Author name: Bhagya

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 1 आंकड़े : स्रोत और संकलन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 1 आंकड़े: स्रोत और संकलन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 1 आंकड़े : स्रोत और संकलन

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए- (i) एक संख्या अथवा लक्षण को जो मापन को प्रदर्शित करता है, कहते हैं-
(क) अंक
(ग) संख्या
(ख) आंकड़े
(घ) लक्षण
उत्तर:
(ख) आंकड़े।

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(ii) एकल आधार सामग्री एकमात्र माप हैं-
(क) तालिका
(ग) वास्तविक संसार
(ख) आवृत्ति
(घ) सूचना।
उत्तर:
(क) तालिका।

(iii) एक मिलान चिह्न में, फोर एंड क्रासिंग फिफ्थ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं-
(क) फोर एंड क्रास विधि
(ख) मिलान चिह्न विधि
(ग) आवृत्ति अंकित विधि
(घ) समावेश विधि
उत्तर:
(क) फोर एंड क्रास विधि

(iv) ओजाइव एक विधि है जिसमें-
(क) साधारण आवृत्ति नापी जाती हैं
(ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती हैं।
(ग) साधारण आवृत्ति अंकित की जाती हैं
(घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती हैं।
उत्तर:
(घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती हैं।

(v) यदि वर्ग के दोनों अंत आवृत्ति समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं-
(क) बहिष्कार विधि
(ख) समावेश विधि
(ग) चिह्न विधि
(घ) सांख्यिकीय विधि।
उत्तर:
(ख) समावेश विधि।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर।
उत्तर:
सभी प्रकार के स्वीकृत तथ्य, व्यक्ति, वस्तु, स्थानों इत्यादि के नाम उनसे जुड़े तथ्य विवरण व आंकड़ों को डेटा (आंकड़ा) कहते हैं। इन आंकड़ों की कंप्यूटर द्वारा प्रोसेस कर एंड यूजर के लिए उपलब्ध करवाई जाने वाली उपयोगी जानकारियों को सूचना कहते हैं।

(ii) आंकड़ों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सभी प्रकार के स्वीकृत तथ्य, व्यक्ति, स्थानों इत्यादि के नाम उनसे जुड़े तथ्य, विवरण व आंकड़ों को डेटा या आंकड़े कहते हैं।

(iii) एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
एक तालिका में पाद टिप्पणी से लाभ इस प्रकार हैं- तालिका में, पाद टिप्पणी कुछ विशिष्ट सेल (cells) से जुड़ी होती है। इस सेल (cells) में कॉलम शीर्षक अथवा कतार शीर्षक शामिल होते हैं।

(iv) आंकड़ों के प्राथमिक स्त्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
वे आंकड़े जो क्षेत्र से सीधे किसी तत्व की गणना द्वारा अथवा लोगों से साक्षात्कार करके प्राप्त किये जाते हैं, उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहते हैं।

(v) द्वितीयक आंकड़ों के पाँच स्त्रोत बताइए।
उत्तर:
द्वितीयक आंकड़ों के पाँच प्रकाशित व अप्रकाशित स्त्रोत इस प्रकार हैं-

  1. सरकारी
  2. अर्ध सरकारी
  3. अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन
  4. निजी प्रकाशन
  5. समाचार पत्र और पत्रिकाएं।

(vi) आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्ती विधि क्या है?
उत्तर:

वर्गfCf
00-1044
10-2059
20-30514
30-40721
40-50627
50-601037
60-70845
70-80651
80-90556
90-100460

जैसे कि इस तालिका में दर्शाया गया है कि एक वर्ग की उच्च सीमा अगले वर्ग की निम्न सीमा जैसी है। इस विधि में कोई भी अवलोकन जिसका मूल्य 30 है उसी वर्ग में रखा जाएगा जिसमें यह निम्न सीमा पर आता है और यह उस वर्ग से निकाल दिया जाता है जिसमें यह उच्च सीमा पर है। इसलिए इस विधि को अपवर्ती विधि कहते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए-
(i) राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए। जहाँ से द्वितीयक आंकड़े एकत्र किए जा सकते हैं?
उत्तर:
द्वितीयक आंकड़ों को राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय अभिकरणों द्वारा एकत्र किया जा सकता है जैसे कि-
सरकारी प्रकाशन – विभिन्न मंत्रालयों और भारत सरकार के विभागों, राज्य सरकारों के प्रकाशन और जिलों के बुलेटिन द्वितीयक सूचनाओं के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके अंतर्गत भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित भारत की जनगणना राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्ट, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की मौसम रिपोर्ट, राज्य सरकारों द्वारा प्रकाशित सांख्यिकीय सारांश और विभिन्न आयोगों द्वारा प्रकाशित आवधिक रिपोर्ट सम्मिलित किए जाते हैं।

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(ii) सूचकांक का क्या महत्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रक्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवर्तनों को दिखाइए।
उत्तर:
सूचकांक एक सांख्यिकीय मापदण्ड है जो किसी परिवर्ती में आए बदलाव को दिखाने के लिए अथवा समय को ध्यान में रखकर परिवर्तीयों से जुड़े ग्रुप, भौगोलिक स्थानों तथा तापों को दिखाने के लिए डिजाइन किया गया है। सूचकांक न केवल समय के साथ हुए परिवर्तनों की माप करता है बल्कि विभिन्न स्थानों, उद्योगों, नगरों अथवा देशों की आर्थिक दशाओं की तुलना भी करता है। सूचकांक का प्रयोग व्यापक रूप में अर्थशास्त्र तथा व्यवसाय में लागत तथा मात्रा में आए बदलाव को देखने के लिए किया जाता है। सूचकांक के परिकलन के लिए अलग-अलग प्रकार की विधियाँ हैं। इसे इस प्रकार प्राप्त किया जाता है-
\(\frac{\sum q 1}{\sum q 0} \times 100\)
∑q1 = वर्तमान वर्ष के उत्पादन का योग
∑q0= आधार वर्ष के उत्पादन का योग
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लघु उत्तरीय प्रश्न
(Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भौगोलिक आँकड़े किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
भौगोलिक आँकड़े (Geographical Data)- भौगोलिक आँकड़े संख्याओं तथा सूचना के समूह का विवरण है।
आँकड़े किसी तथ्य के घनत्व, वितरण तथा विस्तार की जानकारी प्रदान करते हैं। भौगोलिक आँकड़े विभिन्न प्रकार के होते हैं जिनमें उच्चावच, चट्टानें, जलवायु, वनस्पति, कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन तथा मानव संबंधी आँकड़े हैं।

प्रश्न 2.
आँकड़ों के वर्गीकरण के कौन-कौन से चरण हैं?
उत्तर:
आँकड़ों के वर्गीकरण के निम्नलिखित मुख्य चरण हैं-

  1. समय, प्रदेश, गुण, मात्रा आदि के आधार पर आँकड़ों के वर्ग बनाना (Classification)
  2. आँकड़ों का शुद्ध रूप में सारणीयन (Tabulation)
  3. उपयुक्त सांख्यिकीय तकनीकों का प्रयोग करते हुए आँकड़ों को संसाधित करना (Processing)

प्रश्न 3.
आँकड़ों के प्राथमिक स्रोतों एवं गौण स्रोतों की तुलना करो।
उत्तर:
आँकड़ों के स्रोत (Sources of Data)- भौगोलिक आँकड़ों के दो मुख्य स्रोत होते हैं- प्राथमिक (Primary) तथा गौण (Secondary)।

  1. प्राथमिक आँकड़े-वे आँकड़े जो क्षेत्र से सीधे किसी तत्त्व की गणना द्वारा अथवा लोगों से साक्षात्कार करके प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें प्राथमिक आँकड़े कहते हैं।
  2. गौण आँकड़े-गौण आँकड़े प्रयोगकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र नहीं किए जाते हैं। ये बहुधा प्रकाशित होते हैं अथवा किसी दूसरे के पास उपलब्ध होते हैं। प्रयोगकर्ता ऐसे आँकड़ों को लेकर उन्हें सही व विश्वसनीय मानते हुए अपना निष्कर्ष निकालते हैं।

प्रश्न 4.
आँकड़ों के स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर:
प्राथमिक आँकड़ों के स्त्रोत (Sources of Primary Data)- प्राथमिक आँकड़ों का मुख्य स्रोत क्षेत्र सर्वेक्षण (Field work) होता है गौण सूचनाओं के स्रोतों की संख्या अनगिनत है। प्रत्येक विशिष्ट संस्था अपने अलग-अलग आँकड़े एकत्र करके प्रकाशित करती है।
(1) भारत का जनगणना विभाग (Census Deptt.) जनसंख्या आँकड़ों का प्रकाशन करता है।
(2) कृषि विभाग (Agriculture Deptt.) द्वारा कृषि संबंधी आँकड़े प्रकाशित किए जाते हैं।
(3) भारत में मानचित्रों के प्रकाशन की दो सरकारी संस्थाएं हैं। पहली भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) तथा दूसरी राष्ट्रीय मानचित्र एवं विषयक मानचित्रण संगठन (नैटमी) (NATMO)। भारतीय सर्वेक्षण विभाग विभिन्न मापकों पर मुख्यतः स्थलाकृतिक मानचित्रों का प्रकाशन करता है जबकि नैटमो विभिन्न प्रकार के विषयक मानचित्रों को प्रकाशित करता है।

प्रश्न 5.
आँकड़ों का आरेखीय प्रदर्शन किस प्रकार महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
आरेखीय प्रदर्शन – आँकड़ों का आरेखीय प्रदर्शन भूगोल की दूसरी महत्त्वपूर्ण विशेषता है। हम बड़े-बड़े आँकड़ों का लेखाचित्र चार्ट या मानचित्र में बदल सकते हैं तथा इसकी प्रमुख विशेषताओं को दृश्य स्वरूप प्रदान करते हैं। ऐसे मानचित्रों में चुने हुए तथ्यों के वितरण तथा उसके आपसी संबंधों का प्रदर्शन किया जाता है।

प्रश्न 6.
आँकड़ों के विश्लेषण के दो चरण बताओ।
उत्तर:
आंकड़ों का विश्लेषण ( Data Analysis) – आँकड़ों का विश्लेषण निम्नलिखित चरणों में होता है-
1. आँकड़ों का संकलन (Collection of Data) – इनके प्रयोग का प्रथम चरण होता है सही आँकड़े प्राप्त करने का यथासंभव प्रयास किया जाता है त्रुटिपूर्ण आँकड़ों से त्रुटिपूर्ण परिणाम मिलते हैं।
2. आँकड़ों का वर्गीकरण (Data Classification ) संकलित आँकड़ों को संक्षिप्त रूप देने के लिए उनका संपादन (Editing), वर्गीकरण (Classification) तथा संगठन (Organisation) किया जाता है। गणना करना, सारणीबद्ध करना और यथाप्राप्त सूचनाओं का एक उपयुक्त आधार पर संख्यात्मक स्वरूप प्रदान करना आदि क्रियाओं को सम्मिलित रूप में आँकड़ा विश्लेषण कहते हैं। इस प्रक्रिया में पहला चरण किन्हीं समान विशेषताओं के आधार पर आँकड़ों का वर्गीकरण करना होता है। यही आँकड़ों का वर्गीकरण है।

निबंधात्मक प्रश्न
(Essay Type Questions)

प्रश्न 1.
आंकड़ों के सारणीयन (Tabulation) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों का सारणीयन (Tabulation of Data)- एकत्रित आँकड़े अव्यवस्थित तथा अवर्गीकृत रूप में प्राप्त होते हैं। इन आँकड़ों को सरल रूप में समझना तथा कोई निष्कर्ष निकालना कठिन होता है। इन आँकड़ों को सारणीबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इन आँकड़ों को स्तम्भ और पंक्तियों में रखा जाता है। इससे इनकी तुलना करना आसान हो जाता है। पंक्तियों को समान्तर क्षैतिजीय (Horizontal) रूप में रखा जाता है तथा स्तंभों को लंबवत् (Vertical) रूप में लिखा जाता है।
सारणी के प्रमुख भाग (Main Parts of a Table )-एक अच्छी सारणी के प्रमुख भागों को नीचे सारणी में एक प्रतिरूप (Format) द्वारा दिखाया गया है-
1. सारणी संख्या (Table Number ) सब से ऊपर सारणी का संकेत (Reference) देने के लिए नंबर दिया जाता है।
2. सारणी शीर्षक (Title of the Table)-सारणी के उद्देश्य को प्रकट करने के लिए शीर्षक दिया जाता है।

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3. शीर्षक टिप्पणी (Head-note) अधिक जानकारी के लिए शीर्षक टिप्पणी लिखी जाती है।
4. प्रतिपर्ण (Stubs) पंक्तियों के इकट्ठे शीर्षक को प्रतिपर्ण कहा जाता है। इसके आगे प्रतिपर्ण की प्रविष्टियां (enteries) होती हैं।
5. कक्ष शीर्ष (Book- head) सारणी के स्तंभों में लिखे जाने वाले विवरण को कक्ष शीर्ष कहा जाता है।
6. मुख्य भाग (Body) सारणी के आँकड़ों को कोशिकाओं के रूप में लिखा जाता है।
7.याद टिप्पणी (Foot-note)- सारणी के नीचे आँकड़ों से संबंधित आवश्यक सूचना लिखी जाती है तथा एक तारे (*) का चिह्न लगाया जाता है।
8. खोत (Source) सारणी में सबसे नीचे आँकड़ों के लोत के बारे में लिखा जाता है।

प्रश्न 2.
आँकड़ों के वर्गीकरण से क्या अभिप्राय है? इसे कितने प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है?
उत्तर:
आँकड़ों का वर्गीकरण (Classification of Data)- आँकड़ों को सरल रूप में समझने के लिए विभिन्न वर्गों में रखा जाता है। वर्गीकरण एक ऐसी क्रिया है जिसके द्वारा आँकड़ों को उनके एक जैसे गुण के आधार पर समान वर्गों में या अलग गुणों के आधार पर अलग-अलग वर्गों में रखा जाता है। इन आँकड़ों को आरोही क्रम (Ascending order) तथा अवरोही क्रम (Descending order) में लिखा जाता है। आरोही क्रम में आँकड़ों का क्रम बढ़ता जाता है, परंतु अवरोही क्रम में आंकड़ों का क्रम घटता जाता है।
उदाहरण-नीचे दिए गए कुछ विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त अंकों को वर्गों तथा सारणी के रूप में रखो-

चिहन (Tally Bar) कहते हैं। जब इन मिलान चिहनों को संख्या के रूप में लिखते हैं तो इसे आवृत्ति (Frequency) कहते हैं। किसी वर्ग की ऊपरी तथा निम्न सीमा के मध्य अंतर को वर्ग अंतराल (Class Interval) कहा जाता है।
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उत्तर:
आरोही क्रम (Ascending order)

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अवरोही क्रम (Descending order)
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बारंबारता बंटन सारणी (Frequency Distribution Table ) – बारंबारता बंटन सारणी एक ऐसी सारणी है जिसमें आँकड़ों को एक व्यवस्थित रूप में रखा जाता है। आँकड़ों को विभिन्न वर्गों में बांटा जाता है। इन वर्गों को मिलान चिह्नों द्वारा प्रकट किया जाता है। प्रत्येक वर्ग में जितने आँकड़े या संख्याएं आती हैं उन्हें एक खड़ी लाइन
(1) से लिखा जाता है। पांच संख्यात्मक मूल्यों को दिखाने के लिए चार लाइनें खींच कर पांचवीं लाइन से काट देते हैं। इसे मिलान

प्रश्न 3.
वर्गीकरण की मुख्य रीतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वर्गीकरण की विधियां ( Methods of Classification)
आँकड़ों को सरल व संक्षिप्त बनाया जाता है ताकि उनसे आसानी से निष्कर्ष निकाले जा सकें। जलवायु, तापमान, वर्षा आदि के आँकड़ों

3. अखंडित श्रृंखला – अखंडित अथवा अविच्छिन्न अथवा स श्रृंखला वह श्रृंखला होती है जिसमें इकाइयों का निश्चित माप संभव नहीं होता। इसी कारण उन्हें कुछ सीमाओं में व्यक्त किया जाता है। इन सीमाओं को वर्गन्तर कहते हैं। प्रत्येक वर्गातर के साथ उसकी आवृत्तियां लिखी जाती हैं।
आगे 30 विद्यार्थियों के अर्थशास्त्र में प्राप्त अंक दिए गए हैं जिन्हें हम 5-5 के वर्गांतर से अखंडित श्रृंखला अथवा श्रेणी में बदल सकते हैं।
अखंडित श्रृंखला को निम्नलिखित चार प्रकारों में बांटा जाता

(i) अपवर्जी शृंखला (Exclusive Series)
(ii) समावेशी श्रृंखला (Inclusive Series)
(iii) खुले सिरे वाली शृंखला (Open End Series)
(iv) संचयी आवृत्ति ( Cumulative Frequency Series)

(i) अपवर्जी श्रृंखला (Exclusive Series ) – यह विधि समावेशी विधि से अधिक प्रचलित है। इस रीति में एक वर्ग की जगह सीमा तथा अगले वर्ग की निचली सीमा एक ही होती है।
दिया उदाहरण इस विधि का उदाहरण है-

अंकविद्यार्थियों की संख्या
0-10

10-20

20-30

30-40

40-50

50-40

60-70

10

30

15

35

8

7

2

योग =107

इसमें पहला वर्ग 0-10 तथा 10-20 है। इसमें विदित होता है कि पहले वर्ग की उच्च सीमा तथा दूसरे वर्ग की निम्न सीमा एक हैं। जब वर्ग इस प्रकार होते हैं तो यह शंका होती है कि 10 को किस वर्ग में रखा जाए पहले में या दूसरे में? इस विषय में यह नियम है कि किसी वर्ग की उच्च सीमा को इस वर्ग के अंतर्गत सम्मिलित नहीं किया जाता बल्कि उसके बाद वाले वर्ग में सम्मिलित किया जाता है। इस प्रकार 10 पहले वर्ग में नहीं अपितु दूसरे में किया जाएगा।

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(ii) समावेशी श्रृंखला ( Inclusive Series) – इस प्रकार के वर्गीकरण में निम्न सीमा तथा उच्च सीमा दोनों की उसी वर्ग में सम्मिलित कर लिया जाता है। संदेह को दूर करने के लिए पहले वर्ग की उच्च सीमा दूसरे वर्ग की निम्न सीमा से 1 या कोई अन्य संख्या कम कर दी जाती है। जैसे-

वेतनमजनूरों की संख्या
100-14920
150-19925
200-24960
250-29915
300-3495
योग =125

(iii) खुले सिरे वाली शृंखला (Open End Series)-इस शृंखला में प्रथम वर्ग की निचली सीमा में ‘कम’ (Below) तथा ऊपरी सीमा में ‘अधिक’ (Above) का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

अंक (Marks)विद्यार्थियों की संख्या
10 से कम(Frequency)
10-207
20-307
30 से अधिक5
1

(iv) संचयी आवृत्ति भृंखला (Cumulative Frequency Series)-इस शृंखला में आवृत्तियों को जोड़ दिया जाता है। दूसरे वर्ग की आवृत्ति को जोड़कर संचयी आवृत्ति प्राप्त की जाती है। जैसे-

आय (रुपए में) (x)परिवारों की संख्या (f)संचयी आवृति (c)
0-50044
500-100064+6=10
1000-15001010+10=20
1500-2000520+5=25
2000-2500325+3=8

प्रश्न 5.
आँकड़ों के प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों का वर्णन करें।
उत्तर:
आँकड़ों के स्रोत आँकड़ों को दो प्रकार से एकत्रित किया जाता है –
1. प्राथमिक स्रोत
2. द्वितीयक स्रोत।
जिन आँकड़ों को हम पहली बार व्यक्तिगत रूप से अथवा किसी समूह इत्यादि के द्वारा एकत्रित किया जाता है उन्हें आँकड़ों के प्रथम स्त्रोत कहते हैं और जिन आँकड़ों को किसी प्रकाशित या अप्रकाशित साधनों के द्वारा एकत्रित किया जाता है उन्हें द्वितीयक स्रोत कहते हैं।

प्राथमिक आँकड़ों के साधन
1. व्यक्तिगत प्रेक्षण-
यह व्यक्तिगत या व्यक्तियों के समूह के संग्रह की ओर संकेत करता है जिस द्वारा क्षेत्र में प्रत्यक्ष प्रेक्षण के द्वारा एकत्र किया जाता है। इस प्रेक्षण द्वारा क्षेत्र सर्वेक्षण के अंतर्गत भू-आकृति के लक्षणों, मिट्टी तथा प्राकृतिक वनस्पति के प्रकारों के साथ ही जनसंख्या संरचना, लिंग अनुपात, साक्षरता, परिवहन तथा संचार के साधन नगरीय तथा ग्रामीण अधिवास इत्यादि की सूचना प्रदान की जाती हैं। परंतु व्यक्तिगत प्रेक्षण करते समय उसमें शामिल व्यक्तियों की निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए ज्ञान का तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण होना आवश्यक है।

2. साक्षात्कार-
इस विधि के द्वारा सूचना उत्तर देने वाले से शोधकर्ता संवाद तथा बातचीत द्वारा प्राप्त करता है फिर भी साक्षात्कार करते समय साक्षात्कारकर्ता को क्षेत्र के लोगों से निम्नलिखित सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए-
(1) जिन सूचनाओं को लोगों से साक्षात्कार द्वारा इकट्ठा करना है, उन विषयों की एक परिशुद्ध सूची तैयार की जानी चाहिए।
(2) साक्षात्कार लेने वाले व्यक्तियों को सर्वेक्षण के उद्देश्यों के बारे में जानकारी होनी आवश्यक है।
(3) अगर कोई भी संवेदनशील प्रश्न पूछना है तो पहले उत्तर देने वालों को विश्वास में लेना आवश्यक है और उसे विश्वास दिलाना चाहिए कि गोपनीयता बनाई रखी जाएगी।
(4) वातावरण का अनुकूल होना भी आवश्यक है। इससे उत्तर देने वाला बिना किसी झिझक के तथ्यों को स्पष्ट कर सकेगा।
(5) प्रश्नावली की भाषा सरल और स्पष्ट होनी चाहिए ताकि उत्तर देने वाला प्रेरित होकर तथा सहज होकर प्रश्नों से संबंधित सूचना देने के लिए सहमत हो जाए।
(6) जिस प्रश्नों से उत्तर देने वाले के आत्मसम्मान अथवा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे ऐसे प्रश्नों को पूछने से परहेज करना चाहिए।
(7) अंत में उत्तर देने वाले से यह पूछना चाहिए कि जो भी सूचना वह दे चुके हैं, इसके अतिरिक्त और क्या जानकारी वह और दे सकते हैं?
(8) उत्तर देने वाले का अपना बहुमूल्य समय प्रदान करने के लिए धन्यवाद किया जाना भी आवश्यक है।

3. प्रश्नावली अनुसूची-
यह एक ऐसी विधि है जिसमें साधारण प्रश्नों और उनके उत्तर एक सादे कागज पर लिखे जाते हैं तथा उत्तर देने वाले व्यक्ति से दिए गए विकल्पों में से किसी एक विकल्प पर निशान लगाना होता है। कई बार संरचनात्मक प्रश्नों का एक समूह भी प्रश्नावली में शामिल किया जाता है और उत्तर देने वाले के विचारों को ज्ञात करने के लिए उचित स्थान भी छोड़ दिया जाता है। यदि केवल विवृत्तांत प्रश्नों के माध्यम से लोगों के विचारों को एकत्र करने की आवश्यकता तो इसे प्रश्नावली कहते हैं सर्वेक्षण के उद्देश्य भी स्पष्ट रूप से प्रश्नावली में उल्लिखित होने चाहिए।

यह विधि बड़े क्षेत्र के सर्वेक्षण के लिए भी उपयोगी होती हैं इस विधि की सीमा यह है कि सूचनाओं को उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है कि केवल साक्षर और शिक्षित लोगों से ही संपर्क किया जा सकता है। इसमें एक अनुसूची होती है। जो प्रश्नावली से मिलती-जुलती होती है जिसमें जांच-पड़ताल से जुड़े प्रश्न दिए रहते हैं। अनुसूची और प्रश्नावली में केवल यह अंतर है कि प्रश्नावली में उत्तर देने वाला प्रश्नावलियों को स्वयं भरता तथा सूची में परिगणक उत्तर देने वाले से प्रश्न पूछकर वह खुद भरता है। प्रश्नावली की तुलना में अनुसूची का मुख्य लाभ यह है कि इसके द्वारा सूचना शिक्षित तथा अशिक्षित दोनों ही उत्तर देने वालों से एकत्र की जाती हैं। एक अनुसूची को भरने के लिए गणनाकर्ता को पूरी तरह से प्रशिक्षित होना आवश्यक है।

4. अन्य विधियां
जल तथा मृदा से संबंधित आँकड़े सीधे क्षेत्रों से उनकी विशेषताओं का मापन करके मृदा किट तथा जल गुणवत्ता किट का प्रयोग करके एकत्र किया जाता है। इस प्रकार क्षेत्र वैज्ञानिक के प्रयोग से फसलों तथा वनस्पति के स्वास्थ्य के बारे में आँकड़े एकत्र किए जाते हैं। आँकड़ों के द्वितीयक स्त्रोत इन स्रोतों के अंतर्गत आँकड़ों को प्रकाशित और अप्रकाशित रूप में एकत्र किया जाता है जिसमें सरकारी प्रकाशन, प्रलेख और रिपोर्ट सम्मिलित किए जाते हैं।

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प्रकाशित साधन

1. सरकारी प्रकाशन-
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों, राज्य सरकारों के प्रकाशन और बुलेटिन द्वितीयक सूचनाओं के उपयोगी स्रोत हैं। भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रकाशित भारत की जनगणना, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण की रिपोर्टें, राज्य सरकारों के द्वारा प्रकाशित सांख्यिकीय सारांश और विभिन्न आयोगों द्वारा प्रकाशित आवधिक रिपोर्ट इसके अंतर्गत शामिल किए जाते हैं।

2. अर्ध सरकारी प्रकाशन-
विभिन्न नगरों और शहरों के नगर निगमों और नगर विकास प्राधिकरणों और जिला परिषदों के प्रकाशन तथा रिपोर्ट इत्यादि इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

3. अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन-
वार्षिकी, संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभिकरण जैसे कि वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व स्वास्थ्य संगठन, खाद्य व कृषि परिषद् इत्यादि द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट और मोनोग्राफ अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशनों के अंतर्गत शामिल किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के कुछ महत्वपूर्ण प्रकाशन जो आवधिक रूप में छपते हैं वह हैं – डेमोग्राफिक इयर बुक और मानव विकास रिपोर्ट इत्यादि।

4. निजी प्रकाशन-
समाचार पत्र और निजी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित वार्षिकी पुस्तिका, सर्वेक्षण शोध रिपोर्ट तथा प्रबंध इत्यादि इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं।

5. समाचार पत्र और पत्रिकाएं-
इस श्रेणी के अंतर्गत दैनिक समाचार पत्र और साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक पत्रिकाएं आसानी से प्राप्त स्रोत हैं।

अप्रकाशित साधन

1. सरकारी आलेख-
इस श्रेणी के अंतर्गत अप्रकाशित रिपोर्ट, मोनोग्राफ और प्रलेख इत्यादि शामिल हैं। यह प्रलेख सरकार के अलग-अगल स्तरों पर अप्रकाशित रिकॉर्ड के रूप में मिलते हैं और इनको अनुरक्षित रखा जाता है जैसे कि गांव के स्तर पर, राजस्व अभिलेख, गाँव के पटवारियों के द्वारा तैयार किए जाते हैं जो कि एक गांव स्तर की जानकारी प्रदान करने का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

2. अर्ध-सरकारी प्रलेख-
इस श्रेणी के अंतर्गत विभिन्न नगर-निगम, जिला परिषदों और लोक सेवा विभागों द्वारा बनाए और अनुरक्षित की गई रिपोर्ट और विकास की योजनाएं शामिल की जाती हैं।

3. निजी प्रलेख-
इस श्रेणी के अंतर्गत व्यापार संघों, विभिन्न राजनैतिक और अराजनैतिक संगठनों तथा कंपनियों इत्यादि अप्रकाशित रिपोर्ट और रिकॉर्ड शामिल किए जाते हैं।

मौखिक परीक्षा के प्रश्न
(Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
मानचित्र (Map) शब्द की उत्पत्ति किस शब्द से हुई?
उत्तर:
‘मैप’ शब्द लैटिन भाषा के शब्द मप्पा (Mappa) का बिगड़ा हुआ रूप है।

प्रश्न 2.
संसार में सर्वप्रथम मानचित्र किसने बनाया?
उत्तर:
संसार में सर्वप्रथम मानचित्र ट्यूरिन पैपीरस नामक विद्वान् ने तैयार किया।

प्रश्न 3.
आँकड़े किन-किन इकाइयों के आधार पर एकत्र होते हैं?
उत्तर:
आँकड़े प्राय: प्रशासनिक इकाइयों जैसे गांव, ब्लाक, जिला, नगर, राज्य के आधार पर एकत्र होते हैं।

प्रश्न 4.
आँकड़ों के दो प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. मात्रात्मक आँकड़े (Quantitation Data)
  2. गुणात्मक आँकड़े (Qualitation Data)

प्रश्न 5.
आँकड़ों के दो प्रमुख स्त्रोत बताओ।
उत्तर(:

  1. प्राथमिक आँकड़े (Primary Data)
  2. गौण आँकड़े (Secondary Data)।

प्रश्न 6.
NATMO किसे कहते हैं?
उत्तर:
भारत में राष्ट्रीय मानचित्र एवं विषयक मानचित्रण संघटन (National Atlas and Thematic Mapping Organisation) NATMO कहते हैं।

प्रश्न 7.
आँकड़ों का विश्लेषण किसे कहते हैं?
उत्तर:
आँकड़ों की गणना करना, सारणीबद्ध करना तथा संख्यात्मक रूप देना।

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प्रश्न 8.
आँकड़ों का वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
समान विशेषताओं के आधार पर वर्ग बनाना।

प्रश्न 9.
आँकड़ों के संगठन (Organisation of Data) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आँकड़ों को तर्कसंगत क्रम में व्यवस्थित करना तथा उन्हें सारणीबद्ध करना।

प्रश्न 10.
आँकड़ों के संक्षिप्तीकरण (Summarisation of Data) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
आरेख, लेखाचित्र (Graphs ) तथा विषयक मानचित्रों में आँकड़ों को बदलना।

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Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु

बहुविकल्पीय प्रश्न 

1. मोनोसैकैराइड का सरल उदाहरण है–
(अ) माल्टोस
(ब) सूक्रोस
(स) सेलुलोस
(द) राइबोस
उत्तर:
(द) राइबोस

2. निम्नलिखित में से अपचायी शर्करा है-
(अ) स्टार्च
(ब) सेलुलोस
(स) लैक्टोस
(द) सूक्रोस
उत्तर:
(स) लैक्टोस

3. प्रोटीन होते हैं-
(अ) पॉलिएस्टर
(ब) पॉलिपेप्टाइड
(स) पॉलिसैकैराइड
(द) पॉलिन्यूक्लिओटाइड
उत्तर:
(ब) पॉलिपेप्टाइड

4. न्यूक्लिक अम्ल होते हैं-
(अ) सरल अणु
(ब) प्रोटीन
(स) शर्करा
(द) बहुलक
उत्तर:
(द) बहुलक

5. DNA में निम्नलिखित में से कौनसा क्षारक नहीं होता?
(अ) ऐडेनीन
(ब) यूरेसिल
(स) थायमीन
(द) साइटोसीन
उत्तर:
(ब) यूरेसिल

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6. संतरा तथा आँवला में पाया जाने वाला मुख्य विटामिन है-
(अ) D
(ब) C
(स) K
(द) E
उत्तर:
(ब) C

7. रतौधी रोग (रात्रि अंधता) किस विटामिन की कमी से होता है?
(अ) B6
(ब) A
(स) C
(द) D
उत्तर:
(ब) A

8. दो ऐमीनो अम्लों की परस्पर क्रिया से बने बन्ध को क्या कहते हैं?
(अ) आयनिक बन्ध
(ब) ग्लाइकोसाइडी बन्ध
(स) हाइड्रोजन बन्ध
(द) पेप्टाइड बन्ध
उत्तर:
(द) पेप्टाइड बन्ध

9. निम्नलिखित में से किसमें निरपवाद रूप से नाइट्रोजन उपस्थित होता है?
(अ) वसा
(ब) कार्बोहाइड्रेट
(स) प्रोटीन
(द) स्टार्च
उत्तर:
(स) प्रोटीन

10. विटामिन B1 है-
(अ) थायमीन
(ब) राइबोफ्लेविन
(स) ऐस्कॉर्बिक अम्ल
(द) पिरिडाक्सिन
उत्तर:
(अ) थायमीन

11. निम्नलिखित में से कौनसी शर्करा शेष तीनों से अधिक मीठी है?
(अ) ग्लूकोस
(ब) लैक्टोस
(स) फ्रक्टोस
(द) सूक्रोस
उत्तर:
(स) फ्रक्टोस

12. निम्नलितित में से कौन डाइसैकैराइड नहीं है?
(अ) सूक्रोस
(ब) गैलैक्टोस
(स) लैक्टोस
(द) माल्टोस
उत्तर:
(ब) गैलैक्टोस

13. कोशिका के आनुवांशिक गुणों के नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है-
(अ) RNA
(ब) प्रोटीन
(स) DNA
(द) विटामिन
उत्तर:
(स) DNA

14. ग्लूकोस को ब्रोमीन जल से ऑक्सीकृत करने पर बना अम्ल है-
(अ) ग्लाइकॉलिक अम्ल
(ब) सैकैरिक अम्ल
(स) ग्लूकोनिक अम्ल
(द) ग्लिसरिक अम्ल
उत्तर:
(स) ग्लूकोनिक अम्ल

15. दुग्ध में पाए जाने वाली शर्करा है-
(अ) ग्लूकोस
(ब) लैक्टोस
(स) माल्टोस
(द) सूक्रोस
उत्तर:
(ब) लैक्टोस

16. प्राणी शरीर में कार्बोहाइड्रेट किसके रूप में संग्रहित रहता है?
(अ) स्टार्च
(ब) सेलुलोस
(स) ग्लाइकोजन
(द) माल्टोस
उत्तर:
(स) ग्लाइकोजन

17. निम्नलिखित में से आवश्यक ऐमीनो अम्ल है-
(अ) ऐलानिन
(ब) ग्लाइसीन
(स) वैलीन
(द) ऐस्पार्टिक अम्ल
उत्तर:
(स) वैलीन

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18. प्रोटीन की तृतीयक संरचना में वे कौनसे प्रमुख बल हैं जो 2° तथा 3° संरचनाओं को स्थायित्व प्रदान करते हैं?
(अ) ह्यडड्रोजन आबंध
(ब) डाइसल्फाइड बन्ध
(स) स्थिर विद्युत आकर्षण बल
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

19. माल्टोस के जल अपघटन से ग्लूकोस बनता है। इस अभिक्रिया में प्रयुक्त एन्जाइम है-
(अ) इनवर्टेस
(ब) जाइमेस
(स) माल्टेस
(द) यूरियेस
उत्तर:
(स) माल्टेस

20. वसा में विलेय विटामिन है-
(अ) A
(ब) B
(स) C
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) A

21. मनुष्य के पाचन तंत्र द्वारा निम्न में से किसका जल अपघटन नहीं होता?
(अ) ग्लाइकोजन
(ब) सेलुलोस
(स) माल्टोस
(द) स्टार्च
उत्तर:
(ब) सेलुलोस

22. निम्नलिखित में कौनसा यौगिक ज्विटर आयन के रूप में नहीं पाया जाता है?
(अ) ऐलानिन
(ब) ग्लाइसीन
(स) सल्फेनिलिक अम्ल
(द) p-ऐमीनो बेन्जोइक अम्ल
उत्तर:
(द) p-ऐमीनो बेन्जोइक अम्ल

23. निम्नलिखित में से जल विलेय विटामिन कौनसा है?
(अ) विट्रमिन D
(ब) विटामिन C
(स) विटामिन E
(द) विटामिन A
उत्तर:
(ब) विटामिन C

24. ग्लोबुलर (गोलिकाकार) प्रोटीन में कौनसा बन्ध पाया जाता है?
(अ) हाइड्रोजन बन्ध
(ब) वान्डरवाल आकर्षण बल
(स) डाइसल्फाइड बन्ध
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

25. एक शर्करा-रोगी के मूत्र में किसका परीक्षण किया जाता है?
(अ) ग्लूकोस
(ब) फ्रक्टोस
(स) सुक्रोस
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(अ) ग्लूकोस

26. DNA का पूर्ण जल अपघटन पेन्टोस शर्करा, डिआक्सीराइबोस बनाता है। राइबोस से डिऑक्सीराइबोस इस तरह भिन्न है कि इसमें किस कार्बन पर -OH ग्रुप नहीं होता है ?
(अ) C – 1
(ब) C – 2
(स) C – 3
(द) C – 4
उत्तर:
(ब) C – 2

27. एक महत्त्वपूर्ण विट्रामिन जो कि तेल एवं वसा में विलेय है तथा जल में अविलेय। यह बच्चों में रिकेट्स एवं वयस्कों में ऑस्टियोमेलेशिया के लिये उत्तरदायी है। यह विटामिन है-
(अ) विटामिन B12
(ब) विटामिन C
(स) विटामिन D
(द) विटामिन E
उत्तर:
(स) विटामिन D

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
फ्रक्टोस में उपस्थित क्रियात्मक समूह बताइए।
उत्तर:
फ्रक्टोस में – OH समूहों के अतिरिक्त कार्बन संख्या-2 पर कीटोनिक समूह होता है।

प्रश्न 2.
ओलिगोसैकैराइड किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे कार्बोहाइड्रेट जिनके जल अपघटन से 2 से 10 मोनोसैकैराइड इकाइयाँ प्राप्त होती हैं उन्हें ओलिगोसैकैराइड कहते हैं।

प्रश्न 3.
जैव तंत्र में पाए जाने वाले मुख्य जैव अणु कौनसे ह हैं?
उत्तर:
जैव तंत्र में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल तथा लिपिड इत्यादि जैव अणु पाए जाते हैं।

प्रश्न 4.
ऐसे दो यौगिकों के नाम बताइए जिनमें हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का अनुपात 2:1 है लेकिन वे कार्बोहाइड्रेट नहीं हैं।
उत्तर:
ऐसिटिक अम्ल (C2H4O2) तथा लैक्टिक अम्ल (C3HO3)।

प्रश्न 5.
एरिथ्रोस की संरचना दीजिए।
उत्तर:
CH2 (OH) – (CHOH)2 – CHO

प्रश्न 6.
डाइसैकैराइडों के दो उदाहरण बताइए।
उत्तर:
माल्टोस तथा लैक्टोस।

प्रश्न 7.
राइबोस की संरचना दीजिए।
उत्तर:
CH2(OH) – (CHOH)3 – CHO

प्रश्न 8.
एक ऐसा यौगिक बताइए जो कार्बोहाइड्रेट है लेकिन इसका अणु सूत्र कार्बोहाइड्रेट के सामान्य सूत्र के अनुसार नहीं है।
उत्तर:
रेम्नोस (C6H12O5)

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प्रश्न 9.
ग्लूकोस की निम्न के साथ अभिक्रिया के उत्पाद बताइए – (i) ब्रोमीन जल (ii) सोडियम अमलगम तथा जल।
उत्तर:

  1. ग्लूकोस ब्रोमीन जल द्वारा ऑक्सीकृत होकर ग्लूकोनिक अम्ल देता है।
  2. सोडियम अमलगम (Na / Hg) तथा जल द्वारा ग्लूकोस का अपचयन हो जाता है तथा सार्बिटॉल प्राप्त होता है।

प्रश्न 10.
जन्तुओं के यकृत में संग्रहित पॉलिसैकैराइड कौनसा होता है?
उत्तर:
ग्लाइकोजन।

प्रश्न 11.
सूक्रोस के स्रोत बताइए।
उत्तर:
सुक्रोस गन्ने तथा चुकन्दर से प्राप्त होता है।

प्रश्न 12.
a-D-ग्लूकोस तथा B-D-ग्लूकोस के विशिष्ट घूर्णन का मान बताइए।
उत्तर:
a-D- ग्लूकोस के विशिष्ट घूर्णन का मान 112° तथा B-D- ग्लूकोस के विशिष्ट घूर्णन का मान 19° होता है।

प्रश्न 13.
पेप्टाइड बन्ध का सूत्र क्या होता है?
उत्तर:
पेप्टाइड बन्ध का सूत्र – CO-NH – होता है।

प्रश्न 14.
ऐलानिन ( ऐमीनो अम्ल ) का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
ऐलानिन का सूत्र HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 1 होता है।

प्रश्न 15.
क्षारक किस प्रकार के यौगिक होते हैं?
उत्तर:
क्षारक विषमचक्रीय यौगिक होते हैं?

प्रश्न 16.
क्षारकीय ऐमीनो अम्ल कौनसे होते हैं?
उत्तर:
वे ऐमीनो अम्ल जिनमें कार्बोक्सिल ( – COOH) समूहों की तुलना में ऐमीनो (-NH2 ) समूहों की संख्या अधिक होती है, उन्हें क्षारकीय ऐमीनो अम्ल कहते हैं।

प्रश्न 17.
जल में विलेय विटामिन बताइए।
उत्तर:
B वर्ग के विटामिन तथा विटामिन C जल में विलेय होते हैं।

प्रश्न 18.
प्रोटीन के मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:
दूध, पनीर, दालें, मूंगफली तथा मांस प्रोटीन के मुख्य स्रोत होते हैं।

प्रश्न 19.
विटामिन K का मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:
विटामिन K हरे पत्ते वाली सब्जियों में पाया जाता है।

प्रश्न 20.
प्रोटीन को निनहाइड्रिन के साथ गरम करने पर क्या होते हैं?
उत्तर:
प्रोटीन को निहाइड्रिन के साथ गरम करने पर नीला रंग प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 21.
विटामिन B2 का नाम बताइए।
उत्तर:
विटामिन B2 को राइबोफ्लेविन कहते हैं।

प्रश्न 22.
सायनोकोबालैमीन किस विटामिन का नाम है?
उत्तर:
विटामिन B12

प्रश्न 23.
विटामिन D की कमी से कौनसे रोग होते हैं?
उत्तर:
विटामिन D की कमी से रिकेट्स तथा ऑस्टियोमेलेशिया रोग होते हैं।

प्रश्न 24.
यकृत में संग्रहित जल में विलेय विटामिन कौनसा होता है?
उत्तर:
विटामिन B12

प्रश्न 25.
प्रोटीन → पॉलीपेप्टाइड → α – ऐमीनो अम्ल
इस अभिक्रिया अनुक्रम के लिए आवश्यक एन्जाइम बताइए।
उत्तर:
प्रोटिऐस तथा पेप्टाइडेस।

प्रश्न 26.
न्यूक्लिओटाइड आपस में कौनसे बन्ध द्वारा जुड़े होते हैं?
उत्तर:
फास्फोडाइएस्टर बन्ध।

प्रश्न 27.
ग्लूकोस को डेक्सट्रोस क्यों कहते हैं?
उत्तर:
ग्लूकोस दक्षिण ध्रुवण घूर्णक होता है अतः इसे डेक्सट्रोस भी कहते हैं।

प्रश्न 28.
सर्वाधिक मीठी शर्करा कौनसी होती है ?
उत्तर:
फ्रक्टोज सर्वाधिक मीठी शर्करा होती है।

प्रश्न 29.
कार्बोहाइड्रेट्स को सैकैराइड क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेट शर्करा या शर्करा एकलकों के बहुलक होते हैं अतः इन्हें सैकैराइड कहा जाता है।

प्रश्न 30.
मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए दूध पीना आवश्यक है, क्यों ?
उत्तर:
दूध एक सम्पूर्ण आहार है जिसमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन तथा विटामिन होते हैं अतः मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए दूध पीना आवश्यक है।

प्रश्न 31.
नर लिंग हॉर्मोनों को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
एन्ड्रोजन।

प्रश्न 32.
इन्सुलिन हॉर्मोन का क्या कार्य है ?
उत्तर:
रक्त में ग्लूकोस की मात्रा को सन्तुलित रखना।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अपचायी तथा अनअपचायी शर्करा में अन्तर बताइए तथा उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
अपचायी शर्करा में अपचायक गुण होते हैं अतः ये फेलिंग विलयन तथा टॉलेन अभिकर्मक इत्यादि का अपचयन कर देते हैं। उदाहरण सभी मोनोसैकैराइड, माल्टोस तथा लैक्टोस । अनअपचायी शर्करा में अपचायक गुण नहीं होता अतः ये फेलिंग विलयन तथा टॉलेन अभिकर्मक का अपचयन नहीं करते हैं। उदाहरण- सूक्रोस ।

प्रश्न 2.
ग्लूकोस एक ऐल्डोहेक्सोस मोनोसैकैराइड है फिर भी यह हाइड्रोजन सायनाइड से क्रिया करके सायनोहाइड्रिन तो देता है लेकिन सोडियम हाइड्रोजनसल्फाइट के साथ योग नहीं करता। क्यों?
उत्तर:
ग्लूकोस की चक्रीय संरचना होती है जिसमें – CHO समूह के प्रयोग से चक्रीय हैमीऐसीटैल संरचना बनती है अतः इसमें स्वतंत्र ऐल्डिहाइड समूह नहीं होता जिसके कारण इसकी सोडियम हाइड्रोजन सल्फाइट (NaHSO3) के साथ अभिक्रिया नहीं होती लेकिन हाइड्रोजन सायनाइड (HCN) से क्रिया में इसकी चक्रीय संरचना की वलय टूटकर ऐल्डिहाइड समूह स्वतंत्र हो जाता है क्योंकि ग्लूकोस की वलय तथा विवृत श्रृंखला संरचना में साम्य होता है। अतः HCN के साथ क्रिया द्वारा यह सायनो हाइड्रिन दे देता है।

प्रश्न 3.
कार्बोहाइड्रेटों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेटों को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जाता है-
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प्रश्न 4.
सूक्रोस की संरचना तथा गुण बताइए।
उत्तर:
सूक्रोस (इक्षु-शर्करा) से-सूक्रोस को तनु HCl अथवा H2SO4 के साथ ऐल्कोहॉलिक विलयन में उबालने पर ग्लूकोस तथा फ्रक्टोज के एक-एक मोल (समान मात्रा) प्राप्त होते हैं।
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प्रश्न 5.
लैक्टोस की संरचना बताइए।
उत्तर:
लैक्टोस (Lactose) –
(i) लैक्टोस को दुग्ध शर्करा भी कहते हैं क्योंकि यह दुग्ध में उपस्थित होती है।
(ii) लैक्टोस के जल अपघटन से D (+) ग्लूकोस तथा D (+) गैलेक्टोस के समान मोल प्राप्त होते हैं।
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(iii) लैक्टोस की संरचना – लैक्टोस, ß – [D] गैलेक्टोस तथा ß- [D] ग्लूकोस से मिलकर बनी होती है। गैलैक्टोस के C1 तथा ग्लूकोस के C4 के मध्य ग्लाइकोसाइडी बंध होता है विलयन में ग्लूकोस इकाई C-1 पर मुक्त एल्डिहाइड समूह उत्पन्न होता है। अतः माल्टोस की तरह यह भी एक अपचायी शर्करा है।
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(iv) यह एक क्रिस्टलीय ठोस होता है जो कि जल में विलेय तथा ऐल्कोहॉल एवं ईथर में अविलेय है।

प्रश्न 6.
ग्लूकोस के α तथा ß रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्लूकोस प्रकृति में मुक्त अथवा संयुक्त अवस्था में पाया जाता है। यह मीठे फलों जैसे पके हुए अंगूर तथा शहद में पाया जाता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु

प्रश्न 7.
एपीमरीकरण किसे कहते हैं? समझाइए।
उत्तर:
वे ऐल्डोस जिनके α- कार्बन परमाणु (C2) के विन्यास में भिन्नता होती है उन्हें एक-दूसरे के एपीमर कहते हैं तथा एक एपीमर के दूसरे एपीमर में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को ऐपीमरीकरण कहते हैं। उदाहरण- ग्लूकोस तथा मैनोस।

ग्लूकोस में C2 पर – OH समूह दाईं ओर जबकि मैनोस में यह बायीं ओर होता है।

प्रश्न 8.
ऐमीनो अम्ल अम्लीय क्षारीय तथा उदासीन होते हैं। इनकी व्याख्या उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर:
(i) अम्लीय ऐमीनो अम्लों में ऐमीनो समूहों की तुलना में कार्बोक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है जैसे- ऐस्पार्टिक अम्ल HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 5a

(ii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल वे होते हैं जिनमें कार्बोक्सिल समूहों की तुलना में ऐमीनो समूहों की संख्या अधिक होती है जैसे- लाइसीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 5b

(iii) वे ऐमीनो अम्ल जिनमें कार्बोक्सिल समूह तथा ऐमीनो समूह समान संख्या में होते हैं उन्हें उदासीन ऐमीनो अम्ल कहते हैं। जैसे-ग्लाइसीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 5c

प्रश्न 9.
प्रोटीन का निर्माण किस प्रकार होता है ? समझाइए।
उत्तर:
प्रोटीन α-ऐमीनो अम्लों के बहुलक होते हैं जो आपस में पेप्टाइड अंघ द्वारा जुड़े होते हैं। ऐमीनो अम्लों के एक अणु के – COOH तथा दूसरे अणु के – NH2 समूह के मध्य अभिक्रिया होकर जल के अणु से निकलने से बने बन्ध को पेप्टाइड बन्ध कहते हैं जिसे – CONH- द्वारा दर्शाया जाता है।
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प्रोटीनों में α- ऐमीनो अम्ल समान तथा भिन्न भी हो सकते हैं। जब बनने वाला उत्पाद दो ऐमीनो अम्लों से बनता है तो इसे डाइपेप्टाइड कहते हैं। उदाहरण, ग्लाइसीन का कार्बोक्सिल समूह, ऐलानीन के ऐमीनो समूह के साथ क्रिया करता है तो एक डइपेप्टाइड, ग्लाइसिलऐलानिन बनता है। अतः डाइपेप्टाइड में एक पेप्टाइड बन्ध होता है।

जब तीसरा ऐमीनो अम्ल, डाइपेप्टाइड के साथ क्रिया करता है तो बने उत्पाद को ट्राइपेप्टाइड कहते हैं। अतः एक ट्राइपेप्टाइड में तीन ऐमीनो अम्ल दो पेप्टाइड बन्धों द्वारा जुड़े होते हैं। इसी प्रकार चार, पाँच तथा छः ऐमीनो अम्लों के आपस में जुड़ने से बने उत्पादों को टेट्रापेप्टाइड पेन्टापेप्टाइड तथा हेक्सापेप्टाइड कहते हैं बहुत से ऐमीनो अम्लों (10 से अधिक) के आपस में संघनन द्वारा बने पेप्टाइडों को पॉलिपेप्टाइड कहते हैं।

वे पॉलिपेप्टाइड जिनमें असंख्य (100 से अधिक) भिन्न-भिन्न ऐमीनो अम्ल होते हैं तथा जिनका आण्विक द्रव्यमान 10,000 से अधिक होता है, उन्हें प्रोटीन कहते हैं। यद्यपि पॉलिपेप्टाइड तथा प्रोटीन विभेद अधिक स्पष्ट नहीं है। 100 से कम ऐमीनो अम्लों वाले पॉलिपेप्टाइडों को भी प्रोटीन कहा जाता है यदि उनमें प्रोटीन जैसा स्पष्ट संरूपण (conformation) हो। उदाहरण इन्सुलिन 51 ऐमीनो अम्लों से मिलकर बना होता है।

प्रोटीनों के सामान्य गुण:

  • प्रोटीन रंगहीन तथा अक्रिस्टलीय होते हैं लेकिन इन्सुलिन क्रिस्टलीय होती है।
  • प्रोटीन के गलनांक तथा क्वथनांक अनिश्चित होते हैं।
  • प्रोटीन सामान्यतः जल, ऐल्कोहॉल तथा ईधर इत्यादि में अविलेव होते हैं।
  • प्रोटीन, बहुलक होते हैं जिनका आण्विक द्रव्यमान अधिक होता है, अतः ये जल में कोलाइडों के रूप में पाए जाते हैं।
  • प्रोटीन उभयधर्मी होते हैं जिनके समविभव बिन्दु निश्चित होते हैं।

आण्विक आकृति के आधार पर प्रोटीनों का वर्गीकरण प्रोटीनों को इनकी आण्विक आकृति के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है- रेशेदार प्रोटीन तथा गोलिकाकार प्रोटीन।

(a) रेशेदार या तन्तुक प्रोटीन (Fibrous Proteins) – ये जल में अविलेय जन्तु प्रोटीन है जो प्रोटियोलिटिक एन्जाइम द्वारा भी अप्रभावित रहते हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर होती हैं जो हाइड्रोजन तथा डाइसल्फाइड बन्धों द्वारा जुड़कर रेशों के समान संरचना बनाती हैं।
उदाहरण – किरेटिन तथा मायोसिन । किरेटिन बाल, ऊन तथा रेशम में एवं मायोसिन मांसपेशियों में उपस्थित होती है।

(b) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins)- ये जल विलेय प्रोटीन हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं कुण्डली बनाकर गोलाकार आकृति ग्रहण कर लेती हैं।

उदाहरण- इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन।

प्रोटीनों की संरचना तथा आकृति का अध्ययन चार स्तरों पर किया जाता है – प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक तथा चतुष्क संरचनाएं। इनका प्रत्येक स्तर पूर्व स्तर की तुलना में अधिक जटिल होता है।

(i) प्रोटीन की प्राथमिक संरचना प्रोटीनों में एक या अधिक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं उपस्थित होती हैं किसी प्रोटीन के प्रत्येक पॉलिपेप्टाइड में ऐमीनो अम्ल एक विशिष्ट तथा निश्चित क्रम में जुड़े होते हैं। ऐमीनो अम्लों के विशिष्ट क्रम को ही प्रोटीनों की प्राथमिक संरचना कहते हैं। भिन्न-भिन्न प्रोटीनों में यह क्रम भिन्न-भिन्न होता है। फ्रेडरिंग सेंगर (1953) ने सर्वप्रथम अग्न्याशय द्वारा उत्सर्जित, इन्सुलिन की प्राथमिक संरचना का निर्धारण किया था।

किसी विशिष्ट प्रेटीन में उपस्थित विभिन्न ऐमीनो अम्लों में से एक a- ऐमीनो अम्ल के स्थान पर किसी अन्य x – ऐमीनो अम्ल के आ जाने से उस प्रोटीन की जैव रासायनिक क्रियाशीलता में परिवर्तन आ जाता है या नष्ट हो जाती है। उदहरण- हीमोग्लोबिन में ग्लुटेमिक अम्ल के स्थान पर वैलीन आ जाने पर सिकल सेल एनिमिया रोग हो जाता है। प्रोटीनों की प्राथमिक संरचना को चित्र 14.1 द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
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(ii) प्रोटीनों की द्वितीयक संरचना-प्रोटीन की द्वितीयक संरचना इनकी आकृति से सम्बन्धित होती है जिसमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला उपस्थित होती है। यह दो प्रकार की संरचनाओं में पायी जाती है(i) α-हेलिक्स तथा (ii) ß-प्लीटेड शीट संरचना (या लहरियादार चादर
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संरचना)। ये संरचनाएं पेप्टाइड बंध के HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 9 तथा -NH- समूह के मध्य हाइड्रोजन बंध के कारण पॉलिपेप्यइड की मुख्य श्रृंखला के नियमित कुंडलन (Folding) में उत्पन्न होती हैं।
(i) α-हेलिक्स संरचना की पॉलिपेप्यइड शृंखला में सभी संभव हाइड्रोजन बन्ध बन सकते हैं तथा इसकी पॉलिपेप्यइड शृंखला दक्षिणावर्ती पेच की तरह मुड़ी होती है जिससे प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशिष्ट का NH-समूह कुण्डली के अगले मोड़ पर स्थित >C = O समूह के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता है।

(ii) ß-प्लीटेड शीट संरचना (लहरियादार चादर संरचना) में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं एक-दूसरे के पाश्र्व में होती हैं जिनमें अधिकतम खिंचाव होता है तथा ये आपस में अंतरा आण्विक हाइड्रोजन बन्ध द्वारा जुड़ी होती हैं। यह संरचना वस्त्रों (लहरियादार चादर) के समान होती है। अतः इसे ß-प्लीटेड शीट संरचना कहते हैं।

α-हेलिक्स तथा ß-प्लीटेड शीट संरचना को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 10

प्रश्न 10.
प्रोटीनों के सामान्य गुण बताइए।
उत्तर:
प्रोटीनों के सामान्य गुण:

  • प्रोटीन रंगहीन तथा अक्रिस्टलीय होते हैं लेकिन इन्सुलिन क्रिस्टलीय होती है।
  • प्रोटीन के गलनांक तथा क्वथनांक अनिश्चित होते हैं।
  • प्रोटीन सामान्यतः जल, ऐल्कोहॉल तथा ईधर इत्यादि में अविलेव होते हैं।
  • प्रोटीन, बहुलक होते हैं जिनका आण्विक द्रव्यमान अधिक होता है, अतः ये जल में कोलाइडों के रूप में पाए जाते हैं।
  • प्रोटीन उभयधर्मी होते हैं जिनके समविभव बिन्दु निश्चित होते हैं।

आण्विक आकृति के आधार पर प्रोटीनों का वर्गीकरण प्रोटीनों को इनकी आण्विक आकृति के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है- रेशेदार प्रोटीन तथा गोलिकाकार प्रोटीन।

(a) रेशेदार या तन्तुक प्रोटीन (Fibrous Proteins) – ये जल में अविलेय जन्तु प्रोटीन है जो प्रोटियोलिटिक एन्जाइम द्वारा भी अप्रभावित रहते हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं समानांतर होती हैं जो हाइड्रोजन तथा डाइसल्फाइड बन्धों द्वारा जुड़कर रेशों के समान संरचना बनाती हैं।

उदाहरण – किरेटिन तथा मायोसिन । किरेटिन बाल, ऊन तथा रेशम में एवं मायोसिन मांसपेशियों में उपस्थित होती है।

(b) गोलिकाकार प्रोटीन (Globular Proteins)- ये जल विलेय प्रोटीन हैं। इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं कुण्डली बनाकर गोलाकार आकृति ग्रहण कर लेती हैं।
उदाहरण- इन्सुलिन तथा ऐल्बुमिन।

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प्रश्न 11.
प्रोटीनों के परीक्षण बताइए।
उत्तर:
प्रोटीनों का परीक्षण:

  • बाइयूरेट परीक्षण-प्रोटीन में थोड़ा-सा 10% NaOH तथा कुछ बूंद 1% CuSO4 विलयन डालने पर नीला-बैंगनी रंग आता है।
  • जेन्थोप्रोटिक परीक्षण-प्रोटीन को सान्द्र HNO3 के साथ गर्म करने पर यह पीले ग का अवक्षेप देती है, इसे जेन्थोप्रोटिक परीक्षण कहते हैं।
  • निनहाइड्रिन परीक्षण-प्रोटीन में कुछ बूंदें निनहाइड्रिन विलयन मिलाकर उबालने से गहरा नीला रंग प्राप्त होता है।

प्रश्न 12.
DNA तथा RNA में उपस्थित शर्कराओं की संरचना बताइए।
उत्तर:
DNA में ß-D-2-डिऑक्सीराइबोस शर्करा होती है जबकि RNA में ß-D-राइबोस शर्करा होती है जिनकी संरचनाएं निम्न प्रकार होती हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 11

प्रश्न 13.
DNA की द्विकुंडलनी संरचना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
DNA की द्विकुंडलनी संरचना (Double Strand Helix Structure of DNA):
न्यूक्लिक अम्ल की एक शृंखला के अनुक्रम से संबंधित जानकारी को इसकी प्राथमिक संरचना कहते हैं। प्रोटीन के समान न्यूक्लिक अम्लों की द्वितीयक संरचना भी होती है। जेम्स वाटसन तथा फ्रांसिस क्रिक ने DNA की द्विकुंडलनी त्रिविमीय संरचना दी।

DNA की वाटसन-क्रिक संरचना के अनुसार पॉलिन्यूक्लिओटाइड की दो सर्पिल शृंखलाएँ या स्ट्रेण्ड क्षारक इकाइयों के मध्य हाइड्रोजन बन्धन द्वारा जुड़कर परस्पर समानान्तर रूप से कुण्डिलत अवस्था में विद्यमान रहती हैं। एक पॉलिन्यूक्लिओटाइड शृंखला के पिरिमिडीन क्षारक तथा दूसरी पॉलिन्यूक्लिओटाइड श्रंखला के प्यूरीन क्षारक के मध्य ही हाइड्रोजन बन्ध बन सकता है। इसके पश्चात् प्रयोगों से ज्ञात हुआ कि प्रकृति में क्षारक ऐडेनीन A केवल थायमीन T के साथ दो हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़ सकता है तथा ग्वानीन G केवल साइटोसीन C के साथ तीन H बन्धों द्वारा जुड़ सकता है।

इस प्रकार, ‘ T तथा A ‘ और ‘ G तथा C’ क्षारकों के युग्म बनते हैं अर्थात् T तथा A एक-दूसरे के पूरक हैं और G तथा C एक-दूसरे के पूरक हैं। DNA में T: A तथा G: C अनुपात 1: 1 पाया गया, इससे उपरोक्त युग्मों की पुष्टि हो जाती है। अतः यह कहा जा सकता है कि DNA की दो पॉलिपेप्टाइड शृंखलाओं के मध्य निश्चित क्षारक युग्मों की उपस्थिति के कारण एक श्रृंखला (रज्जुक) दूसरी शृंखला की पूरक होती है, अर्थात् यदि एक पॉलिपेप्टाइड शृंखला में क्षारक अनुक्रम ज्ञात हो तो दूसरी शृंखला का क्षारक अनुक्रम स्वतः ही निश्चित हो जाता है। इसे निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है-
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प्रश्न 14.
DNA की द्विकुण्डलनी त्रिविमीय संरचना को चित्रित कीजिए।
उत्तर:
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DNA की तुलना में RNA की संरचना कम जटिल होती है। RNA की द्वितीयक संरचना में कुण्डली केवल एक रज्जुक (Strand) से बनी होती है जो कभी-कभी स्वयं के मुड़ने से ही द्विकुण्डलनी हो जाती है। RNA में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल क्षारक तथा डीऑक्सीराइबोस के स्थान पर राइबोस शर्करा होती है। RNA तीन प्रकार के होते हैं जिनके कार्य भिन्न-भिन्न हैं-

  • संदेशवाहक RNA (m-RNA)
  • राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  • अंतरण या स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

प्रश्न 15.
DNA अंगुली छापन क्या होता है? समझाइए तथा इसके उपयोग भी बताइए।
उत्तर:
डी.एन.ए. अंगुली छापन (DNA Finger Printing)प्रत्येक जीव के अंगुली छाप अद्वितीय (Unique) होते हैं। ये अंगुली के शीर्ष पर होते हैं तथा पहले इन्हें किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिए काम में लाया जाता था, लेकिन शल्य चिकित्सा के द्वारा इन्हें बदला जा सकता है। किसी व्यक्ति में DNA के क्षारकों का अनुक्रम अद्वितीय होता है तथा DNA के क्षारकों के अनुक्रम का निर्धारण ही DNA अंगुली छापन कहलाता है। यह प्रत्येक कोशिकां के लिए समान होता है तथा इसे किसी भी इलाज द्वारा परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

DNA अंगुली छापन एक महत्वपूर्ण तकनीक है जिसके निम्नलिखित उपयोग हैं-

  • विधि संबंधी प्रयोगशाला में अपराधी की पहचान करने में।
  • किसी व्यक्ति की पैतृकता (Paternity) को निर्धीरित करने में।
  • दुर्घटना में मृत व्यक्ति के शरीर की पहचान करने के लिए उसके बच्चों या जनक के DNA से तुलना करने में।
  • जैव विकास के पुनर्लेखन में किसी प्रजाति की पहचान करने में।

प्रश्न 16.
DNA की स्वप्रतिकृति (Self Replication) किस प्रकार होती है? समझाइए।
उत्तर:
स्व-प्रतिकृति (Self Replication)-डी.एन.ए. आनुवांशिकता का रासायनिक आधार होता है तथा यह आनुवांशिक सूचनाओं का संग्राहक होता है। DNA लाखों वर्षों से किसी जीव की विभिन्न प्रजातियों की पहचान को बनाए रखने के लिए विशिष्ट रूप से जिम्मेदार है।

जीवों में कोशिका विभाजन के समय DNA की प्रतिकृति होती है। इसमें जनक DNA दो संतति DNA में विभाजित हो जाता है। उपयुक्त एन्जाइम की उपस्थिति में पहले DNA के एक सिरे से हाइड्रोजन बन्धों के टूटने से दो स्ट्रेण्ड पृथक् होती जाती हैं तथा प्रत्येक स्ट्रेण्ड पर उपयुक्त न्यूक्लिओटाइड जुड़ते चले जाते हैं और दो समान संतति द्विकुण्डलनियाँ बन जाती हैं। इस प्रकार बनी प्रत्येक संतति द्विकुण्डलनी में एक कुण्डलनी जनक DNA से आती है तथा दूसरी कुण्डलनी नयी बनती है, जिन्हें क्रमशः जनक स्ट्रेण्ड तथा संतति स्ट्रेण्ड कहा जाता है। इस प्रकार पुत्री कोशिका में समान रज्जुक का अंतरण होता है।
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प्रश्न 17.
DNA द्वारा प्रोटीन संश्लेषण के नियंत्रण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रोटीन संश्लेषण का नियन्त्रण (Control of Protein Synthesis)-न्यूक्लिक अम्ल प्रोटीन संश्लेषण भी करते हैं। वास्तव में कोशिका में प्रोटीन का संश्लेषण विभिन्न प्रकार के RŃA द्वारा होता है। परन्तु किसी विशेष प्रोटीन के संश्लेषण का संदेश DNA में उपस्थित होता है। DNA का वह भाग जो प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण करता है उसे जीन कहते हैं। मानव कोशिका के केन्द्रक में एक DNA में सामान्यतः दस लाख जीन होते हैं।

न्यूक्लिक अम्ल की कुण्डलनी पर उपस्थित तीन-तीन क्रमागत विषमचक्रीय क्षारकों के समुच्चय एक त्रिककूट (Triplet Code) का काम करते हैं। प्रत्येक त्रिककूट का सम्बन्ध एक विशिष्ट ऐमीनो अम्ल से होता है। अतः अनेक त्रिककूटों का निश्चित अनुक्रम, विशिष्ट ऐमीनो अम्लों को निश्चित क्रम में व्यवस्थित करके प्रोटीन संश्लेषण को नियन्त्रित करता है।
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प्रश्न 18.
(i) सिकल सेल एनिमिया रोग कब होता है?
(ii) थायमीन तथा यूरेसिल के संरचना सूत्रों में क्या अन्तर होता है ?
(iii) आनुवांशिकता तथा क्रोमोसोम को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
(i) हीमोग्लोबिन में ग्लूटेमिक अम्ल के स्थान पर वेलिन – ऐमीनो अम्ल आ जाता हैं तो सिकल सेल एनिमिया रोग हो जाता है।

(ii) यूरेसिल के संरचना सूत्र में > C = 0 के पास वाले कार्बन पर हाइड्रोजन के स्थान पर मेथिल समूह आ जाने पर थायमीन की संरचना प्राप्त होती है।
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(iii) प्रत्येक प्रजाति की किसी पीढ़ी के गुण उसके पूर्वजों से मिलते-जुलते होते हैं जीवों के इस गुण को आनुवांशिकता कहते हैं। किसी सजीव कोशिका के नाभिक में उपस्थित वे कण जो अनुवांशिकता के लिए जिम्मेदार होते हैं, उन्हें क्रोमोसोम कहते हैं।

प्रश्न 19.
ग्लूकोस तथा स्टार्च में विभेद कीजिए।
उत्तर:

  1. ग्लूकोस, आयोडीन विलयन के साथ क्रिया नहीं करता जबकि स्टार्च, आयोडीन विलयन के साथ नीला रंग देता है।
  2. ग्लूकोस का जल अपघटन नहीं होता जबकि स्टार्च के जल अपघटन से ग्लूकोस बनता है।
  3. ग्लूकोस, फेलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देता है लेकिन स्टार्च नहीं।

प्रश्न 20.
सूक्रोसको तनु H2SO4 या तनु HCl के साथ गर्म करने पर क्या होता है?
उत्तर:
सूक्रोसको तनु H2SO4 या तनु HCl के साथ गर्म करने पर इसका जल अपघटन होकर ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस बनते है।
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प्रश्न 21.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए-
(i) ऐड्रिनोकॉर्टिकॉइड हॉर्मोन
(ii) प्रोटीन हॉर्मोन।
उत्तर:
(i) ऐड्डिनोकॉर्टि कॉइड हॉर्मोन (Adrenocorticoid Hormones)-ये वृक्क या गुर्दों (Kidney) में विद्यमान अधिवृक्क ग्रन्थि (Adrenal gland) तथा वल्कुट (Cortex) द्वारा स्रावित होते हैं। जन्तुओं में ये हॉर्मोन अनुपस्थित होने पर तत्काल मृत्यु हो जाती है। ये हॉर्मोन अनेक प्रक्रियाओं का नियन्त्रण करते हैं। उदाहरणग्लूकोक्रॉर्टिकायड हार्मोन कार्बोहाइड्रेट उपापचय का नियंत्रण करते हैं, जलन उत्पत्र करने वाली अभिक्रियाओं में कमी करते हैं तथा तनाव के प्रति प्रतिक्रिया में भी सम्मिलित होते हैं।

मिनरैलोकॉर्टिकॉयड गुर्दों से उत्सर्जित होने वले जल तथा लवण के स्तर को नियंत्रित करते हैं। यदि ऐड्रिनल कॉर्टेक्स ठीक से कार्य न करें तो इसके परिणामस्वरूप ऐडीसन्सडिजीज हो सकती है जिसके लक्षण हैं हाइपोग्लाइसीमिया, दुर्बलता और तनाव के प्रति संवेदनशीलता की संभावना बढ़ना।

(ii) प्रोटीन हॉर्मोन-प्रोटीन हॉर्मोनों को पॉलिपेप्टाइड हॉर्मोन भी कहा जाता है क्योंकि ये विभिन्न ऐमीनो अम्लों के संघनन सहबहुलकीकरण से बनते हैं। इन्सुलिन, ग्लूकागॉन, ऑक्सीटोसिन, वैसोप्रेसिन, गैस्ट्रिन तथा एन्डोर्फिन इस परिवार के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं। इन्सुलिन तथा ग्लूकागॉन का स्रवण अग्न्याशय (Pancreas) में होता है जबकि ऑक्सीटोसिन तथा वैसोप्रेसिन का स्रवण पीयूष ग्रन्थि (Pituitary Gland) में होता है।

इन्सुलिन तथा ग्लूकागॉन दोनों एक साथ कार्बोहाइड्रेट उपापचय को नियंत्रित करके रक्त में ग्लूकोस की मात्रा को सामान्य स्तर पर बनाये रखते हैं। रक्त में ग्लूकोस को मात्रा तेजी से बढ़ने पर इन्सुलिन निकलने लगती है। दूसरी ओर हॉर्मोन ग्लूकागॉन की प्रवृत्ति रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ाने की होती है। ऑक्सीटोसिन, प्रसव के बाद गर्भाशय के संकुचन तथा स्तन ग्रन्थियों से दूध के मोचन (Release of milk) को नियंत्रित करता है। वैसोप्रेसिन हॉर्मोन रक्त दाब (Blood Pressure) को बढ़ाता है तथा वृक्क की जल-धारण क्षमता में वृद्धि करता है। गैस्ट्रिन, आमाशय में जठर रस के स्रवण को नियंत्रित करके प्रोटीन के पाचन में अपनी भूमिका निभाता है।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
चार क्षारकों के नाम लिखिए जो DNA में विद्यमान हैं। इनमें से कौनसा एक RNA में विद्यमान नहीं है?
उत्तर:
DNA में विद्यमान क्षारक साइटोसीन, ऐडेनीन, ग्वानीन तथा थायमीन हैं। इनमें से थायमीन RNA में नहीं पाया जाता लेकिन इसके स्थान पर यूरेसिल होता है।

प्रश्न 2.
वसा में घुलनशील दो विटामिनों के नाम, उनके स्रोत और उनकी भोजन में कमी से होने वाली बीमारियों के नाम बताइए।
उत्तर:
विटामिन A तथा Dवसा में घुलनशील होते हैं। विटामिन A गाजर, मक्खन, दूध तथा मछली के यकृत के तेल में पाया जाता है तथा इसकी कमी से रात्रि अंधता (रतौंधी) नामक बीमारी हो जाती है।

विटामिन D, सूर्य के प्रकाश, मछली तथा अंडे से प्राप्त होता है तथा इसकी कमी से रिकेट्स नामक बीमारी हो जाती है।

प्रश्न 3.
अपचायी शर्करा से क्या समझा जाता है?
उत्तर:
वे कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक या फेलिंग विलयन को अपचयित करते हैं उन्हें अपचायी शर्करा कहते हैं। इनमें स्वतंत्र ऐल्डिहाइड या कीटोन समूह होता है। जैसे-ग्लूकोस, फ्रक्टोस, माल्टोस तथा लैक्टोस।

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प्रश्न 4.
ऐमीनो अम्ल संभवतः अम्लीय, क्षारीय अथवा उदासीन होते हैं। यह किस प्रकार होता है? आवश्यक और अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार का एकएक नाम बताइए।
उत्तर:
(a) ऐमीनो अम्लों की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण- ऐमीनो अम्लों में उपस्थित ऐमीनो तथा कार्बोक्सिल समूहों की संख्या के आधार पर इन्हें अम्लीय क्षारीय तथा उदासीन में वर्गीकृत किया जाता है।

(i) अम्लीय ऐमीनो अम्ल – वे ऐमीनो अम्ल जिनमें ऐमीनो समूहों की तुलना में कार्बोक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है उन्हें अम्लीय ऐमीनो अम्ल कहते हैं। उदाहरण-
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(ii) क्षारीय ऐमीनो अम्ल ऐमीनो अम्ल, जिनमें कार्बोक्सिल समूहों की तुलना में ऐमीनो समूहों की संख्या अधिक होती है, उन्हें क्षारीय ऐमीनो अम्ल कहते हैं। उदाहरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 19

(iii) उदासीन ऐमीनो अम्ल वे ऐमीनो अम्ल, जिनमें कार्बोक्सिल समूहों तथा ऐमीनो समूहों की संख्या समान होती है, वे उदासीन ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं। उदाहरण-
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(b) संश्लेषण के आधार पर वर्गीकरण – संश्लेषण के आधार पर ऐमीनो अम्लों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है; अनावश्यक तथा आवश्यक ऐमीनो अम्ल।
(i) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल वे ऐमीनो अम्ल जिनका संश्लेषण हमारे शरीर में हो जाता है उन्हें अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहते हैं। आवश्यक ऐमीनो अम्लों के अतिरिक्त सभी ऐमीनो अम्ल इस श्रेणी में लिए जाते हैं जैसे ग्लाइसीन, ऐलानिन इत्यादि।

(ii) आवश्यक ऐमीनो अम्ल – वे ऐमीनो अम्लं जिनका संश्लेषण हमारे शरीर में नहीं होता है तथा जिनको भोजन में लेना आवश्यक होता है उन्हें आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहते हैं। आवश्यक ऐमीनो अम्लों की संख्या 10 होती है जो निम्नलिखित हैं-

ट्रिप्टोफेन (T), वैलीन (V), मेथिओनिन (M), आइसोल्यूसीन (I), ल्यूसीन (L.), लाइसीन (L), फेनिल ऐलानिन (P), आर्जिनीन (A), ट्रिप्टोफेन (T) तथा हिस्टिडीन (H)

आवश्यक ऐमीनो अम्लों को इनके अंग्रेजी नामों के प्रथम अक्षर ‘टीवीमीलपाथ’ (TVMILLPATH) से याद रखा जा सकता है।
ऐमीनो अम्लों के गुण-
(i) एमीनो अम्ल रंगहीन, अवाष्पशील क्रिस्टलीय ठोस होते हैं।

(ii) ये जल में विलेय तथा कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं तथा इनका गलनांक उच्च होता है क्योंकि इनमें -NH2 तथा -COOH दोनों समूह होने के कारण ये लवणों के समान व्यवहार करते हैं।

(iii) ग्लाइसीन के अतिरिक्त प्रकृति में उपलब्ध सभी ऐमीनो अम्ल ध्रुवण घूर्णक (optically active) होते हैं क्योंकि इनमें α-कार्बन परमाणु असममित होता है।

(iv) ये ‘D’ तथा ‘L’ रूपों में पाए जाते हैं।

(v) अधिकांश प्राकृतिक ऐमीनो अम्लों का विन्यास ‘L’ होता है तथा L- एमीनो अम्लों में NH2 समूह को सूत्र में बाईं ओर लिखकर दर्शाया जाता है।

प्रश्न 5.
स्पष्ट कीजिए कि निम्नलिखित से क्या समझा जाता है?
(i) पेप्टाइड लिंकेज
(ii) ग्लूकोस की पिरानोस संरचना।
उत्तर:
(i) वह बन्ध (लिंकेज) जिसके द्वारा विभिन्न α- ऐमीनो अम्ल आपस में जुड़कर प्रोटीन बनाते हैं उसे पेप्टाइड लिंकेज (-CONH-) कहते हैं। यह α – ऐमीनो अम्ल के एक अणु के – COOH तथा दूसरे अणु के -NH2 समूह से जल के निकलने से बनता है।

(ii) ग्लूकोस की छः सदस्यीय वलय युक्त संरचना पाइरैन के समान होती है अतः इसे पिरानोस (पाइरैनोस) संरचना कहते हैं। पाइरैन पांच कार्बन तथा एक ऑक्सीजन युक्त चक्रीय यौगिक होता है।
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प्रश्न 6.
DNA और RNA में मुख्य संरचनात्मक अंतर लिखिए। चार क्षारकों में से उनके नाम लिखिए जो इन दोनों में पाए जाते हैं।
उत्तर:
DNA की तुलना में RNA की संरचना कम जटिल होती है। RNA की द्वितीयक संरचना में कुण्डली केवल एक रज्जुक (Strand) से बनी होती है जो कभी-कभी स्वयं के मुड़ने से ही द्विकुण्डलनी हो जाती है। RNA में थायमीन के स्थान पर यूरेसिल क्षारक तथा डीऑक्सीराइबोस के स्थान पर राइबोस शर्करा होती है। RNA तीन प्रकार के होते हैं जिनके कार्य भिन्न-भिन्न हैं-

  • संदेशवाहक RNA (m-RNA)
  • राइबोसोमल RNA (r-RNA)
  • अंतरण या स्थानान्तरण RNA (t-RNA)

DNA तथा RNA में विभेद

(a) संरचनात्मक विभेद्

  • DNA, कोशिका के नाभिक में स्थित क्रोमोसोम (गुणसूत्र ) में पाया जाता है जबकि RNA मुख्यतः कोशिकाद्रव्य में पाया जाता है
  • DNA में ß-D-डीऑक्सीराइबोस शर्करा होती है जबक् RNA में ß-D राइबोस शर्करा होती है।
  • पिरीमिडीन क्षारक, थायमीन केवल DNA में होता है जबक् यूरेसिल केवल RNA में होता है।
  • DNA की द्विकुंडलनी संरचना होती है जबकि RNA कं एककुंडलनी संरचना होती है।

(b) क्रियात्मक विभेद: DNA में स्वप्रतिकरण (Self Replication) का गुण होता है तथ यह आनुवांशिक गुणों के स्थानान्तरण को नियंत्रित करता है जबकि RNA प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है। साइटोसीन, ऐडेनीन तथा ग्वानीन धारक DNA तथा RNA दोनों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
उस उत्पाद की संरचना लिखिए जो ग्लूकोस पर नाइट्रिक अम्ल की ऑक्सीकारक अभिक्रिया से प्राप्त होता है।
उत्तर:
ग्लूकोस पर नाइट्रिक अम्ल की ऑक्सीकारक अभिक्रिया से ग्लूकोनिक अम्ल प्राप्त होता है।
HOOC – (CHOH)4 – CH2OH

प्रश्न 8.
α- ग्लूकोस और ß – ग्लूकोस में विशेषतः क्या अंतर है? ग्लूकोस की पायरैनोस संरचना से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
α-ग्लूकोस तथा ß- ग्लूकोस में C1 पर उपस्थित हाइड्रॉक्सिल (-OH) समूह के विन्यास में भिन्नता होती है। α – ग्लूकोस में यह -OH समूह दायीं ओर (नीचे की तरफ ) जबकि ß-ग्लूकोस में यह बायीं ओर (ऊपर की तरफ) स्थित होता है इसलिए C1 कार्बन को ऐनोमरी कार्बन कहते हैं।

ग्लूकोस की ये संरचनाएँ विषमचक्रीय यौगिक पाइरैन के समान होती हैं अतः इन्हें पाइरैनोस संरचना कहते हैं।

प्रश्न 9.
(i) शारीरिक वृद्धि में मंदता होने पर व्यक्ति को किस प्रकार का आहार देना चाहिए?
(ii) ग्लूकोस की ऐसी अभिक्रियाएँ दीजिए जिससे यह सिद्ध होता है कि-
(A) ग्लूकोस के सभी छः कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।
(B) ग्लूकोन में ऐल्डिहाइड समूह पाया जाता है।
(iii) एन्जाइम किसे कहते हैं ?
उत्तर:
(i) शारीरिक वृद्धि में मंदता होने पर व्यक्ति को विटामिन B1 (थायमीन) युक्त आहार जैसे हरी सब्जियाँ, दालें तथा दूध इत्यादि देना चाहिए।

(ii)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 22
ग्लूकोस की HI से क्रिया द्वारा n हेक्सेन का बनना यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोस के सभी छः कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े हैं।

(B) ग्लूकोस का दुर्बल ऑक्सीकारक जैसे ब्रोमीन जल से ऑक्सीकरण कराने पर ग्लूकोनिक अम्ल बनता है। इससे सिद्ध होता है कि ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित है।
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(iii) सजीवों में होने वाली जैव रासायनिक क्रियाओं में प्रयुक्त होने वाले जैव उत्प्रेरकों को एन्जाइम कहते हैं। जैसे – माल्टेस एन्जाइम की उपस्थिति में माल्टोस के जल अपघटन से ग्लूकोस बनता है।

प्रश्न 10.
(अ) DNA की द्विकुंडलनी संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
(ब) हमारे शरीर में विटामिन C संचित नहीं हो सकता है। कारण दीजिए।
(स) ग्लूकोस से कैसे प्राप्त करेंगे? (केवल समीकरण दीजिए)
(i) ग्लूकोनिक अम्ल
(ii) n-हैक्सेन।
उत्तर:
(अ) DNA की द्विकुंडलिनी संरचना निम्न प्रकार होती है-
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(ब) विटामिन C जल में विलेय होता है अतः यह हमारे शरीर में संचित नहीं हो सकता क्योंक यह जलीय विलयन के रूप में हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है।

(स) (i) ग्लूकोस से ग्लूकोनिक अम्ल-
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(ii) ग्लूकोस से n-हैक्सेन-
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प्रश्न 11.
(अ) सूक्रोस का हावर्थ सूत्र लिखिए।
(ब) सूक्रोस एक अनपचायी शर्करा है। क्यों?
उत्तर:
उत्तर:
(अ) सूक्रोस (C12H12O11) का हावर्थ सूत्र निम्न प्रकार होता है-
इसमें α- ग्लूकोस के C1 तथा ß – फ्रक्टोज के C2 के मध्य ग्लाइकोसाइडी बन्ध होता है।
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(ब) सूक्रोस में उपस्थित ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस के अपचायक समूह ग्लाइकोसाइडी बन्ध बना लेते हैं अतः यह एक अनअपचायी शर्करा है।

प्रश्न 12.
(a) दो ऐमीनो अम्लों को जोड़ने वाले बन्धन का नाम लिखिए।
(b) श्रीमती अनुराधा के घर में सहायक शान्ति एक दिन फर्श को पोंछते हुए अचानक बेहोश होकर गिर गई। श्रीमती अनुराधा शीप्र ही उसे निकट के अस्पताल में ले गई जहाँ बताया गया कि शान्ति को अत्यधिक रक्त की कमी हो गयी है। डॉक्टर ने उसके लिए लोह धारक भोजन और बहु विटामिनी गोलियाँ लिख दीं। औषधि खरीदने में श्रीमती अनुराधा ने उसकी आर्थिक सहायता की। एक माह पश्चात् निदान कराने पर शान्ति को साधारण बताया गया।

उपर्युक्त लेख को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) श्रीमती अनुराधा ने किन मूल्यों का परिचय दिया ?
(ii) उस विटामिन का नाम बताइए जिसके अभाव में शान्ति को ‘हानिकारक रक्त अभाव’ (प्रणांशी रक्ताल्पता) हुआ।
(iii) जलविलेय विटामिन का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
(a) दो ऐमीनो अम्लों को जोड़ने वाले बन्धन को पेप्टाइड बन्धन कहते हैं।
(b) (i) श्रीमती अनुराधा ने मानवता का परिचय दिया जो कि दयालु, बुद्धिमान तथा दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य के प्रति भी सजग है।
(ii) विटामिन B12
(iii) विटामिन C

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प्रश्न 13.
(i) स्टार्च का कौनसा घटक जल में विलेय होता है?
(ii) कौनसे विटामिन की कमी से रात्रि अंधता रोग उत्पन्न होता है?
(iii) उस क्षारक का नाम बताइए जो केवल RNA के न्युक्लिओटाइड में पाया जाता है।
(iv) ग्लूकोस की HI के साथ अभिक्रिया से n-हेक्सेन बनता है, इससे ग्लूकोस की संरचना के बारे में क्या जानकारी प्राप्त होती है?
उत्तर:
(i) ऐमिलोस
(ii) विटामिन-A
(iii) यूरेसिल
(iv) ग्लूकोस की HI के साथ अभिक्रिया से n-हेक्सेन का बनना यह सिद्ध करता है कि ग्लूकोस में सभी छः कार्बन परमाणु सीधी श्रृंखला में होते हैं।

प्रश्न 14.
वह रासायनिक अभिक्रिया लिखिए जिससे ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति की पुष्टि होती है।
उत्तर:
ग्लूकोस, हाइड्रॉक्सिल ऐमीन (NH2OH) के साथ अभिक्रिया करके एक ऑक्सिम देता है। इस अभिक्रिया से ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह ( HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 28

प्रश्न 15.
विटामिन A, B, C और D को जल तथा वसा में विलेयता के आधार पर वर्गीकृत कर उनकी तुलना कीजिए।
उत्तर:
जल तथा वसा में विलेयता के आधार पर विटामिनों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है-
(i) वसा विलेय विटामिन-ये विटामिन वसा तथा तेल में विलेय होते हैं लेकिन जल में अविलेय होते हैं। ये विटामिन A तथा D हैं। ये यकृत तथा ऐडिपोस ऊतक में संग्रहित रहते हैं अतः इनका उत्सर्जन नहीं होता है।

(ii) जल विलेय विटामिन-ये विटामिन जल में विलेय होते हैं। ये विटामिन B तथा C हैं। ये मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं। इस कारण हमारे शरीर में संचित नहीं हो पाते हैं।

प्रश्न 16.
मोनोसैकैराइड क्या होते हैं?
उत्तर:
मोनोसैकैराइड वे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिनको और अधिक सरल यौगिकों में जल अपघटित नहीं किया जा सकता है। इनका सामान्य सूत्र C2H2nOn होता है। यहाँ n = 3 से 7. उदाहरण – ग्लूकोस, फ्रक्टोस तथा राइबोस।

प्रश्न 17.
प्रोटीन के विकृतिकरण को एक उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब प्राकृतिक प्रोटीन के ताप तथा pH में परिवर्तन किया जाता है तो उसमें उपस्थित हाइड्रोजन बन्धों की व्यवस्था बिगड़ जाती है जिसके कारण प्रोटीन की गोलिका खुल जाती है तथा हैलिक्स अकुंडलित हो जाती है अतः प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता खो देता है, इसे प्रोटीन का विकृतिकरण कहते हैं। उदाहरण-अंडे को उबालने पर उसमें उपस्थित सफेदी का स्कंदन।

प्रश्न 18.
(i) निम्नलिखित में कौनसा एक डाइसैकेराइड है : स्टार्च, माल्टोस, फ्रक्टोस, ग्लूकोस
(ii) अम्लीय ऐमीनो ऐसिड और क्षारीय ऐमीनो ऐसिड में क्या अन्तर है?
(iii) दो न्यूक्लिओटाइडों को जोड़ने वाली लिंकेज का नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) माल्टोस एक डाइसैकेराइड है।

(ii) अम्लीय ऐमीनो ऐसिड में ऐमीनो समूहों की तुलना में कार्बोक्सिल समूहों की संख्या अधिक होती है जबकि क्षारीय ऐमीनो ऐंसिड में कार्बोक्सिल समूहों की तुलना में ऐमीनो समूहों की संख्या अधिक होती है। उदाहरण-अम्लीय ऐमीनो ऐसिड-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 14 जैव-अणु 29
(iii) दो न्यूक्लिओटाइडों को जोड़ने वाली लिंकेज को फॉस्फोडाइएस्टर बंधन कहते हैं।

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. R3N में नाइट्रोजन परमाणु की संकरण अवस्था क्या है?
(अ) sp³
(ब) sp
(स) sp²
(द) sp³d
उत्तर:
(अ) sp³

2. अम्लीय माध्यम में Sn + HCI से नाइट्रोबेन्जीन का अपचयन करने पर प्राप्त उत्पाद होगा-
(अ) N-फेनिल हाइड्रॉक्सिल ऐमीन
(ब) फीनॉल
(स) ऐनिलीन
(द) N-मेथिल ऐनिलीन
उत्तर:
(स) ऐनिलीन

3. एथेन नाइट्राइल का LiAlH4 द्वारा अपचयन करने पर प्राप्त उत्पाद होगा-
(अ) मेथिल ऐमीन
(ब) एथिल ऐमीन
(स) डाइमेथिल ऐमीन
(द) ट्राइमेथिल ऐमीन
उत्तर:
(ब) एथिल ऐमीन

4. निम्नलिखित में से किसके द्वारा प्राथमिक ऐमीन की पहचान की जाती है?
(अ) NaOH
(ब) HCl
(स) CHCl3
(द) CHCl3 + KOH
उत्तर:
(द) CHCl3 + KOH

5. बेन्जीन डाइऐजोनियम क्लोराइड की क्रिया यौगिक y से कराने पर एक रंजक बनता है तो यौगिक y है-
(अ) C6H6
(ब) C2H5OH
(स) H2O
(द) C6H5NH2
उत्तर:
(द) C6H5NH2

6. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 1का LiAlH4 / H2O से अपचयन कराने पर प्राप्त यौगिक है-
(अ) ऐथेनेमीन
(ब) प्रोपेन- 1- ऐमीन
(स) प्रोपेन -2- ऐमीन
(द) प्रोपेनॉइक अम्ल
उत्तर:
(ब) प्रोपेन- 1- ऐमीन

7. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 2 का आई.यू.पी.ए.सी. नाम है-
(अ) एथेन डाइऐमीन
(ब) एथेन – 1, 2 – डाइऐमीन
(स) 1, 2 – डाइऐमीनोएथेन
(द) 2 – ऐमीनो ऐथेनेमीन
उत्तर:
(ब) एथेन – 1, 2 – डाइऐमीन

8. निम्नलिखित में से कौनसा तृतीयक ऐमीन है ?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 3
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 4

9. निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक उच्चतम है ?
(अ) CH3-CH2-CH-NH2
(ब) CH3-NH-CH2-CH3
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 5
(द) सभी का समान
उत्तर:
(अ) CH3-CH2-CH-NH2

10. निम्नलिखित में से किसका pKb मान न्यूनतम है?
(अ) N- मेथिल मेथेनेमीन
(ब) N N डाइमेथिलमेथेनेमीन
(स) मेथेनेमीन
(द) बेन्जीनेमीन
उत्तर:
(अ) N- मेथिल मेथेनेमीन

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

11. निम्नलिखित में से अधिकतम क्षारीय यौगिक कौनसा है?
(अ) (C2H5)3N
(ब) (C2H5)2NH
(स) C2H5NH2
(द) NH3
उत्तर:
(ब) (C2H5)2NH

12. इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन के लिए – NH2 समूह है-
(अ) निर्देशी
(ब) o, p-निर्देशी
(स) केवल 0-निर्देशी
(द) केवल p-निर्देशी
उत्तर:
(ब) o, p-निर्देशी

13. ऐनिलीन की ब्रोमीन जल से अभिक्रिया कराने पर बना यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 6
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 7

14. अभिक्रिया C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2, \(\stackrel{-}{C}\)l + KI से बना यौगिक है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 8
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 9

15. C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2, \(\stackrel{-}{C}\)l का अपचयन CH3CH2OH से कराने पर कौनसा उत्पाद नहीं बनेगा-
(अ) C6H6
(ब) C6H5 – CHO
(स) N2
(द) NH3
उत्तर:
(द) NH3

16. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 10
में यौगिक C है-
(अ) CH3 – CH2 – CH2 – NH2
(ब) CH3 – CH2 – NH – CH3
(स) CH3 – CH2 – CH2 NHCOCH3
(द) CH3 – CH2 – CONH – COCH3
उत्तर:
(स) CH3 – CH2 – CH2 NHCOCH3

17. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 11
में यौगिक Z है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 12
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 13

18. निम्नलिखित में से कौनसी अभिक्रिया शॉटन बोमान अभिक्रिया कहलाती है?
(अ) CH3 NH2 + HCl → CH3N\(\stackrel{+}{H}\)3, \(\stackrel{-}{Cl}\)
(ब) CH3 – CH2 NH2 + C6H5 COCl → CH3 – CH2 – NH – COC6H5 + HCl
(स) C6H5 NH2 + CH3 COCl → C6H5 NH – COCH3 + HCl
(द) C6H5OH + CH3COCl → C6H5O COCH3 + HCl
उत्तर:
(ब) CH3 – CH2 NH2 + C6H5 COCl → CH3 – CH2 – NH – COC6H5 + HCl

19. निम्नलिखित में से कौनसे यौगिक की CH3COCl से अभिक्रिया नहीं होती?
(अ) C2H5OH
(ब) (CH3 – CH2)2 NH
(स) (CH3)3 N
(द) CH3 NH2
उत्तर:
(स) (CH3)3 N

20. निम्नलिखित में से किस यौगिक का अपचयन LiAIH4 द्वारा कराने पर \(\stackrel{\circ}{2}\) ऐमीन प्राप्त होता है?
(अ) CH3 – CH2 – NC
(ब) CH3CONH2
(स) CH3 – NO2
(द) CH3 – CH2 – CN
उत्तर:
(अ) CH3 – CH2 – NC

21. प्राथमिक ऐल्किल ऐमीन को क्लोरोफॉर्म एवं ऐल्कोहॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर बनता है-
(अ) ऐल्किल क्लोराइड
(ब) ऐल्किल ऐल्कोहॉल
(स) ऐल्किल आइसोसायनाइड
(द) ऐल्कीन
उत्तर:
(स) ऐल्किल आइसोसायनाइड

22. निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में उत्पाद की पहचान कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 14
(अ) 3, 4, 5 ट्राइबोमोबेन्जीन
(ब) 1, 2, 3 ट्राइब्रोमोबेन्जीन
(स) 3, 4, 5 ट्राइब्रोमोफीनॉल
(द) 3, 4, 5 ट्राइब्रोमोनाइट्रो बेन्जीन
उत्तर:
(ब) 1, 2, 3 ट्राइब्रोमोबेन्जीन

23. ऐमीन जो नाइट्स अम्ल के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन मुक्त नहीं करती है, वह है-
(अ) ट्राइमेथिल ऐमीन
(ब) एथिल ऐमीन
(स) द्वितीयक ब्यूटिल ऐमीन
(द) आइसोप्रोपिल ऐमीन
उत्तर:
(अ) ट्राइमेथिल ऐमीन

24. बेन्जिलऐमीन को क्लोरोफार्म तथा एथेनॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर प्राप्त उत्पाद है-
(अ) बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(ब) बेन्जेल्डिहाइड
(स) बेन्जोनाइट्राइल
(द) बेन्जिल आइसोसायनाइड
उत्तर:
(द) बेन्जिल आइसोसायनाइड

25. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक ऐमीन प्राप्त नहीं होती?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 15
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 16

26. अणुसूत्र C4H11N से कितने प्राथमिक ऐमीनों का निर्माण सम्भव है-
(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
उत्तर:
(द) 4

27. ऐनिलीन सर्वप्रथम ऐसीटिल क्लोराइड के साथ क्रिया करके यौगिक ‘A’ बनाती है। ‘A’ नाइट्रिक अम्ल / सल्फ्यूरिक अम्ल मिश्रण के साथ क्रिया करता है तथा यौगिक ‘B’ बनाता है जो जल अपघटित होकर यौगिक ‘C’ देता है। यौगिक ‘C’ क्या है?
(अ) ऐसीटेनिलाइड
(ब) p-नाइट्रो ऐसीटेनिलाइड
(स) p- नाइट्रोऐनीलीन
(द) सल्फोनिक अम्ल
उत्तर:
(स) p- नाइट्रोऐनीलीन

28. निम्नलिखित में से कौन सी अभिक्रिया गाटरमान अभिक्रिया कहलाती है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 17
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 18

29. O – टॉलुडीन से एक उत्पाद D बनता है
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 19
यह मुख्य उत्पाद D होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 20
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 21

30. निम्नलिखित अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 22
तो D होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 23
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 24

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
यौगिकों के निम्नलिखित युग्म में कौनसी समावयवता है?
CH3 – CH2 – CH2 – NH2 तथा HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 25
उत्तर:
स्थिति समावयवता।

प्रश्न 2.
ऐल्किल हैलाइड की अमोनिया के आधिक्य के साथ क्रिया कराने पर प्राप्त प्रमुख उत्पाद क्या होगा?
उत्तर:
प्राथमिक ऐमीन।

प्रश्न 3.
समान अणुभार वाले प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों के क्वथनांक का क्रम लिखिए।
उत्तर:
प्राथमिक ऐमीन > द्वितीयक ऐमीन > तृतीयक ऐमीन।

प्रश्न 4.
कौनसे ऐमीन जल में अविलेय होते हैं ?
उत्तर:
तृतीयक ऐमीन।

प्रश्न 5.
सल्फेनिलिक अम्ल का सूत्र तथा IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 26

प्रश्न 6.
ऐमीनों के प्राकृतिक स्रोत बताइए।
उत्तर:
प्रकृति में ऐमीन, प्रोटीन, विटामिन, ऐल्केलॉइड तथा हॉर्मोनों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 7.
दो जैव सक्रिय ऐमीन बताइए जिनका उपयोग रक्त चाप बढ़ाने में किया जाता है।
उत्तर:
ऐड्रीनलिन और इफेड्रिन, ये द्वितीयक ऐमीन हैं।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

प्रश्न 8.
बैनेड्रिल का उपयोग बताइए। इसमें उपस्थित क्रियात्मक समूह भी बताइए।
उत्तर:
बैनेड्रिल प्रतिहिस्टैमिन के रूप में प्रयुक्त होता है तथा इसमें तृतीयक ऐमीन समूह उपस्थित होता है।

प्रश्न 9.
चतुष्क अमोनियम लवणों का एक उपयोग बताइए।
उंत्तर:
चतुष्क अमोनियम लवणों \(\left(\mathrm{R}_4 \stackrel{+}{\mathrm{N}} \overline{\mathrm{X}}\right)\) को पृष्ठ सक्रिय पदार्थों के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 10.
तृतीयक ब्यूटिल ऐमीन किस प्रकार की ऐमीन है?
उत्तर:
प्राथमिक ऐमीन।

प्रश्न 11.
वह सरलतम प्राथमिक ऐमीन कौनसा है जो प्रकाशिक समावयवता दर्शाता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 27

प्रश्न 12.
मेथिल ऐमीन की अम्लीय प्रकृति को दर्शाने वाली एक अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 28

प्रश्न 13.
एक प्राथमिक ऐमीन (अणु भार 31) HgCl2 की उपस्थिति में कार्बन डाइसल्फाइड के साथ क्रिया करके ऐसा यौगिक बनाता है जिसमें सरसों के तेल के समान गंध आती है तो प्राथमिक ऐमीन का सूत्र तथा रासायनिक समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 29

प्रश्न 14.
हिन्सबर्ग अभिकर्मक से 2° तथा 3° ऐमीन में विभेद कैसे किया जाता है ?
उत्तर:
2° ऐमीन हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ क्रिया कर लेती है। लेकिन 3° ऐमीन की हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ कोई क्रिया नहीं होती।

प्रश्न 15.
ऐनिलीन की बैन्जेल्डिहाइड के साथ अभिक्रिया का समीकरण दीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 30

प्रश्न 16.
मेथेनैमीन को एथेन नाइट्राइल में रूपान्तरित करने के लिए आवश्यक अभिक्रिया अनुक्रम को लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 31

प्रश्न 17.
जल में विलेय तथा जल में अविलेय डाइएजोनियम लवण कौनसे होते हैं?
उत्तर:
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड (C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2\(\overline{Cl}\)) जल में विलय होता है लेकिन बेन्जीन डाइएजोनियम फ्लुओरो बोरेट [C6H5\(\stackrel{+}{N}\)2B\(\overline{F}\)4] जल में अविलेय होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित परिवर्तनों के लिए आवश्यक समीकरण दीजिए-
(i) एथेनैल से मेथेनेमीन
(ii) एथेनॉयल क्लोराइड से मेथेनेमीन
(iii) एथेनॉइक अम्ल से प्रोपेन- 1- ऐमीन।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 32

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 33
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 34

प्रश्न 3.
ऐथेनेमीन जल में पूर्ण विलेय है, जबकि बेन्जीनेमीन (ऐनिलीन) जल में लगभग अविलेय है, क्यों?
उत्तर:
ऐथेनेमीन जल के साथ आसानी से अन्तरा अणुक हाइड्रोजन बन्ध बना लेती है, अतः यह जल में पूर्ण विलेय है लेकिन ऐनिलीन में फेनिल समूह के बड़े आकार के कारण यह जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बना पाती है अतः यह जल में लगभग अविलेय है।

प्रश्न 4.
(i) ऐलुमिना की उपस्थिति में एथेनॉल के आधिक्य की क्रिया अमोनिया के साथ कराने पर प्राप्त उत्पाद बताइए।
(ii) निम्नलिखित यौगिकों से मेथिल ऐमीन किस प्रकार बनाया जाता है? समीकरण दीजिए।
(a) CH3-MgCl
(b) CH3COCl
उत्तर:
(i) ऐलुमिना (Al2O3) की उपस्थिति में एथेनॉल के अधिकय की क्रिया अमोनिया के साथ कराने पर प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐमीनों का मिश्रण प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 35

प्रश्न 5.
निम्नलिखित विधियों से प्राथमिक ऐमीन बनाने की अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(a) ऐल्किल आइसोसायनाइड का जल अपघटन
(b) कार्बोनिल यौगिकों का अपचायक ऐमीनीकरण
(c) ऐल्किल आइसोसायनेट का क्षारीय जल अपघटन
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 36

प्रश्न 6.
ऐथिलऐमीन क्षारीय होती है जबकि ऐसिटेमाइड उभयधर्मी होता है, इसका कारण बताइए।
उत्तर:
ऐथिलऐमीन में – NH2 समूह के नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म प्रोटोन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन ऐसिटैमाइड में उपस्थित HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 37 समूह के – I प्रभाव के कारण, -NH2 समूह के नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म अनुनाद में भाग लेता है अतः यह प्रोटेन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है इसलिए ऐथिलऐमीन क्षारीय होता है जबकि ऐसिटैमाइड उभयधर्मी होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 38

प्रश्न 7.
साइक्लोहेक्सेनैमीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 39 बेन्जीनेमीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 40की तुलना में अधिक क्षारीय होती है, क्यों?
उत्तर:
साइक्लोहेक्सेनैमीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से उपलब्ध हो जाता है क्योंकि इसमें अनुनाद नहीं होता जबकि बेन्जीनेमीन (ऐनिलीन) में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है अतः साइक्लोहेक्सेनैमीन, बेन्जीनेमीन की तुलना में अधिक क्षारीय होती है।

प्रश्न 8.
मेथिलऐमीन की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया दीजिए-
(i) HAuCl4
(ii) H2PtCl6
(iii) CH3COCl
(iv) C6H5COCl
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 42

प्रश्न 9.
हॉफमान मस्टर्ड ऑइल अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
हॉफमान मस्टर्ड ऑइल अभिक्रिया-ऐल्किल ऐमीन की क्रिया कार्बन डाइसल्फाइड CS2 के साथ कराने पर पहले N-ऐल्किल डाइथायोकार्बेमिक अम्ल बनता है जिसे मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCl2) के साथ गरम करने पर ऐल्किल आइसोथायोसायनेट प्राप्त होता है जिसकी सरसों के तेल के समान गंध आती है। अतः इस अभिक्रिया को हॉफमान मस्टर्ड ऑइल अभिक्रिया कहते हैं तथा यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के परीक्षण में प्रयुक्त होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 43
ऐरोमैटिक ऐमीन (जैसे ऐनिलीन) में यह अभिक्रिया निम्न प्रकार भी की जा सकती है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 44

प्रश्न 10.
ऐनिलीन से o-ब्रोमोऐनिलीन तथा p-ब्रोमोऐनिलीन किस प्रकार बनाया जाता है? समझाइए।
उत्तर:
ऐनिलीन की इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति अधिक क्रियाशीलता के कारण प्रतिस्थापन o – तथा p – दोनों स्थितियों पर हो जाता है अतः ऐनिलीन का एकल प्रतिस्थापी व्युत्पन्न बनाने के लिए – NH2 समूह के सक्रियण प्रभाव को कम करने के लिए पहले ऐसिटिलीकरण द्वारा इसका रक्षण किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 45

प्रश्न 11.
ऐनिलीन के नाइट्रीकरण से p-नाइट्रोऐनिलीन किस प्रकार बनाया जाता है ? समीकरण सहित समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रीकारक मिश्रण में उपस्थित सान्द्र HNO3 के ऑक्सीकारक गुण के कारण यह ऐनिलीन का ऑक्सीकरण कर देता है अतः इस अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए नाइट्रीकरण से पहले ऐनिलीन का ऐसिटिलीकरण करके – NH2 समूह का रक्षण किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 46

प्रश्न 12.
नाइट्रोबेन्जीन को बेन्जीन में रूपान्तरित कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 47

प्रश्न 13.
p-ऐमीनोटॉलुइन से 2-ब्रोमो-4-मेथिल ऐनिलीन बनाने के लिए आवश्यक अभिक्रिया अनुक्रम बताइए।
उत्तर:
p-ऐमीनोटॉलुइन से 2 -ब्रोमो-4-मेथिल ऐनिलीन बनाने के लिए निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम आवश्यक होते हैं-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 48

प्रश्न 14.
सैन्डमायर अभिक्रिया तथा गाटरमान अभिक्रिया पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
हैलाइड अथवा सायनाइड आयन द्वारा प्रतिस्थापन (हैलोबेन्जीन अथवा सायनो बेन्जीन का निर्माण) –
(i) बेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड की क्रिया Cu(I) की उपस्थिति में HCl, HBr तथा KCN के साथ करवाने पर क्रमशः C6H5Cl, C6H5Br तथा C6H5CN बनते हैं। इसे सैन्डमायर अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 49
इस अभिक्रिया में Cu(I) के स्थान पर कॉपर लेने परइसे गाटरमान अभिक्रिया कहते हैं लेकिन इसमें उत्पाद की लब्धि कम होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 50
नोट-C6H5CN (बेन्जोनाइट्राइल) से बेन्जिल ऐमीन, बेन्जेमाइड तथा बेन्जोइक अम्ल का संश्लेषण किया जा सकता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 51

(ii) फ्लुओरोबेन्जीन का निर्माण – जब बेन्जीनडाइएजोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया फ्लुओरोबोरिक अम्ल के साथ की जाती है तो पहले ऐरीनडाइएजोनियम फ्लुओरोबोरेट अवक्षेपित होता है जिसे गरम करने पर यह ऐरिलफ्लुओराइड देता है। इसे बाल्ज शीमान अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 52

(iii) आयोडोबेन्जीन का निर्माण – बेन्जीन वलय में आयोडीन को सीधे जोड़ना मुश्किल होता है अतः आयोडोबेन्जीन बनाने के लिए बेन्जीन डाइजोनियम क्लोराइड की क्रिया पोटेशियम आयोडाइड के साथ करवायी जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 53

प्रश्न 15.
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की निम्नलिखित के साथ अभिक्रियाएँ बताइए-
(i) N, N-डाइमेथिल ऐनिलीन
(ii) ß – नैफ्थॉल।
उत्तर:
(i) N, N-डाइमेथिलऐनिलीन के साथ क्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 54

(ii) ß – नैफ्थॉल के साथ क्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 55

प्रश्न 16.
ऐमीनों के बनाने की वे कौनसी विधियाँ हैं जिनसे ऐनिलीन नहीं बनायी जा सकती ?
उत्तर:
ऐमीन बनाने की निम्नलिखित विधियों द्वारा ऐनिलीन नहीं बनायी जा सकती-

  • नाइट्राइलों का अपचयन
  • ऐमाइडों का अपचयन
  • ऑक्सिमों का अपचयन
  • कार्बोनिल यौगिकों का अपचायक ऐमीनीकरण।

प्रश्न 17.
अणुसूत्र C4H11N युक्त दो समावयवी A तथा B की HNO2 के साथ क्रिया से यौगिक C तथा D बनते हैं। C का ऑक्सीकरण मुश्किल से होता है लेकिन यह शीघ्रता से ल्युकास अभिकर्मक से क्रिया करता है जबकि D की ल्युकास अभिकर्मक से क्रिया 5 मिनट में होती है तथा यह हैलोफॉर्म अभिक्रिया भी देता है तो A, B, C तथा D की पहचान कीजिए।
उत्तर:
A = (CH3)3 C – NH2
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 56
A व B प्राथमिक ऐमीन हैं जिनकी HNO2 के साथ क्रिया से संगत ऐल्कोहॉल बनते हैं। C तृतीयक ऐल्कोहॉल है जिसका ऑक्सीकरण मुश्किल से होता है तथा यह ल्युकास अभिकर्मक से तुरन्त क्रिया कर लेता है तथा D एक द्वितीयक ऐल्कोहॉल है अतः यह ल्युकास अभिकर्मक से 5 मिनट में क्रिया करता है एवं HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 57 समूह के कारण यह हैलोफॉर्म अभिक्रिया देता है।

प्रश्न 18.
आप निम्नलिखित परिवर्तन किस प्रकार करेंगे ?
(i) मेथिल ऐल्कोहॉल से एथिल ऐमीन
(ii) एथेनॉइक अम्ल से एथेनैमीन।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 58

प्रश्न 19.
बेन्जीन से फेनिल आइसोसायनाइड किस प्रकार बना जाता है ? आवश्यक ‘अभिक्रिया अनुक्रम लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 59

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित यौगिकों को उनके जलीय विलयनों में क्षारीय सामर्थ्य के बढ़ते हुए क्रम में लिखिए-
NH3, CH3NH2, (CH3)2NH, (CH3)3N
उत्तर:
NH3 < (CH3)3 N < CH3 – NH2 < (CH3)2NH

प्रश्न 2.
निम्नलिखित अभिक्रिया समीकरणों को पूर्ण रूप में लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 60
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 61

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिक युग्मों में अंतर करने के लिए रासायनिक परीक्षण लिखिए-
(i) एथिलऐमीन और ऐनिलीन में
(ii) ऐनिलीन और बेन्जिलऐमीन में।
उत्तर:
(i) ऐथिलऐमीन बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोरइड से क्रिया करके ऐजो रंजक (Azo dye) नहीं बनाता जबकि ऐनिलीन, बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड से क्रिया करके एजोरंजक (पीला) बनाती है।

(ii) ऐनिलीन, बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड (C6H5\(\overline{N}\)2\(\overline{C}\)) से क्रिया करके एजोरंजक बनाती है लेकिन बेन्जिलऐमीन ऐसा नहीं करती।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रत्येक प्रक्रम में A और B की पहचान कीजिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 62
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 63

प्रश्न 5.
निम्नलिखित को उनकी क्षारीय सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में पुनः व्यवस्थित कीजिए-
C6H5NH2, C6H5N(CH3)2, (C6H5)2NH और CH3NH2
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 64

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के कारण लिखिए-
(i) ऐनिलीन के लिए pKb का मान अपेक्षाकृत मेथिलऐमीन से अधिक होता है।
(ii) एथिलऐमीन जल में घुलनशील है परन्तु ऐनिलीन जल में नहीं घुलती।
(iii) प्राथमिक ऐमीनों के क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होते हैं।
उत्तर:
(i) मेथिल ऐमीन (CH3 – NH2) में मेथिल समूह के + I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव) के कारण नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति अधिक होती है इसलिए इसका क्षारीय गुण अधिक होता है जबकि ऐनिलीन HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 65 में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद (+M प्रभाव) करता है जिससे इसके नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन देने की प्रवृत्ति कम हो जाती है इसलिए इसका क्षारीय गुण कम होता है। इसी कारण ऐनिलीन का pKb मेथिलऐमीन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि क्षारीय गुण \(\propto \frac{1}{pK}{b} \propto K{b}\) (क्षार वियोजन स्थिरांक)

(ii) ऐथिलऐमीन (C2H5 – NH2) जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाती है जबकि ऐनिलीन के C6H5 – समूह (अध्रुवीय) के बड़े आकार के इसमें जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाने की प्रवृत्ति नहीं होती अतः ऐथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं।

(iii) प्राथमिक ऐमीनों में नाइट्रोजन पर दो हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हैं जिनके कारण इनमें प्रबल अन्तराआण्विक हाइड्रोजन बन्ध होता है जिससे आण्विक सगुणन (Molecular association) अधिक होता है जबकि तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन पर हाइड्रोजन परमाणु नहीं होने के कारण हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनता अतः प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 66

प्रश्न 7.
प्रत्येक के लिए संगत रासायनिक समीकरण देकर निम्नलिखित का वर्णन कीजिए-
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया
(ii) हॉफमान की ब्रोमैमाइड अभिक्रिया
उत्तर:
(i) हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया या आइसोसायनाइड परीक्षण-ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफ़ार्म तथा एथेनॉलिक KOH या NaOH के साथ गर्म करने पर तीक्ष्ण दुर्गधधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कार्बिलऐमीन बनता है इसे हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन में यह अभिक्रिया नहीं होती तथा यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के परीक्षण में प्रयुक्त की जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 67

(ii) हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया या हॉफमान हाइपोब्रोमाइट अभिक्रिया द्वारा (By Hofmann Bromamide Degradation Reaction or Hofmann Hypobromite Reaction) – NaOH याँ KOH के जलीय अथवा एथेनॉलिक विलयन में ऐमाइडों की क्रिया ब्रोमीन के साथ करवाने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होते हैं। इस अभिक्रिया से प्राप्त ऐमीन में ऐमाइड की तुलना में एक कार्बन कम होता है। अतः इस अभिक्रिया को निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं तथा इसे सजातीय श्रेणी में अवरोहण के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इस अभिक्रिया के प्रथम पद में ब्रोमामाइड (हाइपोब्रोमाइट) बनता है अतः इसे हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया कहा जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 68
अभिक्रिया की क्रियाविधि – यह अभिक्रिया चार पदों में सम्पन्न होती है तथा इसमें नाइट्रीन मध्यवर्ती बनता है।
(i) ब्रोमीनीकरण (Bromination)-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 69
(ii) विहाइड्रोब्रोमीनीकरण (Dehydrobromination)-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 70

(iii) पुनर्विन्यास (Rearrangement) – इस पद में ऐल्किल समूह का स्थानान्तरण कार्बन परमाणु से नाइट्रोजन परमाणु पर होकर ऐल्किल आइसोसायनेट बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 71

(iv) जल अपघटन (Hydrolysis)-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 72

प्रश्न 8.
(i) ऐनिलीन के डाइएजोटीकरण से क्या अभिप्राय है? अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
(ii) ऐनिलीन की निम्नलिखित के साथ होने वाली अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए-
(A) हिन्सबर्ग अभिकर्मक से
(B) ब्रोमीन जल से
(C) नाइट्रीकारी मिश्रण से
(D) क्षार की उपस्थिति में क्लोरोफार्म से
उत्तर:
(i) बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड बनाने के लिए निम्न ताप पर ऐनिलीन की नाइट्रस अम्ल के साथ क्रिया करवायी जाती है। इस अभिक्रिया के लिए आवश्यक नाइट्रस अम्ल को अभिक्रिया मिश्रण में ही सोडियम नाइट्राइट (NaNO2 तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की क्रिया से उत्पन्न किया जाता है। प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन से डाइऐजोनियम लवण बनाने की इस अभिक्रिया को डाइऐजोकरण या डाइएजोटीकरण (Diazotisation) कहते हैं। यह अभिक्रिया उन्हीं प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीनों द्वारा दी जाती है जिनमें -NH2 समूह ऐरीमैटिक वलय से सीधे जुड़ा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 73
बेन्जीन डाइएजोनियम लवण केवल विलयन में ही कुछ समय के लिए स्थायी होते हैं अतः इनका भण्डारण नहीं किया जा सकता तथा इन्हें बनते ही प्रयोग में ले लिया जाता है।

(ii)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 74

B. हैलोजेनीकरण या हैलोजनन (Halogenation)-ऐनिलीन कमरे के ताप पर ही ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन का श्वेत अवक्षेप देती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 75
ऐनिलीन की इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के प्रति अधिक क्रियाशीलता के कारण प्रतिस्थापन आर्थो तथा पैरा दोनों स्थितियों पर हो जाता है। जब ऐनिलीन का एकल हैलो प्रतिस्थापी व्युत्पन्न बनाना हो तो NH2 समूह के सक्रियण प्रभाव को कम करने के लिए पहले ऐसीटिक ऐनहाइड्राइड से ऐसिटिलीकरण द्वारा इसको रक्षित (Protect) किया जाता है, इसके पश्चात् प्रतिस्थापन करते हैं और फिर अंत में प्रतिस्थापित ऐमाइड का जल अपघटन किया जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 76
ऐसिटेनिलाइड की नाइट्रोजन पर स्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म, ऑक्सीजन परमाणु की इलेक्ट्रॉन आकर्षी प्रवृत्ति के कारण इसके साथ अनुनाद में भाग लेता है जिससे नाइट्रेजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का बेन्जीन वलय की तरफ अनुनाद (+M प्रभाव) कम हो जाता है। इसी कारण – NHCOCH3 समूह का सक्रियण प्रभाव, – NH2 समूह से कम होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 77

C. नाइट्रीकरण (Nitration ) – नाइट्रीकारक मिश्रण (सान्द्र HNO3 + सान्द्र H2SO4) में उपस्थित सान्द्र HNO3 ऑक्सीकारक होता है अतः ऐनिलीन के सीधे नाइट्रीकरण में नाइट्रोव्युत्पन्नों के साथ ऑक्सीकरण उत्पाद भी बनते हैं तथा ऐनिलीन H2SO4 से प्रोटोन ग्रहण करके ऐनिलीनियम आयन बना देती है जिसके m – निर्देशी प्रभाव के कारण o- तथा p- उत्पादों के साथ m – उत्पाद भी अपेक्षित मात्रा से अधिक बन जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 78

अतः ऐनिलीन की नाइट्रीकरण अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए पहले, (CH3CO)2O के साथ क्रिया द्वारा – NH2 समूह का रक्षण (Protection) करते हैं इसके पश्चात् नाइट्रीकरण करके प्राप्त उत्पाद का जल अपघटन करने से पैरानाइट्रोऐनिलीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है।

D. हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया या आइसोसायनाइड परीक्षण-ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफ़ार्म तथा एथेनॉलिक KOH या NaOH के साथ गर्म करने पर तीक्ष्ण दुर्गधधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कार्बिलऐमीन बनता है इसे हॉफमान कार्बिलऐमीन अभिक्रिया कहते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन में यह अभिक्रिया नहीं होती तथा यह अभिक्रिया प्राथमिक ऐमीनों के परीक्षण में प्रयुक्त की जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 80

प्रश्न 9.
(अ) ऐनिलीन एवं N मेथिल ऐनिलीन में विभेद के लिए एक रासायनिक समीकरण दीजिए।
(ब) डाइमेथिल ऐमीन मेथिल ऐमीन से प्रबल क्षार है । (कारण दीजिए)
(स) ऐनिलीन से कैसे प्राप्त करेंगे – (केवल समीकरण दीजिए)
(i) 2, 4, 6- ट्राइब्रोमोऐनिलीन?
(ii) बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड ?
उत्तर:
(अ) ऐनिलीन (1° – ऐमीन) CHCI, तथा क्षार के साथ कार्बिल ऐमीन परीक्षण देता है जबकि N- मेथिल ऐनिलीन (2°- ऐमीन) कार्बिल ऐमीन परीक्षण नहीं देती।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 81

(ब) डाइमेथिल ऐमीन, मेथिल ऐमीन से प्रबल क्षार है क्योंकि डाइमेथिल ऐमीन (2°) में दो मेथिल समूहों के धनात्मक प्रेरणिक प्रभाव (+I प्रभाव) के कारण नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है अतः इसकी इलेक्ट्रॉन युग्म देने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

(स)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 82

प्रश्न 10.
(अ) निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रम में X तथा Y को पहचानिए एवं प्रयुक्त दोनों अभिक्रियाओं के नाम भी लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 83

(ब) ऐल्केनेमीन अमोनिया से प्रबल क्षारक है। कारण दीजिए।
उत्तर:
(अ) RCONH2 + Br2 + 4 NaOH → RNH2 + Na2CO3 + 2NaBr + 2H2O
यहाँ X = R-NH2 ( प्राथमिक ऐमीन) इस अभिक्रिया को हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 84
इस अभिक्रिया को कार्बिल ऐमीन अभिक्रिया कहते हैं।

(ब) ऐल्केनेमीन, अमोनिया से प्रबल क्षारक है क्योंकि ऐल्केनेमीन में उपस्थित ऐल्किल समूह की इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रकृति के कारण यह इलेक्ट्रॉन युग्म को नाइट्रोजन की ओर प्रतिकर्षित करता है इससे नाइट्रोजन के असहभाजित इलेक्ट्रॉन युग्म की प्रोटॉन से साझेदारी के लिए उपलब्धता बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त ऐमीन से प्राप्त हुआ प्रतिस्थापित अमोनियम आयन, ऐल्किल समूह + I प्रभाव के कारण आवेश के वितरण द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन

प्रश्न 11.
निम्नलिखित की संरचना लिखिए-
(i) प्रोप-2-ईन-1-ऐमीन
(ii) N-मेथिल ऐथेनैमीन
(iii) 2-ऐमीनो टॉलुईन
उत्तर:
(i) CH2 = CH – CH2 – NH2
(ii) CH3 – CH2 – NH – CH3
(iii) HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 85

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं के मुख्य उत्पाद लिखिए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 86
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 87

प्रश्न 13.
(i) निम्नलिखित यौगिकों की जल में विलेयता का आरोही क्रम लिखिए-
C6H5NH2, (C2H5)2NH, C2H5NH2
(ii) निम्नलिखित यौगिकों को क्षारीय प्रबलता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
C6H5NH2, C6H5NHCH3, C6H5CH2NH2
उत्तर:
(i) जल में विलेयता का आरोही क्रम
C6H5NH2 < (C2H5)2 NH < C2H5NH2

(ii) क्षारीय प्रबलता का बढ़ता क्रम
C6H5NH2 < C6H5NHCH3 < C6H5CH2NH2

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परिवर्तन किस प्रकार करेंगे ? समीकरण दीजिए।
(i) नाइट्रोबेन्जीन से ऐनिलीन
(ii) एथेनॉइक अम्ल से मेथेनैमीन
(iii) ऐनिलीन से N – फेनिलएथेनैमाइड
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 88

प्रश्न 15.
हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
किसी ऐमाइड की NaOH या KOH के जलीय अथवा ऐथेनॉलिक विलयन में ब्रोमीन से अभिक्रिया कराने पर प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है। इसे हॉफमान ब्रोमाइड अभिक्रिया कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 88a

प्रश्न 16.
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की फ़ीनॉल के साथ युग्मन अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर:
बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की फीनॉल के साथ अभिक्रिया कराने पर युग्मन द्वारा p-हाइड्रॉक्सीऐजोबेन्जीन बनता है जो कि एक ऐजोरंजक है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 89

प्रश्न 17.
(i) ऐलीफैटिक एवं (ii) ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
(i) ऐलीफैटिक प्राथमिक ऐमीन की नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया से मुख्य उत्पाद के रूप में ऐल्केनॉल प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 90

(ii) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया द्वारा जीन डाइजोनियम लवण प्राप्त होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 91

प्रश्न 18.
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 92 का IUPAC नाम लिखिए।
उत्तर:
N, N-डाइएथिल ब्यूटेन-1-ऐमीन

प्रश्न 19.
क्या होता है जब बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया पोटेशियम आयोडाइड से कराई जाती है? (केवल अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।)
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 93

प्रश्न 20.
अधोलिखित यौगिकों को उनके बढ़ते हुए क्षारीय सामर्थ्य के क्रम में व्यवस्थित कर कारण स्पष्ट कीजिए-
C2H5NH2, NH3, C6H5NH2
उत्तर:
उपर्युक्त यौगिकों के क्षारीय सामर्थ्य का बढ़ता क्रम निम्न प्रकार है-
C2H5NH2 < NH3 < C6H5NH2
C6H5NH2(ऐनिलीन) में नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का बेन्जीन वलय के साथ संयुग्मन (अनुनाद ) (+ M प्रभाव) हो जाता है। अतः यह प्रोटोन ग्रहण करने के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता है इसलिए इसकी क्षारीय सामर्थ्य NH3 से कम होती है जबकि C2H5NH2 में एथिल समूह (C2H5-) के इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षी प्रभाव (+I प्रभाव ) के कारण नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से प्रोटोन ग्रहण कर लेता है तथा इससे प्राप्त प्रतिस्थापित अमोनियम आयन में आवेश का वितरण हो जाता है जिससे वह स्थायी हो जाता है अतः एथिल एमीन (C6H5NH2) की क्षारीय सामर्थ्य, NH3 से अधिक होती है।

प्रश्न 21.
आणिकक सूत्र C7H7ON का एक ऐरोमैटिक यौगिक ‘A’ नीचे दिखाई गई एक अभिक्रिया श्रेणी में जाता है। निम्नलिखित अभिक्रियाओं में A, B, C, D और E की संरचनाएँ लिखिए :
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 94
अथवा
(a) जब ऐनिलीन निम्नलिखित अभिकारकों के साथ अभिक्रिया करता है तो प्राप्त उत्पादों की संरचनाएँ लिखिए :
(i) Br2 जल
(ii) HCl
(iii) (CH3CO)2O / पिरिडीन

(b) निम्नलिखित को उनके क्वथनांक के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
C2H5NH2, C2H5OH, (CH3)3 N

(c) यौगिकों के निम्नलिखित युग्म में अन्तर करने के लिए एक सामान्य रासायनिक जाँच दीजिए :
(CH3)2 – NH और (CH3)3N
उत्तर:
दिए गए ऐरोमैटिक यौगिक C7H7ON की अभिक्रिया श्रेणी निम्न प्रकार है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 95
अतः
A = C6H5CONH2 बेन्जैमाइड
B = C6H5N2Cl बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड
C = C6H5CN फेनिल सायनाइड
D = C6H5NC फेनिल आइसोसायनाइड
E = C6H5OH फीनॉल
अथवा
(a)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 13 ऐमीन 96
(b) क्वथनांक का बढ़ता क्रम-
(CH3)3N < C2H5NH2 < C2H5OH

(c) (CH3)2NH (\({ }_2^{\circ}\)-ऐमीन) हिन्सबर्ग अभिकर्मक से अभिक्रिया करती है लेकिन (CH3)3 N (\({ }_3^{\circ}\)-ऐमीन) हिन्सबर्ग अभिकर्मक से अभिक्रिया नहीं करती। अतः हिन्सबर्ग अभिकर्मक की सहायता से इनमें अन्तर किया जा सकता है।

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HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Practical Work in Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण Textbook Exercise  Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए-
(i) जनसंख्या वितरण दर्शाया जाता है-
(क) वर्णमात्री मानचित्रों द्वारा
(ख) सममान रेखा मानचित्रों द्वारा
(ग) बिंदुकित मानचित्रों द्वारा
(घ) ऊपर में से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) बिंदुकित मानचित्रों द्वारा।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

(ii) जनसंख्या की दशकीय वृद्धि को सबसे अच्छा प्रदर्शित
करने का तरीका है-
(क) रेखा ग्राफ
(ग) वृत्त आरेख
(ख) दंड आरेख
(घ) ऊपर में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(क) रेखा ग्राफ।

(iii) बहुरेखाचित्र की रचना प्रदर्शित करती है-
(क) केवल एक बार
(ख) दो चरों से अधिक
(ग) केवल दो चर
(घ) ऊपर में से कोई भी नहीं।
उत्तर:
(ख) दो चरों से अधिक।

(iv) कौन-सा मानचित्र “गतिदर्शी मानचित्र” जाना जाता है-
(क) बिंदुकित मानचित्र
(ख) सममान रेखा मानचित्र
(ग) वर्णमात्री मानचित्र
(घ) प्रवाह संचित्र।
उत्तर:
(घ) प्रवाह संचित्र।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए-
(i) थिमैटिक मानचित्र क्या हैं?
उत्तर:
थिमैटिक मानचित्र मानचित्रों की विविधता। प्रादेशिक वितरणों के प्रतिरूपों अथवा स्थानों पर विविधताओं की विशेषताओं को समझने के लिए विविध मानचित्रों को बनाया जाता हैं। यह मानचित्र अलग-अलग विशेषताओं को पेश करने वाले आंकड़ों में आंतरिक विभिन्नताओं के मध्य की तुलना दिखाने के लिए भी उपयोगी प्रयोजन प्रदान करते हैं।

(ii) आंकड़ों के प्रस्तुतीकरण से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
आंकड़े उन तथ्यों की विशेषताओं को हमारे सामने लाते हैं जो प्रदर्शित किए जाते हैं। आंकड़ो के प्रस्तुतीकरण की आलेखी विधि हमारी समझ के क्षेत्र को बढ़ाती हैं अथवा तुलनाओं को आसान बना देती हैं। इसके अतिरिक्त इस प्रकार की विधियाँ एक लंबे समय के लिए मस्तिष्क पर अपनी छाप छोड़ देती हैं।

(iii) बहुदंड आरेख और यौगिक दंड आरेख में अंतर बताइए।
उत्तर:
दंड आरेख-आँकड़े दिखाने के लिए यह सबसे सरल विधि है। इसमें आँकड़ों को समान चौड़ाई वाले दंडी या स्तंभों द्वारा दिखाया जाता हैं। इन दंडों की लंबाई वस्तुओं की मात्रा के अनुपात के अनुसार छोटी-बड़ी होती है। बहुदंड आरेख-यदि एक दंड को अनेक भागों में बांटकर उसके द्वारा कई वस्तुओं को एक साथ दिखाया जाए तो बहुदंड आरेख का निर्माण होता है। इस विधि के द्वारा आंकड़ों के कुल योग तथा उसके विभिन्न भागों को दिखाया जाता है।

(iv) एक बिंदुकित मानचित्र की रचना के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं?
उत्तर:
बिंदु विधि द्वारा मानचित्र की रचना के लिए आवश्यकता होती है-

  1. जिस वस्तु का वितरण प्रकट करना हो उसके सही-सही आँकड़े उपलब्ध होने चाहिए। ये आंकड़े प्रशासकीय इकाइयों के आधार पर होने चाहिए।
  2. उस प्रदेश का एक सीमा चित्र हो जिसमें जिले या राज्य आदि शासकीय भाग दिखाए हों।
  3. उस प्रदेश का धरातलीय मानचित्र हो जिसमें contours, marshes इत्यादि धरातल की आकृतियां दिखाई गई हों।
  4. उस प्रदेश का जलवायु मानचित्र हो जिसमें वर्षा तथा तापमान का ज्ञान हो सके।
  5. विभिन्न कृषि पदार्थों की उपज वाले मानचित्रों में भूमि के मानचित्र जरूरी हैं।

(v) सममान रेखा मानचित्र क्या हैं? एक क्षेपक का किस प्रकार कार्यान्वित किया जाता है?
उत्तर:
सममान रेखा शब्द Isopleth दो शब्दों के जोड़ से बना है ISO + Pleth अर्थ है समान रेखाएँ। इस प्रकार सममान रेखाएं वे रेखाएं हैं जिनका मूल्य, तीव्रता तथा घनत्व समान हो। ये रेखाएं उन स्थानों को आपस में जोड़ती हैं जिनका मान समान हो।
क्षेत्रक की कार्यान्वित करने का तरीका-

  1. सबसे पहले मानचित्र पर दिए गए न्यूनतम तथा अधिकतम मान को निश्चित करना चाहिए।
  2. उसके बाद परास की गणना की जानी चाहिए।
  3. उसके बाद श्रेणी के आधार पर, एक पूर्ण संख्या जैसे 5, 10, 15 इत्यादि में अंतराल निश्चित करनी चाहिए।
  4. सममान रेखा के चित्रण के बिल्कुल सही बिंदु को निम्नलिखित सूत्र द्वारा निश्चित किया जाता है-

सममान रेखा का बिंदु =
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 1

(vi) एक वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्त्वपूर्ण चरणों की सचित्र व्याख्या की कीजिए।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्त्वपूर्ण चरणों को सचित्र इस प्रकार हैं-

  1. आंकड़ों को चढ़ते अथवा उतरते हुए क्रम में व्यवस्थित किया जाता है।
  2. अति उच्च, उच्च, मध्यम, निम्न तथा अति निम्न केंद्रीकरण को दर्शाने के लिए आंकड़े को 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
  3. श्रेणियों के मध्य अंतराल की, निम्नलिखित सूत्र परास / 5 तथा अधिकतम मान-न्यूनतम मान, द्वारा पहचाना जा सकता है।
  4. प्रतिरूपी, छापाओं और रंगों का उपयोग चुनी हुई श्रेणियों को चढ़ते और उतरते क्रम में दर्शाने के लिए किया जाता है।

(vii) आंकड़े की वृत आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्त्वपूर्ण चरणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आंकड़े की वृत आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्त्वपूर्ण चरणों की विवेचना इस प्रकार है-

  1. आंकड़ों को चढ़ते क्रम में व्यवस्थित करो।
  2. मानों को दिखाने के लिए कोणों के अंशों की गणना करो। खींचे जाने वाले वृत्त के लिए एक उपयुक्त त्रिज्या को चुनना चाहिए।
  3. वृत्त के बीच से चाप एक त्रिज्या की तरह रेखा खींचनी चाहिए।
  4. वृत्त को विभागों की आवश्यक संख्या में विभाजन द्वारा आंकड़े को प्रदर्शित करते हैं।
  5. एक रेखा लगाओ केन्द्रीय धुरे से लेकर वृत्त तक।
  6. इसके बाद वृत्त तक के कोण को मापा जाए और हर एक वर्ग के वाहनों को चढ़ते क्रम में लिखा जाए। वाहनों की प्रत्येक श्रेणी के लिए चढ़ते हुए क्रम में, दक्षिणावर्त, छोटे कोण से शुरू करके वृत्त के चाप से कोणों को नापते हैं। उसके बाद शीर्षक उपशीर्षक और सूचिका द्वारा आरेख को पूर्ण किया जाता है।

क्रिया-कलाप
1. निम्न आंकड़ों को अनुकूल / उपयुक्त आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए:
भारत : नगरीकरण की प्रवृत्ति 1901-2001

वर्षदशवार्षिक वृर्धि (%)
19110.35
19218.27
193119.12
194131.97
195141.42
196126.41
197138.23
198146.14
199136.47
200131.13

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 2

रेखाग्राफ़ की रचना –

  • रेखाग्राफ़ में सबसे पहले आंकड़ों को पूर्णांक में बदला जाता है। ताकि इसे सरल बनाया जा सके। जैसे कि ऊपर दी गई तालिका में 1961 और 1981 के लिए दर्शाई गई नगरीकरण की प्रवृत्ति दर को क्रमश: 26.4 और 46.1 पूर्णांक में बदला जा सकता है।
  • इसके बाद x और y अक्ष खींचो। समय क्रम चरों को x अक्ष पर तथा आंकड़ों के मात्रा को अक्ष पर अंकित करें।
  • एक योग्य मापनी को चुनकर y अक्ष पर अंकित कर दो। यदि आंकड़ा एक ऋणात्मक मूल्य में हैं तो चुनी हुई मापनी को इसे भी दर्शाना चाहिए।
  • y अक्ष पर चुनी हुई मापनी के अनुसार वर्ष बार दर्शाने के लिए आंकड़े अंकित कीजिए तथा बिंदु द्वारा अंकित मूल्यों की स्थिति चिह्नित करें तथा हाथ से रेखा खींचकर मिला दो।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

2. निम्नलिखित आंकड़े को उपयुक्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए:
भारत: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में साक्षरता और नामांकन अनुपात।

अतिरिक्त प्रश्न (Other Questions)

प्रश्न 1.
सांख्यिकीय आरेख से क्या अभिप्राय है? इनके लाभ तथा सीमाओं का वर्णन करो।
उत्तर:
सांख्यिकीय आरेख (Statistical Diagram) –
आवश्यकता (Necessity)-आर्थिक भूगोल के अध्ययन में आँकड़ों का विशेष महत्त्व है। विभिन्न प्रकार के आँकड़े किसी वस्तु की मात्रा, गुण, घनत्व, वितरण आदि को स्पष्ट करते हैं। ये आँकड़े अनेक तथ्यों की पुष्टि करते हैं। किसी क्षेत्र की जलवायु के अध्ययन में तापमान, वर्षा आदि के आँकड़ों का भी अध्ययन किया जाता है। इन आँकड़ों का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकाले जाते हैं, परंतु इस विश्लेषण के लिए अनुभव, समय तथा परिश्रम की आवश्यकता होती है।

बड़ी- बड़ी तालिकाओं को याद करना बहुत कठिन तथा नीरस होता है। लंबी-लंबी सारणियां कई बार भ्रम उत्पन्न कर देती हैं। इन्हें सरल और स्पष्ट बनाने के लिये ये आँकड़े रेखाचित्रों द्वारा प्रकट किए जाते हैं। इन सांख्यिकीय आँकड़ों पर आधारित रेखाचित्रों तथा आरेखों को सांख्यिकीय आरेख कहा जाता है। “सांख्यिकीय आँकड़ों को चित्रात्मक ढंग से प्रदर्शित करने वाले रेखाचित्रों को सांख्यिकीय आरेख कहते हैं।” इन विधियों में विभिन्न प्रकार की ज्यामितीय आकृतियां रेखाएं, वक्र रेखाएं, रचनात्मक ढंग से प्रयोग की जाती हैं। ये आँकड़ों को एक दर्शनीय रूप (visual impression) देकर मस्तिष्क पर गहरी छाप डालते हैं।

सांख्यिकीय आरेखों के लाभ
(Advantages of Statistical Diagrams)

  1. आँकड़ों का सजीव रूप प्राय: किसी विषय संबंधी आँकड़े नीरस व प्रेरणा रहित होते हैं। रेखाचित्र इन विषयों को एक सजीव तथा रोचक रूप देते हैं। एक ही दृष्टि में रेखाचित्र तथ्यों का मुख्य उद्देश्य व्यक्त करने में सहायक होते हैं।
  2. सरल रचना-रेखाचित्रों की रचना सरल होने के कारण अनेक विषयों में इनका प्रयोग किया जाता है।
  3. तुलनात्मक अध्ययन-रेखाचित्रों द्वारा विभिन्न आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन सरल हो जाता है
  4. अधिक समय तक स्मरणीय-रेखाचित्रों का दर्शनीय रूप मस्तिष्क पर एक लंबे समय के लिए गहरी छाप छोड़ जाता है। यह आरेख दृष्टि सहायता (Visual Aid ) का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
  5. विश्लेषण में उपयोगी शोध कार्य में किसी तथ्य के विश्लेषण में रेखाचित्र सहायक होते हैं।
  6. साधारण व्यक्ति के लिए उपयोगी – साधारण व्यक्ति आँकड़ों को चित्र द्वारा आसानी से समझ सकता है।
  7. समय की बचत-रेखाचित्रों द्वारा तथ्यों को शीघ्र ही समझा जा सकता है, जिससे समय की बचत होती है।

आरेख चित्रों की सीमाएं
(Limitations of Statistical Diagrams)

  1. आँकड़ों का शुद्ध रूप से निरूपण का संभव न होना- रेखाचित्र आँकड़ों को कई बार शुद्ध रूप में प्रदर्शित नहीं करते। इनमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन किया जाता  है।
  2. आरेख आँकड़ों के प्रतिस्थापन नहीं हैं- मापक के अनुसार रेखाचित्रों का आकार बदल जाता है तथा कई भ्रम उत्पन्न हो जाते हैं।
  3. बहुमुखी आँकड़ों का निरूपण संभव नहीं है- एक ही रेखाचित्र पर एक से अधिक प्रकार के आँकड़े नहीं दिखाए जा सकते हैं। इसके द्वारा एक ही इकाई में मापे जाने वाले समान गुणों वाले आँकड़ों को ही दिखाया जा सकता है।
  4. उच्चतम तथा न्यूनतम मूल्य में अधिक अंतर- जब उच्चतम तथा न्यूनतम मूल्य में बहुत अधिक अंतर हो तो रेखाचित्र नहीं बनाए जा सकते।
  5. भ्रमात्मक परिणाम उपयुक्त आरेख का प्रयोग न करने से गलत तथा भ्रमात्मक परिणाम निकलने की संभावना होती है।

प्रश्न 2.
आँकड़ों को प्रदर्शित करने की कौन-कौन सी विधियां हैं?
उत्तर:
आँकड़े रेखाचित्रों तथा वितरण मानचित्रों द्वारा प्रकट किए जाते हैं।
आँकड़ों के विस्तार तथा प्रकृति के अनुसार ये रेखाचित्र निम्नलिखित प्रकार से हैं-

  1. रेखा आरेख चित्र (Line graph )
  2. दंड आरेख चित्र ( Bar diagram)
  3. चलाकृति चित्र (Wheel diagram)
  4. तारक चित्र (Star diagram)
  5. क्लाइमोग्राफ (Climograph)
  6. हीधरग्राफ (Hythergrahp)
  7. चित्रीय आरेख (Prictorial diagram)
  8. आयत चित्र (Rectangular diagram)
  9. मुद्रिक चित्र ( Ring diagram)
  10. मेखला चित्र (Circular diagram)

प्रश्न 3.
दंड आरेख (Bar diagrams ) क्या होते हैं? इनके विभिन्न प्रकारों का वर्णन करो।
उत्तर:
दंड आरेख (Bar Diagrams) आँकड़े दिखाने की यह सबसे सरल विधि है। इसमें आँकड़ों को समान चौड़ाई वाले दंडों (Bar या स्तंभों (Columns) द्वारा दिखाया जाता है। इन दंडों की लंबाई वस्तुओं की मात्रा के अनुपात के अनुसार छोटी-बड़ी होती है। प्रत्येक दंड किसी एक वस्तु की कुल मात्रा को प्रदर्शित करता है। इन आरेखों के प्रयोग से संख्याओं का तुलनात्मक अध्ययन आसानी से किया जा सकता है।

दंड आरेखों की रचना (Drawing of Bar Diagrams)
दंडचित्र बनाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखा जाता है-
1. मापक (Scale) वस्तु को मात्रा के अनुसार मापक निश्चित करना चाहिए। भाषक तीन बातों पर निर्भर करता है-
(क) कागत का विस्तार।
(ख) अधिकतम संख्या।
(ग) न्यूनतम संख्या।
मापक अधिक बड़ी या अधिक छोटी नहीं होनी चाहिए।
2. दंडों की लंबाई (Length of Bars) दंडों की चौड़ाई समान रहती है, परंतु लंबाई मात्रा के अनुसार घटती-बढ़ती है।
3. शेड करना (Shading) दंड रेखा खींचने के पश्चात् उसे काला कर दिया जाता है या छायांकन का प्रयोग किया जाता है।
4. मध्यांतर (Interval) दंड रेखाओं के मध्य अंतर रखा जाता है।
5. आँकड़ों को निश्चित करना ( Determination of Datas) सर्वप्रथम आँकड़ों को संख्या के अनुसार क्रमवार तथा पूर्णांक बना लेना चाहिए।

गुण-दोष (Merits and Demerits)-

  1. यह आँकड़े दिखाने की सबसे सरल विधि है।
  2. इनके द्वारा तुलना करना आसान है।
  3. दंडचित्र बनाने कठिन हैं जब समय अवधि बहुत अधिक हो।
  4. जब अधिकतम तथा न्यूनतम संख्या में बहुत अधिक अंतर | हो, तो दंडचित्र नहीं बनाए जा सकते हैं।

दंड आरेखों के प्रकार (Types of Bar Diagrams ) दंड आरेख मुख्यतः निम्नलिखित प्रकार के होते हैं
1. क्षैतिज दंड आरेख (Horizontal Bars) ये सरल दंड आरेख हैं। इन दंडों से किसी वस्तु का कुछ वर्षों का वार्षिक उत्पादन, जनसंख्या आदि दिखाए जाते हैं ये समान चौड़ाई के होते हैं। ये आसानी से पढ़े जा सकते हैं। सरल दंड आरेख किसी वस्तु के मूल्यों के केवल एक ही गुण को प्रदर्शित करते हैं। इन मूल्यों को आरोही (Ascending) क्रम में व्यवस्थित कर लेना चाहिए। इससे आरेख दंडों की ऊंचाई लगातार बढ़ती जाती है या घटती जाती है। इस विधि से मूल्यों की तुलना करना आसान हो जाता है। क्षैतिज दंड आरेख लंबवत् दंड ओरेखों की अपेक्षा में अच्छे माने जाते हैं क्योंकि इन पर मापक लिखने तथा पढ़ने में सुविधा रहती है।

2. लंबवत् दंड आरेख (Vertical Bars) ये आरेख किसी आधार रेखा के ऊपर खड़े देशों के रूप में बनाए जाते हैं। इन्हें स्तम्भी आरेख (Columnar diagrams) भी कहते हैं। आधार रेखा को शून्य माना जाता है और दंडों की ऊंचाई पैमाने के अनुसार मापी जाती है। इन दंडों से वर्षा का वितरण भी दिखाया जाता है जब उच्चतम तथा निम्नतम संख्याओं में अंतर बहुत अधिक हो तो दंड आरेख प्रयोग नहीं किए जाते दंड की लंबाई कागज के विस्तार से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि दंडों की संख्या बहुत अधिक हो तो भी ये आरेख प्रयोग नहीं किए जाते।

3. संश्लिष्ट दंड आरेख (Compound Bar )-यदि एक दंड को अनेक भागों में बांट कर उसके द्वारा कई वस्तुओं को एक साथ दिखाया जाए तो संश्लिष्ट दंड का निर्माण होता है। इन्हें मिश्रित या संयुक्त दंड आरेख भी कहा जाता है। इनसे आँकड़ों के कुल योग तथा उसके विभिन्न भागों को प्रदर्शित किया जाता है। विभिन्न भागों में अलग-अलग Shade कर दिए जाते हैं ताकि विभिन्न वस्तुएं स्पष्टतया अलग दृष्टिगोचर हों। इस विधि से जल सिंचाई के विभिन्न साधन और शक्ति के विभिन्न साधन आदि दिखाए जाते हैं।

4. प्रतिशत दंड आरेख (Percentage Bar ) किसी वस्तु के विभिन्न भागों को उस वस्तु के कुल मूल्य के प्रतिशत अंश के रूप में दिखाना हो तो प्रतिशत दंड बनाए जाते हैं। दंड की कुल लंबाई 100% को प्रकट करती है।

प्रश्न 4.
रेखाग्राफ की रचना तथा महत्त्व का वर्णन करो।
उत्तर:
सांख्यिकीय चित्रों में रेखाग्राफ का महत्व बहुत अधिक है। इसमें प्रत्येक वस्तु को दो निर्देशकों की सहायता से दिखाया जाता है यह ग्राफ किसी निश्चित समय में किसी वस्तु के शून्य में परिवर्तन को प्रकट करता है। आधार रेखा पर समय को प्रदर्शित किया जाता है जिसे ‘X’ अक्ष कहते हैं ‘Y’ अक्ष या खड़ी रेखा या किसी वस्तु मूल्य को प्रदर्शित किया जाता है। दोनों निर्देशकों के प्रतिच्छेदन के स्थान पर बिंदु लगाया जाता है। इस प्रकार विभिन्न बिंदुओं को मिलाने से एक वक्र रेखा प्राप्त होती है ये रेखाग्राफ दो प्रकार के होते है।

  1. जब किसी निरंतर परिवर्तनशील वस्तु (तापमान, नमी, वायु, भार आदि) को दिखाना हो तो उसे वक्र रेखा (Smooth Curve) से दिखाया जाता है।
  2. जब किसी रुक-रुक कर बदलने वाली वस्तु का प्रदर्शन करना हो तो विभिन्न बिंदुओं को सरल रेखा द्वारा मिलाया जाता है। जैसे वर्षा, कृषि उत्पादन, जनसंख्या।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

महत्त्व (Importance)-
रेखाग्राफ से तापमान, जनसंख्या वृद्धि, जन्म-दर, विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन दिखाया जाता है। यह आसानी से बनाए जा सकते हैं। रेखाग्राफ समय तथा उत्पादन में एक स्पष्ट संबंध प्रदर्शित करते हैं। इसलिए मापक चुना जाता है।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से हिसार तथा अंबाला नगर के उच्चतम मासिक तापमान तथा औसत मासिक तापमान को रेखाग्राफ से दिखाओ-
तापमान-1990

नगरज०फ०म०अ०म०जू०जु०अ०सि०अ०न०दि०
हिसार उच्चतम तापमान °C 24.126.835.243.145.045.640.140.339.035.234.327.5
अंबाला औसत तामयान °C14.815.719.226.530.833.029.028.524.134.015.014.6

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 3
उत्तर:
तापमान के आँकड़ों को दिखाने के लिए रेखाग्राफ का प्रयोग किया जाता है। ग्राफ पेपर पर एक आधार रेखा लो। इस रेखा पर समय दिखाने के लिए एक पैमाना निश्चित करो। पांच-पांच छोटे खानों के अंतर पर 12 मास दिखाओ। इसे क्षैतिज पैमाना कहते हैं। लंबात्मक पैमाने पर तापमान दिखाने के लिए एक खाना1°C का पैमाना निश्चित करो। प्रत्येक मास के लिए तापमान के लिए बिंदु लगाओ। इन 12 बिंदुओं को मिलाने से एक रेखाग्राफ बन जाएगा।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 4

प्रश्न 6.
वृत्त चक्र किसे कहते हैं? इनकी रचना और गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
चक्र चित्र (Pie-Diagram )-यह वृत्त चित्र (Circular Diagrams) का ही एक रूप है। इसमें विभिन्न राशियों के जोड़ को एक वृत्त द्वारा दिखाया जाता है। फिर इस वृत्त को विभिन्न भागों (Sectors) में बांटकर विभिन्न राशियों का आनुपातिक प्रदर्शन अंशों में किया जाता है। इस चित्र को चक्र चित्र (Pic Diagram). पहिया चित्र (Wheel diagram) या सिक्का चित्र (Coin diagram) भी कहते हैं।

रचना- इस चित्र में वृत्त का अर्धव्यास मानचित्र के आकार के अनुसार अपनी मर्जी से लिया जाता है। इसका सिद्धांत यह है कि कुल राशि वृत्त ‘के क्षेत्रफल के बराबर होती है। एक वृत्त के केंद्र पर 360° का कोण बनता है। प्रत्येक राशि के लिए वृत्तांश ज्ञात किए जाते हैं। इसलिए निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया जाता है-
किसी राशि के लिए कोण =
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कई बार वृत्त के विभिन्न भागों को प्रभावशाली रूप से दिखाने के लिए इनमें भिन्न-भिन्न शेड (छायांकन) कर दिए जाते हैं। गुण-दोष (Merits-Demerits)

  1. चक्र चित्र विभिन्न वस्तुओं के तुलनात्मक अध्ययन के लिए उपयोगी है।
  2. ये कम स्थान घेरते हैं। इन्हें वितरण मानचित्रों पर भी दिखावा जाता है।
  3. इसका चित्रीय प्रभाव (Pictorial Effect) भी अधिक है।
  4. इसमें पूरे आँकड़ों का ज्ञान नहीं होता तथा गणना करनी कठिन होती है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित आँकड़ों को लंबवत् (Vertical) दंड आरेख द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
POPULATION OF INDIA FROM 1901 TO 2001

Census yearPopulationCensus yearPopulation
190123,83,96,327196143,92.34.77
191125,20,93,390197154,81 i9,652
192125,13,21,213198168,38,10051
193127,89,77,238199134,39,30,861
194131,86,60,58020011,02,70,15,247
195136,10,88,09020111,21,01.93,42

उत्तर:
रचना-

  1. आधार रेखा (X-Axis) पर समय का पैमाना निश्चित करके जनगणना वर्ष दिखाओ।
  2. आधार रेखा के सिरों पर लंब रेखाएं (v- Axis) खींचो।
  3. बाई ओर लंब रेखा पर जनसंख्या दिखाने के लिए मापक निश्चित करो जैसे।” = 10 करोड़
  4. मापक के अनुसार प्रत्येक वर्ष के लिए जनसंख्या के लिए दंड की ऊँचाई ज्ञात करो आधार रेखा पर समान चौड़ाई वाली दंड रेखाएं खींचो तथा इन्हें काली छाया से सजाओ।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित आंकड़ों की सहायता से कोलकाता की माध्य मासिक वर्षा का आरेख बनाओ।

वर्षा(सेमी.)
J1
F3
M3
A5
M14
J25
J30
A30
S25
O13
N3
D1

उत्तर:
रचना- आधार रेखा पर पांच-पांच छोटे खानों के अंतर पर 12 मास दिखाओ आधार रेखा के बाएँ सिरे पर एक लंब रेखा खींचो। इस रेखा पर एक छोटा खाना 1 सेंटीमीटर वर्षा का मापक बना कर प्रत्येक मास के लिए लंबवत् दंड रेखा खींचो। इन्हें काले रंग से छायांकन (Shade) करो।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित आंकड़ों को क्षैतिज दंड रेखाचित्र से प्रकट करो।
भारत में पक्की सडकों का वितरण

राज्यपककी सड़कों की लंबाई (कि० मी०)
1. कर्नाटक49,753
2. मध्य प्रदेश45,756
3. उत्तर प्रदेश45,361
4. आध्र प्रदेश35,714
5. तमिलनाडु35,138
6. पंजाब31,862

उत्तर:
रचना-सबसे पहले एक आधार रेखा खींचो। इस रेखा पर मापक बनाओ। सुविधा अनुसार मापक एक सेंटीमीटर = 10000 कि० मी० है तो मापक के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए दंड रेखा की लंबाई ज्ञात करो। समान चौड़ाई वाले क्षैतिज दंड खींचो। विभिन्न राज्यों के लिए दंड रेखाओं की लंबाई इस प्रकार होगी- कर्नाटक = 4.9 सेंटीमीटर, मध्य प्रदेश = 4.5 सेंटीमीटर, उत्तर प्रदेश = 4.5 सेंटीमीटर, आंध्र प्रदेश = 3.5 सेंटीमीटर, तमिलनाडु =3.5 सेंटीमीटर, पंजाब =3.1 सेंटीमीटर।
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित आंकड़ों को मिश्रित दंड आरेख से स्पष्ट करो।
भारत का विदेशी व्यापार (₹ करोड़ में )

बहैआयातनिर्यातकुल
1979-809,1426,45815,700
1980-8112,5606,71019,270
1981-8213,6717,80221,473
1982-8314,0478,63722,684

उत्तर:
रचना (Construction )-आधार रेखा को शून्य मान कर समय दिखाओ। पांच छोटे खाने एक वर्ष के बराबर मान कर समय दिखाएं | आधार पर रेखा की बाईं ओर एक लंब रेखा लो। इस पर एक पैमाना बनाओ जिसमें एक सेंटीमीटर = ₹ 5000 करोड़ का मापक लो। विभिन्न वर्षों के लिए कुल मूल्य के अनुसार खड़े दंड रेखाओं की ऊंचाई ज्ञात करो। प्रत्येक दंड रेखा को दो उप-भागों में बांटकर आयात तथा निर्यात प्रकट करो।
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित आँकड़ों को प्रतिशत दंड आरेख तथा वृत्तारेख से दिखाओ।
भारत में प्रमुख धर्म

धर्मपतिशत जनसंखा (सम 1991)
1. हिंदू (Hindus)82.41
2. मुसलमान (Muslims)11.67
3. ईसाई (Christians)2.32
4. सिक्ख (Sikhs)1.99
5. अन्य (Others)1.61
कुल =100.00

उत्तर:
रचना-10 सें० मी० लंबी रेखा प्रतिशत दंड बनाओ। इस पर 1 सेंटीमीटर = 10 प्रतिशत का लो। मापक के अनुसार विभिन्न धर्मों के लिए लंब ज्ञात करो और प्रत्येक भाग को दिखाकर अंकित करो।
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वृत्तारेख (Piegraph) द्वारा-यह एक द्विमित्तीय आरेख है। इसे पाई अथवा वृत्त अथवा चक्र रेखाचित्र भी कहा जाता है। इस चित्र में विभिन्न उप-भागों को वृत्तांश के कोणों द्वारा दिखाया जाता है।

वृत्त में कुल कोण 360° होते हैं जो कि वस्तु की कुल संख्या को दिखाते हैं। प्रत्येक संख्या के लिए कोण ज्ञात कर लिए जाते हैं।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 19
अर्थात् दी गई संख्या के प्रतिशत को 3.6 से गुणा करो। हिंदू धर्म के लिए कोण = 296.7°, मुसलमान धर्म के लिए कोण 42°, ईसाई धर्म के लिए कोण 8.4°, सिख धर्म के लिए कोण 7.1° है तथा अन्य के लिए 5.8° है।

भारत में धार्मिक आधार पर जनसंख्या 1991
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 11

प्रश्न 12.
निम्नलिखित आँकड़ों को रेखाग्राफ़ द्वारा प्रकट करो।
भारत की जनसंख्या वृद्धि (मिलियन में)

वर्षजनसंख्यावर्षजनसेख्य
19012381961439
19112521971548
19212511981683
19312791991844
194131920011027
1951361

उत्तर:
रचना-आधार रेखा को शून्य मानकर इस रेखा पर समय दिखाओ। पांच खाने एक वर्ष के बराबर रखकर विभिन्न वर्ष दिखाओ | आधार रेखा पर बाईं ओर लंब रेखा खींचकर मापक बनाओ। सुविधा के अनुसार मापक 1 सें० मी० = 100 मिलियन हो। प्रत्येक वर्ष की जनसंख्या के लिए खड़े अक्ष पर बिंदु निर्धारित करो। विभिन्न बिंदुओं को सरल रेखा से मिला कर रेखाग्राफ बनाओ।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 12 (2)

प्रश्न 13.
निम्नलिखित आँकड़ों की सहायता से बंबई (मुंबई ) नगर का तापमान तथा वर्षा का रेखाग्राफ बनाओ।

जि०फ०मा०अ०म०जू०जु०अ०सि०अ०न०दि०
तापमान °C22.522.27302928282828272625
वर्षा (सें० मी०)22××45060362664×

उत्तर:
तापमान तथा वर्षा को जब इकट्ठा प्रदर्शित किया जाए तो इसे संयुक्त रेखा तथा दंड ग्राफ कहते हैं। वर्षा को खड़े दंडों द्वारा दिखाया जाता है तथा तापमान को रेखाग्राफ द्वारा दिखाया जाता है। रचना-ग्राफ पेपर पर एक आधार रेखा लो। इस पर समय दिखाने के लिए एक पैमाना निश्चित करो। पांच-पांच छोटे खानों के अंतर पर 12 मास दिखाओ। इसे क्षैतिज पैमाना (Horizontal Scale) कहते हैं। आधार रेखा के सिरों पर लंब खींचो। एक लंब पर तापमान के लिए मापक बनाओ। दूसरे लंब पर वर्षा दिखाने के लिए मापक बनाओ। इसे लंबवत् मापक (Vertical Scale) कहते हैं। मापक के अनुसार वर्षा को खड़ी दंड रेखाओं द्वारा दिखाओ। प्रत्येक भाग के तापमान के लिए बिंदु लगाओ। इन 12 बिंदुओं को मिलाने से एक रेखाग्राफ बन जाएगा।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 12

प्रश्न 14.
प्रवाह आरेखों पर एक नोट लिखें।
उत्तर:
प्रवाह आरेख ( Flow Diagrams)-इन आरेखों से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की गतिशीलता एवं गति सघनता को दिखाया जाता है। इस प्रकार यह मानचित्र दो तथ्यों पर आधारित है-

  •  प्रवाह की दिशा
  • प्रवाह की मात्रा

ऐसे मानचित्रों को प्रवाह मानचित्र (Flow maps ) भी कहते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

उदाहरण-

  • जल, रेल, राजमार्गों पर वाहनों की संख्या।
  • ढोया गया माल जैसे गेहूँ, इस्पात आदि।
  • आयात-निर्यात व्यापार।

रचना-

  • क्षेत्र का रेखा-मानचित्र दो जिसमें सभी नगर तथा परिवहन मार्ग निश्चित हों।
  • प्रदर्शित किए जाने वाले तत्व के आँकड़े उपलब्ध हों।
  • एक मापक के अनुसार प्रत्येक मार्ग की मोटाई वाहनों की संख्या के अनुपात में मापी जाए।

गुण-दोष (Merits-Demerits)-

  • इन मानचित्रों द्वारा सभी मार्गों पर प्रवाह की मात्रा का महत्त्व एक साथ प्राप्त हो जाता है।
  • विभिन्न दिशाओं से मार्गों के मिलने के कारण संगम नगरों का महत्त्व बढ़ जाता है।
  • विभिन्न नगरों के प्रभाव क्षेत्र का ज्ञान होता है।
  • विभिन्न केंद्रों के अंतर्संबंधों का पता चलता है।

उदाहरण-निम्नलिखित बस सेवा संबंधी आँकड़ों को प्रवाह मानचित्र द्वारा दिखाइए।

पानीपत से प्रमुख स्थानों की बस सेवा

नूहारबर सेवा संख्या
करनाल70
दिल्ली50
रोहतक20
अंबाला90
जींद25
  1. रेखा-मानचित्रों पर इन नगरों की स्थिति दिखाओ।
  2. इन नगरों के मध्य सड़क मार्ग बनाओ।
  3. प्रत्येक सड़क मार्ग पर रेखा की मोटाई बसों की संख्या ( मापक के अनुसार) अंकित करें।
  4. प्रत्येक मार्ग पर बसों की संख्या तथा दिशा के लिए तीर बनाओ।
  5. मानचित्र पर बसों की संख्या का मापक बनाओ।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 13

प्रश्न 15.
वितरण मानचित्रों से क्या अभिप्राय है? इनकी क्या आवश्यकता है? इसका महत्त्व बताओ।
उत्तर:
वितरण मानचित्र (Distribution Maps )-वितरण मानचित्र वे मानचित्र हैं जो पृथ्वी के किसी भाग में किसी तत्व के वितरण को या मूल्य या घनत्व को प्रकट करते हैं। इन मानचित्रों पर विभिन्न भौगोलिक तत्व तथा वस्तुओं के उत्पादन को अंकित किया जाता है। जैसे- जनसंख्या, पशुधन, फसलें, खनिज आदि। इन मानचित्रों को बनाने के लिए कई विधियों का प्रयोग किया जाता है।

वितरण मानचित्रों की आवश्यकता (Necessity of distribution Maps)-
प्रारंभ में किसी वस्तु के वितरण को प्रकट करने के लिए नामांकन विधि (Writing the name of commodity) का प्रयोग किया था। जिस क्षेत्र में जो वस्तु उत्पन्न हो वहां पर उस वस्तु का नाम लिख दिया जाता था। जैसे- भारत में चावल का उत्पादन प्रकट करने के लिए गंगा के डेल्टा में Rice लिखा जाता था। परंतु इस विधि से न तो वस्तु का कुल उत्पादन और न ही उत्पादन क्षेत्र का ठीक ज्ञान होता था। इसलिए वितरण मानचित्र बनाए गए, जिनमें वैज्ञानिक ढंग पर शुद्धता हो।

भूगोल में विभिन्न तथ्यों की पुष्टि के लिए कई प्रकार के आँकड़ों (Data) का प्रयोग किया जाता है। ये आँकड़े तालिकाओं के रूप (Tables) में लिखे जाते हैं। इन आँकड़ों का अध्ययन बड़ा नीरस, कठिन होता है तथा बहुत समय नष्ट हो जाता है। आँकड़ों को इकट्ठा देखकर किसी परिणाम पर पहुंचना कठिन है। इसलिए इन आँकड़ों को वितरण मानचित्रों द्वारा प्रकट करके मस्तिष्क में एक वास्तविक चित्र की कल्पना की जा सकती है। इसलिए भौगोलिक तत्त्वों को चित्रों की भाषा में प्रकट किया जाता है।

गुण (Advantages) –
(1) यह आर्थिक भूगोल के अध्ययन में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है। पृथ्वी पर विभिन्न साधन तथा मानव का वितरण इन मानचित्रों द्वारा स्पष्ट रूप से प्रकट किया जा सकता है।

(2) इन मानचित्रों से कारण तथा प्रभाव का नियम स्पष्ट हो जाता है। (They help the geographer to study the cause and effect of any distribution.) वस्तु विशेष के वितरण पर प्रभाव डालने वाले भौगोलिक तत्व समझ आ जाते हैं।

(3) आँकड़ों की लंबी-लंबी तालिकाओं को याद करना कठिन हो जाता है। परंतु वितरण मानचित्र एक तथ्य की स्थायी छाप मस्तिष्क पर छोड़ जाते हैं। (They give a visual impression.)

(4) इनका उपयोग शिक्षा संबंधी कार्य (Educational purposes) के लिए अधिक होता है।

(5) इन मानचित्रों द्वारा एक दृष्टि में ही किसी वस्तु के वितरण का तुलनात्मक ज्ञान हो जाता है। (They represent the pattern of distribution of any element.) यह स्पष्ट हो जाता है कि अमुक वस्तु किस क्षेत्र में अधिक और किस क्षेत्र में कम मिलती है।

(6) इन मानचित्रों द्वारा क्षेत्रफल और उत्पादन की मात्रा का तुलनात्मक अध्ययन होता है। (The contrast and comparison become clear at a glance.) वितरण मानचित्र वास्तविक आँकड़ों का स्थान नहीं ले सकते हैं। वास्तव में मानचित्रों के द्वारा एक भूगोलवेत्ता, केवल तथ्य प्रस्तुत कर सकता है। (Such maps supplement the data, but these do not replace the tables.)

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

बिंदु मानचित्र (Dot Maps)

प्रश्न 16.
बिंदु मानचित्र से क्या अभिप्राय है? इसकी रचना के लिए क्या आवश्यकताएं हैं? इनकी रचना संबंधी समस्याओं का वर्णन करो तथा गुण-दोष बताओ।
उत्तर:
बिंदु मानचित्र ( Dot Maps )-इस विधि के अंतर्गत किसी वस्तु के उत्पादन तथा वितरण के आँकड़ों को बिंदुओं द्वारा प्रकट किया जाता है। ये बिंदु समान आकार के होते हैं। प्रत्येक बिंदु द्वारा एक निश्चित संख्या (Specific Value) प्रकट की जाती है, किसी वस्तु की निश्चित संख्या तथा मात्रा (Absolute Figures) उपलब्ध हों। वितरण मानचित्र बनाने की यह सबसे अधिक प्रचलित जब सर्वोत्तम विधि है। (This is the most common method used for showing the distribution of population, livestock, crops, minerals etc.) बिंदु मानचित्र बनाने के लिए आवश्यकताएं (Requirements for drawing Dot Maps )-बिंदु विधि द्वारा मानचित्र बनाने के लिए कुछ चीज़ों की आवश्यकता होती है।
1. निश्चित आँकड़े (Definite and Detailed Data )-जिस वस्तु का वितरण प्रकट करना हो उसके सही-सही आँकड़े उपलब्ध होने चाहिए। ये आँकड़े प्रशासकीय इकाइयों (Administrative Units) के आधार पर होने चाहिएं। जैसे जनसंख्या तहसील या जिले के अनुसार होनी चाहिए।

2. रूप-रेखा मानचित्र ( Outline Map)-उस प्रदेश का एक सीमा चित्र हो जिसमें ज़िले या राज्य आदि शासकीय भाग दिखाए हों। यह सीमा-चित्र समक्षेत्र प्रक्षेप (Equal Area Projection) पर बना हो।

3. धरातलीय मानचित्र (Relief Map)-उस प्रदेश का धरातलीय मानचित्र हो जिसमें Contours, Hills, Marshes आदि धरातल की आकृतियां दिखाई गई हों।

4. जलवायु मानचित्र (Climatic Map)-उस प्रदेश का जलवायु मानचित्र हो जिसमें वर्षा तथा तापमान का ज्ञान हो सके।

5. मृदा मानचित्र (Soil Map )-विभिन्न कृषि पदार्थों की उपज वाले मानचित्रों में भूमि के मानचित्र आवश्यक हैं क्योंकि हर प्रकार की मिट्टी का उपजाऊपन विभिन्न होता है।
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6. स्थलाकृतिक मानचित्र (Topographical Map )-जनसंख्या के वितरण के लिए भूपत्रक मानचित्रों की आवश्यकता होती है जिनमें शहरी (Urban) तथा ग्रामीण ( Rural Settlements) नगर आवागमन के साधन और नहरें आदि प्रकट की जाती हैं।

रचना-विधि (Procedure )

  1. वितरण मानचित्र की सभी आवश्यक सामग्री को इकट्ठा कर लेना चाहिए।
  2. मानचित्र पर प्रशासकीय इकाइयों (Administrative Units) को दिखाओ।
  3.  राजनीतिक या प्रशासकीय इकाइयों के विस्तार को देखकर तथा आँकड़ों के कम-से-कम और अधिक से अधिक मूल्य को देखकर एक बिंदु का मूल्य ज्ञात करो।
  4. प्रत्येक इकाई के लिए बिंदुओं की संख्या गिनकर पूर्ण अंक बनाओ।
  5. प्रत्येक इकाई में बिंदुओं की संख्या हल्के हाथ से पेंसिल से लिख दो।
  6. धरातल, जलवायु और मिट्टी के मानचित्रों की सहायता से उस क्षेत्र में नकारात्मक प्रदेश (Negative areas) को ज्ञात करो और मानचित्र में पेंसिल से अंकित करो ताकि इन स्थानों को रिक्त छोड़ा जा सके।
  7. बिंदुओं के आकार को समान कर लो।
  8. घनत्व के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में बिंदु प्रकट करके मानचित्र बनाओ।

बिंदु मानचित्र की समस्याएं (Problems of Dot Map)

1. बिंदुओं का मान (Value of a dot)
बिंदुओं को अंकित करने से पहले एक बिंदु का मूल्य निश्चित कर लेना चाहिए। (The success of the map depends upon the choice of the value of a dot.) मानचित्र को प्रभावशाली बनाने के लिए बिंदु का मूल्य ध्यानपूर्वक निश्चित करना चाहिए। कई बार गलत मूल्य के कारण बिंदुओं की संख्या बहुत अधिक हो जाती है या बहुत थोड़ी रह जाती है। मापक या मूल्य ऐसा निश्चित करना चाहिए जिसमें क्षेत्र में बिंदुओं की संख्या इतनी अधिक न हो कि उन्हें गिनना कठिन हो जाए। बिंदुओं की संख्या इतनी कम भी न हो कि कुछ प्रदेश खाली रह जाएं। मूल्य का चुनाव निश्चित करना तीन बातों पर निर्भर करता है-

  • मानचित्र का मापक (Scale of the map)
  • अधिकतम तथा न्यूनतम आंकड़े (Maximum and Minimum Figures)
  • प्रदर्शित तत्व के प्रकार (Types of the Element).

2. मानचित्र का मापक (Scale of the Map)
यदि मानचित्र लघु मापक (Small Scale) पर बना हुआ है तो बिंदुओं की संख्या बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए। एक बिंदु का मूल्य अधिक होना चाहिए ताकि बिंदुओं की संख्या इतनी हो जो उस छोटे मानचित्र में अंकित की जा सके नहीं तो अधिक बिंदुओं के कारण मानचित्र का प्रभाव स्पष्ट नहीं होगा। (The areas having low density will also appear dark and give a misleading idea.) यदि मानचित्र दीर्घ मापक पर हो तो एक बिंदु का मूल्य बहुत अधिक नहीं होना चाहिए। एक बिंदु के अधिक मूल्य के कारण कई क्षेत्रों में बिंदुओं की संख्या बहुत कम होगी (With very few dots the map will look blank.)

3. बिंदुओं को लगाना (Placing of dots)
बिंदु मानचित्र बनाते समय ऋणात्मक क्षेत्र (Negative areas) में बिंदु नहीं लगाने चाहिए। ऐसे क्षेत्र प्रायः दलदली भागों में, मरुस्थलों में, पर्वतों पर या बंजर भूमि में मिलते हैं ये क्षेत्र धरातलीय मानचित्र, मृदा मानचित्र तथा जलवायु मानचित्र की सहायता से मानचित्र पर लगाए जा सकते हैं। इन स्थानों को रिक्त छोड़ दिया जाता है क्योंकि यहां उत्पादन असंभव होता है। दीर्घ मापक मानचित्र पर क्षेत्र आसानी से दिखाए जा सकते हैं परंतु लघु मापक मानचित्रों पर इन्हें दिखाना कठिन होता है।

  • बिंदुओं की अधिक संख्या के कारण बिंदु एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। (Dots should not merge together.) इसमें मानचित्र पर संख्या गिनना असंभव हो जाता है।
  • बिंदु बिखरे हुए रूप में लगाना चाहिए अन्यथा नियमित बिंदुओं के कारण समान वितरण दिखाई देगा। (Straight rows of dots should be avoided.) जैसे कि शेडिंग मानचित्र (Shading Maps ) में दिखाई देता है। यह भौगोलिक नियम में विपरीत भी है क्योंकि उत्पादन में विभिन्नता होती है।
  • गुरुत्वीय केंद्र (Centre of Gravity) बिंदु अंकित करते समय प्रत्येक बिंदु अपने चित्र के आकर्षण केंद्र को प्रकट करे; जैसे- जनसंख्या मानचित्र में बिंदुओं के केंद्र नगरों के स्थान पर लगाने चाहिए।
  • अधिक उत्पादन के क्षेत्रों में बिंदु इकट्ठे होने चाहिए।

4. बिंदुओं का आकार (Size of the dots)
बिंदु मानचित्र की शुद्धता और सुंदरता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रत्येक बिंदु समान आकार का हो। इनका आकार दो बातों पर निर्भर करता है-

  • मानचित्र मापक (Scale of the Map)
  • बिंदुओं की संख्या (Number of Dots)

यदि मानचित्र दीर्घ मापक पर बना हुआ है तो बिंदु कुछ बड़े हो सकते हैं परंतु लघु मापक मानचित्रों पर बिंदुओं का आकार अपेक्षाकृत छोटा होगा। इसी प्रकार यदि बिंदुओं की संख्या अधिक है तो भी बिंदु का आकार छोटा होगा। बिंदुओं को समान आकार करने के लिए विशेष प्रकार की निब प्रयोग की जाती है जैसे Le Roy Nib तथा Pazent Nib आदि।

गुण (Merits)
(1) यह मानचित्र किसी वस्तु के क्षेत्रफल के साथ-साथ उसका मूल्य या मात्रा भी प्रकट करते हैं। (This method is both quantitative and qualitative.)

(2) मानचित्र में नकारात्मक क्षेत्रों को खाली छोड़ा जा सकता है। (Waste land can be avoided.).

(3) यह मानचित्र मस्तिष्क पर एक छाप छोड़ जाते हैं कि कहां उत्पादन अधिक है और कहां कम है। (It gives visual impression.)

(4) इन मानचित्रों में रंग का गहरापन उत्पादन की मात्रा के अनुसार होता है। इसलिए यह मानचित्र वितरण के स्वरूप (Pattern of Distribution) को ठीक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इस विधि द्वारा बिंदुओं को सरलतापूर्वक गिना जा सकता है और बिंदुओं को पुनः आँकड़ों में बदला जा सकता है। इस प्रकार किसी वस्तु की मात्रा का भी सही ज्ञान हो जाता है।

(5) इन मानचित्रों को शेडिंग मानचित्र (Shading Map) में बदला जा सकता है। अधिक बिंदुओं वाले क्षेत्र को शेड (Shade) में पूरा दिखाया जा सकता है। एक ही मानचित्र कई अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है। जैसे-Markets, Fairs, Coal Fields Villages आदि दिखाने के लिए यह एक शुद्ध विधि है जिनमें वितरण तथा तीव्रता ठीक प्रकार से दिखाई जा सकती है।

दोष (Demerits)

  1. एक ही मानचित्र पर एक-से-अधिक वस्तुओं का वितरण नहीं दिखाया जा सकता।
  2. इनके बनाने में काफ़ी समय लगता है और यह कठिन कार्य
  3. इनका प्रयोग शिक्षा संबंधी कार्यों में किया जाता है परंतु वैज्ञानिक कार्यों के लिए सम मान रेखा-विधि ( Isopleth) का प्रयोग किया जाता है।
  4. यह मानचित्र अनुपात, प्रतिशत तथा औसत आँकड़ों के लिए प्रयोग नहीं किए जा सकते। (This method cannot be used for ratios and percentages and average figures.)
  5. बिंदु अधिक स्थान घेरते हैं।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

वर्णमात्री मानचित्र
(Shading Map)

प्रश्न 17.
वर्णमात्री मानचित्र किसे कहते हैं? इसका सिद्धान्त क्या है? इसकी रचना-विधि तथा गुण-दोष का वर्णन करो।
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र (Shading Map)- इस विधि को Choropleth Method भी कहते हैं। इस विधि में किसी एक वस्तु के वितरण को मानचित्र पर विभिन्न आभाओं या रंगों द्वारा प्रकट किया जाता है। (In this method distribution of an element is shown by different shades.) किसी रंग की अपेक्षा Black and white shading का प्रयोग करना उचित समझा जाता है।

सिद्धांत (Principle of Shading)
जैसे-जैसे किसी वस्तु में वितरण का घनत्व बढ़ता जाता है उसी प्रकार आभा (Shade ) भी अधिक गहरी होती जाती है (The lighter shades show lower densities and deeper shades show higher densities.) आभा को अधिक सघन करने के कई तरीके हैं-

  1. बिंदुओं का आकार बड़ा करके (By enlarging the dots)
  2. रेखाओं को मोटा करके (By thickening the lines)
  3. बिंदु रेखाओं को निकट करके (By bringing the lines closed together)
  4. रेखा जाल बनाकर (By crossing the lines)
  5. रंगों को गहरा करके (By increasing the depth of the colours)

प्रत्येक मानचित्र के नीचे Scheme of shades का एक सूचक (Index) दिया जाता है।

रचना-विधि (Procedure)

  1. किसी वस्तु के निश्चित आँकड़े प्राप्त करो। यह आँकड़े प्रशासकीय इकाइयों के आधार पर हों।
  2. ये आँकड़े औसत के रूप में हों या प्रतिशत या अनुपात के रूप में, जैसे- जनसंख्या का घनत्व।
  3. घनत्व को प्रकट करने के लिए उचित अंतराल (Interval) चुन लेना चाहिए।
  4. अंतराल के अनुसार Shading का सूचक मानचित्र के कोने में बनाना चाहिए।
  5. यह आभा घनत्व के अनुसार गहरी होती चली जाए।
  6. प्रत्येक प्रशासकीय इकाई में घनत्व के अनुसार शेडिंग करके मानचित्र तैयार किया जा सकता है।

समस्याएं (Problems)-
1. प्रशासकीय इकाई का चुनाव (Choice Administrative Unit)-
प्राय: आँकड़े प्रशासकीय इकाइयों के आधार पर एकत्रित किए जाते हैं, जिसे जिले या तहसील के अनुसार मानचित्र बनाने के लिए सबसे पहले प्रशासकीय इकाई का चुनाव करना होता है। प्रशासकीय इकाई न बहुत बड़ी होनी चाहिए और न ही बहुत छोटी। यदि काफ़ी बड़ी इकाई को चुन लिया जाए तो मानचित्र से भ्रम उत्पन्न हो सकता है कि इतने बड़े क्षेत्र में समान वितरण है। कई बार कई आँकड़े छोटी इकाइयों के आधार पर उपलब्ध नहीं होते, इसलिए उस दशा में बड़ी इकाइयां चुनी जाती हैं।

2. अंतराल का चुनाव (Choice of Intervals) –
घनता के अनुसार शेडिंग में अंतर रखा जाता है। इसी अंतर के अनुसार Scheme of Shading या Scale of Densities या सूचक बनाया जाता है। इस उद्देश्य के लिए सारे आँकड़ों को कुछ वर्गों में बांटा जाता है। यह वर्ग बनाते समय इन आँकड़ों की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है।

  • अधिकतम संख्या (Maximum figures)
  • निम्नतम संख्या (Minimum figures)
  • दरमियानी संख्या (Intermediate figures)

श्रेणियों की संख्या काफ़ी होनी चाहिए ताकि प्रत्येक इकाई का सापेक्षिक महत्त्व (Comparative importance) स्पष्ट रूप से दिखाई दे बहुत अधिक श्रेणियां नक्शे पर गड़बड़ कर देती हैं और बहुत कम श्रेणियों के कारण वितरण की विभिन्नता प्रकट नहीं होती। (Too many categories can be confusing and too few categories can result in little differentiation) प्रायः अंतराल नियमित (Regular) होता है परंतु यह आवश्यक नहीं है कि हर श्रेणी में अंतर समान हो।

गुण (Merits)
(1) इस विधि के द्वारा किसी वस्तु के क्षेत्रीय घनत्व (Areal density) के औसत वितरण को प्रकट किया जा सकता है। (It is useful for showing average figures or percentage or ratios.)

(2) यह विधि अधिकतर फसलें, पशु, भू-उपयोग और जनसंख्या घनत्व को प्रकट करने के लिए प्रयोग की जाती है। इसके लिए क्षेत्रफल की प्रत्येक इकाई (Per unit area) के औसत आँकड़े दिए जाते हैं; जैसे-Numbers of persons per sq. km. या Number of livestock per sq. km. Yield of a crop per hectare.
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(3) एक जैसे प्रभाव के कारण यह रंग-विधि से मिलता-जुलता है। (This method is somewhat similar to colour method.)
(4) विभिन्न रंग प्रयोग करने से यह मानचित्र मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं। (It gives visual impression on the mind.)
(5) यह मानचित्र गुणात्मक होते हैं जिनमें केवल क्षेत्रफल के साथ-साथ आँकड़ों का ज्ञान हो जाता है।
(6) इस विधि से विभिन्न प्रकार के अन्य मानचित्र भी बनाए जा सकते हैं।
(7) जनसंख्या के घनत्व को प्रकट करने के कारण इसे मानवीय भूगोल का मुख्य उपकरण कहा जाता है। (Choropleth map is the chief tool of human Geographer.)

दोष (Demerits)

  1. ऐसे मानचित्रों के लिए आँकड़े इकट्ठे करना कठिन होता है।
  2. इन मानचित्रों से केवल औसत का ही पता चलता है तथा कुल उत्पादन का अनुमान लगाना कठिन होता है।
  3. इस विधि द्वारा किसी क्षेत्र में समान वितरण (Uniform distribution) प्रकट किया जाता है जो भौगोलिक नियम के अनुसार नहीं है। किसी क्षेत्र के विभिन्न भागों में उत्पादन विभिन्न होता है।
  4. प्राय: अधिक घनत्व वाले छोटे क्षेत्र अधिक महत्त्वपूर्ण दिखाई देते हैं जबकि किसी बड़े क्षेत्र में बहुत अधिक उत्पादन है परंतु औसत घनत्व कम है। ऐसा क्षेत्र अधिक उत्पादन होते हुए भी कम महत्त्वपूर्ण दिखाई देगा।
  5. इस विधि द्वारा ऋणात्मक प्रदेश में भी उत्पादन प्रकट किया जाता है जैसे मरुस्थल, दलदल, झील आदि ऐसे क्षेत्रों में 1 उत्पन्न नहीं होता परंतु वहां उत्पादन अंकित होता है।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

प्रश्न 18.
सममान रेखा मानचित्र किसे कहते हैं? इसके विभिन्न प्रकार बताओ। इन मानचित्रों की रचना कैसे की जाती है? इनके गुण तथा दोष बताओ।
उत्तर:
सममान रेखाएं (Isopleths )-शब्द Isopleth दो शब्दों के जोड़ से बना (Isos + plethron) है Isos शब्द का अर्थ है समान तथा Plethron शब्द का अर्थ है मान इस प्रकार सममान रेखाएं वे रेखाएं हैं जिनका मूल्य, तीव्रता तथा घनत्व समान हो। ये रेखाएं उन स्थानों को आपस में जोड़ती हैं जिनका मान (value) समान हो। (Isopleths are lines of equal value in the form of quantity, intensity and density.)
सममान रेखाओं के प्रकार (Types of Isopleths) विभिन्न तत्वों को दिखाने वाली सम-रेखाओं को क्रमशः इन नामों से पुकारा जाता है-
1. समदाब रेखाएं (Isobars) समान वायु दाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समदाब रेखा कहते हैं।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 162. समताप रेखाएं (Isotherms)-समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समताप रेखा कहते हैं।
3. समंवृष्टि रेखा (Isohyets) समान वर्षा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समवृष्टि रेखा कहते हैं।
4. समोच्य रेखाएं (Contours)-समान ऊंचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को समोच्च रेखा कहते हैं।
5. सममेघ रेखा (Iso Npeh) समान मेघावरण वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को सममेघ रेखा कहते हैं।
6. अन्य (Others)-जैसे समगंभीरता रेखा (Isobath), समलवणता रेखा (Iso Haline), समभूकंभ रेखा (Iso Seismal), समधूप रेखा (Isohets) अन्य उदाहरण हैं।

सममान रेखाओं की रचना (Drawing of Isopleths)-
(1) संबंधित क्षेत्र का रूप रेखा मानचित्र (Outline map) की आवश्यकता होती है। इस मानचित्र पर सभी स्थानों की स्थिति अंकित हो।
(2) इस क्षेत्र के अधिक-से-अधिक स्थानों के आँकड़े प्राप्त होने चाहिए।
(3) अधिकतम तथा न्यूनतम आँकड़ों के अनुसार इन रेखाओं के मध्य अंतराल (Interval) चुनना चाहिए। अंतराल या सममान रेखाओं की संख्या न तो कम हो और न ही अधिक हो।
(4) अंतराल का चुनाव किसी तत्व के परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। बड़े क्षेत्र पर दूर-दूर स्थित रेखाएँ मंद परिवर्तन प्रकट करती हैं। यदि परिवर्तन दर तीव्र हो तथा क्षेत्र कम हो तो ये रेखाएं उपयोगी सिद्ध नहीं होतीं।
(5) समान मान वाले स्थानों को मिलाकर सम-मान रेखाएँ खींची जाती हैं। यदि समान मूल्य वाले स्थान प्राप्त न हों तो विभिन्न मूल्य वाले स्थानों के बीच समानुपात दूरी पर इन रेखाओं का अन्तर्वेशन किया जाता है।
HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण 17(6) कई बार विभिन्न मूल्य वाले क्षेत्रों को अलग-अलग स्पष्ट करने के लिए इनके बीच आभाओं (Shades ) या रंगों का प्रयोग भी किया जाता है।

गुण (Merits) –

  • सम-मान रेखाएँ वर्षा, तापमान आदि आँकड़ों के परिवर्तन को शुद्ध रूप से प्रदर्शित करती हैं।
  • ये रेखाएँ किसी स्थान पर उपस्थित मूल्य को प्रकट करती हैं।
  • अन्य विधियों की अपेक्षा यह एक अधिक वैज्ञानिक विधि है।
  • बिंदु मानचित्र तथा वर्णमात्री मानचित्रों को सम-मान रेखा, मानचित्रों में बदला जा सकता है।
  • इन मानचित्रों का प्रशासकीय इकाइयों से कोई संबंध नहीं होता है।

दोष (Demerits) –

  •  सम-मान रेखाओं का अंतर्वेशन एक कठिन कार्य है।
  • यदि आँकड़े अनेक स्थानों पर प्राप्त न हों तो ये मानचित्र नहीं बनाए जा सकते।
  • घनत्व में अधिक तथा तीव्र परिवर्तन हो तो ये मानचित्र अर्थपूर्ण नहीं रहते।
  • सम- मान रेखा-मानचित्रों पर ग्रामीण तथा शहरी जनसंख्या को एक साथ नहीं दिखाया जा सकता।

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मौखिक परीदा के प्रश्न (Questions For Viva-Voce)

प्रश्न 1.
आँकड़े प्रायः किस रूप में लिखे जाते हैं?
उत्तर:
तालिकाओं के रूप में।

प्रश्न 2.
दंड आरेख के मुख्य प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. क्षैतिज दंड आरेख
  2. लंबवत् दंड आरेख
  3. संश्लिष्ट दंड आरेख
  4. प्रतिशत दंडारेख।

HBSE 12th Class Practical Work in Geography Solutions Chapter 3 आंकड़ों का आलेखी निरूपण

प्रश्न 3.
दंडारेख में मापक चुनते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
अधिकतम तथा न्यूनतम आँकड़ों का।

प्रश्न 4.
कौन-से दंडारेख अच्छे माने जाते हैं- क्षैतिज अथवा लंबवत्?
उत्तर:
क्षैतिज दंडारेख इनमें मापक दृष्टि के सामने होने से पढ़ने-लिखने में सुविधा रहती है।

प्रश्न 5.
भारत का विदेशी व्यापार ( आयात-निर्यात ) किस दंड आरेख द्वारा दिखाया जाता है?
उत्तर-:
संश्लिष्ट दंड आरेख

प्रश्न 6.
भारत की जनसंख्या वृद्धि किस रेखाग्राफ से दिखाई जाती है?
उत्तर:
सरल रेखाग्राफ से।

प्रश्न 7.
वृत्त चक्र कितने प्रकार के हैं?
उत्तर:

  1. चक्र चित्र (Pie-graph)
  2. मुद्रिका चित्र ( Ring Diagram)
  3. वृत्त चित्र (Circular Diagram)
  4. अंशंकित वृत्त।

प्रश्न 8.
वृत्त चित्रों का सिद्धांत क्या है?
उत्तर:
वृत्त का क्षेत्रफल मात्रा के अनुपात होता है।

प्रश्न 9.
भारत में विभिन्न धर्मों के लोगों की संख्या किस दंड आरेख से दिखाई जाती है?
उत्तर:
प्रतिशत दंड आरेख से।

प्रश्न 10.
वितरण मानचित्र के दो मुख्य प्रकार बताओ।
उत्तर:

  1. गुणात्मक (Qualitative)
  2. मात्रात्मक (Quantitative)

प्रश्न 11.
हरियाणा राज्य की जिलावार कुल जनसंख्या वितरण किस विधि से दिखाई जाती है?
उत्तर:
बिंदु विधि (Dot Method)।

प्रश्न 12.
एक बिंदु का मूल्य चयन किन दो तत्वों पर निर्भर
उत्तर:

  1. अधिकतम न्यूनतम आँकड़े।
  2. मानचित्र का विस्तार।

प्रश्न 13.
नकारात्मक प्रदेश क्या होते हैं?
उत्तर:
मरुस्थल, दलदली प्रदेश यहां कुछ नहीं होता।

प्रश्न 14.
बिंदु विधि से किस प्रकार के मानचित्र बनते हैं?
उत्तर:
गुणात्मक तथा मात्रात्मक।

प्रश्न 15.
वर्णं मात्री मानचित्र किस प्रकार के मानचित्र हैं?
उत्तर:
गुणात्मक।

प्रश्न 16.
हरियाणा राज्य की जिलावार जनसंख्या घनत्व किस विधि से दिखाई जाती है?
उत्तर:
वर्णमात्री मानचित्र।

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प्रश्न 17.
वर्णमात्री मानचित्र का सिद्धांत क्या है?
उत्तर:
किसी क्षेत्र में आभा का गहरापन घनत्व के अनुपात में होता है।

प्रश्न 18.
किसी वर्णमात्री मानचित्र (राज्य के) में प्रशासकीय इकाई क्या होती है?
उत्तर:
जिला या तहसील।

प्रश्न 19.
वर्णमात्री मानचित्र में वर्ग अंतराल क्या समान होता है?
उत्तर:
नहीं।

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HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

Haryana State Board HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. दो समान आवेश q एक-दूसरे से d दूरी पर रखे हैं। इनके मध्य दूरी पर स्थित बिन्दु पर विभव होगा-
(अ) शून्य
(ब) \(\frac{\mathrm{kq}^2}{\mathrm{~d}}\)
(स) \(4 \frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{d}}\)
(द) \(\frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{d}^2}\)
उत्तर:
(स) \(4 \frac{\mathrm{kq}}{\mathrm{d}}\)

2. पृथ्वी का विद्युत विभव माना गया है-
(अ) धनात्मक
(ब) ऋणात्मक
(स) शून्य
(द) 1000 बोल्ट
उत्तर:
(स) शून्य

3. एक E = 0 वाले विद्युत क्षेत्र की तीव्रता में विद्युत विभव का दूरी के साथ परिवर्तन होगा-
(अ) V ∝ r
(स) V ∝ \(\frac{1}{r}\)
(ब) V ∝ \(\frac{1}{\mathrm{r}^2}\)
(द) V = नियत
उत्तर:
(द) V = नियत

4. एक समबाहु त्रिभुज के तीन कोनों पर समान आवेश स्थित है। त्रिभुज के केन्द्र O पर विद्युत विभव V तथा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E के लिए सत्य कथन होगा-
(अ) V = 0, E = 0
(स) V=0, E≠ 0
(ब) V = 0, E≠ 0
(द) V≠ 0, E = 0
उत्तर:
(द) V≠ 0, E = 0

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

5. जब दो आवेश के बीच की दूरी बढ़ाई जाती है तो आवेश की स्थितिज ऊर्जा-
(अ) बढ़ती है।
(स) नियत रहती है।
(ब) घटती है।
(द) बढ़ या घट सकती है।
उत्तर:
(द) बढ़ या घट सकती है।

6. यदि एक धन आवेश को निम्न विभव के क्षेत्र से उच्च विभव के क्षेत्र में ले जाया जाता है तो विद्युत स्थितिज ऊर्जा-
(अ) घटती है।
(स) स्थिर रहती है।
(ब) बढ़ती है।
(द) घट भी सकती है अथवा बढ़ भी सकती है।
उत्तर:
(ब) बढ़ती है।

7. दो बिन्दुओं के मध्य की दूरी 30 सेमी. है। यदि बिन्दु A पर 20 µC आवेश व B पर 10C आवेश पर रखा हुआ है तो A व B के बीच किस बिन्दु पर विभव शून्य होगा-
(अ) A से 20 सेमी. दूर
(स) A पर
(ब) B से 20 सेमी. दूर
(द) B पर।
उत्तर:
(अ) A से 20 सेमी. दूर

8. समविभव पृष्ठ में से पारित फ्लक्स हमेशा-
(अ) पृष्ठ के लम्बवत् होता है।
(ब) पृष्ठ के समान्तर होता है।
(स) शून्य होता है।
(द) पृष्ठ से 45° कोण पर होता है।
उत्तर:
(अ) पृष्ठ के लम्बवत् होता है।

9. पानी की आवेशित 64 बूंदों को मिलाकर एक बड़ी बूंद बना ली जाती है तो बड़ी बूंद पर विभव का मान पूर्ण मान से कितने गुना होगा-
(अ) 4 गुना
(ब) 16 गुना
(स) 64 गुना
(द) 8 गुना
उत्तर:
(ब) 16 गुना

10. धातु के एक आवेशित ठोस गोले के केन्द्र पर विद्युत विभव है-
(अ) शून्य
(ब) ठोस गोले की सतह पर विभव से आधा
(स) ठोस गोले की सतह पर विभव के बराबर
(द) ठोस गोले की सतह पर विभव से दुगुना
उत्तर:
(स) ठोस गोले की सतह पर विभव के बराबर

11. जब एक परीक्षण आवेश को किसी विद्युत द्विध्रुव के निरक्ष रेखा के अनुदिश अनन्त से द्विध्रुव के निकट लाया जाता है तो किया गया कार्य होगा-
(अ) धनात्मक
(ब) ऋणात्मक
(स) शून्य
(द) अनन्त
उत्तर:
(स) शून्य

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

12. किसी माध्यम की परावैद्युताशक्ति 2KV mm-1 है। 50µm के नमूने में बिना बंधे कितना अधिकतम विभवान्तर स्थापित किया जा सकता है?
(अ) 10000 V
(ब) 1000 V
(स) 100 V
(द) 10 V
उत्तर:
(स) 100 V

13. समविभव पृष्ठ वह है-
(अ) जिसका विभव शून्य हो ।
(ब) जिसके समस्त बिन्दुओं पर विभव समान हो।
(स) जिस पर ऋण विभव विद्यमान हो।
(द) जिस पर धन- विभव विद्यमान हो।
उत्तर:
(ब) जिसके समस्त बिन्दुओं पर विभव समान हो।

14. एक आवेशित गोलाकार चालक के केन्द्र पर विद्युत विभव चालक के तल पर विभव की तुलना में-
(अ) कम होगा
(स) समान होगा
(ब) अधिक होगा
(द) शून्य होगा।
उत्तर:
(स) समान होगा

15. शंकु की आकृति के सुचालक वस्तु का आवेश घनत्व अधिकतम होगा-
(अ) नीचे की चौड़ी सतह पर
(ब) ऊपर की चोटी पर
(स) सम्पूर्ण सतह पर
(द) सिर्फ ऊपर की सतह पर
उत्तर:
(ब) ऊपर की चोटी पर

16. r1 और r2 त्रिज्याओं के दो गोलों पर आवेश q इस प्रकार बंटा है कि उनका पृष्ठ घनत्व समान है। उनके विभव में अनुपात –
(अ) \(\frac{\mathrm{r}_1}{\mathrm{r}_2}\)
(ब) \(\frac{r_1^2}{\mathrm{r}_2^2}\)
(स) \(\mathrm{I}_1^3\)
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) \(\frac{\mathrm{r}_1}{\mathrm{r}_2}\)

17. विभवान्तर V, आवेश Q तथा धारिता C में सम्बन्ध है-
(अ) V = CQ
(ब) C = VQ
(स) V = \(\frac{Q}{C}\)
(द) Q = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{C}}\)
उत्तर:
(स) V = \(\frac{Q}{C}\)

18. समान त्रिज्या के ताँबे के खोखले गोले A व ठोस गोले B को एक समान विभव से आवेशित किया गया है। सत्य कथन है-
(अ) गोले A पर आवेश अधिक होगा
(ब) गोले B पर आवेश अधिक होगा
(स) दोनों पर समान आवेश होगा
(द) निश्चित नहीं कहा जा सकता ।
उत्तर:
(स) दोनों पर समान आवेश होगा

19. एक समान्तर प्लेट संधारित्र को एक बैटरी से आवेशित करके बैटरी हटा ली जाती है। अब संधारित्र की प्लेटों के मध्य दूरी बढ़ा दी जाये तो अब संधारित्र में-
(अ) संधारित्र पर आवेश बढ़ जाता है व धारिता घट जाती है।
(ब) विभवान्तर में वृद्धि तथा धारिता कम हो जाती है।
(स) धारिता बढ़ जाती है।
(द) एकत्रित ऊर्जा के मान में कमी हो जाती है।
उत्तर:
(ब) विभवान्तर में वृद्धि तथा धारिता कम हो जाती है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

20. समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के मध्य के स्थान के आधे भाग में ∈r, परावैद्युतांक माध्यम भरा हुआ है। यदि हवा वाले भाग की धारिता C है तो सम्पूर्ण संधारित्र निकाय की धारिता होगी-
(अ) \(\frac{2 \epsilon_{\mathrm{r}} \mathrm{C}}{1+\epsilon_{\mathrm{r}}}\)
(ब) \(\frac{C\left(\epsilon_{\mathrm{r}}+1\right)}{2}\)
(स) \(\frac{C \epsilon_{\mathrm{r}}}{1+\epsilon_{\mathrm{r}}}\)
(द) ∈r
उत्तर:
(स) \(\frac{C \epsilon_{\mathrm{r}}}{1+\epsilon_{\mathrm{r}}}\)

21. तीन संधारित्रों को किस क्रम में जोड़ा जाए कि उनमें समान विभव पर संचित ऊर्जा अधिकतम हो-
(अ) दो समान्तर क्रम में एक श्रेणी क्रम में
(ब) तीनों समान्तर क्रम में
(स) तीनों श्रेणी क्रम में
(द) दो श्रेणी तथा एक समान्तर क्रम में
उत्तर:
(ब) तीनों समान्तर क्रम में

22. छोटी 64 बूँदें मिलकर एक बड़ी बूँद बनाती हैं। यदि प्रत्येक छोटी बूँद पर Q आवेश हो तो बड़ी बूँद पर आवेश होगा-
(अ) 64 Q
(ब) 8 Q
(स) 4 Q
(द) 2 Q
उत्तर:
(अ) 64 Q

23. कम से कम 2 µF धारिता वाले कितने संधारित्र 5 µF धारिता देंगे-
(अ) तीन
(ब) चार
(स) पाँच
(द) सात
उत्तर:
(ब) चार

24. एक संधारित्र की धारिता C है। इसे V विभवान्तर पर आवेशित किया गया है। यदि अब इसे प्रतिरोध से सम्बन्धित कर दिया जाये, ऊर्जा क्षय की मात्रा होगी-
(अ) \(\frac{1}{2}\)CV2
(ब) CV2
(स) \(\frac{\mathrm{CV}^2}{3}\)
(द) \(\frac{1}{2}\)QV2
उत्तर:
(अ) \(\frac{1}{2}\)CV2

25. एक वायु संधारित्र की धारिता 5 µF है। उसी संधारित्र में वायु के स्थान पर पूर्ण रूप से अभ्रक रख दिया जाये तो धारिता 30 µF हो जाती है, अभ्रक का परावैद्युतांक होगा-
(अ) 3
(ब) 6
(स) 12
(द) 24
उत्तर:
(ब) 6

26. 2uF के तीन संधारित्रों को समान्तर क्रम में जोड़ने पर तुल्यधारिता होगी-
(अ) 2μF
(ब) 6μF
(स) \(\frac{1}{3}\)μF
(द) \(\frac{2}{3}\)μF
उत्तर:
(ब) 6μF

27. एक आवेशित समान्तर प्लेट संधारित्र में U, विद्युत ऊर्जा संग्रहित है। संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी को दुगुना करने पर विद्युत ऊर्जा होगी-
(अ) U。
(ब) \(\frac{\mathrm{U}_0}{2}\)
(स) 2U。
(द) \(\frac{U_0}{4}\)
उत्तर:
(स) 2U。

28. एक समान त्रिज्या एवं समान आवेशयुक्त पानी को 27 छोटी बूंदें मिलकर एक बड़ी बूंद बनाती हैं। बड़ी बूंद की धारिता तथा एक छोटी बूंद की धारिता का अनुपात होगा-
(अ) 2 : 1
(ब) 3 : 1
(स) 4 : 1
(द) 16 : 1
उत्तर:
(ब) 3 : 1

29. दिये गये चित्र में प्रत्येक संधारित्र की धारिता x है बिन्दु A व B के मध्य तुल्यधारिता होगी-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 1
(अ) 3x
(ब) \(\frac{x}{3}\)
(स) \(\frac{2}{3} x\)
(द) \(\frac{3}{2} x\)
उत्तर:
(स) \(\frac{2}{3} x\)

30. 3μF धारिता प्राप्त करने के लिए 2μF के तीन प्रकार संयोजित करेंगे?
(अ) तीनों को समान्तर क्रम में
(ब) तीनों को श्रेणीक्रम में
(स) दो संधारित्र श्रेणीक्रम में तथा तीसरा संधारित्र संयोजन के समान्तर क्रम में
(द) दो संधारित्र समान्तर क्रम में तथा तीसरा संधारित्र संयोजन के श्रेणीक्रम में।
उत्तर:
(स) दो संधारित्र श्रेणीक्रम में तथा तीसरा संधारित्र संयोजन के समान्तर क्रम में

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

31. संधारित्र में ऊर्जा किस स्वरूप में उपस्थित होती है?
(अ) आवेश के रूप में
(ब) धारिता के रूप में
(स) विद्युत क्षेत्र के रूप में
(द) ऊष्मीय ऊर्जा के रूप में
उत्तर:
(स) विद्युत क्षेत्र के रूप में

32. तीन संधारित्र जिनकी धारिताएँ क्रमश: 2, 4 व 8 μF हैं। पहले श्रेणीक्रम में फिर समान्तर क्रम में जोड़े जाते हैं। दोनों स्थितियों में इनकी तुल्यधारिताओं का अनुपात होगा-
(अ) 49 : 4
(ब) 3 : 7
(स) 4 : 49
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) 3 : 7

33. दो संधारित्र जिनकी धारिताएँ C1 व C2 हैं। यदि उन्हें समान आवेश दिये जायें तो उनमें संग्रहित ऊर्जाओं का अनुपात होगा-
(अ) \(\frac{\mathrm{C}_2}{\mathrm{C}_1}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{C}_1}{\mathrm{C}_2}\)
(स) \(\sqrt{\frac{C_2}{C_1}}\)
(द) \(\sqrt{\frac{C_1}{C_2}}\)
उत्तर:
(अ) \(\frac{\mathrm{C}_2}{\mathrm{C}_1}\)

34. 10μF धारिता के समान्तर प्लेट संधारित्र को 40μc आवेश देने पर उसकी कुल ऊर्जा का मान जूल में होगा-
(अ) 8 × 10-5
(ब) 800
(स) 8.00
(द) 2 × 10-3
उत्तर:
(अ) 8 × 10-5

35. 5 माइक्रो फैरड धारिता के एक आवेशित किया जाता है। संधारित्र पर संचित ऊर्जा होगी-(जूल में)
(अ) 2.5 × 10-3
(ब) 5.5 × 10-3
(स) 2.5
(द) 5.0 × 108
उत्तर:
(स) 2.5

36. दो संधारित्रों की धारितायें C1 तथा C2 में संग्रहित ऊर्जायें समान हैं। संधारित्रों पर विभवान्तर का अनुपात होगा-
(अ) C2 : C1
(ब) \(\sqrt{C_2}: \sqrt{C_1}\)
(स) C1 : C2
(द) \(\sqrt{C_1}: \sqrt{C_2}\)
उत्तर:
(ब) \(\sqrt{C_2}: \sqrt{C_1}\)

37. निम्नांकित परिपथ में तुल्यधारिता है-
(अ) \(\frac{5}{3}\) μF
(ब) \(\frac{3}{5}\) μF
(स) 15μF
(द) \(\frac{1}{15}\) μF
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 2
उत्तर:
(अ) \(\frac{5}{3}\) μF

38. संलग्न चित्र में बिन्दुओं A व B के बीच तुल्य धारिता का मान होगा-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 3
(अ) 6μF
(ब) 4μF
(स) \(\frac{6}{11}\)
(द) \(\frac{11}{5}\)
उत्तर:
(अ) 6μF

39. आवेशित संधारित्र में संग्रहित ऊर्जा होती है-
(अ) धन आवेशित प्लेट पर
(ब) धन तथा ऋण आवेशित दोनों प्लेटों पर
(स) प्लेटों के मध्य क्षेत्र में
(द) संधारित्र के किनारे पर
उत्तर:
(स) प्लेटों के मध्य क्षेत्र में

40. C1 तथा C2 धारिता के दो संधारित्रों के समान्तर संयोजन को Q आवेश दिया जाता है। C1 पर Q1 तथा C2 पर Q2 आवेश होने पर \(\frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}\) का अनुपात होगा-
(अ) \(\frac{\mathrm{C}_2}{\mathrm{C}_1}\)
(ब) \(\frac{C_1}{C_2}\)
(स) \(\frac{\mathrm{C}_1 \mathrm{C}_2}{1}\)
(द) \(\frac{1}{\mathrm{C}_1 \mathrm{C}_2}\)
उत्तर:
(ब) \(\frac{C_1}{C_2}\)

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

41. समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का मान कम करने के लिए प्लेटों के बीच रिक्त स्थान-
(अ) में परावैद्युत पदार्थ भर देते हैं।
(ब) को कम कर प्लेटों का क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं।
(स) को बढ़ाकर प्लेटों का क्षेत्रफल घटा देते हैं।
(द) भी बढ़ा देते हैं तथा क्षेत्रफल भी बढ़ा देते हैं।
उत्तर:
(स) को बढ़ाकर प्लेटों का क्षेत्रफल घटा देते हैं।

42. एक आवेशित संधारित्र की दोनों प्लेटों को एक तार से जोड़ दिया जाये तो-
(अ) विभव अनन्त हो जायेगा।
(ब) आवेश अनन्त हो जायेगा।
(स) संधारित्र निरावेशित हो जायेगा।
(द) आवेश पूर्णमान का दुगुना हो जायेगा।
उत्तर:
(स) संधारित्र निरावेशित हो जायेगा।

43. ( 8 μF – 250V) अंकित अनेक संधारित्र दिये गये हैं। एक (16 μF – 1000V) की तुल्यधारिता प्राप्त करने के लिए आवश्यक संधारित्रों की न्यूनतम संख्या होगी-
(अ) 4
(ब) 16
(स) 32
(द) 64
उत्तर:
(स) 32

44. एक समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों के बीच समरूप क्षेत्र E वोल्ट/मीटर है। यदि प्लेटों के बीच की दूरी d (मी) तथा प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A (मी2) है तो उसमें संचित कल ऊर्जा है-
(अ) \(c\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \mathrm{Ad}\)
(ब) \(\frac{\mathrm{E}^2 \mathrm{Ad}}{\epsilon_0} \)
(स) \(\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \)
(द) ∈0AEd
उत्तर:
(अ) \(c\frac{1}{2} \epsilon_0 E^2 \mathrm{Ad}\)

45. एक C धारिता का तथा दूसरा \(\frac{C}{2}\) धारिता का संधारित्र एक V बोल्ट की बैटरी से चित्र के अनुसार जोड़े गये हैं। दोनों संधारित्रों को पूर्णतया आवेशित करने में किया गया कार्य है-
(अ) \(\frac{3}{4}\)CV2
(ब) \(\frac{1}{2}\)CV2
(स) \(\frac{1}{4}\)CV2
(द) 2CV-2

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 4
उत्तर:
(अ) \(\frac{3}{4}\)CV2

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
किसी बिन्दु पर विभव को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
वैद्युत क्षेत्र में किसी बिन्दु पर विभव कार्य की वह मात्रा है जो एकांक धन आवेश को अनन्त से उस बिन्दु तक बिना त्वरण के लाने में करना पड़ता है।

प्रश्न 2.
विभवान्तर को परिभाषित करते हुए इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर:
विद्युत क्षेत्र में दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर एक एकांक धन परीक्षण आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक क्षेत्र के विपरीत ले जाने में किए गए कार्य से इसकी परिभाषा देते हैं। S. I. पद्धति में इसका मात्रक वोल्ट (V) या J/C

प्रश्न 3.
किसी क्षेत्र में वैद्युत विभव V नियत है। वहाँ पर आप वैद्युत क्षेत्र E के सम्बन्ध में क्या कह सकते हैं?
उत्तर:
हमारा कहना यह होगा कि उस क्षेत्र में वैद्युत क्षेत्र E शून्य होगा।

प्रश्न 4.
दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 20 वोल्ट है। एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक 4 × 10-4 कूलॉम ले जाने में कितना कार्य करना होगा?
उत्तर:
कार्य (W) = आवेश (q) x विभवान्तर (V)
= 4 × 10-4 × 20 = 8 × 10-3 जूल

प्रश्न 5.
क्या निर्वात (vacuum) में किसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य हो सकता है, जबकि उस बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य नहीं है?
उत्तर:
हाँ, (i) दो समान परिमाण तथा विपरीत प्रकृति के आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य होता है, वैद्युत क्षेत्र नहीं ।
(ii) वैद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति में वैद्युत विभव शून्य होता है, वैद्युत क्षेत्र नहीं।

प्रश्न 6.
क्या किसी बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य हो सकता है, जबकि उसी बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य न हो। उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हाँ, (i) दो समान परिमाण तथा समान प्रकृति के आदेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिन्दु पर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है, वैद्युत विभव नहीं।
(ii) आवेशित गोलीय कोश के अन्दर वैद्युत क्षेत्र शून्य होता है, वैद्युत विभव नहीं।

प्रश्न 7.
उस भौतिक राशि का नाम बताइए जिसका मात्रक जूल / कूलॉम है क्या यह सदिश राशि है अथवा अदिश?
उत्तर:
वैद्युत विभव अथवा वैद्युत विभवान्तर अदिश ।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 8.
धातु के 5 cm त्रिज्या के एक खोखले गोले को इतना आवेशित किया गया है कि उसके पृष्ठ का विभव 10V हो जाता है। इस गोले के केन्द्र पर विभव कितना होगा?
उत्तर:
खोखले गोले के केन्द्र व पृष्ठ पर विद्युत विभव समान होता है। अतः गोले के केन्द्र पर विभव V = 10 वोल्ट होगा।

प्रश्न 9.
समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? बिन्दु धनात्मक आवेश के कारण समविभव पृष्ठ का चित्र बनाइए ।
उत्तर:
ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 5

प्रश्न 10.
उस क्षेत्र के तदनुरूप तीन समविभव पृष्ठ खींचिये जिसके परिमाण में एकसमान वृद्धि होती है, परन्तु z-दिशा के अनुदिश नियत रहता है। ये पृष्ठ उन पृष्ठों से किस प्रकार भिन्न हैं जो किसी नियत विद्युत क्षेत्र के 2-दिशा के अनुदिश हैं?
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 6
यदि E एकसमान हो तो d2 = d1
एकसमान क्षेत्र के लिए प्रत्येक तल पर विभव समान होगा।

प्रश्न 11.
एक समविभव पृष्ठ एक-दूसरे से 5 सेमी. दूरी पर स्थित बिन्दुओं के बीच 500 HC आवेश को ले जाने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
उत्तर:
समविभव पृष्ठ के किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर ∆V = शून्य
अतः कार्य W = आवेश q × विभवान्तर (∆V)
= 100 µC × 0 = शून्य
अर्थात् कोई कार्य नहीं करना पड़ेगा।

प्रश्न 12.
वैद्युत विभव के मात्रक की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वैद्युत विभव का मात्रक वोल्ट होता है, जिसको निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है-“यदि एक कूलॉम परीक्षण धनावेश को अनन्त से वैद्युत क्षेत्र के अन्तर्गत किसी बिन्दु तक क्षेत्र की दिशा के विपरीत लाने में एक जूल कार्य करना पड़े तो उस बिन्दु पर वैद्युत विभव का मान एक वोल्ट होगा।”

प्रश्न 13.
निम्नलिखित के कारण समविभव पृष्ठों की आकृति क्या होती है?
(a) बिन्दु आवेश के कारण
(b) एकसमान वैद्युत क्षेत्र के कारण।
उत्तर:
(a) बिन्दु आवेश को केन्द्र मानते हुए खींचे हुए संकेन्द्रीय गोले ।
(b) वैद्युत बल रेखाओं के लम्बवत् परस्पर समान्तर समतल तल ।

प्रश्न 14.
वैद्युत बल रेखाओं के अनुदिश जाने पर वैद्युत विभव घटता है अथवा बढ़ता है?
उत्तर:
विभव घटता है।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 15.
क्या इलेक्ट्रॉन अधिक विभव क्षेत्र में अथवा कम विभव- क्षेत्र में जाने का प्रयत्न करते हैं, क्यों?
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन अधिक विभव क्षेत्र में जाने का प्रयत्न करते हैं। क्योंकि ऋणावेशित होते हैं।

प्रश्न 16.
एक वर्ग PQRS के केन्द्र पर 10 µC आवेश रखा है। इसके कोने P पर रखे 2 µC के बिन्दु आवेश को Q तक ले जाने में किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
शून्य, क्योंकि Vp = VQ एवं P तथा Q की केन्द्र 0 पर स्थित आवेश 10 µC से समान दूरी है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 7

प्रश्न 17.
किसी समरूप विद्युत क्षेत्र में समविभव पृष्ठ खींचिये ।
उत्तर-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 8

प्रश्न 18.
किन्हीं दो समान्तर पृष्ठों पर विभव समान हैं। इनके मध्य की दूरी है। यदि किसी q आवेश को एक पृष्ठ से दूसरे पृष्ठ तक ले जायें तो इस स्थिति में किया गया कार्य कितना होगा?
उत्तर:
किया गया कार्य शून्य होगा क्योंकि दोनों पृष्ठ समान विभव

प्रश्न 19.
दिए गए चित्र में किसी बिन्दु आवेश को x से क्रमशः y तथा z बिन्दुओं तक ले जाने में किया गया कार्य कितना होगा?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 9
उत्तर:
बिन्दु 2 तथा y एक ही समविभव पृष्ठ पर स्थित हैं। आवेश को x से y तक ले जाने में किया गया कार्य, आवेश को x से 2 तक ले जाने में किए गए कार्य के समान होगा।
इसलिए Wy = Wz

प्रश्न 20.
क्या परीक्षण आवेश की प्रकृति पर धन या ऋण विद्युत विभव निर्भर करता है? समझाइए ।
उत्तर:
नहीं, यह परीक्षण आवेश की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है अपितु केवल स्रोत आवेश की प्रकृति पर निर्भर करता है।

प्रश्न 21.
दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को नहीं काटते। क्यों?
उत्तर:
यदि दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को काटते हैं तो इसका अर्थ है कि प्रतिच्छेद बिन्दु पर विद्युत विभव के दो अलग-अलग मान होंगे जो कि सम्भव नहीं है।

प्रश्न 22.
\(\overrightarrow{\mathrm{r}_1} \) तथा \(\overrightarrow{\mathrm{r}_2} \) पर क्रमशः Q1 तथा Q2 दो बिन्दु आवेशों के कारण किसी बिन्दु पर जिसका स्थिति सदिश \(\overrightarrow{\mathrm{r}}\) है। वैद्युत विभव (\(\overrightarrow{\mathrm{r}}\)) के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 58

प्रश्न 23.
मध्यवर्ती बिन्दु पर किसी वैद्युत द्विध्रुव के कारण स्थिर वैद्युत विभव क्या होता है?
उत्तर:
शून्य ।

प्रश्न 24.
जब कोई वैद्युत द्विध्रुव किसी वैद्युत क्षेत्र के लम्बवत् रखा जाता है, तो इसकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा क्या होगी ?
उत्तर:
U = -pE cos θ तथा
यहाँ θ = 90°
अतः U = – pE × 0 = 0

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 25.
वैद्युत बल रेखा के अनुदिश वैद्युत विभव घटता है अथवा बढ़ता है?
उत्तर:
वैद्युत बल रेखा की दिशा वैद्युत क्षेत्र की दिशा होती है। अतः इस दिशा में वैद्युत विभव घटता है।

प्रश्न 26.
एक परीक्षण आवेश १ को एक वैद्युत द्विध्रुव की मध्यवर्ती अक्ष ( equitorial axis) के अनुदिश एक सेमी ले जाने में कितना कार्य करना होगा?
उत्तर:
चूँकि द्विध्रुव की मध्यवर्ती अक्ष के प्रत्येक बिन्दु पर विभव शून्य होता है, अतः इसके किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर = 0.
अतः कार्य W=q × ∆V = q × 0 = 0

प्रश्न 27.
किसी बाह्य वैद्युत क्षेत्र में आवेश से q r दूरी पर स्थित बिन्दु पर इसकी स्थितिज ऊर्जा की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
किसी आवेश q की बाह्य वैद्युत क्षेत्र में इससे r दूरी पर इसकी स्थितिज ऊर्जा
U = q. V(r)

प्रश्न 28.
चालक तथा अचालक में क्या अन्तर है?
उत्तर:
चालक के सिरों पर वैद्युत विभवान्तर स्थापित करने पर इसमें आवेश का प्रवाह सुगमता से हो जाता है, जबकि ऐसा अचालक में नहीं होता है। चालकों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक होती है जबकि अचालकों में यह संख्या नगण्य होती है।

प्रश्न 29.
परावैद्युत से क्या तात्पर्य है? सिलिकॉन, माइका तथा कार्बन में कौनसा परावैद्युत है?
उत्तर:
परावैद्युत वे अचालक पदार्थ होते हैं जिनमें वैद्युत प्रभाव बिना आवेशों की गति के संचारित हो जाते हैं माइका परावैद्युत पदार्थ है।

प्रश्न 30.
किसी चालक की वैद्युत धारिता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी चालक द्वारा वैद्युत आवेश ग्रहण करने की क्षमता उसकी वैद्युत धारिता कहलाती है।

प्रश्न 31.
धारिता का मात्रक और इसकी विमा सूत्र लिखो।
उत्तर:
धारिता का SI मात्रक फैरड, विमा सूत्र [M-1L-2T4+A2]

प्रश्न 32.
धारिता के SI मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
यदि किसी चालक को एक कूलॉम आवेश देने से उसके विभव में एक वोल्ट की वृद्धि हो जाये तो उसकी धारिता एक फैरड कहलाती है।

प्रश्न 33.
एक संधारित्र की धनात्मक प्लेट पर + Q व ऋणात्मक प्लेट पर Q आवेश दिया जाता है। संधारित्र पर कुल आवेश क्या होगा? प्लेट पर – Q आवेश दिया जाता है। संधारित्र पर कुल आवेश क्या
उत्तर;
Q, जब हम संधारित्र की एक प्लेट को + Q आवेश देते हैं तब विद्युत प्रेरण के कारण दूसरी प्लेट धरती से जुड़े होने के कारण उस पर Q आवेश आ जाता है। संधारित्र पर कुल आवेश शून्य है।

प्रश्न 34.
समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के मध्य के स्थान को आंशिक रूप से परावैद्युत पदार्थ भरने पर धारिता का मान परावैद्युत पदार्थ की स्थिति पर किस प्रकार निर्भर करता है ?
उत्तर:
निर्भर नहीं करता।

प्रश्न 35.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की एक प्लेट का क्षेत्रफल आधा कर दिया जाये तो क्या युक्ति संधारित्र का कार्य करेगी ?
उत्तर;
नहीं, संधारित्र की एक प्लेट का क्षेत्रफल आधा करने से संधारित्र की धारिता आधी रह जायेगी इसलिये वह युक्ति कार्य नहीं करेगी।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 36.
धारिता C के संधारित्र को V विभवान्तर से आवेशित किया जाता है। संधारित्र के चारों ओर पृष्ठ से गुजरने वाले विद्युत फलक्स का मान क्या होगा ?
उत्तर:
शून्य, चूँकि विद्युत क्षेत्र संधारित्र की दो प्लेटों के मध्य में ही होता है।

प्रश्न 37.
एक फैरड विद्युत धारिता वाले चालक गोले की त्रिज्या क्या होगी ?
उत्तर:
दिया है-
C= 1 फैरड
R = ?
∵ C = 4π∈0R
∴ R = \(\frac{C}{4 \pi \epsilon_0}\) = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\) × C
R = 9 × 109 × 1 = 9 × 109 मीटर

प्रश्न 38.
तीन संधारित्र जिनके प्रत्येक की धारिता 6 μF है, के संयोजनों से प्राप्त अधिकतम व न्यूनतम धारिताओं का मान क्या होगा?
उत्तर:
अधिकतम धारिता = 6 μF + 6 μF + 6 μF
= 18 μF
न्यूनतम धारिता \(\frac{1}{\mathrm{C}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{6}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{6}}\) + \(\frac{1}{\mathrm{6}}\) = \(\frac{3}{\mathrm{6}}\) = \(\frac{1}{\mathrm{2}}\)
C = 2 μF

प्रश्न 39.
संधारित्रों का उपयोग कम्प्यूटरों में किस उद्देश्य के लिये किया जाता है?
उत्तर:
मेमोरी संग्रहित करने के लिये ।

प्रश्न 40.
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का सूत्र लिखिये । धारिता पर प्लेटों के क्षेत्रफल का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता C = \(\frac{\epsilon_0 A}{d}\)
समीकरण से स्पष्ट है कि समान्तर संधारित्र की धारिता प्लेटों के क्षेत्रफल के समानुपाती और उनके मध्य की दूरी के प्रतिलोमानुपाती होती है। प्लेटों का क्षेत्रफल A बढ़ाकर धारिता बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न 41.
समान धारिता C की दो संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। संयोजन की धारिता क्या होगी?
उत्तर:
श्रेणीक्रम में संयोजन की धारिता \(\frac{1}{\mathrm{C}}\) = \(\frac{1}{C_1}+\frac{1}{C_2}\)
संयोजन की धारिता = \(\frac{C}{2}\) होगी।

प्रश्न 42.
संधारित्र की धारिता पर परावैद्युत माध्यम का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
परावैद्युत माध्यम की उपस्थिति में धारिता के मान में वृद्धि हो जाती है। लेकिन यह वृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि प्लेटों के मध्य का भाग परावैद्युत पदार्थ से पूर्णतः आंशिक या विभिन्न परतों के रूप में कैसे-कैसे भरा हुआ है।

प्रश्न 43.
3 μF व 5 μF धारिता के दो संधारित्रों के समान्तर संयोजन को Q आवेश दिया जाता है। यदि 3 μF पर आवेश Q1 तथा 5 μF पर Q2 हो तो \( \frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}\) का मान क्या होगा ?
उत्तर:
\( \frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}=\frac{\mathrm{C}_1}{\mathrm{C}_2}=\frac{3}{5}\)

प्रश्न 44.
एक संधारित्र की प्लेटों के बीच रखे पदार्थ का परावैद्युतांक 5 है और इसकी धारिता C है। यदि इसको परावैद्युतांक 20 वाले पदार्थ से प्रतिस्थापित कर दिया जाये तो संधारित्र की नई धारिता क्या होगी ?
उत्तर:
संधारित्र की नई धारिता का मान पहले वाली धारिता का चार गुना होगा।

प्रश्न 45.
नीचे दिखाये गये परिपथ में A, बिन्दु पर विभव 100 वोल्ट है। बिन्दु B पर विभव होगा-
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उत्तर:
बिन्दु B पर विभव 50 वोल्ट होगा।

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प्रश्न 46.
तीन संधारित्र, परिपथ चित्र में दिखाये अनुसार व्यवस्थित हैं। बिन्दु A व B के मध्य कुल धारिता 3 μF है, तो X संधारित्र की धारिता का मान होगा-
उत्तर:
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प्रश्न 47.
दिये गये परिपथ चित्र में A व B के बीच तुल्यधारिता ज्ञात कीजिए।
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इसलिये A तथा B के बीच में तुल्यधारिता = 1+1=2pF उत्तर

प्रश्न 48.
एक आवेशित संधारित्र की प्लेटों को एक-दूसरे से दूर हटाने से प्लेटों के बीच विभवान्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्लेटों के बीच में विभवान्तर बढ़ेगा।

प्रश्न 49.
क्या समान आयतन के दो चालकों के बीच विभवान्तर हो सकता है, जबकि दोनों पर समान धनावेश है ?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि समान आयतन के दो चालकों का आकार भिन्न हो सकता है, जिसके कारण धारिता भिन्न होने के कारण विभव भिन्न-भिन्न होंगे अर्थात् उनके बीच विभवान्तर होगा ।

प्रश्न 50.
एक ग्राफ खींचिये जो धारिता के संधारित्र को दिये गये आवेश Q तथा उसके विभवान्तर V के बीच सम्बन्ध बताता हो।
उत्तर:
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प्रश्न 51.
समविभव पृष्ठ को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
ऐसा पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है। समविभव पृष्ठ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर का मान शून्य होता है अतः समविभव पृष्ठ के किसी एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक किसी आवेश को ले जाने में किया गया कार्य शून्य के बराबर होता है किन्तु किया गया कार्य शून्य तभी होता है जब आवेश को विद्युत क्षेत्र के लम्बवत् दिशा में ले जाया जाता है। अतः समविभव पृष्ठ विद्युत क्षेत्र के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत् होता है।

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प्रश्न 52.
4 × 10-9C आवेश के कारण इससे 9 × 10-2 मी. दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर विभव परिकलित कीजिए ।
हल- दिया है-
q = 4 × 10-9 C
r = 9 × 10-2 मी.
हम जानते हैं
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प्रश्न 53.
4 μF धारिता का मान कितना होगा यदि समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के मध्य 2 परावैद्युतांक का परावैद्युत पूर्णतः भर दिया जाए?
हल – जब प्लेटों के बीच सम्पूर्ण स्थान में ∈r परावैद्युतांक का माध्यम भरा हुआ हो, तब C = C0r होता है।
इसलिये C = 4 × 2 = 8 μF

प्रश्न 54.
किसी माध्यम के परावैद्युतांक की परिभाषा लिखिये। इसका एस.आई. (S.I.) मात्रक क्या है ?
उत्तर:
हम जानते हैं
C = C0r
या ∈r = \(\frac{C}{C_0}\)
अतः किसी माध्यम के परावैद्युतांक का मान, परावैद्युत पदार्थ से पूर्णतया भरी समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता का मान C, हवा या निर्वात धारिता C के अनुपात के बराबर होता है। इसका कोई भी मात्रक नहीं होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
एक बिन्दु आवेश ‘q’ बिन्दु 0 पर चित्र में दिखाये अनुसार रखा है। क्या (VA – VB) धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य होगा यदि q (i) धनात्मक है (ii) ऋणात्मक ‘
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होगी इसलिए VA – VB का चिन्ह q के चिन्ह पर निर्भर करेगा ।
(∵ 4π∈0 = नियतांक)
अतः (i) q के धनात्मक होने पर (VA – VB) धनात्मक होगा।
(ii) q के ऋणात्मक होने पर (A – VB) ऋणात्मक होगा।

प्रश्न 2.
एक लघु वैद्युत द्विध्रुव के कारण अत्यधिक दूरी पर उत्पन्न वैद्युत विभव की दूरी पर निर्भरता बताइए, जबकि प्रेक्षण बिन्दु
(i) अक्षीय स्थिति में हो, तथा
(ii) निरक्षीय स्थिति में हो।
उत्तर:
(i) अक्षीय स्थिति में विभव (V) = \( \frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{p}{r^2}\right)\)
अतः स्पष्ट है V ∝ \(\frac{1}{r^2}\)
(ii) निरक्षीय स्थिति में V = 0, अतः यह दूरी पर निर्भर नहीं करता है। अर्थात् इस स्थिति में प्रत्येक बिन्दु पर वैद्युत विभव शून्य होता है।

प्रश्न 3.
समविभव पृष्ठ की परिभाषा दीजिए। इसकी विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर:
परिभाषा – किसी वैद्युत क्षेत्र में वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिन्दु का विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
विशेषताएँ – (i) इसके किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर शून्य होता है।
(ii) इसके किन्हीं भी दो बिन्दुओं के बीच किसी आवेश को ले जाने में कोई कार्य नहीं करना पड़ता।
(iii) वैद्युत क्षेत्र सदैव समविभव पृष्ठ के लम्बवत् रहता है।

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प्रश्न 4.
वैद्युत विभव तथा वैद्युत स्थितिज ऊर्जा में भेद स्पष्ट कीजिए तथा इनके बीच सम्बन्ध बताइए ।
उत्तर:
वैद्युत विभव एकांक धन आवेश को बिना त्वरण के अनन्त से लाने में किया गया कार्य है जबकि वैद्युत स्थितिज ऊर्जा दिये गये आवेशों को अनन्त से उनकी स्थिति तक लाने में किया गया कार्य होती है।
वैद्युत विभव V = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{\mathrm{q}_1}{\mathrm{r}}\right)\) तथा U = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{q_1 q_2}{r}\right)\)
जहाँ प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं। उपर्युक्त व्यंजकों से स्पष्ट है कि
U = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{q_1}{\mathrm{r}}\right)\) . q2
U = q2 . V
अतः q1 तथा q2आवेशों (जो परस्पर 1 दूरी पर स्थित ) बने निकाय की स्थितिज ऊर्जा
U = आवेश q2 x
(आवेश q1 के कारण q2 की स्थिति में विभव)

प्रश्न 5.
किसी बिन्दु आवेश से दूरी में परिवर्तन के संगत होने वाले विभव परिवर्तन दर्शाने वाला ग्राफ बनाइए चित्र में प्रदर्शित आवेश निकाय के लिए सिद्ध कीजिए कि बिन्दुओं A व B के मध्य विभवान्तर
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प्रश्न 6.
इस सत्य की भौतिक व्याख्या कीजिए कि धन आवेश युग्म की स्थितिज ऊर्जा धनात्मक होती है।
उत्तर:
धन आवेश युग्म के दो आवेश आपस में प्रतिकर्षित करेंगे और त्वरित गति से एक-दूसरे से दूर हो जायेंगे जब तक उनके बीच की दूरी अनन्त नहीं हो जाये। उन आवेशों में गति उनके अन्दर स्थितिज ऊर्जा के कारण ही सम्भव है। इसलिए धन आवेश युग्म की स्थितिज ऊर्जा धनात्मक होती है।

प्रश्न 7.
ध्रुवण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
आयतित विद्युत क्षेत्र में परावैद्युत में परमाणुओं को खींचकर आवेशों को पृथक करने के प्रक्रम को ध्रुवण कहते हैं। परमाणुओं का खिंचाव तब तक चलता है जब तक कि आवेशों पर विद्युत क्षेत्र द्वारा आयोजित बल प्रत्यानयन बल के तुल्य नहीं हो जाता। इस तनन के कारण नाभिक का धनात्मक गुरुत्व केन्द्र ऋणात्मक गुरुत्व केन्द्र, जो इलेक्ट्रॉनों के कारण बनता है, एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और इस प्रकार परमाणु द्विध्रुव आघूर्ण प्राप्त कर लेते हैं। अर्थात् किसी पदार्थ का प्रति एकांक आयतन द्विध्रुव आघूर्ण उसका ध्रुवण कहलाता है तथा इसे \(\vec{p}\) द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। रैखिक समदैशिक परावैद्युतों के लिए
\(\overrightarrow{\mathrm{p}}=\chi_0 \mathrm{E}\)
यहाँ Xo परावैद्युतका स्थिर अभिलक्षण है जिसे परावैद्युत माध्यम की वैद्युत प्रवृत्ति कहते हैं।

प्रश्न 8.
एक सीधी रेखा में समान दूरियों पर तीन आवेश q, Q तथा – q स्थित हैं। यदि तीनों आवेशों के निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा शून्य हो तो Q : q अनुपात का मान कितना होगा?
उत्तर:
निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा का मान होगा-
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प्रश्न 9.
तीन बिन्दु आवेशों से निर्मित किसी तंत्र की स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
तीन आवेशों q1, q2 तथा q3 से निर्मित तंत्र को सामने चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इस तंत्र की कुल स्थितिज ऊर्जा
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प्रश्न 10.
एक गोलाकार चालक कोश की त्रिज्या R है व उस पर आवेश Q है। गोले के केन्द्र से (2R) दूरी पर विभव की तुलना \(\frac{\mathbf{R}}{\mathbf{2}}\) दूरी पर विभव से कीजिए।
उत्तर:
हम जानते हैं कि बाह्य बिन्दुओं के लिए आवेशित चालक कोश इस तरह से व्यवहार करता है जैसे उसका आवेश उसके केन्द्र पर स्थित हो अतः केन्द्र से (2R) दूरी पर विभव का मान माना V1 है।
अतः V1 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{Q}{2 R}\) ………..(1)
गोलीय कोश के अन्दर विभव नियत होता है तथा वह उसके पृष्ठ पर विभव के तुल्य होता है। अतः केन्द्र से R/2 दूरी पर विभव का मान माना (V2) है।
V2 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{Q}{R}\) …………(2)
अतः \(\frac{V_1}{V_2}\) = \(\frac{1}{2}\)

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प्रश्न 11.
किसी द्विध्रुव की विद्युत क्षेत्र में स्थितिज ऊर्जा के लिए सूत्र लिखिए तथा इनके न्यूनतम व अधिकतम मान ज्ञात कीजिए।
हल-विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में क्षेत्र के लम्बव्त् द्विध्रुव की स्थिति θ = 90° को निर्देश स्थिति मानते हुए अन्य स्थिति पर स्थितिज ऊर्जा का मान
U = \(-\overrightarrow{\mathrm{P}} \cdot \overrightarrow{\mathrm{E}}\) = – PE cos θ
θ = 0, अर्थात् क्षेत्र के समान्तर स्थिति में
U = Umin = – PE
θ = π, अर्थात् क्षेत्र के विरुद्ध दिशा में
U = Umax = + PE
∵ cos π = -1

प्रश्न 12.
अधुवी व ध्रुवी परमाणुओं या अणुओं में अन्तर उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर:
अधुवी परमाणुओं या अणुओं में ऋण व धन आवेशों के वितरण केन्द्र सम्पाती होते हैं, जिससे द्विध्रुव आघूर्ण शून्य रहता है। ध्रुवी अणुओं में इन आवेशों के वितरण केन्द्रों के मध्य अन्तराल होता है और अणु का स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण होता है।
N2, CH4, OH2, O2 आदि अध्रुवी हैं जबकि H2O, NH3 HCI आदि ध्रुवी अणु हैं।

प्रश्न 13.
धुवी तथा अधुवी परावैद्युत में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
ध्रुवी तथा अधुवी परावैद्युत में अन्तर

ध्रुवी परावैद्युतअधुवी परावैद्युत
1. इनके अणु बाह्य वैद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में भी नैट विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण रखते हैं।इनके अणुओं में कोई स्थायी वैद्युत द्विध्रुव आघूर्ण नहीं होता। बाह्य वैद्युत क्षेत्र में रखे जाने पर ध्रुवण अवस्था में यह आघूर्ण उत्पन्न होता है।
2. इनके अणुओं की रचना असममित होती है। उदाहरणार्थ- NH3इनके अणुओं की रचना सममित होती है। उदाहरणार्थ- O2

प्रश्न 14.
संधारित्र का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर:
आवेशित चालक का विभव उसके समीप एक अन्य भू- सम्पर्कित चालक को रखकर कम किया जा सकता है इस प्रकार चालक की आवेश संग्रहित करने की क्षमता जिसे हम धारिता कहते हैं, बढ़ जाती है। ऐसे समायोजन को संधारित्र कहते हैं।

प्रश्न 15.
संधारित्र की धारिता पर परावैद्युत माध्यम का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
परावैद्युत माध्यम की उपस्थिति में धारिता के मान में वृद्धि हो जाती है लेकिन यह वृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि प्लेटों के मध्य का भाग परावैद्युत पदार्थ से पूर्णतः आंशिक या विभिन्न परतों के रूप में किस प्रकार भरा हुआ है।

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प्रश्न 16.
क्या एक फैरड धारिता का समान्तर पट्ट संधारित्र आपकी आलमारी में रखना सम्भव है?
हल-चूँकि चालक की धारिता C = 4π∈0R होती है, इसलिए इसकी त्रिज्या का मान
R = \(\frac{C}{4 \pi \epsilon_0}\) = 9 × 109 मीटर/फैरड × 1 फैरड
= 9 × 109 मीटर = 9 × 106 किमी.
अतः यह त्रिज्या बहुत बड़ी है। अर्थात् 1 फैरड धारिता का गोलाकार चालक बनाना सम्भव नहीं है, जिसको अलमारी में रखना सम्भव नहीं है।

प्रश्न 17.
क्या 1 सेमी. त्रिज्या का धात्वीय गोला 1 कूलॉम आवेश ग्रहण कर सकता है?
हल – R = 1 सेमी = 1 × 10-2 मीटर त्रिज्या के गोले को Q = एक कूलॉम आवेश देने पर इसकी सतह पर वैद्युत क्षेत्र की तीव्रता
E = \( \frac{1}{4 \pi \epsilon_0}\left(\frac{Q}{R}\right)=9 \times 10^9 \times\left(\frac{1}{10^{-2}}\right)\)
= 9 × 1011 न्यूटन/कूलॉम
= 9 × 1011 वोल्ट/मीटर
यह चालक की वैद्युत सामर्थ्य होगी, लेकिन वायु की परावैद्युत सामर्थ्य 3 × 106 वोल्ट / मीटर होती है इसलिए चालक के चारों ओर की निकटतम वायु आयनीकृत हो जायेगी, जिससे कि गोले के आवेश का वायु में क्षरण होने लगेगा अतः कहा जा सकता है कि एक सेमी. त्रिज्या का गोला एक कूलॉम आवेश ग्रहण नहीं कर सकता है।

प्रश्न 18.
A और B दो समान त्रिज्या के चालक गोले हैं, जिसमें A गोला ठोस है और B खोखला है। दोनों को समान विभव तक आवेशित किया जाता है। दोनों गोलों पर आवेशों में क्या सम्बन्ध होगा?
उत्तर:
गोला चाहे ठोस हो अथवा खोखला हो, आवेश उसके बाहरी पृष्ठ पर रहता है। चूँकि गोलाकार चालक की धारिता उसकी त्रिज्या के अनुक्रमानुपाती होती है। यहाँ पर दोनों गोलों की त्रिज्या समान है। अतः दोनों की धारितायें भी समान होंगी। अतः CA = CB = C माना दोनों गोलों पर समान विभव (माना V तक) आवेशित किया गया है।
अर्थात् VA = VB = V, अतः इनका आवेश क्रमश: QA= CAVA = CV, QB = CBVB = CV
∴ QA : QB = 1 : 1 अर्थात् दोनों पर आवेश समान होगा।

प्रश्न 19.
समान्तर पट्ट संधारित्र की प्लेटों के बीच एक धातु की पन्नी (foil) रखने पर उसकी धारिता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
संधारित्र की प्लेटों के बीच वायु होने पर धारिता C0 = \( \frac{\epsilon_0 A}{\mathrm{~d}}\)
इसकी प्लेटों के बीच धातु की पन्नी रखने पर (चित्र) यह संधारित्र दो समान्तर पट्ट संधारित्र के श्रेणी संयोजन के तुल्य होगा, जिनमें प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A तथा प्लेटों के बीच की दूरी = \(\frac{\mathrm{d}}{2}\)
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प्रश्न 20.
संधारित्रों के समान्तर संयोजन व श्रेणी संयोजन में अन्तर लिखिये।
उत्तर:
(1) संधारित्रों का ऐसा संयोजन जिसमें प्रत्येक संधारित्र पर विभवान्तर का मान एकसमान हो, उसे समान्तर संयोजन कहते हैं। संधारित्रों का ऐसा संयोजन, जिसमें प्रत्येक संधारित्र पर आवेश का परिमाण एकसमान रहता है उसे श्रेणी संयोजन कहते हैं।

(2) संधारित्रों को समान्तर क्रम में संयोजित करने पर संयोजन की तुल्यधारिता, प्रत्येक संधारित्र की धारिता के योग के बराबर होती है। श्रेणी संयोजन में परिपथ की तुल्यधारिता का व्युत्क्रम, इस संयोजन में प्रयुक्त प्रत्येक संधारित्र की
धारिता के व्युत्क्रम के योग के बराबर होता है। श्रेणी संयोजन में प्राप्त तुल्यधारिता का मान किसी भी धारिता के मान से भी कम होता है।

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प्रश्न 21.
एक गोलीय चालक पर आवेश की मात्रा तीन गुनी करने पर उसकी धारिता में कितने प्रतिशत वृद्धि होगी ?
उत्तर:
चालक पर आवेश में परिवर्तन करने पर उसके विभव में उसी अनुपात में परिवर्तन हो जाता है अतः आवेश व विभव वृद्धि का अनुपात स्थिर रहता है। इसलिए चालक की धारिता के मान में कोई परिवर्तन नहीं होगा।

प्रश्न 22.
एक समान्तर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच दो परावैद्युत गुटके (जिनके परावैद्युतांक क्रमश: K1 तथा K2 हैं) चित्र में दर्शाये अनुसार भरे हुए हैं। संधारित्र की धारिता क्या होगी?
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 22

प्रश्न 23.
एक समान्तर पट्ट संधारित्र एक दिष्टधारा स्रोत से v विभवान्तर तक आवेशित किया गया है, जबकि प्लेटों के बीच वायु है। संधारित्र को बैटरी से अलग किये बिना वायु के स्थान पर K परावैद्युतांक का परावैद्युत माध्यम भर दिया गया है। कारण सहित बताइए कि निम्नलिखित में से क्या परिवर्तन होगा? उत्तरों का स्पष्टीकरण भी दो ।
(i) विभवान्तर
(ii) प्लेटों के बीच वैद्युत क्षेत्र
(iii) धारिता
(iv) आवेश
(v) ऊर्जा
उत्तर:
(i) चूँकि यहाँ पर संधारित्र को बैटरी से जोड़ा गया है, अतः वैद्युत विभवान्तर V अपरिवर्तित रहेगा।
(ii) चूँकि विभवान्तर और प्लेटों के मध्य की दूरी दोनों अपरिवर्तित हैं, अतः वैद्युत क्षेत्र \(E=\frac{V}{d} \) अपरिवर्तित रहेगा।
(iii) धारिता बढ़ जायेगी : ∵ C = KC0
(iv) चूँकि V नियत है और धारिता K गुनी हो जाती है, अतः आवेश Q भी K गुना हो जायेगा।
(v) प्रारम्भिक ऊर्जा \(\mathrm{U}_0=\frac{1}{2} \mathrm{C}_0 \mathrm{~V}_0^2\) और बाद में ऊर्जा U = \(\frac{1}{2} \mathrm{KC}_0 \mathrm{~V}_0^2=\mathrm{KU}_0\) अर्थात् ऊर्जा भी बढ़कर K गुनी हो जायेगी।

प्रश्न 24.
C धारिता के n संधारित्रों को श्रेणीक्रम में संयोजित करने पर तुल्यधारिता Cs तथा समान्तर क्रम में संयोजित करने पर तुल्यधारिता Cp है। सिद्ध कीजिए कि
उत्तर:
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प्रश्न 25.
आवेशों के निकाय के कारण विद्युत विभव के मान की गणना कीजिए ।
उत्तर:
किन्हीं आवेशों q1, q2, q3 , …….. qn के ऐसे निकाय पर विचार करते हैं, जिनके किसी मूल बिन्दु के सापेक्ष स्थिति सदिश क्रमशः
\(\overrightarrow{\mathrm{r}_1}, \overrightarrow{\mathrm{r}_2}, \overrightarrow{\mathrm{r}_3} \ldots \ldots, \overrightarrow{\mathrm{r}_{\mathrm{n}}}\)
बिन्दु P पर आवेश q1 के कारण विभव
V1 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{\mathrm{q}_1}{r_{1 \mathrm{P}}}\)
यहाँ r1p बिन्दु p तथा आवेश q1 के बीच की दूरी है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 24
इसी प्रकार बिन्दु P पर आवेश q2 के कारण विभव V2 तथा आवेश q3 के कारण विभव V3 को भी व्यक्त कर सकते हैं-
V2 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{q_2}{r_{2 P}}\)
V3 = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_0} \frac{q_3}{r_{3 \mathrm{P}}}\)
यहाँ r2p तथा r3p बिन्दु p की क्रमशः q2 तथा q3 से दूरियाँ हैं। इसी प्रकार हम अन्य आवेशों के कारण बिन्दु p पर विभव व्यक्त कर सकते हैं। अध्यारोपण सिद्धान्त के अनुसार, समस्त आवेश विन्यास के कारण बिन्दु P पर विभव V विन्यास के व्यष्टिगत आवेशों के विभवों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है-
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प्रश्न 26.
समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? बिन्दु आवेश के लिए समविभव पृष्ठ बनाइए और इनके गुण लिखिए ।
उत्तर:
चित्र में एक बिन्दु आवेश Q, O पर रखा है। O को केन्द्र मानकर r त्रिज्या का गोला बनायें तो गोले की धरातल का प्रत्येक बिन्दु O से समान दूरी पर होगा अतः इस धरातल के प्रत्येक बिन्दु पर विभव का मान \(\frac{\mathrm{KQ}}{\mathrm{r}}\) होगा। इस प्रकार के पृष्ठ को समविभव पृष्ठ कहते हैं।
“विद्युत क्षेत्र में ऐसे पृष्ठ जिनके प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत विभव समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाते हैं।” समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव समान होने के कारण किन्हीं भी दो बिन्दुओं के मध्य जो पृष्ठ पर स्थित हैं, विभवान्तर शून्य होता है।

अतः गोले के पृष्ठ पर किसी भी मान के आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में सम्पन्न कार्य शून्य होगा। इस पृष्ठ पर बल रेखायें सदैव पृष्ठ के लम्बवत् होंगी। चित्र में S, S1, S2 बिन्दु आवेश Q के लिए समविभव पृष्ठ हैं। ये संकेन्द्रीय गोले हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 26
यदि दो समान्तर प्लेटों के मध्य बैटरी जोड़कर निश्चित विभवान्तर स्थापित किया जाये तो प्लेटों के मध्य एकसमान विद्युत क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस विद्युत क्षेत्र से समविभव पृष्ठ प्लेटों के समान्तर समतल पृष्ठ होते हैं। जैसा चित्र (b) में दिखाया गया है।
विभवान्तर की परिभाषा के अनुसार एकांक मान के परीक्षण आवेश को एक बिन्दु A से दूसरे बिन्दु B तक विस्थापित करने में किया गया कार्य विभवान्तर के तुल्य होता है।
अर्थात् VB – VA = WAB
यदि बिन्दु A और B एक समविभव तल पर स्थित हैं तो
VB = VA ∴ WAB = 0
अर्थात् समविभव तल पर किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरे तक विस्थापन में कार्य का मान शून्य होता है। रेखीय आवेश के लिए समविभव पृष्ठ बेलनाकार पृष्ठ होता है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 27
समविभव पृष्ठ के गुण-

  1. पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विभव एकसमान होता है।
  2. समविभव पृष्ठ पर किसी आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक विस्थापन में किया गया कार्य का मान शून्य होता है।
  3. दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को कभी भी नहीं काटते हैं।
  4. विद्युत बल रेखायें पृष्ठ के लम्बवत् होती हैं।
  5. किसी भी चाल की सतह हमेशा समविभव पृष्ठ होती है क्योंकि सतह के सभी बिन्दु एक-दूसरे से विद्युत सम्पर्क में होते हैं।

HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता

प्रश्न 27.
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) तथा वैद्युत विभव में सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।
उत्तर:
(Relation between Intensity of Electric field \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) and potential V)
माना q0 परीक्षण आवेश एक समविभव पृष्ठ से dr दूरी पर स्थित दूसरी समविभव पृष्ठ पर विस्थापित होता है। परीक्षण आवेश पर क्षेत्र द्वारा किया गया कार्य
W = – q0dV ……………(1)
जहाँ dV = समविभव पृष्ठों के मध्य विभवान्तर है।
इसी कार्य को निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त कर सकते हैं-
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 28
यहाँ पर आंशिक अवकलन इस बात को दर्शाता है कि समीकरण (3) में V का परिवर्तन उस दिशा में है जिसमें क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) का घटक स्थित है।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 29

प्रश्न 28.
तीन बिन्दु आवेशों से निर्मित किसी तंत्र की विद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
अनुच्छेद 2.7 में उदाहरणार्थ देखें ।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 61

प्रश्न 29.
बाह्य क्षेत्र में एकल आवेश की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर:
एकल आवेश की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy of a single charge) आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के लिए हम सूत्र स्थापित कर चुके हैं, जिसमें वैद्युत क्षेत्र के स्रोत अर्थात् आवेशों की स्थितियों को भी ध्यान में रखा गया था। अब यहाँ पर हमें बाहरी विद्युत क्षेत्र में किसी आवेश की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा ज्ञात करनी है। यहाँ विद्युत क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) उत्पन्न करने वाले आवेश अज्ञात हैं।
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 30
बाहरी विद्युत क्षेत्र ([/latex]\overrightarrow{\mathrm{E}}[/latex]) और किसी बिन्दु पर विद्युत विभव (V) दोनों प्रेक्षण बिन्दु की स्थिति बदलने पर बदल सकते हैं। यदि किसी बिन्दु P पर विद्युत विभव \(V(\vec{r})\) है, जहाँ \(\vec{r}\) बिन्दु P की स्थिति सदिश है, तो विभव की परिभाषा से एकांक आवेश को अनन्त से P बिन्दु तक लाने में किया गया कार्य V जूल होगा। अतः किसी आवेश q को अनन्त से P बिन्दु तक लाने में किया गया कार्य W = q. \(V(\vec{r})\) यही कार्य आवेश में उसकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगा।
अतः आवेश q की किसी बाहरी क्षेत्र /latex]\overrightarrow{\mathrm{E}}[/latex] में बिन्दु \(p(\vec{r})\) पर वैद्युत स्थितिज ऊर्जा = q . \(V(\vec{r})\)
यही कार्य आवेश में उसकी वैद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जायेगा।
अतः आवेश q की किसी बाहरी क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में बिन्दु \(\mathrm{P}(\overrightarrow{\mathrm{r}})\) पर वैद्युत स्थितिज ऊर्जा = q. \(\mathrm{q} \cdot \mathrm{V}(\overrightarrow{\mathrm{r}})\)

प्रश्न 30.
किसी बाह्य क्षेत्र में दो आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। लिखिए।
उत्तर:
किसी बाह्य क्षेत्र में दो आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा (Potential energy of a system of two charges in an external field)
माना किसी बाह्य क्षेत्र \(\overrightarrow{\mathrm{E}}\) में दो आवेश q1 तथा q2 क्रमशः \(\overrightarrow{\mathrm{r}_1}\)
तथा \(\overrightarrow{\mathrm{r}_2}\)
अब q1 आवेश को अनन्त से स्थिति \(\vec{r}_1 \) तक लाने में किया गया कार्य
W1 = q1V(\(\vec{r}_1 \)) …………..(1)
यहाँ पर V(\(\vec{r}_1 \)), \(\vec{r}_1 \) दूरी पर स्थित बिन्दु पर विभव का मान है।
जब q2 आवेश को अनन्त से स्थिति \(\overrightarrow{\mathrm{r}_2}\) तक लाया जाता है तब किया गया कार्य W2 बाह्य क्षेत्र \( \overrightarrow{\mathrm{E}}\) के विरुद्ध किया गया कार्य +q1 के कारण क्षेत्र के विरुद्ध किंया गया कार्य
HBSE 12th Class Physics Important Questions Chapter 2 स्थिर वैद्युत विभव तथा धारिता 31

प्रश्न 31.
संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक
उत्तर:
संधारित्र की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक (Factors effecting the Capacity of a Conductor)
किसी संधारित्र विशेष के लिए उसकी धारिता नियत होती है तथा यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है-

(i) प्लेटों (चालकों) के क्षेत्रफल पर-प्रयोगों के आधार पर यह देखा गया है कि किसी संधारित्र की धारिता उसकी प्लेटों के प्रभावी क्षेत्रफल A के अनुक्रमानुपाती होती है।
अर्थात् C ∝ A

(ii) प्लेटों के बीच की दूरी पर-यदि संधारित्र की प्लेटों के बीच की दूरी d को बढ़ाया जाता है तो संधारित्र की धारिता का मान घट जाता है। चूँकि यह प्लेटों के बीच की दूरी d के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

(iii) प्लेटों के बीच के माध्यम पर-यह देखा गया है कि यदि संधारित्र की प्लेटों के मध्य का स्थान किसी कुचालक पदार्थ जैसे पैराफिन, मोम, तेल, अभ्रक आदि से भर दिया जाये तो संधारित्र की धारिता बढ़ जाती है, यदि प्लेटों के बीच की दूरी को स्थिर रखा जाये। अतः संधारित्र की धारिता का मान प्लेटों के बीच स्थित परावैद्युत माध्यम के परावैद्युतांक K के अनुक्रमानुपाती होता है। यदि संधारित्र की प्लेटों के मध्य वायु होने पर संधारित्र की धारिता C हो तो प्लेटों के मध्य K परावैद्युतांक का माध्यम होने पर संधारित्र की विद्युत धारिता KC हो जाती है। अर्थात् धारिता K गुनी बढ़ जाती है।

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प्रश्न 32.
संधारित्रों के उपयोग को लिखिए ।
उत्तर:
(1) आवेश के संचायक के रूप में (As a charge Accumulator):
संधारित्र का मुख्य कार्य आवेश को संचित करना होता है। यदि हम किसी परिपथ में क्षणिक (Instantaneous) परन्तु शक्तिशाली वैद्युत धारा प्रवाहित करना चाहें तो परिपथ के सिरे को एक आवेशित संधारित्र से सम्बन्धित कर देते हैं। स्पंदित वैद्युत चुम्बक जो क्षणिक परन्तु तीव्र चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त किये जाते हैं, आवेशित संधारित्रों से ही विद्युत-धारा प्राप्त करते हैं।

(2) विद्युत स्थितिज ऊर्जा संचित करने के लिए (For storing Electrostatic P.E):
संधारित्र द्वारा ऊर्जा संग्रहित करने की दर धीमी होती है जबकि ऊर्जा विसर्जन की प्रक्रिया अतिशीघ्र होती है। इसी गुण के आधार पर न्यून समय में फ्लश से (फलश) परिपथ में संधारित्र का उपयोग करके प्रकाश प्राप्त कर कैमरे में चित्र लिये जाते हैं।

(3) रेडियो व टीवी में (In Radio and T.V.):
रेडियो व टीवी की संचार प्रणाली में प्रयुक्त दो प्रमुख परिपथों (ट्रान्समीटर व रिसीवर) में संधारित्रों का उपयोग किया जाता है। उपयुक्त धारिता मान के संधारित्रों का उपयोग कर इन परिपथों में विद्युत चुम्बकीय दोलन उत्पन्न किये जाते हैं। दोलनों से उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंगों का उपयोग, संकेतों के प्रसारण में किया जाता है। संधारित्रों के उपयोगों से इच्छित आवृत्ति के रेडियो या टीवी संकेतों को प्राप्त किया जा सकता है।

(4) वैज्ञानिक अध्ययन में (In Scientific Study):
वैज्ञानिक अध्ययन में संधारित्र अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुए हैं। संधारित्र में भिन्नभिन्न आकार की प्लेटों का प्रयोग करके उनके मध्य भिन्न-भिन्न संरूपण (Configuration) के वैद्युत-क्षेत्र स्थापित किये जाते हैं। इन क्षेत्रों में विभिन्न परावैद्युत पदार्थ रखकर उनके व्यवहार के विषय में अध्ययन किया जाता है।

(5) चिकित्सा क्षेत्र में (In Medicine):
हृदय रोगी में छाती (Chest) पर विद्युत आघात (Electric shock) देकर हृदय की धड़कन को नियंत्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया में जिस उपकरण का प्रयोग किया जाता है, उसे डेफिब्रीलेटर (defibrillator) कहते हैं। इसमें कई F कोटि की संधारित्र होती है, जिसे कई हजार वोल्ट पर आवेशित किया जाता है। संधारित्र में संचित ऊर्जा का उपयोग छाती पर विद्युत आघात देकर हृदय रोगी की हृदय मांसपेशियों की क्रियाप्रणाली को व्यवस्थित करते हैं, जो हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने में सहायक होती है।

(6) विद्युत फिल्टरों में (In Electric Filters):
शक्तिप्रदाय स्रोतों में प्रयुक्त दिष्टकारी परिपथों से प्राप्त वोल्टता संकेत को smooth करने के लिए संधारित्रों का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त श्रव्य यंत्रों में प्रयुक्त शक्ति प्रवर्धकों का युग्मन करने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है।

(7) कम्प्यूटर में (In Computers):
कम्प्यूटर के कुंजी पटल (Key Board) की कार्यप्रणाली धारिता के सिद्धान्त पर आधारित होती है। कुंजी पटल में कुंजी प्लैन्जर (Plunger) के एक सिरे पर स्थितं होती है। प्लैन्जर का दूसरा सिरा गतिक धातु की प्लेट से जुड़ा होता है। गतिक प्लेट को एक अन्य स्थिर प्लेट से परावैद्युत माध्यम के द्वारा अलग रखा जाता है, जिससे एक परिवर्तित संधारित्र की संरचना होती है। कुंजी को दबाने से प्लेटों के मध्य की दूरी कम होती है, जिससे धारिता के मान में वृद्धि होती है। इस परिवर्तन को कम्प्यूटर के इलेक्ट्रॉनिक परिपथों द्वारा संसूचित कर लिया जाता है। सूक्ष्म संधारित्रों का उपयोग कम्य्यूटरों में मैमोरी संग्रहित करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 33.
10 संधारित्र प्रत्येक की धारिता 10 μF है, को श्रेणी संयोजन तत्पश्चात् समान्तर संयोजन में जोड़ने पर तुल्य धारिताओं का गुणनफल लिखिए।
हल – n संधारित्रों के श्रेणी संयोजन की तुल्यधारिता
\(\frac{1}{\mathrm{C}_{\mathrm{S}}}=\frac{1}{\mathrm{C}_{\mathrm{I}}}+\frac{1}{\mathrm{C}_2}+\frac{1}{\mathrm{C}_3}+\ldots \ldots \cdot \frac{1}{\mathrm{C}_{\mathrm{n}}}\) होगी
यहाँ पर 10 संधारित्र जिनकी प्रत्येक की धारिता 10 μF है। इन सभी को श्रेणी संयोजन में जोड़ा गया है। इसलिये तुल्यधारिता का मान 1 μF होगा।
इन सभी को श्रेणी संयोजन के बाद समान्तर संयोजन में जोड़ा गया है।
समान्तर संयोजन के लिये तुल्यधारिता का सूत्र
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आंकिक प्रश्न-

प्रश्न 1.
(a) आवेश 4 × 10-7C के कारण इससे 9 cm दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर विभव परिकलित कीजिए।
(b) अब, आवेश 2 × 10-9C को अनंत से बिंदु P तक लाने में किया गया कार्य ज्ञात कीजिए। क्या उत्तर जिस पथ के अनुदिश आवेश को लाया गया है उस पर निर्भर करता है?
हल-दिया गया है-
(a) Q = 4 × 10-7C
r = 9 cm = 9 × 10-2m.
V = \(\frac{1}{4 \pi \epsilon_o} \frac{Q}{r}\)
मान रखने पर V = \(\frac{9 \times 10^9 \times 4 \times 10^{-7}}{9 \times 10^{-2}}\)
V = 4 × 104 Volt
(b) किया गया कार्य (W) = आवेश (q) × विभवान्तर (V)
W = 2 × 10-9 × 4 × 104
= 8 × 10-5
नहीं, कार्य पथ पर निर्भर नहीं होगा।

प्रश्न 2.
एक वर्ग की प्रत्येक भुजा 90 सेमी. लम्बी है। इसके कोने पर क्रमशः -2,+3,-4 तथा +5 माइक्रो कूलॉम आवेश रखे हैं। वर्ग के केन्द्र पर विद्युत विभव ज्ञात कीजिये।
हल-माना कि 90 सेमी. भुजा वाला वर्ग ABCD है और जिसके शीर्ष A,B,C,D पर क्रमश: -2, 3, -4, +5 माइक्रो कूलॉम मान के आवेश रखे हुए हैं।
यहाँ AC और BD वर्ग के विकर्ण हैं जो O पर काटते हैं जो कि वर्ग का केन्द्र है। वर्ग के केन्द्र O पर विभव V0 = वर्ग के शीर्षों पर रखे प्रत्येक आवेश के कारण उत्पन्न विभवों का बीजगणितीय योग
यहाँ पर (AC)2 = (AB)2 + (BC)2
(AC)2 = (90)2 + (90)2 = 2 × (90)2
∴ AC = 90√2 सेमी.
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प्रश्न 3.
एक बिन्दु आवेश के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता तथा वैद्युत विभव क्रमशः 30 न्यूटन/कूलॉम तथा 15 जूल/कूलॉम है। ज्ञात कीजिए कि
(i) प्रेक्षण बिन्दु से आवेश की दूरी तथा
(ii) आवेश का परिमाण।
हल-दिया है-
E = 30 न्यूटन/कूलॉम
V = 15 जूल/कूलॉम
(i) एक बिन्दु आवेश q के कारण इससे $r$ दूरी पर स्थित प्रेक्षण बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता
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प्रश्न 4.
+10 μC एवं -10 μC के दो बिन्दु आवेश वायु में परस्पर 40 cm की दूरी पर रखे हैं।
(a) निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा की गणना कीजिए। यह मान लीजिए कि अनन्त पर विद्युत स्थितिज ऊर्जा शून्य होती है।
(b) निकाय के लिए समविभव पृष्ठ खींचिये।
(c) निकाय के दोनों आवेशों को अनन्त तक दूर करने में कितना कार्य करना होगा?
हल-(a) दिया है-
q1 = 10 μC = 10 × 10-6C
q2 = -10 μC = – 10 × 10-6C
r12 = 40 cm = 0. 40 m
दो आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा
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(b) अनुच्छेद 2.6 में देखें।
(c) जब दोनों आवेशों को एक-दूसरे से अलग करते हुए अनन्त तक विस्थापित किया जायेगा तो दोनों की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा शून्य हो जायेगी अर्थात्
U2 = 0
परन्तु U1 = -2. 25 J
इसलिए दोनों को विस्थापित करने में किया गया कार्य
W = U2 – U1 = 0 – (- 2. 25)
= 2. 25 J

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प्रश्न 5.
किसी बिन्दु P पर वैद्युत विभव V(x, y, z) = 6x -8xy2 -8 y + 6yz – 4z2। मूल बिन्दु पर स्थित 4 कूलॉम बिन्दु आवेश पर वैद्युत बल ज्ञात कीजिए।
हल-हम जानते हैं-
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प्रश्न 6.
10-6 मीटर व्यास तथा 880.5 किलोग्राम/मीटर3 घनत्व वाली एक तेल बूँद 10 मिलीमीटर में पृथक्कृत प्लेटों के मध्य स्थिर रहती है। प्लेटों के मध्य विभवान्तर 36 वोल्ट है। तेल बूँद पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
g = 10 मीटर/सेकण्ड2
हल-दिया है-
घनत्व d0 = 880.5 किग्रा./मी.3
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प्रश्न 7.
तीन सर्वसम (एक-जैसे) संधारित्रों को श्रेणीक्रम में संयोजित करने (जोड़ने) पर उनकी तुल्य (कुल) धारिता 1 μF है। यदि
उन्हें पार्श्वक्रम (समान्तर क्रम) में संयोजित किया (जोड़ा) जाये, तो उनकी कुल धारिता कितनी होगी? यदि दोनों दशाओं (संयोजनों) में संधारित्रों को एक ही स्रोत से जोड़ा जाये तो इन दो प्रकार के संयोजनों में संचित ऊर्जा का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल-माना कि प्रत्येक संधारित्र की धारिता C μF है। इसलिए श्रेणीक्रम में संयोजन की स्थिति में
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प्रश्न 8.
संधारित्र C की धारिता की गणना कीजिए यदि A व B के मध्य संयोजन की तुल्यधारिता 15 μF है।
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प्रश्न 9.
चित्र में दर्शाये गये संयोजन की बिन्दु P व N के मध्य तुल्यधारिता ज्ञात कीजिए।.
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हल-यहाँ 10 μF व 20 μF मान के संधारित्र समान्तर क्रम में जुड़े हुए हैं, अतः इनकी तुल्यधारिता जुड़े हुए हैं, अतः इनकी तुल्यधारिता
C = (C1 + C2) से C = (10 + 20) = 30 μF होगी।
अतः इन संधारित्रों को बिन्दु P व N के मध्य अन्य 30 μF मान के एक संधारित्र से प्रतिस्थापित कर सकते हैं। यह प्रतिस्थापित संधारित्र; पहले से ही लगे हुए 30 μF संधारित्र के श्रेणीक्रम में है जैसा आगे के चित्र में दर्शाया गया है।
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प्रश्न 10.
चित्र में दर्शाये गये संयोजन की बिन्दु P व N के मध्य तुल्यधारिता का मान ज्ञात कीजिए जबकि (अ) स्विच S खुला है, (ब) स्विच S बन्द है। यहाँ C1 = 1 µF व C2 = 2 µF हैं।
हल-(अ) दिये गये संयोजन में बिन्दु a व b के मध्य स्विच S खुला होने पर बिन्दु P व a के मध्य जुड़ी संधारित्र Cp बिन्दु a व N के मध्य जुड़ी संधारित्र C1 के साथ श्रेणी संयोजन में होगी। इस संयोजन की तुल्यधारिता

इसी प्रकार बिन्दु P व N के मध्य जुड़ी दोनों C2 मान वाली संधारित्र भी श्रेणी संयोजन में हैं। इस संयोजन की तुल्यधारिता
\(\frac{1}{\mathrm{C}^{\prime \prime}}=\frac{1}{\mathrm{C}_2}+\frac{1}{\mathrm{C}_2}=\frac{2}{\mathrm{C}_2}\)
या C” = \(\frac{\mathrm{C}_2}{2}\) = 1 μF
∵ C2 = 2 μF
अब बिन्दु P व N के मध्य संधारित्र C’ तथा C” परस्पर समान्तर संयोजन में हैं अतः तुल्यधारिता
C = \( \frac{1}{2}\) μF + 1 μF = \(\frac{3}{2}\) μF होगी।
(ब) बिन्दु a व b के मध्य स्विच S बन्द (on) होने पर ये बिन्दु समान विभव पर होंगे इसलिए संयोजन के दोनों खण्ड परस्पर श्रेणी क्रम में हो जायेंगे जिनमें प्रत्येक खण्ड की धारिता होगी-
Ct = Ctt = Ct + Ctt = 1 + 2 = 3 μF

प्रश्न 11.
एक समान्तर पट्ट वायु संधारित्र की धारिता 8 μF है। इसकी प्लेटों के बीच की दूरी आध् कर दी जाती है तथा प्लेटों के बीच का स्थान 5 परावैद्युतांक वाले माध्यम से भर दिया जाता है। दूसरी स्थिति में संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
हल-समान्तर पट्ट वायु संधारित्र की धारिता
C = \(\frac{\epsilon_0 A}{\mathrm{~d}}\) = 8 μF (दिया है,)
प्लेटों के बीच की दूरी आधी अर्थात् d/2 करने पर तथा प्लेटों के बीच का स्थान K = 5 परावैद्युतांक वाले माध्यम से भरने पर संधारित्र की धारिता
Cm = \(\mathrm{K}\left(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~d} / 2}\right)=2 \mathrm{~K}\left(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~d}}\right)\)
इसलिए Cm = 2K × C
मान रखने पर Cm = 2 × 5 × 8 μF = 80 μF

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प्रश्न 12.
एक समान्तर पट्ट संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच की दूरी 4 मिमी. है। 3 पराव्द्युतांक वाली 3 मिमी. मोटी एक परावैद्युत पट्टी प्लेटों के बीच प्लेटों के समान्तर रख दी जाती है। प्लेटों के बीच की दूरी इस प्रकार व्यवस्थित की जाती है कि संधारित्र की धारिता प्रारम्भिक धारिता की 2/3 हो जाती है। प्लेटों के बीच नई दूरी क्या है?
हल-दिया गया है-प्रारम्भिक संधारित्र की धारिता का सूत्र,
C = \(\frac{\epsilon_0 \mathrm{~A}}{\mathrm{~d}}\)
यदि प्लेटों के बीच परावैद्युत रखने पर, इनके बीच नई दूरी d1 हो तो प्रश्नानुसार, संधारित्र की नई धारिता = \(\left(\frac{2}{3}\right)\) बिना परावैद्युत संधारित्र की प्रारम्भिक धारिता
परावैद्युत पट्टी रखने के उपरान्त धारिता का सूत्र
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प्रश्न 13.
C धारिता वाले अनेक संधारित्र चित्र में दर्शाये अनुसार अनन्त संख्या में संयोजित हैं। बिन्दु A व B के मध्य कुल धारिता का मान ज्ञात कीजिए।
हल-चूँकि श्रेणी अनन्त लम्बाई की है, अतः बिन्दुओं P व a के दाहिनी ओर की श्रेणी की धारिता का मान उतना ही होगा जो श्रेणी के बिन्दुओं A व B के दाहिनी ओर है। यदि श्रेणी की तुल्यधारिता C1 हो तो दिये गये चित्र के संयोजन को नीचे दिये गये चित्र द्वारा प्रतिस्थापित
कर सकते हैं। इस प्रकार A व B के मध्य तुल्यधारिता \(\left[\mathrm{C}+\frac{\mathrm{CC}_1}{\mathrm{C}+\mathrm{C}_1}\right]\)
होगी। परन्तु धारिता का यह मान मूल श्रेणी की तुल्यधारिता C1 के ही बराबर है। अतः
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प्रश्न 14.
एक गोलाकार संधारित्र के गोलों के बीच भरे माध्यम का परावैद्युतांक 7 है। इसके गोलों की त्रिज्यायें क्रमशः 50 सेमी. तथा 60 सेमी. हैं। संधारित्र की धारिता का मान ज्ञात कीजिए।
हल-गोलीय संधारित्र के आन्तरिक गोले की त्रिज्या a = 50 सेमी. = 0.50 मीटर, बाह्य गोले की त्रिज्या b = 60 सेमी. = 0.60 मीटर तथा दोनों गोलों के बीच माध्यम का परावैद्युतांक K = 7 इसलिए गोलीय संधारित्र की धारिता
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प्रश्न 15.
समान्तर पट्ट वायु संधारित्र की धारिता 10 μF है। इस संधारित्र को चित्र के अनुसार दो बराबर भागों में विभाजित करके \(\epsilon_{r_1}=2\) तथा \(\epsilon_{\boldsymbol{r}_2}=4\) परावैद्युतांक वाले माध्यम से भर दिया जाता है। इस निकाय की धारिता का मान ज्ञात कीजिए।
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हल-यहाँ पर प्रत्येक भाग को एक संधारित्र के तुल्य लिया जा सकता है। दोनों संधारित्रों की ऊपर वाली प्लेटें बैटरी के धनाग्र से व नीचे की प्लेटें ऋणाग्र से जुड़ी हैं। अतः कल्पित दोनों संधारित्रों को परस्पर समान्तर संयोजन में जुड़ा मानकर प्रथम संधारित्र की धारिता
C1 = द्वितीय संधारित्र की धारिता C2 = \(\frac{\epsilon_{\mathrm{r}_2} \in_0 \mathbf{A} / 2}{\mathrm{~d}}\) अतः संयोजन की कुल धारिता
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प्रश्न 16.
4 सेमी. व 7 सेमी. के दो चालक गोलों पर आवेश की मात्राएँ क्रमशः 500 माइक्रो कूलॉम और 60 माइक्रो कूलॉम हैं। चालकों को परस्पर जोड़ने पर विद्युत स्थितिज ऊर्जा हानि की गणना कीजिए।
हल-निकाय की कुल प्रारम्भिक विद्युत ऊर्जा
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प्रश्न 17.
दो समान आवेश घनत्व वाले चालकों A तथा B की त्रिज्याएँ क्रमशः R1 व R2 (R1 >R2) हैं। चालकों को नगण्य धारिता के चालक तार से जोड़ा जाता है तो ज्ञात कीजिए-
(अ) आवेश किस चालक से किसकी ओर प्रवाहित होगा?
(ब) आवेश पुनर्वितरण के पश्चात् चालकों पर आवेश का अनुपात क्या होगा?
हल-(अ) यदि आवेश पुनर्वितरण से पूर्व चालकों A व B पर
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समीकरण (iii) से \(\frac{\mathrm{Q}_1}{\mathrm{Q}_2}\) का मान रखने पर
यहाँ R1 > R2 है, अतः गोले A पर विभव का मान (V1) गोले B पर विभव के मान (V2) से अधिक होगा। अतः आवेश; उच्चविभव के चालक A से निम्न विभव के चालक B की ओर प्रवाहित होगा।
(ब) आवेश पुनर्वितरण के पश्चात् गोलों पर आवेश की मात्राओं का अनुपात उनकी धारिताओं के अनुपात के तुल्य होगा। अर्थात
\(\frac{Q_1}{Q_2}=\frac{C_1}{C_2}=\frac{4 \pi \epsilon_0 R_1}{4 \pi \epsilon_0 R_2}=\frac{R_1}{R_2}\)

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प्रश्न 18.
एक अनावेशित संधारित्र को बैटरी से जोड़ा जाता है। दर्शाइये कि संधारित्र को आवेशित करने के लिए बैटरी द्वारा प्रयुक्त की गई ऊर्जा का आधा भाग ऊष्मा के रूप में क्षय होता है।
हल-किसी V विद्युत वाहक बल की बैटरी द्वारा C धारिता के संधारित्र को Q आवेश से आवेशित करने के लिए बैटरी द्वारा किये गये कार्य का मान W = QV होगा।
वस्तुतः यह कार्य बैटरी द्वारा संधारित्र को आवेशित करने की प्रक्रिया में खर्च की गई ऊर्जा है। इसमें जो ऊर्जा संधारित्र में संचित ऊर्जा के तुल्य होगी, वह है U = \(\frac{1}{2}\)CV2 = \(\frac{1}{2}\)QV
तथा शेष ऊर्जा = QV – \(\frac{1}{2}\)QV = \(\frac{1}{2}\)QV जो ऊष्मा के रूप में क्षय हो जायेगी। अतः बैटरी द्वारा आवेशन प्रक्रिया में खर्च की गई ऊर्जा का आधा भाग ऊष्मा के ऊर्जा के रूप में क्षय होता है।

प्रश्न 19.
समान धारिता की दो संधारित्र चित्रानुसार (चित्र) एक बैटरी से जुड़ी हुई हैं। स्विच S प्रारम्भ में बन्द अवस्था में है। अब स्विच S को खुला कर संधारित्र की प्लेटों के मध्य ∈r = 3 परावैद्युतांक के पदार्थ को भरा जाता है। परावैद्युत पदार्थ को रखने से पूर्व व उसके पश्चात् संधारित्रों में संग्रहित विद्युत ऊर्जा के मानों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
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हल-प्रारम्भ में स्विच S बन्द होने पर दोनों संधारित्रों के समान्तर क्रम में जुड़े होने के कारण, ये दोनों समान विभव V पर होंगे।
अर्थात् = Ui = \(\frac{1}{2}\)C1V2
= \(\frac{1}{2}\)(C1 + C2) V2 = CV2 ………..(i)
जब स्विच S को खुला रखकर संधारित्र की प्लेटों के मध्य परावैद्युत पदार्थ रखा जाता है तब प्रत्येक संधारित्र की धारिता ∈r गुणा हो जायेगी और चूँकि संधारित्र A अब भी बैटरी से जुड़ा है। अतः इस पर विभवान्तर का मान प्रारम्भिक विभवान्तर के मान V के तुल्य होगा जबकि संधारित्र B पर विभवान्तर का नया मान V’ = [/latex]\frac{\mathrm{V}}{\epsilon_{\mathrm{r}}}[/latex] हो जायेगा एवं आवेश स्थिर रहेगा। अतः इस स्थिति में निकाय की विद्युत ऊर्जा होगी-
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प्रश्न 20.
X एवं Y दो समान्तर प्लेट संधारित्र हैं, जिनकी प्लेटों का क्षेत्रफल एवं उनके बीच की दूरी समान है। X की प्लेटों के मध्य वायु है और Y की प्लेटों के मध्य K = 5 परावैद्युतांक वाला परावैद्युत माध्यम है। (चित्र में)
(a) X एवं Y की प्लेटों के मध्य विभवान्तर की गणना कीजिए।
(b) X एवं Y में संचित वैद्युत स्थितिज ऊर्जाओं का अनुपात क्या है?
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हल-(a) वायु संधारित्र X की धारिता
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प्रश्न 21.
चित्र में दर्शाए अनुसार तीन परिपथों, जिनमें प्रत्येक स्विच S और दो संधारित्र लगे हैं, को प्रारम्भ में आवेशित किया जाता है। स्विच को बन्द करने पर किस परिपथ में बार्यी ओर दिए गए संधारित्र में आवेश
(i) बढ़ेगा,
(ii) घटेगा और
(iii) अपरिवर्तित रहेगा? कारण दीजिए।
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हल-आवेश संरक्षण के नियम से
माना q1 तथा q2 दो आवेश हैं जो कि संधारित्र के बायीं तरफ तथा दायीं तरफ है।
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अतः बायें संधारित्र पर आवेश का मान अपरिवर्तित रहता है।
(b) दूसरे परिपथ के लिये
6Q + 3Q = CV + CV
उभयनिष्ठ विभवान्तर, V = \(\frac{9 \mathrm{Q}}{2 \mathrm{C}}\)
स्विच (S) की बन्द करने के बाद बायें संधारित्र पर संधारित्र का मान
q1 = CV
= C × \(\frac{9 \mathrm{Q}}{2 \mathrm{C}}\) = 4.5 Q
इसलिये परिपथ (b) में बायें संधारित्र पर आवेश का मान घटेगा।
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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. अभिक्रिया
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 1
की अभिक्रिया की कोटि तथा अणुसंख्यता क्रमशः है-
(अ) 1, 3
(ब) 1, 2
(स) 2, 1
(द) 2, 2
उत्तर:
(ब) 1, 2

2. प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु 100 सेकण्ड है तो इसका वेग स्थिरांक होगा-
(अ) 6.93 × 10-3s
(ब) 6.93 × 10-2s
(स) 0.693 s
(द) 6.93 s
उत्तर:
(अ) 6.93 × 10-3s

3. अभिक्रिया x + y → उत्पाद के लिए अभिक्रिया का वेग = k[x]a [y]b है तो अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) b
(ब) a
(स) a + b
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(स) a + b

4. x तथा y के मध्य अभिक्रिया का वेग 100 गुना हो जाता है जब x की सांद्रता 10 गुना बढ़ा देते हैं तो X ‘संदर्भ में अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) 10
(ब) 2
(स) 4
(द) 1
उत्तर:
(ब) 2

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

5. प्रथम कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई है-
(अ) सेकंड2
(ब) मोल लीटर-1 सेकंड-1
(स) सेकंड-1
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(स) सेकंड-1

6. अभिक्रिया के वेग की इकाई है-
(अ) मोल लीटर-1
(ब) मोल सेकंड-1
(स) मोल लीटर-1 सेकंड-1
(द) मोल लीटर-1 सेकंड
उत्तर:
(स) मोल लीटर-1 सेकंड-1

7. उत्प्रेरक की उपस्थिति में किसी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा-
(अ) बढ़ जाती है।
(ब) कम हो जाती है।
(स) स्थिर रहती है।
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।
उत्तर:
(ब) कम हो जाती है।

8. किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करता है?
(अ) सांद्रता
(ब) अभिक्रिया का ताप
(स) दाब
(द) माध्यम की प्रकृति
उत्तर:
(ब) अभिक्रिया का ताप

9. प्रथम कोटि की अभिक्रिया की अर्धायु निर्भर करती है-
(अ) क्रियाकारकों की सांद्रता पर
(ब) उत्पादों की सांद्रता पर
(स) वेग स्थिरांक पर
(द) उत्प्रेरक पर
उत्तर:
(स) वेग स्थिरांक पर

10. शून्य कोटि अभिक्रिया का उदाहरण है-
(अ) H2 + I2 → 2HI
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 2
(स) एस्टर का क्षारीय जल अपघटन
(द) \(\mathrm{C}_2 \mathrm{H}_{4(\mathrm{~g})}+\mathrm{H}_{2(\mathrm{~g})} \rightarrow \mathrm{C}_2 \mathrm{H}_{6(\mathrm{~g})}\)
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 3

11. किसी अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर नहीं करता तो उस अभिक्रिया की कोटि क्या होगी ?
(अ) 1
(ब) शून्य
(स) 2
(द) 3
उत्तर:
(ब) शून्य

12. किसी शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौनसा कथन सत्य है ?
(अ) वेग = k
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 4
(स) k का मात्रक = सेकण्ड-1
(द) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(अ) वेग = k

13. अभिक्रिया A + B = 2C के लिए A के लुप्त होने का वेग 10-2 मोल लीटर-1 सेकंड-1 है तो C के बनने का वेग क्या होगा-
(अ) 1.5 × 10-2 मोल लीटर10-1 सेकंड10-1
(ब) 0.5 × 10-2 मोल-1 लीटर सेकंड
(स) 1 × 10-2 मोल लीटर सेकंड
(द) 2.0 × 10-2 मोल लीटर सेकंड ।
उत्तर:
(द) 2.0 × 10-2 मोल लीटर सेकंड ।

14. \({ }_6 \mathrm{C}^{14}\) की अर्धायु 5760 वर्ष है। \({ }_6 \mathrm{C}^{14}\) का 100 mg का नमूना कितने वर्ष के बाद 25 mg रह जाएगा ?
(अ) 1440 वर्ष
(ब) 23040 वर्ष
(स) 11520 वर्ष
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(स) 11520 वर्ष

15. किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए देहली ऊर्जा होती है-
(अ) सक्रियण ऊर्जा – अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा
(ब) सक्रियण ऊर्जा + अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा
(स) सक्रियण ऊर्जा के बराबर
(द) अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा के बराबर.
उत्तर:
(ब) सक्रियण ऊर्जा + अभिकारकों की सामान्य ऊर्जा

16. अभिकारक अणुओं को उत्पाद में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा होती है-
(अ) गतिज ऊर्जा
(ब) स्थितिज ऊर्जा
(स) सक्रियण ऊर्जा
(द) गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
उत्तर:
(स) सक्रियण ऊर्जा

17. अभिक्रिया 2A + B → 3C + D के लिए, निम्नलिखित में से कौनसा व्यंजक, अभिक्रिया के वेग को नहीं दर्शाता ?
(अ) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{A})}{2 \mathrm{dt}}\)
(ब) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{B})}{\mathrm{dt}}\)
(स) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{C})}{\mathrm{dt}}\)
(द) \(+\frac{\mathrm{d}(\mathrm{D})}{\mathrm{dt}}\)
उत्तर:
(स) \(-\frac{\mathrm{d}(\mathrm{C})}{\mathrm{dt}}\)

18. किसी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को प्रभावित करने वाला कारक
(अ) ताप
(स) सांद्रता
(ब) टक्कर आवृत्ति
(द) ताप
उत्तर:
(द) ताप

19. किसी अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की ताप पर निर्भरता को निम्नलिखित में से किस समीकरण से दिया जाता है?
(अ) In k = In A – \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)
(ब) In A = In k – \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)
(स) In k = A\(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)
(द) In A = RT In Ea – In k
उत्तर:
(अ) In k = In A – \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{\mathrm{RT}}\)

20. शून्य कोटि अभिक्रिया का आलेख है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 5
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 6

21. किसी अभिक्रिया में अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता दुगुनी करने पर उस अभिक्रिया की अर्धआयु भी पहले की तुलना में दुगुनी हो जाती है तो इस अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) 3
(ब) 2
(स) शून्य
(द) 1
उत्तर:
(स) शून्य

22. HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 7 यह ग्राफ किस कोटि की अभिक्रिया को दर्शाता है?
(अ) प्रथम
(ब) शून्य
(स) द्वितीय
(द) तृतीय
उत्तर:
(अ) प्रथम

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

23. रेडियोएक्टिव विघुटन की अभिक्रिया की कोटि कितनी होती है?
(अ) शून्य
(ब) 1
(स) 2
(द) 3
उत्तर:
(ब) 1

24. शून्य कोटि अभिक्रिया के पूर्ण होने में लगा समय है-
(अ) [R]o/k
(ब) 2k/[R]o
(स) [R]ok
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) [R]o/k

25. अभिक्रिया A + 2B → उत्पाद के लिए अवकलन दर समीकरण है-
(अ) \(-\frac{1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
(ब) \(\frac{1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
(स) \(\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{-1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
(द) \(\frac{\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)
उत्तर:
(स) \(\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{A}]}{\mathrm{dt}}=\frac{-1}{2} \frac{\mathrm{d}[\mathrm{B}]}{\mathrm{dt}}=\mathrm{k}[\mathrm{A}][\mathrm{B}]^2\)

26. अभिकर्मक की प्रारम्भिक सान्द्रता को दोगुना करने पर इसकी t1/2 आधी हो जाती है। इस अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) प्रथम कोटि
(ब) शून्य कोटि
(स) द्वितीय कोटि
(द) तृतीय कोटि
उत्तर:
(स) द्वितीय कोटि

27. यदि a तथा t1/2 क्रमशः अभिक्रियकों की प्रारम्भिक सान्द्रता तथा शून्य कोटि की अभिक्रिया की अर्द्ध आयु हो तो निम्नलिखित में से सही सम्बन्ध है?
(अ) t1/2 ∝ \(\frac { 1 }{ a }\)
(ब) t1/2 ∝ a
(स) t1/2 ∝ \(\frac{1}{a^2}\)
(द) t1/2 ∝ a2
उत्तर:
(ब) t1/2 ∝ a

28. प्रथम कोटि की अभिक्रिया के (t2/3) ज्ञात कीजिए। दिया है k = 5.48 × 10-14 सेकण्ड |
(अ) 2.00 × 1013 सेकण्ड
(ब) 2.00 × 1013 सेकण्ड
(स) 200 × 1020 सेकण्ड
(द) 0.200 × 1010 सेकण्ड
उत्तर:
(अ) 2.00 × 1013 सेकण्ड

29. 2A + B → उत्पाद (P) अभिक्रिया गति नियम दिया है। \(\frac { dp }{ dt }\) = k[A][B] जब [B] >> [A], तो इस परिस्थिति में अभिक्रिया की कोटि होगी-
(अ) 0
(ब) 1
(स) 2
(द) 1.5
उत्तर:
(ब) 1

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
शर्करा के क्रिस्टल की तुलना में शर्करा का पाउडर जल में जल्दी घुल जाता है। क्यों?
उत्तर:
पाठडर अवस्था में शर्करा का पृष्ठ क्षेत्रफल क्रिस्टल की तुलना में अधिक होता है अतः यह जल में जल्दी घुल जाता है।

प्रश्न 2.
N2O5 के विघटन की अभिक्रिया की कोटि बताइए।
उत्तर:
N2O5 का विघटन प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

प्रश्न 3.
किसी अभिक्रिया का औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग कब समान होता है?
उत्तर:
जब समय अन्तराल △t बहुत ही कम (शून्य के नजदीक) हो तब अभिक्रिया का औसत वेग तथा तात्क्षणिक वेग समान होगा।

प्रश्न 4.
किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक तथा अभिक्रिया वेग की इकाई समान है तो इस अभिक्रिया की कोटि कितनी होगी?
उत्तर:
यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है क्योकि इसके लिए-
वेग = k

प्रश्न 5.
किस प्रकार की अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई सान्द्रता पर निर्भर नहीं करती?
उत्तर:
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक (k) की इकाई sec-1 होती है अतः यह सान्द्रता पर निर्भर नहीं करती।

प्रश्न 6.
अभिक्रिया के वेग स्थिरांक को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक अभिकारकों की प्रकृति तथा ताप पर निर्भर करता है।

प्रश्न 7.
शून्य कोटि अभिक्रिया में अभिकारकों की सान्द्रता को तीन गुना करने पर इसके वेग पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
अभिक्रिया का वेग अपरिवर्तित रहेगा क्योंकि शून्य कोटि अभिक्रिया का वेग सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 8.
अभिक्रिया 2NO +O2 की आप्विकता तथा कोटि कितनी है?
उत्तर:
इस अभिक्रिया की कोटि तथा आण्विकता दोनों ही 3 हैं।

प्रश्न 9.
अभिक्रिया की कोटि तथा आण्विकता में एक अन्तर बताइए।
उत्तर:
अभिक्रिया की आण्विकता हमेशा पूर्णांक होती है जबकि कोटि का पूर्णांक होना आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 10.
कोई द्विअणुक अभिक्रिया किस स्थिति में प्रथम कोटि की होगी?
उत्तर:
द्विअणुक अभिक्रिया में किसी एक अभिकारक को आधिक्य में लेने पर अभिक्रिया प्रथम कोटि की होगी क्योंकि अभिक्रिया का वेग इस अभिकारक की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करेगा।

प्रश्न 11.
अवकल वेग समीकरण क्या होता है?
उत्तर:
किसी अभिक्रिया के लिए सांद्रता पर आधारित समीकरण को अवकल वेग समीकरण कहते हैं।

प्रश्न 12.
किसी अभिक्रिया का वेग निधाँक पद कौनसा होता है?
उत्तर:
जटिल अभिक्रियाओं में सबसे धीमा पद वेग निर्धारक पद होता है क्योंकि इससे अभिक्रिया का वेग निर्धारित किया जाता है।

प्रश्न 13.
किसी रेडियोएक्टिव विघटन अभिक्रिया की कोटि कितनी होती है?
उत्तर:
रेडियोएक्टिव विघटन अभिक्रिया हमेशा प्रथम कोटि की होती हैं।

प्रश्न 14.
प्रथम कोष्टि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का मात्रक बताइए।
उत्तर:
समय-1 (सेकण्ड-1 या मिनट-1)

प्रश्न 15.
शून्य कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक का सूत्र बताइए।
उत्तर:
शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक
\(\mathrm{k}=\frac{[\mathrm{R}]_0-[\mathrm{R}]}{\mathrm{t}}\)

प्रश्न 16.
गैसीय अभिक्रिया A → B + C के लिए वेग नियतांक का सूत्र बताइए।
उत्तर:
\(k=\frac{2.303}{t} \log \frac{P_i}{\left(2 P_i-P_t\right)}\)

प्रश्न 17.
शून्य कोटि अभिक्रिया की अर्धयु ज्ञात करने का सूत्र बताइए।
उत्तर:
\(\mathbf{t}_{\frac{1}{2}}=\frac{[\mathrm{R}]_0}{2 \mathrm{k}}\)

प्रश्न 18.
यदि किसी अभिक्रिया में अभिकारक के सभी अणुओं के मध्य प्रभावी टक्कर हो जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
अभिक्रिया तीक्र वेग से होगी तथा लगभग पूर्ण हो जाएगी।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 19.
देहली ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी अभिकारक की वह न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा जो उसे उत्पाद् में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक होती है, उसे देहली ऊर्जा कहते हैं।
देहली ऊर्जां = सामान्य अणु की ऊर्जा + सक्रियण ऊर्जा

प्रश्न 20.
किसी अभिक्रिया में टक्कर करने वाले अणुओं की पर्याप्त संख्या की ऊर्जा, देहली ऊर्जा से अधिक है फिर भी अभिक्रिया का वेग कम है, क्यों?
उत्तर:
अणुओं का अभिविन्यास सही नही होने के कारण अभिक्रिया का वेग कम है।

प्रश्न 21.
दो भिन्न-भिन्न अभिक्रियाएँ समान ताप पर करवाई जाती हैं तथा दोनों के लिए सक्रियण ऊर्जा भी समान है, तो क्या इन अभिक्रियाओं के वेग भी समान होंगे?
उत्तर:
इन अभिक्रियाओं के वेग समान नहीं हो सकते क्योंकि वेग नियतांक, पूर्व चरघातांकी गुणक (A) पर भी निर्भर करता है, जो कि भिन्नभिन्न अभिक्रियाओं के लिए भिन्न-भिन्न होता है।

प्रश्न 22.
प्रभावी टक्कर क्या होती है?
उत्तर:
वे टक्कर जिनके परिणामस्वरूप उत्पाद का निर्माण होता है, उन्हें प्रभावी टक्कर कहते है।

प्रश्न 23.
किसी अभिक्रिया के लिए t1/2 ∝ [R]0 है, तो इस अभिक्रिया की कोटि कितनी होगी?
उत्तर:
शून्य।

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
अभिक्रिया की कौटि तथा अणुसंख्यता (आणिवकता) में विभेद् कीजिए।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया की कोटि तथा अणुसंख्यता में निम्नलिखित विभेद है-

  • अभिक्रिया की कोटि प्रायोगिक राशि है जबकि आण्विक्ता एक सैद्धान्तिक राशि है।
  • कोटि, शून्य या भिन्नात्मक भी हो सकती है जबकि आण्विकता हमेशा पूर्णांक होती है।
  • कोटि से अभिक्रिया की क्रियाविधि ज्ञात होती है, आण्विकता से नहीं।
  • अभिक्रिया की कोटि प्राथमिक तथा जटिल दोनों प्रकार की अभिक्रियाओं के लिए लाग होती है लेकिन अभिक्रिया की आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रियाओ के लिए ही लागू होती है। जटिल अभिक्रियाओं की आण्विकता का कोई अर्थ नहीं होता। जटिल अभिक्रियाओं में कोटि सबसे धीमे पद से दी जाती है तथा सामान्यतः सबसे मंद पद की आण्विकता तथा कोटि समान होती है।
  • कोटि ताप, दाब या अभिक्रिया की परिस्थिति पर निभर करती है लेकिन आण्विकता नहीं।
  • कोटि सान्द्रता से सम्बन्धित होती है जबकि आण्विकता अणुओं की संख्या से सम्बन्धित है।

प्रश्न 2.
तीन अभिक्रियाएँ जिनकी कोटि 1,2 तथा 3 हैं इनके लिए वेग स्थिरांकों का मान समान है तो सान्द्रता का मान 1M, से कम तथा 1M से अधिक होने पर इन अभिक्रियाओं के वेगों का क्रम क्या होगा?
उत्तर:
माना R → उत्पाद्
प्रथम कोटि के लिए, वेग (v1)=k[R]
द्वितीय कोटि के लिए, वेग (v2)=k[R]2
तृतीय कोटि के लिए, वेग (v3)=k[R]3
अतः [R] = 1 होने पर v1 = v2 = v3
जब [R] = 1 तो v1 > v2 > v3
तथा [R] > 1 होने पर v1 < v2 < v3

प्रश्न 3.
किसी अभिक्रिया के वेग स्थिरांक तथा अभिक्रिया वेग में तीन अन्तर बताइए।
उत्तर:
वेग स्थिरांक तथा अभिक्रिया वेग में निम्नलिखित अन्तर होते है-

  • वेग स्थिरांक वह वेग है जब सभी अभिकारकों की सान्द्रता इकाई हो लेकिन इकाई समय में किसी अभिकारक या उत्पाद् की सान्द्रता में होने वाला परिवर्तन अभिक्रिया वेग होता है।
  • वेग स्थिरांक अभिकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता जबकि अभिक्रिया का वेग सान्द्रता के समानुपाती होता है।
  • वेग स्थिरांक का मात्रक अभिक्रिया की क्रोटि पर निर्भर करता है जबकि वेग का मात्रक mol L-1 s-1 है। अर्थात् यह निश्चित होता है।

प्रश्न 4.
अभिक्रिया – HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 8 में पात्र का आयतन प्रारम्भिक आयतन का \(\frac { 1 }{ 3 }\) करने पर अभिक्रिया वेग पर क्या प्रभाव होगा तथा आयतन में इस परिवर्तन से अभिक्रिया की कोटि में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर:
समीकरण के अनुसार,
अभिक्रिया का प्रारम्भिक वेग (v)= k [A]2 [B]
जब्न पात्र का आयतन प्रारम्भिक आयतन का \(\frac { 1 }{ 3 }\) कर द्यि जाता है तो A तथा B दोनों की सान्द्रता 3 गुना हो जाएगी। अतः इस स्थिति में अभिक्रिया का वेग
v1 = k [3A]2[3B]
v1 = 27k [A]2[B]
अतः अभिक्रिया का वेग प्रारम्भिक वेग की तुलना में 27 गुना हो जाएगा लेकिन अभिक्रिया की कोटि पर कोई प्रभाव नहीं होगा क्योंकि कोटि सान्द्रता या आयतन पर निभर नहीं करती।

प्रश्न 5.
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु का सूत्र ज्ञात कीजिए तथा सिद्ध कीजिए कि प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती।
उत्तर:
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 9
अतः किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अध्धायु का मान निश्चित होता है। अर्थात् यह अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर नहीं करती।

प्रश्न 6.
प्रथम कोटि की गैसीय अभिक्रिया A(g) → B(g) + C(g) के लिए वेग नियतांक के सूत्र \(k=\frac{2.303}{t} \log \frac{P_i}{\left(2 P_i-P t\right)}\) की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया का अर्ध आयु काल:
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 11
अतः किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु का मान निश्चित होता है, अर्थात् यह अभिकारक की प्रारंभिक सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।
इसे निम्नलिखित ग्राफ द्वारा दर्शाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 12
अत: n वीं कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु (t1/2) का सूत्र निम्न प्रकार होगा-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 13
[R]0 = अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता
तथा किसी अभिक्रिया के लिए n अर्धायु के बाद बचा पदार्थ = \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{2^n}\)
प्रथम कोटि अभिक्रियाओं के उदाहरण-
(i) एथीन का हाइड्रोजनीकरण-
C2H4 (g) + H2 (g) → C2H4 (g)
वेग = k (C2H4) (इसमें H2 आधिक्य में होता है।)

(ii) नाभिकीय विखण्डन (प्राकृतिक या कृत्रिम) की सभी अभिक्रियाएँ प्रथम कोटि की होती हैं जैसे
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 14

(iii) नाइट्स्सक्साइड का अपघटन-
2N2O → 2N2 + O2
वेग = k[N2O]
अभिक्रिया की क्रियाविधि

  • N2O → N2 + O (धीमा पद)
  • N2O → N2 + O2 (तेज पद)

(iv) गैसीय अभिक्रिया का अध्ययन विभिन्न समय पर अभिकारकों तथा उत्पादों के आंशिक दाब ज्ञात करके किया जाता है।
अभिक्रिया A(g) → B(g) + C(g)
उदाहरण-एजो आइसोप्रोपेन का विघटन
C6H14N2 → N2 + C6H14
अभिक्रिया के लिए वेग = k[A]
अतः यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

माना कि गैस A का प्रारंभिक दाब Pi तथा ‘t’ समय पर अभिक्रिया मिश्रण का कुल दाब Pt है तो इस अभिक्रिया हेतु समाकलित वेग समीकरण निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते हैं-
कुल दाब Pt = PA + PB + PC
PA, PB तथा PC क्रमशः A, B तथा C के आंशिक दाब हैं।
माना t समय पर A के दाब में x atm की कमी होती है तो B तथा C प्रत्येक के दाब में x atm की वृद्धि होगी।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 15
यहाँ Pi = t = 0 समय पर A का प्रारंभिक दाब
Pt = (Pi – x) + x + x
Pt = Pi + x
x = Pt – Pi
t समय पर, PA = Pi – x
= Pi – (Pt – Pi)
या PA = 2Pi – Pt
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
[R]0 = Pi, [R] pt
अतः k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{p_i}{p_A}\)
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{p_i}{\left(2 p_i-p_t\right)}\)

प्रश्न 7.
उस अभिक्रिया की कोटि क्या होगी जिसके 50% पूर्ण होने में 2 घण्टे तथा 75% पूर्ण होने में 4 घण्टे लगते हैं?
उत्तर:
इस अभिक्रिया के 50% पूर्ण होने में 2 घण्टे लग रहे हैं अर्थात् इस अभिक्रिया की अर्धायु 2 घण्टे है। इसमें 4 घण्टे (दो अर्धायु) के बाद 75% अभिक्रिया पूर्ण हो जाती है अर्थात् 25% अभिकारक बच जाता है, जिसका तात्पर्य यह है कि इस अभिक्रिया की अध्धायु प्रारम्भिक सान्द्रता पर निभर नर्ही करती। अतः यह एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।

प्रश्न 8.
(a) किसी जटिल अभिक्रिया के धीमे पद् की अणुसंख्यता ही सम्पूर्ण अभिक्रिया की अणुसंख्यता होती है। समझाइए।
(b) उच्य कोटि की अभिक्रियाएँ सामान्यत: नहीं होती, क्यों?
उत्तर:
(a) जटिल अभिक्रियाओं की क्रियाविधि में सबसे धीमे पद को वेग निर्धारक पद माना जाता है। चूँक किसी अभिक्रिया के लिए अणुसंख्यता का मान सामान्यतया 3 से अधिक नहीं होता अतः धीमे पद में उपस्थित अणुओं से ही अभिक्रिया की अणुसंख्यता ज्ञात करते हैं, चाहे पूर्ण सन्तुलित समीकरण में अणुओ की संख्या अधिक हो।

(b) अभिक्रिया होते समय उन अणुओ के मध्य टक्कर होती है जो निश्चित दिशा में अभिविन्यासित होते हैं तथा जटिल अभिक्रियाओं में धीमे पद में जितने अणुओ की सान्द्रता में परिवर्तन होता है, वही अभिक्रिया की कोटि होती है। टककर में सामान्यतः तीन से अधिक अणु भाग नहीं लेते अतः उच्च कोटि की अभिक्रियाएँ सामान्यतः नहीं होती।

प्रश्न 9.
अभिक्रिया – 2N2O → 2N2 + O2 का प्रायोगिक वेग समीकरण निम्नलिखित है-वेग =k[N2O], इस अभिक्रिया की क्रियाविधि बताइए।
उत्तर:
वेग समीकरण में N2O की सान्द्रता की घात एक है अतः वेग निर्धारक पद (धीमा पद) में N2O का एक अणु उपस्थित होना चाहिए इसलिए इस अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्नलिखित है-
N2O → N2 + O (धीमा पद)
N2O + O → N2 + O2 (तेज पद)

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 10.
अभिक्रिया 2NO + Br2 → 2NOBr की क्रियाविधि निम्नलिखित है –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 10
तो इस अभिक्रिया का वेग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
अभिक्रिया की क्रियाविधि के आधार पर धीमे पद से अभिक्रिया के वेग को ज्ञात किया जाता है अतः
वेग = k[NOBr2][NO] ….(1)
चूँकि NOBr2 अभिकारक नहीं है बल्कि माध्यमिक यौगिक है तथा प्रथम पद उत्क्रमणीय है अतः
साम्य स्थिरांक Kc = \(\frac{\left[\mathrm{NOBr}_2\right]}{[\mathrm{NO}]\left[\mathrm{Br}_2\right]}\) …(2)
या [NOBr2] = Kc [NO][Br2]
यह मान समीकरण (i) में रखने पर
वेग = k Kc [NO][Br2][NO]
वेग = k1 [NO]2[Br2]
यहाँ k1 = k . Kc
अतः अभिक्रिया का वेग समीकरण निम्न प्रकार होगा-
वेग = k1 [NO]2[Br2]

बोर्ड परीक्षा के दूष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
(a) निम्नलिखित पदों को स्पष्ट कीजिए-

  • अभिक्रिया की दर
  • अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा

(b) फॉस्फोन, PH3, का अपघटन निम्नलिखित समीकरण के अनुसार होता है-
4PH3(g) → P4(g) + 6H2(g)
यह पाया जाता है कि अभिक्रिया निम्नलिखित दर समीकरण के अनुसार होती है-
दर = k [PH3].
120°C पर PH3 की अर्ध-आयु 37.9 s है।

(i) PH3 के 3/4 भाग के अपघटित होने के लिए कितना समय लगेगा?
(ii) 1 मिनट के पश्चात् PH3 के मूल प्रतिदर्श का कौनसा प्रभाज शेष रह जाएगा?
अथवा
(a) निम्न पदों को स्पष्ट कीजिए-

  • एक अभिक्रिया की कोटि
  • एक अभिक्रिया की आण्विकता

(b) तापमान 300 K से बढ़कर 320 K हो जाने पर एक अभिक्रिया की दर चार गुनी हो जाती है। अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा का परिकलन कीजिए, यह मानते हुए तापमान बदलने के साथ इसका मान परिवर्तित नहीं होता है। (R = 8.314 JK-1 mol-1)
उत्तर:
(a) (i) अभिक्रिया की दर-काई समय में कसी अभिकारक या उत्पाद की सान्द्रता में जितना परिंवर्तन होता है, उसे अभिक्रिया की दर कहते हैं।
(ii) अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा-किसी अभिकारक को उत्पाद में परिवर्तित होने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा जो अभिकारक द्वारा ग्रहण करना आवश्यक है, उसे अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा कहते हैं।
(b) (i) अभिक्रिया 4PH3(g) → P4(g)(g) + 6H2(g) की दर = k[PH3] दी गई है अतः यह एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। इसके लिए
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
k = 0.693/t1/2
t1/2 = 37.9 s
अतः k = \(\frac { 0.693 }{ 37.9 }\) = 0.01828
k = 1.82 × 10-2 s-1
समाकलित वेग समीकरण
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t समय पर PH3 का 3/4 भाग अपघटित हो रहा है।
अतः t = \(\frac { 2.303 }{ k }\)log\(\frac{[R]_0}{\frac{3}{4}[R]_0}\)
t = \(\frac{2.303}{1.82 \times 10^{-2}}\)log\(\frac { 4 }{ 3 }\)
t = 126.5 (log 4 – log 3)
t = 126.5 (0.6021 – 0.4771)
t = 126.5 × 0.125
t = 15.8 sec.

(ii) k = \(\frac { 2.303 }{ 37.9 }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t = 1 मिनट = 60 सेकण्ड
1.82 × 10-2 = \(\frac { 2.303 }{ 60 }\)log\(\frac{1}{[R]}\)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 16
अतः 1 मिनट (60 sec) के बाद पदार्थ का बचा अंश = 0.335 अर्थात् 33.5%
अथवा
(a) (i) अभिक्रिया की कोटि:
रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों की सान्द्रता में परिवर्तन होता है, अतः किसी अभिक्रिया के प्रायोगिक वेग समीकरण (वेग नियम व्यंजक) में अभिकारकों की सान्द्रता के घातांकों का योग उस अभिक्रिया की कोटि कहलाता है।
अथवा
किसी अभिक्रिया में अभिकारक अणुओं की संख्या, जिनकी सान्द्रता में परिवर्तन होता है, उसे अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।
अभिक्रिया aA + bB → उत्पाद के लिए
वेग = k [A]x[B]y
अतः अभिक्रिया की कोटि (n) = x + y
इस अभिक्रिया में अभिकारक A के प्रति अभिक्रिया की कोटि x है एवं अभिकारक B के प्रति अभिक्रिया की कोटि y है। अभिक्रिया की कोटि शून्य, एक, दो, तीन अथवा भिन्नात्मक भी हो सकती है। किसी अभिक्रिया की कोटि शून्य होने का अर्थ है कि उस अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सान्द्रता के शून्य घात के समानुपाती होता है अर्थात् अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।

किसी रासायनिक अभिक्रिया के संतुलित समीकरण द्वारा अभिक्रिया की पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं होती। कुछ अभिक्रियाएँ एक पद में तथा कुछ अभिक्रियाएँ एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं। लेकिन एक पद में होने वाली अभिक्रियाएँ बहुत कम होती हैं। वे अभिक्रियाएँ जो एक पद में होती हैं, उन्हें प्राथमिक अभिक्रियाएँ (Elementary reactions) तथा एक से अधिक पदों में होने वाली अभिक्रियाओं को जटिल अभिक्रियाएँ (Complex reactions) कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में कुछ पद धीमे तथा कुछ पद तेज होते हैं, लेकिन धीमा पद अभिक्रिया का गति निर्धारक पद होता है जिससे अभिक्रिया का वेग लिखा जाता है।
जटिल अभिक्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं-

  • क्रमागत अभिक्रियाएँ
  • विपरीत अभिक्रियाएँ तथा
  • पाश्र्व अभिक्रियाएँ।

एथेन का CO2 तथा H2O में ऑक्सीकरण क्रमागत अभिक्रिया तथा फीनॉल का नाइट्रीकरण पार्श्व अभिक्रिया का उदाहरण है।

(ii) अभिक्रिया की आण्विकता:
प्राथमिक अभिक्रिया में भाग लेने वाली स्पीशीज (परमाणु, अणु या आयन ) की संख्या जो कि एक साथ टक्कर करके रासायनिक अभिक्रिया सम्पन्न करती हैं, उसे अभिक्रिया की आण्विकता कहते हैं।
उदाहरण – NH4NO2 → N2 + 2H2O (एक अणुक अभिक्रिया)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 18
तीन से अधिक अणुओं की उचित विन्यास के साथ एक साथ टक्कर होकर अभिक्रिया होने की सम्भावना बहुत ही कम होती है अतः अणुसंख्यता सामान्यतः तीन से अधिक नहीं होती है।
सरल अभिक्रियाओं की आण्विकता, संतुलित रासायनिक समीकरण में उपस्थित अभिकारक अणुओं की संख्या के बराबर होती है। उदाहरण-
H2 + I2 → 2HI (द्विअणुक अभिक्रिया)
जटिल अभिक्रियाएँ जिनमें तीन से अधिक अभिकारक अणु उपस्थित होते हैं, सामान्यतया एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं। जैसे-
KCIO3 + 6 FeSO4 + 3H2SO4 → KCI + 3Fe2 (SO4)3 + 3H2O

यह अभिक्रिया द्वितीय कोटि की है। इन जटिल अभिक्रियाओं की कोटि क्रियाविधि से ज्ञात होती है जिसमें धीमा पद गति निर्धारक पद होता है। अतः इनके लिए सम्पूर्ण अभिक्रिया की अणुसंख्यता का कोई महत्त्व नहीं होता है, केवल गति निर्धारक पद की अणुसंख्यता देखी जाती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 17

प्रश्न 2.
अभिक्रिया कोटि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया की कोटि:
रासायनिक अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों की सान्द्रता में परिवर्तन होता है, अतः किसी अभिक्रिया के प्रायोगिक वेग समीकरण (वेग नियम व्यंजक) में अभिकारकों की सान्द्रता के घातांकों का योग उस अभिक्रिया की कोटि कहलाता है।
अथवा
किसी अभिक्रिया में अभिकारक अणुओं की संख्या, जिनकी सान्द्रता में परिवर्तन होता है, उसे अभिक्रिया की कोटि कहते हैं।
अभिक्रिया aA + bB → उत्पाद के लिए
वेग = k [A]x[B]y
अतः अभिक्रिया की कोटि (n) = x + y
इस अभिक्रिया में अभिकारक A के प्रति अभिक्रिया की कोटि x है एवं अभिकारक B के प्रति अभिक्रिया की कोटि y है। अभिक्रिया की कोटि शून्य, एक, दो, तीन अथवा भिन्नात्मक भी हो सकती है। किसी अभिक्रिया की कोटि शून्य होने का अर्थ है कि उस अभिक्रिया का वेग अभिकारकों की सान्द्रता के शून्य घात के समानुपाती होता है अर्थात् अभिक्रिया का वेग, अभिकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।

किसी रासायनिक अभिक्रिया के संतुलित समीकरण द्वारा अभिक्रिया की पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं होती। कुछ अभिक्रियाएँ एक पद में तथा कुछ अभिक्रियाएँ एक से अधिक पदों में सम्पन्न होती हैं। लेकिन एक पद में होने वाली अभिक्रियाएँ बहुत कम होती हैं। वे अभिक्रियाएँ जो एक पद में होती हैं, उन्हें प्राथमिक अभिक्रियाएँ (Elementary reactions) तथा एक से अधिक पदों में होने वाली अभिक्रियाओं को जटिल अभिक्रियाएँ (Complex reactions) कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में कुछ पद धीमे तथा कुछ पद तेज होते हैं, लेकिन धीमा पद अभिक्रिया का गति निर्धारक पद होता है जिससे अभिक्रिया का वेग लिखा जाता है।

जटिल अभिक्रियाएँ तीन प्रकार की होती हैं-

  • क्रमागत अभिक्रियाएँ
  • विपरीत अभिक्रियाएँ तथा
  • पाश्र्व अभिक्रियाएँ।

एथेन का CO2 तथा H2O में ऑक्सीकरण क्रमागत अभिक्रिया तथा फीनॉल का नाइट्रीकरण पार्श्व अभिक्रिया का उदाहरण है।

प्रश्न 3.
आप एक अभिक्रिया के दर नियम (वेग व्यंजक) और दर स्थिरांक (वेंग स्थिरांक) से क्या समझते हैं? दर स्थिरांक के निम्नलिखित मात्रकों से अभिक्रिया की कोटि की पहचान कीजिए-
(i) L-1 mol s-1
(ii) L mol-1 s-1
उत्तर:
किसी अभिक्रिया के वेग को अभिकारकों की सांद्रता के पदों में व्यक्त करना ही वेग नियम कहलाता है। अतः वेग नियम वह व्यंजक होता है जिसमें किसी अभिक्रिया के वेग को अभिकारकों की मोलर सांद्रता के पद पर कोई घातांक लगाकर व्यक्त किया जाता है। यह किसी संतुलित रासायनिक समीकरण में अभिकर्मकों के स्टॉइकियोमीट्री गुणांक के समान या भिन्न होता है।
वेग नियम को वेग समीकरण या वेग व्यजंक भी कहते हैं।
उदाहरण : अभिक्रिया-
a A + bB → cC + dD के लिए
अभिक्रिया का वेग ∝[A]x [B]y
x तथा y, a व b के समान भी हो सकते हैं अथवा भिन्न भी हो सकते हैं तथा x व y का मान प्रयोग द्वारा ज्ञात किया जाता है, अतः इसे प्रायोगिक वेग समीकरण कहते हैं।
या वेग = k[A]x [B]y
\(\frac{-\mathrm{d}[\mathrm{R}]}{\mathrm{dt}}\) = k[A]x [B]y
इसे अवकल वेग समीकरण कहते हैं।
यहाँ k = समानुपाती स्थिरांक जिसे वेग स्थिरांक या वेग नियतांक भी कहते हैं। अतः वेग नियम अभिक्रिया के वेग तथा अभिकारकों की सान्द्रता में सम्बन्ध दर्शाता है।
(i) शून्य कोटि
(ii) द्वितीय कोटि।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 4.
दिए गए ताप पर 2.4 × 10-3 s-1 के दर स्थिरांक के साथ HCO2H का ऊष्मीय विघटन एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया होता है। परिकलन कीजिए HCO2H की एक आरम्भिक मात्रा को इसके तीन-चौथाई तक विघटन में कितना समय लगेगा?
उत्तर:
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t = \(\frac { 2.303 }{ k }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
t समय पर प्रारम्भिक मात्रा का तीन-चौथाई विघटन हो रहा है, अतः \(\frac { 1 }{ 4 }\) भाग बचेगा
t = \(\frac{2.303}{2.4 \times 10^{-3}}\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{\frac{1}{4}[\mathrm{R}]_0}\)
t = 0.9595 × 103 (log 4)
t = 0.9595 × 103 × 0.6021
t = 577.7 sec.

प्रश्न 5.
एक अभिक्रिया एक अभिकारक के सन्दर्भ में द्वितीय कोटि की है। यदि इस अभिकारक की सान्द्रता (i) दुगुनी कर दी जाए (ii) आधी कर दी जाए, तो दर (वेग) कैसे प्रभावित होती है?
उत्तर:
वेग = k [R]2
(i) अभिकारक की सान्द्रता दुगुनी करने पर,
वेग = k [2R]2
वेग = 4k [R]2
अतः दर पहले की तुलना में 4 गुना हो जाएगी।
(ii) अभिकारक की सान्द्रता आधी करने पर,
वेग = \(\mathrm{k}\left[\frac{\mathrm{R}}{2}\right]^2\)
वेग = \(\frac{\mathrm{k}}{4}[\mathrm{R}]^2\)
अतः दर पहले की एक-चौथाई रह जाएगी।

प्रश्न 6.
(अ) रासायनिक अभिक्रिया में 10°C ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दुगुनी वृद्धि हो जाती है। नामांकित वितरण वक्र से समझाइए।
(ब) ताप 350 K से 400 K परिवर्तित करने पर प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग स्थिरांक चार गुना बढ़ जाता है। सक्रियण ऊर्जा की गणना यह मानकर कीजिए कि यह ताप के साथ परिवर्तित नहीं होती है।
(R=8.314 जूल केल्विन-1 मोल-1, log 4=0.6021)
अथवा
(अ) उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया का वेग अधिक हो जाता है। इस कथन को अभिक्रिया निर्देशांक व ऊर्जा में वक्र बनाकर समझाइए।
(ब) एक अभिक्रिया के लिए क्रियाकारकों की प्रारम्भिक सान्द्रता 0.4 M तथा वेग स्थिरांक 2.5 × 10-4 मोल लीटर-1 से.-1 हैं। अभिक्रिया का अर्द्ध-आयुकाल ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(अ) किसी पदार्थ का ताप बढ़ाने पर Ea से अधिक ऊर्जायुक्त संघट्ट करने वाले अणुओं की संख्या में वृद्धि होती है। चित्र से स्पष्ट है कि वक्र मेंt +10 तापमान पर सक्रियण ऊर्जा या इससे अधिक ऊर्जायुक्त अणुओं को दर्शाने वाला क्षेत्रफल लगभग दो गुना हो जाता है अतः अभिक्रिया वेग भी दो गुना हो जाता है।
आर्रेनिसस समीकरण में कारक \(\mathrm{e}^{-\mathrm{E}_a / \mathrm{RT}}, \mathrm{E}_{\mathrm{a}}\) से अधिक गतिज ऊर्जा वाले अणुओं की भिन्न के संगत होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 19
(ब) log\(\frac{k_2}{k_1}\) = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{2.303 \mathrm{R}}\left[\frac{\mathrm{T}_2-\mathrm{T}_1}{\mathrm{~T}_1 \mathrm{~T}_2}\right]\)
प्रश्नानुसार,
\(\frac{\mathrm{k}_2}{\mathrm{k}_1}\) = 4, T1 = 350K, T2 = 400 K, R = 8.314 जूल केल्विन-1 मोल-1
मान रखने पर,
log 4 = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{2.303 \times 8.314}\left[\frac{400-350}{350 \times 400}\right]\)
0.6021 = \(\frac{\mathrm{E}_{\mathrm{a}}}{19.1471}\left[\frac{50}{140000}\right]\)
Ea = \(\frac{0.6021 \times 19.1471 \times 140000}{50}\)
Ea = 32279.71 J mol-1
अथवा
उत्तर:
(अ) उत्प्रेरक अभिक्रिया को वैकल्पिक पथ प्रदान करता है जिससे सक्रियण ऊर्जा कम हो जाती है अतः यह ऊर्जा अवरोध में कमी करके अभिक्रिया को सम्पन्न करता है जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है। इसे निम्नलिखित वक्र से समझाया जा सकता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 20
(ब) यह शून्य कोटि अभिक्रिया है क्योंकि इसमें प्रारम्भिक सान्द्रता दी गई है। अतः इसके लिए
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 21

प्रश्न 7.
एथिल ऐसीटेट के जल अपघटन का उदाहरण लेकर छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया को समझाइए।
उत्तर:
छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया-वह अभिक्रिया जिसकी कोटि एक हो तथा आण्विकता एक से अधिक हो उसे छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया कहते हैं। इस प्रकार की अभिक्रिया में दो अभिकारकों में से एक अभिकारक आधिक्य में होता है जिसकी सान्द्रता में परिवर्तन बहुत कम होता है अतः इसको नगण्य मानते हैं।
उदाहरण: एस्टर का अम्लीय माध्यम में जल अपघटन
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 22

प्रश्न 8.
शून्य कोटि एवं प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के लिए वेग स्थिरांक की इकाइयाँ लिखिए।
उत्तर:
शून्य कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई = mol L-1S-1
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई =S-1

प्रश्न 9.
अभिक्रिया की अर्धायु किसे कहते हैं? प्रथम कोटि अभिक्रिया के वेग समीकरण से अर्धायु ज्ञात करने का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया की अर्धायु-किसी अभिक्रिया में जितने समय में अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता आधी रह जाती है, उसे अभिक्रिया की अर्धायु कहते हैं।
प्रथम कोटि अभिक्रिया का अवकल वेग समीकरण-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
[R]0 = प्रारम्भिक सान्द्रता, [R] = t समय पर सान्द्रता,
t = समय तथा k = वेग नियतांक
अर्धायु t1/2 पर, [R] = \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{2}\)
ये मान उपर्युक्त समीकरण में रखने पर,
k = \(\frac{2.303}{\mathrm{t}^{\frac{1}{2}}} \log \frac{\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]_0}}{2}\)
या t1/2 = \(\frac { 2.303 }{ k }\)log2
= \(\frac { 2.303 }{ k }\)log2
= \(\frac { 2.303 }{ k }\) × 0.3010
t1/2 = \(\frac { 0.693 }{ k }\)

प्रश्न 10.
(a) अभिक्रिया A + B → P के लिए वेग नियम v = \(\mathbf{k}[\mathbf{A}]^{\frac{1}{2}}[\mathrm{~B}]^2\) से दिया जाता है। इस अभिक्रिया की कोटि क्या होगी ?
(b) एक प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग नियतांक k = 5.5 × 10-14s-1 से दिया जाता है । इस अभिक्रिया की अर्धआयु कीजिए ।
उत्तर:
(a) अभिक्रिया की कोटि = \(\frac { 1 }{ 2 }\)+2 = 2\(\frac { 1 }{ 2 }\) या 2.5
(b) प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए-
अर्धआयु (t\(\frac { 1 }{ 2 }\)) = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
t\(\frac { 1 }{ 2 }\) = \(\frac{0.693}{5.5 \times 10^{-14}}\)
t\(\frac { 1 }{ 2 }\) = 1.26 × 1013s

प्रश्न 11.
स्थिर आयतन पर SO2Cl2 के प्रथम कोटि के तापीय विघटन के दौरान निम्नलिखित आँकड़े प्राप्त हुए-
SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl2(g)
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 23
वेग नियतांक परिकलित कीजिए।
( दिया गया है – log 4 = 0.6021)
उत्तर:
अभिक्रिया SO2Cl2(g) → SO2(g) + Cl2(g)
अभिक्रिया Ag → B(g) + C(g) के समतुल्य है
अतः इसके लिए-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{P_i}{\left(2 P_i-P_t\right)}\)
यहाँ Pi = 0.4 atm, Pt = 0.7 atm तथा t = 100 s
k = \(\frac { 2.303 }{ 100 }\)log\(\frac{0.4}{(2 \times 0.4-0.7)}\)
= \(\frac { 2.303 }{ 100 }\)log\(\frac { 0.4 }{ 0.1 }\)
= \(\frac { 2.303 }{ 100 }\)log4
= \(\frac { 2.303 }{ 100 }\) × 0.6021
k = 0.01386 = 1.38 × 10-2 s-1

प्रश्न 12.
एक रासायनिक अभिक्रिया, R → P के लिए, समय (t) के प्रति सान्द्रता (R) में परिवर्तन को निम्नलिखित ग्राफ में दर्शाया गया है –
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 24
(i) इस अभिक्रिया की कोटि बताइए ।
(ii) ग्राफ की प्रवणता ( ढलान ) क्या होगी ?
उत्तर:
(i) यह एक शून्य कोटि अभिक्रिया है ।
(ii) इस ग्राफ का ढाल = – k = –\(-\left[\frac{[\mathrm{R}]_0-[\mathrm{R}]}{\mathrm{t}}\right]\)
यदि [R]0 = a तथा [R] = a – x तो k = \(-\frac{x}{t}\)

प्रश्न 13.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं की कोटि बताइए-
(अ) कृत्रिम नाभिकीय क्षय
(ब) उच्च दाब पर गैसीय अमोनिया का तप्त Pt सतह पर वियोजन
(स) एथीन का हाइड्रोजनन
(द) N2O5 का अपघटन ।
उत्तर:
(अ) कृत्रिम नाभिकीय क्षय प्रथम कोटि अभिक्रिया होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 25
(ब) उच्च दाब पर गैसीय अमोनिया का तप्त Pt सतह पर वियोजन शून्य कोटि अभिक्रिया होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 26
वेग = k [NH3]

(स) एथीन का हाइड्रोजनन (हाइड्रोजनीकरण) एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।
C2H4(g) + H2(g) → C2H6(g)
वेग = K [C2H4]

(द) N2O5 का अपघटन एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।
2N2O5 → 4NO2 + O2
वेग = k[N2O5]

प्रश्न 14.
किसी अभिक्रिया की अर्धायु क्या है? प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग समीकरण से यह पुष्टि कीजिए कि इस अभिक्रिया की अर्धायु अभिक्रियकों की प्रारम्भिक सान्द्रताओं पर निर्भर नहीं होती।
उत्तर:
किसी अभिक्रिया में अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता का आधा जितने समय में उत्पाद में बदल जाता है उसे अभिक्रिया की अर्धायु कहते हैं।
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग समीकरण
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\);
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) पर [R] = \(\frac{[\mathrm{R}]_0}{2}\)
R का यह मान रखने पर,
k = \(\frac{2.303}{\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}} \frac{[\mathrm{R}]_0}{\frac{[\mathrm{R}]_0}{2}}\)
या \(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log 2
= \(\frac { 2.303 }{ t }\) × 0.3010 (log 2 = 0.3010)
या \(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
अतः किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु निश्चित होती है, अर्थात् यह अभिकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता पर निर्भर नहीं होती।

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 रासायनिक बलगतिकी

प्रश्न 15.
किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई सेकण्ड-1 है। अभिक्रिया की कोटि क्या होगी ?
उत्तर:
यह एक प्रथम कोटि अभिक्रिया है।

प्रश्न 16.
अभिक्रिया 2A + B → उत्पाद हेतु अवकलन वेग समीकरण लिखिए।
उत्तर:
अभिक्रिया 2A + B → उत्पाद के लिए अवकलन वेग समीकरण निम्न प्रकार होगा-
\(-\frac{\mathrm{d}[\mathrm{R}]}{\mathrm{dt}}\) = K[A]2[B]

प्रश्न 17.
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु काल 10 sec
उत्तर:
प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु काल
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 0.693 }{ k }\) यहाँ k = वेग स्थिरांक
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = 10 sec.
अतः वेग स्थिरांक k = \(\frac{0.693}{t_{1 / 2}}\)
k = \(\frac { 0.693 }{ 10 sec. }\) = 0.0693 sec-1

प्रश्न 18.
जलीय विलयन में मेथिल ऐसीटेट के जल- अपघटन से निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 4 Img 27
(i) जल की सान्द्रता स्थिर रखते हुए प्रदर्शित कीजिए कि यह छद्म (स्यूडो) प्रथम कोटि की अभिक्रिया है।
(ii) समयांतराल 30 से 60 सेकण्ड के बीच अभिक्रिया की औसत दर का परिकलन कीजिए।
अथवा
(a) एक अभिक्रिया A + B → P के लिए दर दिया गया है। दर = k [A]2 [B]

  • यदि A की सान्द्रता दुगुनी कर दी जाए, तो अभिक्रिया की दर कैसे प्रभावित होती है ?
  • यदि B बड़ी मात्रा में उपस्थित हो, तो अभिक्रिया की सम्पूर्ण कोटि क्या है?

(b) एक अभिक्रिया 50% पूर्ण होने में 23.1 मिनट लेती है और अभिक्रिया प्रथम कोटि की है। इस अभिक्रिया को 75% पूर्ण होने में कितना समय लगेगा, उसका परिकलन कीजिए। ( दिया गया है – log 2 = 0.301, log 3 = 0.4771, log 4 = 0.6021)
उत्तर:
(i) जल की सान्द्रता स्थिर है अतः यह छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया है। प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक है-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{[\mathrm{R}]_0}{[\mathrm{R}]}\)
उपर्युक्त आँकड़ों से सूत्र द्वारा k का मान 30 S तथा 60 S पर ज्ञात करते हैं तो समान आता है जो कि 2.310 × 10-2 s-1 है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि यह एक छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया है।

(ii) अभिक्रिया की औसत दर (rav) = \(-\frac{\Delta[\mathrm{R}]}{\Delta \mathrm{t}}\)=\(\frac{\mathrm{C}_2-\mathrm{C}_1}{\Delta \mathrm{t}}\)
= \(-\frac{0.15-0.30}{60-30}\) = \(-\frac{(-0.15)}{30}\)
= 0.005
= 5 × 10-3 mol L-1
अथवा
(a) अभिक्रिया की दर = k [A]2 [B]

(i) जब A की सान्द्रता दुगुनी की जाती है तो उपरोक्त समीकरण के अनुसार
दर = k [24]2 [B]
दर = 4k [A]2 [B]
अतः अभिक्रिया की दर 4 गुना हो जाती है।
(ii) जब B बड़ी मात्रा में उपस्थित हो तो अभिक्रिया की दर इस पर निर्भर नहीं करेगी इसलिए अभिक्रिया की सम्पूर्ण कोटि 2 + 0 = 2 होगी।

(b) प्रथम कोटि अभिक्रिया के 50% पूर्ण होने में लगा समय अर्थात्
अर्धायु
\(\mathrm{t}_{\frac{1}{2}}\) = \(\frac { 0.693 }{ k }\)
या k = \(\frac{0.693}{t_{\frac{1}{2}}}\) \(\frac{0.693}{23.1 \mathrm{~min}}\)
= 0.03 = 3 × 10-2 min-1
अतः अभिक्रिया के 75% पूर्ण {[R] = 0.25} होने में लगा समय-
k = \(\frac { 2.303 }{ t }\)log\(\frac{\left[\mathrm{R}_0\right]}{[\mathrm{R}]}\)
t = \(\frac{2.303}{3 \times 10^{-2}}\)log\(\frac{1}{0.25}\) = \(\frac{2.303}{0.03}\)log 4
t = \(\frac { 2.303 }{ 0.03 }\)(0.6021) = 46.2 मिनट

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Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 6 पुष्पी पादपों का शारीर


(A) बहुविकल्पीय प्रश्न

1. मूल विभज्योतक का प्रशान्त केन्द्र कार्य करता है- (RPMT)
(A) परिपक्वन के दौरान भोजन के भण्डारण स्थल की तरह
(B) वृद्धि हार्मोन के भण्डारण की तरह
(C) विभत्र्योटक की क्षति ग्रस्त कोशिकाओं की पुनः पूर्ति के लिए संचय की तरह
(D) जल अवशोषण के क्षेत्र की तरह।
उत्तर:
(C) विभत्र्योटक की क्षति ग्रस्त कोशिकाओं की पुनः पूर्ति के लिए संचय की तरह

2. काग एथा (crok camblum), काग (cork) तथा द्विपीय वल्कुट (secondary cortex) सामूहिक रूप से कहलाते हैं- (AIPMT)
(A) कागजन
(B) परित्वक
(C) काग
(D) कागज अस्तर ।
उत्तर:
(B) परित्वक

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3. वार्षिक वलयों को गिनकर वृक्ष की आयु का पता लगाना कहलाता है- (UPCPMT)
(A) डेण्ड्रोक्रोनोलॉजी
(B) आयुवृद्धि
(C) क्रोनोलॉजी
(D) कॉन्ट्रालोजी
उत्तर:
(A) डेण्ड्रोक्रोनोलॉजी

4. छाल (bark) शब्द सम्बोधित करता है- (RPMT)
(A) फैलम, फैलाडर्म तथा संवहन कैम्बियम को
(B) पैरीडर्म तथा द्वितीयक जाइलम को
(C) कॉर्क, कैम्बियम तथा कॉर्क को
(D) फैलोजन, फैलम, फैलोडम तथा द्वितीयक फ्लोएम को
उत्तर:
(D) फैलोजन, फैलम, फैलोडम तथा द्वितीयक फ्लोएम को

5. कैस्पेरियन स्ट्रिप्स पायी जाती है- (RPMT)
(A) अन्तः स्त्वचा में
(B) बाध्य त्वचा में
(C) बल्कुट में
(D) परिरम्भ में
उत्तर:
(A) अन्तः स्त्वचा में

6. पाश्र्व विभज्योतक निम्नलिखित में वृद्धि हेतु उत्तरदायी होता है। (RPMT)
(A) लम्बाई
(B) मोटाई
(C) मुद्वतक
(D) बल्कुट
उत्तर:
(B) मोटाई

7. ड्यूरोमन पाया जाता है- (UPCPMT)
(A) द्वितीयक वस्तु के भीतरी भाग में
(B) रस वस्तु में
(C) द्वितीयक वस्तु के बाह्य भाग में
(D) परिरम्भ में
उत्तर:
(A) द्वितीयक वस्तु के भीतरी भाग में

8. बन्द संवहन पूलों में नहीं पाया जाता है- (CBSE AIPMT)
(A) भरण ऊतक
(B) कंजक्टिव ऊतक
(C) एधा
(D) मज्जा
उत्तर:
(C) एधा

(B) अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
ऊतक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
समान संरचना, उत्पत्ति एवं कार्य वाली कोशिकाओं का समूह ऊतक कहलाता है।

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प्रश्न 2.
विभज्योतक की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
विभाजन की अपार क्षमता का पाया जाना।

प्रश्न 3.
ऊतकों का अध्ययन क्या कहलाता है ?
उत्तर:
औतिकी (Histology) ।

प्रश्न 4.
शीर्षस्थ विभज्योतक कहाँ पाए जाते हैं ?
उत्तर:
मूल तथा प्ररोह के शीर्षो पर ।

प्रश्न 5.
पार्श्व विभज्योतक के उदाहरण लिखिए ।
उत्तर:
संवहन एधा (vascular cambium) तथा कार्क एधा (cork cambium)।

प्रश्न 6.
स्थाई ऊतक के प्रकार लिखिए।
उत्तर:

  • सरल ऊतक,
  • जटिल ऊतक,
  • विशिष्ट ऊतक ।

प्रश्न 7.
मृदूतक कोशिकाएँ जब प्रकाश संश्लेषी हो जाती है तो इसे क्या कहते हैं ?
उत्तर:
[क्लोरेन्काइमा (Chlorenchyma)।

प्रश्न 8.
मृदूतक का प्रमुख कार्य क्या है ?
उत्तर:
भोजन संचय करना ।

प्रश्न 9.
अधिधर्म की उत्पत्ति किससे होती है ?
उत्तर:
त्वचाजन (dermatogen) से ।

प्रश्न 10.
कैस्पेरियन पट्टियाँ कहाँ पायी जाती हैं ?
उत्तर:
जड़ की अन्तस्त्वचा (endodermis ) में।

प्रश्न 11.
अखरोट, नारियल आदि की अन्तःभित्ति कठोर क्यों होती है ?
उत्तर:
दृढ़ कोशिकाओं (stone cells) के कारण ।

प्रश्न 12.
वेलामेन ऊतक किन पौधों में पाए जाते हैं ?
उत्तर:
अधिपादपों (epiphytes ) की जड़ों में।

प्रश्न 13.
वाहिकाएँ किस ऊतक का अवयव हैं
उत्तर;
जाइलम (xylem) का ।

प्रश्न 14.
कम पैरन्काइमा वाला सघन काष्ठ क्या कहलाता है ?
उत्तर:
पिक्नोजाइलिक वुड (Pycnoxylic wood) ।

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प्रश्न 15.
वार्षिक वलय किसकी सक्रियता के कारण बनते हैं ?
उत्तर:
कैम्बियम की सक्रियता के कारण।

प्रश्न 16.
रबर क्षीरी ऊतक पाए जाने वाले पौधे का नाम लिखिए।
उत्तर:
मदार, कनेर ।

प्रश्न 17.
किसी वाहिका रहित आवृतबीजी का नाम लिखिए।
उत्तर:
ट्रोकोडेन्ड्रान, हाइड्रिला ।

प्रश्न 18.
कैलिप्ट्रोजन का क्या कार्य है ?
उत्तर:
मूलगोप (root cap) का निर्माण करना ।

प्रश्न 19.
जलीय आवृतबीजियों में प्लावकता प्रदान करने वाले ऊतक का नाम लिखिए।
उत्तर:
ऐरन्काइमा (aerenchyma)।

प्रश्न 20.
ऊतक शब्द का प्रयोग किस वैज्ञानिक ने किया ?
उत्तर:
एन. मयू (grew) ने ।

प्रश्न 21.
एक्सार्क जाइलम तथा पॉलीआर्क संवहन पूल किसमें मिलते
उत्तर:
‘एकबीजपत्री मूल में ।

प्रश्न 22.
भोजपत्र किससे प्राप्त होता है ?
उत्तर:
बेटुला (Batula) नामक पौधे की छाल से ।

प्रश्न 23.
किस एकबीजपत्री पौधे के तने में संवहन पूल एक घेरे में स्थित होते हैं ?
उत्तर:
गेहूँ (Triticum) में ।

प्रश्न 24.
वार्षिक वलय बैण्ड क्या होते हैं ?
उत्तर:
द्वितीयक जाइलम तथा मैड्यूलरी किरणों के छल्ले ।

(C) लघु उत्तरीय प्रश्न – I

प्रश्न 1.
जाइलम के तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर:
वाहिनिकाएँ (tracheids), वाहिकाएँ ( vessels), जाइलम मृदूतक (xylem parenchyma) तथा जाइलम तन्तु (xylem fibres ) ।

प्रश्न 2.
फ्लोएम के तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर:
सहचर कोशिकाएँ (companian cells), चालनी नलिकाएँ (sieve tubes), फ्लोएम पैरन्काइमा (Phloem parenchyma) तथा फ्लोएम तन्तु (phloem fibres ) ।

प्रश्न 3.
यूस्टील किसे कहते हैं ?
उत्तर:
द्विबीजपत्रों तनों में संवहन पूल संयुक्त, कोलेटरल व खुले होते हैं। तथा ये एक वलय में व्यवस्थित होते हैं। दो पूलों के बीच पिथ किरणें होती हैं। यह अतिविकसित स्टील है। इसे यूस्टील (eustele) कहते हैं।

प्रश्न 4.
एटेक्टोस्टील किसे कहते हैं ?
उत्तर:
एक बीजपत्री तनों में संवहन पूल संयुक्त, कोलेटरल व बन्द होते हैं तथा भरण ऊतक में बिखरे रहते हैं। इसे एटेक्टोस्टील ( atactostele) कहते हैं ।

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प्रश्न 5.
अरीय संवहन पूल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जब जाइलम एवं फ्लोएम अलग-अलग समूहों में तथा भिन्न-भिन्न अर्द्धव्यासों पर स्थित होते हैं तब इन्हें अरीय संवहन पूल (radial vascular bundles ) कहते हैं।

प्रश्न 6.
संयुक्त पूल किसे कहते हैं ?
उत्तर:
जब जाइलम तथा फ्लोएम एक ही पूल में स्थित होते हैं और एक ही अर्द्धव्यास में स्थित होते हैं तो इन्हें संयुक्त पूल (conjoint vascular bundles) कहते हैं।

प्रश्न 7.
अधिचर्म में पाए जाने वाले चार उपांगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • उपत्वचा (cuticle)
  • रन्ध्र (stomta)
  • रोम (hairs)
  • बुल्लीफार्म कोशिकाएँ (bulliform cells) ।

प्रश्न 8.
बाह्यमूल त्वचा क्या होती है ?
उत्तर:
कुछ पौधों की पुरानी मूलों की मूलीय त्वचा नष्ट हो जाने पर वल्कुट की बाहरी कोशिकाएँ क्यूटिन युक्त या लिग्नीभूत होकर रक्षक आवरण बनाती हैं। इसके स्तर को बाह्य मूल त्वचा कहते हैं।

प्रश्न 9.
जड़ के बाहरी स्तर को रोमधर स्तर क्यों कहते हैं ?
उत्तर:
जड़ का बाहरी स्तर मृदूतक कोशिकाओं का एक कोशिकीय स्तर होता है जिसकी कोशिकाएँ वृद्धि करके रोम बनाती हैं, जिन्हें मूलरोम कहते हैं इसीलिए बाहरी स्तर रोमधर स्तर कहलाता है।

प्रश्न 10.
एक्सार्क तथा एण्डार्क जाइलम में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
एक्सार्क जाइलम में प्रोटोजाइलम परिधि की ओर तथा मेटाजाइलम केन्द्र की ओर होता है, जैसे-जड़ों में, जबकि एण्डार्क जाइलम में प्रोटोजाइलम सदैव केन्द्र की ओर तथा मेटाजाइलम परिधि की ओर होता है, जैसे-तनों में ।

प्रश्न 11.
स्थाई ऊतक क्या होते हैं
उत्तर:
इस श्रेणी के ऊतक ऐसी विभज्योतकी कोशिकाओं से बने होते हैं। जो विभाजन के पश्चात् एक निश्चित स्वरूप और परिमाण ग्रहण कर लेती हैं। ये पतली या मोटी भित्ति वाली जीवित या मृत कोशिकाएँ होती हैं। इनमें विभाजन की क्षमता नहीं होती है।

प्रश्न 12.
भरण विभज्योतक क्या होता है ?
उत्तर:
यह शीर्ष विभज्योतक का प्रमुख भाग होता है। इससे अधस्त्वचा, वल्कुट, अन्तस्त्वचा, परिरम्भ, मज्जा रश्मियाँ तथा मज्जा का निर्माण होता है।

प्रश्न 13.
शान्त क्षेत्र क्या होते हैं ?
उत्तर:
पौधे के जिस भाग की कोशिकाओं में DNA एवं RNA की मात्रा कम होती है एवं विभाजन की क्षमता कम होती है। उसे शान्त क्षेत्र (quiescent centre) कहते हैं।

प्रश्न 14.
पृष्ठाधारी पत्ती की ऊपरी सतह अधिक गहरी क्यों दिखाई देती
उत्तर:
पृष्ठाधारी पत्ती की ऊपरी सतह में स्थित खम्भ मृदूतक (pallisade parenchyma) की कोशिकाएँ परस्पर सटी हुई होती हैं और इनमें हरित लवक अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। अतः हरित लवक की अधिक उपस्थिति के कारण पृष्ठाधारी पत्तियों की ऊपरी सतह अधिक गहरी दिखाई देती है।

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प्रश्न 15.
अन्तःकाष्ठ एवं रस-काष्ठ में से कौन-सी अधिक टिकाऊ होती ? कारण बताइए।
उत्तर:
अन्तः काष्ठ (heart wood) रस-काष्ठ (sap wood) की अपेक्षा अधिक टिकाऊ एवं सूक्ष्म जीवियों के लिए प्रतिरोधी होती है। अन्तःकाष्ठ की कोशिकाएँ तेल, रेजिन, गोंद, टेनिन आदि के जमाव के कारण कठोर हो जाती है। जबकि रस- काष्ठ जीवित कोशिकाओं की बनी होती है।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न – II

प्रश्न 1.
मूल शीर्ष तथा प्ररोह शीर्ष में अन्तर लिखिए ।
उत्तर:
मूलशीर्ष तथा प्ररोह शीर्ष में अन्तर (Differences between root apex and shoot apex)

मूल शीर्ष (Root apex)प्ररोह शीर्ष (Shoot apex )
1. यह उपान्तस्थ होता है।यह शीर्षस्थ होता है।
2. मूल शीर्ष छोटा होता है ।प्ररोह शीर्ष लम्बा होता है।
3. शीर्ष पतला होता है।अपेक्षाकृत चौड़ा होता है।
4. मूल शीर्ष मूल गोप से ढँका होता है ।शीर्ष पर्ण आद्यकों (leaf premordia) से घिरा होता है।
5. पार्श्व उपांग नहीं पाए जाते हैं।पर्ण आधकों (leaf promordia) के रूप में होते हैं ।
6. मूलीय शाखाएँ मूल शीर्ष (root apex) से दूर निकलती है।प्ररोह शाखाएँ कक्षस्थ कलिकाओं (axillary bud) के रूप में शीर्ष विभज्योतक के बहिर्जात (exogenous) निकलती हैं।
7. पर्व एवं पर्वसन्धियाँ (nodes) विकसित नहीं होते हैं ।पर्व एवं पर्वसन्धियाँ (nodes) विकसित होते हैं।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित का एक-एक मुख्य कार्य बताइए-
(अ) दृढ़ ऊतक
(आ) वेलामेन
(इ) एधा
(ई) जाइलम
(उ) मृदूतक
(ऊ) चालनी नलिका
(ए) विभज्योतक
(ऐ) वुल्लीफार्म कोशिकाएँ
(ओ) खम्म ऊतक
(औ) वाहिका
(अं) द्वार कोशिकाएँ ।
उत्तर:
(अ) दृढ़ ऊतक ( Sclerenchyma ) – पौधों को यांत्रिक सहारा देता है।
(आ) वेलामेन (Velamen ) – वायु से नमी अवशोषित करता है।
(इ) एधा (Cambium) – पौधों की द्वितीयक वृद्धि में भाग लेता है।
(ई) जाइलम ( Xylem ) – पौधों में जल तथा खनिजों का संवहन करता है ।
(उ) मृदूतक (Parenchyma ) – भोजन संचय करता है।
(ऊ) चालनी नलिका ( Sieve tube ) – संश्लेषित भोजन का करती है।
(ए) विभज्योतक (Meristem) – पौधों की वृद्धि में भाग लेना है।
(ऐ) बुल्लीफार्म कोशिकाएँ (Bulliform cells) – अधिक वाष्पोत्सर्जन (transpiration) से रक्षा करना ।
(ओ) खम्भ ऊतक (Pallisade tissue ) – प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) में भाग लेता है।
(औ) वाहिका (Vessel ) – जल एवं खनिजों का संवहन।
(अं) द्वार कोशिकाएँ (Guard cells) – रन्ध्रों को खोलने एवं बन्द करने का कार्य करती हैं।

प्रश्न 3.
विभाजन के तल के आधार पर विभज्योतकों के प्रकार लिखिए।
उत्तर:
विभाजन के तल के आधार पर विभज्योतक (Meristematic tissue on the basis of Plane of Division ) – ये निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-

  1. स्थूल विभज्योतक (Mass meristem) – इनकी कोशिकाओं में विभाजन सभी सम्भव तलों में होते हैं। ये विभाजित होकर अनियमित आकार की संरचनाएँ बना लेती हैं, जैसे- भ्रूणपोष में।
  2. पटिट्का विभज्योतक (Plate meristem) – इसकी कोशिकाएँ अपनत तल (anticlinal plane) में विभाजित होती है। विभाजन के पश्चात् ये पट्टिका जैसी रचना बनाती हैं। ये एकपंक्तिक फलक का निर्माण करती हैं।
  3. पट्टी विभज्योतक (Rib meristem) – इन कोशिकाओं में अपनत व परिनत (anticlinal and periclinal) विभाजन होते हैं जिससे अनुदैर्ध्य अक्ष पर पट्टियों का निर्माण होता है।

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प्रश्न 4.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए-
(क) अष्ठि कोशिकाएँ
(ख) जलरन्ध्र
उत्तर:
(अ) अष्ठि कोशिकाएँ (Stone cells or Scleroids) – अष्ठि कोशिकाएँ समव्यासी (isodimetric) या अनियमित आकृति की निर्जीव कोशिकाएँ हैं जिनकी भित्ति मोटी एवं लिग्निन युक्त होती हैं जिससे इनकी कोशिका गुहा (cell lumen) संकरी हो जाती है। इनकी भित्ति में शाखित या अशाखत गर्त होते हैं।

इन्हें स्क्लीरोटिक कोशिकाएँ ( sclerotic cells) कहते हैं। अष्ठि कोशिकाएँ सख्त बीजों, अष्ठिफलों, के खोल जैसे अखरोट, तथा वृक्षों की छाल के अतिरिक्त द्विबीजपत्री तने व पत्तियों में कार्टेक्स, मज्जा, फ्लोएम में तथा कुछ फलों जैसे नाशपाती नख आदि के गूदे में पायी जाती हैं।

(ब) जलरन्ध्र (Hydathodes) –

रबरक्षीरी ऊतक (Laticiferous tissue ) – यह एक प्रकार का स्रावी (secretory ) ऊतक है जो आवृतबीजियों में बहुतायत से पाया जाता है। इससे एक गाढ़ा या पतला, रंगीन या रंगहीन, चिपिचपा पदार्थ स्त्रावित होता है। यह जल में विलेय या कलिलीय (calloidal ) अवस्था में पड़े कई पदार्थों जैसे- प्रोटीन्स, शर्कराएँ, गोंद, एल्केलॉइडस, एन्जाइम, मण्डकण आदि का मिश्रण है जो हल्का पीला, सफेद, दूधिया या जल के समान हो सकता है ।

इस तरल को रबरक्षीर या लेटेक्स (Latex) कहते हैं। रबर (Hevea) और फाइकस (Ficus ) की कुछ जातियों में मिलने वाले रबरक्षीर से रबर प्राप्त होता है। पपीता में मिलने वाले लेटेक्स में पेपेन (papain) नामक एल्केलॉइड होता है। रबरक्षीरी ऊतकों में मुख्यतः दो प्रकार की रचनाएँ मिलती हैं-
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(अ) रबरक्षीरी को शिकाएँ (Laticiferous cells) – ये
लम्बी शाखा युक्त तथा बहुकेन्द्रीय होती हैं। इनका निर्माण भी विभज्योतकों से ही होता है । जैसे -मदार ( Calotropis ), यूफोर्बिया (Euphorbia) आदि ।

(ब) रबर क्षीरी वाहिकाएँ (Laticiferous vessels) – इनका निर्माण अनेक रबरक्षीरी कोशिकाओं के आपस में मिलने से होता है। ये जीवित तथा बहुकेन्द्रीय होती हैं। इनमें अनुप्रस्थ भित्तियाँ नहीं होती हैं। जैसे – पपीता, पोस्त ।
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2. ग्रन्थिल ऊतक (Glandular Tissue) – इस ऊतक की कोशिकाएँ ग्रन्थिल (Glandular) होती हैं। ये पौधों के बाहरी तथा भीतरी भागों में पाये जाते हैं, इनसे तेल, गोंद, मकरन्द, विकर, श्लेष्म रॉल, टैनिन आदि अनेक पदार्थों का स्त्रावण होता है। स्थिति के आधार पर ये ग्रन्थियाँ दो प्रकार की होती हैं-

(a) बाह्य ग्रन्थि (External Glands) – य बाह्य त्वचा में मिलती है। कभी-कभी ये बाह्य त्वचा पर निकले छोटे-छोटे रोमों पर होती हैं। इन्हें प्रन्थिल रोम कहते हैं। जलरन्ध्र मन्थिल रोम, मकरन्द, प्रन्थियाँ, कीट भक्षी पौधों की पाचक प्रन्थियाँ आदि इसी प्रकार की प्रन्थियाँ होती हैं।

(i) जलरन्ध्र (Hydathodes) – जलरन्ध्र पौधों की पत्तियों के किनारों या शीर्ष पर पायी जाने वाली वे अन्तः मन्थियाँ हैं जिनसे जल का स्रावण होता है। इस ग्रन्थि के सिरे पर एक छिद्र होता है जो द्वार कोशिकाओं (gaurd cells) द्वारा घिरा रहता है रन्ध्र के नीचे वायु गुहा तथा विशेष मृदूतकीय कोशिकाएँ ( epithem) होती हैं जिनके नीचे के अवकाशों में जल भरा होता है। इनके नीचे जाइलम वाहिकाएँ पायी जाती हैं। यह जल बूंद-बूंद करके पत्तियों के किनारों से टपकता रहता है जैसे-टमाटर, घास आदि ।

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(ii) पाचक ग्रन्थियाँ (Digestive glands) – अनेक कीटभक्षी पौधों (insectivorous plants) में पाचक प्रन्थियाँ पायी जाती हैं। इनसे पाचक एन्जाइम स्रावित होते हैं जो कीटों को पचाने का कार्य करते हैं। जैसे – ड्रोसेरा ।
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(iii) मकरन्द ग्रन्थियाँ (Nectaries) – मकरन्द प्रन्थियाँ प्रायः अण्डाशय के चारों ओर एक डिस्क के रूप में पायी जाती हैं, जैसे- डिस्कीप्लोरी में ।

(iv) ग्रन्थिल रोम (Glandular hairs) – ये बाह्य त्वचा से निकले छोटे-छोटे रोमों के ऊपर पायी जाती हैं। इनसे गोंद की तरह चिपचिपे पदार्थ का स्त्रावण होता है। जैसे- प्लम्बेगो में ।

(b) आन्तरिक ग्रन्थियाँ (Internal Glands) – ये ऊतकों के अन्दर पायी जाती हैं। नीबू, नारंगी आदि में पायी जाने वाली तेल ग्रन्थि, पाइनस की रेजिन ग्रन्थि पान की म्यूसिलेज, प्रन्थि आदि आन्तरिक प्रन्थि के उदाहरण हैं।

  • तेल ग्रन्थि (Oil glands) – इन प्रन्थियों से सुगन्धित तेलों का स्राव होता है। इस प्रकार की ग्रन्थियाँ नीबू नारंगी आदि में होती हैं।
  • पाइनस की रेजिन ग्रन्थियाँ- गोंद तथा टेनिंन स्रावित करने वाली ग्रन्थियाँ आन्तरिक प्रन्थियों के उदाहरण हैं ।HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 6 पुष्पी पादपों का शारीर 4

प्रश्न 5.
रबरक्षीरी ऊतक कहां पाए जाते हैं ? इससे स्रावित पदार्थ के लक्षण बताइए ।
उत्तर:
रबरक्षीरी ऊतक (Laticiferous Tissue)
यह एक प्रकार का स्रावी (secretory) ऊतक है। आवृतबीजी पौधों में बहुतायत से पाया जाता है। इससे एक प्रकार का तरल स्रावित होता है। यह गाढ़ा या जलीय होता है। यह जल में घुलनशील या कोलॉयडल अवस्था में पाए जाने वाले पदार्थों जैसे प्रोटीन्स, शर्कराएँ, गोंद, ऐल्केलॉयड्स, एन्जाइम्स, मण्ड कण आदि का मिश्रण होता है यह हल्का पीला, सफेद (white) दूध को तरह या जल की तरह हो सकता है। इस तरलं को रबरक्षीर या लेटेक्स (latex) कहते हैं। हेविया (Hevea) और फाइकस (FYeus) की कुछ जातियों से मिलने वाले रबरक्षीर से रबर (rubber) प्राप्त होता है। अफीम पोस्त पादप से स्रावित रबरक्षीर (latex) ही है।

पपीता (Carica) से मिलने वाले रबरक्षीर में पैपेन (papain) नामक एन्जाइम होता है। रबरक्षीरी कोशिकाएँ। रबरक्षीरी ऊतकों में प्रमुखतः दो प्रकार की संरचनाएँ मिलती हैं रबरक्षीरी कोशिकाएँ (Latex cells)-ये लम्बी, शाखायुक्त तथा बहुकेन्द्रकीय होती हैं। ये विभज्योतकों से बनती हैं, जैसे – मदार (Calotropis), यूफोर्बिया (Euphorbia) आदि में। रबरक्षीरी वाहिकाएँ (Latex vessels)-इनका निर्माण अनेक रबरक्षीर कोशिकाओं के जुड़ने से होता है। ये जीवित एवं बहुकेन्द्रकीय होती हैं। इनमें अनुप्रस्थ भित्तियाँ नहीं होती हैं, जैसे-पपीता (Carica), पोस्त (Poppy), हेविया (Hevea), फाइकस (Ficus sp.) आदि।

प्रश्न 6.
वातरन्ध्र क्या है ? सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वार (Lenticel) – द्वितीयक वृद्धि के फलस्वरूप, कार्क एधा (cork cambium) सक्रिय होकर वायुरुद्ध कार्क (cork) बनाती है जिससे जीवित ऊतकों का सम्बन्ध बाह्य बातावरण से समाप्त हो जाता है। कार्क बनने के कारण श्वसन, वाष्पोत्सर्जन आदि जैविक क्रियाओं में बाधा उत्पन्न होती है। कार्क एधा से बाहर की ओर कुछ स्थानों पर तनों में कार्क के स्थान पर ढीली-ढाली मृदूतकीय कोशिकाएँ बनती हैं इन्हें सम्पूरक कोशिकाएँ कहते हैं। अधिक दबाव के कारण बाह्य त्वचा फट जाती हैं। यह संरचना वातरन्ध्र कहलाती है ।
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द्वितीयक वृद्धियुक्त तने पर वातरन्ध्र-

  • बाह्य स्वरूप,
  • काट में संरचना (आवर्द्धित) ।

वातरन्ध्र द्वारा पौधे के उस अंग तथा बाह्य वातावरण से सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इनके द्वारा गैसों का विनिमय तथा वाष्पोत्सर्जन होता है।

प्रश्न 7.
टायलोसिस क्या है ? समझाइए ।
उत्तर:
अन्तःकाष्ठ (Heart wood) एवं टायलोसिस (Tylosis) – द्वितीयक वृद्धि के फलस्वरुप नया जाइलम या काष्ठ (wood) बनता है और पुराना जाइलम जो केन्द्र की ओर स्थित होता है व्यर्थ हो जाता है। किसी पुराने वृक्ष के कटे स्तम्भ को देखने पर इसका केंन्द्रीय भाग अन्तः काष्ठ (heart wood) कहलाता है । अन्तः काष्ठ की सभी कोशिकाएँ मृत एवं ज्यादा दृढ़ होती हैं। इस भाग की वाहिकाएँ भी अनेक पदार्थों और रचनाओं में बन जाने के कारण रूंध जाती है। तेल, रेजिन, गोंद आदि पदार्थ इनमें बहुतायत में एकत्रित हो जाने के कारण अन्तः काष्ठ अधिक मजबूत तथा गहरे रंग का हो जाता हैं।

जाइलम मृदूतक से वाहिकाओं के गर्तौ (pits) में होकर गुब्बारे की तरह की रचनाएँ बन जाती हैं, इन्हें टायलोसिस (tylosis) कहते हैं। इनमें उपरोक्त पदार्थ भरे होते हैं। ये वाहिकाओं को अवरुद्ध कर देते हैं। अन्तः काष्ठ केवल कंकाल का ही कार्य करता है। इसमें किसी प्रकार का संवहन नहीं होता। यह भाग अधिक मजबूत एवं टिकाऊ होने के कारण फर्नीचर एवं अन्य सामान बनाने के काम आता है।

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प्रश्न 8.
मृदूतक तथा दृढ़ ऊतक में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
मृदूतक तथा दृढ़ ऊतक में अन्तर (Differences between parenchyma and sclerenchyma)

मृदूतक (Parenchyma)दृढ़ ऊतक (Sclerenchyma)
1. परिपक्व होकर भी जीवित बनी रहती हैं।परिपक्व होकर मृत हो जाती हैं।
2. कोशिकाएँ हरितलवक युक्त होती हैं इनके बीच अन्तराकोशीय स्थान पाए जाते हैं ।हरित लवक एवं अन्तराकोशीय स्थान (intercellula spaces ) नहीं पाए जाते हैं।
3. कोशिकाओं की भित्तियाँ पतली तथा सेलुलोस की बनी होती हैं।कोशिका भित्तियाँ लिग्नीकृत होने से स्थूलित हो जाती हैं।
4. इसकी कोशिकाएँ प्रायः समव्यासी होती हैं।कोशिकाएँ समव्यासी या रेशामय होती हैं।
5. कोशिकाएँ जल, भोज्य पदार्थ का संचय करती हैं। इसके अतिरिक्त भोजन निर्माण गैस विनिमय, प्लवन आदि में भाग लेती हैं।यह पौधों को यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं।

प्रश्न 9.
वार्षिक वलय क्या होते हैं ? समझाइए ।
उत्तर:
वार्षिक क्लय (Annual rings)-बहुवर्षी (perennial) पौधों के तनों में द्वितीयक जाइलम के स्तरों का निर्माण संकेन्द्रित (concentric) होता है। तने की अनुपस्थ काट में ये स्तर वलयों (rings) के रूप में दिखाई देते हैं जिन्हें वृद्धि वलय कहते हैं। कुछ स्थानों की जलवायु में बहुत अन्तर पाया जाता है जिसके कारण संवहन एधा (vascualr cambium) की सक्रियता बहुत प्रभावित होती है। विश्व के शीतोष्ण (temperate) क्षेत्रों में वर्षभर जलवायु एक जैसी नहीं होती है जिससे केम्बियल सक्रियता भिन्न होती है। शरद ऋतु (winter) में एधा (canbuim) का विभाजन बन्द हो जाता है।

बसन्त ऋतु (spring) में यह अपनी सक्रियता पुनः प्राप्त करके विभाजन करना प्रारम्भ कर देता है। इस ॠतु में वृक्षों की वृद्धि स्पष्ट होती है और III पत्तियों का निर्माण अधिक होता है। इसके लिए जल एवं खाद्य पदार्थों के संवहन की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। यह कार्य जाइलम तथा फ्लोएम द्वारा होता है, अत: कैम्बियम की सक्रियता से बड़ी अवकाशों वाली वाहिकाओं का निर्माण होता है। इस प्रकार बने द्वितीयक जाइलम को स्र्रिंग काष्ठ (spring wood) कहते हैं।

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प्रश्न 10.
रसकाष्ठ एवं अन्तःकाष्ठ पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
रसकाष्ठ एवं अन्तः काष्ठ (Sap wood and Heart wood) – द्वितीयक वृद्धि के फलस्वरूप बना द्वितीयक जाइलम बहुत क्रियाशील होता है जिसकी ट्रेकियल कोशिकाओं द्वारा पानी विभिन्न भागों में जाता है तथा जाइलम की मृदूतकीय कोशिकाओं (parenchymatous cell) में बहुत कम मात्रा में कार्बनिक भोज्य पदार्थ एकत्रित रहता है। पुराना जाइलम केन्द्र की ओर चला जाता है जिसकी कोशिकाओं का जीवद्रव्य नष्ट हो जाता है तथा उनमें कार्बनिक पदार्थ जैसे- गोंद, टेनिन, तेल आदि जमा हो जाते हैं।

ट्रेकियल कोशिकाओं में टायलोसिस ( tylosis) बन जाते हैं। अतः ये बन्द हो जाती हैं तथा पानी का संवहन नहीं करती हैं। इसे अन्तःकाष्ठ (heart wood) कहते हैं। द्वितीयक जाइलम की जीवित मृदूतकीय कोशिकाएँ जो जल संवहन करती हैं जो हल्के रंग की होती हैं रस काष्ठ (sap wood) कहलाती हैं। वाली वाहिकाओं का निर्माण होता है। इस प्रकार बने द्वितीयक जाइलम को स्र्रिंग काष्ठ (spring wood) कहते हैं।

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प्रश्न 11.
एक समद्विपार्श्विक पत्ती की आन्तरिक संरचना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
समद्विपार्श्विक या एकबीजपत्री पत्ती की आन्तरिक संरचना (Internal Structure of Isobilateral or monocot leaf)-
एक बीजपत्री पादपों में पत्तियाँ प्रायः ऊर्ध्व (erect) होती है। जिससे इनकी दोनों सतहों पर सूर्य का प्रकाश लगभग बराबर मात्रा पड़ता है। इसीलिए इन पत्तियों में दोनों बाह्यत्वचाओं के बीच स्थित पर्णमध्योतक (mesophyll) केवल एक ही प्रकार का होता है। एक प्रारुपिक (Typical) एक बीजपत्री पत्ती की काट का सूक्ष्मदर्शीय अध्ययन करने पर निम्नलिखित रचनाएँ दिखाई देती हैं-

1. बाह्य त्वचा (Epidermis ) – यह एक कोशिका मोटी परत है जो ऊपरी तथा निचली बाह्य त्वचा ( epidermis ) कहलाती है। दोनों ही बाह्य त्वचाओं में रन्ध्र (stomata) उपस्थित होते हैं तथा दोनों ही के ऊपर मोटी क्यूटिकल का आवरण पाया जाता है। ऊपरी बाह्यत्वचा में दो रन्ध्रों के बीच की कोशिकाएँ बड़ी तथा रंगहीन होती है। इन्हें आवर्ध त्वक कोशिका (bulliform cells) अथवा मोटर सेल्स (motor cells) कहते हैं।

2. पर्णमध्योतक (Mesophyll) – यह दोनों बाह्य कोशिकाओं के बीच पाया जाने वाला ऊतक है। सम्पूर्ण पर्णमध्योतक (mesophyll) केवल स्पंजी पैरन्काइमा का बना होता है। इसकी कोशिकाएँ विभिन्न आकारों वाली होती हैं तथा इनमें पर्ण हरिम (Chlorophyll) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। ऊपरी तथा निचली बाह्य त्वचाओं में स्थित रन्ध्रों के नीचे अधोरन्ध्री कोष्ठ पाए जाते हैं।

3. संवहन पूल (Vascular bundles ) – प्रत्येक संवहन पूल मृदूतकीय पूलाच्छद (parenchymatous bundle sheath) से घिरा हुआ होता है। संवहन पूल विभिन्न आमाप के बहिपोषवाही (collateral) और अवर्धी (closed) होते हैं। बड़े पूलों के ऊपर व नीचे दोनों ओर दृढ़ोतक का समूह होता है। मूलाच्छद एक प्रकार के संचयी ऊतक का कार्य करता है। इसकी कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट तथा मण्ड कण पाए जाते हैं।
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प्रश्न 12.
मूल तथा तने की आन्तरिक संरचना में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
जड़ (root) तथा तना (stem) की आन्तरिक संरचना में अन्तर-

जड़ (root)तना (stem)
1. बाबत्वचा को एपीब्लेमा कंहते हैं जिस पर उपचर्म (culticle) का प्रायः अभाव होता है।1. बाहा त्वचा को एपीडर्मिस कहते हैं। इस पर उपचर्म (cuticle) पायी जाती है।
2. मूलीय त्वचा (epiblend) से अनेक एक कोशिकीय रोम निकलते हैं।2. बाहा त्वचा (epidermis) पर बहुकोशिकीय रोम मिलते हैं ।
3. कारेंक्स की कोरिकाएँ हरितलवक (chloroplasts) रहित होती हैं।3. तरुण तनों के काटेंक्स में हरित लवक (chloroplasts) होते हैं किन्तु पुराने तर्नों में नहीं।
4. अन्तस्वचा अंक विकसित होती है।4. अन्तस्वचा (endodermis) कम विकसित। एकबीजपत्री में अनुपस्थित।
5. संवह्न पूल(vascular bundles) अरीय होते हैं।5. संवहन पूल (Vacular bundles) संयुक्त, कोलेटरल या बाइकोलेटरल या कमी-कभी संकेन्द्री (concentric) होते हैं।
6. जाइलम एक्सार्क होता है।6. जाइलम एण्डार्क होता है।
7. मूल शीर्ष की संरचना सरल होती है।7. प्ररोह शीर्ष की संरचना जटिल होती है।

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प्रश्न 13.
एकबीजपत्री पत्ती तथा द्विबीजपत्री पत्ती की आन्तरिक संरचना में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
एकबीजपत्री पत्ती तथा द्विबीजपत्री पत्ती की आन्तरिक संरचना में अन्तर-

एकबीजपत्री पत्ती (Monocot leaf)द्विबीजपत्री पती (Dicot leaf)
1. समद्विपार्श्विक (isobilateral) पत्ती होती है।1. पृष्ठाधारी (dorsoventral) पत्ती होती है।
2. इसमें दोनों बाह्य त्वचा समान होती हैं।2. इसमें दोनों बाह्य त्वचा भिन्न-भिन्न होती हैं।
3. रन्ध्र दोनों सतहों पर समान रूप से मिलते हैं।3. रन्ध्र प्रायः निचली बाह्य त्वचा पर मिलते हैं।
4. बाह्म त्वचा में बुल्लीफार्म कोशिकाएँ मिलती हैं।4. नहीं मिलती हैं।
5. दोनों अधिर्मों पर क्यूटिकल समान होती हैं।5. दोनों अधिचमों पर क्यूटिकल समान नहीं होती।
6. पर्णमध्योतक की सभी कोशिकाएँ समान होती हैं।6. पर्णमध्योतक, खम्भ मूदूतक तथा स्पंजी मृदूतक में विभेदित होता है।
7. पर्णमध्योतक में छोटे अन्तरा कोशिकीय स्थान होते हैं।7. स्पंजी मृदूतक में बड़े-बड़े अन्तरा कोशिकीय स्थान होते हैं।
8. इसमें बंडल शीथ की कोशिकाओं में हरित लवक मिल सकते हैं।8. बण्डल शीथ (bundle sheet) कोशिकाओं में हरित लवक नहीं मिलते हैं।
9. इसमें संवहन पूल (V.B.) के ऊपर तथा नीचे केवल दढ़ ऊतक पाया जाता है।9. इसमें मुख्य संवहन पूल (V.B.) के ऊपर तथा नीचे मृदूतक या स्थूलकोण ऊतक अधिचर्म तक पाया जाता है।

प्रश्न 14.
पौधों के तनों से उतरने वाली छाल क्या है ? समझाइए ।
उत्तर:
छाल (Bark) – कार्क एधा के बाहर अपारगम्य कार्क (cork) निर्मित होने से इससे बाहर के सभी ऊतक प्रायः मृत हो जाते हैं। संवहन धा एवं कार्क एधा की सक्रियता के फलस्वरूप तने की मोटाई बढ़ती रहती है। इस प्रकार अन्दर से बाहर की ओर एक दबाव उत्पन्न होता है। इस दबाव को मृत कार्क कोशिकाएँ सहन नहीं कर पाती हैं तो ये तिरक जाती हैं और सूख कर तनों पर खुरंट जैसी रचना बनाती हैं इन स्तरों को छाल (bark) कहते हैं।

प्रश्न 15.
संवहन एथा तथा कार्क एधा में अन्तर लिखिए ।
उत्तर:
संवहन एथा तथा कार्क एधा में अन्तर (Differences between vascular cambium and Cork cambium)-

संवहन एधा (Vascular cambium)करके एथ (Cork camblum)
1. यह जाइलम तथा फ्लोएम के बीच स्थित होती है।1. यह द्वितीयक वृद्धि के समय वल्कुट (cortex) या परिरम्भ कोशिकाओं के पुनः सक्रिय होने से बनती हैं।
2. उत्पत्ति के आधार पर संवहन एधा (vascular cumbium) प्राथमिक तथा अन्तरा पूलीय एधा (intrafascicular cambium) द्वितीयक होती है ।2. उत्पत्ति के आधार पर कार्क एधा (cork cambium) द्वितीयक होती है।
3. इससे केन्द्र की ओर द्वितीयक जाइलम तथा परिधि की ओर द्वितीयक फ्लोएम बनता है।3. कार्क एधा से केन्द्र की ओर द्वितीयक वल्कुट (cortex) तथा परिधि की ओर कार्क बनता है।

प्रश्न 16.
वायु ऊतक क्या होते हैं ? ये किन पौधों में मिलते है ?
उत्तर:
वाय ऊतक (Aerenchyma ) – कभी-कभी मृदूतक कोशिकाओं में जब अपेक्षाकृत बड़े अन्तरकोशिकीय स्थान पाए जाते हैं जिनमें वायु भरी होती है तब इसे वायु ऊतक या एरन्काइमा कहा जाता है। ये जलोद्भिद् पादपों जैसे जलकुम्भी (Eichomia) हाइड्रिला (Hydrilla) कैना (Canna) आदि पौधों में पाए जाते हैं। इनका प्रमुख कार्य इन पादपों को प्लावकता प्रदान करना तथा वातन है।
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प्रश्न 17.
पौधों में वितरण के आधार पर रन्ध्रों के प्रकार बताइए। उत्तर- वितरण के आधार पर न्यों के प्रकार-पत्तियों पर रन्ध्रों के वितरण के आधार पर रन्ध्र निम्न प्रकार के होते हैं।

  1. सेब प्रकार (Apple type ) – रन्ध्र केवल पत्ती की निचली सतह पर मिलते हैं; जैसे सेब, अखरोट आदि। ऐसी पत्ती अधोरन्ध्री कहलाती है।
  2. आलू प्रकार (Potato type)- पत्ती की निचली सतह पर अधिकांश रन्ध्र तथा ऊपरी सतह पर कम रन्ध्र होते हैं; जैसे- आलू, टमाटर, बैंगन आदि ।
  3. जई प्रकार (Oat type) – पत्ती की दोनों सतहों पर रन्ध्र बराबर पाए जाते हैं; जैसे मक्का, जई आदि। ऐसी पत्तियाँ उभयरन्ध्रीय कहलाती हैं।
  4. जल लिली प्रकार (Water lily type) – रन्ध्र केवल पत्ती की ऊपरी सतह पर पाए जाते हैं। निचली सतह पानी में रहती है; जैसे तैरने वाले जलोद्भिद । ऐसी पत्तियाँ अधिरन्ध्री (epistomatic) कहलाती हैं।
  5. पोटेमोजीटान प्रकार (Potamogeton type ) – सामान्यतः पत्तियाँ रन्ध्रहीन होती हैं। यदि रन्ध्र उपस्थित भी हैं तो अक्रियाशील होते हैं; जैसे- पोटेमोजीटान आदि में ।

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प्रश्न 18.
पादप ऊतकों का रेखीय वर्गीकरण दीजिए।
उत्तर:
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(E) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (निबन्धात्मक)

प्रश्न 1.
स्थायी ऊतक क्या हैं तथा ये कितने प्रकार के होते हैं ? साधारण स्थायी ऊतकों की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
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प्रश्न 2.
पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न जटिल स्थायी ऊतकों का सचित्र वर्णन करें।
अथवा
जाइलम तथा फ्लोएम की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिये।
उत्तर:
जटिल अतक (Complex Tissues) –
जटिल स्थाई ऊतक अथवा संवहन ऊतक (Complex Permanent or Vascular Tissues) विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित होते हैं। सभी कोशिकाएँ मिलकर किसी कार्य को सामूहिक रूप से सम्पन्न करते हैं। जाइलम (xylem) तथा फ्लोएम (phloem) जटिल स्थाई ऊतक के दो प्रकार हैं। ये पौधों में जल एवं खाद्य पदार्थों के संवहन का कार्य करते हैं, इसलिए इन्हें संवहन ऊतक (vascular tissues) भी कहते हैं।

(A) जाइलम या दारु (Xylem) – यह एक संवहन ऊतक (vascular tissue) है जो पौधों में जल एवं इसमें घुलित खनिज लवणों का संवहन करता है। यह चार प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बनता है जो निम्न प्रकार है-
1. वाहिनिकाएँ (Tracheids) – ये जाइलम की आधारभूत कोशिकाएँ हैं जो अधिक लम्बी तथा संकरी होती हैं। इनके सिरे नुकीले होते हैं। परिपक्व होने पर ये कोशिकाएँ मृत हो जाती हैं तथा इनकी भित्तियाँ लिग्नीकृत (lignified) हो जाती हैं। अनुप्रस्थ काट में देखने पर ये कोणीय प्रतीत होती हैं। भित्तियों पर अनेक गर्त (pits) पाये जाते हैं। वाहिनिकाएँ पौधे के लम्बवत् अक्ष के समान्तर रहती हैं तथा नुकीले सिरों पर दूसरी वाहिनिकाओं से जुड़ती हैं। वाहिनिकाएँ पौधों में जल संवहन के साथ-साथ दृढ़ता भी प्रदान करती हैं।

प्रश्न 3.
विशिष्ट ऊतक कितने प्रकार के होते हैं ? रबर क्षीरी ऊतक का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
रबरक्षीरी ऊतक (Laticiferous tissue) – यह एक प्रकार का स्रावी (secretory) एक गाढ़ा या पतला, रंगीन या रंगहीन, चिपिचपा पदार्थ स्रावित होता है। यह जल में विलेय या कलिलीय (calloidal) अवस्था में पड़े कई पदार्थों जैसे-प्रोटीन्स, शर्कराएँ, गोंद, एल्केलॉइडस, एन्जाइम, मण्डकण आदि का मिश्रण है जो हल्का पीला, सफेद, दूधिया या जल के समान हो सकता है। इस तरल को रबरक्षीर या लेटेक्स (Latex) कहते हैं। रबर (Hevea) और फाइकस (Ficus) की कुछ जातियों में मिलने वाले रबरक्षीर से रबर प्राप्त होता है। पपीता में मिलने वाले लेटेक्स में पेपेन (papain) नामक एल्केलॉइड होता है। रबरक्षीरी ऊतकों में मुख्यत: दो प्रकार की रचनाएँ मिलती हैं-

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प्रश्न 4.
आवृत बीजी में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार के संवहन पूलों का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
का प्राथमिक फ्लोएम के अन्तर्गत दिया गया भाग (IV) का अवलोकन करें।
संवहन पूलों के प्रकार (Types of Vascular Bundles) जाइलम और फ्लोएम की एक दूसरे के सापेक्ष स्थिति के आधार पर संवहन पूल निम्नलिखित चार प्रकार के होते हैं-
1. बदि:पोषवाही (Collateral or Exophloic) – ऐसे संवहन पूल जिनमें जाइलम व फ्लोएम एक ही त्रिज्या पर स्थित हों तथा जाइलम अन्दर की ओर

  • वर्धी (Open)-जब जाइलम तथा फ्लोएम के बीच एधा (cambium) उपस्थित होती है, जैसे-द्विबीज पत्री पौधीं में।
  • अवर्धी (Closed) – जब जाइलम तथा फ्लोएम के बीच एधा अनुपस्थित हो जैसे एकबीजपत्री पौधे।

2. उभय पोषवाही (Bicollateral or Amphiph- loic) – इस प्रकार के संवहन पूलों में फ्लोएम समूह जाइलम समूह के अन्दर व बाहर, दोनों ओर स्थित होते हैं। बाह्य फ्लोएम समूह व जाइलम के बीच स्थित कैम्बियम पट्टी बाहा कैम्बियम तथा आंतरिक फ्लोएम पट्टी आंतरिक कैम्बियम कहलाती है। इस प्रकार के संवहन पूल कुकरबिटेसी, सोलेनेसी आदि कुल के पौधों में पाए जाते हैं।

3. अरीय (Radial) – इन संवहन पूलों में जाइलम व फ्लोएम समूह अलग-अलग त्रिज्याओं (radius) पर एकान्तर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। ऐसे संवहन पूल (vascular boundles) जड़ों में पाए जाते हैं।

4. संकेन्द्री (Concentric) – इन संवहन पूलों (vasclar bundles) में एक प्रकार का संवहन ऊतक दूसरे संवहन ऊतक से पूर्णत: घिरा होता है। ये निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-

  • दासकेन्द्री (Amphicribal or Hadrocentric) – इन संवहन पूलों का मध्य भाग जाइलम का बना तथा इसके चारों ओर फ्लोएम पाया जाता है।
  • पोषवाह केन्दी (Amphivasal or Lepto- centric) – इन पूलों के मध्य भाग में फ्लोएम होता है तथा इसके चारों ओर जाइलम होता है।
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प्रश्न 5.
एक बीज पत्री जड़ की आंतरिक संरचना का सचित्र वर्णन् कीजिए।
उत्तर:
एकबीजपप्री जड़ (मक्का) की आंतरिक संरचना [Internal Structure of Monocot root (Maize)] एकबीजपत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट को सूक्ष्मदर्शी में देखने पर इसमें निम्नलिखित संरचनाएँ दिखाई देती हैं-
1. मूलीय वचा (Epiblema)-जड़ की सबसे बाहरी परत एपीब्लेमा कहलाती है। यह मृदूतकीय कोशिकाओं की बनी होती है। इसमें अनेक एक कोशिकीय मूलरोम (Root hairs) पाये जाते हैं।

2. वस्कुट (Cortex)-यह मृद्तकीय कोशिकाओं (parenchymatous celsl) का बना तथा कई कोशिका मोटा स्तर होता है। इसकी कोशिकाओं के बीच अन्तराकोशिकीय स्थान (intercellular spaces) मिलते हैं। कभी-कभी जब मूलीय त्वचा नृ हो जाती है तब करेंक्स की बाहर की कोशिकाएँ क्यूटिनीकृत (cutinized) होकर एक्सोडर्मिस बनाती है। यह एक रक्षात्मक परत (protective layer) का कार्य करती है।

3. अन्नसवच्चा (Endodermis) – यह रम्भ के चारों ओर एक घेरा बनाती है। इसकी कोशिकाएँ अरीय तथा स्पशरेखीय भित्तियाँ (tegnetial wall) मोटी होती हैं। परन्तु प्रोटो जाइलम के सम्पुख मिलने वाली कोशिकाओं की कोशिका भित्तियाँ पतली होती हैं। इन कोशिकाओं को पाथ कोशिकाएँ कहते हैं।

4. परिरम्घ (Pericycle)-यह मृद्तकीय कोशिकाओं की बनी एक कोशिकीय मोटी परत है। जो एन्डोड़िंस के नीचे मिलती है। कभी-कभी इसमें प्रोटोजाइलम के पास स्क्लेर्क्काइमा कोशिकाएँ या इनके समूह मिलते हैं।

5. संवहन पूल (Vascular bundles)-संवहुन पूल में जाइलम व फ्लोएम समान संख्या में मिलते हैं। पूल संख्या में बहुत अधिक (प्राय: 6 से अधिक) होते हैं। जाइलम एक्सार्क (exarch) होता है। प्रोटोजाइलम व मेटाजाइलम स्पष्ट होते हैं। जाइलम में वलयाकार, सर्पिलाकार, जालिकावत, व गर्ती स्थूलन (thickning) मिलते हैं।

6. पिथ (Pith)- यह केन्द्रीयु भाग में मृदूतकीय कोशिकाओं का बना होता है। इसमें मण्ड कण मिल सकते हैं। पिथ स्पष्ट व विकसित होता है।
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प्रश्न 6.
द्विबीज पत्री जड़ की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाकर इसकी संरचना का संक्षिप्त वर्णन कीजिये।
उत्तर:
हिबीजजपत्री जड़ की आन्तरिक सरच्चा (Internal Structure of Dicot Root) –
द्विबीजपत्री पौधे (चने) की जड़ की अनुप्रस्थ काट को सूक्ष्मदर्शी में देखने पर उसमें निम्न संरचनाएँ दिखाई देती हैं-
1. मूलीयत्वच्वा (Epiblema) – यह सबसे बाहर स्थित एक कोशिका मोटी परत है। इसकी कोशिकाओं की कोशिका भित्तियाँ पतली तथा ये एक कोशिकीय रोम (unicellular hairs) युक्त होती हैं। इस पर उपचर्म (cuticle) तथा रन्श्रों (stomata) का अभाव होता है।

2. क्क्कुट (Cortex)- यह मूलीय त्वचा के ठीक नीचे पाया जाने वाला कई कोशिका मोटा स्तर होता है। इसकी कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली, गोल या अण्डाकार अथवा बहुभुजी (polygonal) होती हैं। कोशिकाओं के बीच बड़े-बड़े अन्तराकोशिकीय स्थान (intercellular spaces) पाये जाते हैं। कोशिकाओं में स्टार्च कण व अवर्णी लवंक (leucoplasts) मिलते हैं। कभी-कभी मूलीय त्वचा नष्ट हो जाती है तो वल्कुट की कोशिकाएँ क्यूटिनीकृत होकर एक्सोडर्मिस (exodermis) बनाती हैं।

3. अन्नस्चचचा (Endodermis)-वल्कुट की भीवरी परत अन्तस्वचा बनाती है जो स्टील बनाती है। इसकी कोशिकाएं ढोलकाकार होती है। इनकी अराय भित्तियों पर कैस्पेरियन पह्टियाँ उपस्थित होती हैं। प्रोटोजाइलम के सम्मुख स्थित अन्तस्त्वचा (endodermis) की कोशिका भित्तियाँ पाथ कोशिकाएँ कहलाती हैं।

4. परिरम्म (Pericycle) – यह मृदूतकीय कोशिकाओं (parenchymatous cells) का बना एक कोशा मोटा स्तर है जो अन्तस्वचा (endodermis) के ठीक नीचे पाया जाता है। इसकी कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली (thin walled) होती हैं।

5. संवहन पूल (Vascular bundles)-संवहन पूल अरीय (radial) होते हैं अर्थात् जाइलम तथा फ्लोएम एकांतर अर्धव्यासों पर मिलते हैं। जाइलम एक्सार्क होता है। प्रोटोजाइलम केन्द्र से दूर तथा मेटाजाइलम केन्द्र की ओर मिलता है। संवहन पूलों की संख्या 2 से 6 तक होती है। जाइलम तथा फ्लोएम के बीच एथा (cambium) का अभाव होता है। द्वितीयक वृद्धि के समय ऐधा (cambium) का निर्माण हो जाता है। जाइलम तथा फ्लोएम के बीच में चारों ओर पाया जाने वाला ऊतक संयोजी ऊतक (connective tissue) कहलाता है।

6. मग्दा (Pith)-जड का केन्द्रीय भाग पिथ (pith) कहलाता है तथा यह बहुत कम विकसित होता है, इसकी कोशिकाएँ मृदूतकीय होती हैं।
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प्रश्न 7.
एक बीजपत्री तने की अनुप्रस्थ काट का सचित्र वर्णन कीजिये।
उत्तर:
एकबीजपत्री तने की आन्तरिक संरचना (Anatomy of Monocot Stem) – एकबीजपत्री तने (मक्का) की आन्तरिक संरचना में निम्नलिखित भाग दिखाई देते हैं-
1. बहु त्वचा (Epidermis) – यह. सबसे बाहरी परत. है, जो उपचर्म (cuticle) से ढँकी रहती है। इसमें रोम का अभाव होता है। कोमल तनों की बाह्म त्वचा में रन्ध्र (stomata) मिल सकते हैं।

2. अघस्तचा (Hypodermis) – यह दृढ़ोतकी कोशिकाओं की बनी दो-तीन कोशा मोटी परत है। इसमें अन्तराकोशिकीय स्थान अनुपस्थित होते हैं। यह पौधे को यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है।

3. भरण ऊतक (Ground Tissue) – यह अधस्तचा से लेकर तने में केन्द्र तक फैला होता है। इसकी कोशिकाएँ मृदूतकीय (parencymatous) तथा अन्तरा कोशिक स्थान युक्त होती हैं। भरण ऊतक में संवहन पूल विखेे रहते हैं। कुछ पौहों जैसे-ोहुँ, घासों में भरण ऊतक का केन्द्रीय भाग खोखला हो जाता है जिसे मज्जा गुहा (pith cavity) कहते हैं।

4. संवहन पूल (Vascular bundles) – संवहन पूल अधिक संख्या में मिलते हैं जो भरण ऊतक में बिखे हुए पाये जाते हैं। संवहन पूल संयुक्त (conjoint), कोलेटरल (collateral) तथा बन्द (closed) होते हैं। प्रत्येक पूल दृणोतकीय कोशिकाओं की बनी एक बलय से घिरा होता है जिसे बण्डल छाद (bundle sheath) कहते हैं।

जाइलम ‘y’ के आकार में व्यवस्थित होते हैं। बड़े आकार व गर्त वाली मेटाजाइलम की दो वाहिकाएँ ‘ y ‘ की दो भुजाएँ बनाती हैं। एक या दो वाहिकाएँ का आधार बनाती हैं। प्रोटोजाइलम के पास कुछ वाहिनिकाओं (trachieds) की भित्तियाँ गलकर एक बड़ी गुहा बनाती हैं। फ्लोएम चालनी नलिका, संहचर कोशिकाओं व अन्य तत्वों से मिलकर बनता है। फ्लोएम का बाहरी टूटा हुआ भाग प्रोटोफ्लोएम तथा भीतरी भाग मेटाफ्लोएम कहलाता है। इसमें पिथ का अभाव होता है।
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प्रश्न 8.
द्विबीजपत्री तने की आंतरिक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिये।
उत्तर:
द्विबीजपत्री तने की आन्तरिक संरचना (Anatomy of dicot stem) – द्विबीजपत्री तने (सूर्यमुखी का तना) की अनुप्रस्थ काट में निम्नलिखित संरचनाएँ दिखाई देती हैं-
1. बाह़ त्वचा (Epidermis)- यह सबसे बाहरी एक स्तरीय परत है। यह उपचर्म (cuticle) से ढकी होती है। इसमें कहीं-कहीं पर बहुकोशिकीय रोम तथा रन्प्र (stomata) मिलते हैं।

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2. वस्कुट (Cortex)- यह बाह्य तचा के ठीक नीचे स्थित होता है इसे तीन भागों में विभेदित किया जा सकता है-
(a) अधस्त्वचा (Hypodermis)-यह कोलेन्काइमी कोशिकाओं से बना 4-5 कोशिका मोटा स्तर है। इसकी कोशिकाएँ जीवित एवं हरितलवक (chloroplasts) युक्त होती है। कोशिका भित्तियाँ कोनों पर पेक्टिनीकृत सेल्युलोस से स्थूलित होती हैं।

(b) सामान्य काटेंक्स (General Cortex) – यह अधस्तचा तथा अन्तस्तचा के बीच का भाग है। यह मृदुतकीय कोशिकाओं का बना काफी चौड़ा भाग है। इसकी कोशिकाए पतली कोशिकाभित्ति वाली, गोल या अण्डाकार एवं अन्तराकोशिकीय स्थान युक्त होती हैं। कार्टेक्स में कहीं-कहीं रेजिन नलिकाएँ (Rasin canals) पायी जाती हैं।
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(c) अन्तस्वची (Endo- dermis) – यह वल्कुट की सबसे भीतरी परत है जो वल्कुट को स्टील से अलग करती है । इसकी कोशिकाएँ ठोलकनुमा (barrelshaped) एवं स्टार्चयुक्त होती हैं।

3. स्टील (Stele) – अन्तस्ववचा (endodermis) से घिरा मध्य भाग स्टील कहलाता है। यह परिरम्भ (pericycle), पिथ, पिथ किरणें एवं संवहन पूलों (vascular bundle) से मिलकर बनता है ।
(i) परिरम्भ (Pericycle) – यह स्क्लेर्काइमेटस तथा पैरन्काइमेटस कोशिकाओं से मिलकर बनता है। स्क्लेर्काइमा के समूह अन्तस्वचा एवं संवहन पूल के बीच मिलते हैं। इन समूहों का संबंध संवहन पूल के फ्लोएम से होता है। इस समूह को बास्ट तन्तु (bast fibre) या कठोर बास्ट (hard bast) भी कहते हैं।

(ii) पिथ किरणें (Pith rays) – यह दो संवहहन पूलों के मध्य मृदृतकीय, बड़ी बहुभुजी तथा लम्बी कोशिकाओं से बनी होती हैं।

(iii) पिथ (Pith)-यह तने के मध्य भाग में मिलता है जो मृदूतकी, गोल या बहुभुजी कोशिकाओं (polygonal cells) का बना होता है। इसकी कोशिकाओं के बीच अन्तराकोशिक अवकाश (intercellular spaces) मिलते हैं।

(iv) संवहन पूल (Vascular bundles) – प्रत्येक संवहन पूल जाइलम, फ्लोएम तथा कैम्बयम का बना होता है। संवहन पूल संयुक्त कोलेटराल खुले तथा एक वलय (ring) में व्यवस्थित होते हैं।

प्रश्न 9.
परिचर्म क्या है ? इसमें कितने प्रकार के ऊतक पाये जाते हैं तथा इनका निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर:
नमस्कार दोस्तों हमारा आज का प्रश्न है परीक्षण किया है री बीज पत्री तने में परिचय कैसे बनता है तो देखते हैं दोस्तों सर्वप्रथम परीक्षण होता क्या है दोस्तों यह पौधों में पाया जाता है यानी कि यह पौधों में कार्य था कार्य दैनिक दोस्तों कोर्ट कैंबियम की जीवित मृत कोशिका से परिचय बनता है दोस्तों को और कोई था यानी कि कोर को कम दिया कि जो जीवित मृत्यु तक कोशिका से ही परिचय का निर्माण होता है

अधिकतर सुदी बीज पत्री तने में परिचय बनता कैसे हैं तो दोस्तों को रिझाया कागज इसे कहते हैं यानी कि कोर्ट कैंबियम यह कोर को कैंबियम की कोशिका जो होते हैं वह कोशिका विभाजित होकर परिधि की ओर इसकी और परिधि की तरफ या परिधि की ओर जो कोशिका का निर्माण करती है खुशी को बनाती हैं वे से बुरी युक्त होता है यानी कि शबुरी नाइस होती है और इससे बुरी नियत कोशिका से

बना यह स्तर कोर्ट या इसे से लंबी कहते हैं और कोर कैदा यानी कि कोर्ट को पीएम से भीतर की ओर जो बनने वाली मरुधर की कोशिका होती हैं वह कोशिका भित्ति एक्वल कुटिया सिलोडर्म का निर्माण करती है फिर ऑर्डर में बनाती हैं और से लाभ तथा यानी कि कोर्ट और कोर्ट कैंबियम और इसके अतिरिक्त दीदी अक्कलकोट यह सब मिलकर परिजनों का निर्माण करती हैं परिजनों को बनाती हैं तो दोस्तों हमने देखा कि और कोई ध्यान की कोर को हम भी उनकी जीवित मृत कोशिका से परिचय धन्यवाद दोस्तों आशा करता हूं आपको यह उत्तर जरूर समझ में आया होगा ।

प्रश्न 10.
नामांकित चित्रों की सहायता से द्विबीजपत्री पौधे की जड़ में पायी जाने वाली द्वितीय वृद्धि का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
द्वितीयंक वृद्धि (Secondary growth)-शीर्षस्थ विभज्योतक की कोशिकाओं के विभाजन, विभेदन और परिवर्द्धन के फलस्वरूप प्राथमिक ऊतकों का निर्माण होता है। अतः शीर्षस्थ विभज्योतक के कारण पौधे की लम्बाई में वृद्धि होती है। इसे प्राथमिक वृद्धि कहते हैं। द्विवीजपत्री आवृतबीजी तथा अनावृतबीजी काष्ठीय पौधों में पार्श्व विभज्योतक के कारण तने तथा जड़ की मोटाई में वृद्धि होती है। इस प्रकार मोटाई में होने वाली वृद्धि को द्वितीयक वृद्धि (secondary growth) कहते हैं।

जाइलम और पलोएम.के मध्य विभज्योतक को संवहन एघा (vascular cambium) तथा वल्कुट या परिरम्भ में विभज्योतक को कॉर्क एधा (cork cambium) कहते हैं। द्विबीजपत्री. जड़ में द्वितीयक वृद्धि (Secondary Growth in Dicot Root) जड़ों में प्राथमिक एधा (cambium) नहीं होती है। द्विबीजपत्री जड़ों में द्वितीयक एधा दो प्रकार की होती है ।
I. संवहन एधा (vascular cambium) तथा
II. कॉर्क कैम्बियम (cork cambium)

I. संवहन एधा का निर्माण तथा क्रियाशीलता (Formation and Activity of Vascular Camblum).
पौधे की आयु एक वर्ष हो जाने के पश्चात् अरीय संवहन बण्डल में फ्लोएम के नीचे स्थित मर्दूतकीय संयोजक ऊतक.को कोशिकाएँ विभज्योतकी (meristematic) होकर वक्राकृति द्वितीयक संवहन एथा (secondary vascular cambium) बनाती हैं। आदिदारु (protoxylem) के बाहर स्थित परिरम्भ की कोशिकाएं भी विभज्योतको (meristematic) होकर संवहन एधा बनाती हैं। इसके फलस्वरूप द्वितीयक संवहन एघा का एक लहरदार वलय बन जाता है।

II कॉर्क कैम्बियम का निर्माण और क्रियाशीलता (Formation and Activity of Cork Cambium)
द्वितीयक संवहन ऊतक बनने के कारण बाहरी ऊतकों पर दबाव बढ़ जाता है तो प्रायः परिरम्भ की कोशिकाओं का एक घेरा सक्रिय होकर विभज्योतक हो जाता है। इसके फलस्वरूप कॉर्क एया (cork cambium) बनती है।

कॉर्क एधा कोशिकाओं के विभाजन से बाहर की ओर कॉर्क (cork) और केन्द्र की ओर द्वितीयक कॉर्टेक्स (secondary cortex) का निर्माण होता है।. कॉर्क की कोशिकाएँ सुबेरिनयुक्तं (suberinized) होती हैं। अत: अपारगम्य कॉर्क के बाहर के सभी ऊतक (वल्कुट, अन्तस्त्वचा, बाह्यत्वचा) मृत हो जाते हैं। मृत ऊतक छाल (bark) बनाते हैं। द्वितीयक कॉर्टेक्स की कोशिकाएँ मृदूतकीय तथा जीवित होती हैं। कॉर्क एधा से स्थान-स्थान पर वांतरन्ध्र lenticels) बनते हैं।

प्रश्न 11.
मृदूतक, स्थूल कोण ऊतक तथा दृढोतक का तुलनात्मक वर्णन कीजिये ।
उत्तर:
सरल ऊतक (Simple Tissues) –
1. मृदूतक या पैरन्काइमा (Parenchyma) – यह ऊतक पौधे के लगभग सभी अंगों का आधार बनाता है। यह मूल तथा स्तम्भों के कार्टेक्स (cortex), पिथ (pith), परिरम्भ (pericyle) में पत्तियों के पर्णमध्योतक (mesophyll) में तथा फलों के गूदे तथा बीजों के भ्रूणपोष में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह प्राथमिक व द्वितीयक संवहन ऊतक व मज्जा किरणों (medullary rays) का भी प्रमुख घटंक है। यह ऊतक पतली कोशिका भित्ति वाली जीवित कोशिकाओं का बना होता है। कोशिका भित्ति सेलुलोस की बनी होती है। कोशिकाएँ समव्यासी (isodiametric), जैसे-गोल, अण्डाकार या कोणीय होती हैं।

कोशिकाओं के मध्य अन्तराकोशिकीय स्थान (intercellular space) पाए जाते हैं। मांसल पौधों की पत्तियों में इनके बीच ये स्थान नहीं पाए जाते हैं। मृदूतकीय कोशिकाओं में एक बड़ी केन्द्रीय रिक्तिका (central vacuole) होती है। मृदूतक विभिन्न आवास रुपों तथा विशिष्ट कार्यों से सम्बद्ध पादप अंगों में विभेदन दर्शाते हैं। जलीय पौधों के मृदूतक में अन्तरा कोशिक अवकाश सबसे अधिक विकसित होते हैं। इनमें पौधे के सभी अन्तराकोशिक अवकाश मिलकर एक सरल वातन तन्त्र (aeriation system) बनाते हैं। इस ऊतक को वायूतक (aerenchyma) कहते हैं।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 6 पुष्पी पादपों का शारीर

यह पौधों को उत्लावकता (buyoncy) प्रदान करता है । जिन मृद्तरकों में पर्णहरिम (chlorophyll) उपस्थित होता है, हरित ऊतक (chlorenchyma) कहलाते हैं। जब मृदूतक विभिन्न पदार्थों के संम्रह का कार्य करते हैं तो ये संचयी पैरेन्काइमां (storage parenchyma) कहलाते हैं। कुछ मृदूतकी कोशिकाएँ अनेक प्रकार के पाचक विकर (digestive enzymes) स्रावित करने लगती हैं, तब इन्हें इडियोब्लास्ट (Idioblasts) कहते हैं।मृदूतक के कार्य (Functions of Parenchyma)

  • ये भोज्य पदार्थों एवं जल का संप्रह करते हैं।
  • शाकीय पौध़ों में इनकी स्फीतिता (turgidity) यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है।
  • इनकी कोशिकाओं में जब हरित लवक (chloroplasts) उत्पन्न हो जाते हैं तब इन्हें क्लोरन्काइमा (chlorenchyma) कहते हैं जो प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) में भाग लेते हैं।
  • जब इनकी कोशिकाओं के बीच बड़े-बड़े वायु आशय (air spaces) बन जाते हैं तो इन्हें एन्काइमा (aerenchyma) कहते हैं और ये जलीय पौधों को प्लावकता (buyoncy) प्रदान करते हैं।
  • कभी-कभी इनकी कोशिकाएँ विभाजित होकर घाव भरने का कार्य करती हैं।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 6 पुष्पी पादपों का शारीर 17

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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 19 उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 19 उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 19 उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन

(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions )

1. यूरिया का संश्लेषण किसके टूटने से होता है ?
(A) ग्लूकोस
(B) वसा अम्ल
(C) अमीनो अम्ल
(D) अमोनिया ।
उत्तर:
(C) अमीनो अम्ल

2. हेनले के लूप में होता है-
(A) ग्लोमेरुलर निस्यंदन
(B) यूरिया
(C) मूत्र
(D) रुधिर ।
उत्तर:
(A) ग्लोमेरुलर निस्यंदन

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3. परानिस्यंदन कहाँ होता है ?
(A) बोमेन सम्पुट में
(B) मूत्राशय में
(C) रुधिर वाहिनी में
(D) केशिकागुच्छ में।
उत्तर:
(D) केशिकागुच्छ में।

4. स्तनियों का मुख्य उत्सर्जी पदार्थ होता है ?
(A) अमोनिया
(B) अमीनो अम्ल
(D) यूरिया !
(C) यूरिक अम्ल
उत्तर:
(D) यूरिया !

5. केशिकागुच्छ (ग्लोमेरुलस) में परानिस्यंद कब बनता है ?
(A) बोमेन सम्पुट में केशिकागुच्छ से हाइड्रोस्टेटिक दबाव अधिक हो
(B) बोमेन सम्पुट में कोलॉयडली ऑस्मोटिक दबाव तथा हाइड्रोस्टेटिक दबाव ग्लोमेरुलर हाइड्रोस्टेटिक दबाव से कम हो ।
(C) हाइड्रोस्टेटिक दबाव ऑस्मोटिक दबाव से अधिक हो
(D) ऑस्मोटिक दबाव हाइड्रोस्टेटिक दबाव से अधिक हो ।
उत्तर:
(B) बोमेन सम्पुट में कोलॉयडली ऑस्मोटिक दबाव तथा हाइड्रोस्टेटिक दबाव ग्लोमेरुलर हाइड्रोस्टेटिक दबाव से कम हो ।

6. ग्लोमेरुलर निस्यंद होता है-
(A) रुधिराणु एवं प्लाज्मा प्रोटीन रहित रुधिर
(B) रुधिराणु रहित रुधिर
(C) जल, अमोनिया तथा रुधिराणु का मिश्रण
(D) मूत्र ।
उत्तर:
(A) रुधिराणु एवं प्लाज्मा प्रोटीन रहित रुधिर

7. सोडियम तथा जल का सर्वाधिक अवशोषण कहाँ होता है ?
(A) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में
(B) दूरस्थ कुण्डलित नलिका में
(C) हेनले के लूप में
(D) इन सभी में।
उत्तर:
(A) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में

8. स्तनी के वृक्क में ग्लोमेरुलस से निकलने वाली रुधिर वाहिनी कहलाती है-
(A) अपवाही धमनिका
(B) अभिवाही धमनिका
(C) रीनल धमनी
(D) रीनल शिरा ।
उत्तर:
(A) अपवाही धमनिका

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9. रुधिर प्लाज्मा का ग्लोमेरुलस से वोमेन सम्पुट में निस्यंदन किस कारण होता है ?
(A) डाएलिसिस
(B) अवशोषण
(C) स्त्रावण
(D) ग्लोमेरुलर हाइड्रोस्टेटिक दबाव ।
उत्तर:
(D) ग्लोमेरुलर हाइड्रोस्टेटिक दबाव ।

10. जब ADH की मात्रा कम होती है तो मूत्र विसर्जन की दर-
(A) कम होती है।
(B) अधिक होती है
(C) यथावत् रहती है
(D) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(B) अधिक होती है

11. स्तनियों में जल का सर्वाधिक अवशोषण किस भाग में होता है?
(A) त्वचा में
(B) आन्त्र में
(C) फेफड़े में
(D) वृक्क में।
उत्तर:
(D) वृक्क में।

12. मैलपीघी कोष में होता है-
(A) वृक्क नलिका
(B) बोमेन सम्पुट व केशिका गुच्छ
(C) बोमेन सम्पुट तथा वृक्क नलिका
(D) उपर्युक्त सभी।
उत्तर:
(B) बोमेन सम्पुट व केशिका गुच्छ

13. ग्लूकोस का अवशोषण वृक्क नलिका के किस भाग में होता है ?
(A) संग्रह नलिका में
(B) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में
(C) दूरस्थ कुण्डलित नलिका में
(D) हेनले लूप में ।
उत्तर:
(B) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में

14. यकृत में यूरिया का निर्माण किसके द्वारा होता है ?
(A) नाइट्रोजन चक्र
(B) ग्लाइकोलिसिस
(C) आर्निथीन चक्र
(D) क्रैब चक्र ।
उत्तर:
(C) आर्निथीन चक्र

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15. गुर्दे (वृक्क) की कार्यिकी इकाई है- (UPPMT)
(A) डैन्ड्रॉन
(B) नेफ्रॉन
(C) न्यूरॉन
(D) एक्सॉन ।
उत्तर:
(B) नेफ्रॉन

16. कीटों का मुख्य उत्सर्जी पदार्थ है- (RPMT)
(A) अमोनिया
(B) यूरिक अम्ल
(C) अमीनो अम्ल
(D) यूरिया ।
उत्तर:
(B) यूरिक अम्ल

17. Na+ तथा CI दोनों का पुनः अवशोषण होता है-
(A) हेनले लूप की आरोही भुजा में
(B) हेनले लूप की अवरोही भुजा में
(C) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में
(D) दूरस्थ कुण्डलित नलिका में।
उत्तर:
(A) हेनले लूप की आरोही भुजा में

18. मनुष्य के वृक्क होते हैं-
(A) मीसोनेफ्रिक प्रकार के
(B) मेटानेफ्रिक प्रकार के
(C) प्रोनेफिक प्रकार के
(D) सभी प्रकार के ।
उत्तर:
(B) मेटानेफ्रिक प्रकार के

19. मांसाहारी व्यक्ति के मूत्र में अधिक मात्रा निकलेगी-
(A) ग्लूकोस की
(B) ग्लाइकोजन की
(C) यूरिया की
(D) क्रिएटीनीन की ।
उत्तर:
(C) यूरिया की

20. ग्लोमेरुलस में रुधिर लाने वाली वाहिनी कहलाती है-
(A) अभिवाही धमनिका
(B) अपवाही धमनिका
(D) वृक्कीय शिरा ।
(C) वृक्कीय धमनी
उत्तर:
(A) अभिवाही धमनिका

21. कुण्डलित नलिका के दूरस्थ भाग द्वारा जल अवशोषण नियन्त्रित होता
(A) ऐण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन द्वारा
(B) ऐन्ड्रोजन्स द्वारा
(C) टेस्टोस्टीरोन द्वारा
(D) लेक्टोजेनिक हॉर्मोन द्वारा ।
उत्तर:
(A) ऐण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन द्वारा

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22. मूत्र का आयतन किसके द्वारा नियन्त्रित होता है ?
(A) केवल ADH द्वारा
(B) केवल एल्डोस्टीरोन द्वारा
(C) एल्डोस्टीरोन तथा ADH द्वारा
(D) ADH व टेस्टोस्टीरोन द्वारा ।
उत्तर:
(C) एल्डोस्टीरोन तथा ADH द्वारा

23. यूरिया का उत्सर्जन कहलाता है- (RPMT)
(A) यूरियोटेलिज्म
(B) ऐमीनोटेलिज्म
(C) यूरिकोटेलिज्म
(D) इनमें से कोई नहीं ।
उत्तर:
(A) यूरियोटेलिज्म

24. ग्लोमेरुलस निस्यंद में होते हैं- (RPMT)
(A) यूरिया, यूरिक अम्ल, अमोनिया और जल
(B) केवल यूरिया एवं यूरिक अम्ल
(C) यूरिया, यूरिक अम्ल एवं जल
(D) यूरिया, यूरिक अम्ल, ग्लूकोज और जल ।
उत्तर:
(A) यूरिया, यूरिक अम्ल, अमोनिया और जल

25. जन्तुओं के शरीर में यूरिया का निर्माण होता है- (RPMT)
(A) ऐमीनो अम्ल के डिएमीनेशन से,
(B) ग्लूकोज में ऑक्सीकरण से
(C) वसा के जल में अपघटन से
(D) वसा में इमेल्सीकरण से ।
उत्तर:
(A) ऐमीनो अम्ल के डिएमीनेशन से,

26. वृक्क का कार्य नहीं है-
(A) उत्सर्जन
(B) जल नियन्त्रण
(C) रुधिर आयतन नियन्त्रण
(D) मृत रुधिराणुओं का विनाश।
उत्तर:
(D) मृत रुधिराणुओं का विनाश।

27. अमीबा में परासरण नियमन किसके द्वारा होता है- (RPMT)
(A) संकुचनशील धानी द्वारा
(B) एक्टोप्लाज्म द्वारा
(C) कूटपाद द्वारा
(D) हायलोप्लाज्मा द्वारा
उत्तर:
(A) संकुचनशील धानी द्वारा

28. एक व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में प्रोटीन आहार लेता है वह किस पदार्थ की अधिक मात्रा उत्सर्जित करेगा ? (UPCPMT)
(A) अमोनिया
(B) यूरिया
(C) ग्लाइकोजन
(D) पित्त ।
उत्तर:
(B) यूरिया

29. कौनसा यकृत से वृक्क की ओर जाता है ? (UPCPMT)
(A) अमोनिया
(B) यूरिया
(C) शर्करा
(D) पित्त ।
उत्तर:
(B) यूरिया

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30. यूरिया का सान्द्रण होता है- (UPCPMT)
(A) वृक्क में
(B) यकृत में
(C) कोलन में
(D) हृदय में
उत्तर:
(A) वृक्क में

31. बोमेन्स सम्पुट पाए जाते हैं- (UPCPMT)
(A) ग्लोमेरुलस में
(C) नेफ्रॉन में
(B) यूरी नेफरस नलिका में
(D) मैल्पीघी नलिका में ।
उत्तर:
(C) नेफ्रॉन में

32. अमीनो (NH2) समूह का पृथक्करण कहलाता है- (RPMT)
(A) उत्सर्जन
(B) अवशोषण
(C) ट्रांस एमीनेशन
(D) ऐमीनेशन ।
उत्तर:
(D) ऐमीनेशन ।

33. डिऐमीनेशन पाया जाता है- (UPCPMT)
(A) वृक्क में
(B) यकृत में
(C) नेफ्रॉन में
(D) अ व द दोनों ।
उत्तर:
(B) यकृत में

34. एक व्यक्ति लम्बे समय से भूख हड़ताल पर है और केवल पानी पर आश्रित है, उसके-
(A) मूत्र में अधिक सोडियम होगा
(B) मूत्र में कम एमीनो अम्ल होंगे
(C) रुधिर में अधिक ग्लूकोज होगा
(D) मूत्र में कम यूरिया होगा ।
उत्तर:
(A) मूत्र में अधिक सोडियम होगा

35. निम्न में से आर्निथीन चक्र में अंश नहीं है-(CBSE PMT) (RPMT)
(A) आथीन, सिलीन, एलेनीन
(B) आनिथीन, सिटुलीन, अर्जिनीन
(C) अमीनो अम्ल प्रयोग नहीं होते
(D) आर्नीथीन, सिटूलीन, फ्यूमेरिक अम्ल ।
उत्तर:
(C) अमीनो अम्ल प्रयोग नहीं होते

(B) अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
उत्सर्जन किसे कहते हैं ?
उत्तर:
नाइट्रोजनयुक्त उपापचयी अपशिष्ट पदार्थों एवं अतिरिक्त लवणों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

प्रश्न 2.
उत्सर्जन की रचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई क्या है ?
उत्तर:
उत्सर्जन की रचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई वृक्क नलिका या नेफ्रॉन है।

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प्रश्न 3.
अमोनिया के उत्सर्जन की प्रक्रिया को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
अमोनिया के उत्सर्जन की प्रक्रिया को अमोनियोत्सर्ग (ammonotelism) कहते हैं।

प्रश्न 4.
अमोनिया उत्सर्जी प्राणियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
अमोनिया उत्सर्जी प्राणियों को अमोनोटेलिक (ammonotelic) प्राणी कहते हैं।

प्रश्न 5.
यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करने वाले प्राणियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करने वाले प्राणियों को यूरिकोटेलिक (Urecotelic) प्राणी कहते हैं।

प्रश्न 6.
अमोनिया को कौन-सा अंग यूरिया में बदलता है ?
उत्तर:
अमोनिया को यूरिया में यकृत बदल देता है।

प्रश्न 7.
यूरिया का उत्सर्जन करने वाले प्राणियों को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
यूरिया का उत्सर्जन करने वाले प्राणियों को यूरियोटैलिक (Ureotelic) प्राणी कहते हैं।

प्रश्न 8.
केशिकागुच्छ कहाँ पाया जाता है ? इसका प्रमुख कार्य क्या ?
उत्तर:
केशिकागुच्छ (glomerulus) वृक्क नलिका के समीपस्थ भाग बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) में पाया जाता है। यह परानिस्यंदन द्वारा ग्लोमेरुलर निस्यंद बनाता हैं।

प्रश्न 9.
मैलपीघी काय किसे कहते हैं ?
उत्तर:
बोमेन सम्पुट तथा केशिकागुच्छ को संयुक्त रूप से मैलपीघी काय (Malpighian body) कहते हैं।

प्रश्न 10.
हैनले पाश (लूप) कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर:
हैनले पाश (लूप) वृक्क नलिका में पाया जाता है जो इसकी समीपस्थ एवं दूरस्थ कुण्डलित नलिकाओं के बीच ‘U’ के आकार की रचना के रूप में स्थित होता है।

प्रश्न 11.
केशिकागुच्छ को रुधिर ले जाने वाली रुधिरवाहिनी का नाम लिखिए ।
उत्तर:
अभिवाही वृक्क धमनिका ( Afferent renal arteriole)।

प्रश्न 12.
परानिस्यंदन की क्रिया वृक्क नलिका के किस भाग में होती है ?
उत्तर:
परानिस्यंदन (ultrafiltration) की क्रिया केशिकागुच्छ (glomerulus) में होती है।

प्रश्न 13.
चयनात्मक पुनरावशोषण वृक्क नलिका के किस भाग में होता ?
उत्तर:
चयनात्मक पुनरावशोषण वृक्क नलिका के कुण्डलित भाग में होता है।
The

प्रश्न 14.
मूत्र निर्माण के अन्तर्गत आने वाली तीन आवश्यक क्रियाओं के नाम बताइए।
उत्तर:

  • परानिस्यंदन या अति सूक्ष्म निस्यंदन (ultrafiltration),
  • वरणात्मक या चयनात्मक पुनरावशोषण (selective reabsorption) तथा
  • स्रावण ( Secretion ) ।

प्रश्न 15.
उत्सर्जन क्रिया के तीन चरणों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • उत्सर्जी पदार्थों का निर्माण,
  • उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन,
  • उत्सर्जी पदार्थों का निष्कासन ।

प्रश्न 16.
ग्लोमेरुलर निस्यंद में उपस्थित पदार्थों के नाम बताइये।
उत्तर:
ग्लोमेरुलर निस्यंद में उत्सर्जी पदार्थ यूरिया, लाभदायक जल, . अनेक लवण, ग्लूकोज तथा अन्य कुछ विषैले पदार्थ उपस्थित होते हैं।

प्रश्न 17.
सबसे अधिक पुनरावशोषण नेफ्रॉन के किस भाग में होता है ?
उत्तर:
सबसे अधिक पुनरावशोषण नेफ्रॉन की समीपस्थ कुण्डलित नलिका होता है।

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प्रश्न 18.
बर्टिनी के स्तम्भ किन्हें कहते हैं ?
उत्तर:
वृक्क कॉर्टेक्स की उभारों को बर्टिनी के स्तम्भ कहते हैं ।

प्रश्न 19.
शरीर में वृक्कों का मुख्य कार्य बताइए ।
उत्तर:
वृक्कों द्वारा शरीर में जल व लवण सन्तुलन स्थापित होता है।

प्रश्न 20.
मनुष्य में प्रभावी निस्यंद दाब कितना होता है ?
उत्तर:
मनुष्य में प्रभावी निस्यंद दाब (effective filtration pressure) 60 – (32 +18) 10mm Hg होता है।

प्रश्न 21.
मूत्र का pH तथा आपेक्षिक घनत्व बताइए।
उत्तर:

  • मूत्र का pH = 4.8 से 7.5 तक,
  • मूत्र का आपेक्षिक घनत्व = 1.003 से 1.032 तक ।

प्रश्न 22.
वृक्कों के दो प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर:

  • शरीर के नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना ( उत्सर्जन) ।
  • शरीर के आन्तरिक वातावरण को सन्तुलित बनाए रखना ।

प्रश्न 23.
यकृत में अमोनिया के यूरिया में परिवर्तन के प्रक्रम को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
यकृत में अमोनिया के यूरिया में परिवर्तन के प्रक्रम को आर्निथीन चक्र कहते हैं।

प्रश्न 24.
नेफ्रॉन कितने प्रकार के होते हैं ? उनके नाम लिखिए।
उत्तर:
नेफ्रॉन दो प्रकार के होते हैं-

  • वल्कुटीय नेफ्रॉन,
  • मध्यांशीय नेफ्रॉन ।

प्रश्न 25.
हेनले लूप में क्या अवशोषित होता है ?
उत्तर:
हेनले लूप में जल का पुनरावशोषण होता है ।

प्रश्न 26.
एक स्वस्थ मनुष्य के केशिकागुच्छ की धमनिकाओं में आने वाले रुधिर का द्रव स्थैतिक दाब कितना होता है ?
उत्तर:
70 mm Hg होता है ।

प्रश्न 27.
हीमेटूरिया क्या है ?
उत्तर:
ग्लोमेरुलस (glomerulus) में सूजन आने अथवा इसकी झिल्लियों के अत्यधिक पारगम्य हो जाने के कारण लाल रक्ताणु (RBCs) तथा प्रोटीन (protein) भी छनकर निस्यन्द ( filtrate) में आ जाते हैं। इसी घटना को हीमेटूरिया (haematuria) कहते हैं।

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प्रश्न 28.
ग्लाइकोसूरिया किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मूत्र (Urine) में शर्करा (Glucose) की उपस्थिति एवं उत्सर्जन ग्लाइकोसूरिया (glycosuria) कहलाता है।

प्रश्न 29.
यदि किसी मनुष्य की वृक्क नलिका (nephron ) में से हल का लूप ( Henle’s loop) हटा दिया जाये तो इसके उत्सर्जन पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
यदि किसी मनुष्य की वृक्क नलिका ( nephron ) में से हेनले का लूप (Henle’s loop) हटा दिया जाये तो मूत्र (Urine ) अधिक तनु हो जायेगा ।

प्रश्न 30.
रक्त में यूरिया (urea) की उपस्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
रक्त में यूरिया की उपस्थिति को यूरेमिया ( uremia) कहते हैं जो अत्यन्त हानिकारक है।

प्रश्न 31.
मूत्र में रक्त की उपस्थिति को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
मूत्र (urine) में रक्त (blood) की उपस्थिति हीमेटूरिया (haematuria) कहलाती है।

प्रश्न 32.
रक्त अपोहन (हीमोडायलिसिस) क्या है ?
उत्तर:
रोगी के शरीर से कृत्रिम विधि द्वारा उत्सर्जी पदार्थ को बाहर निकालने की क्रिया को रक्त अपोहन ( haemodialysis) कहते हैं।

प्रश्न 33.
एण्टीडाइयूरेटिक हार्मोन (ADH) के अल्पस्त्रावण का उत्सर्जन क्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर:
एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (ADH) के अल्पस्रावण से दूरस्थ कुण्डलित नलिका एवं संग्राहक नलिका में जल का अवशोषण नहीं होगा फलस्वरूप बार-बार अधिक मात्रा में मूत्र त्याग करना पड़ेगा।

प्रश्न 34.
केशिकागुच्छ निस्यंदन दर ( GFR) कितनी होती है ?
उत्तर:
एक स्वस्थ व्यक्ति में केशिका गुच्छ निस्यंदन दर (GFR ) 125 मिली / मिनट या 180 लीटर प्रतिदिन होती है ।

प्रश्न 35.
रेनिन एन्जियोटेन्सिन क्रिया-विधि पर नियंत्रक का कार्य कौन करता है ?
उत्तर:
रेनिन एन्जियोटेन्सिन क्रिया विधि पर नियंत्रण का कार्य अलिन्दीय नेटियेरेटिक कारक करता है।

प्रश्न 36.
वृक्क की पथरी क्या है ?
उत्तर:
जब केशिकागुच्छ निस्यंदन में ऑक्सलेट एवं फॉस्फेट आयनों की मात्रा अधिक हो जाती है तो वे पेल्विस में अवक्षेपित हो जाते हैं और पथरी बनाते हैं। पथरी द्वारा मूत्रवाहिनी अवरुद्ध हो जाने से वृक्क में तेज दर्द होता है।

प्रश्न 37
परानिस्यंदन किसे कहते हैं ?
उत्त;
ग्लोमेरुलस (glomerulus) की रक्त केशिकाओं से उत्सर्जी तथा अन्य उपयोगी पदार्थों का छनकर बोमेन कैप्सूल ( Bowman’s capsule) की गुहा में जाने की क्रिया परानिस्यन्दन (ultrafiltration) कहलाती है ।

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प्रश्न 38.
वृक्क के ग्लोमेरुलस से निकलने वाली रुधिर वाहिनी का नाम लिखिए।
उत्तर:
वृक्क के ग्लोमेरुलस से निकलने वाली रुधिर वाहिनी अपवाही धमनिका (efferent arteriole) कहलाती है।

(C) लघूत्तरात्मक प्रश्न ( Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
परानिस्यन्दन तथा चयनात्मक पुनः अवशोषण की मूत्र निर्माण में क्या भूमिका है ?
उत्तर:
परानिस्यन्दन (Ultrafiltration ) – यकृत कोशिकाओं (liver cells) में यूरिया का निर्माण होने के पश्चात् रक्त नलिकाओं द्वारा यूरिया वृक्क (kidney) में पहुँचता है। वृक्क नलिका में बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) एक सूक्ष्म छलनी की भाँति कार्य करता है। इसमें अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) यूरिया युक्त रुधिर लेकर आती है और अपवाही धमनियाँ (efferent arteriole) रुधिर बाहर लेकर आती है।

ग्लोमेरुलस की केशिका दीवारों में लगभग 1.0 µ व्यास के असंख्य छिद्र होते हैं, जिससे छिद्रित दीवार की पारगम्यता (permeability) सामान्य रुधिर केशिकाओं की तुलना में अधिक होती है, जिससे तरल प्लाज्मा व अन्य उत्सर्जी पदार्थ छनकर बोमेन सम्पुट की गुहा में आ जाते हैं, परन्तु ग्लोमेरुलस केशिकाओं से रुधिर कणिकाएँ तथा रक्त में घुले हुए रुधिर प्रोटीन नहीं छन पाते हैं।

ग्लोमेरुलस से छना हुआ रक्त प्लाज्मा जो बोमेन सम्पुट की गुहा में आता है, ग्लोमेरुलर निस्यन्द (glomerular filtrate) कहलाता है तथा यह प्रक्रिया परानिस्यन्दन (ultrafiltration) कहलाती है। इस प्रक्रिया द्वारा रक्त से उत्सर्जी पदार्थ अलग हो जाते हैं।

चयनात्मक पुनः अवशोषण (Selective Reabsorption ) – परानिस्यन्दन (ultrafiltration) क्रिया द्वारा निस्यन्द (glomerular filtrate) में उत्सर्जी पदार्थों; जैसे-यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रियेटिन आदि उत्सर्जी पदार्थों के साथ-साथ लाभदायक पदार्थ जैसे-ग्लूकोस (glucose), एमीनो अम्ल ( amino acid), कुछ वसीय अम्ल (fatty acids), विटामिन (vitamins), जल (water) तथा उपयोगी लवण (salts) भी छनकर आ जाते हैं। रक्त में उपस्थित जल का लगभग 95% भाग छनकर निस्यन्द में आ जाता है परन्तु इसका केवल 0.8% भाग के लगभग ही मूत्र में परिवर्तित होकर बाहर निकलता है।

निस्यन्द (filtrate) में उपस्थित लाभदायक पदार्थों का वृक्क की नलिकाओं द्वारा रुधिर में पुनरावशोषण (reabsorption ) कर लिया जाता है। वृक्क नलिकाओं द्वारा निस्यन्द (filtrate) में उपस्थित लाभदायक पदार्थों के पुनः रुधिर में पहुँचने की क्रिया ही चयनात्मक पुनः अवशोषण कहलाती है। इस प्रकार परानिस्यन्दन (ultrafiltration ) तथा चयनात्मक पुनः अवशोषण (selective reabsorption ) मूत्र निर्माण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पद हैं।

प्रश्न 2.
मूत्र की तनुता एवं सान्द्रण को नियन्त्रित करने वाली हॉर्मोन की कार्य प्रणाली को समझाइए ।
उत्तर:
शरीर में जल की मात्रा बढ़ने पर मूत्र पतला तथा मात्रा में अधिक हो जाता है तथा शरीर में जल की मात्रा घटने पर मूत्र की मात्रा कम तथा सान्द्रता अधिक हो जाती है। मूत्र की मात्रा एवं सान्द्रता में परिवर्तन के लिए वृक्क नलिका (nephron ) की दूरस्थ कुण्डलित नलिका एवं संग्रह नलिकाओं की पारगम्यता जिम्मेदार होती है। इनकी पारगम्यता का नियमन दो विशेष हॉर्मोन (hormones) द्वारा किया जाता है। ये हॉर्मोन निम्नलिखित हैं-

(1) एल्डोस्टीरॉन (Aldosterone ) – इस हॉर्मोन का स्त्रावण एड्रीनल कॉर्टेक्स प्रन्थि ( adrenal cortex gland) द्वारा किया जाता है। यह हॉर्मोन वृक्क नलिकाओं (Nephrons) में ग्लोमेरुलर निस्यन्द (glomerular filtrate) से सोडियम आयनों Na+ के पुनः अवशोषण ( re-absorption ) में वृद्धि करता है, जिससे शरीर मे सोडियम आयनों (Nat) की सान्द्रता निश्चित बनी रहती है।

(2) एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन अथवा वेसोप्रेसिन (Antidiuretic Hormone, ADH or Vasopressin) – इस हॉर्मोन (hormone) का स्रावण पश्च पीयूष मन्यि (posterior pituitary gland) द्वारा किया जाता है। यह हॉर्मोन वृक्क नलिका (Nephron ) के संग्राहक नलिका (Collecting tubule) वाले भाग में जल के पुनः अवशोषण एवं स्त्रावण (reabsorption and secretion) के नियमन द्वारा मूत्र ( urine) की मात्रा एवं सान्द्रता को नियन्त्रित रखता है।

जब शरीर में जल की अधिकता होती है तो ADH का स्त्रावण कम तथा ऐल्डोस्टीरीन हॉर्मोन का स्त्रावण अधिक होता है जिसके फलस्वरूप सोडियम आयनों (Na+) का अधिक अवशोषण तथा जल का काम अवशोषण होता है परिणामस्वरूप मूत्र की सान्द्रता कम तथा आयतन ज्यादा होता है। इसके विपरीत शरीर में जल की कमी होने पर एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (ADH) का स्रावण अधिक तथा ऐल्डोस्टीरॉन हॉर्मोन का स्त्रावण कम होने से मूत्र अधिक सान्द्र तथा मात्रा में कम होता है।

प्रश्न 3.
नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों के आधार पर निर्धारित श्रेणियों को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों के आधार पर प्राणियों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है-

  1. अमोनिया उत्सर्जी जन्तु ( Ammonotelic animals),
  2. यूरिया उत्सर्जी जन्तु (Ureotelic animals),
  3. यूरिक अम्ल उत्सर्जी जन्तु (Urecotelic animals)।
  4. अमोनिया उत्सर्जी जन्तु (Ammonotelic Animals) वे जन्तु जो नाइट्रोजनी अपशिष्ट के रूप में अमोनिया ( ammonia) का उत्सर्जन करते हैं, अमोनिया उत्सर्जी जन्तु या अमोनोटेलिक जन्तु ( Ammonotelic animal) कहलाते हैं।
    उदाहरण- संघ प्रोटोजोआ (Protozoa), पोरीफेरा ( Porifera ), सीलेन्ट्रेटा (Coelentrata ), ऐनिलिडा ( Annelida ), जलीय आर्थ्रोपोडा (Aquatic arthropoda) इत्यादि ।

2. यूरिया उत्सर्जी जन्तु (Ureotelic Animals) – जिन जन्तुओं में मुख्य नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थ यूरिया (Urea ) होती है वे जन्तु यूरिया उत्सर्जी जन्तु या यूरियोटेलिक जन्तु (ureotelic) कहलाते हैं। उदाहरण- मेंढक (Frog ), उपारिस्थल मछलियाँ (cartilaginous fishes), जल व स्थल पर रहने वाले सरीसृप ( amphibian reptiles) तथा स्तनी प्राणी (mammals) इत्यादि ।

3. यूरिक अम्ल उत्सर्जी जन्तु (Urecotelic Animals) – जिन जन्तुओं मुख्य नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थ यूरिक अम्ल (uric acid) होता है वे जन्तु यूरिक अम्ल उत्सर्जी जन्तु या यूरिकोटेलिक जन्तु (urecotelic) कहलाते हैं। उदाहरण – शुष्क वातावरण में रहने वाले जन्तु, जैसे- सरीसृप (Reptiles), कीट (Insects), पक्षी (Birds ) तथा घोंघे ( Snails) इत्यादि ।

प्रश्न 4.
मूत्र के संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संग्राहक वाहिनी (Collecting tubule) के अन्तिम भाग में ग्लोमेरुलर निस्यन्द (glomerular filtrate) मूत्र (Urine) कहलाता है।

मानव मूत्र का संघटन निम्न प्रकार से होता है-

(1) जल-लगभग96 %
(2) यूरिया2.0 %
(3) अकार्बनिक लवण .5 %
(4) कार्बनिक लवण0.5 %
(5) क्रियेटिनिन0.5 %
(6) यूरिक अम्ल0.2-0.5 %
(7) हिपेरिक अम्ल0.5 %
(8) अमोनिया0.25 %

प्रश्न 5.
स्तनियों की उत्सर्जन क्रिया में वरणात्मक पुनः अवशोषण की क्रिया कहाँ होती है ? इस क्रिया का महत्व बताइए ।
उत्तर:
वरणात्मक पुनः अवशोषण स्तनधारियों की उत्सर्जन क्रिया में वरणात्मक पुनः अवशोषण (selective reabsorption) वृक्क नलिकाओं के कुण्डलित भाग में होती है। इस क्रिया के अन्तर्गत केशिकागुच्छ से छनकर आए हुए निस्यंद से वृक्क नलिका के कुण्डलित भाग की प्रन्थिल कोशिकाएँ इसमें से ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, विटामिन्स, Na+, CI, K+, Ca++ HCO3 तथा PO4, आदि लवणों के आयन व जल आदि उपयोगी पदार्थों को अवशोषित करके पुनः अपवाही धमनिका के केशिका जाल (परिनलिका जाल ) में पहुंचा देती हैं। इसमें यूरिया व यूरिक अम्ल आदि का अवशोषण नहीं होता है।

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इसलिए इस प्रक्रिया को वरणात्मक पुनः अवशोषण या चयनात्मक पुनरावशोषण कहते हैं। वरणात्मक पुनः अवशोषण का महत्व उत्सर्जन क्रिया का यह एक महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि यह क्रिया मूत्र निर्माण में प्रमुख योगदान करती है। इसके द्वारा शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों को कुण्डलित वृक्क नलिकाओं में पुनः अवशोषित करके उन्हें रुधिर में मुक्त कर दिया जाता है और के साथ शरीर से बाहर निकल जाने से रोक दिया जाता है। इससे शरीर के आन्तरिक वातावरण (रुधिर, लसिका व ऊतक द्रव्य) का रासायनिक संघटन, परासरणी दाब की मात्रा आदि का सन्तुलन यथावत् बना रहता है।

प्रश्न 6.
वृक्कों के विभिन्न नियन्त्रक कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वृक्कों के नियन्त्रक कार्य (Regulatory Functions of Kidney)
उत्सर्जी उत्पादों के उत्सर्जन के अतिरिक्त प्राणियों के वृक्क निम्नलिखित नियन्त्रक कार्य भी करते हैं-
1. रुधिर में से आवश्यकता से अधिक और निरर्थक पदार्थों का चयनात्मक उत्सर्जन (selective excretion) करके वृक्क शरीर के भीतरी वातावरण की रासायनिक अखण्डता (समस्थापन – होमियोस्टेसिस) बनाये रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

2. उपापचयी प्रक्रियाओं के फलस्वरूप बने आवश्यकता से अधिक अम्ल व क्षारों का वृक्क चयनात्मक उत्सर्जन करके रुधिर के pH को सामान्य बनाये रखते हैं।

3. हॉर्मोन्स की सहायता से रुधिर तथा ऊतक द्रव्य में जल एवं लवणों की उपयुक्त मात्रा बनाये रखकर वृक्क रुधिर दाब और ऊतक द्रव्यों की परासरणीयता ( osmolarity) का नियन्त्रण करते हैं।

4. शरीर में ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया hypoxia) होने पर वृक्क एक विशेष एन्जाइम एरिथ्रोजेनिन का स्त्रावण करते हैं जो रुधिर में मुक्त होकर उसकी ग्लोब्यूलिन प्रोटीन से मिलकर एरिथ्रोपोयटिन ( erythropoitin) नामक पदार्थ बनाता है, जो अस्थि मज्जा में पहुँचकर अधिकाधिक लाल रुधिर कणिकाओं के निर्माण को प्रेरित करता है, जिससे ये फेफड़ों में वायु से अधिक ऑक्सीजन ग्रहण कर सकें।

5. वृक्क शरीर में परासरण नियन्त्रण द्वारा जल की निश्चित मात्रा को बनाये रखते हैं।

प्रश्न 7.
वृक्क के कार्यों का नियन्त्रण किस प्रकार होता है ?
उत्तर:
वृक्क के कार्यों का नियन्त्रण-वृक्कों का प्रमुख कार्य मूत्र-निर्माण । मूत्र की मात्रा, सान्द्रता आदि का नियन्त्रण कुछ हॉर्मोन्स द्वारा किया जाता
(1) जल अवशोषण का नियन्त्रण- पीयूष पन्थ (pituitary gland) के पश्च पिण्ड से स्त्रावित ऐन्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (Antidiuretic hormone : ADH) द्वारा वृक्क नलिकाओं में जल अवशोषण का नियन्त्रण किया जाता है। इस प्रकार ADH मूत्र के तनुकरण व सान्द्रण का प्रमुख नियन्त्रक होता है।

(2) सोडियम (Na+) व पोटैशियम (K+) का नियन्त्रण मूत्र में Na+ व K+ लवणों की मात्रा का नियन्त्रण अधिवृक्क ग्रन्थियों (adrenal glands) से स्त्रावित ऐल्डोस्टीरोन (aldosterone) नामक हॉर्मोन द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में अन्तर बताइए-
(क) उत्सर्जन तथा बहिष्करण
(ख) परानिस्यंदन तथा चयनात्मक पुनरावशोषण ।
उत्तर:
(क) उत्सर्जन तथा बहिष्करण में अन्तर

उत्सर्जन (Excretion)बहिष्करण (Egestion)
1. यह एक कोशिकीय प्रक्रिया है।1. यह कोशिकीय क्रिया नहीं है।
2. इसमें अनेक उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप कई उत्सर्जी पदार्थ बनते हैं जिनका बाद में उत्सर्जन होता है।2. इसमें भोजन के पाचन के बाद अपच भाग शेष रह जाता है। इसे मल विसर्जन द्वारा शरीर से बाहर निष्कासित किया जाता है।
3. उत्सर्जी पदार्थ प्राय: जल में विलेय होते हैं। अतः इनका उत्सर्जन प्राय: जलीय विलयन के रूप में होता है।3. प्राय: मल अपच व जटिल कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो जल में अविलेय होते हैं। इनका बहिष्करण अर्द्धठोस के रूप में होता है।
4. फेफड़े, वृक्क व त्वचा उत्सर्जन के मुख्य अंग हैं।4. मल का बहिष्करण आहारनाल के अन्तिम भाग गुदा अथवा क्लोएका के द्वारा होता है।

(ख) परानिस्यंदन तथा चयनात्मक पुनरावशोषण में अन्तर

परानिस्यन्दन (Ultrafiltration)चयनार्मक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption)
1. यह क्रिया बोमेन सम्पुट तथा केशिकागुच्छ (ग्लोमेरुलस) के मध्य होती है।1. यह क्रिया वृक्क नलिका की काय (body) तथा इसके उप लिपटी अपवाही धमनिका की केशिकाओं के मध्य सम्पन्न होती है।
2. इसमें लाभदायक तथा हानिकारक पदार्थ रुधिर दाब के कारण जल में घुलित अवस्था में केशिकागुच्छ से छनकर बोमेन्स सम्पुट में आ जाते हैं।2. इसमें लाभदायक पदार्थ एवं जल ही वृक्क नलिका की काय से पुनः अवशोषित होकर अपवाहीी धमनिका की केशिकाओं में आते हैं। हानिकारक पदार्थों का अवशोषण नहीं होता है तथा रुधिर केशिकाओं से यूरिया व हानिकारक लवण वृक्क नलिकाओं की काय में विसरित हो जाते हैं।
3. यह क्रिया रुधिर दाब की भिन्नता के कारण होती है।3. यह क्रिया रुधिर में जल की कमी के कारण होती है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित के संक्षिप्त उत्तर दीजिए-
(क) यूरिया का निर्माण किस अंग द्वारा तथा किस पदार्थ से होता है ?
(ख) मूत्रलता या डाइयूरेसिस किसे कहते हैं ?
(ग) यूरीमिया किसे कहते हैं ?
(ब) जक्स्टा ग्लोमेरुलर नलिकाएँ क्या हैं ?
(ङ) परासरण नियन्त्रण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
(क) यूरिया का निर्माण यकृत में अमीनो अम्लों के डीएमीनेशन की क्रिया से प्राप्त अमोनिया (NH ) तथा CO2 के संयोग से होता है। ये सभी क्रियाएँ जिनके अन्तर्गत यूरिया (NH2.CO.NH2) बनता है, आर्निवीन चक्र कहलाती है।

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(ख) मूत्रलता (Diuresis) शरीर में जल की मात्रा बढ़ जाने पर रुधिर, लसीका तथा ऊतक द्रव्य की परासरणीयता कम हो जाती है। इसके कारण वृक्कों से उत्सर्जित मूत्र पतला व अधिक मात्रा में होता है। मूत्र की मात्रा के बढ़ने की क्रिया को मूत्रलता या डाइयूरेसिस कहते हैं। इसे बहुमूत्र रोग भी कहते हैं । इस रोग में बार-बार पेशाब आता है और प्यास भी बहुत लगती है।

(ग) यूरीमिया (Uremia) – वृक्कों की कार्यिकी अव्यवस्थित ( गड़बड़ ) हो जाने पर हमारे रुधिर में यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है। इसे ‘यूरीमिया का रोग’ कहते हैं।

(घ) जक्स्टा ग्लोमेरुलर नलिकाएँ (Juxta Glomerular Tubules) – ये वे वृक्क नलिकाएँ होती हैं जिनका हेनले लूप अपेक्षाकृत बहुत लम्बा तथा वृक्क के पेल्विस (pelvis) तक फैला होता है। वृक्क नलिकाओं में लगभग 20-30% जक्स्टा ग्लोमेरुलर वृक्क नलिकाएँ होती हैं।

(ङ) परासरण नियन्त्रण (Osmoregulation) – हॉर्मोन्स की सहायता से रुधिर तथा ऊतक द्रव्य में जल एवं लवणों की उपयुक्त मात्रा बनाये रखकर वृक्क रुधिर दाब और ऊतक द्रव्यों की परासरणीयता का नियन्त्रण करते हैं। इसे ही परासरण नियन्त्रण कहते हैं।

प्रश्न 10.
परासरण नियन्त्रण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
परासरण नियन्त्रण (Osmoregulation) की परिभाषा लघु उत्तरीय प्रश्न 9 (ङ) के उत्तर में देखिए ।
वृक्कों द्वारा परासरण नियन्त्रण (Osmoregulation by Kidneys ) – समस्थापन (Homeostasis) के अन्तर्गत शरीर के तरल को छानने के अतिरिक्त शरीर के जल एवं लवणों की मात्रा का नियन्त्रण भी वृक्कों का एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। शरीर में जल की मात्रा अधिक हो जाने पर भूत्र पतला और मात्रा में अधिक हो जाता है।

इसी प्रकार शरीर में जल की कमी हो जाने में पर मूत्र गाढ़ा और मात्रा में कम हो जाता है। मूत्र में ये परिवर्तन दूरस्थ कुण्डलित नलिकाओं और संग्रह नलिकाओं की पारगम्यता के बदलने से सम्भव हो पाते हैं। इसीलिए इन नलिकाओं की पारगम्यता निम्नलिखित दो प्रमुख हॉर्मोन्स द्वारा नियन्त्रित होती है-

(1) एल्डोस्टीरॉन (Aldosterone) हॉमोंन-इसका स्रावण अधिवृक्क ग्रन्थियों ( adrenal glands) से होता है। यह हॉर्मोन दूरस्थ कुण्डलित एवं संग्रह नलिकाओं में बहते हुए निस्यंद से Na+ के पुनरावशोषण को बढ़ाता है जिससे शरीर के अन्तः वातावरण में Na+ की उपयुक्त मात्रा बनी रहती है।

(2) ऐण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (Antidiuretic Hormone ADH ) – इसका स्रावण मस्तिष्क में स्थित पीयूष ग्रन्थि (pituitary gland) द्वारा होता है। यह हॉर्मोन मूत्र के पतलेपन (तनुकरण) या गाढ़ेपन (सान्द्रण) को नियन्त्रित करता है।

प्रश्न 11.
वल्कुटीय वृक्क नलिकाओं एवं जक्स्टा मेड्यूलरी वृक्क नलिकाओं में अन्तर बताइए।
उत्तर:
वल्कुटीय एवं जक्स्टा मेड्यूलरी वृक्क नलिकाओं में अन्तर

वर्कुटीय वृक्क नलिकाएँ (Cortical Nephrons)जक्स्टा मेड्यूलरी वृक्क नलिकाएँ (Juxta Medullary Nephrons)
1. ये अपेक्षाकृत छोटी होती हैं।1. ये अपेक्षाकृत बड़ी होती हैं।
2. इनके बोमैन सम्पुट वृक्कों की सतह के समीप स्थित होते हैं।2. इनके बोमैन सम्पुट वृक्कों के वल्कलीय (cortical) एवं मध्यांश (medullary) भाग के संगम क्षेत्र पर स्थित होते हैं।
3. इनके हेनले लूप छोटे एवं वृक्कों के मध्यांश भाग में कुछ ही दूरी तक फैले होते हैं।3. इनके हेनले लूप बहुत बड़े एवं वृक्कों के मध्यांश भाग के पिरैमिड्स में पूरी गहराई तक फैले होते हैं।
4. इनमें रुधिर की आपूर्ति परिनलिका केशिकाओं के द्वारा होती है।4. इनमें रुधिर की आपूर्ति वासारेक्टा द्वारा होती है।

प्रश्न 12.
हीमोडाइलेसिस पर टिप्पणी लिखिए ।
उत्तर:
हीमोडाइलेसिस (Haemodialysis)
वृक्कों के निष्क्रिय होने पर रक्त में यूरिया एकत्रित हो जाता है। इसे यूरिमिया ( uremia) कहते हैं जो कि अत्यन्त हानिकारक है। यह वृक्क पात (kidney failure) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है। इसके मरीजों में यूरिया का निष्कासन हीमोडाइलेसिस (रक्त अपोहन) द्वारा होता है। इस क्रिया में रोगी की मुख्य धमनी से रक्त निकालकर 0°C पर ठण्डा करते हैं।

अथवा इस रक्त में हिपेरिन (heparin) नामक थक्कारोधी (प्रतिस्कन्दक) मिलाते हैं। तत्पश्चात् इस रक्त को अपोहनकारी इकाई में भेजा जाता है। इस इकाई में एक कुण्डलित सेलोफेन नली होती है और यह ऐसे द्रव से घिरी रहती है, जिसका संगठन नाइट्रोजनी अपशिष्टों को छोड़कर प्लाज्मा के समान होता है।

छिद्र युक्त सेलोफेन झिल्ली से अपोहनी द्रव में अणुओं का आवागमन सान्द्रण प्रवणता के अनुसार होता है। अपोहनी द्रव में नाइट्रोजनी अपशिष्ट अनुपस्थित होते हैं, अतः वे पदार्थ बाहर की ओर गमन करते हैं और रक्त को शुद्ध करते हैं। शुद्ध रक्त में हिपेरिन विरोधी डालकर उसे रोगी की शिराओं द्वारा पुनः शरीर में भेज दिया जाता है। हीमोडाइलेसिस विधि द्वारा यूरिमिया व्याधि से रोगियों का उपचार किया जाता है।

(D) निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions )

प्रश्न 1.
उत्सर्जन किसे कहते हैं ? सरल जन्तुओं में उत्सर्जन किस प्रकार होता है ? उत्सर्जन (Excretion)
उत्तर:
प्राणियों के शरीर में होने वाली विभिन्न उपापचयिक क्रियाओं (metabolic activities) के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले हानिकारक पदार्थों, मुख्यतः प्रोटीन के अपचय (catabolism) से उत्पन्न अमोनिया यूरिया, यूरिक अम्ल आदि नाइट्रोजनी पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने की जैव-प्रक्रिया को उत्सर्जन (excretion) कहते हैं। शरीर में बनने वाले ऐसे नाइट्रोजनी वर्ज्य व हानिकारक पदार्थों को उत्सर्जी पदार्थ (excretory products) कहते हैं।

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इन वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने वाले अंगों को उत्सर्जी अंग (excretory organs) कहते हैं। उत्सर्जन अंगों को सामूहिक रूप से उत्सर्जन तन्त्र (excretory system) कहते हैं। संक्षेप में- “शरीर के अन्दर प्रोटीन के अपचय के फलस्वरूप उत्पन्न अमोनिया, यूरिया तथा यूरिक अम्ल आदि हानिकारक वर्ज्य पदार्थों को उत्सर्जी अंगों द्वारा शरीर से बाहर त्यागने की प्रक्रिया को उत्सर्जन (excretion) कहते हैं। इस क्रिया से सम्बन्धित अंगों को उत्सर्जन अंग कहते हैं। ”

नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों का उत्सर्जन (Excretion of Nitrogenous Waste Products):
नाइट्रोजनी वर्ज्य (अपशिष्ट पदार्थ अमोनिया, यूरिया एवं यूरिक अम्ल के रूप में शरीर से बाहर निकलते हैं।

इनके आधार पर जन्तुओं की तीन श्रेणियाँ होती हैं-
1. अमोनियोटेलिक जन्तु (Ammoniotelic Animals) – ये वे जन्तु होते हैं जो अपने शरीर से अमोनिया का उत्सर्जन करते हैं। इस प्रक्रिया को अमोनियोटेलिज्म (ammoniotelism) कहते हैं। अमोनिया जल में घुलनशील होती है, अतः इसे बाहर निकालने के लिए अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। अतः केवल सरल जलीय जन्तु ही अपने जलीय वातावरण में इसका उत्सर्जन करने में समर्थ होते हैं। उदाहरणार्थ – अमीबा, स्पंज, हाइड्रा, जेलीफिश तथा स्वच्छ जलीय मछलियाँ, पोलीकीट कृमि, सेफेलोपोड्स तथा क्रस्टेशियन एवं अन्य मॉलस्क आदि अमोनिया का उत्सर्जन करते हैं।

2. यूरियोटेलिक जन्तु (Ureotelic Animals) – ये वे जन्तु होते हैं जो नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थों को यूरिया के रूप में अपने शरीर से बाहर निकालते हैं। इस प्रक्रिया को यूरियोटेलिज्म (ureotelism) कहते हैं। इसमें अपेक्षाकृत कम जल की आवश्यकता होती है। यूरिया अधिक मात्रा में होने पर विषाक्त होता है।

अतः रुधिर में से इसे पृथक् करने के लिए पर्याप्त मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। इसीलिए यूरिया के साथ मूत्र के रूप में काफी मात्रा में जल भी बाहर निकलता है। सभी स्तनी, कुछ सरीसृप, (जैसे-मगर, घड़ियाल, कछुआ आदि), कुछ समुद्री मछलियाँ तथा मेंढक व टोड आदि यूरियोटेलिक जन्तुओं के उदाहरण हैं।

3. यूरिकोटेलिक जन्तु (Uricotelic Animals) – ये वे जन्तु होते हैं। जो नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थों को यूरिक अम्ल के रूप में अपने शरीर से बाहर निकालते हैं। इस प्रक्रिया को यूरिकोटेलिज्म (uricotelism) कहते हैं। यूरिक अम्ल ठोस या अर्द्ध ठोस के रूप में उत्सर्जी होता है, उदाहरणार्थ- सभी पक्षी कीट, कुछ सरीसृप, जैसे–छिपकली, गिरगिट, स्थलीय साँप आदि यूरिकोटेलिक जन्तु हैं।

रहता सरल जन्तुओं में उत्सर्जन (Excretion in Simple Animals)
एककोशिकीय प्राणियों; जैसे-संघ प्रोटोजोआ के जन्तु और सबसे निम्नकोटि के बहुकोशिकीय जन्तुओं जैसे स्पंज, सीलेन्ट्रेट्स (हाइड्रा, जैलीफिश आदि) में शरीर की प्रत्येक कोशिका का बाहरी जलीय वातावरण से सीधा सम्पर्क है और ये सामान्य विसरण (simple diffusion) द्वारा अपने उत्सर्जी पदार्थों (मुख्यतः अमोनिया) का इस जल में विसर्जन करती रहती हैं।

इन प्राणियों की कोशिकाओं में निरन्तर उपापचय के कारण उत्सर्जी पदार्थों का सान्द्रण बाहर के जलीय वातावरण की अपेक्षा सदैव अधिक रहता है। इसलिए ये पदार्थ सामान्य विसरण द्वारा कोशिकाओं से बाहर निकलते रहते हैं। अलवण जलीय प्रोटोजोआ एवं स्पंजों की कुछ कोशिकाओं में परासरण नियन्त्रण हेतु संकुचनशील रिक्तिकाएँ (contractile vacuoles) होती हैं। उत्सर्जन के लिए इन सरल प्राणियों में कोई विशिष्ट संरचनाएँ नहीं होती हैं।

प्रश्न 2.
मनुष्य के उत्सर्जी तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य का उत्सर्जी तन्त्र (Excretory System of Human)
मनुष्य एवं अन्य उच्च कशेरुकी प्राणियों का उत्सर्जन तन्त्र नाइट्रोजनी अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन तथा परासरण नियमन का कार्य करता है। इसमें निम्नलिखित अंग होते हैं-

  1. एक जोड़ी वृक्क (Kidneys)
  2. एक जोड़ी मूत्र वाहनियाँ (Ureters)
  3. एक मूत्राशय (Urinary Bladder)
  4. एक मूत्र मार्ग (Urethra)

1. वृक्क या गुर्दे (Kidneys) – मनुष्य में एक जोड़ी वृक्क होते हैं, जो उदर गुहा के पृष्ठभाग में डायाफ्राम के नीचे व कशेरुकदण्ड के इधर-उधर (दायें-बायें) स्थित होते हैं। दाहिनी ओर यकृत (Liver) की उपस्थिति के कारण दाहिना वृक्क बायें वृक्क से कुछ आगे स्थित होता है। दोनों वृक्क एक पतली पेरिटोनियम झिल्ली द्वारा उदरगुहा की पृष्ठ दीवार से लगे होते हैं और वसीय ऊतक के अन्दर धँसे होते हैं।

मनुष्य के वृक्क गहरे लाल रंग के तथा सेम के बीज जैसी आकृति के होते हैं। प्रत्येक वृक्क लगभग 10-11 सेमी लम्बा, 5 सेमी चौड़ा तथा 2.5-3 सेमी मोटा होता है। प्रत्येक वृक्क का बाहरी तल उत्तल (convex) तथा भीतरी तल अवतल (Concave) होता है। अवतल सतह की ओर गड्डे जैसी एक रचना होती है, जिसे वृक्क नाभि या हाइलस (hilus) कहते हैं।

इसी से होकर रीनल धमनी (renal artery) वृक्क में प्रवेश करती है और रीनल शिरा (renal vein) तथा मूत्रवाहिनी (ureter) इसमें से बाहर निकलती है। वृक्क के चारों ओर तन्तुमय संयोजी ऊतक का बना पतला रीनल कैप्सूल (renal capsule) होता है।
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2. मूत्रवाहिनियाँ (Ureters) – प्रत्येक वृक्क की नाभि (hilus) से मोटी व पेशीय भित्चि की बनी सँकरी नलिका निकलती है। इसे मूत्वाहिनी (यूरेटर; ureter) कहते हैं। यह नीचे की ओर चलकर झिर्री के समान एक छिद्र द्वारा मूत्राशय में खुलती है। दोनों ओर की मूत्र वाहिनियाँ वृक्कों से मूत्र को लाकर मूत्राशय में पहुँचाती हैं।

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3. मूत्राशय (Urinary Bladder) – यह थैले के समान एक पेशीय संरचना है, जिसमें मूत्र का स्थाई रूप से संभह किया जाता है। इसकी भित्ति में तीन स्तर पाए जाते हैं- बाल्य स्तर-पेरीटोनियम का सीरोसा स्तर, मध्य-अरेखित पेशी स्तर तथा आन्तरिक-श्लेष्मिका स्तर। मूत्राशय शंकुरूपी होता है जिसका ऊपरी भाग चौड़ा तथा निचला भाग संकरा होता है।

सँकरा भाग एक छिद्र द्वारा मूत्रोजनन मार्ग (urethra) में खुलता है। इस छिद्र रेखित पेशी की बनी अवरोधनी (sphincter) पायी जाती है। मूत्राशय नर में मलाशय (rectum) के आगे तथा मादा में योनि के ठीक ऊपर पाया जाता है। मूत्राशय में 700-800 मिली मूत्र का संग्रह किया जा सकता है। पक्षियों, सर्पों, घड़ियाल तथा प्रोटोथीरिया वर्ग के जन्तुओं में मूत्राशय का अभाव होता है। परन्तु उड़ानविहीन पक्षी शुतुर्मुर्ग में मूत्राशय पाया जाता है। पक्षियों में मूत्राशय का अभाव इनके उड़ने के लिए अनुकूलन है।

4. मूत्र मार्ग (Urethra) – मूत्राशय की ग्रीवा से एक पतली नलिका निकलती है जिसे मूत्रमार्ग या यूरेश्रा कहते हैं। मूत्रमार्ग द्वारा मूत्र शरीर से बाहर निकलता है। मूत्रमार्ग पर अवरोधनी पेशी (sphincter muscle) उपस्थित होती है जो सामान्यतः मूत्रमार्ग को कसकर बन्द रखती है। मूत्रत्याग के समय अवरोधनी शिथिल हो जाती है, जिससे मूत्र आसानी से बाहर निकल जाता है।

पुरुषों में मूत्रमार्ग लगभग 15 सेमी लम्बा होता है और शिश्न में से होकर गुजरता है। इसमें होकर मूत्र व वीर्य (शुक्ररस जिसमें शुक्राणु उपस्थित होते हैं) दोनों ही बाहर निकलते हैं। स्तियों में मूत्रमार्ग लगभग 4 सेमी लम्बा होता है तथा इसमें केवल मूत्र ही बाहर निकलता है।

नर में मूत्रमार्ग तीन भागों का बना होता है-

  • प्रोस्टेट भाग या यूरिध्रल भाग (Prostatic or Urethral Part) – यह 2.5 सेमी लम्बा होता है जो प्रोस्टेट प्रन्थि के मध्य से गुजरता है। इसी भाग में दोनों शुक्रवाहनियाँ खुलती हैं।
  • झिल्लीनुमा थाग (Membranous Part) – यह प्रोस्टेट ग्रन्थि एवं शिश्न के मध्य का छोटा भाग होता है।
  • शिश्नी भाग (Penile Part) – यह लगभग 15 सेमी लम्बा मार्ग है, जो शिश्न (penis) के कॉर्पस स्पंजियोसम से निकलकर शिश्न मुण्ड के शीर्ष पर बाह्य मत्र छिद्र के रूप में बाहर खुलता है।

प्रश्न 3.
मनुष्य के वृक्क की आन्तरिक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए। –
उत्तर:
मनुष्य के वृक्क की आन्तरिक संरचना (Internal Structure of Human Kidney)
मनुष्य का प्रत्येक वृक्क या गुर्दा एक दृढ़ तन्तुमय संयोजी ऊतक के बने वृक्क सम्पुट या रीनल कैप्सूल (capsule) से ढँका रहता है। वृक्क की एक अनुलम्ब काट (longitudinal section) में दो भाग स्पष्ट दिखाई देते हैं।
(1) प्रानसस्थ या वल्कीय भाग या वस्कुट (Cortex) -यह वृक्क का बाहरी एवं गहरे लाल रंग का भाग होता है। इसमें वृक्क नलिकाओं या नेफ्रोन्स (uriniferous tubules or nephrons) के मैलपीघी कोष (malpighian capsules) तथा संवलित नलिकाओं के समीपस्थ एवं दुरस्थ भाग स्थित होते हैं।
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(2) अन्तस्थ या मध्यांश या मज्जक (medulla) – यह वृक्क का भीतरी व हल्के रंग का भाग होता है। अन्तस्थ का मध्यभाग एक स्पष्ट वृक्क अंकुर (renal papilla) के रूप में वृक्क नाभि (hilum or hilus) की ओर उभरा होता है। प्रान्तस्थ भाग के कुछ छोटे-छोटे एवं सँकरे उभार अन्तस्थ के बाहरी भाग में धँसे रहते हैं। इन्हें बर्टिनी के वृक्क स्तम्भ (renal columns of Bertini) कहते हैं।

इनके कारण अन्तस्थ (medulla) का बाहरी भाग 6-12 शंक्वाकार उभारों के रूप में बँटा-सा दिखाई देता है। जिन्हें पिरामिझ्स (pyramids) कहते हैं। ये पिरामिड्स ही वृक्क नाभि की ओर वृक्क अंकुर (Renal papilla) के रूप में एक कीप जैसे भाग-पेल्विस (Pelvis) में उभरे रहते हैं।

यहीं से मूत्रवाहिनी (ureter) निकलती है। पेल्विस (वृक्क श्रोणि) पिरामिड्स की ओर छोटी-छोटी शाखाओं में बँटी रहती है जिन्हें वृद् कैलिक्स (major calyx) कहते हैं। ये फिर लघु कैलिक्स (minor calyxes) में बँटे रहते हैं। वृक्क अंकुर लघु कैलिक्स के उपर खुलते हैं। मनुष्य के प्रत्येक वृक्क में 10-12 लाख सूक्ष्म, बहुत लम्बी तथा कुण्डलित वृक्क नलिकाएँ या नेक्रॉन्स होती हैं।

ये संयोजी ऊतक में रुधिर वाहनियों, लसीका वाहनियों, तन्त्रिका एवं पेशी तन्तुओं सहित दबी हुई व सटी हुई रहती हैं। ये उत्सर्जन की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाइयाँ होती हैं। प्रत्येक वृक्क नलिका के निम्नलिखित प्रमुख भाग होते हैं-

  • मैल्पीघी सम्पुट (Malpighian capsule),
  • प्रीवा (Neck),
  • समीपस्थ कुण्डलित नलिका,
  • हेनले लूप (Henle’s loop),
  • दूरस्थ कुण्डलित नलिका,
  • संमह नलिका (Collecting duct)।

वृक्क नलिकाओं के मैलपीघी सम्पुट, ग्रीवा, समीपस्थ कुण्डलित नलिका युक्त भाग तो प्रान्तस्थ (cortex) में और इनका हेनले. लूप वाला भाग अन्तस्थ (medulla) में स्थित रहता है।

वृक्क नलिकाएँ (नेक्रॉन्स) भी दो प्रकार की होती हैं-

  • वल्कुटीय नेक्रॉन्स (Cortical nephrons) – इनका मैलपीघी सम्पुट प्रान्तस्थ (cortex) में दूर स्थित होता है।
  • मध्यांशीय नेक्रॉंस्स (Medullary nephrons) – इनका मैलपीघी सम्पुट अन्तस्थ (medulla) के बहुत ही समीप स्थित होता है।

प्रान्तस्थ और अन्तस्थ के जोड़ पर वृक्क शिरा (renal vein) तथा वृक्क धमनी (renal artery) समान्तर चलती है तथा धमनी से धमनिकाएँ निकलकर केशिका गुच्छ (ग्लोमेरुलस- glomerulus) बनाती हैं तथा वृक्क नलिका के कुण्डलित भाग के चारों ओर केशिका जाल बनाती हैं। ये केशिकाएँ मिलकर शिरिकाएँ बनाती हैं जो अन्त में वृक्क शिरा में खुलती हैं।

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प्रश्न 4.
मनुष्य की वृक्क नलिका या नेफ्रोन की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य की वृक्क नलिका या नेफ्रॉन की संरचना (Structure of Urineferous Tubule or Nephron)
वृक्क नलिकाएँ वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई होती हैं। मनुष्य के प्रत्येक वृक्क में लगभग 10-12 लाख सूक्ष्म, बहुत्त लम्बी व कुण्डलित वक्क नलिकाएँ होती हैं। प्रत्येक वृक्क नलिका में निम्नलिखित भाग होते हैं-
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(1) मैलपीघी कोष (Malpighian Capsule)-प्रत्येक वृक्क नलिका का अगला स्वतत्र सिरा प्यालेवत् दोहरी दीवार का बना हुआ होता है। इसे बोमेन समपट (Bowman’s capsule) कहते हैं। यह दोही दीवार का बना होता है। बाहरी दीवार शल्की एपिथीलियम की बनी होती है तथा भीतरी दीवार पोडोसाइद्स (podocytes) नामक विशेष प्रकार की कोशिकाओं की बनी होती है।

पोडोसाइट्स से अनेक अंगुलीवत् प्रवर्ध बाहर की ओर निकलकर ग्लोमेरलस की केशिकाओं से लिपटे रहते हैं। केशिकाओं एवं पोड़साइट्स के प्रवर्धों की दीवरों मिलकर महीन ग्लोमेरूलस कला बनाती हैं जिसमें होकर परानिस्यंदन (ultrafiltration) होता है। बोमेन समुट में कोशिका गुच्छ या ग्लोमेरलस (glomerulus) नामक रुधर कोशिकाओं का घना जाल स्थित होता है।

बोमेन सम्युट तथा केशिका गुच्छ को सम्मिलित रूप में मैलपीघी कोष कहते हैं। केशिका गुच्छ में रुधिर अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) द्वारा प्रवेश करता है तथा अपवाही धमनिका (efferent arteriole) द्वारा बाहर निकलता है। अभिवाही धमनिका का व्यास अपवाही धमनिका के व्यास से अधिक होता है, जिसके कारण केशिका गुच्छ में रुधर दाब बढ़ जाता है।

अपवाही धमनिका पुनः वृक्क नलिका के कुण्डलित भाग पर केशिकाओं का जाल बनाती है। जिसे परिनलिका केशिका जालक (peritubular capillary network) कहते हैं। ये केशिकाएँ मिलकर वृक्क शिरा (renal vein) के रूप में बाहर आती हैं।

(2) ग्रीवा (Neck) – बोमेन समुट का निचला भाग पतली नलिका के रूप में होता है जिसे प्रीवा कहते हैं। यह भीतर की ओर रोमाभि उपकला (ciliated epithelium) से स्तरित रहती है तथा निस्यंदन (filtrate) को आगे की ओर प्रवाहित करने में सहायता करती है।

(3) वृक्क नलिका का स्रावी भाग (Secretory Part of nephron)-प्रीवा के पीछे वृक्क नलिका अत्यधिक लम्बी, स्रावी एवं कुण्डलित होती है।
(i) समीपस्थ कुण्डलित नलिका (Proximal convoluted tubule)-यह बोमेन सम्पुट से निकलने वाली छोटी, मोटी एवं कुण्डलित नलिका होती है। आगे की ओर यह पतली और सीधी हो जाती है। यह भाग घनाकार उपकला (cuboidal epithelium) का बना होता है। कोशिकाओं की स्वतन्त्र सतह पर सूक्ष्मांकुर (microvilli) होते हैं। ये समीपस्थ कुण्डलित नलिका को अवशोषण के उपयुक्त बनाते हैं।

(ii) हेनले लूप (Henle’s loop) – समीपस्थ कुण्डलित भाग के बाद वृक्क नलिका का कुछ भाग सीधा और चाप ‘ U ‘ के रूप में होता है। इसे हेनले लूप कहते हैं। इसकी अवरोही नलिका (descending tubule) समीपस्थ कुण्डलित नलिका से मिली रहती है तथा आरोही़ नलिका (ascending tubule) दूरस्थ कुण्डलित नलिका से मिली रहती है।

(iii) दूरस्थ कुष्डलित नलिका (Distal convoluted tubule) – हेनले लूप की आरोही नलिका से मिली हुई यह नलिका भी समीपस्थ कुण्डलित नलिका के समान छोटी-मोटी और कुण्डलित होती है तथा इसी के समीप स्थित रहती है और किसी संग्रह नलिका (collecting duct) में खुलती है।
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(4) संग्रह नलिका (Collecting duct) – अनेक वृक्क नलिकाएँ अन्त में संम्रह नलिका में खुलती हैं। संप्रह नलिका वृक्क नलिका का भाग नहीं है। कई संप्रह नलिकाएँ (जो अन्तस्थ के पिरैमिड्स में स्थित होती हैं) एक चौड़ी प्रमुख संम्रह नलिका में खुलती है, जिसे बेलिनी की नलिका (duct of Bellini) कहते हैं। सभी बेलिनी की नलिकाएँ वृक्क अंकुरों के शिखर पर मूत्रवाहिनी (ureter) में खुलती हैं।

वृक्क नलिकाओं (नेफ्रोन) के प्रकार (Kinds of Nephrons)
मनुष्य (तथा अन्य स्तनियों) के वृक्कों में स्थिति, लम्बाई तथा रुधि आपूर्ति में भिन्न दो स्पष्ट प्रकार की वृक्क नलिकाएँ होती हैं-
(1) वल्कलीय या वस्कुटीय वृक्क नलिकाएँ (Cortical nephrons) – इनकी संख्या लगभग 80% होती है। ये अपेक्षाकृत छोटी होती हैं। इनके बोमेन सम्पुट वृक्कों की सतह के अधिक निकट स्थित होते हैं। इनके हेनले के लूप बहुत छोटे और वृक्कों के अन्तस्थ या मज्जक (medullary) भाग के कुछ ही दूर तक फैले होते हैं।

(2) मध्यांशीय वृक्क नलिकाएँ या जक्स्टामेडुलरी नेक्रॉंन (Medullary nephron or Juxtamedullary nephron) – इनकी संख्या लगभग 20% होती है। ये वल्कीय वृक्क नलिकाओं को अपेक्षा बड़ी होती हैं। इनके वोमैन सम्पुट वृक्कों के प्रान्तस्थ या वल्कीय (Cortical) तथा अन्तस्थ या मज्जक (medullary) भागों के संगम क्षेत्र में स्थित होते हैं तथा इनके हेनले लूप बहुत लम्बे और वृक्कों के मज्जक (medullary) भाग के पिरामिडों में लगभग पूरी गहराई तक फैले होते हैं । इनके हेनले लूप के समान्तर एक ‘ U ‘ के आकार की कोशिका होती है, जिसे वासा रेक्टा (vasa recta) कहते हैं। ये कोशिकाएँ जल के पुनरावशोषण में सहायता करती हैं।

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प्रश्न 5.
मनुष्य में यूरिया के निर्माण की क्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मूत्र निर्माण (Formation of Urine)
यकृत कोशिकाओं में बने यूरिया को रुधिर द्वारा वृक्कों में लाया जाता है। यकृत से यूरिया युक्त रुधि यकृत शिरा द्वारा पश्च महाशिरा में डाल दिया जाता है। पश्च महाशिरा से यूरिया युक्त रधधर वृक्कों में पहुँचता है। वृक्कों में यूरिया को रुधिर से पृथक् किया जाता है। इसे मूत्र निर्माण कहते हैं। मूत्र निर्माण की क्रिया निम्न चरणों में पूर्ण होती है-

  • परानिस्यन्दन (Ultrafiltration),
  • वरणात्मक पुनरावशोषण (Selective reabsorption),
  • स्रावण (Secretion)।

1. परानिस्यन्दन या अस्ट्राफिल्ट्रेशन (Ultrafiltration) – वृक्क के बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) सूक्ष्म छलनी की भाँति कार्य करते हैं। मनुष्य के ग्लोमेरलस (glomerulus) में लगभग 50 समानान्तर केशिकाएँ पायी जाती हैं। इसमें अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) यूरिया युक्त रुधिर लाती है तथा अपवाही धमनिका (efferent arteriole) इससे रुधिर बाहर ले जाती है।

ग्लोमेरुलस की दीवार में असंख्य छिद्र होते हैं, जिनका व्यास लगभग 0.1µm होता है, इन छिद्रों में से प्लाज्मा में घुले पदार्थ छनकर निकल सकते हैं। छिद्रित दीवार की पारगम्यता (permeability) सामान्य रुधिर केशिकाओं की अपेक्षा 100 से 1000 गुना अधिक होती है। ग्लोमेरूलस में आने वाला रुधिर जितना तेजी से आता है, बाहर जाते समय उतनी तेजी से नहीं जा पाता है।

इसी कारण एक स्वस्थ मनुष्य में ग्लोमेरूलस में आने वाले रुधिर का रुधिर दाब 70mm Hg होता है, जबकि ग्लोमेरुलस से जाते समय रीधर दाब 30mm Hg होता है। इसके फलस्वरूप ग्लोमेरुलस के रुधिर से तरल प्लाज्मा (plasma) व उत्सर्जी पदार्थ बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) की गुहा में पहुँच जाते हैं।

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ग्लोमेरूलस से छनकर बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) की गुहा में जाने वाले द्रव को ग्लोमेरलर निस्यन्द (glomerular filtrate) कहते हैं। इसमें रुधिर के जल का 95% भाग, अमीनो अम्ल (amino acids), यूरिया (urea), ग्लूकोस (glucose), यूरिक अम्ल (uric acid), क्रिएटिन (criatine) तथा लवण (salts) होते हैं। बोमेन सम्मुट के नीचे म्रीवा (neck) का भीतरी अस्तर पक्ष्माभी एपिथीलियम का बना होता है। पक्ष्माभों (cilia) की गति से ग्लोमेरलर फिल्ट्रेट तेजी से नलिका में आगे बढ़ता रहता है।

(2) वरणात्पक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption) – ग्लोमेरूलर निस्यन्द (Glomerular filtrate) में रुधिर के जल का 95% भाग छनकर आ जाता है परन्तु इसका लगभग 0.8 % भाग ही मूत्र में परिवर्तित होकर बाहर निकलता है। शेष भाग का रुधिर में पुन: अवशोषण हो जाता है। लाभदायक पदार्थों का वृक्क नलिकाओं से पुनः रुधर में पहुँचना वरणात्मक पुनरावशोषण (selective reabsorption) कहलाता है। यह पुन: अवशोषण निम्नानुसार होता है-

(i) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में पुनरावशोषण (Reabsorption in Proximal Convoluted Tubules) – इन कोशिकाओं द्वारा निस्यन्द का लगभग 75% भाग अवशोषित होकर परिनलिका केशिका जाल (peritubular capillary network) के रुधिर में पहुँचता है। जिसके फलस्वरूप ग्लूकोज (glucose), ऐमीनो अम्ल (amino acids), विटामिन (vitamins), अकार्बनिक लवण, जैसे – फॉस्फेट, स्ल्फेट, सोडियम, कैल्सियम, पोटैशियम आदि सक्रिय गमन (active transport) द्वारा पुनः रुधिर में चले जाते हैं, परासरण द्वारा जल भी रुधिर में पहुँचता है।
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(ii) हेन्ले के लूप में पुनरावशोषण (Reabsorption in Loop of Henle) – इसके तीन भाग होते हैं-
(अ) अवरोही भुजा (Descending Limb) – लूप का यह भाग मैड्यूला में स्थित होता है जिस कारण यहाँ सोडियम आयन Na+ की अधिकता होती है। इस कारण यहाँ जल का अधिक मात्रा में अवशोषण होता है तथा सोडियम Na+ पोटैशियम K+ तथा क्लोराइड CI आयनों का अवशोषण कम होता है।

(ब) आरोही भुआ का महीन खण्ड (Thin Segment of Ascending Limb) – यह जल के लिए अपारगम्य, यूरिया के लिए अर्द्धपारगम्य तथा Na+ एवं CI के लिए पूर्ण पारगम्य होता है।

(स) आरोही भुजा का चौड़ा खण्ड (Thick Segment of Ascending Limb) – इस खण्ड की दीवार मोटी व जल और यूरिया के लिए अपारगम्य होती है। यहाँ Na+ तथा CI आयनों का सक्रिय अभिगमन द्वारा निस्यन्द से बाहर स्थानान्तरण होता है।

(iii) दूरस्थ कुण्डलित नलिका में पुनरावशोषण (Reabsorption in Distal Convoluted Tubule)-इस भाग में सोडियम आयनों Na+तथा क्लोराइड आयनों CI का सक्रिय अभिगमन द्वारा अवशोषण होता है।

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(3) स्रावण (Secretion)- कुछ हानिकारक पदार्थ, जैसे- रंगा पदार्थ (pigments), कुछ औषधियाँ (drugs), यूरिक अम्ल (uric acid) इत्यादि हानिकारक पदार्थ परानिस्यन्दन (ultrafiltration) द्वारा नहीं छन पाते हैं। हेनले के लूप तथा समीपस्थ एवं दूरस्थ कुण्डलित नलिकाओं की उपकला कोशिकाएँ इन अपशिष्ट पदार्थों को सक्रिय अभिगमन द्वारा वृक्क नलिकाओं (nephrons) की गुहा में मुक्त करती रहती हैं। इस प्रक्रिया को नलिकीय स्रावण (secretion) कहते हैं। संप्राहक नलिका (collecting tubule) के अन्तिम भाग में ग्लोमेरलर निस्यन्द (glomerular filtrate) मूत्र (Urine) कहलाने लगता है।

मूत्र (Urine) – ग्लोमेलुलर निस्यन्द का अवशेष, जो पेल्विस में तथा वहाँ से मूत्रवाहिनी में पहुँचता है, मूत्र (urine) होता है। मूत्र में सामान्यतया 95% जल, 2% अनावश्यक लवण, 2.6% यूरिया, 0.3% क्रिटिनीन, सूक्ष्म मात्रा में यूरिक अम्ल तथा अन्य पदार्थ होते हैं। मूत्र का पीला रंग यूरोक्रोम (urochrome) के कारण होता है। मूत्र हल्का अम्लीय (pH-6) होता है। निम्न ताप पर मूत्र अधिक मात्रा में उत्सर्जित होता है। उच्च ताप, शारीरिक परिश्रम तथा अधिक पसीना आने के कारण मूत्र की मात्रा कम हो जाती है। चाय, कॉफी, ऐल्कोहॉल आदि के प्रभाव से मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है। इन पदार्थों को मूत्रलता (diuretic) कहते हैं।

मूत्र का संगठन

जल95%
अकार्बनिक लवण1.5%Na+Mg++K+PO2,Se
यूरिया2.6%
यूरिक अम्ल0.5%
हिप्यूरिक अम्ल.0.5%
अमोनिया0.25%
क्रिएटिन, क्रिऐटिनिन0.5%

प्रश्न 6.
मनुष्य में मूत्र निर्माण कहाँ होता है ? मूत्र निर्माण का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
मूत्र निर्माण (Formation of Urine)
यकृत कोशिकाओं में बने यूरिया को रुधिर द्वारा वृक्कों में लाया जाता है। यकृत से यूरिया युक्त रुधि यकृत शिरा द्वारा पश्च महाशिरा में डाल दिया जाता है। पश्च महाशिरा से यूरिया युक्त रधधर वृक्कों में पहुँचता है। वृक्कों में यूरिया को रुधिर से पृथक् किया जाता है। इसे मूत्र निर्माण कहते हैं। मूत्र निर्माण की क्रिया निम्न चरणों में पूर्ण होती है-

  • परानिस्यन्दन (Ultrafiltration),
  • वरणात्मक पुनरावशोषण (Selective reabsorption),
  • स्रावण (Secretion)।

(1) परानिस्यन्दन या अस्ट्राफिल्ट्रेशन (Ultrafiltration) – वृक्क के बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) सूक्ष्म छलनी की भाँति कार्य करते हैं। मनुष्य के ग्लोमेरलस (glomerulus) में लगभग 50 समानान्तर केशिकाएँ पायी जाती हैं। इसमें अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) यूरिया युक्त रुधिर लाती है तथा अपवाही धमनिका (efferent arteriole) इससे रुधिर बाहर ले जाती है।

ग्लोमेरुलस की दीवार में असंख्य छिद्र होते हैं, जिनका व्यास लगभग 0.1µm होता है, इन छिद्रों में से प्लाज्मा में घुले पदार्थ छनकर निकल सकते हैं। छिद्रित दीवार की पारगम्यता (permeability) सामान्य रुधिर केशिकाओं की अपेक्षा 100 से 1000 गुना अधिक होती है। ग्लोमेरूलस में आने वाला रुधिर जितना तेजी से आता है, बाहर जाते समय उतनी तेजी से नहीं जा पाता है।

इसी कारण एक स्वस्थ मनुष्य में ग्लोमेरूलस में आने वाले रुधिर का रुधिर दाब 70mm Hg होता है, जबकि ग्लोमेरुलस से जाते समय रीधर दाब 30mm Hg होता है। इसके फलस्वरूप ग्लोमेरुलस के रुधिर से तरल प्लाज्मा (plasma) व उत्सर्जी पदार्थ बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) की गुहा में पहुँच जाते हैं।

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ग्लोमेरूलस से छनकर बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) की गुहा में जाने वाले द्रव को ग्लोमेरलर निस्यन्द (glomerular filtrate) कहते हैं। इसमें रुधिर के जल का 95% भाग, अमीनो अम्ल (amino acids), यूरिया (urea), ग्लूकोस (glucose), यूरिक अम्ल (uric acid), क्रिएटिन (criatine) तथा लवण (salts) होते हैं। बोमेन सम्मुट के नीचे म्रीवा (neck) का भीतरी अस्तर पक्ष्माभी एपिथीलियम का बना होता है। पक्ष्माभों (cilia) की गति से ग्लोमेरलर फिल्ट्रेट तेजी से नलिका में आगे बढ़ता रहता है।

(2) वरणात्पक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption) – ग्लोमेरूलर निस्यन्द (Glomerular filtrate) में रुधिर के जल का 95% भाग छनकर आ जाता है परन्तु इसका लगभग 0.8 % भाग ही मूत्र में परिवर्तित होकर बाहर निकलता है। शेष भाग का रुधिर में पुन: अवशोषण हो जाता है। लाभदायक पदार्थों का वृक्क नलिकाओं से पुनः रुधर में पहुँचना वरणात्मक पुनरावशोषण (selective reabsorption) कहलाता है। यह पुन: अवशोषण निम्नानुसार होता है-

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(i) समीपस्थ कुण्डलित नलिका में पुनरावशोषण (Reabsorption in Proximal Convoluted Tubules) – इन कोशिकाओं द्वारा निस्यन्द का लगभग 75% भाग अवशोषित होकर परिनलिका केशिका जाल (peritubular capillary network) के रुधिर में पहुँचता है। जिसके फलस्वरूप ग्लूकोज (glucose), ऐमीनो अम्ल (amino acids), विटामिन (vitamins), अकार्बनिक लवण, जैसे – फॉस्फेट, स्ल्फेट, सोडियम, कैल्सियम, पोटैशियम आदि सक्रिय गमन (active transport) द्वारा पुनः रुधिर में चले जाते हैं, परासरण द्वारा जल भी रुधिर में पहुँचता है।
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(ii) हेन्ले के लूप में पुनरावशोषण (Reabsorption in Loop of Henle) – इसके तीन भाग होते हैं-
(अ) अवरोही भुजा (Descending Limb) – लूप का यह भाग मैड्यूला में स्थित होता है जिस कारण यहाँ सोडियम आयन Na+ की अधिकता होती है। इस कारण यहाँ जल का अधिक मात्रा में अवशोषण होता है तथा सोडियम Na+ पोटैशियम K+ तथा क्लोराइड CI आयनों का अवशोषण कम होता है।

(ब) आरोही भुआ का महीन खण्ड (Thin Segment of Ascending Limb) – यह जल के लिए अपारगम्य, यूरिया के लिए अर्द्धपारगम्य तथा Na+ एवं CI के लिए पूर्ण पारगम्य होता है।

(स) आरोही भुजा का चौड़ा खण्ड (Thick Segment of Ascending Limb) – इस खण्ड की दीवार मोटी व जल और यूरिया के लिए अपारगम्य होती है। यहाँ Na+ तथा CI आयनों का सक्रिय अभिगमन द्वारा निस्यन्द से बाहर स्थानान्तरण होता है।

(iii) दूरस्थ कुण्डलित नलिका में पुनरावशोषण (Reabsorption in Distal Convoluted Tubule)-इस भाग में सोडियम आयनों Na+ तथा क्लोराइड आयनों CI का सक्रिय अभिगमन द्वारा अवशोषण होता है।

(3) स्रावण (Secretion)- कुछ हानिकारक पदार्थ, जैसे- रंगा पदार्थ (pigments), कुछ औषधियाँ (drugs), यूरिक अम्ल (uric acid) इत्यादि हानिकारक पदार्थ परानिस्यन्दन (ultrafiltration) द्वारा नहीं छन पाते हैं। हेनले के लूप तथा समीपस्थ एवं दूरस्थ कुण्डलित नलिकाओं की उपकला कोशिकाएँ इन अपशिष्ट पदार्थों को सक्रिय अभिगमन द्वारा वृक्क नलिकाओं (nephrons) की गुहा में मुक्त करती रहती हैं। इस प्रक्रिया को नलिकीय स्रावण (secretion) कहते हैं। संप्राहक नलिका (collecting tubule) के अन्तिम भाग में ग्लोमेरलर निस्यन्द (glomerular filtrate) मूत्र (Urine) कहलाने लगता है।

मूत्र (Urine) – ग्लोमेलुलर निस्यन्द का अवशेष, जो पेल्विस में तथा वहाँ से मूत्रवाहिनी में पहुँचता है, मूत्र (urine) होता है। मूत्र में सामान्यतया 95% जल, 2% अनावश्यक लवण, 2.6% यूरिया, 0.3% क्रिटिनीन, सूक्ष्म मात्रा में यूरिक अम्ल तथा अन्य पदार्थ होते हैं। मूत्र का पीला रंग यूरोक्रोम (urochrome) के कारण होता है। मूत्र हल्का अम्लीय (pH-6) होता है।

निम्न ताप पर मूत्र अधिक मात्रा में उत्सर्जित होता है। उच्च ताप, शारीरिक परिश्रम तथा अधिक पसीना आने के कारण मूत्र की मात्रा कम हो जाती है। चाय, कॉफी, ऐल्कोहॉल आदि के प्रभाव से मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है। इन पदार्थों को मूत्रलता (diuretic) कहते हैं।

प्रश्न 7.
मानव में उत्सर्जन से सम्बन्धित प्रमुख क्रिया रोगों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
उत्सर्जन सम्बन्धी रोग (Disorders Related to Excretion)
मानव में उत्सर्जन क्रिया में अनियमितता होने पर कई रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख रोग निम्नलिखित हैं-

  1. यूरेमिया (Uremia) – जब रक्त में यूरिया की मात्रा सामान्य मात्रा (10-30) mg प्रति 100 ml से अधिक हो जाती है तो यह स्थिति यूरेमिया (uremia) कहलाती है।
  2. गॉड्ट (Gout) – यह एक आनुवंशिक रोग होता है जिसमें रक्त में यूरिक अम्ल (uric acid) की मात्रा अधिक हो जाती है तथा यह सन्धियों (joints) तथा वृक्क ऊतकों (kidney tissues) में जमा हो जाता है।
  3. वृक्क पथरी (Kidney stones) – सामान्यतः वृक्क श्रोणि (renal pelvis) में यूरिक अम्ल के क्रिस्टल, कैल्सियम के ऑक्सलेट्स, फॉस्फेट लवण इत्यादि पथरी के रूप में जमा हो जाते हैं जिसमें रोगी को दर्द या मूत्र त्याग में बाधा उत्पन्न होती है।
  4. बाइट का रोग अधवा नेक्रिटिस (Bright’s Disease or Nephritis) – इस रोग में ग्लोमेरुलस में जीवाणु संक्रमण (bacterial infection) के कारण ग्लोमेरूलस में सूजन आ जाती है जिस कारण लाल रक्ताणु तथा प्रोटीन थी छनकर निस्यन्द (filtrate) में आ जाते हैं।
  5. ग्लाइकोसूरिया (Glycosuria)-मूत्र (urine) में शर्करा (glucose) की उपस्थिति एवं उत्सर्जन ग्लाइकोसूरिया (glycosuria) कहलाता है। यह रोग इन्सुलिन हॉर्मोन (insuline hormone) की कमी से उत्पन्न होता है।
  6. डिसयूरिया (Disurea) – मूत्र त्याग के समय दर्द की अवस्था डिसयूरिया कहलाती है।
  7. पोलीयूरिया (Polyurea) – वृक्क नलिकाओं (nephrons) द्वारा पुन: अवशोषण (Re-absorption) में कमी आने या न होने से मूत्र के आयतन के बढ़ने की अवस्था पोलीयूरिया (polyurea) कहलाती है।
  8. सिस्टिटि (Cystitis) – मूत्राशय (Urinay bladder) में सूजन आ जाने से यह रोग उत्पन्न होता है।
  9. डायबिटीज इन्सिपिड्स (Diabetes Insipidus) – पीयूष ग्रन्थि (pituitary gland) द्वारा स्नावित एण्टीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (ADH) के कम स्नावण के कारण दूरस्थ कुण्डलित नलिका (distal convoluted tubules) एवं संयाहक नलिका (collecting tubule) में जल के अवशोषण में कमी आती है जिस कारण रोगी बार-बार अधिक मात्रा में मूत्र त्याग करता है।
  10. ओलीगोयूरिया (Oligouria) – मूत्र (urine) की बहुत कम मात्रा के निर्माण होने से यह रोग उत्पन्न होता है।
  11. प्रोटीन्यूरिया (Proteinuria) – मूत्र में प्रोटीन की मात्रा का सामान्य से अधिक होना प्रोटीन्यूरिया कहते हैं।
  12. एल्ब्यूमिनयूरिया (Albuminuria) – नेफ्रोन के ग्लोमेरूलस में सूजन के कारण अल्ट्रा छिद्रों (ultra pore) का व्यास बढ़ जाता है जिसे नेक्राइटिस (Nephritis) कहते हैं। इस रोग के कारण मूत्र में एल्ब्यूमिन प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है।
  13. कीटोन्यूरिया (Ketonuria) – मूत्र में कीटोनकाय जैसे ऐसीटिक अम्ल आदि की मात्रा का बढ़ना कीटोन्यूरिया कहलाती है।
  14. हीमेटोयूरिया-मूत्र के साथ लाल रक्त कणिकाओं (RBC) का निष्कासित होना हीमेटोयूरिया कहलाता है।
  15. हीमोग्लोबिनयूरिया (Haemoglobinuria) – मूत्र में हीमोग्लोबिन की उपस्थिति हीमोग्लोबिनयूरिया कहलाती है।
  16. पाइयूरिया (Pyuria) – मूत्र में मवाद कोशिकाओं (pus cells) का पाया जाना पाइयूरिया कहलाती है।
  17. पीलिया (Jaundice) – मूत्र में पित्त वर्णकों का अस्यधिक मात्रा में पाया जाना पीलिया कहलाता है। यह प्रायः हिपेटाइटिस या पित्त नलिका में रुकावट के समय दिखाई देता है।
  18. एल्कैप्टोन्यूरिया (Alcaptonuria) – मूत्र में एल्कैप्टोन या होमोजेन्टीसिक अम्ल का पाया जाना एल्कैप्टोन्यूरिया कहलाता है। जब एल्कैप्टोन वायु के सम्पर्क है तो मूत्र काले रंग का दिखाई देता है।

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प्रश्न 8.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए-
(अ) अपोहन
(ब) परानिस्यंदन
(स) चयनात्मक पुनः अवशोषण
(द) जक्स्टा ग्लोमेरुलर उपकरण ।
उत्तर:
(अ) अपोहन
अपाहन या हामाडाइालासस (Haemodialysis)
वृक्कों के निक्क्रिय होने पर रक्त में यूरिया एकत्रित हो जाता है। इसे यूरिनिया (urenia) कहते हैं जो कि अत्यन्त हानिकारक है। यह वृक्क-पात (kidney failure) के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है। इसके मरीजों में यूरिया का निष्कासन हीमोडाइलिसिस (रक्त अपोहन) द्वारा होता है। इस क्रिया में रोगी की मुख्य धमनी से रक्त निकालकर 0° पर उण्डा करते हैं।

अथवा इस रक्त में हिपेरिन (heparin) नामक थक्कारोधी (प्रतिस्कन्दक) मिलाते हैं। तत्पश्चात् इस रक्त को अपोहनकारी इकाई में भेजा जाता है। इस इकाई में एक कुण्डलित सेलोफेन नली होती है और यह ऐसे द्रव से घिरी रहती है, जिसका संगठन नाइट्रोजनी अपशिष्टों को छोड़कर प्लाज्मा के समान होता है।

छिद्र युक्त सेलोफेन झिल्ली से अपोहनी द्रव में अणुओं का आवागमन सान्द्रण प्रवणता के अनुसार होता है। अपोहनी द्रव में नाइट्रोजनी अपशिष्ट अनुपस्थित होते हैं, अतः वे पदार्थ बाहर की ओर गमन करते हैं और रक्त को शुद्ध करते हैं। शुद्ध रक्त में हिपेरिन विरोधी डालकर, उसे रोगी की शिराओं द्वारा पुनः शरीर में भेज दिया जाता है। हीमोडाइलिसिस विधि द्वारा यूरिमिया व्याधि से रोगियों का उपचार किया जाता है।

(ब) परानिस्यंदन
(1) परानिस्यन्दन या अल्ट्राफिल्ट्रेशन (Ultrafiltration) – वृक्क के बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) सूक्ष्म छलनी की भाँति कार्य करते हैं। मनुष्य के ग्लोमेरूलस (glomerulus) में लगभग 50 समानान्तर केशिकाएँ पायी जाती हैं। इसमें अभिवाही धमनिका (afferent arteriole) यूरिया युक्त रुधिर लाती है तथा अपवाही धमनिका (efferent arteriole) इससे रुधिर बाहर ले जाती है। ग्लोमेरुलस की दीवार में असंख्य छिद्र होते हैं, जिनका व्यास लगभग 0.1 µm होता है, इन छिद्रों में से प्लाज्मा में घुले पदार्थ छनकर निकल सकते हैं।
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छिद्रित दीवार की पारगम्यता (permeability) सामान्य रुधिर केशिकाओं की अपेक्षा 100 से 1000 गुना अधिक होती है। ग्लोमेरुलस में आने वाला रुधिर जितना तेजी से आता है, बाहर जाते समय उतनी तेजी से नहीं जा पाता है। इसी कारण एक स्वस्थ मनुष्य में ग्लोमेरुलस में आने वाले रुधिर का रुधिर दाब 70 mm Hg होता है, जबकि ग्लोमेरुलस से जाते समय रुधर दाब 30mm = Hg होता है।

इसके फलस्वरूप ग्लोमेरुलस के रुधिर से तरल प्लाज्मा (plasma) व उत्सर्जी पदार्थ बोमेन सम्पट (Bowman’s capsule) की गुहा में पहुँच जाते हैं। ग्लोमेरलस से छनकर बोमेन सम्पुट (Bowman’s capsule) की गुहा में जाने वाले द्रव को ग्लोमेरेलर निस्यन्द (glomerular filtrate) कहते हैं।

इसमें रुधिर के जल का 95% भाग, अमीनो अम्ल (amino acids), यूरिया (urea), ग्लूकोस (glucose), यूरिक अम्ल (uric acid), क्रिएटिन (criatine) तथा लवण (salts) होते हैं। बोमेन सम्मुट के नीचे प्रीवा (neck) का भीतरी अस्तर पक्ष्माभी एपिथीलियम का बना होता है। पक्ष्माभों (cilia) की गति से ग्लोमेरुलर फिल्टेट तेजी से नलिका में आगे बढ़ा रहता है।

(स) चयनात्मक पुनः अवशोषण
वरणात्भक पुनरावशोषण (Selective Reabsorption) – ग्लोमेरुलर निस्यन्द (Glomerular filtrate) में रुधिर के जल का 95% भाग छनकर आ जाता है परन्तु इसका लगभग 0.8% भाग ही मूत्र में परिवर्तित होकर बाहर निकलता है। शेष भाग का रुधिर में पुन: अवशोषण हो जाता है। लाभदायक पदार्थों (र)। यह पन: अवशोषण निम्नानुसार होता है-

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(द) जक्स्टा ग्लोमेरुलर उपकरण ।
(ii) सानिध्य मध्यांश वृक्काणु या जक्स्ता मैड्यूलरी नेक्रान्स (Juxta medullary nephrons)
ये कुल नेक्रॉन्स का5-35% होते हैं। ये वृक्क में कार्टेक्स व मेड्यूला के मिलने के स्थान पर पाए जाते हैं। इनके हेनले के लूप लम्बे होते हैं जोकि वृक्क अंकुर (renal papilla) तक फैले होते हैं। इनकी परिनलिका केशिका जाल आलपिन की नोंक जैसा लूप बनाता है जिसे वासा रेक्टा (vasa recta) या
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रीटी माइेबिल (rete Mirabile) कहते हैं। इसमें बोमेन सम्पुट, आरोही भुजा तथा अभिवाही व अपवाही धमनिका में विशिष्ट कोशिकाएँ पायी जाती हैं, जिन्हें क्रमशः पोल्कीसन कोशिका (polkisson cells), मैक्युला डेस्सा (macula densa) तथा जक्स्टा म्लोमेरललर कोशिका (Juxta-Glomerular cells) कहते हैं। ये तीनों प्रकार की कोशिकाएँ मिलकर जक्स्टा-ग्लोमेुलर समिश्र (Juxta-glomerular apparatus) बनाते हैं। ये अन्त्रान्रावी प्रन्थि की भाँति कार्य कर वृक्क हामोंन रेनिन का स्रावण करते हैं।

वृक्कों में गुच्छ निस्यंदन की दर के नियमन के लिए गुच्छीय आसन्न उपकरण या जक्स्टा ग्लोमेरुलर समिश्र पाया जाता है जो अभिवाही व अपवाही धमनिकाओं के दूरस्थ कुण्डलित नलिका की केशिकाओं के रूपान्तरण से बनता है। इसी के सक्रियण से रेनिन का स्रावण होता है। रेनिन मून्र के सान्द्रण तथा गुच्छ निस्यंदन को नियन्त्रित करता है।

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HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 1 भौतिक जगत

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 1 भौतिक जगत Important Questions and Answers.

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बहुविकल्पीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
सबसे क्षीण मूल बल है:
(a) गुरुत्वीय बल
(b) विद्युत् चुम्बकीय बल
(c) प्रबल नाभिकीय बल
(d) क्षीण नाभिकीय बल
उत्तर:
(a) गुरुत्वीय बल

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प्रश्न 2.
जगदीश चन्द्र बोस की प्रमुख खोज है:
(a) X – किरण
(b) इलेक्ट्रॉन
(c) अति लघु रेडियो तरंगें
(d) जड़त्व का नियम
उत्तर:
(c) अति लघु रेडियो तरंगें

प्रश्न 3.
जब निकाय पर बाह्य बल शून्य है, तो संरक्षित भौतिक राशि है:
(a) यांत्रिक ऊर्जा
(b) रेखीय संवेग
(c) कोणीय संवेग
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(b) रेखीय संवेग

प्रश्न 4.
β-क्षय उत्सर्जन के साथ कौन-सा कण उत्सर्जित होता है?
(a) न्यूट्रिनो
(b) इलेक्ट्रॉन
(c) प्रोटॉन
(d) न्यूट्रॉन
उत्तर:
(a) न्यूट्रिनो

प्रश्न 5.
X- किरणों के आविष्कारक थे:
(a) न्यूटन
(b) आइंस्टीन
(c) रोजन
(d) गोल्डस्टीन
उत्तर:
(c) रोजन

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प्रश्न 6.
दो कारों की टक्कर में संरक्षित राशि होगी:
(a) गतिज ऊर्जा
(b) कुल यान्त्रिक ऊर्जा
(c) रेखीय संवेग
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) रेखीय संवेग

प्रश्न 7.
बोसॉन है:
(a) अर्द्ध-पूर्णांक चक्रण वाले कण
(b) पूर्णांक चक्रण वाले कण
(c) गैसों के कण
(d) अनावेशित कण
उत्तर:
(b) पूर्णांक चक्रण वाले कण

प्रश्न 8.
दो प्रोटॉनों के बीच का वैद्युत् बल उनके बीच लगे गुरुत्वाकर्षण बल का कितने गुना होता है:
(a) 1014
(b) 1017
(c) 1034
(d) 1036
उत्तर:
(d) 1036

अति लघु उत्तरीय प्रश्न: 

प्रश्न 1.
प्रकृति के मूल बलों में अल्प परास का सबसे प्रबल बल कौन-सा है?
उत्तर:
नाभिकीय बल।

प्रश्न 2.
सूर्य के परितः ग्रहों की गति में कौन सी राशि संरक्षित रहती है?
उत्तर:
कोणीय वेग।

प्रश्न 3.
वैज्ञानिक व्यवहार क्या है?
उत्तर:
वैज्ञानिक विधियों के प्रयोग से समस्याएँ हल करने का व्यवहार, वैज्ञानिक व्यवहार कहलाता है।

प्रश्न 4.
विज्ञान का मूलभूत लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
विज्ञान का मूलभूत लक्ष्य हमारे चारों ओर के वातावरण में होने वाली प्राकृतिक परिघटनाओं का विश्लेषण तथा सत्य की खोज करना है।

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प्रश्न 5.
प्रकृति के चार मूलभूत बलों के नाम दीजिए।
उत्तर:

  1.  गुरुत्वाकर्षण बल,
  2.  विद्युत् चुम्बकीय बल
  3.  प्रबल नाभिकीय बल
  4.  दुर्बल नाभिकीय बल।

प्रश्न 6.
द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता का सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर:
E = mc2, यहाँ
c → प्रकाश का वेग।

प्रश्न 7.
भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रथम वैज्ञानिक का क्या नाम है?
उत्तर:
सर सी०वी० रमन (रमन प्रभाव के लिए)।

प्रश्न 8.
नाभिक में धनावेशित कण किस मूल बल के कारण बँधे रहते हैं?
उत्तर:
नाभिकीय बल।

लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1.
भौतिक विज्ञान क्या है?
उत्तर:
भौतिकी अर्थात् भौतिक विज्ञान शब्द की उत्पत्ति यूनानी (ग्रीक) शब्द ‘फुसिस’ (Pheusis / Fusis) से हुई है जिसका तात्पर्य है ‘प्रकृति’। वेदों में भी ‘प्राकृतिक’ (Natural) के लिए अधिकांशतः “भौतिक” (Physical) शब्द का उपयोग किया गया है। इसी से ‘भौतिकी’ या ‘भौतिक विज्ञान’ शब्द की उत्पत्ति हुई है। इस प्रकार ” भौतिकी अर्थात् भौतिक विज्ञान, विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत प्रकृति और प्राकृतिक घटनाओं का अध्ययन किया जाता है।” [Physics is the branch of Science which deals with the study of nature and natural phenomena] चूँकि प्रकृति में ब्रह्माण्ड की सभी सजीव तथा निर्जीव वस्तुएँ समाहित हैं, जो द्रव्य तथा ऊर्जा से मिलकर बनी हैं; अत: दूसरे शब्दों में, विज्ञान की उस शाखा को जिसमें द्रव्य तथा ऊर्जा और उनकी पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है, भौतिक विज्ञान कहते हैं।

प्रश्न 2.
भौतिकी की हमारे आम जीवन में क्या भूमिका है?
उत्तर:
आपसी सम्पर्क तथा आदान-प्रदान सुलभ होने से सभी देशों की सभ्यता, रहन-सहन और सोचने-विचारने के तरीकों में बहुत परिवर्तन हुआ है। इस प्रकार भौतिक विज्ञान ने अन्तर्राष्ट्रीय एवं विश्व-बन्धुत्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। शक्ति के साधनों का विकास- मानव का अस्तित्व तथा विकास शक्ति के साधनों पर निर्भर है।

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प्रश्न 3.
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम लिखिए।
उत्तर:
1. गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force ): गुरुत्वाकर्षण बल दो पिण्डों के बीच उनके द्रव्यमानों के कारण लगने वाला आकर्षण बल है। यह सार्वत्रिक बल है। न्यूटन के अनुसार, “दो द्रव्य पिण्डों के मध्य आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती व इनके मध्य दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” यह संरक्षी बल है।
माना दो पिण्ड m1 व m2 हैं, जिनके बीच की दूरी हो तो गुरुत्वाकर्षण बल
F = G \(\frac{m_1 m_2}{r^2}\)
G सार्वत्रिक नियतांक कहलाता है जिसका मान 6.67 x 10-11 N- m2 kg-2 होता है।
पृथ्वी के परित: चन्द्रमा तथा मानव निर्मित उपग्रहों की गति, सूर्य के परितः पृथ्वी तथा ग्रहों की गति और पृथ्वी पर गिरते पिण्डों की गति गुरुत्व बल द्वारा ही नियन्त्रित होती है। गुरुत्वीय बल का क्षेत्र कण ‘ग्रेविटोन’ कहलाता है।

प्रश्न 4.
भौतिकी तथा प्रौद्योगिकी के बीच सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
विज्ञान एवं उसमें भी विशेष रूप से भौतिकी का अनुप्रयोगात्मक स्वरूप ही प्रौद्योगिकी है। भौतिकी के सिद्धान्तों एवं नियमों का उपयोग करके बहुत-सी युक्तियाँ विकसित की गई हैं तथा यंत्र और उपकरण बनाये गये हैं। जिनके उपयोग से मानव जीवन अत्यन्त ही लाभान्वित और उन्नत हुआ है।
इससे सम्बन्धित अनेकों उदाहरण हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:

  1.  गुरुत्वाकर्षण के नियमों एवं गति के अध्ययन से अन्तरिक्षयानों तथा कृत्रिम उपग्रहों का प्रक्षेपण संभव हो सका, जिससे मनुष्य का चन्द्रमा तक जाना संभव हो सका है
  2.  ऊष्मागतिकी के नियमों के अध्ययन से ही ऊष्मीय इंजन तथा प्रशीतक (Refrigerator ) का विकास संभव हुआ है।
  3.  फैराडे के विद्युत् चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त के आधार पर ही विद्युत् ऊर्जा का उत्पादन (हाइड्रोइलेक्ट्रिक संयंत्रों तथा थर्मल पावर संयंत्रों द्वारा) किया जाता है। यह विद्युत् ऊर्जा आधुनिक प्रौद्योगिकी का मूल आधार है।
  4.  प्रकाश विद्युत् प्रभाव का उपयोग करके सौर बैटरी, सौर-कार, सौर लैम्प आदि का निर्माण सम्भव हो सका।
  5.  नाभिकीय विखण्डन की प्रक्रिया के आधार पर परमाणु ऊर्जा का उत्पादन तथा परमाणु बम, नाभिकीय पनडुब्बियों आदि का निर्माण किया जाता है।
  6.  इलेक्ट्रॉनिक्स के ज्ञान से टेलीविजन, कम्प्यूटर आदि का विकास संभव हुआ है।

प्रश्न 5.
भौतिकी तथा समाज के बीच सम्बन्ध बताइए।
उत्तर:
भौतिक विज्ञान में होने वाले तरह-तरह की खोजों, नए-नए नियमों एवं अवधारणाओं के सूत्रपात से नए नए साधनों और उपकरणों का आविष्कार हुआ। इन उपकरणों का प्रयोग समाज ही करता है, जिससे उसका जीवन सुगम होता है। उसका श्रम,धन और समय बचता है। इसलिए भौतिकी में हुई शोध, खोज और अविष्कारों का फल सकारात्मक रूप में समाज को मिलता है और समाज स्वयं को विकास के रास्ते पर ले जाता है, इसलिए समाज एवं भौतिकी में गहरा संबंध है।

  1.  ऊर्जा के नए स्रोतों की खोज बहुत बड़ी है। समाज के लिए महत्व।
  2.  परिवहन के तीव्र साधन किसके लिए कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। समाज।

प्रश्न 6.
ऊर्जा संरक्षण नियमों का कथन एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विभिन्न बलों से नियन्त्रित होने वाली किसी भी भौतिक घटना में कई राशियाँ समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन कुछ विशिष्ट भौतिक राशियाँ समय के साथ नहीं बदलती, जैसे- द्रव्यमान, ऊर्जा, संवेग, आदेश आदि । ये प्रकृति की संरक्षी भौतिक राशियाँ हैं। इन राशियों का संरक्षित
रहना कई प्रकार के संरक्षण नियमों का आधार है ऐसी ज्ञात 14 संरक्षी भौतिक राशियों में से कुछ संरक्षण नियम निम्नलिखित हैं-
1. द्रव्यमान-ऊर्जा संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass Energy): बाह्य संरक्षी बलों के अन्तर्गत होने वाली गति कुल यांत्रिक ऊर्जा (अर्थात् गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा) संरक्षित रहती है। उदाहरण के लिए, गुरुत्व के अन्तर्गत मुक्त रूप से गिरते पिण्ड की गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा समय के साथ परिवर्तित होती रहती है। लेकिन उनका योग नियत रहता है। संरक्षी बलों के लिए यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम विलगित निकाय के ऊर्जा संरक्षण के सामान्य नियम पर लागू नहीं होता है।

ऊर्जा संरक्षण का सामान्य नियम सभी बलों के लिए तथा ऊर्जा के सभी रूपों के परस्पर एक-दूसरे में परिवर्तन के लिए सत्य है। इसी प्रकार आइन्सटीन के सापेक्षवाद के सिद्धान्त के पूर्व अवधारणा सर्वमान्य थी कि द्रव्य अविनाशी है। रासायनिक अभिक्रियाओं के विश्लेषण एवं अध्ययन में यह नियम अभी भी लागू होता है। नाभिकीय अभिक्रियाओं में द्रव्य का ऊर्जा में तथा ऊर्जा का द्रव्य में रूपान्तरण होता है। आइंस्टीन के द्रव्य ऊर्जा समीकरण E = mc2 के अनुसार यदि किसी द्रव्य के m द्रव्यमान का ऊर्जा में पूर्णतः रूपान्तरण होने पर E ऊर्जा उत्पन्न होती है। अतः नाभिकीय अभिक्रियाओं में ऊर्जा संरक्षण का नियम तथा द्रव्यमान संरक्षण का नियम अलग-अलग लागू नहीं होता, अपितु द्रव्यमान-ऊर्जा संरक्षण का नियम लागू होता है।

2. रेखीय संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Linear Conservation): इस नियम के अनुसार, “किसी विलगित निकाय का कुल रेखीय संवेग संरक्षित रहता है।” संवेग एक सदिश राशि है। यद्यपि संवेग संरक्षण के नियम की व्युत्पत्ति न्यूटन के गति के नियमों से की जा सकती है तथा संरक्षण का नियम प्रकृति का एक सार्वत्रिक नियम है। और वहाँ भी लागू रहता है जहाँ न्यूटन के गतिविषयक नियम लागू नहीं होते।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 1 भौतिक जगत

प्रश्न 7.
विभिन्न मूल बलों के एकीकरण के प्रयासों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौतिक विज्ञान की महत्वपूर्ण उपलब्धि विभिन्न सिद्धान्तों तथा प्रभाव क्षेत्रों तथा मूल बलों को एकीकरण की ओर ले जाती है। प्रकृति के विभिन्न बलों एवं प्रभाव क्षेत्रों के एकीकरण में प्रगति में महत्वपूर्ण प्रयास निम्नलिखित हैं:

  1.  सन् 1687 में आइजेक न्यूटन ने खगोलीय तथा पार्थिव यांत्रिकी को एकीकृत किया। उन्होंने यह दर्शाया कि दोनों प्रभाव क्षेत्रों पर समान गति के नियम तथा गुरुत्वाकर्षण लागू होते हैं।
  2.  सन् 1820 में हेंस क्रिश्चियन ऑस्टेंड ने यह दर्शाया कि वैद्युत् तथा चुम्बकीय परिघटनाएँ एक एकीकृत प्रभाव क्षेत्र हैं।
  3.  सन् 1830 में माइकल फैराडे ने विद्युत् चुम्बकत्व के अविक्षेप रूप को प्रस्तुत किया।
  4.  सन् 1873 में जेम्स क्लॉर्क मैक्सवेल ने विद्युत् चुम्बकत्व तथा प्रकाशिकी को एकीकृत किया तथा यह दर्शाया कि प्रकाश विद्युत् चुम्बकीय तरंगें हैं।

प्रश्न 8.
भौतिकी की तकनीकी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वह विधि जिसमें द्रव्य, ऊर्जा तथा उनकी अन्तर क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है तथा भौतिकी के सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया जाता है, भौतिकी की तकनीक कहलाती है। इसे वैज्ञानिक विधि (Scientific method) भी कहते हैं।
अनुसंधान कार्यों के लिए वैज्ञानिकों द्वारा अपनायी जाने वाली सुविचारित, सुव्यवस्थित, क्रमबद्ध तथा तर्कसंगत विधि को वैज्ञानिक विधि कहते हैं।

वैज्ञानिक विधि के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:

  1.  क्रमबद्ध प्रेक्षण (Systematic Obervation): किसी प्रश्न या समस्या के हल या समाधान के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयोग किये जाते हैं, जिनसे ये क्रमबद्ध प्रेक्षण लेते हैं। इस प्रेक्षणों से आँकड़े एकत्र किये जाते हैं और फिर उनका गहन अध्ययन और विश्लेषण किया जाता है।
  2.  परिकल्पना (Hypothesis): प्राप्त प्रेक्षणों एवं आँकड़ों की व्याख्या करने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा कुछ परिकल्पनाएँ प्रस्तुत की जाती हैं।
  3.  परिकल्पनाओं का परीक्षण (Testing of Hypothesis): परिकल्पनाएँ बनाने के उपरान्त इन परिकल्पनाओं का परीक्षण किया जाता है। इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा परिकल्पनाओं के आधार पर कुछ निष्कर्ष निकाले जाते हैं और भविष्यवाणियाँ (Predictions) की जाती हैं। इन भविष्यवाणियों का नये प्रयोगों द्वारा सत्यापन किया गया है।
  4. अन्तिम सिद्धान्त (Final Theory): यदि प्राप्त निष्कर्षों तथा भविष्यवाणियों का प्रयोगों द्वारा सत्यापन हो जाता है, तो इसे अन्तिम सिद्धान्त मान लिया जाता है। सत्यापन न होने की स्थिति में परिकल्पनाओं में आवश्यकतानुसर संशोधन किये जाते हैं अथवा नई परिकल्पनाएँ बनाई जाती हैं तथा उनका पुनः परीक्षण किया जाता है। परिकल्पनाएँ बनाने और उनका परीक्षण करने का यह क्रम तब तक जारी रखा जाता है जब तक कि प्रयोगों द्वारा सत्यापित अंतिम सिद्धान्त प्राप्त न हो जाये।

 

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 पृष्ठ रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 पृष्ठ रसायन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 पृष्ठ रसायन

बहुविकल्पीय प्रश्न:

1. कोलॉइडी सॉल होता है-
(अ) वास्तविक विलयन
(ब) निलम्बन
(स) विषमांगी सॉल
(द) समांगी सॉल
उत्तर:
(स) विषमांगी सॉल

2. निम्नलिखित में से किस गैस का सक्रियित चारकोल पर अधिशोषण सुगमता से होगा?
(अ) SO2
(ब) O2
(स) N2
(द) H2
उत्तर:
(अ) SO2

3. दूध, निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
(अ) पायस (इमल्शन )
(ब) निलम्बन
(स) सॉल
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) पायस (इमल्शन )

4. निम्नलिखित में से किस धातु का सॉल नहीं बनाया जा सकता?
(अ) Au
(ब) Pt
(स) Cu
(द) K
उत्तर:
(द) K

5. कोहरा निम्नलिखित में से किसका कोलॉइड है-
(अ) द्रव में परिक्षिप्त ठोस
(ब) गैस में परिक्षिप्त द्रव
(स) द्रव में परिक्षिप्त गैस
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(ब) गैस में परिक्षिप्त द्रव

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6. log \(\frac { x }{ m }\) तथा log p के मध्य ग्राफ खींचने पर सीधी रेखा प्राप्त होती है जिसका ढाल किसके तुल्य होगा-
(अ) n
(ब) log k
(स) 1/n
(द) k
उत्तर:
(स) 1/n

7. किसी ऋणावेशित कोलॉइड के स्कंदन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त लवण है-
(अ) Na3PO4
(ब) K4[Fe(CN)6]
(स) AlCl3
(द) ZnSO4
उत्तर:
(स) AlCl3

8. निम्नलिखित में से किसका सॉल जलविरोधी है?
(अ) स्टार्च
(ब) गोंद
(स) प्रोटीन
(द) आसनियस सल्फाइड
उत्तर:
(द) आसनियस सल्फाइड

9. किसी आयन की कोलॉइड को स्कन्दित करने की क्षमता निर्भर करती है-
(अ) आयन के आकार पर
(ब) आयन के आवेश पर
(स) ताप पर
(द) आयन की मात्रा तथा आवेश पर
उत्तर:
(द) आयन की मात्रा तथा आवेश पर

10. अधिशोषण सिद्धान्त, निम्नलिखित में से किस प्रकार के उत्प्रेरण की व्याख्या करता है?
(अ) समांगी उत्प्रेरण
(ब) एन्जाइम उत्प्रेरण
(स) अम्ल-क्षार उत्प्रेरण
(द) विषमांगी उत्प्रेरण
उत्तर:
(द) विषमांगी उत्प्रेरण

11. निम्नलिखित में कौनसा कोलॉइड का उदाहरण नहीं है?
(अ) तेल तथा जल का मिश्रण
(ब) दूध तथा पानी
(स) साधारण जल
(द) पनीर
उत्तर:
(स) साधारण जल

12. कोलॉइड को आवेशविहीन करके अवक्षेपित करना कहलाता है-
(अ) अपोहन
(ब) स्कन्दन
(स) पायसीकरण
(द) परिरक्षण
उत्तर:
(ब) स्कन्दन

13. स्टार्च के माल्टोस में परिवर्तन हेतु उपयुक्त एन्जाइम है-
(अ) माल्टेज
(ब) डायस्टेज
(स) जाइमेज
(द) इन्वर्टेज
उत्तर:
(ब) डायस्टेज

14. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ अच्छा अधिशोषक है?
(अ) चारकोल
(ब) सिलिका जेल
(स) ऐलुमिना जेल
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

15. ताप बढ़ाने पर भौतिक अधिशोषण-
(अ) बढ़ता है
(ब) घटता है
(स) स्थिर रहता है
(द) कभी बढ़ता है, कभी घटता है
उत्तर:
(ब) घटता है

16. निम्नलिखित में से किस एन्जाइम का स्रोत यीस्ट (खमीर) नहीं है?
(अ) इन्वर्टेज
(ब) जाइमेज
(स) माल्टेज
(द) यूरिएज
उत्तर:
(द) यूरिएज

17. वृहदाण्विक कोलॉइड का उदाहरण निम्नलिखित में से कौनसा नहीं है?
(अ) संश्लेषित रबर
(ब) सल्फर सॉल
(स) स्टार्च
(द) एन्जाइम
उत्तर:
(ब) सल्फर सॉल

18. ऋणावेशित सॉल का उदाहरण है-
(अ) हिमोग्लोबिन
(ब) गोल्ड सॉल
(स) Al2O3 . x H2O
(द) TiO2 सॉल
उत्तर:
(ब) गोल्ड सॉल

19. निम्नलिखित में से कौनसा कोलॉइड का उदाहरण है-
(अ) पेंट
(ब) स्याही
(स) रबर
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

20. समान सांद्रता पर कोलॉइडी विलयन के अणुसंख्यक गुणों का मान, वास्तविक विलयन की तुलना में-
(अ) कम होता है।
(ब) अधिक होता है।
(स) समान होता है।
(द) कभी कम तथा कभी अधिक होता है।
उत्तर:
(अ) कम होता है।

21. As2S3 के कोलॉइडी विलयन के स्कन्दन में निम्नलिखित में से किसका स्कन्दन मान न्यूनतम होगा-
(अ) BaCl2
(ब) KCl
(स) AlCl3
(द) NaCl
उत्तर:
(स) AlCl3

22. रक्षी कोलॉइडों A, B, C तथा D की स्वर्ण संख्या क्रमशः 0.5, 0.01 0.10 तथा 0.005 है तो इनकी रक्षण क्षमता का सही क्रम
(अ) B < D < A < C
(ब) C < B < D < A
(स) D < A < C < B
(द) A < C < B < D
उत्तर:
(द) A < C < B < D

23. निम्नलिखित में से जेल का उदाहरण है-
(अ) पनीर
(ब) कुहरा
(स) साबुन
(द) दूध
उत्तर:
(अ) पनीर

24. अधिशोषण प्रक्रम में किसका मान ऋणात्मक (शून्य से कम) होता है?
(अ) △H
(ब) △S
(स) △G
(द) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(द) उपर्युक्त सभी

25. उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है-
(अ) सक्रियण ऊर्जा घटाकर
(ब) अभिकारकों से क्रिया करके
(स) उत्पादों से क्रिया करके
(द) सक्रियण ऊर्जा बढ़ाकर
उत्तर:
(अ) सक्रियण ऊर्जा घटाकर

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26. सल्फर (गन्धक) के सॉल में होते हैं-
(अ) विविक्त सल्फर अणु
(ब) ठोस सल्फर में परिक्षिप्त जल
(स) सल्फर अणुओं के बड़े समूह
(द) विविक्त सल्फर परमाणु
उत्तर:
(स) सल्फर अणुओं के बड़े समूह

27. फिटकरी द्वारा जल का शोधन होता है-
(अ) अपोहन से
(ब) अधिशोषण से
(स) स्कन्दन से
(द) अवशोषण से
उत्तर:
(स) स्कन्दन से

28. कृत्रिम वर्षा निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है-
(अ) स्कन्दन
(ब) अपोहन
(स) वैद्युतकणसंचलन
(द) पेप्टीकरण
उत्तर:
(अ) स्कन्दन

29. मानव शरीर में वृक्क (Kidney) द्वारा रक्त का शोधन है-
(अ) स्कन्दन
(ब) अपोहन
(स) वैद्युत परासरण
(द) वैद्युतकणसंचलन
उत्तर:
(ब) अपोहन

30. विभिन्न विधियों से प्राप्त गोल्ड सॉल का रंग भिन्न-भिन्न होने का कारण है-
(अ) भिन्न सान्द्रण
(ब) कणों का भिन्न-भिन्न आकार
(स) भिन्न अशुद्धियाँ
(द) भिन्न संयोजकता
उत्तर:
(ब) कणों का भिन्न-भिन्न आकार

31. स्वर्णांक मापक है-
(अ) रक्षी कोलॉइड की रक्षण क्षमता का
(ब) स्वर्ण की शुद्धता का
(स) धात्विक स्वर्ण का
(द) विद्युत लेपित स्वर्ण का
उत्तर:
(अ) रक्षी कोलॉइड की रक्षण क्षमता का

32. निम्नलिखित में से कौनसा मिलान अशुद्ध है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 1
उत्तर:
(द)

33. फेरिक क्लोराइड का प्रयोग कटने के कारण होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है, क्योंकि
(अ) Fe3+ आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक ऋणावेशित सॉल है।
(ब) Fe3+ आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक धनावेशित सॉल है।
(स) Cl आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि धनावेशित सॉल है।
(द) Cl आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक ऋणावेशित सॉल है।
उत्तर:
(अ) Fe3+ आयन रक्त का स्कन्दन करता है जो कि एक ऋणावेशित सॉल है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
अधिशोषण एक सतही घटना है, क्यों?
उत्तर:
ठोस या द्रव की सतह पर मुक्त संयोजकताएँ पाई जाती हैं। अतः अधिशोषण सतह पर ही होता है अतः यह एक सतही घटना है।

प्रश्न 2.
अवशोषण को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
वह प्रक्रिया जिसमें एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ में प्रवेश करके समान रूप से वितरित हो जाते हैं, उसे अधिशोषण कहते हैं।

प्रश्न 3.
शर्करा के विलयन को रंगहीन करने के लिए कौनसा अधिशोषक प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
शर्करा विलयन को रंगहीन करने के लिए जान्तव चारकोल प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 4.
Pd, Pt, Au तथा Ni की अधिशोषण क्षमता का घटता क्रम बताइए।
उत्तर:
इन धातुओं की अधिशोषण का क्षमता क्रम निम्न प्रकार होता है Pd > Pt > Au > Ni

प्रश्न 5.
दो अधिशोषण सूचकों के नाम बताइए।
उत्तर:
ईओसीन तथा फ्लुओरेसीन अधिशोषण सूचक का कार्य करते हैं।

प्रश्न 6.
रासायनिक अधिशोषण पर ताप का प्रभाव बताइए ।
उत्तर:
ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण पहले बढ़ता है फिर कम होता है।

प्रश्न 7.
अधिशोषण समतापी क्या होता है?
उत्तर:
निश्चित ताप पर अधिशोषित गैस की मात्रा तथा साम्यावस्था दाब के मध्य सम्बन्ध को अधिशोषण समतापी कहते हैं।

प्रश्न 8.
समांगी उत्प्रेरण का सिद्धान्त बताइए।
उत्तर:
समांगी उत्प्रेरण, माध्यमिक यौगिक सिद्धान्त पर कार्य करता है।

प्रश्न 9.
टेट्रा एथिल लैड (C2H5)4Pb का उपयोग क्या है?
उत्तर:
टेट्रा एथिल लैड पेट्रोल की गुणवत्ता बढ़ाकर उसके अपस्फोटन को कम करता है।

प्रश्न 10.
एन्जाइम की कार्यप्रणाली क्या होती है?
उत्तर:
एन्जाइम ताला चाबी सिद्धान्त पर कार्य करता है।

प्रश्न 11.
सहएन्जाइम क्या होते हैं?
उत्तर:
वे अप्रोटीन भाग जो एन्जाइम के साथ जुड़े होते हैं तथा एन्जाइम की सक्रियता में वृद्धि करते हैं, उन्हें सहएन्जाइम कहते हैं। मुख्यतः ये विटामिनों के व्युत्पन्न होते हैं।

प्रश्न 12.
एन्जाइम की सक्रियता को कम करने वाले विषकारकों (उत्प्रेरक विष) के उदाहरण बताइए।
उत्तर:
CS2 तथा HCN विषकारकों की भाँति कार्य करते हैं।

प्रश्न 13.
पेप्सिन एन्जाइम का कार्य बताइए |
उत्तर:
पेप्सिन एन्जाइम प्रोटीनों को एमीनो अम्लों में परिवर्तित करता है।

प्रश्न 14.
ऐल्कोहॉल को गैसोलीन (पेट्रोल) में परिवर्तित करने वाला उत्प्रेरक कौनसा होता है?
उत्तर:
ZSM-5

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प्रश्न 15.
एन्जाइम के अणुओं का आकार कितना होता है?
उत्तर:
एन्जाइम के अणुओं का आकार 10Å से 1000Å तक होता है।

प्रश्न 16.
सर्वप्रथम उत्प्रेरक शब्द का प्रयोग करने वाले वैज्ञानिक कौन थे?
उत्तर:
बर्जीलियस ने सर्वप्रथम उत्प्रेरक शब्द का प्रयोग किया था।

प्रश्न 17.
उत्प्रेरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी उत्प्रेरक द्वारा रासायनिक अभिक्रिया के वेग में वृद्धि करने की क्रिया को उत्प्रेरण कहते हैं।

प्रश्न 18.
वर्धक क्या होते हैं?
उत्तर:
वे पदार्थ जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को बढ़ा देते हैं, उन्हें उत्प्रेरक वर्धक कहते हैं। जैसे NH3 के निर्माण में Mo, Fe की क्रियाशीलता को बढ़ा देता है।

प्रश्न 19.
दो गैसों के मिलाने पर कोलॉइड नहीं बनता, क्यों?
उत्तर:
कोलॉइड विषमांगी तंत्र होता है जबकि गैसें आपस में मिलकर हमेशा समांगी विलयन बनाती हैं अतः दो गैसों को मिलाने पर कोलॉइड नहीं बनता।

प्रश्न 20.
दूध को कोलॉइडी विलयनों की किस श्रेणी में लिया जाता है?
उत्तर:
दूध, जल में तेल श्रेणी का एक पायस है।

प्रश्न 21.
सबसे कम तथा सबसे अधिक स्वणांक वाले द्रव स्नेही कोलॉइडों का नाम बताइए।
उत्तर:
जिलेटिन का स्वर्णाक सबसे कम (0.005) तथा आलू के स्टार्च का स्वणांक सबसे अधिक (25) होता है।

प्रश्न 22.
द्रव स्नेही सॉल, द्रव विरोधी सॉल की तुलना में अधिक स्थायी होता है, क्यों?
उत्तर:
द्रव स्नेही सॉल के अधिक स्थायित्व का कारण उनके कणों का जलयोजन (विलायकन) है।

प्रश्न 23.
कैसियस का पर्पल क्या होता है?
उत्तर:
गोल्ड के कोलॉइडी विलयन को कैसियस का पर्पल कहते हैं।

प्रश्न 24.
निम्नलिखित को किस प्रकार के कोलॉइड में वर्गीकृत किया जाएगा?
(i) साबुन का सान्द्र विलयन
(ii) जल में अण्डे का सफेद भाग ।
उत्तर:
(i) सहचारी कोलॉइड
(ii) वृहदाण्विक कोलॉइड (प्रोटीन) ।

प्रश्न 25.
कालाजार बुखार के इलाज के लिए प्रयुक्त कोलॉइड बताइए ।
उत्तर:
कोलॉइडी ऐण्टीमनी को कालाजार बुखार के इलाज के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 26.
फोटोग्राफी में जिलेटिन का क्या कार्य है?
उत्तर:
फोटोग्राफी में जिलेटिन रक्षी कोलॉइड का कार्य करता है।

प्रश्न 27.
दो नदियों के मिलने पर डेल्टा नहीं बनता, क्यों?
उत्तर:
दो नदियों में उपस्थित कोलॉइडी कणों पर समान आवेश होने के कारण, उनका स्कन्दन नहीं होता अतः डेल्टा नहीं बनता।

प्रश्न 28.
कोलॉइडों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन का कारण बताइए।
उत्तर:
कोलॉइडों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन ( टिन्डल प्रभाव ) का कारण परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम के अपवर्तनांक में अन्तर है।

प्रश्न 29.
उत्प्रेरक किस प्रकार कार्य करते हैं?
उत्तर:
उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम करके उसे एक नया पथ प्रदान करते हैं जिससे अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

प्रश्न 30.
एन्जाइम तथा अकार्बनिक उत्प्रेरक में एक अन्तर बताइए ।
उत्तर:
एन्जाइम उच्च अणुभार युक्त जटिल प्रोटीन होते हैं जबकि अकार्बनिक उत्प्रेरक सरल अणु या आयन होते हैं।

प्रश्न 31.
ब्राउनी गति किस सिद्धान्त के पक्ष में प्रायोगिक प्रमाण प्रस्तुत करती है?
उत्तर:
गैसों का अणुगति सिद्धान्त ।

प्रश्न 32.
भौतिक अधिशोषण बहुपरतीय होता है जबकि रासायनिक अधिशोषण एकपरतीय क्यों?
उत्तर:
भौतिक अधिशोषण के बहुपरतीय होने का कारण वान्डरवाल बल है जबकि रासायनिक अधिशोषण के एकपरतीय होने का कारण रासायनिक बन्ध का बनना है।

प्रश्न 33.
अधिशोषक का विशिष्ट क्षेत्रफल क्या होता है?
उत्तर:
किसी अधिशोषक के प्रतिग्राम पृष्ठ क्षेत्रफल को उसका विशिष्ट क्षेत्रफल कहते हैं।

प्रश्न 34.
नमी को नियंत्रित करने के लिए प्रयुक्त दो अधिशोषक बताइए।
उत्तर:
सिलिका जेल तथा ऐलुमिना जेल।

प्रश्न 35.
जल की कठोरता को दूर करने के लिए प्रयुक्त अधिशोषक कौनसा होता है?
उत्तर:
जिओलाइट।

प्रश्न 36.
एन्जाइम उत्प्रेरण समांगी होता है या विषमांगी ।
उत्तर:
एन्जाइम उत्प्रेरण विषमांगी होता है।

प्रश्न 37.
उस अभिक्रिया का समीकरण लिखिए जो माइकोडर्मा एसीटि एन्जाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
उत्तर:
माइकोडर्मा एसीटि
C2H5OH + O2 → CH3COOH + H2O

प्रश्न 38.
समान रंग के कोलाइड तथा वास्तविक विलयन में कैसे अन्तर करेंगे?
उत्तर:
टिन्डल प्रभाव द्वारा, क्योंकि वास्तविक विलयन में टिन्डल प्रभाव नहीं होता।

लघूत्तरात्मक प्रश्न:

प्रश्न 1.
ठोसों पर गैसों के अधिशोषण के प्रकार बताइए।
उत्तर:
ठोसों पर गैसों के अधिशोषण को, अधिशोष्य तथा अधिशोषक के अणुओं के मध्य आकर्षण बलों के आधार पर दो भागों में वर्गीकृत किया गया है-
(a) भौतिक अधिशोषण
(b) रासायनिक अधिशोषण या रसोवशोषण

(a) भौतिक अधिशोषण (Physical Adsorpiton or Physiorption) या वान्डरवाल अधिशोषण (Vanderwal Adsorption) – किसी ठोस की सतह पर जब गैस का अधिशोषण वान्डरवाल बलों के कारण होता है तो इसे भौतिक अधिशोषण कहते हैं। दुर्बल वान्डरवाल बलों के कारण ताप बढ़ाने से या दाब कम करने से इसे आसानी से कम किया जा सकता है। भौतिक अधिशोषण में अधिशोष्य तथा अधिशोषक के मध्य किसी प्रकार के रासायनिक बन्ध का निर्माण नहीं होता।

रासायनिक अधिशोषण या लेग्मूर अधिशोषण (Chemisorption or Chemical Adsorption or Langmuir Adsorption)-जब किसी ठोस की सतह पर गैस के अधिशोषण में रासायनिक बन्ध बनते हैं तो इसे रासायनिक अधिशोषण कहते हैं। ये रासायनिक बन्ध आयनिक या सहसंयोजक हो सकते हैं, लेकिन प्रायः यह बन्ध सहसंयोजक होता है। रासायनिक अधिशोषण की सक्रियण ऊर्जा उच्च होती है अतः इसे सक्रियत अधिशोषण (activated adsorption) भी कहते हैं।

भौतिक एवं रासायनिक अधिशोषण साथ-साथ भी हो सकते हैं। तब निम्न ताप पर होने वाला भौतिक अधिशोषण, ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण, H2 गैस पहले Ni की सतह पर वान्डरवाल बलों के द्वारा अधिशोषित होती है। उसके बाद हाइड्रोजन के अणु, परमाणुओं में वियोजित होकर रासायनिक अधिशोषण द्वारा निकल की सतह पर बंध जाते हैं, क्योंकि उच्च ताप पर अभिकारकों को सक्रियण ऊर्जा प्राप्त हो जाती है।

रासायनिक अधिशोषण में अधिशोषक की सतह पर उत्पाद बनता है, अतः विशोषण के समय उत्पाद का ही विशोषण होता है। जैसे कार्बन की सतह पर O2 के अधिशोषण से CO तथा CO2 बनती है तथा इन्हीं CO तथा CO2 का विशोषण होता है।

प्रश्न 2.
रासायनिक अधिशोषण के मुख्य अभिलक्षण बताइए।
उत्तर:
रासायनिक अधिशोषण या लेग्मूर अधिशोषण (Chemisorption or Chemical Adsorption or Langmuir Adsorption)-जब किसी ठोस की सतह पर गैस के अधिशोषण में रासायनिक बन्ध बनते हैं तो इसे रासायनिक अधिशोषण कहते हैं। ये रासायनिक बन्ध आयनिक या सहसंयोजक हो सकते हैं, लेकिन प्रायः यह बन्ध सहसंयोजक होता है। रासायनिक अधिशोषण की सक्रियण ऊर्जा उच्च होती है अतः इसे सक्रियत अधिशोषण (activated adsorption) भी कहते हैं।

भौतिक एवं रासायनिक अधिशोषण साथ-साथ भी हो सकते हैं। तब निम्न ताप पर होने वाला भौतिक अधिशोषण, ताप बढ़ाने पर रासायनिक अधिशोषण में परिवर्तित हो जाता है। उदाहरण, H2 गैस पहले Ni की सतह पर वान्डरवाल बलों के द्वारा अधिशोषित होती है। उसके बाद हाइड्रोजन के अणु, परमाणुओं में वियोजित होकर रासायनिक अधिशोषण द्वारा निकल की सतह पर बंध जाते हैं, क्योंकि उच्च ताप पर अभिकारकों को सक्रियण ऊर्जा प्राप्त हो जाती है।

रासायनिक अधिशोषण में अधिशोषक की सतह पर उत्पाद बनता है, अतः विशोषण के समय उत्पाद का ही विशोषण होता है। जैसे कार्बन की सतह पर O2 के अधिशोषण से CO तथा CO2 बनती है तथा इन्हीं CO तथा CO2 का विशोषण होता है।

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प्रश्न 3.
भौतिक अधिशोषण तथा रासायनिक अधिशोषण की तुलना कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 2

प्रश्न 4.
(a) नारियल चारकोल द्वारा अक्रिय गैसों का पृथक्करण किस प्रकार किया जाता है? समझाइए।
(b) अधिधारण किसे कहते हैं?
उत्तर:
(a) अक्रिय गैसों के मिश्रण को नारियल चारकोल पर प्रवाहित करके इन्हें पृथक किया जाता है क्योंकि इस चारकोल की अधिशोषण क्षमता भिन्न-भिन्न गैसों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। यह अधिशोषण भिन्नभिन्न तापों पर किया जाता है।
(b) किसी धातु के द्वारा हाइड्रोजन गैस के अधिशोषण को अधिधारण (Occlusion) कहते हैं।

प्रश्न 5.
एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
(i) स्टार्च का माल्टोस में परिवर्तन-डायस्टेज एन्जाइम स्टार्च को माल्टोस में परिवर्तित कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 3
(ii) माल्टोस का ग्लूकोस में परिवर्तन-माल्टेज एन्जाइम माल्टोस को ग्लूकोज में बदल देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 4
(iii) यूरिया का अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड में अपघटन-यह अपघटन यूरिएज एन्जाइम द्वारा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 5

प्रश्न 6.
निम्नलिखित एन्जाइमों द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रियाएँ लिखिए-
(i) इन्वर्टेस
(ii) जाइमेज
(iii) पेप्सिन
(iv) ट्रिप्सिन
(v) लैक्टोबैसिलस।
उत्तर:
(i) इन्बर्टेस एन्जाइम इक्षु शर्करा (सूक्रोस) को ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में परिवर्तित कर देता है। इसे शर्करा का प्रतीपन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 6
(ii) जाइमेज एन्जाइम से ग्लूकोस, ऐथिल ऐल्कोहॉल एवं कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 7
यहाँ ग्लूकोस का किण्वन हो रहा है।
(iii) पेप्सिन एन्जाइम, आमाशय में प्रोटीनों को पेप्टाइडों में परिवर्तित
(iv) ट्रिप्सिन एन्जाइम आँत में प्रोटीनों को ऐमीनो अम्लों में परिवर्तित करता है।
(v) लेक्टोबैसिलस द्वारा दुग्ध का दही में परिवर्तन होता है।

प्रश्न 7.
स्वः उत्प्रेरक क्या होता है ? समझाइए।
उत्तर:
समांगी उत्प्रेरण- किसी अभिक्रिया में जब अभिकारकों तथा उत्प्रेरकों की भौतिक अवस्था समान (द्रव या गैस) होती है तो इसे समांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण:
(i) सीस कक्ष विधि (लेड चेंबर प्रक्रम) में नाइट्रिक ऑक्साइड उत्प्रेक की उपस्थिति में, सल्फर डाइऑक्साइड की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया द्वारा सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 8
(ii) शर्करा का जल अपघटन, सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा प्राप्त H+ आयनों द्वारा होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 9
(iii) NO की उपस्थिति में CO का CO2 में ऑक्सीकरण-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 10
(iv) HCl द्वारा प्राप्त H+ आयनों की उपस्थिति में मेथिल ऐसीटेट का जल अपघटन-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 11

प्रश्न 8.
कोलॉइडी विलयनों के अणुसंख्यक गुण वास्तविक विलयनों से कम होते हैं, क्यों?
उत्तर:
अणुसंख्य गुण, कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं। कोलॉइडी कण बड़े पुंज या समूह के रूप में होते हैं अतः क्रोलॉइडी विलयन हैं में कणों की संख्या वास्तविक विलयन की अपेक्षा कम होती है। अतः समान सान्द्रता पर इसके अणुसंख्य गुणों (परासरण दाब, वाष्पदाब अवनमन, हिमांक अवनमन, क्वथनांक उन्नयन आदि) के मान वास्तविक विलयन से कम होते हैं।

प्रश्न 9
रक्षी कोलॉइड क्या होते हैं? इनसे द्रव विरोधी कोलॉइडों का रक्षण किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर:
कोलॉइडी विलयनों के गुण:
कोलॉइडी विलयनों के मुख्य गुण निम्नलिखित हैं-

  • विषमांगी प्रकृति – कोलॉइडी विलयन विषमांगी होता है, जिसमें दो घटक परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था होते हैं।
  • निस्यन्दता – कोलॉइडी विलयन के कण साधारण फिल्टर पत्र से छन जाते हैं लेकिन जान्तव झिल्ली या चर्म पत्र से नहीं छनते।
  • सतही क्षेत्रफल – कोलॉइड में उपस्थित कोलाँइडी कणों का सतही क्षेत्रफल बहुत अधिक होता है अतः कोलॉइड अच्छे अधिशोषक तथा प्रभावी उत्प्रेरक होते हैं।
  • स्थायित्व – द्रवस्नेही कोलॉइड, द्रव विरोधी कोलॉइड की तुलना में अधिक स्थायी होते हैं।

प्रश्न 10.
(a) वैद्युत परासरण किसे कहते हैं?
(b) निम्नलिखित सॉलों में से धनावेशित तथा ऋणावेशित सॉलों को वर्गीकृत कीजिए-
Sh2S3 सॉल, सिल्वर सॉल, इओसिन रंजक, जिलेटिन, हिमोग्लोबिन, TiO2 सॉल।
उत्तर:
(a) वैद्युत परासरण जब किसी उपयुक्त विधि द्वारा वैद्युतकणसंचलन अर्थात् कोलॉइडी कणों की गति को रोका जाता है तो विद्युत क्षेत्र द्वारा परिक्षेपण माध्यम गति करना प्रारम्भ कर देता है। इस प्रक्रम को वैद्युत परासरण कहते हैं।
(b) धनावेशित सॉल – हिमोग्लोबिन (रक्त) TiO2 सॉल
ऋणावेशित सॉल – Sb2S3 सॉल, सिल्लर सॉल, इओसिन रंजक, जिलेटिन।

प्रश्न 11.
(a) स्वर्णांक क्या होता है? समझाइए।
(b) खतरे के संकेत हमेशा लाल रंग के ही बनाए जाते हैं, नीले रंग के नहीं, क्यों?
उत्तर:
(a) स्वणांक से द्रव स्नेही सॉल (रक्षक कोलॉइड) की रक्षण क्षमता को व्यक्त किया जाता है। स्वर्णक, रक्षक कोलॉइड की मिलीग्राम में वह न्यूनतम मात्रा है, जो NaCl के 10 प्रतिशत विलयन के एक मिली आयतन को 10 मिली मानक गोल्ड सॉल में मिलाने पर उसके स्कन्दन को रोकने के लिए पर्याप्त होती है।

(b) लाल रंग का प्रकीर्णन सबसे कम होता है जिससे खतरे का संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देता है जबकि नीले रंग का प्रकीर्णन अधिक होने के कारण संकेत फैला हुआ दिखाई देता है जो कि स्पष्ट नहीं होता । अतः खतरे के संकेत हमेशा लाल रंग के ही बनाए जाते हैं।

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प्रश्न 12.
उद्योगों में मिलों की चिमनियों में कॉट्रेल अवक्षेपक का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर:
कोलॉइडों के अनुप्रयोग – कोलॉइडों के महत्वपूर्ण औद्योगिक अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं-

(i) चर्मशोधन – पशुओं की खाल कोलॉइडी प्रकृति की होती है जिस पर धनात्मक आवेशित कण होते हैं। इसे टेनिन में भिगोया जाता है, जिसमें ऋणावेशित कोलॉइडी कण होते हैं, जिनसे पारस्परिक स्कंदन हो जाता है। इससे चमड़ा कठोर हो जाता है तथा इस प्रक्रिया को चर्मशोधन कहते हैं। टेनिन के स्थान पर क्रोमियम लवणों का उपयोग भी चर्मशोधन में किया जाता है।

(ii) धूम्र का विद्युतीय अवक्षेपण – धूम्र, कार्बन, आर्सेनिक यौगिकों, धूल आदि ठोस कणों
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का वायु में कोलॉइडी विलयन होता है। उद्योगों में चिमनी के बाहर आने से पहले धुएँ को इसके कणों से विपरीत आवेशित इलैक्ट्रोडों के कक्ष में से गुजारा जाता है। कण इन प्लेटों के संपर्क में आने पर अपना आवेश खोकर अवक्षेपित हो जाते हैं। इस प्रकार प्राप्त कण कक्ष के फर्श पर बैठ जाते हैं। इस अवक्षेपक को कॉट्रेल अवक्षेपक कहते हैं।

(iii) पेयजल का शुद्धिकरण – प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त जल में प्रायः अशुद्धियाँ मिली होती हैं। ऐसे जल से अशुद्धियों को स्कंदित करने के लिए फिटकरी मिलाई जाती है जिससे जल पीने योग्य हो जाता है।

(iv) औषधियाँ – अधिकांश औषधियाँ कोलॉइडी प्रकृति की होती हैं। उदाहरणार्थ, आँखों का लोशन आर्जिरॉल, एक सिल्वर सॉल है। कोलॉइडी एन्टिमनी का उपयोग कालाजार के इलाज में होता है। कोलॉइडी गोल्ड का उपयोग अन्तःपेशी इन्जेक्शन में होता है। दूधिया मैग्नीशिया (पायस) का उपयोग पेट की बीमारियों में किया जाता है। कोलॉइडी औषधियों का पृष्ठ क्षेत्रफल अधिक होने के कारण, इनका स्वांगीकरण आसानी से होता है अतः ये अधिक प्रभावी होती हैं।

(v) फोटोग्राफी प्लेटें एवं फिल्में – जिलेटिन में प्रकाश संवेदी सिल्वर ब्रोमाइड के इमल्शन का ग्लास प्लेटों या सेलुलॉइड फिल्मों पर लेपन करके फोटोग्राफी की प्लेटें या फिल्म बनायी जाती हैं।

(vi) रबर उद्योग – लेटेक्स, रबर के ऋणात्मक आवेशित कणों का कोलॉइडी विलयन होता है। अतः रबर को लेटेक्स के स्कंदन से बनाया जाता है।

(vii) औद्योगिक उत्पाद – पेंट, स्याही, संश्लेषित प्लास्टिक, रबर, ग्रेफाइट, स्नेहक, सीमेन्ट आदि सभी पदार्थ कोलॉइड हैं।

(vii) औद्योगिक उत्पाद – पेंट, स्याही, संश्लेषित प्लास्टिक, रबर, ग्रेफाइट, स्नेहक, सीमेन्ट आदि सभी पदार्थ कोलॉइड हैं।

(viii) साबुन की शोधन क्रिया – साबुन की शोधन क्रिया में मिसेल का निर्माण होता है। इसकी व्याख्या निम्न प्रकार की जा सकती है। हम पढ़ चुके हैं कि मिसेल निर्माण में जलविरोधी हाइड्रोकार्बन का एक केन्द्रीय कोड (भाग) होता है। शोधन क्रिया में साबुन के अणु तेल या चिकनाई की बूँदों के चारों ओर इस प्रकार मिसेल बनाते हैं कि स्टिऐरेट आयन (साबुन) का जलविरोधी भाग तेल की बूँदों के अंदर होता है एवं जल-स्नेही भाग चिकनाई की बूँदों के बाहर निकला रहता है।

(ix) वहित मल या अवशिष्ट का विसर्जन – नालियों में बहने वाले गन्दे जल में मल तथा मिट्टी के कण ऋणावेशित कोलॉइड के रूप में होते हैं, इसे शहर के बाहर बड़े-बड़े कुण्डों में लगे इलेक्ट्रोडों पर से प्रवाहित किया जाता है तो गन्दगी के कोलॉइडी कण अवक्षेपित होकर पृथक् हो जाते हैं, जिसे खाद के रूप में तथा जल को सिंचाई के लिए प्रयुक्त करते हैं। इस प्रकार के संयंत्रों को अवशिष्ट निस्तारण संयंत्र (Sewage Treatment Plant) कहते हैं।

प्रश्न 13.
(a) आइसक्रीम में जिलेटिन मिलाया जाता है, क्यों?
(b) गोंद तथा जिलेटिन का स्वर्णांक 0.10 तथा 0.005 है। इनमें से किसकी रक्षण क्षमता अधिक है तथा क्यों ?
उत्तर:
(a) आइसक्रीम में जिलेटिन मिलाने से इसमें उपस्थित दूध, . शर्करा तथा बर्फ का स्कन्दन नहीं होता है।
(b) गोंद तथा जिलेटिन में से जिलेटिन की रक्षण क्षमता अधिक है। क्योंकि जिस रक्षी कोलॉइड का स्वर्णाक कम होता है, उसकी रक्षण क्षमता अधिक होती है।

प्रश्न 14.
फाउण्टेन पेन की स्याही क्यों नहीं चिपकती है? कारण बताइए।
उत्तर:
स्याही बनाते समय इसमें काजल के साथ गोंद मिलाया जाता है जो कि रक्षी कोलॉइड है। यह स्याही को स्कन्दित होने से रोकता है अर्थात् उसको स्थायित्व प्रदान करता है। स्याही का स्कन्दन नहीं होने के कारण उसमें चिपचिपाहट नहीं होती अतः फाउण्टेन पेन की स्याही नहीं चिपकती।

प्रश्न 15.
सॉल, जेल तथा पायस में विभेद तथा उदाहरणों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 13

प्रश्न 16. बादलों से कृत्रिम वर्षा किस प्रकार की जाती है? समझाइए।
उत्तर:
बादल, कोलॉइडी अवस्था में होते हैं, जिसमें वायु में जल के कण परिक्षिप्त रहते हैं। इनके ऊपर विपरीत आवेशयुक्त लवण का छिड़काव करने से बादल में उपस्थित कोलॉइडी कणों का आवेश समाप्त हो जाता है, जिससे उनका स्कंदन होकर पानी की बूँदों (वर्षा) के रूप में नीचे आ जाते हैं, इसे कृत्रिम वर्षा कहते हैं।

प्रश्न 17.
सूजी का हलवा बनाते समय उसमें गोंद मिलाने पर क्या प्रभाव होता है तथा क्यों?
उत्तर:
सूजी का हलवा एक प्रकार का कोलॉइड (जेल) होता है जिसमें सूजी में पानी कण परिक्षिप्त होते हैं। गोंद रक्षी कोलॉइड होता है जिसे मिलाने पर हलवे को स्थायित्व प्राप्त होता है जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है एवं काफी समय तक नर्म बना रहता है।

प्रश्न 18.
सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखाई देता है। क्यों ?
उत्तर:
सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज की ओर होता है अतः सूर्य से निकलने वाले प्रकाश की किरणें वायुमण्डल में लम्बी दूरी तय करती हैं। इसलिए वायु में उपस्थित धूल के कण प्रकाश के नीले भाग का प्रकीर्णन कर देते हैं अतः शेष भाग लाल दिखाई देता है।

बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित का वर्णन कीजिए-
(i) टिन्डल प्रभाव
(ii) आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण।
उत्तर:
(i) टिन्डल प्रभाव (Tyndal effect) – जब अंधेरे में रखा एक समांगी विलयन, प्रकाश की दिशा से देखा जाता है, तो यह स्वच्छ दिखाई देता है तथा यदि इसे प्रकाश किरण पुंज की दिशा के लंबवत् देखा जाता है तो यह पूर्णतया अदीप्त (Perfect dark) दिखाई देता है। कोलॉइडी विलयन को भी इसी प्रकार से पारगमन प्रकाश (Transmitted light) द्वारा देखने पर पर्याप्त स्वच्छ या पारदर्शी दिखाई देते हैं परन्तु इसे प्रकाश के पथ की दिशा से लम्बवत् देखने पर वह मंद से प्रबल दूधियापन दर्शाता है।

अर्थात् प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं तथा प्रकाश का चमकीला शंकु (Cone), टिन्डल शंकु कहलाता है। इस प्रभाव को सर्वप्रथम फैराडे ने प्रेक्षित किया था अतः इसे फैराडे टिन्डल प्रभाव भी कहते हैं।
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(ii) आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण-वह उत्प्रेरकी अभिक्रिया जो उत्प्रेरक की रन्द्र संरचना (Pore structure) तथा अभिकारक एवं उत्पाद अणुओं के आकार पर निर्भर करती है उसे आकार वरणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं। मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के कारण जिओलाइट अच्छे आकृति-वरणात्मक उत्त्रेरक होते हैं। ये त्रिविमीय नेटवर्क वाले तथा सूक्ष्मरंध्री होते हैं। जिओलाइटों में होने वाली अभिक्रियाएँ जिओलाइटों के संरंध्रों एवं कोटरों (cavities) पर भी निर्भर करती हैं। जिओलाइट प्रकृति में उपलब्ध होते हैं तथा उत्प्रेरक वरणात्मकता के लिए इनका संश्लेषण भी किया जाता है।

जिओलाइटों के उपयोग-

  • जिओलाइट, पेट्रोरसायन उद्योग में हाइड्रोकार्बनों के भंजन (cracking) तथा समावयवीकरण (Isomerisation) में उत्प्रेरक की भाँति प्रयुक्त किए जाते हैं। इससे ईंधन की गुणवत्ता बढ़ती है।
  • ZSM-5 (एक जिओलाइट) ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण करके हाइड्रोकार्बन का मिश्रण बनाता है और यह उन्हें सीधे ही गैसोलीन (पेट्रोल) में परिवर्तित कर देता है।
  • जल योजित सोडियम जिओलाइट, आयन विनिमयक के रूप में कठोर जल को मृदु करने में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 2.
कोलॉइडी विलयन के स्कन्दन से क्या समझा जाता है ? किसी एक विधि का नाम बताइए जिससे द्रव विरोधी सॉल का स्कन्दन किया जा सकता हो ।
देखें।
उत्तर:
कोलॉइडों का स्कंदन या अवक्षेपण – द्रवस्नेही कोलॉइड-द्रवस्नेही कोलॉइडों का स्थायित्व उन पर उपस्थित आवेश तथा कणों के विलायकन (Solvation) के कारण होता है। जब इन दोनों कारकों को हटा दिया जाए तो द्रवरागी सॉल का स्कंदन हो जाता है क्योंकि इसके कण गुरुत्व बल के कारण नीचे बैठ जाते हैं।

इसके लिए वैद्युत अपघट्य या उपयुक्त विलायक मिलाया जाता है। जब द्रवस्नेही सॉल में ऐल्कोहॉल एवं ऐसीटोन आदि विलायक मिलाते हैं तो परिक्षिप्त प्रावस्था का निर्जलीकरण हो जाता है। इस स्थिति में विद्युत अपघट्य की कम मात्रा से भी स्कंदन हो जाता है। अतः कोलॉइडी कणों के स्कंदित होकर नीचे बैठ जाने के प्रक्रम को स्कंदन या अवक्षेपण कहते हैं।

प्रश्न 3.
आकृति आधारित (शेष सेलेक्टिव) उत्प्रेरण का क्या अर्थ होता है?
उत्तर:
ज़िओलाइटों का आकृति वरणात्मक उत्प्रेरण-
जिओलाइट-जिओलाइट, विभिन्न धातुओं के ऐलुमिनो सिलिकेट होते हैं जिनका सामान्य सूत्र \(\mathrm{M}_{\mathrm{x} / \mathrm{n}}\left[\left(\mathrm{Al}_2 \mathrm{O}_3\right)_{\mathrm{x}}\left(\mathrm{SiO}_2\right)_{\mathrm{y}}\right]_{\mathrm{z}}^{\mathrm{m}} \mathrm{H}_2 \mathrm{O}\) होता है। यहाँ n = धातु आयन पर आवेश।

जिओलाइट में पाए जाने जाने वाले धनायन मुख्यतः Na+, K+, Mg2+ तथा Ca2+ आदि होते हैं। जिओलाइट आकार वरणात्मक उत्प्रेरण में प्रयुक्त होते हैं। इनमें कुछ Si परमाणु Al परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थापित होकर Al-O-Si दाँचे का निर्माण करते हैं।

आकृति वरणात्मक उत्त्रेरण – वह उत्प्रेरकी अभिक्रिया जो उत्प्रेरक की रन्ध्र संरचना (Pore structure) तथा अभिकारक एवं उत्पाद् अणुओं के आकार पर निर्भर करती है उसे आकार वरणात्मक उत्प्रेरण कहते हैं। मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना के कारण जिओलाइट अच्छे आकृति-वरणात्मक उत्प्रेरक होते हैं।

ये त्रिविमीय नेटवर्क वाले तथा सूक्ष्मरंध्री होते हैं। जिओलाइटों में होने वाली अभिक्रियाएँ जिओलाइटों के संरंध्रों एवं कोटरों (cavities) पर भी निर्भर करती हैं। जिओलाइट प्रकृति में उपलब्ध होते हैं तथा उत्प्रेरक वरणात्मकता के लिए इनका संश्लेषण भी किया जाता है।

जिओलाइटों के उपयोग-

  • जिओलाइट, पेट्रोरसायन उद्योग में हाइड्रोकार्बनों के भंजन (cracking) तथा समावयवीकरण (Isomerisation) में उत्प्रेरक की भाँति प्रयुक्त किए जाते हैं। इससे ईंधन की गुणवत्ता बड़ती है।
  • ZSM-5 (एक जिओलाइट) ऐल्कोहॉल का निर्जलीकरण करके हाइड्रोकार्बन का मिश्रण बनाता है और यह उन्हे सीधे ही गैसोलीन (पेट्रोल) में परिवर्तित कर देता है।
  • जल योजित सोडियम जिओलाइट, आयन विनिमयक के रूप में कठोर जल को मुद करने में प्रयुक्त किया जाता है।

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प्रश्न 4.
परिक्षेपण माध्यम जल वाले कोलॉइडों का वर्गीकरण कीजिए । प्रत्येक वर्ग की विशेषता और एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
परिक्षेपण माध्यम जल वाले कोलॉइडों को दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है-
(i) जल स्नेही सॉल (द्रव स्नेही)
(ii) जल विरोधी सॉल (द्रव विरोधी)

विभिन्न प्रकार के कोलॉइडों में से सबसे अधिक उपयोगी एवं प्रचलित कोलॉइड, सॉल (द्रव में ठोस), जेल (ठोस में द्रव) तथा इमल्सन (द्रव में द्रव ) हैं।

सॉलों का वर्गीकरण – परिक्षिप्त प्रावस्था एवं परिक्षेपण माध्यम के मध्य अन्योन्य क्रिया के आधार पर कोलॉइडी सॉलों को दो भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है, द्रवरागी या द्रवस्नेही (विलायक को आकर्षित करने वाले) एवं द्रवविरागी या द्रव विरोधी (विलायक को प्रतिकर्षित करने वाले )। जब परिक्षेपण माध्यम जल होता है तो जलरागी एवं जलविरागी शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

(i) द्रवरागी या द्रवस्ने ही कोलॉइड – द्रवरागी का अर्थ है द्रव को आकर्षित करने वाला। वे कोलॉइड जिन्हें पदार्थों को उचित द्रव (परिक्षेपण माध्यम) में मिलाने से सीधे ही कोलॉइड प्राप्त हो जाते हैं उन्हें द्रवरागी कोलॉइड (सॉल) कहते हैं। जैसे गोंद, जिलेटिन, स्टार्च, रबर इत्यादि। इन्हें उत्क्रमणीय कोलॉइड भी कहते हैं क्योंकि परिक्षेपण माध्यम तथा परिक्षिप्त प्रावस्था के पृथक् हो जाने के पश्चात् इन्हें पुनः मिश्रित करने पर कोलॉइड बन जाता है। ये स्थायी होते हैं अतः इनका स्कंदन आसानी से नहीं होता।

(ii) द्रवविरागी या द्रव विरोधी कोलॉइड (Lyophobic colloids )-द्रवविरागी का अर्थ है द्रव का विरोध करने वाला अर्थात् द्रव को प्रतिकर्षित करने वाला। परिक्षिप्त प्रावस्था तथा परिक्षेपण माध्यम को मिश्रित करने से ये कोलॉइड नहीं बनते अतः इन्हें विशेष विधियों से बनाया जाता है। इस प्रकार के कोलॉइडों को द्रवविरोधी कोलॉइड कहते हैं। उदाहरण धातुएँ तथा उनके सल्फाइडों के सॉल।

द्रव विरोधी सॉलों को वैद्युत अपघट्य की थोड़ी सी मात्रा मिलाकर, गर्म करके या हिलाकर आसानी से अवक्षेपित (स्कंदित) किया जा सकता है इसलिए ये स्थायी नहीं होते अतः एक बार अवक्षेपित होने के बाद, परिक्षेपण माध्यम मिलाने से ये पुनः कोलॉइड नहीं बनाते। अतः इनको अनुत्क्रमणीय कोलॉइड भी कहते हैं। द्रवविरागी सॉल के परिरक्षण के लिए स्थायी कारक आवश्यक होते हैं।

प्रश्न 5.
पेप्टीकरण पद को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
किसी अवक्षेप में वैद्युत अपघट्य की थोड़ी-सी मात्रा मिलाकर, परिक्षेपण माध्यम के साथ हिलाकर कोलॉइडी सॉल बनाने की प्रक्रिया को पेप्टीकरण कहते हैं।

प्रश्न 6.
प्रत्येक के लिए एक-एक उपयुक्त उदाहरण देते हुए, निम्नलिखित पदों की व्याख्या कीजिए-
(i) ऐरोसॉल (Aerosol )
(ii) इमल्शन (Emulsion )
(iii) मिसेल (Micelle )
उत्तर:

  • ऐरोसॉल वह कोलॉइड होता है जिसमें परिक्षेपण माध्यम गैस होती है। उदाहरण-धुआँ (ठोस एरोसॉल) इसमें ठोस के कण गैस में परिक्षिप्त रहते हैं।
  • दो आंशिक मिश्रणीय या अमिश्रणीय द्रवों से मिलकर बने कोलॉइड को इमल्शन कहते हैं। उदाहरण- दूध (द्रव वसा का जल में परिक्षेपण) ।
  • वे पदार्थ जो कम सान्द्रता पर प्रबल वैद्युत अपघट्य के समान व्यवहार करते हैं, लेकिन उच्च सान्द्रताओं पर कोलॉइड की भाँति व्यवहार करते हैं, उन्हें मिसेल कहते हैं। उदाहरण-जल में साबुन ।

प्रश्न 7.
कोलॉइडी विलयन टिण्डल प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। दो कारण दीजिए।
उत्तर:
कोलॉइडी विलयन के कणों का आकार वास्तविक विलयन से अधिक होता है तथा ये प्रकाश को अन्तराल में सभी दिशाओं में प्रकीर्णित करते हैं। प्रकाश का यह प्रकीर्णन कोलॉइडी परिक्षेपण में किरण के पथ को प्रदीप्त करता है। अतः कोलॉइडी विलयन टिण्डल प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 8.
जल विरागी कोलॉइड का स्कन्दन आसानी से हो जाता है। कारण दीजिए।
उत्तर:
जल विरागी कोलॉइड विलायक को प्रतिकर्षित करते हैं तथा अस्थायी होते हैं। इनका स्थायित्व आवेश के कारण होता है। अतः किसी भी प्रकार से आवेश को समाप्त कर देने पर इनके कण एक-दूसरे के पास आकर आसानी से स्कंदित हो जाते हैं।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित प्रक्रियाओं के प्रभाव को दर्शाने के लिए उपयुक्त शब्द दीजिए—
(अ) आर्सेनिक सल्फाइड सॉल में फेरिक हाइड्रोक्साइड सॉल मिलाया जाता है।
(ब) फेरिक हाइड्रोक्साइड के ताजा अवक्षेप में फेरिक क्लोराइड का विलयन मिलाया जाता है।
(स) आर्सेनिक ऑक्साइड के विलयन में H2S गैस प्रवाहित की जाती है।
(द) कोलॉइडी विलयन में प्रकाश पुंज गुजरता है।
उत्तर:
(अ) स्कन्दन (Coagulation)
(ब) पेप्टन या पेप्टीकरण ( Peptisation)
(स) As2S3 का कोलॉइडी विलयन बनता है।
(द) टिण्डल प्रभाव।

प्रश्न 10.
(अ) भौतिक अधिशोषण एवं रासायनिक अधिशोषण में दो अन्तर लिखिए।
(ब) समांगी एवं विषमांगी उत्प्रेरण को परिभाषित कीजिए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
(स) विद्युत अपोहन का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(अ) भौतिक अधिशोषण एवं रासायनिक अधिशोषण में निम्न अन्तर हैं-

  • भौतिक अधिशोषण वान्डरवाल बलों के कारण होता है जबकि रासायनिक अधिशोषण रासायनिक बन्ध बनने के कारण होता है।
  • भौतिक अधिशोषण उत्क्रमणीय होता है जबकि रासायनिक अधिशोषण अनुत्क्रमणीय होता है।

(ब) (i) समांगी उत्प्रेरण किसी अभिक्रिया में जब अभिकारकों एवं उत्प्रेरकों की भौतिक अवस्था समान (द्रव या गैस) होती है तो इसे समांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
उदाहरण:
शर्करा का जल अपघटन, सल्फ्यूरिक अम्ल द्वारा उत्पन्न H+ आयनों से उत्प्रेरित होता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 15

(ii) विषमांगी उत्प्रेरण – किसी अभिक्रिया में जब अभिकारक एवं उत्प्रेरक भिन्न-भिन्न भौतिक अवस्था में होते हैं तो इसे विषमांगी उत्प्रेरण कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 16

प्रश्न 11.
(अ) द्रवरागी एवं द्रवविरागी कोलॉइडों में दो अन्तर लिखिए।
(ब) यीस्ट में उपस्थित दो एन्जाइमों के नाम दीजिए। इनके द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रियाओं के समीकरण भी दीजिए।
(स) ब्रेडिंग आर्क विधि का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
(अ) (i) द्रवरागी कोलाइड उत्क्रमणीय होते हैं जबकि द्रवविरागी कोलाइड अनुत्क्रमणीय होते हैं।
(ii) द्रवरागी कोलाइड, पदार्थ को उचित परिक्षेपण माध्यम में मिलाने से सीधे ही प्राप्त हो जाते हैं क्योंकि इनमें पदार्थ द्रव को अपनी ओर आकर्षित ‘करता है जबकि द्रवविरागी कोलाइड विशेष विधियों द्वारा बनाए जाते हैं क्योंकि इनमें पदार्थ द्रव का विरोध करता है। रबर का कोलाइड द्रवरागी होता है जबकि धातु सल्फाइडों के कोलाइड द्रवविरागी होते हैं।

(ब) यीस्ट में इन्वर्ट्स तथा जाइमेज एन्जाइम पाए जाते हैं। इनके द्वारा उत्प्रेरित अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
(i) इन्वर्टेस एन्जाइम इक्षु शर्करा (सूक्रोस) को ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में परिवर्तित कर देता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 17
(ii) जाइमेज एन्जाइम से ग्लूकोस एथिल ऐल्कोहॉल एवं कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 18
(स) ब्रेडिंग आर्क विधि द्वारा कोलाइड बनाने का नामांकित चित्र निम्नलिखित है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 19

प्रश्न 12.
(i) जब एक प्रकाश किरण पुंज को कोलॉइडी विलयन में गुजारा जाता है, तो क्या होता है ?
(ii) बहु आण्विक कोलॉइड किसे कहते हैं?
उत्तर:
(i) जब एक प्रकाश किरण पुंज को कोलॉइडी विलयन में से गुजारा जाता है तथा इसे प्रकाश किरण पुंज की दिशा में लम्बवत् देखा जाता है तो प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं।

(ii) किसी पदार्थ को घोलने पर उसके बहुत से परमाणु या अणु एकत्रित होकर ऐसी स्पीशीज बनाते हैं जिनका आकार कोलॉइडी सीमा में होता है तो इन्हें बहु आण्विक कोलॉइड कहते हैं। उदाहरण- गोल्ड तथा सल्फर सॉल।

प्रश्न 13.
(i) द्रवस्नेही तथा द्रवविरोधी सॉल के एक-एक उदाहरण बताइए।
(ii) फ्रॉयन्डलिक अधिशोषण समतापी के सन्दर्भ में ठोसों पर गैसों के अधिशोषण के व्यंजक को एक समीकरण के रूप में लिखिए |
(iii) सहचारी कोलॉइड का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  • द्रवस्नेही सॉल-गोंद
    द्रवविरोधी सॉल – सिल्वर सॉल
  • अधिशोषित गैस की मात्रा = \(\frac{x}{\mathrm{~m}}=\mathrm{kp}^{\frac{1}{n}}\)
  • साबुन तथा अपमार्जक सहचारी कोलॉइड के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 14.
(अ) सोने का कोलाइडी सॉल बनाने की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
(ब) सॉल एवं जैल में क्या अन्तर है ?
(स) स्कंदन किसे कहते हैं? समझाइए ।
अथवा
(अ) वैद्युत अपघट्य की अतिरिक्त मात्रा की अशुद्धियों वाले कोलाइडी विलयन के शुद्धिकरण की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
(ब) एरोसॉल एवं फोम में क्या अन्तर है?
(स) पेष्टन किसे कहते हैं ? समझाइए ।
उत्तर:
(अ) सोने का कोलाइडी सॉल बनाने के लिए विद्युत परिक्षेपण विधि (ब्रेडिंग आर्क विधि) परिक्षेपण एवं संघनन दोनों ही होते हैं प्रयुक्त की जाती है। इस प्रक्रम में गोल्ड, सिल्वर तथा प्लेटिनम इत्यादि धातुओं के कोलॉइडी सॉल इस विधि से बनाये जाते हैं। इस विधि में परिक्षेपण माध्यम में डूबे हुए धातु के इलैक्ट्रोडों के बीच एक विद्युत आर्क उत्पन्न किया जाता है, इससे उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा द्वारा धातु वाष्पित हो जाती है जो पुनः हिमशीत जल द्वारा संघनित होकर कोलॉइडी अवस्था में आ जाती है। इसमें परिक्षेपण माध्यम सामान्यतः KOH या NaOH का तनु जलीय विलयन लिया जाता है।

(ब) सॉल वे कोलॉइड होते हैं जिनमें ठोस (परिक्षिप्त प्रावस्था), ठोस, द्रव या गैस (परिक्षेपण माध्यम ) में वितरित रहता है। मुख्यतः सॉल वे होते हैं जिनमें ठोस, द्रव में वितरित रहता है, जैसे गोंद, स्टार्च इत्यादि । जबकि जैल वे कोलॉइड हैं जिनमें द्रव प्रावस्था ठोस परिक्षेपण माध्यम में वितरित होती है, जैसे-पनीर, मक्खन इत्यादि ।

(स) स्कंदन – जब किसी सॉल में कोई विद्युत अपघट्य मिलाया जाता है तो उसका आवेश समाप्त हो जाता है जिससे इसके कण नीचे बैठ जाते हैं अर्थात् उनका अवक्षेपण हो जाता है। इसे सॉल का स्कंदन कहते हैं।

अथवा

(अ) कोलॉइडी विलयन में उपस्थित वैद्युत अपघट्यों की अशुद्धियों को अपोहन द्वारा पृथक् किया जाता है। इस विधि में एक उपयुक्त झिल्ली द्वारा वैद्युत अपघट्य के कणों को पृथक् किया जाता है। वास्तविक विलयन के कण जांतव झिल्ली ( ब्लैडर), पार्चमेन्ट पत्र या सेलोफेन शीट में से निकल जाते हैं परन्तु कोलॉइडी कण नहीं, अतः जांतव झिल्ली को अपोहन में प्रयुक्त किया जाता है। अपोहन के लिए प्रयुक्त उपकरण अपोहक कहलाता है।

अशुद्ध कोलॉइडी विलयन से भरा एक उपयुक्त झिल्ली का बैग पात्र में लटकाया जाता है जिसमें से होकर लगातार जल बहता रहता है। अणु एवं आयन झिल्ली में से विसरित होकर बाहरी जल में आ जाते हैं तथा शुद्ध कोलॉइडी विलयन बच जाता है। विद्युत प्रवाहित करने पर यह प्रक्रम जल्दी होता है तथा इस प्रक्रम को विद्युत अपोहन कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 20
(ब) एरोसॉल में परिक्षेपण माध्यम गैस होती है जिसमें ठोस या द्रव परिक्षिप्त रहता है। जैसे तम्बाकू का धुआँ (ठोस एरोसॉल) तथा कोहरा (द्रव एरोसॉल), जबकि फोम में द्रव में गैस के कण परिक्षिप्त रहते हैं जैसे फेन (फ्रोथ ) तथा फेंटी हुई क्रीम।

(स) पेप्टन या पेप्टीकरण – किसी अवक्षेप में वैद्युत अपघट्य की थोड़ी-सी मात्रा मिलाकर परिक्षेपण माध्यम के साथ हिलाकर इसे कोलॉइडी सॉल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को पेप्टन कहते हैं तथा पेप्टन में प्रयुक्त वैद्युत अपघट्य को पेप्टीकारक कहते हैं। यह स्कंदन का विपरीत प्रक्रम है। इस विधि से ताजा बने अवक्षेप को कोलॉइडी सॉल में परिवर्तित किया जाता है।
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प्रश्न 15.
(अ) एन्जाइम उत्प्रेरण किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।
(ब) दूध किस प्रकार का इमल्शन है ? समझाइए।
(स) वैद्युतकणसंचलन को नामांकित चित्र सहित समझाइए।
अथवा
(अ) उत्प्रेरक की वरणात्मकता किसे कहते हैं ? उदाहरण लिखिए।
(ब) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड एवं आर्सेनियस सल्फाइड सॉल को मिश्रित करने पर क्या होता है ?
(स) टिन्डल प्रभाव को नामांकित चित्र सहित समझाइए ।
उत्तर:
(अ) एन्जाइमों द्वारा विभिन्न अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने की प्रक्रिया को एन्जाइम उत्प्रेरण कहते हैं। उदाहरण-
माल्टोस का ग्लूकोस में परिवर्तन-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 22

(ब) दूध, जल में तेल प्रकार का इमल्शन है। दूध में जल परिक्षेपण माध्यम है जिसमें द्रव वसा के कण परिक्षिप्त रहते हैं।

(स) जब किसी कोलॉइडी विलयन में डूबे हुये दो प्लैटिनम इलैक्ट्रॉडों पर विद्युत विभव लगाते हैं तो कोलॉइडी कण विपरीत आवेशित इलैक्ट्रॉड की ओर गमन करते हैं। इसे वैद्युत कण संचलन कहते हैं। धनात्मक आवेशित कण कैथोड की ओर तथा ऋणात्मक आवेशित कण ऐनोड की ओर गति करते हैं । वैद्युत कण संचलन से कोलाइडी कणों पर आवेश की उपस्थिति की पुष्टि होती है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 23

(अ) उत्प्रेरक की उपस्थिति में किसी अभिक्रिया द्वारा विशिष्ट उत्पाद बनाने की क्षमता को उत्प्रेरक की वरणात्मकता कहते हैं अर्थात् विशिष्ट उत्पाद बनाते समय उत्प्रेरक अभिक्रिया को निश्चित दिशा प्रदान करता है। उदाहरण- Ni उत्प्रेरक की उपस्थिति में CO तथा H2 की क्रिया से CH4 बनती है जबकि Cu उत्प्रेरक की उपस्थिति में HCHO बनता है।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 24

(ब) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड ( धन-आवेशित सॉल) एवं आर्सेनियस सल्फाइड (ऋण आवेशित सॉल) को मिश्रित करने पर ये अवक्षेपित (स्कंदित) हो जाते हैं, इसे पारस्परिक स्कंदन भी कहते हैं।

(स) टिन्डल प्रभाव – जब अंधेरे में रखा एक समांगी विलयन, प्रकाश की दिशा से देखा जाता है, तो यह स्वच्छ दिखाई देता है तथा यदि इसे प्रकाश किरण पुंज की दिशा के लंबवत् देखा जाता है तो यह पूर्णतया अदीप्त (Perfect dark) दिखाई देता है। कोलॉइडी विलयन को भी इसी प्रकार से पारगमन प्रकाश (Transmitted light) द्वारा देखने पर पर्याप्त स्वच्छ या पारदर्शीं दिखाई देते हैं परन्तु इसे प्रकाश के पथ की दिशा से लम्बवत् देखने पर वह मंद से प्रबल दूधियापन दर्शाता है।

अर्थात् प्रकाश किरण पुंज का पारगमन पथ नीले प्रकाश से प्रदीप्त हो जाता है, इसे टिन्डल प्रभाव कहते हैं तथा प्रकाश का चमकीला शंकु (Cone), टिन्डल शंकु कहलाता है। इस प्रभाव को सर्वप्रथम फैराडे ने प्रेक्षित किया था अतः इसे फैराडे टिन्डल प्रभाव भी कहते हैं।
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 5 Img 25

प्रश्न 16.
AlCl3 और NaCl में से कौन-सा ऋणात्मक सॉल को स्कंदित करने में अधिक प्रभावशाली है और क्यों?
उत्तर:
AlCl3 और NaCl में से AlCl3 ऋणात्मक सॉल को स्कंदित करने में अधिक प्रभावशाली है क्योंकि इसमें धनायन (Al3+) पर आवेश अधिक है जो कि ऋणात्मक सॉल के कणों को अधिक आसानी से उदासीन करेगा।

प्रश्न 17.
एक उदाहरण सहित अधिशोषण को परिभाषित कीजिए । क्या कारण है कि अधिशोषण स्वभाव में ऊष्माक्षेपी होता है ? अधिशोष्य और अधिशोषी के बीच बलों की प्रकृति के आधार पर अधिशोषण के प्रकार लिखिए।
उत्तर:
इस प्रश्न के उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न संख्या 5.1 तथा 5.8 का उत्तर देखें तथा अधिशोष्य और अधिशोषी (अधिशोषक) के बीच बलों की प्रकृति के आधार पर अधिशोषण दो प्रकार के होते हैं।

  • भौतिक अधिशोषण या वान्डरवाल अधिशोषण
  • रासायनिक अधिशोषण या लैग्म्यूर अधिशोषण।

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HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

Haryana State Board HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes Notes.

Haryana Board 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

Introduction
So far, in all our study, we have been dealing with figures that can be easily drawn on page of our note book or blackboards. These are called plane figures. In previous classes, we have learnt about the perimeters and areas of rectangles, squares, rhombus and circles. If we cut out many of these plane figures of same shape and size from cardboard sheet and stack them up in a vertical pile, then by this process, we will obtain some solid figures such as a cuboid, a cylinder etc. In this chapter, we will learn to find the surface areas and volumes of cubes, cuboids, cylinders, cones and spheres.
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Units measurement of Area:
1 km2 = 1 km × 1 km = 10 hm × 10 hm = 100 hm2 or 100 hectares
1 hm2 = 1 hm × 1 hm = 10 dam × 10 dam = 100 dam2
1 hm2 = 1 hm × 1 hm = 100 m × 100 m = 10000 m2
1 dam2 = 1 dam × 1 dam = 10 m × 10 m = 100 m2
1 m2 = 1m × 1m = 10 dm × 10 dm = 100 dm2
1 m2 = 1m × 1m = 100 cm × 100 cm = 10000 cm2
1 dm2 = 1 dm × 1 dm = 10 cm × 10 cm = 100 cm2
1 cm2 = 1 cm × 1 cm = 10 mm × 10 mm = 100 mm2
1 km2 = 1 km × 1 km = 1000 m × 1000 m = 106 m2
1m2 = 1m × 1m = 1000 mm × 1000 mm = 106 mm2

HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

Units measurement of volume:
1 km3 = 1 km × 1 km × 1 km = 1000 m × 1000 m × 1000 m = 109 m3
1 km3 = 1 km × 1 km × 1 km = 10 hm × 10 hm × 10 hm = 1000 hm3
1 hm3 = 1 hm × 1 hm × 1 hm = 10 dam × 10 dam × 10 dam = 1000 dam3
1 hm3 = 1 hm × 1 hm × 1 hm = 100 m × 100 m × 100 m = 106 m3
1 dam3 = 1 dam × 1 dam × 1 dam = 10 m × 10 m × 10 m = 1000 m3
1 m3 = 1 m × 1 m × 1 m = 100 cm × 100 cm × 100 cm = 106 cm3
1 m3 = 1 m × 1 m × 1 m = 1000 mm × 1000 mm × 1000 mm = 109 mm3
1m3 = 1m × 1m × 1m = 10 dm × 10 dm × 10 dm = 1000 dm3
1 cm3 = 1 ml = 1 cm × 1 cm × 1 cm = 10 mm × 10 mm × 10 mm = 1000 mm3
1 litre = 1000 ml = 1000 cm3
1 m3 = 106 cm3 = 1000 litre = 1 kilolitre

Key Words:
→ Solids: Bodies which have three dimensions in space are called solids.

→ Volume: The amount of space occupied by a solid or bounded by a closed surface is known as the volume of solid.

→ Surface area: Surface area is the total sum of all the areas of all the shapes that cover the surface of solid.

→ Lateral surface area: Lateral surface in a solid is the sum of surface areas of all its faces excluding the bases of solid.

→ Cubold: A cuboid is a solid bounded by six rectangular plane regions.

→ Cube: When all the edges of cuboid are equal in length, it is called a cube.

→ Right circular cylinder: If a rectangle is revolved about one of its sides, the solid thus formed is called a right circular cylinder.

→ Right circular cone: If a right angled triangle is revolved about one of the sides containing a right angle, the solid thus generated is called a right circular cone.

→ Sphere: The set of all points in space which are equidistant from a fixed point, is called a sphere.

→ Hemisphere: A plane through the centre of a sphere divides the sphere into two equal parts. Each part is called a hemisphere.

HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

Basic Concepts
Surface Area of a Cuboid and a Cube:
(a) Cuboid: A solid bounded by six rectangular faces is called a cuboid.
e.g., a book, a brick, a matchbox, a tile etc. A cuboid has 6 rectangular faces, 12 edges and 8 vertices.
6 rectangular faces are ABCD, EFGH, BCGF, ADHE, ABFE and DCGH.
ABCD is the bottom face and EFGH is the top face and these are one pair of opposite faces. Similarly, other pairs of opposite faces are BCGF, ADHE and ABFE, DCGH.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 2
Out of these six faces, BCGF, ADHE, ABFE and DCGH are called the lateral faces of the cuboid. Any two faces other than the opposite faces are called adjacent faces.

In the given figure, ABCD and ABFE are adjacent faces.
Similarly, EFGH and ADHE are adjacent faces.
AB, BC, CD, DA, EF, FG, GH, HE, AE, BF, CG and DH are 12 edges of a cuboid. A, B, C, D, E, F, G and H are its 8 vertices.
(i) Total surface area of a cuboid:
Area of the face ABCD = Area of the face EFGH = (1 × b) sq. units
Area of the face BCGF = Area of the face ADHE = (b × h) sq. units
Area of the face ABFE = Area of the face DCGH = (1 × h) sq. units
Total surface area of the cuboid = Sum of the areas of six faces
= 2(l × b) + 2(b × h) + 2(l × h).
= 2(l × b + b × h + h × l)
= 2(lb + bh + hl) sq. units
where l = length, b = breadth and h = height.

(ii) Lateral surface area of the cuboid: Out of the six faces of a cuboid, we only find the area of the four faces, leaving the bottom and top faces. In such a case, area of these four faces is called the lateral surface of the cuboid.
Lateral surface area of the cuboid = Area of face BCGF+ Area of face ADHE + Area of face ABFE + Area of face DCGH
=bxh+bxh+lxh+lxh
= 2(l × h) + 2(b × h)
=2(l + b) × h sq. units
= Perimeter of the base × height.

(iii) Diagonal of a cuboid = \(\sqrt{l^2+b^2+h^2}\) units
(b) Cube: A cuboid whose length, breadth and height are all equal is called a cube eg., ice cubes, dice etc.
Each edge of a cube is called its edge. A cube has six faces, All the six faces of a cube are congruent square faces. Length of each edge of the cube is same. It has also 12 edges and 8 vertices.
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(i) Total surface area of the cube : Total surface area of the cube is the sum of the areas of the six congruent square faces. Area of the one face is a3, where a is the edge of a cube.
∴ Total surface of the cube = 6a3 sq. units
(ii) Lateral surface area of the cube = 4a3 sq. units
Diagonal of the cube = \(\sqrt{3}\)a units

HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

(a) Right Circular Cylinder: If we take a number of circular sheets of paper and stack them vertical pile, we will get a solid called a right circular cylinder.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 4
eg., circular pipes, circular pillars, road rollers, gas cylinders, measuring jars etc. In case if circular sheets are not stack up vertically as shown figure 13.8 (I) then the cylinder is not a right circular cylinder. Of course, if we have a cylinder with a non-circular base as shown in figure 13.8 (II), then we also cannot call it a right circular cylinder.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 5
Remarks: 1. From now onwards, the word cylinder would mean a right circular cylinder.

(b) Some Terms Related to the Cylinder:
(i) Base: Two circular ends of cylinder are called its bases.
(ii) Radius: The radius of the circular bases is called the radius of the cylinder. In the adjoining figure AO, OB, A’O’ and O’B’ are equal radii of the cylinder.
(iii) Axis: A line segment joining the centres of two circular bases is the called the axis of the cylinder.
In the figure 13.9, OO’ is the axis of the cylinder.
(iv) Height: The length of the axis of the right circular cylinder is called the height of the cylinder. In the figure, OO’ is the height of the cylinder.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 6

(c) Surface Area of Right Circular Cylinder:
(i) Lateral surface area of right circular cylinder: We take a rectangular sheet of paper, whose length is just enough to go round the cylinder and whose breadth is equal to the height of the cylinder as shown figure below.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 7
If we fold rectangular sheet along its length, we get a right circular cylinder of height h. Lateral surface area of the cylinder is the area of the rectangular sheet. The length of the sheet is equal to the circumference of the circular base which is equal to 2πr. Lateral surface area of a cylinder is also called the curved surface area of the cylinder.
Lateral or curved surface area of the cylinder = Area of the rectangular sheet
= length × breadth
=2πr × h = 2πrh sq. units
Therefore, lateral surface area of a cylinder = 2πrh sq. units.

(ii) Total surface area of the right circular cylinder: If we include areas of top and bottom of the cylinder to its lateral surface area, we get the total surface area of the cylinder.
If r is the radius of the cylinder and h its height.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 8
∴ Total surface area of the cylinder = lateral surface area + 2 bases area
= 2πrh + 2πr2[∵ base area = πr2]
= 2πr(h + r) sq. units
Therefore, total surface area of the cylinder = 2πr(h + r) sq. units

(d) Surface Area of Hollow Cylinder: Hollow cylinder is a solid bounded by two coaxial cylinders of the same height and different radii.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 9
eg., iron pipes, rubber tubes etc.
Let external and internal radii of a hollow cylinder be R and r and h be its height as shown in the given figure.
(i) Area of each base = π(R2 – r2) sq, units
(ii) Lateral or curved surface area of the cylinder = External surface area + Internal surface area
= 2πRh + 2πrh = 2πh(R + r) sq units
(iii) Total surface area of the cylinder
= Lateral surface area + 2 area of the base ring
= 2πh(R + r) + 2π(R2 – r2)
= 2πh(R + r) + 2π(R + r) (R – r)
= 2π(R + r) [h + R – r] sq. units.

HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

(a) Right Circular Cone: A solid described by the revolution of a right angled triangle about one of its sides (containing the right angle) which remains fixed. In the given figure revolves about side AO. It generates a cone. O is the centre of base BC and A is its vertex.
eg., ice cream cone, clow’s cap, conical vessel etc.

(b) Some Terms Related to the Cone : (i) Radius of the cone: The length segment OB = OC is called radius of the cone. It is usually denoted by r.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 10
(ii) Height of the cone: The length segment AO is called the height of the cone. It is usually denoted by h.
(iii) Slant height of the cone: Slant height of a right circular cone is the distance of its vertex from any point on the circumference of the base. In the given figure, AB and AC represents the slant height of the cone. It is usually denoted by l.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 11
(iv) Vertical angle of the cone: ∠BAC is called the vertical angle of the cone.

(c) Surface Area of a Right Circular Cone: (i) Lateral surface area of a right circular cone: On a sheet of paper, we draw a circle with centre O and radius l. Now cut out a circular region from the sheet of a paper. We obtain a circular disc of paper [see in figure 13.19 (I)].
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 12
Now cut cone OAB from the circular disc of paper [see figure 13.19 (II, III) and open it out (see in figure 13.19 (IV)]. AB is the perimeter of base of cone OAB. The cone OAB is cut into small pieces of triangles such as ΔOAb1, ΔOb1b2, ΔOb2b3, …… whose height is the slant height of the cone.
Area of each small triangle = \(\frac{1}{2}\)base of each triangle × l
Area of entire piece of paper (cone ΔOAB) = Sum of the areas of all triangles
= \(\frac{1}{2}\)b1l + \(\frac{1}{2}\)b2l + \(\frac{1}{2}\)b3l + ……..
= \(\frac{1}{2}\)l(b1 + b2 + b3 + ………)
\(\frac{1}{2}\) × l × AB
\(\frac{1}{2}\)l × 2πr = πrl
So, curved surface area of a cone = πrl.

(ii) Total surface area of a right circular cone:
Total surface of the cone = Lateral surface area + Area of the base of a cone
= πrl + πr2 = πr(l + r)
So, total surface area of the cone = πr(l + r),
where r is its base radius and l its slant height.

(iii) Relation between the height, slant height and radius of cone:
l2 = h2 + r2
⇒ l = \(\sqrt{h^2+r^2}\)

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1. (a) Sphere: A sphere is a solid described by the revolution of a semicircle about its diameter, which remains fixed, e.g., football, volleyball, throwball, etc.
In the given figure 13.27 (i) semicircle ABC by revolving about its diameter AB describes the sphere [(see in figure 13.27 (ii)]

The mid point of AB is the centre. Any line which passes through the centre and is terminated both ways by the surface is a diameter. Any line drawn from the centre to the surface is known as radius. A sphere may also defined as:
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 13
A sphere is a three dimensional figure (solid figure) which is made up of all points in the space, which lie at a constant distance from a fixed point is called the radius and the fixed point called the centre of the sphere.

(b) Surface Area of a Sphere: Let us take a rubber ball and drive a nail into it. Let us wind a string around the ball. When you reached the fullest part of the ball, use pins to keep the string in place and continue to wind the string around the remaining part of the ball till it is fully covered [see in figure 13.28 (I) and (II)].
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 14
Now, we unwind the string from the surface of the ball.

Start filling the circles one by one, with the string you had wound around the wall (see fig. 13.28). Then, on a sheet of paper, we draw four circles with radius equal to the radius of the ball. Now string is used to completely fill the regions of four circles, all of the same radius as of the sphere. It means, the surface area of a sphere of radius r = 4 times the area of a circle of radius r.
Therefore,surface area of sphere = 4πr2.

2. Hemisphere: A plane through the centre of a sphere divides the sphere into two equal parts. Each part is called a hemisphere.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 15
For a hemisphere of radius r, we have
(i) Curved surface area of the hemisphere = 2πr2
(ii) Total surface area of the hemisphere
= 2πr2 + πr2
= 3πr2.

3. (a) Spherical Shell: The difference of two solid concentric spheres is called a spherical shell.
(b) Surface Area of Spherical Shell: If R and be the external and internal radii of a spherical shell, then
Total surface area of spherical shell = 4π(R2 + l2).
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1. Volume of a Cuboid: In previous classes, we have learnt about of certain figures. Recall that solids occupy space. The measure of this occupied space is called the volume of the object.
If the object is hollow, then interior is empty and can be filled with air or some liquid that will take the shape of its container. In this case, the volume of the substance that can fill the interior is called the capacity of the container. Thus, we may say that the volume of an object is the measure of the space it occupies and the capacity of an object is the volume of substance its interior can accommodate. Unit of measurement of volume is cubic unit. If we take some rectangular sheets and place it one over the other. If we place these sheets vertically in pile, we get a cuboid. (see figure below)
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 17
If area of each rectangle is A, the height upto which the rectangles are stacked is h. Measure of the space occupied by the cuboid
= Area of a rectangular sheet × height
= A × h = l × b × h [∵ A = l × b]
Hence, volume of the cuboid = l × b × h
= length × breadth × height
Also, volume of the cuboid = Area of the base × height

2. Volume of Cube: If length, breadth and height of a cuboid are equal, then it is known as the cube.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 18
Volume of a cube = edge × edge × edge
= a × a × a = a3,
where a is the edge of a cube. Unit of measurement of volume is cubic unit.

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(a) Volume of a Cylinder: If we stack the circular sheets of radius r vertically, we will get a solid called a right circular cylinder of radius r and height h.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 19
Volume of the cylinder = The area of each circular sheet × height
= πr2 × h = πr2h
or Volume of the cylinder = Area of the base × height
= πr2h.

(b) Volume of the Hollow Cylinder: Let the external and internal radii of the hollow cylinder be R and r respectively and h be its height, then
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 20
Volume of the material = External volume – Internal volume.
= πR2h – πr2h
= πh(R2 – r2).

Volume of a Right Circular Cone:
Experiment: Take a hollow cylinder and a hollow cone of the same base radius and the same height.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 21
Fill the cone with water to the brim and empty it into the cylinder. Repeat the process two times more. We observe that 3 cone full to brim will fill the cylinder competely. With this, we can safely come to the conclusion that three times the volume of a cone, makes up the volume of a cylinder.
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 22
It means volume of a cone of radius ‘r’ and height ‘h’
= \(\frac{1}{3}\) of volume of cylinder of radius ‘r’ and height ‘h’
Volume of a cone = \(\frac{1}{3}\) × πr2h
or Volume of a cone = \(\frac{1}{3}\) × Area of the base × height

HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes

1. Volume of a Sphere: We take a cylindrical container and two or three spheres of different radii. Also take a large trough in which we can place the cylindrical container. Then fill the container up to the brim with water.
Now, we place a sphere in the container. Some of the water will overflow into the trough in which it is kept (see in figure given below).
HBSE 9th Class Maths Notes Chapter 13 Surface Areas and Volumes 23
We pour out the water from the trough into a measuring cylinder and find the volume of the over flowed water. If r is the radius of immersed sphere on evaluating \(\frac{4}{3}\)πr3, we find this value atmost equal to the volume of over flowed water.

We repeat this process with two or three spheres of different radii, we find:
Volume of overflowed water = The volume of the sphere immersed in the water
= \(\frac{4}{3}\)πr3
Thus,volume of the sphere = \(\frac{4}{3}\)πr3.

2. Volume of the hollow sphere: If R and r are respectively the outer and inner radii of hollow sphere.
Volume of the material = Volume of outer sphere – Volume of inner sphere
= \(\frac{4}{3}\)πrR3 – \(\frac{4}{3}\)πr3
= \(\frac{4}{3}\)π(R3 – r3)

3. Volume of the hemisphere :
Volume of the hemisphere \(\frac{2}{3}\)πr3
where r is the radius of the hemisphere.

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