
उत्तर:
गलत ।

4. मैथुन के समय कंडोम का प्रयोग नहीं करने से यौन संचारित रोग नहीं होते हैं।
उत्तर:
गलत ।

5. जब किसी जनसंख्या में जन्मदर तथा मृत्युदर समान होती है।
और जनसंख्या में कोई भी वृद्धि नहीं होती तो इसे शून्य जनसंख्या वृद्धि कहते हैं।
उत्तर:
सत्य ।

6. विश्व में हमारा देश चौथा ऐसा देश है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जननात्मक स्वस्थ समाज को प्राप्त करने की कार्ययोजनाएँ बनाई हैं ।
उत्तर:
गलत ।

7. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तथा जीवन के रहन-सहन की बेहतर परिस्थितियाँ होने के कारण जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि हुई हैं।
उत्तर:
सत्य ।

8. दो वर्ष तक मुक्त या असुरक्षित सहवास के ‘बावजूद गर्भाधान न हो पाने की स्थिति को बंध्यता कहते हैं।
उत्तर:
सत्य ।

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प्रश्न 14.
सुजाक रोग क्या है? इसके लक्षण व उपचार लिखिए ।
उत्तर:
सुजाक रोग – इसे गोनोरिया (Gonorrhoea) भी कहते हैं। यह रोग निसेरिया गोनोरिया (Neisseria gonorrhoea) नामक जीवाणु के संक्रमण के कारण उत्पन्न होता है। यह रोग लैंगिक सम्पर्क के माध्यम से फैलता है।
सुजाक रोग के लक्षण-

  • मूत्र विसर्जन के समय तेज दर्द ।
  • शुक्राणु प्रवाह रुक जाता है।
  • संक्रमित नर मनुष्य के मूत्र मार्ग द्वारा श्वेत गाढ़े द्रव का स्राव होता है एवं रोग की अधिकता के कारण अधिवृषण भी संक्रमित हो जाती है।
  • महिलाओं में मासिक चक्र में व्यवधान के कारण बाँझपन आ जाता है।
  • महिलाओं में बार्थोलिन ग्रन्थि (Bartholian gland) एवं

मूत्र जनन मार्ग के संक्रमण के फलस्वरूप मूत्र त्याग में तेज दर्द होना आदि सुजाक रोग का लक्षण है।
उपचार-

  • इस रोग के उपचार में सल्फोनेमाइड तथा स्पेक्टिनोमाइसिम टेट्रासाइक्लिन आदि औषधियाँ दी जाती हैं।
  • सुरक्षित यौन सम्बन्ध व रोगी के सम्पर्क में न आवें ।
  • वेश्यावृत्ति व समलैंगिकता से बचना ।

प्रश्न 15
परखनली शिशु पर टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर:
परखनली शिशु (Test Tube Babies) – कुछ महिलाओं में अण्डावाहिनी अवरुद्ध हो जाती है जिसके कारण अण्डे का निषेचन नहीं हो पाता। इस समस्या का निदान परखनली शिशु तकनीक की सहायता से किया जा सकता है। इस तकनीक में स्त्री अण्डाशय से एक या अधिक परिपक्व अण्डे एक विशेष पिचकारी ( Syringe ) द्वारा खींचे जाते हैं।

इन अण्डों को स्त्री के पुरुष साथी के शुक्राणुओं के साथ एक डिश में अनुकूलतम परिस्थितियों में कुछ घण्टों के लिए रखा जाता है। शुक्राणु अण्डों को निषेचित करते हैं और इससे एक भ्रूण निर्मित होता है। तब इस भ्रूण को स्त्री के गर्भाशय में प्रवेश कराया जाता है। जहाँ पर यह एक शिशु के रूप में परिवर्धित होता है।

प्रश्न 16.
कॉलम – I के पदों को कॉलम-II के साथ सही-सही क्रम में मिलाइए-

कॉलम-Iकॉलम-II
(a) जनन स्वास्थ्य लक्ष्य प्राप्ति में विश्व में1. अन्तःगर्भाशय वीर्य सेचन
(b) पहला उल्बवेधन जाँच2. एल एन जी-20
(c) प्राकृतिक गर्भनिरोधक विधि3. भ्रूणलिंग निर्धारण
(d) हार्मोन मोचक आई यू डी4. शुक्रवाहक उच्छेदन (वेसेक्टोमी)
(e) बंध्यकरण प्रक्रिया पुरुषों के लिए5. भारत
(f) कृत्रिम वीर्य सेचन6. स्तनपान अनार्तव

उत्तर:

कॉलम-Iकॉलम-II
(a) जनन स्वास्थ्य लक्ष्य प्राप्ति में विश्व में5. भारत
(b) पहला उल्बवेधन जाँच3. भ्रूणलिंग निर्धारण
(c) प्राकृतिक गर्भनिरोधक विधि6. स्तनपान अनार्तव
(d) हार्मोन मोचक आई यू डी2. एल एन जी-20
(e) बंध्यकरण प्रक्रिया पुरुषों के लिए4. शुक्रवाहक उच्छेदन (वेसेक्टोमी)
(f) कृत्रिम वीर्य सेचन1. अन्तःगर्भाशय वीर्य सेचन

प्रश्न 17.
सिफलिस रोग के रोग जनक, संक्रमण विधि, उद्भवन अवधि, लक्षण, रोकथाम एवं उपचार लिखिए।
उत्तर:
रोगजनक – ट्रोपोनेमा पैलीडम ।
संक्रमण की विधि-संक्रमित व्यक्ति के साथ लैंगिक सम्पर्क | उद्भवन अवधि – सम्पर्क के 10-90 दिन के बाद लक्षण स्पष्ट होते हैं लेकिन सामान्यतया जीवाणु द्वारा संक्रमित होने के 3-4 सप्ताह में लक्षण प्रकट होने लगते हैं।
लक्षण – लक्षण कई चरणों में प्रकट होते हैं। सिलफिस के सामान्य लक्षण निम्न हैं-

  • ज्वर, त्वचा में गले में, मूत्र प्रजनन क्षेत्र विशेषकर योनि या लिंग, गुदा, मलाशय व मुँह में अल्सर होते हैं। अल्सर (व्रण) गोल व दृढ़ व बहुधा पीड़ारहित होते हैं
  • हाथों, पाँवों व हथेली में दाने ।
  • मुँह में सफेद धब्बे ।
  • जाँघ में मुँहासे के समान मस्से ।
  • संक्रमित क्षेत्र से बालों का झड़ना ।
  • अन्तिम तीन लक्षण काफी हो सकते हैं।

ये बहुधा अंदरूनी हो जाते हैं और मस्तिष्क, तन्त्रिका, नेत्रों, रक्त वाहिनियों, अस्थियों व जोड़ों को प्रभावित करते हैं। जो संक्रमण के 10 वर्ष बाद प्रकट होते हैं। इससे पक्षाघात, अंधापन, मनोभ्रम (Dementia) व बंध्यता (Sterility) हो सकती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

रोकथाम व उपचार-

  • केवल एक ही व्यक्ति के साथ लैंगिक सम्पर्क
  • वेश्यावृत्ति व समलैंगिकता से बचना ।
  • संयम बरतना व कंडोम का प्रयोग करना ।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता रखनी चाहिए व उचित औषधीय उपचार लेना चाहिये ।

प्रश्न 18.
जीव विज्ञान का विद्यार्थी होने के नाते बंध्य दम्पतियों को संतान प्राप्ति हेतु आप क्या सुझाव देना चाहेंगे ?
उत्तर:
स्त्री व पुरुष दोनों की बंध्यता क्लीनिक में जाँच करवानी चाहिए तथा सहायक जनन प्रौद्योगिकियों ( ए आर टी) की मदद लेनी चाहिए। इन्हें टेस्ट ट्यूब बेबी कार्यक्रम का लाभ उठना चाहिये ।

प्रश्न 19.
(i) IUD का पूर्ण नाम लिखिए।
(ii) हार्मोन स्रावित करने वाले IUDs को, बच्चों के बीच में अन्तर रखने के लिए उत्तम गर्भनिरोधक माना जाता है। क्यों ?
उत्तर:
(i) IUD का पूर्ण नाम- इन्द्रा यूटेराइन डिवाइस (Intra Uterine Devices)
(ii) हार्मोन स्रावित करने वाले IUDs उत्तम गर्भनिरोधक हैं क्योंकि
(a) शुक्राणुओं की भक्षकाणुक्रिया (Phogocytosis) को बढ़ा देती है।
(b) जिससे शुक्राणुओं की गतिशीलता तथा उनकी निषेचन की क्षमता को कम करती है।
(c) गर्भाशय में भ्रूण के रोपण के लिए अनुपयुक्त बनाने तथा गर्भाशय ग्रीवा को शुक्राणुओं का विरोधी बनाते हैं।

प्रश्न 20.
जन्म नियन्त्रण की स्तनपान अनार्तव (लैक्टेशनल एमेनोरिया) विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्तनपान अनार्तव (Lactational amenorrhoea)- यह विधि इस बात पर निर्भर करती है कि प्रसव के बाद स्त्री द्वारा शिशु को भरपूर स्तनपान कराने के दौरान अण्डोत्सर्ग (Ovulation ) और आर्तव चक्र (Menstrual cycle) शुरू नहीं होता है। इसलिए जितने दिनों तक माता शिशु को पूर्णत: स्तनपान कराना जारी रखती है, गर्भधारण का अवसर शून्य होता है।

इस समय शिशु को माँ के दूध के अतिरिक्त ऊपर से पानी या अतिरिक्त दूध भी नहीं दिया जाना चाहिए। इस दौरान मैथुन क्रिया करने पर अण्डाणु के अनुपस्थित होने के कारण निषेचन की सम्भावना नहीं होती है। यह विधि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा 6 माह की अवधि तक कारगर मानी गई है।

प्रश्न 21.
युग्मनज का अन्तः फैलोपियन स्थानान्तरण (ZIFT) तकनीक की व्याख्या करें। यह अन्तः गर्भाशयी स्थानान्तरण (IUT) तकनीक से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
युग्मनज का अन्तः फैलोपियन स्थानान्तरण तकनीक में 8 ब्लास्टोमियर तक के भ्रूण को स्त्री फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में स्थानान्तरण किया जाता है। जबकि अन्तः गर्भाशयी स्थानान्तरण (IUT) तकनीक में 32 ब्लास्टोमीयर के भ्रूण को गर्भाशय में स्थानान्तरण किया जाता है।

प्रश्न 22.
आपके विचार से यौन संचारित रोगों से बचने का सर्वाधिक उपयुक्त उपाय क्या है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए ।
उत्तर:
यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) – यौन संबंधों द्वारा संचारित होने वाले रोगों या संक्रमणों को यौन संचारित रोग (STD) कहा जाता है। इन्हें रतिज रोग (Veneral Diseases) अथवा जनन मार्ग संक्रमण (Reproductive tract infections) भी कहा जाता है। ये रोग निम्न हैं- सुजाक (Gonorrhoea), सिफिलिस (Syphilis), हर्पीस (Herpes), जननिक हर्पिस (Genital herpes), क्लेमिडियता (Chlamydiasis), ट्राइकोमोनसता (Trichomoniasis), यकृत शोध-बी (Hepatitis B ), लैंगिक मस्से ( Genital warts), एड्स (AIDS) आदि। इनसे बचने के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिये-

  • मैथुन के समय हमेशा कंडोम (Condoms ) का उपयोग करना चाहिये ।
  • किसी अनजान व्यक्ति अथवा बहुत से व्यक्तियों के साथ यौन सम्बन्ध नहीं रखना चाहिए।
  • यदि कोई आशंका है तो तत्काल ही प्रारम्भिक जाँच के लिए किसी योग्य चिकित्सक से मिलें और रोग का पता चले तो पूरा इलाज कराना चाहिए।

प्रश्न 23.
मानव स्त्री द्वारा प्रयोग की जाने वाली किसी एक गर्भ निरोधक गोली का नाम लिखिए। मुखीया गोलियाँ कैसे जन्म नियन्त्रण में सहायता करती हैं?
अथवा
मानव मादाओं द्वारा प्रयोग किये जाने वाले मुख से सेवन किये जाने वाले गर्भनिरोधक का हार्मोनी संघटन बताइए। यह एक गर्भनिरोधक के रूप में किस प्रकार कार्य करता है?
उत्तर:
गर्भनिरोधक गोली का नाम पिल्स (Pills) है। ये गोलियाँ प्रोजेस्ट्रोन व एस्ट्रोजन के संयोजन से बनी होती हैं। इन गोलियों का प्रयोग लगातार 21 दिनों तक किया जाता है और इन्हें माहवारी (Menstrual cycle) के पाँच दिनों में ही किसी दिन प्रारम्भ किया जाता है। अगली माहवारी के बाद पुनः शुरू कर दिया जाता है।

ये गोलियाँ ( Pills) अण्डोत्सर्ग (Ovulation ) और रोपण (Implentation) को रोकने के साथ-साथ गर्भाशय ग्रीवा की श्लेष्मा की गुणवत्ता को मंद कर देती है। जिससे शुक्राणुओं के प्रवेश पर रोक लग जाती है अथवा उनकी गति मंद हो जाती है। जिसके फलस्वरूप गर्भाधान नहीं हो पाता है।
हैं?

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प्रश्न 24.
कुछ स्त्रियाँ ‘सहेली’ गोलियों का सेवन क्यों करती
अथवा
स्त्री के लिए ‘सहेली’ गर्भनिरोधक को उत्तम माना जाता है। क्यों?
उत्तर:
सहेली एक उत्तम गैर स्टीरॉइड गर्भनिरोधक गोली है। इसे मुँह से सप्ताह में एक बार लेना होता है। इसके दुष्प्रभाव बहुत कम तथा उच्च निरोधक क्षमता वाली है।

प्रश्न 25.
यदि पुरुष नसबंदी करते समय चिकित्सक दायीं तरफ की शुक्रवाहक को बाँधना भूल जाता है, तो बन्ध्यकरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
पुरुष नसबंदी में दोनों बायें व दायें शुक्रवाहक को बाँधा जाता है। यदि दायीं तरफ की शुक्रवाहक को नहीं बाँधता है तो युग्मक परिवहन निरन्तर होगा व नसबंदी अपूर्ण होगी।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
गर्भनिरोधक साधनों को कौनसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है ? किन्हीं तीन श्रेणियों (विधियों) का वर्णन कीजिए। उत्तर- गर्भनिरोधक साधनों को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. प्राकृतिक / परम्परागत (Natural / Traditional)
  2. रोध (Barrier)
  3. आईयूडीज (IUDS)
  4. मुँह से लेने योग्य गर्भनिरोधक (Oral Contraceptives)
  5. टीका ( Injectables)
  6. अंतरोंप (Implants )
  7. शल्यक्रियात्मक विधियाँ (Surgical Methods )

1. प्राकृतिक / परम्परागत विधियाँ (Natural / Traditional Methods)- ये विधियाँ अण्डाणु (Ovum) एवं शुक्राणु ( Sperm) के मिलने (संयोजन) को रोकने के सिद्धान्त पर कार्य करती हैं जो निम्न हैं-
(i) आवधिक संयम (Periodic abstinence ) – इस विधि में एक दम्पति माहवारी चक्र ( menstrual cycle) के 10वें से 17वें दिन के बीच की अवधि के दौरान संभोग क्रिया नहीं करते हैं, जिसे अंडोत्सर्जन (Ovulation) की अपेक्षित अवधि मानते हैं। इस अवधि के दौरान निषेचन (Fertilization) एवं उर्वर (गर्भधारण) के अवसर बहुत अधिक होने के कारण इस अवधि को निषेच्य अवधि (Fertile Period) कहते हैं अतः उक्त अवधि में सहवास / संभोग न करके गर्भाधान से बचा जा सकता है।

(ii) बाह्य स्खलन अथवा अंतरित मैथुन (Withdrawal or coitus interruptus) – इस विधि में पुरुष साथी संभोग के दौरान वीर्य स्खलन से ठीक पहले स्त्री की योनि से अपना लिंग (penis) निकाल कर वीर्यसेचन (Insemination) से बच सकता है।

(iii) स्तनपान अनार्तव (Lactational amenorrhoea) – यह विधि भी इस बात पर निर्भर करती है कि प्रसव के बाद स्त्री द्वारा शिशु को भरपूर स्तनपान कराने के दौरान अण्डोत्सर्ग (Ovulation ) और आर्तव चक्र (Menstrual cycle) शुरू नहीं होता है। इसलिए जितने दिनों तक माता शिशु को पूर्णतः स्तनपान कराना जारी रखती है (इस समय शिशु को माँ के दूध के अतिरिक्त ऊपर से पानी या अतिरिक्त दूध भी नहीं दिया जाना चाहिए) गर्भधारण के अवसर लगभग शून्य होते हैं। यह विधि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा 6 माह की अवधि तक ही कारगर मानी गई है। उपरोक्त विधियों में किसी दवा या साधन का उपयोग नहीं किया जाता है अतः इसके कोई किसी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।

2. रोध (Barrier) – इन विधियों के अन्तर्गत रोधक साधनों के माध्यम से अंडाणु (Ovum) और शुक्राणु ( Sperm) को भौतिक रूप से मिलने अथवा संयोजन से रोका जाता है। इस प्रकार के उपाय पुरुष व स्त्री दोनों के लिए उपलब्ध हैं। निरोध (Condoms) एक रोधक उपाय है जिसे पतली रबर या लेटेक्स से बनाया जाता है ताकि इसके उपयोग से पुरुष के लिंग (Penis) या स्त्री की योनि (Vagina) एवं गर्भाशय (Uterus) ग्रीवा को संभोग से ठीक पहले, ढक दिया जाए और स्खलित शुक्राणु स्त्री के जननमार्ग में प्रवेश न कर सकें।

यह गर्भाधान से बचा सकता है। पुरुषों के लिए कंडोम (Condoms) का मशहूर ब्रांड नाम निरोध (Nirodh) काफी लोकप्रिय है। देखिए नीचे चित्र में पुरुष व स्त्री के कंडोम । हाल ही के वर्षों में कंडोम के उपयोग में तेजी से वृद्धि हुई है। क्योंकि इससे गर्भधारण के अतिरिक्त यौन संचारित रोगों तथा एड्स से बचाव अथवा सुरक्षा हो जाती है। स्त्री एवं पुरुष दोनों के ही कंडोम उपयोग के बाद फेंकने वाले होते हैं।

इन्हें स्वयं के द्वारा ही लगाया जा सकता है और इस तरह उपयोगकर्ता की गोपनीयता बनी रहती है। डायफ्राम (Diaphragms), गर्भाशय ग्रीवा टोपी (Cervical Cap) तथा वाल्ट (Vaults) आदि भी रबर से बने रोधक उपाय हैं जो स्त्री के जनन मार्ग में सहवास के पूर्व गर्भाशय ग्रीवा को ढकने के लिए लगाए जाते हैं।

ये गर्भाशय ग्रीवा को ढक कर शुक्राणुओं के प्रवेश को रोककर गर्भाधान से छुटकारा दिलाते हैं। इन्हें पुनः उपयोग में लिया जा सकता है। इसके साथ ही इन रोधक साधनों के साथ-साथ शुक्राणुनाशक क्रीम (Spermicidal Creams), जेली (Jelly ) एवं फोम (Foams) का प्रायः उपयोग किया जाता है, जिससे इनकी गर्भनिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।
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3. अंतर्रोप (Implants) – स्त्रियों द्वारा प्रोजेस्ट्रोन अकेले या फिर एस्ट्रोजन के साथ इसका संयोजन भी टीके या त्वचा के नीचे अंतर्रोप ( Implant) के रूप में किया जाता है । (देखिए चित्र में )
डालिए ।
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प्रश्न 2.
जनन स्वास्थ्य समस्याएँ एवं कार्यनीतियों पर प्रकाश
उत्तर:
[ संकेत – बिन्दु 4.1 का अवलोकन करें ।]
जनन स्वास्थ्य-समस्याएँ एवं कार्यनीतियाँ (Reproductive Health-Problems and Strategies)
मानव समुदाय में जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक प्रत्येक सदस्य को आयु स्तर के सोपानों से होकर गुजरना पड़ता है। इन अवस्थाओं में बाल्यावस्था (Childhood), किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था एवं वृद्धावस्था शामिल हैं। इन सभी अवस्थाओं में किशोरावस्था एक महत्त्वपूर्ण  अवस्था होती है क्योंकि किसी भी समष्टि के भविष्य की समृद्धि एवं उसका आकार इसके द्वारा निर्धारित होता है।

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किशोरावस्था में त्वरित वृद्धि तथा अनेक प्रकार के शारीरिक व मानसिक विकासात्मक परिवर्तन आते हैं। इस अर्वधि में किशोरों में लैंगिक परिपक्वन हेतु परिवर्तन उत्पन्न होते हैं जो कि लैंगिक परिपव्वता तक जारी रहते हैं। लड़कों में यह अवधि 719 वर्ष तक और लड़कियों में 8-18 वर्ष की आयु मानी जाती है। इस कालावधि में दोनों ही विशिष्ट हार्मोन्स का उत्पादन व स्रावण होता है जो कि उनमें शारीरिक, क्रियात्मक एवं व्यवहारात्मक परिवर्तन उत्पन्न करते हैं।

ऐसे युवाओं को आगे चलकर वैवाहिक जीवन में प्रवेश कर सन्तानोत्पत्ति व उनके उचित पालन-पोषण की जिम्मेदारी हेतु शारीरिक व मानसिक रूप से अपने आपको योग्य बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ता है। उपरोक्त कारणों से यह अव्वधि अत्यधिक संवेदनशील पायी जाती है।

चूँकि जनन स्वास्थ्य, जनन के सभी पहलुओं सहित एक सम्पूर्ण स्वास्थ्य है अतः जनन सम्बन्धी अनेक समस्याओं जैसे जनन अंगों का सामान्य रूप से कार्य न करना, प्रजनन के समय विपरीत परिस्थितियाँ उत्पन्न होना, विभिन्न प्रकार के जननिक रोगों की उत्पत्ति, शिशु मृत्युदर में वृद्धि, स्त्री एवं पुरुषों में जननिक दशाओं में अनियमितता आदि को जनन स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में जाना जाता है।

जिनमें कुछ महत्वपूर्ण पहलू निम्नलिखित हैं-

  • लोगों में जनन स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरूकता की कमी।
  • तेजी से बढ़ती हुई मानव जनसंख्या अर्थात् जनसंख्या विस्फोट।
  • गर्भावस्था की जटिलताएँ, शिशु जन्म एवं असुरक्षित गर्भपात।
  • प्रसव के समय वांछित सुविधाओं व देखरेख का अभाव।
  • जन्मजात एवं उपार्जित बन्ध्यता।
  • सन्तानों के बीच का कम अन्तराल व अधिक सन्तानों की उत्पत्ति।
  • युवक-युवतियों में लैंगिक संचारित रोगों (Sexually transmitted diseases) का उच्च संक्रमण। एड्स (AIDS) जैसे भयावह व लाइलाज रोग।
  • किशोरियों में मासिक चक्र की अनियमितता व उसका रुकना जैसी कार्यियकीय असमानताएँ।
  • यौन रोगों को छिपाना।
  • विद्यालयों में यौन शिक्षा की कमी।
  • समय पर टीकाकरण न कराना। जन्म नियन्त्रक (गर्भनिरोधक) विकल्पों एवं स्तनपान के महत्त्व का अभाव।
  • पुत्र को कन्या के मुकाबले अत्यधिक महत्च एवं मादा भुण हत्या।
  • कम उम्र में विवाह, प्रजनन, गर्भधारण की अनिवार्यता, गर्भपात आदि 15-19 वर्ष की महिलाओं की मृत्यु के प्रमुख कारण हैं।

उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने समय-समय पर कुछ कार्ययोजना एवं कार्यक्रमों की शुरुआत की। वास्तव में भारत ही विश्व का पहला ऐससा देश है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सम्पूर्ण जनन स्वास्थ्य को एक लक्ष्य के रूप में प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना और कार्यक्रमों की शुरुआत की।

इन कार्यक्रमों को परिवार नियोजन और आधुनिक समय में परिवार कल्याण के नाम से जाना जाता है। इन कार्यक्रमों की शुरुआत 1951 में हुई। पिछले दशकों में समय-समय पर इनका स्थिर मूल्यांकन भी किया गया है। जनन संबंधित और आवधिक क्षेत्रों को इसमें सम्मिलित करते हुए बहुत उन्नत व व्यापक कार्यक्रम फिलहाल ‘जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम’ (Reproductive and Child Health Care RCH Programme)

के नाम से प्रसिद्ध है। इन कार्यक्रमों के अन्तर्गत जनन सम्बन्धी विभिन्न पहलुओं के बारे में जन सामान्य में जागरूकता पैदा करते हुए और जननात्मक रूप से स्वस्थ समाज तैयार करने के लिए अनेक सुविधाएँ एवं प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। दुश्य एवं श्रव्य (Audio-Visual) और मुद्रित सामग्री की सहायता से सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन के माध्यम से जनता के बीच जनन सम्बन्धी सभी पहलुओं के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए विभिन्न उपाय सुझा रहे हैं।

उपरोक्त सूचनाओं को प्रसारित करने में माता-पिता, अन्य निकट सम्बन्धी, शिक्षक एख्वं मित्रों की प्रमुख भूमिका है। विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में यौन शिक्षा (Sex Education) को बढ़ावा देकर युवाओं को सही जानकारी उपलव्य कराना लाकि बच्चों को यौन संबंधी फैली भान्तियों पर विश्वास न हो एवं उन्हें यौन संबंधी गलत धारणाओं से निजात मिल सके।

लोगों को जनन अंगों, किशोराबस्था एवं उससे सम्बन्धित परिवर्तनों, सुरक्षेत और स्वच्छ यौन क्रियाओं, यौन संचारित रोगों एवं एड्स के बारे में जानकारियां उपल्नव्य कराना। विशेष रुप से इस प्रकार की जानकारियां किशोर आयु वर्ग के लोगों के लिए जनन सम्बन्धी र्वस्थ जीवन बिताने में सहायक होती है।

लोगों को शिक्षित करना, विशेष रूप से जननक्षम जोड़ी तथा वे लोग जिनकी आयु विवाह योग्य हैं, उन्हें उपलब्ब जन्म नियन्त्रक (गर्भनिरोधक) विकल्पों तथा गर्भवती माताओं की देखभाल, माँ और बच्चे की प्रसवोत्तर (Postnatal) देखभाल आदि के बारे में तथा स्तनपान के महत्व, लड़का या लड़की को समान महत्व एवं समान अवसर देने की जानकारियों आदि से जागरूक स्वस्थ परिवर्तनों का निर्माण होगा।

लोगों को जनसंख्या विस्फोट के दुष्परिणामों, जनन अपराधों, यौन दुरुपयोग, सामाजिक उत्पीड़नों आदि के प्रति जागरूक करना जिससे वे इन बुराइयों से बचकर एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें। जनन स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए विभिन्न कार्यदोजनाओं के सफलतापूर्वक क्रियान्बयन के लिए मजबूत संरचनात्मक सुविधाओं, व्यावसायिक विशेषजता तथा भरपूर भौतिक सहारों की आवश्यकता होती है।

लोगों को जनन सम्बन्धी समस्याओं जैसे कि सगर्भता (Pragnancy), प्रसव (Parturition), यौन संचारित रोगों, गर्भपात (Abortion), गर्भनिरोधकों (Anti-pregnancy agents), आर्तव चक्र (Menstrual cycle) सम्बन्धी समस्याओं, बांपन (Infertility) आदि के बारे में चिकित्सा सहायता एवं देखभाल उपलब्ध करवाना समय-समय पर बेहतर तकनीकों और नई कार्यनीतियों को क्रियान्वित करने की भी आवश्यकता है, ताकि लोगों की अधिक सुचारु रूप से देखभाल और सहायता की जा सके ।

बढ़ती मादा भूरण हत्या की कानूनी रोक के लिए उल्बवेधन (Aminiocentesis) जाँच (भूणीय लिंग के निर्धारण की जाँच), लिंग परीक्षण पर वैधानिक प्रतिबंध तथा व्यापक बाल प्रतिरक्ष्कीकरण (टीका) आदि कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। जनन सम्बन्धी बिभिन्न अनुसंधानों को बढ़ावा देने के लिए हमारे देश की सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियां नयी विधियाँ तलाशने तथा कार्येशील प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का काम कर रही हैं।

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लखनक स्थित केन्द्रीय औषध अनुसंधान संस्थान (Central Drug Research Institute, CDRI) ने ‘सहेली’ नामक गर्भनिरोधक गोली का निर्माण किया। यौन सम्बन्धी मामलों के बारे में बेहतर जागरूकता अधिकाधिक रूप से चिकिल्सा सहायता प्राप्त प्रसव तथा बेहतर प्रसवोत्तर देखभाल से मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी आई है। छोटे परिवार वाले जोड़ों की संख्या बढ़ी है। यौन संचारित रोगों की सही जाँच तथा देखभाल और लगभग सभी जनन स्वास्थ्य समस्याओं हेतु विकसित चिकित्सा सुविधाओं के होने से बेहतर समाज बेहतर जनन स्वास्थ्य के संकेत प्राप्त हो रहे हैं।

प्रश्न 3.
जनसंख्या विस्फोट किसे कहते हैं? जनसंख्या विस्फोट के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियन्त्रण (Population Explosion and Birth Control)
चिकित्सीय सुविधाओं की उपलब्धता एवं व्यापक जागरूकता के कारण विश्व में मृत्युदर में कमी व जन्मदर में वृद्धि होने के फलस्वरूप जनसंख्या में वृद्धि हुई है। सन् 1900 ई. में पूरे विश्व की जनसंख्या लगभग 2 अरब थी जो सन् 2000 ई. में तेजी से बढ़कर 6 अरब हो गई।

हमारे देश भारत की जनसंख्या आजादी के समय लगभग 35 करोड़ थी जो सन् 2000 ई. में बढ़कर एक अरब से ऊपर पहुँच गई अर्थात् आज दुनिया का हर छठा आदमी भारतीय है। हमारे जन स्वास्थ्य के अथक प्रयासों से हमारी जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है जो नाममात्र है।

]हमारी जनसंख्या वृद्धि दर जो 1991 में 2.1 प्रतिशत थी, वह 2001 में घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई। इस वृद्धि दर के साथ भी हम 2033 तक 200 करोड़ हो जायेंगे। इस प्रकार कम समयावधि में जनसंख्या में होने वाली इस प्रकार
की तीव्र वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) कहा जाता है।

जनसंख्या विस्फोट के कारण-किसी देश की जनसंख्या की वृद्धि के लिए निम्न प्रमुख तीन कारण हैं-
(1) उच्च जन्म दर-अधिकतर देशों में जन्मदर मृत्युदर से अधिक होती है। उच्च जन्मदर के लिए निम्न आर्थिक एवं सामाजिक कारक जिम्मेदार हैं-
(क) आर्थिक कारक-

  • कृषि प्रधानता
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  • निर्धनता।

(ख) सामाजिक कारक-

  • अशिक्षा
  • धार्मिक मान्यताएँ
  • बाल विवाह
  • अन्धविश्वास
  • विवाह की अनिवार्यता
  • संयुक्त परिवार एवं परिवार नियोजन के प्रति उदासीनता आदि।

(2) अपेक्षाकृत निम्न मृत्युदर-प्रति हजार जनसंख्या में प्रति वर्ष मरने वाले प्राणियों की जनसंख्या को मृत्युदर कहते हैं। जनसंख्या में विस्फोट का मुख्य कारण लगातार घटती हुई मृत्युदर है। भारत में पिछले दशकों में मृत्युदर में निरन्तर कमी आई है जो कि जनसंख्या वृद्धि में एक महत्त्वपूर्ण कारक है।

वर्ष 1901 में हमारे देश में मृत्युदर (प्रति हजार व्यक्ति) 44.4 थी जो कि 1951 में घटकर 27.4 रह गई व अगले वर्षों में भी इस प्रवृत्ति में और कमी आकर वर्ष 1999 में यह मात्र 8.7 के स्तर तक रह गई। इस प्रवृत्ति में और कमी आकर वर्ष 2007 में यह मात्र 8.0 के स्तर तक आ चुकी थी। इसके निम्न कारण हैं-

  • प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा-मनुष्य अपनी सुरक्षा हेतु मकान बनाकर रहने लगा जिससे उसे प्राकृतिक आपदाओं से बचाव हो सका, जैसे-सर्दी, गर्मी, वर्षा, आग तथा तूफान आदि।
  • कृषि का विकास-इसके कारण अनाज की पैदावार में बढ़ोतरी हुई और बढ़ती हुई जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में इसकी पूर्ति किया जाना सम्भव हुआ।
  • भण्डारण की सुविधा-भण्डारण की सुविधा से मानव को पूरे साल खाद्यान्न आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
  • उन्नत परिवहन-उन्नत परिवहन तन्त्र से ऐसे स्थान जहाँ खाद्यान्न की कमी है वहाँ तुरन्त प्रभाव से तथा कम समय में खाद्यान्न पहुँचना सम्भव हो सका।
  • रोगों पर नियन्त्रण-विभिन्न रोगों पर नियन्त्रण होने के कारण तथा स्वास्थ्य उपायों के बढ़ने के फलस्वरूप मृत्युदर में कमी आई है तथा मानव की आयु 30 वर्ष से वृद्धि कर 60 वर्ष हो गई।

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(3) आप्रवासन-किसी स्थान पर बाहर से आकर कुछ सदस्य शामिल हो जायें तो इसे आप्रवासन कहा जाता है। यह जनसंख्या को बढ़ाता है। भारत की सीमाओं में विभिन्न देशों के शरणार्थियों व घुसपैठियों के आगमन से जनसंख्या में इस प्रकार की वृद्धि दर्ज की गई है।
उपर्युक्त कारणों के अतिरिक्त निम्न कारक भी जनसंख्या वृद्धि हेतु जिम्मेदार हैं-

  • विश्व के अधिकतर देशों में औसत आयु में वृद्धि होना।
  • पारस्परिक समाज में नर शिशु की चाहत।
  • मनोरंजन सुर्विधाओं का अभाव।
  • जनसंख्या में नवयुवकों की संख्या अधिक होना।

जनसंख्या वृद्धि दर की समस्या से बचने का सबसे सरल उपाय छोटा परिवार को बढ़ावा देने हेतु गर्भनिरोधक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जाये। दूर संचार माध्यमों की सहायता से विज्ञापन द्वारा सुखी परिवार का प्रचार-प्रसार किया जाता है। विज्ञापन में ‘ हम दो हमारे दो’ नारे सहित दंपति व दो बच्चों का परिवार प्रदर्शित किया जाता है।

शहरों के कामकाजी युवा दंपतियों ने ‘हम दो हमारे एक’ का नारा अपनाया है। कानूनन विवाह योग्य स्त्री की आयु 18 वर्ष तथा पुरुष की आयु 21 वर्ष सुनिश्चित है। सरकार ऐसे युवा जोड़े को प्रोत्साहन देती है जो सुखी छोटे परिवार में विश्वास रखते हैं। जन्मदर कम करने का अच्छा व आसानी से स्वीकार्य उपाय है एक आदर्श गर्भनिरोधक।

एक आदर्श गर्भनिरोधक की मुख्य विशेषताएँ निम्न होनी चाहिए-

  • एक आदर्श गर्भनिरोधक प्रयोगकर्ता के हितों की रक्षा करने वाला एवं आसानी से उपलब्ध होने वाला चाहिए।
  • गर्भनिरोधक का कोई अनुषंगी प्रभाव या दुष्प्रभाव नहीं हो या हो भी तो कम से कम होना चाहिए।
  • गर्भनिरोधक के उपयोग से उपयोगकर्ता की कामेच्छा, प्रेरणा तथा मैथुन में बाधक नहीं होना चाहिए।
  • गर्भनिरोधक प्रभावी होना चाहिए।

गर्भनिरोधक साधनों को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. प्रकृ तिक/परम्परागत विधियाँ (Natural/ Traditional Methods)
  2. रोध (Barrier)
  3. अन्तः गभर्शाशयी युक्तियाँ (Intra Uterine Devices-IUD)
  4. मुँह से लेने योग्य गर्भनिरोधक (Oral Contraceptives)
  5. अंतर्रोप एवं टीका (Implants and Injectables)
  6. शल्यक्रियात्मक विधियाँ (Surgical Methods)

(1) प्रकृ तिक / परम्परागत विधियाँ (Natural/ Traditional Methods)-ये विधियाँ अण्डाणु (Ovum) एवं शुक्राणु (Sperm) के मिलने को रोकने के सिद्धान्त पर कार्य करती हैं जो निम्न तीन प्रकार की होती हैं-

(i) आवधिक संयम (Periodic Abstinence)-इस विधि में एक दम्पति माहवारी चक्र (Menstrual cycle) के 10 वें से 17 वें दिन के बीच की अवधि के दौरान संभोग क्रिया नहीं करते हैं, जिसे अण्डोत्सर्जन (Ovulation) की अपेक्षित अव्वध मानते हैं। इस अवधि के दौरान निषेचन (Fertilization) एवं उर्वर ( गर्भधारण )

के अवसर बहुत अधिक होने के कारण इस अवधि को निषेच्य अवधि (Fertile Period) कहते हैं। अतः उक्त अवधि में सहवास/संभोग न करके गभर्भाधान से बचा जा सकता है। इस विधि में संयम की अत्यधिक आवश्यकता होती है तथा माहवारी के पूर्ण चक्र की जानकारी होनी चाहिए।

(ii) बाह्य स्खलन अथवा अंतरित मैथुन (Withdrawal or Coitus interruptus)-इस विधि में पुरुष साथी संभोग के दौरान वीर्य स्खलन से ठीक पहले स्वी की योनि (Vagina) से अपना लिंग (Penis) निकाल कर वीर्यसेचन (Insemination) से बच सकता है।

(iii) स्तनपान अनार्तव (Lactational amenorrhoea)-बह विधि इस बात पर निर्भर करती है कि प्रसव के बाद स्त्री द्वारा शिशु को भरपूर स्तनपान कराने के दौरान अण्डोत्सर्ग (Ovulation) और आर्वव चक्र (Menstrual cycle) शुरू नहीं होता है। इसलिए जितने दिनों तक माता शिशु को पूर्णतः स्तनपान कराना जारी रखती है (इस समय शिशु को माँ के दूध के अतिरिक्त ऊपर से प्रानी या अतिरिक्त दूध भी नहीं दिया जाना चाहिए) गर्भाधारण के अवसर शुन्य होते है।

इस दौरान मैधुन क्रिया करने पर अण्डाणु के अनुपस्थित होने के कारण निषेचन की सम्भावना शुन्य (नहीं) होती है। यह विधि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा 6 माह की अवधि तक कारगर मानी गई है। उपरोक्त विधियों में किसी दवा या साधन का उपयोग नहीं किया जाता है। अतः इसके कोई किसी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।

(2) रोध (Barrier)-इन विधियों के अन्तर्गत रोधक साधनों के माध्यम से अण्डाणु (Ovum) और शुक्राणु (Sperm) को भौतिक रूप से मिलाने अथवा संयोजन से रोका जाता है। इस प्रकार के उपाय पुरुष एवं स्ती दोनों के लिए उपलब्ध हैं।
(i) निरोध (Condom)-रबड़ या लेटेक्स (Rubber or Latex) से निर्मित पतली दीवार वाली धैलीनुमा संरचना होती है। इसे संभोग के समब उत्तेजना अवस्था में शिर्न (Penis) पर चढ़ा लिया जाता है जिससे स्खलन के फलस्वरूप वीर्य निरोध में ही रह जाता है अर्थात् गर्भाशय में नहीं पहुँच पाता है। इससे अनचाहे गर्भंधारण से बचा जा सकता है।

आजकल स्त्रियों के लिए भी निरोध बाजारों में उपलब्ध हैं। इनके द्वारा संभोग से पहले स्वी की योनि एवं गर्भाशय के सर्बिक्स (Cervix) भाग को ढक दिया जाता है जिससे शुक्राणु स्वी के जनन मार्ग में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। पुरुषों के लिए कंडोम (Condom) का महशूर ब्रांड नाम निरोध (Nirodh) काफी लोकप्रिय है। देखिए आगे पृष्ठ पर चित्र में पुरुष व स्वी के कंडोम।

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हाल ही के वर्षों में कंडोम के उपयोग में वेजी से वृद्धि हुई है क्योंकि इससे गर्भधारण के अतिरिक्त यौन संचारित रोगों तथा एडस से बचाव अथवा सुरक्षा हो जाती है। ये बाजारों में आसानी से उपलब्ब तथा सस्ते होते हैं। यह सरकार द्वारा मुफ्त भी वितरित किये जाते हैं। यह साधारण और प्रभावशाली युक्ति है, इससे कोई नुकस्तान भी नहीं होता है। निरोध का प्रयोग नियमित रूप से किया जा सकता है।
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स्त्री एवं पुरुष दोनों के ही कंडोम उपयोग के बाद फेंकने वाले होते हैं। इन्हें स्वयं के द्वारा ही लगाया जा सकता है और इस तरह उपयोगकर्ता की गोपनीयता बनी रहती है।

(ii) डायाफ्राम (Diaphragms), गभर्भाशय ग्रीवा टोपी (Cervical Cap) तथा वाल्ट (Vault)-ये रबर के बने गुम्बदाकार रोधक उपाय होते हैं। ये स्त्री की योनि के सर्विक्स (Cervix) पर संभोग से पूर्व फिट कर दिए जाते हैं। ये गर्भाशय की ग्रीवा को ढककर गर्भाशय में शुक्राणुओं के प्रवेश को रोक कर गर्भाधान नहीं होने देते हैं। अगली बार प्रयोग करने से पहले इन्हें शुक्राणुनाशक क्रीम (Spermicidal Cream), जेली (Jelly) एवं फोम (Foams) आदि से साफ कर लिया जाता है, जिससे इनकी गर्भनिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।
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(3) अन्तः गभर्शाशयी युक्तियाँ (Intra Uterine Devices-IUD)-हमारे देश में दूसरी प्रभावशाली और लोकप्रिय विधि अन्तः गर्भाशयी युक्ति का उपयोग है। अन्तः गर्भाशयी युक्ति योनि मार्ग द्वारा गर्भाशय में लगाई जाती है। परन्तु इन्हें प्रशिक्षित डाक्टर या नर्स द्वारा ही लगवाया जाना चाहिए। आजकल निम्न तीन प्रकार की IUDs उपलब्ध हैं-

  • औषधिहीन आई यू डी (Non-Medicated IUDs)उदाहरण-लिप्पेस लूप।
  • तांबा मोचक आई यू डी (Copper releasing IUD) – उदाहरण-कॉपर टी, कॉपर-7, मल्टीलोड 375 कॉपर टी।
  • हार्मोन मोचक आई यू डी (Hormone Releasing IUD)-उदाहरण-प्रोजेस्टासर्ट, एल एन जी- 20 आदि। देखिए चित्र में।

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आई यू डी गर्भाशय के अन्दर कॉपर Cu का आयन मोचित होने के कारण शुक्राणुओं की भक्षकाणुक्रिया (Phagocytosis) बढ़ा देती है जिससे शुक्राणुओं की गतिशीलता तथा उनकी निषेचन की क्षमता को कम करती है। इसके अतिरिक्त आई यू डी हार्मोन को गर्भाशय में भूरण के रोपण के लिए अनुपयुक्त बनाने तथा गर्भाशय ग्रीवा को शुक्राणुओं का विरोधी बनाते हैं। जो महिलाएँ गभावस्था में देरी या बच्चों के जन्म में अन्तराल चाहती हैं उनके लिए आई यू डी आदर्श गर्भनिरोधक है। भारत में गर्भनिरोध की ये विधियाँ व्यापक रूप से प्रचलित हैं।

(4) मुँह से लेने योग्य गर्भनिरोधक (गोलियाँ) (Oral Contraceptives)-मुँह से लेने योग्य गर्भ निरोधक (गोलियाँ) महिलाओं द्वारा ली जाती हैं। ये गोलियाँ प्रोजेस्ट्रोन व एस्ट्रोजन के संयोजन से बनी होती हैं। ये गोलियाँ पिल्स (Pills) के नाम से लोकप्रिय हैं। इन गोलियों का प्रयोग लगातार 21 दिनों तक किया जाता है और इन्हें माहवारी (Menstrual cycle) के पाँच दिनों में ही किसी दिन प्रारम्भ किया जाता है।

अगली माहवारी के बाद इन्हें पुनः शुरू कर दिया जाता है। ये गोलियाँ (Pills) अण्डोत्सर्ग (ovulation) और रोपण (Implantation) को रोकने के साथ-साथ गर्भाशय ग्रीवा की श्लेष्मा की गुणवत्ता को मंद कर देती हैं। जिससे शुक्राणुओं के प्रवेश पर रोक लग जाती है अथवा उनकी गति मंद हो जाती है। जिसके फलस्वरूप गर्भाधान नहीं हो पाता है।

ये गोलियाँ बहुत ही प्रभावशाली तथा कम दुष्प्रभाव वाली होती हैं। इसी प्रकार माला-डी तथा पर्ल नामक गोली भी प्रतिदिन ली जा सकती है। इस प्रकार साप्ताहिक ली जाने वाली गोली भी खूब प्रचलित है जिसे सहेली के नाम से जाना जाता है। सहेली एक उत्तम गैर स्टीरॉइड गर्भनिरोधक गोली है। इसे मुँह से सप्ताह में एक बार लेना होता है।

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इसके दुष्प्रभाव बहुत कम तथा उच्य निरोधक क्षमता वाली है। भारत में लखनक के केन्द्रीय औषध अनुसंधान संस्थान (Central Drug Research InstitutionCDRI) ने सहे ली (गोली) का निर्माण किया। आजकल कु छ गोलियाँ संभोग के बाद 72 घण्टे के भीतर ली जाने वाली भी आती हैं। जिनका प्रयोग बलात्कार (Rape), असुरक्षित यौन संसर्ग (Unprotected Intercourse) के बाद् आपातकालीन अवस्था में किया जा सकता है जिससे गर्भ सगर्भता से बचा जा सकता है।
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(5) अंतर्रोप एवं टीका (Implants and Injectables)स्त्रियों द्वारा प्रोजेस्ट्रोन अकेले या फिर एस्ट्रोजन के साथ इसका संयोजन भी टीके या त्वचा के नीचे अंतर्रोप (Implant) के रूप में किया जाता है। इसके कार्य की विधि ठीक गर्भनिरोधक गोलियों की भाँति होती है तथा काफी लम्बी अवधि के लिए प्रभावशाली होते हैं।

(6) शल्यक्रियात्मक विधियाँ (Surgical Methods)-इन्हें बन्ध्यकरण (Sterilisation) भी कहते हैं। प्रायः उन व्यक्तियों को बताया जाता है, जिन्हें बच्या नहीं चाहिये तथा इसे स्थाई माध्यम के रूप में (पुरुष/स्त्री में से एक) अपनाना चाहते हैं। शल्यक्रिया द्वारा युग्मक के परिवहन को रोक दिया जाता है जिसके फलस्वरूप गर्भाधान नहीं होता है।

बन्ध्यकरण (Sterilisation) की प्रक्रिया दो प्रकार की होती है-
(1) वेसेक्टोमी/शुक्रवाहक उच्छेदन (Vasectomy)-पुरुषों में शुक्रवाहिका, जिनसे होकर शुक्राणु अधिवृषणों (Epididymis) से बाहर आते, एक शल्य चिकित्सक द्वारा बाँध दी जाती है ताकि शुक्राणु शरीर से बाहर न निकाल सकें, यह विधि अस्थायी है और आवश्यकता पड़ने पर शल्य चिकित्सक द्वारा प्रतिवर्तित की जा सकती है।

निषेचन को स्थायी रूप से रोकने के लिए शुक्रवाहिकाओं को काट दिया जाता है और खुले सिरों को धागे से बाँध दिया जाता है। शुक्रवाहिकाओं को शल्य चिकित्सक द्वारा काटने की क्रिया को वे से क्टोमी (Vasectomy) कहते हैं। में। इसे पुरुष नसबंदी के नाम से भी जाना जाता है।
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(2) ट्यूबैक्टोमी/नलिका उच्छेदन (Tubec-tomy)महिलाओं का बन्धीकरण अंडवाहिकाओं (Oviducts) को शल्य
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चिकित्सक द्वारा बाँधकर व काटकर किया जाता है। इससे अण्डाशयों में बने अण्डे गर्भाशय एवं जनन मार्ग तक नहीं आ पाते हैं। जिससे निषेचन अथवा गर्भधारण नहीं होता है लेकिन आर्तव चक्र (Menstrual cycle) सामान्य रूप से चलता रहता है। अण्डवाहिकाओं को शल्य चिकित्सक द्वारा काटना ही ट्यूबेक्टोमी (Tubectomy) कहते हैं। इसे महिला नसबंदी के नाम से जाना जाता है। उपरोक्त सभी गर्भनिरोधक उपायों का चुनाव एवं उपयोग योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिये क्योंक सभी गर्भनिरोधक साधन प्राकृतिक प्रक्रिया जनन जैसे गर्भाधान/सगर्भता को रोकते हैं।

इनका लम्बे समय तक उपयोग करने से इनके कुप्रभाव भी देखे जाते हैं, जो निम्न हैं-

  • मतली आना
  • उदरीय पीड़ा
  • बीच-बीच में रक्तस्राव
  • अनियमित आर्तव रक्तस्राव
  • स्तन कैंसर।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि उक्त विधियों के व्यापक उपयोग ने जनसंख्या की अनियन्त्रित वृद्धि को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिर भी इनके उपयोग से कुछ कुप्रभाव पड़ते हैं तो उन्हें नजरअदांज किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
बंध्यता से क्या तात्पर्य है? इसके निवारण से सम्बन्धित तकनीकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सहायक जनन प्रौद्योगिकी किसे कहते हैं ? विभिन्न तकनीकों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
दो वर्ष तक मुक्त या असुरक्षित सहवास के बावजूद गर्भाधान न हो पाने की स्थिति को बन्ध्यता (Sterility) कहते हैं।
बन्ध्यता के अनेक कारण हो सकते हैं जिनमें मुख्य निम्न हैं-

  • शारीरिक
  • जन्मजात
  • औषधिक
  • प्रतिरक्षात्मक
  • मनोवैज्ञानिक आदि।

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ये समस्याएँ पुरुष अथवा स्त्री किसी में भी हो सकती हैं। हमारे देश में बच्चा न होने की स्थिति में प्रायः सिर्फ स्त्री को ही दोष दिया जाता है जबकि हमेशा ऐसा नहीं होता है। यह समस्या पुरुष में भी हो सकती है। इसके लिए अर्थात् सामान्य विकारों को बन्ध्यता क्लीनिक के योग्य चिकित्सकों की सेवायें लेकर दोषों की जाँच एवं उपचार के माध्यम से संतान उत्पन्न करने में सफलता मिल सकती है।

फिर भी जहाँ ऐसे विकार या दोषों को ठीक करना सम्भव नहीं है वहाँ कुछ विशेष तकनीकों की सहायता द्वारा संतान पैदा करने में सहायता की जा सकती है। ऐसी तकनीकों को सहायक जनन प्रौद्योगिकी (Addid Reproductive Technique) कहते हैं। इनमें कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं-

(1) पात्रे निषेचन (In vitro fertilization)-पात्रे निषेचन से तात्पर्य है कि शरीर के बाहर लगभग शरीर के भीतर जैसी स्थितियाँ निर्मित करना व निषेचन कराना अर्थात् निषेचन की क्रिया पात्र (Test Tube) में की जाती है इसलिए इसे पात्रे निषेचन कहते हैं। यह विधि टेस्ट ट्यूब बेबी (Test Tube Baby) कार्यक्रम के नाम से लोकप्रिय है।

इस तकनीक में पत्नी या दाता स्त्री के अण्डे से पति अथवा दाता पुरुष से प्राप्त शुक्राणुओं (Sperms) को प्रयोगशाला में एकत्रित किया जाता है। इसके बाद अनुकूल परिस्थितियों में निषेचन कराकर युग्मनज (Zygote) बनने के लिए प्रेरित किया जाता है। अब इस युग्मनज (Zygote) को स्त्री के गर्भाशय में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। स्थानान्तरण दो विधियों द्वारा किया जा सकता है-

(i) अन्तः डिम्ब वाहिनी (फैलोपी) स्थानान्तरण (Intra Fallopian Tube Transfer)-इसे युग्मनज अन्त: डिम्ब वाहिनी स्थानान्तरण (Zygote Intra Fallopian Transfer) के नाम से भी जाना जाता है। इसके अन्तर्गत युग्मनज या 8 ब्लास्टोमियर तक के भूरण को स्त्री की फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में स्थानान्तरित किया जाता है।

(ii) इन्द्रा यूटेराइन ट्रांसफर (Intra Uterine Transfer)-इस तकनीक के अन्तर्गत 8 ब्लास्टोमीयर से अधिक के भ्रूण को गर्भाशय (Uterus) में स्थानान्तरित किया जाता है। इसलिए इसे इन्ट्रा यूटेराइन ट्रांसफर कहते हैं। अब निषेचित भ्रूण का स्त्री में स्थानान्तरण के बाद परिवर्धन शरीर के भीतर होता है।

(2) जीवे निषेचन (In vitro Fertilization)-ऐसी स्त्रियाँ जिनको गर्भधारण करने में समस्या आती है उनके लिए यह तकनीक सर्वोत्तम है। इसके अन्तर्गत युग्मकों का निषेचन स्त्री के भीतर ही होता है।

(3) युग्मक फैलोपी नलिका में स्थानान्तरण (Gamete Intra Fallopian Transfer)-ऐसी स्त्रियाँ जिनमें अण्डाणु उत्पन्न नहीं होते हैं परन्तु निषेचन और भ्रूण के परिवर्धन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान कर सकती हैं। ऐसी स्त्रियों के लिए GIFT तकनीक अपनाई जाती है।
इसके अन्तर्गत दाता के अण्डाणु प्राप्त करके फैलोपी नलिका में स्थानान्तरित किया जाता है। जिसके परिणामस्वरूप निषेचन क्रिया प्राकृतिक होती है।

(4) अन्तःकोशिकीय शुक्राणु निक्षेपण (Intracytoplasm Sperm Injection)-इस तकनीक द्वारा प्रयोगशाला में शुक्राणु (Sperm) को सीधे ही अण्डाणु में अंतःक्षेपित (Injected) किया जाता है।

(5) कृत्रिम वीर्य सेचन (Artificial Insemination)-ऐसे पुरुष जो स्त्री को वीर्य सेचित करने में सक्षम नहीं हैं अथवा उनके वीर्य में शुक्राणुओं (Sperms) की संख्या बहुत ही कम होती है, उन पुरुषों के दोष के निवारण हेतु कृत्रिम वीर्य सेचन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में पति या स्वस्थ दाता से शुक्राणु (Sperm) लेकर कृत्रिम रूप से या तो स्त्री की योनि (Vagina) में अथवा उसके गर्भांशय (Uterus) में प्रविष्ट कराया जाता है। इसे गभराशय वीर्य सेचन (Intra Uterine Insemination) कहते हैं।

इस प्रकार हमारे पास बहुत सारी तकनीकें हैं लेकिन इनका उपयोग करने हेतु विशेषीकृत व्यावसायिक विशेषजों की आवश्यकता होती है। ये तकनीकें मंहगी होती हैं। इसलिए ये सुविधाएँ भारत के कुछ शहरों में ही उपलब्थ हैं। अतः इनका लाभ कुछ ही लोगों को मिल पाता है। इन विधियों को अपनाने में धार्मिक, सामाजिक व भावात्मक घटक बाधक होते हैं।

इन सभी विधियों का लक्ष्य मात्र केवल संतान प्राप्ति का है। भारत में अनेक अनाथ और दीनहीन बच्चे हैं जिनकी देखभाल नहीं की जावे तो वे जीवित नहीं रहेंगे। ऐसे निःसंतान दम्पतियों को यदि संतान चाहिए तो इन्हें गोद् लेकर माता-पिता बन सकते हैं। यह संतान प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय है। हमारे देश में कानून शिशु को गोद लेने की इजाजत भी देता है।

प्रश्न 5.
गर्भनिरोधक साधन कौन-सी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है? प्रत्येक का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट और जन्म नियन्त्रण (Population Explosion and Birth Control)
चिकित्सीय सुविधाओं की उपलब्धता एवं व्यापक जागरूकता के कारण विश्व में मृत्युदर में कमी व जन्मदर में वृद्धि होने के फलस्वरूप जनसंख्या में वृद्धि हुई है। सन् 1900 ई. में पूरे विश्व की जनसंख्या लगभग 2 अरब थी जो सन् 2000 ई. में तेजी से बढ़कर 6 अरब हो गई।

हमारे देश भारत की जनसंख्या आजादी के समय लगभग 35 करोड़ थी जो सन् 2000 ई. में बढ़कर एक अरब से ऊपर पहुँच गई अर्थात् आज दुनिया का हर छठा आदमी भारतीय है। हमारे जन स्वास्थ्य के अथक प्रयासों से हमारी जनसंख्या वृद्धि दर में कमी आई है जो नाममात्र है।

]हमारी जनसंख्या वृद्धि दर जो 1991 में 2.1 प्रतिशत थी, वह 2001 में घटकर 1.7 प्रतिशत रह गई। इस वृद्धि दर के साथ भी हम 2033 तक 200 करोड़ हो जायेंगे। इस प्रकार कम समयावधि में जनसंख्या में होने वाली इस प्रकार
की तीव्र वृद्धि को जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) कहा जाता है।

जनसंख्या विस्फोट के कारण-किसी देश की जनसंख्या की वृद्धि के लिए निम्न प्रमुख तीन कारण हैं-
(1) उच्च जन्म दर-अधिकतर देशों में जन्मदर मृत्युदर से अधिक होती है। उच्च जन्मदर के लिए निम्न आर्थिक एवं सामाजिक कारक जिम्मेदार हैं-
(क) आर्थिक कारक-

  • कृषि प्रधानता
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था
  • निर्धनता।

(ख) सामाजिक कारक-

  • अशिक्षा
  • धार्मिक मान्यताएँ
  • बाल विवाह
  • अन्धविश्वास
  • विवाह की अनिवार्यता
  • संयुक्त परिवार एवं परिवार नियोजन के प्रति उदासीनता आदि।

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(2) अपेक्षाकृत निम्न मृत्युदर-प्रति हजार जनसंख्या में प्रति वर्ष मरने वाले प्राणियों की जनसंख्या को मृत्युदर कहते हैं। जनसंख्या में विस्फोट का मुख्य कारण लगातार घटती हुई मृत्युदर है। भारत में पिछले दशकों में मृत्युदर में निरन्तर कमी आई है जो कि जनसंख्या वृद्धि में एक महत्त्वपूर्ण कारक है।

वर्ष 1901 में हमारे देश में मृत्युदर (प्रति हजार व्यक्ति) 44.4 थी जो कि 1951 में घटकर 27.4 रह गई व अगले वर्षों में भी इस प्रवृत्ति में और कमी आकर वर्ष 1999 में यह मात्र 8.7 के स्तर तक रह गई। इस प्रवृत्ति में और कमी आकर वर्ष 2007 में यह मात्र 8.0 के स्तर तक आ चुकी थी। इसके निम्न कारण हैं-

  • प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा-मनुष्य अपनी सुरक्षा हेतु मकान बनाकर रहने लगा जिससे उसे प्राकृतिक आपदाओं से बचाव हो सका, जैसे-सर्दी, गर्मी, वर्षा, आग तथा तूफान आदि।
  • कृषि का विकास-इसके कारण अनाज की पैदावार में बढ़ोतरी हुई और बढ़ती हुई जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में इसकी पूर्ति किया जाना सम्भव हुआ।
  • भण्डारण की सुविधा-भण्डारण की सुविधा से मानव को पूरे साल खाद्यान्न आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
  • उन्नत परिवहन-उन्नत परिवहन तन्त्र से ऐसे स्थान जहाँ खाद्यान्न की कमी है वहाँ तुरन्त प्रभाव से तथा कम समय में खाद्यान्न पहुँचना सम्भव हो सका।
  • रोगों पर नियन्त्रण-विभिन्न रोगों पर नियन्त्रण होने के कारण तथा स्वास्थ्य उपायों के बढ़ने के फलस्वरूप मृत्युदर में कमी आई है तथा मानव की आयु 30 वर्ष से वृद्धि कर 60 वर्ष हो गई।

(3) आप्रवासन-किसी स्थान पर बाहर से आकर कुछ सदस्य शामिल हो जायें तो इसे आप्रवासन कहा जाता है। यह जनसंख्या को बढ़ाता है। भारत की सीमाओं में विभिन्न देशों के शरणार्थियों व घुसपैठियों के आगमन से जनसंख्या में इस प्रकार की वृद्धि दर्ज की गई है।
उपर्युक्त कारणों के अतिरिक्त निम्न कारक भी जनसंख्या वृद्धि हेतु जिम्मेदार हैं-

  • विश्व के अधिकतर देशों में औसत आयु में वृद्धि होना।
  • पारस्परिक समाज में नर शिशु की चाहत।
  • मनोरंजन सुर्विधाओं का अभाव।
  • जनसंख्या में नवयुवकों की संख्या अधिक होना।

जनसंख्या वृद्धि दर की समस्या से बचने का सबसे सरल उपाय छोटा परिवार को बढ़ावा देने हेतु गर्भनिरोधक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जाये। दूर संचार माध्यमों की सहायता से विज्ञापन द्वारा सुखी परिवार का प्रचार-प्रसार किया जाता है। विज्ञापन में ‘ हम दो हमारे दो’ नारे सहित दंपति व दो बच्चों का परिवार प्रदर्शित किया जाता है।

शहरों के कामकाजी युवा दंपतियों ने ‘हम दो हमारे एक’ का नारा अपनाया है। कानूनन विवाह योग्य स्त्री की आयु 18 वर्ष तथा पुरुष की आयु 21 वर्ष सुनिश्चित है। सरकार ऐसे युवा जोड़े को प्रोत्साहन देती है जो सुखी छोटे परिवार में विश्वास रखते हैं। जन्मदर कम करने का अच्छा व आसानी से स्वीकार्य उपाय है एक आदर्श गर्भनिरोधक।

एक आदर्श गर्भनिरोधक की मुख्य विशेषताएँ निम्न होनी चाहिए-

  • एक आदर्श गर्भनिरोधक प्रयोगकर्ता के हितों की रक्षा करने वाला एवं आसानी से उपलब्ध होने वाला चाहिए।
  • गर्भनिरोधक का कोई अनुषंगी प्रभाव या दुष्प्रभाव नहीं हो या हो भी तो कम से कम होना चाहिए।
  • गर्भनिरोधक के उपयोग से उपयोगकर्ता की कामेच्छा, प्रेरणा तथा मैथुन में बाधक नहीं होना चाहिए।
  • गर्भनिरोधक प्रभावी होना चाहिए।

गर्भनिरोधक साधनों को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है-

  1. प्रकृ तिक/परम्परागत विधियाँ (Natural/ Traditional Methods)
  2. रोध (Barrier)
  3. अन्तः गभर्शाशयी युक्तियाँ (Intra Uterine Devices-IUD)
  4. मुँह से लेने योग्य गर्भनिरोधक (Oral Contraceptives)
  5. अंतर्रोप एवं टीका (Implants and Injectables)
  6. शल्यक्रियात्मक विधियाँ (Surgical Methods)

(1) प्रकृ तिक / परम्परागत विधियाँ (Natural/ Traditional Methods)-ये विधियाँ अण्डाणु (Ovum) एवं शुक्राणु (Sperm) के मिलने को रोकने के सिद्धान्त पर कार्य करती हैं जो निम्न तीन प्रकार की होती हैं-

(i) आवधिक संयम (Periodic Abstinence)-इस विधि में एक दम्पति माहवारी चक्र (Menstrual cycle) के 10 वें से 17 वें दिन के बीच की अवधि के दौरान संभोग क्रिया नहीं करते हैं, जिसे अण्डोत्सर्जन (Ovulation) की अपेक्षित अव्वध मानते हैं। इस अवधि के दौरान निषेचन (Fertilization) एवं उर्वर ( गर्भधारण )

के अवसर बहुत अधिक होने के कारण इस अवधि को निषेच्य अवधि (Fertile Period) कहते हैं। अतः उक्त अवधि में सहवास/संभोग न करके गभर्भाधान से बचा जा सकता है। इस विधि में संयम की अत्यधिक आवश्यकता होती है तथा माहवारी के पूर्ण चक्र की जानकारी होनी चाहिए।

(ii) बाह्य स्खलन अथवा अंतरित मैथुन (Withdrawal or Coitus interruptus)-इस विधि में पुरुष साथी संभोग के दौरान वीर्य स्खलन से ठीक पहले स्वी की योनि (Vagina) से अपना लिंग (Penis) निकाल कर वीर्यसेचन (Insemination) से बच सकता है।

(iii) स्तनपान अनार्तव (Lactational amenorrhoea)-बह विधि इस बात पर निर्भर करती है कि प्रसव के बाद स्त्री द्वारा शिशु को भरपूर स्तनपान कराने के दौरान अण्डोत्सर्ग (Ovulation) और आर्वव चक्र (Menstrual cycle) शुरू नहीं होता है। इसलिए जितने दिनों तक माता शिशु को पूर्णतः स्तनपान कराना जारी रखती है (इस समय शिशु को माँ के दूध के अतिरिक्त ऊपर से प्रानी या अतिरिक्त दूध भी नहीं दिया जाना चाहिए) गर्भाधारण के अवसर शुन्य होते है।

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इस दौरान मैधुन क्रिया करने पर अण्डाणु के अनुपस्थित होने के कारण निषेचन की सम्भावना शुन्य (नहीं) होती है। यह विधि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा 6 माह की अवधि तक कारगर मानी गई है। उपरोक्त विधियों में किसी दवा या साधन का उपयोग नहीं किया जाता है। अतः इसके कोई किसी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।

(2) रोध (Barrier)-इन विधियों के अन्तर्गत रोधक साधनों के माध्यम से अण्डाणु (Ovum) और शुक्राणु (Sperm) को भौतिक रूप से मिलाने अथवा संयोजन से रोका जाता है। इस प्रकार के उपाय पुरुष एवं स्ती दोनों के लिए उपलब्ध हैं।
(i) निरोध (Condom)-रबड़ या लेटेक्स (Rubber or Latex) से निर्मित पतली दीवार वाली धैलीनुमा संरचना होती है। इसे संभोग के समब उत्तेजना अवस्था में शिर्न (Penis) पर चढ़ा लिया जाता है जिससे स्खलन के फलस्वरूप वीर्य निरोध में ही रह जाता है अर्थात् गर्भाशय में नहीं पहुँच पाता है। इससे अनचाहे गर्भंधारण से बचा जा सकता है।

आजकल स्त्रियों के लिए भी निरोध बाजारों में उपलब्ध हैं। इनके द्वारा संभोग से पहले स्वी की योनि एवं गर्भाशय के सर्बिक्स (Cervix) भाग को ढक दिया जाता है जिससे शुक्राणु स्वी के जनन मार्ग में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। पुरुषों के लिए कंडोम (Condom) का महशूर ब्रांड नाम निरोध (Nirodh) काफी लोकप्रिय है। देखिए आगे पृष्ठ पर चित्र में पुरुष व स्वी के कंडोम।

हाल ही के वर्षों में कंडोम के उपयोग में वेजी से वृद्धि हुई है क्योंकि इससे गर्भधारण के अतिरिक्त यौन संचारित रोगों तथा एडस से बचाव अथवा सुरक्षा हो जाती है। ये बाजारों में आसानी से उपलब्ब तथा सस्ते होते हैं। यह सरकार द्वारा मुफ्त भी वितरित किये जाते हैं। यह साधारण और प्रभावशाली युक्ति है, इससे कोई नुकस्तान भी नहीं होता है। निरोध का प्रयोग नियमित रूप से किया जा सकता है।
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स्त्री एवं पुरुष दोनों के ही कंडोम उपयोग के बाद फेंकने वाले होते हैं। इन्हें स्वयं के द्वारा ही लगाया जा सकता है और इस तरह उपयोगकर्ता की गोपनीयता बनी रहती है।

(ii) डायाफ्राम (Diaphragms), गभर्भाशय ग्रीवा टोपी (Cervical Cap) तथा वाल्ट (Vault)-ये रबर के बने गुम्बदाकार रोधक उपाय होते हैं। ये स्त्री की योनि के सर्विक्स (Cervix) पर संभोग से पूर्व फिट कर दिए जाते हैं। ये गर्भाशय की ग्रीवा को ढककर गर्भाशय में शुक्राणुओं के प्रवेश को रोक कर गर्भाधान नहीं होने देते हैं। अगली बार प्रयोग करने से पहले इन्हें शुक्राणुनाशक क्रीम (Spermicidal Cream), जेली (Jelly) एवं फोम (Foams) आदि से साफ कर लिया जाता है, जिससे इनकी गर्भनिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।
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(3) अन्तः गभर्शाशयी युक्तियाँ (Intra Uterine Devices-IUD)-हमारे देश में दूसरी प्रभावशाली और लोकप्रिय विधि अन्तः गर्भाशयी युक्ति का उपयोग है। अन्तः गर्भाशयी युक्ति योनि मार्ग द्वारा गर्भाशय में लगाई जाती है। परन्तु इन्हें प्रशिक्षित डाक्टर या नर्स द्वारा ही लगवाया जाना चाहिए। आजकल निम्न तीन प्रकार की IUDs उपलब्ध हैं-

  • औषधिहीन आई यू डी (Non-Medicated IUDs)उदाहरण-लिप्पेस लूप।
  • तांबा मोचक आई यू डी (Copper releasing IUD) – उदाहरण-कॉपर टी, कॉपर-7, मल्टीलोड 375 कॉपर टी।
  • हार्मोन मोचक आई यू डी (Hormone Releasing IUD)-उदाहरण-प्रोजेस्टासर्ट, एल एन जी- 20 आदि। देखिए चित्र में।

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आई यू डी गर्भाशय के अन्दर कॉपर Cu का आयन मोचित होने के कारण शुक्राणुओं की भक्षकाणुक्रिया (Phagocytosis) बढ़ा देती है जिससे शुक्राणुओं की गतिशीलता तथा उनकी निषेचन की क्षमता को कम करती है। इसके अतिरिक्त आई यू डी हार्मोन को गर्भाशय में भूरण के रोपण के लिए अनुपयुक्त बनाने तथा गर्भाशय ग्रीवा को शुक्राणुओं का विरोधी बनाते हैं। जो महिलाएँ गभावस्था में देरी या बच्चों के जन्म में अन्तराल चाहती हैं उनके लिए आई यू डी आदर्श गर्भनिरोधक है। भारत में गर्भनिरोध की ये विधियाँ व्यापक रूप से प्रचलित हैं।

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(4) मुँह से लेने योग्य गर्भनिरोधक (गोलियाँ) (Oral Contraceptives)-मुँह से लेने योग्य गर्भ निरोधक (गोलियाँ) महिलाओं द्वारा ली जाती हैं। ये गोलियाँ प्रोजेस्ट्रोन व एस्ट्रोजन के संयोजन से बनी होती हैं। ये गोलियाँ पिल्स (Pills) के नाम से लोकप्रिय हैं। इन गोलियों का प्रयोग लगातार 21 दिनों तक किया जाता है और इन्हें माहवारी (Menstrual cycle) के पाँच दिनों में ही किसी दिन प्रारम्भ किया जाता है।

अगली माहवारी के बाद इन्हें पुनः शुरू कर दिया जाता है। ये गोलियाँ (Pills) अण्डोत्सर्ग (ovulation) और रोपण (Implantation) को रोकने के साथ-साथ गर्भाशय ग्रीवा की श्लेष्मा की गुणवत्ता को मंद कर देती हैं। जिससे शुक्राणुओं के प्रवेश पर रोक लग जाती है अथवा उनकी गति मंद हो जाती है। जिसके फलस्वरूप गर्भाधान नहीं हो पाता है।

ये गोलियाँ बहुत ही प्रभावशाली तथा कम दुष्प्रभाव वाली होती हैं। इसी प्रकार माला-डी तथा पर्ल नामक गोली भी प्रतिदिन ली जा सकती है। इस प्रकार साप्ताहिक ली जाने वाली गोली भी खूब प्रचलित है जिसे सहेली के नाम से जाना जाता है। सहेली एक उत्तम गैर स्टीरॉइड गर्भनिरोधक गोली है। इसे मुँह से सप्ताह में एक बार लेना होता है।

इसके दुष्प्रभाव बहुत कम तथा उच्य निरोधक क्षमता वाली है। भारत में लखनक के केन्द्रीय औषध अनुसंधान संस्थान (Central Drug Research InstitutionCDRI) ने सहे ली (गोली) का निर्माण किया। आजकल कु छ गोलियाँ संभोग के बाद 72 घण्टे के भीतर ली जाने वाली भी आती हैं। जिनका प्रयोग बलात्कार (Rape), असुरक्षित यौन संसर्ग (Unprotected Intercourse) के बाद् आपातकालीन अवस्था में किया जा सकता है जिससे गर्भ सगर्भता से बचा जा सकता है।
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(5) अंतर्रोप एवं टीका (Implants and Injectables)स्त्रियों द्वारा प्रोजेस्ट्रोन अकेले या फिर एस्ट्रोजन के साथ इसका संयोजन भी टीके या त्वचा के नीचे अंतर्रोप (Implant) के रूप में किया जाता है। इसके कार्य की विधि ठीक गर्भनिरोधक गोलियों की भाँति होती है तथा काफी लम्बी अवधि के लिए प्रभावशाली होते हैं।

(6) शल्यक्रियात्मक विधियाँ (Surgical Methods)-इन्हें बन्ध्यकरण (Sterilisation) भी कहते हैं। प्रायः उन व्यक्तियों को बताया जाता है, जिन्हें बच्या नहीं चाहिये तथा इसे स्थाई माध्यम के रूप में (पुरुष/स्त्री में से एक) अपनाना चाहते हैं। शल्यक्रिया द्वारा युग्मक के परिवहन को रोक दिया जाता है जिसके फलस्वरूप गर्भाधान नहीं होता है।

बन्ध्यकरण (Sterilisation) की प्रक्रिया दो प्रकार की होती है-
(1) वेसेक्टोमी/शुक्रवाहक उच्छेदन (Vasectomy)-पुरुषों में शुक्रवाहिका, जिनसे होकर शुक्राणु अधिवृषणों (Epididymis) से बाहर आते, एक शल्य चिकित्सक द्वारा बाँध दी जाती है ताकि शुक्राणु शरीर से बाहर न निकाल सकें, यह विधि अस्थायी है और आवश्यकता पड़ने पर शल्य चिकित्सक द्वारा प्रतिवर्तित की जा सकती है।

निषेचन को स्थायी रूप से रोकने के लिए शुक्रवाहिकाओं को काट दिया जाता है और खुले सिरों को धागे से बाँध दिया जाता है। शुक्रवाहिकाओं को शल्य चिकित्सक द्वारा काटने की क्रिया को वे से क्टोमी (Vasectomy) कहते हैं। देखिए चित्र 4.5 में। इसे पुरुष नसबंदी के नाम से भी जाना जाता है।
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(2) ट्यूबैक्टोमी/नलिका उच्छेदन (Tubec-tomy)महिलाओं का बन्धीकरण अंडवाहिकाओं (Oviducts) को शल्य
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चिकित्सक द्वारा बाँधकर व काटकर किया जाता है। इससे अण्डाशयों में बने अण्डे गर्भाशय एवं जनन मार्ग तक नहीं आ पाते हैं। जिससे निषेचन अथवा गर्भधारण नहीं होता है लेकिन आर्तव चक्र (Menstrual cycle) सामान्य रूप से चलता रहता है। अण्डवाहिकाओं को शल्य चिकित्सक द्वारा काटना ही ट्यूबेक्टोमी (Tubectomy) कहते हैं। इसे महिला नसबंदी के नाम से जाना जाता है। उपरोक्त सभी गर्भनिरोधक उपायों का चुनाव एवं उपयोग योग्य चिकित्सक की सलाह से करना चाहिये क्योंक सभी गर्भनिरोधक साधन प्राकृतिक प्रक्रिया जनन जैसे गर्भाधान/सगर्भता को रोकते हैं।

इनका लम्बे समय तक उपयोग करने से इनके कुप्रभाव भी देखे जाते हैं, जो निम्न हैं-

  • मतली आना
  • उदरीय पीड़ा
  • बीच-बीच में रक्तस्राव
  • अनियमित आर्तव रक्तस्राव
  • स्तन कैंसर।

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इसमें कोई संदेह नहीं है कि उक्त विधियों के व्यापक उपयोग ने जनसंख्या की अनियन्त्रित वृद्धि को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिर भी इनके उपयोग से कुछ कुप्रभाव पड़ते हैं तो उन्हें नजरअदांज किया जा सकता है।

प्रश्न 6.
निम्न लैंगिक संचारित रोग के रोगजनक एवं लक्षण लिखिए-

  1. सिफिलस
  2. सुजाक
  3. हर्पीज जेनाइटेलिस
  4. ट्राइकोमोनियासिस
  5. क्लेमाइडियेसिस
  6. एड्स
  7. जेनाइटल मस्सा
  8. वेजाइनिटिस (Vaginitis ) I

उत्तर:
लैंगिक संचारित रोग, उनके रोगजनक एवं लक्षण

रोग का नाम (Diseases)रोग जनक (Pathogens)लक्षण (Symptoms)
1. सिफिलस (Syphilis)नि पोनिमा पैलिडम Pallidum)जनन अंगों पर उभरते हुए गोलाकार घाव
2. सुजाक या गोनोरिया (Gonorrhea)निसेरिया गोनोही (Neisseria Gonorrhoeae)नर में-मूत्रमार्ग का संक्रमण, मूत्र मार्ग से श्वेत गाढ़े द्रव का स्राव व मूत्र विसर्जन में पीड़ा। मादा में-गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में संक्रमण तथा मूत्र त्यागने में जलन व दर्द।
3. हर्पीज जेनाइटेलिस (Herpes genealis)एच एस वी-2 (डी एन ए) वाइरस (HSV-2, DNA Virus)नर में शिश्नमुंडछद (Prepuce), शिश्नमुंड (Glans) व शिश्न पर पीड़ा युक्त फफोले मादा में-भग द्वार (Vulva) एवं योनि (Vagina) के ऊपरी भाग में फफोले
4. ट्राइकोमोनियासिस (Trichomoniasis)ट्राइकोमोनास वेजाइनेलिस (Trichomonas Vaginalis)योनि से हरित-पीत स्राव (Greenish-Yellow Vaginal discharge)
5. क्लेमाइडियेसिस (Chlamydiasis)क्लेमाइडिया ट्रेकोमैटिस (ChlamydiaTrachomatis)मूत्र मार्ग में पुनरावर्ती पीड़ा व संक्रमण
6. एड्स (AIDS)ह्यूमन इम्यूनोडेफीशियेन्सी विषाणु (HIV)प्रतिरक्षित तन्त्र का पूर्णतः निष्क्रिय होना, ज्वर, अतिसार इत्यादि।
7. जेनाइटल मस्सा (Genital Warts)मानव पैपिलोमा वायरस (Human Papilloma Virus)गुदा के आसपास, शिश्न, लेबिया एवं योनि के पास मस्से बनना।
8. वेजाइनिटिस (Vaginitis)गार्नेरेला वैजाइनैलिस (Gardnerella Vaginalis)मादा में योनि से श्वेत-धूसर स्राव

प्रश्न 7.
यौन संचारित रोग किसे कहते हैं? इनके नाम लिखिए। इनमें से किन्हीं दो रोगों के संचरण के माध्यम, रोग के लक्षण एवं बचने के उपाय लिखिए।
उत्तर:
यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) – वे रोग जो मैथुन (Sexual intercourse) द्वारा संचारित होते हैं, उन्हें सामूहिक तौर पर यौन संचारित रोग (Sexually transmitted diseases) कहते हैं । इन्हें रतिरोग (Veneral diseases) अथवा जनन मार्ग संक्रमण (Reproductive tract infections) भी कहते हैं।
यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases)- निम्न हैं-

  1. सुजाक (Gonorrhoea)
  2. सिफिलिस (Syphilis)
  3. हर्पीस (Herpes)
  4. जननिक परिसर्प ( Genital Herpes)
  5. क्लेमिडियता (Chlamydiasis)
  6. ट्राइकोमोनसता (Trichomoniasis)
  7. लैगिंक मस्से (Genital Warts)
  8. यकृतशोथ – बी (Hepatitis-B)
  9. एड्स (AIDS)

यकृतशोथ-बी (Hepatitis B ) तथा एच. आई. वी. के संचरण के माध्यम

  1. संक्रमित व्यक्ति के साझे प्रयोग वाली सूई (टीका)
  2. शल्य क्रिया के औजार
  3. संदूषित रक्ताधान (Blood Transfusion)
  4. संक्रमित माता से गर्भस्थ शिशु ( नर से मादा, मादा से नर, माता से शिशु में जरायु के माध्यम से आदि)
  5. समलैंगिकता ।

रोग के लक्षण (Symptoms of Diseases) – इन सभी रोगों के शुरुआती लक्षण बहुत ही हल्के-फुल्के होते हैं जो कि जननिक क्षेत्र (Genital region) गुप्तांगों में खुजली, तरल स्राव (Fluid discharge) आना, हल्का दर्द तथा सूजन आदि होते हैं । संक्रमित महिलाओं में लक्षण कभी-कभी प्रकट भी नहीं होते हैं । इसलिए लम्बे समय तक उनका पता ही नहीं चल पाता। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति समाज के भय से जाँच एवं उपचार भी नहीं करा पाता है ।

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इसके कारण आगे चलकर जटिलताएँ उत्पन्न हो जाती हैं । जैसे- श्रोणि-शोथज रोग (Pelvic inflammatory diseases), • गर्भपात (Abortions), मृतशिशु जन्म ( Still-births), अस्थानिक सगर्भता (Ectopic pregnancies ), बंध्यता ( Infertility) अथवा जनन मार्ग (Reproductive tract) का कैंसर (Cancer) हो सकता है । यौन संचारित रोग स्वस्थ समाज के लिए खतरा हैं। यद्यपि सभी लोग इन संक्रमणों के प्रति अतिसंवेदनशील हैं लेकिन 15 से 24 वर्ष की आयु के लोग इन रोगों से ज्यादा ग्रसित हैं ।

निम्न नियमों का पालन करने पर इन रोगों के संक्रमण से बचा जा सकता है-

  1. किसी अनजान व्यक्ति या बहुत से व्यक्तियों के साथ यौन सम्बन्ध न रखें।
  2. मैथुन (Sexual intercourse) के समय सदैव निरोध (Condom) का इस्तेमाल करें।
  3. समलैंगिकता को नकारा जाना चाहिए ।
  4. सदैव निर्जर्मीकृत सूई का प्रयोग करना चाहिए।
  5. रक्त आधान में एच. आई. वी. मुक्त रक्त ही स्थानान्तरित करना चाहिए ।
  6. नशीली दवाओं के रक्त के माध्यम से प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  7. यदि कोई आशंका है तो तुरन्त ही प्रारम्भिक जाँच के लिए किसी योग्य चिकित्सक से मिलें और रोग का पता चले तो पूरा इलाज कराएँ।

प्रश्न 8.
एक गर्भवती महिला को सगर्भता का चिकित्सीय समापन (MTP) कराने की सलाह दी गयी। उसके डॉक्टर ने जाँच में पाया था कि उस महिला के गर्भ में पल रहा भ्रूण एक ऐसे युग्मनज से परिवर्धित हुआ जो Y-धारक शुक्राणु द्वारा निषेचित हुए X X – अण्डे से बना है। उस महिला को M. T. P. कराने की सलाह क्यों दी गई ?
उत्तर:
इस गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहा भ्रूण का चिकित्सीय समापन (MTP) करने की सलाह दी क्योंकि भ्रूण में लिंग गुणसूत्र दो के बजाय तीन और प्राय: XXY होगा। अर्थात् 44 + XXX होगा। क्योंकि अण्डजनन (Oogenesis) की प्रक्रिया में अवियोजन के कारण होता है। यदि अण्डा Y गुणसूत्र युक्त शुक्राणु के साथ मिलता है तो भ्रूण में गुणसूत्र की संख्या 47 (44+XXY) हो जायेगी ।

अर्थात् भ्रूण क्लाईनफेल्टर सिण्ड्रोम (Klinefelter’s Syndrome) से ग्रसित होगा । Y गुणसूत्र की उपस्थिति के कारण, भ्रूण का शरीर लगभग सामान्य पुरुषों जैसा होगा, लेकिन एक अतिरिक्त X गुणसूत्र की उपस्थिति के कारण वृषण छोटे होंगे और इनमें शुक्राणु नहीं बनेंगे। अतः यह नपुंसक होंगे। प्रायः इनमें स्त्रियों जैसे स्तनों का विकास हो जाता है। गाइनीकोमास्टि (Gynaecomastia) औसतन 500 पुरुषों में एक क्लाइनफेल्टर सिन्ड्रोम होता है। इसलिए डॉक्टर द्वारा महिला को M. T. P. कराने की सलाह दी गई।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. निम्न में से किस तकानीक की सहायता से ऐसी स्वियाँ जो गर्भधारण नहीं कर सकर्तीं, में भूण को स्थानान्तरित किया जाता है? (NEET-2020)
(अ) GIFT एवं ZIFT
(ब) ICSI एवं ZIFT
(स) GIFT एवं ICSI
(द) ZIFT एवं IUT
उत्तर:
(द) ZIFT एवं IUT

2. यौन संचारित रोगों के सही विकल्प का चयन करो। (NEET-2020)
(अ) सुजाक, मलेरिया, जननिक परिसर्प
(ब) AIDS, मलेरिया, फाइलेरिया
(स) कैंसर, AIDS, सिफिलिस
(द) सुजाक, सिफिलिस, जननिक परिसर्प
उत्तर:
(द) सुजाक, सिफिलिस, जननिक परिसर्प

3. निम्न में से किन गर्भनिरोधक तरीकों में हॉमोंन भूमिका अदा करता है? (NEET-2019)
(अ) गोलियाँ, आपातकालीन गर्भनिरोधक, रोध विधियाँ
(ब) स्तनपान, अनार्रव, गोलियाँ, आपातकालीन गर्भनिरोधक
(स) रोध विधियाँ, स्तनपान, अनार्तब, गोलियाँ
(द) CuT गोलियाँ, आपातकालीन गर्भनिरोधक।
उत्तर:
(ब) स्तनपान, अनार्रव, गोलियाँ, आपातकालीन गर्भनिरोधक

4. हॉर्मोन मोचक अंतःगर्भाशयी युकियों का चयन करो- (NEET-2019)
(अ) लिप्पेस लूप, मल्टीलोड 375
(ब) बाल्टस, LNG-20
(स) मल्टीलोड 375 , प्रोजेस्टासर्ट
(द) प्रोजेस्टासर्ट, LNG-20
उत्तर:
(द) प्रोजेस्टासर्ट, LNG-20

5. निम्न में कौनसा यौन संचारित रोग पूर्णतः साध्य नहीं है- (NEET-2019)
(अ) क्लेमिडियता
(ब) सुजाक
(स) लैंगिक मस्से
(द) जननिक परिसमें
उत्तर:
(द) जननिक परिसमें

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6. गर्भ निरोधक ‘सहेली’- (NEET-2018)
(अ) एक IUD है।
(ब) मादाओं में एस्ट्रोजन की सान्द्रता को बड़ाती है एवं अण्डोत्सर्ग को रोकती है।
(स) गर्भाशय में एस्ट्रोजन ग्राही को अवरुद्ध करती है एवं अण्डों के रोपण को रोकती है।
(द) एक पश्च-मैधुन गर्भनिरोधक है।
उत्तर:
(स) गर्भाशय में एस्ट्रोजन ग्राही को अवरुद्ध करती है एवं अण्डों के रोपण को रोकती है।

7. स्वस्भ I में दिए गए, यौन संचारित रोगों को उनके रोग कारकों (स्तम्भ II) के साथ सुमेलित कीजिए और सही़ी विकल्प का चयन कीजिए- (NEET-2017)

स्तम्भ-Iस्तम्भ-II
1. सुजाक(i) HIV
2. सिफिलिस(ii) नाइडिरिया (Neisseria)
3. जनन मस्से(iii) ट्रेखोनिया
4. AIDS(iv) ह्यामन पैपिलोमा।
कूट :1234
(अ)(ii)(iii)(iv)(i)
(ब)(iii)(iv)(i)(ii)
(स)(iv)(ii)(iii)(i)
(द)(iv)(iii)(ii)(i)

उत्तर:

(अ)(ii)(iii)(iv)(i)

8. एक दंपति जिसके पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम है, उनके लिए निषेचन की कौन-सी तकनीक उचित रहेगी? (NEET-2017)
(अ) अंतः गभाशय स्थानान्तरण
(ब) गैमीट इन्ट्रा फैल्लोपियन ट्रांसफर
(स) कृत्रिम बीर्य सेचन
(द) अंतः कोशिकीय शुक्राणु निक्षेपण
उत्तर:
(द) अंतः कोशिकीय शुक्राणु निक्षेपण

9. कॉपर मोचित ‘IUD’ कोंपर आयनों का क्या कार्य होता है? (NEET-2017)
(अ) ये शुक्राणुओं की गतिशीलता एवं निषेचन क्षमता कम करते हैं।
(ब) ये युग्मक जनन को रोकते हैं।
(स) बे गभाशशय को रोपण के लिए अनुपयुक बना देते है।
(द) ये अण्डोत्सर्ग को संदमित करते है।
उत्तर:
(अ) ये शुक्राणुओं की गतिशीलता एवं निषेचन क्षमता कम करते हैं।

10. शुक्रवाहक-उच्छेदन के बारे में निम्नलिखित में से कौनसा गलत है? (NEET II-2016)
(अ) शुक्रवाहक को काटकर बांध दिया जाता है
(य) अनुक्फ्रमणीय बंध्यता
(स) बीर्य में शुक्राणु नहीं होते है
(द) पपिड्डीडाइलिस में शुक्राणु नहीं होते है।
उत्तर:
(द) पपिड्डीडाइलिस में शुक्राणु नहीं होते है।

11. एम्नीओसेटेसिस के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा कथन गलत है? (NEET 1-2016)
(अ) इसे छडन सिन्ड्रेम का पता लगाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
(ब) इसे खांडतालु (क्लेफ्ट पैलेट) का पता लगाने के लिए प्रयुक किया जाता है।
(स) यह आमतौर पर तब किया जाता है जब स्त्री को 14-16 सताह के बीच का गर्भ होता है।
(द) इसे प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण के लिए प्रबुक्त किया जाता है।
उत्तर:
(ब) इसे खांडतालु (क्लेफ्ट पैलेट) का पता लगाने के लिए प्रयुक किया जाता है।

12. निम्नलिखित उपागमों में से कौनसा उपागम किसी गर्भनिरोधक को परिभाषित क्रिया नहीं बताता- (NEET II-2016)

(अ) हॉर्मोनी गर्भनिरोधकशुक्राणुओं के प्रवेश को रोकते हैं। उसकी दर को धीमा कर देते हैं, अण्डोत्सर्ग और निषेचन नहीं होने देते।
(ब) शुक्रवाहक उच्छेदनशुकाणुजनन नहीं होने देते।
(स) रोध (बैरियर विधियाँ)निषेचन रोकती है।
(द) अन्तःगर्भाशयी युक्तियाँशुक्राणुओं की भक्ष कोशिकता बढ़ा देती हैं, शुक्राणुओं की गतिशीलता एवं निषेचन क्षमता का मंदन करती हैं।

उत्तर:

(ब) शुक्रवाहक उच्छेदनशुकाणुजनन नहीं होने देते।

13. पात्रे निषेचन द्वारा निमिंत 16 से अधिक कोरकखण्ड्डों (Blasomeres) वाले भ्रूण को स्थानान्तरित कर दिया जाता है- (NEET-2016)
(अ) झालर में
(ब) ग्रीवा में
(स) गर्भाशय में
(द) फैलोपियन नली
उत्तर:
(स) गर्भाशय में

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14. एक निःसंत्रान दम्यति को GIFT नामक तकनीक के जरिये बच्चा प्रास करने में मदद की जा सकती है। इस तकनीक का पूरा नाम है- (NEET-2015)
(अ) युग्मक आंतरिक निषेचन और स्थानान्तरण
(ब) जनन कोशिका का आंतरिक फैलोपियन नलिका स्थानान्तरण
(स) युग्मक वीर्य सेचित का फैलोपियन स्थानान्तरण
(द) युग्मक अंतः फैलोपियन नलिका का स्थानान्तरण।
उत्तर:
(द) युग्मक अंतः फैलोपियन नलिका का स्थानान्तरण।

15. निम्नलिखित में से कौन एक होंमोन मोचित करने वाली इंट्रायूटेराइन युकि (आई.यू.डी.) है? (NEET-2014)
(अ) मल्टीलोड-375
(ब) एल.एन.जी-20
(स) ग्रीवा टोपी
(द) वाल्ट।
उत्तर:
(ब) एल.एन.जी-20

16. ट्यूबेक्टोमी बंध्यकरण की एक विधि है जिसमें- (NEET-2014)
(अ) डिबवाहिनी नली का छोटा भाग निकाल या बांध दिया जाता है ।
(ब) अण्डाशय को शस्य क्रिया विधि से निकाल दिया जाता है।
(स) वास डेफरेन्स का छोटा भाग निकाल दिया जाता है या बांध दिया जाता है।
(द) गर्भांशय शल्य क्रिया विधि द्वारा निकाल दिया जाता है।
उत्तर:
(अ) डिबवाहिनी नली का छोटा भाग निकाल या बांध दिया जाता है ।

17. सहायक जनन प्रौद्योगिकी आई,वी,एक. के अन्तर्गत किसका स्थानान्तरण होता है ? (NEET-2014)
(अ) अण्डाणु का फैलोपियन नलिका में
(ब) युग्मनज का फैलोपियन नलिका में
(स) युग्मनज का गर्भाशय में
(द) 16 ब्लास्टोमीयर्स वाले श्रूण का फैलोपियन नलिका में
उत्तर:
(ब) युग्मनज का फैलोपियन नलिका में

18. कृत्रिम वीर्य सेचन से आपका क्या वात्पर्य है? (NEET-2013)
(अ) किसी स्वस्थ दाता के शुक्राणुओं को ऐसी परखनली में स्षानान्तरित का देना जिसमें अण्डाणु मौजूद हों
(ब) पति के शुक्राणुओं को ऐसी परखनली में स्थानान्तरित कर देना जिसमें अण्डाणु मौजूद हों
(स) स्वस्थ दाता के शुक्राणुओं को कृत्रिम तरीके से सीधे ही योनि के भीतर डाल देना।
(द) स्वस्थ दाता के शुक्राणुओं को सीधे ही अण्छाशय के भीतर डाल देना।
उत्तर:
(स) स्वस्थ दाता के शुक्राणुओं को कृत्रिम तरीके से सीधे ही योनि के भीतर डाल देना।

19. जन्म नियंग्नण (बर्थ कंट्रोल) के लिए एक वैध विधि है- (NEET-2013)
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(अ) उपयुक्त औरधि द्वारा गर्भपात करवा देना
(ब) आर्तव-चक्र के 10 वें दिन से लेकर 17 वे दिन तक मैधुन से बचन
(स) प्रातःकाल मैथुन करना
(द) मैध्युन के दौरान कालपूर्व स्ललन करना।
उत्तर:
(अ) उपयुक्त औरधि द्वारा गर्भपात करवा देना

20. नीचे दिए जा रहे चित्र में विशिएथत क्या दर्शाया गया है? (CBSE PMT-2012, NEET-2012)
(अ) अण्डाशबी कैंसर
(ब) गभाशायी कैंसर
(स) ट्युबेक्टोमी
(द) बासेक्टोमी
उत्तर:
(स) ट्युबेक्टोमी

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21. परखनली शिशु (टेस्टट्यूब्ब बेबी) कार्यक्रम में निम्नलिखित में से किस एक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है- (NEET-2012, CBSE PMT (Pre)-2012)
(अ) अंतःकोशिकीय द्रव्यी शुक्राणु इन्जेषशन (ICSI)
(ब) अंतःगभांशयी वीर्य सेचन (IUI)
(स) युग्मक अंतः फैलोपी स्थानान्तरण (GIFT)
(द) युग्मनज अंतः फैलोपी स्थानान्तरण (ZIFT)
उत्तर:
(द) युग्मनज अंतः फैलोपी स्थानान्तरण (ZIFT)

22. चिकित्सीय सगर्धता समापन (MTP) को कितने ससाह की गर्भावस्था तक सुरक्षिता माना जाता है? (NEET-2011)
(अ) आठ ससाह
(ब) बारह सताह
(स) अट्ठारह ससाह
(द) हैः सताह
उत्तर:
(ब) बारह सताह

23. वर्तमान समय में भारत में गर्भनिरोध की सर्वाधिक मान्य विधि है- (NEET-2011)
(अ) ट्यूबेक्टॉमी
(ब) डायफ्राम
(स) अन्तःगर्भाशयी युक्तियाँ
(द) सर्वाइकल कैप
उत्तर:
(स) अन्तःगर्भाशयी युक्तियाँ

24. सहेली है- (Kerala PMT-2011)
(अ) महिलाओं के लिए मुखीय गर्भनिरोधक
(ब) महिलाओं के लिए बंध्यकरण की शल्य विधि
(स) महिलाखं के लिए डायफ्राम
(द) नरों में बंध्यकरण की शल्य विधि
उत्तर:
(अ) महिलाओं के लिए मुखीय गर्भनिरोधक

25. कॅपर मोचक अन्तरा-गर्भाशायी युक्तिर्यों (Intra Uterine Device, IUD) से निर्मुक्त होने वाले कॉपर आयन- (NEET-2010)
(अ) गर्भाशाय को रोपण के प्रति अनुपयुक्त बनाते हैं
(ब) शुक्रापुओं के भक्षकाणु क्रिया में वृद्धि करते है
(स) शुक्राणुओं की गति का संदमन करते हैं
(द) अण्डोत्सर्ग को रोकते हैं।
उत्तर:
(अ) गर्भाशाय को रोपण के प्रति अनुपयुक्त बनाते हैं

26. गैमीट इन्ट्रफेलोंपियन ट्रंस्रफर (GIFT) अर्थात् युग्मक अन्तःफैलोपी स्थानान्तरण तक्नीक की सलाह उन महिलाओं के लिए दी जाती है- [NEET-2011, CBSE PMT (Main) 2011]
(अ) जिनकी गर्भारय ग्रीवा नाल इतनी संकीर्ण होती है कि उसमें से शुक्राणु प्रवेश नहीं कर सकते
(ब) जिनमें निषेचन प्रक्रिया के लिए उपयुक्त पर्यावरण उपलब्ध? नहीं हों सकता
(स) जिनमें अण्डाणु नहीं बन सकत्ता
(द) जो भ्राण को गर्भाशय के मीतर बनाए नहीं रख सकती।
उत्तर:
(स) जिनमें अण्डाणु नहीं बन सकत्ता

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27. जीवे (In vitro) निषेचन की तकनीक के अन्तर्गत निम्नलिखित में से किसका स्थानान्तरण फैल्लोपियन नलिका में किया जाता है? (NEET-2010)
(अ) केवल भूरण का आठ-कोशिकीय अवस्था तक
(ब) युग्मनज अथवा आठ-कोशिकीय अवस्था तक के प्राकृष्षुण का
(स) बत्तीस-कोशिकीय अवस्था के भ्र्ण का
(द) केवल युग्मनज का
उत्तर:
(ब) युग्मनज अथवा आठ-कोशिकीय अवस्था तक के प्राकृष्षुण का

28. एम्नियोसेण्टेसिस की तकनीक का अनुमोदित डपयोग है- (NEET-2010)
(अ) अजन्मे गभं के लिए लिंग की जाँच
(ब) कृत्रिम बीर्य सेचन
(स) सरोगेट माता के गर्भाशय कें भ्रृण का स्थानान्तरण
(द) आनुवंशिक असामान्यता की जांच
उत्तर:
(द) आनुवंशिक असामान्यता की जांच

29. निम्न में ओरल पिलों का अवयख है- (AFMC-2009)
(अ) प्रोजेस्टेरोन
(ब) अंक्सीटोसिन
(स) रिलेक्सिन
(द) उपयुंक से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) प्रोजेस्टेरोन

30. परखनली शिशु को उत्पग्न करने के लिए भ्रृण को कौनसी अवस्था में स्त्री के इरीर में रोषित किया जाता है ? (CPMT-2009)
(अ) 32 कोशिकीय अवस्था में
(ब) 64 कोशिकीय अवस्था में
(स) 100 कोशिकीय अवस्था में
(द) 164 कोशिकीय अवस्था में
उत्तर:
(अ) 32 कोशिकीय अवस्था में

31. गर्भनिरोधक के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उनके आगे पूछे जा रहे प्रश्न का उत्तर दीजिए- (CBSE-2008)
(1) प्रथम त्रिमास में चिकित्सीय गर्भ समापन (MTP) सामान्यत: निरापद (खतरे से बाहर) होता है
(2) जब तक माँ अपने शिशु को दो वर्ष तक स्तनपान कराती रहती है तब तक गर्भाधान की सम्भावनाएँ नहीं होती हैं
(3) कॉपर-T जैसी आंतर गर्भाशय युक्तियाँ कारगर गर्भनिरोधक होती हैं
(4) संभोग के बाद गर्भनिरोधक गोलियों का एक सताह तक सेवन करने से गर्भाधान रुक जाता है।

(अ) 2,3
(ब) 3,4
(स) 1,3
(द) 1,2
उत्तर:
(स) 1,3

32. अंडवाहिनी में सीधे ही युग्मक प्रवेश करने की तकनीक है- (Manipal-2004)
(अ) MTS
(ब) IVF
(स) POST
(द) ET
उत्तर:
(ब) IVF

33. मादा में मुखीय गर्भनिरोधक किसे रोकती है- (JK. CMEE-2004)
(अ) अण्डोत्सर्ग
(ब) निषेचन
(स) रोपण
(द) योनि में शुक्राणु का प्रवेश
उत्तर:
(अ) अण्डोत्सर्ग

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34. कॉपर-T का कार्य क्या है- (AFMC-2010, BHU-2002)
(अ) विद्लन रोकना
(ब) निषेचन रोकना
(स) उत्परिवर्तन रोकना
(द) गेस्ट्रुलेशन रोकना
उत्तर:
(ब) निषेचन रोकना

35. गर्भनिरोधक गोलियों में प्रोजेस्ट्रोन- (AIPMT-2000)
(अ) अण्डोत्सर्ग रोकता है
(ब) एस्ट्रेजन को बाधित करता है
(स) एन्ड्रोमेट्रियम से युग्मनज के जुड़ाव को रोकता है
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(अ) अण्डोत्सर्ग रोकता है

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. ईसा के जन्म के समय विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 20 करोड़
(B) 30 करोड़
(C) 40 करोड़
(D) 80 लाख
उत्तर:
(B) 30 करोड़

2. बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 1 अरब
(B) 1.4 अरब
(C) 1.6 अरब
(D) 2 अरब
उत्तर:
(C) 3.

3. इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 5 अरब
(B) 6. अरब
(C) 7 अरब
(D) 5.5 अरब
उत्तर:
(B) 6. अरब

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

4. बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक विश्व की जनसंख्या कितने गुना बढ़ी?
(A) दो गुना
(B) तीन गुना
(C) चार गुना
(D) पांच गुना
उत्तर:
(C) चार गुना

5. विश्व के दस सर्वाधिक आबाद देशों में विश्व की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है?
(A) लगभग 20 प्रतिशत
(B) लगभग 50 प्रतिशत
(C) लगभग 60 प्रतिशत
(D) लगभग 90 प्रतिशत
उत्तर:
(C) लगभग 60 प्रतिशत

6. मानव बसाव के लिए अनुपयुक्त स्थान कौन-सा है?
(A) आर्द्र जलवायु प्रदेश
(B) लंबे वर्धनकाल वाले प्रदेश
(C) पर्वतीय तथा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश
(D) मैदानी प्रदेश
उत्तर:
(C) पर्वतीय तथा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश

7. प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाने वाली जनसंख्या को कहा जाता है-
(A) जनसंख्या वितरण
(B) जनगणना
(C) जनसंख्या घनत्व
(D) जनसंख्या विस्फोट
उत्तर:
(C) जनसंख्या घनत्व

8. निम्नलिखित में से उच्च जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र कौन-सा है?
(A) सहारा मरुस्थल
(B) अमेजन तथा जायरे बेसिन
(C) पूर्व एशिया
(D) पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया
उत्तर:
(C) पूर्व एशिया

9. अशोधित जन्म दर से तात्पर्य है-
(A) एक वर्ष में 1000 जनसंख्या के अनुपात में पैदा होने वाले व्यक्तियों की संख्या
(B) एक वर्ष में 1000 जनसंख्या के अनुपात में मरने वालों की संख्या
(C) एक वर्ष में एक स्थान पर आने वाले व्यक्तियों की संख्या
(D) एक वर्ष में बाहर जाने वाले व्यक्तियों की संख्या
उत्तर:
(C) एक वर्ष में एक स्थान पर आने वाले व्यक्तियों की संख्या

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

10. कुल जनसंख्या और कुल कृषि क्षेत्र के अनुपात को कहा जाता है
(A) अंकगणितीय घनत्व
(B) कायिक घनत्व
(C) जन घनत्व
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) कायिक घनत्व

11. विश्व जनसंख्या वृद्धि की वर्तमान दर क्या है?
(A) 1 प्रतिशत
(B) 1.8 प्रतिशत
(C) 1.2 प्रतिशत
(D) 2.1 प्रतिशत
उत्तर:
(C) 1.2 प्रतिशत

12. विश्व का हर पाँचवां व्यक्ति है
(A) भारतीय
(B) चीनी
(C) रूसी
(D) अमेरिकी
उत्तर:
(B) चीनी

13. विश्व का हर छठा व्यक्ति है
(A) भारतीय
(B) चीनी
(C) रूसी
(D) अमेरिकी
उत्तर:
(A) भारतीय

14. किस महाद्वीप में ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि-दर पाई जाती है?
(A) अफ्रीका
(B) उत्तर अमेरिका
(C) यूरोप
(D) एशिया
उत्तर:
(C) यूरोप

15. निम्न जनसंख्या घनत्व के क्षेत्र हैं-
(A) उष्ण आर्द्र अक्षांश
(B) शुष्क भूमि
(C) ठंडी भूमि
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) ठंडी भूमि

16. पहली शताब्दी में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 20 करोड़
(B) 25 करोड़
(C) 15 करोड़
(D) 40 करोड़
उत्तर:
(B) 25 करोड़

17. विश्व में सबसे कम जनसंख्या वृद्धि-दर किस महाद्वीप में पाई जाती है?
(A) एशिया
(B) यूरोप
(C) उत्तरी अमेरिका
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(B) यूरोप

18. विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि-दर किस देश में है?
(A) भारत में
(B) चीन में
(C) नाइजीरिया में
(D) बांग्लादेश में
उत्तर:
(C) नाइजीरिया में

19. श्रीलंका की जनसंख्या को दो गुनी होने में कितना समय लगेगा?
(A) 25 वर्ष
(B) 36 वर्ष
(C) 46 वर्ष
(D) 58 वर्ष
उत्तर:
(C) 46 वर्ष

20. भारत में विश्व की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है?
(A) 16.87 प्रतिशत
(B) 18.01 प्रतिशत
(C) 19.20 प्रतिशत
(D) 17.5 प्रतिशत
उत्तर:
(D) 17.5 प्रतिशत

21. नाइजीरिया में विश्व की कितने प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है?
(A) 1.84 प्रतिशत
(B) 2.09 प्रतिशत
(C) 2.13 प्रतिशत
(D) 2.43 प्रतिशत
उत्तर:
(D) 2.43 प्रतिशत

22. भारत की जनसंख्या को दो गुनी होने में कितने वर्ष लगेंगे?
(A) 25 वर्ष
(B) 30 वर्ष
(C) 36 वर्ष
(D) 46 वर्ष
उत्तर:
(C) 36 वर्ष

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
ईसा के जन्म के समय विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
30 करोड़।

प्रश्न 2.
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
1.6 अरब।

प्रश्न 3.
इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
लगभग 6 अरब से अधिक।

प्रश्न 4.
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ से इक्कीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक विश्व की जनसंख्या कितने गुना बढ़ी?
उत्तर:
चार गुना।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 5.
मानव बसाव के लिए अनुपयुक्त स्थान कौन-सा है?
उत्तर:
पर्वतीय तथा ऊबड़-खाबड़ प्रदेश।

प्रश्न 6.
प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पाई जाने वाली जनसंख्या को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व।

प्रश्न 7.
कुल जनसंख्या और कुल कृषि क्षेत्र के अनुपात को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
कायिक घनत्व।

प्रश्न 8.
विश्व में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत कितना है? (वर्ष, 2001)
उत्तर:
48 प्रतिशत।

प्रश्न 9.
विश्व में उच्चतम जनसंख्या वृद्धि दर (2%+) वाले एक महाद्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर:
अफ्रीका।

प्रश्न 10.
विश्व में मध्यम जनसंख्या वृद्धि दर (1.1-1.9%) वाले एक महाद्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण अमेरिका।

प्रश्न 11.
विश्व में न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर (0-1%) वाले एक महाद्वीप का नाम लिखिए।
उत्तर:
यूरोप।

प्रश्न 12.
पहली शताब्दी में विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
लगभग 25 करोड़।

प्रश्न 13.
विश्व की जनसंख्या में प्रति वर्ष कितने लोग जुड़ रहे हैं?
उत्तर:
लगभग 8.2 करोड़।

प्रश्न 14.
विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या का संकेंद्रण कहाँ पर होता है?
उत्तर:
मैदानी क्षेत्रों पर।

प्रश्न 15.
विश्व में जनसंख्या वितरण का प्रारूप कैसा है?
उत्तर:
असमान।

प्रश्न 16.
किन्हीं दो प्रतिकर्ष कारकों के नाम लिखिए जो लोगों को उनके रहने के मूल स्थान से प्रवास करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
उत्तर:

  1. प्राकृतिक आपदा
  2. सामाजिक तनाव।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या घनत्व क्या है?
उत्तर:
किसी स्थान में प्रति वर्ग कि०मी० में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या जनसंख्या घनत्व कहलाती है।

प्रश्न 2.
अशोधित जन्म-दर क्या हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को अशोधित जन्म-दर कहा जाता है।

प्रश्न 3.
अशोधित मृत्यु-दर क्या हैं?
उत्तर:
एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के अनुपात में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को अशोधित मृत्यु-दर कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
प्रजननशीलता के चार निर्धारक तत्त्व कौन-से है?
उत्तर:

  1. जैव कारक
  2. जनांकिकीय कारक
  3. सामाजिक-सांस्कृतिक कारक
  4. आर्थिक कारक।

प्रश्न 5.
उद्गम स्थान किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब लोग एक-स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो वह स्थान जहाँ से लोग गमन करते हैं, उद्गम स्थान कहलाता है।

प्रश्न 6.
गंतव्य स्थान किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिस स्थान पर लोग आगमन करते हैं वह गंतव्य स्थान कहलाता है।

प्रश्न 7.
विश्व के उच्च जनसंख्या घनत्व वाले दो क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. पश्चिमी यूरोप
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के पूर्वी भाग।

प्रश्न 8.
जनसंख्या वृद्धि किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में लोगों की संख्या में, एक निश्चित समय के भीतर होने वाले परिवर्तन वृद्धि को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं।

प्रश्न 9.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले प्राकृतिक कारक बताएँ।
उत्तर:
धरातलीय स्वरूप, जलवायु, मृदा, प्राकृतिक वनस्पति।

प्रश्न 10.
जनसंख्या में ऋणात्मक वृद्धि कब होती है?
उत्तर:
जब जन्म-दर, मृत्यु-दर से कम हो या लोग विदेशों में जाकर बस जाते हैं तो जनसंख्या में ऋणात्मक वृद्धि होती है।

प्रश्न 11.
अशोधित मृत्यु-दर की गणना किस प्रकार की जाती है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 1

प्रश्न 12.
जनसंख्या स्थानान्तरण क्या है?
उत्तर:
जनसंख्या के एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवसन होने को स्थानान्तरण कहते हैं। जन्म-दर तथा मृत्यु-दर की भाँति स्थानान्तरण भी जनसंख्या परिवर्तनशीलता का मुख्य निर्धारक है। स्थानान्तरण से किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती या कम होती है।

प्रश्न 13.
जनांकिकीय संक्रमण क्या है?
उत्तर:
मनुष्य के साथ जनसंख्या से होने वाले कृत्रिम परिवर्तन को जनांकिकीय संक्रमण कहते हैं। यह जनसंख्या के विकास की अवस्था है। जनसंख्या के इस विकास चक्र में सामान्यतया पाँच अवस्थाएँ होती हैं। इन अवस्थाओं को जनसंख्या चक्र भी कहते हैं।

प्रश्न 14.
मानसून एशिया में सघन जनसंख्या पाए जाने के कारण बताइए।
उत्तर:
मानसून एशिया में नदी-घाटियों, उपजाऊ मैदानों, अनुकूल जलवायु व लम्बे वर्धनकाल के कारण कृषि अधिक होती है; जैसे यहाँ पर चावल की तीन-तीन फसलें उगाई जाती हैं। नगरीकरण तथा औद्योगिकीकरण से यहाँ पर सघन जनसंख्या पाई जाती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 15.
विश्व में उच्च अथवा सघन जनसंख्या वाले मुख्य क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:
जिन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है, वे क्षेत्र उच्च घनत्व वाले क्षेत्र अथवा प्रदेश कहलाते हैं; जैसे-

  1. मानसून एशिया
  2. पश्चिमी यूरोप
  3. संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के पूर्वी भाग।

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प्रश्न 16.
उत्प्रवास किसे कहते हैं?
उत्तर:
उत्प्रवास के द्वारा मनुष्य अपने प्रदेश से दूसरे स्थान को जाते हैं; जैसे यूरोप के मनुष्य उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया आदि गए। जिन प्रदेशों में कोई भौतिक प्रकार का कष्ट; जैसे जलवायु, बाढ़, सूखा अथवा जीवन निर्वाह की अन्य कठिनाइयाँ अथवा सामाजिक या आर्थिक कठिनाई उत्पन्न होती हों, उन स्थानों से मनुष्य बाहर की ओर स्थानान्तरण करने लगते हैं।

प्रश्न 17.
जन्म-दर और जनसंख्या की वृद्धि दर में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
जन्म-दर और जनसंख्या की वृद्धि दर में निम्नलिखित अंतर हैं-

जन्म-दरजनसंख्या वृद्धि दर
1. किसी देश में एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या जन्म-दर कहलाती है।1. दो समयावधियों के बीच होने वाले जनसंख्या परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि दर कहा जाता है।
2. यह दर प्रति हजार व्यक्ति होती है।2. यह दर प्रतिशत में होती है।

प्रश्न 18.
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि तथा वास्तविक वृद्धि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि तथा वास्तविक वृद्धि में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्राकृतिक वृद्धिवास्तबिक वृद्धि
दो समय बिंदुओं के बीच प्राकृतिक तौर पर होने वाले जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के अंतर को प्राकृतिक वृद्धि कहते हैं।वास्तविक वृद्धि में जन्म-दर व मृत्यु-दर के साथ-साथ प्रवास व आप्रवास की भी गणना की जाती है।

प्रश्न 19.
जनसंख्या की प्राकृतिक तथा प्रवासी वृद्धि में अंतर बताइए।
उत्तर:
जनसंख्या की प्राकृतिक तथा प्रवासी वृद्धि में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्राकृतिक वृद्धिप्रवासी वृद्धि
1. जन्म-दर में से मृत्यु-दर घटाने से प्राकृतिक वृद्धि प्राप्त होती है।1. जब किसी देश से लोग आकर बस जाएँ तो यह प्रवासी वृद्धि होती है.।
2. इसका देश की कुल जनसंख्या पर प्रभाव पड़ता है।2. इसका देश की कुल जनसंख्या पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 20.
प्रवास एवं दिक् परिवर्तन में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्रवास एवं दिक् परिवर्तन में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्रवासदिक् परिवर्तन
1. जनसंख्या के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं।1. किसी नगर तथा उसके पृष्ठ प्रदेश में स्थित गांवों के लोगों का स्थानांतरण दिक परिवर्तन कहलाता है।
2. यह स्थायी होता है।2. यह अस्थायी होता है।

प्रश्न 21.
अंतःराज्यीय प्रवास तथा अंतर्राज्यीय प्रवास में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
अंतःराज्यीय प्रवास तथा अंतर्राज्यीय प्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतःराज्यीय प्रवासअंतर्राज्यीय प्रवास
1. अपने ही राज्य में व्यक्तियों के स्थानांतरण को अंतःराज्यीय प्रवास कहते हैं।1. एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यक्तियों के स्थानांतरण को अंतर्राज्यीय प्रवास कहते हैं।
2. यह स्थानांतरण अधिक होता है।2. यह अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रश्न 22.
उत्प्रवास तथा आप्रवास में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्प्रवास तथा आप्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्प्रवासआप्रवास
1. जब किसी प्रदेश के निवासी दूसरे प्रदेश में जाते हैं तो उसे उत्प्रवास कहते हैं।1. जब दूसरे प्रदेशों के निवासी किसी प्रदेश में आकर निवास करते हैं तो उसे आप्रवास कहते हैं।
2. इससे मूल प्रदेश की जनसंख्या घटती है।2. इससे किसी प्रदेश की जनसंख्या में वृद्धि होती है।
3. अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों से उत्प्रवास होता है।3. कम जनसंख्या के क्षेत्रों की ओर आप्रवास होता है।

प्रश्न 23.
विश्व के विरल जनसंख्या वाले तथा जन विहीन प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. उष्ण मरुस्थल-सहारा, कालाहारी, अटाकामा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, अरब तथा थार।
  2. अति शीत क्षेत्र-कनाडा, साइबेरिया का उत्तरी भाग, ग्रीनलैंड तथा अंटार्कटिक महाद्वीप।
  3. ठंडे मरुस्थल व उच्च पर्वतीय प्रदेश मध्य एशिया, गोबी मरुस्थल, राकीज, एंडीज व हिमालय पर्वत।
  4. विषुवत् रेखीय क्षेत्र-अमेजन तथा जायरे बेसिन।

प्रश्न 24.
प्रवास को प्रभावित करने वाले अपकर्ष व प्रतिकर्ष कारक क्या हैं?
उत्तर:
अपकर्ष कारक-नगरीय सुविधाओं तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण जब. लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं तो इसे अपकर्ष कारक (Pull Factors) कहा जाता है। अपकर्ष कारक के कारण लोग गन्तव्य स्थान को आकर्षक बनाते हैं।

प्रतिकर्ष कारक-जब लोग जीविका के साधन उपलब्ध न होने के कारण गरीबी तथा बेरोज़गारी के कारण नगरों की ओर प्रवास करते हैं तो इसे प्रतिकर्ष कारक (Push Factors) कहा जाता है। प्रतिकर्ष कारक के कारण लोग अपने उद्गम स्थान से दूसरे स्थान की ओर जाते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवास क्या होता है? अस्थायी प्रवास के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या का एक निवास स्थल से दूसरे निवास स्थल तक किसी भी कारणवश संचलन या गतिशीलता प्रवास कहलाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के अनुसार, “प्रवास आवास परिवर्तन युक्त जनसंख्या की गतिशीलता को इंगित करता है।”

स्थानांतरण विभिन्न प्रकार का होता है। प्रवास को दूरी, अवधि, मात्रा, दिशा आदि के आधार पर कई भागों में विभाजित किया जा सकता है। प्रवास स्थायी और अस्थायी भी हो सकता है।
अस्थायी प्रवास के विभिन्न रूप-अस्थायी प्रवास को विभिन्न प्रकार से व्यक्त किया गया है। कुछ महत्त्वपूर्ण अस्थायी प्रवास निम्नलिखित हैं-
1. दैनिक प्रवास-नगरों में विविध प्रकार की सुविधाओं के उपलब्ध होने के कारण लोग प्रायः प्रतिदिन गांवों से नगरों में आते हैं और सायंकाल लौट जाते हैं। यदि व्यक्ति एक सप्ताह तक नगर में रुककर वापस लौट आता है तो इसे दैनिक या साप्ताहिक प्रवास कहते हैं।

2. मौसमी प्रवास-शीत ऋतु में पर्वतीय लोग सर्दी से बचने के लिए घाटियों में आ जाते हैं। इसी प्रकार गन्ने की पेराई के काल में मजदूर चीनी मिलों में काम करते हैं और पेराई बंद होने पर घरों में वापस चले जाते हैं। यह प्रवास मौसमी होता है। टुंड्रा, टैगा व स्टैप्स प्रदेश के निवासी मौसमी प्रवास करते हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए (क) विश्व जनसंख्या की दुगुना होने की अवधि, (ख) जनांकिकीय संक्रमण।।
उत्तर:
(क) विश्व जनसंख्या की दुगुना होने की अवधि किसी भी देश की जनसंख्या के दुगुना होने की अवधि का संबंध जनसंख्या की प्रति वर्ष प्रतिशत वृद्धि दर से है। वृद्धि दर जितनी कम होगी जनसंख्या के दुगुना होने का समय उतना ही अधिक होगा। इसके विपरीत यदि वृद्धि दर अधिक है तो जनसंख्या के दुगुना होने में कम समय लगेगा। इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा निकाला जा सकता है
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 2
विकसित देशों में जनसंख्या के दुगुना होने का समय अधिक है जबकि विकासशील देशों की जनसंख्या के दुगुना होने का समय अपेक्षाकृत बहुत कम है।

(ख) जनांकिकीय संक्रमण जनसंख्या का विकास कुछ क्रमिक अवस्थाओं में होता है। जैसे-जैसे किसी देश का आर्थिक विकास होता जाता है उसमें जनसंख्या परिवर्तन भी होते रहते हैं। आर्थिक विकास की अवस्था में स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रसार से पहले मृत्यु-दर में कमी आती है। तत्पश्चात् जन्म-दर भी घटनी प्रारंभ हो जाती है जिसके फलस्वरूप जनसंख्या वृद्धि दर कम हो जाती है। इस प्रकार की कमी पहले मृत्यु-दर में जिसके कारण वृद्धि दरें बढ़ीं। फिर जन्म-दरों में जिससे जन्म-दरें और मृत्यु-दरें लगभग बराबर हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप बहुत कम या शून्य वृद्धि दर हुई। इस स्थिति को जनांकिकीय संक्रमण कहते हैं।

प्रश्न 3.
जनसंख्या परिवर्तन तथा आर्थिक विकास में क्या सम्बन्ध है? व्याख्या कीजिए। अथवा “विकास सबसे उत्तम गर्भ निरोधक है।” वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व जनसंख्या का विकास बढ़ती हुई जनसंख्या के विकास दर का प्रतिपादक है। विकसित देशों में पहले मृत्यु-दर में कमी हुई। फिर जन्म-दर में भी कमी हुई जिससे जनसंख्या वृद्धि दर में भी कमी आई। यह प्रक्रिया जनसंख्या परिवर्तन कहलाती है। जनसंख्या के बढ़ने के साथ उनकी माँगें और आवश्यकताएँ भी बढ़ जाती हैं। जनसंख्या बढ़ने से राष्ट्रीय आय बढ़ जाती है। राष्ट्रीय आय के घटने-बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय और उसी के अनुरूप जीवन स्तर घटता-बढ़ता है।

कम आय से वस्तुओं की माँग पर प्रतिकूल असर पड़ता है, जिससे विकास अवरुद्ध हो जाता है। यदि जनसंख्या इष्टतम (Optimum) है तो संसाधनों का उचित उपयोग होगा और जीवन स्तर बढ़ेगा। विकासशील देशों की बढ़ती जनसंख्या के कारण आज वे गरीबी, कुपोषण और बेरोज़गारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। आर्थिक विकास के साथ जनसंख्या की वृद्धि कम होती चली जाती है। इसलिए कहा गया है कि विकास सबसे उत्तम गर्भ निरोधक है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 4.
जनसंख्या के अंकगणितीय घनत्व और कायिक घनत्व में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
जनसंख्या के अंकगणितीय घनत्व और कायिक घनत्व में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंकगणितीय घनत्वकायिक घनत्व
1. किसी देश की कुल जनसंख्या तथा कुल क्षेत्रफल के अनुपात को अंकगणितीय घनत्व कहते हैं।1. किसी देश की कुल जनसंख्या तथा कुल कृषि-भूमि के अनुपात को कायिक घनत्व कहते हैं।
2. बेशक भूगोलवेत्ता इसका प्रयोग करते हैं, फिर भी इस ढंग की अपनी त्रुटि है- ऋणात्मक क्षेत्र भी इस ढंग में धनात्मक दर्शाए जाते हैं।2. इस ढंग में कृषि अयोग्य भूमि को कुल भूमि में से घटा देते हैं। अतः इस ढंग द्वारा कृषि भूमि पर जन-दबाव का ठीक अनुमान लगता है।
3. इस ढंग से लोगों की संपन्नता का कोई पता नहीं लगता।3. इस ढंग से लोगों क् संपन्नता का कुछ अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रश्न 5.
ईसा से 8000 वर्ष पूर्व से वर्तमान तक विश्व की जनसंख्या किस प्रकार बढ़ी है?
उत्तर:
ईसा से 8000 वर्ष पूर्व विश्व की जनसंख्या लगभग 0.8 करोड़ थी। लगभग 2000 वर्ष पूर्व ईसा मसीह के समय में जनसंख्या 30 करोड़ के लगभग थी। वर्ष 1830 तक यह 100 करोड़ तक पहुँच गई और तब से यह बहुत तेजी से बढ़ती आ रही है जो लगभग 160 वर्षों में 700 करोड़ से भी अधिक हो गई है। निम्नलिखित तालिका में विश्व की जनसंख्या वृद्धि को दर्शाया गया है
तालिका : विश्व की जनसंख्या में वृद्धि

इन वर्षों के दौरानविश्व जनसंख्याइस संख्या तक पहुँचने के लिए लिया गया समय
आदिमानव से ईसा30 करोड़संपूर्ण मानव इतिहास के दौरान
0-1500 ई०50 करोड़1500 वर्ष
1500-1850 ई०100 करोड़350 वर्ष
1850-1930 ई०200 करोड़100 वर्ष
1930-1960 ईం300 करोड़30 वर्ष
1960-1974 ई400 करोड़14 वर्ष
1974-1987 ई०500 करोड़13 वर्ष
1987-1999 ई०600 करोड़ से अधिक12 वर्ष
1999-2011 ई०लगभग 700 करोड़12. वर्ष

प्रश्न 6.
विश्व के अधिक घनत्व वाले प्रदेश कौन-कौन से हैं और क्यों?
उत्तर:
वे क्षेत्र जहाँ जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है। इनके प्रमुख क्षेत्र हैं-

  • पूर्वी एशिया तथा दक्षिणी एशिया।
  • पश्चिमी यूरोप तथा उत्तर पूर्वी अमेरिका।

कारण-

  • ऊष्ण आर्द्र व समशीतोष्ण जलवायु जनसंख्या को आकर्षित करती है।
  • नदी घाटियों की उपजाऊ मिट्टी, जल-सिंचाई, समतल भूमि और चावल का अधिक उत्पादन, अधिक घनत्व में सहायक हैं।
  • निर्माण उद्योगों का अधिक होना तथा समुद्री मार्गों के कारण व्यापार का अधिक उन्नत होना भी जनसंख्या के उच्च घनत्व का कारण है।
  • मिश्रित कृषि का विकास, नगरीकरण के कारण बड़े-बड़े नगरों का विकास जनसंख्या को आकर्षित करता है।
  • वैज्ञानिक तथा तकनीकी ज्ञान में अधिक वृद्धि जनसंख्या के उच्च घनत्व का प्रमुख कारक है।

प्रश्न 7.
विश्व के मध्यम घनत्व वाले प्रदेश कौन-कौन से हैं और क्यों?
उत्तर:
वे क्षेत्र जहाँ 25 से 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० तक घनत्व मिलता है। इसमें निम्नलिखित क्षेत्र हैं

  • उत्तरी अमेरिका में प्रेयरीज का मध्य मैदान
  • अफ्रीका का पश्चिमी भाग
  • पूर्वी यूरोप और पूर्वी रूस
  • पूर्वी ऑस्ट्रेलिया
  • दक्षिणी अमेरिका में उत्तर:पूर्वी ब्राजील, मध्य चिली, मैक्सिको का पठार।

कारण –

  • विस्तृत खेती-बाड़ी में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाता है।
  • पर्वतीय व पठारी क्षेत्र के कारण जनसंख्या कम है।

प्रश्न 8.
विश्व में जनसंख्या का घनत्व असमान क्यों है?
उत्तर:
विश्व के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में विश्व की 60% से अधिक जनसंख्या रहती है और यह जनसंख्या विश्व के कुल क्षेत्रफल के लगभग 20% भाग पर रहती है। विश्व की 40% से भी कम जनसंख्या विश्व के लगभग 80% क्षेत्रफल पर निवास करती है। इस कारण विश्व में जनसंख्या का घनत्व असमान है। जनसंख्या की विशालता और इसके अत्याधिक ग्रामीण स्वरूप के अतिरिक्त नृ-जातीय विविधता, तीव्र वृद्धि दर और जनसंख्या का असमान वितरण अन्य पक्ष हैं जो देश की सामाजिक, आर्थिक विकास की प्रक्रिया और गति को धीमा कर रहे हैं।

प्रश्न 9.
विश्व में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले राजनीतिक कारक का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
राजनीतिक कारक भी कुछ सीमा तक जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करते हैं। सरकार की जनसंख्या नीति मानव के बसाव को अनुकूल तथा प्रतिकूल बना सकती है। रूस सरकार साइबेरिया में जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करके उनको पारितोषिक देती है। फ्रांस में जनसंख्या वृद्धि के लिए करों में रियायतें दी जाती हैं, जबकि चीन व भारत में जनसंख्या की विस्फोटक स्थिति है। चीन में एक बच्चा होने के बाद सरकार ने दूसरे बच्चे के जन्म देने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। भारत में भी जनसंख्या को नियन्त्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पिछले एक दशक से चीन की जनसंख्या में वृद्धि-दर निरन्तर अधिक है। वह दिन निकट ही है जब भारत की जनसंख्या विश्व में सबसे अधिक हो जाएगी।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 10.
प्रवास कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
प्रवास मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

  • उत्प्रवास
  • अप्रवास।

1. उत्प्रवास (Emigration) – उत्प्रवास के द्वारा मनुष्य अपने प्रदेश से दूसरे स्थान को जाते हैं। जैसे यूरोप के मनुष्य उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया आदि गए। जिन प्रदेशों में कोई भौतिक प्रकार का कष्ट; जैसे जलवायु, बाढ़, सूखा अथवा जीवन निर्वाह की अन्य कठिनाइयाँ अथवा सामाजिक या आर्थिक कठिनाई उत्पन्न होती हों, उन स्थानों से मनुष्य बाहर की ओर स्थानान्तरण करने लगते हैं।

2. अप्रवास (Immigration)-अप्रवास के द्वारा बाहरी स्थानों से मनुष्य किसी प्रदेश या स्थान के अन्दर आते हैं। उदाहरण उत्तरी अमेरिका में ब्रिटेन, इटली, फ्रांस आदि देशों से मनुष्यों का प्रवास होता है। जिन देशों में जीविका निर्वाह की सुविधाएँ प्रचुर मात्रा में होती हैं, वे बाहर से मनुष्यों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कभी-कभी आर्थिक या सामाजिक आवश्यकताओं के कारण भी बाहरी क्षेत्रों से प्रवास होता है।

प्रश्न 11.
जनसंख्या की वृद्धि-दर की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
विश्व में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या की वृद्धि-दर की प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
1. प्राकृतिक वृद्धि-दर (Natural Growth Rate) – दो समय बिन्दुओं में जन्म-दर और मृत्यु-दर में अन्तर से बढ़ने वाली जनसंख्या को उस क्षेत्र की प्राकृतिक वृद्धि-दर कहते हैं अर्थात् प्राकृतिक वृद्धि-दर = जन्म-दर – मृत्यु-दर।

2. वास्तविक वृद्धि-दर (Real Growth Rate) – इसमें जनसंख्या की जन्म-दर व मृत्यु-दर के साथ-साथ आप्रवास व अप्रवास की भी गणना की जाती है अर्थात् वास्तविक वृद्धि-दर = जन्म-दर – मृत्यु-दर + आप्रवासी – उत्प्रवासी।

3. धनात्मक वृद्धि-दर (Positive Growth Rate) – धनात्मक वृद्धि-दर तब होती है जब दो समय बिन्दुओं के बीच जन्म-दर, मृत्यु-दर से अधिक हो या अन्य देशों के लोग स्थायी रूप से उस देश में प्रवास कर जाएँ।

4. ऋणात्मक वृद्धि-दर (Negative Growth Rate) – यदि दो समय बिन्दुओं के बीच जनसंख्या कम हो जाए तो उसे ऋणात्मक वृद्धि-दर कहते हैं। यह तब होती है जब जन्म-दर मृत्यु-दर से कम हो जाए या लोग अन्य देशों में प्रवास कर जाएँ।

प्रश्न 12.
विश्व में न्यून (विरल) जनसंख्या वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जिन क्षेत्रों में 1 से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहते हैं, उन्हें विरल जनसंख्या वाले प्रदेश कहते हैं। इनमें प्रमुख निम्नलिखित प्रदेश सम्मिलित हैं-
1. उष्ण मरुस्थल-सहारा, कालाहारी, अटाकामा, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, अरब, थार तथा सोनोरैन मरुस्थल । इन क्षेत्रों में न्यून . वर्षा के कारण जल की कमी है और जनसंख्या विरल है।

2. अति-शीत क्षेत्र-ये ध्रुवीय क्षेत्र हैं, जिनमें कनाडा का उत्तरी भाग, ग्रीनलैंड, साइबेरिया का उत्तरी भाग तथा दक्षिणी ध्रुव के चारों ओर फैला हुआ अंटार्कटिक महाद्वीप सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों में तापमान कम है तथा फसलों के लिए वर्धनकाल छोटा है। अंटार्कटिक महाद्वीप तो बिल्कुल ही जनविहीन है।

3. विषुवत् रेखीय क्षेत्र इसमें दक्षिणी अमेरिका का अमेजन बेसिन तथा अफ्रीका का जायरे बेसिन सम्मिलित हैं। इन क्षेत्रों में वर्षा तथा तापमान दोनों ही अधिक हैं, जिससे घने वन उगते हैं, जिन्हें पार करना कठिन है। यह जलवायु मरुस्थल के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

प्रश्न 13.
विकसित तथा विकासशील देशों की जनांकिकीय प्रवृत्तियों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विकसित और विकासशील देशों की जनांकिकीय प्रवृत्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

अभिलक्षणविकसित देशविकासशील देश
(1) वृद्धि दरनिम्न (0.6 प्रतिशत)उच्च (2.1 प्रतिशत)
(2) द्विगुणन अवधिउच्च (116 वर्ष)निम्न (35 वर्ष)
(3) शिशु मृत्यु-दरनिम्न (5-25)उच्च (50 – 100)
(4) साक्षरताउच्च 95 प्रतिशतनिम्न 35-75 प्रतिशत
(5) औद्योगीकरणउच्चनिम्न
(6) मुख्य जनसंख्यानगरीय 75 प्रतिशतग्रामीण 54 प्रतिशत
(7) जीवन स्तरउच्चनिम्न

प्रश्न 14.
जनसंख्या घनत्व और जनसंख्या वितरण में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व और जनसंख्या वितरण में निम्नलिखित अंतर हैं-

जनसंख्या घनत्वजनसंख्या वितरण
1. किसी स्थान में प्रति वर्ग कि०मी० में निवास करने वाले व्यक्तियों की संख्या है।1. किसी स्थान की कुल जनसंख्या ही वहाँ का वितरण है।
2. जनसंख्या घनत्व एक अनुपात है।2. जनसंख्या वितरण की प्रकृति स्थितिगत है।
3. जनसंख्या वितरण को उसके घनत्व द्वारा अधिक सुचारु ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।3. जनसंख्या वितरण का प्रारूप क्षेत्रीय होता है।
4. घनत्व को प्रति वर्ग कि०मी० में व्यक्त करते हैं; जैसे भारत की जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है।4. वितरण को व्यक्त करने के लिए कोई इकाई नहीं है।

प्रश्न 15.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौतिक कारक-किसी भी देश अथवा प्रदेश की जनसंख्या के वितरण को निम्नलिखित भौतिक कारक प्रभावित करते हैं-
1. धरातल-जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने में धरातल की विभिन्नता सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है। ऊबड़-खाबड़ तथा ऊँचे पर्वतीय प्रदेशों में जनसंख्या कम आकर्षित होती है। इन प्रदेशों में जनसंख्या विरल पाई जाती है, क्योंकि यहाँ पर मानव निवास की अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध नहीं होती, कृषि के लिए उपजाऊ मिट्टी का अभाव होता है, यातायात के साधनों का विकास आसानी से नहीं हो पाता, कृषि फसलों के लिए वर्धनकाल (Growing Period) छोटा होता है तथा जलवायु कठोर होती है।

2. जलवायु अनुकूल तथा आरामदेय जलवायु में कृषि, उद्योग तथा परिवहन एवं व्यापार का विकास अधिक आसानी से होता है। विश्व में मध्य अक्षांश का क्षेत्र (शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र) जलवायु की दृष्टि से अनुकूल है। इसलिए विश्व की अधिकांश जनसंख्या इन्हीं प्रदेशों में निवास करती है। इसके विपरीत अत्यधिक शीत प्रदेशों में जनसंख्या विरल पाई जाती है। इसी प्रकार शुष्क मरुस्थली प्रदेशों की जलवायु ग्रीष्म ऋतु में झुलसाने वाली तथा शीत ऋतु में ठिठुराने वाली होती है। यही कारण है कि विश्व के मरुस्थलों; जैसे सहारा, थार, कालाहारी, अटाकामा तथा अरब के मरुस्थलों में जनसंख्या विरल है।

3. मृदा मनुष्य की पहली आवश्यकता है भोजन। भोजन हमें मिट्टी से मिलता है। मिट्टी में ही विभिन्न कृषि उपजें पैदा होती विश्व के जिन क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी है, वहाँ जनसंख्या अधिक पाई जाती है। भारत में गंगा-सतलुज के मैदान, संयुक्त राज्य अमेरिका में मिसीसिपी के मैदान, पाकिस्तान में सिन्धु के मैदान, मिस्र में नील नदी के मैदान आदि में उपजाऊ मिट्टी की परतें हैं, जिससे अधिक लोग वहाँ आकर बस गए हैं।

4. वनस्पति-वनस्पति भी जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करती है। उदाहरणार्थ, भूमध्य-रेखीय क्षेत्रों में सघन वनस्पति (सदाबहारी वनों) के कारण यातायात के साधनों का विकास कम हुआ है। आर्द्र जलवायु के कारण मानव-जीवन अनेक रोगों से ग्रसित रहता है, इसलिए यहाँ की जनसंख्या विरल है। इसके विपरीत जिन क्षेत्रों में वनस्पति आर्थिक उपयोग वाली होती है, वहाँ मानव लकड़ी से सम्बन्धित अनेक व्यवसाय आरम्भ हो जाते हैं; जैसे टैगा के वनों का आर्थिक महत्त्व है इसलिए वहाँ जनसंख्या अधिक पाई जाती है। वनस्पति विहीन क्षेत्रों (मरुस्थलों) में भी जनसंख्या विरल है।

5. खनिज सम्पदा-जिन क्षेत्रों में खनिज पदार्थों के भण्डार मिलते हैं, वहाँ खनन व्यवसाय तथा उद्योगों की स्थापना के कारण बेत होती है। ब्रिटेन में पेनाइन क्षेत्र, जर्मनी में रूर क्षेत्र, संयुक्त राज्य अमेरिका में आप्लेशियन क्षेत्र, रूस के डोलेत्स बेसिन तथा भारत के छोटा नागपुर के पठार में जनसंख्या का केन्द्रीयकरण वहाँ की खनिज सम्पदा की ही देन है।

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प्रश्न 16.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले मानवीय कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले मानवीय कारक निम्नलिखित हैं-
1. कृषि विश्व में जो क्षेत्र कृषि की दृष्टि से अनुकूल हैं, वहाँ जनसंख्या का अधिक आकर्षण होता है। वहाँ लोग प्राचीन समय से ही अधिक संख्या में निवास करते आ रहे हैं। प्रेयरीज तथा स्टेपीज प्रदेश कृषि के लिए उपयुक्त हैं, इसलिए वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है।

2. नगरीकरण-बीसवीं शताब्दी में नगरीकरण की प्रवृत्ति के कारण नगरों की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। नगरों में रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, व्यापार आदि की अधिक सुविधाएँ सुलभ हैं इसलिए जनसंख्या का जमघट नगरों में अधिक देखने को मिलता है। न्यूयॉर्क, लन्दन, मास्को, बीजिंग, शंघाई, सिडनी, दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई आदि नगरों में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हो रही है।

3. औद्योगिकीकरण-जिन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास तीव्र हुआ है, वहाँ जनसंख्या का आकर्षण बढ़ा है। जापान, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका का उत्तर:पूर्वी भाग, जर्मनी का रूर क्षेत्र, यूरोपीय देशों तथा भारत में पिछले दो दशकों से दिल्ली, मुम्बई तथा हुगली क्षेत्र में औद्योगिक विकास के कारण जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हुई है।

4. परिवहन-परिवहन की सुविधाओं का भी जनसंख्या के वितरण पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। जिन क्षेत्रों में यातायात की अधिक सुविधाएँ हैं, वहाँ जनसंख्या का अधिक आकर्षण होता है। महासागरीय यातायात के विकास के कारण कई बन्दरगाह विश्व के बड़े नगर बन चुके हैं। सिंगापुर, शंघाई, सिडनी, न्यूयॉर्क आदि नगर बन्दरगाहों के रूप में विकसित हुए थे, लेकिन आज इन नगरों में रेल, सड़क तथा वायु यातायात की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या घनत्व क्या है? विश्व में जनसंख्या घनत्व के वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व में न्यून या विरल जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व में सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
अथवा
संसार के सघन और विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
किसी भी प्रदेश की जनसंख्या और उस प्रदेश की भूमि के क्षेत्रफल के पारस्परिक अनुपात को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। इससे किसी प्रदेश के लोगों की सघनता का पता चलता है। यह जनसंख्या के विश्लेषणात्मक अध्ययन करने का महत्त्वपूर्ण माप है। इसे प्रति इकाई क्षेत्रफल पर व्यक्तियों की संख्या द्वारा व्यक्त किया जाता है। घनत्व इस प्रदेश की उन्नति और भावी विकास का अनुमान लगाने का मुख्य आधार होता है। इसका मुख्य लक्ष्य किसी क्षेत्र के संसाधनों पर जनसंख्या दबाव ज्ञात करना होता है। इसे निम्नलिखित रूपों में परिभाषित किया जाता है
1. गणितीय घनत्व (Arithmetic Density) किसी देश अथवा प्रदेश की कुल जनसंख्या तथा उसके कुल क्षेत्रफल के अनुपात को वहाँ की जनसंख्या का गणितीय घनत्व कहा जाता है। यह जनसंख्या तथा क्षेत्रफल के बीच एक साधारण अनुपात है। इसे निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है
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उदाहरण के लिए, जनसंख्या 376.80 करोड़ व क्षेत्रफल 440 लाख वर्ग कि०मी० है, तो जनसंख्या का घनत्व निम्नलिखित प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है
गणितीय घनत्व = \(\frac { 37680 }{ 440 }\)
= 85.64 या 86 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
यह जनसंख्या घनत्व का सबसे सरल रूप है, परन्तु इसमें कई त्रुटियाँ हैं। जैसे इससे जनसंख्या निवास तथा जीवन-स्तर का सही अनुमान नहीं लग पाता। लेकिन उपरोक्त त्रुटियों के बावजूद यह विभिन्न देशों की जनसंख्या विशेषताओं की तुलना करने की एक अच्छी विधि है।

2. कायिक घनत्व (Physiological Density)-इसे प्रति वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि (Cultivated Land) पर कुल निवास करने वाली जनसंख्या के अनुपात में व्यक्त किया जाता है। किसी देश या प्रदेश की कुल जनसंख्या वहाँ की कुल कृषि भूमि (Cultivated Land) के अनुपात को कायिक घनत्व कहते हैं। इसे निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जाता है-
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उदाहरण के लिए, यदि कुल कृषि भूमि 14.26 लाख वर्ग कि०मी० व जनसंख्या 10270 लाख है तो जनसंख्या का कायिक घनत्व निम्नलिखित प्रकार से होगा
कायिक घनत्व = \(\frac { 10270 }{ 14.26 }\) = 720 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
कायिक घनत्व द्वारा यह पता चलता है कि कृषि भूमि के प्रति वर्ग कि०मी० पर कितने व्यक्ति निर्भर हैं। कृषि प्रधान विकासशील देशों के लिए इस घनत्व का विशेष महत्त्व है।

3. आर्थिक घनत्व (Economic Density) इससे उस देश या प्रदेश के साधनों की उत्पादन क्षमता (Productive Capacity) तथा उस प्रदेश में निवास करने वाली जनसंख्या के अनुपात को लिया जाता है।
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4. कृषि घनत्व (Agriculture Density) इसमें उस देश या प्रदेश की कृषि की जाने वाली भूमि के क्षेत्रफल (Cultivated Area) तथा उसमें निवास करने वाली कृषक जनसंख्या (Agricultural Population) के अनुपात को लिया जाता है।
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5. पोषण घनत्व (Nutrition Density)-इसमें खेती की भोज्य फसलों (Food Crops) का क्षेत्रफल तथा उस प्रदेश की कुल जनसंख्या (Total Population) को लिया जाता है।
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जनसंख्या का विश्व वितरण-विश्व की जनसंख्या के वितरण पर यदि नजर डालें तो इसके आँकड़े चौंकाने वाले हैं। जनसंख्या का वितरण अत्यधिक असमान एवं विषम है। विश्व की लगभग 90 प्रतिशत आबादी केवल एक चौथाई भू-भाग पर निवास करती है और शेष 10 प्रतिशत जनसंख्या तीन-चौथाई क्षेत्रफल घेरे हुए है। सन् 2001 में विश्व की अनुमानित जनसंख्या 605 करोड़ थी, जोकि सन् 2011 में बढ़कर 693 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उत्तरी गोलार्द्ध में विश्व की 90% जनसंख्या रहती है तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 10% से भी कम जनसंख्या रहती है। विश्व का लगभग 33% भाग जनविहीन है।

जनसंख्या के वितरण के आधार पर विश्व को तीन प्रदेशों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
1. विरल जनसंख्या अथवा निम्न घनत्व वाले क्षेत्र-विश्व में कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ जनसंख्या का घनत्व 1 से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। ऐसे क्षेत्रों को विरल जनसंख्या के क्षेत्र कहते हैं। विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में कुल विश्व के क्षेत्रफल का तीन-चौथाई भाग आता है। इस प्रकार के प्रदेश निम्नलिखित हैं-
(1) उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र-उष्ण मरुस्थलीय भू-भाग अधिकांश महाद्वीपों के पश्चिमी भागों में स्थित हैं। यहाँ जनसंख्या का घनत्व 1 व्यक्ति से 2 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। ऐसे क्षेत्रों में वर्षा की न्यूनता तथा जल का अभाव है। यहाँ वर्षा के अभाव में केवल काँटेदार झाड़ियाँ ही उगती हैं। इन क्षेत्रों में कृषि बहुत कम होती है। यहाँ निवास करने वाले लोगों का मुख्य व्यवसाय भेड़-बकरी तथा ऊँट पालना है। इस प्रकार के मरुस्थलों में सहारा, कालाहारी, अटाकामा, थार, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया तथा अरब का मरुस्थल प्रमुख हैं।

(2) अति-शीत प्रदेश-इन प्रदेशों में ध्रुवीय प्रदेश सम्मिलित हैं। यहाँ की जलवायु अत्यन्त शीतल होती है और हर समय अधिकतर बर्फ जमी रहती है। यहाँ वर्धनकाल इतना छोटा होता है कि कोई भी फसल उगाना कठिन है। इस प्रकार के प्रदेशों में लोगों का मुख्य व्यवसाय आखेट करना तथा मछली पकड़ना है। इनमें ग्रीनलैण्ड, साइबेरिया का उत्तरी भाग, कनाडा का उत्तरी भाग, अलास्का तथा दक्षिणी ध्रुव का अंटार्कटिक महाद्वीप निर्जन हैं। ऐसे क्षेत्रों में 10 महीने तापमान हिमांक बिन्दु से नीचे ही रहता है। अधिकांश चलवासी चरवाहे हैं जो रेडियर पालते हैं और सील तथा व्हेल का शिकार करते हैं।

(3) उच्च पर्वतीय प्रदेश मध्य एशिया चारों ओर से सागरीय प्रभाव से वंचित शुष्क तथा अनाकर्षक प्रदेश हैं। पर्वतीय एवं पठारी होने के कारण मिट्टी की गहराई कम है तथा कृषि फसलें न के बराबर हैं या कहीं-कहीं साल-भर में केवल एक ही फसल उगाई जाती है। 4000 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले पवर्तीय भागों में तो वायु का दबाव कम हो जाता है, जिससे साँस लेना भी कठिन हो जाता है। उत्तरी अमेरिका में रॉकीज पर्वत, दक्षिणी अमेरिका में एण्डीज़ तथा भारत में महान हिमालय तथा चीन के दक्षिण-पश्चिमी भाग में इस प्रकार के उच्च पर्वतीय प्रदेश हैं।

(4) विषुवत रेखीय क्षेत्र-यह प्रदेश अत्यधिक वर्षा तथा साल-भर ऊँचा तापक्रम होने के कारण मानवं बसाव की दृष्टि से अनुकूल नहीं है। यहाँ जनसंख्या विरल है। चारों ओर घने जंगल तथा वन्य प्राणियों का साम्राज्य है। यहाँ जलवायु उमस वाली है तथा विभिन्न प्रकार के कीटाणु तथा जहरीले कीड़े-मकौड़े यहाँ देखने को मिलते हैं। इनमें दक्षिणी अमेरिका का अमेज़न बेसिन, अफ्रीका का जायरे बेसिन आदि सम्मिलित हैं।

2. मध्यम जनसंख्या और घनत्व वाले क्षेत्र-विश्व के जिन भागों में जनसंख्या का घनत्व 11 से 50 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है, उन्हें मध्यम या साधारण जनसंख्या वाले क्षेत्र में रखा जा सकता है। ये प्रदेश सभी महाद्वीपों में पाए जाते हैं।

  • एशिया-म्यांमार, दक्षिणी भारत, पश्चिमी चीन, थाईलैण्ड, कम्बोडिया आदि हैं।
  • यूरोप डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, लिथुआनिया, बाल्टिक गणराज्य तथा रूस के उत्तर-पश्चिमी भाग।
  • अमेरिका-संयुक्त राज्य अमेरिका का पश्चिमी तथा मध्यवर्ती भाग, कनाडा का दक्षिण-पश्चिमी भाग।
  • अफ्रीका-अफ्रीका के तटीय भाग, नील नदी का डेल्टा, नाइजीरिया तथा दक्षिणी अफ्रीका के कुछ क्षेत्र।
  • दक्षिण अमेरिका-वेनेजुएला, उत्तरी-पूर्वी ब्राजील, मध्यवर्ती चिली आदि।
  • ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया का तटवर्ती भाग तथा मरे-डार्लिंग, नदियों का बेसिन।

3. सघन जनसंख्या अथवा उच्च घनत्व के क्षेत्र-जिन प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है, उन्हें सघन जनसंख्या वाले प्रदेश कहते हैं। उच्च घनत्व वाले प्रदेश विश्व में निम्नलिखित हैं
(1) मानसून एशिया – इस प्रदेश की जलवायु मानव तथा कृषि दोनों के लिए अनुकूल है। कृषि फसलों के लिए वर्धनकाल लम्बा है। जलवायु विभिन्नता के कारण अनेक ऋतुएँ तथा उनमें विभिन्न प्रकार की कृषि फसलें उगाई जाती हैं। वर्ष में 2 से 3 फसलें उगाई जाती हैं। यहाँ की जनसंख्या अधिकांशतः कृषि पर निर्भर करती है। इन क्षेत्रों में समतल मैदानी भू-भाग हैं, जिनमें कहीं-कहीं जनसंख्या का घनत्व 700 से 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० तक है। इस क्षेत्र में चीन, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इण्डोनेशिया, जापान, सिंगापुर आदि आते हैं। नगरीकरण एवं औद्योगिकीकरण के कारण कई क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व 2000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से भी अधिक है। सिंगापुर में जनसंख्या का घनत्व 5000 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक है।

(2) पश्चिमी यूरोप – पश्चिमी यूरोप में औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण की प्रक्रिया 19वीं शताब्दी से ही चल रही है। लोग उद्योग, व्यापार तथा वाणिज्य को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। यहाँ सघन जनसंख्या दक्षिणी तथा पश्चिमी भाग में है। उत्तर में जनसंख्या अपेक्षाकृत कम है। सघन जनसंख्या वाला क्षेत्र इंग्लिश चैनल से पूर्व में नीपर नदी तक है। इसमें स्पेन, पुर्तगाल, दक्षिणी फ्राँस, ब्रिटेन, जर्मनी, हॉलैण्ड और बेल्जियम आदि सम्मिलित हैं।

(3) संयुक्त राज्य अमेरिका का मध्य – पूर्वी भाग संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य-पूर्वी भाग में यूरोपीय लोग आकर बसे और उसके बाद इस क्षेत्र में औद्योगिकीकरण तथा नगरीकरण की गति भी तीव्र रही, जिसके कारण जनसंख्या का घनत्व वर्तमान समय में अधिक हो गया है। जीवन की सभी सुविधाएँ सुलभ हैं। कृषि, उद्योग, व्यापार, वाणिज्य आदि सभी व्यवसायों का विकास द्रुतगति से हुआ है। दक्षिणी-पूर्वी कनाडा भी जनसंख्या की दृष्टि से सघन क्षेत्र हैं। देश की राजधानी तथा अन्य व्यापारिक नगर इसी क्षेत्र में हैं।
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प्रश्न 2.
जनांकिकीय संक्रमण सिद्धान्त की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
अथवा जनांकिकीय
संक्रमण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संसार में जनसंख्या की वृद्धि के इतिहास पर दृष्टिपात करने से जनसंख्या के विकास की विभिन्न अवस्थाएँ (Stages) दिखाई देती हैं। समय के साथ-साथ जनसंख्या में होने वाले क्रमिक परिवर्तन को जनांकिकीय संक्रमण कहते हैं। जैसे-जैसे कोई देश विकास करता है, उसकी जन्म-दर और मृत्यु-दर में परिवर्तन होने लगता है। उस देश की जनसंख्या का विकास होने लगता है, जो कुछ क्रमिक अवस्थाओं में होता है। जनसंख्या के विकास चक्र में सामान्यतः पाँच अवस्थाएँ होती हैं। इन अवस्थाओं को जनसंख्या चक्र (Population Cycle) कहते हैं। बर्गडौरफर (Burgdorfer), ब्लेकर (Blaker), साइमन (Simon), संयुक्त राष्ट्र (United Nations) आदि ने जनसंख्या चक्र की विभिन्न अवस्थाओं पर अपने विचार दिए हैं। जनांकिकीय संक्रमण की प्रायः पाँच अवस्थाएँ देखने को मिलती हैं
1. प्रथम अवस्था (First Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की यह पहली अवस्था होती है। इसमें उच्च जन्म-दर और उच्च मृत्यु-दर दोनों होते हैं। अतः जनसंख्या धीमी गति से बढ़ती है। यह 40 से 50 तक जन्म तथा मृत्यु प्रति हजार होती है। जन्म-दर तथा मृत्यु-दर बराबर होने के कारण इन देशों में जनसंख्या वृद्धि-दर बहुत मन्द होती है। यहाँ लोगों की मान्यता होती है कि “बहुत सारे बच्चों में से कुछ तो जिएँगे।” इसमें जनसंख्या की शुद्ध वृद्धि-दर लगभग 1 प्रतिशत होती है। इसे उच्च स्थिरता की अवस्था भी कहा जाता है।

2. द्वितीय अवस्था (Second Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की दूसरी अवस्था में आर्थिक विकास होते हैं। अकाल तथा सूखे पर नियंत्रण, खान-पान में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की प्रक्रिया के आरम्भ होने से मृत्यु-दर कम हो जाती है। परन्तु जन्म-दर ऊँची बनी रहती है। अतः इस अवस्था में जनसंख्या तेजी से बढ़ती है। विकासशील देश इसी अवस्था से गुजर रहे हैं। एशिया में पूर्वी दक्षिणी और मध्य एशिया के देश इसी अवस्था में हैं।

3. तृतीय अवस्था (Third Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की इस अवस्था में जन्म-दर में कमी आने से जनसंख्या वृद्धि-दर कम हो जाती है। यह अवस्था उच्च जन्म-दर (High Fertility) तथा मध्यम मृत्यु-दर (Moderate Mortality) वाली होती है। अमेरिका, ब्राजील, इक्वाडोर तथा पेरू इसी अवस्था में है। आधुनिक खेती, नगरीकरण, औद्योगिकीकरण इस अवस्था की पहचान हैं। इस अवस्था को विलम्ब से वृद्धि वाली अवस्था कहा जाता है।

4. चौथी अवस्था (Fourth Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की इस अवस्था में जन्म-दर एवं मृत्यु-दर दोनों ही कम हो जाती है। यह अवस्था मध्यम जन्म-दर (Moderate Fertility) तथा निम्न मृत्यु-दर (Low Mortality) वाली होती है। फलस्वरूप जनसंख्या की वृद्धि-दर बहुत ही कम हो जाती है। कुछ देशों में तो वृद्धि-दर शून्य हो जाती है। इसे न्यून स्थिरता की अवस्था कहते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैण्ड आज इसी अवस्था में हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 9

5. पाँचवीं अवस्था (Fifth Stage)-जनांकिकीय संक्रमण की यह अन्तिम अवस्था मानी जाती है। इस अवस्था में जन्म-दर कम होकर प्रायः शून्य त है। मृत्यु-दर जन्म-दर से अधिक हो जाती है, जिससे जनसंख्या घटने लगती है। इस अवस्था में आर्थिक विकास अपने उच्चतम स्तर पर होता है। लोगों में बच्चे पैदा करने की चाहत नहीं रहती है और न ही उनके पास समय होता है। इस अवस्था को जनांकिकीय संक्रमण की ह्रासमान अवस्था कहा जाता है। पश्चिमी यूरोप के प्रायः सभी देश और जापान इसी अवस्था में हैं। रूस, यूक्रेन, फ्रांस व इटली में भी लगभग यही अवस्था है। यहाँ जनसंख्या बढ़ने की बजाय कम हो रही है।

प्रश्न 3.
प्रवास से आपका क्या अभिप्राय है? इसे निर्धारित करने वाले कारकों का विस्तृत वर्णन करें। अथवा प्रवास को प्रभावित करने वाले कारकों/तत्त्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रवास का अर्थ एवं परिभाषाएँ-युगों से ही मानव वर्गों (Human Groups) का प्रवास होता रहा है। मानव जातियाँ (Human Races) आदिकाल से ही अपने उद्गम प्रदेश के बाहर प्रवास करती रही हैं। ऐतिहासिक काल में भी, पृथ्वी के विभिन्न भागों, एक स्थान से दूसरे स्थान पर, मानव वर्गों का प्रवसन होता रहा है, इसे जनसंख्या का स्थानान्तरण या प्रवास कहते हैं। स्थानान्तरण या प्रवास मात्र स्थान परिवर्तन ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तत्त्वों को समझने का आधार भी है। यह सामाजिक और आर्थिक पक्षों से जुड़ी हुई एक महत्त्वपूर्ण घटना है। संयुक्त राष्ट्र संघ के जनांकिकीय शब्दकोष के अनुसार, “प्रवास/प्रवसन एक प्रकार की भौगोलिक अथवा स्थानिक प्रवासिता है जो एक भौगोलिक इकाई के बीच देखने को मिलती है, जिनमें रहने का मूल स्थान अथवा पहुँचने का स्थान दोनों भिन्न होते हैं। यह प्रवास स्थायी होता है, क्योंकि इसमें मानव का निवास स्थान स्थायी रूप से परिवर्तित हो जाता है।” इसी प्रकार डेविड हीर के अनुसार, “अपने सामान्य निवास स्थान से किसी दूसरे स्थान पर जाकर बसना स्थानान्तरण (प्रवसन) कहलाता है।”

स्थानान्तरण या प्रवास को निर्धारित करने वाले कारक-प्रवास को निर्धारित करने वाले अनेक कारक हैं। प्रवास के कारणों का कोई सामान्य नियम नहीं है, क्योंकि प्रवास की प्रक्रिया व्यक्ति के अपने निर्णय से जुड़ी होती है। बड़े पैमाने पर प्रवास के कई कारण हैं, जिन्हें मुख्य रूप से निम्न भागों में बाँटा जा सकता है आर्थिक कारक, भौतिक कारक, धार्मिक या सांस्कृतिक कारक, राजनीतिक कारक और जनसांख्यिकीय कारक आदि। इनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-
1. आजीविका (Earning) – सीमित संसाधन तथा बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि एवं अन्य क्षेत्रों में एक निश्चित जनसंख्या को ही रोजगार मिलता है। इस कारण जनसंख्या का एक बड़ा भाग आजीविका की खोज में गाँवों से नगरों की ओर प्रवास होता है। इसके अतिरिक्त किसी क्षेत्र में जनसंख्या का दबाव बढ़ने से जनसंख्या-संसाधन सन्तुलन बिगड़ने के कारण लोग आजीविका के लिए विकसित और सिंचाई समृद्ध कृषि क्षेत्रों में जाना पसन्द करते हैं। उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं दक्षिणी अफ्रीका में उपलब्ध विस्तृत कृषि योग्य भूमि ने यूरोप, चीन और जापान में लोगों को आकर्षित किया है।

2. विवाह (Marriage) – सामाजिक रीति के अनुसार लड़कियों को विवाह के पश्चात् ससुराल में रहना पड़ता है। यही कारण है कि भारत में स्त्रियों की प्रवास दर काफी ऊँची है। यह प्रवास गाँव या नगरों से नगरों की ओर होता है। नगरों से गाँव की ओर प्रवास कम होता है।

3. शिक्षा (Education) – प्रायः गाँवों में उच्च शिक्षा की सुविधाएँ नहीं होतीं। उच्च शिक्षा व योग्यता में वृद्धि हेतु लोग शहरों में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की उच्च तथा तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए शहरों में प्रवास करते हैं। सुशिक्षित, निपुण, कलाकार, वैज्ञानिक तथा अन्य क्षेत्रों में योग्य लोग शहरों में अपनी उन्नति के अवसरों की तलाश में प्रवास करते हैं। इसके अतिरिक्त आर्थिक रूप से समृद्ध परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए गाँवों से शहरों व छोटे शहरों से बड़े शहरों में, जहाँ शिक्षा की अच्छी सुविधाएँ होती हैं, प्रवास करते हैं।

4. सामाजिक असुरक्षा (Social Unsecurity) – जिस किसी देश या प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता एवं गड़बड़ी, जातीय दंगे, वर्ग-संघर्ष आदि की सम्भावनाएँ अधिक होती हैं तो ऐसे क्षेत्रों की जनसंख्या क्षेत्र को छोड़कर अन्य शांत क्षेत्रों को प्रवास कर जाते हैं। उदाहरण के लिए, कश्मीर में राजनीतिक अस्थिरता व अशान्ति के कारण कश्मीरी पंडित कश्मीर प्रवास कर गए। इसी प्रकार सन् 1947 के देश विभाजन में भारत व पाकिस्तान से लोगों का प्रवास हुआ।

5. प्राकृतिक प्रकोप (Natural Destroy) – प्राकृतिक प्रकोप भी जनसंख्या को प्रवास करने पर मजबूर करते हैं। भयंकर बाढ़ें, सूखा, बीमारियाँ आदि प्राकृतिक प्रकोपों से लोग भयभीत व मजबूर होकर प्रवास करते हैं। ज्वालामुखी के आकस्मिक विस्फोट के कारण भी मानव को अपने निवास स्थान को छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ता है। सिसली, फिलीपीन और हवाई द्वीपों से इसी कारण लोग अन्य देशों में जाकर बस गए हैं। भूकम्प भी प्रवास का एक मुख्य कारण है। सन् 1934 में बिहार के भूकम्प के समय हजारों लोग पश्चिमी बंगाल, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में जाकर स्थाई रूप से बस गए थे।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 4.
मर्त्यता से क्या तात्पर्य है? इसे निर्धारित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मर्त्यता का अर्थ (Meaning of Mortality) जन्म की तरह मृत्यु भी एक निश्चित घटित होने वाली महत्त्वपूर्ण जैविक घटना है। सन् 1953 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा मर्त्यता की दी गई परिभाषा के अनुसार “जन्म के बाद जीवन के सभी लक्षणों का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना मर्त्यता कहलाता है।”

मर्त्यता की माप (Measures of Mortality)-जनसंख्या वृद्धि के निर्धारण में मर्त्यता की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मर्त्यता में कमी आने के कारण भी जनसंख्या वृद्धि हो जाती है। मर्त्यता को मुख्य रूप से निम्नलिखित विधियों द्वारा मापा जाता है

  1. अशोधित मृत्यु-दर
  2. शिशु मृत्यु-दर
  3. मातृ मृत्यु-दर
  4. आयु विशिष्ट मृत्यु-दर।

इन विधियों में अशोधित मृत्यु-दर अधिक सर्वमान्य है जिसका वर्णन निम्नलिखित है-
अशोधित मृत्यु-दर (Crude Death Rate)-एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के अनुपात में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को अशोधित मृत्यु-दर कहा जाता है। इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है-
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 10
मर्त्यता के निर्धारक कारक (Determinants of Mortality)-अधिक जन्म-दर और अधिक मृत्यु-दर किसी देश के पिछड़ेपन का सूचक है जबकि कम जन्म-दर और कम मृत्यु-दर किसी देश की आर्थिक उन्नति के सूचक हैं। मृत्यु-दर किसी देश की जनसांख्यिकी संरचना सामाजिक प्रगति तथा आर्थिक विकास की सूचक है। मर्त्यता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
1. आयु संरचना (Age Structure) युवाओं की अपेक्षा प्रौढ़ों में मृत्यु की संभावना अधिक होती है। अच्छी चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है तथा जीवन प्रत्याशा को बढ़ाया जा सकता है। इसी कारण विकसित देशों में प्रौढ़ों की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी प्रतीत हो रही है।

2. लिंग संरचना (Sex Structure) स्त्रियों और पुरुषों की मृत्यु-दर भी अलग-अलग होती है। स्त्रियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों की अपेक्षा अधिक है। इसलिए प्रत्येक आयु वर्ग में स्त्रियों की मर्त्यता भी कम है और उनकी जीवन प्रत्याशा भी पुरुषों की अपेक्षा अधिक है, परंतु विकासशील और पिछड़े देशों में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। इन देशों में स्त्रियों की मृत्यु-दर पुरुषों से अधिक है। इसका प्रमुख कारण इन देशों में लड़कियों और स्त्रियों के प्रति भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण का होना है।

3. नगरीकरण (Urbanization)-नगर में होने वाली दुर्घटनाएँ, प्रदूषित वातावरण तथा वहाँ की तनावपूर्ण जिंदगी भी उच्च मृत्यु-दर के लिए उत्तरदायी है।

4. सामाजिक कारक (Social Factors)-भ्रूण हत्या, स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, साक्षरता दर तथा धार्मिक विश्वास आदि सामाजिक कारक भी मर्त्यता को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5.
प्रजननशीलता क्या है? प्रजननशीलता को निर्धारित या प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रजननशीलता का अर्थ (Meaning of Fertility)-प्रजननशीलता से तात्पर्य स्त्री द्वारा पूरे समय बाद किसी समय विशेष में जीवित जन्म देने वाले बच्चों की संख्या से है। कुछ स्त्रियों में गर्भ धारण करने की क्षमता तो होती है परंतु प्रजननशीलता नहीं होती। किसी देश की जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने में प्रजननशीलता महत्त्वपूर्ण कारक है। यदि प्रजननशीलता मृत्यु-दर से अधिक है तो जनसंख्या में वृद्धि होगी। इसके विपरीत प्रजननशीलता से मृत्यु-दर अधिक होने पर जनसंख्या में कमी होगी।

प्रजनन दर मापने की विधियाँ (Methods of Measuring Fertile Rate)-प्रजनन दर को निम्नलिखित दो विधियों द्वारा व्यक्त किया जाता है-
1. अशोधित जन्म-दर (Crude Birth Rate)-किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को जन्म-दर कहा जाता है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या में जन्म-दर को निम्नांकित प्रकार से दर्शाया जा सकता है-
B = \(\frac{\mathbf{N}_{\mathbf{n}}}{\mathbf{P}}\) x 100
B = जन्म-दर, Nn = एक वर्ष में जन्मे नवजात शिशुओं की संख्या।
P = उस वर्ष के मध्य की जनसंख्या
यद्यपि इस विधि का प्रचलन अधिक है, फिर भी यह दोषयुक्त है, क्योंकि इसमें संपूर्ण जनसंख्या से भाग दिया जाता है कि संपूर्ण जनसंख्या कभी भी प्रजनन क्षमता की परिधि में नहीं आती।

2. सामान्य प्रजनन दर (General Fertile Rate)-प्रजनन आयु वर्ग (15-49 वर्ष) की 1000 स्त्रियों के पीछे जन्मे जीवित बच्चों की संख्या को सामान्य प्रजनन दर कहते हैं। इसे निम्नलिखित प्रकार से निकाला जा सकता है-
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 11

प्रजननशीलता/प्रजननता को निर्धारित या प्रभावित करने वाले कारक (Factor-Effecting of Fertility)-प्रजननशीलता को निर्धारित करने वाले कारकों को निम्नलिखित दो वर्गों में रखा गया है-
(क) जैव कारक (Biological Factors) – जैव कारकों में लोगों की प्रजातियाँ, प्रजनन क्षमता तथा उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव आता है। विश्व में विभिन्न प्रजातियों के लोगों का जनसंख्या स्तर एक जैसा नहीं पाया जाता जबकि वे एक समान पर्यावरण में रहते हैं। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रजननशीलता को प्रभावित करता है। अच्छे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दशा में प्रजनन दर ऊँची पाई जाती है जबकि अस्वस्थ शारीरिक और मानसिक वातावरण में मर्त्यता (Mortality) ऊँची पाई जाती है। स्त्रियों की प्रजनन क्षमता भी प्रजननशीलता को प्रभावित करती है। प्रजनन क्षमता या संतानोत्पादकता स्त्रियों में सामान्यतया 14 से 44 वर्ष की आयु तक पाई जाती है, लेकिन यह अवधि विभिन्न स्त्रियों में अलग-अलग पाई जाती है। भारत में यह आयु 15 से 49 वर्ष की है जबकि ठंडे देशों में यह आयु वर्ग कुछ भिन्न होती है।

(ख) प्रजननता को प्रभावित करने वाले अन्य कारक (Other factor-Effecting of Fertility) प्रजननता को अन्य निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं
1. शिक्षा का स्तर (Stage of Education) – शिक्षा का उच्च स्तर प्रजननता को निश्चित रूप से प्रभावित करता है। शिक्षित पति-पत्नी की अपेक्षा अशिक्षित पति-पत्नियों में प्रजननता अधिक पाई जाती है। अतः शिक्षा का प्रजननता से सीधा संबंध है।

2. विवाह की आयु (Age of Marriage) – 15 से 49 वर्ष के वर्ग की स्त्रियाँ सामान्य रूप से बच्चे पैदा करने में सक्षम होती हैं। यदि 15 वर्ष की आयु में विवाह किया जाए तो 34 वर्ष बच्चे पैदा करने के लिए मिलते हैं। इस अवधि में नारी लगभग 14-15 बच्चे पैदा कर सकती है। यदि 21 वर्ष की आयु के बाद कन्या का विवाह किया जाए तो अपेक्षाकृत कम बच्चे पैदा करने का अवसर मिलता है। अतः विवाह की आयु प्रजननता को प्रभावित करती है। इसलिए सरकार ने जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए लड़कियों की विवाह आयु 18 वर्ष तथा लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित की है।

3. आर्थिक स्तर (Economic Stage) – गरीबी और जनसंख्या वृद्धि का सीधा संबंध है। यहाँ विभिन्न आय वर्ग के लोगों में प्रजननता दर में भिन्नता पाई जाती है। सामान्यतया निम्न आय वर्ग या गरीबी की रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले लोगों में उच्च प्रजननता दर मिलती है, जबकि उच्च आय वर्ग के लोगों में कम प्रजननता मिलती है।

4. व्यवसाय (Business) – प्रत्येक व्यवसाय के लोगों में प्रजननता दर समान नहीं पाई जाती। किसान और मजदूरों में प्रजनन दर सामान्य से अधिक होती है, जबकि अन्य सेवाओं में लगे लोगों की प्रजननता दर कुछ कम होती है।

5. धार्मिक मान्यताएँ (Realistic Assumptions) – धर्म के अनुसार भी प्रजननता की दर में भिन्नता पाई जाती है। प्रायः सभी धर्म जनसंख्या नियंत्रण का विरोध करते हैं, फिर भी यह नियंत्रण भिन्न-भिन्न धर्मों में भिन्न-भिन्न है। जिन धर्मों में परिवार कल्याण के साधनों का उपयोग नहीं किया जा रहा है, उस धर्म के लोगों की प्रजनन दर अधिक है। हिंदुओं की प्रजननता दर मुसलमानों की प्रजननता दर से कम है।

प्रश्न 6.
विश्व में जनसंख्या वृद्धि के कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में जनसंख्या वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं-
1. उच्च जन्म-दर तथा निम्न मृत्यु-दर (High Birth Rates and Low Death Rates)-जनसंख्या की वृद्धि-दर जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के अन्तर से ज्ञात की जाती है। जब मृत्यु-दर कम तथा जन्म-दर अधिक होती है, तब जनसंख्या में वृद्धि होती है। प्राकृतिक तौर पर होने वाले जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के अन्तर को प्राकृतिक वृद्धि-दर कहते हैं तथा दो समयावधियों के बीच होने वाले जनसंख्या सम्बन्धी परिवर्तन को वृद्धि-दर कहते हैं। जब जन्म-दर अधिक तथा मृत्यु-दर कम हो या किसी अन्य देश से आकर जनंसख्या में बढ़ोत्तरी हो जाए तो इसे धनात्मक वृद्धि कहते हैं। जब दो समयावधियों के बीच जनसंख्या में कमी आए तो इसे ऋणात्मक वृद्धि कहते हैं। ऐसा तब होता है, जब मृत्यु-दर अधिक तथा जन्म-दर कम हो या जनसंख्या बाहर प्रवास कर जाए।

2. प्रवास (Migration)-किसी स्थान पर धनात्मक कारकों के कारण दूसरे स्थान से लोग प्रवासित होते हैं तो भी जनसंख्या में वृद्धि होगी। शहरों तथा कस्बों में उच्च शिक्षा, रोजगार की सुविधा, सुरक्षा, यातायात के साधन, चिकित्सा सुविधाएँ आदि विकसित अवस्था में होते हैं तो आस-पास के क्षेत्र से लोग यहाँ पर आकर रहने लगते हैं। ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जर्मनी में जनसंख्या वृद्धि इसी कारण से हुई है।

3. खनिज संसाधनों का आकर्षण (Attraction of Minerals)-संसार में जिन भागों में खनिज संसाधन अधिक हैं, वे क्षेत्र मानव को बसाव के लिए आकर्षित करते हैं। मानव उन क्षेत्रों में श्रमिकों के रूप में कार्य करते हैं। चाहे वहाँ की जलवायु सम हो या विषम। स्वीडन में लौह-अयस्क के कारण गेलिवारे नगर में जनसंख्या बढ़ी है। कनाडा की यक्रेन में केपर बैंक नगर, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कालगुर्ली, भारत में दामोदर घाटी, जर्मनी में रूस घाटी, रूस का डोनेट्स बेसिन, अल्लेशिन क्षेत्र आदि कई उदाहरण हैं, जहाँ खनिजों के कारण ही उन क्षेत्रों में जनसंख्या आकर्षित हुई।

4. उद्योगों का प्रभाव (Effect of Industries)-किसी भी क्षेत्र में यदि उद्योग विकसित होते हैं, तब वहाँ पर जनसंख्या में वृद्धि होने लगती है, क्योंकि उद्योगों में काम करने के लिए उन क्षेत्रों में अन्य देशों से श्रमिक आते हैं और वहाँ बसते हैं। आबादी श्रम के रूप में आती है और उस क्षेत्र में इस प्रकार उद्योगों के साथ-साथ जनसंख्या भी बढ़ती जाती है; जैसे पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका तट, पश्चिमी यूरोप का तटीय भाग, भारत में छोटा नागपुर पठार आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहाँ उद्योगों के विकास के साथ-साथ जनसंख्या भी बढ़ती गई।

5. निम्न जीवन-स्तर (Low Life Standard)-जिन क्षेत्रों में लोगों का जीवन-स्तर निम्न होगा, वहाँ अज्ञानता की बढ़ोतरी होगी, इसलिए वहाँ पर जनसंख्या वृद्धि तीव्र गति से होगी, क्योंकि वहाँ के लोगों को वहाँ के संसाधनों को प्रयोग करने का पूर्ण ज्ञान नहीं होता। वहाँ प्रति व्यक्ति आय कम होने से जनसंख्या में बढ़ोतरी होती है।

6. आर्थिक विकास (Economic Development)-जनसंख्या वृद्धि का मुख्य प्रभाव क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। प्राथमिक अर्थव्यवस्था वाले विकासशील देशों में वृद्धि-दर दो प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच होती है; जैसे एशिया, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका आदि। विकसित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि-दर 1.7% से भी कम पाई जाती है। इस प्रकार आर्थिक विकास तथा जनसंख्या वृद्धि-दर व सह-सम्बन्ध स्पष्ट देखने को मिलता है। आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में जन्म-दर अधिक पाई जाती है। आर्थिक पिछड़ेपन के कारण मृत्यु-दर भी अधिक होती है; जैसे कालाहारी मरुस्थल के बुशमैन।

7. स्वास्थ्य सेवाएँ (Health Services)-विकसित देशों में स्वास्थ्य सेवाओं के कारण मृत्यु-दर पर अंकुश लग जाता है, लेकिन जन्म-दर बढ़ती जाती है, जिससे जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ने लगती है; जैसे दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में ऐसी स्थिति बनी हुई है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या : वितरण, घनत्व और वृद्धि

प्रश्न 7.
जनसंख्या परिवर्तन के घटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक होते हैं-

  • प्रजननशीलता या जन्म दर
  • मृत्यु दर या मर्त्यता
  • प्रवास।

1. प्रजननशीलता-प्रजननशीलता से तात्पर्य स्त्री द्वारा पूरे समय बाद किसी समय विशेष में जीवित जन्म देने वाले बच्चों की संख्या से है। कुछ स्त्रियों में गर्भ धारण करने की क्षमता तो होती है परंतु प्रजननशीलता नहीं होती। किसी देश की जनसंख्या वृद्धि ननशीलता महत्त्वपूर्ण कारक है। यदि प्रजननशीलता मृत्यु-दर से अधिक है तो जनसंख्या में वृद्धि होगी। इसके विपरीत प्रजननशीलता से मृत्यु-दर अधिक होने पर जनसंख्या में कमी होगी।

प्रजनन दर मापने की विधियाँ – प्रजनन दर को निम्नलिखित दो विधियों द्वारा व्यक्त किया जाता है-
(1) अशोधित जन्म-दर-किसी क्षेत्र में प्रति वर्ष हजार व्यक्तियों में जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को जन्म-दर कहा जाता है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या में जन्म-दर को निम्नांकित प्रकार से दर्शाया जा सकता है
B = \(\frac{\mathbf{N}_{\mathbf{n}}}{\mathbf{P}}\) x 100
B = जन्म-दर, Nn = एक वर्ष में जन्मे नवजात शिशुओं की संख्या।
P = उस वर्ष के मध्य की जनसंख्या
यद्यपि इस विधि का प्रचलन अधिक है, फिर भी यह दोषयुक्त है, क्योंकि इसमें संपूर्ण जनसंख्या से भाग दिया जाता है कि संपूर्ण जनसंख्या कभी भी प्रजनन क्षमता की परिधि में नहीं आती।

(2) सामान्य प्रजनन दर-प्रजनन आयु वर्ग (15-49 वर्ष) की 1000 स्त्रियों के पीछे जन्मे जीवित बच्चों की संख्या को सामान्य प्रजनन दर कहते हैं। इसे निम्नलिखित प्रकार से निकाला जा सकता है-
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि 12

2. मर्त्यता-जन्म की तरह मृत्यु भी एक निश्चित घटित होने वाली महत्त्वपूर्ण जैविक घटना है। सन् 1953 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा मर्त्यता की दी गई परिभाषा के अनुसार “जन्म के बाद जीवन के सभी लक्षणों का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना मयंता कहलाता है।”

मर्त्यता की माप – जनसंख्या वृद्धि के निर्धारण में मर्त्यता की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। मर्त्यता में कमी आने के कारण भी जनसंख्या वृद्धि हो जाती है। मर्त्यता को मुख्य रूप से निम्नलिखित विधियों द्वारा मापा जाता है

  • अशोधित मृत्यु-दर
  • शिशु मृत्यु-दर
  • मातृ मृत्यु-दर
  • आयु विशिष्ट मृत्यु-दर।

इन विधियों में अशोधित मृत्यु-दर अधिक सर्वमान्य है जिसका उल्लेख निम्नलिखित है

अशोधित मृत्यु-दर – एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या के अनुपात में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को अशोधित मृत्यु-दर कहा जाता है। इसे निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया जाता है
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3. प्रवास-युगों से ही मानव वर्गों (Human Groups) का प्रवास होता रहा है। मानव जातियाँ (Human Races) आदिकाल से ही अपने उद्गम प्रदेश के बाहर प्रवास करती रही हैं। ऐतिहासिक काल में भी, पृथ्वी के विभिन्न भागों, एक स्थान से दूसरे स्थान पर, मानव वर्गों का प्रवसन होता रहा है, इसे जनसंख्या का स्थानान्तरण या प्रवास कहते हैं। स्थानान्तरण या प्रवास मात्र स्थान परिवर्तन ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय तत्त्वों को समझने का आधार भी है। यह सामाजिक और आर्थिक पक्षों से जुड़ी हुई एक महत्त्वपूर्ण घटना है।

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. असममित कार्बन परमाणु युक्त यौगिक है-
(अ) C6H5CH2COOH
(ब) HOOC (CH2)2COOH
(स) HO(CH2)2OH
(द) HOOC CH(OH)CH2COOH
उत्तर:
(द) HOOC CH(OH)CH2COOH

2. ध्रुवण घूर्णकता निम्न में से किसके कारण पायी जाती है-
(अ) सममिति तल
(ब) आणविक सममितता
(स) आणविक असममितता
(द) सममित कार्बन परमाणु
उत्तर:
(स) आणविक असममितता

3. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक ध्रुवण घूर्णक नहीं है ?
(अ) लैक्टिक अम्ल
(स) सिट्रिक अम्ल
(ब) टार्टरिक अम्ल
(द) मैलिक अम्ल
उत्तर:
(स) सिट्रिक अम्ल

4. अग्निशामक के रूप में प्रयुक्त होने वाला यौगिक है-
(अ) CH3Cl
(ब) CH2Cl2
(स) CHCl3
(द) CCI4
उत्तर:
(द) CCI4

5. ऐरिल हैलाइड (हैलोएरीन) का उदाहरण है-
(अ) C6H3Cl
(ब) C6H5CH2Cl
(स) C6H5Cl
(द) C6H6Cl6
उत्तर:
(स) C6H5Cl

6. 2° ऐल्किल हैलाइड का उदाहरण है-
(ब) आइसोब्यूटिल क्लोराइड
(स) आइसोप्रोपिल क्लोराइड
(द) उपरोक्त सभी
(अ) n – ब्यूटिल क्लोराइड
उत्तर:
(स) आइसोप्रोपिल क्लोराइड

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

7. प्रोपेन के संभावित डाइक्लोरो व्युत्पन्नों की संख्या है-
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच
उत्तर:
(स) चार

8. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक SN1 अभिक्रिया सुगमता से दर्शाता है ?
(अ) CH3Cl
(ब) (CH3)2CH-Cl
(स) (CH)3C-Cl
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(स) (CH)3C-Cl

9. ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया है-
(अ) इलेक्ट्रॉनस्नेही संकलन
(ब) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन
(स) इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन
(द) नाभिकस्नेही संकलन
उत्तर:
(ब) नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन

10. निम्न में से न्यूनतम क्वथनांक वाला यौगिक कौनसा है?
(अ) CH3Cl
(ब) C2H5Cl
(स) CH3-CH2-CH2-Cl
(द) C4H9Cl
उत्तर:
(अ) CH3Cl

11. ऐल्किल हैलाइडों की क्रियाशीलता का घटता क्रम है-
(अ) RI < RBr < RCI
(ब) RBr < RI < RCl
(स) RBr > RCI > RI
(द) RI > RBr > RCI
उत्तर:
(द) RI > RBr > RCI

12. मोनो हैलोऐल्केन्स की श्रेणी
(अ) CnH2n+1 X
(ब) C2nH2n+1 X
(स) CnH2n-1 X
(द) CnH2n+2 X
उत्तर:
(अ) CnH2n+1 X

13. निम्नलिखित में से किस यौगिक को प्रशीतक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है ?
(अ) CH3COCH3
(ब) CCl4
(स) CF4
(द) CCl2F2
उत्तर:
(द) CCl2F2

14. निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक एक जेम डाइहैलाइड है ?
(अ) एथिलीन डाइक्लोराइड
(ब) 2,2-डाइक्लोरोप्रोपेन
(स) 1,3 – डाइक्लोरोप्रोपेन
(द) 1,2- डाइक्लोरोप्रोपेन
उत्तर:
(ब) 2,2-डाइक्लोरोप्रोपेन

15. किसी ऐल्कोहॉल से क्लोरो ऐल्केन बनाने के लिए सबसे उपयुक्त अभिकर्मक है-
(अ) PCl3
(ब) Cl2/CCl4
(स) SOCl2
(द) HCl / ZnCl2
उत्तर:
(स) SOCl2

16. विहाइड्रोहैलोजेनीकरण के लिए आवश्यक विशिष्ट अभिकर्मक है-
(अ) जलीय KOH
(ब) ऐल्कोहॉलिक KOH
(स) जलीय NaOH
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) ऐल्कोहॉलिक KOH

17. FeCl3 की उपस्थिति में टॉलुईन की Cl2 से क्रिया द्वारा बना मुख्य उत्पाद होगा-
(अ) बेन्जिल क्लोराइड
(ब) बेन्जल क्लोराइड
(स) m-क्लोरोटॉलुईन
(द) o- तथा p-क्लोरो टॉलुईन
उत्तर:
(द) o- तथा p-क्लोरो टॉलुईन

18. नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के लिए न्यूनतम क्रियाशीलता वाला यौगिक कौनसा है ?
(अ) CH2 = CH – Cl
(ब) CH3 – CH2Cl
(स) (CH3), C – Cl
(द) CH2 = CH – CH2Cl
उत्तर:
(अ) CH2 = CH – Cl

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

19. निम्नलिखित में से किस यौगिक का क्वथनांक उच्चतम होगा?
(अ) CH3 – CH2 – CH – Cl
(ब) CH3 – CH3 – CH – CH2-Cl
(स) CH3CH(CH3)CH2Cl
(द) (CH3)3C – Cl
उत्तर:
(ब) CH3 – CH3 – CH – CH2-Cl

20. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 1, यह अभिक्रिया है-
(अ) विलोपन
(ब) संकलन
(स) प्रतिस्थापन
(द) पुनर्विन्यास
उत्तर:
(स) प्रतिस्थापन

21. शल्य चिकित्सा में निश्चेतक के रूप में प्रयुक्त हैलोजन युक्त यौगिक है-
(अ) थाइरॉक्सिन
(ब) हैलोथेन
(स) फ्रेऑन
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(ब) हैलोथेन

22. सान्द्र H2SO4 की उपस्थिति में क्लोरोबेन्जीन तथा क्लोरैल को गर्म करने से प्राप्त उत्पाद है-
(अ) BHC
(ब) C2Cl6
(स) DDT
(द) CF2Cl2
उत्तर:
(स) DDT

23. I Cl तथा Br की नाभिकस्नेहिता का बढ़ता क्रम क्या होगा ?
(अ) I < Br Cl
(ब) Br < Cl < I
(स) Cl < Br < I
(द) I < Cl < Br
उत्तर:

24. अभिक्रिया HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 2B, में यौगिक B मुख्य रूप से क्या होगा ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 3
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 4

25. यौगिक HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 5का IUPAC का नाम होगा-
(अ) 1- ब्रोमो – 3 – क्लोरो साइक्लोहेक्सीन
(ब) 3- ब्रोमो – 1 – क्लोरो साइक्लोहेक्स – 1 – ईन
(स) 2- ब्रोमो – 5-क्लोरो साइक्लोहेक्स – 1 – ईन
(द) 6- ब्रोमो – 1 – क्लोरो साइक्लोहेक्स- 1- ईन
उत्तर:
(ब) 3- ब्रोमो – 1 – क्लोरो साइक्लोहेक्स – 1 – ईन

26. अभिक्रिया CH3Br + OH → CH3OH + Br ; SN2 क्रियाविधि द्वारा सम्पादित होती है। इस अभिक्रिया की दर किसकी सान्द्रता पर निर्भर करती है?
(अ) CH3Br, OH
(ब) केवल CH3Br
(स) केवल OH
(द) CH, Br, CH3 OH
उत्तर:
(ब) केवल CH3Br

27. निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक I2 तथा NaOH के साथ पीला अवक्षेप देगा ?
(अ) ICH2COCH2CH3
(ब) CH3COOCOCH3
(स) CH3-CH2 CH(OH) CH2CH3
(द) CH3COOH
उत्तर:
(स) CH3-CH2 CH(OH) CH2CH3

28. क्लोरोबेन्जीन की अपेक्षा मेथिल क्लोराइड में C-Cl आबन्ध-
(अ) लम्बा तथा दुर्बल है
(ब) छोटा तथा दुर्बल है
(स) छोटा तथा प्रबल है
(द) लम्बा तथा प्रबल है
उत्तर:
(अ) लम्बा तथा दुर्बल है

29. यौगिक (A) C8H9Br को जब ऐल्कोहॉलिक AgNO3 के साथ गर्म करते हैं तो सफेद अवक्षेप आता है। (A) के ऑक्सीकरण पर एक अम्ल (B) C3H6O4 प्राप्त होता है। (B) गर्म करने पर आसानी से एनहाइड्राइड बनाता है तो यौगिक A है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 6
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 7

30. परॉक्साइड की अनुपस्थिति में प्रोपीन पर HBr के संयोजन में प्रथम
पद में संयोजन होता है-
(अ) H+ का
(ब) Br का
(स) H
(द) Br का
उत्तर:
(अ) H+ का

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1- क्लोरोप्रोपेन से 1 आयोडोप्रोपेन प्राप्त करने का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 8
इसे फिंकेल्स्टाइन अभिक्रिया कहते हैं। यह एक हैलोजन विनिमय अभिक्रिया है।

प्रश्न 2.
स्वास अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 9

प्रश्न 3.
अणुसूत्र C4H8Br2 से कितने जेम डाइहैलाइड संभव हैं?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 10

प्रश्न 4.
C3H6Cl2 से बनने वाले सभी यौगिकों के सूत्र लिखिये।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 11

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अभिक्रिया का उत्पाद बताइए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 12
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 13 क्योंकि HCl के संकलन में परॉक्साइड प्रभाव नहीं लगता है।

प्रश्न 6.
CH3F, CH3Cl, CH3Br तथा CH3I को द्विध्रुव आघूर्ण के बढ़ते क्रम में लिखिए।
उत्तर:
CH3I < CH3Br < CH3F < CH3 – Cl

प्रश्न 7.
विभिन्न हैलोजन अम्लों की क्रियाशीलता का अवरोही क्रम लिखिए।
उत्तर:
HI > HBr > HCl > HF

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 8.
ऐल्केनॉल से हैलोएल्केन बनाने के लिए HCl, PCl3 तथा SOCl2 में से सर्वाधिक उपयुक्त अभिकर्मक कौनसा है?
उत्तर:
SOCl2

प्रश्न 9.
मेथिल आयोडाइड से एथेनॉइक अम्ल बनाने के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 14

प्रश्न 10.
टेट्राएथिल लैड का एक उपयोग बताइए।
उत्तर:
टेट्राएथिल लैड (C2H5)4 Pb एक अपस्फोटरोधी यौगिक होता है।

प्रश्न 11.
CH3-CH2-CH2-Cl तथा (CH3)3C-Cl में से किसका विहाइड्रोहैलोजेनीकरण अधिक सुगमता से होगा तथा क्यों?
उत्तर:
(CH3)3C-Cl का विहाइड्रोहैलोजेनीकरण अधिक सुगमता से होगा क्योंकि यह एक 3° हैलोऐल्केन है जो कि अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 12.
हैलाइड आयनों की नाभिकस्नेही प्रबलता का क्रम बताइए।
उत्तर:
\(\stackrel{-}{I}\) > \(\stackrel{-}{B}\)r > \(\stackrel{-}{C}\)l > \(\stackrel{-}{F}\)

प्रश्न 13.
वुर्ट्स अभिक्रिया द्वारा किस ऐल्केन का संश्लेषण नहीं होता ?
उत्तर:
मेथेन (CH4)

प्रश्न 14.
वह कौनसा हैलोएल्केन है जिससे एक ही पद में मेथेन तथा एथेन दोनों का संश्लेषण किया जा सकता है? समीकरण भी दीजिए।
उत्तर:
CH3 – X (मेथिल हैलाइड)
समीकरण –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 15

प्रश्न 15.
शुद्ध CHCl में सिल्वर नाइट्रेट विलयन डालने पर AgCl का अवक्षेप नहीं आता, क्यों?
उत्तर:
CHCl3 एक सहसंयोजी यौगिक है अतः इसका आयनन नहीं होने के कारण विलयन में Cl उपलब्ध नहीं होंगे इसलिए यह AgNO3 विलयन के साथ कोई अवक्षेप नहीं देता।

प्रश्न 16.
हैलोऐरीन की नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के लिए क्रियाशीलता कब बढ़ती है?
उत्तर:
हैलोऐरीन में आर्थो तथा पैरा स्थिति पर इलेक्ट्रॉन आकर्षी समूह जैसे – NO2 उपस्थित होने पर इसकी नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के लिए क्रियाशीलता बढ़ जाती है।

प्रश्न 17.
फ्रेऑन- 112 का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
C2F2Cl4

प्रश्न 18.
BHC के अन्य व्यापारिक नाम तथा IUPAC नाम बताइए।
उत्तर:
BHC (बेन्जीन हेक्सा क्लोराइड) के विभिन्न व्यापारिक नाम गेमेक्सीन, गेमेन, लिन्डेन व 666 हैं तथा इसका IUPAC नाम 1, 2, 3, 4, 5, 6 हेक्साक्लोरो साइक्लोहेक्सेन है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 16

प्रश्न 19.
वेस्ट्रॉन तथा वेस्ट्रोसॉल के सूत्र बताइए तथा इनका क्या उपयोग है?
उत्तर:
CHCl2-CHCl2 (वेस्ट्रॉन) तथा HCCl = CCl2 (वेस्ट्रोसॉल) विलायक के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

प्रश्न 20.
बेन्जल क्लोराइड को जलीय NaOH के साथ उबालने पर क्या होता है?
उत्तर:
बेन्जेल्डिहाइड बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 17

प्रश्न 21.
B\(\stackrel{-}{r}\) तथा \(\stackrel{-}{I}\) में से कौनसा प्रबल नाभिकस्नेही है तथा क्यों?
उत्तर:
B\(\stackrel{-}{r}\) तथा \(\stackrel{-}{I}\) में से \(\stackrel{-}{I}\) प्रबल नाभिकस्नेही है क्योंकि \(\stackrel{-}{I}\) का आकार बड़ा है तथा इसकी विद्युतॠणता Br से कम है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
(i) पाँच कार्बन युक्त हैलोएल्केन की संरचना बताइए जिसके द्वारा प्रकाशिक समावयवता दर्शायी जाती है।
(ii) 1 – क्लोरो ब्यूटेन तथा 1 – क्लोरो – 2 – मेथिल प्रोपेन में कौनसी समावयवता होती है ?
(iii) अणु सूत्र C4H9Cl वाले स्थिति समावयवी बताइए जिनमें सीधी श्रृंखला हो।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 18

प्रश्न 2.
सैन्डमायर अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
ऐमीनो से-सैन्डमायर अभिक्रिया द्वारा- किसी एरोटिक प्राथमिक एमीन (जिसमें – NH2 समूह बेन्जीन वलय से सीधा जुड़ा होता है) की क्रिया सोडियम नाइट्राइट तथा ठण्डे जलीय खनिज अम्ल (HX) से की जाती है तो डाइएजोनियम लवण बनता है। इस डाइएजोनियम लवण की क्रिया Cu2X2 (क्युप्रस हैलाइड) से करवाने पर डाइएजोनियम समूह के स्थान पर हैलोजन आ जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 19
(i) क्लोरीनीकरण तथा ब्रोमोनीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 20
इस अभिक्रिया में CuCl2 तथा Cu2Br2 के स्थान पर Cu लेने पर इसे गाटरमान अभिक्रिया कहते हैं।

(ii) आयोडीनीकरण-आयोडोबेन्जीन बनाने के लिए डाइएजोनियम लवण की क्रिया KI सें करवायी जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 21

प्रश्न 3.
निम्नलिखित को समझाइए-
(i) टॉलुईन का इलेक्ट्रॉनस्नेही क्लोरीनीकरण (प्रतिस्थापन)
(ii) ऐल्केनों का मुक्तमूलक हैलोजेनीकरण।
उत्तर:
(i) इलेक्ट्रॉनस्नेही (इलेक्ट्रॉन रागी) प्रतिस्थापन द्वाराएरिल हैलाइडों का विरचन-जब बेन्जीन, टॉलूईन इत्यादि की क्रिया Fe या FeCl3 (लुईस अम्ल) की उपस्थित में C2 या Br2 से करवाई जाती है तो वलय के हाइड्रोजन का प्रतिस्थापन हैलोजेन द्वारा हो जाता है। यह एक इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है तथा इससे एरिल हैलाइड प्राप्त होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 22
अभिक्रिया से बने आर्थो तथा पैरा समावयवियों के गलनांकों में अधिक अंतर होने के कारण इन्हें आसानी से पृथक् किया जा सकता है।

फ्लुओरीन बहुत अधिक क्रियाशील होती है अतः इस विधि से फ्लुओरो व्युत्पन्न नहीं बना सकते तथा आयोडीन के साथ अभिक्रिया उत्क्रमणीय होने के कारण प्राप्त HI को ऑक्सीकृत करने के लिए HNO3 या HIO3 प्रयुक्त किया जाता है।

(ii) ऐल्केनों के मुक्त मूलक हैलोजेनीकरण द्वारा-सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ऐल्केनों की Cl2 या Br2 से क्रिया करवाने पर समावयवी मोनो तथा पॉली हैलोऐल्केनों का मिश्रण बनता है। अतः किसी एक यौगिक की लब्धि कम होती है तथा इस मिश्रण को पृथक् करना मुश्किल होता है।
इस अभिक्रिया के लिए हाइड्रोजन परमाणुओं के प्रतिस्थापन का क्रम निम्नलिखित है-
3°H > 2°H > 1°H
अतः प्रोपेन की क्लोरीन से क्रिया करवाने पर 2-क्लोरोप्रोपेन (2°) अधिक मात्रा में प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 23
97 %, 2-ब्रोमो प्रोपेन प्राप्त होने का कारण ब्रोमीन की वरणशीलता (Selectivity) है।
ऐल्केनों के हैलोजेनीकरण में विभिन्न हैलोजनों की क्रियाशीलता निम्न क्रम में होती है-
F2 > Cl2 > Br2 > I2
फ्लुओरीनीकरण विस्फोटक होता है जबकि आयोड़ीनीकरण बहुत धीमी गति से होता है अतः यह एक उत्क्रमणीय अभिक्रिया है। इसलिए इसे आयोडिक अम्ल (HIO3) की उपस्थिति में करवाया जाता है। जो कि अभिक्रिया से प्राप्त HI (अपचायक) से क्रिया करके I2 तथा H2O बना देता है ताकि यह पुनः R-I से क्रिया करके ऐल्केन न बना सके तथा प्राप्त I2 पुनः अभिक्रिया को अग्र दिशा में ले जाने में सहायक होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 24

प्रश्न 4.
ऐल्कीनों पर HX तथा हैलोजेन के योग की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(i) ऐल्कीनों पर हाइड्रोजन अम्ल (HX) के संकलन (संयोजन) से-ऐल्कीनों पर HX के संकलन से हैलोऐल्केन बनते हैं। असममित ऐल्कीनों पर HX के संकलन में प्राप्त उत्पाद मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होता है तथा परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का संकलन परॅक्साइड प्रभाव के अनुसार होता है।

इस अभिक्रिया के लिए विभिन्न हाइड्रोजन हैलाइडों की क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 25
मार्कोनीकॉफ का नियम-जब किसी असममित ऐल्कीन पर HX का योग होता है तो ऋणात्मक भाग (\(\overline{\mathbf{X}}\)) उस असंतृप्त कार्बन पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।

यह एक इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया है।

अभिक्रिया की क्रियाविधि-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 26
परॉक्साइड प्रभाव या खराश प्रभाव-जब किसी असममित ऐल्कीन पर परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का योग होता है तो ब्रोमीन परमाणु उस असंतृप्त कार्बन पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 27

(ii) ऐल्कीनों पर हैलोजन के संकलन से-ऐल्कीन पर हैलोजन की क्रिया से विसिनल डाइहैलाइड बनते हैं। ब्रोमीन के कार्बन टेट्रा क्लोराइड में विलयन की क्रिया एल्कीन से करवाने पर ब्रोमीन के विलयन का लाल रंग गायब हो जाता है। यह किसी यौगिक में द्विआबंध तथा त्रिआबन्ध की पहचान करने की एक महत्त्वपूर्ण विधि है। इसमें बना विसिनल डाइब्रोमाइड रंगहीन होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 28

प्रश्न 5.
मार्कोनीकॉफ के नियम तथा परॉक्साइड प्रभाव की व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए ।
उत्तर:
(i) ऐल्कीनों पर हाइड्रोजन अम्ल (HX) के संकलन (संयोजन) से-ऐल्कीनों पर HX के संकलन से हैलोऐल्केन बनते हैं। असममित ऐल्कीनों पर HX के संकलन में प्राप्त उत्पाद मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होता है तथा परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का संकलन परॅक्साइड प्रभाव के अनुसार होता है।

इस अभिक्रिया के लिए विभिन्न हाइड्रोजन हैलाइडों की क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 25
मार्कोनीकॉफ का नियम-जब किसी असममित ऐल्कीन पर HX का योग होता है तो ऋणात्मक भाग (\(\overline{\mathbf{X}}\)) उस असंतृप्त कार्बन पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।

यह एक इलेक्ट्रॉनस्नेही योगात्मक अभिक्रिया है।

अभिक्रिया की क्रियाविधि-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 26
परॉक्साइड प्रभाव या खराश प्रभाव-जब किसी असममित ऐल्कीन पर परॉक्साइड की उपस्थिति में HBr का योग होता है तो ब्रोमीन परमाणु उस असंतृप्त कार्बन पर जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 27

प्रश्न 6.
प्रोपेन के मोनोक्लोरीनीकरण तथा मोनोब्रोमीनीकरण के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 29

प्रश्न 7.
प्रोपीन पर HCI के योग की क्रियाविधि बताइए।
उत्तर:
अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 30
यह अभिक्रिया दो पदों में होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 31

प्रश्न 8.
निम्नलिखित के समीकरण लिखिए-
(i) C2H5NH2 से C2H5Cl बनाना
(ii) CH3CH2COOAg से CH3
उत्तर:
(i) C2H5NH2 + NOCl → C2H5Cl + N2 + H2O
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 32

प्रश्न 9.
निम्नलिखित परिवर्तनों के समीकरण लिखिए-
(i) C2H5I से CH3-CH2COOH
(ii) CH3Cl से CH3CONH2
(iii) CH3-CH2-Cl से CH3-CH2-CH2-NH2
(iv) CH3Cl से CH3CHO
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 33

प्रश्न 10.
निम्नलिखित समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 34
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 35

प्रश्न 11.
स्ट्रेकर अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
ऐल्किल सल्फोनेट का संश्लेषण (स्ट्रेकर अभिक्रिया)हैलोऐल्केन की क्रिया सोडियम सल्फाइट के साथ करवाने पर सोडियम ऐल्किल सल्फोनेट प्राप्त होता है। इसे स्ट्रेकर अभिक्रिया कहते हैं।

इस अभिक्रिया को अपमार्जकों के संश्लेषण में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 12.
(i) CH3I की KNO2 तथा AgNO2 से अभिक्रिया के समीकरण लिखिए।
(ii) बेन्जीन से टॉलुईन बनाने की फ्रीडेल क्राफ्ट अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 37
(ii) फ्रिडेल क्राफ्ट अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 38

प्रश्न 13.
SN1 तथा SN2 अभिक्रियाओं में अन्तर बताइए।
उत्तर:
SN1 तथा SN2 अभिक्रियाओं में अन्तर
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 39

प्रश्न 14.
सममिति तत्त्व कितने होते हैं? परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
आण्विक असममितता, किरैलता तथा प्रतिबिम्ब रूप (Molecular Asymmetry, Chirality and Enantiomers) लुइस पाश्चर (1848) के अनुसार कुछ यौगिकों के क्रिस्टल दर्पण प्रतिबिम्ब रूपों (d तथा l) में पाए जाते हैं तथा इन दोनों क्रिस्टलीय रूपों के समान सान्द्रता के जलीय विलयन, समान मात्रा (परिमाण) में लेकिन विपरीत दिशा में ध्रुवण घूर्णन दर्शाते हैं। घूर्णन में यह अन्तर इन यौगिकों में परमाणुओं तथा समूहों की त्रिविमीय व्यवस्था (विन्यास) में भिन्नता के कारण होता है।

असममित (किरेल) कार्बन परमाणु अथवा त्रिविम केन्द्र [Asymmetric (Chiral) Carbonatom or Stereo Centre]ले बेल तथा वान्ट हॉफ के अनुसार किसी कार्बनिक यौगिक में केन्द्रीय कार्बन परमाणु के चारों ओर परमाणुओं या समूहों की व्यवस्था चतुष्फलकीय (Tetrahedral ) होती है। जब किसी यौगिक में किसी कार्बन परमाणु से जुड़े सभी चार परमाणु तथा समूह भिन्न-भिन्न होते हैं तो ऐसे कार्बन को असममित (किरेल) कार्बन या त्रिविम केन्द्र कहते हैं, इस प्रकार के अणु को असममित (किरेल) अणु कहते हैं। वे अणु जो असममित होते हैं अर्थात् जिनमें असममित कार्बन परमाणु उपस्थित होता है वे प्रकाशिक समावयवता ( धुवण समावयवता) दर्शाते हैं। इन यौगिकों में कोई सममिति तत्त्व नहीं होता है।

सममिति तत्त्व मुख्यतः तीन होते हैं-सममिति तल, सममिति अक्ष तथा सममिति केन्द्र।

सममिति तल-किसी वस्तु या यौगिक का वह तल जो उसे दो समान भागों में विभाजित कर देता है, उसे सममिति तल कहते हैं। ये दोनों भाग एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब होते हैं, जो कि एक-दूसरे पर अध्यारोपित नहीं होते। जैसे अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर A में ऊर्ध्व्वाधर सममिति तल तथा B में क्षैतिज सममिति तल होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 40
सममिति अक्ष – किसी वस्तु या यौगिक का वह अक्ष जिस पर उसे घुमाने पर वही रूप प्राप्त हो जो उसके मूल रूप पर अध्यारोपित हो जाता है उसे सममिति अक्ष कहते हैं।

सममिति केन्द्र-किसी वस्तु का वह काल्पनिकःबिन्दु जिस पर से एक सरल रेखा खींचने पर, उस बिन्दु के दोनों और स्थित समूह समान दूरी पर पाए जाते हैं उसे सममिति केन्द्र कहते हैं।

किरेल तथा किरेलता-वे वस्तुएँ या यौगिक जो अपने दर्पण प्रतिबिम्ब पर अध्यारोपित नहीं होते उन्हें किरेल कहते हैं तथा इस गुण को किरेलता कहते हैं तथा वे वस्तुएँ जो अपने दर्पण प्रतिबिम्ब पर अध्यारोपित हो जाती हैं, उन्हें अकिरेल कहते हैं।

उदाहरण-अपने दोनों हाथ व पैर किरेल तथा गोले एवं चित्र में दिखाए गए शंकु अकिरेल होते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 41

प्रश्न 15.
(i) CH3-I, Mg तथा शुष्क ईथर के प्रयोग से एथेन किस प्रकार बनाया जा सकता है?
(ii) CH3COOH से प्रारम्भ करके एथिल एथेनॉएट बनाने में प्रयुक्त समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 41a

प्रश्न 16.
हैलोएल्केन से फ्रैंकलैण्ड अभिकर्मक तथा टेट्रामेथिल लैड बनाने के लिए आवश्यक समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 41b

प्रश्न 17.
हैलोऐल्केन के अपचयन से ऐल्केन कितने प्रकार से बनाया जा सकता है? समीकरण सहित समझाइए |
उत्तर:
(i) अपचायकों द्वारा – ऐल्किल हैलाइडों का अपचयन विभिन्न अपचायकों द्वारा किया जा सकता है तथा इससे ऐल्केन प्राप्त होते हैं। ये अपचायक Na + C2H5OH, Zn + HCl तथा ZnCu युग्म +C2H5OH हो सकते हैं।
R – X + 2H → RH + HX
C2H3Br + 2H → C2H6 + HBr

(ii) उत्प्रेरकी हाइड्रोजनीकरण – धातु उत्प्रेरक की उपस्थिति में R – X की क्रिया हाइड्रोजन से करवाने पर भी ऐल्केन बनते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 42

(iii) लीथियम ऐलुमीनियम हाइड्राइड (LiAIH4) या सोडियम बोरो हाइड्राइड (NaBH4) द्वारा अपचयन – RX का अपचयन LiAlH4 या NaBH4 से करवाने पर भी एल्केन प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया हाइड्राइड आयन (H) प्रयुक्त होता है, अतः यह एक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है।
4R – X + LiAlH4 → 4RH + LiAlX4

(iv) हाइड्रोजन आयोडाइड द्वारा अपचयन – लाल- फॉस्फोरस की उपस्थिति में ऐल्किल हैलाइडों का अपचयन, HI से कराने पर भी ऐल्केन प्राप्त होते हैं। इसे बर्थेलो विधि कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 43

प्रश्न 18.
हैलोऐल्केनों की मुख्य अभिक्रिया नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन होती है जबकि हैलोऐरीनों की मुख्य अभिक्रिया इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन, क्यों?
उत्तर:
हैलोऐल्केनों में कार्बन हैलोजन बन्ध ध्रुवीय होता है HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 44अतः इनके कार्बन पर नाभिकस्नेही का आक्रमण होकर, हैलोजन का प्रतिस्थापन हो जाता है, अतः ये मुख्यतः नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया दर्शाते हैं।
\(\mathrm{R}-\stackrel{+\delta}{\mathrm{CH}_2}-\stackrel{-\delta}{\mathrm{X}}+\mathrm{N} \overline{\mathrm{u}} \longrightarrow \mathrm{R}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Nu}+\overline{\mathrm{X}}\)
हैलोऐरीनों में उपस्थित बेन्जीन वलय के ऐरोमैटिक षट्क ( 6 इलेक्ट्रॉन) के कारण इसमें इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है। अतः वलय पर इलेक्ट्रॉनस्नेही का आक्रमण सुगमता से हो जाता है इसलिए ये मुख्यतः इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया दर्शाते हैं।

प्रश्न 19.
एक अणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN1) के लिए बेंजिल हैलाइड की क्रियाशीलता, हैलोबेन्जीन की तुलना में अधिक होती है। इसका उचित कारण दीजिए।
उत्तर:
SN1 अभिक्रिया में कार्बोकैटायन मध्यवर्ती बनता है। बेन्जिल हैलाइड के C-X बन्ध के वियोजन से प्राप्त बेन्जिल कार्बोकैटायन \(\left(\mathrm{C}_6 \mathrm{H}_5 \stackrel{+}{\mathrm{C}} \mathrm{H}_2\right)\) अनुनाद के कारण स्थायी हो जाता है अतः इसका बनना सुग होता है। इसके विपरीत हैलोबेन्जीन में हैलोजन के + M प्रभाव के कारण कार्बन हैलोजन बन्ध में द्विबन्ध के गुण आ जाते हैं, अतः बन्ध का टूटना मुश्किल होता है तथा C – X बन्ध के वियोजन से प्राप्त \(\stackrel{+}{\mathrm{C}}_6 \mathrm{H}_5\) (फेनिल कार्बधनायन) में अनुनाद नहीं होने के कारण यह अस्थायी होता है अतः इसके बनने की संभावना कम होती है। इसी कारण SN1 अभिक्रिया के लिए बेंजिल हैलाइड की क्रियाशीलता हैलोबेन्जीन की तुलना में अधिक होती है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 20.
क्लोरोबेन्जीन में कार्बन क्लोरीन (C-Cl) आबन्ध लम्बाई, C2H5Cl में C-Cl आबन्ध लम्बाई की अपेक्षा कम होती है, क्यों?
उत्तर:
क्लोरोबेन्जीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 45 में क्लोरीन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म, बेन्जीन वलय के इलेक्ट्रॉनों के साथ संयुग्मन में होते हैं अतः इसमें वलय की तरफ अनुनाद ( + M प्रभाव) होता है जिसके कारण C-CI बन्ध बन्ध के गुण आ जाते हैं। इसलिए C-Cl बन्ध लम्बाई कम हो जाती है जबकि C2H5Cl में कोई अनुनाद नहीं होता अतः इसमें C-Cl बन्ध लम्बाई अधिक होती है।

प्रश्न 21.
हुसडीकर अभिक्रिया ऐल्किल आयोडाइड बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है, क्यों ?
उत्तर:
हुन्सडीकर अभिक्रिया में जब RCOOAg की I2 के साथ क्रिया की जाती है तो ऐल्किल आयोडाइड के स्थान पर एस्टर मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है। अतः यह अभिक्रिया ऐल्किल आयोडाइड बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है।
2RCOOAg + I2 → RCOOR + CO, + 2AgI

प्रश्न 22.
क्लोरोफॉर्म को रंगीन बोतल में अंधेरे में रखा जाता है। क्यों ?
उत्तर:
क्लोरोफॉर्म प्रकाश की उपस्थिति में वायु में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके विषैली गैस फॉस्जीन बनाता है अतः इसे रंगीन बोतल में अंधेरे में रखा जाता है ताकि इसका ऑक्सीकरण न हो।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 46

प्रश्न 23.
निम्नलिखित यौगिकों की नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया के प्रति क्रियाशीलता का क्रम कारण सहित बताइए –
CH3F, CH3Cl, CH3Br तथा CH3 – I
उत्तर:
CH3F < CH3Cl < CH3Br < CH3 – I
कार्बन हैलोजन बन्ध ऊर्जा का क्रम निम्न प्रकार होता है-
CF > C – Cl > C Br> C – I क्योंकि बन्ध ऊर्जा परमाणु आकार के व्युत्क्रमानुपाती होती है अतः बन्ध ऊर्जा कम होने पर बन्ध का वियोजन आसानी से होगा तथा अभिक्रिया का वेग अधिक होगा। इसी कारण CH,F की क्रियाशीलता न्यूनतम तथा CH3 – I की क्रियाशीलता अधिकतम है।

प्रश्न 24.
(i) निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए-
CH2 = CH – CH2 – Br HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 47
(ii) आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड से n – प्रोपिल ब्रोमाइड किस प्रकार बनाया जाता है ?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 48

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित अभिक्रिया समीकरणों को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 49
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 50

प्रश्न 2.
निम्नलिखित युग्मों में से कौनसा एक SN1 प्रतिस्थापन अभिक्रिया अधिक तीव्रता से करता है और क्यों?
अथवा
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 51
अथवा
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 52
उत्तर:
(i) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 53क्योंकि तृतीयक कार्बोकैटायन का स्थायित्व अधिक होने के कारण तृतीयक ऐल्किल हैलाइड की अभिक्रियाशीलता SN1 अभिक्रिया के लिए द्वितीयक ऐल्किल हैलाइड से अधिक होती है।
(ii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 54, क्योंकि प्राथमिक कार्बोकैटायन की तुलना में द्वितीयक कार्बोकैटायन का स्थायित्व अधिक होने के कारण इसमें SN1 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से होगी।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 55

प्रश्न 3.
निम्न यौगिक का आई.यू.पी.ए.सी. (IUPAC) पद्धति अनुसार नाम दीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 56
उत्तर:
4-ब्रोमो-3-मेथिल-पेन्ट-2-ईन

प्रश्न 4.
प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं की SN1 और SN2 क्रियाविधियों के बीच आप कैसे अंतर करेंगे? प्रत्येक प्रकार का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 57
उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 57a

प्रश्न 5.
निम्नलिखित यौगिक का आई.यू.पी.ए.सी. (IUPAC) नाम लिखिए-
CH2 = CHCH2Br
उत्तर:
3-ब्रोमो प्रोप-1-ईन।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रत्येक समूह के यौगिकों को उनके SN2 विस्थापन की सक्रियता के क्रम में लिखिए-
(i) 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमोपेन्टेन, 2-ब्रोमोपेन्टेन
(ii ) 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो3-मेथिलब्यूटेन
(iii) 1-ब्रोमोब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2, 2-डाइमेथिलप्रोपेन, 1-ब्रोमो-2मेथिलब्यूटेन
उत्तर:
विभिन्न ऐल्किल हैलाइडों में SN² अभिक्रिया के लिए क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होता है- \(\stackrel{\circ}{1}>\stackrel{\circ}{2}>\stackrel{\circ}{3}\) तथा जब ऐल्किल हैलाइड समान प्रकार के होते हैं तो वह ऐल्किल हैलाइड जिसमें हैलोजनयुक्त कार्बन पर बड़ा समूह जुड़ा होता है तो वह त्रिविम विन्यासी बाधा उत्पन्न करता है जिससे उसकी क्रियाशीलता कम हो जाती है। क्योंकि स्थूल (बड़ा) समूह आक्रमणकारी नाभिकरागी के लिए अवरोध उत्पन्न करता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 58

प्रश्न 7.
जब CH2 = CH – CH2 – C ≡ CH पर ब्रोमीन की क्रिया होती है, तो क्या होता है?
उत्तर:
निम्न अभिक्रिया होती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 59
इसका कारण यह है कि त्रिआबन्ध की तुलना में द्विआबन्ध अधिक क्रियाशील होता है।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) किसी यौगिक की किरेलिटी का क्या अर्थ है? एक उदाहरण दीजिए।
(ii) निम्नलिखित यौगिकों में से कौनसा KOH द्वारा अधिक सरलता से जल-अपघटित होता है और क्यों ?
CH3CHClCH2CH3 अथवा CH3CH2CH2Cl
(iii) इनमें कौन SN² प्रतिस्थापन अभिक्रिया अधिक तेजी से करता है और क्यों ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 60
उत्तर:
(i) वे वस्तुएँ या यौगिक जो अपने दर्पण प्रतिबिम्ब पर अध्यारोपित नहीं होते हैं उन्हें किरेल कहते हैं तथा इस गुण को किरेलता (किरेलिटी) कहते हैं। उदाहरण- लैक्टिक अम्ल |

(ii) CH3 – CHClCH2CH3 का KOH द्वारा अधिक सरलता से जल अपघटन होगा क्योंकि यह एक \(\stackrel{\circ}{2}\) ऐल्किल हैलाइड है तथा \(\stackrel{\circ}{2}\)– ऐल्किल हैलाइड की क्रियाशीलता \(\stackrel{\circ}{1}\) ऐल्किल हैलाइड से अधिक होती है तथा दूसरा ऐल्किल हैलाइड \(\stackrel{\circ}{1}\) है।

(iii) उपरोक्त में से HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 61 में SN2 अभिक्रिया अधिक तेजी से होगी क्योंकि क्लोरीन की तुलना में आयोडीन का आकार बड़ा होने के कारण C – I बन्ध सुगमता से टूट जाता है।

प्रश्न 9.
ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति ऐल्किल हैलाइड से कम क्रियाशील होते हैं, कारण समझाइए।
अथवा
एथिल क्लोराइड KCN से क्रिया करके मुख्य उत्पाद एथिल सायनाइड बनाता है जबकि AgCN से क्रिया करके एथिल आइसोसायनाइड बनाता है, समझाइए।
उत्तर:
नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Nucleophilic Substitution Reaction )-नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया के लिए ऐरिल हैलाइड की क्रियाशीलता ऐल्किल हैलाइड, ऐलिलिक हैलाइड तथा बेन्जिलिक हैलाइड की तुलना में कम होती है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-
(i) कार्बन हैलोजन आबंध (C-X) में कार्बन परमाणु के संकरण में भिन्नता-हैलोऐल्केन में हैलोजन से जुड़ा कार्बन परमाणु sp³ संकरित होता है जबकि हैलोऐरीन में इस कार्बन परमाणु पर sp² संकरण होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 62
संकरण में s लक्षण बढ़ने पर कार्बन की विद्युत-ऋणता बढ़ती है अतः sp³ संकरित कार्बन की तुलना में sp² संकरित कार्बन अधिक विद्युतत्रणी होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 63
अतः हैलोऐरीन का कार्बन, बन्ध के इलेक्ट्रॉन युग्म को अधिक आकर्षित करता है। अतः इसकी बन्ध लम्बाई कम हो जाती है तथा बन्ध की प्रबलता बढ़ जाती है जिससे बन्ध का टूटना मुश्किल हो जाता है।

(ii) मेसोमरी प्रभाव (अनुनाद प्रभाव)-हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्जीन वलय के π इलेक्ट्रॉनों के साथ संयुग्मन (Conjugation) में होते हैं अतः इसमें अनुनाद होता है। (+ M प्रभाव) क्लोरोबेन्जीन की अनुनादी संरचनाएँ निम्नलिखित हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 64
+ M प्रभाव के कारण कार्बन हैलोजन बन्ध में द्विबंध के लक्षण आ जाते हैं जिसके कारण इस बन्ध की प्रबलता बढ़ जाती है, अतः हैलोएरीन में हैलोएल्केन की अपेक्षा यह बन्ध मुश्किल से टूटता है। इसलिए ये नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के लिए कम क्रियाशील होते हैं।

(iii) फेनिल धनायन का कम स्थायित्व-हैलोऐरीनो के स्वतः आयनन से बना फेनिल कार्ब धनायन स्थायी नहीं हो पाता क्योंकि इसमें अनुनाद नहीं होता है। अतः इसमें SN1 क्रियाविधि की संभावना नहीं होती।

(iv) प्रतिकर्षण-इलेक्ट्रॉनधनी नाभिकस्नेही की इलेक्ट्रॉनधनी ऐरीन वलय की ओर जाने की संभावना कम होती है, क्योंकि इनमें प्रतिकर्षण होता है। अतः ऐरिल हैलाइडों की नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ विशेष परिस्थितियों में उच्च ताप पर ही हो सकती हैं।
अथवा
KCN आयनिक होता है अतः यह विलयन में सायनाइड आयन देता है। यद्यपि कार्बन तथा नाइट्रोजन दोनों ही परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकते हैं परन्तु आक्रमण मुख्यतः कार्बन परमाणु के द्वारा होता है, न कि नाइट्रोजन परमाणु के द्वारा, क्योंक C-C आबंध C-N आबंध की तुलना में अधिक स्थायी होता है। अतः मुख्य उत्पाद सायनाइड बनतां है। जबकि $\mathrm{AgCN}$ सहसंयोजक होता है तथा इसका नाइट्रेजन परमाणु इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकता है अतः इससे आइसोसायनाइड मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।

प्रश्न 10.
क्या होता है जब (केवल समीकरण दीजिए) –
(i) क्लोरोबेन्जीन की क्रिया नाइट्रीकारी मिश्रण से कराई जाती है।
(ii) एथिल ब्रोमाइड मैग्नीशियम से क्रिया करता है।
(iii) क्लोरोफॉर्म की प्रकाश की उपस्थिति में O2 से क्रिया होती है।
(iv) ऐरिल हैलाइड सोडियम से क्रिया करता है।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 65

प्रश्न 11.
निम्नलिखित प्रत्येक युग्मों में से कौन-सा यौगिक जलीय KOH के साथ SN1 अभिक्रिया में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा? कारण दीजिए-
(अ) CH3 – CH2 – Br अथवा CH3 – CH2 – Cl
(ब) CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – X अथवा (CH3)3 C X
अथवा
निम्नलिखित अभिक्रियाओं की क्रियाविधि लिखिए-
(अ) CH3 – Cl + जलीय KOH → CH3 – OH + KCl
(ब) (CH3)3 CCl + जलीय KOH → (CH2), COH+KCI
उत्तर:
(अ) CH3 – CH2 – Br तथा CH3 – CH2 – Cl में से CH3 – CH2 – Br, जलीय KOH के साथ SN1 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से देगा क्योंकि C – Br बन्ध C- Cl बन्ध की तुलना में अधिक दुर्बल है क्योंकि Br का आकार C] से बड़ा है। अतः यह आसानी से टूटकर कार्बोकटायन बना देता है।

(ब) CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – X तथा (CH3)3 C – X में से (CH3)3C – X जलीय KOH के साथ SN1 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से देगा क्योंकि यह एक \(\stackrel{\circ}{3}\) ऐल्किल हैलाइड है जिसमें बना कार्बोकटायन अधिक स्थायी होता है।
अथवा
(अ) अभिक्रिया CH3 – Cl + जलीय KOH → CH3OH + KCl
क्रियाविधि – SN2 (द्वितीय कोटि अभिक्रिया)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 66
यह एक पदीय अभिक्रिया है तथा इसमें संक्रमण अवस्था मानी जाती है।

(ब) अभिक्रिया (CH3)3 C – Cl + जलीय KOH (CH3)3 C – OH + KCl
क्रियाविधि – SN1 (प्रथम कोटि अभिक्रिया)
यह दो पदीय अभिक्रिया है तथा इसमें कार्बोकैटायन मध्यवर्ती बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 67

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(अ) फिटिग अभिक्रिया
(ब) फिंकेल्स्टाइन अभिक्रिया।
उत्तर:
(अ) फिटिंग अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 68

(ब) फिंकेल्स्टाइन अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 69

प्रश्न 13.
बेन्जिलिक क्लोराइड तथा वाइनिलिक क्लोराइड के संरचना सूत्र लिखिए। इन यौगिकों में क्लोरीन परमाणुओं से जुड़े कार्बन परमाणुओं की संकरण अवस्थाएँ भी लिखिए।
उत्तर:
(i) बेन्जिलिक क्लोराइड HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 70
इसमें क्लोरीन परमाणु से जुड़े कार्बन पर sp संकरण है क्योंकि इस पर चार σ आबन्ध हैं।

(ii) वाइनिलिक क्लोराइड HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 71
इसमें क्लोरीन परमाणु से जुड़े कार्बन पर sp³ संकरण है क्योंकि इस पर चार σ आबन्ध है।

प्रश्न 14.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(अ) वुर्ज अभिक्रिया
(ब) वुर्ज-फिटिग अभिक्रिया।
उत्तर:
(अ) वुर्ज अभिक्रिया- शुष्क ईथर
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 72

(ब) वुर्ज-फिटिग अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 73

प्रश्न 15.
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 74
उत्तर:
(i) 2- क्लोरो-3, 3- डाइमेथिलब्यूटेन
(ii) 1,4-डाइक्लोरो-2- मेथिल बेन्जीन

प्रश्न 16.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के मुख्य उत्पादों की संरचना लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 75
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 76

प्रश्न 17.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों का अनुमान लगाइए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 77
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 78

प्रश्न 18.
द्वि-अणुक नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN2) तथा एकाण्विक नाभिकरागी प्रतिस्थापन (SN1) अभिक्रिया की क्रियाविधियों में कोई दो अन्तर बताइए।
उत्तर:
द्वि- अणुक नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN2) तथा एकाण्विक नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN1) की क्रियाविधियों में निम्न अंतर हैं-

  • SN2 अभिक्रिया एक पद में होती है जबकि SN1 अभिक्रिया दो पदों में होती है।
  • SN2 अभिक्रिया में काल्पनिक संक्रमण अवस्था मानी जाती है जबकि SN1 अभिक्रिया में कार्बोकैटायन मध्यवर्ती बनता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन

प्रश्न 19.
अधोलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कर इसकी क्रियाविधि समझाइए –
(CH3)3 CBr + ŌH (जलीय ) →
उत्तर:
(CH3)3 CBr + ŌH (जलीय ) → (CH3)3COH + Br यह एकअणुक नाभिक स्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN1) है जिसकी क्रियाविधि निम्न प्रकार है – यह अभिक्रिया दो पदों में होती है-

प्रथम पद में C-Br बन्ध का विखण्डन होकर कार्बोकैटायन (कार्बोनियम आयन) या कार्ब – धनायन बनता है। द्वितीय पद में इस पर नाभिकस्नेही (ŌH) आक्रमण करके प्रतिस्थापन उत्पाद देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 79
प्रथम पद में C-Br बन्ध के विखण्डन के लिए आवश्यक ऊर्जा, विलायक से प्राप्त प्रोटोन द्वारा, हैलाइड आयन के विलायकन से प्राप्त होती है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 80
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 81

प्रश्न 21.
निम्नलिखित युग्म में से कौन SN2 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से करेगा :
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 82
उत्तर:
उपर्युक्त युग्म में से C6H5 CH2 CH2 – Br, SN2 अभिक्रिया अधिक तीव्रता से करेगा।

प्रश्न 22.
आप निम्नलिखित का रूपान्तरण कैसे करेंगे:
(i) प्रोप- 1- ईन को प्रोपेन 2- ऑल में
(ii) ब्रोमोबेन्जीन को 2 – ब्रोमोऐसीटोफीनोन में
(iii) 2- ब्रोमोब्यूटेन को ब्यूट – 2 – ईन में।
अथवा
क्या होता है जब
(i) एथिल क्लोराइड को NaI के साथ ऐसीटोन की उपस्थिति में उपचारित किया जाता है,
(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में क्लोरोबेन्जीन को Na धातु के साथ उपचारित किया जाता है,
(iii) मेथिल क्लोराइड को KNO2 के साथ उपचारित किया जाता है ?
अपने उत्तर के पक्ष में रासायनिक समीकरणों को लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रोप- 1 – ईन का प्रोपेन-2-ऑल में रूपान्तरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 83

(ii) ब्रोमोबेन्जीन का 2- ब्रोमोऐसीटोफीनोन में रूपान्तरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 84

(iii) 2- ब्रोमोब्यूटेन का ब्यूट-2 ईन में रूपान्तरण
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 85
अथवा
(i) एथिल क्लोराइड को ऐसीटोन की उपस्थिति में Nal के साथ उपचारित करने पर हैलोजन का विनिमय होकर एथिल आयोडाइड प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 86

(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में क्लोरोबेन्जीन को Na धातु के साथ उपचारित करने पर बाइफेनिल बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 87

(iii) मेथिल क्लोराइड को KNO2 के साथ उपचारित करने पर मेथिल नाइट्राइट बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन 88

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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. जैव प्रोद्योगिकी का उपयोग निम्न में से किस में हो रहा है?
(अ) चिकित्सा शास्त्र में
(ब) निदान सूचक में
(स) जैब सुधार में
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

2. ऐसे पौधे, जीवाणु, कवक व जन्तु जिनके जीस हस्तकौशल द्वारा परिवर्तित किए जा चुके हैं, कहलाते हैं-
(अ) आनुवंशिकतः रूपान्तरित जीव
(ब) कीटनाशक
(स) मिल्वाडेगाइन इनकोगनीशिया
(द) रुपेटवाएड संधिशोथ
उत्तर:
(अ) आनुवंशिकतः रूपान्तरित जीव

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

3. क्राइ 1 एबी निम्न में से किसे नियंत्रित करता है?
(अ) कपास छेदक
(ब) सुनहरा चावल छेदक
(स) मक्षा छेदक
(द) तम्बाकू छेदक
उत्तर:
(स) मक्षा छेदक

4. बच्चों में एडीए की कमी का उपचार किसके प्रत्यारोपण से होता है-
(अ) वृक्क
(ब) यकृत
(स) फुफ्फुस
(द) अस्थिमज्जा
उत्तर:
(द) अस्थिमज्जा

5. निम्न में से पारजीवी जन्तु है-
(अ) चूहे
(ब) खरगोश
(स) सूअर
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

6. कम्प्यूटर की तर्ज पर निम्न में से किस तकनीक का विकास हुआ है-
(अ) जीन चिकित्सा
(ब) जीन चिप
(स) DNA अंगुली छापन
(द) हाइब्रिडोमा तकनीक
उत्तर:
(ब) जीन चिप

7. आनुवंशिक रोग में रोगकारी जीन को पहचान कर उसको स्वस्थ जीन द्वारा विस्थापित करने को कहते हैं-
(अ) जीन स्थानान्तरण
(ब) जीन रूपान्तरण
(स) जीन हेर-फेर
(द) जीन थेरेपी
उत्तर:.
(द) उपरोक्त सभी

8. ह्यूमिलिन है-
(अ) एंजाइम
(ब) प्रतिजैविक
(स) इन्सुलिन
(द) वृद्धि हार्मोन
उत्तर:
(स) इन्सुलिन

9. जीन में हेर-फेर से तात्पर्य है-
(अ) आनुवंशिक पदार्थ को जोड़ना
(ब) आनुवंशिक पदार्थ को हटाना
(स) आनुवंशिक पदार्थ को ठीक करना
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

10. ट्रांसजैनिक पौधे विकसित किए जाते हैं-
(अ) जीन स्थानान्तरण द्वारा
(ब) रूपान्तरण द्वारा
(स) कलम द्वारा
(द) मुकुलन द्वारा
उत्तर:
(अ) जीन स्थानान्तरण द्वारा

11. बी टी विष (Bt Toxin) में होता है-
(अ) एन्जाइम
(ब) एल्केलाइड
(स) लिपिड
(द) क्राइ प्रोटीन
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

12. बी टी (Bt) जीन युक्त कपास को कहा जाता है-
(अ) किलर कॉटन
(ब) इजिपियन कॉटन
(स) रोमिल कॉटन
(द) देशी कॉटन
उत्तर:
(अ) किलर कॉटन

13. सबसे अधिक ट्रांसजेनिक पादप कहाँ निर्मित हो रहे हैं?
(अ) न्यूजीलैण्ड
(ब) इंग्लैण्ड
(स) स्कॉटलैण्ड
(द) फिनलैण्ड
उत्तर:
(अ) न्यूजीलैण्ड

14. कौनसा जीव प्राकृतिक आनुवंशिक इंजीनियर के नाम से जाना जाता है?
(अ) सूडोमोनास
(ब) एग्रोबेक्टिसिम ह्यूमिफेसिएन्स
(स) ई.कोलाई
(द) एजोटे बेक्टर
उत्तर:
(ब) एग्रोबेक्टिसिम ह्यूमिफेसिएन्स

15. खनिज तेलों के विघटक के रूप में जैव प्रौद्योगिकीय उपयोगिता का उदाहरण है-
(अ) बायोसेन्सर
(ब) बायोचिप
(स) बायोफिल्म
(द) सुपर बग
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

16. कीटों के लिए प्रतिरोधी जीन निम्न में से किसमें पाया जाता है?
(अ) बैसीलस थूरिजिन्जएन्सिस
(ब) बैसीलस सबटिलिस
(स) बैसीलस एन्थ्रेसिस
(द) सूडोमोनास पूटिडा
उत्तर:
(अ) बैसीलस थूरिजिन्जएन्सिस

17. निम्न में से किसका जीनोम इन्टरनेट पर जारी हो चुका है?
(अ) गोल्डन राइस
(ब) एरेकिस हाइपोजिया
(स) सोलेनम ट्यूबरोसम
(द) एलियम सिपा
उत्तर:
(अ) गोल्डन राइस

18. बैसिल थूरीनजिएंसीस से निर्मित प्रोटीन कौनसे विशिष्ट कीटों को मारने में सहायक है-
(अ) लीथोडोप्टेशन
(ब) कोलियोप्टेरान
(स) डीप्टेशन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

19. आनुर्वंशिक रोग के समय पैदा हुए व्यक्ति का किस विधि से उपचार सम्भव है?
(अ) जीन चिप
(ब) जीन चिकित्सा
(स) आणविक निदान
(द) बायोसेन्सर
उत्तर:
(ब) जीन चिकित्सा

20. मानव प्रोटीन (अल्फा-1 एंट्रीट्रिप्सीन) का उपयोग किसके निदान में होता है-
(अ) सिस्टिक फाइब्रोसिस
(ब) कैंसर
(स) इंफासीमा
(द) एड्स
उत्तर:
(स) इंफासीमा

21. मानव में बौनेपन के उपचार हेतु किस वृद्धि हॉर्मोन का निर्माण किया गया है?
(अ) एन्डोर्फिन
(ब) ह्यमिलिन
(स) प्रोटोपिन
(द) कोकीन
उत्तर:
(स) प्रोटोपिन

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22. जैव प्रौद्योगिकी की तकनीकी का सबसे अधिक उपयोग किस क्षेत्र में किया गया है?
(अ) उद्योगों में
(ब) कृषि में
(स) बायो गैस निर्माण में
(द) औषध क्षेत्र में
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

23. भारतीय मूल का फसली पौधा जिसका अमेरिका ने पेटेन्ट करवा लिया है-
(अ) ज्वार
(ब) बाजरा
(स) बासमती चावल
(द) गेहुं
उत्तर:
(स) बासमती चावल

24. किन देशों द्वारा जैव अनैतिकता की जा रही है-
(अ) औद्योगिक सम्पन्न देश
(ब) प्रौद्योगिकी सम्पन्न देश
(स) वित्तीय सम्पन्न देश
(द) उपरोक्त सभी के द्वारा
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

25. सुनहरा चावल एक बहुत ही सम्भावनापूर्ण पारजीनी फसल है। कृषि में उतारने पर यह किस चीज में सहायक होगा?
(अ) विटामिन A का अभाव दूर करने में
(ब) पीड़क प्रतिरोध में
(स) शाकनाशी सहनता से
(द) चावल से एक पेट्रोल-ईंधन बनाने में
उत्तर:
(अ) विटामिन A का अभाव दूर करने में

26. 1977 में सर्वप्रथम किस गाय से मानव सम्पन्न दुग्ध (2.4 ग्राम प्रति लीटर) प्रास किया गया?
(अ) पारजीवी गाय रोजी
(ब) पारजीवी गाय सोजी
(स) पारजीवी गाय जर्सी
(द) पारजीवी गाय पीजी
उत्तर:
(अ) पारजीवी गाय रोजी

27. रोजी गाय के दूध में क्या मिलता है जो साधारण गाय के दूध में नहीं मिलता है?
(अ) मानव एल्फा-लेक्टएल्बुमिन
(ब) मानव बीटा-लेक्टएल्बुमिन
(स) मानव डेल्य-लेकटएल्खुमिन
(द) मानव गामा-लेक्टएल्बुमिन
उत्तर:
(अ) मानव एल्फा-लेक्टएल्बुमिन

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28. निम्न में पीड़क प्रतिरोधी फसल है-
(अ) Bt कपास
(ब) Bt मक्का
(स) टमाटर
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

29. बासमती धान अपनी सुगंध व स्वाद के लिए मशहूर है। इसकी कितनी किस्में भारत में उगाई जाती हैं?
(अ) 25 किस्में
(ब) 26 किस्में
(स) 27 किस्में
(द) 28 किस्में
उत्तर:
(स) 27 किस्में

30. ऐसे जन्तुओं जिनके डी.एन.ए, में परिचालन द्वारा एक अतिरिक्त (बाहरी) जीन व्यर्वस्थित होता है जो अपना लक्षण व्यक्त करता है उसे कहते हैं-
(अ) पारजीवी पादप
(ब) पारजीवी जन्तु
(स) पारजीवी कवक
(द) पारजीवी शैवाल
उत्तर:
(ब) पारजीवी जन्तु

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग किसमें हो रहा है ?
उत्तर:
इसका उपयोग चिकित्साशास्त्र, निदानसूचक (diagnostics), कृषि में आनुवंशिकतः रूपांतरित फसलें, संसाधित खाद्य (processed food), जैव सुधार (bioremediation), अपशिष्ट प्रतिपादन व ऊर्जा उत्पादन में हो रहा है।

प्रश्न 2.
खाद्य उत्पादन में वृद्धि के लिये किन तीन संभावनाओं के विषय में सोचा जा सकता है ?
उत्तर:

  • कृषि रसायन आधारित कृषि,
  • कार्बनिक कृषि और
  • आनुवंशिकतः निर्मित फसल आधारित कृषि।

प्रश्न 3.
वे जीव जिनके जींस हस्तकौशल द्वारा परिवर्तित किये जा चुके हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
उत्तर:
आनुवंशिकतः रूपांतरित जीव (Genetically modified organism=(GMO) ।

प्रश्न 4.
जी एम ओ का व्यवहार किस पर निर्भर करता है ?
उत्तर:
इनका व्यवहार स्थानांतरित जीन की प्रकृति, परपोषी पौधों, जंतुओं या जीवाणुओं की प्रकृति व खाद्य जाल पर निर्भर करता है।

प्रश्न 5.
जैव प्रौद्योगिकी के सहयोग से तैयार की गई पीड़क फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
बी टी कपास, बी टी मक्का, धान, टमाटर व आलू तथा सोयाबीन।

प्रश्न 6.
बी टी विष (BT toxin) प्रोटीन किसके द्वारा उत्पन्न होता है?
उत्तर:
बैसीलस थूरीनजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) द्वारा।

प्रश्न 7.
बी टी विष किस जीन द्वारा कूटबद्ध होता है ?
उत्तर:
जींस को क्राई (cry) कहते हैं।

प्रश्न 8.
RNi का पूर्ण नाम लिखिए, यह क्या है?
उत्तर:
आर एन ए अंतरक्षेप (RNA interference) पूर्ण नाम है, यह सभी ससीमकेन्द्रकी (eukaryotes) जीनों में कोशिकीय सुरक्षा की एक विधि है।

प्रश्न 9.
वर्तमान में कितनी पुनर्योगज चिकित्सीय औषधियाँ विश्व में मानव प्रयोग हेतु स्वीकृत हो चुकी हैं व भारत में कितनी विपणित हो रही हैं?
उत्तर:
वर्तमान में लगभग 30 पुनर्योगज चिकित्सीय औषधियाँ विश्व में मानव के प्रयोग हेतु स्वीकृत हो चुकी हैं। वर्तमान में इनमें से 12 भारत में विपणित हो रही हैं।

प्रश्न 10.
आणविक निदान के लिये जब रोग के लक्षण स्पष्ट दिखाई नहीं देते हैं तो इसकी पहचान किसके द्वारा करते हैं?
उत्तर:
इसकी पहचान PCR द्वारा उनके न्यूक्लिक अम्ल के प्रवर्धन (amplification) द्वारा की जाती है।

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प्रश्न 11.
जीन चिकित्सा किसे कहते हैं?
उत्तर:
जीन चिकित्सा वह पद्धति है जिसके द्वारा आनुवंशिक रोग के साथ पैदा होने वाले जातकों का उपचार किया जाता है।

प्रश्न 12.
बायोपाइरेसी किसे कहते हैं?
उत्तर:
मल्टीनेशनल कम्पनियों व दूसरे संगठनों द्वारा किसी राष्ट्र या उससे सम्बन्धित लोगों से बिना व्यवस्थित अनुमोदन व क्षतिपूरक भुगतान के जैव संसाधनों का उपयोग करना बायोपाइरेसी कहलाता है।

प्रश्न 13.
आनुवंशिक अभियांत्रिकी द्वारा रूपान्तरित जीवाणु उत्पाद का नाम लिखिए जिसका हृदयाघात के अग्रग मायोकार्डियल संक्रमण से गुजरे रोगी की रक्त वाहिकाओं से थक्का हटाने यानि ‘थक्का स्फोटन’, में उपयोग किया जाता है।
उत्तर:
स्ट्रैप्टोकाइनेज।

प्रश्न 14.
आनुवंशिक रोग से ग्रसित शिशु के रोगोपचार के लिए उपयुक्त चिकित्सा व्यवस्था का नाम लिखिए।
उत्तर:
जीन चिकित्सा।

प्रश्न 15.
आनुवंशिकतः रूपांतरित जीव को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ऐसे पौधे, जीवाणु, कवक व जंतु जिनके जींस (genes) हस्तकौशल द्वारा परिवर्तित किये जा चुके हैं, आनुवंशिकतः रूपांतरित जीव (genetically modified organism) कहलाते हैं।

प्रश्न 16.
रोग जनकों के द्वारा उत्पन्न संक्रमण की पहचान कैसे की जाती है?
उत्तर:
रोग जनकों के द्वारा उत्पन्न संक्रमण की पहचान प्रतिजनों (प्रोटीनजन, ग्लाइकोप्रोटीस आदि) की उपस्थिति या रोग जनकों के विरुद्ध संश्लेषित प्रतिरक्षी की पहचान के आधार पर की जाती है।

प्रश्न 17.
उस जीवाणु का वैज्ञानिक नाम लिखिए जिससे Bt जीव विष निर्मित होता है।
उत्तर:
बैसीलस थुरीनजिएंसीस।

प्रश्न 18.
चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का एक उपयोग बताइए।
उत्तर:
आनुवंशिकतः निर्मित इन्सुलिन।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
जैव प्रौद्योगिकी के तीन विवेचनात्मक अनुसंधान क्षेत्र बताइये।
उत्तर:
इसके तीन विवेचनात्मक अनुसंधान क्षेत्र निम्न हैं-

  • उन्नत जीवों जैसे-सूक्ष्मजीवों या शुद्ध एंजाइम के रूप में सर्वोत्तम उत्प्रेरक का निर्माण करना।
  • उत्प्रेरक के कार्य हेतु अभियांत्रिकी द्वारा सर्वोत्तम परिस्थितियों का निर्माण करना।
  • अनुप्रवाह प्रक्रमण तकनीक का प्रोटीन/कार्बनिक यौगिक के शुद्धीकरण में उपयोग करना।

प्रश्न 2.
हरित क्रांति के बावजूद कोई इस प्रकार का वैकल्पिक रास्ता है जिससे खादों व रसायनों का न्यूनतम उपयोग कर सर्वाधिक उत्पादन लिया जा सकता है?
उत्तर:
यद्यपि हरित क्रांति से खाद्य आपूर्ति को बढ़ाकर खाद्य समस्या को हल किया गया है। उत्पादन में यह वृद्धि उन्नत किस्मों का उपयोग, उत्तम प्रबंधकीय व्यवस्था और कृषि रसायनों (खादों तथा पीड़कनाशकों) के प्रयोगों के कारण हुआ है। परन्तु रसायन व खादों का उपयोग एक मंहगी प्रक्रिया है तथा पर्यावरण पर भी हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते हैं।

अतः अब किसान आनुवंशिकतः रूपांतरित फसलों का उपयोग कर अधिक उत्पादन ले सकेंगे। ये फसलें कम खाद व रसायन का उपयोग चाहने वाली होती हैं तथा इससे पर्यावरण पर भी कम हानिकारक प्रभाव होते हैं।

प्रश्न 3.
जीन चिकित्सा (Gene therapy) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
यदि एक व्यक्ति आनुवंशिक रोग के साथ पैदा हुआ है, क्या इस रोग के उपचार हेतु कोई चिकित्सा व्यवस्था है? जीन चिकित्सा ऐसा ही एक प्रयास है। जीन चिकित्सा में उन विधियों का सहयोग लेते हैं जिनके द्वारा किसी बच्चे या भूरण में चिह्नित किए गए जीन दोषों का सुधार किया जाता है।

उसमें रोग के उपचार हेतु जीनों को व्यक्ति की कोशिकाओं या उतकों में प्रवेश कराया जाता है। आनुवंशिक दोष वाली कोशिकाओं के उपचार हेतु सामान्य जीन को व्यक्ति या भ्रूण में स्थानांतरित करते हैं जो निष्क्रिय जीन की क्षतिपूर्ति कर उसके कार्यों को संपन्न करते हैं।

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प्रश्न 4.
जैव अनैतिकता या अपहरण (Biopiracy) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ व दूसरे संगठनों द्वारा किसी राष्ट्र या उससे सम्बन्धित व्यक्तियों से बिना व्यवस्थित अनुमोदन व क्षतिपूरक भुगतान के जैव संसाधनों का उपयोग करना जैव अनैतिकता या अपहरण कहलाता है। अनेक औद्योगिक राष्ट्र जो आर्थिक रूप से अत्यधिक सम्पन्न हैं परन्तु उनके पास जैव विविधता व परंपरागत ज्ञान की कमी है।

ठीक इसके विपरीत विकसित व अविकसित देश जैव विविधता व जैव संसाधनों से सम्बंधित परंपरागत ज्ञान से सम्पन्न हैं। ऐसे देशों से आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ राष्ट्र जैव अनैतिकता या अपहरण का कार्य करते हैं। इसी कारण विकसित व विकासशील राष्ट्रों के बीच अन्याय, अपर्याप्त क्षतिपूर्ति व लाभों की भागीदारी के प्रति भावना विकसित हो रही है।

प्रश्न 5.
जैव अनैतिकता (Biopiracy) को किसी उपयुक्त उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैविक अनैतिकता या अपहरण को स्पष्ट करने के लिये एक उदाहरण दिया जा रहा है। पशिमी अफ्रीका में एक पौधा पेन्टाडिप्लेन्ड्रा ब्रेजीइयाना (Pentadiplandra brazzeana) पाया जाता है। इस पौधे से ब्रेजीन (brazzein) नामक एक प्रोटीन का उत्पादन होता है जो कि शर्करा की तुलना में 2000 गुना मीठा होता है।

प. अफ्रीका के लोग इसके उपयोग के विषय में जानते हैं। इससे शक्कर का निर्यात करने वाले देशों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अतः इस प्रकार परंपरागत उपयोग का ज्ञान अर्जित कर वाणिज्यिक क्षेत्र में प्रवेश करा, लाभ अर्जित की दृष्टि रखकर जैव स्रोतों का अपहरण करते हैं, इसे जैव अपहरण या अनैतिकता कहते हैं।

प्रश्न 6.
” कुछ जीवाणुओं द्वारा संश्लेषित बी टी (Bt) आविष प्रोटीन के रवे कीटों को तो मार देते हैं परन्तु स्वयं को नहीं।” कथन को कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
वास्तव में बी टी जीव-विष प्रोटीन, प्राक्जीव विष निष्क्रिय रूप में होता है, ज्यों ही कीट इस निष्क्रिय जीव-विष को खाता है, इसके रवे आँत में क्षारीय पी.एच. के कारण घुलनशील होकर सक्रिय रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। सक्रिय जीव विष मध्य आँत के उपकलीय कोशिकाओं की सतह से बँधकर उसमें छिद्रों का निर्माण करते हैं, जिस कारण से कोशिकाएँ फूलकर फट जाती हैं और परिणामस्वरूप कीट की मृत्यु हो जाती है।

प्रश्न 7.
जी.एम. पौधों के उपयोग से होने वाले कोई चार लाभ लिखिए।
उत्तर:
आनुवंशिकतः रूपान्तरित फसलों (GM Crops) का उपयोग लाभदायक है क्योंकि आनुवंशिक रूपांतरण द्वारा-

  • अजैव प्रतिबलों (ठंडा, सूखा, लवण, ताप) के प्रति अधिक सहिष्णु फसलों का निर्माण
  • रासायनिक पीड़कनाशकों पर कम निर्भरता करना (पीड़कनाशी-प्रतिरोधी फसल)
  • कटाई के पश्चात् होने वाले (अन्नादि) नुकसानों को कम करने में सहायक”
  • पौधों द्वारा खानिज उपयोग क्षमता में वृद्धि (यह शीघ्र मृदा उर्वरता समापन को रोकता है)
  • खाद्य पदार्थों के पोषणिक स्तर में वृद्धि; उदाहरणार्थविटामिन ए समृद्ध धान।

उपरोक्त उपयोगों के साथ-साथ जी एम का उपयोग तदनुकूल पौधों के निर्माण में सहायक है, जिनसे वैकल्पिक संसाधनों के रूप में उद्योगों में वसा, ईंधन व भेषजीय पदार्थों की आपूर्ति की जाती है।

प्रश्न 8.
किसी बच्चे या भ्रूण में चिह्नित किये गए जीन दोषों का उपचार किस तकनीक द्वारा किया जाता है? उदाहरण द्वारा समझाइये।
उत्तर:
जीन चिकित्सा द्वारा किसी बच्चे या भ्रूण में चिद्धित किए गए जीन दोषों का सुधार किया जाता है। इसमें रोग के उपचार हेतु जीनों को व्यक्ति की कोशिकाओं या ऊतकों में प्रवेश कराया जाता है। आनुवंशिक दोष वाली कोशिकाओं के उपचार के लिये सामान्य जीन को व्यक्ति या भूर्ण में स्थानांतरित करते हैं जो निष्क्रिय जीन की क्षतिपूर्ति कर उसके कार्यों को सम्पन्न करते हैं।

सर्वप्रथम जीन चिकित्सा का प्रयोग वर्ष 1990 में एक चार वर्षीय लड़की में एडीनोसीन डिएमीनेज (ADA) की कमी को दूर करने के लिये किया गया था। यह एन्जाइम प्रतिरक्षातंत्र के कार्य के लिये अति आवश्यक होता है। यह कमी इसलिए हो जाती है क्योंकि एडीनोसीन डिएमीनेज के लिये जिम्मेदार जीन लुप्त हो जाती है।

जीन चिकित्सा में सर्वप्रथम रोगी के रक्त में से लसीकाणु (Lymphocytes) को निकालकर शरीर से बाहर संवर्धन किया जाता है। सक्रिय ADA का cDNA (पश्च विषाणु संवाहक का प्रयोग कर) लसीकाणु में प्रवेश कराकर अंत में रोगी के शरीर में वापस कर दिया जाता है। ये कोशिकाएँ मृतप्राय: होती हैं, इसलिये आनुवंशिक निर्मित लसीकाणुओं को समयसमय पर रोगी के शरीर से अलग करने की आवश्यकता होती है। यदि मज्जा कोशिकाओं (bone marrow) से विलगित अच्छे जीनों को प्रारम्भिक भ्रूणीय अवस्था की कोशिकाओं से उत्पादित ADA में प्रवेश करा दिया जाए तो यह एक स्थायी उपचार हो सकता है।

प्रश्न 9.
मधुमेह रोगियों को यदि असंसाधित प्राक् इन्सुलिन दिया जाए तो क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
मानव सहित स्तनधारियों में इन्सुलिन प्राक्-हार्मोन (प्राक् एन्जाइम की जैसे प्राक्-हार्मोन को पूर्ण परिपक्व व क्रियाशील हार्मोन बनने से पूर्व संसाधित होने की आवश्यकता होती है) संश्लेषित होता है; जिसमें एक अतिरिक्त फैलाव होता है जिसे पेप्टाइड ‘सी’ कहते हैं। यह ‘सी’ पेप्टाइड परिपक्व इन्सुलिन में नहीं होता, जो परिपक्वता के दौरान इन्सुलिन से पृथक् हो जाता है। अतः मधुमेह रोगियों को संसाधित प्राक् इन्सुलिन देने पर नियंत्रण पाया जाता है। असंसाधित प्राक् इन्सुलिन से नियंत्रण नहीं किया जा सकता।

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वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. Bt कपास की किस्म जो बैसिलस थुर्रिजनिसिस के विष जीन को समाविष्ट करके बनाई गयी प्रतिरोधी है- (NEET-2020)
(अ) कवकीय रोगों से
(ब) पादप सूत्रकृमि से
(स) कीट परभक्षी से
(द) कीट पीड़कों से
उत्तर:
(द) कीट पीड़कों से

2. निम्न स्तम्भों का,मिलान कर सही विकल्प का चयन करो- (NEET-2020)

स्तम्भ-Iस्तम्भ-II
1. बीटी कपास(i) जीन चिकित्सा
2. एडीनोसीन डिएमीनेज(ii) कोशिकीय सुरक्षा
3. आर.एल.ए. आई.(iii) HIV संक्रमण का पता लगाना
4. पी.सी.आर.(iv) वैसिलस थुरिजिनिसिस
कूट(1)(2)(3)(4)
(अ)(iii)(ii)(i)(iv)
(ब)(ii)(iii)(iv)(i)
(स)(i)(ii)(iii)(iv)
(द)(iv)(i)(ii)(iii)
(द)(iv)(i)(ii)(iii)

3. निम्न में कौनसा कथन सही नहीं है- (NEET-2020)
(अ) प्राक्-इन्सुलिन में एक अतिरित्क पेप्टाइड, जिसे सी-पेप्यइड कहते हैं, होती है
(ब) कार्यांत्मक इंसुलिन में A एवं B शृंखलाएँ होती है जो हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी होती है
(स) आनुवंशिक इंजीनियरी इंसुलिन ई-कोलाई द्वारा उत्पादित होता है
(द) मनुष्य में इंसुलिन प्राक्-इंसुलिन से संश्लेषित होता है।
उत्तर:
(ब) कार्यांत्मक इंसुलिन में A एवं B शृंखलाएँ होती है जो हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी होती है

4. जीव को उनके जैव प्रौद्योगिंकी में उपयोग के लिए सुमेलित कीजिए। (NEET-2020)

(अ) बैसिलस धुरिनाजिनिसिस(i) क्लोसिक वेक्टर
(ब) थर्मस एक्वेटिकस(ii) प्रथम rDNA अपु का निर्माय
(स) एग्रोयैक्टिसियम ट्यूसिफेसिएंस(iii) डी.एन.ए, पॉलिमरेज
(द) साल्मोनेला(iv) Cry प्रोटीन
कूट(1)(2)(3)(4)
(अ)(iv)(iii)(i)(ii)
(ब)(iii)(ii)(iv)(i)
(स)(iii)(iv)(i)(ii)
(द)(ii)(iv)(iii)(i)

उत्तर:

(अ)(iv)(iii)(i)(ii)

5. गोल्डन चावल के विषय में निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही है- (NEET-2019)
(अ) चावल की एक आध किस्म से जीन निवेशन के कारण इसके दाने पीले हैं।
(ब) यह डैफोडिल के जीन वाला विटामिन-ए प्रचुरित है।
(स) यह वैसिलस थुर्रिजिएसिस के जीन वाला पीड़क प्रतिरोधी है।
(द) एग्रोबैक्टीरियम वेक्टर का उपयोग कर विकसित किया गया है।
उत्तर:
(ब) यह डैफोडिल के जीन वाला विटामिन-ए प्रचुरित है।

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6. गोलभ शरलभ कृमि में वैसिलस धुर्रिजिएसिस के Bt आविष को सक्रिय करने के लिए प्रोटोक्सीन की सक्रियता किससे प्रेरित होती है? (NEET-2019)
(अ) आमाशय की अम्लीय pH
(ब) शरीर का तापमान
(स) मध्य आंत की नमी वाली सतह
(द) आंत की क्षारीय pH
उत्तर:
(द) आंत की क्षारीय pH

7. एक विदेशी कम्पनी द्वारा चावल की एक नई किस्म को पेटेन्ट किया गया था, यद्यपि ऐसी किस्में भारत में लम्बे समय से विद्यमान हैं। यह किससे सम्यन्धित है? (NEET-2018)
(अ) लेमो रोजो
(ब) शर्बती सोनोरा
(स) Co-667
(द) बासमती
उत्तर:
(द) बासमती

8. मानव लसिकाणुओं मे डी.एन.ए. के एक टुकड़े के निवेशन के लिए निम्नलिखित में से कौनसा वेक्टर सामान्यतः प्रयुक्त किया जाता है? (NEET-2018)
(अ) λ फाज
(ब) Ti प्लाज्मिड
(स) रेट्रोबाइरस
(द) pBR322
उत्तर:
(स) रेट्रोबाइरस

9. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और संगठनों द्वारा किसी देश या उसके लोगों की बिना अनुज्ञति के जैव संसाधनों के उपयोग को क्या कहा जाता है? (NEET-2018)
(अ) जैव अपघटन
(ब) बायोपाइरेसी
(स) जैब-उल्लंघन
(द) जैव शोषण
उत्तर:
(ब) बायोपाइरेसी

10. तम्बाकू के पौधे का कौनसा भाग मिलेइड्डोगाइन इन्कोग्रिटा द्वारा संक्रमित होता है? (NEET-2016)
(अ) तना
(ब) जड़
(स) पुष्प
(द) पत्ती
उत्तर:
(ब) जड़

11. वर्ष 1990 में एडिनोसीन डीऐमिनेज (ADA) की कमी से पीड़ित चार वर्ष की बालिका को निम्नलिखित से कौनसी चिकिल्सा दी गई? (NEET II-2016)
(अ) प्रतिरक्षा चिकिल्सा
(ब) विकिरण चिकिल्सा
(स) जीन चिकिल्सा
(द) रसायन चिकित्सा
उत्तर:
(स) जीन चिकिल्सा

12. सुनहरे (गोल्डन) चावल एक आनुवंशिक रूपान्तरित फसल पादप है। इसमें निवेशित जीन किसके जैविक संश्लेषण के लिए हैं? (NEET-2015)
(अ) विटामिन C
(ब) ओमेगा
(स) विटामिन A
(द) विटामिन B
उत्तर:
(स) विटामिन A

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13. पादर्पों में t.DNA (tDNA) के प्रवेश से क्या होता है? (NEET-2015)
(अ) मृदा के pH में बदलाव आता है और पादप में प्रघात होता है।
(ब) पादर्पों को थोड़े अल्पकाल के लिए शीत में उद्भासित करना पड़ता है।
(स) पादप मूलों को जल में खड़े रहने देता है।
(द) पादप में एग्रोबेक्टिरियम ट्यूमिफेशिएन्स द्वारा संक्रमित होता है।
उत्तर:
(द) पादप में एग्रोबेक्टिरियम ट्यूमिफेशिएन्स द्वारा संक्रमित होता है।

14. पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी द्वारा उत्पादित पहला मानव हॉमोंन कौनसा है? (NEET-2014)
(अ) इंसुलिन
(ब) एस्ट्रोजन
(स) धॉयरॉक्सिन
(द) प्रोजेस्ट्रान
उत्तर:
(अ) इंसुलिन

15. निम्नलिखित Bt फसलों में से कौनसी फसल भारत में किसानों द्वारा उगाई जा रही है? (NEET-2013)
(अ) मक्का
(ब) कपास
(स) बैंगन
(द) सोयाबीन
उत्तर:
(ब) कपास

16. सबसे पहले नैदनिक जीन चिकित्सा किसके उपचार के लिए दी गई थी? (Mains-2012)
(अ) मधुमेह
(ब) छोटी माता
(स) रुमेठी गठिया
(द) एडीनोसीन डीएमीनेज अल्पता
उत्तर:
(द) एडीनोसीन डीएमीनेज अल्पता

17. विटामिन ‘A’ की कमी से आने वाला अंधापन किसके उपयोग से रोका जा सकता है? (CBSE PMT-2008, 2012, Mains-2012)
(अ) फ्लेवर सैवर टमाटर
(ब) कैनोला
(स) गोल्डन चावल
(द) Bt बैंगन
उत्तर:
(स) गोल्डन चावल

18. तम्बाकू के सूत्रकृमि-प्रतिरोधी पौधे बनाने के लिए उनमें DNA प्रवेश कराया गया जिससे (परपोषी कोशिकाओं के भीतर) किसका बनना संभव हुआ? (NEET-2012)
(अ) अर्थ तथा प्रति-अर्थ दोनों प्रकार का RNA
(ब) एक विशिष्ट हॉर्मोन
(स) एक एन्टीफीडेन्ट (प्रति भोज्य)
(द) एक विषाक्त प्रोटीन
उत्तर:
(अ) अर्थ तथा प्रति-अर्थ दोनों प्रकार का RNA

19. वर्तमान पारजीनी जन्तुओं में से इस समय सबसे अधिक संख्या किसकी है? (NEET-2011)
(अ) मछली
(ब) मूषक
(स) गाय
(द) सूअर
उत्तर:
(ब) मूषक

20. m.RNA की साइलेंसिग किसके प्रतिरोधी ट्रांसजैनिक पादप उत्पादन में उपयुक्त है? (NEET-2011)
(अ) बैक्टोरियल ब्नाइटस
(ब) बालवर्स
(स) नीमेटोद्धस
(द) काइट रस्ट
उत्तर:
(ब) बालवर्स

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21. पौधों में RVA इन्टरफिरेन्स प्रक्रिया (RVAI) का उपयोग किसके विरद्ध प्रतिरोध विकास करने के लिए किया गया है? (NEET-2011)
(अ) सूत्रकृमियों के
(ब) कवकों के
(स) वाइरसों के
(द) कीटों के
उत्तर:
(अ) सूत्रकृमियों के

22. बंसिलस थुरिजिएंसिस प्रोटीन क्रिस्टल बनाते हैं, जो कीट प्रतिरोधी प्रोटीन होती है, यह प्रोटीन- (NEET-2011)
(अ) वाहक जीवाणु को नहीं मारते क्योंकि वह स्वयं में विष के प्रति प्रतिरोधी होता है
(ब) कीट की मध्य-आहार नली की उपकलीय कोशिका द्वारा जुड़ी रहती है। अंततः इसे मार देते हैं।
(स) क्राई जीन सहित कई जीनों द्वारा कोडिल होती है।
(द) कीट की अग्र आहार नली अम्लीय pH द्वारा सक्रिय होती है।
उत्तर:
(ब) कीट की मध्य-आहार नली की उपकलीय कोशिका द्वारा जुड़ी रहती है। अंततः इसे मार देते हैं।

23. भारत में आनुवंशिकतः रूपान्तरित (GM) बैंगन किसके लिए विकसित किया गया है? (NEET-2010)
(अ) शेल्फ लाइफ (ताजा बनाए रखने) की अवधि बढ़ाना
(ब) खनिज तत्वों की मात्रा बढ़ाना
(स) सूखा प्रतिरोधी
(द) कीट प्रतिरोधी
उत्तर:
(द) कीट प्रतिरोधी

24. निम्नलिखित में से किस एक का जैव प्रौद्योगिकी विधि द्वारा व्यापारिक स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है? (Mains-2010)
(अ) मोर्फीन
(ब) कुनैन
(स) इंसुलिन
(द) निकोटिन
उत्तर:
(स) इंसुलिन

25. बी टी (Bt) आविष के रवे कुछ जीवाणुओं द्वारा बनाये जाते हैं परन्तु जीवाणु स्वयं को नहीं मारते हैं क्योंकि- (NCERT-2009)
(अ) आविष अपरिपक्व है
(ब) जीवाणु आविष के लिये प्रतिरोधी है
(स) आविष निष्क्रिय होता है
(द) आविष जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है
उत्तर:
(द) आविष जीवाणु की विशेष थैली में मिलता है

26. प्लाज्मिड्स उपस्थित होते हैं- (RPMT-2009)
(अ) विषाणुओं में
(ब) जीवाणुओं में
(स) कवकों में
(द) वायरॉंड्डस में
उत्तर:
(ब) जीवाणुओं में

27. भारतीय पौर्धों में विदेशी DNA स्थानांतरण में सामान्यत: प्रयोग की जाती है- (CBSE AIPMT-2009)
(अ) ट्राइकोडर्मा हाजीएवम
(ब) मेलोइडोगाइन इन्कोंग्नीटा
(स) एल्रोबैक्टिरियम ट्यूमीफेसिएन्स
(द) पेनीसीलिखन एक्सपेन्सम
उत्तर:
(स) एल्रोबैक्टिरियम ट्यूमीफेसिएन्स

28. निम्नलिखित में से किस एक की पारजीनी स्पीशीज से मानव इंसुलिन का व्यापरिक स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है ? (NEET-2008)
(अ) राइकोषियम
(ब) सेकैरामाइसीज
(स) एशरिश्चिया
(द) माइक्रोबैक्टौरियम
उत्तर:
(स) एशरिश्चिया

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

29. धैसिलस धुर्रिर्जिएसिस से प्रात काई I एंडोटौंज्सिन किसके प्रति कारगार होते हैं? (NEET-2008)
(अ) नीमेयेक
(ब) वॉलवर्म
(स) मच्छ
(द) मखिख्यां
उत्तर:
(ब) वॉलवर्म

30. बायोपाइरेसौ सम्बन्धित है- (Maharashtra-2008)
(अ) मैव अणु तथा जौन्स की खोज से
(ब) परम्परागात ज्ञान से
(स) जैव अनुसंधान से
(द) उपरोक्त सभी से
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी से

31. गोल अधिप्लाव (छलकन) के गैषोपयार में सफलतापूर्वक उपयोग की जाने वाली आनुर्बशिकता इंजीनियरिंग सूक्ष्मजौब स्पौशीज किसकी है? (NEET-2007)
(अ) बेसिलस
(ब) स्यूडोमोन्तास
(स) ट्राइकोडमां
(द) जै घोमोनास
उत्तर:
(ब) स्यूडोमोन्तास

32. वाहल परीक्षण किसके निदान से सम्बन्धित है- (RPMT-2006)
(अ) यइ्फाइड
(ब) कोलेरा
(स) मलेरिया
(द) पीत ज्वर
उत्तर:
(अ) यइ्फाइड

33. लींच (जॉंक) कौन-सा प्रतिथक्कारी (anticoagulant) प्दार्थ युक्ति करता है- (AIIMS-2005)
(अ) हिपेरिन
(ब) हिराडिन
(स) हिस्ट्यमीन
(द) सीरोट्रोनिन
उत्तर:
(ब) हिराडिन

34. Bt टोंक्सिन है- (Wardha-2005)
(अ) अंतःकोशिकीय लिपिड
(ब) अन्तःकोशिकीय श्रिस्टलित प्रोटीन
(स) घाछ्म कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन
(द) लिपिक्ध किया जाता है-
उत्तर:
(स) घाछ्म कोशिकीय क्रिस्टलित प्रोटीन

35. बैसीलस थूरिनजिएन्सिस (Bt) विभेद अपूर्व कार्य के लिये प्रयोग किया जाता है- (CBSE-2005)
(अ) बायोमेटलर्जिक तकनीक
(ब) बायोइन्सेक्टीसाइड्स पौधे
(स) जैव उर्वरक
(द) बायोमिनरेलाइजेशन प्रक्रम
उत्तर:
(ब) बायोइन्सेक्टीसाइड्स पौधे

36. Ti प्लाज्मिड जो आनुवंशिक इंजीनियरिंग में प्रयुक्त होता है, प्राप्त होता है- (UP CPMT-2004)
(अ) ईश्चेरिचिया कोलाई से
(ब) बैसीलस थूरिनजिएन्सिस से
(स) एग्रोबैक्टीरियम राइजोजीन्स से
(द) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशिएन्स से
उत्तर:
(द) एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशिएन्स से

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 12 जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

37. जीन थैरेपी का उदाहरण है- (AIMS-2004)
(अ) प्रविष्ट योग्य हिपेटाइटिस B वेक्सीन का उत्पादन
(ब) भोज्य फसलों में वेक्सीन का उत्पादन
(स) सीवियर कम्बाइन इम्यूनोडेफिफियन्सी से ग्रसित मनुष्यों में एडीनोसीन डीएमीनेज के लिए जीन्स का प्रवेश
(द) निषेचित अण्डों के प्रत्यारोपण और कृत्रिम इन्सेमिनेशन के द्वारा टेस्ट ट्यूब बेबी का उत्पादन
उत्तर:
(स) सीवियर कम्बाइन इम्यूनोडेफिफियन्सी से ग्रसित मनुष्यों में एडीनोसीन डीएमीनेज के लिए जीन्स का प्रवेश

38. एलिसा को विषाणुओं की पहचान में उपयोग किया जाता है जिसमें मुख्य अभिकर्मक होता है- (NEET-2003)
(अ) क्षारीय फास्फेटेज
(ब) कैटेलेज
(स) DNA प्रोब
(द) RNase
उत्तर:
(अ) क्षारीय फास्फेटेज

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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. बहुजीनी वंशागति में पर्यावरण के प्रभाव का उदाहरण है-
(अ) मानव त्वचा का रंग
(ब) डाउन सिन्ड्रोम
(स) फेनिल कीटोमेह रोग
(द) क्लाईनफेल्टर – सिन्ड्रोम
उत्तर:
(अ) मानव त्वचा का रंग

2. मेंडल के अध्ययन में मुख्यतः किन लक्षणों का वर्णन किया गया-
(अ) स्पष्ट विकल्पी रूप
(ब) अस्पष्ट विकल्पी रूप
(स) 50% स्पष्ट विकल्पी तथा 50% अस्पष्ट विकल्पी रूप
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) स्पष्ट विकल्पी रूप

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

3. लक्षण सामान्यत: तीन अथवा अधिक जीनों द्वारा नियंत्रित करते हैं उन्हें कहते हैं-
(अ) बहुप्रभाविता के लक्षण
(ब) बहुजीनी लक्षण
(स) एकजीनी लक्षण
(द) न्यूनजीनी लक्षण
उत्तर:
(ब) बहुजीनी लक्षण

4. तीन प्रभावी अलील तथा तीन अप्रभावी अलील वाले जीनोटाइप की त्वचा का रंग होगा-
(अ) अग्रवर्ती
(ब) मध्यवर्ती
(स) पश्चवर्ती
(द) कोई अन्तर नहीं आयेगा
उत्तर:
(ब) मध्यवर्ती

5. एक एकल जीन अनेक फीनोटाइप लक्षणों को प्रकट करता है, ऐसे जीन को कहते हैं-
(अ) बहुप्रभावी जीन
(ब) लीथल जीनं
(स) लिंग जीन
(द) सहलग्न जीन
उत्तर:
(अ) बहुप्रभावी जीन

6. फेनिल कीटोमेह व्याधि किसका उदाहरण है ?
(अ) सहप्रभाविता का
(ब) बहुप्रभाविता का
(स) अपूर्ण प्रभाविता का
(द) डाउन सिन्ड्रोम
उत्तर:
(ब) बहुप्रभाविता का

7. फेनिल कीटोमेह व्याधि का लक्षण है-
(अ) मानसिक मंदन
(ब) बालों का कम होना
(स) त्वचीय रंजन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

8. फेनिल कीटोमेह व्याधि किस एन्जाइम के लिए उत्तरदायी जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है ?
(अ) फेनिल हाइड्रोक्सीलेज
(ब) एलेनीन हाइड्रोक्सीलेज
(स) फेनिल कीटो हाइड्रोक्सीलेज
(द) फेनिल एलेनीन हाइड्रोक्सीलेज ।
उत्तर:
(द) फेनिल एलेनीन हाइड्रोक्सीलेज ।

9. अगुणित – द्विगुणित लिंग निर्धारण प्रणाली पायी जाती है-
(अ) मानव में
(ब) मधुमक्खी में
(स) कबूतर में
(द) बंदर में
उत्तर:
(ब) मधुमक्खी में

10. मधुमक्खी के एक शुक्राणु एवं अण्डे के युग्मन से उत्पन्न संतति होगी-
(अ) रानी तथा श्रमिक
(ब) ड्रोन व रानी
(स) श्रमिक तथा नर
(द) रानी तथा नर
उत्तर:
(अ) रानी तथा श्रमिक

11. अनिषेचित अण्ड अनिषेकजनन (Parthenogenesis ) द्वारा विकसित होते हैं-
(अ) श्रमिक
(ब) रानी
(स) नर
(द) नर एवं रानी
उत्तर:
(स) नर

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

12. मादा मधुमक्खी में क्रोमोसोम की संख्या होती है-
(अ) 32
(ब) 16
(स) 30
(द) 34
उत्तर:
(अ) 32

13. किस रोग में व्यक्ति लाल एवं हरे वर्ण (रंग) में विभेद नहीं कर पाता-
(अ) वर्णांधता
(स) दात्रकोशिका अरक्तता
(ब) फीनाइल कीटोनूरिया
(द) थैलीसिमिया
उत्तर:
(अ) वर्णांधता

14. HBA1 एवं HBA2 किस रोग से सम्बन्धित हैं-
(अ) वर्णांधता
(ब) थैलेसीमिया
(स) दात्रकोशिका अरक्तता
(द) डाउन सिन्ड्रोम
उत्तर:
(ब) थैलेसीमिया

15. नर (ड्रोन) किस विभाजन द्वारा शुक्राणु उत्पादित करते हैं-
(अ) अर्धसूत्री विभाजन
(स) समसूत्री विभाजन
(ब) असूत्री विभाजन
(द) कोशिकाद्रव्य विभाजन
उत्तर:
(स) समसूत्री विभाजन

16. अगुणित 16 क्रोमोसोम निम्न में से किसमें होता है-
(अ) नर में
(स) श्रमिक में
(ब) मादा में
(द) नर व मादा दोनों में
उत्तर:
(अ) नर में

17. विकृत हीमोग्लोबिन का संश्लेषण किस रोग में होता है ?
(अ) वर्णांधता
(स) थैलेसीमिया
(ब) दात्रकोशिका अरक्तता
(द) फीनाइलकीटोन्यूरिया
उत्तर:
(स) थैलेसीमिया

18. थैलेसीमिया रोग का नियंत्रण किस जीन द्वारा किया जाता है-
(अ) HBA1 एवं HBA2
(ब) HBA3 एवं HBA4
(स) HBA1 एवं HBA5
(द) HBA6 एवं HBA7
उत्तर:
(अ) HBA1 एवं HBA2

19. मेंडल की सफलता का मुख्य कारण था-
(अ) मटर के पौधे का चयन किया था
(ब) अपने संकरण में केवल एक लक्षण को एक बार में लिया
(स) वंशावली अभिलेख रखे थे
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

20. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम सिद्ध किया जाता है-
(अ) F1 पीढ़ी की समस्त संतति लम्बी होती है
(ब) लम्बे तथा बौने पौधे 3 : 1 के अनुपात में प्रकटन द्वारा
(स) F2 पीढ़ी में चिकने तथा झुर्रीदार बीजों वाले पौधों के प्रकटनद्वारा
(द) F2 पीढ़ी में लम्बे तथा बौने पौधों के प्रकटन द्वारा
उत्तर:
(स) F2 पीढ़ी में चिकने तथा झुर्रीदार बीजों वाले पौधों के प्रकटनद्वारा

21. एक संकर संकरण की F2 पीढ़ी का लक्षण प्ररूप अनुपात होता है-
(अ) 9 : 33 : 1
(ब) 3 : 1
(स) 1 : 1
(द) 2 : 1
उत्तर:
(ब) 3 : 1

22. लाल तथा सफेद के संकरण से उत्पन्न संतति गुलाबी है। इसमें R जीन किस प्रकार का होना सिद्ध करता है-
(अ) संकर
(ब) अप्रभावी
(स) अपूर्ण प्रभावी
(द) उत्परिवर्ती
उत्तर:
(स) अपूर्ण प्रभावी

23. रुधि वर्ग AB समूह वाले मनुष्य का जीनोटाइप प्रभाव दिखाई
(अ) प्रभावी अप्रभावी देती है, जो कहलाता है-
(ब) अपूर्ण प्रभाविता
(स) सहप्रभाविता
(द) संपूरक
उत्तर:
(स) सहप्रभाविता

24. निम्न में से मंडलीय विकार है-
(अ) सिस्टिक फाइब्रोसिस
(ब) वर्णांधता
(स) थैलेसीमिया
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

25. एक X क्रोमोसोम का अभाव अर्थात 45 क्रोमोसोम की (XO) स्थिति, किस रोग में होती है-
(अ) टर्नर सिन्ड्रोम
(ब) क्लाइनफेल्टर
(स) डाउन सिन्ड्रोम
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) टर्नर सिन्ड्रोम

26. ड्रोसोफिला मेलेनोगेस्टर पर आनुवंशिक अध्ययन करने वाले थे-
(अ) सटन
(ब) बोवेरी
(स) मोरगन
(द) मेंडल
उत्तर:
(स) मोरगन

27. मेंडल के आनुवंशिकी नियमों का अपवाद है-
(अ) सहलग्नता
(ब) पूर्ण प्रभाविता
(स) समयुग्मता
(द) विपर्यासी लक्षण
उत्तर:
(अ) सहलग्नता

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

28. इनमें कौनसा परीक्षण क्रॉस है-
(अ) F1 × कोई सा जनक
(ब) F1 × F1
(स) F1 × अप्रभावी जनक
(द) F2 × प्रभावी जनक
उत्तर:
(स) F1 × अप्रभावी जनक

29. मेंडल के वंशागति नियमों की पुनः खोज करने वाले थे-
(अ) डीब्रिज, सटन
(ब) डीब्रिज, कॉरेन्स, बोवेरी
(स) सटन, बोवेरी, बान शेरमाक
(द) डीब्रिज, कॉरेन्स, वान शेरमाक
उत्तर:
(द) डीब्रिज, कॉरेन्स, वान शेरमाक

30. HBAI एवं HBA2 जीन जनक के कौनसे क्रोमोसोम पर स्थित होती है-
(अ) क्रोमोसोम 15
(ब) क्रोमोसोम 16
(स) क्रोमोसोम 17
(द) क्रोमोसोम -18
उत्तर:
(ब) क्रोमोसोम 16

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
आनुवंशिक विज्ञान में किसका अध्ययन होता है ?
उत्तर:
इस शाखा में वंशागति व विविधता दोनों का अध्ययन होता है।

प्रश्न 2.
मेंडल ने मटर के पौधे के किन लक्षणों पर विचार किया ?
उत्तर:
मेंडल ने विपरीतार्थ लक्षणों पर विचार किया, इन्हें विपर्यासी लक्षण (Contrasting Character) भी कहते हैं। उदाहरण – लंबे या बौने पौधे, पीले या हरे बीज ।

प्रश्न 3.
तद्रूप प्रजनन – सम (True Breeding) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वह लक्षण जो अनेक पीढ़ियों तक स्व-परागण के फलस्वरूप वही लक्षण प्रकट करता हो ।

प्रश्न 4.
मेंडल ने मटर की कितनी तद्रूप प्रजननी किस्मों को चुना ?
उत्तर:
14 तद्रूप प्रजननी मटर किस्मों को चुना।

प्रश्न 5.
मेंडल के प्रयोगों में F1 से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
प्रथम संतति पीढ़ी (Filial Progeny)।

प्रश्न 6.
समयुग्मजी व विषमयुग्मजी को समझाइये
उत्तर:
यदि पौधे की आनुवंशिक संरचना में किसी युग्म के दोनों विकल्प (alleles) गुण एकसमान हों जैसे (RR), तो पौधों को समयुग्मजी (homozygous) पादप कहते हैं। जब युग्म (gene pair) के दोनों विकल्प भिन्न हों, जैसे Rr, तो पादप को विषमयुग्मजी ( heterozygous) कहते हैं।

प्रश्न 7.
जीन प्ररूप (genotype ) व लक्षण प्ररूप ( phenotype ) को समझाइये।
उत्तर:
पौधे के बाहरी दिखने वाले लक्षण जैसे लाल, लम्बा आदि को लक्षण प्ररूप कहते हैं तथा उसमें स्थित जीनी संरचना को जीन प्ररूप कहते हैं; जैसे -RR, Rr आदि।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

प्रश्न 8.
द्विसंकर संकरण का लक्षण व जीन प्ररूप बताइये।
उत्तर:
लक्षण प्ररूप 9 : 3 : 3 : 1
जीन प्ररूप 1 : 2 : 2 : 4 : 1 : 2 : 2 : 1

प्रश्न 9.
द्विसंकर परीक्षण संकरण में लक्षण प्ररूप व जीन प्ररूप का अनुपात बताइये।
उत्तर:
लक्षण प्ररूप व जीन प्ररूप दोनों 1 : 1 : 1 : 1 अनुपात में होते हैं।

प्रश्न 10.
सह-प्रभाविता से क्या समझते हैं ? उदाहरण बताइये।
उत्तर:
इसमें F1 पीढ़ी दोनों जनकों से मिलती-जुलती है। इसका अच्छा उदाहरण मानव ABO रुधिर वर्ग है।

प्रश्न 11.
वाल्टर सटन और थियोडोर बोवेरी का क्या कार्य था ?
उत्तर:
इन्होंने बताया कि गुणसूत्रों का व्यवहार जीन जैसा होता है। इन्होंने मेंडल के नियमों को गुणसूत्रों की गतिविधि द्वारा समझाया। इन्होंने गुणसूत्रों के विसंयोजन के ज्ञान को मेंडल के सिद्धान्तों के साथ जोड़कर ‘वंशागति का क्रोमोसोमवाद या सिद्धान्त’ प्रस्तुत किया।

प्रश्न 12.
व्युत्क्रम संकरण (Reciprocal Cross) किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब प्रयोग में मुख्य जनक का उपयोग दो अलग-अलग प्रयोगों में विपरीत तरीके से किया जावे, जैसे पहले प्रयोग में यदि ‘A’ नर तथा ‘B’ मादा होगा तो दूसरे प्रयोग में ‘B’ को नर तथा ‘A’ को मादा के रूप में प्रयोग में लाते हैं। इस प्रकार के संकरण को व्युत्क्रम संकरण कहते हैं।

प्रश्न 13.
सहलग्नता, पुनर्योजन (Recombination) शब्द किसने दिया तथा रीकोम्बीनेशन मैप बनाने वाले कौन थे ?
उत्तर:
मोरगन ने सहलग्नता व पुनर्योजन शब्द दिया तथा इनके शिष्य एल्फ्रेड स्टर्टीवेंट ने रीकोम्बीनेशन मैप बनाया।

प्रश्न 14.
‘X काय’ नाम किसने दिया व मानव में लिंग निर्धारण किससे होता है?
उत्तर:
हेंकिंग ने ‘X काय’ नाम दिया। मानव में XX व XY से लिंग निर्धारण होता है।

प्रश्न 15.
फ्रेम शिफ्ट उत्परिवर्तन किससे होता है ?
उत्तर:
DNA के क्षार युग्मों के घटने-बढ़ने से फ्रेम शिफ्ट उत्परिवर्तन होता है।

प्रश्न 16.
मानव में वंशागत ऐसे दो लक्षण दीजिए जिनके जीन्स लिंग गुणसूत्र पर स्थित हों।
उत्तर:
सिकिल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia) तथा गंजापन (Boldness) मानव में वंशागत होने वाले लक्षण हैं। इनके जीन्स लिंग गुणसूत्र पर स्थित नहीं होते हैं।

प्रश्न 17.
यदि किसी बच्चे में 46 के स्थान पर 47 गुणसूत्र हों तो उस बच्चे में किस प्रकार के विकार की सम्भावना है?
उत्तर:
उस बच्चे में ‘मंगोलिक विकार’ नामक विकार होने की सम्भावना होगी।

प्रश्न 18.
विषमयुग्मकता (Heterogamety) क्या है? एक जीव का उदाहरण दीजिए, जो इसे प्रदर्शित करता है।
उत्तर:
जिन जीवों में लिंग गुणसूत्र भिन्न प्रकार के होते हैं वे दो प्रकार के युग्मक उत्पन्न करते हैं, अतः ये विषमयुग्मकता प्रदर्शित करते हैं। उदा. ड्रॉसोफिला नर।

प्रश्न 19
सहप्रभाविता का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
‘A’, ‘B’ तथा ‘O’ रुधिर वर्गों के जीन्स सहप्रभावी ( Codominant) होते हैं।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

प्रश्न 20.
सामान्य जनकों के यहाँ हीमोफीलिया युक्त पुत्र का जन्म हुआ। उनके जनकों का जीनोटाइप बताइये।
उत्तर:
एक हीमोफिलिक पुत्र का जन्म एक सामान्य जनकों के यहाँ माता के वाहक होने पर हो सकता है-
अतः पिता सामान्य = XY
माता वाहक = XXh

प्रश्न 21.
बिन्दु उत्परिवर्तन किसे कहते हैं?
उत्तर:
डीएनए के एकल क्षार युग्म ( बेस पेयर) के परिवर्तन को बिन्दु उत्परिवर्तन (Point mutation) कहते हैं।

प्रश्न 22.
मेण्डल के द्विसंकरण प्रयोग का समलक्षणी (फीनोटाइप) अनुपात लिखिए।
उत्तर:
मेण्डल के द्विसंकरण प्रयोग का समलक्षणी (फीनोटाइप) अनुपात 9 : 3 : 3 : 1 है।

प्रश्न 23.
वंशागति के ‘गुणसूत्र सिद्धान्त’ को प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सटन और बोवेरी।

प्रश्न 24.
मानव में पाये जाने वाले अलिंग सूत्री प्रभावी तथा अलिंग सूत्री अप्रभावी मेण्डलीय दोष से प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए ।
उत्तर:
मायोटोनिक दुष्पोषण (डिस्ट्रोफी), दात्र कोशिका अरक्तता ( सिकल सेल एनीमिया ) ।

प्रश्न 25
बिंदु उत्परिवर्तन के कारण कौन-सा रोग होता है ?
उत्तर:
दात्र कोशिका अरक्तता (Sickle cell anaemia)।

प्रश्न 26.
मानव आनुवंशिकी में वंशावली अध्ययन के कोई दो उपयोग लिखिये।
उत्तर:
इसका उपयोग विशेष लक्षण, अपसामान्यता या रोग का पता लगाने में किया जाता है।

प्रश्न 27.
वाल्टर सटन द्वारा प्रस्तुत वंशागति के सिद्धांत का नाम लिखिए।
उत्तर:
‘ वंशागति का क्रोमोसोमवाद या सिद्धान्त’।

प्रश्न 28.
उत्परिवर्तजन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन रासायनिक और भौतिक कारकों द्वारा उत्परिवर्तन होता है, उन्हें उत्परिवर्तजन (म्यूटाजन) कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
दो माता-पिता श्री X व श्रीमती X तथा श्री Y व श्रीमती Y एक ही बच्चे को अपनी-अपनी सन्तान बताते हैं। श्री व श्रीमती X दोनों का ही रुधिर वर्ग A तथा श्री Y का रुधिर वर्ग O व श्रीमती Y का रुधिर वर्ग AB है। परन्तु बच्चे का रुधिर वर्ग O है । बताइए कि वह बच्चा किसका हो सकता है और क्यों?
उत्तर:
श्री व श्रीमती X का रुधिर वर्ग A होने पर उनकी सन्तान का रुधिर वर्ग A या O हो सकता है। इसी प्रकार श्री Y का रुधिर वर्ग O तथा श्रीमती Y का रुधिर वर्ग AB होने पर उनकी सन्तान का रुधिर वर्ग A या B होगा ।

माता-पिता का रुधिर वर्ग

 

सन्तान का रुधिर वर्ग
हो सकता हैनहीं हो सकता
1. श्री व श्रीमती X A×AA या OB, AB
2. श्री व श्रीमती O×ABA या BAB या O

क्योंकि बच्चे का रुधिर वर्ग O है अतः उपरोक्त परिणामानुसार बच्चा श्री व श्रीमती X का है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

प्रश्न 2.
सामान्य पुरुष तथा हीमोफीलिया से ग्रस्त स्त्री द्वारा हीमोफीलिया की वंशागति को बताइये ।
उत्तर:
जब एक सामान्य पुरुष किसी हीमोफिलिक स्त्री से विवाह करता है तो उसके सभी पुत्र हीमोफिलिक रोग से ग्रस्त होंगे तथा पुत्रियाँ हीमोफीलिया जीन की वाहक होंगी।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत 1

प्रश्न 3.
एक पुरुष का रुधिर वर्ग ‘A’ है तथा उसकी स्त्री का रुधिर वर्ग ‘O’ है। इनके बच्चे किस रुधिर वर्ग के नहीं होंगे? कारण सहित बताइये।
उत्तर:
पुरुष का रुधिर वर्ग ‘A’ है अतः जीनी संरचना = IAIA/IAIO स्त्री का रुधिर वर्ग -‘O’ है अतः जीनी संरचना = IoIo रुधिर वर्ग प्रदर्शित करने वाली तीन जीन Ia , Ib तथा Io होती हैं। इनमें से  Ia  व  Ib  सहप्रभावी (Co-dominant ), परन्तु Io दोनों का अप्रभावी होता है। इस प्रकार इनके दो क्रॉस सम्भव हैं-

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत 2

इस प्रकार शिशु का रुधिर वर्ग ‘A’ या ‘O’ सम्भव है। ‘A’ रुधिर वर्ग होने पर यह ‘B’ तथा ‘O’ वर्ग वाले व्यक्तियों के लिये हानिकारक होगा, परन्तु ‘O’ होने पर यह सार्विक दाता होगा। अतः यह किसी भी व्यक्ति को हानिकारक नहीं होगा।

प्रश्न 4.
दात्र कोशिका अरक्तता या सिकेल सेल रक्ताल्पता (Sickle Cell Anaemia) की वंशागति को समझाइये
उत्तर:
इस रोग की प्रकृति आनुवंशिक है जो एक अप्रभावी जीन (HbS) के कारण होती है। यह जीन आटोसोमल होती है तथा अपूर्ण प्रभावी जीन (HbA) के साथ होने पर अर्थात् विषमयुग्मजी (HbA HbS ) अवस्था में कम या आंशिक रूप से परन्तु समयुग्मजी ( HbSHbS) होने पर पूर्ण रोग उत्पन्न करती है। विषमयुग्मजी अवस्था वाला व्यक्ति कम थकान का कार्य करके सामान्य व्यक्ति के जैसे जीता है। किन्तु समयुग्मजी अप्रभावी (HbS HbS) जीन वाले व्यक्ति में सभी RBC पिचककर हंसिये की जैसे हो जाती हैं और वे व्यर्थ की हो जाती हैं, अन्ततः ऐसे रोगी की मृत्यु हो जाती है।

वंशागति को निम्न चित्र से समझाया गया है –
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प्रश्न 5
हीमोफीलिया की वंशागति को समझाइये
उत्तर:
प्रायः पुरुष ही हीमोफीलिया रोग से ग्रसित होते हैं, स्त्रियाँ इस रोग की वाहक होती हैं। इस रोग से ग्रसित पुरुष भी प्राय: बाल्यावस्था या यौवन से पूर्व ही मर जाते हैं। वाहक स्त्रियों के द्वारा ही सामान्यतः इस रोग की वंशानुगति होती है।
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प्रश्न 6.
सहलग्नता किसे कहते हैं? पक्षियों में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया समझाइए ।
उत्तर:
गुणसूत्र पर दो जीनों का भौतिक संयोग या जुड़े होने को मोरगन ने सहलग्नता बताया था। पक्षियों में लिंग गुणसूत्रों को Z व W गुणसूत्र कहा जाता है। इनमें मादा के अन्दर एक Z तथा एक W गुणसूत्र होता है जबकि नर में अलिंग गुणसूत्रों के अलावा Z-गुणसूत्र का एक जोड़ा होता है।
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प्रश्न 7.
सहप्रभाविता से क्या अभिप्राय है? मानव में रुधिर वर्ग का उदाहरण देकर सहप्रभाविता को समझाइए।
उत्तर:
जब प्रभावी व अप्रभावी दोनों एलील स्वतन्त्र रूप से अपनी अभिव्यक्ति प्रदर्शित करते हैं तो उसे सहप्रभाविता (codominance) कहते हैं अर्थात् इसमें F1 पीढ़ी दोनों जनकों से मिलती-जुलती है। इसका एक अच्छा उदाहरण मानवों में ABO रुधिर वर्गों का निर्धारण करने वाली विभिन्न प्रकार की लाल रुधिर कोशिकाएँ (RBC) हैं। ABO रुधिर वर्गों का नियंत्रण जीन ‘I’ करती है।

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RBC की प्लाज्मा झिल्ली में सतह से बाहर निकलते हुए शर्करा बहुलक होते हैं। इस बहुलक का प्रकार क्या होगा यहाँ इस बात का नियंत्रण जीन ‘I’ से होता है। इस जीन ‘I’ के तीन अलील IA IB और i होते हैं। अलील IA और अलील IB कुछ भिन्न प्रकार की शर्करा का उत्पादन करते हैं और अलील i किसी भी प्रकार की शर्करा का उत्पादन नहीं करती। मानव जीन (2n) द्विगुणित होता है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति में इन तीन में से दो प्रकार के जीन अलील होते हैं।

और IA तो के ऊपर पूर्णरूप से प्रभावी होते हैं अर्थात् जब IA और तो केवल IB अभिव्यक्त होता है और जब IB और विद्यमान हों तो केवल ” अभिव्यक्त होता है, तो शर्करा बनाता ही नहीं है। विद्यमान हों जब IA और IB दोनों उपस्थित हों तो ये दोनों अपने-अपने प्रकार की शर्करा की अभिव्यक्ति कर देते हैं। यह घटना ही सह प्रभाविता है। इसी कारण RBC में A और B दोनों प्रकारों की शर्करा होती है।

प्रश्न 8.
मानव में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर:
मानव में लिंग निर्धारण XY प्रकार का होता है। मानव में कुल 23 जोड़े अर्थात् 46 गुणसूत्र होते हैं। नर में 44 गुणसूत्र अलिंग गुणसूत्र (Autosomes ) होते हैं तथा दो लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome ) ‘X’ तथा ‘Y’ होते हैं। स्त्री या मादा में भी 44 गुणसूत्र ऑटोसोम (Autosomes) होते हैं तथा दो लिंग गुणसूत्र ‘X’ व ‘Y’ होते हैं। जब शुक्राणु बनते हैं तो 50% शुक्राणु 22+X गुणसूत्र वाले तथा शेष 50% शुक्राणु 22+Y गुणसूत्र वाले होते हैं।

जबकि स्त्री या मादा के सभी अण्डों में 22+X गुणसूत्र होते हैं। सन्तान मैं कितनो लड़कियाँ ताकि लड़के यह इस पर निर्भर करता है कि कौनसा शुक्राणु अण्ड से निषेचित करता है। मानव में नर बच्चे का होना ‘Y’ गुणसूत्र की उपस्थिति पर निर्भर करता है। एक शुक्राणु में केवल ‘X’ या ‘Y’ लिंग गुणसूत्र ही हो सकता है, अतः पिता का ‘X’ गुणसूत्र लड़कियों में तथा ‘Y गुणसूत्र लड़कों में मिलता है।
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निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
बहुविकल्पता या बहुगुण ऐलीलवाद ( Multiple Allelism) को मानव रुधिर वर्ग की सहायता से बताइये ।
उत्तर:
मेंडल के नियमों के अनुसार, परन्तु उसके आधारभूत कारक युग्म (Factor Pairs) के सिद्धान्त से हटकर बहुगुण ऐलीलंवाद पाया जाता है। इस प्रकार की वंशागति दो या दो से अधिक तुलनात्मक लक्षणों वाले जीन्स या एलील्स (Alleles) पर निर्भर करती है। मानव में रुधिर वर्गों की वंशागति बहु-विकल्पता का उदाहरण है।

मानव की आबादी में चार प्रकार के रुधिर वर्ग A, B, AB तथा 0 पाये जाते हैं। रुधिर वर्ग का वर्गीकरण इनमें पाये जाने वाले एन्टीजन (Antigen ) के आधार पर होता है। मानव के रुधिर प्लाजमा में इन प्रतिजनों के प्रति विशिष्ट प्रोटीन्स पाये जाते हैं, जिन्हें प्रतिरक्षी (Antibodies) कहते हैं।

रुधिर वर्ग (Blood Group)प्रतिजन (Antigen)प्रतिरक्षी (Antibodies)
AAAnti-B or ‘b’
BBAnti-A or ‘A’
ABA,Bअनुपस्थित
Oनहीं‘a’ और ‘b’

मानव में रुधिर वर्ग वंशानुगत लक्षण है एवं जनकों से संततियों में मेंडल के नियम के आधार पर वंशानुगत होते हैं। रुधिर वर्ग की वंशागति जनकों से प्राप्त होने वाले जीन्स पर निर्भर करती है। जीन्स जो मनुष्य में रुधिर वर्गों को नियंत्रित करते हैं उनकी संख्या दो के स्थान पर तीन होती है एवं मल्टीपल एलील्स (बहुविकल्पी) कहलाते हैं। अर्थात् दो से अधिक यानी तीन अलील एक ही लक्षण को नियंत्रित करते हैं।

ये सभी तीनों जीन या एलील्स समजात गुणसूत्र में एक ही लोकस (स्थान) पर पाये जाते हैं। एक व्यक्ति में इन तीनों जीनों में से एक साथ केवल दो जीन ही पाये जा सकते हैं, जो प्रकृति में दोनों समान या असमान हो सकते हैं। ये जीन्स ही संतति में रुधिर वर्ग / एन्टीजन्स के उत्पादन को नियंत्रित करते हैं।

जीन जो कि एन्टीजन A उत्पन्न करता है उसे IA से चिन्हित करते हैं, एन्टीजन B के लिये IB जीन एवं दोनों एन्टीजन की अनुपस्थिति के लिये I° जीन होती है। अक्षर I का प्रचलन एक लोकस पर जीन की उपस्थिति दिखाने के लिये आधारीय प्रतीक के रूप में किया जाता है (I = आइसोहीमएग्लूटीनोजन)। इस प्रकार मानव जनसंख्या में चार रुधिर वर्गों के लिये छः प्रकार के जीनोटाइप सम्भव हैं।

संतति का जीनोटाइपसंतति का रुधिर वर्ग
Ia IaA
Ia IoA
IbIbB
IbIoB
IaIbAB
IoIoO

इस आधार पर ABO रुधिर वर्गों की वंशागति का चित्रात्मक प्रदर्शन निम्न प्रकार किया जा सकता है-
(i) रुधिर वर्ग A के लिये समयुग्मजी पुरुष (IaIa) द्वारा O रुधिर वर्ग वाली स्त्री (या इसके विपरीत) से विवाह करने पर इनकी सन्तानों का रुधिर वर्ग A होगा ।
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सभी सन्तानें A रुधिर वर्ग के लिये विषमयुग्मजी हैं।

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(ii) रुधिर वर्ग B के लिये समयुग्मजी पुरुष द्वारा 0 रुधिर वर्ग की स्त्री ( या इसके विपरीत) से विवाह करने पर इनकी सन्तानों में रुधिर वर्ग B होगा ।
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सभी सन्तानें रुधिर वर्ग B के लिये विषमयुग्मजी होंगी।

(iii) A रुधिर वर्ग के लिये समयुग्मजी पुरुष द्वारा B रुधिर वर्ग की समयुग्मजी स्त्री से विवाह करने पर सन्तानें AB रुधिर वर्ग की होंगी ।
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सभी सन्तानें AB रुधिर वर्ग की होंगी।

(iv) AB रुधिर वर्ग वाले पुरुष द्वारा AB रुधिर वर्ग वाली स्त्री से विवाह करने पर 25% सन्तानें A रुधिर वर्ग की, 50% AB रुधिर वर्ग की तथा 25% सन्तानें B रुधिर वर्ग की होंगी।
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(v) विषमयुग्मजी A तथा B रुधिर वर्ग वाले स्त्री-पुरुषों से उत्पन्न सन्तानों में चारों प्रकार की सन्तानें 1:1:1:1 के अनुपात में उत्पन्न होने की सम्भावना है।
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(vi) यदि स्त्री व पुरुष के रुधिर वर्ग क्रमशः AB तथा O हैं तो उनकी सन्तानों में केवल A अथवा B रुधिर वर्ग की सम्भावना होती है।
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प्रश्न 2.
अपूर्ण प्रभाविता क्या है? श्वान पुष्प नामक पौधे में अपूर्ण प्रभाविता को चैकर बोर्ड द्वारा समझाइए । फीनोटाइप व जीनोटाइप अनुपात भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance)-
मेंडल ने मटर पर प्रयोग कर प्रभावी व अप्रभावी लक्षणों के विषय में बताकर प्रभाविता का नियम भी दिया। किन्तु इसी प्रकार के प्रयोग कुछ अन्य पादपों में करने पर यह देखा कि F1 में जो लक्षण उत्पन्न होता है वह किसी भी जनक से नहीं मिलता है, वस्तुतः प्रकट होने वाला लक्षण दोनों जनकों के मध्य का होता है। अतः यहाँ प्रभावित का नियम लागू नहीं होता, वरन् यह मेंडल के नियमों का अपवाद है। इसे अपूर्ण प्रभावित कहते हैं।

श्वान पुष्प या एंटीराइनम (Snap dragon or antirrhinum majus) में जब शुद्ध लाल पुष्प वाली (RR) और शुद्ध सफेद पुष्य (rr) वाली प्रजाति के बीच क्रॉस करवाया गया तो F1 में गुलाबी पुष्पों (Rr) वाली संतति प्राप्त हुई। जब F1 संतति को स्व-परागित किया गया तो परिणामों का अनुपात 1(RR) लाल : 2(Rr) गुलाबी (rr) सफेद था।

यहाँ जीनोटाइप अनुपात तो मेंडलीय एकसंकरण की (1 : 2 : 1) जैसे ही है परन्तु फीनोटाइप अनुपात 3: 1 के स्थान पर 1: 2: 1 हो जाता है। यहाँ R कारक पूर्ण रूप से r पर प्रभावी न होकर अपूर्ण प्रभावी होता है (चित्र 5.5)। गुलावास पादप (Mirabillus jalapa or 4 ‘o’ clock plant) में भी अपूर्ण प्रभाविता पाई जाती है।

प्रभाविता नामक संकल्पना का स्पष्टीकरण-जैसा ज्ञात है कि प्रत्येक जीन में विषेष लक्षण को अभिव्यक्त (Experss) करने की क्षमता होती है। द्विगुणित जीव में प्रत्येक लक्षण को नियंत्रित करने वाली जीन के दो प्रारूप विद्यमान होते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि जीन के दोनों प्रारूप सदैव एक जैसे हों। इनमें से कभी-कभी भिन्नता के कारण परिवर्तन आ जाता है।

उदाहरण के लिये एक ऐसी जीन जिसमें एक विशेष एन्जाइम को उत्पन्न करने की सूचना है। इस जीन के दोनों प्रतिरूप इसके दो अलील रूप हैं। मान लेते हैं कि सामान्य अलील ऐसा एन्जाइम उत्पन्न करता है जो एक सबस्ट्रेट ‘S’ के रूपान्तरण के लिये जरूरी है। रूपान्तरित अलील निम्न में से किसी एक परिवर्तन हेतु उत्तरदायी हो सकता है-

  • सामान्य एन्जाइम या
  • कार्य अक्षम एंजाइम निर्मित करना या
  • एन्जाइम अनुपस्थित होना।

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प्रथम परिवर्तन में रूपान्तरित अलील ठीक अरूपांतरित अलील की जैसे कार्य कर रहा है अर्थात् यह सबस्ट्रेट ‘S’ को बदलकर वही फीनोटाइप (जो होना चाहिए) का उत्पादन करेगा। परन्तु जब अलील किसी भी प्रकार के एन्जाइम का उत्पादन नहीं करता या अक्षम एन्जाइम का उत्पादन करता है तो फीनोटाइप प्रभावित हो सकता है।

वस्तुत: फीनोटाइप अरूपान्तरित अलील के कार्य पर निर्भर होता है। सामान्यत: अरूपान्तरित अलील प्रभावी व रूपान्तरित अलील अप्रभावी होता है। अतः इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि अप्रभावी अलील के उपस्थित होने पर या तो एन्जाइम बनता ही नहीं है या फिर कार्य अक्षम होता है।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. मेंडल ने स्वतंत्र रूप से प्रजनन करने वाली मटर के पौधे की कितनी किस्मों को युग्मों के रूप में चुना जो विपरीत विशेषकों वाले एक लक्षण के अलावा एक समान थीं? (NEET-2020)
(अ) 2
(ब) 14
(स) 8
(द) 4
उत्तर:
(ब) 14

2. सही मिलान का चयन करो- (NEET-2020)
(अ) फेनिलकीटोन्यूरिया – अलिग क्रोमोसोम प्रभावी लक्षण
(ब) दात्र कोशिका अरक्तता – अलिग क्रोमोसोम अप्रभावी लक्षण, क्रोमोसोम- 11
(स) थैलेसीमिया – X संलग्न
(द) हीमोफीलिया – Y संलग्न
उत्तर:
(ब) दात्र कोशिका अरक्तता – अलिग क्रोमोसोम अप्रभावी लक्षण, क्रोमोसोम – 11

3. वंशागति के गुणसूत्र सिद्धान्त का प्रायोगिक प्रमाण किसने किया था? (NEET-2020)
(अ) सटन
(ब) बोवेरी
(स) मार्गन
(द) मेंडल
उत्तर:
(स) मार्गन

4. वह आनुवंशिक विकार कौन है, जिसमें एक व्यक्ति में मुख्यतः पौरुष विकास होता है, मादा लक्षण होते हैं और बांझ होता है – (NEET-2019)
(अ) डाउन सिन्ड्रोम
(ब) टर्नर सिन्ड्रोम
(स) क्लाइनफेल्टर सिन्ड्रोम
(द) एडवर्ड सिन्ड्रोम
उत्तर:
(स) क्लाइनफेल्टर सिन्ड्रोम

5. जीनों के बीच की दूरी के मापन के रूप में ही गुणसूत्र पर जीन युग्मों के बीच पुनर्योगजन की आवृति की व्याख्या किसके द्वारा की गई थी? (NEET-2019)
(अ) सटन बोवेरी
(ब) टी.एच. मार्गन
(स) ग्रेगर जे मेण्डल
(द) अलफ्रेड स्टुअर्टवेन्ट
उत्तर:
(द) अलफ्रेड स्टुअर्टवेन्ट

6. एंटीराइनम (स्नैपड्रेगन) में एक लाल पुष्प को श्वेत पुष्प के साथ प्रजनन किया तब F1 में गुलाबी पुष्प प्राप्त हुए। जब गुलाबी पुष्पों को स्वपरागित किया गया तब F2 में श्वेत, लाल और गुलाबी पुष्प प्रास हुए। निम्नलिखित में से गलत कथन का चयन कीजिए- (NEET-2019)
(अ) इस प्रयोग में पृथक्करण का नियम लागू नहीं होता
(ब) यह प्रयोग प्रभाविता के सिद्धान्त का अनुसरण नहीं करता
(स) F1 में गुलाबी रंग, अपूर्ण प्रभाविता के कारण आया।
(द) F2 का अनुपात 14 (लाल), 24 (गुलाबी), 14 (श्वेत) है।
उत्तर:
(स) F1 में गुलाबी रंग, अपूर्ण प्रभाविता के कारण आया।

7. निम्नलिखित में से कौनसा युग्म गलत रूप में सुमेलित किया गया है- (NEET-2018)
(अ) XO प्रकार लिंग निर्धारण : टिड्डा
(ब) ABO रक्त समूहन : सहप्रभाविता
(स) मटर में मंड संश्लेषण : बहुविकल्पी
(द) टी.एच. मार्गन : सहलग्नता
उत्तर:
(स) मटर में मंड संश्लेषण : बहुविकल्पी

8. एक स्त्री के एक X- गुणसूत्र में X- संलग्न अवस्था है। यह गुणसूत्र किनमें वंशागत होगा? (NEET-2018)
(अ) केवल पोता-पोतियों/नाती-नातियों में
(ब) केवल पुत्रों में
(स) केवल पुत्रियों में
(द) पुत्रों व पुत्रियों दोनों में
उत्तर:
(द) पुत्रों व पुत्रियों दोनों में

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

9. निम्नलिखित अभिलक्षणों में से कौनसे मनुष्य में रुधिर वर्गों की वंशागति को दर्शाते हैं- (NEET-2018)
(i) प्रभाविता
(ii) सहप्रभाविता
(iii) बहु अलील
(iv) अपूर्ण प्रभाविता
(v) बहुजीनी वंशागति

(अ) (ii), (iv) एवं (v)
(ब) (i), (ii) एवं (iii)
(स) (ii), (ii) एवं (v)
(द) (i), (iii) एवं (v)
उत्तर:
(ब) (i), (ii) एवं (iii)

10. यदि पति एवं पति का जीनोटाइप IAIB एवं IAi है। इनके बच्चों का रुधिर वर्गों में कितने जीनोटाइप एवं फीनोटाइप संभव है-
(NEET-2017)
(अ) 3 जीनोटाइप, 3 फीनोटाइप
(ब) 3 जीनोटाइप, 4 फीनोटाइप
(स) 4 जीनोटाइप, 3 फीनोटाइप
(द) 4 जीनोटाइप, 4 फीनोटाइप
उत्तर:
(स) 4 जीनोटाइप, 3 फीनोटाइप

11. एक रोग, जो अलिंगसूत्र प्राथमिक अवियोजन के कारण होता है, कौनसा है? (NEET-2017)
(अ) डाठन सिन्ड्रोम
(ब) क्लाइनफेल्टर सिन्ड्रोम
(स) टर्नर सिन्ड्रोम
(द) दात्र कोशिका अरक्तता
उत्तर:
(अ) डाठन सिन्ड्रोम

12. निम्नलिखित में से मटर के कौनसे लक्षण पर मेंडल द्वारा अपने प्रयोगों में विचार नहीं गया था? (NEET-2017)
(अ) तना – लम्बा या बौना
(ब) त्वचारोम – ग्रंथिल या ग्रंधिल रहित
(स) बीज – हरा या पीला
(द) फली – फूली हुई या संकुचित
उत्तर:
(ब) त्वचारोम – ग्रंथिल या ग्रंधिल रहित

13. एक वर्णांध पुरुष एक ऐसी स्त्री से विवाह करता है जो सामान्य रंग दृष्टि के लिए समयुग्मजी है। उनके पुत्र के वर्णांध होने की संभावना क्या होगी? (NEET II-2016)
(अ) 0.75
(ब) 1
(स) 0
(द) 0.5
उत्तर:
(स) 0

14. कॉलम-I के शब्दों को कॉलम-II में दिए गए उनके वर्णन से मिलान कीजिए तथा सही विकल्प चुनिए- (NEET-2016)

कॉलम-Iकॉलम-II
1. प्रभाविता(i) अनेक जीन एकल लक्षण का नियंत्रण करते हैं।
2. सहप्रभाविता(ii) विषमयुग्मजी जीव में केवल एक ही अलील स्वयं को अभिव्यक्त करता है।
3. बहुप्रभाविता(iii) विषमयुग्मजी जीव में दोनों ही अलील स्वयं को पूरी तरह अभिव्यक्त करते हैं।
4. बहुजीनी वंशागति(iv) एकल जीन अनेक लक्षणों को प्रभावित करता है।
विकल्प :1234
(अ)(iv)(i)(ii)(iii)
(ब)(iv)(iii)(i)(ii)
(स)(ii)(i)(iv)(iii)
(द)(ii)(iii)(iv)(i)

उत्तर:

(द)(ii)(iii)(iv)(i)

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15. यदि दोनों ही जनक थैलेसीमिया, जो एक अलिंगसूत्री अप्रभावी विकार हैं, के लिए वाहक हैं तो गर्भधारण करने की क्या संभावनाएँ हैं जिसके फलस्वरूप प्रभावित बच्वा पैदा होगा- (NEET-2013)
(अ) कोई संभावना नहीं
(ब) 50%
(स) 25%
(द) 100%
उत्तर:
(स) 25%

16. ऐसे प्रसंकरण के द्वारा कौनसे मेंडलीय विचार प्रदर्शित होता है है जिसमें F1 पीढ़ी दोनों ही जनकों में मिलती है? (NEET-2013)
(अ) अपूर्ण प्रभाविता
(ब) प्रभाविता का नियम
(स) एक जीन की वंशागति
(द) सहप्रभाविता
उत्तर:
(द) सहप्रभाविता

17. एक मेंडलीय संकरण में, F2 पीढ़ी में पाया गया कि जीनी प्रारूपी तथा लक्षण प्रारूपी दोनों अनुपात एक समान 1: 2: 1 है, यह मामला क्या दर्शाता है ? (NEET-2012)
(अ) सह प्रभाविकता
(ब) द्विसंकर संकरण
(स) सम्पूर्ण प्रभाविकता वाला एक संकर संकरण
(द) अपूर्ण प्रभाविकता वाला एक संकर संकरण।
उत्तर:
(द) अपूर्ण प्रभाविकता वाला एक संकर संकरण।

18. मानव वंशावली विश्लेषण में निम्नलिखित में से कौनसा प्रतीक एवं जिस सूचना को प्रदर्शित करता है, सही मिलाया गया है- (NEET-2010)
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उत्तर:
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19. निम्नलिखित में से कौनसा एक लक्षण बहुजीनीय वंशागति का उदाहरण है- (NEET-2006)
(अ) मिरैविलिस जलापा में फूल का रंग
(ब) नर मधुमक्खी का उत्पादन
(स) उद्यान मटर में फलों की आकृति
(द) मानवों में त्वचा का रंग
उत्तर:
(द) मानवों में त्वचा का रंग

20. क्लाइनेफेल्टर्स सिन्ड्रोम में लिंग गुणसूत्र संघटक होते हैं- (BHU-2006)
(अ) 22 A+XXY
(ब) 22 A+XO
(स) 22 A+XY
(द) 22 A+XX
उत्तर:
(अ) 22 A+XXY

21. एक परिवार में पाँच पुत्रियाँ हैं तथा पुत्र नहीं हैं। छ्ठे बच्चे के लिए पुत्र की क्या सम्भावना होगी- (AFMC, 2000; CPMT-2005)
(अ) 50%
(ब) 75%
(स) पूर्ण
(द) कोई भी नहीं
उत्तर:
(अ) 50%

22. नीचे दिए जा रहे एक वंशावली चार्ट में एक खास लिंग-सहलग विशेषक (Trait) की वंशावली दर्शायी गयी है- (AIIMS-2005)
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत 14

ऊपर दिए गए वंशावली चार्ट के अध्ययन पश्चात् विशेषक कैसा है-
(अ) प्रभावी X- सहलग्न
(ब) अप्रभावी X- सहलग्न
(स) प्रभावी Y – सहलग्न
(द) अप्रभाव Y- सहलग्न
उत्तर:
(अ) प्रभावी X- सहलग्न

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[हल-पुरुषों में अप्रभावी जीन एकल X – सहलग्न प्रभावी जीन को फीनोटिपिकिली प्रदर्शित करती है जबकि महिला में लिंग से सम्बन्धित एकल क्रीनोटिपिकिल लक्षणों को निर्धारित करने के लिए दो X- सहलग्न जीनों की आवश्यकता होती है। अप्रभावी X – सहलग्न जीन्स में विशिष्ट क्रिस क्रॉस वंशागति पायी जाती है ।

23. एलील्स का निर्माण होता है- (MP. PMT-2005; Haryana PMT-2005)
(अ) जीन
(ब) गुणसूत्र
(स) DNA
(द) कोई नहीं
उत्तर:
(अ) जीन

24. मेंडल के नियम निम्न में से किसके लिए मान्य हैं- (MP PMT-2005)
(अ) अलैंगिक प्रजनन
(ब) लैंगिक प्रजनन
(स) कायिक प्रजनन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ब) लैंगिक प्रजनन

25. मेंडल का पृथक्करण का नियम लागू होता है- (Wardha-2005)
(अ) केवल द्विसंकर क्रॉस के लिए
(ब) केवल एकसंकर क्रॉस के लिए
(स) दोनों द्विसंकर और एकसंकर क्रॉस के लिए
(द) द्विसंकर के लिए परन्तु एकसंकर के लिए नहीं।
उत्तर:
(स) दोनों द्विसंकर और एकसंकर क्रॉस के लिए

26. वंशानुगति की कार्यिकी इकाई होती है- (Haryana PMT-2005)
(अ) सिस्ट्रॉन
(ब) जीन
(स) इन्ट्रॉन
(द) गुणसूत्र
उत्तर:
(ब) जीन

27. निम्न में से कौन-सा रक्त समूह $\mathrm{A}$ रक्त समूह वालों को स्थानान्तरित किया जा सकता है? (MP PMT-2005)
(अ) A तथा O
(ब) AB तथा O
(स) AB
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) A तथा O

28. ABO रक्त समूह का प्रतिपादक है- (BCECE-2005)
(अ) वीनर
(ब) लेविन
(स) फिशर
(द) लैण्डस्टीनर
उत्तर:
(द) लैण्डस्टीनर

29. गुणसत्र की 2 n-1 अवस्था होती है- (BHU-2005)
(अ) मोनोसोमी (Monosomy)
(ब) नलीसोमी (Nullisomy)
(स) ट्राइसोमी (Trisomy)
(द) टेट्रासोमी (Tetrasomy)
उत्तर:
(अ) मोनोसोमी (Monosomy)

30. वह अमीनो अम्ल जो कि सिकल सेल एनीमिया में प्रतिस्थापित हो जाता है- (Kerala CET-2004, 05)
(अ) वेलीन के लिए ग्लूटामिक अम्ल, α शृंखला में
(ब) वेलीन के लिए ग्लूटामिक अम्ल, β श्रृंखला में
(स) ग्लूटेमिक अम्ल के लिए वेलीन, α श्रृंखला में
(द) ग्लूटेमिक अम्ल के लिए वेलीन, β शृंखला में
उत्तर:
(द) ग्लूटेमिक अम्ल के लिए वेलीन, β शृंखला में

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

31. मेंडल के मोनोहाइब्रिड (Monohybrid) क्रॉस का जीनोटिपिक अनुपात होता है- (MP PMT, 2005)
(अ) 1: 3
(ब) 3: 1
(स) 1: 2: 1
(द) 1: 1: 1: 1
उत्तर:
(स) 1: 2: 1

32. नर में लिंग सहलग्न लक्षण किसके द्वारा स्थानान्तरित होते हैं? (MP PMT-2004)
(अ) Y-गुणसूत्र
(ब) ऑटोसोम्स
(स) X- गुणसूत्र
(द) X व Y तथा ऑटोसोम्स
उत्तर:
(स) X- गुणसूत्र

[नोट-क्योंकि नर में केवल एक X गुणसूत्र होता है तथा Y गुणसूत्र बिना एलील के होता है। इसलिए नर में एकल अप्रभावी एलील अपना प्रभाव दिखाते हैं ]

33. यदि AA और aa के बीच क्रॉस कराया जाए तो F1 संतति का स्वभाव होगा (CPMT-2004)
(अ) जीनोटिपिकली AA, फीनोटिपिकली a
(ब) जीनोटिपिकली Aa, फीनोटिपिकली a
(स) जीनोटिपिकली Aa, फीनोटिपिकली A
(द) जीनोटिपिकली aa, फीनोटिपिकली A
उत्तर:
(ब) जीनोटिपिकली Aa, फीनोटिपिकली a

34. टर्नर सिन्ड्रोम किसका उदाहरण है- (Kerala PMT 2004)
(अ) मोनोसोमी
(स) ट्राईसोमी
(ब) बाई सोमी
(द) पोलीयनाइडी
उत्तर:
(अ) मोनोसोमी

35. ड्रोसोफिला मेलेनोगेस्टर में लिंग निर्धारण आधारित होता है- (AIEEE-2004)
(अ) XY गुणसूत्र की क्रियाविधि
(ब) ऑटोसोम्स और X गुणसूत्र के बीच आनुवंशिक संतुलन
(स) गुणसूत्र वातावरण की पारस्परिक क्रिया
(द) स्यूडोएलील्स
उत्तर:
(ब) ऑटोसोम्स और X गुणसूत्र के बीच आनुवंशिक संतुलन

36. डाउन सिन्ड्रोम की आवृत्ति में वृद्धि होती है, जब माता की आयु (Orissa JEE-2004)
(अ) 35 वर्ष से अधिक होती है।
(ब) 35 वर्ष से कम होती है
(स) प्रथम गर्भावस्था के समय
(द) तीन बच्चों की माता में
उत्तर:
(अ) 35 वर्ष से अधिक होती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

[ नोट- यह 1/700 जन्म लेने वाले बच्चों में पाया जाता है। इसमें महिला की उम्र 25 वर्ष या इससे कम होती है। इसकी आवृति उम्र के समय बढ़ती है। यह 40 वर्ष की महिला के लिए 1/100 तथा 45 वर्ष की महिला के लिए 1/10 होती है।]

37. गायनेकोमेस्टिया (Gynacomastia) लक्षण है- (KCET-2004)
(अ) क्लाइनफेल्टर्स सिन्ड्रोम का
(ब) टर्नर्स सिन्ड्रोम का
(स) सार्स का
(द) डाउन्स सिन्ड्रोम का
उत्तर:
(अ) क्लाइनफेल्टर्स सिन्ड्रोम का

38. मनुष्य के लिए X गुणसूत्र पर स्थित अप्रभावी जीन सदैव- (CBSE PMT 2004 )
(अ) नर में अभिव्यक्त होते हैं
(ब) मादा में अभिव्यक्त होते हैं।
(स) घातक होते हैं
(द) अर्ध घातक होते हैं
उत्तर:
(अ) नर में अभिव्यक्त होते हैं

39. पाइसम सटाइवम में सहलग्न समूहों की संख्या क्या है- (BVP-2004)
(अ) 2
(ब) 5
(स) 7
(द) 9
उत्तर:
(स) 7

[ नोट उद्यान मटर के पौधों में गुणसूत्र के 7 जोड़े होते हैं और समान संख्या में सहलग्न समूह होते हैं ।

40. एक पुरुष जिसका रक्त समूह B है A रक्त समूह वाली महिला से विवाह करता है और उसकी पहली संतान का रक्त समूह B है तो उसकी संतान का जीनोटाइप क्या होगा- (CPMT 2004)
(अ) IaIb
(ब) IaIo
(स) IbIo
(द) IbIb
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत 15

उत्तर:
(स) IbIo

41. एक पौधे में लाल रंग का फल (R) पीले रंग के फल (r) पर प्रभावी है तथा लम्बापन (T) बौनेपन (t) पर प्रभावी है। यदि RRTt जीनोटाइप के पौधे का क्रॉस rrtt वाले पौधे से कराते हैं, तब- (CBSE PMT 2004)
(अ) 75% लाल फल वाले लम्बे पौधे होंगे।
(ब) सभी सन्तति पौधे लाल फल वाले एवं लम्बे होंगे।
(स) 25% लाल फल वाले लम्बे पौधे होंगे।
(द) 50% लाल फल वाले लम्बे पौधे होंगे।
उत्तर:
(द) 50% लाल फल वाले लम्बे पौधे होंगे।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

42. सर्वत्र आदाता (Recipient ) का रक्त वर्ग कौन-सा है- (MP. PMT 2003)
(अ) AB
(स) B
(ब) A
(द) O
उत्तर:
(अ) AB

43. एक समयुग्मज अप्रभावी एवं विषमयुग्मज पौधों के बीच संकरण कहलाता है- (MHCET 2003)
(अ) एकसंकर संकरण
(ब) द्विसंकर संकरण
(स) परीक्षण क्रॉस
(द) पश्च क्रॉस
उत्तर:
(स) परीक्षण क्रॉस

44. एक टेस्ट क्रॉस में 1 : 1 फीनोटाइपिक अनुपात क्या प्रदर्शित करता है- (AIEEE 2003)
(अ) एलील्स सहप्रभावी हैं
(ब) जनक के प्रभावी फीनोटाइप हेटेरोजायगस थे
(स) एलील्स का स्वतन्त्र पृथक्करण होता है।
(द) एलील्स प्रभावी हैं।
उत्तर:
(ब) जनक के प्रभावी फीनोटाइप हेटेरोजायगस थे

45. मेंडल का प्रथम नियम है- (CPMT 2003)
(अ) वंशागति का नियम
(ब) विभिन्नता का नियम
(स) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम
(द) पृथक्करण का नियम
उत्तर:
(द) पृथक्करण का नियम

46. मेंडल ने मटर के पौधे का चयन किया क्योंकि- (BVP 2003)
(अ) ये सस्ते थे
(ब) उनमें सात जोड़े विपरीत प्रकार के लक्षण उपस्थित थे
(स) वे आसानी से मिल जाते थे
(द) वे अधिक आर्थिक महत्त्व के थे।
उत्तर:
(ब) उनमें सात जोड़े विपरीत प्रकार के लक्षण उपस्थित थे

47. मेंडल के नियम का अपवाद है – (PB PMT 2000; RPMT 2002)
(अ) स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम
(ब) पृथक्करण का नियम
(स) प्रभाविता का नियम
(द) सहलग्नता का नियम
उत्तर:
(द) सहलग्नता का नियम

48. यदि एक लाल पुष्प वाले समयुग्मजी पौधे का क्रॉस एक सफेद पुष्प वाले समयुग्मजी पौधे से कराया जाये तो संतति उत्पन्न होगी – ( AIIMS, 2002)
(अ) आधी लाल पुष्प वाली
(ब) आधी सफेद पुष्प वाली
(स) पूरी लाल पुष्प वाली
(द) आधी गुलाबी पुष्प वाली
उत्तर:
(स) पूरी लाल पुष्प वाली

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

49. मेंडल का स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम किस पर लागू होता है- (Orissa PMT 2002)
(अ) सभी जीवों में सभी जीन्स पर
(ब) केवल मटर के सभी जीन्स पर
(स) सभी सहलग्न जीन्स पर
(द) केवल सभी असहलग्न जीन्स पर
उत्तर:
(द) केवल सभी असहलग्न जीन्स पर

[नोट- जो स्वतन्त्र रूप से संचरण करते हैं, जीन्स से सहलग्न नहीं होते।]

50. लैंगिक जनन बढ़ाता है- (CPMT 2002)
(अ) आनुवंशिक पुनसंयोजन
(ब) बहुगुणिता
(स) एन्यूप्लॉइडी (Anueploidy)
(द) यूप्लॉइडी (Euploidy)
उत्तर:
(अ) आनुवंशिक पुनसंयोजन

51. जब कोई जीन एक से अधिक रूपों में उपस्थित रहता है तो विभिन्न रूपों को कहते हैं- (CPMT 2002)
(अ) विषमयुग्मजी
(ब) पूरक जीन
(स) समजीनी ( Genotype)
(द) युग्मविकल्पी (Alleles)
उत्तर:
(द) युग्मविकल्पी (Alleles)

52. मेंडल के अनुसार निम्न में से कौन-सा प्रभावी लक्षण है- (AFMC 2000)
(अ) बौना पौधा व पीला फल
(ब) शीर्षस्थ फल व झुर्रीदार बीज
(स) सफेद बीजचोल व पीला पेरीकार्य
(द) हरा फल व गोल बीज
उत्तर:
(द) हरा फल व गोल बीज

[हल मेंडल के अनुसार फली का पीला रंग और झुर्रीदार बीज अप्रभावी लक्षण होते हैं।]

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 5 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत

53. पुरुषों में गुणसूत्र की स्थिति होती है- (JIPMER 2000)
(अ) 44 AA+XO
(स) 44 AA+XY
(ब) 44 AA+XX
(द) 44 AA+XXY
उत्तर:
(द) 44 AA+XXY

54. सहलग्नता का सर्वप्रथम अवलोकन किस पौधे में किया गया है- (AFMC 2000)
(अ) फील्ड मटर
(ब) घास मटर
(स) मीठी मटर
(द) मटर
उत्तर:
(स) मीठी मटर

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HBSE 12th Class Economics Solutions Haryana Board

Haryana Board HBSE 12th Class Economics Solutions

HBSE 12th Class Economics Solutions in Hindi Medium

HBSE 12th Class Economics Part 1 Microeconomics (व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (भाग-1))

HBSE 12th Class Economics Part 2 Macroeconomics (समष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय (भाग-2))

HBSE 12th Class Economics Solutions in English Medium

HBSE 12th Class Economics Part 1 Microeconomics

  • Chapter 1 Micro Economics: An Introduction
  • Chapter 2 Theory of Consumer Behaviour
  • Chapter 3 Production and Costs
  • Chapter 4 Theory of the Firm Under Perfect Competition
  • Chapter 5 Market Equilibrium
  • Chapter 6 Non-Competitive Markets

HBSE 12th Class Economics Part 2 Macroeconomics

  • Chapter 1 Macro Economics: An Introduction
  • Chapter 2 National Income Accounting
  • Chapter 3 Money and Banking
  • Chapter 4 Determination of Income and Employment
  • Chapter 5 Government Budget and The Economy
  • Chapter 6 Open Economy: Macro Economics

HBSE 12th Class Economics Question Paper Design

Class: 12th
Subject: Economics
Paper: Annual or Supplementary
Marks: 80
Time: 3 Hours

1. Weightage to Objectives:

ObjectiveKUASTotal
Percentage of Marks504055100
Marks40324480

2. Weightage to Form of Questions:

Forms of QuestionsESAVSAO/MapTotal
No. of Questions387119
Marks Allotted1832141680
Estimated Time47703924180

3. Weightage to Content:

Units/Sub-UnitsMarks
1. विषय प्रवेश (व्यष्टि अर्थशास्त्र भाग-1)4
2. उपभोक्ता का व्यवहार और मांगें10
3. उत्पादक का व्यवहार और आपूर्ति6
4. बाजार संरचना के विभिन्न प्रतिमान और कीमत निर्धारण10
5. प्रतिस्पर्धा रहित बाजार10
6. विषय प्रवेश (समष्टि अर्थशास्त्र भाग-2)4
7. राष्ट्रीय आय और संबंधित समुच्चय10
8. आय और रोजगार का निर्धारण5
9. मुद्रा और बैंक व्यवस्था8
10. सरकारी बजट और अर्थव्यवस्था7
11. भुगतान शेष6
Total80

4. Scheme of Sections:

5. Scheme of Options: Internal Choice in Long Answer Question i.e. Essay Type in two questions.

6. Difficulty Level:
Difficult: 10% Marks
Average: 50% Marks
Easy: 40% Marks

Abbreviations: K (Knowledge), U (Understanding), A (Application), S (Skill), E (Essay Type), SA (Short Answer Type), VSA (Very Short Answer Type), O (Objective Type)

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