Class 7

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

HBSE 7th Class Hindi रहीम की दोहे Textbook Questions and Answers

दोहे से

रहीम के दोहे Class 7 व्याख्या HBSE प्रश्न 1.
पाठ में दिए गए दोहों की कोई पंक्ति कथन है और कोई कथन को प्रमाणित करनेवाला उदाहरण। इन दोनों प्रकार की पंक्तियों को पहचान कर अलग-अलग लिखिए।
उत्तर :
वास्तविकता का वर्णन करने वाले दोहे कहि रहीम संपति सर्ग, बनत बहुत बहु रीति। विपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।। अन्य सभी दोहे उदाहरण के माध्यम से संदेश देते हैं खैर खून खाँसी खुसी, और प्रीति मदपान। रहिमन दा न दवें, जानत सकल जहाना। जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह। रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँड़ति छोह।। तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान। कहि रहीम परकाज हित, संपति-संचहि सुजान।। थोथे बादर पवार के, ज्यों रहीम पहरात। धनी पुरुष निर्धन भए, करें पाछिली बात।। धरती की-सी रीत है, सीत घाम औं मेह जैसी परे सो सहि रहे. त्यों रहीम यह देह।

पाठ 11 रहीम के दोहे HBSE 7th Class प्रश्न 2.
रहीम ने क्वार के मास में गरजनेवाले बादलों की तुलना ऐसे निर्धन व्यक्तियों से क्यों की है जो पहले कभी धनी थे और बीती बातों को बताकर दूसरों को प्रभावित करना चाहते हैं? दोहे के आधार पर आप सावन के बरसने और गरजनेवाले बदलों के विषय में क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर :
रहीम ने आश्विन (क्वार) के महीने में आकाश में छाने वाले बादलों की तुलना निर्धन हो गए व्यक्तियों से इसलिए की है क्योंकि दोनों बड़बड़ा कर रह जाते हैं, कुछ कर नहीं पाते। बादल बरस नहीं पाते, निर्धन व्यक्ति का धन लौटकर नहीं आता।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

दोहों से आगे

Chapter 11 Rahim Ke Dohe HBSE 7th Class प्रश्न 1.
नीचे दिए गए दोहों में बताई गई सच्चाइयों को यदि हम अपने जीवन में उतार लें तो उनके क्या लाभ होंगे? सोचिए और लिखिए :
(क) तरुवर फल ………………. सहि सुजान।।
(ख) धरती की-सी ………” यह देह।।
उत्तर :
(क) हम परोपकारी बन जाएँगी, लालच त्याग देंगे।
(ख) यदि हम इस दोहे के वर्णित यथार्थ को जीवन में स्वीकार कर लें तो हम कभी दुःखी नहीं रहेंगे। हम हर स्थिति में संतुष्ट रहेंगे।

HBSE 7th Class Hindi रहीम की दोहे Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

रहीम के दोहे Class 7 HBSE  प्रश्न 1.
सच्चा मित्र कब साथ नहीं छोड़ता?
उत्तर :
सच्चा मित्र विपत्ति काल में साथ नहीं छोड़ता।

Class 7 Hindi Chapter 11 Hindi प्रश्न 2.
परोपकार की शिक्षा किन-किनके उदाहरण से मिलती है?
उत्तर :
तरुवर (पेड़) और सरवर (तालाब) के उदाहरण से।

रहीम के दोहे HBSE 7th Class प्रश्न 3.
किस मास के गरजने वाले बादल व्यर्थ हैं?
उत्तर :
क्वार मास के गरजने वाले बादल व्यर्थ हैं।

रहीम की दोहे प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 4.
धरती हमें क्या शिक्षा देती है?
उत्तर :
धरती हमें सहनशीलता की शिक्षा देती है।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

लघुत्तरात्मक प्रश्न

रहीम के दोहे Class 7 HBSE प्रश्न 1.
रहीम ने सच्चे मित्र की क्या पहचान बताई है?
उत्तर :
रहीम ने सच्चे मित्र की यह पहचान बताई है कि वह विपत्ति की घड़ी में हमारे साथ खड़ा रहता है। जो मित्र विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरता है, वही सच्चा मित्र है।

प्रश्न 2.
रहीम के दोहों से अनुप्रास अलंकार के उदाहरण छाँट कर लिखिए।
उत्तर :
अनुप्रास अलंकार के उदाहरण :

  1. बनत बहुत बहु रोति। (‘व’ वर्ण की आवृत्ति)
  2. खैर खून खाँसी खुसी (‘ख’ वर्ण की आवृत्ति)
  3. जाल पर जल जात (‘ज’ वर्ण की आवृत्ति)
  4. छाँडति छोह (‘छ’ वर्ण की आवृत्ति)
  5. संपत्ति संचहि सुजान (‘स’ वर्ण की आवृत्ति)।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

रहीम की दोहे दोहों की सप्रसंग व्याख्या

1. कहि रहीम ……….. साँचे मीत॥

शब्दार्थ : संपत्ति सगे = धन होने पर अपने (Wealth)। बहुत रीत = तरह-तरह से (Different type)। विपत्ति = मुसीबत (Trouble)। कसौटी = जाँच (Test)। कसे = जो कसा जाए,खरा उतरे (Tested)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीमदास द्वारा रचित है।

व्याख्या : रहीम कहते हैं कि जब धन मनुष्य के पास रहता है तब अनेक प्रकार के लोग सगे-संबंधी और रिश्तेदार बनने लगते हैं पर ऐसे लोगों को सच्चा मित्र नहीं कहा जा सकता। सच्चा मित्र तो वही होता है, जो मुसीबत रूपी कसौटी पर खरा उतरता है। जैसे खरा सोना कसौटी के पत्थर पर खरा उतरता है, उसी प्रकार सच्चा मित्र हर विपत्ति की घड़ी में साथ निभाता है।

विशेष : ‘विपत्ति-कसौटी’ में रूपक अलंकार है। ‘बनत बहुत बहु’ में अनुप्रास अलंकार है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. लोग कब सगे बनने का प्रयास करते हैं?
2. सच्चा मित्र कौन होता है?
उत्तर:
1. जब किसी के पास धन-सम्पत्ति होती है तब लोग उसके सगे बनने का प्रयास करते हैं।
2. सच्चा मित्र वह होता है जो विपत्ति की कसौटी पर खरा उतरता है अर्थात् मुसीबत के समय काम आता है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘संपत्ति सगे’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास
(ख) पुनरुक्ति
(ग) यमक
(घ) श्लेष
उत्तर :
(क) अनुप्रास

2. साँचा मीत किसे कहा गया है?
(क) विपति की कसौटी पर खरा उतरने वाला
(ख) सच बोलने वाला
(ग) संपत्ति हड़पने वाला
(घ) मिलने वाला
उत्तर :
(क) विपति की कसौटी पर खरा उतरने वाला

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

2. खैर खून ………………… सकल जहान॥

शब्दार्थ : खैर – कत्था (Catechu)। बैर – शत्रुता (Enmity)। प्रीति = प्रेम (Love)। मदपान = शराब पीना (Drinking alcohol)। दाबै ” दबाने से (To press)। सकल = सारा (Whole)। जहान = संसार (I World)!

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीमदास द्वारा रचित है। इसमें नीति संबंधी बात बताई गई है।

व्याख्या : रहीमदास बताते हैं कि कत्था, खून, खाँसी, खुशी, शत्रुता और प्रेम तथा शराब पीना दबाने या छिपाने से दबते-छिपते नहीं हैं। इनको सारा संसार जान ही जाता है। पान में कत्थे का रंग लाली लाता ही है. खून दिख जाता है, खाँसी रोकी या छिपाई नहीं जा सकती, बैर-प्रीति भी प्रकट होकर रहती है. शराबी की चाल भी उसका पता बता देती है। इनको दबाया नहीं जा सकता।

विशेष : ‘ख’ वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. किस-किसको दबाया नहीं जा सकता?
2 ‘जानत सकल जहान’ का क्या अर्थ है?
उत्तर:
1. कत्था, खून, खाँसी, खुशी, बैर-प्रीति और मदिरा सेवन को दबाया नहीं जा सकता।
2. इसका अर्थ है– इस बात को सारा संसार जानता है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘खैर खून खाँसी खुसी’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) पुनरुक्ति
(ख) अनुप्रास
(ग) यमक
(घ) श्लेष
(ख) अनुप्रास

2. ‘जहान’ शब्द किस भाषा का है?
(क) हिंदी का
(ख) उर्दू का
(ग) पंजाबी का
(घ) अंग्रेजी का
उत्तर :
(ख) उर्दू का

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

3. जाल परे ………………… छाँड़ति छोह॥

शब्दार्थ : तजि – त्यागना (To leave)। मीन – मछली (Fish)। नीर – पानी (Water)। छाँड़ति – छोड़ती (To leave)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीमदास द्वारा रचित है।

व्याख्या : जब नदी या तालाब के पानी में जाल पड़ता है तब पानी तो मछलियों का मोह त्याग कर बह जाता है लेकिन मछली तब भी पानी का मोह नहीं त्यागती। वह या तो पानी में ही रहती है या पानी के बिना अपने प्राण त्याग देती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. ‘जल को मछलियों से कोई मोह नहीं होता’-कैसे?
2. मछलियाँ किसके प्रति अपना लगाव नहीं छोड़ पाती?
उत्तर:
1. जल को मछलियों से कोई मोह (लगाव) नहीं होता, इसका प्रमाण है, जाल में मछलियों के फंसते ही जल उन्हें छोड़कर आगे बह जाता है।
2. मछलियाँ जल के प्रति अपना मोह नहीं छोड़ पाती। वे जल के लिए तड़पती रहती हैं और जल से बाहर होते ही अपने प्राण त्याग देती हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘छाँडति छोह’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्लेष
(घ) पुनरुक्ति
उत्तर :
(क) अनुप्रास

2. इस दोहे के रचयिता हैं
(क) रहीम
(ख) कबीर
(ग) तुलसी
(घ) सूर
उत्तर :
(क) रहीम

4. तरूवर फल ………… संचहि सुजान।

शब्दार्थ: तरुवर = वृक्ष (Tree)। सरवर – नदी (River)। पान = पानी (IWater)। परकाज = दूसरों का काम, परोपकार (For others)। संचहि . जोड़ता है (Collects)। सुजान – चतुर, बुद्धिमान (Intelligent)

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीमदास द्वारा रचित है और हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित है।

व्याख्या : रहीमदास परोपकार का महत्त्व बताते हुए कहते हैं कि वृक्ष कभी अपने फल नहीं खाते और नदियाँ कभी अपना पानी स्वयं नहीं पीतीं। वे इन्हें दूसरों को ही देती हैं। इसी प्रकार बुद्धिमान लोग दूसरों की भलाई के लिए ही धन-संपत्ति का संग्रह करते हैं।

विशेष : ‘संपति-संचहि सुजान’ में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
1. तरुवर क्या नहीं करते?
2. तालाब क्या करता है?
3. बुद्धिमान लोग किसके लिए सम्पत्ति जोड़ते हैं?
उत्तर:
1. तरुवर अर्थात् पेड़ अपने फल नहीं खाते।
2 तालाब अपना पानी कभी नहीं पीते।
3. बुद्धिमान दूसरों की भलाई करने के लिए सम्पत्ति जोड़ते

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. इस दोहे से हमें किसकी शिक्षा मिलती है?
(क) परोपकार की
(ख) धन जोड़ने की
(ग) फल खाने की
(घ) पानी पीने की
उत्तर :
(क) परोपकार की

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

5. थोथे बादर …………. पाछिली बात।

शब्दार्थ : थोथे = खाली (Empty)। घहरात = घहराते हैं (To make noise)। पाछिली – पिछली (Previous)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत दोहा रहीमदास द्वारा रचित है।
व्याख्या : रहीमदास बताते हैं कि जिस प्रकार क्वार के महीने में खाली बादल केवल घहरा कर रह जाते हैं, बरस नहीं पाते, उसी प्रकार धनी व्यक्ति यदि गरीब हो जाए तो पिछली बातों याद को करके ही रह जाता है। वह कुछ कर नहीं पाता।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कवि ने क्वार मास के बादलों को कैसा बताया है?
2. यदि धनी पुरुष निर्धन हो जाए तो वह क्या करता है?
उत्तर:
1. कवि ने क्वार मास के बादलों को थोथा अर्थात् बेकार गरजने वाला बताया है।
2 यदि कोई धनी पुरुष निर्धन हो जाए तो वह पिछली बातों का जिक्र करता रहता है, जो व्यर्थ है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘थोथे बादर’ में रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया
उत्तर :
(ग) विशेषण

2. ‘पाछिली’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर :
(ग) देशज

6. धरती की ……………. यह देह॥

शब्दार्थ : रीत = नियम (Rule)। सीत – सर्दी (Winter)। घाम = धूप, गर्मी (Summer)। मेह – वर्षा (Rain)। देह = शरीर (Body)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : यह दोहा रहीमदास द्वारा रचित है। दो चीजों की समानता बताते हुए रहीम कहते हैं

व्याख्या : जिस प्रकार यह धरती सर्दी, गर्मी और वर्षा सभी ऋतुओं को सह लेती है उसी प्रकार हमारा शरीर भी सभी प्रकार के कष्टों को सहन कर लेता है। जिस पर जैसी विपत्ति पड़ती है, उसे सह लेता है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. धरती क्या-क्या सह लेती है?
2. हमारा शरीर भी कैसा है?
उत्तर:
1. धरती शीत (सर्दी), घाम (धूप) और मेह (वर्षा) आदि ऋतुओं के प्रभाव को सह लेती है।
2. हमारा शरीर भी सभी प्रकार की स्थितियों को सहने वाला है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘घाम’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर :
(क) तत्सम

2. इए दोहे के रचयिता हैं
(क) रहीम
(ख) कबीर
(ग) तुलसी
(घ) सूरदास
उत्तर :
(ग) तुलसी

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 11 रहीम की दोहे

अपूर्व अनुभव Summary in Hindi

रहीम की दोहे कवि-परिचय

जीवन-परिचय :
रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। रहीम अपने समय के वीर योद्धा, कुशल राजनीतिज्ञ और सहृदय कवि थे। इनका जन्म सन् 1556 ई. में लाहौर (पश्चिम पंजाब, पाकिस्तान) में हुआ था। ये अकबर के संरक्षण बैरमखाँ के पुत्र थे। रहीम अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। ये अकबर के प्रधान सेनापति और मंत्री भी थे। ये वीर योद्धा थे और बड़े कौशल से सेना का संचालन करते थे। इनकी दानशीलता भी काफी प्रसिद्ध थी। कहते हैं अंत समय तक इनके यहाँ से किसी याचक को निराश नहीं लौटना पड़ा। सन् 1627 में इनकी मृत्यु हो गई। इनका मकबरा दिल्ली में बना हुआ है।

अध्ययन और ज्ञानार्जन में रुचि होने पर भी इन्हें युद्ध-क्षेत्र में ही अपने जीवन का अधिकतर समय व्यतीत करना पड़ा। इन्होंने अपने जीवन में अनेक उतार-चढाव देखे। अपनी बहादुरी और पराक्रम के लिए सूबेदारी और जागीरें भी मिलीं, सम्राट जहाँगीर के कोप के कारण दारिद्र्य भी भोगना पड़ा। अरबी, तुर्की, फारसी तथा संस्कृत के ये पंडित थे। हिंदी काव्य के ये मर्मज्ञ थे और हिंदी कवियों का बड़ा सम्मान करते थे।

रचनाएँ :
रहीम ने अनेक काव्य-ग्रंथों का प्रणयन किया है जिनमें से ‘रहीम सतसई’, ‘शृंगार सतसई’, ‘मदनाष्टक’, ‘रहीम रत्नावली’, ‘रासपंचाध्यायी’ तथा ‘बरवै नायिका भेद वर्णन’ प्रमुख हैं। इनकी रचनाओं का पूर्ण संग्रह ‘रहीम रत्नावली’ के नाम से प्रकाशित हुआ है। इन्होंने फारसी भाषा में भी ग्रंथों की रचना की है।

विशेषताएँ :
रहीम बड़े लोकप्रिय कवि थे। इनके नीति के दोहे तो सर्वसाधारण की जिह्वा पर रहते हैं। इनके दोहों में कोरी नीति की नीरसता नहीं है। उनमें मार्मिकता तथा कवि हृदय की सच्ची संवेदना भी मिलती है। दैनिक जीवन की अनुभूतियों पर आधारित दृष्टांतों के माध्यम से इनका कथन सीधे हृदय पर चोट करता है। इनकी रचना में नीति के अतिरिक्त भक्ति तथा शृंगार की भी सुंदर व्यंजना हुई है।

अगर रहीम जन-साधारण में अपने दोहों के लिए प्रसिद्ध थे, तो उन्होंने कवित्त, सवैया, सोरठा तथा बरवै छंदों में भी सफल काव्य रचना की है। रहीम का ब्रज और अवधी भाषाओं पर समान अधिकार था। इनकी भाषा सरल, स्पष्ट तथा प्रवाहपूर्ण है। इनकी रचना में भारतीय जीवन के सजीव चित्र अंकित हैं। रहीम ने खड़ी बोली में भी कुछ पद्य लिखे हैं।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

HBSE 7th Class Hindi चिड़िया की बच्ची Textbook Questions and Answers

कहानी से

चिड़िया की बच्ची प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 1.
किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था?
उत्तर :
निम्नलिखित बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था –

  • माधवदास ने संगमरमर की नई कोठी बनवाई है।
  • उसके पास धन की कोई कमी नहीं है।
  • वह चिड़िया से कहता है
  • मेरे पास बहुत-सा सोना-मोती है। सोने के एक बहुत सुंदर घर मैं तुम्हें बना दूंगा, मोतियों की झालर उसमें लटकेगी।
  • मेरी कोठियों पर कोठियाँ हैं, बगीचों पर बगीचे हैं।

निम्नलिखित बातों से प्रतीत होता है कि वह सुखी नहीं था :

  • खयाल-ही-खयाल में संध्या को स्वप्न की भांति गुजार देते हैं।
  • जी भरकर भी कुछ खाली सा रहता है।
  • मेरा महल भी सूना है। वहाँ कोई भी चहकता नहीं।
  • मेरा दिल वीरान है। वहाँ कब हँसी सुनने को मिलती है?

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

चिड़िया की बच्ची Class 7 HBSE प्रश्न 2.
माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास नि:स्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
माधवदास चिड़िया से यार-बार ऐसा इसलिए कहता है क्योंकि उसे चिड़िया बहुत सुंदर और प्यारी लगी। उसे देखकर उसका मन प्रफुल्लित हो गया। वह उसे देखते रहना चाहता था। इससे उसके मन का एकाकीपन दूर होता था। माधवदास का ऐसा कहना पूरी तरह से नि:स्वार्थ मन से नहीं था। चिड़िया को देखने से उसके मन को संतुष्टि कर अनुभव हो रहा था। वह अपने मन के सुख के लिए चिड़िया को अपने बगीचे में रखना चाहता था।

Chidiya Ki Bacchi Summary In Hindi HBSE 7th Class प्रश्न 3.
माधवदास के बार-बार समझाने पर भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ माधवदास की नज़र में चिड़िया की जिद का कोई तुक न था। माधवदास और चिड़िया के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
चिड़िया और माधवदास के मनोभावों में भारी अंतर था। माधवदास अभी भी अपनी धन-दौलत को सभी कुछ समझ रहा था। उसका विचार था कि सोने, चाँदी, महल आदि से सभी को वश में किया जा सकता है।

जबकि चिड़िया प्रकृति-प्रेमी है। उसे अपनी स्वच्छंदता प्यारी है। वह धन-दौलत को कुछ नहीं समझती। उसे अपनी माँ की गोद सबसे मूल्यवान और प्यारी प्रतीत होती है। यही कारण है कि चिड़िया माधवदास के बार-बार समझाने पर भी सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं के लालच में नहीं आती।

चिड़िया की बच्ची शब्दार्थ HBSE 7th Class प्रश्न 4.
कहानी के अंत में नही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पड़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
उत्तर :
कहानी के अंत में चिड़िया सेठ के नौकर के पंजे के चंगुल से भाग निकलती है और उड़कर सीधी माँ की गोद में जाकर सुबकने लगती है। इस बात को पढ़कर हमें बहुत अच्छा लगा। हाँ, यदि सेठ का नौकर उसे पकड़कर पिंजरे में डाल देता तो हमें बहुत बुरा लगता। उसके भाग निकलने से उसकी स्वच्छंदता कायम रहती है। पक्षी को बंधन में रहना कतई पसंद नहीं होता। वह किसी भी लोभ में नहीं फँसता। उसे तो प्रकृति में स्वच्छंद उड़ान भरना प्रिय लगता है। वह घोंसले में रहकर और माँ का सान्निध्य पाकर खुश रहता है।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

चिड़िया की बच्ची HBSE 7th Class प्रश्न 5.
‘माँ मेरी बाट देखती होगी’-नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?
उत्तर :
हमारी जिंदगी में भी माँ का बहुत महत्त्व है। जिस प्रकार चिड़िया बार-बार माँ के पास जाने की रट लगाए रहती है, उसी प्रकार हम भी अपनी माँ के पास जाने की चाह रखते हैं। माँ हमें जन्म देती है, हमारा पालन-पोषण करती है, हमें सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराती है तथा दु:ख की घड़ी में हमें ढाढस बंधाती है। हम माँ के ऋण से उऋण नहीं हो सकते। माँ हमारे सुख की सच्ची साथी होती है।

चिड़िया की बच्ची प्रश्न उत्तर Class 7 HBSE प्रश्न 6.
इस कहानी का कोई और शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर :
हम कहानी का शीर्षक ‘सुखी कौन? देना चाहेंगे। इसका कारण यह है कि सुखी धन-दौलत में नहीं मिलता। सुखी वह है जो प्रकृति की गोद में रहकर स्वच्छंद जीवन बिताता है। सेठ सुख नहीं है जबकि चिड़िया सुखी है।

कहानी से आगे

1. इस कहानी में आपने देखा कि वह चिड़िया अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चींटियों, ग्रह-नक्षत्रों तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीजों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।
उत्तर :
इस प्रकार का स्वाभाविक अनुशासन का रूप हमें प्रकृति के विभिन्न रूपों में मिलता है
‘सूर्य’ अपने नियत समय पर निकलता है और छिपता है। वह एक दिन के लिए भी छुट्टी नहीं करता। ‘चंद्रमा की भी यही स्थिति है।
‘ऋतु-चक्र’ भी अनुशासन का पालन करता है।

2. सोचकर लिखिए कि यदि सारी सुविधाएँ देकर एक कमरे में आपको सारे दिन बंद रहने को कहा जाए तो क्या आप स्वीकार करेंगे? आपको अधिक प्रिय क्या होगा-“स्वाधीनता’ या ‘प्रलोभनोंवाली पराधीनता’? ऐसा क्यों कहा जाता है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिल पाता। नीचे दिए गए कारणों को पढ़ें और विचार करें
उत्तर :
(क) क्योंकि किसी को पराधीन बनाने की इच्छा रखनेवाला व्यक्ति स्वयं दुखी होता है, वह किसी को सुखी नहीं कर सकता।
(ख) क्योंकि पराधीन व्यक्ति सुख के सपने देखना ही नहीं चाहता।
(ग) क्योंकि पराधीन व्यक्ति को सुख के सपने देखने का भी अवसर नहीं मिलता।
हमें अपनी स्वाधीनता पसंद है। हम किसी भी कीमत पर पराधीनता को स्वीकार नहीं करेंगे। यह बिल्कल सही है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिल पाता।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

HBSE 7th Class Hindi चिड़िया की बच्ची Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

चिड़िया की बच्ची Class 9 HBSE 7th Class प्रश्न 1.
सेठ का नाम क्या था?
उत्तर :
सेठ का नाम माधवदास था।

चिड़िया की बच्ची Questions And Answers HBSE 7th Class प्रश्न 2.
सेठ ने क्या काम किया था?
उत्तर :
सेठ ने अपनी नई कोठी बनवाई थी।

चिड़िया की बच्ची पाठ के शब्दार्थ HBSE 7th Class प्रश्न 3.
सेठ में क्या-क्या गुण थे?
उत्तर :
सेठ में कोई व्यसन नहीं था। ये कला प्रेमी थे तथा सुंदर अभिरुचि वाले व्यक्ति थे।

पाठ 9 चिड़िया की बच्ची के प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 4.
सेठ माधवदास को चिड़िया कैसी लगी?
उत्तर :
सेठ माधवदास को चिड़िया बहुत सुंदर पर मनमानी लगी।

Chidiya Ki Bacchi Ke Prashn Uttar 7th Class प्रश्न 5.
सेठ के प्रस्ताव का चिड़िया पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर :
सेठ के प्रस्ताव पर चिड़िया सकुथा गई।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

चिड़िया की बच्ची के प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 6.
सेठ चिड़िया को क्या देना चाहता था?
उत्तर :
सेठ चिड़िया को सुंदर घर तथा काफी धन देना चाहता था।

चिड़िया की बच्ची पाठ के प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 7.
चिड़िया को सबसे प्यारी कौन लगती थी?
उत्तर :
चिड़िया को अपनी माँ सबसे प्यारी लगती थी।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

Chapter 9 Chidiya Ki Bacchi HBSE 7th Class प्रश्न 1.
एक दिन संध्या के समय सेट माधवदास ने अपने बगीचे में क्या दृश्य देखा?
उत्तर :
एक दिन सेठ जी ने देखा कि संध्या समय उनके देखते-देखते सामने की गुलाब की डाली पर एक चिड़िया आन बैठी। चिड़िया बहुत सुंदर थी। उसकी गरदन लाल थी और गुलाबी होते-होते किनारों पर जरा-जरा नीली पड़ गई थी। पंख ऊपर से चमकदार स्याह थे। उसका नन्हा-सा सिर तो बहुत प्यारा लगता था और शरीर पर चित्र-विचित्र चित्रकारी थी। चिड़िया को मानो माधवदास की सत्ता का कुछ पता नहीं था और मानो तनिक देर का आराम भी उसे नहीं चाहिए था। कभी पर हिलाती थी, कभी फुदकती थी। वह खूब खुश मालूम होती थी। अपनी नन्ही-सी चोंच से प्यारी-प्यारी आवाज निकाल रही थी।

पाठ 9 चिड़िया की बच्ची HBSE 7th Class प्रश्न 2.
माधवदासने चिड़िया को क्या-क्या प्रलोभन दिए?
उत्तर :
माधवदास ने चिड़िया को ये प्रलोभन दिए –

  • मैं तुम्हें एक सुंदर घर बनवाकर दूंगा।
  • उसमें मोतियों की झालर लटकेगी।
  • तुम्हें सोना-मोती दूंगा।
  • यह बगीचा उसी का होगा।

प्रश्न 3.
चिड़िया ने सेठ के प्रस्ताव को ठुकराते हुए क्या कहा?
उत्तर :
चिड़िया ने सेठ के प्रस्ताव को ठुकराते हुए यह कहा कि उसकी समझ में सेठ की बातें नहीं आती। उसकी माँ के घोंसले के बाहर बहुत-सी धूप बिखरी रहती है। उसकी माँ उसे प्यार करती है।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

प्रश्न 4.
चिड़िया को अंत में क्या बोध हुआ तथा वह कहाँ जा पहुँची?
उत्तर :
चिड़िया को अंत में किसी व्यक्ति के कठोर, स्पर्श का बोध हुआ। जैसे ही किसी ने उसके शरीर को छुआ वह चीखी और चिंचिया कर उड़ गई। वह उड़ती हुई एक ही साँस में माँ के पास पहुँच गई तथा माँ की गोद में सिसकने लगी।

चिड़िया की बच्ची गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. माधवदास ने …………………….. मिलती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. माधवदास ने किसका निर्माण करवाया?
2. माधवदास किस स्वभाव के व्यक्ति हैं?
3. वे शाम को कहाँ, किस प्रकार बैठते हैं?
4. उन्हें किसमें तृप्ति मिलती है?
उत्तर:
1. माधवदास ने एक संगमरमर की कोठी और उसके सामने सुहावने बगीचे का निर्माण करवाया।
2. माधवदास कला-प्रेमी और सुंदर अभिरुचि वाले हैं।
3. वे शाम को कोठी के बाहर चबूतरे पर तख़्त डलवाकर मसनद के सहारे गलीचे पर बैठते हैं।
4. उन्हें प्रकृति की छटा निहारने में तृप्ति मिलती है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. माधवदास की कोठी किससे बनी है?
(क) लाल पत्थर से
(ख) संगमरमर से
(ग) सीमेंट से
(घ) सफेद पत्थरों से
उत्तर :
(ख) संगमरमर से

2. माधवदास के पास धन की
(क) कमी है
(ख) कमी नहीं है
(ग) दिक्कत है
(घ) स्थिति पता नहीं
उत्तर :
(ख) कमी नहीं है

3. उनके पास समय
(क) काफी है
(ख) कम है
(ग) अच्छा है
(घ) पता नहीं
उत्तर :
(क) काफी है

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

2. उस दिन …………………. होती थी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. उस दिन संध्या को क्या हुआ?
2 चिड़िया कैसी थी?
3. चिड़िया को क्या पता नहीं था?
4. वह कैसी मालूम देती थी?
उत्तर:
1. उस दिन संध्या के समय एक चिड़िया गुलाब की डाली पर आ बैठी।
2. चिड़िया बहुत सुंदर थी। उसकी गरदन लाल थी। उसके पंख चमकदार थे; शरीर पर चित्रकारी थी।
3. चिड़िया को माधवदास की सत्ता का कुछ पता नहीं था।
4. चिड़िया बहुत खुश मालूम देती थी।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. चिड़िया कहाँ आ बैठी थी?
(क) गुलाब की डाली पर
(ख) नीम की डाली पर
(ग) कदंव के पेड़ पर
(घ) पीपल के पेड़ पर
उत्तर :
(क) गुलाब की डाली पर

2. चिड़िया की गरदन कैसी थी?
(क) लाल
(ख) गुलाबी
(ग) नीली
(घ) स्याह
उत्तर :
(क) लाल

3. चिड़िया क्या कर रही थी?
(क) पर हिला रही थी
(ख) कभी फुदकती थी
(ग) दोनों काम
(घ) कुछ नहीं
उत्तर :
(ग) दोनों काम

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3, माधवदास ने ………………. न रहो?

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. माधवदास ने चिड़िया से क्या कहा?
2. माधवदास का महल कैसा है?
3. माधवदास ने चिड़िया से क्या प्रार्थना की?
उत्तर:
1. माधवदास ने चिड़िया से कहा-तुम बड़ी भोली हो। तुम्हें देखकर मेरा मन खुश हो जाता है।
2. माधवदास का महल सूना है। वहाँ कोई भी.चहकता नहीं।
3. माधवदास ने चिड़िया से अपने महल में ही रहने की प्रार्थना की।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘भोली चिड़िया’ में रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) विशेषण
(ग) क्रिया
(घ) सर्वनाम
उत्तर :
(ख) विशेषण

2. ‘तुम प्यारी हो।’-रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया
उत्तर :
(ख) सर्वनाम

3. माधवदास कौन है?
(क) एक सेठ
(ख) एक कला प्रेमी
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर :
(ग) दोनों

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 9 चिड़िया की बच्ची

4. तुम सेठ ………………. होना चाहिए?

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. चिड़िया क्या नहीं जानती?
2. चिड़िया ने माँ के बारे में क्या कहा?
3. मालामाल किसे कहते हैं?
उत्तर:
1. चिड़िया यह नहीं जानती कि सामने वाला व्यक्ति सेठ है। वह सेठ को भी नहीं जानती।
2. चिड़िया ने कहा कि उसकी माँ उसे बहुत प्यार करती है और वह उसकी प्रतीक्षा करती होगी।
3. मालामाल धनी व्यक्ति को कहते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. चिड़िया स्वयं को कैसा बताती है?
(क) समझदार
(ख) अनसमझ
(ग) प्यारी
(घ) मूर्ख
उत्तर :
(ख) अनसमझ

2. क्या चिड़िया मालामाल होना चाहती थी?
(क) हाँ
(ख) नहीं
(ग) पता नहीं
(घ) कुछ-कुछ
उत्तर :
(ख) नहीं

3. चिड़िया की राह कौन देख रही होगी?
(क) माँ
(ख) सखी
(ग) पड़ोसन
(घ) कोई नहीं
उत्तर :
(क) माँ

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5. इतने में ……………. सुबकने लगी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. चिड़िया को क्या बोध हुआ?
2. कठोर स्पर्श पर चिड़िया ने क्या प्रतिक्रिया दी?
3. वह उड़ती हुई कहाँ जा पहुँची?
उत्तर:
1. चिड़िया को बोध हुआ कि किसी का कठोर स्पर्श उसके शरीर को छू रहा है।
2. उस कठोर स्पर्श से चिड़िया चीखी और चिचियाई।
3. यह चिड़िया उड़ती हुई एक साँस में माँ की गोद में जा गिरी।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘कठोर स्पर्श’ में रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया
उत्तर :
(ग) विशेषण

2. यह कठोर स्पर्श किसका हो सकता है?
(क) सेठ का
(ख) माधवदास का
(ग) नौकर का
(घ) किसी का भी
उत्तर :
(ग) नौकर का

3. माँ की गोद में चिड़िया क्या करने लगी?
(क) रोने
(ख) सुबकने
(ग) हँसने
(घ) सोने
उत्तर :
(ख) सुबकने

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चिड़िया की बच्ची Summary in Hindi

चिड़िया की बच्ची पाठ का सार

एक सेठ थे-माधवदास। उन्होंने संगरमरमर की नई कोठी ‘बनवाई और उसमें सुहावना बगीचा भी लगाया। उन्हें कला से बहुत प्रेम था। उनके पास धन की कोई कमी न थी। उन्हें बगीचे में फूल-पौधे और फव्वारों से उछलता पानी देखना बहुत अच्छा लगता था। वे मित्रों से विनोद-चर्चा अथवा हुक्के की नली को मुँह में दयाए संध्या को स्वप्न की भाँति गुजार देते थे।

एक दिन की बात है कि वे मसनद के सहारे बैठे थे। मन कुछ खाली-सा था। तभी सामने गुलाब की डाली पर एक चिड़िया आ बैठी। वह बड़ी रंग-बिरंगी और प्यारी लग रही थी। माधवदास को वह चिड़िया बड़ी अच्छी लगी। उसने चिड़िया से कहा, “आओ, तुम बड़ी अच्छी आईं। यह बगीचा तुम लोगों के बिना सूना लगता है।

सुनो चिड़िया, तुम खुशी से यह समझो कि यह बगीचा मैंने तुम्हारे लिए ही बनवाया है। तुम बेखटके यहाँ आया करो।” चिड़िया तो घबरा गई। वह बोली.-“मुझे मालूम नहीं था कि यह बगीचा आपका है। मैं अभी चली जाती हूँ। पलभर साँस लेने के लिए मैं यहाँ टिक गई थी।” सेठ माधवदास ने उससे बार-बार आग्रह किया वह यहीं रहे और इस संगमरमर की कोठी तथा बगीचे को अपना ही समझे।

चिड़िया इसके लिए तैयार न हुई। वह बार-बार यही कहती रही कि मैं अपनी माँ के पास जा रही हूँ। अब साँझ हो गई है। मेरी । माँ मेरी बाट देख रही होगी। सेठ ने उसे अपना परिचय दिया और कहा कि वह जो कुछ माँगेगी, वही उसे मिलेगी। चिड़िया को सेठ से कुछ भी नहीं चाहिए था। वह मालामाल नहीं होना चाहती थी।

वह सोने को भी नहीं जानती थी। सेठ को लगा कि चिड़िया नादान है। सेठ ने एक बटन दबा दिया। उसकी आवाज सनकर कोठी के भीतर से एक दास झपटकर बाहर आया। सेठ ने दास को इशारा कर दिया और वह चिड़िया को पकड़ने का उपाय करने लगा। चिड़िया के मन के भीतर चैन नहीं था।

वह सेठ से कहने लगी-” सेठ मुझे डर लगता है। माँ मेरी दूर है। रात हो जाएगी तो राह नहीं सूझेगी।” तभी चिड़िया को लगा कि कोई कठोर स्पर्श उसके शरीर को छू गया है। वह चीखकर एकदम उड़ी। वह नौकर के फैले पंजे से निकल गई और एक ही साँस में माँ के पास जा पहुँची। वह माँ की गोद में गिरकर सुबकने लगी। माँ ने उसे छाती से चिपकाकर पूछा-“क्या है मेरी बच्ची?” चिड़िया बस सुबकंती रही। वह पलक मींचकर माँ की छाती से चिपककर सो गई।

चिड़िया की बच्ची शब्दार्थ

सुहावना = सुदर (Beautiful)। व्यसन = बुरी आदत (Addiction)। अभिरुचि = अच्छी रुचि (Good taste)। रकाबी = तश्तरी (Plate)। निहारते – देखते (To see)। गुजारना – बिताना (To spend)। प्रकाश = रोशनी (Light)। स्वच्छंदता – आजादी (Freedom)। सकुचाना = झिझकना (To hesitate)। भयभीत = डरी हुई (Feared)। प्रफुल्लित = प्रसन्न चित्त (Cheerful)। वीरान = सुनसान (Lonely)। मालामाल = धनी (Rich)। किस्मत = भाग्य (Luck)। अनगिनती = जिनकी गिनती न हो सकी Countless): देह = शरीर (Body)। राह = रास्ता (Parh)। ढाढस = तसल्ली (Solace)। तृप्ति = संतुष्टि (Satisfaction)।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 10 अपूर्व अनुभव

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 10 अपूर्व अनुभव Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 10 अपूर्व अनुभव

HBSE 7th Class Hindi अपूर्व अनुभव Textbook Questions and Answers

पाठ से

Class 7 Hindi Chapter 10 Apoorv Anubhav HBSE प्रश्न 1.
यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने के लिए तोत्तो-चान ने अथक प्रयास क्यों किया ? लिखिए।
उत्तर :
यासुकी-चान पोलियोग्रस्त था अतः स्वयं पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था। वह तोत्तो-चान की मदद से ही पेड़ पर चढ़ सका। इसके लिए तोत्ता-चान को भारी परिश्रम करना पड़ा।

पहले तो वह चौकीदार की झोपड़ी से एक सीढ़ी लाई। उसे पेड़ के सहारे लगा दिया। पर यासुकी-चान के हाथ-पैर इतने कमजोर थे कि वह पहली सीढ़ी पर भी नहीं चढ़ पाया। फिर तोत्तो-चान चौकीदार की झोपड़ी से एक तिपाई-सीढ़ी खींचकर लाई। बहुत प्रयास के बाद वह ऊपर तो पहुँच गया। फिर तोतो-चान ने उसकी पोलियोग्रस्त उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फंसाकर ऊपर खींचा। इस प्रकार यासुकी-चान पेड़ की द्विशाखा तक पहुँचने में सफल हो सका।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 10 अपूर्व अनुभव

अपूर्व अनुभव पाठ के शब्दार्थ HBSE 7th Class प्रश्न 2.
दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम से सफलता पाने के बाद तोत्तो-चान और यासुकी-चान को अपूर्व अनुभव मिला, इन दोनों के अपूर्व अनुभव कुछ अलग-अगल थे। दोनों में क्या अंतर रहे ? लिखिए।
उत्तर :
पेड़ से बच्चों का नाता गहरा था। वे एक-एक पेड़ को अपनी निजी संपत्ति मानते थे। वे उन पर चढ़ते थे और आनंदित होते थे। बाग के पेड़ों पर वे खूब मजा लेते थे। बाग में उनकी गतिविधियों को देखकर यासुकी-चान को अपनी अपंगता पर हताशा होती होगी। उसके मन में उदासी छा जाती होगी। वह अपनी विवशता पर दुःखी होता होगा।

अपूर्व अनुभव के प्रश्न उत्तर Class 7 HBSE प्रश्न 3.
पाठ में खोजकर देखिए-कब सुरज का ताप यासुकी-चान और तोत्तो-चान पर पड़ रहा था, वे दोनों पसीने से तरबतर हो रहे थे और कब बादल का एक टुकड़ा उन्हें छाया देकर कड़कती धूप से बचाने लगा था। आपके अनुसार इस प्रकार परिस्थिति के बदलने का कारण क्या हो सकता है?
उत्तर :
जब यासुकी-चान और तोत्तो-चान एक सीढ़ी के द्वारा पेड़ की द्विशाखा तक जा पहुँचे तब उन पर सूरज का ताप पर पड़ रहा था। उन्हें काफी पसीना आ रहा था। वे दोनों पसीने से तरबतर हो रहे थे। जब तोत्तो-चान अपनी पूरी ताकत से यासुकी-चान को खींच रही थी तभी बादल का एक बड़ा टुकड़ा बीच-बीच में छाया कर उन्हें कड़कती धूप से बचाने लगा।
यह मौसम का बदलाव था।

अपूर्व अनुभव का सारांश HBSE 7th Class प्रश्न 4.
“यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह ……..” अंतिम मौका था।” इस अधूरे वाक्य को पूरा कीजिए और लेखिका ने ऐसा क्यों लिखा होगा?
उत्तर :
लेखिका ने ऐसा इसलिए लिखा होगा क्योंकि यासुकी-चान के लिए स्वयं अपने बूते पर चढ़ना लगभग असंभव था। उसे हर बार तोत्तो-चान जैसा सहयोगी मिल पाना कठिन था। एक बार पेड़ पर चड़ने पर ही उसे घोर परिश्रम करना पड़ा था।

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पाठ से आगे

Apoorv Anubhav Question Answer Class 7 HBSE प्रश्न 1.
तोत्तो-चान ने अपनी योजना को बड़ों से इसलिए छिपा लिया कि उसमें जोखिम था, यासुकी-चान के गिर जाने की संभावना थी। फिर भी उसके मन में यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने की दृढ़ इच्छा थी। ऐसी दृढ़ इच्छाएँ बुद्धि और कठोर परिश्रम से अवश्य पूरी हो जाती हैं। आप किस तरह की सफलता के लिए तीव्र इच्छा और बुद्धि का उपयोग कर कठोर परिश्रम करना चाहते हैं ?
उत्तर :
हम जोखिम भरा काम करना पसंद करेंगे क्योंकि कुछ पाने के लिए जोखिम तो उठाना ही पड़ता है।

Class 7 Hindi Chapter 10 Apoorv Anubhav Question Answer  प्रश्न 2.
हम अकसर बहादुरी के बड़े-बड़े कारनामों के बारे में सुनते रहते हैं, लेकिन ‘अपूर्व अनुभव’, कहानी एक मामूली बहादुरी और जोखिम की आर हमारा ध्यान खींचती है। यदि आपको अपने आसपास के संसार में कोई रोमांचकारी अनुभव प्राप्त करना हो तो कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर :
एक बार की बात है कि हम एक नदी के किनारे पिकनिक पर गए हुए थे तभी एक लड़का पानी में उतर गया। पानी की लहर उसे बहाकर दूर तक ले गई। वह चिल्लाने लगा-बचाओ-बचाओ। मैंने उसकी आवाज सुन ली। मैं दौडकर उस तक गया। मैं तैरना जानता था। अत: कपड़े उतारकर नदी के पानी में कूद गया। मैंने उस तक पहुँचकर उसका हाथ पकड़ लिया और अपनी ओर खींचने लगा। यद्यपि मैं भी घबरा रहा था, पर उसे किनारे तक खींच लाया। उसके पेट में पानी भर गया था अत: उसे जमीन पर लिटाकर कमर पर दबाव डाला। इससे उसके मुंह के रास्ते पेट का पानी निकल गया। थोड़ी देर में वह ठीक हो गया।
तब तक अध्यापक एवं अन्य साथी आ गए थे। सभी ने मेरी प्रशंसा की। मुझे अपने साहस पर हैरानी हो रही थी।

HBSE 7th Class Hindi अपूर्व अनुभव Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

अपूर्व अनुभव पाठ के प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 1.
तोत्तो-चान ने किसको क्या निमत्रंण दिया?
उत्तर :
तोते-चान ने यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ने का निमंत्रण दिया।

अपूर्व अनुभव प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 2.
बच्चे किसे अपनी निजी सम्पत्ति मानते थे?
उत्तर :
बच्चे अपने-अपने पेड़ को अपनी निजी सम्पत्ति मानते थे।

अपूर्व अनुभव के प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class प्रश्न 3.
यासुकी-चान किस रोग से ग्रस्त था?
उत्तर :
यासुकी-चान पोलियो रोग से ग्रस्त था।

पाठ 10 अपूर्व अनुभव HBSE 7th Class प्रश्न 4.
तोत्तो-चान को यासुकी-चान कहाँ मिला?
उत्तर :
उसे यासुकी-चान मैदान में क्यारियों के पास मिला।

Apurv Anubhav Class 7 HBSE प्रश्न 5.
तोत्तो-चान यासुकी-चान को कहाँ ले गई?
उत्तर :
तोत्तो-चान यासुकी-चान को अपने पेड़ की ओर ले गई।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 10 अपूर्व अनुभव

अपूर्व अनुभव HBSE 7th Class प्रश्न 6.
यासुकी-चान बिना सहारे के सीढ़ी पर क्यों नहीं चढ़ पाया?
उत्तर :
यासुको-चान के हाथ-पैर बहुत कमजोर थे।

अपूर्व अनुभव शब्दार्थ HBSE 7th Class प्रश्न 7.
तोत्तो-चान को चौकीदार के घर से क्या मिल गया?
उत्तर :
उसे वहाँ से एक तिपाई सीढ़ी मिल गई।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

अपूर्व अनुभव पाठ का सारांश HBSE 7th Class प्रश्न 1.
तोत्तो-चान कौन थी? उसकी हार्दिक इच्छा क्या थी?
उत्तर :
तोत्तो-चान एक जापानी लड़की थी। उसकी यह हार्दिक इच्छा थी कि उसका अपंग साथी यासुकी-चान उसके पेड़ पर आकर उसकी चीजों एवं दुनिया को देखे।

प्रश्न 2.
तोत्तो-चान के चरित्र की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :
तोत्तो-चान एक सहृदय बालिका है। उसके मन में अपने साथी के लिए असीम प्यार एवं सम्मान की भावना है। वह उसे भी वह खुशी देना चाहती हैं जो दूसरे बालकों को मिलती है। तोत्तो-चान परोपकारी है। वह दूसरों का भला करती है। तोत्तो-चान परिश्रमी है। वह परिश्रमपूर्वक सीढ़ी तथा तिपाई झोंपड़ी से खींचकर ले आती है।

प्रश्न 3.
यासुकी-चान किसी पेड़ को अपना क्यों नहीं कह पाता?
उत्तर :
यासुकी-चान पोलियोग्रस्त है। उसके हाथ-पैर काम नहीं करते। अत: वह किसी भी पेड़ पर चढ़ नहीं पाता। यही कारण है कि वह किसी पेड़ को अपना नहीं कह पाता। कोई पेड़ उसकी निजी संपत्ति नहीं बन सकता।

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अपूर्व अनुभव गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. बच्चे अपने ……………………….. जरूर डाँटते।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. बच्चे अपने पेड़ को क्या मानते थे ?
2. किसी दूसरे के पेड़ पर चढ़ने से पूर्व क्या करना पड़ता था?
3. कोन, किस कारण पंड़ पर नहीं चढ़ पाता था ?
4. किसने, किसको, कहाँ आमंत्रित किया था?
उत्तर :
1. बच्चे अपने-अपने पेड़ को अपनी निजी संपत्ति मानते थे।
2 किसी दूसरे के पेड़ पर चढ़ने से पूर्व उस पेड़ के स्वामी से शिष्टतापूर्वक पूछना पड़ता था-“माफ कीजिए, क्या मैं अंदर आ जाऊँ ?”
3. यासुकी-चान किसी पेड़ पर नहीं चढ़ पाता था क्योंकि उसको पोलियो था। वह किसी पेड़ को अपनी संपत्ति भी नहीं मानता था।
4. तोत्तो-चान ने यासुकी चान को अपने पेड़ पर आमंत्रित किया था।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. बच्चे किसे अपनी सम्पत्ति मानते थे?
(क) स्वयं को
(ख) अपने पेड़ को
(ग) अपनी जगह को
(घ) किसी को नहीं
उत्तर :
(ख) अपने पेड़ को

2. थासुकी-चान को क्या रोग था?
(क) पोलियो
(ख) अंधापन
(ग) बहरापन
(घ) हकलापन
उत्तर :

3. यासुकी-चान को किसके लिए आमंत्रित किया गया था?
(क) खाना खाने के लिए
(ख) पेड़ पर चढ़ने के लिए
(ग) आपस में मिलने के लिए
(घ) कहीं चलने के लिए
उत्तर :
(ख) पेड़ पर चढ़ने के लिए

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2. यासुकी-चान ……………… क्या करे वह?

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. तोत्तो-चान ने पेड़ पर चढ़ने का क्या उपाय किया था?
2. क्या यासुकी-चान सीढ़ी पर चढ़ गया? क्यों?
3. तोत्तो-चान ने क्या प्रयास किया?
4. दोनों की क्या दशा थी?
उत्तर :
1. तोत्तो-चान चौकीदार के छप्पर से एक सीढ़ी पेड़ तक घसीट लाई थी और उसे तने के सहारे लगा दिया था ताकि द्विशाखा तक पहुँचा जा सके।
2. नहीं, यासुकी-चान पहली सीढ़ी पर भी बिना सहारे के नहीं चढ़ पाया। पोलियो के कारण उसके हाथ-पैर बहुत कमजोर थे।
3. तोत्तो-चान यासुकी-धान को पीछे से धकियाने लगी, जिससे वह सौढ़ी पर चढ़ सके।
4. यासुकी-चान ने अपना पैर सीढ़ी से हटा लिया। वह हताशा में सिर झुकाकर खड़ा हो गया। तोत्तो-चान ने भी समझ लिया कि यह काम उतना आसान नहीं है जितना उसने समझा था।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. यासुकी-चान का कौन-सा अंग कमजोर था?
(क) मस्तिष्क
(ख) हाथ-पैर
(ग) आँखें
(घ) कोई नहीं
उत्तर :
(ख) हाथ-पैर

2. पेड़ से नीचे कौन उतर आया?
(क) यासुकी-चान
(ख) तोत्तो-चान
(ग) वायु चान
(घ) माओ चान
उत्तर :
(ख) तोत्तो-चान

3. यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ाने का काम कैसा था?
(क) आसान
(ख) कठिन
(ग) पक्का
(घ) ठीक
उत्तर :
(ख) कठिन

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3. यासुकी-चान ……………. रही थी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. किसकी क्या इच्छा थी?
2. तोत्तो-चान किस प्रयास में लगी थी?
3. तोत्तो-चान ने क्या उपाय किया?
4. तोतो-चान किस बात पर हैरान थी?
उत्तर :
1. तोत्तो-चान की यह हार्दिक इच्छा थी कि यासुकी-चान उसके पेड़ पर चढ़े।
2. जय तोत्तो-चान ने यासुकी-चान का उदास-लटका चेहरा देखा तो वह उसे हँसाने के प्रयास में लग गई। उसने अपना गाल फुलाकर तरह-तरह के चेहरे बनाए।
3. तोत्तो-चान चौकीदार के छप्पर की चोर दौड़ी गई। वहाँ उसे एक तिपाई-सीढ़ी मिल गई इसे थामे रहना भी जरूरी नहीं था।
4. तोत्तो-चान इस बात पर हैरान थी कि उसमें इतनी शक्ति कहाँ से आ गई कि वह तिपाई-सीढ़ी को यहाँ तक खींच लाने में सफल हो सकी। यह तिपाई-सीढ़ी द्विशाखा तक पहुंच गई।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘यह उसकी हार्दिक इच्छा थी’-किसकी?
(क) यासुकी-चान की
(ख) तोत्तो-चान की
(ग) दोनों की
(घ) किसी की नहीं
उत्तर :
(ख) तोत्तो-चान की

2. उदास कौन था?
(क) यासुकी-चान
(ख) तोत्तो-चान
(ग) कोई नहीं
(घ) सभी
उत्तर :
(क) यासुकी-चान

3. तोत्तो-चान को चौकीदार के छप्पर से क्या वस्तु मिली?
(क) तिपाई-सीढ़ी
(ख) चारपाई
(ग) कुरसी
(घ) स्टूल
उत्तर :
(क) तिपाई-सीढ़ी

4. तिपाई की ऊपरी सीढ़ी कहाँ तक पहुँच गई?
(क) छत तक
(ख) द्विशाखा तक
(ग) पेड़ तक
(घ) घर तक
उत्तर :
(ख) द्विशाखा तक

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4. काफी मेहनत …………. लड़ाते रहे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. किसकी, किस मेहनत के बाद यासुको-चान पेड़ की द्विशाखा पर पहुंच पाया था?
2. तोत्तो-चान ने यासुकी-चान से क्या कहा?
3. यासुकी-चान ने किस मुद्रा में क्या पूछा?
4. यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़कर क्या अनुभूति हुई?
उत्तर :
1. तोत्तो-चान ने यासुकी-चान की पोलियोग्रस्त उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फंसाकर उसे पूरी ताकत से ऊपर खींचा था। तभी वह पेड़ की द्विशाखा पर पहुंच पाया था।
2. तोत्तो-चान ने यासुकी-चान के सम्मान में सिर झुकाकर कहा कि मेरे पेड़ पर तुम्हारा स्वागत है।
3. यासुकी-चान ने मुसकराते हुए तोत्तो-चान से पूछा कि क्या वह अंदर आ सकता है ?
4. यासुकी-चान ने पेड़ पर चढ़कर दुनिया की नई झलक देखी। इसे उसने पहले कभी नहीं देखा था। उसे पेड़ पर चढ़ने का विचित्र अनुभव हुआ।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. तोत्तो-चान ने यासुकी-चान का स्वागत कहाँ किया?
(क) अपने पेड़ पर
(ख) जमीन पर
(ग) तिपाई पर
(घ) सीढ़ी पर
उत्तर :
(क) अपने पेड़ पर

2. यासुकी-चान ने क्या पूछा?
(क) क्या पेड़ पर स्वागत है?
(ख) क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?
(ग) क्या मैं पेड़ पर चढ़ सकता हूँ?
(घ) क्या ऐसे चढ़ा जाता है?
उत्तर :
(ख) क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?

3. यासुकी-चान ने पेड़ पर क्या देखा?
(क) दुनिया की नई झलक
(ख) पेड़ों का दृश्य
(ग) नीला आसमान
(घ) सभी कुछ
उत्तर :
(क) दुनिया की नई झलक

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अपूर्व अनुभव Summary in Hindi

अपूर्व अनुभव पाठ का सार

इस कहानी में दो पात्र हैं-एक बालिका तोत्ता-चान और उससे एक साल बड़ा लड़का यासुकी-चान। यासुकी-चान को पोलियों था अतः वह किसी पेड़ पर नहीं चढ़ पाता था। सभागार में शिविर लगने के दो दिन बाद तोखे चान को एक साहसपूर्ण काम करने का दिन आया। उसने अपंग यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ने का न्योता दिया। तोमोए में प्रत्येक बच्चा बाग के एक-एक पेड़ को अपने खुद के चढ़ने का पेड़ मानता था। तोत्ता-चान अक्सर खाने की छुट्टी के समय या स्कूल के बाद पेड़ के ऊपर चढ़ी मिलती थी।

सभी बच्चे अपने-अपने पेड़ को निजी संपत्ति मानते थे। किसी दूसरे के पेड़ पर चढ़ने से पूर्व पूछना पड़ता था। यासुकी-चान पोलियोग्रस्त होने के कारण किसी पेड़ को अपना नहीं मान पाता था। घर से निकलते समय तोत्तो चान ने झूठ बोला था कि वह यासुकी-चान के घर डेनेनचोफु जा रही है पर उसने रॉकी को सच बता दिया था। जब तोत्तो-चान स्कूल पहुँची तो उसे यासुकी-चान मैदान में क्यारियों के पास मिला। जैसे ही यासुकी चान ने तोत्तो चान को देखा, वह पैर घसीटता हुआ उसकी ओर आया।

तोत्ता-चान यासुकी-चान को अपने पेड़ की ओर ले गई। वह चौकीदार के छप्पर से एक सीढ़ी घसीट लाई और उसे तने के सहारे ऐसे लगा दिया, जिससे वह द्विशाखा तक पहुँच जाए। उसने सीढ़ी को पकड़ लिया और यासुकी-चान को ऊपर चढ़ने की कोशिश करने को कहा, पर उसके हाथ-पैर इतने कमजोर थे कि वह बिना सहारे के पहली सीढ़ी भी नहीं चढ़ पाया।

वह सिर झुकाकर खड़ा हो गया। तोत्तो-चान कोई और उपाय सोचने लगी। वह चौकीदार के छप्पर से एक तिपाई-सीढ़ी खींच लाई। वह सीढ़ी द्विशाखा तक पहुँच रही थी। यासुकी-चान ने घबराकर तिपाई-सीढ़ी की ओर देखा। उसे पसीना आ रहा था। उसने निश्चय के साथ पाँव उठाकर पहली सीढ़ी पर रखा। तोत्तो-चान उसकी मदद कर रही थी।

यासुको-चान पूरी शक्ति के साथ जूझ रहा था और आखिर वह ऊपर पहुँच गया, पर तभी सारी मेहनत बेकार होती लगने लगी। तोत्तो चान तो सीढ़ी पर से द्विशाखा पर छलांग लगाकर पहुँच गई, पर यासुकी-चान को सीढ़ी से पेड़ पर लाने की हर कोशिश बेकार रही। तोत्तो चान की रुलाई छूटने को थी, क्योंकि वह चाहती थी कि वह यासुकी-चान को अपने पेड़ पर आमंत्रित कर तमाम नई-नई चीजें दिखाए।

तोत्तो चान ने यासुकी-चान की पोलियो से पिचकी और अकड़ी उँगलियों को अपने हाथ में थाम लिया और बोली-“तुम लेटे रहो, मैं तुम्हें पेड़ पर खींचने की कोशिश करती हूँ।” यह कहकर वह पूरी ताकत से यासुकी-चान को खींचने लगी। काफी मेहनत के बाद दोनों आमने-सामने पेड़ की द्विशाखा पर थे। तोत्तो ने सम्मान से सिर झुकाकर कहा-“मेरे पेड़ पर तुम्हारा स्वागत है।” यासुकी-चान ने मुस्कराते हुए पूछा-“क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?”

उस दिन यासुकी-घान ने दुनिया की एक ऐसी नई झलक देखी जैसी उसने पहले कभी नहीं देखी थी। वे दोनों गप्पें लड़ाते रहे। यासुकी-चान ने उमंग में भरकर बताया कि उसकी बहन अमेरिका में है। उसने एक चीज टेलीविजन के बारे में बताया है। वह कहती है कि इसमें वह सूमो-कुश्ती भी देख सकेगा। तोत्तो-चान सोचती रही कि सूमो पहलवान किसी डिब्बे में कैसे
समा सकता है।

अपूर्व अनुभव शब्दार्थ

उदास = निराश, दु:खी होना (Sad)। छप्पर = झोंपड़ी के ऊपर घास-पूस की छत (Hut), तिपाई = तीन पाँवों/पैरों वाली (Stool)। धामे = पकड़े (Caught)। तरबतर = लथपथ, डूबे हुए (Drenched)। तमाम = समस्त, सारी (Total)। जोखिम = खतरा (Danger)। भरोसा = विश्वास (Belief) झिझकता हुआ = हिचक या संकोच के साथ धीरे-धीरे (Hesitated)। सम्मान से = आदर के साथ (With regard)। झलक = तस्वीर (Picture)। सूमों = (जापानी पहलवान जो कुश्ती लड़ते हैं उन्हें सूमों बोला जाता है।) (A wrestler)। ताकना = देखना (To see)। आमंत्रित = बुलाया हुआ (Invited) स्थिर = टिका हुआ (Stable)। संपत्ति = प्रापर्टी (Property)। हताशा = निराशा (Distress)। हैरान = आश्चर्यचकित (Surprised)। सभागार = बैठक करने का बड़ा कक्ष (Meeting Place)। शिविर = किसी निश्चित उद्देश्य से एकत्र होना (Camp)। द्विशाखा = दो शाखाएँ (Two wigs)। निजी = अपनी (Own)। सूना = खाली-खाली, सुनसान (Empty place)। उत्तेजित = जोश में आना (Excited)। भेद = अंतर (Difference)।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान

HBSE 7th Class Hindi शाम एक किशान Textbook Questions and Answers

कविता से

शाम एक किसान शब्दार्थ HBSE Class 7 प्रश्न 1.
इस कविता में शाम के दृश्य को किसान के रूप में दिखाया गया है-यह एक रूपक है। इसे बनाने के लिए पाँच एकरूपताओं की जोड़ी बनाई गई है। उन्हें उपमा कहते हैं। पहली एकरूपता आकाश और सोफे में दिखाते हुए कविता में ‘आकाश का साफा’ वाक्यांश आया है। इसी तरह तीसरी एकरूपता नदी और चादर में दिखाई गई है, मानों नदी चादर-सी हो। अब आप दूसरी, चौथी और पाँचवी एकरूपताओं को खोजकर लिखिए।

  • इस प्रकार की दूसरी एकरूपता दिखाने वाली उपमाओं को कविता से खोजकर सूची बनाइए।

उत्तर :
एकरूपता दिखाने वाली उपमाएँ
1. पहाड़ – किसान
2. नदी – चादर
3. पलाश का जंगल – दहकती अँगीठी
4. अंधकार – भेड़ों का गल्ला।

शाम एक किसान कविता का सारांश HBSE Class 7 प्रश्न 2.
शाम का दृश्य अपने घर की छत या खिड़की से देखकर बताइए
(क) शाम कब से शुरू हुई ?
(ख) तब से लेकर सूरज डूबने में कितना समय लगा?
(ग) इस बीच आसमान में क्या-क्या परिवर्तन आए?
उत्तर :
(क) सायं छह बजे शुरू हुई।
(ख) आधे घंटे का समय लगा।
(ग) आसमान में लालिमा छा गई, आकाश पीला-पीला हो गया और अंत में सूरज आँखों से ओझल हो गया।

शाम एक किसान के प्रश्न उत्तर HBSE Class 7 प्रश्न 3.
मोर के बोलने पर कवि को लगा जैसे किसी ने कहा हो-‘सुनते हो’। आगे दिए गए पक्षियों की बोली सुनकर उन्हें भी एक या दो शब्दों में बाँधिए –
कबूतर, कौआ, मैना, तोता, चील, हंस.
उत्तर:

  1. कबूतर-गुटरगूं
  2. कौआ-काँव-काँव
  3. चील-चें-चें

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान

कविता से आगे

Class 7 Hindi Chapter 8 HBSE प्रश्न 1.
इस कविता को चित्रित करने के लिए किन-किन रंगों का प्रयोग करना होगा ?
उत्तर :
पीला, सुनहरा, सफेद, लाल रंगों का प्रयोग करना होगा।

शाम एक किसान कविता की व्याख्या HBSE Class 7 प्रश्न 2.
शाम के समय ये क्या करते हैं, पता लगाइए और लिखिए
पक्षी, खिलाड़ी, फलवाले, माँ, पेड़-पौधे, पिताजी, किसान, बच्चे.
उत्तर :

  1. पक्षी : घोंसलों की ओर लौट जाते हैं।
  2. खिलाड़ी : खेलना बंद कर देते हैं।
  3. फल वाले : फल बेचते हैं।
  4. माँ : बच्चों के लिए खाना पकाने की तैयारी करती है।
  5. पेड़-पौधे : सोने लगते हैं।
  6. पिताजी : घर लौट आते हैं।
  7. किसान : खेतों से लौट आते हैं। गाय-भैंसों का दूध निकालते हैं।
  8. बच्चे : गृह कार्य करते हैं।

शाम एक किसान के शब्दार्थ HBSE Class 7 प्रश्न 3.
हिंदी के एक प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत ने संध्या का वर्णन इस प्रकार किया है
संध्या का झुटपुट, कौओं का झुटपुट, चहक रही है चिड़ियाँ, टी वी टी टुर-टुर,
ऊपर दी गई कविता और सर्वेश्वरदयाल की कविता में आपको क्या मुख्य अंतर लगा ? लिखिए।
उत्तर :
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने संध्याकालीन दृश्य का किसान के रूप में रूपक बाँधकर प्रस्तुत किया है जबकि कवि पंत ने संध्याकाल में विभिन्न पक्षियों की आवाजों को सुनवाया है।

HBSE 7th Class Hindi शाम एक किशान Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

शाम एक किसान प्रश्न उत्तर HBSE Class 7 प्रश्न 1.
कविता में पहाड़ को किस रूप में दर्शाया गया है?
उत्तर :
कविता में पहाड़ को साफा बाँधे किसान के रूप में दर्शाया गया है।

शाम एक किसान कविता के प्रश्न उत्तर HBSE Class 7 प्रश्न 2.
इस किसान के घुटनों पर क्या है?
उत्तर :
इस किसान के घुटनों पर चादर है।

शाम एक किसान Question Answer HBSE Class 7 प्रश्न 3.
किसे अंगीठी बताया गया है और क्यों?
उत्तर :
पलाश के जंगल को अँगीठी बताया गया है क्योंकि पलाश के लाल-लाल फूल आग की तरह दहकते प्रतीत होते हैं।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान

शाम एक किसान व्याख्या HBSE Class 7 प्रश्न 4.
‘भेड़ों के गल्ले-सा’ किसे कहा गया है?
उत्तर :
अंधकार को भेड़ों के गल्ले-सा कहा गया है।

Chapter 8 Shaam Ek Kisan HBSE Class 7 प्रश्न 5.
मोर की आवाज़ कैसी लगी?
उत्तर :
जैसे किसी के कहा हो-‘सुनते हो?’

लघुत्तरात्मक प्रश्न

Shaam Ek Kisan Class 7th HBSE प्रश्न 1.
किसको किस रूप में चित्रित किया गया है ?
पहाड़, नदी, पलाश के जंगल को, डूबते सूरज को, आकाश को
उत्तर :

  1. पहाड़ को : किसान के रूप में
  2. नदी को : चादर के रूप में
  3. पलाश के जंगल को : दहकती अँगीठी के रूप में।
  4. डूबते सूरज को : चिलम के रूप में।
  5. आकाश को : किसान के साफे के रूप में।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान

शाम एक किसान HBSE Class 7 प्रश्न 2.
चिलम औंधी क्यों हो गई?
उत्तर :
सूरज चिलम के रूप में था। अंधकार होते ही सूरज डूब गया और इसके साथ चिलम का आकार भी गायब हो गया। इससे ऐसा लगा कि किसान की चिलम औंधी हो गई है।

शाम एक किशान काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. आकाश का …………… गल्ले-सा।

शब्दार्थ: आकाश = आसमान (Sky)सूरज = सूर्य (Sun), बहकना = जलना (To burn)

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग :
प्रस्तुत पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित कविता ‘शाम : एक किसान’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं। इसमें कवि ने जाई की शाम में पहाड़ को एक किसान के रूप में चित्रित किया है।

व्याख्या :
कवि जाड़े की शाम के प्राकृतिक दृश्य का चित्रण करते हुए कहता है कि इस दृश्य में पहाड़ एक किसान की तरह दिखाई देता है। आकाश उसके सिर के साफे के समान है। सूरज चिलम के समान प्रतीत होता है जिसे वह दम लगाकर खींचता – है। पहाड़ के नीचे नदी बहती रहती है और यह नदी पहाड़ रूपी किसान के घुटनों पर पड़ी चादर के समान प्रतीत होती है। सर्दी भगाने के लिए इस किसान के पास अंगीठी दहक रही है। पलाश के लाल-लाल फूलों को अंगीठी का रूप दिया गया है। पूरब दिशा में क्षितिज पर होता अंधकार झुंड में बैठी भेड़ों जैसा प्रतीत होता है। पश्चिम दिशा में डूबता सूरज इस पहाड़ रूपी किसान की चिलम है। यह पूरा दृश्य शांत है।

विशेष :
1. प्रकृति का मनोहारी चित्रण किया गया है।
2. ‘भेड़ों का गल्ला-सा’ में उपमा अलंकार है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कॉन, किस रूप में बैठा है?
2. नदी किसके समान प्रतीत होती है?
3. किसे दहकती अंगीठी बताया गया है?
4. अंधकार कैसा लग रहा है?
उत्तर:
1. पहाड़ एक किसान के रूप में बैठा है। उसने सिर पर साफा बाँध रखा है तथा चिलम पी रहा है।
2 पहाड़ के नीचे की नदी किसान के घुटनों पर पड़ी चादर के समान प्रतीत होती है।
3. पलाश के लाल-लाल फूलों को दहकती अंगीठी बताया गया है।
4. अंधकार दूर सिमटा भेड़ों के गल्ले के समान लग रहा है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. इस कविता के रचयिता कौन है?
(क) सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
(ख) सुमित्रानंदन पंत
(ग) रघुवरदयाल सक्सेना
(घ) मैथिलीशरण गुप्त
उत्तर :
(ख) सुमित्रानंदन पंत

2. पहाड़ किस रूप में है?
(क) किसान के रूप में
(ख) साफा बाँधे हुए
(ग) चिलम खींचता
(घ) ये सभी रूप
उत्तर :
(घ) ये सभी रूप

3. कौन-सी अंगीठी दहक रही है?
(क) पलाश के जंगल की
(ख) कोयले की
(ग) लकड़ी की
(घ) प्रकृति की
उत्तर :
(क) पलाश के जंगल की

4. ‘भेड़ों के गल्ले-सा’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) यमक
उत्तर :
(ख) उपमा

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2. अचानक – बोला …………………….. छा गया।

सप्रसंग व्याख्या
प्रसंग :
प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित कविता ‘शाम : एक किसान’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता सर्वेश्वरदयाल सक्सेना है। इसमें कवि ने जाडे की शाम में पहाड़ को एक किसान के रूप में चित्रित किया है।

व्याख्या :
कवि जाड़े की संध्या का चित्रण करते हुए बताता है कि अभी तक सारा वातावरण शांत था। अचानक मोर बोल उठता है, मानो किसी ने आवाज़ लगाई हो-‘सुनते हो?’ इसके बाद प्रकृति में सारा दृश्य घटना में बदल जाता है–चिलम उलट जाती है, आग बुझ जाती है, धुआँ उठने लगता है.सूरज डूब जाता है, शाम ढल जाती है और रात का अँधेरा छा जाता है।

विशेष : संध्याकालीन वातावरण का सजीव चित्रण किया गया है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. इस कविता के रचयिता कौन हैं?
2 इस कविता में किस वातावरण का चित्रण है?
3. दृश्य में क्या परिवर्तन आ जाता है?
उत्तर:
1. इस कविता के रचयिता सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं।
2. इस कविता में जाड़े की एक संध्या के वातावरण का चित्रण है।
3. मोर के बोलते ही अर्थात् संध्या के होते ही सारा प्राकृतिक वातावरण बदल जाता है-सूरज डूब जाता है, रात का अंधेरा छाने लगता है। लगता है, चिलम औंधी हो गई है, आग बुझ गई है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. अचानक कौन बोल उठा?
(क) मोर
(ख) किसान
(ग) तांता
(घ) किसान की पत्नी
उत्तर :
(क) मोर

2. “चिलम औंधी होना’ किसका प्रतीक है?
(क) सूरज डूबने का
(ख) सूरज चमकने का
(ग) दिन छपने का
(घ) रात होने का
उत्तर :
(क) सूरज डूबने का

3. कौन-सा शब्द ‘सूरज’ का पर्यायवाची नहीं है
(क) रवि
(ख) दिनकर
(ग) भास्कर
(घ) शशि
उत्तर :
(घ) शशि

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शाम एक किशान Summary in Hindi

शाम एक किशान कवि-परिचय

प्रश्न : कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के जीवन एवं साहित्य का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर :
जीवन एवं साहित्यिक परिचय :
आधुनिक हिंदी साहित्य की नई कविता के कवियों में श्री सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का नाम अग्रगण्य है। आपका जन्म 15 सितंबर, 1927 को उत्तर ‘प्रदेश स्थित बस्ती में हुआ। आपने एंग्लों संस्कृत विद्यालय, बस्ती से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की और क्वीस कॉलेज वाराणसी में प्रवेश लिया।

तत्पश्चात् आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। शिक्षा क्षेत्र में अध्यापन करने के उपरांत आपने आकाशवाणी में सहायक प्रोड्यूसर के रूप में कार्य किया। सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ने कुछ दिन दिनमान के प्रमुख उपसंपादक पद पर भी कार्य किया। बाद में बच्चों की पत्रिका ‘पराग’ का संपादन कार्य भी किया। आपका देहावसान 25 सितंबर, 1984 को हुआ।

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ‘तीसरा तारसप्तक’ के कवि हैं। छायावाद के उपरांत नई कविता के कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सुमित्रानंदन पंत ने सक्सेना जी की साहित्य कला दृष्टि की सराहना की है तथा उन्हें सहज-प्रयत्न कवि और नए कवियों में कलाबोध का पारखी बताया है। उनके काव्य में रोमानियत और सम-सामयिकता पाई जाती है। वे समष्टि चेतना और व्यष्टि चेतना के प्रति सजग हैं। आपने कविता के नए-नए विषयों की ओर ध्यान दिया है। सक्सेना जी ने जीवन के विविध पक्षों को अपनी कविता में नए रंग-ढंग से व्यक्त किया है।

भाषा-शैली :
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना खड़ी बोली के कवि हैं। उन्हें छंदमुक्त कविता अभीष्ट है। आपकी भाषा सरल और स्पष्ट है। कविता में कहीं-कहीं तीखे व्यंग्य पाए जाते हैं। कविता में बिंब योजना और प्रतीकात्मकता विशेष रूप से परिलक्षित होती है। भाषा प्रसाद गुण युक्त है। भाषा में तत्सम शब्दों के साथ स्थानीय शब्दों का अदभुत समन्वय है तथा कल्पना की प्रधानता है। चित्रात्मकता के साथ मानवीकरण उनकी अनूठी विशेषता है।

रचनाएँ : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार हैं। आपकी साहित्यिक कृतियाँ निम्न प्रकार हैं

काव्य कृतियाँ : काठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, एक सूनी नाव, गर्म हवाएँ, जंगल का दर्द, खूटियों पर टंगे लोग आदि।

नाटक : बकरी, कल फिर भात आएगा, लड़ाई, अब गरीबी हटाओ, राज-बाज बहादुर और रानी रूपमती आदि।

उपन्यास : पागल कुत्तों का मसीहा, सोया हुआ जल। लेख संग्रह : चरचे और चरखे आदि।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 8 शाम एक किशान

शाम एक किशान कविता का सार

‘शाम : एक किसान’ शीर्षक कविता सर्वेश्वरदयाल सक्सेना द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने जाड़े की शाम के दृश्य को एक किसान के रूप में दर्शाया है। यह कविता एक रूपक है। इस कविता में शाम के दृश्य और किसान के बीच एकरूपता दिखाई गई है।

जिस प्रकार किसान सिर पर साफा बाँधकर चिलम खींचता या पीता है, उसी प्रकार पहाड़ (जो एक किसान के रूप में है) आकाश रूपी साफा बाँधकर और सूरज की चिलम को खींचता दिखाई देता है। जिस प्रकार किसान के घुटनों पर चादर पड़ी रहती है उसी प्रकार शाम के घुटनों पर नदी पड़ी रहती है। सर्दी भगाने के लिए किसान अँगीठी जलाता है।

शाम की अँगीठी है-पलाश के जंगल। इनमें लाल-लाल फूल आग की तरह दहकते हैं। अंधकार भेड़ों के गल्ले के समान दूर छिपकर बैठा रहता है। तभी अचानक बोल उठा, मानो कोई आवाज़ दे रहा हो। उस समय वह चिलम उल्टी हो गई, धुआँ उठने लगा और सूरज डूब गया तथा चारों ओर अंधेरा छा गया।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

Haryana State Board HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

सड.कल्पः सिद्धिदायकः Class 7 Question Answer प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुत-
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः-1
उत्तर
छात्राः स्वयमेव उच्चारणं कुर्वन्तु।

Sanskrit Class 7 HBSE प्रश्न 2.
उदाहरणम् अनुसृत्य रिक्तस्थानानि पूरयत
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः-2
उत्तर
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः-3

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

HBSE 7th Class Sanskrit सड.कल्पः सिद्धिदायकः प्रश्न 3.
प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत
(क) निर्भयं नंकः स्वयमेव रक्षति?
(ख) पार्वती तपस्यार्थ कत्र अगच्छत?
(ग) कः अशिवं चरति ?
(घ) शिवनिन्दां श्रुत्वा का क्रुद्धा जाता?
(ङ) वटुरूपेण तपोवनं कः प्राविशत् ?
उत्तर:
(क) ईश्वरः
(ख) कानने
(ग) शिवः
(घ) पार्वती
(ङ) शिवः।

HBSE 7th Class Sanskrit Ruchira Chapter 7 प्रश्न 4.
कः/का कं/कां प्रति कथयति –

कः/काकम्/काम्
यथा-वत्से! क्व कठिनं तपः ?मातापार्वतीम्
(क) अम्ब ! पतिरूपेण शिवं प्राप्तुं तपस्यां करिष्यामि।…………………………
(ख) अत्रैव व्रतादिकं कुरु।…………………………
(ग) अयि पार्वति! सत्यमेव त्वं शिवं पतिमिच्छसि ?…………………………
(घ) अपसर, अरे वाचाल !…………………………
(ङ) पार्वति ! प्रीतोस्मि तव तपस्यया।…………………………

उत्तर

कः/काकम्/काम्
यथा-वत्से! क्व कठिनं तपः ?मातापार्वतीम्
(क) अम्ब ! पतिरूपेण शिवं प्राप्तुं तपस्यां करिष्यामि।पार्वतीमातरम् प्रति
(ख) अत्रैव व्रतादिकं कुरु।मातापार्वतीम् प्रति
(ग) अयि पार्वति! सत्यमेव त्वं शिवं पतिमिच्छसि ?वटु:पार्वतीम् प्रति
(घ) अपसर, अरे वाचाल !पार्वतीवटुम्
(ङ) पार्वति ! प्रीतोस्मि तव तपस्यया।शिवःपार्वतीम्।

प्रश्न 5.
प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
(क) वटुं दृष्ट्वा पार्वती सादरं किम् अवदत् ?
(ख) वटुः पार्वतीं किम् अपृच्छत् ?
(ग) नारदवचनप्रभावात् पार्वती किं कर्तुम् ऐच्छत् ?
उत्तर:
(क) वटुं दृष्ट्वा पार्वती सादरम् अवदत्-‘वटो! स्वागतं ते। उपविशतु भवान्।’
(ख) वटुः पार्वतीम् अपृच्छत्-‘हे तपस्विनि ! किमर्थं कठिनं तपः समाचरसि ? स्वकीयाम् तनुं च मलिनां करोषि।’
(ग) नारदवचनप्रभावात् पार्वती तपस्यां कर्तुम् ऐच्छत्।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

प्रश्न 6.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा समानार्थकानि पदानि लिखत –
मञ्जूषा
माता, दृष्ट्वा, कानने, जन्तवः।
वने …………
पशवः ……………….
जननी ……………….
नयनानि ……………….
विलोक्य ……………….
उत्तर
वने – कानने
पशवः – जन्तवः
जननी – माता
नयनानि – नेत्राणि
विलोक्य – दृष्ट्वा

प्रश्न 7.
उदाहरणानुसारं पदरचनां कुरुत
I यथा – वसति स्म = अवसत्।
(क) पश्यति स्म = …………….
(ख) लिखति स्म = …………….
(ग) चिन्तयति स्म = …………….
(घ) वदति स्म = …………….
(ङ) गच्छति स्म = …………….
उत्तर
(क) पश्यति स्म = अपश्यत्
(ख) लिखति स्म = अलिखत्
(ग) चिन्तयति स्म = अचिन्तयत्
(घ) वदति स्म = अवदत्
(ङ) गच्छति स्म = अगच्छत्

II
यथा- अलिखत् = लिखति स्म
(क) ………. = कथयति स्म
(ख) …………….. = नयति स्म
(ग) ……………… = पठति स्म
(घ) ………….. = धावति स्म
(ङ) …………….. = हसति स्म
उत्तर
(क) अकथयत् = कथयति स्म
(ख) अनयत् = नयति स्म
(ग) अपठत् = पठति स्म
(घ) अधावत् = धावति स्म
(ङ) अहसत् = हसति स्म

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

ध्यातव्यम् –

‘स्म’ इत्यस्य प्रयोगः।
यदा वर्तमानकालिकैः धातुभिः सह ‘स्म’ इत्यस्य प्रयोग: भवति तदा ते धातवः भूतकालिकक्रियाणाम् अर्थ प्रकटयन्ति।

यथा-पठति स्म = पढ़ता था।
गच्छति स्म = जाता था।

ध्यातव्य –
‘स्म’ का प्रयोग
जब वर्तमानकालिक धातुओं के साथ ‘स्म’ का प्रयोग होता है तब वे धातुएँ भूतकालिक क्रियाओं का अर्थ प्रकट करती हैं; जैसे-
पठति स्म = पढ़ता था।
गच्छति स्म = जाता था।

मूलपाठः

1. नारदवचनप्रभावात् पार्वती शिवं पतिरूपेण इच्छन्ती तपस्यां कर्तुम् इच्छति स्म। सा स्वसङ्कल्पं मात्रे न्यवेदयत्। तच्छ्रुत्वाद पार्वत्याः माता चिन्ताकुला अभवत्।

पुत्र्याः कोमलतनुं दृष्ट्वा जननी आदिशत्- “वत्स्! क्व कठिन तपः क्व च तव कोमलं शरीरम् ? कथम् आतपात् शीतात् वा आत्मनं रक्षिष्यसि ? तर्हि तपः मा चर। सुखेन स्वगृहे एव वस। अत्रैव व्रतादिक कुरु। एतेनैव तव मनोरथपूर्तिः भविष्यति।”
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः-4
परन्तु पार्वती अकथयत्-“अम्ब! शिवं पतिरूपेण प्राप्तुं तपस्यामेव करिष्यामि इति मे सङ्कल्पः। ईश्वर मम रक्षा करिष्यति। तपस्यार्थं कोऽपि न गृहे वसति।” एवमुक्त्वा दृढनिश्चया सा पितृगृहं परित्यज्य कानने निर्मितां स्वपर्णकुटीम् अगच्छत् शिवं च अनन्यमनसा अपूजयत्, चिरं तपस्यां च समाचरत्। कानने हिंसा: पशवः विचरन्ति स्म। तथापि पार्वती निर्भया वसति स्म। यतो हि निर्भयं जनम् ईश्वरः स्वयमेव रक्षति।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः-5
हिन्दी-अनुवाद :
नारद मुनि के वचनों के प्रभाव से पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा करते हुए तपस्या करने की इच्छा (प्रकट) की। उसने अपना संकल्प माता को बताया। यह सुनकर पार्वती की माँ चिन्ता से व्याकुल हो गई।

पुत्री के कोमल शरीर को देखकर माँ ने आदेश दिया “हे पुत्री! कहाँ (तो) कठोर तप और कहाँ तुम्हारा कोमल शरीर ? या धूप और सर्दी से कैसे अपनी रक्षा करोगी? तो (इसलिए) तप मत करो। सुख से अपने घर में ही रहो। यहाँ ही व्रत आदि करो। इसी से तुम्हारी मनोकामना पूर्ण हो जाएगी।”

परन्तु पार्वती ने कहा-“हे माँ! शिव को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या ही करूँगी, यह मेरा संकल्प है। ईश्वर मेरी रक्षा करेंगे। तपस्या के लिए कोई भी घर में नहीं रहता है।” यह कहकर दृढ निश्चय वाली वह (पार्वती) पिता का घर छोडकर वन में बनी हुई अपनी पत्तों की कुटिया में चली गई और एकाग्रचित्त होकर शिव की पूजा की और लम्बे समय तक तपस्या की। वन में हिंसक पशु घूमते थे। फिर भी पार्वती निर्भया होकर रहती थीं क्योंकि निर्भय व्यक्ति की ईश्वर स्वयं रक्षा करता है।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

2. कतिचित् मासाः गताः। एकदा कश्चित् वटुः तपोवनं प्राविशत्। वटुं दृष्ट्वा पार्वती आसनात् उत्थाय तमुपगम्य सादरम् अवदत्-“वटो, स्वागतं ते। उपविशतु भवान्।” ।
वटुः कुशलं पृष्ट्वा कौतूहलेन अपृच्छत्-“हे तपस्विनि! किमर्थं कठिनं तपः समाचरसि ? स्वकीयां तनुं च मलिनां करोषि?” पार्वती न किञ्चित् वदति स्म। तत्सखी एव तस्याः सङ्कल्पस्य प्रयोजनं वटवे निवेदयति स्म।

तत् श्रुत्वा वटुः अपृच्छत्-“अयि पार्वति! किं सत्यमेव त्वं शिवं पतिमिच्छसि यो हि अशिवं चरति, श्मशाने वसति? यस्य त्रीणि नेत्राणि, यस्य वसनं गजचर्म, यस्य अङ्गरागः चिताभस्म, यस्य परिजनाश्च भूतगणाः, किं तमेव शिवं पतिम् इच्छसि ?”
शिवनिन्दा श्रुत्वा पार्वती क्रुद्धा जाता। सा अवदत् – “अपसर अरे वाचाल! त्वं महेश्वरस्य परमार्थस्वरूपमेव न जानासि। जनाः अनादिकालात् सङ्कल्पसिद्धये शिवमेव पूजयन्ति। तत् नोचितं त्वया सह सम्भाषणम्।”
एवमुक्त्वा यदा सा प्रस्थानाय उद्यता, तावदेव शिवः वटोः रूपं परित्यज्य तस्याः मार्गम् अवरुध्य अवदत्-“पार्वति! प्रीतोऽस्मि तव सङ्कल्पेन तपस्यया च।”
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः-6
हिन्दी-अनुवाद :
कुछ महीने बीत गए। एक बार कोई ब्रह्मचारी तपोवन में आया। ब्रह्मचारी को देखकर पार्वती ने आसन से उठकर उसके पास जाकर आदर सहित कहा-“हे ब्रह्मचारी! तुम्हारा स्वागत है। बैठिये आप।” ब्रह्मचारी ने कुशलता पूछकर जिज्ञासा से पूछा-“हे तपस्विनी! किसलिए कठोर तप कर रही हो? क्यों अपने कोमल शरीर को मैला कर रही हो?” पार्वती ने कुछ नहीं कहा। उसकी सखी ने ही उसके संकल्प का प्रयोजन उसे बता दिया।

यह सुनकर ब्रह्मचारी ने पूछा-“हे पार्वती! क्या सचमुच तुम शिव को पति (के रूप में) चाहती-हो, जो कि अमंगल आचरण करता है ? श्मशान में रहता है ? जिसके तीन नेत्र हैं, जिसका वस्त्र हाथी का चमड़ा है। जिसका सौन्दर्य प्रसाधन चिता की राख है। जिसके सेवक भूत-गण हैं, क्या तुम उसी शिव को पति (के रूप में) चाहती हो?”

शिव की निन्दा सुनकर पार्वती क्रोधित हो गई। वे बोलीं-“दूर हटो, अरे वाचाल! तुम शिव के दिव्य रूप को ही नहीं जानते हो। लोग अनादि काल से संकल्प की सिद्धि के लिए शिव को ही पूजते हैं। तो तेरे साथ बात करना उचित नहीं है।”

यह कहकर जब वे जाने के लिए तैयार हुईं, तभी शिव ने ब्रह्मचारी का रूप त्यागकर उनका मार्ग रोककर कहा-“हे पार्वती! मैं तुम्हारे संकल्प और तपस्या से प्रसन्न हूँ।”

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 7 सड.कल्पः सिद्धिदायकः

सन्धिच्छेदः
न्यवेदयत् = नि + अवदेयत्। तच्छ्रुत्वा . तत्+ श्रुत्वा। चिन्ताकुला – चिन्ता + आकुला। अत्रैव = अत्र + एव। व्रतादिकम् – व्रत + आदिकम्। एतेनैव = एतेन + एव। तपस्यार्थम्-तपस्या + अर्थम्। यतोहि = यतः + हि। कश्चित् – क: चित्। तपोवनम् – तपः + वनम्। किञ्चित् = किम् + चित्। परिजनाश्च परिजना:+च। परमार्थ-परम+अर्थ। नोचितम्-न + उचितम्। तावदेव = तावत् + एव। प्रीतोऽस्मि – प्रीतः + अस्मि

संयोगः
तपस्यामेव-तपस्याम् एव। समाचरत्-सम्+ आचरत्। स्वयमेव = स्वयम् + एव। किमर्थम् – किम् + अर्थम्। समाचरसि – सम् + आचरसि। सत्यमेव = सत्यम् + एव। पतिमिच्छसि – पतिम् + इच्छसि। तमेव = तम् + एव। स्वरूपमेव – स्वरूपम् + एव। अनादि – अन् + आदि। एवमुक्त्वा = एवम् + उक्त्वा ।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

Haryana State Board HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

त्रिवर्णः ध्वजः Class 7 Question Answer प्रश्न 1.
शुद्धकथनस्य समक्षम् ‘आम्’ अशुद्धकथनस्य समक्षं ‘न’ इति लिखत
(क) अस्माकं राष्ट्रस्य ध्वजे त्रयः वर्णाः सन्ति।
(ख) ध्वजे हरितवर्णः शान्तेः प्रतीकः अस्ति।
(ग) ध्वजे केशरवर्णः शक्त्याः सूचकः अस्ति।
(घ) स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने लक्षाधिकाः जनाः स्वप्राणान् अत्यजन्।
(ङ) अस्माकं ध्वजः अनेकत्वे एकत्वस्य सूचकः।
उत्तरम्:
(क) अस्माकं राष्ट्रस्य ध्वजे त्रयः वर्णाः सन्ति। [आम्]
(ख) ध्वजे हरितवर्णः शान्तेः प्रतीकः अस्ति। [न]
(ग) ध्वजे केशरवर्णः शक्त्याः सूचकः अस्ति। [आम्]
(घ) स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने लक्षाधिकाः जनाः स्वप्राणान् अत्यजन्। [आम्]
(ङ) अस्माकं ध्वजः अनेकत्वे एकत्वस्य सूचकः। [आम्]

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

HBSE 7th Class Sanskrit त्रिवर्णः ध्वजः प्रश्न 2.
अधोलिखितेषु पदेषु प्रयुक्तां विभक्तिं वचनंच लिखत-
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः-1
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः-2

HBSE 7th Class Sanskrit Ruchira Chapter 8 प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तरत
(क) अस्माकं ध्वजे कति वर्णाः सन्ति?
(ख) त्रिवर्णे ध्वजे शक्त्याः सूचकः कः वर्णः?
(ग) अशोकचक्रं कस्य द्योतकम् अस्ति?
(घ) त्रिवर्णः ध्वजः कस्य प्रतीकः?
उत्तरम्:
(क) केशर-श्वेत-हरिता:
(ख) केशर:
(ग) सत्य-धर्म-अंिंसानाम् धर्मस्य
(घ) स्व्नाभिमानस्य/एकत्वस्य।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

प्रश्न 4.
एकवाक्येन उत्तरत
(क) अस्माकं ध्वजस्य श्वेतवर्णः कस्य सूचकः अस्ति?
(ख) स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने कस्य महती भूमिका आसीत्?
(ग) अस्माभिः कस्य मानसम्मानरक्षा करणीया?
(घ) ध्वजस्य श्वेतपट्टिका कस्याः सूचिका अस्ति?
उत्तरम्:
(क) अस्माकं ध्वजस्य श्वेतवर्णः शान्तेः सूचकः अस्ति।
(ख) स्वतन्त्रतायाः आंदोलने ध्वजस्य महती भूमिका आसीत्।
(ग) अस्माभिः ध्वजस्य मानसम्मानरक्षा करणीया।
(घ) ध्वजस्य श्वेतपट्टिका सात्त्विकतायाः निर्मलतायाः च सूचिका अस्ति।

प्रश्न 5.
अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) अस्माकं त्रिवर्णध्वजः विश्वविजयी भवेत्।
(ख) स्वधर्मात् प्रमादं वयं न कुर्याम।
(ग) एतत् सर्वम् अस्माकं नेतृणां सबुद्धेः सत्फलम्।
(घ) शत्रूणां समक्षं विजयः सुनिश्चितः भवेत्।
उत्तरम्:
(क) अस्माकं कः विश्वविजयी भवेत्?
(ख) स्वधर्मात् किं वयं न कुर्याम?
(ग) एतत् सर्वम् अस्माकं नेतृणां कस्याः सत्फलम्?
(घ) केषाम् समक्षं विजयः सुनिश्चितः भवेत्?

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

प्रश्न 6.
उदाहरणानुसारं समुचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयत-
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः-3
उत्तरम्:
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः-4

मूलपाठः

1. (केचन बालकाः काश्चन बालिकाश्च स्वतन्त्रतादिवसस्य ध्वजारोहणसमारोहे सोत्साह’ गच्छन्तः परस्पर संलपन्ति।)
देवेशः – अद्य स्वतन्त्रता-दिवसः। अस्माकं विद्यालयस्य प्राचार्यः ध्वजारोहणं करिष्यति। छात्राश्च सांस्कृतिककार्यक्रमान् प्रस्तोष्यन्ति। अन्ते च मोदकानि मिलिष्यन्ति।।
डेविडः – शुचे! जानासि त्वम् ? अस्माकं ध्वजस्य किं नाम ?
शुचिः – अरे! कः एतादृशः भारतीयः यः अस्य ध्वजस्य विषये न जानाति ? अस्माकं देशस्य ध्वजः त्रिवर्णः इति।
सलीमः – रुचे! अस्य नाम त्रिवर्णः कथम् ?
रुचिः – अस्मिन ध्वजे त्रयः वर्णाः सन्ति.अतः त्रिवर्णः। किं त्वम् एतेषां वर्णानां नामानि जानासि?
सलीमः – अरे! केशरवर्णः, श्वेतः, हरितः च एते त्रयः वर्णाः।
देवेशः – अस्माकं ध्वजे एते त्रयः एव वर्णाः कथं गृहीताः?
सलीमः – एतेषां त्रयाणां वर्णानाम् अत्र विशेषः अभिप्रायः।
देवेशः – कः विशेषः?
सलीमः – शृणु, केशरवर्णः शौर्यस्य, श्वेतः शान्तेः, हरितश्च समृद्धेः सूचकाः सन्ति। स्वयं च अयं ध्वजः अनेकत्वे द्योतकः।

शब्दार्थाः
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः-5
हिन्दी-अनुवाद : (कुछ बालक तथा कुछ बालिकाएँ स्वतन्त्रता दिवस के ध्वजारोहण समारोह में उत्साहपूर्वक जाते हुए परस्पर बातें करते हैं।
देवेश – आज स्वतन्त्रता दिवस है। हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य ध्वजारोहण करेंगे और छात्र सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे और अन्त में लड्डू मिलेंगे।
डेविड – शुचि! क्या तुम जानती हो? हमारे ध्वज का नाम क्या है ?
शुचि – अरे! कौन ऐसा भारतीय है जो हमारे ध्वज के विषय में नहीं जानता है ? हमारे देश का ध्वज तिरंगा है, ऐसा।
सलीम – रुचि इसका नाम तिरंगा क्यों है ?
रुचि – इस ध्वज में तीन रंग हैं, इसलिए यह तिरंगा है। क्या तुम इन रंगों के नाम जानते हो?
सलीम – अरे! केसरिया, सफेद और हरा ये तीन रंग हैं।
देवेश – हमारे ध्वज में ये तीन रंग क्यों लिए गए हैं ?
सलीम- इन तीन रंगों का यहाँ विशेष अभिप्राय है।
देवेश – क्या विशेष?
सलीम – सुनो, केसरिया रंग वीरता (बलिदान) का, सफेद रंग शान्ति का तथा हरा रंग समृद्धि का सूचक है और यह स्वयं अनेकता में एकता का प्रतीक है।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

2. शुचिः – किम् एतासां पट्टिकानाम् अन्यदपि महत्त्वम्?
डेविडः – आम्! कथं न ? ध्वजस्य उपरि स्थिता केशरपट्टिका अग्निशिखा इव ऊर्जास्वितायाः उत्साहस्य च सूचिका। मध्ये स्थिता श्वेतपट्टिका सात्त्विकताया: निर्मलतायाः च द्योतिका। अधः स्थिता हरितपट्टिका समृद्धेः प्रगतेश्च सङ्कोतिका।
तेजिन्दरः – शुचे! ध्वजस्य मध्ये स्थितस्य चक्रस्य किमपि महत्त्वम् अस्ति ?
शुचिः – अथ किम् इंदम् अशोकचक्रं सत्यस्य, धर्मस्य अहिंसायाश्च द्योतकम्।
प्रणवः – किं न जानासि ? स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने अस्य ध्वजस्य महती भूमिका आसीत्।
शुचिः – का सा ध्वजस्य भूमिका ?
देवेशः – एनं ध्वजम् आश्रित्य एव स्वतन्त्रतायाः आन्दोलनम् अभवत्।
डेविडः – देशस्य स्वतन्त्रताय लक्ष्मीबाई, महात्मागान्धी, पं. जवाहरलालनेहरू, सुभाषाचन्द्रबोसः, आजादः चन्द्रशेखरः, भगतसिंहः, सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ अली इत्यादयः आजीवन संघर्षम् अकुर्वन्। लक्षाधिकाः च जनाः स्वान् प्राणान् अपि अत्यजन्।
तेजिन्दरः – अस्माकं त्रिवर्णः ध्वजः स्वाभिमानस्य प्रतीकः। सर्वैः अपि भारतीयः अस्य सम्मानः करणीयः। अतः अस्माकं सङ्कल्पः स्यात् यत् अस्य राष्ट्रध्वजस्य सम्मानरक्षार्थं वयं सर्वे स्व-स्व-कर्तव्ये तत्पराः भवेम। जयतु त्रिवर्णः ध्वजः, जयतु भारतम्।

शब्दार्थाः
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः-6
हिन्दी-अनुवाद :
शुचि – क्या इन पट्टियों का दूसरा भी महत्त्व है ? डेविड – हाँ, क्यों नहीं ? ध्वज के ऊपर स्थित केसरिया पट्टी अग्निशिखा की तरह ऊर्जा और उत्साह की सूचिका है। बीच में सफेद पट्टी सात्त्विकता तथा निर्मलता की सूचक है। नीचे स्थित हरी पट्टि समृद्धि और प्रगति की द्योतक (प्रतीक) है। तेजिन्दर – शुचि! ध्वज के बीच में स्थित चक्र का भी कुछ महत्त्व है?
शुचि – और क्या। यह अशोक चक्र सत्य, धर्म और अहिंसा का द्योतक है।
प्रणव – क्या नहीं जानती हो ? स्वतन्त्रता-आन्दोलन में इस ध्वज की महान् भूमिका थी।
शुचि – ध्वज की क्या भूमिका थी?
देवेश – इस ध्वज का सहारा लेकर ही स्वतन्त्रता-आन्दोलन हुआ था।
डेविड – देश की स्वतन्त्रात के लिए लक्ष्मीबाई, महात्मा गान्धी, पं. जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचन्द्र बोस, आजाद चन्द्रशेखर, भगतसिंह, सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ अली इत्यादि ने आजीवन संघर्ष किया और लाखों से अधिक लोगों ने अपने प्राण भी त्याग दिए।
तेजिन्दर – हमारा तिरंगा झण्डा स्वाभिमान का प्रतीक है। सभी भारतीयों को इसका सम्मान करना चाहिए। अत: हमारा संकल्प हो कि इस राष्ट्रध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए हम सब अपने-अपने कर्तव्य के पालन में जुट जाएँ। तिरंगे झण्डे की जय हो, भारत की जय हो।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 8 त्रिवर्णः ध्वजः

सन्धिच्छेदः
काश्चन – काः + चन। बालिकाश्च – बालिकाः + च। ध्वजारोहणम् = ध्वज + आरोहणम्। सोत्साहम् – स + उत्साहम्। छात्राश्च – छात्रा: + च। हरितश्च – हरितः + च। अन्यदपि – अन्यत् + अपि। प्रगतेश्च – प्रगते: + च। अहिंसायाश्च = अहिंसायाः + च। इत्यादय = इति + आदयः। लक्षाधिकाः = लक्ष्रा + अधिकाः। रक्षार्थम् = रक्षा + अर्थम्।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

Haryana State Board HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम् Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

हास्यबालकविसम्मेलनम् प्रश्न उत्तर HBSE 7th Class Sanskrit प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुत-
उपरि – अधः – उच्चैः
नीचैः – बहिः – अलम्
कदापि – अन्तः – पुनः
कुत्र – कदा – एकदा
उत्तर:
स्वयं उच्चारण कीजिए।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

हास्यबालकविसम्मेलनम् अनुवाद HBSE 7th Class Sanskrit प्रश्न 2.
मञ्जूषात: अव्ययपदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत
मञ्जूषा
अलम् अन्तः बहिः अधः उपरि
(क) वृक्षस्य ………………………………………………. खगाः वसन्ति।
(ख) ………………………………………………. विवादेन।
(ग) वर्षाकाले गृहात् ……………………………………………… .
(घ) मञ्चस्य ………………………………………………. श्रोतारः उपविष्टाः सन्ति ।
(ङ) छात्रा: चलच्चित्रगृहस्य ………………………………………………. प्रविशन्ति।
उत्तर:
(क) उपरि
(ख) अलम्
(ग) बहिः
(घ) अधः
(ङ) अन्तः।

हास्यबालकविसम्मेलनम् HBSE 7th Class Sanskrit प्रश्न 3.
अशुद्धं पदं चिनुत
(क) गमन्ति, यच्छन्ति, पृच्छन्ति, धावन्ति।
(ख) रामेण, गृहेण, सर्पेण, गजेणा।
(ग) लतया, सुप्रिया, रमया, निशया।
(घ) लते, रमे, माते, प्रिये।
(ङ) लिखति, गर्जति, फलति, सेवति।
उत्तर
(क) गमन्ति, यच्छन्ति, पृच्छन्ति, धावन्ति। – गमन्ति
(ख) रामेण, गृहेण, सर्पेण, गजेणा। – गजेण
(ग) लतया, सुप्रिया, रमया, निशया। – सुप्रिया
(घ) लते, रमे, माते, प्रिये। – माते
(ङ) लिखति, गर्जति, फलति, सेवति। – सेवति।

Sanskrit Class 7 Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम् प्रश्न 4.
मञ्जूषातः समानार्थक पदानि चित्वा लिखत-
मञ्जूषा
प्रसन्नतायाः, चिकित्सकम्, लब्ध्वा, कुटिलः, दक्षाः
(क) प्राप्य …………
(ख) कुशलाः ……….
(ग) हर्षस्य …………
(घ) वक्र: …………
(ङ) वैद्यम् …………
उत्तर
(क) प्राप्य – लब्ध्वा
(ख) कुशलाः – दक्षाः
(ग) हर्षस्य – प्रसन्नतायाः
(घ) वक्र: – कुटिलः
(ङ) वैधम् – चिकित्सकम्

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

प्रश्न 5.
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत
(क) मञ्चे कति बालकवयः उपविष्टाः सन्ति?
(ख) के कोलाहलं कुर्वन्ति ?
(ग) गजाधरः कम् उद्दिश्य काव्यं प्रस्तौति?
(घ) तुन्दिलः कस्य उपरि हस्तम् आवर्त्तयति?
(ङ) लोके पुनः पुनः कानि भवन्ति ?
(च) दशमः ग्रहः कः?
उत्तर:
(क) चत्वारः
(ख) श्रोतारः
(ग) आधुनिक वैद्यम्
(घ) तुन्दस्य
(ङ) शरीराणि
(च) जामाता।

प्रश्न 6.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा कथायाः पूर्तिं कुरुत-
मञ्जूषा
नासिकायामेव वारंवारम् खड्गेन दूरम् मित्रता मक्षिका व्यजनेन उपाविशत् छिन्ना सुप्तः प्रियः
प्रियः पुरा एकस्य नृपस्य एकः ………………. वानरः आसीत्। एकदा नृपः ………………. आसीत्। वानरः ………… तम् अवीजयत्। तदैव एका ………………. नृपस्य नासिकायाम् ……………….। यद्यपि वानरः ………………. व्यजनेन तां निवारयति स्म तथापि सा पुनः पुनः नृपस्य ……………. उपविशति स्म। अन्ते सः मक्षिकां हन्तुं ………………. प्रहारम् अकरोत्। मक्षिका तु उड्डीय ………………. गता, किन्तु खड्गप्रहारेण नृपस्य नासिका ………………. अभवत्। अतएवोच्यते-“मुर्खजनैः सह ………………. नोचिता।”
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्-1
उत्तर
पुरा एकस्य नृपस्य एकः प्रियः वानरः आसीत्। एकदा नृपः सुप्तः आसीत्। वानरः व्यजनेन तम् अवीजयत्। तदैव एका मक्षिका नृपस्य नासिकायाम् उपाविशत्। यद्यपि वानरः वारंवारं व्यजनेन तां निवारयति। स्म तथापि सा पुनः पुनः नृपस्य नासिकायामेव उपविशति स्म। अन्ते सः मक्षिका हन्तुं खड्गेन प्रहारम् अकरोत्। मक्षिका तु उड्डीय दूरं गता, किन्तु खड्गप्रहारेण नृपस्य नासिका छिन्ना अभवत् । अतएवोच्यते-“मूर्खजनैः सह मित्रता नोचिता।”

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

प्रश्न 7.
विलोमपदानि योजयत
अधः – नीचैः
अन्तः – सुलभम्
दुर्बुद्धे! – उपरि
उच्चैः – बहिः
दुर्लभम् – सुबुद्धे!
उत्तर:
अधः – उपरि
अन्तः – बहिः
दुर्बुद्धे! – सुबुद्धे!
उच्चैः – नीचैः
दुर्लभम् – सुलभम्

ध्यातव्यम्

अस्मिन् पाठे अधः, अन्तः, बहिः, नीचैः, पुनः इत्यादीनि अव्ययपदानि सन्ति। एषां त्रिषु लिङ्गेषु, त्रिषु वचनेषु सर्वासु विभक्तिषु च एकमेव रूपं भवति, विकारो न जायते।

उक्तञ्च-
सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु।
वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम्॥

ध्यातव्य-
इस पाठ में ‘अधः, अन्तः, बहिः, नीचैः, पुनः इत्यादि अव्यय-पद हैं। इनका तीनों लिंगों, तीनों वचनों और सभी विभक्तियों में एक ही रूप होता है, विकार (बदलाव) नहीं होता है।
कहा भी गया है-तीनों लिंगों, सभी विभक्तियों और सभी वचनों में जो समान रहता है, बदलता नहीं, वह अव्यय है।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

मूलपाठः

1.(विविध-वेशभूषाधारिणः चत्वारः बालकवयः मञ्चस्य उपरि उपविष्टाः सन्ति। अधः श्रोतारः हास्यकविताश्रवणाय उत्सुकाः सन्ति कोलाहलं कुर्वन्ति च)
सञ्चालकः – अलं कोलाहलेन। अद्य परं हर्षस्य अवसरः यत् अस्मिन् कविसम्मेलने काव्यहन्तारः कालयापकाश्च भारतस्य हास्यकविधुरन्धराः समागताः सन्ति। एहि, करतलध्वनिना वयम् एतेषां स्वागतं कुर्मः।
गजाधरः – सर्वेभ्योऽरसिकेभ्यो नमो नमः। प्रथमं तावद् अहम् आधुनिक वैद्यम् उद्दिश्य स्वकीयं काव्यं श्रावयामिवैद्यराज! नमस्तुभ्यं यमराजसहोदर ।। यमस्तु हरति प्राणान् वैद्यः प्राणान् धनानि च ॥ 1 ॥
कालान्तकः- अरे! वैद्यस्तु सर्वत्र परन्तु न ते मादृशाः कुशलाः जनसंख्यानिवारणे। ममापि काव्यम् इदं शृण्वन्तु भवन्तःचिता प्रज्वलिता दृष्ट्वा वैद्यो विस्मयमागतः । नाहं गतो न मे भ्राता कस्येवं हस्तलाघवम् ॥ 2 ॥ (सर्वे पुनः हसन्ति)
तुन्दिलः, – (तुन्दस्य उपरि हस्तम् आवर्तयन्) तुन्विलोऽह भोः। ममापि इदं काव्यं श्रूयताम, जीवने धार्यतां चपरानं प्राप्य दुर्बुद्धे! मा शरीरे दयां कुरु । परानं दुर्लभं लोके शरीराणि पुनः पुनः ॥ 3 ॥ (सर्वे पुनः अट्टहासं कुर्वन्ति)
अन्वयः
1. यमराजसहोदर! वैद्यराज! तुभ्यं नमः। यमः तु प्राणान् (एव) हरति। नैद्यः प्राणान् धनानि च।
2. प्रज्ज्वलितां चितां दृष्ट्वा वैद्यः विस्मयम आगतः। न अहं गतः न मे भ्राता, इदं हस्तलाघवं कस्य (अस्ति)?
3. दुर्बुद्धे! पर-अन्नं प्राप्य शरीरे दयां मा कुरु। लोके परान्नं दुर्लभम्, शरीराणि (तु) पुनः पुनः (लभन्ते)।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्-2
हिन्दी-अनुवाद :
(विविध वेषभूषा धारण किए हुए चार बाल-कवि मञ्च के ऊपर बैठे हैं। नीचे श्रोतागण हास्यकविता सुनने के लिए उत्सुक हैं और शोर कर रहे हैं।)
सञ्चालक – कोलाहल मत कीजिए। आज हर्ष का महान् अवसाद है कि इस कवि-सम्मेलन में काव्य की हत्या करने वाले और समय का विनाश करने वाले श्रेष्ठ हास्य कवि आए हुए हैं। आइए, तालियों से उनका स्वागत करते हैं।
गजाधर – सभी नीरसों (अरसिकों) को नमस्कार, नमस्कार। पहले तो मैं आधुनिक वैद्य (डॉक्टर) पर अपनी कविता सुनाता हूँ- (1) “हे यमराज के सगे भाई वैद्यराज! तुम्हें नमस्कार है। यमराज तो केवल प्राण हरता है। वैद्य प्राण और धन दोनों को नष्ट करता है।” (सभी जोर से हँसते हैं।)
कालान्तक – अरे! वैद्य तो सब जगह हैं परन्तु वे जनसंख्या को मिटाने में मेरी तरह कुशल नहीं हैं। मेरी भी यह कविता सुनिए आप- (2) “जलती हुई चिता को देखकर वैद्य आश्चर्यचकित हो गया। (उसने सोचा) न मैं इसके (मृत के घर) यहाँ गया था और न मेरा भाई। फिर यह हाथ की सफाई किसकी है?”
तुन्दिल – (तोंद के ऊपर हाथ फेरते हुए) अरे मैं तुन्दिल हूँ। मेरी भी कविता सुनिए और इसे जीवन में धारण कीजिए- (3) “हे दुर्बुद्धि (मन्दमति)! दूसरे का अन्न (भोजन) पाकर (अपने) शरीर पर दया मत कर। संसार में दूसरे का अन्न मिलना कठिन है, शरीर तो बार-बार (मिलते हैं)।” (सभी फिर से अट्टहास करते हैं।)

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

2. धुन्धः – अरे! भवन्त जानन्ति एव यद् आधुनिकाः वैज्ञानिकाः प्लूटो-ग्रहं न स्वीकुर्वन्ति। तेषां मते अष्ट एव ग्रहाः, किन्तु मन्मतेन दश ग्रहाः सन्ति।
श्रोसारः – अयि! कविधुरन्धर! कस्तावत् दशमो ग्रहः? अस्माभिः कदापि न श्रुतम्। तस्य च कः प्रभावः ?
धुन्धः – सावधानमनसा शृण्वन्तु भवन्तः दशमग्रहस्य वैशिष्ट्यम्सदा वक्रः सदा क्रूरः सदा मानधनापहः। कन्याराशिस्थितो नित्यं जामाता दशमो ग्रहः ॥ 4 ॥ (काव्यपाठश्रवणेन उत्प्रेरितः एकः बालकोऽपि आशुकविता रचयति सहासं श्रावयति च)
बालकः – श्रूयताम्, श्रूयतां भोः! ममापि काव्यम् गजाधरं यम नौमि तुन्दिलं चान्नलोलुपम्। दशमं च ग्रहं धुन्धं कालान्तक तथैव व ॥ 5 ॥ (काव्यं श्रावयित्वा ‘हा हा हा’ इति कृत्वा हसति। अन्ये चाऽपि हसन्ति, बहि: निष्क्रम्य सर्वे गृहं च गच्छन्ति।)

अन्वयः 4. सदा वक्रः, सदा क्रूरः, सद मान-धनापहः, नित्यं कन्याराशि-स्थित: जामाता दशम: ग्रहः।
5. गजाधर, यम, तुन्दिलम्, अन्नलोलुपं च नौमि। तथा एव च दशमं ग्रहं धुन्ध, कालान्तकं च (नौमि)।
शब्दार्थाः

हिन्दी-अनुवाद :
धुन्ध : अरे! आप सब जानते ही हैं कि आधुनिक वैज्ञानिक प्लूटो को ग्रह नहीं मानते हैं। उनके मत से आठ ही ग्रह हैं किन्तु मेरे मत से ग्रह दश हैं।
श्रोतागण : अरे! श्रेष्ठकवि! कौन है वह दसवाँ ग्रह ? हमने कभी भी नहीं सुना और उसका प्रभाव क्या है ?
धुन्ध : सावधान मन से सुनिए आप लोग दसवें ग्रह की विशेषता-
(4) हमेशा कुटिल (वक्री), सदैव निर्दय, हमेशा यान और धन का अपहरण करने वाला, सदा कन्या राशि पर रहने वाला दसवाँ ग्रह जमाई है।
(काव्यपाठ सुनने से प्रेरित एक बालक भी तात्कालिक कविता रचता है और हँसी सहित सुनाता है।)

‘बालक : सुनिए, अरे। सुनिए, मेरी भी कविता- (5) “मेरी गजाधर को, यमराज को, तुन्दिल को, अन्न (भोजन) के लालची को नमन करता हूँ और उसी तरह दसवें ग्रह धुन्ध को कालान्तक को (नमन करता हूँ।” (कविता सुनाकर ‘हा हा हा’ करके हँसता है और दूसरे भी हंसते हैं। बाहर निकलकर सभी घर जाते हैं।)

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्

सन्धिच्छेदाः
कालयापकाश्च = कालयापकाः + च। स्वागतम् = सु + आगतम्। सर्वेभ्योऽरसिकेभ्यो नमो नमः = सर्वेभ्यः + अरसिकेभ्यः + नमः + नमः। तावद् अहम् – तावत् + अहम्। नमस्तुभ्यम् = नमः + तुभ्यम्। यमस्तु – यमः + तु। वैद्यस्तु – वैद्यः + तु। ममापि = मम + अपि। वैद्यो विस्मयम् – वैद्यः । विस्मयम्। नाहम् = न + अहम्। गतो न = गतः + न। कस्येदम् – कस्य + इदम्। तुन्दिलोऽहम् = तुन्दिल: + अहम्। परान्नम् – पर + अन्नम्। मन्मतेन = मत् + मतेन! कस्तावत् – क: + तावत्। कदापि – कृदा + अपि। मानधनापहः – मानधन + अपहः। राशिस्थितो नित्यम् = राशिस्थितः + नित्यम्। दशमो ग्रहः – दशमः + ग्रहः। बालकोऽपि = बालक: + अपि। चान्नलोलुपम् – च + अन्नलोलुपम्। तथैव = तथा + एव। चापि च + अपि।

संयोगः – विस्मयमागतः – विस्मयम् + आगतः।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 1 सुभाषितानि

Haryana State Board HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 1 सुभाषितानि Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Sanskrit Solutions रुचिरा Chapter 1 सुभाषितानि

सुभाषितानि Class 7 HBSE Sanskrit प्रश्न 1.
सर्वान् श्लोकान् सस्वरं गायत।
उत्तरम्:
छात्र स्वयं श्लोकों को गाएँ।

HBSE 7th Class Sanskrit सुभाषितानि प्रश्न 2.
यथायोग्यं श्लोकांशान् मेलयत-

(क) धनधान्यप्रयोगेषुनासद्भिः किञ्चिदाचरेत्।
(ख) विस्मयो न हि कर्तव्यःत्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
(ग) सत्येन धार्यते पृथ्वीबहुरत्ना वसुन्धरा।
(घ) सद्भिर्विवादं मैत्री चविद्यायाः संग्रहेषु च।
(ङ) आहारे व्यवहारे चसत्येन तपते रविः

उत्तरम्:

(क) धनधान्यप्रयोगेषुविद्यायाः संग्रहेषु च।
(ख) विस्मयो न हि कर्तव्यःबहुरत्ना वसुन्धरा।
(ग) सत्येन धार्यते पृथ्वीसत्येन तपते रविः।
(घ) सद्भिर्विवादं मैत्री चनासद्भिः किञ्चिदाचरेत्।
(ङ) आहारे व्यवहारे चत्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 1 सुभाषितानि

प्रश्न 3.
एकपदेन उत्तरत-
(क) पृथिव्यां कति रत्नानि?
(ख) मूढः कुत्र रत्नसंज्ञा विधीयते?
(ग) पृथिवी केन धार्यते?
(घ) कैः सङ्गतिं कुर्वीत?
(ङ) लोके वशीकृतिः का?
उत्तरम्:
(क) त्रीणि
(ख) पाषाणखण्डेषु
(ग) सत्येन
(घ) सद्भिः
(ङ) क्षमा।

प्रश्न 4.
रेखाङ्कितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत-
(क) सत्येन वाति वायुः।
(ख) सद्भिः एव सहासीत।
(ग) वसुन्धरा बहुरत्ना भवति।
(घ) विद्यायाः संग्रहेषु त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।
(ङ) सद्भिः मैत्री कुर्वीत।
उत्तरम्:
(क) केन वाति वायुः?
(ख) कैः एव सहासीत?
(ग) का बहुरत्ना भवति?
(घ) कस्याः संग्रहेषु त्यक्तलजः सुखी भवेत्?
(ङ) सद्भिः काम् कुर्बीत?

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 1 सुभाषितानि

प्रश्न 5.
प्रश्नानामुत्तराणि लिखत-
(क) कुत्र विस्मयः न कर्त्तव्यः?
(ख) पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि कानि?
(ग) त्यक्तलज्जः कुत्र सुखी भवेत्?
उत्तरम्:
(क) दाने तपसि शौर्ये विज्ञाने विनये नये च विस्मयः न कर्त्तव्यः।।
(ख) पृथिव्यां जलम् अन्नं सुभाषितं च त्रीणि रत्नानि सन्ति।
(ग) धनधान्यप्रयोगेषु, विद्यायाः संग्रहेषु, आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।

प्रश्न 6.
एञ्जूषातः पदानि चित्वा लिङ्गानुसारं लिखत-
रत्लानि, वसुन्धरा, सत्येन, सुखी, अन्नम्, वह्निः, रविः, पृथ्वी, सङ्गतिम्
पुल्लिङ्गम् – स्त्रीलिङ्गम् – नपुंसकलिङ्गम्
उत्तरम्:
पुंल्लिङ्गम् – स्त्रीलिङ्गम् – नपुंसकलिङ्गम्
सुखी – वसुन्धरा – रत्नानि
वहनिः – पृथ्वी – अन्नम्
रविः – सङ्गतिम् – सत्येन।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 1 सुभाषितानि

प्रश्न 7.
अधोलिखितपदेषु धातवः के सन्ति?
पदम् – धातुः
कर्तव्यः – ……………….
पश्य – ……………….
भवेत् – ……………….
स्थितः – ……………….
उत्तरम्:
पदम् – धातुः
कर्त्तव्यः – कृ
पश्य – दूृश्
भवेत् – भू
स्थितः – स्था

मूलपाठः

I. पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् ।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नासंज्ञा विधीयते ॥ 1 ॥
सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः ।
सत्येन वाति वायुश्व सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम् ॥2॥
दाने तपसि शौर्ये च विज्ञाने विनये नये ।
विस्मयो न हि कर्त्तव्यो बहुरला वसुन्धरा ॥ 3 ॥
अन्वय :
1. पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि (भवन्ति)-जलम्, अन्नं सुभाषितम् (च)। मूढे: पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।
2. पृथ्वी सत्येन धार्यते। रविः सत्येन तपते। वायुः च सत्येन’ “वाति। सत्ये सर्व प्रतिष्ठितम्।
3. दाने, तपसि, शौर्य, विज्ञाने, विनये, नये च विस्मयः न हि कर्तव्यः; (यतः) वसुन्धरा बहुरत्ना (अस्ति)।
हिन्दी-अनुवाद :
1. पृथ्वी पर तीन रत्न हैं-
(i) जल
(ii) अन्न तथा
(iii) सुभाषित।
मूों के द्वारा पत्थर के टुकड़ों (हीरा, पन्ना, माणिक्य आदि) को रत्नों का नाम दिया जाता है।
2. पृथ्वी सत्य से धारण की जाती है। सूर्य सत्य से तपता है। हवा सत्य से बहती है। सत्य में ही सब-कुछ स्थित है।
3. दान में, तपस्या में, बल में, विज्ञान में, विनम्रता में और नीति में आश्चर्य नहीं करना चाहिए। पृथ्वी रत्नों से भरी हुई है।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 1 सुभाषितानि-1

II सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम् ।
सद्भिर्विवाद मैत्री च नासद्भिः किञ्चिदाचरेत् ॥ 4 ॥
धनधान्यप्रयोगेषु विद्यायाः संग्रहेषु च ।।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत् ॥5॥
क्षमावशीकृतिर्लोके क्षमया किं न साध्यते ।
शान्तिखड्गः करे यस्य किं करिष्यति दुर्जनः ॥ 6 ॥
अन्वयः
4. सद्भिः एव सह आसीत। सद्भिः सङ्गतिं कुर्वीत। सद्धिः विवादं मैत्री च (कुर्वीत); असद्भिः किञ्चित् न आचरेत्।
5. धन-धान्यप्रयोगेषु, विद्यायाः संग्रहेषु च; आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्।।
6. लोके क्षमावशीकृतिः, क्षमया किं न साध्यते ? यस्य करे शान्तिखड्गः दुर्जनः किं करिष्यति ?
हिन्दी-अनुवाद :
4. सज्जनों के साथ ही रहना चाहिए। सज्जनों की संगति करनी चाहिए। विवाद और मित्रता (भी) सज्जनों से करने चाहिए। असज्जनों (दुष्टों) के साथ कुछ भी नहीं करना चाहिए।
5. धन व धान्य (अन्न) के प्रयोगों में, विद्या के संग्रह करने में, भोजन में और व्यवहार में संकोच को त्यागने वाला सुखी हो जावे।
6. लोक (संसार) में क्षमा सबसे बड़ा वशीकरण है। क्षमा से क्या नहीं किया जा सकता हैं ? जिसके हाथ में शान्ति की तलवार हो, दुष्ट उसका क्या करेगा? अर्थात् दुष्ट व्यक्ति उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है।

सन्धिच्छेदाः-
वायुश्च = वायुः+ च। विस्मयो न – विस्मयः + न। कर्त्तव्यो बहुरला = कर्त्तव्यः + बहुरला। सद्भिरेव = सद्धिः + एव। सहासीत – सह + आसीत। सद्धिर्विवादम् = सद्धिः + विवादम्। नासद्धिः = न + असद्धिः। किञ्चिदारेत् = किम् + चित् + आचरेत्। क्षमावशीकृतिर्लोके = क्षमावशीकृतिः + लोके। ‘संयोगः जलमन्नम् = जलम् + अन्नम्।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

Haryana State Board HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

दुर्बुद्धिः विनश्यति HBSE 7th Class Sanskrit प्रश्न 1.
उच्चारणं करुत-

फुल्लोत्पलम्अवलम्ब्यपक्त्वा
कम्बुग्रीवःआवाभ्याम्भक्षयिष्यामि
उक्तवान्हृदम्सुहृदाम्
भवद्भ्याम्उड्डीयतेभ्रष्टः

उत्तरम्:
स्वयं उच्चारण कीजिए।

दुर्बुद्धिः विनश्यति class 7 HBSE Sanskrit प्रश्न 2.
एकपदेन उत्तरत
(क) कूर्मस्य किं नाम आसीत्?
(ख) सरस्तीरे के आगच्छन्?
(ग) कूर्मः केन मार्गेण अन्यत्र गन्तुम् इच्छति?
(घ) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा के अधावन्?
उत्तरम्:
(क) कम्बुग्रीवः
(ख) धीवराः
(ग) आकाशमार्गेण
(घ) गोपालकाः।।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

HBSE 7th Class Sanskrit दुर्बुद्धिः विनश्यति प्रश्न 3.
अधोलिखितवाक्यानि कः कं प्रति कथयति इति लिखत-
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति-1.1
उत्तरम्:
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति-1.2

प्रश्न 4.
मञ्जूषातः क्रियापदं चित्वा वाक्यानि पूरयत
अभिनन्दति, भक्षयिष्यामः, इच्छामि, वदिष्यामि, उड्डीयते, प्रतिवसति स्म।।
(क) हंसाभ्यां सह कूर्मोऽपि ………………………।
(ख) अहं किञ्चिदपि न ………………………।
(ग) यः हितकामानां सुहृदां वाक्यं न ………………………।
(घ) एकः कूर्मः अपि तत्रैव ………………………।
(ङ) अहम् आकाशमार्गेण अन्यत्र गन्तुम् ………………………।
(च) वयं गृहं नीत्वा कूर्म ………………………।
उत्तरम्:
(क) उड्डीयते
(ख) वदिष्यामि
(ग) अभिनन्दति
(घ) प्रतिवसति स्म
(ङ) इच्छामि
(च) भक्षयिष्यामः।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

प्रश्न 5.
पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) कच्छपः कुत्र गन्तुम् इच्छति?
(ख) कच्छपः कम् उपायं वदति?
(ग) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा गोपालकाः किम् अवदन्?
(घ) कूर्मः मित्रयोः वचनं विस्मृत्य किम् अवदत्?
उत्तरम्:
(क) कच्छपः सरोवरात् अन्यत्र गन्तुम् इच्छति।
(ख) कच्छपः वदति-युवाम् एकं काष्ठदण्डम् चञ्च्वा धारयताम्। अहं काष्ठदण्डमध्ये अवलम्ब्य युवाभ्यां पक्षबलेन सुखेन गमिष्यामि।
(ग) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा गोपालकाः अवदन्-हंहो! महदाश्चर्यम् हंसाभ्याम् सह कूर्मोऽपि उड्डीयते
(घ) कूर्मः मित्रयोः वचनं विस्मृत्य अवदत्-“यूयं भस्म खादत।”

प्रश्न 6.
घटनाक्रमानुसारं वाक्यानि लिखत-
(क) कूर्मः हंसयोः सहायतया आकाशमार्गेण अगच्छत्।
(ख) गोपालकाः अकथयन्-वयं पतितं कूर्मं खादिष्यामः।
(ग) कूर्मः हंसौ च एकस्मिन् सरसि निवसन्ति स्म।
(घ) केचित् धीवराः सरस्तीरे आगच्छन्।
(ङ) कूर्मः अन्यत्र गन्तुम् इच्छति स्म।
(च) लम्बमानं कूर्मं दृष्ट्वा गोपालकाः अधावन्।
(छ) कूर्मः आकाशात् पतितः गोपालकैः मारितश्च।
(ज) ‘वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारयिष्यामः’ इति धीवराः अकथयन्।
उत्तरम्:
(क) कूर्मः हंसौ च एकस्मिन् सरसि निवसन्ति स्म।
(ख) केचित् धीवराः सरस्तीरे आगच्छन्।
(ग) ‘वयं श्व: मत्स्यकूर्मादीन् मारयिष्यामः’ इति धीवराः अकथयन्।
(घ कूर्मः अन्यत्र गन्तुम् इच्छति स्म।
(ङ)) कूर्मः हंसयोः सहायतया आकाशमार्गेण अगच्छत्।
(च) लम्बमानं कूर्म दृष्ट्वा गोपालकाः अधावन्।
(छ) गोपालकाः अकथयन्-वयं पतितं कूर्म खादिष्यामः।
(ज) कूर्मः आकाशात् पतित: गोपालकैः मारितश्च।

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प्रश्न 7.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत
जलाशयम्, अचिन्तयत्, वृद्धः, दुःखिताः, कोटरे, वृक्षस्य, सर्पः,आदाय, समीपे।।

(क) एकस्य वृक्षस्य शाखासु अनेके काका: वसन्ति स्म। तस्य वृक्षस्य ……………………. (1) ……………………. एकः सर्पः अपि अवसत्। काकानाम् अनुपस्थितौ ……………………. (2) ……………………. काकानां शिशून् खादति स्म। काकाः ……………………. (3) ……………………. आसन्। तेषु एकः ……………………. (4) ……………………. काकः उपायम् ……………………. (5) …………………….। वृक्षस्य ……………………. (6) ……………………. जलाशयः आसीत् तत्र एका राजकुमारी स्नातुं ……………………. (7) ……………………. आगच्छति। शिलायां स्थितं तस्याः आभरणम् ……………………. (8) ……………………. एकः काकः वृक्षस्य उपरि अस्थापयत्। राजसेवकाः काकम् अनुसृत्य ……………………. (9) ……………………. समीपम् अगच्छन्। तत्र ते तं सर्प च अमारयन्। अतः एवोक्तम्-उपायेन सर्वं सिद्धयति।
उत्तरम्:
एकस्य वृक्षस्य शाखासु अनेके काकाः वसन्ति स्म। तस्य वृक्षस्य कोटरे एकः सर्पः अपि अवसत्। काकानाम् अनुपस्थितौ सर्पः काकानां शिशून् खादति स्म। काकाः दुःखिताः आसन्। तेषु एक: वृद्धः काकः उपायम् अचिन्तयत् । वृक्षस्य समीपे जलाशयः आसीत्। तत्र एका राजकुमारी स्नातुं जलाशयम् आगच्छति। शिलायां स्थितं तस्याः आभरणम् आदाय एकः काक: वृक्षस्य उपरि अस्थापयत्। राजसेवकाः काकम् अनुसृत्य वृक्षस्य समीपम् अगच्छन्। तत्र ते तं सर्प च अमारयन्। अत: एवोक्तम्-‘उपायेन सर्व सिद्ध्यति’।

ध्यातव्यम्

इयं कथा ‘पञ्चतन्त्रम्’ इति ग्रन्थात् उद्धृता। पञ्चतन्त्रस्य लेखक: विष्णुशर्मा। पञ्चानां तन्त्राणां समाहारः पञ्चतन्त्रम् इति। अतः पञ्चतन्त्रस्य पञ्चभागाः सन्ति-मित्रभेदः, मित्रलाभः, सन्धिविग्रहः, लब्धप्रणाश: अपरीक्षितकारकञ्च।

अस्मिन् पाठे अनवसरे भाषणेन कथं सर्वनाशः भवतीति दर्शितम्। क्वचित् मौनं कार्यसाधकं भवति ।
यथोक्तम्वि –
भूषणं मौनमपण्डितानाम्।
मूखो हि शोभते तावत् यावत् किञ्चिन्न भाषते।

ध्यान देने योग्य ( पाठ का परिचय)
यह कथा ‘पञ्चतन्त्रम्’ नामक पुस्तक से ली गई है। ‘पञ्चतन्त्र’ के लेखक पं० विष्णु शर्मा थे। ‘पञ्चानां तन्त्राणां समाहारः पञ्चतन्त्रम्’-पाँच तन्त्रों के समूह को ‘पञ्चतन्त्र’ कहा जाता है। इसीलिए ‘पञ्चतन्त्र’ के भी पाँच भाग हैं-
1. मित्रभेदः
2. मित्रलाभः
3. सन्धिविग्रहः
4. लब्धप्रणाशः
5. अपरीक्षितकारकम्।

इस पाठ में यह दिखाया गया है कि बिना अवसर के बोलने पर किस प्रकार सर्वनाश हो जाता है। कभी-कभी ‘मौन’ (चुप रहना) भी कार्य सिद्ध करने वाला होता है। जैसे कि कहा भी गया है।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

मूलपाठः

1. अस्ति मगधदेशे पुल्लोत्पलनाम सरः। तत्र संकटविकटनामको हंसी निवसतः। कुम्बग्रीवनामा तयोः मित्रम् एकः कूर्मः अपि तत्रैव प्रतिवसति स्म।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति-1
अथ एकदा धीवराः तत्र आगच्छन् अकथयन् च-वयं श्वः मत्स्यकूर्मादीन् मारयिष्यामः। एतत् श्रुत्वा कूर्मः अवदत्-“मित्रे! किं युवाभ्यां धीवारणां वार्ता श्रुत्वा ? अधुना किम् अहं करोमि ?” हंसौ अवदातम्-“प्रातः यद् उचित तत्कर्त्तव्यम्।” कूर्मः अवदत्-“मैवम्। तद् यथाऽहम् अन्यं हवं गच्छामि तथा कुरुतम्।” हंसी अवदताम्-“आवां किं करवाव ?” कूर्मः अवदत्-“अहं भवद्भ्यां सह आकाशमार्गेण अन्यत्र गुन्तम् इच्छामि।”

हंसौ’ अवदताम्-“अत्र कः उपाये: ?” कच्छपः वदति-“युवां काष्ठदण्डम् एकं चञ्च्वा धारयताम्। अहं काष्ठदण्डमध्ये अवलम्व्य युवाभ्यां पक्षबलेन सुखेन गमिष्यामि।” हंसी अकथयताम्-“सम्भवति एषः उपायः। किन्तु अत्र एकः अपायोऽपि वर्तते। आवाभ्यां नीयमानं त्वामवलोक्य जनाः किञ्चिद् वदिष्यन्ति एव। यदि त्वमुत्तरं दास्यसि तदा तव मरणं निश्चितम्। अतः त्वम् अत्रैव वस।” तत् श्रुत्वा क्रुद्धः कूर्मः अवदत्-“किमहं मूर्खः ? उत्तरं न दास्यामि। किञ्चिदपि न वदिष्यामि।” अतः अहं यथा उक्तवान् तथा युवां कुरुतम्।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति-2
हिन्दी-अनुवाद :
मगध देश में फुल्लोत्पल नाम का एक तालाब था। वहाँ संकट और विकट नाम के दो हंस रहते थे। कम्बुग्रीव नाम वाला उन दोनों का एक मित्र कछुआ भी वहीं रहता था।

इसके बाद एक बार (कुछ) मछुआरे वहाँ आए और बोले-हम कल (यहाँ) मछली, कछुए आदि मारेंगे। यह सुनकर कछुआ बोला-“मित्रो! क्या तुम दोनों ने मछुआरों की बात सुनी? अब मैं क्या करूँ ?” दोनों हंस बोले-“सुबह जो उचित हो वह करना चाहिए।” कछुआ बोला-“ऐसा नहीं। तुम दोनों ऐसा उपाय करो, कि मैं दूसरे तालाब में चला जाऊँ।” दोनों हंस बोले-“हम दोनों क्या करें।” कछुआ बोला-“मैं तुम दोनों के साथ आकाश-मार्ग से कहीं दूसरी जगह जाना चाहता हूँ।”

हंसों ने कहा-” यह क्या उपाय है ?” कछुआ कहता है-“तुम दोनों लकड़ी का एक डण्डा चोंच से पकड लो। मैं लकड़ी के डण्डे के बीच में लटककर तुम दोनों के पंखों के बल से सुख से जाऊँगा।” हंसों ने कहा-“यह उपाय हो सकता है, किन्तु यहाँ (इसमें) एक हानि भी है। हम दोनों द्वारा ले जाए जाते समय लोग कुछ कहेंगे ही। यदि तुम उत्तर दोगे, तभी तुम्हारा मरना निश्चित है। इसलिए तुम यहीं रहो।” यह सुनकर क्रोधित कछुआ बोला-“क्या मैं मूर्ख हूँ ? उत्तर नहीं दूंगा। कुछ भी नहीं बोलूंगा।” इसलिए मैंने जैसा कहा वैसा तुम दोनों करो।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति

मूलपाठः

2. एवं कृते काष्ठदण्डे लम्बमानं कूर्म दृष्ट्वा गोपालकाः पश्चाद् अधावन् अवदन् च-“हहो! महदाश्चर्यम्। हंसाभ्यां सह कूर्मोऽपि उड्डीयते।” कश्चिद् वदति-“यद्ययं कूर्मः कथमपि निपतति तदा अत्रैव पक्त्वा खादिष्यामि।” अपर: अवदत्- “सरस्तीरे दग्ध्वा खादिष्यामि।” अन्यः अकथयत्-“गृहं नीत्वा भक्षयिष्यामि” इति।

तेषां तद् वचनं श्रुत्वा कूर्मः मित्रयोः दत्तं वचनं विस्मृत्य कोपेन अवदत्-“यूयं भस्म खादत” इति वदन्नेव कूर्मः आकाशात् पतितः गोपालकैः मारितश्च। अत एवोक्तम्-
सुहृदां हितकामानां वाक्यं यो नाभिनन्दति।।
स कूर्म इव दुर्बुद्धिः काष्ठाद् भ्रष्टो विनश्यति॥
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति-3

अन्वय:
य: हितकामानां सुहुदां वाक्यं न अभिनन्दति, सु: दुर्बुद्धि: कूर्म: इव काष्ठात् भ्रष्टः विनश्यति।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 2 दुर्बुद्धिः विनश्यति-2
हिन्दी-अनुवाद :
ऐसा करने पर लकड़ी के डण्डे पर लटकते हुए कछुए को देखकर ग्वाले पीछे दौड़ने लगे और बोले-“अरे। महान् आश्चर्य है। हंसों के साथ कछुआ भी उड़ रहा है।” कोई कहता है-“यदि यह कछुआ किसी तरह गिरता है, तो यहीं पकाकर खा जाऊँगा।” दूसरे ने कहा-” तालाब के किनारे भूनकर खाऊँगा।” अन्य ने कहा-“घर ले जाकर खाऊँगा।” ऐसा।

उनके उस वचन को सुनकर कछुआ मित्रों को दिया हुआ वचन भूलकर गुस्से से बोला-“तुम सब राख खा लो।” ऐसा बोलते हुए ही कछुआ आकाश से गिर गया और ग्वालों के द्वारा मार दिया गया।
इसीलिए कहा गया- “हित (कल्याण) चाहने वाले मित्रों की बात जो खुशी से नहीं मानता है, वह दुष्टबुद्धि कछुए की तरह लकड़ी से गिरकर नष्ट हो जाता है।”

सन्धिच्छेदाः
फुल्लोत्पनाम् = फुल्ल + उत्पलनामा तत्रैव = तत्र + एव। मत्स्य-कूर्मादीन् – मत्स्य-कूर्म + आदीन्। मैवम् – मा + एवम्। तद् यथाऽहम् = तत् + यथा + अहम्। अपायोऽपि = अपायः + अपि। किञ्चिद् = किम् + चिद्। अत्रैव – अत्र + एव। किञ्चिदपि = किम् + चित् + अपि। महदाश्चर्यम् = महत् + आश्चर्यम्। कूर्मोऽपि = कूर्मः + अपि। यद्ययम् – यदि + अयम्। वदन्नेव = वदन् + एव। मारितश्चमारितः + च। अत एवोक्तम् = अतः + एव + उक्तम्। यो नाभिनन्दति = यः + न + अभिनन्दति। स कूर्म इव = स: + कूर्मः + इव। काष्ठा भ्रष्टो विनश्यति काष्ठात् + भ्रष्टः + विनश्यति। संयोगः त्वामवलोक्य – त्वाम् + अवलोक्य। त्वमुत्तरम् – त्वम् + उत्तरम्। किमहम् = किम् + अहम्।।

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HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

Haryana State Board HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम् विनश्यति Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

स्वावलम्बनम् HBSE 7th Class Sanskrit प्रश्न 1.
उच्चारणं कुरुत-
विंशतिः – त्रिंशत् – चत्वारिंशत्
द्वाविंशतिः – द्वात्रिंशत् – द्विचत्वारिंशत्
चतुर्विंशतिः – त्रयस्त्रिंशत् – त्रयश्चत्वारिंशत्
पञ्चविंशतिः – चतुस्त्रिंशत् – चतुश्चत्वारिंशत्,
अष्टाविंशतिः – अष्टात्रिंशत् – सप्तचत्वारिंशत्
नवविंशतिः – नवत्रिंशत् – पञ्चाशत्।
उत्तरम्:
स्वयं उच्चारण कीजिए।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

7th Class Sanskrit HBSE स्वावलम्बनम्प्र श्न 2.
अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि लिखत
(क) कस्य भवने सर्वविधानि सुखसाधनानि आसन्?
(ख) कस्य गृहे कर्मकर: नासीत्?
(ग) श्रीकण्ठस्य आतिथ्यम् के अकुर्वन्?
(घ) प्रत्येकं चतुर्थवर्षे फरवरी-मासे कति दिनानि भवन्ति?
(ङ) कति ऋतवः भवन्ति?
(च) कृष्णमूर्तेः कति कर्मकराः सन्ति?
उत्तरम्:
(क) श्री कण्ठस्य भवने सर्वविधानि सुखसाधनानि आसन् ?
(ख) श्रीकण्ठस्य गृहे कर्मकरः नासीत् ?
(ग) श्रीकण्ठस्य आतिथ्यं कृष्णमूर्तिः तस्य माता-पिता च अकुर्वन् ?
(घ) प्रत्येकं चतुर्थवर्षे फरवरी-मासे एकोनविंशतिः दिनानि भवन्ति ?
(ङ) षड् ऋतवः भवन्ति।
(च) कृष्णमूर्तेः बहवः कर्मकराः सन्ति ?

7th Class Sanskrit स्वावलम्बनम् HBSE प्रश्न 3.
चित्राणि गणयित्वा तदने संख्यावाचकशब्दं लिखत-
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-1
उत्तरम्:
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-2

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

प्रश्न 4.
मञ्जूषातः अड्कानां कृते पदानि चिनुत-
मञ्जूषा
चत्वारिंशत्, सप्तविंशतिः, एकत्रिंशत्, पञ्चाशत्, अष्टाविंशतिः, त्रिंशत्, चतुर्विंशतिः
28 …………
27 …………
30 …………
31 ……….
24 ……….
40 ………..
50 ……….
त्रयस्त्रिंशत्।
उत्तरम्-
28 = अष्टाविंशतिः
27 = सप्तविंशतिः
30 = त्रिंशत्
31 = एकत्रिंशत्
24 = चतुर्विंशतिः
40 = चत्वारिंशत्
50 = पञ्चाशत्।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

प्रश्न 5.
चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषातः पदानि च प्रयुज्य वाक्यानि रचयत
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-3
उत्तरम्:
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-4
(क) एषः कृषक: क्षेत्रम् कर्षति।
(ख) एतौ कृषकौ खननकार्यम् कुरुतः।
(ग) एते कृषकाः धान्यम् रोपयन्ति।
(घ) एष: कृषक: क्षेत्रं कर्षति।

प्रश्न 6.
रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं करुत
यथा- अहं स्वावलम्बनस्य सुखं प्रतिदिनम् अनुभवामि।
अहं कस्य सुखं प्रतिदिनम् अनुभवामि?
(क) कृष्णमूर्तिः सामान्यकृषकस्य पुत्रः आसीत्।
(ख) अधुना गृहे कोऽपि कर्मकरः नास्ति।
(ग) नक्षत्राणाम् आवागमनं स्वयमेव भवति।
(घ) एकस्मिन् वर्गे सप्तदश छात्रा: अपठन्।
उत्तरम्:
(क) कः सामान्यकृषकस्य पुत्रः आसीत्?
(ख) अधुना कुत्र कोऽपि कर्मकरः नास्ति?
(ग) केषाम् आवागमनं स्वयमेव भवति?
(घ) एकस्मिन् वर्गे कति छात्राः अपठन्?

प्रश्न 7.
मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत
षड्, त्रिंशत्, एकत्रिंशत्, द्वौ, द्वादश, अष्टाविंशतिः।
(क) ………………………………. ऋतवः भवन्ति।
(ख) मासा: ………………………………. भवन्ति ।
(ग) एकस्मिन् मासे ………………………………. अथवा ………………………………. दिवसाः भवन्ति।
(घ) फरवरी-मासे सामान्यत: ………………………………. दिनानि भवन्ति।
(ङ) मम शरीरे ………………………………. हस्तौ स्तः।
उत्तरम्:
(क) षड् ऋतवः भवन्ति।
(ख) मासाः द्वादश भवन्ति।
(ग) एकस्मिन् मासे त्रिंशत् अथवा एकत्रिंशत् दिवसाः भवन्ति।
(घ) फरवरी-मासे सामान्यतः अष्टाविंशतिः दिनानि भवन्ति।
(ङ) मम शरीरे द्वौ हस्तौ स्तः।

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

ध्यातव्यम्

वैदिकपरम्परानुसारं भारतीयमासानां ऋतूनां च नामानि-
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-5

मूलपाठः

1. कृष्णमूर्तिः श्रीकण्ठश्च मित्रे आस्ताम्। श्रीकण्ठस्य पिता समृद्धः आसीत्। अतः तस्य भवने सर्वविधानि सुख-साधनानि आसन्। तस्मिन् विशाले भवने चत्वारिंशत् स्तम्भाः आसन्। तत्र अष्टादश-प्रकोष्ठेषु पञ्चाशत् गवाक्षाः, चतुश्चत्वारिंशत् द्वाराणि च आसन्। परं कृष्णमूर्तेः माता पिता च कृषकदम्पती। तस्य वासगृहं आडम्बरविहीन सुन्दरञ्च आसीत्।
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-6
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-7
एकदा श्रीकण्ठः तेन सह तस्य गृहम् अगच्छत्। तत्र कृष्णमूर्तिः तस्य माता पिता च स्वशक्त्या श्रीकण्ठस्य आतिथ्यम् अकुर्वन्। तस्य गृहे कोऽपि कर्मकरः नासीत्। एतत् दृष्ट्वा श्रीकण्ठः अकथयत्- “मित्र! अहं भवताम् आतिथ्येन सन्तुष्टोऽस्मि। केवलम् एतदेव तथ्यं मां दुःखयति यत् तव गृहे एकोऽपि भृत्यः नास्ति येन मम आतिथ्याय भवन्तः कष्ट कुर्वन्ति। मम गृहे तु बहवः कर्मराः सन्ति।”
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-8
हिन्दी-अनुवाद :
कृष्णमूर्ति और श्रीकण्ठ (दोनों) मित्र थे। श्रीकण्ठ के पिता धनवान् थे। इसलिए उसके घर में सब प्रकार के सुख-साधन थे। उसके विशाल भवन में चालीस खम्बे थे। वहाँ अठारह कमरों में पचास झरोखे और चालीस दरवाजे थे परन्तु कृष्णमूर्ति के माता-पिता किसान थे। उनका रहने का घर आडम्बरों (दिखाने) से रहित और सुन्दर था।

एक बार श्रीकण्ठ उसके साथ उसके घर गया। वह कृष्णमूर्ति के माता-पिता ने अपनी शक्ति के अनुसार श्रीकण्ठ का अतिथि सत्कार किया। उसके घर में कोई भी नौकर नहीं था। यह देखकर श्रीकण्ठ ने कहा- “मित्र! मैं आपके अतिथि सत्कार से सन्तुष्ट हूँ। केवल यही तथ्य मुझे दुःख दे रहा है कि तुम्हारे घर में एक भी नौकर नहीं है। इस कारण मेरे आतिथ्य के लिए आप कष्ट कर रहे हैं। मेरे घर में तो अनेक नौकर हैं।”

HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्

2. तदा स्वावलम्बी कृष्णमूर्तिः अवदत्-“मित्र! ममापि अष्टौ कर्मकराः सन्ति। ते च द्वौ पादौ, द्वौ हस्तो, द्वे नेत्रे, द्वे श्रोत्रे इति। एते प्रतिक्षणं ममाधीनाः। परन्तु तव भृत्याः अहर्निश कर्माणि कर्तुं न शक्नुवन्ति। त्वं तु स्वकार्यार्थं स्वभृत्याधीनः। यदा यदा ते अनुपस्थिताः, तदा तदा त्वं कष्टम् अनुभवसि। स्वावलम्बने तु सर्वदा सुखमेव, न कदापि कष्टं भवति।”

अहं मासे मासे ऋतौ ऋतौ च स्व-दिनचर्याम् अनुकूलयामि। एतत् श्रुत्वा श्रीकण्ठः अकथयत्-“मित्र! अहं तु न जानाम के मासाः भवन्ति के च ऋतवः।” एतत् श्रुत्वा कृष्णमूर्तिः द्वादशमासानां षण्णाम् ऋतूनां च नामानि अवदत्। श्रीकण्ठः अपृच्छत्-“एकस्मिन् मासे कति दिनानि भवन्ति।” कृष्णमूर्तिः अवदत्-“एकस्मिन् मासे त्रिंशत् एकत्रिंशत् वा दिनानि भवन्ति। फरवरी-मासे अष्टाविंशतिः दिनानि श्रावन्ति। परन्तु तत्र प्रत्येक चतुर्थे वर्षे दिनानां संख्या एकोनविंशतिः भवति।” श्रीकण्ठः अवदत्-“मित्र! तव वचनानि श्रुत्वा मम मनसि महती प्रसन्नता जाता। अधुना अहमपि स्वकार्याणि स्वयमेव करिष्यामि।”
HBSE 7th Class Sanskrit Solutions Ruchira Chapter 3 स्वावलम्बनम्-9
हिन्दी-अनुवाद :
तब स्वावलम्बी कृष्णमूर्ति बोला-“मित्र ! मेरे भी आठ नौकर हैं। वे हैं-दो पैर, दो हाथ, दो नेत्र और दो कान, ऐसा। ये प्रतिक्षण मेरे अधीन हैं परन्तु तुम्हारे नौकर दिन-रात काम नहीं कर सकते। तुम तो अपना काम करने के लिए अपने नौकरों के अधीन हो। जब-तक वे अनुपस्थित होते हैं, तब-तब तुम कष्ट का अनुभव करते हो। स्वावलम्बन में तो हमेशा सुख ही है, कभी कष्ट नहीं होता है।”

मैं हर महीने और हर ऋतु में अपनी दिनचर्या को अपने अनुकूल कर लेता हूँ। यह सुनकर श्रीकण्ठ ने कहा-“मित्र ! मैं तो नहीं जानता, कौन-से महीने होते हैं और कौन-सी ऋतुएँ।” यह सुनकर कृष्णमूर्ति ने ,बारह महीनों और छ: ऋतुओं के नाम बताए। श्रीकण्ठ ने पूछा-“एक महीने में कितने दिन होते हैं ?” कृष्णमूर्ति बोला-“एक महीने में तीस या इकत्तीस दिन होते हैं। फरवरी के महीने में अट्ठाईस दिन होते हैं। लेकिन हर चौथे वर्ष में दिनों की संख्या उनत्तीस होती है।” श्रीकण्ठ बोला-“मित्र । तुम्हारी बातें सुनकर मेरे मन में बहुत प्रसन्नता हुई है। अब मैं भी अपने काम स्वयं ही करूँगा।”

सन्धिच्छेदा: –
श्रीकण्ठश्च = श्रीकण्ठः + च। चतुश्चत्वारिंशत् – चतु: + चत्वारिंशत्। सुंदरञ्च – सुंदरम् + चा कोऽपि – कः + अपि। नासीत् = न + आसीत्। संतुष्टोऽस्मि – संतुष्टः + अस्मि। एतदेव = एतत् + एव। एकोऽपि = एक: + अपि। नास्ति = न + अस्ति। स्वावलम्बी – स्व + अवलम्बी। ममापि – मम + अपि। ममाधीनाः = मम + अधीनाः। अहर्निशम् – अहः + निशम्। स्वकार्यार्थम् = स्वकार्य + अर्थम्। स्वभृत्याधीनाः – स्वभृत्य + अधीनाः। स्वावलम्बने = स्व + अवलम्बने। कदापि = कदा + अपि। प्रत्येकम् = प्रति + एकम्। एकोनविंशतिः – एक + ऊनविंशतिः।

संयोगाः – अनुपस्थिताः – अन् + उपस्थिताः। सुखमेव – सुखम् + एव। अहमपि = अहम् + अपि। स्वयमेव = स्वयम् + एव।

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HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

Haryana State Board HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

HBSE 6th Class Science पौधों को जानिए InText Questions and Answers

पहेली/बूझो

प्रश्न 1.
पहेली जानना चाहती है कि मनीप्लांट, सेम, लौकी तथा अंगूर के तने किस प्रकार के हैं? इनमें से कुछ पौधों को देखिए। ये शाक, झाड़ी और पेड़ से किस प्रकार भिन्न हैं। आपके विचार से इनमें से कुछ को ऊपर चढ़ने के लिए सहारे की आवश्कयता क्यों होती है?
उत्तर:
ये पौधे, शाक, झाड़ी तथा पेड़ों से विभिन्न होते हैं क्योंकि इनका तना कोमल एवं कमजोर होता है। ये पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते हैं और भूमि पर फैल जाते हैं। इसलिए इन्हें विसपी लताएँ कहते हैं। जबकि कुछ पौधे आस-पास में ढाँचे की सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं। ऐसे पौधे आरोही पौधे कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
बूझो के मस्तिष्क में अजब विचार आया। यदि वह जानना चाहता है कि पौधे की जड़ किस प्रकार की होगी, तो उसे पौधे को उखाड़ने की आवश्यकता नहीं है। वह पौधे की पत्तियों को देखकर इसका उत्तर दे सकता है।
उत्तर:
पौधे की पत्ती के शिराविन्यास को देखकर पौधे की जड़ का पता लगाया जा सकता है। समान्तर शिरा विन्यास पत्ती वाले पौधे की जड़ रेशेदार होती है। जबकि जालिकावत् शिराविन्यास वाले पौ? की जड़ें मूसला होती है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

HBSE 6th Class Science पौधों को जानिए Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न कश्चनों को ठीक करके लिखिए
(क) मा मिट्टी सेजल एवं खनिज अवशोषित करता है।
(ख) पत्तियाँ पौधे को सीधा खड़ा रखती हैं।
(ग) जड़ें जल को पत्तियों तक पहुँचाती हैं।
(घ) पुष्य में पुंकेसरों एवं पंखुड़ियों की संख्या सदा समान होती है।
(ङ) यदि किसी पुष्प के बाह्य दल परस्पर जुड़े हो तो उसकी पंखुड़ियाँ भी आपस में जुड़ी होंगी।
(च) यदि किसी पुष्प की पंखुड़ियाँ परस्पर जुड़ी हो तो स्त्रीकेसर पंखुड़ियों से जुड़ा होगा।
उत्तर:
(क) जड़ें मिट्टी से जल एवं खनिज अवशोषित करती हैं।
(ख) तना पौधे को सीधा खड़ा रखता है।
(ग) तना जल को पत्तियों तक पहुँचाता है।
(घ) पुष्प में पुंकेसरों एवं पंखुड़ियों की संख्या सदा समान नहीं होती है।
(ङ) यदि किसी पुष्प के बाह्यदल परस्पर जुड़े हों तो उसका पखुड़िया पृथक् होगा, परस्पर जुड़ा नहीं होगा।
(च) यदि किसी पुष्प की पंखुड़ियाँ परस्पर जुड़ी हों तो स्त्रीकेसर आवश्यक रूप से पंखुड़ियों से जुड़ा नहीं होगा।

प्रश्न 2.
निम्न के चित्र बनाइए
(क) पत्ती
(ख) मूसला जड़
(ग) एक पुष्प जिसका उपरोक्त सारणी में अध्ययन किया हो।
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -1

प्रश्न 3.
क्या आप अपने घर के आस-पास ऐसे पौधे को जानते हैं जिसका तना लम्बा परन्तु दुर्बल हो? इसका नाम लिखिए। आप इसे किस वर्ग में रखेंगे?
उत्तर:
हाँ, काशीफल का पौधा, इसे सहारे की आवश्यकता होती है। यह विसी लता है।

प्रश्न 4.
पौधे में तने का क्या कार्य है?
उत्तर:
1. तना पौधे को सहारा देता है।
2. तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से जड़ों को व अन्य भागों को भोजन पहुँचाया जाता है।

प्रश्न 5.
निम्न में से किन पत्तियों में जालिका रूपी शिरा विन्यास पाया जाता है
गेहूँ, तुलसी, मक्का, घास, धनिया, गुड़हल।
उत्तर:
तुलसी, धनिया, गुड़हल।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 6.
यदि किसी पौधे की जड़ रेशेदार हो तो उसकी पत्ती का शिरा विन्यास किस प्रकार का होगा?
उत्तर:
समान्तर शिराविन्यास।

प्रश्न 7.
यदि किसी पौधे की पत्ती में जालिका रूपी शिरा विन्यास हो तो उसकी जड़ें किस प्रकार की होगी?
उत्तर:
मूसला जड़।

प्रश्न 8.
क्या आप पत्तियों को देखे बिना उनकी पहचान कर सकते हैं?
उत्तर;
1. हाँ, पत्ती की छाप लेकर।
2. पत्ती के ऊपर एक कागज रखिये। पेंसिल को तिरछा पकड़िए तथा इसकी नौक से कागज के उस भाग को जिसके नीचे पत्ती है, धीरे-धीरे रगड़िए। आपको कुछ रेखाओं के साथ छाप दिखाई देगी।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -2
चित्र : पत्ती की छाप लेना

प्रश्न 9.
किसी पुष्प के विभिन्न भागों के नाम लिखिए।
उत्तर:
पुष्य के विभिन्न भागों के नाम

  1. पुष्प वृन्त,
  2. बाह्य दल,
  3. पंखुड़ियाँ,
  4. पुंकेसर,
  5. परागकोष,
  6. स्त्रीकेसर,
  7. वर्तिका,
  8. वर्तिकान।

प्रश्न 10.
निम्न में से किन पौधों के फूल आपने देखे हैं
घास, मक्का , गेहूँ, टमाटर, तुलसी, पीपल, शीशम,
बरगद, आम, जामुन, अमरूद, अनार, पपीता, केला, नीबू, गन्ना, आलू, मूंगफली।
उत्तर:
हमने सभी पौधों को देखा है। इनमें से फूलों वाले पौधे हैं।
जामुन टमाटर अनार अमरूद
तुलसी केला पपीता नीबू
आम मिर्च

प्रश्न 11.
पौधों के उस भाग का नाम लिखिए जो अपना भोजन बनाता है। इस प्रक्रम को क्या कहते हैं?
उत्तर:
पत्तियाँ भोजन बनाती हैं। इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

प्रश्न 12.
पुष्प के किस भाग में अंडाशय मिलता है?
उत्तर:
अंडाशय स्त्रीकेसर का सबसे निचला एवं फूला हुआ भाग है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 13.
ऐसे दो पुष्यों के नाम लिखिए जिनमें से प्रत्येक में संयुक्त और अलग-अलग पंखुड़ियाँ हों।
उत्तर:
1. संयुक्त पंखुड़ियाँ – धतूरा, कनेर।
2. अलग-अलग पंखुड़ियाँ – कमल, सरसों।

HBSE 6th Class Science पौधों को जानिए Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पी प्रश्न : निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प का चयन कीजिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा पौधा झाड़ी है?
(क) गेहूँ
(ख) मेंहदी
(ग) पालक
(घ) पीपल
उत्तर:
(ख) मेंहदी

2. फलक भाग होता है
(क) जड़ का
(ख) तने का
(ग) पत्ती का
(घ) फल का
उत्तर:
(ग) पत्ती का

3. शिरा विन्यास पाया जाता है
(क) पत्तियों में
(ख) तने में
(ग) जड़ों में
(घ) पुष्यों में
उत्तर:
(क) पत्तियों में

4. पौधों द्वारा जल को वाष्प के रूप में उड़ाना कहलाता है
(क) प्रकाश संश्लेषण
(ख) संवहन
(ग) प्रकीर्णन
(घ) वाष्पोत्सर्जन
उत्तर:
(घ) वाष्पोत्सर्जन

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

II. रिक्त स्थान : निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए

1. हरे एवं कोमल तने वाले पौधे …………….. कहलाते हैं।
2. पत्ती के चपटे हरे भाग को …………….. कहते हैं।
3. पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को …………….. कहते हैं।
4. पुष्प के केन्द्र में स्थित भाग को …………….. कहते हैं।
उत्तर:
1. शाक
2. फलक
3. शिराविन्यास
4. स्त्रीकेसर

III. सुमेलन : कॉलम ‘A’ के शब्दों का मिलान कॉलम ‘B’ के शब्दों से कीजिए-

कॉलम ‘A’कॉलम ‘B’
(क) प्रकाश संश्लेषण(i) तना
(ख) जल संवहन(ii) जड़
(ग) पौधे का स्थिरक(iii) पुंकेसर व स्त्रीकेसर
(घ) पुष्प के जननांग(iv) पत्ती

उत्तर:

कॉलम ‘A’कॉलम ‘B’
(क) प्रकाश संश्लेषण(iv) पत्ती
(ख) जल संवहन(i) तना
(ग) पौधे का स्थिरक(ii) जड़
(घ) पुष्प के जननांग(iii) पुंकेसर व स्त्रीकेसर

IV. सत्य/असत्य : निम्नलिखित वाक्यों में सत्य एवं असत्य कथन छोटिए

(i) पीपल की पत्ती में जालिकावत् शिरा विन्यास पाया जाता
(ii) हम पौधे के उन भागों को खाते हैं जिनमें भोजन संचित होता है।
(iii) पुष्प पौधे का निरर्थक एवं अनाकर्षक भाग है।
(iv) अण्डाशय में छेटी-छेटी गोल संरचनाएं बीजाण्ड कहलाती है।
उत्तर:
1. सत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पौधों को कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है? नाम लिखिए।
उत्तर:
तीन वर्गों में शाक, झारा था वृक्ष।

प्रश्न 2.
पौधे के दो मुख्य भाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

जड़
तना।

प्रश्न 3.
खरपतवार क्या होता है?
उत्तर:
खेतों में बिना बोए उगने वाले (अनचाहे) पौधे खरपतवार कहलाते हैं।

प्रश्न 4.
आरोही पौधे किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
कमजोर तने वाले पौधे जो आगे बढ़ने के लिए किसी का सहारा लेते हैं, आरोही पौधे कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
विसपी लताएं किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
ऐसे पौधे जो भूमि पर रेंगकर आगे बढ़ते हैं, विसी लताएँ कहलाते हैं।

प्रश्न 6.
किसी शाक के पत्तियोंयुक्त तने को लाल स्याही से रंगीन जल के गिलास में थोड़ी देर तक रखने पर आप क्या देखते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
तने का कुछ भाग, पत्तियाँ तथा पत्तियों की शिराएँ लाल दिखाई देती हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 7.
पत्तियों और शिराओं में लाल रंग कैसे पहुँचता (क्रियाकलाप)
उत्तर:
तने में उपस्थित महीन नलिकारूपी संरचनाओं द्वारा।

प्रश्न 8.
तने का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर:
जल तथा इसमें घुले खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाना तथा पत्तियों में बने भोजन को जड़ों तक पहुँचाना।

प्रश्न 9.
पत्ती क्या होती है?
उत्तर:
पौधे के तने पर लगा चपटा, चौड़ा एवं हरा भाग पत्ती कहलाता है।

प्रश्न 10.
पत्ती के मुख्य भागों के नाम लिखिए।
उत्तर:
1. पर्णवृन्त तथा
2. पटल।

प्रश्न 11.
पत्ती तने से कैसे जुड़ी होती है।
उत्तर:
पत्ती तने से पर्णवृन्त द्वारा जुड़ी होती है।

प्रश्न 12.
किसी जल सिंचित पौधे को दिन के समय पॉलीथीन से ढक देने पर आप पॉलीथीन में क्या देखते हैं और क्यों? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
पॉलीथीन की भीतरी सतह पर जल की बूंदें एकत्र हो जाती हैं। ये जल की बूंदें पत्तियों द्वारा वाष्प के रूप में जल के निष्कासन द्वारा बनी हैं।

प्रश्न 13.
वाष्पोत्सर्जन किसे कहते हैं?
उत्तर:
पौधों के हरे भागों से जल का वाष्य के रूप में उड़ना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है।

प्रश्न 14.
एक जड़युक्त पौधे तथा एक जड़ कटे पौधे को अलग-अलग गमलों में लगाकर नियमित रूप से पानी दिया गया गया। कौन सा पौधा स्वस्थ रहेगा और क्यों? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
जड़युक्त पौधा स्वस्थ रहेगा। क्योंकि जड़विहीन पौधा जल ग्रहण नहीं कर पाया और वह सूख गया।

प्रश्न 15.
दो ऐसे पौधों के नाम बताइए जिनमें मूसला जड़ें मिलती हैं।
उत्तर:

  • सरसों
  • चना।

प्रश्न 16.
दो ऐसे पौधों के नाम बताइए जिनमें रेशेदार जड़ें मिलती हैं।
उत्तर:

  • मक्का
  • गेहूँ।

प्रश्न 17.
दो ऐसी जड़ों के नाम लिखिए जिन्हें हम खाते हैं।
उत्तर:

  • गाजर
  • मूली।

प्रश्न 18.
बिना खिले पुष्प में पंखुड़ियाँ कहाँ बन्द रहती हैं? (क्रिया कलाप)
उत्तर:
बाह्य दलों के अन्दर।

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प्रश्न 19.
अण्डाशय की काट पर जल की बूँद क्यों जाती है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
अण्डाशय की काट को सूखने से बचाने के लिए।

प्रश्न 20,
अण्डाशय की काट को आवर्धक लेंस द्वारा देखने पर आपको क्या दिखाई देता है। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
छोटी-छोटी गोल संरचनाएँ जिन्हें बीजाण्ड कहते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
शाक, झाड़ी तथा वृक्ष के दो-दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
शाक-गेहूँ, धनिया। झाड़ी-मेंहदी, गुड़हल।
वृक्ष-आम, बरगद।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण दीजिए-
(क) दो विसपी लताओं के नाम
(ख) दो जड़ों के नाम जिन्हें हम खाते हैं।
उत्तर:
(क)
(i) लौकी
(ii) कद्दू ।

(ख)
(i) गाजर
(ii) शकरकन्द।

प्रश्न 3.
जड़ तथा तने के दो-दो कार्य लिखिए।
उत्तर:
(क) जड़ के कार्य-

  • पौधे को भूमि में साधे रखना।
  • भूमि से जल एवं खनिज लवण अवशोषित करना।

(ख) तने के कार्य-

  • पत्नियों, पुष्पों व फलों को धारण करना।
  • जल एवं भोज्य पदार्थों का स्थानान्तरण करना।

प्रश्न 4.
एक सामान्य पत्ती का चित्र बनाकर उसके दो भागों के नाम व कार्य लिखिए।
उत्तर:
1. पर्ण वृन्त- यह पटल पत्ती को तने से जोड़ता है।
2. फलक- यह भोजन निर्माण करता है।
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प्रश्न 5.
आपके द्वारा अध्ययन किये गये कुछ खरपतवारों के नाम, इनमें जड़ों एवं शिरा विन्यास के प्रकार को दर्शाने के लिए एक तालिका बनाइए।
उत्तर:
जड़ के प्रकार एवं पत्तियों में शिरा-विन्यास के प्रकार

पौधों के नामशिरा विन्यास का प्रकारजड़ का प्रकार
1. बथुआजालिकावत्मूसला
2. जईसमान्तररेशेदार
3. सहूँसमान्तररेशेदार
4. चौलाईजालिकावत्मूसला

प्रश्न 6.
वाष्योत्सर्जन क्या होता है? हम यह कैसे पता करेंगे कि पौधे वाष्योत्सर्जन क्रिया में जलवाष्य निष्कासित करते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
पौधे की पत्तियों द्वारा अतिरिक्त जल को जल वाष्प के रूप में निष्कासित करना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है। एक स्वस्थ पौधे को गमले में लेकर इसमें पर्याप्त पानी देकर इसे पॉलीथीन से पूर्णत: ढक देते हैं। अब इसे धूप में रख देते हैं। कुछ देर पश्चात हम पॉलीथीन की भीतरी सतह पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें देखते हैं। ये जल की बूंदें पत्तियों द्वारा वाष्पोत्सर्जन के फलस्वरूप बनती हैं।

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प्रश्न 7.
प्रकाश संश्लेषण क्या होता है?
उत्तर:
यह पौधों के हरे भागों (विशेषकर पत्तियों) में होने वाली एक प्रक्रिया है। इसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हरे रंग के पदार्थ द्वारा, कार्बन डाइऑक्साइड व जल ग्रहण करके अपना भोजन बनाते हैं। इस क्रिया में ऑक्सीजन मुक्त होती है।

प्रश्न 8.
मक्का और चने के बीजों को नम रुई पर उगाया गया। कुछ दिनों बाद दोनों नवोद्भिदों की जड़ों का निरीक्षण किया गया।
(i) चित्र में पहचानिए कौन-सी जड़ चना की है तथा कौन-सी मक्का की।
(i) दोनों जड़ों में एक समानता तथा अन्तर बताइए। (क्रिया कलाप)
उत्तर:
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(i) (a) मक्का की जड़
(b) चने की जड़

(ii) समानता : दोनों नीचे की ओर निकलती हैं।
अन्तर : मक्का की जड़ अशाखित है, जबकि चने की जड़ शाखित हैं।

प्रश्न 9.
मूसला जड़ एवं रेशेदार जड़ें किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
मूसला जड़-वे जड़ें जिनमें एक मुख्य जड़ होती है तथा इससे अनेक पार्श्व जड़ें निकलती हैं, मूसला जड़ कहलाती हैं।
रेशेदार जड़-ऐसी जड़ें जिनमें एक ही स्थान से धागे के समान अनेक जड़े निकलती हैं, रेशेदार जड़ें कहलाती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी पौधे के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ आरेख चित्र बनाइए।
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -5

प्रश्न 2.
पौधों को उनकी लम्बाई, कोमल एवं कठोर गुण तथा शाखाओं के आधार पर कितने भागों में बाँटा गया है? सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उपरोक्त आधार पर पौधों को तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है-
1. शाक : ये कम लम्बाई वाले पौधे होते हैं। इनके तने कोमल तथा शाखाएँ छोटी होती हैं।
जैसे- गेहूँ, बथुआ, चना, मटर।

2. झाड़ी : ये पौधे मध्यम ऊँचाई के होते हैं। इन पौधों में कोई एक मुख्य तना नहीं होता है। अनेक तने एक ही स्थान से निकलते दिखाई देते हैं।
जैसे- मेंहदी, गुड़हल, बाँस आदि।

3. वृक्ष : ये अधिक ऊँचाई वाले पौधे होते हैं। इनमें एक मुख्य स्तम्भ होता है जो ऊपर जाकर काफी शाखित हो जाता है। इनका तना कठोर होता है।
जैसे- बरगद, आम, पीपल।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -6
चित्र : (a) शाक, (b) झाड़ी, () वृक्ष

प्रश्न 3.
आपके द्वारा देखे गए कुछ पौधों को शाक, झाड़ी अथवा वृक्ष संवर्ग में निम्नानुसार सारणी में वर्गीकृत कीजिए।
(i) ऊँचाई (स्वयं की लम्बाई से तुलना करके)
(ii) तना (हरा, कोमल, मोटा, कठोर)
(iii) शाखाएँ कहाँ से निकलती हैं (तने के आधार से या तने के ऊपर से)
(iv) पौधे का संवर्ग (शाक, झाड़ी या वृक्ष) (क्रियाकलाप)
उत्तर:
सारणी : पौधों के संवर्ग
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -7

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

प्रश्न 4.
किसी क्रिया कलाप द्वारा स्पष्ट कीजिए कि पत्तियों में मण्ड का निर्माण होता है। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
आवश्यक सामग्री : पत्ती, स्प्रिट, बीकर, परखनली, बर्नर, जल, प्लेट एवं आयोडीन विलयन।
परखनली में एक पत्ती रखिए तथा उसमें पर्याप्त मात्रा में स्प्रिट डालें, जिससे पत्ती उसमें पूर्णत: डूबी रहे। अब इस परखनली को जल से आधे भरे बीकर में रखिए। बीकर को उस समय तक गर्म करते रहें जब तक पत्ती से हरा रंग पूर्णत: बाहर नहीं निकल जाता। अब पत्ती को परखनली से सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर जल से भली-भाँति धोएँ। इसे प्लेट में रखकर आयोडीन विलयन की कुछ बूंदें डालिए।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -8
पत्ती से हरा रंग बाहर निकल कर स्प्रिट में घुल जाता है और पत्ती रंगहीन दिखाई देती है। इस पत्ती पर आयोडीन की बूंदें डालने पर इसका रंग नीला-काला हो जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि पत्ती में मण्ड उपस्थित है।

प्रश्न 5.
किसी बगीचे या खेत में जाकर विभिन्न प्रकार के पौधों (खरपतवारों) को उखाड़कर देखिए तथा उनके नामांकित चित्र बनाइए। चित्र में जड़ों के प्रकार भी बताइए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -9

प्रश्न 6.
किसी पुष्प का नामांकित चित्र बनाकर उसके भागों के नाम अंकित कीजिए। स्त्रीकेसर तथा पुंकेसर के चित्र बनाकर उनका कार्य लिखिए।
उत्तर:
पुष्प के विभिन्न भागों को दर्शाता हुआ चित्र-
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -10
स्त्रीकेसर: यह पुष्प का मादा भाग है। इसका फूला हुआ नीचे का भाग अण्डाशय कहलाता है। इसके ऊपर का सँकरा भाग वर्तिका तथा वर्तिका के ऊपर धुंडी जैसा भाग वर्तिकान कहलाता है।
कार्य: अण्डाशय के अन्दर बीज का निर्माण होता है तथा यह फूलकर फल बनाता है।

पुंकेसर: यह पुष्प का नर अंग है। इसका लम्बा पतला भाग तंतु तथा ऊपर का फूला भाग परागकोष कहलाता है।
कार्य: परागकोष के अन्दर परागकण बनते हैं।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -11

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प्रश्न 7.
पुष्प के अण्डाशय की आन्तरिक संरचना का अध्ययन कैसे किया जाता है? अण्डाशय की आन्तरिक संरचना का चित्र बनाइए।
उत्तर:
अण्डाशय स्त्रीकेसर का सबसे निचला फूला हुआ भाग है। इसकी आन्तरिक संरचना के अध्ययन के लिए इसे काटना पड़ता है। अण्डाशय को दो प्रकार से काटा जा सकता है जैसा कि नीचे दिये गये चित्रों में दर्शाया गया है।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -12
अलग-अलग पुष्पों से दो अण्डाशय लेते हैं। दोनों अण्डाशयों को प्लेट पर रखकर चित्र के अनुसार काट सकते हैं। अण्डाशय की काट को सूखने से बचाने के लिए प्रत्येक काट पर जल की एक बूंद रखिए।
आवर्धक लैंस की सहायता से अण्डाशय की आन्तरिक रचना का अध्ययन कीजिए। आपको अण्डाशय के अन्दर छोटी-छोटी गोल रचनाएँ दिखाई देती हैं, जिन्हें बीजाण्ड कहते हैं।

प्रश्न 8.
विभिन्न पौधों के पुष्पों का अवलोकन करके निम्न प्रश्नों के उत्तर सारणीबद्ध कीजिए
उत्तर:
बाह्य दल एवं पंखुड़ियों का भली-भाँति अवलोकन कीजिए तथा निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1. इसमें कितने बाह्य दल है?
2. क्या ये आपस में जुड़े हैं?
3. बाह्य दल एवं पंखुड़ियाँ किन रंगों की हैं?
4. आपके फूल में पंखुड़ियों की संख्या कितनी है?
5. क्या वे एक-दूसरे से जुड़ी हैं अथवा स्वतन्त्र हैं?
6. क्या जुड़े हुए बाह्य दल वाले पुष्प की पंखुड़ियाँ अलग-अलग है या संयुक्त ? अपनी कक्षा के सभी विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न पुष्पों के अध्ययन सम्बन्धी प्रेक्षण सारणी में लिखिए।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -14

प्रश्न 9.
निम्न ग्रिड में पौधे के विभिन्न भागों के नाम छिपे हुए हैं। ऊपर, नीचे, दाएँ, बाएँ और तिर्यक दिशा में जाकर उन नामों को ढ़ँढिए। नाम का घेरा लगाइए।
HBSE 6th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए -15
उत्तर:
(i) Ovule
(ii) Filament
(iii) Flower
(iv) Stem
(v) Stamen
(vi) Sepal
(vii) Midrib
(viii) Fruit
(ix) Vein
(x) Herb
(xi) Ovary
(xii) Petal

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

पौधों को जानिए Class 6 HBSE Notes in Hindi

→ सामान्यतः पौधों का वर्गीकरण उनकी ऊँचाई, तने एवं शाखाओं के आधार पर शाक, झाड़ी तथा वृक्ष में किया जाता है।
→ पौधे का जमीन के अन्दर का भाग जड़ तंत्र तथा जमीन के बाहर का भाग प्ररोह तंत्र कहलाता है। प्ररोह तंत्र में तना, शाखाएँ एवं पत्तियाँ होती हैं।
→ तने पर पत्तियाँ, पुष्प तथा फल बनते हैं।
→ सामान्यत: पत्ती में पर्णवृन्त तथा फलक होते हैं।
→ पत्ती में शिराओं का प्रतिरूप शिराविन्यास कहलाता है।
→ यह दो प्रकार का होता है- जालिका रूपी तथा समान्तर।
→ पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा जलवाष्प को वायु में निष्कासित करती हैं।
→ हरी पत्तियों सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में वायु एवं जल से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन बनाती है।
→ जड़ें मिट्टी से जल एवं खनिज पदार्थों का अवशोषण करती है तथा पौधों को मिट्टी में दृढ़ता से जमाए रखती हैं।
→ जड़ें मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं मूसला जड़ एवं रेशेदार जड़ा।
→ जालिका रूपी शिराविन्यास युक्त पत्तियों वाले पौधों की जड़ें मूसला जड़ होती हैं, जबकि समान्तर शिराविन्यास युक्त पत्तियों वाले पौधों की जड़ें रेशेदार होती हैं।
→ तने द्वारा जड़ों से पत्तियों और अन्य भागों को जल और पत्तियों से भोजन पौधे के अन्य भागों तक पहुँचता है।
→ पुष्प के विभिन्न भाग हैं बाह्य दल, पंखुड़ी, पुंकेसर तथा स्त्रीकेसर।
→ शाक – हरे एवं कोमल तने वाले पौधे शाक कहलाते हैं।
→ झाड़ी – ऐसे मध्यम ऊँचाई के पौधे जिनमें एक समान कई तने जमीन से निकल कर झाड़ बनाते हैं।
→ वृक्ष – ऐसे बड़े पौधे जिनमें एक मुख्य तना होता है।
→ विसपी लताएँ – कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और ये भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसी लता कहते हैं।
→ आरोही – ऐसे कमजोर पौधे जो किसी सहारे के द्वारा ऊपर बढ़ते हैं, आरोही कहलाते हैं।
→ पर्ण वृन्त – पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा पत्ती तने से जुड़ी रहती है।
→ फलक – पत्ती का चौड़ा हरा भाग। शिरा-पत्ती में उपस्थित नाड़ियाँ।
→ मध्य शिरा – पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है।
→ शिराविन्यास – पत्ती में शिराओं की व्यवस्था।
→ जालिकावत् शिराविन्यास – पत्ती में जब सभी शिराएँ मिलकर एक जाल-सा बनाती हैं तो इसे जालिकावत् शिरा विन्यास कहते हैं।
→ समान्तर शिराविन्यास – पत्ती में जब सभी शिराएँ एक-दूसरी के समान्तर फैली होती हैं तो इसे समान्तर शिरा विन्यास कहते हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 पौधों को जानिए

→ वाष्पोत्सर्जन – पत्तियों द्वारा जल को वाष्प के रूप में निकालने की प्रक्रिया।
→ प्रकाश संश्लेषण – पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश में भोजन बनाने की प्रक्रिया।
→ मूसला जड़ – मुख्य जड़ जिससे पार्श्व जड़ें निकलती है।
→ रेशेदार जड़ – जिन पौधों में कोई एक मुख्य जड़ नहीं होती और सभी जड़ें एक समान दिखाई देती हैं तथा एक ही स्थान से निकलती हैं, इन्हें झकड़ा जड़ें या रेशेदार जड़ें कहते हैं।
→ पार्श्व जड़ – मुख्य मूसला जड़ से निकली जड़ें पार्श्व जड़ें कहलाती हैं।
→ संवहन – तने द्वारा जल एवं खनिजों का स्थानान्तरण संवहन कहलाता है।
→ बाह्यदल – फूल की कलिका छटी-छोटी हरी पत्तियों जैसी रचना से ढकी होती है जिन्हें बाह्यदल कहते हैं।
→ पंखुड़ियाँ – फूलों के बाह्यदल से घिरा आकर्षक प्रमुख रंगीन भाग।
→ पुंकेसर – पुष्प के नर भाग जो परागकण उत्पन्न करते हैं।
→ स्त्री-केसर – पुष्प के मादा भाग जो बीजाण्ड उत्पन्न करते हैं।
→ बीजाण्ड – अण्डाशय में छोटी-छोटी गोल संरचनाएँ जो बीज बनाती हैं।

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