Author name: Prasanna

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3

प्रश्न 1.
ΔDEF की रचना कीजिए, ताकि DE = 5 सेमी, DF = 3 सेमी और m∠EDF = 90° हो।
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 1
1. एक रेखाखण्ड DE = 5 cm खींचते है।
2. बिन्दु D पर 90° का कोण बनाते हुए DX किरण खींची।
3. D को केन्द्र मानकर 3 cm त्रिज्या का चाप खींचा जो DX को F पर काटता है।
4. DF और EF को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट त्रिभुज DEF प्राप्त होगा।

प्रश्न 2.
एक समद्विबाहु त्रिभुज की रचना कीजिए, जिसकी प्रत्येक समान भुजा की लंबाई 6.5 सेमी हो और उनके बीच का कोण 110° का हो।
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 2
1. BC रेखाखण्ड 6.5 सेमी खींचते हैं।
2. बिन्दु B पर ∠CBX = 110° का बनाया।
3. बिन्दु B को केन्द्र मानकर 6.5 सेमी की त्रिज्या का चाप खींचते है जो BX को A बिन्दु पर काटता है।
4. AC को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट त्रिभुज ABC प्राप्त होगा।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3

प्रश्न 3.
BC = 7.5 सेमी और AC = 5 सेमी और m∠C = 60° वाले ΔABC की रचना कीजिए।
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.3 3
1. एक रेखाखण्ड BC = 7.5 सेमी खींचा।
2. बिन्दु C पर कोण ∠BCX = 60° का बनाया।
3. बिन्दु C को केन्द्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का चाप खींचा जो CX को A पर काटता है।
4. AB को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट त्रिभुज ABC प्राप्त होगा।

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HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2

प्रश्न 1.
ΔXYZ की रचना कीजिए, जिसमें XY = 4.5 सेमी, YZ = 5 सेमी और ZX = 6 सेमी है।
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2 1
1. एक रेखाखण्ड XY = 4.5 सेमी खींचते हैं।
2. बिन्दु X को केन्द्र मानक़र 6 सेमी त्रिज्या का चाप खींचते हैं।
3. बिन्दु Y को केन्द्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का चाप खींचते हैं जो पहले वाले चाप को Z बिन्दु पर काटता है।
4. XZ और YZ को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट त्रिभुज XYZ प्राप्त हुआ।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2

प्रश्न 2.
5.5 सेमी भुजा वाले एक समबाहु त्रिभुज की रचना कीजिए।
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2 2
1. AB रेखाखण्ड 5.5 सेमी खींचते हैं।
2. बिन्दु A को केन्द्र मानकर 5.5 त्रिज्या का चाप खींचते हैं।
3. बिन्दु B को केन्द्र मानकर 5.5 सेमी त्रिज्या की चाप खींचते है जो पहले वाले चाप को C बिन्दु पर काटता है।
4. AC और BC को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट समबाहु त्रिभुज ABC प्राप्त हुआ।

प्रश्न 3.
ΔPQR की रचना कीजिए, जिसमें PQ = 4 सेमी, QR = 3.5 सेमी और PR = 4 सेमी है। यह किस प्रकार का त्रिभुज है ?
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2 3
1. एक रेखाखण्ड PQ = 4 सेमी खींचते हैं।
2. बिन्दु P को केन्द्र मानकर 4 सेमी त्रिज्या का चाप लगाया।
3. बिन्दु Q को केन्द्र मानकर 3.5 सेमी त्रिज्या का चाप लगाया जो पहले वाले चाप को R बिन्दु पर काटता है।
4. PR और QR को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट त्रिभुज PQR प्राप्त हुआ।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2

प्रश्न 4.
ABC की रचना कीजिए, ताकि AB = 2.5 सेमी, BC = 6 सेमी और AC = 6.5 सेमी हो। ∠B को मापिए।
हल :
रचना के पद :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 10 प्रायोगिक ज्यामिती Ex 10.2 4
1. BC रेखाखण्ड 6 सेमी खींचा।
2. बिन्दु B से परकार की सहायता से 2.5 सेमी त्रिज्या का चाप लगाया।
3. बिन्दु C से परकार की सहायता से 6.5 सेमी त्रिज्या का चाप लगाया जो पहले वाले चाप को A बिन्दु पर काटता है।
4. AB और AC को मिलाया।
इस प्रकार अभीष्ट त्रिभुज ABC प्राप्त हुआ। मापने पर ∠B = 90° प्राप्त होता है।

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HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.3

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.3 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Exercise 2.3

Question 1.
Find the remainder when x3 + 3x2 + 3x + 1 is divided by:
(i) x + 1
(ii) x – \(\frac {1}{2}\)
(iii) x
(iv) x + π
(v) 5 + 2x.
Solution:
Let p(x) = x3 + 3x2 + 3x + 1
(i) We know that when p(x) is divided by (x + 1), the remainder is p(- 1).
(By Remainder Theorem)
So, p(-1) = (-1)3 + 3 x (-1)2 + 3 x (-1) + 1
= – 1 + 3 – 3 + 1 = 0
Hence, required remainder = 0.

(ii) We know that when p(x) is divided by (x – \(\frac {1}{2}\)), the remainder is p(\(\frac {1}{2}\))
(By Remainder Theorem)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.3 - 1

(iii) We know that when p(x) is divided by x, the remainder is p(0).
[By Remainder Theorem]
So, p(0) = (0)3 + 3 × (0)2 + 3 × 0 + 1
= 0 + 0 + 0 + 1 = 1
Hence,required remainder = 1.

(iv) We know that when p(x) is divided by (x + π), the remainder is p(-π).
(By Remainder Theorem)
So, p(-π) = (-π)3 + 3 × (-π)2 + 3 × (-π) + 1
= – π3 + 3π2 – 3π + 1
Hence,required remainder = – π3 + 3π2 – 3π + 1.

(v) We know that when p(x) is divided by (5 + 2x), the remainder is p(\(\frac {-5}{2}\))
[By Remainder Theorem]
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.3 - 2

HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.3

Question 2.
Find the remainder when x3 – ax3 + 6x – a is divided by x – a.
Solution :
Let p(x) = x3 – ax2 + 6x – a
We know that when p(x) is divided by (x – a), the remainder is p(a).
[By Remainder Theorem]
So, p(a)=(a)3 – a × (a)2 + 6 × a – a
= a3 – a3 + 6a – a = 5a
Hence required remainder = 5a.

Question 3.
Check whether 7 + 3x is a factor of 3x3 + 7x.
Solution :
Letp(x) = 3x3 + 7x
We know that, if 7 + 3x is a factor of p(x), then it is divisible by (7 + 3x) with leaving no
remainder i.e., remainder [p(\(\frac {-7}{3}\))] will be zero. (By Factor Theorem)
HBSE 9th Class Maths Solutions Chapter 2 Polynomials Ex 2.3 - 3
Since, remainder p(\(\frac {-7}{3}\)) ≠ 0. Therefore, (7 + 3x) is not a factor of p(x)

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HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

Haryana State Board HBSE 12th Class Hindi Solutions अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर Questions and Answers, Notes.

Haryana Board 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

लघूत्तरात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
जनसंचार पत्रकारिता का माध्यम क्या है?
उत्तर:
रेडियो, टेलीविजन एवं समाचार-पत्र जनसंचार पत्रकारिता का माध्यम है।

प्रश्न 2.
सर्वाधिक खर्चीला जनसंचार माध्यम कौन-सा है?
उत्तर:
इंटरनेट सर्वाधिक खर्चीला जनसंचार माध्यम है।

प्रश्न 3.
मुद्रण का आरंभ किस देश में हुआ?
उत्तर:
मुद्रण का आरंभ चीन में हुआ।

प्रश्न 4.
वर्तमान छापेखाने का आविष्कार किसने किया?
उत्तर:
वर्तमान छापेखाने का आविष्कार गुटेनबर्ग ने किया।

HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 5.
कथावस्तु किसे कहते हैं?
उत्तर:
घटनाओं के मेल को कथावस्तु कहते हैं।

प्रश्न 6.
‘राजस्थान पत्रिका’ किस भाषा का समाचार-पत्र है?
उत्तर:
हिन्दी।

प्रश्न 7.
आमतौर पर रेडियो नाटक की अवधि कितनी होती है?
उत्तर:
30-40 मिनट।

प्रश्न 8.
समाचार लेखन में किस शैली का प्रयोग करते हैं?
उत्तर:
समाचार लेखन में उल्टा पिरामिड शैली का प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 9.
जनमत को प्रतिबिम्बित करने वाला स्तंभ कौन-सा है?
उत्तर:
जनमत को प्रतिबिम्बित करने वाला स्तंभ संपादक के नाम पत्र है।

HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 10.
कारोबार और व्यापार से संबंधित खबर का सम्बन्ध किससे है?
उत्तर:
कारोबार और व्यापार से संबंधित खबर का सम्बन्ध आर्थिक क्षेत्र है।

प्रश्न 11.
टेलीविजन किस प्रकार का माध्यम है?
उत्तर
दृश्य एवं श्रव्य।

प्रश्न 12.
मुद्रण माध्यम के अंतर्गत कौन-कौन से माध्यम आते हैं?
उत्तर:
मुद्रण माध्यम के अंतर्गत समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि आते हैं।

प्रश्न 13.
ड्राई एंकर क्या है?
उत्तर:
ड्राई एंकर वह होता है जो समाचार के दृश्य दिखाई देने तक दर्शकों को रिपोर्टर से मिली जानकारी के आधार पर समाचार से संबंधित सूचना देता है।

प्रश्न 14.
लाइव से क्या आशय है?
उत्तर:
किसी समाचार का घटनास्थल से दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण लाइव कहलाता है।

प्रश्न 15.
रेडियो कैसा जनसंचार माध्यम है? इसमें किसका मेल होता है?
उत्तर:
रेडियो श्रव्य माध्यम है। इसमें ध्वनि, स्वर और शब्दों का मेल होता है। प्रश्न 16. इंटरनेट पत्रकारिता क्या है? उत्तर:इंटरनेट पर समाचार-पत्रों को प्रकाशित करना तथा समाचारों का आदान-प्रदान करना इंटरनेट पत्रकारिता कहलाता है।

प्रश्न 17.
भारत में इंटरनेट का आरंभ कब हुआ था? इसका दूसरा दौर कब आरंभ हुआ था?
उत्तर:
भारत में इंटरनेट का आरंभ सन् 1993 में हुआ था और सन् 2003 में इसका दूसरा दौर आरंभ हुआ था।

प्रश्न 18.
अंशकालिक पत्रकार किसे कहते हैं?
उत्तर:
अंशकालिक पत्रकार किसी भी समाचार संगठन द्वारा निश्चित किए गए मानदेय पर काम करता है।

प्रश्न 19.
उलटा पिरामिड शैली क्या है?
उत्तर:
उलटा पिरामिड शैली में सबसे पहले महत्त्वपूर्ण तथ्य तथा जानकारियाँ दी जाती हैं। तत्पश्चात् कम महत्त्वपूर्ण बातें देकर समाप्त कर दिया जाता है। इसकी आकृति उलटे पिरामिड जैसी होने के कारण इसे उलटा पिरामिड शैली कहते हैं।

प्रश्न 20.
पूर्णकालिक पत्रकार किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी समाचार-संगठन में काम करने वाला नियमित वेतनभोगी कर्मचारी को पूर्णकालिक पत्रकार कहते हैं।

HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 21.
समाचार लेखन के कितने ककार हैं? उनके नाम लिखें।
उत्तर:
समाचार लेखन के छः ककार हैं। ये हैं क्या, कौन, कब, कहाँ, कैसे और क्यों।

प्रश्न 22.
विशेष रिपोर्ट किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी घटना, समस्या या मुद्दे की गहन छानबीन और विश्लेषण को विशेष रिपोर्ट कहते हैं।

प्रश्न 23.
संपादकीय किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह लेख जिसमें किसी मुद्दे के प्रति समाचार-पत्र की अपनी राय प्रकट होती है, संपादकीय कहलाता है।

प्रश्न 24.
विशेष लेखन क्या है? ।
उत्तर:
किसी विशेष विषय पर सामान्य लेखन से हटकर लिखा गया लेख विशेष लेखन कहलाता है।

प्रश्न 25.
बीट रिपोर्टिंग क्या होती है?
उत्तर:
जो संवाददाता केवल अपने क्षेत्र विशेष से संबंधित रिपोर्टों को भेजता है, वह बीट रिपोर्टिंग कहलाती है।

प्रश्न 26.
भारत में पहला छापाखाना कब और कहाँ खुला था?
उत्तर:
भारत में पहला छापाखाना सन् 1556 ई० में गोआ में खुला था।

प्रश्न 27.
समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय और उपयोगी शैली का नाम लिखिए।
उत्तर:
उलटा पिरामिड शैली।

प्रश्न 28.
रेडियो में कौन-सी सुविधा नहीं होती?
उत्तर:
रेडियो में समाचार-पत्र की तरह पीछे लौटकर सुनने की सुविधा नहीं होती।

HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 29.
आजकल टेलीप्रिंटर पर एक सेकेंड में कितने शब्द भेजे जा सकते हैं?
उत्तर:
आजकल टेलीप्रिंटर पर एक सेकेंड में 56 किलोबाइट अर्थात् लगभग 70 हज़ार शब्द भेजे जा सकते हैं।

प्रश्न 30.
उलटा पिरामिड शैली का प्रयोग कब से आरंभ हुआ था?
उत्तर:
उलटा पिरामिड शैली का प्रयोग उन्नीसवीं सदी के मध्य से आरंभ हुआ था।

प्रश्न 31.
समाचार-पत्रों में छपने वाले फीचरों की शब्द-संख्या कितनी होती है?
उत्तर:
समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में छपने वाले फीचरों की शब्द-संख्या 250 शब्दों से लेकर 2000 शब्दों तक होती है।

प्रश्न 32.
पत्रकार कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 33.
जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौन-सा है?
उत्तर:
जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम मुद्रित माध्यम है।

प्रश्न 34.
स्तंभ लेखन क्या है?
उत्तर:
स्तंभ लेखन विचारपरक लेखन होता है। स्तंभकार समसामयिक विषयों पर नियमित रूप से अपने समाचार-पत्र के लिए लिखते हैं।

प्रश्न 35.
इंटरव्यू के लिए हिन्दी शब्द क्या है?
उत्तर:
साक्षात्कार।

प्रश्न 36.
नाटक किस प्रकार की विधा है?
उत्तर:
रंगमंचीय।

प्रश्न 37.
ऑल इंडिया रेडियो की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
ऑल इंडिया रेडियो की स्थापना सन् 1930 में हुई।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. क्रिकेट मैच का प्रसारण किस प्रकार का है?
(A) फोन इन
(B) एंकर पैकेज
(C) सीधा प्रसारण
(D) एंकर बाइट
उत्तर:
(C) सीधा प्रसारण

2. हिन्दी में नेट पत्रकारिता किसके साथ आरंभ हुई?
(A) वैब दुनिया के साथ
(B) दैनिक जागरण के साथ
(C) दैनिक भास्कर के साथ
(D) राजस्थान पत्रिका के साथ
उत्तर:
(A) वैब दुनिया के साथ

3. समाचार लेखन की श्रेष्ठ शैली कौन-सी है?
(A) सीधा पिरामिड शैली
(B) उल्टा पिरामिड शैली
(C) व्याख्या शैली
(D) विवेचनात्मक शैली
उत्तर:
(B) उल्टा पिरामिड शैली

4. फीचर की कौन-सी विशेषता है?
(A) सृजनात्मक
(B) सुव्यवस्थित
(C) आत्मनिष्ठ
(D) उपर्युक्त तीनों
उत्तर:
(D) उपर्युक्त तीनों

5. फीचर की कौन-सी विशेषता है?
(A) सृजनात्मक
(B) सुव्यवस्थित
(C) आत्मनिष्ठ
(D) उपर्युक्त तीनों
उत्तर:
(D) उपर्युक्त तीनों

HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

6. कविता का जन्म किस परंपरा के रूप में हुआ था?
(A) वाचिक रूप में
(B) लिखित रूप में
(C) यांत्रिक रूप में
(D) उपर्युक्त तीनों रूपों में
उत्तर:
(A) वाचिक रूप में

7. एक शब्द में कितने अर्थ छिपे रहते हैं?
(A) एक
(B) दो
(C) तीन
(D) अनेक
उत्तर:
(D) अनेक

8. लिखित रूप में नाटक कितने आयामों में होता है?
(A) द्विआयामी
(B) बहुआयामी
(C) एकआयामी
(D) त्रिआयामी
उत्तर:
(C) एकआयामी

9. प्रतिशोध का सशक्त माध्यम है?
(A) रंगमंच
(B) कहानी
(C) कविता
(D) फिल्म
उत्तर:
(A) रंगमंच

10. अस्वीकार की स्थिति किस विधा में बराबर नहीं होती?
(A) उपन्यास में
(B) कविता में
(C) नाटक में
(D) संस्मरण में
उत्तर:
(C) नाटक में

11. अकसर बच्चे किससे कहानियाँ सुनते रहते हैं?
(A) माँ से
(B) नानी-दादी से
(C) मित्रों से
(D) पिता से
उत्तर:
(B) नानी-दादी से

HBSE 12th Class Hindi अभिव्यक्ति और माध्यम लघूत्तरात्मक एवं बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

12. कहानी का केंद्रीय बिंदु क्या है?
(A) कथानक
(B) देशकाल
(C) पात्रों का चरित्र-चित्रण
(D) संवाद
उत्तर:
(A) कथानक

13. कहानी का दूसरा महत्त्वपूर्ण तत्त्व कौन-सा है?
(A) कथानक
(B) देशकाल
(C) भाषा-शैली
(D) पात्रों का चरित्र-चित्रण
उत्तर:
(D) पात्रों का चरित्र-चित्रण

14. नाटक में कैसे पात्र होने चाहिएँ?
(A) सजीव
(B) निर्जीव
(C) कठपुतली
(D) रूढ़
उत्तर:
(A) सजीव

15. नाटक में कैसे पात्र होने चाहिएँ?
(A) सजीव
(B) निर्जीव
(C) कठपुतली
(D) रूढ़
उत्तर:
(A) सजीव

16. ‘मोहनदास’ कहानी के लेखक का क्या नाम है?
(A) प्रेमचंद
(B) निबंध
(C) यशपाल
(D) रेखाचित्र
उत्तर:
(B) उदय प्रकाश

17. श्रव्य नाटक किसे कहते हैं?
(A) नाटक को
(B) कहानी को
(C) दूरदर्शन के सीरियल को
(D) रेडियो नाटक को
उत्तर:
(D) रेडियो नाटक को

18. ‘आषाढ़ का एक दिन’ किस विधा की रचना है?
(A) कहानी
(B) निबंध
(C) नाटक
(D) रेखाचित्र
उत्तर:
(C) नाटक

19. रटंत का क्या अर्थ है?
(A) रट्टा लगाकर याद करना
(B) सोच-समझकर पढ़ना
(C) शिक्षक से प्रेरणा लेना
(D) माता-पिता से पूछकर लिखना
उत्तर:
(A) रट्टा लगाकर याद करना

20. रटंत प्रवृत्ति कैसी है?
(A) घातक
(B) लाभकारी
(C) सहायक
(D) मौलिक
उत्तर:
(A) घातक

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने विकास के स्तर को मापने के लिए किस एक आकांक्षा को आधार नहीं बनाया?
(A) दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन
(B) शिक्षित एवं ज्ञानवान होना
(C) समृद्ध एवं धनाढ्य होना
(D) उत्तम जीवन के लिए सभी संसाधनों का होना
उत्तर:
(C) समृद्ध एवं धनाढ्य होना

2. विकास का तात्पर्य है-
(A) व्यक्ति की शिक्षा में सुधार
(B) संपत्ति में वृद्धि
(C) जीवन की गुणवत्ता
(D) शारीरिक बल में वृद्धि
उत्तर:
(C) जीवन की गुणवत्ता

3. मानव विकास को जिस पैमाने पर मापा जाता है, उसका मान कितना होता है?
(A) 0-10
(B) 0-1
(C) 1-100
(D) A से Z
उत्तर:
(B) 0-1

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

4. मानव विकास के मध्यम वर्ग का पैमाना कितना माना जाता है?
(A) 0.6 से 0.7
(B) 0.5 से 0.65
(C) 0.5 से 0.8
(D) 0.550 से 0.700
उत्तर:
(D) 0.550 से 0.700

5. मानव विकास सूचकांक के सबसे निचले पायदान पर कौन-सा देश बैठा है?
(A) बुरूंडी
(B) केन्या
(C) सियरालियोन
(D) नाइजीरिया
उत्तर:
(D) नाइजीरिया

6. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मानव विकास में उन्नति नहीं करता?
(A) पौष्टिक भोजन की उपलब्धता
(B) कल्याणकारी योजनाएँ
(C) महिला सशक्तीकरण
(D) युद्ध एवं अराजकता
उत्तर:
(D) युद्ध एवं अराजकता

7. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मानव विकास का ह्रास नहीं करता?
(A) एड्स की बीमारी
(B) लगातार सूखा एवं अकाल
(C) उच्च प्रौद्योगिकी
(D) आर्थिक विकास की जड़ता
उत्तर:
(C) उच्च प्रौद्योगिकी

8. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कब से मानव विकास प्रतिवेदन प्रकाशित कर रहा है?
(A) सन् 1988 से
(B) सन् 1990 से
(C) सन् 1992 से
(D) सन् 1999 से
उत्तर:
(B) सन् 1990 से

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

9. विश्व का कौन-सा एकमात्र देश है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को देश की प्रगति का अधिकारिक माप घोषित किया है?
(A) श्रीलंका
(B) भूटान
(C) नेपाल
(D) अमेरिका
उत्तर:
(B) भूटान

10. डॉ० महबूब-उल-हक कहाँ के अर्थशास्त्री थे?
(A) भारत के
(B) पाकिस्तान के
(C) इंग्लैण्ड के
(D) अफगानिस्तान के
उत्तर:
(B) पाकिस्तान के

11. मानव गरीबी सूचकांक और मानव विकास सूचकांक किसके द्वारा प्रयुक्त किए जाते हैं?
(A) UNDP द्वारा
(B) UNICEF GRT
(C) UNESCO ART
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) UNDP द्वारा

12. मानव विकास मापन का सूचकांक है-
(A) मानव विकास सूचकांक
(B) मानव गरीबी सूचकांक
(C) (A) व (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) व (B) दोनों

13. निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया जीवन-पर्यंत चलती है?
(A) वृद्धि
(B) विकास
(C) स्वास्थ्य
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) विकास

14. किस प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने विकास का मुख्य ध्येय स्वतंत्रता में वृद्धि के रूप में देखा है?
(A) अभिजीत बनर्जी
(B) डॉ० महबूब-उल-हक
(C) प्रो० अमर्त्य सेन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रो० अमर्त्य सेन

15. मानव विकास का स्तंभ नहीं है-
(A) समता
(B) सशक्तीकरण
(C) स्वतंत्रता
(D) सतत् पोषणीयता
उत्तर:
(C) स्वतंत्रता

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
मानव विकास सूचकांक का अधिकतम संभावित मान लिखें।
उत्तर:
1.

प्रश्न 2.
मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन कब किया गया?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन सन् 1990 में किया गया।

प्रश्न 3.
भारत के किस राज्य में सबसे अधिक मानव विकास सूचकांक है?
उत्तर:
केरल में।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 4.
मानव विकास की अवधारणा किस विद्वान की देन है?
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक की।

प्रश्न 5.
मानव विकास को जिस पैमाने पर मापा जाता है, उसका मान कितना होता है?
अथवा
मानव विकास सूचकांक का स्कोर क्या है?
उत्तर:
0-1।

प्रश्न 6.
मानव विकास के अति उच्च वर्ग का पैमाना कितना होता है?
उत्तर:
अति उच्च वर्ग का पैमाना 0.800 से ऊपर।

प्रश्न 7.
मानव विकास रिपोर्ट किसके द्वारा दी जाती है?
अथवा
विश्व मानव विकास रिपोर्ट का प्रकाशन करने वाली संस्था का नाम लिखिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)।

प्रश्न 8.
कौन-सा कारक मानव विकास का ह्रास नहीं करता?
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिकी।

प्रश्न 9.
मानव विकास सूचकांक सर्वाधिक विश्वसनीय माप क्यों नहीं है?
उत्तर:
क्योंकि यह बिना आय वाला माप है।

प्रश्न 10.
मानव विकास सूचकांक की गणना में भारत किस श्रेणी में आता है?
उत्तर:
मध्यम श्रेणी में।

प्रश्न 11.
मानव विकास सूचकांक को कितने सूचकों से प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक को तीन सूचकों से प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 12.
मानव विकास सूचकांक के सर्वोच्च पायदान पर कौन-सा देश है?
उत्तर:
नार्वे।

प्रश्न 13.
HDI का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Human Development Index.

प्रश्न 14.
GNH का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Gross National Happiness.

प्रश्न 15.
HPI का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Human Poverty Index.

प्रश्न 16.
UNDP का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
United Nations Development Programme.

प्रश्न 17.
किस देश ने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता की अवधारणा प्रस्तुत की?
उत्तर:
भूटान ने।

प्रश्न 18.
मानव विकास के कितने स्तंभ हैं?
उत्तर:
मानव विकास के चार स्तंभ हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 19.
मानव विकास के सबसे निचले पायदान पर कौन-सा देश है?
उत्तर:
नाइजीरिया।

प्रश्न 20.
किन देशों का स्कोर 0.550 से 0.700 के बीच होता है?
उत्तर:
मध्यम सूचकांक वाले देशों का।

प्रश्न 21.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कब से मानव विकास रिपोर्ट (प्रतिवेदन) प्रकाशित कर रहा है?
उत्तर:
वर्ष 1990 से।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गुणवत्ता में हुए सकारात्मक परिवर्तन को विकास कहते हैं।

प्रश्न 2.
मानव विकास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
सन् 1990 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास को इस प्रकार परिभाषित किया गया है, “मानव विकास मनुष्य की आकांक्षाओं एवं उन्हें उपलब्ध जीवन-यापन की सुविधाओं के स्तर को विकसित करने की प्रक्रिया है।”

प्रश्न 3.
मानव विकास का मूल उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
मानव विकास का मूल उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों को उत्पन्न करना है जिनमें लोग सार्थक जीवन जी सकें।

प्रश्न 4.
1990 की रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास के तीन सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष कौन-से हैं?
अथवा
मानव विकास के सूचक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन या स्वास्थ्य
  2. शिक्षा व ज्ञान का प्रसार
  3. संसाधनों तक पहुँच।

प्रश्न 5.
दक्षिण-पूर्वी एशिया के दो अर्थशास्त्रियों के नाम लिखें जिन्होंने मानव विकास की अवधारणा सर्वप्रथम प्रस्तुत की।
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक एवं डॉ० अमर्त्य सेन।

प्रश्न 6.
मानव विकास के उपागम कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. आय उपागम
  2. कल्याण उपागम
  3. क्षमता उपागम
  4. न्यूनतम आवश्यकता उपागम।

प्रश्न 7.
सशक्तीकरण (Empowerment) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सशक्तीकरण का अर्थ है कि लोगों में अपने विकल्प चुनने की ताकत पैदा की जाए। यह ताकत बढ़ती हुई स्वतंत्रता, क्षमता और उत्पादकता से आती है। सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों से लोगों को सशक्त किया जा सकता है। मानव विकास के लिए जरूरी है कि सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों और विशेष रूप से महिलाओं का सशक्तीकरण हो।

प्रश्न 8.
मानव गरीबी सूचकांक क्या है?
उत्तर:
मानव गरीबी सूचकांक मानव विकास से संबंधित है जो मानव विकास में कमियों को दर्शाता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 9.
मानव विकास सूचकांक के चार वर्ग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. अति उच्च वर्ग 0.800 से ऊपर
  2. उच्च वर्ग 0.701 से 0.799 के बीच
  3. मध्यम वर्ग 0.550 से 0.700 के बीच तथा
  4. निम्न वर्ग 0.549 से नीचे।

प्रश्न 10.
कल्याण उपागम क्या है?
उत्तर:
कल्याण उपागम के अनुसार सरकार द्वारा लोगों के कल्याणकारी कार्यक्रमों; जैसे-शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर अधिक खर्च करके मानव विकास के स्तरों को बढ़ा सकती है। यह उपागम मनुष्य को सभी विकासात्मक गतिविधियों के केंद्र के रूप में देखता है।

प्रश्न 11.
विकासहीन वृद्धि से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी निश्चित अवधि में किसी नगर की जनसंख्या 5 लाख से 10 लाख हो जाती है तो कहा जाता है कि नगर की वृद्धि हुई। लेकिन यदि उस नगर में आवास, पेय जल, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएँ पहले जैसी रहती हैं और उनमें कोई बेहतरी नहीं होती तो इसे विकासहीन वृद्धि माना जाएगा।

प्रश्न 12.
सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति नहीं की जा सकती। सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता हमें विकास के आध्यात्मिक, भौतिकता एवं गुणात्मक पक्षों को सोचने के लिए प्रोत्साहित करती है। भूटान विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को देश की प्रगति का अधिकारिक माप घोषित किया है।

प्रश्न 13.
अति उच्च सूचकांक वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. नार्वे
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. स्विट्ज़रलैंड
  4. जर्मनी।

प्रश्न 14.
मध्यम सूचकांक वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मलेशिया
  2. बहामस
  3. कुवैत
  4. बेलारूस।

प्रश्न 15.
निम्न सूचकांक वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. माली
  2. नाइजीरिया
  3. मोजांबिक
  4. बरूंडी।

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प्रश्न 16.
मानव विकास सूचकांक क्या है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक (HDI) मानव विकास में प्राप्तियों का मापन करता है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा एवं संसाधनों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार करता है। यह क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर/अंक पर आधारित है। यह प्रदर्शित करता है कि मानव विकास के प्रमुख क्षेत्रों में क्या उपलब्धि हुई है।

प्रश्न 17.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रयुक्त मानव विकास मापन के दो महत्त्वपूर्ण सूचकांक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रयुक्त मानव विकास मापन के दो महत्त्वपूर्ण सूचकांक हैं-

  1. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index)
  2. मानव गरीबी सूचकांक (Human Poverty Index)।

प्रश्न 18.
मानव विकास सूचकांक तथा मानव गरीबी सूचकांक में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक तथा मानव गरीबी सूचकांक में निम्नलिखित अंतर हैं-

मानव विकास सूचकांकमानव गरीबी सूचकांक
1. मानव विकास सूचकांक मानव विकास में उपलब्धियों को मापता है।1. मानव गरीबी सूचकांक मानव विकास में कमियों को मापता है।
2. यह वितरण के बारे में कुछ नहीं कहता।2. यह शिक्षा, स्वास्थ्य एवं संसाधनों के वितरण के स्तर को मापता है।
3. यह एक आय उपाय है।3. यह एक गैर-आय उपाय है।

प्रश्न 19.
सार्थक जीवन की मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
सार्थक जीवन केवल दीर्घ नहीं होता। जीवन का कोई उद्देश्य होना भी आवश्यक है। लोग स्वस्थ हों, अपने विवेक व बुद्धि का विकास कर सकते हों, वे समाज में प्रतिभागिता करें और वे अपने उद्देश्यों को पूरा करने में स्वतंत्र हों।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकास और वृद्धि में अंतर बताइए।
उत्तर:
विकास और वृद्धि दोनों समय के संदर्भ में परिवर्तन को दर्शाते हैं। अंतर बस इतना है कि वृद्धि में परिवर्तन मात्रात्मक होता है। वृद्धि हमेशा मूल्य निरपेक्ष होती है। यदि मात्रा बढ़ जाए तो यह धनात्मक कहलाती है और यदि हास को इंगित करे तो यह ऋणात्मक कहलाती है। इसके विपरीत विकास में परिवर्तन गुणात्मक होता है। विकास तभी संभव है जब वर्तमान दशाओं में वृद्धि हो अर्थात् विकास उस समय होता है जब वृद्धि सकारात्मक हो।

प्रश्न 2.
मानव विकास अवधारणा के अन्तर्गत सतत् पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सतत् पोषणीयता अथवा निर्वहन का मतलब है कि लोगों को विकास करने के अवसर लगातार मिलते रहें। सतत् पोषणीय मानव विकास तभी होगा जब प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें। अतः यह जरूरी है कि हम पर्यावरणीय, वित्तीय और मानव संसाधनों का आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए सुविचारित उपयोग करें। यदि हम इन बहुमूल्य संसाधनों का अंधा-धुंध प्रयोग अथवा दुरुपयोग करेंगे तो भावी पीढ़ियों के विकल्प कम हो जाएंगे।

प्रश्न 3.
मानव विकास के हास के कारकों का उल्लेख करें।
उत्तर:
मानव विकास के ह्रास के कारक निम्नलिखित हैं-

  1. एड्स जैसी बीमारियों के प्रसार से जीवन-प्रत्याशा में कमी होना।
  2. लगातार सूखा व अकाल पड़ना।
  3. आर्थिक विकास की जड़ता।
  4. युद्ध और अराजकता।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 4.
मानव विकास की अवधारणा में दक्षिण एशियाई अर्थशास्त्रियों का क्या योगदान रहा?
अथवा
मानव विकास की संकल्पना के विकास में डॉ० अमर्त्य सेन के योगदान का वर्णन कीजिए।
अथवा
मानव विकास की संकल्पना के विकास में डॉ० महबूब-उल-हक के योगदान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन पाकिस्तानी अर्थशास्त्री डॉ० महबूब-उल-हक ने किया था। उन्होंने मानव विकास की कल्पना एक ऐसे विकास के रूप में की जिसका संबंध लोगों के विकल्पों (Choices) में बढ़ोतरी से है ताकि वे आत्म-सम्मान के साथ दीर्घ जीवन जी सकें। डॉ० अमर्त्य सेन ने भी विकास का मुख्य ध्येय स्वतंत्रता में वृद्धि अथवा परतंत्रता में कमी के रूप में देखा। स्वतंत्रताओं में वृद्धि विकास का प्रभावशाली उपाय है। ये दोनों अर्थशास्त्री लोगों को विकास पर होने वाली किसी भी चर्चा की केन्द्र में लाने में सफल हुए। उन्होंने कहा कि विकल्प स्थिर नहीं हैं बल्कि आवश्यकताओं और हालातों के मुताबिक परिवर्तनशील हैं।

प्रश्न 5.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा परिभाषित मानव विकास की संकल्पना का उल्लेख कीजिए और इसे मापने की विधियाँ बताइए।
अथवा
मानव विकास की संकल्पना को परिभाषित कीजिए। इसके मापने के आधारों का वर्णन करें।
अथवा
मानव विकास की संकल्पना की विवेचना कीजिए।
अथवा
मानव विकास का विचार किन संकल्पनाओं पर आश्रित है? वर्णन करें।
उत्तर:
प्रकृति के संसाधनों का उपयोग तब तक पूर्णतया से नहीं किया जा सकता, जब तक मनुष्य की क्षमताओं का विकास नहीं किया जाता। केवल धन के द्वारा मानव विकास संभव नहीं है। विकास का लक्ष्य लोगों का कल्याण होना चाहिए। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास जन-कल्याण के प्रमुख आधार हैं।

संयुक्त राष्ट्र विकास (UNDP) के अनुसार, “विकास केवल लोगों की आय तथा पूँजी की ही वृद्धि नहीं बल्कि यह मानव की कार्यप्रणाली तथा क्षमताओं में वृद्धि की प्रक्रिया है। मानव विकास लोगों की आकांक्षाओं और उन्हें उपलब्ध जीवन-यापन की सुविधाओं के स्तर को विकसित करने की प्रक्रिया है।”
मानव विकास संकल्पना की विधियाँ/आधार-UNDP के मानव विकास को मापने के लिए तीन महत्त्वपूर्ण आकांक्षाओं को आधार माना है, जो निम्नलिखित हैं
1. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन-मनुष्य के जीवन-काल को जन्म के समय संभावित आयु या जीवन-प्रत्याशा से मापा जाता है। उच्च जीवन प्रत्याशा उच्च जीवन स्तर का और निम्न जीवन प्रत्याशा निम्न जीवन स्तर का अभिलक्षण है। विकासशील देशों की जीवन प्रत्याशा 40-65 वर्ष पाई जाती है जबकि विकसित देशों में यह 60-75 वर्ष पाई जाती है।

2. शिक्षित एवं ज्ञानवान होना-शिक्षा और विकास का घनिष्ठ सम्बन्ध है। शिक्षा मनुष्य को विवेकशील बनाकर उसमें आत्मविश्वास जगाती है। विकसित देशों में उच्च साक्षरता दर पाई जाती है जबकि विकासशील देशों में निम्न या मध्यम साक्षरता दर पाई जाती है।

3. संसाधनों की उपलब्धता आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी उत्तम जीवन स्तर का आधार माना जाता है। जीवन स्तर को प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में भी व्यक्त किया जाता है।
इस प्रकार मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन किया गया और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा मानव विकास को इस प्रकार परिभाषित किया गया। “लोगों के विकल्पों के परिवर्द्धन की प्रक्रिया और जन-कल्याण के स्तर को ऊंचा उठाना ही मानव विकास है।”

स्त्री, पुरुष और बच्चे विकास की प्रक्रिया के केंद्र-बिंदु होने चाहिएँ। “विकास लोगों के लिए हो, न कि लोग विकास के लिए।” प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की अपेक्षा प्रति व्यक्ति सुविधाएँ बढ़ाने पर बल दिया जाना चाहिए। राष्ट्र की वास्तविक संपदा लोग हैं। इसलिए विकास का मुख्य लक्ष्य मानव-जीवन की समृद्धि होना चाहिए।

प्रश्न 6.
मानव विकास सूचकांक के अनुसार विश्व के उच्च सूचकांक वाले देशों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
उच्च मानव विकास सूचकांक वाले 59 देश हैं। इनका सूचकांक 0.800 से ऊपर है। सर्वोच्च सूचकांक वाले देश क्रमशः हैं नार्वे, आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया, लग्जमबर्ग, कनाडा, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि।

इन देशों में सामाजिक खंड में बहुत निवेश हुआ है। लोगों और सुशासन में उच्चतर निवेश ने इस वर्ग के देशों को अन्य देशों से अलग कर दिया है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराना सरकार की महत्त्वपूर्ण प्राथमिकता है। इन देशों में उच्च स्तरीय औद्योगिकीकरण पाया जाता है। उच्च मानव स्कोर वाले देश यूरोप में अवस्थित हैं फिर भी गैर-यूरोपीय देशों की संख्या आश्चर्यचकित करने वाली है उन्होंने भी इस सूची में अपना स्थान बनाया है।

प्रश्न 7.
मानव विकास सूचकांक के अनुसार विश्व के मध्यम सूचकांक वाले देशों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
मध्यम सूचकांक वाले देश 39 हैं जिनका स्कोर 0.550 से 0.700 के बीच है। मध्यम मूल्य सूचकांक वाले देश हैं बहामस, कुवैत, भारत, मकदूनिया, एंटीगुआ और बारबाडोस, मलेशिया, रोमानिया, मॉरीशस, ग्रेनेडा, बेलारूस आदि।

इनमें से अधिकांश देशों का विकास द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की अवधि में हुआ है। इस वर्ग के कुछ देश पूर्वकालीन उपनिवेश थे। अन्य अनेक देशों का विकास 1990 ई० में तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् हुआ है। इनमें से अनेक देश लोकोन्मुखी नीतियों को अपनाकर स्था सामाजिक भेदभाव को दूर करके अपने मानव विकास स्कोर में सुधार कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश देशों में उच्चतर मानव विकास के स्कोर वाले देशों की तुलना में सामाजिक विविधता अधिक पाई जाती है।

प्रश्न 8.
मानव विकास सूचकांक के अनुसार विश्व के निम्न सूचकांक वाले देशों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
निम्न सूचकांक वाले देशों की संख्या 38 है जिनका मानव विकास सूचकांक का स्कोर 0.549 से नीचे है। निम्नतम मूल्य सूचकांक वाले देश हैं नाइजीरिया, सियरा लियोन, बुस्कीनो फासो, माली, चाड, गिनी बिसाऊ, मध्य अफ्रीकन गणराज्य, इथोपिया, बरूंडी, मोजांबिक आदि।

इनमें से अधिकांश देश छोटे हैं जो राजनीतिक उपद्रव, गृहयुद्ध के रूप में सामाजिक स्थिरता, अकाल अथवा बीमारियों की अधिक घटनाओं के दौर से गुजर रहे हैं। इन देशों में सुशासन, सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं में सरकारी निवेश की तत्काल आवश्यकता है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव विकास अवधारणा के चार स्तंभ कौन-से हैं? स्पष्ट करें।
अथवा
मानव विकास अवधारणा के कौन-कौन से स्तंभ हैं? विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
उत्तर:
मानव विकास का ध्येय लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। यह संसाधनों के उपयोग के लिए मनुष्यों के काम करने के तरीकों तथा क्षमताओं में उन्नयन की प्रक्रिया है। मानव विकास की सारी सोच चार स्तंभों पर टिकी हुई है। ये हैं-
1. समता (Equity) – समता का आशय ऐसी व्यवस्था करने से है जिससे प्रत्येक व्यक्ति की उपलब्ध संसाधनों तक समान पहुँच हो सके। लोगों को उपलब्ध अवसर धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान तथा आय के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिएँ। भारत के संविधान में अनुच्छेद 14-18 के अंतर्गत लोगों को समानता के मूल अधिकार प्रदान किए गए हैं। इसके बावजूद भी लगभग प्रत्येक समाज में भेदभाव की घटनाएँ कभी-न-कभी देखने को मिलती रहती हैं।

2. सतत् पोषणीयता (Sustainability) – यहाँ सतत् पोषणीयता अथवा निर्वहन का मतलब है कि लोगों को विकास करने के अवसर लगातार मिलते रहें। सतत् पोषणीय मानव विकास तभी होगा जब प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें। अतः यह जरूरी है कि हम पर्यावरणीय, वित्तीय और मानव संसाधनों का आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए सुविचारित उपयोग करें। यदि हम इन बहुमूल्य संसाधनों का अंधाधुंध प्रयोग अथवा दुरुपयोग करेंगे तो भावी पीढ़ियों के विकल्प कम हो जाएँगे।

3. उत्पादकता (Productivity) – यहाँ उत्पादकता से तात्पर्य मानव श्रम उत्पादकता से है। मनुष्यों के काम करने के तरीकों को बेहतर बनाकर तथा उनमें क्षमताओं का निर्माण करके उत्पादकता में निरंतर वृद्धि की जा सकती है। स्वस्थ शरीर से युक्त हुनरमंद लोग ही किसी राष्ट्र का वास्तविक धन होते हैं। अतः लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने एवं उनके ज्ञान को बढ़ाने के प्रयासों से ही लोगों की कार्य क्षमता बढ़ेगी।

4. सशक्तीकरण (Empowerment) इसका अर्थ है कि लोगों में अपने विकल्प चुनने की ताकत पैदा की जाए। यह ताकत बढ़ती हुई स्वतंत्रता, क्षमता और उत्पादकता से आती है। सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों से लोगों को सशक्त किया जा सकता है। मानव विकास के लिए जरूरी है कि सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों और विशेष रूप से महिलाओं का सशक्तीकरण हो।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 2.
मानव विकास के चार प्रमुख उपागमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास को देखने और समझने के अनेक ढंग अथवा उपागम हैं जिनमें चार महत्त्वपूर्ण हैं-
1. आय उपागम (Income Approach) यह मानव विकास के अध्ययन के सबसे पुराने उपागमों में से एक है जिसमें आमदनी के बढ़ने को विकास का होना माना जाता है। इस उपागम में यह माना जाता है कि आय का स्तर किसी व्यक्ति द्वारा भोगी जा रही स्वतंत्रता के स्तर को परिलक्षित करता है। आय के स्तर के ऊँचा या नीचा होने पर मानव विकास का स्तर भी उसी अनुरूप ऊँचा या नीचा होता है।

2. कल्याण उपागम (Welfare Approach)-इस उपागम के अनुसार सरकार द्वारा लोगों के कल्याणकारी कार्यक्रमों; जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर अधिक खर्च करके मानव विकास के स्तरों को, बढ़ा सकती है। यह उपागम मनुष्य को सभी विकासात्मक गतिविधियों के केंद्र के रूप में देखता है। लोग विकास के प्रतिभागी नहीं हैं, अपितु वे केवल निष्क्रिय लाभार्थी हैं।

3. आधारभूत/न्यूनतम आवश्यकता उपागम (Basic/Minimum Needs Approach)-मूल रूप से यह उपागम अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (I.L.O.) की देन है जिसमें मानव विकास के लिए जरूरी छः न्यूनतम आवश्यकताओं की पहचान की गई है। वे हैं-

  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • भोजन
  • जलापूर्ति
  • स्वच्छता और
  • आवास।

इस उपागम में परिभाषित वर्गों की मूलभूत आवश्यकताओं पर तो बल दिया गया है, किंतु मानव विकल्पों की ओर ध्यान नहीं दिया गया।

4. क्षमता उपागम (Capability Approach)-इस उपागम का समर्थन प्रो० अमर्त्य सेन ने किया है। इसके अनुसार क्षमताओं को विकसित किए बिना मनुष्य संसाधनों तक नहीं पहुँच सकता। क्षमताओं का निर्माण ही मानव विकास की कुंजी है।

प्रश्न 3.
मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ रुचिकर हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ रुचिकर हैं। प्रायः मानव विकास में बड़े देशों की अपेक्षा छोटे देशों का कार्य अच्छा रहा है। इसी तरह मानव विकास में अपेक्षाकृत गरीब राष्ट्रों का कोटि-क्रम अमीर पड़ोसियों से उच्च रहा है। उदाहरण के लिए श्रीलंका, त्रिनिदाद, टोबैगो का मानव विकास सूचकांक भारत के मानव विकास सूचकांक से ऊँचा है। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय कम होते हुए भी मानव विकास में केरल का प्रदर्शन पंजाब और गुजरात से बेहतर है। मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों को चार समूहों में बाँटा जा सकता है

मानव विकास के स्तरमानव विकास सूचकांक के स्कोर/अंकदेशों की संख्या
अति उच्च0.800 से ऊपर– 59
उच्च0.701 से 0.799 के मध्य53
मध्यम0.550 से 0.700 के मध्य39
निम्न0.549 से नीचे38

मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ कुछ अत्यंत रुचिकर परिणाम दर्शाती हैं। प्रायः लोग मानव विकास के निम्न स्तर के लिए लोगों की संस्कृति को दोष देते हैं। मानव विकास के उच्च स्तरों वाले देश सामाजिक क्षेत्रों में अधिक निवेश करते हैं और ये राजनीतिक दृष्टिकोण से स्थिर होते हैं। दूसरी ओर, निम्न स्तरों वाले देश प्रतिरक्षा पर अधिक खर्च करते हैं।

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HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

Haryana State Board HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

प्रश्न 1.
निम्न में आप कौन-से सर्वांगसम प्रतिबंधों का प्रयोग करेंगे?
(a) दिया है:
AC = DF
AB = DE
BC = EF
इसलिए, ΔARC ≅ ΔDEF

(b) दिया है: ZX = RP
RQ = ZY
∠PRQ = ∠XZY
इसलिए, ΔPQR ≅ ΔXYZ

(c) दिया है : ∠MLN = ∠FGH
∠NML = ∠GFH
ML = FG
इसलिए, ΔLMN ≅ ΔGFH

(d) दिया है: EB = DB
AE = BC
∠A = ∠C = 90°
इसलिए, ΔABE ≅ ACDB
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 1
हल :
(a) S.S.S. सर्वांगसमता से,
ΔABC ≅ ΔDEE

(b) S.A.S. सर्वांगसमता से,
ΔPQR ≅ ΔXYZ.

(c) A.S.A. सर्वांगसमता से, .
ΔLMN ≅ AGFH

(d) R.H.S. सर्वांगसमता से,
ΔABE ≅ ΔCDB.

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

प्रश्न 2.
आप ΔART ≅ ΔPEN दर्शाना चाहते हैं,
(a) यदि आप S.S.S. सर्वांगसमता प्रतिबंध का प्रयोग करें, तो आपको दर्शाने की आवश्यकता है:
(i) AR =
(ii) RT =
(iii) AT =
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 2
(b) यदि यह दिया गया है कि ∠T = ∠N और आपको S.A.S. प्रतिबंध का प्रयोग करना है, तो आपको आवश्यकता होगी:
(i) RT = और
(ii) PN =
(c) यदि यह कह दिया गया है कि AT = PN और आपको A.S.A. प्रतिबन्ध का प्रयोग करना है, तो आपको आवश्यकता होगी:
(i) ∠RAT = और
(ii) ∠ATR =
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 3
हल :
(a) ΔART ≅ ΔPEN को S.S.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का प्रयोग करने पर,
(i) AR = PE
(ii) RT = EN
(iii) AT = PN

(b) यदि m∠T = m∠N और S.A.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का प्रयोग करने पर
(i) RT = EN और
(ii) PN = AT.

(c) यदि AT = PN और A.S.A. सर्वांगसमता का प्रयोग करने के लिए आवश्यकता होगी।
(i) ∠RAT = ∠EPN और
(ii) ∠ATR = ∠PNE.

प्रश्न 3.
आपको ΔAMP ≅ ΔAMQ दर्शाना है। निम्न चरणों में रिक्त कारणों को भरिए:
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 4

क्रमकारण
(i) PM = QM(i) ………….
(ii) ∠PMA = ∠QMA(ii) ………….
(iii) AM = AM(iii) ………….
(iv) ΔAMP ≅ ΔAMQ(iv) ………….

हल :
कारण क्रमानुसार निम्न है:
(i) दिया है
(ii) दिया है
(iii) उभयनिष्ठ
(iv) S.A.S. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध से।

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

प्रश्न 4.
ΔABC में, ∠A = 30°, ∠B = 40° और ∠C = 110°, ΔPQR में, ∠P = 30°, ∠Q = 40° और ∠R = 110°
एक विद्यार्थी कहता है कि A.A.A. सर्वांगसमता प्रतिबंध से ΔABC ≅ ΔPQR है। क्या यह कथन सत्य है? क्यों या क्यों नहीं ?
हल :
दो त्रिभजों में, एक त्रिभुज के तीनों कोण दूसरे त्रिभुज के तीनों कोणों के बराबर हों, तो यह आवश्यक नहीं है कि दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हों।
हम एक त्रिभुज ABC की रचना करते हैं जिसमें ∠A = 30°, ∠B = 40°, ∠C = 110° और BC = 3 सेमी (माना)
तथा दूसरा त्रिभुज PQR की रचना करते हैं जिसमें ∠P = 30°, ∠Q = 40°, ∠R = 110° और QR = 4 सेमी (माना),
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 5
स्पष्ट है कि त्रिभुजों के संगत कोण बराबर हैं, परन्तु सर्वांगसम नहीं हैं क्योंकि BC ≠ QR.

प्रश्न 5.
आकृति में दो त्रिभुज ART तथा OWN सर्वांगसम हैं जिनके संगत भागों को अंकित किया गया है। हम लिख सकते हैं ΔRAT = ?
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 6
हल :
दी गई आकृति में,
ΔRAT ≅ ΔWON

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

प्रश्न 6.
कथनों को पूरा कीजिए :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 7
ΔBCA ≅ ?
ΔQRS ≅ ?
हल :
सर्वांगसम कथनों को पूरा करने पर,
ΔABC ≅ ΔBTA
ΔQRS ≅ ΔTPQ

प्रश्न 7.
एक वर्गाकित शीट पर, बराबर क्षेत्रफलों वाले दो त्रिभुजों को इस प्रकार बनाइए कि :
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 8
(i) त्रिभुज सर्वांगसम हों।
(ii) त्रिभुज सर्वागसम न हों।
आप उनके परिमाप के बारे में क्या कह सकते हैं?
हल :
(i) ΔABC का क्षेत्रफल = \(\frac {1}{2}\) × BC × AB
= \(\frac {1}{2}\) × 4 × 3 वर्ग इकाई
= 6 वर्ग इकाई
और ΔDCA का क्षेत्रफल = \(\frac {1}{2}\) × DC × DA
= \(\frac {1}{2}\) × 3 × 4 वर्ग इकाई
= 6 वर्ग इकाई
∴ ΔABC का क्षेत्रफल = ΔCDA का क्षेत्रफल।
ΔABC और ΔCDA में,
AB = CD
∠B = ∠D
और AC = AC
∴ R.H.S. सर्वांगसमता प्रतिबंध से,
ΔABC ≅ ΔCDA.
दोनों त्रिभुजों के परिमाप समान है।

(ii) यहाँ ΔABC का क्षेत्रफल
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 9
∴ ΔABC का क्षेत्रफल = ΔDBC का क्षेत्रफल ।
ये त्रिभुज आकृति से सर्वांगसम नहीं हैं परन्तु क्षेत्रफल समान हैं।
दोनों त्रिभुजों की परिमाप अलग-अलग है।

प्रश्न 8.
आकृति में एक सांगसम भागों का एक अतिरिक्त युग्म बताइए जिससे ΔMBC और ΔPQR सर्वांगसम हो जाएँ। आपने किस प्रतिबंध का प्रयोग किया ?
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 10
हल :
ΔABC ≅ ΔPQR सिद्ध करने के लिए संगत भागों के एक अतिरिक्त युग्म की आवश्यकता होगी, वह है BC = QR.
इसमें A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का प्रयोग किया

HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2

प्रश्न 9.
चर्चा कीजिए, क्यों ?
ΔABC ≅ ΔFED.
HBSE 7th Class Maths Solutions Chapter 7 त्रिभुजों की सर्वांगसमता Ex 7.2 - 11
हल:
ΔABC ≅ ΔFED
∴ ∠C = ∠D.
[∠A = ∠F, ∠B = ∠E और DE = BC, दिया है]
अत: A.S.A. सर्वांगसमता प्रतिबन्ध का प्रयोग किया गया है।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
(A) आकार में वृद्धि
(B) गुण में धनात्मक परिवर्तन
(C) आकार में स्थिरता
(D) गुण में साधारण परिवर्तन
उत्तर:
(B) गुण में धनात्मक परिवर्तन

2. मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में से किस विद्वान की देन है?
(A) प्रो० अमर्त्य सेन
(B) डॉ० महबूब-उल-हक
(C) एलन सी० सेम्पुल
(D) रैटजेल
उत्तर:
(B) डॉ० महबूब-उल-हक

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास

3. निम्नलिखित में कौन-सा देश उच्च मानव विकास वाला नहीं है?
(A) नार्वे
(B) अर्जेंटाइनों
(C) जापान
(D) मिस्र
उत्तर:
(D) मिस्र

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र हैं जिनके आधार पर विभिन्न देशों का उच्च कोटि-क्रम तैयार किया जाता है। ये मूलभूत क्षेत्र हैं-

  1. स्वास्थ्य
  2. शिक्षा
  3. संसाधनों तक पहुँच।

प्रश्न 2.
मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मानव विकास के चार प्रमुख घटक अथवा स्तंभ हैं-

  1. समता
  2. सतत् पोषणीयता
  3. उत्पादकता
  4. सशक्तीकरण।

मानव विकास का विचार इन्हीं चार संकल्पनाओं/घटकों पर आधारित है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 3.
मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
प्रत्येक देश अपने मूलभूत क्षेत्रों स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संसाधनों तक पहुँच के अंतर्गत हुई प्रगति के आधार पर 0 से 1 के बीच अंक अर्जित करते हैं। यह अंक 1 के जितना पास होगा, मानव विकास का स्तर उतना ही अधिक होगा। मानव विकास प्रतिवेदन 2018 के अनुसार 59 देशों का स्कोर 0.800 से ऊपर है जो अति उच्च वर्ग में आते हैं। 53 देशों का स्कोर 0.701 से 0.799 के बीच उच्च वर्ग में, 39 देशों का स्कोर 0.550 से 0.700 के बीच मध्यम वर्ग तथा 38 देशों का स्कोर 0.549 से नीचे है जो निम्न वर्ग में रखे गए हैं। इस प्रकार मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों को चार समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है-

मानव विकास का स्तरमानव विकास सूचकांक के अंकदेशों की संख्या
अति उच्च0.800 से ऊपर59
उच्च0.701 से 0.799 के मध्य53
मध्यम0.550 से 0.700 के मध्य39
निम्न0.549 से नीचे38

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
मानव विकास शब्द से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन सन् 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री डॉ० महबूब-उल-हक ने किया था। उन्होंने मानव विकास की कल्पना एक ऐसे विकास के रूप में की जिसका संबंध लोगों के विकल्पों में बढ़ोतरी से है, ताकि वे आत्म-सम्मान के साथ दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन जी सकें। सन् 1990 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास को इस प्रकार से परिभाषित किया गया है, “मानव विकास मनुष्य की आकांक्षाओं एवं उन्हें उपलब्ध जीवनयापन की सुविधाओं के स्तर को विकसित करने की प्रक्रिया है।” अतः मानव विकास के तीन महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं (i) स्वास्थ्य, (ii) शिक्षा का प्रसार, (iii) संसाधनों तक पहुँच।

भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं नोबल पुरस्कार विजेता डॉ० अमर्त्य सेन ने विकास का मुख्य उद्देश्य लोगों की स्वतंत्रता में वृद्धि को बताया है। इन सभी अवधारणाओं में सभी प्रकार के विकास का केंद्र-बिंदु मनुष्य है। अतः विकास का मूल उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों को उत्पन्न करना है जिनमें लोग सार्थक जीवन व्यतीत कर सकें।

सार्थक जीवन केवल दीर्घ नहीं होता बल्कि उसका कोई उद्देश्य होना भी जरूरी होता है। इसका अर्थ है-लोग स्वस्थ व तंदुरुस्त रहें और अपने विवेक व बुद्धि का विकास कर सकें। वे समाज में प्रतिभागिता करें और अपने उद्देश्यों को पूरा करने में स्वतंत्र हों। यही जीवन की सार्थकता है। इस अवधारणा से पहले अनेक दशकों तक मानव-विकास के स्तर को केवल आर्थिक वृद्धि के संदर्भ में मापा जाता था अर्थात जिस देश की अर्थव्यवस्था जितनी बड़ी होती थी उसे उतना ही विकसित माना जाता था। चाहे उस विकास से लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन हुआ हो। विकास की नई अवधारणा ने इस पूर्व प्रचलित विचारधारा पर पुनः विचार करने पर मजबूर किया है।

प्रश्न 2.
मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत् पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
समता (Equity) – समता का आशय ऐसी व्यवस्था करने से है कि प्रत्येक व्यक्ति की उपलब्ध संसाधनों तक समान पहुँच हो सके। लोगों को उपलब्ध अवसर धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान तथा आय के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिएँ। भारत के संविधान में अनुच्छेद 14-18 के अंतर्गत लोगों को समानता के मूल अधिकार प्रदान किए गए हैं। इसके बावजूद भी प्रत्येक समाज में भेदभाव की घटनाएँ कभी-न-कभी देखने को मिलती रहती हैं।

सतत पोषणीयता (Sustainability) – यहाँ सतत पोषणीयता अथवा निर्वहन का मतलब है कि लोगों को विकास करने के अवसर लगातार मिलते रहें। सतत पोषणीय मानव विकास तभी होगा जब प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें। अतः यह जरूरी है कि हम पर्यावरणीय, वित्तीय और मानव संसाधनों का आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए सुविचारित उपयोग करें। यदि हम इन बहुमूल्य संसाधनों का अंधा-धुंध प्रयोग अथवा दुरुपयोग करेंगे तो भावी पीढ़ियों के विकल्प कम हो जाएंगे।

मानव विकास HBSE 12th Class Geography Notes

→ सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) : एक देश की सीमाओं में उत्पादित समस्त वस्तुओं एवं सेवाओं का मुद्रा में मूल्य। इसमें विदेशों से अर्जित आय को शामिल नहीं किया जाता।

→ सकल राष्ट्रीय आय (Gross National Income) : देश का सकल घरेलू उत्पाद तथा विश्व के अन्य देशों में उत्पादन संसाधनों से अर्जित निबल आय का योग।

→ विकास का पारंपरिक अर्थ (Traditional Meaning of Development) : विकास परिवर्तन की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें संसाधनों के दोहन से लोगों की गुणवत्ता में सुधार हो सके। विकास की अवधारणा समय और स्थान के साथ बदलती रहती है। प्रति व्यक्ति आय, ऊर्जा उपभोग तथा पोषण स्तर आदि विकास को मापने के कुछ तरीके हैं।

→ वृद्धि (Growth) : वृद्धि मात्रात्मक एवं मूल्य निरपेक्ष है। इसका चिह्न धनात्मक अथवा ऋणात्मक हो सकता है।

→ विकास (Development) : विकास का अर्थ गुणात्मक परिवर्तन से है, जो मूल्य सापेक्ष होता है। विकास की प्रक्रिया जीवन-पर्यंत निरंतर चलती है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव विकास

→ मानव विकास (Human Development) : मानव विकास मनुष्य की आकांक्षाओं एवं उन्हें उपलब्ध जीवन-यापन की सुविधाओं के स्तर को विकसित करने की प्रक्रिया है।

→ मानव विकास के सूचक (Indicators of Human Development):

  • जीवन प्रत्याशा
  • साक्षरता एवं
  • प्रति व्यक्ति आय।

→ मानव विकास के चार स्तंभ (Four Pillars of Human Development):

  • समता
  • सतत् पोषणीयता
  • उत्पादकता
  • सशक्तीकरण।

→ मानव विकास के उपागम (Approaches of Human Development):

  • आय उपागम
  • कल्याण
  • आधारभूत आवश्यकता उपागम
  • क्षमता उपागम।

→ मानव विकास सूचकांक (Human Development Index-HDI) : यह मानव विकास में प्राप्तियों का मापन करता है। यह प्रदर्शित करता है कि मानव विकास के प्रमुख क्षेत्रों में क्या उपलब्धियाँ हुई हैं।

→ मानव गरीबी सूचकांक (Human Poverty Index) : यह मानव विकास सूचकांक से संबंधित है, जो मानव विकास में कमियों को दर्शाता है।

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HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(A) खुली अर्थव्यवस्था में विश्व के अन्य राष्ट्रों से आयात-निर्यात होता है
(B) विश्व की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ खुली अर्थव्यवस्थाएँ हैं
(C) विश्व की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ बंद अर्थव्यवस्थाएँ हैं
(D) खुली अर्थव्यवस्था में अन्य राष्ट्रों के साथ वित्तीय परिसंपत्तियों में भी व्यापार होता है
उत्तर:
(C) विश्व की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ बंद अर्थव्यवस्थाएँ हैं

2. भुगतान शेष से अभिप्राय है
(A) निर्यात तथा आयात के दृश्य मदों में अंतर
(B) निर्यात तथा आयात के अदृश्य मदों में अंतर
(C) स्वर्ण के बाहरी तथा आंतरिक प्रवाह में अंतरं
(D) एक देश के निवासियों तथा दूसरे देश के निवासियों में किए गए आर्थिक सौदों का क्रमबद्ध लेखा
उत्तर:
(D) एक देश के निवासियों तथा दूसरे देश के निवासियों में किए गए आर्थिक सौदों का क्रमबद्ध लेखा

3. व्यापार शेष से अभिप्राय है
(A) वस्तुओं के निर्यात तथा आयात में अंतर
(B) सेवाओं के निर्यात तथा आयात में अंतर
(C) पूँजी के निर्यात तथा आयात में अंतर
(D) उपर्युक्त में से कोई भी नहीं
उत्तर:
(A) वस्तुओं के निर्यात तथा आयात में अंतर

4. भुगतान शेष में शामिल होते हैं-
(A) दृश्य मदें
(B) अदृश्य मदें
(C) पूँजी हस्तांतरण
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

5. व्यापार शेष में निम्नलिखित में से किसको शामिल नहीं किया जाता?
(A) सेवाओं के आयात-निर्यात को
(B) देशों के बीच ब्याज तथा लाभांश के भुगतान को
(C) पर्यटकों द्वारा व्यय को
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

6. भुगतान शेष के चालू खाते में निम्नलिखित में से कौन-से सौदे रिकॉर्ड किए जाते हैं?
(A) वस्तुओं तथा सेवाओं के आयात और निर्यात
(B) एक देश से दूसरे देश को एक-पक्षीय हस्तांतरण
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों

7. भुगतान शेष के एक-पक्षीय हस्तांतरण-
(A) एक देश से दूसरे देश को एक-तरफा किए जाते हैं.
(B) इनका व्यावसायिक लेन-देन से कोई संबंध नहीं होता
(C) इनमें प्राप्तियों के बदले में कोई भुगतान नहीं किए जाते; जैसे-उपहार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

8. भुगतान शेष के पूँजी खाते की मुख्य मदें निम्नलिखित में से कौन-सी हैं?
(A) विदेशी निवेश
(B) ऋण
(C) बैंकिंग पूँजी लेन-देन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

9. वे सभी पूँजीगत सौदे जिनके कारण विदेशी विनिमय का प्रवाह देश से बाहर को जाता है, उन्हें भुगतान शेष के पूँजी खाते में किन मदों में लिखा जाता है?
(A) धनात्मक मदों में
(B) ऋणात्मक मदों में
(C) शून्य मदों में
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) ऋणात्मक मदों में

10. निर्यात-आयात के मूल्य के अंतर को कहते हैं-
(A) व्यापार शेष
(B) भुगतान शेष
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) व्यापार शेष

11. केवल दृश्य मदों को शामिल किया जाता है-
(A) व्यापार शेष में
(B) भुगतान शेष में
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) व्यापार शेष में

12. व्यापार शेष
(A) भुगतान शेष + शुद्ध अदृश्य मदें
(B) भुगतान शेष – शुद्ध अदृश्य मदें
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) भुगतान शेष – शुद्ध अदृश्य मदें

13. स्वायत्त (Autonomous) मदें उन सौदों से संबंधित होती हैं जिनका-
(A) निर्धारण लाभ को ध्यान में रखकर किया जाता है
(B) संबंध भुगतान शेष की स्थिति से नहीं होता
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों

14. समायोजक (Accommodating) मदें भुगतान शेष के खाते की वे मदें हैं जिनका
(A) निर्धारण लाभ को ध्यान में रखकर नहीं किया जाता
(B) संबंध देश के भुगतान शेष की धनात्मक अथवा ऋणात्मक स्थिति से होता है
(C) उद्देश्य भुगतान शेष की समानता स्थापित कराना होता है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

15. भुगतान शेष सदैव होता है
(A) प्रतिकूल
(B) संतुलित
(C) अनुकूल
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) संतुलित

16. व्यापार शेष की तुलना में भुगतान शेष है
(A) अधिक व्यापक
(B) कम व्यापक
(C) व्यापक भी तथा नहीं भी
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) अधिक व्यापक

17. भुगतान शेष के असंतुलन से अभिप्राय है-
(A) बचत वाला भुगतान शेष
(B) घाटे वाला भुगतान शेष
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों

18. भुगतान शेष का घाटे वाला असंतुलन तब होता है जब-
(A) प्राप्तियों तथा भुगतानों का शुद्ध शेष ऋणात्मक (-) है
(B) प्राप्तियों तथा भुगतानों का शुद्ध शेष धनात्मक (+) है
(C) प्राप्तियों तथा भुगतानों का शुद्ध शेष बराबर (=) है
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(A) प्राप्तियों तथा भुगतानों का शुद्ध शेष ऋणात्मक (-) है

19. ब्रेटन वुड्स व्यवस्था किस वर्ष से प्रारंभ हुई?
(A) 1944 से
(B) 1960 से
(C) 1994 से
(D) 1947 से
उत्तर:
(A) 1944 से

20. यदि व्यापार शेष (-) 600 करोड़ रुपए है और निर्यात का मूल्य 500 करोड़ रुपए है तो आयात का मूल्य होगा
(A) -1,300 करोड़ रुपए
(B) 300 करोड़ रुपए
(C) 1,100 करोड़ रुपए
(D) 1,200 करोड़ रुपए
उत्तर:
(C) 1,100 करोड़ रुपए

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

21. विनिमय दर से अभिप्राय अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में एक करेंसी की अन्य करेंसियों के रूप में-
(A) कीमत से है
(B) विनिमय के अनुपात से है
(C) (A) और (B) दोनों
(D) वस्तु विनिमय से है
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों

22. वर्तमान में विनिमय दरों के किस रूप को अपनाया जाता है?
(A) स्थिर विनिमय दरों के
(B) नम्य (लोचशील) विनिमय दरों के
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) नम्य (लोचशील) विनिमय दरों के

23. स्थिर विनिमय प्रणाली के अंतर्गत विनिमय दर का निर्धारण करेंसी की एक इकाई में निहित निम्नलिखित में से किसके आधार पर किया जाता है?
(A) चाँदी की मात्रा
(B) सोने की मात्रा
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) सोने की मात्रा

24. टकसाली दर से अभिप्राय है-
(A) समान क्रय-शक्ति
(B) दो करेंसियों में स्वर्ण का भार
(C) विदेशी करेंसी की माँग तथा पूर्ति
(D) दो देशों में कीमत स्तर
उत्तर:
(B) दो करेंसियों में स्वर्ण का भार

25. विनिमय दर की समंजनीय प्रणाली (या ब्रेटन वुडस प्रणाली) के अनुसार-
(A) विभिन्न करेंसियों को एक करेंसी (अमेरिकी डॉलर) के साथ संबंधित कर दिया गया
(B) अमेरिकी डॉलर का एक निश्चित कीमत पर स्वर्ण मूल्य निर्धारित कर दिया गया
(C) दो करेंसियों के बीच समता उनमें पाई जाने वाली स्वर्ण की मात्रा द्वारा निर्धारित की जाती थी
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

26. वर्तमान समय में एक देश की मुद्रा की विभिन्न देशों की मुद्राओं के बीच विनिमय दर-
(A) एक ही होगी
(B) अलग-अलग होगी.
(C) निश्चित होगी
(D) अनिश्चित होगी
उत्तर:
(B) अलग-अलग होगी

27. निम्नलिखित में से स्थिर विनिमय प्रणाली का कौन-सा लाभ नहीं है?
(A) अस्थिरता
(B) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा
(C) स्थिरता
(D) समष्टिगत नीतियों में समन्वय
उत्तर:
(A) अस्थिरता

28. स्थिर विनिमय प्रणाली का निम्नलिखित में से कौन-सा दोष नहीं है?
(A) विशाल अंतर्राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता
(B) पूँजी का असीमित आवागमन
(C) जोखिम पूँजी का निरुत्साहित होना
(D) साधनों के आबंटन में कठोरता
उत्तर:
(B) पूँजी का असीमित आवागमन

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

29. नम्य(लोचशील) वह दर है जिसका निर्धारण-
(A) मुद्रा में निहित सोने की मात्रा द्वारा होता है
(B) विभिन्न मुद्राओं की पूर्ति तथा माँग द्वारा होता है
(C) एक करेंसी के टकसाली मूल्य द्वारा होता है
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) विभिन्न मुद्राओं की पूर्ति तथा माँग द्वारा होता है

30. जिस विनिमय दर पर विदेशी मुद्रा की माँग उसकी पूर्ति के बराबर हो जाए तो उसे कहते हैं-
(A) विनिमय की समानता दर
(B) विनिमय की असंतुलन दर
(C) संतुलन दर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) संतुलन दर

31. विदेशी विनिमय की माँग निम्नलिखित में से किस उद्देश्य के लिए की जाती है?
(A) अंतर्राष्ट्रीय ऋणों का भुगतान करने के लिए
(B) शेष विश्व में निवेश करने के लिए
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों

32. विदेशी मुद्रा की माँग तथा विनिमय दर में क्या संबंध पाया जाता है?
(A) विपरीत
(B) प्रत्यक्ष
(C) कोई संबंध नहीं
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) विपरीत

33. विदेशी विनिमय की पूर्ति तथा विनिमय दर में क्या संबंध पाया जाता है?
(A) विपरीत
(B) प्रत्यक्ष
(C) बहुत निकट
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) प्रत्यक्ष

34. नम्य विनिमय दर प्रणाली का निम्नलिखित में से कौन-सा दोष नहीं है?
(A) अस्थिरता
(B) समष्टिगत नीतियों के समन्वय में कठिनाई
(C) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में स्थिरता

35. विदेशी विनिमय बाज़ार वह बाज़ार है जिसमें संसार के विभिन्न देशों की राष्ट्रीय करेंसियों को-
(A) बेचा जाता है
(B) खरीदा जाता है
(C) बेचा अथवा खरीदा जाता है
(D) विनिमय नहीं होता
उत्तर:
(C) बेचा अथवा खरीदा जाता है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

36. हाजिर (चालू) बाज़ार का अर्थ उस बाज़ार से है जिसमें-
(A) केवल चालू या हाजिर लेन-देन किया जाता है
(B) किसी भविष्य में किसी तिथि पर लेन-देन किया है
(C) तात्कालिक विनिमय दर का निर्धारण होता है
(D) (A) और (C) दोनों
उत्तर:
(D) (A) और (C) दोनों

37. वर्तमान समय में विनिमय दर का निर्धारण होता है-
(A) IMF ART
(B) IBRD द्वारा
(C) WTO GRI
(D) विदेशी मुद्रा बाज़ार में विदेशी मुद्रा की माँग और पूर्ति द्वारा
उत्तर:
(D) विदेशी मुद्रा बाज़ार में विदेशी मुद्रा की माँग और पूर्ति द्वारा

38. विनिमय दर का निर्धारण होता है-
(A) विदेशी मुद्रा की माँग से
(B) विदेशी तथा देशी मुद्रा की माँग से
(C) विदेशी तथा देशी मुद्रा की माँग व पूर्ति से
(D) विदेशी मुद्रा की माँग तथा पूर्ति से
उत्तर:
(D) विदेशी मुद्रा की माँग तथा पूर्ति से

39. स्वतंत्र विनिमय बाज़ार में जब पूर्ति यथास्थिर रहते हुए विदेशी मुद्रा की माँग बढ़ जाती है तो विनिमय दर में ……………. होती है और जब माँग यथास्थिर रहे परंतु पूर्ति बढ़ जाए तो विनिमय दर में …………. हो जाती है।
(A) कमी, शून्य
(B) वृद्धि, कमी
(C) वृद्धि, शून्य
(D) वृद्धि, वृद्धि
उत्तर:
(B) वृद्धि, कमी

40. नम्य (लोचपूर्ण) विनिमय प्रणाली में विनिमय दर निर्धारित होती है-
(A) देश के मौद्रिक प्राधिकरण (Authority) द्वारा
(B) स्वर्ण कीमत द्वारा
(C) विदेशी विनिमय बाज़ार की माँग-पूर्ति शक्ति द्वारा
(D) विनिमय मूल्यांतर द्वारा
उत्तर:
(C) विदेशी विनिमय बाज़ार की माँग-पूर्ति शक्ति द्वारा

41. देश में मुद्रास्फीति बढ़ने पर विनिमय दर-
(A) देश के विपक्ष में हो जाती है
(B) देश के पक्ष में हो जाती है
(C) अप्रभावित रहती है।
(D) उपर्युक्त सभी दशाएँ संभव हैं
उत्तर:
(A) देश के विपक्ष में हो जाती है

42. नम्य विनिमय दर प्रणाली में इंग्लैंड के पौंड की अमेरिका में माँग बढ़ती है, तब-
(A) डॉलर का मूल्यह्रास (Depreciation) होगा
(B) पौंड का मूल्यह्रास होगा
(C) डॉलर की मूल्यवृद्धि (Appreciation) होगी
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) डॉलर का मूल्यह्रास (Depreciation) होगा

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

43. विनिमय दर यदि 3 डॉलर = 1 पौंड से बदल कर 2 डॉलर = 1 पौंड हो जाती हे तब इसका अर्थ है-
(A) डॉलर का मूल्यह्रास
(B) डॉलर की मूल्यवृद्धि
(C) पौंड की मूल्यवृद्धि
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) डॉलर की मूल्यवृद्धि

44. यदि किसी देश में किसी समय स्टोरियों द्वारा विदेशी मुद्रा को अधिक मात्रा में खरीदा जाता है, तब उस देश में विनिमय दर-
(A) घटती है
(B) बढ़ती है
(C) स्थिर बनी रहती है
(D) उपर्युक्त सभी असत्य
उत्तर:
(B) बढ़ती है

45. देश में विस्तारवादी मौद्रिक नीति देश में विनिमय दर को-
(A) घटाती है
(B) बढ़ाती है
(C) अप्रभावित रखती है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) घटाती है

46. नम्य (लोचपूर्ण) विनिमय दर के लिए कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(A) विनिमय दर परिवर्तनशील होती है
(B) इस दर पर सरकार का नियंत्रण रहता है
(C) इसमें माँग और पूर्ति की शक्तियों के फलस्वरूप परिवर्तन होता है
(D) उपर्युक्त सभी सत्य
उत्तर:
(B) इस दर पर सरकार का नियंत्रण रहता है

47. विनिमय दर का निर्धारण माँग व पूर्ति से होता है, इस संदर्भ में किसी देश के अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में माँग किससे निर्धारित होती है? (A) उस देश के आयात से
(B) उस देश द्वारा लिए गए ऋणों से
(C) उस देश के निर्यातों से
(D) उस देश की राष्ट्रीय आय से
उत्तर:
(C) उस देश के निर्यातों से

48. नम्य (लोचदार) विनिमय दर नीति-
(A) माँग के नियम पर आधारित है
(B) पूर्ति के नियम पर आधारित है
(C) (A) और (B) दोनों पर आधारित है
(D) उपर्युक्त में से किसी पर भी आधारित नहीं
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों पर आधारित है।

49. स्वर्णमान में विनिमय दर का निर्धारण किया जाता था-
(A) टकसाली समता सिद्धांत द्वारा
(B) क्रय-शक्ति समता सिद्धांत द्वारा
(C) (A) और (B) दोनों द्वारा
(D) उपर्युक्त में से किसी के द्वारा नहीं
उत्तर:
(A) टकसाली समता सिद्धांत द्वारा

50. वर्तमान में विनिमय दर का निर्धारण टकसाली समता सिद्धांत द्वारा महत्त्वहीन हो गया है क्योंकि-
(A) वर्तमान में किसी भी देश ने स्वर्णमान नहीं अपना रखा है
(B) वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय पटल पर स्वर्ण आयात-निर्यात पर प्रतिबंध लगे हुए हैं
(C) वर्तमान में सभी देशों ने अपरिवर्तनीय पत्र मुद्रामान अपना रखा है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

51. स्वर्णमान वाले देशों की मुद्राओं की विनिमय दरों के उच्चावचन की सीमाएँ निर्धारित होती हैं-
(A) उनके स्वर्ण के मूल्यों के बीच
(B) स्वर्ण निर्यात तथा आयात मूल्यों के बीच
(C) रजत तथा स्वर्ण की मात्रा पर
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) स्वर्ण निर्यात तथा आयात मूल्यों के बीच

52. क्रय-शक्ति समता सिद्धांत के अनुसार विनिमय दर किस देश के पक्ष में होगी यदि पाँच वर्ष में A देश का सूचकांक 150 और B देश का सूचकांक 200 हो जाए।
(A) ‘A’ देश के
(B) ‘B’ देश के
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से किसी के नहीं
उत्तर:
(A) ‘A’ देश के

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53. विनिमय दर को निम्नलिखित प्रक्रिया द्वारा बाज़ार के सभी भागों में समान बनाया जा सकता है-
(A) सट्टे (Specutation) द्वारा
(B) विनिमय की मध्यस्थता (Arbitrage) द्वारा
(C) विदेशी मुद्रा की माँग एवं पूर्ति द्वारा
(D) ब्याज मध्यस्थता द्वारा
उत्तर:
(C) विदेशी मुद्रा की माँग एवं पूर्ति द्वारा

54. हाजिर दर (Spot Rate) एवं अग्रिम दर (Forward Rate) के बीच निम्न में से कौन-सी क्रिया होती है?
(A) सट्टा
(B) द्वैद्य रक्षण
(C) मध्यस्थता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

55. वायदा बाज़ार वह बाज़ार है जिसमें-
(A) भविष्य में पूरा होने वाला लेन-देन का कारोबार होता है
(B) यह भविष्य की विनिमय दर को परिभाषित करता है
(C) (A) और (B) दोनों
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(C) (A) और (B) दोनों

56. यदि 50 रुपए 2 डॉलर खरीदने के लिए आवश्यक हैं तो विनिमय दर है-
(A) 50 रुपए = 2 डॉलर
(B) 25 रुपए = 1 डॉलर
(C) 20 रुपए = 1 डॉलर
(D) 100 रुपए = 4 डॉलर
उत्तर:
(B) 25 रुपए = 1 डॉलर

57. नम्य (Flexible) विनिमय दर व्यवस्था का लाभ है-
(A) आर्थिक उथल-पुथल से बचाव
(B) विदेशी मुद्राओं को रिज़र्व रखने की जरूरत नहीं
(C) अंतर्राष्ट्रीय सौदों में जोखिम और अनिश्चितता
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

58. स्थिर विनिमय दर व्यवस्था का लाभ है-
(A) आर्थिक उथल-पुथल से बचाव
(B) विदेशी मुद्राओं को रिज़र्व रखने की जरूरत नहीं
(C) अंतर्राष्ट्रीय सौदों में जोखिम और अनिश्चितता
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) आर्थिक उथल-पुथल से बचाव

B. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. एक देश के निवासियों तथा दूसरे देश के निवासियों में किए गए आर्थिक सौदों का क्रमबद्ध लेखा ………………….. कहलाता है। (भुगतान शेष/व्यापार शेष)
उत्तर:
भुगतान शेष

2. वस्तुओं के निर्यात तथा आयात में अंतर ………………… कहलाता है। (भुगतान शेष/व्यापार शेष)
उत्तर:
व्यापार शेष

3. भुगतान शेष सदैव होता है। (असंतुलित/संतुलित)
उत्तर:
संतुलित

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4. व्यापार शेष की तुलना में भुगतान शेष ………………… होता है। (अधिक व्यापक/कम व्यापक)
उत्तर:
अधिक व्यापक

5. यदि विदेशी मुद्रा बाज़ार में लेन-देन दैनिक प्रकृति का है तो वह ………………… बाज़ार कहलाता है। (हाजिर/कारक)
उत्तर:
हाजिर

6. नम्य विनिमय दर में विनिमय दर का निर्धारण ………………….. माँग तथा पूर्ति की शक्तियों द्वारा होता है। (बाज़ार/कारक)
उत्तर:
बाज़ार

C. बताइए कि निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत

  1. नम्य विनिमय दर पर सरकार का नियंत्रण होता है।
  2. व्यापार-शेष और भुगतान-शेष में अंतर पाया जाता है।
  3. भुगतान-शेष एक आर्थिक बैरोमीटर है जिसकी सहायता से किसी देश की अन्तर्राष्ट्रीय भुगतानों की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है।
  4. व्यापार-शेष को दृश्य वस्तुओं का सन्तुलन भी कहा जाता है।
  5. भुगतान-शेष व्यापार-शेष से विस्तृत धारणा है।
  6. वास्तविक विनिमय दर, स्थिर कीमतों पर आधारित विनिमय दर होती है।
  7. किसी मुद्रा की औसत सापेक्ष क्षमता का माप, वास्तविक प्रभावी विनिमय दर कहलाती है।
  8. विश्व की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ बंद अर्थव्यवस्थाएँ हैं।
  9. स्थिर विनिमय दर प्रणाली में विनिमय की दर सरकार द्वारा निर्धारित की जाती है।
  10. सेयर्स के अनुसार मुद्राओं के आपसी मूल्यों को विदेशी विनिमय दर कहते हैं।

उत्तर:

  1. गलत
  2. सही
  3. सही
  4. सही
  5. सही
  6. सही
  7. गलत
  8. गलत
  9. सही
  10. सही

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक बंद अर्थव्यवस्था क्या है?
उत्तर:
एक बंद अर्थव्यवस्था से अभिप्राय उस अर्थव्यवस्था से है जिसका अन्य देशों के साथ कोई आर्थिक संबंध नहीं होता।

प्रश्न 2.
एक खुली अर्थव्यवस्था क्या है?
उत्तर:
एक खुली अर्थव्यवस्था से अभिप्राय उस अर्थव्यवस्था से है जिसके अन्य देशों के साथ आर्थिक संबंध होते हैं।

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प्रश्न 3.
एक अर्थव्यवस्था के खुलेपन की मात्रा को कैसे मापा जाता है?
उत्तर:
सकल घरेलू उत्पाद में कुल विदेशी व्यापार के अनुपात के रूप में एक अर्थव्यवस्था के खुलेपन की मात्रा को मापा जाता है।

प्रश्न 4.
भुगतान शेष (BOP) क्या है?
उत्तर:
भुगतान शेष (Balance of Payment) देश के शेष विश्व से आर्थिक लेन-देन के फलस्वरूप समस्त अंतर्राष्ट्रीय भुगतानों और प्राप्तियों का अंतर है।

प्रश्न 5.
व्यापार शेष का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यापार शेष से अभिप्राय किसी देश के केवल वस्तुओं या दृश्य मदों के आयात और निर्यात के अंतर से है।

प्रश्न 6.
भुगतान शेष (अदायगी संतुलन) खाते का क्या अर्थ है?
उत्तर:
भुगतान शेष (अदायगी संतुलन) खाते से अभिप्राय शेष विश्व के साथ किसी दिए हुए वित्तीय वर्ष में आर्थिक लेन-देनों के व्यवस्थित रिकॉर्ड से है।

प्रश्न 7.
भुगतान शेष के चालू व पूँजी खातों के मुख्य घटक बताएँ।
उत्तर:
भुगतान शेष के चालू खाते के घटक हैं-(i) वस्तुओं का आयात-निर्यात, (ii) सेवाओं का आयात-निर्यात और (ii) एक-पक्षीय हस्तांतरण।
भुगतान शेष के पूँजी खाते के घटक हैं-(i) निजी लेन-देन, (ii) सरकारी लेन-देन, (iii) प्रत्यक्ष निवेश और (iv) पत्राधार निवेश।

प्रश्न 8.
भुगतान शेष के पूँजी खाते का क्या अर्थ है?
उत्तर:
भुगतान शेष का पूँजी खाता वह खाता है जिसमें एक देश के निवासियों द्वारा शेष विश्व से पूँजीगत परिसंपत्तियों तथा दायित्वों के आदान-प्रदानों का लेखा किया जाता है।

प्रश्न 9.
एक देश के भुगतान शेष खाते में क्या दर्ज किया जाता है?
उत्तर:
एक देश के भुगतान शेष खाते में एक देश के अन्य देशों के साथ किए गए वस्तुओं, सेवाओं और परिसंपत्तियों के लेन-देन दर्ज किए जाते हैं।

प्रश्न 10.
भुगतान शेष में घाटे (Deficit) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भुगतान शेष में घाटे से अभिप्राय यह है कि समस्त प्राप्तियों और भुगतानों का शुद्ध शेष ऋणात्मक (-) होता है।

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प्रश्न 11.
भुगतान शेष में आधिक्य (Surplus) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
भुगतान शेष में आधिक्य से अभिप्राय यह है कि सभी प्राप्तियों और भुगतानों का शुद्ध शेष धनात्मक (+) होता है।

प्रश्न 12.
समायोजक (Accommodating) और स्वायत्त (स्वप्रेरित) (Autonomous) मदों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
समायोजक मदों का अभिप्राय उन लेन-देनों से है जो भुगतान शेष (BOP) में किन्हीं अन्य गतिवधियों के कारण करने जरूरी हो जाते हैं; जैसे सरकार द्वारा वित्तीयन।

स्वायत्त (स्वप्रेरित) मदों से अभिप्राय उन अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक लेन-देनों (Transactions) से है जो अधिकतम लाभ कमाने जैसे उद्देश्यों से प्रेरित होते हैं।

प्रश्न 13.
विदेशी मुद्रा बाज़ार क्या है?
उत्तर:
विदेशी मुद्रा बाज़ार वह बाज़ार है जिसमें विभिन्न देशों की मुद्राओं को परस्पर बेचा व खरीदा जाता है।

प्रश्न 14.
विनिमय बाज़ार में संतुलन कहाँ होगा?
उत्तर:
विनिमय बाज़ार में संतुलन वहाँ होगा जहाँ विदेशी मुद्रा का माँग वक्र विदेशी मुद्रा के पूर्ति वक्र को काटता है।

प्रश्न 15.
विदेशी मुद्रा की माँग के दो स्रोत बताइए।
उत्तर:

  1. विदेशों में उपहार भेजने के लिए
  2. विदेशों से वस्तुओं और सेवाओं का क्रय।

प्रश्न 16.
विदेशी मुद्रा की पूर्ति के दो स्रोत बताइए।
उत्तर:

  1. निर्यात
  2. विदेशी निवेश।

प्रश्न 17.
विनिमय की दर में वृद्धि का क्या अर्थ है?
उत्तर:
विनिमय की दर में वृद्धि का अर्थ यह है कि विदेशी मुद्रा की एक इकाई के लिए अपने देश की पहले से अधिक मुद्रा देनी होगी।

प्रश्न 18.
आंतरिक मुद्रा के मूल्यहास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आंतरिक मुद्रा के मूल्यह्रास से अभिप्राय देशीय मुद्रा इकाइयों में विदेशी मुद्राओं की कीमत में वृद्धि से है। दूसरे शब्दों में, आंतरिक मुद्रा के ह्रास से अभिप्राय देश की मुद्रा के मूल्य में कमी से है।।

प्रश्न 19.
मुद्रा अधिमूल्यन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मुद्रा अधिमूल्यन से अभिप्राय देशी मुद्रा की इकाइयों में विदेशी मुद्रा की कीमत में कमी से है।

प्रश्न 20.
एक देश में विनिमय दर की कौन-सी दो व्यवस्थाएँ हो सकती हैं?
उत्तर:

  1. स्थिर विनिमय दर व्यवस्था
  2. नम्य (लोचदार) विनिमय दर व्यवस्था।

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प्रश्न 21.
स्थिर विनिमय दर व्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
स्थिर विनिमय दर व्यवस्था से अभिप्राय उस व्यवस्था से है जिसमें सभी विनिमय (लेन-देन) सरकार द्वारा घोषित की गई दर पर होते हैं। इस विनिमय दर में बहुत मामूली उतार-चढ़ाव मान्य होते हैं।

प्रश्न 22.
समंजनीय सीमाबंध व्यवस्था (Adjustable Peg System) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
समंजनीय सीमाबंध व्यवस्था से अभिप्राय एक देश द्वारा अपनी मुद्रा की विनिमय दर को किसी अन्य देश की मुद्रा की इकाइयों में नियत करने से है। इस नियत दर में किन्हीं विशेष परिस्थितियों में ही परिवर्तन किया जाता है।

प्रश्न 23.
नम्य (Flexible) विनिमय दर व्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
नम्य विनिमय दर व्यवस्था से अभिप्राय उस व्यवस्था से है जिसमें विनिमय दर का निर्धारण विदेशी मुद्रा बाज़ार में माँग और आपूर्ति द्वारा होता है। इस व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता। इसे लचीली विनिमय दर भी कहते है।

प्रश्न 24.
विस्तृत सीमापट्टी व्यवस्था से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विस्तृत सीमापट्टी व्यवस्था से अभिप्राय उस व्यवस्था से है जिसमें प्रत्येक सदस्य देश को उसकी घोषित विनिमय दर से 10% तक उतार-चढ़ाव करने की स्वतंत्रता होती है।

प्रश्न 25.
प्रबंधित तिरती व्यवस्था (Managed Floating System) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रबंधित तिरती व्यवस्था से अभिप्राय उस व्यवस्था से है जिसमें मौद्रिक अधिकारी ऐच्छिक आधार पर विनिमय दर निर्धारण में हस्तक्षेप कर सकते हैं।

प्रश्न 26.
विदेशी मुद्रा का हाजिर बाज़ार (Spot Market) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विदेशी मुद्रा के हाजिर बाज़ार से अभिप्राय उस मुद्रा बाज़ार से है जिसमें तुरंत होने वाले लेन-देन के लिए विदेशी मुद्रा की दर निर्धारित की जाती है।

प्रश्न 27.
विदेशी मुद्रा का वायदा बाज़ार (Forward Market) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विदेशी मुद्रा के वायदा बाज़ार से अभिप्राय उस मुद्रा बाज़ार से है जिसमें भविष्य में किसी तिथि पर होने वाले लेन-देन के लिए विदेशी मुद्रा की दर निर्धारित की जाती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक बंद अर्थव्यवस्था की तुलना में एक खुली अर्थव्यवस्था के क्या लाभ हैं? अथवा ‘एक खुली अर्थव्यवस्था में चयन की अधिक स्वतंत्रता होती है।’ समझाइए।
उत्तर:
यह कहना उचित है कि एक बंद अर्थव्यवस्था की तुलना में एक खुली अर्थव्यवस्था में लोगों को चयन की अधिक स्वतंत्रता होती है, जिसे निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है-(i) उपभोक्ताओं और फर्मों को घरेलू एवं विदेशी वस्तुओं के बीच चयन का अवसर मिलता है, (i) निवेशकों को घरेलू व विदेशी परिसंपत्तियों के बीच चयन का अवसर मिलता है, (iii) फर्मों को उत्पादन के स्थान का चयन करने और श्रमिकों को कहाँ काम देने, यह चयन की स्वतंत्रता होती है।

प्रश्न 2.
भुगतान शेष लेखांकन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
भुगतान शेष खाते में सभी लेन-देन को दोहरी लेखा प्रणाली के आधार पर लिखा जाता है। प्रत्येक लेन-देन को दो प्रविष्टियों के रूप में लिखा जाता है- एक पक्ष ‘नाम’ और दूसरा पक्ष ‘जमा’। इन दोनों प्रविष्टियों का आकार समान होता है, जिसके कारण ‘जमा’ पक्ष की प्रविष्टियों का योगफल सदा ‘नाम’ पक्ष की प्रविष्टियों के योग के बराबर रहता है। उदाहरण के लिए, जब किसी अन्य देश से भुगतान प्राप्त होता है तो यह क्रेडिट सौदा है और जब किसी अन्य देश को भुगतान किया जाता है तो यह डेबिट सौदा है। भुगतान शेष खाते के लेन-देन को हम निम्नलिखित पाँच प्रमुख श्रेणियों में वर्गीकृत करते हैं-

  • वस्तुएँ और सेवाएँ खाता
  • एक-पक्षीय हस्तांतरण खाता
  • दीर्घकालिक पूँजी खाता|
  • अल्पकालिक निजी पूँजी खाता
  • अल्पकालिक सरकारी पूँजी खाता।

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प्रश्न 3.
पूँजी खाते के संघटकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
पूँजी खाते के संघटक निम्नलिखित हैं-

  1. निजी लेन-देन-इस लेन-देन से व्यक्तियों, व्यवसायों और गैर-सरकारी निकायों द्वारा निजी रूप से धारित परिसंपत्तियाँ और दायित्व प्रभावित होते हैं।
  2. सरकारी लेन-देन सरकारी लेन-देन सरकार और उसकी संस्थाओं की परिसंपत्तियों और दायित्वों को प्रभावित करते हैं।
  3. प्रत्यक्ष निवेश-प्रत्यक्ष निवेश किसी परिसंपत्ति को खरीदकर उस पर अपना नियंत्रण स्थापित करता है।
  4. पत्राधार निवेश-पत्राधार निवेश (Perfect Investment) परिसंपत्तियों के क्रेता को उन पर नियंत्रण प्रदान नहीं करता। सरकार को विदेशी बैंकों द्वारा ऋण दिया जाना इस वर्ग में आता है।

प्रश्न 4.
भुगतान शेष से क्या अभिप्राय है? भुगतान शेष, व्यापार शेष से किस प्रकार विस्तृत अवधारणा है? अथवा व्यापार शेष तथा भुगतान शेष में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भुगतान शेष का अर्थ-मोटे रूप में, भुगतान शेष एक लेखा वर्ष में एक देश के समस्त अंतर्राष्ट्रीय भुगतानों और प्राप्तियों का अंतर है। भुगतान शेष लेखा एक देश का अन्य देशों के साथ एक वर्ष में किए गए समस्त आर्थिक सौदों का एक क्रमबद्ध लेखा है। इसमें दृश्य मदें (वस्तुएँ), अदृश्य मदें (गैर-साधन सेवाएँ) एक-पक्षीय हस्तांतरण और पूँजीगत लेन-देन शामिल होते हैं। भौतिक वस्तुओं (जैसे मशीनरी, चाय) का आयात-निर्यात दृश्य मदें हैं, क्योंकि वे दिखाई देती हैं जबकि सेवाएँ (जैसे जहाज़रानी, बीमा आदि) अदृश्य मदें हैं, क्योंकि वे राष्ट्रीय सीमा को पार करते दिखाई नहीं देती हैं। पुनः भुगतान शेष खाता दोहरी लेखांकन प्रणाली के अनुसार लिखा जाता है जिससे भुगतान और प्राप्तियाँ सदा बराबर रहती हैं। दूसरे शब्दों में, भुगतान शेष, तकनीकी दृष्टि से सदा संतुलन में रहता है।

व्यापार शेष और भुगतान शेष में अंतर-भुगतान शेष, व्यापार शेष की तुलना में एक व्यापक व विस्तृत अवधारणा है क्योंकि व्यापार शेष, भुगतान शेष के चार घटकों में से केवल एक घटक (दृश्य मदों के आयात-निर्यात का अंतर) है। यह दोनों के बीच अंतर से स्पष्ट है

व्यापार शेषभुगतान शेष
1. व्यापार शेष में केवल दृश्य मदें (वस्तुएँ) शामिल होती हैं।1. भुगतान शेष में दृश्य मदें (वस्तुएँ) और अदृश्य मदें (सेवाएँ) दोनों शामिल होती हैं।
2. इसमें पूँजीगत लेन-देन शामिल नहीं होते।2. इसमें पूँजीगत लेन-देन शामिल होते हैं।
3. यह भुगतान शेष के चालू खाते का एक भाग है।3. यह संपूर्ण चालू खाते और पूँजी खाते का भाग है।
4. यह अनुकूल, प्रतिकूल या संतुलित हो सकता है।4. यह लेखांकन दृष्टि से सदा संतुलित रहता है।
5. इसके घाटे को भुगतान शेष की मदों से पूरा किया जा सकता है।5. इसके घाटे को व्यापार शेष द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 5.
स्थिर विनिमय दर के किन्हीं चार लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्थिर विनिमय दर के लाभ निम्नलिखित हैं:
(i) स्थिर विनिमय दर विदेशी व्यापार को सविधाजनक बनाती है क्योंकि उनसे व्यापार में आने वाली वस्तुओं की कीमतों का सही अनुमान लगाया जा सकता है।

(ii) स्थिर विनिमय दर व्यवस्था में कोई अनिश्चितता नहीं होती और न ही कोई जोखिम होता है। इस प्रकार स्थिर विनिमय दर व्यवस्थित तथा अबाध रूप से दीर्घकालीन पूँजी प्रवाहों को प्रोत्साहन देती है।

(iii) स्थिर विनिमय दर प्रणाली एक प्रतिबंध का काम करती है और सरकार पर यह अनुशासन लगाती है कि वे देश के भीतर उत्तरदायित्वपूर्ण वित्तीय नीतियों का पालन करे।

(iv) स्थिर विनिमय दर प्रणाली के अंतर्गत सट्टेबाजी समाप्त हो जाती है क्योंकि सट्टेबाजी का विनिमय दर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रश्न 6.
व्यापार शेष (Balance of Trade) और चालू खाता शेष (Balance of CurrentAccount) में भेद कीजिए।
उत्तर:
व्यापार शेष केवल दृश्य मदों (वस्तुओं) के निर्यात मूल्य और आयात मूल्य का अंतर है। दूसरे शब्दों में, व्यापार शेष में केवल दृश्य मदों को शामिल किया जाता है। इसके विपरीत चालू खाता शेष में दृश्य मदें, अदृश्य मदें (सेवाएँ) और एक-पक्षीय हस्तांतरण के आयात-निर्यात का ब्यौरा दिया होता है। इस प्रकार व्यापार शेष, चालू खाता शेष का एक भाग है। स्पष्टतः व्यापार शेष की तुलना में ‘चालू खाता शेष’ एक विस्तृत अवधारणा है।

प्रश्न 7.
विदेशी मुद्रा दर का क्या अर्थ है? तीन कारण दीजिए कि क्यों लोग विदेशी मुद्रा प्राप्त करना चाहते हैं?
उत्तर:
विदेशी मुद्रा दर से अभिप्राय उस दर से है जिस पर एक देश की मुद्रा को अन्य देश की मुद्रा की इकाइयों में बदला जा सकता है। निम्नलिखित कारणों के लिए लोग विदेशी मुद्रा प्राप्त करना चाहते हैं-

  • अन्य देशों से वस्तुओं और सेवाओं को क्रय करने के लिए
  • विदेशों को उपहार भेजने के लिए
  • किसी अन्य देश में वित्तीय परिसंपत्तियाँ खरीदने के लिए
  • विदेशी मुद्राओं के मूल्यमान को लेकर व्यावसायिक दृष्टि से सट्टेबाजी के लिए।

प्रश्न 8.
भुगतान शेष तथा राष्ट्रीय आय लेखों के बीच संबंध की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भुगतान शेष अंतर्राष्ट्रीय प्राप्तियों और भुगतानों से संबंधित होता है। इसलिए भुगतान शेष राष्ट्रीय आय को प्रभावित करते हैं। एक अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन पर समस्त व्यय में घरेलू क्षेत्र के उपभोक्ताओं, निवेशकों तथा सरकार के व्यय के साथ ही विदेशियों द्वारा उक्त देश से आयात पर व्यय को जोड़ा जाता है। अर्थात्
Y = C + I + G + X
इस प्रकार सृजित आय का प्रयोग उपभोग, बचत और कर भुगतान में होता है। विदेशों से आयात पर व्यय (M) भी इसी में से किया जाता है। अर्थात्
Y = C + S + T + M
राष्ट्रीय आय लेखांकन सिद्धांत के अनुसार सृजित आय का मान प्रयोग की गई आय के समान होगा। अर्थात्
Y = C+ I + G + x
= C + S + T + M
I + G + x = S + T + M
इनमें I, G, X आय के चक्रीय प्रवाह में भरण (Injections) हैं और S, T, M क्षरण (Leakages) हैं। इसलिए संतुलन में प्रयोजित भरणों (Planned Injections) का योग, प्रायोजित क्षरणों (Planned Leakages) के योग के बराबर होगा। यही राष्ट्रीय आय और भुगतान शेष में संबंध है।

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प्रश्न 9.
विदेशी मुद्रा दर क्या है? विदेशी मुद्रा की कीमत कम होने से इसकी माँग क्यों बढ़ती है?
उत्तर:
विदेशी मुद्रा दर से अभिप्राय उस दर से है जिस पर एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा से विनिमय किया जाता है। विदेशी मुद्रा की माँग के मुख्य स्रोत निम्नलिखित हैं

  • अन्य देशों से वस्तुओं और सेवाओं को क्रय करने के लिए।
  • विदेशों को उपहार भेजने के लिए।
  • किसी अन्य देश में वित्तीय परिसंपत्तियाँ खरीदने के लिए।
  • विदेशी मुद्राओं के मूल्यमान को लेकर व्यावसायिक दृष्टि से सट्टेबाजी के लिए।

विदेशी मुद्रा बाज़ार में भी माँग का नियम लागू होता है और विदेशी मुद्रा का माँग वक्र ऊपर से नीचे दाईं ओर गिरता हुआ होता है। जब विदेशी मुद्रा की कीमत कम होती है तो विदेशी मुद्रा की माँग बढ़ती है।

प्रश्न 10.
विदेशी विनिमय बाज़ार से क्या अभिप्राय है? इसके मुख्य कार्य लिखें।
उत्तर:
विदेशी विनिमय बाज़ार से अभिप्राय उस बाज़ार से है जिसमें विभिन्न देशों की मुद्राओं को परस्पर बेचा व खरीदा जाता है। विदेशी विनिमय बाज़ार निम्नलिखित तीन कार्य करता है

  • हस्तांतरण कार्य-विदेशी विनिमय बाज़ार देशों के बीच क्रय-शक्ति का हस्तांतरण करता है।
  • साख कार्य-विदेशी विनिमय बाज़ार विदेशी व्यापार के लिए साख स्रोत का प्रावधान करता है।
  • जोखिम पूर्वोपाय कार्य-विदेशी विनिमय बाज़ार विदेशी विनिमय जोखिम से बचाव करता है।

प्रश्न 11.
विदेशी विनिमय की बाज़ार दर का निर्धारण कैसे होता है? एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
विदेशी विनिमय की बाज़ार दर का निर्धारण मुद्रा बाज़ार में संतुलन द्वारा होता है। विदेशी मुद्रा बाज़ार में संतुलन उस बिंदु पर निर्धारित होता है जहाँ विदेशी मुद्रा का माँग वक्र और मुद्रा का पूर्ति वक्र एक-दूसरे को काटते हों। विदेशी मुद्रा का माँग वक्र ऊपर से नीचे दाईं ओर गिरता हुआ होता है, जबकि विदेशी मुद्रा का पूर्ति वक्र नीचे से ऊपर दाईं ओर उठता हुआ होता है। विदेशी मुद्रा बाज़ार में संतुलन को संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था समष्टि अर्थशास्त्र 1

संलग्न रेखाचित्र में माँग वक्र और पूर्ति वक्र एक-दूसरे को E बिंदु पर काटते विदेशी मुद्रा की माँग और पूर्ति । हैं जहाँ संतुलन विनिमय दर OP है और संतुलन विदेशी मुद्रा की मात्रा OQ है।

प्रश्न 12.
स्थिर विनिमय और नम्य विनिमय दरों में भेद समझाइए।
उत्तर:
स्थिर विनिमय दर से अभिप्राय उस विनिमय दर से है जिसमें सभी विनिमय (लेन-देन) सरकार या मौद्रिक अधिकारी द्वारा घोषित की गई दरों पर होते हैं। नम्य विनिमय दर से अभिप्राय उस विनिमय दर से है जो विदेशी मुद्रा की माँग और पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। इस प्रकार स्थिर विनिमय दर में मौद्रिक अधिकारी का हस्तक्षेप आवश्यक है, जबकि नम्य विनिमय दर की दशा में मौद्रिक अधिकारी का हस्तक्षेप नहीं होता। पूर्ण रूप से स्थिर विनिमय दर को अव्यावहारिक माना जाता है, इसलिए यह प्रचलित नहीं है। सामान्यतया नम्य विनिमय दर को ही व्यावहारिक माना जाता है।

प्रश्न 13.
नम्य विनिमय दर प्रणाली के किन्हीं चार लाभों (गुणों) का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नम्य विनिमय दर प्रणाली के लाभ निम्नलिखित हैं-

  1. नम्य विनिमय दर प्रणाली के अंतर्गत केंद्रीय बैंक को विदेशी मुद्राओं के भंडार बनाए रखने की आवश्यकता नहीं होती।
  2. यह व्यापार तथा पूँजी के आवागमन के प्रति अवरोधों की समाप्ति में सहायक है।
  3. यह संसाधनों का कुशलतम आबंटन करती है जिससे अर्थव्यवस्था की कशलता में वृद्धि होती है।
  4. नम्य विनिमय दर की व्यवस्था सरल है। विनिमय दर अपने आप स्वतंत्र रूप से बदलती रहती है तथा माँग और पूर्ति में समानता लाती है।

प्रश्न 14.
विस्तृत सीमापट्टी व्यवस्था को समझाइए।
उत्तर:
विस्तृत सीमापट्टी व्यवस्था स्थिर विनिमय दर व्यवस्था (प्रणाली) और नम्य विनिमय दर व्यवस्था का मिश्रण है। विस्तृत सीमापट्टी व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक सदस्य देशों को यह छूट होती है कि वह अपनी घोषित विनिमय दर से 10 प्रतिशत तक उतार-चढ़ाव कर सकता है। इस छूट का मुख्य उद्देश्य भुगतानों में आसानी से समायोजन करना है। उदाहरण के लिए, यदि किसी देश को भुगतान शेष के घाटों का सामना करना पड़ रहा है तो वह 10 प्रतिशत तक अपनी मुद्रा की दर कम करके इस समस्या से निपट सकता है।

प्रश्न 15.
चलित सीमाबंध व्यवस्था को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
चलित सीमाबंध व्यवस्था स्थिर विनिमय दर व्यवस्था और नम्य विनिमय दर व्यवस्था का मिश्रण है। चलित सीमाबंध व्यवस्था के अनुसार विभिन्न करेंसियों की विनिमय दर में लघु सीमा तक किंतु समय-समय पर नियमित रूप से परिवर्तन की छूट होती है। चलित सीमाबंध के अंतर्गत प्रत्येक सदस्य देश को यह छूट होती है कि वह अपनी घोषित विनिमय दर से केवल एक प्रतिशत तक ही उतार-चढ़ाव कर सकता है। वास्तव में यह लघु समायोजन है, किंतु इसे समय-समय पर दोहराया जा सकता है। समायोजन का आकार तथा बारंबारता इस बात पर निर्भर करते हैं कि समायोजन करने वाले देश के पास विदेशी मुद्रा के भंडार कितने हैं।

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प्रश्न 16.
समायोजक (Accommodating) मदों और स्वप्रेरित (Autonomous) मदों की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
भुगतान शेष खाते से संबंधित मदों के लिए अर्थशास्त्री विभिन्न शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे-स्वायत्त (स्वप्रेरित), समायोजक, रेखा के ऊपर, रेखा के नीचे आदि। इनकी संक्षिप्त जानकारी नीचे दी गई है।

स्वायत्त या स्वप्रेरित मदें-भुगतान शेष में प्रयोग किए गए स्वायत्त अथवा स्वप्रेरित (Autonomous items) शब्द से अभिप्राय उन अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक लेन-देनों (Transactions) से है जो अधिकतम लाभ कमाने जैसे आर्थिक उद्देश्यों से प्रेरित होते हैं। ऐसे सौदे (लेन-देन), देश के भुगतान शेष की स्थिति की परवाह किए बिना होते हैं। इन्हीं को ही भुगतान शेष खाते में रेखा से ऊपर मदें’ (above the line items) कहा जाता है।

प्रश्न 17.
भुगतान संतुलन के प्रतिकूल होने के आर्थिक कारण बताइए।
उत्तर:
भुगतान संतुलन के प्रतिकूल होने के आर्थिक कारण निम्नलिखित हैं-

  1. निर्यात और आयात में असंतुलन का पैदा होना।
  2. बड़े पैमाने पर विकास व्यय जिसके लिए भारी आयात करने पड़ते हैं।
  3. ऊँची घरेलू कीमतों के कारण आयात में वृद्धि होना।
  4. चक्रीय उतार-चढ़ाव (Cyclical Fluctuations) अर्थात् सामान्य व्यवसाय में तेजी व मंदी का चक्र।
  5. पूर्ति के नए स्रोतों का विकास।
  6. नए व बेहतर स्थानापन्न उत्पाद का उभरना।
  7. उत्पादन लागतों में वृद्धि आदि।

प्रश्न 18.
गंदी तरणशीलता तिरती (Dirty Floating) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यह अवधारणा विनिमय दर की प्रबंधित तरणशीलता तिरती व्यवस्था से संबंधित है। ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है जब नियमों और अधिनियमों की परवाह किए बिना प्रबंधित तरणशीलता व्यवस्था को लागू किया जाता है। एक देश जब विनिमय दर को किसी अन्य देश के हित के विरूद्ध कम या अधिक करता है तब इस प्रकार के व्यवहार को गंदी तरणशीलता/तिरती व्यवस्था कहा जाता है।

प्रश्न 19.
प्रबंधित तिरती व्यवस्था (Managed Floating System) की व्यवस्था का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रबंधित तिरती व्यवस्था स्थिर और नम्य विनिमय दरों का मिश्रण है। प्रबंधित तिरती व्यवस्था में मौद्रिक अधिकारी ऐच्छिक आधार पर विनिमय दर के निर्धारण में हस्तक्षेप करते हैं लेकिन इसमें हस्तक्षेप के लिए आधिकारिक रूप से नियम और मार्गदर्शक सत्रों की घोषणा होती है। परंत मौद्रिक अधिकारी कोई विनिमय दर नियत नहीं करते और न ही विनिमय दर के उतार-चढ़ाव की कोई समय-सीमा निर्धारित की जाती है। जब भी मौद्रिक अधिकारी को हस्तक्षेप की आवश्यकता अनुभव होती है वे उपयुक्त कदम उठा सकते हैं।

प्रश्न 20.
विस्तृत सीमापट्टी चलित सीमाबंध कैसे एक-दूसरे से भिन्न हैं?
उत्तर:
दोनों व्यवस्थाएँ विनिमय दर में समायोजन की अनुमति देती हैं। चलित सीमाबंध की तुलना में विस्तृत सीमापट्टी में अधिक समायोजन (Wider adjustments) किया जा सकता है। अन्य शब्दों में, विस्तृत सीमापट्टी की तुलना में चलित सीमाबंध एक संकुचित सीमापट्टी (Narrow Bond) है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘भुगतान शेष खाते’ (Balance of Payment Accounts) का क्या अर्थ है? एक उदाहरण द्वारा BOP खाते की संरचना समझाइए।
उत्तर:
भुगतान शेष खाते का अर्थ-भुगतान शेष खाता किसी देश के निवासियों और शेष विश्ववासियों के बीच नियत अवधि में हुए सारे आर्थिक लेन-देनों का व्यवस्थित रिकॉर्ड होता है। यह दोहरी लेखा पद्धति (Double Entry System) के आधार पर तैयार किया जाता है। लेखांकन की दृष्टि से भुगतान शेष, सदा संतुलन में रहता है क्योंकि भुगतान शेष लेखा, दोहरी लेखा पद्धति में प्रस्तुत किया जाता है जिसके अनुसार प्राप्ति पक्ष, सदैव भुगतान पक्ष के बराबर रहता है।

दोहरी लेखा प्रणाली-समस्त अंतर्राष्ट्रीय सौदों (लेन-देनों को ‘दोहरी लेखा प्रणाली’ के आधार पर भगतान शेष खाते में रिकॉर्ड किया जाता है। प्रत्येक अंतर्राष्ट्रीय सौदा, बराबर मूल्य की लेनदारी (Credit) और देनदारी (Debit) की प्रविष्टि (Entry) दिखाता है। समस्त अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक लेन-देन, इन तीन प्रवाहों के कारण उत्पन्न होते हैं-(i) वस्तुओं के प्रवाह, (ii) सेवाओं व अन्य अदृश्य मदों के प्रवाह और (iii) पूँजी के प्रवाह। भुगतान शेष लेखा के यही मुख्य घटक हैं। भुगतान शेष खाते के दो पक्ष-लेनदारी पक्ष और देनदारी पक्ष होते हैं। लेखे के लेनदारी पक्ष में वे मदें शामिल की जाती हैं जिनसे विदेशी मुद्रा के रूप में भुगतान प्राप्त होता. है और प्राप्त भुगतान की राशि दिखाई जाती है, इन्हें लेनदारी मदें कहते हैं। देनदारी पक्ष में यह लेखा उन मदों और मदों की राशि को दर्शाता है जिनका विदेशी मुद्रा के रूप में विदेशियों को भुगतान किया जाता है। इन्हें देनदारी मदें कहते हैं।

एक देश के भुगतान शेष का एक काल्पनिक सरल उदाहरण निम्नलिखित तालिका में दिखाया गया है। इसका बायाँ भाग वे सभी स्रोत दिखाता है जिनसे कोई देश विदेशी करेंसी प्राप्त करता है जबकि दायाँ भाग शेष विश्व को भुगतान की गई विदेशी करेंसी का ब्यौरा देता है।
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प्रतिकूल, अनुकूल व संतुलित भुगतान शेष जब देनदारियाँ (भुगतान), लेनदारियों (प्राप्तियों) से अधिक हो जाती हैं तो इसे प्रतिकूल (या घाटे का) भुगतान संतुलन (शेष) कहते हैं। जब देनदारियाँ, लेनदारियों से कम होती हैं तो इसे अनुकूल (या बचत का) भुगतान शेष (संतुलन) कहते हैं। देनदारियाँ और लेनदारियाँ बराबर होने पर भुगतान शेष संतुलित कहलाता है।

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प्रश्न 2.
भुगतान शेष (संतुलन) खाते की दृश्य एवं अदृश्य मदों का अर्थ बताते हुए भुगतान शेष खाते के संघटकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भुगतान शेष खाते की दृश्य और अदृश्य मदें भुगतान शेष (संतुलन) खाते की दृश्य मदों से अभिप्राय भौतिक वस्तुओं से है जो राष्ट्रीय सीमा को पार (Cross) करती देखी जाती हैं। दृश्य मदों (Visible Items) के उदाहरण हैं-मशीनरी, चाय, चावल, वस्त्रों का आयात-निर्यात जिन्हें आँखों से देखा जा सकता है। भुगतान शेष खाते में दृश्य मदों के आयात-निर्यात के शेष को ‘दृश्य व्यापार का शेष’ कहा जाता है। भुगतान शेष की अदृश्य मदें वे मदें हैं जिन्हें राष्ट्रीय सीमा (National Border) पार करते नहीं देखा जाता है। सब प्रकार की सेवाएँ; जैसे जहाज़रानी, बैंकिंग, पर्यटन, सॉफ्टवेयर तथा एक-पक्षीय हस्तांतरण अदृश्य मदें हैं। अदृश्य मदों (Invisible Items) के आयात-निर्यात के शेष (Balance) को ‘अदृश्य व्यापार का शेष’ कहा जाता है।

भुगतान शेष खाते के संघटक-भुगतान शेष खाते के प्रमुख संघटक निम्नलिखित हैं-
1. वस्तओं का निर्यात व आयात (दृश्य मदें) विदेशी मुद्रा प्राप्त करने का सबसे सरल तरीका वस्तुओं का निर्यात है। विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं का आना-जाना खुले रूप में होता है और सीमा शुल्क अधिकारी इन्हें देखकर प्रमाणित कर सकते हैं। ये दृश्य मदें (Visible Items) कहलाती हैं। ऐसी सभी मदें देश का दृश्य व्यापार (Visible Trade) दर्शाती हैं।

2. सेवाओं का निर्यात व आयात (अदृश्य मदें) इसमें गैर-साधन आय; (जैसे-जहाज़रानी, बैंकिंग, बीमा, पर्यटन, सॉफ्टवेयर सेवाओं से आय और साधन आय; जैसे ब्याज, लाभांश, लाभ के रूप में विदेशों में हमारी परिसंपत्तियों से आय आदि मदें शामिल की जाती हैं। ध्यान रहे, ब्याज, लाभांश और लाभ जो एक देश के नागरिक विदेशों में निवेश करने पर कमाते हैं, निवेश आय है जिसे साधन आय माना जाता है। ये अदृश्य मदें हैं जो राष्ट्रीय सीमाओं को पार करते दिखाई नहीं देती हैं। ऐसी सभी मदें देश का अदृश्य व्यापार (Invisible Trade) दर्शाती हैं।

3. एक-पक्षीय हस्तांतरण या अप्रतिदत्त हस्तांतरण-इसमें वे मदें शामिल की जाती हैं जिनके बदले में प्राप्त करने वाले को कुछ भी नहीं देना पड़ता; जैसे उपहार, प्रेषणाएँ, अनुदान क्षतिपूर्ति आदि। इसमें निजी और सरकारी दोनों प्रकार के हस्तांतरण शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, विदेशों से प्राप्त उपहार, अनिवासियों (Emigrants) द्वारा अपने रिश्तेदारों को भेजी गई प्रेषणाएँ और युद्ध में पराजित देश द्वारा क्षतिपूर्ति आदि की प्राप्तियाँ। (नोट-भारत में एक-पक्षीय हस्तांतरणों को अदृश्य व्यापार में शामिल किया जाता है।)

4. पूँजीगत प्राप्तियाँ व भुगतान-इसमें निजी व सरकारी ऋण, सोने के स्टॉक व विदेशी मुद्रा के भंडार में परिवर्तन, परिसंपत्तियों का क्रय-विक्रय, पूँजीगत अनुदान आदि जैसी मदें शामिल की जाती हैं। ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सौदे एक देश की शेष विश्व से देनदारियों और परिसंपत्तियों (Liabilities and Assets) को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, एक देश की सरकार, दूसरे देश की सरकार से ऋण लेती है, एक फर्म विदेश में शेयर्स का निर्गमन करती है या एक बैंक विदेश में ऋण शुरू करता है या एक देश के नागरिक विदेश में भूमि, मकान, प्लांट, आदि के रूप में संपत्तियों का क्रय-विक्रय करते हैं-ये सब पूँजीगत प्राप्तियों और भुगतान के रूप हैं।

प्रश्न 3.
भगतान शेष में असंतलन के कारण और उसे दूर करने के उपायों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भुगतान शेष में असंतुलन के कारण अनेक कारणों से भुगतान शेष में घाटा (Deficit) या आधिक्य (Surplus) के रूप में असंतुलन पैदा हो जाता है। ध्यान रहे, इस घाटे या आधिक्य का संबंध मुख्यतः भुगतान शेष के चालू खाते से होता है। इन साधनों को निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा गया है
1. आर्थिक साधन-

  • निर्यात और आयात में असंतुलन का पैदा होना
  • बड़े पैमाने पर विकास व्यय जिसके लिए भारी आयात करने पड़ते हैं
  • ऊँची घरेलू कीमतों के कारण आयात में वृद्धि होना
  • चक्रीय उतार-चढ़ाव (Cyclical Fluctuations) अर्थात् सामान्य व्यवसाय में तेजी व मंदी का चक्र
  • पूर्ति के नए स्रोतों का विकास
  • नए व बेहतर स्थानापन्न उत्पाद का उभरना
  • उत्पादन लागतों में वृद्धि आदि।

2. राजनीतिक साधन अनुभव बताता है कि देश में राजनीतिक अस्थिरता और दंगों से-

  • देश से बड़े पैमाने पर पूँजी का पलायन होता है
  • विदेशी निवेश रुक जाता है और
  • नए घरेलू उद्योगों की स्थापना धीमी पड़ जाती है।

3. सामाजिक कारण-

  • लोगों के फैशन, अभिरुचियों और प्राथमिकताओं के कारण आयात-निर्यात प्रभावित होते हैं जिससे भुगतान शेष में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है
  • गरीब व पिछड़े देशों में जनसंख्या में तीव्र वृद्धि होने से निर्यात घट जाते हैं और आयात बढ़ जाते हैं जिससे भुगतान शेष में असंतुलन पैदा हो जाता है।

भुगतान शेष में असंतुलन दूर करने के उपाय-भुगतान शेष में असंतुलन दूर करने के उपाय निम्नलिखित है-
1. निर्यात बढ़ाना-उद्यमियों और निर्यातकों को भारी आर्थिक सहायता, अनुदान व रियायतें देकर निर्यात संवर्धन (Promote) करना चाहिए और आयात यथासंभव सीमित करना चाहिए।

2. आयात प्रतिस्थापन-आयात की जाने वाली वस्तुओं का स्थान लेने वाली अर्थात् प्रतिस्थापित वस्तुएँ देश के अंदर निर्मित करनी चाहिएँ जिससे आयात कम हो सके।

3. घरेलू करेंसी का अवमूल्यन-जब घरेलू मुद्रा का विदेशी मुद्रा में मूल्य घटाया जाता है तो विदेशियों के लिए हमारी घरेलू वस्तुएँ सस्ती हो जाती हैं जिससे निर्यात में वृद्धि होती है। ध्यान रहे, घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन सरकार द्वारा होता है जब देश में स्थिर विनिमय दर की व्यवस्था लागू हो।

4. विनिमय नियंत्रण-सरकार द्वारा सब निर्यातकों (Exporters) को विदेशी मुद्रा (विनिमय) केंद्रीय बैंक में समर्पण (Surrender) करने के आदेश देकर विदेशी विनिमय पर नियंत्रण करना चाहिए। केवल लाइसेंस प्राप्त आयातकों (Importers) को राशन के रूप में विदेशी विनिमय देनी चाहिए।

5. निरंतर बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना तेजी या बढ़ती कीमतों से निर्यात कम होता है और आयात बढ़ता है। इसलिए सरकार को न केवल कीमतों में वृद्धि की प्रवृत्ति रोकनी चाहिए, बल्कि कीमतें गिराने के उपाय भी करने चाहिए।

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प्रश्न 4.
स्थिर विनिमय दर व्यवस्था क्या है? इसके गुण-दोषों का वर्णन करें।
उत्तर:
स्थिर विनिमय दर व्यवस्था इस व्यवस्था में देश की सरकार अपनी मद्रा की विनिमय दर को सोने के रूप में या किसी दसरी करेंसी के रूप में घोषित करती है। चूंकि इस दर को लगभग स्थिर रखा जाता है, इसलिए इसे स्थिर विनिमय दर कहते हैं। इस दर में बहुत मामूली अंतर ही मान्य होता है। यह प्रणाली 1880-1914 तक लागू स्वर्णमान व्यवस्था (Gold Standard System) में अपनाई गई थी जिसके अंतर्गत प्रत्येक देश अपनी मुद्रा का मूल्य सोने के निश्चित भार के रूप में घोषित करता था।

इन घोषित मूल्यों के आधार पर विभिन्न मुद्राओं (करेंसियों) का आपस में विनिमय दर तय हो जाता था, इसे विनिमय की टकसाल मान समता दर (Mint Parity . Value of Exchange) कहा जाता था। उदाहरण के लिए, यदि एक रुपए के बदले शुद्ध सोने के 20 ग्राम मिलते हैं तथा एक अमेरिकी डॉलर के बदले 100 ग्राम मिलते हैं तो एक डॉलर 100/20 = 5 रुपए का है। ऐसी स्थिति में एक डॉलर = 5 रुपए की विनिमय दर निश्चित हो जाएगी।

स्थिर विनिमय दर व्यवस्था के गुण-स्थिर विनिमय दर व्यवस्था के गुण निम्नलिखित हैं-

  • इससे विनिमय दर में स्थायित्व (Stability) आता है जो विदेशी व्यापार को बढ़ावा देता है।
  • अंतर्निर्भर विश्व अर्थव्यवस्था में, देशों की समष्टि स्तर की आर्थिक नीतियों में यह समन्वय लाने में सहायता करती है।
  • यह प्रणाली सदस्य देशों में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल से बचाती है क्योंकि विनिमय दर स्थिर रहती है।
  • यह विश्व व्यापार को बढ़ाने में सहायता करती है, क्योंकि इससे अंतर्राष्ट्रीय सौदों में जोखिम और अनिश्चितता नहीं रहती।

स्थिर विनिमय दर व्यवस्था के दोष-स्थिर विनिमय दर व्यवस्था के दोष निम्नलिखित हैं-
1. मुद्रा अवमूल्यन का भय-जब माँग अधिक होती है तो केंद्रीय बैंक, स्थिर विनिमय दर बनाए रखने के लिए अपने रिज़र्व का इस्तेमाल करता है, परंतु जब सुरक्षित रखा रिज़र्व भी समाप्त हो जाए और माँग आधिक्य जारी रहे तो सरकार को मजबूर होकर घरेलू मुद्रा के मान में ह्रास करना पड़ता है। यदि सट्टेबाजों ने इसकी माँग और बढ़ा दी तो घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन करना पड़ जाएगा। यही इसका सबसे बड़ा दोष है।

2. कारकों (साधनों) के आबंटन में कठोरता-इस प्रणाली के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में विशेष रूप से कारकों के आबंटन में कठोरता (Rigidity) आती है।

3. पूँजी का सीमित आवागमन-स्थिर विनिमय दर को बनाए रखने हेतु बहुत अधिक अंतर्राष्ट्रीय निधि की मदद की जरूरत पड़ती है, इस कारण पूँजी का विभिन्न देशों में आवागमन बहुत सीमित (Restricted) हो जाता है।

प्रश्न 5.
नम्य (लचीली) विनिमय दर प्रणाली से आप क्या समझते हैं? इसके गुण-दोषों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नम्य (लचीली) विनिमय दर व्यवस्था-नम्य (लचीली) विनिमय दर वह दर है जो विदेशी मुद्रा बाज़ार में किसी देश की मुद्रा की माँग एवं पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। विदेशी करेंसी की माँग और पूर्ति में परिवर्तन के अनुसार यह दर बदलती रहती है। इस व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप बिलकुल नहीं होता। सामान्य रूप से केंद्रीय बैंक भी दखल नहीं देता। नम्य विनिमय दर एक प्रकार से स्थिर विनिमय दर के बिलकुल विपरीत दूसरे सिरे पर है क्योंकि यह विदेशी मुद्रा बाज़ार में माँग और पूर्ति में उतार-चढ़ाव के फलस्वरूप निरंतर बदलती रहती है। इसीलिए इस दर को नम्य या लचीली विनिमय दर कहते हैं। जैसे समाचार-पत्रों में हम डॉलर और रुपयों में हर रोज़ बदलती हुई विनिमय दर पढ़ते हैं।

नम्य विनिमय दर व्यवस्था के गुण-नम्य विनिमय दर व्यवस्था के गुण निम्नलिखित हैं-

  • भुगतान शेष में असंतुलन स्वतः दूर हो जाता है।
  • केंद्रीय बैंक को विदेशी मुद्राओं के भंडार (Reserve) रखने की जरूरत नहीं रहती। अतः भंडार रखने व प्राप्त करने की लागत से बचा जा सकता है।
  • यह व्यापार और पूँजी के आवागमन में आने वाली रुकावटों को दूर करने में सहायक है।
  • इससे अर्थव्यवस्था में संसाधनों का सर्वोत्तम आबंटन होता है जिससे कार्यक्षमता बढ़ जाती है।
  • इस प्रणाली में जोखिम पूँजी को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाज़ार में प्रोत्साहन प्राप्त होता है।
  • इस प्रणाली को अंतर्राष्ट्रीय निधि की मदद की आवश्यकता नहीं होती।

नम्य विनिमय दर व्यवस्था के दोष-नम्य विनिमय दर व्यवस्था के दोष निम्नलिखित हैं-

  • यह सट्टेबाजी को बढ़ावा देती है जिससे विनिमय दर में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं।
  • विनिमय दर में बार-बार उतार-चढ़ाव से विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश में रुकावट आती है।
  • भुगतान शेष घाटा पूरा करने के लिए मद्रा अवमूल्यन से कीमतों में निरंतर वृद्धि (मद्रास्फीति) होने लगती है।
  • यह प्रणाली समष्टिगत नीतियों में समन्वय स्थापित करने में कठिनाई उत्पन्न कर देती है।
  • इसके कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 6.
विदेशी विनिमय दर कैसे निर्धारित होती है? एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
स्वतंत्र मुद्रा बाज़ार में, संतुलन (साम्य) विनिमय दर उस बिंदु पर निर्धारित होती है जहाँ विदेशी विनिमय की माँग, विदेशी विनिमय की पूर्ति के बराबर हो जाए अर्थात् संतुलन विनिमय दर का निर्धारण विदेशी विनिमय की माँग और पूर्ति वक्रों के प्रतिच्छेदन द्वारा होता है। वस्तुतः जिस प्रकार किसी वस्तु की कीमत उसकी माँग और पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है उसी प्रकार नम्य विदेशी विनिमय दर भी विदेशी मुद्रा (करेंसी) की माँग और पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है। मान लीजिए, दो देश भारत और अमेरिका की करेंसी अर्थात् रुपया और डॉलर की विनिमय दर निर्धारित होनी है। इस समय भारत और अमेरिका दोनों में चलायमान विनिमय दर (Floating Exchange Rate) व्यवस्था है। इसलिए प्रत्येक देश की करेंसी का, दूसरी करेंसी के रूप में मूल्य, दोनों करेंसियों की माँग और पूर्ति पर निर्भर करता है। इस संदर्भ में संतुलन विनिमय दर के निर्धारण की चर्चा निम्नलिखित तीन भागों माँग, पूर्ति तथा संतुलन-शीर्षकों के अंतर्गत की गई है

(क) विदेशी विनिमय (मुद्रा) की माँग (जैसे अमेरिकी डॉलर)-विदेशी मुद्रा की माँग निम्नलिखित कार्यों के लिए की जाती है

  • विदेशों से वस्तुएँ व सेवाएँ खरीदने (आयात करने) के लिए
  • विदेशों में उपहार भेजने के लिए
  • विदेश में वित्तीय परिसंपत्तियों (अर्थात् बॉण्ड व शेयर) खरीदने के लिए
  • विदेशी मुद्राओं के मूल्यों पर सट्टेबाजी के लिए
  • विदेशों में जाने वाले पर्यटकों की विदेशी विनिमय की माँग पूरी करने के लिए।

विदेशी विनिमय की दर और विदेशी विनिमय की माँग में संबंध-दोनों में विपरीत संबंध (Inverse Relations) हैं अर्थात् कीमत घटने पर माँग बढ़ जाती है और कीमत बढ़ने (महँगा होने) पर विदेशी विनिमय की माँग कम हो जाती है। मान लीजिए विदेशी विनिमय अमेरिकी डॉलर की कीमत 1 डॉलर = 45 रुपए गिरकर 1 डॉलर = 40 रुपए हो गई है। इसका अर्थ यह है कि अमेरिकी वस्तुएँ भारत के लोगों के लिए सस्ती हो गई हैं क्योंकि 1 डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुएँ खरीदने के लिए उन्हें 45 रुपए देने की बजाय 40 रुपए देने होंगे।

फलस्वरूप भारत, अमेरिका से अधिक माल आयात करने लगेगा जिसके लिए अमेरिकी डॉलर की माँग भारत में बढ़ जाएगी। अतः स्पष्ट है कि विदेशी विनिमय की दर (कीमत) गिरने पर (जैसे 1 डॉलर की कीमत 45 रुपए से गिरकर 40 रुपए होने पर), विदेशी विनिमय (यहाँ डॉलर) की माँग बढ़ जाती है। इसी प्रकार विदेशी विनिमय की दर बढ़ने पर उसकी माँग कम हो जाती है। इसी कारण विदेशी मुद्रा का माँग वक्र का आकार बाएँ से दाएँ ऋणात्मक ढाल वाला होता है। संक्षेप में, विदेशी विनिमय दर गिरने पर विदेशी मुद्रा की माँग इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि तब विदेशी वस्तुएँ देशीय लोगों के लिए तुलनात्मक रूप से सस्ती हो जाती हैं।

(ख) विदेशी विनिमय की पूर्ति (जैसे अमेरिकी डॉलर)-किसी देश (जैसे भारत) में विदेशी विनिमय निम्नलिखित स्रोतों से आती है

  • विदेशियों द्वारा उस देश (जैसे भारत) की वस्तुओं व सेवाओं की खरीद अर्थात् भारत द्वारा निर्यात
  • विदेशी निगमों द्वारा उस देश (भारत) में निवेश
  • विदेशी पर्यटकों का उस देश (भारत) में भ्रमण
  • मुद्रा के व्यापारियों और सट्टेबाजों की गतिविधियाँ
  • विदेश में रहने वालों (भारतीयों) द्वारा प्रेषणाएँ।

विदेशी विनिमय की दर (कीमत) और विदेशी विनिमय की पूर्ति में संबंध दोनों में प्रत्यक्ष संबंध (Direct Relation) हैं अर्थात् कीमत बढ़ने पर विदेशी विनिमय की पूर्ति बढ़ जाती है। मान लीजिए कि विदेशी विनिमय अमेरिकी डॉलर की भारतीय मुद्रा में कीमत 1 डॉलर = 65 रुपए से बढ़कर 1 डॉलर = 67 रुपए हो गई है। इसका अर्थ है कि भारतीय वस्तुएँ अमेरिका के लिए सस्ती हो गई हैं क्योंकि अब 1 डॉलर से 65 रुपए की बजाय 67 रुपए की भारतीय वस्तुएँ अर्थात् अधिक वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं। फलस्वरूप अमेरिका, भारत से अधिक आयात करने लगेगा जिससे विदेशी विनिमय अर्थात् अमेरिकी डॉलर की पूर्ति भारत में बढ़ जाएगी।

अतः स्पष्ट है कि विदेशी विनिमय की दर (कीमत) बढ़ने से उसकी पूर्ति बढ़ जाती है। इसी प्रकार विदेशी विनिमय दर कम होने पर (जैसे 1 डॉलर की कीमत 65 रुपए से गिरकर 63 रुपए होने पर) विदेशी विनिमय की पूर्ति कम हो जाती है। इसीलिए विदेशी मुद्रा की पूर्ति वक्र का आकार दाईं ओर ऊपर की तरफ ढाल वाला होता है। संक्षेप में, विदेशी विनिमय दर बढ़ने पर विदेशी मुद्रा की पूर्ति इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि तब देशी वस्तुएँ विदेशियों के लिए तुलनात्मक रूप से सस्ती हो जाती हैं।

(ग) विनिमय बाज़ार में संतुलन-संतुलन विनिमय दर, उस बिंदु पर निर्धारित होती है जहाँ विदेशी विनिमय की माँग और विदेशी विनिमय की पूर्ति आपस में बराबर हो जाते हैं। दूसरे शब्दों में, माँग और पूर्ति वक्रों के प्रतिच्छेदन (Intersection) से संतुलन दर और संतुलन मात्रा का निर्धारण हो जाता है। इसे संलग्न रेखाचित्र में दर्शाया गया है। उपर्युक्त उदाहरण के संदर्भ में डॉलर की रुपयों में कीमत को Y-अक्ष पर दर्शाया गया है जबकि डॉलर की माँग और पूर्ति को X-अक्ष पर दर्शाया गया है। इस रेखाचित्र में माँग वक्र नीचे की ओर ढालू है जो यह दर्शाता है कि ऊँची विनिमय दर होने पर विदेशी विनिमय (डॉलर) की माँग कम होती है। पूर्ति वक्र ऊपर की ओर उठता हुआ वक्र है जो इस बात का प्रतीक है कि
HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था समष्टि अर्थशास्त्र 3
विदेशी मुद्रा बाजार में संतुलन विनिमय दर बढ़ने पर विदेशी विनिमय (डॉलर) की पूर्ति बढ़ती जाती है। दोनों वक्र एक-दूसरे को बिंदु E पर प्रतिच्छेदित करते हैं जिसका यह अर्थ है कि OR (QE) विनिमय दर पर माँग और पूर्ति की मात्रा बराबर है (क्योंकि दोनों OQ के बराबर हैं)। अतः संतुलन विनिमय दर OR है और संतुलन विनिमय मात्रा OQ है।

विनिमय दर में परिवर्तन होने पर अमेरिकी डॉलर के लिए भारत की माँग बढ़ने पर माँग वक्र DD ऊपर खिसक कर वक्र D’D’ हो जाएगा। फलस्वरूप विनिमय पर (डॉलर की रुपयों में कीमत) OR से बढ़कर OR, हो जाएगी। इसका अर्थ होगा भारत को प्रत्येक अमेरिकी डॉलर के लिए पहले से अधिक रुपए देने होंगे। इसी को भारतीय रुपए के मान में हास (Depreciation of Indian Currency) कहा जाता है।

इसी प्रकार अमेरिकी डॉलरों की पूर्ति में वृद्धि होने से पूर्ति वक्र SS नीचे खिसककर S’S’ हो जाएंगा। फलस्वरूप रुपयों में डॉलर की कीमत गिर जाएगी। यह भारतीय रुपए का अधिमूल्यन (Appreciation of Indian Currency) होगा क्योंकि तब एक डॉलर खरीदने के लिए कम रुपए देने होंगे।

प्रश्न 7.
विदेशी विनिमय बाज़ार में हाजिर बाज़ार (Spot Market) और वायदा बाज़ार (Forward Market) के बारे में आप क्या जानते हैं? .
उत्तर:
हाजिर बाज़ार-यदि विदेशी मुद्रा बाज़ार में लेन-देन दैनिक प्रकृति का है तो उसे हाजिर या चालू (Current) बाज़ार कहते हैं। विदेशी मुद्रा के हाजिर बाज़ार में लागू हो रही विनिमय दर को हाजिर दर (Spot Rate) कहते हैं। दूसरे शब्दों में, हाजिर दर से अभिप्राय उस दर से है जिस पर विदेशी करेंसी तत्काल उपलब्ध होती है। उदाहरण के लिए, यदि विदेशी मुद्रा बाज़ार में किसी समय बिंदु पर एक अमेरिकी डॉलर 65 रुपए में खरीदा जा सकता है तो यह विदेशी मुद्रा (डॉलर) की हाजिर दर होगी। निस्संदेह तुरंत होने वाले सौदों में विदेशी मुद्रा की हाजिर (या तात्कालिक) दर बहुत उपयोगी होती है परंतु हाजिर दर की मात्रा क्या है इसे जानना भी जरूरी होता है।

वायदा बाज़ार-यह विदेशी मुद्रा का वह बाज़ार है जिसमें विदेशी करेंसी के क्रय-विक्रय का सौदा वर्तमान में हो जाता है, परंतु करेंसी की देयता (Delivery) भविष्य में तयशुदा किसी तिथि पर होती है। दूसरे शब्दों में, भविष्य में विदेशी मुद्रा की देयता का बाज़ार, वायदा बाज़ार कहलाता है। हम जानते हैं कि अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन (या सौदे) उसी दिन पूरे नहीं हो जाते, बल्कि जिस दिन सौदों के प्रपत्रों पर हस्ताक्षर होते हैं उसके कई दिनों बाद वह लेन-देन पूरा होता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में होने वाली संभावित विनिमय दर की ओर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। विनिमय की वह दर जो भविष्य की किसी तिथि पर विदेशी मुद्रा के लेन-देन पर लागू होती है, वायदा दर (Forward Rate) कहलाती है। इस प्रकार वायदा दर वह दर है जिस पर भविष्य में विदेशी करेंसी के क्रय-विक्रय का सौदा होता है।

भविष्य में सौदा करने के दो उद्देश्य होते हैं-

  • विनिमय दर के बदलने से संभावित जोखिम को कम करना। इसे जोखिम का पूर्वोपाय (Hedging) कहते हैं।
  • सौदे से लाभ कमाना। इसे सट्टेबाजी कहते हैं। स्पष्ट है कि वायदा बाज़ार में वे व्यापारी होते हैं जिन्हें भविष्य में किसी दिन को विदेशी मुद्रा की आवश्यकता (माँग) होगी अथवा उसकी पूर्ति करनी होगी।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

प्रश्न 8.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त नोट लिखिए-
(क) मुद्रा का अधिमूल्यन (Appreciation) और मुद्रा का मूल्यहास (Depreciation)।
(ख) (O NEER, (ii) REER और (iii) RER को परिभाषित कीजिए।
(ग) चलित सीमाबंध (Crawling Peg) व प्रबंधित तरणशीलता (Managed Floating)।
उत्तर:
(क) मुद्रा का अधिमूल्यन और मुद्रा का मूल्यहास:
1. मुद्रा का अधिमूल्यन-मुद्रा (करेंसी) के अधिमूल्यन से अभिप्राय, अन्य विदेशी करेंसी के मूल्य में कमी से है। दूसरे शब्दों में, मुद्रा अधिमूल्यन तब होता है जब घरेलू मुद्रा की इकाइयों में विदेशी मुद्रा की कीमत कम हो जाए अर्थात विदेशी मुद्रा के रूप में घरेलू मुद्रा का मूल्य बढ़ जाए। उदाहरण के लिए, यदि भारतीय रुपए की अमेरिकी डॉलर में कीमत 65 रुपए से 64 रुपए हो जाए तो इसे भारतीय करेंसी (रुपया) का अधिमूल्यन कहा जाएगा, क्योंकि एक डॉलर खरीदने के लिए कम (65 रुपए की बजाय 64 रुपए) रुपए देने पड़ेंगे अर्थात् रुपए की क्रय-शक्ति बढ़ गई है। यह भारतीय मुद्रा के प्रबल होने का प्रतीक है। तुलन में, हम यह भी कह सकते हैं कि जब भारतीय रुपए का अमेरिकी डॉलर के रूप में अधिमूल्यन (Appreciation) होता है तो अमेरिकी डॉलर का मूल्यह्रास (Depreciation) होता है।

2. मुद्रा का मूल्यहास-मुद्रा (करेंसी) के मूल्यह्रास से अभिप्राय, दूसरी विदेशी करेंसी के मूल्य में वृद्धि से है। दूसरे शब्दों में, का मूल्यह्रास उस समय होता है जब घरेलू मद्रा की इकाइयों में विदेशी मुद्रा की कीमत में वृद्धि हो जाए उदाहरण के लिए, यदि भारतीय रुपए की अमेरिकी डॉलर में कीमत 65 रुपए से 66 रुपए हो जाए तो यह भारतीय करेंसी (रुपए) का मूल्यह्रास माना जाएगा क्योंकि एक डॉलर खरीदने के लिए अब अधिक रुपए (65 रुपए की बजाए 66 रुपए) देने पड़ेंगे। यह भारतीय रुपए,के दुर्बल होने का प्रतीक है। स्पष्ट है नम्य विनिमय दर व्यवस्था में किसी करेंसी का विनिमय मूल्य, उसकी माँग व पूर्ति में बार-बार परिवर्तन के आधार पर घटता बढ़ता रहता है।

(ख) NEER, REER, RER की परिभाषाएँ:
1. मौद्रिक प्रभावी विनिमय दर (Nominal Effective Exchange Rate-NEER)-किसी मुद्रा की औसत सापेक्ष शक्ति या क्षमता का मान (माप), प्रभावी विनिमय दर कहलाता है। चूंकि कीमतों में परिवर्तन के प्रभावों को हम समाप्त नहीं करते, इसलिए इसे मौद्रिक प्रभावी विनिमय दर (NEER) कहते हैं।

2. वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (Real Effective Exchange Rate-REER)-यह ऐसी प्रभावी विनिमय दर है जो मौद्रिक दर की बजाय वास्तविक विनिमय दरों पर आधारित होती है।

3. वास्तविक विनिमय दर (Real Exchange Rate-RER) यह स्थिर कीमतों पर आधारित विनिमय दर होती है। पुनः यह कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव से मुफ्त (स्वतंत्र) होती है।

(ग) चलित सीमाबंध और प्रबंधित तरणशीलता:
1. चलित (परिवर्तनशील) सीमाबंध-यह स्थिर विनिमय दर और नम्य विनिमय दर के बीच का एक समझौता है। चलित सीमाबंध व्यवस्था के अनुसार देश अपनी करेंसी का समता मान (Parity Value) नियत करता है और इसके इर्द-गिर्द थोड़ा उतार-चढ़ाव (जैसे समता मान से ± 1%) की इजाजत देता है।

2. प्रबंधित तरणशीलता-यह स्थिर विनिमय दर और नम्य (लचीली) विनिमय दर के प्रबंध की अंतिम संकर प्रजाति या मिश्रण है जो सरकार द्वारा प्रबंधित या नियंत्रित होती है। इसे प्रबंधित तरणशीलता कहते हैं, परंतु यह नियत दर समय-समय पर जरूरत के अनुसार मौद्रिक अधिकारी द्वारा संशोधित की जाती है।

संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जब व्यापार शेष 400 करोड़ रुपए है और निर्यात का मूल्य 300 करोड़ रुपए का है, तो आयात का मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
व्यापार शेष = निर्यात का मूल्य – आयात का मूल्य
400 करोड़ रुपए = 300 करोड़ रुपए – आयात का मूल्य
आयात का मूल्य = 300 करोड़ रुपए – 400 करोड़ रुपए
अतः
आयात का मूल्य = (-) 100 करोड़ रुपए उत्तर

प्रश्न 2.
जब व्यापार शेष 500 करोड़ रुपए है और आयात का मूल्य 300 करोड़ रुपए है, तो निर्यात का मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
व्यापार शेष = निर्यात का मूल्य – आयात का मूल्य
500 करोड़ रुपए = निर्यात का मूल्य – 300 करोड़ रुपए
500 करोड़ रुपए + 300 करोड़ रुपए = निर्यात का मूल्य
800 करोड़ रुपए = निर्यात का मूल्य
अतः निर्यात का मूल्य = 800 करोड़ रुपए उत्तर

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 6 खुली अर्थव्यवस्था : समष्टि अर्थशास्त्र

प्रश्न 3.
जब व्यापार शेष (-) 400 करोड़ रुपए हो और निर्यातों का मूल्य 300 करोड़ रुपए हो, तो आयातों के मूल्य की गणना कीजिए।
हल:
व्यापार शेष = (-) 400 करोड़ रुपए
निर्यातों का मूल्य = 300 करोड़ रुपए
आयातों का मूल्य = 300 + 400
अतः आयातों का मूल्य = 700 करोड़ रुपए उत्तर

प्रश्न 4.
व्यापार शेष (-) 300 करोड़ रुपए है और निर्यात का मूल्य 500 करोड़ रुपए है, तो आयात का मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
व्यापार शेष = निर्यात का मूल्य – आयात का मूल्य
(-) 300 करोड़ रुपए = 500 करोड़ रुपए – आयात का मूल्य
आयात का मूल्य = 500 करोड़ रुपए + 300 करोड़ रुपए
अतः आयात का मूल्य = 800 करोड़ रुपए उत्तर

प्रश्न 5.
जब व्यापार शेष में घाटा 800 करोड़ रुपए का है और निर्यात का मूल्य 500 करोड़ रुपए है, तो आयात का मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल:
व्यापार शेष = निर्यात का मूल्य – आयात का मूल्य
– 800 करोड़ रुपए = 500 करोड़ रुपए – आयात का मूल्य
आयात का मूल्य = 500 करोड़ रुपए + 800 करोड़ रुपए
अतः आयात का मूल्य = 1300 करोड़ रुपए उत्तर

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HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6

Haryana State Board HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Exercise 3.6

प्रश्न 1.
निम्नलिखित समीकरणों के युग्मों को रैखिक समीकरणों के युग्म में बदल करके हल कीजिए-
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 1
हल :
(i) यहाँ पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 2
माना 1/x = u व 1/y = v तो समीकरण-युग्म (i) व (ii) से प्राप्त होगा,
\(\frac{1}{2}\)u + \(\frac{1}{3}\)v = 2
3u + 2v = 12 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर) ……………(i)
\(\frac{1}{3} u+\frac{1}{2} v=\frac{13}{6}\)
2u+3y = 13 (दोनों ओर 6 से गुणा करने पर) ……………(iv)
समीकरण (ii) को 3 से तथा समीकरण (iv) को 2 से गुणा करके घटाने पर प्राप्त होगा,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 3
या u = \(\frac{10}{5}\) = 2
u का मान समीकरण (iii) में रखने पर,
या 3(2)+ 2v = 12
2v = 12 – 6
या v = \(\frac{6}{2}\) = 3
अब u = 2 ⇒ \(\frac{1}{x}\) = 2 ⇒ x = \(\frac{1}{2}\)
व v = 3 ⇒ \(\frac{1}{y}\) = 3 ⇒ y = \(\frac{1}{3}\)
अतः अभीष्ट हल x = \(\frac{1}{2}\) व.y = \(\frac{1}{3}\)

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6

(ii) यहाँ पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 4
2u + 3v = 2 ………….(iii)
4u – 9v = -1 …(iv)
समीकरण युग्म समीकरण (iii) को 3 से गुणा करके समीकरण (iv) में जोड़ने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 5
u का मान समीकरण (ii) में प्रतिस्थापित करने पर,
2(1/2) + 3v = 2
या 3v = 2 – 1
या v = \(\frac{1}{3}\)
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 6

(ii) यहाँ पर
\(\frac{4}{x}\) + 3 y = 14 ……………….(i)
व \(\frac{3}{x}\) – 4y = 23 ……………..(ii)
माना \(\frac{1}{x}\) = u, तो समीकरण (i) व (ii) से प्राप्त होगा,
4u + 3y = 14 …………..(iii)
34 – 4y = 23 …………………(iv)
समीकरण (iii) को 4 से व समीकरण (iv) को 3 से गुणा करके परस्पर जोड़ने से,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 7
u का मान समीकरण (iii) में प्रतिस्थापित करने पर,
4(5) +3y = 14
या 3y = 14 – 20
या y = \(\frac{-6}{3}\) = -2
अब u = 5 ⇒ \(\frac{1}{x}\) = 5 ⇒ x = \(\frac{1}{5}\)
अतः अभीष्ट हल x = \(\frac{1}{5}\) व y = -2

(iv) यहाँ पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 8
माना \(\frac{1}{x-1}\) = u तथा ,\(\frac{1}{y-2}\) = v तो समीकरण (i) व (ii) से प्राप्त होगा,
5u + v = 2 …(iii)
6u – 3y = 1 …(iv)
समीकरण (iii) को 3 से गुणा करके समीकरण (iv) में जोड़ने से-
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 9
u का मान समीकरण (iii) में प्रतिस्थापित करने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 10
अतः अभीष्ट हल x = 4 व y = 5

(v) यहाँ पर
\(\frac{7 x-2 y}{x y}\) = 5
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 11
माना \(\frac{1}{y}\) = u तथा \(\frac{1}{x}\) = v तो समीकरण (i) व (ii) से प्राप्त होता है,
7u – 2v = 5
व 8u + 7v = 15
समीकरण (iii) को 7 से व समीकरण (iv) को 2 से गुणा करके जोड़ने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 12
u का मान समीकरण (iv) में प्रतिस्थापित करने पर,
8(1)+ 7v = 15
या 7v = 15 – 8
या v = 7/7 = 1
अब u = 1 ⇒ \(\frac{1}{y}\) = 1 ⇒ y = 1
v = 1 ⇒ \(\frac{1}{x}\) = 1 ⇒ x = 1
अतः अभीष्ट हल x = 1 व y = 1

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6

(vi) यहाँ पर
6x + 3y = 6xy
या \(\frac{6}{y}+\frac{3}{x}\) = 6 (दोनों ओर xy से भाग करने पर) …………..(i)
2x + 4y = 5xy
या \(\frac{2}{y}+\frac{4}{x}\) = 5 (दोनों ओर xy से भाग करने पर) ………….(ii)
माना \(\frac{1}{y}\) = u तथा \(\frac{1}{x}\) = v तो समीकरण (i) व (ii) से प्राप्त होगा,
6u + 3v = 6 ………………(iii)
2u+ 4v = 5 ………………….(iv)
समीकरण (iv) को 3 से गुणा करके समीकरण (iii) में से घटाने पर,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 13
v का मान समीकरण (iii) में प्रतिस्थापित करने पर,
6u + 3(1) = 6
या 6u = 6 – 3
या u = \(\frac{3}{6}=\frac{1}{2}\)
अब u = \(\frac{1}{2} \Rightarrow \frac{1}{y}=\frac{1}{2}\) ⇒ y = 2
v = 1 ⇒ \(\frac{1}{x}\) = 1 ⇒ x = 1
अतः अभीष्ट हल x = 1 व y = 2

(vii) यहाँ पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 14
माना \(\frac{1}{x+y}\) = u तथा \(\frac{1}{x-y}\) = v तो समीकरण () व (i) से प्राप्त होगा,
10u + 2v = 4 …………….(iii)
15u – 5v = -2 …………….(iv)
समीकरण (iii) को 5 से तथा समीकरण (iv) को 2 से गुणा करके परस्पर जोड़ने से,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 15
u का मान समीकरण (iii) में प्रतिस्थापित करने पर,
10(1/5) + 2v = 4
या 2v = 4 – 2
या v = 2/2 = 1
अब u = \(\frac{1}{5} \Rightarrow \frac{1}{x+y}=\frac{1}{5}\) ⇒ x + y = 5
v = 1⇒ \(\frac{1}{x-y}\) 1 ⇒ x – y = 1
समीकरण (v) व समीकरण (vi) को जोड़ने पर,
2x = 6
या x = \(\frac{6}{2}\) = 3
x का मान समीकरण (v) में प्रतिस्थापित करने पर,
3 + y = 5
या y = 5 – 3
या y = 2
अतः अभीष्ट हल x = 3 व y = 2

(viii) यहाँ पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 16

u का मान समीकरण (iii) में प्रतिस्थापित करने पर,
4(1/4) + 4v = 3
या 4v = 3 – 1
या v = \(\frac{2}{4}=\frac{1}{2}\)
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 17
समीकरण (v) व समीकरण (vi) को जोड़ने पर,
6x = 6
या x = 6/6 = 1
x का मान समीकरण (v) में प्रतिस्थापित करने पर,
3(1) + y = 4
या y = 4 – 3 = 1
या y = 1
अतः अभीष्ट हल x = 1 व y = 1

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6

प्रश्न 2.
निम्नलिखित समस्याओं को रैखिक समीकरण युग्म के रूप में व्यक्त कीजिए और फिर उनके हल ज्ञात कीजिए
(i) (रितु धारा के अनुकूल 2 घंटे में 20 km तैर सकती है और धारा के प्रतिकूल 2 घंटे में 4 km तैर सकती है। उसकी स्थिर जल में तैरने की चाल तथा धारा की चाल ज्ञात कीजिए।
(ii) 2 महिलाएँ एवं 5 पुरुष एक कसीदे के काम को साथ-साथ 4 दिन में पूरा कर सकते हैं, जबकि 3 महिलाएँ एवं 6 पुरुष इसको 3 दिन में पूरा कर सकते हैं। ज्ञात कीजिए कि इसी कार्य को करने में एक अकेली महिला कितना समय लेगी। पुनः इसी कार्य को करने में एक पुरुष कितना समय लेगा?
(iii) रूही 300 km दूरी पर स्थित अपने घर जाने के लिए कुछ दूरी रेलगाड़ी द्वारा तथा कुछ दूरी बस द्वारा तय करती है। यदि वह 60 km रेलगाड़ी द्वारा तथा शेष बस द्वारा यात्रा करती है तो उसे 4 घंटे लगते हैं। यदि वह 100 km रेलगाड़ी से तथा शेष बस से यात्रा करे, तो उसे 10 मिनट अधिक लगते हैं। रेलगाड़ी एवं बस की क्रमशः चाल ज्ञात कीजिए।
हल :
(i) माना रितु की स्थिर जल में तैरने की चाल = x km/h.
तथा धारा की चाल = y km/h
रितु की धारा के अनुकूल तैरने की चाल = (x + y) km/h
रितु की धारा के प्रतिकूल तैरने की चाल = (x -y) km/h
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण युग्म होंगे,
2(x + y) = 20 ⇒ x + y = 10 ……………(i)
तथा 2(x – y) = 4 ⇒ x – y = 2 …………(ii)
समीकरण (i) व (ii) को जोड़ने पर,
2x = 12
या x = 12/2 = 6
x का मान समीकरण (i) में प्रतिस्थापित करने पर,
6 +y = 10
या y = 10 – 6 = 4
अतः रितु की स्थिर जल में तैरने की चाल = 6 km/h
तथा धारा की चाल = 4 km/h

HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6

(ii) माना 1 महिला कसीदे के काम को समाप्त करने में दिन लगाती है तथा 1 पुरुष कसीदे के काम को समाप्त करने में y दिन लगाता है।
1 महिला का 1 दिन का काम = \(\frac{1}{x}\)
1 पुरुष का 1 दिन का काम = \(\frac{1}{y}\)
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण-युग्म होगा,
\(\frac{2}{x}+\frac{5}{y}=\frac{1}{4}\) …………..(i)
व \(\frac{3}{x}+\frac{6}{y}=\frac{1}{3}\) …………..(ii)
माना \(\frac{1}{x}\) = u व \(\frac{1}{y}\) = v तो समीकरण (i) व (ii) से प्राप्त होगा,
2u + 5v = \(\frac{1}{4}\) 8u + 20v = 1 …………(iii)
3u + 6v = \(\frac{1}{3}\) 9u + 18v = 1 …………(iv)
समीकरण (iii) को 9 से व समीकरण (iv) को 8 से गुणा करके घटाने पर
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 18
या v = \(\frac{1}{36}\)
v का मान समीकरण (iii) में रखने पर,
8u + 20 (\(\frac{1}{36}\)) = 1
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 19
अतः 1 महिला कसीदे के काम को समाप्त कर सकती है = 18 दिन में
1 पुरुष कसीदे के काम को समाप्त कर सकता है = 36 दिन में

(iii) माना रेलगाड़ी की चाल = x km/h
तथा बस की चाल = y km/h
प्रश्नानुसार रैखिक समीकरण-युग्म होगा,
HBSE 10th Class Maths Solutions Chapter 3 दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म Ex 3.6 20
या x = 15 x 4 = 60
अतः रेलगाड़ी की चाल = 60 km/h
बस की चाल = 80 km/h

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HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 1 समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 1 समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Solutions Chapter 1 समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय

पाठयपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में क्या अंतर है?
उत्तर:
व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics) और समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics) में अग्रलिखित अंतर हैं-

व्यष्टि अर्थशास्त्रसमष्टि अर्थशास्त्र
1. इसमें व्यक्तिगत इकाई के आर्थिक व्यवहार का अध्ययन किया जाता है; जैसे एक उपभोक्ता, एक फर्म (उत्पादक) आदि।1. इसमें बड़े आर्थिक समूहों का अध्ययन व अंतर्संबंधों का विश्लेषण किया जाता है; जैसे समग्र माँग, समग्र पूर्ति, राष्ट्रीय आय।
2. यह अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोज़गार की मान्यता पर आधारित है।2. यह अर्थव्यवस्था में संसाधनों के अपूर्ण व अल्प रोज़गार पर आधारित है।
3. इसकी मुख्य समस्या कीमत निर्धारण है, इसलिए इसे ‘कीमत सिद्धांत’ भी कहा जाता है।3. इसकी मुख्य समस्या आय व रोज़गार का निर्धारण है। इसलिए इसे ‘आय व रोज़गार का सिद्धांत’ भी कहते हैं।
4. इसका उद्देश्य संसाधनों के सर्वोत्तम आबंटन से होता है।4. इसका उद्देश्य संसाधनों के पूर्ण रोज़गार व विकास से होता है।
5. इसमें ‘अन्य बातें पूर्ववत रहें’ की मान्यता के अनुसार सिद्धांत बनाए जाते हैं। अध्ययन को केवल महत्त्वपूर्ण तत्त्वों तक सीमित रखने के कारण इसे आंशिक संतुलन विधि कहा जाता है।5. इसमें ‘अन्य बातें पूर्ववत रहें’ जैसी कोई मान्यता तो नहीं है परंतु आर्थिक तत्त्वों के सभी समूहों की परस्पर निर्भरता जानने के कारण इसे सामान्य संतुलन विधि कहा जाता है।
6. इसमें कीमत आर्थिक समस्याओं का प्रमुख निर्धारक तत्त्व है।6. इसमें आय आर्थिक समस्याओं का प्रमुख निर्धारक तत्त्व है।

प्रश्न 2.
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से अभिप्राय ऐसी अर्थव्यवस्था से है जिसमें आर्थिक क्रियाकलापों से संबंधित निम्नलिखित (विशेषताएँ) लक्षण पाए जाते हैं-

  1. उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व होता है।
  2. बाज़ार में निर्गत को बेचने के लिए ही उत्पादन किया जाता है।
  3. श्रमिकों की सेवाओं का क्रय-विक्रय एक निश्चित कीमत पर होता है, जिसे मज़दूरी की दर कहते हैं।
  4. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में सभी आर्थिक क्रियाओं का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक कल्याण न होकर निजी लाभ होता है।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 1 समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय

प्रश्न 3.
समष्टि अर्थशास्त्र की दृष्टि से अर्थव्यवस्था के चार प्रमुख क्षेत्रकों का वर्णन करें।
उत्तर:
समष्टि अर्थशास्त्र की दृष्टि से अर्थव्यवस्था के निम्नलिखित चार प्रमुख क्षेत्रक हैं-
1. पारिवारिक क्षेत्रक-परिवार से अभिप्राय एकल व्यक्तिगत उपभोक्ता अथवा कई व्यक्तियों के समूह से है जो अपने उपभोग संबंधित निर्णय अकेले अथवा संयुक्त रूप से लेते हैं। परिवार बचत भी करते हैं और सरकार को कर (Tax) का भुगतान भी करते हैं।

2. व्यापारिक क्षेत्रक-व्यापारिक क्षेत्र से अभिप्राय उत्पादन इकाइयों अथवा फर्मों से है। किसी फर्म के कारोबार के संचालन का दायित्व उद्यमियों पर होता है। उद्यमी ही श्रम, भूमि तथा पूँजी जैसे उत्पादन कारकों को नियोजित कर उत्पादन प्रक्रिया का संचालन करता है। उनका उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन कर (जिसे निर्गत कहा जाता है) बाज़ार में लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से बेचना है। इस प्रक्रिया में उसे जोखिम एवं अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।

3. सरकार-अर्थव्यवस्था में सरकार भी अनेक उत्पादन कार्य करती है। कर लगाने और सार्वजनिक आधारभूत संरचना के निर्माण पर व्यय करने के अतिरिक्त स्कूल, कॉलेज भी चलाए जाते हैं और स्वास्थ्य सेवाएँ भी प्रदान की जाती हैं।

4. बाह्य क्षेत्रक-विश्व के अन्य देशों से व्यापार करना, आयात-निर्यात करना अथवा विभिन्न देशों के बीच पूँजी प्रवाह होना।

प्रश्न 4.
1929 की महामंदी का वर्णन करें।
उत्तर:
विश्व में 1930 से पहले परंपरावादी अर्थशास्त्रियों (Classical Economists) की विचारधारा प्रचलित व मान्य थी कि “पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में सदा पूर्ण रोजगार की स्थिति पाई जाती है।” परंत 1929-33 की Depression) की घटना ने परंपरावादी मान्यता को चूर-चूर कर दिया। मंदी के कारण अमरीका औ आय व रोज़गार में भारी गिरावट आई। इसका प्रभाव दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ा। बाज़ार में वस्तुओं की माँग कम थी और कई कारखाने बेकार पड़े थे। श्रमिकों को काम से निकाल दिया गया था। संयुक्त राज्य अमरीका में 1929 से 1933 तक बेरोजगारी की दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गई थीं। इस अवधि के दौरान अमरीका में समस्त उत्पादन में 33 प्रतिशत की गिरावट आई।

परंपरावादी अर्थशास्त्री उत्पादन, आय व रोज़गार में आई इस भारी गिरावट का जवाब नहीं दे सकें। मंदी की ऐसी गंभीर स्थिति ने अर्थशास्त्रियों को व्यष्टि की बजाय समष्टि स्तर पर सोचने को मजबूर कर दिया। तभी सन् 1936 ई० में इंग्लैंड के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जे०एम०केञ्ज ने अपनी पुस्तक ‘रोज़गार, ब्याज और मुद्रा का सामान्य सिद्धांत’ (The General Theory of Employment, Interest and Money) प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने परंपरावादी सिद्धांत की आलोचना करते हुए एक नया वैकल्पिक सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसे केज का सिद्धांत या समष्टि सिद्धांत कहते हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद आर्थिक चिंतन में भारी क्रांति आई, जिसे केजीयन (Keynesian) क्रांति कहते हैं। केज के सिद्धांत को आधुनिक समष्टि स्तर पर चिंतन का आरंभिक बिंदु माना जाता है।

समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय HBSE 12th Class Economics Notes

→ समष्टि अर्थशास्त्र-समष्टि अर्थशास्त्र में संपूर्ण अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया जाता है। इसमें हम समस्त माँग, समस्त पूर्ति, कुल उपभोग, कुल बचत, कुल निवेश, कुल आय अथवा राष्ट्रीय आय, कुल रोज़गार, सामान्य कीमत स्तर आदि तत्त्वों का अध्ययन करते हैं।

→ समष्टि अर्थशास्त्र का उद्भव (प्रादुर्भाव)-समष्टि अर्थशास्त्र का उद्भव 1930 के दशक में 1929-33 की विश्वव्यापी महामंदी के कटु अनुभव के उपरांत हुआ जब पूर्ण रोज़गार की स्थिति को स्वतः ही बनाए रखने के लिए परंपरावादी अर्थशास्त्रियों द्वारा सुझाए गए समाधान असफल सिद्ध हुए। केजीयन विचारधारा का विकास भी इसी समय हुआ।

→ समष्टिगत आर्थिक चर-समष्टि अर्थशास्त्र में संपूर्ण अर्थव्यवस्था के बड़े भागों और औसतों का अध्ययन किया जाता है; जैसे समस्त माँग, समस्त पूर्ति, कुल उपभोग, कुल बचत, कुल निवेश, सामान्य कीमत स्तर, सकल राष्ट्रीय उत्पाद तथा आय।

HBSE 12th Class Economics Solutions Chapter 1 समष्टि अर्थशास्त्र : एक परिचय

→ व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र परस्पर प्रतियोगी नहीं बल्कि पूरक हैं व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र एक-दूसरे के प्रतियोगी न होकर पूरक हैं। एक का ज्ञान दूसरे के अध्ययन के लिए जरूरी है। अनेक बार व्यष्टिगत आर्थिक विश्लेषण के लिए समष्टिगत आर्थिक विश्लेषण पर निर्भर रहना पड़ता है। उदाहरण के लिए, व्यक्तिगत आय कुल राष्ट्रीय आय पर निर्भर करती है, जबकि कुल राष्ट्रीय आय व्यक्तियों, परिवारों, फर्मों और उद्योगों की आय का जोड़ होती है।

→ समष्टि आर्थिक विरोधाभास-समष्टि आर्थिक विरोधाभास से अभिप्राय है कि जो बात व्यक्तिगत स्तर पर सही है, आवश्यक नहीं है कि वह समष्टिगत स्तर पर भी सही हो।

→ केजीयन विचारधारा केजीयन विचारधारा पूर्ण रोज़गार की स्थिति को अर्थव्यवस्था की सामान्य स्थिति नहीं मानती। इसके अनुसार बेरोज़गारी और मंदी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।

→ परंपरावादी विचारधारा-परंपरावादी विचारधारा स्वतंत्र पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोज़गार की स्थिति को एक सामान्य स्थिति मानती है, जोकि अर्थव्यवस्था में स्वचालित (स्वयंमेव) सामंजस्य के परिणामस्वरूप स्वतः ही बनी रहती है।

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HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

Haryana State Board HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए

1. संतुलन कीमत उस कीमत को कहते हैं जिस पर-
(A) क्रेता वस्तु को खरीदने के लिए तैयार है
(B) विक्रेता वस्तु को बेचने के लिए तैयार है
(C) वस्तु की माँग तथा पूर्ति बराबर हो जाती है
(D) वस्तु की कीमत वस्तु की उपयोगिता के बराबर होती है
उत्तर:
(C) वस्तु की माँग तथा पूर्ति बराबर हो जाती है

2. पूर्ति के स्थिर रहने तथा माँग के कम होने पर कीमत
(A) बढ़ती है
(B) स्थिर रहती है
(C) कम होती है
(D) घटती-बढ़ती रहती है
उत्तर:
(C) कम होती है

3. माँग के स्थिर रहने तथा पूर्ति के कम होने पर कीमत-
(A) बड़ती है
(B) स्थिर रहती है
(C) कम होती है
(D) घटती-बढ़ती रहती है
उत्तर:
(A) बढ़ती है

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

4. जब माँग और पूर्ति एक साथ बढ़ती है परंतु माँग में होने वाली वृद्धि पूर्ति में होने वाली वृद्धि से अधिक होती है तो कीमत
(A) बढ़ेगी
(B) कम होगी
(C) स्थिर रहेगी
(D) घटती-बढ़ती रहेगी
उत्तर:
(A) बढ़ेगी

5. जब माँग और पूर्ति में बराबर वृद्धि होती है तो उत्पादन की मात्रा-
(A) बढ़ेगी
(B) कम होगी
(C) स्थिर रहेगी
(D) घटती-बढ़ती रहेगी
उत्तर:
(A) बढ़ेगी

6. जब माँग और पूर्ति में बराबर कमी होती है तो कीमत
(A) बढ़ती है
(B) कम होती है
(C) स्थिर रहती है
(D) घटती-बढ़ती रहती है
उत्तर:
(C) स्थिर रहती है

7. जब पूर्ति पूर्णतया लोचदार हो तथा माँग में वृद्धि हो तो संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव होगा?
(A) समान रहेगी
(B) घटेगी
(C) बढ़ेगी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) समान रहेगी

8. पूर्ति पूर्णतया बेलोचदार होने पर माँग में वृद्धि होने से संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(A) बढ़ेगी
(B) घटेगी
(C) स्थिर रहेगी
(D) समान रहेगी
उत्तर:
(A) बढ़ेगी

9. माँग पूर्णतया बेलोचदार होने पर पूर्ति में कमी का संतुलन मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(A) बढ़ेगी
(B) घटेगी
(C) समान रहेगी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) समान रहेगी

10. माँग पूर्णतया लोचदार होने पर पूर्ति में कमी का संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(A) समान रहेगी
(B) बढ़ेगी
(C) घटेगी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) समान रहेगी

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

11. बाजार कीमत का निर्धारण किया जाता है
(A) अल्पकाल में
(B) अति-अल्पकाल में
(C) दीर्घकाल में
(D) अति-दीर्घकाल में
उत्तर:
(B) अति-अल्पकाल में

12. संतुलन कीमत से कम, कीमत की उच्चतम सीमा निर्धारण से-
(A) अधिमाँग की स्थिति उत्पन्न होती है
(B) न्यून माँग की स्थिति उत्पन्न होती है
(C) शून्य माँग की स्थिति उत्पन्न होती है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) अधिमाँग की स्थिति उत्पन्न होती है

13. संतुलन कीमत से अधिक, कीमत की निम्नतम सीमा निर्धारण से-
(A) अधिपूर्ति की स्थिति उत्पन्न होती है
(B) न्यून पूर्ति की स्थिति उत्पन्न होती है
(C) शून्य पूर्ति की स्थिति उत्पन्न होती है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) अधिपूर्ति की स्थिति उत्पन्न होती है।

14. जब सरकार द्वारा किसी वस्तु की उच्चतम कीमत निर्धारित की जाती है, तो उसे कहा जाता है-
(A) समर्थन मूल्य
(B) उच्चतम निर्धारित कीमत
(C) न्यूनतम निर्धारित कीमत
(D) उचित कीमत
उत्तर:
(B) उच्चतम निर्धारित कीमत

15. अभिरुचियों में सकारात्मक परिवर्तन का वस्तु की कीमत और विनिमय मात्रा पर कैसा प्रभाव पड़ता है?
(A) कीमत और विनिमय मात्रा में वृद्धि होती है
(B) कीमत और विनिमय मात्रा समान रहती है
(C) कीमत और विनिमय मात्रा में कमी होती है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) कीमत और विनिमय मात्रा में वृद्धि होती है

16. किसी अव्यवहार्य (Non-viable) उद्योग का पूर्ति वक्र माँग वक्र की तुलना में कहाँ स्थित होता है?
(A) पूर्ति वक्र माँग वक्र के नीचे होता है
(B) पूर्ति वक्र माँग वक्र के ऊपर होता है
(C) पूर्ति वक्र माँग वक्र को प्रतिच्छेदित करता है
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) पूर्ति वक्र माँग वक्र के ऊपर होता है

B. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

1. पूर्ति के स्थिर तथा माँग के कम होने पर कीमत …………… होती है। (कम/अधिक)
उत्तर:
कम

2. माँग के …………. होने तथा पूर्ति के कम होने पर कीमत बढ़ती है। (स्थिर/परिवर्तित)
उत्तर:
स्थिर

3. जब माँग और पूर्ति में …………. वृद्धि होती है तो उत्पादन की मात्रा बढ़ती है। (समान/असमान)
उत्तर:
समान

4. जब माँग और पूर्ति में बराबर कमी होती है तो कीमत ………….. रहती है। (परिवर्तित स्थिर)
उत्तर:
स्थिर

5. जब सरकार द्वारा किसी वस्तु की उच्चतम कीमत निर्धारित की जाती है, तो उसे ………….. निर्धारित कीमत कहा जाता है। (न्यूनतम/उच्चतम)
उत्तर:
उच्चतम

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

6. वस्तु की वह मात्रा जिसे संतुलन कीमत पर बेचा और खरीदा जाता है, वह …………. कहलाती है। (संतुलन मात्रा पूर्ति मात्रा)
उत्तर:
संतुलन मात्रा

7. फर्म उस समय संतुलन में होता है, जब उसे अधिकतम ………….. प्राप्त होता होती है। (लाभ/हानि)
उत्तर:
लाभ

8. बिक्री कर लगाना और आर्थिक सहायता देना ………… बाज़ार व्यवस्था के उदाहरण हैं। (प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष)
उत्तर:
अप्रत्यक्ष

9. संतुलन कीमत से अधिक कीमत की निम्नतम सीमा निर्धारण से …………… की स्थिति उत्पन्न होती है। (अधिपूर्ति/न्यूनपूर्ति)
उत्तर:
अधिपूर्ति

C. बताइए कि निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत

  1. पूर्ण बाज़ार में विक्रेता कीमत-स्वीकारक नहीं होता।
  2. पूर्ण बाज़ार में विक्रय लागतों का महत्त्व होता है।
  3. बाज़ार कीमत वह कीमत है जिसकी बाज़ार में प्रचलित होने की प्रवृत्ति होती है।
  4. समर्थन मूल्य संतुलन कीमत से अधिक होता है।
  5. पूर्ण प्रतियोगिता की तुलना में शुद्ध प्रतियोगिता अधिक वास्तविक होती है।
  6. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में वस्तुएँ समरूप होती हैं।
  7. पूर्ण प्रतियोगिता में एक फर्म कीमत को प्रभावित करती है।
  8. पूर्ण प्रतियोगिता उस समय तक नहीं पाई जाती जब तक बाज़ार में फर्मों का स्वतन्त्र प्रवेश नहीं होता।
  9. अल्पकाल में वस्तु की कीमत पर माँग की अपेक्षा पूर्ति का अधिक प्रभाव पड़ता है।
  10. सामान्य कीमत का संबंध अल्पकाल से होता है।
  11. पूर्ति तथा स्टॉक में अंतर होता है।
  12. अर्थशास्त्र में प्रत्येक वस्तु का अलग बाज़ार होता है।
  13. एकाधिकार में अन्य बाज़ारों की अपेक्षा कीमत कम व उत्पादन अधिक होता है।
  14. एकाधिकारी प्रतियोगिता में वस्तुएँ निकट स्थानापन्न नहीं होती।
  15. द्वि-अधिकार में दो क्रेता होते हैं।
  16. अल्पाधिकार में अनेक विक्रेता होते हैं।
  17. एकाधिकार में एक नई फर्म का बाज़ार में प्रवेश हो सकता है।
  18. यदि किसी वस्तु की माँग बढ़ती है, अन्य बातें समान रहने पर उसकी कीमत कम होती है।
  19. दीर्घकाल में एक वस्तु की कीमत सीमांत लागत के बराबर होती है।
  20. माँग के स्थिर रहने तथा पूर्ति के कम होने पर कीमत बढ़ती है।

उत्तर:

  1. गलत
  2. गलत
  3. गलत
  4. सही
  5. सही
  6. गलत
  7. गलत
  8. सही
  9. गलत
  10. गलत
  11. सही
  12. सही
  13. गलत
  14. गलत
  15. गलत
  16. गलत
  17. गलत
  18. गलत
  19. सही
  20. सही।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संतुलन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
संतुलन से अभिप्राय ऐसी स्थिति से है जिसमें परिवर्तन की प्रवृत्ति का अभाव हो।

प्रश्न 2.
उन दो कारकों का उल्लेख कीजिए जिन पर संतुलन कीमत निर्भर करती है।
उत्तर:

  • वस्तु की बाज़ार माँग।
  • वस्तु की बाज़ार पूर्ति।

प्रश्न 3.
संतुलन कीमत के निर्धारण में किस बाज़ार शक्ति, माँग तथा पूर्ति, का अधिक योगदान होता है?
उत्तर:
संतुलन कीमत के निर्धारण में माँग और पूर्ति का बराबर योगदान होता है, क्योंकि वस्तु की कीमत उस बिंदु पर निर्धारित होती है जहाँ माँग और पूर्ति दोनों एक-दूसरे के बराबर होती हैं।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 4.
उपभोग में प्रतिस्थापक (Substitute) वस्तु की कीमत में वृद्धि का संतुलन कीमत पर क्या प्रभाव होता है?
उत्तर:
प्रतिस्थापक वस्तु की कीमत में वृद्धि से संतुलन कीमत में वृद्धि हो जाएगी क्योंकि इस वस्तु की माँग बढ़ जाएगी।

प्रश्न 5.
अभिरुचियों में सकारात्मक परिवर्तन का कीमत और विनिमय मात्रा पर कैसे प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
अभिरुचियों में सकारात्मक परिवर्तन से वस्तु की माँग में वृद्धि हो जाती है जिसके फलस्वरूप कीमत और विनिमय मात्रा दोनों में वृद्धि होगी।

प्रश्न 6.
अभिरुचियों में नकारात्मक परिवर्तन का कीमत और विनिमय मात्रा पर कैसे प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
अभिरुचियों में नकारात्मक परिवर्तन से वस्तु की माँग में कमी हो जाती है जिसके फलस्वरूप कीमत और विनिमय मात्रा में कमी आती है।

प्रश्न 7.
कीमत नियंत्रण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कीमत नियंत्रण से अभिप्राय यह है कि सरकार ने कुछ वस्तुओं की कीमत की उच्चतम सीमा निर्धारित कर दी है।

प्रश्न 8.
कीमत नियंत्रण का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
कीमत नियंत्रण का उद्देश्य गरीब जन-समुदाय को अति आवश्यक वस्तुओं; जैसे खाद्यान्नों आदि को उचित कीमत पर उपलब्ध कराना होता है।

प्रश्न 9.
नियंत्रित कीमत और संतुलन कीमत में क्या संबंध है?
उत्तर:
उपभोक्ताओं के हित की रक्षा के लिए सरकार नियंत्रित कीमत को संतुलन कीमत से कम रखती है।

प्रश्न 10.
नियंत्रित कीमत से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
सरकार द्वारा वस्तु की संतुलन कीमत से कम निर्धारित कीमत, नियंत्रित कीमत कहलाती है।

प्रश्न 11.
सरकार किन दो रूपों में कीमत नियंत्रित करती है?
उत्तर:
सरकार अधिकतम कीमत तथा न्यूनतम कीमत निर्धारित करके कीमत नियंत्रित करती है।

प्रश्न 12.
उच्चतम कीमत सीमा (Price Ceiling) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब सरकार द्वारा किसी वस्तु की उच्चतम कीमत निर्धारित की जाती है, तो उसे कीमत की उच्चतम सीमा कहते हैं।

प्रश्न 13.
न्यूनतम (समर्थन) कीमत क्या है?
उत्तर:
न्यूनतम (समर्थन) कीमत से अभिप्राय उस कीमत से है जो सरकार द्वारा प्रचलित कीमत से अधिक निर्धारित की जाती है और उस कीमत पर सरकार वस्तुओं का क्रय करती है अर्थात् संतुलन कीमत से अधिक निर्धारित कीमत समर्थन कीमत कहलाती है।

प्रश्न 14.
राशनिंग से आप क्या समझते हैं? उत्तर:राशनिंग का अर्थ एक व्यक्ति के लिए वस्तु के उपभोग या क्रय की उच्चतम सीमा का निर्धारण करना है। प्रश्न 15. ‘कालाबाजारी’ से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कालाबाजारी का अर्थ किसी वस्तु को सरकार द्वारा निर्धारित कीमत से अधिक कीमत पर गैर-कानूनी ढंग से बेचा जाना है।

प्रश्न 16.
मज़दूरी दर का निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर:
मज़दूरी दर का निर्धारण उस बिंदु पर होता है जहाँ श्रम की माँग और श्रम की पूर्ति बराबर हो।

प्रश्न 17.
वस्तु की माँग और श्रम की माँग में क्या अंतर है?
उत्तर:
वस्तु की माँग उपभोक्ता द्वारा की जाती है और श्रम की माँग उत्पादक द्वारा की जाती है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 18.
वस्तु के पूर्ति वक्र और श्रम के पूर्ति वक्र में क्या अंतर है?
उत्तर:
वस्तु के पूर्ति वक्र की प्रवणता नीचे से ऊपर होती है जबकि श्रम के पूर्ति वक्र की प्रवणता एक सीमा के बाद पीछे की ओर मुड़ी हुई होती है।

प्रश्न 19.
किसी उद्योग के व्यवहार्य (अर्थक्षेम) (Viable) होने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
व्यवहार्य या अर्थक्षेम उद्योग वह होता है जिसके माँग वक्र और पूर्ति वक्र उत्पादन के धनात्मक स्तर पर परस्पर काटते हैं।

प्रश्न 20.
‘बाज़ार’ (Market) अवधारणा का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बाजार से अभिप्राय उस क्षेत्र से है जिसमें वस्तु के क्रय-विक्रय के लिए खरीदने और बेचने वाले एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं।

प्रश्न 21.
बाज़ार व्यवस्था के मुख्य तत्त्व बताएँ।
उत्तर:

  1. पदार्थ या सेवा का उपलब्ध होना
  2. क्षेत्र, जहाँ वस्तु का लेन-देन हो
  3. क्रेता व विक्रेता का विद्यमान होना
  4. क्रेताओं व विक्रेताओं में संपर्क होना है। ध्यान रहे क्रेताओं व विक्रेताओं के बीच संपर्क (प्रतिस्पर्धा) आमने-सामने होने के अतिरिक्त डाक-तार या टेलीफोन से भी हो सकता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए (क) पूर्ण प्रतियोगिता में सीमांत संप्राप्ति (MR), औसत संप्राप्ति (AR) के बराबर क्यों होते हैं? (ख) पूर्ण प्रतियोगिता में MR व AR रेखा X-अक्ष के समानांतर क्यों होते हैं?
उत्तर:
(क) पूर्ण प्रतियोगिता में AR, MR के बराबर (AR=MR) होने का कारण यह है कि उद्योग कीमत निर्धारित करता है और फर्म इसे स्वीकार करती है। स्पष्ट है कि उद्योग द्वारा निर्धारित कीमत पर फर्म जितनी भी इकाइयाँ बेचेगी, उसे प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से आगम (अर्थात् MR) उस कीमत (अर्थात् AR) के बराबर मिलेगा। फलस्वरूप MR औसत आगम (AR) के बराबर होगा, क्योंकि कीमत और A=R सदा समान होते हैं। संक्षेप में, हम कह सकते हैं कि पूर्ण प्रतियोगिता (प्रतिस्पर्धा) में MR, AR व कीमत बराबर होते हैं अर्थात् MR = AR = कीमत।

(ख) पूर्ण प्रतियोगिता में MR व AR रेखा (वक्र) एक समतल सीधी रेखा (Horizontal Straight Line) होती है जो X-अक्ष के समानांतर होती है। इसका कारण यह है कि MR और AR बराबर होते हैं। MR,AR के बराबर इसलिए होता है क्योंकि फर्म उद्योग द्वारा निर्धारित कीमत पर ही वस्तु बेच सकती है। MR,AR और कीमत बराबर होने के फलस्वरूप उनका वक्र एक ही बनता है जो X-अक्ष के समानांतर होता है। चूंकि AR कीमत के बराबर होता है, इसलिए AR वक्र को कीमत रेखा भी कहते हैं।

प्रश्न 2.
माँग व पूर्ति अनुसूचियों की सहायता से बाज़ार संतुलन का निर्धारण समझाइए। रेखाचित्र भी बनाइए।
उत्तर:
एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में वस्तु की कीमत का निर्धारण फर्म द्वारा नहीं, बल्कि उद्योग द्वारा वस्तु की बाज़ार माँग और बाज़ार पूर्ति की शक्तियों द्वारा किया जाता है। बाज़ार में एक वस्तु की कीमत सामान्यतः वस्तु की माँग और पूर्ति शक्तियों द्वारा निर्धारित होती है। जिस कीमत पर वस्तु की माँग वस्तु की पूर्ति के बराबर होती है, वह बाज़ार कीमत निर्धारित होती है। इसे हम सारणी व रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं

गेहूँ की कीमत (रुपए)गेहूँ की माँग (क्विंटल)गेहूँ की पूर्ति (क्विंटल)
9008025
10007040
11005050
12003070
13001590

उपर्युक्त सारणी में गेहूँ की बाज़ार कीमत 1100 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि रेखाचित्र में बाज़ार की कीमत OP है। क्योंकि इस कीमत पर वस्तु की माँग (50 क्विंटल) वस्तु की बाज़ार पूर्ति (50 क्विंटल) बराबर है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 3.
संतुलन कीमत या साम्य कीमत (Equilibrium Price) तथा बाज़ार संतुलन (Market Equilibrium) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
संतुलन कीमत-वह कीमत जिस पर वस्तु की माँग और पूर्ति बराबर होती है, संतुलन कीमत कहलाती है और माँग व पूर्ति की मात्रा को संतुलन मात्रा कहते हैं। जिस निश्चित बिंदु पर माँग वक्र और पूर्ति वक्र एक-दूसरे को काटते हैं उसे संतुलन बिंदु कहते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 1
बाज़ार संतुलन-बाज़ार संतुलन तब होता है जब वस्तु की माँगी गई मात्रा और पूर्ति की मात्रा बराबर होती है। ऐसी अवस्था में न तो आधिक्य माँग होती है और न ही आधिक्य पूर्ति होती है अर्थात् बाज़ार माँग और बाज़ार पूर्ति में पूर्ण संतुलन होता है। बाजार कीमत वह कीमत है जिस पर बाज़ार में वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है। यह संतुलन कीमत से कम या अधिक हो सकती है।

प्रश्न 4.
किन परिस्थितियों में पूर्ति में वृद्धि का उसकी कीमत पर प्रभाव नहीं पड़ेगा?
उत्तर:
निम्नलिखित परिस्थितियों में पूर्ति में वृद्धि का उसकी कीमत पर प्रभाव नहीं पड़ेगा
(i) जब पूर्ति में वृद्धि के साथ-साथ उसी अनुपात में माँग में भी वृद्धि हो। इसे हम निम्नांकित रेखाचित्र (i) द्वारा दिखा सकते हैं। (ii) जब माँग पूर्णतया लोचदार हो। इसे हम निम्नांकित रेखाचित्र (ii) द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 2

प्रश्न 5.
रेखाचित्र की सहायता से संतुलन कीमत और मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाइए जब-
(i) माँग पूर्णतया लोचदार है और पर्ति घटती है।
(ii) पूर्ति पूर्णतया लोचदार है और माँग बढ़ती है।
उत्तर:
(i) जब माँग पूर्णतया लोचदार है और पूर्ति घटती है तो कीमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अग्रांकित रेखाचित्र में पूर्ति घटने के पश्चात् भी कीमत पूर्ववत् OP बनी रहती है लेकिन मात्रा OQ से घटकर OQ1 हो जाती हैं। जैसाकि अग्रांकित रेखाचित्र (i) से स्पष्ट हो रहा है।

(ii) यदि पूर्ति पूर्णतया बेलोचदार है और माँग बढ़ती है तो संतुलन कीमत में वृद्धि होती है लेकिन वस्तु की मात्रा पूर्ववत् रहती है। जैसाकि निम्नांकित रेखाचित्र में माँग बढ़ने पर संतुलन कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाती है लेकिन वस्तु की मात्रा OQ ही बनी रहती है। जैसाकि निम्नांकित रेखाचित्र (ii) से स्पष्ट हो रहा है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 3

प्रश्न 6.
बाज़ार कीमत और विनिमय मात्रा पर क्या प्रभाव होगा, जब (i) माँग वक्र दाहिनी ओर खिसक जाए। (i) माँग वक्र पूर्णतया लोचशील हो और पूर्ति वक्र बाहर की ओर खिसक जाए। (ii) माँग और पूर्ति वक्रों में समान अनुपात में बाईं ओर खिसकाव हो जाए।
उत्तर:
(i) जब माँग वक्र दाहिनी ओर खिसक जाए तो बाज़ार कीमत बढ़ जाएगी और विनिमय मात्रा भी बढ़ जाएगी। निम्नांकित रेखाचित्र में कीमत OP से बढ़कर OP1 तथा विनिमय मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो गई है। जैसाकि निम्नांकित रेखाचित्र (i) से स्पष्ट हो रहा है।

(ii) जब माँग वक्र पूर्णतया लोचशील हो और पूर्ति वक्र बाहर की ओर खिसक जाए तो संतुलन कीमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन विनिमय मात्रा में वृद्धि होगी जैसाकि रेखाचित्र (ii) में कीमत OP रहती है लेकिन विनिमय मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो जाती है।

(iii) जब माँग और पूर्ति वक्रों में समान अनुपात में बाईं ओर खिसकाव हो तो बाज़ार कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन विनिमय मात्रा में कमी आएगी। निम्नांकित रेखाचित्र में कीमत OP ही रहेगी परंतु विनिमय मात्रा OQ से कम होकर OQ1 हो जाएगी। जैसाकि निम्नांकित रेखाचित्र (iii) से स्पष्ट हो रहा है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 4

प्रश्न 7.
जब किसी वस्तु की बाज़ार पूर्ति में वृद्धि होती है तो उस वस्तु की संतुलन कीमत व मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है? रेखाचित्र की सहायता से दर्शाइए।
अथवा
एक वस्तु के पूर्ति वक्र के दायीं ओर खिसकने से उसकी संतुलन कीमत और मात्रा पर होने वाले प्रभाव को एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
किसी वस्तु की बाज़ार पूर्ति में वृद्धि से उस वस्तु का पूर्ति वक्र दायीं ओर खिसक जाता है जिसके फलस्वरूप संतुलन कीमत में कमी और संतुलन मात्रा में वृद्धि होती है। इसे हम रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 5
संलग्न रेखाचित्र में SS वस्तु का प्रारंभिक पूर्ति वक्र है जो वस्तु के माँग वक्र DD को E बिंदु पर काटता है जिससे संतुलन कीमत OP तथा संतुलन मात्रा OQ निर्धारित होती है। जब पूर्ति वक्र खिसकर S1S1 हो जाता है तो नया संतुलन बिंदु E1 हो जाता है जहाँ संतुलन कीमत OP1 है जो पूर्व संतुलन कीमत से कम है लेकिन संतुलन मात्रा OQ1 है जो पूर्व संतुलन मात्रा से अधिक है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 8.
जब किसी वस्तु की बाज़ार माँग में कमी होती है जो उस वस्तु की कीमत और मात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है? एक रेखाचित्र की सहायता से दर्शाइए।
अथवा
एक वस्तु के माँग वक्र के बायीं ओर खिसकने से उसकी संतुलन कीमत और मात्रा पर होने वाले प्रभाव को एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
किसी वस्तु की बाज़ार माँग में कमी से उस वस्तु का माँग वक्र बायीं ओर खिसक जाता है जिससे उस वस्तु की संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा भी कम हो जाती है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र से दिखा सकते हैं-
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 6
संलग्न रेखाचित्र में DD वस्तु का प्रारंभिक मॉग वक्र है जो वस्तु के पूर्ति वक्र SS को E बिंदु परं काटता है जिसके फलस्वरूप OP संतुलन कीमत और OQ संतुलन मात्रा निर्धारित होती है। माँग वक्र के दायीं ओर खिसकने से माँग वक्र D1D1 हो जाता है जो पूर्व पूर्ति वक्र को E1 बिंदु पर काटता है जिसके फलस्वरूप संतुलन कीमत OP से कम होकर OP1 तथा संतुलन मात्रा OQ से कम होकर OQ1 हो जाती है।

प्रश्न 9.
एक वस्तु की पूर्ति में कमी का उसकी संतुलन कीमत और मात्रा वस्तु की मात्रा पर प्रभाव एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
अथवा
एक वस्तु की पूर्ति वक्र के बाईं ओर खिसकने से उसकी संतुलन कीमत और मात्रा पर प्रभाव एक रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
उत्तर:
एक वस्तु के पूर्ति वक्र के बाईं ओर खिसकने का अर्थ है कि वस्तु की पूर्ति में कमी हुई है। एक वस्तु के पूर्ति वक्र के बाईं ओर खिसकने से उस वस्तु की संतुलन कीमत और मात्रा पर जो प्रभाव पड़ेगा उसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 7a
संलग्न रेखाचित्र में प्रारंभिक पूर्ति वक्र SS है जो माँग वक्र DD को बिंदु E पर काटता है जिससे OP संतुलन कीमत और OQ संतुलन मात्रा निर्धारित होती है। पूर्ति वक्र SS के बाईं ओर खिसकने से पूर्ति वक्र SS1 हो जाता है जो माँग वक्र को E1 पर काटता है जिससे संतुलन कीमत OP से बढ़कर OP1 हो जाती है और संतुलन मात्रा OQ से घटकर OQ1 हो जाती है। इस प्रकार एक वस्तु की पूर्ति में कमी से संतुलन कीमत में वृद्धि होगी और संतुलन मात्रा में कमी होगी।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पूर्ण प्रतियोगिता (प्रतिस्पर्धा) बाज़ार से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता (प्रतिस्पर्धा) बाज़ार का अर्थ-पूर्ण प्रतियोगिता (प्रतिस्पर्धा) बाज़ार की वह अवस्था है जिसमें असंख्य क्रेता और विक्रेता स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करते हैं और वस्तु एक-समान कीमत पर बाज़ार में बिकती है। वस्तुएँ समरूप (Homogeneous) होती हैं। उद्योग वस्तु की कीमत निर्धारित (Price Maker) करता है और फर्म कीमत स्वीकार (Price taker) करती है। क्रेताओं व विक्रेताओं को बाज़ार की स्थिति का पूर्ण ज्ञान होता है और बाज़ार में नई फर्मों के प्रवेश या बाज़ार छोड़ने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।

पूर्ण प्रतियोगिता बाज़ार की विशेषताएँ पूर्ण प्रतियोगिता बाज़ार की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. क्रेताओं व विक्रेताओं की अत्यधिक संख्या पूर्ण प्रतियोगिता में क्रेता तथा विक्रेता दोनों की संख्या इतनी अधिक होती है कि कोई भी अकेली फर्म या व्यक्ति अपने व्यक्तिगत व्यवहार से प्रचलित कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता। इसका कारण यह है कि प्रत्येक विक्रेता और क्रेता बाज़ार में वस्तु की कुल पूर्ति/माँग का बहुत थोड़ा अंश बेचता या खरीदता है।

2. समरूप वस्तुएँ विभिन्न फर्मों द्वारा उत्पादित वस्तुएँ, गुण, रंग, रूप तथा आकार में समरूप होती हैं। वस्तु (उत्पाद) एक समान या समरूप होने के कारण कोई भी विक्रेता किसी वस्तु की कीमत अधिक वसूल नहीं कर सकता अन्यथा वह ग्राहक खो बैठेगा। इसी प्रकार कोई क्रेता किसी विशेष फर्म द्वारा बनाई वस्तु को प्राथमिकता नहीं दे सकता, क्योंकि वस्तु की इकाइयाँ हर दृष्टि से एक-समान होती हैं और उनमें भेद करना कठिन होता है।

3. निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन-पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म को उद्योग में आने और छोड़ने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। यदि फर्म को किसी उद्योग के अंतर्गत असामान्य लाभ दिखाई देता है और फर्म उद्योग में आना चाहे तो आ सकती है और यदि हानि दिखाई दे तो फर्म उद्योग को छोड़कर जा सकती है। इसलिए सब फर्मे केवल सामान्य लाभ कमा सकती हैं।

4. परिवहन लागत का अभाव कीमत की समानता के लिए जरूरी है कि परिवहन लागत स्थिर होनी चाहिए। कीमत की समानता के लिए यह मान लिया जाता है कि वस्तु को लाने व ले जाने में परिवहन व्यय नहीं होता। गुण, आकार तथा रूप में वस्तु एक जैसी होने के कारण इसके विज्ञापन पर विक्रेता को व्यय करने की आवश्यकता नहीं होती।

5. पूर्ण ज्ञान-क्रेताओं और विक्रेताओं को कीमत संबंधी पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। क्रेताओं को मालूम होना चाहिए कि बाज़ार में वस्तु की क्या कीमत है और विक्रेताओं को भी मालूम होना चाहिए कि बाज़ार में वस्तु किस कीमत पर बिक रही है। इसलिए यदि दोनों को कीमत की पूर्ण जानकारी होगी तो विक्रेता क्रेता से वस्तु की अधिक कीमत नहीं ले सकेगा।

6. पूर्ण गतिशीलता यहाँ उत्पादन के सभी साधनों की पूर्ण गतिशीलता होती है अर्थात् वे मनपसंद धंधे में आ-जा सकते हैं। इसी प्रकार वस्तुओं को एक-स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है। जब अर्थव्यवस्था में साधनों और वस्तुओं की पूरी गतिशीलता होगी तो बाज़ार में वस्तु की एक ही कीमत होगी।

7. समान कीमत–पूर्ण प्रतियोगिता बाज़ार में वस्तु की कीमत समान होगी, क्योंकि कीमत उद्योग की समस्त माँग और पूर्ति द्वारा निर्धारित होती है जिसे प्रत्येक फर्म स्वीकार करती है।

8. माँग (AR) वक्र माँग वक्र पूर्ण लोचशील और X-अक्ष के समानांतर होता है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 2.
पूर्ण प्रतियोगिता में उद्योग कीमत निर्धारित करता (Price Maker) है और फर्म कीमत स्वीकार करती (Price Taker) है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पूर्ण प्रतियोगिता में उद्योग कीमत-निर्धारक व फर्म कीमत-स्वीकारक होती है-
1. उद्योग और फर्म में अंतर-मोटे रूप में किसी वस्तु विशेष के क्रेताओं और विक्रेताओं के समूह को उस वस्तु का उद्योग कहते हैं और उद्योग में व्यक्तिगत उत्पादन इकाई को फर्म कहते हैं। परंतु यहाँ उद्योग का अभिप्राय उन फर्मों के समूह से है जो एक प्रकार की वस्तुओं का उत्पादन करती हैं; जैसे जूतों के सभी उत्पादकों के समूह को जूता उद्योग (Shoe Industry) और कपड़ा बनाने वाली सभी मिलों के समूह को कपड़ा उद्योग कहेंगे।

2. कीमत निर्धारण में उद्योग व फर्म की भूमिका पूर्ण प्रतियोगिता में किसी वस्तु की कीमत का निर्धारण समस्त उद्योग की माँग व पूर्ति द्वारा होता है। यहाँ वस्तु की कीमत का निर्धारण किसी एक उत्पादक (या फम) द्वारा नहीं होता, बल्कि उस उद्योग की सामूहिक माँग व सामूहिक पूर्ति द्वारा होता है। उद्योग द्वारा निर्धारित कीमत प्रत्येक फर्म को स्वीकार करनी पड़ती है। फर्म को केवल इतनी छूट है कि इस दी हुई कीमत पर जितना चाहे बेच सकती है। इसीलिए पूर्ण प्रतियोगिता में उद्योग को कीमत-निर्धारक और फर्म को कीमत-स्वीकारक कहा जाता है।

3. कीमत का निर्धारण–पूर्ण प्रतिस्पर्धा में वस्तु की कीमत का निर्धारण उद्योग की कुल माँग व कुल पूर्ति के संतुलन पर होता है। इसे उद्योग की संतुलन कीमत भी कहते हैं। इसे अग्रांकित तालिका व रेखाचित्र द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 7
दी गई तालिका व रेखाचित्र से स्पष्ट है कि इस उद्योग में माँग व पूर्ति की शक्तियों द्वारा निर्धारित कीमत 6 रुपए प्रति इकाई होगी, क्योंकि इस कीमत पर माँग व पूर्ति दोनों बराबर हैं अर्थात् 60-60 इकाइयाँ हैं। उद्योग द्वारा निर्धारित इस कीमत को प्रत्येक फर्म स्वीकार करेगी। यदि कोई फर्म इस कीमत से अधिक लेने का प्रयत्न करेगी तो उसकी वस्तु कोई नहीं खरीदेगा। यदि वह कम लेगी तो हानि सहन करेगी। अतः कीमत 6 रुपए ही रहेगी चाहे कोई फर्म इस कीमत पर कम बेचे या अधिक बेचे, उद्योग में रहे या उद्योग छोड़कर चली जाए।

प्रश्न 3.
एक वस्तु की एक दी हुई कीमत पर ‘माँग आधिक्य’ है। क्या यह कीमत एक संतुलन कीमत है? यदि नहीं, तो संतुलन कीमत कैसे स्थापित होगी? (रेखाचित्र का प्रयोग कीजिए।)
उत्तर:
एक वस्तु की दी हुई कीमत पर माँग आधिक्य का अर्थ यह है कि वस्तु की माँग वस्तु की पूर्ति से अधिक है। ऐसी कीमत संतुलन कीमत नहीं हो सकती। संतुलन कीमत से अभिप्राय उस कीमत से है जिस पर वस्तु की माँग उसकी पूर्ति के बराबर होती है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 8
यदि एक वस्तु की दी हुई कीमत पर माँग आधिक्य है तो संतुलन कीमत पर निम्नलिखित विकल्पों द्वारा पहुँचा जा सकता है-
(i) माँग आधिक्य से संतुलन कीमत पर पहुँचने के लिए उत्पादकों को माँग आधिक्य को दूर करने के लिए उसी कीमत पर अधिक पूर्ति करने के लिए प्रोत्साहित करना पड़ेगा। इसे हम संलग्न रेखाचित्र (i) द्वारा दिखा सकते हैं।

संलग्न रेखाचित्र (i) में हम देखते हैं कि OP कीमत पर पूर्ति OQ है जबकि माँग OQ1 है जिसके फलस्वरूप AB (QQ1) माँग का आधिक्य है। इसे दूर करने के लिए पूर्ति वक्र को SS से S1S1 तक खिसकाना होगा अर्थात् पूर्ति में वृद्धि करनी होगी ताकि OP कीमत बन जाए। B बिंदु पर संतुलन कीमत OP तथा संतुलन मात्रा OQ1 होगी।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 9

(ii) माँग आधिक्य से संतुलन कीमत पर पहुँचने के लिए उपभोक्ताओं को माँग में कमी करने के लिए प्रोत्साहित करना पड़ेगा, जिससे माँग वक्र बाईं ओर खिसक आए। इसे हम संलग्न रेखाचित्र (ii) द्वारा दिखा सकते हैं।

संलग्न रेखाचित्र में हम देखते हैं कि OP कीमत पर पूर्ति OQ है जबकि माँग OQ1 है जिसके फलस्वरूप EE1 (QQ1) माँग का आधिक्य है। इसे दूर करने के लिए माँग वक्र को DD से D1D1 तक खिसकाना होगा अर्थात् माँग में कमी करनी होगी ताकि OP कीमत पर ही संतुलन कीमत बन जाए। E बिंदु पर संतुलन कीमत OP तथा संतुलन मात्रा OQ होगी।

प्रश्न 4.
एक वस्तु की माँग में वृद्धि के उसकी संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा पर पड़ने वाले प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एक वस्तु की संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा का निर्धारण उस वस्तु की माँग और पूर्ति द्वारा होता है। जहाँ ये दोनों शक्तियाँ एक-दूसरे के बराबर होती हैं, वहाँ संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा निर्धारित होती है। माँग में वृद्धि से माँग वक्र दाईं ओर खिसक जाती है जिसके फलस्वरूप संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा में वृद्धि होती है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 10
संलग्न रेखाचित्र में हम देखते हैं कि प्रारंभिक माँग वक्र DD है जो पूर्ति वक्र SS को E बिंदु पर काटता है। यहाँ संतुलन कीमत OP और मात्रा OQ है। जब माँग वक्र DD से बढ़कर D1D1 हो जाती है तो संतुलन बिंदु E1 हो जाता है और संतुलन कीमत OP से बढ़कर OP1 तथा मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो जाती है।

प्रश्न 5.
एक वस्तु की पूर्ति में वृद्धि के उसकी संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा पर पड़ने वाले प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एक वस्तु की संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा का निर्धारण उस वस्तु की माँग और पूर्ति द्वारा होता है। जहाँ ये दोनों शक्तियाँ एक-दूसरे के बराबर होती हैं, वहाँ संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा निर्धारित होती है। पूर्ति में वृद्धि से पूर्ति वक्र दाईं ओर खिसक जाता है जिसके फलस्वरूप संतुलन कीमत गिर जाती है और संतुलन मात्रा में वृद्धि होती है। इसे हम संलग्न रेखाचित्र द्वारा दिखा सकते हैं।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 11

संलग्न रेखाचित्र में हम देखते हैं कि प्रारंभिक पूर्ति SS है जो माँग वक्र DD को E बिंद पर काटता है। यहाँ संतलन कीमत OP और संतुलन मात्रा OQ है। जब पूर्ति वक्र SS से बढ़कर S1S1 हो जाता है तो संतुलन बिंदु E1 हो जाता है और संतुलन कीमत OP से घटकर OP1 तथा संतुलन मात्रा OQ से बढ़कर OQ1 हो जाती है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 6.
एक वस्तु की बाज़ार माँग और बाज़ार पूर्ति दोनों में एक साथ वृद्धि से उसकी कीमत पर क्या प्रभाव पड़ सकते हैं? समझाइए।
उत्तर:
माँग और पूर्ति में एक साथ वृद्धि का प्रभाव हम जानते हैं कि माँग और पूर्ति में वृद्धि होने के कारण वस्तु की संतुलित मात्रा में अवश्य वृद्धि होती है। परंतु कीमत में कोई परिवर्तन होगा या नहीं, इस बात पर निर्भर करता है कि माँग व पूर्ति में बराबर की वृद्धि होती है या पूर्ति की तुलना में माँग में अधिक वृद्धि होती है या पूर्ति की तुलना में माँग में कम वृद्धि होती है। अतः पूर्ति में एक साथ परिवर्तन से संतुलन कीमत पर प्रभाव के संबंध में तीन स्थितियाँ हो सकती हैं। इन्हें निम्नांकित रेखाचित्र द्वारा दर्शाया जा सकता है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 12
रेखाचित्र (i) में माँग में होने वाली वृद्धि पूर्ति की वृद्धि के बराबर है ऐसी स्थिति में संतुलन कीमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता यह OP1 रहती है। केवल संतुलन मात्रा OQ1 से बढ़कर OQ2 हो जाती है। अतः जब माँग और पूर्ति में समान वृद्धि होती है तो संतलन कीमत में कोई परिवर्तन नहीं होता। परंत संतलन मात्रा में परिवर्तन होता है अर्थात यह बढ़ जाती है।

रेखाचित्र (ii) में माँग में होने वाली वृद्धि पूर्ति में वृद्धि की तुलना में अधिक है। ऐसी स्थिति में नई संतुलन कीमत OP2 पहली संतुलन कीमत OP1 से अधिक होती है। संतुलन मात्रा भी OQ1 से बढ़कर OQ2 हो जाती है। अतः जब माँग, पूर्ति की तुलना में अधिक बढ़ती है तो संतुलन कीमत तथा मात्रा में वृद्धि होती है।

रेखाचित्र (iii) में पूर्ति में होने वाली वृद्धि माँग में होने वाली वृद्धि की तुलना में अधिक है। ऐसी स्थिति में नई संतुलन कीमत OP2 पहली संतुलन कीमत OP1 की तुलना में कम होगी और संतुलन मात्रा OQ1 से बढ़कर OQ2 होगी। अतः जब पूर्ति में वृद्धि माँग की तुलना में अधिक होती है तो संतुलन कीमत कम हो जाती है तथा संतुलन मात्रा बढ़ जाती है।

प्रश्न 7.
जब किसी वस्तु की पूर्ति (1) पूर्णतया लोचदार व (ii) पूर्णतया बेलोचदार हो तो उसकी माँग में वृद्धि और कमी से उसकी कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है? (रेखाचित्र बनाइए)
उत्तर:
(i) जब पूर्ति पूर्णतया लोचदार हो-यदि वस्तु की पूर्ति पूर्णतया लोचदार हो, तो माँग में होने वाली वृद्धि या कमी का संतुलन कीमत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, केवल वस्तु की मात्रा पर ही प्रभाव पड़ता है। इसे संलग्न रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 13
रेखाचित्र में DD माँग वक्र और SS पूर्णतया लोचदार पूर्ति वक्र हैं। दोनों एक-दूसरे को E बिंदु पर काटते हैं। OP संतुलन कीमत तथा OQ संतुलन मात्रा है। यदि माँग में वृद्धि होने पर माँग वक्र ऊपर खिसककर D1D1 हो जाता है तो नया संतुलन बिंदु E1 होगा। संतुलन कीमत तो OP ही रहती है, परंतु संतुलन मात्रा बढ़कर OQ1 हो जाती है। इसके विपरीत माँग में कमी होने पर माँग वक्र नीचे की ओर D2D2 हो जाता है तो नया संतुलन बिंदु E2 होगा। संतुलन कीमत OP ही रहती है, परंतु संतुलन मात्रा कम होकर OQ2 हो जाती है।

(ii) जब पूर्ति पूर्णतया बेलोचदार हो-वस्तु की पूर्ति पूर्णतया बेलोचदार होने पर कीमत और माँग का प्रत्यक्ष संबंध हो जाता है अर्थात् माँग में वृद्धि से कीमत बढ़ जाती है और माँग में कमी से कीमत कम हो जाती है। जैसाकि संलग्न रेखाचित्र से स्पष्ट है।
HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन 14

रेखाचित्र में SS पूर्णतया बेलोचदार पूर्ति वक्र है जिसका अभिप्राय है कि मूल्य में परिवर्तन होने पर पूर्ति की मात्रा में परिवर्तन नहीं होता। आरंभ में DD माँग वक्र E पर काटता है। OP संतुलन कीमत और OQ संतुलन मात्रा है। यदि माँग बढ़कर D1D1 हो जाती है तो पूर्ति की मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता। कीमत बढ़कर OP1 और इसी प्रकार माँग के कम होने पर कीमत कम होकर OP2 हो जाती है।

प्रश्न 8.
पूर्ति की स्थिति परिवर्तन (Supply Shift) के कारण समझाइए और संतुलन कीमत व विनिमय मात्रा पर उनके प्रभाव बताइए।
उत्तर:
पूर्ति में स्थिति-परिवर्तन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं, जिनके संतुलन कीमत और विनिमय मात्रा का प्रभाव नीचे स्पष्ट किया गया है
1. साधन आदानों की कीमतों में परिवर्तन-साधन आदानों की कीमतों (लगान, मज़दूरी, ब्याज आदि) में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ जाती है और उत्पादन में कमी आती है जिससे पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसक जाता है।

प्रभाव-वस्तु की कीमत बढ़ जाती है और विनिमय मात्रा गिर जाती है। इसके विपरीत साधन आदान की कीमत गिरने से पूर्ति वक्र दाहिनी ओर खिसक जाता है और प्रभाव के रूप में वस्तु की कीमत गिर जाती है तथा विनिमय मात्रा बढ़ जाती है।

2. तकनीकी प्रगति-चूँकि यह उत्पादन लागत घटाती है इसलिए तकनीकी प्रगति, पूर्ति वक्र को दाहिनी ओर खिसका देती है।

प्रभाव-वस्तु की कीमत गिर जाती है और विनिमय मात्रा बढ़ जाती है। किंतु उत्पादन की घटिया एवं पुरानी तकनीकों को अपनाने से पूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

3. उत्पादन में संबंधित वस्तु की कीमत में वृद्धि उत्पादन में प्रतिस्थापक वस्तु की कीमत में वृद्धि से वस्तु विशेष का पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसक जाता है (क्योंकि उत्पादक अब प्रतिस्थापक वस्तु का उत्पादन करना लाभदायक समझता है।)

प्रभाव-दी. की कीमत बढ़ जाएगी और विनिमय मात्रा कम हो जाएगी। परिणाम तब विपरीत होता है जब प्रतिस्थापक वस्तु की कीमत गिर जाती है तो दी हुई वस्तु का पूर्ति वक्र दाहिनी ओर खिसक जाता है, दी हुई वस्तु की कीमत गिर जाती है और विनिमय मात्रा बढ़ जाती है।

4. उत्पादन शुल्क में परिवर्तन वस्तु के उत्पादन पर, उत्पादन शुल्क में वृद्धि होने पर वस्तु का पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसक जाता है।

प्रभाव-वस्तु की कीमत बढ़ जाती है और विनिमय मात्रा गिर जाती है। इसके विपरीत उत्पादन शुल्क की दर कम होने पर वस्तु का पूर्ति वक्र दाहिनी ओर खिसक जाता है और प्रभाव के रूप में वस्तु की कीमत गिर जाती है तथ विनिमय मात्रा बढ़ जाती है।

5. बाज़ार में फर्मों की संख्या फर्मों की संख्या बढ़ने पर पूर्ति वक्र दाहिनी ओर खिसक जाता है।

प्रभाव-वस्तु की कीमत (प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण) कम हो जाएगी तथा विनिमय मात्रा बढ़ जाएगी। प्रभाव इसके विपरीत होते हैं जब बाज़ार में फर्मों की संख्या कम हो जाती है।

6. अन्य कारक हैं मौसम की दशा में परिवर्तन (जैसे बाढ़, सूखा आदि), उत्पादकों के लक्ष्यों में परिवर्तन, भविष्य में कीमतों में परिवर्तन की आशा तथा सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता आदि।

संख्यात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
X-वस्तु के बाज़ार में 20,000 समरूप क्रेता है। प्रत्येक का माँग फलन Qx = 12 – 2 Px है। दूसरी ओर वस्तु के 2,000 समरूप विक्रेता हैं, प्रत्येक का आपूर्ति फलन Q1 = 20 Px दिया हुआ है। संतुलन कीमत और संतुलन मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
माँग फलन = 20,000 (12 – 2Px)
आपूर्ति फलन = 2,000 (20 Px)
जैसाकि हमें विदित है कि संतुलन की स्थिति में मांगी गई मात्रा (Qx) आपूर्ति की मात्रा (Sx) के बराबर होती है। अतः संतुलन स्तर पर
20,000 (12 – 2Px) = 2,000 (20 Px)
2,40,000 – 40,000 Px = 40,000 Px
2,40,000 = 80,000 Px
Px = 3
अर्थात् संतुलन कीमत 3 रु० प्रति इकाई है।
संतुलन मात्रा का परिकलन
20,000 (12 – 2Px)
20,000 (12 – 2 x 3)
20,000 x 6 = 1,20,000 इकाइयाँ (माँगी गई मात्रा)
अथवा
2,000 (20Px)
2,000 (20 x 3) =1,20,000 इकाइयाँ (आपूर्ति की मात्रा)। स्पष्ट है 3 रु० प्रति इकाई की कीमत पर माँगी गई मात्रा और आपूर्ति की मात्रा समान है।

HBSE 12th Class Economics Important Questions Chapter 5 बाज़ार संतुलन

प्रश्न 2.
यदि qd = 10 – p और qs = p तो एक वस्तु विशेष के माँग और पूर्ति कक्रों के लिये संतुलन कीमत और मात्रा की गणना कीजिए। यह भी बताइये कि यदि उस वस्तु की बाज़ार कीमत 7 रु० या 3 रु० प्रति इकाई हो तो उसकी माँग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
हल:
(i) संतुलित कीमत = qd = qs
10 – p = p
∴ – p – p = – 10
– 2p = – 10
∴ p = \(\frac { 10 }{ 2 }\) = 5
वस्तु विशेष की संतुलित कीमत = 5 रु० प्रति इकाई
∴ संतुलित मात्रा = qd = 10 – 5
qd = 5 (माँग पक्ष)
∴ संतुलित मात्रा = 5 इकाई

(ii) बाज़ार कीमत 7 रु० होने पर यह संतुलित कीमत से 2 रु० अधिक हो जाएगी अतः वस्तु विशेष की माँग कम होने से अतिरिक्त पूर्ति का समायोजन करना होगा।

(iii) बाज़ार कीमत 3 रु० होने पर यह संतुलित कीमत से 2 रु० कम है अतः वस्तु विशेष की माँग बढ़नी आवश्यक होगी।

प्रश्न 3.
एक वस्तु विशेष की माँग और पूर्ति के समीकरण क्रमशः Qd = 8000 – 3000 p तथा Qs = – 6000 + 4000p दिए गए हों, तो संतुलन कीमत और मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
संतुलित कीमत : Qd = Qs
∴ 8000 – 3000 p = – 6000 + 4000p
⇒ – 3000p – 4000p = – 6000 – 8000
⇒ – 7000 p = – 14000
∴ p = \(\frac { 14000 }{ 2 }\)= 2 रुपए
संतुलित मात्रा = p का मान समीकरण (i) में रखने पर
= 8000 – 3000 x 2 = – 6000 + 4000 x 2
= 8000 – 6000
= – 6000 + 8000
= 2000
= 2000
संतुलित मात्रा = 2000 उत्तर

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