Author name: Bhagya

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

Haryana State Board HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन गति Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs Type)

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा समीकरण सरल आवर्त गति को व्यक्त नहीं करता है-
(a) y =R sin (ωt + ϕ)
(b) y =R cos (ωt + ϕ)
(c) y = R sin ωt + b cos ωt
(d) y = R sin ωt cos 2 ωt
उत्तर :
(d) y = R sin ωt cos 2ωt

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प्रश्न 2.
सरल आवर्त गति करते कण का अधिकतम वेग 4 ms-1 है तथा अधिकतम त्वरण 16 ms-2 है तो कण का आयाम व आवर्तकाल क्या होगा-
(a) 1 m, \(\frac{\pi}{2}\)
(b) 2 m, π s
(c) 4 m, 2π s
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(a) 1 m, \(\frac{\pi}{2}\)

प्रश्न 3.
सरल आवर्त गति करते हुए एक पिण्ड का आवर्तकाल 0.05 s तथा आयाम 4 cm है। पिण्ड का अधिकतम वेग होगा-
(a) 1.6 π ms-1
(b) 2 π ms-1
(c) 3.1 π ms-1
(d) 4 π ms-1
उत्तर :
(a) 1.6 π ms-1

प्रश्न 4.
एक सरल लोलक का पृथ्वी पर आवर्तकाल T1 है, यदि पृथ्वी से R ऊँचाई पर आवर्तकाल T2 हो, तो \(\frac{T_2}{T_1}\) होगा-
(a) 1
(b) 2
(c) √2
(d) 4
उत्तर :
(b) 2

प्रश्न 5.
सरल आवर्त गति करते कण का अधिकतम विस्थापन की स्थिति में त्वरण होता है-
(a) अधिकतम
(b) न्यूनतम
(c) न अधिकतम न न्यूनतम
(d) शून्य
उत्तर :
(a) अधिकतम

प्रश्न 6.
0.2 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड x-अक्ष के अनुदिश 25/π हट्र्ज की आवृत्ति से सरल आवर्त गति कर रह्न है। x = 0.04 मीटर की दूरी पर पिण्ड की गतिज ऊर्जा 0.4 जूल है, दोलन का आयाम है –
(a) 0.12 m
(b) 0.03 m
(c) 0.06 m
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर :
(c) 0.06 m

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प्रश्न 7.
सरल आवर्त गति में क्या स्थिर रहता है-
(a) गतिज ऊर्जा
(b) स्थितिज ऊर्जा
(c) प्रत्यानयन बल
(d) आवर्तकाल
उत्तर :
(d) आवर्तकाल

प्रश्न 8.
यदि एक सेकण्ड लोलक की लम्बाई, जहाँ g = 9.8 ms-2 है, 1 m है, किसी ग्रहपर, जहाँ g = 4.9 ms-2 है, सेकण्ड लोलक की लम्बाई होगी-
(a) 1 m
(b) 2 m
(c) 0.5 m
(d) 1.5 m
उत्तर :
(c) 0.5 m

प्रश्न 9.
यदि एक सरल लोलक मुक्त रूप से गुरुत्वाकर्षण बल के अन्तर्गत नीचे गिर रहा है तो उसका आवर्तकाल होगा-
(a) 2 π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\)
(b) 2 π
(c) शून्य
(d) अनन्त
उत्तर :
(d) अनन्त

प्रश्न 10.
सरल आवर्त गति करते कण की स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है-
(a) साम्य स्थिति में
(b) अधिकतम विस्थापन की स्थिति में
(c) आधे विस्थापन पर
(d) एक-चौथाई विस्थापन पर।
उत्तर :
(b) अधिकतम विस्थापन की स्थिति में

प्रश्न 11.
किसी सरल आवर्त गति का आयाम R है तथा आवर्तकाल T है। अधिकतम तात्कालिक वेग होगा-
(a) \(\frac{2 \pi R}{T}\)
(b) \(\frac{2 R}{T}\)
(c) \(\frac{4 \mathrm{R}}{\mathrm{T}}\)
(d) \(2 \pi \sqrt{\frac{R}{T}}\)
उत्तर :
(a) \(\frac{2 \pi R}{T}\)

प्रश्न 12.
सरल आवर्त गति करते हुए कण की साम्य स्थिति से x दूरी पर स्थितिज ऊर्जा होती है-
(a) \(\frac{1}{2} m \omega^2 \mathrm{R}^2\)
(b) \(\frac{1}{2} m \omega^2 x^2\)
(c) \(\frac{1}{2} m \omega^2\left(\mathrm{R}^2-x^2\right)\)
(d) शून्य।
उत्तर :
(b) \(\frac{1}{2} m \omega^2 x^2\)

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प्रश्न 13.
एक वस्तु का द्रव्यमान m है तथा \mathrm{F}=-k x बल के अधीन आयाम a से सरल आवर्त गति कर रही है। वस्तु की कुल ऊर्जा निर्भर करती है-
(a) k, x
(b) k, a
(c) k, a, x
(d) k, a, v
उत्तर :
(b) k, a

प्रश्न 14.
सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण का आवर्तकाल होता है-
(a) T = \(2 \pi \sqrt{\frac{\text { विस्थापन }}{\text { त्वरण }}}\)
(b) T = \(2 \pi \sqrt{\frac{g}{\text { विस्थापन }}}\)
(c) T = \(2 \pi \sqrt{\frac{\text { वेग }}{\text { विस्थापन }}}\)
(d) T = \(2 \pi \sqrt{g \times \text { विस्थापन }}\)
उत्तर :
(a) T = \(2 \pi \sqrt{\frac{\text { विस्थापन }}{\text { त्वरण }}}\)

प्रश्न 15.
एक कण समीकरण x = 7 cos 0.5 πt के अनुसार दोलन कर रहा है, जहाँ x विस्थापन तथा t समय है। कण अपनी माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन तक की स्थिति में पहुँचने में समय लेता है-
(a) 4 सेकण्ड
(b) 2 सेकण्ड
(c) 1 सेकण्ड
(d) 0.5 सेकण्ड।
उत्तर :
(c) 1 सेकण्ड

प्रश्न 16.
एक स्प्रिंग से लटके किसी पिण्ड का आवर्तकाल T है, यदि इस स्प्रिंग को बराबर चार भागों में बाँट दिया जाए तथा उसी पिण्ड को किसी एक भाग से लटकाकर दोलन कराएँ तो नया आवर्तकाल होगा-
(a) \(\frac{T}{2}\)
(b) 2 T
(c) \(\frac{T}{4}\)
(d) T
उत्तर :
(a) \(\frac{T}{2}\)

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प्रश्न 17.
एक कण का विस्थापन x = 6 cos ωt + 8 sin ωt मीटर है। यह समीकरण एक सरल आवर्त दोलन व्यक्त करता है जिसका आयाम है-
(a) 14 m
(b) 2 m
(c) 10 m
(d) 5 m
उत्तर :
(c) 10 m

प्रश्न 18.
5 cm आयाम की सरल आवर्त गति करने वाले कण की अधिकतम चाल 31.4 cm s-1 है। इन दोलनों की आवृत्ति है-
(a) 13 Hz
(b) 2 Hz
(c) 4 Hz
(d) 1 Hz
उत्तर :
(d) 1 Hz

प्रश्न 19.
निम्न में से कौन-सा वक्र अवमन्दित दोलन प्रदर्शित करता है-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 1
उत्तर :
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 2

प्रश्न 20.
m द्रव्यमान का एक पिण्ड मूलबिन्दु के परितः X-अक्ष पर दोलन कर रहा है। इसकी स्थितिज ऊर्जा Ux = k|x|³ है, जहाँ k एक धनात्मक नियतांक है। यदि दोलन का आयाम r है, तब इसका आवर्तकाल T –
(a) \(\frac{1}{\sqrt{r}}\) के अनुक्रमानुपाती है
(b) r पर निर्भर करता है
(c) √r के अनुक्रमानुपाती है
(d) r3/2 के अनुक्रमानुपाती है।
उत्तर :
(a) \(\frac{1}{\sqrt{r}}\) के अनुक्रमानुपाती है

प्रश्न 21.
अनुनाद एक विशेष अवस्था है-
(a) मुक्त दोलन की
(b) प्रणोदित दोलन की
(c) अवमन्दित दोलनों की
(d) पोषित दोलनों की।
उत्तर :
(b) प्रणोदित दोलन की

प्रश्न 22.
एक कण का विस्थापन x = 3 sin (5 πt) + 4 cos (5 πt) द्वारा व्यक्त है। कण का आयाम होगा-
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 7
उत्तर :
(c) 5

प्रश्न 23.
एक लड़की झूले पर बैठी हुई झूल रही है। यदि वह खड़ी हो जाये तो झूलने का दोलन काल-
(a) घट जायेगा
(b) बढ़ जायेगा
(c) अपरिवर्तित रहेगा
(d) दो गुना हो जायेगा
उत्तर :
(a) घट जायेगा

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प्रश्न 24.
समान आवर्तकाल किन्तु π/2 कलान्तर वाली दो असमान आयाम वाली परस्पर लम्बवत् सरल आवर्त गतियों का परिणामी है-
(a) वृत्त
(b) दीर्घवृत्त
(c) सरल रेखा
(d) परवलय
उत्तर :
(b) दीर्घवृत्त

प्रश्न 25.
जब समान आयाम तथा समान आवृत्ति वाली दो सरल आवर्त गतियाँ π/2 कलान्तर में एक-दूसरे के ऊपर प्रत्यारोपित हैं तो परिणामी गति है-
(a) दीर्घवृत्ताकार
(b) वृत्ताकार
(c) सरल रेखीय
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर :
(b) वृत्ताकार

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer type Questions)

प्रश्न 1.
सरल आवर्त गति का विस्थापन समीकरण लिखिए।
उत्तर :
विस्थापन समीकरण y = R sin ωt
तथा यदि कण की प्रारम्भिक कला ϕ है तो विस्थापन समीकरण y = R sin (ωt + ϕ)

प्रश्न 2.
सरल आवर्त गति करते हुए कण के त्वरण व उसके विस्थापन के बीच सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर :
त्वरण a = -ω² y, जहाँ ω² एक नियतांक है। अतः a ∝ -y अतः त्वरण विस्थापन के अनुक्रमानुपातीं तथा विपरीत दिशा में है।

प्रश्न 3.
किसी सरल लोलक को खान में ले जाने पर उसकी आवृत्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
आवर्तकाल T ∝ \(\frac{1}{\sqrt{g}}\), अतः खान में ले जाने से g का मान कम होने के कारण आवर्तकाल बढ़ जाएगा, अतः आवृत्ति (v=\(\frac{1}{T}\)) घट जाएगी।

प्रश्न 4.
सरल आवर्त गति करते हुए कण के वेग तथा त्वरण के व्यंजक, कण के विस्थापन के पदों में लिखिए।
उत्तर :
कण का वेग u = 0 \(\sqrt{A^2-y^2}\) तथा कण का त्वरण a = -ω² y, जहाँ y विस्थापन, A आयाम तथा ω कोणीय आवृत्ति है।

प्रश्न 5.
सरल आवर्त गति करते हुए कण के आवर्तकाल का सूत्र लिखिए।
उत्तर :
T= 2π \(\sqrt{\frac{\text { विस्थापन }}{\text { त्वरण }}}\)

प्रश्न 6.
सेकण्ड लोलक से क्या तात्पर्य है?
उत्तर :
जिस सरल लोलक का आवर्तकाल 2 सेकण्ड होता है, सेकण्ड लोलक कहलाता है।

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प्रश्न 7.
सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण के त्वरण, विस्थापन तथा आवृत्ति के बीच सम्बन्ध लिखिए।
उत्तर :
कण का त्वरण
a = -ω² y = -(2πv)² y
या a = -4π²v²y

प्रश्न 8.
सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण की गति का समीकरण a = -bx से प्रदर्शित किया जाता है, जिसमें त्वरण है, x मध्यमान स्थिति से विस्थापन है तथा कोई नियतांक है। कण का दोलनकाल क्या होगा ?
उत्तर :
समीकरण a = -bx से,
\(\frac{\text { विस्थापन }(x)}{\text { त्वरण }(a)}=\frac{1}{b}\) (आंकिक रूप से)
अतः कण का दोलनकाल T= 2π \(\sqrt{\frac{\text { विस्थापन }}{\text { त्वरण }}}\)
या
T= 2π \(\sqrt{\frac{1}{b}}\)

प्रश्न 9.
क्या कृत्रिम भू-उपग्रह में कमानी द्वारा नियन्त्रित कलाई घड़ी प्रयुक्त की जा सकती है?
उत्तर :
हाँ, क्योंकि T = 2π \(\sqrt{\frac{m}{k}}\) द्रव्यमान m व बल नियतांक k नियत रहने से T नियत रहा है।

प्रश्न 10.
एक सरल लोलक के आवर्तकाल में प्रतिशत परिवर्तन ज्ञात कीजिए यदि लोलक की लम्बाई 4% बढ़ा दी जाए।
उत्तर :
T ∝ \(\sqrt{l}\)
अतः लोलक की लम्बाई 4% बढ़ा देने पर आवर्तकाल में 2% का परिवर्तन (बढ़) हो जायेगा।

प्रश्न 11.
एक लड़की झूलते झूलते खड़ी हो जाती है ? झूले के आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
लड़की के खड़े होने पर गुरुत्व केन्द्र ऊँचा हो जाएगा। जिससे प्रभावी लम्बाई l घट जाएगी अतः सूत्र T = 2π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\) से आवर्तकाल T भी घट जाएगा।

प्रश्न 12.
किसी स्प्रिंग के बल नियतांक का अर्थ समझाइए ।
उत्तर :
स्प्रिंग का बल नियतांक- यदि किसी स्प्रिंग पर F बल लगाने से उसकी लम्बाई में वृद्धि हो जाए, तो
F ∝ -x या F = -kx.
जहाँ = स्प्रिंग का बल नियतांक।
यदि x = 1, तो F (आंकिक रूप से)
अतः किसी स्प्रिंग का बल नियतांक उस बल के बराबर है जो उसकी लम्बाई में एकांक वृद्धि कर दे इसका मात्रक न्यूटन / मीटर होता है।

प्रश्न 13.
सरल आवर्त गति के आवश्यक प्रतिबन्ध लिखिए।
उत्तर :
सरल आवर्त गति के प्रतिबन्ध
(1) कण की गति एक स्थिर बिन्दु (माध्य स्थिति) के इधर-उधर सीधी रेखा में होती है।
(2) कण पर लगने वाला प्रत्यानयन बल (अथवा त्वरण) सदैव उस बिन्दु से कण के विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है।
(3) बल (अथवा त्वरण) सदैव उस बिन्दु (मध्य बिन्दु) की ओर दिष्ट होता है।

प्रश्न 14.
एक भारहीन स्प्रिंग का बल नियतांक है। इससे लटकते हुए ” द्रव्यमान के कण की सरल आवर्त गति के आवर्त काल का सूत्र लिखिए।
उत्तर :
आवर्तकाल का सूत्र T = 2π \(\sqrt{\frac{m}{k}}\)

प्रश्न 15.
यदि लड़की झूला झूल रही है उसके पास उसके आधे भार का एक बच्चा आकर बैठ जाता है झूले के आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर :
झूले का आवर्तकाल पिण्ड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता, अतः आवर्तकाल वही रहेगा।

प्रश्न 16.
सरल आवर्त गति में कौन-सी भौतिक राशि संरक्षित रहती है।
उत्तर :
यांत्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है।

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प्रश्न 17.
क्या कोई गायक अपने गाने से काँच की वस्तु के टुकड़े-टुकड़े कर सकता है?
उत्तर :
यदि गायक ऐसा स्वर उत्पन्न करे कि उसकी आवृत्ति काँच की वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर हो जाये तो अनुनाद के कारण वस्तु के दोलनों का आयाम बहुत अधिक बढ़ जायेगा और वस्तु के टुकड़े टुकड़े हो जाएँगे।

प्रश्न 18.
तार वाले वाद्य यन्त्र में प्रधान तार के साथ अन्य तार क्यों लगाए जाते हैं?
उत्तर :
स्वर की तीव्रता को बढ़ाने के लिए प्रधान तार के साथ अन्य तार लगाए जाते हैं।

प्रश्न 19.
ध्वनि तथा विद्युत् चुम्बकीय अनुनाद का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
(i) ध्वनि – सोनोमीटर।
(ii) विद्युत् चुम्बकीय अनुनाद – रेडियो ।

प्रश्न 20.
सरल आवर्त गति कर रहे किसी लोलक के लिए यह क्यों आवश्यक है कि उसका आयाम लम्बाई की तुलना में कम हो ?
उत्तर :
लोलक की गति सरल आवर्त गति तभी होती है, जबकि उसका कोणीय आयाम 10° से कम हो ।

प्रश्न 21.
वायु में सरल लोलक के दोलन किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर :
अवमन्दित दोलन ।

प्रश्न 22.
क्या अवमन्दन में यान्त्रिक ऊर्जा संरक्षित रहती है?
उत्तर :
हाँ

प्रश्न 23.
सरल आवर्त गति किस भौतिक राशि के संरक्षण पर आधारित है ?
उत्तर :
ऊर्जा संरक्षण पर ।

प्रश्न 24.
क्या कृत्रिम उपग्रह पर लोलक घड़ी प्रयुक्त की जा सकती है ?
उत्तर :
नहीं, कृत्रिम उपग्रह में भारहीनता की स्थिति होती है, अतः 8 का प्रभावी मान शून्य होता है।

प्रश्न 25.
निम्न स्थितियों में प्रत्यानयन बल कौन प्रदान करेगा-
(i) यदि स्प्रिंग को दबाकर कम्पन के लिए छोड़ दिया जाये।
(ii) यदि नली में पारे को विस्थापित करके छोड़ दिया जाये।
(iii) यदि सरल लोलक को माध्य स्थिति से विस्थापित कर छोड़ दिया जाये।
हल :
(i) स्प्रिंग के पदार्थ की प्रत्यास्थता के द्वारा
(ii) पारे के भार के द्वारा
(iii) लोलक के भार के द्वारा।

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
जब लोलक घड़ी को पर्वत चोटी पर ले जाया जाये तो क्या यह समय ग्रहण करेगी या खाएगी ?
उत्तर :
पर्वत की चोटी पर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण के मान घट जाने की वजह से आवर्तकाल बढ़ जायेगा, अतः घड़ी सुस्त हो जायेगी और समय ग्रहण करेगी।

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प्रश्न 2.
पोषित कम्पन क्या होते हैं?
उत्तर :
यदि कम्पन करने वाली वस्तु को किसी बाह्य अनावर्ती स्रोत से ऊर्जा देकर उसके स्वाभाविक कम्पनों का आयाम समय के साथ नियत रखा जाये तो इन कम्पनों को पोषित कम्पन कहते हैं, जैसे-विद्युत् पोषित स्वरित्र द्विभुज ।

प्रश्न 3.
प्रणोदित दोलनों से क्या तात्पर्य है? उदाहरण देकर समझाइए ।
उत्तर :
प्रणोदित दोलन (Force Oscillation ) :
“जब किसी दोलन करने वाली वस्तु पर कोई बाह्य आवर्ती बल कार्य करता है, तो प्रारम्भ में वस्तु अपनी स्वाभाविक आवृत्ति से दोलन करने का प्रयास करती है, परन्तु कुछ समय पश्चात् वह बाह्य आवर्ती बल की आवृत्ति से दोलन करने लगती है। वस्तु के इन दोलनों को प्रणोदित दोलन कहते हैं।” उदाहरण- जब तने हुए पतले तार से प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित करके को चुम्बक के ध्रुवों के बीच रखते हैं, तो तार प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति से प्रणोदित कम्पन करने लगता है।

प्रश्न 4.
मुक्त दोलन का अर्थ एक उदाहरण द्वारा समझाइए ।
उत्तर :
मुक्त दोलन (Free Oscillation ) :
जब किसी वस्तु को जो कि दोलन कर सकती हो, उसकी साम्य स्थिति से थोड़ा-सा विस्थापित करके छोड़ दिया जाता है तो वह एक निश्चित आवृत्ति से दोलन करने लगती है। यह आवृत्ति उस वस्तु के आकार व प्रत्यास्थता इत्यादि जैसे निजी गुणों पर निर्भर करती है। इसे वस्तु की ‘स्वाभाविक आवृत्ति’ (Natural Frequency) कहते हैं।
“वस्तु के इस प्रकार के दोलन जिस पर कोई भी बाह्य बल अपना प्रभाव नहीं डाल रहा है, मुक्त दोलन कहलाते हैं। ”
उदाहरणार्थ – स्वरित्र द्विभुज (Tuning Fork) को रबर की गद्दी पर मारने से उसकी भुजाएँ अपनी स्वाभाविक आवृत्ति से कम्पन करने लगती हैं। यह आवृत्ति भुजाओं की लम्बाई, मोटाई तथा उनके पदार्थ की प्रत्यास्थता पर निर्भर करती है।
इस प्रकार स्वरित्र द्विभुज के दोलनमुक्त दोलन हैं।

प्रश्न 5.
एक कण की दोलनी गति का समीकरण \(\frac{d^2 x}{d t^2}=-b x\) है जिसमें x माध्य स्थिति से विस्थापन तथा 6 नियतांक है। कण का दोलन काल क्या होगा ?
उत्तर :
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 3

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प्रश्न 6.
जब कहीं बम विस्फोट होता है तो दूर-दूर तक बनी इमारतों की खिड़कियों के काँच टूट जाते हैं। समझाइए, क्यों ?
उत्तर :
बम विस्फोट के द्वारा हवा में तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों से खिड़कियों के काँच में कम्पन उत्पन्न हो जाते हैं। जब इन तरंगों की आवृत्ति खिड़की के काँच की मूल आवृत्ति के बराबर हो जाती है तो कम्पनों का आयाम बहुत अधिक हो जाता है। इस स्थिति में खिड़कियों के काँच टूट जाते हैं।

प्रश्न 7.
क्या कोई कण अपनी चाल को परिवर्तित किये बिना त्वरित गति कर सकता है ?
उत्तर :
हाँ, जब कण नियत चाल से वृत्ताकार पथ पर गति करता है तो यह गति त्वरित होती है, क्योंकि इस गति में दिशा निरन्तर बदलती रहती है।

प्रश्न 8.
क्या स्वतन्त्रतापूर्वक गिरती हुई कलाई घड़ी सही समय का मापन कर सकती है ?
उत्तर :
हाँ, क्योंकि कलाई घड़ी स्प्रिंग के दोलन क्रिया पर आधारित होती है, और स्प्रिंग का आवर्तकाल (T) = 2π \(\sqrt{\frac{m}{k}}\) होता है जिसमें g (गुरुत्वीय त्वरण) का कोई पद नहीं होता है।

प्रश्न 9.
आवर्ती गति एवं दोलन गति को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर :
“जब कोई वस्तु एक निश्चित समय में एक निश्चित पथ पर बार-बार अपनी गति को दोहराती है तो उसकी गति को आवर्ती गति कहते हैं और उस निश्चित समय को आवर्तकाल (time period) कहते हैं।” उदाहरण के लिए, पेण्डुलम की गति, घड़ी की सुइयों की गति, ग्रहों एवं उपग्रहों की गति आदि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 3654 दिन में अपनी परिक्रमा पूरी करती है, अतः पृथ्वी की आवर्ती गति का आवर्तकाल 365 दिन हुआ।

दोलनी या कम्पनिक गति (Oscillatory or Vibratory Motion) : जब कोई वस्तु आवर्ती गति में एक ही पथ पर किसी निश्चित बिन्दु के इधर-उधर या आगे-पीछे (to and fro ) गति करती है तो यह गति दोलनी अथवा कम्पनिक गति कहलाती है। जिस निश्चित बिन्दु के दोनों ओर दोलनी गत्ति होती है उसे माध्य स्थिति या साम्य स्थिति (mean position or equilibrium position) कहते हैं। उदाहरण के लिए; लोलक की गति, स्वरित्र द्विभुज की भुजाओं की गति आदि कम्पनिक गति के उदाहरण हैं। दोलन गति में वस्तु एक निश्चित साम्य स्थिति के एक ओर जाती है, फिर वापस उसी स्थिति में लौटकर दूसरी ओर चली जाती है और पुन: लौटकर माध्य स्थिति में आ जाती है।

प्रश्न 10.
l लम्बाई के एक सरल लोलक का गोलक ऋण आवेशित है। यदि गोलक के ठीक नीचे एक धनावेशित धातु की प्लेट रखकर लोलक का दोलन कराया जाये तो बताइए सरल लोलक के आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
ऋण आवेश तथा धन आवेश में आकर्षण बल के कारण g का प्रभावी मान बढ़ जायेगा, अत: दोलन काल घट जायेगा ।

प्रश्न 11.
किसी पुल पर सैनिकों को गुजरते समय कदम से कदम न मिलाकर चलने के निर्देश क्यों दिये जाते हैं।
उत्तर :
जब सेना किसी पुल को पार करती है तब सैनिक कदम मिलाकर नहीं चलते। इसका कारण यह है कि यदि सैनिकों के कदमों की आवृत्ति, पुल की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर हो जाए तो पुल बड़े आयाम के कम्पन होने लगेंगे और पुल के टूटने का खतरा हो जाएगा।

प्रश्न 12.
यदि खोखला पाइप पृथ्वी के व्यास के अनुदिश रखकर उसमें एक पिण्ड गिरा दिया जाये तो इसके वेग और त्वरण में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर :
यह पिण्ड पाइप में सरल आवर्त गति करेगा, जिसकी माध्य स्थिति पृथ्वी के केन्द्र पर होगी। पृथ्वी के केन्द्र से गुजरते समय वेग अधिकतम होगा तथा पृथ्वी की सतह पर न्यूनतम और त्वरण पृथ्वी की सतह पर अधिकतम होगा तथा पृथ्वी के केन्द्र पर न्यूनतम होता है।

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प्रश्न 13.
यदि सरल आवर्त गति करते हुए सरल लोलक को एक लिफ्ट में रख दिया जाये, जो ऊपर की ओर त्वरण (a) से गतिमान हो तो उसके आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
जब लिफ्ट ऊपर की ओर त्वरित होगी तो सरल लोलक पर कार्यकारी बल
R – mg = ma
या R = ma + mg = m (a + g)
या mg = m (a + g)
या g = (a + g)
∵ सरल लोलक का आवर्तकाल (T) = 2π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\)
∵ T ∝ \(\frac{l}{\sqrt{g}}\)
∵ g बढ़ जायेगा, अतः आवर्तकाल घट जायेगा।

प्रश्न 14.
सरल आवर्त गति करते हुए किसी सरल लोलक को एक लिफ्ट में रख दिया जाये, यदि लिफ्ट त्वरण से नीचे की दिशा में त्वरित हो तो इसके आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
जब लिफ्ट (a) त्वरण से नीचे की ओर त्वरित होती है तो उसमें रखे लोलक पर प्रभावकारी बल
mg – R = ma
या R = mg – ma = m(g – a)
या mg’ = m(g – a)
या g’ = (g – a)
∵ सरल लोलक का आवर्तकाल (T) = 2π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\)
T ∝ \(\frac{l}{\sqrt{g}}\)
∵गुरुत्वीय त्वरण का प्रभावी मान घट जाता है, इसलिए आवर्तकाल का मान बढ़ जाता है।

प्रश्न 15.
क्या दोलन करते सरल लोलक की डोरी में तनाव बल सदैव नियत रहता है ? यदि नहीं तो कब न्यूनतम व कब अधिकतम होता है ?
उत्तर :
जब लोलक माध्य स्थिति में θ कोण से विस्थापित होता है तो तनाव बल T = mg cos θ से होता है, क्योंकि θ का मान विभिन्न स्थानों पर दोलन करते समय भिन्न होगा। अतः तनाव बल का मान भी भिन्न होगा। अधिकतम विस्थापन की स्थिति में θ का मान अधिकतम होगा तथा cos θ का मान न्यूनतम होगा। इस कारण तनाव बल न्यूनतम होगा।
माध्य स्थिति पर θ = 0, cos θ = 1 जो कि cos θ का अधिकतम मान है, अतः तनाव बल अधिकतम होता है।

प्रश्न 16.
एक स्प्रिंग का स्प्रिंग नियतांक (k) है, जिसे तीन बराबर भागों में विभाजित कर दिया जाता है। प्रत्येक भाग का स्प्रिंग नियतांक क्या हो जायेगा ?
उत्तर :
चूँकि हम जानते हैं कि
k = \(\frac{F}{y}\)
जब स्प्रिंग को तीन भागों में काट दिया जाता है तो लम्बाई तीन गुनी कम हो जाती है। जिससे वल नियतांक का मान तीन गुना बढ़ जाता है।
y’ = \(\frac{y}{3}\)
∴ k’ = \(\frac{F}{y/3}=3 \frac{F}{y}\) = 3k

प्रश्न 17.
कभी-कभी भूकम्प बहुत विध्वंसकारी क्यों होता है ?
उत्तर :
जब इमारतों की मूल आवृत्ति भूकम्प के समय उत्पन्न पृथ्वी के कम्पनों की आवृत्ति के बराबर हो जाती है तो अनुनाद के कारण इमारतें बड़े आयाम के साथ कम्पन करना प्रारम्भ कर देती हैं, जिससे वह नीचे गिर जाती हैं।

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प्रश्न 18.
एक सरल लोलक के धात्विक गोले का आपेक्षिक घनत्व ρ है। इसका आवर्तकाल T है यदि गोलक को पानी में डुबोया जाये तो सरल लोलक के आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
सरल लोलक का आवर्तकाल
T = 2π \(\sqrt{\frac{l}{g}}\)
यदि लोलक को पानी में डुबो दिया जाता है तो पानी से लगने वाले उछाल के कारण लोलक का आभासी भार कम होगा। अतः आभासी गुरुत्वीय त्वरण g’ का मान g से कम होगा। फलस्वरूप आवर्त काल T का मान बढ़ जायेगा।

प्रश्न 19.
एक द्रव्यमान m एवं k बल नियतांक तथा l लम्बाई वाली स्प्रिंग से लटकाया जाता है। इस द्रव्यमान की दोलन आवृत्ति f1 है। यदि स्प्रिंग को दो बराबर भागों में काटकर उसी द्रव्यमान को एक भाग से लटका दिया जाए और नयी आवृत्ति f2 हो तो f1 तथा f2 के मध्य क्या सम्बन्ध है ?
उत्तर :
स्प्रिंग को दो बराबर भागों में तोड़ने पर प्रत्येक भाग का बल नियतांक दो गुना हो जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 4

प्रश्न 20.
सिद्ध कीजिए कि परवलयिक विभव कूप में कण सरल आवर्त गति करता है।
उत्तर :
जब कोई पिण्ड सरल आवर्त गति करता है तो उसकी माध्य स्थिति y दूरी पर स्थितिज ऊर्जा U = \(\frac{1}{2}\) ky² होती है। जब हम स्थितिज ऊर्जा U और विस्थापन में ग्राफ खींचते हैं तो एक परवलय प्राप्त होता है। इसका आकार कूप के समान होता है इस प्रकार के विभव फलन को परवलयिक विभव कूप (parabolic potential well) कहते हैं। सरल आवर्त गति इस प्रकार के कूप में पायी जाती है।
स्थितिज ऊर्जा U = \(\frac{1}{2}\) ky²
कण पर लगने वाला परिणामी बल
F = \(– \frac{d}{dy}\) |U|
या F = \(– \frac{d}{dy}\) (\(\frac{1}{2}\) ky²)
= \(\frac{1}{2}\) k . 2y
या F = -ky
स्पष्ट है कि प्रत्यानयन बल विस्थापन के समानुपाती होता है। जिसकी दिशा माध्य स्थिति की ओर होती है अतः पिण्ड सरल आवर्त गति करेगा।

प्रश्न 21.
यदि आपको एक हल्का स्प्रिंग, एक मीटर स्केल और एक ज्ञात द्रव्यमान दे दिया जाये तो आप घड़ी का उपयोग किये बिना आवर्तकाल कैसे ज्ञात करोगे ?
उत्तर :
हम दिये गये द्रव्यमान को स्प्रिंग से लटका देते हैं और स्केल की सहायता से स्प्रिंग में विस्तार ज्ञात कर लेते हैं। इस प्रकार स्प्रिंग के बल नियतांक की गणना की जा सकती है।
F = k . l लेकिन F = mg
kl = mg
k = \(\frac{mg}{l}\),
जहाँ l = स्प्रिंग की लम्बाई में वृद्धि
स्प्रिंग का आवर्तकाल (T) = 2π\(\sqrt{\frac{m}{k}}\)
k का मान रखने पर,
T = 2π \(\sqrt{\frac{m}{m g / l}}=\sqrt{\frac{l}{g}}\)
l तथा g के मान ज्ञात हैं, अतः T का मान ज्ञात हो सकता है।

प्रश्न 22.
सरल लोलक में लोहे के गोलक के स्थान पर उसी आकार का चाँदी का गोलक लटका कर प्रयोग करने पर आवर्तकाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
अपरिवर्तित रहेगा क्योंकि सरल लोलक का आवर्तकाल द्रव्यमान तथा घनत्व पर निर्भर नहीं करता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 23.
सरल आवर्त गति कर रहे कण द्वारा एक सम्पूर्ण दोलन में कितना कार्य करना पड़ेगा ?
उत्तर :
कार्य (W) = बल × विस्थापन
चूँकि सम्पूर्ण दोलन में विस्थापन = 0
∴ W = 0
अतः कार्य शून्य होगा।

प्रश्न 24.
समान द्रव्यमान के दो पिण्ड P तथा Q दो द्रव्यमानहीन स्प्रिंगों से अलग-अलग लटके हैं। स्प्रिंगों के बल नियतांक क्रमशः k1 तथा k2 हैं यदि दोनों पिण्ड ऊर्ध्वाधर तल में इस प्रकार कम्पन करते हैं कि उनके अधिकतम वेग समान हों, तब P तथा Q के कम्पन के आयाम में क्या अनुपात होगा ?
उत्तर :
चूँकि दो पिण्ड P तथा Q के अधिकतम वेग समान हैं-
∴ P का अधिकतम वेग = Q का अधिकतम वेग
a1ω1 = a2ω2
या a1 × \(\frac{2л}{T_1}\) = a2 × \(\frac{2л}{T_2}\)
या a1 × \(\sqrt{\frac{k_1}{m}}\) = a2 × \(\sqrt{\frac{k_2}{m}}\)
या \(\frac{a_1}{a_2}\) = \(\sqrt{\frac{k_2}{k_1}}\)

प्रश्न 25.
एक सरल लोलक जिसके धागे की लम्बाई (l) तथा गोलक का दव्यमान m है, ऊर्ध्वाधर तल में θ कोण के वृत्तीय चाप पर गति कर रहा है। चाप के अन्तिम सिरे पर m द्रव्यमान का एक अन्य गोलक जो स्थिर स्थिति में रखा है से टकराता है तो गतिशील गोलक द्वारा स्थिर गोलक को कितना संवेग दिया जायेगा ?
उत्तर :
शून्य (0), क्योंकि अन्तिम बिन्दु पर गोलक का वेग शून्य होता है इसी कारण संवेग शून्य होगा।

प्रश्न 26.
l लम्बाई की एक स्प्रिंग का बल नियतांक & है, जब इस पर भार लटकाया जाता है तो इसकी लम्बाई में वृद्धि होती है। यदि स्प्रिंग को दो बराबर टुकड़ों में काटकर तथा उन्हें समान्तर क्रम में रखकर उन पर वही भार » लटकायें तो उसकी लम्बाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?
उत्तर :
स्प्रिंग को दो बराबर भागों में बाँटने पर उसकी स्प्रिंग का बल नियतांक दो गुना हो जायेगा। चूंकि स्प्रिंग दो स्प्रिंगों में बदल जाती हैं जिन्हें समान्तर क्रम में जोड़ने पर परिणामी बल नियतांक 46 हो जायेगा।
भार समान है इसलिए
∵ x ∝ \(\frac{1}{k}\)
∴ \(\frac{x_1}{x_2}=\frac{k_1}{k_2}=\frac{4k}{k}=4\)
x2 = \(\frac{x_1}{4}\)

प्रश्न 27.
यदि हम अपने कान के पास एक गिलास रख लें, तो हमें गुन-गुन की ध्वनि सुनाई देती है, क्यों ?
उत्तर :
वातावरण के कणों के कम्पनों की आवृत्ति गिलास में भरी वायु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर हो जाती है, जिससे अनुनाद की घटना होती है। अतः हमें गुन-गुन की ध्वनि सुनाई देती है।

प्रश्न 28.
ऊँचा सुनने वाला व्यक्ति अपने कान के पीछे हाथ क्यों लगा लेता है ?
उत्तर :
अनुनाद की घटना उत्पन्न करने के लिए, जिससे उसे स्पष्ट ध्वनि सुनाई दे।

प्रश्न 29.
स्प्रिंग का बल नियतांक किन कारकों पर निर्भर करता है ?
उत्तर :
किसी स्प्रिंग का बल नियतांक, स्प्रिंग के पदार्थ की प्रकृति, स्प्रिंग की बनावट एवं उसकी भौतिक अवस्था पर निर्भर करता है, अर्थात् मुलायम स्प्रिंग के लिए k का मान कम तथा कठोर स्प्रिंग के लिए k का मान अधिक होता है।
∴ \(k_{\text {कठोर }}>k_{\text {मुलायम }}\)

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Question)

प्रश्न 1.
सरल आवर्त गति के आवश्यक प्रतिबन्ध बताइए तथा सिद्ध कीजिए कि किसी वृत्त की परिधि पर एकसमान कोणीय वेग से गतिमान बिन्दु का वृत्त पर प्रक्षेप सरल आवर्त गति करता है ?
उत्तर :
रैखिक सरल आवर्त गति (Linear Simple Harmonic Motion) :
किसी वस्तु की रैखिक सरल आवर्त गति होने के लिए निम्नलिखित तीन प्रतिंबन्ध हैं–
(i) वस्तु की गति एक स्थिर बिन्दु (साम्य स्थिति) के इधर-उधर सरल रेखा में हो।
(ii) वस्तु पर कार्यरत् प्रत्यानयन बल अर्थात् वस्तु में उत्पन्न त्वरण सदैव माध्य स्थिति से वस्तु के विस्थापन के अनुक्रमानुपाती हो अर्थात् a ∝ (-y) जहाँ (-) चिह्न यह दर्शाता है कि त्वरण a की दिशा सदैव विस्थापन y की दिशा के विपरीत होती है।
(iii) बल अर्थात् त्वरण सदैव साम्य स्थिति की ओर दिष्ट हो।
इस प्रकार सरल आर्वत गति में प्रत्यानयन बल, साम्य स्थिति से विस्थापन के रामानुपाती रंध्या जिपरीत दिशा में होता है। अर्थात्
F ∝ -y
F = -k y …………(1)
यहाँ F प्रत्यानयन बल, y साम्य स्थिति से विस्थापन तथा k प्रत्यानयन बल नियतांक कहलाता है, जिसका मात्रक न्यूटन/मीटर होता है।
प्रत्यानयन बल (F) तथा विस्थापन (y) में वक्र निम्न प्रकार रैखिक प्राप्त होता है-

रैखिक सरल आवर्त गति का अवकल समीकरण :
माना कि किसी वस्तु का द्रव्यमान m है जिस पर F बल आरोपित है।
वस्तु की गति में त्वरण a = \(\frac{F}{m}\)
लेकिन समीकरण (l) से F = -k y
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 6

सरल आवर्त गति : एकसमान वृत्तीय गति में प्रक्षेप (Simple Harmonic Motion : Project in Uniform Circular Motion) :
माना कोई कण त्रिज्या (A) के वृत्तीय पथ पर एकसमान कोणीय वेग ω से घूम रहा है। परिभाषा के अनुसार कण की गति आवर्ती गति तो है, परन्तु सरल आवर्त गति नहीं है।

जब कण बिन्दु N पर है, तो बिन्दु N से वृत्त के व्यास YY’ पर डाले गये लम्ब का पाद P बिन्दु पर मिलता है। जब कण Y पर है, तो लम्ब का पाद भी Y पर है। जब कण X’ पर पहुँचता है, तो लम्ब का पाद व्यास पर चलकर Y से O पर आ जाता है। जब कण Y’ पर पहुँचता है, तो पाद भी Y’ पर पहुँच जाता है। जब कण X पर पहुँचता है, तब लम्ब का पाद O पर पहुँच जाता है तथा जब कण लौटकर बिन्दु N तक पहुँचता है तो पुन: लम्ब का पाद P हो जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 7
सणष्ट है कि एकसमान वृत्तीय गति पर गतिमान कण की तात्कालिक स्थितियों से किसी व्यास Y.Y’ पर डाले गये लम्ब का पाद बिन्दु O के इधर-उधर एक सरल रेखा में गति करता है। लम्ब के पाद की यह गति दोलनी गति कहलाती है।

जितने समय में कण एक समान वृत्तीय गति पर एक चक्कर पूरा कर लेता है, लम्ब का पाद भी उतने समय में एक कम्पन पूरा कर लेता है। इस समय को दोलन काल कहते हैं।

कण की स्थिति N में लम्ब के पाद P का साम्य स्थिति से विस्थापन = (OP = y) कण पर केन्द्र की ओर बल F = mω²A लगता है जिसमें m कण का द्रव्यमान है। इस बल का y दिशा में घटक Fy = mω²A sin θ, ॠणात्मक चिह्न केवल प्रदर्शित करता है कि बल Fy की दिशा केन्द्र O की ओर है।
∴ त्रिभुज OPN में,
sin θ = \(\frac{OP}{ON}=\frac{y}{a}\)
y = A sin θ
∴ Fy = -mω²A sin θ
sin θ का मान रखने पर,
Fy = -mω²A . \(\frac{y}{a}\) = -mω²y
चूँक कण का द्रव्यमान (m) तथा कोणीय वेग (ω) नियत हैं, अर्थात् कह सकते हैं कि mω² = नियतांक = k
∴ Fy = -ky
Fy ∝ -y
अर्थात् लम्ब के पाद (N) पर कार्य करने वाला बल उसकी माध्य स्थिति से विस्थापन के अनुक्रमानुपाती है तथा इसकी दिशा माध्य स्थिति की ओर ही दिष्ट है। यही सरल आवर्त गति का आवश्यक तथा पर्याप्त त्रतिबन्ध है, अतः हम कह सकते हैं कि लम्ब के पाद की गति सरल आवर्त गति है।

इस प्रकार एकसमान वृत्तीय गति पर गतिमान कण की गति आवर्ती है, परन्तु सरल आवर्त गति नहीं, जबकि एकसमान वृत्तीय ति पर गतिमान कण की तात्कालिक स्थितियों से किसी व्यास पर डाले गये लम्ब के प्रक्षेप या लम्ब पाद की गति सरल आवर्त गति है।
नोट : इस वृत्त को सरल आवर्त गति का निर्देश वृत्त (reference circle) कहते हैं।

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प्रश्न 2.
सरल आवर्त गति से क्या अभिप्राय है ? सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण के त्वरण एवं विस्थापन में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर :
अनुच्छेद संख्या 14.7, 14.10 तथा 14 .12 . 2 देखें।

जब कोई कण अपनी साम्य या माध्य स्थिति के इधर-उधर गति इस प्रकार करे कि इस पर कार्यकारी बल प्रत्येक स्थिति में इसकी साम्य स्थिति की ओर दिष्ट रहे तब कण की गति सरल आवर्त गति (S.H.M.) कहलाती है।

उदाहरण के लिए, सरल लोलक के दोलन, स्प्रिंग में लटके पिण्ड के कम्पन, स्वरित्र द्विभुज की भुजाओं के कम्पन आदि।

एक वृत्त के चाप पर भी कोणीय गति हो सकती है। जैसे मरोड़ी लोलक में। वस्तु को जब माध्य स्थिति से विस्थापित किया जाता है तो उस पर एक प्रत्यानयन बल लगता है तो उसे माध्य स्थिति की ओर लाता है। सरल आवर्त गति, दोलन गति का एक विशेष रूप है, जो सबसे सरल होता है।

सरल आवर्त गति के प्रकार (Types of S.H.M.) :
सरल आवर्त गति निम्नलिखित दो प्रकार की होती हैं-
(i) रैखिक सरल आवर्त गति (Linear Simple Harmonic Motion)
(ii) कोणीय सरल आवर्त गति (Angular Simple Harmonic Motion)

सरल आवर्त गति का विस्थापन समीकरण (Displacement equation of S.H.M.) :
माना एक कण की एकसमान वृत्तीय मार्ग पर प्रारम्भिक स्थिति X है तथा t सेकण्ड में यह कण θ कोण घूम जाता है, तो
कोणीय विस्थापन = कोणीय वेग × समय
θ = ω.t

चित्र से स्पष्ट है कि t समय में लम्ब का पाद O से P तक पहुँचता है तथा इसकी माध्य स्थिति O से विस्थापन
x = OP = ON sin θ = A sin θ
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 8
y = A sin ωt ……………(1)

∵ पथ की त्रिज्या A ही सरल आवर्त गति का आयाम है अतः

y = A sin ωt ……………(1)

व्यापक रूप में प्रारम्भिक स्थिति को कहीं भी माना जा सकता है। माना कण की प्रारस्भिक स्थिति A पर है एवं ∠AOX = ϕo एवं ∠AOP = ωt
θ = ∠XOP = ωt – ϕ0
अतः y = A sin (ωt – ϕ0)
एवं x = A cos (ωt – ϕ0)

– ϕ0 को प्रारम्भिक कला कहते हैं। अगर कण की प्रारम्भिक स्थिति B पर है

एवं ∠BOX = ϕ0
तथा ∠BOP = ωt
तब θ = ∠XOP = ωt + ϕ0
अतः y = A sin (ωt + ϕ0)
एवं x = A cos (ωt + ϕ0)
यहाँ + ϕ0 को प्रारम्भिक कला कहते हैं।

सरल आवर्त गति में विस्थापन-समय आलेख :

विस्थापन व समय में आलेख निम्न प्रकार होगा-
(i) जब ϕ – शून्य हो-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 9

(ii) जब प्रारम्भिक कला कोण +ϕ हो-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 10

(iii) जब प्रारम्भिक कला कोण -ϕ हो-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 11

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

सरल आवर्त गति में त्वरण के लिए व्यंजक (Expression for Acceleration in S.H.M.) :
हम जानते हैं कि जब कोई वस्तु वृत्तीय गति करती है तो उस पर एक अभिकेन्द्रीय त्वरण लगता है। यदि वस्तु का कोणीय वेग ω एवं पथ की त्रिज्या A हो तो अभिकेन्द्रीय त्वरण का मान Aω² होगा जिसकी दिशा केन्द्र की ओर होगी अर्थात् P बिन्दु OP दिशा में होगी। इस त्वरण का हमें वह घटक चाहिए, जो व्यास YY’ के अनुदिश हो क्योंक सरल आवर्त गति करने वाले लम्बपाद N की गति इसी व्यास के अनुदिश होती है। यदि यह घटक α से व्यक्त करें तो
α = -Aω² sin θ
(यहाँ ऋण चिह्न यह दर्शाता है कि त्वरण एवं विस्थापन की दिशाएँ एक-दूसरे के विपरीत हैं।)
θ = ωt
α = -Aω² sin θ
= -ω² (A sin θ)
या α = -ω²y …………..(1)
क्योंकि y = A sin ωt
कोंणीय वेग ω नियत है अतः
α ∝ -y
अर्थात् त्वरण ∝ -विस्थापन
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 12
स्पष्ट है कि सरल आवर्ते गति मे त्वरण वस्तु को साम्य स्थिति से उसके विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है तथा इसकी दिशा विस्थापन की दिशा के विपरीत होती है।
(i) जब वस्तु माध्य स्थिति में होती है तो
y = 0
अतः त्वरण, α = ω²y = ω² × 0
या α = 0
(ii) जब वस्तु अधिकतम विस्थापन की स्थिति में होती है तो
y = A
अत: αmax = ω²A

त्वरण-समय वक्र (Time-Acceleration Curve):
सरल आवर्त गति में त्वरण,
α = -Aω² sin θ
या α = -Aω² . sin \(\frac{2π}{T}\).t
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 13
इन आँकड़ों के आधार पर खींचा गया समय-त्वरण ग्राफ चित्र में प्रदर्शित है-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 14

प्रश्न 3.
सरल आवर्त गति करते हुए पिण्ड की दोलन गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए तथा सिद्ध कीजिए कि सम्पूर्ण ऊर्जा दोलन की आवृत्ति तथा दोलन के आयाम के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
उत्तर :
सरल आवर्त गति में ऊर्जा (Energy in S.H.M.) ;
सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण की किसी क्षण कुल ऊर्जा को सरल आवर्त गति की कुल ऊर्जा कहते हैं। सरल आवर्त गति करते हुए कण की ऊर्जा दो प्रकार की होती है-
(i) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
(ii) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)।
इस प्रकार कुल ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है अर्थात्
कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
ET = K + U

(i) सरल आवर्त गति करते हुए कण की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy of Particle in S.H.M.) :
सरल आवर्त गति करते हुए कण में उसकी गति के कारण विद्यमान ऊर्जा सरल आवर्त गति की गतिज ऊर्जा कहलाती है।
माना कोई कण जिसका द्रव्यमान (m) तथा चाल u है तो कण की गतिज ऊर्जा
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 15

(ii) सरल आवर्त गति में कण की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of Particle in S.H.M.):
सरल आवर्त गति में कण की स्थिति के कारण निहित ऊर्जा कण की स्थितिज ऊर्जा कहलाती है।
माना दोलन करने वाले m द्रव्यमान के पिण्ड का किसी क्षण साम्य स्थिति से विस्थापन y है, अतः पिण्ड की सरल आवर्त गति का विस्थापन समीकरण,
y = A sin ωt
जहाँ A पिण्ड का दोलन आयाम तथा ω कोणीय वेग है।
अतः पिण्ड का रेखीय वेग,
v = \(\frac{dy}{dt}=\frac{d}{dt}\)(A sin ωt)
= Aω cos ωt
पिण्ड का रेखीय त्वरण
α = \(\frac{dv}{dt}=\frac{d}{dt}\)(Aω cos ωt)
या α = -Aω². sin ωt
या α = -ω².y
क्योंकि y = A sin ωt
पिण्ड पर लगने वाला प्रत्यानयन बल
F = mα = -mω²y …………..(1)

अतः पिण्ड में अत्यन्त सूक्ष्म विस्थापन dy के विपरीत प्रत्यानयन बल द्वारा किया गया कार्य,
dW = F × (-dy) = mω²y dy
या dW = mω².y.dy
अतः पिण्ड को y = 0 से y = y तक विस्थापित करने में कृत कार्य अर्थात् y विस्थापन में पिण्ड y की स्थितिज ऊर्जा
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 16
(i) जब पिण्ड का विस्थापन शून्य होता है अर्थात् पिण्ड माध्य स्थिति में होता है तो
y = 0
∴ Umin = 0 ……………(3)
(ii) जब पिण्ड अधिकतम विस्थापन की स्थिति में होता है तो,
y = a
∴ Umax = \(\frac{1}{2}\)mω²A ……………(3)

(iii) सरल आवर्त गति करते हुए कण की कुल ऊर्जा (Total Energy of Particle in S.H.M.) :
सरल आवर्त गति करने वाले कण की गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा का योग कुल ऊर्जा के बराबर होता है अर्थात्
ET = K + U
या
ET = \(\frac{1}{2}\)mω²(A² – y²) + \(\frac{1}{2}\)mω²A
= \(\frac{1}{2}\)mω²(A² – y² + y²)
= \(\frac{1}{2}\)mω²A²

स्पष्ट है कि कुल ऊर्जा का समय एवं स्थिति अर्थात् उसके विस्थापन पर निर्भर नहीं करती है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि, सरल आवर्त गति में कण की कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है। स्पष्ट है कि सरल आवर्त गति में ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन होता है।
ω = 2πn (जहाँ n = आवृत्ति)
∴ ET = \(\frac{1}{2}\)m(2πn)²A²
= \(\frac{1}{2}\)m.4π²n²A²
या ET = 2mπ²n²A²
इस प्रकार सरल आवर्त गति में कण की कुल ऊर्जा,
ET = 2mπ²n²A²
ET ∝ A² अर्थात् (आयाम)²
तथा
ET ∝ n² अर्थात् (आवृत्ति)²
सरल आवर्त गति में कण की गतिज ऊर्जा (K), स्थितिज ऊर्जा (U)
तथा कुल ऊर्जा (ET) को विस्थापन के साथ निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 17
नोट – सरल आवर्त गति में कुल ऊर्जा की आवृत्ति शून्य होती है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 4.
एक समान परिच्छेद् वाला लकड़ी का बेलन जल में ऊध्र्वाधर तैर रहा है। जब इसे थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ देते हैं तो यह दोलन करने लगता है। इसका दोलनकाल जल में डूबी लम्बाई के पदों में ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
तैरता हुआ लकड़ी का आयताकार (Oscillations of a Rectangular wooden Block):
माना एक बेलनाकार पिण्ड जिसका द्रव्यमान (m), लम्बाई (L), अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A) तथा घनत्व (ρ) है। ρ0 घनत्व के द्रव में आंशिक रूप से डूबकर तैर रहा है। यदि बेलन का h भाग द्रव के अन्दर है तो तैरने के सिद्धान्त से,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 18
बेलन द्वारा हटाये गये द्रव का भार = बेलन का भार
(A . h) ρ0 g = mg
m = Ah ρ0 …………(1)
तैरने की स्थिति में यदि बेलन को थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ देते हैं पिण्ड ऊर्ध्व रेखा में दोलन गति करने लगता है।
गति अवस्था में साम्यावस्था से y विस्थापन में प्रत्यानयन बल (F)
F = उत्प्लावन बल = हटाये गये द्रव का भार
F = -(A.y.ρ0)g …………(2)
ऋणात्मक चिह्न का अर्थ है कि प्रत्यानयन बल, विस्थापन के विपरीत होता है।
यदि पिण्ड का त्वरण (a) हो तो गति के द्वितीय नियम से,
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 19

प्रश्न 5.
दोलन के अवमन्दन से क्या अभिप्राय है ? उपयुक्त उदाहरण से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
अवमंदित सरल आवर्त गति (Undamped Simple Harmonic Motion) :
यदि कम्पित वस्तु का आयाम धीरे-धीरे कम होता जाता है तथा अन्त में शून्य हो जाता है तो ऐसे कम्पन अवमन्दित कम्पन कहलाते हैं। चित्र 14.37 में अवमन्दित कम्पन के आयाम को घटता हुआ दिखाया गया है। इसके उदाहरण निम्नवत् हैं-
(1) सरल लोलक के कम्पनों के आयामों का धीरे-धीरे कम होना।
(2) स्वरित्र द्विभुज के कम्पनों का आयाम भी धीरे-धीरे घटकर शून्य हो जाता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 20
जब कोई वस्तु किसी बाह्य बल के अन्तर्गत, बाह्य बल की आवृत्ति से कम्पन करती है तो वस्तु के कम्पनों को प्रणोदित कम्पन कहते हैं। अवमन्दित कम्पन को प्रणोदित कम्पन में बदला जा सकता है; जैसे-जब कम्पन करते हुए किसी स्वरित्र द्विभुज के दस्ते को हम हाथ में पकड़े रहते हैं तो बहुत मन्द ध्वनि सुनाई पड़ती है। यदि इस दस्ते को मेज पर टिका दें तो ध्वनि तीव्र हो जाती है। इसका कारण यह है कि स्वरित्र द्विभुज को मेज पर टिकाने से स्वरित्र के कम्पन दस्ते के द्वारा मेज तक पहुँच जाते हैं तथा मेज में प्रणोदित कम्पन उत्पन्न हो जाते हैं।

प्रश्न 6.
सिद्ध कीजिए कि किसी स्प्रिंग से लटके किसी पिण्ड को साम्यावस्था में थोड़ा-सा नीचे विस्थापित करके छोड़ दिया जाए तो उसकी गति सरल आवर्त गति होगी। इसके आवर्तकाल का सूत्र भी स्थापित कीजिए।
उत्तर :
कमानी के दोलन (Oscillation of Spring) :
(i) स्प्रिंग से संलग्न द्रव्यमान के क्षैतिज तल में दोलन (Horizontal Vibrations of Mass Attached to a Spring)-माना नगण्य द्रव्यमान की एक स्प्रिंग का एक सिरा दृढ़ सतह से बँधा है और दूसरे सिरे से एक m द्रव्यमान का पिण्ड बँधा है तथा स्प्रिंग एक घर्षणरहित क्षैतिज मेज पर रखी है।
माना पिण्ड पर एक बाह्य बल F लगाकर उसमें x विस्थापन उत्पन्न करके छोड़ दिया जाता है तो द्रव्यमान क्षैतिज तल में दोलन करने लगता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 21
माना स्प्र्रंग का बल नियतांक k है तो x विस्थापन की स्थिति में पिण्ड पर लगने वाला प्रत्यानयन बल,
\(\overrightarrow{\mathrm{F}^{\prime}}=-k \vec{x}\)
यहाँ पर ऋण चिह्न का प्रयोग यह इंगित करता है कि F व x की दिशाएँ परस्पर विपरीत हैं।
यदि पिण्ड का त्वरण α हो तो
F’ = ma
अतः mα = -kx
या α = –\(\frac{k}{m}\)x
या α = -ω²x ……………..(1)
जहाँ ω² = \(\frac{k}{m}\) = नियतांक
∴ ω = \(\sqrt{\frac{k}{m}}\)
∴ समी (1) से α ∝ -x
या त्वरण ∝ -विस्थापन
अतः पिण्ड की गति सरल आवर्त गति होगी। इस गति में पिण्ड का आवर्त काल
\(\mathrm{T}=\frac{2 \pi}{\omega}=\frac{2 \pi}{\sqrt{\frac{k}{m}}}\)
\(\mathrm{~T}=2 \pi \sqrt{\frac{m}{k}}\)
स्पष्ट है कि स्प्रिंग से बँधे पिण्ड का दोलन काल पिण्ड के द्रव्यमान एवं स्प्रिंग के बल नियतांक पर निर्भर करता है।
नोट – स्प्रिंग से बँधे पिण्ड का आवर्तकाल गुरुत्वीय त्वरण (g) तथा सरल आवर्त गति के आयाम (A) पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 7.
k1 व k2 बल नियतांकों की दो स्प्रिंगों को लम्बाई में जोड़कर ऊध्र्वाधर लटका दिया जाता है। स्प्रिंग के निचले सिरे पर m द्रव्यमान का पिण्ड लटका दिया जाये तो पिण्ड के कम्पन का दोलन काल ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
भारित स्प्रिंग संयोजन के दोलन (Oscillation of Loaded Spring Combination):
माना k1 व k2 बल नियतांकों की दो स्प्रिंगें संयुक्त की जाती हैं। दोनों स्प्रिंगों के निम्न तीन प्रकार के संयोजन हो सकते हैं-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 22

स्थिति I –
माना कि दोनों स्प्रिंगों को चित्र 14.23 की भाँति समान्तर क्रम में एक दृढ़ आधार से लटकाकर संयोजन से m द्रव्यमान का पिण्ड लटकाने पर संयोजन में y विस्थापन उत्पन्न होता है। दोनों स्प्रिंगों में क्रमशः F1 व F2 विरोधी बल अर्थात् प्रत्यानयन बल उत्पन्न होते हैं अतः
F1 = -k1 y
तथा F2=-k2 y
∴ संयोजन द्वारा पिण्ड पर आरोपित परिणामी प्रत्यानयन बल
F = F1 + F2
F = -k1 y + (-k2 y)
या F = -(k1 + k2) y
यदि संयोजन का तुल्य बल नियतांक (Equivalent force constant) k है तो
F = -ky
∴ -ky = -(k1 + k2) y
या k = k1 + k2
∴ पिण्ड का आवर्तकाल,
\(\mathrm{T}=\frac{2 \pi}{\sqrt{\frac{k}{m}}}\)
\(\mathrm{~T}=\frac{2 \pi}{\sqrt{\frac{k}{k_1+k_2}}}\)

स्थिति II –
इस स्थिति में चित्र की भाँति पिण्ड को दोनों स्प्रिंगों के मध्य बाँधते हैं और स्प्रिंगों के दोनों मुक्त सिरे दो दृढ़ आधारों के मध्य सम्बद्ध कर दिये जाते हैं। पिण्ड में चित्र की भाँति यदि y विस्थापन दिया जाता है तो एक स्प्रिंग में विरलन एवं दूसरी में उतना ही सम्पीडन हो जाता है। इस स्थिति में भी परिणामी प्रत्यानयन बल
F = F1 + F2
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 23

स्थिति III –
इस स्थिति में दोनों स्प्रिंगों को श्रेणी क्रम में जोड़कर संयोजन का एक सिरा दृढ़ आधार से सम्बद्ध करके दूसरे सिरे से m द्रव्यमान का पिण्ड सम्बद्ध कर देते हैं। संयोजन में उत्पन्न विस्थापन y दोनों स्प्रिंगों में उत्पन्न विस्थापनों क्रमशः y1 व y2 के योग के बराबर होता है। अतः
y = y1 + y2
दोनों स्प्रिंगें श्रेणी क्रम में जुड़ी हैं।
अतः दोनों में समान प्रत्यानयन बल F उत्पन्न होता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 24

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 8.
किसी सरल लोलक के आवर्त काल के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए। सेकण्ड लोलक से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
सरल लोलक (Simple pendulum) :
“यदि छोटे से पीतल के गोले को किसी हल्के एवं मजबूत धागे की सहायता से किसी दृढ़ आधार से लटका दें तो प्राप्त व्यवस्था को सरल लोलक कहते हैं।’ पीतल के गोले को ‘गोलक’ (bob) कहते हैं। दृढ़ आधार के जिस बिन्दु से लोलक को लटकाया जाता है, उसे ‘निलम्बन बिन्दु (point of suspension) कहते हैं। निलम्बन बिन्दु से गोले के गुरुत्व केन्द्र तक की दूरी को लोलक की प्रभावकारी लम्बाई (effective length) कहते हैं।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 25
सेकण्ड लोलक (Second’s Pendulum) :
ऐसा सरल लोलक जिसका आवर्तकाल 2 सेकण्ड हो तो उसे सेकण्ड लोलक कहते हैं। इस प्रकार का लोलक प्रत्येक 1 सेकण्ड बाद अपनी माध्य स्थिति से गुजरता है।
सेकण्ड लोलक की प्रभावकारी लम्बाई
T = 2 सेकण्ड, g = 9.8
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 26
अतः सेकण्ड लोलक की लम्बाई लगभग 100 सेमी होती है।

नोट :
1. लोलक की प्रभावकारी लम्बाई गोलक के गुरुत्व केन्द्र से नापी जाती है। गुरुत्व केन्द्र के परिवर्तित होने पर आवर्तकाल बदल जाता है।

2. यदि खोखली गेंद (जिसमें पारा भरा है) में एक छोटा-सा छेद करने पर उसमें से बूँद-बूँद कर पारा गिरने लगेगा जिस कारण गुरुत्व केन्द्र नीचे खिसक जायेगा और प्रभावकारी लम्बाई बढ़ जायेगी। अतः आवर्तकाल बढ़ जायेगा।

3. यदि सरल लोलक किसी दिये गये घनत्व ρ वाले द्रव के अन्दर दोलन कर रहा है जहाँ ρ0 (गोलक का घनत्व) तो सरल लोलक का आवर्तकाल बढ़ जायेगा क्योंकि-
गोलक का भार =m g=\mathrm{V} ρ g
गोलक पर कार्यरत् उत्प्लावन बल =V0} g
∴ गोलक पर परिणामी बल = V ρ g-V ρ0 g
F’ = V(ρ – ρ0) g (नीचे की ओर)
अतः यदि प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण g’ हो तो
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 27

4. अगर सरल लोलक को किसी तार द्वारा लटकाया जाये तो लोलक की प्रभावी लम्बाई ताप के बढ़ने पर बढ़ जाती है अतः सरल लोलक का आवर्तकाल बढ़ जाता है। माना ताप में परिवर्तन dθ है और α
तार का रेखीय प्रसार गुणांक है, तो तार की प्रभावी लम्बाई
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 28

प्रश्न 9.
यदि पृथ्वी के केन्द्र से होकर पृथ्वी के आर-पार एक सुरंग बनाई जाये तथा उस सुरंग में एक कण छोड़ा जाये तो दिखाइए कि कण का त्वरण सदैव सुरंग के मध्य-बिन्दु (अर्थात् पृथ्वी के केन्द्र) से विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है।
उत्तर :
पृथ्वी के आर-पार एक काल्पनिक सुरंग में पिण्ड की गति (Body moving in a tunnel through The Earth) :
पृथ्वी के आर-पार काल्पनिक सुरंग की निम्न दो स्थितियाँ सम्भव हैं-
(i) जब सुरंग पृथ्वी के केन्द्र से न गुजरे-माना कि O पृथ्वी का केन्द्र है तथा AB एक सुरंग है। यदि इस सुरंग में m द्रव्यमान की एक गोली डाली जाए तो इस पर केन्द्र O की ओर एक बल (गोली का भार) mg लगेगा। बल mg का सुरंग के अनुदिश घटक mg cos θ है जो गोली में सुरंग के अनुदिश त्वरण उत्पन्न करेगा, जिससे गोली का वेग लगातार बढ़ता जाएगा। यह वेग वृद्धि का क्रम सुरंग के मध्य-बिन्दु C तक चलेगा और C पर वेग अधिकतम होगा। जैसे ही गोली बिन्दु को पार करेगी उक्त बल m g cosθ की दिशा उलट जाएगी। अब यह बल गोली की गति का विरोध करेगा, फलस्वरूप C के बाद गोली का वेग घटना प्रार्भम्भ करेगा और बिन्दु B (सुरंग का दूसरा किनारा) पर शून्य हो जाएगा। बिन्दु B पर m g cos θ बल की दिशा बिन्दु A की ओर अर्थात् केन्द्र C की ओर होगी और गोली पूर्व की भाँति गति करके पुन: A तक जाएगी। इसी क्रम की पुनरावृत्ति होती रहेगी और गोली केन्द्र C के दोनों ओर सरल आवर्त गति करती रहेगी।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 29
अधिकतम विस्थापन की स्थिति A में गोली पर कार्यरत प्रत्यानयन
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 30

प्रश्न 10.
अनुनाद से क्या तात्पर्य है ? यान्त्रिकी, ध्वनि तथा विद्युत् -चुम्बकीय अनुनाद का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
जब किसी दोलन करने वाली वस्तु पर कोई बाह्य आवर्ती बल लगाया जाता है तो वस्तु बल की आवृत्ति से प्रणोदित दोलन करने लगती है। यदि बाह्य बल की आवृत्ति, वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर (अथवा इसकी पूर्ण गुणज) हो तो वस्तु के प्रणोदित दोलनों का आयाम बहुत बढ़ जाता है। इस घटना को अनुनाद (resonance) कहते हैं। बाह्य बल और वस्तु की आवृत्ति में थोड़ा सा ही अन्तर होने पर आयाम बहुत कम हो जाता है। स्पष्ट है कि अनुनाद, प्रणोदित दोलनों की ही एक विशेष अवस्था है।

अनुनाद की व्याख्या- जब बाह्य बल की आवृत्ति वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर होती है तो दोनों समान कला में कम्पन करते हैं। अतः आवर्ती बल द्वारा लगाये गए उत्तरोत्तर आवेग वस्तु की ऊर्जा लगातार बढ़ाते जाते हैं और वस्तु का आयाम लगातार बढ़ता जाता है। सिद्धान्त रूप से वस्तु का आयाम अनन्त तक बढ़ता रहना चाहिए परन्तु व्यवहार में दोलन करती हुई वस्तु में वायु के घर्षण तथा ध्वनि विकिरण के कारण ऊर्जा क्षय होती रहती है। दोलन- आयाम बढ़ने के साथ-साथ ऊर्जा क्षय भी बढ़ता जाता है और एक ऐसी स्थिति आ जाती है कि बाह्य बल द्वारा प्रति दोलन दी गई ऊर्जा, वस्तु द्वारा प्रति दोलन में ऊर्जा क्षय के बराबर हो जाती है। इस स्थिति में आयाम का बढ़ना रुक जाता है।

उदाहरण- (1) यान्त्रिक अनुनाद सेना का पुल पार करना- जब सेना किसी पुल को पार करती है तब सैनिक कदम मिलाकर नहीं चलते। इसका कारण यह है कि यदि सैनिकों के कदमों की आवृत्ति, पुल की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर हो जाए तो पुल में बड़े आयाम के कम्पन होने लगेंगे और पुल के टूटने का खतरा हो जाएगा।

(2) ध्वनि अनुनाद – डोरियों के कम्पन– यदि समान आवृत्ति की दो डोरियाँ एक ही बोर्ड पर तनी हों तथा उनमें से एक को कम्पित किया जाए तो दूसरी स्वयं कम्पन करने लगती है।

(3) विद्युत् चुम्बकीय दोलन में अनुनाद – रेडियो द्वारा विभिन्न स्टेशनों से प्रेषित प्रोग्राम का सुनना भी अनुनाद के कारण ही सम्भव होता है विभिन्न स्टेशनों द्वारा विभिन्न आवृत्तियों की तरंगें प्रसारित की जाती हैं। रेडियो में एक विद्युत् परिपथ (L-C परिपथ) होता है जिसमें विद्युत् कम्पन उत्पन्न होते हैं। इन विद्युत् कम्पनों की स्वाभाविक आवृत्ति सूत्र T = \(\frac{1}{2π{\sqrt{LC}}}\) से ज्ञात की जाती है। जब रेडियो की ट्यून वाली घुण्डी को घुमाया जाता है तो विद्युत् परिपथ में लगे संधारित्र की धारिता C बदल जाती है जिससे विद्युत् कम्पन की स्वाभाविक आवृत्ति बदल जाती है।

जब यह आवृत्ति किसी स्टेशन द्वारा प्रसारित विद्युत् चुम्बकीय तरंगों की आवृत्ति के ठीक बराबर हो जाती है तो विद्युत् परिपथ उन तरंगों को ग्रहण कर लेता है तथा उस स्टेशन का प्रोग्राम सुनाई देने लगता है।

नोट :
अनुनाद की तीक्ष्णता एवं अवमन्दन- जिस माध्यम में कोई वस्तु दोलन करती है, उस माध्यम के कारण वस्तु पर एक अवमन्दन बल कार्य करता है, जिससे दोलनों का आयाम घटता जाता है। यदि अनुनादित वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति तथा बाह्य आवर्त बल की आवृत्ति में थोड़ा-सा अन्तर आ जाने पर आयाम बहुत कम हो जाता है तो अनुनाद तीक्ष्ण कहलाता है अन्यथा सपाट अनुनाद की तीक्ष्णता अवमन्दन पर निर्भर करती है। अवमन्दन के कम होने पर अनुनाद तीक्ष्ण होता है, जैसा स्वरमापी के तार में देखा जाता है।

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 11.
प्रणोदित दोलनों से क्या अभिप्राय है ? उदाहरण देकर समझाइए। मेल्डी का प्रयोग देकर इनकी उत्पत्ति समझाइए।
उत्तर :
प्रणोदित दोलन (Forced Oscillation) ;
जब किसी दोलन करती हुई वस्तु पर कोई बाह्य आवर्त बल आरोपित किया जाता है, जिसकी आवृत्ति का मान वस्तु की स्वाभाविक आवृत्ति से भिन्न होता है तो प्रारम्भ में वस्तु स्वाभाविक आवृत्ति से दोलन करती है, लेकिन बाह्य बल के प्रभाव में वस्तु बाह्य आवर्त बल की आवृत्ति से दोलन करने लगती है। इस प्रकार के दोलन परिचालित दोलन या प्रणोदित दोलन कहलाते हैं।

अतः इस प्रकार जब कोई वस्तु किसी बाह्य आवर्ती बल के प्रभाव में, बाह्य आवृत्ति से दोलन करती है तब वस्तु के दोलन प्रणोदित दोलन कहलाते हैं।

उदाहरण के लिए चित्र में दो भिन्न-भिन्न लम्बाइयों के लोलक R तथा N एक छड़ X-Y द्वारा लटकाये गये हैं। इनकी स्वाभाविक आवृत्तियाँ अलग-अलग है।

जब लोलक R को दोलन कराते हैं तब लोलक N का सम्बन्ध छड़ X-Y से होने के कारण एक आवर्त बल आरोपित होता है जिसकी आवृत्ति लोलक R की आवृत्ति के बराबर होती है उस आवर्त बल के प्रभाव से लोलक N, लोलक R की आवृत्ति से दोलन करता है। लोलक N के दोलन प्रणोदित दोलन कहलाते हैं। यहाँ लोलक Rको चालक (driver) लोलक, और N को चालित (driven) लोलक कहते हैं।

नोट-
1. जब तने हुए तार में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित करके तार को चुम्बक के ध्रुवों के बीच रखते हैं तो तार प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति के प्रणोदित कम्पन करने लगता है।
2 सितार वायलिन, स्वरमापी के तार पर जब किसी आवृत्ति का स्वर उत्पन्न किया जाता है तो तार के कम्पन सेतु के द्वारा खोखले ध्वनि बोर्ड में पहुँच जाते हैं। इससे बोर्ड के अन्दर की वायु में प्रणोदित दोलन उत्पन्न हो जाते हैं, जिससे ध्वनि की तीव्रता बढ़ जाती है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 31
माना अवमन्दित दोलक पर कोई समय के साथ विचरण करने वाले आयाम का आवर्ती बाह्य बल F(1) आरोपित किया जाता है, इसे निम्न प्रकार निरूपित करते हैं-
F (t) = F0 cos ωdt ………..(1)
रैखिक प्रत्यानयन बल, अवमन्दक बल तथा कालाश्रित प्रणोदित बल के संयोजी प्रभाव के अन्तर्गत कण की गति का समीकरण निम्नलिखित होगा-
ma = -kx ( t ) – bv (t) + F0 cos ωdt ………….(2)
जहाँ F = -kx प्रत्यानयन बल तथा Fd = -bv अवमन्दक बल है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 32
यह m द्रव्यमान वाले दोलित्र, जिस पर ०५ आवृत्ति का बल कार्यरत है, की गति का समीकरण है। दोलित्र प्रारम्भ में अपनी प्राकृतिक आवृत्ति से दोलन करता है। जब इस पर बाह्य आवर्ती वल आरोपित किया जाता है तब आरोपित बाह्य बल की आवृत्ति से दोलन होने लगते हैं। प्राकृतिक दोलन के शान्त होने पर दोलित्र का विस्थापन निम्नवत् होता है-
x (t) = A cos (ωdt + ϕ) ……….(4)
आयाम A कोणीय आवृत्तियों तथा प्रणोदित आवृत्ति ω का फलन है जिसे हम निम्न प्रकार व्यक्त करते हैं-
A = \(\frac{\mathrm{F}_0}{\left\{m^2\left(\omega^2-\omega_d^2\right)+\omega_d^2 b^2\right\}^{1 / 2}}\) ………..(5)
तथा tan – = \(\frac{v_0}{\omega_d x_0}\) ………(6)
यहाँ m कण का द्रव्यमान ωd तथा v0 व x0 समय t = 0 पर कण के क्रमशः वेग व विस्थापन हैं। इसी क्षण हम आवर्ती बल आरोपित करते हैं। ωd व ω में अत्यधिक भिन्नता होने और इनके समीप होने की अवस्थाओं में हम दोलित्र का भिन्न-भिन्न व्यवहार देखते हैं। ये दोनों स्थितियाँ निम्नवत् हैं।

प्रश्न 12.
दर्शाइये कि U-नली में भरे एक द्रव की गति सरल आवर्त गति होती है तथा यदि द्रव को n दूरी तक विस्थापित किया जाता है तो दोलन के आवर्तकाल का सूत्र ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
U-नली में द्रव का दोलन (Oscillation of Liquid of U-Tube) :
माना कि एक U-नली में h ऊँचाई तक द्रव भरा है। जिसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A) एकसमान है। प्रारम्भिक स्थिति में दोनों भुजाओं में द्रव का तल समान है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 33
जब तल B को y दूरी नीचे बिन्दु D तक दबाया जाता है तो तल C उतनी ही दूरी y ऊपर चढ़ जाता है। इस प्रकार U-नली में दायीं भुजा में D’E अतिरिक्त द्रव स्तम्भ है। द्रव के दबाये हुए तल छोड़ देने पर सम्पूर्ण द्रव स्तम्भ D’E के भार के कारण उत्पन्न प्रत्यानयन बल के कारण ऊपर-नीचे दोलन करने लगता है।
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 34
माना नली में एकांक लम्बाई में द्रव का द्रव्यमान = m हो तो द्रव पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल
F = -(एकांक द्रव्यमान × लम्बाई) × g
F = -(m × 2 y) . g ………..(1)
ऋणात्मक चिह्न केवल यह प्रदर्शित करता है कि बल द्रव के विस्थापन के विपरीत दिशा में है।
अतः नली में सम्पूर्ण द्रव का द्रव्यमान
(M)=m × 2 h ………….(2)
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 35

HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन

प्रश्न 13.
सरल आवर्त गति करते हुए कण की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा एवं कुल ऊर्जा में विस्थापन के साथ होने वाले परिवर्तनों की ग्राफीय विधि द्वारा विवेचना कीजिए।
उत्तर :
सरल आवर्त गति में ऊर्जा (Energy in S.H.M.) ;
सरल आवर्त गति करते हुए किसी कण की किसी क्षण कुल ऊर्जा को सरल आवर्त गति की कुल ऊर्जा कहते हैं। सरल आवर्त गति करते हुए कण की ऊर्जा दो प्रकार की होती है-
(i) गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
(ii) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)।
इस प्रकार कुल ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा के योग के बराबर होती है अर्थात्
कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थितिज ऊर्जा
ET = K + U

(i) सरल आवर्त गति करते हुए कण की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy of Particle in S.H.M.) :
सरल आवर्त गति करते हुए कण में उसकी गति के कारण विद्यमान ऊर्जा सरल आवर्त गति की गतिज ऊर्जा कहलाती है।
माना कोई कण जिसका द्रव्यमान (m) तथा चाल u है तो कण की गतिज ऊर्जा
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 36

(ii) सरल आवर्त गति में कण की स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy of Particle in S.H.M.):
सरल आवर्त गति में कण की स्थिति के कारण निहित ऊर्जा कण की स्थितिज ऊर्जा कहलाती है।
माना दोलन करने वाले m द्रव्यमान के पिण्ड का किसी क्षण साम्य स्थिति से विस्थापन y है, अतः पिण्ड की सरल आवर्त गति का विस्थापन समीकरण,
y = A sin ωt
जहाँ A पिण्ड का दोलन आयाम तथा ω कोणीय वेग है।
अतः पिण्ड का रेखीय वेग,
v = \(\frac{dy}{dt}=\frac{d}{dt}\)(A sin ωt)
= Aω cos ωt
पिण्ड का रेखीय त्वरण
α = \(\frac{dv}{dt}=\frac{d}{dt}\)(Aω cos ωt)
या α = -Aω². sin ωt
या α = -ω².y
क्योंकि y = A sin ωt
पिण्ड पर लगने वाला प्रत्यानयन बल
F = mα = -mω²y …………..(1)

अतः पिण्ड में अत्यन्त सूक्ष्म विस्थापन dy के विपरीत प्रत्यानयन बल द्वारा किया गया कार्य,
dW = F × (-dy) = mω²y dy
या dW = mω².y.dy
अतः पिण्ड को y = 0 से y = y तक विस्थापित करने में कृत कार्य अर्थात् y विस्थापन में पिण्ड y की स्थितिज ऊर्जा
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 37
(i) जब पिण्ड का विस्थापन शून्य होता है अर्थात् पिण्ड माध्य स्थिति में होता है तो
y = 0
∴ Umin = 0 ……………(3)
(ii) जब पिण्ड अधिकतम विस्थापन की स्थिति में होता है तो,
y = a
∴ Umax = \(\frac{1}{2}\)mω²A ……………(3)

(iii) सरल आवर्त गति करते हुए कण की कुल ऊर्जा (Total Energy of Particle in S.H.M.) :
सरल आवर्त गति करने वाले कण की गतिज ऊर्जा एवं स्थितिज ऊर्जा का योग कुल ऊर्जा के बराबर होता है अर्थात्
ET = K + U
या
ET = \(\frac{1}{2}\)mω²(A² – y²) + \(\frac{1}{2}\)mω²A
= \(\frac{1}{2}\)mω²(A² – y² + y²)
= \(\frac{1}{2}\)mω²A²

स्पष्ट है कि कुल ऊर्जा का समय एवं स्थिति अर्थात् उसके विस्थापन पर निर्भर नहीं करती है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि, सरल आवर्त गति में कण की कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है। स्पष्ट है कि सरल आवर्त गति में ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन होता है।
ω = 2πn (जहाँ n = आवृत्ति)
∴ ET = \(\frac{1}{2}\)m(2πn)²A²
= \(\frac{1}{2}\)m.4π²n²A²
या ET = 2mπ²n²A²
इस प्रकार सरल आवर्त गति में कण की कुल ऊर्जा,
ET = 2mπ²n²A²
ET ∝ A² अर्थात् (आयाम)²
तथा
ET ∝ n² अर्थात् (आवृत्ति)²
सरल आवर्त गति में कण की गतिज ऊर्जा (K), स्थितिज ऊर्जा (U)
तथा कुल ऊर्जा (ET) को विस्थापन के साथ निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है-
HBSE 11th Class Physics Important Questions Chapter 14 दोलन - 38
नोट – सरल आवर्त गति में कुल ऊर्जा की आवृत्ति शून्य होती है।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

HBSE 7th Class Science Nutrition in Plants Textbook Questions and Answers

Question 1.
Why do organisms need to take food?
Answer:
Food is needed by all living organisms for four main purposes:
(i) An important function of food is to help a living organism to grow, if enough food is not given or it is not of the right kind, growth will not be sufficient or healthy.
(ii) Second important function of food is to provide energy. We need energy for doing physical work. We use more energy when we run than when we walk and less energy when we sleep. Energy is given by hidden materials present in our food.
(iii) Food is also needed by living beings for replacement and repairing their damaged body parts.
(iv) Food gives us resistance against diseases and protects us from infections.

Question 2.
Distinguish between a parasite and a saprotroph.
Answer:
Parasite:
The mode of nutrition in organisms which derive their food from the body of some other living organism is called parasite nutrition. Such organism are called parasite. Examples of parasites are Tapeworm, Roundworm, Malarial parasite, Cuscutta, Puccinia (a fungus) etc.

Saprotroph:
The mode of nutrition in organisms which derive their food from the dead and decaying organic matter is called saprotroph nutrition and such organisms are called saprotroph. Examples of saprotrophs’^ire Mushrooms, Yeast and Bacteria.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Question 3.
How would you test the presence of starch in leaves?
Answer:
Starch Test:
(i) Take the green leaf to be tested.
(ii) Boil it in water for 5 minutes.
(iii) Keep it in the 60% angle amyle alcohol at 60°C till it becomes colourless.
(iv) Take the colourless leaf out from alcohol and wash it with cold water.
(v)Pour few drops of dilute Iodine solution on the leaf. The leaf becomes very blue with the solution which proves the presence of starch in the leaf.

Question 4.
Give a brief description of the process of synthesis of food in green plants.
Answer:
The process by which the green plants synthesize their own food in the presence of Sunlight and chlorophyll by taking carbon dioxide from the atmosphere and water from the soil is known as photosynthesis. The process of photosynthesis can be summarised as given below:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-1
Green plants require four things to prepare their own food. These are:
1. Carbon dioxide, absorbed from the atmosphere through stomata present on the leaf surface.
2. Water, absorbed from the soil, through the root system.
3. Chlorophyll, present in the leaf.
4. Light, coming from the sun.
During photosynthesis, food is synthesized.
Oxygen is released in the process.

Question 5.
Show with the help of a sketch that the plants are the ultimate source of food.
Answer:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-2

Question 6.
Fill in the blanks:
(a) Green plants are called ………….. since they synthesise their own food.
(b) The food synthesised by the plants isstared as …………… .
(c) In photosynthesis solar energy is captured by the pigment called …………… .
(d) During photosynthesis plants take in ………. and release ……………. .
Answer:
(a) autotrophs
(b) solar enetgy
(c) chlorophyll
(d) carbon dioxide, oxygen.

Question 7.
Name the following:
(i) A parasite plant with yellow, slender, tubular stem.
(ii) A plant that has both* autotrophic and heterotrophic mode of nutrition.
(iii) The pores through which leaves exchange gases.
Answer:
(i) Cuscuta (Amarbet)
(ii) Pitcher plant
(iii) Stomata

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Question 8.
Tick the correct answer:
(a) Amarbel is an example of:
(i) Autotroph
(ii) Parasite
(iii) Saprotroph
(iv) Host.
Answer:
(iii) Parasite.

(b) The plant which traps arid feeds on insects is:
(i) Cuscuta
(ii) China rose
(iii) Pitcher plant
(iv) Rose.
Answer:
(iii) Pitcher plant.

Question 9.
Match the items given in column I with those in Column II:

Column IColumn II
(a) Chlorophyll(i) Bacteria
(b) Nitrogen(ii) Heterotrophs
(c) Amarbel(iii) Pitcher plant
(d) Animals(iv) Leaf
(e) Insects(v) Parasite

Answer:

Column IColumn II
(a) Chlorophyll(iv) Leaf
(b) Nitrogen(i) Bacteria
(c) Amarbel(v) Parasite
(d) Animals(ii) Heterotrophs
(e) Insects(iii) Pitcher plant

Question 10.
Mark ‘T’ if two Statement is true and ‘F’ if it is False.
(i) Carbon dioxide is released during photosynthesis.
(ii) Plants which synthesise their food themselves are called saprotrophs.
(iii) The product of photosynthesis is not a protein.
(iv) Solar energy is converted into chemical energy during photosynthesis.
Answer:
(i) False
(ii) False
(iii) False
(iv) True.

Question 11.
Choose the correct option from the following:
Which part of the plant gets carbon dioxide from the air for photosynthesis?
(i) Root hair
(ii) Stomata
(iii) Leaf veins
(iv) Sepals.
Answer:
(ii) Stomata.

Question 12.
Choose the correct option from the; following:
Plants take carbon dioxide from the atmosphere mainly through their:
(i) Roots
(ii) Stem
(iii) Flowers
(iv) Leaves.
Answer:
(iv) Leaves.

Extended Learning – Activities and Projects

Question 1.
Project
Take a potted plant with broad leaves. Take a strip of black paper and cut out a small square in its centre. Cover a part of a leaf with this paper
and secure it the occurrence of photosynthesis
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-3
with paper clips. Keep the plant in the sunlight for 2-5 days. Observe the difference in the colour of the covered and the uncovered portions on the leaf. Perform iodine test on leaf. Did the two parts show any difference in results? Remove the strip and expose the covered part to the sunlight for 2-3 days and do the iodine test again. Describe your observations.
Answer:
Do yourself.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Question 2.
Visit a green house if there is one near your place. Observe how they raise plants. Find out how they regulate the light, water and carbon dioxide.
Answer:
Do yourself. Take the help of your teacher.

Question 3.
Try growing a sweet potato just in water. Describe your experiment and observations.
Answer:
Do yourself. Take the help of your teacher.

HBSE 7th Class Science Nutrition in Plants Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Why do all living organisms need food?
Answer:
All living organisms need food for getting energy for doing physical work.

Question 2.
Define the term Nutrition.
Answer:
The process of taking or consuming and utilising food is called nutrition.

Question 3.
Define Photosynthesis?
Answer:
The process by which the green plants prepare food using carbon dioxide and water in the presence of chlorophyll and light is called photosynthesis.

Question 4.
Mention the role of chlorophyll in photosynthesis.
Answer:
The leaves have a green pigment called chlorophyll. It helps leaves to capture the energy of the sunlight. Without chlorophyll, photosynthesis will not tajte place.

Question 5.
Plants make food from water and carbon dioxide. What else is needed?
Answer:
Chlorophyll and sunlight are also needed to the plant for photosynthesis.

Question 6.
What would happen if there are no green plants on the earth?
Answer:
In the absence of green plants there will not be any living being.

Question 7.
What is the purpose of starch test?
Answer:
The confirmation of the presence of starch in the green plants also confirms that photosynthesis has taken place in the plant.

Question 8.
Name three Carnivorous animals.
Answer:
(a) Lion
(b) Tiger
(c) Leopard.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Question 9.
Name three Omnivorous animals.
Answer:
(a) Dog
(b) Cat
(c) Crow.

Question 10.
Name three Herbivorous animals.
Answer:
(a) Rabbit
(b) Deer
(c) Cow.

Question 11.
Name two Insectivorous plants.
Answer:
(a) Aldrovenda
(b) Sundew.

Question 12.
Write chemical reaction that takes place during photosynthesis.
Answer:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-4
Question 13.
Which are the raw materials required for photosynthesis?
Answer:
The process of photosynthesis requires four raw materials:
1. Carbon dioxide
2. Water,
3. Chlorophyll
4, Light.

Question 14.
Why are green plants called autotrophs?
Answer:
Green plants can prepare their own food using inorganic substances from the environment. Hence they are called autotrophs.

Question 15.
What are heterotrophs?
Answer:
Human beings and other animals depend on plants for food. They cannot make their own food. They are called the heterotrophs.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Question 16.
What is the mode of nutrition in plants different from that of the animals?
Answer:
In plants the nutrition is autotrophic type in which anabolism takes place. While in animal, they are heterotrophs where catabolism takes place.

Short Answer Type Questions

Question 1.
‘All animals depend upon plants for food’. Justify the statement.
Answer:
Green parts of the plants have the ability to prepare their own food which is stored in their various parts. All the animals do not have such property. So they depend on plants for their food directly or indirectly.

Question 2.
Differentiate between autotrophic and heterotrophic nutrition.
Answer:

Autotrophic NutritionHeterotrophic Nutrition
1. This type of nutrition occurs in green plants.1. This type of nutrition is found in all living beings except green plants.
2. It prepares its own food.2. It depends on plants directly or indirectly.
3. They prepare food in presence of sunlight.3. They have no such condition.
4. They require carbon dioxide and water along with chlorophyll.4. They receive prepared food.
5. Oxygen evolves during this process.5. Only carbon dioxide is evolved during the use of food.

Question 3.
Differentiate between carnivores, Herbivores and Omnivores.
Answer:
Carnivores: Animals like lion, tiger, snake and leopard that depend on other animals for their food are called carnivores.
Herbivores: Animals like cow, goat, horse, sheep, deer and elephant that depend on plants for their food are called herbivores.
Omnivores: Omnivores are those which depend on both plants and animals for food, e.g. man, pig, hen, bear, crow etc.

Question 4.
Differentiate between saprophytes and epiphytes.
Answer:
Saprophytes: These are the organisms that depend upon dead and decaying matter for food e.g., Monotropa (a bacteria) etc. These grow during or after the rainy season.
Epiphytes: These grow on the trees but only for support. They possess green leaves and can prepare their own food by absorbing moisture from the atmosphere. They have special roots called the aerial roots for this purpose e.g. orchids.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants

Question 5.
What do you understand by parasite, saprophyte and symbiosis? Give one example for each.
Answer:
Parasites: Such living organisms are those which depend on other living beings for their food. They may also depend on host not only for food but also for shelter too. e.g., Lice, Leech, Bed bug.
Saprophytes: Such organisms are those which take the dead and decayed organic substances in the form of their food e.g., kite.
Symbiosis: It is the phenomenon in which two plants live together in such a way that both are beneficial for each other, e.g., Rhizobium bacteria live in the nodules of Leguminous plants.

Question 6.
Some plants are both parasite and saprophyte. Explain with examples.
Answer:
There are some plants which survive like parasite as well as saprophyte. For example, Lichen. In lichen algae which is green in colour and lives on the upper side of the plant in the sun and prepares its own food during photosynthesis. The lower part of lichen in fungus which is saprophyte in nature. Both live together in it.

Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe an experiment to prove that chlorophyll is necessary for photosynthesis.
Answer:
1. Pluck one or two leaves from Croton and Coleus plant in the evening so that they have synthesised starch.
2. Make an outline sketch of the leaf to mark green and non-green areas of the leaf.
3. Boil the leaf in alcohol over a water bath till the chlorophyll and other pigments are washed out.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-5
4. Now keep the leaf in a petridish and add sufficient amount of iodine solution over the leaf.
Only the green portion of the leaves turn blue-black showing the presence of starch in that region, As the green portion contained chlorophyll it could photosynthesise thereby forming starch. The non-green portion of the leaf does not have chlorophyll, which is essential for phtosynthesis.

Question 2.
Describe the factors affecting the process of photosynthesis.
Answer:
Factors affecting the process of Photosynthesis:
1. Light: It is essential for the process of photosynthesis. An increase in the intensity of light increases the rate of photosynthesis.
2. Carbon dioxide: It is the source of carbon for the synthesis of organic compounds formed in, the plant.
3. Water: It is also very important for the process of photosynthesis. Lack of water decreases the rate of photosynthesis.
4. Temperature: The optimum temperature required by most of the plants for photosynthesis is 350°C.
5. Chlorophyll: It is indispensable for the process of photosynthesis. Photosynthesis does not occur in the plants that lack chlorophyll.

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Question 3.
Describe an experiment to prove that light is necessary for photosynthesis.
Answer:
1. Destarch the leaves of a potted plant by placing them in total darkness for about 24-48 hours.
2. Cover tightly one of the leaves with a leaf clasp or a strip of black paper on both the surface of the leaf. Use clips or cellotape to fix the black paper.
3. Put the experimental set up in sunlight for a few hours.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-6
4. After that pluck the leaf that was covered with black paper or leaf clasp.
5. Test the leaf for the presence of starch by boiling it in alcohol over a water bath and then putting iodine solution over it.
The part of the leaf that was covered with black paper or leaf clasp did not get sunlight and thus no photosynthesis could occur in that region, hence, starch was not formed.
The part of the leaf that was exposed to sunlight could photosynthesise and so starch was formed in that region of leaf. This shows that light is essential for the process of photosynthesis.

Nutrition in Plants Class 7  HBSE Notes

1. Carbohydrates, proteins, fats, vitamins and minerals are components of food. These components of food are necessary for our body and are called nutrients.
2. Nutrition is the mode of taking food by an organism and its utilization by the body.
3. The mode of nutrition in which organisms make food themselves from simple substances is called autotrophic (auto = self; trophos = nourishment) nutrition. Green plants are autotrophs.
4. Animals and most other organisms take in ready-made food prepared by the plants. They are called heterotrophs (heteros = other).
5. (a) The process by which green plants prepare their own food is called photosynthesis.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-7
(b) Photosynthesis can be summarized as follows:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-8
(c) Photosynthesis takes place mostly in green leaves which contain green pigment, Chlorophyll inside Chloroplasts.
(d) Gaseous exchange in the leaves takes place through tiny pores called stomata
6. The mode of nutrition in organisms which derive their food from the dead and decaying organic matter is called saprophytic nutrition and such organisms are called
saprophytes.
7. The mode of nutrition in organisms which derive their food from the body of some other living organism is called parasitic nutrition. Such organisms are called parasites and other organism, from wlWh the food is derived by the parasite, is called the host.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-9
8. In,sect,ivores are the green plants growing in marshy areas. They obtain their nutrition partly from the soil and atmosphere and partly from the insects, e.g,, pitcher plant, venus fly-trap, sundew plant and bladderwort.
9. Some organisms live together and share shelter and nutrients. This is called symbiotic relationship. For example, certain fungi live in the roots of trees. The tree provides nutrients to the fungus and, in return, receives help from it to take up water and nutrients from the soil. This association is very important for the tree.
10. In a lichen, algal and fungal partners live together and both are mutually beneficial. Algal component of a lichen is autotrophic. It provides food material to the fungal component in the lichen. In return, the fungus (heterotroph) provides shelter, water and minerals to the alga.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 Nutrition in Plants-10

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HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

Haryana State Board HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. वृषण की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है-
(अ) वृक्क नलिकाएँ
(स) एपीडिडाइमिस
(ब) शुक्रजनन नालिकाएँ
(द) मुलेरियन नलिकाएँ
उत्तर:
(ब) शुक्रजनन नालिकाएँ

2. बुम्ब किसे कहते हैं-
(अ) योनि
(ब) बच्चादानी
(द) भगशेफ
(स) भग
उत्तर:
(ब) बच्चादानी

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

3. स्त्रियों में अण्डाणु बनना किस आयु में बंद हो जाता है-
(अ) 13 वर्ष
(ब) 20 वर्ष
(स) 40 वर्ष
(द) 50 वर्ष
उत्तर:
(द) 50 वर्ष

4. वृषणकोष में उदर गुहा की तुलना में कितने ताप की कमी होती है-
(अ) 2-2.50 C
(ब) 5°C
(स) 6°C
(द) 13° C
उत्तर:
(अ) 2-2.50 C

5. मानव में सगर्भता की अवधि है-
(अ) 15 महीने
(ब) 9 महीने
(स) 12 महीने
(द) 18 महीने
उत्तर:
(ब) 9 महीने

6. कोरकपुटी (ब्लास्टोसिस्ट) गर्भाशय के कौनसे स्तर में अन्तःस्थापित होती है-
(अ) परिगर्भाशय
(ब) गर्भाशय पेशी स्तर
(स) गर्भाशय अन्त:स्तर
(द) अध: श्लेष्मिका
उत्तर:
(स) गर्भाशय अन्त:स्तर

7. प्रति आर्तव चक्र में अण्डोत्सर्ग के दौरान कितने अण्डाणु मोचित होते हैं-
(अ) एक
(ब) दो
(स) तीन
(द) चार
उत्तर:
(अ) एक

8. एक शिशु के लिंग का निर्धारण निम्न में से किसके द्वारा होता है-
(अ) पिता
(ब) माता
(स) भाई
(द) बहन
उत्तर:
(अ) पिता

9. शुक्राणुओं का निर्माण निम्न में किस अंग में होता है-
(अ) वृषण
(ब) अधिवृषण
(स) शुक्रवाहिनी
(द) प्रोस्टेट ग्रन्थि
उत्तर:
(अ) वृषण

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

10. 8 से 16 कोरक खण्डों वाले भ्रूण को क्या कहते हैं-
(अ) तूतक (मोरुला)
(ब) ब्लास्टूला
(स) कोरकपुटी
(द) अंतर्रोपण
उत्तर:
(अ) तूतक (मोरुला)

11. आर्तव चक्र के दौरान रक्तस्राव कितने दिन तक चलता रहता है-
(अ) 10-15 दिन
(ब) 3-5 दिन
(स) 20-25 दिन
(द) उपर्युक्त में कोई नहीं ।
उत्तर:
(ब) 3-5 दिन

12. ग्रेफियन पुटक (Graffian Follicle) का फटना व अण्डाणु का मुक्त होना कहलाता है
(अ) संयुग्मन
(ब) केस्ट्रेशन
(स) क्रिप्टोडि
(द) अण्डोत्सर्ग
उत्तर:
(द) अण्डोत्सर्ग

13 तरुणावस्था (Puberty) में पहली बार रजस्राव (Menstruation) कहलाता है-
(अ) रजोदर्शन
(ब) रजोनिवृत्ति
(स) कामोन्माद
(द) क्रिप्टोकिंडिज्म
उत्तर:
(अ) रजोदर्शन

14. HCGC (ह्यूमन कोरिओनिक गोनेडोट्रॉपिन) का स्रावण होता है-
(अ) सरोली कोशिकाओं से
(ब) डिस्कस प्रालिजेरस
(स) अपरा (Placenta ) से
(द) पुटक कोशिकाओं से
उत्तर:
(स) अपरा (Placenta ) से

15. वृषण उदरगुहा के बाहर एक थैली में स्थित होते हैं जिसे कहते हैं-
(अ) वृषणकोष
(स) शुक्राशय
(ब) अधिवृषण
(द) अण्डाशय
उत्तर:
(अ) वृषणकोष

16. नर जर्म कोशिकाएँ किस विभाजन के फलस्वरूप शुक्राणुओं का निर्माण होता है?
(अ) अर्धसूत्री विभाजन
(ब) समसूत्री विभाजन
(स) असूत्री विभाजन
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(अ) अर्धसूत्री विभाजन

17. पुरुष लिंग की सहायक ग्रन्थि है-
(अ) शुक्राशय
(ब) प्रोस्टेट ग्रन्थि
(स) बल्बोयूरेथ्रल ग्रन्थि
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

18. शुक्राणुजनन के पश्चात् शुक्राणु हो जाता शीर्ष किन कोशिकाओं में अन्तःस्थापित है?
(अ) स्ट्रोमा में
(ब) ध्रुव कोशिकाओं में
(स) सर्टोली कोशिकाओं में
(द) थीका इन्टरना में
उत्तर:
(स) सर्टोली कोशिकाओं में

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

19. शुक्राणुओं की पूंछ को गति करने के लिए ऊर्जा किससे प्राप्त होती है?
(अ) गॉल्जीकाय
(ब) माइटोकॉन्ड्रिया
(स) लाइसोसोम
(द) केन्द्रक
उत्तर:
(ब) माइटोकॉन्ड्रिया

20. रजोधर्म की अनुपस्थिति किसका संकेत देती है?
(अ) गर्भपात का
(स) आर्तव चक्र का
(ब) गर्भधारण का
(द) मद चक्र का
उत्तर:
(ब) गर्भधारण का

21. मानव में एक महीने की सगर्भता के बाद भ्रूण अंग विकसित होता है
(अ) हृदय
(ब) पाद् व अंगुलियाँ
(स) बालों का
(द) बाह्य जननाँग
उत्तर:
(अ) हृदय

22. अपरा (प्लैसेंटा) का निम्न में से कार्य है-
(अ) पोषण
(ब) उत्सर्जन
(स) श्वसन
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

23. शुक्राणुओं के साथ-साथ शुक्राणु प्लाज्मा मिलकर बनाता है-
(अ) वीर्य
(ब) हॉर्मोन
(स) एंजाइम
(द) क्षारीय द्रव
उत्तर:
(अ) वीर्य

24. स्त्री के प्राथमिक लैंगिक अंग हैं-
(अ) गर्भाशय
(ब) अण्डाशय
(स) अण्डवाहिनी
(द) इन्फन्डीबुलम
उत्तर:
(ब) अण्डाशय

25. शिश्न का अन्तिम वर्धित भाग कहलाता है-
(अ) फोरस्किन
(ब) मौंसप्यूबिस
(स) ग्लांस पेनिस
(द) अधिवृषण
उत्तर:
(स) ग्लांस पेनिस

26. फल शर्करा पाई जाती है-
(अ) मूत्र में
(ब) पसीने में
(स) ऑक्सीटोसिन में
(द) शुक्रिय प्लाज्मा में
उत्तर:
(द) शुक्रिय प्लाज्मा में

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27. मानव के शुक्राणु के शीर्ष भाग में उपस्थित केन्द्रक होता है-
(अ) गोलाकार
(ब) अण्डाकार
(स) त्रिकोणाकार
(द) दीर्घीकार (इलोगेटेड)
उत्तर:
(द) दीर्घीकार (इलोगेटेड)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
फटी हुई पुटक कोशिकाओं द्वारा निर्मित ग्रन्थिल संरचना से स्रावित एक हारमोन का नाम बताइए ।
उत्तर:
प्रोजेस्टरोन (Progestron) अथवा एस्ट्रोजन ( Estrogen ) ।

प्रश्न 2.
शुक्र कायान्तरण को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
शुक्राणु पूर्वी कोशिकाएँ ( Spermatids ) गोल, अचल एवं अगुणित संरचनाएँ हैं। इनके आकारिकी, उपापचयी एवं क्रियात्मक रूप में एक अति विशिष्ट संरचना ‘शुक्राणु’ में परिवर्तन को शुक्र कायान्तरण कहते हैं।

प्रश्न 3.
एक पंचास वर्षीय स्त्री का रजचक्र समाप्त होना क्या कहलाता है ?
उत्तर:
एक पचास वर्षीय स्त्री का रजचक्र का समाप्त होना रजोनिवृत्ति (Menopause) कहलाता है ।

प्रश्न 4.
वीर्यसेचन ( Insemination) को परिभाषित कीजिए ।
उत्तर:
स्त्री एवं पुरुष के संभोग (मैथुन) के दौरान शिश्न द्वारा (वीर्य) शुक्राणु स्त्री की योनि में छोड़ने की क्रिया को वीर्यसेचन कहते हैं।

प्रश्न 5.
गर्भावस्था (Gestation Period) किसे कहते हैं ?
उत्तर:
निषेचन से शिशु के जन्म (प्रसव) के बीच के समय को गर्भावस्था कहते हैं ।

प्रश्न 6.
कॉरपोरा केवरनौसा कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर:
कॉरपोरा केंवरनौसा शिश्न (Penis) में पाया जाता है।

प्रश्न 7.
स्तनधारियों के एक्रोसोम द्वारा स्रावित एन्जाइम का नाम लिखिए जो अण्डकलाओं को घोलने में सहायता करता है ।
उत्तर:
स्तनधारियों के एक्रोसोम द्वारा हाएलसोयूरोनाइडेज एन्जाइम का स्रावण किया जाता है जो अण्ड कलाओं को घोलने में सहायता करता है।

प्रश्न 8.
हाथी, कुत्ता एवं बिल्ली में औसत गर्भकाल क्या है ?
उत्तर:
हाथी – 641 दिन, कुत्ता – 63 दिन एवं बिल्ली – 63 दिन ।

प्रश्न 9.
क्लोस्ट्रम क्या है ?
उत्तर:
प्रसव के पश्चात् मादा के स्तनों से प्रथम स्रावित दुग्ध क्लोस्ट्रम कहलाता है। यह हल्का पीला, गाढ़ा व रोग प्रतिरोधक होता है ।

प्रश्न 10.
भ्रूण का माता के गर्भाशय से सम्बन्ध बनाने की क्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर:
भ्रूण का माता के गर्भाशय से सम्बन्ध बनाने की क्रिया को आरोपण (Implantation) कहते हैं ।

प्रश्न 11.
अण्डाशय पीठिका कौनसे दो भागों में विभेदित होता है?
उत्तर:

  • परिधीय वल्कुट (Peripheral Cortex)
  • आन्तरिक मध्यांश (Internal Medulla)

प्रश्न 12.
रजोधर्म की अनुपस्थिति किस बात का संकेत है?
उत्तर:
रजोधर्म की अनुपस्थिति गर्भधारण का संकेत है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

प्रश्न 13.
मनुष्य में किस प्रकार का अपरा (Placenta ) पाया जाता है ?
उत्तर:
मनुष्य में हीमोकारियल अपरा (Placenta ) पाया जाता है।

प्रश्न 14.
अण्डोत्सर्ग (Ovulation) के बाद ग्रेफियन पुटिका (Graffian Follicle) द्वारा निर्मित स्रावी संरचना का नाम लिखिए ।
उत्तर:
अण्डोत्सर्ग (Ovulation ) के बाद ग्रेफियन पुटिका (Graffian Follicle) द्वारा निर्मित स्रावी संरचना को कॉरपस ल्यूटियम (Corpus luteum) कहते हैं।

प्रश्न 15.
प्रसव के बाद दुग्ध संश्लेषण ( Milk Synthesis) के लिए उत्तरदायी हारमोन का नाम लिखिए ।
उत्तर:
प्रसव के बाद दुग्ध संश्लेषण ( Milk Synthesis) के लिए उत्तरदायी हारमोन LTH (Lactotrophic Hormone)।

प्रश्न 16.
शुक्राणुओं का संग्रहण व परिपक्वन (Storage & Maturation ) किस अंग में होता है ?
उत्तर:
अधिवृषण (Epididymis) में शुक्राणुओं का संग्रहण परिपक्वन होता है।

प्रश्न 17.
वृषण के एक पिण्डक (Lobule) में शुक्रज- नलिकाओं (Seminiferous Tubules) की संख्या कितनी होती है?
उत्तर:
वृषण के एक पिण्डक (Lobule) में शुक्रजन नलिकाओ (Seminiferous Tubules) की संख्या 1-3 होती है।

प्रश्न 18.
उस हारमोन का नाम लिखिए जो प्रसक (Parturition) के समय प्यूबिक सिम्फाइसिस (Pubic Symphysis) का शिथिलन करता है।
उत्तर:
रिलेक्सिन हारमोन प्रसव के समय प्यूबिक सिम्फाइसिस का शिथिलन करता है।

प्रश्न 19.
लैंगिक उत्तेजना (Sexual Excitement) के समय महिलाओं में रंगहीन पदार्थ का स्रावण किस ग्रन्थि द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
लैंगिक उत्तेजना (Sexual Excitement) के समय महिलाओं में रंगहीन पदार्थ का स्रावण बार्थोलिन ग्रन्थियों (Bartholian glands) द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 20.
योनि का द्वार प्राय: एक पतली झिल्ली से आंशिक रूप से ढका होता है जिसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
योनि का द्वार प्राय: एक पतली झिल्ली से आंशिक रूप से ढका होता है जिसे योनिच्छद (Hymen) कहते हैं।

प्रश्न 21.
एक छोटी अंगुली जैसी संरचना जो मूत्र द्वार के ऊपर दो वृहद् भगोष्ठ से ऊपरी मिलन बिन्दु के पास स्थित होती है उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
एक छोटी अंगुली जैसी संरचना जो मूत्र द्वार के ऊपर दो वृहद् भगोष्ठ के ऊपरी मिलन बिन्दु के पास स्थित होती है उसे भगशेफ (Clitoris) कहते हैं।

प्रश्न 22.
जघन शैल (माँस प्यूबिस) किस प्रकार के ऊतकों से बनता है?
उत्तर:
जघन शैल (माँस प्यूबिस) वसामय ऊतकों से बना होता है।

प्रश्न 23.
गर्भाशय की भित्ति कितनी परतों से बनी होती है? नाम लिखिए ।
उत्तर:
गर्भाशय की भित्ति तीन परतों से बनी होती है-

  • परिगर्भाशय (पेरिमैट्रियम)
  • गर्भाशय पेशी स्तर (मायोमैट्रियम)
  • गर्भाशय अन्तःस्तर (एंडोमैट्रियम) ।

प्रश्न 24.
स्त्री के गर्भाशय की आकृति किस फल के समान होती है?
उत्तर:
स्त्री के गर्भाशय की आकृति उल्टी रखी हुई नाशपाती के समान होती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

प्रश्न 25.
उस भ्रूण अवस्था का नाम लिखिए जो मानव स्त्री की गर्भाशय भित्ति में अन्तर्रोपित हो जाती है।
उत्तर:
ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst) मानव स्त्री की गर्भाशय भित्ति में अन्तरोंपित हो जाती है।

प्रश्न 26.
नवजात शिशुओं में कोलोस्ट्रम (Colostrum ) किस प्रकार रोगों के प्रति आरम्भिक सुरक्षा प्रदान करता है? एक कारण दे।
उत्तर:
कोलोस्ट्रम ( खीस) में कई प्रकार के प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) होती है जो नवजात शिशुओं में रोगों के प्रति प्रतिरोधी क्षमता उत्पन्न करती है।

प्रश्न 27.
वह क्या चीज है जो प्रसव के लिए उत्तरदायी हार्मोन्स के विमोचन के लिए पीयूष (पिट्यूटरी) को उत्तेजित करती है? उस हार्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर:
गर्भ उत्क्षेपन प्रतिवर्त (फीटल इंजेक्शन रेफलेक्स) पीयूष ग्रन्थि को आक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन के स्रावण को उद्दीपन करते हैं।

प्रश्न 28.
मादा के अण्डाशय से अण्डोत्सर्ग के लिए ग्राफी पुटक को फटने के लिए कौनसा हार्मोन प्रेरित करता है?
उत्तर:
LH हार्मोन के प्रभाव से ग्राफी पुटक फट जाती है।

प्रश्न 29.
मानव अण्डाशय में कौनसा भाग प्रोजेस्ट्रॉन स्त्रावित करता है?
उत्तर:
मानव अण्डाशय में पीत पिण्ड ( कार्पसल्यूटियम) प्रोजेस्ट्रॉन स्रावित करता है।

प्रश्न 30.
मानव भ्रूण में ट्रोफोब्लास्ट का क्या कार्य है?
उत्तर:
मानव भ्रूण में ट्रोफोब्लास्ट का कार्य गर्भाशय ( Uterus ) की आन्तरिक भित्ति (एण्डोमेट्रियम) को भेदने का कार्य है। जिससे ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst) आन्तरिक भित्ति में रोपित हो सके।

प्रश्न 31.
अंडोत्सर्ग को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
अण्डाशय की ग्राफियन पुटिका में से द्वितीयक ऊसाइट का फट कर उदर गुहा में मुक्त होना अंडोत्सर्ग कहलाता है।

प्रश्न 32.
प्रथम स्तन्य या खीस क्या है?
उत्तर:
प्रसव के बाद मादा के स्तनों से आरम्भिक कुछ दिनों तक जो दूध निकलता है, उसे प्रथम स्तन्य या खीस (कोलोस्ट्रम) कहते हैं ।

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
अपरा (Placenta ) किसे कहते हैं? गर्भाशय में अपरा को दर्शाते हुए मानव भ्रूण का नामांकित चित्र बनाइए एवं इसके कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर:
अपरा (Placenta ) – भ्रूण के अन्तर्रोपण के पश्चात् पोषकोरक पर अंगुली जैसी संरचनाएँ उभरती हैं, जिन्हें जरायु अंकुरक (Chorionic Villi) कहते हैं। ये जरायु अंकुरक गर्भाशयी ऊतक और मातृ रक्त से आच्छादित होते हैं। जरायु अंकुरक और गर्भाशयी ऊतक एक-दूसरे के साथ अंतरागुलियुक्त (Interdigited) हो जाते हैं तथा संयुक्त रूप से परिवर्धशील भ्रूण (Foetus ) और मातृ शरीर के साथ एक संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई को गठित करते हैं जिसे अपरा (Placenta ) कहते हैं। देखिए चित्र में ।

अपरा (Placenta ) के कार्य- अपरा के निम्नलिखित कार्य हैं-

  • भ्रूण को ऑक्सीजन तथा पोषण की आपूर्ति एवं कार्बन -डाइऑक्साइड तथा भ्रूण द्वारा उत्पन्न उत्सर्जी (Excretory ) अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करता है।
  • अपरा एक नाभिरज्जु ( umbilical cord) द्वारा भ्रूण से जुड़ा होता है जो भ्रूण तक सभी आवश्यक पदार्थों को अन्दर लाने तथा बाहर ले जाने के कार्य में सहायता करता है।
  • अपरा अन्तःस्रावी (Endocrine) ऊतकों का कार्य करता है।
  • इसके द्वारा अनेक हार्मोनों का स्रावण किया जाता है जैसे मानव जरायु गोनेडोट्रॉपिन (HCG), मानव अपरा लैक्टोजन (HPL), एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोजन आदि ।
  • प्रोजेस्टरोन पूरे गर्भकाल तक गर्भ को साधे रखता है, प्रसव के समय अपरा से ही रिलेक्सिन का स्राव होता है जो प्रसव के समय मूत्रमार्ग व जननमार्ग को चिकना कर भ्रूण के निकास में सहायता करता है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन 1

प्रश्न 2.
अपवाहक नलिका तथा शुक्रवाहिनी में कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर:
अपवाहक नलिका (Vasa Efferentia) तथा शुक्रवाहिनी (Vasa Deferentia) में अन्तर

अपवाहक नलिका (Vasa Efferentia)शुक्रवाहिनी (Vasa Deferentia)
1. अपवाहक नलिका की उत्पत्ति वृषण जालक (Rete Testis) से होती है।जबकि शुक्रवाहिनी की उत्पत्ति कॉडा एपिडिडाइमिस (Cauda epididymis) से होती है।
2. अपवाहक नलिकाओं की संख्या 15-20 होती है।जबकि शुक्रवाहिनी की संख्या दो होती है।
3. अपवाह क नलिका अत्यधिक वलित होती है।वृषणकोष में आंशिक रूप से कुण्डलित तथा उदरगुहा में सीधी होती है।
4. वृषण जालक (Rete Testis) से शुक्राणुओं का कैपट एपिडिडाइमिस की ओर वहन करती है।शुक्रवाहिनी शुक्राणुओं का कॉडा एपिडडडाइ मिस से स्खलन वाहिनी (Eijculatory duct) की ओर वहन करती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

प्रश्न 3.
सगर्भता के विभिन्न महीनों में भ्रूण परिवर्धन के प्रमुख लक्षणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव में सगर्भता की अवधि 9 महीने की होती है। सगर्भता के विभिन्न महींनों में भ्रूण परिवर्धन के प्रमुख लक्षण अग्र हैं-

  1. मानव में एक महीने की सगर्भता के बाद भ्रूण के हृदय का निर्माण होता है। हृदय की धड़कनों को स्टेथेस्कोप की सहायता से ध्यानपूर्वक सुना जा सकता है।
  2. सगर्भता के दूसरे माह के अन्त तक भ्रूण के पाद एवं अंगुलियाँ विकसित होती हैं।
  3. 12वें सप्ताह ( पहली तिमाही) के अन्त तक लगभग सभी प्रमुख अंग तंत्रों की रचना बन जाती है, जैसे पाद एवं बाह्य जननांग अच्छी तरह से विकसित हो जाते हैं।
  4. गर्भावस्था के पाँचवें माह के दौरान गर्भ की पहली गतिशीलता और सिर पर बाल उग आते हैं ।
  5. 24वें सप्ताह के अन्त तक (दूसरी तिमाही), पूरे शरीर पर कोमल बाल निकल आते हैं।
  6. आँखों की पलकें अलग-अलग हो जाती हैं और बरौनियाँ बन जाती हैं।
  7. गर्भावस्था के 9वें माह के अन्त तक गर्भ पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है और प्रसव के लिए तैयार हो जाता है।

प्रश्न 4.
युग्मक जनन किसे कहते हैं? इसके कोई तीन महत्त्व लिखिए।
उत्तर:
जनदों (वृषणों एवं अण्डाशयों) में जननिक उपकला (Germinal epithelium) की कोशिकाओं से युग्मक कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को युग्मक जनन ( Gametogenesis) कहते हैं । युग्मक जनन का महत्त्व (Importance of Gametogenesis )

  • इसके फलस्वरूप अगुणित युग्मकों का निर्माण होता है। नर एवं मादा युग्मक संयुजन करके द्विगुणित युग्मनज (Diploid Zygote) का निर्माण करते हैं जिसके विकास से नए जीव की उत्पत्ति होती है।
  • इसमें होने वाले अर्धसूत्री विभाजन में जीन विनिमय (Crossingover) होता है जिससे नये संयोगों का निर्माण होता है।
  • युग्मक जनन की समानताओं के आधार पर जीवों का विकासीय क्रम जाना जा सकता है।

प्रश्न 5.
स्टेम कोशिकाएँ किसे कहते हैं? समझाइए ।
उत्तर:
अंतर्रोपण के तुरन्त पश्चात् अन्तर कोशिका समूह (भ्रूण) बाह्य त्वचा (Ectoderm) नामक तथा एक बाहरी स्तर और अंतस्त्वचा (Endoderm) नामक एक भीतरी स्तर में विभेदित हो जाता है। इस बाह्यस्त्वचा और अंतस्त्वचा के बीच जल्दी ही मध्यजननस्तर (Mesoderm) बन जाता है। ये तीनों ही स्तर वयस्कों में भी ऊतकों (अंगों ) का निर्माण करते हैं। यहाँ यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस अन्तरकोशिका समूह में कुछ निश्चित तरह की कोशिकाएँ जिन्हें स्टेम कोशिकाएँ कहते हैं, समाहित रहती हैं, जिनमें यह क्षमता होती है कि वे सभी अंगों एवं ऊतकों को उत्पन्न कर सकती हैं।

प्रश्न 6.
यदि मनुष्य की एपिडिडाइमिस को काट दिया गया है तो कौनसा कार्य प्रभावित होगा? स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
यदि मनुष्य की एपिडिडाइमिस को काट दिया जाये तो इसके अभाव में शुक्राणुओं का परिपक्वन, पोषण एवं संग्रह (एक माह तक) कार्य नहीं होगा । एपिडिडाइमिस के अभाव में वृषण से शुक्राणु शुक्रवाहिनी तक नहीं जा पायेंगे जिसके फलस्वरूप निषेचन क्रिया नहीं होगी।

प्रश्न 7.
प्रजनन क्रिया में स्त्रियों की पुरुषों की तुलना में अधिक जिम्मेदारी होती है। क्यों? समझाइये |
उत्तर:
प्रजनन क्रिया में स्त्रियों की पुरुषों की तुलना में अधिक जिम्मेदारी होती है, क्योंकि मादा जनन तन्त्र द्वारा जनन से सम्बन्धित कई कार्य सम्पादित किये जाते हैं; जैसे- अण्डाणु निर्माण, मैथुन के समय शुक्राणुओं को ग्रहण करना, गर्भाधान हेतु अनुकूल वातावरण तैयार करना, नवजात शिशु को भ्रूणावस्था एवं प्रसव पश्चात् पोषण देना, स्तन ग्रन्थियों द्वारा दूध का संश्लेषण एवं स्रावण आदि ।

प्रश्न 8.
मदचक्र किसे कहते हैं? मदचक्र एवं रजचक्र के कोई तीन अन्तर लिखिए।
उत्तर:
मदचक्र (Estrous cycle ) – नॉन प्राइमेट्स स्तनधारियों की मादाओं के जनन तन्त्र में होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को मद चक्र कहते हैं। इस काल या चक्र में मादा उत्तेजित अवस्था में होती है एवं मैथुन हेतु तैयार होती है। मद चक्र (Estrous cycle) एवं रजचक्र (Menstrual cycle) में अन्तर –

मद चक्र (Estrous cycle)रजचक्र (Menstrual cycle)
1. प्राइमेट्स को छोड़कर सभी स्तनधारियों में चक्र पाय जाता है। उदाहरण-कुत्तायह चक्र प्राइमेट्स मादा स्तनियों में पाया जाता है। उदाहरण-स्त्री
2. इसमें रक्त का स्राव नही होता है ।इस चक्र के अन्त में रक्त का साव होता है ।
3. एण्डोमीट्रियम का क्षरण एवं रक्तस्राव नहीं होता है ।एण्डोमीट्रियम का क्षरण एवं रक्तस्राव होता है।
4. मद चक्र में मादा उत्तेजित अवस्था में होती है एवं मैथुन हेतु तैयार होती है।इस चक्र में ऐसा नहीं होता है।

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प्रश्न 9.
भगशेफ क्या है?
उत्तर:
भगशेफ/क्लाइटोरिस ( Clitoris ) – यह भग (Vulva) के अग्र छोर पर स्थित एक घुण्डीनुमा रचना होती है जिसे क्लाइटोरिस (Clitoris) कहते हैं। यह स्पर्शकणिकाओं की अधिक उपस्थिति के कारण अत्यधिक संवेदी होता है। क्लाइटोरिस नर के शिश्न के समजात अंग है। लैंगिक संभोग के समय यह मादा में उत्तेजना तरंगों को प्रसारित करने में सहायक होता है।

प्रश्न 10.
यदि नर के वृषण से निकले हारमोन को मादा में प्रवेश करा दिया जावे तो क्या प्रभाव होगा?
उत्तर:
नर के वृषण से स्रावित होने वाला हारमोन नर के द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का नियन्त्रण करता है। इन नर हारमोन्स को यदि मादा में प्रवेश कराया जायेगा तो मादा में नर के द्वितीयक लक्षण बनने की सम्भावना पैदा हो जायेगी।

प्रश्न 11.
अण्डाशय को अन्तःस्रावी ग्रन्थि क्यों कहा जाता है ? समझाइये |
उत्तर:
अण्डाशय भी अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के समान हारमोन स्रावित करता है । अण्डाशय में पाये जाने वाला कॉरपस ल्यूटियम (Corpus Luteum) निषेचन के तुरन्त बाद सक्रिय होकर निम्न हारमोन्स का स्रावण करता है-

  • प्रोजेस्टेरॉन (Progesteron ) – यह हारमोन गर्भ धारण = गर्भावस्था के लिये आवश्यक है। अतः इसे गर्भावस्था हारमोन (Pregnancy Hormone) कहते हैं।
  • रिलैक्सिन (Relaxin) – प्रसव के समय यह हारमोन श्रोणि मेखला के प्यूबिक सिम्फाइसिस को शिथिल करता है, जिससे जन्म नाल (Birth Canal) या वेजाइना चौड़ी हो जाती है और शिशु का जन्म सुगमता से हो जाता है।

प्रश्न 12.
यदि मादा की अण्डवाहिनियों के स्थान पर प्लास्टिक की नलिकायें लगा दी जायें, तो अण्डाणुओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
मादा में अण्डवाहिनियों का प्रारम्भिक कार्य अण्डों को निषेचन के लिए आगे बढ़ाना, शुक्राणुओं को स्थान देना तथा उनकी गति व जीवन को सुरक्षित रखते हुए निषेचन के लिए स्थान देना आदि होते हैं । प्लास्टिक की नली में अण्डों को आगे कैसे बढ़ाया जा सकेगा तथा विशेष तरल पदार्थों की अनुपस्थिति में तो शुक्राणु अण्डों तक कैसे पहुँचेंगे अर्थात् निषेचन नहीं हो सकेगा। इसके बाद की प्रक्रियायें जैसे रोपण, गर्भधारण, भ्रूण परिवर्धन आदि की तो बात ही नहीं की जा सकती। इस प्रकार अण्डाणु नष्ट हो जायेगा ।

प्रश्न 13.
यदि पुरुष के शरीर से प्रोस्टेट ग्रन्थि तथा काउपर्स ग्रन्थियाँ निकाल दी जाएँ तो शुक्राणुओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
प्रोस्टेट ग्रन्थि का स्राव शुक्राणुओं के लिए जीवनदायक होता है। ये एपिडिडाइमिस में रहने तक निष्क्रिय होते हैं, किन्तु इस व्यन्थि के स्राव के सम्पर्क में आते ही सक्रिय हो जाते हैं। वीर्य के अधिकांश भाग में इसी ग्रन्थि का स्राव होता है। काउपर्स ग्रन्थि का स्राव क्षारीय होता है तथा शुक्राणुओं की रक्षा करता है।

नर में मूत्र मार्ग और शुक्र रस का मार्ग एक ही होता है और सूत्र हल्का अम्लीय होता है। यदि दोनों ग्रन्थियों को पुरुष के शरीर से निकाल दिया जाये तो शुक्राणु न तो निष्क्रियता छोड़कर सक्रिय हो सकेंगे और न ही उनकी सुरक्षा अम्ल इत्यादि से हो सकेगी। अतः निषेचन करने योग्य भी नहीं होंगे।

प्रश्न 14.
यौवनारम्भ (Puberty) किसे कहते हैं? समझाइए ।
उत्तर:
यौवनारम्भ (Puberty ) – मानव में नर एवं मादा में अपरिपक्व जनन अंगों का परिपक्व होकर जनन क्षमता का विकास होना यौवनारम्भ कहलाता है। नर की अपेक्षा मादा में यौवनारम्भ पहले प्रारम्भ होता है। मानव नर में यौवनारम्भ 14-16 वर्ष की आयु में वृषणों की सक्रियता तथा शुक्राणु उत्पादन के साथ शुरू होता है जबकि मादा में 12-14 वर्ष की आयु में स्तन ग्रन्थियों की वृद्धि एवं रजोदर्शन के साथ प्रारम्भ होता है।

प्रश्न 15.
वृषण देहगुहा के बाहर क्यों होते हैं? समझाइये ।
उत्तर:
मानव में वृषण देहगुहा के बाहर होते हैं क्योंकि वृषण कोष में ताप शरीर के ताप से लगभग 2-2.5°C तक कम होता है जिसके कारण शुक्राणुओं का निर्माण सुगमता से होता है। यदि वृषण देहगुहा के अन्दर होंगे तो शरीर के तापमान पर शुक्राणुओं का बनना असम्भव होगा।

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प्रश्न 16.
प्राथमिक शुक्र कोशिकाओं व 100 प्राथमिक tus कोशिकाओं से कितने शुक्राणु व अण्डाणु बनेंगे? समझाइए ।
उत्तर:
100 शुक्राणु व 100 अण्डाणु बनेंगे। शुक्रजनन में प्रथम एवं द्वितीय परिपक्वन विभाजन केन्द्रक एवं कोशिकाद्रव्यी विभाजन में समान होते हैं एवं परिणामस्वरूप चार समान शुक्राणु निर्मित होते हैं। अतः 25 प्राथमिक कोशिकाओं से 100 शुक्राणुओं का निर्माण होता है। जबकि अण्डजनन में दोनों परिपक्वन विभाजन असमान कोशिकाद्रव्यी विभाजन दर्शाते हैं तथा इसके फलस्वरूप एक बड़ी अण्डाणु कोशिका तथा तीन ध्रुवकायों का निर्माण होता है। तीनों ध्रुवकाय नष्ट हो जाती हैं, केवल एक अण्डाणु शेष रहता है। अतः 100 प्राथमिक अण्ड कोशिकाओं से 100 अण्डाणुओं का निर्माण होता है।

प्रश्न 17.
मानव नर व मादा में यौवनारम्भ शुरू होने पर क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं?
उत्तर:
यौवनारम्भ के समय मानव नर तथा मादा में होने वाले परिवर्तन-

नर (Male)मादा (Female)
1. शिश्न, वृषण कोषों, प्रॉस्टेट ग्रन्थि एवं शुक्राशय ग्रन्थि के आकार में वृद्धि होती है।गर्भाशय, योनि, अण्डवाहिनियों तथा भग के आकार में वृद्धि होती है।
2. वृषणों के आकार में वृद्धि एवं शुक्राणुजनन प्रारम्भ होता है।वक्ष स्थल पर स्तन ग्रन्थियों में वृद्धि तथा रजोदर्शन के साथ मासिक चक्र का प्रारम्भ होना।
3. आवाज का भारी होना।आवाज महीन, तीव्र एवं मधुर हो जाती है।
4. शरीर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे चेहरे, वक्षस्थल एवं श्रोणि भाग में बालों का उगना।शरीर पर बालों का अभाव होना।
5. शरीर में तीव्र वृद्धि तथा अंसीय क्षेत्र में वृद्धि होना।श्रोणि भाग में तीव्र वृद्धि, नितम्ब भाग का फैलकर चौड़ा होना, स्तनों की वृद्धि, शरीर में वसा का संचय।
6. टेस्टोस्टेरोन, FSH, LH इत्यादि हारमोन के स्रावण में वृद्धि।प्रोजेस्टेरोन, ऐस्ट्रोजन तथा FSH, LH हारमोन के स्राव में वृद्धि होना।
7. मादा की ओर मनोवैज्ञानिक आकर्षण।नर की तरफ मनोवैज्ञानिक आकर्षण।

प्रश्न 18.
पुरुषों में सहायक जनन ग्रन्थियाँ वीर्य निर्माण एवं जनन प्रक्रिया में किस प्रकार सहायता करती हैं?
उत्तर:
पुरुषों में सहायक जनन ग्रन्थियाँ तीन प्रकार की पायी जाती हैं। ये सभी स्रावी पदार्थ अधिवृषण एवं शुक्राशय द्वारा स्रावित पदार्थों एवं शुक्राणुओं से मिलकर वीर्य का निर्माण करती हैं।
(1) प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland) – यह ग्रन्थि मूत्र मार्ग के आधार भाग पर स्थित होती है। यह कई पिण्डों से मिलकर बनी होती है। इस ग्रन्थि द्वारा हल्के सफेद क्षारीय तरल पदार्थ का स्रावण किया जाता है, जो वीर्य का 25-30 प्रतिशत भाग बनाता है। इस तरल में फॉस्फेट्स, सिट्रेट, लाइसोजाइम, फाइब्रिनोलाइसिन, स्पर्मिन आदि पदार्थ पाये जाते हैं। यह शुक्राणुओं को सक्रिय बनाता है एवं वीर्य के स्कंदन को रोकता है।

(2) शुक्राशय (Seminal Vesicle ) – यह मूत्राशय की पश्च सतह एवं मलाशय के बीच में स्थित होता है जो एक जोड़ी थैलीनुमा रचना है। शिश्न के उत्तेजित अवस्था में स्खलन के समय शुक्राशय संकुचित होकर स्राव मुक्त करते हैं। यह स्राव वीर्य का 60% भाग बनाता है। स्राव की क्षारीय प्रकृति के कारण यह स्राव योनि मार्ग की अम्लीयता को समाप्त कर शुक्राणुओं की सुरक्षा करता है ।

(3) काउपर ग्रन्थि या ब्लबोयूरीथल ग्रन्थि (Cowper’s Gland or Bulbouretheral Gland) – मैथुन के समय इस ग्रन्थि द्वारा एक गाढ़ा, चिपचिपा तथा क्षारीय पारदर्शी तरल पदार्थ स्रावित किया जाता है जो मूत्र मार्ग को चिकना बनाता है तथा मूत्र मार्ग की अम्लीयता को समाप्त कर उसे उदासीन या हल्का क्षारीय बनाता है। यह तरल मादा की योनि को चिकना कर मैथुन क्रिया को सुगम बनाता है। अतः हम कह सकते हैं कि पुरुषों में सहायक जनन ग्रन्थियाँ वीर्य निर्माण एवं जनन प्रक्रिया में सहायता करती हैं।

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प्रश्न 19.
कार्पस ल्यूटियम का निर्माण किस प्रकार होता है तथा इसका प्रमुख कार्य क्या है?
उत्तर:
अण्डोत्सर्ग (Ovulation) के पश्चात् रिक्त या खाली ग्राफियन पुटिका नष्ट न होकर ल्यूटिनाइजिंग हारमोन (LH) के प्रभाव से, एक पीली ग्रन्थिल रचना में बदल जाती है जिसे कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum) अथवा पीत पिण्ड कहते हैं। अण्ड के बाहर निकल जाने पर पुटिका का फटा हुआ भाग बंद हो जाता है और इसकी गुहा में रक्त जमा होकर एक थक्का (Clot ) बन जाता है।

थक्के के चारों ओर की पुटिका कोशिकाएँ LH के कारण ल्यूटिन की कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं। इनके द्रव्य में ल्यूटिन नामक पीला-सा वर्णक बन जाता है। ये कोशिकाएँ आमाप में बड़ी होती हैं तथा प्रोजेस्ट्रान (Progestrone) तथा रिलेक्सिन (Relaxin) नामक हारमोन का स्रावण करती हैं। इस प्रकार यह एक अन्तःस्रावी ग्रन्थि होती है।

यदि अण्डाणु का निषेचन (फैलोपियन नलिका में) हो जाता है तो यह प्रोजेस्ट्रान तथा रिलेक्सिन हारमोन का स्रावण करती रहती है अन्यथा निष्क्रिय होकर नष्ट होने लगती है। कार्पस ल्यूटियम की अपभ्रष्ट (Degenerate) हुई रचना को कार्पस एल्बिकैन्स (Corpus Albicans) कहते हैं। यह अन्त में समाप्त हो जाती है।

कार्य-

  1. पीत पिण्ड (Corpus Luteum) द्वारा स्रावित प्रोजेस्टरोन हारमोन भ्रूण के सफल परिवर्धन के लिए गर्भ को बनाये रखता है। इसलिये उसे सगर्भता हारमोन (Pregnancy Hormone) भी कहते हैं।
  2. भ्रूणीय परिवर्धन पूर्ण हो जाने के उपरान्त शिशु के जन्म के लिए पीत पिण्ड (Corpus Luteum) द्वारा रिलेक्सन (Relaxin) हारमोन उत्पन किया जाता है।

प्रश्न 20.
मानव में मादा के विभिन्न जनन अंगों के महत्त्वपूर्ण कार्य लिखिए।
उत्तर:
मानव में मादा के विभिन्न जनन अंगों के महत्त्वपूर्ण कार्य

अंग का नाम (Name of Organ)जनन अंगों के कार्य (Functions of Reproductive organ)
1. अण्डाशय (Ovary)अंडों का निर्माण करता है।
2. अण्डवाहिनियाँ Oviducts)निषेचन स्थल, निषेचित अंड/भू को गर्भाशय में स्थानान्तरित करती है।
3. गर्भाशय (Uterus)आन्तरिक परत भ्रूण को ग्रहण करती है और उसे पोषण प्रदान करती है। मांसल भित्ति के संकुचनी प्रसव के दौरान शिशु को बाहर निकालने में सहायता करती है।
4. गर्भ ग्रीवा (Cervix)जलीय श्लेष्म उत्पन्न करती है जो शिश्न के लिये एक स्नेहक प्रदान करता है जिसमें स्खलन के पश्चात् शुक्राणु तैरते हैं।
5. योनि (Vagina)लैंगिक समागम के दौरान शिश्न को ग्रहण करती है व प्रसव के दौरान शिशु को निकालने के लिए नलिका का काम करती है।
6. क्लाइटोरिस (Clitoris)नर शिश्न के समजात।

प्रश्न 21.
25 प्राथमिक शुक्र कोशिकाएँ व 25 प्राथमिक अण्ड कोशिकाओं से कितने शुक्राणु व अण्डाणु बनेंगे? कारण सहित समझाइए ।
उत्तर:
1000 शुक्राणु व 25 अण्डाणु बनेंगे। शुक्रजनन में प्रथम एवं द्वितीय परिपक्व विभाजन केन्द्रक एवं कोशिकाद्रव्यी विभाजन में समान होते हैं एवं परिणामस्वरूप चार समान शुक्राणु निर्मित होते हैं। होता है। अतः 25 प्राथमिक कोशिकाओं से 100 शुक्राणुओं का निर्माण जबकि अण्डजनन में दोनों परिपक्वन विभाजन असमान कोशिकाद्रव्यी विभाजन दर्शाते हैं तथा इसके फलस्वरूप एक बड़ी अण्डाणु कोशिका तथा तीन ध्रुवकायों का निर्माण होता है। तीनों ध्रुवकाय नष्ट हो जाती हैं, केवल एक अण्डाणु शेष रहता है। अतः 25 प्राथमिक अण्ड कोशिकाओं से 25 अण्डाणुओं का निर्माण होता है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

प्रश्न 22.
शुक्रजनन का क्या महत्व है?
उत्तर:
शुक्रजनन का निम्न महत्त्व है-

  1. शुक्रजनन क्रिया के फलस्वरूप अगुणित युग्मक अर्थात् शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
  2. इस क्रिया से पैतृक के आनुवंशिक गुण शुक्राणु में गुणसूत्रों एक समुच्चय के रूप में आ जाते हैं। यह निषेचन अण्डाणु में प्रवेश करते हैं।
  3. इस क्रिया से बनी अगुणित, पुच्छयुक्त संरचना होती है। यह द्रवीय माध्यम में सरलता से गति करने योग्य होते हैं।

प्रश्न 23.
शुक्रजनन व अण्डजनन में कोई चार समानताएँ लिखिये ।
उत्तर:
शुक्रजनन व अण्डजनन में समानताएँ-

  1. दोनों क्रियाएँ जनदों में जनन उपकला की प्राथमिक जनन कोशिकाओं द्वारा आरम्भ होती हैं।
  2. दोनों क्रियाओं में तीन प्रावस्थाएँ पाई जाती हैं गुणन प्रावस्था वृद्धि प्रावस्था व परिपक्वन प्रावस्था ।
  3. गुणन प्रावस्था के तहत दोनों में समसूत्री विभाजन द्वारा जनन कोशिकाओं की संख्यात्मक वृद्धि होती है।
  4. दाना क्रियाओं का परिपक्वन प्रावस्था में प्रथम एवं द्वितीय परिपक्वन विभाजन होते हैं जो अर्धसूत्रीय विभाजन होता है।

प्रश्न 24.
वयस्क की शुक्रवाहिनी को हटाकर उसके स्थान पर रबर की नलिका लगा दी जावे तो क्या प्रभाव पड़ेगा? समझाइए ।
उत्तर;
वयस्क में शुक्रवाहिनी को हटाकर उसके स्थान पर रबड़ की नलिका लगा दी जाती है तो शुक्राणुओं में गमन नहीं हो पायेगा क्योंकि शुक्रवाहिनी की कोशिकाएँ विशेष तरल पदार्थ का स्राव करती हैं जो शुक्रवाहिनी के मार्ग को शुक्राणुओं के गमन हेतु चिकना बनाती हैं । इसके साथ ही शुक्रवाहिनी की दीवार में पेशियों में तरंग गति उत्पन्न होती है जिससे शुक्राणु आगे बढ़ते हैं । अतः रबड़ की नलिका में शुक्राणुओं का गमन नहीं होगा ।

प्रश्न 25.
शुक्रजनक नलिकाओं (वर्धित) आरेखीय काट का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
शुक्रजनक नलिकाओं (वर्धित) के आरेखीय काट का चित्र-
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन 2

प्रश्न 26.
सर्टोली कोशिकाओं से क्या तात्पर्य है? इनका क्या कार्य है?
उत्तर:
सर्टोली कोशिकायें (Sertoli Cells) – इन्हें आलम्बन अथवा धात्री कोशिकायें (Nurse Cells) भी कहते हैं। ये कोशिकायें मुग्दाकार, संख्या में कम एवं आकार में बड़ी होती हैं। इनके स्वतन्त्र भाग में शुक्राणुपूर्व कोशिकायें (Spermatids ) सटकर लगी होती हैं।
सर्टोली कोशिकाओं का कार्य –

  • ये विकासशील जनन कोशिकाओं को सुरक्षा, आलम्बन तथा पोषण प्रदान करती हैं।
  • शुक्राणुपूर्व कोशिका के बेकार कोशिकाद्रव्य का विघटन करती हैं।
  • इनके द्वारा शुक्राणु उत्पादन प्रेरित करने वाले हारमोन की क्रिया का नियमन करने हेतु इन्हिबिन (Inhibin) हारमोन का स्रावण किया जाता है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

प्रश्न 27.
सगर्भता किसे कहते हैं? सगर्भता को बनाये रखने वाले हार्मोन्स के नाम लिखिए ।
उत्तर:
सगर्भता (Pregnancy) – भ्रूण का गर्भाशय की भित्ति से जुड़ना आरोपण कहलाता है और बाद में यह सगर्भता का रूप धारण कर लेती है। रजोधर्म का न आना ही सगर्भता का संकेत है। सगर्भता को बनाये रखने वाले हार्मोन्स निम्न हैं- मानव जरायु गोनेडोट्रापिन, मानव अपरा लेक्टोजन, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन आदि हार्मोन अपरा द्वारा स्रावित किये जाते हैं। सगर्भता के उत्तरार्द्ध की अवधि में अण्डाशय द्वारा रिलैक्सिन नामक एक हार्मोन भी स्रावित किया जाता है।

मानव जरायु गोनेडोट्रापिन मानव अपरा लेक्टोजन और रिलैक्सिन स्त्री में केवल सगर्भता की स्थिति में उत्पादित होते हैं। इसके अलावा दूसरे हार्मोनों जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, कॉर्टिसाल, प्रोलेक्टिन, थॉइराक्सिन आदि की भी मात्रा सगर्भता के दौरान माता के रक्त में कई गुणा बढ़ जाती है। इन हार्मोनों के उत्पादन में बढ़ोतरी होना भी भ्रूण वृद्धि, माता की उपापचयी क्रियाओं में परिवर्तनों तथा सगर्भता को बनाये रखने के लिए आवश्यक होता है।

प्रश्न 28.
यदि निषेचन पश्चात् स्त्री के अण्डाशय को काटकर हटा दिया जावे तो गर्भ पर क्या प्रभाव होगा? समझाइए ।
उत्तर:
अण्डाशय में उपस्थित कार्पस ल्यूटियम एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रान तथा रिलैक्सिन हार्मोन्स का सक्रिय स्रावण करता है। यही गर्भाशय की दीवार के संकुचन को रोक कर गर्भ की सुरक्षा करता है। इसलिए गर्भधारण के बाद लगभग 6 सप्ताह तक कॉर्पस ल्यूटियम का सक्रिय रहना आवश्यक है। यदि इस दौरान अण्डाशय को हटा दिया जाये तो गर्भपात ( abortion) हो जाता है। लगभग 6 सप्ताह के गर्भकाल के पश्चात् अपरा (Placenta ) से ही एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्ट्रोन की मात्रा स्रावित होने लगती है जिससे गर्भपात की आशंका समाप्त हो जाती है अतः अब अण्डाशयों को हटा दिया जाए तो गर्भपात नहीं होगा ।

प्रश्न 29.
वीर्यसेचन को परिभाषित करते हुए निषेचन क्रिया को समझाइए ।
उत्तर:
वीर्यसेचन (Insemination ) – स्त्री एवं पुरुष के संभोग मैथुन के दौरान शिश्न द्वारा शुक्र (वीर्य) स्त्री की योनि में छोड़ना वीर्यसेचन कहलाता है । निषेचन क्रिया- गतिशील शुक्राणु तेजी से तैरते हुए गर्भाशय ग्रीवा से होकर गर्भाशय में प्रवेश करते हैं और अन्त में अण्डवाहिनी नली के संकीर्ण पथ (इस्थमस) तथा तुंबिका (Ampulla) के संधिस्थल तक पहुँचते हैं।

इसी बीच अण्डाशय द्वारा मोचित अंडाणु भी इस संधिस्थल तक पहुँच जाता है, जहाँ निषेचन की क्रिया सम्पन्न होती है। निषेचन तभी हो सकता है जब अण्डाणु तथा शुक्राणु दोनों एक ही समय में तुंबिका – संकीर्ण पथ के संधिस्थल पर पहुँच जाएँ। यही कारण है जिससे कि संभोग क्रियाएं निषेचन व सगर्भता की स्थिति में नहीं पहुँच पाती हैं।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन 3

शुक्राणु के साथ एक अण्डाणु के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन (Fertilization) कहते हैं। निषेचन के दौरान एक शुक्राणु अण्डाणु के पारदर्शी अण्डावरण (Zona Pellucida ) स्तर के सम्पर्क में आता है। देखिए चित्र में और अतिरिक्त शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकने हेतु उसके उक्त स्तर में बदलाव प्रेरित करता है।

इस प्रकार यह सुनिश्चित हो जाता है कि एक अण्डाणु को केवल एक ही शुक्राणु निषेचित कर सकता है। अग्रपिण्डक (Acrosome ) का स्रवण शुक्राणु की पारदर्शी अंडावरण के माध्यम से अंडाणु के कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) तथा प्लाज्मा भित्ति से प्रवेश करने में मदद करता है। यह द्वितीयक अंडक के अर्द्धसूत्री विभाजन को प्रेरित करता है।

दूसरा अर्धसूत्री विभाजन भी असमान होता है और इसके फलस्वरूप द्वितीयक ध्रुवीय पिंड (Secondary Polar Body ) की रचना होता है और एक अगुणित अंडाणु बनता है। शीघ्र ही शुक्राणु का अंडाणु के अगुणित केन्द्रक के साथ संलयन (Fusion ) होता है, जिससे कि द्विगुणित युग्मनज (Diploid Zygote) की रचना होती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

प्रश्न 30.
स्तन ग्रन्थि का आरेखीय काट का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए एवं दुग्ध स्रवण को समझाइए ।
उत्तर:
स्तन ग्रन्थि का पाया जाना सभी मादा स्तनधारियों का लक्षण है। मादा (स्त्री) में एक जोड़ी स्तन ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। प्रत्येक स्तन ग्रन्थि में ग्रन्थिल ऊतक एवं वसीय ऊतक होता है। स्तन का ग्रन्थिल ऊतक 15-20 स्तन पालियों (Mammary lobes) में विभक्त होता है। इसमें कोशिकाओं के गुच्छ होते हैं, जिन्हें कूपिका (alveoli) कहते हैं। इन कूपिकाओं की कोशिकाओं के द्वारा दूध का स्रावण किया जाता है।

यह दूध कूपिकाओं की गुहाओं ( अवकाशिकाओं) में संग्रह किया जाता है। ये कूपिकाएँ स्तन नलिकाओं (Mammary tubules) में खुलती हैं। प्रत्येक पाली की नलिकाएँ मिलकर स्तन वाहिनी (Mammary ducts) का निर्माण करती हैं। विभिन्न स्तन वाहिनियाँ (Mammary ducts) मिलकर एक वृहद् स्तन तुंबिका (ampulla) बनाती हैं जो दुग्ध वाहिनी (Lactiferous duct) से जुड़ी होती हैं। जिससे कि दूध स्तन से बाहर निकलता है।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन 4

दुग्ध स्रवण (Lactation) –
सगर्भता की अवस्था में प्रोजेस्ट्रान व एस्ट्रोजन हार्मोन्स के प्रभाव से स्तन ग्रन्थियों की वृद्धि से स्त्री के वक्ष बड़े आकार के हो जाते हैं। प्रोलेक्टिन के प्रभाव से शिशु जन्म के 24 घण्टे के अन्दर दुग्ध ग्रन्थियों से दुग्ध स्रावण (Lactation) हो जाता है। प्रारम्भ में वक्ष की चूचुकों से कोलस्ट्रम (Colstrum) का स्राव होता है। यह पीले रंग का होता है जिसमें ग्लोबुलिन प्रोटीन (Globulin Protein) काफी मात्रा में होता है। इसमें माता की एण्टीबॉडीज (Antibodies) होती है जो नवजात शिशु की संक्रमण से रक्षा करती है।

प्रश्न 31.
मानव शुक्राणु (Human Sperm) की सूक्ष्मदर्शीय संरचना का नामांकित चित्र बनाइये ।
उत्तर:
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प्रश्न 32.
मनुष्य के अण्डाशय की काट का एक नामांकित चित्र बनाइए जिसमें ग्राफी पुटिका की विभिन्न अवस्थाएँ प्रदर्शित हों ।
उत्तर:
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प्रश्न 33.
एक परिपक्व ग्रेफियन पुटिका ( Mature Graffian Follicle) का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
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प्रश्न 34.
शुक्र कोशिका निर्माण (Spermatogenesis) एवं शुक्र कायान्तरण ( Spermiogenesis) में कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर:
शुक्र कोशिका निर्माण एवं शुक्र कायान्तरण में अन्तर

शुक्र कोशिका निर्माण (Spermatogenesis)शुक्र कायान्तरण (Spermiogenesis)
1. यह पूर्व शुक्राणु निर्माण की द्वितीय प्रावस्था होती है।यह पूर्व शुक्राणु निर्माण के पश्चात् की प्रावस्था होती है।
2. इ समें स्पर मे टो गो निया (Spermatogonia) से प्राथमिक शुक्र कोशिकाएँ (Primary Spermatocytes) बनती हैं।इसमें स्पर मेट्ट्स् (Spermatids) से परिपक्व अगुणित शुक्राणुओं (Sperms) का निर्माण होता है।
3. यह शुक्रजनन कोशिकाओं की वृद्धि में भाग लेता है।इस क्रिया में कोशिकाओं का स्थानान्तरण होता है।
4. इ समें अनेक प्रक्रिया सम्मिलित होती हैं।यह शुक्राणु निर्माण की अन्तिम प्रावस्था है।

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प्रश्न 35.
दिये गये चित्र का अध्ययन कीजिए और पूछे जा रहे प्रश्नों का उत्तर दीजिए-
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(अ) चित्र में प्रदर्शित मानव भ्रूण की अवस्था का नाम लिखिए ।
(ब) चित्र ‘a’ नामांकित भाग का नाम लिखिए एवं उसका कार्य लिखिए ।
(स) गर्भाशय के भीतर अन्तर्रोपित होने के बाद भीतरी कोशिका संहति का क्या होता है? लिखिए।
(द) इस भ्रूणम में स्टेम (मूल) कोशिकाएँ कहाँ हैं?
उत्तर:
(अ) ब्लास्टोसिस्ट (Blastocyst)
(ब) ट्रोफोब्लास्ट ( Trophoblast), कार्य-ट्रोफोब्लास्ट भ्रूण को सुरक्षा एवं पोषण उपलब्ध करवाती है।
(स) यह वास्तविक भ्रूण बनाती है।
(द) स्टेम (मूल) कोशिकाएँ भीतरी कोशिका संहति में है।

प्रश्न 36.
दिये गये चित्र के आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
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  • शुक्राणुजनन की क्रिया किस कोशिका में होती है? नाम लिखिए।
  • ‘a’ तथा ‘b’ कोशिकाओं के नाम लिखिए। गुणसूत्रों की संख्या के आधार पर दोनों में क्या अन्तर होता है?
  • समसूत्री कोशिका को चिन्हित कर नाम लिखिए ।
  • ‘f’ कोशिका क्या है? इसका कार्य लिखिए।
  • उपरोक्त चित्र किस संरचना का भाग है? नाम लिखिए।

उत्तर:

  • ‘d’ शुक्राणु पूर्वी (Spermatid)
  • ‘a’ स्पर्मेटोगोनिया (Spermatogonia) ‘b’ प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट (Primary Spermatocyte), दोनों कोशिकाएँ द्विगुणित (Diploid) होती है। प्रत्येक में गुणसूत्र 46 होते हैं ।
  • समसूत्री विभाजन-‘e’
  • ‘T’ कोशिका – सर्टोली कोशिका (Sertoli Cell) कार्य – विकासशील शुक्राणुओं को पोषण एवं आलम्बन प्रदान करती है।
  • शुक्रजनन नलिका (Seminiferous tubule)

प्रश्न 37.
मानव गर्भाशय की पेशीय तथा ग्रन्थीय परतों के नाम लिखिए। रजोचक्र के दौरान इनमें से किस परत में चक्रीय परिवर्तन होता है? इस परत के बने रहने के लिए अनिवार्य हार्मोन का नाम लिखिए।
उत्तर:
मानव गर्भाशय की पेशीय तथा ग्रन्थीय परतें निम्न हैं-

  1. एपिमेट्रियम (Epimatrium) – यह बाह्य तथा विसरल पेरीटोनियम से बनी होती है।
  2. मायोमेट्रियम (Myomatrium) – यह मध्य चिकनी कोशिकाओं से बनी होती है।
  3. एण्डोमेट्रियम (Endomatrium) – यह सबसे अन्दर की परत है जो ग्रन्थिल होती है।

रजोचक्र के दौरान एण्डोमेट्रियम परत में चक्रीय परिवर्तन होते हैं। इस परत के बने रहने के लिए अनिवार्य हार्मोन निम्न हैं- FSH, LH, तथा एस्ट्रोजन ।

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प्रश्न 38.
लेडिग कोशिकाएँ कहां पाई जाती हैं? प्रजनन में इनकी क्या भूमिका है?
उत्तर:
वृषण में शुक्रजनन नलिकाओं (Seminiferous tubules) के बाहर संयोजी ऊतक में धँसी हुई अनेक कोशिकाओं के समूह पाये जिन्हें लेडिंग कोशिकाएँ कहते हैं। इन्हें अन्तराली कोशिकाएँ (Interstial Cells) भी कहते हैं । इनके द्वारा नरलिंगी हार्मोन (male sex hormone) पुंजन ( एन्ड्रोजन) स्रावित किया जाता है ।

प्रश्न 39.
रजोदर्शन ( Menarch) तथा रजोनिवृत्ति (Menopause) में क्या अन्तर है?
उत्तर:
रजोदर्शन तथा रजोनिवृत्ति में अन्तर

रजोदर्शन (Menarch)रजोनिवृत्ति (Menopause)
किसी बालिका के जीव काल में प्रथम बार रजोधर्म य ॠतुस्राव (Menstrual होने को रजोदर्श (Menarch) कहते हैं।स्त्री में स्थायी रूप से ऋतु स्राव चक्रों के रुकने को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं।
यह 12-13 वर्ष की आयु मे प्रारम्भ होता है।स्त्रियों में ॠतुसाव चक्र सामान्यतः 45-50 वर्ष की आयु में रुक जाता है।

प्रश्न 40.
मानव शिशु में यदि वृषणों का वृषण कोषों में स्थानान्तरण नहीं हुआ तो युवावस्था में जनन की कौनसी क्रिया प्रभावित होगी? कारण बताइये ।
उत्तर:
युवा अवस्था में शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) की क्रिया प्रभावित होगी। शुक्राणुजनन के लिए तापमान शरीर के तापक्रम से 2- 2.5 डिग्री सेंटीग्रेड कम होना चाहिए। यदि वृषण कोष में स्थानान्तरित नहीं होते हैं तो अधिक तापमान के कारण शुक्राणुओं ( Sperms) का निर्माण नहीं होगा।

प्रश्न 41.
25 प्राथमिक शुक्र कोशिकाओं तथा 25 प्राथमिक अण्ड कोशिकाओं से बनने वाले शुक्राणुओं तथा अण्डाणुओं का अनुपात कितना होगा? कारण सहित समझाइए ।
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प्रश्न 42.
सजीव प्रजक प्राणियों की संतानों का उत्तर जीवन अधिक जोखिमपूर्ण नहीं होता है। दो कारण बताते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
अथवा
सजीव प्रजक जीवों में संतानों की उत्तर जीविता की अधिक सम्भावनाएँ हैं। कारण सहित समझाइए ।
उत्तर:
सजीव प्रजक जीवों में (अधिकतर स्तनधारी जिनमें मानव शामिल हैं) मादा जीव के शरीर के भीतर युग्मनज विकसित होकर शिशु का विकास करता है और एक निश्चित अवधि एवं विकास के चरणों को पूरा करने के बाद मादा जीव के शरीर से प्रसव द्वारा पैदा किये जाते हैं। भ्रूणीय सही देखभाल तथा संरक्षण के कारण सजीव प्रजक जीवों के उत्तरजीवित रहने के सुअवसर बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 43.
मानव मादा जनन तंत्र को समझाइए ।
उत्तर:
स्त्रियों में एक जोड़ी अण्डाशय (Ovary) प्राथमिक जननांगों (Primary Sex Organs) के रूप में होते हैं। इसके अतिरिक्त अण्डवाहिनी (Oviduct), गर्भाशय (Uterus), योनि (Vagina), भग (Vulva), जनन ग्रन्थियाँ (Reproductive glands) तथा स्तन या छाती (Breast) सहायक जननांगों का कार्य करते हैं।
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(1) अण्डाशय (Ovary)-स्त्रियों में अण्डाशय की संख्या दो होती है, जिनकी आकृति बादाम के समान होती है। प्रत्येक अण्डाशय की लम्बाई लगभग 2 से 4 से. मी. होती है। दोनों अण्डाशय उदरगुहा में वृक्कों के काफी नीचे श्रोणि भाग (Pelvic region) में पीछे की ओर गर्भाशय (Uterus) के इधर-डधर स्थित होते हैं।

प्रत्येक अण्डाशय उदरगुहीय पेरीटोनियम के वलन से बनी मीसोविरियम (Mesovarium) नामक झिल्लीनुमा मीसेन्ट्री (Mesentery) द्वारा श्रोणि भाग की दीवार से टिका होता है। ऐसे ही एक झिल्ली अण्डाशयी लिगामेन्ट (Ovarian Ligament) प्रत्येक अण्डाशय को दूसरी ओर से गर्भाशय से जोड़ती है।

अण्डाशय की संरचना-प्रत्येक अण्डाशय भी वृषण के समान तीन स्तरों से घिरा होता है। बाहरी स्तर को ट्यूनिका एलब्यूजिनिया (Tunica Albuginea) कहते हैं। यह संयोजी ऊतक का महीन स्तर होता है। आन्तरिक स्तर को ट्यूनिका प्रोपरिया (Tunica Propria) कहते हैं तथा इनके बीच वाले स्तर को जनन उपकला (Germinal Epithelium) कहते हैं।

जनन उपकला घनाकार कोशिकाओं का बना होता है। अण्डाशय के बीच वाला भाग जो तन्तुमय होता है तथा संवहनीय संयोजी ऊतक (Vascular Connective Tissue) का बना होता है उसे स्ट्रोमा कहते हैं। स्ट्रोमा दो भागों में विभक्त होता है जिन्हें क्रमशः परिधीय वल्कुट (Peripheral Cortex) एवं आंतरिक मध्यांश (Internal Medulla) कहते हैं।

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अण्डाशय के वल्कुट (Cortex) भाग में अनेक अण्ड पुटिकाएँ (Ovarian Follicles) पायी जाती हैं। जिनका निर्माण जनन उपकला से होता है। पुटिकाएँ बहुकोशिकीय झिल्ली मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा (Membrana Granulosa) से घिरी होती हैं। जिसके भीतर फॉलीक्यूलर गुहा (Follicular Cavity) होती है जो फॉलीक्यूलर द्रव (Follicular Fluid) से भरी होती है।

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इस गुहा में अण्ड कोशिका (Ovum) होती है जो चारों ओर अनेक फॉलीकुलर कोशिकाओं से घिरी रहती है। इन कोशिकाओं को जोना पेल्यूसिडा (Zonapellucida) एवं चारों ओर के मोटे स्तर को कोरोना रेडिएटा (Corona Radiata) कहते हैं। इस संरचना को अब परिपक्व ग्राफियन पुटिका (Mature Graatian Follicle) कहते हैं। परिपक्व ग्राफियन पुटिका अण्डाशय की सतह पर पहुँच कर फट जाती है तथा अण्ड बाहर निकलकर उदरीय गुहा में आ जाता है। इस क्रिया को डिम्बोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं।

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(2) अण्डवाहिनी (Oviduct)-स्त्री में दो अण्डवाहिनियाँ होती हैं जो अण्डाणु को अण्डाशय से गर्भाशय तक पहुँचाती हैं। प्रत्येक अण्डवाहिनी की लम्बाई 10-12 से.मी. होती है। अण्डवाहिनी का स्वतन्त्र सिरा जो अण्डाशय के निकट होता है, कीप रूपी (Funnellike) एवं चौड़ा होता है तथा इसे आस्टियम (Ostium) कहते हैं।

आस्टियम या मुखिका का किनारा झालरदार (Fimbriated) एवं रोमाभि (Ciliated) होता है। अतः मुखिका को फिम्ब्रिएटेड कीप (Fimbriated Funnel) भी कहते हैं। अण्डोत्सर्ग के बाद अण्ड अण्डाशय से निकलकर उदरगुहा में आकर इसी फिम्ब्रिएटेड कीप के द्वारा फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में चला जाता है। फैलोपियन नलिका की भित्ति पेशीयुक्त होती है तथा भीतर से अत्यन्त वलित (Folded) होती है। निषेचन की क्रिया फैलोपियन नलिका में ही होती है। प्रत्येक फैलोपियन नलिका अपनी ओर के गर्भाशय (Uterus) में अपने पश्च अन्त द्वारा खुलती है।

(3) गर्भाशय (Uterus)-इसे बच्चादानी (वुम्ब) भी कहते हैं। इसकी आकृति उल्टी नाशपाती के समान होती है। यह श्रोणि भित्ति से स्नायुओं द्वारा जुड़ा होता है। यह लगभग 7.5 से.मी. लम्बा, 3 से.मी, मोटा तथा अधिकतम 5 से.मी, चौड़ा खोखला तथा शंक्वाकार अंग होता है। इसका संकरा भाग नीचे की ओर तथा चौड़ा भाग ऊपर की ओर होता है।

इसके पीछे की ओर मलाशय (Rectum) तथा आगे की ओर मूत्राशय (Urinary Bladder) होता है। गर्भाशय की भित्ति, फतकों की तीन परतों से बनी होती हैबाहरी पताली झिल्लीमय स्तर को परिगभांशय (पेरिमेट्रियम), मध्य मोटी चिकनी पेशीख स्तर को गभाँशय पेशी स्तर (मायोमैट्रियम) और आन्तरिक ग्रान्थल स्तर को गर्भाशय अन्तःस्तर (एंड्रोमैट्रियम) कहते हैं जो गभाशएय गुहा को आस्तरित करती है। आतंव चक्र (Menstrual Cycle) के चक्र के दौरान गर्भाशब के अन्तःस्तर में चक्रीय परिवर्तन होते हैं, जबकि गभांशय पेशी स्तर में प्रसव के समय काफी तेज संकुचन होंता है।

गर्भाशाब को तीन भागों में विभेदित किया गया है-

  • फण्डस (Fundus)-ऊपर की और उभरा हुआ भाग फण्डस कहलाता है।
  • काय (Body)-बीच का प्रमुख भाग ग्रीवा (Cervix) कहलाता है।
  • ग्रीवा (Cervix)-सबसे निचला भाग ग्रीवा (Cervix) कहलाता है जो योनि से जुड़ा होता है।

भूण का विकास गर्भाशय (Uterus) में होता है। शूण अपरा (Placenta) की सहायता से गर्भाशय की भित्ति से संलग्न होता है। यहाँ भ्रूण को सुरक्षा एवं पोषण प्राप्त होता है।

(4) योनि (Vagina)-गर्भाशय ग्रीवा (Cervix Uteri) आगे बढ़कर एकपेशीय लचीली नलिका रूपी रचना का निर्माण करती है जिसे योनि (Vagina) कहते है। योनि स्त्रियों में मैथुन अंग (Copulatory organ) की तरह कार्य करती है। इसके अतिरिक्त योनि गर्भाशाय से उत्पन्न मास्तिक स्राव को निक्कासन हेतु पथ उपलख्ब करवाती है एवं शिशु जन्म के समय गर्भस्थ शिशु के बाहर निकालने के लिए जन्मनाल (Birth Canal) की तरह कार्य करती है।

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(5) बाद्य जननांग (External Genitila)-स्त्रियों के बाह्ष जननांग निम्न हैं-

(i) जघन शौल (Mons Pubis)-यह प्यूबिस लिम्फाइसिस के ऊपर स्थित होता है जो गद्दीनुमा होता है क्योंकि इसकी त्वचा के नीचे वसीय परत होती है। तरुण अवस्था में इस पर घने रोम उग आते हैं जो अन्त तक रहते हैं।

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(ii) वृहद् भगोष्ठ (Labia Majora)-ये जघन शैल (प्यूबिस मुंड) से नीचे की तरफ व पीछे की ओर से विस्तृत एक जोड़ी बड़े अनुद्रै्घ्य वलन होते हैं। इनकी बाह्य सतह पर रोम पाये जाते हैं।

(iii) लघु भगोष्ठ (Labia Minora)-ये आन्तरिक व छोटे वलन होते हैं। इन पर रोम नहीं पाये जाते हैं। लेबिया माइनोरा प्रघाण (Vestibule) को घेरे रहते हैं।

(iv) भगशेफ या क्लाइटोरिस (Clitoris)-यह जघन शैल (Mons Pubis) लेबिया माइनोरा के अग्र कोने पर स्थित एक संवेदी तथा घुण्डीनुमा अथवा अंगुलीनुमा रचना है। यह नर के शिश्न के समजात अंग है। यह अत्यधिक संवेदनशील होता है क्योंक इसमें स्पर्शकणिकाओं की अधिकता पायी जाती है।

(v) योनिच्छद (Hymen)-योनि द्वार पर पतली झिल्ली पाई जाती है जिसे योनिच्छद (Hymen) कहते हैं। यह लैंगिक सम्पर्क, शारीरिक परिश्रम एवं व्यायाम के कारण फट जाती है। बार्थोलिन की ग्रन्थियाँ (Bartholian Glands)-योनिद्वार के दोनों ओर एक-एक सेम की आकृति की ग्रन्थि लेबिया मेजोरा पर स्थित होती है। ये ग्रन्थियाँ एक क्षारीय व स्रेहक द्रव का स्राव करती हैं जो कि भग (Vulva) को नम रखता है एवं लैंगिक परस्पर व्यवहार को सुगम बनाता है।

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(6) स्तनग्रन्थि (Mammary Glands)-स्त्री में स्तन ग्रन्थियों (Mammary Glands) से युक्त एक जोड़ी स्तन उपस्थित होते हैं। ये वक्ष के सामने की तरफ अंसीय पेशियों (Pectoral Muscles) के ऊपर स्थित होते हैं। प्रत्येक स्तन ग्रन्थि में भीतर का संयोजी ऊतक $15-20$ नलिकाकार कोष्ठकीय पालियों का बना होता है। इनके बीच-बीच में वसीय ऊतक होता है। प्रत्येक पाली में अंगूर के गुच्छों के समान दुग्ध ग्रन्थियाँ होती हैं जो दुग्ध का स्राव करती हैं। यह दूध नवजात शिशु के पोषण का कार्य करता है।

प्रत्येक पालिका से निकली कई छोटी वाहिनियां एक दुग्ध नलिका या लैक्टीफेरस नलिका (Lactiferous Duct) बनाती हैं। ऐसी कई दुग्ध नलिकाएँ स्वतन्त्र रूप से आकर चूचुक (Nipples) में खुल जाती हैं। चूचुक स्तनग्रन्थियों के शीर्ष भाग पर उभरी हुई वर्णांकित (Pigmented) रचना है। इसके आसपास का क्षेत्र भी गहरा वर्णांकित हो जाता है। इस क्षेत्र को स्तन परिवेश (Areola Mammae) कहते हैं। स्त्रियों में चूचुक के चारों तरफ का क्षेत्र वसा के जमाव तथा पेशियों के कारण काफी उभरा हुआ होता, है। चूचुक में 0.5 मिमी. के 15-25 छिद्र पाये जाते हैं। पुरुषों में चूचुक अवशेषी होते हैं।

प्रश्न 44.
शुक्राणु जनन एवं अण्ड जनन में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न के निबन्धात्मक प्रश्न क्रमांक 8 का अवलोकन करें।

शुक्रजनन (Spermatogenesis)अण्डजनन (Oogenesis)
1. यह क्रिया वृषणों (Testes) में सम्पन्न होती है।यह क्रिया अण्डाशय (Ovaries) में सम्पन्न होती है।
2. शुक्रजनन की क्रिया प्राणी में जीवन पर्यन्त जारी रहती है।यह क्रिया एक निश्चित आयु के पश्चात् बन्द हो जाती है।
3. इस क्रिया में सभी शुक्रजनक कोशिकाएँ शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।के वल एक अण्ड जनक कोशिका अण्डाणु का निर्माण करती है। अन्य अनेक अण्डजनक कोशिकाएँ वृद्धि प्रावस्था में नष्ट हो जाती हैं।
4. दोनों परिपक्वन विभाजन वृषण में ही होते हैं।दोनों परिपक्वन विभाजन या कम से कम द्वितीय परिपक्वन विभाजन अण्डाशय से बाहर होते हैं।
5. वृद्धि प्रावस्था छोटे अन्तराल की एवं कम वृद्धि होती है।वृद्धि प्रावस्था लम्बे समय तक जारी रहती है एवं अधिक वृद्धि होती है।
6. इस क्रिया में एक शुक्रजनन कोशिका से चार पूर्व शुक्राणु कोशिकाओं का निर्माण होता है ।इस क्रिया में एक ऊगोनिया से एक अण्डाणु एवं तीन ध्रुवकाय निर्मित होती हैं।
7. इस क्रिया में प्रथम एवं द्वितीय परिपक्वन विभाजन समान होते हैं एवं परिणामस्वरूप चार समान शुक्राणु (Sperm) निर्मित होते हैं। ये चारों ही स्वतन्त्र जनन इकाई होते हैं।दोनों परिपक्वन विभाजन असमान होते हैं तथा इसके फलस्वरूप एक बड़ी अण्डाणु कोशिका तथा तीन ध्रुवकाय का निर्माण होता है। इसमें केवल अण्डाणु (Ovum) ही स्वतन्त्र जनन इकाई है।
8. शुक्राणु निर्माण में कायान्तरण की क्रिया होती है।इसमें कायान्तरण नहीं होता।
9. शुक्राणु पीतक रहित एवं गतिशील होते हैं।अण्डाणु पीतकयुक्त एवं गतिहीन होते हैं।

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प्रश्न 45.
वृषण के अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए ।
उत्तर:
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प्रश्न 46.
यदि पीतपिंड निष्क्रिय हो जाये तो भ्रूण परिवर्धन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? कारण सहित समझाइए ।
उत्तर:
पीतपिंड भारी मात्रा में प्रोजेस्ट्रॉन स्रावित करता है, जो कि गर्भाशय अंतःस्तर को बनाए रखने के लिये आवश्यक है। इस प्रकार गर्भाशय अंतःस्तर निषेचित अण्डाणु के अंतर्रोपण (inplantation) तथा सगर्भता की अन्य घटनाओं के लिये आवश्यक है। यदि पीतपिंड निष्क्रिय हो जाये तो यह अंत: स्तर का विखंडन कर देता है, जिससे फिर से रजोधर्म का नया चक्र शुरू हो जाता है यानी माहवारी पुनः होती है।

प्रश्न 47.
एक स्त्री जिसे आगे गर्भावस्था नहीं चाहिए, वह किस स्थाई विधि को अपनाएगी और क्यों?.
उत्तर:
शल्यक्रिया का उपयोग किया जाता है। महिलाओं के लिये डिंबनलिका उच्छेदन ( Tubectomy) का प्रयोग करते हैं। इसमें स्त्री के उदर में छोटा-सा चीरा लगाकर अथवा योनि द्वारा डिंबवाहिनी नली का छोटा-सा भाग निकाल या बांध दिया जाता है। यह शल्यक्रिया प्रभावशाली है और इसका कोई दुष्परिणाम भी नहीं है।

प्रश्न 48.
मानव के यौवनारम्भ के पश्चात् होने वाली लैंगिक जनन की चार जनन घटनाओं के नाम दीजिए ।
उत्तर:
निम्न चार जनन घटनाएँ होती हैं-

  • युग्मकजनन
  • युग्मक स्थानान्तरण
  • निषेचन
  • भ्रूणोद्भव ।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1.
मानव शुक्राणु (Sperms) की संरचना का वर्णन कीजिए ।
अथवा
शुक्राणु की संरचना का सचित्र वर्णन करिये तथा शुक्राणुजनन को परिभाषित कीजिये ।
उत्तर:
शुक्राणुओं की आकृति भिन्न-भिन्न जाति में भिन्न-भिन्न प्रकार की होती है। जैसे अस्थिल मछलियों में गोलाकार, मनुष्य में चमचाकार (Spoon-shaped), चूहों में हुक के आकार के व पक्षियों में सर्पिलाकार होते हैं।

शुक्राणु के चार भाग पाये जाते हैं-

  1. शीर्ष (Head)
  2. ग्रीवा (Neck)
  3. मध्य भाग (Middle piece)
  4. पूँछ (Tail)

(1) शीर्ष (Head) – मनुष्य में शीर्ष तिकोना एवं चपटा होता है। इसकी आकृति केन्द्रक की आकृति पर निर्भर होती है। शीर्ष भाग अंग्र दो संरचनाओं से मिलकर बना होता है-

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(i) केन्द्रक (Nucleus) – शुक्राणु के शीर्ष का अधिकांश भाग केन्द्रक द्वारा घिरा होता है। केन्द्रक में प्रमुख रूप से ठोस क्रोमेटिन पदार्थ पाये जाते हैं। DNA अत्यधिक संघनित अवस्था में होता है।

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(ii) अग्रपिंडक / एक्रोसोम (Acrosome ) – केन्द्रक के अग्र भाग में टोपी के समान रचना पाई जाती है जिसे एक्रोसोम कहते हैं। टोपी के समान एक्रोसोम पाया जाता है। यह स्पर्मलाइसिन्स नामक पाचक एन्जाइम का स्रावण करता है । स्तनधारियों में इसके द्वारा हाएलोयूरोनाइडेज एन्जाइम एवं प्रोएक्रोसिन, एसिड फॉस्फेटेस, बाइन्डीन का स्रावण किया जाता है। प्रोएक्रोसिन, एक्रोसोम क्रिया द्वारा एक्रोसिन में बदल जाता है । ये दोनों एन्जाइम अण्डभेदन में सहायक होते हैं।

(2) ग्रीवा (Neck ) – शीर्ष एवं मध्य भाग के बीच जहाँ तारक केन्द्र उपस्थित रहते हैं, ग्रीवा क्षेत्र कहलाता है। इस भाग में तारककाय पायी जाती है। समीपस्थ तारककाय केन्द्रक के पश्च भाग में एक गर्त में स्थित होता है, जो निषेचन के बाद खण्डीभवन को प्रेरित करता है । इसके पास ही दूरस्थ तारककाय पाया जाता है।

(3) मध्यभाग (Middle Piece ) – यह भाग शुक्राणु का ऊर्जा कक्ष या इंजन कहलाता है । मध्य भाग दूरस्थ तारककाय से मुद्रिका तारककाय तक होता है जिसमें अक्षीय तन्तुओं के चारों ओर माइटोकॉन्ड्रिया के आपस में आंशिक समेकन के फलस्वरूप बनी सर्पिल कुण्डली के रूप में व्यवस्थित रहते हैं ।

स्तनधारियों में माइटोकॉन्ड्रिया के आपस में आंशिक समेकन के फलस्वरूप बनी सर्पिल कुण्डली को बेनकर्म आच्छद (Nebenkerm Sheath) कहते हैं । मध्य भाग द्वारा ही शुक्राणु की गति के लिये आवश्यक ऊर्जा प्रदान की जाती है। शीर्ष के पश्च भाग एवं सम्पूर्ण मध्य भाग को चारों ओर कोशिकाद्रव्य की महीन पर्त घेरे रहती है जिसे मेनचैट (Manchette) कहते हैं। मध्य भाग के अंत में एक मुद्रिका सेन्ट्रियोल पायी जाती है।

(4) पूँछ (Tail) – यह पश्च भाग होता है । यह जीवद्रव्य की झिल्ली से बनी नलिका की तरह होता है। इसके बीचोंबीच में एक अक्षीय सूत्र (Axial Filament) होता है। अक्षीय सूत्र आगे सेट्रिओल से जुड़ा रहता है तथा पीछे की तरफ झिल्ली से स्वतन्त्र रहता है जिसे अन्तिम  खण्ड (End Piece) कहते हैं । पूँछ की तरंग गति द्वारा शुक्राणु तरल मध्यम में तैरते रहते हैं । शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) – वृषण की जनन उपकला कोशिकाओं के समसूत्रीय व अर्धसूत्रीय विभाजन द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण शुक्रजनन कहलाता है ।

प्रश्न 2.
आर्तव चक्र किसे कहते हैं? इसकी विभिन्न घटनाओं को आरेख की सहायता से समझाइए ।
अथवा
आर्तव चक्र की और अवस्थाओं को चित्र बनाकर वर्णन कीजिए ।
अथवा
आर्तव चक्र की विभिन्न अवस्थाओं की व्याख्या कीजिए । आर्तव चक्र की विभिन्न अवस्थाओं का चित्रीय निरूपण कीजिए ।
उत्तर:
प्राइमेट्स मादाओं में पाये जाने वाले जनन चक्र को आर्तव चक्र या रजचक्र (Menstruation) कहते हैं। स्त्रियों में रजचक्र 28 दिन का होता है। प्रथम रजचक्र तरुणावस्था (Puberty) में प्रारम्भ होता है । इसे रजोदर्शन ( Menarche ) कहते हैं । इस चक्र के दौरान स्त्रियों की योनि मार्ग से महीने में एक बार रक्त का स्राव होता है। चालीस से पचास वर्ष की उम्र में यह चक्र लगभग समाप्त हो जाता है । इस अवस्था को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहते हैं । गर्भवती महिलाओं में रज चक्र अनुपस्थित होता है । आर्तव चक्र (Menstrual Cycle) में निम्न चार अवस्थायें पायी जाती हैं-

(1) आर्तव प्रावस्था / रजस्राव प्रावस्था (Menstrual Phase)- यह चक्र स्त्रियों में रजस्राव शुरू होने के पहले दिन से प्रारम्भ होता है। इसकी अवधि स्त्रियों में 3-5 दिन की होती है। इस प्रावस्था में गर्भाशय की एण्डोमीट्रियम (Endometrium) का अस्थायी स्तर जिसे स्ट्रेटम फंक्सनेलिस (Stratum Functionalis) कहते हैं ।

रक्तस्राव का प्रारम्भ ऐस्ट्रोजन ( Estrogen) एवं प्रोजेस्ट्रोन (Progesterone) हार्मोन की मात्रा में अचानक कमी हो जाने के कारण होता है। इस प्रावस्था में एन्डोमीट्रियम की रक्त कोशिकायें एवं ग्रन्थियां फट जाती हैं एवं रक्तस्राव प्रारम्भ हो जाता है। रक्त गर्भाशयी ऊतकों से बाहर योनि मार्ग द्वारा निकलता रहता है।

(2) पश्च आर्तव / पुटिकीय प्रावस्था (Follicular Phase) – यह अवस्था आर्तव एवं अण्डोत्सर्ग के बीच की अवस्था होने के कारण इस अवस्था को पूर्व अण्डोत्सर्ग (Pre-ovulatory Phase) कहते हैं स्त्री में इसकी अवधि 8-10 दिन की होती है। इस प्रावस्था में निम्न कार्य सम्पन्न होते हैं-

  • गर्भाशय की एन्डोमीट्रियम पुनः निर्मित होती है एवं टूटी रुधिर वाहिनी एवं ऊतकों की मरम्मत होती है।
  • गर्भाशयी एवं फैलोपियन नलिका की क्षतिग्रस्त म्यूकस झिल्ली की मरम्मत होती है।
  • गर्भाशय की दीवार में पेशियों की मोटाई तथा रक्त नलिकाओं व ग्रन्थियों की संख्या बढ़ जाती है।

इस प्रावस्था में एस्ट्रोजन हार्मोन स्राव अधिक होता है।

(3) अण्डोत्सर्ग प्रावस्था (Ovulatory Phase ) – इस प्रावस्था में अण्डोत्सर्ग होता है जो स्त्री में 14वें दिन होता है अर्थात् अण्डाशय में स्थित ग्राफियन पुटिका फट जाती है एवं परिपक्व अण्डा मुक्त हो जाता है । अण्डाणु मुक्त होने को ही अण्डोत्सर्ग कहते हैं। यह क्रिया LH (Luteinizing Hormone) द्वारा नियन्त्रित होती है। इस प्रावस्था में स्त्रियों के शरीर का तापमान बढ़ जाता है ।

(4) पश्च अण्डोत्सर्ग या ल्यूटियल प्रावस्था (Luteal Phase)- इसको पूर्व रज – स्राव प्रावस्था भी कहते हैं । यह प्रावस्था 15- 28 वें दिन तक चलती है । अण्डोत्सर्ग के पश्चात् फटी हुई ग्राफियन कोशिकाओं में वृद्धि होती है एवं कार्पस ल्यूटियम ( Corpus Luteum) का निर्माण करती है । यह कार्पस ल्यूटियम एक अन्तःस्रावी ग्रन्थि का कार्य करती है एवं इससे एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का अत्यधिक मात्रा में स्रावण किया जाता है। ये हार्मोन निषेचित अण्डाणु को गर्भाशय की भित्ति जुड़ने अर्थात् रोपण हेतु तैयार करते हैं।

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यदि निषेचन नहीं होता है, यह कॉर्पस ल्यूटियम जिसे पीत ग्रन्थि (Yellow gland) भी कहते हैं, धीरे-धीरे विघटित होकर एक श्वेत पदार्थ के रूप में परिवर्तित हो जाती है, जिसे कार्पस एल्बीकेन्स (Corpus Albicans) कहते हैं । एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्ट्रोन का स्राव कम हो जाता है एवं पुनः निर्मित एवं मोटी एन्डोमीट्रियम नष्ट होना प्रारम्भ हो जाती है एवं रजचक्र अथवा आर्तव चक्र प्रारम्भ हो जाता है।

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प्रश्न 3.
मनुष्य में नर जनन तन्त्र का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
पुरुषों में एक जोड़ी वृषण (Testis) प्राथमिक जननांग के रूप में होते हैं। इसके अतिरिक्त सहायक जननांग (Accessory Reproduction organs) मुख्यतया वृषणकोष (Scrotal Sac), अधिवृषण (Epididymis), शुक्रवाहिनियां (Vas-deferences), शिश्न (Penis) तथा प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland) एवं कॉउपर ग्रन्थि (Cowper’s Gland) पाये जाते हैं।

वृषण (Testis)-वृषण प्राथमिक जननांग होते हैं जिनका निर्माण भ्रूणीय मीसोडर्म (Mesoderm) से होता है। ये मीसोर्कियम (Mesorchium) की सहायता से उदरगुहा की पृष्ठभित्ति से जुड़े रहते हैं। वृषण संख्या में दो होते हैं। इनका रंग गुलाबी तथा आकृति में अण्डाकार होते हैं जिसकी लम्बाई 4 से 5 से.मी., चौड़ाई लगभग 2 से 3 से.मी. एवं वजन में 12 ग्राम होता है।

दोनों वृषण उदरगुहा के बाहर एक थैले में स्थित होते हैं जिसे वृषणकोष (Scrotal Sac) कहते हैं। वृषणकोष एक ताप नियंत्रक की भांति कार्य करता है। वृषणों का तापमान शरीर के तापमान से 2-2.5° C नीचे बनाये रखता है। यह तापमान शुक्राणुओं के विकास के लिए उपयुक्त होता है। वृषणकोषों की दीवार पतली, लचीली एवं रोमयुक्त होती है।

इसके अन्दर पेशी तन्तुओं का मोटा अवत्वक (Subcutaneous) स्तर होता है जिसे डारटोस पेशी (Dartos muscle) कहते हैं। रेखित पेशी तन्तुओं का एक दण्डनुमा गुच्छा वृषणकोष के प्रत्येक अर्धभाग के अवत्वक पेशी स्तर को उदरीय अवत्वक पेशी स्तर से जोड़ता है, जिसे वृषणोत्कर्ष पेशी (cremaster muscles) कहते हैं।

प्रत्येक वृषण कोष की गुहा उदरगुहा से एक सँकरी नलिका द्वारा जुड़ी होती है जिसे वक्षणनाल (Inguinal Canal) कहते हैं। वक्षणनाल के द्वारा होकर वृषण धमनी, वृषणशिरा तथा वृषण तन्त्रिका एक वृषण रज्जु (Spermatic Cord) के रूप में वृषण तक जाती है।

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वृषण पर दो आवरण पाये जाते हैं जिन्हें वृषण खोल (Testicular capsule) कहते हैं। इसमें बाहरी महीन आवरण को मौनिक स्तर (Tunica Vaginalis) कहते हैं। यह उदरगुहा के उदरावण से बनता है जबकि भीतरी स्तर को श्वेत कुंचक अथवा ट्यूनिका ऐल्ब्यूजिनिया (Tunica Albuginea) कहते हैं। वृषण की गुहा भी इसी ऊतक की पट्टियों द्वारा लगभग 250 पालियों या वेश्मों में बंटी रहती है।

प्रत्येक पाली में अनेक कुण्डलित रूप में एक-दूसरे से सटी हुई कई पतली नलिकाएँ पायी जाती हैं, जिन्हें शुक्रजनन नलिका (Seminiferous Tubules) कहते हैं। इन नलिकाओं के बीच संयोजी ऊतक पाया जाता है जिसमें विशेष प्रकार की अन्तराली कोशिकाएँ या लैडिग कोशिकाएँ (Leydig cells) पायी जाती हैं।

इन कोशिकाओं द्वारा नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का विकास होता है। प्रत्येक शुक्रजनक नलिका (Seminiferous Tubules) के चारों ओर झिल्लीनुमा आवरण पाया जाता है जिसे ट्यूनिका प्रोप्रिया (Tunica Propria) कहते हैं। इस झिल्ली के नीचे जनन उपकला (Germinal Epithelium) का स्तर पाया जाता है। शुक्रजनक नलिका (Seminiferous Tubules) को वृषण की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई कहा जाता है। जनन उपकला स्तर में दो प्रकार की कोशिकाएँ पायी जाती हैं-
(i) स्परमेटोगोनिया कोशिकाएँ (Spermatogonia cells)इनके द्वारा शुक्रजनन (Spermatogenesis) द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण होता है।

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(ii) सरटोली कोशिकाएँ (Sertoli cells)-सरटोली कोशिकाओं को अवलम्बन या पोषी या नर्स या मातृ या सबटेन्टाकुलर कोशिकाएँ (Supporting or Nutritive or Nurse or Mother or Subtentacular cells) भी कहते हैं। ये कोशिकाएँ आकार में बड़ी, संख्या में कम एवं स्तम्भी प्रकार की होती हैं। इनका स्वतन्त्र भाग कटाफटा होता है। इस भाग में शुक्राणुपूर्व कोशिकाएँ (Spermatids) सर्टोली कोशिकाओं से सटकर संलग्न रहती हैं।

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सरटोली कोशिकाओं के कार्य (Functions of Sertoli Cells)-

  • शुक्राणुओं को आलम्बन प्रदान करती हैं।
  • ये कोशिकाएँ शुक्राणुओं को संरक्षण एवं पोषण प्रदान करती हैं।
  • शुक्रकायान्तरण (Spermiogenesis) के दौरान अवशिष्ट कोशिकाद्रव्य (Residual Cytoplasm) का भक्षण करना।
  • सरटोली कोशिका द्वारा एन्टीमुलेरियान हार्मोन का स्रावण किया जाता है। यह भूरणीय अवस्था में मादा जननवाहिनी के विकास का संदमन करता है।
  • सरटोली कोशिकाओं के द्वारा इनहिबिन (Inhibin) हार्मोन का स्रावण किया जाता है जो FSH का संदमन करता है।
  • इन कोशिकाओं के द्वारा ABP (एण्ड्रोजन बाइडिंग प्रोटीन) का स्रावण किया जाता है।

शुक्रजनन नलिका (Seminiferous Tubules) से पतलीपतली नलिकाएँ निकलती हैं, वृषण के अन्दर ये नलिकाएँ आपस में मिलकर एक जाल बनाती हैं, इसे वृषण जालक (Rete Testis) कहते हैं। इससे लगभग 15-20 संवलित नलिकाएँ (Convoluted ductules) निकलती हैं जिन्हें वास इफरेंशिया (Vas Efferentia) कहते हैं। ये नलिकाएँ वृषण की अग्र या ऊपरी सतह पर पहुँचकर लम्बी रचना में खुलती हैं जिसे अधिवृषण (Epididymis) कहते हैं।

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अधिवृषण (Epididymis)-यह एक लम्बी तथा अत्यधिक कुंडलित नलिका है जिसकी लम्बाई 6 मीटर होती है। प्रत्येक वृषण के भीतरी किनारों पर अत्यधिक कुण्डलित नलिका द्वारा निर्मित एक रचना पाई जाती है जिसे अधिवृषण कहते हैं। अधिवृषण को तीन भागों में बाँटा गया है-

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  • कैपुट एपिडिडाइमिस (Caput Epididymis)-यह वृषण के ऊपर केप (Cap) के समान होती है। इमें वृषण से आने वाली वास इफरेन्शिया (Vas Efferentia) खुलती है। कैपुट एपिडिडाइमिस को ग्लोबस मेजर (Globus Major) भी कहते हैं।
  • कॉर्पस एपिडिडाइमिस (Corpus Epididymis)-यह मध्य भाग है व संकरा होता है। इसे एपिडिडाइमिस काय (Epididymis body) भी कहते हैं।
  • कॉडा एपिडिडाइमिस (Cauda Epididymis)-यह एपिडिडाइमिस का पश्च व सबसे छोटा भाग है। इसे ग्लोबस माइनर (Globus Minor) भी कहते हैं। कॉडा एपिडिडाइमिस से इसकी नली पीछे निकलकर शुक्रवाहिनी (Vas deference) बनाती है। अधिवृषण

(Epididymis) के कार्य-

  • शुक्राणुओं को अधिवृषण में संग्रहित किया जाता है व यहाँ इनका परिपक्वन होता है।
  • यह वृषणों से शुक्रवाहिनी में शुक्राणुओं के पहुँचने के लिए मार्ग प्रदान करते हैं।
  • अधिवृषण (Epididymis) में शुक्राणु एक माह तक संचित रह सकते हैं। स्खलन न होने की स्थिति में शुक्राणुओं का विघटन न होने पर इनके तरल का अवशोषण इसी में होता है।
  • इसकी नलिका में क्रमाकुंचन के कारण शुक्राणु वास डिफरने्स (Vas deference) की ओर बहते हैं।

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शुक्रवाहिनी (Vas deference)-शुक्रवाहिनी लगभग 45 सेमी. लम्बी नलिका होती है। इसकी दीवार पेशीय होती है। शुक्रवाहिनी अधिवृषण के पश्च भाग से प्रारम्भ होकर ऊपर की ओर वक्षणनाल से होकर गुहा में मूत्राशय के पश्च तल पर नीचे की ओर मुड़कर चलती हुई अन्त में एक फूला हुआ भाग तुम्बिका (Ampulla) बनाती है। यहाँ इसमें शुक्राशय (Seminal Vesicle) की छोटी वाहिनी आकर खुलती है। दोनों के मिलने से स्खलनीय वाहिनी (Ejaculatory Duct) का निर्माण होता है।

शुक्रवाहिनी की भित्ति पेशीय होती है व इसमें संकुचन व शिथिलन की क्षमता पायी जाती है। संकुचन व शिथिलन द्वारा शुक्राणु शुक्राशय तक पहुँचा दिये जाते हैं। शुक्रवाहिनियों में ग्रन्थिल कोशिकाएँ पाई जाती हैं जो चिकने पदार्थ का सावण करती हैं। यह द्रव शुक्राणुओं को गति करने में सहायता करता है। तुम्बिका (Ampulla) में शुक्राणुओं को अस्थायी रूप से संग्रह किया जाता है।

स्खलनीय वाहिनियां अन्त में मूत्र मार्ग (Urethra) में आकर खुलती हैं। मूत्रमार्ग (Urethra)-मूत्राशय से मूत्रवाहिनी निकलकर स्खलनीय वाहिनी से मिलकर मूत्रजनन नलिका या मूत्रमार्ग (Urinogenital Duct or Urethra) बनाती है। यह लगभग 20 से.मी. लम्बी नाल होती है जो शिश्न के शिखर भाग पर मूत्रजनन छिद्र (Urinogenital Aperture) द्वारा बाहर खुलती है। मूत्रमार्ग एवं वीर्य दोनों के लिए एक उभयनिष्ठ मार्ग (Common Passage) का कार्य करता है।

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मूत्रमार्ग (Urethra) तीन भागों में बँटा होता है-

  1. प्रोस्टेटिक मूत्रमार्ग (Prostatic Urethra)
  2. झिल्लीमय मूत्रमार्ग (Membranous Urethra)
  3. स्पंजी मूत्रमार्ग (Spongy Urethra)

1. प्रोस्टेटिक मूत्रमार्ग (Prostatic Urethra)-यह मूत्रमार्ग का 2-3 से.मी. लम्बा भाग होता है। यह प्रोस्टेट ग्रन्थि के मध्य से गुजरता तथा दोनों ओर की स्खलन वाहिनियाँ इसी भाग में खुलती हैं।

2.  झिल्लीमय मूत्रमार्ग (Membranous Urethra)-यह मध्य का लगभग 1 से.मी. लम्बा भाग होता है जो प्रोस्टेट ग्रन्थि तथा शिश्न (Penis) के बीच स्थित पेशीय तन्तुपट (Muscular Diaphragm) को बेधता हुआ शिश्न में प्रवेश करता है।

3.  स्पंजी मूत्रमार्ग (Spongy Urethra)-यह मूत्रमार्ग का अन्तिम या शिखर भाग है जो शिश्न में से गुजरता है। यह स्पंजी तथा सर्वाधिक लम्बाई (16-17 से.मी.) वाला भाग है।

शिश्न (Penis)-पुरुष का मैथुनी अंग है जो एक लम्बा, संकरा, बेलनाकार तथा वहिःसारी (Protrusible) होता है। इसका स्वतन्त्र सिरा फूला हुआ तथा अत्यधिक संवेदी होता है तथा शिश्नमुण्ड (Galns Penis) कहलाता है। यह भाग एक त्वचा के आवरण से ढका रहता है। यह आवरण शिश्न = मुण्डछद (Prepuce) कहलाता है। शिश्न दोनों वृषणकोषों के ऊपर व मध्य में उदर के निचले भाग में लटका रहता है।
यह तीन भागों में विभेदित होता है-

  • शिश्नमूल (Root of Penis)-यह मूत्रोजनन तनुपट (Urinogenital diaphargm) से लगा शिश्न का समीपस्थ भाग होता है।

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  • शिश्नकाय (Body of Penis)-यह शिश्न का मुख्य लम्बा भाग है।
  • शिश्नमुण्ड (Glans Penis)-यह शिश्न का शिखर भाग होता है ।

शिश्न की संरचना पेशियों एवं रुधिर कोटरों (Blood Sinus) से होती है। ये तीन मोटे अनुदैर्घ्य डोरियों के समान रज्ञुओं (Cords) के रूप में होते हैं। पृष्ठ भाग में ऐसी संरचनाएँ दो होती हैं जिन्हें कॉरपोरा केवरनोसा (Corpora Cavernosa) तथा अधर भाग में एक कॉर्पस स्पंजिओसम (Corpus Spongiosum) कहलाती है। सामान्य अवस्थाओं में शिश्न शिथिल एवं छोटा होता है।

मैथुन उत्तेजना के समय इसके कोटर रुधिर से भर जाते हैं तथा यह लम्बा, मोटा तथा कड़ा हो जाता है। इस अवस्था में शिश्नमुण्ड नग्न हो जाता है तथा यह स्त्री की योनि में आसानी से प्रविष्ट कराया जा सकता है। मैथुन क्रिया में सुगमतापूर्वक शुक्राणुओं को वीर्य के साथ स्थानान्तरित किया जा सकता है।

सहायक ग्रन्थियाँ (Accessory Glands)-पुरुषों में मुख्यतः तीन प्रकार की सहायक जनन ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं जो जनन में सहायता करती हैं-

(1) प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland)-इस ग्रन्थि की आकृति सिंघाड़ेनुमा होती है। यह मूत्रमार्ग के आधार भाग पर स्थित होती है एवं कई पिण्डों में विभक्त होती है। प्रत्येक पिण्ड एक छोटी नलिका द्वारा मूत्रमार्ग में खुलता है। इस ग्रन्थि का स्राव विशेष गंध युक्त, सफेद एवं हल्का क्षारीय होता है जो वीर्य का 25-30 प्रतिशत भाग बनाता है।

इस स्राव में फॉस्फेट्स सिट्रेट, लाइसोजाइम, फाइब्रिनोलाइसिन, स्पर्मिन (Spermin) आदि पाये जाते हैं। वृद्ध पुरुषों में यह ग्रन्थि बड़ी हो जाती है व मूत्रोजनन मार्ग में अवरोध उत्पन्न कर देती है। इसे शल्य क्रिया द्वारा हटा दिया जाता है। कार्य-इस ग्रन्थि का साव (प्रोस्टेटिक द्रव) शुक्राणुओं को सक्रिय बनाता है एवं वीर्य के स्कंदन को रोकता है।

(2) काडपर गन्थि (Cowper’s Gland)-इ से बल्बोयूरेश्रिल ग्रन्थियाँ (Bulbourethral Glands) भी कहते हैं। ये ग्रन्थियाँ एक जोड़ी प्रोस्टेट ग्रन्थि के पीछे स्थित होती हैं। इनका स्राव चिकना, पारदर्शी व क्षारीय होता है जो मूत्रोजनन मार्ग की अम्लीयता को नष्ट करता है। यह तरल मादा की योनि को चिकना कर मैथुन क्रिया को सुगम बनाता है।

(3) शुक्राशय (Seminal Vesicle)-शुक्राशय एक थैलीनुमा रचना होती है जो एक जोड़ी के रूप में मूत्राशय की पश्च सतह एवं मलाशय के बीच में स्थित होती है। इसके द्वारा एक पीले रंग का चिपचिपे पदार्थ का स्रावण किया जाता है। यही तरल पदार्थ वीर्य का अधिकांश भाग (लगभग 60 प्रतिशत) बनाता है।

इसमें फ्रक्टोस, शर्क रा, प्रोस्टाग्लैं डिन्स (Prostaglandins) तथा प्रोटीन सेमीनोजेलिन (Semenogelin) होते हैं। फ्रक्टोस शुक्राणुओं को ATP के रूप में ऊर्जा प्रदान करता है। क्षारीय प्रकृति के कारण यह स्राव योनि मार्ग की अम्लीयता को समाप्त कर शुक्राणुओं की सुरक्षा करता है। प्रत्येक शुक्राशय से एक छोटी नलिका निकल कर शुक्रवाहिनी की तुम्बिका में खुलती है। शिश्न की उत्तेजित अवस्था में स्खलन के समय दोनों शुक्राशय संकुचित होकर अपने स्राव को मुक्त करते हैं।

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प्रश्न 4.
स्त्रियों में मादा जनन तन्त्र का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्त्रियों में एक जोड़ी अण्डाशय (Ovary) प्राथमिक जननांगों (Primary Sex Organs) के रूप में होते हैं। इसके अतिरिक्त अण्डवाहिनी (Oviduct), गर्भाशय (Uterus), योनि (Vagina), भग (Vulva), जनन ग्रन्थियाँ (Reproductive glands) तथा स्तन या छाती (Breast) सहायक जननांगों का कार्य करते हैं।

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(1) अण्डाशय (Ovary)-स्त्रियों में अण्डाशय की संख्या दो होती है, जिनकी आकृति बादाम के समान होती है। प्रत्येक अण्डाशय की लम्बाई लगभग 2 से 4 से. मी. होती है। दोनों अण्डाशय उदरगुहा में वृक्कों के काफी नीचे श्रोणि भाग (Pelvic region) में पीछे की ओर गर्भाशय (Uterus) के इधर-डधर स्थित होते हैं। प्रत्येक अण्डाशय उदरगुहीय पेरीटोनियम के वलन से बनी मीसोविरियम (Mesovarium) नामक झिल्लीनुमा मीसेन्ट्री (Mesentery) द्वारा श्रोणि भाग की दीवार से टिका होता है।

ऐसे ही एक झिल्ली अण्डाशयी लिगामेन्ट (Ovarian Ligament) प्रत्येक अण्डाशय को दूसरी ओर से गर्भाशय से जोड़ती है। अण्डाशय की संरचना-प्रत्येक अण्डाशय भी वृषण के समान तीन स्तरों से घिरा होता है। बाहरी स्तर को ट्यूनिका एलब्यूजिनिया (Tunica Albuginea) कहते हैं। यह संयोजी ऊतक का महीन स्तर होता है।

आन्तरिक स्तर को ट्यूनिका प्रोपरिया (Tunica Propria) कहते हैं तथा इनके बीच वाले स्तर को जनन उपकला (Germinal Epithelium) कहते हैं। जनन उपकला घनाकार कोशिकाओं का बना होता है। अण्डाशय के बीच वाला भाग जो तन्तुमय होता है तथा संवहनीय संयोजी ऊतक (Vascular Connective Tissue) का बना होता है उसे स्ट्रोमा कहते हैं। स्ट्रोमा दो भागों में विभक्त होता है जिन्हें क्रमशः परिधीय वल्कुट (Peripheral Cortex) एवं आंतरिक मध्यांश (Internal Medulla) कहते हैं।

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अण्डाशय के वल्कुट (Cortex) भाग में अनेक अण्ड पुटिकाएँ (Ovarian Follicles) पायी जाती हैं। जिनका निर्माण जनन उपकला से होता है। पुटिकाएँ बहुकोशिकीय झिल्ली मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा (Membrana Granulosa) से घिरी होती हैं। जिसके भीतर फॉलीक्यूलर गुहा (Follicular Cavity) होती है जो फॉलीक्यूलर द्रव (Follicular Fluid) से भरी होती है।

इस गुहा में अण्ड कोशिका (Ovum) होती है जो चारों ओर अनेक फॉलीकुलर कोशिकाओं से घिरी रहती है। इन कोशिकाओं को जोना पेल्यूसिडा (Zonapellucida) एवं चारों ओर के मोटे स्तर को कोरोना रेडिएटा (Corona Radiata) कहते हैं। इस संरचना को अब परिपक्व ग्राफियन पुटिका (Mature Graatian Follicle) कहते हैं। परिपक्व ग्राफियन पुटिका अण्डाशय की सतह पर पहुँच कर फट जाती है तथा अण्ड बाहर निकलकर उदरीय गुहा में आ जाता है। इस क्रिया को डिम्बोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं।

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(2) अण्डवाहिनी (Oviduct)-स्त्री में दो अण्डवाहिनियाँ होती हैं जो अण्डाणु को अण्डाशय से गर्भाशय तक पहुँचाती हैं। प्रत्येक अण्डवाहिनी की लम्बाई 10-12 से.मी. होती है। अण्डवाहिनी का स्वतन्त्र सिरा जो अण्डाशय के निकट होता है, कीप रूपी (Funnellike) एवं चौड़ा होता है तथा इसे आस्टियम (Ostium) कहते हैं। आस्टियम या मुखिका का किनारा झालरदार (Fimbriated) एवं रोमाभि (Ciliated) होता है। अतः मुखिका को फिम्ब्रिएटेड कीप (Fimbriated Funnel) भी कहते हैं।

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अण्डोत्सर्ग के बाद अण्ड अण्डाशय से निकलकर उदरगुहा में आकर इसी फिम्ब्रिएटेड कीप के द्वारा फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में चला जाता है। फैलोपियन नलिका की भित्ति पेशीयुक्त होती है तथा भीतर से अत्यन्त वलित (Folded) होती है। निषेचन की क्रिया फैलोपियन नलिका में ही होती है। प्रत्येक फैलोपियन नलिका अपनी ओर के गर्भाशय (Uterus) में अपने पश्च अन्त द्वारा खुलती है।

(3) गर्भाशय (Uterus)-इसे बच्चादानी (वुम्ब) भी कहते हैं। इसकी आकृति उल्टी नाशपाती के समान होती है। यह श्रोणि भित्ति से स्नायुओं द्वारा जुड़ा होता है। यह लगभग 7.5 से.मी. लम्बा, 3 से.मी, मोटा तथा अधिकतम 5 से.मी, चौड़ा खोखला तथा शंक्वाकार अंग होता है। इसका संकरा भाग नीचे की ओर तथा चौड़ा भाग ऊपर की ओर होता है।

इसके पीछे की ओर मलाशय (Rectum) तथा आगे की ओर मूत्राशय (Urinary Bladder) होता है। गर्भाशय की भित्ति, फतकों की तीन परतों से बनी होती हैबाहरी पताली झिल्लीमय स्तर को परिगभांशय (पेरिमेट्रियम), मध्य मोटी चिकनी पेशीख स्तर को गभाँशय पेशी स्तर (मायोमैट्रियम) और आन्तरिक ग्रान्थल स्तर को गर्भाशय अन्तःस्तर (एंड्रोमैट्रियम) कहते हैं जो गभाशएय गुहा को आस्तरित करती है। आतंव चक्र (Menstrual Cycle) के चक्र के दौरान गर्भाशब के अन्तःस्तर में चक्रीय परिवर्तन होते हैं, जबकि गभांशय पेशी स्तर में प्रसव के समय काफी तेज संकुचन होंता है।

गर्भाशाब को तीन भागों में विभेदित किया गया है-

  • फण्डस (Fundus)-ऊपर की और उभरा हुआ भाग फण्डस कहलाता है।
  • काय (Body)-बीच का प्रमुख भाग ग्रीवा (Cervix) कहलाता है।
  • ग्रीवा (Cervix)-सबसे निचला भाग ग्रीवा (Cervix) कहलाता है जो योनि से जुड़ा होता है।

भूण का विकास गर्भाशय (Uterus) में होता है। शूण अपरा (Placenta) की सहायता से गर्भाशय की भित्ति से संलग्न होता है। यहाँ भ्रूण को सुरक्षा एवं पोषण प्राप्त होता है।

(4) योनि (Vagina)-गर्भाशय ग्रीवा (Cervix Uteri) आगे बढ़कर एकपेशीय लचीली नलिका रूपी रचना का निर्माण करती है जिसे योनि (Vagina) कहते है। योनि स्त्रियों में मैथुन अंग (Copulatory organ) की तरह कार्य करती है। इसके अतिरिक्त योनि गर्भाशाय से उत्पन्न मास्तिक स्राव को निक्कासन हेतु पथ उपलख्ब करवाती है एवं शिशु जन्म के समय गर्भस्थ शिशु के बाहर निकालने के लिए जन्मनाल (Birth Canal) की तरह कार्य करती है।

(5) बाद्य जननांग (External Genitila)-स्त्रियों के बाह्ष जननांग निम्न हैं-
(i) जघन शौल (Mons Pubis)-यह प्यूबिस लिम्फाइसिस के ऊपर स्थित होता है जो गद्दीनुमा होता है क्योंकि इसकी त्वचा के नीचे वसीय परत होती है। तरुण अवस्था में इस पर घने रोम उग आते हैं जो अन्त तक रहते हैं।
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(ii) वृहद् भगोष्ठ (Labia Majora)-ये जघन शैल (प्यूबिस मुंड) से नीचे की तरफ व पीछे की ओर से विस्तृत एक जोड़ी बड़े अनुद्रै्घ्य वलन होते हैं। इनकी बाह्य सतह पर रोम पाये जाते हैं।

(iii) लघु भगोष्ठ (Labia Minora)-ये आन्तरिक व छोटे वलन होते हैं। इन पर रोम नहीं पाये जाते हैं। लेबिया माइनोरा प्रघाण (Vestibule) को घेरे रहते हैं।

(iv) भगशेफ या क्लाइटोरिस (Clitoris)-यह जघन शैल (Mons Pubis) लेबिया माइनोरा के अग्र कोने पर स्थित एक संवेदी तथा घुण्डीनुमा अथवा अंगुलीनुमा रचना है। यह नर के शिश्न के समजात अंग है। यह अत्यधिक संवेदनशील होता है क्योंक इसमें स्पर्शकणिकाओं की अधिकता पायी जाती है।

(v) योनिच्छद (Hymen)-योनि द्वार पर पतली झिल्ली पाई जाती है जिसे योनिच्छद (Hymen) कहते हैं। यह लैंगिक सम्पर्क, शारीरिक परिश्रम एवं व्यायाम के कारण फट जाती है।

बार्थोलिन की ग्रन्थियाँ (Bartholian Glands)-योनिद्वार के दोनों ओर एक-एक सेम की आकृति की ग्रन्थि लेबिया मेजोरा पर स्थित होती है। ये ग्रन्थियाँ एक क्षारीय व स्रेहक द्रव का स्राव करती हैं जो कि भग (Vulva) को नम रखता है एवं लैंगिक परस्पर व्यवहार को सुगम बनाता है।
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(6) स्तनग्रन्थि (Mammary Glands)-स्त्री में स्तन ग्रन्थियों (Mammary Glands) से युक्त एक जोड़ी स्तन उपस्थित होते हैं। ये वक्ष के सामने की तरफ अंसीय पेशियों (Pectoral Muscles) के ऊपर स्थित होते हैं। प्रत्येक स्तन ग्रन्थि में भीतर का संयोजी ऊतक $15-20$ नलिकाकार कोष्ठकीय पालियों का बना होता है। इनके बीच-बीच में वसीय ऊतक होता है। प्रत्येक पाली में अंगूर के गुच्छों के समान दुग्ध ग्रन्थियाँ होती हैं जो दुग्ध का स्राव करती हैं। यह दूध नवजात शिशु के पोषण का कार्य करता है।

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प्रत्येक पालिका से निकली कई छोटी वाहिनियां एक दुग्ध नलिका या लैक्टीफेरस नलिका (Lactiferous Duct) बनाती हैं। ऐसी कई दुग्ध नलिकाएँ स्वतन्त्र रूप से आकर चूचुक (Nipples) में खुल जाती हैं। चूचुक स्तनग्रन्थियों के शीर्ष भाग पर उभरी हुई वर्णांकित (Pigmented) रचना है। इसके आसपास का क्षेत्र भी गहरा वर्णांकित हो जाता है। इस क्षेत्र को स्तन परिवेश (Areola Mammae) कहते हैं। स्त्रियों में चूचुक के चारों तरफ का क्षेत्र वसा के जमाव तथा पेशियों के कारण काफी उभरा हुआ होता, है। चूचुक में 0.5 मिमी. के 15-25 छिद्र पाये जाते हैं। पुरुषों में चूचुक अवशेषी होते हैं।

प्रश्न 5.
प्रसव किसे कहते हैं? प्रसव एवं दुग्ध स्रवण क्रिया को समझाइए ।
उत्तर:
गर्भावस्था (Gestation) के पश्चात् माता के गर्भाशय (Uterus) से पूर्ण विकसित शिशु के बाहर आने की प्रक्रिया को प्रसव कहते है।
शिशु जन्म (Parturition) का नियन्त्रण हार्मोन द्वारा होता है, अतः यह क्रिया एक अन्तःस्रावी-नियमित क्रिया (Endocrine Regulatory Process) होती है। शिशु जन्म में दो हार्मोन प्रमुख हैं। पीयूष के पश्च भाग का आक्सीटोसिन (Oxytocin) तथा अण्डाशय द्वारा स्रावित रिलेक्सिन (Relaxin) हार्मोन।

जैसे गर्भावस्था का अन्त होने लगता है तथा जब फीटस (Foetus) पूर्ण विकसित हो जाता है, प्लेसेन्टा (Placenta) द्वारा स्रावित हार्मोन मुख्यतः प्रोजेस्टरोन की मात्रा कम होने लगती है तथा जन्म के समय न्यूनतम हो जाती है, जिसके फलस्वरूप प्लेसेन्टा का गर्भाशय से सम्बन्ध कमजोर हो जाता है। अतः शिशु जन्म के समय आक्सीटोसिन गर्भाशय को उत्तेजित करता है तथा इसमें क्रमिक संकुचन होने लगता है, इसे प्रसव पीड़ा (Labour Pain) कहते हैं।

इसके साथ ही रिलेक्सिन हार्मोन भी मुक्त होता है जिसके फलस्वरूप जघनास्थिसंधि (Pubic Symphysis) एवं जघन पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं। इन क्रियाओं के फलस्वरूप पूर्ण रचित शिशु योनि में से होते हुए भग से बाहर आ जाता है। इस क्रिया को प्रसव कहते हैं। गर्भाशय में शिशु, नाभिनाल (Umbilical) द्वारा माता के गर्भाशय से जुड़ा रहता है जिसे काटकर हटा दिया जाता है।

यदि माता में प्राकृतिक रूप से प्रसव पीड़ा प्रारम्भ न हो तो चिकित्सक उन्हें आक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन का इन्जेक्शन लगाते हैं जिससे प्रसव पीड़ा प्रारम्भ हो जाती है और प्रसव आसानी से हो जाता है।

दुग्धस्रवण (Lactation)-सगर्भता की अवस्था में प्रोजेस्ट्रॉन व एस्ट्रोजन हार्मोन्स के प्रभाव से स्तन ग्रन्थियों की वृद्धि से स्त्री के वक्ष बड़े आकार के हो जाते हैं। प्रौलेक्टिन के प्रभाव से शिशु जन्म के 24 घन्टे के अन्दर दुग्ध ग्रन्थियों से दुग्धस्रवण (Lactation) हो जाता है। प्रारम्भ में वक्ष की निप्पलों से कोलस्ट्रम (Colstrum) का स्राव होता है। यह पीले रंग का होता है जिसमें ग्लोबुलिन प्रोटीन (Globulin Protein) काफी में मात्रा में होता है। इसमें माता की एन्टीबॉडीज होती है जो नवजात शिशु की संक्रमण से रक्षा करती है।

प्रश्न 6.
युग्मकजनन को परिभाषित कीजिए । शुक्राणुजनन व अण्डजनन को विस्तार से समझाइए ।
उत्तर:
जनद (Gonods) द्वारा युग्मकों के निर्माण को युग्मकजनन कहते हैं। युग्मकजनन के दौरान समसूत्रीय व अर्धसूत्रीय दोनों प्रकार के विभाजन पाये जाते हैं। इस प्रकार अगुणित (Haploid) युग्मकों का निर्माण होता है। युग्मक दो प्रकार के होते हैं जिन्हें क्रमशः शुक्राणु व अण्डाणु कहते हैं।

शुक्रजनन की क्रियाविधि
वृषण की जनन उपकला कोशिकाओं के समसूत्रीय व अर्धसूत्रीय विभाजन द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण शुक्रजनन (Spermatogenesis) कहलाता है। शुक्रजनन एक सतत (Continuous) क्रिया है। शुक्रजनन में अग्र दो चरण पाये जाते हैं-
(A) शुक्र णुपूर्वी का निर्माण या स्पर्में टोसाइटोसिस (Formation of Spermatid or Spermatocytosis)
(B) शुक्राणुपूर्वी का शुक्राणु में कायान्तरण अथवा स्पर्मिओजे नेसिस (Metarmorphosis of Spermatids in to Spermatozoa or Spermiogenesis)

(A) शुकाणुपूर्वी का निमर्णा (Formation of Spermatids)-यह क्रिया तरुणावस्था (Puberty) में आरम्भ होती है। शुक्रजनन प्राथमिक जनन कोशिका अथवा आदि जनन कोशिका से आरम्भ होता है। इस क्रिया में निम्न तीन चरण पाये जाते हैं-

(a) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)
(b) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)
(c) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase)
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(a) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)-इस दौरान प्राथमिक जनन कोशिका या आदि जनन कोशिका में एक के बाद एक समसूत्री विभाजन पाये जाते हैं, इससे निर्मित कोशिका को स्परमेटोगोनिया (Spermatogonia) कहते हैं। स्परमेटोगोनिया द्विगुणित (Diploid) या (2n) कोशिका है।

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(b) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)-इस दाँरान स्परमेटोगोनिया के आकार में वृद्धि होती है। यह वृद्धि दुगुने (Double) के बराबर होती है। इस वृद्धि द्वारा निर्मित कोशिका को प्राथमिक स्परमेटोसाइट्स (Primary Spermatocytes) कहते हैं। वृद्धि प्रावस्था, अण्डजनन की वृद्धि प्रावस्था से अल्पावधि की होती है। इस अवस्था में किसी भी प्रकार का विभाजन नहीं पाया जाता है। प्राथमिक स्परमेटोसाइट्स द्विगुणित (2n) कोशिका है।

(c) परिपक्व प्रावस्था (Maturation phase)-इस दौरान प्राथमिक स्परमेटेसाइट्स में दो बार विभाजन होता है-

  • प्रथम परिपक्वन विभाजन (First maturation division)-अर्धसूत्रीय-I (Meiosis-I) होता है। इसके परिणामस्वरूप दो द्वितीयक स्परमेटोसाइट्स (Secondary Spermatocytes) का निर्माण होता है।
  • द्वितीय परिपक्वन विभाजन (Second maturation division)-अर्धसूत्रीय-II होता है। यह समसूत्रीय विभाजन के समान होता है। इस प्रकार 4 शुक्राणुपूर्वी (Spermatid) का निर्माण हो जाता है। शुक्राणुपूर्वी अगुणित होते हैं। देखिए चित्र में।

(B) शुक णुपूर्वी का शुक्राणु में कायान्तरण (Spermiogenesis)-गोल, अचल व पूंछविहीन शुक्राणु पूर्वी (Spermatid) का तर्कुकार, चल व पूंछयुक्त शुक्राणु में बदलना शुक्रकायान्तरण (Spermiogenesis) कहलाता है। इस शुक्राणु में निम्न परिवर्तन होते हैं-
(i) शीर्ष का निर्माण (Formation of Head)-शुक्राणुपूर्व कोशिका के केन्द्रक से जल के कम हो जाने से गुणसूत्र एक छोटे व अत्यधिक संहत् पिण्ड का निर्माण कर लेते हैं। RNA तथा केन्द्रिका (Nucleolus) की हानि हो जाने से केन्द्रक में केवल आनुवंशिक पदार्थ (DNA व क्रोमेटिन) रह जाते हैं। गोलाकार केन्द्रक दीर्घित हो जाता है और धीरे-धीरे उत्केन्द्री (Ecentric) स्थिति ग्रहण कर लेता है। कोशिकाद्रव्य निर्माणाधीन पूंछ की ओर चला जाता है। केन्द्रक कोशिकाद्रव्य के एक पतले आवरण से आवरित रह जाता है।

(ii) अग्रपिण्डक या एक्रोसोम का निर्माण (Formation of Acrosome)-शुक्राणुपूर्वी के गॉल्जीकाय से शुक्राणु का अग्रपिण्डक (स्क्रोसोम) बनता है। शुक्राणुपूर्वी के गाल्जीकाय में अनेक छोटी-छोटी रिक्तिकाओं का समूह होता है। इनमें से अग्रपिण्डक के निर्माण हेतु एक रिक्तिका बड़ी होने लगती है और इसमें एक सघन प्रोएक्रोसोमल कणिका (Proacrosomal Granule) बन जाती है ।

अब गॉल्जीकाय को अग्रकोरक (Acroblast) कहते हैं। अन्य रिक्तिकाओं के संयुक्त हो जाने से एक्रोसोमल कणिका भी अब बड़ी होकर एक्रोसोमल कणिका (Acrosomal granule) बन जाती है। एक्रोसोम आशय में उपस्थित तरल पदार्थ धीर-धीरे कम होने लगता है।
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(iii) ग्रीवा का निर्माण (Formation of Neck)-शुक्राणुपूर्व में पहले से ही दो तारक केन्द्र (Centrioles) होते हैं। ये बेलनाकार तथा परस्पर समकोणिक होते हैं, शुक्राणुजनन में ये दोनों तारक केन्द्र के पश्च भाग में चले जाते हैं। केन्द्रक के पश्च तल पर बने एक गड्ढे में एक तारक केन्द्र शुक्राणु के लम्बे अक्ष पर समकोणिक स्थिति में व्यवस्थित हो जाता है।

इसे समीपस्थ तारक केन्द्र (Proximal Centriole) कहते हैं। दूसरे तारक केन्द्र को दूरस्थ तारक केन्द्र (Distal Centriole) कहते हैं। इसका लम्बा अक्ष शुक्राणु के लम्बे अक्ष की संपाती स्थिति में होता है।

(iv) मध्य खण्ड का निर्माण (Formation of Middle Piece)-दूरस्थ तारक केन्द्र से बना एक सूत्र धीरे-धीरे पीछे की ओर लम्बाई में बढ़ने लगता है। शुक्राणुपूर्व के सभी माइटोकॉन्ड्रिया इस सूत्र के समीपस्थ भाग के पास सर्पिल कुण्डली के रूप में व्यवस्थित हो जाते हैं। यह शुक्राणु का मध्य खण्ड होता है।

(v) पूंछ का निर्माण (Formation of Tail)-दूरस्थ तारक केन्द्र द्वारा बना सूत्र निरन्तर लम्बा होता जाता है तथा इसे ढकता हुआ कोशिकाद्रव्य भी पश्च भाग की ओर प्रवाहित होता रहता है। इसी सूत्र की पूंछ को अक्ष्रीय सूत्र (Axial filament) कहते हैं। यह सूत्र तेज गति से बढ़ता हुआ अन्ततः कोशिकाओं से निकलकर बाहर आ जाता है। यह भाग कोशिकाद्रव्य से अनावरित होता है। अक्ष्षीय सूत्र का कोशिकाद्रव्य से अवरित भाग पूंछ का मुख्य खण्ड होता है तथा अनावरित भाग अन्त्यखण्ड (End piece) कहलाता है।

इस समय तक शेष बचे कोशिकाद्रव्य को गॉल्जीकाय के अनावश्यक अवयवों सहित त्याग दिया जाता है और एक अत्यन्त सक्रिय शुक्राणु (Sperm) का निर्माण हो जाता है। शुक्राणु की संरचना शुक्राणुओं की आकृति भिन्न-भिन्न जाति में भिन्न-भिन्न प्रकार की होती है। जैसे अस्थिल मछलियों में गोलाकार, मनुष्य में चमचाकार, चूहों में हुक के आकार के व पक्षियों में सर्पिलाकार होते हैं।

शुक्राणु के चार भाग पाये जाते हैं-

  1. शीर्ष
  2. ग्रीवा
  3. मध्य भाग
  4. पूँछ

1. शीर्ष-मनुष्य में शीर्ष तिकोना एवं चपटा होता है। इसकी आकृति केन्द्रक की आकृति पर निर्भर होती है। शीर्ष भाग निम्न दो संरचनाओं से मिलकर बना होता है-
(i) केन्द्रक-शुक्राणु के शीर्ष का अधिकांश भाग केन्द्रक द्वारा घिरा होता है। केन्द्रक में प्रमुख रूप से ठोस क्रोमेटिन पदार्थ पाये जाते हैं। DNA अत्यधिक संघनित अवस्था में होता है।

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(ii) अग्रपिंडक/एक्रोसोम-केन्द्रक के अग्र भाग में टोपी के समान रचना पाई जाती है जिसे एक्रोसोम कहते हैं। टोपी के समान एक्रोसोम पाया जाता है। यह स्पर्मलाइसिन्स नामक पाचक एन्जाइम का स्रावण करता है। स्तनधारियों में इसके द्वारा हाएलोयूरोनाइडेज एन्जाइम एवं प्रोएक्रोसिन, एसिड फॉस्फेटेस, बाइन्डीज का स्रावण किया जाता है। प्रोएक्रोसिन, एक्रोसोम क्रिया द्वारा एक्रोसिन में बदल जाता है। ये दोनों एन्जाइम अण्डभेदन में सहायक होते हैं।
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2. ग्रीवा-शीर्ष एवं मध्य भाग के बीच जहाँ तारक केन्द्र उपस्थित रहते हैं, ग्रीवा क्षेत्र कहलाता है। इस भाग में तारककाय पायी जाती है। समीपस्थ तारककाय केन्द्रक के पश्च भाग में एक गर्त में स्थित होता है, जो निषेचन के बाद खण्डीभवन को प्रेरित करता है। इसके पास ही दूरस्थ तारककाय पाया जाता है।

3. मध्य भाग-यह भाग शुक्राणु का ऊर्जा कक्ष या इंजन कहलाता है। मध्य भाग दूरस्थ तारककाय से मुद्रिका तारककाय तक होता है जिसमें अक्षीय तन्तुओं के चारों ओर माइटोकॉन्ड्रिया के आपस में आंशिक समेकन के फलस्वरूप बनी सर्पिल कुण्डली के रूप में व्यवस्थित रहते हैं।

स्तनधारियों में माइटोकॉन्ड्रिया के आपस में आंशिक समेकन के फलस्वरूप बनी सर्पिल कुण्डली को नेबेनकर्न (Nebenkern) आच्छद कहते हैं। मध्य भाग द्वारा ही शुक्राणु की गति के लिये आवश्यक ऊर्जा प्रदान की जाती है। शीर्ष के पश्च भाग एवं सम्पूर्ण मध्य भाग को चारों ओर कोशिकाद्रव्य की महीन पर्त घेरे रहती है जिसे मेनचैट (Manchette) कहते हैं। मध्य भाग के अंत में एक मुद्रिका सेन्ट्रियोल पायी जाती है।

4. पूंछ-यह शुक्राणु का सबसे लम्बा तन्तुमय भाग है जो गति में सहायक है।
अण्डजनन (Oogenesis)-अण्डाशय की जनन उपकला द्वारा अण्डाणु निर्माण एवं परिपक्वन की क्रिया को अण्डजनन कहते हैं। अण्डजनन में निम्न तीन चरण पाये जाते हैं-
(A) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)
(B) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)
(C) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase)

(A) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)-प्रारम्भिक अथवा प्राथमिक जनन कोशिकाओं (Primordial or Primary Germ Cells) के बारम्बार समसूत्री विभाजन के फलस्वरूप वर्त्त कोशिकाएँ अण्डजन या ऊगोनिया (Oogonia) कहलाती हैं। ऊगोनिया द्विगुणित (2n) कोशिकाएँ हैं।
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(B) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)-इस दौरान ऊगोनिया में पुन: समसूत्रीय विभाजन होता है। इसके फलस्वरूप स्तनधारियों के अण्डाशय में कोशिकाओं के समूह का निर्माण होता है, जिन्हें अण्डवाही रज्जु (Ovigerous cord) कहते हैं। अण्डवाही रज्जु की एक ऊगोनिया कोशिका वृद्धि करती है व शेष कोशिकाएँ घेर लेती हैं। ऊगोनिया की वृद्धि से प्राथमिक ऊसाइट (Primary Oocyte) का निर्माण होता है। प्राथमिक ऊसाइट को घेरने वाली कोशिकाओं को पुटक कोशिकाएँ (Follicle cells) कहते हैं।

(C) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase)-प्राथमिक ऊसाइट (Primary Oocyte) में, अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) प्रथम द्वारा द्वितीयक ऊसाइट (Secondary Oocyte) व एक पोलर बॉडी (Polar Body) का निर्माण होता है। प्रारम्भिक पुटिक की पुटिकीय कोशिकाओं में निरन्तर विभाजन होने लगता है जिसके फलस्वरूप विकासशील अण्डकोशिका के चारों ओर एक बहुस्तरीय आवरण बन जाता है जिसे मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा (Membrana Granulosa) कहते हैं तथा सम्पूर्ण पुटिका समूह को अब द्वितीयक पुटिका (Secondary Follicle) कहते हैं।

धीरे-धीरे अण्डाणु व मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा के बीच रिक्त स्थान का निर्माण होने लगता है जिसे पुटिका गुहा (Follicular Cavity) कहते हैं। इसमें पाये जाने वाले पोषक तरल पदार्थ को पुटिका द्रव्य (Follicular Fluid) कहते हैं। पुटिका कोशिकाओं का स्तर जो अण्डाणु के चारों ओर उपस्थित होता है उसे कोरोना रेडिएटा (Corona Radiata) कहते हैं।

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इसके ठीक नीचे अण्डाणु के चारों तरफ एक ओर पारदर्शी आवरण पाया जाता है जिसे जोना पेल्यूसिडा (Zona Pellucida) कहते हैं। इस अवस्था में पुटिका अपने परिमाण के चरम सीमा पर होती है और इसे अब ग्राफ्रियन पुटिका (Graffian Follicle) कहते हैं। ग्राफियन पुटिका (Graffian Follicle) अण्डाशय के आवरण के निकट पहुँचकर फट जाती है तथा इसमें अण्डाणु (Ovum) बाहर निकलकर देहगुहा में आ जाता है। पुटिका से अण्डाणु के बाहर निकलने की प्रक्रिया को अण्डोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं।

शुकजनन व अण्डजनन में समानताएँ

  1. शुक्र जनन (Spermatogenesis) व अण्ड जनन (Oogenesis) दोनों क्रियाएँ जनन उपकला (Germinal Epithelium) से प्रारम्भ होती है।
  2. दोनों ही क्रियाओं में तीन समान प्रावस्थाएँ होती हैं-
    • गुणन प्रावस्था
    • वृद्धि प्रावस्था
    • परिपक्वन प्रावस्था
  3. गुणन प्रावस्था में दोनों क्रियाओं में समसूत्री विभाजन होता है ।
  4. परिपक्वन प्रावस्था में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis division) होता है।
  5. दोनों की अन्तिम प्रावस्था में अगुणित युग्मक का निर्माण होता है।

प्रश्न 7.
अंतर्रोपण किसे कहते हैं? अंतर्रोपण क्रिया का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
स्त्री एवं पुरुष के संभोग (मैथुन) के दौरान शुक्र (वीय) स्त्री की योनि में छोड़ा जाना वीर्यसेचन (Insemination) कहलाता है। गर्भाशय में होने वाली तरंग गति के कारण शुक्राणु गति करते हुए गर्भाशय में प्रवेश करते हुए अन्त में अंडवाहिनी नली के संकीर्ण पथ इस्थमस तथा तुंबिका (Ampulla) के संधिस्थल तक पहुँच जाता है। यहीं पर द्वितीय ऊसाइट (Secondary oocyte) होता है।

ऊसाइट द्वारा फर्टीलाइजिन (Fertilizin) एवं शुक्राणुओं द्वारा एन्टीफर्टीलाइजिन (anti-fertilizin) नामक रासायनिक पदार्थों का स्रावण किया जाता है जिसके परिणामस्वरूप ऊसाइट (oocyte) व शुक्राणु एक दूसरे के समीप आ जाते हैं। वे फर्टीलाइजिन व एन्टी-फर्टीलाइजिन दोनों जाति विशिष्ट होते हैं।

अब शुक्राणु के एक्रोसोम (Acrosome) द्वारा हाएलुरोनिडेज (Hyaluronidase) नामक रासायनिक पदार्थ का स्रावण किया जाता है। इस एन्जाइम की उपस्थिति के कारण अण्डाणु के आवरण कोरोना रेडियेटा (Corona Rodiata) तथा जोना पैल्युसिडा (Zona pellucida) को नष्ट कर देता है, जिसके फलस्वरूप शुक्राणु अण्ड में प्रवेश कर जाता है एवं इसकी पूँछ बाहर ही रह जाती है। केवल एक शुक्राणु ही अण्डे में प्रवेश कर पाता है। इसके बाद अण्डे की प्लाज्मा झिल्ली निध्रुवित हो जाती है जिससे अन्य शुक्राणु प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
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शुक्राणु को केन्द्रक अण्ड के केन्द्रक से आपस में संलयन करते हैं जिसके परिणामस्वरूप द्विगुणित रचना का निर्माण होता है जिसे युग्मनज (Zygote) कहते हैं। इस क्रिया को निषे चन (Fertilization) कहते हैं। निषेचन की क्रिया फैलोपियन नलिका अथवा अण्डवाहिनी में होती है। इसी समय भ्रूण के लिंग का निर्धारण हो जाता है।

स्त्री में XX लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome) व पुरुष में XY लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome) पाये जाते हैं। अर्थात् स्त्री द्वारा सिर्फ X गुणसूत्र के ही अगुणित युग्मक (अण्ड) निर्मित होते हैं। पुरुष द्वारा 50% X गुणसूत्र व 50% Y गुणसूत्र के अगुणित युग्मक शुक्राणु बनते हैं। पुरुष युग्मक (शुक्राणु) व स्त्री युग्मक (अण्ड) के संयोजन के बाद युग्मनज (Zygote) XYया XXप्रकार के होते हैं।

XXयुग्मनज मादा भ्रण (लड़की) व XYवाले युग्मनज नर भूण (लड़का) में परिवर्तित हो जाते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि एक शिशु का लिंग निर्धारण उसके पिता द्वारा होता है न कि माता के द्वारा। निषेचन के पश्चात् युग्मनज (Zygote) में विदलन समसूत्री विभाजन प्रारम्भ हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप 2,4,8,16 संतति कोशिकाओं का निर्माण होता है जिसे कोरकखण्ड (Blastomeres) कहते हैं।

8 से 16 कोरकखण्डों वाले भूण को मोरुला (Morulla) कहते हैं। देखिए आगे चित्र (य)। यह मोरुला लगातार विभाजित होता रहता है और जैसे-जैसे गर्भाशय की ओर बढ़ता है, यह कोरकपुटी (Blastocyst) के रूप में परिवर्तित हो जाता है। देखिए का (र)। एक कोरकपुटी में कोरकखण्ड बाहरी परत में व्यवस्थित होते हैं, जिसे पोषक कोरक (Trophoblast) कहते हैं। कोशिकाओं के भीतरी समूह जो पोषक कोरक से जुड़े होते हैं उन्हें अंतरकोशिका (Inner Cell Mass) कहते हैं।
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अब पोषक कोरक स्तर गभाशय के अन्तः स्तर (Endometrium) से संलग्न हो जाता है और अन्तर कोशिका समूह भ्रूण के रूप में अलग-अलग या विभेदित हो जाता है। संलग्न होने के बाद गर्भाशयी क्डोशिकाएँ तेजी से विभक्त होती हैं औरकोरकपुटी (Blastocyst) को आवृत कर लेती हैं। इसके परिणामस्वरूप कोरकपुटी गर्भाशय अन्तःस्तर में अन्तःस्थापित हो जाती है। देखिए चित्र (ल) इसे ही अन्तर्रोपण (Implantation) कहते हैं और बाद में सगर्भता का रूप धारण कर लेती है।

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प्रश्न 8.
शुक्रजनन ( Sperminatogenesis) एवं अण्डजनन (Oogenesis) में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
शुक्रजनन (Spermatogenesis) एवं अण्डजनन (Oogenesis) में अन्तर

शुक्रजनन (Spermatogenesis)अण्डजनन (Oogenesis)
1. यह क्रिया वृषणों (Testes) में सम्पन्न होती है।यह क्रिया अण्डाशय (Ovaries) में सम्पन्न होती है।
2. शुक्रजनन की क्रिया प्राणी में जीवन पर्यन्त जारी रहती है।यह क्रिया एक निश्चित आयु के पश्चात् बन्द हो जाती है।
3. इस क्रिया में सभी शुक्रजनक कोशिकाएँ शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।के वल एक अण्ड जनक कोशिका अण्डाणु का निर्माण करती है। अन्य अनेक अण्डजनक कोशिकाएँ वृद्धि प्रावस्था में नष्ट हो जाती हैं।
4. दोनों परिपक्वन विभाजन वृषण में ही होते हैं।दोनों परिपक्वन विभाजन या कम से कम द्वितीय परिपक्वन विभाजन अण्डाशय से बाहर होते हैं।
5. वृद्धि प्रावस्था छोटे अन्तराल की एवं कम वृद्धि होती है।वृद्धि प्रावस्था लम्बे समय तक जारी रहती है एवं अधिक वृद्धि होती है।
6. इस क्रिया में एक शुक्रजनन कोशिका से चार पूर्व शुक्राणु कोशिकाओं का निर्माण होता है ।इस क्रिया में एक ऊगोनिया से एक अण्डाणु एवं तीन ध्रुवकाय निर्मित होती हैं।
7. इस क्रिया में प्रथम एवं द्वितीय परिपक्वन विभाजन समान होते हैं एवं परिणामस्वरूप चार समान शुक्राणु (Sperm) निर्मित होते हैं। ये चारों ही स्वतन्त्र जनन इकाई होते हैं।दोनों परिपक्वन विभाजन असमान होते हैं तथा इसके फलस्वरूप एक बड़ी अण्डाणु कोशिका तथा तीन ध्रुवकाय का निर्माण होता है। इसमें केवल अण्डाणु (Ovum) ही स्वतन्त्र जनन इकाई है।
8. शुक्राणु निर्माण में कायान्तरण की क्रिया होती है।इसमें कायान्तरण नहीं होता।
9. शुक्राणु पीतक रहित एवं गतिशील होते हैं।अण्डाणु पीतकयुक्त एवं गतिहीन होते हैं।

प्रश्न 9.
मानव में भ्रूणीय अवस्थाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव में भ्रूणीय अवस्थाओं का सारांश (Summary of Embryonic Development Stage in Human)
1 दिन – निषेचन (Fertilization), निषेचित अण्डाणु का व्यास लगभग 0.15 मि.मी. होता है।
2 दिन – दो कोशिका अवस्था (Two Cell Stage)।
3 दिन – 16 कोशिका अवस्था (16 Cell Stage), मॉर्ला (Morula)।
4 दिन – कोरकपुटी (Blastocyst) का गर्भाशय अवकाशिका (Uterine Lumen) में प्रवेश, जोना पैल्यूसिडा (Zona pellucida) का विलोपन, कोरपुटी का व्यास लगभग 0.3 मि.मी।
7-8 दिन – कोरकपुटी का गर्भाशय की एण्डोमीट्रियम में आंशिक प्रवेश, रोपण (Implantation)।
12 दिन – कोरकपुटी का एण्डोमीट्रियम में प्रवेश पूर्ण, भ्रूणीय डिस्क (Embryonic Disc) का निर्माण, अतिरिक्त भूर्णीय अन्तश्चर्म (Extra-embryonic Endoderm), अतिरिक्त भ्रूणीय मध्यचर्म (Extra-embryonic Mesoderm), एम्निऑन (Amnion), पीतक कोष (Yolk Sac) का निर्माण।
14 दिन – आदि रेखा (Primitive Streak) का निर्माण।
18 दिन – 3-5 जोड़ी कायखण्डों (Somites) का निर्माण।
19 दिन – तन्त्रिका खाँच (Neural Groove), तन्त्रिका पट्ट (Neural Plate), पृष्ठ रज्जु पट्ट् (Notochordal plate), 6-8 जोड़ी कायखण्डों का निर्माण।
24 दिन – सिर एवं पुच्छ भागों का निर्धारण 21-23 जोड़ी कायखण्ड निर्मित। अधर भाग में हुदय (Heart) का निर्माण जारी।
28 दिन – हुदय का धड़कना प्रारम्भ, तन्त्रिका नाल (Neural Tube) का निर्माण पूर्ण, तीन जोड़ी ग्रसनी चाप (Viscerl Arch) निर्मित, 30-31 दिन जोड़ी कायखण्ड निर्मित रुधिर द्वीप (Blood Islands) दिखने लगते हैं।
32 दिन – 30-39 जोड़ी कायखण्ड निर्मित।
7 सप्ताह – जबड़े, उँगलियाँ, बाह्य कर्ण आदि दृष्टिगोचर होने लगते हैं। भूरण की शिखर कटिप्रोथ लम्बाई (CR length, crown rump lengte) सिर से नितम्ब के तल तक की लम्बाई ) 19-20 मिमी. हो जाती है।

8 सप्ताह – भ्रूण पूर्णरूपेण एम्निऑन द्वारा घेर लिया जाता है। उँगलियाँ एवं पंजे (Toes) स्पष्ट होते हैं। लगभग सभी अंग निर्मित होकर विकसित हो रहे होते हैं। 8 वें सप्ताह के अन्त तक भूरण एक छोटे मनुष्य का आकार ले लेता है। अब इसे गर्भ (Foetus) कहते हैं। CR लम्बाई 28 से 30 मिमी.।

5 महीने – अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में रक्त निर्माण प्रारम्भ। पाती सम्पुट (Decidua Capsularis) पैराइटेलिस (Parietails) जुड़ जाती हैं। बाल आने लगते हैं।

9 महीने – अपरा (Placenta) का आकार अधिकतम हो जाता है। उँगलियाँ पर नाखून (Nails) आ जाते हैं। अगले 10 दिन में गर्भ जन्म लेने को तैयार होता है। मनुष्य में गर्भकाल 280 दिन का होता है।
HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन 36

उपर्युक्त समयावधि सन्निकट समयावधि (Approximate Time Period) है। कभी-कभी किसी कारणवश कुछ बच्चों का जन्म कुछ माह पहले हो जाता है। सातवें माह में जन्म लेने वाले शिशु भी सामान्य शिशु की भाँति विकसित हो जाते हैं।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जननb

प्रश्न 10.
(a) मानव शुक्रजनक नलिका की काट का नामांकित चित्र बनाइए ।
(b) मानव नर तथा मादा में युग्मक जनन में निम्न आधार पर अन्तर लिखिए-
(i) प्रक्रिया के प्रारम्भ होने का समय ।
(ii) प्रक्रिया के अन्त में बनी संरचनाएँ ।
उत्तर:
(a) [ संकेत- मानव शुक्रजनक नलिका की काट का नामांकित चित्र हेतु देखिए चित्र 3.13]
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(b) (i) प्रक्रिया के प्रारम्भ होने का समय-नर में यौवनारम्भ की आयु में होता है जबकि मादा में विकास की भ्रूणीय अवस्था में होता है।
(ii) प्रक्रिया के अन्त में बनी हुई संरचनाएँ – नर में एक प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट में चार स्पर्मेटोजोआ बनते हैं जबकि मादा में एक प्राथमिक असाइट से एक क्रियात्मक अण्ड तथा दो ध्रुवीयकाय (Pol body) बनाती है।

प्रश्न 11.
शुक्राणुजनन क्या है? संक्षेप में शुक्राणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन करें।
उत्तर:
युग्मकजनन को परिभाषित कीजिए । शुक्राणुजनन व अण्डजनन को विस्तार से समझाइए ।
जनद (Gonods) द्वारा युग्मकों के निर्माण को युग्मकजनन कहते हैं। युग्मकजनन के दौरान समसूत्रीय व अर्धसूत्रीय दोनों प्रकार के विभाजन पाये जाते हैं। इस प्रकार अगुणित (Haploid) युग्मकों का निर्माण होता है। युग्मक दो प्रकार के होते हैं जिन्हें क्रमशः शुक्राणु व अण्डाणु कहते हैं।

शुक्रजनन की क्रियाविधि
वृषण की जनन उपकला कोशिकाओं के समसूत्रीय व अर्धसूत्रीय विभाजन द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण शुक्रजनन (Spermatogenesis) कहलाता है। शुक्रजनन एक सतत (Continuous) क्रिया है। शुक्रजनन में अग्र दो चरण पाये जाते हैं-
(A) शुक्र णुपूर्वी का निर्माण या स्पर्में टोसाइटोसिस (Formation of Spermatid or Spermatocytosis)
(B) शुक्राणुपूर्वी का शुक्राणु में कायान्तरण अथवा स्पर्मिओजे नेसिस (Metarmorphosis of Spermatids in to Spermatozoa or Spermiogenesis)

(A) शुकाणुपूर्वी का निमर्णा (Formation of Spermatids)-यह क्रिया तरुणावस्था (Puberty) में आरम्भ होती है। शुक्रजनन प्राथमिक जनन कोशिका अथवा आदि जनन कोशिका से आरम्भ होता है। इस क्रिया में निम्न तीन चरण पाये जाते हैं-
(a) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)
(b) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)
(c) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase)
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(a) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)-इस दौरान प्राथमिक जनन कोशिका या आदि जनन कोशिका में एक के बाद एक समसूत्री विभाजन पाये जाते हैं, इससे निर्मित कोशिका को स्परमेटोगोनिया (Spermatogonia) कहते हैं। स्परमेटोगोनिया द्विगुणित (Diploid) या (2n) कोशिका है।

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(b) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)-इस दाँरान स्परमेटोगोनिया के आकार में वृद्धि होती है। यह वृद्धि दुगुने (Double) के बराबर होती है। इस वृद्धि द्वारा निर्मित कोशिका को प्राथमिक स्परमेटोसाइट्स (Primary Spermatocytes) कहते हैं। वृद्धि प्रावस्था, अण्डजनन की वृद्धि प्रावस्था से अल्पावधि की होती है। इस अवस्था में किसी भी प्रकार का विभाजन नहीं पाया जाता है। प्राथमिक स्परमेटोसाइट्स द्विगुणित (2n) कोशिका है।

(c) परिपक्व प्रावस्था (Maturation phase)-इस दौरान प्राथमिक स्परमेटेसाइट्स में दो बार विभाजन होता है-

  • प्रथम परिपक्वन विभाजन (First maturation division)-अर्धसूत्रीय-I (Meiosis-I) होता है। इसके परिणामस्वरूप दो द्वितीयक स्परमेटोसाइट्स (Secondary Spermatocytes) का निर्माण होता है।
  • द्वितीय परिपक्वन विभाजन (Second maturation division)-अर्धसूत्रीय-II होता है। यह समसूत्रीय विभाजन के समान होता है। इस प्रकार 4 शुक्राणुपूर्वी (Spermatid) का निर्माण हो जाता है। शुक्राणुपूर्वी अगुणित होते हैं। देखिए चित्र में।

(B) शुक णुपूर्वी का शुक्राणु में कायान्तरण (Spermiogenesis)-गोल, अचल व पूंछविहीन शुक्राणु पूर्वी
(Spermatid) का तर्कुकार, चल व पूंछयुक्त शुक्राणु में बदलना शुक्रकायान्तरण (Spermiogenesis) कहलाता है। इस शुक्राणु में निम्न परिवर्तन होते हैं-
(i) शीर्ष का निर्माण (Formation of Head)-शुक्राणुपूर्व कोशिका के केन्द्रक से जल के कम हो जाने से गुणसूत्र एक छोटे व अत्यधिक संहत् पिण्ड का निर्माण कर लेते हैं। RNA तथा केन्द्रिका (Nucleolus) की हानि हो जाने से केन्द्रक में केवल आनुवंशिक पदार्थ (DNA व क्रोमेटिन) रह जाते हैं। गोलाकार केन्द्रक दीर्घित हो जाता है और धीरे-धीरे उत्केन्द्री (Ecentric) स्थिति ग्रहण कर लेता है। कोशिकाद्रव्य निर्माणाधीन पूंछ की ओर चला जाता है। केन्द्रक कोशिकाद्रव्य के एक पतले आवरण से आवरित रह जाता है।

(ii) अग्रपिण्डक या एक्रोसोम का निर्माण (Formation of Acrosome)-शुक्राणुपूर्वी के गॉल्जीकाय से शुक्राणु का अग्रपिण्डक (स्क्रोसोम) बनता है। शुक्राणुपूर्वी के गाल्जीकाय में अनेक छोटी-छोटी रिक्तिकाओं का समूह होता है। इनमें से अग्रपिण्डक के निर्माण हेतु एक रिक्तिका बड़ी होने लगती है और इसमें एक सघन प्रोएक्रोसोमल कणिका (Proacrosomal Granule) बन जाती है ।

अब गॉल्जीकाय को अग्रकोरक (Acroblast) कहते हैं। अन्य रिक्तिकाओं के संयुक्त हो जाने से एक्रोसोमल कणिका भी अब बड़ी होकर एक्रोसोमल कणिका (Acrosomal granule) बन जाती है। एक्रोसोम आशय में उपस्थित तरल पदार्थ धीर-धीरे कम होने लगता है।
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(iii) ग्रीवा का निर्माण (Formation of Neck)-शुक्राणुपूर्व में पहले से ही दो तारक केन्द्र (Centrioles) होते हैं। ये बेलनाकार तथा परस्पर समकोणिक होते हैं, शुक्राणुजनन में ये दोनों तारक केन्द्र के पश्च भाग में चले जाते हैं। केन्द्रक के पश्च तल पर बने एक गड्ढे में एक तारक केन्द्र शुक्राणु के लम्बे अक्ष पर समकोणिक स्थिति में व्यवस्थित हो जाता है। इसे समीपस्थ तारक केन्द्र (Proximal Centriole) कहते हैं। दूसरे तारक केन्द्र को दूरस्थ तारक केन्द्र (Distal Centriole) कहते हैं। इसका लम्बा अक्ष शुक्राणु के लम्बे अक्ष की संपाती स्थिति में होता है।

(iv) मध्य खण्ड का निर्माण (Formation of Middle Piece)-दूरस्थ तारक केन्द्र से बना एक सूत्र धीरे-धीरे पीछे की ओर लम्बाई में बढ़ने लगता है। शुक्राणुपूर्व के सभी माइटोकॉन्ड्रिया इस सूत्र के समीपस्थ भाग के पास सर्पिल कुण्डली के रूप में व्यवस्थित हो जाते हैं। यह शुक्राणु का मध्य खण्ड होता है।

(v) पूंछ का निर्माण (Formation of Tail)-दूरस्थ तारक केन्द्र द्वारा बना सूत्र निरन्तर लम्बा होता जाता है तथा इसे ढकता हुआ कोशिकाद्रव्य भी पश्च भाग की ओर प्रवाहित होता रहता है। इसी सूत्र की पूंछ को अक्ष्रीय सूत्र (Axial filament) कहते हैं। यह सूत्र तेज गति से बढ़ता हुआ अन्ततः कोशिकाओं से निकलकर बाहर आ जाता है।

यह भाग कोशिकाद्रव्य से अनावरित होता है। अक्ष्षीय सूत्र का कोशिकाद्रव्य से अवरित भाग पूंछ का मुख्य खण्ड होता है तथा अनावरित भाग अन्त्यखण्ड (End piece) कहलाता है। इस समय तक शेष बचे कोशिकाद्रव्य को गॉल्जीकाय के अनावश्यक अवयवों सहित त्याग दिया जाता है और एक अत्यन्त सक्रिय शुक्राणु (Sperm) का निर्माण हो जाता है।

शुक्राणु की संरचना शुक्राणुओं की आकृति भिन्न-भिन्न जाति में भिन्न-भिन्न प्रकार की होती है। जैसे अस्थिल मछलियों में गोलाकार, मनुष्य में चमचाकार, चूहों में हुक के आकार के व पक्षियों में सर्पिलाकार होते हैं।
शुक्राणु के चार भाग पाये जाते हैं-

  1. शीर्ष
  2. ग्रीवा
  3. मध्य भाग
  4. पूँछ

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1. शीर्ष-मनुष्य में शीर्ष तिकोना एवं चपटा होता है। इसकी आकृति केन्द्रक की आकृति पर निर्भर होती है। शीर्ष भाग निम्न दो संरचनाओं से मिलकर बना होता है-
(i) केन्द्रक-शुक्राणु के शीर्ष का अधिकांश भाग केन्द्रक द्वारा घिरा होता है। केन्द्रक में प्रमुख रूप से ठोस क्रोमेटिन पदार्थ पाये जाते हैं। DNA अत्यधिक संघनित अवस्था में होता है।

(ii) अग्रपिंडक/एक्रोसोम-केन्द्रक के अग्र भाग में टोपी के समान रचना पाई जाती है जिसे एक्रोसोम कहते हैं। टोपी के समान एक्रोसोम पाया जाता है। यह स्पर्मलाइसिन्स नामक पाचक एन्जाइम का स्रावण करता है। स्तनधारियों में इसके द्वारा हाएलोयूरोनाइडेज एन्जाइम एवं प्रोएक्रोसिन, एसिड फॉस्फेटेस, बाइन्डीज का स्रावण किया जाता है। प्रोएक्रोसिन, एक्रोसोम क्रिया द्वारा एक्रोसिन में बदल जाता है। ये दोनों एन्जाइम अण्डभेदन में सहायक होते हैं।
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2.  ग्रीवा-शीर्ष एवं मध्य भाग के बीच जहाँ तारक केन्द्र उपस्थित रहते हैं, ग्रीवा क्षेत्र कहलाता है। इस भाग में तारककाय पायी जाती है। समीपस्थ तारककाय केन्द्रक के पश्च भाग में एक गर्त में स्थित होता है, जो निषेचन के बाद खण्डीभवन को प्रेरित करता है। इसके पास ही दूरस्थ तारककाय पाया जाता है।

3. मध्य भाग-यह भाग शुक्राणु का ऊर्जा कक्ष या इंजन कहलाता है। मध्य भाग दूरस्थ तारककाय से मुद्रिका तारककाय तक होता है जिसमें अक्षीय तन्तुओं के चारों ओर माइटोकॉन्ड्रिया के आपस में आंशिक समेकन के फलस्वरूप बनी सर्पिल कुण्डली के रूप में व्यवस्थित रहते हैं।

स्तनधारियों में माइटोकॉन्ड्रिया के आपस में आंशिक समेकन के फलस्वरूप बनी सर्पिल कुण्डली को नेबेनकर्न (Nebenkern) आच्छद कहते हैं। मध्य भाग द्वारा ही शुक्राणु की गति के लिये आवश्यक ऊर्जा प्रदान की जाती है। शीर्ष के पश्च भाग एवं सम्पूर्ण मध्य भाग को चारों ओर कोशिकाद्रव्य की महीन पर्त घेरे रहती है जिसे मेनचैट (Manchette) कहते हैं। मध्य भाग के अंत में एक मुद्रिका सेन्ट्रियोल पायी जाती है।

4. पूंछ-यह शुक्राणु का सबसे लम्बा तन्तुमय भाग है जो गति में सहायक है।
अण्डजनन (Oogenesis)-अण्डाशय की जनन उपकला द्वारा अण्डाणु निर्माण एवं परिपक्वन की क्रिया को अण्डजनन कहते हैं। अण्डजनन में निम्न तीन चरण पाये जाते हैं-
(A) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)
(B) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)
(C) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase)

(A) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase)-प्रारम्भिक अथवा प्राथमिक जनन कोशिकाओं (Primordial or Primary Germ Cells) के बारम्बार समसूत्री विभाजन के फलस्वरूप वर्त्त कोशिकाएँ अण्डजन या ऊगोनिया (Oogonia) कहलाती हैं। ऊगोनिया द्विगुणित (2n) कोशिकाएँ हैं।
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(B) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase)-इस दौरान ऊगोनिया में पुन: समसूत्रीय विभाजन होता है। इसके फलस्वरूप स्तनधारियों के अण्डाशय में कोशिकाओं के समूह का निर्माण होता है, जिन्हें अण्डवाही रज्जु (Ovigerous cord) कहते हैं। अण्डवाही रज्जु की एक ऊगोनिया कोशिका वृद्धि करती है व शेष कोशिकाएँ घेर लेती हैं। ऊगोनिया की वृद्धि से प्राथमिक ऊसाइट (Primary Oocyte) का निर्माण होता है। प्राथमिक ऊसाइट को घेरने वाली कोशिकाओं को पुटक कोशिकाएँ (Follicle cells) कहते हैं।

(C) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase)-प्राथमिक ऊसाइट (Primary Oocyte) में, अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) प्रथम द्वारा द्वितीयक ऊसाइट (Secondary Oocyte) व एक पोलर बॉडी (Polar Body) का निर्माण होता है। प्रारम्भिक पुटिक की पुटिकीय कोशिकाओं में निरन्तर विभाजन होने लगता है जिसके फलस्वरूप विकासशील अण्डकोशिका के चारों ओर एक बहुस्तरीय आवरण बन जाता है जिसे मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा (Membrana Granulosa) कहते हैं तथा सम्पूर्ण पुटिका समूह को अब द्वितीयक पुटिका (Secondary Follicle) कहते हैं।

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धीरे-धीरे अण्डाणु व मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा के बीच रिक्त स्थान का निर्माण होने लगता है जिसे पुटिका गुहा (Follicular Cavity) कहते हैं। इसमें पाये जाने वाले पोषक तरल पदार्थ को पुटिका द्रव्य (Follicular Fluid) कहते हैं। पुटिका कोशिकाओं का स्तर जो अण्डाणु के चारों ओर उपस्थित होता है उसे कोरोना रेडिएटा (Corona Radiata) कहते हैं।

इसके ठीक नीचे अण्डाणु के चारों तरफ एक ओर पारदर्शी आवरण पाया जाता है जिसे जोना पेल्यूसिडा (Zona Pellucida) कहते हैं। इस अवस्था में पुटिका अपने परिमाण के चरम सीमा पर होती है और इसे अब ग्राफ्रियन पुटिका (Graffian Follicle) कहते हैं। ग्राफियन पुटिका (Graffian Follicle) अण्डाशय के आवरण के निकट पहुँचकर फट जाती है तथा इसमें अण्डाणु (Ovum) बाहर निकलकर देहगुहा में आ जाता है। पुटिका से अण्डाणु के बाहर निकलने की प्रक्रिया को अण्डोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं।

शुकजनन व अण्डजनन में समानताएँ

  1. शुक्र जनन (Spermatogenesis) व अण्ड जनन (Oogenesis) दोनों क्रियाएँ जनन उपकला (Germinal Epithelium) से प्रारम्भ होती है।
  2. दोनों ही क्रियाओं में तीन समान प्रावस्थाएँ होती हैं-
    • गुणन प्रावस्था
    • वृद्धि प्रावस्था
    • परिपक्वन प्रावस्था
  3. गुणन प्रावस्था में दोनों क्रियाओं में समसूत्री विभाजन होता है ।
  4. परिपक्वन प्रावस्था में अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis division) होता है।
  5. दोनों की अन्तिम प्रावस्था में अगुणित युग्मक का निर्माण होता है।

प्रश्न 12.
(a) मानव शुक्राणु का चित्र बनाइए तथा उसके कोशिकीय घटकों को नामांकित कीजिए। किन्हीं तीन भागों के कार्य बताइए ।
(b) शुक्राणुजनन के बाद जीवित रहने के लिए इनका सिर कहाँ धंसा होता है?
उत्तर:
संकेत-
(a) शुक्राणु के चित्रों एवं तीन भागों के कार्य हेतु अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न के निबन्धात्मक प्रश्न क्रमांक 1 का अवलोकन करें।]
(b) शुक्राणुओं का सिर सर्टोली कोशिकाओं (Sertoli Cells) में धंसा होता है।

प्रश्न 13.
मानव जनन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
पुरुष जनन तंत्र (Male Reproductive System)
पुरुषों में एक जोड़ी वृषण (Testis) प्राथमिक जननांग के रूप में होते हैं। इसके अतिरिक्त सहायक जननांग (Accessory Reproduction organs) मुख्यतया वृषणकोष (Scrotal Sac), अधिवृषण (Epididymis), शुक्रवाहिनियां (Vas-deferences), शिश्न (Penis) तथा प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland) एवं कॉउपर ग्रन्थि (Cowper’s Gland) पाये जाते हैं।

वृषण (Testis)-वृषण प्राथमिक जननांग होते हैं जिनका निर्माण भ्रूणीय मीसोडर्म (Mesoderm) से होता है। ये मीसोर्कियम (Mesorchium) की सहायता से उदरगुहा की पृष्ठभित्ति से जुड़े रहते हैं। वृषण संख्या में दो होते हैं। इनका रंग गुलाबी तथा आकृति में अण्डाकार होते हैं जिसकी लम्बाई 4 से 5 से.मी., चौड़ाई लगभग 2 से 3 से.मी. एवं वजन में 12 ग्राम होता है। दोनों वृषण उदरगुहा के बाहर एक थैले में स्थित होते हैं जिसे वृषणकोष (Scrotal Sac) कहते हैं। वृषणकोष एक ताप नियंत्रक की भांति कार्य करता है।

वृषणों का तापमान शरीर के तापमान से 2-2.5° C नीचे बनाये रखता है। यह तापमान शुक्राणुओं के विकास के लिए उपयुक्त होता है। वृषणकोषों की दीवार पतली, लचीली एवं रोमयुक्त होती है। इसके अन्दर पेशी तन्तुओं का मोटा अवत्वक (Subcutaneous) स्तर होता है जिसे डारटोस पेशी (Dartos muscle) कहते हैं।

रेखित पेशी तन्तुओं का एक दण्डनुमा गुच्छा वृषणकोष के प्रत्येक अर्धभाग के अवत्वक पेशी स्तर को उदरीय अवत्वक पेशी स्तर से जोड़ता है, जिसे वृषणोत्कर्ष पेशी (cremaster muscles) कहते हैं। प्रत्येक वृषण कोष की गुहा उदरगुहा से एक सँकरी नलिका द्वारा जुड़ी होती है जिसे वक्षणनाल (Inguinal Canal) कहते हैं। वक्षणनाल के द्वारा होकर वृषण धमनी, वृषणशिरा तथा वृषण तन्त्रिका एक वृषण रज्जु (Spermatic Cord) के रूप में वृषण तक जाती है।
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वृषण पर दो आवरण पाये जाते हैं जिन्हें वृषण खोल (Testicular capsule) कहते हैं। इसमें बाहरी महीन आवरण को मौनिक स्तर (Tunica Vaginalis) कहते हैं। यह उदरगुहा के उदरावण से बनता है जबकि भीतरी स्तर को श्वेत कुंचक अथवा ट्यूनिका ऐल्ब्यूजिनिया (Tunica Albuginea) कहते हैं। वृषण की गुहा भी इसी ऊतक की पट्टियों द्वारा लगभग 250 पालियों या वेश्मों में बंटी रहती है।

प्रत्येक पाली में अनेक कुण्डलित रूप में एक-दूसरे से सटी हुई कई पतली नलिकाएँ पायी जाती हैं, जिन्हें शुक्रजनन नलिका (Seminiferous Tubules) कहते हैं। इन नलिकाओं के बीच संयोजी ऊतक पाया जाता है जिसमें विशेष प्रकार की अन्तराली कोशिकाएँ या लैडिग कोशिकाएँ (Leydig cells) पायी जाती हैं। इन कोशिकाओं द्वारा नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का विकास होता है।

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प्रत्येक शुक्रजनक नलिका (Seminiferous Tubules) के चारों ओर झिल्लीनुमा आवरण पाया जाता है जिसे ट्यूनिका प्रोप्रिया (Tunica Propria) कहते हैं। इस झिल्ली के नीचे जनन उपकला (Germinal Epithelium) का स्तर पाया जाता है। शुक्रजनक नलिका (Seminiferous Tubules) को वृषण की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई कहा जाता है। जनन उपकला स्तर में दो प्रकार की कोशिकाएँ पायी जाती हैं-
(i) स्परमेटोगोनिया कोशिकाएँ (Spermatogonia cells)इनके द्वारा शुक्रजनन (Spermatogenesis) द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण होता है।
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(ii) सरटोली कोशिकाएँ (Sertoli cells)-सरटोली कोशिकाओं को अवलम्बन या पोषी या नर्स या मातृ या सबटेन्टाकुलर कोशिकाएँ (Supporting or Nutritive or Nurse or Mother or Subtentacular cells) भी कहते हैं। ये कोशिकाएँ आकार में बड़ी, संख्या में कम एवं स्तम्भी प्रकार की होती हैं। इनका स्वतन्त्र भाग कटाफटा होता है। इस भाग में शुक्राणुपूर्व कोशिकाएँ (Spermatids) सर्टोली कोशिकाओं से सटकर संलग्न रहती हैं।
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सरटोली कोशिकाओं के कार्य (Functions of Sertoli Cells)-

  • शुक्राणुओं को आलम्बन प्रदान करती हैं।
  • ये कोशिकाएँ शुक्राणुओं को संरक्षण एवं पोषण प्रदान करती हैं।
  • शुक्रकायान्तरण (Spermiogenesis) के दौरान अवशिष्ट कोशिकाद्रव्य (Residual Cytoplasm) का भक्षण करना।
  • सरटोली कोशिका द्वारा एन्टीमुलेरियान हार्मोन का स्रावण किया जाता है। यह भूरणीय अवस्था में मादा जननवाहिनी के विकास का संदमन करता है।
  • सरटोली कोशिकाओं के द्वारा इनहिबिन (Inhibin) हार्मोन का स्रावण किया जाता है जो FSH का संदमन करता है।
  • इन कोशिकाओं के द्वारा ABP (एण्ड्रोजन बाइडिंग प्रोटीन) का स्रावण किया जाता है।

शुक्रजनन नलिका (Seminiferous Tubules) से पतलीपतली नलिकाएँ निकलती हैं, वृषण के अन्दर ये नलिकाएँ आपस में मिलकर एक जाल बनाती हैं, इसे वृषण जालक (Rete Testis) कहते हैं। इससे लगभग 15-20 संवलित नलिकाएँ (Convoluted ductules) निकलती हैं जिन्हें वास इफरेंशिया (Vas Efferentia) कहते हैं। ये नलिकाएँ वृषण की अग्र या ऊपरी सतह पर पहुँचकर लम्बी रचना में खुलती हैं जिसे अधिवृषण (Epididymis) कहते हैं।

अधिवृषण (Epididymis)-यह एक लम्बी तथा अत्यधिक कुंडलित नलिका है जिसकी लम्बाई 6 मीटर होती है। प्रत्येक वृषण के भीतरी किनारों पर अत्यधिक कुण्डलित नलिका द्वारा निर्मित एक रचना पाई जाती है जिसे अधिवृषण कहते हैं। अधिवृषण को तीन भागों में बाँटा गया है-
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  • कैपुट एपिडिडाइमिस (Caput Epididymis)-यह वृषण के ऊपर केप (Cap) के समान होती है। इमें वृषण से आने वाली वास इफरेन्शिया (Vas Efferentia) खुलती है। कैपुट एपिडिडाइमिस को ग्लोबस मेजर (Globus Major) भी कहते हैं।
  • कॉर्पस एपिडिडाइमिस (Corpus Epididymis)-यह मध्य भाग है व संकरा होता है। इसे एपिडिडाइमिस काय (Epididymis body) भी कहते हैं।
  • कॉडा एपिडिडाइमिस (Cauda Epididymis)-यह एपिडिडाइमिस का पश्च व सबसे छोटा भाग है। इसे ग्लोबस माइनर (Globus Minor) भी कहते हैं। कॉडा एपिडिडाइमिस से इसकी नली पीछे निकलकर शुक्रवाहिनी (Vas deference) बनाती है। अधिवृषण

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(Epididymis) के कार्य-

  • शुक्राणुओं को अधिवृषण में संग्रहित किया जाता है व यहाँ इनका परिपक्वन होता है।
  • यह वृषणों से शुक्रवाहिनी में शुक्राणुओं के पहुँचने के लिए मार्ग प्रदान करते हैं।
  • अधिवृषण (Epididymis) में शुक्राणु एक माह तक संचित रह सकते हैं। स्खलन न होने की स्थिति में शुक्राणुओं का विघटन न होने पर इनके तरल का अवशोषण इसी में होता है।
  • इसकी नलिका में क्रमाकुंचन के कारण शुक्राणु वास डिफरने्स (Vas deference) की ओर बहते हैं।

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  • सरटोली कोशिका द्वारा एन्टीमुलेरियान हार्मोन का सावण किया जाता है। यह भ्रूणीय अवस्था में मादा जननवाहिनी के विकास का संदमन करता है।
  • सरटोली कोशिकाओं के द्वारा इनहिबिन (Inhibin) हार्मोन का स्रावण किया जाता है जो =FSH= का संद्मन करता है।
  • इन कोशिकाओं के द्वारा ABP (एण्ड्रोजन बाइडिंग प्रोटीन) का स्रावण किया जाता है।

शुक्रवाहिनी (Vas deference)-शुक्रवाहिनी लगभग 45 सेमी. लम्बी नलिका होती है। इसकी दीवार पेशीय होती है। शुक्रवाहिनी अधिवृषण के पश्च भाग से प्रारम्भ होकर ऊपर की ओर वक्षणनाल से होकर गुहा में मूत्राशय के पश्च तल पर नीचे की ओर मुड़कर चलती हुई अन्त में एक फूला हुआ भाग तुम्बिका (Ampulla) बनाती है। यहाँ इसमें शुक्राशय (Seminal Vesicle) की छोटी वाहिनी आकर खुलती है। दोनों के मिलने से स्खलनीय वाहिनी (Ejaculatory Duct) का निर्माण होता है।

शुक्रवाहिनी की भित्ति पेशीय होती है व इसमें संकुचन व शिथिलन की क्षमता पायी जाती है। संकुचन व शिथिलन द्वारा शुक्राणु शुक्राशय तक पहुँचा दिये जाते हैं। शुक्रवाहिनियों में ग्रन्थिल कोशिकाएँ पाई जाती हैं जो चिकने पदार्थ का सावण करती हैं। यह द्रव शुक्राणुओं को गति करने में सहायता करता है। तुम्बिका (Ampulla) में शुक्राणुओं को अस्थायी रूप से संग्रह किया जाता है। स्खलनीय वाहिनियां अन्त में मूत्र मार्ग (Urethra) में आकर खुलती हैं।

मूत्रमार्ग (Urethra)-मूत्राशय से मूत्रवाहिनी निकलकर स्खलनीय वाहिनी से मिलकर मूत्रजनन नलिका या मूत्रमार्ग (Urinogenital Duct or Urethra) बनाती है। यह लगभग 20 से.मी. लम्बी नाल होती है जो शिश्न के शिखर भाग पर मूत्रजनन छिद्र (Urinogenital Aperture) द्वारा बाहर खुलती है। मूत्रमार्ग एवं वीर्य दोनों के लिए एक उभयनिष्ठ मार्ग (Common Passage) का कार्य करता है।

मूत्रमार्ग (Urethra) तीन भागों में बँटा होता है-

  1. प्रोस्टेटिक मूत्रमार्ग (Prostatic Urethra)
  2. झिल्लीमय मूत्रमार्ग (Membranous Urethra)
  3. स्पंजी मूत्रमार्ग (Spongy Urethra)

1. प्रोस्टेटिक मूत्रमार्ग (Prostatic Urethra)-यह मूत्रमार्ग का 2-3 से.मी. लम्बा भाग होता है। यह प्रोस्टेट ग्रन्थि के मध्य से गुजरता तथा दोनों ओर की स्खलन वाहिनियाँ इसी भाग में खुलती हैं।

2. झिल्लीमय मूत्रमार्ग (Membranous Urethra)-यह मध्य का लगभग 1 से.मी. लम्बा भाग होता है जो प्रोस्टेट ग्रन्थि तथा शिश्न (Penis) के बीच स्थित पेशीय तन्तुपट (Muscular Diaphragm) को बेधता हुआ शिश्न में प्रवेश करता है।

3. स्पंजी मूत्रमार्ग (Spongy Urethra)-यह मूत्रमार्ग का अन्तिम या शिखर भाग है जो शिश्न में से गुजरता है। यह स्पंजी तथा सर्वाधिक लम्बाई (16-17 से.मी.) वाला भाग है।

शिश्न (Penis)-पुरुष का मैथुनी अंग है जो एक लम्बा, संकरा, बेलनाकार तथा वहिःसारी (Protrusible) होता है। इसका स्वतन्त्र सिरा फूला हुआ तथा अत्यधिक संवेदी होता है तथा शिश्नमुण्ड (Galns Penis) कहलाता है। यह भाग एक त्वचा के आवरण से ढका रहता है। यह आवरण शिश्न = मुण्डछद (Prepuce) कहलाता है। शिश्न दोनों वृषणकोषों के ऊपर व मध्य में उदर के निचले भाग में लटका रहता है।

यह तीन भागों में विभेदित होता है-

  • शिश्नमूल (Root of Penis)-यह मूत्रोजनन तनुपट (Urinogenital diaphargm) से लगा शिश्न का समीपस्थ भाग होता है।

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  • शिश्नकाय (Body of Penis)-यह शिश्न का मुख्य लम्बा भाग है।
  • शिश्नमुण्ड (Glans Penis)-यह शिश्न का शिखर भाग होता है ।

शिश्न की संरचना पेशियों एवं रुधिर कोटरों (Blood Sinus) से होती है। ये तीन मोटे अनुदैर्घ्य डोरियों के समान रज्ञुओं (Cords) के रूप में होते हैं। पृष्ठ भाग में ऐसी संरचनाएँ दो होती हैं जिन्हें कॉरपोरा केवरनोसा (Corpora Cavernosa) तथा अधर भाग में एक कॉर्पस स्पंजिओसम (Corpus Spongiosum) कहलाती है।

HBSE 12th Class Biology Important Questions Chapter 3 मानव जनन

सामान्य अवस्थाओं में शिश्न शिथिल एवं छोटा होता है। मैथुन उत्तेजना के समय इसके कोटर रुधिर से भर जाते हैं तथा यह लम्बा, मोटा तथा कड़ा हो जाता है। इस अवस्था में शिश्नमुण्ड नग्न हो जाता है तथा यह स्त्री की योनि में आसानी से प्रविष्ट कराया जा सकता है। मैथुन क्रिया में सुगमतापूर्वक शुक्राणुओं को वीर्य के साथ स्थानान्तरित किया जा सकता है।

सहायक ग्रन्थियाँ (Accessory Glands)-पुरुषों में मुख्यतः तीन प्रकार की सहायक जनन ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं जो जनन में सहायता करती हैं-
(1) प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate Gland)-इस ग्रन्थि की आकृति सिंघाड़ेनुमा होती है। यह मूत्रमार्ग के आधार भाग पर स्थित होती है एवं कई पिण्डों में विभक्त होती है। प्रत्येक पिण्ड एक छोटी नलिका द्वारा मूत्रमार्ग में खुलता है। इस ग्रन्थि का स्राव विशेष गंध युक्त, सफेद एवं हल्का क्षारीय होता है जो वीर्य का 25-30 प्रतिशत भाग बनाता है।

इस स्राव में फॉस्फेट्स सिट्रेट, लाइसोजाइम, फाइब्रिनोलाइसिन, स्पर्मिन (Spermin) आदि पाये जाते हैं। वृद्ध पुरुषों में यह ग्रन्थि बड़ी हो जाती है व मूत्रोजनन मार्ग में अवरोध उत्पन्न कर देती है। इसे शल्य क्रिया द्वारा हटा दिया जाता है। कार्य-इस ग्रन्थि का साव (प्रोस्टेटिक द्रव) शुक्राणुओं को सक्रिय बनाता है एवं वीर्य के स्कंदन को रोकता है।

(2) काडपर गन्थि (Cowper’s Gland)-इ से बल्बोयूरेश्रिल ग्रन्थियाँ (Bulbourethral Glands) भी कहते हैं। ये ग्रन्थियाँ एक जोड़ी प्रोस्टेट ग्रन्थि के पीछे स्थित होती हैं। इनका स्राव चिकना, पारदर्शी व क्षारीय होता है जो मूत्रोजनन मार्ग की अम्लीयता को नष्ट करता है। यह तरल मादा की योनि को चिकना कर मैथुन क्रिया को सुगम बनाता है।

(3) शुक्राशय (Seminal Vesicle)-शुक्राशय एक थैलीनुमा रचना होती है जो एक जोड़ी के रूप में मूत्राशय की पश्च सतह एवं मलाशय के बीच में स्थित होती है। इसके द्वारा एक पीले रंग का चिपचिपे पदार्थ का स्रावण किया जाता है। यही तरल पदार्थ वीर्य का अधिकांश भाग (लगभग 60 प्रतिशत) बनाता है।

इसमें फ्रक्टोस, शर्क रा, प्रोस्टाग्लैं डिन्स (Prostaglandins) तथा प्रोटीन सेमीनोजेलिन (Semenogelin) होते हैं। फ्रक्टोस शुक्राणुओं को ATP के रूप में ऊर्जा प्रदान करता है। क्षारीय प्रकृति के कारण यह स्राव योनि मार्ग की अम्लीयता को समाप्त कर शुक्राणुओं की सुरक्षा करता है। प्रत्येक शुक्राशय से एक छोटी नलिका निकल कर शुक्रवाहिनी की तुम्बिका में खुलती है। शिश्न की उत्तेजित अवस्था में स्खलन के समय दोनों शुक्राशय संकुचित होकर अपने स्राव को मुक्त करते हैं।

पुरुष जनन तंत्र (Female Reproductive System)
इस पाठ के बिन्दु सं. 3.2 का अवलोकन करें।
स्त्रियों में एक जोड़ी अण्डाशय (Ovary) प्राथमिक जननांगों (Primary Sex Organs) के रूप में होते हैं। इसके अतिरिक्त अण्डवाहिनी (Oviduct), गर्भाशय (Uterus), योनि (Vagina), भग (Vulva), जनन ग्रन्थियाँ (Reproductive glands) तथा स्तन या छाती (Breast) सहायक जननांगों का कार्य करते हैं।
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(1) अण्डाशय (Ovary)-स्त्रियों में अण्डाशय की संख्या दो होती है, जिनकी आकृति बादाम के समान होती है। प्रत्येक अण्डाशय की लम्बाई लगभग 2 से 4 से. मी. होती है। दोनों अण्डाशय उदरगुहा में वृक्कों के काफी नीचे श्रोणि भाग (Pelvic region) में पीछे की ओर गर्भाशय (Uterus) के इधर-डधर स्थित होते हैं। प्रत्येक अण्डाशय उदरगुहीय पेरीटोनियम के वलन से बनी मीसोविरियम (Mesovarium) नामक झिल्लीनुमा मीसेन्ट्री (Mesentery) द्वारा श्रोणि भाग की दीवार से टिका होता है।

ऐसे ही एक झिल्ली अण्डाशयी लिगामेन्ट (Ovarian Ligament) प्रत्येक अण्डाशय को दूसरी ओर से गर्भाशय से जोड़ती है। अण्डाशय की संरचना-प्रत्येक अण्डाशय भी वृषण के समान तीन स्तरों से घिरा होता है। बाहरी स्तर को ट्यूनिका एलब्यूजिनिया (Tunica Albuginea) कहते हैं। यह संयोजी ऊतक का महीन स्तर होता है।

आन्तरिक स्तर को ट्यूनिका प्रोपरिया (Tunica Propria) कहते हैं तथा इनके बीच वाले स्तर को जनन उपकला (Germinal Epithelium) कहते हैं। जनन उपकला घनाकार कोशिकाओं का बना होता है। अण्डाशय के बीच वाला भाग जो तन्तुमय होता है तथा संवहनीय संयोजी ऊतक (Vascular Connective Tissue) का बना होता है उसे स्ट्रोमा कहते हैं। स्ट्रोमा दो भागों में विभक्त होता है जिन्हें क्रमशः परिधीय वल्कुट (Peripheral Cortex) एवं आंतरिक मध्यांश (Internal Medulla) कहते हैं।
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अण्डाशय के वल्कुट (Cortex) भाग में अनेक अण्ड पुटिकाएँ (Ovarian Follicles) पायी जाती हैं। जिनका निर्माण जनन उपकला से होता है। पुटिकाएँ बहुकोशिकीय झिल्ली मेम्ब्रेना ग्रेन्यूलोसा (Membrana Granulosa) से घिरी होती हैं। जिसके भीतर फॉलीक्यूलर गुहा (Follicular Cavity) होती है जो फॉलीक्यूलर द्रव (Follicular Fluid) से भरी होती है।

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इस गुहा में अण्ड कोशिका (Ovum) होती है जो चारों ओर अनेक फॉलीकुलर कोशिकाओं से घिरी रहती है। इन कोशिकाओं को जोना पेल्यूसिडा (Zonapellucida) एवं चारों ओर के मोटे स्तर को कोरोना रेडिएटा (Corona Radiata) कहते हैं। इस संरचना को अब परिपक्व ग्राफियन पुटिका (Mature Graatian Follicle) कहते हैं। परिपक्व ग्राफियन पुटिका अण्डाशय की सतह पर पहुँच कर फट जाती है तथा अण्ड बाहर निकलकर उदरीय गुहा में आ जाता है। इस क्रिया को डिम्बोत्सर्ग (Ovulation) कहते हैं।
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(2) अण्डवाहिनी (Oviduct)-स्त्री में दो अण्डवाहिनियाँ होती हैं जो अण्डाणु को अण्डाशय से गर्भाशय तक पहुँचाती हैं। प्रत्येक अण्डवाहिनी की लम्बाई 10-12 से.मी. होती है। अण्डवाहिनी का स्वतन्त्र सिरा जो अण्डाशय के निकट होता है, कीप रूपी (Funnellike) एवं चौड़ा होता है तथा इसे आस्टियम (Ostium) कहते हैं। आस्टियम या मुखिका का किनारा झालरदार (Fimbriated) एवं रोमाभि (Ciliated) होता है।

अतः मुखिका को फिम्ब्रिएटेड कीप (Fimbriated Funnel) भी कहते हैं। अण्डोत्सर्ग के बाद अण्ड अण्डाशय से निकलकर उदरगुहा में आकर इसी फिम्ब्रिएटेड कीप के द्वारा फैलोपियन नलिका (Fallopian Tube) में चला जाता है। फैलोपियन नलिका की भित्ति पेशीयुक्त होती है तथा भीतर से अत्यन्त वलित (Folded) होती है। निषेचन की क्रिया फैलोपियन नलिका में ही होती है। प्रत्येक फैलोपियन नलिका अपनी ओर के गर्भाशय (Uterus) में अपने पश्च अन्त द्वारा खुलती है।

(3) गर्भाशय (Uterus)-इसे बच्चादानी (वुम्ब) भी कहते हैं। इसकी आकृति उल्टी नाशपाती के समान होती है। यह श्रोणि भित्ति से स्नायुओं द्वारा जुड़ा होता है। यह लगभग 7.5 से.मी. लम्बा, 3 से.मी, मोटा तथा अधिकतम 5 से.मी, चौड़ा खोखला तथा शंक्वाकार अंग होता है। इसका संकरा भाग नीचे की ओर तथा चौड़ा भाग ऊपर की ओर होता है।

इसके पीछे की ओर मलाशय (Rectum) तथा आगे की ओर मूत्राशय (Urinary Bladder) होता है। गर्भाशय की भित्ति, फतकों की तीन परतों से बनी होती हैबाहरी पताली झिल्लीमय स्तर को परिगभांशय (पेरिमेट्रियम), मध्य मोटी चिकनी पेशीख स्तर को गभाँशय पेशी स्तर (मायोमैट्रियम) और आन्तरिक ग्रान्थल स्तर को गर्भाशय अन्तःस्तर (एंड्रोमैट्रियम) कहते हैं जो गभाशएय गुहा को आस्तरित करती है। आतंव चक्र (Menstrual Cycle) के चक्र के दौरान गर्भाशब के अन्तःस्तर में चक्रीय परिवर्तन होते हैं, जबकि गभांशय पेशी स्तर में प्रसव के समय काफी तेज संकुचन होंता है।

गर्भाशाब को तीन भागों में विभेदित किया गया है-

  • फण्डस (Fundus)-ऊपर की और उभरा हुआ भाग फण्डस कहलाता है।
  • काय (Body)-बीच का प्रमुख भाग ग्रीवा (Cervix) कहलाता है।
  • ग्रीवा (Cervix)-सबसे निचला भाग ग्रीवा (Cervix) कहलाता है जो योनि से जुड़ा होता है।

भूण का विकास गर्भाशय (Uterus) में होता है। शूण अपरा (Placenta) की सहायता से गर्भाशय की भित्ति से संलग्न होता है। यहाँ भ्रूण को सुरक्षा एवं पोषण प्राप्त होता है।

(4) योनि (Vagina)-गर्भाशय ग्रीवा (Cervix Uteri) आगे बढ़कर एकपेशीय लचीली नलिका रूपी रचना का निर्माण करती है जिसे योनि (Vagina) कहते है। योनि स्त्रियों में मैथुन अंग (Copulatory organ) की तरह कार्य करती है। इसके अतिरिक्त योनि गर्भाशाय से उत्पन्न मास्तिक स्राव को निक्कासन हेतु पथ उपलख्ब करवाती है एवं शिशु जन्म के समय गर्भस्थ शिशु के बाहर निकालने के लिए जन्मनाल (Birth Canal) की तरह कार्य करती है।

(5) बाद्य जननांग (External Genitila)-स्त्रियों के बाह्ष जननांग निम्न हैं-
(i) जघन शौल (Mons Pubis)-यह प्यूबिस लिम्फाइसिस के ऊपर स्थित होता है जो गद्दीनुमा होता है क्योंकि इसकी त्वचा के नीचे वसीय परत होती है। तरुण अवस्था में इस पर घने रोम उग आते हैं जो अन्त तक रहते हैं।
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(ii) वृहद् भगोष्ठ (Labia Majora)-ये जघन शैल (प्यूबिस मुंड) से नीचे की तरफ व पीछे की ओर से विस्तृत एक जोड़ी बड़े अनुद्रै्घ्य वलन होते हैं। इनकी बाह्य सतह पर रोम पाये जाते हैं।

(iii) लघु भगोष्ठ (Labia Minora)-ये आन्तरिक व छोटे वलन होते हैं। इन पर रोम नहीं पाये जाते हैं। लेबिया माइनोरा प्रघाण (Vestibule) को घेरे रहते हैं।

(iv) भगशेफ या क्लाइटोरिस (Clitoris)-यह जघन शैल (Mons Pubis) लेबिया माइनोरा के अग्र कोने पर स्थित एक संवेदी तथा घुण्डीनुमा अथवा अंगुलीनुमा रचना है। यह नर के शिश्न के समजात अंग है। यह अत्यधिक संवेदनशील होता है क्योंक इसमें स्पर्शकणिकाओं की अधिकता पायी जाती है।

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(v) योनिच्छद (Hymen)-योनि द्वार पर पतली झिल्ली पाई जाती है जिसे योनिच्छद (Hymen) कहते हैं। यह लैंगिक सम्पर्क, शारीरिक परिश्रम एवं व्यायाम के कारण फट जाती है। बार्थोलिन की ग्रन्थियाँ (Bartholian Glands)-योनिद्वार के दोनों ओर एक-एक सेम की आकृति की ग्रन्थि लेबिया मेजोरा पर स्थित होती है। ये ग्रन्थियाँ एक क्षारीय व स्रेहक द्रव का स्राव करती हैं जो कि भग (Vulva) को नम रखता है एवं लैंगिक परस्पर व्यवहार को सुगम बनाता है।
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(6) स्तनग्रन्थि (Mammary Glands)-स्त्री में स्तन ग्रन्थियों (Mammary Glands) से युक्त एक जोड़ी स्तन उपस्थित होते हैं। ये वक्ष के सामने की तरफ अंसीय पेशियों (Pectoral Muscles) के ऊपर स्थित होते हैं। प्रत्येक स्तन ग्रन्थि में भीतर का संयोजी ऊतक $15-20$ नलिकाकार कोष्ठकीय पालियों का बना होता है। इनके बीच-बीच में वसीय ऊतक होता है। प्रत्येक पाली में अंगूर के गुच्छों के समान दुग्ध ग्रन्थियाँ होती हैं जो दुग्ध का स्राव करती हैं। यह दूध नवजात शिशु के पोषण का कार्य करता है।

प्रत्येक पालिका से निकली कई छोटी वाहिनियां एक दुग्ध नलिका या लैक्टीफेरस नलिका (Lactiferous Duct) बनाती हैं। ऐसी कई दुग्ध नलिकाएँ स्वतन्त्र रूप से आकर चूचुक (Nipples) में खुल जाती हैं। चूचुक स्तनग्रन्थियों के शीर्ष भाग पर उभरी हुई वर्णांकित (Pigmented) रचना है। इसके आसपास का क्षेत्र भी गहरा वर्णांकित हो जाता है। इस क्षेत्र को स्तन परिवेश (Areola Mammae) कहते हैं। स्त्रियों में चूचुक के चारों तरफ का क्षेत्र वसा के जमाव तथा पेशियों के कारण काफी उभरा हुआ होता, है। चूचुक में 0.5 मिमी. के 15-25 छिद्र पाये जाते हैं। पुरुषों में चूचुक अवशेषी होते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-

1. द्वितीयक अंडक का अर्धसूत्री विभाजन पूर्ण होता है- (NEET-2020)
(अ) सम्भोग के समय
(ब) युग्मनज बनने के बाद
(स) शुक्राणु एवं अण्डाणु के संलयन के समय
(द) अण्डोत्सर्ग के पहले
उत्तर:
(स) शुक्राणु एवं अण्डाणु के संलयन के समय

2. निम्न में से कौन ग्राफी पुटक से अण्डाणु का मोचन (अण्डोत्सर्ग) करेगा ?(NEET-2020)
(अ) प्रोजेस्टरोन की उच्च सान्द्रता
(ब) LH की निम्न सान्द्रता
(स) FSH की निम्न सान्द्रता
(द) एस्ट्रोजन की उच्च सान्द्रता
उत्तर:
(द) एस्ट्रोजन की उच्च सान्द्रता

3. निम्न स्तम्भों का मिलान कर सही विकल्प का चयन करो-

स्तम्भ-Iस्तम्भ-II
(क) अपरा(i) एन्ड्रोजन
(ख) जोनापेल्युसिडा(ii) मानव जरायु गोनेडोट्रोपिन
(ग) बल्बो-यूरेश्रल ग्रन्थियाँ(iii) अण्डाणु की परत
(घ) लीडिंग कोशिकाएँ(iv) शिश्न का स्नेहन
(क)(ख)(ग)(घ)
(अ)(i)(iv)(ii)(iii)
(ब)(iii)(ii)(iv)(i)
(स(ii)(iii)(iv)(i)
(द)(iv)(iii)(i)(ii)

उत्तर:

(स(ii)(iii)(iv)(i)

4. अण्डाणु केन्द्रक से द्वितीय ध्रुवीय पिण्ड कब बाहर निकलते हैं? (NEET-2019)
(अ) प्रथम विदलन के साथ-साथ
(ब) शुक्राणुओं के प्रवेश के बाद लेकिन निषेचन से पहले
(स) निषेचन के बाद
(द) शुक्राणु का अण्डाणु में प्रवेश से पहले
उत्तर:
(ब) शुक्राणुओं के प्रवेश के बाद लेकिन निषेचन से पहले

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5. नर जनन तंत्र में शुक्राणु कोशिकाओं के परिवहन के सही क्रम का चयन करो- (NEET-2019)
(अ) वृषण → अधिवृषण → शुक्रवाहिकाएँ → शुक्रवाहक → स्खलनीय वाहिनी → वृषण नाल → मूत्र मार्ग → यूरेश्रल मीटस
(ब) वृषण → अधिवृषण → शुक्रवाहिकाएँ → वृषण जालिकाएँ → वृषण नाल → मूत्र मार्ग
(स) शुक्रजनक नलिकाएँ → वृषण जालिकाएँ → शुक्रवाहिकाएँ → अधिवृषण → शुक्रवाहक → स्खलनीय वाहिनी → मूत्र मार्ग → यूरेश्रल मीटस
(द) शुक्रजनक नलिकाएँ → शुक्रवाहिकाएँ → अधिवृषण → वषण नाल → मत्र मार्ग।
उत्तर:
(स) शुक्रजनक नलिकाएँ → वृषण जालिकाएँ → शुक्रवाहिकाएँ → अधिवृषण → शुक्रवाहक → स्खलनीय वाहिनी → मूत्र मार्ग → यूरेश्रल मीटस

6. सगर्भता को बनाए रखने के लिए अपरा कौन-से हॉर्मोन स्रावित करती है? (NEET-2018)
(अ) hCG, hPL, प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन
(ब) hCG, hPL, एस्ट्रोजन, रिलैक्सिन, आक्सीटोसिन
(स) CG PL प्रोजेस्टेरोन, प्रोलेक्टिन
(द) HCG, प्रोजेस्ट्रोन, एस्ट्रोजन, ग्लूकोकोर्टिकाइडस ।
उत्तर:
(अ) hCG, hPL, प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन

7. असत्य कथन को चुनिए- (NEET-2016)
(अ) पुटकीय अवस्था के दौरान LH और FSH धीरे-धीरे कम होते जाते हैं।
(ब) LH, लेडिंग कोशिका स्रावित एन्ड्रोजन का संदमन करता है।
(स) FSH, सरटोली कोशिका को उत्तेजित करके, शुक्राणुजनन में मददगार है।
(द) LH, अण्डाणु में अण्डोत्सर्ग को संदमित करता है।
उत्तर:
(अ) पुटकीय अवस्था के दौरान LH और FSH धीरे-धीरे कम होते जाते हैं।

8. निम्नलिखित घटनाओं में से कौनसी घटना स्त्री में अण्डोत्सर्ग से सम्बन्धित नहीं है ? (NEET-2015)
(अ) ग्राफीपुटक का पूर्ण विकास
(ब) द्वितीयक अण्डक का निर्मोचन
(स) LH प्रवाह
(द) एस्ट्रेडिओल में कमी
उत्तर:
(द) एस्ट्रेडिओल में कमी

9. एन्ट्रम (Antram) पुटक में निम्नलिखित में से कौनसी सतह अकोशिकीय होती है ? (NEET-2015)
(अ) थीमा इंटरना
(स) जोना पेल्युसीडा
(ब) स्ट्रोमा
(द) ग्रैनुलोसा
उत्तर:
(स) जोना पेल्युसीडा

10. मानव मादाओं में अर्धसूत्री विभाजन- II किसके पूर्ण होने तक नहीं होता है ? (NEET-2015)
(अ) निषेचन
(ब) गर्भाशय में आरोपण
(स) जन्म
(द) यौवनारंभ
उत्तर:
(अ) निषेचन

11. मानव नर में जनन और मूत्र प्रणाली की साझेदारी अंतस्थ वाहिका है। (NEET-2014)
(अ) मूत्र मार्ग
(ब) मूत्र वाहिनी
(स) शुक्रवाहक
(द) शुक्रवाहिका
उत्तर:
(अ) मूत्र मार्ग

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12. शुक्राणु -1 निर्माण का सही क्रम क्या है? (NEET-2013, CBSE PMT-2009)
(अ) स्पर्मेटिड, स्पर्मेटोसाइट, स्पर्मेटोगोनिया, स्पर्मेटोजोआ (शुक्राणु)
(ब) स्पर्मेटोगोनिया, स्पर्मेटोसाइट, स्पर्मेटोजोआ (शुक्राणु), स्पर्मेटिड
(स) स्पर्मेटोगोनिया, स्पर्मेटोजोआ (शुक्राणु), स्पर्मेटोसाइट, स्पर्मेटिड
(द) स्पर्मेटोगोनिया, स्पर्मेटोसाइट, स्पर्मेटिड, स्पर्मेटोजोआ (शुक्राणु)
उत्तर:
(द) स्पर्मेटोगोनिया, स्पर्मेटोसाइट, स्पर्मेटिड, स्पर्मेटोजोआ (शुक्राणु)

13. रक्त बहाव किसकी कमी के कारण होता है ? ( NEET 2013 )
(अ) प्रोजेस्ट्रोन
(ब) FSH
(स) ऑक्सीटोसिन
(द) वैसोप्रेसिन
उत्तर:
(अ) प्रोजेस्ट्रोन

14. स्तनीय शुक्राणु की जीवन क्षमता के विषय में निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है ? (NEET-2012)
(अ) शुक्राणु केवल 24 घण्टे तक जीवनक्षम बना रहता है।
(ब) शुक्राणु की उत्तरजीविता माध्यम के PH पर निर्भर होती है। और क्षारीय माध्यम में वह अधिक सक्रिय बना रहता है।
(स) शुक्राणु की जीवन क्षमता उसकी गतिशीलता द्वारा निर्धारित होता है।
(द) शुक्राणुओं का सान्द्रण एक गाढ़े निलम्बन के भीतर होना चाहिए।
उत्तर:
(अ) शुक्राणु केवल 24 घण्टे तक जीवनक्षम बना रहता है।

15. मानव शरीर में पायी जाने वाली लेडिंग कोशिकाओं से किसका स्रवण होता है? (NEET-2012)
(अ) प्रोजेस्ट्रोन
(स) ग्लूकैगॉन
(ब) आंत्र श्लेस्म
(द) ऐन्ड्रोजन
उत्तर:
(द) ऐन्ड्रोजन

16. मानव आर्तव – चक्र में पायी जाने वाली स्रवण प्रावस्था को एक यह नाम भी दिया जाता है एवं वह कितने दिनों तक रहती है? (Mains-2012)
(अ) पीतपिण्ड प्रावस्था, अंतिम लगभग 6 दिन तक
(ब) पुटक प्रावस्था, अंतिम लगभग 6 दिन तक
(स) पीतपिण्ड प्रावस्था, अंतिम लगभग 13 दिन तक
(द) पुटक प्रावस्था, अन्तिम लगभग 13 दिन तक
उत्तर:
(स) पीतपिण्ड प्रावस्था, अंतिम लगभग 13 दिन तक

17. फैलोपियन नलिका का कौनसा भाग अण्डाशय के निकटतम होता है- (NEET 2010, CBSE PMT (Pre)- 2010)
(अ) इन्फंडीबुलम (कीपम)
(ब) सर्विक्स ग्रीवा
(स) ऐम्पूला ( तुम्बिका)
(द) इस्थमस (तनुयोजी)
उत्तर:
(अ) इन्फंडीबुलम (कीपम)

18. वृषण की कौनसी कोशिकाएँ टेस्टोस्टीरोन (नर लिंग हॉर्मोन) स्रावित करती हैं ? ( CBSE PMT – 2001, JPMT – 2007)
(अ) अन्तराली कोशिकाएँ अथवा लीडिंग कोशिकाएँ
(ब) जनन एपीथिलियम की कोशिकाएँ
(स) सरटोली कोशिकाएँ
(द) द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट।
उत्तर:
(अ) अन्तराली कोशिकाएँ अथवा लीडिंग कोशिकाएँ

19. वृषण में पाई जाने वाली सर्टोली कोशिकाएँ क्या होती हैं? (MP PMT-2007)
(अ) पोषक कोशिकाएँ
(ब) प्रजनन कोशिकाएँ
(स) संवेदी कोशिकाएँ
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(अ) पोषक कोशिकाएँ

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20. 400 शुक्राणुओं के निर्माण के लिए कितने सेकण्डरी स्पर्मेटोसाइट्स की आवश्यकता होगी- (MP PMT-2006)
(अ) 100
(स) 40
(ब) 200
(द) 400
उत्तर:
(ब) 200

21. रजोचक्र का तात्कालिक शुरू हो जाना निम्नलिखित में से किस हॉर्मोन की उपलब्धता समाप्त होने के कारण होता है- (NEET-2006)
(अ) ऐस्ट्रोजन
(ब) FSH
(स) FSH-RH
(द) प्रोजेस्ट्रोन
उत्तर:
(द) प्रोजेस्ट्रोन

22. सर्टोली कोशिकाओं का नियमन कौनसे पिट्यूटरी हॉर्मोन से होता है (NEET-2005)
(अ) FSH
(ब) GH
(स) प्रोलेक्टिन
(द) LH
उत्तर:
(अ) FSH

23. यदि स्तनी अण्डाणु निषेचन नहीं हो पाता तो निम्नलिखित में से कौनसा एक असम्भावित है- (NEET-2006)
(अ) एस्ट्रोजन का स्रवण और भी तेज हो जाएगा
(ब) प्रोजेस्ट्रोन का स्रवण तेजी से गिर जाएगा
(स) का सल्यूटियम विघटित हो जाएगा
(द) प्राथमिक पुष्टक विकसित होने लग जाता है।
उत्तर:
(अ) एस्ट्रोजन का स्रवण और भी तेज हो जाएगा

24. मानव स्त्रियों में रजोचक्र के दौरान अण्डोत्सर्ग सामान्यतः किस समय होता है- (NEET-2004)
(अ) स्रवण प्रावस्था के समाप्त होने के ठीक पूर्व
(ब) प्रचुरोद्भवन प्रावस्था के आरम्भ होने पर
(स) प्रचुरोद्भवन प्रावस्था के समाप्त होने पर
(द) मध्य स्रावण प्रावस्था पर
उत्तर:
(स) प्रचुरोद्भवन प्रावस्था के समाप्त होने पर

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25. निम्नलिखित में से कौनसा एक हॉर्मोन अपरा (Placenta ) का स्रवण उत्पाद नहीं है- (NEET-2004)
(अ) प्रोलेक्टिन
(ब) एस्ट्रोजन
(स) प्रोजेस्ट्रोन
(द) मानव कारियोनिक गोनेडोट्रोपिन ।
उत्तर:
(अ) प्रोलेक्टिन

26. भ्रूण परिवर्धन के दौरान अग्र/पश्च पृष्ठ / अधर अथवा मध्य / पार्श्व अक्ष पर ध्रुवता की स्थापना को क्या कहते हैं? (NEET 2003)
(अ) आर्गेनाइजर परिघटना,
(ब) अक्षनिर्माण
(स) ऐनाफार्मोसिस
(द) प्रतिरूप निर्माण
उत्तर:
(अ) आर्गेनाइजर परिघटना,

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones

HBSE 7th Class Science Winds, Storms and Cyclones Textbook Questions and Answers

Question 1.
Fill the missing word in the blank spaces in the following statements:
(a) Wind is …………… air.
(b) Winds are generated due to …………… heating on the earth.
(c) Near the earth’s surface air rises up whereas …………… air comes down.
(d) Air moves from a region of …………… pressure to a region of …………… pressure.
Answer:
(a) moving
(b) uneven
(c) warm, cooler
(d) high, low.

Question 2.
Suggest two methods to find out wind direction at a given place.
Answer:
(i) Take a piece of a paper in your hand. Let it fall from your hand. It will blow in the direction in which wind is blowing.
(ii) You can use a wind vane (a device helps us to make accurate measurements of wind direction) to find out the direction of wind.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones

Question 3.
State two experiences that made you think that air exerts pressure (other than those given in the text).
Answer:
(i) Balloons and balls can be used only when they are inflated with air.
(ii) Compressed air is used in the brake system for stopping trains.

Question 4.
You want to buy a house. Would you like to buy a house having windows but no ventilators? Explain your answer.
Answer:
No. A house which has no ventilators is not a healthy house to live in. The air circulation is not there in such a house and hence it has no fresh air.

Question 5.
Explain why holes are made in hanging banners and hoardings.
Answer:
Air exerts pressure. It is due to this pressure banners and hoardings flutter when the wind is blowing. Holes are made in the banners and hoardings as wind pass through that holes and they does not become loose and fall down.

Question 6.
How will you help your neighbours in case cyclone approaches your village/town?
Answer:
(i) A cyclone forecast and warning service.
(ii) Rapid communication of warnings to the Government agencies, the ports, fishermen, ships and to the general public.
(iii) Construction of cyclone shelters in the cyclone prone areas, and Administrative arrangements for moving people fast to safer places.

Question 7.
What planning is required in advance to deal with the situation created by a cylone?
Answer:
In order to deal with cyclone, it is important to follow the following points:
(i) listening carefully to warnings being transmitted on TV and radio.
(ii) moving to safer places or taking adequate steps to ensure safety at home.
(iii) keeping an emergency kit ready.
(iv) storing food in water-proof bags.
(v) not venturing into sea.
(vi) keeping all the emergency numbers handy.

Question 8.
Which one of the following place is unlikely to be affected by a cyclone?
(i) Chennai
(ii) Mangalore
(iii) Amritsar
(iv) Puri
Answer:
(iv) Puri.

Question 9.
Which of the statements given below is correct?
(i) In winter the winds flow from the land to the ocean.
(ii) In summer the winds flow from the land towards the ocean.
(iii) A cyclone is formed by a very high pressure system with very high speed winds revolving around it.
(iv) The coastline of India is not vulnerable to cyclones.
Answer:
(i) In winter the winds flow from the land to the ocean.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones

Extended Learning – Activities And Projects

Question 1.
You can perform the Activity 8.5. in the chapter at home slight differently at home. Use two plastic bottles of the same size. Stretch one balloon on the neck of each bottle. Keep one bottle in the sun and the other in the shade. Record your observations. Compare these observations and the result with those of Activity 8.5.
Answer:
Do yourself.

Question 2.
You can make your own anemometer. Collect the following items:
4 small paper cups (used ice-cream cups), 2 strips of cardboard (20cm long and 2cm wide), gum, stapler, a sketch pen and a sharpened pencil with eraser at one end.
Take a scale; draw crosses on the cardboard strips as shown in the Fig. 8.4. This will give you the centres of the strips.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones-1
Finding centre of the strips
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones-2
A model of an anemometer
Fix the strips at the centre, putting one over the other so that they make a plus (+) sign. Now fix the cups at the ends of the strips. Colour the outer surface of one cup with a marker or a sketch pen. All the 4 cups should face in the same direction.

Push a pin through the center of the strips and attach the strips and the cups to the eraser of the pencil. Check that the strips rotate freely when you blow on the cups. Your anemometer is ready. Counting the number of rotations per minute will give you an estimate of the speed of the wind. To observe the changes in the wind speed, use it at different places and different times of the day.

If you do not have a pencil with attached eraser you can use the tip of a ball pen. The only condition is that the strips should rotate freely.
Remember that this anemometer will indicate only speed changes. It will not give you the actual wind speed.
Answer:
Do yourself.

Question 3.
Collect articles and photographs from newspapers and magazines about storms and cyclones. Make a story on the basis of what you learnt in this Chapter and the matter collected by you.
Answer:
Do yourself.

Question 4.
Suppose you are a member of a committee, which is responsible for creating development plan of a coastal state. Prepare a short speech indicating the measures to be taken to reduce the suffering of the people caused by cyclones.
Answer:
Do yourself.

Question 5.
Interview eyewitness to collect the actual experience of people affected by a cyclone.
Answer:
Do yourself.

Question 6.
Take an aluminium tube about 15 cm long and 1 to 1.5 cm in diameter. Cut slice of a medium sized potato about 2 cm thick. Insert the tube in the slice, press it, and rotate it 2-3 times. Remove the tube. You will find a piece of potato fixed in the tube like a piston head.

Repeat the same process with the other end of the tube. Now you have the tube with both ends closed by potato pieces with an air column in between.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones-3
Take a pencil with one end unsharpened. Place this end at one of the pieces of potato. Press it suddenly to push the potato piece in the tube. Observe what happens. The activity shows rather dramatically how increased air pressure can push things.
Caution: When you perform this activity, make sure that nobody is standing in front of i e tube.
Answer:
Do yourself.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones

HBSE 7th Class Science Winds, Storms and Cyclones Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is a wind?
Answer:
The moving air is called wind.

Question 2.
Define the term ‘cycle’.
Answer:
It is an event or phenomenon which repeats itself after sometime.

Question 3.
Define term ‘evaporation’.
Answer:
The process of changing water from its liquid form to its vapour is known as evaporation.

Question 4.
Is evaporation a slow process or fast process?
Answer:
Evaporation is a slow process.

Question 5.
Name two processes through which water vapour add continuously into the air.
Answer:
The two processes are:
(i) Evaporation
(ii) Condensation.

Question 6.
Define condensation.
Answer:
The process of conversion of water vapours into liquid form of water is called condensation.

Question 7.
Define water cycle.
Answer:
The water in its vapour form goes into air by evaporation and transpiration forms cloud and, then comes back to the surface of the earth through the process of condensation and precipitation. This process is called ‘water cycle’.

Question 8.
At what speed wind becomes (i) gentle breeze, (ii) storm?
Answer:
When the wind blows gently, it is called a breeze. But, when it blows very fast it causes storm.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones

Question 9.
What is sea breeze?
Answer:
In coastal areas, during the day, the cool air blows from sea towards the land called sea breeze.

Question 10.
What is land breeze?
Answer:
In coastal areas, during the night, the cool air blows from land to sea called the land breeze.

Question 11.
What is tornadoes?
Answer:
In our country tornadoes are not very frequent. A tornado is a dark funnel shaped cloud that reaches from the sky to the ground.

Question 12.
What is ‘hurricane’?
Answer:
The ‘hurricane’ is the term used for storm in America and West Indies.

Question 13.
What is the eye of hurricane?
Answer:
The region of chimney like low pressure around which warm water vapour spirals is called the eye of hurricane.

Question 14.
What is Beaufort Scale?
Answer:
The number and name of.a wind is determined by the speed at which it flows on an internationally accepted scale, called Beaufort scale.

Question 15.
Name two properties of air.
Answer:
(i) Air occupies space
(ii) It has mass.

Question 16.
Write two importances of air in agriculture.
Answer:
(i) Air helps rotate wind-mill which is used to draw water from tube-wells.
(ii) Air helps in dispersion of seeds and pollen grains of flowers of several plants.

Question 17.
How are high building protected from lightning?
Answer:
High buildings are protected from lightning by fixing lightning conductor on the building.

Question 18.
What is the cause of atmospheric electricity?
Answer:
Atmospheric electricity is due to ionisation of air by the ultraviolet rays of sunlight.

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Question 19.
Is our body a conductor?
Answer:
Yes, our body is a good conductor of electricity.

Question 20.
What damage can lightning do?
Answer:
Lightning damage the high buildings and the trees on which it strikes. The buildings and trees can be set on fire by lightning. It can do a high loss of life and property.

Question 21.
Why do chimneys made of steel not require lightning conductor?
Answer:
Steel is a good conductor of electricity. Due to this reason steel chimneys do not require lightning conductor. They themselves pass the discharge to the earth.

Question 22.
Why is it advised not to take shelter under a tree during lightning?
Answer:
We should not stand under a tree during lightning, due to the danger of the lightening, because it can destroy the trees and can set it on fire.

Question 23.
Which gas is produced in air during lightning that absorbs ultraviolet radiation present in sunlight?
Answer:
During lightning ozone (oz) gas is produced due to higher temperature which absorbs ultraviolet radiation. It is dangerous for the living being.

Question 24.
Name the arrangement used for the protection of buildings against damage from lightning.
Answer:
To protect buildings from damage by lightning, a good lightning conductor is used. This is done by installing a lightning conductor on the buildings.

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Short Answer Type Questions

Question 1.
How is rain caused?
Answer:
Water, on land, is present in different sources, e.g., sea, river, pond, lake, etc. The water from all these sources change into vapour form due to sun’s heat and goes up into the air. This change of water into vapour form is called evaporation. The water vapour, when reaches high up in the air, cools down and forms clouds. This cooling down of water vapour to form clouds is called condensation. On cooling, the water vapour changes to water droplets. These group together farm clouds. When the droplets become very heavy they fall down as rain.

Question 2.
What is water cycle? What does it indicate?
Answer:
Evaporation of water from oceans, ponds, rivers, lakes and from roads and streets to form cloud by condensation at higher altitude. When clouds rain, the rain water flows into the seas and oceans through rivers and streams. Some water percolates into the soil to form underground water. It comes again out in the form of spring and well. This is called water cycle.

Because of water cycle, the amount of water on the earth remains more or less the same. The water cycle also indicates that all the water in world is on the move all the time.

Question 3.
How does water cycle help in maintaining global climate?
Answer:
Water cycle plays an important role in the world climate. Oceans absorb vast quantities of heat and help in global warming. By absorbing heat water evaporates and on condensation releases heat. This absorption and releasing of heat in the form of energy drives weather pattern in the short term and regulate the climate for long time.

Question 4.
How is storm caused?
Answer:
When the wind blows gently, it is called a breeze. But, when it blows very fast it causes storm. Storm may be defined as something taking place in the weather of a violent nature. At sea, a storm may be a strong wind or gale. On land, a storm usually means a weather situation marked by heavy rain and often with strong winds, lightning and thunder.

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Question 5.
How a thunderstorm becomes a cyclone?
Answer:
Water requires heat when it changes from liquid to vapour state. Before cloud formation water takes up heat from the atmosphere to change into vapour. When water vapour changes back to liquid form as raindrops, this heat is released to the atmosphere. The heat released to the atmosphere warms the air around. The air tends to rise and causes a drop in pressure. More air rushes to the centre of the storm. This cycle is repeated. The chain of events ends with the formation of a very low pressure system with very high speed winds revolving around it. It is this weather condition that we call a cyclone.

Question 6.
How is lightning useful in nature?
Answer:
Lightning is useful in nature because during lightning intense heat and high temperature are produced. As a result, nitrogen combines with oxygen to form its oxides. These oxides of nitrogen further get dissolved in water to form a dilute solution of nitric acid that comes to the ground with rain. This is how nature provides nitrogenous compounds to plants that are important for their growth.

Question 7.
How is ozone layer useful for us?
Answer:
During lightning, a part of oxygen gets converted to ozone. Ozone provides protection against harmful ultraviolet radiations of the sun that cannot reach the earth’s surface.

Question 8.
What are the precautions to be taken against a storm is accompanied by lighting?
Answer:
If a storm is accompanied by lightning, we must take the following precautions:
(i) Do not take shelter under an isolated tree. If you are in a forest take shelter under a small tree. Do not lie on the ground.
(ii) Do not take shelter under an umbrella with a metallic end.
(iii) Do not sit near a window. Open garages, storage sheds, metal sheds are not safe places to take shelter.
(iv) A car or a bus is a safe place to take shelter.
(v) It you are in water, get out and go inside a building.

Question 9.
Why is it advisable to switch off TV sets during lightning?
Answer:
Lightning in the sky also effects radio and TV transmission in our radio and TV sets during lightning and thunder is due to this reason. TV antina and dish antina has fixed on tall buildings are especially prove to lightning strikes. So it is advisable to stop our TV set during lightning to save them from damage.

Question 10.
What is a lightning conductor? Why is it fixed on the top of high tall buildings?
Answer:
A lightning conductor is a long flat thick strips of copper with sharp point or spikes. The lower end of it is connected to copper plate deep into the earth. It is fixed on the top of the building because the thundering electricity comes in the contact first and the building will not be damaged.

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Question 11.
How are lightning and thunder caused?
Answer:
When two oppositively charged clouds are near each other, the air between them becomes good conductor because charges begin, to move in air very speedily. The presence of electric charges in very large quantities in the air causes to appear as steaks of lightning and thunder.

Question 12.
When do we say that lightning has struck on the earth?
Answer:
Sometimes the direction of the wind changes; then the clouds move and the charges in the clouds are discharged into the earth when it happens, then it is said that lightning has struck on the earth.

Question 13.
Why should we not stand under a tree during a thunderstorm?
Answer:
We should not stand under a tree during a thunderstorm due to the danger of the lightning because it can destroy the tree, and can set it on fire.

Question 14.
What are tornadoes?
Answer:
In our country tornadoes are not very frequent. A tornado is a dark funnel shaped cloud that reaches from the sky to the ground. Most of the tornadoes are weak. A violent tornado can travel at speeds of about 300 km/h. Tornadoes may form within cyclones.

Question 15.
Write short note on ‘lightning conductor’.
Answer:
A lightning conductor is made up of long, thick metal rod having sharp spikes at its upper end. The spikes pointing towards the sky are fixed at the highest points of the building. The lower end of the metal rod is connected to a large copper or aluminium plate which is hurried deep inside the earth which is called earthing.

When a highly charged cloud passes over a tall building, it induces an opposite charge on the spikes. This charge quickly flows to the earth through the copper rod. Hence, the lightning discharge is prevented and the building is saved from damage.

Question 16.
Explain how lightning takes place?
Answer:
Normally air is a bad conductor of electricity. However, when two clouds having huge amount of positive and negative state charges approach each other, the air becomes a good conductor of electricity.

Thus the electrons from the negatively charged cloud push their way through air so as to reach the positively charged cloud. In doing so the air gets white hot and hence a dazzling bluish white streak of light is formed which is called lightning.

Question 17.
What precautions should be taken to provide protection against lightning?
Answer:
Precautions should be taken to provide protection against lightning:
Answer:
(i) Lightning conductor provides us a simple means to protect against damage due to lightning property and life.
(ii) When lightning strikes, it provide a path to the entire charge through it to the earth.
(iii) We should not stand under, I tree during a thunderstorms due to the air of lightning, because it destroys trees set it on fire.
(iv) Lightning conductor should be installed on large buildings and tall chimneys of factories.

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Long Answer Type Questions

Question 1.
Describe water cycle in nature.
Answer:
Water constantly moves from the earth to the air and back again.
The constant circulation of water is known as the water cycle.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 Winds, Storms and Cyclones-4
The water in seas, rivers, lakes, ponds or streams evaporates because of the heat of the sun.

Plants also give out large amounts of water from their leaves. The water vapour rises up. The air higher up in the atmosphere is cooler. This cools the water vapour and it condenses to form tiny drops of water on dust particles. These drops of water together form clouds. As the clouds get cooled further, the water drops become bigger and heavier. When they become too heavy, they fall to the earth as rain. The rain water enters the seas, rivers, lakes, ponds and streams and then evaporates again. Thus the water cycle in nature goes on.

Question 2.
Explain destructions caused by cyclones.
Answer:
Cyclones can be very destructive. Strong winds push water towards the shore even ;f the storm is hundreds of kilometres away. These are the first indications of an approaching cyclone. The water waves produced by the wind are so powerful that a person cannot overcome them.

The low pressure in the eye lifts water surface in the centre. The rising water may be as high as 3-12 metres. It appears like a water wall moving towards the shore. As a result the seawater enters the low-lying coastal areas, causing severe loss of life and property. It also reduces the fertility of the soil.

Continuous heavy rainfall may further worsen the flood situation. High speed winds accompanying a Cyclone can damage houses, telephones and other communication systems, trees, etc; causing tremendous loss of life and property.

Question 3.
What is lightning? How does ligthning takes place in the clouds?
Answer:
When the air gets white hot and hence a dazzling bluish white streck of light is framed, is called lightning. Normally air is a bad conductor of electricity. However, when two clouds having J e amount of positive and negative charges a proach each other, the air becomes a good conductor of electricity.

Thus the electrons from the negatively charged cloud push their way through air so as to reach to the positively charged cloud. In doing so air gets white hot and hence a dazzling bluish white hot and hence a dazzling bluish white streak of light is formed, which is called lightning. Because of this intense heat produced, the air suddenly expands and sends out huge pressure waves. These waves produced thunder.

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Question 4.
How does lightning takes place between the clouds?
Answer:
Normally air is a bad conductor of electricity. However when few clouds having huge amount of positive and negative static charges approach each other, the air becomes a good conductor of electricity.

Thus the electrons from the negatively charged cloud push their way through air. So as to reach to the positively charged cloud. In doing so the air gets white hot and hence a dazzling bluish white streak of light is formed which is called lightning. Because of this intence heat produced, the air suddenly expands and sends out huge pressure causes. These waves produce thunder.

Winds, Storms and Cyclones Class 7 HBSE Notes

  1. Air around us exerts pressure.
  2. Air expands on heating and contracts on cooling.
  3. Warm air rises up, whereas comparatively cooler air tends to sink towards the earth’s surface.
  4. As warm air rises, air pressure at that place is reduced and the cooler air moves to that place.
  5. The moving air is called wind.
  6. Uneven heating on the earth is the main cause of wind movements.
  7. Winds carrying water vapour bring rain.
  8. Thunderstorms develop in hot, humid tropical areas like India very frequently. The rising temperatures produce strong upward rising winds. These winds carry water droplets upwards, where they freeze, and fall down again. The swift movement of the falling water droplets alongwith the rising air create lightning and sound. It is this event that we call a thunderstorm.
  9. A cyclone is a storm in which the wind blows at a speed of about 300 km per hour. Cyclones develop over oceans but never close to the equator. They never originate from the land mass but may penetrate the margins of continents.
  10. A cyclone is known by different names in different parts of the world. It is called a ‘hurricane’ in the
  11. American continent. In Philippines and Japan its called a ‘typhoon’ and in Australia its called ‘willywillies’.
  12. It has become easier to monitor cyclones with the help of advance technology like satellites and radars.
  13. Self-help is the best help. Therefore, it is better to plan in advance and be ready with defence against any approaching cyclone.

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate

HBSE 7th Class Science Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Textbook Questions and Answers

Question 1.
Name the elements that determine the weather of a place.
Answer:
The temperature, humidity, rainfall, wind-seed etc. are called the elements of the weather, that determines the weather of a place.

Question 2.
When are the maximum and minimum temperature likely to occur during the day?
Answer:
The maximum temperature of the day occurs generally in the afternoon while the minimum temperature occurs generally in the early morning.

Question 3.
Fill in the blanks:
(i) The average weather taken over a long time is called ………… .
(ii) A place receives very little rainfall and the temperature is high throughout the year, the climate of that place will be………….. and ………….. .
(iii) The two regions of the earth extreme climatic conditions are …………… and ……………. .
Answer:
(i) the climate of the place
(ii) hot, dry
(iii) polar, tropical

Question 4.
Indicate the type of climate of the following areas:
(a) Jammu and Kashmir
(b) Kerla
(c) Rajasthan
(d) North-East India.
Answer:
(a) Jammu and Kashmir – moderately hot and moderately wet climate
(b) Kerala – very hot and wet climate
(c) Rajasthan – hot and dry climate
(d) North-east India – The north eastern India receives rain for a major part of the year. Therefore, we can say that the climate of the north-east is wet.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate

Question 5.
Which of the two changes frequently, weather or climate?
Answer:
Weather.

Question 6.
Following are some of the characteristics of animals:
(i) Diets heavy on fruits
(ii) White fur
(iii) Need to migrate
(iv) Loud Voice
(v) Sticky pads on feet
(vi) Layer of fat under skin
(vii) Wide and large paws
(viii) Bright colours
(ix) Strong tails
(x) Long and large beak
For each characteristic indicate whether it is adaptation for tropical rainforests or polar regions. Do yQU think that some of these characteristics can be adaptations for both the regions?
Answer:
(i) Diets heavy on fruits – tropical rainforests
(ii) White fur – polar regions
(iii) Need to migrate – pblar regions
(iv) Loud Voice – tropical rainforests
(v) Sticky pads, on feet – tropical rainforests
(vi) Layer of fat under skin – polar regions
(vii) Wide and large paws – polar Regions
(viii) Bright colours – tropical rainforests
(ix) Strong tails – tropical regions
(x) Long and large beak – tropical rainforests.

Question 7.
The tropical rainforests has a large population of animals. Explain why it is so?
Answer:
The tropical region has generally a hot climate because of its location around the equator. Even in the coldest month the temperature is generally higher than about 15°C. During hot summers, the temperature may cross 40°C. Days and nights are almost equal in length throughout the year. These regions get plenty of rainfall.

An important feature of this region is the tropical rainforests. Tropical rainforests are found in Western Ghats and Assam in India, South East Asia, Central America and Central Africa. Because of continuous warmth and rain, this region support wide variety of plants and animals. The major types of animals living in the rainforests are monkeys, apes, gorillas, lions, tigers,, elephants, leopards, lizards, snakes, birds and insects.

Question 8.
Explain, jirith examples, why we find animals of certain kind living in particular climatic conditions?
Answer:
Animals are adapted to survive in the conditions in which they live. Animals living in very cold and hot climate must possess special features to protect themselves against the extreme cold or heat.

Penguins are found in cold regions. They have a feathery coat as well as a layer of fat under the feathery coat. The coat covers their bodies right down to their legs. These adaptations keep the body warm.

Polar bear Eire found in the Arctic region where it is very cold. They have a thick layer of fur Emd a lot of fat in their bodies to keep them warm. Their soles are covered with fur to keep them warm. The white fur also helps the polar bears to blend with the snowy surroundings so that they are detected by the prey.!

Question 9.
How do elephant living in the tropical! rainforest adapt itself
Answer:
It has adapted to the conditions of rainforests in many remarkable ways. Trunks uses it as a nose because of which it has a strong sense of smell. The trunk is also used by it for picking up food. Moreover, its tusks are modified teeth. These can tear the bark of trees that elephant loves to eat. So, the elephant is able to handle the competition for food rather well. Large ears of the elephant help it to hear even very soft sounds. They also help the elephant to keep cool in the hot and humid climate of the rainforest.

Choose the correct option which answers the following questions (Question 10-12).

Question 10.
A carnivore with stripes on its body moves very fast while catching its prey. It is likely to be found in:
(i) polar regions
(ii) deserts
(iii) oceans
(iv) tropical rainforests
Answer:
(iv) tropical rainforests

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate

Question 11.
Which features adapt polar bears to live in extremely cold climate?
(i) A white fur, fat below skin, keen sense of smell.
(ii) Thin skin, large eyes, a white fur.
(iii) A long tail, strong claws, white large paws.
(iv) White ‘body, paws for swimming, gills for respiration.
Answer:
(i) A white fur, fat below skin, keen sense of smell.

Question 12.
Which option best describes a tropical region?
(i) hot and humid
(ii) moderate temperature, heavy rainfall
(iii) cold and humid
(iv) hot and dry
Answer:
(i) hot and humid

Extended Learning – Projects And Activities

Question 1.
Collect weather reports of seven successive days in the winter months (Preferably December). Collect similar reports for the summer months (Preferably June). Now prepare a Table for sunrise and sunset times as shown:

JuneDecember
DateSunriseSunsetDateSunriseSunset

Try to answer the following questions:

  • Is there any difference in the time of sunrise during summer and winter?
  • When do you find that the sun rises earlier?
  • Do you also find any difference in the time of sunset during the month of June and December?
  • When are the days longer?
  • When are the nights longer?
  • Why are the days sometimes longer and sometimes shorter?
  • Plot the length of the day against the days chosen in June and December. (Instructions for plotting graphs are given in Chapter 13).
    Answer:
    Do yourself.

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Question 2.
Collect information about the Indian Meteorological Department. If possible visit its website: htt/www.imd.gov.in.
Write a brief report about the things this department does.
Answer:
Do yourself.

HBSE 7th Class Science Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
What is raingauge?
Answer:
Rainfall is measured by an instrument called the rainguage. It is basically a measuring cylinder with a funnel on top to collect rainwater.

Question 2.
Define weather.
Answer:
The day-to-day condition of the atmosphere at,’a place with respect to the temperature, humidity, rainfall, wind speed, etc., is called the weather of that place.

Question 3.
Who prepares the weather reports?
Answer:
The weather reports are prepared by the Materological Department of the Government. This department collects data on temperature, wind etc., and makes the weather prediction.

Question 4.
Define climate.
Answer:
The average weather pattern taken over a long time, say 25 years, is called the climate of the place.

Question 5.
Why do some places have hotter climate than others?
Answer:
The places nearer to the equator are usually hotter. This is because the sun’s rays are more concentrated near the equator than they are farther North or South.

Question 6.
Give two examples of animals found in cold climates.
Answer:
(i) Penguins
(ii) Polar bear.

Question 7.
Give two examples of animals found in hot and humid climate.
Answer:
(i) Red-eyed frog
(ii) Beard ape.

Question 8.
Name three desert animals.
Answer:
(i) Camel
(ii) Snake
(iii) Lizard.

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Question 9.
Can a polar bear live happily on land?
Answer:
No, it lives where the land is fully covered with snow.

Question 10.
Where do the elephant live?
Answer:
Elephant lives in forest.

Question 11.
Where does penguin live?
Answer:
Penguin lives in very cold places.

Question 12.
Define adaptation.
Answer:
The particular features of an organism that makes it suited to a particular climate is called adaptation.

Question 13.
What do you understand by ‘summer sleep’?
Answer:
Animals like frog, crocodiles and alligators live in mud during the summer months. This is called the ‘summer sleep’.

Question 14.
What do you understand by hibernation?
Answer:
During winter, some animals like bears, bats, snakes, lizards, frogs and squirrels go to sleep. This is called the winter sleep or hibernation.

Question 15.
Where do the following animals live?
(i) Monkeys
(ii) Snakes
(iii) Rabbit
(iv) Fish.
Answer:
(i) On land and trees
(ii) On land and water
(iii) On land
(iv) In water.

Question 16.
Name three animals which are active during night;
Answer:
(i) Bat
(ii) Owl
(iii) Cockroach.

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Question 17.
What is the difference between climate of Kashmir and Kerala?
Answer:
Kerala is very hot and wet in comparison to Kashmir, which has a moderately hot and moderately wet.

Question 18.
Name two countries where polar regions are found?
Answer:
(i) Canada
(ii) Sweden.

Question 19.
Name two countries where the tropical rainforests are found?
Answer:
(i) India
(ii) Malaysia.

Question 20.
Name a migratory bird.
Answer:
Siberian crane.

Short Answer Type Questions

Question 1.
Why do desert animals have thick skin?
Answer:
Animals living in hot places, such as snakes, desert rats and lizards are not able to get sufficient water. So these animals have a thick skin, which prevents evaporation. Since they do not sweat, they can survive| without water for a longer time.

Question 2.
How is camel adapted live in/ desert?
Answer:
Camel lives in desert. It has long legs which help it to lift its body above the ground. Thus camel is able to avoid direct contact with the hot ground. The camel drinks water 50 litre or above in one time and store it in its body. So it lives without water for longer time. Its skin is also thick which prevents transpiration of ‘ water. Thus camel is suited to live in desert.

Question 3.
How cold place animals protect themselves from cold?
Answer:
The animals which live in cold places like waives seals, and penguins have thick skin which protects them from cold. They also have thick ,fur.

Question 4.
How fishes are adapted to live in water?
Answer:
Fishes are best suited to live in water. They have boat like structure which help them in swimming in water. They have gills from which they get oxygen and food. The body of fishes contain different types of fins which help them from swimming in water. Fishes shape tapers which provide least resistance in swimming water.

Question 5.
Why do polar bears have white fur?
Answer:
Polars bears have white fur so that they are not easily visible in the snowy white background. It protects them from their predators. It also helps them in catching their prey. To protect them from extreme cold, they have two this layers of fur. They also live a er of fair under their skin.

Question 6.
Differentiate between weather and climate.
Answer:

ClimateWeather
The average weather pattern taken over a long time, say 25 years, is called the climate of the place.The day-to-day condition Of the atmosphere at a place with respect to the temperature, humidity, rainfall, wind-speed, etc; is called the weather at that place.

Question 7.
Give some examples of sea water animals.
Answer:
Almost all types of animals live in sea water. Most of the sea water animals are actively swimming animals like fishes and whales. Animals like corals, star fish, and urchin live at the bottom of the sea.s

Question 8.
Write the factors which the climate of a region depend.
Answer:
The climate of a region depends on:
(i) The presence or absence of water (rainfall).
(ii) Amount of sunshine it gets.
(iii) The ability to transfer water to the atmosphere (evaporation), and
(iv) The place whether it is a hilly or a plain region.

Question 9.
Mention the adaptive features of the animals found n cold climates.
Answer:
The animals found in cold climates have a thick layer of fat under the skin. This gives them nourishment in winter. They also have thick coat of fur on their body which helps the stay warm. The examples of animals 6 in cold regions are reindeer, arctic fox, polar bear, etc.

Question 10.
Mention the adaptations in hot and dry climates.
Answer:
Animals living in hot and dry places usually have following adaptations:
(i) Short shiny fur to reflect the sun’s rays.
(ii) Keep the body cool through sweating and panting.
(iii) To avoid the strong sun, they feed in the morning or evening and hide behind rocks and in burrows during the day.
Examples: Camel, Ostrich and Snail.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate

Long Answer Type Questions

Question 1.
The Earth is the only planet on which life is exists, why? Explain.
Answer:
The Earth is not the only planet revolving around the Sun. There are eight other planets that revolve Ground tfye Sun. But Earth is the only planet on which life exists. A number of factors are responsible for it. These are:
(i) Distance of Earth from the Sun; this is sufficient to keep the temperature’ on the surface of Earth at an average of 30°C; life can exist at this temperature.
(ii) The layer of carboh dioxide and watervapour which surrounds Earth prevents too much heat from leaving Earth into space; otherwise the temperature of Earth would be -30°C.
(iii) The layer of Zone which surrounds Earth does not allow ultraviolet rays to reach Earth from the sun, other wise living onganisns will die.

Question 2.
Describe the adaptive features of camel.
Answer:
The camel is the animal that thrives on the best in such hpt climate. It is also called the ship of the desert. The camel is called so because of the following adaptations it has:
(i) Thick skin that prevents water loss through perspiration or evaporation.
(ii) Humps (one or two) present in the body. These are the storehouse of fat. The camel uses this fat when food is scarce.
(iii) Pouches in the body to store water. This enables the camei to go without water for many days.
(iv) Pads of skin under the feet that act like cushions and enable the camel to walk easily in the sand without sinking.
(v) Long curly eyelashes preventing the entry of sand into eyes and thick eyebrows to protect eyes from sun. The plants and animals living in cold regions also have certain features. These are different from those possessed by plants and animals living in hot regions.

Question 3.
Defind adaptation. Mention various adaptations in terrestrial animals.
Answer:
Climate influences living organisms directly. Hence, they develop certain traits that help them to thrive well in that particular climate. This is called adaptation.

The animals that live on land are called terrestrial animals. These animals have different types of habits and ways of living. The terrestrial animals may be runners (cursorial habit), burrowers and diggers (fossorial habit), climbers (scansorial or arboreal habit) and fliers (aerial habit). Accordingly, these animals have different types of adaptations, as described below.
A. Modification of foot: Terrestrial animals have different types of foot for locomotion.
(i) Pentadactily: Terrestial animals have pentadactyl (five digits) foo; bearing claws for walking and running. Pentadactyl foot are of following three types:
(а) Plantigrade: In this type of foot, the entire palm and sole rest on the ground e.g. bear, baboon, raccoon.
(b) Digitigrade: In this case, animals perform walking and running on the digits e.g. dogs, cat, hyaena.
(c) Unguligrade: In this case, animals perform walking and running on the tips of digits covered with modified nail called hoof. The distal toe bones (unguals) are depressed or flattened, e.g. pig, horse, donkey, rhinoceros.

(ii) Bipedality: Some terrestrial animals have two footed or bipedal mode of locomotion, which spares forelimbs for other types of jobs. e.g. human beings.

B. Modification of body and head:
(i) The fast moving animals like horse, dog, etc. have streamlined body to reduce the resistance offered by the air.
(ii) In burrowing and digging animals, the head and snout are tapering. e.g. snakes, shrew, mole.

C. Modification for respiration:
The majority of terrestrial animals are lung breathers. They have lungs for respiration, e.g. Frog, lizards, all mammals.

D. Protective adaptations:
Many terrestrial animals are able to modify their form, appearance, structure or behaviour to escape predation or to increase the chances of capturing the prey. For example frog can change its body colour to match the back ground.

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate

Question 4.
Mention various adaptations in aquatic animals.
Answer:
A large number of animals live in aquatic habitat. They include both fresh water and marine (sea water) forms. Several invt ibrates such as prawn, Octopus, some insects are aquatic or semi aquatic. A number of vertebrates such as fishes, whales, dolphins are well adapted to aquatic mode of life. They have following adaptation for aquatic mode of life.
(i) Body contour: They have streamlined laterally compressed body to reduce friction. This allows swift passage in water while swimming.
(ii) Swimming organs: The fishes have fins and whales possess flippers which help them in swimming. Frogs and ducks have webbed feet for swimming.
(iii) Protective covering: The body of fishes is covered with scales and that of frog with a mucilaginous covering, which protect them from decaying effect of water.
(iv) Gills: Fishes have special breathing organs called gills, which use dissolved oxygen of water.
(v) Swim bladder or Air bladder:
Certain fishes (bony fishes) have swim bladder or air bladder. It is filled with air and maintain buoyancy.

Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Class 7  HBSE Notes

1. The day-to-day condition of the atmosphere at a place with respect to the temperature, humidity, rainfall, wind-speed, etc.; is called the weather at that place.
2. The temperature, humidity and other factors are called the elements of the weather. The weather of a place charges day after day and week after week.
3. The maximum temperature of the day occurs generally in the afternoon while the minimum temperature occurs in the early morning.
4. The times of sunrise and sunset also change during the year.
5. All the changes in the weather are driven by the sun.
6. The average weather pattern taken over a long time, say 25 years, is called the climate of the place.
7. The tropical and the polar regions are the two regions of the earth, which have severe climate conditions. .
8. Animals are adapted to the conditions in which they live.
9. The polar regions are very cold throughout the year. The sun does not set for six months in a year and in the other six months it does not rise.
10. Animals in the polar region are adapted to the extremely cold climate by having some special characteristics such as white fur, strong sense of smell, a layer of fat under the skin, wide and large paws for swimming and walking etc.
11. Migration is another means to escape the harsh, cold conditions.
12. Because of the hospitable climatic conditions, huge populations of plants and animals are found in the tropical rainforests.
13. Animals in the tropical rainforests are adapted such that they eat different kinds of food to overcome the competition for food and shelter.
14. Some adaptations of animals living in the tropical rainforests include living on the trees, development of strong tails, long and large beaks, bright colours, sharp patterns, loud voice, diet of fruits, sensitive hearing, sharp eyesight, thick skin, ability to camouflage in order to protect themselves from predators etc.

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HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Haryana State Board HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

HBSE 8th Class Science Cell Structure and Functions Textbook Questions and Answers

Question 1.
Indicate whether the following statements are True (T) or False (F).
(а) Unicellular organisms have one-celled body. (T/F)
(б) Muscle cells are branched structures. (T/F)
(c) The basic living structure of an organism is an organ. (T/F)
(d) Amoeba has irregular shape. (T/F)
Answer:
(a) True
(b) True
(c) False
(d) True

Question 2.
Make a sketch of the human nerve cell. What function do nerve cells performs?
Answer:
Functions of human nerve cell:
(i) Nerve cells receive messages from different parts of body.
(ii) They further transfer these message to brain and brain further send commands for functioning Long Branched Nerve Cell of different organs.
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions-1
(iii) They coordinate functioning of different organs of body.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Question 3.
Write short notes on the following:
(а) Cytoplasm
(b) Nucleus of a cell.
Answer:
(a) Cytoplasm:
Cytoplasm is a jelly like substance which is present between the cell membrane and the nucleus. Various other organelles of cells are present in the cytoplasm. Cytoplasm is made up of chemical substances like carbohydrates, proteins and water. These chemical substances are present in cells of all types and sizes.

(b) Nucleus of a cell:
Nucleus is the master of the cell. It commands all the functioning of the cell. It is generally located in the centre of the cell and is spherical in structure. A membrane called nuclear membrane separates it from cytoplasm. It contains the genetic material (DNA, RNA) in it. This porous membrane allows the transfer of material in the nucleus and cytoplasm. Nucleus contains a dense body called nucleolus which actually contain chromosomes the genetic material.

Question 4.
Which part of the cell contains organelles?
Answer:
Cytoplasm.

Question 5.
Make sketches of animals and plant cells. State three differences between them. Answer:

Plant CellAnimal Cell
1. Plant cell has a rigid cell wall.1. Cell wall is absent.
2. Plant cell has chloroplasts.2. Chloroplasts are absent.
3. Plant cell lacks centrosomes.3. Centrosomes are present.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions-2

Question 6.
State a difference between eukaryotes and prokaryotes.
Answer:
Prokaryotes do not have a well designed nuclear membrane, while Eukaryotes have a well designed nuclear membrane.

Question 7.
Where are chromosomes found in a cell? State their function.
Answer:
Chromosomes are found in the nucleus of a cell. Their function is to carry characteristic features of parent cells to the daughter cell i.e. from parent to offsprongs.

Question 8.
‘Cells are the basic structural units of living organism’. Explain.
Answer:
Cells are the basic structural units of living organisms because lot of cells unit to form and many tissues form an organ. And organs combine to form a complete body, so cell is the basic structural unit of an organism. All basic function for the survival of an organism take peace inside cells so they are the basic functional units of a living being.

Question 9.
Explain why chloroplasts are found only in plant cells?
Answer:
Chloroplasts are only found in plant cells because they are required for the food making process of plants called photosynthesis.

Question 10.
Complete the following crossword with the help of clues given below:
Across
1. This is necessary for photosynthesis.
3. Term for component present in the cytoplasm.
6. The living substance in the cell.
8. Unit of inheritance present on the chromosomes.

Down
1. Green plastids.
2. Formed by collection of tissues.
4. It separates the contents of the cell from the surrounding medium.
5. Empty space in the cytoplasm.
7. A group of cells.
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions-3
Answer:
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions-4

Extended Learning – Activities And Projects

1. Visit a laboratory for senior secondary students in your school or in a neightbouring school. Learn about the functioning of a microscope in the laboratory. Also observe how a slide is observed under the microscope,
Answer:
For self attempt.

2. Talk to the senior biology teacher in your school or a neighbouring school. Find out if there are diseases which are passed on from parents to the offspring. Find out how these are carried and also if these diseases can be treated. For this you can also visit a doctor.
Answer:
There are certain diseases which are passed on from parent to the offspring. Diseases like diabites, heart diseases, certain skin diseases like leukoderma, etc. are genetic diseases.

3. Visit an agriculture extension centre in your area. Find out about genetically modified (GM) crops. Prepare a short speech for your class on this topic. You may visit www.usc.ernet.in / currsci / sep2520Ql/ 655.pdf
Answer:
For self attempt.

4. Find out about Bt cotton from an agriculture expert (or from envfor.nic.in/ division/csnrv/btcotton/b gnote.pdf). Prepare a short note on its advantages / disadvantages.
For more on cell, visit: www.enchantedlearning.com/subjects/ plants/ cell/
Answer:
For self attempt.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

HBSE 8th Class Science Cell Structure and Functions Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Question 1.
Define a cell.
Answer:
A cell is the basic structural and functional unit of living things.

Question 2.
Who discovered cell?
Answer:
Robert Hooke.

Question 3.
Name three important parts of cell.
Answer:
(i) Cell membrane
(ii) Cytoplasm
(iii) Nucleus

Question 4.
In which cells, cell wall is present?
Answer:
In plant cells.

Question 5.
Give three examples of unicellular organisms.
Answer:
Amoeba, Paramecium, Chlamydomonas.

Question 6.
Where are chromosomes present in a cell?
Answer:
Nucleus.

Question 7.
Name the cell part that has tiny holes.
Answer:
Cell Membrane

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Question 8.
Which cell organelle is found only in animal cell?
Answer:
Centrosome.

Question 9.
Name the cells organelle which is found only in plant cell.
Answer:
Plastids.

Question 10.
How do cells increase in numbers?
Answer:
By cell division.

Question 11.
Which organelle is called the ppwer house of the cell?
Answer:
Mitochondria.

Question 12.
Which organelle is called suicidal bags of the cell?
Answer:
Lysosomes.

Question 13.
What does mitochondria do?
Answer:
It prepares food for plants.

Question 14.
What does chromosomes do?
Answer:
Transfer chracters from one generation to another generation.

Question 15.
What does ribosomes do?
Answer:
They help in synthesis of proteins.

Question 16.
Name plastids found in plant cells.
Answer:
Chloroplasts, Leucoplast and chromoplast.

Question 17.
What is the unit of measuring the size of the cell?
Answer:
Microns.

Question 18.
Name the longest cell.
Answer:
Nerve cell in animal.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Question 19.
Name the heaviest animal cell.
Answer:
Ostrich Egg.

Question 20.
Name the largest plant cell.
Answer:
Acetabulum.

Question 21.
Name the smallest plant cell.
Answer:
Bacteria.

Short Answer Type Questions

Question 1.
Why cells are called building blocks of life?
Answer:
Cells like bricks of a building are basic structural units of living organisms. Buildings differ from each other, organism also differ from each other. Both are basic unit of structure. So, they are called building blocks of life.

Question 2.
Why are the mitochondria known as the power housd of the cell?
Answer:
They are rod shaped and very minute. They are concerned with the release of energy from food during respiration. Because of this, they are often referred to as the power house of the cell.

Question 3.
What are the cell organelles? What are their functions?
Answer:
Cell organelles are small active living structures found in cytoplasm of cell. Each organelle has different structure and performs different function for cell. They are endoplasmic reticulum, Plastides, Mitochondria, Ribosomes, Golgi bodies, Centrosomes, Lysosomes, Vacoules.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Question 4.
What is meant by protoplasm?
Answer:
The cytoplasm surrounded by the cell membrane and enclosing the nucleus together constitute the protoplasm. Protoplasm in other words, includes the cell membrance, the nucleus and the Cytoplasm.

Question 5.
Name four elements which form major part of protoplasm?
Answer:
Ninety nine percent of protoplasm by its weight is made up of four elements. Namely; Carbon, Hydrogen, Nitrogen and Oxygen. It also contains other elements such as H20, Carbohydrates, fats, proteins and mineral acids. Both elements and compounds in unique combination provide living nature to the protoplasm.

Question 6.
Why cells could not be observed before 17th century?
Answer:
The main reason was that the size of the majority of the cells are too small to be invisible to the unaided eye and at that time microscope was not discovered. So, the cell could not be observed before 17th century.

Question 7.
Why Hooke had to take thin slices of cork?
Answer:
The cork was solid and the details of cork could not seen in solid state. So he made thin slices to see the details of the cork. He saw space in cork slice which appeared like honey comb, called these compartments as cells.

Question 8.
What do you know about cell shape?
Answer:
Cells are of diverse shapes. Some cells are like Amoeba and white blood cells of our blood. They continuously change their shape. Most cells, however, maintain a constant shape all through their existence.

Question 9.
Write about size variation of the cells.
Answer:
Cells vary in their size. The smallest known cell is bacteria measuring about 0.5 micrometre. Nerve cell is up to 1 metre long. The heaviest cell is of ostrich and acetabulum is the largest unicellular algae which is about 10 cm long. Majority of cells in plants and animals range from 20 to 30 microns in diameter.

Question 10.
Write a short note on cell numbers.
Answer:
Cells are of two types depending upon their number. Some cells exist single in number. The organism consisting of a single cell are called unicellular organisms. The organisms which consist of two or more than two cells are called multicellular organisms. Human body consists of more than a trillion of cells. Amoeba,Paramecium etc. are unicellular organisms.

Question 11.
What is nucleolus?
Answer:
Nucleolus is a small spherical dense body present in the nucleus. It is only visible, with a microscope of a higher magnification.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Long Answer Type Questions

Question 1.
How do you differentiate protoplasm from cytoplasm?
Answer:
Protoplasm:
The cytoplasm surrounded by the cell membrane and enclosing the nucleus together constitute the protoplasm. In other words the cell membrane, the cytoplasm and the nucleus constitute pr’otoplasm.

Cytoplasm:
It is jelly like substance occupied most of the inside of the cell. It occupies the space between the cell membrane and the nucleus. All the life functions take place in the cytoplasm. It contains many important tiny structures called the organelles, which performs the various life functions.

Question 2.
Write the functions of cell organelles.
Answer:
(i) Mitochondria: It performs the function of respiration provide the cell with energy.
(ii) Endoplasmic-reticulum: It is a network of membrane, it provides large surface area for life function to take place.
(iii) Chloroplasts: These are green in colour, contain green pigment chlorophyll which help in food manufacturing in plants.
(iv) Golgi complex: These collect and distribute substances made in the cell. Synthesis and secretions of many materials.
(v) Lysosomes: Certain enzymes which help in breaking down or destroying various unwanted materials of cell.
(vi) Centrioles and centrosome: It helps in cell division in animal cells.
(vii) Ribosomes: They help in protein synthesis.
(viii) Vacoules: These are generally stored inside clear space in the cytoplasm.
In animal cells they are very small. In plant cells they are large and greater in number.

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions

Question 3.
Differentiate between the plant cell and the animal cell.
Answer:

Animal CellPlant Cell
(i) Cell wall is absent.(i) A rigid cell wall is present.
(ii) Chloroplasts are absent.(ii) Chloroplasts are present.
(iii) Centrosome is present near the nucleus.(iii) Centrosome is absent.
HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions-5HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 8 Cell Structure and Functions-6

Cell Structure and Functions Class 8 HBSE Notes

1. All organisms are made of small basic structural and functional units.
2. These smallest functional units are called cells.
3. Robert Hooke observed a cell for the first time in 1665.
4. Cells can be defined as the basic structural and functional unit of life.
5. Cells are of different size and shape.
6. Living Organisms made up of a single cell are called unicellular organisms.
7. All unicellular organisms are microscopic organism e.g. Amoeba, Paramecium etc. i.e. they cannot be seen with naked eyes.
8. Some cells can be seen with naked eyes without any aid e.g. egg of a hen.
9. In unicellular organisms, the single cell perform all the function necessary for living.
10. A cell has different parts. These small parts of the cell are called organelles.
11. A cell is made up of cell membrane, which contains all the organelles in it.
12. All cell organellies are contained in cytoplasm.
13. In the centre of the cytoplasm nucleus is situated, which is the brain of the cell.
14. Mitochondria, Endoplasmic reticulum, chloroplasts, golgi complex, lysosomes, centrioles, and ribosomes are other cell organelles.
15. Cells which don’t have a well organized nuleus are called the karyotic cells. In these cells the nucleus lacks the nuclear membrane.
16. The cells of plants are a bit different from that of animals.
17. In animals, cell wall, chloroplast, chromosomes, vacoules are absent, while they are present in plant cells.
18. Green leaves have a special organelle called chlorophyll i.e. the Green plastids (chloroplasts) which helps in the process of photosynthesis.
19. Different colours of plastids give different colours to plants.

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2

प्रश्न 1.
निम्नलिखित संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए-
(i) \(\frac{7}{4}\)
(ii) \(\frac{-5}{6}\)
हल:
(i)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2 -1
बिन्दु P संख्या रेखा पर \(\frac{7}{4}\) को निरूपित करता है ।

(ii)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2 -2
बिन्दु P संख्या रेखा पर \(\frac{-5}{6}\) को निरूपित करता है ।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.2

प्रश्न 2.
\(\frac{-2}{11}\), \(\frac{-5}{11}\), \(\frac{-9}{11}\) को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए।
हल:
बिन्दु P, Q, R क्रमशः संख्या रेखा पर \(\frac{-2}{11}\), \(\frac{-5}{11}\), \(\frac{-9}{11}\) निरूपित करता है ।

प्रश्न 3.
ऐसी पाँच परिमेय संख्याएँ लिखिए जो 2 से छोटी हों।
हल:
2 से छेटी पाँच परिमेय संख्याएँ निम्न हैं-
1, \(\frac{1}{2}\), 0, -1, \(-\frac{1}{2}\)

प्रश्न 4.
\(\frac{-2}{5}\) और \(\frac{1}{2}\) के मध्य दस परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
सर्वप्रथम \(\frac{-2}{5}\) और \(\frac{1}{2}\) को समान हर वाली परिमेय संख्याओं में बदलेंगे ।
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2 -3

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.2

प्रश्न 5.
(i) \(\frac{2}{3}\) और \(\frac{4}{5}\)
(ii) \(\frac{-3}{2}\) और \(\frac{5}{3}\)
(iii) \(\frac{1}{4}\) और \(\frac{1}{2}\) के मध्य पाँच परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
(i) सर्वप्रथम \(\frac{2}{3}\) और \(\frac{4}{5}\) को समान हर वाली संख्याओं में बदलेंगे ।
\(\frac{2 \times 20}{3 \times 20}=\frac{40}{60}\) और \(\frac{4 \times 12}{5 \times 12}=\frac{48}{60}\)
अत: \(\frac{40}{60}\) और \(\frac{48}{60}\) के मध्य पाँच परिमेय संख्याएँ निम्न है –
\(\frac{41}{60}\), \(\frac{42}{60}\), \(\frac{43}{60}\), \(\frac{44}{60}\), \(\frac{45}{60}\)

(ii) सर्वप्रथम \(-\frac{3}{2}\) और \(\frac{5}{3}\) को समान हर वाली संख्याओं में बदलेंगे ।
\(-\frac{3 \times 3}{2 \times 3}\) और \(\frac{5 \times 2}{3 \times 2}\)
⇒ \(\frac{-9}{6}\) और \(\frac{10}{6}\)
अत: \(\frac{-9}{6}\) और \(\frac{10}{6}\) के मध्य 5 परिमेय संख्याएँ निम्न है –
\(\frac{-8}{6}\), \(\frac{-7}{6}\), \(\frac{-6}{6}\),\(\frac{-5}{6}\), \(\frac{-4}{6}\) या, \(\frac{-8}{6}\), \(\frac{-7}{6}\), 0,\(\frac{2}{6}\), \(\frac{3}{6}\)

(iii) सर्वप्रथम \(\frac{1}{4}\) और \(\frac{1}{2}\) को समान हर वाली संख्याओं में बदलेंगे ।
\(\frac{1 \times 8}{4 \times 8}\) और \(\frac{1 \times 16}{2 \times 16}\)
⇒ \(\frac{8}{2}\) और \(\frac{16}{32}\)
अत: \(\frac{8}{32}\) और \(\frac{16}{32}\) के मध्य पाँच परिमेय संख्याएँ निम्न है –
\(\frac{9}{32}\), \(\frac{10}{32}\), \(\frac{11}{32}\), \(\frac{12}{32}\), \(\frac{13}{32}\)

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.2

प्रश्न 6.
-2 से बड़ी पाँच परिमेय संख्याएँ लिखिए।
हल:
-2 से बड़ी पाँच परिमेय संख्याएँ निम्न है –
\(-\frac{3}{2}\), -1, \(-\frac{1}{2}\), 0, \(\frac{1}{2}\)

प्रश्न 7.
\(\frac{3}{5}\) और \(\frac{3}{4}\) के बीच में दस परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल:
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.2 -4

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.1 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

प्रश्न 1.
उचित गुणधर्मों के उपयोग से निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए-
(i) \(\frac{2}{3} \times \frac{3}{5}+\frac{5}{2}-\frac{3}{5} \times \frac{1}{6}\)
(ii) \(\frac{2}{5} \times\left(\frac{-3}{7}\right)-\frac{1}{6} \times \frac{3}{2}+\frac{1}{14} \times \frac{2}{5}\)
हल :
(i) \(\frac{2}{3} \times \frac{3}{5}+\frac{5}{2}-\frac{3}{5} \times \frac{1}{6}\)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.1 -1

(ii)
HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 1 परिमेय संख्याएँ Ex 1.1 -2

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से प्रत्येक के योज्य प्रतिलोम लिखिए
(i) \(\frac{2}{8}\)
(ii) \(\frac{-5}{9}\)
(iii) \(\frac{-6}{5}\)
(iv) \(\frac{2}{-9}\)
(v) \(\frac{19}{-6}\)
हल :
(i) \(\frac{-2}{8}\) का योज्य प्रतिलोम, \(\frac{2}{8}\) है; क्योंकि
\(\frac{-2}{8}\) + \(\frac{2}{8}\) = \(\frac{-2 + 2}{8}\) = \(\frac{0}{8}\) = 0

(ii) \(\frac{-5}{9}\) का योज्य प्रतिलोम = \(\frac{5}{9}\)

(iii) \(\frac{-6}{5}\) = \(\frac{6}{5}\) का योज्य प्रतिलोम = \(\frac{-6}{5}\)

(iv) \(\frac{2}{-9}\) का योज्य प्रतिलोम = \(\frac{2}{9}\)

(v) \(\frac{19}{-6}\) का योज्य प्रतिलोम = (v) \(\frac{19}{6}\)

प्रश्न 3.
(i) x = \(\frac{11}{15}\)
(ii) x = \(-\frac{13}{17}\) के लिए सत्यापित कीजिए कि – (-x) = x.
हल :
(i) x = \(\frac{11}{15}\)
x = \(\frac{11}{15}\) का योज्य प्रतिलोम = -x = \(\frac{-11}{15}\)
अर्थात् \(\frac{-11}{15}\) का योज्य प्रतिलोम = \(\frac{11}{15}\)
अभवा, –\(\frac{-11}{15}\) = \(\frac{11}{15}\) अर्थात् -(-x) = x

(i) x =\(-\frac{13}{17}\)
x = \(\frac{13}{17}\) का योज्य प्रतिलोम = -x = \(-\frac{13}{17}\)
अर्थात् \(\frac{13}{17}\) का योज्य प्रतिलोम = \(-\frac{13}{17}\)
अभवा, –\(-\frac{13}{17}\) = \(\frac{13}{17}\) अर्थात् -(-x) = x;

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

प्रश्न 4.
निम्नलिखित के गुणनात्मक प्रतिलोम ज्ञात कीजिए
(i) -13
(ii) \(\frac{-13}{19}\)
(iii) \(\frac{1}{5}\)
(iv) \(\frac{-5}{8} \times \frac{-3}{7}\)
(v) -1 × \(\frac{-2}{5}\)
(vi) -1
हल :
(i) – 13 का गुणनात्मक प्रतिलोम = \(-\frac{1}{13}\)
क्योंकि, -13 × \(-\frac{1}{13}\) = 1 (\(\frac{a}{b} \times \frac{b}{a}=1\))

(ii) \(\frac{-13}{19}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम = \(\frac{19}{-13}\)

(iii) \(\frac{1}{5}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम = 5

(iv) \(\frac{-5}{8} \times \frac{-3}{7}\) = \(\frac{56}{15}\)
\(\frac{56}{15}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम = \(\frac{56}{15}\)

(v) -1 × \(\frac{-2}{5}\) ⇒ \(\frac{2}{5}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम = \(\frac{5}{2}\)

(vi) -1 का गुणनात्मक प्रतिलोम = \(\frac{1}{-1}\)

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रत्येक में गुणन के अन्तर्गत | उपयोग किए गए गुणधर्म का नाम लिखिए-
(i) \(\frac{-4}{5} \times 1=1 \times \frac{-4}{5}=-\frac{4}{5}\)
(ii) \(-\frac{13}{17} \times \frac{-2}{7}=\frac{-2}{7} \times \frac{-13}{17}\)
(iii) \(\frac{-19}{29} \times \frac{29}{-19}\) = 1
हल :
(i) \(\frac{-4}{5} \times 1=1 \times \frac{-4}{5}=-\frac{4}{5}\) गुणनात्मक तत्समक है।

(ii) \(-\frac{13}{17} \times \frac{-2}{7}=\frac{-2}{7} \times \frac{-13}{17}\) क्रमविनिमेयता।

(iii) \(\frac{-19}{29} \times \frac{29}{-19}\) = 1 गुणनात्मक प्रतिलोम

प्रश्न 6.
\(\frac{6}{13}\) को \(\frac{-7}{16}\) के व्युत्क्रम से गुणा कीजिए।
Solution:
सर्वप्रथम, \(\frac{-7}{16}\) का व्युत्क्रम = \(\frac{16}{-7}\)
अतः प्रश्नानुसार, latex]\frac{6}{13}[/latex] × \(\frac{16}{-7}\) = \(\frac{96}{-91}\)

प्रश्न 7.
बताइए कौन-से गुणधर्म की सहायता से आप \(\frac{1}{3} \times\left(6 \times \frac{4}{3}\right)\) को \(\left(\frac{1}{3} \times 6\right) \times \frac{4}{3}\) के रूप में अभिकलन करते हैं?
हल:
सहचारिता नियम से \(\frac{1}{3} \times\left(6 \times \frac{4}{3}\right)\) को \(\left(\frac{1}{3} \times 6\right) \times \frac{4}{3}\) के रूप में अभिकलन करते हैं।

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

प्रश्न 8.
क्या -1\(\frac{1}{8}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम \(\frac{8}{9}\) है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
हल:
हम जानते हैं कि, -1\(\frac{1}{8}\) = \(\frac{-9}{8}\)
नहीं, \(\frac{-9}{8}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम नहीं है।
क्योंकि \(\frac{-9}{8}\) × \(\frac{8}{-9}\) = -1

प्रश्न 8.
क्या 3\(\frac{1}{3}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम 0.3 है? क्यों अथवा क्यों नहीं?
हल:
हमें ज्ञात है, 3\(\frac{1}{3}\) = \(\frac{10}{3}\) 0.3 = \(\frac{3}{10}\)
\(\frac{10}{3}\) का गुणनात्मक प्रतिलोम \(\frac{3}{10}\) है।
क्योंकि \(\frac{10}{8}\) × \(\frac{3}{10}\) = 1

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

प्रश्न 10.
लिखिए
(i) ऐसी परिमेय संख्या जिसका कोई व्युत्क्रम नहीं है।
(ii) परिमेय संख्याएँ जो अपने व्युत्क्रम के समान हैं।
(iii) परिमेय संख्या जो अपने ऋणात्मक के समान है।
हल:
(i) हम जानते हैं कि ऐसी कोई परिमेय संख्या नहीं है जिसे 0 से गुणन करके 1 मिलता हो। अतः परिमेय संख्या 0 का कोई व्युत्क्रम नहीं है।
(ii) हम जानते हैं कि 1 का व्युत्क्रम 1 है और -1 का व्युत्क्रम -1 है। अतः 1 और -1 ऐसी परिमेय संख्याएँ हैं जो स्वयं के व्युत्क्रम के समान हैं।
(iii) परिमेय संख्या 0 अपने ऋणात्मक -0 = 0 के बराबर है।

प्रश्न 11.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(i) शून्य का व्युत्क्रम ___________ है।
हल:
नहीं

(ii) संख्याएँ ___________ तथा ___________ स्वयं के व्युत्क्रम हैं।
हल:
1, – 1

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter परिमेय संख्याएँ Ex 1.1

(iii)-5 का व्युत्क्रम ___________ है।
हल:
\(\frac{1}{x}\)

(iv) \(-\frac{1}{5}\) (x ≠ 0) का व्युत्क्रम ___________ है।
हल:
परिमेय संख्या

(v) दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल हमेशा ___________ है।
हल:
परिमेय संख्या

(vi) किसी धनात्मक परिमेय संख्या का व्युत्क्रम ___________ है।
हल:
धनात्मक।

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HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

Haryana State Board HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण


(A) वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Type Questions)

1. फॉस्फोरस किसके लिए संरचनात्मक तत्व है ?
(A) न्यूक्लिक अम्ल
(B) कार्बोहाइड्रेट
(C) प्रोटीन्स
(D) लिपिड
उत्तर:
(A) न्यूक्लिक अम्ल

2. निम्न में से महापोषक शृंखला है-
(A) Mg, Mn, Mo
(B) N, P,K
(C) N, P, B
(D) B, C, H
उत्तर:
(B) N, P,K

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

3. मक्के का श्वेत कलिका रोग किसकी कमी से होता है ?
(A) बोरॉन
(B) आयरन
(C) जिंक
(D) मैग्नीज
उत्तर:
(C) जिंक

4. चुकन्दर का अन्तः विगलन (Heart rot) रोग किसकी कमी से होता है ?
(A) बोरॉन
(C) लौह
(B) जिंक
(D) मैग्नीज
उत्तर:
(A) बोरॉन

5. निम्न में से विटामिन B12 का एक घटक तत्व है-
(A) Ni
(B) Cu
(C) Hg
(D) Co
उत्तर:
(D) Co

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

6. चाय के पौधों में पीली बीमारी होती है-
(A) सल्फर की कमी से
(B) सल्फर की अधिकता से
(C) नाइट्रोजन की कमी से
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सल्फर की कमी से

7. मृदा से प्राप्त पोषक तत्व कहलाते हैं-
(A) खनिज लवण
(B) अखनिज तत्व
(C) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) खनिज लवण

8. वृहत् पोषक तत्व है-
(A) नाइट्रोजन
(B) Cd
(C) Ni
(D) Mo
उत्तर:
(D) Mo

9. रन्धों के खुलने एवं बन्द होने में किस तत्व की महत्वपूर्ण भूमिका है ?
(A) ऑक्सीजन
(B) नाइट्रोजन
(C) पोटैशियम
(D) कैल्शियम
उत्तर:
(C) पोटैशियम

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

10. पादप कोशिका की मे पटलिका का प्रमुख तत्व है-
(A) Ca
(B) Mg
(C) Co
(D) Mn
उत्तर:
(B) Mg

11. किसकी कमी से ‘Dle back’ रोग होता है ?
(A) K.
(C) B
(B) Cu
(D) Fe
उत्तर:
(A) K.

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

12. नाइट्रोजन उपापचय हेतु आवश्यक तत्व है-
(a) K
(B) Mo
(C) Mg
(D) Fe
उत्तर:
(B) Mo

13. किस तत्व की पूर्ति के लिए कीटभक्षी पौधे कीटों को पकड़ते हैं ?
(A) O
(B) C
(C) K
(D) N
उत्तर:
(D) N

14. I सूची के तत्वों को सूची II में न्यूनता से होने वाले लक्षणों से सुमेलित कीजिए तथा सही कूट बुनिए-

III
1. N(a) पत्तियों का ताम्रवर्णी होना
2. Mg(b) अपरिपक्व पत्तियों का गिरना
3. B(c) अन्तरशिरीय हरिमाहीनता
4. P(d) चितकबरी हरिमाहीनता तथा ऊतक क्षरण

(A) 1. (a) 2. (b) 3. (c) 4. (d)
(B) 1. (d) 2. (c) 3. (a) 4. (b)
(C) 1. (b) 2. (c) 3. (d) 4. (a)
(D) 1. (d) 2. (c) 3. (b) 4. (a)
उत्तर:
(B) 1. (d) 2. (c) 3. (a) 4. (b)

15. पौधों में सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्व है-
(A) Mg
(B) Ne
(C) C
(D) Fe
उत्तर:
(C) C

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

16. जौ में भूरे धव्यों का कारण है-
(A) Zn
(B) Mo
(C) Cu
(D) Fe
उत्तर:
(B) Mo

17. अनिवार्यता की कसौटी प्रतिपादित की-
(A) मार्गन ने
(B) आर्नन ने
(C) लैंग ने
(D) स्मिथ ने
उत्तर:
(B) आर्नन ने

18. कौन-सा खनिज तत्व आवश्यक नहीं है ?
(A) Co
(B) Ni
(C) Mo
(D) Cd
उत्तर:
(D) Cd

19. सूक्ष्म पोषक पदार्थ-
(A) दीर्घ पोषक पदार्थों के समान महत्वपूर्ण हैं परन्तु कम मात्रा में उपयोग होते हैं।
(B) दीर्घ पोषक पदार्थों से कम महत्वपूर्ण हैं।
(C) सूक्ष्म कहलाते हैं क्योंकि ये पादप उपापचय में सूक्ष्म भूमिका अदा करते हैं।
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं।

20. लेग्यूम (फलीदार) पौधे पर्यावरण हेतु महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे-
(A) N, स्थिरीकरण में सहायक हैं।
(B) उपरोक्त सभी।
(C) मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।
(D) उपरोक्त में से कोई नहीं।
उत्तर:
(C) मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।

21. माइकोराइजा सहायक है-
(A) श्वसन में
(B) जल अवशोषण में
(C) पोषक पदार्थ अवशोषण में
(D) फॉस्फेट अवशोषण में
उत्तर:
(C) पोषक पदार्थ अवशोषण में

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

22. दिये गये तत्वों में से कौन-सा पादप वृद्धि के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है?
(A) मैग्नीशियम
(C) कॉपर
(B) जिंक
(D) कैल्शियम
उत्तर:
(D) कैल्शियम

23. पौधे को मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है-
(A) कोशिकाओं को जोड़ने में
(B) प्रोटीन संश्लेषण में
(C) पर्णहरित संश्लेषण में
(D) कोशिका भित्ति विकास में
उत्तर:
(C) पर्णहरित संश्लेषण में

24. एनस की मूल गुलिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण होता है-
(A) ब्रेडीराइजोबियम द्वारा
(B) क्लोस्ट्रीडियम द्वारा
(C) किया द्वारा
(D) एजोराइजोबियम द्वारा
उत्तर:
(C) किया द्वारा

25. मैगनीज आवश्यक होता है-
(A) न्यूक्लिक अम्ल के संश्लेषण हेतु
(B) पादप कोशिका भित्ति के निर्माण हेतु
(C) प्रकाश संश्लेषण के दौरान जल प्रकाश अपघटन हेतु
(D) पर्णहरिम के संश्लेषण हेतु
उत्तर:

26. नाइट्रोजन स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला तत्व है-
(A) मोलिब्डेनम (Mo)
(B) कॉपर (Cu)
(C) मैगनीज (Mn)
(D) जिंक (Zn)
उत्तर:
(A) मोलिब्डेनम (Mo)

27. एनास्ट्रोसायनिन में उपस्थित होता है-
(A) Cu
(B) Fe
(C) Ca
(D) K.
उत्तर:
(A) Cu

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

28. रन्धों के खुलने एवं बंद होने में सहायक आयन है-
(A) Mn+
(B) Mg+
(C) Ca2+
(D) K+
उत्तर:
(D) K+

29. निम्नलिखित में से कौन पौधों द्वारा मृदा से फॉस्फोरस के अवशोषण में सहायता करता है-
(A) राइजोबियम
(B) फ्रेंकिया
(C) एनाबीना
(D) ग्लोमस
उत्तर:
(D) ग्लोमस

30. किस तत्व के बाहर निकलने से मध्य पटलिका मुलायम हो जाती है?
(A) कैल्शियम
(C) पोटैशियम
(B) मैग्नीशियम
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) मैग्नीशियम

31. निम्नलिखित में से कौन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है-
(A) Mg
(C) S
(B) Ca
(D) Cu
उत्तर:
(D) Cu

32. निम्नलिखित कथनों में से कौन असत्य है ?
(A) एनाबीना तथा नास्टॉक स्वतंत्रजीवी अवस्था में भी नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने में सक्षम है।
(B) जड़ मन्यिकाओं का निर्माण करने वाले नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीव स्वतंत्रजीवी दशाओं में वायवीय जीवों की भाँति रहते हैं।
(C) फॅस्फोरस कोशिका कलाओं, कुछ न्यूक्लिक अम्लों तथा सभी प्रोटीनों का एक संघटक है।
(D) नाइट्रोसोमोनास तथा नाइट्रोबैक्टर रसायन स्वपोषी होते हैं।
उत्तर:
(C) फॅस्फोरस कोशिका कलाओं, कुछ न्यूक्लिक अम्लों तथा सभी प्रोटीनों का एक संघटक है।

33. सबसे प्रचुर अन्तरकोशिकीय धनायन कौन-सा है?
(A) Na+
(B) CO2+
(C) H+
(D) K+.
उत्तर:
(D) K+.

34. निम्नलिखित में से कौन-सा मानदण्ड संसाधित अभिगमन से सम्बन्ध नहीं रखता है ?
(A) विशिष्ट कला प्रोटीन की आवश्यकता
(B) उच्च चयनता
(C) अभिगमन संतृप्तता
(D) ऊर्ध्व अभिगमन ।
उत्तर:
(D) ऊर्ध्व अभिगमन ।

35. फॉस्फोरस का प्राकृतिक भण्डार कौन-सा है ?
(A) समुद्री जल
(B) प्राणि अस्थियाँ
(C) शैल
(D) जीवाश्म ।
उत्तर:
(C) शैल

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

36. नाइट्रोजन और पोटैशियम की कमी के लक्षण सर्वप्रथम कहाँ दिखते हैं?
(A) तरुण पत्तियों में
(B) जड़ों में
(C) कलियों में
(D) जीर्णमान पत्तियों में।
उत्तर:
(D) जीर्णमान पत्तियों में।

(B) अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions )

प्रश्न 1.
खनिज पोषण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
पौधों की वृद्धि एवं परिवर्धन के लिए आवश्यक खनिज तत्वों को ग्रहण करना खनिज पोषण (Mineral nutrition) कहलाता है।

प्रश्न 2.
बालू संवर्धन (sand culture) क्या है?
उत्तर:
शुद्ध बालू में पौधों को उगाते हैं। बालू में पोषक विलयन डालते रहते हैं। है?

प्रश्न 3.
किस पादप हॉर्मोन के लिए संश्लेषण हेतु जिंक (Zn) आवश्यक
उत्तर:
IAA इण्डोल ऐसीटिक अम्ल ।

प्रश्न 4.
पौधों की वृद्धि एवं परिवर्धन हेतु आवश्यक पोषक तत्वों की संख्या कितनी होती है?
उत्तर:
17.

प्रश्न 5.
पादप शरीर का प्राधार या अंश तत्व किसे कहते हैं?
उत्तर:
-C, H तथा O को प्राधार तत्व (frame work elements ) कहते हैं।

प्रश्न 6.
पर्णहरित का संघटक पोषक तत्व कौन-सा है?
उत्तर:
Mg (मैग्नीशियम)।

प्रश्न 7.
सेब के फलों में आन्तरिक कार्क (Internal cork) नामक रोग किस तत्व की कमी से होता है?
उत्तर:
बोरॉन (B)।

प्रश्न 8.
क्रान्तिक तत्व (critical elements) कौन-से तत्व होते हैं?
उत्तर:
-N, P तथा K.

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

प्रश्न 9.
ऑक्सिन संश्लेषण में कौन-सा पोषक तत्व आवश्यक होता है?
उत्तर:
जिंक (Zinc)!

प्रश्न 10.
उत्प्रेरक कार्य तत्व किसे कहते हैं?
उत्तर:
Mg, Cu आदि एन्जाइम के सहयोगी के रूप में कार्य करते हैं। इनकी अनुपस्थिति में एन्जाइम क्रियाशील नहीं होते। अतः इन्हें उत्प्रेरक कार्य तत्व कहते हैं।

प्रश्न 11.
डाल्टन ने किस नये तत्व को आवश्यक तत्व के रूप में माना?
उत्तर:
निकिल ( nickle)

प्रश्न 12.
लौह का एक प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर:
लौह श्वसन विकर सायटोक्रोम (cytochrome) का मुख्य घटक होता है।

प्रश्न 13.
जल संवर्धन क्या है?
उत्तर:
मृदारहित पोषक विलयन के घोल में पौधों को उगाना जल संवर्धन (Hydroponics) कहलाता है।

प्रश्न 14.
नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले नीले हरे शैवाल के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
एनाबीना ( Anabaena), नास्टॉक ( Nostoc)

प्रश्न 15.
प्रकाश संश्लेषण में जल के प्रकाश अपघटन में कौन-से तत्व भाग लेते हैं?
उत्तर:
क्लोरीन तथा मैंगनीज ।

प्रश्न 16.
खनिज तत्वों की अनिवार्यता की कसौटियाँ (criteria of essentiality) किसने प्रस्तावित की थी?
उत्तर:
आर्नन (Arnon; 1938) ने।

प्रश्न 17.
उस लक्षण को क्या कहते हैं, जिसमें पत्तियों के पर्णहरित के ह्रास से पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं?
उत्तर:
हरिमाहीनता ( chlorosis)।

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प्रश्न 18.
जीवद्रव्यी तत्व किसे कहते हैं?
उत्तर:
नाइट्रोजन, सल्फर, फॉस्फोरस को जीवद्रव्यी तत्व कहा जाता है, क्योंकि ये C, H तथा के साथ मिलकर जीवद्रव्य का प्रमुख भाग बनाते हैं।

प्रश्न 19.
राइजोबियम जीवाणु की विशेषता लिखिए।
उत्तर:
राइजोबियम जीवाणु स्वतन्त्र अवस्था में ऑक्सी (aerobic) तथा मन्थिकाओं में अनॉक्सी (anaerobic) होता है।

प्रश्न 20.
अनॉक्सी नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु का नाम लिखिए।
उत्तर:
रोडोस्पाइरिलियम (Rhodospirillium)।

प्रश्न 21.
नाइट्रोजिनेस एन्जाइम की सुरक्षा कौन करता है?
उत्तर:
लेगहीमोग्लोबिन (leghaemoglobin, Ib)।

प्रश्न 22.
सर्वाधिक गतिशील तत्व तथा अगतिशील तत्व का नाम लिखिए।
उत्तर:
सर्वाधिक गतिशील तत्व = पोटैशियम (K)
सर्वाधिक अगतिशील तत्व = आयरन (Fe)

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(C) लघु उत्तरीय प्रश्न-1 (Short Answer type Questions-1)

प्रश्न 1.
उत्प्रेरक प्रभाव उत्पन्न करने वाले खनिजों के नाम लिखिए।
उत्तर:
उत्प्रेरक प्रभाव (Catalytic Effect ) – लोहा (Fe), कॉपर (Cu), जिंक (Zn) आदि तत्व कुछ विकरों के प्रास्थेटिक समूह (prosthetic groups ) का कार्य करते हैं। इसके विपरीत मैगनीज (Mn), मैग्नीशियम (Mg), कोबाल्ट (Co) आदि के आयन्स अनेक विकरों की क्रियाओं के लिए सक्रियकारक या रोधक का कार्य करते हैं।

प्रश्न 2.
पौधों का ताजा भार तथा शुष्क भार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
पौधे या उसके किसी भाग का वजन करें तो इसे उसका ताजा भार (fresh weight) कहते हैं। यदि पौधे या उसके किसी भाग को 100°C ताप पर सुखाकर शेष बचे भाग का वजन करें तो इसे उसका शुष्क भार (dry weight) कहते हैं।

प्रश्न 3.
आर्नन की अनिवार्यता की कसौटियाँ क्या हैं?
उत्तर:
आर्जन (Arnon, 1938) के अनुसार अनिवार्य तत्व वे हैं-
(i) जो उपापचय में सीधे भाग लेते हैं।
(ii) जिनकी कमी या अभाव में विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
(iii) जिनकी कमी का निदान उसी तत्व की पूर्ति से सम्भव है।

प्रश्न 4.
विनाइट्रीकरण क्या है? इसके लिए कौन-सी परिस्थितियाँ उपयुक्त होती हैं?
उत्तर:
कुछ जीवाणुओं द्वारा मृदा में उपस्थित नाइट्रेट को स्वतन्त्र नाइट्रोजन में बदल दिया जाता है। इसे विनाइट्रीकरण (denitrification) कहते हैं। जैसे— स्यूडोमोनास (Pseudomonas), थायोबैसीलस (Thiobacillus ) आदि । विनाइट्रीकरण के लिए प्रायः अनॉक्सी परिस्थितियाँ उपयुक्त हैं।

प्रश्न 5.
नाइट्रीकरण क्या है? दो नाइट्रीकारी जीवाणुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
अमोनिया का नाइट्रेट में बदला जाना नाइट्रीकरण (nitrification) कहलाता है।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण 1
दो नाइट्रीकारी जीवाणु नाइट्रोसोमोनास ( Nitrosomonas ) तथा नाइट्रोवैक्टर (Nitrobacter) हैं।

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प्रश्न 6.
अन्य पौधों की तुलना में लैग्यूम (दाब कुल) के पौधों में प्रोटीन की मात्रा अधिक क्यों होती है?
उत्तर:
लैग्यूमिनोसी कुल के पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन स्थित जीवाणु उपस्थित होते हैं जो वायु नाइट्रोजन को नाइट्राइट एवं नाइट्रेट में परिवर्तित कर देते हैं जिससे पौधे नाइट्रोजन को पर्याप्त मात्रा में संचित कर लेते हैं। चूँकि नाइट्रोजन का मुख्य घटक है। इस कारण इस कुल के पौधों में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है।

(D) लघु उत्तरीय प्रश्न- II ( Short Answer Type Questions-II)

प्रश्न 1.
नॉप के पोषक विलयन के संघटक लिखिए।
उत्तर:
नॉप का पोषक विलयन (Knop’s Nutrient Solution)

1. कैल्शियम नाइट्रेट0-8 g/L
2. मैग्नीशियम सल्फेट0-2 g/L
3. पोटैशियम नाइट्रेट0-2 g/L
4. पोटैशियम डाइहाइड्रोजन फॉस्फेट0-2 g/L
5. फेरस सल्फेट0-2 g/L
6. फेरस टारट्रेटसूक्ष्म मात्रा में।

प्रश्न 2.
पौधों में नाइट्रोजन व पोटैशियम का क्या क्या कार्य है?
उत्तर:
नाइट्रोजन (Nitrogen):
पौधे मृदा से नाइट्रोजन को NOT NH, NH के रूप में अवशोषित करते हैं नाइट्रोजन, प्रोटीन, कोएन्जाइम, न्यूक्लिक अम्ल (DNA, RNA) तथा अन्य कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण के लिए आवश्यक होता है। यह जीवद्रव्य व पर्णहरित का मुख्य भाग है। रन्धों के खुलने व बन्द होने, जल की गति एवं सन्तुलन में नाइट्रोजन सहायक होती है।

पोटैशियम (Potassium):
यह विभज्योतक (meristematic) कोशिकाओं की वृद्धि, पत्तियों की वृद्धि एवं द्वितीयक जड़ों के निर्माण में महत्वपूर्ण होता है। यह जीवद्रव्य की जैविकता को बनाये रखने के लिए आवश्यक है । रन्धों के खुलने व बन्द होने में इनकी विशेष भूमिका होती है। यह एन्जाइम्स का सहकारक होता है।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

प्रश्न 3.
सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारक के कुछ उदाहरण दीजिये।
उत्तर:
सहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारक (Symbiotic Nitrogen Fixers)
1. मटर, चना, बाकला, सेम आदि की प्रन्थिकामय जड़ों में पाया जाने वाला राइजोबियम जीवाणु ।
2. एनस की जड़ मन्थियों में पाया जाने वाला फ्रैंकिया सूक्ष्म जीव । 3. सायकस की कोरेलॉयड जड़ में नॉस्टॉक (Nastoc), एनाबीना (Anabaena) |
4. एजोला (Azolla) फर्न की पत्तियों में एनाबीना ।
5. लाइकेन (Lichens) के सूकाय ( thalloid) में नीले हरे शैवाल या सायनोबैक्टीरिया ।

प्रश्न 4.
पोटैशियम तथा नाइट्रोजन के अभाव में उगने वाले पौधों में उत्पन्न लक्षण लिखिए।
उत्तर:
(i) पोटैशियम की कमी से पत्तियों पर निर्जीव धब्बे ( necrosis ) बन जाते हैं प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया मन्द हो जाती है रोगों के लिए प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। यान्त्रिक ऊतक कम विकसित होता है। पौधे झाड़ीनुमा (bushy) हो जाते हैं।

(ii) नाइट्रोजन की कमी से पत्तियाँ पीली हो जाती हैं। कोशिका विभाजन, श्वसन क्रिया प्रोटीन संश्लेषण मन्द हो जाता है। पौधों की वृद्धि रुक जाती है। पुष्पन विलम्ब से होता है। अनाज के दाने सिकुड़ जाते हैं।

प्रश्न 5
खनिज तत्वों के सामान्य कार्य लिखिए।
उत्तर:
(1) खनिज तत्व पादप शरीर के निर्माणक तत्व (framework elements) हैं, जैसे -C, H तथा O शरीर का ढाँचा बनाते हैं।
(2) जीवद्रव्यी तत्व (Protoplasmic Elements), जैसे-N, S, P आदि ये C H तथा ) के साथ मिलकर जीवद्रव्य बनाते हैं।
(3) उत्प्रेरक तत्व (Catalytic Elements) Mg, Cu आदि एन्जाइम के सहकारक का कार्य करते हैं। इनके अभाव में एन्जाइम क्रियाशील नहीं होते।
(4) सन्तुलन तत्व (Balancing Elements) – Cu, Mg K आदि अन्य खनिजों के विषैले प्रभाव को समाप्त करते हैं।

प्रश्न 6.
सामान्य पोषक विलयन की आवश्यक परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मृदा रहित पोषक विलयन तैयार करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि विलयन में सभी अनिवार्य पोषक तत्व उपस्थित हों। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित परिस्थितियाँ आवश्यक हैं-
(i) सभी अनिवार्य तत्व घुलित अवस्था में हों।
(ii) विलयन तनु हो तथा इसे समय-समय पर बदलते रहने की व्यवस्था
(iii) विलयन में वातायन की उचित व्यवस्था हो ।
(iv) विलयन का pH निश्चित रहे ।

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प्रश्न 7.
जल संवर्धन क्या है ? इसका क्या महत्व है?
उत्तर:
जल संवर्धन (Hydroponics): यह वह तकनीक है जिसमें पौधे को मृदाविहीन माध्यम अर्थात् जलीय विलयन में उगाया जाता है। इसके लिए
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण 2
पोषक विलयन संवर्धन के लिए एक आदर्श अवस्था का आरेख
काँच का बना अक्रिय पात्र लेकर इसमें सन्तुलित पोषक युक्त विलयन भर दिया जाता है। इस विलयन के ऊपर जाली लगाकर नवोद्भिद् (seedling) पौधे की जड़ को विलयन में डुबो दिया जाता है तथा प्ररोह ऊपर रखा जाता है। विलयन में वातायन (aeration) की उचित व्यवस्था रखी जाती है।

महत्व:
जल संवर्धन विधि द्वारा तत्वों की कमी या पौधों में प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है। इसके द्वारा कुछ शाकीय पौधे उगाये जा सकते हैं तथा कायिक जनन कराया जा सकता है।

प्रश्न 8.
पौधे मृदा से फॉस्फोरस को किस रूप में ग्रहण करते हैं? फॉस्फोरस का पौधों में कहाँ उपयोग होता है? फॉस्फोरस की कमी के दो लक्षण लिखिए।
उत्तर:
पौधे फॉस्फोरस को मुख्यतया फॉस्फेट आयन (PO)” ) तथा डाइहाइड्रोजन फॉस्फेट H, PO, आयन के रूप में ग्रहण करते हैं। फॉस्फोरस का उपयोग कोशिका कला, पत्तियों के निर्माण, जड़ों की वृद्धि आदि में होता है। फॉस्फोरस प्रोटीन, न्यूक्लिओप्रोटीन्स, न्यूक्लिओटाइड आदि के संश्लेषण में प्रयुक्त होता है।
फॉस्फोरस की कमी से पत्तियों पर एन्थोसायनिन ( anthocyanin ) के धब्बे प्रकट हो जाते हैं और पत्तियाँ शीघ्र गिर जाती हैं।

प्रश्न 9.
असहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण सूक्ष्म जीवों के उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
स्वतन्त्रजीवी या असहजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकरण सूक्ष्मजीवी प्रायः ऑक्सीजीवी (aerobes) या अनॉक्सीजीवी (Anaerobes) होते हैं। उदाहरण रोडोस्पाइरिलम (Rhodospirillium), अनॉक्सीजीवी तथा एजोटोबैक्टर (Azotobacter), विजेरन्किया (Beijemikia) आदि आक्सीजीवी जीवाणु हैं। स्वतन्त्रजीवी नीले हरे शैवाल (Blue green algae) जैसे – एनाबीना (Anabaena), नास्टॉक (Nostoc), टोलीपोथ्रिक्स (Tolypothrix) आदि हैं। यीस्ट की प्रजातियाँ भी नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होती हैं।

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प्रश्न 10.
हीमोग्लोबिन तथा लैगहीमोग्लोबिन में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
हीमोग्लोबिन (Leghaemoglobin) में अन्तर

हीमोग्लोजिन (Haemoglobin)लैगहीमोम्लोबिन (Leghaemoglobin)
यह जन्तुओं, मुख्यतः कशेरुकियों में पाया जाता है।यह फलीदार फसलों की जड़ों में मूल गुलिकाओं (root nodules) में पाया जाता है।
यह लाल चमकीला होता है।यह भूरा तथा धुँधला होता है।
यह ऑक्सीजन वाहक का कार्य करता है।यह ऑक्सीजन से तेजी से संयुक्त होता है तथा नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक है।
यह श्वसन में भाग लेता है।यह नाइट्रोजिनेज (nitrogenase) विकर की सुरक्षा करता है।

(E) निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions )

प्रश्न 1.
प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र का आरेख सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
नाइट्रोजन, (N2) कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के बाद पौधों में पाया जाने वाले प्रमुख तत्व हैं। यह ऐमीनो अम्ल, न्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन्स, पर्णहरित, विटामिन्स, पादप हॉर्मोन्स आदि का प्रमुख संघटक हैं। पौधे नाइट्रोजन को मृदा से नाइट्रेट, नाइट्राइट आदि रूप में मूण करते हैं। वायुमण्डल में लगभग 78% नाइट्रोजन पायी जाती है।

पौधे वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन (free nitrogen) का उपयोग सीधे ही नहीं कर पाते। अत: इसे विभिन्न यौगिकों के रूप में ही पहुण किया जा सकता है। पृथ्वी तथा वायुमण्डल में नाइट्रोजन का अनुपात स्थिर बना रहता है जो कि नाइट्रोजन चक्र (nitrogen cycle) द्वारा सम्भव होता है। नाइट्रोजन चक्र निम्न पदों में पूर्ण होता है-
1. अऔव नाइट्टोजन स्थिरीकरण (Non-biological Nitrogen Fixation)बिजली के तड़कने से वायुमण्डलीय नाइट्रोजन ऑक्सीजन से संयोग करके नाइट्रोजन पर-ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड तथा नाइट्रक अम्ल बनाती हैं। ये पानी में घुलकर वर्षा के साथ भूमि पर आ जाते हैं और मृदा में पहुँचकर नाइट्रेट्स तथा नाइट्राइट्स बनाते हैं।

2. औविक नाझ्ट्रोजन स्थिरीकरण (Biological Nitrogen Fixation)स्वतन्त्रजीवी, सहजीवी जीवाणुओं (symbiotic bacteria) तथा नीले हरे शैवालों (blue green algae) द्वारा वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन को इसके यौगिकों में बदल दिया जाता है। जैसे-एजोटोबैक्टर (Azotobacter), रोडोस्पाइरिलम (Rhodospirillium), क्लॉस्टरीडियम (Clostridium) आदि जीवाणु तथा नास्टॉक (Nostoc), एनाबीना (Anabaena) आदि स्वतन्त्रजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारी सूक्ष्म जीव हैं।

मटर कुल के पौर्धों की जड़ों की मूल गुलिकाओं (Root nodules) में पाये जाने वाले जीवाणु राइजोबियम (Rhizobium) सहजीवी के रूप में पाये जाते हैं। ये स्वतन्त्र नाइट्रोजन को अमोनिया में बदल देवे हैं।

3. अमोनीकरण (Ammonification)-मृत जीव- जन्तुओं तथा पौधों में उपस्थित नाइट्रोजनी कार्बनिक पदार्थों का अमोनिया में अपघटन अमोनीकरण (ammonification) कहललाता है। मुक्त अमोनिया जल, मृदा या वातावरण में मुक्त हो जाती है।

4. नाइड्थीकरण (Nitrification) – अमोनीकरण के द्वारा मुक्त अमोनिया मृदा में उपस्थित जीवाणुओं द्वारा नाइट्राइट तथा नाइट्रेट में बदल दी जाती है जो पौधों के लिए प्राप्त होती है।
नाइट्रोसोमोनास (Nitrosomonas), नाइट्रोकोकस (Nitrococcus) आदि जीवाणु भी अमोनिया को नाइट्राइड में बदल देते हैं। नाइट्रोबैक्टर (Nitrobacter) नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदल देता है जो घुलित अवस्था में जड़ों द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।

5. विनाइट्रीकरण (Denitrification)- मृदा में उपस्थित कुछ जीवाणु जैसे-थायोबैसीलस, स्यूडोमोनास आदि नाइट्रोजनी यौगिकों का अपघटन करके स्वतन्त नाइट्रोजन में बदल देते हैं। यह क्रिया विनाइट्रीकरण (denitrification) कहलाती है। नाइट्रोजन चक्र का महत्व (Importance of Nitrogen Cycle)
(i) इसके द्वारा वायुमण्डल में नाइट्रोजन का सन्तुलन बना रहता है।
(ii) नाइट्रोजन ऑक्सीजन की सक्रियता को कम करने में सहायक है।
(iii) नाइट्रोजन चक्रीकरण से पौधों को तथा जन्तुओं को नाइट्रोजन उपलब्य हो पाता है।
(iv) जीव-जन्तुओं के अपशिष्टों के विषटन से नाइट्रोजन वायुमण्डल में पहुँचती है।
HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण 1

प्रश्न 2.
निम्नलिखित तत्वों के कार्य व न्यूनता के लक्षण लिखिए- (क) Ca (ख) Mg (ग) Fe (घ) P (ङ) SI
उत्तर:
नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)
नाइट्रोजन, (N2) कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के बाद पौधों में पाया जाने वाले प्रमुख तत्व हैं। यह ऐमीनो अम्ल, न्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन्स, पर्णहरित, विटामिन्स, पादप हॉर्मोन्स आदि का प्रमुख संघटक हैं। पौधे नाइट्रोजन को मृदा से नाइट्रेट, नाइट्राइट आदि रूप में मूण करते हैं। वायुमण्डल में लगभग $78 \%$ नाइट्रोजन पायी जाती है।

पौधे वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन (free nitrogen) का उपयोग सीधे ही नहीं कर पाते। अत: इसे विभिन्न यौगिकों के रूप में ही पहुण किया जा सकता है। पृथ्वी तथा वायुमण्डल में नाइट्रोजन का अनुपात स्थिर बना रहता है जो कि नाइट्रोजन चक्र (nitrogen cycle) द्वारा सम्भव होता है। नाइट्रोजन चक्र निम्न पदों में पूर्ण होता है-

1. अऔव नाइट्टोजन स्थिरीकरण (Non-biological Nitrogen Fixation)बिजली के तड़कने से वायुमण्डलीय नाइट्रोजन ऑक्सीजन से संयोग करके नाइट्रोजन पर-ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड तथा नाइट्रक अम्ल बनाती हैं। ये पानी में घुलकर वर्षा के साथ भूमि पर आ जाते हैं और मृदा में पहुँचकर नाइट्रेट्स तथा नाइट्राइट्स बनाते हैं।

2. औविक नाझ्ट्रोजन स्थिरीकरण (Biological Nitrogen Fixation)स्वतन्त्रजीवी, सहजीवी जीवाणुओं (symbiotic bacteria) तथा नीले हरे शैवालों (blue green algae) द्वारा वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन को इसके यौगिकों में बदल दिया जाता है। जैसे-एजोटोबैक्टर (Azotobacter), रोडोस्पाइरिलम (Rhodospirillium), क्लॉस्टरीडियम (Clostridium) आदि जीवाणु तथा नास्टॉक (Nostoc), एनाबीना (Anabaena) आदि स्वतन्त्रजीवी नाइट्रोजन स्थिरीकारी सूक्ष्म जीव हैं।
मटर कुल के पौर्धों की जड़ों की मूल गुलिकाओं (Root nodules) में पाये जाने वाले जीवाणु राइजोबियम (Rhizobium) सहजीवी के रूप में पाये जाते हैं। ये स्वतन्त्र नाइट्रोजन को अमोनिया में बदल देवे हैं।

3. अमोनीकरण (Ammonification)-मृत जीव- जन्तुओं तथा पौधों में उपस्थित नाइट्रोजनी कार्बनिक पदार्थों का अमोनिया में अपघटन अमोनीकरण (ammonification) कहललाता है। मुक्त अमोनिया जल, मृदा या वातावरण में मुक्त हो जाती है।

4. नाइड्थीकरण (Nitrification) – अमोनीकरण के द्वारा मुक्त अमोनिया मृदा में उपस्थित जीवाणुओं द्वारा नाइट्राइट तथा नाइट्रेट में बदल दी जाती है जो पौधों के लिए प्राप्त होती है।
नाइट्रोसोमोनास (Nitrosomonas), नाइट्रोकोकस (Nitrococcus) आदि जीवाणु भी अमोनिया को नाइट्राइड में बदल देते हैं। नाइट्रोबैक्टर (Nitrobacter) नाइट्राइट को नाइट्रेट में बदल देता है जो घुलित अवस्था में जड़ों द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।
5. विनाइट्रीकरण (Denitrification)- मृदा में उपस्थित कुछ जीवाणु जैसे-थायोबैसीलस, स्यूडोमोनास आदि नाइट्रोजनी यौगिकों का अपघटन करके स्वतन्त नाइट्रोजन में बदल देते हैं। यह क्रिया विनाइट्रीकरण (denitrification) कहलाती है। नाइट्रोजन चक्र का महत्व (Importance of Nitrogen Cycle)
(i) इसके द्वारा वायुमण्डल में नाइट्रोजन का सन्तुलन बना रहता है।
(ii) नाइट्रोजन ऑक्सीजन की सक्रियता को कम करने में सहायक है।
(iii) नाइट्रोजन चक्रीकरण से पौधों को तथा जन्तुओं को नाइट्रोजन उपलब्य हो पाता है।
(iv) जीव-जन्तुओं के अपशिष्टों के विषटन से नाइट्रोजन वायुमण्डल में पहुँचती है।
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प्रश्न 3.
विभिन्न पोषक तत्वों की कमी से उत्पन्न प्रभावों को कैसे ज्ञात करते हैं? समझाइए।
उत्तर:
पौधों में पोषक तत्वों की कमी से उत्पन्न प्रभावों का अध्ययन जब हम किसी विशेष पोषक तत्व की उपयोगिता का अध्ययन या तत्व की कमी से उत्पन्न प्रभाव का अध्ययन करते हैं तो इसके लिए पौधों हेतु जलीय माध्यम प्रयोग में लाया जाता है। इसके लिए हम कई बोतलों में जलीय संवर्धन माध्यम तैयार (aquatic culture medium) करते हैं। इनमें से एक में सभी आवश्यक तत्वों को उचित अनुपात में मिलाया जाता है। अन्य बोतलों में उस तत्व की कमी रखी जाती है जिसका अध्ययन करना होता है। अब पौधों को वृद्धि करने के लिए छोड़ दिया जाता है। कुछ समय बाद पौधों का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं। पौधे में उत्पन्न प्रभाव किसी विशेष तत्व की कमी का लक्षण होता है।

तत्वों के प्रभाव के अध्ययन के लिए तालिका
संवर्धन घोल में तत्व की कमीप्रभाव (लक्षण)
सामान्य पोषक विलयन (Control)पौधे की सामान्य वृद्धि।
मैग्नीशियम का अभाव (Deficency of Mg)कम वृद्धि, पत्तियाँ पीली।
कैल्शियम का अभाव (Deficency of Ca)कमजोर पौधा, जड़ें अविकसित, पत्तियों पर धब्बे।
आयरन का अभाव (Deficency of Fe)पत्तियाँ सफेद-पीली, कम वृद्धि।
पोटैशियम का अभाव (Deficency of K)कम वृद्धि, पत्तियाँ भूरी, पौधा शीघ्र मर जाता है।
फॉस्फोरस का अभाव (Deficency of P)जड़ों की वृद्धि प्रभावित होने से पौधा मर जाता है।
नाइट्रोजन का अभाव (Deficency of N)वृद्धि कम, पत्तियाँ पीली, कमजोर पौधा।

प्रश्न 4.
जड़ों द्वारा खनिज तत्वों के अवशोषण को समझाइए। खनिज तत्वों का अवशोषण
उत्तर:
(Absorption of Mineral Element )
अधिकांश खनिज तत्व जल में घुलित अवस्था में मूलरोमों द्वारा अवशोषित होते हैं। ये खनिज मूल की बाह्य त्वचा (epiblema) एवं बल्कुट (cortex) में से विसरित होते हुए अन्तस्त्वचा (Endodermis ) तक पहुँचते हैं। अन्तस्त्वचा में कैस्पेरियन पट्टियाँ (casparian strips) पायी जाती हैं जो खनिज लवणों व जल के विसरण में रुकावट पैदा करती हैं।

HBSE 11th Class Biology Important Questions Chapter 12 खनिज पोषण

बटलर (Butler, 1953) तथा एप्सटीन (Epstein, 1955) के अनुसार वल्कुट (cortex) की कोशिकाएँ जीवित होती हैं तथा इनमें लवणों के अभिगमन के लिए उपापचयी ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसे सक्रिय अवशोषण कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि कोशिकाद्रव्य का एक भाग प्रत्यक्ष स्वतन्त्र सतह द्वारा घिरा रहता है। अतः आयनों का स्थानान्तरण कोशिका भित्ति तथा कोशिकाद्रव्यी तन्तुओं (plasmodesmata) द्वारा अन्तस्त्वचा तक होता है। अतः आयन जाइलम में प्रवेश करा दिये जाते हैं। इसे आयन ग्रहण सरल विधि कहा जाता है।

अन्तस्त्वचा (endodermis ) से जाइलम की निर्जीव कोशिकाओं तक आयनों का सक्रिय स्थानान्तरण होता है। जड़ों की वल्कुट कोशिकाएँ श्वसन द्वारा उत्पादित ऊर्जा का प्रयोग करके आयनों को मृदा से खींचती हैं और जाइलम (xylem) में पहुँचा देती हैं। इस क्रिया को सक्रिय स्थानान्तरण कहते हैं। लवणों का जाइलम में प्रवेश होने के बाद यह वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (transpiration pull) द्वारा तथा संसंजन बल द्वारा जल के साथ ऊपर की ओर चढ़ते हैं। गन्तव्य तक पहुँचकर इनका उपयोग कर लिया जाता है।

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HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

Haryana State Board HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6 Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Exercise 2.6

निम्नलिखित समीकरणों को हल कीजिए

प्रश्न 1.
\(\frac{8 x-3}{3 x}\) = 2
हल :
\(\frac{8 x-3}{3 x}\) = 2
कैंची गुणा करने पर,
⇒ (8x – 3) × 1= 3x × 2
8x – 3= 6x
– 3 तथा 6x का पक्षान्तरण करने पर,
⇒ 8x – 6x = 3
⇒ 2x = 3
∴ x = \(\frac{3}{2}\)

प्रश्न 2.
\(\frac{9 x}{7-6 x}\) = 15
हल :
\(\frac{9 x}{7 – 6x}\) = \(\frac{15}{1}\)
कैंची गुणा करने पर,
⇒ 9x × 1 = (7 – 6x) × 15
⇒ 9x = 105 – 90x
90x का पक्षान्तरण करने पर,
⇒ 9x + 90x = 105
⇒ 99x = 105
⇒ x = \(\frac{105}{99}\) = \(\frac{35}{33}\)
अतः x = \(\frac{35}{33}\)

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

प्रश्न 3.
\(\frac{z}{z+15}\) = \(\frac{4}{9}\)
हल :
\(\frac{z}{z+15}\) = \(\frac{4}{9}\)
⇒ 9z = 4(z + 15) (कैंची गुणा करने पर)
⇒ 9z = 4z + 60
⇒ 9z – 4z = 60
⇒ 5z = 60
⇒ z = \(\frac{60}{5}\)
अतः z = 12

प्रश्न 4.
\(\frac{3y+4}{2-6y}\) = \(\frac{-2}{5}\)
हल :
\(\frac{3y+4}{2-6y}\) = \(\frac{-2}{5}\)
कैंची गुणा करने पर,
⇒ 5(3y + 4) = – 2(2 – 6y)
⇒ 15y + 20 = – 4 +12y
⇒ 15y – 12y = – 4 – 20 (पक्षान्तरण करने पर)
⇒ 3y = – 24
⇒ y = \(\frac{-24}{3}\)
अतः y = -8

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

प्रश्न 5.
\(\frac{7y+4}{y+2}\) = \(\frac{-4}{3}\)
हल :
\(\frac{7y+4}{y+2}\) = \(\frac{-4}{3}\)
कैंची गुणा करने पर,
⇒ 3(7y + 4) = -4(y + 2)
⇒ – 21y + 12 = – 4y – 8
⇒ – 21y + 4y = – 8 – 12 (पक्षान्तरण करने पर)
⇒ – 25y = – 20
⇒ y = \(-\frac{20}{25}\) = \(-\frac{4}{5}\)
अतः y = \(-\frac{4}{5}\)

प्रश्न 6.
हरी और हैरी की वर्तमान आयु का अनुपात 5 : 7 है । अब से 4 वर्ष बाद उनकी आयु का अनुपात 3 : 4 हो जायेगा । उनकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।
हल :
माना कि हरी और हैरी की वर्तमान आयु क्रमश : 5x तथा 7x हैं।
अत: 4 वर्ष बाद हरी की आयु = (5x + 4) वर्ष
तथा 4 वर्ष बाद हैरी की आयु = (7x + 4) वर्ष
4 वर्ष बाद उनकी आयु का अनुपात = 3 : 4
प्रश्नानुसार,
\(\frac{5x+4}{7x+4}\) = \(\frac{3}{4}\)
कैंची गुणा करने पर,
⇒ 3(7x + 4) = 4 (5x + 4)
⇒ 21x + 12 = 20x + 16
⇒ 21x – 20x = 16 – 12 (पक्षान्तरण करने पर)
∴ x = 4
अत: हरी की वर्तमान आयु = 5x = 5 × 4 = 20 वर्ष
तथा हैरी की वर्तमान आयु = 7x = 7 × 4 = 28 वर्ष

HBSE 8th Class Maths Solutions Chapter 2 एक चर वाले रैखिक समीकरण Ex 2.6

प्रश्न 7.
एक परिमेय संख्या का हर उसके अंश से 8 अधिक है । यदि अंश में 17 जोड़ दिया जाए तथा हर में से 1 घटा दिया जाए, तब हमें में प्राप्त होता है । वह परिमेय संख्या ज्ञात कीजिए।
हल :
माना कि परिमेय संख्या का अंश =x
तब हर = (x+8)
तो परिमेय संख्या = \(\frac{x}{x+8}\)
अंश में 17 जोड़ने पर, नया अंश = (x + 17)
हर में से 1 घटाने पर, नया हर = (x + 8 – 1) = (x + 7)
तो प्राप्त नयी परिमेय संख्या = \(\frac{x+17}{x+7}\)
अतः प्रश्नानुसार, \(\frac{x+17}{x+7}\) = \(\frac{3}{2}\)
कैंची गुणा करने पर,
⇒ 2(x + 17) = 3(x +7 )
⇒ 2x + 34 = 3x + 21
⇒ 2x – 3x = 21 – 34 (पक्षान्तरण करने पर)
⇒ -x = -13
⇒ x = 13
∴ अंश = 13
हर (x + 8) = (13 + 8) ⇒ 21
अतः परिमेय संख्या = \(\frac{13}{21}\)

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HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

Haryana State Board HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

बहुविकल्पीय प्रश्न 

1. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ दर्द निवारक (पीड़ाहारी) है?
(अ) ऐस्प्रिन
(स) इण्डिगो
(ब) पेनिसिलिन
(द) सैकरीन
उत्तर:
(अ) ऐस्प्रिन

2. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ पूतिरोधी है ?
(अ) पैरासिटैमॉल
(ब) ल्यूमीनल
(स) डेटॉल
(द) प्रोथजिन
उत्तर:
(स) डेटॉल

3. सोडियम बेन्जोएट है-
(अ) खाद्य रंग
(ब) खाद्य परिरक्षक
(स) कृत्रिम मधुरक
(द) प्रति-ऑक्सीकारक
उत्तर:
(ब) खाद्य परिरक्षक

4. सैकरीन है-
(अ) खाद्य परिरक्षक
(ब) खाद्य रंग
(स) प्रति आक्सीकारक
(द) कृत्रिम मधुरक
उत्तर:
(द) कृत्रिम मधुरक

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

5. अपमार्जक होते हैं-.
(अ) प्राकृतिक पदार्थ
(ब) क्षारीय
(स) संश्लेषित पदार्थ
(द) दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षार का लवण
उत्तर:
(स) संश्लेषित पदार्थ

6. पैरासिटैमॉल का सही संरचना सूत्र निम्नलिखित में से कौनसा है?
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 1
उत्तर:
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 2

7. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ लक्ष्य- अणु अथवा औषध-लक्ष्य है?
(अ) कार्बोहाइड्रेट
(ब) प्रोटीन
(स) न्यूक्लीक अम्ल
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

8. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ कृत्रिम मधुरक है?
(अ) ऐस्पार्टेम
(ब) ऐलिटेम
(स) सूक्रालोस
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(द) उपरोक्त सभी

9. निम्नलिखित में से अपमार्जक का सूत्र कौनसा है?
(अ) (C17H35COO)2Ca
(ब) CH3(CH2)10CH2O SO3 Na
(स) C17H35COONa
(द) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(ब) CH3(CH2)10CH2O SO3 Na

10. निम्नलिखित में से कौनसा पदार्थ पूतिरोधी तथा विसंक्रामक दोनों की भाँति कार्य करता है?
(अ) आयोडीन
(ब) फीनॉल
(स) क्लोरीन
(द) सोफ्रामाइसिन
उत्तर:
(ब) फीनॉल

11. साबुन तथा अपमार्जक होते हैं-
(अ) पृष्ठ अक्रिय
(ब) जल विरोधी
(स) पृष्ठ सक्रिय
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(स) पृष्ठ सक्रिय

HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन

12. निम्नलिखित में से कौनसी औषध प्रतिजैविक नहीं है?
(अ) क्लॉरैम्फेनिकॉल
(ब) सल्फा औषध
(स) पेनिसिलिन
(द) बाइथायोनल
उत्तर:
(द) बाइथायोनल

13. 2-ऐसिटॉक्सी बेन्जोइक अम्ल है-
(अ) प्रतिरोधी
(ब) ज्वरनाशी
(स) प्रतिअम्ल
(द) प्रतिजैविक
उत्तर:
(ब) ज्वरनाशी

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न 

प्रश्न 1.
एन्जाइम संदमक किसे कहते हैं ?
उत्तर:
वे औषध जो एन्जाइम के उत्प्रेरक कार्य में अवरोध उत्पन्न करती हैं, उन्हें एन्जाइम संदमक कहते हैं।

प्रश्न 2.
रासायनिक संदेशवाहक किन्हें कहते हैं ?
उत्तर:
वे रसायन जो दो तंत्र कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) और तंत्र कोशिकाओं तथा पेशी के मध्य संदेश का संचार करते हैं, उन्हें रासायनिक संदेशवाहक कहते हैं।

प्रश्न 3.
प्रतिहिस्टैमिन के दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
संश्लिष्ट औषध, ब्रोमफेनिरामिन तथा टरफेनाडीन (सेलडेन) प्रतिहिस्टैमिन का कार्य करते हैं।

प्रश्न 4.
पीड़ाहारी के दो प्रकार बताइए ।
उत्तर:
पीड़ाहारी (i) अस्वापक (अनासक्त) या नॉन एडिक्टिव तथा (ii) स्वापक (नारकोटिक) प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 5.
जनन नियंत्रण गोलियों में प्रयुक्त प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न का नाम बताइए ।
उत्तर:
नॉरएथिनड्रान संश्लिष्ट प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न है जिसे जनन नियंत्रण गोलियों में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 6.
दर्द को कम करने के लिए प्रयुक्त मुख्य स्वापक पीड़ाहारी वर्ग कौनसा होता है?
उत्तर:
मार्फीन एक महत्त्वपूर्ण स्वापक पीड़ाहारी वर्ग है।

प्रश्न 7.
फेनैसिटीन किस बीमारी के इलाज के लिए प्रयुक्त किया जाता है?
उत्तर:
फेनैसिटीन एक ज्वरनाशी औषध होती है।

प्रश्न 8.
प्रभावी प्रतिअम्लों के उदाहरण बताइए।
उत्तर:
सिमेटिडीन तथा रेनिटिडीन (जैनटेक) प्रभावी प्रतिअम्ल हैं।

प्रश्न 9.
प्रशांतक क्या होते हैं?
उत्तर:
वे औषध जो बिना नींद के मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती हैं तथा जिनका उपयोग तनाव तथा मानसिक बीमारियों में किया जाता है उन्हें प्रशान्तक कहते हैं।

प्रश्न 10.
पीड़ाहारी औषध क्या होते हैं?
उत्तर:
वे औषध जो तंत्रिका तंत्र में बाधा उत्पन्न किए बिना दर्द को कम अथवा समाप्त कर देती हैं, उन्हें पीड़ाहारी औषध कहते हैं।

प्रश्न 11.
प्रतिसूक्ष्म जैविक औषध क्या होते हैं?
उत्तर:
वे औषध जो जीवाणु, कवक, वायरस या परजीवियों को चयनित करके उनका विनाश करती हैं या उनकी वृद्धि को रोकती हैं अथवा सूक्ष्मजीवियों के परजीवी प्रभाव को रोकती हैं, उन्हें प्रतिसूक्ष्म जैविक औषध कहते हैं।

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प्रश्न 12.
आँखों के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले पूतिरोधी का नाम बताइए।
उत्तर:
बोरिक अम्ल (H3BO3)

प्रश्न 13.
प्रतिजनन क्षमता औषध क्या होती है? इसके दो उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
वे औषध जो जीव की जनन क्षमता में कमी करती हैं उन्हें प्रतिजनन क्षमता औषध कहते हैं। उदाहरण- नारएथिनड्रान तथा एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल (नोवएस्ट्रॉल)।

प्रश्न 14.
जैव निम्ननीकृत अपमार्जक में किस प्रकार की शृंखलाएँ होती हैं?
उत्तर:
जैव निम्ननीकृत अपमार्जक में अशाखित श्रृंखलाएँ होती हैं।

प्रश्न 15.
खाद्य पदार्थों में परिरक्षक क्यों मिलाए जाते हैं?
उत्तर:
खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकने के लिए परिरक्षक मिलाए जाते हैं ताकि वे खराब न हों।

प्रश्न 16.
कृत्रिम मधुरक सैकरीन का संरचना सूत्र लिखिए।
उत्तर:
सैकरीन का संरचना सूत्र अग्रलिखित है-
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प्रश्न 17.
अनआयनिक अपमार्जक किन यौगिकों से मिलकर बनता है?
उत्तर:
अनआयनिक अपमार्जक स्टीऐरिक अम्ल तथा पॉलिएथिलीन ग्लाइकॉल की अभिक्रिया से बनता है।

प्रश्न 18.
धनायनी अपमार्जक का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड, एक धनायनी अपमार्जक है।

प्रश्न 19.
किसी औषध के लिए आण्विक लक्ष्य के चयन का क्या महत्त्व है ?
उत्तर:
किसी औषध के वांछित चिकित्सकीय प्रभाव को प्राप्त करने के लिए आण्विक लक्ष्य का चयन किया जाता है।

प्रश्न 20.
निम्नलिखित रोगों के इलाज में कौनसा ऐल्केलॉयड उपयोग किया जाता है ?

  1. मलेरिया बुखार
  2. हाइपर टेंशन
  3. दर्द

उत्तर:

  1. क्विनीन
  2. रेसर्पिन
  3. मॉर्फीन।

लघूत्तरात्मक प्रश्न 

प्रश्न 1.
औषधों का वर्गीकरण किन-किन मापदंडों के अनुसार किया जाता है ?
उत्तर:
औषधों का वर्गीकरण निम्नलिखित मापदंडों के आधार पर किया जाता है-

  • भेषजगुणविज्ञानीय (फार्माकोलोजिकल) प्रभाव
  • औषध का प्रभाव
  • रासायनिक संरचना
  • लक्ष्य अणु।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित व्यापारिक नाम युक्त औषधियों में उपस्थित रसायनों का नाम बताइए-
(a) (i) क्रोसीन, (ii) डिस्प्रिन।
(b) साबुन में पूतिरोधी गुण उत्पन्न करने के लिए कौनसा यौगिक मिलाया जाता है?
उत्तर:
(a) (i) क्रोसीन – पेरासिटैमॉल, (ii) डिस्प्रिन – ऐसिटिल-सैलिसिलिक अम्ल।
(b) साबुन में पूतिरोधी गुण उत्पन्न करने के लिए बाइथायोनॉल मिलाया जाता है।

प्रश्न 3.
बाइथायोनॉल तथा क्लोरैम्फेनिकॉल की संरचना बताइए।
उत्तर:
(i) डेटॉल, क्लोरोजाइलिनॉल टर्पीनिऑल तथा परिशुद्ध ऐल्कोहॉल का मिश्रण होता है।
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(ii) बाइथायोनॉल (बाइथायोनैल) को साबुन में पूतिरोधी गुण उत्पन्न करने के लिए मिलाया जाता है।
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(iii) आयोडोफॉर्म (CHl3) को घावों पर पूतिरोधी के रूप में प्रयोग करते हैं क्योंकि यह विघटित होकर आयोडीन देता है।

(iv) बोरिक अम्ल (H3BO3) का तनु जलीय विलयन आँखों के लिए दुर्बल पूतिरोधी होता है।

(v) आयोडीन एक प्रबल पूतिरोधी है तथा इसके ऐल्कोहॉल-जल मिश्रण में 2-3% विलयन को आयोडीन का टिंक्चर कहते हैं। इसे घाव पर लगाया जाता है।

(vi) अनेक कार्बनिक रंजकों में बैक्टीरियाई कोशिका के केन्द्रक में उपस्थिति क्रोमेटिन से जुड़कर उसे निष्क्रिय कर देने की क्षमता होती है जिससे बैक्टीरिया निष्प्रभावी हो जाते हैं। उदाहरण- मेथिलीन ब्लू, मर्क्युरोक्रोम तथा जेन्शियन वायलेट।

(vii) पूतिरोधियों को टूथपेस्ट, माउथवाश, फेस पाउडर तथा साबुन को दुर्गन्धरहित करने के लिए भी मिलाया जाता है।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित औषधों का वर्गीकरण उनके उपयोग के आधार पर कीजिए –
(a) फीनॉल, बाइथॉयोनॉल, क्लोरोजाइलिनॉल तथा ऐम्पिसिलिन
(b) इक्वेनिल, ल्यूमिनल, फेनैसिटीन तथा वेरोनल।
उत्तर:
(a) पूतिरोधी – फीनॉल, बाइथॉयोनॉल, क्लोरोजाइलिनॉल, प्रतिजैविक – ऐम्पिसिलिन।
(b) प्रशान्तंक – इक्वेनिल, ल्यूमिनल तथा वेरोनल फेनैसिटीन – ज्वरनाशी।

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प्रश्न 5.
प्रतिअम्ल (एन्ट – एसिड) क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
मनुष्य द्वारा अत्यधिक मात्रा में चाय, कॉफी, अचार तथा ऐलोपेथी दवाइयों इत्यादि के सेवन से आमाशय में अम्ल का उत्पादन बढ़ जाता है जिससे अत्यधिक पीड़ा होती है तथा कभी-कभी आमाशय में घाव (अल्सर) भी हो जाते हैं। आमाशय की इस अम्लता को कम करने के लिए प्रतिअम्ल प्रयुक्त किए जाते हैं। अतः वे रासायनिक पदार्थ जो आमाशय की

अम्लता को कम करने के लिए प्रयुक्त होते हैं उन्हें प्रतिअम्ल कहते हैं।

प्रारम्भ में अम्लता का उपचार सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) या ऐलुमिनियम तथा मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड। Al(OH)3 तथा Mg(OH)2] द्वारा किया जाता था लेकिन NaHCO3 की अधिक मात्रा के कारण आमाशय क्षारीय हो जाता है जिसके कारण अम्ल का उत्पादन अधिक होता है। अतः धात्विक हाइड्रॉक्साइड अच्छे प्रतिअम्ल माने जाते हैं क्योंकि ये अविलेय होते हैं जिससे pH का मान 7 (उदासीन) से अधिक नहीं हो पाता है। इनोफ्रूटसाल्ट भी एक सामान्यतः प्रयुक्त किए जाने वाला प्रतिअम्ल है जिसे जल के साथ प्रयुक्त किया जाता है। उपरोक्त सभी प्रतिअम्लों से रोग का कारण ठीक नहीं होता, केवल रोग के लक्षण नियंत्रित होते हैं, अतः अत्यधिक मात्रा में अल्सर होना प्राणघातक भी हो सकता है। इस कारण पहले आमाशय के रोगयुक्त भाग को ही निकाल दिया जाता था।

आजकल पुदीन हरा जैसे हर्बल प्रतिअम्ल भी प्रयोग में लिए जाते हैं। आगे के शोध से ज्ञात हुआ कि सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन (ज़ैनटेक) प्रभावी प्रतिअम्ल हैं। हिस्टैमिन, आमाशय की दीवारों में स्थित ग्राही के साथ क्रिया करता है जिससे आमाशय में पेप्सिन तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उत्पादन बढ़ जाता है जिसे रोकने के लिए सिमेटिडीन औषध का प्रयोग किया जाता है। लेकिन आजकल रेनिटिडीन को प्रतिअम्ल के रूप में सर्वाधिक मात्रा में उपयोग में लिया जाता है। वर्तमान में ओमेप्रेजॉल तथा लैन्सोप्रेजॉल को भी प्रतिअम्ल के रूप में प्रयुक्त किया जा रहा है।
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प्रश्न 6.
ग्राही (Receptors) किस प्रकार औषध लक्ष्य की तरह कार्य करते हैं? समझाइए।
उत्तर:
शरीर की संचार व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाने वाले प्रोटीनों को ग्राही कहते हैं। इनमें से अधिकतर प्रोटीन, कोशिका झिल्ली (कला) में पाए जाते हैं तथा ये ग्राही प्रोटीन, कोशिका झिल्ली में इस प्रकार स्थित होते हैं कि उनकी सक्रिय सतह वाला छोटा भाग कोशिका झिल्ली के बाहरी क्षेत्र की और खुलता है।

शरीर में दो न्यूरॉन्स (तंत्र कोशिका) एवं न्यूरॉन तथा पेशी (Muscle) के मध्य संदेश का संचार कुछ रसायनों द्वारा होता है उन्हें रासायनिक संदेशवाहक (Chemical Messengers) कहा जाता है। ये रसायन ग्राही की बंधनी सतह द्वारा ग्रहण किए जाते हैं। ग्राही के आकार में परिवर्तन होने से संदेशवाहक, ग्राही के साथ समायोजित हो जाता है जिससे संदेश कोशिका तक पहुँच जाता है। इस प्रकार रासायनिक संदेशवाहक कोशिका में प्रवेश किए बिना ही संदेश को कोशिका के अन्दर पहुँचा देते हैं। रासायनिक संदेशवाहक दो प्रकार के होते हैं : (i) हॉर्मोन तथा (ii) तत्त्रिकीय संदेशवाहक।
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प्रश्न 7.
हिस्टैमिन तथा प्रतिहिस्टैमिन क्या होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
प्रतिहिस्टैमिन, वे रासायनिक पदार्थ हैं जो त्वचा (Skin) पर उत्पन्न खुजली तथा जल इत्यादि के प्रभाव को कम करते हैं। हिस्टैमिन एक वाहिका विस्फारक (वैसोडाइलेटर) पदार्थ है जो कि श्वास नलिकाओं तथा आहार नली की पेशियों को संकुचित करता है एवं रुधिर वाहिकाओं की दीवारों को नरम (Relax) करता है। जुकाम के कारण होने वाला नासिक संकुलन (Nasal congestion) तथा परागकणों के कारण उत्पन्न एलर्जी भी हिस्टैमिन के कारण ही होती है। प्रतिहिस्टैमिन, हिस्टैमिन के प्राकृतिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं।

प्रतिहिस्टैमिन, ग्राही की उस बंधनी सतह पर जुड़ती है जिस पर हिस्टैमिन अपना प्रभाव डालती है अर्थात् इस बंधनी सतह के लिए हिस्टैमिन तथा प्रतिहिस्टैमिन में प्रतिस्पर्धा होती है। ब्रोमफेनिरामिन (डाइमेटेप) तथा टरफेनाडीन (सेलडेन ) नामक संश्लिष्ट औषध, प्रतिहिस्टैमिन का कार्य करती हैं। प्रतिहिस्टैमिन, आमाशय के अम्ल स्रवण पर प्रभाव नहीं डालती क्योंकि प्रतिएलर्जी तथा प्रति-अम्ल औषध भिन्न-भिन्न ग्राहियों पर कार्य करती है।
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प्रश्न 8.
स्वापक पीड़ाहारी क्या होते हैं? समझाइए।
उत्तर:
स्वापक (नारकोटिक या ऐनाल्जेसिक) पीड़ाहारी-ये पीड़ाहारी दर्द को कम करते हैं लेकिन इनसे नींद तथा बेहोशी आती है। इनकी अधिक मात्रा के सेवन से भावशून्यता (Stupor), कोमा में आना (सम्मूच्छा ) तथा मरोड़ (Convulsions) जैसे प्रभाव उत्पन्न होते हैं तथा अन्त में मृत्यु भी हो सकती है।

मॉर्फीन एक महत्वपूर्ण स्वापक पीड़ाहारी वर्ग है, इन्हें ओपिएट्स (अहिफेनी) भी कहते हैं क्योंकि ये पोस्त (ओपियम पौपी) से प्राप्त किए जाते हैं। ये पीड़ाहारी मुख्यतः हृदय के दर्द, ऑपरेशन (शल्य चिकित्सा) के बाद होने वाले दर्द, प्रसव पीड़ा तथा कैंसर की अन्तिम अवस्था में होने वाले दर्द से आराम देने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं। इन पीड़ाहारियों के प्रयोग से मनुष्य इनका आदी हो जाता है। हेरोइन तथा कोडीन भी महत्वपूर्ण स्वापक पीड़ाहारी होती हैं। हेरोइन को मॉर्फीन के ऐसिटिलीकरण द्वारा बनाया जाता है तथा यह एक शक्तिशाली पीड़ाहारी है।
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प्रश्न 9.
प्रतिजैविक (एन्टिबायोटिक) क्या होते हैं ? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
प्रतिजैविक (ऐन्टिबॉयोटिक) या प्रतिजीवाणु-प्रतिजैविक वे औषध हैं, जो सूक्ष्म जीवों (Micro organisms) जैसे जीवाणु (वायरस) तथा कवक (फफूँदी) द्वारा उत्पन्न होते हैं तथा ये अन्य सूक्ष्मजीवों के उपापचयी प्रक्रमों में अवरोध उत्पन्न करके उनकी वृद्धि को रोकते हैं या उनका विनाश करते हैं। प्रतिजैविक, पूर्ण अथवा आंशिक रासायनिक संश्लेषण द्वारा प्राप्त की जाती हैं।

इन्हें कम सान्द्रता में प्रयुक्त किया जाता है तथा ये कम विषैली होती हैं अतः इन्हें संक्रमण (Infections) के उपचार हेतु प्रयोग में लिया जाता है। उन्नीसवीं शताब्दी में ऐसे रसायनों की खोज हुई जो आक्रमणकारी जीवाणुओं पर तो प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं, लेकिन परपोषी (होस्ट) पर इनका कोई प्रभाव नहीं होता। प्रतिजैविकों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-
1. आर्सेनिक आधारित औषध आर्सफेनेमीन (सैल्वरसैन) सिफलिस के उपचार के लिए प्रयुक्त होती है, जिसकी खोज पॉल एर्लिश ने की थी। सैल्वरसैन मनुष्य के लिए विषैली होती है, लेकिन इसका प्रभाव मनुष्य की अपेक्षा सिफलिस उत्पन्न करने वाले जीवाणु (स्पाइरोकीट) पर अधिक होता है।

2. प्रॉन्टोसिल एक प्रतिजीवाणु है जो शरीर में सल्फैनिलऐमाइड में बदल जाता है जो कि वास्तविक असरकारक सल्फा औषध है।
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3. सल्फा औषधों में सल्फापिरिडीन सर्वाधिक प्रभावकारी प्रतिजैविक होती है।
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4. सल्फोनैमाइडों की सफलता के बाद 1929 में ऐलेक्जेन्डर फ्लैमिंग ने पेनिसिलियम नोटेटम नामक फफूँदी से एक प्रतिजैविक औषधि पेनिसिलिन की खोज की, जिसका सामान्य सूत्र निम्नलिखित है-
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पेनिसिलिन देने से पहले इसके प्रतिएलर्जी का परीक्षण करना आवश्यक होता है। प्रतिजैविक, सूक्ष्म जीवों को नष्ट करते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं। कुछ जीवाणुनाशी (Bactericidal) तथा जीवाणुरोधी (Bacteriostatic) प्रतिजैविकों के उदाहरण निम्नलिखित हैं-

जीवाणुनाशीजीवाणुरोधी
पेनिसिलिनएरिश्रोमाइसिन
ऐमीनोग्लाइकोसाइडटेट्रासाइक्लीन
ऑफ्लोक्सासिनक्लौरैम्फेनिकॉल

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प्रश्न 10.
प्रतिजनन क्षमता औषध क्या होती हैं? समझाइए।
उत्तर:
वे औषध जो जीव की जनन क्षमता में कमी करती हैं, उन्हें प्रतिजननक्षमता औषध कहते हैं। जनन नियंत्रण गोलियों में संशिलष्ट एस्ट्रोजन एवं प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्नों का मिश्रण होता है। ये दोनों ही हार्मोन होते हैं। प्रोजेस्टेरोन अंडोत्सर्ग को निरोधित करता है। संश्लेषित प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न प्राकृतिक प्रोजेस्टेरोन की तुलना में अधिक प्रभावशाली होते हैं। नॉरएथिनड्रान एक संशिलष्ट प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न है जिसे मुख्य रूप से जनन नियंत्रण गोलियों में प्रयुक्त किया जाता है। एथाइनिलएस्ट्राडाइऑल (नोवएस्ट्रॉल) एक एस्ट्रोजन व्युत्पन्न है जिसे प्रोजेस्टेरोन व्युत्पन्न के साथ जनन नियंत्रण गोलियों में प्रयुक्त किया जाता है।
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वे यौगिक जो गर्भधारण में रुकावट डालते हैं उन्हें गर्भ निरोधक पदार्थ (Contraceptive Substances) कहते हैं तथा वे रसायन जिनसे सन्तानोत्पत्ति की क्षमता नष्ट हो जाती है उन्हें रसोबन्ध्यक (Chemosterilants) कहा जाता है।

उदाहरण-
(i) मटर के तेल से प्राप्त m-जाइलोहाइड्रोक्विनोन चूहों में गर्भ धारण क्षमता को कम कर देता है तथा इसका महिलाओं की गर्भधारण क्षमता पर भी काफी प्रभाव होता है।
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(ii) डैनैजॉल नामक रसायन से पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या में प्रभावी कमी आ जाती है।

(iii) बिनौले के तेल से प्राप्त गोसिपॉल नामक ऐरोमैटिक हेक्साहाइड्रॉक्सीडाइऐल्डिहाइड पुरुषों के लिए सर्वाधिक प्रभावी प्रतिनिषैची (प्रतिजनन क्षमता) कर्मक होता है।
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प्रश्न 11.
सैकरीन के संश्लेषण में प्रयुक्त अभिक्रिया अनुक्रम लिखिए।
उत्तर:
वे पदार्थ जो शर्करा (Sugar) के स्थान पर मधुरक (Sweetening agent) के रूप में प्रयोग में लिए जाते हैं लेकिन उनका कोई पोषण मान (Nutritional value) नहीं होता, उन्हें कृत्रिम मधुरक कहते हैं।

प्राकृतिक मधुरक जैसे सूक्रोस इत्यादि ग्रहण की गई कैलोरी मान को बढ़ाते हैं। अतः आजकल बहुत से व्यक्ति कृत्रिम मधुरकों का प्रयोग करने लगे हैं। सैकरीन एक प्रथम अधिक प्रचलित कृत्रिम मधुरक है जिसकी खोज 1879 में हुई थी। यह सूक्रोस से लगभग 550 गुना अधिक मीठी होती है तथा इसका रासायनिक नाम आर्थोसल्फो-बेन्जीनीमाइड है तथा यह एक श्वेत क्रिस्टलीय ठोस है।

सैकरीन के प्रयोग का लाभ यह है कि इसका शरीर में पाचन नहीं होता तथा यह अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाती है क्योंकि यह पूर्णतः अक्रिय होता है तथा इससे कोई हानि भी नहीं होती। इसी कारण इसे मधुमेह के रोगियों के लिए आसानी से प्रयोग में लाया जा सकता है।

सैकरीन जल में अविलेय होती है लेकिन इसका सोडियम लवण जल में विलेय होता है। सैकरीन का संश्लेषण निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है-
HBSE 12th Class Chemistry Important Questions Chapter 16 दैनिक जीवन में रसायन 15
सैकरीन के अतिरिक्त ऐस्पार्टेम सूक्रालोस तथा ऐलिटेम भी महत्वपूर्ण कृत्रिम मधुरक हैं।
(i) ऐस्पार्टेम-यह एक व्यापक रूप से प्रयुक्त किए जाने वाला कृत्रिम मधुरक है। यह एस्पार्टिक अम्ल तथा फेनिलऐलानिन से बने डाइपेप्टाइड का मेथिल एस्टर है। यह सूक्रोस की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक मीठा होता है। एस्पार्टेम का प्रयोग केवल ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों को मीठा करने के लिए ही प्रयुक्त किया जाता है क्योंकि इसे खाना बनाने के ताप तक गर्म करने पर यह विघटित हो जाता है। इसकी संरचना निम्नलिखित है-
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(ii) सूक्रालोस-यह सूक्रोस का ट्राइक्लोरो व्युत्पन्न है। शर्करा के समान यह भी क्रिस्टलीय ठोस होता है लेकिन यह सूक्रोस की तुलना में लगभग 600 गुना मीठा होता है। यह खाना पकाने के तापमान पर स्थायी होता है तथा इससे कोई कैलोरी प्राप्त नहीं होती है। सूक्रालोस संरचना निम्नलिखित है-
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(iii) ऐलिटेम-यह एक प्रबल कृत्रिम मधुरक है तथा ऐस्पार्टेम की तुलना में अधिक स्थायी होता है। यह सूक्रोस से लगभग 2000 गुना अधिक मीठा होता है तथा इसकी मिठास को नियंत्रित करना कठिन होता है। इसकी संरचना निम्नलिखित है-
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प्रश्न 12.
एक अच्छे खाद्य परिरक्षक के गुण बताइए।
उत्तर:
खाद्य पदार्थों को पड़ा रखने पर उनमें सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण ये खराब हो जाते हैं। अतः वे पदार्थ जिन्हें खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। उन्हें खाद्य परिरक्षक कहते हैं।

कुछ सामान्य परिक्षक निम्नलिखित हैं-साधारण नमक, चीनी, वनस्पति तेल, सोडियम बेन्जोएट (C6H5COONa), सॉर्बिक अम्ल तथा प्रोपेनॉइक अम्ल के लवण।

सोडियम बेन्जोएट का प्रयोग सीमित मात्रा में किया जाता है क्योंकि यह शरीर द्वारा उपापचयित हो जाता है।

एक अच्छे खाद्य परिरक्षक में निम्नलिखित गुण होने चाहिये-

  • खाद्य पदार्थों पर इनका लम्बे समय तक असर रहना चाहिए।
  • ये स्वादहीन होने चाहिए।
  • इन्हें अल्प मात्रा में ही प्रयुक्त किया जाना चाहिए।
  • इनकी खाद्य पदार्थों से कोई क्रिया नहीं होनी चाहिए।
  • इनके प्रयोग से जलन, अम्लता, एलर्जी, गैस तथा पित्त नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 13.
साबुन क्या होते हैं तथा इन्हें किस प्रकार बनाया जाता है ?
उत्तर:
दीर्घ श्रृंखलायुक्त वसा अम्लों के सोडियम तथा पोटैशियम लवणों को साबुन कहते हैं। संतृप्त तथा असंतृप्त मोनोकार्बोक्सिलिक अम्लों को वसा अम्ल (Fatty Acids) कहते हैं। जैसे स्टिऐरिक अम्ल (C17H35COOH), पामिटिक अम्ल (C15H31COOH) तथा ओलीक अम्ल (C17H33COOH)। ये प्रकृति में प्रमुखता से पाये जाते हैं।

वसा अम्लों के सेडियम लवणों को सोडियम साबुन अथवा कठोर साबुन (Hard Soaps) अथवा धावन साबुन (Washing Soaps) कहते हैं, जबकि पोटैशियम साबुन को नहाने के साबुन (Bathing Soaps) अथवा मृदु साबुन (Soft Soaps) कहते हैं।

साबुन बनाना – वसा (वसा अम्लों के ग्लिसरिल एस्टर) को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन के साथ गर्म करने पर साबुन प्राप्त होता है तथा साबुन बनाने की इस प्रक्रिया को साबुनीकरण ( Saponification) कहते हैं। इस अभिक्रिया में वसा अम्लों के एस्टर का जल अपघटन होता है तथा प्राप्त साबुन कोलॉइडी अवस्था में होता है। इसे विलयन में सोडियम क्लोराइड (NaCl) डालकर अवक्षेपित कर लेते हैं। साबुन को पृथक् कर लेने के बाद बचे हुए विलयन में ग्लिसरॉल रह जाता है जिसे प्रभाजी आसवन के द्वारा प्राप्त किया जाता है।
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आठ से अठारह कार्बन परमाणु युक्त साबुन की गुणवत्ता अच्छी होती है । अठारह से अधिक कार्बन होने पर इनकी जल में विलेयता कम होती है तथा अठारह से कम कार्बन होने पर इनकी शोधन शक्ति (Cleansing Power) कम हो जाती है। सोडियम तथा पोटेशियम साबुन जल में विलेय होते हैं तथा इन्हें सफाई के लिए प्रयुक्त किया जाता है। पोटेशियम साबुन मृदु होते हैं अतः इस प्रकार के साबुन त्वचा के लिए कोमल होते हैं। पोटेशियम साबुन बनाने के लिए NaOH के विलयन के स्थान पर KOH का विलयन लिया जाता है।

साबुन के प्रकार (Types of Soaps ) साबुनों के उपयोगों के आधार पर ये अग्रलिखित प्रकार के होते हैं-
(i) प्रसाधन साबुन (Toilet Soap ) – ये अच्छे वसा एवं तेलों से बनाए जाते हैं तथा इनसे क्षार के आधिक्य को निकाल लिया जाता है। इन्हें आकर्षक बनाने के लिए इनमें रंग तथा सुगंध मिलाते हैं।

(ii) पानी में तैरने वाले साबुन (Floating Soap ) – तैरने वाले साबुन बनाने के लिए इनके कठोर होने से पहले इनमें वायु के छोटे-छोटे बुलबुले विस्पंदित (प्रवाहित ) किए जाते हैं।

(iii) पारदर्शी साबुन (Transparent Soap ) – साबुन को एथेनॉल में मोलकर और फिर विलायक के आधिक्य को वाष्पित करने से पारदर्शी साबुन बनते हैं।

(iv) औषध ‘साबुन (Medicated Soap ) – इनमें औषधीय गुण वाले पदार्थ मिलाए जाते हैं। कुछ साबुनों में गंधहारी (Deodorants) पदार्थं भी मिलाए जाते हैं।

(v) दाढ़ी बनाने का साबुन (Shaving Soap ) – दाढ़ी बनाने साबुन बनाने के लिए इसमें रोजिन नामक गोंद मिलायी जाती है जिससे सोडियम रोजिनेट बनता है जो झाग बनाने में मदद करता है तथा इसे जल्दी सूखने से बचाने के लिए इसमें ग्लिसरॉल भी मिलाया जाता है।

धुलाई के साबुन में सोडियम रोजिनेट, सोडियम कार्बोनेट, सोडियम सिलिकेट तथा बोरेक्स जैसे पूरक (Fillers) भी मिलाए जाते हैं तथा साबुन की छीलन ( Soap Chips) बनाने के लिए ठंडे सिलिंडर पर साबुन की पतली परत चढ़ाकर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों के रूप में खुरच लिया जाता है। दानेदार साबुन (Soap Granules) सूखे हुए साबुन के छोटे-छोटे बुलबुले होते हैं।

साबुन का पाउडर तथा मार्जन साबुन में कुछ साबुन, मार्जक (अपघर्षी) जैसे झामक चूर्ण ( Powdered Pumice) या बारीक रेत तथा सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) एवं ट्राइसोडियम फॉस्फेट (Na3PO4) जैसे बिल्डर मिले होते हैं। बिल्डर से साबुन की क्रियाशीलता बढ़ जाती है।

साबुन की शोधन क्रिया (Cleansing Action of Soaps) – साबुन की शोधन क्रिया में पायसीकरण ( इमल्सीकरण ) होता है। इस प्रक्रिया में साबुन, कपड़े पर लगे ग्रीस तथा मिट्टी के कणों का जल के साथ इमल्सन (पायस) बनाने में मदद करता है।

स्पष्टीकरण (Explanation ) – साबुन के अणु में अध्रुवीय जल विरोधी तथा ध्रुवीय जलस्नेही भाग होता है। कपड़े की सतह पर मिट्टी के कण, ग्रीस या तेल द्वारा चिपके रहते हैं। ग्रीस या तेल जल में अविलेय होता है अतः मिट्टी के कणों को केवल जल द्वारा नहीं हटाया जा सकता। जब साबुन का प्रयोग किया जाता है तो इसका अध्रुवीय एल्किल समूह तेल की बूंदों में विलेय होता है जबकि ध्रुवीय – COON+a समूह जल में विलेय होता है अतः तेल की प्रत्येक बूँद के चारों ओर ऋणावेश आ जाता है इससे इमल्सन बन जाता है तथा मिट्टी के कण युक्त तेल की बूँदें जल द्वारा साफ हो जाती हैं।
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साबुन केवल मृदु जल (Soft Water) में ही कार्य करते हैं। कठोर जल में नहीं, क्योंकि कठोर जल में Ca2+ तथा Mg2+ आयन होते हैं इसलिए सोडियम अथवा पोटैशियम साबुन को कठोर जल में घोलने पर वह अघुलनशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम साबुन में परिवर्तित हो जाता है।
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ये अघुलनशील साबुन, मलफेन (Scum) की भाँति जल से पृथक् हो जाते हैं तथा शोधन अभिकर्मक के रूप में उपयुक्त नहीं रहते। ये अच्छी धुलाई में रुकावट डालते हैं क्योंकि यह अवक्षेप कपड़ों पर चिपक जाता है। कठोर जल से धुले बाल इसी चिपचिपे पदार्थ के कारण ही चमकदार नहीं होते हैं। कठोर जल और साबुन से धुले कपड़ों में इस चिपचिपे पदार्थ के कारण रंजक भी एकसमान रूप से अवशोषित नहीं होता है।

प्रश्न 14.
अपमार्जकों के संश्लेषण की विधियों के समीकरण लिखिए।
उत्तर:
अपमार्जकों का संश्लेषण (Synthesis of Detergents) – अपमार्जकों को निम्नलिखित विधियों द्वारा संश्लेषित किया जाता है-
(i)
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(ii) रीड अभिक्रिया द्वारा (By Reed Reaction)
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साबुन तथा अपमार्जक में अन्तर (Difference between Soaps and Detergents)
(i) उच्चतर (दीर्घ श्रृंखला युक्त) मोनोकार्बोक्सिलिक अम्लों का सोडियम अथवा पोटैशियम लवण साबुन कहलाता है, जबकि उच्चतर ऐल्केन सल्फोनिक अम्ल अथवा ऐल्केन हाइड्रोजनसल्फेट के सोडियम लवणों को अपमार्जक कहते हैं। अर्थात् साबुन तथा अपमार्जक के ध्रुवीय सिरे में रासायनिक भिन्नता होती है।

(ii) साबुन दुर्बल अम्ल (RCOOH) तथा प्रबल क्षार के लवण होते हैं; जबकि अपमार्जक, प्रबल अम्ल (RSO3H अथवा RSO4H ) तथा प्रबल क्षार के लवण होते हैं। इसी कारण कठोर जल में उपस्थित Ca2+ तथा Mg2+ आयन साबुन के साथ क्रिया करके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण बनाते हैं, जो कि सहसंयोजी होने के कारण जल में अविलेय होते हैं। अपमार्जक कठोर जल में भी शोधन करते हैं क्योंकि इनके कैल्सियम तथा मैग्नीशियम आयनिक प्रकृति के होने के कारण जल में विलेय होते हैं।

(iii) साबुन जल अपघटित होकर क्षारीय विलयन देते हैं, जबकि अपमार्जक का जलीय विलयन उदासीन होता है। इसी कारण अपमार्जकों को ऊनी, रेशमी तथा अन्य कोमल वस्त्रों को धोने के काम में लेते हैं, लेकिन साबुन द्वारा इन कोमल वस्त्रों का शोधन नहीं किया जा सकता है।
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बोर्ड परीक्षा के दृष्टिकोण से सम्भावित महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पदार्थ क्या होते हैं? प्रत्येक का एक- एक उदाहरण दीजिए-
(i) धनायनी अपमार्जक
(ii) एन्जाइम
(iii) स्वीटनिंग कर्मक या मिठासकारक (मधुरक)।
उत्तर:
(i) धनायनी अपमार्जक ऐमीनो के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड आयनों के साथ बने चतुष्क अमोनियम लवण होते हैं। उदाहरण- सेटिलट्राइमेथिल अमोनियमब्रोमाइड।

(ii) जैव रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरक का कार्य करने वाले प्रोटीन युक्त पदार्थों को एन्जाइम अथवा जैव उत्प्रेरक कहते हैं। उदाहरण- यूरिऐस।

(iii) वे पदार्थ जो शर्करा के स्थान पर मधुरक के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं, उन्हें कृत्रिम मधुरक कहते हैं। उदाहरण- सैकरीन।

प्रश्न 2.
प्रत्येक स्थिति में एक-एक उदाहरण सहित निम्नलिखित पदों की व्याख्या कीजिए-
(i) खाद्य परिरक्षक
(ii) अपमार्जक
(iii) एन्टासिड (Antacid)।
उत्तर:
(i) खाद्य परिरक्षक- वे पदार्थ जो खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं उन्हें खाद्य परिरक्षक कहते हैं। उदाहरण- सोडियम बेन्जोएट।

(ii) अपमार्जक – वे शोधन अभिकर्मक जिनमें साबुन के सभी गुण पाए जाते हैं लेकिन रासायनिक दृष्टि से ये साबुन नहीं होते हैं उन्हें अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण- सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड।

(iii) एन्टासिड (प्रतिअम्ल) वे औषध होती हैं जो आमाशय में उत्पन्न अधिक अम्ल के प्रभाव को समाप्त करके पीड़ा से बचाती हैं। जैसे- रैनिटिडीन।

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प्रश्न 3.
रोगाणुनाशी और पूतिरोधी पदार्थों के बीच अंतर कीजिए।
उत्तर:
पूतिरोधी तथा विसंक्रामी (संक्रमणहारी) ऐसे रसायन होते हैं जो या तो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं।

पूतिरोधियों (Antiseptic) को सजीव ऊतकों, जैसे-घाव, चोट तथा अल्सर पर लगाया जाता है। फ्यूरासिन तथा सोफ्रामाइसिन इसके मुख्य उदाहरण हैं।

संक्रमणहारी (रोगाणुनाशी) (Disinfectant) भी सूक्ष्मजीवियों को नष्ट करते हैं तथा इनका प्रयोग निर्जीव वस्तुओं जैसे-फ़र्श, नालियाँ तथा यंत्रों को रोगाणुमुक्त करने में प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण-फ़ीनॉल का एक प्रतिशत विलयन।

प्रश्न 4.
(i) ऋणायनिक एवं धनायनिक अपमार्जक किसे कहते हैं? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण भी लिखिए।
(ii) निम्नलिखित के संरचना सूत्र लिखिए-
(A) बाईथायोनल
(B) सैकरीन।
अथवा
(i) साबुन किसे कहते हैं? साबुनीकरण की अभिक्रिया लिखिए। साबुन के दो प्रकारों का वर्णन कीजिए।
(ii) स्वापक व अस्वापक पीड़ाहारी में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर:
(i) संश्लिष्ट अपमार्जक (Synthetic Detergents) – संश्लिष्ट अपमार्जक वे शोधन अभिकर्मक (Cleansing Agents) होते हैं जिनमें साबुन के सभी गुण पाए जाते हैं लेकिन रासायनिक दृष्टि से ये साबुन नहीं होते हैं। अतः इन्हें साबुन रहित साबुन या सिन्डेट्स भी कहा जाता है।

अपमार्जक कठोर जल में भी झाग बनाते हैं अतः इन्हें कठोर तथा मृदु दोनों प्रकार के जल में उपयोग में लिया जा सकता है।

संश्लिष्ट अपमार्जक तीन प्रकार के होते हैं-
(a) धनायनी अपमार्जक
(b) ऋणायनी अपमार्जक
(c) अनआयनिक अपमार्जक।
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(a) धनायनी अपमार्जक (Cationic Detergents)-धनायनी अपमार्जक एमीनों के ऐसीटेट, क्लोराइड या ब्रोमाइड आयनों के साथ बने चतुष्क अमोनियम लवण होते हैं। इनमें धनात्मक भाग में लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला तथा नाइट्रोजन परमाणु पर धन आवेश होता है। अतः इन्हें धनायनी अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण-सेटिलट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड।

धनायनी अपमार्जकों को बालों के कन्डीशनरों में प्रयुक्त किया जाता है तथा इनमें जीवाणुनाशक गुण पाया जाता है। महंगे होने के कारण इनका उपयोग सीमित मात्रा में होता है।

(b) ऋणायनी अपमार्जक (Anionic Detergents)-ऋणायनी अपमार्जक लम्बी श्रंखलायुक्त सल्फोनीकृत ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सोडियम लवण होते हैं। जैसे-सोडियम p-ऐल्किल बेन्जीन सल्फ्रेनेट तथा सोडियम लॉरिल सल्फोनेट या सल्फेट। दीर्घ शृंखला वाले ऐल्कोहॉलों की सांद्र सल्प्यूरिंक अम्ल (H2SO4 के साथ अभिक्रिया कराने पर पहले ऐल्किल हाइड्रोजन सल्फेट बनते हैं जिनकी क्रिया क्षार से कराने पर ऋणायनी अपमार्जक बनते हैं। इसी प्रकार ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट, ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनिक अम्लों की क्षार के साथ क्रिया से प्राप्त होते हैं।
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ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेटों के सोडियम लवण महत्त्वपूर्ण ऋणायनी अपमार्जक होते हैं। ऋणायनी अपमार्जकों में इनका ऋणात्मक भाग शोधन (Cleansing) क्रिया में भाग लेता है। ये सामान्यतः घरेलू उपयोग में आते हैं। ऋणायनी अपमार्जक दंतमंजन में भी प्रयुक्त किए जाते हैं।

(c) अनआयनिक अपमार्जक (Non-Ionic Detergents) अनायनिक अपमार्जकों में कोई आयन नहीं होता है, अतः इसे अनआयनिक अपमार्जक कहते हैं। उदाहरण-(i) स्टिऐरिक अम्ल तथा पॉलीएथिलीन ग्लाइकॉल की अभिक्रिया से बना अपमार्जक।
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(ii) संरचना सूत्र
(A) बाईथायोनल
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(B) सैकरीन
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प्रश्न 5.
(अ) साबुन व संश्लेषित अपमार्जक में दो अन्तर दीजिए।
(ब) निम्नलिखित को कृत्रिम मधुरक, परिरक्षक, साबुन, अपमार्जक में वर्गीकृत कीजिए-
सोडियम पॉमिटेट, सुक्रालोस, सार्बिक अम्ल का लवण, सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड ।
अथवा
(अ) पूतिरोधी व विसंक्रामी में दो अन्तर दीजिए।
(ब) निम्नलिखित को प्रतिहिस्टैमिन, प्रतिअम्ल, प्रशांतक, प्रतिजैविक औषधि में वर्गीकृत कीजिए-
पेनिसिलीन, मेप्रोबमेट, टरफेनाडीन, रैनिटिडीन।
उत्तर:
(अ) (i) साबुन कठोर जल में कार्य नहीं करते जबकि संश्लेषित अपमार्जक कठोर जल में भी कार्य करते हैं।
(ii) साबुन को मृदु कपड़ों (Soft cloths) जैसे ऊन, रेशम आदि को धोने में प्रयुक्त नहीं किया जाता है जबकि अपमार्जकों द्वारा इन्हें धोया जा सकता है।

(ब) कृत्रिम मधुरक- सुक्रालोस
परिरक्षक-सार्विक अम्ल का लवण
साबुन- सोडियम पॉमिटेट
अपमार्जक सेटिल ट्राइमेथिल अमोनियम ब्रोमाइड।
अथवा
(अ) पूतिरोधी तथा विसंक्रामी (संक्रमणहारी) ऐसे रसायन होते हैं जो या तो सूक्ष्मजीवों का विनाश करते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं। पूतिरोधियों (Antiseptic) को सजीव ऊतकों, जैसे- घाव, चोट तथा अल्सर पर लगाया जा सकता है। उदाहरण- फ्यूरासिन तथा सोफ्रामाइसिन।

संक्रमणहारी (Disinfectant) का प्रयोग निर्जीव वस्तुओं, जैसे- फर्श, नालियों तथा यंत्रों पर किया जाता है। उदाहरण- फीनॉल का एक प्रतिशत विलयन सान्द्रता परिवर्तन से वही पदार्थ पूतिरोधी अथवा विसंक्रामी का कार्य कर सकता है।

(ब) प्रतिहिस्टैमिन – टरफेनाडीन
प्रतिअम्ल – रैनिटिडीन
प्रशांतक – मेप्रोबमेट
प्रतिजैविक – पेनिसिलीन

प्रश्न 6.
(अ) मधुमेह के रोगियों को कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
(ब) एक खाद्य परिरक्षक का नाम लिखिए। यह खाद्य परिरक्षण किस प्रकार करता है?
(स) ऋणायनी अपमार्जक का नाम एवं सूत्र लिखिए।
उत्तर:
(अ) प्राकृत मधुरक जैसे सूक्रोस ग्रहण की गई कैलोरीमान बढ़ाते हैं अतः मधुमेह के रोगियों को कृत्रिम मधुरकों की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि कृत्रिम मधुरक अपरिवर्तित रूप में ही मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं तथा ये पूर्णतः अक्रिय होते हैं एवं इनसे कोई हानि नहीं होती। ये कैलोरी में भी वृद्धि नहीं करते हैं।

(ब) सोडियम बेन्जोएट एक खाद्य परिरक्षक है। खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म जीवों की वृद्धि होती है जिसके कारण ये खराब हो जाते हैं। खाद्य परिरक्षक इन सूक्ष्म जीवों की वृद्धि को रोकते हैं जिससे खाद्य पदार्थ खराब नहीं होते हैं।

(स) सोडियम लॉरिल सल्फेट [CH3(CH2)10CH2OSO2Na+] एक ऋणायनी अपमार्जक है।

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प्रश्न 7.
(i) रैनिटिडीन किस वर्ग की औषध है?
(ii) यदि जल में Ca2+ आयन घुले हुए हैं तो कपड़ों को साफ
करने के लिए आप साबुन तथा अपमार्जक में से किसे प्रयुक्त करेंगे?
(iii) निम्नलिखित में से कौनसा पूतिरोधी है ?
0.2% फीनॉल, 1% फीनॉल
उत्तर:
(i) रैनिटिडीन एक प्रतिअम्ल है क्योंकि यह आमाशय की अम्लता को दूर करती है।

(ii) जल में Ca2+ आयन घुले हुए हैं अतः यह कठोर जल है। इसलिए कपड़ों को साफ करने के लिए साबुन की तुलना में अपमार्जकों को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि अपमार्जकों के कैल्सियम लवण जल में विलेय होते हैं जबकि साबुन के कैल्सियम लवण जल में अविलेय होते हैं अतः अधिक साबुन बेकार चला जाता है।

(iii) 0.2% फीनॉल, पूतिरोधी की भांति व्यवहार करता है जबकि 1% फीनॉल रोगाणुनाशी होता है।

प्रश्न 8.
(i) दो वृहत अणुओं के उदाहरण बताइए जिन्हें औषध लक्ष्य की तरह चुना जाता है।
(ii) पूतिरोधी क्या होते हैं ? एक उदाहरण दीजिए।
(iii) ऐस्पार्टेम का प्रयोग ठंडे खाद्य तथा पेय पदार्थों तक ही क्यों सीमित है ?
उत्तर:
(i) न्यूक्लिक अम्ल तथा प्रोटीन ऐसे वृहत अणु हैं जिन्हें औषध लक्ष्य की तरह चुना जाता है।

(ii) पूतिरोधी वे रसायन हैं जो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोक देते हैं लेकिन जिनका ऊतकों पर कोई प्रभाव नहीं होता है। उदाहरण-बोरिक अम्ल का तनु विलयन

(iii) ऐस्पार्टेम खाना बनाने के ताप तक गर्म करने पर यह विघटित हो जाता है अतः इसका प्रयोग ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक ही सीमित है।

प्रश्न 9.
निम्न को समझाइए –
(अ) पूतिरोधी
(ब) कृत्रिम मधुरक
(स) प्रतिअम्ल।
अथवा
निम्न को समझाइए – (अ) विसंक्रामी (ब) खाद्य परिरक्षक (स) प्रशांतक ।
उत्तर:
(अ) पूतिरोधी-वे रसायन होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोक देते हैं। पूतिरोधियों को सजीव ऊतकों जैसे घाव, चोट तथा अल्सर पर लगाया जा सकता है। उदाहरण-सोफ्रामाइसिन, डेटॉल, आयोडोफार्म तथा बोरिक अम्ल इत्यादि।

(ब) कृत्रिम मधुरक-वे पदार्थ जो शर्करा (Sugar) के स्थान पर मधुरक (Sweetening agent) के रूप में प्रयोग में लिए जाते हैं लेकिन उनका कोई पोषण मान (Nutritional value) नहीं होता, उन्हें कृत्रिम मधुरक कहते हैं।
उदाहरण सैकरीन (आर्थों सल्फोबेन्जीनीमाइड), सूकालोस तथा ऐलिटेम।

(स) प्रतिअम्ल-रासायनिक पदार्थ जो आमाशय की अम्लता को कम करने के लिए प्रयुक्त होते हैं उन्हें प्रतिअम्ल कहते हैं।
उदाहरण-धात्विक हाइड्रॉक्साइड जैसे Mg(OH)2। इसके अतिरिक्त सिमेटिडीन तथा रैनिटिडीन प्रभावी प्रतिअम्ल होते हैं।
अथवा
(अ) विसंक्रामी – वे रसायन होते हैं जो सूक्ष्मजीवियों को नष्ट करते हैं परन्तु जैव ऊतकों पर इनका उपयोग सुरक्षित नहीं होता है। अतः इन्हें निर्जीव वस्तुओं जैसे फर्श, नालियाँ तथा यंत्रों इत्यादि को रोगाणुमुक्त करने के काम में लिया जाता है। उदाहरण क्लोरीन, सल्फरडाइऑक्साइड।

(ब) खाद्य परिरक्षक-खाद्य पदार्थों को पड़ा रखने पर उनमें सूक्ष्म जीव उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण ये खराब हो जाते हैं। अतः वे पदार्थ जो खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं उन्हें खाद्य परिरक्षक कहते हैं। उदाहरण साधारण नमक, चीनी, वनस्पति तेल तथा सोडियम बेन्जोएट।

(स) प्रशांतक वे औषध जो बिना नींद के मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती हैं उन्हें प्रशांतक कहते हैं। अतः प्रशांतकों का उपयोग तनाव तथा मानसिक बीमारियों में किया जाता है। उदाहरण-इप्रोनाइजिड तथा फिनल्जिन (नारडिल)।

प्रश्न 10.
(अ) अस्वापक पीड़ाहारी किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।
(ब) ठण्डे पेय एवं खाद्य पदार्थों में ही कृत्रिम मधुरक एस्पार्टेम का उपयोग क्यों किया जाता है?
(स) पूतिरोधी व रोगाणुनाशी में कोई एक अंतर लिखिए।
अथवा
(अ) ऋणायनी अपमार्जक किसे कहते हैं ? एक उदाहरण लिखिए।
(ब) खाद्य पदार्थों में रसायन क्यों मिलाये जाते हैं ? कोई दो कारण लिखिए।
(स) विस्तृत स्पेक्ट्रम व संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु में कोई एक अंतर लिखिए।
उत्तर:
(अ) वे पीड़ाहारी जो दर्द को कम करते हैं लेकिन इनकी आदत नहीं पड़ती अर्थात् व्यक्ति इनका आदी नहीं होता उन्हें अस्वापक पीड़ाहारी कहते हैं। उदाहरण – ऐस्पिरिन।

(ब) (i) न्यूक्लिक अम्ल तथा प्रोटीन ऐसे वृहत अणु हैं जिन्हें औषध लक्ष्य की तरह चुना जाता है।

(ii) पूतिरोधी वे रसायन हैं जो सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोक देते हैं लेकिन जिनका ऊतकों पर कोई प्रभाव नहीं होता है।
उदाहरण-बोरिक अम्ल का तनु विलयन

(iii) ऐस्पार्टेम खाना बनाने के ताप तक गर्म करने पर यह विघटित हो जाता है अतः इसका प्रयोग ठंडे खाद्य एवं पेय पदार्थों तक ही सीमित है।

(स) पूतिरोधी व रोगाणुनाशी दोनों ही सूक्ष्मजीवियों को मार देते हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोकते हैं लेकिन पूतिरोधी को सजीव ऊतकों, जैसे-घाव, चोट तथा अल्सर पर लगाया जाता है जबकि रोगाणुनाशी का प्रयोग निर्जीव वस्तुओं, जैसे- फर्श तथा नालियों को रोगाणुमुक्त करने में किया जाता है परन्तु जैव ऊतकों पर इनका उपयोग सुरक्षित नहीं होता है।

अथवा

(अ) वे अपमार्जक जिनमें यौगिक का ऋणायनिक भाग अपमार्जन का कार्य करता है उन्हें ऋणायनी अपमार्जक कहते हैं। ऋणायनी अपमार्जक लम्बी श्रृंखलायुक्त सल्फोनीकृत ऐल्कोहॉलों अथवा हाइड्रोकार्बनों के सोडियमलवण होते हैं। जैसे- सोडियम p- ऐल्किल बेन्जीन सल्फोनेट तथा सोडियम लॉरिल सल्फेट।

(ब) खाद्य पदार्थों में रसायन मिलाने के निम्न कारण हैं-

  • खाद्य पदार्थों का परिरक्षण तथा
  • खाद्य पदार्थों की पौष्टिक गुणवत्ता बढ़ाना।

(स) संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु मुख्यतः ग्रैम ग्राही या ग्रैम अग्राही जीवाणुओं पर ही अपना प्रभाव डालते हैं, जबकि विस्तृत स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु ग्रैम ग्राही तथा ग्रैम अग्राही दोनों प्रकार के जीवाणुओं के विस्तृत परास को नष्ट करते हैं या उनका निरोध करते हैं। पेनिसिलिन जी संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु है जबकि ऐम्पिसिलिन एक विस्तृत स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु है।

प्रश्न 11.
जवान बच्चों में मधुमेह और अवसाद (उदासी) की बढ़ती संख्या को देखकर, एक प्रसिद्ध स्कूल के प्रिंसिपल श्री लुगानी ने एक सेमिनार का आयोजन किया जिसमें अन्य प्रिंसिपलों और बच्चों के माता-पिताओं को आमंत्रित किया। यह निर्णय लिया गया कि स्कूलों में सड़े खाने (Junk Food) की वस्तुएँ बन्द की जाएँ और स्वास्थ्यवर्धक वस्तुएँ, जैसे सूप, लस्सी, दूध आदि उपलब्ध कराई जाएँ।

उन्होंने यह भी निर्णय लिया कि स्कूलों में रोज प्रात:काल की ऐसेम्बली के साथ बच्चों को आधा घण्टे का शारीरिक व्यायाम अनिवार्य रूप से कराया जाए। छः माह पश्चात्, श्री लुगानी ने अधिकतर स्कूलों में फिर स्वास्थ्य परीक्षण कराया और बच्चों के स्वास्थ्य में अनुपम सुधार पाया गया।

उपर्युक्त विवरण को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(i) श्री लुगानी द्वारा किन मूल्यों (कम-से-कम दो) को प्रदर्शित किया गया?
(ii) एक विद्यार्थी के रूप में, आप इस विषय में कैसे जागरूकता फैलाएँगे?
(iii) प्रति-अवसादक (ऐन्टिडीप्रीसेन्ट) ड्रग्स क्या हैं? एक उदाहरण दीजिए।
(iv) एक मधुमेह के रोगी के लिए मिठाई बनाने के लिए जो मीठाकारी अभिकर्मक (मधुकर) प्रयुक्त होता है, उसका नाम दीजिए।
उत्तर:
(i) श्री लुगानी द्वारा अपने कर्त्तव्य तथा बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को प्रदर्शित किया गया।

(ii) एक विद्यार्थी के रूप में, मैं समाज तथा अपने निवास स्थान के आसपास भी सड़ा खाना नहीं खाना तथा शारीरिक व्यायाम के बारे में जागरूकता फैलाऊँगा, इसके लिए सभाओं का आयोजन करूँगा।

(iii) जब नॉरएड्रीनेलिन की मात्रा कम हो जाती है तो व्यक्ति अवसादग्रस्त हो जाता है तो इसके लिए प्रयुक्त ड्रग को प्रति अवसादक कहते हैं। ये ड्रग नॉरएड्रीनेलिन का निम्नीकरण करने वाले एन्जाइम को संदमित करती है। उदाहरण-फिनल्जिन।

(iv) सैकरीन एक मीठाकारी अभिकर्मक (मधुकर) है।

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