Author name: Prasanna

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भाग-I : सही विकल्प का चयन करें

1. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राकृतिक पदार्थ शैल की रचना करता है?
(A) बालू और चीका
(B) बजरी और रोड़ी
(C) ग्रेनाइट
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

2. आग्नेय शैलों को प्राथमिक शैलें इसलिए कहा जाता है क्योंकि
(A) ये भू-पृष्ठ पर सबसे ऊपर पाई जाती हैं।
(B) इनका भू-पृष्ठ पर सबसे अधिक विस्तार है
(C) इन शैलों का पृथ्वी पर सबसे पहले निर्माण हुआ था
(D) ये आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण शैलें हैं
उत्तर:
(C) इन शैलों का पृथ्वी पर सबसे पहले निर्माण हुआ था

3. ‘प्लूटो’ का अर्थ है-
(A) ग्रहों का देवता
(B) जल देवता
(C) अग्नि देवता
(D) पाताल देवता
उत्तर:
(D) पाताल देवता

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल

4. अंतर्वेधी आग्नेय शैलों के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
(A) पातालीय शैलें केवल उत्थापन अथवा पृथ्वी के ऊपरी भाग के अनाच्छादन के बाद ही नजर आती हैं
(B) पाताल के अन्दर शीघ्र ठण्डी होने के कारण इन शैलों के रवे अत्यन्त छोटे होते हैं
(C) पातालीय आग्नेय शैलों के उदाहरण गेब्रो व ग्रेनाइट हैं
(D) पातालीय शैलें अपने मूल स्थान पर मैग्मा के जम जाने से बनती हैं
उत्तर:
(B) पाताल के अन्दर शीघ्र ठण्डी होने के कारण इन शैलों के रवे अत्यन्त छोटे होते हैं

5. स्थलमण्डल के लगभग तीन-चौथाई भाग में कौन-सी शैलें पाई जाती हैं?
(A) अवसादी
(B) आग्नेय
(C) कायांतरित
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) अवसादी

6. भूगर्भ में मैग्मा का सबसे बड़ा व सबसे गहरा भण्डार क्या कहलाता है?
(A) लैकोलिथ
(B) फैकोलिथ
(C) बैथोलिथ
(D) स्टॉक
उत्तर:
(C) बैथोलिथ

7. मोड़दार पर्वतों की अपनति व अभिनति में हुए मैग्मा के लहरदार जमाव को क्या कहते हैं?
(A) सिल
(B) डाइक
(C) फैकोलिथ
(D) लैकोलिथ
उत्तर:
(C) फैकोलिथ

8. गन्ना व कपास के लिए उपजाऊ काली मिट्टी किस शैल के क्षरण से बनती है?
(A) बेसाल्ट शैलें
(B) बालू-प्रधान अवसादी शैलें
(C) ग्रेनाइट शैलें
(D) आब्सीडियन
उत्तर:
(A) बेसाल्ट शैलें

9. निम्नलिखित में से कौन-सी अवसादी शैल है?
(A) बलुआ-पत्थर
(B) अभ्रक
(C) ग्रेनाइट
(D) नाईस
उत्तर:
(A) बलुआ-पत्थर

10. ग्रेनाइट शैल को आप किस वर्ग में रखेंगे?
(A) पैठिक आग्नेय शैल
(B) मध्यवर्ती आग्नेय शैल
(C) पातालीय आग्नेय शैल
(D) बहिर्वेधी आग्नेय शैल
उत्तर:
(C) पातालीय आग्नेय शैल

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11. रासायनिक क्रिया से बनी परतदार शैल का उत्तम उदाहरण है-
(A) जिप्सम
(B) बालू पत्थर
(C) शैल
(D) खड़िया
उत्तर:
(A) जिप्सम

12. निम्नलिखित में से कौन-सी आग्नेय शैल अंतर्वेधी है?
(A) लावा पठार
(B) गौण शंकु
(C) ज्वालामुखी शंकु
(D) डाइक
उत्तर:
(D) डाइक

13. किस मूल शैल से कायांतरित होकर हीरा बना?
(A) नीस
(B) बलुआ पत्थर
(C) कोयला
(D) ग्रेनाइट
उत्तर:
(C) कोयला

14. पैंसिल का सिक्का बनाने के लिए किस शैल का प्रयोग किया जाता है?
(A) स्लेट
(B) एस्बेस्टस
(C) कोयला
(D) ग्रेफाइट
उत्तर:
(D) ग्रेफाइट

भाग-II : एक शब्द या वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
पृथ्वी के आंतरिक भाग में खनिजों का मूल स्रोत क्या है?
उत्तर:
मैग्मा।

प्रश्न 2.
खनिजों का निर्माण करने वाले तत्त्वों की संख्या बताइए।
उत्तर:
खनिजों का निर्माण करने वाले तत्त्वों की संख्या 8 है।

प्रश्न 3.
चट्टान बनाने वाले सामान्य खनिज कितने हैं?
उत्तर:
चट्टान बनाने वाले सामान्य खनिज 12 हैं।

प्रश्न 4.
भू-पर्पटी पर पाए जाने वाले खनिजों में सिलीकेट की प्रतिशत मात्रा कितनी है?
उत्तर:
भू-पर्पटी पर पाए जाने वाले खनिजों में सिलीकेट की प्रतिशत मात्रा लगभग 87 प्रतिशत है।

प्रश्न 5.
अधिसिलिक आग्नेय चट्टानों में सिलिका का प्रतिशत कितना होता है?
उत्तर:
अधिसिलिक आग्नेय चट्टानों में सिलिका का प्रतिशत लगभग 55 प्रतिशत होता है।

प्रश्न 6.
अल्पसिलिक आग्नेय चट्टान का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
बेसाल्ट/गेब्रो।

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प्रश्न 7.
बेसाल्ट के अपक्षय से दक्षिणी भारत में पाई जाने वाली उपजाऊ काली मिट्टी का नाम क्या है?
उत्तर:
बेसाल्ट के अपक्षय से दक्षिणी भारत में पाई जाने वाली उपजाऊ काली मिट्टी का नाम रेगड़ है।

प्रश्न 8.
स्थिति के आधार पर आग्नेय चट्टानों के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर:
स्थिति के आधार पर आग्नेय चट्टानें दो प्रकार की होती हैं-

  1. बहिर्वेधी और
  2. अंतर्वेधी।

प्रश्न 9.
शैलें (चट्टानें) कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
तीन।

  1. याग्नेय शैलें
  2. अवसादी शैलें
  3. कायांतरित शैलें।

प्रश्न 10.
लाल रंग के बलुआ पत्थर से बनी किन्हीं दो प्रसिद्ध इमारतों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. दिल्ली का लाल किला
  2. फतेहपुर सीकरी का महल।

प्रश्न 11.
हिमानी द्वारा जमा किए गए अवसादों से बनी चट्टान का क्या नाम है?
उत्तर:
गोलाश्म मृत्तिका (Till)।

प्रश्न 12.
अवसादी चट्टानों में कौन-से दो खनिज ईंधन पाए जाते हैं?
उत्तर:

  1. कोयला और
  2. खनिज तेल।

प्रश्न 13.
पेन्सिल बनाने, धातु गलाने, परमाणु ऊर्जा संयन्त्रों के निर्माण तथा बिलियर्डस की मेज़ बनाने के लिए कौन-सी चट्टान का उपयोग किया जाता है?
उत्तर:
पेन्सिल बनाने, धातु गलाने, परमाणु ऊर्जा संयन्त्रों के निर्माण तथा बिलियर्ड्स की मेज़ बनाने के लिए ग्रेफाइट का उपयोग किया जाता है।।

प्रश्न 14.
अवसादी चट्टानें स्थलमण्डल के कितने प्रतिशत भाग पर विस्तृत हैं?
उत्तर:
अवसादी चट्टानें स्थलमण्डल के 75 प्रतिशत भाग पर विस्तृत हैं।

प्रश्न 15.
भारत में स्लेट किन-किन राज्यों में मिलती है?
उत्तर:
झारखण्ड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में।

प्रश्न 16.
जिप्सम किस प्रकार की उत्पत्ति वाली चट्टान है?
उत्तर:
जिप्सम रासायनिक उत्पत्ति वाली चट्टान है।

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प्रश्न 17.
जैविक उत्पत्ति वाली दो अवसादी चट्टानों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. चूने का पत्थर और
  2. कोयला।

प्रश्न 18.
रूपान्तरण कितनी गहराई पर और कितने तापमान पर होता है?
उत्तर:
धरातल से 12 से 16 कि०मी० की गहराई पर और 150°C से 800°C तापमान तक।

प्रश्न 19.
ग्रेफाइट का गलनांक कितना होता है?
उत्तर:
ग्रेफाइट का गलनांक 3500°C सेल्सियस होता है।

प्रश्न 20.
आग्नेय चट्टानों/शैलों की उत्पत्ति का स्रोत क्या है?
उत्तर:
आग्नेय चट्टानों की उत्पत्ति का स्रोत ज्वालामुखी उदभेदन है।

प्रश्न 21.
धरातल पर आते ही लावा तेजी से ठण्डा क्यों हो जाता है?
उत्तर:
क्योंकि वह वायुमण्डल के सम्पर्क में आ जाता है।

प्रश्न 22.
अधिसिलिक या अम्लीय आग्नेय चट्टानों में सिलिका की मात्रा कितनी होती है?
उत्तर:
65 से 85 प्रतिशत तक।

प्रश्न 23.
अल्पसिलिक या क्षारीय या पैठिक आग्नेय चट्टानों में सिलिका की मात्रा कितनी होती है?
उत्तर:
45 से 55 प्रतिशत तक।

प्रश्न 24.
पश्चिमी भारत में बेसाल्ट से घिरे विस्तृत प्रदेश का क्या नाम है?
उत्तर:
दक्कन ट्रैप।

प्रश्न 25.
तलछट को कठोरता से जोड़ने का काम कौन-से तत्त्व करते हैं?
उत्तर:
सिलिका और कैल्साइट।

प्रश्न 26.
यांत्रिक क्रिया द्वारा बनी अवसादी चट्टानों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
काँग्लोमरेट, ब्रेसिया, शेल (Shale) तथा चीका मिट्टी।

प्रश्न 27.
वह कौन-सा मापक है जो खनिज कणों के आकार का कोटि-निर्धारण करता है?
उत्तर:
वेंटवर्थ (Wentworth) मापक।

प्रश्न 28.
स्थलजात पदार्थ (Terrigenous Material) क्या होते हैं?
उत्तर:
स्थल से प्राप्त होने वाला अवसाद जो समुद्रों में निक्षेपित होता है।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उत्पत्ति के आधार पर अवसादी चट्टानें कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
उत्पत्ति के आधार पर अवसादी चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं-

  1.  यांत्रिक
  2. जैविक और
  3. रासायनिक।

प्रश्न 2.
चट्टानों का रूपान्तरण कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
चट्टानों का रूपांतरण तीन प्रकार का होता है-

  1. गतिक
  2. तापीय और
  3. क्षेत्रीय।

प्रश्न 3.
उत्पत्ति के आधार पर चट्टानों के कितने प्रकार हैं?
उत्तर:
उत्पत्ति के आधार पर चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं-

  1. आग्नेय चट्टानें
  2. परतदार अथवा तलछटी चट्टानें
  3. कायान्तरित चट्टानें।

प्रश्न 4.
IGNEOUS’ शब्द कहाँ से आया है? इसका अर्थ भी बताइए।
उत्तर:
इग्नियस शब्द लातीनी (Latin) भाषा के ‘Ignis’ शब्द से बना है जिसका अर्थ है-आग (Fire)।

प्रश्न 5.
‘Plutonic’ शब्द कहाँ से आया है? इसका अर्थ भी बताइए।
उत्तर:
प्लूटोनिक शब्द ‘Pluto’ से बना है जिसका अर्थ है ‘पाताल देवता’।

प्रश्न 6.
गेब्रो तथा ग्रेनाइट की चट्टानों से रवे (Crystals) बड़े-बड़े क्यों बनते हैं?
उत्तर:
इन चट्टानों को पाताल के अन्दर ठण्डा होने में बहुत समय लग जाता है जिससे इन चट्टानों की रचना करने वाले रवे बड़े बनते हैं।

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प्रश्न 7.
बेसाल्ट में रखे नहीं के बराबर होते हैं, क्यों?
उत्तर:
शान्त उद्गार से बनी इस चट्टान में लावा शीघ्र जम जाता है जिसमें इन चट्टानों के खनिजों के रवे लगभग नहीं बनते।

प्रश्न 8.
ज्वालामुखी काँच क्या होता है?
उत्तर:
यदि लावा बहुत शीघ्र ठण्डा हो जाए तो काँच जैसी चट्टानों का निर्माण होता है जिसे ज्वालामुखी काँच (Volcanic Glass) या आब्सीडियन कहा जाता है।

प्रश्न 9.
पातालीय, अधिवितलीय तथा बहिर्वेधी चट्टानों के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. पातालीय – ग्रेबो तथा ग्रेनाइट।
  2. अधिवितलीय या मध्यवर्ती – डोलेराइट तथा माइका पैग्मेटाइट।
  3. बहिर्वेधी – बेसाल्ट तथा आब्सीडियन।

प्रश्न 10.
बैथोलिथ क्या होता है?
उत्तर:
यह मैग्मा का सबसे बड़ा गुम्बदाकार जमाव होता है जो अत्यधिक गहराई में पाया जाता है।

प्रश्न 11.
लैकोलिथ क्या होता है?
उत्तर:
भू-गर्भ से धरातल की ओर बढ़ता हुआ विस्फोटक मैग्मा जब किन्हीं कारणों से धरातल पर नहीं पहुंच पाता तो वह परतदार चट्टानों में छतरीनुमा रूप ले लेता है जिसे लैकोलिथ कहते हैं।

प्रश्न 12.
स्टॉक किसे कहते हैं?
उत्तर:
छोटे आकार के बैथोलिथ को स्टॉक कहते हैं।

प्रश्न 13.
निर्माणकारी साधनों के आधार पर अवसादी चट्टानें कितने प्रकार की हैं?
उत्तर:
निर्माणकारी साधनों के आधार पर अवसादी चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं-

  1. जलीय चट्टानें
  2. हिमनद निर्मित
  3. वायु निर्मित।

प्रश्न 14.
जलीय अवसादी चट्टानें कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
जलीय अवसादी चट्टानें तीन प्रकार की होती हैं-

  1. नदीकृत
  2. सरोवरी
  3. समुद्री।

प्रश्न 15.
काँग्लोमरेट क्या होता है?
उत्तर:
जब बालू के कणों के साथ गोल व चिकने रोड़े गारे के साथ आपस में जुड़ जाते हैं तो उसे काँग्लोमरेट कहते हैं।

प्रश्न 16.
चूना-प्रधान तथा कार्बन-प्रधान जैव अवसादी चट्टानों के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
चूना-प्रधान अवसादी चट्टानें सेलखड़ी और खड़िया कार्बन-प्रधान अवसादी चट्टानें कोयला, पीट।

प्रश्न 17.
कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयले की श्रेष्ठता का क्रम निर्धारित कीजिए।
उत्तर:

  1. पीट
  2. लिग्नाइट
  3. बिटुमिनस
  4. एन्थ्रेसाइट।

प्रश्न 18.
रासायनिक क्रिया से बनी निर्जेव अवसादी चट्टानों के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. सेंधा नमक (Salt Rock)
  2. जिप्सम व
  3. शोरा।

प्रश्न 19.
रूपान्तरण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
रूपान्तरण से अभिप्राय चट्टानों के रंग, रूप तथा रचना में बदलाव से है।

प्रश्न 20.
रूपान्तरण किन कारणों से होता है?
उत्तर:
चट्टानों का रूपान्तरण ताप और दबाव के कारण होता है।

प्रश्न 21.
रूपान्तरित होकर बलुआ पत्थर तथा चूने का पत्थर किन चट्टानों में बदल जाता है?
उत्तर:
बलुआ पत्थर क्वार्टज़ाइट में तथा चूने का पत्थर संगमरमर में।

प्रश्न 22.
शैल गठन से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
चट्टानों में खनिजों के क्रिस्टलों का आकार तथा उनका प्रतिरूप (Pattern) शैल गठन कहलाता है।

प्रश्न 23.
शिलीभवन (Solidification) क्या होता है?
उत्तर:
महासागरों के नितलों पर दबाव के कारण अवसादी परतों का सघन और कठोर हो जाना शिलीभवन कहलाता है।

प्रश्न 24.
जीवांश (Humus) का अर्थ बताइए।
उत्तर:
मिट्टी में पाए जाने वाले जन्तु एवं वनस्पति के विघटित एवं अंशतः विघटित जैव पदार्थ जो मिट्टी के उपजाऊपन को बढ़ाते हैं, जीवांश कहलाते हैं।

प्रश्न 25.
जीवाश्म (Fosil) क्या होता है?
उत्तर:
परतदार चट्टानों के बीच जीव-जन्तुओं और वनस्पति के अवशेष या उनके छापों का मिलना, जीवाश्म होता है।

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प्रश्न 26.
चट्टानों के गठन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चट्टानों की रचना करने वाले कणों का आकार, आकृति और एक-दूसरे से जुड़ने की व्यवस्था अर्थात् कणों का ज्यामितीय स्वरूप चट्टानों का गठन कहलाता है।

प्रश्न 27.
क्वाटर्ज क्या है और इसकी क्या विशेषता है?
उत्तर:
यह प्राकृतिक रवेदार सिलिका (बालू) है। यह कभी-कभी शुद्ध, स्वच्छ और रंगहीन कणों में मिलता है। इसके ऊँचे गलनांक के कारण उद्योगों में इसका बहुत उपयोग होता है।

प्रश्न 28.
रासायनिक संरचना के आधार पर आग्नेय चट्टानों के कितने भेद हैं?
उत्तर:
रासायनिक संरचना के आधार पर आग्नेय चट्टानों (अन्तर्वेधी और बहिर्वेधी दोनों) के दो वर्ग हैं-]

  1. अधिसिलिक या अम्लीय चट्टानें।
  2. अल्पसिलिक या क्षारीय या पैठिक चट्टानें।

प्रश्न 29.
खनिज की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
‘खनिज’ वे प्राकृतिक पदार्थ होते हैं जिनकी अपनी भौतिक विशेषताएँ तथा एक निश्चित रासायनिक बनावट होती है। अधिकांश खनिज ठोस, जड़ व अकार्बनिक अथवा अजैव पदार्थ होते हैं। चट्टानों की रचना विभिन्न खनिजों के संयोग से होती है। वॉरसेस्टर के अनुसार, “लगभग सभी चट्टानों में दो या दो से अधिक खनिज होते हैं।” कई बार चट्टान केवल एक खनिज से भी बनती है; जैसे चूना, पहाड़ी नमक, बालू-पत्थर इत्यादि। इसी आधार पर फिन्च व ट्रिवार्था ने कहा है, “एक या एक से अधिक खनिजों के मिश्रण से चट्टानों का निर्माण होता है।”

प्रश्न 30.
बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानें क्या होती हैं?
उत्तर:
वे चट्टानें जो ज्वालामुखी क्रिया द्वारा धरातल के ऊपर आए लावा के ठण्डा होकर ठोस होने से बनती हैं बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानें कहलाती हैं। इन्हें ज्वालामुखी चट्टानें भी कहा जाता है। काले या लाल रंग के गाढ़े द्रव्य के बहते हुए चादर के रूप में जमने के कारण इन चट्टानों को लावा स्तर (Lava flows) भी कहा जाता है।

प्रश्न 31.
आग्नेय चट्टानी पिण्ड क्या होते हैं?
उत्तर:
मैग्मा के ठोसावस्था में आने पर अनेक तरह के आग्नेय चट्टानी पिण्डों की रचना होती है। इनका नामकरण इनके रूप, आकार, स्थिति तथा आस-पास पाई जाने वाली चट्टानों के आधार पर किया जाता है। अधिकांश चट्टानी पिण्ड अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानों से बने हुए हैं।

प्रश्न 32.
गतिक रूपान्तरण क्या होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी की आन्तरिक हलचलों के कारण चट्टानों में नमन (Bending) और वलन (Folding) आ जाते हैं। इससे चट्टानों पर भारी दबाव पड़ता है और परिणामस्वरूप चट्टानों के रूप व संघटन में परिवर्तन आ जाता है। इसे गतिक रूपान्तरण कहते हैं। इस प्रकार के रूपान्तरण से ग्रेनाइट का नीस तथा चिकनी मिट्टी व शैल का शिस्ट व स्लेट में कायान्तरण हो जाता है।

प्रश्न 33.
अधिसिलिक या अम्लीय आग्नेय चट्टानें क्या होती हैं?
उत्तर:
अधिसिलिक चट्टानों में सिलिका की मात्रा 65 से 85 प्रतिशत होती है। इन चट्टानों के शेष तत्त्वों में सोडियम, पोटाशियम व कैल्शियम के फेल्सपार नामक खनिजों की प्रधानता होती है। लोहे की कम मात्रा के कारण इन चट्टानों का घनत्व कम (लगभग 2.75) होता है तथा रंग भी हल्का होता है। ग्रेनाइट (अन्तर्वेधी) और आब्सीडियन (बहिर्वेधी) अधिसिलिक आग्नेय चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं। .

प्रश्न 34.
अल्पसिलिक या क्षारीय या पैठिक आग्नेय चट्टानें क्या होती हैं?
उत्तर:
अल्पसिलिक आग्नेय चट्टानों में सिलिका की मात्रा 45 से 55 प्रतिशत तक होती है। इन चट्टानों के अन्य रचक तत्त्वों में लोहा व मैग्नीशियम के खनिजों की प्रधानता होती है, इसी कारण इन चट्टानों का रंग गहरा व घनत्व अधिक (लगभग 3) होता है। बेसाल्ट (बहिर्वेधी) और गेब्रो (अन्तर्वेधी) इसी वर्ग की चट्टानें हैं।

प्रश्न 35.
भारत में कायान्तरित चट्टानें कहाँ-कहाँ पाई जाती हैं?
उत्तर:

  1. शिस्ट व नीस दक्षिणी भारत, बिहार व राजस्थान के कुछ भागों में पाई जाती है।
  2. क्वार्टज़ाइट राजस्थान, झारखण्ड, मध्य प्रदेश व तमिलनाडु में पाया जाता है।
  3. संगमरमर राजस्थान के अलवर, अजमेर, जयपुर व जोधपुर में व मध्य प्रदेश में जबलपुर के निकट नर्मदा घाटी में पाया जाता है।
  4. स्लेट हरियाणा (रेवाड़ी, कुण्ड, अटेली, नारनौल), हिमाचल प्रदेश (काँगड़ा) तथा झारखण्ड में पाई जाती है।

प्रश्न 36.
चट्टानी चक्र से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आग्नेय और अवसादी चट्टानें ताप, दबाव, भू-संचलन व रासायनिक क्रियाओं के प्रभावाधीन रूपान्तरित चट्टानों में बदलती रहती हैं। जब चट्टानें अपने किसी वर्ग में स्थिर न रहकर परिस्थितियों के कारण अपना वर्ग बदलती रहती हैं, इसे चट्टानी चक्र कहते हैं। इसमें कोई भी चट्टान कोई भी रूप धारण कर सकती है।

प्रश्न 37.
ब्रेसिआ तथा काँग्लोमरेट का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
ब्रेसिआ तथा काँग्लोमरेट का निर्माण तलछटी चट्टानों से यान्त्रिक क्रिया द्वारा होता है। अपरदन क्रिया द्वारा पत्थरों तथा कंकड़ों का आकार गोल हो जाता है। जब ये पत्थर आपस में जुड़ जाते हैं तो उनसे काँग्लोमरेट का निर्माण होता है। ये पत्थर क्वार्ट्ज के कारण आपस में जुड़ते हैं। ब्रेसिआ का निर्माण पत्थरों के बीच गारा भर जाने के कारण जुड़ने से होता है। ब्रेसिआ में पत्थरों की आकृति नुकीली होती है।

प्रश्न 38.
निम्नलिखित चट्टानों का आग्नेय, अवसादी तथा रूपान्तरित चट्टानों में वर्गीकरण कीजिए-
(1) ट्रैप
(2) बेसाल्ट
(3) डोलेराइट
(4) क्वार्ट्ज़ाइट
(5) कोयला
(6) एन्थ्रासाइट
(7) चूनाश्म
(8) खड़िया
(9) संगमरमर
(10) चीका
(11) शैल
(12) नाइस
(13) शिस्ट
(14) बलुआ पत्थर
(15) ग्रेनाइट
(16) सेंधा नमक
(17) ब्रेसिआ
(18) फाइलाइट
(19) प्रवाल
(20) काँग्लोमरेट।
उत्तर:

आग्नेय चट्टानेंअवसादी चट्टानेंरूपान्तरित चट्टानें
ट्रैप, बेसाल्ट, डोलेराइट ग्रेनाइट।कोयला, चीका, एन्थ्रासाइट, शैल, चूना पत्थर, खड़िया, बलुआ पत्थर, सेंधा नमक, ब्रेसिआ, प्रवाल, काँग्लोमरेट।क्वार्ट्रज़ाइट, संगमरमर, नाइस, शिस्ट, फाइलाइट।

प्रश्न 39.
अवसादी चट्टानों के गुणों को नियन्त्रित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. उत्पत्ति क्षेत्र में उपस्थित शैलों के प्रकार
  2. उत्पत्ति क्षेत्र का वातावरण
  3. उत्पत्ति क्षेत्र एवं निक्षेपण क्षेत्र में भू-संचरण (Earth Movements)
  4. निक्षेपण क्षेत्र में वातावरण
  5. निक्षेपण के बाद तलछटों में हुए परिवर्तन।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आग्नेय चट्टान क्या है?
उत्तर:
आग्नेय शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के इग्निस (Ignis) शब्द से हुई है, जिसका तात्पर्य है कि अग्नि के समान गरम तप्त लावा के ठण्डे होने से इन चट्टानों का निर्माण हुआ। पृथ्वी अपनी उत्पत्ति के समय गरम, तरल एवं गैसीय पुंज थी, जो धीरे-धीरे ठण्डी हुई। ठण्डी एवं ठोस अवस्था में आने से इन चट्टानों का निर्माण हुआ। पृथ्वी पर सर्वप्रथम इन्हीं चट्टानों का निर्माण हुआ इसलिए इन्हें प्राथमिक चट्टानें भी कहते हैं। आग्नेय चट्टानें पृथ्वी के पिघले हुए पदार्थ (मैग्मा) के ठण्डा एवं ठोस हो जाने के कारण बनी हैं।

प्रश्न 2.
चट्टान बनाने वाले खनिज कौन-से होते हैं? इनकी रचना किन तत्त्वों से होती है?
उत्तर:
चट्टानों की रचना 2,000 विभिन्न खनिजों से हुई है। इनमें से केवल 12 खनिज ऐसे हैं जो पृथ्वी तल पर हर जगह पाए जाते हैं। प्रायः प्रत्येक खनिज में दो या दो से अधिक रासायनिक तत्त्व होते हैं। उदाहरणतः क्वार्टज़ दो तत्त्वों सीलिकॉन व ऑक्सीजन से मिलकर बना है। इसी प्रकार कैल्शियम कार्बोनेट कैल्शियम (चूना), कार्बन और ऑक्सीजन से बना रासायनिक यौगिक है। कुछ खनिज एक ही तत्त्व से बने हुए पाए जाते हैं; जैसे सोना, ताँबा, सीसा (Lead) व गन्धक इत्यादि। अधिकांश खनिजों की रचना आठ मुख्य रासायनिक तत्त्वों से हुई है। भू-पर्पटी के कुलं भार का 97.3% इन्हीं 8 तत्त्वों के कारण है। स्थलमण्डल के लगभग 87% खनिज सिलिकेट हैं।

प्रश्न 3.
धात्विक तथा अधात्विक खनिजों में आप कैसे अन्तर करेंगे?
उत्तर:
धात्विक खनिज (Metallic Minerals) वे होते हैं जिन्हें परिष्कृत किया जा सकता है। परिष्कृत करने पर उनका ‘धरातल चिकना (Smooth) व चमकीला हो जाता है। इनसे हमें धातुएँ प्राप्त होती हैं जिन्हें पीटकर चादर, तार इत्यादि विभिन्न आकारों में ढाला जा सकता है। लोहा, चाँदी, सोना, ताँबा, टीन, एल्यूमीनियम, जस्ता, मैंगनीज़ इत्यादि महत्त्वपूर्ण धात्विक खनिज हैं। अधात्विक खनिज (Non-metallic Minerals) वे होते हैं जिन्हें परिष्कृत नहीं किया जा सकता। इनमें धातु का अंश नहीं होता। इन्हें केवल खुरचकर या काटकर विभिन्न आकारों में परिवर्तित किया जा सकता है। कोयला, चूना-पत्थर, गन्धक, जिप्सम, नमक व खनिज तेल इत्यादि अधात्विक खनिजों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 4.
“शैलें पृथ्वी के इतिहास के पन्ने हैं और जीवावशेष उसके अक्षर” स्पष्ट कीजिए।
अथवा
“शैलें पृथ्वी के इतिहास की जानकारी प्रदान करती हैं।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भू-पृष्ठ का निर्माण शैलों से हुआ है। भू-वैज्ञानिक इतिहास के बारे में शैलें महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। शैलों में खनिज पदार्थ पाए जाते हैं तथा इनसे मिट्टी का निर्माण होता है, जो प्राकृतिक पर्यावरण का एक महत्त्वपूर्ण तथा आवश्यक भाग है। शैलों की परतों में जीव-जन्तु तथा प्राकृतिक वनस्पतियों के अवशेष पाए जाते हैं। इन जीवावशेषों से पृथ्वी की उत्पत्ति तथा समय की जानकारी प्राप्त होती है। इसलिए यह कहना सत्य है कि शैलें पृथ्वी के इतिहास के पन्ने हैं और जीवावशेष उसके अक्षर हैं।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल

प्रश्न 5.
आग्नेय चट्टानों को प्राथमिक चट्टानें क्यों कहा जाता है? स्थिति के आधार पर आग्नेय चट्टानों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
स्थलमण्डल करोड़ों वर्ष पहले तरल पृथ्वी के ऊपरी भाग के कठोर हो जाने से बना है। इसलिए पृथ्वी पर सबसे पहले आग्नेय चट्टानों का निर्माण हुआ था। इसी आधार पर इन्हें प्राथमिक चट्टानें (Primary Rocks) भी कहा जाता है। अवसादी और रूपान्तरित चट्टानों की अन्य दो किस्में, आग्नेय चट्टानों पर पड़ने वाले प्राकृतिक कारकों के प्रभावों से बनती हैं।
स्थिति के आधार पर आग्नेय चट्टानों को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है-

  • अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानें
  • बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानें।

प्रश्न 6.
अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टान से क्या अभिप्राय है? इसे कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
जब मैग्मा धरातल के ऊपर न पहुँचकर उसके नीचे ही अलग-अलग गहराइयों पर ठण्डा होकर ठोस रूप धारण कर लेता है तो इससे अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। भू-पटल के नीचे गहराई के आधार पर अन्तर्वेधी चट्टानें दो प्रकार की होती हैं

  • पातालीय चट्टानें
  • अधिवितलीय चट्टानें।

प्रश्न 7.
पातालीय चट्टानें क्या होती हैं और इनकी क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर:
पातालीय चट्टानों का नामकरण ‘प्लूटो’ (Pluto) के नाम पर किया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘पाताल देवता’। अतः ऐसी आग्नेय चट्टानें जो स्थलमण्डल में काफ़ी गहराई पर अपने मूल स्थान पर ही मैग्मा के जम जाने से बनती हैं, पातालीय चट्टानें कहलाती हैं। मैग्मा की विशाल राशि को पाताल के अन्दर ठण्डा होकर जमने में बहुत समय लग जाता है। फलस्वरूप इन चट्टानों की रचना करने वाले खनिजों के रवे (Crystals) बड़े-बड़े बनते हैं। पृथ्वी के ऊपरी भाग के अत्यधिक अनाच्छादन या उत्थापन (Uplifting) के बाद ही ये चट्टानें भू-तल पर प्रकट होती हैं। पातालीय आग्नेय चट्टानों का सबसे महत्त्वपूर्ण उदाहरण गेब्रो तथा ग्रेनाइट हैं। सामान्यतः ग्रेनाइट का रंग भूरा, लाल, गुलाबी व सफेद होता है।

प्रश्न 8.
आग्नेय चट्टानों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
आग्नेय चट्टानों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. आग्नेय चट्टानें कठोर, ठोस व संहत (Compact) होती हैं, इसलिए ये टिकाऊ भी होती हैं।
  2. इन चट्टानों में परतें नहीं होती, बल्कि ये स्थूल होती हैं।
  3. इन चट्टानों में रन्ध्र (Pores) नहीं होते, अतः जल इनमें प्रवेश नहीं कर पाता।
  4. आग्नेय चट्टानें रवेदार होती हैं किन्तु रवों का आकार मैग्मा के ठण्डा होने की गति पर निर्भर करता है। अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानों के रवे बड़े और बहिर्वेधी चट्टानों के रवे छोटे होते हैं।
  5. तप्त और तरल द्रव्य से बनने के कारण इन प्राथमिक चट्टानों में जीवावशेष (Fossils) नहीं पाए जाते।
  6. इन चट्टानों का अपक्षय कम होता है। इनमें यान्त्रिक अपक्षय (Mechanical Weathering) की प्रक्रिया इनके सन्धि-तलों व भ्रंशों से आरम्भ होती है।
  7. इन चट्टानों में अनेक प्रकार के खनिज बहुतायत में पाए जाते हैं।
  8. सिलिका की मात्रा अधिक होने पर इन चट्टानों का रंग हल्का व सिलिका कम होने पर रंग गहरा हो जाता है।

प्रश्न 9.
आग्नेय चट्टानों का आर्थिक महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. इन चट्टानों में आर्थिक महत्त्व के बहुमूल्य खनिज पदार्थों; जैसे सोना, चाँदी, हीरा, निकिल, प्लैटिनम, मैंगनीज़, लोहा, टीन, जस्ता, ग्रेफाइट, ताँबा, सीसा आदि के विशाल भण्डार पाए जाते हैं।
  2. ग्रेनाइट व बेसाल्ट चट्टानों का प्रयोग सड़क और भवन निर्माण में प्राचीनकाल से होता रहा है। भारत में अनेक भव्य किले, महल और मन्दिर आदि इन चट्टानों से बने हुए हैं।
  3. बेसाल्ट चट्टानों के क्षरण से उपजाऊ काली मिट्टी बनती है जो गन्ना और कपास जैसी फसलों के लिए श्रेष्ठ है।
  4. आग्नेय चट्टानों के क्षेत्र में खनिज मिश्रित गरम जल के स्रोत पाए जाते हैं।

प्रश्न 10.
अवसादी चट्टानें किस प्रकार बनती हैं?
अथवा
अवसादी चट्टानों की निर्माण प्रक्रिया समझाइए।
अथवा
“अवसादी चट्टानें अन्य चट्टानों से बनती हैं।” इस कथन को सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
अपक्षय तथा अपरदन क्रिया द्वारा चट्टानें ट-फट कर छोटे-बड़े कणों में परिवर्तित होती रहती हैं जिसे अवसाद कहते हैं। बालू, मिट्टी, बज़री, रोड़ी इत्यादि अवसाद के विभिन्न रूप हैं। अनाच्छादन के साधन लाखों वर्षों तक इस अवसाद को परतों में जमा करते रहते हैं। कालान्तर में ये परतें ठोस होकर अवसादी चट्टानें बनती हैं। स्तरों में मिलने के कारण इन्हें स्तरित चट्टानें (Stratified Rocks) भी कहा जाता है। अवसाद के अतिरिक्त इन चट्टानों के निर्माण में पौधों और जानवरों के अवशेषों से उत्पन्न जीवांश (Humus) तथा घुलनशील तत्त्व भी योगदान देते हैं।

प्रश्न 11.
आग्नेय शैलों/चट्टानों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल 1

प्रश्न 12.
अवसादी शैलों का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल 2

प्रश्न 13.
आग्नेय तथा रूपान्तरित चट्टानों में खनिज रवों की व्यवस्था लगभग एक-समान क्यों होती है?
उत्तर:
आग्नेय चट्टानों और रूपान्तरित चट्टानों का निर्माण लगभग एक समान परिस्थितियों में होता है। इन चट्टानों का निर्माण भू-तल के आन्तरिक भाग में होता है तथा इनके निर्माण में प्रमुख कारक मैग्मा है। आन्तरिक भाग में चट्टानें पिघली हुई अवस्था में होती हैं। जब इनसे आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है, तो इनके रवे ढेरों के रूप में बनते हैं, परन्तु जब दबाव तथा तापक्रम के कारण रूपान्तरित चट्टानों का निर्माण होता है, तो इनके रवे तहों में समानान्तर रूप में स्थिर रहते हैं।

प्रश्न 14.
जीवाश्म केवल अवसादी चट्टानों में ही सुरक्षित रहते हैं, न कि आग्नेय चट्टानों में। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
प्राकृतिक वनस्पति तथा विभिन्न जीव-जन्तुओं के अवशेषों अथवा अस्थि-पिंजरों को जीवाश्म कहते हैं। जीवाश्म केवल अवसादी चट्टानों में ही सुरक्षित रहते हैं क्योंकि अवसादी चट्टानें परतदार होती हैं। इन परतों में जीवाश्म सुरक्षित रहते हैं तथा इनसे चट्टानों की उत्पत्ति के समय का ज्ञान होता है। जीवाश्म आग्नेय चट्टानों में सुरक्षित नहीं रह सकते, क्योंकि ये चट्टानें परतरहित होती हैं तथा इनके मूल पदार्थ मैग्मा की गर्मी के कारण ये जीवाश्म झुलस जाते हैं।

प्रश्न 15.
भू-पर्पटी में किन परिस्थितियों में खनिज तेल के भण्डार पाए जा सकते हैं? समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
खनिज तेल सूक्ष्म सागरीय जीव-जन्तुओं और प्राकृतिक वनस्पति के गलने-सड़ने से अवसादी चट्टानों में पाया जाता है। इन चट्टानों की संरचना परतदार तथा विशेष प्रकार की होती है। खनिज तेल भू-पर्पटी में निम्नलिखित परिस्थितियों में पाया जाता है

  1. खनिज तेल तलछट के जमाव के कारण तलछटी चट्टानों में मिलता है।
  2. जब दो अप्रवेशीय चट्टानों के मध्य एक प्रवेशीय परत होती है।
  3. दो परतों के मध्य बलुआ पत्थर की परत से खनिज तेल का निर्माण होता है, क्योंकि गर्मी और दबाव के कारण बलुआ पत्थर में उपस्थित प्राकृतिक वनस्पति तथा जीव-जन्तुओं के अवशेष खनिज तेल में परिवर्तित हो जाते हैं।
  4. अवसादी चट्टानों में वलन होते हैं। खनिज तेल इन वलनों के शिखर से प्राप्त होता है।
  5. नदियों, घाटियों एवं डेल्टाई क्षेत्रों की अवसादी चट्टानों में खनिज तेल के विस्तृत भण्डार संचित हैं। उदाहरण के लिए, सम्पूर्ण उत्तरी भारत की चट्टानों में खनिज तेल मिलने की सम्भावनाएँ हैं।

प्रश्न 16.
अवसादी चट्टानों की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
अवसादी चट्टानों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. अवसादी चट्टानें परतों में पाई जाती हैं।
  2. इन चट्टानों में रवे नहीं पाए जाते।
  3. इन चट्टानों में प्राणिज अवशेष (Fossils) पाए जाते हैं जो जीवन के विकास काल को प्रदर्शित करते हैं।
  4. ये चट्टानें अपेक्षाकृत नरम होती हैं। इन्हें चाकू से खुरचने पर इनमें से महीन कण झड़ते हैं।
  5. आग्नेय व कायान्तरित शैलों की तुलना में इनका अपक्षय व अपरदन आसानी से होता है।
  6. अवसादी चट्टानें सरन्ध्र होती हैं। इनमें जल सुगमता से प्रवेश कर सकता है।

प्रश्न 17.
“रूपान्तरित चट्टानें आग्नेय चट्टानों और अवसादी चट्टानों का ही परिवर्तित रूप है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ऐसी चट्टानें जो अन्य चट्टानों के रूप परिवर्तन द्वारा बनती हैं, रूपान्तरित चट्टानें कहलाती हैं। पी०जी० वॉरसेस्टर के घटन हए बिना गर्मी. दबाव तथा रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप उनके रूप, बनावट व खनिजों का पूर्ण कायान्तरण हो जाता है, वे कायान्तरित चट्टानें कहलाती हैं। रूपान्तरण केवल आग्नेय व अवसादी शैलों का नहीं होता, बल्कि प्राचीन कायान्तरित शैलों का भी होता है जिसे पुनः रूपान्तरण या अति-रूपान्तरण कहा जाता है।

प्रश्न 18.
कायान्तरित चट्टानों का आर्थिक महत्त्व स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  1. कायान्तरित चट्टानों में अनेक महत्त्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं; जैसे नीस, क्वार्टज़ाइट, ग्रेफाइट, एन्थ्रासाइट, स्लेट व संगमरमर इत्यादि।
  2. क्वार्टज़ाइट का प्रयोग काँच उद्योग में होता है क्योंकि यह एक कठोरतम खनिज है।
  3. स्लेट का प्रयोग छप्पर व फर्श बनाने के लिए तथा स्कूली बच्चों के लिखने के लिए होता है। बिलियर्ड्स की मेज़ मोटी स्लेट से बनाई जाती है।
  4. नीस व संगमरमर का प्रयोग इमारती पत्थर के रूप में किया जाता है। विश्व प्रसिद्ध ताजमहल संगमरमर का बना हुआ है।
  5. ग्रेफाइट का प्रयोग पेन्सिल का सिक्का बनाने तथा धातु गलाने की घड़िया (Crucible) बनाने के काम आता है। ग्रेफाइट का गलनांक $3500^{\circ}$ सेल्सियस होतां है। परमाणु बिजली-घरों के लिए ग्रेफाइट अनिवार्य है।
  6. रूपान्तरित चट्टानों में ही बहुमूल्य जवाहरात; जैसे रत, माणिक, नीलम इत्यादि उत्पन्न होते हैं।
  7. सेलखड़ी और टेल्क का प्रयोग टेलकम पाउडर जैसे सौन्दर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल

प्रश्न 19.
तापीय अथ्वा स्पर्श रूपान्तरण क्या होता है?
उत्तर:
ऊँचे ताप के प्रभाव से चट्टानों में होने वाला रूपान्तरण तापीय रूपान्तरण कहलाता है। भू-गर्भ से ऊपर की ओर बढ़ता हुआ गरम मैग्मा अपने सम्पर्क में आने वाली स्थानीय शैलों को पिघलाकर या भूनकर उनके रूप, रंग, संरचना और गुणों में परिवर्तन ला देता है। इस तापीय रूपान्तरण से बलुआ पत्थर बदलकर क्वार्टज़ाइट, चूने का पत्थर बदलकर संगमसमर, चीका मिट्टी और शैल बदलकर स्लेट और बिटुमिनस कोयला बदलकर एंग्रासाइट और ग्रेफाइट बन जाते हैं। ये सभी परिवर्तन लगभग 50 से 80 डिग्री सेल्सियस तक होते हैं। 150 से 200 सेल्सियस में स्लेट पुनः कायान्तरित होकर फाइलाइट (Philite) में बदल जाती है।

प्रश्न 20.
खनिज संसाधरों का वर्गीकरण कीजिए-
उत्तर:
खनिज संसाधन निम्नलिखित वर्गों में बाँटे जाते हैं-

  1. आवश्यक संसाधन-आधारभूत संसाधनों के इस वर्ग से हमें जल तथा मृदा उपलब्ध होते हैं।
  2. ऊर्जा संसाधन-इनमें हमें जीवाशुमी ईंधन; जैसे कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला, तारकोल, बालू तथा परमाणु ईंधन; जैसे यूरेनियम, थोरियम तथा भूतापीय ऊर्जा उपलब्ध होती है।
  3. धात्विक संसाधन-इनमें हमें संरचनात्मक धातुएँ; जैसे लोहा, एल्यूमीनियम, टिटैनियम, सोना, प्लैटिनम तथा सैलियम इत्यादि प्राप्त होते हैं।
  4. औधोगिक संसाधन-औद्योगिक खनिजों से हमें 30 से अधिक पदार्थ प्राप्त होते हैं; जैसे बालू, नमक व एस्बेस्टस इत्यादि।

प्रश्न 21.
निम्नलिखित में अन्तर स्पष्ट कीजिए-
(क) खनिज तथा चट्टान
(ख) डाइक तथा सिल
(ग) आग्नेय तथा अवसादी चट्टारें।
उत्तर:
(क) खनिज तया चट्टान-

खनिज (Mineral)चट्टान (Rock)
1. खनिज एक या अधिक तत्त्वों के योग से बनते हैं। प्रायः ये यौगिक रूप में मिलते हैं।1. चट्टान एक या अधिक खनिजों के मिश्रण से बनती हैं।
2. खनिज प्राकृतिक अवस्था में पाया जाने वाला एक अजैविक पदार्थ है।2. चट्टान भू-पृष्ठ पर पाया जाने वाला जैविक और अजैविक, कठोर और नरम पदार्थ है।
3. खनिजों की एक निश्चित रासायनिक संरचना होती है।3. चट्टानों की निश्चित रासायनिक संरचना नहीं होती।
4. खनिजों से चट्टान बनती है।4. चट्टानों से भू-पर्पटी बनती है।
5. लोहा, तांबा, सोना, अभ्रक, फेल्सपार आदि खनिजों के उदाहरण हैं।5. चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, स्लेट, ग्रेनाइट आदि चट्टानों के उदाहरण हैं।

(ख) डाइक तथा सिल

डाइकसिल
1. इनका निर्माण भूतल के आन्तरिक भाग में मैग्मा के लम्बवत् रूप में दरारों में जम जाने के कारण होता है।1. इनका निर्माण भूतल के आन्तरिक भाग में मैग्मा के क्षैतिज परतों के मध्य दरारों में जम जाने के कारण होता है।
2. यह अन्तर्वेधी आग्नेय शैल है।2. यह भी अन्तर्वेधी आग्नेय शैल है।
3. ये भूतल के लम्बवत् बनते हैं।3. ये भूतल के समानान्तर क्षैतिज अवस्था में बनते हैं।

(ग) आग्नेय तथा अवसादी चट्टानें

आग्नेय चट्टानेंअवसादी चट्टानें
1. आग्नेय शैलों का निर्माण लावा के ठण्डा तथा ठोस होने से होता है।1. अवसादी शैलों का निर्माण तलछट की परतों के निरन्तर जमने से होता है।
2. ये शैलें ढेरों में मिलती हैं।2. ये शैलें परतदार होती हैं।
3. इन शैलों में रवे मिलते हैं।3. इन शैलों में विभिन्न प्रकार के गोल कण मिलते हैं।
4. इनमें जीवावशेष नहीं मिलते।4. इनमें प्राकृतिक वनस्पति तथा जीव-जन्तुओं के अवशेष मिलते हैं।

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आग्नेय चट्टानें किसे कहते हैं? इनका वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
विभिन्न आधारों पर आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
आग्नेय चट्टानों का अर्थ (Meaning of Igneous Rocks)-आग्नेय शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के इग्निस (Ignis) शब्द से हुई है, जिसका तात्पर्य है कि अग्नि के समान गरम तप्त लावा के ठण्डे होने से इन चट्टानों का निर्माण हुआ। पृथ्वी अपनी उत्पत्ति के समय गरम, तरल एवं गैसीय पुंज थी, जो धीरे-धीरे ठण्डी हुई। ठण्डी एवं ठोस अवस्था में आने से इन चट्टानों का निर्माण हुआ। पृथ्वी पर सर्वप्रथम इन्हीं चट्टानों का निर्माण हुआ इसलिए इन्हें प्राथमिक चट्टानें भी कहते हैं। आग्नेय चट्टानें पृथ्वी के पिघले हुए पदार्थ (मैग्मा) के ठण्डा एवं ठोस हो जाने के कारण बनी हैं।

आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण (Classification of Igneous Rocks)-आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधार पर किया जाता है

  • स्थिति के आधार पर
  • रासायनिक संरचना के आधार पर

I. स्थिति के आधार पर-स्थिति के आधार पर आग्नेय चट्टानों का वर्गीकरण इस प्रकार है-
1. बाह्य या बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानें (Extrusive Ieneous Rocks) जब भू-गर्भ का तप्त एवं गरम मैग्मा धरातल पर आकर ठण्डा होता है तो बाह्य आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। इन चट्टानों का प्रमुख उदाहरण बेसाल्ट है। प्रायद्वीपीय भारत के उत्तर:पश्चिमी क्षेत्र में इस प्रकार की चट्टानें पाई जाती हैं।

2. आन्तरिक या अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानें (Intrusive Igneous Rocks)-ज्वालामुखी उद्गार के समय जब भू-गर्भ का मैग्मा पृथ्वी के तल के नीचे दरारों में जम जाता है तो आन्तरिक आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। भू-गर्भ में मैग्मा का जमाव दो विभिन्न स्थितियों में होता है, इसलिए इन्हें निम्नलिखित दो उपवर्गों में बाँटा जा सकता है
(i) पातालीय चट्टानें (Plutonic Rocks)-भू-गर्भ में अत्यधिक गहराई पर मैग्मा के जमाव द्वारा बनी चट्टानों को पातालीय चट्टानें कहते हैं। यहाँ मैग्मा के ठण्डा होने में पर्याप्त समय लगता है, इसलिए इनके रवे बड़े होते हैं। ग्रेनाइट तथा गेब्रो (Gabro) इनके प्रमुख उदाहरण हैं। ये आन्तरिक आग्नेय चट्टानों के बड़े-बड़े पिण्ड होते हैं, इन्हें बैथोलिथ कहते हैं। भारत में छोटा नागपुर के पठार, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में इसी प्रकार की चट्टानें पाई जाती हैं।

(ii) मध्यवर्ती चट्टानें (Hypabyssal Rocks)-जब भू-गर्भ का मैग्मा धरातल के ऊपर नहीं आ पाता और भू-गर्भ की चट्टानों हो जाता है तो उन्हें मध्यवर्ती आग्नेय चट्टानें कहते हैं। यदि लावे का जमाव लम्बवत् रूप में होता है तो उन्हें डाइक कहते हैं और यदि क्षैतिज रूप में हो तो उन्हें सिल कहते हैं।

II. रासायनिक संरचना के आधार पर रासायनिक संरचना के आधार पर आग्नेय चट्टानों को निम्नलिखित दो भागों में बाँटा जा सकता है
1. अम्लीय आग्नेय चट्टानें (Acid Igneous Rocks)-इनमें सिलिका की मात्रा 65% से अधिक होती है। इसके अतिरिक्त इन चट्टानों में सोडियम, पोटाशियम तथा एल्यूमीनियम आदि महत्त्वपूर्ण रासायनिक तत्त्व होते हैं। ग्रेनाइट, क्वार्ट्ज़ाइट, पेग्मैटाइट तथा राओलाइट इस प्रकार की चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं।

2. क्षारीय आग्नेय चट्टानें (Basic Igneous Rocks) इनमें सिलिका की मात्रा 40% से 55% तक होती है। बेसाल्ट, गेब्रो तथा डोलेराइट इस प्रकार की चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
आग्नेय चट्टानी पिण्डों से आपका क्या तात्पर्य है? विभिन्न आग्नेय चट्टानी पिण्डों का वर्णन करें।
उत्तर:
आग्नेय चट्टानी पिण्ड का अर्थ (Meaning of Masses of Igneous Rocks)-मैग्मा के ठोसावस्था में आने पर अनेक तरह के चट्टानी पिण्डों की रचना होती है। इनका नामकरण इनके रूप, आकार, स्थिति तथा आस-पास पाई जाने वाली चट्टानों के आधार पर किया जाता है। अधिकांश चट्टानी पिण्ड अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानों से बने हुए हैं।

आग्नेय चट्टानी पिण्डों के प्रकार (Types of Masses of lgneous Rocks)-आग्नेय चट्टानी पिण्डों के प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. बैथोलिथ (Batholith) यह मैग्मा का सबसे बड़ा गुम्बदाकार जमाव है जो अत्यधिक गहराई में पाया जाता है। हज़ारों वर्ग कि०मी० क्षेत्र में विस्तृत इस पिण्ड का ऊपरी तल ऊबड़-खाबड़ तथा ढाल खड़ा होता है। इसकी मोटाई इतनी अधिक होती है कि इसके आधार पर पहुँच पाना कठिन होता है। अनाच्छादन के बाद इसका केवल ऊपरी भाग ही देखा जा सकता है। बैथोलिथ की जड में होते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के इडाहो (Idaho) राज्य में 40 हजार वर्ग कि०मी० से भी ज्यादा क्षेत्र में फैला बैथोलिथ तथा पश्चिमी कनाडा में कोस्ट रेन्ज बैथोलिथ इसके प्रमुख उदाहरण हैं। बैथोलिथ मूलतः ग्रेनाइट चट्टानों के जमाव होते हैं।

2. स्टॉक (Stock)-छोटे आकार के बैथोलिथ को स्टॉक कहते हैं। स्टॉक की ऊपरी सतह का विस्तार 100 वर्ग कि०मी० से कम क्षेत्र में होता है। यह खड़ी अवस्था में होता है जिसका ऊपरी भाग अधिक विषम किन्तु गोलाकार होता है। इसकी अन्य विशेषताएँ बैथोलिथ जैसी होती हैं।

3. लैकोलिथ (Lacolith) भू-गर्भ से धरातल की ओर बढ़ता हुआ विस्फोटक मैग्मा जब किन्हीं कारणों से धरातल पर नहीं पहुँच पाता तो वह परतदार चट्टानों में छतरीनुमा रूप धारण कर लेता है। लैकोलिथ की निचली परत सीधी होती है जो नली के द्वारा मैग्मा भण्डार से जुड़ी होती है। लैकोलिथ बहिर्वेधी ज्वालामुखी पर्वत का अन्तर्वेधी प्रतिरूप है। उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी भाग में अनेक लैकोलिथ देखने को मिलते हैं।

4. लैपोलिथ (Lapolith)-जब मैग्मा का जमाव धरातल के नीचे किसी अवतल आकार वाले उथले बेसिन में हो जाता है तब एक तश्तरीनुमा चट्टानी पिण्ड का निर्माण होता है, जिसे लैपोलिथ कहते हैं। इसका उदाहरण दक्षिण अफ्रीका के ट्रांसवाल क्षेत्र में मिलता है।

5. फैकोलिथ (Phacolith) मोड़दार पर्वतों की अपनति (Anticline) व अभिनति (Syncline) में मैग्मा के जमाव को फैकोलिथ कहते हैं। यह लहरदार आकृति का होता है।

6. सिल (Sill)-परतदार चट्टानों के बीच भू-पृष्ठ के समानान्तर मैग्मा से बनी अधिवितलीय चट्टान को सिल कहते हैं। इसकी मोटाई सैकड़ों मीटर तक होती है किन्तु एक मीटर से पतली सिल को शीट (Sheet) कहा जाता है।

7. डाइक (Dike or Dyke)-जब भू-तल के नीचे मैग्मा लम्बवत् जोड़ों या दरारों में जमता है तो डाइक कहलाता है। कठोर होने के कारण इस पर अपरदन का कम प्रभाव पड़ता है। आस-पास की चट्टानों के अपरदन द्वारा नष्ट होने पर डाइक एक खड़ी या झुकी विशाल दीवार की भान्ति दिखाई पड़ते हैं। डाइक कुछ मीटर से कई कि०मी० तक लम्बे व कुछ सेंटीमीटर से कई मीटर तक चौड़े होते हैं। झारखण्ड के सिंहभूम जिले में डोलेराइट के अनेक डाइक देखने को मिलते हैं।

उपर्युक्त अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टानी पिण्डों के अतिरिक्त अनेक बहिर्वेधी आग्नेय चट्टानी पिण्ड भी पाए जाते हैं। इनसे महाद्वीपों और महासागरों की तली पर ज्वालामुखी पर्वतों और ज्वालामुखी पठारों का निर्माण होता है।

प्रश्न 3.
परतदार अथवा अवसादी चट्टानें किसे कहते हैं? इनका वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
तलछटी चट्टानों या शैलों का वर्गीकरण करते हुए इसकी मुख्य किस्मों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अवसादी (परतदार) चट्टानों का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Sedimentary Rocks) अपक्षय तथा अपरदन के विभिन्न साधनों द्वारा प्राप्त बड़ी मात्रा में अवसाद के जमने से बनी हुई चट्टानों को परतदार अथवा अवसादी चट्टानें अवसाद के परतों में जमने के कारण होता है। भूतल पर लगभग 75% चट्टानें अवसादी चट्टानें हैं। पी०जी० वॉरसेस्टर के अनुसार, “अवसादी शैल, धरातलीय चट्टानों के टूटे मलबे तथा खनिज एक स्थान से दूसरे स्थान पर एकत्रित होते रहते हैं जो धीरे-धीरे एक परत का रूप धारण कर लेते हैं।”

अवसादी चट्टानों का वर्गीकरण (Classification of Sedimentary Rocks)-अवसादी चट्टानों की निर्माण-विधि तथा संरचना के आधार पर इन्हें अग्रलिखित दो वर्गों में विभाजित किया जा सकता है

  • जैव अवसादी चट्टानें (Organic Sedimentary Rocks)
  • अजैव अवसादी चट्टानें (Inorganic Sedimentary Rocks)

I. जैव अवसादी चट्टानें (Crganic Sedimentary Racks)-जिन चट्टानों का निर्माण विभिन्न जीव-जन्तुओं या वनस्पति के जमाव द्वारा होता है, उन्हें जैव अवसादी चट्टानें कहते हैं। ये चट्टानें निम्नलिखित प्रकार की होती हैं-
(1) चूना प्रधान अवसादी चट्टानें (Calcareous Sedimentary Rocks) महासागरीय तथा सागरीय जल में विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु रहते हैं। इन जीव-जन्तुओं की मृत्यु के पश्चात् इनके अवशेष समुद्र की तलहटी में जमा होते रहते हैं जिनसे चूना प्रधान अवसादी चट्टानों का निर्माण होता है। चूना पत्थर, खड़िया, डालोमाइट तथा सेलखड़ी इनके प्रमुख उदाहरण हैं। प्रवाल भित्तियों या प्रवाल द्वीपों का निर्माण चूना-युक्त चट्टानों से होता है।

(2) कार्बनयुक्त अवसादी चट्टानें (Carbonaceous Sedimentary Rocks) इस प्रकार की चट्टानों का निर्माण जीव-जन्तुओं तथा प्राकृतिक वनस्पति द्वारा होता है। पृथ्वी में उथल-पुथल के कारण जीव-जन्तु तथा प्राकृतिक वनस्पति भू-तल के नीचे दब जाती है। भू-गर्भ के तापमान तथा ऊपरी चट्टानों के दबाव के कारण इन जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों के अंश कालान्तर में कोयले के रूप में बदल जाते हैं जिसमें कार्बन की प्रधानता होती है। कार्बन की मात्रा के अनुसार पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस तथा एन्थ्रासाइट कोयले का निर्माण होता है।

(3) रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनी अवसादी चट्टानें (Chemically formed Sedimentory Rocks)-खारी झीलों या समुद्रों का पानी जलवाष्प बनकर उड़ जाता है तथा अवसाद नीचे रह जाते हैं जिससं अवसादी चट्टानें बनती हैं। रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बनी चट्टानों के प्रमुख उदाहरण सेंधा नमक, जिप्सम तथा शोरा हैं।

II. अजैव अवसादी चट्टानें (Inorganic Sedimentary Rocks)-अपक्षय तथा अपरदन की क्रियाओं द्वारा चट्टानें टूटती-फूटती रहती हैं तथा उनका मलबा जमा होता रहता है। अजैव अवसादी चट्टानों को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है

  • प्रधान अवसादी चट्टानें (Arenaceous Sedimentary Rocks)-इन चट्टानों का निर्माण बालू के कणों के संगठन से होता है। बलुआ पत्थर इनका प्रमुख उदाहरण है।
  • चीका प्रधान अवसादी चट्टानें (Argillaceous Sedimentary Rocks)-इनका निर्माण चिकनी मिट्टी तथा दलदल के कठोर होने के कारण होता है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 5 खनिज एवं शैल

प्रश्न 4.
अवसादी या परतदार चट्टानों की विशेषताओं तथा आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अवसादी चट्टानों की विशेषताएँ (Characterstics of Sedimentary Rocks) अवसादी चट्टानों की विशेषताएँ। निम्नलिखित हैं

  • आग्नेय चट्टानों की तुलना में ये चट्टानें कोमल अथवा नरम होतो हैं।
  • ये चट्टानें परतों के रूप में पाई जाती हैं।
  • ये चट्टानें छिद्रमय होती हैं। बलुई चट्टानें अधिक छिद्रमय तथा चीका-युक्त चट्टानें कम छिद्रमय होती हैं।
  • इन चट्टानों में जीव-जन्तुओं एवं वनस्पति के अवशेष पाए जाते हैं।
  • ये चट्टानें रवे-रहित होती हैं।
  • ये चट्टानें प्रवेश्य चट्टानें हैं।

अवसादी चट्टानों का आर्थिक महत्त्व (Economical Significance of Sedimentary Rocks)-अवसादी चट्टानों का महत्त्व निम्नलिखित कारकों पर आधारित है

  • अवसादी चट्टानें उपजाऊ मिट्टी का अभूतपूर्व भण्डार हैं। उदाहरण के लिए, सतलुज, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र के मैदान की उपजाऊ मिट्टी अवसादी चट्टानों की ही देन हैं।
  • इन चट्टानों में शक्ति के प्रमुख स्रोत; जैसे कोयला तथा पेट्रोलियम मिलते हैं। उदाहरण के लिए, महानदी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों में कोयले के भण्डार हैं तथा सम्पूर्ण उत्तरी भारत की अवसादी चट्टानों में खनिज तेल के भण्डार मिलने की सम्भावनाएँ हैं।
  • उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में अवसादी चट्टानों के अपक्षय से बॉक्साइट, मैंगनीज, टिन आदि खनिजों के गौण अयस्क मिलते हैं।
  • अवसादी चट्टानों में लौह-अयस्क, फास्फेट, इमारती पत्थर, कोयला तथा सीमेण्ट बनाने वाले पदार्थों के स्रोत मिलते हैं।
  • इन चट्टानों में विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थ पाए जाते हैं।

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HBSE 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts Notes.

Haryana Board 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts

Understanding chemical Properties of Acids and Bases:

  • In present times, 114 elements are known to us. These elements combine in several ways and give rise to a very large number of compounds.
  • On the basis of their chemical properties all the compounds is can be divided into three groups. They are:

Acids: An acid is a compound having hydrogen which when dissolved in water releases i.e. dissociates hydrogen ions (H+) to be specific (H3O+ ions). For example, hydrochloric acid (HCl), sulphuric acid (H2SO4), etc.

Bases: A base is a metal hydroxide substance which when dissolved in water release hydroxide (OH) ions. For example, sodium hydroxide (NaOH), calcium hydroxide (Ca(OH)2), etc.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts

Salts: A salt is an ionic compound which is formed from the neutralization reaction of an acid and a base.

Olfactory Indicators: Olfactory means ‘relating to the sense of smell’. Those substances whose smell changes in acidic or basic solutions are called olfactory indicators.

Outcomes of certain important types of reactions:

Reaction of acid with metal:
When acid reacts with metal, metallic salt of that metal and hydrogen gas are produced.

Reaction of base with metal:
When a strong base reacts with certain metals, it produces salt and hydrogen gas.

Reaction of acid with metal carbonate or metal hydrogen carbonate:
When acids react with metal carbonate or metal hydrogen carbonate, most acids produce salt, water and carbon dioxide gas.

Reaction of acid with base:
When acid reacts with base, salt and water are produced. Since base neutralizes the effect of acid, this reaction is called neutralization reaction.

Reaction of acid with metal oxide:
When acid reacts with metal oxide, salt and water are produced.

Reaction of nonmetallic oxide with base:
When a non-metallic oxide reacts with base, the reaction gives out salt and water.

How Strong are Acid or Base Solutions?

Strong acids:
An acid which gets completely ionized completely in water or say which completely dissociates in water and produce a large amount of hydrogen [H+] ions (or say hydronium [H2O+] ions) is called a strong acid.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts

Weak acids:
An acid which does not ionize completely (i.e. does not dissociate completely in water) and thus produce a small amount of hydrogen [H+] ions (or say H2O+ ions) is called a weak acid.

Strong base:
A base, which completely ionizes in water and thus produces a large amount of hydroxide (OH) ions, is called a strong base or a strong alkali.

Weak base:
A base, which does not ionize completely in water and thus produces a small amount of hydroxide (OH) ions, is called a weak base or a weak alkali.

The methods of measuring the strength of an acid or a base:

  • Through universal indicator and
  • Through pH scale

pH scale:

  • The pH scale measures concentration of hydrogen [H+] ions in the solution.
  • The scale points range from O to 14. 0 means very acidic and 14 means very alkaline. Scale point 7 means neutral solution.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts

Importance of pH in everyday life:

  • Importance of pH in existence of living beings,
  • Importance of pH in soil,
  • Importance of pH in digestion of food,
  • Importance of pH in stopping tooth decay,
  • Self-defence by animals and plats through Chemical warfare:

More About Salts

Salt:

  • A salt is an ionic compound which is formed by the neutralization reaction of an acid and a base. Thus, we get salt when we react an acid with a base. When we dissolve a salt in water it will get ionized and release cation (i.e. the positive +ve ion) and anion (i.e. the negative – ve ion).
  • In general, salts having same type of cations (+ve ions) or anions (-ve) belong to the same family.

Some Important Salts:
HBSE 10th Class Science Notes Chapter 2 Acids, Bases and Salts 1

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HBSE 10th Class Science Notes Chapter 12 Electricity

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Notes Chapter 12 Electricity Notes.

Haryana Board 10th Class Science Notes Chapter 12 Electricity

Electric Current and Circuit

  • Electric charge and conduction of electricity:
  • ‘Charge’ or ‘electric charge’ is the fundamental quantity of electricity.
  • Electric charge or simply charge is of two types, (1) Positive (+) charge and (2) negative (-) charge.
  • If electric charge flows through a conductor such as metal wire, we say that there is electric current in the conductor. The S.l. unit of electric charge is columb ‘C’.
  • An electron possesses a ‘negative charge of  6 x 10-19 C whereas a proton possesses a ‘positive charge of 6 x 10-19 C’.
  • Free (or conducting) electrons are responsible for conducting electricity or say conduction.
  • Electric current can flow very easily through material which contain a large number of free electrons. Hence such a material is called a conductor. For example, metals such as copper, silver and aluminium are conductors.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 12 Electricity

Electric current:
The rate of flow of electric charge is known as electric current. In other words, the net quantity of electric charge that flows through any cross­section of a conductor is known as the electric current.

Thus, electric current \(=\frac{\text { Quantity of electric charge }}{\text { Time }}\)

If Q is the amount of electric charge passing through any cross-section of a conductor in time then, electric current \((I)=\frac{Q}{t}\)

SI unit of electric current is Coulomb/second (C/s). Electric current is also measured in Ampere (A).

Electric circuit:
A continuous and closed path along which electric current flows is called an electric circuit.

Electric Potential and Potential Difference

Electric potential difference:
The amount of work done to take a unit positive charge from a given point say A to point B in a circuit carrying some current is known as the electrical potential difference between the two points.

Thus, electric potential difference
\((V)=\frac{\text { Work done }(W)}{\text { Electric charge }(Q)}\) \(V=\frac{W}{Q}\)

In practice, electric potential difference is known as voltage. Its S.I unit is joule/coulomb or volt (V).

If the work done to bring 1 coulomb electric charge from one point to another is 1 joule, then the potential difference between these two points is called 1 volt.
\(\text { Thus, } 1 \text { volt }=\frac{1 \text { joule }}{1 \text { Coulomb }} \quad \mathrm{~V}=1 \mathrm{JC}^{-1}\)

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Ohm’s law:

  • In a definite physical situation, the electric current (I) flowing through the conductor is directly proportional to the potential difference (V) applied across it, provided its temperature and other physical conditions remain same.
  • Thus, I α V or say V α I.
    ∴ V = I R (where, R is the proportionality by constant and it represents resistance R of the circuit)
  • The SI unit of resistance (R) is volt/ampere which is called ohm and it is denoted by Ω. (Omega).
    ∴ \(1 \mathrm{Ohm}(\Omega)=\frac{1 \text { volt }(\mathrm{V})}{1 \text { ampere }(\mathrm{l})}\)

Factors on which the Resistance of a Conductor Depends

The resistance (R) of a conductor is directly proportional to the length of the conductor and inversely proportional to the area of its cross-section.

Resistance R α length l and also R α \(\frac{1}{A}\)
∴ \(\mathrm{R} \alpha \frac{1}{\mathrm{~A}}=\rho \frac{1}{\mathrm{~A}}\)

∴ \(R \alpha \frac{1}{A}=\rho \frac{1}{A}\) (where ρ (rho) is constant and called the resistivity of conducting material.)
We can also say, \(\rho=\mathrm{R} \frac{\mathrm{A}}{l}\)

The S.l unit of resistivity ρ =Ωm (Ohm meter)

At constant temperature, the resistance of a conductor depends on:

  • Length (L) i.e. R α L,
  • Area of cross-section (A) i.e. \(R \propto \frac{1}{A}\) and
  • Nature of material.

Combining all these factors we get:
\(R \propto \frac{L}{A} \text { or say } R=\rho \frac{L}{A}\)

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 12 Electricity

Resistance of a Sprem of Resistors

Joining resistors in a series connection:

  • When two or more resistors are connected end- to-end consecutively, such a connection is called a series connection.
  • In a series connection, equivalent resistance
    Rs = R1 + R2 + R3

Joining resistors in a parallel connection:
When two or more resistors are connected between the same two points of a circuit, they are said to be connected in a parallel connection (because they are connected in parallel and not end-to-end).

In a parallel connection, equivalent resistance is denoted as \(\frac{1}{R_p}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}+\frac{1}{R_3}\)

Heating effect of electric current:

  • When electric current is passed through a high resistance wire, the resistance wire becomes hot and produces heat. Here, electrical energy is converted into heat energy which is known as the heating effect of electric current.
  • The energy spent by the source of the work done by the source can be calculated as
    W=l.R x I.t =l2Rt.
    Thus, heat energy (H) = I2Rt

Practical Applications of Heating Effect of Electric Current

Practical (daily life) applications of heating effect of electric current:

  • Household heating appliances: Electric iron, toaster, sandwich maker, room heater, electric kettle, etc. all such appliances make use of heating effect of electric current.
  • Electric bulbs: When electricity is passed through the filament of the electric bulbs, the bulbs light up. Here, heating effect is used foremitting light.
  • Electric fuse: Electric tuse is a safety device which works on the heating effect of electric current.

Electric power:

  • The electrical energy consumed (or heat energy generated) in unit time is called electric power.
  • In other words, electric power is the rate of electric energy. It is denoted by R.

∴ Power P \(\mathrm{P}=\frac{\text { Electric energy consumed }}{\text { Time }}\)
\(=\frac{W}{t}=\frac{l^2 R t}{t}\)
(∴ W = electrical energy = I2Rt)
∴ P=I2R

The SI unit of power is joule/second or watt (W).
Practical unit of electrical energy:
Power \(\mathrm{P}=\frac{\text { electric energy }(\mathrm{W})}{\text { time }(\mathrm{t})}\)
∴ Electrical energy (W) = Power (P) x time (t)
= watt x second
= joule

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Thus, the unit of electrical energy is watt. second.
The larger unit of electrical energy is kWh.
1 kWh = 1000 watt x 3600 seconds
= 3.6 x 106 joules (J)

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HBSE 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements Notes. BANKBARODA Pivot Point Calculator

Haryana Board 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Making Order Out of Chaos – Early Attempts at the Classification of Elements

Need of classifying elements:
Classifying the elements help us to understand their properties and produce various products.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Dobereiner’s classification of elements
(Dobereiner’s triads):
In 1817, German chemist Johann Wolfgang Dobereiner started classifying elements on the basis of their chemical properties.

Law of Triads:
If three elements are arranged in the increasing order of their atomic masses, the atomic mass of the intermediate (i.e. second) element would be almost equal to the average of atomic masses of first and third elements. This is known as Law of Triads. It was given by Dobereiner.

Limitation of Dobereiner’s classification :

  • Certain elements could not be classified by Dobereiner’s method.
  • Only a limited number of elements could be classified into triads.

The three triads identified by Doberiner:

  • Lithium, Sodium and Potassium
  • Chlorine, Bromine and Iodine
  • Calcium, Strontium and Barium.

Newlands’ Law of Octaves:

  • When elements are arranged in the increasing
    order of their atomic masses, properties of every 8th element are found to be similar to the properties of the first element.
  • In 1866, a scientist named John Newlands arranged the elements in the increasing order of their atomic masses.
  • During this arrangement, he found properties of every 8th element to be similar i.e. property of 1st and then 8th element would be similar. This periodicity pattern was known as the Law of Octaves (octaves = eight).

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Limitation of Newlands’ Law of Octaves:

1. The law was applicable only upto calcium.
2. Newlands thought that there were only 56 elements in nature. He also thought that no more elements would be discovered in the future.
3. In order to fit elements any how into his table, Newlands adjusted two elements in the slot even if the properties of elements did not match with other elements.

Making Order Out of Chaos Mendeleev \ Periodic Table

Mendeleev’s Periodic Table:

1. In 1869, Russian chemist Dmitri Ivanovich Mendeleev started his work of classifying 63 elements known to man.

2. Mendeleev started by examining the relationship of

  • ‘Atomic mass of an element’ with
  • ‘Physical property of the element’ and
  • Chemical property of the element.

3. Through this classification, he concluded that “The properties of elements are periodic function (i.e. periodic in nature) of their atomic mass.” This law came to be known as Mendeleev’s Periodic Law

Criteria used by Mendeleev for developing periodic table:

  • The properties of elements are the periodic function of their atomic masses. Hence, arranging elements in the increasing order of their atomic masses.
  • Elements with similar properties are arranged in the same group.
  • The formula of oxides and hydrides formed by an element.

Anomalies (irregularities) of Mendeleev’s Periodic Table:

  • Sequence of few elements was inverted,
  • Gaps were kept at few places

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Limitations of Mendeleev’s Periodic Table:

  • The position of hydrog en could not be correctly assigned,
  • The table could not assign proper position for the isotopes of various elements
  • Some elements were not arranged on the basis of their increasing atomic mass. This posed a question as to how many elements could still take the place between two elements.

Making Order out of Chaos – The Modern Periodic Table:

Periodic table:
The Periodic Table is a chart in which all the elements known to us are arranged in a systematic manner.

Modern Periodic Law:
Properties of elements are a periodic function of their atomic numbers.

Arrangement of elements in groups and periods in Modern Periodic Table:

(a) Placement of an element in a group:
Elements are placed in a particular group on the basis of the ‘valence electrons’ i.e. elements having same number of valence electrons will be placed in same group.

(b) Placement of an element in a period:
Within a horizontal period, as one moves from left to right, the ‘elements have same number of shells’ but, ‘different valence electrons’. Moreover, on moving left to right, the number of electrons of valence shell increase by 1 unit.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Thus, elements having same number of shells are placed in the same period. For example, Na, Mg, Al, Si, etc. have 3 shells and hence are placed in the 3rd period.

Trends in the Modern Periodic Table Periodic properties:

The properties which are determined by the electronic configuration of elements or which depend on the electroninc configuration of elements are known as periodic properties.

Trends of change in (1) Valency, (2) Atomic size and (3) Metallic and non-metallic properties in groups and periods:

CharacteristicGroupsPeriods
1. ValencyAll the elements of a group have same valency.On moving from left to right, the valency of elements increase from 1 to 4 and then goes on decreasing to O (zero).
2. Atomic size (Radius of atom)As we move down in a group, the size of atoms i.e. atomic size increaseOn moving from left to right in a period, the size of the atoms decrease.
3. Metallic and Non-metallic propertiesGoing down in the group, the metallic property of elements increaseOn moving left to right in a period, the metallic property of elements decreases while non-metallic property increases.

HBSE 10th Class Science Notes Chapter 5 Periodic Classification of Elements

Metalloids or semi-metallic elements:

1. Elements which possess properties of both metals and non-metals are known as metalloids or semi- metallic elements.
2. In the Modern Periodic Table, a zig-zag line separates metals and non-metals. The border line elements such as boron (B), silicon (Si), germanium (Ge), arsenic (As), antimony (Sb), tellurium (Te) and polonium (Po) on this zig-zag line are known as metalloids or semi-metals.

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. मानव के आर्थिक क्रियाकलापों को कितने प्रमुख वर्गों में बांटा गया है?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(C) 4

2. मानव की नितांत आवश्यकताएँ हैं
(A) भोजन, आवास, वस्त्र
(B) भोजन, लकड़ी, आग
(C) जल, वस्त्र, आग
(D) वायु, आवास, भोजन
उत्तर:
(A) भोजन, आवास, वस्त्र

3. संसार के विकसित राष्ट्रों में कितने प्रतिशत लोग प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न हैं?
(A) 2 प्रतिशत
(B) 3 प्रतिशत
(C) 5 प्रतिशत
(D) 7 प्रतिशत
उत्तर:
(C) 5 प्रतिशत

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

4. कालाहारी के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) पिग्मी
(B) इनुइट
(C) सान
(D) पिंटुपी
उत्तर:
(C) सान

5. अफ्रीका के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) सान
(B) इनुइट
(C) पिंटुपी
(D) पिग्मी
उत्तर:
(D) पिग्मी

6. दक्षिण भारत के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) सेमांग
(B) पालियान
(C) ऐनु
(D) टोबा
उत्तर:
(B) पालियान

7. ‘पिंटुपी’ आखेटक तथा संग्राहक निम्नलिखित में किस क्षेत्र से संबंधित है?
(A) ऑस्ट्रेलिया
(B) अफ्रीका
(C) दक्षिण अमेरिका
(D) कालाहारी
उत्तर:
(A) ऑस्ट्रेलिया

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

8. लैब्रेडोर के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) इन्नू
(B) इनुइट
(C) खेकी
(D) ऐनु
उत्तर:
(A) इन्नू

9. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?
(A) आखेट
(B) संग्रहण
(C) मत्स्य पकड़ना
(D) सूती वस्त्र बनाना
उत्तर:
(D) सूती वस्त्र बनाना

10. निम्नलिखित में से कौन-से देश में चलवासी पशुचारण पाया जाता है?
(A) सऊदी अरब
(B) उत्तरी अमेरिका
(C) दक्षिणी अफ्रीका
(D) न्यूजीलैंड
उत्तर:
(A) सऊदी अरब

11. ऑस्ट्रेलिया में विश्व की कितने प्रतिशत भेड़ें पाली जाती हैं?
(A) 20 प्रतिशत
(B) 35 प्रतिशत
(C) 50 प्रतिशत
(D) 65 प्रतिशत
उत्तर:
(C) 50 प्रतिशत

12. ‘डियर’ कहाँ पाला जाता है?
(A) विकसित चरागाहों में
(B) कम घास वाले क्षेत्रों में
(C) शीत तथा टुंड्रा प्रदेशों में
(D) शुष्क प्रदेशों में
उत्तर:
(C) शीत तथा टुंड्रा प्रदेशों में

13. खनिज तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन-सा है?
(A) इराक
(B) सऊदी अरब
(C) ईरान
(D) कुवैत
उत्तर:
(B) सऊदी अरब

14. गुज्जर तथा बकरवाल किस प्रदेश के निवासी हैं?
(A) पठारी प्रदेश
(B) पर्वतीय प्रदेश
(C) तटीय प्रदेश
(D) मैदानी प्रदेश
उत्तर:
(B) पर्वतीय प्रदेश

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

15. निम्नलिखित में हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला प्रमुख जानवर कौन-सा है?
(A) लामा
(B) यॉक
(C) घोड़ा
(D) रेडियर
उत्तर:
(B) यॉक

16. उत्तर:पूर्वी भारत में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
(A) रोका
(B) चेनगिन
(C) झूमिंग
(D) मसोले
उत्तर:
(C) झूमिंग

17. मलेशिया में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
(A) रोका
(B) झूमिंग
(C) लदांग
(D) मसोले
उत्तर:
(C) लदांग

18. कौन-सी स्थानांतरित कृषि नहीं है?
(A) झूमिंग
(B) चेनगिन
(C) रोका
(D) रेशम-कृषि
उत्तर:
(D) रेशम-कृषि

19. फलों व सब्जियों की कृषि को कहा जाता है-
(A) डेयरी कृषि
(B) ट्रक कृषि
(C) रोपण कृषि
(D) स्थानांतरी कृषि
उत्तर:
(B) ट्रक कृषि

20. पृथ्वी के सबसे अधिक क्षेत्र पर पैदा की जाने वाली फसल कौन-सी है?
(A) गेहूं
(B) चावल
(C) मक्का
(D) गन्ना
उत्तर:
(A) गेहूं

21. निम्नलिखित में कौन-सी खाद्य फसल नहीं है?
(A) गेहूं
(B) आलू
(C) चावल
(D) कपास
उत्तर:
(D) कपास

22. निम्नलिखित में से किस खाद्य फसल की उपज सर्वाधिक है?
(A) गेहूं
(B) चावल
(C) मक्का
(D) आलू
उत्तर:
(D) आलू

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23. निम्नलिखित में से किस फसल को तैयार होते समय बादल रहित आकाश की आवश्यकता होती है?
(A) कहवा
(B) कपास
(C) चाय
(D) गन्ना
उत्तर:
(B) कपास

24. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल श्रम प्रधान है?
(A) गेहूं
(B) चावल
(C) मक्का
(D) गन्ना
उत्तर:
(B) चावल

25. मक्का का सर्वाधिक उत्पादन किस देश में होता है?
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका
(B) चीन
(C) भारत
(D) ब्राजील
उत्तर:
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका

26. सस्ते और कुशल श्रम की उपलब्धता किस फसल के लिए महत्त्वपूर्ण है?
(A) कहवा
(B) गेहूं
(C) चाय
(D) गन्ना
उत्तर:
(C) चाय

27. पहाड़ी ढलानों पर उगाई जाने वाली फसल कौन-सी है?
(A) चाय
(B) कहवा
(C) तंबाकू
(D) मक्का
उत्तर:
(A) चाय

28. जब एक ही खेत में एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक फसलें उत्पन्न की जाएँ तो ऐसी कृषि को क्या कहा जाता है?
(A) उद्यान कृषि
(B) बहुफसली कृषि
(C) जीविकोपार्जी कृषि
(D) वाणिज्यिक कृषि
उत्तर:
(B) बहुफसली कृषि

29. ‘पाला’ किस फसल के लिए हानिकारक है?
(A) चाय
(B) तंबाकू
(C) कहवा
(D) गन्ना
उत्तर:
(C) कहवा

30. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती है?
(A) गेहूं
(B) चुकंदर
(C) गन्ना
(D) आलू
उत्तर:
(C) गन्ना

31. गेहूँ मुख्य रूप से फसल है-
(A) उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र की
(B) टुण्ड्रा क्षेत्र की
(C) मरुस्थल की
(D) शीतोष्ण कटिबन्ध की
उत्तर:
(D) शीतोष्ण कटिबन्ध की

32. कौन-सी फसल रेशेदार है?
(A) रबड़
(B) तंबाकू
(C) कसावा
(D) कपास
उत्तर:
(D)

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाने वाली कोई एक फसल का नाम बताएँ।
उत्तर:
गन्ना।

प्रश्न 2.
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि संसार के किन क्षेत्रों में की जाती है?
उत्तर:
मध्य अक्षांशों के आंतरिक अर्द्ध शुष्क प्रदेशों में।

प्रश्न 3.
किस प्रकार की कृषि में खट्टे रसदार फलों की कृषि की जाती है?
उत्तर:
भूमध्य-सागरीय कृषि।

प्रश्न 4.
किस देश में सहकारी कृषि का सफल परीक्षण किया गया है?
उत्तर:
डेनमार्क में।

प्रश्न 5.
फूलों की कृषि क्या कहलाती है?
उत्तर:
पुष्पोत्पादन।

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प्रश्न 6.
संसार के विकसित राष्ट्रों में कितने प्रतिशत लोग प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न हैं?
उत्तर:
5 प्रतिशत लोग।

प्रश्न 7.
मलेशिया में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
लदांग।

प्रश्न 8.
प्राथमिक व्यवसाय में लगे हुए श्रमिक किस रंग वाले श्रमिक कहलाते हैं?
उत्तर:
लाल।

प्रश्न 9.
सहारा व एशिया के मरुस्थलों में कौन-से पशु पाले जाते हैं?
उत्तर:
भेड़, बकरी, ऊँट।

प्रश्न 10.
आदिमकालीन मानव का जीवन-निर्वाह किन दो कार्यों पर निर्भर था?
उत्तर:
आखेट, संग्रहण।

प्रश्न 11.
उष्ण कटिबन्धीय अफ्रीका में कौन-से पशु पाले. जाते हैं?
उत्तर:
गाय, बैल।

प्रश्न 12.
आर्कटिक व उत्तरी उप-ध्रुवीय क्षेत्रों में कौन-सा पशु पाला जाता है?
उत्तर:
रेडियर।

प्रश्न 13.
सोवियत संघ में सामूहिक कृषि को क्या कहते हैं?
उत्तर:
कालेखहोज।

प्रश्न 14.
दक्षिणी-पूर्वी एशिया, मध्य अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका की प्रमुख खाद्यान्न फसल कौन-सी है?
उत्तर:
कसावा।

प्रश्न 15.
सब्जियों की कृषि को क्या कहते हैं?
उत्तर:
ट्रक कृषि।

प्रश्न 16.
मक्का का सर्वाधिक उत्पादन किस देश में होता है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 17.
रोपण कृषि विश्व के किन क्षेत्रों में की जाती है?
उत्तर:
यूरोपीय देशों के उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में।

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प्रश्न 18.
विश्व की प्राचीनतम आर्थिक क्रिया कौन-सी है?
उत्तर:
आखेट व संग्रहण।

प्रश्न 19.
किस प्रदेश में विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती?
उत्तर:
अमेजन बेसिन में।

प्रश्न 20.
भारत व श्रीलंका में चाय बागानों का विकास सर्वप्रथम किस देश ने किया?
उत्तर:
ब्रिटेन ने।

प्रश्न 21.
आदिमकालीन मानव के दो क्रियाकलाप बताइए।
उत्तर:
आखेट व संग्रहण।

प्रश्न 22.
कालाहारी के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
सान।

प्रश्न 23.
अफ्रीका के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
पिग्मी।

प्रश्न 24.
ऑस्ट्रेलिया में विश्व की कितने प्रतिशत भेड़ें पाली जाती हैं?
उत्तर:
50 प्रतिशत।

प्रश्न 25.
भूमध्यसागरीय कृषि की मुख्य फसल क्या है?
उत्तर:
अंगूर की फसल।

प्रश्न 26.
उत्तर-पूर्वी भारत में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
झूमिंग।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राथमिक आर्थिक क्रियाकलाप क्या होता है?
अथवा
प्राथमिक क्रियाएँ क्या हैं?
उत्तर:
प्राथमिक आर्थिक क्रियाकलाप वे क्रियाएँ होती हैं जो प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण पर निर्भर होती हैं क्योंकि ये पृथ्वी के संसाधनों; जैसे-भूमि, जल, वनस्पति, भवन-निर्माण सामग्री एवं खनिजों के उपयोग के विषय में बताती हैं। इस प्रकार की क्रियाओं के अंतर्गत आखेट, भोजन संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वनों से लकड़ी काटना, कृषि एवं खनन कार्य आदि शामिल किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
कृषि पद्धति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी खास उद्देश्य को लेकर की जाने वाली खेती के लिए जिन तौर-तरीकों व विधियों को अपनाया जाता है, उन्हें कृषि पद्धति कहा जाता है।

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प्रश्न 3.
स्थानांतरी कृषि को विभिन्न क्षेत्रों में किन-किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थानांतरी कृषि को झूम, मलेशिया में लदांग, इंडोनेशिया में हुआ, मध्य अमेरिका व मैक्सिको में मिल्पा, ब्राजील में रोका, जायरे व मध्य अमेरिका में मसोले तथा फिलीपींस में चेनगिन कहा जाता है।

प्रश्न 4.
स्थानबद्ध कृषि क्या होती है?
उत्तर:
स्थानबद्ध कृषि खेती की वह पद्धति होती है जिसमें किसान अथवा किसान समूह अपने परिवारों के साथ एक निश्चित स्थान पर स्थाई रूप से रहकर कृषि का व्यवसाय करते हैं।

प्रश्न 5.
विशिष्टीकरण वाणिज्यिक कृषि की प्रमख विशेषता क्यों होती है?
उत्तर:
इस कृषि में फ़सलों को बेचने के लिए पैदा किया जाता है। कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए आवश्यक है कि फसलों का विशिष्टीकरण हो।

प्रश्न 6.
लोहे को उन्नति का बैरोमीटर क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि लोहे से ही विकास के लिए जरूरी अवसंरचना का निर्माण होता है; जैसे-औज़ार, मशीनें, कारखाने, परिवहन के साधन, जहाज इत्यादि।

प्रश्न 7.
आर्थिक क्रियाओं या क्रियाकलापों से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ऐसी क्रियाएँ जिनमें वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण एवं उपभोग का संबंध हो और जिनसे आर्थिक वृद्धि होती हो, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं।

प्रश्न 8.
मानव क्रियाकलापों के प्रमुख वर्गों के नाम लिखिए। अथवा
आर्थिक
क्रियाकलाप कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:

  1. प्राथमिक क्रियाकलाप
  2. द्वितीयक क्रियाकलाप
  3. तृतीयक क्रियाकलाप
  4. चतुर्थक क्रियाकलाप
  5. पंचम क्रियाकलाप।

प्रश्न 9.
प्राथमिक व्यवसायों के प्रमुख क्षेत्र बताएँ।
उत्तर:
आखेट, एकत्रीकरण, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, खनन तथा कृषि इत्यादि प्राथमिक व्यवसायों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
आखेट (Hunting) किसे कहते हैं?
उत्तर:
वनों से जंगली जानवरों का शिकार करना तथा जल से मछली आदि जंतुओं को पकड़ना आखेट कहलाता है।

प्रश्न 11.
मनुष्य के विभिन्न व्यवसायों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. कृषि व्यवसाय
  2. खनन व्यवसाय
  3. मत्स्यन व्यवसाय
  4. पशु-पालन व्यवसाय आदि।

प्रश्न 12.
चलवासी पशुचारण के तीन प्रमुख क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. मध्य एशिया
  2. दक्षिण-पश्चिमी एशिया
  3. टुंड्रा प्रदेश।

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प्रश्न 13.
संग्रहण (Gathering) किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
संग्रहण का अभिप्राय एकत्रीकरण करना है। वनों में रहने वाली आदिम जातियों द्वारा अपने निर्वाह के लिए वनों से विभिन्न वस्तुओं को इकट्ठा करने के व्यवसाय को संग्रहण कहते हैं।

संग्रहण के प्रकार-यह तीन प्रकार का है-

  1. साधारण पैमाने पर जीविकोपार्जन संग्रहण
  2. वाणिज्यिक संग्रहण
  3. संगठित पैमाने पर संग्रहण।

प्रश्न 14.
विश्व की कोई चार खाद्य फसलों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. चावल
  2. गेहूँ
  3. मक्का
  4. आलू।

प्रश्न 15.
चावल की फसल बोने की प्रमुख विधियाँ बताएँ।
उत्तर:

  1. छिड़ककर या छिड़काव विधि
  2. हल चलाने वाली विधि
  3. प्रतिरोपण विधि।

प्रश्न 16.
वाणिज्य फसलों के कोई तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. रबड़
  2. कपास
  3. गन्ना।

प्रश्न 17.
रोपण फसलों के कोई तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. चाय
  2. केला
  3. कहवा।

प्रश्न 18.
चावल को खुरपे की कृषि क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
चावल की खेती में मशीनों का प्रयोग नगण्य है। भूमि की जुताई, बुआई, पौधों का प्रतिरोपण, फसल की कटाई, धान का छिलका हटाना तथा इसे कूटने आदि का सारा काम हाथों से किया जाता है। समय की अधिकता के कारण चावल की खेती को खुरपे की कृषि (Hoe Agriculture) कहा जाता है।

प्रश्न 19.
गहन कृषि संसार के किन देशों में की जाती है?
उत्तर:
जापान, बांग्लादेश, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाइलैंड, वियतनाम व भारत इत्यादि मानसून एशिया के देशों में गहन कृषि की जाती है।

प्रश्न 20.
गन्ने की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
गन्ने की खेती के लिए चूना तथा फॉस्फोरस युक्त गहरी, सुप्रवाहित तथा उपजाऊ दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 21.
चलवासी पशुचारण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चलवासी पशुचारण एक जीवन निर्वाह पद्धति है। इस पद्धति में चारा प्राकृतिक रूप से विकसित होता है। इस पद्धति में पशुओं को चराने वाले चारे व पानी की तलाश में इधर-उधर घूमते रहते हैं। ये स्थायी निवास नहीं कर पाते, इसी कारण इन्हें चलवासी कहा जाता है।

प्रश्न 22.
डेयरी कृषि के लिए अनुकूल कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
डेयरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केंद्रों के समीप किया जाता है क्योंकि ये क्षेत्र दूध एवं अन्य डेयरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं। पशुओं के उन्नत पालन-पोषण के लिए पूँजी की भी अधिक आवश्यकता होती है। वाणिज्य डेयरी के मुख्य क्षेत्र उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, कनाडा, दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड हैं।

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प्रश्न 23.
कहवा का पौधा बड़े वृक्षों की छाया में लगाया जाता है, क्यों?
उत्तर:
कहवा भी चाय की तरह ही एक पेय पदार्थ है। यह एक झाड़ीनुमा पेड़ के फलों से प्राप्त बीज का चूर्ण बनाकर तैयार किया जाता है। अधिक धूप एवं पाला कहवे के लिए हानिकारक है। इसलिए कहवे के वृक्षों को धूप तथा पाले से बचाने के लिए बड़े-बड़े छायादार वृक्ष उगाए जाते हैं।

प्रश्न 24.
शीतकालीन गेहूँ क्या है?
उत्तर:
शीतकालीन गेहूँ शीत ऋतु के आगमन पर बोया जाता है तथा ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में काट दिया जाता है। यह उन क्षेत्रों में बोया जाता है जहाँ साधारण शीत ऋतु होती है। विश्व का अधिकांश गेहूँ (लगभग 80%) इसी मौसम में बोया जाता है।

प्रश्न 25.
सहकारी कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य संपन्न करे, उसे सहकारी कृषि कहते हैं। सहकारी संस्था कृषकों को सभी प्रकार से सहायता उपलब्ध कराती है। इस प्रकार की कृषि का उपयोग डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन एवं इटली जैसे देशों में सफलतापूर्वक किया जाता है।

प्रश्न 26.
कृषि क्या है?
उत्तर:
मिट्टी को जोतने, गोड़ने, उसमें विभिन्न फसलें एवं फल-फूल उगाने तथा पशुपालन से जुड़ी कला या विज्ञान को कृषि कहा जाता है।

प्रश्न 27.
प्रेयरी तथा स्टेपीज प्रदेश में गेहूँ की पैदावार अधिक क्यों होती है?
उत्तर:
जिस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा अधिक होती है, उसमें गेहूँ की पैदावार अच्छी एवं अधिक होती है। प्रेयरी तथा स्टेपीज प्रदेश की मिट्टी में पर्याप्त ह्यूमस उपलब्ध है। ये ही कारण है कि यहाँ गेहूँ की पैदावार अधिक या अच्छी होती है।

प्रश्न 28.
गेहूँ की उपज के लिए कितने तापमान व वर्षा की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
गेहूँ के लिए उगते समय 10° सेल्सियस तथा पकते समय 20° सेल्सियस तापमान तथा 50 से०मी० से 75 से०मी० तक वर्षा अनुकूल होती है।

प्रश्न 29.
शीतकालीन गेहूँ एवं बसंतकालीन गेहूँ में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:

  1. शीतकालीन गेहूँ शीत ऋतु के आगमन पर बोई जाती है, जबकि बसंतकालीन गेहूँ बसंत ऋतु में बोई जाती है।
  2. शीतकालीन गेहँ ग्रीष्म ऋत के आरंभ में काटी जाती है, जबकि बसंतकालीन गेहँ शीत ऋत के आगमन पर काटी जाती है।

प्रश्न 30.
भूमध्यसागरीय कृषि के क्षेत्र व प्रमुख फसलें कौन-सी हैं?
उत्तर:
भूमध्यसागर के समीपवर्ती क्षेत्र जो दक्षिणी यूरोप से उत्तरी अफ्रीका में टयूनीशिया से एटलांटिक तट तक फैला है। दक्षिणी कैलीफोर्निया, मध्यवर्ती चिली, दक्षिणी अफ्रीका का दक्षिणी-पूर्वी भाग एवं ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-जैसे-अंगूर की कृषि यहाँ की विशेषता है। अंजीर, जैतून भी यहाँ उत्पन्न होता है।

प्रश्न 31.
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के प्रमुख मैदानों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मध्य अक्षांशों के आंतरिक अर्धशुष्क प्रदेशों में इस प्रकार की कृषि की जाती है। इस प्रकार की कृषि के मैदान हैं यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेन्टाइना के पंपाज, दक्षिणी अफ्रीका के वैल्डस, ऑस टरबरी के मैदान। इसकी मुख्य फसल गेहँ है। अन्य फसलें जैसे-मक्का, जई, जौ, राई भी बोई जाती है। इस कषि में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है एवं खेत जोतने से फसल काटने तक सभी कार्य यंत्रों द्वारा सम्पन्न किए जाते हैं।

प्रश्न 32.
संसार के पाँच प्रमुख कपास उत्पादक देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कपास एक महत्त्वपूर्ण अखाद्य फसल है व एक विश्वव्यापी रेशा है। वनस्पति के औद्योगिक रेशेदार उत्पादों में कपास सबसे महत्त्वपूर्ण है। भारत और मिस्र इसके प्राचीन उत्पादक देश हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका व प्यूरटोरिको में लम्बे रेशे वाली कपास पाई जाती है। मिस्र की नील नदी की घाटी, मध्य एशिया, ब्राजील में कपास का उत्पादन किया जाता है।

प्रश्न 33.
कपास की फसल पकते समय बादल रहित आकाश क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
कपास की फसल के पकते समय शुष्क मौसम आवश्यक है। कपास में डोडी आने के पश्चात स्वच्छ आकाश आवश्यक है तथा तेज धूप लाभदायक है, जिससे तेज धूप में डोडी के फूल आसानी से खिल सकें तथा कपास की चुनाई आसानी से हो सके। इसलिए कपास की फसल के पकते समय वर्षा नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 34.
व्यापारिक पशुपालन क्या है?
उत्तर:
जब बड़े पैमाने पर आय प्राप्त करने के उद्देश्य से तथा व्यापारिक दृष्टिकोण से पशुपालन किया जाए, उसे व्यापारिक पशुपालन कहा जाता है। उत्तरी अमेरिका के विस्तृत घास के मैदानों में यह व्यवसाय बड़ी तेजी से विकसित हुआ। इसमें पशुओं को . बड़े-बड़े बाड़ों (Ranches) में रखा जाता है।

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प्रश्न 35.
चावल की बहत बड़ी मात्रा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए उपलब्ध नहीं है, क्यों?
उत्तर:
चावल उत्पादक देशों की जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक है। इसलिए चावल की उपज का अधिकतर भाग उत्पादक देशों में ही खप जाता है। इसलिए चावल के विश्व के कुल उत्पादन का केवल पांच प्रतिशत भाग ही व्यापार के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध है। इसलिए चावल की बहुत बड़ी मात्रा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए उपलब्ध नहीं है।

प्रश्न 36.
विस्तृत कृषि अधिकांशतः मशीनों की सहायता से की जाती है, क्यों?
उत्तर:
विस्तृत कृषि में खेतों का आकार बड़ा होता है। इसमें कृषि योग्य भूमि तथा मनुष्य का अनुपात अधिक होता है। इस प्रकार की कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में होती है। इसलिए यहाँ श्रम आसानी से उपलब्ध नहीं होता। इसलिए विस्तृत कृषि अधिकांशतः मशीनों की सहायता से की जाती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कृषि क्रांति और औद्योगिक क्रांति में क्या अंतर है?
उत्तर:
कृषि क्रांति और औद्योगिक क्रांति में निम्नलिखित अंतर हैं-

कृषि क्रांतिऔद्योगिक क्रांति
1. यह प्रकृति में उपलब्ध जैविक उत्पादों के अधिक संगठित तरीके से उपयोग करने से शुरू हुई।1. यह प्रकृति में कोयला एवं पैट्रोल के रूप में संचित ऊर्जा शक्ति के प्रयोग पर निर्भर थी।
2. कृषि कार्य शारीरिक दृष्टि से बहुत कष्टपूर्ण थे।2. औद्योगिक क्रांति ने लोगों को श्रम की पीड़ा से मुक्ति दिलाई।

प्रश्न 2.
धान की गहन जीविकोपार्जी कृषि के क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक क्यों है?
उत्तर:
छोटे खेतों पर अधिक पूँजी तथा श्रम का प्रयोग करके अधिक उपज प्राप्त करने वाली कृषि गहन कृषि कहलाती है। इसमें बोई जाने वाली प्रमुख फसल धान अर्थात् चावल है। धान की कृषि मुख्य रूप से मानसूनी प्रदेशों में की जाती है। धान की कृषि में मुख्य रूप से सभी कार्य मनुष्य अपने हाथों से करता है। इसलिए इस कार्य के लिए सस्ते तथा अधिक मज़दूरों की आवश्यकता होती है। श्रम की अधिक माँग होने के कारण यहाँ रोजगार मिल जाता है। इसलिए धान की गहन जीविकोपार्जी कृषि के क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 3.
रोपण कृषि का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
रोपण कृषि एक लाभ देने वाली उत्पादन प्रणाली है। इस कृषि की प्रमुख विशेषता यह है कि इस कृषि में क्षेत्र का आकार बहुत बड़ा होता है। इसमें अधिक पूँजी, उन्नत तकनीक व वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। यह एक फसली कृषि है। इसके लिए अधिक श्रम की व विकसित यातायात के साधनों की आवश्यकता होती है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अधीन उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले व अनानास आदि फसलों का उपयोग करके रोपण कृषि का विस्तार किया है।

प्रश्न 4.
मिश्रित कृषि की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि जिसमें फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुओं को पालने का कार्य भी किया जाता है, उसे मिश्रित कृषि कहा जाता है। इस कृषि में खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ चारे और नकदी फसलों को भी उसी पैमाने पर उगाया जाता है। मिश्रित कृषि का अधिक प्रचलन पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेन्टाइना, पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी अफ्रीका, न्यूजीलैंड व दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में है। संयुक्त राज्य अमेरिका में मिश्रित कृषि मक्के की पेटी (Maize Belt) में की जाती है। इसके अतिरिक्त मिश्रित कृषि में राई, गेहूँ व घास भी पैदा की जाती है। रूस में मिश्रित खेती में गेहूँ, आलू, चुकंदर, सूरजमुखी जैसी फसलों के साथ-साथ पशु-पालन किया जाता है।

प्रश्न 5.
गहन निर्वाह कृषि का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
गहन निर्वाह कृषि मानसून एशिया के घनी बसी आबादी वाले देशों में की जाती है। यह कृषि दो प्रकार की है-
1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि-इस प्रकार की कृषि की मुख्य फसल चावल होती है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों के कारण इसमें जोतों का आकार छोटा होता है और किसान का पूरा परिवार इस काम में लगा होता है। मानवीय श्रम, गोबर की खाद व हरी खाद का उपयोग किया जाता है। इस कृषि में प्रति कृषक उत्पादन कम होता है।

2. चावल रहित गहन निर्वाह कृषि-मानसून एशिया में अनेक भौगोलिक कारकों की भिन्नता के कारण धान की फसल हर जगह उगाना संभव नहीं है। इस प्रकार की कृषि में सिंचाई की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 6.
खनन के प्रकारों/विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अयस्कों की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार हैं-

  • धरातलीय खनन
  • भूमिगत खनन।

1. धरातलीय खनन-इसे विवृत खनन भी कहा जाता है। यह खनन का सबसे सस्ता तरीका है क्योंकि इस विधि में सुरक्षा, कम खर्च व उत्पादन शीघ्र और अधिक होता है।

2. भूमिगत खनन-जब अयस्क धरातल के नीचे गहराई में होता है तब भूमिगत खनन का प्रयोग किया जाता है। यह खनन जोखिम भरा होता है क्योंकि जहरीली गैस, आग और बाढ़ के कार टिना का भय
बना रहता है। खदानों में काम करने वाले श्रमिकों को विशेष प्रकार की लिफ्ट बेधक, वायु संचार प्रणाली और माल ढोने की गाड़ियों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7.
चलवासी पशुचारण क्षेत्रों के प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
चलवासी पशुचारण के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

  1. इसका प्रमुख क्षेत्र उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से सहारा मरुस्थल, अफ्रीका के पूर्वी तटीय भाग, अरब प्रायद्वीप, इराक, ईरान, अफगानिस्तान होता हुआ मंगोलिया एवं मध्य चीन तक फैला हुआ है।
  2. दूसरा क्षेत्र यूरेशिया में टुंड्रा के दक्षिणी सीमांत पर स्थित है जो पश्चिम में नार्वे व स्वीडन से होता हुआ रूस के पूर्वी भाग में स्थित कमचटका प्रायद्वीप तक फैला है।
  3. तीसरा क्षेत्र अपेक्षाकृत टा है जो दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका तथा मेडागास्कर के पश्चिमी भाग में फैला हुआ है।

प्रश्न 8.
व्यापारिक पशुचारण क्षेत्रों के प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
व्यापारिक पशुपालन के प्रमुख क्षेत्र हैं-

  1. उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र
  2. दक्षिणी अमेरिका में वेनेजुएला का लानोस क्षेत्र
  3. ब्राज़ील के पठारी भाग से अर्जेंटीना की दक्षिणी सीमा तक का क्षेत्र
  4. दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र
  5. ऑस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड की शीतोष्ण घास भूमि
  6. कैस्पियन सागर के पूर्व में स्थित क्षेत्र
  7. अरब सागर के उत्तर में स्थित क्षेत्र आदि।

प्रश्न 9.
मिश्रित कृषि एवं डेयरी कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि एवं डेयरी कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

मिश्रित कृषिडेयरी कृषि
1. मिश्रित कृषि में फसलों का उत्पादन तथा पशुपालन साथ-साथ किया जाता है।1. डेयरी कृषि में मुख्य रूप से दुधारु पशुओं को पाला जाता है।
2. इसमें खाद्यान्न के खपत क्षेत्र उत्पादन क्षेत्र से दूर होते हैं।2. यह व्यवसाय बड़े नगरों तथा औद्योगिक केंद्रों के निकट स्थापित होते हैं।
3. यहाँ पशुओं के लिए चारा कृषि योग्य भूमि के कुछ भाग पर बोया जाता है।3. यहाँ पशुओं के लिए चारे के लिए कृषि फार्मों तथा चारे की मिलों की व्यवस्था की जाती है।

प्रश्न 10.
आदिम जीविकोपार्जी कृषि एवं गहन जीविकोपार्जी कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आदिम जीविकोपार्जी कृषि एवं गहन जीविकोपार्जी कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

आदिम जीविकोपार्जी कृषिगहन जीविकोपार्जी कृषि
1. इस प्रकार की कृषि में उत्पादन बहुत कम होता है।1. इस प्रकार की कृषि में उत्पादन अधिक होता है।
2. यह कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।2. यह कृषि बढ़ती हुई जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।
3. इसमें फसलों का और खेतों का हेर-फेर नहीं होता।3. इसमें फसलों का हेर-फेर किया जाता है।
4. इस कृषि में खादों का प्रयोग नहीं किया जाता।4. इसमें उत्तम बीज, रासायनिक उर्वरकों तथा सिंचाई के साधनों का प्रयोग किया जाता है।
5. इसमें मुख्य रूप से खाद्य फसलें बोई जाती हैं।5. इसमें आय की वृद्धि के लिए अधिक मूल्य वाली फसलों को उगाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

प्रश्न 11.
रोपण कृषि एवं उद्यान कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रोपण कृषि एवं उद्यान कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

रोपण कृषिउद्यान कृषि
1. यह कृषि बड़े-बड़े फार्मों पर की जाती है।1. इस कृषि में फार्मों का आकार छोटा होता है।
2. इस प्रकार की कृषि की उपजों का अधिकतर भाग निर्यात किया जाता है।2. इसमें मुख्य रूप से उत्पादित वस्तुएँ स्थानीय बाज़ारों में बिक जाती हैं।
3. रोपण कृषि की मुख्य फसलें रबड़, चाय, कहवा, गन्ना, नारियल, केला हैं।3. उद्यान कृषि में मुख्य रूप से सब्जियाँ, फल तथा फूल बोए जाते हैं।
4. यह कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।4. यह कृषि सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।
5. इस कृषि में वैज्ञानिक विधियों, मशीनों, उर्वरकों तथा अधिक पूँजी का प्रयोग होता है।5. इस कृषि में केवल पशुओं की नस्ल सुधार तथा दुग्ध दोहने के यंत्रों का प्रयोग होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 12.
जीविकोपार्जी कृषि एवं वाणिज्यिक कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जीविकोपार्जी कृषि एवं वाणिज्यिक कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

जीविकोपार्जी कृषिवाणिज्यिक कृषि
1. इस कृषि का मुख्य उद्देश्य अपने परिवार का भरण-पोषण करना है।1. इस कृषि में व्यापार के उद्देश्य से फसलों का उत्पादन किया जाता है।
2. इस कृषि में कृषि फार्म या खेत का आकार छोटा होता है।2. इसमें खेतों का आकार बड़ा होता है।
3. इस कृषि में मशीनों, कीटनाशकों तथा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाता।3. इस कृषि में उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक तथा मशीनों का अधिक प्रयोग किया जाता है।
4. यह कृषि अधिकतर अल्पविकसित और विकासशील देशों में की जाती है।4. यह कृषि मुख्यतः विकसित देशों में की जाती है।

प्रश्न 13.
व्यापारिक पशुपालन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्यापारिक पशुपालन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

  1. चरवाहे स्थाई रूप से पशुपालन करते हैं तथा बड़ी संख्या में पशुओं को रखते हैं।
  2. व्यापारिक पशुपालन का उद्देश्य दूध, घी, मक्खन, पनीर, मांस तथा ऊन का अधिक-से-अधिक उत्पादन करके उसे बाजार में बेचकर अधिक लाभ कमाना है।
  3. कृषक पशुओं के लिए चारा उगाते हैं तथा उन्हें चारे की तलाश में इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता।
  4. पशुओं के लिए पशुशालाएँ तथा स्थायी निवास बनाए जाते हैं।
  5. पशुओं के पीने के लिए स्वच्छ जल की व्यवस्था की जाती है।
  6. व्यापारिक पशुपालन में पशुओं के प्रजनन, नस्ल-सुधार तथा बीमारियों के उपचार की उचित व्यवस्था की जाती है।
  7. पश पदार्थों के विशिष्टीकरण पर बल दिया जाता है।
  8. पशुओं से प्राप्त पदार्थों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार किया जाता है।

प्रश्न 14.
ऋतु प्रवास (Transhumance) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
ऋतु प्रवास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चलवासी पशुचारण का व्यवसाय चलवासी चरवाहों (Nomadic Pastoral Population) द्वारा किया जाता है। इन लोगों का प्राकृतिक चरागाहों तथा पशुओं दोनों से घनिष्ठ संबंध है। पशुचारण उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ पर्याप्त मात्रा में चरागाह (घास के मैदान) तथा पानी की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। जहाँ चरागाहों का अच्छा विकास हुआ है, वहाँ गाय, बैल पाले जाते हैं, जबकि कम घास वाले क्षेत्रों में भेड़, बकरियां पाली जाती हैं। शुष्क तथा अर्द्धशुष्क प्रदेशों में घोड़े, गधे और ऊँट पाले जाते हैं तथा शीत तथा टुंड्रा प्रदेशों में रेडियर मुख्य पशु है। पर्वतीय क्षेत्रों में चलवासी चरागाहों द्वारा यह पशुचारण किया जाता है। शीत ऋतु में ये लोग अपने पशुओं को लेकर घाटियों में आ जाते हैं तथा ग्रीष्म ऋतु में ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ बर्फ पिघल जाती है, अपने पशओं को लेकर चले जाते हैं। कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में इस प्रकार का मौसमी स्थानांतरण होता है। कश्मीर के गज्जर इस प्रकार का पशुपालन करते हैं। इस प्रकार के चलवासी पशुचारण को ऋतु-प्रवास (Transhumance) कहते हैं।

प्रश्न 15.
गहन निर्वाह कृषि से क्या अभिप्राय है? इसके दो मुख्य प्रकारों व विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
गहन निर्वाह कृषि-यह कृषि की वह पद्धति है जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रति इकाई भूमि पर पूँजी और श्रम का अधिक मात्रा में निवेश किया जाता है। छोटी-छोटी जोतों और मशीनों के अभाव के कारण यद्यपि प्रति व्यक्ति उपज कम होती है। इस प्रकार की कृषि मानसून एशिया के घने बसे देशों में की जाती है।
प्रकार-गहन निर्वाह कृषि के दो प्रकार हैं-
1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि-मानसून एशिया के उन देशों में जहाँ गर्मी अधिक और वर्षायुक्त लंबा वर्धनकाल पाया जाता है, वहाँ चावल एक महत्त्वपूर्ण फसल होती है। अधिक जनसंख्या घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है और कृषि कार्य में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है। यहाँ के भारत, चीन, जापान, म्याँमार, कोरिया, फिलीपींस, मलेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों में चावल की माँग अधिक है। इस कृषि में अधिक वर्षा के कारण सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2. चावल रहित गहन निर्वाह कृषि-मानसून एशिया के अनेक भागों में उच्चावच जलवायु, मृदा तथा भौगोलिक दशाएँ चावल की खेती के लिए अनुकूल नहीं हैं । ऐसे ठंडे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया एवं उत्तरी जापान में चावल की फसल उगाना संभव नहीं है। यहाँ चावल की अपेक्षा गेहूँ, सोयाबीन, जौ एवं सोरघम बोया जाता है। इसमें सिंचाई द्वारा कृषि की जाती है।

गहन निर्वाह कृषि की विशेषताएँ-

  • जनसंख्या के अधिक घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है।
  • कृषि की गहनता इतनी अधिक है कि एक वर्ष में तीन या चार फसलें उगाई जाती हैं।
  • अंतर्फसली कृषि यहाँ कृषि की गहनता का एक अन्य उदाहरण प्रस्तुत करती है।
  • इस प्रकार की कृषि में खेत व पशु समूह आत्म-निर्भर होते हैं।

निष्कर्ष-गहन कृषि के क्षेत्रों में रासायनिक खादों, फफूंदी नाशक एवं कीटनाशक दवाओं तथा सिंचाई सुविधाओं का प्रयोग होने से परंपरागत जीविका कृषि से वाणिज्यिक कृषि की कुछ विशेषताएँ विकसित हो गई हैं।

प्रश्न 16.
गेहूँ सबसे अधिक विस्तृत क्षेत्र में उगाया जाने वाला खाद्यान्न क्यों है?
उत्तर:
गेहूँ एक शीतोष्ण कटिबंधीय तथा संसार की प्रमुख खाद्यान्न फसल है। गेहूँ की कृषि 25 सें०मी० से 100 सें०मी० वार्षिक वर्षा वाले प्रदेशों में सफलतापूर्वक हो जाती है। विश्व के आधे भू-भाग पर 25 सें०मी० से 100 सें०मी० वर्षा होती है। इसलिए गेहूँ सबसे अधिक विस्तृत क्षेत्र में उगाया जाता है। दूसरे गेहूँ की अत्यधिक किस्में होने के कारण इसे संसार के किसी न किसी भाग पर बोया या काटा जा रहा होता है।

प्रश्न 17.
वाणिज्यिक कृषि में फसलों का विशिष्टीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वाणिज्यिक कृषि का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादों को बाजार में बेचने के लिए उत्पन्न करना है। इसमें मुख्य रूप से व्यापारिक दृष्टिकोण होता है। इस प्रकार की कृषि में खाद्यान्नों का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है। इस प्रकार की कृषि में एक प्रकार की फसल पर अधिक बल दिया जाता है जिससे उत्पाद का निर्यात किया जा सके। इसमें अधिकतर कार्य मशीनों से किए जाते हैं तथा कृषि में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर फसलों का विशिष्टीकरण करना आवश्यक होता है जिससे अधिक-से-अधिक उपज उत्पन्न करके अधिक-से-अधिक लाभ कमाया जा सके।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव क्रियाकलापों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव समाज अपने विकास के लंबे दौर में अपनी आवश्यकताओं और अस्तित्व के लिए भौतिक पर्यावरण पर निर्भर रहा है। हिमयुगों के प्रतिकूल वातावरण में आदिमानव गुफाओं में रहने को विवश था। धीरे-धीरे पत्थरों की रगड़ से आदि मानव ने आग का आविष्कार किया। तत्पश्चात जलवायु में परिवर्तन हुए और पाषाण युग में मनुष्य पूर्णतया प्रकृति पर निर्भर रहा। मानव की आवश्यकताएँ सीमित थीं परंतु फिर भी जीवन बड़ा कठिन था। मानव समाज अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए तथा पेट भरने के लिए जंगलों में आखेट करता था। इस युग में मानव ने पत्थरों के हथियार व सामान्य औजार बनाने सीख लिए थे।

बाद में कृषि आधारित समाज का विकास हुआ जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई। नदी-घाटियों की उपजाऊ मिट्टी में मानव ने कृषि प्रारंभ की। हल के आविष्कार से घास के मैदानों का खेती के लिए प्रयोग शुरु हुआ। कृषि से उत्पादित पदार्थों पर पशुपालन को प्रोत्साहन मिला। इस प्रकार मानव ने पशुओं से दूध और दुग्ध पदार्थ प्राप्त किए। धीरे-धीरे पशुओं की खाल से वस्त्र तथा जूते आदि बनाने आरंभ किए। इस प्रकार आखेटी मानव अब कृषक बन गया। कृषि की नींव डालने में निम्नलिखित चार घटक महत्त्वपूर्ण थे

  • भोजन बनाने तथा उसे पकाने के लिए आग का आविष्कार
  • फसलों की खेती के लिए हल का आविष्कार
  • पशुपालन अर्थात् पशुओं को घरेलू बनाना
  • स्थायी जीवन के परिणामस्वरूप गाँवों का बसाव।

कृषि क्रांति के साथ सामाजिक परिवर्तन हुए। कृषि ने मानव को सुरक्षा, स्थायित्व और व्यवस्थित जीवन दिया। खेती से काफी मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध होने से लोगों को शिल्प विकसित करने के लिए पर्याप्त समय और सुविधा मिली। मानव को सौंदर्यात्मक बोध होने लगा। शिल्पियों ने अपनी बनाई वस्तुओं का भोजन तथा अन्य वस्तुएँ प्राप्त करने के लिए व्यापार किया। व्यापार से नए मार्ग खुले, जनसंख्या बढ़ी। परिणाम यह हुआ कि लोग छोटे-मोटे शिल्प कार्यों तथा विभिन्न वस्तुओं के छोटे स्तर के उत्पादन कार्यों में लग गए। जीवन-यापन की दशा सुधरी और गाँवों का आकार बढ़ने लगा तथा उपजाऊ मैदानों व नदियों के तट पर अनेक बड़े व सुव्यवस्थित नगरों का उदय हुआ।

औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) ईसा से लगभग 10,000 वर्ष पूर्व धातु युग का आरंभ हुआ। इस युग में मानव ने धातुओं का प्रगलन, शोधन तथा उनके यंत्र बनाने की कला सीख ली थी। हाथ से काम करके छोटे पैमाने पर वस्तुओं के उत्पादन के तरीके की समाप्ति और मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर उत्पादन की शुरुआत ही औद्योगिक क्रांति है। 1763 में जेम्स वाट द्वारा भाप के इंजन के आविष्कार ने औद्योगिक क्रांति की आधारशिला रखी। औद्योगिक समाज में उत्पादन और उपभोग में भारी वृद्धि हुई। ऊर्जा के गैर-नवीकरणीय संसाधनों के इस्तेमाल में भारी बढ़ोतरी हुई। साथ ही प्रदूषण, संसाधनों का लगातार कम होना, जनसंख्या का बढ़ना तथा अमीरों द्वारा गरीबों के शोषण जैसी समस्याएँ बढ़ती चली गईं। परिणामस्वरूप औद्योगिक ढांचे से लोगों की आस्था डगमगाने लगी।

20वीं शताब्दी के अंत में ज्ञान का प्रचार और प्रसार एक महत्त्वपूर्ण व्यवसाय बनने लगा। फलस्वरूप विश्व में सूचना क्रांति का आगमन हआ। सचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग ने लोगों को रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर प्रदान किए।

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प्रश्न 2.
कृषि विकास की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण दिशाओं तथा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषि विकास की प्रक्रिया में आदिकाल से आधुनिक काल तक अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए। प्राचीन एवं आदिमकालीन कृषि में स्थानांतरी कृषि की जाती थी जो अब भी संसार के कुछ भागों में प्रचलित है। इस प्रकार की कृषि में जंगलों में आग लगाकर उसकी राख को मिट्टी के साथ मिलाकर फसलें बोई जाती हैं। सामान्यतः तीन चार साल तक फसलों का उत्पादन करने के बाद जब इन खेतों की मिट्टी अनुपजाऊ हो जाती है, तब इन खेतों को खाली छोड़ दिया जाता है। स्थानांतरी कृषि ने लोगों को एक स्थान पर अधिक समय के लिए स्थाई रूप से रहने को प्रेरित किया। तत्पश्चात् अनुकूल जलवायु एवं उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में स्थाई कृषि प्रणाली का प्रारंभ हुआ। इसमें किसान एक निश्चित स्थान पर स्थाई रूप से रह कर निश्चित भूमि में कृषि करने लगा।

अठारहवीं शताब्दी में यूरोप में जन्मी औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप कृषि के मशीनीकरण में वृद्धि हुई। कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। अनेक देशों में फसलं प्रतिरूप बदल गए। कृषि का विशिष्टीकरण किया गया। प्रमुख फसलें; जैसे कपास, गन्ना, चावल, चाय तथा रबड़ इत्यादि को यूरोपीय कारखानों में संशोधित किया गया। तब यूरोप में इन फसलों की मांग तेजी से बढ़ने लगी। इनमें से कुछ फसलों की बड़े पैमाने पर व्यापारिक कृषि प्रारंभ की गई जिसे रोपण कृषि कहते हैं। रोपण कृषि में एक फसल के उत्पादन के लिए बड़े-बड़े बागान बनाए गए जिनका वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया गया। इनका मुख्य उद्देश्य व्यापार द्वारा धन अर्जित करना था।

उत्तरी अमेरिका में यंत्रीकरण के प्रभाव से कृषकों को उन वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने तथा विशिष्टीकरण के योग्य बनाने पर जोर दिया गया, जिन्हें अधिकतम लाभ के साथ बेचा जा सके। इस प्रकार विशिष्ट व्यापारिक कृषि प्रणाली का उदय हुआ जिससे अनेक फसल प्रदेशों का सीमांकन हुआ; जैसे गेहूं पेटी, कपास पेटी, मक्का पेटी तथा डेयरी कृषि इत्यादि । इसके अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं तथा उत्तम बीजों के प्रयोग से फसलों के प्रति एकड़ उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई।

प्रश्न 3.
संसार में फसलों के वितरण प्रतिरूप को भौतिक पर्यावरण कैसे प्रभावित करता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौतिक पर्यावरण फसलों के वितरण प्रतिरूप के लिए कुछ विस्तृत सीमाएँ निर्धारित करता है, जिनके भीतर किसी खास फसल को अच्छे ढंग से उगाया जा सकता है। भौतिक पर्यावरण के वे तत्त्व, जो फसलों के वितरण प्रतिरूप को प्रभावित करते हैं, निम्नलिखित हैं
1. जलवायु (Climate) – किसी निश्चित फसल के क्षेत्र को सीमांकित करने में जलवायु के दो महत्त्वपूर्ण कारक तापमान और वर्षा हैं।
(i) तापमान (Temperature) – यह फसलों के वितरण को प्रभावित करने वाला महत्त्वपूर्ण कारक है। उपयुक्त तापमान बीजों को अंकुरण से लेकर फसलों के पकने तक आवश्यक है। तापमान की आवश्यकता के आधार पर फसलों को दो वर्गों में बांटा गया है
(क) उष्ण कटिबंधीय अर्थात् ऊंचे तापमान में उगने वाली फसलें; जैसे चावल, चाय, कहवा, गन्ना इत्यादि। (ख) शीतोष्ण कटिबंधीय अर्थात् निम्न तापमान की दशाओं में उगने वाली फसलें; जैसे गेहूं, जौं, राई इत्यादि।

(ii) वर्षा (Rainfall) – मिट्टी में नमी की मात्रा फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह नमी वर्षा से प्राप्त होती है। विभिन्न . फसलों के लिए जल की आवश्यकता में अंतर पाया जाता है; जैसे गेहूं की खेती के लिए 75 सें०मी० वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। जबकि चावल की खेती के लिए 125 से 200 सें०मी० वार्षिक वर्षा आवश्यक है। अतः फसलों के लिए जल की एक आदर्श मात्रा की आवश्यकता होती है। जल की कमी को सिंचाई के साधनों द्वारा भी पूरा किया जा सकता है।

गेहूं को 25 सें०मी० वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है क्योंकि सिंचाई द्वारा आवश्यक जलापूर्ति फसल के लिए संभव हो सकती है। . 2. मृदा (Soil)-मिट्टी भूपर्पटी की ऊपरी सतह का आवरण है। चट्टानों के अपक्षय तथा जीव-जंतुओं के अवशेषों से मिट्टी का निर्माण होता है। मिट्टी एक धरातलीय पदार्थ है जिसमें परतें पाई जाती हैं। मिट्टी जैविक तथा अजैविक दोनों पदार्थों के मिश्रण से बनती है।

एच० रॉबिंसन के अनुसार, “मिट्टी से आशय चट्टानों पर बिछी धरातल की सबसे ऊपरी परत से है जो असंगठित या ढीले पदार्थों से निर्मित होती है तथा जिन पर पौधों की वृद्धि हो सकती है।” मिट्टी में बारीक कण, ह्यूमस तथा विभिन्न खनिज पदार्थ मिले होते हैं।

मिट्टी एक प्राकृतिक संसाधन है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर कृषि तथा विभिन्न फसलों की उत्पादकता आधारित है। मिट्टी की परत के नष्ट होने से इसकी उत्पादकता शक्ति कम हो जाती है जिससे फसलों का उत्पादन कम हो जाता है।

मिट्टी में फसलों के लिए आवश्यक प्रमुख पोषक तत्त्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा सल्फर आदि होते हैं। इसके अतिरिक्त मिट्टी में कुछ गौण पोषक तत्त्व; जैसे जिंक और बोरोन आदि भी पाए जाते हैं। मिट्टी का उपजाऊपन मूल चट्टानों की सरंचना तथा जलवायुवीय तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है। उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में भारी वर्षा के कारण मिट्टी के पोषक तत्त्व बह जाते हैं जबकि शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में मिट्टी के पोषक तत्त्व अधिक पाए जाते हैं। अधिक उपजाऊ और गहरी मिट्टी में उत्पादन अधिक होता है। फलस्वरूप इन क्षेत्रों में सघन जनसंख्या निवास करती है। इसके विपरीत अनुपजाऊ और कम गहरी मिट्टी में कृषि उत्पादन कम होता है तथा जनसंख्या घनत्व और लोगों का जीवन स्तर दोनों निम्न होते हैं।

3. उच्चावच (Relief) – उच्चावच के तीन प्रमुख तत्त्व होते हैं जो कृषि क्रियाओं के प्रतिरूप को प्रभावित करते हैं। ये हैं-

  • ऊंचाई तथा कृषि
  • ढाल और
  • धरातल।

(i) ऊंचाई तथा कृषि (Height and Agriculture) – ऊंचाई बढ़ने पर वायुदाब घटता है तथा तापमान भी कम होता जाता है। ऊंचाई के साथ मिट्टी की परत पतली हो जाती है तथा वह कम उपजाऊ होती है। इसलिए यहाँ कृषि क्रियाएँ सीमित हो जाती हैं।

(ii) ढाल (Slope) – ढाल की दिशा कृषि को अत्यधिक प्रभावित करती है। उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणवर्ती ढाल उत्तरवर्ती ढाल की अपेक्षा अधिक समय तक तेज धूप प्राप्त करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों में मृदा अपरदन का जोखिम बना रहता है।

(ii) धरातल (Surface) – सामान्यतः कृषि क्रियाओं के लिए समतल भूमि को आदर्श माना जाता है। ऊबड़-खाबड़ धरातल पर कृषि क्रियाएँ असुविधाजनक होती हैं। सामान्य ढाल वाला धरातल जल निकासी के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 4.
चावल की फसल के लिए भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। विश्व में इसके वितरण प्रतिरूप का वर्णन करें।
अथवा
विश्व में चावल की फसल के स्थानिक वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चावल विश्व की लगभग आधी जनसंख्या का भोज्य पदार्थ है। यह एशिया महाद्वीप की एक प्रमुख फसल है। एशिया महाद्वीप में चावल प्रमुख खाद्यान्न है। एशिया के बड़े देशों; जैसे चीन, भारत, जापान, म्यांमार, थाइलैंड आदि में चावल एक प्रमुख खाद्यान्न है। इतिहासकार चावल की कृषि का शुभारंभ चीन से मानते हैं। चीन से ही यह भारत तथा अन्य दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में विकसित हुआ। 15वीं शताब्दी से यूरोपीय देशों में तथा 17वीं शताब्दी से संयुक्त राज्य अमेरिका में इसका उत्पादन प्रारंभ हुआ। धीरे-धीरे विश्व के अनेक देशों में भी इसका विस्तार हुआ।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) – चावल उष्ण कटिबन्धीय पौधा है जिसके लिए उच्च तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। चावल की फसल के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं
1. तापमान (Temperature) – चावल की कृषि के सफल उत्पादन के लिए 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस के मध्य तापमान की आवश्यकता होती है। चावल की फसल के पकते समय तापमान अपेक्षाकृत अधिक होना चाहिए और बोते समय 21° सेल्सियस तापमान पर्याप्त रहता है।

2. वर्षा (Rainfall) – वर्षा चावल के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। चावल की कृषि के लिए 125 सें०मी० से 200 सें०मी० तक वर्षा की आवश्यकता होती है। चावल के पौधे का जब क्यारियों में रोपण करते हैं तो प्रारंभ के एक महीने तक खेत में लगभग 15 सें०मी० पानी भरा होना चाहिए। फसल के पकने से पूर्व खेत को पानी से मुक्त रखा जाना चाहिए। पकते समय तेज धूप तथा स्वच्छ आकाश आवश्यक है। जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी रहती है, वहाँ जल की कमी को सिंचाई द्वारा पूरा किया जाता है।

3. मिट्टी (Soil) – विश्व के अनेक भागों में चावल विभिन्न प्रकार की मिट्टी में पैदा होता है लेकिन इसके लिए जलोढ़ मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है। नदियों के डेल्टाओं तथा बाढ़ के मैदानों में इस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। जलोढ़ मिट्टी में पानी धारण करने की क्षमता अधिक होती है। लंबे समय तक मिट्टी में नमी रहती है जो चावल की पैदावार के लिए आवश्यक है।

4. श्रम (Labour) – चावल की कृषि में अधिकांश कार्य हाथ से किया जाता है। इसलिए पर्याप्त श्रम की आवश्यकता होती है। चावल को खुरपे की कृषि (Hoe Agriculture) भी कहते हैं। इसमें बीज बोना, उनका प्रतिरोपण करना, निराई-गुड़ाई आदि सभी कार्य हाथ से किए जाते हैं। विगत वर्षों में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने धान के पौधों के प्रतिरोपण के लिए मशीन का आविष्कार किया है लेकिन अभी यह प्रचलन में नहीं है।

चावल बोने की विधियाँ (Methods of Sowing Rice)-विश्व में चावल निम्नलिखित तीन विधियों से बोया जाता है-
1. छिड़ककर या छिड़काव विधि (Broadcasting Method) – यह विधि उन क्षेत्रों में प्रयोग में लाई जाती है, जहाँ सिंचाई के साधनों का अभाव हो। चावल की कृषि वर्षा पर ही निर्भर है। इस विधि में खेत में हाथ से बीज छिड़ककर फिर हल चलाते हैं। इस विधि में पैदावार कम होती है।

2. हल चलाकर (Drilling Method) – इस विधि में एक व्यक्ति हल चलाता है तथा दूसरा व्यक्ति उसके पीछे नाली में बीज डालता जाता है। यह विधि शुष्क प्रदेशों में प्रयुक्त की जाती है। इसमें भी पैदावार अपेक्षाकृत कम होती है।

3. प्रतिरोपण विधि (Transplantation Method) – इस विधि में पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है। पौध 30 से 40 दिन में तैयार हो जाती है। उसके बाद खेत में पानी डालकर हल चलाया जाता है तथा पौध का रोपण तैयार किए गए खेत में किया जाता है। यह विधि प्रायः अधिक वर्षा या सिंचाई के साधनों की सुलभता वाले प्रदेशों में अपनाई जाती है। दक्षिणी-पूर्वी एशिया में अधिकांशतः यही विधि अपनाई जाती है। इस विधि में प्रति हेक्टेयर पैदावार अधिक होती है। पौधों के प्रतिरोपण के बाद लगभग . 20-30 दिन तक खेत में पर्याप्त पानी रहना चाहिए।

चावल का विश्व वितरण (World Distribution of Rice)-विश्व का लगभग 92% चावल दक्षिणी पूर्वी एशिया में उत्पन्न किया जाता है। पिछले कछ वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा ब्राजील में भी चावल के उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। दक्षिणी पूर्वी एशिया के देशों में चीन, भारत, इंडोनेशिया और बांग्लादेश विश्व का लगभग 70% चावल उत्पन्न करते हैं। इन चा थाइलैंड, जापान, वियतनाम, फिलीपींस, कोरिया आदि प्रमुख चावल उत्पादक देश हैं।

1. चीन (China) – चीन चावल का प्रमुख उत्पादक देश है जो विश्व का लगभग 36% चावल उत्पन्न करता है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 17 करोड़ मीट्रिक टन चावल पैदा किया जाता है। चीन में चावल उत्पादन के प्रमुख चार क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • जेच्चान बेसिन
  • ह्यांग-हो घाटी का निचला मैदान
  • सिक्यांग तथा यांग्त्सी बेसिन प्रांत
  • दक्षिणी-पूर्वी तटीय प्रांत।

चीन में नदियों की घाटियों तथा डेल्टाई भागों में चावल की कृषि अधिक विकसित अवस्था में है। दक्षिणी तटीय मैदान में वर्ष में चावल की तीन फसलें पैदा की जाती हैं। इसी कारण दक्षिणी चीन को चावल का कटोरा (Rice Bowl) भी कहते हैं। पिछले कुछ दशकों में चीन में चावल के क्षेत्र में वृद्धि के साथ-साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। चीन में भारत की अपेक्षा चावल के अंतर्गत कम क्षेत्रफल होने के बावजूद भी चावल का उत्पादन भारत से अधिक है।

2. भारत (India) – चीन के बाद भारत दूसरा प्रमुख चावल उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का लगभग 17% चावल उत्पन्न किया जाता है। भारत में कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 24% भाग पर चावल की खेती की जाती है। भारत में जहाँ वर्षा 150 सें०मी० से अधिक होती है, उन क्षेत्रों में चावल उगाया जाता है। भारत में प्रति हेक्टेयर उत्पादन चीन, जापान तथा अन्य कई देशों से कम है। भारत में चावल के उत्पादन क्षेत्रों को चार वर्गों में रखा जा सकता है

  • पूर्वांचल में असम, मेघालय व मणिपुर राज्य।
  • मध्य गंगा तथा निचला मैदान (पूर्व उत्तर प्रदेश, बिहार तथा बंगाल)।
  • पूर्वी तट (ओडिशा, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के तटीय मैदान)।
  • पश्चिमी तट (केरल, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के तटीय मैदान)।

3. इंडोनेशिया (Indonesia) – चावल इंडोनेशिया की प्रमुख फसल है। यहाँ देश की कल कृषि योग्य भूमि के 45% भाग पर चावल की कृषि की जाती है। इंडोनेशिया विश्व का लगभग 8% चावल उत्पन्न करने वाला विश्व का तीसरा प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त सुमात्रा, कालिमंटन और सुलावेसी द्वीपों पर भी चावल की कृषि की जाती है। चावल अधिकांशतः तटीय तथा दलदली भू-भागों में पैदा किया जाता है। जावा द्वीप की लावा युक्त मिट्टी तथा संवहनीय वर्षा चावल की पैदावार के लिए विशेषतया अनुकूल है। चावल यहाँ के निवासियों का मुख्य भोजन होने के कारण यह देश अपनी आवश्यकता का पूरा चावल उत्पन्न नहीं कर पाता, इसलिए यह विदेशों से भी चावल आयात करता है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ 1

4. बांग्लादेश (Bangladesh) – बांग्लादेश विश्व का चौथा प्रमुख चावल उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का लगभग 5% चावल उत्पन्न होता है। यहाँ लगभग सभी जिलों में चावल की खेती की जाती है लेकिन गंगा ब्रह्मपुत्र का डेल्टाई भाग चावल के उत्पादन में विशेष स्थान रखता है। इस क्षेत्र में चावल तथा जूट दो ही प्रमुख फसलें हैं। गंगा ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई भाग में लगभग 60% भाग पर चावल की कृषि की जाती है। डेल्टाई भाग में वर्ष में चावल की तीन फसलें उगाई जाती हैं।

5. थाइलैंड (Thailand) – थाइलैंड में विश्व का लगभग 4% चावल उत्पन्न किया जाता है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 90% क्षेत्र में चावल की कृषि की जाती है। इस देश में मीकांग नदी की घाटी तथा डेल्टा की घाटी चावल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। थाइलैंड विश्व के प्रमुख चावल निर्यातक देशों में से एक है। बैंकॉक बंदरगाह द्वारा देश का लगभग 33% चावल निर्यात किया जाता है। इस देश के चावल के प्रमुख ग्राहक बांग्लादेश, इंडोनेशिया, जापान तथा मलेशिया हैं। थाइलैंड में सिंचाई की सुविधाओं का अभाव है। इस कारण अधिकांश चावल की कृषि वर्षा पर आधारित है। इसलिए जहाँ सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहाँ प्रति हेक्टेयर पैदावार कम है।

6. जापान (Japan) – चावल जापान की प्रमुख कृषि फसल है। यहाँ के लोगों का मुख्य भोजन चावल ही है। इस देश में विश्व का लगभग 3% चावल उत्पन्न होता है। चावल की कृषि समुद्री तटीय भागों तथा नदियों की घाटियों में की जाती है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 60% क्षेत्र में चावल उत्पन्न होता है लेकिन फिर भी यह अपनी आवश्यकता की पूर्ति नहीं कर पाता और इसे चावल विदेशों से आयात करना पड़ता है। जापान में चावल उत्पन्न करने की विधि सर्वोत्तम है। इसलिए विश्व के अन्य चावल उत्पादक देश इस विधि को अपनाते हैं। जापान के अधिकांश चावल उत्पादक क्षेत्र होंशू द्वीप का दक्षिणी भाग, क्यूशू तथा शिकोक द्वीप हैं। जापान में वर्ष में चावल की दो फसलें उगाई जाती हैं।

उपर्युक्त प्रमुख चावल उत्पादक देशों के अतिरिक्त म्याँमार, वियतनाम, कोरिया, ब्राज़ील, फिलीपींस, द्वीप समूह तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में भी चावल की खेती होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 5.
गेहूँ के उत्पादन की भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। विश्व में गेहूँ उत्पादन व वितरण की व्याख्या करें।
अथवा
विश्व में गेहूँ की फसल के स्थानिक (Spatial) वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खाद्यान्नों में गेहूँ एक महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगी खाद्यान्न है जिसकी कृषि प्राचीनकाल से होती आ रही है। प्रस्तर युग में भी स्विट्जरलैंड की झीलों के आसपास के क्षेत्रों में गेहूँ उगाया जाता था। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोजों से प्रमाणित हो चुका है कि आज से 4000 वर्ष पूर्व भी सिंधु घाटी में गेहूँ उगाया जाता था। गेहूँ एक पौष्टिक खाद्यान्न है जिसमें प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) – गेहूँ उत्तरी गोलार्ध में 30° से 55° उत्तरी अक्षांशों तथा दक्षिणी गोलार्ध में 30° से 40° दक्षिणी अक्षांशों के मध्य उगाया जाता है। गेहूँ शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों की उपज है जो मध्य अक्षांशों में उत्पन्न होती है। इसके लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं-
1. तापमान (Temperature) – गेहूँ को बोते समय 10° सेल्सियस तथा पकते समय 20° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। औसत रूप से गेहूँ के लिए 15° से 20° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। गेहूँ के पकते समय आकाश स्वच्छ (बादलों रहित) होना चाहिए।

2. वर्षा (Rainfall) – गेहूँ शुष्क प्रदेशों की उपज है। इसकी पैदावार के लिए 50 सें०मी० से 75 सें०मी० वर्षा अनुकूल रहती है। 100 सें०मी० से अधिक वर्षा गेहूँ की फसल के लिए हानिकारक होती है।

3. मिट्टी (Soil) – गेहूँ अनेक प्रकार की मिट्टियों में पैदा किया जाता है लेकिन हल्की चिकनी मिट्टी तथा भारी दोमट मिट्टी और बलुई दोमट मिट्टी गेहूँ के लिए अधिक उपयोगी रहती हैं। जिस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा अधिक हो, उसमें गेहूँ की पैदावार अच्छी होती है।

4. भूमि तथा श्रम (Land and Labour) – गेहूँ के लिए लगभग समतल भूमि की आवश्यकता है। मशीनी कृषि के लिए समतल तथा बड़े-बड़े फार्मों का होना आवश्यक है। गेहूँ के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि अधिकांश कृषि मशीनों से की जाती है। इसकी कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक की जाती है।

गेहूँ की किस्में (Kinds of Wheat)-विश्व में गेहूँ विभिन्न जलवायु प्रदेशों में बोया जाता है। साइबेरिया से लेकर उष्ण कटिबंधीय जलवायु प्रदेशों तक गेहूँ की कृषि की जाती है। इसलिए गेहूँ को मुख्य रूप से दो वर्गों में रखा जा सकता है
1. शीतकालीन गेहूँ यह गेहूँ शीत ऋतु के आगमन पर बोया जाता है तथा ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में काट दिया जाता है। यह उन क्षेत्रों में बोया जाता है जहाँ साधारण शीत ऋतु होती है। विश्व का अधिकांश गेहूँ (लगभग 80%) इसी मौसम में बोया जाता है।

2. बसंतकालीन गेहूँ यह गेहूँ बसंत ऋतु में बोया जाता है तथा शीत ऋतु के आगमन पर काट लिया जाता है। जहाँ कठोर शीत ऋतु होती है, वहाँ इस प्रकार का गेहूँ बोया जाता है। ऊंचे अक्षांशों में जहाँ शीत ऋतु में बर्फ पड़ती है, वहाँ बसंत ऋतु में गेहूँ बोया जाता है।

गेहूँ का विश्व वितरण (World Distribution of Wheat)-गेहूँ की खेती का विस्तार धरातल के बहुत बड़े क्षेत्र पर है। गेहूँ उत्पादक देशों में मुख्य रूप से चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि हैं।
1. चीन (China) – चीन विश्व का प्रथम बड़ा गेहूँ उत्पादक देश है। यह देश विश्व का लगभग 19.6% गेहूँ पैदा करता है। चीन में शीतकालीन तथा बसंतकालीन दोनों प्रकार का गेहूँ पैदा किया जाता है। बसंतकालीन गेहूँ मंचूरिया तथा आंतरिक मंगोलिया में पैदा किया जाता है, जबकि शीतकालीन गेहूँ ह्यांग-हो तथा यांगटीसिक्यांग घाटी में पैदा किया जाता है।

2. भारत (India) – वर्ष 1965 तक भारत का गेहूँ के उत्पादन में विश्व में छठा स्थान था, लेकिन वर्तमान समय में भारत विश्व का दूसरा उत्पादक राष्ट्र है। विश्व के कुल उत्पादन का लगभग 12% गेहूँ भारत उत्पन्न करता है। भारत में गेहूँ की पैदावार 100 सें०मी० वर्षा तक के क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है। जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सें०मी० से कम है, वहाँ सिंचाई के साधनों के विकास से गेहूँ उत्पन्न किया जाता है। देश के कुल उत्पादन का लगभग 50% गेहूँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा में पैदा किया जाता है। उत्तर प्रदेश भारत का गेहूँ उत्पन्न करने वाला सबसे प्रमुख राज्य है जो देश का लगभग एक-तिहाई गेहूँ पैदा करता है।

3. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) – संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का लगभग 10.7% गेहूँ उत्पन्न होता है। अमेरिका में दोनों प्रकार का गेहूँ (बसंतकालीन तथा शीतकालीन) बोया जाता है। बसंतकालीन गेहूँ का क्षेत्र उत्तरी डेकोटा से मोंटाना तक है। यहाँ शीत ऋतु में तापमान कम हो जाने के कारण बर्फ पड़ जाती है। इसलिए इस क्षेत्र में शीतकालीन गेहूँ बोना सम्भव नहीं है। दक्षिणी भाग में शीतकालीन गेहूँ की पेटी है जिसका विस्तार कंसास से पूर्वी कोलोरैडो तथा ओक्लाहोमा तक है।

4. कनाडा (Canada) – कनाडा विश्व का प्रमुख गेहूँ उत्पादक देश है। इस देश में अधिकांश बसंतकालीन गेहूँ उगाया जाता है। गेहूँ मुख्य रूप से प्रेयरी प्रदेश में उत्पन्न किया जाता है। देश का वितरण लगभग 75% गेहूँ इसी क्षेत्र में पैदा किया जाता है। बसंतकालीन गेहूँ का क्षेत्र सास्केच्चान, मैनीटोबा तथा अलबर्टा प्रांत में है। इस क्षेत्र में विनिपेग नगर विश्व की सबसे बड़ी गेहूँ की मंडी है। शीतकालीन गेहूँ के क्षेत्र ओंटारियो तथा क्यूबेक राज्यों के दक्षिणी पूर्वी भाग में स्थित हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ 2

5. रूस (Russia) – रूस में गेहूँ की खेती सहकारी पद्धति से की जाती है। यहाँ शीतकालीन तथा बसंतकालीन दोनों प्रकार का गेहूँ दक्षिणी भाग में अधिक उत्पन्न किया जाता है। गेहूँ की पेटी वोल्गा नदी बेसिन से यूराल क्षेत्र तथा साइबेरिया में बेकॉल झील तक फैली हुई है। साइबेरिया में बसंतकालीन गेहूँ पैदा किया जाता है।

रूस के अतिरिक्त गेहूँ पैदा करने वाले यूरोपीय देशों में यूक्रेन, स्पेन, इटली, हंगरी, रोमानिया, यूगोस्लाविया, फ्रांस, डेनमार्क, नीदरलैंड तथा ग्रेट ब्रिटेन आदि हैं। यूक्रेन तथा फ्रांस यूरोपीय देशों में महत्त्वपूर्ण निर्यातक देश हैं। प्रमुख गेहूँ आयातक देशों में इटली, जर्मनी, ब्रिटेन तथा नीदरलैंड आदि हैं।

6. ऑस्ट्रेलिया (Australia)-दक्षिणी गोलार्द्ध में ऑस्ट्रेलिया गेहूँ का महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश है। ऑस्ट्रेलिया विश्व का लगभग 3.6% गेहूँ पैदा करता है। गेहूँ ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख खाद्यान्न है तथा यह निर्यातक देश भी है। यहाँ गेहूँ का उत्पादन दो क्षेत्रों में होता है-

  • दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में मुर्रे-डार्लिंग का बेसिन
  • दक्षिणी-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया।

प्रश्न 6.
कपास के उत्पादन की भौगोलिक दशाएँ तथा विश्व वितरण का वर्णन करें। अथवा कपास की फसल की भौगोलिक दशा और प्रकार का वर्णन करते हुए विश्व वितरण पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
वस्त्र मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। वस्त्रों के निर्माण में रेशेदार पदार्थों का विशिष्ट योगदान है। रेशेदार पदार्थ विभिन्न प्रकार की वनस्पति तथा जीवों से प्राप्त होते हैं। वनस्पति या कृषिगत फसलों में कपास का महत्त्वपूर्ण स्थान है। सूती कपड़े का निर्माण कपास से ही होता है। सूती कपड़े का प्रचलन विश्व में सबसे अधिक है। कपास एक रेशेदार फूल होता है जो एक झाड़ीनुमा वनस्पति पर लगता है। उस फूल से सूत काता जाता है तथा कपड़े तैयार किए जाते हैं। फूल के अंदर बीज होता है, जिसे बिनौला कहते हैं। यह पशुओं की खली (चारे) के काम आता है तथा दूध में वसा की मात्रा को बढ़ाता है। कपास के पौधे की सूखी लकड़ी ईंधन के रूप में प्रयोग की जाती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) कपास शुष्क मानसूनी जलवायु की उपज है। इसके लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनकल होती हैं-
1. तापमान (Temperature) – कपास के लिए अधिक तापमान वाले क्षेत्र अनुकूल रहते हैं। यह ग्रीष्म ऋतु में बोया जाता है तथा शीत ऋतु के आगमन पर इसका फूल तैयार हो जाता है। कपास का वर्धनकाल लगभग 6 महीने का होता है। कपास के लिए 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।

2. वर्षा (Rainfall) – 50 सें०मी० से 100 सें०मी० वर्षा वाले क्षेत्र कपास के लिए उपयुक्त रहते हैं। इससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई से कपास की खेती की जाती है। अंतिम दिनों में मेघ-रहित तथा वर्षा-रहित मौसम आवश्यक है।

3. मिट्टी (Soil) कपास के लिए लावा – युक्त मिट्टी, जिसमें चूने का अंश अधिक मात्रा में हो, अनुकूल रहती है। चीका प्रधान दोमट मिट्टी कपास के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। भारत में लावा-युक्त मिट्टी का क्षेत्र मालवा के पठार में है जिसे कपास की मिट्टी कहते हैं, वहाँ पर्याप्त मात्रा में कपास उत्पन्न होती है। जहाँ मिट्टी में चूने की मात्रा कम हो, वहाँ उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।

कपास की किस्में (Kinds of Cotton) कपास की प्रायः चार किस्में होती हैं जिन्हें लंबाई के अनुसार बाँटा गया है-
1. अधिक लंबे रेशे वाली कपास (Very Long Staple Cotton)-इसके रेशे की लंबाई 5 सें०मी० से अधिक होती है। ऐसी कपास संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी पूर्वी तट, प्यूरिटोरिको तथा पश्चिमी द्वीप समूह के अन्य द्वीपों में बोई जाती है। इसे ‘समुद्र-द्वीपीय कपास’ भी कहते हैं।

2. लंबे रेशे वाली कपास (Long Staple Cotton)-इस प्रकार की कपास का रेशा 3.75 सें०मी० से 5 सें०मी० तक लंबा होता है। इससे उत्तम किस्म का कपड़ा तैयार किया जाता है। ऐसी कपास संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, पेरू तथा चीन में उगाई जाती है।

3. मध्यम रेशे वाली कपास (Medium Staple Cotton)-इस प्रकार की कपास का रेशा 2.5 सें०मी० से 3.75 सें०मी० तक लंबाई वाला होता है। इस प्रकार की कपास मुख्यतः मिस्र में नील घाटी, ब्राज़ील तथा चीन में उगाई जाती है।

4. छोटे रेशे वाली कपास (Small Staple Cotton)-इस प्रकार की कपास का रेशा 2.5 सें०मी० से छोटा होता है। इस प्रकार की कपास मुख्य रूप से भारत, ब्राजील तथा चीन में उगाई जाती है।

कपास का विश्व वितरण (World Distribution of Cotton) – संसार में कपास के क्षेत्र साधारणतया 40° उत्तरी और दक्षिणी अक्षाशों के मध्य फैले हैं। विश्व में कपास के उत्पादन में 19वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के बाद वृद्धि हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, मिस्र, चीन तथा भारत प्रमुख कपास उत्पादक देश हैं।

1. चीन (China) – चीन विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है जो लगभग 21% कपास उत्पन्न करता है। इस देश में कपास की खेती प्राचीनकाल से ही हो रही है लेकिन पिछले कुछ दशकों से इसके उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। चीन के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र यांग्टीसिक्यांग की निचली घाटी, हांग-हो और उसकी सहायक नदियों की घाटी तथा सिक्यांग का सिंचित क्षेत्र है। चीन की अधिकांश कपास देश में ही खप जाती है क्योंकि यहाँ सूती वस्त्रों की माँग अधिक है।

2. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) – संयुक्त राज्य अमेरिका में कपास की पेटी का विस्तार 37° उत्तरी अक्षांश लंबाई में 100° पश्चिमी देशांतर तक फैली है जिसको संयुक्त राज्य अमेरिका की कपास की मेखला के नाम से जाना जाता है। इस पेटी के अंतर्गत कैरोलीना, मिसीसीपी, जोर्जिया, अलाबामा, लुसियाना, अर्कनासौस, टैक्सास तथा ओक्लाहामा राज्य सम्मिलित हैं। टैक्सास संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

3. भारत (India) भारत में लंबे रेशे की कपास का उत्पादन कम होता है। भारत में अधिकांशतः छोटे रेशे की कपास ही उत्पन्न होती है। भारत में विश्व के कुल कपास क्षेत्र का लगभग 20% भाग है लेकिन उत्पादन लगभग 11% है। भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में
भी कपास उत्पन्न की जाती है।

4. ब्राज़ील (Brazil) ब्राज़ील में साओ – पालो मुख्य कपास उत्पादक राज्य है। ब्राज़ील कुछ कपास का निर्यात भी करता है।

5. मिस्र (Egypt) – मिस्र की कपास अपने गुण तथा लंबे रेशे के लिए विश्व-भर में प्रसिद्ध है। यहाँ आसवान बाँध के निर्माण के बाद सिंचाई की सुविधाओं के कारण कपास की खेती का निरंतर विस्तार हुआ है और उत्पादन में वृद्धि हुई है। कपास की खेती का विस्तार दक्षिणी मिस्र में अधिक हुआ है। मिस्र की अर्थव्यवस्था में कपास का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इन प्रमुख उत्पादक देशों के अतिरिक्त पाकिस्तान, टर्की तथा सूडान कपास के उत्पादक देश हैं।
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प्रश्न 7.
गन्ने के उत्पादन की भौगोलिक दशाओं तथा विश्व में इसके वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
गन्ना दक्षिणी एशिया में उगने वाला सेकेरम ऑफिसिनरस (Saccharum Officinarus) नामक वनस्पति का वंशज है। इसका पौधा लगभग 2 मीटर तक लंबा होता है जो बांस के पौधे से मिलता-जुलता है। इस पौधे का मूल स्थान भारत बताया जाता है। इस पौधे की घास जंगली अवस्था में बंगाल की खाड़ी के तट पर उगी हुई मिली। यहीं से यह घास सतलुज गंगा के मैदान तथा दक्षिणी एशिया के देशों में ले जाई गई। पृथ्वी पर पाई जाने वाली कई वनस्पतियों में चीनी का अंश है जिनमें चुकंदर, ताड़, खजूर, नारियल, अंगूर तथा आड़ प्रमुख हैं, लेकिन गन्ना चीनी का सबसे बड़ा स्रोत है जो विश्व की लगभग 65% चीनी तैयार करता है। प्राचीनकाल में गन्ने से गुड़ तथा शक्कर घरों में कोल्हू से रस निकालकर बनाई जाती थी लेकिन अब वैज्ञानिक तरीके से मिलों में चीनी तैयार की जाती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions ofYield) गन्ना उष्णार्द्ध जलवायु का पौधा है, जिसके लिए ऊंचा तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। धरातल पर गन्ने की खेती उष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में भूमध्य रेखा से 30° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांशों के मध्य होती है। गन्ने की कृषि के लिए निम्नलिखित दशाएँ अनुकूल होती हैं
1. तापमान (Temperature) – गन्ने की उपज के लिए 20° सेल्सियस से 30° सेल्सियस तक तापमान की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में तापमान कम होता है, वहाँ वर्धनकाल अपेक्षाकृत बड़ा होता है। 15° सेल्सियस से कम तापमान वाले प्रदेशों में इसकी वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है।

2. वर्षा (Rainfall) – गन्ने की कृषि के लिए पर्याप्त मात्रा में वर्षा की आवश्यकता होती है। गन्ने के विकास के समय जितनी अधिक वर्षा होगी, गन्ने में उतना ही रस का संचार होगा। गन्ने की कृषि के लिए 75 सें०मी० से 150 सें०मी० वर्षा की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा का औसत कम है, वहाँ सिंचाई द्वारा गन्ने की कृषि की जाती है।

3. भूमि तथा मिट्टी (Land and Soil) – गन्ने की कृषि के लिए समतल मैदानी भाग अनुकूल रहते हैं। दोमट मिट्टी, जिसमें चूने का अंश अधिक हो गन्ने के विकास के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। मिट्टी में नाइट्रोजन तथा पर्याप्त नमी धारण करने की क्षमता होनी चाहिए।

4. श्रम एवं यातायात (Labour and Transport) – गन्ने की खेती में अधिकांश कार्य हाथ से किया जाता है। गन्ने की रोपाई करने, निराई-गुड़ाई करने, उसे काटने तथा मिलों तक पहुँचाने का कार्य मानव श्रम द्वारा ही किया जाता है। इसलिए गन्ने की कृषि में सस्ता श्रम आवश्यक है। गन्ना एक भारी वस्तु है जिसकी परिवहन लागत अधिक आती है क्योंकि खेतों से चीनी मिलों तक गन्ना पहुँचाने के लिए सस्ते तथा सुलभ यातायात के साधनों का होना आवश्यक है। गन्ने को काटने के बाद जल्दी-से-जल्दी मिलों में भेजना पड़ता है वरना इसका रस सूख जाता है तथा चीनी की मात्रा कम निकलती है। गन्ने की खेती को अधिकांशतः बहुत-सी बीमारियाँ लग जाती हैं। अतः कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग किया जाना चाहिए तथा कीड़ा लगे पौधों को खेतों से बाहर जला देना चाहिए।

गन्ने का विश्व वितरण (World Distribution of Sugarcane) विश्व में गन्ने का अधिकांश उत्पादन तीन देशों-ब्राजील, भारत तथा क्यूबा में होता है। इंडोनेशिया, चीन, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका भी गन्ने के उत्पादक देश हैं।
1. ब्राज़ील (Brazil) ब्राज़ील विश्व का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। यह देश लगभग एक-चौथाई गन्ना उत्पन्न करता है। गन्ने की कृषि को सरकार द्वारा काफी प्रोत्साहन मिला है। ब्राज़ील में गन्ना उत्पादन निम्नलिखित क्षेत्रों में होता है

  • उत्तरी-पूर्वी तटीय क्षेत्र
  • दक्षिणी मिनास की उच्च भूमि
  • रियो-डी-जेनेरियो का उत्तर-पूर्वी तथा उत्तरी तटीय मैदान
  • साओ-पोलो क्षेत्र।

2. भारत (India) – भारत में संपूर्ण विश्व की अपेक्षा सबसे अधिक क्षेत्रफल पर गन्ना बोया जाता है, लेकिन उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। गन्ने का प्रति हेक्टेयर उत्पादन भारत में बहुत कम है। भारत में गन्ने का उत्पादन दो क्षेत्रों में होता है-(i) उत्तरी क्षेत्र इसमें गन्ने के उत्पादन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है, (ii) दक्षिणी क्षेत्र उत्पादन के दृष्टिकोण से इस क्षेत्र में तमिलनाडु सबसे प्रमुख राज्य है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक अन्य उत्पादक राज्य हैं।

3. क्यूबा (Cuba) – क्यूबा में गन्ने के बड़े-बड़े फार्म हैं। यह देश विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। क्यूबा की अर्थव्यवस्था में चीनी का बहुत बड़ा योगदान है। क्यूबा में चीनी की लगभग 160 मिलें हैं। क्यूबा वर्ष 1959 से पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका को अधिकांश चीनी का निर्यात करता था, लेकिन अब अधिकांश निर्यात पश्चिमी यूरोपीय देशों; जैसे रूस तथा चीन को किया जाता है। क्यूबा में गन्ने की खेती सभी द्वीपों में की जाती है। क्यूबा में गन्ने की खेती वैज्ञानिक स्तर पर मशीनों द्वारा की जाती है। क्यूबा चीनी का बहुत बड़ा निर्यातक देश है। इसका अधिकांश निर्यात रूस को किया जाता है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ 4

4. चीन (China) – चीन में विश्व का लगभग 7% गन्ना पैदा किया जाता है। चीन का तटीय क्षेत्र तथा सिक्यांग बेसिन गन्ने के प्रमुख उत्पादक प्रदेश हैं। देश के उत्तरी भागों में अधिक सर्दी के कारण गन्ना नहीं उगाया जाता।

5. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) – संयुक्त राज्य अमेरिका में गन्ने का उत्पादन मिसीसिपी नदी के डेल्टाई भाग, लुसियाना राज्य तथा हवाई द्वीपों में किया जाता है। यहाँ की कृषि मशीनी कृषि है। यहाँ चुकंदर से भी चीनी तैयार की जाती है।

6. ऑस्ट्रेलिया (Australia) – ऑस्ट्रेलिया में गन्ने का उत्पादन न्यू साउथ वेल्स के तटीय मैदानों में किया जाता है।

7. पाकिस्तान (Pakistan) – पाकिस्तान में गन्ने की अधिकांश कृषि नहरी सिंचाई द्वारा की जाती है। लाहौर, मुल्तान, लायलपुर, सियालकोट, क्वेटा और रावलपिंडी गन्ने के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 8.
चाय के लिए भौगोलिक दशाएँ तथा विश्व वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
चाय विश्व का प्रमुख पेय पदार्थ है जिसको करोड़ों लोग प्रतिदिन पीते हैं। चाय का प्रयोग बहुत समय से हो रहा है लेकिन पहले इसे औषधि के रूप में प्रयोग में लाया जाता था। चाय का प्रयोग सर्वप्रथम चीन में ईसा से छठी शताब्दी में प्रचलित के निवासियों को इसका पता बहुत बाद में लगा। प्राचीनकाल में चीन के व्यापारी यात्रा के दौरान अपनी थकान मिटाने के लिए चाय का प्रयोग करते थे। यूरोप में 17वीं शताब्दी तक चाय एक विलासिता की वस्तु मानी जाती थी क्योंकि इसका मूल्य बहुत अधिक था। सन् 1664 में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारियों ने चाय के पैकेट भारत से ले जाकर सम्राट चार्ल्स को उपहार के रूप में प्रस्तुत किए। धीरे-धीरे इसकी रोपण कृषि आरंभ हुई और उत्पादन में वृद्धि होने से यह सर्वसुलभ वस्तु बन गई।

चाय में थीन (Thein) नामक तत्त्व है जो हल्का नशा तथा स्फूर्ति देता है। यह एक सदापर्णी झाड़ी है जिसकी पत्तियों को सुखाकर, पीसकर चाय तैयार की जाती है। चाय की कृषि बागानी कृषि है। पहले इसकी पौध तैयार की जाती है। जब पौध 20 सें०मी० ऊंची हो जाती है, तब इसे प्रतिरोपण करके दूर-दूर लगा दिया जाता है। जब पौधा बड़ा हो जाता है तो उसकी कटाई-छंटाई की जाती है। इसको 40-50 सें०मी० से अधिक नहीं बढ़ने दिया जाता है। जितनी अधिक छंटाई की जाएगी, उतनी अधिक चाय की पत्तियाँ आती हैं। चाय की पत्तियों को छाया में या मशीनों द्वारा गर्म हवा देकर सुखाया जाता है। कई देशों में हरी पत्तियों की चाय भी प्रयोग की जाती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) चाय एक उपोष्ण जलवायु का पौधा है जो मानसून प्रदेश में पैदा होता है। इस पौधे के लिए अधिक तापमान तथा वर्षा की आवश्यकता होती है। इसके लिए. निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं
1. तापमान (Temperature)-चाय की कृषि के लिए सामान्यतया 25° से 30° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। चाय की कृषि के लिए वर्षा की अधिकता के साथ-साथ अधिक तापमान अनुकूल रहता है।

2. वर्षा (Rainfall)-चाय के पौधों के लिए 200 सें०मी० से 250 सें०मी० औसत वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। अगर वर्षा बार-बार बौछारों के रूप में होती रहे तो अधिक अनुकूल रहती है। वर्षा का वितरण साल भर समान रूप से होता रहना चाहिए, जिससे चाय की पत्तियाँ निरंतर विकसित होती रहें। चाय के लिए ओस तथा धुंध वाला मौसम अच्छा रहता है। आर्द्रता वाला मौसम चाय की पत्तियों की प्रचुरता के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

3. धरातल (Relief)-चाय के लिए ढलावदार भूमि का होना आवश्यक है क्योंकि चाय आर्द्र जलवायु वाले प्रदेशों में उगती है और यदि पानी खड़ा रहा तो इसके पौधे की जड़ें गल जाती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। इसलिए हल्के ढलान वाले पहाड़ी क्षेत्र चाय के लिए उपयुक्त रहते हैं।

4. मिट्टी (Soil) चाय की कृषि के लिए बलवी दोमट मिट्टी, जिसमें ह्यूमस की मात्रा अधिक हो, उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी में पोटाश, फास्फोरस, लोहा आदि तत्त्वों का पर्याप्त मात्रा में होना आवश्यक है। नाइट्रोजन तथा पोटैशियम युक्त उर्वरकों के प्रयोग से चाय का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

5. श्रम एवं पूँजी (Labour and Money)-चाय की कृषि में श्रम का महत्त्वपूर्ण योगदान है क्योंकि चाय के पौधों का प्रतिरोपण, उसकी कटाई-छंटाई, निराई तथा पत्तियों को चुनने के लिए पर्याप्त मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता होती है। स्त्रियों तथा बच्चों द्वारा चाय की पत्तियों को चुनने में अत्यधिक मदद मिलती है। पत्तियों को चुनने के बाद मशीनों से पत्तियों को सुखाया तथा पीसा जाता है। चाय की कृषि के लिए अधिक पूँजी तथा परिवहन की उचित व्यवस्था आवश्यक है।

चाय का विश्व वितरण (World Distribution of Tea)-जलवायु की अनुकूलता की दृष्टि से चाय सामान्यतया उत्तरी गोलार्द्ध में 45° अक्षांश तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 30° अक्षांशों के मध्य उगाई जाती है। चाय आज भी दक्षिणी पूर्वी एशिया की महत्त्वपूर्ण उपज है जबकि ब्रिटेन इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चाय के प्रमुख उत्पादक देशों में भारत, चीन, श्रीलंका, जापान, रूस तथा इंडोनेशिया हैं। इनके अतिरिक्त केन्या तथा टर्की में भी चाय उत्पन्न की जाती है।
1. भारत (India)-विश्व में चाय के उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान है। भारत देश में लगभग 4 लाख हेक्टेयर भूमि पर चाय की कृषि की जाती है। संसार की लगभग 26% चाय अकेला भारत उत्पन्न करता है। भारत में चाय के बागान उत्तर:पूर्व में हिमालय के पर्वतीय ढलानों तथा दक्षिण में नीलगिरि की पहाड़ियों में पाए जाते हैं। भारत का उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, जिसमें असम राज्य अग्रणी है, चाय का प्रमुख उत्पादक राज्य है। असम के ब्रह्मपुत्र तथा सुरमा नदियों की घाटी चाय के उत्पादन के लिए विश्वविख्यात है। असम के अतिरिक्त पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग तथा जलपाईगुडी चाय के विशिष्ट उत्पादक क्षेत्र हैं। दार्जिलिंग की चाय अपने रंग तथा स्वाद के लिए विश्वविख्यात है। उत्तर:पश्चिम में हिमाचल प्रदेश तथा देहरादून और दक्षिणी भारत में नीलगिरि की पहाड़ियों में भी चाय के बागान हैं।

2. चीन (China) – चीन चाय का दूसरा महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश है। यहाँ विश्व की लगभग 25% चाय उत्पन्न की जाती है। यहाँ चाय के प्रमुख तीन क्षेत्र हैं-(i) पूर्वी तटीय क्षेत्र, (ii) यांग्टीसिक्यांग की घाटी, (iii) जेच्वान बेसिन। यहाँ चाय का उत्पादन निजी ‘क्षेत्र तथा छोटे-छोटे बागानों में किया जाता है। चीन में अधिकांश उत्पादन घरेलू कार्यों के लिए ही होता है।

3. श्रीलंका (Sri Lanka) – श्रीलंका विश्व की लगभग 10% चाय उत्पन्न करता है। श्रीलंका के मध्यवर्ती पर्वतीय ढलानों पर केंडी के दक्षिण की ओर चाय के बागान हैं। श्रीलंका चाय का प्रमुख निर्यातक देश है। पिछले कुछ वर्षों से तमिल समस्या और आतंकवाद के कारण चाय के उत्पादन में कुछ कमी आई है।

इन प्रमुख देशों के अतिरिक्त इंडोनेशिया, जापान, रूस, टर्की, केन्या, युगांडा तथा मोजांबिक में भी चाय की कृषि की जाती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 9.
रबड़ की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं व विश्व वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रबड़ भूमध्य-रेखीय वनों में उगने वाला पेड़ है, जिसका दूध या रस चिपचिपा होता है, जिसे लैटेक्स (Latex) कहते हैं। सबसे पहले रबड़ का प्रयोग पेन्सिल के निशान को मिटाने (Rub) के लिए किया गया था। इसलिए इसका ना का वृक्ष सर्वप्रथम दक्षिणी अमेरिका के अमेजन बेसिन में खोजा गया। रबड़ का वृक्ष बहुत लम्बा होता है है। जब यह वृक्ष छह-सात साल का हो जाता है तब इसके तनों पर चाकू से V आकार का खाँचा लगाकर नीचे गमला लटकाकर दूध या रस प्राप्त किया जाता है।

बीसवीं शताब्दी में रबड़ की माँग बढ़ने से इसके बागानों का विस्तार हुआ। रबड़ में लोच, जल-प्रतिरोधी तथा विद्युत का कुचालक जैसे विशेष गुण होने से इसका प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वाहनों के टायरों (साइकिल से लेकर वायुयान तक), विद्युत के सामान में तथा अन्य अनेक वस्तुओं के निर्माण में इसका प्रयोग किया जाता है। वर्तमान समय में कृत्रिम रबड़ का प्रयोग भी अत्यधिक बढ़ रहा है क्योंकि प्राकृतिक रबड़ से आवश्यकताओं की पूर्ति सम्भव नहीं रही। इस समय विश्व में लगभग 60% रबड़ की पूर्ति कृत्रिम रबड़ से होती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (GeographicalConditions of Yield) रबड़ ऊष्णार्द्ध प्रदेशों का पौधा है, जिसके लिए साल भर ऊँचा तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। इसलिए इसकी खेती भूमध्य रेखा के आस-पास के क्षेत्रों में, जहाँ सारा साल सूर्य की किरणें लम्बवत् पड़ती हैं तथा प्रत्येक दिन वर्षा होती है, वहाँ सफलतापूर्वक की जाती है।
1. तापमान (Temperature) रबड़ की कृषि के लिए 21° से 30° सेल्सियस औसत तापमान की आवश्यकता होती है। किसी भी माह का तापमान 18° सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए।

2. वर्षा (Rainfall) रबड़ की कृषि के लिए 200 सें०मी० से 250 सें०मी० औसत वर्षा की आवश्यकता होती है। वर्षा वर्ष-भर निश्चित अन्तराल पर होनी आवश्यक है। भूमध्य रेखीय प्रदेशों में पर्याप्त वर्षा के कारण रबड़ एक सदाबहारी वनस्पति है, जो वर्ष-भर हरा-भरा रहता है। रबड़ के विकास के लिए भूमि में जल के निकास की पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए। सामान्य ढाल वाले मैदानी भाग इसके लिए उपयुक्त रहते हैं।

3. मिट्टी (Soil)-जलोढ़ मिट्टी रबड़ की कृषि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। लावा-निर्मित काली मिट्टी भी इसकी कृषि के लिए उपयुक्त रहती है।

4. श्रम (Labour)-रबड़ के बागान लगाने, उनकी देखभाल करने, दूध एकत्रित करने तथा उसे कारखानों तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त एवं सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
रबड़ का विश्व वितरण (World Distribution of Rubber)-संसार में उत्पन्न होने वाले प्राकृतिक रबड़ का लगभग 90% दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों, जिनमें मलेशिया, इंडोनेशिया, थाइलैंड, भारत तथा श्रीलंका सम्मिलित हैं, में मिलता है।
1. मलेशिया (Malasia) मलाया प्रायद्वीप का दक्षिण पश्चिमी तथा दक्षिणी भाग रबड़ के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के दो-तिहाई भाग पर रबड़ के बागान लगे हैं। इस देश में विश्व के कुल उत्पादन का लगभग 50% रबड़ उत्पन्न होता है। यहाँ के रबड़ के बागानों में मलय, चीनी तथा तमिल लोग कार्य करते हैं।

2. इंडोनेशिया (Indonesia)-इंडोनेशिया विश्व का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है, जो विश्व का लगभग एक-चौथाई (24%) रबड़ उत्पन्न करता है। यहाँ पर रबड़ के तीन क्षेत्र हैं

जावा द्वीप का दक्षिणी तथा पश्चिमी तट
सुमात्रा का मध्य भाग,
बोर्नियो तथा सेलीबीज आदि द्वीपों के विषुवत् रेखा पर स्थित होने के कारण वर्षभर ऊँचा तापमान तथा अधिक वर्षा के कारण रबड़ की कृषि सफलतापूर्वक होती है।

3. थाइलैंड (Thailand)-थाइलैंड विश्व का तीसरा उत्पादक देश है तथा कुल उत्पादन में थाइलैंड की भागीदारी लगभग 15% है। रबड़ के उत्पादन में अधिकतर भाग देश के प्रायद्वीपीय भाग में है, जहाँ पर मुख्य रूप से चीनी वंश के छोटे कृषक रबड़ का उत्पादन करते हैं।

4. भारत (India) भारत विश्व का लगभग 4% रबड़ उत्पन्न करता है। भारत में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में रबड़ की कृषि की जाती है।

5. श्रीलंका (Sri Lanka)-श्रीलंका में दक्षिणी-पश्चिमी तटों तथा मध्यवर्ती उच्च भूमि के वर्षानुमुखी ढाल रबड़ की कृषि के लिए अनुकूल हैं तथा श्रीलंका का अधिकांश रबड़ इसी भाग में उत्पन्न होता है।
अन्य रबड़ उत्पादक देशों में नाइजीरिया, वियतनाम, साइबेरिया तथा ब्राज़ील आदि हैं।

प्रश्न 10.
कहवा के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं तथा विश्व वितरण का विवरण दीजिए।
उत्तर:
कहवा भी चाय की तरह एक पेय पदार्थ है। यह एक झाड़ीनुमा पेड़ के फलों से प्राप्त बीज का चूर्ण बनाकर तैयार किया जाता है। इसमें ‘बैफिन’ नामक नशीला पदार्थ होता है जिसके पीने से थकान दूर होती है तथा स्फूर्ति आती है। अरब के मोचा क्षेत्र से यह 11वीं शताब्दी में दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में लाया गया। कहवे का पौधा तीन वर्ष बाद फल देता है तथा 25-30 वर्षों तक फल देता रहता है।

कहवा दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका में इथोपिया के पठारी प्रदेश में जंगली अवस्था में उगा पाया गया। वहाँ इसका नाम ‘काफा’ था। अरब सौदागरों द्वारा 11वीं शताब्दी में इसे यहाँ लाया गया तथा दक्षिणी अमेरिका तथा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में उगाया गया। यह एक सदाबहारी वृक्ष है जो 3-4 मीटर तक ऊँचा होता है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) कहवे की उपज के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं-
1. तापमान (Temperature)-कहवा उष्ण कटिबन्धीय पौधा है जिसके लिए ऊँचा तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। कहवे की उपज के लिए 20° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तक तापमान उपयुक्त होता है तथा पाला हानिकारक होता है। अधिक धूप एवं पाले से बचाने के लिए कहवे का पौधा बड़े-बड़े वृक्षों के नीचे लगाया जाता है जिससे उसे छाया मिलती रहे। सबसे ठंडे माह का तापमान 11° सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए।

2. वर्षा (Rainfall) कहवे के पौधे के लिए 100 सें०मी० से 200 सें०मी० वर्षा की आवश्यकता पड़ती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई करके इसकी कृषि की जाती है। शुष्क मौसम तथा अति-वृष्टि दोनों ही कहवे की खेती के लिए हानिकारक हैं। वृक्षों पर फल आते समय कम वर्षा की आवश्यकता होती है, क्योंकि अधिक वर्षा से फल गिर जाता है।

3. भूमि एवं मिट्टी (Land and Soil)-कहवे की कृषि के लिए चाय की तरह ढलवां भूमि की आवश्यकता होती है क्योंकि पानी इसकी जड़ों में रुकने से नुकसान पहुंचाता है। इसलिए कहवा पहाड़ी ढलानों या पठारी भागों में लगाया जाता है। कहवे की खेती के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। मिट्टी में लोहे का अंश तथा चूने की मात्रा अधिक होनी चाहिए। मिट्टी की गहराई पर्याप्त होनी चाहिए जिससे इसकी जड़ें गहराई तक प्रवेश कर सकें।

4. अधिक श्रम (More Labour)-चाय की भाँति कहवे की कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता होती है क्योंकि कहवे की पौध लगाने व बीज एकत्रित करने तथा उन्हें सुखाने के लिए निपुण श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

कहवा का विश्व वितरण (World Distribution of Coffee) विश्व में कहवा उत्पन्न करने वाले देशों में ब्राज़ील, कोलंबिया, इक्वेडोर, वेनेजुएला, गुयाना, ग्वाटेमाला, एल्व-सल्वाडोर, मैक्सिको, क्यूबा हैरी, जमैका, अंगोला, आइवरी कोस्ट, युगांडा, इथोपिया, कैमरून, मालागैसी, भारत, इंडोनेशिया तथा श्रीलंका हैं।

1. ब्राज़ील (Brazil) ब्राज़ील विश्व का सबसे बड़ा कहवा उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का लगभग 20% कहवा उत्पन्न किया जाता है। यहाँ कहवे की कृषि के लिए सभी भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ब्राज़ील में रियो-डि-जनेरो के पृष्ठ-प्रदेश में इसे पैदा करने की आदर्श दशाएँ मिलती हैं। यहाँ बड़े-बड़े बागानों को फैजेंडा कहते हैं। कहवा उत्पादक राज्यों में साओ-पालो तथा मिनास गेरास प्रमुख हैं। यहाँ के ढलावदार पठारी भागों में बड़े-बड़े बागान लगाए गए हैं। यहाँ कहवा के लिए रस्सी मार्ग द्वारा परिवहन की व्यवस्था की गई है।

2. कोलंबिया (Columbia) यह देश विश्व का लगभग 10% कहवा उत्पन्न करता है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख टन कहवा उत्पन्न किया जाता है। यहाँ का उत्पादक क्षेत्र कोलंबिया की राजधानी बोगोटा के पश्चिम में फैला हुआ है। दूसरा उत्पादक क्षेत्र एंटीकुआ है। कोलंबिया के कहवा का रंग तथा स्वाद में अच्छा होने के कारण विश्व बाजार में इसकी माँग अधिक है।

3. मैक्सिको (Maxico) मैक्सिको विश्व का तीसरा कहवा उत्पादक देश है। यहाँ लगभग 5% कहवा उत्पन्न किया जाता है। यहाँ का कहवा उत्पादक क्षेत्र प्रशांत महासागर के तटवर्ती भाग की ढालनों से मध्यवर्ती उच्च भूमि तक फैला हुआ है।

4. मध्य अमेरिकी तथा कैरेबियन द्वीप (Mid-American and Caribean Continent) इस क्षेत्र के उत्पादक देश ग्वाटेमाला एल-सल्वाडोर, हैरी, जमैका, क्यूबा, पोर्टोरीको तथा त्रिनिदाद हैं।

5. अफ्रीका के मुख्य उत्पादक देश (Major Productive Countries of Africa)-इस क्षेत्र के उत्पादक देश आइबरी कोस्ट, युगांडा, अंगोला, केन्या, केमरुन तथा तंजानिया हैं।

6. दक्षिण-पूर्वी एशिया (South-East Asia) इस क्षेत्र के उत्पादक देश श्रीलंका, जावा, सुमात्रा, भारत में कर्नाटक एवं तमिलनाडु हैं।

प्रश्न 11.
कृषि को परिभाषित कीजिए। विश्व में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की कृषि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषि का अर्थ व परिभाषा (Meaning and Definition of Agriculture) कृषि (Agriculture) शब्द अंग्रेजी के Ager + Culture, दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘Ager’ का अर्थ है-मिट्टी या खेत और ‘Culture’ का अर्थ है-देखभाल या जोतना अर्थात् मिट्टी को जोतना तथा उसमें फसलें उगाना कृषि है, लेकिन यह इसका संकुचित अर्थ है। विस्तृत अर्थ में कृषि के अंतर्गत फसलें उगाना, पशुपालन, फलों की खेती करना आदि सभी क्रियाएँ सम्मिलित हैं। दूसरे शब्दों में, कृषि वह कला तथा विज्ञान है, जिसमें मनुष्य भूमि से भोज्य पदार्थ प्राप्त करने के लिए उसका उपयोग करता है। प्रो० जिम्मरमैन के अनुसार, “कृषि में वे मानवीय प्रयास सम्मिलित हैं, जिनके द्वारा मानव भूमि पर निवास करता है तथा यदि सम्भव हुआ तो पौधों तथा पशुओं की प्राकृतिक रूप से हो रही वृद्धि को नियन्त्रित करता है, जिससे इन उत्पादों और मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।”

विश्व में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की कृषि (Different Types of Agriculture Found in World) विश्व में पाई जाने वाली विभिन्न भौतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दशाएँ कृषि कार्य को प्रभावित करती हैं एवं इसी प्रभाव के कारण विभिन्न प्रकार की कृषि देखी जाती हैं। विश्व में निम्नलिखित प्रकार की कृषि पाई जाती हैं
1. निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture) इस प्रकार की कृषि में कृषि क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय उत्पादों का संपूर्ण अथवा लगभग का उपयोग करते हैं। इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है
(1) आदिकालीन निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture)-आदिकालीन निर्वाह कृषि उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में की जाती है जहाँ आदिम जाति के लोग कृषि करते हैं। इसका क्षेत्र अफ्रीका, दक्षिणी एवं मध्य अमेरिका का उष्ण कटिबन्धीय भाग एवं दक्षिणी-पूर्वी एशिया है। इन क्षेत्रों की वनस्पति को जला दिया जाता है एवं जली हुई राख की परत उर्वरक का कार्य करती है। इस प्रकार यह कृषि कर्तन एवं दहन कृषि भी कहलाती है। कुछ समय पश्चात् जब मिट्टी का उपजाऊपन समाप्त हो जाता है तो वे नए क्षेत्र में वन जलाकर कृषि के लिए भूमि तैयार करते हैं।

(2) गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture) इस प्रकार की कृषि मानसून एशिया के घने बसे देशों में की जाती है। यह भी दो प्रकार की है
(i) चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture with Rice)-इसमें चावल प्रमुख फसल है। अधिक जनसंख्या घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है और कृषि कार्य में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है। इस कृषि में प्रति इकाई उत्पादन अधिक होता है, परंतु प्रति कृषक उत्पादन कम है।

(ii) चावल रहित गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture without Rice)-मानसून एशिया के अनेक भागों में भौगोलिक दशाओं में भिन्नता के कारण धान की फसल उगाना प्रायः संभव नहीं है। इसमें सिंचाई द्वारा कृषि की जाती है।

2. रोपण कृषि (Plantation Agriculture) रोपण कृषि में कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है। इसमें अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबंध एवं तकनीकी और वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। यह एक फसली कृषि है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अधीन उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले एवं अनानास आदि फसलों का उपयोग करके रोपण कृषि का विस्तार किया है।

3. विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि (Extensive Commercial Grain Cultivation) मध्य अक्षांशों के आंतरिक अर्द्ध-शुष्क प्रदेशों में इस प्रकार की कृषि की जाती है। इसकी मुख्य फसल गेहूँ है। इसके अलावा मक्का, जौ, राई, जई भी बोई जाती है। इस कृषि में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है और सभी कार्य यंत्रों द्वारा संपन्न किए जाते हैं। इसमें प्रति एकड़ उत्पादन कम होता है और प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक होता है।

4. मिश्रित कृषि (Mixed Farming)-इस प्रकार की कृषि विश्व के अत्यधिक विकसित भागों में की जाती है। उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका का पूर्वी भाग, यूरेशिया के कुछ भाग एवं दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश वाले भागों में इसका विस्तार है। इसमें फसल उत्पादन एवं पशुपालन दोनों को समान महत्त्व दिया जाता है।

5. डेयरी कृषि (Dairy Farming)-डेयरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केंद्रों के समीप किया जाता है क्योंकि ये क्षेत्र दूध एवं अन्य डेयरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं। पशुओं के उन्नत पालन-पोषण के लिए पूँजी की भी अधिक आवश्यकता होती है। वाणिज्य डेयरी के मुख्य क्षेत्र उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, कनाडा, दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड हैं।

6. भूमध्य-सागरीय कृषि (Meditterranean Agriculture)- यह अति-विशिष्ट प्रकार की कृषि है। इसका विस्तार भूमध्य-सागर के समीपवर्ती क्षेत्रों में है। अंगूर की कृषि भूमध्य-सागरीय क्षेत्र की विशेषता है। खट्टे फलों की आपूर्ति करने में यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है।

7. सहकारी कृषि (Co-operative Farming)-जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य संपन्न करे, उसे सहकारी कृषि कहते हैं। सहकारी संस्था कृषकों को सभी प्रकार से सहायता उपलब्ध कराती है। इस प्रकार की कृषि का उपयोग डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन एवं इटली जैसे देशों में सफलतापूर्वक किया जाता है।

8. सामूहिक कृषि (Collective Farming) इस प्रकार की कृषि में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व संपूर्ण समाज एवं सामूहिक श्रम पर आधारित होता है। कृषि का यह प्रकार पूर्व सोवियत संघ में प्रारंभ हुआ था। इस प्रकार की सामूहिक कृषि को सोवियत संघ में कालेखहोज का नाम दिया गया। सभी कृषक अपने संसाधन; जैसे भूमि, पशुधन एवं श्रम को मिलाकर कृषि कार्य करते हैं। सरकार उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करती है और उत्पादन को सरकार ही निर्धारित मूल्य पर खरीदती है।

9. ट्रक कृषि (Truck Farming)-जिन प्रदेशों में कृषक केवल सब्जियाँ पैदा करता है। वहाँ इसे ट्रक कृषि का नाम दिया जाता है। ट्रक फार्म एवं बाजार के मध्य की दूरी, जो एक ट्रक रात-भर में तय करता है उसी आधार पर इसे ट्रक कृषि कहा जाता है।

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HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Haryana State Board HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

HBSE 6th Class Science Components of Food Textbook Questions and Answers

Exercises

Question 1.
Name the major nutrients in our food.
Answer:
The major nutrients in our food are:

  • Carbohydrates
  • Proteins
  • Fats
  • Vitamins
  • Minerals
  • Dietary fibres and water.

Question 2.
Name the following :
(a) The nutrients which mainly gives energy to our body.
(b) The nutrients that are needed for the growth and maintenance of our body.
(c) A vitamin required for maintaining good eye sight.
(d) A mineral that is required for keeping our bones healthy.
Answer:
(a) Carbohydrates and fats,
(b) Proteins
(c) Vitamins ‘A’
(d) Calcium.

Question 3.
Name two food each rich in :
(a) Fats
(b) Starch
(c) Dietary fibre
(d) Proteins.
Answer:
(a) (i) Butter, (ii) Ghee, (iii) Soyabean.
(b) (i) Rice (cooked), (ii) Dal (cooked), (iii) Peanuts.
(c) Whole grains and pulses. Fresh fruits.
(d) Milk, fish, cheese and eggs.

Question 4.
Tick (✓) the statements that are correct.
(a) By eating rice alone, we can fulfill nutritional requirement of our body. ( )
(b) Deficiency diseases can be prevented by eating a balanced diet. ( )
(c) Balance diet for the body should contain a variety of food items. ( )
(d) Meat alone is sufficient to provide all nutrients to the body. ( )
Answer:
(a) Not correct
(b) correct
(c) correct
(d) not correct.

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Question 5.
Fill in the blanks :
(a) _________ is caused by deficiency of vitamin D.
(b) Deficiency of _________ causes a disease known as beri-beri.
(c) Deficiency of vitamin C causes a disease known as _________.
(d) Night blindness is caused due to deficiency of _________ in our food.
Answer:
(a) Rickets
(b) Vitamin B
(c) Scurvy
(d) Vitamin ‘A’.

HBSE 6th Class Science Components of Food Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What are the essential nutrients for our body?
Answer:
Carbohydrates, proteins and fats, vitamins and minerals are essential nutrients.

Question 2.
Name any three sources of carbohydrates.
Answer:
Cereals – Sugar and sweet potato.

Question 3.
Name the disease caused due to lack of vitamin A.
Answer:
Night blindness.

Question 4.
Name two sources of animal proteins.
Answer:
Egg and milk.

Question 5.
Write two sources of plant protein.
Answer:
Pulses and beans.

Question 6.
Same mass of which nutrient gives more energy – Fats or carbohydrate?
Answer:
Fats.

Question 7.
Name two foods rich in dietary fibres.
Answer:

  • cabbage
  • spinach.

Question 8.
Name three foods rich in oil and fats.
Answer:
Butter, ghee, vegetable oils.

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Question 9.
Name two protein-rich foods.
Answer:
Meat and milk.

Question 10.
Which food is needed for strong bones and teeth?
Answer:
Milk, fish, oils and eggs.

Question 11.
Which food is needed to prevent constipation?
Answer:
Juicy fruits and fresh vegetables.

Question 12.
Name the type of food which makes a balanced diet?
Answer:

  • Energy-providing
  • Growth- promoting
  • protective food.

Question 13.
What are protective foods?
Answer:
Foods which help in protection of body from disease like – minerals and vitamins.

Question 14.
Name three sources of fats.
Answer:
Coconut, ghee and groundnut.

Question 15.
What is the importance of proper food selection?
Answer:
By selecting food properly, we can have nutritious diet in less price.

Question 16.
What are the sources of vitamin ‘D’?
Answer:
Milk, butter, egg and fish liver.

Question 17.
What is the causal factor of scurvy?
Answer:
It is caused by the deficiency of vitamin C.

Question 18.
What is the main cause of obesity?
Answer:
Excess eating of fried food is the main cause of obesity.

Question 19.
What are harmful effects of obesity?
Answer:
It causes heart disease, high blood pressure and diabetes.

Question 20.
Name four important minerals present in our body.
Answer:
Calcium, sodium, potassium and iron.
Calcium and phosphorus.

Question 21.
Name the disease caused by the deficiency of proteins and carbohydrates in children.
Answer:
Kwashiorkar and Marasmus.

Question 22.
Which disease is caused by the deficiency of vitamin B2?
Answer:
Retarded growth, Pellegra.

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Question 23.
Name the disease caused by the deficiency of iron.
Answer:
Anaemia.

Question 24.
Name the disease caused by the deficiency of phosphorus.
Answer:
Body weakness and bad bones and teeth.

Question 25.
Chapatis of wheat flour or maida?
Answer:
Chapatis of wheat flour give us more nutrients.

Question 26.
Vegetables and fruits with peels or without peels?
Answer:
Vegetables and fruits with peels give us more nutrients.

Question 27.
Dalia or noodles?
Answer:
Dalia gives us more nutrients.

Question 28.
Fruit juice or created spot drinks?
Answer:
Fruits juice gives us more nutrients.

Short Answer Type Questions

Question 1.
What are the symptoms of vitamin ‘C’ deficiency?
Answer:
Symptoms of vitamin ‘C’ deficiency are :
(i) Skin on the gums begins to crack and bleed.
(ii) Wounds in the body take a longer time to heal.
(iii) Cough and cold are caused due to its deficiency.

VitaminsMinerals
1. They are a special group of compounds.1. These are special groups of inorganic compounds.
2. These are needed by our body in a very small quantity.2. These are needed in small amounts.
3. They perform specific functions.3. Each mineral is necessary for the growt hand development of the body.
4. They help in keeping our eyes, bones, teeth and gums healthy.4. They help in maintaining a good health.

Question 2.
What is the difference between vitamins and minerals?
Answer:
Difference between vitamins and minerals :

Question 3.
What is a balanced diet?
Answer:
A diet containing all the essential requirements in right proportion, necessary for the growth and development of the body. These are carbohydrates, fats, proteins, vitamins and minerals. Sufficient amount of water and roughage should also be present.

Question 4.
What are protective foods? Give two examples.
Answer:
Those foods which help in the protection of body against diseases like vitamins and minerals.

Question 5.
Name the different components of food.
Answer:
The main components of foods are : Carbohydrates, fats, proteins, vitamins and minerals. Roughage and water are also needed in proper quantity.

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Question 6.
List the functions of food.
Answer:
Functions of foods are:

  • To provide energy to do work.
  • To help in repairing of injured body part and growth.
  • To protect the body from infections and disease.

Question 7.
What is the importance of fats in our body?
Answer:
Fats are important for our body in the following ways:

  • They are used as fuels in the absence of carbohydrates.
  • Fats protect the internal organs from the external shocks.

Question 8.
Why is water essential for our life?
Answer:
Water is very essential for our body in the following ways :

  • It acts as medium for body reactions and functions.
  • It helps in transport of substances in the different parts of the body.
  • It helps in digestion of food.
  • It helps in removal of waste from the begins.
  • It helps in maintaining the body tempture constant.

Question 9.
Why are vitamins and minerals called protective food?
Answer:
Minerals are chemical compounds needed in small quantities for proper growth and function of the body. Vitamins are also very important for proper functioning of the body organs. They protect our body from many diseases and infections. So they are called protective foods.

Question 10.
What is roughage? How is it important for the body?
Answer:
The part of food containing cellulose which is undigestible in nature acts as roughage. It helps in removing all the undigested food, stored in the digestive tracts, outside the body.

Question 11.
What is malnutrition? What are its harmful effects?
Answer:
Malnutrition is caused by deficiency of one or more nutrients in our diet. Protein deficiency causes kwashiorkar in which swelling in body occurs. Protein and carbohydrate deficiency cause marasmus in which leaves body parts leaning and person becomes thin.

Question 12.
What are the causal factors for scurvy and rickets?
Answer:
Scurvy is caused by the deficiency of vitamin ‘C’. In this disease, gums and nose start bleeding. The body bleeds inside. Rickets is caused by the deficiency of vitamin D. In this disease, bones become soft and bend.

Question 13.
Explain the following with suitable examples:
(i) Obesity, (ii) Hypervitaminosis, (iii) Anaemia.
Answer:
(i) Obesity : It is caused by excess eating of fried foods. Fats and carbohydrates are stored in our body and cause obesity. In it too much fats are deposited in the body which is very harmful.

(ii) Hypervitaminosis : It is caused due to excess of vitamin ‘D’. In hypervita-minosis the foot becomes like elephant and becomes very thick.

(iii) Anaemia : It is caused by the deficiency of iron. It is needed for the formation of red-blood cells in our blood. Therefore by the deficiency of iron our body becomes yellow. In this disease, there is a loss of appetite, nails becomes white, swelling appears on our hands and feet and other body parts.

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Question 14.
What is the importance of carbohydrates in our body?
Answer:
Carbohydrates act as fuels in our body. It is the only nutrient which combusts frequently and produce energy. Our body use this energy in performing various body functions.

Question 15.
What is meant by P.E.M.? Name the disease caused by P.E.M.
Answer:
The elaborated form of P.E.M. is protein energy malnutrition. The diseases caused by P.E.M. are: (i) Kwashiorkar and (ii) Marasmus.

Question 16.
Explain the importance of proteins in the human body.
Answer:
Protein contains sufficient quantity of amino-acids to maintain a normal functioning of our body. It is required for growth and repairs in our body. It helps in building the new tissues. They also account for the tough fibrous nature of hair and nails. They are parts of our body and help in proper functioning of our body. It can also burn to provide energy in the time of emergency.

Question 17.
How would you test the presence of the following in the given food?
(a) Starch (b) Vitamin C.
Answer:
(a) Test for starch : The material is dissolved in water. To this solution, add some drops of iodine solution. If it turns blue, it shows the presence of starch.

(b) Test for vitamin C : The material is dissolved in water and add some drops of iodine solution in it. Now with the help of a dropper put drop by drop into the blue coloured iodine solution. If the blue colour disappears and brown colour appears, it shows the presence of vitamin C.

Question 18.
What happens when we eat lots of fried food?
Answer:
Fried foods such as noodles, pizza, burgers, potato wafers, chocolate, candies, ice-creams and soft drinks all are harmful to us if we take these in excess and regularly. These fast foods lack in minerals and vitamins. They cause obesity. They increase body weight.

Question 19.
Why do we have to drink lots of water?
Answer:
Water is required to perform several different functions. Our blood is mostly water. In dehydration, blood becomes thicker. Water helps in digestion. It dissolves waste products of the body and these could be removed through urine.

Long Answer Type Questions

Question 1.
What are vitamins? Write the sources of vitamin A, B, C and D. Name the disease caused due to the deficiency of these vitamins.
Answer:
Vitamins are a special group of compounds which are needed by our body only in very small quantities. They do not provide any energy to us, but they are essential components of our diet as they perform specific functions in our body. Some vitamins are water-soluble and some are fat-soluble. Vitamin ‘A’ is a fat-soluble vitamin. Its good sources are fish oil, milk, milk products and carrots. Its deficiency causes night blindness.

Vitamin ‘B’ is water-soluble. It is found in wheat, rice, yeast extract, liver and kidney. Lack of vitamin ‘B’ causes beri-beri.

Vitamin ‘C’ is water-soluble. It is found in citrus fruits, (orange, lemon, lime) and in many fresh vegetables. Lack of vitamin C causes scurvy.

Vitamin ‘D’ is fat soluble. It is found in fish oil, eggs, milk and milk products. Its deficiency causes rickets.

HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 2 Components of Food

Question 2.
What are the sources and importance of the following minerals:
(a) Calcium, (b) Magnesium, (c) Potassium, (d) Zinc.
Answer:
(a) The main sources of calcium minerals are : Milk, cheese, eggs and green vegetables. It is also found in flour and breads. It helps in formation of bone, teeth and blood clotting. It also helps in muscles activity.

(b) Magnesium is found in cheese and green vegetables. It is found in whole meal bread, milk and fish. It helps in energy transfer and muscles activity. Magnesium is also helpful in bone and teeth formation. It works with calcium and vitamin C.

(c) Potassium is found in meats, fruits and vegetables. It is also found in milk, eggs, cheese, beef and potatoes. Its main function is to maintain balance in blood and tissues fluid. It also helps in nerve impulse conduction.

(d) Zinc is mainly found in onions, liver and green vegetables. Its importance in our diet is that it is an important part of hormone insulin.

Components of Food Class 6 HBSE Notes

1. We get energy from the food we eat. It gives us energy to work and play. It helps us to grow.

2. Food helps us in repairing or replacing damaged cells and tissues. It also protects our body from diseases and infections.

3. Food is an absolute necessity for sustaining body functions.

4. Food has many components; such as carbohydrate, fats, proteins, minerals and vitamins. All these are called nutrients.

5. Water and roughage are also necessary for our diet. They play a vital role in our diet.

6. On the basis of functions, they perform, the components of food may be classified as:

  • Energy-giving food: carbohydrates and fats.
  • Body-building food : proteins.
  • Protective food: vitamins and minerals.
  • Roughage and water: roughage helps in digestive system and water’ is essential for the body.

7. Carbohydrate is the main source of energy in our body. Proteins help in repairing of tissues, body building and many other functions.

8. Minerals and vitamins are very essential for our body. They are required in minor quantities for proper growth and body functions.

9. Vitamins are protective foods which are necessary for the well being of the body. They are needed in small quantities for carrying out various biological functions.

10. We should take a balanced diet means which contains all nutrients, such as carbohydrate, fats, proteins, vitamins and minerals in proper proportion. No single food can provide all the nutrients.

11. Over eating is also not good for a person, as he becomes fat and obese. Obesity may cause many diseases.

12. Sources of carbohydrates in our diet are; cereals grains such as corn and sorgham, peas, beans, sugarcane, sugar beet and many fruits such as banana, mango, melons and vegetables.

13. Many processed foods are rich in carbohydrates including breads. Pizzas, burgers, jams and jelleys, dried fruits, sugar and jaggery are also carbohy-drates.

14. Fats are obtained either from animals or from plants. Butter and ghee are obtained from animals. Groundnut oil, soyabean oil and mustard oil are derived from plants. Fats give more energy than carbohydrates.

15. Protein is obtained from animals and from plants both. Milk, fish, meat, ghee and eggs are main sources of animal proteins. Pulses and beans are sources of plant proteins.

16. Children suffering from protein—deficiency have light brown hair, oldman like face, always hungry and have distended stomach.

17. Proper amount of vitamins helps our body to function normally. Lack of vitamin A causes deficiency disease such as night blindness. Deficiency of vitamin B causes beri-beri and deficiency of vitamin ‘C’ causes scurvy.

18. Fibres and roughage is mainly given by plant foods : grains flour, cereals, potatoes, fresh fruits and raw and cooked vegetables provide roughages in our food.

19. If a person does not get adequate food or his/ her diet does not contain all the nutrients, he becomes weak and said to be suffering from malnutrition. Enough food without enough protein causes rickets.

20. Food may be vegetarian/non-vegetarian, balanced or unbalanced, simple or spicy, nourishing or junk food. Deep fried and roasted foods usually loose their nutritive value.

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Gann Square Of 9 Calculator

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time

HBSE 7th Class Science Motion and Time Textbook Questions and Answers

Question 1.
Classify the following as motion along a straight line, circular or oscillatory motion :
(i) Motion of your hands while running.
(ii) Motion of a horse pulling a cart on a straight road.
(iii) Motion of a child in a merry go round.
(iv) Motion of a child on a see-saw.
(v) Motion of the hammer of an electric bed.
(vi) Motion of a train on a straight bridge.
Answer:
(i) Oscillatory
(ii) along a straight, line
(iii) circular
(iv) oscillatory
(v) oscillatory
(vi) along a straight line.

Question 2.
Which of the following is not correct?
(i) The basic unit of time is second.
(ii) Every object moves with a constant speed.
(iii) Distance between two cities are measured in kilometres.
(iv) The time period of a given pendulum is not constant.
(v) The speed of a train is expressed in m/h.
Answer:
(ii), (iv) (v).

Question 3.
A simple pendulum takes 32 s to complete 20 oscillations. What is the time period of the pendulum?
Answer:
Time period of a pendulum is time taken to complete 1 oscillation
Time taken to complete = 32 s.
20 oscillations
Time taken to complete = \(\frac { 32 }{ 20 }\)s.
1 oscillation
= 1.6 s.
∴ Time period of pendulum is 1.6 seconds.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time

Question 4.
The distance between two stations is 240 km. A train takes 4 hours to cover this distance. Calculate the speed of the train.
Answer:
Distance = 240 km.
Time taken = 4 hr.
Speed = \(\frac { Distance covered }{time taken }\)
= \(\frac { 240 }{ 4 }\) \(\frac { km }{ h }\)
= 60 km/h.
Speed of the train is 60 km/h.

Question 5.
The odometer of a car reads 57321.0 km when the clock shows the time 08:30 AM. What is the distance moved by the car, if at 08:50 AM, the odometer reading has changed to 57336.0 km? Calculate the speed of the car in km/min during this time. Express the speed in km/ h also.
Answer:
Distance = 57336.0 km – 57321 km = 15 Km
Time = 8.50 Am. – 8.30 Aim. = 20 min
Speed = \(\frac { Distance }{ time }\) = \(\frac { 15 }{ 20 }\) km/m
= 0.75 km/m. = 45 km/h

Question 6.
Salma takes 15 minutes from her house to reach her school on a bicycle. If the bicycle has a speed of 2 m/s. Calculate the distance between her house and’the school.
Answer:
Time taken = 15 min
Speed = 2 m/s.
Distance = Speed x time
= 15 x 2
= 30 m.
So, distance between Salma’s School and her house is 30 metre.

Question 7.
Show the shape of the distance-time graph for the motion in the following cases :
(i) A car moving with a constant speed.
(ii) A car parked on a side road.
Answer:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time 1

Question 8.
Which of the following relations is correct?
(i) Speed = Distance x Time
(ii) Speed = \(\frac { Distance }{ Time }\)
(iii) Speed = \(\frac { Time }{ Distance }\)
(iv) Speed = \(\frac { 1 }{ Distance x Time }\)
Answer:
(ii) Speed = \(\frac { Distance }{ Time }\) is correct.

Question 9.
The basic unit of speed is :
(i) km/min
(ii) m/min
(iii) km/h
(iv) m/s
Answer:
(iv) m/s

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time

Question 10.
A car moves with a speed of 40 km/h for 15 minutes and then with a speed of 60 km/h for the next 15 minutes. The total distance covered by the car is :
(i) 100 km
(ii) 25 km
(iii) 15 km
(iv) 10 km
Answer:
(ii) 25 km

Question 11.
Suppose, the two photographs shown in Fig. 13.1 and Fig. 13.2, had been taken at an interval of 10 seconds. If a distance of 100 metres is shown by 1 cm in these photographs. Calculate the speed of the blue car.
Answer:
0.1 cm/s or 10 m/s.

Question 12.
Fig. 13.16 shows the distance-time graph for the motion of two vehicles A and B. Which one of them is moving faster?
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time 2
Answer:
‘A’ car is moving faster.

Question 13.
Which of the following distance-time graphs shows a truck moving with speed which is not constant?
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time 3
Answer:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time 4

Extend Learning – Activities and Projects

Question 1.
You can make your own sundial and use it to mark the time of the day at your place. First of all find the latitude of your city with the help of an atlas. Cut out a triangular piece of a cardboard such that its one angle is equal to the latitude of your place and the angle opposite to it is a right angle. Fix this piece, called gnomon, vertically along a diameter of a circular board a shown in Fig. 13.4. One way to fix the gnomon could be to make a groove along a diameter on the circular board.

Next, select an open space, which receives sunlight for most of the day, Mark a line on the ground along the North-South direction. Place the sundial in the sun as shown in Fig. 13.4 Mark the position of the tip of the shadow of the gnomon on the circular board as early in the day as possible, say 8:00 AM. Mark the position of the tip of the shadow every hour throughout the day. Draw lines to connect each point marked by you with the centre of the base of the gnomon as shown in Fig. 13.4. Extend the lines on the circular board up to its periphery. You can use „ this sundial to read the time of the day at your place. Remember that the gnomon should always be placed in the North- South direction as shown in Fig. 13.4.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time 5
Answer:
Do it yourself.

Question 2.
Collect information about time-measuring devices that were used in the ancientitimes in different partrs of the world. Prepare a brief write up on each one of them. The write up may include the name of the device, the place of its origin, the period when it was used, the unit in which the time was measured by it and a drawing or a photograph of the device, if available.
Answer:
Do it yourself

Question 3.
Make a model of a sand clock which can measure a time interval of 2 minutes (Fig. 13.5).
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time 6
Answer:
Do it yourself

Question 4.
You can perform an interesting activity when you visit a park to ride a swing. You will require a watch. Make the swing oscillate without anyone sitting on it. Find its time period in the same way as you did for the pendulum. Make sure that there are no jerks in the motion of the swing. Ask one of your friends to sit on the swing. Push it once and let it swing naturally. Again measure its time period. Repeat the activity with different persons sitting on the swing. Compare the time period of the swing measured in different cases. What conclusions do you draw from this activity?
Answer:
Do it yourself.

HBSE 7th Class Science Motion and Time Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is motion?
Answer:
Motion is the change in the position of a body with respect to time and its surroundings.

Question 2.
What is uniform motion?
Answer:
When a body covers equal distance in equal intervals of time, the motion is called uniform motion.

Question 3.
What is speed?
Answer:
Speed is the distance covered by a body in a unit time.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time

Question 4.
Write one way in which people used to measure time in early days?
Answer:
People used to measure time with the help of Sundials.

Question 5.
What is the use of stop-watch?
Answer:
Stop-watch is used to measure exact time in case of athletic events as it can be stopped and started any moment.

Question 6.
What is a pendulum?
Answer:
A pendulum is a small non-magnetic ball like body, suspended by a light string.

Question 7.
What is a uniform motion?
Answer:
Motion of a body along a straight line covering equal distances in equal intervals of time is called a uniform motion.

Question 8.
What are the units of measuring speed?
Answer:
Speed is measured in metre per second (m/s) or kilometre per hour (km/h).

Short Answer Type Questions

Question 1.
Distinguish between uniform and non-uniform motion.
Answer:
Uniform motion is the equal distances covered in equal intervals of time. It means body moves with a constant speed. Non-uniform motion is the unequal distances covered in equal intervals of time. It means the body moves with unconstant speed.

Question 2.
How can we make a pendulum of our own? What is the time period of a pendulum?
Answer:
We can make a pendulum by susptending a metal ball with a cotton thread. The other end of the thread can be tied to some support. The time taken by a pendulum to complete its to and fro movement i.e. one oscillation is called the time period of the pendulum.

Question 3.
How can we determine the motion made by any body to be uniform or non-uniform with the help of a distance – time graph?
Answer:
If the distance – time graph obtained shows a straight line, the motion of the body is said to be uniform and if we obtain a curved line on a distance time graph that means the body is undertaking non-uniform motion. Thus a distance time graph helps in determining the uniform or non-uniform speed of the body.

Question 4.
A train is running at a speed of 50 km/h. How long will it take to cover a distance of 250 km.?
Answer:
Speed = 50 km/h
Distance = 250 km.
Time = ?
S = \(\frac { d }{ t }\)
50 = \(\frac { 250 }{ t }\)
∴ t = \(\frac { 250 }{ 50 }\) hr = 5 hr.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 13 Motion and Time

Question 5.
Shatabdi Express takes 6 hours to reach Lucknow, at a speed of 60 km/h. Find the distance it travels.
Answer:
Time = 6 hr.
Speed = 60 km/h
Distance = Speed x time
= 60 x 6 = 360 km
∴ Shatabdi travels 360 km at a speed of 60 km/h in 6 hr.

Question 6.
A car travels a distance of 200 km at the speed of 50 km/h. Calculate the time taken to cover the distance.
Answer:
Distance = 200 km
Speed = 50 km/h
Time = \(\frac { Distance }{ Speed }\) = \(\frac { 200 }{ 50 }\) = 4h
Car will take 4 h to cover the distance.

Long Answer Type Questions

Question 1.
Given below is a table showing time taken by a car to travel various distances. What do you infer from this data?

Time (S)Distance (M)
00
110
220
330
440
550

Answer:
We see that the car covers the distance of first 10 m in 1 sec. It again covers the distance of 10 m in another time of 1 sec i.e. 2-1 = 1 sec. So, we find that the car covers every 10 m in each 1 sec. It means that the car is covering equal distance in equal interval of time. When a body covers equal distance in equal intervals of time, it is said to be in a uniform motion. So, this data shows that the car is moving with a constant speed.

Question 2.
Describe various methods used to measure time in earlier times?
Answer:
There were no electronic watches in earlier times. Measuring time was a little bid difficult. The earliest method of measuring time was based on the position of the Sun. The Sundials were used for this purpose. Time was measured by the shadow casted by the changing position of the Sun from day to night. Chinese made a water clock 6000 years ago. Sand Clock was also used to measure time. Sand Clock was used by Romans. The time taken by sand to fall into the lower chamber from the upper chamber was considered to be the unit of measuring time. The discovery of pendulum helped in determining the exact time before the electronic watches were invented.

Question 3.
What is a pendulum? How does it help in determing time?
Answer:
Pendulum is a simple device which shows periodic motion. A simple pendulum consists of a non-magnetic metal ball called bob. This bob is suspended with help of a string. The open end of the string is tied to a support. Bob of the pendulum is held at a side and released. It starts moving in a to and fro motion. This is called an oscillatory motion. The time taken by the pendulum to complete one oscillation is called time period. This time period is always same with a pendulum having same length. Time period changes with the change in the length of the string. The string of the pendulum is adjusted to the length, that it completes one oscillation in second and it keeps on moving the clock giving us time.

Motion and Time Class 7 HBSE Notes

  • Motion is the change in the position of an object with respect to its surroundings.
  • Motion can be of many types. It can be along a straight line, circular, oscillatory.
  • Motion can be uniform or non-uniform motion.
  • Uniform motion means equal distance covered in equal intervals of time. It means a constant motion.
  • Non-uniform motion means unequal distance covered in equal intervals of time.
  • Distance moved by an object in unit time is called its speed.
  • Basic unit of measuring speed is (m/s) meter / second.
  • Time is measured in respect to the periodic motions.
  • Pendulum was the first device to measure time exactly.
  • In earlier days time Was measured by various objects like sundials, sand clocks, water clocks, etc.
  • With the discovery of pendulum, devices to measure exact time were invented.
  • Now-a-days various devices like stop-watch and other electronic devices are used to measure time intervals smaller than even a second.
  • Distance time graph gives us the an idea about the motion of the object. Straight line obtained on this graph depicts constant motion, while non-constant motion is depicted by various shapes on the graph.

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HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Exercise 3.4

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समीकरणों के युग्म को विलोपन विधि तथा प्रतिस्थापना विधि से हल कीजिए। कौन-सी विधि अधिक उपयुक्त है?
(i) x +y = 5 और 2x – 3y =4
(ii) 3x + 4y = 10 और 2x – 2y = 2
(iii) 3x – 5y – 4 = 0 और 9x = 2y + 7
(iv) \(\frac{x}{2}+\frac{2 y}{3}\) = -1 और x – \(\frac{y}{3}\) = 3
हल :
(i) यहाँ पर
x + y = 5 …………(i)
2x – 3y = 4 ………….(ii)

विलोपन विधि से हल
समीकरण (i) को 3 से गुणा करके समीकरण (ii) में जोड़ने पर प्राप्त होगा,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 1

प्रतिस्थापन विधि से हल

समीकरण (i) से x = 5-y को समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
2 (5-7)-3y = 4
या10 – 2y – 3y = 4
-5y = 4 – 10
या y = \(\frac{-6}{-5}=\frac{6}{5}\)
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
x + \(\frac{6}{5}\) = 5
x = 5 – \(\frac{6}{5}=\frac{25-6}{5}=\frac{19}{5}\)
अतः अभीष्ट हल x = \(\frac{19}{5}\) y = \(\frac{6}{5}\)
दोनों ही विधियाँ उपयुक्त हैं।

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4

(ii) यहाँ पर
3x + 4y = 10 ………..(i)
2x-2y = 2 …………..(ii)

विलोपन विधि से हल
समीकरण (ii) को 2 से गुणा करके समीकरण (i) में जोड़ने पर प्राप्त होगा,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 2
या x = \(\frac{14}{7}\) = 2
‘x का मान समीकरण (i) में रखने पर,
3(2) +4y = 10
या 4y = 10-6
या y = 4/4 = 1
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y = 1

प्रतिस्थापन विधि से हल
समीकरण (i) से x = \(\frac{10-4 y}{3}\)
x = \(\frac{10-4 y}{3}\) का मान समीकरण (ii) में रखने पर,
2 (\(\frac{10-4 y}{3}\)) -29 – 2
या 2 (10 -4y)- 6y = 6 (दोनों ओर 3 से गुणा करने पर)
या 20 – 8y – 6y = 6
या – 14y = 6 – 20
या y = -14/-14 = 1
y का मान समीकरण (1) में प्रतिस्थापित करने पर,
3x +4 (1) = 10
या 3x = 10 – 4
या x = \(\frac{6}{3}\) = 2
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y = 1
दोनों ही विधियाँ उपयुक्त हैं।

(iii) यहाँ पर
3x – 5y – 4 = 0
या 3x – 5y = 4 ………….(i)
9x = 2y+7
या 9x – 2y = 7 …………(ii)

विलोपन विधि से हल

समीकरण (i) को 3 से गुणा करके उसमें से समीकरण (ii) घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 3
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 4

प्रतिस्थापन विधि से हल
समीकरण (i) से x = \(\frac{4+5 y}{3}\)
x = \(\frac{4+5 y}{3}\) का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
9 (\(\frac{4+5 y}{3}\)) – 2y = 7
3 (4 + 5y) – 2y = 7
12 + 15y – 2y = 7
13y = 7 – 12
y = \(\frac{-5}{13}\)
y का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 5
अतः अभीष्ट हल x = \(\frac{9}{13}\) व y = \(\frac{-5}{13}\)
दोनों ही विधियाँ उपयुक्त हैं।

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4

(iv) यहाँ पर
\(\frac{x}{2}+\frac{2 y}{3}\) = -1
या 3x +4y = – 6 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर) …………..(i)
तथा x – \(\frac{y}{3}\) = 3
3x – y = 9 (दोनों ओर 3 से गुणा करने पर)

विलोपन विधि से हल

क्योंकि समीकरण (i) व (ii) में x के गुणांक समान हैं इसलिए समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 6
या y = \(\frac{-15}{5}\) = -3
y का मान समीकरण (i) में रखने पर,
3x +4(- 3) = -6
या 3x= -6 + 12
या x = 6/3 = 2
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y = – 3

प्रतिस्थापन विधि से हल
समीकरण (ii) से x = \(\frac{9+y}{3}\)
x = \(\frac{9+y}{3}\) को समीकरण (1) में प्रतिस्थापित करने पर,
3(\(\frac{9+y}{3}\)) +4y = – 6
9 + y + 4y = -6
5y = -6-9
y = \(\frac{-15}{5}\) =-3
y का मान समीकरण (1) में प्रतिस्थापित करने पर,
3x +4 (-3) = -6
3x = -6+ 12.
x = \(\frac{6}{3}\) = 2
अतः अभीष्ट हल x = 2 व y = -3
दोनों ही विधियाँ उपयुक्त हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित समस्याओं में रैखिक समीकरणों के युग्म बनाइए और उनके हल (यदि उनका अस्तित्व हो) विलोपन विधि से ज्ञात कीजिए-
(i) यदि हम अंश में 1 जोड़ दें तथा हर में से 1 घटा दें, तो भिन्न 1 में बदल जाती है। यदि हर में 1 जोड़ दें, तो यह 1/2 हो जाती है। वह भिन्न क्या है?
(ii) पाँच वर्ष पूर्व नूरी की आयु सोनू की आयु की तीन गुनी थी। दस वर्ष पश्चात्, नूरी की आयु सोनू की आयु की दो गुनी हो जाएगी। नूरी और सोनू की आयु कितनी है?
(iii) दो अंकों की संख्या के अंकों का योग 9 है। इस संख्या का नौ गुना, संख्या के अंकों को पलटने से बनी संख्या का दो गुना है। वह संख्या ज्ञात कीजिए।
(iv) मीना 2000 रु० निकालने के लिए एक बैंक गई। उसने खजाँची से 50 रु० तथा 100 रु० के नोट देने के लिए कहा। मीना ने कुल 25 नोट प्राप्त किए। ज्ञात कीजिए कि उसने 50 रु० और 100 रु० के कितने-कितने नोट प्राप्त किए?
(v) किराए पर पुस्तकें देने वाले किसी पुस्तकालय का प्रथम तीन दिनों का एक नियत किराया है तथा उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त दिन का अलग किराया है। सरिता ने सात दिनों तक एक पुस्तक रखने के लिए 27 रु० अदा किए, जबकि सूसी ने एक पुस्तक पाँच दिनों तक रखने के 21 रु० अदा किए। नियत किराया तथा प्रत्येक अतिरिक्त दिन का किराया ज्ञात कीजिए।
हल :
(i), यहाँ पर
माना भिन्न = \(\frac{x}{y}\),
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण होगी, \(\frac{x+1}{y-1}\) = 1
x +1 = y-1
x – y = -1 – 1
x – y = -2 …………..(i)
\(\frac{x}{y+1}=\frac{1}{2}\)
या 2x = y +1
2x -y = 1 …….(ii)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 7
या x = 3
x का मान समीकरण (i) में रखने पर,
3-y = – 2
या -y = -2 – 3
या -y = -5
या y = 5
अतः अभीष्ट भिन्न = \(\frac{3}{5}\)

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4

(ii) यहाँ पर
माना नूरी की वर्तमान आयु = x वर्ष
व सोनू की वर्तमान आयु = y वर्ष
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण होगी, x-5 = 3 (y-5)
x-5 = 3y- 15
या x – 3y = – 15 +5
या 3y = – 10
तथा x+ 10 = 2 (y + 10)
या x + 10 = 2y + 20
या x – 2y = 20 – 10
या x – 2y = 10
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 8
या y = 20
y का मान समीकरण (i) में रखने पर,
x – 3 (20) = – 10
x = – 10 + 60
x = 50
अतः नूरी की वर्तमान आयु = 50 वर्ष
व सोनू की वर्तमान आयु = 20 वर्ष

(iii) यहाँ पर
माना दो अंकों की संख्या की इकाई का अंक = x
व दो अंकों की संख्या की दहाई का अंक = y
संख्या = x + 10y
अंक पलटने पर प्राप्त संख्या = 10x +y
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण होगी, xy = 9
तथा 9 (x + 10y) = 2 (10x + y)
या 9x + 90y = 20x +2y
या 20x – 9x +2y – 90y = 0
या 11x – 88y = 0
या x – 8y = 0 (दोनों ओर 11 से भाग करने पर)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 9
या y = 9/9
y = 1
y का मान समीकरण (i) में रखने पर,
x + 1 = 9
x = 9-1 = 8
अतः अभीष्ट संख्या = x + 10y = 8 + 10 (1) = 18

(iv) यहाँ पर
माना 50 रु० वाले नोटों की संख्या = x
व 100 रु० वाले नोटों की संख्या = y
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण होगी x + y = 25
व 50x + 100y = 2000
या x + 2y = 40 (दोनों ओर 50 से भाग देने पर)
समीकरण (ii) को समीकरण (i) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 10
या y = 15
y का मान समीकरण (i) में रखने पर,
x+ 15 = 25
x = 25 – 15 = 10
अतः 50 रु० वाले नोटों की संख्या = 10
व 100 रु० वाले नोटों की संख्या = 15

(v) यहाँ पर
माना पुस्तक का प्रथम 3 दिन का नियत किराया = x रु०
व पुस्तक का प्रत्येक अतिरिक्त दिन का किराया = y रु०
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण होगी, x +4y = 27 (सरिता के लिए) ………….(i)
व x + 2y = 21(सूसी के लिए) ……………(ii)
समीकरण (ii) को समीकरण (1) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.4 11
2y = 6
y = 6/2
y = 3
y का मान समीकरण (i) में रखने पर,
x +4 (3) = 27 या
या x = 27-12 = 15
x = 15
अतः पुस्तक का प्रथम 3 दिन का नियत किराया = 15 रु०
पुस्तक का प्रत्येक अतिरिक्त दिन का किराया = 3 रु०

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HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Haryana State Board HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

HBSE 8th Class Science Pollution of Air and Water Textbook Questions and Answers

Question 1.
What are the different ways in which water gets contaminated?
Answer:
Water gets contaminated by following ways:

  • Water gets contaminated when sewage is disposed off in rivers.
  • Chemicals which are harmful and poisonous are thrown in water resources by various industrial units.
  • Harmful chemicals used in agricultural process gets mixed with ground water making it unfit for consumption.
  • Breeding of microorganisms in water make water polluted.

Question 2.
At an individual level, how can you help reduce air pollution?
Answer:
We can plant tree to reduce the level of carbon dioxide. We can get our vehicles serviced well to reduce uncomplete consumption of fuels. We can also reduce air pollution by saying no to crackers during Diwali celebrations.

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Question 3.
Clear, transparent water is always fit for drinking. Comment.
Answer:
Water which is clear and through which we can see is fit for consumption because this type of water is free from pollutants. Transparent water means no microorganisms and no dust particles.

Question 4.
You are a member of the municipal body of your town.
Make a list of measures that would help your town to ensure the supply of clean water to all its residents.
Answer:

  • To get clean water in every household, it is necessary that water reaching houses should be treated water. Water is treated in sewage plants, to make it free from physical, chemical and biological impurities.
  • Strict laws should be enforced on industrial units, which dispose polluted water in water resources.
  • Open defecation in water resources by slum dwellers should be strictly prohibited.
  • Chlorine tablets should be distributed for purification of water during rainy season.
  • People should be made aware and motivated to keep water resources clean.

Question 5.
Explain the differences between pure air and polluted air.
Answer:
Pure air is free from harmful gases which can be poisonous in nature. Pure air has balanced quantity of all its constituent gases and it is free from other germs. This type of air is fit for breathing. On the other hand polluted air has poisonous gases and other suspended impurities like dust and smoke. It is unfit for consumption.

Question 6.
Explain circumstances leading to acid rain. How does acid rain affect us?
Answer:
Acid rain is caused due to mixing of poisonous gases with rain. When our industrial units emit poisonous gases like sulphur dioxide and nitrogen dioxide, these gases react with moisture present in air and form nitric acid and sulphuric acid. These acids fall on the earth with rain making rain water acidic and harmful.

Acid rain causes the corrosion of buildings and make food grains, fruits and vegetables on which it fall, unfit for consumption.

Question 7.
Which of the following is not a greenhouse gas?
(a) Carbon dioxide
(b) Sulphur dioxide
(c) Methane
(d) Nitrogen
Answer:
Sulphur dioxide.

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Question 8.
Describe the ‘Green House Effect’ in your own words.
Answer:
Green house effect means warming the environment. When the rays of sun reach earth, some of the heat is absorbed by the earth. Rest of it is reflected back by the earth. Some of the heat is trapped by the environment of the earth. This causes warming of the environment, which is necessary for the sustaining life. This trapping of the heat is called green house effect.

Question 9.
Prepare a brief speech on global warming. You have to deliver the speech in your class.
Answer:
Continuous increase in the temperature of the earth is called global warming. It it caused by the pollution of air, excessive heat trapped by the green house gases, because the amount of green house gases has increased in the environment. Global warming is a threating phenomenon because we may have to face dire consequences due to Global warming.

Question 10.
Describe the threat to the beauty of the Taj Mahal.
Answer:
Increasing air pollution has posed a threat to the beauty of the Taj Mahal. Excessive poisonous gases and smoke has started to discolour the white marble of the Taj Mahal. Acid rains due to increasing air pollution has started to corrode the marble, thus making Taj Mahal loose its beauty.

Question 11.
Why does the increased level of nutrients in the water affect the survival of aquatic organisms?
Answer:
Addition of nutrients in water flourishes the growth of microorganisms like algae. When these microorganisms die, they become food of bacteria. When bacteria become active, they consume a lot of oxygen present in water. Decrease in oxygen in water, becomes trouble for other aquatic animals and they start dying due to insufficient amount of oxygen to breath.

Extended Learning – Activities and Projects

Question 1.
In some cities, a pollution check has been made compulsory for vehicles. Visit a petrol pump in order to learn about the process of conducting a pollution check. You may systematically record your findings in the following areas:
(i) Average number of vehicles checked per month.
(ii) Time taken to check each vehicle.
(iii) Pollutants checked for.
(iv) The process of testing.
(v) Permissible levels of emission of various gases.
(vi) Measures taken if the emitted gases are above the permissible limits.
(vii) How frequently is a pollution check required?
Answer:
For self attempt.

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Question 2.
Conduct a survey in your school to investigate various environment related activities that have been undertaken. The class can divide itself into two groups, with each group looking at a different area. For example, one group can find out whether there is an environment club in the school. What are its objectives? What is its calendar of events? How can you become a member?
If your school does not have such a club, you can even think of starting one along with a few of your friends.
Answer:
For self attempt.

Question 3.
Organise a field visit to a river in or around your town with the help of your teachers. Observations followed by discussion could focus on:
(i) The history of the river.
(ii) Cultural traditions.
(iii) Role of the river in meeting the town’s water needs.
(iv) Pollution concerns.
(v) Sources of pollution.
(vi) Effects of pollution on the people living by the riverside as well as those living far away.
Answer:
For self attempt.

Question 4.
Find out with the help of your teachers and the internet (if possible), whether there are any international agreements to control global warming. Which are the gases covered under these agreements?
(i) www.edugreen.teri.res.in/explore/air/ air.htm
(ii) www.edugreen.teri.res.in/explore/water/ pollu.htm
(iii) www.cpcb.nic.in/citizen’s%Charter/ default_citizen’s.html
(iv) coe.mse.ac.in/kidswater.asp
(v) coe.mse.ac.in/kidsair.asp
Answer:
For self attempt.

HBSE 7th Class Science Pollution of Air and Water Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is a pollutant?
Answer:
Pollutant is an undesired and harmful substance.

Question 2.
What is air pollution?
Answer:
Addition of pollutants to air is called air pollution.

Question 3.
Name any two air pollutants.
Answer:
Smoke and sulphur dioxide.

Question 4.
Name any two natural pollutants.
Answer:
Forest fire and erruption in volcanoes.

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Question 5.
What is smog?
Answer:
Mixture of smoke and moisture is called smog.

Question 6.
Name two chemicals causing acid rains.
Answer:
Sulphur dioxide and nitrogen dioxide.

Question 7.
Which gas is responsible for depletion of ozone layer?
Answer:
Chlorofluorocarbon.

Question 8.
Where CFC is used?
Answer:
CFC is used for refrigeration.

Question 9.
What effect does acid rain has on building?
Answer:
It corrodes the buildings.

Question 10.
Name any two green house gases.
Answer:
Methane and carbon dioxide.

Question 11.
Which phenomenon causes global warming?
Answer:
Green house effect.

Question 12.
Write any one harmful effect of global warming.
Answer:
It can cause flood by melting glaciers.

Question 13.
Which is the main constituent gas of air?
Answer:
Nitrogen about 78%.

Question 14.
What is the percentage of oxygen in air?
Answer:
21%.

Question 15.
Which industry is the main source of gaseous pollutants like sulphur dioxide and nitrogen dioxide?
Answer:
Petroleum refineries.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 16.
From what does the ozone layer – protect us?
Answer:
Ozone layer protects us from ultraviolet rays of sun.

Question 17.
What reduces the visibility in air?
Answer:
Small suspended particles emitted by automobiles using diesel as fuel.

Question 18.
Which refinery is producing pollutants near the Taj Mahal?
Answer:
Mathura oil refinery.

Question 19.
What is Marble cancer?
Answer:
Corrosion of marble due to acid rain is called marble cancer.

Question 20.
Which fuel is being used as the pollution free fuel?
Answer:
CNG and LPG.

Question 21.
What is trapping of radiations of sun by the atmosphere of the earth, called?
Answer:
Green house effect.

Question 22.
Which gas is mainly the green house gas?
Answer:
Carbon dioxide.

Question 23.
Which substances pollute water?
Answer:
Sewage, toxic chemicals, silt etc.

Question 24.
Name the Indian river which is considered as one of the ten most polluted rivers in world?
Answer:
Ganga.

Question 25.
What pollutes Ganga?
Answer:
Untreated sewage, dead bodies, garbage etc.

Question 26.
What is the plan, implemented to save Ganga, called?
Answer:
Ganga Action Plan.

Question 27.
Which chemicals released in water leads to toxicity in animals and plants?
Answer:
Arsenic, lead and fluorides.

Question 28.
What do you mean by potable water?
Answer:
Water which is suitable for drinking is called potable water.

Question 29.
Which chemical is used to purify water?
Answer:
Chlorine.

Question 30.
Which physical qualities should we look for in drinking water?
Answer:
Clearness, transparency and odour.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Short Answer Type Questions

Question 1.
Describe what is pollution.
Answer:
Pollution can be described as addition of unwanted and undesired harmful substances in any natural resource. Addition of these substances spoil the natural resources and make them unfit for consumption by men and other living beings. Air pollution, water pollution, soil pollution etc. are various types of pollutions.

Question 2.
Describe air pollution.
Answer:
Addition of poisonous and harmful substances in air is called air pollution. Air gets polluted when poisonous gases like sulphur dioxide, nitrogen dioxide and other oxides of nitrate get mixed up in air. It is also polluted by smoke emitted by industries using coal and also the smoke emitted by vehicles.

Question 3.
Write any three causes of air pollution.
Answer:
Following are various causes of air pollution:

  • Smoke emitted due to fires in forests.
  • Poisonous gases expelled the various industries.
  • Poisonous gases emitted by vehicles using petroleum fuels.

Question 4.
What is smog? How is it produced?
Answer:
In winters, we can see a fog like dark layer in the mornings and nights. It reduces the visibility. This is called smog. Smog means fog plus smoke. It is formed due to combination of oxides of mitrates with fog. Various vehicles and industries produce smoke and the nitrates. Thus smog is formed.

Question 5.
What is ozone? How is it helpful for our environment?
Answer:
Ozone is a gas which is very helpful for environment of our earth. It forms a protective layer around the atmosphere of earth. It does not allow the ultraviolet rays of the sun from reaching the earth. U.V. rays can cause great damage to our earth. So, ozone is of great help for our earth.

Question 6.
What is ozone hole or depletion of ozone layer?
Answer:
A gas named ozone forms a protective layer around the atmosphere of the earth. It protects the earth from the ultra-violet rays of the sun. But some chemicals used in refrigeration causes damage to this layer. CFCs cause tearing away of this layer. This is called depletion of ozone layer. At some points, this layer is depleted completely and holes are created. These holes are called ozone holes.

Question 7.
What are the harmful effects of air pollution?
Answer:
Air pollution cause many diseases in human beings. Respiratory diseases are commonly caused by air pollution. It causes harm to our building and monuments. It reduces visibility as smog and causes many serious accidents.

Question 8.
How is acid rain caused?
Answer:
When rain water becomes acidic in nature, it is called the acid rain. Different industries produce pollutants like sulphur dioxide and nitrogen dioxide. These gases react with moisture and produce sulphuric acid and nitric acid. These acids fall on earth along with rain and this is called acidic rain.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Question 9.
What steps has. Honourable Supreme Court taken to save the Taj Mahal from air pollution?
Answer:
The Supreme Court has given orders that cleaner fuel be used in the near about areas of the Taj Mahal. Fuels like CNG and LPG are considered clean fuel. Moreover petrol should be free from lead. This is called unleaded petrol. Only unleaded petrol can be used in areas near the Taj Mahal.

Question 10.
What is the Green House effect?
Answer:
The sun sends its rays to the earth. Some of these rays are absorbed by the earth and some radiations are reflected back by the earth. Thes reflected radiations are not allowed to leave earth’s atmosphere completely. Some of these radiations are trapped by the earth’s atmosphere and this is called the green house effect.

Question 11.
What is global warming? How is it caused?
Answer:
Increasing temperature of the earth is called global warming. The radiation of the sun, reaching the earth is not being consumed. This is due to the deforestation. The level of CO2 has increased and thus global warming has also increased. CO2 is absorbed by the plants for photosynthesis. So reduced number of plants increases the amount of carbon dioxide in the environment, this causes accumulation of carbondioxide and increases temperature.

Question 12.
How does water get polluted?
Answer:
Water gets polluted when unwanted and harmful chemical substances are added to the water. Untreated sewer and garbage is also added to water resources to pollute water. All these chemicals make water unfit for usage.

Long Answer Type Questions

Question 1.
What is air pollution? How is it caused?
Answer:
When poisonous gases, dirt and smoke get added in the water it pollutes the air and it is called air pollution. Following factors are responsible for air pollution.
(i) Industrial Emissions : Various dangerous and poisonous gases emitted by different industries cause air pollution. Industries using coal and other petroleum products as fuel emit poisonous gases like sulphur dioxide and nitrogen dioxide. These gases further react with moisture present in environment and form their respective acids. These acids along with rain water cause acid rains.

(ii) Vehicles : Unburnt carbon particles emitted by vehicles due to incomplete combustion cause severe air pollution. It contains gases like carbodioxide and carbon monoxide which is highly poisonous. Unburnt carbon particles emitted as smoke also cause phenomenon like smog which reduce visibility besides causing air pollution.

(iii) Natural Pollutant: Natural pollutants like forest fire, volcanic erruption, dust storms etc. also cause air pollution to some extent.

(iv) Other activities of Man : Besides above described causes many other human activities also add to air pollution. Using fuels like cow dung, coal, wood etc. at home for domestic use also pollute the air. Agricultural practices like burning chaff after cultivation etc. also pollute the air. A lot of air pollution is caused due to burning of crackers on Diwali and other celebrations.

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Question 2.
How is water pollution caused?
Answer:
Water pollution is caused by many factors. These pollutants are described below :
(i) Industrial discharges: Various harmful and poisonous chemicals are discharged by various industries directly into water bodies. These chemicals when added in water, spoil it and render it unfit for consumption by living beings.

(ii) Domestic discharges : Sewage from homes are collected and disposed off in rivers nearby. This untreated sewage is one of the prominent causes of water, pollution.

(iii) Religious Rituals : Various religious rituals of different religions also add to certain extent to the water pollution.
Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water 1
Dispersion of dead bodies or remains of dead bodies in rivers is causing pollution of water. Various other materials are also dispersed in water after performing some rituals. These also make water dirty.

(iv) Other Human activities : Apart from above cited reasons, water is also polluted due to certain other human activities. People wash their clothes on banks of rivers. They take their livestock to rivers for their bathing. They throw their wastage in water bodies and sometimes defecate in open at the banks of rivers. This makes water polluted and unfit for human consumption.

Question 3.
What measures should be taken to control air pollution and water pollution?
Answer:
Air pollution and water pollution are causing a great threat for the human civilization. We should seriously work to control them. Following measures can help us in controlling air and water pollution :
(i) All industrial units should use cleaner fuels and should not release their harmful 4 emission directly into air or water.

(ii) All industrial units throwing their harmful waste products in water, should install treatment or purification plants in their premises so that only treated and purified waste should be released in water bodies.

(iii) All the sewages of cities and villages should treated to destroy harmful physical, chemical and biological impurities before releasing it in water resources.

(iv) All vehicles should use pollution free fuels like CNG, LPG and unleaded petrol. Vehicles should be serviced well to avoid incomplete combustion of fuel.

(v) Smokeless fuels should be provided for domestic usage.

(vi) Electrical crematoriums should be made in all cities as well as in villages.

Question 4.
What are the various harmful effects of air and water pollution?
Answer:
(i) Air and water pollution are both dangerous for human health. They cause various diseases, which are the result of harmful emissions and discharges in air and water. Water brone diseases like Cholera, Typhoid, Infections, etc. are caused. Air pollution causes various respiratory diseases like asthma, allergies and lung cancer etc.

(ii) These pollutions also cause troubles for animals. Water pollution destroy the aquatic life as it causes deficiency of oxygen in water causing death of aquatic animals.

(iii) Various environmental problems like global warming are result of air pollution. Due to increase in level of carbon dioxide, the radiations of sun are not allowed to leave our environment. They get trapped in our environment and temperature of earth gets increased. This is called global warming.

(iv) Fresh and consumable water is getting reduced day by day as water resources are getting polluted very rapidly.

(v) Phenomena like smog, marble-cancer etc. are causing threat to our property and life.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 18 Pollution of Air and Water

Pollution of Air and Water Class 8 HBSE Notes

  • Addition of unwanted and poisonous substances in air or water is called their respective pollutions.
  • Air and water pollution has increased in recent past with industrialization and urbanization.
  • Air is a mixture of gases mainly the nitrogen, oxygen and carbon dioxide when any of the harmful gases increase in its percentage, it makes the air polluted.
  • Emission of smoke in industries, smoke due to forest fires and smoke emitted by vehicles pollutes the air.
  • Smoke, dust of harmful gases emitted during volcanic erruptions, or forest fires or due to dust storms etc. are called the natural air pollutents.
  • Unburnt fuel of the vehicles is one of main cause of air pollution.
  • Air pollution can give rise to different ailments in human beings. Oxides of nitrogen can cause asthma, cough and wheezing. It can even cause cancer of lungs.
  • Pollutants like sulphur dioxide, nitrogen oxide are emitted by industries.
  • Gases used in refregeration also cause depletion of ozone layer, which cause further environmental problems like global warming.
  • Non-living objects are also effected by air pollution. Discolouring of white marble of Taj Mahal is ah example.
  • Deforestation is one of the main cause of air pollution because less amount of carbon dioxide is absorbed by the plants and its amount increases in atmosphere resulting in global warming.
  • Addition of undesirable substances like sewage, harmful chemicals etc. to the water cause water pollution.
    Polluted water becomes unfit for consumption.
  • Water is purified before consuming it.

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HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 6 उषा

Haryana State Board HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 6 उषा Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 6 उषा

HBSE 12th Class Hindi उषा Textbook Questions and Answers

कविता के साथ

प्रश्न 1.
कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि ‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील शब्दचित्र है?
उत्तर:
कविता में वर्णित राख से लीपा हुआ चौका, काली सिल, स्लेट पर लाल खड़िया चाक आदि उपमानों से यह पता चलता है कि कवि ने गाँव के परिवेश को आधार बनाकर उषाकालीन प्रकृति का सुंदर चित्रण किया है। महानगरों में कहीं भी न तो लीपा हुआ चौका देखा जा सकता है, न ही स्लेट और न ही खड़िया चाक। ये सभी शब्द-चित्र गाँव से संबंधित हैं। गाँव के प्रत्येक घर में प्रातःकाल होने के बाद पहले चौका लीपा जाता है। तत्पश्चात् सिल का प्रयोग होता है फिर कुछ देर बाद बालक को स्लेट पट्टी दी जाती है। अतः यहाँ कवि ने ग्रामीण जन-जीवन के गतिशील चित्र अंकित किए हैं। इससे पता चलता है कि ये तीनों शब्दचित्र स्थिर न होकर गतिशील हैं क्योंकि एक क्रिया के समाप्त होने के बाद दूसरी क्रिया का आरंभ होता है।

प्रश्न 2.
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
नई कविता में कोष्ठक, विराम चिह्नों और पंक्तियों के बीच का स्थान भी कविता को अर्थ देता है। उपर्युक्त पंक्तियों में कोष्ठक से कविता में क्या विशेष अर्थ पैदा हुआ है? समझाइए।
उत्तर:
नई कविता अपने प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कवि ने भाषा शिल्प के स्तर पर नए प्रयोग करके अर्थ की अभिव्यक्ति की है। सर्वप्रथम कवि ने कोष्ठक में ‘अभी गीला पड़ा है’ पंक्ति का प्रयोग किया है जो कि अतिरिक्त ज्ञान की सूचक है। यह पंक्ति आकाश रूपी चौके की ताज़गी और नमी को सूचित करती है। यह जानकारी पहले भी दी जा चुकी है। राख से लीपा हुआ चौका अपने आप में गीलेपन को सूचित करता है परंतु अतिरिक्त जानकारी के लिए कवि ने कोष्ठक का प्रयोग किया है जोकि गीलेपन को पूर्णतः स्पष्ट करता है।

अपनी रचना

अपने परिवेश के उपमानों का प्रयोग करते हुए सूर्योदय और सूर्यास्त का शब्दचित्र खींचिए।
उत्तर:
प्रातःकालीन सूर्योदय हो रहा है जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानों वह नीले सरोवर में स्नान करके बाहर निकला है। सूर्य लाल रंग का पक्षी है जो नीले आकाश के तारों को चुगकर खा जाता है और ओस कणों से अपनी प्यास बुझाता है। धीरे-धीरे यह सूर्य आकाश के मध्य विराजमान हो जाता है तथा अपने प्रकाश द्वारा संपूर्ण संसार को प्रकाशमान कर देता है। परंतु धीरे-धीरे यह सूर्य पर्वतों के शिखरों, वृक्षों, भवनों को पार करता हुआ पश्चिम दिशा की ओर अग्रसर होता है। लगता है कि सूर्य एक थका हुआ मुसाफिर है जो दिन भर यात्रा करने के बाद थक गया है तथा थकान के कारण उसका चेहरा लाल रंग का हो गया है। विश्राम करने के लिए वह पश्चिम दिशा रूपी गुफा में प्रवेश करने लगता है। उसकी गति मंद हो जाती है। अन्ततः वह अपनी थकान को दूर करने के लिए विश्राम करने लगता है तथा दूसरी ओर सूर्यास्त के बाद अँधेरा संसार को अपनी आगोश में ले लेता है।

HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 6 उषा

आपसदारी

सूर्योदय का वर्णन लगभग सभी बड़े कवियों ने किया है। प्रसाद की कविता ‘बीती विभावरी जाग री’ और अज्ञेय की ‘बावरा अहेरी’ की पंक्तियाँ आगे बॉक्स में दी जा रही हैं। ‘उषा’ कविता के समानांतर इन कविताओं को पढ़ते हुए नीचे दिए गए बिंदुओं पर तीनों कविताओं का विश्लेषण कीजिए और यह भी बताइए कि कौन-सी कविता आपको ज्यादा अच्छी लगी और क्यों ?
→ उपमान
→ शब्दचयन
→ परिवेश
बीती विभावरी जाग री!
अंबर पनघट में डुबो रही-
तारा-घट ऊषा नागरी।
खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा,
किसलय का अंचल डोल रहा,
लो यह लतिका भी भर लाई-
मधु मुकुल नवल रस गागरी।
अधरों में राग अमंद पिए,
अलकों में मलयज बंद किए
तू अब तक सोई है आली आँखों में भरे विहाग री। -जयशंकर प्रसाद
उत्तर:
उपमान-“अंबर पनघट में डुबो रही
तारा-घट ऊषा नागरी।”
यहाँ कवि ने आकाश को ‘पनघट’, तारों को ‘घट’ (घड़ा) तथा ऊषा को ‘नागरी’ कहा है।

शब्दचयन-यहाँ कवि ने शृंगारिक शब्दों का सुंदर प्रयोग किया है। प्रस्तुत गीत की शब्दावली पाठक के मन में प्रेम के संयोग और वियोग दोनों पक्षों को उभारती है। शब्दचयन बड़ा ही सटीक तथा भावाभिव्यक्ति में सहायक है। कविता को एक बार पढ़कर पुनः पढ़ने का मन करता है।

परिवेश-कविता पढ़कर ऐसा लगता है कि मानो किसी सुंदर उपवन में बैठकर कवि गीत लिख रहा है, वहीं पर सुंदर युवती सोई हुई है जिसे जगाने के लिए कवि प्रकृति को आधार बनाता है।
भोर का बावरा अहेरी
पहले बिछाता है आलोक की
लाल-लाल कनियाँ
पर जब खींचता है जाल को
बाँध लेता है सभी को साथः
छोटी-छोटी चिड़ियाँ, मँझोले परेवे, बड़े-बड़े पंखी
डैनों वाले डील वाले डौल के बेडौल
उड़ते जहाज़,
कलस-तिसूल वाले मंदिर-शिखर से ले
तारघर की नाटी मोटी चिपटी गोल धुस्सों वाली उपयोग-सुंदरी
बेपनाह काया कोः
गोधूली की धूल को, मोटरों के धुएँ को भी
पार्क के किनारे पुष्पिताग्र कर्णिकार की आलोक-खची तन्चि रूप-रेखा को
और दूर कचरा जलानेवाली कल की उदंड चिमनियों को, जो
धुआँ यों उगलती हैं मानो उसी मात्र से अहेरी को हरा देंगी। -सच्चिदानन्द हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
उत्तर:
उपमान बावरा अहेरी, चिड़ियाँ जाल, मंझोले परेवे, उड़ते जहाज़, उदंड चिमनियाँ आदि सर्वथा नवीन उपमान हैं।

शब्दचयन-यहाँ कवि ने सटीक तथा भावानुकूल शब्दों का चयन किया है जिससे कविता बड़ी सजीव बन पड़ी है। कविता का प्रत्येक शब्द बड़ा ही गतिशील एवं सक्रिय दिखाई देता है।

परिवेश-यह कविता नगरीय परिवेश का चित्रण करती है और सूर्य की किरणों द्वारा नगर पर फैलने का यथार्थ वर्णन करती है। दोनों कविताओं में से मुझे “बीती विभावरी जाग री” कविता अच्छी लगी है क्योंकि यह कविता महानगरों से दूर किसी ग्रामीण आँचल का सुंदर वर्णन करती है। इस कविता का प्रकृति वर्णन बहुत ही स्वाभाविक बन पड़ा है परंतु ‘बावरा अहेरी’ कविता शहरी जन-जीवन के धूल और धुएँ से ढकी हुई है। इसलिए यह कविता मुझे अच्छी नहीं लगती।

HBSE 12th Class Hindi उषा Important Questions and Answers

सराहना संबंधी प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
“प्रात नभ या बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)”
उत्तर:

  1. यहाँ कवि ने प्रातःकालीन प्रकृति का बहुत ही सूक्ष्म चित्रण किया है जिसमें सुंदर तथा नवीन उपमानों का प्रयोग किया है।
  2. ‘शंख जैसे’, ‘राख ………………. पड़ा है। दोनों में उपमा अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  3. इस पद्यांश में मौलिक कल्पना के साथ-साथ नवीन उपमानों का प्रयोग किया गया है।
  4. (अभी गीला पड़ा है) पंक्ति कोष्ठक में रखी गई है जो कि आकाश रूपी चौके की नमी तथा ताज़गी को सूचित करती है।
  5. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग किया गया है।
  6. शब्द-चयन सर्वथा उचित एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  7. मुक्त छंद का सफल प्रयोग हुआ है।

2. “नील जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।”
उत्तर:

  1. इस पद्यांश में कवि ने सूर्योदय की बेला में क्षण-क्षण परिवर्तित प्रकृति का सूक्ष्म चित्रण किया है।
  2. ‘नीला जल’ नीले आकाश को सांकेतिक करता है और ‘गौर झिलमिल देह’ उगते हुए सूर्य के प्रकाश की ओर संकेत करती है।
  3. ‘नील जल’ में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  4. ‘नील जल ……………. हिल रही हो’ में उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  5. यहाँ नीले जल में झिलमिलाती गोरी देह उगते हुए सूर्य की द्योतक है।
  6. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग हुआ है।
  7. शब्द-चयन सर्वथा उचित एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  8. मुक्त छंद का सफल प्रयोग हुआ है।

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3. “बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक
मल दी हो किसी ने”
उत्तर:

  1. इसमें कवि ने नीले नभ से उदित होते हुए सूर्य के सौंदर्य का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है।
  2. ‘बहुत काली सिल ……………. गई हो’ तथा ‘स्लेट पर …………… किसी ने’ में उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  3. ‘काली सिल’ में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  4. लाल केसर से धुली काली सिल, भोर कालीन गीले वातावरण में सूर्योदय की लालिमा का द्योतन करती है।
  5. ‘स्लेट पर लाल खड़िया चाक’ प्रातःकालीन गीले वातावरण में उगते हुए सूर्य के लिए प्रयुक्त किया गया है।
  6. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग हुआ है।
  7. शब्द-चयन सर्वथा अनुकूल व भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  8. संपूर्ण पद्यांश में चित्रात्मक व बिंबात्मक शैलियों का प्रयोग हुआ है।
  9. मुक्त छंद का सफल प्रयोग है।

विषय-वस्तु पर आधारित लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भोर के नभ को राख से लीपा चौका क्यों कहा गया है?
उत्तर:
भोरकालीन आकाश गीली राख के रंग के समान गहरा स्लेटी रंग का होता है। उस समय के वातावरण में नमी के साथ-साथ पवित्रता भी होती है। अतः स्लेटी रंग को नमी तथा पवित्रता के कारण ही भोर के नभ की राख से लीपा गया गीला चौका कहा गया है। कवि सूर्योदयकालीन वातावरण की तुलना रसोई की पावनता के साथ करता है।

प्रश्न 2.
नील जल में हिलती झिलमिलाती देह के द्वारा कवि क्या स्पष्ट करना चाहता है?
उत्तर:
कवि ने नील जल शब्द का प्रयोग नीले आकाश के लिए किया है। जिस प्रकार नीले जल में कोई गौरवर्णी नारी धीरे-धीरे बाहर निकलकर आती है, उसी प्रकार नीले आकाश से सूर्य की श्वेत किरणें विकीर्ण होकर प्रकाश फैलाने लगती हैं।

प्रश्न 3.
स्लेट पर लाल खड़िया चाक मलने से क्या अभिप्राय है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
यदि काली स्लेट पर लाल खड़िया चाक को लीप दिया जाए तो वह गीली होने के साथ-साथ थोड़ी-सी लालिमा लिए हुए रहती है। उसका रंग भोरकालीन गहरे आकाश में सूर्य की लालिमा जैसा हो जाता है। यहाँ कवि का अभिप्राय उस नीले आकाश से है जिसमें सूर्य की लालिमा धीरे-धीरे व्याप्त होने लगती है।

प्रश्न 4.
सिल और स्लेट शब्दों का प्रयोग कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
सिल तथा स्लेट शब्दों का प्रयोग कवि ने भोरकालीन आकाश के गहरे नीले रंग के लिए किया है जिसमें सूर्योदय की थोड़ी-सी लालिमा भी मिली हुई होती है।

प्रश्न 5.
‘उषा’ कविता में निहित प्रकृति-सौंदर्य की विवेचना कीजिए। [H.B.S.E. March, 2019 (Set-B, C)]
उत्तर:
रात्रि के समय आकाश में कालिमा और नीली आभा फैली हुई होती है जिसमें झिलमिलाते हुए तारे अपना सौंदर्य बिखेरते हैं। सूर्योदय से पूर्व के काल में हल्का-हल्का प्रकाश चमकने लगता है और तारे लुप्त होने लगते हैं। इस अवसर पर आकाश में थोड़ी-सी नमी होती है तथा पौ फटने पर केसरिया रंग छिटक जाता है। फलस्वरूप पक्षी जाग जाते हैं और प्रकृति अंगड़ाई लेकर मुखरित होने लगती है। धीरे-धीरे लालिमा पूरे संसार पर छा जाती है। सूर्योदय के पश्चात् सारा संसार प्रकाश से जगमगाने लगता है और संसार के सभी प्राणी अपने-अपने क्रिया-कलाप आरंभ कर देते हैं।

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प्रश्न 6.
सूर्योदय से उषा का कौन-सा जादू टूट जाता है?
उत्तर:
सर्योदय के कारण उषा का अलौकिक रंग-रूप टने लगता है। सर्योदय से पहले प्रातःकालीन प्रकति क्षण-क्षण में परिवर्तित होती हुई दिखाई देती है। रात्रिकालीन कालिमा लुप्त हो जाती है और हल्की-हल्की लालिमा पूर्व दिशा में फैलने लगती है। इस प्रकार उषा का अद्वितीय रूप-सौंदर्य लुप्त हो जाता है और आकाश में सूर्य का प्रकाश फैलने लगता है।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. शमशेर बहादुर सिंह का जन्म कब हुआ?
(A) 13 जनवरी, 1921
(B) 13 जनवरी, 1911
(C) 15 जनवरी, 1912
(D) 26 जनवरी, 1913
उत्तर:
(B) 13 जनवरी, 1911

2. शमशेर बहादुर सिंह का जन्म किस प्रदेश में हुआ?
(A) उत्तराखंड में
(B) मध्य प्रदेश में
(C) पंजाब में
(D) राजस्थान में
उत्तर:
(A) उत्तराखंड में

3. शमशेर बहादुर सिंह का जन्म किस जनपद में हुआ?
(A) हरिद्वार में
(B) ऋषिकेश में
(C) देहरादून में
(D) मसूरी में
उत्तर:
(C) देहरादून में

4. शमशेर बहादुर सिंह का निधन कब हुआ?
(A) सन् 1992 में
(B) सन् 1991 में
(C) सन् 1990 में
(D) सन् 1993 में
उत्तर:
(D) सन् 1993 में

5. ‘कुछ कविताएँ’ के रचयिता हैं-
(A) शमशेर बहादुर सिंह
(B) आलोक धन्वा
(C) हरिवंश राय बच्चन
(D) रघुवीर सहाय
उत्तर:
(A) शमशेर बहादुर सिंह

6. ‘बात बोलेगी’ के रचयिता हैं-
(A) कुंवर नारायण
(B) विष्णु खरे
(C) शमशेर बहादुर सिंह
(D) हरिवंश राय बच्चन
उत्तर:
(C) शमशेर बहादुर सिंह

7. शमशेर बहादुर सिंह को ‘दो मोती के दो चंद्रमा होते’ रचना पर कौन-सा राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ?
(A) ज्ञानपीठ
(B) साहित्य अकादेमी
(C) शिखर सम्मान
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) साहित्य अकादेमी

8. ‘उर्दू-हिंदी कोश’ के संपादक कौन थे?
(A) आलोक धन्वा
(B) हरिवंश राय बच्चन
(C) रघुवीर सहाय
(D) शमशेर बहादुर सिंह
उत्तर:
(D) शमशेर बहादुर सिंह

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9. ‘उषा’ कविता में किस काल की परिवर्तित प्रकृति का वर्णन किया गया है?
(A) सूर्योदय पूर्व काल की
(B) सूर्योदय के बाद की
(C) रात्रिकाल की
(D) सूर्योदय काल की
उत्तर:
(A) सूर्योदय पूर्व काल की

10. ‘उषा’ कविता के रचयिता हैं-
(A) कुँवर नारायण
(B) आलोक धन्वा
(C) शमशेर बहादुर सिंह
(D) रघुवीर सहाय
उत्तर:
(C) शमशेर बहादुर सिंह

11. ‘प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) उपमा अलंकार
(B) रूपक अलंकार
(C) अनुप्रास अलंकार
(D) मानवीकरण अलंकार
उत्तर:
(A) उपमा अलंकार

12. ‘उषा’ कविता में किस छंद का प्रयोग हुआ है?
(A) दोहा छंद
(B) मुक्त छंद
(C) सवैया छंद
(D) कवित्त छंद
उत्तर:
(B) मुक्त छंद

13. ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ के अतिरिक्त शमशेर बहादुर सिंह को अन्य कौन-सा सम्मान प्राप्त हुआ?
(A) शिखर सम्मान
(B) ज्ञानपीठ पुरस्कार
(C) कबीर सम्मान
(D) तुलसी सम्मान
उत्तर:
(C) कबीर सम्मान

14. शमशेर बहादुर सिंह कहाँ पर पेंटिंग सीखने लगे?
(A) उकील बंधुओं के कला विद्यालय में
(B) साहित्य अकादमी में
(C) कला केंद्र में
(D) दिल्ली विश्वविद्यालय में
उत्तर:
(A) उकील बंधुओं के कला विद्यालय में

15. ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ का प्रकाशन कब हुआ?
(A) सन् 1970 में
(B) सन् 1972 में
(C) सन् 1971 में
(D) सन् 1975 में
उत्तर:
(D) सन् 1975 में

16. ‘कुछ कविताएँ’ काव्य-संग्रह का प्रकाशन कब हुआ?
(A) सन् 1960 में
(B) सन् 1959 में
(C) सन् 1958 में
(D) सन् 1957 में
उत्तर:
(B) सन् 1959 में

17. ‘शमशेर’ का प्रकाशन कब हुआ?
(A) सन् 1970 में
(B) सन् 1969 में
(C) सन् 1971 में
(D) सन् 1972 में
उत्तर:
(C) सन् 1971 में

18. ‘इतने पास अपने’ के रचयिता हैं-
(A) कुँवर नारायण
(B) हरिवंश राय बच्चन
(C) आलोक धन्वा
(D) शमशेर बहादुर सिंह
उत्तर:
(D) शमशेर बहादुर सिंह

19. ‘इतने पास अपने का प्रकाशन कब हुआ?
(A) सन् 1980 में
(B) सन् 1979 में
(C) सन् 1975 में
(D) सन् 1977 में
उत्तर:
(A) सन् 1980 में

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20. ‘उषा’ कविता में किस रंग की खड़िया चाक मलने की बात कही गई है?
(A) लाल
(B) पीली
(C) सफेद
(D) नीली
उत्तर:
(A) लाल

21. ‘उषा’ दिन का कौन-सा समय होता है?
(A) प्रभात
(B) मध्याह्न
(C) संध्या
(D) रात्रि
उत्तर:
(A) प्रभात

22. कविता में चौका किससे लीपा हुआ होने की बात कही गई है?
(A) गोबर
(B) राख
(C) मिट्टी
(D) लाल खड़िया
उत्तर:
(B) राख

23. ‘उषा’ का जादू टूटने का समय क्या है?
(A) सूर्यास्त
(B) प्रदोश
(C) सूर्योदय
(D) प्रहर
उत्तर:
(C) सूर्योदय

24. कविता में राख से लीपा हुआ क्या बताया है?
(A) आकाश
(B) चन्द्र
(C) काली सिल
(D) चौका
उत्तर:
(D) चौका

25. ‘राख से लीपा हुआ चौका’ आकाश की किस स्थिति की व्यंजना करता है?
(A) पवित्रता की
(B) ताज़गी की
(C) विशालता की
(D) गंभीरता की
उत्तर:
(A) पवित्रता की

26. राख से लीपा हुआ चौका गीला पड़ा होने से क्या अभिप्राय है?
(A) वर्षा
(B) पानी
(C) वातावरण की नमी
(D) रात शेष रहना
उत्तर:
(C) वातावरण की नमी

27. ‘बहुत काली सिल’ से क्या अभिप्राय है?
(A) रसोई की काली सिल
(B) रात की कालिमा
(C) प्रातःकाल की कालिमा
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) रात की कालिमा

28. ‘लाल खड़िया चाक’ क्या व्यंजित करती है?
(A) सूर्योदय से पूर्व की लालिमा
(B) खड़िया चाक का लाल रंग
(C) सूर्यास्त के बाद की लालिमा
(D) दोपहर की लालिमा
उत्तर:
(A) सूर्योदय से पूर्व की लालिमा

29. ‘नील जल में …………… हिल रही हो’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) अनुप्रास अलंकार
(B) रूपक अलंकार
(C) उपमा अलंकार
(D) उत्प्रेक्षा अलंकार
उत्तर:
(D) उत्प्रेक्षा अलंकार

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30. शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित ‘उषा’ कविता में किस शैली का प्रयोग हुआ है?
(A) विवरणात्मक शैली का
(B) चित्रात्मक शैली का
(C) संबोधन शैली का
(D) वर्णनात्मक शैली का
उत्तर:
(B) चित्रात्मक शैली का

31. प्रातःकालीन आकाश का रंग कैसा था?
(A) लाल
(B) सुनहरा
(C) नीला
(D) काला
उत्तर:
(C) नीला

32. ‘लाल केसर से धुली काली सिल’ किसे कहा गया है?
(A) आकाश
(B) तारे
(C) सूर्य
(D) चंद्रमा
उत्तर:
(A) आकाश

33. नीले आकाश में उदय होता हुआ सूर्य किसके समान दिखाई देता है?
(A) गौरवर्णीय सुंदरी के समान
(B) शंख के समान
(C) झील के समान
(D) सिंदूर के समान
उत्तर:
(A) गौरवर्णीय सुंदरी के समान

34. ‘उषा’ कविता में प्रातःकालीन नीला आकाश किसके जैसा बताया गया है?
(A) केसर
(B) शंख
(C) सिंदूर
(D) झील
उत्तर:
(B) शंख

35. ‘लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने स्लेट पर’ पंक्ति में स्लेट क्या है?
(A) तारे
(B) सूर्य
(C) धरती
(D) आकाश
उत्तर:
(D) आकाश

36. ‘उषा’ कविता में बहुत काली सिल की किससे धुलने की बात कही गई है?
(A) खड़िया
(B) पानी
(C) लाल केसर
(D) वर्षा
उत्तर:
(C) लाल केसर

37. सूर्योदय से पहले किसका जादू होता है?
(A) उषा का
(B) निशा का
(C) निशिचर का
(D) भूत का
उत्तर:
(A) उषा का

उषा पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

[1] प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है) [पृष्ठ-36]

शब्दार्थ-भोर = सवेरा, सवेरा होने से पहले का झुटपुटा वातावरण। नभ = आकाश। चौका = रसोई बनाने का स्थान।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित कविता ‘उषा’ से अवतरित है। इसके कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। इस लघु कविता में कवि ने सूर्योदय से पूर्व की प्रकृति का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है।

व्याख्या-प्रातःकालीन सूर्योदय का वर्णन करते हुए कवि कहता है कि पौ फटने से पहले आकाश का रंग गहरा नीला था। यह शंख के समान गहरा नीला दिखाई दे रहा था। जैसे शंख की कांति स्वच्छ व नीली होती है वैसे ही आकाश भी स्वच्छ और नीली आभा लिए हुए था। उसके बाद भोर हुई तथा आकाश का गहरा नीला रंग थोड़ा मंद पड़ गया और वातावरण में नमी आ गई। उस समय आकाश ऐसा लग रहा था कि मानों राख से लीपा हुआ कोई गीला चौका हो अर्थात् नमी के कारण उसमें थोड़ा गीलापन आ गया था, लेकिन अभी भी उसमें थोड़ा नीलापन और थोड़ा मटमैलापन था।

विशेष-

  1. इस पद्यांश में कवि ने भोर के वातावरण का बहुत ही सूक्ष्म तथा मनोहारी वर्णन किया है।
  2. ‘शंख जैसे’ और ‘राख से लीपा हुआ चौका’ में उपमा अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  3. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का सहज प्रयोग हुआ है।
  4. शब्द-प्रयोग सर्वथा उचित एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  5. प्रस्तुत पद्यांश नवीन उपमानों तथा मौलिक कल्पना के लिए प्रसिद्ध है।
  6. चित्रात्मक शैली है तथा मुक्त छंद का सफल प्रयोग किया गया है।

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) कवि ने प्रातःकालीन नभ की तुलना नीले शंख से क्यों की है?
(ग) भोर के नभ को राख से लीपा चौका क्यों कहा है?
(घ) चौके के गीले होने का प्रतीकार्थ क्या है?
(ङ) इस पद्यांश के आधार पर प्रातःकालीन प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
(क) कविता – उषा कवि – शमशेर बहादुर सिंह

(ख) भोरकालीन वातावरण न अधिक काला होता है और न ही उजला। इसलिए कवि ने उसकी तुलना नीले शंख के साथ की है जिसका रंग बुझा-बुझा-सा होता है।

(ग) भोरकालीन वातावरण सुरमयी रंग का होता है और राख से लीपे जाने पर भी आँगन का रंग गहरा सुरमयी हो जाता है। इसलिए कवि ने भोर के नभ को राख से लीपा हुआ चौका कहा है।

(घ) प्रातःकालीन वातावरण में ओस की नमी होती है तथा इसका रंग गहरा परमयी होता है। इसलिए कवि ने इसकी तुलना चौके के साथ की है जोकि बड़ा ही पवित्र माना गया है। अतः चौके के गीले होने का प्रतीकार्थ है-प्रातःकालीन वातावरण में पवित्रता का होना।

(ङ) प्रातःकालीन वातावरण बड़ा ही शांत तथा ओस की नमी के कारण कुछ-कुछ गीला होता है। उस समय आकाश की पूर्व दिशा में हल्की लालिमा होती है जिसमें पेड़-पौधे, खेत-खलिहान बड़े ही मनोहारी प्रतीत होते हैं। धीरे-धीरे सूर्य की लाल-लाल किरणें संपूर्ण प्रकृति पर फैल जाती हैं और कुछ देर बाद यह लालिमा उजाले में परिवर्तित हो जाती है।

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[2] बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो
स्लेट पर या लाल खड़िया चाक
मल दी हो किसी ने [पृष्ठ-36]

शब्दार्थ-सिल = मसाला, चटनी आदि पीसने वाला पत्थर जो रसोई में रखा जाता है। लाल केसर = फूल का सुगंधित पदार्थ, पराग = केसर के फूल का मध्य भाग जो औषधि में डाला जाता है।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित कविता ‘उषा’ से अवतरित है। इसके कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। इस लघु कविता में कवि ने सूर्योदय से पूर्व की प्रकृति का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है। यहाँ कवि उषा की लालिमा का वर्णन करते हुए कहता है कि

व्याख्या-भोर के अस्पष्ट अँधेरे में उगते हुए सूर्य की लाली का धीरे-धीरे मिश्रण होने लगता है। उस समय आकाश ऐसा लगता है कि मानों बहुत गहरी काली सिल लाल केसर से धुल गई हो अर्थात् संपूर्ण आकाश में सूर्य की लालिमा फैलकर उसको हल्के लाल रंग का बना देती है। उस समय यह वातावरण ऐसा दिखाई देता है कि मानों स्लेट पर लाल खड़िया चाक मिट्टी लगा दी गई है। यहाँ कवि ने नीले-काले आकाश की तुलना काली स्लेट के साथ की है और सूर्य की लालिमा की तुलना लाल खड़िया चाक के साथ की है।

विशेष-

  1. इस पद्यांश में कवि ने प्रातःकालीन प्रकृति के क्षण-क्षण बदलते हुए वातावरण का मनोहारी वर्णन किया है।
  2. रात की कालिमा, ओस का गीलापन तथा सूर्य की लालिमा तीनों का मिश्रण करके एक सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है।
  3. ‘बहुत काली सिल …………….. गई हो’ तथा ‘स्लेट पर ……………. किसी ने दोनों में उत्प्रेक्षा अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है।
  4. ‘काली सिल’ में अनुप्रास अलंकार का सफल प्रयोग किया गया है।
  5. सहज, सरल एवं साहित्यिक हिंदी भाषा का सफल प्रयोग किया गया है।
  6. मुक्त छंद का प्रयोग हुआ है तथा बिंब-योजना आकर्षक बन पड़ी है।

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर-
प्रश्न-
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) इस पद्यांश में कवि ने किस प्रकार के दृश्य का चित्रण किया है?
(ग) ‘काली सिल’, ‘स्लेट’ किस दृश्य को अंकित करती हैं?
(घ) ‘लाल केसर’ तथा ‘लाल खड़िया चाक’ से किस चित्र को अंकित किया गया है?
उत्तर:
(क) कवि – शमशेर बहादुर सिंह कविता – उषा

(ख) इस पद्यांश में कवि ने भोर के अँधेरे वातावरण में सूर्योदय की हल्की लालिमा के मिश्रण का दृश्य अंकित किया है जोकि बड़ा ही मनोहारी बन पड़ा है।

(ग) भोर के समय आकाश का रंग सुरमयी काला होता है। इस समय का अंधकार काली सिल या काली स्लेट जैसा होता है। इसलिए कवि ने काली सिल अथवा काली स्लेट द्वारा भोरकालीन सुरमयी अँधेरे का सुंदर चित्रण किया है।

(घ) ‘लाल केसर’ तथा ‘लाल खड़िया चाक’ सूर्योदय की लालिमा को चित्रित करने में समर्थ हैं। ये दोनों उपमान सर्वथा मौलिक तथा जनरुचि के अनुकूल हैं।

[3] नील जल में या किसी की
गौर झिलमिल देह
जैसे हिल रही हो।
और….
जादू टूटता है इस उषा का अब
सूर्योदय हो रहा है। [पृष्ठ-36]

शब्दार्थ-नील जल = नीले रंग का पानी। गौर = गोरे रंग की। झिलमिल देह = चमकता हुआ शरीर। सूर्योदय = सूर्य का उदित होना।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित कविता ‘उषा’ से अवतरित है। इसके कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। इस लघु कविता में कवि ने सूर्योदय से पूर्व की प्रकृति का बहुत ही मनोहारी वर्णन किया है। यहाँ कवि सूर्योदय का वर्णन करते हुए कहता है कि-

व्याख्या-प्रातःकाल में पहले तो आकाश में गहरा नीला रंग होता है फिर सूर्य की श्वेत आभा दिखाई देने लगती है। उस समय का प्राकृतिक सौंदर्य ऐसा दिखाई देता है मानों किसी सुंदर युवती की गोरी देह नीले रंग के पानी में झिलमिला रही हो परंतु कुछ समय बाद आकाश में सूर्य उदित हो जाता है। पता भी नहीं लग पाता कि उषा का क्षण-क्षण में बदलता हुआ सौंदर्य लुप्त हो जाता है अर्थात् क्षण भर में ही आकाश में सूर्योदय हो जाता है और प्रकृति का सौंदर्य भी नष्ट हो जाता है।

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने सूर्योदयकालीन प्राकृतिक शोभा का बहुत ही सूक्ष्म चित्रण किया है।
  2. ‘नील जल ……………….. हिल रही हो’ में उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  3. ‘नीला जल’, ‘हो रहा है’ में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  4. सहज, सरल एवं साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग है।
  5. शब्द-चयन सर्वथा सटीक व भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  6. संपूर्ण पद्यांश चित्रात्मक भाषा के लिए प्रसिद्ध है।
  7. मुक्त छंद का प्रयोग हुआ है।

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-
(क) नीले जल में गौर देह के झिलमिलाने में कौन सा दृश्य चित्रित किया है?
(ख) नीले जल द्वारा कवि प्रातःकाल के किस दृश्य का अंकन करना चाहता है?
(ग) गोरी देह की झिलमिलाने की समानता किस दृश्य से की गई है?
(घ) उषा का जादू टूटने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
(क) नीले जल में गौर देह के झिलमिलाने के माध्यम से कवि नीले आकाश में सूर्य की कांति के झिलमिलाने का दृश्य अंकित करता है। प्रातःकाल के समय आकाश नीला होता है तथा सूर्य की पहली किरणें झिलमिलाकर उसको अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।

(ख) नीले जल के उपमान द्वारा कवि प्रातःकालीन नीले आकाश की निर्मलता और स्वच्छता को अंकित करता है।

(ग) प्रातःकाल में सूर्य की लालिमा धीरे-धीरे श्वेत होने लगती है। उस समय के वातावरण में कुछ नमी तथा कुछ चमक होती है। इसके लिए कवि ने नीले जल में स्नान करने वाली गोरी देह का वर्णन किया है जोकि सर्वथा उचित एवं प्रभावशाली बन पड़ा है।

(घ) उषा के जादू टूटने से अभिप्राय है प्रातःकालीन प्रकृति के अद्वितीय सौंदर्य का कम होना। उस समय प्रकृति क्षण-क्षण में परिवर्तित होती रहती है। भोर के समय आकाश नीला तथा काला होता है फिर पूर्व दिशा में हल्की लालिमा छा जाती है जिससे प्रकृति में नीलिमा व लालिमा का मिश्रण हो जाता है और अन्ततः दय के संपूर्ण आकाश में श्वेत लालिमा फैल जाती है।

उषा Summary in Hindi

उषा कवि-परिचय

प्रश्न-
शमशेर बहादुर सिंह का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा शमशेर बहादुर सिंह का साहित्यिक परिचय अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
1. जीवन-परिचय-नई कविता में शमशेर बहादुर सिंह का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उनका काव्य तथा व्यक्तित्व बहुमुखी तथा विविधतापूर्ण है। उनका जन्म 13 जनवरी, 1911 ई० को देहरादून में एक जाट परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम बाबू सिंह था जोकि बडे ही निष्ठावान सरकारी नौकर थे। उनकी माता का नाम प्रभुदई था। वे बड़ी ही धार्मिक विचारों वाली स्त्री थी। माता के देहांत के बाद पूरा परिवार बिखर गया और पिता ने दूसरी शादी कर ली। शमशेर का विवाह धर्मवती से हुआ। उनकी आरंभिक शिक्षा देहरादून में हुई। उन्होंने 1928 ई० में हाई स्कूल तथा 1933 ई० में प्रयाग विश्वविद्यालय से बी०ए० की परीक्षाएँ उत्तीर्ण की। उन्होंने अंग्रेजी विषय में एम०ए० करनी चाही, परंतु सफल नहीं हो पाए। बाद में दिल्ली के उकील बंधुओं के ‘कला विद्यालय’ में पेंटिंग सीखने लगे, लेकिन शीघ्र ही वापिस देहरादून लौट गए और अपने ससुर की कैमिस्ट की दुकान में कंपाउडर का काम करने लगे। उनका संपूर्ण जीवन प्रायः अस्थिर ही रहा। 1993 ई० में अहमदाबाद में उनका देहांत हो गया।

2. प्रमुख रचनाएँ-शमशेर ने गद्य तथा पद्य दोनों में कुशलतापूर्वक लिखा है। ‘कुछ कविताएँ’ (1959), ‘शमशेर’ (1971), ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ (1975), ‘इतने पास अपने’ (1980), ‘उदिता’ (1980), ‘बात बोलेगी’ (1981) आदि उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। उन्होंने सन् 1932-33 में लिखना आरंभ किया था तथा उनकी आरंभिक रचनाएँ ‘सरस्वती’ तथा ‘रूपाभ’ में प्रकाशित हुईं। सन् 1951 में प्रकाशित दूसरे तार सप्तक में उनकी रचनाएँ भी सम्मिलित की गईं। सन् 1977 में उन्हें ‘दो मोती के दो चंद्रमा होते’ रचना पर साहित्य अकादेमी पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया।

3. काव्यगत विशेषताएँ-उनके काव्य की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
(क) राष्ट्रीय चेतना-शमशेर जी की आरंभिक कविताओं में देश-प्रेम की भावना देखी जा सकती है। कवि ने स्वतंत्रता पूर्व अंग्रेज़ी शासकों के अत्याचारों को समीप से देखा था। उन्होंने अपनी कविताओं में अंग्रेज़ी राज्य की क्रूरता तथा हिंसा का यथार्थ वर्णन किया है। सन् 1944 में अंग्रेज़ी सरकार ने मजदूरों पर गोलियाँ चलवाई थीं। इस संदर्भ में कवि लिखता है
“ये शाम है
कि आसमान खेत है पके हुए अनाज का
लपक उठी लहू से भरी दरातियाँ
कि आग है धुआँ-धुआँ
सुलग रहा
ग्वालियर के मजूर का हृदय।”

(ख) मार्क्सवादी चेतना-शमशेर जी सन् 1938 में मार्क्सवाद की ओर आकृष्ट हुए थे और 1945 में कम्युनिस्ट पार्टी के कम्यून में रहे। वहीं पर रहते हुए उन्होंने ‘नया साहित्य’ का संपादन भी किया। वे मानवता के उज्ज्वल भविष्य के लिए मार्क्सवाद को आवश्यक मानते थे। इसीलिए एक स्थल पर वे लिखते हैं-
“वाम-वाम-वाम दिशा
समय साम्यवादी”

HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 6 उषा

(ग) सामाजिक चेतना-शमशेर जी के काव्य में सामाजिक चेतना भी देखी जा सकती है। उनका कहना था कि व्यक्ति अपने आप में समाज का ही एक अंश है। अतः कवि को अपनी भावनाएँ समाज के सत्य के संदर्भ में व्यक्त करनी चाहिएँ। इसीलिए वे समाज के कटुतम अनुभवों को अपनी कविताओं में प्रस्तुत करते हुए दिखाई देते हैं
“मैं समाज तो नहीं, न मैं कुल
जीवन,
कण-समूह में हूँ मैं केवल एक कण”।

(घ) वैयक्तिक अनुभूति-शमशेर जी ने अपनी कविताओं में अपनी निजी संवेदना को भी व्यक्त किया है। उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ भोगा और जो कुछ पाया, उन्हीं अनुभूतियों को वे यत्र-तत्र अनुभव करते रहे। उन्होंने अपने प्रणय संबंधों को स्वीकार किया और प्रेमी तथा प्रेमिका के एकत्व की स्थापना पर बल दिया। वे एक स्थल पर लिखते हैं
“मैं तो साये में बँधा सा
दामन में तुम्हारे ही कहीं ग्रह सा
साथ तुम्हारे।”

(ङ) प्रेम और सौंदर्य मूलतः शमशेर जी प्रेम और सौंदर्य के कवि माने जाते हैं। उनकी कविता में प्रेम का रंग बड़ा ही गहरा है। वे प्रेम और सौंदर्य का परस्पर संबंध स्थापित करते नज़र आते हैं। वे प्रेयसी को जीवन का सर्वस्व मानते हैं तथा वादा करके मुकर भी जाते हैं।
“वो कल आयेंगे वादे पर
मगर कल देखिए कब हो?
गलत फिर हज़रते-दिल
आपका तख्मीना होना है।”

(च) मानवतावाद-शमशेर जी का काव्य देश और काल की सीमा में बँधा नहीं है। वे मानवीय चेतना में अधिक विश्वास रखते थे और विश्व-बंधुत्व की भावना को अधिक महत्त्व देते थे। कवि ने नवीन तथा प्राचीन और पूर्व-पश्चिम में कोई भेद स्वीकार नहीं किया। कारण यह था कि वे अपनी कविता में मानव को ही अधिक महत्त्व देते हैं। एक स्थल पर वे लिखते हैं
“बहुत हौले-हौले नाच रहा हूँ
सब संस्कृतियाँ मेरे सरगम में विभोर हैं
क्योंकि मैं हृदय की सच्ची सुख-शांति का राग हूँ
बहुत आदिम, बहुत अभिनव।”
इसी प्रकार कवि ने अपनी कविताओं में जहाँ एक ओर प्रकृति-चित्रण किया है वहीं दूसरी ओर बाह्य आडंबरों तथा रूढ़ियों का भी विरोध किया है। वे जीवन में मृत्यु की हस्ती को भी स्वीकार करते हैं और मृत्यु को अपनी प्रेमिका मानते हैं।

4. कला-पक्ष-शमशेर बहादुर सिंह ने अपने साहित्य में सहज, सरल एवं साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग किया है। कहीं-कहीं वे उर्दू भाषा के शब्दों का अधिक प्रयोग करने लगते हैं। उन्होंने भाषा तथा छंद की दृष्टि से अनेक प्रयोग किए हैं। उनकी भाषा में चित्रात्मकता, ध्वन्यात्मकता, लयात्मकता, नाद-सौंदर्य आदि गुण देखे जा सकते हैं। मूलतः उनका काव्य प्रतीकों तथा बिंबों के लिए प्रसिद्ध है। उनके बारे में रंजना अरगड़े लिखती हैं-“शमशेर को कवियों का कवि इसी अर्थ में कहते हैं कि उनकी कविता में हिंदी भाषा की अभिव्यक्ति-क्षमता खिलती-खुलती नज़र आती है। ऐसी बात नहीं है कि उन्होंने हिंदी भाषा को अभिव्यक्ति के उच्चतम शिखर तक पहुँचा दिया है पर आने वाले कवियों के समक्ष उन्होंने अनेक संभावनाएँ खोल दी हैं।”

उषा कविता का सार

प्रश्न-
शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित कविता ‘उषा’ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘उषा’ कविता कविवर शमशेर बहादुर सिंह द्वारा रचित एक लघु कविता है जिसमें कवि ने सूर्योदय से पूर्व पल-पल परिवर्तित प्रकृति का शब्द-चित्र प्रस्तुत किया है : भोर होने से पहले आकाश का रंग गहरा नीला होता है। इसकी तुलना कवि शंख के साथ करता है परंतु कुछ ही क्षणों के बाद उसमें नमी आ जाती है जिसमें वह राख से लीपे हुए चौके के समान दिखने लगता है। अगले क्षणों में उसमें सूर्य की लालिमा मिल जाती है जिसके फलस्वरूप ऐसा लगता है कि मानों लाल केसर से धुली काली सिल हो अथवा ऐसे लगता है कि मानों काली सिल पर किसी ने लाल खड़िया चाक लगा दी है। थोड़ी ही देर में सूर्य का प्रकाश प्रकट होने लगता है। इस स्थिति में ऐसा प्रतीत होता है कि मानों नीले जल में किसी की गोरी देह झिलमिला रही हो। इस प्रकार उषा का जादू समाप्त हो जाता है और सूर्योदय होने पर सारा आकाश प्रकाश से जगमगाने लगता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि उषा का सौंदर्य प्रति क्षण बदलता रहता है। यहाँ कवि ने उषा के सौंदर्य को देखने का प्रयास नहीं किया, बल्कि उसे पृथ्वी के परिवेश से जोड़कर प्रस्तुत किया है।

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HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

Haryana State Board HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

HBSE 12th Class Hindi सहर्ष स्वीकारा है Textbook Questions and Answers

कविता के साथ

प्रश्न 1.
टिप्पणी कीजिए; गरबीली गरीबी, भीतर की सरिता, बहलाती सहलाती आत्मीयता, ममता के बादल।
उत्तर:
(क) गरबीली गरीबी कवि को अपने गरीब होने का कोई दुख नहीं है, बल्कि वह अपनी गरीबी पर भी गर्व करता है। उसे गरीबी के कारण न तो हीनता की अनुभूति होती है और न ही कोई ग्लानि। कवि स्वाभिमान के साथ जी रहा है।

(ख) भीतर की सरिता-इसका अभिप्राय यह है कि कवि के हृदय में असंख्य कोमल भावनाएँ हैं। नदी के पानी के समान ये कोमल भावनाएँ उसके हृदय में प्रवाहित होती रहती हैं।

(ग) बहलाती सहलाती आत्मीयता कवि के हृदय में प्रियतम की आत्मीयता है। इस आत्मीयता के दो विशेषण हैं बहलाती एवं सहलाती। यह आत्मीयता कवि को न केवल बहलाने का काम करती है, बल्कि उसके दुख-दर्द और
पीड़ा को सहलाती भी है और उसकी सहनशक्ति को बढ़ाती है।

(घ) ममता के बादल-जैसे ग्रीष्म ऋतु में बादल बरसकर हमें आनंदित करते हैं उसी प्रकार प्रेम की कोमल भावनाएँ कवि को आनंदानुभूति प्रदान करती हैं।

प्रश्न 2.
इस कविता में और भी टिप्पणी-योग्य पद-प्रयोग हैं। ऐसे किसी एक प्रयोग का अपनी ओर से उल्लेख कर उस पर टिप्पणी करें।
उत्तर:
(क) दक्षिणी ध्रुवी अंधकार-अमावस्या-जिस प्रकार दक्षिणी ध्रुव में अमावस्या जैसा धना काला अंधकार छाया रहता है, उसी प्रकार कवि अपने प्रियतम के वियोग रूपी घनघोर अंधकार में डूबना चाहता है। कवि की इच्छा है कि वियोग की गहरी अमावस उसके चेहरे, शरीर और हृदय में व्याप्त हो जाए।

(ख) विचार वैभव-यहाँ कवि स्पष्ट करता है कि धन का वैभव तो स्थायी नहीं होता, लेकिन विचारों की संपत्ति स्थायी होने के साथ-साथ मानवता का कल्याण करती है। कबीर, तुलसी, सूरदास आदि अपनी विचार संपदा के ही कारण महान कवि कहलाते हैं।

(ग) रमणीय उजेला-उजाला हमेशा प्रिय लगता है। कवि भी अपने प्रियतम के स्नेह उजाले से आच्छादित है। परंतु कवि के लिए यह मनोरम उजाला भी अब असहनीय हो गया है। कवि उससे मुक्त होना चाहता है।

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प्रश्न 3.
व्याख्या कीजिए-
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!
उपर्युक्त पंक्तियों की व्याख्या करते हुए यह बताइए कि यहाँ चाँद की तरह आत्मा पर झुका चेहरा भूलकर अंधकार-अमावस्या में नहाने की बात क्यों की गई है?
उत्तर:
कवि उस अनंत सत्ता को संबोधित करता हुआ कहता है कि मुझे यह भी पता नहीं है कि तुम्हारे और मेरे बीच स्नेह का न जाने ऐसा कौन-सा रिश्ता और संबंध है कि मैं जितना भी अपने हृदय के स्नेह को व्यक्त करता हूँ अथवा लोगों में उसे बाँटता हूँ, उतना ही वह बार-बार भर जाता है। ऐसा लगता है कि मानों मेरे हृदय में कोई मधुर झरना है जिससे लगातार स्नेह की वर्षा होती रहती है अथवा मेरे भीतर प्रेम की कोई नदी (झरना) है जो हमेशा स्नेह रूपी जल से छलकती रहती है। मेरे हृदय में तो तुम्हारा ही प्रेम विद्यमान है। मेरे हृदय में तुम्हारा यह प्रसन्न चेहरा इस प्रकार विद्यमान रहता है, जैसे पृथ्वी पर रात के समय चंद्रमा मुस्कुराता रहता है अर्थात् जैसे चाँद रात को रोशनी देता है, उसी प्रकार हे मेरे ईश्वर! तुम मेरे हृदय को प्रेम से प्रकाशित करते रहते हो।

प्रश्न 4.
तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित
रहने का रमणीय यह उजेला अब
सहा नहीं जाता है।
(क) यहाँ अंधकार-अमावस्या के लिए क्या विशेषण इस्तेमाल किया गया है और उससे विशेष्य में क्या अर्थ जुड़ता है? (ख) कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में किस स्थिति को अमावस्या कहा है?

(ग) इस स्थिति से ठीक विपरीत ठहरने वाली कौन-सी स्थिति कविता में व्यक्त हुई है? इस वैपरीत्य को व्यक्त करने वाले शब्द का व्याख्यापूर्वक उल्लेख करें।

(घ) कवि अपने संबोध्य (जिसको कविता संबोधित है कविता का ‘तुम’) को पूरी तरह भूल जाना चाहता है, इस बात को प्रभावी तरीके से व्यक्त करने के लिए क्या युक्ति अपनाई है? रेखांकित अंशों को ध्यान में रखकर उत्तर दें।
उत्तर:
(क) कवि ने ‘अंधकार-अमावस्या के लिए दक्षिण ध्रुवी विशेषण का प्रयोग किया है। इस विशेषण के प्रयोग से विशेष्य अंधकार की सघनता का पता चलता है अर्थात् अंधकार घना और काला है। कवि अपने प्रियतम को भूलकर इसी घने अंधकार में लीन हो जाना चाहता है।

(ख) कवि ने व्यक्तिगत संदर्भ में अपने प्रियतम की वियोग-जन्य वेदना एवं निराशा की स्थिति को अमावस्या की संज्ञा दी है। अतः इस स्थिति के लिए ‘अमावस्या’ शब्द का प्रयोग सर्वथा उचित एवं सटीक है।

(ग) वर्तमान स्थिति है-दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या की। यह स्थिति कवि वियोगावस्था से उत्पन्न पीड़ा की परिचायक है। इसकी विपरीत स्थिति है-‘तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित रहने का रमणीय उजेला’ जो कि कवि के संयोग प्रेम को व्यंजित करता है। एक ओर कवि ने वियोग-जन्य निराशा को गहरी अमावस्या के माध्यम से व्यक्त किया है। प्रथम स्थिति निराशा को व्यक्त करती है। इसीलिए कवि ने अमावस के अंधकार की बात की है। द्वितीय स्थिति आशा को व्यक्त करती है जो कि प्रेम की संयोगावस्था से संबंधित है। इसलिए कवि ने ‘रमणीय उजेला’ की बात की है।

(घ) कवि अपने संबोध्य को पूरी तरह भूल जाना चाहता है। इस स्थिति की तुलना कवि ने अमावस्या के साथ की है जहाँ चंद्रमा नहीं होता बल्कि घना काला अंधकार होता है। अन्य शब्दों में हम कह सकते हैं कि कवि अपने प्रियतम रूपी चाँद से सर्वथा अलग-थलग एकाकी जीवन व्यतीत करना चाहता है। कवि अपने प्रियतम के बिना अंधकार में डूब जाना चाहता है। वह अब वियोग से उत्पन्न पीड़ा को झेलना चाहता है। इस स्थिति के लिए कवि ने ‘शरीर पर चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं झेलू मैं/ उसी में नहा लूँ मैं’ आदि शब्दों का प्रयोग किया है अर्थात् कवि विरह को अपने शरीर तथा हृदय में झेलना चाहता है, उसमें नहा लेना चाहता है। कवि अपने प्रियतम के वियोग की पीड़ा के अंधकार में नहा लेना चाहता है।

प्रश्न 5.
बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है-और कविता के शीर्षक ‘सहर्ष स्वीकारा है’ में आप कैसे अंतर्विरोध पाते हैं। चर्चा कीजिए।
उत्तर:
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में कवि ने दो विपरीत स्थितियों की चर्चा की है। कवि अपने उस प्रियतम की प्रत्येक वस्तु अथवा दृष्टिकोण को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करता है। प्रथम स्थिति वह है जब कवि प्रेम के संयोग पक्ष को भोग रहा है। लेकिन अब कवि के लिए यह स्थिति असहनीय बन गई है। कवि प्रियतम की आत्मीयता को त्यागना चाहता है और उससे दूर रहकर वियोग आरोह (भाग 2) [गजानन माधव मुक्तिबोध] के अंधकार में डूब जाना चाहता है। अतः बहलाती सहलाती आत्मीयता से कवि दूर जाना चाहता है। यहाँ स्वीकार और अस्वीकार का भाव होने के कारण अंतर्विरोध है।

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कविता के आसपास

प्रश्न 1.
अतिशय मोह भी क्या त्रास का कारक है? माँ का दूध छूटने का कष्ट जैसे एक ज़रूरी कष्ट है, वैसे ही कुछ और ज़रूरी कष्टों की सूची बनाएँ।
उत्तर:
अतिशय मोह निश्चय से दुखदायक होता है। सांसारिक मोह-माया के कारण ही मनुष्य अनेक गलत काम कर बैठता है। संतान-मोह के कारण लोग भ्रष्ट तरीकों से धन कमाते हैं और प्रिया के कारण माँ-बाप को भी त्याग देते हैं।

बच्चा माँ का दूध छोड़ना नहीं चाहता है। लेकिन बच्चे को माँ का दूध छोड़ना पड़ता है। धीरे-धीरे बच्चा इस कष्ट को भूल जाता है। कुछ विद्यार्थी घर-परिवार त्यागकर दूर देश में शिक्षा-प्राप्ति के लिए जाते हैं। घर का मोह छोड़ना उन्हें पीड़ादायक लगता है, लेकिन भावी जीवन का निर्माण करने के लिए उन्हें यह कष्ट सहना पड़ता है। लोग रोजगार पाने के लिए विदेशों में जाते हैं। घर का मोह उन्हें भी कुछ समय के लिए कष्ट पहुंचाता है। इसी प्रकार सैनिक युद्ध में भाग लेने के लिए उत्साहित रहता है। परंतु घर त्यागते समय उसे भी कष्ट की अनुभूति होती है। लेकिन वह इस कष्ट की परवाह न करके युद्ध लड़ने के लिए जाता है और देश के लिए कभी अपने प्राण तक न्योछावर कर देता है।

प्रश्न 2.
‘प्रेरणा’ शब्द पर सोचिए और उसके महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए जीवन के वे प्रसंग याद कीजिए जब माता-पिता, दीदी-भैया, शिक्षक या कोई महापुरुष/महानारी आपके अँधेरे क्षणों में प्रकाश भर गए।
उत्तर:
प्रेरणा का अर्थ है-आगे बढ़ने अथवा उन्नति करने की भावना उत्पन्न करना। संसार का प्रत्येक महापुरुष किसी-न-किसी महान् व्यक्ति, शिक्षक अथवा माता-पिता से प्रेरणा प्राप्त करके महान् काम करने में सफल हुआ। वीर शिवाजी ने अपनी माता जीजाबाई से प्रेरणा प्राप्त करके औरंगजेब के अत्याचारों से देश के एक भाग को मुक्त कराया और मराठा राज्य की स्थापना की। हम सब किसी-न-किसी से प्रेरणा प्राप्त करके कोई अच्छा काम कर जाते हैं। श्रीराम का आदर्श आज भी हमारे लिए प्रेरणा-स्रोत है। मैंने अपने बड़े भाई से प्रेरणा प्राप्त करके ही पढ़ना शुरू किया। पहले मैं दिन-भर खेल-कूद में लगा रहता था। मेरी बड़ी बहन पिता जी से प्रेरणा प्राप्त करके डॉक्टर बन सकी। हम सभी किसी-न-किसी से प्रेरणा प्राप्त करके ही आगे बढ़ते हैं।

प्रश्न 3.
‘भय’ शब्द पर सोचिए। सोचिए कि मन में किन-किन चीजों का भय बैठा है? उससे निबटने के लिए आप क्या करते हैं और कवि की मनःस्थिति से अपनी मनःस्थिति की तुलना कीजिए।
उत्तर:
भय का अर्थ है-डर। भय के अनेक प्रकार हैं। आज के भौतिकवादी युग में भय कदम-कदम पर हमारे साथ लगा रहता है। भय का क्षेत्र अत्यधिक व्यापक एवं विस्तृत है। विद्यार्थियों को परीक्षा में फेल होने का भय लगा रहता है अथवा अच्छे अंक प्राप्त न करने का भी भय लगा रहता है। किसी विशेष विद्यालय अथवा महाविद्यालय में प्रवेश न मिलने का भय अथवा शिक्षा-प्राप्ति के पश्चात् उचित रोजगार न मिलने का भय हमारे पीछे लगा रहता है। लेकिन यदि हम जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण लेकर काम करते हैं तो भय से छुटकारा पाया जा सकता है। भय तो कदम-कदम पर हमारे सामने खड़ा है, लेकिन इसका डट कर सामना करना चाहिए। यदि हम सोच-समझकर योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे तो ही भय से बचा जा सकेगा। फिर भी हमें जीवन की प्रत्येक स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस मनःस्थिति के साथ हम बुरे-से-बुरे परिणाम का भी सामना कर सकते हैं।

कवि की मनःस्थिति से हमारी मनःस्थिति सर्वथा अलग है। हमें आज के जीवन में कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन हम विद्यार्थी बुरी-से-बुरी स्थिति के लिए तैयार हैं। हमें तो आगे बढ़ना है, परिश्रम करना है और आने वाले काल में अपने देश के गौरव को ऊँचा उठाना है।

HBSE 12th Class Hindi सहर्ष स्वीकारा है Important Questions and Answers

सराहना संबंधी प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में निहित काव्य-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए
जिंदगी में जो कुछ है, जो भी है
सहर्ष स्वीकारा है;
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
वह तुम्हें प्यारा है।
गरबीली गरीबी यह, ये गंभीर अनुभव सब
यह विचार-वैभव सब
दृढ़ता यह, भीतर की सरिता यह अभिनव सब
मौलिक है, मौलिक है

विशेष-

  1. यहाँ कवि स्पष्ट करता है कि जीवन के सुख-दुख, गरीबी, गंभीरता, वैचारिक मौलिकता आदि से कवि को इसलिए प्यार है क्योंकि उसका प्रिय भी इनसे प्यार करता है।
  2. कवि का प्रिय अज्ञात है।
  3. ‘गरबीली गरीबी’ का प्रयोग कवि के स्वाभिमान को व्यंजित करता है।
  4. ‘भीतर की सरिता’ एक सफल लाक्षणिक प्रयोग है जो कि कवि की गहन आंतरिक अनुभूतियों को व्यंजित करता है। ‘अभिनव’ विशेषण अनुभूतियों की मौलिकता की ओर संकेत करता है।
  5. सहज, सरल एवं साहित्यिक हिंदी भाषा का सफल प्रयोग हुआ है।
  6. शब्द-चयन सर्वथा उचित एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  7. संपूर्ण पद्य में अनुप्रास अलंकार (सहर्ष स्वीकारा, गरबीली गरीबी, विचार-वैभव) की छटा दर्शनीय है।
  8. ‘भीतर की सरिता’ में रूपकातिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  9. संबोधनात्मक शैली है तथा मुक्त छंद का प्रयोग है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में निहित काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है!

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने अपने अज्ञात प्रिय के प्रति अपनी प्रेमानुभूति व्यक्त की है।
  2. संपूर्ण पद्य में प्रश्न तथा संदेह अलंकारों के प्रयोग के कारण रहस्यात्मकता का समावेश हो गया है।
  3. ‘भर-भर फिर’ में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।
  4. ‘झरना’ तथा ‘मीठे पानी का सोता’ दोनों में रूपकातिशयोक्ति अलंकार है।
  5. ‘मुसकाता चाँद ……………….चेहरा है’ में उत्प्रेक्षा अलंकार का सफल प्रयोग हुआ है।
  6. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग है।
  7. शब्द-चयन सर्वथा सटीक एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  8. संबोधन शैली है तथा मुक्त छंद का प्रयोग हुआ है।
  9. माधुर्य गुण है तथा श्रृंगार रस का परिपाक हुआ है।

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प्रश्न 3.
निम्नलिखित पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
ममता के बादल की मँडराती कोमलता-
भीतर पिराती है
कमज़ोर और अक्षम अब हो गई है आत्मा यह
छटपटाती छाती को भवितव्यता डराती है
बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है!!

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने स्वीकार किया है कि उसके प्रिय की ममता उसके हृदय को पीड़ा पहुँचाने लगी है। अतः प्रिय का स्नेह उसके लिए असहय हो गया है।
  2. ‘ममता के बादल’ में रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  3. ‘आत्मीयता’ तथा ‘कोमलता’ दोनों भावनाओं का सुंदर मानवीकरण किया गया है।
  4. ‘छटपटाती छाती’ में अनुप्रास अलंकार है तथा संपूर्ण पद्यांश में स्वर मैत्री है।
  5. ‘मँडराती कोमलता भीतर पिराती’ में भी अनुप्रास अलंकार है।।
  6. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का सफल प्रयोग हुआ है।
  7. शब्द-योजना सर्वथा उचित एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  8. प्रसाद गुण है तथा मुक्त छंद का प्रयोग हुआ है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए
सचमुच मुझे दंड दो कि हो जाऊँ
पाताली अँधेरे की गुहाओं में विवरों में
धुएँ के बादलों में
बिलकुल मैं लापता
लापता कि वहाँ भी तो तुम्हारा ही सहारा है !!

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने अपने प्रिय के प्रति पूर्णतया समर्पित होने का वर्णन किया है। उसके प्रेम में अनन्य गहराई है। लेकिन वह प्रेम के संयोग पक्ष को छोड़कर वियोग पक्ष को भोगना चाहता है।
  2. ‘दंड दो’ में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  3. ‘पाताली अँधेरे की गुहाओं …………………बादलों में’ में लाक्षणिकता है।
  4. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का सरल प्रयोग हुआ है।
  5. शब्द-चयन सर्वथा उचित एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  6. संबोधन शैली है तथा कवि की आत्मानुभूति की अभिव्यक्ति हुई है।
  7. मुक्त छंद का सफल प्रयोग हुआ है।

विषय-वस्तु पर आधारित लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘सहर्ष स्वीकारा है’ शीर्षक कविता का प्रतिपाद्य (उद्देश्य) मूलभाव संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
‘सहर्ष स्वीकारा है’ मुक्तिबोध की एक महत्त्वपूर्ण कविता है। इसमें कवि ने जीवन के सुख-दुख तथा कोमल-कठोर स्थितियों को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करने का वर्णन किया है। कवि कहता है कि वह स्वयं को हमेशा अपने प्रिय से जुड़ा हुआ अनुभव करता है। कारण यह है कि यह सब उसके प्रिय की ही देन है। उसका पूरा जीवन अपने प्रिय की संवेदनाओं से संबद्ध है। कवि के मन में प्रेम का जो झरना प्रवाहित हो रहा है, वह उसके प्रिय की ही देन है। परंतु कवि स्वयं को प्रिय के प्रेम को निभाने में असमर्थ अनुभव करता है, जिसके लिए वह दंड भोगना चाहता है। वह कहता है कि उसे अंधेरी गुफाओं का निर्वासन मिल जाए, जहाँ वह प्रिय से अलग होकर उसकी यादों के सहारे अपने जीवन को व्यतीत कर सकेगा। ऐसी स्थिति में भी वह अपने प्रिय से जुड़ सकेगा।

प्रश्न 2.
कवि ने किसे सहर्ष स्वीकारा है?
उत्तर:
कवि ने अपने जीवन के सुख-दुख, गरबीली गरीबी, जीवन के गहरे अनुभवों आदि सब को सहर्ष स्वीकार किया है। कवि ने अपने भीतर प्रवाहित होने वाली नूतन भावनाओं के प्रवाह और प्रिय के संयोग तथा वियोग दोनों को सहर्ष स्वीकार किया है।

प्रश्न 3.
कवि के पास जो अच्छा-बुरा है, उसमें कौन-सी विशिष्टता तथा मौलिकता है?
उत्तर:
कवि के पास अच्छा-बुरा बहुत कुछ है। उसके पास गरबीली गरीबी है। गहरे अनुभव तथा प्रौढ़ विचार भी हैं। इसके साथ-साथ उसके पास कुछ नूतन भावनाएँ भी हैं। कवि की ये सब उपलब्धियाँ मौलिक तथा विशिष्ट हैं। कारण यह है कि कवि ने इन्हें अपने प्रिय के प्रेम के कारण प्राप्त किया है। ये इसलिए भी मौलिक हैं कि कवि ने इनको अपने जीवन में खूब भोगा है।

प्रश्न 4.
मुसकाता चाँद किसका प्रतीक है?
उत्तर:
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में चाँद कवि के प्रिय के आलोक अथवा उसके खिले हुए चेहरे का प्रतीक है। इसलिए कवि कहता है कि जिस प्रकार चाँद रात भर धरती पर अपना प्रकाश फैलाता है, उसी प्रकार प्रिय का चेहरा कवि को आनंद प्रदान करता है।

प्रश्न 5.
कवि पाताली अँधेरे की गुफाओं के विवरों में लापता होने का दंड क्यों भोगना चाहता है?
उत्तर:
कवि अब प्रिय के अत्यधिक प्रेम को सहन नहीं करना चाहता। वह सोचता है कि प्रिय के प्यार के बिना विरह-वेदना सहकर उसका व्यक्तित्व अत्यधिक सुदृढ़ हो जाएगा। प्रिय के प्रेम के संयोग पक्ष को भोगकर उसकी आत्मा तथा उसकी संकल्प-शक्ति दोनों ही कमजोर हो गए हैं। इसलिए वह विरह के पाताली अँधेरे की गुहाओं में लापता हो जाना चाहता है।

प्रश्न 6.
जितना भी उड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
इन पद्य पंक्तियों का भावार्थ क्या है?
उत्तर:
कवि यह कहना चाहता है कि उसने स्नेह को खुलकर लोगों में बाँटा है। लेकिन जितना वह इसे बाँटता है, उतना ही और बढ़ता जाता है। लगता है कि कवि के हृदय में प्रेम का एक झरना प्रवाहित हो रहा है। यह झरना मानों मीठे पानी का सोता है, जो भी नहीं सूखता। कवि अन्य लोगों में इस स्नेह को जितना अधिक बाँटता है, उतना ही वह झरना और भरता चला जाता है।

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प्रश्न 7.
कवि के लिए प्रेम का सुखद पक्ष असह्य क्यों बन गया है?
उत्तर:
कवि सोचता है कि प्रेम के सुखद पक्ष के कारण उसके मन में प्रिय की ममता बादलों के समान मँडराती रहती है जिससे उसकी आत्मा कमजोर और असमर्थ हो गई है। प्रिय के प्रेम के कारण उसका अपना व्यक्तित्व भी कमज़ोर होता जा रहा है। इसलि कवि प्रिय के वियोग का दंड भोगना चाहता है। वह यह भी सोचता है कि प्रिय की प्रेममयी यादें अकेलेपन में भी उसे प्रसन्न रखेंगी।

प्रश्न 8.
कवि ने अपने जीवन में सब कुछ सहर्ष क्यों स्वीकार किया है?
उत्तर:
कवि ने अपने जीवन में जो कुछ भी भोगा है अर्थात् सुख-दुख जो कुछ भी पाया है चाहे वह गरीबी हो या विचार वैभव; वह सब उसके प्रिय को भी प्यारा है। कवि की इन उपलब्धियों के पीछे उसके प्रिय की प्रेरणा काम करती रही है। इसलिए उसने अपने जीवन में सब कुछ सहर्ष स्वीकार किया है।

प्रश्न 9.
कवि पाताली अँधेरे की गुहाओं में और विवरों में तथा धुएँ के बादलों में लापता क्यों होना चाहता है?
उत्तर:
कवि अपने प्रिय के स्नेह के संयोग पक्ष से अब छुटकारा चाहता है। वह सोचता है कि उसके प्रेम में ग्लानि छिपी हुई है। अतः वह प्रिय के प्रेम के संयोग पक्ष के उजाले को सहन नहीं कर पाता। इसलिए वह पाताली अंधेरे की गुफाओं अर्थात् वियोग के धुएँ के बादलों में लापता हो जाना चाहता है।

प्रश्न 10.
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता के आधार पर सिद्ध कीजिए कि कवि एक स्वाभिमानी व्यक्ति है।
उत्तर:
कवि ने अपनी गरीबी को गरबीली कहा है। वह अपनी गरीबी के कारण स्वयं को लाचार अनुभव नहीं करता और न ही किसी की सहानुभूति चाहता है, बल्कि कवि ने गरीबी की बजाय अपनी मौलिक वैचारिकता को अधिक महत्त्व दिया है।

प्रश्न 11.
‘जाने क्या रिश्ता है?’ का गूढ़ अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर:
कवि और उसके प्रिय के बीच एक विचित्र प्रकार का संबंध है। जितना वह अपने प्रेम को व्यक्त करता है, उतना ही वह भर-भर आता है। भाव यह है कि कवि का प्रेम अनंत और गहरा है। कवि पूर्णतया अपने प्रिय के प्रति समर्पित है। उसका प्रेम प्रगाढ़ है।

प्रश्न 12.
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता के आधार पर कविवर मुक्तिबोध के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
इस कविता के पढ़ने से पता चलता है कि मुक्तिबोध का व्यक्तित्व गंभीर, विचारशील, सुदृढ़ होने के साथ-साथ मौलिक चिंतन की छाप लिए हुए है। भले ही कवि गरीब है, लेकिन उसे अपनी गरीबी पर भी गर्व है। कवि ने धन का संग्रह करने के लिए अनुचित साधनों का कभी भी प्रयोग नहीं किया। वे विचार-वैभव की तुलना में धन-वैभव को तुच्छ मानते थे। उनके पास एक गहरी सोच और समृद्ध विचार सपंदा थी। कवि की अभिव्यक्ति पूर्णतया मौलिक थी।

प्रश्न 13.
क्या प्रेम के संयोग पक्ष के साथ-साथ वियोग पक्ष भी आवश्यक है? कविता के आधार पर सिद्ध कीजिए।
उत्तर:
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में मुक्तिबोध ने प्रेम के संयोग पक्ष के साथ-साथ वियोग पक्ष को भी आवश्यक माना है। इसीलिए तो वह कहता है कि “जो कुछ भी मेरा है, वह तुम्हें प्यारा है।” आगे चलकर कवि अपने विभिन्न रिश्ते की बात करता है। वह प्रिय के प्रसन्न चेहरे की तुलना मुसकाते चाँद के साथ करता है। परंतु अगली पंक्तियों में वह प्रिय को भूलने का दंड भोगना चाहता है। वह प्रिय के रमणीय उजाले को सहन नहीं कर पाता और उसके वियोग को पाना चाहता है, क्योंकि कवि को लगता है कि इस स्थिति में उसे प्रिय का सहारा प्राप्त होगा। कवि के विचारानुसार प्रेम के संयोग और वियोग दोनों पक्षों में ही प्रेम की संपूर्णता है।

प्रश्न 14.
ममता सदा हितकर क्यों नहीं होती?
उत्तर:
ममता मनुष्य को पंगु कर देती है। ममता देने वाला व्यक्ति अपने प्रिय को प्रेम के उजाले से आच्छादित कर देता है जिससे प्रिय-पात्र का आत्मविश्वास कमज़ोर पड़ जाता है। वह प्रिय की कृपा पर ही निर्भर हो जाता है। उसका आत्मबल नष्ट हो जाता है। अतः ममता के सहारे अधिक समय तक निर्भर न रहकर मनुष्य को अपने व्यक्तित्व को दृढ़ करना चाहिए।

प्रश्न 15.
कवि दंड किसे और क्यों कहता है?
उत्तर:
अपने प्रिय से वंचित होने के अनुभव को ही कवि ने दंड कहा है। इसीलिए कवि ने अपने प्रिय से विमुक्त होने की कामना की है। प्रथम स्थिति में कवि को प्रिय की आत्मीयता बहलाती और सहलाती है। उसे लगता है कि वह प्रिय के बिना जी नहीं पाएगा। अतः दूसरी स्थिति में वियोग का दंड भोगना चाहता है ताकि वह अपने व्यक्तित्व को सुदृढ़ कर सके।

प्रश्न 16.
छटपटाती छाती को भवितव्यता डराती है-इस पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट करें।
उत्तर:
कवि को प्रिय के संयोग जनित प्रकाश अर्थात् सुखानुभूति से भविष्य की आशंकाएँ डराने लगी हैं। यह सोचकर कवि की छाती अर्थात् हृदय छटपटाने लगता है कि यदि भविष्य में उसे प्रिय का प्रेम नहीं मिलेगा तो वह कैसे जी सकेगा? प्रिय के बिना उसका क्या होगा?

प्रश्न 17.
कवि अपने प्रिय को क्यों नहीं भूल पाता?
उत्तर:
कवि अपने प्रिय को इसलिए नहीं भूल पाता, क्योंकि उसका जीवन प्रिय से अत्यधिक प्रभावित रहा है। प्रिय ने उसके जीवन की सभी कमजोरियों तथा उपलब्धियों को स्वीकार किया है और गरीबी में भी उसका साथ दिया है। कवि के प्रत्येक संवेदन को जागृत करने में उसके प्रिय का सहयोग रहा है। उसके बिना तो वह जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता।

प्रश्न 18.
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता किसको व क्यों स्वीकारने की प्रेरणा देती है?
उत्तर:
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता हमें जीवन के सुख-दुख, क्षमता अक्षमता तथा गरीबी-अमीरी आदि सभी उपलब्धियों को स्वीकार करने की प्रेरणा देती है। हमारा प्रेरणा-स्रोत अर्थात् प्रिय इन सब स्थितियों को स्वीकार कर लेता है। इसलिए हमारे प्रेरणा-स्रोत अर्थात् प्रिय हमारे लिए वरदान के समान हैं। अतः कवि के अनुसार गरबीली गरीबी, मौलिक विचार तथा गहरे अनुभव सभी स्वीकार करने योग्य हैं।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. मुक्तिबोध का जन्म कब हुआ?
(A) 13 नवंबर, 1918
(B) 13 नवंबर, 1917
(C) 13 दिसंबर, 1920
(D) 10 नवंबर, 1922
उत्तर:
(B) 13 नवंबर, 1917

2. मुक्तिबोध का पूरा नाम क्या है?
(A) गजानन माधव मुक्तिबोध
(B) गजाधर मुक्तिबोध
(C) राम माधव मुक्तिबोध
(D) दयानंद माधव मुक्तिबोध
उत्तर:
(A) गजानन माधव मुक्तिबोध

3. मुक्तिबोध का जन्म किस प्रदेश में हुआ?
(A) उत्तरप्रदेश में
(B) दिल्ली में
(C) मध्यप्रदेश में
(D) राजस्थान में
उत्तर:
(C) मध्यप्रदेश में

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4. मुक्तिबोध का जन्म कहाँ हुआ?
(A) मुरैना जनपद के शिवपुर कस्बे में
(B) मुरैना जनपद के रामपुर कस्बे में
(C) ग्वालियर जनपद के श्योपुर में
(D) भिंड जनपद के कृष्णापुरा में
उत्तर:
(C) ग्वालियर जनपद के श्योपुर में

5. मुक्तिबोध के पिता का नाम क्या था?
(A) कृष्णकुमार मुक्तिबोध
(B) रामकुमार मुक्तिबोध
(C) कृष्णमाधव मुक्तिबोध
(D) माधव मुक्तिबोध
उत्तर:
(D) माधव मुक्तिबोध

6. मुक्तिबोध के पिता किस पद पर नियुक्त थे?
(A) आयकर इंस्पैक्टर
(B) पुलिस इंस्पैक्टर
(C) सिविल सप्लाई इंस्पैक्टर
(D) स्वास्थ्य इंस्पैक्टर
उत्तर:
(B) पुलिस इंस्पैक्टर

7. मुक्तिबोध ने किस विश्वविद्यालय से एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की?
(A) मुंबई विश्वविद्यालय
(B) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
(C) नागपुर विश्वविद्यालय
(D) लखनऊ विश्वविद्यालय
उत्तर:
(C) नागपुर विश्वविद्यालय

8. मुक्तिबोध ने किस वर्ष एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की?
(A) सन् 1953 में
(B) सन् 1954 में
(C) सन् 1951 में
(D) सन् 1952 में
उत्तर:
(A) सन् 1953 में

9. मुक्तिबोध ने किस विषय में एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की?
(A) अंग्रेज़ी
(B) भाषा विज्ञान
(C) इतिहास
(D) हिंदी
उत्तर:
(D) हिंदी

10. मुक्तिबोध का निधन कब हुआ?
(A) 12 सितंबर, 1963
(B) 11 सितंबर, 1964
(C) 18 जनवरी, 1960
(D) 11 सितंबर, 1965
उत्तर:
(B) 11 सितंबर, 1964

11. मुक्तिबोध का निधन किस रोग से हुआ?
(A) मलेरिया
(B) क्षय रोग
(C) मधुमेह
(D) मैनिनजाइटिस
उत्तर:
(D) मैनिनजाइटिस

12. मुक्तिबोध का निधन कहाँ हुआ?
(A) नयी दिल्ली
(B) नागपुर
(C) ग्वालियर
(D) मुरैना
उत्तर:
(A) नयी दिल्ली

13. मुक्तिबोध की आरंभिक रचनाएँ किस पत्रिका में प्रकाशित हुईं?
(A) नवजीवन
(B) दिनमान
(C) सरिता
(D) कर्मवीर
उत्तर:
(D) कर्मवीर

14. मुक्तिबोध ने कहाँ पर ‘मध्य भारत प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना की?
(A) नागपुर
(B) उज्जैन
(C) ग्वालियर
(D) मुरैना
उत्तर:
(B) उज्जैन

15. हँस पत्रिका’ के संपादकीय विभाग में मुक्तिबोध ने कब स्थान प्राप्त किया?
(A) सन् 1943 में
(B) सन् 1942 में
(C) सन् 1945 में
(D) सन् 1946 में
उत्तर:
(C) सन् 1945 में

16. मुक्तिबोध ने किस कॉलेज में प्राध्यापक के रूप में कार्य किया?
(A) दिग्विजय कॉलेज
(B) एस०डी० कॉलेज
(C) डी०ए०वी० कॉलेज
(D) नागपुर कॉलेज
उत्तर:
(A) दिग्विजय कॉलेज

17. ‘तार सप्तक’ में मुक्तिबोध की कितनी कविताएँ प्रकाशित हुईं?
(A) बारह कविताएँ
(B) सत्रह कविताएँ
(C) अट्ठाईस कविताएँ
(D) पंद्रह कविताएँ
उत्तर:
(B) सत्रह कविताएँ

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18. ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ में कुल कितनी कविताएँ सम्मिलित हैं?
(A) 18
(B) 16
(C) 28
(D) 27
उत्तर:
(C) 28

19. ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ के रचयिता हैं
(A) धर्मवीर भारती
(B) रघुवीर सहाय
(C) शमशेर बहादुर सिंह
(D) मुक्तिबोध
उत्तर:
(D) मुक्तिबोध

20. ‘भूरी-भूरी खाक धूल’ किस विधा की रचना है?
(A) कविता संग्रह
(B) प्रबंध काव्य
(C) नाटक
(D) निबंध
उत्तर:
(A) कविता संग्रह

21. ‘भूरी-भूरी खाक धूल’ के कवि का नाम है
(A) हरिवंश राय बच्चन
(B) मुक्तिबोध
(C) रघुवीर सहाय
(D) निराला
उत्तर:
(B) मुक्तिबोध

22. ‘काठ का सपना’ के रचयिता हैं
(A) अज्ञेय
(B) नागार्जुन
(C) मुक्तिबोध
(D) कुँवर नारायण
उत्तर:
(C) मुक्तिबोध

23. ‘सतह से उठता आदमी किस विधा की रचना है?
(A) नाटक
(B) काव्य संग्रह
(C) निबंध संग्रह
(D) कथा साहित्य
उत्तर:
(D) कथा साहित्य

24. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ मुक्तिबोध की किस काव्य रचना में संकलित है?
(A) भूरी-भूरी खाक धूल
(B) चाँद का मुँह टेढ़ा है
(C) काठ का सपना
(D) विपात्र
उत्तर:
(A) भूरी-भूरी खाक धूल

25. ‘कामायनी-एक पुनर्विचार’ के रचयिता हैं
(A) हरिवंशराय बच्चन
(B) रघुवीर सहाय
(C) आलोक धन्वा
(D) मुक्तिबोध
उत्तर:
(D) मुक्तिबोध

26. ‘कामायनी-एक पुनर्विचार’ किस विधा की रचना है?
(A) उपन्यास
(B) कथा साहित्य
(C) आलोचना
(D) काव्य संग्रह
उत्तर:
(C) आलोचना

27. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता किसे संबोधित है?
(A) कवि के प्रिय को
(B) पाठकों को
(C) साहित्यकारों को
(D) ईश्वर को
उत्तर:
(A) कवि के प्रिय को

28. ‘भीतर की सरिता’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) उपमा
(B) रूपक
(C) अनुप्रास
(D) रूपकातिशयोक्ति
उत्तर:
(D) रूपकातिशयोक्ति

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29. ‘गरबीली गरीबी’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) उपमा
(B) अनुप्रास
(C) श्लेष
(D) रूपक
उत्तर:
(B) अनुप्रास

30. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में किस छंद का प्रयोग हुआ है?
(A) चौपाई
(B) सवैया
(C) मुक्त
(D) दोहा
उत्तर:
(C) मुक्त

31. ‘मीठे पानी का सोता’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) अनुप्रास
(B) रूपकातिशयोक्ति
(C) रूपक
(D) उपमा
उत्तर:
(B) रूपकातिशयोक्ति

32. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में कवि ने मुख्यतः किस शैली का प्रयोग किया है?
(A) वर्णनात्मक शैली
(B) संबोधन शैली
(C) आलोचनात्मक शैली
(D) गीति शैली
उत्तर:
(B) संबोधन शैली

33. ‘मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) अनुप्रास
(B) रूपक
(C) उपमा
(D) उत्प्रेक्षा
उत्तर:
(D) उत्प्रेक्षा

34. ‘ममता के बादल’ में कौन-सा अलंकार है?
(A) रूपक
(B) उपमा
(C) रूपकातिशयोक्ति
(D) मानवीकरण
उत्तर:
(A) रूपक

35. ममता के बादल की मँडराती कोमलता कहाँ पिराती है?
(A) बाहर
(B) सर्वत्र
(C) भीतर
(D) बीच में
उत्तर:
(C) भीतर

36. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में कवि ने गरीबी को कैसा बताया है?
(A) शर्मीली
(B) सुखदायक
(C) दुखभरी
(D) गरबीली
उत्तर:
(D) गरबीली

37. प्रस्तुत कविता में बहलाती सहलाती आत्मीयता क्या नहीं होती?
(A) बरदाश्त
(B) फालतू
(C) कम
(D) जहरीली
उत्तर:
(A) बरदाश्त

38. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता में कवि की आत्मा कैसी हो गई है?
(A) कमज़ोर
(B) दृढ़
(C) संवेदनशील
(D) सक्षम
उत्तर:
(A) कमज़ोर

39. ‘काठ का सपना’ किस विधा की रचना है?
(A) काव्य संग्रह
(B) कथा साहित्य
(C) नाटक
(D) निबंध संग्रह
उत्तर:
(B) कथा साहित्य

40. ‘सहर्ष स्वीकारा है। कविता में कवि कहाँ लापता होना चाहता है?
(A) वायु में
(B) आकाश में
(C) बादलों में
(D) धुएँ के बादलों में
उत्तर:
(D) धुएँ के बादलों में

41. ‘पाताली अँधेरे की गुहाओं में विवरों में यहाँ ‘विवरों का क्या अर्थ है?
(A) बादल
(B) बिल
(C) गुफा
(D) शिविर
उत्तर:
(B) बिल

42. ‘सहर्ष स्वीकारा है’ शीर्षक कविता में किस भाव की प्रधानता है?
(A) क्रूरता
(B) रुक्षता
(C) कठोरता
(D) विनय
उत्तर:
(D) विनय

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43. ‘परिवेष्टित’ शब्द का क्या अर्थ है?
(A) पगड़ी
(B) परिजन
(C) चारों ओर से घिरा हुआ
(D) परिक्रमा
उत्तर:
(C) चारों ओर से घिरा हुआ

44. भवितव्यता किसे डराती है?
(A) संपाती को
(B) छाती को
(C) बिलखाती को
(D) पराती को
उत्तर:
(B) छाती को

सहर्ष स्वीकारा है पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर |

[1] ज़िंदगी में जो कुछ है, जो भी है
सहर्ष स्वीकारा है।
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है वह तुम्हें प्यारा है।
गरबीली गरीबी यह, ये गंभीर अनुभव सब
यह विचार-वैभव सब
दृढ़ता यह, भीतर की सरिता यह अभिनव सब
मौलिक है, मौलिक है
इसलिए कि पल-पल में
जो कुछ भी जाग्रत है अपलक है
संवेदन तुम्हारा है!! [पृष्ठ-30]

शब्दार्थ-जिंदगी = जीवन। सहर्ष = प्रसन्नता के साथ। स्वीकारा = मन से माना। गरबीली = अभिमान से भरी हुई। गंभीर = गहरा। विचार-वैभव = विचारों की संपत्ति। दृढ़ता = मजबूती। सरिता = नदी (भावनाओं का प्रवाह)। अभिनव = नया। मौलिक = नया। पल = क्षण। जाग्रत = जागा हुआ जीवित। अपलक = बिना पलकें झपकाए हुए। संवेदन = अनुभूति।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित कविता ‘सहर्ष स्वीकारा है’ से अवतरित है। इसके कवि गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इस कविता में कवि यह बताना चाहता है कि जीवन में उसे जो कुछ प्राप्त हुआ है, उसने उसे बड़ी प्रसन्नता के साथ स्वीकार कर लिया है। कवि को किसी प्रकार की शिकायत नहीं है। यहाँ कवि ईश्वर को संबोधित करता हुआ कहता है कि

व्याख्या-मुझे जीवन में जो कुछ मिला है अथवा पाया है, उसे मैंने प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार कर लिया है। मुझे जीवन की उपलब्धियों पर बहुत गर्व है। इसलिए जीवन में मेरा जो कुछ अपना है, वह सब उस अनंत सत्ता को भी प्रिय है। कवि पुनः स्पष्ट करता है कि यह मेरी गर्व भरी गरीबी, मेरे जीवन के गहरे अनुभव, मेरी यह विचार संपदा, मेरे मन की यह मजबूती और मेरे हृदय में जो भावनाओं का एक नया प्रवाह है, वह सब कुछ नया है और मौलिक है। भाव यह है कि उस ईश्वर के कारण ही मैं प्रत्येक स्थिति में खुशी-खशी जी रहा हूँ। तुमने ही मुझे अपनी गरीबी पर गर्व करना सिखाया है। मैंने जीवन के गंभीर अनुभवों तथा विचारों की संपन्नता तुमसे ही प्राप्त की है। मैं अपने इन मौलिक विचारों के साथ दृढ़तापूर्वक जी रहा हूँ। मेरे मन में नवीन विचारों की एक नदी हमेशा प्रवाहित होती रहती है। अतः प्रत्येक क्षण में जो कुछ मेरे अंदर जागता रहता है और लगातार मेरे जीवन को गतिशील बनाता है, उसके पीछे तुम्हारी प्रेरणा ही काम कर रही है। भाव यह है कि मैंने अपने जीवन में उस असीम सत्ता से प्रेरणा प्राप्त करके ही अपने व्यक्तित्व का निर्माण किया है।

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने असीम सत्ता को संबोधित किया है। साथ ही जीवन में मिलने वाली उपलब्धियों तथा कमियों को सहर्ष स्वीकार किया है।
  2. रहस्यवादी भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
  3. ‘भीतर की सरिता’ कवि की आंतरिक गहन अनुभूतियों का प्रतीक है।
  4. ‘भीतर की सरिता’ में रूपकातिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग है तथा ‘पल-पल’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
  5. इस पद्य में कवि ने साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग किया है जिसमें संस्कृत के तत्सम् शब्दों के अतिरिक्त उर्दू के शब्दों का मिश्रण किया गया है।
  6. संबोधनात्मक शैली है तथा संपूर्ण कविता में लाक्षणिक पदावली का भी प्रयोग है।
  7. मुक्त छंद का सफल प्रयोग हुआ है।

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) इस कविता में कवि ने किसे संबोधित किया है?
(ग) कवि अपने जीवन को सहर्ष स्वीकार क्यों करता है?
(घ) कवि अपनी उपलब्धियों के लिए किसे श्रेय देता है और क्यों?
(ङ) कवि अपनी किस उपलब्धि पर गर्व करता है?
उत्तर:
(क) कवि का नाम-गजानन माधव मुक्तिबोध कविता का नाम-सहर्ष स्वीकारा है।

(ख) इस कविता के द्वारा कवि असीम सत्ता को संबोधित करता है।

(ग) कवि अपनी प्रत्येक उपलब्धि को इसलिए प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करता है, क्योंकि असीम सत्ता की प्रेरणा से ही उसे यह सब प्राप्त हुआ है। दूसरा, उसकी प्रत्येक उपलब्धि उस असीम सत्ता को भी प्रिय लगती है।

(घ) कवि अपनी उपलब्धियों के लिए उस असीम सत्ता प्रियतम अर्थात् परमात्मा को श्रेय देता है। कारण यह है कि उसी से प्रेरणा पाकर ही कवि अपनी कविताओं में मौलिक अनुभव, विचार तथा अनुभूतियाँ प्राप्त कर पाया है। इसलिए कवि अपनी गरीबी के साथ इन सब पर गर्व करता है।

(ङ) कवि अपनी गरीबी, जीवन के गहरे अनुभव, गंभीर चिंतन, व्यक्तित्व की दृढ़ता तथा मन में प्रवाहित होने वाली भावनाओं की नदी पर गर्व करता है।

[2] जाने क्या रिश्ता है, जाने क्या नाता है
जितना भी उँडेलता हूँ, भर-भर फिर आता है
दिल में क्या झरना है?
मीठे पानी का सोता है
भीतर वह, ऊपर तुम
मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात-भर
मुझ पर त्यों तुम्हारा ही खिलता वह चेहरा है! [पृष्ठ-30]

शब्दार्थ-रिश्ता = संबंध। उँडेलना = खाली करना, देना। सोता = झरना।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2′ में संकलित कविता ‘सहर्ष स्वीकारा है’ से अवतरित है। इसके कवि गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इसमें कवि स्वीकार करता है कि वह रहस्यात्मक शक्ति ही उसकी प्रेरणा का स्रोत है।

व्याख्या कवि उस अनंत सत्ता को संबोधित करता हुआ कहता है कि मुझे यह भी पता नहीं है कि तुम्हारे और मेरे बीच स्नेह का न जाने ऐसा कौन-सा रिश्ता और संबंध है कि मैं जितना भी अपने हृदय के स्नेह को व्यक्त करता हूँ अथवा लोगों में उसे बाँटता हूँ, उतना ही वह बार-बार भर जाता है। ऐसा लगता है कि मानों मेरे हृदय में कोई मधुर झरना है जिससे लगातार स्नेह की वर्षा होती रहती है अथवा मेरे भीतर प्रेम की कोई नदी (झरना) है जो हमेशा स्नेह रूपी जल से छलकती रहती है। मेरे हृदय में तो तुम्हारा ही प्रेम विद्यमान है। मेरे रा यह प्रसन्न चेहरा इस प्रकार विद्यमान रहता है, जैसे पृथ्वी पर रात के समय चंद्रमा मुस्कुराता रहता है अर्थात् जैसे चाँद रात को रोशनी देता है, उसी प्रकार हे मेरे ईश्वर! तुम मेरे हृदय को प्रेम से प्रकाशित करते रहते हो।

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने परमात्मा को संबोधित किया है, क्योंकि वही कवि के लिए प्रेरणा का काम करता है।
  2. संपूर्ण पद्य में प्रश्न तथा संदेह अलंकारों का सफल प्रयोग हुआ है जिसके कारण रहस्यात्मकता उत्पन्न हो गई है।
  3. ‘झरना’ तथा ‘मीठे पानी का सोता’ में रूपकातिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग हुआ है।
  4. ‘मुसकाता चाँद’ ………………. चेहरा है’ में उत्प्रेक्षा अलंकार का सफल प्रयोग हुआ है।
  5. ‘भर-भर फिर’ में अनुप्रास तथा पुनरुक्ति प्रकाश अलंकारों का सफल प्रयोग है। इसी प्रकार ‘धरती पर रात-भर’ में अनुप्रास अलंकार है।
  6. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग हुआ है तथा साथ ही भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  7. संबोधन शैली का प्रयोग हुआ है तथा मुक्त छंद है।
  8. माधुर्य गुण होने के कारण शृंगार रस का परिपाक हुआ है।

HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-
(क) कवि तथा कविता का नाम लिखिए।
(ख) कवि ने अपने प्रिय अर्थात परमात्मा के प्रति अपने रिश्ते को किस प्रकार व्यक्त किया है?
(ग) ‘जितना भी उँडेलता हूँ, उतना ही भर-भर आता है’ से कवि का क्या अभिप्राय है?
(घ) कवि ने अपने दिल के झरने को ‘मीठे पानी का सोता’ क्यों कहा है?
(ङ) कवि ने कौन-से अटूट रिश्ते को प्रकट किया है?
उत्तर:
(क) कवि का नाम-गजानन माधव मुक्तिबोध कविता का नाम-सहर्ष स्वीकारा है।

(ख) कवि और परमात्मा के मध्य एक कथनीय प्रेम है। कवि ने उस अनंत सत्ता के प्रेम की तुलना एक झरने के साथ की है जो उसे बार-बार भिगोकर आनंद प्रदान करता रहता है। भाव यह है कि कवि का प्रेम रूपी झरना कभी सूखने वाला नहीं है।

(ग) यहाँ कवि यह कहना चाहता है कि वह अपने हृदय के स्नेह को जितना बाँटता है, वह उतना अधिक बढ़ता जाता है, वह कभी भी कम नहीं होता। इसलिए कवि ने स्वीकार किया है कि उसके हृदय में प्रेम का झरना प्रवाहित हो रहा है।

(घ) ‘मीठे पानी का सोता’ कहने का अभिप्राय यह है कि कवि को अपने मालिक (ईश्वर) के प्रति प्रगाढ़ प्रेम है जो कि कभी समाप्त नहीं हो सकता। यह प्रेम मधुर भी है।

(ङ) इन पंक्तियों में कवि ने आत्मा और परमात्मा के अटूट रिश्ते को प्रकट किया है।

[3] सचमुच मुझे दंड दो कि भूलूँ मैं भूलूँ मैं
तुम्हें भूल जाने की
दक्षिण ध्रुवी अंधकार-अमावस्या
शरीर पर, चेहरे पर, अंतर में पा लूँ मैं
झेलूँ मैं, उसी में नहा लूँ मैं
इसलिए कि तुमसे ही परिवेष्टित आच्छादित
रहने का रमणीय यह उजेला अब
सहा नहीं जाता है।
नहीं सहा जाता है।
ममता के बादल की मँडराती कोमलता-
भीतर पिराती है
कमज़ोर और अक्षम अब हो गई है आत्मा यह
छटपटाती छाती को भवितव्यता डराती है
बहलाती सहलाती आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है!! [पृष्ठ 30-31]

शब्दार्थ-दक्षिण ध्रवी अंधकार = दक्षिण ध्रुव पर गहरा अंधकार। अमावस्या = काली रात। अंतर = हृदय। परिवेष्टित = चारों ओर से घिरा हुआ। आच्छादित = ढका हुआ, छाया हुआ। रमणीय = सुंदर, मनोहर। उजेला = रोशनी, प्रकाश। ममता = मोह-प्रेम । मँडराती = फैली हुई। पिराती = पीड़ा पहुँचाती हुई। अक्षम = कमजोर। भवितव्यता = भविष्य की आशंका। बहलाती मन को प्रसन्न करती हुई। सहलाती = पीड़ा को कम करती हुई। आत्मीयता = अपनापन। बरदाश्त = सहन करना।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित कविता ‘सहर्ष स्वीकारा है’ से अवतरित है। इसके कवि गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इस पद्यांश द्वारा कवि ने अपने परमात्मा से वियोग के दंड का वर्णन किया है। इसके साथ ही अपने आशीर्वाद रूपी प्रकाश को स्वयं से हटाने की बात की है।

व्याख्या-कवि अपने परमात्मा को संबोधित करता हुआ कहता है कि वह अपने जीवन में अहंकार के भाव में आकर उसे भूल गया था। अब वह उससे इस भूल की सजा पाना चाहता है। कवि स्वयं के लिए दक्षिणी ध्रुव पर अमावस की रात्रि के समान फैलने वाले अंधकार जैसी सजा पाना चाहता है। वह उस गहरे अंधकार को अपने शरीर, चेहरे और अन्तर्मन में झेलना चाहता है और इसी में नहाना चाहता है।

कवि सोचता है कि उसका वर्तमान जीवन उस ईश्वर के प्रेम से पूर्णतया घिरा हुआ है। उसके प्रेम का यह उजाला बड़ा ही मनोहर एवं आकर्षक है। परन्तु यह उजाला कवि के लिए असहनीय बन गया है। वह उसे सहन नहीं कर सकता। उस अनंत सत्ता की ममता कवि के मन में बादल के समान छाई हुई है जो उसके हृदय को पीड़ित करती है। इसलिए अब कवि की आत्मा दुर्बल और असमर्थ हो गई है। भविष्य की आशंका उसे डरा रही है और उसकी छाती छटपटा रही है। उस प्रियतम की ममता कवि के हृदय को बहलाती, सहलाती और अपनापन दिखाती है, वह कवि से अब सहन नहीं हो पा रही है। भाव यह है कि कवि अपने अहंकार की सजा पकार अपने पापों से मुक्त होना चाहता है।

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने स्वीकार किया है कि वह अपने ही गर्व के बहाव में बहकर उस परमात्मा को भूल गया है जिसकी वह उस परमात्मा से सजा पाना चाहता है।
  2. ममता के बादल, तुमसे ही …………………. उजेला तथा दक्षिणी ध्रुवी अंधकार-अमावस्या आदि में रूपक अलंकार का सफल प्रयोग है।
  3. आत्मीयता तथा कोमल भावनाओं का सुंदर मानवीकरण किया गया है।
  4. ‘शरीर पर, चेहरे पर’, ‘मँडराती कोमलता-भीतर पिराती’ और ‘छटपटाती छाती’ में अनुप्रास अलंकार का सफल प्रयोग हुआ है।
  5. ‘ई’ स्वर के कारण स्वर मैत्री का प्रयोग है।
  6. यहाँ कवि ने संस्कृतनिष्ठ साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग किया है, साथ ही कुछ नवीन शब्दों का भी प्रयोग किया है।
  7. संबोधन शैली है तथा मुक्त छंद का प्रयोग हुआ है।
  8. शांत रस का प्रयोग है।

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-
(क) कवि अपने प्रियतम (परमात्मा) से कौन-सा दंड पाना चाहता है और क्यों?
(ख) कवि किस रमणीय उजाले की बात कर रहा है जो उसके लिए असहनीय है?
(ग) कौन-सी भावना कवि को पीड़ा पहुँचाती है?
(घ) कवि अपने भविष्य के प्रति आशंकित क्यों है?
(ङ) कवि ने अपने प्रियतम को भूलने के दुख की तुलना किससे की है? .
उत्तर:
(क) कवि अपने प्रियतम (परमात्मा) से वियोग का दंड पाना चाहता है। कवि को लगता है कि उस प्रियतम के प्रेम और कोमलता ने उसकी आत्मा को कमजोर बना दिया है। अतः अब वह उसकी ममता को सहन करने में असमर्थ हो गया है। त्ता का प्रेम ही कवि के लिए रमणीय उजाला है जिसे कवि अब सहन नहीं कर पा रहा है। इसलिए कवि अब वियोग का दंड भोगना चाहता है।

(ग) उस अनंत सत्ता की ममता उसके मन में बादल के समान छाई हुई है। यही भावना अब कवि को पीड़ा पहुँचाती है जिससे वह अब मुक्त होना चाहता है।

(घ) कवि अपने भविष्य के प्रति इसलिए आशंकित है, क्योंकि अपराधी होने के कारण उसकी आत्मा छटपटाती रहती है।

(ङ) कवि ने अपने प्रियतम को भूलने के दुख की तुलना दक्षिणी ध्रुवी अमावस्या के साथ की है, जहाँ हमेशा घना काला और गहरा अंधकार छाया रहता है।

[4] सचमुच मुझे दंड दो कि हो जाऊँ
पाताली अँधेरे की गुहाओं में विवरों में
धुएँ के बादलों में
बिलकुल मैं लापता
लापता कि वहाँ भी तो तुम्हारा ही सहारा है!
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
या मेरा जो होता-सा लगता है, होता-सा संभव है
सभी वह तुम्हारे ही कारण के कार्यों का घेरा है, कार्यों का वैभव है
अब तक तो जिंदगी में जो कुछ था, जो कुछ है
सहर्ष स्वीकारा है
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
वह तुम्हें प्यारा है। [पृष्ठ-32]

शब्दार्थ-पाताली अँधेरा = धरती के नीचे पाताल में पाया जाने वाला अंधकार। गुहा = गुफा। विवर = बिल। लापता होना = गायब हो जाना। कारण = मूल प्रेरणा। घेरा = फैलाव। वैभव = संपदा, समृद्धि।

प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह भाग 2’ में संकलित कविता ‘सहर्ष स्वीकारा है’ से अवतरित है। इसके कवि गजानन माधव मुक्तिबोध हैं। इसमें कवि कहता है कि उसने अपने प्रियतम भाव परमात्मा की प्रेरणा से आज तक जो प्राप्त किया है उसे उसने प्रसन्नतापर्वक स्वीकार कर लिया है। प्रस्तत पद्यांश द्वारा कवि स्वयं को उस ईश्वर देता है।

व्याख्या-कवि अपनी उस अनंत सत्ता को संबोधित करता हुआ कहता है कि तुम मुझे अपने वियोग का ऐसा दंड दो कि मैं पाताल लोक की अंधेरी गुफाओं की सूनी सुरंगों में और दम घोंटने वाले धुएँ के बादलों में बिल्कुल खो जाऊँ अर्थात् उनमें विलीन हो जाऊँ। मेरा जीवन उस घुटन से भले ही समाप्त हो जाए, पर मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। मैं इस खो जाने वाले अकेलेपन में भी खुश रहूँगा, क्योंकि वहाँ भी मुझे तुम्हारा आश्रय मिलता रहेगा। तुम्हारी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। अतः मैंने अपने जीवन में जो कुछ प्राप्त किया है अर्थात् मेरी जो उपलब्धियाँ हैं अथवा स्थितियाँ हैं या जो संभव हो सकती हैं अर्थात् मेरे जीवन के विकास तथा ह्रास की जो संभावनाएँ हैं वे मुझे तुम्हारी ही प्रेरणास्वरूप प्राप्त हुई हैं। तुम्हारे प्रेम से प्रेरणा पाकर मैंने जो काम किए हैं या मेरे कामों का जो परिणाम है, मेरा जो कुछ बना है अथवा बिगड़ा है वह सब कुछ तुम्हारी ही देन है। मैं इन सभी स्थितियों को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करता हूँ कि मेरे जीवन के सुखों तथा दुखों से तुम्हें अत्यधिक प्यार है। अतः मैं खुशी-खुशी इनको स्वीकार
करता हूँ।

विशेष-

  1. यहाँ कवि ने अपने प्रियतम (परमात्मा) पर अत्यधिक विश्वास व्यक्त किया है तथा उसके प्रेम की अनन्यता को उजागर किया है।
  2. संपूर्ण पद्य में लाक्षणिक पदावली का सुंदर प्रयोग हुआ है।
  3. सहज, सरल तथा साहित्यिक हिंदी भाषा का सफल प्रयोग हुआ है।
  4. शब्द-चयन सर्वथा सटीक एवं भावाभिव्यक्ति में सहायक है।
  5. मुक्त छंद का प्रयोग है तथा संबोधन शैली है।
  6. संपूर्ण पद्य में वियोग शृंगार का सुंदर परिपाक हुआ है।

पद पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर
प्रश्न-
(क) कवि अपने प्रियतम से दंड क्यों पाना चाहता है?
(ख) कवि ने अपने जीवन में उस अनंत सत्ता को क्या स्थान दिया है?
(ग) कवि पाताली अंधेरों की गुफाओं में क्यों लापता होना चाहता है?
(घ) कवि अपने जीवन के प्रत्येक सुख-दुख को प्रसन्नता से क्यों स्वीकार करना चाहता है?
उत्तर:
(क) कवि अपने प्रियतम से इसलिए दंड पाना चाहता है कि वह अपने उस मालिक के वियोग को सहन कर सके और उसके बिना भी जीना सीख सके।

(ख) कवि के जीवन में उस अनंत सत्ता का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वह सोचता है कि वियोगावस्था में भी वह उस परमात्मा की यादों के सहारे सुखद जीवन जी सकेगा और उसे वियोगजन्य पीड़ा दुख नहीं देगी।

(ग) कवि पाताल की अभेद्य अंधेरी गुफाओं में इसलिए विलीन होना चाहता है कि ताकि वह अपने प्रियतम के बिना अकेला रह सके और उसके वियोग को सह सके।

(घ) कवि अपने जीवन के प्रत्येक सुख-दुख को प्रसन्नता से स्वीकार करना चाहता है कि उसका सुख-दुख भी उस प्रियतम की देन है तथा वह भी उसके सुख-दुख से प्यार करता है। कवि भी उस प्रियतम की यादों के सहारे जीना चाहता है।

HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

सहर्ष स्वीकारा है Summary in Hindi

सहर्ष स्वीकारा है कवि-परिचय

प्रश्न-
गजानन माधव मुक्तिबोध का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
अथवा
गजानन माधव मुक्तिबोध का साहित्यिक परिचय अपने शब्दों में लिखिए।।
उत्तर:
1. जीवन-परिचय-गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म मध्यप्रदेश के मुरैना जनपद के श्योपुर नामक कस्बे में 13 नवंबर, 1917 को हुआ। उनके किसी पूर्वज को मुक्तिबोध की उपाधि प्राप्त हुई थी। इसलिए कुलकर्णी के स्थान पर मुक्तिबोध कहलाने लगे। उनके पिता का नाम माधव मुक्तिबोध था, जो कि पुलिस इंस्पैक्टर थे। वे एक न्यायप्रिय अधिकारी होने के साथ-साथ धर्म तथा दर्शन में अत्यधिक रुचि रखते थे। गजानन माधव का पालन-पोषण बड़े लाड़-प्यार से हुआ। वे एक योग्य विद्यार्थी नहीं थे। 1930 में वे मिडिल की परीक्षा में असफल रहे तथा 1937 में प्रथम प्रयास में बी०ए० की परीक्षा भी उत्तीर्ण नहीं कर सके। उन्होंने सन् 1953 में नागपुर विश्वविद्यालय से एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। विद्यार्थी जीवन से ही वे काव्य रचना करने लगे थे। उनकी आरंभिक रचनाएँ माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा संपादित ‘कर्मवीर’ में प्रकाशित हुई थीं। आरंभ में उन्होंने ‘बड़नगर’ के मिडिल स्कूल में चार महीने तक अध्यापन का कार्य किया। तत्पश्चात् शुजालपुर में नगरपालिका के विद्यालय में एक सत्र तक पढ़ाते रहे। 1942 में उज्जैन चले गए और वहाँ रहते हुए उन्होंने ‘मध्य भारत प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना की। सन् 1945 में ‘हंस’ पत्रिका के संपादकीय विभाग में स्थान पाया। सन् 1946-47 में वे जबलपुर में रहे और 1948 में नागपुर चले गए। 1958 में मुक्तिबोध राजनांदगाँव के दिग्विजय कॉलेज में प्राध्यापक के रूप में कार्य करने लगे। 11 सितंबर, 1964 को इस प्रगतिशील कवि का निधन ‘मैनिनजाइटिस’ रोग के कारण दिल्ली में हुआ।

2. प्रमुख रचनाएँ मुक्तिबोध मुख्यतः कवि-रूप में प्रसिद्ध हुए लेकिन उन्होंने आलोचना, कहानी एवं डायरी लेखन में भी सफलता प्राप्त की। उनकी रचनाओं का विवरण इस प्रकार है-‘तार सप्तक’ में संकलित सत्रह कविताएँ (1943)–’चाँद का मुँह टेढ़ा है’, ‘भूरी-भूरी खाक धूल’ (कविता संग्रह), ‘काठ का सपना’, ‘विपात्र’, ‘सतह से उठता आदमी’ (कथा साहित्य); ‘कामायनी-एक पुनर्विचार’, ‘नयी कविता का आत्मसंघर्ष’, ‘नये साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’, ‘समीक्षा की समस्याएँ’, ‘एक साहित्यिक की डायरी’ (आलोचना); तथा ‘भारत : इतिहास और संस्कृति’ आदि उनकी मुख्य अन्य रचनाएँ हैं। परंतु इनकी कीर्ति का आधार-स्तंभ ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ है, जिसमें कुल 28 कविताएँ संकलित हैं।

3. काव्यगत विशेषताएँ-उनकी काव्यगत विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
(i) वैयक्तिकता तथा सामाजिकता का उद्घाटन मुक्तिबोध की अधिकांश कविताएँ छायावादी शिल्प लिए हुए हैं। लेकिन वे वैयक्तिकता से सामाजिकता की ओर प्रस्थान करते दिखाई देते हैं। इसलिए उनका कथ्य प्रगतिशील है। कवि की वैयक्तिकता सामाजिकता से जुड़ती प्रतीत होती है। परंतु कुछ कविताओं में कवि की निराशा तथा कुंठा अभिव्यक्त हुई है। ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ में कवि लिखता है-
“याद रखो
कभी अकेले में मुक्ति नहीं मिलती
यदि वह है तो सबके साथ ही।”
मुक्तिबोध ने स्वयं को विश्व-मानव के सुख-दुख के साथ जोड़ने का प्रयास किया है। कवि यत्र-तत्र आम आदमी की निराशा, कुंठा, अवसाद तथा वेदना का वर्णन करता हुआ दिखाई देता है। कवि स्वीकार करता है कि आज की व्यवस्था के नीचे दबा मानव नितांत निराश तथा हताश है। कवि कहता है-
“दुख तुम्हें भी है,
दुख मुझे भी है,
हम एक ढहे हुए मकान के नीचे
दबे हैं
चीख निकालना भी मुश्किल है।”

(ii) पूँजीवादी व्यवस्था का विरोध-आरंभ से ही मुक्तिबोध का झुकाव मार्क्सवाद की तरफ रहा है। कवि शोषण व्यवस्था से जुड़े व्यक्तियों से घृणा करता है। कवि का विचार है कि उसका जीवन पूँजीवादी व्यवस्था की देन है। जहाँ के लोग झूठी चमक-दमक तथा झूठी शान से निर्मित दोगली जिंदगी जी रहे हैं। कवि इस पूँजीवादी व्यवस्था को शीघ्र-से-शीघ्र नष्ट करना चाहता है तथा उसके स्थान पर समाजवाद लाना चाहता है।

(iii) शोषित वर्ग के प्रति सहानुभूति-मुक्तिबोध ने स्वयं अभावग्रस्त जीवन व्यतीत किया और गरीबों के जीवन को निकट से देखा। इसलिए कवि अपनी कविताओं में जहाँ एक ओर शोषित वर्ग के प्रति सहानभति व्यक्त करता है, वहीं दूसरी ओर शोषितों को आर्थिक तथा सामाजिक शोषण से मुक्त भी करना चाहता है। कवि ने अपनी कविताओं में शोषित समाज के अनेक चित्र अंकित किए हैं तथा जनहित के दृष्टिकोण को अपनाया है।

(iv) व्यंग्यात्मकता-मुक्तिबोध के काव्य में तीखा तथा चुभने वाला व्यंग्य देखा जा सकता है। कवि सामाजिक रूढ़ियों पर करारा व्यंग्य करता है और यथार्थ चित्रण में विश्वास रखता है। कवि का यह चित्रण अपना ही भोगा यथार्थ है।

HBSE 12th Class Hindi Solutions Aroh Chapter 5 सहर्ष स्वीकारा है

(v) वर्गहीन समाज की स्थापना पर बल-मुक्तिबोध एक ऐसा वर्गहीन समाज स्थापित करना चाहते थे जिसमें समाज तथा संस्कृति के लिए स्वस्थ मूल्यों का पोषण हो सके। वे स्वार्थपरता, संकीर्णता तथा भाई-भतीजावाद को समाप्त करना चाहते थे। में साम्यवाद की स्थापना अवश्य होगी और भारतवासी शोषण के चक्र से मुक्त हो सकेंगे। इसलिए कवि कहता है-
“कविता में कहने की आदत नहीं, पर कह दूँ,
वर्तमान समाज चल नहीं सकता,
पूँजी से जुड़ा हृदय बदल नहीं सकता,
स्वातंत्र्य व्यक्ति का वादी
छल नहीं सकता मुक्ति के मन को,
जन को”

4. भाषा-शैली-मुक्तिबोध के काव्य का कलापक्ष भी काफी समृद्ध है। परंतु बिंबात्मकता का अधिक सहारा लेने के कारण उनकी कविता कुछ स्थलों पर जटिल-सी हो गई है। वे अनेक प्रकार के कल्पना-चित्रों तथा फैटसियों का निर्माण करते हुए चलते हैं।

वस्तुतः मुक्तिबोध ने साहित्यिक हिंदी भाषा का प्रयोग किया है। यदि इसमें संस्कृत के तत्सम् प्रधान शब्द हैं तो अंग्रेज़ी, उर्दू, फारसी के शब्द भी हैं। उनकी कविता प्रतीकों के लिए प्रसिद्ध है। उनके प्रतीक पारंपरिक भी हैं और नवीन भी। मुक्तिबोध ने अपनी काव्य भाषा में उपमा, मानवीकरण, रूपक, उत्प्रेक्षा तथा अनुप्रास आदि अलंकारों का स्वाभाविक रूप से वर्णन किया है। कवि शमशेर सिंह बहादुर ने उनकी काव्य कला के बारे में सही ही लिखा है-“अद्भुत संकेतों भरी, जिज्ञासाओं से अस्थिर, कभी दूर से शोर मचाती, कभी कानों में चुपचाप राज़ की बातें कहती चलती है। हमारी बातें हमको सुनाती हैं। हम अपने को एकदम चकित होकर देखते हैं और पहले से अधिक पहचानने लगते हैं।”

सहर्ष स्वीकारा है कविता का सार

प्रश्न-
गजानन माधव मुक्तिबोध द्वारा रचित कविता ‘सहर्ष स्वीकारा है’ का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
‘सहर्ष स्वीकारा है’ कविता कविवर मुक्तिबोध की एक उल्लेखनीय कविता है। यह उनकी काव्य-रचना ‘भूरी-भूरी खाक धूल’ में संकलित है। यहाँ कवि ने असीम सत्ता को अपनी प्रेरणा का स्रोत माना है। कवि स्वीकार करता हुआ कहता है कि उसे प्रकृति से जो सुख-दुःख, राग-विराग आदि प्राप्त हुए हैं, उन्हें उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया है। कवि की गरबीली गरीबी, गंभीर अनुभूतियाँ, विचार, चिंतन तथा भावनाओं की नदी-सब कुछ मौलिक हैं। कवि अपने ईश्वर से पूर्णतयाः संबद्ध है। वह कहता है कि वह उस अनंत सत्ता के स्नेह को अपने भीतर से जितना उड़ेलता है, उतना ही वह फिर से भर जाता है। कवि को लगता है कि उसके भीतर कोई मधुर स्नेह रूपी झरना है। उसे ऐसा अनुभव होता है कि परमात्मा चाँद की तरह उसके हृदय को प्रकाशित करता रहता है।

कवि अपनी उस अनंत सत्ता से उसको भूलने की कठोर सजा पाना चाहता है। कवि के लिए उजाला असहनीय है। उसकी आत्मा कमजोर होने के कारण छटपटाती रहती है। वह धएँ के बादलों में लापता हो जाना चाहता है। कवि को आभास है कि उसके लापता होने पर ही उसे उस असीम सत्ता का सहारा प्राप्त होगा। अंत में कवि कहता है कि उसके पास जो कुछ भी है वह उस अनंत सत्ता को बहुत प्रिय है।

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