Author name: Prasanna

HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

Haryana State Board HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समानता के कोई तीन लक्षण लिखें।
उत्तर:

  • विशेष सुविधाओं का अभाव।
  • इसमें सभी को विकास के समुचित या पर्याप्त अवसर दिए जाते हैं।
  • प्रत्येक व्यक्ति की मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है।

प्रश्न 2.
नागरिक असमानता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
नागरिक असमानता को कानूनी असमानता भी कहा जाता है। इसमें नागरिकों को अधिकार समान रूप से प्राप्त नहीं होते। इसमें सभी लोगों को जीवन, स्वतंत्रता, परिवार और धर्म आदि से संबंधित अधिकार असुरक्षित होते हैं। अधिकार प्रदान करते समय नागरिकों में रंग, जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है।

प्रश्न 3.
सामाजिक असमानता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
सामाजिक असमानता का अर्थ है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को समान नहीं समझा जाता। समाज में रंग, जाति, धर्म, भाषा, वर्ण आदि के आधार पर भेदभाव किया जाता है।

प्रश्न 4.
राजनीतिक असमानता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
राजनीतिक असमानता का अर्थ है कि नागरिकों को राजनीतिक अधिकार प्रदान करते समय विभिन्न आधारों पर भेदभाव किया जाना अर्थात वोट का अधिकार, चुने जाने का अधिकार, सरकारी पद प्राप्त करने का अधिकार ये सभी नागरिकों को भेदभाव के आधार पर प्राप्त कराए जाते हैं।

प्रश्न 5.
आर्थिक असमानता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
आर्थिक असमानता में साधनों के वितरण की असमान स्थिति होती है। समाज में आर्थिक आधार पर भेदभाव किया जाता है। आर्थिक असमानता में प्रत्येक व्यक्ति को जीवन-यापन के समान व उचित अवसर प्राप्त नहीं होते। आर्थिक असमानता की स्थिति देश के लिए स्वास्थ्यवर्धक नहीं होती। यह समाज को दो वर्गों में विभाजित कर देती है।

HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 6.
समानता के महत्त्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक युग में समानता का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्त्व है। स्वतंत्रता की प्राप्ति की तरह मनुष्य में समानता की प्राप्ति की इच्छा सदा रही है। बिना समानता के व्यक्ति को स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हो सकती। समानता लोकतंत्र की आधारशिला है। समानता के बिना सामाजिक न्याय की स्थापना नहीं हो सकती। समानता का महत्त्व इस बात में निहित है कि किसी मनुष्य के साथ जाति, धर्म, रंग, लिंग, धन आदि के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 7.
किन्हीं दो विचारधाराओं के नाम लिखिए जो स्वतंत्रता तथा समानता को परस्पर विरोधी मानती हैं।
उत्तर:
स्वतंत्रता तथा समानता को परस्पर विरोधी मानने वाली दो विचारधाराएँ निम्नलिखित हैं

  • व्यक्तिवादी विचारधारा तथा
  • अराजकतावादी विचारधारा।

प्रश्न 8.
सभी व्यक्ति समान पैदा होते हैं। इस कथन को स्पष्ट करें।
उत्तर:
कुछ विद्वानों का मत है कि प्रकृति ने सभी व्यक्तियों को समान पैदा किया है और इसीलिए समाज की सुविधाएँ सभी को समान रूप से मिलनी चाहिएँ। प्राकृतिक रूप से सभी व्यक्ति समान हैं और सभी के साथ एक-सा व्यवहार होना चाहिए।

प्रश्न 9.
‘अवसर की समानता’ से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘अवसर की समानता’ समानता के सभी रूपों से जुड़ी हुई है। सामाजिक समानता में सभी को उन्नति व प्रगति के समान अवसर प्राप्त होने चाहिएँ। इसी तरह आर्थिक समानता में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आजीविका कमाने व अपनी आधारभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए समान अवसर प्राप्त होने चाहिएँ।।

प्रश्न 10.
‘कानून के समक्ष समानता’ के सिद्धांत की व्याख्या करें। अथवा ‘कानून के समक्ष समानता’ का क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर:
कानून के समक्ष समानता का अर्थ है कि सब पर एक से कानून लागू हों और कानून की दृष्टि में सब समान हों, कोई छोटा-बड़ा न हो, जाति, वंश, रंग व लिंग आदि के आधार पर कानून भेदभाव न करता हो अर्थात बड़े-से-बड़ा अधिकारी व छोटे-से-छोटे कर्मचारी कानून के सामने समान है। देश में सभी के लिए एक-सा कानून लागू होता है।

प्रश्न 11.
समानता की कोई दो परिभाषाएँ लिखें।
उत्तर:

  • स्टीफेंसन के अनुसार, “समानता से अभिप्राय मानव विकास के नियमित आवश्यक उपकरणों का समान विभाजन है।”
  • लास्की के अनुसार, “समानता का अर्थ प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शक्तियों के यथासंभव प्रयोग के समान अवसर प्रदान करने के प्रयास करना है।”

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समानता से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
साधारण शब्दों में समानता का यह अर्थ लिया जाता है कि सभी व्यक्ति समान हैं, सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और सभी को समान वेतन मिलना चाहिए, परंतु समानता का यह अर्थ ठीक नहीं है कि किसी को विशेषाधिकार नहीं मिलने चाहिएँ और सभी को उन्नति के समान अवसर मिलने चाहिएँ। समाज के अंदर सभी व्यक्तियों को उन्नति के लिए समान अधिकार प्राप्त होने चाहिएँ। समानता के मुख्य प्रकार हैं-

  • प्राकृतिक समानता,
  • नागरिक समानता,
  • राजनीतिक समानता,
  • सामाजिक समानता,
  • आर्थिक समानता।

प्रश्न 2.
समानता की कोई पाँच विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
समानता की पाँच विशेषताएँ निम्नलिखित हैं
1. मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति सभी नागरिकों की मूल आवश्यकताएँ पूरी होनी चाहिएँ।।

2. विशेष अधिकारों का अभाव-प्रत्येक व्यक्ति को आजीविका के साधन उपलब्ध होने चाहिएँ और प्रत्येक व्यक्ति को अपने काम के लिए उचित मज़दूरी मिलनी चाहिए। किसी व्यक्ति का शोषण नहीं होना चाहिए।

3. आर्थिक न्याय आर्थिक न्याय का यह भी अर्थ है कि विशेष परिस्थितियों में राजकीय सहायता प्राप्त करने का अधिकार हो। बुढ़ापे, बेरोज़गारी तथा असमर्थता में राज्य सामाजिक एवं आर्थिक संरक्षण प्रदान करे।

4. प्राकृतिक असमानताओं की समाप्ति-स्त्रियों और पुरुषों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए।

5. उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण-संपत्ति और उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण के संबंध में विद्वानों में मतभेद पाया जाता है।

HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 3.
समानता के पाँच रूपों का वर्णन करें।
उत्तर:
समानता के पाँच रूप निम्नलिखित हैं
1. प्राकृतिक समानता इसका अर्थ है कि प्रकृति ने सभी व्यक्तियों को समान बनाया है, इसलिए सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।
2. नागरिक समानता या कानूनी समानता इसका अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को समान अधिकार प्राप्त हों और सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हों।
3. सामाजिक समानता-इसका अर्थ है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान समझा जाना चाहिए।
4. राजनीतिक समानता इसका अर्थ है कि नागरिकों को राजनीतिक अधिकार समान रूप से मिलने चाहिएँ।
5. आर्थिक समानता आर्थिक समानता का अर्थ है कि समाज में सभी व्यक्तियों को आर्थिक विकास के समान अवसर प्राप्त हों तथा अमीर और गरीब का अंतर नहीं होना चाहिए।

प्रश्न 4.
‘नागरिक समानता, स्वतंत्रता की एक आवश्यक दशा के रूप में’, पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
नागरिक समानता का अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को समान अधिकार प्राप्त हों अर्थात कानून के सामने सभी व्यक्ति समान हों। धर्म, जाति, रंग, लिंग आदि के आधार पर नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार प्राप्त होने चाहिएँ। नागरिक समानता स्वतंत्रता की एक आवश्यक शर्त है। बिना नागरिक समानता के नागरिक स्वतंत्रता का आनंद नहीं उठा सकते, इसलिए सभी लोकतंत्रीय राज्यों में कानून के समक्ष सभी नागरिकों को समान समझा जाता है और सभी को कानून का समान संरक्षण प्राप्त होता है।

प्रश्न 5.
‘स्वतंत्रता व समानता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, पूरक हैं।’ व्याख्या करें। अथवा क्या स्वतंत्रता और समानता परस्पर विरोधी हैं? अथवा स्वतंत्रता और समानता में क्या संबंध है?
उत्तर:
स्वतंत्रता तथा समानता में गहरा संबंध है। अधिकांश आधुनिक विचारकों के अनुसार स्वतंत्रता तथा समानता परस्पर विरोधी न होकर एक-दूसरे के सहयोगी हैं। समानता के अभाव में स्वतंत्रता व्यर्थ है। आर०एच० टोनी ने ठीक ही कहा है, “समानता स्वतंत्रता की विरोधी न होकर इसके लिए आवश्यक है।” आधुनिक लोकतंत्रात्मक राज्य मनुष्य की स्वतंत्रता के लिए आर्थिक तथा सामाजिक समानता स्थापित करने का प्रयास करते हैं।

आर्थिक समानता के अभाव में राजनीतिक स्वतंत्रता निरर्थक है। जिस देश में नागरिकों को आर्थिक समानता प्राप्त नहीं होती, वहाँ नागरिक अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता का प्रयोग नहीं कर पाते। भारत में राजनीतिक स्वतंत्रता तो है, परंतु आर्थिक समानता नहीं है। गरीब, बेकार एवं अनपढ़ व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का कोई महत्त्व नहीं है। एक गरीब व्यक्ति अपना वोट बेच सकता है और चुनाव लड़ने की तो वह सोच भी नहीं सकता। अतः स्वतंत्रता के लिए समानता का होना अनिवार्य है।

प्रश्न 6.
समानता के महत्त्व पर संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
समानता का मनुष्य के जीवन में विशेष महत्त्व है। स्वतंत्रता की प्राप्ति की तरह मनुष्य में समानता की प्राप्ति की इच्छा सदा रही है। स्वतंत्रता के लिए समानता का होना आवश्यक है। समानता तथा स्वतंत्रता प्रजातंत्र के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं। समानता का महत्त्व इस तथ्य में निहित है कि नागरिकों के बीच जाति, धर्म, भाषा, वंश, रंग, लिंग आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

सामाजिक न्याय और सामाजिक स्वतंत्रता के लिए समानता का होना आवश्यक है। वास्तव में समानता न्याय की पोषक है। कानून की दृष्टि में सभी को समान समझा जाता है। भारत के संविधान में मौलिक अधिकारों के अनुच्छेद में समानता का अधिकार लिखा गया है।

प्रश्न 7.
“आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता व्यर्थ है।” व्याख्या करें।
उत्तर:
राजनीति शास्त्र में आर्थिक समानता और राजनीतिक स्वतंत्रता बहुत महत्त्वपूर्ण अवधारणाएं हैं। राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ है कि लोगों को विभिन्न राजनीतिक अधिकार प्रदान करना। राजनीतिक अधिकारों में चुनाव का अधिकार व वोट का अधिकार हैं। राजनीतिक स्वतंत्रताएं प्रजातंत्र का आधार हैं, लेकिन केवल राजनीतिक स्वतंत्रताओं से ही प्रजातंत्र के लक्ष्यों को पूरी तरह से प्राप्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह साधारणतया देखा गया है कि धनाढ्य व्यक्तियों का ही राजनीति पर अधिकार होता वे ही चुनाव लड़ते हैं।

वे ही पैसे के ज़ोर पर वोटों को खरीदते हैं। गरीब व्यक्ति चुनाव लड़ने की बात तो सोच ही नहीं सकता। उसे दो वक्त की रोटी की चिंता सताए रहती है। चुनाव लड़ने के लिए धन चाहिए, जिसकी वह व्यवस्था नही कर सकता। अतः समाज में आर्थिक विषमता को दूर किया जाना चाहिए। जहां आर्थिक विषमता होगी, वहाँ राजनीतिक स्वतंत्रता सुरक्षित नहीं रह सकती।

इस संबंध में प्रो० लास्की ने ठीक ही कहा है, “राजनीतिक समानता तब तक कदापि वास्तविक नहीं हो सकती, जब तक उसके साथ आर्थिक समानता न हो।” अंत में कहा जा सकता है कि आर्थिक समानता के अभाव में राजनीतिक स्वतंत्रता केवल मात्र ढोंग, दिखावा और मिथ्या है।

प्रश्न 8.
आर्थिक असमानता का अर्थ एवं कारण बताएं।
उत्तर:
आर्थिक असमानता का अर्थ है-आर्थिक क्षेत्र में असमानता। यह अमीर तथा गरीब के बीच का अंतर होता है। आर्थिक असमानता में लोकतंत्र कमज़ोर पड़ता है क्योंकि गरीब व्यक्तियों को चुनाव में खड़े होने तथा अपने प्रतिनिधि चुनकर भेजने का अवसर नहीं मिलता। सरकार पर अमीरों का अधिकार रहता है और वे अपने वर्ग के हितों को सुरक्षित रखने के लिए कार्य करते हैं। निर्धन व्यक्ति तो कई बार अपना मत बेचने पर भी मज़बूर हो जाते हैं। प्रेस पर भी धनी वर्ग का ही नियंत्रण रहता है। आर्थिक असमानता के कारण भारतीय समाज निम्नलिखित आधारों पर आर्थिक असमानता का शिकार है

(1) समाज में दो वर्ग हैं-अमीर और गरीब। अमीर वर्ग संख्या में बहुत कम है, लेकिन समाज की अधिकतर संपत्ति पर उसका कब्जा है। गरीब वर्ग समाज का बहुत बड़ा भाग है जिसके पास संपत्ति नहीं है। इस कारण अमीर वर्ग गरीबों का शोषण करने में सफल हो रहा है।

(2) आर्थिक विकास का लाभ समाज के गरीब वर्ग को नहीं पहुंचा है, जिसके कारण गरीब और अधिक गरीब हो गया है तथा अमीर और अधिक अमीर हुआ है।

(3) अनियंत्रित महंगाई के कारण मध्यम वर्ग भी बदल चुका है। वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण साधारण जनता बहुत कठिनाई का सामना कर रही है।

(4) ग्रामीण लोगों का एक बड़ा भाग आज भी ऋण के बोझ के नीचे दबा हुआ है और बंधुआ मज दूरों जैसा जीवन व्यतीत करता है। भूमिहीन श्रमिकों को आज भी जीवन की न्यूनतम आवश्यकताएं भी उपलब्ध नहीं होती।

(5) अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जन-जातियों को दी गई सुविधाओं का लाभ केवल कुछ परिवारों तक ही सीमित रहा है। इन जातियों के लिए आरक्षित किए गए बहुत से पद अब भी खाली पड़े हैं।

प्रश्न 9.
राजनीतिक समानता तथा आर्थिक समानता में संबंधों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानता तथा आर्थिक समानता में घनिष्ठ संबंध है। वास्तव में राजनीतिक समानता की स्थापना करने के लिए आर्थिक समानता की स्थापना करना बहुत आवश्यक है। उदारवादी राजनीतिक समानता को महत्त्व देते हैं, जबकि मार्क्सवादी आर्थिक समानता पर अधिक बल देते हैं। परंतु वास्तव में यह दोनों एक-दूसरे के विरोधी न होकर एक-दूसरे के पूरक हैं।

राजनीतिक समानता की स्थापना के लिए यह आवश्यक है कि समाज में आर्थिक विषमताएं कम से कम हों और सभी की मौलिक आर्थिक आवश्यकताएं पूरी हों। एक भूखे तथा गरीब व्यक्ति के लिए आर्थिक समानता व्यर्थ है क्योंकि वह न तो चुनाव लड़ सकता है और न ही स्वतंत्रतापूर्वक अपने मत का प्रयोग कर सकता है।

सरकारी पद (नौकरी) प्राप्त करने के लिए उच्च शिक्षा की आवश्यकता होती है, परंतु एक निर्धन व्यक्ति के पास इसके लिए धन नहीं होता और उसके बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं। अतः राजनीतिक समानता की वास्तविक स्थापना के लिए आर्थिक समानता का होना आवश्यक होता है। अतः दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों में घनिष्ठ संबंध हैं।

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
समानता से आपका क्या अभिप्राय है? समानता की प्रमुख विशेषताओं/लक्षणों का वर्णन कीजिए। अथवा समानता की परिभाषा करके इसके अर्थ का विस्तृत विवेचन कीजिए।
उत्तर:
समानता का अर्थ स्वतंत्रता की तरह समानता की अवधारणा का अपना महत्त्व है। समानता को भी लोकतंत्र का आधार माना गया है। समानता के बिना लोकतंत्र को सफल नहीं बनाया जा सकता और न ही व्यक्ति के विकास को संभव बनाया जा सकता है। समानता के महत्त्व को प्राचीन काल से ही विचारकों ने स्वीकार किया है, किंतु यह एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण अवधारणा के रूप में 18वीं शताब्दी में ही सामने आई। सामाजिक व आर्थिक विषमताओं के कारण पैदा हुई यह धारणा आज राजनीति विज्ञान के अध्ययन-क्षेत्र में एक प्रमुख स्थान रखती है। समानता की अवधारणा को विश्वव्यापी और प्रभावशाली बनाने का श्रेय समाजवादियों को ही जाता है।

समानता का गलत अर्थ:
साधारण रूप से समानता का यह अर्थ लिया जाता है कि सब मनुष्य समान हैं, सभी के साथ एक-सा व्यवहार हो और सभी की आमदनी भी एक-सी होनी चाहिए। इस अर्थ के समर्थक मनुष्य की प्राकृतिक समानता पर बल देते हैं कि मनुष्य समान ही पैदा होते हैं और प्रकृति ने उन्हें समान रहने के लिए पैदा किया है, परंतु यह कहना ठीक नहीं है। प्रकृति ने सभी मनुष्यों को समान नहीं बनाया है। एक व्यक्ति दूसरे से शक्ल-सूरत तथा शरीर के विस्तार में समान नहीं है। मनुष्य किसी फैक्ट्री में बना एक उच्चकोटि का माल नहीं है। साथ ही उसकी प्राकृतिक शक्तियों में भी अंतर है। इसलिए यह धारणा गलत है।

समानता का सही अर्थ:
समानता का अर्थ हम प्राकृतिक समानता से नहीं रखते। प्रकृति ने तो हमें असमान ही बनाया है। समानता का अर्थ हम सामाजिक और सांसारिक भावना के रूप में करते हैं। मनुष्य मात्र में कुछ मौलिक समानताएं पाई जाती हैं, परंतु सामाजिक व्यवस्था ने उन समानताओं को स्थान नहीं दिया। प्राचीन काल से ही समाज में इतनी विषमता चली आ रही है कि मनुष्य, मनुष्य के अत्याचारों तथा शोषण से कराह उठा है। राजनीतिक जागृति के साथ-साथ इस असमानता के विरुद्ध भी मानव ने विद्रोह किया है।

शारीरिक समानता और असमानता तो प्राकृतिक है, किंतु समाज में फैली असमानता प्राकृतिक नहीं है। वह मनुष्य द्वारा ही स्थापित की गई है। इस सामाजिक असमानता को दूर कर समानता स्थापित करने की बात पर विचार तथा व्यवहार किया जाने लगा है। समानता की महत्ता को ध्यान में रखते हुए डॉ० आशीर्वादम ने कहा है, “फ्रांस के क्रांतिकारी न तो पागल थे और न मूर्ख, जब उन्होंने स्वतंत्रता और भ्रातृत्व का नारा लगाया था, अर्थात स्वतंत्रता और समानता साथ-साथ चलती है।”

समानता का वास्तविक अर्थ सामाजिक और आर्थिक समानता से है। परंतु इसका यह तात्पर्य नहीं कि सभी मनुष्यों की समान आय हो तथा उनमें छोटे-बड़े, शिक्षित-अशिक्षित, बुद्धिमान-मूर्ख, योग्य-अयोग्य का भेदभाव न किया जाए। प्रकृति ने भी सभी मनुष्यों को शारीरिक बनावट, बुद्धि, रुचि और योग्यता में एक जैसा नहीं बनाया। जब तक यह अंतर रहेगा, तब तक यह बिल्कुल असंभव है कि सभी लोगों को बराबर बनाया जा सके। समानता की परिभाषाएँ समानता के सही अर्थ को समझने के लिए उसकी विभिन्न परिभाषाओं का अध्ययन आवश्यक है, जो निम्नलिखित हैं

1. प्रो० लास्की:
के शब्दों में, “समानता का यह अर्थ है कि प्रत्येक के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाए अथवा प्रत्येक व्यक्ति को समान वेतन दिया जाए। यदि ईंट ढोने वाले का वेतन एक प्रसिद्ध गणितज्ञ या वैज्ञानिक के बराबर कर दिया गया तो इससे समाज का उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा। इसलिए समानता का यह अर्थ है कि कोई विशेष अधिकार वाला वर्ग न रहे और सबको उन्नति के समान अवसर प्राप्त हों।”

2. जे०ए० कोरी:
के अनुसार, “समानता का विचार इस बात पर बल देता हैं कि सभी मनुष्य राजनीतिक रूप में समान होते हैं, राजनीतिक जीवन में समान रूप से भाग लेने, अपने मताधिकार का प्रयोग करने, निर्वाचित होने एवं कोई भी पद ग्रहण करने के लिए सभी नागरिक समान रूप से अधिकारी होते हैं।”

3. बार्कर:
के अनुसार, “समानता का यह अर्थ है कि अधिकारों के रूप में जो सुविधाएँ मुझे उपलब्ध हैं वैसे ही और उतनी ही सुविधाएं दूसरों को भी उपलब्ध हों तथा दूसरों को जो अधिकार प्रदान किए गए हैं, वे मुझे अवश्य दिए जाएं।”

4. अप्पादोराय:
का कथन है, “यह कहना कि सब मनुष्य समान हैं, ऐसे ही गलत है जैसे कि यह कहना कि पृथ्वी समतल है।”

5. टॉनी:
के मतानुसार, “सबके लिए व्यवस्था की समानता विभिन्न आवश्यकताओं को एक ही प्रकार से संसाधित कर (या समझकर) प्राप्त नहीं की जा सकती है, बल्कि आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न प्रकारों से उन्हें पूरा करने के लिए एक समान ध्यान देकर प्राप्त की जा सकती है।” समानता की विशेषताएँ/लक्षण-समानता की निम्नलिखित विशेषताएँ लक्षण स्पष्ट होते हैं।

1. विशेष सुविधाओं का अभाव:
लास्की के अनुसार समानता का पहला अर्थ होता है-विशेष सुविधाओं का अभाव, अर्थात उनके कहने का तात्पर्य यह है कि जाति, वंश, रंग, भाषा, धर्म, संपत्ति आदि के आधार पर राज्य में किसी भी व्यक्ति को विशेष सुविधाएँ नहीं मिलनी चाहिएँ। सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। जहां तक प्रजातंत्र राज्य का प्रश्न है, इसमें सभी को समान मताधिकार मिलने चाहिएँ। सभी व्यक्ति प्रशासन के कार्य में भाग ले सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को विशेष सुविधा प्राप्त नहीं होनी चाहिए।

2. सभी को पर्याप्त अवसर:
लास्की के अनुसार समानता का दूसरा अर्थ यह होता है कि सभी व्यक्तियों को विकास के लिए समुचित या पर्याप्त अवसर दिया जाए अर्थात् प्रत्येक व्यक्ति को यह सुविधा मिलनी चाहिए कि वह अपने गुणों का विकास समुचित रूप से कर सके। उसके आंतरिक गुणों के विकास में किसी प्रकार का रोड़ा न अटकाया जाए। उसे उसके व्यक्तित्व के विकास के लिए समुचित अवसर मिलना चाहिए। महान दार्शनिक एवं विद्वान व्यक्ति मध्यम पैदा होते हैं। अगर उन्हें राज्य की ओर से समुचित अवसर न दिया जाए तो शायद ही वे अपनी प्रतिभा का विकास कर सकते हैं।

3. प्राकृतिक असमानताओं की समाप्ति:
समानता की तृतीय विशेषता यह है कि समाज में प्राकृतिक असमानताओं को नष्ट किया जाता है। यदि समाज में प्राकृतिक असमानताएं रहेंगी तो समानता के अधिकार : का कोई लाभ नहीं है।

4. मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति:
समानता का चौथा अर्थ यह है कि प्रत्येक व्यक्ति की मौलिक आवश्यकताओं की पूर्ति अवश्य होनी चाहिए अर्थात सभी को समान भोजन, वस्त्र, आवास एवं सम्पत्ति नहीं दी जा सकती है। लेकिन उनकी मौलिक आवश्यकताओं-भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा एवं शिक्षा की पूर्ति अवश्य होनी चाहिए। उसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि समाज में मनुष्य की जीवनयापन की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति अवश्य रूप से होनी चाहिए।

लास्की (Laski) ने भी कहा है, “समानता का अर्थ एक-सा व्यवहार करना नहीं है, इसका तो आग्रह इस बात पर निर्भर : है कि मनुष्यों को सुख का समान अधिकार होना चाहिए, उनके इस अधिकार में किसी प्रकार का आधारभूत अंतर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।”

5. तर्क के आधार पर भेदभाव:
यद्यपि समानता का अर्थ विशेषाधिकारों का अभाव है तथापि समाज में तर्क के आधार पर कुछ लोगों को विशेष सुविधाएं प्रदान कराई जा सकती हैं; जैसे पिछड़े वर्ग, अपंग स्त्रियों, रोगी तथा दिव्यांग को समाज में कुछ विशेष सुविधाएं प्राप्त कराई जाती हैं। इस व्यवस्था को कानून के सामने संरक्षण कहते हैं। ये विशेष सुविधाएं ऐसे लोगों को समाज में उन्नति व विकास करने में सहायता प्रदान करती हैं।

निष्कर्ष:
समानता का सही अर्थ यह है कि राज्य और समाज में विशेष सुविधाओं का अंत होना चाहिए और सभी को अपने-अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। अवसर की समानता ही सच्ची समानता है। जाति, वंश, रंग, संपत्ति, भाषा, धर्म आदि के आधार पर किसी भी व्यक्ति को विशेष सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिएँ। लास्की के अनुसार समानता के लिए निम्नलिखित बातें होनी चाहिएँ

  • सभी को पर्याप्त अवसर,
  • सभी की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति,
  • विशेष सुविधाओं का अंत।

HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 2.
समानता के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक समानता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
समानता का अर्थ जानने के बाद हमारे लिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम समानता के विभिन्न रूपों का अध्ययन करें। भिन्न-भिन्न लेखक समानता के प्रकारों को भिन्न-भिन्न संख्या और नाम देते हैं, जैसे बार्कर दो प्रकार की समानता मानता है- वैधानिक तथा सामाजिक। प्रो० लास्की के अनुसार समानता राजनीतिक तथा आर्थिक दो प्रकार की होती है। ब्राइस चार प्रकार की समानता मानता है-

  • नागरिक समानता,
  • सामाजिक समानता,
  • राजनीतिक समानता तथा
  • प्राकृतिक समानता।

आजकल समानता पांच प्रकार की मानी जाती है; जैसे

  • प्राकृतिक समानता,
  • नागरिक समानता,
  • सामाजिक समानता,
  • राजनीतिक समानता तथा
  • आर्थिक समानता।

उपर्युक्त समानताओं का विस्तारपूर्वक वर्णन नीचे दिया गया है

1. प्राकृतिक समानता:
कुछ लोगों का विचार है कि सभी लोग जन्म से ही समान हैं। वे संसार में दिखाई देने वाली सभी असमानताओं को मानवकृत मानते हैं। प्राकृतिक समानता की अवधारणा को 1789 की फ्रांस की मानव अधिकारों की घोषणा में माना गया है और 1776 ई० की अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा में भी माना गया है। परंतु ऐसा विचार गलत है, क्योंकि लोगों में काफी असमानताएं हैं जो जन्म से ही होती हैं और उनका समाप्त करना भी असंभव है।

दो भाई भी आपस में बराबर नहीं होते। सभी लोगों में शरीर और दिमाग से संबंधित परस्पर असमानता है। वास्तव में जन्म से ही बच्चों में शारीरिक और मानसिक असमानता होती है जिसे दूर करना संभव नहीं है। इसलिए यह कहना गलत है कि प्रकृति मनुष्यों को जन्म से समानता प्रदान करती है।

2. नागरिक समानता:
नागरिक समानता का अर्थ है कि नागरिक अधिकार सब लोगों के लिए समान हों। सब लोगों के लिए जीवन, स्वतंत्रता, परिवार और धर्म आदि से संबंधित अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित हों। किसी भी व्यक्ति के साथ रंग, जाति, धर्म या लिंग आदि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। यदि किसी राज्य में किसी भी आधार पर कुछ भेदभाव किया जाता है तो वहाँ पूर्ण नागरिक समानता नहीं कही जा सकती।

नागरिक समानता में यह भी शामिल है कि सब लोग कानून के सामने बराबर (Equal before Law) हों। प्रधानमंत्री से लेकर साधारण नागरिक तक सभी के ऊपर एक ही कानून लागू हो। सरकारी कर्मचारियों के लिए भी अलग कानून न हों। किसी भी व्यक्ति को बिना कानून तोड़े कोई दंड न दिया. जाए। इसे कई बार वैधानिक समानता भी कहा जाता है।

3. सामाजिक समानता:
सामाजिक समानता का अर्थ है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समाज में समान समझा जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति समाज का बराबर अंग है और सभी को समान सुविधाएं प्राप्त होनी चाहिएँ। किसी व्यक्ति से धर्म, जाति, लिंग, धन आदि के आधार पर भेदभाव न हो। भारत में जाति-पाति के आधार पर भेद किया जाता था। भारत सरकार ने कानून द्वारा छुआछूत को समाप्त कर दिया है। दक्षिण अफ्रीका में कुछ समय पहले रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता था, जिसे 1991 में एक कानून पास करके समाप्त कर दिया गया है।

अब वहाँ सामाजिक समानता पाई जाती है। अमेरिका में भी काले और गोरे लोगों में भेद किया जाता रहा है। वहाँ पर काले लोगों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया जाता लेकिन पिछले कुछ वर्षों से कानून द्वारा इस भेदभाव को समाप्त करने का प्रयत्न किया जा रहा है। इस प्रयास में सरकार को काफी सफलता भी मिली है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सामाजिक समानता की स्थापना केवल कानून बनाकर ही नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए लोगों को शिक्षित करके उनके दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना होगा अर्थात लोगों के सामाजिक, धार्मिक व जातिगत दृष्टिकोण में परिवर्तन करना आवश्यक है।

4. राजनीतिक समानता:
राजनीतिक समानता का अर्थ है कि जो लोग संविधान और कानून की दृष्टि से योग्य हैं, उन्हें समान राजनीतिक अधिकार प्रदान किए जाएं। संविधान या कानून के द्वारा जो लोग इन अधिकारों से वंचित किए जाएं, वे किसी भेदभाव के आधार पर वंचित न किए जाएं। सभी प्रौढ़ लोगों को मताधिकार प्राप्त होना चाहिए और किसी विशेष आयु से ऊपर सब लोगों को चुनाव लड़ने का अधिकार हो। राजनीतिक समानता में समान स्वतंत्रताएं (भाषण, प्रैस और संगठन से संबंधित) और सरकार की आलोचना करने का अधिकार भी शामिल है।

इन अधिकारों पर कोई ऐसे प्रतिबंध नहीं होने चाहिएँ, जिनसे धर्म, रंग, जाति या लिंग आदि के आधार पर किसी के साथ पक्षपात हो, जैसे पाकिस्तान में कोई गैर-मुसलमान वहाँ का राष्ट्रपति नहीं बन सकता। इसी तरह कई देशों में स्त्रियों को राजनीतिक अधिकारों से वंचित किया गया है, जैसे स्विट्ज़रलैंड में पहले नीतिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। अभी कुछ वर्ष पहले ही वहाँ स्त्रियों को ये अधिकार दिए गए। कुछ मुस्लिम देशों में अब भी महिलाओं को राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। यह राजनीतिक समानता के विरुद्ध है।

5. आर्थिक समानता:
आर्थिक समानता का तात्पर्य है कि लोगों में आर्थिक भेद न हों। इसका यह अर्थ नहीं कि लोगों की आमदनी व खर्च के आंकड़े समान हों, परंतु इसका उद्देश्य समाज में पाई जाने वाली धन और आय की असमानताओं को दूर करना है। आर्थिक समानता के सिद्धांत की मांग है कि समाज के सभी सदस्यों को जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त साधन प्राप्त होने चाहिएँ अर्थात सभी लोगों को कम-से-कम आवश्यक भोजन, वस्त्र और निवास-स्थान मिलना चाहिए, क्योंकि ये अच्छे जीवन की मूल आवश्यकताएं हैं।

सबकी प्रारम्भिक आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही किसी के लिए विलास-सामग्री की बात सोची जाए। लास्की का कथन है, “मुझे अपने लिए केक पकाने का कोई अधिकार नहीं है, जबकि मेरा पड़ोसी उसी अधिकार को रखते हुए भी भूखा सो रहा है।”सबको काम पाने तथा मजदूरी का उचित फल पाने का अधिकार हो। आर्थिक समानता इस बात पर जोर देती है कि किसी के पास भी अपने लिए जरूरत से अधिक धन नहीं होना चाहिए, जबकि दूसरे भूखे मर रहे हों।

इस प्रकार आर्थिक समानता समाजवादी आदर्श स्थापित करना चाहती है जिसमें देश की संपत्ति का न्यायपूर्ण और ठीक-ठीक वितरण हो, जिनमें आर्थिक शोषण न हो और जिसमें समाज को हानि पहुंचाकर धन एकत्रित करने का मौका न दिया जाए। वास्तव में जब तक आर्थिक समानता नहीं होगी, तब तक नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक समानता स्थापित नहीं हो सकती।

निष्कर्ष: समानता के उपरोक्त रूपों का अध्ययन करने के पश्चात ऐसा मालूम पड़ता है कि सभी रूप अपने-अपने स्थान पर महत्त्वपूर्ण हैं। अकेले में कोई समानता लाभकारी नहीं है। आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक या सामाजिक समानता स्थापित नहीं की जा सकती। ऐसे ही राजनीतिक समानता के बिना आर्थिक या नागरिक समानता स्थापित नहीं की जा सकती। अतः समाज में सभी प्रकार की समानताओं का होना आवश्यक है। व्यक्ति का विकास भी सभी समानताओं पर निर्भर करता है।

प्रश्न 3.
समानता और स्वतंत्रता में क्या संबंध है? अथवा राजनीतिक समानता और आर्थिक समानता के आपसी संबंधों का वर्णन करें। क्या स्वतंत्रता और समानता एक-दूसरे के विरोधी हैं? अथवा राजनीतिक स्वतंत्रता तथा आर्थिक समानता में संबंध बताएं।
उत्तर:
समानता और स्वतंत्रता लोकतंत्र के मूल तत्त्व हैं। व्यक्ति के विकास के लिए स्वतंत्रता तथा समानता का विशेष महत्त्व है। बिना स्वतंत्रता और समानता के मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता, परंतु स्वतंत्रता और समानता के संबंध पर विद्वान एकमत नहीं हैं। कुछ विचारकों का मत है कि स्वतंत्रता तथा समानता परस्पर विरोधी हैं, जबकि कुछ विचारकों के अनुसार स्वतंत्रता तथा समानता में गहरा संबंध है और स्वतंत्रता की प्राप्ति के बिना समानता नहीं की जा सकती अर्थात एक के बिना दूसरे का कोई महत्त्व नहीं है।

स्वतंत्रता तथा समानता परस्पर विरोधी हैं:
कुछ विचारकों के अनुसार स्वतंत्रता तथा समानता परस्पर विरोधी हैं और एक ही समय पर दोनों की प्राप्ति नहीं की जा सकती। टॉक्विल तथा लॉर्ड एक्टन इस विचारधारा के मुख्य समर्थक हैं। इन विद्वानों के मतानुसार जहां स्वतंत्रता है, वहाँ समानता नहीं हो सकती और जहां समानता है, वहाँ स्वतंत्रता नहीं हो सकती। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि यदि समाज में आर्थिक समानता स्थापित कर दी. गई तो स्वतंत्रता समाप्त हो जाएगी, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपनी योग्यता के आधार पर धन नहीं कमा सकेगा। इन विचारकों ने निम्नलिखित आधारों पर स्वतंत्रता तथा समानता को विरोधी माना है

1. सभी मनुष्य समान नहीं हैं:
इन विचारकों के अनुसार असमानता प्रकृति की देन है। कुछ व्यक्ति जन्म से ही शक्तिशाली होते हैं तथा कुछ कमजोर। कुछ व्यक्ति जन्म से ही बुद्धिमान होते हैं और कुछ मूर्ख। अतः मनुष्य में असमानताएं प्रकृति की देन हैं और इन असमानताओं के होते हुए सभी व्यक्तियों को समान समझना अन्यायपूर्ण और अनैतिक है।

2. आर्थिक स्वतंत्रता और समानता परस्पर विरोधी हैं:
व्यक्तिवादी सिद्धांत के अनुसार स्वतंत्रता तथा समानता को परस्पर विरोधी माना जाता है। व्यक्तिवादी सिद्धांत के अनुसार मनुष्य को आर्थिक क्षेत्र में पूर्ण स्वतंत्रता होनी चाहिए तथा आर्थिक क्षेत्र में स्वतंत्र प्रतियोगिता होनी चाहिए। यदि स्वतंत्र प्रतियोगिता को अपनाया जाए तो कुछ व्यक्ति अमीर हो जाएंगे, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ेगी और यदि आर्थिक समानता की स्थापना की जाए तो व्यक्ति का स्वतंत्र व्यापार का अधिकार समाप्त हो जाता है। आर्थिक समानता तथा स्वतंत्रता परस्पर विरोधी हैं और एक समय पर दोनों की स्थापना नहीं की जा सकती।

3. समान स्वतंत्रता का सिद्धांत अनैतिक है:
सभी व्यक्तियों की मूल योग्यताएं समान नहीं होती। इसलिए सबको समान अधिकार अथवा स्वतंत्रता प्रदान करना अनैतिक और अन्यायपूर्ण है।

4. प्रगति में बाधक (Resists the Progress) यदि स्वतंत्रता के सिद्धांत को समानता के आधार पर लागू किया जाए तो इससे व्यक्ति तथा समाज को समान रूप दे दिए जाते हैं जिससे योग्य तथा अयोग्य व्यक्ति में अंतर करना कठिन हो जाता है। इससे योग्य व्यक्ति को अपनी योग्यता दिखाने का अवसर नहीं मिलता।

स्वतंत्रता और समानता परस्पर विरोधी नहीं हैं स्वतंत्रता और समानता के संबंधों के विषय में दूसरा दृष्टिकोण व्यक्त किया गया है कि यह दोनों एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जिन विचारकों ने स्वतंत्रता को समानता का विरोधी माना है, वास्तविकता में उन्होंने स्वतंत्रता का सही अर्थ नहीं लिया है। यदि वे स्वतंत्रता को सही अर्थ में लें तो स्वतंत्रता और समानता का संबंध स्पष्ट हो जाएगा कि ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

जो विचारक स्वतंत्रता तथा समानता को परस्पर विरोधी न मानकर एक-दूसरे का पूरक मानते हैं और इनका आपस में घनिष्ठ संबंध बतलाते हैं, उनमें प्रसिद्ध हैं रूसो, प्रो० आर०एच० टॉनी व प्रो० पोलार्ड। रूसो (Rousseau) के अनुसार, “बिना स्वतंत्रता के समानता जीवित नहीं रह सकती।” प्रो० आर०एच० टॉनी (Prof. R.H. Tony) के अनुसार, “समानता की प्रचुर मात्रा स्वतंत्रता की विरोधी नहीं, वरन इसके लिए अत्यंत आवश्यक है।” प्रो० पोलार्ड (Prof. Pollard) के अनुसार, “स्वतंत्रता की समस्या का केवल एक ही समाधान है और वह है समानता।” ऊपरलिखित विचारक अपने पक्ष में निम्नलिखित तर्क देते हैं

1. स्वतंत्रता और समानता का विकास एक साथ हुआ है:
स्वतंत्रता और समानता का संबंध जन्म से है। जब निरंकुशता और असमानता के विरुद्ध मानव ने आवाज उठाई और क्रांतियां हुईं, तो स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों का जन्म हुआ। इस प्रकार इन दोनों में रक्त-संबंध है।

2. दोनों प्रजातंत्र के आधारभूत सिद्धांत हैं:
स्वतंत्रता और समानता का विकास प्रजातंत्र के साथ हुआ है। प्रजातंत्र के दोनों मूल सिद्धांत हैं। दोनों के बिना प्रजातंत्र की स्थापना नहीं की जा सकती।

3. दोनों के रूप समान हैं:
स्वतंत्रता और समानता के प्रकार एक ही हैं और उनके अर्थों में भी कोई विशेष अंतर नहीं है। प्राकृतिक स्वतंत्रता तथा प्राकृतिक समानता का अर्थ प्रकृति द्वारा प्रदान की गई स्वतंत्रता अथवा समानता है। नागरिक स्वतंत्रता का अर्थ समान नागरिक अधिकारों की प्राप्ति है। इसी प्रकार दोनों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक इत्यादि रूप हैं।

4. दोनों के उद्देश्य समान हैं:
दोनों का एक ही उद्देश्य है और वह है व्यक्ति के विकास के लिए सुविधाएं प्रदान करना, ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास कर सके। एक के बिना दूसरे का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। स्वतंत्रता के बिना समानता असंभव है और समानता के बिना स्वतंत्रता का कोई मूल्य नहीं है। आशीर्वादम (Ashirvatham) ने दोनों में घनिष्ठ संबंध बताया है।

उसने लिखा है, “फ्रांस के क्रांतिकारियों ने जब स्वतंत्रता, समानता तथा भाई-चारे को अपने युद्ध का नारा बताया तो वे न पागल थे और न ही मूर्ख।” इस प्रकार स्पष्ट है कि समानता तथा स्वतंत्रता में गहरा संबंध है।

5. आर्थिक समानता के अभाव में राजनीतिक स्वतंत्रता संभव नहीं है:
समानता और स्वतंत्रता में घनिष्ठ संबंध ही नहीं है बल्कि आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता को प्राप्त नहीं किया जा सकता। आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता एक धोखा व कपट मात्र है, क्योंकि गरीब व्यक्ति अपनी राजनीतिक स्वतंत्रताओं का भोग कर ही नहीं सकता। उसके लिए राजनीतिक स्वतंत्रताओं का कोई मूल्य नहीं है।

जैसा कि हॉब्सन ने ठीक ही कहा है, “भूखे व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का क्या लाभ है? वह स्वतंत्रता को न खा सकता है और न पी सकता है।” अतः जिस समाज में गरीबी है, वहाँ राजनीतिक स्वतंत्रता हो ही नहीं सकती।

निष्कर्ष:
स्वतंत्रता और समानता के आपसी संबंधों का अध्ययन करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे के सहायक हैं। जो विद्वान इन दोनों को विरोधी मानते हैं, उन्होंने समानता व स्वतंत्रता को सही अर्थों में नहीं लिया है। यदि इन दोनों को सकारात्मक अर्थों में लिया जाए तो ये एक-दूसरे के पूरक हैं। समानता के बिना स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के बिना समानता अधूरी है। ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

प्रश्न 4.
आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता व्यर्थ है।
अथवा
आर्थिक समानता व राजनीतिक स्वतंत्रता में संबंध बताएँ।
अथवा
“आर्थिक समानता के अभाव में राजनीतिक स्वतंत्रता एक धोखा मात्र है।” इस कथन की व्याख्या करें।
उत्तर:
राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक समानता को प्रजातंत्र का आधार माना गया है। प्रजातंत्र को सफल बनाने के लिए इन दोनों स्वतंत्रताओं में आपसी संबंध होना आवश्यक है। इस संदर्भ में लास्की ने ठीक ही कहा है, “आर्थिक समानता की अनुपस्थिति में राजनीतिक स्वतंत्रता एक धोखा है।” लास्की के इस कथन में काफी सच्चाई है, क्योंकि गरीब व्यक्ति के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता का कोई महत्त्व नहीं है।

गरीब व्यक्ति मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता। वह चुनाव नहीं लड़ सकता है अर्थात निर्धन व्यक्ति राजनीतिक स्वतंत्रताओं का आनंद नहीं उठा सकता। राजनीतिक स्वतंत्रता व आर्थिक समानता के परस्पर संबंधों को देखने से पहले राजनीतिक स्वतंत्रता एवं आर्थिक समानता के अर्थों को जानना आवश्यक है।

राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ:
राजनीतिक स्वतंत्रता का तात्पर्य है कि राज्य के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेना। व्यक्ति को इसमें अपने नागरिक अधिकारों का प्रयोग करने की स्वतंत्रता होती है। व्यक्ति अपने विवेकपूर्ण निर्णय का राजनीतिक क्षेत्र में प्रयोग कर सकता है। उसे अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होता है और निर्वाचित होने का भी अधिकार प्राप्त होता है। इस प्रकार राजनीतिक स्वतंत्रता शासन कार्यों में भाग लेने और शासन-व्यवस्था को प्रभावित करने की शक्ति का नाम है।

आर्थिक समानता का अर्थ:
आर्थिक समानता का साधारण शब्दों में अर्थ है कि समाज में आर्थिक असमानता को दूर किया जाए। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति की आय और संपत्ति समान हो। इसका अर्थ यह है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आजीविका कमाने व अपनी आधारभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए समान अवसर प्राप्त होने चाहिएँ। आर्थिक समानता के लिए निम्नलिखित बातों का होना आवश्यक है

  • समान अवसरों की प्राप्ति,
  • समान कार्य के लिए समान वेतन,
  • आर्थिक समानता को कम किया जाए,
  • आर्थिक शोषण को समाप्त करना,
  • स्वामी और सेवक की व्यवस्था को समाप्त करना आदि।

इन दोनों के संबंधों के बारे में हॉब्सन ने ठीक कहा है, “एक भूखे मर रहे व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का क्या लाभ है? वह स्वतंत्रता को न खा सकता है और न पी सकता है।” श्री जी०डी० एच० कोल ने भी ठीक ही कहा है, “राजनीतिक स्वतंत्रता आर्थिक समानता के बिना एक ढोंग है।” अतः स्पष्टता के लिए इन दोनों के संबंधों को निम्नलिखित ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है

1. निर्धन व्यक्ति के लिए मताधिकार का कोई महत्त्व नहीं है:
राजनीतिक स्वतंत्रताओं में वोट का अधिकार सबसे महत्त्वपूर्ण है लेकिन निर्धन व्यक्ति के लिए इसका कोई महत्त्व नहीं है, क्योंकि वह न तो इसको खा सकता है और न पी सकता है। निर्धन व्यक्ति हमेशा अपनी आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में लगा रहता है। निर्धन व्यक्ति को वोट का अधिकार देना एक वास्तविक वस्तु की बजाए उसकी परछाई मात्र है। यदि निर्धन व्यक्ति को मताधिकार व मजदूरी में से किसी एक का चुनाव करना पड़े तो वह मजदूरी को ही चुनेगा। अतः गरीब व्यक्ति के लिए मताधिकार का कोई महत्त्व नहीं है।

2. निर्धन व्यक्ति द्वारा मताधिकार का दुरुपयोग:
व्यक्ति की आर्थिक स्थिति उसकी राजनीतिक स्वतंत्रता को प्रभावित करती है। निर्धन व्यक्ति अपने मताधिकार का दुरुपयोग कर सकता है। वह लोभ में आकर अपने मताधिकार को बेच देता है। वास्तविकता में इसके लिए निर्धन व्यक्ति की आर्थिक स्थिति उत्तरदायी है जो उसे अपने पवित्र अधिकार, मताधिकार को बेचने के लिए मजबूर कर देती है। वह मताधिकार के बदले में प्राप्त धन से अपने परिवार की भूख मिटा सकता है। अतः स्पष्ट है कि आर्थिक समानता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता संभव नहीं है।

3. निर्धन व्यक्ति मताधिकार का प्रयोग नहीं करते:
राजनीतिक स्वतंत्रताओं का प्रयोग व्यक्ति के बुद्धि के स्तर पर निर्भर करता है अर्थात् व्यक्ति का शिक्षित व जागरूक होना आवश्यक है। निर्धनता व्यक्ति के शिक्षित होने के रास्ते में बाधा बनती है। अशिक्षित व्यक्ति न तो राजनीतिक समस्या पाता है और न ही उनका समाधान निकाल सकता है। अशिक्षित होने से व्यक्ति अपने मताधिकार का ठीक प्रयोग नहीं कर सकता और सही नेता का चुनाव भी नहीं कर सकता। अतः स्पष्ट है कि निर्धन व्यक्ति अशिक्षित रह जाते हैं तथा चालाक राजनीतिज्ञ साधारण व्यक्तियों का राजनीतिक रूप से शोषण करते हैं।

निर्धन व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता :
लोकतंत्रीय राज्यों में प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के चुनाव लड़ने का अधिकार प्राप्त है। परंतु यह अधिकार नाममात्र का है, क्योंकि आधुनिक युग में चुनाव लड़ने के लिए लाखों रुपयों की आवश्यकता होती है जो निर्धन व्यक्ति के पास नहीं होते। वास्तविकता यह है कि निर्धन व्यक्ति धन के अभाव में चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं सकता। वह बड़े-बड़े धनिकों या पूंजीपतियों का चुनाव में मुकाबला कैसे कर सकता है? अतः स्पष्ट है कि राजनीतिक स्वतंत्रता निर्धन के लिए मात्र एक दिखावा है।

5. निर्धन व्यक्ति उच्च पद प्राप्त नहीं कर सकता:
निर्धन व्यक्ति या श्रमिक वर्ग अशिक्षित होता है और उसके पास इतने साधन नहीं होते हैं कि वह अपने बच्चों को शिक्षित करके उन्हें उच्च पद प्राप्त करने के योग्य बना सके। उसे अपनी रोजी-रोटी कमाने से ही फुरसत नहीं मिलती, इसलिए वह राजनीति में भाग नहीं ले सकता और न ही उच्च पदों को प्राप्त कर सकता है।

6. राजनीतिक दलों पर पूंजीपतियों का नियंत्रण:
राजनीतिक स्वतंत्रता में राजनीतिक दलों का अध्ययन आता है और लोकतंत्र के लिए राजनीतिक दलों का होना अनिवार्य भी है। आज की राजनीति राजनीतिक दलों पर निर्भर करती है। राजनीतिक दल ही सरकार का निर्माण करते हैं। राजनीतिक दलों को अपना काम चलाने के लिए धन चाहिए। उन्हें यह धन पूंजीपतियों से मिलता है। पूंजीपतियों का राजनीतिक दलों पर प्रभुत्व होता है।

वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक दलों को प्रभावित करते हैं। पूंजीपतियों द्वारा समर्थित राजनीतिक दल सत्ता में आने के बाद पूंजीपतियों के ही गुणगान करते हैं। अतः निर्धन लोगों की राजनीतिक स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है। इस संबंध में किसी लेखक ने ठीक ही कहा है कि धनवान व्यक्ति कानून पर शासन करते हैं और कानून निर्धन व्यक्ति को पीसता है।

7. प्रेस धनी व्यक्ति का साधन है :
प्रेस राजनीतिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। प्रैस ही सरकार के कार्यों की आलोचना करती है। प्रैस द्वारा ही लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाया जा सकता है, लेकिन प्रैस पर पूंजीपतियों का नियंत्रण होता है। प्रैस गरीब व्यक्तियों की समस्याओं को न तो छापती है और न ही सरकार का उनकी ओर ध्यान जाता है। अतः अमीर व्यक्ति ही प्रैस का प्रयोग करते हैं। प्रैस उनको ही लाभ पहुंचाती है। अतः राजनीतिक स्वतंत्रता की सुरक्षा के लिए जिस प्रकार से स्वतंत्र प्रैस की आवश्यकता होती है, वह उसके अनुसार नहीं होती।

8. इतिहास इसका समर्थन करता है :
इतिहास इस बात का समर्थन करता है कि आर्थिक असमानता के रहते राजनीतिक स्वतंत्रता स्थापित नहीं हो सकती। पूंजीपति श्रमिकों का न केवल आर्थिक आधार पर बल्कि राजनीतिक आधार पर भी उनका शोषण करते हैं। यह निश्चित है कि श्रमिक पूंजीपतियों की दया पर निर्भर करते हैं और उनके राजनीतिक अधिकार भी पूंजीपतियों के हाथों में ही चले जाते हैं।

निष्कर्ष:
उपरोक्त तर्कों के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है कि राजनीतिक स्वतंत्रता और आर्थिक समानता में गहरा संबंध है। लास्की का यह कहना कि आर्थिक समानता के अभाव में राजनीतिक स्वतंत्रता एक ढोंग है, बिल्कुल सच है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि राजनीतिक स्वतंत्रता को वास्तविक बनाने के लिए आर्थिक समानता का होना अनिवार्य है इसलिए वास्तविक प्रजातंत्र का अस्तित्व केवल वही हो सकता है, जहां आर्थिक प्रजातंत्र है।

वस्तु निष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दिए गए विकल्पों में से उचित विकल्प छाँटकर लिखें

1. अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम एवं फ्रांस की राज्य क्रांति में स्वतंत्रता, समानता एवं भातृत्व का नारा देने वाले विचारक निम्नलिखित में से हैं
(A) जेफरसन
(B) जॉन लॉक एवं रूसो
(C) वाल्टेयर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

2. समानता की अवधारणा को विकसित एवं प्रेरित करने में निम्नलिखित में से किस कारक का योगदान रहा है?
(A) साम्राज्यवाद
(B) सामंतवाद
(C) पूंजीवाद
(D) उपर्युक्त तीनों
उत्तर:
(D) उपर्युक्त तीनों

3. समानता की अवधारणा के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(A) सभी को समान वेतन
(B) विशेषाधिकारों का अभाव
(C) सभी को समान गुजारा-भत्ता
(D) सबके साथ समान व्यवहार
उत्तर:
(B) विशेषाधिकारों का अभाव

4. समानता का लक्षण निम्नलिखित में से है
(A) सभी को पर्याप्त अवसर देना
(B) सभी को मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति
(C) समाज में विशेष सुविधाओं का अंत
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

5. समाज में नागरिकों के अधिकारों का लोगों को समान रूप से प्राप्त न होना कौन-सी असमानता का रूप है?
(A) सामाजिक असमानता
(B) प्राकृतिक असमानता
(C) नागरिक असमानता
(D) संवैधानिक असमानता
उत्तर:
(C) नागरिक असमानता

6. स्वतंत्रता एवं समानता को परस्पर विरोधी मानने वाला विचारक निम्नलिखित में से हैं
(A) डी० टॉकविल
(B) लार्ड एक्टन
(C) डी० टॉकविल एवं लार्ड एक्टल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) डी० टॉकविल एवं लार्ड एक्टन

7. स्वतंत्रता एवं समानता को एक-दूसरे के संपूरक मानने वाले विद्वान निम्नलिखित में से हैं
(A) रूसो
(B) प्रो० पोलार्ड
(C) प्रो०आर०एच०टोनी
(D) उपर्युक्त तीनों
उत्तर:
(D) उपर्युक्त तीनों

8. “फ्रांस के क्रांतिकारियों ने जब स्वतंत्रता, समानता तथा भाई-चारे को अपने युद्ध का नारा बनाया तो वे न पागल थे और न ही मूर्ख।” यह कथन निम्नलिखित में से है
(A) हॉब्सन
(B) आशीर्वादम
(C) लार्ड एक्टन
(D) सी०ई०एम० जोड
उत्तर:
(B) आशीर्वादम

9. आर्थिक समानता का लक्षण निम्नलिखित में से नहीं है
(A) समान कार्य के लिए समान वेतन
(B) आर्थिक शोषण को समाप्त करना
(C) समान अवसरों की प्राप्ति होना
(D) कानून के समक्ष समानता
उत्तर:
(D) कानून के समक्ष समानता

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक शब्द में दें

1. किस प्रकार की समानता में सभी नागरिकों को शासन में भाग लेने का समान अधिकार प्राप्त होता है?
उत्तर:
राजनीतिक समानता में।।

HBSE 11th Class Political Science Important Questions Chapter 3 समानता

2. समाज में जाति, रंग, धर्म, भाषा, वर्ण एवं जन्म के आधार पर भेदभाव होना कौन-सी असमानता का रूप है?
उत्तर:
सामाजिक असमानता का।

3. “भूखे व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का क्या लाभ है? वह स्वतंत्रता को न खा सकता है और न पी सकता है।” यह कथन किस विद्वान का है?
उत्तर:
हॉब्सन का।

रिक्त स्थान भरें

1. पुरुष एवं स्त्रियों में भेदभाव करना ……………. असमानता का रूप कहलाता है।
उत्तर:
लैंगिक

2. जन्म के आधार पर सभी मनुष्यों को समान मानने वाली समानता …………….. कहलाती है।
उत्तर:
प्राकृतिक समानता

3. “राजनीतिक स्वतंत्रता आर्थिक समानता के बिना एक ढोंग है।” यह कथन एक ढाग है।” यह कथन …………….. का है।
उत्तर:
जी०डी०एच० कोल

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HBSE 11th Class Political Science Solutions Chapter 5 अधिकार

Haryana State Board HBSE 11th Class Political Science Solutions Chapter 5 अधिकार Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Political Science Solutions Chapter 5 अधिकार

HBSE 11th Class Political Science अधिकार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अधिकार क्या हैं और वे महत्त्वपूर्ण क्यों हैं? अधिकारों का दावा करने के लिए उपयुक्त आधार क्या हो सकते हैं?
उत्तर:
अधिकार सामान्य जीवन का एक ऐसा वातावरण है, जिसके बिना कोई भी व्यक्ति अपने जीवन का विकास कर ही नहीं सकता। अधिकार व्यक्ति के विकास और स्वतंत्रता का एक ऐसा दावा है जो कि व्यक्ति तथा समाज दोनों के लिए लाभदायक है, जिसे समाज मानता है और राज्य लागू करता है। अधिकार एक व्यक्ति की अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध अपनी सुविधा की मांग है। यह समाज पर एक दावा है, परंतु इसे हम शक्ति नहीं कह सकते, जैसा कि ऑस्टिन ने कहा है कि शक्ति हमें प्रकृति से प्राप्त होती है, जिसमें देखने, सुनने और दौड़ने आदि की शक्तियां सम्मिलित हैं।

परंतु यह बात ध्यान देने योग्य है कि व्यक्ति की प्रत्येक मांग को हम ‘दावा’ (Claim) नहीं कह सकते, क्योंकि मांग उचित भी हो सकती है अथवा अनुचित भी, नैतिक भी हो सकती है और अनैतिक भी। एक व्यक्ति की दूसरे को मारने अथवा लूटने की मांग को हम दावा नहीं कह सकते, क्योंकि इस दावे से दूसरे को हानि हो सकती है और समाज ऐसे दावे को कभी स्वीकार नहीं कर सकता।

केवल वही ‘दावा’ ही अधिकार बन सकता है जिसे समाज की स्वीकृति प्राप्त हो, परंतु एक ‘दावे’ के अधिकार बनने के लिए केवल इतना ही काफी नहीं है, समाज द्वारा स्वीकार व्यक्ति का केवल वही ‘दावा’ अधिकार का रूप ले सकता है, जिसे राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त हो जाए अर्थात राज्य उसे लागू करने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दे। बोसांके (Bosanque) ने लिखा है कि

“अधिकार मनुष्य का वह दावा है जिसे समाज स्वीकार करता है तथा राज्य लागू करता है।” व्यक्ति की नैतिक मांगें ही अधिकार बन सकती हैं, अनैतिक मांगें नहीं। जीवित रहने, संपत्ति रखने, विचार प्रकट करने आदि की मांगें नैतिक हैं, परंतु चोरी करने, मारने या गाली-गलौच करने की मांग अनैतिक है। जिन मांगों से व्यक्ति तथा समाज दोनों का ही हित होता हो, वे ही अधिकार कहलाएंगे।

HBSE 11th Class Political Science Solutions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 2.
किन आधारों पर यह अधिकार अपनी प्रकृति में सार्वभौमिक माने जाते हैं?
उत्तर:
अधिकार व्यापक होते हैं। वे किसी एक व्यक्ति या वर्ग के लिए नहीं होते, वरन् समाज के सभी लोगों के लिए समान होते हैं। अधिकारों को प्रदान करते समय किसी के साथ जाति, धर्म, वर्ण आदि का भेदभाव नहीं किया जा सकता; जैसे

(1) समाज में सभी व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप में सम्मानित जीवन जीने का अधिकार है। अतः व्यक्तियों के जीवन को कानून द्वारा पूर्णतः सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसी तरह

(2) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार भी समाज में रहने वाले सभी व्यक्तियों के लिए महत्त्वपूर्ण है। इसी वजह से अधिकारों की प्रकृति सार्वभौमिक मानी जाती है। इसके अतिरिक्त

(3) शिक्षा का अधिकार हमें उपयोगी कौशल प्रदान करता है और जीवन में सूझ-बूझ के साथ चयन करने में सक्षम बनाता है। व्यक्ति के कल्याण के लिए शिक्षा अनिवार्य है। यही कारण है कि शिक्षा के अधिकार को सार्वभौमिक अधिकार माना गया है।

प्रश्न 3.
संक्षेप में उन नए अधिकारों की चर्चा कीजिए, जो हमारे देश में सामने रखे जा रहे हैं। उदाहरण के लिए आदिवासियों के अपने रहवास और जीने के तरीके को संरक्षित रखने तथा बच्चों के बँधुआ मजदूरी के खिलाफ अधिकार जैसे नए अधिकारों को लिया जा सकता है।
उत्तर:
अब विविध समाजों में मानवाधिकारों के संदर्भ में नए-नए खतरे और चुनौतियाँ उभरने लगी हैं और इसी क्रम में उन मानवाधिकारों की सूची लगातार बढ़ती जा रही है जिनका लोगों ने परिस्थितियों के कारण दावा किया है; जैसे कुछ नए अधिकार निम्नलिखित हैं

(1) स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और टिकाऊ विकास जैसे अधिकार की मांग या दावा आम बात हो गई है।
(2) महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए अधिकार की माँग भी आज प्रमुख दावों में सम्मिलित है।
(3) युद्ध या प्राकृतिक संकट के दौरान अनेक लोग, खासकर महिलाएँ, बच्चे या बीमार जिन बदलावों को झेलते हैं, उनके बारे में नई जागरूकता ने आजीविका के अधिकार, बच्चों के अधिकार और ऐसे अन्य अधिकारों की माँग उत्पन्न की है।
(4) महिला सशक्तिकरण के लिए लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की माँग भी निरन्तर बढ़ रही है।
(5) समाज के कमजोर/गरीब तबके के लोगों के लिए शौचालयों की व्यवस्था भी आज के समय में अपरिहार्य मांग बनती जा रही है।

प्रश्न 4.
राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों में अंतर बताइये। हर प्रकार के अधिकार के उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
नागरिकों के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों के अर्थों के साथ उनके अन्तर को निम्नलिखित रूप में समझा जा सकता है

1. राजनीतिक अधिकार राजनीतिक अधिकार से अभिप्राय उन अधिकारों से है जिनमें नागरिक को देश की शासन प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है। राजनीतिक अधिकार व्यक्ति को एक निश्चित योग्यता के आधार पर प्राप्त होता है; जैसे, मत देने के लिए एक निश्चित आयु सीमा निर्धारित की गई है, उसी प्रकार लोकसभा एवं विधानसभा के सदस्य बनने के लिए एक निश्चित आयु सीमा निर्धारित की गई है।

राजनीतिक अधिकार नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े होते हैं। नागरिक स्वतंत्रता का अर्थ है-स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक जाँच का अधिकार, विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार तथा प्रतिवाद करने और असहमति प्रकट करने का अधिकार । नागरिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार मिलकर किसी सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली के सफल संचालन के आधार बनते हैं।

2. आर्थिक अधिकार आर्थिक अधिकार उन सुविधाओं का नाम है जिनके कारण व्यक्ति अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी बना सकता है। कुछ मुख्य आर्थिक अधिकार हैं-काम करने का अधिकार, उचित मजदूरी पाने का अधिकार, काम के निश्चित घंटों का अधिकार, अवकाश का अधिकार और आर्थिक सुरक्षा का अधिकार आदि।

आर्थिक अधिकार राजनीतिक अधिकार से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि एक मजदूर और भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए संघर्ष करने वालों के लिए अपने-आप में राजनीतिक अधिकार का कोई मूल्य नहीं है। अतः राजनीतिक अधिकारों के उपयोग हेतु आर्थिक समानता आवश्यक है।

3. सांस्कृतिक अधिकार- अब अधिकांश लोकतांत्रिक देशों की सरकारों ने राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के साथ नागरिकों के सांस्कृतिक दावों को भी मान्यता प्रदान की है; जैसे अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार, अपनी भाषा लिपि और संस्कृति के शिक्षण के लिए संस्थाएँ बनाने के अधिकार को बेहतर जिंदगी जीने के लिए आवश्यक माना जा रहा है। हमारे भारतीय संविधान में भी हमने सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकार को मूल अधिकार के रूप में प्रदान किया है।

HBSE 11th Class Political Science Solutions Chapter 5 अधिकार

प्रश्न 5.
अधिकार राज्य की सत्ता पर कुछ सीमाएँ लगाते हैं। उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अधिकार हमें केवल यहीं नहीं बताते कि राज्य को क्या करना है बल्कि हमें वे यह भी बताते हैं कि राज्य को क्या कुछ नहीं करना है। दूसरे शब्दों में, अधिकार राज्य की सत्ता पर कुछ सीमाएँ या अंकुश भी लगाते हैं, जो अग्रलिखित रूप में स्पष्ट कर सकते हैं

(1) राज्य सत्ता केवल अपनी इच्छा से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। अगर वह किसी को जेल में बंद करना चाहती है, तो उसे इस कार्रवाई को उचित ठहराना पड़ेगा। उसे किसी न्यायालय के समक्ष उस व्यक्ति की स्वतंत्रता के विपरीत बन्दी बनाने का कारण बताना होगा।
(2) किसी को गिरफ्तार करने से पहले गिरफ्तारी का वारंट दिखाना पुलिस के लिए आवश्यक होता है।
(3) गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष अपने आपको दोष मुक्त करने का पूर्ण अधिकार होगा। ऐसा वह स्वयं या वकील की सहायता से भी कर सकता है।

इस प्रकार हमारे अधिकार यह सुनिश्चित करते हैं कि राज्य की सत्ता वैयक्तिक जीवन और स्वतंत्रता की मर्यादा का उल्लंघन किए बगैर काम करे। राज्य संपूर्ण प्रभुत्वसंपन्न सत्ता हो सकती है, उसके द्वारा निर्मित कानून बलपूर्वक लागू किए जा सकते हैं लेकिन संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न राज्य का अस्तित्व अपने लिए नहीं, बल्कि व्यक्ति के हित के लिए होता है। अतः सत्तारूढ़ सरकार को जनता के कल्याण की दृष्टि से ही कार्य करना होता है, अन्यथा जनता राज्य सत्ता के विरुद्ध खड़ी हो सकती है।

अधिकार HBSE 11th Class Political Science Notes

→ अधिकार और कर्त्तव्य राजनीतिक विचारकों के अध्ययन का महत्त्वपूर्ण विषय रहा है। जब से बुद्धिजीवी वर्ग ने संगठन समाज, राज्य, व्यक्ति तथा समाज के संबंधों का गंभीर अध्ययन करना आरंभ किया तब से व्यक्ति के अधिकार और कर्तव्य महत्त्वपूर्ण हो गए हैं।

→ अधिकार को लेकर ही विश्व में कई क्रांतियां हुईं। अधिकार के प्रश्न पर अनेक वाद लिखे गए हैं। अधिकारों को लेकर ही प्रथम और द्वितीय महायुद्ध हुए। विश्व में अनेक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों का गठन भी अधिकारों की सुरक्षा के लिए ही किया गया है।

→ आधुनिक युग के प्रजातांत्रिक समय में अधिकारों की और भी अधिक महत्ता बढ़ गई है। राजनीतिक दल, सरकार, व्यक्ति और संस्थाओं के द्वारा अधिकारों की ही बात की जाती है।

→ प्रजातांत्रिक युग में प्रत्येक व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुका है और अपने अधिकारों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयत्न करता है। प्रस्तुत अध्याय में हम व्यक्ति के अधिकारों और कर्तव्यों का अध्ययन करेंगे।

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HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

Haryana State Board HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

HBSE 8th Class English The Great Stone Face 2 Textbook Questions and Answers

Comprehension Check

The Great Stone Face 2 Summary HBSE 8th Class

Write ‘True’ or ‘False’ against each of the following statements :
निम्नलिखित वाक्यों के सामने सत्य अथवा असत्य लिखो :
1. Ernest’s words reminded people of the wise old sayings.
2. Total strangers from far away, who visited Ernest in the valley, found his face familiar.
3. The Great Stone Face confirmed Ernest’s view that the poet could be worthy of its likeness.
4. When Ernest and the poet met, they respected and admired each other equally.
5. The poet, along with Ernest addressed the inhabitants of the valley.
6. The poet realised that Ernest’s thoughts were far nobler than his own verses.
Answer:
1. True
2. True
3. False
4. True
5. False
6. True

Working With The Text

Answer the following questions :
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो :
Great Stone Face 2 HBSE 8th Class Question 1.
How was Ernest different from others in the valley?
घाटी में अर्नस्ट अन्य लोगों से भिन्न कैसे था?
Answer:
People of the valley never considered Ernest to be more than an ordinary man, but as i a matter of fact, thoughts which he expressed were so high that no one else could be expected to have spoken. This was the difference between Ernest and the other people of the valley.

The Great Stone Face 2 HBSE 8th Class Question 2.
Why did Ernest think the poet was like the Stone Face?
अर्नस्ट ने यह क्यों सोचा कि कवि ही महान वज्रमुख के समान रूप रखता है?
Answer:
A rumour went about all over the valley that the great man who appeared like the Great Stone Face, had been seen at last for the first time. It was said that a youngman had left the valley many years before and gone to a seaport to settle and do business there. Gathergold was his name. Gathergold had to return to the valley it was in this way that they wanted to come to know of the prophecy was about to come true.

HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

The Great Stone Face 2 Question Answers HBSE 8th Class Question 3.
What did the poet himself say about his thoughts and poems?
कवि ने स्वयं अपने विचारों तथा अपनी कविताओं के प्रति क्या कहा ?
Answer:
The poet told Ernest that he could hear in his own songs the distant voice of a heavenly song. However, his life had been different from his poems. He added that he had grand dreams but they had been only dreams. Sometimes he had no confidence in Ms own thoughts.

The Great Stone Face 2 Question Answer HBSE 8th Class Question 4.
What made the poet proclaim Ernest was the Stone Face?
किस बात ने उसे स्वयं को यह घोषणा करने का आग्रह किया कि अर्नस्ट ही वज्रमुख है?
Answer:
The poet proclaimed that Ernest was the Great Stone Face when he (Ernest) after speaking to the gathering, took on a grand expression. The poet who was moved so much at this that he shouted “Behold! Ernest is himself the likeness of Great Stone Face.”

Question 5.
Write ‘Ernest’ or ‘Poet’, against each statement below:
नीचे दिए गये प्रत्येक वक्तव्य के सामने अर्नस्ट या कवि लिखो:
(i) There was a gap between his life and his words.
(ii) His words had the power of truth as they agreed with his thoughts.
(iii) His words were as soothing as a heavenly song but only as useful as a vague dream, _
(iv) His thoughts were worthy.
(v) Whatever he said was truth itself.
(vi) His poems were noble.
(vii) His life was nobler than all the poems.
(viii) He lacked faith in his own thoughts.
(ix) His thoughts had power as they agreed with the life he lived.
(x) Greatness lies in truth.Truth is best expressed in one’s actions. He was truthful, therefore, he was great.
Answer:
(i) Poet
(ii) Ernest
(iii) Poet
(iv) Ernest
(v) Ernest
(vi) Poet
(vii) Ernest
(viii) Poet
(ix) Ernest
(x) Ernest.

Question 6.
(i) Who, by common consent, turned out to be like the Great Stone Face?
सामान्य सहमति के आधार पर, कौन महान वज्रमुख के समान निकला?
Answer:
By conimon consent, Ernest turned out to be like the Great Stone Face.

(ii) Did Ernest believe that the old prophecy had come true? What did he say about it?
क्या अर्नस्ट को विश्वास थ्रा कि प्राचीन भविष्यवाणी सत्य हो गई है? उसने इसके प्रति क्या कहा?
Answer:
Ernest felt in the end, by dint of a grand expression that the prophecy had come true. He couldn’t deny the face that the possessed the good qualities as well as the face that was exactly like the Great Stone Face.

Working With The Language

Question 1.
Mark the meaning that best fits the word / pharse in the story.

(i) (sun) going down(a) becoming smaller
(b) weakening
(c) setting
(ii) brightening(a) making (it) look bright and cheerful
(b) lending (it) a special glow
(c) causing (it) to appear hopeful
(iii) spacious(a) lonely and wild
(b) big and wide
(c) special and important
(iv) prophecy(a) proverb
(b) prediction
(c) rumour
(v) marvellous(a) wonderful
(b) surprising
(c) shout
(vi) proclaim(a) reven
(b) declue
(c) shout
(vii) cease(a) happen
(b) stop
(c) remain
(viii) (a night’s)(a) stay
(b) safety
(c) hospitality
(ix) grazed(a) wandered about
(b) stared at
(c) thought of
(x) took on (an expression)(а) challenged
(b) resembled
(c) assumed

Answer:
(i) (c)
(ii) (a)
(iii) (b)
(iv) (b)
(v) (a)
(vi) (b)
(vii) (b)
(viii) (a)
(ix) (b)
(x) (c)

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Question 2.
(i) Read the following sentences.
(a) I do hope I’ll live to see him.
(b) He will come ! Fear not, Ernest, the man will come.
(c) Gathergold is arriving tomorrow, people said.
(d) Blood-and-Thunder starts his journey back to the valley next week, everyone proclaimed.
(e) The great man is going to spend his old age in his native town.

Notice that in the above sentences, verbs in bold type are in four different forms, denoting four important ways of expressing future time. None of these can be said to be exclusively used to show future time, though each is used to refer to some action in future.

(ii) Which form of the verb is more natural in these sentences? Encircle your choice.
(a) I’m not free this evening. I will work/ am working on a project.
(b) Have you decided where you will go for your higher secondary ? Yes, I have. I will go/ am going to the Kendriya Vidyailaya.
(c) Don’t worry about the dog. It won’t hurt/ isn’t hurting you.
(d) The weatherman has predicted that it will snow/is snowing in Ranikhet tonight.
(e) Swapna can’t go out this evening. Her father will come/ is coming to see her.
Answer:
(a) am working
(b) will go
(c) won’t hurt
(d) will snow
(e) is coming.

Question 3.
(i) Complete these pieces of conversation using ‘will’ or ‘going to’ with the verbs given.
(a) Rani: Why are you turning on the radio?
Ravi : I …………. (listen) to the news.
Answer:
will listen

(b) Rani: Oh, I can’t buy this book. I have no money.
Ravi: Don’t worry. I …………. (lend) you some.
Answer:
will lend

(c) Rani : Look at those dark clouds.
Ravi : I think it (rain).
Answer:
is going to rain

(d) Rani : What shall we have for dinner?
Ravi : I can’t decide.
Rani : Make up your mind.
Ravi : All right, then. We (have) fried rice and dry beans.
Answer:
are going to have

(e) Rani : Why are you filling the kettle with water ?
Ravi : I ………… (make) coffee.
Answer:
am going to make

(f) Rani : We need some bread and butter for breakfast.
Ravi : All right. I …………. (go) to the bakery and get some. (before he goes out, Ravi talks to their father)
Ravi : I ……………. (get) some bread and butter. Do you want any thing from the bakery?
Father : Yes, I want some salt biscuits.
Ravi : Fine, I …………….. (get) you a packet.
Answer:
will go, am going to get, will get.

(ii) Let pairs of children take turns to speak aloud the dialogues.
Answer:
Let pairs of children take turns to speak aloud the dialogues.

Speaking and Writing

Question 1.
Each of the following words has the sound /f/as in feel. The words on the left have it initially. Those on the right have it finally. Speak each word clearly.
flail – life
fact – tough
Philip – puff
fail – laugh
flowed – deaf

Question 2.
Underline the letter or letters representing /f/in each of the following words :
file – slough – faint
lift – cough – defence
afford – enough – photograph
staff – tough – aloof
affront – philosophy – sophistry
Answer:
file – sloughfaint
lift – cough – defence
afford – enough – photograph
staff – tough – aloof
affront – philosophy – sophistry

Question 3.
Imagine that you are the poet. You have come to your native valley to meet a famous preacher called Ernest. Narrate the incident of your first meeting with him.
Answer:
My Meeting with Ernest
I was born in the valley more than fifty years ago. I left the place at the age of fifteen. I reached the seaport named Khandala. It is a fine tourist spot. My business there is catering. I have a hotel for high class tourists. Even I have a passion for writing poems. I heard about a famous preacher called Ernest in my native valley. I went to see him. When I reached at his home, he had been holding a book, reading and looking at the Great Stone Face. He was a quiet, mild, hospitable and decent fellow. He welcomed me with all his love and care. We exchanged our thoughts of the lives. I recited some of my poems to him. Both of us were very glad to meet each other.

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Question 4.
(i) Put each of the following in the correct order to construct sentences.
→ a resident of Noida near Delhi, / is visually impaired/ George Abraham, ………………………………………
→ confidence and competitive spirit / and infuses discipline among the participants/ It provides ………………………………………
→ he/has helped /The brain behind the World Cup Cricket/ the disabled to dream ………………………………………
→ to the blind school in Delhi/It was a chance visit/that changed his life ………………………………………
→ sport is a powerful tool/the disabled/He believes that/for rehabilitation of ………………………………………
Answer:

  • George Abraham, a resident of Noida near Delhi, is visually impaired.
  • It provides confidence and competitive spirit and infuses discipline among the participants.
  • He, the brain behind the World Cup Cricket, has helped the disabled to dream.
  • It was a chance visit to the blind school in . Delhi that changed his life.
  • He believes that sports is a powerful tool for rehabilitation of the disabled.

(ii) Now rearrange the sentences above to construct a paragraph.
Answer:
George Abraham, a resident of Noida near Delhi, is visually impaired. He, the brain behind the World Cup Cricket, has helped the disabled to dream. It was a chance visit to the blind school in Delhi that changed his life. He believes that sports is a powerful tool for rehabilitation of the disabled. It provides confidence and competitive spirit and infuses discipline among the participants.

The Great Stone Face 2 Passages for Comprehension

Read the passages carefully and answer the questions that follow :

PASSAGE – 1

The years hurried on, and brought white hairs upon the head of Ernest, and made wrinkles across his forehead and furrows in his cheeks. He was an old man. But not in vain had he grown old; more numerous than the white hairs on his head were the wise thoughts in his mind. And Ernest had ceased to be obscure.
Questions:
(i) How had Ernest become famous?
(ii) Explain : ‘Ernest had ceased to be obscure.
(iii) Find out those words from the passage – whose meanings are given below : stopped, ran quickly, intelligent.
(iv) Write the opposites of : white, old, hurried on.
(v) Write the three degrees of adjectives – old, wise.
Answers :
(i) Ernest had become an old man now. He was known for his wisdom, not only in the valley but in the whole world.
(ii) Ernest had become famous, very popular.
(iii) ceased, hurried on, wise.
(iv) black, new (young), slowed down.
(v) They are given below :
old – older (elder) – oldest (eldest)
wise – wiser – wisest

PASSAGE – 2

Ernest threw a look of familiar kindness around upon his audience. He began to speak to the people what was in his heart and mind. His words had power.
Questions:
(i) What did Ernest speak to and to whom?
(ii) What did he say?
(iii) What was special about his words? Why?
(iv) Use ‘audience’ in sentence of your own.
Answers:
(i) As was his custom, Ernest spoke to his neighbours in the open air.
(ii) Ernest spoke to the people what was in his heart.
(iii) His words had great power (effect) because acted upon what he said. His life’s activities matched with his words.
(iv) Audience : The audience gave a standing ovation to the participants.

The Great Stone Face 2 Translation in Hindi

I. Before You Read

Many years passed. Ernest was now a man of middle age. To his neighbours, who neiier suspected that he was anything more than an ordinary and familiar face, he was only a humble and hardworking, though thoughtful, person.

But what about the old prophecy? Was it ever fulfilled? Let us read and find put.
कई वर्ष बीत गए। अर्नस्ट अब एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति हो चुका था। अपने पड़ोसियों के लिए, जिन्होंने कभी शक नहीं किया कि वह एक साधारण एवं सामान्य चेहरे से कुछ अधिक था, वह मात्र .एक विनम्र और मेहनती और विचारवान व्यक्ति था। परंतु पुरानी भविष्यवाणी का क्या हुआ ? क्या वह कभी भी पूरी हुई? आइए हम पढ़ें और पता लगाएँ।

1. The years hurried on, and brought white hairs upon the head of Ernest, and made wrinkles across his forehead and furrows in his cheeks. He was an old man. But not in vain had he grown old; more numerous than the white hairs on his head were the wise thoughts in his mind. And Ernest had ceased to be obscure.

Word Meaning: Obscure : unknown = (अप्रसिद्ध), In vain : uselessly = (व्यर्थ), Ceased : stopped = (रुक गया), Hurried : ran quickly = (तेजी से भागना), Numerous : many = (बहुत सा), Wrinkles : lines = (रेखाएँ)।

वर्षों बीत गये और अर्नस्ट के सिर के बाल सफेद हो गए। और उसके माथे पर झुर्रियाँ और गाल में सिकुड़न हो गई थी। वह अब वृद्ध व्यक्ति था पंरतु वह व्यर्थ में वृद्ध नहीं हुआ था उसके मन में विवेकशील विचारों की संख्या उसके सिर के सफेद बालों से कहीं अधिक थी। अर्नस्ट अब अनजाना व्यक्ति नहीं रह गया था।

2. Unsought for, undesired, had come the fame which so many seek. He had become famous beyond the limits of the Valley. College professors, and even the activemen of cities, came from far to see and converse with Ernest, and he received them with gentle sincerity, and spoke freely with them of whatever came uppermost, pr lay deepest in hie heart or their own. While they talked together his face would brighten, unawares, and shine upon them, as with a mild evening light.

कवि अर्नस्ट के पास बैठ गया और दोनों बातें करने लगे। कवि ने पहले कभी इतने बुद्धिमान और सज्जन व्यक्ति से बात नहीं की थी। जब अर्नस्ट कवि की बात सुन रहा था तो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे चट्टान का चेहरा भी उसकी बातें सुनने के लिए आगे झुक रहा है। उसने ध्यान से कवि के चेहरे की ओर देखा। अर्नस्ट ने कवि से पूछा कि वह कौन है, तो वह वही व्यक्ति है जिसके लिखी हुई कविताएँ अर्नस्ट पढ़ रहा है। अर्नस्ट इस बात से बहुत प्रभावित हुआ। उसने बार-बार कवि के चेहरे को चट्टान के चेहरे में मिलाया। बाद में वह उदास हो गया। कवि ने उससे पूछा कि वह उदास क्यों है तो उसने बताया कि वह सारी उम्र ऐसे व्यक्ति का इंतजार करता रहा जिसका चेहरा चट्टान के चेहरे की तरह हो। उसने सोचा था कि कवि वह व्यक्ति होगा जिसका चेहरा चट्टान की तरह है। कवि ने हंसकर कहा कि वह चट्टान के चेहरे के प्रतिरूप होने के लायक नहीं है, क्योंकि उसका जीवन उसकी कविताओं से बहुत अलग रहा है तथा उसकी अपनी कविताओं में व्यक्त विचारों में पूरी आस्था नहीं है। यह बात कहते हुए कवि उदास हो गया था, तथा अर्नस्ट भी उदास था।

HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

शाम के समय अर्नस्ट प्रतिदिन लोगों को संबोधित करता था उन्हें उपदेश देता था। उस दिन कवि भी उसके साथ गया। वहाँ से उसे चट्टान का चेहरा भी दिख रहा था। अर्नस्ट ने बोलना शुरू किया। उसके शब्दों में शक्ति थी क्योंकि उनका उसके विचारों से सामंजस्य था और उसका जीवन उसके विचारों पर आधारित था। जब कवि उसे सुन रहा था तो उसे लग रहा था कि अर्नस्ट का जीवन उसकी कविताओं से ज्यादा महान् है। बोलते बोलते अचानक अर्नस्ट के चेहरे पर एक भाव आया जो बहुत महान् था। उस क्षण कवि को लगा कि अर्नस्ट का चेहरा बिल्कुल चट्टान के चेहरे की तरह लग रहा है। उसने सबसे कहा कि अर्नस्ट ही चट्टान के चेहरे का प्रतिरूप है। सब लोगों ने देखा और उन्हें भी लगा कि अर्नस्ट का चेहरा बिल्कुल चट्टान के चेहरे की तरह लग रहा है। इस तरह यह कहानी पूरी हो गई लेकिन अर्नस्ट अभी भी एसे व्यक्ति का इंतजार कर रहा था जो उससे भी बुद्धिमान हो।

II. Before You Read

Many years passed. Ernest was now a man of middle age. To his neighbours, who never suspected that he was anything more than an ordinary and familiar face, he was only a humble and hardworking, though thoughtful, person.

But what about the old prophecy? Was it ever fulfilled? Let us read and find out.

कई वर्ष बीत गए। अर्नस्ट अब एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति हो चुका था। अपने पड़ोसियों के लिए, जिन्होंने कभी शक नहीं किया कि वह एक साधारण एवं सामान्य चेहरे से कुछ अधिक था, वह मात्र एक विनम्र और मेहनती और विचारवान व्यक्ति था। परंतु पुरानी भविष्यवाणी का क्या हुआ? क्या वह कभी भी पूरी हुई? आइए हम पढ़ें और पता लगाएँ।

1. The years hurried on, and brought white hairs upon the head of Ernest, and made wrinkles across his forehead and furrows in his cheeks. He was an old man. But not in vain had he grown old; more numerous than the white hairs on his head were the wise thoughts in his mind. And Ernest had ceased to be obscure.

Word Meaning : Obscure : unknown = (अप्रसिद्ध), In vain : uselessly = (व्यर्थ), Ceased : stopped = (रुक गया), Hurried : ran quickly = (तेजी से भागना), Numerous : many = (बहुत सा), Wrinkles : lines = (रेखाएँ)।

वर्षों बीत गये और अर्नस्ट के सिर के बाल सफेद हो गए। और उसके माथे पर झुर्रियाँ और गाल में सिकुड़न हो गई थी। वह . अब वृद्ध व्यक्ति था परंतु वह व्यर्थ में वृद्ध नहीं हुआ था उसके मन में विवेकशील विचारों की संख्या उसके सिर के सफेद बालों से कहीं अधिक थी। अर्नस्ट अब अनजाना व्यक्ति नहीं रह गया था। .

2. Unsought for, undesired, had come the fame which so many seek. He had become famous beyond the limits of the valley. College professors, and even the active men of cities, came from far to see and converse with Ernest, and he received them with gentle sincerity, and spoke freely with them of whatever came uppermost, or lay deepest in his heart or their own. While they talked together, his face would brighten, unawares, and shine upon them, as with a mild evening light.

Word Meaning : Unsought : unseek = (बिना ढूढी), Undesired : not wished for = (अनचाही), Converse : to talk = (बात करना), Mild : soft = (कोमल)।

बिना ढूँढे, बिना चाहे, वह प्रसिद्धि आ गई थी जिसे कई लोग पाना चाहते हैं। वह घाटी की सीमाओं से परे तक प्रसिद्ध हो चुका था। कॉलेज प्रोफेसर और यहाँ तक कि शहरों के सक्रिय व्यक्ति भी दूर-दूर से अर्नस्ट को देखने और उसके साथ बात करने आते थे। और वह उनसे नम्र भाव से मिलता था और उनसे खुलकर बोलता था जो भी उसके दिल के ऊपरी तथा चरम बिंदु से निकलता था और उनकी भी सुनता था। जब वे आपस में बात करते थे, उसका चेहरा दमकता, अनजान और उन पर चमकता था, जैसा कि ढलती शाम की रोशनी के साथ।

3. While Erne: . had been growing old, God had granted a new poet to this earth. He, too, was a native of the valley, but had spent the greater part of his life in distant cities, pouring out his sweet music everywhere. Neither was the Great Stone Face forgotten, for the poet had celebrated it in a poem. The songs of this poet found their way to Ernest. He read them after his customary toil, seated on the bench before his cottage door. As he read he lifted his eyes to the mountain.

Word Meaning : Distant : far away = (दूर का),Customary : routine work = (दैनिक), Toil : hard work = (परिश्रम), Cottage : hut = (झोंपड़ी)।

जब अर्नस्ट वृद्ध में रहा था, तब भगवान ने एक नया कवि पृथ्वी को दिया था। वह भी घाटी का वासी था परंतु उसने अपने जीवन का अधिकतर भाग सुदूर शहरों में व्यतीत किया था, हर जगह अपना मीठा संगीत बिखेरते हुए। न ही महान वज्रमुख को भुलाया जा सका था क्योंकि कवि ने उसे एक कविता में स्थान दिया था। कवि के इन गीतों ने अर्नस्ट तक अपनी जगह ढूँढ ली थी। वह अपनी दैनिक मेहनत के बाद उन्हें पढ़ता था। अपनी झोपड़ी के दरवाजे के बाहर बेंच पर बैठकर जैसे ही वह पढ़ता, वह अपनी आँखें पहाड़ी की तरफ उठा लेता था।

4. “O Great Stone Face,” he said, “is not this man worthy to be your likeness?” The face seemed to smile, but did not answer.
Now it happened that the poet, though he lived so far away, had not only heard of Ernest but had thought much about his character and wished to meet this man whose wisdom walked hand in hand with the noble simplicity of his life. One summer day, therefore, he arrived at Ernest’s door, where he found the good old man holding a book in his hand, which he read and, then, with a finger between the leaves, looked lovingly at the Great Stone Face.

Word Meaning : Worthy : able to = (योग्य), Simplicity: Sober = (सादगी)।
“ओ महान वज्रमुख” उसने कहा, “क्या यह मनुष्य तुम्हारी समानता बनने योग्य नहीं है”?
चेहरा मुस्कुराता हुआ प्रतीत होता था। परंतु उसने कुछ उत्तर नहीं दिया।
अब ऐसा हुआ कि कवि ने यद्यपि वह दूर रहता था न केवल अर्नस्ट की बात सुन ली अपितु उसके चरित्र के प्रति भी सोचा और उस व्यक्ति से मिलने की इच्छा हुई जिसके बुद्धिमता और साधारण चरित्र के चर्चे थे। इसलिए एक गर्मी के दिन वह अर्नस्ट के द्वार पर पहुंचा जहाँ उसने उस अच्छे वृद्ध व्यक्ति को एक पुस्तक अपने हाथ में पकड़े हुए पाया, जो वह पढ़ता था और तब पेजों के बीच में ऊँगली रखकर महान वज्रमुख को देखता था।

5. “Good evening,” said the poet. “Can you give a traveller a night’s shelter?”
“Gladly,” answered Ernest; and then he added, smiling, “I think I never saw the Great Stone Face look so hospitably at a stranger.”

HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

Word Meaning : Night’s shelter : (रात के लिए आश्रय), Stranger : (अजनबी)।
“नमस्ते” कवि बोला। “क्या तुम एक यात्री को रात भर के लिए विश्राम का स्थान दे सकते हो?”
“बहुत प्रसन्नता से,” अर्नस्ट ने उत्तर दिया, और तब उसने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरा विचार है कि मैंने कभी भी इस महान वज्रमुख को इतनी दयालुता से एक अपरिचित व्यक्ति पर देखते नहीं देखा।

6. The poet sat down beside him, and he and Ernest talked together. Never before had the poet talked with a man like Ernest, so wise, and gentle, and kind. Ernest, on the other hand, was moved by the living images flung out of the poet’s mind.

Word Meaning : Beside : by the side of = (बगल में, पास में),On the other hand : (दूसरी ओर), Moved by : (प्रभावित हुआ)।
कवि उसके पास बैठ गया और वह तथा अर्नस्ट मिलकर बातें करने लगे। कवि ने इतने विवेकशील, इतने सज्जन तथा इतने कृपालु व्यक्ति अर्नस्ट के साथ पहले कभी भी बातें करते हुए नहीं देखा था। अर्नस्ट भी कभी के मस्तिष्क से बाहर निकली सजीव , चित्रण की बातें सुनकर पहले कभी इतना प्रभावशाली नहीं हुआ।

7. As Ernest listened to the poet, he imagined that the Great Stone Face was bending forward to listen too. He gazed into the poet’s eyes.
“Who are you, my gifted guest?” he asked.
The poet laid his finger on the book that Ernest had been reading. “You have read these poems,” said he. “You know me, then, for I wrote them.”

Word Meaning: Laid on : (हाथ किसी वस्तु पर रखना), Listened to: hear = (किसी को सुनाना)।
जैसा कि अर्नस्ट ने कवि को सुना, उसने सोचा कि महान वज्रमुख आगे को सुनने के लिए भी झुक रहा है ? उसने कवि की आँखों में घूरकर देखा।
“तुम कौन हो,” मेरे वरदानस्वरूप अतिथि ?” उसने पूछा। कवि ने अपनी अंगुली उस पुस्तक पर रख दी जो अर्नस्ट पढ़ रहा था। “तुमने ये कविताएँ पढ़ी हैं”, उसने कहा, “तुम मुझे जानते हो क्योंकि यह मैंने लिखी हैं।”

8. Again and again, Ernest examined the poet’s features; he turned towards the Great Stone Face then back. He shook his head and sighed.
“Why are you sad?” inquired the poet.
“Because,” replied Ernest, “all through life I have awaited the fulfilment of a prophecy, and when I read these poems, I hoped that it might be fulfilled in you.”

Word Meaning : Examined : (निरीक्षण किया), Feature : signs, characteristics = (चिह्न, लक्षण) Sighed : breath heavily = (आह भरना)।
अर्नस्ट ने कवि के लक्षणों का बार-बार निरीक्षण किया। वह महान वज्रमुख की ओर मुड़ा। उसने अपना हाथ मिलाया और ठण्डी आह भरी।
“तुम उदास क्यों हो ?” कवि ने पूछा।
“क्योंकि, समस्त जीवन मैं एक भविष्यवाणी के पूरा होने की प्रतीक्षा करता रहा हूँ और जब मैं ये कविताएँ पढ़ता हूँ, मुझे आशा है कि यह तुम ही हो सकते हो” अर्नस्ट ने उत्तर दिया।

9. “You hoped,” answered the poet, faintly smiling, “to find in me the likeness of the Great Stone Face. I am not worthy to be its likeness.”
“And why not?” asked Ernest. He pointed to the book. “Are not those thoughts worthy?”

Word Meaning : Faintly: dimly = (धुंधला, हल्का), Pointed : hinted = (संकेत किया)।
कवि ने हल्का सा मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “कि तुम मुझमें उस महान वज्रमुख की समानता पाने की आशा करते हो ? मैं इस समानता के योग्य नहीं हूँ।”
“और क्यों नहीं” ? अर्नस्ट ने पूछा। उसने पुस्तक की ओर संकेत किया। “क्या वे विचार इस योग्य नहीं हैं।”

10. “You can hear in them the distant voice of a heavenly song. But my life, dear Ernest, has not corresponded with my thoughts. I have had grand dreams, but they have been only dreams. Sometimes I lack faith in my own thoughts. Why, then, pure seeker of the good and true, should you hope to find me in the face of the mountain?”

Word Meaning: Heavenly: Godly = (ईश्वरीय), Seeker of good : (सत्य की खोज करने वाला), Lack: fall short of = (कमी होना), True : (सच्चा)।

“तुम अपने आध्यात्मिक गीतों की आवाज दूर से आती सुन सकते हो। परंतु मेरे प्यारे अर्नस्ट, मेरा जीवन मेरे विचारों से भिन्न रहा है। मैंने बहुत बड़े स्वप्न देखे हैं। परंतु वह केवल स्वप्न ही रहे हैं। कभी-कभी मैं अपने विचारों में कमी देखता हूँ। तब तुम इस पर्वत के चेहरे के सामने क्यों अच्छाई और सत्य के शुद्ध खोजी को मेरे भीतर पाने की आशा करते हो ?”

11. The poet spoke sadly and his eyes were wet with tears. So, too, were those of Ernest. 1 At the hour of sunset, as had long been his custom, Ernest was to speak to a group of neighbours in the open air. Together he and the poet went to the meeting place, arm in arm. From there could be seen the Great Stone Face. :

Word Meaning: Sunset : (सूर्यास्त),Custom: (प्रथा रीति-रिवाज), Arm in arm : (हाथ में हाथ डालकर)। कवि ने उदास होकर कहा और उसकी आँखें आँसुओं से गीली हो गईं। ऐसे ही अर्नस्ट की भी हो गईं।
सूर्यास्त के समय जैसा कि लंबे समय से उसकी प्रथा रही थी, अर्नस्ट ने पड़ोसियों के एक समूह को खुली हवा में प्रवचन सुनाना था। वह और कवि दोनों मिलकर सभा-स्थल पर बाजू में बाजू डालकर चले। वहाँ से वे उस महान वज्रमुख को देख सकते थे।

12. Ernest threw a look of familiar kindness around upon his audience. He began to speak to the people what was in his heart and mind. His words had power, because they agreed with his thoughts, and his thoughts had reality and depth, because they harmonised with the life which he had always lived.

Word Meaning : Familiar : (जानी-पहचानी), Kindness : (दयालुता), Agreed with : (सहमत हुए)।
अर्नस्ट ने अपने दर्शकों पर एक जानी-पहचानी दयालुतापूर्ण दृष्टि डाली और उसने जो कुछ उसके मन तथा आत्मा में विद्यमान था लोगों को बताना आरंभ किया। उसके शब्दों में शक्ति थी क्योंकि वे उसके विचारों से सहमत हो रहे थे और उसके विचारों में भी वास्तविकता और गहराई थी क्योंकि वे उसके बिताए गए जीवन से संबंधित थे।

13. It was not mere breath that the preacher uttered; they were the words of life. A life of good deeds and selfless love was melted into them. The poet, as he listened, felt that the life and character of Ernest were a nobler strain of poetry than he had ever written. His eyes filled with tears and he said to himself that never was there so worthy a sage as that mild, sweet, thoughtful face, with the glory of white hair diffused about it.

Word Meaning: Melted:to turn into liquid = (पिघलना),Preacher:speaker = (वक्ता), Uttered: spoke = (बोला), Selfless : true = (स्वार्थहीन), Strain : exert one’s power = (अपनी शक्ति लगाना)।

HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

वह मात्र श्वास नहीं था जो कि वक्ता ने कहा, वे जीवन के शब्द थे। एक अच्छे कार्यों का जीवन एवं स्वार्थहीन प्रेम उनमें घुला हुआ था। कवि, जैसा कि उसने सुना, महसूस किया कि अर्नस्ट का जीवन एवं चरित्र काव्य का एक आदर्श जज्बा थे, जैसा उसने लिखा था उससे कहीं अधिक। उसकी आँखों में आँसू आ गए और उसने स्वयं से कहा कि कभी इस प्यारे विचारवान चेहरे जैसा मूल्यवान साधु नहीं देखा जिसके सफेद बाल स्वयं महानता की गाथा कह रहे हों।

14. At a distance, but clearly to be seen, high up in the golden light of the setting sun, appeared the Great Stone Face, with white mists around it, like the white hairs around the brow of Ernest. At that moment, Ernest’s face took on an expression so grand that the poet was moved to throw his arms up and shout. “Behold! Behold! Ernest is himself the likeness of the Great Stone Face!”

Word Meaning : Moment : smallest time possible = (क्षण),Expression : (अभिव्यक्ति), Shout: cry aloud = (चिल्लाना)। कुछ दूरी पर, किंतु स्पष्ट दिखने वाला, छिपते हुए सूर्य की सुनहरी रोशनी में प्रकट हो गया वह महान वज्रमुख जिसके चारों ओर सफेद धुंध के बादल थे जैसे अनस्ट के भौंहों के सफेद बाल हों। उस क्षण अर्नस्ट के चेहरे पर इतना गौरवपूर्ण दृश्य था कि कवि उस पर बहुत प्रभावित हो गया कि उसने उस पर अपनी बाहें डाल दी और चिल्ला उठा : देखो! देखो! अर्नस्ट स्वयं ही महान वज्रमुख बन गया है।”

15. Then all the people looked, and saw that what the poet said was true. The prophecy was fulfilled. But Ernest, having finished what he had to say, took the poet’s arm, and walked slowly homeward, still hoping that some wiser and better man than himself would by and by appear, bearing a resemblance to the Great Stone Face.

Word Meaning : Homeward : towards home = (घर की तरफ),Bearing : having = (रखना)।

तब सभी लोगों ने देखा और पाया कि जो कवि ने कहा वह सच था। भविष्यवाणी संपूर्ण हुई परंतु अर्नस्ट ने जो कहना था कह डाला और कवि की बाहें पकड़ ली और धीरे-धीरे घर की ओर चल दिया। वह अब भी आशा कर रहा था कि कोई उससे अधिक विवेकशील तथा अच्छा व्यक्ति अवश्य प्रकट होगा जिसकी समानता उस महान वज्रमुख से अवश्य होगी।

The Great Stone Face 2 Summary in English

Ernest had become a middle-aged man. He became famous for his simplicity and goodness. He was intelligent and helpful. Time passed quickly. His hair had become white. He was well known throughout the world. People visited him for wise consultations. They looked at Great Stone Face. They could not remember that they had seen its resembling face one day.

A new poet also visited his native valley. He had visited mapy cities. His songs appealed Ernest, who sang them and looked above. He felt the resemblance of this poet’s face with the Great Stone Face. So, he wanted to see Ernest. He reached there. He found him wise, gentle and kind. Ernest too, was moved by the poet’s clear mind. He told him that he had written the book which Ernest was reading. Ernest looked at his’features and expressed a deep thought. He told that he had found, his likeness with the “Great Stone Face.”

The poet did not agree with this view. Ernest pointed to the book. The poet replied that his life had been different from the songs of that book. These songs were only dreams in which he had no faith. So, he did not deserve to have resemblance with the Great Stone Face. Both became sad as tears welled from the eyes of the both.

At sunset, Ernest used to hold an open meeting with a group of neighbours. The poet accompanied him on that day. From there, they could see the Great Stone Face. Ernest started speaking in his powerful words. The audience agreed with him. They and the poet were impressed by his noble behaviour. His practical life matched with his principles and thoughts.

For away, they saw the Great Stone Face. Ernest’s white hair matched with white clouds. Its impression became awfully grand. The poet was so much impressed that he threw his arms around Ernest and shouted the likeness with “Behold! Behold! Ernest is himself” The people looked Great Stone Face. They agreed the story was complete. But Ernest finished his speech and walked home. He helped some one would come to have the likeness with the Great Stone Face.

The Great Stone Face 2 Summary in Hindi

अर्नस्ट अब भी उसी घाटी में रहता था तथा अब एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति था। धीरे-धीरे उसकी ख्याति पूरी घाटी में एक सज्जन तथा कोमल हृदय के रूप में फैल गई थी। ऐसा कोई दिन नहीं बीतता था जब वह लोगों की भलाई के लिए कोई काम न करता हो। हालांकि उसके आस-पास के लोग उसे एक साधारण व्यक्ति ही समझते थे लेकिन उसके होठों से ऐसे विचार व्यक्त होते थे जैसे किसी ने कभी नहीं किए थे। अब अर्नस्ट घाटी के बाहर भी बहुत मशहूर हो गया था। लोग दूर-दूर से उससे बात करने आते थे। जब लोग उससे मिलकर लौटते तो वह चट्टान के चेहरे की ओर देख कर सोचते कि शायद उन्होंने उसका प्रतिरूप देखा है। लेकिन उन्हें याद नहीं है कि कहाँ।

जब अर्नस्ट वृद्ध हो रहा था तभी एक नया कवि भी उसकी घाटी में आया। उसने बहुत से शहरों की यात्रा कर रखी थी। इस कवि के लिखे हुए गीत अर्नस्ट तक पहुंच गए। वह अपने दरवाजे पर बैठकर उन्हें गाता था। उस चट्टान के चेहरे से कहता था कि क्या ये कवि उसका प्रतिरूप होने के लायक नहीं है।

उस कवि ने भी अनस्ट की ख्याति सुनी। वह अनस्ट के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुआ तथा उसने अर्नस्ट से मिलने का फैसला किया। एक बार गर्मी के दिनों में वह अर्नस्ट से मिलने घाटी में आया। उसने अर्नस्ट से पूछा कि क्या वह उसे एक रात का आश्रय दे सकता है। अर्नस्ट ने इस बात को सहर्ष स्वीकार किया।

कवि अर्नस्ट के पास बैठ गया और दोनों बातें करने लगे। कवि ने पहले कभी इतने बुद्धिमान और सज्जन व्यक्ति से बात नहीं की थी। जब अर्नस्ट कवि की बात सुन रहा था तो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे चट्टान का चेहरा भी उसकी बातें सुनने के लिए आगे झुक रहा है। उसने ध्यान से कवि के चेहरे की ओर देखा। अर्नस्ट ने कवि से पूछा कि वह कौन है, तो वह वही व्यक्ति है जिसके लिखी हुई कविताएँ अर्नस्ट पढ़ रहा है। अर्नस्ट इस बात से बहुत प्रभावित हुआ। उसने बार-बार कवि के चेहरे को चट्टान के चेहरे में मिलाया। बाद में वह उदास हो गया। कवि ने उससे पूछा कि वह उदास क्यों है तो उसने बताया कि वह सारी उम्र ऐसे व्यक्ति का इंतजार करता रहा जिसका चेहरा चट्टान के चेहरे की तरह हो। उसने सोचा था कि कवि वह व्यक्ति होगा जिसका चेहरा चट्टान की तरह है। कवि ने हंसकर कहा कि वह चट्टान के चेहरे के प्रतिरूप होने के लायक नहीं है, क्योंकि उसका जीवन उसकी कविताओं से बहुत अलग रहा है तथा उसकी अपनी कविताओं में व्यक्त विचारों में पूरी आस्था नहीं है। यह बात कहते हुए कवि उदास हो गया था, तथा अर्नस्ट भी उदास था।

HBSE 8th Class English Solutions Honeydew Chapter 10 The Great Stone Face 2

शाम के समय अर्नस्ट प्रतिदिन लोगों को संबोधित करता था उन्हें उपदेश देता था। उस दिन कवि भी उसके साथ गया। वहाँ से उसे चट्टान का चेहरा भी दिख रहा था। अर्नस्ट ने बोलना शुरू किया। उसके शब्दों में शक्ति थी क्योंकि उनका उसके विचारों से सामंजस्य था और उसका जीवन उसके विचारों पर आधारित था। जब कवि उसे सुन रहा था तो उसे लग रहा था कि अर्नस्ट का जीवन उसकी कविताओं से ज्यादा महान् है। बोलते बोलते अचानक अर्नस्ट के चेहरे पर एक भाव आया जो बहुत महान् था। उस क्षण कवि को लगा कि अर्नस्ट का चेहरा… बिल्कुल चट्टान के चेहरे की तरह लग रहा है। उसने सबसे कहा कि अर्नस्ट ही चट्टान के चेहरे का प्रतिरूप है। सब लोगों ने देखा और उन्हें भी लगा कि अर्नस्ट का चेहरा बिल्कुल चट्टान के चेहरे की तरह लग रहा है। इस तरह यह कहानी पूरी हो गई लेकिन अर्नस्ट अभी भी एसे व्यक्ति का इंतजार कर रहा था जो उससे भी बुद्धिमान हो।

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HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

Haryana State Board HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 14 HBSE प्रश्न 1.
एकपदेन उत्तरत-
(क) सूर्यः कस्यां दिशायाम् उदेति?
उत्तरम्:
पूर्वदिशायाम्

(ख) आर्यभटस्य वेधशाला कुत्र आसीत्?
उत्तरम्:
पाटलिपुत्रे

(ग) महान् गणितज्ञ: ज्योतिर्विच्च कः अस्ति?
उत्तरम्:
आर्यभटः

(घ) आर्यभटेन कः ग्रन्थः रचितः?
उत्तरम्:
आर्यभटीयम्

(ङ) अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम किम् अस्ति?
उत्तरम्:
आर्यभटम्।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

Sanskrit Class 8 Chapter 14 Pdf HBSE प्रश्न 2.
सन्धिविच्छेदं कुरुत-
ग्रन्थोऽयम् – ______ + _________
सूर्याचलः – ______ + _________
तथैव – ______ + _________
कालातिगामिनी – ______ + _________
प्रथमोपग्रहस्य – ______ + _________
उत्तरम्:
ग्रन्थोऽयम् – ग्रन्थः + अयम्
सूर्याचलः – सूर्य + अचलः
तथैव – तथा + एव
कालातिगामिनी – काल + अतिगामिनी
प्रथमोपग्रहस्य – प्रथम + उपग्रहस्य

Class 8th Sanskrit Chapter 14 आर्यभटः प्रश्न 3.
अधोलिखितपदानां विपरीतार्थकपदानि लिखत-
उदयः – __________
अचल: – __________
अन्धकारः – __________
स्थिरः – __________
समादरः – __________
उत्तरम्:
उदयः – अस्तः
अचल: – चलः
अन्धकारः – प्रकाशः
स्थिरः – अस्थिरः
समादरः – निरादरः

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

Sanskrit Class 8 Chapter 14 आर्यभटः प्रश्न 4.
अधोलिखितानि पदानि आधृत्य वाक्यानि रचयत-
साम्प्रतम् – _______________
निकषा – _______________
परितः – _______________
उपविष्टः – _______________
कर्मभूमिः – _______________
वैज्ञानिक: – _______________
उत्तरम्:
साम्प्रतम् – (अब) साम्प्रतं क्रीडनीयम्।
निकषा – (निकट) गृह निकषा मन्दिरम् अस्ति।
परितः – (चारों ओर) विद्यालय परितः वृक्षाः सन्ति।
उपविष्टः – (बैठा हुआ) सः उपविष्टः पठति।
कर्मभूमिः – (कर्मभूमि) पठनमेव में कर्मभूमिः।
वैज्ञानिक: – (वैज्ञानिक) अहं वैज्ञानिकः भवितुम् इच्छामि।

Sanskrit Class 8 Chapter 14 HBSE प्रश्न 5.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
नौकाम्, पृथिवी, तदा, चला, अस्तं
(क) सूर्यः पूर्वदिशायाम् उदेति पश्चिमदिशि च __________ गच्छति।
(ख) सूर्यः अचलः पृथिवी च __________।
(ग) __________ स्वकीये अक्षे घूर्णति।
(घ) यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते __________ चन्द्रग्रहणं भवति।
(ङ) नौकायाम् उपविष्टः मानवः __________ स्थिरामनुभवति।
उत्तरम्:
(क) अस्तं
(ख) चला
(ग) पृथिवी
(घ) तदा
(ङ) नौकाम्

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

प्रश्न 6.
उदाहरणानुसारं पदपरिचयं ददत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः -1
उत्तरम्:
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः -2

प्रश्न 7.
‘मति’ शब्दस्य रूपाणि पूरयत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः -3
उत्तरम्:
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः -4

योग्यता-विस्तारः

आर्यभट को अश्मकाचार्य नाम से भी जाना जाता है। यही कारण है कि इनके जन्मस्थान के विषय में विवाद है। कोई इन्हें पाटलिपुत्र का कहते हैं तो कोई महाराष्ट्र का।

आर्यभट ने दशमलव पद्धति का प्रयोग करते हुए π (पाई) का मान निर्धारित किया। उन्होंने दशमलव के बाद के चार अंकों तक π के मान को निकाला। उनकी दृष्टि में π का मान है 3.1416। आधुनिक गणित में π का मान, दशमलव के बाद सात अंकों तक जाना जा सका है, तदनुसार π = 3.14169261

भारतीयज्योतिषशास्त्र- वैदिक युग में यज्ञ के काल अर्थात् शुभ मुहूर्त के ज्ञान के लिए ज्योतिषशास्त्र का उद्भव हुआ। कालान्तर में इसके अन्तर्गत ग्रहों का संचार, वर्ष, मास, पक्ष, वार, तिथि, घंटा आदि पर गहन विचार किया जाने लगा। लगध, आर्यभट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य, बालगंगाधर तिलक, रामानुजन् आदि हमारे देश के प्रमुख ज्योतिषशास्त्री हैं। आर्यभटीयम्, सौरसिद्धान्तः, बृहत्संहिता, लीलावती, पञ्चसिद्धान्तिका आदि ज्योतिष के प्रमुख संस्कृत ग्रन्थ हैं।

आर्यभटीयम्- आर्यभट ने 499 ई. में इस ग्रन्थ की रचना की थी। यह ग्रन्थ 20 आर्याछन्दों में निबद्ध है। इसमें ग्रहों की गणना के लिए कलि संवत् (499 ई.में 3600 कलि संवत्) को निश्चित किया गया है।

गणितज्योतिष- संख्या के द्वारा जहाँ काल की गणना हो, वह गणितज्योतिष है। ज्योतिषशास्त्र की तीन विधाओं यथा-सिद्धान्त, फलित एवं गणित में यह सर्वाधिक प्रमुख है।

फलितज्योतिष- इसके अन्तर्गत ग्रह नक्षत्रों आदि की स्थिति के आधार पर भाग्य, कर्म आदि का विवेचन किया जाता है।

वेधशाला- ग्रह, नक्षत्र आदि की गति, स्थिति की. जानकारी जहाँ गणना तथा यान्त्रिक विधि के आधार पर ली जाये वह वेध शाला है। यथा-जन्तर-मन्तर।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

मूलपाठः

पूर्वदिशायाम् उदेति सूर्यः पश्चिमदिशायां च अस्तं गच्छति इति दृश्यते हि लोके। परं न अनेन अवबोध्यमस्ति यत्सूर्यो गतिशील इति। सूर्योऽचल: पृथिवी च चला या स्वकीये अक्षे घूर्णति इति साम्प्रतं सुस्थापितः सिद्धान्तः। सिद्धान्तोऽयं प्राथम्येन येन प्रवर्तितः, स आसीत् महान् गणितज्ञः ज्योतिर्विच्च आर्यभटः।

पृथिवी स्थिरा वर्तते इति परम्परया प्रचलिता रूढिः तेन प्रत्यादिष्टा। तेन उदाहृतं यद् गतिशीलायां नौकायाम् उपविष्टः मानवः नौकां स्थिरामनुभवति, अन्यान् च पदार्थान् गतिशीलान् अवगच्छति। एवमेव गतिशीलायां पृथिव्याम् अवस्थितः मानवः पृथिवीं स्थिरामनुभवति सूर्यादिग्रहान् च गतिशीलान् वेत्ति।

476 तमे ख्रिस्ताब्दे (षट्सप्तत्यधिकचतुःशततमे वर्षे) आर्यभटः जन्म लब्धवानिति तेनैव विरचिते ‘आर्यभटीयम्’ इत्यस्मिन् ग्रन्थे उल्लिखितम्। ग्रन्थोऽयं तेन त्रयोविंशतितमे वयसि विरचितः। ऐतिहासिकस्त्रोतोभिः ज्ञायते यत् पाटलिपुत्र निकषा आर्यभटस्य वेधशाला आसीत्। अनेन इदम् अनुमीयते यत् तस्य कर्मभूमिः पाटलिपुत्रमेव आसीत्।

आर्यभटस्य योगदानं गणितज्योतिषा सम्बद्धं वर्तते यत्र संख्यानाम् आकलनं महत्त्वम् आदधाति। आर्यभटः फलितज्योतिषशास्त्रे न विश्वसिति स्म। गाणितीयपद्धत्या कृतप आकलनमाधृत्य एव तेन प्रतिपादितं यद् ग्रहणे राहु-केतुनामको, दानवौ नास्ति कारणम्। तत्र तु सूर्यचन्द्रपृथिवी इति त्रीणि एव कारणानि। सूर्य परितः भ्रमन्त्याः पृथिव्याः, चन्द्रस्य परिक्रमापथेन संयोगाद् ग्रहणं भवति। यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा चन्द्रग्रहणं भवति। तथैव पृथ्वीसूर्ययोः मध्ये समागतस्य चन्द्रस्य छायापातेन सूर्यग्रहणं दृश्यते।

समाजे नूतनानां विचाराणां स्वीकारे प्रायः सामान्यजनाः काठिन्यमनुभवन्ति। भारतीयज्योतिःशास्त्रे तथैव आर्यभटस्यापि विरोधः अभवत्। तस्य सिद्धान्ताः उपेक्षिताः। स पण्डितम्मन्यानाम् उपहासपात्रं जातः। पुनरपि तस्य दृष्टि: कालातिगामिनी दृष्टा। आधुनिकैः वैज्ञानिकैः तस्मिन्, तस्य च सिद्धान्ते समादरः प्रकटितः। अस्मादेव कारणाद् अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभट इति कृतम्।

वस्तुतः भारतीयायाः गणितपरम्परायाः अथ च विज्ञानपरम्परायाः असौ एकः शिखरपुरुषः आसीत्।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

सन्धिविच्छेद:
सूर्यो गतिशील इति = सूर्यः + गतिशीलः + इति।
सूर्योऽचलः = सूर्य+ + अचल:।
सिद्धान्तोऽयम् = सिद्धान्तः + अयम्।
ज्योतिर्विच्च = ज्योतिः + विद् + च।
प्रत्याविष्य = प्रति + आदिष्य।
ख्रिस्ताब्दे = ख्रिस्त + अब्दे।
सप्तत्यधिक = सप्तति + अधिक।
तेनैव = तेन + एव।
इत्यस्मिन् = इति + अस्मिन्।
उल्लिखितम् = उत् + लिखितम्।
ग्रन्थोऽयम् = ग्रन्थः + अयम्।
नास्ति = न + अस्ति।
तथैव = तथा + एव।
आर्यभटस्यापि = आर्यभटस्य + अपि।
पुनरपि = पुनः + अपि।

संयोगः
अवबोध्यमस्ति = अवबोध्यम् + अस्ति।
स्थिरामनुर्भवति = स्थिराष्य + अनुभवति।
एवमेव = एवम् + एव।
लब्धवानिति = लब्धवान् + इति।
पाटलिपुत्रमेव = पाटलिपुत्रम् + एव।
आकलनमाधृत्य = आकलनम् + आधृत्य।
समागतस्य = सम् + आगतस्य।
काठिन्यमनुभवन्ति = काठिन्यम् + अनुभवन्ति।
समादरः = सम् + आदरः।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

पदार्थबोध:
उदेति = उदित होता है (उद्गच्छति, चकास्ति)।
लोके = संसार में (संसारे, जगति)।
अवबोध्यम् = जानने योग्य (ज्ञातव्यम्, ज्ञानीयम्)।
अचलः = गतिहीन, स्थिर (स्थिर:)।
चला = अस्थिर, गतिशील (गतिशीला, अस्थिरा)।
स्वकीये = अपने (आत्मीये)।
अक्षे = धुरी पर (ध्रुवके)।
घूर्णति = घूमती है (घूर्णनं करोति)।
सुस्थापितः = भली-भाँति स्थापित (सम्यक् स्थापितः)।
प्राथम्येन = प्राथमिकता से (प्राथमिकतया)।
ज्योतिविद् = ज्योतिषी (ज्योतिष्क:)।
रूढ़िः = प्रथा, परम्परा।
प्रत्यादिष्टा = खण्डन किया (खण्डितवान्)।
ख्रिस्ताब्दे = ईस्वी में (ईस्वीये)।
षट्सप्ततिः = छिहत्तर (षडधिकसप्ततिः)।
वयसि = आयु में (आयौ)।
निकषा = निकट (समीपे)।
वेधशाला = ग्रह-नक्षत्रों को जानने की प्रयोगशाला (ग्रह-ज्ञानशाला)।
आकलनम् = गणना।
आदधाति = रखता है (धारयति)।
भ्रमन्त्याः = घूमने वाली की (घूर्णन्त्याः )।
छायातपेन = छाया पड़ने से (छायावशात्)।
अवरुध्यते = रुक जाता है (अवबाध्यते)।
अपरत्र = दूसरी ओर (अन्यत्र)।
अवस्थितः = स्थित (स्थितः)।
उपेक्षिताः = नहीं माने गए (तिरस्कृताः)।
पण्डितम्मन्यानाम् = स्वयं को अधिक विद्वान् मानने वालों की (विद्वन्मन्यानाम्)।
कालातिगामिनी = समय को लाँघने वाली (कालजयिनी)।
प्रकटितः = प्रकट किया (प्रदर्शितः)।
असौ = वह (स:)।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 14 आर्यभटः

सरलार्थ:
सूर्य पूर्व दिशा में उदित होता है और पश्चिम दिशा में अस्त हो जाता है, यह देखा जाता है संसार में। परन्तु इससे यह नहीं समझना चाहिए कि सूर्य गतिशील है, ऐसा। सूर्य स्थिर है और पृथ्वी गतिशीला है जो अपने अक्ष (धुरी) पर घूमती है यह सिद्धान्त अब पूरी तरह स्थापित है। यह सिद्धान्त सबसे पहले जिसने स्थापित किया वे थे-महान् गणितज्ञ और ज्योतिषी ‘आर्यभट’। ‘पृथ्वी स्थिर है’ इस परम्परा वाली प्रथा को उन्होंने नकार दिया। उन्होंने उदाहरण दिया कि ‘गतिशील नौका में बैठा हुआ व्यक्ति नौका के स्थिर होने का अनुभव करता है और दूसरे पदार्थों को गतिशील समझता है।’ इसी प्रकार गतिशीला पृथ्वी में स्थित मानव पृथ्वी को स्थिर समझता है और सूर्यादि ग्रहों को गतिशील जानता है।

476 ई. सन् में आर्यभट ने जन्म लिया यह उनके द्वारा रचित ‘आर्यभटीयम्’ नामक ग्रन्थ में लिखित है। यह ग्रन्थ उन्होंने तेईसवें (23वें) वर्ष में रचा। ऐतिहासिक स्रोतों से ज्ञात होता है कि पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) के निकट आर्यभट की वेधशाला थी। इससे यह अनुमान किया जाता है कि उनकी कर्मभूमि पाटलिपुत्र ही थी।

आर्यभट का योगदान गणित-ज्योतिष से सम्बन्धित है, जहाँ संख्याओं का आंकलन (गणना) महत्त्व रखता है। आर्यभट फलित ज्योतिष शास्त्र में विश्वास नहीं करते थे। गणितीय पद्धति से किए गए आंकलन को ही आधार मानकर उन्होंने प्रतिपादित किया कि ग्रहण में राहु व केतु राक्षस कारण नहीं है। इसमें सूर्य, चन्द्र और पृथ्वी ये तीन ही कारण हैं। सूर्य के चारों ओर घूमती हुई पृथ्वी के व चन्द्रमा के परिक्रमा पथ से संयोग होने के कारण ग्रहण होता है। जब पृथ्वी की छाया पड़ने से चन्द्रमा का प्रकाश रुक जाता है, तब चन्द्रग्रहण होता है। वैसे ही पृथ्वी और सूर्य के बीच आए हुए चन्द्रमा की छाया पड़ने से सूर्यग्रहण दिखाई देता है।

समाज में नए विचारों को अपनाने में प्रायः सामान्य लोग कठिनाई का अनुभव करते हैं। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में उसी प्रकार आर्यभट का विरोध भी हुआ। उसके सिद्धान्तों की उपेक्षा की गई। वे स्वयं को विद्वान् मानने वाले लोगों में उपहास के पात्र बने। फिर भी उनकी दृष्टि काल को लाँघने वाली थी। आधनिक वैज्ञानिकों के द्वारा उनमें व उनके सिद्धान्तों में आदर प्रकट किया गया है। इसी कारण से हमारे प्रथम उपग्रह का नाम ‘आर्यभट’ रखा गया।

वास्तव में ये भारतीय गणित-परम्परा तथा विज्ञान-परम्परा के शिखर (श्रेष्ठ) पुरुष थे।

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आर्यभटः Summary

आर्यभटः पाठ-परिचयः

ज्ञान-विज्ञान की सुदीर्घ परम्परा भारतवर्ष की अमूल्य निधि है। इस परम्परा को प्रबुद्ध मनीषियों ने सम्पोषित किया। आर्यभट इन्हीं मनीषियों में अग्रगण्य थे। दशमलव पद्धति आदि के प्रारम्भिक प्रयोक्ता आर्यभट ने गणित को नयी दिशा दी। इन्हें एवं इनके सिद्धान्तों को तत्कालीन रूढ़िवादियों का विरोध झेलना पड़ा। वस्तुतः गणित को विज्ञान बनाने वाले तथा गणितीय गणना पद्धति के द्वारा आकाशीय पिण्डों (नक्षत्रों) की गति का प्रवर्तन करने वाले ये प्रथम आचार्य थे। आचार्य आर्यभट के इसी वैदुष्य का उद्घाटन प्रस्तुत पाठ में है। अधिक जानकारी के लिए योग्यता-विस्तार: द्रष्टव्य है।

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HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

Haryana State Board HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

अभ्यासः

प्रहेलिकाः HBSE 8th Class Sanskrit  प्रश्न 1.
श्लोकांशेषु रिक्तस्थानानि पूरयत-
(क) सीमन्तिनीषु का _________ राजा ___________ गुणोत्तमः?
(ख) कं सञ्जघान _________ का _________ गङ्गा?
(ग) के _________ कं _________ न बाधते शीतम्।
(घ) वृक्षाग्रवासी न च _________, _________ न च शूलपाणिः।
उत्तरम्:
(क) सीमन्तिनीषु का शान्ता? राजा कोऽभूत् गुणोत्तमः?
(ख) कं सञ्जघान कृष्णः? का शीतलवाहिनी गङ्गा?
(ग) के दारपोषणरता:? कं बलवन्तं न बाधते शीतम्?
(घ) वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः, त्रिनेत्रधारी न च शूलपाणिः।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

HBSE 8th Class Sanskrit Chapter 15 प्रहेलिकाः प्रश्न 2.
श्लोकाशान् योजयत-

कि कुर्यात् कातरो युद्धेअत्रैवोक्तं न बुध्यते।
विद्वद्भिः का सदा वन्ध्यातक्रं शक्रस्य दुर्लभम्।
कं स्ज्घान कृष्ण:मृगात् सिहः पलायते।
कथं विष्णुपदं प्रोक्तंकाशींतलवाहिनी गद्भा।

उत्तरम्:

कि कुर्यात् कातरो युद्धेमृगात् सिहः पलायते।
विद्वद्भिः का सदा वन्ध्याअत्रैवोक्तं न बुध्यते।
कं स्ज्घान कृष्ण:काशींतलवाहिनी गद्भा।
कथं विष्णुपदं प्रोक्तंतक्रं शक्रस्य दुर्लभम्।

प्रहेलिकाः Questions and Answers Class 8 HBSE प्रश्न 3.
उपयुक्तकथनानां समक्षम् ‘आम’ अनुपयुक्तकथनानां समक्ष ‘न’ इति लिखत-
उपयुक्तकथनानां समक्षम् ‘आम’ अनुपयुक्तकथनाना समक्ष ‘न’ इति लिखत-
यथा – सिंहः करिणां कुलं हन्ति। [आम]
(क) कातरो युद्धे युद्ध्यते।
(ख) कस्तूरी मृगात् जायते।
(ग) मृगात् सिंहः पलायते।
(घ) कंस: जघान कृष्णम्।
(ङ) तक शक्रस्य दुर्लभम्।
(च) जयन्तः कृष्णस्य पुत्रः।
उत्तरम्:
(क) कातरो युद्धे युध्यते। [न]
(ख) कस्तूरी मृगात् जायते। [आम]
(ग) मृगात् सिंहः पलायते। [न]
(घ) कंसः जघान कृष्णम्। [न]
(ङ) तक्रं शक्रस्य दुर्लभम्। [आम]
(च) जयन्तः कृष्णस्य पुत्रः। [न]

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

Class 8 Sanskrit Chapter 15 HBSE प्रश्न 4.
अधोलिखितानां पदानां लिङ्ग विभक्तिं वचनञ्च लिखत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः - 1
उत्तरम्:
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः - 2

प्रश्न 5.
कोष्ठकान्तर्गतानां पदानामुपयुक्तविभक्तिप्रयोगेन अनुच्छेदं पूरयत-
एकः काकः __________ (आकाश) डयमानः आसीत्। तृषार्तः सः __________ (जल) अन्वेषणं करोति। तदा सः __________ (घट) अल्पं __________ (जल) पश्यति। सः __________ (उपल) आनीय __________ (घट) पातयति। जलं __________ (घट) उपरि आगच्छति। __________ (काक) सानन्दं जलं पीत्वा तृप्यति।
उत्तरम्:
एकः काकः आकाशे (आकाश) डयमानः आसीत्। तृषार्तः सः जलस्य (जल) अन्वेषणं करोति। तदा सः घटे (घट) अल्पं जलं (जल) पश्यति। सः उपलान् (उपल) आनीय घटे (घट) पातयति। जलं घटे (घट) उपरि आगच्छति। काकः (काक) सानन्दं जलं पीत्वा तृप्यति।

योग्यता-विस्तारः

प्रस्तुत पाठ में दी गयी पहेलियों के अतिरिक्त कुछ अन्य पहेलियाँ अधोलिखित हैं। उन्हें पढ़कर स्वयं समझने की कोशिश करें और ज्ञानवर्धन करें यदि न समझ पायें तो उत्तर देखें।

(क) चक्री त्रिशूली न हरो न विष्णुः।
महान् बलिष्ठो न च भीमसेनः।
स्वच्छन्दगामी न च नारदोऽपि
सीतावियोगी न च रामचन्द्रः।।

(ख) न तस्यादिर्न तस्यान्तः मध्ये यस्तस्य तिष्ठति।
तवाप्यस्ति ममाप्यस्ति यदि जानासि तद्वद॥

(ग) अपदो दूरगामी च साक्षरो न च पण्डितः।
अमुखः स्फुटवक्ता च यो जानाति स पण्डितः।
उत्तर:
(क) वृषभः
(ख) नयनम्
(ग) पत्रम्

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

मूलपाठः

कस्तूरी जायते कस्मात्?
को हन्ति करिणां कुलम्?
किं कुर्यात् कातरो युद्ध?
मृगात् सिंहः पलायते ॥1॥

सीमन्तिनीषु का शान्ता?
राजा कोऽभूत् गुणोत्तमः?
विद्वद्भिः का सदा वन्द्या?
अत्रैवोक्तं न बुध्यते ॥2॥

कं सञ्जधान कृष्णः?
का शीतलवाहिनी गङ्गा?
के दारपोषणरताः?
के बलवन्तं न बाधते शीतम् ॥3॥

वृक्षाग्रवासी न च पक्षिराजः
त्रिनेत्रधारौ न च शूलपाणिः।
त्वग्वस्त्रधारी न च सिद्धयोगी
जलं च विचन्न घटो न मेघ: ॥4॥

भोजनान्ते च किं पेयम्?
जयन्तः कस्य वै सुतः?
कथं विष्णुपदं प्रोक्तम्?
तक्र शक्रस्य दुर्लभम् ॥5॥

अन्वयः
1. कस्तूरी कस्मात् जायते?
करिणां कुलं कः हन्ति?
कातरः युद्ध किं कुर्यात्?
मृगात् सिंहः पलायते।

2. सीमन्तिनीषु का शान्ता?
क: गुणोत्तमः राजा अभूत?
विद्वद्भिः सदा का वन्द्या?

3. कृष्णः क सञ्जधान?
का शीतलवाहिनी गङ्गा?
के दारपोषणरताः?
शीतं कं बलवन्तं न बाधते?

4. वृक्षाग्रवासी पक्षिराज: च ना
त्रिनेत्रधारी (किन्तु) शूलपाणिः च न।
त्वग्वस्त्रधारी (परन्तु) सिद्धयोगी च न।
जलं च बिभ्रत् न घटः न (च) मेघः।

5. भोजनान्ते कि पेयम्?
जयन्तः कस्य वै सुतः?
विष्णुपदं कथं प्रोक्तम्?
तक्र शक्रस्य दुर्लभम्।

सन्धिविच्छेदः
कोहन्ति = कः + हन्ति।
कातरो युद्धे = कातरः + युद्धे।
कोऽभूत = कः + अभूत् (को + अभूत्)।
गुणोत्तमः = गुण + उत्तमः।
अत्रैवोक्तम् = अत्र + एव + उक्तम्।
वृक्षाग्रवासी = वृक्ष + अग्रवासी।
बिभ्रन्न = ब्रिभत् + न।
भोजनान्ते = भोजन + अन्ते।
प्रोक्तम् = प्र + उक्तम्।

पदार्थबोध:
हन्ति = मारता/ती है (मारयति)।
करिणाम् = हाथियों के (गजानाम्)।
कातरः = कायर (भीत:)।
सीमन्तिनीषु = नारियों में (नारीषु, महिलासु)।
अभूत् = हुआ (अजायत)।
बुध्यते = जाना जाता है (ज्ञायते)।
सञ्जधान = मारा (अमारयत्, अहन्)।
कसञ्जधान् = कंस को मारा (कंसममारयत्)।
शीतलवाहिनी = शीतलधारा वाली (शैत्यवाहिनी)।
काशीतलवाहिनी = काशी की भूमि पर बहने वाली (वाराणसीतलवाहिनी)।
दारपोषणरताः = पत्नी के पोषण में लीन (पत्नीपोषणलीनाः)।
केदारपोषणरताः = खेत के कार्य में संलग्न (क्षेत्रकार्यरताः)।
बलवन्तम् = बलवान् को (शक्तिमन्तम्)।
कम्बलवन्तम् = कम्बल वाले को (कम्बलवस्त्रधारिणम्)।
बाधते = बाधित करता है (सीदति)।
वृक्षाग्रवासी = पेड़ों पर रहने वाला (तरुवासी)।
पक्षिराजः = पक्षियों का राजा (गरुड़) (वैनतेयः)।
त्रिनेत्रधारी = तीन नेत्रों वाला (शिव) (नारिकेलः, शिवः)।
शूलपाणिः = त्रिशूलधारी (शंकरः, शूली)।
त्वम् = त्वचा, छाल (वल्कलः)।
बिभ्रत् = भरा हुआ (परिपूर्णः)।
विष्णुपदम् = मोक्ष (मोक्षः)।
तक्रम् = छाछ, मठा (घृतशेषः)।
शक्रस्य = इन्द्र का (इन्द्रस्य)।
दुर्लभम् = कठिन (कठिनम्)।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

प्रहेलिकानामुत्तरान्वेषणाय सङ्केताः
प्रथमा प्रहेलिका – अन्तिम चरणे क्रमशः त्रयाणां प्रश्नानां त्रिभिः पदैः उत्तरं दत्तम्।

द्वितीया प्रहेलिका – प्रथम-द्वितीय-तृतीय चरणेषु प्रथमस्य वर्णस्य अन्तिमवर्णेन संयोगात् उत्तरं प्राप्यते।

तृतीया प्रहेलिका – प्रत्येकं चरणे प्रथमद्वितीययोः प्रथमत्रयाणां वा वर्णानां संयोगात् तस्मिन् चरणे प्रस्तुतस्य प्रश्नस्य उत्तरं प्राप्यते।

चतुर्थप्रहेलिकायाः उत्तरम् – नारिकेलफलम्।

पञ्चमप्रहेलिकायाः उत्तरम् – प्रथम-प्रहेलिकावत्।

पहेलियों का उत्तर खोजने के संकेत
पहली पहेली – अन्तिम चरण (चौथी पंक्ति) में ऊपर के तीनों प्रश्नों के उत्तर क्रमश: तीन शब्दों में दिए गए हैं।

दूसरी पहेली – प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय (तीनों) चरणों के पहले तथा अन्तिम वर्ण का मिलान करने से उत्तर मिलता है।

तीसरी पहेली – प्रत्येक चरण में पहले दोनों या पहले तीनों वर्गों को मिलाने से उसका उत्तर मिलता है।

चौथी पहेली का उत्तर नारियल।

पाँचवीं पहेली का उत्तर – पहली पहेली के समान।

सरलार्थः
1. कस्तूरी किससे उत्पन्न होती है?
कौन मारता है हाथियों के कुल को?
कायर युद्ध में क्या करता है?
‘हरिण से’, ‘शेर’, ‘भाग जाता है।’
(ये तीनों ही क्रमशः उत्तर हैं।)

2. (i) नारियों में कौन शान्त है? (सीता)
(ii) गुणों में उत्तम राजा कौन हुआ है? (राम)
(ii) विद्वानों द्वारा सदा कौन पूजी जाती है? (विद्या)
इन्हीं में कहा गया है, पता नहीं चल रहा है।

3. कृष्ण ने किसे मारा? (कंस को)
शीतलधारा वाली गंगा कहाँ है? (काशी में)
स्त्री के पोषण में कौन लगे रहते हैं? (किसान)
किस बलवान् को सर्दी नहीं लगती? (कम्बल वाले को)

4. वृक्ष पर रहता है लेकिन पक्षिराज (गरुड़) नहीं है।
तीन नेत्रों वाला है, लेकिन शिव नहीं है।
छाल के वस्त्र पहनता है लेकिन योगी नहीं है।
जल से भरा हुआ है फिर भी न घड़ा है और न बादल।
उत्तर है- नारियल।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 15 प्रहेलिकाः

5. भोजन के अन्त में क्या पीना चाहिए? (छाछ)
जयन्त किसका पुत्र था? (इन्द्र का)
मोक्ष कैसा कहा गया है? (दुर्लभ)
मट्ठा दुर्लभ है इन्द्र के लिए।

प्रहेलिकाः Summary

प्रहेलिकाः पाठ-परिचयः

मनोरञ्जनहीन व हास्यविहीन जीवन को नरक माना जा सकता है। पहेलियाँ मनोरञ्जन की प्राचीन विधा हैं। ये प्रायः विश्व की सारी भाषाओं में उपलब्ध हैं। संस्कृत के कवियों ने इस परम्परा को अत्यन्त समृद्ध किया है। पहेलियाँ जहाँ हमें आनन्द देती हैं, वहीं समझ-बूझ की हमारी मानसिक व बौद्धिक प्रक्रिया को अधिक तेज बनाती हैं। इस पाठ में संस्कृत प्रहेलिका (पहेली) बूझने की परम्परा के कुछ रोचक उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं। रोचकपूर्ण ढंग से ज्ञानवर्धन करने के लिए पहेलियाँ उत्तम साधन हैं।

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

HBSE 8th Class Hindi लाख की चूड़ियाँ Textbook Questions and Answers

कहानी से

पाठ 2 लाख की चूड़ियाँ प्रश्न उत्तर HBSE 8th Class प्रश्न 1.
बचपन में लेखक अपने मामा के गाँव चाव से क्यों जाता था और बदलू को ‘बदलू मामा’ न कहकर ‘बदलू काका’ क्यों कहता था? ..
उत्तर:
बचपन में लेखक अपने मामा के गाँव बड़े चाव के साथ जाता था। उसके चाव का कारण यह था कि वहाँ उसे ढेर सारी लाख की रंग-बिरंगी गोलियाँ मिलती थीं। ये गोलियाँ उसका मन मोह लेती थीं। बदलू लेखक के मामा के गाँव का था अतः उसे उसको ‘बदलू मामा’ कहना चाहिए था, पर वह ‘बदलू मामा’ न कहकर ‘बदलू काका’ कहता था। इसका कारण यह था कि गाँव के सभी बच्चे उसे ‘बदलू काका’ ही कहा करते थे। लेखक भी उनकी देखा-देखी उसे ‘बदलू काका’ ही कहता था।

लाख की चूड़ियाँ प्रश्न उत्तर HBSE 8th Class प्रश्न 2.
वस्तु विनिमय क्या है? विनिमय की प्रचलित पद्धति क्या है?
उत्तर:
‘वस्तु विनिमय’ में एक वस्तु को दूसरी वस्तु देकर लिया जाता था। वस्तु के लिए पैसे नहीं लिए जाते थे। वस्तु के बदले वस्तु ली-दी जाती थी। लोग अनाज देकर चूड़ियाँ ले लेते थे।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

लाख की चूड़ियाँ HBSE 8th Class प्रश्न 3.
“मशीनी युग ने कितने हाथ काट दिए हैं।’-पंक्ति में लेखक ने किस व्यथा की ओर संकेत किया है?
उत्तर:
इस पंक्ति में लेखक ने इस व्यथा की ओर संकेत किया है कि मशीनों के आगमन के साथ कारीगरों के हाथों से काम-धंधा छिन गया। मानो उनके हाथ ही कट गए हों। मशीनों ने लोगों को बेरोजगार बना दिया। .

लाख की चूड़ियाँ पाठ के प्रश्न उत्तर HBSE 8th Class प्रश्न 4.
बदलू के मन में ऐसी कौन-सी व्यथा थी, जो लेखक से छिपी न रह सकी?
उत्तर:
बदलू के मन में इस बात की व्यथा की मशीनी युग के प्रभावस्वरूप उस जैसे अनेक कारीगरों को बेरोजगारी और उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। अब लोग कारीगरी की कद्र न करके दिखावटी चमक पर अधिक ध्यान देते हैं। ।

लाख की चूड़ियाँ शब्दार्थ HBSE 8th Class  प्रश्न 5.
मशीनी युग से बदलू के जीवन में क्या बदलाव आया?
उत्तर:
मशीनी युग से बदलू के जीवन में यह बदलाव आया कि वह बेरोजगार हो गया। काम न करने से उसका शरीर भी ढल गया, उसके हाथों-माथे पर नसें उभर आईं। अब वह बीमार रहने लगा।

कहानी से आगे

लाख की चूड़ियाँ पाठ का सार HBSE 8th Class  प्रश्न 1.
आपने मेले-बाजार आदि में हाथ से बनी चीजों को बिकते देखा होगा। आपके मन में किसी चीज को बनाने की कला को सीखने की इच्छा हुई हो और आपने कोई कारीगरी सीखने का प्रयास किया हो तो उसके विषय में लिखिए।
उत्तर:
मैंने मेले-बाजार में तरह-तरह की रंग-बिरंगी काँच के छोटे-छोटे बीकरों में रखी मोमबत्तियाँ बिकती देखीं। मेरे मन में भी यह इच्छा उत्पन्न हुई कि मैं भी इनको बनाने की कला सीखू। मैंने हस्तशिल्प कार्यशाला में एक सप्ताह का प्रशिक्षण लिया। अब मैं स्वयं इस प्रकार की कलात्मक मोमबत्तियाँ आसानी से बना लेता हूँ। मैं इनकी बिक्री करके कुछ धन भी कमा लेता हूँ।

Vasant Chapter 2 HBSE 8th Class प्रश्न 2.
लाख की वस्तुओं का निर्माण भारत के किन-किन राज्यों में होता है? लाख से चूड़ियों के अतिरिक्त क्या-क्या चीजें बनती हैं? ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
लाख की वस्तुओं का निर्माण राजस्थान में सबसे अधिक होता है। यह काम गुजरात में भी होता है क्योंकि यह राज्य राजस्थान से सटा हुआ है। – लाख से चूड़ियाँ बनती हैं। – लाख से खिलौने बनते हैं।

अनुमान और कल्पना

पाठ 2 लाख की चूड़ियाँ HBSE 8th Class प्रश्न 1.
घर में मेहमान आने पर आप उसका अतिथि-सत्कार कैसे करेंगे?
उत्तर:
घर में मेहमान आने पर हम उन्हें आदर सहित बिठाएँगे।

  • उनके आने पर प्रसन्नता प्रकट करेंगे।
  • उन्हें पीने के लिए चाय, कॉफी, लस्सी या शर्बत देंगे।
  • बाद में उन्हें खाना खिलाएँगे।
  • उनके साथ प्रेमपूर्वक बातचीत करेंगे।

प्रश्न 2.
आपको अपनी छुट्टियों में किसके घर जाना सबसे अच्छा लगता है? वहाँ की दिनचर्या लिखिए। अलग कैसे होती है?
उत्तर:
हमें छुट्टियों में अपने नाना-नानी के घर जाना सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि वे हमें बहुत प्यार करते हैं। वहाँ की दिनचर्या बहुत ही मस्ती भरी होती है। वहाँ हमें स्कूल जाने की चिंता नहीं होती। अतः हम वहाँ देर तक सोते हैं और धूप निकल आने पर उठते हैं। वहाँ हम आस-पास के बच्चों के साथ घूमने जाते हैं। घर पर हमें नाश्ता भी बड़ा मजेदार मिलता है। नाश्ता करके हम खेलने निकल जाते हैं। दोपहर का खाना काफी देर से होता है। घर के आँगन में खेलते-कूदते और मस्ती करते हैं। इस प्रकार दिन भर मौज-मस्ती चलती रहती है।

प्रश्न 3.
मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। आप अपने आस-पास से इस प्रकार के किसी परिवर्तन का उदाहरण चुनिए और उसके बारे में लिखिए।
उत्तर:
मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। हमारे आस-पास भी इस प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं। पहले हमारे घर के पास कई स्त्रियाँ दाल पीसने का काम करती थीं। वे बड़ी-बड़ी सिलों पर पत्थर के बट्टों से दाल पीसकर कुछ रुपए कमा लेती थीं। प्रायः हलवाई उनसे दाल पिसवाते थे। अब दाल पीसने की मशीनें आ गई हैं। अब वही काम मशीन थोड़ी ही देर में कर देती है। इससे उनका काम छिन गया है।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

प्रश्न 4.
बाजार में बिकने वाले सामानों की डिज़ाइनों में हमेशा परिवर्तन होता रहता है। आप इन परिवर्तनों को किस प्रकार देखते हैं। आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
बाजार में अनेक प्रकार के सामान बिकते हैं। इनमें खाने-पीने के सामानों के अतिरिक्त पहनने-ओढ़ने के कपड़े भी होते हैं। मनोरंजन के भी बहुत सामान बाजार में मिलते हैं। इन सामानों में डिजाइनों में हमेशा परिवर्तन आता रहता है, विशेषकर कपड़ों के डिजाइनों में।

प्रश्न 5.
हमारे खान-पान, रहन-सहन और कपड़ों में भी बदलाव आ रहा है। इस बदलाव के पक्ष-विपक्ष में बातचीत कीजिए और बातचीत के आधार पर लेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
आज के युग में हमारे खान-पान, रहन-सहन तथा कपड़ों में अनेक प्रकार के बदलाव आ रहे हैं। इस बदलाव के पक्षविपक्ष में बड़े लोगों से बातचीत करने पर यह कहा जा सकता है: बदलाव प्रकृति का नियम है। हर युग में बदलाव आता रहा है और आता रहेगा। इस बदलाव को कोई रोक नहीं सकता। यद्यपि बड़े लोग इसे देर से स्वीकार करते हैं, पर युवा पीढ़ी इसे तुरंत अपना लेती है। बड़े लोग इसे फैशन का नाम दे देते हैं तथा प्रारंभ में इसका विरोध करते हैं, पर कुछ समय बीत जाने के उपरांत वे भी इसे स्वीकार कर लेते हैं।

भाषा की बात

1. ‘बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो काँच की चूड़ियों से’ और बदलू स्वयं कहता है।-“जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है लाख में कहाँ संभव है?” ये पंक्तियाँ बदलू की दो प्रकार की मनोदशाओं को सामने लाती हैं। दूसरी पंक्ति में उसके मन की पीड़ा है। इसमें व्यंग्य भी है। हारे हुए मन.से, या दुखी मन से अथवा व्यंग्य में बोले गए वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते। कुछ व्यंग्य वाक्यों को ध्यानपूर्वक समझकर एकत्र कीजिए और उनके भीतरी अर्थ की व्याख्या करके लिखिए।

‘वहाँ की औरतें अपने मरद का हाथ पकड़कर सड़कों पर घूमती भी हैं और फिर उनकी कलाइयाँ नाजुक होती हैं। लाख की चूड़ियाँ पहनें तो मोच न आ जाए।’
→ इस कथन में शहरी स्त्रियों पर व्यंग्य किया गया है। शहर की औरतों को बेशर्म बताया गया है क्योंकि वे सड़कों पर अपने मर्द (पति) का हाथ पकड़कर घूमती हैं।

→ दूसरा व्यंग्य उनकी कलाई की नाजुकता पर किया गया है कि वे लाख की चूड़ियों का बोझ झेल ही नहीं सकती।

→ ‘आजकल सब काम मशीन से होता है। जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?

→ बदलू मशीनी युग पर व्यंग्य करता है। मशीनों ने लोगों को बेरोजगार बना दिया। लोग सुंदरता के पीछे भागते हैं, मजबूती की परवाह किसे है।

2. बदलू कहानी में दृष्टि से पात्र है और भाषा की बात (व्याकरण) की दृष्टि से संज्ञा है। किसी भी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, विचार अथवा भाव को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को तीन भेदों में बांटा गया है –
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा जैसे-शहर, गाँव, पतली-मोटी, गोल, चिकना इत्यादि

(ख) जातिवाचक संज्ञा जैसे–चरित्र, स्वभाव, वजन, आकार आदि द्वारा जानी जाने वाली संज्ञा।

(ग) भाववाचक संज्ञा, जैसे–सुंदरता, नाजुक, प्रसन्नता इत्यादि जिसमें कोई व्यक्ति नहीं है और न आकार, वचन परंतु उसका अनुभव होता है। पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाएँ चुनकर लिखिए।

  • व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ – रज्जो, बदलू
  • जातिवाचक संज्ञाएँ – चूड़ियाँ, स्त्रियाँ, काँच, सड़क, काका, मशीन, चारपाई, गोली।
  • भाववाचक संज्ञाएँ – पढ़ाई, सुंदरता, व्यथा
  • गाँव की बोली के शब्द : मरद (मर्द), लला (लाल), बखत (वक्त), मचिया (खाट), पियाज (प्याज), तमाखू (तंबाकू) आदि।

3. गाँव की बोली में कई शब्दों के उच्चारण बदल जाते हैं। कहानी में बदलू बक्त (समय) को बखत, उम्र (वय/आयु) को उमर कहता है। इस तरह के अन्य शब्दों को खोजिए जिनके रूप में परिवर्तन हुआ हो, अर्थ में नहीं।
विद्यार्थी स्वयं करों

HBSE 8th Class Hindi लाख की चूड़ियाँ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
बदलू कौन था? उसका व्यवसाय क्या था?
उत्तर:
बदलू मनिहार था। चूड़ियाँ बनाना उसका पैतृक पेशा था और वास्तव में वह बहुत ही सुंदर चूड़ियाँ बनाता था। उसकी बनाई हुई चूड़ियों की खपत भी बहुत. थी। उस गाँव में तो सभी स्त्रियाँ उसकी बनाई हुई चूड़ियाँ पहनती ही थीं आस-पास के गाँवों के लोग भी उससे चूड़ियाँ ले जाते थे परंतु वह कभी भी चूड़ियों को पैसों से बेचता न था। उसका अभी तक वस्तु-विनिमय का तरीका था और लोग अनाज के बदले उससे चूड़ियाँ ले जाते थे। बदलू स्वभाव से बहुत सीधा था। कभी भी उसे किसी से झगड़ते नहीं देखा गया।

प्रश्न 2.
जब कई वर्ष बाद लेखक बदलू से मिलने गया तब उसने क्या शिकायत की?
उत्तर:
बदलू ने लेखक को बताया कि उसका काम तो कई साल से बंद है। उसकी बनाई हुई चूड़ियाँ कोई पूछे तब तो। गाँव-गाँव में काँच का प्रचार हो गया है। वह कुछ देर चुप रहा, फिर बोला, मशीन युग है न यह, लला! आजकल सब काम मशीन से होता है। खेत भी मशीन से जोते जाते हैं और फिर जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

प्रश्न 3.
बदलू लेखक को मलाई क्यों नहीं खिला पाया?
उत्तर:
पहले बदलू के पास एक गाय थी। वह उसके दूध की मलाई लेखक को खिलाया करता था। अब वह गाय बिक चुकी थी क्योंकि बदलू के पास उसको खिलाने को कुछ नहीं था अतः अब मलाई होती ही न थी।

लाख की चूड़ियाँ गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. वैसे तो मेरे मामा के गाँव का होने के कारण मुझे बदलू को ‘बदलू मामा’ कहना चाहिए था परंतु मैं उसे ‘बदलू मामा’ न कहकर बदलू काका कहा करता था जैसा कि गाँव के सभी बच्चे उसे कहा करते थे। बदलू का मकान कुछ ऊँचे पर बना था। मकान के सामने बड़ा-सा सहन था जिसमें एक पुराना नीम का वृक्ष लगा था। उसी के नीचे बैठकर बदलू अपना काम किया करता था। बगल में भट्ठी दहकती रहती जिसमें वह लाख पिघलाया करता।

सामने एक लकड़ी की चौखट पड़ी रहती जिस पर लाख के मुलायम होने पर वह उसे सलाख के समान पतला करके चूड़ी का आकार देता। पास में चार-छह विभिन्न आकार की बेलननुमा मुंगेरियाँ रखो रहतीं जो आगे से कुछ पतली और पीछे से मोटी होतीं। लाख की चूड़ी का आकार देकर वह उन्हें मुंगेरियों पर चढ़ाकर गोल और चिकना बनाता और तब एक-एक कर पूरे हाथ की चूड़ियाँ बना चुकने के पश्चात वह उन पर रंग करता।
प्रश्न:
1. लेखक को बदलू को किस संबोधन से पुकारना चाहिए था पर वह किस संबोधन से पुकारता था और क्यों?
2. बदलू का मकान कैसा था?
3. बदलू अपना काम कहाँ करता था?
4. वह अपना काम कैसे करता था?
5. वह किससे चूड़ी बनाता था तथा कैसे?
उत्तर:
1. लेखक को बदलू को ‘मामा’ से संबोधित करना चाहिए था क्योंकि वह उसके मामा के गाँव से था, पर वह उसे ‘बदलू काका’ कहकर संबोधित करता था क्योंकि गाँव के सभी बच्चे उसे ‘बदलू काका’ ही कहते थे।
2. बदलू का मकान कुछ ऊँचाई पर बना था। उसके मकान के सामने बड़ा सा आँगन था और उसमें नीम का पेड़ लगा हुआ था।
3. बदलू नीम के पेड़ के नीचे बैठकर अपना काम करता था।
4. वह दहकती भट्ठी पर लाख पिघलाता रहता था। वह लाख को मुलायम करके चूड़ी का आकार देता। इसके लिए वह विभिन्न आकार की मुंगरियों पर चढ़ाकर गोल करता था?
5. वह लाख से चूड़ी बनाता था। इसके बाद वह चूड़ियों पर रंग करता था।

2. मैं बहुधा हर गर्मी की छुट्टी में अपने मामा के यहाँ चला जाता और एक-आध महीने वहाँ रहकर स्कूल खुलने के समय तक वापस आ जाता। परंतु दो-तीन बार ही मैं अपने मामा के यहाँ गया होऊँगा। जब मेरे पिता की एक दूर के शहर में बदली हो गई और एक लंबी अवधि तक मैं अपने मामा के गाँव न जा सका। तब लगभग आठ-दस वर्षों के बाद जब मैं वहाँ गया तो इतना बड़ा हो चुका था कि लाख की गोलियों में मेरी रूचि नहीं रह गई थी। अत: गाँव में होते हुए भी कई दिनों तक मुझे बदलू का ध्यान न आया।

इस बीच मैंने देखा कि गाँव में लगभग सभी स्त्रियाँ काँच की चूड़ियाँ पहने हैं। विरले ही हाथों में मैंने लाख की चूड़ियाँ देखीं। तब एक दिन सहसा मुझे बदलू का ध्यान हो आया। बात यह हुई कि बरसात में मेरे मामा की छोटी लड़की आँगन में फिसलकर गिर पड़ी और उसके हाथ की काँच की चूड़ी टूटकर उसकी कलाई में घुस गई और उससे खून बहने लगा। मेरे मामा उस समय घर पर न थे। मुझे ही उसकी मरहम-पट्टी करनी पड़ी। तभी सहसा मुझे बदलू का ध्यान हो आया और मैंने सोचा कि उससे मिल आऊँ। अतः शाम को मैं घूमते-घूमते उसके घर चला गया। बदलू वहीं चबूतरे पर नीम के नीचे एक खाट पर लेटा था।
प्रश्न:
1. लेखक काफी समय तक मामा के गाँव क्यों नहीं जा सका?
2. वहाँ जाकर लेखक ने स्त्रियों में क्या परिवर्तन देखा?
3. लेखक को बदलू की याद कैसे आई?
4. लेखक को बदलू कहाँ मिला?
उत्तर:
1. लेखक के पिता की बदली किसी दूर के शहर में हो गई थी। इसी कारण वह 8-10 वर्षों तक मामा के गाँव नहीं जा सका।
2. लंबे समय के बाद जब लेखक मामा के गाँव गया तो उसने देखा कि अब वहाँ की अधिकांश स्त्रियाँ लाख की चूड़ियों के स्थान पर काँच की चूड़ियाँ पहने हुए हैं। किसी-किसी स्त्री ने ही लाख की चूड़ी पहन रखी थी।
3. लेखक की मामा की छोटी लड़की के हाथ की काँच की चूड़ी टूटकर उसकी कलाई में घुस गई थी और खून बहने लगा था। उस समय उसके मामा घर पर नहीं थे और लेखक को ही उसकी मरहम-पट्टी करनी पड़ी थी। तभी उसे बदलू की याद हो आई।
4. जब लेखक बदलू से मिलने उसके घर गया तब वह उसे | चबूतरे पर नीम के पेड़ के नीचे एक खाट पर लेटा हुआ मिला।

लाख की चूड़ियाँ Summary in Hindi

लाख की चूड़ियाँ पाठ का सार

लेखक को सारे गाँव में बदलू सबसे अच्छा लगता था क्योंकि वह उसे लाख की सुंदर-सुंदर गोलियाँ बनाकर देता था। लेखक उसे ‘बदलू काका’ कहा करता था। बदलू काका नीम के पेड़ के नीचे बैठकर दहकती भट्ठी पर लाख पिघला कर उसे चूड़ी का आकार देता था। वह बेलननुमा मुँगेरियों पर लाख को चढ़ाकर उसे चूड़ियों का आकार देता था और बाद में उन पर रंग करता था। वह बीच-बीच में हुक्का पीता रहता था। वह बचपन में लेखक को ‘लला’ कहता था और एक मचिया पर बिठाता था। वहीं लेखक उसे चूड़ियाँ बनाते देखता रहता था। बदलू मनिहार था। चूड़ियाँ बनाना उसका पैतृक पेशा था। गाँव की सभी स्त्रियाँ उसी की बनाई चूड़ियाँ पहनती थीं। बदलू स्वभाव से बहुत सीधा था। विवाह के अवसर पर उसकी चूड़ियों का मूल्य बढ़ जाता था। वह काँच की चूड़ियों से चिढ़ता था।

वह लेखक से बचपन में उसकी पढ़ाई के बारे में पूछता रहता था। कभी-कभी बदलू उसकी अच्छी खातिर भी करता था। बदलू उसके लिए लाख की एक-दो गोलियाँ बना देता था। बदलू लेखक के मामा के गाँव में रहता था। लेखक के पिता की बदली दूर के शहर में हो गई थी। अतः वह लंबे समय तक मामा के गाँव न जा सका। जब वह गाँव गया तो उसने गाँव की लगभग सभी स्त्रियों को काँच की चूड़ियाँ पहने देखा। एक शाम को वह बदलू से मिला तो सहसा उसने लेखक को पहचाना नहीं। फिर लेखक ने अपना नाम जनार्दन बताकर गोलियों की बात याद दिलाई, लेकिन वह फिर भी चुप रहा। बदलू ने उसे बताया कि अब उसका लाख की चूड़ियाँ बनाने का काम कई साल से बंद है क्योंकि अब उसकी बनाई चूड़ियों की पूछ नहीं होती। सभी को काँच की सुंदर चूड़ियाँ चाहिए। अब तक बदलू का शरीर भी ढल चुका था। उसे बुरी तरह खाँसी आ रही थी। उसके मन में व्यथा छिपी थी, जिसे लेखक ने भाँप लिया।

लेखक ने विषय बदलने के लिए पूछा-काका, अब की आम की फसल कैसी है? उसने जवाब दिया-अच्छी है और यह कहकर उसके लिए अपनी बेटी से कहकर आम मँगवाए। फिर लेखक ने गाय के बारे में पूछा तो वह बोला-गाय को दो साल पहले बेच दिया, कहाँ से खिलाता उसे? तभी उसकी बेटी रज्जो एक डलिया में ढेर से आम ले आई। बेटी ने चार-पाँच सिंदूरी आम छाँटकर उसे दे दिए। लेखक ने देखा कि रज्जो की गोरी-गोरी कलाइयों पर लाख की चूड़ियाँ फब रही थीं। बदलू बोला-यही आखिरी जोड़ा बनाया था, जमींदार साहब की बेटी के लिए। वे दस आने दे रहे थे, बदलू ने वह जोड़ा नहीं दिया और कह दिया-शहर से ले आओ। लेखक को यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि बदलू ने हारकर भी हार नहीं मानी। उसका व्यक्तित्व टूटने वाला नहीं था।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

लाख की चूड़ियाँ शब्दार्थ

विभिन्न = तरह-तरह की (Different), पैतृक = पिता का (Paternal), विनिमय = बदल-बदल (Exchange), नाजुक = कोमल (Tender), विरले = कोई-कोई (not common), स्मृति पटल = मस्तिष्क में याद (Memory), अतीत = पुराना समय (old period), व्यथा = मन की तकलीफ (Agony)।

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HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Haryana State Board HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

HBSE 12th Class English Evans Tries an O-Level Textbook Questions and Answers

Question 1.
Reflecting on the story, what did you feel about Evans having the last laugh ? (कहानी पर विचार करते हुए ईवान्स की अन्तिम जीत के बारे में आपका क्या विचार है ?)
Answer:
Evans is a prisoner. In the past, he escaped from the jail three times. This time, the Governor and other officers of the jail are very cautious. They have made elaborate arrangements for him. He escapes but the Governor catches him in the hotel. However, Evans finally escapes with the help of his friends. All this shows that Evans is a very clever person. He and his friends are far superior to the Governor who proves to be no match to Evans.
(ईवान्स एक कैदी है। अतीत में, वह जेल से तीन बार भाग चुका है। इस बार, गवर्नर और जेल के अन्य अधिकारी बहुत सावधान हैं। उन्होंने इसके लिए कड़े इंतजाम किए हैं। वह फरार हो जाता है मगर गवर्नर उसे होटल में पकड़ लेता है। लेकिन ईवान्स अंत में, अपने साथियों की सहायता से फिर भाग जाता है। यह सब बातें दर्शाती हैं कि ईवान्स एक बहुत चालाक आदमी है। वह और उसके साथी गवर्नर से काफी अधिक चालाक हैं जो ईवान्स के मुकाबले में कुछ नहीं हैं।)

Question 2.
When Stephens comes back to the cell he jumps to a conclusion and the whole machinery blindly goes by his assumption without even checking the identity of the injured ‘McLeery’. Does this show how hasty conjectures can prevent one from seeing the obvious? How is the criminal able to predict such negligence?
(जब स्टीफन्स कोठरी में लौटकर आया तो वह एकदम एक निष्कर्ष पर पहुँच जाता है और सारी व्यवस्था घायल ‘मैकलीरी’ की पहचान की पड़ताल किए बिना आँखें बन्द करके उसी धारणा के अनुसार चल पड़ती है। क्या इससे पता चलता है कि जल्दबाजी में लगाए अनुमान स्पष्ट चीज को भी देखने में बाधा डाल देते हैं ? अपराधी इस प्रकार की लापरवाही का पहले से ही कैसे अनुमान लगा लेते हैं ?)
Answer:
Stephens accompanies the parson to the gate of the prison. When he comes back to the cell, he finds an injured person in Evan seat. He comes to the conclusion that it is McLeery. He thinks that Evans has injured him and has escaped from the prison in the parson’s dress. Everybody, including the Governor, believe it. This is the general belief that a prisoner escapes in the guise of someone else. So they do not even recognize Evan’s voice. They trust him completely when he tells them that he knows where Evans has gone. They do not even try to check how deep his wound is. This clearly shows that hasty judgments prevent one from seeing the obvious things. The criminals devise new ways of escaping. They know that the officials are generally negligent. So they make use of such negligence in escaping from the prison.

(स्टीफन्स पादरी को जेल के द्वार तक छोड़कर आता है। जब वह कोठरी में वापस आता है, तो वह ईवान्स की सीट में एक घायल व्यक्ति को पाता है। वह इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि वह मैकलीरी है। वह सोचता है कि ईवान्स ने उसे घायल कर दिया है और पादरी की पोशाक पहनकर जेल से भाग गया है। गवर्नर सहित हर व्यक्ति, इस बात पर विश्वास करता है। आमतौर पर यह माना जाता है कि कोई कैदी किसी अन्य व्यक्ति के भेष में फरार होता है। इसलिए वे ईवान्स की आवाज को भी नहीं पहचानते। वे उस पर पूरी तरह विश्वास करते हैं, जब वह उन्हें बताता है कि ईवान्स कहाँ गया है। वे इस बात की जांच करने का प्रयत्न भी नहीं करते कि उसका घाव कितना गहरा है। इससे साफ प्रतीत होता है कि जल्दबाजी में किए गए निर्णय हमें साफ जाहिर चीजों को देखने से रोकते हैं। अपराधी फरार होने के नए तरीके खोजते रहते हैं। वे जानते हैं कि अफ़सर लोग आमतौर पर लापरवाह होते हैं। इसलिए वे जेल से भागने में इस लापरवाही का फायदा उठाते हैं।)

Question 3.
What could the Governor have done to securely bring back Evans to prison when he caught him at the Golden Lion? Does that final act of foolishness really prove that “he was just another good for-a-giggle, gullible governor, that was all”?
(जब गवर्नर ने ईवान्स को गोल्डन लॉयन में पकड़ लिया था, तो उसे पक्की तरह वापस लाने के लिए क्या प्रबन्ध करने चाहिए थे ? क्या उसका अन्तिम मूर्खता का कार्य सिद्ध करता है कि “वह भोला-भाला बुद्धू गवर्नर था” ?)
Answer:
The Governor is cleverer than Stephen and Jackson. He is able to decode the six-figure reference, 313/271. He can see that this code refers to Chipping Norton. He is right. He is able to trace Evans to the hotel. But the Governor does not know that Evans is more intelligent than him. The reference to the code is only to befool the Governor. In his over-confidence, he goes there all alone to arrest Evans. It appears that he only asked the hotel receptionist to request the jail authorities to send a prison van.

The prison van comes and takes Evans away. In fact, this is the same van that the Governor sent to the court in the morning. It is being driven by Evan’s friends. Even the police officer who arrests him is his friend. Thus the Governor makes a number of mistakes. To bring Evans back to prison securely, the Governor should have asked the area police to help him. He should have followed the prison van to the jail. But he does not any such precautions. Therefore, in the end, he proves to be just a foolish and gullible Governor.

(गवर्नर स्टीफन्स और जैक्सन से अधिक चालाक है। वह छह अंकों के संकेत 313/271 का भेद खोलने में सफल हो जाता है। वह देख सकता है कि यह संकेत चिप्पिंग नॉर्टर के बारे में है। वह सही है। वह ईवान्स के होटल तक पहुँचने में सफल हो जाता है। मगर गवर्नर नहीं जानता कि ईवान्स उससे अधिक अक्लमंद है। संकेत के प्रति जिक्र तो केवल गवर्नर को बेवकूफ बनाने के लिए है। अपने जरूरत से अधिक विश्वास के कारण वह वहाँ ईवान्स को गिरफ्तार करने के लिए अकेला ही जाता है। ऐसा लगता है कि उसने केवल होटल की स्वागतकर्ता को कहा कि वह जेल के अफसरों को जेल की वैन भेजने के लिए प्रार्थना करे।

जेल की वैन आती है और ईवान्स को ले जाती है। वास्तव में, यह वही वैन है, जो गवर्नर ने सुबह कचहरी में भेजी थी। इसे ईवान्स के मित्र ही चला रहे हैं। यहाँ तक कि जो पुलिस अफसर उसे गिरफ्तार करता है, वह भी उसका मित्र है। इस प्रकार गवर्नर बहुत-सी गलतियाँ करता है। ईवान्स को वापस जेल में सुरक्षित लाने के लिए, गवर्नर को एरिया पुलिस को उसकी सहायता करने के लिए कहना चाहिए था। उसे जेल की वैन के पीछे जेल तक जाना चाहिए था। मगर वह ऐसी कोई सावधानी नहीं बरतता। इसलिए अंत में वह केवल मूर्ख और जल्दी बेवकूफ बन जाने वाला गवर्नर साबित होता है।)

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Question 4.
While we condemn the crime, we are sympathetic to the criminal. Is this the reason why prison staff often develop a soft corner for those in custody?
(जबकि हम अपराध की निन्दा करते हैं, हम अपराधी से सहानुभूति रखते हैं। क्या यही कारण है कि जेल कर्मचारी कैदियों के प्रति नर्म पड़ जाते हैं ?)
Answer:
We all condemn the crime. But we are human beings. That is why the jail staff often develops a soft corner for the prisoner. This is especially true when the prisoner is not violent in his behavior and is cooperative. They begin to trust the prisoner. So in some cases, they do not follow the rules very strictly. The clever prisoners make use of this human tendency. In the case of Evans, the prison officials are sympathetic towards him. The Governor tells Stephens to come out of his cell so that he could concentrate on writing. Jackson does not insist on his taking off his cap. The Governor allows him to cover his shoulders with a blanket as it is cold inside. All these things help Evans in his plan to escape from the prison.

(हम सब अपराध की निंदा करते हैं। मगर हम सब इन्सान हैं। इसलिए जेल का विभाग अक्सर किसी कैदी के लिए नम्र दृष्टिकोण बना लेता है। यह बात विशेषतौर पर तब सच होती है जब कैदी अपने व्यवहार में हिंसक न हो और सहयोग देने वाला हो। वे कैदी पर विश्वास करना शुरु कर देते हैं। कई मामलों में तो, वे नियमों का सख्ती से पालन नहीं करते। चालाक कैदी मनुष्य की इस प्रवृत्ति का फायदा उठाते हैं। ईवान्स के मामले में, जेल के अधिकारी उसके प्रति सहानुभूतिपूर्ण हैं। गवर्नर स्टीफन्स से कहता है कि वह कोठरी से बाहर आ जाए ताकि वह लिखने पर ध्यान केन्द्रित कर सके। जैक्सन इस बात पर जोर नहीं देता कि वह अपनी टोपी उतारे। गवर्नर उसे इस बात की अनुमति दे देता है कि वह अपने कंधे कम्बल से ढक ले क्योंकि अन्दर सर्दी है। ये सब बातें ईवान्स की जेल से फरार होने में सहायता करती हैं।)

Question 5.
Do you agree that between crime and punishment it is mainly a battle of wits ? (क्या आप इस बात से सहमत हैं कि अपराध और सजा में दिमाग की लड़ाई होती है ?)
Answer:
Yes, it is mainly a battle of wits between the crime and the punishment. The criminals use their intelligence and cleverness to befool the law. However, in this battle of wits, the criminals often have the upper hand. In the case of Evans, the jail authorities keep strict watch on Evans and his movements. Even then, he is able to hoodwink the Governor and his jail staff and escapes from there.

(हाँ, यह मुख्यतौर पर अपराध और सजा में दिमाग की लड़ाई है। अपराधी कानून को बेवकूफ बनाने के लिए अपनी अक्ल और चालाकी का प्रयोग करते हैं। लेकिन दिमाग की इस लड़ाई में आमतौर पर अपराधियों का पलड़ा भारी होता है। ईवान्स के मामले में जेल के अफसर उस पर और उसकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखते हैं। इसके बावजूद भी वह गवर्नर और जेल के विभाग को बेवकूफ बनाने में सफल हो जाता है, और जेल से फरार हो जाता है।)

Read And Find Out

Question 1.
What kind of a person was Evans? [H.B.S.E. 2017 (Set-B)] (ईवान्स किस प्रकार का व्यक्ति था?)
Answer:
Evans was a criminal. He had been imprisoned in the Oxford prison. He was different from other prisoners. He was gentle in his behavior. He was not given to violence. But he was very clever. He had already escaped from jail three times.
(ईवान्स एक अपराधी था। उसे ऑक्सफोर्ड जेल में कैद करके रखा गया था। वह अन्य कैदियों से भिन्न था। वह अपने बर्ताव में विनम्र था। वह हिंसक नहीं था। मगर वह बहुत चालाक था। वह पहले ही जेल से तीन बार फरार हो चुका था।)

Question 2.
What were the precautions taken for the smooth conduct of the examination? (परीक्षा के सुचारु संचालन के लिए क्या सावधानियाँ ली गईं?)
Answer:
Every possible precaution was taken for the smooth conduct of the examination. Jackson, a senior prison officer is asked to search Evans’s cell thoroughly. Another jail officer is asked to stay inside the cell till the examination lasts. Evan’s cell is fitted with a microphone so that the Governor can listen to every word spoken and every sound made in the cell.
(परीक्षा के सुचारु रूप से संचालन के लिए हर संभव सावधानी बरती गई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जैक्सन को ईवान्स की कोठरी की अच्छी तरह तलाशी लेने को कहा जाता है। एक अन्य पुलिस अफसर को कहा कि जब तक परीक्षा चलती है कोठरी के अन्दर ही रहे। ईवान्स की कोठरी में एक माईक्रोफोन लगा दिया जाता है। ताकि गवर्नर कोठरी के अन्दर बोली जाने वाली हर बात और हर आवाज को सुन सके।)

Question 3.
Will the exam now go as scheduled? (क्या परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलेगी?)
Answer:
Evans is very clever. The Governor fears that Evans may try to escape from the jail. He may overpower the invigilator. So he takes every possible precaution. He orders Jackson, a senior prison offic search Evans’s cell thoroughly. After these precautions, the examination will go on as scheduled.
(ईवान्स बहुत चालाक है। गवर्नर को डर है कि ईवान्स जेल से फरार होने की कोशिश करेगा। वह पर्यवेक्षक को काबू कर सकता है। इसलिए वह हर सम्भव सावधानी बरतता है। वह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जैक्सन को आदेश देता है कि वह ईवान्स की कोठरी की अच्छी तरह तलाशी ले। इन सावधानियों के बाद, परीक्षा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलेगी।)

Question 4.
Did the Governor and his staff finally heave a sigh of relief? (क्या गवर्नर और उसके विभाग ने अन्त में चैन की साँस ली?)
Answer:
After the examination came to an end, the Governor and his staff finally heaved a sigh of relief. But this relief was short-lived. After some time it is found that in spite of all their precautions, Evans has escaped from the prison. He is caught in the hotel. But from there also he escapes.
(जब परीक्षा समाप्त हो गई, तो गवर्नर और उसका विभाग चैन की सांस लेता है। मगर यह चैन क्षणभंगुर था। थोड़ी देर के बाद पता लगता है कि सब सावधानियों के बावजूद, ईवान्स जेल से फरार हो गया है। वह होटल में पकड़ा जाता है मगर वह वहाँ से भी भाग जाता है।)

Question 5.
Will the injured McLeery be able to help the prison officers track Evans? (क्या घायल मैकलीरी जेल के अफसरों की ईवान्स को खोजने में सहायता कर पाएगा?)
Answer:
McLeery is found injured. It appears that Evans has injured him and has escaped. McLeery shows the question paper to the Governor. A photocopied sheet is pasted on the last page of the question paper. It is printed in German. It contains instructions for Evans to escape. Thus he helps the prison officers. However, he is only putting them on the wrong track.
(मैकलीरी घायल अवस्था में मिलता है। ऐसा लगता है कि ईवान्स ने उसे घायल कर दिया है और भाग गया है। मैकलीरी गवर्नर को प्रश्न-पत्र दिखाता है। प्रश्न-पत्र के अन्तिम पेज पर एक अन्य कागज चिपकाया गया था। यह जर्मन भाषा में छपा हुआ है। इसमें ईवान्स के भाग जाने के लिए निर्देश छपे हैं। इस प्रकार वह जेल के अफसरों की सहायता करता है। लेकिन वह तो केवल उन्हें गलत रास्ते पर डाल रहा है।)

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Question 6.
Will the clues left behind on the question paper, put Evans back in prison again? (क्या प्रश्न-पत्र पर छोड़े गए संकेत, ईवान्स को फिर से जेल में पहुँचा देंगे?)
Answer:
There are some clues left behind on the question paper. But these clues have been left there deliberately. Their purposes is to put the prison officers on the wrong trail. These clues will not be able to put Evans back in prison again.
(प्रश्न-पत्र पर कुछ संकेत छोड़ दिए गए हैं। मगर ये संकेत वहाँ पर जानबूझ कर छोड़े गए हैं। उनका उद्देश्य है जेल के अधिकारियों को गलत रास्ते पर डालना। ये संकेत ईवान्स को फिर से जेल में डालने में कामयाब नहीं होंगे।)

Question 7.
Where did Evans go? [H.B.S.E. 2017 (Set-C)] (ईवान्स कहाँ गया?)
Answer:
Evans is out of the prison. He is happy to be free. He reaches the Golden Lion Hotel in Chipping Norton. But he is shocked to see that the Governor is already there. The Governor orders the policemen to arrest him. But Evans is very clever. He escapes from there also. (ईवान्स जेल से बाहर है। वह आजाद होकर प्रसन्न है। वह चिप्पिंग नॉर्टन में गोल्डन लॉयन होटल में जाता है। मगर उसे यह देखकर सदमा लगता है कि गवर्नर पहले से ही वहाँ पर है। गवर्नर पुलिस वालों को आदेश देता है कि वे उसे कैद कर लें। मगर ईवान्स बहुत चालाक है। वह वहाँ से भी फरार हो जाता है।)

HBSE Class 12 English Evans Tries an O-Level Important Questions and Answers

Multiple Choice Questions
Select the correct option for each of the following questions :

1. Who is the writer of the play ‘Evans Tries An O-Level’?
(A) Colin Dexter
(B) Dolin Center
(C) Rolin Dexter
(D) Nolin Sexter
Answer:
(A) Colin Dexter

2. Who is Evans?
(A) a doctor
(B) a prisoner
(C) a teacher
(D) a leader
Answer:
(B) a prisoner

3. How many times has Evans already escaped from jail?
(A) five times
(B) four times
(C) three times
(D) two times
Answer:
(C) three times

4. How is Evans popularly known?
(A) Evans the Terrible
(B) Evans the Break
(C) Evans the Sake
(D) Evans the Fake
Answer:
(B) Evans the Break

5. What language does Evans want to study?
(A) German
(B) Chinese
(C) Hindi
(D) Punjabi
Answer:
(A) German

6. What test does Evans want to take?
(A) C-level in Chinese
(B) F-level in Hindi
(C) D-level in French
(D) O-level in German
Answer:
(D) O-level in German

7. Who would be the invigilator for Evans’ test?
(A) a teacher
(B) a doctor
(C) a priest
(D) a policeman
Answer:
(C) a priest

8. Whom does the governor ask to search Evans’ cell thoroughly?
(A) Jackson
(B) Rexon
(C) Sexon
(D) Maxon
Answer:
(A) Jackson

9. What does Evans tell Jackson when he asks him to take off his hat?
(A) he is bald
(B) he feels cold without his hat
(C) the hat fits him nicely
(D) it is his lucky hat
Answer:
(D) it is his lucky hat

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

10. What is the real reasons for Evans for not taking off his hat?
(A) it is his lucky hat
(B) he has cut off his hair
(C) he is bald
(D) his hair is grey
Answer:
(B) he has cut off his hair

11. What is the name of the invigilator?
(A) Rev. Stuart McLeary
(B) Rev. Mtuart ScLeary
(C) Rev. Ltuart ScLeary
(D) Rev. Rtuart McLeary
Answer:
(A) Rev. Stuart McLeary

12. Why does the invigilator use the rubber ring?
(A) when he runs
(B) when he sleeps
(C) when he sings
(D) when he has to sit for a long time
Answer:
(D) when he has to sit for a long time

13. What does the rubber ring actually contain?
(A) red ink
(B) human blood
(C) pig’ blood
(D) red paint
Answer:
(C) pig’s blood

14. The invigilator is not real McLeary. Who is he?
(A) a shopkeeper
(B) a friend of Evans
(C) a truck driver
(D) a dry cleaner
Answer:
(B) a friend of Evans

Short Answer Type Questions
Question 1.
How was Evans different from other criminals ? (ईवान्स किस प्रकार अन्य अपराधियों से अलग था ?)
Or
Who was Evans ? Describe his true characteristics. [H.B.S.E. March, 2018 (Set-B)] (ईवान्स कौन था? इसकी सही विशेषताएँ बताएँ।)
Answer:
Evans was a criminal. He had been imprisoned in the Oxford prison. He was different from other prisoners. He was gentle in his behaviour. He was not given to violence. That’s why even jail officials had some sympathy for him. But he was very clever.
(ईवान्स एक अपराधी था। उसे ऑक्सफोर्ड जेल में कैद करके रखा गया था। वह अन्य कैदियों से भिन्न था। वह अपने व्यवहार में विनम्र था। वह हिंसक नहीं था। इसलिए जेल के अफसरों में भी उसके लिए सहानुभूति थी। मगर वह बहुत चालाक था।)

Question 2.
What precautions have been taken about Evans ? (ईवान्स के बारे में क्या सावधानियाँ बरती गई हैं ?) Why was Evans called Evans the Break’? [H.B.S.E. 2020 (Set-B)] (ईवान्स को ‘ईवान्स भगौड़ा’ क्यों कहा जाता था?)
Answer:
Evans has already escaped from jail three times. So he is popularly known as Evans, the Break. It is feared that he will try to escape the fourth time also. So every precaution has been taken. He has been put
Or
into a separate cell in the jail. There is a strict watch over him. However, he makes a clever plan of escaping and hoodwinks all.
(ईवान्स पहले ही जेल से तीन बार भाग चुका है। इसलिए उसे आमतौर पर ईवान्स, भगौड़ा कहा जाता है। ऐसा डर है कि वह चौथी बार भागने का प्रयत्न भी करेगा। इसलिए हर सावधानी बरती गई है। उसे जेल में एक अलग कोठरी में रखा गया है। उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। लेकिन, वह जेल से भाग जाने की एक चालाकीपूर्ण योजना बनाता है और सबको धोखा दे देता है।)\

Question 3.
How does Evans learn German language in the cell ? (कोठरी में ईवान्स किस प्रकार जर्मन भाषा सीखता है ?)
Answer:
Evans expresses his desire to study the German language. So evening classes are selected for him in the jail. He is the only student. The jail authorities have arranged a teacher for him from the technical college. But later it is learnt that the German teacher was, infact, a friend of Evans.
(ईवान्स जर्मन भाषा सीखने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। इसलिए उसके लिए जेल में सांयकालीन कक्षाओं का इंतजाम किया जाता है। वह अकेला छात्र है। जेल के अफसरों ने उसके लिए तकनीकी महाविद्यालय से एक अध्यापक का इंतजाम किया है। मगर बाद में पता लगता है कि जर्मन अध्यापक वास्तव में ईवान्स का मित्र ही था।)

Question 4.
In what examination does Evans want to appear ? (ईवान्स कौन-सी परीक्षा देना चाहता है ?)
Answer:
Evans appears keen on learning German language. He wants to take an O-level test in German language. The Governor concedes to his request. He arranges with the examination board to hold the examination in Evans’s cell. A priest from St. Mary Mags is to be the invigilator.
(ईवान्स जर्मन भाषा सीखने को बड़ा उत्सुक नजर आता है। वह जर्मन भाषा में ओ-स्तर की परीक्षा देना चाहता है। गवर्नर उसकी प्रार्थना को स्वीकार कर लेता है। वह परीक्षा-बोर्ड के साथ यह इंतजाम करता है कि ईवान्स की कोठरी में उसकी परीक्षा ली जाए। सेन्ट मैरी मैग्ज़ का एक पादरी पर्यवेक्षक होगा।)

Question 5.
What precaution does the Governor take about Evans’s examination ? . (गवर्नर ईवान्स की परीक्षा के बारे में क्या सावधानी लेता है ?)
Answer:
The Governor takes every possible precaution. He orders Jackson, a senior prison officer to search Evans’s cell thoroughly. Jackson takes away even Evans’s nail scissors and nail file. Another jail official is asked to stay inside the cell till the examination lasts. Evan cell is fitted with a microphone so that the Governor can listen to every word spoken and every sound made in the cell.
(गवर्नर हर सम्भव सावधानी बरतता है। वह एक सीनियर जेल अधिकारी, जैक्सन को आदेश देता है कि वह ईवान्स की कोठरी की अच्छी तरह तलाशी ले। जैक्सन ईवान्स की नाखून काटने की कैंची और उसके नाखून की रेती भी ले जाता है। जेल के एक अन्य अधिकारी को जब तक परीक्षा चलती है तब तक ईवान्स की कोठरी के अन्दर रहने को कहा जाता है। ईवान्स की कोठरी में एक माईक्रोफोन फिट कर दिया जाता है ताकि गवर्नर कोठरी में कहे गए हर शब्द और की गई हर आवाज को सुन सके।)

Question 6.
Why is Evans allowed to keep his hat on? (ईवान्स को टोप पहने रखने की अनुमति क्यों दी गई है ?)
Answer:
Evans is wearing a woollen hat. Jackson asks Evans to take off his hat. But Evans says that it is his lucky hat. So Jackson lets him keep the hat on. Infact, this is part of Evans’s plan to escape. He has cut off his long wavy hair with the blade to impersonate the invigilator.
(ईवान्स ने एक ऊनी टोप पहना हुआ है। जैक्सन ईवान्स को कहता है कि वह अपना टोप उतार दे। मगर ईवान्स कहता है कि वह उसका भाग्यशाली टोप है। इसलिए जैक्सन उसे टोप पहने रखने की अनुमति दे देता है। वास्तव में, यह ईवान्स के भागने की योजना का भाग है। उसने अपने लंबे घुघराले बाल ब्लेड से काट लिए हैं ताकि वह पर्यवेक्षक का भेष बना सके।)

Question 7.
Where was McLeery in the hospital or somewhere else? (मैकलीरी कहाँ था अस्पताल में या कहीं और?)
Answer:
The invigilator arrives at the gate of the prison. He is a parson in a church. His name is Rev. Stuart McLeery. Infact, this man is not the real McLeery, the parson. He is Evans’s friend who is impersonating as McLeery. The real McLeery was bound and gagged in his flat.
(पर्यवेक्षक जेल के गेट पर आता है। वह चर्च का एक पादरी है। उसका नाम रिवरेंड स्टुअर्ट मैकलीरी है। वास्तव में, यह व्यक्ति वास्तविक पादरी मैकलीरी नहीं है। वह ईवान्स का मित्र है जो मैकलीरी होने का नाटक कर रहा है। वास्तविक मैकलीरी को उसके फ्लैट में बाँध दिया गया था और उसके मुँह को भी बंद कर दिया गया था।)

Question 8.
What does Jackson find in the parson’s suitcase ? (जैक्सन को पादरी के सूटकेस में क्या मिलता है ?)
Answer:
Jackson searches the parson’s suitcase also. He finds a semi-inflated small rubber ring. He tells Jackson that he is suffering from haemorrhoids. He uses the rubber ring when he sits down for a long time. Jackson lets him keep it. But he does not know that this is a clever plan. The tube contains pig’s blood which Evan later uses to pretend that he is the wounded McLeery.

(जैक्सन पादरी का एक सूटकेस भी चेक करता है। उसे एक आधी-फूली हुई रबड़ की छोटी गोल ट्यूब से मिलती है। वह जैक्सन को बताता है कि वह हैमोरॉयड्स से पीड़ित है। जब वह अधिक देर तक बैठता है तो वह रबड़ की उस गोल ट्यूब का प्रयोग करता है। जैक्सन उसे इसको अपने पास रखने देता है। मगर वह यह नहीं जानता कि यह एक चतुराईपूर्ण योजना है। ट्यूब में सूअर का खून है जिसे बाद में ईवान्स इस बात का ढोंग करने के लिए प्रयोग करता है कि वही घायल मैकलीरी है।)

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Question 9.
Why does Stephens not stay inside the cell, as originally planned ? (जैसे कि पहले सोचा गया था, उसके विपरीत स्टीफन्स कोठरी में क्यों नहीं ठहरता ?)
Answer:
The examination starts. Stephens is to stay inside Evans’s cell. But Evans says that he cannot concentrate if Stephens remains inside the cell. So Jackson posts Stephens out of the cell and asks him to keep a watch through a peep-hole.

(परीक्षा आरम्भ होती है। स्टीफन्स ने कोठरी के अन्दर ही रहना है। मगर ईवान्स कहता है कि अगर स्टीफन्स कोठरी के अंदर रहेगा तो वह ध्यान नहीं लगा पाएगा। इसलिए जैक्सन, स्टीफन्स को दरवाजे के बाहर लगा देता है, और उसे कहता है कि वह एक छोटी-सी खिड़की में से उस पर नजर रखे।)

Question 10.
What clues did the answer sheet of Evans provide to the Governor ? (ईवान्स की उत्तर पुस्तिका ने गवर्नर को क्या संकेत दिए?) [H.B.S.E. March,2019 (Set-B)]
Answer:
Evans was asked to write Index No 133 and Centre No 271 on his answer sheet. The words written on the correction slip meant ‘Golden Lion’ from this, the Governor got the hint that Evans was at the Golden Lion Hotel of chipping Norton.
(ईवान्स को उत्तर पुस्तिका पर इन्डैक्स नं० 133 और सेंटर नं० 271 लिखने के लिए कहा गया था। करेक्शन स्लिप पर लिखे गए शब्दों का मतलब था ‘गोल्डन लायन’, इससे गवर्नर को संकेत मिला कि ईवान्स चिपिंग नॉर्टन के गोल्डन लॉयन होटल में थे।)

Question 11.
How was the Governor able to find the place where Evans had gone? (गवर्नर को उस स्थान का पता कैसे चला कि ईवान्स कहाँ गया है?)
Answer:
McLeery was appointed Evans’ invigilator. He is found injured. It appears Evans has injured him. He shows the question paper to the Governor. A photocopied sheet is pasted on the last page of the question paper. It is printed in German. It contains instructions for Evans to escape. Thus the Governor was able to find the place where Evans had gone.
(मैकलीरी को ईवान्स का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया। उसे घायल अवस्था में पाया गया। ऐसा लगता है कि ईवान्स ने उसे घायल किया है। मैकलीरी गवर्नर को प्रश्न-पत्र दिखाता है। प्रश्न-पत्र के अंतिम पेज पर एक कागज चिपकाया गया है। यह जर्मन भाषा में है। इसमें ईवान्स के भाग जाने के लिए निर्देश लिखे हैं। इससे गवर्नर को पता चला कि ईवान्स कहाँ गया है।)

Question 12.
What instruction does Stephens get from the Governor ? (स्टीफन्स को गवर्नर से क्या निर्देश मिलता है ?)
Answer:
Stephens gets a phone call from the Governor. He tells Stephen that after the examination, he should accompany McLeery to the prison gate and should check that Evans’s cell is properly locked. In fact this is a fake call. Its purpose is to put Stephens out of the way. In the meantime, Evans will give final shape to his plan of escape.
(स्टीफन्स को गवर्नर से फोन मिलता है। वह स्टीफन्स से कहता है कि परीक्षा के बाद, वह मैकलीरी को जेल के द्वार तक छोड़ने जाए और यह बात चेक करे कि ईवान्स की कोठरी को अच्छी तरह ताला लगा हुआ है। वास्तव में यह एक नकली फोन है। इसका उद्देश्य स्टीफन्स को रास्ते से हटाना है। इस बीच ईवान्स जेल से भागने की योजना को अंतिम रूप देगा।)

Question 13.
What does Stephens find when he comes back to the cell ? (जब स्टीफन्स वापिस कोठरी में आता है तो क्या देखता है ?)
Answer:
The examination is over. Stephens accompanies McLeery to the prison gate. When he comes back, he finds that McLeery is in Evans’s seat. He is injured and blood is trickling down from his head. He presumes that Evans has escaped after injuring McLeery. He shouts to Jackson and calls him.
(परीक्षा समाप्त हो जाती है। स्टीफन्स मैकलीरी को जेल के द्वार तक ले जाता है। जब वह लौटकर आता है, तो वह देखता है कि मैकलीरी ईवान्स की सीट पर है। वह घायल है और उसके सिर से खून बह रहा है। वह सोचता है कि इवान्ज़ मैकलीरी को घायल करके भाग गया है। वह जैक्सन को चिल्लाकर बुलाता है।)

Question 14.
Describe two of Evans main characteristics. (ईवान्स के दो प्रमुख गुणों का वर्णन करो।)
Answer:
Evans is a criminal. He has been imprisoned in the oxford prison. He is different from other prisoners. He is gentle in his behaviour. He is not given to violence.
(ईवान्स एक अपराधी है। वह ऑक्सफोर्ड जेल में बंद है। वह अन्य कैदियों से भिन्न है। वह अपने व्यवहार में सौम्य है। वह हिंसावादी नहीं है।)

Question 15.
Who do you think has outwitted the other – Evans or the Governor ? How ? (तुम्हारे अनुसार ईवान्स या गवर्नर में से किसने दूसरे को मात दी? कैसे?) [H.B.S.E. March, 2019 (Set-A)]
Answer:
It is Evans who has outwitted the Governor at every step of the story. Evans is so clever that it becomes a hard job for the Governor to keep him in jail. He has befooled the Governor four times to make sure his release from the prison.
(यह ईवान्स है जिसने कहानी के हर चरण में गवर्नर को पीछे छोड़ दिया है। ईवान्स इतना चालाक है कि उसे जेल में रखना गर्वनर के लिए एक कठिन काम हो जाता है। उन्होंने जेल से अपनी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए चार बार गवर्नर से गुहार लगाई है।)

Question 16.
How is Evans caught at the hotel ? (ईवान्स होटल में किस प्रकार पकड़ा जाता है ?)
Answer:
Evans is out of the prison. He is happy to be free. He reaches the Golden Lion Hotel in Chipping Norton. He opens the door of his room and gets a great shock. He finds the Governor sitting on the bed. The Governor tells him that he got the hint about the hotel and its location from the information given in the question paper in code words. Evans admires the intelligence of the Governor.

(ईवान्स जेल से बाहर है। वह आज़ाद होकर प्रसन्न है। वह चिप्पिंग नॉर्टन में गोल्डन लायन होटल में पहुँचता है। वह कमरे का दरवाजा खोलता है और उसे बहुत बड़ा झटका लगता है। वह देखता है कि बिस्तर पर गवर्नर बैठा है। गवर्नर उसे बताता है कि उसे होटल और उसके स्थान के बारे में संकेत प्रश्न-पत्र में सांकेतिक भाषा में दी गई सूचना से मिला था। इवान्ज गवर्नर की बुद्धिमत्ता की तारीफ करता है।)।

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Question 17.
How does Evans escape from the jail? (ईवान्स जेल से कैसे भाग जाता है ?) [H.B.S.E. March, 2019, 2020 (Set-D)]
Answer:
The Governor hands over Evans to a prison officer. He handcuffs Evans and takes him into the van and drives away. In fact, the Governor has again been hoodwinked by Evans and his friends. They got the prison van in the morning on the pretext that it was needed by the Magistrate. Now Evans was taken away in the same van. The prison officer who arrests Evans is in fact, one of his friends.

(गवर्नर ईवान्स को जेल के एक अफसर को सौंप देता है। वह अफसर ईवान्स को हथकड़ी लगाता है और वह उसे वैन में ले जाता है और चला जाता है। वास्तव में, गवर्नर को ईवान्स और उसके मित्रों ने एक बार फिर चकमा दे दिया है। उन्होंने प्रातः ही जेल की वैन इस बहाने से ले ली थी मैजिस्ट्रेट को इसकी जरूरत है। अब ईवान्स को इसी वैन में ले जाया गया है। जेल का वह अफसर जो ईवान्स को कैद करता है वास्तव में उसका एक मित्र है।)

Long Answer Type Questions

Question 1.
What precautions do the jail authorities take regarding Evan’s examination ? (जेल के कर्मचारी ईवान्स की परीक्षा के बारे में क्या सावधानियाँ लेते हैं ?) [H.B.S.E. 2017 (Set-D)]
Answer:
Evans expresses his desire to study the German language. So evening classes are selected for him in the jail. He is the only student. The jail authorities have arranged a teacher for him from the technical college. But later it is learnt that the German teacher was, in fact, a friend of Evans. Evans appears keen on learning German language. He wants to take an O-level test in German language. The Governor concedes to his request. He arranges with the Examinations Board to hold the examination in Evans’s cell. A priest from St. Mary Mags is to be the invigilator.

The Governor fears that Evans may try to escape from the jail. He may overpower the invigilator. So he takes every possible precaution. He orders Jackson, a senior prison officer to search Evans’s cell thoroughly. Jackson spends two hours searching the cell but finds nothing hidden there. He takes away even Evans’s nail scissors and nail file. Another jail official is asked to stay inside the cell till the examination lasts. Evans’s cell is fitted with a microphone so that the Governor can listen to every word spoken and every sound made in the cell.

(ईवान्स जर्मन भाषा सीखने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। इसलिए उसके लिए जेल में सांयकालीन कक्षाओं का इंतजाम किया जाता है। वह अकेला छात्र है। जेल के अफसरों ने उसके लिए तकनीकी महाविद्यालय से एक अध्यापक का इंतजाम किया है। मगर बाद में पता लगता है कि जर्मन अध्यापक, वास्तव में, ईवान्स का मित्र ही था। ईवान्स जर्मन भाषा सीखने को बड़ा उत्सुक नजर आता है। वह जर्मन भाषा में ओ-स्तर की परीक्षा देना चाहता है। गवर्नर उसकी प्रार्थना को स्वीकार कर लेता है। वह परीक्षा-बोर्ड के साथ यह इंतजाम करता है कि ईवान्स की कोठरी में ही उसकी परीक्षा ली जाए। सेन्ट मैरी मैग्ज़ का एक पादरी पर्यवेक्षक होगा।

गवर्नर को इस बात का भय है कि ईवान्स जेल से भागने का प्रयत्न करेगा। वह पर्यवेक्षक पर काबू पा सकता है। इसलिए वह हर सम्भव सावधानी बरतता है। वह एक सीनियर जेल अधिकारी जैक्सन को आदेश देता है कि वह ईवान्स की कोठरी की अच्छी तरह तलाशी ले। जैक्सन कोठरी की तलाशी लेने में दो घन्टे लगाता है मगर उसे वहाँ कुछ भी छुपा हुआ नहीं मिलता। वह तो ईवान्स की नाखून काटने की कैंची और उसके नाखून की रेती भी ले जाता है। जेल के एक अन्य अफसर को जब तक परीक्षा चलती है तब तक ईवान्स की कोठरी के अन्दर रहने को कहा जाता है। ईवान्स की कोठरी में एक माईक्रोफोन फिट कर दिया जाता है ताकि गवर्नर कोठरी में कहे गए हर शब्द और की गई हर आवाज को सुन सके।)

Question 2.
Describe the scene in Evan’s cell before the start of the examination. [H.B.S.E. 2020 (Set-C)] (परीक्षा आरम्भ होने से पहले ईवान्स की कोठरी के दृश्य का वर्णन करो।)
Answer:
Half an hour before the beginning of the examination, Jackson and Stephen visit Evans’s cell. They give a blade to Evans to shave himself. Jackson asks Stephen to take away the blade after Evans has shaved himself. He is wearing a woollen hat. Jackson asks Evans to take off his hat. But Evans says that it is his lucky hat. So Jackson lets him keep the hat on. Infact, this is part of Evans’s plan to escape. He has cut off his long wavy hair with the blade to impersonate the invigilator. The invigilator arrives at the gate of the prison. He is a person in a church. His name is Rev. Stuart McLeery. He is led to Evans’s cell and introduced to him.

The Governor is still worried. He phones Jackson and asks him to search McLeery thoroughly. Jackson searches his suitcase also. He finds a semi-inflated small rubber ring. He tells Jackson that he is suffering from hemorrhoids. He uses the rubber ring when he sits down for a long time. Jackson lets him keep it. But he does not know that this is a clever plan. The tube contains pig’s blood which Evans later uses to pretend that he is the wounded McLeery. In fact, this man is not the real McLeery, the parson. He is Evans’s friend who is impersonating as McLeery. The real McLeery was bound and gagged in his flat.

(परीक्षा आरम्भ होने से आधा घंटा पहले, जैक्सन और स्टीफन्स ईवान्स की कोठरी में जाते हैं। वे ईवान्स को शेव करने के लिए एक ब्लेड देते हैं। जैक्सन स्टीफन्स से कहता है कि जब ईवान्स शेव कर चुके तो वह ब्लेड को ले जाए। इवान्ज़ अपनी शेव कर लेता है। उसने एक ऊनी टोप पहना हुआ है। जैक्सन ईवान्स को कहता है कि वह अपना हैट उतार दे। मगर ईवान्स कहता है कि वह उसका भाग्यशाली टोप है। इसलिए जैक्सन उसे टोप पहने रखने की अनुमति दे देता है। वास्तव में, यह ईवान्स के भागने की योजना का एक भाग है। उसने अपने लम्बे घुघराले बाल ब्लेड से काट लिए हैं ताकि वह पर्यवेक्षक का भेष बना सके।

पर्यवेक्षक जेल के गेट पर आता है। वह चर्च का एक पादरी है। उसका नाम रिवरेंड स्टुअर्ट मैकलीरी है। उसे ईवान्स की कोठरी में लाया जाता है और उससे उसका परिचय करवाया जाता है। गवर्नर अभी भी चिंतित है। वह जैक्सन को फोन करता है और उसे कहता है कि वह मैकलीरी की पूरी तरह तलाशी ले। जैक्सन उसका सूटकेस भी चेक करता है। उसे एक आधी फूली हुई रबड़ की छोटी गोल ट्यूब मिलती है। वह जैक्सन को बताता है कि वह हैमोरॉयड्स से पीड़ित है।

जब वह अधिक देर तक बैठता है तो वह रबड़ की उस गोल ट्यूब का प्रयोग करता है। जैक्सन उसे इसको अपने पास रखने देता है। मगर वह यह नहीं जानता कि यह एक चतुराईपूर्ण योजना है। ट्यूब में सूअर का खून है जिसे बाद में ईवान्स इस बात का ढोंग करने के लिए प्रयोग करता है कि वही घायल मैकलीरी है। वास्तव में यह व्यक्ति वास्तविक पादरी मैकलीरी नहीं है। वह ईवान्स का मित्र है जो मैकलीरी होने का नाटक कर रहा है। वास्तविक मैकलीरी को उसके फ्लैट में बाँध दिया गया था और उसके मुँह को भी बंद कर दिया गया था।)

Question 3.
What two calls does the Governor receive during Evans’s examination ? (ईवान्स की परीक्षा के दौरान गवर्नर को कौन-से दो फोन आते हैं ?)
Answer:
The examination starts. Stephens is to stay inside Evans’s cell. But Evans says that he cannot concentrate if Stephens remains inside the cell. So Jackson posts Stephens out of the cell and asks him to keep a watch through a peephole. At 9.40, the Governor receives a call from the Examination Board office. He is told that there is an error in the question paper and it has to be corrected. The Governor passes on the information to Jackson. The invigilator announces it to Evans. It is a minor correction. In fact, it is a hint to Evans. The call is not from the Examination Board. It is from one of the friends of Evans. It cleverly informs Evans the name of the hotel — Golden Lion.

eives another call. It is from the Magistrate’s office. They need a prison van and two prison officials for a remand case. Infact this call is also a hoax. Through this call, Evans’s friends are able to get a prison van. They will use it at the end of the story. He says that it is cold inside the cell. He asks for permission to cover his shoulders with a blanket lying in the cell. The Governor allows him to do so.

Stephens keeps looking through the peephole almost every minute. He always finds McLeery reading the newspaper, and Evans sitting with his pen held between his teeth. Three minutes before the end of the examination, Stephens gets a phone call from the Governor. He tells Stephen that after the examination, he should accompany McLeery to the prison gate and should check that Evans’s cell is properly locked. In fact, this is a fake call. Its purpose is to put Stephens out of the way. In the meantime, Evans will give final shape to his plan of escape.

(परीक्षा आरम्भ होती है। स्टीफन्स ने ईवान्स की कोठरी के अन्दर रहना है। मगर ईवान्स कहता है कि अगर स्टीफन्स कोठरी के अन्दर रहेगा तो वह परीक्षा देने पर अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाएगा। इसलिए जैक्सन स्टीफन्स को कोठरी के बाहर पहरे पर बिठा देता है और उसे कहता है कि वह एक छोटी-सी खिड़की में से उस पर नजर रखे। 9.40 पर, गवर्नर को परीक्षा-बोर्ड के दफ्तर से फोन आता है कि प्रश्न-पत्र में कुछ गलती है और उसे ठीक करवाना है। गवर्नर यह सूचना जैक्सन को दे देता है। पर्यवेक्षक यह सूचना ईवान्स को देता है। यह एक छोटी-सी गलती है। वास्तव में यह ईवान्स को एक संकेत है। यह फोन परीक्षा-बोर्ड से नहीं आता है। यह ईवान्स के एक मित्र से आता है। यह बड़ी चतुराई से ईवान्स को होटल का नाम बता देते हैं-गोल्डन लॉयन।

थोड़ी देर बाद, गवर्नर को एक और फोन मिलता है। यह मैजिस्ट्रेट के दफ्तर से है। उन्हें एक रिमांड केस के लिए जेल की वैन और दो जेल अधिकार चाहिएँ। वास्तव में, यह फोन भी नकली है। इसके द्वारा, ईवान्स के मित्रों को जेल की वैन मिल जाती है। इसे वे कहानी के अन्त में प्रयोग करेंगे। ईवान्स माईक्रोफोन के द्वारा गवर्नर से बात करता है। वह कहता है कि कोठरी में बहुत ठंड है। वह कोठरी में पड़े कम्बल से अपने कंधे ढकने की अनुमति माँगता है। गवर्नर उसे ऐसा करने की अनुमति दे देता है।

स्टीफन्स छोटी खिड़की में से लगभग हर मिनट झांक लेता है। वह सदा मैकलीरी को अखबार पढ़ते हुए, और ईवान्स को अपने पेन को दाँतों में दबाए हुए बैठे देखता है। परीक्षा समाप्त होने से तीन मिनट पहले, स्टीफन्स को गवर्नर से फोन मिलता है। वह स्टीफन्स से कहता है कि परीक्षा के बाद वह मैकलीरी को जेल के द्वार तक छोड़ने जाए और यह बात चेक करे कि ईवान्स की कोठरी को अच्छी तरह ताला लगा हुआ है। वास्तव में, यह एक नकली फोन है। इसका उद्देश्य स्टीफन्स को रास्ते से हटाना है। इस बीच, ईवान्स जेल से भागने की योजना को अंतिम रूप देगा।)

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Question 4.
What does Stephens find when he comes back after escorting McLeery to the prison door ? (मैकलीरी को जेल के द्वार तक छोड़कर जब स्टीफन्स वापस आता है तो क्या देखता है ?)
OR
How was the ‘Injured’ McLeery able to befool the prison officers? (घायल मैकलीरी जेल के अफसरों को मूर्ख बनाने में कैसे सफल हुआ?) [H.B.S.E. March, 2019 (Set-D)]
Answer:
After the examination, Stephens accompanies McLeery to the prison gate. When he comes back, he finds that McLeery is in Evans’s seat. He is injured and blood is trickling down from his head. He presumes that Evans has escaped after injuring McLeery. He shouts to Jackson and calls him. McCleery appears to be shocked and weak. Jackson and Stephens lead him to the yard where the Governor has also arrived. He orders that McLeery should be taken to the hospital. But McLeery says that he is alright. He shows the question paper to the Governor. A photocopied sheet is pasted on the last page of the question paper.

It is printed in German. It contains instructions for Evans to escape. Just then, detective superintendent, Carter arrives there. McCleery says that he knows where Evans has escaped and he can help them trace him out. So the Governor asks Carter to take McLeery with him and they both drive away. The Governor rebukes Stephens to escort Stephens to the prison gate, thinking him to be McLeery. But Stephens tells him that he received a call from him. The Governor realizes that it was a hoax call, as he did not send any such instructions to Stephens. He also thinks that Jackson did not search Evans’s cell thoroughly. He could not find that a false beard and a parson’s cloak was hidden in the cell. He could not see that McLeery brought it.

(परीक्षा समाप्त होने के बाद स्टीफन्स मैकलीरी को जेल के द्वार तक ले जाता है। जब वह लौटकर आता है, तो वह देखता है कि मैकलीरी ईवान्स की सीट पर है। वह घायल है और उसके सिर से खून बह रहा है। वह सोचता है कि ईवान्स मैकलीरी को घायल करके भाग गया है। वह जैक्सन को चिल्लाकर बुलाता है। मैकलीरी कमजोर और हैरान लगता है। जैक्सन और स्टीफन्स उसे आँगन में ले जाते हैं जहाँ पर गवर्नर भी पहुंच गया है। वह आदेश देता है कि मैकलीरी को हस्पताल में ले जाया जाए। मगर मैकलीरी कहता है कि वह ठीक है। वह गवर्नर को प्रश्न-पत्र दिखाता है। उसके आखिरी पेज पर एक फोटो-कॉपी शीट चिपकी हुई है। यह जर्मन भाषा में छपी है। इसमें ईवान्स के भागने के बारे में निर्देश हैं। तभी वहाँ पर जासूस, अधीक्षक कार्टर पहुँच जाता है। मैकलीरी कहता है कि वह जानता है कि ईवान्स भागकर कहाँ गया होगा और वह उसे ढूंढने में सहायता कर सकता है।

इसलिए गवर्नर कॉर्टर से कहता है कि वह मैकलीरी को अपनी साथ ले जाए और वे दोनों कार में चले जाते हैं। गवर्नर स्टीफन्स को इस बात के लिए डाँटता है कि वह ईवान्स को मैकलीरी समझकर उसे जेल के गेट के बाहर तक छोड़ आया। मगर स्टीफन्स कहता है कि उसे उस (गवर्नर से) इस बारे में फोन आया था। गवर्नर महसूस करता है कि यह एक नकली फोन था, क्योंकि उसने ऐसे कोई निर्देश स्टीफन्स को नहीं भेजे थे। वह यह भी सोचता है कि कोठरी के अन्दर एक नकली दाढ़ी और पादरी का चोगा छुपा हुआ था। वह यह नहीं देख सका कि मैकलीरी इन्हें लाया था।)

Question 5.
What does the Governor realise about McLeery ? (गवर्नर को मैकलीरी के बारे में क्या पता चलता है ?)
Answer:
Carter telephones the Governor and tells him that McLeery spotted Evans on a road in a car. They chased the car but it disappeared at the Headington roundabout. He also tells Governor that when they went to the Examination Board Office, McLeery appeared to be very ill. So he phoned the Radcliffe hospital for an ambulance. He hopes that McLeery is now in the hospital. The Governor enquires from the hospital. They tell him that they sent an ambulance for McLeery but he was not there. Now the Governor sees that it was a very clever plan made by Evans. First, someone impersonated as McLeery and came to Evans’s cell. Then Evans impersonated as McLeery and faked as injured, telling the Governor that Evans injured him. In fact, it was pig’s blood which gave the appearance of a bleeding head.

(कॉर्टर गवर्नर को फोन करता है और उसे बताता है कि मैकलीरी ने ईवान्स को एक सड़क पर एक कार में देखा था। उन्होंने कार का पीछा किया था मगर वह कार हेडिंग्टन रोड के मोड़ पर गायब हो गई थी। वह गवर्नर को यह भी बताता है कि जब वे परीक्षा बोर्ड के दफ्तर में गए, तो मैकलीरी बहुत बीमार नजर आ रहा था। इसलिए उसने रैडक्लिफ हस्पताल में एम्बुलैन्स के लिए फोन किया था। उसे आशा है कि मैकलीरी अब हस्पताल में है। गवर्नर हस्पताल से पूछताछ करता है। वे उसे बताते हैं कि उन्होंने मैकलीरी के लिए एक वैन भेजी थी, मगर वह वहाँ पर नहीं था। अब गवर्नर महसूस करता है कि यह ईवान्स द्वारा बनाई गई एक बड़ी चतुराईपूर्ण योजना थी। पहले तो किसी ने मैकलीरी का भेष बनाया और ईवान्स की कोठरी में आया। तब ईवान्स ने मैकलीरी का भेष बनाया और यह ढोंग किया कि वह घायल है, और गवर्नर को कहा कि उसे ईवान्स ने घायल किया है। वास्तव में, उन्होंने सूअर के खून से सिर से खून बहने का नाटक किया।)

Question 6.
How was Evans arrested and how did he gain his freedom? (ईवान्स कैसे गिरफ्तार हुआ और उसने अपनी आजादी कैसे हासिल की?)
Answer:
Evans is out of the prison. He is happy to be free. He is sorry that he cut his hair short to impersonate as McLeery. He recalls the events of the day. His friends provided him soap, water and everything in the car. Now he hopes to leave his hotel early in the morning. He reaches the Golden Lion Hotel in Chipping Norton.

He opens the door of his room and gets a great shock. He finds the Governor sitting on the bed. The Governor tells him that he got the hint about the hotel and its location from the information given in the question paper in code words. Evans admires the intelligence of the Governor. The Governor and Evans come into the lobby of the hotel. Receptionist tells the Governor that the prison van is waiting in front of the hotel. A prison officer handcuffs Evans. He takes him into the van and drive away.

Infact, the Governor has again been hoodwinked by Evans and his friends. They got the prison van in the morning on the pretext that it was needed by the Magistrate. Now Evans was taken away in the same van. The prison officer who arrests Evans is in fact, one of his friends. When the prison van turns the corner, his friend unlocks the handcuff. Then they drive to Newbury. Evans escapes from prison for the fourth time.

(ईवान्स जेल से बाहर है। वह आज़ाद होकर प्रसन्न है। उसे इस बात का अफसोस है कि उसे मैकलीरी का भेष बनाने के लिए अपने बाल काटने पड़े। वह दिन भर की घटनाओं को याद करता है। उसके दोस्तों ने उसे साबुन, पानी और अन्य हर चीज कार में दी। अब उसे आशा है कि वह प्रातः जल्दी होटल से चला जाएगा। वह चिप्पिंग नॉर्टन में गोल्डन लायन होटल में पहुँचता है। वह कमरे का दरवाजा खोलता है और उसे बहुत बड़ा झटका लगता है। वह देखता है कि बिस्तर पर गवर्नर बैठा है। गवर्नर उसे बताता है कि उसे होटल और उसके स्थान के बारे में संकेत प्रश्न-पत्र में सांकेतिक भाषा में दी गई सूचना से मिला था। ईवान्स गवर्नर की बुद्धिमत्ता की तारीफ करता है। गवर्नर और ईवान्स होटल की लॉबी में आते हैं।

स्वागत करने वाली गवर्नर को बताती है कि जेल की वैन होटल के सामने खड़ी है। जेल का एक अफसर ईवान्स को हथकड़ी लगाता है। वह उसे वैन में ले जाता है और चला जाता है। वास्तव में गवर्नर को ईवान्स और उसके मित्रों ने एक बार फिर चकमा दे दिया है। उन्होंने प्रातः ही जेल की वैन इस बहाने ले ली थी मैजिस्ट्रेट को इसकी जरूरत है। अब ईवान्स को इसी वैन में ले जाया गया है। जेल का वह अफसर जो ईवान्स को कैद करता है वास्तव में उसका एक मित्र है। जब जेल की वैन मोड़ से ओझल होती है। उसका मित्र हथकड़ी खोल देता है। तब वे न्यूबरी चले जाते हैं। ईवान्स जेल से चौथी बार फरार हो जाता है।)

Question 7.
Write a brief summary of the story ‘Evans Tries an O-level. (‘Evans Tries an O-Level’ कहानी का संक्षिप्त सार लिखो।)
Answer:
This is a very interesting play. Evans is a prisoner. In the past, he has escaped from prison three times. Now a strict watch is being kept over him. One day he expresses his desire to appear for O-level examination in German language. He is given permission to take the examination. The exam his prison cell. A question paper comes from the Examination Board. A person named McLeery comes as an invigilator. Infact, he is Evans’s friend. Acting on a fake call, Stephens escapes McLeery to the gate.

When he comes back, he finds McLeery injured. He guesses that the person who went out was Evans. Infact it was Evans, impersonating as McLeery. When he is taken out, he escapes. But the Governor gets hints from the question paper and goes to Evans’s hotel. He arrests Evans. But the prison officer who takes Evans away in the prison van is also fake. He is Evans’s friend. In this way, Evans escapes from the prison for the fourth time.

(यह एक बहुत रोचक नाटक है। ईवान्स एक कैदी है। अतीत में वह जेल से तीन बार भाग चुका है। अब उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। एक दिन वह जर्मन भाषा में ओ-स्तर की परीक्षा देने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। उसे वह परीक्षा देने की अनुमति मिल जाती है। परीक्षा जेल की कोठरी में ही होती है। परीक्षा-बोर्ड से प्रश्न-पत्र आता है। मैकलीरी नाम का एक व्यक्ति पर्यवेक्षक के रूप में आता है। वास्तव में, वह ईवान्स का मित्र है। एक नकली टेलीफोन कॉल के कारण, स्टीफन्स को द्वार तक ले जाता है। जब वह लौटकर वापस आता है, तो वह देखता है कि मैकलीरी घायल है।

वह अनुमान लगाता है कि, जो व्यक्ति बाहर गया वह ईवान्स है। वास्तव में यह मैकलीरी के भेष में ईवान्स था। जब उसे बाहर ले जाया जाता है तो वह भाग जाता है। मगर गवर्नर को प्रश्न-पत्र से संकेत मिल जाता है और वह ईवान्स के होटल में जाता है। वह ईवान्स को गिरफ्तार कर लेता है। मगर जेल का जो अफसर ईवान्स को वैन में ले जाता है वह भी नकली है। वह ईवान्स का मित्र है। इस प्रकार ईवान्स चौथी बार जेल से भाग जाता है।)

Evans Tries an O-Level Summary in English and Hindi

Evans Tries an O-Level Introduction to the Chapter
This is a very interesting play. Evans is a prisoner. In the past, he has escaped from prison three times. Now a strict watch is being kept over him. One day he expresses his desire to appear for O-level examination in German language. He is given permission to take the examination. The examination is held in his prison cell. A question paper comes from the Examination Board.

A person named McLeery comes as an invigilator. Infact, he is Evans’s friend. Acting on a fake call, Stephens escorts McLeery to the gate. When he comes back, he finds McLeery injured. He guesses that the person who went out was Evans.

Infact it was Evans, impersonating as McLeery. When he is taken out, he escapes. But the Governor gets hints from the question paper and goes to Evans’s hotel. He arrests Evans. But the prison officer who takes Evans away in the prison van is also fake. He is Evans’s friend. In this way, Evans escapes from the prison for the fourth time.

(यह एक बहुत रोचक नाटक है। ईवान्स एक कैदी है। अतीत में वह जेल से तीन बार भाग चुका है। अब उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। एक दिन वह जर्मन भाषा में ओ-स्तर की परीक्षा देने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। उसे वह परीक्षा देने की अनुमति मिल जाती है। परीक्षा जेल की कोठरी में ही होती है। परीक्षा बोर्ड से प्रश्न-पत्र आता है। मैकलीरी नाम का एक व्यक्ति पर्यवेक्षक के रूप में आता है। वास्तव में, वह ईवान्स का मित्र है।

एक नकली टेलीफोन के कारण स्टीफन्स मैकलीरी को गेट तक ले जाता है। जब वह लौटकर वापिस आता है, तो वह देखता है कि मैकलीरी घायल है। वह अनुमान लगाता है कि जो व्यक्ति बाहर गया वह ईवान्स था। वास्तव में यह मैकलीरी के भेष में ईवान्स था। जब उसे बाहर ले जाया जाता है तो वह भाग जाता है। मगर गवर्नर को प्रश्न-पत्र से संकेत मिल जाता है, और वह ईवान्स के होटल में जाता है। वह ईवान्स को गिरफ्तार कर लेता है। मगर जेल का जो अफसर ईवान्स को वैन में ले जाता है वह भी नकली है। वह ईवान्स का मित्र है। इस प्रकार, ईवान्स चौथी बार जेल से भाग जाता है।)

Evans Tries an O-Level Summary
Evans is a criminal. He has been imprisoned in the Oxford prison. He is different from other prisoners. He is gentle in his behavior. He is not given to violence. But he is very clever. He has already escaped from jail three times. So he is popularly known as Evans, the Break. It is feared that he will try to escape the fourth time also. So every precaution has been taken. He has been put into a separate cell in the jail. There is a strict watch over him. However, he makes a clever plan of escaping and hoodwinks all.

Evans expresses his desire to study the German language. So evening classes are arranged for him in the jail. He is the only student. The jail authorities have arranged a teacher for him from the technical college. But later it is learnt that the German teacher was, infact, a friend of Evans. Evans appears keen on learning German language. He wants to take an O-level test in German language. The Governor concedes to his request. He arranges with the Examinations Board to hold the examination in Evans’s cell.

A priest from St. Mary Mags is to be the invigilator. The Governor fears that Evans’s may try to escape from the jail. He may overpower the invigilator. So he takes every possible precaution. He orders Jackson, a senior prison officer, to search Evans’s cell thoroughly. Jackson spends two hours searching the cell, but finds nothing hidden there. He takes away even Evans’s nail scissors and nail file. Another jail officer is asked to stay inside the cell till the examination lasts. Evans’s cell is fitted with a microphone so that the Governor can listen to every word spoken and every sound made in the cell.

Half an hour before the beginning of the examination, Jackson and Stephens visit Evans’s cell. They give a blade to Evans to shave himself. Jackson asks Stephens to take away the blade after Evans has shaved himself. He is wearing a woollen hat. Jackson asks Evans to take off his hat. But Evans’s says that it is his lucky hat. So Jackson lets him keep the hat on. Infact, this is a part of Evans’s plan to escape. He has cut off his long wavy hair with the blade to impersonate the invigilator.

The invigilator arrives at the gate of the prison. He is a parson in a church. His name is Reverend Stuart McLeery. He is led to Evans’s cell and introduced to him. The Governor is still worried. He phones Jackson and asks him to search McLeery thoroughly. Jackson searches his suitcase also. He finds a semi-inflated small rubber ring. He tells Jackson that he is suffering from hemorrhoids. He uses the rubber ring when he sits down for a long time. Jackson lets him keep it. But he does not know that this is a clever plan. The tube contains pig’s blood which Evans later uses to pretend that he is the wounded McLeery. In fact, this man is not the real McLeery, the parson. He is Evans’s friend who is impersonating as McLeery. The real McLeery was bound and gagged in his flat.

The examination starts. The invigilator asks Evans to write his index number and his center number on his answer sheet. Stephens is to stay inside Evans’s cell. But Evans says that he cannot concentrate if Stephens remains inside the cell. So Jackson posts Stephens out of the cell and asks him to keep a watch through a peephole.

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

At 9.40, the Governor receives a call from the Examinations Board office. He is told that there is an error in the question paper and it has to be corrected. The Governor passes on the information to Jackson. The invigilator announces it to Evans. It is a minor correction. Infact, it is a hint to Evans. The call is not from the Examinations Board. It is from one of the friends of Evans. It cleverly informs Evans the name of the hotel : Golden Lion.
After some time, the Governor receives another call. It is from the Magistrate’s office. They need a prison van and two prison officers for a remand case. In fact this call is also a hoax. Through this call, Evans’s friends are able to get a prison van. They will use it at the end of the story.

Evans talks to the Governor through the microphone. He says that it is cold inside the cell. He asks for permission to cover his shoulders with a blanket lying in the cell. The Governor allows him to do so. Stephens keeps looking through the peephole almost every minute. He always finds McLeery reading the newspaper, and Evans sitting with his pen held between his teeth.

Three minutes before the end of the examination, Stephens gets a phone call from the Governor. He tells Stephens that after the examination, he should accompany McLeery to the prison gate and should check that Evans’s cell is properly locked. In fact, this is a fake call. Its purpose is to put Stephens out of the way. In the meantime, Evans will give final shape to his plan of escape.

Then the examination is over. Stephens accompanies McLeery to the prison gate. When he comes back, he finds that McLeery is in Evans’s seat. He is injured and blood is trickling down from his head. He presumes that Evans has escaped after injuring McLeery. He shouts to Jackson and calls him.

McCleery appears to be shocked and weak. Jackson and Stephens lead him to the yard where the Governor has also arrived. He orders that McLeery should be taken to the hospital. But McLeery says that he is alright. He shows the question paper to the Governor. A photocopied sheet is pasted on the last page of the question paper. It is printed in German.

It contains instructions for Evans to escape. Just then, detective superintendent, Carter arrives there. McCleery says that he knows where Evans has escaped and he can help them trace him out. So the Governor asks Carter to take McLeery with him and they both drive away. The Governor rebukes Stephens for escorting Stephens to the prison gate, thinking him to be McLeery. But Stephens tells him that he received a call from him. The Governor realises that it was a hoax call, as he did not send any such instructions to Stephens.

He also thinks that Jackson did not search Evans’s cell thoroughly. He could not find that a false beard and a parson’s cloak was hidden in the cell. He could not see that McLeery brought it. He could not detect that Evans is McLeery. But the Governor thinks that Evans has made the mistake of leaving his question paper behind. He feels sure that with the help of McLeery Evans will soon be arrested again.

Carter telephones the Governor and tells him that McLeery spotted Evans on a road in a car. They chased the car but it disappeared at the Headington roundabout. He also tells Governor that when they went o the Examinations Board office, McLeery appeared to be very ill. So he phoned the Radcliffe hospital for an ambulance. He hopes that McLeery is now in the hospital. The Governor enquires from the hospital. They tell him that they sent an ambulance for McLeery but he was not there.

Now the Governor sees that it was a very clever plan made by Evans. First, someone impersonated as McLeery and came to Evans’s cell. Then Evans impersonated as McLeery and faked as injured, telling the Governor that Evans injured him. In fact, it was pig’s blood which gave the appearance of a bleeding head.

Evans is out of the prison. He is happy to be free. He is sorry that he cut his hair short to impersonate as McLeery. He recalls the events of the day. His friends provided him soap, water, and everything in the car. Now he hopes to leave his hotel early in the morning. He reaches the Golden Lion Hotel in Chipping Norton. He opens the door of his room and gets a great shock. He finds the Governor sitting on the bed. The Governor tells him that he got the hint about the hotel and its location from the information given in the question paper in code words. Evans admires the intelligence of the Governor.

The Governor and Evans come into the lobby of the hotel. The receptionist tells the Governor that the prison van is waiting in front of the hotel. A prison officer handcuffs Evans. He takes him into the van and drive away. In fact, the Governor has again been hoodwinked by Evans and his friends. They got the prison van in the morning on the pretext that it was needed by the Magistrate. Now Evans was taken away in the same van. The prison officer who arrests Evans,is fact, one of his friends. When the prison van turns the corner, his friend unlocks the handcuff. Then they drive to Newbury. Evans escapes from prison for the fourth time.

(ईवान्स एक अपराधी है। उसे ऑक्सफोर्ड जेल में कैद करके रखा गया है। वह अन्य कैदियों से भिन्न है। वह अपने व्यवहार में विनम्र है। वह हिंसक नहीं है। मगर वह बहुत चालाक है। वह पहले ही जेल से तीन बार भाग चुका है। इसलिए उसे आमतौर पर, ईवान्स भगौड़ा कहा जाता है। ऐसा डर है कि वह चौथी बार भागने का प्रयत्न भी करेगा। इसलिए हर सावधानी बरती गई है। उसे जेल में एक अलग कोठरी में रखा गया है। उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। लेकिन, वह जेल से भाग जाने की एक चालाकीपूर्ण योजना बनाता है और सबको धोखा दे देता है।

ईवान्स जर्मन भाषा सीखने की अपनी इच्छा जाहिर करता है। इसलिए उसके लिए जेल में सायंकालीन कक्षाओं का इंतज़ाम किया जाता है। वह अकेला छात्र है। जेल के अफसरों ने उसके लिए तकनीकी महाविद्यालय से एक अध्यापक का इंतजाम किया है। मगर बाद में पता लगता है कि जर्मन अध्यापक वास्तव में ईवान्स का मित्र ही था। ईवान्स जर्मन भाषा सीखने को बड़ा उत्सक नजर आता है। वह जर्मन भाषा में ओ-स्तर की परीक्षा देना चाहता है। गवर्नर उसकी प्रार्थना को स्वीकार कर लेता है। वह परीक्षा-बोर्ड के साथ यह इंतजाम करता है कि ईवान्स की कोठरी में ही उसकी परीक्षा ली जाए। सेन्ट मैरी मैग्स का एक पादरी पर्यवेक्षक होगा।

गवर्नर को इस बात का भय है कि ईवान्स जेल से भागने का प्रयत्न करेगा। वह पर्यवेक्षक पर काबू पा सकता है। इसलिए वह हर सम्भव सावधानी बरतता है। वह एक वरिष्ठ जेल अधिकारी जैक्सन को आदेश देता है, कि वह ईवान्स की कोठरी की अच्छी तरह तलाशी ले। जैक्सन कोठरी की तलाशी लेने में दो घण्टे लगाता है, मगर उसे वहाँ कुछ भी छुपा हुआ नहीं मिलता। वह तो ईवान्स की नाखून काटने की कैंची और उसके नाखून की रेती भी ले जाता है। जेल के अन्य, अफसर को जब तक परीक्षा चलती है तब तक ईवान्स की कोठरी के अन्दर रहने को कहा जाता है। ईवान्स की कोठरी में एक माइक्रोफोन फिट कर दिया जाता है ताकि गवर्नर कोठरी में कहे गए हर शब्द और की गई आवाज को सुन सके।

परीक्षा आरम्भ होने से आधा घण्टा पहले, जैक्सन और स्टीफन्स ईवान्स की कोठरी में जाते हैं। वे ईवान्स को शेव करने के लिए एक ब्लेड देते हैं। जैक्सन स्टीफन्स से कहता है कि जब ईवान्स शेव कर ले तो वह उस ब्लेड को ले जाए। ईवान्स अपनी शेव कर लेता है। उसने एक ऊनी टोप पहना हुआ है। जैक्सन ईवान्स को कहता है कि वह अपना टोप उतार दे। मगर, ईवान्स कहता है कि वह उसका भाग्यशाली टोप है। इसलिए जैक्सन उसे टोप पहने रखने की अनुमति दे देता है। वास्तव में यह ईवान्स के भागने की योजना का एक भाग है। उसने अपने लम्बे धुंघराले बाल ब्लेड से काट लिए हैं ताकि वह पर्यवेक्षक का भेष बना सके। पर्यवेक्षक जेल के द्वार पर आता है।

वह चर्च का एक पादरी है। उसका नाम रिवरेंड स्टुअर्ट मैकलीरी है। उसे ईवान्स की कोठरी में लाया जाता है। उससे उसका परिचय करवाया जाता है। गवर्नर अभी भी चिंतित है। वह जैक्सन को फोन करता है और उसे कहता है कि वह मैकलीरी की पूरी तरह तलाशी ले। जैक्सन उसका सूटकेस भी देखता है। उसे एक आधी फूली हुई रबड़ की छोटी गोल ट्यूब मिलती है। वह जैक्सन को बताता है कि वह हैमोरॉयड्स से पीड़ित है। जब वह अधिक देर तक बैठता है, तो वह रबड़ की उस गोल ट्यूब का प्रयोग करता है। जैक्सन उसे इसको अपने पास रखने देता है, मगर वह यह नहीं जानता कि यह एक चतुराईपूर्ण योजना है। ट्यूब में सूअर का खून है, जिसे बाद में ईवान्स इस बात का ढोंग करने के लिए प्रयोग करता है कि वह घायल मैकलीरी है। वास्तव में यह व्यक्ति वास्तविक पादरी मैकलीरी नहीं है। वह ईवान्स का मित्र है जो मैकलीरी होने का नाटक कर रहा है। वास्तविक मैकलीरी को उसके फ्लैट में बाँध दिया गया था और उसके मुँह को भी बंद कर दिया गया था।

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

परीक्षा आरम्भ होती है। पर्यवेक्षक ईवान्स को कहता है कि वह अपनी उत्तर-पुस्तिका पर अपना इन्डेक्स नम्बर और सेन्टर नम्बर लिखे। स्टीफन्स ने ईवान्स की कोठरी के अन्दर रहना है। मगर ईवान्स कहता है कि अगर स्टीफन्स कोठरी के अन्दर रहेगा तो वह परीक्षा देने पर अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाएगा। इसलिए जैक्सन स्टीफन्स को कोठरी के बाहर पहरे पर बिठा देता है, और उसे कहता है कि वह एक छोटी-सी खिड़की में से उस पर नज़र रखे। 9:40 पर, गवर्नर को परीक्षा बोर्ड के दफ्तर से फोन आता है कि प्रश्न-पत्र में कुछ गलती है और उसे ठीक करवाना है। गवर्नर यह सूचना जैक्सन को देता है। पर्यवेक्षक यह सूचना ईवान्स को देता है। यह एक छोटी-सी गलती है। वास्तव में, यह ईवान्स को एक संकेत है। यह फोन परीक्षा-बोर्ड से नहीं है। यह ईवान्स के एक मित्र से है। यह बड़ी चतुराई से ईवान्स को होटल का नाम बता देती है-गोल्डन लॉयन।

थोड़ी देर बाद, गवर्नर को एक और फोन आता है। यह मैजिस्ट्रेट के दफ्तर से है। उन्हें एक रिमांड केस के लिए जेल की वैन और दो जेल अधिकारी चाहिएँ। वास्तव में यह फोन भी नकली है। इसके द्वारा ईवान्स के मित्रों को जेल की वैन मिल जाती है। इसे वे कहानी के अन्त में प्रयोग करेंगे। ईवान्स माइक्रोफोन के द्वारा गवर्नर से बात करता है। वह कहता है कि कोठरी में बहुत ठंड है। वह कोठरी में पड़े कम्बल से अपने कन्धे ढकने की अनुमति माँगता है। गवर्नर उसे ऐसा करने की अनुमति दे देता है।

स्टीफन्स छोटी खिड़की में से लगभग हर मिनट झाँक लेता है। वह सदा मैकलीरी को अखबार पढ़ते हुए और ईवान्स को अपने पेन को दाँतों में दबाए हुए बैठे देखता है। परीक्षा समाप्त होने से तीन मिनट पहले स्टीफन्स को गवर्नर से फोन मिलता है। वह स्टीफन्स से कहता है कि परीक्षा के बाद वह मैकलीरी को जेल के गेट तक छोड़ने जाए और यह बात चेक करे कि ईवान्स की कोठरी को अच्छी तरह ताला लगा हुआ है। वास्तव में यह एक नकली फोन है। इसका उद्देश्य स्टीफन्स को रास्ते से हटाना है। इस बीच ईवान्स जेल से भागने की योजना को अंतिम रूप देगा।

तब परीक्षा समाप्त हो जाती है। स्टीफन्स मैकलीरी को जेल के द्वार तक ले जाता है। जब वह लौटकर आता है, तो वह देखता है कि मैकलीरी ईवान्स की सीट पर है। वह घायल है और उसके सिर से खून बह रहा है। वह सोचता है कि ईवान्स मैकलीरी को घायल करके भाग गया है। वह जैक्सन को चिल्लाकर बुलाता है। मैकलीरी कमजोर और सदमें में लगता है। जैक्सन और स्टीफन्स उसे आँगन में ले जाते हैं, जहाँ पर गवर्नर भी पहुँच गया है। वह आदेश देता है कि मैकलीरी को हस्पताल में ले जाया जाए। मगर मैकलीरी कहता है कि वह ठीक है। वह गवर्नर को प्रश्न पत्र दिखाता है। उसके आखिरी पेज पर एक फोटो कॉपी शीट चिपकी हुई है। यह जर्मन भाषा में छपी है। इसमें ईवान्स के भागने के बारे में निर्देश है। तभी वहाँ पर जासूस, सुपरिटेन्डेंट कॉर्टर पहुँच जाता है। मैकलीरी कहता है कि वह जानता है कि ईवान्स भागकर कहाँ गया होगा और वह उसे ढूंढ़ने में सहायता कर सकता है। इसलिए गवर्नर कॉर्टर से कहता है कि वह मैकलीरी को अपने साथ ले जाए और वे दोनों कार में चले जाते हैं।

गवर्नर स्टीफन्स को इस बात के लिए डाँटता है कि वह ईवान्स को मैकलीरी समझकर उसे जेल के गेट के बाहर तक छोड़ आया। मगर स्टीफन्स उसे कहता है कि उसे उससे (गवर्नर) इस बारे में फोन आया था। गवर्नर महसूस करता है कि यह एक नकली फोन था क्योंकि उसने ऐसे कोई निर्देश स्टीफन्स को नहीं भेजे थे। वह यह भी सोचता है कि जैक्सन ने ईवान्स की कोठरी की तलाशी अच्छी तरह नहीं ली होगी। वह यह नहीं देख सका कि कोठरी के अन्दर एक नकली दाढ़ी और पादरी का चोगा छुपा हुआ था। वह यह नहीं देख सका कि मैकलीरी इन्हें लाया था। वह इस बात को भाँप नहीं सका कि ईवान्स मैकलीरी था। मगर गवर्नर यह सोचता है कि ईवान्स ने प्रश्न-पत्र को अपने पीछे छोड़कर गलती कर दी है। उसे पूरा विश्वास है कि मैकलीरी की सहायता से वह शीघ्र ही ईवान्स को पकड़ लेगा।

कार्टर गवर्नर को फोन करता है, और उसे बताता है कि मैकलीरी ने ईवान्स को एक सड़क पर एक कार में देखा था। उन्होंने कार का पीछा किया था मगर वह कार हैडिन्गटन रोड के मोड़ पर गायब हो गई थी, वह गवर्नर को यह भी बताता है कि जब वे परीक्षा बोर्ड के दफ़तर में गए, तो मैकलीरी बहुत बीमार नज़र आ रहा था। इसलिए उसने रैडक्लिफ हस्पताल में एम्बुलेन्स के लिए फोन किया था। उसे आशा है कि मैकलीरी अब हस्पताल में है। गवर्नर हस्पताल से पूछताछ करता है। वे उसे बताते हैं कि उन्होंने मैकलीरी के लिए एक वैन भेजी थी। अब गवर्नर महसूस करता है कि यह ईवान्स द्वारा बनाई गई एक बड़ी चतुराईपूर्ण योजना थी। पहले तो किसी ने मैकलीरी का भेष बनाया और ईवान्स की कोठरी में आया। तब ईवान्स ने मैकलीरी का भेष बनाया और यह ढोंग किया कि वह घायल है और गवर्नर को कहा कि उसे ईवान्स ने घायल किया है। वास्तव में उन्होंने सूअर के खून से सिर से खून बहने का नाटक किया।

ईवान्स जेल से बाहर है। वह आजाद होकर प्रसन्न है। उसे इस बात का अफ़सोस है कि उसे मैकलीरी का भेष बनाने के लिए अपने बाल काटने पड़े हैं। वह दिन भर की घटनाओं को याद करता है। उसके दोस्तों ने उसे साबुन, पानी और अन्य हर चीज कार में दी। अब उसे आशा है कि वह प्रातः जल्दी होटल से चला जाएगा। वह चिप्पिंग नॉर्टन में गोल्डन लॉयन होटल में पहुँचता है। वह कमरे का दरवाजा खोलता है और उसे बहुत बड़ा झटका लगता है। वह देखता है कि बिस्तर पर गवर्नर बैठा है। गवर्नर उसे बताता है कि उसे होटल और उसके स्थान के बारे में संकेत प्रश्न-पत्र में सांकेतिक भाषा में दी गई सूचना से मिला था। ईवान्स गवर्नर की बुद्धिमत्ता की तारीफ करता है।

गवर्नर और ईवान्स होटल की लॉबी में आते हैं। रिसेप्सनिस्ट गवर्नर को बताती है कि जेल की वैन होटल के सामने खड़ी है। जेल का एक अफसर ईवान्स को हथकड़ी लगाता है। वह उसे वैन में ले जाता है। वास्तव में गवर्नर को ईवान्स और उसके मित्रों ने एक बार फिर चकमा दे दिया है। उन्होंने प्रातः ही जेल की वैन इस बहाने से ले ली थी मैजिस्ट्रेट को इसकी जरूरत है। अब ईवान्स को इसी वैन में ले जाया गया है। जेल का वह अफसर जो ईवान्स को कैद करता है वास्तव में उसका एक मित्र है। जब जेल की वैन मोड़ से ओझल होती है, उसका मित्र हथकड़ी खोल देता है। तब वे न्यूबरी चले जाते हैं। ईवान्स जेल से चौथी बार फरार हो जाता है।)

Evans Tries an O-Level Meanings

[Page 70-71] :
Slightly (a little) = कुछ;
chap (person/man) = व्यक्ति ;
packet (a lot of money) = बहुत पैसा;
procedure (method/wayof doing something) = तरीका;
criminal (relating to crime)= अपराध सम्बन्धी;
congenital (since birth) = जन्म से;
kleptomaniac (habitual of stealing) = चुराने की आदत वाला;
tempted (induced) = प्रेरित किया;
presumably (supposedly) = शायद;
cell (small room in a jail) = जेल की कोठरी;
parson (priest) = पादरी;
invigilate (supervise) = निरीक्षण करना;
chuckled (laughed softly) = हल्के-हल्के हँसना;
incommunicado (prohibited to be communicated) = कहने को निषेध;
reiterated (repeated) = दोहराई गई;
cradled (hung up) = फोन को रख देना।

[Page 72] :
Recent (that happened sometime ago) = कुछ समय पहले घटित;
gracing (doing a favour) = एहसान करना;
premises (building) = भवन/चारदीवारी;
disgracing (causing shame)= शर्मनाक;
persistent (continuous) = लगातार;
nagging (quarrelsome)= झगड़ालू;
genuinely (earmestly) = गम्भीरता से/सच से;
recreational (concerning recreation) = मनोरंजन सम्बन्धी;
cat in hell’s chance (no chance) = कोई अवसर नहीं;
grubby (dirty) = गन्दा;
bunk (sleeping berth) = सोने का लम्बा स्थान;
burly (big and healthy) = बड़ा एवं स्वस्थ;
surly (irritating) = चिड़चिड़ा;
curtly (dryly) = खुश्की से;
bust in (come in suddenly) = अचानक अन्दर आना।

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

[Page 73-74] :
Scraping (remove by rubbing) = रगड़कर हटाना;
mug (face) = चेहरा;
smouldered (burnt slowly) = सुलगना;
leered (looked at with contempt) = घृणा से देखना;
contemptuous (full of hatred) = घृणा भरा;
shrugged (raised shoulder) = कन्धे उचकाए;
crisis (time of danger) = संकट;
charm (amulet) = ताबीज;
briskly (quickly) = शीघ्रता से;
clerical (concerning a priest) = पादरी सम्बन्धी;
drizzle (light rain) = हल्की बरसात;
spattered (sprinkled) = छिड़काव किया;
scheduled (fixed) = निश्चित;
lathering (making froth) = झाग बनाना;
vigorously (energetically) = जोश से;
distempered (painted) = पेन्ट किया;
swath (the part cut by a scythe)= दरांती द्वारा काटा गया एक भाग।

[Page 75-76]:
vaguely (not clearly) = अस्पष्ट;
conceded (admitted)= स्वीकार किया;
keep your nose clean (keep out of trouble) = मुसीबत से दूर रहो;
lodge (hut) = झोंपड़ी;
clanging (sound made by metal) = धातु द्वारा की गई आवाज़;
riveted (fixed) = केन्द्रित;
thudded (made dull heavy sound)= भारी आवाज़ करना;
precaution (preventive action) = सावधानी सतर्कता;
spot (notice) = देखना;
theatrical (showy) = दिखावापूर्ण;
alert (watchful) = चौकन्ना;
haystack (heap of hay) = घास-फूस का ढेर;
nagging (worrying/quarrelling)= झगड़ालू;
smuggle (to bring in illegally) = तस्करी करना;
chisel (wedge) = छैनी;
potential (possible) = सम्भव;
jack-knife (small knife)= छोटा चाकू;
frisked (searched) = तलाशी ली;
landing (platform) = चबूतरा।

[Page 77-78] :
Riffled (ransacked) = छान मारा;
cursorily (not thoroughly) = सरसरी तौर पर;
holy Writ (the Bible) = बाईबल;
amiable (gentle) = विनम्र;
demeanour (conduct)= व्यवहार;
ruffled (annoyed)= परेशान;
sourly (bitterly)= कड़वाहट से;
haemorrhoids (piles) = पेचिश;
embarrassment (discomfort)= असुविधा;
overdoing (doing to excess) = अधिकता से करना;
correction slip (amendment) = सुधार;
fake (spurious) = नकली;
staccato (sharp sound) = तीखी आवाज;
wee (a bit) = कुछ।

[Page 79-80] :
Agreement (concurrence) = समझौता;
impressive (causing impression) = प्रभावशाली;
remand (send into custody) = हवालात में भेजना;
hoax (deceit) = धोखा;
peered (looked closely)= घूरकर देखना;
peep-hole (inspection hole) = निरीक्षण छिद्र;
sorely (painfully) = कष्ट से;
amateurishly (not professionally) = बिना व्यावसायिक रूप से;
scalp (upper part of skull)= खोपड़ी का ऊपरी भाग;
pebble (shingles) = कंकड़;
parky (chilly) = ठण्डा;
draped (wrapped) = लिपटा;
fishy (doubtful) = संदेहात्मक;
suffocate (stifle) = दबाना;
revert (return) = लौटाना;
apprehensively (with fears)= भय से;
absolutely (completely)= पूरी तरह से।

[Page 81-82] :
Scraping (rubbing) = रगड़ना;
distinguished (prominent) = प्रमुख;
accent (style of pronunciation) = उच्चारण का तरीका;
foster (encourage) = प्रोत्साहित करना;
belated (delayed) = देरी से;
tufted (bushy) = झाड़ी की तरह;
dripped (fall in drops) = बूंद-बूंद करके गिरना;
fierce (wild) = जंगली/खूखार;
wildly (madly) = पागलों की तरह;
penetrate (enter) = प्रवेश करना;
moan (groan) = कराहना;
trailed (dragged behind) = खींचना;
sticky (gum like) = चिपचिपा;
squelchy (wet sucking sound) = पानी की छप-छप की आवाज;
grasped (held tightly) = कसकर पकड़ना;
banged (slammed) = जोर से बंद किया;
bolted (fastened with bolts) = चिटकनी से बंद करना;
caked (became hard) = सख्त होना।

[Page 83-85] :
Dredging (exploring) = खोजना;
vital (significant) = महत्त्वपूर्ण;
wailed (cried) = चिल्लाना;
squealed (made a sharp cry) = तीखी चीख मारना;
tarnished (discoloured) = बदरंग होना;
bewilderment (puzzle) = पहेली;
spurt (jet) = फुआरा;
gravel (small stones) = कंकड़;
scathing (scornful) = निंदाजनक;
morons (fools) = मूर्ख;
stammered (stuttered) = हकलाया;
sworn (said on oath) = कसम खाकर कहा;
whiplash (stroke of a whip)= चाबुक का वार;
blithering (talking foolishly) = मूर्खता से बात करना;
despair (hopelessness) = निराशा;
conceal (hid) = छिपाना;
paraphernalia (equipment) = साजो-सामान;
rapped (spoke sharply and rapidly) = तीखे रूप से एवं तेज बोलना;
erupted (exploded) = फट पड़ा;
strident (ear shattering) = कर्ण-भेदी;
burst (exploded) = फटना;
gullible (credulous) = बहुत जल्दी विश्वास करने वाला;
groggy (shaky) = व्यथित।

[Page 86-87] :
Vanished (disappeared)= गायब होना;
impact (collision) = टक्कर;
bound (tied) = बाँध दिया;
gagged (prevented from speaking) = बोलने से रोकना;
impersonating (playing the part of)= अन्य की भूमिका निभाना;
delicious (tasty) = स्वादिष्ट;
stroll (walk leisurely) = आराम से चलना;
former (earlier) = पहले;
glories (splendour) = शान;
tricky (clever) = चालाक;
close call (nearly caught)= लगभग पकड़ा गया;
sore (painful) = कष्टदायक;
definitely (certainly) = निःसन्देह;
bothering (troubling) = तंग करना;
stud (doubled headed button)= दो तरफा बटन;
apart (separate) = अलग;
fiddling (making idle movement) = बेकार की हरकत करना;
gorgon (a fierce monster) = खूंखार राक्षस;
darted (walked or moved rapidly) = तेजी से चलना;
visibly (apparently) = स्पष्टतया।

[Page 88-89] :
Mask (hide/conceal) = छिपाना;
relaxed (in an easy mood)= आराम के मूड में;
ruefully (sorrowfully) = दुःख से;
muddle (confusion) = उथल-पुथल;
pint (about half a litre) = आधा लिटर;
grinned (laughed) = हैंसा;
feebly (weakly) = कमजोरी से।

[Page 90-91]:
Volume (bulk) = बड़ी मात्रा;
reluctant (unwilling) = अनिच्छा से;
awkwardly (clumsily)= बेढंगे तरीके से;
ponder (think deeply) = गहराई से सोचना।

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

Evans Tries an O-Level Translation in Hindi

Should criminals in prison be given the opportunity of learning and education? (क्या जेल में हत्यारों को कुछ सीखने व पढ़ाई करने के अवसर देने चाहिएँ ?) Dramatis Personae The Secretary of the Examinations Board The Governor of H.M. Prison, Oxford James Evans, a prisoner Mr Jackson, a prison officer Mr Stephens, a prison officer The Reverend S. McLeery, an invigilator Mr Carter, Detective Superintendent Mr Bell, Detective Chief Inspector
All precautions have been taken to see to it that the O-level German examination arranged in the prison for Evans does not provide him with any means of escape.

(नाटक के पात्र परीक्षा बोर्ड का सचिव एच०एम० जेल ऑक्सफोर्ड का गवर्नर जेम्स ईवान्स, एक कैदी श्रीमान जैक्सन, जेल का एक अधिकारी श्रीमान स्टीफन्स, जेल का एक अधिकारी रिवरेंड एस० मैकलीरी, एक पर्यवेक्षक श्रीमान कॉर्टर, जासूस अधीक्षक श्रीमान बेल, जासूसी प्रमुख इंस्पैक्टर जेल में ओ-स्तर परीक्षा के लिए सभी सावधानियाँ ली जा रही हैं ताकि ईवान्स नाम के जिस कैदी के लिए यह की जा रही हैं उसे भागने का अवसर न मिल पाए)

It was in early March when the Secretary of the Examinations Board received the call from Oxford Prison. “It’s a slightly unusual request, Governor, but I don’t see why we shouldn’t try to help. Just the one fellow, you say ?” “That’s it. Chap called Evans. Started night classes in O-level German last September. Says he’s dead keen to get some sort of academic qualification.”

(यह मार्च का आरम्भ था जब परीक्षा बोर्ड के सचिव को ऑक्सफोर्ड जेल से कॉल प्राप्त हुई। “यह थोड़ी-सी अजीब प्रार्थना है, गवर्नर, परंतु मैं सहायता न करने की कोशिश का कोई कारण नहीं देख रहा। बस एक आदमी, आप कहते हैं?” “वही है। ईवान्स नाम का व्यक्ति। पिछले सितंबर में ओ-स्तर जर्मन की कक्षाएँ शुरु की थीं। कहता है कि वह किसी प्रकार की शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने का इच्छुक है।”)

“Is he any good?” “He was the only one in the class, so you can say he’s had individual tuition all the time, really. Would have cost him a packet if he’d been outside.” “Well, let’s give him a chance, shall we ?”

(“क्या वह कुछ अच्छा है?” “वह कक्षा में एकमात्र था, अतः आप कह सकते हो कि उसे वास्तव में सदा व्यक्तिगत शिक्षण मिला है। अगर वह जेल में नहीं होता तो उसे यह बड़ा महँगा पड़ता।” “अच्छा, चलिए उसे एक मौका देते हैं, दें क्या ?”)

“That’s jolly kind of you. What exactly’s the procedure now ?” “Oh, don’t worry about that. I’ll be sending you all the forms and stuff. What’s his name, you say? Evans ?” “James Roderick Evans.” It sounded rather grand. “Just one thing, Governor. He’s not a violent sort of fellow, is he? I don’t want to know his criminal record or anything like that, but-”

(“यह आपकी बड़ी कृपा है। अब यह बताइए कि सही तरीका क्या है ?” “ओह, इसकी चिंता मत करो। मैं आपको सारे फार्म व अन्य सामान भेज रहा हूँ। उसका क्या नाम है, क्या बताया था आपने ? ईवान्स ?” “जेम्स रोडरिक ईवान्स।” यह कुछ शानदार मालूम पड़ता है। “सिर्फ एक बात, गवर्नर। यह कोई हिंसात्मक व्यक्ति तो नहीं है न, क्या है ? मैं उसके अपराधिक रिकॉर्ड के बारे में नहीं जानना चाहता, या उस तरह की कोई और बात, मगर-।”)।

“No. There’s no record of violence. Quite a pleasant sort of chap, they tell me. Bit of a card, really. One of the stars at the Christmas concert. Imitations, you know the sort of thing : Mike Yarwood stuff. No, he’s just a congenital kleptomaniac, that’s all.” The Governor was tempted to add something else, but he thought better of it. He’d look after that particular side of things himself.

(“नहीं। हिंसा का कोई रिकॉर्ड नहीं है। काफी खुशमिजाज़ लड़का है, ऐसा कहते हैं। कुछ मजाक किस्म का, वाकई। क्रिसमस सभा का एक खास आकर्षण। कुछ नकलचीसा, आप ऐसी बातों को जानते ही हैं। जैसे माइक यारवुड करता है। नहीं, उसे केवल चोरी करने की मानसिक बीमारी है।” गवर्नर कुछ और भी कहना चाहता था मगर उसने उसे कुछ न कहना बेहतर समझा। इस विशेष बात को वह अपने-आप ही देख लेगा।)

“Presumably,” said the Secretary, “you can arrange a room where —-” “No problem. He’s in a cell on his own. If you’ve no objections, he can sit the exam in there.” “That’s fine.” “And we could easily get one of the parsons from St. Mary Mags to invigilate, if that’s-”

(“मेरा विचार है,” सचिव बोला, “आप एक कमरे की व्यवस्था कर सकते हो जहाँ-” “कोई समस्या नहीं। उसके पास अलग से कोठरी है। अगर आपको कोई आपत्ति न हो, तो वह वहीं बैठकर परीक्षा दे सकता है।” “यह ठीक है।” “और हम सेन्ट मेरी मैग्स से किसी पादरी को आसानी से पर्यवेक्षण के लिए बुला सकते हैं, ऐसा है-“)

“Fine, yes. They seem to have a lot of parsons there, don’t they ?” The two men chuckled good-naturedly, and the Secretary had a final thought. “At least there’s one thing. You shouldn’t have much trouble keeping him incommunicado, should you ?”

(“बहुत अच्छा है। ऐसा लगता है कि वहाँ उनके पास काफी पादरी होते हैं, क्या उनके पास नहीं होते ?” दोनों आदमी मजाक में हँसे, और सचिव ने अन्तिम बात कही। “कम-से-कम एक चीज है। आपको उसे बिना बातचीत रखने में ज्यादा परेशानी नहीं रही होगी, क्या रही ?”)

The Governor chuckled politely once more, reiterated his thanks, and slowly cradled the phone. Evans! “Evans the Break” as the prison officers called him. Thrice he’d escaped from prison, and but for the recent wave of unrest in the maximum-security establishments up north, he wouldn’t now be gracing the Governor’s premises in Oxford; and the Governor was going to make absolutely certain that he wouldn’t be disgracing them. Not that Evans was a real burden: just a persistent, nagging presence. He’d be all right in Oxford, though : the Governor would see to that–would see to it personally. And besides, there was just a possibility that Evans was genuinely interested in O-level German. Just a slight possibility. Just a very slight possibility. AT 8.30 p.m. on Monday 7 June, Evans’s German teacher shook him by the hand in the heavily guarded Recreational Block, just across from D Wing.

(गवर्नर एक बार फिर हल्के से हँसा, अपने धन्यवाद को दोहराया, और धीरे से टेलीफोन को रख दिया। ईवान्स! “ईवान्स द ब्रेक” जैसे कि जेल अधिकारी उसे पुकारते थे। तीन बार वह जेल से भाग चुका था, और यदि उत्तर के अधिकतम सुरक्षा वाली जेलों में हाल ही में विद्रोह की लहर न होती तो वह गवर्नर के ऑक्सफोर्ड के प्रांगण की शोभा नहीं बढ़ा रहा होता; और गवर्नर यह निश्चित मानने जा रहा था कि वह उनको अपमानित नहीं करेगा।

ऐसा नहीं था कि ईवान्स वास्तव में एक बोझ थाः बस एक लगातार कष्ट देने वाली उपस्थिति था। यद्यपि वह ऑक्सफोर्ड में एकदम सही थाः गवर्नर उसका ख्याल रखता था वह इसका स्वयं व्यक्तिगत रूप से ख्याल रखता था। और इसके अलावा, बस एक संभावना थी कि ईवान्स वास्तव में ओ-स्तर जर्मन में रुचि रखता था। बस एक थोड़ी-सी संभावना। बस बहुत कम संभावना। 7 जून सोमवार को शाम के 8.30 पर, ईवान्स के जर्मन अध्यापक ने उससे भारी सुरक्षा वाले मनोरंजन ब्लॉक में हाथ मिलाया जो बस डी विंग के सामने थे।)

“Guten Glück, Herr Evans.” “Pardon ?” “I said, “Good luck”. Good luck for tomorrow.” “Oh. Thanks, er, I mean, er, Danke Schön.” “You haven’t a cat in hell’s chance of getting through, of course, but-” “I may surprise everybody,” said Evans.

(“श्रीमान ईवान्स, सफल हो।” “मैं समझा नहीं?” “मैंने कहा, “किस्मत आपका साथ दे”। कल के लिए शुभकामना।” “ओह। धन्यवाद श्रीमान।” “यद्यपि तुम्हारे सफल होने की कोई सम्भावना नहीं है, मगर…….” “शायद मैं सबको हैरान कर दूँ,” ईवान्स ने कहा।)

At 8.30 the following morning, Evans had a visitor. Two visitors, in fact. He tucked his grubby string vest into his equally grubby trousers, and stood up from his bunk, smiling cheerfully. “Morning”, Mr Jackson. This is indeed an honour.”

(अगली प्रातः 8.30 पर ईवान्स के पास कोई आगन्तुक आया। वास्तव में वे दो थे। उसने अपनी गंदी बनियान को अपनी उतनी ही गंदी पैन्ट में दबाया और प्रसन्नतापूर्ण मुस्कराता हुआ अपने बंक से खड़ा हो गया। “शुभ प्रातः”, श्रीमान जैक्सन। यह सचमुच सम्मान का विषय है।)

Jackson was the senior prison officer on D Wing, and he and Evans had already become warm enemies. At Jackson’s side stood Officer Stephens, a burly, surly-looking man, only recently recruited to the profession. Jackson nodded curtly. “And how’s our little Einstein this morning, then ?” “Wasn’t a mathematician, Mr Jackson ?” “I think ‘e was a Jew, Mr. Jackson.” Evans’s face was unshaven, and he wore a filthy-looking red-and-white bobble hat upon his head. “Give me a chance, Mr Jackson. I was just goin’ to shave when you bust in.”

(जैक्सन जेल के डी विंग का वरिष्ठ अधिकारी था, और वह एवं ईवान्स अब तक पक्के दुश्मन बन चुके थे। जैक्सन की बगल में स्टीफन्स नाम का अधिकारी था जो तगड़ा था एवं बदमिजाज लगता था और जो उस व्यवसाय में नया-नया आया था। जैक्सन ने रूखेपन से सिर हलाया। “और आज सुबह हमारे नन्हे आइन्सटीन का क्या हाल है, फिर ?” “मि० जैक्सन, क्या वह गणितज्ञ नहीं था ?” “मि० जैक्सन मेरा ख्याल है वह एक यहूदी था।”
ईवान्स की दाढ़ी नहीं बनी थी और वह अपने सिर पर एक गंदा-सा लाल और सफेद टोप पहने था। “श्रीमान जैक्सन, आप मुझे मौका दीजिए। मैं दाढ़ी बनाने ही जा रहा था कि आप अचानक अन्दर आ गए।”)

“Which reminds me.” Jackson turned his eyes on Stephens. “Make sure you take his razor out of the cell when he’s finished scraping that ugly mug of his Clear? One of these days he’ll do us all a favour and cut his bloody throat.” For a few seconds Evans looked thoughtfully at the man standing ramrod straight in front of him, a string of Second World War medals proudly paraded over his left breast pocket. “Mr Jackson? Was it you who took my nail scissors away?” Evans had always worried about his hands.

(“इससे मुझे याद आया।” जैक्सन ने अपनी आँखें स्टीफन्स की ओर घुमाईं। “जब वह अपने बदसूरत चेहरे को साफ कर ले तब याद करके इसके रेजर को यहाँ से बाहर ले जाना। ठीक है ? किसी-न-किसी दिन यह हम सब पर कृपा करेगा और अपने कमबख्त गले को काट लेगा।” कुछ सैकन्ड तक ईवान्स अपने सामने खड़े व्यक्ति को विचारपूर्ण मुद्रा से देखता रहा जिसकी छाती पर बायीं ओर जेब पर द्वितीय विश्वयुद्ध में प्राप्त मैडलों की कतार बड़े गर्व से लगी थी। “श्रीमान जैक्सन? क्या आप ही ने मेरे नाखून काटने की कैंची उठाई थी?” ईवान्स को सदा अपने हाथों की चिंता सताती थी।)

“And your nail file, too.” “Look!’ For a moment Evans’s eyes smoldered dangerously, but Jackson was ready for him. “Orders of the Governor, Evans.” He leaned forward and leered, his voice dropping to a harsh, contemptuous whisper. “You want to complain ?” Evans shrugged his shoulders lightly. The crisis was over.

(“और नाखून घिसने की रेती भी।” “देखिए!” क्षणभर के लिए ईवान्स की आँखें खतरनाक ढंग से लाल हो गईं, पर जैक्सन उसके लिए तैयार था। “ये गवर्नर का आदेश था, ईवान्स।” वह आगे झुका और बगलें झाँकने लगा, उसकी आवाज धीमी होकर कटु घृणात्मक बुड़बुड़ाहट में बदल गई। “तुम शिकायत करना चाहते हो ?” ईवान्स ने हल्के से कन्धे उचकाए। मुसीबत टल गई थी।)।

“You’ve got half an hour to smarten yourself up, Evans-and take that bloody hat off!” “Me’ at? Huh!” Evans put his right hand lovingly on top of the filthy woollen, and smiled sadly. “D’you know, Mr Jackson, it’s the only thing that’s ever brought me any sort o’ luck in life. Kind o’ lucky charm, if you know what I mean. And today I thought-well, with me exam and all that….” Buried somewhere in Jackson, was a tiny core of compassion; and Evans knew it.

(“ईवान्स, तुम्हारे पास तैयार होने के लिए आधा घंटा है, और इस कमबख्त टोप को उतार लो।” “मेरा टोप ? ओह!” ईवान्स ने अपना दाहिना हाथ प्यार से गन्दे ऊन (टोपी) के ऊपर फेरा, और उदासी से हँसा। “क्या आपको पता है कि श्रीमान जैक्सन, यही एक चीज है जो कभी मेरे जीवन में कोई किस्मत लाई है। एक तरह से सौभाग्य का ताबीज, अगर आप मेरी बात समझें तो। और आज मैंने सोचा-ये परीक्षा और सारी चीजें……” जैक्सन की सारी गाली-गलौच, धमकी और बेवकूफी के नीचे कहीं सहानुभूति का कोई छोटा-सा अंश था और ईवान्स इसे समझता था।)

“Just this once, then, Shirley Temple.” (If there was one thing that Jackson genuinely loathed about Evans it was his long, wavy hair.) “And get shaving!” At 8.45 the same morning the Reverend Stuart McLeery left his bachelor flat in Broad Street and stepped out briskly towards Carfax. The weatherman reported temperatures considerably below the normal for early June, and a long black overcoat and a shallow-crowned clerical hat pro from the steady drizzle which had set in half an hour earlier and which now spattered the thick lenses of his spectacles.

In his right hand, he was carrying a small brown suitcase, which contained all that he would need for his morning duties, including a sealed question paper envelope, a yellow invigilation form, a special “authentication” card from the Examinations Board, a paper knife, a Bible (he was to speak to the Women’s Guild that afternoon on the Book of Ruth), and a current copy of The Church Times.

(“चलो फिर सिर्फ इस एक बार, शर्ले टेम्पल।” (अगर ईवान्स के बारे में कोई एक बात थी जिससे जैक्सन सचमुच बड़ी घृणा करता था तो वे थे जैक्सन के लंबे लहराते बाल ।) “और दाढ़ी बना लो।” उसी प्रातः 8.45 पर रिवरेंड स्टुअर्ट मैकलीरी ने ब्रॉड स्ट्रीट के अपने छोटे फ्लैट को छोड़ा और जल्दी-जल्दी कारफैक्स की तरफ चल पड़ा। मौसम की भविष्यवाणी हुई थी कि जून के शुरुआत में तापमान सामान्य से कम रहेगा और एक लम्बा काला कोट और एक छोटे आकार का पादरियों वाला टोप धीमी बूंदा-बाँदी से बचाव करते थे, जो आधे घण्टे पहले शुरू हुई थी और जो अब उसके चश्मे के मोटे लैंसों पर पड़ रही थी।

अपने दाएँ हाथ में वह एक छोटा भूरा सूटकेस लिए हुए था, जो उन चीजों का भरा था जो उसकी सुबह ड्यूटी में काम आने वाली थीं, जिसमें शामिल थे एक सील किया हुआ प्रश्न-पत्र का लिफाफा, पर्यवेक्षण का एक पीला फॉर्म, एक विशेष ‘सत्यता’ का कार्ड जो परीक्षा बोर्ड से मिला था, एक कागज काटने का चाकू, एक बाईबल (उसे उस दोपहर को महिला सहकारी संस्था को रूथ की पुस्तक के बारे में संबोधित करना था), और ‘द चर्च टाइम्स’ का एक ताजा अंक।)

The two-hour examination was scheduled to start at 9.15 a.m. Evans was lathering his face vigorously when Stephens brought in two small square tables and set them opposite each other in the narrow space between the bunk on the one side and on the other a distempered stone wall. Next, Stephens brought in two hard chairs, the slightly less battered of which he placed in front of the table which stood nearer the cell door.

(दो घंटे की परीक्षा 9.15 पर शुरु होनी थी। ईवान्स जोर से अपने चेहरे पर झाग बना रहा था जब स्टीफन्स दो छोटी चौकोर टेबल लेकर आया और दोनों को एक-दूसरे के सामने सोने की पट्टी और डिस्टेम्पर की हुई दीवार के बीच की तंग जगह में रख दिया। फिर, स्टीफन्स दो सख्त कुर्सियाँ ले आया, जो थोड़ी कम टूटी हुई थीं जिनके सामने उसने एक टेबल रख दिया जो कोठरी के दरवाजे के पास थे।)

Jackson put in a brief final appearance. “Behave yourself, laddy!” Evans turned and nodded. “And these” (Jackson pointed to the pin-ups)”off!” Evans turned and nodded again. “I was goin’ to take “’em down anyway. A minister, isn’t he? The chap comin’ to sit in, I mean.” “And how did you know that ?” asked Jackson quietly. “Well, I had to sign some forms, didn’t I? And I couldn’t ‘help ”

(जैक्सन ने संक्षिप्त रूप से अन्तिम बार प्रवेश किया। “अपने आपको संभालो, नौजवान……….” ईवान्स मुड़ा और सिर हिलाया। “और ये”-(जैक्सन ने तस्वीरों की तरफ इशारा किया) “इन्हें उतारो।” ईवान्स मुड़ा और दुबारा सिर हिलाया। “मैं इनको उतारने ही जा रहा था। एक पादरी है, क्या वह नहीं है ?’ मेरा मतलब है जो यहाँ बैठने आ रहा है।” “और तुमने यह कैसे जाना ?” जैक्सन ने धीरे से पूछा। “ठीक है, मुझे कुछ फार्म साइन करने पड़ते थे, क्या नहीं करने पड़ते ? और मैं ऐसा किए बिना रह भी नहीं सकता।”)

Evans drew the razor carefully down his left cheek and left a neat swath in the white lather. “Can I ask you something, Mr. Jackson? Why did they ’ave to bug me in this cell ?” He nodded his head vaguely to a point above the door. “Not a very neat job,” conceded Jackson. “They’re not—they don’t honestly think I’m goin’ to try to—” “They’re taking no chances, Evans. Nobody in his senses would take any chance with you.” “Who’s goin’ to listen in ?” ।

(ईवान्स ने सावधानी से अपने बाएँ गाल पर ब्लेड चलाया और सफेद झाग के बीच एक साफ लकीर बना दी। “मि० जैक्सन, क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूँ ? मेरी इस कोठरी में उन्हें सुनने की गुप्त मशीन क्यों लगानी पड़ी?” उसने अस्पष्ट-सा अपना सिर उठाकर दरवाजे के ऊपर एक स्थान की ओर संकेत किया। “काम बहुत सफाई से नहीं हुआ,” जैक्सन ने स्वीकार किया। “ऐसा तो नहीं वे कहीं ऐसा तो नहीं सोच रहे कि मैं भागने की कोशिश करूँगा-” “वे कोई खतरा मोल नहीं ले रहे, ईवान्स। कोई भी आदमी जिसमें जरा भी अक्ल है तुम्हें लेकर कोई खतरा नहीं उठाएगा।” “अन्दर इस वार्ता को कौन सुनेगा ?”)

“I’ll tell you who’s going to listen in, laddy. It’s the Governor himself, see? He don’t trust you a bloody inch and nor do I. I’ll be watching you like a hawk, Evans, so keep your nose clean. Clear?” He walked towards the door. Evans nodded. He’d already thought of that, and Number Two Hand kerchief was lying ready on the bunk-a neatly folded square of off-white linen. “Just one more thing, Einstein.” “Ya? Wha’s ‘at?” “Good luck, old son.”

(“नौजवान, मैं बताता हूँ कि अन्दर कौन सुनेगा। देखो, इसे गवर्नर खुद सुनेगा ? वह तुम पर इंच भर भी भरोसा नहीं करता- . और न मैं। मैं एक बाज की तरह तुम पर नजर रखूगा, ईवान्स, इसलिए मुसीबत से बच कर रहना। समझे?” वह दरवाजे की ओर बढ़ा। ईवान्स ने सिर हिलाया। वह पहले ही इस बारे में सोच चुका था और दूसरा रूमाल तख्ने वाले बिस्तर पर तैयार रखा थाएक साफ-सुथरा तह लगा हल्के सफेद रंग का चौकोर सूती कपड़ा। “बस एक और बात, आइन्सटीन” “हाँ ? क्या है ?” “भाग्य तुम्हारा साथ दे, बेटे।”)

In the little lodge just inside the prison’s main gates, the Reverend S. McLeery signed his name neatly in the visitors’ book, and thence walked side by side with a silent prison officer across the exercise yard to D Wing, where he was greeted by Jackson. The Wing’s heavy outer door was unlocked, and locked behind them, the heavy inner door the same, and McLeery was handed into Stephens’s keeping.

“Get the razor ?” murmured Jackson. Stephens nodded. “Well, keep your eyes skinned. Clear ?” Stephens nodded again; and McLeery, his feet clanging up the iron stairs, followed his new guide, and finally stood before a cell door, where Stephens opened the peephole and looked through.
“That’s him, sir.”

(जेल के मुख्य द्वार के अंदर एक छोटे-से कमरे में रिवरेंड एस० मैकलीरी ने विजिटर्स की पुस्तक में अपना नाम साफ-साफ लिखा और वहाँ से जेलखाने के एक मौन अधिकारी के साथ चलता हुआ व्यायाम के मैदान को पार करके डी विंग में आ गया, जहाँ उसका स्वागत जैक्सन ने किया। विंग के भारी बाहरी दरवाजे का ताला खोला गया और उनके घुसने के बाद फिर अंदर से बंद कर दिया गया। भीतर का भारी दरवाजा भी वैसा ही था और मैकलीरी को स्टीफन्स की देख-रेख में छोड़ दिया गया।

“रेजर ले लिया ?” जैक्सन बुड़बुड़ाया। स्टीफन्स ने फिर से सिर हिलाया, और लोहे की सीढ़ी पर अपने जूतों की आवाज करता मैकलीरी अपने नए गाइड के पीछे-पीछे आ गया और अंततः एक कोठरी के दरवाजे पर आकर खड़ा हो गया जहाँ स्टीफन्स ने दरवाजे पर लगा छिद्र खोला और अंदर देखा। “यह वही है श्रीमान।”)

Evans, facing the door, sat quietly at the farther of the two tables, his whole attention riveted to a textbook of elementary German grammar. Stephens took the key from its ring, and the cell lock sprang back with a thudded, metallic twang. It was 9.10 a.m. when the Governor switched on the receiver. He had instructed Jackson to tell Evans of the temporary little precaution that was only fair. (As if Evans wouldn’t spot it!) But wasn’t it all a bit theatrical? Schoolboyish, almost? How on earth was Evans going to try anything on today? If he was so anxious to make another break, why in heaven’s name hadn’t he tried it from the Recreational Block? Much easier. But he hadn’t. And there he was now–sitting in a locked cell, all the prison officers on the alert, two more locked doors between his cell and the yard, and a yard with a wall as high as a haystack. Yes, Evans was as safe as houses.

(दरवाजे की ओर मुँह किए हुए ईवान्स दोनों में से दूर वाली मेज पर बैठा था, उसका पूरा ध्यान प्रारम्भिक जर्मन व्याकरण की एक पाठ्यपुस्तक पर केंद्रित था। स्टीफन्स ने गुच्छे से चाबी निकाली और कोठरी का ताला एक भारी धातु की खनखनाती आवाज के साथ खुल गया। प्रातः 9.10 पर गवर्नर ने अपना रिसीवर चालू कर दिया। उसने जैक्सन को हिदायत दी थी कि वह ईवान्स को तात्कालिक रूप से ली गई छोटी-सी सावधानी के बारे में बता दे। जो बिल्कुल सही था। (मानो ईवान्स इसे नहीं देखेगा!) पर यह सब कहीं कुछ नाटकीय तो न था ? लगभग स्कूली लड़कों जैसा ? भला आज ईवान्स कैसे कोई कोशिश कर सकता था ? अगर उसे फिर से भागने की जरूरत थी तो भला वह मनोरंजन ब्लॉक से भागने का प्रयत्न क्यों न करता ? कहीं अधिक आसान। पर उसने ऐसा नहीं कया। और अब वह वहाँ पर था-एक ताला लगी कोठरी में बैठा, जेल के सारे अधिकारी सतर्क, आँगन और उसकी कोठरी के बीच दो और ताला लगे दरवाजे, और ऐसा आँगन जिसकी दीवारें किसी भूसे के ढेर की तरह ऊँची। हाँ, ईवान्स उतना ही सुरक्षित था जितना घर….)

Anyway, it wouldn’t be any trouble at all to have the receiver turned on for the next couple of hours or so. It wasn’t as if there was going to be anything to listen to, was it? Amongst other things, an invigilator’s duty was to ensure that the strictest silence was observed. But…..but still that little nagging doubt! Might Evans try to take advantage of McLeery? Get him to smuggle in a chisel or two, or a rope ladder, or The Governor sat up sharply. It was all very well getting rid of any potential weapon that Evans could have used; but what about McLeery? What if, quite unwittingly, the innocent McLeery had brought in something himself? A jack-knife, perhaps? And what if Evans held him hostage with such a weapon? The Governor reached for the phone. It was 9.12 a.m.

(खैर, अगले दो घंटे के करीब रिसीवर खुला रखना कोई मुश्किल नहीं था। ऐसा नहीं था कि सुनने के लिए कुछ होगा, होगा क्या ? अन्य बातों के अतिरिक्त निरीक्षक का कर्तव्य है कि वह पूरी शांति बनाए रखे। पर…….पर फिर भी कुछ छोटा-सा परेशान करने वाला शक! हो सकता है ईवान्स, मैकलीरी से फायदा उठाने का प्रयत्न करें ? उसके द्वारा कोई छेनी, कोई रस्सी, सीढ़ी, अथवा कुछ अन्य वस्तु अंदर मंगवाए। गवर्नर चौकन्ना होकर बैठा था। किसी भी ताकतवर हथियार, जो ईवान्स प्रयोग कर सकता था, से अच्छी तरह छुटकारा पा लिया गया था; परन्तु मैकलीरी के बारे में क्या ? क्या होगा यदि, बिल्कुल भोलेपन में, भोला मैकलीरी खुद कुछ अपने साथ ले आया ? एक जैक-नाइफ, शायद ? और क्या होगा यदि ईवान्स इस प्रकार के हथियार से उसे बंधक बना लेगा ? गवर्नर फोन के लिए पहुँचा। सुबह के 9.12 बजे थे।)

The examinee and the invigilator had already been introduced by Stephens when Jackson came back and shouted to McLeery through the cell door. “Can you come outside a minute, sir? You too, Stephens.” Jackson quickly explained the Governor’s worries, and McLeery patiently held out his arms at shoulder level whilst Jackson lightly frisked his clothes. “Something hard here, sir.” “Ma reading glasses,” replied McLeery, looking down at the spectacle case.

Jackson quickly reassured him and bending down on the landing thumb-flicked the catches on the suitcase. He picked up each envelope in turn, carefully passed his palms along their surfaces-and seemed satisfied. He riffled cursorily through a few pages of Holy Writ, and vaguely shook The Church Times. All right, so far. But one of the objects in McLeery’s suitcase was puzzling him sorely.

(परीक्षार्थी और पर्यवेक्षक का परिचय पहले ही स्टीफन्स द्वारा करवा दिया गया था जब जैक्सन वापस आया और कोठरी के दरवाजे में से मैकलीरी पर चिल्लाया। “क्या आप एक मिनट के लिए बाहर आ सकते हैं, सर ? आप भी स्टीफन्स।” जैक्सन ने तुरन्त गवर्नर की चिंताओं की व्याख्या की और मैकलीरी ने धैर्य से कंधों पर से अपने हाथ आगे ऊपर किए जैक्सन धीरे-धीरे उसके कपड़ों की तलाशी ले रहा था। “यहाँ कुछ सख्त है, सर।” “मेरे पढ़ने के चश्मे हैं,” मैकलीरी ने उत्तर दिया, चश्मों के कवर की तरफ देखते हुए। जैक्सन ने जल्दी से उसको तसल्ली दी और नीचे झुकते हुए अंगूठों से दबाकर सूटकेस की चटखनी खोली। उसने प्रत्येक लिफाफे को उठाया बारी-बारी से, उनकी सतह पर सावधानी से अपनी हथेली फेरी और संतुष्ट प्रतीत हुआ। उसने जल्दी-जल्दी बाईबल के कुछ पेज पलटे और हल्के से ‘द चर्च टाइम्स’ को झड़काया। सब ठीक है, अब तक, परन्तु मैकलीरी के सूटकेस में एक चीज उसको बेहद परेशान कर रही थी।)

“Do you mind telling me why you’ve brought this, sir ?” He held up a smallish semi-inflated rubber ring, such as a young child with a waist of about twelve inches might have struggled into. “You thinking of going for a swim, sir ?” McLeery’s hitherto amiable demeanor was slightly ruffled by this tasteless little pleasantry, and he answered Jackson somewhat sourly. “If ye must know, I suffer from hemorrhoids, and when I’m sitting down for any length o’time” “Very sorry, sir. I didn’t mean to, er….” The embarrassment was still reddening Jackson’s cheeks when he found the paper knife at the bottom of the case. “I think I’d better keep this though, if you don’t mind, that is, sir.”

(“श्रीमान जी, क्या आप बताने का कष्ट करेंगे, कि आप यह क्यों लाए हैं ?” उसने एक छोटी-सी आधी फूली हुई रबड़ की रिंग उठाई, ऐसी जैसे कि एक 12 इंच की कमर वाला बच्चा इसमें से फंसकर निकला हो। “क्या आप तैरने जाने की सोच रहे हैं, श्रीमान ?” मैकलीरी का अब तक का मधुर स्वभाव इस छोटे-से मजाक से थोड़ा नाराज हो गया, और उसने जैक्सन को कुछ कड़वे शब्दों में उत्तर दिया। “यदि आपको अवश्य ही जानना है, मैं खूनी बवासीर से पीड़ित हूँ, और जब मैं कुछ समय बैठता हूँ तो…..” “माफी चाहता हूँ, श्रीमान, मेरा मतलब यह नहीं…….” परेशानी अब भी जैक्सन के गालों को लाल कर रही थी जब उसे सूटकेस की तली में कागज काटने का चाकू मिला। “मेरे विचार से मैं इसे रख लूँ तो ठीक होगा, यदि आपको कष्ट न हो, श्रीमान।”)

It was 9.18 a.m. before the Governor heard their voices again, and it was clear that the examination was going to be more than a little late in getting underway.
McLeery: “Ye’ve got a watch ?” Evans: “Yes, sir.”
McLeery: “I’ll be telling ye when to start, and again when you’ve five minutes: left. A’ right ?”
Silence. McLeery: “There’s plenty more on this writing paper should ye need it.”
Silence. McLeery: “Now. Write the name of the paper, 021-1, in the top left-hand corner.”
Silence. McLeery: “In the top right-hand corner write your index number-313. And in the box just below that, write your centre number-271. A’right ?”

(प्रातः 9.18 का समय हो गया था जब गवर्नर ने उनकी आवाजें फिर सुनी, और यह स्पष्ट था कि परीक्षा थोड़ी देरी से आरम्भ होने जा रही थी।
मैकलीरी : “क्या तुम्हारे पास एक घड़ी है ?” ईवान्स : “हाँ, श्रीमान।” मैकलीरी : “मैं आपको बताऊँगा कब शुरू करना है, और फिर जब पाँच मिनट शेष रह जाएंगी। ठीक है ?”
खामोशी। मैकलीरी : “लिखने का कागज़ बहुत है, अगर तुम्हें जरूरत हो।”
खामोशी। मैकलीरी : “अब, ऊपर से दाएँ तरफ पेपर का नाम 021-1 लिखो।”
खामोशी। मैकलीरी : “दायीं ओर सबसे ऊपर कोने में अपना इन्डैक्स नं लिखो-313. और ठीक उसके नीचे बने खाने में, अपना
सैंटर नं० लिखो-271. ठीक है ?”)

Silence. 9.20 a.m. McLeery : “I’m now going to ”
Evans : “E’s not goin’ to stay ‘ere, is ‘e?”
McLeery: “I don’t know about that.
I” Stephens: “Mr Jackson’s given me strict instructions to-”.
Evans: “How am I suppose to concentrate on my exam….with someone breathin’ down my neck? Christ! Sorry, sir, I didn’t mean-” The Governor reached for the phone. “Jackson? Ah, good. Get Stephens out of that cell, will you? I think we’re perhaps overdoing things.” “As you wish, sir.”
The Governor heard the exchanges in the cell, heard the door clang once more, and heard McLeery announce that the examination had begun at last. It was 9.25 a.m., and there was a great calm.

(खामोशी। प्रातः के 9.20. मैकलीरी : “अब मैं शुरू करने जा रहा हूँ-” ईवान्स : “क्या वह यहाँ से नहीं जा रहा, क्या नहीं वह?”
मैकलीरी : “इसके बारे में मैं कुछ नहीं जानता हूँ। मैं-”

स्टीफन्स : “श्रीमान जैक्सन ने मुझे सख्त हिदायतें दी हैं कि-” ईवान्स : “भला कैसे मैं अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकता हूँ….. जब लगातार कोई बन्दूक मेरी गर्दन पर सांस ले रही हो ? हे भगवान! क्षमा करें, श्रीमान, मेरा यह इरादा नहीं है-” गवर्नर ने फोन उठाया। “जैक्सन ? आह, ठीक है। स्टीफन्स को कोठरी से बाहर निकाल लो, कृपया ? मुझे लगता है कि हम कुछ अधिक चिन्ता कर रहे हैं।” “जैसी आपकी मर्जी, श्रीमान।” गवर्नर ने कोठरी में होने वाली बातचीत सुनी, दरवाजे के बन्द होने की आवाज़ एक बार फिर आई, और मैकलीरी को यह घोषणा करते सुना कि परीक्षा अंततः प्रारम्भ हो चुकी है। सुबह 9.25 का समय था और घना सन्नाटा था।)

At 9.40 a.m. the Examinations Board rang through, and the Assistant Secretary with special responsibility for modern languages asked to speak to the Governor. The examination had already started, no doubt? Ah, a quarter of an hour ago. Yes. Well, there was a correction slip which some fool had forgotten to place in the examination package. Very brief. “Could the Governor please….?” “Yes, of course. I’ll put you straight through to Mr Jackson in D Wing. Hold the line a minute.”

(सुबह 9.40 पर परीक्षा बोर्ड का टेलीफोन आया और वह सहायक-सचिव जिस पर आधुनिक भाषाओं का विशेष उत्तरदायित्व था गवर्नर से बात करना चाहता था। निःसंदेह परीक्षा पहले ही प्रारम्भ हो चुकी थी ? हाँ, पंद्रह मिनट हो चुके थे ? अच्छा। ठीक है, एक त्रुटि-निवारण कागज था जो कोई मूर्ख परीक्षा के लिफाफे में रखना भूल गया था। बड़ा छोटा-सा। “क्या गवर्नर साहिब कृपया….?”
“हाँ, अवश्य । मैं आपकी बात सीधे डी विंग में श्रीमान जैक्सन से करवाता हूँ। एक मिनट लाइन पर रहिए।”)

Was this the sort of thing the Governor had feared? Was the phone call a faķe? Some signal? Some secret message…..? But he could check on that immediately. He dialed the number of the Examinations Board but heard only the staccato bleeps of a line engaged. But then the line was engaged, wasn’t it? Yes. Not very intelligent, that….

(कहीं यह वैसी ही तो कोई चीज़ थी जिसका गवर्नर को भय था ? कहीं यह टेलीफोन नकली न हो ? कोई इशारा ? कोई गुप्त सन्देश….. ? पर वह तुरन्त ही जाँच सकता है। उसने परीक्षा बोर्ड का नम्बर मिलाया परन्तु केवल छोटी-सी बीप की आवाजें ही सुनीं जो बताती थीं कि लाइन खाली नहीं है। पर फिर लाइन तो व्यस्त थी, नहीं क्या ? यह कोई बहुत समझदारी की बात न थी….)

Two minutes later he heard some whispered communications in the cell, and then McLeery’s broad Scots voice :
“Will ye please stop writing a wee while, Mr Evans, and listen carefully. Candidates offering German, 021-1, should note the following correction. ‘On page three, line fifteen, the fourth word should read golden, not, goldene; and the whole phrase will therefore read zum goldenen Löwen, not zum Goldene Löwen’. I will repeat that……”

(दो मिनट बाद उसने कोठरी में कानाफूसी में बातचीत सुनी और तब मैकलीरी की तेज स्कॉट आवाज सुनी “श्री ईवान्स, क्या आप कुछ देर के लिए लिखना रोक देंगे और ध्यान से सुनेंगे। जर्मन 021-1 में परीक्षा देने वाले छात्र जरा इस शुद्धी को नोट करें। ‘पृष्ठ तीन पर पंद्रहवीं पंक्ति के चौथे शब्द goldene के स्थान पर goldenen पढ़ें और फिर सारा वाक्यांश इसलिए इस तरह पढ़ना चाहिए Zum goldenen Lowen, और Zum goldene Lowen नहीं।” मैं इसको दोहराऊंगा…………)

The Governor listened and smiled. He had taken German in the sixth form himself, and he remembered all about the agreements of adjectives. And so did McLeery, by the sound of things, for the minister’s pronunciation was most impressive. But what about Evans? He probably didn’t know what an adjective was.

The phone rang again. The Magistrates’ Court. They needed a prison van and a couple of prison officers. Remand case. And within two minutes the Governor was wondering whether that could be a hoax. He told himself not to be so silly. His imagination was beginning to run riot.
Evans!

(गवर्नर ने सुना और मुस्कुराया। वह खुद छठी कक्षा में जर्मन पढ़ चुका था, और उसे विशेषणों की सहमति के बारे में याद था। और ऐसे ही मैकलीरी, जैसा कि लगता था, क्योंकि मंत्री का उच्चारण बहुत प्रभावशाली था। परन्तु ईवान्स के बारे में क्या ? वह शायद नहीं जानता था कि विशेषण क्या था। फोन फिर बजा। मैजिस्ट्रेट का कोर्ट। उनको एक जेल की वैन और दो जेल अधिकारियों की जरूरत थी। एक रिमाण्ड केस था। और दो ही मिनट में गवर्नर हैरान था कि क्या यह एक मजाक हो सकता था। उसने अपने आपको इतना मूर्ख न बनने के लिए कहा। उसकी कल्पना पागल होती जा रही थी। ईवान्स!)

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

For the first quarter of an hour Stephens had dutifully peered through the peep-hole at intervals of one minute or so; and after that, every two minutes. At 10.45 a.m. everything was still all right as he looked through the peephole once more. It took four or five seconds–no more. What was the point? It was always more or less the same. Evans, his pen between his lips, sat staring straight in front of him towards the door, seeking-it seemed-some sorely needed inspiration from somewhere. And opposite him, McLeery, seated slightly askew from the table now: his face in semi-profile; his hair (as Stephens had noticed earlier) amateurishly clipped pretty closely to the scalp; his eyes behind the pebble lenses peering short-sightedly at The Church Times; his right index finger hooked beneath the narrow clerical collar; and the fingers of the left hand, the nails meticulously manicured, slowly stroking the short black beard.

(एक घण्टे के चौथाई समय तक स्टीफन्स ने कर्तव्यनिष्ठता से झांकने के सुराग से एक-मिनट या दो के अन्तराल पर झांक कर देखा और इसके बाद, प्रत्येक दो मिनट बाद । प्रातः 10.45 तक सब कुछ अब भी ठीक था जब उसने एक बार और अन्दर झांकने के सुराग से देखा। इसमें 4 या 5 सैकंड लगे थे अधिक नहीं। बात क्या थी ? यह हमेशा लगभग वैसा ही था। ईवान्स, अपना पेन अपने होठों में, लिए बैठा हुआ सीधा दरवाजे की तरफ देख रहा था, ढूंढता हुआ-ऐसा लगता था-कहीं-न-कहीं से वह प्रेरणा जिसकी उसको बेहद जरूरत थी। और उसके सामने मैकलीरी अब टेबल से थोड़ा तिरछा बैठा हुआः उसका चेहरा आधा दिखता हुआ; उसके बाल (जैसा कि स्टीफन्स पहले भी देख चुका था) नौसिखिए द्वारा बिल्कुल खोपड़ी के नजदीक से काटे हुए; उसकी आँखें मोटे लैंसों के पीछे से द चर्च टाइम्स पर ताकते हुए; उसके दाएँ हाथ की उँगली क्लैरिकल कॉलर के नीचे अटकी हुई; और बाएँ हाथ की उंगलियाँ, जिनके नाखून बड़ी सावधानी से घिसे हुए, धीरे-धीरे छोटी काली दाढ़ी को थपथपाते हुए।)

At 10.50 a.m. the receiver crackled to life and the Governor realised he’d almost forgotten Evans for a few minutes.
Evans: “Please, sir!” (A whisper) Evans: “Please, sir!” (Louder) Evans: “Would you mind if I put a blanket round me shoulders, sir? It’s a bit parky in ‘ere, isn’t it?” Silence. Evans: “There’s one on me bunk ‘ere, sir.” McLeery: “Be quick about it.”

Silence. (प्रातः 10.50 पर रिसीवर से फिर आवाज़ आई और गवर्नर ने महसूस किया कि वह कुछ मिनटों के लिए ईवान्स को लगभग भूल ही गया था।
ईवान्स : “कृपया, श्रीमान!” (फुसफुसाहट)
ईवान्स : “कृपया, श्रीमान ! (पहले से तेज आवाज)
ईवान्स : “क्या आप इस बात की अनुमति देते हैं कि मैं अपने कंधों पर कम्बल डाल लूँ, श्रीमान? यहाँ ठण्ड है, है न ?” खामोशी।
ईवान्स : “मेरे बिस्तर पर एक कम्बल है, श्रीमान।” मैकलीरी : “यह काम जल्दी कर डालो।” खामोशी।)

At 10.51 a.m. Stephens was more than a little surprised to see a grey regulation blanket draped round Evans’s shoulders, and he frowned slightly and looked at the examinee more closely. But Evans, the pen still between his teeth, was staring just as vacantly as before. Blankly beneath a blanket….. Should Stephens report the slight irregularity? Anything at all fishy, hadn’t Jackson said? He looked through the peephole once again, and even as he did so Evans pulled the dirty blanket more closely to himself.

Was he planning a sudden batman leap to suffocate McLeery in the blanket? Don’t be daft! There was never any sun on this side of the prison; no heating, either, during the summer months, and it could get quite chilly in some of the cells. Stephens decided to revert to his earlier every-minute observation.

At 11.20 a.m. the receiver once more crackled across the silence of the Governor’s office, and McLeery informed Evans that only five minutes remained. The examination was almost over now, but something still gnawed away quietly in the Governor’s mind. He reached for the phone once more.

(प्रातः 10.51 पर स्टीफन्स थोड़ा अधिक हैरान हुआ जब उसने ईवान्स के कंधों पर कैदियों का भूरा कम्बल लिपटा देखा और थोड़ा क्रोधित होकर उसने परीक्षार्थी की ओर अधिक गौर से देखा। पर ईवान्स तो अभी भी दाँतों में पेन दबाए पहले की तरह से खाली देखे जा रहा था। कम्बल के नीचे खाली नजरों से…. क्या स्टीफन्स इस छोटी-सी नियम-अवहेलना की खबर दे ? क्या जैक्सन ने नहीं कहा था, कोई भी बात, जो जरा भी संदेहास्पद हो ? उसने सुराग में से एक बार फिर देखा और जैसे ही उसने ऐसा किया ईवान्स ने गन्दे कम्बल को अपने ऊपर खींच लिया। क्या वह मैकलीरी को अचानक ही कम्बल में लपेटकर उसकी सांस को बन्द करने की योजना बना रहा था।

प्रातः 11.20 पर गवर्नर के दफ्तर की शांति को भंग करता हुआ रिसीवर फिर बोल उठा और मैकलीरी ने ईवान्स को सूचित किया कि केवल पाँच मिनट शेष हैं। परीक्षा अब लगभग समाप्त हो चुकी थी, पर कोई चीज अब भी चुपचाप गवर्नर के दिमाग को परेशान कर रही थी। वह एक बार फिर फोन की ओर बढ़ा।)

At 11.22 a.m. Jackson shouted along the corridor to Stephens. The Governor wanted to speak with him— “Hurry, man!” Stephens picked up the phone apprehensively and listened to the rapidly spoken orders. Stephens himself was to accompany McLeery to the main prison gates. Understood? Stephens personally was to make absolutely sure that the door was locked on Evans after McLeery had left the cell. Understood?
Understood. At 11.25 a.m. the Governor heard the final exchanges.

(प्रातः 11.22 जैक्सन बरामदे में स्टीफन्स का नाम पुकारता आया। गवर्नर उससे बात करना चाहते थे-“जल्दी करो, जवान ! डरते-डरते स्टीफन्स ने फोन उठाया और जल्दी-जल्दी बोली हुई आज्ञाओं को सुना। स्टीफन्स को स्वयं जेल के मुख्य द्वार तक मैकलीरी के साथ जाना था। समझे ? स्टीफन्स को स्वयं इस बात का पूरा विश्वास कर लेना था कि मैकलीरी के जाने के बाद ईवान्स का दरवाजा बन्द हो चुका है। समझे ? समझ गया। प्रातः 11.25 पर गवर्नर ने अन्तिम वार्तालाप सुना।)

McLeery: “Stop writing, please.”
Silence. McLeery: “Put your sheets in order and see they’re correctly numbered.”
Silence.
Scraping of chairs and tables. Evans : “Thank you very much, sir.” McLeery : “A’right, was it ?” Evans : “Not too bad.” McLeery : “Good….Mr Stephens!” (Very loud)
The Governor heard the door clang for the last time. The examination was over. (मैकलीरी : “कृपया, लिखना बन्द करें।”
खामोशी। मैकलीरी : “अपने कागज़ तरतीब से लगा लो और निश्चय कर लो कि उन पर सही नम्बर लगे हैं।” खामोशी। कुर्सियों और मेजों के खिसकने की आवाज़। ईवान्स : “श्रीमान, बहुत-बहुत धन्यवाद।” मैकलीरी : “ठीक हो गया, है न ?” ईवान्स : “बहुत बुरा नहीं।” मैकलीरी : “अच्छा….. श्रीमान स्टीफन्स।” (बहुत ऊँचा) गवर्नर ने दरवाजे की आवाज़ अन्तिम बार सुनी। परीक्षा समाप्त हो चुकी थी।)

“How did he get on, do you think ?” asked Stephens as he walked beside McLeery to the main gates. “Och. I canna think he’s distinguished himself, I’m afraid.” His Scots accent seemed broader than ever, and his long black overcoat, reaching almost to his knees, fostered the illusion that he had suddenly grown slimmer.

Stephens felt pleased that the Governor had asked him, and not Jackson, to see McLeery off the premises, and all in all the morning had gone pretty well. But something stopped him from making his way directly to the canteen for a belated cup of coffee. He wanted to take just one last look at Evans. It was like a programme he’d seen on TV about a woman who could never really convince herself that she’d locked the front door when she’d gone to bed: often she’d got up twelve, fifteen, sometimes twenty times to check the bolts.

(“आपके विचार से उसकी परीक्षा कैसी रही ?” मैकलीरी के साथ-साथ मुख्य द्वार की ओर जाते हुए स्टीफन्स ने पूछा। “ओह । मुझे नहीं लगता कि उसने अपना नाम रोशन किया है।” उसका स्काटिश उच्चारण पहले से कहीं अधिक स्पष्ट लगता था और उसका लम्बा काला ओवरकोट लगभग उसके घुटनों तक पहुँचता था जिससे यह भ्रम बढ़ता था कि वह अचानक ही पतला हो गया है। स्टीफन्स ने इस बात पर खुशी महसूस की कि गवर्नर ने जैक्सन की बजाय उसे मैकलीरी को प्रांगण से अलविदा करने को कहा, और पूरी सुबह सही गुजरी। परन्तु किसी चीज ने उसे सीधा कैंटीन में एक कप ताजगी भरी कॉफी के लिए जाने से रोका। वह बस एक अन्तिम नजर ईवान्स पर डालना चाहता था। यह उस कार्यक्रम की तरह था जो उसने TV पर देखा था-एक औरत के बारे में जो हमेशा वास्तव में पक्का समझती थी कि बिस्तर में जाने से पहले उसने सामने वाले दरवाजे को ताला नहीं लगाया था-प्रायः बारह, पंद्रह और कई बार बीस बार चिटखनी का निरीक्षण करने के लिए उठती थी।)

He re-entered D Wing, made his way along to Evans’s cell, and opened the peephole once more. Oh, no! CHRIST, NO! There, sprawled back in Evans’s chair was a man (for a semi-second Stephens thought it must be Evans), a grey regulation blanket slipping from his shoulders, the front of his closely cropped, irregularly tufted hair awash with fierce red blood which had dripped already through the small black beard, and was even now spreading horribly over the white clerical collar and down into the black clerical front.

Stephens shouted wildly for Jackson: and the words appeared to penetrate the curtain of blood that veiled McLeery’s ears, for the minister’s hand felt feebly for a handkerchief from his pocket, and held it to his bleeding head, the blood seeping slowly through the white linen. He gave a long low moan and tried to speak. But his voice trailed away, and by the time Jackson had arrived and despatched Stephens to ring the police and the ambulance, the handkerchief was a sticky, squelchy wodge of cloth.

(वह डी विंग में दुबारा घुसा, ईवान्स की कोठरी में गया, और एक बार फिर से’ झांकने वाली खिड़की को खोला। ओह नहीं। क्राईस्ट, नहीं! वहाँ ईवान्स की कुर्सी पर पीछे को लुढ़का हुआ एक आदमी था। (एक सैकंड के लिए स्टीफन्स ने सोचा कि वह ईवान्स था), एक काला कम्बल उसके कंधों से फिसलता हुआ, उसके सामने के बाल बिल्कुल छोटे, ऊबड़-खाबड़ गुच्छेदार बाल लाल खून से भीगे हुए जो पहले ही छोटी काली दाढ़ी पर आ गया था, और अब पादरी के सफेद कॉलर पर भी फैल रहा था और उसके नीचे काले कपड़ों में भी।

स्टीफन्स जैक्सन के लिए पागलों की तरह चिल्लायाः और उसके शब्द खून के पर्दे को चीरते हुए प्रतीत हुए जो मैकलीरी के कानों को ढक चुका था, पादरी के हाथ ने कमजोरी से उसकी जेब से रूमाल को टटोला, और उसको खून निकलते हुए सिर पर रखा, खून धीरे-धीरे सफेद कपड़े से निकलने लगा। उसने एक लम्बी और धीमी कराहट निकाली, और बोलने की कोशिश की, परन्तु उसकी आवाज लुप्त हो गई और जैक्सन ने वहाँ आने और उसके द्वारा स्टीफन्स को और एम्बुलेंस को बुलाने के लिए फोन करने भेजने तक पूरा रूमाल चिपचिपा, पचर-पचर करता हुआ एक कपड़े का टुकड़ा बन चुका था।)

McCleery slowly raised himself, his face twisted tightly with pain. “Dinna worry about the ambulance, man! I’m a’ right…. I’m a’ right…..Get the police! I know….. I know where…..he….” He closed his eyes and another drip of blood splashed like a huge red raindrop on the wooden floor. His hand felt along the table, found the German question paper, and grasped it tightly in his bloodstained hand. “Get the Governor! I know….I know where Evans….”

(मैकलीरी ने धीरे-धीरे अपने-आपको खड़ा किया, उसका चेहरा दर्द से सख्ती से सिकुड़ गया। “एम्बुलेंस के बारे में चिन्ता मत करो। मैं ठीक हूँ……मैं ठीक हूँ……पुलिस को बुलाओ। मैं जानता हूँ……मैं जानता हूँ वह…..कहाँ….।” उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और खून की एक बड़ी बूँद लकड़ी के फर्श पर आकर गिरी। उसके हाथ ने टेबल को टटोला, जर्मन प्रश्न-पत्र को ढूंढा और इसको अपने खून से भरे हाथ में कसकर दबोच लिया। “गवर्नर को बुलाओ! मैं जानता हूँ……मैं जानता हूँ ईवान्स कहाँ है ?”)

Almost immediately sirens were sounding, prison officers bar asked orders, puzzled prisoners pushed their way along the corridors, doors were banged and bolted, and phones were ringing everywhere. And within a minute McLeery, with Jackson and Stephens supporting him on either side, his face now streaked and caked with drying blood, was greeted in the prison yard by the Governor, perplexed and grim.

“We must get you to hospital immediately. I just don’t-” “I’ve called the police ?” “Yes, yes. They’re on their way. But-” “I’m a’right. I’m a’ right. Look! Look here! ” Awkwardly he opened the German question paper and thrust it before the Governor’s face. “It’s there! D’ye, see what I mean ?”
The Governor looked down and realised what McLeery was trying to tell him. A photocopied sheet had been carefully and cleverly superimposed over the last (originally blank) page of the question paper.

(लगभग उसी समय सायरन बज रहे थे, और अधिकारी आदेश दे रहे थे, हैरान कैदी बरामदे की तरफ बढ़ रहे थे। दरवाजे बज रहे थे और चिटकनियाँ चढ़ाई जा रही थीं, और सभी जगह फोनों की घंटियाँ बज रही थीं। और एक मिनट के अन्दर-अन्दर मैकलीरी उसको संभाले हुए जैक्सन और स्टीफन्स, अब उसके चेहरे पर जमे हुए खून से लाइनें बन गईं थीं, गवर्नर ने उसका अभिवादन किया जो विचलित और गम्भीर था। “हमें तुम्हें फौरन अस्पताल ले जाना होगा। मैं बिल्कुल नहीं-” “आपने पुलिस बुलाई ?” “हाँ, हाँ। वे चल चुके हैं। पर-” “मैं ठीक हूँ। मैं ठीक हूँ। देखो! यहाँ देखो! बेढंगे तरीके से उसने जर्मन प्रश्न-पत्र खोला और उसे गवर्नर के चेहरे के सामने कर दिया। “यह देखो! समझे मेरा क्या मतलब है ?” गवर्नर ने देखा और समझ गया कि मैकलीरी उसे क्या बताना चाह रहा था। एक फोटोकापी बड़ी सावधानी और चतुराई से प्रश्न-पत्र के अन्तिम (मूलरूप से खाली) पेज पर चिपकाई हुई थी।)

“Ye see what they’ve done, Governor. Ye see…” His voice trailed off again, as the Governor, dredging the layers of long neglected learning, willed himself to translate the German text before him :

(“देखो, गवर्नर, उन लोगों ने क्या किया है। आप देखिए…..” उसकी आवाज फिर धीमी पड़ गई, जबकि गवर्नर, बहुत दिनों से भूले ज्ञान की परतों से धूल हटाकर अपने सामने रखे जर्मन भाषा के लेख का अनुवाद करने का प्रयत्न कर रहा था 🙂

Sie sollen dem schon verabredeten Plan genau folgen. Der wichtige Zeitpunkt ist drei Minuten vor Ende des Examens…. “You must follow the plan already somethinged. The vital point in time is three minutes before the end of the examination but something something something something….Don’t hit him too hard remember, he’s a minister! And don’t overdo the Scots accent when…” A fast-approaching siren wailed to its crescendo, the great doors of the prison yard were pushed back, and a white police car squealed to a jerky halt beside them.

…..“तुम्हें योजना के अनुसार चलना होगा। समय के बारे में महत्त्वपूर्ण बात है, परीक्षा समाप्त होने के तीन मिनट पहले पर कुछ कुछ कुछ कुछ….उसे अधिक जोर से मत मारना याद रखो, वह एक पादरी है। और न ज्यादा स्कॉटिश उच्चारण करना जब….” … तेजी से आती हुई साइरन की आवाज अपने पूरे जोर से चीखी। जेल के बड़े दरवाजे अन्दर की ओर खुल गए, और उनकी बगल में पुलिस की एक सफेद कार तेज आवाज के साथ झटका मारकर रुकी।)

Detective Superintendent Carter swung himself out of the passenger seat and saluted the Governor. “What the hell’s happening, sir ?” And, turning to McLeery: “Christ! Who’s hit him ?” But McLeery cut across whatever explanation the Governor might have given. “Elsfield Way, officer! I know where Evans….” He was breathing heavily and leaned for support against the side of the car, where the imprint of his hand was left in tarnished crimson.

(गुप्तचर विभाग का अध्यक्ष कार्टन से पैसेंजर सीट से नीचे उतरा और गवर्नर का अभिवादन किया। “यहाँ पर यह क्या हो रहा है, श्रीमान ?” और मैकलीरी की तरफ मुड़ते हुए-“हे भगवान! इसे किसने मारा ?”
पर मैकलीरी ने गवर्नर के किसी भी संभावित उत्तर को काट दिया। “ऑफिसर, ऐल्सफील्ड मार्ग! मुझे पता है ईवान्स कहाँ…” वह हाँफ रहा था और सहारे के लिए कार की साइड पर झुका जहाँ उसके हाथ के लाल धब्बों का निशान बन गया।)

In bewilderment, Carter looked to the Governor for guidance. “What—?” “Take him with you, if you think he’ll be all right. He’s the only one who seems to know what’s happening.” Carter opened the back door and helped McLeery inside; and within a few seconds, the car leaped away in a spurt of gravel.

(भ्रम की स्थिति में कॉर्टर ने मार्गदर्शन के लिए गवर्नर की ओर देखा। “क्या ?” “अगर आपको लगता है कि इसकी हालत ठीक रहेगी, तो आप इसे अपने साथ ले जाएँ। यह अकेला व्यक्ति है जिसे लगता है कि वह जानता है कि क्या हो रहा है।” कॉर्टर ने पीछे का दरवाजा खोला और सहारा देकर मैकलीरी को अन्दर किया और कुछ पलों में ही कार कंकड़ों को उछालकर तेजी से निकल गई।)

“Elsfield Way”, McLeery had said; and there it was staring up at the Governor from the last few lines of the German text: “From Elsfield Way drive to the Headington roundabout, where….” Yes, of course. The Examinations Board was in Elsfield Way, and someone from the Board must have been involved in the escape plan from the very beginning: the question paper itself, the correction slip…

The Governor turned to Jackson and Stephens. “I don’t need to tell you what’s happened, do I ?” His voice sounded almost calm in its scathing contempt. “And which one of you two morons was it who took Evans for a nice little walk to the main gates and waved him bye-bye ?” “It was me, sir,” stammered Stephens. “Just like you told me, sir. I could have sworn-” “What? Just like I told you, you say? What the hell_?” “When you rang, sir, and told me to-” “When was that ?” The Governor’s voice was a whiplash now. “You know, sir. About twenty past eleven just before-” “You blithering idiot, man! It wasn’t me who rang you. Don’t you realise-” But what was the use? He had used the telephone at that time, but only to try (unsuccessfully, once more) to get through to the Examinations Board.

(“ऐल्सफील्ड मार्ग,” मैकलीरी ने कहा था; और यही चीज जर्मनी में लिखे हुए कागज अन्तिम कुछ पंक्तियों से गवर्नर को घूर रही थी-“ऐल्सफील्ड मार्ग से चक्कर काटकर हैडिंग्टन की तरफ जाओ….” हाँ, वाकई। परीक्षा-बोर्ड का कार्यालय ऐल्सफील्ड मार्ग पर था और बोर्ड का कोई-न-कोई व्यक्ति प्रारम्भ से ही ईवान्स के भागने के काम में शामिल होगा-प्रश्न-पत्र, स्वयं, भूल-सुधार की पर्ची….। गवर्नर जैक्सन और स्टीफन्स की तरफ मुड़ा। “मुझे तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है कि क्या हो चुका है, क्या मुझे है ? तीव्र नफरत से उसकी आवाज लगभग शान्त लगी। “और तुम दोनों में से वह मूर्ख कौन था जो ईवान्स को गेट तक एक छोटी-सी सैर कराता हुआ ले गया और उसे अलविदा कहा ?” “यह मैं था, श्रीमान,” स्टीफन्स हकलाया। “जैसा कि आपने मुझे बताया था, श्रीमान। मैं कसम खा सकता था-” “क्या ? जैसे कि मैंने तुम्हें बताया था, तुम कहते हो ? क्या बेवकूफी है-?” “जब आपने फोन किया, सर, और मुझे बताया कि-” “यह कब हुआ ?” गवर्नर की आवाज अब तीखी हो गई थी । “आप जानते हैं, सर। बस 11 बजकर 20 मिनट पर-” “तुम पूरे मूर्ख आदमी हो। यह मैं नहीं था जिसने तुम्हें फोन किया। क्या तुम्हें एहसास नहीं-” परन्तु क्या फायदा था ? उसने उस समय टेलीफोन का प्रयोग किया था, परन्तु केवल कोशिश की थी (असफल, एक बार फिर) परीक्षा-बोर्ड से सम्पर्क साधने की।)

He shook his head in growing despair and turned on the senior prison officer. “As for you, Jackson! How long have you been pretending you’ve got a brain, eh ? Well, I’ll tell you something, Jackson. Your skull’s empty. Absolutely empty!” It was Jackson who had spent two hours in Evans’s cell the previous evening; and it was Jackson who had confidently reported that there was nothing hidden away there–nothing at all. And yet Evans had somehow managed to conceal not only a false beard, a pair of spectacles, a dog collar, and all the rest of his clerical paraphernalia, but also some sort of weapon with which he’d given McLeery such a terrible blow across the head. Aarrgh!

(बढ़ती हुई निराशा के साथ उसने अपना सिर हिलाया और उच्च जेल अधिकारी की तरफ मुड़ा। “अब तुम्हारी बात जैक्सन! कब से तुम यह झूठा दावा कर रहे हो कि तुम्हारे पास दिमाग है, एह ? चलो मैं तुम्हें एक बात बताता हूँ, जैक्सन । तुम्हारी खोपड़ी खाली है। पूरी तरह खाली है!” वह जैक्सन ही था जिसने पिछली शाम ईवान्स की कोठरी में दो घंटे बिताए और वह जैक्सन था जिसने पूरे विश्वास से सूचना दी थी कि वहाँ कोई चीज छिपी नहीं थी कुछ भी नहीं। और फिर भी ईवान्स ने किसी तरह से न केवल नकली दाढ़ी, एक जोड़ी चश्मा, एक कॉलर और बाकी सारा अपना पादरी से सम्बन्धित साजो-सामान छिपाने में सफल हो गया था, बल्कि कुछ अस्त्र भी जिसकी सहायता से उसने मैकलीरी पर ऐसी भयानक चोट उसके सिर पर की थी। अरे!)

A prison van backed alongside, but the Governor made no immediate move. He looked down again at the last line of the German: “….to the Headington roundabout, where you go straight over and make your way to….to Neugraben.” “Neugraben”? Where on earth-? “New” something. “Newgrave”? Never heard of it: There was a “Wargrave”, somewhere near Reading, but…No, it was probably a code word, or-And then it hit him. Newbury! God, yes! Newbury was a pretty big sort of place but- He rapped out his orders to the driver. “St Aldates Police Station, and step on it! Take Jackson and Stephens here, and when you get there ask for Bell. Chief Inspector Bell. Got that ?” He leaped the stairs to his office three at a time, got Bell on the phone immediately, and put the facts before him. “We’ll get him, sir,” said Bell. “We’ll get him, with a bit o’luck.”

(“जेल की एक गाड़ी बगल में आकर रुकी, पर गवर्नर ने तुरन्त कोई हरकत नहीं की। उसने फिर से जर्मनी में लिखी अन्तिम पंक्ति को देखा “….हेडिंग्टन के आस-पास जहाँ से तुम सीधे चले जाना और अपना रास्ता बनाना….न्यूओबन।” “न्यूओबन” ? यह कौन-सी जगह….? “न्यू” कोई चीज। “न्यूग्रेव” ? यह कभी सुना नहीं एक “वारग्रेव” थी, कहीं रीडिंग के पास, पर… नहीं यह शायद कोई गुप्त संकेत था, या और तब उसे समझ आया। न्यूबरी! हे भगवान, हाँ! न्यूबरी थी तो काफी सुन्दर बड़ी जगह पर… . उसने ड्राइवर को ऊँची आवाज में और जल्दी-जल्दी हुक्म दिया। सेंट एलडेट्स थाना, और जल्दी करो! जैक्सन और स्टीफन्स को यहाँ लेकर आओ, और जब तुम वहाँ पहुँच जाओ तो बेल को बुलाना। चीफ इंस्पैक्टर बेल । समझे ?” अपने दफ्तर की सीढ़ियों पर एक बार में तीन सीढ़ियाँ फाँदता हुआ वह आया, फौरन बेल को फोन मिलाया और उसके सामने सारे तथ्य रखे। “हम उसे पकड़ लेंगे, श्रीमान”, बेल बोला। “अगर किस्मत ने जरा-सा भी साथ दिया तो हम उसे पकड़ लेंगे।”)

The Governor sat back and lit a cigarette. Ye gods! What a beautifully laid plan it had all been! What a clever fellow Evans was! Careless leaving that question paper behind; but then, they all made their mistakes somewhere along the line. Well, almost all of them. And that’s why very very shortly Mr clever-clever Evans would be back inside doing his once more.

The phone on his desk erupted in a strident burst, and Superintendent Carter informed him that McLeery had spotted Evans driving off along Elsfield Way; they’d got the number of the car all right and had given chase immediately, but had lost him at the Headington roundabout; he must have doubled back into the city.

(गवर्नर आराम से बैठ गया, और एक सिगरेट जला ली। हे भगवान! यह कितनी सुन्दर ढंग से बनाई गई योजना थी! ईवान्स कितना चालाक था! लापरवाही करके वह प्रश्न-पत्र पीछे छोड़ गया; परन्तु तब, वे सभी कोई-न-कोई गलती करते ही हैं। ठीक है, लगभग वे सभी। और यही कारण है कि बहुत ही जल्दी श्रीमान चालाक, ईवान्स जेल के अन्दर होगा। उसके डेस्क पर रखा फोन तेज आवाज में फट पड़ा, और अधीक्षक कॉर्टर ने उसको सूचना दी कि मैकलीरी ने ईवान्स को ऐल्सफील्ड वे की तरफ गाड़ी चलाते हुए देखा था; उन्होंने कार का नम्बर अच्छी तरह से प्राप्त किया और तुरन्त उसका पीछा किया, परन्तु उसे हेडिंग्टन के आस-पास कहीं खो दिया था; वह अवश्य ही शहर में दोबारा आ गया है।)

“No,” said the Governor quietly. “No, he’s on his way to Newbury.” He explained his reasons for believing so, and left it at that. It was a police job now-not his. He was just another good-for-a-giggle, gullible governor, that was all. “By the way, Carter. I hope you managed to get McLeery to the hospital all right ?” “Yes. He’s in the Radcliffe now. Really groggy, he was, when we got to the Examination offices, and they rang for the ambulance from there.”

The Governor rang the Radcliffe a few minutes later and asked for the accident department. “McLeery, you say ?” “Yes. He’s a person.” “I don’t think there’s anyone.” “Yes, there is. You’ll find one of your ambulances picked him up from Elsfield Way about-” “Oh, that. Yes, we sent an ambulance all right, but when we got there, the fellow had gone. No one seemed to know where he was. Just vanished! Not a sign-“. But the Governor was no longer listening, and the truth seemed to hit him with an almost physical impact somewhere in the back of his neck.

(“नहीं,” गवर्नर ने धीरे से कहा। “नहीं, वह न्यूबरी के रास्ते पर है।” उसने ऐसा विश्वास करने के अपने कारण बताए, और यह बात यहीं छोड़ दी। अब यह पुलिस का काम था-उसका नहीं। वह भी केवल एक हँसी का पात्र बनने वाला, जल्दी विश्वास करने वाला गवर्नर था, बस यही था। “हाँ, एक बात है, कॉर्टर। मुझे आशा है कि तुम मैकलीरी को सही सलामत अस्पताल ले गए होंगे ?” “हाँ। वह अब रैडक्लीफ में है। जब हम जाँच कार्यालय पहुंचे तो वह सचमुच कमजोर था और उन्होंने वहाँ से एम्बुलैंस बुलाई।” गवर्नर ने कुछ मिनट बाद रैडक्लीफ में फोन किया और दुर्घटना विभाग के बारे में पूछा।

“मैकलीरी, आप कहते हैं ?” “ हाँ। वह एक पादरी है।” “मेरे विचार से इस नाम का कोई नहीं है-” “हाँ, वहाँ है। आपको पता लगेगा कि आपकी एक एम्बुलैंस ने उसे ऐल्सफील्ड वे से लिया था-” “ओह, वह। हाँ, हमने वहाँ एम्बुलैंस भेजी थी, परन्तु जब हम वहाँ पहुँचे, तो वह आदमी जा चुका था। किसी को भी पता नहीं चल पा रहा था कि वह कहाँ गया। बस लुप्त हो गया था! एक भी चिह्न नहीं था परन्तु गवर्नर अब सुन नहीं रहा था, और लगता था कि सच्चाई ने लगभग शारीरिक प्रभाव डालते हुए उसकी गर्दन पर शारीरिक रूप से चोट की।)

A quarter of an hour later they found the Reverend S. McLeery, securely bound and gagged, in his study in Broad Street. He’d been there, he said, since 8.15 a.m., when two men had called and… Enquiries in Newbury throughout the afternoon produced nothing. Nothing at all. And by tea time everyone in the prison knew what had happened. It had not been Evans, impersonating McLeery, who had walked out; it had been Evans, impersonating McLeery, who had stayed in.

(कोई पन्द्रह मिनट बाद उन्होंने रिवरेंड एस० मैकलीरी को अच्छी तरह से बंधा हुआ और मुंह बन्द किया हुआ ब्राड स्ट्रीट के अपने अध्ययन कक्ष में पाया। उसने बताया कि वह वहाँ पर सुबह 8.15 से पड़ा हुआ है जब दो व्यक्ति आए थे और…. सारे न्यूबरी में उस दोपहर बाद होने वाली पूछताछ से कुछ भी पता नहीं लगा। बिल्कुल भी नहीं। और चाय के समय तक जेल के अन्दर हर व्यक्ति को पता चल चुका था कि हुआ क्या था। ईवान्स मैकलीरी का भेष बनाकर भागा नहीं था; बल्कि ईवान्स मैकलीरी का भेष बनाकर अन्दर रह गया था।)

The fish and chips were delicious, and after a gentle stroll round the centre of Chipping Norton, Evans decided to return to the hotel and have an early night. A smart new hat concealed the wreckage of his closely cropped hair, and he kept it on as he walked up to the reception desk of the Golden Lion. It would take a good while for his hair to regain its former glories-but what the hell did that matter. He was out again, wasn’t he? A bit of bad luck, that, when Jackson had pinched his scissors, for it had meant a long and tricky operation with his only razor blade the previous night. Ah! But he’d had his good luck, too. Just think! If Jackson had made him take his bobble hat off! Phew! That really had been a close call. Still, old Jackson wasn’t such a bad fellow…

(मछली और चिप्स स्वादिष्ट थे और चिपिंग नार्टन चौराहे तक आराम से सैर करने के बाद, ईवान्स ने होटल लौटकर जल्दी सोने का निश्चय किया। उसके छोटे कटे बालों को एक शानदार नया हैट छिपाए हुए था, और गोल्डन लॉयन (होटल) के रिसेप्शन पर पहुँचने तक उसने यह हैट पहने रखा। अपनी पहले वाली शान प्राप्त करने में उसके बालों को समय लगेगा-पर इससे आखिर क्या अन्तर पड़ता था। वह फिर से आज़ाद था, नहीं था क्या ? थोड़ी-सी बदकिस्मती तब लगी थी जब जैक्सन ने कैंची चुरा ली थी, क्योंकि इसके कारण बड़ा लम्बा और चालाकी भरा ऑपरेशन उस एकमात्र रेजर से उसे पिछली रात अपने बालों का करना पड़ा था। आह! पर तकदीर ने उसका साथ भी दिया था। जरा सोचो! अगर जैक्सन ने उससे अपना छोटा ऊनी हैट उतारने को कहा होता तो! ओह! वह तो सचमुच बाल-बाल बच गया। फिर भी बूढ़ा जैक्सन इतना बुरा आदमी नहीं था….)

One of the worst things-funny, really!–had been the beard. He’d always been allergic to sticking plaster, and even now his chin was irritatingly sore and red. The receptionist wasn’t the same girl who’d booked him in, but the change was definitely for the better. As he collected his key, he gave her his best smile, told her he wouldn’t be bothering with breakfast, ordered the Daily Express, and asked for an early-morning call at 6.45 a.m. Tomorrow was going to be another busy day.’

(एक बहुत खराब बात, जो वास्तव में मजेदार थी वह दाढ़ी के बारे में है। उसे सदा प्लास्टर चिपकाने से एलर्जी हो जाती थी और इस समय भी उसकी ठोढ़ी में बड़ी दर्द थी और वह लाल थी।) रिसेप्शनिस्ट वह लड़की नहीं थी जिसने उसका कमरा बुक किया था, परन्तु बदलाव निश्चय ही अच्छे के लिए था। जब उसने चाबी ली, उसने उसे अपनी सबसे अच्छी मुस्कराहट दी, उसको बताया कि वह नाश्ते के लिए परेशान नहीं करेगा,डेली एक्सप्रेस का आदेश दिया और सुबह जल्दी 6.45 पर कॉल करने के लिए कहा। कल का दिन एक अन्य व्यस्त दिन होगा।)

He whistled softly to himself as he walked up the broad stairs….He’d sort of liked the idea of being dressed up as a minister dog collar and everything. Yes, it had been a jolly good idea for “McLeery’ to wear two black fronts, two collars. But that top collar! Phew! It had kept on slipping off the back stud; and there’d been that one panicky moment when “McLeery’ had only just got his hand up to his neck in time to stop the collars springing apart before Stephens…Ah! They’d got that little problem worked out all right, though: a pen stuck in the mouth whenever the evil eye had appeared at the peephole.

Easy! But all that fiddling about under the blanket with the black front and the stud at the back of the collar that had been far more difficult than they’d ever bargained for…Everything else had gone beautifully smoothly, though. In the car he’d found everything they’d promised him: soap and water, clothes, the map-yes, the map, of course. The Ordnance Survey Map of Oxfordshire…. He’d got some good friends; some very clever friends. Christ, ah!

(जब वह चौड़ी सीढ़ियों पर चढ़ रहा था तो उसने अपने लिए हल्की-सी सीटी बजाई…….. । एक तरह से पादरी का भेष बनाना उसे अच्छा लगा था, डॉग कालर और हर चीज। हाँ, यह मजेदार विचार था कि मैकलीरी दो अग्र वस्त्र, गाउन पहनकर आया, दो कॉलर। पर वह ऊपर वाला कॉलर! ओह! यह तो बार-बार बटन से अलग हो जाता था और एक क्षण तो बड़ा भयावह हो गया था जब मैकलीरी ने बिल्कुल आखिरी वक्त पर अपना हाथ अपने गले पर लगाया था जिससे कि वह स्टीफन्स के सामने दोनों कॉलरों को अलग होने से रोक ले….! आह! वह छोटी समस्या भी उन्होंने ठीक से सुलझा ली, जब भी निरीक्षण छिद्र पर गन्दी आँख दिखाई दे मुँह में पेन लगा दिया जाए। आसान! पर वह सारा खिलवाड़, कम्बल के नीचे काले कपड़े को पहनना और कॉलर के पीछे स्टड फिट करना जितना उन्होंने सोचा था, यह सब उससे कहीं कठिन लगा था। यद्यपि बाकी सारी बातें बड़ी सफाई से निपट गई थीं। कार में उसे सारी चीजें मिल गई थीं जिनका उससे वायदा किया गया था-साबुन और पानी, कपड़े, नक्शा-हाँ, सचमुच नक्शा। ऑक्सफोर्ड शायर का आर्डिनेंस सर्वे मैप…। उसके पास कुछ अच्छे मित्र थे, कुछ बड़े चतुर मित्र। क्राइस्ट, ओह!)

He unlocked his bedroom door and closed it quietly behind him—and then stood frozen to the spot, like a man who has just caught a glimpse of the Gorgon. Sitting on the narrow bed was the very last man in the world that Evans had expected or wanted to see. “It’s not worth trying anything,” said the Governor quietly, as Evans’s eyes darted desperately around the room. “I’ve got men all round the place.” (Well, there were only two, really: but Evans needn’t know that.) He let the words sink in. “Women, too. Didn’t you think the blonde girl in reception was rather sweet ?”

(उसने अपने शयनकक्ष का ताला खोला और पीछे से इसे धीरे-से बन्द कर दिया और फिर उसी जगह जम कर खड़ा रह गया, उस आदमी की तरह जिसने दैत्य पर नजर डाल दी हो। उस छोटे बिस्तर पर वह व्यक्ति बैठा था जो संसार का अन्तिम व्यक्ति होता जिसकी उसने उम्मीद की हो-या देखना चाहा हो। “किसी कोशिश से कोई फायदा न होगा,” गवर्नर ने शान्ति से कहा, जबकि ईवान्स की आँख हताश में कमरे में चारों ओर दौड़ रही थी। “मेरे आदमियों ने चारों तरफ से घेरा हुआ है।” (वैसे तो वास्तव में दो ही थे पर ईवान्स को यह जानने की आवश्यकता न थी।) उसने शब्दों को ईवान्स की समझ में आने दिया। “औरतें भी। क्या तुम्हें नहीं लगा कि स्वागत टैबल पर बैठी लड़की कुछ अधिक ही सुन्दर थी ?”)

Evans was visibly shaken. He sat down slowly in the only chair the small room could offer, and held his head between his hands. For several minutes there was utter silence. Finally, he spoke. “It was that bloody correction slip, I s’pose.”

(ईवान्स स्पष्ट रूप से घबरा गया था। धीरे-धीरे उस छोटे से कमरे में पड़ी एकमात्र कुर्सी पर बैठा और अपने हाथों में अपने सिर को पकड़ लिया। कई मिनटों तक पूरी निस्तब्धता छाई रही। आखिर, वह बोला। “मेरा ख्याल है, वह कमबख्त भूल-सुधार की पर्ची इस सबका कारण होगी।”)

“We-ell” (the Governor failed to mask the deep satisfaction in his voice) “there are a few people who know a little German.” Slowly, very slowly, Evans relaxed. He was beaten and he knew it. He sat up at last and managed to smile ruefully. “You know, it wasn’t really a mistake. You see, we ‘hadn’t been able to fix up any ‘hotel, but we could’ve worked that some other way. No. The really important thing was for the phone to ring just before the exam finished-to get everyone out of the way for a couple of minutes.

So we ‘ad to know exactly when the exam started, didn’t we?” “And, like a fool, I presented you with that little piece of information on a plate.” “Well, somebody did. So, you see, sir, that correction slip killed two little birds with a single stone, didn’t it? The name of the ‘otel for me, and the exact time the exam started for, er, for, er….”

(“खैर” (अपनी आवाज के गहरे संतोष को गवर्नर छिपा न सका) “कुछ लोग हैं जिन्हें थोड़ी-बहुत जर्मन आती है।” धीरे-धीरे, बहुत धीरे, ईवान्स शांत हुआ। वह हार गया था और वह इस बात को जानता था। अंततः वह विश्वास के साथ बैठा और पश्चात्ताप की मुस्कराहट अपने चेहरे पर ला सका। “देखिए, वास्तव में यह कोई गलती न थी।

देखो, हम किसी होटल को पक्का नहीं कर सके थे, पर हम कुछ और इंतजाम कर सकते थे। नहीं। असली महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि परीक्षा समाप्त होने से ठीक पहले फोन की घंटी बजे–ताकि दो मिनट के लिए हमें पूर्ण आजादी मिल सके। इसलिए हमें यह ठीक-ठीक जानना आवश्यक था कि परीक्षा कब प्रारम्भ होती है। नहीं क्या ?” “और किसी बेवकूफ की तरह सूचना की वह छोटी-सी पर्ची मैंने तुम्हें आसानी से भेंट कर दी।” “जो, किसी ने तो दी। इस प्रकार, देखिए, श्रीमान, उस भूल-सुधार पर्ची ने दो काम किए, नहीं किए क्या ? मुझे होटल का नाम बताया और परीक्षा प्रारम्भ होने का ठीक समय….”)

The Governor nodded. “It’s a pretty common word.” “Good job it is pretty common, sir, or I’d never ‘ave known where to come to, would I?” “Nice name, though: zum goldenen Lowen.” “How did you know which Golden Lion it was? There are ‘hundreds of ’em.” “Same as you, Evans. Index number 313; Centre number 271. Remember? Six figures? And if you take an Ordnance Survey Map for Oxfordshire, you find that the six-figure reference 313/271 lands you bang in the middle of Chipping Norton.” “Yea, you’re right. Huh! We’d ‘oped you’d run off to Newbury.” “We did.” “Well, that’s something, I spose.”

(गवर्नर ने सिर हिलाया। “यद्यपि यह काफी सामान्य शब्द है।” “यही तो अच्छी बात थी श्रीमान, कि यह शब्द काफी सामान्य है वरना मुझे कभी पता ही न लगता कि कहाँ आना है, लगता क्या ?” “हालांकि, अच्छा नाम है-जुम गोल्डन लॉयन।” “आपको यह कैसे पता लगा कि यह कौन-सा गोल्डन लाईन था ? ऐसे तो सैकड़ों हैं।” “जैसे तुमने जाना ईवान्स। इन्डैक्स नं0 313; सेंटर नं. 271. याद है ? छह अंक ? और अगर तुम ऑक्सफोर्ड शायर का आर्डिनेंस सर्वे मैप लो तो तुम देखोगे कि छह अंक वाला संदर्भ तुम्हें बिल्कुल चिपिंग नॉर्टन के बीच में ले आता है। “हाँ, आप सही कहते हैं। हमें उम्मीद थी कि आप न्यूबरी की तरफ जा रहे होंगे।” “हम गए थे।” “खैर, मेरा ख्याल है कि यह कुछ बात हुई न।”)

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level
“That question paper, Evans. Could you really understand all that German? I could hardly – ” “Nah! Course I couldn’t. I knew roughly what it was all about, but we just ‘oped it’d throw a few spanners in the works-you know, sort of muddle everybody a bit.” The Governor stood up. “Tell me one thing before we go. How on earth did you get all that blood to pour over your head ?”

(“वह प्रश्न-पत्र, ईवान्स। क्या तुम सचमुच इतनी सारी जर्मन समझ सकते थे ? मैं तो मुश्किल से कुछ-” “नहीं। निःसन्देह मैं नहीं समझ सकता था। मोटे तौर पर मुझे पता था कि वह किस विषय में था, पर हमें इतनी आशा जरूर थी कि यह गड़बड़ करने जैसा होना-आप जानते हैं न, हर व्यक्ति को थोड़ा एक तरह का संशय पैदा होगा।” गवर्नर खड़ा हो गया। “हमारे चलने से पहले बस एक बात बताओ। भला तुम्हें अपने सिर पर डालने के लिए इतना खून कहाँ से मिला ?”)

Evans suddenly looked a little happier. “Clever, sir. Very clever, that was-‘ow to get a couple o’ pints of blood into a cell, eh? When there’s none there to start off with, and when, er, and when the “invigilator”, shall we say, gets, searched before ‘e comes in. Yes, sir. You can well ask about that, and I dunno if I ought to tell you. After all, I might want to use that particular-” “Anything to do with a little rubber ring for piles, perhaps?” Evans grinned feebly. “Clever, though, wasn’t it?” “Must have been a tricky job sticking a couple of pints.”

(अचानक ही ईवान्स कुछ प्रसन्न दिखाई दिया। “होशियारी, श्रीमान। बड़ा होशियारी का काम था-कैसे किसी कोठरी के अन्दर दो पाईंट खून पहुंचाया जाए, आह ? जबकि प्रारम्भ में वहाँ बिल्कुल भी नहीं है, और जब, अर, जबकि “निरीक्षक” की क्या हम उसे यह नाम दे सकते हैं, अन्दर आने से पहले तलाशी ली जाती है। जी हाँ। आप इसके बारे में अवश्य पूछ सकते हैं पर मैं नहीं समझता कि मुझे आपको बताना चाहिए। आखिर, हो सकता है इस विशेष चीज का उपयोग-” “शायद कहीं इसका सम्बन्ध उन छोटे छल्लों से तो नहीं था जो पाइल्स के लिए थे ?” ईवान्स एक कमजोर मुस्कराहट से हँसा। “होशियारी का काम फिर भी, नहीं क्या ?” “फिर भी काफी कठिन काम रहा होगा उसके अन्दर दो पाईंट खून भरना।”)

“Nah! You’ve got it wrong, sir. No problem about that.” “No?” “Nah! It’s the clotting, you see. That’s the big trouble. We got the blood easy enough. Pig’s blood, it was-from the slaughter’ouse in Kidlington. But to stop it clotting you’ve got to mix yer actual blood” (Evans took a breath) “with one tenth of its own volume of 3.8 per-cent trisodium citrate! Didn’t know that, did you, sir ?”

(“नहीं श्रीमान, आप इसे गलत समझे, सर। यह कोई समस्या नहीं है।” “नहीं है ?” “नहीं! देखिए, समस्या तो खून का जमना है। यह बड़ी समस्या है। खून तो हमें आसानी से मिल गया। यह सूअर का खून था यह किड्लिंगटन के कसाईखाने से मिला। पर इसे जमने से रोकने के लिए आपको इसमें अपना खून मिलाना पड़ेगा” (ईवान्स सांस लेने के लिए रुका) “इसके आयतन के दसवें भाग के बराबर इसमें ट्राइसोडियम सिट्रेट मिलाना होगा! आपको नहीं पता था न, क्या पता था, श्रीमान ?”)

The Governor shook his head in a token of reluctant admiration. “We learn something new every day, they tell me. Come on, m’lad.” Evans made no show of resistance, and side by side the two men walked slowly down the stairs. “Tell me, Evans. How did you manage to plan all this business? You’ve had no visitors-I’ve seen to that. You’ve had no letters-.” “I’ve got lots of friends, though.” “What’s that supposed to mean ?” “Me German teacher, for a start.” “You mean-? But he was from the Technical College.” “Was ‘e?” Evans was almost enjoying it all now. “Ever check up on ‘im, sir ?” . “God Almighty! There’s far more going on than I -” “Always will be, sir.”

(न चाहते हुए भी गवर्नर ने प्रशंसा के चिह्न के रूप में अपना सिर हिलाया। “कहते हैं हमें रोज ही कुछ नया सीखना होता है। अच्छा, बेटे चलो।” ईवान्स ने किसी विरोध का प्रदर्शन नहीं किया और दोनों आदमी साथ-साथ सीढ़ियाँ उतरने लगे। “ईवान्स मुझे यह बताओ कि इस सारे काम की योजना तुमने कैसे बनाई ? तुम्हें कोई मिलने नहीं आया-मैंने इस बात का ख्याल रखा है। तुम्हें कोई पत्र भी नहीं मिला था-” “पर मेरे बहुत-से मित्र हैं।” “इसका क्या अर्थ लगाया जाए ?” । “पहले मेरे जर्मन अध्यापक को ही ले लो।” “तुम्हारा मतलब-? पर वह तो टेक्निकल कॉलेज से था।” “ऐसा क्या ?” ईवान्स को अब इन बातों में मजा आने लगा था। “कभी उसके बारे में पूछताछ की, श्रीमान ?” “हे भगवान् ! बहुत कुछ ऐसा हो रहा जो मैं-” “हमेशा होगा, सर।”)

“Everything ready ?” asked the Governor as they stood by the reception desk. “The van’s out the front, sir,” said the pretty blonde receptionist. Evans winked at her, and she winked back at him. It almost made his day. A silent prison officer handcuffed the recaptured Evans, and together the two men clambered awkwardly into the back seat of the prison van. “See you soon, Evans.” It was almost as if the Governor were saying farewell to an old friend after a cocktail party. “Cheerio, sir. I, er, I was just wonderin’. I know your German’s pretty good, sir, but do you know any more o’ these modern languages ?”

(रिसेप्शन डेस्क पर पहुँचकर गवर्नर ने पूछा, “क्या हर चीज तैयार है ?” सुनहरी बालों वाली सुन्दर रिसेप्शनिस्ट ने कहा, “सर गाड़ी सामने की तरफ खड़ी है।” ईवान्स ने उसकी ओर आँख से इशारा किया और वापस उसने भी आँख से इशारा किया। लगता था इसने तो उसका दिन सुधार दिया। चुपचाप जेल के एक अधिकारी ने दोबारा पकड़े गए ईवान्स के हाथों में हथकड़ियाँ लगा दी और दोनों आदमी साथ-साथ भद्दे ढंग से जेल-गाड़ी की पिछली सीट पर चढ़ गए। “अच्छा ईवान्स, जल्दी मिलेंगे।” यह बिल्कुल ऐसा था मानो कॉकटेल पार्टी के बाद गवर्नर अपने किसी पुराने मित्र को अलविदा कह रहा हो। “आपकी यात्रा शुभ हो, श्रीमान’। मैं बस यह सोच रहा था कि आपकी जर्मन तो काफी अच्छी है, पर क्या आपको इस आधुनिक भाषाओं के बारे में कुछ और भी पता है ?”)

“Not very well. Why ?”
Evans settled himself comfortably on the back seat, and grinned happily. ‘Nothin’, really. I just happened to notice that you’ve got some O-level Italian classes comin’ up next September, that’s all.’ “Perhaps you won’t be with us next September, Evans.” James Roderick Evans appeared to ponder the Governor’s words deeply. “No. P’r’aps I won’t,” he said. As the prison van turned right from Chipping Norton on to the Oxford road, the hitherto silent prison officer unlocked the handcuffs and leaned forward towards the driver, “For Christ’s sake get a move on! It won’t take ’em long to find out-‘ “Where do ye suggest we make for ?” asked the driver, in a broad Scots accent…. “What about Newbury?” suggested Evans.

HBSE 12th Class English Solutions Vistas Chapter 7 Evans Tries an O-Level

(“बहुत अच्छी तरह नहीं। क्यों ?”
ईवान्स आराम से पिछली सीट पर बैठ गया और खुशी से मुस्कराया। “कोई खास बात नहीं, मैं तो सिर्फ यह सोच रहा था कि अगले सितम्बर ओ-स्तर के इटालियन क्लास लगने वाले हैं, बस यही बात थी। “ईवान्स, शायद अगले सितम्बर तक तुम हमारे पास न हो।” जेम्स रूडरिक ईवान्स गवर्नर के उत्तर पर विचार करने लगा। “नहीं शायद मैं न होऊँ,” वह बोला। जैसे ही चिपिंग नॉर्टन से सीधे हाथ मुड़कर गाड़ी ऑक्सफोर्ड रोड पर आई, अभी तक चुपचाप रहे जेल-अधिकारी ने हथकड़ी खोल दी और आगे झुककर ड्राइवर से बोला, “भगवान के नाम पर, चलते चलो! उन्हें पता लगाने में देर नहीं लगेगी-” स्पष्ट स्काटिश आवाज में ड्राइवर ने पूछा, “आप किधर चलना चाहेंगे ?” “न्यूबरी के बारे में क्या ख्याल है ?” ईवान्स ने सुझाव दिया।)

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

HBSE 8th Class Hindi बस की यात्रा Textbook Questions and Answers

कारण बताएँ

बस की यात्रा शब्दार्थ HBSE 8th Class  प्रश्न 1.
“मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा।”
लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई ?
उत्तर:
लेखक के मन में बस कंपनी के हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा इसलिए जाग गई कि वह इतनी खटारा बस को चलाने का साहस जुटा रहा था। कंपनी का हिस्सेदार अपनी पुरानी बस की खूब तारीफ कर रहा था। ऐसे व्यक्ति के प्रति श्रद्धा भाव ही उमड़ता है।

Bas Ki Yatra Class 8 HBSE प्रश्न 2.
“लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस से सफर नहीं करते।”
लोगों ने यह सलाह क्यों दी?
उत्तर:
लोगों ने लेखक को यह सलाह इसलिए दी क्योंकि इस बस का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब और कहाँ रुक जाए, शाम बीतते ही रात हो जाती है और रात रास्ते में कहाँ बितानी पड़ जाए। कुछ पता नहीं रहता। उनके अनुसार यह बस डाकिन की तरह है।

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बस की यात्रा प्रश्न उत्तर HBSE 8th Class प्रश्न 3.
“ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं।”
लेखक को ऐसा क्यों लगा ?
उत्तर:
जब बस का इंजन स्टार्ट हुआ तब सारी बस झनझनाने लगी। लेखक को ऐसा प्रतीत हुआ कि पूरी बस ही इंजन है। मानो वह बस के भीतर न बैठकर इंजन के भीतर बैठा हुआ हो।

Bus Ki Yatra Class 8 HBSE प्रश्न 4.
“गजब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।”
लेखक को यह सुनकर हैरानी क्यों हुई ?
उत्तर:
लेखक ने बस की बुरी हालत देखकर बस-कंपनी के हिस्सेदार से पूछा था कि क्या यह बस चलती भी है। तब उसने उत्तर दिया था कि हाँ, यह बस भली प्रकार चलती है और अपने आप चलती है। यह सुनकर लेखक को हैरानी हुई कि इतनी जर्जर बस बिना धक्का दिए अपने आप चलती है।

Bus Ki Yatra Summary HBSE 8th Class प्रश्न 5.
“मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था।”
लेखक पेड़ों को दुश्मन क्यों समझ रहा था?
उत्तर:
लेखक को पेड़ों से डर इसलिए लग रहा था कि कहीं उसकी बस किसी पेड़ से टकरा न जाए। एक पेड़ के निकल जाने पर वह दसरे पेड़ का इंतजार करता कि बस कहीं इस पेड़ से न टकरा जाए। उसे हर पेड़ अपना दुश्मन लग रहा था।

पाठ से आगे

पाठ 3 बस की यात्रा के प्रश्न उत्तर HBSE 8th Class प्रश्न 1.
‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ किसके नेतृत्व में, किस उद्देश्य से तथा कब हुआ था? इतिहास की उपलब्धत पुस्तकों के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
सविनय अवज्ञा आंदोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1930 में अंग्रेजी सरकार से असहयोग करने तथा स्वराज पारित के लिए किया गया था।

Class 8th Vasant Chapter 3 HBSE प्रश्न 2.
सविनय अवज्ञा का उपयोग व्यंग्यकार ने किस रूप में किया है? लिखिए।
उत्तर:
सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में सरकारी आदेशों का पालन न करने के लिए किया गया था। इसमें अंग्रेजी सरकार के साथ सहयोग न करने की भावना थी। 12 मार्च 1930 को इसी कड़ी में दांडी मार्च किया गया। नमक कानून 1930 में तोड़ा गया। लेखक ने इसका उपयोग इस संदर्भ में किया है कि आंदोलन के दौरान जिस प्रकार अंग्रेजों के दमन पूर्वक कार्यों से भारतीय जनता झकी नहीं विनम्रपूर्वक अपने संघर्ष में बढ़ी रही उसी प्रकार यह बस भी अपने खटारा और टूटी-फूटी होने के बावजूद चल ही रही है या कहें कि चलाई जा रही है। बस का ढाँचा जवाब दे रहा था, किंतु वह चल ही रही थी।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

प्रश्न 3.
आप अपनी किसी यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभवों को याद करते हुए एक लेख लिखिए।
उत्तर:
कुछ समय पूर्व की बात है चाचा जी के बुलावे पर मैं और मेरा मित्र रोहित ऊधमपुर जाने के लिए तैयार हुए। तैयारी अचानक बन गई अतः आरक्षण की व्यवस्था नहीं हो पाई। सामान्य डिब्बे से ही सफर करना पड़ा। यह विचार बना कि गाड़ी से पठानकोट तक चला जाए। उसके बाद सांबा तक बस द्वारा व वहाँ से उधमपुर। अधिक सामान की आवश्यकता नहीं थी अतः एक बैग लेकर दिल्ली जंक्शन के प्लेटफार्म नं. 11 की ओर रुख किया। T.V. स्क्रीन से पता चला कि गाड़ी प्लेटफार्म पर पहुँचने वाली है। हमने टिकट लिए। खुले पैसे की कमी से 6 रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। गाड़ी प्लेटफार्म पर लग चुकी थी। हम पुल से नीचे उतरकर जनरल डिब्बे की ओर चल पड़े। बोतल का पानी रास्ते में ही समाप्त हो चुका था।

अतः यह तय हुआ कि रोहित पानी ले आए। ठंडे पानी की मशीन पर लगर खाने जैसी भीड़ हो रही थी। जैसे तैसे पानी भरकर डिब्बे में सवार हो गए। यह देखकर हम खुश थे कि अधिक भीड़ नहीं थी। लेकिन हमारी यह खुशी पश्चिम बंगाल के मार्क्सवादी शासन (कुशासन) की तरह स्थायी नहीं थी। पता चला कि हाथों में झंडे, डंडे तथा जेब पर बिल्ले लगाए किसान यूनियन के लोग इसी डिब्बे पर नजरे गड़ाए लपके आ रहे थे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने थोड़ी ही देर में डिब्बे को रैली स्थल में बदल दिया। हालत यह थी कि अब हम चाहकर बाहर भी नहीं जा सकते थे। शाहरूख खान के ‘छैयाँ-छैयाँ’ वाले गाने के स्मरण ने मन को कुछ-कुछ राहत दी।

मन बहलाना

अनुमान कीजिए यदि बस जीवित प्राणी होती, वह बोल सकती तो वह अपनी बुरी हालत और भारी बोझ के कष्ट को किन शब्दों में व्यक्त करती? लिखिए।
मैं एक बहुत पुरानी और बूढी बस हूँ। मेरी हालत जर्जर हो चुकी है। अब मैं लंबी यात्रा करने लायक नहीं रह गई हूँ। मैं तो थोड़ा-बहुत टहल ही सकती हूँ। मुझ पर सवारियों का बोझ मत लादो। मैं तुम्हारा बोझ सहन नहीं कर सकती। मैं इस बोझ से दबकर दम तोड़ दूंगी। अब तो मैं एक वृद्धा की तरह हूँ। तुम्हें तो मेरा सम्मान करना चाहिए। तुम मेरे कष्टों को बढ़ाओ मत। अब मुझे चलने में तकलीफ होती है। अब मैं आराम करना चाहती हूँ। मुझे चैन से रहने दो।

भाषा की बात

1. बस, वश, बस तीन शब्द हैं-इनमें बस सवारी के अर्थ में, वश अधीनता के अर्थ में और बस पर्याप्त (काफी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है जैसे- बस से चलना होगा। मेरे वश में नहीं है। अब बस करो।
उपर्युक्त वाक्य के समान तीनों शब्दों से युक्त आप भी दो-दो वाक्य बनाइए।
बस : 1. यह बस बहुत सुविधाजनक है।
2. मेरठ से बस का सफर दो घंटे का है।

वश : 1. इस स्थिति पर मेरा वश नहीं है।
2. यह काम सरकार के वश में ही है।

बस : 1. तुम्हें बस झगड़ना ही आता है।
2. बस मैं नहीं जा सकता।

2. “हम पाँच मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें। पन्ना से इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।” ने, की, से आदि शब्द वाक्य के दो शब्दों के बीच संबंध स्थापित कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को कारक कहते हैं। इसी तरह जब दो वाक्यों को एक साथ जोड़ना होता है ‘कि’ का प्रयोग होता है।

कहानी में से दोनों प्रकार के चार वाक्यों को चुनिए।
→ बस को देखा तो श्रद्धा उमड़ पड़ी।

  • हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।
  • मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है
  • झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस गोता लगा जाएगी।

3. “हम फौरन खिड़की से दूर सरक गए। चाँदनी में रास्ता टटोलकर वह रेंग रही थी।” ‘सरकना’ और ‘रेंगना’ जैसी क्रिया दो प्रकार की गति बताती है। ऐसी कुछ और क्रियाएँ एकत्र कीजिए जो गति के लिए प्रयुक्त होती हैं, जैसे-घूमना इत्यादि। उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

  • पकड़ना – हमने गाड़ी पकड़नी चाही।
  • धड़कना – दिल तेजी से धड़क रहा था।

4. “काँच बहुत कम बचे थे। जो बचे थे, उनसे हमें बचना था।”
इस वाक्य में ‘बच’ शब्द को दो तरह से प्रयोग किया गया है। एक ‘शेष’ के अर्थ में और दूसरा सुरक्षा के अर्थ में।
नीचे दिए गए शब्दों को वाक्यों में प्रयोग करके देखो। ध्यान रहे, एक ही शब्द वाक्य में दो बार आना चाहिए, और शब्दों के अर्थ में कुछ बदलाव होना चाहिए।
(क) जल
(ख) फल
(ग) हार।
जल : नदियों का जल पवित्र होता है।
वह आग से जल गया।

फल : फल खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
अच्छे काम का अच्छा फल मिलता है।

हार : गले का हार सुंदर है।
हम मैच हार गए।

5. भाषा की दृष्टि से देखें तो हमारी बोलचाल में प्रचलित अंग्रेजी शब्द फर्स्ट क्लास में दो शब्द हैं-फर्स्ट और क्लास। क्लास का विशेषण है फर्स्ट। चूँकि फर्स्ट संख्या है, फर्स्ट क्लास संख्यावाचक विशेषण का उदाहरण है। महान आदमी में किसी आदमी की विशेषता है महान। यह गुणवाचक विशेषण है। संख्यावाचक विशेषण और गुणवाचक विशेषण के उदाहरण खोजकर लिखिए।
चतुर व्यक्ति, सुंदर स्त्री, सच्चा आदमी। – गुणवाचक विशेषण
तीसरा आदमी, चार अमरूद। संख्यावाचक विशेषण

बस की यात्रा Summary in Hindi

बस की यात्रा पाठ का सार

लेखक और उसके मित्रों ने तय किया कि वे शाम चार बजे की बस से पन्ना जाएँगे। वहाँ से इसी कंपनी की बस सतना के लिए एक घंटे बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन मिला (पकड़ा) देती है। दो लोगों को सुबह काम पर हाजिर होना था अतः यह रास्ता अपनाना ठीक समझा गया। यद्यपि समझदार लोगों ने शाम की बस से सफर करने को मना किया था, पर वे माने नहीं। बस बहुत बूढी अर्थात् पुरानी थी। उन लोगों को लगा कि यह बस तो पूजा के योग्य है क्योंकि इसकी दशा वृद्धा स्त्री के समान थी। बस कंपनी के हिस्सेदार ने बताया कि यह बस भली प्रकार चलती है। डॉक्टर मित्र ने कहा कि यह बस अनुभवी है और हमें बेटों की तरह गोद में लेकर चलेगी। लेखक को विदा करने आए लोगों ने ऐसा भाव प्रकट किया कि मानो वे उन्हें अंतिम विदा दे रहे हों।

खैर बस का इंजन स्टार्ट हो गया। बस के अधिकांश शीशे टूटे हुए थे। उन लोगों को लगा कि इंजन उनकी सीट के नीचे है। वैसे बस के सभी हिस्से एक-दूसरे से असहयोग कर रहे थे। एकाएक बस रुक गई। पता चला पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है। बस का ड्राइवर बाल्टी में पेट्रोल निकाल कर उसे नली से इंजन में पहुँचाने लगा। लेखक को अब बस के किसी हिस्से का भरोसा नहीं था। उसे डर लगने लगा कि बस किसी पेड़ से टकरा जाएगी। बस फिर रुक गई। उसका इंजन खोलकर ठीक किया गया तो वह बहुत धीमी रफ्तार से चलने लगी। बस पुलिया पर पहुंची ही थी उसका एक टायर फट गया। वह तो बस की स्पीड कम थी अन्यथा वह नाले में जा गिरती। लेखक बस को श्रद्धाभाव से देखने लगा। काफी देर में एक पुराना घिसा हुआ टायर लगाया गया तब वह कहीं चली। लेखक ने समय पर पन्ना पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। अब तो हँसी-मजाक चालू हो गया।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

बस की यात्रा शब्दार्थ

तय = निश्चित (Fix), वयोवृद्ध = आयु से बूढ़े (Old person), वृद्धावस्था = वृद्ध अवस्था = बुढ़ापा (Old age), विश्वसनीय = विश्वास (भरोसा) करने लायक (Faithful), अंतिम = आखिरी (Last), निमित्त = बहाना (Cause), स्टार्ट = चालू (Start),रंक = गरीब (Poor), असहयोग = अ+असहयोग = सहयोग न करना (Non co-operation), सविनय = स+विनय = विनयपूर्वक (Respectfully), अवज्ञा = आज्ञा न मानना (Not obey order), ब्रेक फेल = ब्रेकों का काम न करना (Brake fail), दृश्य = नजारा (Scene), इत्तफाक = संयोग (By chance), अंत्येष्टि = अंतिम संस्कार (Last ceremony), उत्सर्ग = बलिदान (Sacrifice), बेताबी = बेचैनी (Restlessness).।

बस की यात्रा गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. बस को देखा तो श्रद्धा उमड़ पड़ी। खूब वयोवृद्ध थी। सदियों के अनुभव के निशान लिए हुए थी। लोग इसलिए इससे सफर नहीं करना चाहते कि वृद्धावस्था में इसे कष्ट होगा। यह बस पूजा के योग्य थी। उस पर सवार कैसे हुआ जा
प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत. भाग-3’ में संकलित पाठ ‘बस की यात्रा’ से अवतरित है। यह पाठ हास्य-व्यंग्य में रचा गया है। इसके लेखक हैं प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई।।

व्याख्या : इस गद्यांश में लेखक ने बस की जीर्ण-शीर्ण दशा पर व्यंग्य किया है। बस बहुत पुरानी थी। इस बस को देखकर वृद्ध स्त्री का दृश्य सामने आ रहा था। इस बस को देखकर लेखक के पान में श्रद्धा भावना उत्पन्न हुई। यह बस बहुत बूढ़ी अर्थात् पुरानी (कबाड़) थी। इसकी हालत देखकर लगता था कि यह सदियों का अनुभव अपने अंदर समेटे हुए है। जिस प्रकार कोई नूढी स्त्री अनुभवी होती है, वही दशा इस बस की थी। लेखक व्यंग्य करते हुए कहता है कि लोग इसमें सफर करने से इसलिए कतराते थे कि बुढ़ापे में चलते समय इसे कष्ट होगा। वृद्ध व्यक्ति तो पूजा करने के योग्य होता है अतः इस पुरानी बस की भी पूजा ही की जानी चाहिए। भला इस पर सवारी कैसे की जा सकती है।

यहाँ व्यंग्य यह है कि बस की हालत इतनी जर्जर थी कि वह सामान्य ढंग से चल ही नहीं सकती थी। उसकी हालत खस्ता थी।

2. बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नही आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचना ‘बस की यात्रा’ से लिया गया है। लेखक पुरानी बस में यात्रा के अनुभव को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है।

व्याख्या : लेखक और उसके मित्र पुरानी खटारा बस में सवार हो गए। बस का चलना कठिन लग रहा था, पर वह बस चल ही पड़ी। लेखक को लगा कि यह बस उस समय जरूर जवान रही होगी जब महात्मा गाँधी का असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन चल रहा था। (व्यंग्य यह है कि बस की खस्ता हालत को देखकर लेखक ने इसे असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय बताया अर्थात् बस बहुत पुरानी थी) मानो इसे इस प्रकार की पूरी ट्रेनिंग मिल चुकी थी। बस भलीभाँति जानती थी। कि किस प्रकार असहयोग किया जाता है। बस का हर कल-पुर्जा एक दूसरे से असहयोग कर रहा था अर्थात् उनमें कोई तालमेल न था। बस की सीटें बस की बॉडी से अलग हो रही थीं। कभी सीट बस की बॉडी से आगे निकल जाती थी तो कभी बॉडी सीट को पीछे छोड़कर आगे चली जाती थी। यह आँख-मिचौली का खेल 8-10 मील तक चलता रहा। फिर सारे अंतर मिट गए। लेखक की समझ में यह नहीं आ रहा था कि वह सीट पर बैठा है अथवा सीट उसके ऊपर चढ़ी है।

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HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

Haryana State Board HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

अभ्यासः

Sanskrit Class 8 Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः HBSE  प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः - 1
उत्तरम्:
शिक्षकसहायतया छात्राः शुद्धम् उच्चारणं कुर्युः।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

Chapter 12 Sanskrit Class 8 कः रक्षति कः रक्षितः HBSE प्रश्न 2.
अधोलिखितेषु पदेषु प्रयुक्तां विभक्तिं वचनं च लिखत-

पदानिविभक्तिःवचनम्
यथा- भ्रमणायचतुर्थीएकवचनम्
वस्तूनि
प्लास्टिकेन
विकीर्णानि
मसिर्यष्ट्या
स्यूतकेषु
काष्ठपीठे
पृथिव्याम्

उत्तरम्:

पदानिविभक्तिःवचनम्
यथा- भ्रमणायचतुर्थीएकवचनम्
वस्तूनिप्रथमा, द्वितीया चबहुवचनम्
प्लास्टिकेनतृतीयाएकवचनम्
विकीर्णानिप्रथमा, द्वितीया चबहुवचनम्
मसिर्यष्ट्यातृतीयाएकवचनम्
स्यूतकेषुसप्तमीबहुवचनम्
काष्ठपीठेसप्तमीएकवचनम्
पृथिव्याम्सप्तमीएकवचनम्

Class 8 Ch 12 Sanskrit कः रक्षति कः रक्षितः HBSE प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तरत-
(क) मसियष्टी-जलकूपी-प्रभृतिनि वस्तूनि केन पदार्थेन निर्मितानि?
उत्तरम्:
प्लास्टिकेन।

(ख) उपवनस्य द्वारे कानि क्षिप्तानि सन्ति?
उत्तरम्:
प्लास्टिकस्यूतकानि।

(ग) मृत्तिकायां किं वस्तु न कदापि विनश्यति?
उत्तरम्:
प्लास्टिकम्।

(घ) अस्माकं प्रयासः कस्य रक्षणे अपेक्षितः?
उत्तरम्:
पर्यावरणस्य।

Class 8 Sanskrit Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः HBSE प्रश्न 4.
प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-
(क) चेनम्मायाः सविधे कानि वस्तूनि आसन्?
उत्तरम्:
चेनम्मायाः सविधे कङ्कतम्, कुण्डलम्, केशबन्धः, घटिपट्टिका, कङ्कणम् इति वस्तूनि आसन्।

(ख) पूर्वं प्राय: केन पदार्थेन निर्मितानि वस्तूनि प्राप्यन्ते स्म?
उत्तरम्:
पूर्व प्रायः कासेन, चर्मणा, लौहेन, लाक्षया, मृत्तिकया, काष्ठेन वा पदार्थेन निर्मितानि वस्तूनि प्राप्यन्ते स्म।

(ग) कानि कानि वस्तूनि पर्यावरणं दूषयन्ति?
उत्तरम्:
प्लास्टिक निर्मितानि सर्वाणि वस्तूनि पर्यावरणं दूषयन्ति।

(घ) प्लास्टिकस्य मृत्तिकायां लयाभावात् किं भवति?
उत्तरम्:
प्लास्टिकस्य मृत्तिकायां लयाभावात् पर्यावरणस्य क्षतिः भवति।

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Sanskrit Chapter 12 Class 8 कः रक्षति कः रक्षितः HBSE प्रश्न 5.
अधोलिखितानां पदानां लकारं पुरुषं वचनञ्च लिखत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः - 2
उत्तरम्:
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः - 3

प्रश्न 6.
मञ्जूषातः अङ्कानां कृते पदानि चिनुत-
चतुःपञ्चाशत्, सप्तषष्टिः, द्वासप्ततिः, षडशीतिः, चतुर्नवतिः, सप्तनवतिः, पञ्चसप्ततिः, अष्टानवतिः
67 – ________
86 – ________
98 – ________
97 – ________
54 – ________
72 – ________
94 – ________
75 – ________
उत्तरम्:
67 – सप्तषष्टिः
86 – षडशीतिः
98 – अष्टानवतिः
97 – सप्तनवतिः
54 – चतुःपञ्चाशत्
72 – द्वासप्ततिः
94 – चतुर्नवतिः
75 – पञ्चसप्ततिः

योग्यता-विस्तारः

संस्कृत में अकरान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द के रूप प्राप्त नहीं होते हैं। लेकिन लड़कियों के अकारान्त नाम होते हैं। इनके उदाहरण हैं-परमिन्दर, रोजलिन, कचनार आदि। यहाँ प्रश्न उठता है कि किस रूप में इन नामों को संस्कृत में लिखा जाए। इसलिए इस पाठ में व्यञ्जनान्त (परमिन्दर्) रूप में रखा गया है। संस्कृत में इन्हें व्यञ्जनान्त (परमिन्दर् रोजलिन्, कचनार) मानकर रूप चलाये जाने चाहिए।

परियोजना-कार्यम्

चलिए, आगामी अवकाश में एक अभ्यास करते हैं। सुबह जगने से लेकर रात सोने के समय तक बाजार से आनेवाली और प्रतिदिन काम में आने वाली वस्तुओं को ध्यानपूर्वक देखें और इनकी एक सूची बनाएँ। उनके लिए संस्कृत में क्या प्रयोग होता है यह जानने का प्रयास करें। सूची में हर वस्तु के नाम के आगे यह लिखें कि वह किस चीज की बनी है। इसमें प्लास्टिक की बनी हुई चीजों को छाँटकर एक जगह लिखें और यह आकलन करने का प्रयत्न करें कि प्रतिदिन हम कितनी मात्रा में प्लास्टिक का उपयोग करते हैं।

संस्कृत में वाक्य में पहले ‘अपि’ लगाने से वाक्य प्रश्न वाचक हो जाता है। जैसे-अपि प्रविशामः? क्या हम भीतर चलें?

धातु-संयुक्त तुमुन् प्रत्यय के अनुस्वार का लोप करके उसके आगे कामा/कामः जोड़ने से अमुक कार्य करना चाहने वाली/चाहने वाला यह मुहावरेदार प्रयोग होता है। जैसे-गन्तुकामा, वक्तुकामा, कर्तुकामः इत्यादि। इस प्रक्रिया के आधार पर नीचे लिखे वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद करें-
(क) राम क्या कहना चाहता है? – अपि रामः वक्तुकाम:?

(ख) क्रिस्तीना कहाँ जाना चाहती है? – क्रिस्तीना कुत्र गन्तुकामा?

(ग) वह करना क्या चाहता है? – सः किं कर्तुकामः?

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मूलपाठः

(काश्चन बालिकाः भ्रमणाय निर्गताः परस्परमालपन्ति)

रिपञ्ची – परमिन्दर! परमिन्दर! एहि आगच्छ, उपवनं प्रविशामः।

परमिन्दर् – अरे! उपवनस्य द्वारे एव प्लास्टिकस्यूतकानि क्षिप्तानि इतस्ततः विकीर्णानि।

कचनार् – जनाः प्रमादं कुर्वन्ति। प्लास्टिकपुटकेषु खाद्यवस्तूनि गृहीत्वा भक्षयति, परं तानि पुटकानि मार्गे यत्र कुत्रापि क्षिपन्ति।

रोजलिन् – महती इयं समस्या। अपि प्रविशामः?

रिपञ्ची – अस्तु प्रविशामः। (सर्वाः उपवने प्रविशन्तिा)

कचनार् – कुत्र उपविशामः?

रिपञ्ची – अस्मिन् काष्ठपीठं पविशामः। (सर्वाः उपविशन्ति)

रिपञ्ची – अपि पश्यथ, ध्यं यत्रोपविष्टाः तत्र कानि वस्तूनि सन्ति?

परमिन्दर् – आम्। आम्। गहनि वस्तूनि परितो विकीर्णानि।

कचनार् – यथा स्यूतः, जलपी, कनकम् इत्यादीनि।

रोजलिन् – हला, आत्मानम पाया।

चेनम्मा – आम्। आम्। पश्या: सविधे कङ्कतम्, कुट्का , बेशबन्धः, घटिपट्टिका, कङ्कम इत्यादीनि सर्वाणि विराजन्ते। किमसि वक्तुकामा?

रिपञ्ची – इदं ध्यातव्यं यद् एतानि सर्वाणि वस्तूनि प्रायः प्लास्टिकेन निर्मित नि सन्ति।

कचनार – पूर्वं तु प्रायः कार्पासेन, चर्मणा, लौहेन, लाक्षया, मृत्तिकया काष्ठेन वा निर्मितानि वस्तूनि एव प्राप्यन्ते स्म। अधुना तत् स्थाने प्लास्टिक-निर्मितानि वस्तूनि परितः विकीर्णानि सन्ति। एतानि अल्पमूल्यानि अपि सन्ति।

चेनम्मा – अहो! कलमस्तु विस्मृतः। कोऽपि एतत अनुमातुं शक्नोति यत् एकस्मिन् कलमे कति मसियष्टयः प्रयुज्यन्ते।

परमिन्दर् – अनुमीयते यत् प्रत्येक छात्रा प्रतिसप्ताह स्वकलमे एका मसियष्टिं पूरयति। तात्पर्यम् इदमस्ति यत् एकस्मिन्नेव वर्षे न्यूनान्यून प्रायः पञ्चाशत् मसियष्टयः तया प्रयुक्ताः भवन्ति।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

चेनम्मा – परं किं वयम् एकस्मिन् वर्षे एकस्यैव कलमस्य प्रयोगं कुर्मः?

सामूहिकस्वरः – नहि, नहि। वर्षे तु प्रायशः बहवः कलमा: विलुप्यन्ते।

रिपञ्ची – एका छात्रा त्रिषु मासेषु एकं कलम क्रीणाति। अर्थात् एकस्मिन् वर्षे चतुरः कलमान् क्रीणाति।

रोजलिन् – अपरं च कलमेन सह मसियष्टिः अपि प्लास्टिकावरणे समावेश्यते। तर्हि आहत्य प्रतिवर्षम् एका छात्रा प्रायः पञ्चाशन्मसियष्टीनां चतुर्भिः कलमैः

चतुःपञ्चाशद्धिः आवरणैः प्रयोगं करोति।

कचनार् – भवतु, बहुधा प्रयुक्तस्य प्लास्टिकस्य दूरगामिनः घातकाः परिणामाः वयं न द्रष्टुं शक्नुमः। प्लास्टिकं कदापि न गलति, न च अपक्षीयते। यथा-अन्यानि

वस्तूनि विनश्य मृत्तिकायां विलीयन्ते।

चेनम्मा – प्लास्टिकस्य मृत्तिकायां लयाभावात् अस्माकं पर्यावरणस्य कृते महती क्षतिः भवति।

रिपञ्ची – एकेन पदार्थेन अपरः पदार्थः सृज्यते, अथवा विनष्टं वस्तु मृत्तिकायां मिलति। परं प्लास्टिके इयं प्रक्रिया असम्भवा एव।

परमिन्दर् – कल्पयतु, यदि शतं वर्षाणि यावत् प्लास्टिक-निर्मिताना पदार्थानां निर्माणप्रक्रिया पृथिव्यां प्रचलिष्यति तर्हि किं स्यात? (सर्वाः सखेदं विमृशन्ति।)

रोजलिन् – अत्र विषादेन किम्? सर्वप्रथमं तु शिक्षकाणां सहयोगेन प्लास्टिकस्य विविधपक्षाः विचारणीयाः। अस्माकं प्रयासोऽपि पर्यावरणस्य रक्षणे अपेक्षितः।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

सन्धिविच्छेदः
काश्चन = काः + चन।
इतस्ततः = इतः + ततः।
कुत्रापि = कुत्र + अपि।
यत्रोपविष्टाः = यत्र + उपविष्टाः।
परितो विकीर्णानि = परितः + विकीर्णानि।
इत्यादीनि = इति + आदीनि।
यद् एतानि = यत् + एतानि।
कलमस्तु = कलमः + तु।
कोऽपि = कः + अपि।
प्रत्येकम् = प्रति + एकम्।
एकस्मिन्नेव = एकस्मिन् + एव।
न्यूना-न्यूनम् = न्यूनात् + न्यूनम्।
एकस्यैव = एकस्य + एव।
कदापि = कदा + अपि।
लयाभावात् = लय + अभावात्।
प्रयासोऽपि = प्रयास: + अपि।

संयोगः
परस्परमालपन्ति = परस्परम् + आलपन्ति।
आत्मानमपि = आत्यानम् अपि।
किमसि = किम् असि।
इदमस्ति = इदम् + अस्ति।

पदार्थबोध:
काश्चन = कुछ (स्त्री.) (काश्चित्)।
आलपन्ति = बातें कर रही हैं (चर्चपन्ति)।
प्लास्टिक स्थतानि = प्लास्टिक के थैलियाँ/पॉलीथीन।
क्षिप्तानि = फेंकी हुई हैं (विकीर्णानि)।
पुटकानि = छोटी थैलियाँ (पाउच) (लघुस्यूतानि)।
काष्ठपीठे = बेंच पर (काष्टमञ्चे)।
जलकूपी – पानी की बोतल (वारिकूपी)।
हला = सखी! (आलि!)।
कङ्कतम् = कंघा (केशप्रसाधनी)।
केशबन्ध = हेयर बैंड (अलकबन्धः)।
घटिपट्टिका = घड़ी की बैल्ट (घटिबन्धिनी)।
कार्पासेन = कपास से (तूलेन)।
लाक्षया = लाख से (लाक्षातत्त्वेन)।
कलमः = लेखनी, पैन (लेखनी)।
परितः = चारों तरफ (सर्वतः)।
मसियष्य्यः = रिफिल (मसिवर्तिकाः)।
न्यूनान्यूनम् = कम-से-कम (अल्पादल्पम्)।
प्रायशः = अधिकांशतः (अधिकांशतः)।
आहत्य = कुल मिलाकर (योजयित्वा)।
विलीयन्ते = लुप्त हो जाते हैं (विलुप्यन्ते)।
अपक्षीयते = नष्ट हो जाता है (नश्यते)।
लयाभावात् = लय/नष्ट न होने के कारण (विलीनाभावात्)।
सुज्यते = बनाया जाता है (निर्दीयते)।
कल्पयतु = कल्पना कीजिए (अनुमीयताम्)।
प्रयासः = कोशिश (प्रयत्नः)।

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सरलार्थः
(कुछ बालिकाएँ घूमने के लिए निकली हुई परस्पर वार्तालाप कर रही हैं।)

रिपञ्ची – परमिन्दर्! परमिन्दर! यहाँ आओ, उद्यान में प्रवेश करते हैं।

परमिन्दर् – अरे! बगीचे के द्वार पर ही फैकी गई प्लास्टिक की थैलियाँ इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं।

कचनार – लोग प्रमाद (लापरवाही) करते हैं। प्लास्टिक की थैलियों में खाद्य वस्तुएँ लेकर खाते हैं, परन्तु उन (छोटी) थैलियों (पाउचों) को रास्ते में जहाँ-कहीं भी फेंक देते हैं।

रोजलिन् – बहुत बड़ी है यह समस्या। क्या हम प्रवेश करें?

रिपञ्ची – अच्छा प्रवेश करते हैं। (सभी बगीचे में प्रवेश करते हैं।)

कचनार – हम कहाँ बैठे?

रिपञ्ची – इस लकड़ी की बैंच पर बैठते हैं। (सभी बैठती हैं।)

रिपञ्ची – क्या तुम सब देख रही हो? हम जहाँ बैठे हैं वहाँ कौन-सी वस्तुएँ हैं?

परमिन्दर् – हाँ, हाँ। बहुत वस्तुएँ चारों तरफ फैली पड़ी हैं।

कचनार – जैसे थैलियाँ, पानी की बोतल, गेंद आदि।

रोजलिन् – सखी! अपना भी देखो।

चेनम्मा – हाँ। हाँ। देख ही रही हूँ। मेरे पास कंघा, कण्डल, हेयर बैंड, घड़ी का पट्टा, कंगन आदि सभी स्थित हैं। क्या कहना चाहती हो?

रिपञ्ची – यह ध्यान देना चाहिए कि ये सारी वस्तुएँ अधिकांशतः प्लास्टिक से बनती हैं।

कचनार् – पहले तो प्रायः कपास से, चमड़े, लोहे से, लाख से, मिट्टी से या लकड़ी से बनी हुई वस्तुएँ ही मिलती थीं। अब उसके स्थान पर प्लास्टिक से बनी वस्तुएँ चारों ओर बिखरी हुई हैं। ये कम कीमत की भी हैं।

चेनम्मा – अरे! कलम को तो भूल ही गई। कोई यह अनुमान कर सकता है कि एक कलम (पैन) में कितने रिफिल प्रयोग में लाए जाते हैं?

परमिन्दर् – अनुमान है कि प्रत्येक छान्ना प्रति सप्ताह अपनी कलम में एक (नया) रिफिल डालती है। तात्पर्य यह है कि एक ही वर्ष में वह कम-से-कम पचास रिफिल प्रयोग में लाती है।

चेनम्मा – परन्तु क्या हम एक वर्ष में एक ही कलम का प्रयोग करते हैं?

सामूहिक स्वर – नहीं, नहीं। वर्ष में तो प्रायः अनेक कलम विलुप्त हो जाती हैं।

रिपञ्ची – एक छात्रा तीन महीनों में एक पैन (कलम) खरीदती है। अर्थात् एक वर्ष में चार कलम खरीदती है।

रोजलिन् – और दूसरे कलम के साथ रिफिल भी प्लास्टिक के कवर में डाली जाती है। तो जोड़कर प्रतिवर्ष एक छात्रा प्रायः पचास रिफिल, चार कलम और चौवन कवरों का प्रयोग करती है।

कचनार् – ठीक है, बहुत प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के दूरगामी और घातक परिणामों को हम देख नहीं सकते हैं। प्लास्टिक कभी गलता नहीं है और नष्ट भी नहीं होता है। जैसे दूसरी वस्तुएँ नष्ट होकर मिट्टी में मिल जाती हैं।

चेनम्मा – प्लास्टिक का मिट्टी में विलय न होने से पर्यावरण के लिए भारी क्षति होती है।

रिपञ्ची – एक पदार्थ से दूसरा पदार्थ बनता है या नष्ट वस्तु मिट्टी में मिल जाती है। परन्तु प्लास्टिक में यह प्रक्रिया असम्भव है।

परमिन्दर – कल्पना करो, यदि सौ वर्ष तक प्लास्टिक से बने पदार्थों की निर्माण प्रक्रिया पृथ्वी पर चलेगी तो क्या होगा? (सभी खेद सहित विचार करती हैं।)

रोजलिन् – इसमें विषाद (खेद) करने से क्या? सबसे पहले तो शिक्षकों के प्रयोग से प्लास्टिक के विविध पक्षों का विचार करना चाहिए। हमारा प्रयास भी पर्यावरण की रक्षा में आवश्यक है।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 12 कः रक्षति कः रक्षितः

कः रक्षति कः रक्षितः Summary

कः रक्षति कः रक्षितः पाठ-परिचयः

मानवीय सभ्यता में पाषाण, ताम्र, लौह आदि युगों का अपना इतिहास है। वर्तमान युग को ‘प्लास्टिक युग’ कहना उचित होगा। प्रस्तुत पाठ पर्यावरण पर केन्द्रित है। हमारे जीवन में प्लास्टिक का इस सीमा तक प्रवेश हो चुका है कि हम इसके बिना दैनिक जीवन चलाने की कल्पना भी नहीं कर पाते जबकि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए घातक है। प्लास्टिक के बढ़ते हुए उपयोग पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए इस पाठ में पर्यावरण तथा प्रदूषण की समस्या के प्रति संवेदनशील समझ विकसित करने का प्रयास किया गया है।

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि

HBSE 8th Class Hindi ध्वनि Textbook Questions and Answers

कहानी से

ध्वनि HBSE 8th Class Hindi  प्रश्न 1.
कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?
उत्तर:
कवि को ऐसा विश्वांस इसलिए है कि अभी उसके जीवन में काफी उत्साह और ऊर्जा है। वह युवा पीढ़ी को आलस्य की दशा से उबारना चाहता है। अभी उसे का काम करना है। वह स्वयं को काम के सर्वथा उपयुक्त माना है।

ध्वनि की व्याख्या HBSE 8th Class Hindi प्रश्न 2.
फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि कौन-कौन-सा प्रयास करता है?
उत्तर:
फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि उन्हें कलियों की स्थिति से निकालकर खिले फूल बनाना चाहता है। वह कलियों पर वासंती स्पर्श का हाथ फेरकर खिला देगा। वह युवकों को काव्य-प्रेरणा से अनंत का द्वारं दिखा देमा।

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Class 8th Vasant Chapter 1 HBSE ध्वनि प्रश्न 3.
कवि पुष्पों की तन्द्रा और आलस्य दूर हटाने के लिए क्या करना चाहता है?
उत्तर:
कवि पुष्पों की तन्द्रा (नींद) और आलस्य को दूर | हटाने के लिए उन पर हाथ फेरेगा और उनको खिला देगा। जो काम वसंत करता है, वही काम कवि भी करेगा। कलियाँ आलस्य में पड़े युवकों की प्रतीक हैं। वह उनके आलस्य को दूर भगा देगा।

कविता से आगे

Class 8 Vasant Chapter 1 HBSE ध्वनि प्रश्न 1.
वसंत को ऋतुराज क्यों कहा जाता है? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
वसंत को ऋतुराज कहा जाता है क्योंकि यह सभी ऋतुओं का राजा है। वसंत को सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना जाता है। इस ऋतु में प्रकृति पूरे यौवन पर होती है। इस ऋतु में उसकी छटा देखते ही बनती है। यह ऋतु मुर्दो में भी जान डाल देती है। यह ऋतु सभी को अच्छी लगती है।

ध्वनि कविता के प्रश्न उत्तर HBSE 8th Class प्रश्न 2.
वसंत ऋतु में आने वाले त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए और किसी एक त्योहार पर निबंध लिखिए।
उत्तर:
वसंत ऋतु में आने वाले त्योहार – वसंत पंचमी : वसंत पंचमी पर सर्दी घटने लगती है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं तथा पीली वस्तुएँ खाते हैं। बागों में बहार चरम सीमा पर होती है।

महाशिवरात्रि : भगवान शंकर की पूजा-अर्जना की जाती है। यज्ञ तथा मेलों आदि का आयोजन होता है।

होली : यह फागुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह मस्ती भरा त्योहार है। यह रंगों का त्योहार है। भारत विभिन्न ऋतुओं का देश है। वसंत को ऋतुराज की संज्ञा दी जाती है। रंगों का त्योहार होली ऋतुराज वसंत के आने का सूचक है। शीत ऋतु के उपरांत वसंत में प्रकृति अनगिनत रंगों के फूलों से सज जाती है। सर्वत्र प्रकृति के रंग-बिरंगे का ही साम्राज्य होता है। रंग-बिरंगे पुष्प एवं सरसों के पीले पुष्पों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है

और मस्ती में झूम उठता है। इस रंग-बिरंगे वसंत में ही होली का शुभागमन होता है। होली का त्योहार प्रति वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली का त्योहार दो दिन तक प्रमुख रूप से मनाया जाता है। पूर्णिमा की रात्रि को होलिका दहन होता है। लोग रात को अपने घरों में ही होली जलाते हैं तथा रबी की फसल की जौ और गेहूँ आदि की बालियाँ भूनते हैं। परस्पर भूने अन्न के दानों का आदान-प्रदान करते हुए अभिवादन करते हैं। अगले दिन प्रातः से ही सभी आबाल वृद्ध एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हैं। एक दूसरे के गले मिलते हैं। सभी भेद-भाव भुलाकर रंग डालते हैं। लोगों के चेहरे और कपड़े रंग-बिरंगे हो जाते हैं। लोग मस्ती में गाते, बजाते, नाचते हैं। इस प्रकार होली पारस्परिक प्रेम और सौहार्द का परिचायक है।

रंगों के पर्व होली का पौराणिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्त्व हैं। एक पौराणिक आख्यान के अनुसार हिरण्यकश्यप नामक दैत्यराज था। वह अत्यंत अत्याचारी एवं क्रूर था। उसने भक्त स्वभाव के अपने पुत्र प्रह्लाद पर अनेक अत्याचार किए। हिरण्यकश्यप चाहता था कि प्रह्लाद अपने पिता को ही भगवान् माने। इसलिए वह ईश्वर भक्त प्रहलाद से सदैव कुद्ध रहता था। अनेक अत्याचारों के असफल होने पर उसने एक अंतिम उपाय किया। हिरण्यकश्यप की एक होलिका नाम की बहन थी जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। उसने होलिका के सहयोग से प्रहलाद को जलाने की बात सोची। वह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रह्लाद की गोद में लेकर आग में बैठ गई। भगवान् की कृपा से होलिका तो जल गई परंतु प्रहलाद सकुशल बच गया। कहते हैं कि तभी से इस दिन होलिका का दहन किया जाता है। एक ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म किया था। अतः यह पर्व मदन-दहन पर्व बन गया।

रंगों का त्योहार होली हमें पारस्परिक प्रेम एवं सौहार्द का संदेश देता है। इस दिन शत्रु भी अपनी शत्रुता भूलकर मित्र बन जाते हैं, परंतु कुछ लोग अपनी विकृत मानसिकता का प्रयोग होली में करते हैं। वे शराब पीकर ऊद्यम मचाते हैं, कई बार प्रदूषित रंगों से आँखों एवं चमड़ी के रोग हो जाते हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। हमें शालीनता के साथ गुलाल लगाकर प्रेमपूर्वक होली खेलनी चाहिए ताकि समाज में स्नेह एवं प्रेम का सौहार्द बढ़े।

Vasant Chapter 1 HBSE 8th Class ध्वनि प्रश्न 3.
“ऋतु परिवर्तन का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है”-इस कथन की पुष्टि आप किन-किन बातों से कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
लोगों के जीवन पर ऋतु-परिवर्तन का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। शीत ऋतु में हम काँपते रहते हैं तो वसंत ऋतु का आगमन हमें मस्ती एवं उल्लास से भर देता है। फिर ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है। धरती तपने लगती है। पसीना छूटता है। लोग वर्षा की कामना करते हैं। वर्षा ऋतु जीवन में उल्लास लेकर आती है। अन्न उपजाने के लिए वर्षा ऋतु की बड़ी आवश्यकता होती है। इस प्रकार सभी ऋतुओं से लोगों का जीवन प्रभावित होता है।

अनुमान और कल्पना

1. कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है?
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं।
होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूटे हैं।

कविता की इन पंक्तियों में वसंत ऋत का वर्णन है। वसंत में ही होली का त्योहार आता है। आमों के बौर भी इसी ऋतु में फूटते हैं।

2. स्वप्न भरे कोमल-कोमल हाथों को अलसाई कलियों पर फेरते हुए कवि कलियों को प्रभात के आने का संदेश देता है, उन्हें जगाना चाहता है और खुशी-खुशी अपने जीवन के अमृत से उन्हें सींचकर हरा-भरा करना चाहता है। फूलों-पौधों के लिए आप क्या-क्या करना चाहेंगे?
हम फूल-पौधों के लिए ये काम करना चाहेंगे:

  • उन्हें पानी से सीचेंगे।
  • उनमें समय-समय पर खाद डालना चाहेंगे।
  • फूलों को पूरी तरह खिलने देंगे। उनको तोड़ेंगे नहीं।

3. कवि अपनी कविता में एक कल्पनाशील कार्य की बात बता रहा है। अनुमान कीजिए और लिखिए कि उसके बताए कार्यों का और किन-किन संदों से संबंध जुड़ सकता है? जैसे नन्हे-मुन्ने बालक को माँ जगा रही हो…
माँ अपने नन्हें-नन्हें बालक को जगाती है। उस पर प्यार भरा हाथ फेरती है।
→ माली भी पौधों पर अपना प्यार भरा हाथ फेरता है, उन्हें सींचता है, उनका विकास करता है।

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भाषा की बात

1. ‘हरे-भरे’, ‘पुष्प-पुष्प’ में एक शब्द की एक ही अर्थ में पुनरावृत्ति हुई है। कविता के ‘हरे-हरे ये पात’ वाक्यांश में ‘हरे-हरे’ शब्द युग्म पत्तों के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ पात शब्द बहुवचन में प्रयुक्त है। ऐसा प्रयोग भी होता है, जब कर्ता या विशेष्य एकवचन में हो और कर्म या क्रिया या विशेषण बहुवचन में; जैसे-वह लंबी-चौड़ी बातें करने लगा। कविता में एक ही शब्द का एक से अधिक अर्थों में प्रयोग होता है-तीन बेर खाती है तीन बेर खाती है।” जो तीन बार खाती थी वह तीन बेर खाने लगी है। एक शब्द ‘बेर’ का दो अर्थ में प्रयोग करने से वाक्य में चमत्कार आ गया। इसे यमक अलंकार कहा जाता है।

कभी-कभी उच्चारण की समानता से शब्दों की पुनरावृत्ति का आभास होता है। जबकि दोनों दो प्रकार के शब्द होते हैं, जैसे-मन का मनका।

ऐसे वाक्यों को एकत्र कीजिए जिनमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो। ऐसे प्रयोगों को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित पुनरावृत शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-बातों-बातों में, रह-रहकर, लाल-लाल, सुबह-सुबह, रातों-रात, घड़ी-घड़ी।।

काली घटा का घमंड घटा (घटा बादल की घटा, कम हुआ)

  • माँ का लाल गुस्से में लाल हो गया।
  • रात में घड़ी प्रातःकालीन घड़ी की ओर जा रही थी।
  • कनक कनक तै सौ गुनी मादकता अधिकाय।

2. ‘कोमल गात, मृदुल वसंत, हरे-हरे ये पात’:
विशेषण जिस संज्ञा (या सर्वनाम) की विशेषता बताता है, उसे विशेष्य कहते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यांशों में गात, वसंत और पात शब्द विशेष्य हैं, क्योंकि इनकी विशेषता (विशेषण) क्रमशः कोमल, मृदुल और हरे-हरे शब्द बता रहे हैं।

हिंदी विशेषणों के सामान्यतया चार प्रकार माने गए हैं – गुणवाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण और सार्वनामिक विशेषण।

  • गुणवाचक विशेषण – सुंदर बालक, लंबी मेज
  • परिमाणवाचक विशेषण – दो किलो चीनी, थोड़ा चावल
  • संख्यावाचक विशेषण – चार केले, पाँचवाँ बालक
  • सार्वनामिक विशेषण – वह घर, यह बोतल

कविता से आगे

1. वसंत पर अनेक सुंदर कविताएँ हैं। कुछ कविताओं का संकलन तैयार कीजिए।

2. शब्दकोश में ‘वसंत’ शब्द का अर्थ देखिए। शब्दकोश में शब्दों के अर्थों के अतिरिक्त बहुत-सी अलग तरह की जानकारियाँ भी मिल सकती हैं। उन्हें अपनी कॉपी में लिखिए।

वसंत पर कविताएँ:
ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि पद्ममाकर ने अपने शब्दों में वसंत की शोभा का वर्णन करते हुए कहा है –
कूलन में केलिन में कछारन में
कंजन में क्यारिन में कलित कलीन किलकत है।
कहै पद्ममाकर पराग हूँ मैं, पोन हूँ मैं
पानन में, पीकन में, पलाशन पगंत है।
कछार में, दिशा में, दूनी में, देश-देशन में
बनन में, बागन में बगरयो वसंत है।
श्री सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने तो वसंत की समृद्धता और ऐश्वर्यता की तुलना मठ के प्रधान महंत से की है :
आए महंत वसंत
मखमल के झले पड़े हाथी-सा टीला
बैठे किंशुक छत्र लगा बाँध पाग पीला
चँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनंत
आए महंत वसंत।

शब्दकोश में वसंत के अर्थ:

  • छह ऋतुओं में से एक ऋतु जो चैत्र-वैशाख में आती है
  • कामदेव का सहचर
  • अतिसार
  • एक वृत्त
  • एक राग।

ध्वनि Summary in Hindi

ध्वनि कवि-परिचय

प्रश्न: सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’ का जीवन एवं साहित्य का परिचय दीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय : निराला जी का जन्म सन् 1897 ई. में बंगाल के महिषादल राज्य में मेदिनीपुर नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता श्री रामसहाय त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के निवासी थे और आजीविका के लिए महिषादल (बंगाल) चले गये थे। निराला की आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। इन्होंने संस्कृत, बंगला और अंग्रेजी का अध्ययन घर पर ही किया। उनकी साहित्य के अतिरिक्त-दर्शनशास्त्र व संगीत के प्रति रुचि थी। इनकी विचारधारा पर स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद का गहरा प्रभाव पड़ा। अपने निराले व्यक्तित्व के कारण ये हिंदी साहित्य जगत में ‘निराला’ उपनाम से प्रसिद्ध हुए।

रचनाएँ : ‘परिमल’, ‘अनामिका’, ‘गीतिका’, ‘अपरा’, ‘नये पत्ते’, ‘राम की शक्ति-पूजा’, ‘तुलसीदास’ (काव्य) अलका’, ‘निरुपमा’, ‘चोटी की पकड़’ (उपन्यास) ‘लिली’, ‘सखी’, ‘चतुरी चमार’ (कहानी संग्रह) प्रबंध की प्रतिमा’, ‘प्रबंध पद्म’ (निबंध : संग्रह) ‘रवींद्र-कविता-कानन’, ‘पतन और पल्लव’ (आलोचना) ‘समन्वय’, ‘मतवाला’, ‘सुधा’ (पत्रिका) आदि।

साहित्यगत विशेषताएँ : यद्यपि निराला हिंदी-साहित्य में कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं तथापि वे गद्य पर समान अधिकार रखते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा के दर्शन उनकी काव्य रचनाओं एवं उपन्यास, कहानी, निबंध, रेखाचित्र और आलोचना के क्षेत्र में दिखाई देते हैं। पत्र-संपादक के क्षेत्र में भी लौह-लेखनी ने प्रसिद्धि पाई। उनकी आरंभिक कविताओं में छायावाद के दर्शन होते हैं। इसके अतिरिक्त उनकी गणना उच्च कोटि के रहस्यवादी और प्रगतिवादी कवियों में की जाती है। उन्होंने शृंगार, प्रेम, प्रकृति सौंदर्य, राष्ट्र-प्रेम आदि विषयों पर काव्य रचना की। उनके साहित्य में जहाँ दलित समाज के प्रति सहानुभूति का भाव है, वहाँ शोक शोषक वर्ग पर कटु व्यंग्य है।

भाषा-शैली : निराला ने काव्य की पुरानी परंपराओं को त्याग कर काव्य-शैली को नई दिशा प्रदान की। हिंदी काव्य में ‘स्वच्छंद-छंद’ निराला जी की देन है। निराला की कविताओं में संगीतात्मकता है। यद्यपि उनके साहित्य की भाषा तत्सम प्रधान है, तथापि उनकी प्रगतिवादी रचनाएँ बोलचाल की भाषा में हैं।

ध्वनि कविता का सार

इस कविता में कवि निराला कहते हैं कि अभी उनका अंत नहीं होने वाला है। जो आलोचक यह कह रहे थे कि अब निराला के कवि-जीवन का अंत होने वाला है कवि उनको इस कविता के माध्यम से करारा उत्तर देता है। कवि कहता है कि अभी तो उसके कवि-जीवन का उत्कर्ष हुआ है। उसके जीवन में वसंत की बहार आई हुई है। वह अपनी कविताओं के माध्यम से निद्रामग्न युवा पीढ़ी को आशा का संदेश देकर जागृत करेगा। वह एक-एक फूल अर्थात् एक-एक युवक से आलस्य को दूर भगा देगा और उनके जीवन में अमृत सींच देगा। वह उनको स्वर्ग जैसे सुखों का द्वार दिखा देगा। अभी उसे बहुत कुछ करना है। अभी उसका अंत नहीं आया है।

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ध्वनि काव्याशों की सप्रसंग व्याख्या

1. अभी न होगा मेरा अंत
अभी-अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसंत
अभी न होगा मेरा अंत।
हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात।
मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूँगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर।

शब्दार्थ : मृदुल – कोमल सुखद (Tender), वन = जंगल, बगीचा, जीवन (Garden), अंत = समाप्ति (End), पात – पत्ते (Leaves), गात – शरीर (Body), निद्रित = नींद में (Drowsy), प्रत्यूष = प्रातःकालीन समय (time of early morning), मनोहर = सुंदर (Beautiful), कर * हाथ (Hands)।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित कविता ‘ध्वनि’ से अवतरित है। इसमें कवि अपने कवि जीवन के उत्कर्ष काल का वर्णन करता है।

व्याख्या : कवि आलोचकों को उत्तर देते हुए कहता है कि अभी मेरे कवि-जीवन का अंत नहीं होने वाला है। अभी-अभी तो मेरे जीवन में वसंत की बहार आई है अर्थात् मेरे कवि-जीवन का उत्कर्ष हुआ है। कवि के वन में अर्थात् जीवन में कोमल वसंत का आगमन अभी ही हुआ है। अतः अभी उसका अंत नहीं होने वाला। – अभी उसका शरीरं यौवन की मस्ती से भरपूर है। कवि अपने कोमल हाथों को इन कलियों पर फेरकर उनमें एक प्रात:कालीन सवेरे को जागृत कर देगा। कवि के कहने का भाव यह है कि जो युवक नींद में पड़े हुए हैं, वह उनको प्रेरित करके उनमें नए उत्कर्ष के स्वप्न जगा देगा। वह उनका आलस्य दूर या गलथा उनमें उत्साह का संचार कर देगा।

विशेष :
1. ‘अभी-अभी’, ‘हरे-हरे’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
2. ‘कलियाँ कोमल’ में अनुप्रास अलंकार है।

2. पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूंगा मैं,
द्वार दिखा दूंगा फिर उनको।
हैं मेरे वे जहाँ अनंत
अभी न होगा मेरा अंत।

शब्दार्थ : पुष्प – फूल (Flower), तंद्रालस = आलस्य (Laziness sleepness), नव = नया (New), सहर्ष = खुशी के साथ (withjoy), द्वार = दरवाजा (Door), अनंत = जिसका अंत न हो (Endless)।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित कविता ‘ध्वनि’ से अवतरित है। इसमें कवि अपने कवि-कर्म का परिचय देते हुए कहता है :

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं एक-एक फूल से आलस्य . को खींच लूँगा अर्थात् आलस्य में पड़े प्रत्येक युवक के मन से आलस्य की भावना को दूर कर दूंगा और उनके मन में नए जीवन का अमृत प्रसन्नतापूर्वक भर दूंगा। (वसंत भी यही काम करता है। वह लोगों में नव जीवन का संचार करता है।)

कवि युवा वर्ग के मन से आलस्य, निराशा की भावना को दूर करके उनको अमरता का द्वार दिखा देगा। कवि के जीवन में अभी वसंत आया ही है। अतः उसका अभी अंत नहीं होने वाला है।

विशेष:
1. ‘पुष्प-पुष्प’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
2. ‘सहर्ष सींच’ में अनुप्रास अलंकार है।
3. खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।

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HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

Haryana State Board HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

अभ्यासः

Class 8 Sanskrit Chapter 13 HBSE प्रश्न 1.
अधोलिखिताना प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि लिखत-
(क) इयं धरा कैः स्वर्णवद् भाति?
उत्तरम्:
शस्यैः

(ख) भारतस्वर्णभूमिः कुत्र राजते?
उत्तरम्:
क्षिती

(ग) इयं केषां महाशक्तिभिः पूरिता?
उत्तरम्:
अणूनाम्

(घ) इयं भूः कस्मिन् युतानाम् अस्ति?
उत्तरम्:
प्रबन्धे

(ङ) अत्र किं सदैव सुपूर्णमस्ति?
उत्तरम्:
खाद्यान्नभाण्डम्।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

Sanskrit Class 8 Chapter 13 Pdf HBSE प्रश्न 2.
समानार्थकपदानि पाठात् चित्वा लिखत-
(क) पृथिव्याम् ________। (क्षितौ / पर्वतेषु / त्रिलोक्याम्)
(ख) सुशोभते ________। (लिखते / भाति / पिबति)
(ग) बुद्धिमताम् ________। (पर्वणाम् / उत्सवानाम् / विपश्चिज्जनानाम्)
(घ) मयूराणाम् ________। (शिखीनाम् / शुकानाम् / पिकानाम्)
(ङ) अनेकेषाम् ________। (जनानाम् / वैज्ञानिकानाम् / बहूनाम्)
उत्तरम्:
(क) क्षिती
(ख) भाति
(ग) विपश्चिज्जानाम्
(घ) शिखीनाम्
(ङ) बहूनाम्।

Class 8th Sanskrit Chapter 3 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः प्रश्न 3.
श्लोकांशमेलनं कृत्वा लिखत-
(क) त्रिशूलाग्निनागैः पृथिव्यास्त्रघोरैः – नदीनां जलं यत्र पीयूषतुल्यम्
(ख) सदा पर्वणामुत्सवानां धरेयम् – जगद्वन्दनीया च भू:देवगेया
(ग) वने दिग्गजानां तथा केसरीणाम् – क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः
(घ) सुपूर्ण सदैवास्ति खाद्यान्नभाण्डम् – अणूनां महाशक्तिभिः पूरितेयम्
(ङ) इयं वीरभोग्या तथा कर्मसेव्या – तटीनामियं वर्तते भूधराणाम्
उत्तरम्:
(क) त्रिशूलाग्निागैः पृथिव्यास्त्रधौरेः – अणूनां महाशक्तिभिः पूरितेयम्।
(ख) सदा पर्वणामुत्सवानां धरेयम् – क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः
(ग) वने दिग्गजानां तथा केसरीणाम् – तटीनामियं वर्तते भूधराणाम्
(घ) सुपूर्ण पीयूषतुल्यम् खाद्यान्नभाण्डम् – नदीनां जलं यत्र पीयूषतुल्यम्
(ङ) इयं वीरभोग्या तथा कर्मसेव्या – जगद्वन्दनीया च भूः देवगेया

Sanskrit Class 8 Chapter 3 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः प्रश्न 4.
चित्रं दृष्ट्वा (पाठात्) उपयुक्तपदानि गृहीत्वा वाक्यपूर्ति कुरुत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः - 1
(क) अस्मिन् चित्रे एका _________ वहति।
(ख) नदी ___________ नि:सरति।
(ग) नद्याः जलं ________ भवति।
(घ) ________ शस्यसेचनं भवति।
(ङ) भारतः ________ भूमिः अस्ति।
उत्तरम्:
(क) नदी
(ख) पर्वतात्
(ग) पीयूषतुल्यं
(घ) नद्याः जलेन

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

प्रश्न 5.
चित्राणि दृष्ट्वा (मञ्जूषातः) उपयुक्तपदानि गृहीत्वा वाक्यपूर्ति कुरुत-
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः - 2
(क) अस्मिन् चित्रे एका __________ दृश्यन्ते।
(ख) एतेषाम् अस्त्राणां __________ युद्धे भवति।
(ग) भारतः एतादृशानां __________ प्रयोगेण विकतिसदेशः मन्यते।
(घ) अत्र परमाणुशक्तिप्रयोगः अपि __________।
(छ) आधुनिकैः अस्त्रैः __________ अस्मान् शत्रुभ्यः रक्षन्ति।
(च) __________ सहायतया बहूनि कार्याणि भवन्ति।
उत्तरम्:
(क) अस्त्राणि
(ख) प्रयोगः
(ग) अस्त्राणाम्
(घ) भवति
(छ) सैनिकाः
(च) उपग्रहाणाम्।

प्रश्न 6(अ).
चित्रं दृष्ट्वा संस्कृते पञ्चवाक्यानि लिखत।
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः - 3
उत्तरम्:
(क) इदं दीपावली-महोत्सवस्य चित्रम् अस्ति।
(ख) चित्रे एक सुन्दर विशाल च भवनमस्ति।
(ग) भवनस्य आंगने जनाः सन्ति।
(घ) जनाः नार्यः च दीपान प्रज्वालयन्ति।
(ङ) इदं पर्व सम्पूर्ण भारते-अन्यत्र च मानयन्ति।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

प्रश्न 6(आ).
चित्रं दृष्ट्वा संस्कृते पञ्चवाक्यानि लिखत।
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः - 4
उत्तरम्:
(क) इदं रक्षाबंधन पर्व इत्यस्य चित्रं वर्तते।
(ख) रक्षाबंधन राष्ट्रियां पर्व अस्ति।
(ग) अस्मिन भगिनी भ्रातुः हस्ते रक्षासूत्रं बन्धति।
(घ) प्राता भगिन्याः सुरक्षायाः आश्वासनं ददाति।
(ङ) इदं पर्व भगिनीभ्रातो; महत् पर्व वर्तते।

प्रश्न 7.
अत्र चित्रं दृष्ट्वा संस्कृतभाषया पञ्चवाक्येषु प्रकृतेः वर्णनं कुरुत।
HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः - 5
उत्तरम्:
(क) अस्मिन् चित्रे एकं वनं दृश्यते।
(ख) वने महान्तो वृक्षाः विलसन्ति।
(ग) वृक्षाः फलच्छायाप्रदायकाः भवन्ति।
(घ) वृक्षः काष्ठानि प्राप्यन्ते।
(ङ) वनेन पर्यावरण संरक्ष्यते।

योग्यता-विस्तारः

प्राचीन काल में भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, इसी भाव को ग्रहण कर कवि ने प्रस्तुत पाठ में भारतभूमि की प्रशंसा करते हुए कहा है कि आज भी यह भूमि विश्व में स्वर्णभूमि बनकर ही सुशोभित हो रही है।

कवि कहते हैं कि आज हम विकसित देशों की परम्परा में अगग्रण्य होकर मिसाइलों का निर्माण कर रहे हैं, परमाणु शक्ति का प्रयोग कर रहे हैं। इसी के साथ ही साथ हम ‘उत्सवप्रियाः खलु मानवाः नामक उक्ति को चरितार्थ भी कर रहे हैं कि ‘अनेकता में एकता है हिंद की विशेषता’ इसी आधार पर कवि के उद्गार हैं कि बहतु मतावलम्बियों के भारत में होने पर भी यहाँ ज्ञानियों, वैज्ञानिकों और विद्वानों की कोई कमी नहीं है। इस धरा ने सम्पूर्ण विश्व को शिल्पकार, इंजीनियर, चिकित्सक, प्रबंधक, अभिनेता, अभिनेत्री और कवि प्रदान किए हैं। इसकी प्राकृतिक सुषमा अद्भुत है। इस तरह इन पद्यों में कवि ने भारत के सर्वाधिक महत्त्व को उजागर करने का प्रयास किया है।

पाठ में पर्वो और उत्सवों की चर्चा की गई है ये समानार्थक होते हुए भी भिन्न हैं। पर्व एक निश्चित तिथि पर ही मनाए जाते हैं, जैसे – होली, दीपावली, स्वतन्त्रता दिवस, गणतंत्र दिवस इत्यादि। परन्तु उत्सव व्यक्ति विशेष के उद्गार एवं आहाद के द्योतक हैं। किसी के घर सतानोत्पत्ति उत्सव का रूप ग्रहण कर लेती है तो किसी को सेवाकार्य में प्रोन्नति प्राप्त कर लेना, यहाँ तक कि बिछुड़े हुए बंधु-बांधवों से अचानक मिलना भी किसी उत्सव से कम नहीं होता है।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

मूलपाठः

सुपूर्ण सदैववास्ति खाद्यान्नभाण्डं नदीनां जलं यत्र पीयूषतुल्यम।
इयं स्वर्णवद् भाति शस्यैधरेयं क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः ॥1॥

त्रिशुलाग्निनागैः पृथिव्यस्वघोरैः अणूनां महाशक्तिभिः पूरितेयम्।
सदा राष्ट्ररक्षारतानां धरेयम् क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः ॥2॥

इय वीरभोग्या तथा कर्मसेव्या जगद्वन्दनीया च भूः देवगेया।
सदा पर्वणामुत्सवानां धरेयं क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः ॥3॥

इदं ज्ञानिना चैव वैज्ञानिकानां विपश्चिज्जनानामियं संस्कृतानाम्।
बहूनां मतानां जनानां धरेयं क्षितौ राजतै भारतस्वर्णभूमिः ॥4॥

इयं शिल्पिनां यन्त्रविद्याधराणां भिषक्शास्त्रिणां भूः प्रबन्धे युतानाम्।
नटानां नटीना कवीनां धरेयं क्षितौ राजतै भारतस्वर्णभूमिः ॥5॥

वने दिग्गजानां तथा केशरीणां तटीनामियं वर्तते भूधराणाम्।
शिखीनां शुकानां पिकानां धरेयं क्षितौ राजतै भारतस्वर्णभूमिः ॥6॥

अन्वयः
1. इयम् धरा खाद्यान्नभाण्डम् सुपूर्णम् अस्ति यत्र नदीनाम् जलम् पीयूषतुल्यम् (अस्ति), इयम् शस्यैः स्वर्णवत भाति, इयम् भारतस्वर्णभूमिः क्षितौ रजते।

2. इयम् घोरै-त्रिशूल-अग्नि-नागैः पृथिवी अस्त्रैः राष्ट्ररक्षारतानाम् अणूनाम् महाशक्तिभिः पूरिता (अस्ति), इयम् भारतस्वर्णभूमिः सदा क्षितौ राजतै।

3. इयम् वीरभोग्या कर्मसेव्या तथा जगत वन्दनीया देवगेयाः च भूः (अस्ति), पर्वणामुत्सवानाम् इयम् भारतस्वर्णभूमिः क्षिती राजते।

4. इयम् धरा संस्कृतानाम् विपश्चिज्जनानाम् ज्ञानिनाम् वैज्ञानिकानाम् च एव, इयम् बहूनाम मतानाम जनानाम् भारतस्वर्णभूमि क्षितौ राजते।

5. इयम् धरा नटानाम् नटीनाम् कवीनाम् शिल्पिनाम् यन्त्रविद्या-धराणाम् भिशक्शास्त्रिणाम् भूः प्रबन्धे युतानाम् इयम् भारतस्वर्णभूमिः क्षितौ राजते।

6. इयम् धरा वने दिग्गजानाम् केसरीणाम् तथा भूधराणाम् तटिनाम् शिखीनाम् शुकानाम् पिकानाम् इयम् भारतस्वर्णभूमिः क्षितौ राजते।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

सन्धिविच्छेदः
खाद्यान्न = खाद्य + अन्न।
शस्यैधरेयम् = शस्यैः + धरा + इयम्।
त्रिशूलाग्नि = त्रिशूल + अग्नि।
पृथिव्यस्वघोरै = पृथिवी + अस्त्रघोरै।
पूरितेयम् = पूरिता + इयम्।
धरेयम् = धर + इयम्।
विपश्चिज्जनानामियम् = विपश्चित + जनानाम् + इयम्।
दिग्गजानाम् = दिक् + गजानाम्।

संयोग:
पर्वणामुत्सवानाम् = पर्वणाम् + उत्सवानाम्।
तटीनामियम् = तटीनाम् + इयम्।

पदार्थबोध:
भाण्डम् = भण्डार (प्रचुरता)।
पीयूषतुल्यम् = अमृत समान (सुधातुल्यम्)।
स्वर्णवन = सोने जैसा (काञ्चनमिव)।
भाति = सुशोभित हो रही है (शोभते)।
क्षिती – पृथ्वी पर (धरायाम्)।
धरेयम् – यह धरती (इयं वसुधा)।
राजते = सुशोभित है (सुशोभते)।
त्रिशूलाग्निनागैः = त्रिशूल-अग्नि-नाग-पृथ्वी-आकाश पाँच मिसाइलों के नाम हैं (एतानि महास्त्राणि सन्ति)।
पर्वणामुत्सवानाम् = पूर्वो और उत्सवों की (शुभ-अवसराणाम्)।
विपश्चिज्जनानाम् = विद्वानों की (विदुषाम्)।
यन्त्रविद्याधराणाम् = यन्त्र विद्या जानने वालों की (यन्त्रविद्या जानताानाम् जानानम)।
प्रबंधे युतानाम् = प्रबंधकों की (प्रबन्धकानाम्)।
भूधराणाम् = पहाड़ों की (पर्वतानाम्)।
नटीनाम् = नदियों की (नदीनाम्)।
केसरीणाम् = शेरों की (सिंहानाम्)।
दिग्गजानाम् = हाथियों की (हस्तीनाम्)।
शिखीनाम् = मोरों की (मयूराणाम्।

HBSE 8th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 13 क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः

सरलार्थ-
1. यह धरती खाद्यान्न भण्डारों से परिपूर्ण है, जहाँ की नदियों का पानी अमृत के समान है, सोने के समान चमक वाली यह भारतभूमि धरती पर राज करती है, सुशोभित है।

2. यह स्वर्णभूमि भारत भूमि देश रक्षा में लगे त्रिशूल, अग्नि, नाग, पृथ्वी और आकाश मिसाइलों व परमाणु शक्तियों से संपन्न है, ऐसी यह धरती संपूर्ण पृथ्वी पर राज करती है।

3. यह वीर भोग्या व कर्मसेव्या है, जगत् वन्दनीय है, इसका (यशोगान) देवता भी करते हैं। ऐसी भारत स्वर्ण भूमि अनेक पर्वो उत्सवों की भूमि सदा धरती पर राज करती है।

4. यह धरती संस्कृत विद्वानों, ज्ञानियों, वैज्ञानिकों की भूमि है। अनेक धर्मावलम्बी लोगों की यह भारत स्वर्णभूमि संपूर्ण विश्व पर राज करती है।

5. यह धरती कवियों अभिनेता-अभिनेत्रियों, डॉक्टर-इंजीनियरों, शिल्पियों, मशीन के जानकारों, भूमि प्रबंधकों की भूमि है। यह भारत स्वर्णभूमि संपूर्ण धरती पर सदा विराजती है।

6. यह वसुंधरा जंगल में हाथियों, सिंहों, नदियों, पर्वतों की भूमि है। मोर, तोते, कोयल आदि से शोभित यह भारतभूमि सदा पृथ्वी पर शोभित है।

भावार्थ-
पाठ का केंद्रीय भाव भारत की चहुंमुखी प्रगति का वर्णन करता है।

क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः Summary

क्षितौ राजते भारतस्वर्णभूमिः पाठ-परिचयः

संस्कृत के मूर्धन्य विज्ञान कवि कृष्णचन्द्र त्रिपाठी की रचना से संकलित श्लोकों में देश के गौरव का गुणगान, यशोगान किया गया। अनाज, कला, प्रौद्योगिकी, वन संपदा, सामरिक शक्ति, परमाणु-शक्ति सम्पन्नता का वर्णन किया गया है। छात्र इन श्लोकों को गाएँ और देश की ताकत का अनुभव करें, इसलिए यह संकलन किया गया है।

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