HBSE 12th Class Biology Solutions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Solutions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Solutions Chapter 4 जनन स्वास्थ्य

प्रश्न 1.
समाज में जनन स्वास्थ्य के महत्व के बारे में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर:
समाज में जनन स्वास्थ्य के महत्व के बारे में मेरे विचार निम्न हैं-जनन स्वास्थ्य का तात्पर्य जनन के सभी पहलुओं जैसे शारीरिक, भावनात्मक, व्यावहारिक तथा सामाजिक स्वास्थ्य से है दुनिया / संसार में भारत पहला ऐसा देश है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जननात्मक स्वस्थ समाज को प्राप्त करने की कार्य-योजनाएँ बनाई हैं। इन कार्यक्रमों को परिवार कल्याण के नाम से जाना जाता है। इनकी शुरुआत 1951 में परिवार नियोजन से हुई थी। जनन संबंधित और आवधिक क्षेत्रों को इसमें सम्मिलित करते हुए बहुत उन्नत व व्यापक कार्यक्रम फिलहाल जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (Reproductive and Child Health Care) के नाम से प्रसिद्ध है। इन कार्यक्रमों के तहत जनन संबंधी विभिन्न पहलुओं के बारे में लोगों में जागरूकता उत्पन्न करते हुए और जननात्मक रूप से स्वस्थ समाज तैयार करने के लिए अनेक सुविधाएँ एवं प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

प्रश्न 2.
जनन स्वास्थ्य के उन पहलुओं को सुझाएँ, जिन पर आज के परिदृश्य में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उत्तर:
आज हमें अनियन्त्रित जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओं तथा सामाजिक उत्पीड़नों जैसे कि यौन दुरुपयोग एवं यौन सम्बन्धी अपराधों आदि के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है ताकि लोग इन्हें रोकने एवं जननात्मक रूप से जिम्मेदार एवं सामाजिक रूप से स्वस्थ समाज तैयार करने में विचार करें और आवश्यक कदम उठाएँ। लोगों को जनन संबंधी समस्याओं जैसे कि सगर्भता (Pregnancy), प्रसव ( Delivery), यौन संचारित रोगों (STDs), गर्भपात (Abortions), गर्भनिरोधकों (Contraception), ऋतुस्राव (Menstrual ) संबंधी समस्याओं, बंध्यता/बांझपन ( Infertility) आदि के बारे में चिकित्सा सहायता एवं देखभाल उपलब्ध कराना आवश्यक है। समय-समय पर अच्छी तकनीकों और नई कार्य नीतियों को क्रियान्वित करने की भी आवश्यकता है ताकि लोगों की अधिक सुचारु रूप से देखभाल और सहायता की जा सके। बढ़ती मादा भ्रूण हत्या पर कानूनी रोक तथा लिंग परीक्षण (Amniocentesis) आदि पर वैधानिक प्रतिबंध लगाना जरूरी है। बाल प्रतिरक्षीकरण (टीका) आदि कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

प्रश्न 3.
क्या विद्यालयों में यौन शिक्षा आवश्यक है? यदि हाँ, तो क्यों ?
उत्तर:
हाँ, विद्यालयों में यौन शिक्षा आवश्यक है । क्योंकि छात्र / छात्राओं को यौन सम्बन्धी विभिन्न पहलुओं के बारे में फैली हुई भ्रान्तियों एवं यौन संबंधी गलत धारणाओं से छुटकारा मिल सके। बच्चों को जनन अंगों, किशोरावस्था एवं उससे संबंधित परिवर्तनों, सुरक्षित और स्वच्छ यौन क्रियाओं, यौन संचारित रोगों एवं एड्स के बारे में जानकारी विशेष रूप से किशोर आयु वर्ग में जनन संबंधी स्वस्थ जीवन बिताने में सहायक होती है।

प्रश्न 4.
क्या आप जानते हैं कि पिछले 50 वर्षों के दौरान हमारे देश के जनन स्वास्थ्य में सुधार हुआ है? यदि हाँ, तो इस प्रकार के सुधार वाले कुछ क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हमारे देश में सन् 1951 में जनन स्वास्थ्य को एक लक्ष्य के रूप में प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय कार्य-योजना और कार्यक्रमों की शुरुआत हुई थी। पिछले दशकों में समय-समय पर इनका आवधिक मूल्यांकन भी किया गया। जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (Reproductive and Child Health Care) के नाम से प्रसिद्ध है। श्रव्य तथा दृश्य (Audio Visual) और मुद्रित सामग्री की सहायता से सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठन जनता के बीच जनन संबंधी पहलुओं के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न उपाय कर रहे हैं।

इन सबके परिणामस्वरूप यौन संबंधित मामलों के बारे में बेहतर जागरूकता, अधिकाधिक संख्या में चिकित्सा सहायता प्राप्त प्रसव तथा बेहतर प्रसवोत्तर देखभाल से मातृ एवं शिशु मृत्युदर में गिरावट आई है। लघु परिवार वाले जोड़ों की संख्या बढ़ी है। यौन संचारित रोगों (Sexually Transmitted Diseases – STDs) की सही जाँच- पड़ताल तथा देखभाल और कुल मिलाकर सभी यौन समस्याओं हेतु बढ़ी हुई चिकित्सा सुविधाओं का होना आदि समाज के बेहतर जनन स्वास्थ्य की ओर संकेत देते हैं।

प्रश्न 5.
जनसंख्या विस्फोट के कौनसे कारण हैं?
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट (Population Explosion) के निम्न कारण हैं –
1. जनन आयु के लोगों की संख्या में वृद्धि होना।
2. मृत्युदर में तीव्र गिरावट।
3. मातृ मृत्युदर (Maternal mortality rate) एवं शिशु मृत्युदर (Infant mortality rate) में कमी।
4. महिलाओं का अशिक्षित होना ।
5. परिवार नियोजन के तरीकों को पूरी तरह से न अपनाया जाना। 6. अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण जीवन स्तर में आए सुधार के कारण आदि ।

प्रश्न 6.
क्या गर्भ निरोधकों का उपयोग न्यायोचित है? कारण बताएँ ।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि दर अत्यधिक होने के कारण यह राष्ट्रीय संकट है अतः गर्भनिरोधकों का उपयोग न्यायोचित है। क्योंकि इनसे परिवारों को सीमित किया जा सकता है एवं उनकी सुविधाओं में वृद्धि की जा सकती है। इन गर्भनिरोधकों के उपयोग से यौन संचारित रोगों (STDs) से बचा जा सकता है। इसके साथ ही दो संतानों के बीच अन्तराल भी रखा जा सकता है। जनसंख्या वृद्धि को कम करके परिवार, समाज व देश की समृद्धि में सहयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 7.
जनन ग्रंथि को हटाना, गर्भ निरोधकों का विकल्प नहीं माना जा सकता है, क्यों?
उत्तर:
जनन ग्रन्थियाँ संतान उत्पन्न करने वाले अंग हैं। पुरुष में पाई जाने वाली जनन ग्रन्थि को वृषण (Testis) कहते हैं। इसी प्रकार स्त्री में पाई जाने वाली ग्रन्थि को अण्डाशय (ovary) कहते हैं। वृषण में शुक्राणुओं का तथा अण्डाशय में अण्डों का निर्माण होता है। गर्भ निरोधक के प्रयोग के लिए स्वस्थ अंगों का शरीर से हटाना उचित नहीं है। इससे मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं जबकि गर्भनिरोधक विधियाँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं और उनका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है एवं न ही वे महँगी होती हैं तथा आसानी से इनका प्रयोग भी किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर हटाया भी जा सकता है। जनन ग्रन्थि को हटाना एक जटिल प्रक्रिया है। कानून भी हमें इसकी आज्ञा नहीं देता है। इसलिए इसे हटाना गर्भ निरोधकों का विकल्प नहीं माना जा सकता। है।

प्रश्न 8.
उल्बवेधन एक घातक लिंग निर्धारण (जाँच) प्रक्रिया है, जो हमारे देश में निषेधित है। क्या यह आवश्यक होना चाहिए? टिप्पणी करें।
उत्तर:
बढ़ती मादा भ्रूण हत्या की कानूनी रोक के लिए उल्बवेधन (Amniocentesis) जाँच (भ्रूणीय लिंग निर्धारण) लिंग परीक्षण पर वैधानिक प्रतिबंध उचित है क्योंकि यह खतरना प्रवृत्ति है। इससे शिशु के लिंग निर्धारण के लिए उल्बवेधन ( Amniocentesis) का दुरुपयोग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि यह पता चलने पर कि भ्रूण मादा (लड़की) है, चिकित्सीय सगर्भता समापन (Medical Terminatian of Pregnancy) कराया जाता है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

इस प्रकार की प्रवृत्ति से बचना चाहिये क्योंकि यह युवा माँ और भ्रूण दोनों के लिए खतरनाक है। इससे समाज में पुरुष एवं महिलाओं की संख्या का अनुपात भी बिगड़ सकता है जिसके कारण वैवाहिक समस्याएँ तथा स्वास्थ्य सम्बंधी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। इस कारण से इस विधि ( उल्बवेधन) पर हमारे देश में प्रतिबंध है, जो कि उचित है।

प्रश्न 9.
बंध्य दंपतियों को संतान पाने हेतु सहायता देने वाली कुछ विधियाँ बताएँ।
उत्तर:
दो वर्ष तक मुक्त या असुरक्षित सहवास के बावजूद गर्भाधान न हो पाने की स्थिति को बंध्यता कहते हैं। ऐसे निःसंतान दंपतियों को कुछ विशेष तकनीकों द्वारा संतान पैदा करने में मदद की जाती है, ये तकनीकें सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ (Assisted Reproductive Technologies) कहलाती हैं। पात्रे निषेचन (In vitro fertilization ) – इन विट्रो फर्टिलाइजेशन अर्थात् शरीर से बाहर लगभग शरीर के भीतर जैसी स्थितियों में निषेचन के द्वारा भ्रूण स्थानान्तरण (Embryo transfer) एक ऐसा उपाय हो सकता है।

इस विधि में, जिसे लोकप्रिय रूप से टेस्ट ट्यूब बेबी (Test tube baby) कार्यक्रम के नाम से जाना जाता है, इसमें प्रयोगशाला में पत्नी (wife) का या दाता स्त्री ( donor female) के अण्डे (ova) से पति अथवा दाता पुरुष ( donor male) से प्राप्त किए गए शुक्राणुओं (Sperms) को एकत्रित करके प्रयोगशाला में अनुकूल परिस्थितियों (Simulted Conditions) में युग्मनज (Zygote) बनने के लिए प्रेरित किया जाता है।

इस युग्मनज (Zygote) या प्रारम्भिक भ्रूण (8 ब्लास्टोमियर तक) को फैलोपियन नलिकाओं (Fallopian tubes) में स्थानान्तरित किया जाता है जिसे युग्मनज अंतः डिम्बवाहिनी स्थानान्तरण (Zygote intra fallopian transfer) कहते हैं। भ्रूण जब 8 ब्लास्टोमियर से अधिक का होता है, तो उसे परिवर्धन हेतु गर्भाशय (Uterus) में स्थानान्तरित कर दिया जाता है। इसे इन्द्रा यूटेराइन ट्रांसफर (Intra Uterine Transfer) कहते हैं। जिन स्त्रियों / महिलाओं में गर्भधारण की समस्या रहती है उनकी सहायता के लिए जीवे निषेचन ( इन विवो फर्टीलाइजेशन स्त्री के. भीतर ही युग्मकों का संलयन) से बनने वाले भ्रूणों को भी स्थानान्तरण के जिन स्त्रियों/महिलाओं में गर्भधारण की समस्या रहती है उनकी सहायता के लिए जीवे निषेचन ( इन विवो फर्टीलाइजेशन स्त्री के भीतर ही युग्मकों का संलयन) से बनने वाले भ्रूणों को भी स्थानान्तरण के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। ऐसे मामले में जहाँ स्त्रियाँ अण्डाणु (egg) उत्पन्न नहीं कर सकतीं लेकिन जो निषेचन और भ्रूण परिवर्धन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान कर सकती हैं, उनके लिए एक अन्य तरीका अपनाया जा सकता है। इसमें दाता से अण्डाणु लेकर उन स्त्रियों की फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube ) में स्थानान्तरित कर दिया जाता है।

प्रयोगशाला में भ्रूण बनाने के लिए अन्तः कोशिकीय शुक्राणु निक्षेपण (Intra cytoplasmic sperm injection) वह दूसरी विशेष प्रक्रिया है जिसमें शुक्राणु को सीधे ही अण्डाणु में अन्तःक्षेपित (injected) किया जाता है। बंध्यता के ऐसे मामलों में जिनमें पुरुष साथी स्त्री को वीर्य संचित कर सकने के योग्य नहीं है अथवा जिसके स्खलित वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बहुत ही कम है, ऐसे दोष का निवारण कृत्रिम वीर्य सेचन ( Artificial inseminatin) तकनीक से किया जा सकता है। इस तकनीक में पति या स्वस्थ दाता से शुक्र लेकर कृत्रिम रूप से या तो स्त्री की योनि (Vagina) अथवा उसके गर्भाशय ( Uterus) में प्रविष्ट किया जा सकता है। इसे अंतः गर्भाशय वीर्य सेचन (Intra-Uterine Insemination) कहते हैं।

प्रश्न 10.
किसी व्यक्ति को यौन संचारित रोगों के सम्पर्क में आने से बचने के लिए कौन-से उपाय अपनाने चाहिए?
उत्तर:
यौन संचारित रोग (Sexually Transmitted Diseases) – यौन संबंधों द्वारा संचारित होने वाले रोगों या संक्रमणों को यौन संचारित रोग (STD) कहा जाता है। इन्हें रतिज रोग (Veneral diseases) अथवा जनन मार्ग (Reproductive tract infections) संक्रमण भी कहा जाता है। ये रोग निम्न हैं- सुजाक (Gonorrhoea), सिफिलिस (Syphilis), हर्पीस (Herpes), जननिक हर्पिस ( Genital herpes), क्लेमिडियता (Chlamydiasis), ट्राइकोमोनसता (Trichomoniasis), यकृत शोथ-बी (Hepatitis B ), लैंगिक मस्से ( Genital warts), एड्स (AIDS) आदि।

इनसे बचने के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिये –
(i) मैथुन के समय हमेशा कंडोम (Condoms ) का उपयोग करना चाहिये।
(ii) किसी अनजान व्यक्ति अथवा बहुत से व्यक्तियों के साथ यौन सम्बन्ध नहीं रखना चाहिए।
(iii) यदि कोई आशंका है तो तत्काल ही प्रारम्भिक जाँच के लिए किसी योग्य चिकित्सक से मिलें और रोग का पता चले तो पूरा इलाज कराना चाहिए।

प्रश्न 11.
निम्न वाक्य सही है या गलत, व्याख्या सहित बताएँ –
(क) गर्भपात स्वत: भी हो सकता है। (सही / गलत )
उत्तर:
गलत। सामान्य परिस्थितियों में गर्भपात नहीं होता। किसी दुर्घटनावश या स्वैच्छिक रूप से गर्भ समापन (गर्भपात) होता है। स्वैच्छिक गर्भपात को चिकित्सीय सगर्भता समापन ( एम. टी. पी.) कहते हैं।

(ख) बंध्यता को जीवनक्षम संतति न पैदा कर पाने की अयोग्यता के रूप में परिभाषित किया गया है और यह सदैव स्त्री की असामान्यताओं / दोषों के कारण होती है । ( सही / गलत )
उत्तर:
गलत। बंध्यता हमेशा स्त्री की असामान्यताएँ / दोषों के कारण नहीं होती, कभी-कभी पुरुष भी बंध्यता के लिए दोषी होता है।

(ग) एक प्राकृतिक गर्भनिरोधक उपाय के रूप में शिशु को पूर्णरूप से स्तनपान कराना सहायक होता है । (सही / गलत )
उत्तर:
सही। शिशु को पूर्णरूप से स्तनपान कराने से अण्डोत्सर्ग नहीं होता है अत: आर्तव चक्र (Menstrual cycle) भी नहीं होता है, जिसके कारण गर्भ की संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं। किन्तु यह विधि शिशु के जन्म के अधिकतम 6 माह तक ही कारगर है।

(घ) लोगों के जनन स्वास्थ्य के सुधार हेतु यौन संबंधित पहलुओं के बारे में जागरूकता पैदा करना एक प्रभावी उपाय है। ( सही / गलत )
उत्तर:
सही। क्योंकि ऐसा करने से लोगों के जनन स्वास्थ्य की समस्याएँ समाप्त अथवा कम से कम हो जायेंगी।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित कथनों को सही करें –
(क) गर्भनिरोध के शल्यक्रियात्मक उपाय युग्मक बनने को रोकते हैं।
उत्तर:
गर्भनिरोध के शल्यक्रिया उपाय युग्मक बनने से रोकते नहीं हैं बल्कि युग्मक ( Gamee) परिवहन को रोकते हैं।

(ख) सभी प्रकार के यौन संचारित रोग पूरी तरह से उपचार योग्य हैं।
उत्तर:
यकृतशोथ – बी, जननिक हर्पिस (Genital Herpes) तथा एच.आई.वी. संक्रमण को छोड़कर बाकी सभी यौन रोग पूरी तरह से उपचार योग्य हैं, बशर्ते कि इन्हें शुरुआती अवस्था में पहचाना एवं इनका उचित ढंग से पूरा इलाज कराया जाए।

(ग) ग्रामीण महिलाओं के बीच गर्भनिरोधक के रूप में गोलियाँ (पिल्स) बहुत अधिक लोकप्रिय हैं।
उत्तर:
महिलाओं के द्वारा खाया जाने वाला एक अन्य गर्भनिरोधक प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजन का संयोजन है। यह मुँह से टिकिया के रूप में ली जाती है और ये गोलियाँ पिल्स के नाम से सभी महिलाओं में लोकप्रिय हैं, न कि केवल ग्रामीण महिलाओं के बीच।

(घ) ई. टी. तकनीकों में भ्रूण को सदैव गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।
उत्तर:
ई.टी. तकनीकों में 8 ब्लास्टोमीयर से ज्यादा अवस्था वाले भ्रूण को गर्भाशय में स्थानान्तरित किया जाता है। जबकि 8 ब्लास्टोमीयर से कम अवस्था वाले भ्रूण को अण्डवाहिनी में स्थानान्तरित किया जाता है।

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