Class 11

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

HBSE 11th Class Geography महासागरीय जल संचलन Textbook Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. महासागरीय जल की ऊपर एवं नीचे की गति किससे संबंधित है?
(A) ज्वार
(B) तरंग
(C) धाराएँ
(D) ऊपर में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) ज्वार

2. वृहत ज्वार आने का क्या कारण है?
(A) सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल
(B) सूर्य और चंद्रमा द्वारा एक दूसरे की विपरीत दिशा से पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल
(C) तटरेखा का दंतुरित होना
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सूर्य और चंद्रमा का पृथ्वी पर एक ही दिशा में गुरुत्वाकर्षण बल

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

3. पृथ्वी तथा चंद्रमा की न्यूनतम दूरी कब होती है?
(A) अपसौर
(B) उपसौर
(C) उपभू
(D) अपभू
उत्तर:
(C) उपभू

4. पृथ्वी उपसौर की स्थिति कब होती है?
(A) अक्तूबर
(B) जुलाई
(C) सितंबर
(D) जनवरी
उत्तर:
(D) जनवरी

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
तरंगें क्या हैं?
उत्तर:
तरंगे महासागरीय जल की दोलायमान गति है जिसमें जल स्थिर रहता है और अपने स्थान पर ही ऊपर-नीचे और आगे-पीछे होता रहता है। तरंग एक ऊर्जा है। वायु जल को ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे तरंगें उत्पन्न होती है।

प्रश्न 2.
महासागरीय तरंगें ऊर्जा कहाँ से प्राप्त करती हैं?
उत्तर:
वायु जल को ऊर्जा प्रदान करती है, जिससे तरंगें उत्पन्न होती हैं। वायु के कारण तरंगें महासागर में गति करती हैं, तथा ऊर्जा तटरेखा पर निर्मुक्त होती है। तरंगें वायु से ऊर्जा को अवशोषित करती हैं। अधिकतर तरंगें वायु के जल के विपरीत दिशा में गतिमान होने से उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 3.
ज्वार-भाटा क्या है?
उत्तर:
समुद्रों का जल-स्तर कभी भी स्थित नहीं रह पाता अपितु नियमित रूप से दिन (24 घण्टे की अवधि का सौर्यिक दिवस) में दो बार एकान्तर क्रम से ऊपर चढ़ता और नीचे उतरता रहता है। तटीय किनारों पर समुद्री जल के ऊपर चढ़ने को ज्वार तथा नीचे उतरने को भाटा कहते हैं।

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 14 महासागरीय जल संचलन

प्रश्न 4.
ज्वार-भाटा उत्पन्न होने के क्या कारण हैं?
उत्तर:

  1. चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण के कारण ज्वार-भाटाओं की उत्पत्ति होती है।
  2. दूसरा कारक-अपकेंद्रीय बल है, जोकि गुरुत्वाकर्षण को संतुलित करता है।
  3. गुरुत्वाकर्षण बल तथा अपकेंद्रीय बल दोनों मिलकर पृथ्वी पर महत्त्वपूर्ण ज्वार-भाटाओं को उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 5.
ज्वार-भाटा नौसंचालन से कैसे संबंधित है?
उत्तर:
पृथ्वी, चंद्रमा व सूर्य की स्थिति ज्वार की उत्पत्ति का कारण है और इनकी स्थिति के सही ज्ञान से ज्वारों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। यह नौसंचालकों व मछुआरों को उनके कार्य-संबंधी योजनाओं में मदद करता है। नौसंचालन में ज्वारीय प्रवाह का अत्यधिक महत्व है। ज्वार के समय तट के निकट जल की गहराई अधिक हो जाती है जिससे बड़े-बड़े जहाज भी बन्दरगाहों के निकट पहुँच सकते हैं तथा भाटे के समय चले जाते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जल धाराएँ तापमान को कैसे प्रभावित करती हैं? उत्तर पश्चिम यूरोप के तटीय क्षेत्रों के तापमान को ये किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर:
जल धाराएँ किसी प्रदेश के तापमान और जलवायु को प्रभावित करती हैं। गर्म महासागरीय धाराएँ ठण्डे क्षेत्रों में तापमान को बढ़ा देती हैं जबकि ठण्डी धाराएँ गर्म महासागरीय क्षेत्रों में तापमान को घटा देती हैं। गल्फ स्ट्रीम एक गर्म महासागरीय धारा है जो उत्तर:पश्चिम यूरोप के तट के पास से बहती है तथा इस क्षेत्र के तापमान को बढ़ा देती है। जल वाले क्षेत्रों से कम तापमान वाले क्षेत्रों की ओर तथा इसके विपरीत कम तापमान वाले क्षेत्रों से अधिक तापमान वाले क्षेत्रों की ओर बहती हैं। जब ये धाराएँ एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर बहती हैं, तो यह उन क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती हैं। किसी भी जलराशि के तापमान का प्रभाव उसके ऊपर की वायु पर पड़ता है। इसी कारण विषुवतीय क्षेत्रों से उच्च अक्षांशों वाले ठंडे क्षेत्रों की ओर बहने वाली जलधाराएँ उन क्षेत्रों की वायु के तापमान को बढ़ा देती हैं।

तापमान को प्रभावित करना-

  • गर्म उत्तरी अटलांटिक अपवाह जो उत्तर की ओर यूरोप के पश्चिम तट की ओर बहती है।
  • यह ब्रिटेन और नार्वे के तट पर शीत ऋतु में भी बर्फ नहीं जमने देती।
  • जलधाराओं का जलवायु पर प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है, जब आप समान अक्षांशों पर स्थित ब्रिटिश द्वीप समूह की शीत ऋतु की तुलना कनाड़ा के उत्तरी-पूर्वी तट की शीत ऋतु से करते हैं।
  • कनाडा का उत्तरी-पूर्वी तट लेब्राडोर की ठंडी धारा के प्रभाव में आ जाता है। इसलिए यह शीत ऋतु में बर्फ से ढका रहता है।

प्रश्न 2.
जल धाराएँ कैसे उत्पन्न होती हैं?
उत्तर:
जल धाराओं को उत्पन्न करने के निम्नलिखित कारक हैं-
1. ऋतु परिवर्तन-उत्तरी हिंद महासागर में समुद्री धाराओं की दिशा ऋतु परिवर्तन के साथ बदल जाती है। हिंद महासागर में भूमध्य-रेखीय विपरीत धारा केवल शीत ऋतु में ही होती है और भूमध्यरेखीय धारा केवल ग्रीष्म ऋतु में बहती है।

2. भूघूर्णन-पृथ्वी का अपने कक्ष में घूर्णन के कारण कोरिऑलिस बल उत्पन्न होता है। इसी बल के कारण बहता हुआ जल मुड़कर दीर्घ वृत्ताकार मार्ग का अनुसरण करता है, जिसे गायर्स कहते है। “फेरेल” के नियम के अनुसार, उत्तरी गोलार्द्ध में धाराएँ अपनी दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मुड़ जाती हैं। इससे नई धाराएँ बनती हैं।

3. लवणता में अंतर-अधिक लवणता वाला जल भारी होता है, जो नीचे बैठ जाता है। उसके स्थान पर कम लवणता व घनत्व वाला जल आ जाता है जो धारा के रूप में बह जाता है।

4. वाष्पीकरण-जिन स्थानों पर वाष्पीकरण अधिक होता है, वहाँ पर जल का तल नीचे हो जाता है फिर वहाँ अन्य क्षेत्रों का जल जमा हो जाता है। इसी प्रकार एक धारा उत्पन्न होती है।

5. तटरेखा की आकृति-उत्तरी हिंद महासागर में पैदा होने वाली धाराएँ भारतीय प्रायद्वीप की तट रेखा का अनुसरण करती हैं।

महासागरीय जल संचलन HBSE 11th Class Geography Notes

→ तरंग शृंग (Crest of the Wave)-तरंग का ऊपर उठा हुआ भाग तरंग शृंग कहलाता है।

→ स्वेल (Swell) महासागर पर तूफान केन्द्र के बाहर की तरफ दूरी पर एक-समान ऊँचाई और आवर्तकाल के साथ समुद्री तरंगें नियमित रूप से चल रही होती हैं, जिन्हें स्वेल कहा जाता है।

→ महासागरीय धारा (Ocean Currents) महासागरों के एक भाग से दूसरे भाग की ओर निश्चित दिशा में बहुत दूरी तक जल के निरन्तर प्रवाह को महासागरीय धारा कहते हैं।

→ प्रलयकारी तरंगें (Catastrophic Waves)-इन तरंगों की उत्पत्ति ज्वालामुखी, भूकम्प या महासागरों में हुए भूस्खलन के कारण होती है। इन्हें सुनामी भी कहते हैं।

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HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भाग-I : सही विकल्प का चयन करें

1. पृथ्वी के कितने % भाग पर जल है?
(A) 70.8%
(B) 30%
(C) 29.2%
(D) 28%
उत्तर:
(A) 70.8%

2. पृथ्वी के कुल जल का कितने % भाग महासागरों में विद्यमान है?
(A) 70%
(B) 81%
(C) 97%
(D) 99%
उत्तर:
(C) 97%

3. दक्षिणी गोलार्द्ध के कितने % भाग पर जल है?
(A) 70%
(B) 81%
(C) 99%
(D) 97%
उत्तर:
(B) 81%

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

4. महासागरों की औसत गहराई कितनी है?
(A) 2225 मीटर
(B) 3322.5 मीटर
(C) 3525.5 मीटर
(D) 3732.5 मीटर
उत्तर:
(B) 3322.5 मीटर

5. सबसे बड़ा महासागर कौन-सा है?
(A) अंध महासागर
(B) प्रशांत महासागर
(C) हिंद महासागर
(D) आकटिक महासागर
उत्तर:
(B) प्रशांत महासागर

6. प्रशांत महासागर धरातल के कितने भाग पर विस्तृत है?
(A) 1/3
(B) 1/5
(C) 1/7
(D) 1/8
उत्तर:
(A) 1/3

7. किस महासागर में सर्वाधिक गर्त पाए जाते हैं?
(A) अंध महासागर में
(B) प्रशांत महासागर में
(C) हिंद महासागर में
(D) आर्कटिक महासागर में
उत्तर:
(B) प्रशांत महासागर में

8. महाद्वीपीय मग्नतट पर विश्व के कितने % खनिज तेल व प्राकृतिक गैस के भंडार पाए जाते हैं?
(A) 15%
(B) 20%
(C) 25%
(D) 30%
उत्तर:
(C) 25%

9. समुद्री तट के समीप वाला एक समुद्री भाग जो लगभग 200 मीटर तक गहरा होता है, कहलाता है
(A) महाद्वीपीय मग्नतट
(B) महाद्वीपीय ढाल
(C) गंभीर सागरीय मैदान
(D) महासागरीय गर्त
उत्तर:
(A) महाद्वीपीय मग्नतट

10. जलमग्न गों का जन्म किस कारण होता है?
(A) वलन अथवा भ्रंशन
(B) उत्थापन
(C) अवतलन
(D) निमज्जन
उत्तर:
(A) वलन अथवा भ्रंशन

11. विश्व के प्रसिद्ध सदस्य क्षेत्र ग्रांड बैंक तथा डॉगर बैंक कहाँ पर स्थित है?
(A) नितल मैदान
(B) महान् झीलों के किनारे
(C) महाद्वीपीय ढाल
(D) महाद्वीपीय मग्नतट
उत्तर:
(D) महाद्वीपीय मग्नतट

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

12. विश्व की सबसे गहरी खाई कौन-सी है?
(A) प्यूरिटो रिको
(B) सुंडा गर्त
(C) मेरियाना खाई
(D) मिंडनाओ खाई
उत्तर:
(C) मेरियाना खाई

13. मेरियाना खाई किस महासागर में है?
(A) अटलांटिक महासागर में
(B) हिंद महासागर में
(C) प्रशांत महासागर में
(D) आर्कटिक महासागर में
उत्तर:
(C) प्रशांत महासागर में

14. गाईऑट किसे कहते हैं?
(A) सपाट शीर्ष वाले अंतः समुद्री कटक
(B) सपाट शीर्ष वाले समुद्री पर्वत
(C) समुद्री तली पर स्थित प्रतिरोधी चट्टानों के टीले
(D) समुद्री तली पर अवसादों के निक्षेप
उत्तर:
(B) सपाट शीर्ष वाले समुद्री पर्वत

15. महासागरीय जल के लिए ऊष्मा का स्रोत क्या है?
(A) सूर्य
(B) गर्म समुद्री धाराएँ
(C) ज्वालामुखी
(D) ज्वारीय ऊर्जा
उत्तर:
(A) सूर्य

16. निम्नलिखित में से कौन-सा महासागर उत्तरी अमेरिका को स्पर्श नहीं करता?
(A) अटलांटिक महासागर
(B) प्रशांत महासागर
(C) हिंद महासागर
(D) आर्कटिक महासागर
उत्तर:
(C) हिंद महासागर

17. निम्नलिखित में से सबसे कम गहरा सागर कौन-सा है?
(A) उत्तरी सागर
(B) बाल्टिक सागर
(C) हडसन की खाड़ी
(D) पीत सागर
उत्तर:
(D) पीत सागर

18. गंभीर सागरीय मैदानों की गहराई कितनी होती है?
(A) 3000-6000 मीटर
(B) 6000-8000 मीटर
(C) 2000-4000 मीटर
(D) 8000-10,000 मीटर
उत्तर:
(A) 3000-6000 मीटर

19. सामान्यतः महासागरीय जल का तापमान कितना रहता है?
(A) -2°C से 25°C
(B) -5°C से 33°C
(C) -10°C से 35°C
(D) 5°C से 30°C
उत्तर:
(B) -5°C से 33°C

20. डॉल्फिन उभार क्या है?
(A) एक समुद्रतटीय पठार जो डॉल्फिन के प्रजनन के लिए संरक्षित स्थली मानी जाती है
(B) आल्प्स पर्वत के उत्तरी भाग में भ्रंशोत्थ पर्वत
(C) वह पठार जिसे कोलोरेडो नदी ने काटकर विश्वविख्यात कैनयन बनाया है
(D) उत्तरी अंध महासागर में मध्य अटलांटिक कटक का नाम
उत्तर:
(D) उत्तरी अंध महासागर में मध्य अटलांटिक कटक का नाम

21. महाद्वीपीय मग्नतट, महासागर के कितने % भाग पर फैला है?
(A) 2.5%
(B) 3.5%
(C) 5.4%
(D) 7.5%
उत्तर:
(D) 7.5%

22. सबसे अधिक तापमान वाले सागर का क्या नाम है?
(A) लाल सागर
(B) पीत सागर
(C) बाल्टिक सागर
(D) उत्तरी सागर
उत्तर:
(A) लाल सागर

23. किस समुद्र में सर्वाधिक लवणता पाई जाती है?
(A) लाल सागर
(B) मृत सागर
(C) उत्तरी सागर
(D) बाल्टिक सागर
उत्तर:
(B) मृत सागर

24. महाद्वीपीय ढाल, महासागरों के कुल क्षेत्रफल के कितने % भाग पर विस्तृत है?
(A) 4.5%
(B) 5.2%
(C) 6.5%
(D) 7.5%
उत्तर:
(C) 6.5%

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

25. किस महासागर का आकार अंग्रेजी के ‘S’ अक्षर जैसा है?
(A) अंध महासागर
(B) प्रशांत महासागर
(C) हिंद महासागर
(D) आर्कटिक महासागर
उत्तर:
(A) अंध महासागर

26. किस समुद्र में सबसे कम लवणता पाई जाती है?
(A) आर्कटिक सागर
(B) काला सागर
(C) लाल सागर
(D) बाल्टिक सागर
उत्तर:
(A) आर्कटिक सागर

भाग-II : एक शब्द या वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
पृथ्वी के कुल जल का कितने प्रतिशत भाग महासागरों में विद्यमान है?
उत्तर:
97 प्रतिशत भाग।।

प्रश्न 2.
दक्षिणी गोलार्द्ध के कितने प्रतिशत भाग पर जल का आवरण है?
उत्तर:
81 प्रतिशत भाग पर।

प्रश्न 3.
सबसे बड़ा महासागर कौन-सा है?
उत्तर:
प्रशान्त महासागर।

प्रश्न 4.
महासागरों की औसत गहराई कितनी है?
उत्तर:
3322.5 मीटर।

प्रश्न 5.
प्रशान्त महासागर धरातल के कितने भाग पर विस्तृत है?
उत्तर:
1/3 भाग पर।

प्रश्न 6.
महाद्वीपीय मग्नतट, महासागर के कितने प्रतिशत भाग पर फैला है?
उत्तर:
7.5 प्रतिशत भाग पर।

प्रश्न 7.
महाद्वीपीय मग्नतट पर विश्व के कितने प्रतिशत खनिज तेल व प्राकृतिक गैस के भण्डार पाए जाते हैं?
उत्तर:
25 प्रतिशत।

प्रश्न 8.
हिन्द महासागर की सबसे गहरी खाई का नाम लिखिए।
उत्तर:
सुंडा खाई।

प्रश्न 9.
गाईऑट का शीर्ष कैसा होता है?
उत्तर:
सपाट।

प्रश्न 10.
महासागरीय नितल की गहराइयों को किस वैज्ञानिक विधि द्वारा मापा जाता है?
उत्तर:
ध्वनि तरंगों द्वारा।

प्रश्न 11.
महाद्वीपीय मग्नतट की औसत चौड़ाई कितनी होती है?
उत्तर:
80 कि०मी०।

प्रश्न 12.
किस महासागर के मध्य में ‘S’ आकार की समुद्री कटक पाई जाती है?
उत्तर:
अटलांटिक महासागर में।

प्रश्न 13.
किस महासागर में सर्वाधिक गर्त पाए जाते हैं?
उत्तर:
प्रशान्त महासागर में।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

प्रश्न 14.
सबसे बड़ा महासागर कौन-सा है?
उत्तर:
प्रशान्त महासागर।

प्रश्न 15.
किस महासागर का आकार अंग्रेजी के ‘S’ अक्षर जैसा है?
उत्तर:
अन्ध महासागर।

प्रश्न 16.
सबसे अधिक तापमान वाले सागर का क्या नाम है?
उत्तर:
लाल सागर।

प्रश्न 17.
महासागरों की औसत लवणता कितनी है?
उत्तर:
35 प्रति हज़ार अंश।

प्रश्न 18.
किस समुद्र में सर्वाधिक लवणता पाई जाती है?
उत्तर:
मृत सागर।

प्रश्न 19.
महासागरीय जल में दैनिक तापान्तर (Daily Range of Temperature) कितना होता है?
उत्तर:
नगण्य (Negligible)।

प्रश्न 20.
पृथ्वी के कितने प्रतिशत भाग पर जल है?
उत्तर:
लगभग 71 प्रतिशत भाग पर।

प्रश्न 21.
महासागरों की सबसे गहरी खाई का नाम क्या है?
उत्तर:
मेरियाना खाई (11,033 मीटर)।

प्रश्न 22.
अत्यधिक उच्चावच वाले जलमग्न कटकों की लम्बाई कितनी है?
उत्तर:
75,000 कि०मी० से अधिक।

प्रश्न 23.
महाद्वीपीय ढाल की प्रवणता बताइए।
उत्तर:
2° से 5° तक।

प्रश्न 24.
प्रशान्त महासागर में कितने द्वीप हैं?
उत्तर:
20,000 से भी अधिक।

प्रश्न 25.
समुद्र के एक घन किलोमीटर जल में लवणों की कितनी मात्रा होती है?
उत्तर:
1 करोड़ 10 लाख टन लवण।

प्रश्न 26.
महाद्वीपीय ढाल की गहराई कितनी होती है?
उत्तर:
इसकी गहराई 200 से 3,000 मीटर तक होती है।

प्रश्न 27.
गम्भीर सागरीय मैदानों की गहराई कितनी होती है?
उत्तर:
3000 से 6000 मीटर तक।

प्रश्न 28.
गम्भीर सागरीय मैदानों का विस्तार कितना है?
उत्तर:
कुल महासागरीय तल के 77 प्रतिशत भाग पर।

प्रश्न 29.
प्रशान्त महासागर का क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर:
16.52 करोड़ वर्ग कि०मी० (पृथ्वी के क्षेत्रफल का 1/3 भाग)।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

प्रश्न 30.
मध्य अटलांटिक कटक (Mid Atlantic Ridge) के दो भागों के नाम लिखें।
उत्तर:
उत्तर में डाल्फिन उभार तथा दक्षिण में चैलेंजर उभार।

प्रश्न 31.
उभरा हुआ विशाल समुद्री स्थल हवाई उभार (Hawaiin Swell) कहाँ पर है?
उत्तर:
यह प्रशान्त महासागर में स्थित है।

प्रश्न 32.
अन्ध महासागर में पाए जाने वाले दो ज्वालामुखी द्वीपों (Volcanic Islands) के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. कैनरी द्वीप और
  2. केपवर्डे द्वीप।

प्रश्न 33.
हिन्द महासागर में पाए जाने वाले एक सक्रिय ज्वालामुखी का नाम बताइए।
उत्तर:
बंगाल की खाड़ी में निकोबार द्वीप के पास बैरन द्वीप।

प्रश्न 34.
अरब सागर में पाए जाने वाले ‘मूंगे के द्वीप’ कौन-से हैं?
उत्तर:
लक्षद्वीप व मालद्वीप।

प्रश्न 35.
महाद्वीपीय ढाल महासागरों के कुल क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत भाग पर विस्तृत है?
उत्तर:
6.5 प्रतिशत भाग पर।

प्रश्न 36.
महासागरीय जल का सामान्य तापमान कितना रहता है?
उत्तर:
लगभग -5° सेल्सियस से 33° सेल्सियस तक।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जलीय चक्र की तीन प्रक्रियाएँ कौन सी हैं?
उत्तर:

  1. वाष्पीकरण
  2. संघनन तथा
  3. वर्षण।

प्रश्न 2.
रचना के आधार पर महाद्वीपीय मग्नतट कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:

  1. नदियों से निर्मित
  2. हिमानीकृत
  3. प्रवालभित्ति निर्मित।

प्रश्न 3.
महाद्वीपीय मग्नतट के दो आर्थिक महत्त्व बताइए।
उत्तर:

  1. मत्स्य क्षेत्रों का स्थित होना
  2. खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा बालू, बजरी का मिलना।

प्रश्न 4.
समुद्री पर्वत (Sea Mount) किसे कहते हैं?
उत्तर:
जल में डूबे ऐसे पर्वत जिनकी चोटी नितल से 1,000 मीटर से अधिक ऊँची हो।

प्रश्न 5.
गतॊ या जलमग्न खाइयों की रचना क्यों होती है?
उत्तर:
वलन अथवा भ्रंशन के कारण जलमान खाइयों की रचना होती है।

प्रश्न 6.
महासागरीय गों के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. मेरियाना गर्त
  2. पियोर्टो टिको गर्त
  3. फिलीपिन्स गर्त
  4. प्लैनेट गर्त

प्रश्न 7.
महासागरों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. प्रशान्त महासागर
  2. अन्ध महासागर
  3. हिन्द महासागर
  4. आर्कटिक महासागर।

(कई विद्वान् अण्टार्कटिक महासागर अथवा दक्षिणी महासागर को पाँचवाँ महासागर मानते हैं।)

प्रश्न 8.
समुद्री केनियन के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. ओश्नोग्राफ़र केनियन
  2. बेरिंग केनियन
  3. प्रिबिलोफ़ केनियन
  4. हडसन केनियन।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

प्रश्न 9.
वर्तमान में मनुष्य द्वारा भक्षण किए जाने वाले प्रमुख समुद्री खाद्य पदार्थों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. मछली
  2. मोलस्क
  3. क्रस्टेशियन।

प्रश्न 10.
महासागरीय जल के गर्म होने की दो प्रक्रियाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:

  1. सौर विकिरण का अवशोषण
  2. पृथ्वी के आन्तरिक भाग की ऊष्मा।

प्रश्न 11.
महासागरीय जल के ठण्डा होने की तीन प्रक्रियाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:

  1. विकिरण
  2. संवहन तथा
  3. वाष्पीकरण।

प्रश्न 12.
महासागरीय जल का तापमान किन तत्त्वों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
अक्षांश, प्रचलित पवनें, महासागरीय धाराएँ, समीपवर्ती स्थलखण्ड, लवणता और प्लावी हिमशैल।

प्रश्न 13.
भूमध्य रेखा (0°), 40° तथा 60° अक्षांश पर महासागरीय जल का तापमान कितना होता है?
उत्तर:

  1. भूमध्य रेखा पर 26°C
  2. 40° अक्षांश पर 14°C, 60° अक्षांश पर 1°C

प्रश्न 14.
महासागरों में लवणता के स्रोत बताइए।
उत्तर:

  1. महासागरों के निर्माण के समय अधिकांश लवण उसके जल में घुल गए थे।
  2. नदियाँ
  3. लहरें
  4. ज्वालामुखी उभेदन
  5. रासायनिक क्रियाएँ।

प्रश्न 15.
समुद्री जल में पाए जाने वाले सात प्रमुख लवणों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. सोडियम क्लोराइड
  2. मैग्नीशियम क्लोराइड
  3. मैग्नीशियम सल्फेट
  4. कैल्शियम सल्फेट
  5. पोटाशियम सल्फेट
  6. कैल्शियम कार्बोनेट
  7. मैग्नीशियम क्रोमाइड।

प्रश्न 16.
महासागरों में मिलने वाले दो प्रमुख लवणों के नाम तथा उनकी मात्रा लिखिए।
उत्तर:

  1. सोडियम क्लोराइड = 77.8 प्रतिशत
  2. मैग्नीशियम क्लोराइड = 10.9 प्रतिशत।

प्रश्न 17.
महासागरीय लवणता को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. स्वच्छ व मीठे जल की आपूर्ति
  2. वाष्पीकरण की दर व मात्रा
  3. समुद्री धाराएँ आदि।

प्रश्न 18.
सागरीय जल का उच्चतम वार्षिक तापमान तथा न्यूनतम वार्षिक तापमान किस-किस महीने में अंकित किया जाता है?
उत्तर:
क्रमशः अगस्त व फरवरी के महीनों में।

प्रश्न 19.
वार्षिक तापान्तर की सबसे अधिक मात्रा किस महासागर में और कहाँ पाई जाती है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. उत्तरी-पश्चिमी अन्ध महासागर में न्यूफाउण्डलैण्ड के निकट (20°C)
  2. उत्तरी-पश्चिमी प्रशान्त महासागर में व्लाडिवॉस्टक के निकट (25°C)।

प्रश्न 20.
महासागरों का जल खारा क्यों होता है?
उत्तर:
क्योंकि महासागरों और समुद्रों के जल में अनेक प्रकार के लवण घुले हुए होते हैं।

प्रश्न 21.
महाद्वीपीय मग्नतट क्या होता है?
उत्तर:
किसी महाद्वीप के मन्द ढाल वाले किनारे जो समुद्र के नीचे डूबे रहते हैं और जिनका विस्तार महाद्वीपीय ढाल तक होता है, महाद्वीपीय मग्नतट कहलाते हैं।

प्रश्न 22.
पृथ्वी को जलीय ग्रह क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
पृथ्वी का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से घिरा होने के कारण यह जलीय ग्रह कहलाता है। पृथ्वी पर पर्याप्त जल का होना ही इसे सौरमण्डल के ग्रहों में विशिष्टता प्रदान करता है।

प्रश्न 23.
खुले महासागर की औसत लवणता कितनी होती है?
उत्तर:
खुले महासागर की औसत लवणता 35 प्रति हजार होती है।

प्रश्न 24.
विवर्तनिक संचरण (Tectonic Movements) क्या होता है?
उत्तर:
पृथ्वी के आन्तरिक भाग से उठने वाले अन्तर्जात बल दो तरह के संचलन उत्पन्न करते हैं-(1) क्षैतिज संचलन, (2) लम्बवत् संचलन। ये दोनों गतियाँ भूतल पर अनेक विषमताएँ उत्पन्न करती हैं। ऐसे संचलनों को विवर्तनिक संचरण कहते हैं।

प्रश्न 25.
महासागरीय नितल की गहराई कैसे मापते हैं?
उत्तर:
महासागरीय नितल की गहराई गम्भीरता मापी यन्त्र (Sonic Depth Recorder) द्वारा मापी जाती है। इस यन्त्र से ध्वनि तरंगें महासागरीय नितल में भेजी जाती हैं। इन तरंगों की गति तथा समय से इसकी गहराई मापी जा सकती है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

प्रश्न 26.
विश्व का सबसे गहरा स्थान कौन-सा है?
उत्तर:
विश्व में सबसे गहरा स्थान प्रशान्त महासागर में गुआम द्वीपमाला के निकट मेरिआना गर्त है। जिसकी गहराई 11,033 मीटर है। यदि माउण्ट एवरेस्ट को इस गर्त में डुबो दिया जाए तो इसकी चोटी समुद्र जल की सतह से 2 कि०मी० नीचे रहेगी।

प्रश्न 27.
महाद्वीपीय ढाल क्या होती है?
उत्तर:
महाद्वीपीय मग्नतट के किनारे और महाद्वीपीय उत्थान के बीच स्थित खड़े अथवा अधिक तीव्र ढाल को महाद्वीपीय ढाल कहा जाता है। इसका ढाल 2° से 5 तक होता है तथा इसकी गहराई 200 मीटर से 3000 मीटर तक होती है।

प्रश्न 28.
जलमग्न कटकों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर:
सारी दुनिया में पाई जाने वाली जलमग्न कटकें पृथ्वी पर विवर्तनिक हलचलों की गवाह हैं। इनकी रचना ज्वालामुखी क्रिया तथा भू-पटल में विरूपण से होती है।

प्रश्न 29.
महासागरों के जल का दैनिक तापान्तर नगण्य क्यों होता है?
उत्तर:
जल स्थलखण्ड की अपेक्षा धीरे-धीरे गर्म और धीरे-धीरे ठण्डा होता है। इसलिए एक दिन अथवा 24 घण्टों में दिन की गर्मी और रात की ठण्डक का समुद्री जल के तापमान पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।।

प्रश्न 30.
महासागरों के जल में तापमान के लम्बवत् वितरण को नियन्त्रित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
महासागरों के जल में तापमान के लम्बवत् वितरण को मुख्य रूप से सूर्यातप की मात्रा, जल का घनत्व, वर्षा की अधिकता, हिमखण्ड, भूमध्य रेखा से दूरी और जलमग्न अवरोध नियन्त्रित करते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
स्थल गोलार्द्ध तथा जल गोलार्द्ध पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी के दोनों गोलार्डों में जल तथा स्थल का वितरण समान नहीं है। अनुमान है कि उत्तरी गोलार्द्ध के 40 प्रतिशत भाग पर जल तथा 60 प्रतिशत भाग पर स्थल है। इसके विपरीत दक्षिणी गोलार्द्ध के 81 प्रतिशत भाग पर जल तथा 19 प्रतिशत भाग पर स्थल है। जल और स्थल के असमान वितरण के कारण ही पृथ्वी को दो विशिष्ट गोलार्डों में बाँटा जाता है जिन्हें क्रमशः जल गोलार्द्ध तथा स्थल गोलार्द्ध कहा जाता है। जल गोलार्द्ध का केन्द्र न्यूज़ीलैण्ड के दक्षिण-पूर्व में है जबकि स्थल गोलार्द्ध का केन्द्र फ्रांस में ब्रिटेनी (Brittaney) में है। स्थल गोलार्द्ध में पृथ्वी का 83 प्रतिशत स्थलीय भाग है तथा जल गोलार्द्ध में पृथ्वी का 90.5 प्रतिशत जल विद्यमान है।

प्रश्न 2.
महासागरीय नितलों पर पाई जाने वाली सबसे अधिक सामान्य आकृतियों के नाम लिखें।
उत्तर:
महासागरीय नितलों पर महाद्वीपीय मग्नतट, महाद्वीपीय ढाल, महासागरीय मैदान तथा महासागरीय गर्त के अतिरिक्त निम्नलिखित आकृतियाँ देखने को मिलती हैं

  • पहाड़ियाँ (Hills)
  • निमग्न द्वीप (Guyots)
  • टीले (Sea Mounts)
  • कटक (Ridges)
  • खाइयाँ (Trenches)
  • प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs)
  • केनियन (Canyons)।

प्रश्न 3.
महाद्वीपीय मग्नतट के विभिन्न प्रकार बताइए।
उत्तर:
उत्पत्ति के आधार पर महाद्वीपीय मग्नतट निम्नलिखित प्रकार के हैं-

  • हिमानीकृत मग्नतट।
  • बड़ी नदियों के मुहानों के मग्नतट।
  • प्रवाल भित्ति मग्नतट।
  • द्रुमाकृतिक घाटियों वाले मग्नतट।
  • नवीन वलित पर्वत के पार्श्व मग्नतट।

प्रश्न 4.
महासागरीय खाइयों तथा गों को विवर्तनिक उत्पत्ति वाला क्यों समझा जाता है?
उत्तर:
महासागरों की तली में पाए जाने वाले लम्बे, गहरे तथा संकरे खड्ड को महासागरीय गर्त कहा जाता है। इनकी उत्पत्ति समुद्री तली पर दरारें पड़ने तथा वलन (Folding) पड़ने के कारण हुई है। ये गर्त प्रायः उन दुर्बल क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ भूकम्प आते हैं और ज्वालामुखी उद्भेदन होता है। ये अधिकतर वलित पर्वतों तथा द्वीपीय चापों के समान्तर स्थित पाए जाते हैं। इस कारण इन गों को पृथ्वी की हलचलों से जुड़ा और विवर्तनिक उत्पत्ति वाला समझा जाता है।

प्रश्न 5.
महासागरीय नितलों पर अनेक प्रकार के उच्चावच के लिए कौन-सी मुख्य प्रक्रियाएँ उत्तरदायी हैं?
उत्तर:
महासागरीय नितलों पर अनेक प्रकार के उच्चावच के लिए निम्नलिखित चार मुख्य प्रक्रियाएँ उत्तरदायी हैं

  • भूगर्भिक हलचलें (Interior Movements)
  • ज्वालामुखी क्रियाएँ (Volcanic Activities)
  • अपरदन क्रिया (Erosion)
  • निक्षेपण क्रिया (Deposition)।

प्रश्न 6.
आकृति की दृष्टि से महाद्वीपीय ढाल के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर:
आकृति की दृष्टि से महाद्वीपीय ढाल के पाँच प्रकार होते हैं-

  • अधिक तीव्र ढाल, जिनके धरातल केनियन के रूप में कटे होते हैं।
  • मन्द ढाल जिन पर लम्बी-लम्बी पहाड़ियाँ तथा बेसिन होती हैं।
  • भ्रंशित ढाल।
  • सीढ़ीनुमा ढाल।
  • वे ढाल जिन पर समुद्री पर्वत स्थित होते हैं।

प्रश्न 7.
महाद्वीपीय उत्थान क्या होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समुद्र के नीचे जहाँ महाद्वीपीय ढाल का अन्त होता है, वहीं मन्द ढाल वाले महाद्वीपीय उत्थान का आरम्भ होता है। इसकी ढाल 0.5° से 1° तक होती है। इसका सामान्य उच्चावच भी कम होता है। गहराई बढ़ने के साथ यह लगभग समतल होकर नितल मैदान में विलीन हो जाता है। यहीं पर महाद्वीपीय खण्डों (Continental Blocks) का अन्त माना जाता है।

प्रश्न 8.
जलमग्न कटकें क्या होती हैं? इनकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
अथवा
गम्भीर समद्री उद्रेख (कटक) क्या होते हैं?
उत्तर:
अर्थ-महासागरों की तली पर स्थित सैकड़ों कि०मी० चौड़ी तथा हजारों कि०मी० लम्बी जल में डूबी पर्वत-श्रेणियों को जलमग्न कटक या गम्भीर समुद्री उद्रेख कहते हैं।

विशेषताएँ-

  • ये जलमग्न कटक पृथ्वी पर सबसे लम्बे पर्वत-तन्त्र का निर्माण करते हैं।
  • अत्यधिक उच्चावच वाले इन जलमग्न पर्वतों की कुल लम्बाई 75,000 कि०मी० से अधिक है।
  • ये पर्वत-तन्त्र प्रायः महासागरों के मध्य पाए जाते हैं।
  • इनके शिखर कहीं-कहीं समुद्र तल से ऊपर निकलकर द्वीपों का निर्माण करते हैं। अजोर्स तथा केपवर्ड द्वीप ऐसी ही निमग्न कटकों की समुद्र से बाहर निकली चोटियाँ हैं।

मिल-अटलांटिक रिज ऐसी समुद्री कटकों का सर्वोत्तम उदाहरण है।

प्रश्न 9.
महासागरीय खाइयाँ या गर्त (Submarine Trenches) क्या होते हैं? इनकी रचना कैसे होती है? गर्तों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करो।
उत्तर:
अर्थ महासागरीय नितल पर स्थित तीव्र ढाल वाले पतले और गहरे अवनमन (Depressions) को खाई या गर्त कहते हैं। रचना इनकी उत्पत्ति वलन (Folding) अथवा भ्रंशन (Faulting) के कारण होती है।

विशेषताएँ-

  • गर्तों की गहराई सामान्यतः 5,500 मीटर होती है।
  • ये महासागरों के सबसे गहरे भाग होते हैं जिनका तल महासागरों के औसत नितल से काफी नीचे होता है।
  • ये जलमग्न संकीर्ण खाइयाँ अपने निकटवर्ती मोड़दार पर्वतों अथवा द्वीपमालाओं के समानान्तर स्थित होती हैं।

प्रश्न 10.
जलमग्न केनियन क्या होते हैं? इनकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
अर्थ महासागरीय नितल पर तीव्र ढाल वाली गहरी व संकरी ‘V’ आकार की घाटियों अथवा गाों को जलमग्न केनियन कहते हैं।

विशेषताएँ-

  • ये महासागरों के किनारों पर समुद्र तटों के बाहर मिलती हैं और मुख्यतः महाद्वीपीय मग्नतट, मग्न ढाल तथा उत्थान तक पाई जाती हैं।
  • ये तीव्र ढाल वाली गहरी घाटियाँ हैं जिनके किनारे तीव्र ढाल वाले होते हैं।
  • नदियों के मुहाने पर बनी अधिकांश कन्दराओं का ढाल मन्द होता है, परन्तु द्वीपों के सहारे बनी कन्दराओं का ढाल अधिक होता है।
  • विश्व में लगभग 102 जलमग्न केनियन हैं। विश्व के सबसे अधिक केनियन प्रशान्त महासागर में पाए जाते हैं।
  • विश्व के सबसे लम्बे जलमग्न केनियन अलास्का के पास बेरिंग सागर में पाए जाते हैं।
  • विश्व में सर्वाधिक विख्यात केनियन हडसन केनियन है जो हडसन नदी के मुहाने से लेकर अन्ध महासागर तक चला गया है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

प्रश्न 11.
जलमग्न केनियनों के प्रमुख प्रकार बताइए।
उत्तर:
जलमग्न केनियन तीन प्रकार के होते हैं-

  • छोटे गार्ज जो महाद्वीपीय मग्नतट के बाहरी किनारों से शुरू होकर महाद्वीपीय ढाल तक पहुंचते हैं। न्यू इंग्लैण्ड के पास ओश्नोग्राफर केनियन (Oceanographer Canyon) इसका उदाहरण है।
  • वे केनियन, जो किसी नदी के मुहाने से आरम्भ होकर महाद्वीपीय मग्नतट तक फैले होते हैं; जैसे ज़ायरे, मिसीसिपी, हडसन तथा सिन्धु नदी के जलमग्न केनियन।
  • ऐसे गहरे कटे वृक्षाकार जलमग्न केनियन जो महाद्वीपीय मग्नतट के किनारे और ढाल पर मिलते हैं; जैसे दक्षिणी कैलिफोर्निया तट के केनियन।

प्रश्न 12.
महासागरीय नितल के अध्ययन का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
महासागरीय नितलों की प्राकृतिक आकृतियाँ समुद्री जल के स्वभाव तथा गति को नियन्त्रित करती हैं। महासागरीय धाराएँ समुद्री जीवों और वनस्पति के साथ-साथ तटवर्ती क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती हैं। महासागरीय नितलों का उच्चावच नौसंचालन, मत्स्य-ग्रहण, समुद्री खनन तथा मनुष्य की अन्य महत्त्वपूर्ण क्रियाओं को प्रभावित करता है।

प्रश्न 13.
महाद्वीपों तथा महासागरों की प्रतिध्रुवीय स्थिति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी पर महाद्वीप तथा महासागर एक-दूसरे के विपरीत स्थित हैं, जिसे प्रतिध्रुवीय स्थिति कहते हैं। उदाहरण के लिए, यूरोप तथा अफ्रीका महाद्वीप, प्रशान्त महासागर के अण्टार्कटिका महाद्वीप, आर्कटिक महासागर तथा उत्तरी अमेरिका हिन्द महासागर के विपरीत स्थित है।

प्रश्न 14.
जलमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर:
पृथ्वी के जल से डूबे हुए क्षेत्र को जलमण्डल कहते हैं। सम्पूर्ण पृथ्वी के लगभग 71% भाग पर जल का विस्तार है। सम्पूर्ण जलमण्डल को महासागर, सागर, खाड़ियों तथा झीलों आदि में विभक्त किया गया है। ये भूतल के लगभग 36.1 वर्ग करोड़ कि०मी० में फैले हुए हैं। उत्तरी गोलार्द्ध का लगभग 61 प्रतिशत तथा दक्षिणी गोलार्द्ध का 81 प्रतिशत भाग महासागरों से घिरा हुआ है। जल की अधिकता के कारण ही दक्षिणी गोलार्द्ध को जल गोलार्द्ध कहकर पुकारा जाता है।

प्रश्न 15.
महासागरों में पाए जाने वाले महत्त्वपूर्ण खनिजों के नाम बताइए। इन खनिजों के स्रोत क्या हैं?
उत्तर:
महासागर अनेक प्रकार के धात्विक व अधात्विक खनिजों के स्रोत हैं। समुद्री जल में लवण, मैग्नीशियम तथा ब्रोमीन जैसे खनिज मिलते हैं। इन खनिजों का स्रोत स्थलीय भाग ही हैं। महासागरों में पाए जाने वाले अन्य खनिज गन्धक, खनिज तेल, सोना, मोनोजाइट, टिन व लौह-अयस्क प्रमुख हैं।

प्रश्न 16.
समुद्र में नीचे जाने पर आप ताप की किन परतों का सामना करेंगे? गहराई के साथ तापमान में भिन्नता क्यों आती है?
उत्तर:
समुद्र में नीचे जाने पर महासागर की सबसे ऊपरी परत 500 मीटर मोटी होती है जिसका तापमान 20°C-25°C के बीच होता है। दूसरी परत 500-1000 मीटर गहरी होती है जिसमें गहराई के बढ़ने के साथ तापमान में भी गिरावट आती है। तीसरी परत बहुत ठण्डी होती है जो महासागरीय तल तक विस्तृत होती है।

महासागरों का उच्चतम तापमान उनकी ऊपरी सतह पर होता है, क्योंकि वे सूर्य की ऊष्मा को प्रत्यक्ष रूप से लेते हैं। यह ऊष्मा संवहन द्वारा महासागरों के निचले भाग में पारेषित होती है जिससे गहराई के साथ तापमान घटता है।

प्रश्न 17.
जलीय चक्र के विभिन्न तत्त्व किस प्रकार अन्तर सम्बन्धित हैं?
उत्तर:
जल एक चक्र के रूप में महासागर से धरातल और धरातल से महासागर तक पहुँचता है। जल चक्र पृथ्वी पर, इसके नीचे तथा इसके ऊपर वायुमण्डल में जल के संचलन की व्याख्या करता है। जल गैस, तरल तथा ठोस अवस्था में परिसंचरण करता है। इसका सम्बन्ध महासागरों, वायुमण्डल, भूपृष्ठ, अधःस्थल और जीव-जन्तुओं के बीच जल के सतत् आदान-प्रदान से है। सूर्य की ऊष्मा से महासागरों का जल वाष्पीकरण द्वारा वाष्प के रूप में वायुमण्डल में जाता है फिर यह संघनित होकर वर्षा के रूप में धरातल पर बहता है जिसका कुछ भाग भूमि में रिस जाता है और कुछ भाग नदियों द्वारा महासागरों में पुनः चला जाता है।

प्रश्न 18.
महासागरीय जल के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महासागरीय जल के तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं-
1. अक्षांश-ध्रुवों की ओर प्रवेशी सौर विकिरण की मात्रा घटने के कारण महासागरों के जल की सतह का तापमान की सतह का तापमान विषुवत् वृत्त से ध्रुवों की ओर घटता चला जाता है।

2. स्थल एवं जल का असमान वितरण-स्थल खण्ड से जुड़े होने के कारण उत्तरी गोलार्द्ध के महासागर दक्षिणी गोलार्द्ध के महासागरों से अधिक मात्रा में ऊष्मा प्राप्त करते हैं।

3. सनातनी पवनें सनातनी पवनें अपने साथ समुद्री जल को बहा ले जाती हैं। इसकी पूर्ति के लिए समुद्र के निचले भाग से ठण्डा जल ऊपर चला जाता है। परिणामस्वरूप तापमान में देशान्तरीय अन्तर आ जाता है।

4. महासागरीय धाराएँ-गर्म महासागरीय धाराएँ ठण्डे क्षेत्रों के तापमान को भी बढ़ा देती हैं जबकि ठण्डी धाराएँ गर्म महासागरीय क्षेत्रों में तापमान को घटा देती हैं। लेब्रेडोर की ठण्डी धारा उत्तरी अमेरिका के उत्तर:पूर्वी तट के नजदीक तापमान को कम कर देती है जबकि गल्फ स्ट्रीम (गर्म धारा) उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट तथा यूरोप के पश्चिमी तट के तापमान को बढ़ा देती है।

प्रश्न 19.
महासागरीय जल के तापमान में अन्तर होने से विभिन्न क्षेत्रों में क्या क्या प्रभाव पड़ते हैं?
उत्तर:
महासागरीय जल के तापमान में अन्तर के कारण महासागरीय जलराशियों में बृहत् स्तर पर संचरण (Circulation) उत्पन्न होता है जिससे समुद्री लहरें और धाराएँ (Currents) चलती हैं। महासागरीय जल का तापमान और धाराओं द्वारा इसका परिवहन न केवल समुद्री जीवन और वनस्पतियों को प्रभावित करता है, अपितु तटवर्ती स्थलीय भागों की जलवायु को भी प्रभावित करता है।

प्रश्न 20.
महासागरीय जल के गर्म होने की विभिन्न प्रक्रियाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
महासागरीय जल दो विधियों द्वारा गर्म होता है-
1. सौर विकिरण के अवशोषण द्वारा-सूर्य की किरणें काफी गहराई तक पहुँचकर समुद्री जल को गर्म करती हैं। इससे समद्री जल में पर्याप्त ऊष्मा जमा हो जाती है। समुद्री जल मुख्यतः सूर्यातप से ही गर्म होता है।

2. पृथ्वी के आन्तरिक भाग की ऊष्मा द्वारा-पृथ्वी के तप्त आन्तरिक भाग से महासागरीय नितल में ऊष्मा प्रवेश करती है जिससे समुद्रों का जल गर्म हो जाता है। ऊष्मा का यह स्रोत नगण्य है।

प्रश्न 21.
महासागरीय जल के ठण्डा होने की विधियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महासागरीय जल तीन विधियों द्वारा ठण्डा होता है जिनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है-
1. विकिरण द्वारा रात के समय समुद्री जल की सतह से ऊष्मा का विकिरण होता है। यह ऊष्मा जल से निकलकर वायुमण्डल में चली जाती है और जल ठण्डा हो जाता है।

2. संवहन द्वारा-समुद्री जल की ऊपरी सतह की ऊष्मा संवहनीय धाराओं द्वारा जल की निचली सतहों में जाती रहती है। इस प्रक्रिया से जल की ऊपरी सतह का तापमान कुछ कम हो जाता है।

3. वाष्पीकरण द्वारा-जल के वाष्पीकरण में जल की ऊष्मा घटती है, ठीक वैसे ही जैसे पसीना सूखने पर हमें ठण्डक का अनुभव होता है। समुद्री जल प्रत्येक तापमान पर वाष्पीकृत होता रहता है।

प्रश्न 22.
महासागरीय जल का वार्षिक अथवा मौसमी तापान्तर किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर:
महासागरीय जल का वार्षिक अथवा मौसमी तापान्तर निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है-

  • सूर्य का आभासी वार्षिक संचरण
  • पवन-पेटियों का उत्तर व दक्षिण की ओर खिसकाव
  • सागर का आकार
  • जलराशियों का पार्श्व विस्थापन।।

प्रश्न 23.
महासागरीय जल का वार्षिक तापान्तर सबसे कम कहाँ और कितना रहता है? इसका कारण भी बताइए
उत्तर:
भूमध्य रेखीय तथा ध्रुवीय प्रदेशों में समुद्री जल का वार्षिक तापान्तर सबसे कम अर्थात् 5.5° होता है। इसका कारण यह है कि भूमध्य रेखा पर सारा साल गर्मी पड़ती है जबकि शीत कटिबन्ध में सारा वर्ष सर्दी पड़ती है। इन दोनों ताप कटिबन्धों में वर्ष भर एक-जैसा मौसम रहने के कारण महासागरीय जल का वार्षिक तापान्तर कम रहता है।

प्रश्न 24.
महासागरीय जल के तापमान के लम्बवत् वितरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
महासागरीय जल के तापमान के लम्बवत् ह्रास की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • लगभग 100 मीटर की गहराई तक तापमान समुद्र तल के तापमान के लगभग बराबर रहता है।
  • समुद्र तल से 1,800 मीटर की गहराई पर तापमान 15°C से घटकर 2°C रह जाता है।
  • 4,000 मीटर की गहराई पर यह तापमान घटकर 1.6°C ही रह जाता है परन्तु महासागरों के सर्वाधिक गहरे भागों में भी जल का तापमान हिमांक से ऊपर रहता है।
  • यदि स्थलीय भागों में अंशतः घिरा हुआ कोई सागर अपने महासागर से किसी जलमग्न कगार (Submerged Cliff) द्वारा अलग हुआ हो तो दोनों जलराशियों में ताप के ह्रास की दर भिन्न होगी।
  • वायुमण्डल की भाँति अधस्तलीय (Sub-surface) जल में भी तापमान की विलोमता पाई जाती है।

प्रश्न 25.
महासागरीय जल में लवणता कहाँ से और कैसे आई है?
अथवा
महासागरों में लवणता की उत्पत्ति के स्रोत कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  • कुछ विद्वानों के अनुसार, पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद जब महासागरों का निर्माण हुआ था, शायद उसी समय अधिकांश लवण उनके जल में घुल गए थे।
  • इसके पश्चात् स्थल पर बहने वाली नदियों के जल द्वारा घोल के रूप में लाए गए नमक के कारण इसकी मात्रा में बढ़ोतरी होती रही।
  • नदियों की भाँति समुद्री तरंगें भी तटीय चट्टानों का अपरदन करके उनमें पाए जाने वाले लवणों को घोलकर समुद्रों में डाल देती हैं।

इस प्रकार सागरीय लवणता का मुख्य स्रोत पृथ्वी का धरातल ही है।

प्रश्न 26.
महासागरों में लवणता का क्या महत्त्व होता है?
अथवा
महासागरीय जल की लवणता किन-किन तत्त्वों को प्रभावित करती है?
अथवा
महासागरीय जल की लवणता की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
महासागरीय लवणनता का महत्त्व अथवा उपयोगिता-

  • महासागरों की लवणता न केवल समुद्री जीव-जगत को प्रभावित करती है, अपितु महासागरों की भौतिक विशेषताओं; जैसे तापमान, घनत्व, दबाव और धाराओं इत्यादि को भी प्रभावित करती है।
  • समुद्रों का हिमांक (Freezing point) उसकी लवणता पर निर्भर करता है। अधिक खारा जल देर से जमता है।
  • इसी प्रकार समुद्री जल का उबलांक (क्वथनांक) बिन्दु भी सामान्य जल से ऊँचा होता है।
  • अधिक लवणयुक्त समुद्री जल का वाष्पीकरण न्यूनतम होता है।
  • समुद्रों में लवणता की अधिक मात्रा जल का घनत्व बढ़ाती है।
  • इसी प्रकार समुद्री जल की सम्पीडनता, मछली, सागरीय जीव व प्लैंकटन आदि लवणता द्वारा ही नियन्त्रित होते हैं।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 13 महासागरीय जल

प्रश्न 27.
महासागरीय जल में मिलने वाले प्रमुख लवणों के नाम और उनकी मात्रा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समुद्र के जल में 47 विभिन्न प्रकार के लवण पाए जाते हैं, जिनमें से निम्नलिखित 7 प्रमुख हैं-

लवण का नामकुल लवणों का प्रतिशत
1. सोडियम क्लोराइड77.8
2. मैग्नेशियम क्लोराइड10.9
3. मैग्नेशियम सल्फेट4.7
4. कैल्शियम सल्फेट3.6
5. पोटैशियम सल्फेट2.5
6. कैल्शियम कार्बोनेट0.3
7. मैग्नेशियम ब्रोमाइड0.2
योग100.0

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
महासागरीय अधःस्थल या नितल के उच्चावच का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गहराई तथा आकार के अनुसार महासागरीय नितल पर निम्नलिखित आकृतियाँ पाई जाती हैं-

  • महाद्वीपीय मग्नतट (Continental Shelf)
  • महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope)
  • गम्भीर सागरीय मैदान (Deep Sea Plain)
  • महासागरीय गर्त (Ocean Deeps)।

1. महाद्वीपीय मग्नतट (Continental Shelf)-समुद्र तट के समीप वाला वह समुद्री भाग जो 180 मीटर अर्थात् 100 फैदम गहरा हो ‘महाद्वीपीय मग्नतट’ कहलाता है। वस्तुतः यह महाद्वीप का ही अग्र भाग होता है जो अस्थायी रूप से जलमग्न हो जाता है। महाद्वीपीय मग्नतट की चौड़ाई इसके ढाल पर निर्भर करती है। अधिक ढाल वाले मग्नतट की चौड़ाई कम तथा कम ढाल वाले मग्नतट की चौड़ाई अधिक होती है। इस भाग में नदियाँ तथा हिमनदियाँ निक्षेप करती रहती हैं। यहाँ समुद्री लहरें भी तोड़-फोड़ का काम करती रहती हैं। सूर्य की किरणें भी इतनी ही गहराई तक पहुँच पाती हैं। विभिन्न क्षेत्रों में महाद्वीपीय मग्नतट का विस्तार भिन्न होता है। इनकी औसत चौड़ाई 80 कि०मी० होती है। जबकि साइबेरिया में इसकी चौड़ाई सर्वाधिक अर्थात् 1500 कि०मी० है। कई तटों पर यह बिल्कुल ही नहीं है।

2. महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope)-महाद्वीपीय मग्नतट के समाप्त होने पर महासागरीय नितल का ढाल एकदम तीव्र हो जाता है और महाद्वीपीय ढाल आरम्भ हो जाता है। इसकी गहराई 200 मीटर से 3000 मीटर के बीच होती है। महाद्वीपीय ढाल ने महासागरों के कुल नितल का लगभग 6.5 प्रतिशत भाग घेरा हुआ है। इस भाग की ढलान महाद्वीपीय मग्नतट की ढलान की अपेक्षा अधिक होती है। इनका ढाल 2° से 5 तक होता है। यद्यपि यहाँ पर गम्भीर सागरीय पदार्थों का निक्षेप अधिक होता है फिर भी यहाँ काँच के अत्यन्त सूक्ष्म कण पहुँच जाते हैं। नदियों द्वारा लाया गया चीकायुक्त जल इन ढलानों पर बह आता है और समस्त मलबा यहाँ एकत्रित हो आता है। ये ढलान स्थलीय भागों के पर्वतीय ढलानों से मिलते-जुलते होते हैं। इनमें भी पर्वतों के अनुरूप बड़े-बड़े खड्ड पाए जाते हैं। कुछ ढालों पर बीच-बीच में पठार तथा श्रेणियाँ हैं और कुछ ढालों पर भृगु भी देखी जाती है।

3. गम्भीर सागरीय मैदान (Deep Sea Plain)-महाद्वीपीय मग्न ढाल के पश्चात् गम्भीर सागरीय मैदान आरम्भ होते हैं। समुद्र की तली का लगभग 77 प्रतिशत भाग इन मैदानों से घिरा हुआ है। अन्ध महासागर में 55 प्रतिशत, प्रशान्त महासागर में 80.3 प्रतिशत और हिन्द महासागर में 80.1 प्रतिशत इन मैदानों का क्षेत्र है। इनकी औसत गहराई 3,000 से 6,000 मीटर है। इनका क्षेत्रफल लगभग 98 लाख वर्ग मील है। ये एक प्रकार के ऊँचे-नीचे मैदान हैं, परन्तु इनका ढाल क्रमिक होता है।

धरातल से नदियों द्वारा बहाकर लाई गई कोई भी वस्तु यहाँ तक नहीं पहुँच पाती। एल्बेट्रॉस (Albatross) अन्वेषक-दल को निरन्तर ध्वनिकरण ounding) द्वारा यह ज्ञात हआ है कि महासागरीय तल का पेंदा बहुत अधिक ऊबड़-खाबड़ है। विस्तृत अन्तःसमुद्री पठार तथा लम्बी आढ़ी-तिरछी कटके (Ridges) यत्र-तत्र मिलती हैं। ऐसी कटकें कहीं-कहीं समुद्र तल से ऊपर निकली होती हैं जो द्वीपों का निर्माण करती हैं। जापान द्वीप इसी प्रकार की कटक के ऊँचे उठे हुए भाग हैं। इनके किनारे बड़े ढालू होते हैं।

महासागरीय तल का धरातल ठोस शैलों का बना हुआ नहीं होता। ये क्षेत्र मूलतः समुद्री जीव-जन्तुओं के अवशेषों, सूक्ष्म वनस्पति पदार्थों तथा कई प्रकार की बारीक पंकों (Oozes) द्वारा ढंके रहते हैं। अधिक गहरे स्थलों पर लाल मृत्तिका और ज्वालामुखी राख के निक्षेप पाए जाते हैं।

4. महासागरीय गर्त (Ocean Deeps)-ये समुद्र की तली में यत्र-तत्र बिखरे हुए पाए जाते हैं। इनके किनारे प्रायः ढले हुए होते हैं, परन्तु क्षेत्रफल में ये बहुत कम हैं। संपूर्ण समुद्र का लगभग 10 हजार वर्गमील क्षेत्र (अर्थात् 6.15 प्रतिशत भाग) घेरे हुए हैं। समुद्र तल के मध्य में इनका पूर्ण अभाव पाया जाता है। ये प्रायः समुद्र तटों की ओर हटकर पाए जाते हैं। जिन समुद्र तटीय भागों में प्रायः भूचाल के झटके और ज्वालामुखी का प्रकोप होता रहता है, वहाँ ये बहुतायत में मिलते हैं।

प्रशान्त महासागर के दोनों किनारों पर ऐसे कई गर्त हैं। ये गहरे गर्त घोर अन्धकार और अत्यन्त शीतल जल से पूर्ण रहते हैं। इन गों की गहराई 3 कि०मी० से 5 कि०मी० के बीच पाई जाती है। संसार का सबसे गहरा गर्त फिलीपीन्स के निकट स्वायर गर्त है जिसकी गहराई 35,400 फुट है। सन् 1957 में सोवियत अनुसन्धान-पोत वित्यात पर सवार सोवियत महासागरविदों ने पश्चिमी प्रशान्त महासागरों में 68 मील गहरे मेरिआनास गर्त की खोज की है जो सभी महासागरों में गहनतम हो सकता है।

संसार के समस्त महासागरों में लगभग 57 गर्मों का ज्ञान हुआ है। इन गर्तों में से 32 प्रशांत महासागर, 19 अटलांटिक महासागर एवं 6 हिन्द महासागर में हैं।

प्रश्न 2.
महासागरों (सागरों) में लवणता के लम्बवत् वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
महसागरों (सागरों) में लवणता का लम्बवत् वितरण-
महासागरों (सागरों) में लवणता का लम्बवत वितरण किसी निश्चित नियम का अनुसरण नहीं करता है क्योंकि कहीं पर लवणता गहराई के साथ घटती जाती है तो कहीं बढ़ती है। लवणता का लम्बवत् वितरण प्रायः जल राशि के स्वभाव से प्रभावित है। गहराई की ओर लवणता कम होती जाती है। किन्तु ठण्डी या गर्म जल धाराओं की उपस्थिति के कारण लवणता में अचानक अन्तर उत्पन्न हो जाता है। लवणता के लम्बवत् वितरण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) उच्च अक्षांशों में सतह पर लवणता कम होती है, गहराई पर बढ़ती जाती है।

(2) मध्य अक्षांशों में लवणता की वृद्धि 400 मीटर तक होती है तत्पश्चात् अधिक गहराई में कम हो जाती है।

(3) भूमध्य रेखा पर स्वच्छ जल की प्राप्ति के कारण सतह पर लवणता कम होती है, कुछ गहराई पर अधिक लवणता तथा वनों की तरफ पुनः कम लवणता पाई जाती है।

(4) जहाँ अर्द्ध खुले सागर, खुले सागरों में मिलते हैं वहाँ लवणता के वितरण की स्थिति पूर्णतया भिन्न होती है जैसे-भूमध्य सागर में जिब्रान्टर जल संधि के समीप गहराई की तरफ लवणता निरन्तर बढ़ती है। 36.5 प्रतिशत से 38 प्रतिशत हो जाती है, जबकि जिब्रान्टर की पश्चिमी सतह पर 36 प्रतिशत से कम तथा 7,000 मीटर गहराई पर 36.5 प्रतिशत तथा पुनः 1,200 मीटर की गहराई पर 36 प्रतिशत पाई जाती है। इसके बाद लवणता की मात्रा घटती जाती है।

(5) प्रशान्त महासागर व हिन्द महासागर में लवणता की लम्बवत् वितरण में उपर्युक्त प्रकार की स्थिति पाई जाती है।

(6) यह प्रमाणित हो चुका है कि 2000 मीटर की गहराई के बाद लवणता निरन्तर कम होती जाती है।

(7) उत्तरी अटलांटिक महासागर में लवणता का लम्बवत् वितरण दक्षिणी अटलांटिक महासागर से भिन्न है। उत्तरी अटलांटिक महासागर में लवणता के अन्तर की दर अधिक होती है। अटलांटिक महासागर के दक्षिणी सतह पर लवणता 33 प्रतिशत है। 400 मीटर की गहराई पर बढ़कर 34.5 प्रतिशत हो जाती है तथा 1,200 मीटर पर 34.75 प्रतिशत होती है, परन्तु 20° दक्षिणी अक्षांश के समीप सतह पर 37 प्रतिशत है जो घटकर तली के समीप 35 प्रतिशत रह जाती है। इसके विपरीत विषुवत् रेखा पर लवणता 34 प्रतिशत है जबकि गहराई पर 35 प्रतिशत है। अटलांटिक महासागर के लवणता के लम्बवत् वितरण पर ‘S’ आकृति की महासागरीय श्रेणी (Mid Oceanic Ridge) के चैलेन्जर राइज व डाल्फिन राइज का विशेष प्रभाव होता है।

(8) नियमानुसार बढ़ती गहराई के साथ लवणता कम न होकर बढ़ जाती है तो उसे ‘लवण विलोमता’ कहते हैं। यह सभी महासागरों सागरों में पाई जाती है।

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HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

Haryana State Board HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class History Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

निबंधात्मक उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐसे कौन-से कारण थे जिनसे 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली?
अथवा
15वीं शताब्दी में भौगोलिक खोजों के कारणों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
15वीं शताब्दी में यूरोपवासियों ने भौगोलिक खोजों का सिलसिला आरंभ किया। इसके लिए अनेक कारण उत्तरदायी थे। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है

1. आर्थिक उद्देश्य (Economic Motives):
यूरोपवासियों को नई खोज यात्राएँ करने में आर्थिक उद्देश्यों की प्रमुख भूमिका थी। 1453 ई० में तुर्कों द्वारा कुंस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार से यूरोपीय व्यापार को गहरा आघात लगा। इस संकट से निपटने के लिए नए प्रदेशों की खोज करना आवश्यक था। 15वीं शताब्दी में यूरोपवासियों की आर्थिक आवश्यकताएँ बहुत बढ़ गई थीं।

नवोदित राष्ट्रीय राज्यों को अपनी सेना के लिए धन आवश्यकता थी। नए प्रदेशों की खोज करके यूरोपवासी अपने इन आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति कर सकते थे। अत: वे नए प्रदेशों की खोज करने के लिए प्रेरित हुए।

2. नए आविष्कार (New Inventions):
14वीं एवं 15वीं शताब्दियों में जहाजरानी से संबंधित नए आविष्कारों ने नाविकों की समुद्री यात्राओं को सुगम बना दिया। 1380 ई० में कुतबनुमा (compass) भाव दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हुआ। यह एक सर्वोच्च महत्त्व का आविष्कार था। इससे नाविकों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी प्राप्त होती थी। 16वीं शताब्दी में एस्ट्रोलेब (astrolab) का आविष्कार हुआ।

इस यंत्र से नाविकों को भूमध्य रेखा (equator) से दूरी मापने में सहायता मिली। इस काल में यूरोपियों ने अपने जहाजों में बहुत सुधार कर लिया था। ये जहाज़ पहले से अधिक हल्के, विशाल एवं तीव्र गति से चलने वाले थे। निस्संदेह इन नवीन आविष्कारों ने समुद्री यात्राएँ करने वालों को एक नई दिशा प्रदान की। प्रसिद्ध इतिहासकार थॉमस एफ० एक्स० नोबल के शब्दों में, “14वीं एवं 15वीं शताब्दियों में जहाजरानी में सहायक सिद्ध हुए अनेक नए आविष्कारों ने खुले समुद्र में यात्राओं को सुगम एवं अधिक पूर्वानुमानित बनाया।

3. टॉलेमी की ज्योग्राफी (Ptolemy’s Geography):
टॉलेमी की ज्योग्राफी ने नए प्रदेशों की खोज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। टॉलेमी मिस्र का रहने वाला था। उसने दूसरी शताब्दी में ज्योग्राफी की रचना की। यह महत्त्वपूर्ण पुस्तक 1477 ई० में मुद्रित हुई। यह पुस्तक बहुत लोकप्रिय हुई। इससे यूरोपवासी नए प्रदेशों की खोज करने के लिए प्रेरित हुए।

4. मार्को पोलो की यात्राएँ (Travels of Marco Polo):
मार्को पोलो इटली के शहर वेनिस का एक महान् यात्री था। वह 1275 ई० में मंगोलों के महान् नेता कुबलई खाँ (Kublai Khan) के दरबार में पीकिंग (Peking) पहुँचा। कुबलई खाँ ने उसका बहुत सम्मान किया। मार्को पोलो 17 वर्षों तक कुबलई खाँ के दरबार में रहा। इस समय के दौरान वह सरकार के कुछ महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त हुआ।

वापसी के समय वह जापान, बर्मा, भारत एवं थाइलैंड होता हुआ वापस इटली पहुँचा। यहाँ पहुँच कर उसने मार्को पोलो की यात्राएँ (Travels of Marco Polo) नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की। इसमें उसने पूर्वी देशों के महान् वैभव पर विस्तृत प्रकाश डाला था। उसके विवरण में यूरोपवासियों में इन देशों की समुद्री यात्रा करने की एक होड़-सी आरंभ हो गई।

5. धार्मिक उद्देश्य (Religious Motives):
ईसाई धर्म सदैव से एक प्रचारक धर्म रहा था। ईसाई मिशनरियों ने अपने अथक प्रयासों से मध्यकाल तक संपूर्ण यूरोप में ईसाई धर्म का प्रसार कर दिया था। इसमें उन्हें अभूतपूर्व सफलता प्राप्त हुई थी। इसके पश्चात् उन्होंने अपना ध्यान एशिया एवं अफ्रीका की तरफ किया। वे यहाँ के असभ्य लोगों को सभ्य बनाना चाहते थे। इन देशों में ईसाई धर्म का प्रसार करने के लिए बड़ी संख्या में उनके मिशनरी तैयार थे। अतः यूरोपीय व्यापारियों के साथ-साथ ईसाई मिशनरी भी इन देशों में गए। वास्तव में ईसाई धर्म के प्रसार की भावना ने नए देशों की समुद्री खोज को एक नया प्रोत्साहन दिया।

6. आईबेरियाई प्रायद्वीप का योगदान (Contribution of Iberian Peninsula):
15वीं शताब्दी में आईबेरियाई प्रायद्वीप भाव स्पेन एवं पुर्तगाल के देशों ने समुद्री खोज यात्राओं में बहुमूल्य योगदान दिया। अक्सर यह प्रश्न किया जाता है कि स्पेन एवं पुर्तगाल के शासकों ने समुद्री खोजों में अन्य देशों के मुकाबले अग्रणी भूमिका क्यों निभाई ? इसके अनेक कारण थे। प्रथम, इस समय स्पेन एवं पुर्तगाल की अर्थव्यवस्था अच्छी थी जबकि यूरोप की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही थी।

दूसरा, स्पेन एवं पुर्तगाल के शासक सोना एवं धन दौलत के भंडार एकत्र कर अपने यश एवं सम्मान में वृद्धि करना चाहते थे। तीसरा, वे नई दुनिया में ईसाई धर्म का प्रसार करना चाहते थे। चौथा, धर्मयुद्धों (crusades) के कारण इन देशों की एशिया के साथ व्यापार करने में रुचि बढ़ गई। इन युद्धों के दौरान उन्हें पता चला कि इन देशों के साथ व्यापार करके वे भारी मुनाफा कमा सकते हैं। पाँचवां इन देशों के शासकों ने समुद्री खोज पर जाने वाले नाविकों को प्रत्येक संभव सहायता प्रदान की।

7. पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी का योगदान (Contribution of Prince Henry of Portugal):
पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी (1394-1460 ई०) ने समुद्री खोज यात्राओं को प्रोत्साहित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अत: वह इतिहास में हेनरी दि नेवीगेटर (Henry, the Navigator) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने खोज यात्राओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सारगेस (Sargess) में एक नाविक स्कूल खोला। इस स्कूल में शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्व के अनेक देशों से नाविक, वैज्ञानिक एवं मानचित्र बनाने वाले आए।

इसके महत्त्वपूर्ण परिणाम निकले। यहाँ भावी समुद्री खोज यात्राओं की योजना तैयार की जाती थी। यहाँ लंबी दूरी की समुद्री यात्राएँ करने के लिए सुदृढ़ नावों का निर्माण किया गया जिन्हें कैरेवल (caravels) कहा जाता था। नाविकों की सहायता के लिए नए भौगोलिक मानचित्र तैयार किए गए। राजकुमार हेनरी ने व्यापार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से पश्चिमी अफ्रीका के शासकों के साथ संबंध स्थापित किए तथा बोजाडोर (Bojador) में अपना व्यापारिक केंद्र स्थापित किया।

प्रसिद्ध इतिहासकार बी० वी० राव का यह कहना ठीक है कि, “यद्यपि वह (हेनरी) व्यावसायिक तौर पर एक नाविक नहीं था किंतु उसने भौगोलिक खोजों के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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प्रश्न 2.
क्रिस्टोफर कोलंबस कौन था ? उसकी बहामा द्वीप यात्रा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस ने नई दुनिया (New World) की खोज में सर्वाधिक उल्लेखनीय योगदान दिया। उसका जन्म 1451 ई० में इटली के प्रसिद्ध शहर जेनेवा (Genoa) में हआ। जेनेवा इटली की एक प्रसिद्ध बंदरगाह थी। अतः यहाँ जहाज़ों का आना-जाना लगा रहता था। अतः कोलंबस के मन में बचपन से ही समुद्री यात्रा करने एवं नाम कमाने की गहरी इच्छा थी।

वह फ्रांसीसी दार्शनिक कार्डिनल पिएर डिऐली द्वारा 1410 ई० में खगोलशास्त्र (Astronomy) एवं भूगोल (Geography) पर लिखी प्रसिद्ध रचना इमगो मुंडी (Imago Mundi) से बहुत प्रभावित हुआ। अतः उसने पूर्व (the Indies) की यात्रा करने का निर्णय किया।

कोलंबस 3 अगस्त, 1492 ई० को स्पेन की एक बंदरगाह पालोस (Palos) से यात्रा के लिए रवाना हुआ। इस समय उसके पास तीन जहाजों-सांता मारिया (Santa Maria), पिंटा (Pinta) तथा नीना (Nina) का एक छोटा-सा बेड़ा था। इनमें कुल 90 नाविक सवार थे। कोलंबस स्वयं सांता मारिया की कमान कर रहा था। इसमें कुल 40 नाविक थे। यह यात्रा काफी लंबी हो गई। समुद्र एवं आकाश के अतिरिक्त कुछ अन्य नज़र नहीं आता था। उनकी खाद्य सामग्री भी कम होने लगी। इससे नाविकों में बेचैनी फैल गई।

वे कोलंबस से तुरंत वापस चलने की माँग करने लगे। सहसा उन्हें 7 अक्तूबर, 1492 ई० को समुद्र के ऊपर कुछ पक्षी उड़ते दिखाई दिए। इससे उनका धैर्य बढ़ गया। उन्हें यह विश्वास हो गया कि उनका बेड़ा किसी भूमि के निकट पहुँचने वाला है। अंतत: उन्हें 12 अक्तूबर, 1492 ई० को भूमि दिखाई दी। इससे उनकी प्रसन्नता का कोई ठिकाना न रहा।

कोलंबस जिस स्थान पर पहुँचा उसने उसे इंडीज (भारत एवं भारत के पूर्व में स्थित देश) समझा। अतः उसने वहाँ के निवासियों को रेड इंडियन्स (Red Indians) कहा। वास्तव में वह बहामा द्वीप समूह के गुआनाहानि (Guanahani) नामक स्थान पर पहुंचा था। जब कोलंबस एवं उसके साथी वहाँ पहुँचे तो वहाँ रहने वाले अरावाक (The Arawaks) लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।

अरावाक लोग इन अपरिचित लोगों को देखकर एक-दूसरे को आश्चर्य से कह रहे थे कि देखो ये लोग स्वर्गलोक से यहाँ आए हैं। इन लोगों ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया। कोलंबस उनकी उदारता से बहुत प्रभावित हुआ। कोलंबस ने उनके संबंध में लिखा है कि, “वे बहुत उदार हैं तथा वे बुराई को नहीं जानते। वे किसी दूसरे की हत्या नहीं करते तथा न ही चोरी करते हैं तथा उनके पास हथियार भी नहीं हैं।”

कोलंबस लगभग तीन महीने गुआनाहानि में रहा। उसने इस द्वीप में स्पेन का झंडा गाड़ दिया। उसने इस द्वीप का नया नाम सैन सैल्वाडोर (San Salvador) रख दिया। उसने स्वयं को वहाँ का वाइसराय (Viceroy) घोषित कर दिया। वाइसराय का अभिप्राय है राजा का प्रतिनिधि। कोलंबस ने इस समय के दौरान क्यूबा (Cuba) एवं हिस्पानिओला (Hispaniola) की खोज की। कोलंबस ने इन स्थानों की खोजें वहाँ से सोना प्राप्त करने के उद्देश्य से की थी किंतु इसमें उसे कोई विशेष सफलता प्राप्त न हुई।

इस समय के दौरान कोलंबस को कैरिब (Carib) नाम के एक खूखार कबीले का सामना करना पड़ा। अत: कोलंबस के साथी नाविकों ने उसे वापस स्पेन चलने के लिए बाध्य किया। कोलंबस ने 4 जनवरी, 1493 ई० को स्पेन की वापसी यात्रा आरंभ की। इस समय उनका सांता मारिया नामक जहाज़ नष्ट हो गया था तथा बाकी दो अन्य जहाजों को दीमक लगनी आरंभ हो गई थी।

कोलंबस एवं उसके साथी 15 मार्च, 1493 ई० को स्पेन की बंदरगाह पालोस वापस पहुँचने में सफल रहे। उनका स्पेन के शासक फर्जीनेंड द्वारा भव्य स्वागत किया गया। कोलंबस ने भी उसे गुआनाहानि से प्राप्त कुछ बहमल्य उपहार भेंट किए। राजा इससे बहत प्रसन्न हआ। अतः उसने कोलंबस को एडमिरल ऑफ दी ओशन सी (Admiral of the Ocean Sea) नामक उपाधि तथा इंडीज का वाइसराय होने की घोषणा की। इसके पश्चात् कोलंबस ने 1493-96 ई०, 1498-1500 ई० तथा 1502-04 ई० में इंडीज की तीन बार और यात्राएँ कीं।

इस समय के दौरान कोलंबस ने वहाँ सख्ती से शासन किया। उसने वहाँ के लोगों को भारी कर देने तथा सोना देने के लिए बाध्य किया। इंकार करने पर लोगों पर घोर अत्याचार किए जाने लगे। इस कारण वहाँ के लोगों में स्पेनी शासन रोष फैलने लगा। जब यह समाचार स्पेन के शासक फर्जीनेंड को प्राप्त हआ तो उसने कोलंबस को जंजीरों में जकड़ कर दरबार में प्रस्तुत करने को कहा। उसके आदेश की पालना करते हुए कोलंबस को 7 नवंबर, 1504 ई० को दरबार में प्रस्तुत किया गया।

कोलंबस द्वारा क्षमा याचना माँगने पर रानी ईसाबेला ने उसे क्षमा कर दिया किंतु उससे वाइसराय की पदवी छीन ली गई। कोलंबस की 20 मई, 1506 ई० को अत्यंत निराशा की स्थिति में स्पेन के शहर वल्लाडोलिड (Valladolid) में मृत्यु हो गई। प्रसिद्ध इतिहासकार माईकल एच० हार्ट के अनुसार, “उसकी खोज ने नई दुनिया में खोजों एवं उपनिवेशों के युग का आरंभ करके इतिहास को एक नया मोड़ दिया। 1499 ई० में इटली के एक भूगोलवेत्ता अमेरिगो वेस्पुसी (Amerigo Vespucci) ने दक्षिण अमरीका की यात्रा की।

उसने अपनी यात्रा का विस्तृत वर्णन किया तथा दक्षिण अमरीका को नयी दुनिया (New World) के नाम से संबोधित किया। 1507 ई० में एक जर्मन प्रकाशक ने अमेरिगो वेस्पुसी के बहुमूल्य योगदान को देखते हुए नई दुनिया को अमरीका का नाम दिया।

प्रश्न 3.
हरनेडो कोटेंस कौन था? उसने मैक्सिको पर किस प्रकार विजय प्राप्त की?
उत्तर:
हरनेडो अथवा हरनन कोर्टेस जिसने मैक्सिको पर महत्त्वपूर्ण विजय प्राप्त की थी स्पेन का एक महत्त्वपूर्ण विजेता था। उसे तथा उसके सैनिकों को जिन्होंने मैक्सिको पर आक्रमण किया था इतिहास में कोक्विस्टोडोर (Conquistadores) के नाम से जाना जाता है। हरनेंडो कोर्टस का जन्म 1485 ई० में स्पेन के शहर मेडलिन (Medellin) में हुआ था। 1504 ई० में वह अपना भाग्य आजमाने क्यूबा के गवर्नर की सेना में भर्ती हो गया। यहाँ उसने क्यूबा के गवर्नर के आदेश पर अनेक सैनिक अभियानों में भाग लिया। इनमें कोर्टेस ने अपनी बहादुरी के अनेक प्रमाण दिए।

इससे प्रभावित होकर क्यूबा के गवर्नर ने 1519 ई० में कोर्टेस को मैक्सिको पर आक्रमण करने का आदेश दिया। हरनेडो कोर्टेस फरवरी, 1519 ई० में 600 स्पेनी सैनिकों, 11 जहाजों एवं कुछ तोपों के साथ क्यूबा से रवाना हुआ। शीघ्र ही वे मैक्सिको की एक बंदरगाह वेराक्रुज (Veracruz) पहुँचे। यहाँ उसे डोना मैरीना (Dona Marina) का महत्त्वपूर्ण सहयोग मिला। वह स्पेनिश एवं मैक्सिकन भाषाओं में बहुत प्रवीण थी। उसके सहयोग के बिना कोर्टेस के लिए वहाँ के लोगों की भाषा समझना अत्यंत कठिन था।

डोना मैरीना ने इस कार्य को सरल कर दिया। हरनेंडो कोर्टस का कहना था कि, “परमात्मा के पश्चात् हम न्यू स्पेन की विजय के लिए डोना मैरीना के ऋणी हैं।” डोना मैरीना द्वारा अपने देश के साथ किए गए विश्वासघात के लिए मैक्सिकन लोग उसे मालिंच (Malinche) अथवा विश्वासघातिनी कहते थे। डोना मैरीना के संबंध में हमें महत्त्वपूर्ण जानकारी बर्नाल डियाज़ डेल कैस्टिलो (Bernal Diaz del Castillo) की प्रसिद्ध रचना टु हिस्ट्री ऑफ़ मैक्सिको (True History of Maxico) से प्राप्त होती है। हरनेंडो कोर्टेस ने यह जानकारी भी प्राप्त की कि अनेक कबीलों के लोगों में एजटेक शासक मोंटेजुमा द्वितीय (1502-1520 ई०) के घोर अत्याचारों के कारण भारी रोष है। ये लोग उसके शासन का अंत देखना चाहते थे।

इस स्थिति का लाभ उठाते हुए कोर्टेस ने सर्वप्रथम वहाँ के टोटोनेक (Totonacs) लोगों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया। इसे फौरन स्वीकार कर लिया गया क्योंकि टोटोनेक एज़टेक शासन से मुक्त होना चाहते थे। स्पेनी सैनिकों ने सर्वप्रथम लैक्सकलान (Tlaxcalans) नामक एक खूखार कबीले पर आक्रमण कर दिया। इस कबीले ने स्पेनी सैनिकों से कड़ा मुकाबला किया परंतु अंततः उनकी पराजय हुई। इसके पश्चात् ट्लैक्सकलान स्पेनी सैनिकों के साथ सम्मिलित हो गए। इससे कोर्सेस का साहस बढ़ गया। इस समय तक एज़टेक शासक मोंटेजुमा द्वितीय ने कोर्टेस की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

ट्लैक्सकलानों पर उसकी विजय के पश्चात् मोंटेजुमा द्वितीय ने अपने एक अधिकारी के हाथों अनेक बहुमूल्य उपहार कोर्टेस को इस उद्देश्य के साथ भेजे कि वह उनके साम्राज्य से वापस चला जाए। कोर्टेस ने जब इन उपहारों को देखा तो उसकी अधिक धन प्राप्त करने की लालसा बढ़ गई। इस अधिकारी ने जब वापस जाकर मोंटेजुमा द्वितीय को स्पेनवासियों की आक्रमण क्षमता, उनके बारूद एवं घोड़े के प्रयोग के बारे में बताया तो वह घबरा गया।

कोर्टेस एवं उसके सैनिकों ने 8 नवंबर, 1519 ई० को एजटेक की राजधानी टेनोक्टिटलान (Tenochtitlan) पर आक्रमण कर दिया। यहाँ तक वे बिना किसी विरोध के पहुंच गए थे। यहाँ वे राजधानी टेनोक्टिटलान की भव्यता को देखकर स्तब्ध रह गए। उन्हें लगा जैसा कि वे कोई स्वप्न देख रहे हों। यहाँ मोंटेजुमा द्वितीय ने कोर्टेस को देवता का अवतार समझ उसका भव्य स्वागत किया। शीघ्र ही कोर्टेस ने मोंटेजुमा द्वितीय को बिना किसी कारण बंदी बना लिया। वास्तव में उसके बंदी बनाए जाने से ही कोर्टेस ने मैक्सिको पर लगभग विजय प्राप्त कर ली थी।

इसी समय हरनेडो कोर्टेस को क्यूबा वापस लौटना पड़ा। अतः उसने अपने सहायक ऐल्वारैडो (Alvarado) को मैक्सिको का प्रशासन सौंपा। स्पेनी शासन बहुत अत्याचारी प्रमाणित हुआ। सोने की निरंतर माँग के कारण वहाँ के लोगों ने विद्रोह कर दिया। अतः ऐल्वारैडो ने हुइजिलपोक्टली (Huizilpochtli) के वसंतोत्सव (spring festival) के दौरान हत्याकांड का आदेश दे दिया। इसने स्थिति को अधिक विस्फोटक बना दिया।

अतः स्थिति से निपटने के लिए कोर्टेस 25 जून, 1520 ई० को वापस लौटा। पर लोगों में स्पेनी शासन के विरुद्ध बहुत रोष था। उन्होंने कोर्टेस के लिए अनेक बाधाएँ उत्पन्न कर दी। सड़क मार्ग बंद कर दिए गए। पुलों को तोड़ दिया गया। जलमार्गों को काट दिया गया। स्पेनियों को भोजन की घोर कमी का भी सामना करना पड़ा। विद्रोहियों ने अथवा स्पेनी सैनिकों ने 29 जून, 1520 ई० को मोंटेजुमा द्वितीय को मौत के घाट उतार दिया। इसके बावजूद एज़टेकों एवं स्पेनियों में लड़ाई जारी रही। 30 जून, 1520 ई० को 600 स्पेनी एवं उतने ही एज़टेक लोग मारे गए।

अतः हत्याकांड की इस भयंकर रात को इतिहास में आँसू भरी रात (Night of Tears) के नाम से जाना जाता है। अंततः कोर्टेस ने 15 अगस्त, 1521 ई० को एज़टेकों को पराजित कर उनके साम्राज्य का अंत कर दिया। इस प्रकार हरनेंडो कोर्टेस ने दो वर्षों के भीतर ही एजटेक साम्राज्य का अंत कर दिया। प्रसिद्ध इतिहासकार जे० एम० फारेगर के अनुसार, “दो वर्षों के भीतर ही कोर्टेस एवं उसकी सेना ने एजटेक साम्राज्य को नष्ट कर दिया। यह एक ऐसी शानदार सफलता थी जिसकी विजयों के इतिहास में कोई अन्य उदाहरण नहीं है।’

हरनेंडो कोर्टेस ने मैक्सिको पर कब्जा करने के पश्चात् भारी मात्रा में स्पेन के शासक चाल्र्स पँचम (Charles V) को सोना एवं बहुमूल्य आभूषण भेजे। इससे प्रसन्न होकर चार्ल्स पँचम ने हरनेंडो कोर्टेस को अनेक सम्मानों से विभूषित किया तथा उसे 1522 ई० में न्यू स्पेन (मैक्सिको का नाम अब परिवर्तित करके न्यू स्पेन रख दिया गया था।) का गवर्नर एवं कैप्टन-जनरल (Governor and Captain-General) बनाया गया।

कोर्टेस ने अपने शासनकाल के दौरान न्यू स्पेन में नए नगरों का निर्माण किया। उसने वहाँ के लोगों पर घोर अत्याचार किए। कोर्टेस के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण उसके विरोधियों ने चार्ल्स पँचम के कान भरे। अत: चार्ल्स पँचम ने कोर्टेस की शक्तियों में कुछ कमी कर दी। इससे कोर्टेस को बहुत निराशा हुई। अतः कोर्टेस 1541 ई० में वापस स्पेन आ गया। उसकी 2 दिसंबर, 1547 ई० को सेविली (Seville) में मृत्यु हो गई। निस्संदेह हरनेंडो कोर्टेस ने मैक्सिको में स्पेनी शासन स्थापित करने में बहुमूल्य योगदान दिया।

प्रश्न 4.
फ्रांसिस्को पिज़ारो कौन था? उसने इंका साम्राज्य पर किस प्रकार विजय प्राप्त की ?
उत्तर:
फ्राँसिस्को पिज़ारो पेरू (Peru) पर अधिकार करने वाला स्पेन का एक अन्य प्रसिद्ध विजेता था। उसका जन्म 1478 ई० में स्पेन के शहर ट्रजिलो (Trujillo) में हुआ था। वह एक अत्यंत गरीब परिवार से संबंधित था। अत: वह अनपढ़ रहा। वह 1502 ई० में हिस्पानिओला (Hispaniola) में अपना भाग्य आजमाने आ गया था। यहाँ वह सेना में भर्ती हो गया। 1513 ई० में वह प्रसिद्ध नाविक बालबोआ (Balboa) के साथ यात्रा पर गया जिसने प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) की खोज की। इस यात्रा से पिज़ारो बहुत प्रेरित हुआ।

शीघ्र ही उसे इंका राज्य के बारे में यह जानकारी मिली कि यह एक सोने एवं चाँदी का देश (El-do-rado) है। अत: वह इस देश पर अधिकार करने के स्वप्न देखने लगा। 1521 ई० में हरनेंडो कोर्टेस द्वारा मैक्सिको की विजय ने उसमें नव-स्फूर्ति का संचार किया। 1528 ई० में वह पेरू पहुँचने में सफल हो गया।फ्रांसिस्को पिजारो स्पेन की वापसी यात्रा के समय वहाँ से इंका कारीगरों द्वारा बनाए गए सोने के अत्यंत सुंदर कुछ मर्तबान अपने साथ ले आया।

वह स्पेन के शासक चार्ल्स पँचम (Charles V) को 1529 ई० में मिलने में सफल हुआ। उसने अपनी भेंट के दौरान चार्ल्स पँचम को इंका साम्राज्य में उपलब्ध बहुमूल्य दौलत के बारे में जानकारी दी। इससे उसके मन में इस अपार दौलत को प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न हुई। अतः उसने पिज़ारो को यह वचन दिया कि यदि वह इंका साम्राज्य पर विजय प्राप्त करने में सफल हो जाता है तो उसे वहाँ का गवर्नर बना दिया जाएगा।

यह वचन पाकर पिज़ारो बहुत प्रसन्न हुआ। अतः वह इंका साम्राज्य पर आक्रमण करने के लिए किसी सुनहरी अवसर की तलाश करने लगा। 1532 ई० में इंका साम्राज्य में सिंहासन प्राप्त करने के उद्देश्य से दो भाइयों अताहुआल्पा (Atahualpa) एवं हुआस्कर (Huascar) के मध्य गृह युद्ध आरंभ हो गया। अत: यह सुनहरी अवसर देखकर पिज़ारो ने इंका साम्राज्य पर आक्रमण करने की योजना बनाई। उसने केवल 168 सैनिकों एवं 62 घोड़ों के साथ इंका साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया।

इस समय तक अताहुआल्पा ने अपने भाई को पराजित कर सिंहासन प्राप्त कर लिया था। पिज़ारो 15 नवंबर, 1532 ई० को अपने सैनिकों के साथ इंका साम्राज्य के शहर काजामारका (Cajamarca) पहुँचा। यहाँ अताहुआल्पा अपने 40,000 सैनिकों के साथ मौजूद था। इतने सैनिकों का मुकाबला करना पिज़ारो के बस की बात नहीं थी। अतः उसने एक चाल द्वारा अताहुआल्पा को 16 नवंबर, 1532 ई० को बंदी बना लिया। अताहुआल्पा ने अपनी मुक्ति के लिए पिज़ारो को एक कमरा भर सोने की फिरौती देने का प्रस्ताव किया।

उस समय तक के इतिहास में इतनी बड़ी फिरौती कभी नहीं दी गई थी। इसके बावजूद पिज़ारो ने 29 अगस्त, 1533 ई० को राजा का वध करवा दिया। अताहुआल्पा के वध के कारण इंका साम्राज्य के सैनिकों में घोर निराशा फैल गई थी। अतः पिज़ारो एवं उसके सैनिकों ने नवंबर 1533 ई० में सुगमता से इंका साम्राज्य की राजधानी कुजको (Cuzco) पर अधिकार कर लिया। निस्संदेह यह पिज़ारो की एक महान् सफलता थी। दो सौ से भी कम सैनिकों के साथ 6 लाख लोगों के साम्राज्य पर अधिकार करने की कोई अन्य उदाहरण इतिहास में नहीं मिलती।

पिज़ारो के सैनिकों ने कुज़को पर अधिकार करने के पश्चात् वहाँ भयंकर लूटमार की। पिज़ारो ने 1535 ई० में लिमा (Lima) को पेरू की नई राजधानी बनाया। अपने शासन के दौरान पिज़ारो ने इंका साम्राज्य के लोगों पर घोर अत्याचार किए। उसने बड़ी संख्या में लोगों को गुलाम बना लिया तथा उन्हें अधिक-से-अधिक धन देने के लिए विवश किया। अत: 1534 ई० में वहाँ के लोगों ने स्पेनी शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। यह विद्रोह दो वर्षों तक जारी रहा। 26 जून, 1541 ई० को लिमा में पिजारो के एक विरोधी गुट ने उसका वध कर दिया। इस प्रकार स्पेन के इस महान् विजेता का दुःखद अंत हुआ।

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प्रश्न 5.
16वीं शताब्दी में ब्राजील के पुर्तगाली प्रशासन के संबंध में आप क्या जानते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ब्राज़ील पर पुर्तगालियों का कब्जा संयोगवश ही हुआ। पुर्तगाली शासक मनोल (Manoel) के आदेश पर पेड्रो अल्वारिस कैनाल (Pedro Alvares Cabral) 9 मार्च, 1500 ई० को 13 जहाजों के एक बेड़े के साथ पुर्तगाल की बंदरगाह तागुस (Tagus) से भारत के लिए रवाना हुआ। समुद्री तूफानों से बचने के लिए वह अपने जहाजों के साथ 22 अप्रैल, 1500 ई० को ब्राजील के तट पर पहुँचा। उसके वहाँ पहुँचने पर वहाँ के मूल निवासियों (natives) ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया। कैब्राल ब्राज़ील में एक सप्ताह रुकने के पश्चात् पूर्व की ओर चल दिया।

उसने ब्राजील की खोज संबंधी पुर्तगाली शासक को अवगत किया। आरंभ में पुर्तगालियों ने ब्राजील की ओर कम ध्यान दिया। इसका प्रमुख कारण यह था कि वहाँ सोना अथवा चाँदी मिलने की संभावना बहुत कम थी। वहाँ केवल ब्राजीलवुड (Brazilwood) नामक वृक्ष पाया जाता था। इससे लाल रंजक (red dye) तैयार की जाती थी। ब्राजीलवुड के नाम के आधार पर ही यूरोपवासियों ने इस प्रदेश का नाम ब्राजील रखा।

पुर्तगाली शासक ने आरंभिक 30 वर्षों में ब्राजील में व्यापारियों को व्यापार करने की अनुमति बदले में वे सरकार को कर देते थे। ब्राजील के मूल निवासी इन व्यापारियों को लोहे के चाकू, छरियों एवं आरियों के बदले में जिन्हें वे अदभत मानते थे. पेड़ों को काटने तथा उन्हें जहाजों तक ले जाने के लिए तैयार हो गए। इसके अतिरिक्त वे इनके बदले में बहुत से बंदर, मुर्गियाँ, तोते, शहद तथा अन्य वस्तुएँ देने के लिए तैयार रहते थे। ब्राजील के मूल निवासी इस बात को समझने में असमर्थ रहे कि पुर्तगाली एवं फ्रांसीसी लोग इस लकड़ी की तलाश में इतनी दूर से क्यों आते हैं तथा घोर परेशानियाँ क्यों झेलते हैं।

पुर्तगालियों के ब्राजील में बढ़ते हुए व्यापार के कारण फ्रांसीसी व्यापारी उनसे ईर्ष्या करने लगे। अत: वे भी ब्राजील पहुंच गए। अतः पुर्तगाली एवं फ्रांसीसी व्यापारियों के मध्य अनेक भयंकर लड़ाइयाँ हुई। इन लड़ाइयों में अंततः पुर्तगालियों की विजय हुई। 1533 ई० में पुर्तगाली शासक जॉन तृतीय (John II) ने ब्राज़ील को 15 आनुवंशिक कप्तानियों (hereditary captaincies) में बाँट दिया। प्रत्येक कप्तानी का प्रमुख डोनाटेरियस (Donatarius) कहलाता था।

उसे विशाल शक्तियाँ प्रदान की गई थीं। उसे लोगों पर कर लगाने तथा उन्हें भूमि अनुदान देने का अधिकार दिया गया था। वे स्थानीय लोगों को गुलाम भी बना सकते थे। उनका मूल निवासियों के प्रति व्यवहार बहुत क्रूर था। 1540 के दशक में पुर्तगालियों ने ब्राजील में व्यापक पैमाने पर गन्ना उपजाने एवं वहाँ चीनी मिलें चलाने का कार्य शुरू किया। इस चीनी की यूरोप के बाजारों में बहुत माँग थी। अत: उन्हें इस व्यापार से बहुत लाभ होने लगा। पुर्तगाली इन चीनी मिलों में काम करने के लिए स्थानीय लोगों पर निर्भर थे।

इन लोगों की चीनी मिलों में काम करने की कोई दिलचस्पी न थी क्योंकि यह काम बहुत नीरस था। अत: पुर्तगालियों ने इन लोगों को गुलाम बना कर वहाँ काम करने के लिए बाध्य किया। पर्तगालियों के घोर अत्याचार से बचने के लिए इन लोगों ने अपने गाँव खाली कर दिए तथा जंगलों में जाकर शरण ली। अत: बहुत कम लोग गाँवों में बचे थे। अत: मिल मालिकों को अफ्रीका से गुलाम मंगवाने के लिए बाध्य होना पडा। स्पेनी उपनिवेशों-एजटेक साम्राज्य एवं इंका साम्राज्य-में स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत थी। वहाँ स्थानीय लोगों ने खेतों एवं खानों में काम करने का विरोध नहीं किया।

अतः स्पेनियों को वहाँ गुलामों की आवश्यकता नहीं पड़ी। ब्राजील में डोनाटेरियसों के क्रूर व्यवहार के कारण वहाँ के लोगों में पुर्तगाली प्रशासन के विरुद्ध विरोध बढ़ता जा रहा था। अतः 1549 ई० में पुर्तगाली शासक ने ब्राजील के शासन को सीधा अपने हाथों में लेने का निर्णय किया। इस उद्देश्य से ब्राज़ील में एक गवर्नर-जनरल को नियुक्त किया गया। उसे अपने सभी कार्यों के लिए राजा के प्रति उत्तरदायी बनाया गया। सैल्वाडोर (Salvador) को ब्राजील की राजधानी घोषित किया गया।

इस समय से जेसुइट पादरियों (Jesuit missionaries) ने ब्राज़ील जाना आरंभ कर दिया था। इन पादरियों ने दास प्रथा की कड़े शब्दों में आलोचना की। जेसुइट पादरी एंटोनियो वीइरा का कथन था, “जो भी आदमी दूसरों की स्वतंत्रता छीनता है और उस स्वतंत्रता को वापस लौटाने की क्षमता रखते हुए भी नहीं लौटाता, वह अवश्य ही महापाप का भागी होता है। इसके अतिरिक्त इन पादरियों ने वहाँ के मल निवासियों के साथ अच्छा बर्ताव किए जाने का पक्ष लिया। इन कारणों से यूरोपवासी इन जेसुइट पादरियों को पसंद नहीं करते थे। इन पादरियों ने ब्राज़ील में ईसाई धर्म का खूब प्रचार किया।

प्रश्न 6.
साम्राज्यवाद से क्या अभिप्राय है? साम्राज्यवाद के उत्थान के लिए कौन-से कारण उत्तरदायी थे?
उत्तर:
साम्राज्यवाद से तात्पर्य उस तीव्र इच्छा से है जिसके कारण एक शक्तिशाली देश राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से पिछडे हए किसी दूसरे देश पर बलपूर्वक अधिकार जमाने का प्रयास करता है। इतिहास साक्षी है कि प्राचीनकाल से ही राजाओं की इच्छा दूसरे प्रदेशों पर कब्जा करने की रही है। साम्राज्यवाद शब्द विश्व में पहली बार 16वीं शताब्दी में छपा था।

19वीं शताब्दी में साम्राज्वाद को एक नया रूप सामने आया। इस नवीन साम्राज्यवाद के पीछे राजनीति भावना की अपेक्षा आर्थिक भावना अधिक प्रबल थी। साम्राज्यवादी देश उनके नियंत्रण में आए देशों का खूब शोषण करते थे। साम्राज्यवाद को बढ़ावा देने में पुर्तगाल, स्पेन, इंग्लैंड, फ्रांस, रूस एवं जापान ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। 19वीं शताब्दी में सामाज्यवाद के प्रसार के लिए अनेक कारण उत्तरदायी थे। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है

1. कच्चे माल की आवश्यकता (Necessity for Raw Materials):
औद्योगीकरण के अधीन यूरोपियन देशों में बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना हुई। इन उद्योगों को चलाने हेतु कच्चे माल की अत्यधिक मात्रा में आवश्यकता थी। हर प्रकार का कच्चा माल देश के अंदर मिलना संभव न था। इसलिए यूरोपीय लोगों ने उन देशों के साथ मेल जोल बढ़ाना शुरू कर दिया था, जहां से उन्हें कच्चा माल अधिक मात्रा में मिल सकता था।

अधिक लाभ कमाने के लिए वे इन देशों से कच्चा माल काफ़ी सस्ते मूल्य पर खरीदते थे। आरंभ में इन यूरोपीय देशों के लोग व्यापारियों के रूप में एशिया तथा अफ्रीका के अनेक भागों में गए। परंतु बाद में उनकी कमजोर राजनैतिक स्थिति और पिछड़ेपन का लाभ उठा कर उन देशों पर अपना अधिकार कर लिया। इन स्थानों पर अधिकार करने हेतु इन देशों में परस्पर होड़ लग गई। इस प्रकार कच्चे माल की आवश्यकता ने साम्राज्यवाद को जन्म दिया।

2. नई मंडियों की खोज (The Search for New Markets):
यूरोप के देशों में औद्योगिक क्रांति के आने से बहुत-से नए और बड़े-बड़े कारखानों की स्थापना हुई। इन कारखानों में पहले से कहीं अधिक माल तैयार होने लगा। यह माल उस देश की आवश्यकताओं से कहीं अधिक होता था। अधिक लाभ कमाने के लिए और देश में मूल्य नियंत्रण रखने के लिए, इस माल को विदेशों में बेचना बहुत आवश्यक था।

इस माल को वे यूरोप के देशों में नहीं बेच सकते थे क्योंकि इनमें से बहुत-से देशों ने संरक्षण नीति को अपनाया हुआ था। इसके अधीन उन्होंने कानून पास करके विदेशों से तैयार माल खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसीलिए इन देशों ने अपना तैयार माल बेचने के लिए नई मंडियों की खोज शुरू कर दी। परिणामस्वरूप इन देशों ने एशिया तथा अफ्रीका से बहुत-से देशों पर अधिकार कर लिया। इस प्रकार साम्राज्यवाद की भावना को प्रोत्साहन मिला।

3. जनसंख्या में वृद्धि (Increase in Population):
19वीं शताब्दी से यूरोप के कुछ बड़े देशों में जनसंख्या में निरंतर वृद्धि हो रही थी। इन देशों में से इंग्लैंड, जर्मनी तथा फ्राँस प्रमुख थे। इस बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण लोगों को रोजगार देने तथा उन्हें बसाने की समस्या ने जटिल रूप धारण कर लिया था। इस समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए बड़े राष्ट्रों ने अतिरिक्त जनसंख्या को अपने अधीन उपनिवेशों में भेजना आरंभ कर दिया। ये लोग या तो प्रमुख प्रशासनिक एवं सैनिक पदों पर लग गए अथवा उन्होंने वहाँ अपने उद्योग स्थापित कर लिए। धीरे धीरे उन्होंने इन उपनिवेशों में अपना प्रभाव बढ़ा लिया।

4.ईसाई प्रचारक (Christian Missionaries):
ईसाई प्रचारकों ने भी साम्राज्यवाद के प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। इन प्रचारकों ने पिछड़े देशों में जा कर अपने धर्म का प्रचार किया। उन्होंने वहाँ के लोगों में फैले धार्मिक अंधविश्वासों को दूर करने का यत्न किया। इस प्रकार अनेक लोगों ने प्रभावित होकर उनके धर्म में शामिल होना आरंभ कर दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने धन का लालच देकर अनेक लोगों को अपने धर्म में शामिल करना शुरू कर दिया। इस प्रकार धीरे-धीरे उनका प्रभाव एशियाई और अफ्रीकी देशों में बढ़ना शुरू हो गया।

5. उच्चतम सभ्यता में विश्वास (Faith in Higher Civilization):
19वीं शताब्दी में यूरोप के अधिकाँश देशों में एक नई राष्ट्रीय जागृति का विकास हुआ। इस विकास के फलस्वरूप यूरोप के प्रमुख देश अपनी सभ्यता पर अधिक गर्व करने लग पड़े। उनके अनुसार केवल उनकी सभ्यता ही विश्व में विकसित सभ्यता थी। उन्होंने अपनी-अपनी सभ्यता का विकास अविकसित देशों में करना आवश्यक समझा। उनका कहना था कि “हीन जातियों को सभ्य बनाना श्रेष्ठ जातियों का कर्तव्य है।” अधिक-से-अधिक उपनिवेशों को अपने प्रभावाधीन लाने को वे अपने राष्ट्र के लिए सम्मान का चिह्न मानते थे।

6. अतिरिक्त पूँजी का लगाना (Investment of Extra Capital):
औद्योगिक प्रगति के फलस्वरूप यूरोपीय देशों के लोग बहुत धनवान् हो गए। इनके पास पूँजी की मात्रा बढ़ गई, परंतु इस समय ब्याज की दर कम होने के कारण वे पूँजी को बैंकों में रखना नहीं चाहते थे। वे उपनिवेशों में इस अतिरिक्त पूँजी को उद्योग स्थापित करने में लगाना चाहते थे।

अत: उन्होंने अधीनस्थ उपनिवेशों में उद्योग स्थापित किए। वहाँ का कच्चा माल सस्ते दाम पर लेकर निर्मित माल अधिक दामों पर बेचना आरंभ कर दिया। इस प्रकार अपनी पूँजी से अधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त करने हेतु उन्होंने अधीन उपनिवेशों में अधिक-से-अधिक कारखाने आदि स्थापित करके अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया।

7. देशों का पिछडापन (Backwardness of the Countries):
एशिया तथा अफ्रीका के अधिकाँश देश रोपियन देशों से अनेक पक्षों से पिछडे हए थे। उनके पास न तो आधनिक शस्त्र थे और न ही अच्छी प्रशिक्षित सेना। इसके अतिरिक्त उनमें राजनीतिक एकता का भी अभाव था। वे परस्पर लड़ते-झगड़ते रहते थे। इन कारणों से वे यूरोपियन देशों का मुकाबला न कर सके। अतः यूरोप के शक्तिशाली राष्ट्रों के लिए इन पिछड़े देशों पर अधिकार करना सुगम हो गया।

8. यातायात और संचार के साधन (Means of Transport and Communications) :
यातायात तथा संचार के साधनों के विकास ने साम्राज्यवाद की भावना को प्रोत्साहन दिया। भाप से चलने वाले जहाजों तथा रेलगाड़ियों ने एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा को सरल बना दिया। अब यूरोपीय देशों द्वारा उपनिवेशों के आंतरिक भागों से कच्चा माल प्राप्त करने तथा वहाँ अपने देश का बना माल बेचने का कार्य पहले से कहीं सुगम हो गया। तार के द्वारा दूर-दूर के स्थानों के साथ संपर्क संभव हो पाया। इस प्रकार यातायात और संचार के साधनों ने साम्राज्यवाद के विस्तार कार्य को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सुगम बना दिया।

प्रश्न 7.
अरावाक कौन थे? उनके जीवन की मुख्य विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अरावाकी कबीले के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे द्वीप समूहों जिन्हें आजकल बहामा (Bahamas) कहा जाता है एवं वृहत्तर एंटिलीज (Greater Antilles) में रहते थे। वे अरावाकी लुकायो (Arawakian Lucayos) के नाम से भी जाने जाते थे। वे बहुत शाँतिप्रिय लोग थे। वे लड़ने की अपेक्षा बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे। उन्हें कैरिब (Caribs) नामक एक खूखार कबीले ने दक्षिण अथवा लघु ऐंटिलीज (Lesser Antilles) से सहजता से खदेड़ दिया था।

अरावाकी लोग अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनका न तो कोई राजा था तथा न ही कोई सेना। चर्च का भी उनके जीवन पर कोई नियंत्रण न था। इस प्रकार वे एक स्वतंत्र जीवन व्यतीत करते थे। उनमें बहु विवाह प्रथा प्रचलित थी। वे स्त्रियों का बहुत सम्मान करते थे। वे कुशल नौका निर्माता थे। वे नौकाओं में बैठकर खुले समुद्र की यात्रा करते थे एवं मछलियाँ पकड़ते थे। उनके प्रमुख शस्त्र तीर एवं कमान थे। इनके द्वारा वे पशुओं का शिकार करते थे। इनके अतिरिक्त वे खेती का धंधा भी करते थे।

उनकी प्रमुख फ़सलें मक्का (corn), मीठे आलू (sweet potatoes), कंद-मूल (tubers) एवं कसावा (cassava) थे। वे खेती का अधिक विस्तार नहीं कर सके क्योंकि उनके पास घने जंगलों की सफाई करने के लिए लोहे की कुल्हाड़ी नहीं थी। अरावाकी गाँवों में रहते थे। उनके घर साधारण प्रकार के थे। यद्यपि वे सोने के गहने पहनते थे किंतु वे यूरोपियों की तरह सोने को उतना महत्त्व नहीं देते थे। यदि कोई यूरोपीय उन्हें सोने के बदले काँच के मनके (glass beads) दे देता था तो वे बहुत प्रसन्नता से इन्हें स्वीकार करते थे।

इसका कारण यह था कि काँच का मनका उन्हें अधिक सुंदर लगता था। वे बुनाई की कला में बहुत निपुण थे। उनके हैमक (Hammock) नामक झूले को देखकर यूरोपीय भी दंग रह गए थे। अरावाकियों का धर्म में अटूट विश्वास था। वे जीववादी (Animists) थे। उनका विश्वास था कि निर्जीव वस्तुओं-पत्थर एवं पेड़ आदि में भी जीवन होता है। वे जादू-टोनों में भी विश्वास रखते थे। शमन लोग (Shamans) लोगों के कष्टों को दूर करने में प्रमुख भूमिका निभाते थे।

अरावाकी बहुत उदार थे। 1492 ई० में जब क्रिस्टोफर कोलंबस (Cristopher Columbus) बहामा द्वीप में पहुँचा तो अरावाकियों ने उसका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। कोलंबस उनकी उदारता से बहुत प्रभावित हुआ था। इस बारे में उसने अपने रोज़नामचे (log-book) में लिखा, “वे इतने ज्यादा उदार एवं सरल स्वभाव के लोग हैं कि अपना सब कुछ देने को तैयार हैं। वे कभी इंकार नहीं करते; बल्कि वे सदा बाँटने को तत्पर रहते हैं और इतना अधिक प्यार जताते हैं कि मानो उनका प्यार भरा कलेजा ही बाहर निकल आएगा।’
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 8 iMG 1
स्पेनी प्रशासन के अधीन अरावाकियों पर घोर अत्याचार किए गए। उन्हें सोने एवं चाँदी की खानों में कार्य करने के लिए बाध्य किया गया। इस कारण अरावाकी उनके विरुद्ध हो गए। स्पेनियों ने उनका क्रूरता से दमन किया। इसके अतिरिक्त यूरोपियों के आगमन से बहामा में अनेक भयंकर बीमारियाँ फैल गईं। इनके चलते स्पेनियों के संपर्क में आने के बाद 25 वर्ष के अंदर ही अरावाकी सभ्यता लुप्त हो गई। निस्संदेह यह एक दुःखदायी अध्याय था।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 8.
एजटेक सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं ? इस सभ्यता के पतन के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर:
एजटेक एक युद्धप्रिय एवं यायावर कबीला था। वे उत्तर मैक्सिको के रहने वाले थे। वे भोजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते थे। एजटेकों ने मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में 12वीं शताब्दी में बसने का निर्णय किया। मैक्सिको नाम एजटेकों के एक प्रमुख देवता मैक्सिली (Mexitli) के नाम पर पड़ा था।

1. एटेक साम्राज्य (Aztec Empire):
एजटेकों ने एक शक्तिशाली साम्राज्य की स्थापना की थी। इसकी सीमाएं 2 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई थीं। 15वीं शताब्दी में एजटेकों की शक्ति अपने शिखर पर थी। उस समय एजटेक साम्राज्य में 38 प्राँत थे। प्रत्येक प्रांत का मुखिया एक सैनिक गवर्नर होता था। उसकी सहायता के लिए एक सैनिक दल होता था। ये सैनिक लोगों से कर वसूल करते थे तथा गैर-एजटेक लोगों पर घोर अत्याचार करते थे। जॉन ए० गैरटी एवं पीटर गे के अनुसार, “एजटेक खन के प्यासे लोग थे तथा उनका साम्राज्य एक राजनीतिक राज्य की अपेक्षा सैनिक राज्य अधिक था।”

2. सम्राट की स्थिति (Position of the Emperor):
समाज में सम्राट् का स्थान सर्वोच्च था। उसे निरंकुश शक्तियाँ प्राप्त थीं। उसके मुख से निकला प्रत्येक शब्द कानून समझा जाता था। कोई भी उसकी आज्ञा का उल्लंघन करने का साहस नहीं करता था। वह भव्य महलों में निवास करता था। उसके दरबार में विशेष नियमों का पालन किया जाता था। प्रजा उसकी देवता समान उपासना करती थी। उसे पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि समझा जाता था। राजा का चुनाव अभिजात वर्ग द्वारा किया जाता था।

3. कला (Art):
एजटेक शासक महान् कला प्रेमी थे। पाँचवें एज़टेक सम्राट् मोटेजुमा प्रथम (Montezuma I) ने 1325 ई० में टेनोस्टिटलान (Tenochtitlan) नामक राजधानी का निर्माण करवाया। इसका मैक्सिको झील के मध्य निर्माण किया गया था। इसे भव्य महलों, मंदिरों एवं उपवनों से सुसज्जित किया गया था। इस शहर की भव्यता को देखकर बाद में आने वाले स्पेनवासी भी चकित रह गए थे। 16वीं शताब्दी में इसकी गणना अमरीका के सबसे बड़े शहरों में की जाती थी।

4. श्रेणियों (Classes):
एज़टेक समाज श्रेणीबद्ध था। इसमें अभिजात वर्ग (aristocracy) को सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। इसमें शाही परिवार के सदस्य, पुरोहित, सैनिक अधिकारी एवं कुछ धनी व्यापारी सम्मिलित थे। उन्हें राज्य के महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जाता था। वे भव्य महलों में निवास करते थे। उन्हें अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे।

समाज में उनकी बहुत प्रतिष्ठा थी। व्यापारियों को सरकारी राजदूतों एवं गुप्तचरों के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाता था। समाज में प्रतिभाशाली शिल्पियों, चिकित्सकों एवं अध्यापकों को भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। समाज में सबसे निम्न स्थान दासों का था। उनकी स्थिति अत्यंत शोचनीय थी। युद्धबंदियों को दास बना लिया जाता था। गरीब लोग भी विवश होकर अपने बच्चों को दासों के रूप में बेच देते थे।

5. व्यवसाय (Occupations):
एज़टेक लोग विभिन्न प्रकार के व्यवसाय करते थे। उनका मुख्य व्यवसाय कृषि था। क्योंकि एजटेक लोगों के पास भूमि की कमी थी इसलिए उन्होंने एक विशेष ढंग को अपनाया। वे सरकंडे (reed) की चटाइयाँ (mats) बुनकर उन्हें मिट्टी एवं पत्तों से ढक कर मैक्सिको झील में कृत्रिम टापू (artificial islands) बना लेते थे।

इन्हें चिनाम्पा (chinampas) कहा जाता था। इस भूमि पर स्वामित्व किसी व्यक्ति विशेष का नहीं अपितु कुल का होता था। यहाँ की प्रमुख फ़सलें मक्का (corn), फलियाँ (beans), कद्दु (pumpkins), कसावा (manioc root), आलू (potatoes) आदि थीं। कृषि के अतिरिक्त एजटेक लोग वस्त्र बनाने, गहने बनाने, मिट्टी के बर्तन बनाने तथा धातुओं के औजार बनाने का कार्य भी करते थे।

6. शिक्षा (Education):
एजटेक लोग शिक्षा पर विशेष बल देते थे। अभिजात वर्ग के बच्चे जिन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते थे उन्हें कालमेकाक (Calmecac) कहा जाता था। यहाँ उन्हें पुरोहित एवं योद्धा बनने का प्रशिक्षण दिया जाता था। उस समय एजटेक समाज में इन दोनों व्यवसायों की विशेष माँग थी। सामान्य लोगों के बच्चे जिन स्कूलों में पढ़ते थे उन्हें तेपोकल्ली (Telpochcalli) कहा जाता था। यहाँ लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण, कृषि एवं व्यापार करना सिखाया जाता था। उन्हें धर्म, उत्सवी गीतों एवं इतिहास संबंधी शिक्षा भी दी जाती थी। लड़कियों को घरेलू कार्यों की एवं नैतिक शिक्षा दी जाती थी।

7. स्त्रियों की स्थिति (Position of women):
एजटेक समाज में स्त्रियों की दशा अच्छी थी। उन्हें शिक्षा का अधिकार प्राप्त था। कुछ स्त्रियाँ पुरोहित का कार्य करती थीं। इस व्यवसाय को समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था। कुछ स्त्रियाँ पुरुषों के साथ कृषि कार्य करती थीं। कुछ स्त्रियाँ दुकानदारी का कार्य भी करती थीं। अधिकांश स्त्रियाँ घरेलू जीवन व्यतीत करती थीं। उस समय लड़कियों का विवाह प्रायः 16 वर्ष की आयु में कर दिया जाता था। विवाह के समय बहुत जश्न मनाया जाता था। उस समय लड़कियों को दहेज देने की प्रथा प्रचलित थी।

8. धर्म (Religion):
एजटेक लोग अनेक देवी-देवताओं की उपासना करते थे। उनका पंचांग (calendar) 18 माह में विभाजित था। प्रत्येक माह किसी विशेष देवी-देवता को समर्पित था। सूर्य देवता उनका सबसे प्रमुख देवता था। वह विश्व की सभी घटनाओं की जानकारी रखता था तथा पापियों को दंड देता था। युद्ध देवता उनका दूसरा महत्त्वपूर्ण देवता था।

युद्ध में विजय अथवा पराजय उसकी कृपा पर निर्भर करती थी। अन्न देवी (corn goddess) उनकी प्रमुख देवी थी। उसे सभी देवताओं की जननी समझा जाता था। इन देवी-देवताओं की स्मृति में विशाल एवं भव्य मंदिरों का निर्माण किया जाता था। इन मंदिरों में इन देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जाती थीं। इन देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के उद्देश्य से प्रति वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की बलियाँ दी जाती थीं। एजटेक . लोग मृत्यु के पश्चात् जीवन में विश्वास रखते थे। उनमें अनेक प्रकार के अंध-विश्वास भी प्रचलित थे।

9. पतन (Decline):
1519 ई० में स्पेन के हरनेडो कोर्टस (Hernando Cortes) ने एज़टेक साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया। उसने दो वर्षों के भीतर ही संपूर्ण एजटेक सभ्यता को रौंद डाला। एज़टेक साम्राज्य का इतनी शीघ्र पतन क्यों हो गया इसके लिए अनेक कारण उत्तरदायी थे। सर्वप्रथम, एजटेक शासकों ने लोगों पर भारी कर लगाए थे। इस कारण उनमें भारी असंतोष था। दूसरा, एज़टेक शासकों की लगातार लड़ाइयों के कारण सैनिक भी ऊब चुके थे।

तीसरा, एज़टेक शासकों ने जिन नवीन क्षेत्रों को अपने अधीन किया वहाँ के लोगों पर घोर अत्याचार किए। इस कारण उनमें घोर असंतोष था। चौथा, एजटेक साम्राज्य में रोजाना बड़ी संख्या में युद्धबंदियों एवं गैर एज़टेक लोगों को बलि चढ़ा दिया जाता था। इस कारण लोग ऐसे अत्याचारी शासन का अंत करना चाहते थे। अतः इन लोगों ने हरनेडो कोर्टेस के आक्रमण के समय उसकी यथासंभव सहायता की। अतः ऐसे साम्राज्य का डूबना कोई हैरानी की बात नहीं थी।

प्रश्न 9.
इंका सभ्यता के बारे में आप क्या जानते हैं ? इस सभ्यता के पतन के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर:
इंका सभ्यता दक्षिण अमरीका की सबसे प्रसिद्ध एवं शक्तिशाली सभ्यता थी। इस सभ्यता की स्थापना 12वीं शताब्दी में मैंको कपाक (Manco Capac) ने पेरू (Peru) में की थी। उसने कुजको (Cuzco) को अपनी राजधानी घोषित किया। यह सभ्यता 15वीं शताब्दी में अपनी उन्नति के शिखर पर थी। इस सभ्यता का सबसे शाक्तशाली शासक पचकुटी इंका (Pachacuti Inca) था। वह नौवां इंका शासक था। वह 1438 ई० में सिंहासन पर बैठा था। उसके शासनकाल में इंका साम्राज्य की सीमाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इंका साम्राज्य उत्तर में इक्वेडोर (Ecuador) से लेकर दक्षिण में चिली (Chile) तक फैला हुआ था। इसका क्षेत्रफल 3000 मील था तथा इसकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक थी।

1. सम्राट् की स्थिति (Position of the Emperor):
इंका साम्राज्य में सम्राट् की स्थिति सर्वोच्च थी। उसे सूर्य देवता का पुत्र समझा जाता था। राज्य के सभी लोग अपने सम्राट् की देवता समान उपासना करते थे। सम्राट को अनेक शक्तियाँ प्राप्त थीं। उसके मुख से निकला प्रत्येक शब्द कानून समझा जाता था। सम्राट् की आज्ञा का उल्लंघन करना मृत्यु को निमंत्रण देना था। इंका सम्राट् अताहुआल्पा (Atahualpa) का कथन था कि, “मेरे साम्राज्य में मेरी इच्छा के बिना न तो कोई पक्षी उड़ सकता है तथा न ही कोई पत्ता हिल सकता है।

2. प्रशासन (Administration):
इंका शासक कुशल प्रशासक थे। उनके प्रशासन का मुख्य उद्देश्य लोक भलाई था। इंका शासकों ने प्रशासन की कुशलता के उद्देश्य से इसे अनेक प्रांतों में विभाजित किया था। प्रत्येक प्रांत का मुखिया एक गवर्नर होता था। वह अभिजात वर्ग से संबंधित होता था। वह अपने अधीन प्रांत में कानून एवं व्यवस्था के लिए उत्तरदायी होता था। उसकी सहायता के लिए कुछ सैनिक एवं अन्य अधिकारी होते थे। इंका साम्राज्य में अनेक कबीले थे। प्रत्येक कबीला स्वतंत्र रूप से वरिष्ठों की सभा (Council of Elders) द्वारा शासित होता था।

इनका चुनाव कबीले के सदस्यों द्वारा लोकतांत्रिक ढंग से किया जाता था। प्रत्येक कबीला अपने कार्यों के लिए शासक के प्रति उत्तरदायी था। शासक उनके कार्यों पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण रखता था। निस्संदेह इंका शासकों का प्रशासन बहुत उच्च कोटि का था। प्रसिद्ध इतिहासकार पी० एस० फ्राई के कथनानुसार, “इंका ने अपने विशाल साम्राज्य का प्रशासन एक कुशल संगठन द्वारा चलाया जिसका मुकाबला प्राचीन काल रोम के साथ किया जा सकता है।”

3. भवन निर्माण (Architecture):
इंका सभ्यता के लोग महान् भवन निर्माता थे। कुजको (Cuzco) एवं माचू-पिच्चू (Machu-Picchu) नामक शहरों में बने उनके भव्य महल, किले, मंदिर एवं अन्य भवन उनकी उच्च कोटि की भवन निर्माण कला को दर्शाते हैं। इन भवनों की दीवारों को बनाते समय वे विशाल पत्थरों का प्रयोग करते थे। इनमें से कुछ पत्थरों का वजन 100 टन से भी अधिक तक होता था। इन पत्थरों को वे मजदूरों एवं रस्सियों के सहयोग से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते थे। इन पत्थरों को जो कि वास्तव में बड़ी चट्टानें होती थीं बहुत बारीकी से तराशा जाता था।

इन पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए इंका मिस्त्री किसी गारे अथवा सीमेंट का प्रयोग नहीं करते थे। इसके बावजूद उनके द्वारा बनवाए गए भवन बहुत मज़बूत होते थे। इन भवनों को शल्क पद्धति (flaking) द्वारा सुंदर बनाया जाता था। भवनों के अतिरिक्त इंका लोगों ने पहाड़ों के मध्य संपूर्ण साम्राज्य में सड़कें, पुल एवं सुरंगें बनाईं। इनसे उनके इंजीनियरिंग कौशल का पता चलता है। प्रसिद्ध इतिहासकार जे० एच० हाल का यह कथन ठीक है कि, “इंका भवन निर्माण कला के शिखरों को नई दुनिया में भी नहीं छुआ जा सका है।”

4. विभिन्न श्रेणियाँ (Various Classes):
इंका समाज विभिन्न श्रेणियों में विभाजित था। समाज में सर्वोच्च स्थान सम्राट् को प्राप्त था। वह भव्य महलों में रहता था। वह बहुमूल्य वस्त्र पहनता था। उसकी देखभाल के लिए बड़ी संख्या में नौकर होते थे। उसके मनोरंजन के लिए बड़ी संख्या में रखैलें (concubines) भी होती थीं। सम्राट् के पश्चात् दूसरा स्थान कुलीनों (nobles) एवं पुरोहितों (priests) को प्राप्त था।

उन्हें अनेक विशेषाधिकार प्राप्त थे। वे एक समृद्ध जीवन व्यतीत करते थे। शिक्षक, डॉक्टर एवं सैनिक मध्य वर्ग से संबंधित थे। उनका जीवन निर्वाह भी सुगमता से हो जाता था। किसान एवं दस्तकार साधारण वर्ग से संबंधित थे। उन्हें अपने जीवन निर्वाह के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। समाज में सबसे निम्न स्थान दासों को प्राप्त था। उनका जीवन जानवरों से भी बदतर था। ई० एम० बर्नस एवं अन्य के शब्दों में, “इंका समाज मानव समुदायों में पाए जाने वाले सबसे कठोर समाजों में से एक था।”

5. स्त्रियों की स्थिति (Position of Women):
समाज में स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी। उनका परिवार में पूर्ण सम्मान किया जाता था। उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार दिया गया था। वे अपना पति चुनने के लिए भी स्वतंत्र थीं। उनमें बाल विवाह की प्रथा प्रचलित नहीं थी। विधवा को दुबारा विवाह करने की अनुमति थी। अधिकाँश स्त्रियाँ घरेलू होती थीं। कुछ स्त्रियाँ पुरोहित का कार्य करती थीं। उस समय की स्त्रियाँ त्योहारों में बढ़ चढ़ कर भाग लेती थीं।

6. शिक्षा (Education):
इंका समाज में शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया जाता था। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूल भेजा जाता था। लड़कों को प्रायः सैनिक एवं पुरोहित बनने संबंधी शिक्षा दी जाती थी। अधिकाँश लड़कियों को घरेलू कार्यों संबंधी शिक्षा दी जाती थी। कुछ लड़कियाँ पुरोहित संबंधी प्रशिक्षण ग्रहण करती थीं। उस समय विद्यार्थियों को मौखिक (oral) शिक्षा दी जाती थी।

इसका कारण यह था कि इंका समाज में कोई लेखन प्रणाली प्रचलित नहीं थी। वे अपना हिसाब क्विपु (quipu) प्रणाली से रखते थे। इससे चीजों को स्मरण रखने में मदद मिलती थी। इसमें एक डंडा होता था जिस पर विभिन्न रंगों की रस्सियों से गाँठ बाँधी जाती थी। प्रत्येक गाँठ एक किस्म का संकेत होती थी जिससे उस वस्तु का अनुमान लगाया जाता था। इंका लोगों की प्रशासनिक भाषा क्वेचुआ (Quechua) थी।

7. विभिन्न व्यवसाय (Various Occupations):
इंका समाज में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय प्रचलित थे। उस समय के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। इसे इंका सभ्यता का आधार माना जाता था। उस समय पहाड़ों में सीढ़ीदार खेत (terraces) बनाए जाते थे। इन खेतों की सिंचाई के लिए नहरें बनाई जाती थीं। उनकी प्रमुख फ़सलें मक्का (corn) एवं आलू (potatoes) थीं।

उस समय कुछ लोग पशुपालन का कार्य करते थे। वे लामा (Ilama) तथा अल्पाका (Alpaca) नामक पशुओं को पालते थे। इनसे वे भार ढोने का कार्य करते थे। इनसे ऊन प्राप्त की जाती थी तथा इनका माँस खाया जाता था। इनके अतिरिक्त उस समय वस्त्र उद्योग, मिट्टी के बर्तन बनाने का उद्योग एवं सोने, चाँदी एवं ताँबे के आभूषण बनाने के उद्योग भी प्रसिद्ध थे। कुछ लोग खानों से धातु निकालने का कार्य भी करते थे।

8. धर्म (Religion):
इंका लोगों का जीवन धर्म से बहुत प्रभावित था। यद्यपि वे अनेक देवी-देवताओं में विश्वास रखते थे किंतु सूर्य उनका प्रमुख देवता था। उनका विश्वास था कि उनका प्रथम शासक मैंको कपाक सूर्य का पुत्र था। अतः इंका शासकों ने सूर्य देवता की स्मृति में साम्राज्य भर में अनेक भव्य एवं विशाल मंदिरों का निर्माण करवाया। इन मंदिरों को सोने से सजाया जाता था।

इन मंदिरों में इंका के मृत शासकों के शवों को रखा जाता था। इन मंदिरों में उपासना के लिए बड़ी संख्या में पुरोहितों को नियुक्त किया जाता था। सर्य देवता को प्रसन्न करने के लिए जानवरों की एवं कभी-कभी मनुष्य की बलियाँ दी जाती थीं। विशेष अवसरों पर राजा स्वयं विशेष धूम-धड़के के साथ इन मंदिरों में उपासना के लिए आता था। इंका लोग मृत्यु के पश्चात् जीवन में विश्वास रखते थे। उनमें अनेक प्रकार के अंध-विश्वास भी प्रचलित थे।

9. पतन (Decline):
इंका सभ्यता के पतन के लिए अनेक कारण उत्तरदायी थे। प्रथम, 1532 ई० में स्पेनी आक्रमण से पूर्व इंका साम्राज्य कमज़ोर हो गया था। इसका कारण सिंहासन प्राप्ति के लिए वहाँ अताहुआल्पा (Atahualpa) एवं उसके भाई हुआस्कर (Huascar) में गृह युद्ध आरंभ हो गया था। अताहुआल्पा ने सिंहासन प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की तथा उसने अपने भाई हुआस्कर को बंदी बना लिया था। दूसरा, अताहुआल्पा एक योग्य शासक प्रमाणित न हुआ। वह विशाल सेना के होते हुए भी स्पेनी आक्रमणकारियों का सामना न कर सका।

तीसरा, फ्राँसिस्को पिज़ारो (Francisco Pizarro) जिसके नेतृत्व में स्पेनी सैनिकों ने इंका साम्राज्य पर आक्रमण किया था बहुत अनुभवी था। उसने बहुत चतुराई से अताहुआल्पा को बंदी बना लिया था। चौथा, यूरोपियों के आगमन के कारण इंका साम्राज्य में अनेक बीमारियाँ फैल गई थीं। इस कारण वहाँ बड़ी संख्या में लोग मृत्यु का शिकार हो गए थे। पाँचवां, इंका लोग अपने तीरों एवं तलवारों से स्पेनी बंदूकों एवं तोपों का सामना करने में विफल रहे । अतः उनकी सभ्यता का लोप हो गया।

प्रश्न 10.
माया सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। इस सभ्यता का पतनं क्यों हुआ?
उत्तर:
माया सभ्यता मैक्सिको की एक महत्त्वपूर्ण सभ्यता थी। यह सभ्यता 300 ई० से 900 ई० के दौरान अपनी उन्नति के शिखर पर पहुँची । इस सभ्यता के महत्त्वपूर्ण केंद्र मैकि महत्त्वपूर्ण केंद्र मैक्सिको (Maxico), ग्वातेमाला (Guatemala), होंडुरास (Honduras) एवं अल-सैल्वाडोर (El Salvador) में थे। यद्यपि माया सभ्यता का अंत 16वीं शताब्दी में हुआ किंतु इसका पतन 11वीं शताब्दी से आरंभ हो गया था।

1. माया शासन पद्धति (Maya Polity):
माया सभ्यता की शासन पद्धति के संबंध में हमें कोई विशेष जानकारी प्राप्त नहीं है। माया शासक सामान्यतः पुरुष हुआ करते थे। कभी-कभी रानियाँ भी शासन करती थीं। राजा का पद पैतृक होता था। उसकी मृत्यु के पश्चात् उसका बड़ा पुत्र सिंहासन पर बैठता था। राजा का बहादुर होना अनिवार्य था।

एक बहादुर राजा ही साम्राज्य का विस्तार एवं उसकी सुरक्षा कर सकता था। राजा के सिंहासन पर बैठते समय देवताओं को प्रसन्न करने के उद्देश्य से मानव बलि दी जाती थी। राजा अभिजात वर्ग (nobility) एवं पुराहितों (priests) की सहायता से शासन चलाता था। राजा भव्य महलों में रहता था। उसकी सेवा में बड़ी संख्या में लोग, दास एवं दासियाँ होते थे।

2. श्रेणियाँ (Classes):
माया समाज अनेक श्रेणियों में विभाजित था। समाज में सर्वोच्च स्थान पुरोहितों को प्राप्त था। राजा उनके परामर्श के बिना कोई कार्य नहीं करता था। समाज में दूसरा स्थान अभिजात वर्ग को प्राप्त था। अभिजात वर्ग के लोग राज्य के महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त थे। पुरोहित एवं अभिजात वर्ग के लोग बहुत बहुमूल्य वस्त्र पहनते थे तथा वे बहुत ऐश्वर्यपूर्ण जीवन व्यतीत करते थे।

उनकी सेवा में भी अनेक दास-दासियाँ होते थे। समाज की अधिकाँश जनसंख्या किसान वर्ग से संबंधित थी। उन्हें अपने जीवन निर्वाह के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। समाज में सबसे निम्न स्थान दासों को प्राप्त था। उनकी दशा अत्यंत दयनीय थी।

3. कृषि (Agriculture):
माया लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। उन्होंने पत्थर की कुल्हाड़ी (stone axe) तथा आग के द्वारा अनेक घने जंगलों का सफाया किया। इस भूमि को उन्होंने कृषि योग्य बनाया। उनके कृषि करने के ढंग उन्नत एवं कुशलतापूर्वक थे। अतः उस समय फ़सलों की भरपूर पैदावार होती थी। माया किसान सबसे अधिक मक्का (corn) का उत्पादन करते थे। इसका कारण यह था कि माया लोगों के अनेक धार्मिक क्रियाकलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने एवं काटने से जुड़े होते थे। इसके अतिरिक्त वे सेम (beans), आलू (potatoes), कपास (cotton) आदि फ़सलों का उत्पादन करते थे।

4. धर्म (Religion):
माया लोगों का धर्म में अटूट विश्वास था। वे अनेक देवी-देवताओं की उपासना करते थे। उनके दो प्रमुख देवता सूर्य देवता एवं मक्का देवता थे। इनके अतिरिक्त वे अग्नि देवता, वन देवता, भूमि देवता एवं वर्षा देवता आदि की भी उपासना करते थे। वे अपने देवी-देवताओं की स्मृति में भव्य मंदिरों एवं सुंदर मूर्तियों का निर्माण करते थे।

इन मंदिरों की देखभाल के लिए बड़ी संख्या में पुरोहितों को नियुक्त किया जाता था। माया लोग अपने देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पशुओं की बलियाँ देते थे। कुछ विशेष अवसरों पर मानव बलियाँ भी दी जाती थीं। माया लोग मृत्यु के पश्चात् जीवन में विश्वास रखते थे। उनमें अनेक प्रकार के अंध विश्वास भी प्रचलित थे।

5. कला (Art):
माया लोग कला के महान् प्रेमी थे। उन्होंने यूनानी एवं रोमनों की तरह भवन निर्माण कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने अनेक भव्य नगरों, महलों, पिरामिडों, मंदिरों एवं वेधशालाओं (observatories) का निर्माण करवाया। माया लोगों ने जिन नगरों का निर्माण किया उनमें टिक्ल (Tikal), कोपान (Copan), पालेंक (Palenque), कोबा (Coba), युकाटान (Ukatan), चिचेन इटजा (Chichen Itza), बोनामपाक (Bonamapak), कलाक्मुल (Kalakmul) तथा उक्समल (Uxmal) आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

इन नगरों को अनेक भव्य भवनों, उद्यानों एवं फव्वारों से सुसज्जित किया गया था। माया कलाकारों द्वारा बनाए गए महलों को देखकर व्यक्ति चकित रह जाता है। ये महल बहुत विशाल एवं सुंदर थे। माया लोगों ने बहुत विशाल पिरामिड (pyramids) बनवाए। इन पिरामिडों के ऊपर मंदिरों का निर्माण किया जाता था। इन मंदिरों में अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जाती थीं। ये मूर्तियाँ देखने में बिल्कुल सजीव लगती थीं।

माया कलाकारों ने जिन मंदिरों का निर्माण किया उनमें सर्वाधिक प्रसिद्ध आठवीं शताब्दी ग्वातेमाला में निर्मित टिक्ल मंदिर था। यह मंदिर 229 फुट ऊँचा था। इस मंदिर में बनी मूर्तियाँ एवं चित्र इसकी शान में चार चाँद लगाते थे। प्रसिद्ध इतिहासकार टी० एच० वालबैंक के अनुसार, “कला के क्षेत्र में माया भवन निर्माण कला एवं मर्ति कला ने अद्वितीय उन्नति की।”

6. पंचांग (Calendar):
माया सभ्यता ने पंचांग के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण देन दी। उन्होंने दो प्रकार के पंचांग तैयार किए। प्रथम पंचांग धर्म-निरपेक्ष था। इसमें सौर पंचांग की तरह वर्ष में 365 दिन होते थे। उनके वर्ष में 18 माह होते थे। प्रत्येक माह में 20 दिन होते थे। शेष पाँच दिनों को दुर्भाग्यपूर्ण समझा जाता था। माया लोगों का दूसरा पंचांग धार्मिक था। इसमें वर्ष में 260 दिन होते थे। इसे पुराहितों के लिए धार्मिक कर्मकांडों के लिए तैयार किया गया था।

7. लिपि (Script):
माया सभ्यता की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि उनकी लिपि थी। यह अमरीका की प्रथम सभ्यता थी जिसने सर्वप्रथम लिपि का विकास किया। उनकी लिपि चित्रात्मक (pictographic) थी। माया लेखन के उदाहरण प्रस्तर पट्टों पर उत्कीर्ण अभिलेखों (carved inscriptions on the stelae) एवं पुस्तकों जिन्हें कोडिसेज (codices) कहा जाता था में पाए गए हैं। इनमें माया शासकों से संबंधित महत्त्वपूर्ण घटनाओं एवं खगोल विद्या (astronomical information) संबंधी सूचनाएँ दर्ज की जाती थीं। दुर्भाग्यवश इस लिपि को अभी तक पूर्णतः पढ़ने में सफलता प्राप्त नहीं की जा सकी है।

8. पतन (Downfall):
माया सभ्यता का पतन 11वीं शताब्दी में आरंभ हो गया था। माया सभ्यता का पतन क्यों हुआ इस संबंध में इतिहासकारों में मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों का विचार है कि माया सभ्यता का अंत वहाँ आने वाले भयंकर भूकंपों एवं समुद्री तूफानों के कारण हुआ। कुछ अन्य के विचारों के अनुसार माया सभ्यता का विनाश वहाँ फैलने वाली भयंकर बीमारियों के कारण हुआ। इस कारण बड़ी संख्या में लोग मृत्यु का शिकार हो गए थे। कुछ इतिहासकारों का विचार है कि माया सभ्यता का अंत वहाँ आए जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ।

वहाँ काफी लंबे समय तक सूखा पड़ा। इस कारण फ़सलें नष्ट हो गई एवं लोग भूखे मर गए। कुछ इतिहासकारों का कथन है कि माया सभ्यता के पतन में वहाँ होने वाले किसान विद्रोहों ने प्रमुख भूमिका निभाई। अधिकाँश इतिहासकारों का मानना है कि माया सभ्यता का अंत 1519 ई० में हरनेंडो कोर्टेस के आक्रमण के कारण हुआ। उसने 1521 ई० में मैक्सिको को अपने अधीन कर लिया था। शीघ्र ही उसने ग्वातेमाला, निकारागुआ एवं होंडुरास पर कब्जा करके माया सभ्यता का अंत कर दिया।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 11.
ओलाउदाह एक्वियानो कौन था? उसकी यात्रा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
अथवा
गुलाम के रूप में पकड़ कर ब्राज़ील ले जाए गए ग्यारह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करें।
उत्तर:
ओलाउदाह एक्वियानो नाईजीरिया (Nigeria) का रहने वाला था। 11 वर्ष की उम्र में उसे गुलाम बना लिया गया था। उसे गुलाम के रूप में ब्राज़ील में बेच दिया गया। वहाँ से उसे इंग्लैंड के एक कप्तान ने खरीद लिया। 1766 ई० में उसने अपने स्वामी से मुक्ति प्राप्त कर ली। इसके पश्चात् उसने विभिन्न देशों में दासता के विरुद्ध प्रचार किया। 1789 ई० में उसकी आत्मकथा दि इनटरेस्टिंग नैरेटिव ऑफ़ दि लाइफ ऑफ़ ओलाउदाह एक्वियानो (The Interesting Narrative of the Life of Olaudah Equiano) प्रकाशित हुई।

यह पुस्तक शीघ्र ही संपूर्ण विश्व में बहुत लोकप्रिय हुई तथा इसका विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद किया गया। इस पुस्तक में ओलाउदाह एक्वियानो ने एक गुलाम के रूप में अपनी यात्रा तथा गुलामों के जीवन के बारे में विस्तृत प्रकाश डाला है। ओलाउदाह एक्वियानो ने अपनी आत्मकथा (autobiography) में लिखा है कि उसका जन्म 1745 ई० में नाईजीरिया में हुआ था। मैंने कभी अंग्रेज़ों अथवा समुद्र के बारे में नहीं सुना था।

एक दिन जब मेरे माता-पिता खेतों में कार्य करने गए थे तो उस दिन दो पुरुषों एवं एक स्त्री जो कि अफ्रीकी थे ने मेरे घर पर धावा बोल दिया। वे मुझे तथा मेरी छोटी बहन को बंदी बना कर ले गए। उस समय मेरी आयु 11 वर्ष थी। आगे आने वाले 6 अथवा 7 महीनों के दौरान मुझे कई अफ्रीकी मालिकों को बेचा जाता रहा। हमें बंदरगाह की ओर पैदल ले जाया जाता रहा। मेरे साथ बहत से अन्य लोग थे जिन्हें गुलाम बनाया गया था। इन सभी को जंजीरों से जकड कर पंक्ति के रूप में ले जाया जाता था।

जिन लोगों ने हमें खरीदा था वे हमारे साथ-साथ चलते थे। अधिक शोर मचाने वालों अथवा भागने का प्रयास करने वालों की हंटर से ज़बरदस्त पिटाई की जाती थी। एक शाम को हम बंदरगाह के किनारे पहुंच गए। मुझे बहुत से अन्य गुलामों के साथ बंदरगाह पर खड़े एक जहाज में दूंस दिया गया। जहाज़ में सवार नाविकों की डरावनी शकलें देखकर मैं काँप गया। मुझे लगा कि मैं बुरी आत्माओं की दुनिया में आ गया हूँ तथा ये लोग कर खा जाएँगे।

जहाज़ में गलामों का जीवन नरक समान था। उनमें विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ जैसे चेचक, पेचिश तथा पीला बुखार आदि फैल गई थीं। इससे उनके दुःख बहुत बढ़ गए थे। इन घातक बीमारियों के कारण तथा बिना किसी इलाज के रोज़ाना अनेक गुलामों की मत्य हो जाती थी। दर्द से कराह रहे इन गलामों की आवाज़ सुन कर दिल दहल जाता था।

एक दिन अवसर पाकर दो गुलामों ने पानी में कूदकर आत्महत्या कर ली। मुझे यह अवसर प्राप्त नहीं हुआ नहीं तो मैं भी ऐसा ही करता। जब जहाज़ के सदस्यों को इस घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने सभी गुलामों की जम कर पिटाई की तथा हम पर निगरानी बढ़ा दी गई।

जब यह जहाज़ अंततः ब्राजील की बंदरगाह पर पहुँचा तो बहुत से गुलाम खरीदने वाले व्यापारी जहाज़ पर चढ़ आए। उनकी शकलें बहुत डरावनी थीं। ऐसा लगता था कि वे हमें खा जाएंगे। उन्हें देखकर बहुत से गुलाम काँपने लगे। इसी समय जहाज़ पर वहाँ पहले से रह रहे दो अफ्रीकी गुलाम आए तथा उन्होंने हमें समझाया कि उन्हें यहाँ मारने के लिए नहीं अपितु काम करने के लिए लाया गया है। मुझे खेतों में कार्य करने के लिए लगाया गया। यहाँ गुलामों पर घोर अत्याचार किए जाते थे।

अफ्रीका में गुलामों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जाता था। वहाँ गुलामों को परिवार के सदस्यों के रूप में सम्मिलित कर लिया जाता था। कुछ समय पश्चात् मुझे एक गोरे व्यक्ति ने खरीद लिया तथा वह अपने साथ मुझे इंग्लैंड ले आया। वह एक व्यापारी था। उसके साथ मैं अनेक बार वेस्टइंडीज़ (West Indies) गया। 1766 ई० में मेरे स्वामी ने मुझे मुक्त कर दिया। इसके पश्चात् ओलाउदाह एक्वियानो ने 1797 ई० में अपनी मृत्यु तक गुलाम प्रथा के विरुद्ध एक जोरदार अभियान चलाया। इस प्रकार इतिहास में सदैव के लिए उसका नाम अमर हो गया।

प्रश्न 12.
दास व्यापार के बारे में आप क्या जानते हैं ? इस प्रथा का उन्मूलन किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
दास व्यापार आधुनिक विश्व इतिहास के माथे पर एक कलंक समान था। इस प्रथा ने 15वीं शताब्दी में अपने पाँव यूरोप में पसारने आरंभ किए। 16वीं शताब्दी में यह प्रथा दक्षिण एवं उत्तरी अमरीका में भी फैल गई। यह प्रथा 17वीं एवं 18वीं शताब्दियों में अपनी उन्नति के शिखर पर थी। आरंभ में पराजित हए लोगों को गुलाम बना लिया जाता था।

बाद में बड़ी संख्या में दासों को अफ्रीका से पकड़ कर इन देशों में बेचा जाने लगा। वास्तव में दास प्रथा ने एक व्यापार का रूप धारण कर लिया था। इन दासों पर जो अमानवीय अत्याचार किए जाते थे उनका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता। दास व्यापार के कारण न केवल अफ्रीका अपितु यूरोप एवं अमरीका के समाजों पर दूरगामी प्रभाव पड़े।

1. दास प्रथा का जन्म (Origin of Slavery):
15वीं शताब्दी में जब कुछ पुर्तगाली एवं स्पेनी नाविक अफ्रीका गए तो वे अपने साथ वहाँ से कुछ दासों को भी ले आए। इन गुलामों को घरों, खेतों एवं खानों में कार्य पर लगाया गया। 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों एवं स्पेनियों ने दक्षिण अमरीका के कुछ भागों पर अधिकार कर लिया था। वहाँ इन देशों के सैनिकों ने स्थानीय लोगों को पराजित कर उन्हें गुलाम बना लिया था। इन लोगों से गुलाम के रूप में कार्य करवाना अत्यंत कठिन सिद्ध हुआ। इस समस्या से निपटने के लिए यूरोपियों ने नई दुनिया में अफ्रीका से गुलाम मंगवाने आरंभ कर दिए थे।

2. दास व्यापार (Slave Trade):
17वीं एवं 18वीं शताब्दियों में नई दुनिया में दासों की माँग में अभूतपूर्व वृद्धि हो गई थी। इसका कारण था कि जंगलों की सफाई के लिए, खेतों के लिए एवं खानों में कार्य करने के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता थी। अत: यूरोपवासियों ने अफ्रीका के साथ गुलामों का व्यापार आरंभ कर दिया था। ये व्यापारी अपनी माँग अफ्रीका के स्थानीय नेताओं को देते थे।

अफ्रीका के स्थानीय नेता काफी प्रभावशाली होते थे। उन्होंने अपने अधीन कछ सेना रखी होती थी। इन सैनिकों की सहायता से वे रात के समय अफ्रीका के अंदरूनी भागों में छापे मार कर लोगों को बलपूर्वक गुलाम बना लेते थे। इन गुलामों में अधिकाँश संख्या युवा गुलामों की होती थी। इन गुलामों को यूरोपीय व्यापारियों को बेच दिया जाता था।

इसके बदले यूरोपीय व्यापारी उन्हें दक्षिण अमरीका से लाए गए खाद्य पदार्थ देते थे। ये अफ्रीकी लोगों के प्रमुख खाद्य पदार्थ थे। कभी-कभी उन्हें नकद धन भी दिया जाता था। यूरोपीय व्यापारी अफ्रीकी गुलामों को जहाजों में लाद कर नई दुनिया में ले आते थे। बंदरगाह पर पहुँचने पर ये व्यापारी इन दासों को दो से तीन गुना अधिक मुनाफे पर ज़रूरतमंदों को बेच देते थे।

3. दासों का जीवन (Life of Slaves):
अधिकाँश दास खेतों में मजदूरी का कार्य करते थे। कुछ गुलाम खानों में भी काम करते थे। इन्हें अत्यंत भयावह स्थितियों में कार्य करना पड़ता था। गुलामों से प्रतिदिन 14 से 16
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घंटे कार्य लिया जाता था। कार्य के दौरान भी उन्हें जंजीरों से जकड़ कर रखा जाता था ताकि वे भागने न पाएँ। कार्य के दौरान यदि कोई गुलाम सुस्त कार्य करता तो उसकी निगरानी करने वाला गोरा निरीक्षक उसकी हंटर द्वारा जमकर पिटाई करता। उस पर अनेक प्रकार के अन्य अमानवीय अत्याचार किए जाते थे।

कठोर श्रम करने के बावजूद इन गुलामों को दो समय भर पेट खाना भी नसीब नहीं होता था। रात्रि के समय उन्हें गंदी झोंपड़ियों में धकेल दिया जाता था। इस समय भी वे जंजीरों से जकड़े रहते थे। वे नाम मात्र के वस्त्र पहनते थे। संक्षेप में गुलामों का जीवन जानवरों से भी बदतर था। एरिक विलियम्स (Eric Williams) प्रथम आधुनिक इतिहासकार था जिसने 1940 के दशक में अपनी पुस्तक कैपिटलिज्म एंड स्लेवरी (Capitalism and Slavery) में गुलामों के दु:खों पर काफी प्रकाश डाला है।

4. दासों पर प्रतिबंध (Restrictions on Slaves):
दासों पर अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए थे। वे अपने मालिकों से अनुमति पत्र लिए बिना अपने कार्य को नहीं छोड़ सकते थे। वे किसी प्रकार का कोई नशा नहीं कर सकते थे। वे अपने पास किसी प्रकार का कोई हथियार नहीं रख सकते थे। उन्हें पढ़ने तथा लिखने का भी कोई अधिकार न था। वे गोरे लोगों के विरुद्ध चाहे वे उन्हें जान से मार दें अथवा इनकी स्त्रियों के साथ बलात्कार करें कोई शिकायत दर्ज नहीं करवा सकते थे। दसरी ओर वे गोरे लोगों पर हाथ नहीं उठा सकते थे। इनमें से किसी नियम का उल्लंघन करने पर संबंधित गुलाम को कड़ा दंड दिया जाता था।

5. दास व्यापार के प्रभाव (Impacts of the Slave Trade):
दास व्यापार के अनेक दूरगामी परिणाम निकले। प्रथम, यह प्रथा अफ्रीका के लिए विशेष तौर पर विनाशकारी सिद्ध हई। इस प्रथा के कारण अफ्रीका के अधिकांश पुरुषों को दास बना लिया गया। अतः उनकी स्त्रियों को अनेक प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ा। वे खेतों में काम करने के लिए बाध्य हुईं।

यह कार्य पहले पुरुष किया करते थे। दूसरा, इस प्रथा के चलते दासों को घोर अत्याचारों का सामना करना पड़ा। उनका जीवन जानवरों से भी बदतर था। बाध्य होकर अनेक बार दास या तो भाग जाते थे या फिर विद्रोह कर देते थे। दास व्यापार यूरोपियों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ। दासों को खानों एवं खेतों में कार्य पर लगाया गया। उनके खून-पसीने के कारण यूरोपीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिली।

6. दास प्रथा का उन्मूलन (The Abolition of Slavery):
दासों के साथ किए जाने वाले अमानुषिक व्यवहार के कारण अनेक देशों में इस क्रूर प्रथा के विरुद्ध आवाज़ बुलंद होने लगी। बहुत से नेताओं ने इस प्रथा का अंत करने के लिए अपनी सरकारों को प्रेरित किया। इसके लिए उन्हें एक लंबा संघर्ष करना पड़ा। सर्वप्रथम डेनमार्क (Denmark) ने 1803 ई० में दासों के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया।

यह निस्संदेह दास प्रथा का उन्मूलन करने की दिशा में उठाया गया प्रथम महत्त्वपूर्ण पग था। डेनमार्क का अनुसरण करते हुए ब्रिटेन ने 1807 ई० में, फ्राँस ने 1814 ई० में, नीदरलैंड ने 1817 ई० में तथा स्पेन ने 1845 ई० में गुलामों के व्यापार पर पूर्णत: निषेध लगा दिया। 1833 ई० में सर्वप्रथम ब्रिटेन ने दास प्रथा का अंत करने की घोषणा की। इसके पश्चात् फ्राँस ने 1848 ई० में, संयुक्त राज्य अमरीका ने 1865 ई० में, क्यूबा ने 1886 ई० में तथा ब्राजील ने 1888 ई० में दास प्रथा का अंत कर दिया। दास प्रथा का उन्मूलन निस्संदेह एक नए युग का संकेत था।

क्रचन सेख्याबर्षघटना
1.1325 ई०एजटेक की राज्धानी टेनोक्टिटलान का निर्माण।
2.1380 ई०कुलबनुमा का आविष्कार।
3.1410 ई०कार्डिनल पिएर ड्विऐेली ने ‘इमगो मुंड़ी’ की रचना की।
4.1438 ई०इंका सम्र्राज्य का सबसे शब्तिशाली शासक पचकुटी इंका सिंहासन पर बैठा।
5.1453 ई०तुर्कों द्वारा कुस्तुनदुनिया पर अधिकार।
6.1477 ई०टॉलेमी की ज्योग्राफ़ी प्रकाशित हुई।
7.1492 ई०कोलेंबस द्वारा बहामा द्वीप समूह की खोज।
8.1499 ई०अमेरिगो वेस्पुसी ने यदिण अमरीका की यात्रा की।
9.22 अप्रैल, 1500 ई०पेट्गो अल्वारिस कैज्राल ब्राजील पहूँचज।
10.1502 ई०मेंटेजुमा द्वितीय एजटेक सम्नाट् बना।
11.1507 ई०नयी दुनिया को अमरीका का नाम दिया गया।
12.1519 ई०हरनेंड़ो कोटेंस द्वारा एजटेक सात्राज्प पर आक्रमण।
13.30 जून, 1520 ई०औसू भरी रात।
14.15 अगस्त, 1521 ई०एजटेक साम्राज्म का अंत।
15.1522 ई०हरनेंडो कोर्टेस को न्यू स्पेन (मैक्सिको) का गवर्नर एवं कैप्टन-जनरल बनाया गया।
16.1532 ई०अताहुआल्पा इंका साम्राज्य के सिंहासन पर बैठा। फ्राँसिस्को पिज़ारो ने इंका साम्राज्य को जीता।
17.1532 ई०पुर्तगाली शासक ने ब्राज़ील का शासन सीधा अपने हाथों में लिया।
18.1549 ई०ओलाउदाह एक्वियानो की आत्मकथा ‘दि इनटरेस्टिंग नैंरेटिव ऑफ़ दि लाइफ ऑफ़ ओलाउदाह एक्वियानो’ का प्रकाशन।
19.1789 ई०ओलाइदाह एक्वियानो की आत्मकथा ‘दि इनटरेस्टिंग
20.1797 ई०नैरैटिव ऑफ़ दि लाइफ ऑफ ओलाउदाह एक्वियनो’ का प्रकाशन।
21.1803 ई०ओसाउदाह एक्वियानो की मृत्यु हुई।
22.1833 ई०ड़नमार्क ने दास व्यापार पर सर्वप्रथन प्रतिबंध लगापा।
23.1865 ई०ब्रिटेन ने दास प्रथा पर प्रतिबंध लगाया।
24.1888 ई०संयुक्त राज्च अमरीका ने दास प्रथा पर प्रतिबंध लगाया।

संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
ऐसे कौन-से कारण थे जिनसे 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली ?
अथवा
भौगोलिक खोजों के क्या कारण थे ?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में निम्नलिखित कारणों ने यूरोपीय नौचालन में सहायता दी
(1) नए प्रदेशों की खोज कर वहाँ से सोना-चाँदी प्राप्त करना।

(2) विदेशों में ईसाई धर्म का प्रसार करना।

(3)1380 ई० में कुतबनुमा अथवा दिशासूचक का आविष्कार हुआ। इस कारण नाविकों को खुले समुद्र में दिशाओं को सही जानकारी प्राप्त हुई। इस कारण समुद्री यात्राएँ अधिक सुरक्षित हो गई।

(4) समुद्री यात्रा पर जाने वाले यूरोपीय जहाजों में भी काफी सुधार हो चुका था। इससे नाविकों को समुद्र पार जाने के लिए प्रेरणा मिली।

(5) 1477 ई० में टॉलेमी की प्रसिद्ध पुस्तक ज्योग्राफी का प्रकाशन हुआ। इसमें अनेक देशों से संबंधित बहुमूल्य भौतिक जानकारी दी गई थी। इसने नाविकों को समुद्री यात्राएँ करने के लिए प्रेरित किया।

(6) 15वीं शताब्दी में आईबेरियाई प्रायद्वीप अर्थात् स्पेन एवं पुर्तगाल के शासकों ने समुद्री यात्राएँ करने वाले नाविकों को दिल खोलकर सहायता प्रदान की।

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प्रश्न 2.
15वीं शताब्दी में आईबेरियाई प्रायद्वीप ने भौगोलक खोजों के क्षेत्र में क्या योगदान दिया ?
अथवा
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने 15वीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया ?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में आईबेरियाई प्रायद्वीप भाव स्पेन एवं पुर्तगाल के देशों ने समुद्री खोज यात्राओं में बहुमूल्य योगदान दिया। अक्सर यह प्रश्न किया जाता है कि स्पेन एवं पुर्तगाल के शासकों ने समुद्री खोजों में अन्य देशों के मुकाबले अग्रणी भूमिका क्यों निभाई ? इसके अनेक कारण थे। प्रथम, इस समय स्पेन एवं पुर्तगाल की अर्थव्यवस्था अच्छी थी जबकि यूरोप की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही थी।

दूसरा, स्पेन एवं पुर्तगाल के शासक सोना एवं धन दौलत के भंडार एकत्र कर अपने यश एवं सम्मान में वृद्धि करना चाहते थे। तीसरा, वे नई दुनिया में ईसाई धर्म का प्रसार करना चाहते थे। चौथा, धर्मयुद्धों के कारण इन देशों की एशिया के साथ व्यापार करने में रुचि बढ़ गई। इन युद्धों के दौरान उन्हें पता चला कि इन देशों के साथ व्यापार करके वे भारी मुनाफा कमा सकते हैं।

पाँचवां, स्पेन के शासकों द्वारा दिए जाने वाले इकरारनामों जिन्हें कैपिटुलैसियोन कहा जाता था लोगों को महासागरी शूरवीर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। इन इकरारनामों द्वारा स्पेन के शासक ने नई दुनिया के प्रदेशों को जीतने वाले नेताओं को पुरस्कार के रूप में शासन का अधिकार दिया। छठा, इन देशों के शासकों ने समुद्री खोज पर जाने वाली नाविकों को प्रत्येक संभव सहायता प्रदान की।

प्रश्न 3.
नए आविष्कारों ने किस प्रकार भौगोलिक खोजों के उत्साहित किया ?
उत्तर:
14वीं एवं 15वीं शताब्दियों में जहाजरानी से संबंधित नए आविष्कारों ने नाविकों की समुद्री यात्राओं को सुगम बना दिया। 1380 ई० में कुतबनुमा भाव दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हुआ। यह एक सर्वोच्च महत्त्व का आविष्कार था। इससे नाविकों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी प्राप्त होती थी।

इससे सुदूर समुद्री यात्राएँ करना संभव हुआ। 16वीं शताब्दी में एस्ट्रोलेब का आविष्कार हुआ। इस यंत्र से नाविकों को भूमध्य रेखा से दूरी मापने में सहायता मिली। इसी शताब्दी में बतिस्ता ने विश्व का ठीक मानचित्र बनाया। इससे नाविकों को स्थानों के मध्य दूरी जानने में सहायता मिली। 1609 ई० में दूरबीन के आविष्कार ने नाविकों को दूर तक देखना संभव बनाया।

इस कारण वे आने वाले किसी ख़तरे से परिचित हो सकते हैं। सबसे बढ़कर इस काल में यूरोपियों ने अपने जहाजों में बहुत सुधार कर लिया था। ये जहाज़ पहले से अधिक हल्के, विशाल एवं तीव्र गति से चलने वाले थे। निस्संदेह इन नवीन आविष्कारों ने समद्री यात्राएँ करने वालों को एक नई दिशा प्रदान की।

प्रश्न 4.
क्रिस्टोफर कोलंबस पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
क्रिस्टोफर कोलंबस ने नयी दुनिया की खोज में उल्लेखनीय योगदान दिया। उसका जन्म 1451 ई० में इटली के शहर जिनोआ में हुआ था। उसे बचपन से ही समुद्री यात्राएँ करने का शौक था। 1492 ई० में स्पेन के शासक फर्जीनेंड ने समुद्री यात्राओं संबंधी उसकी योजना को स्वीकृति दी। कोलंबस 3 अगस्त, 1492 ई० को स्पेन की बंदरगाह पालोस से यात्रा के लिए रवाना हुआ। इस समय उसके पास तीन जहाज़-सांता मारिया, पिंटा तथा नीना थे।

वह 12 अक्तूबर, 1492 ई० को बहामा द्वीप समूह के गुआनाहानि पहुँचा। कोलंबस ने इसे इंडीज समझा। अत: उसने वहाँ के निवासियों को रेड इंडियन्स कहा। वह यहाँ के निवासियों के भव्य स्वागत एवं उदारता से बहुत प्रभावित हुआ। कोलंबस ने इस द्वीप का नाम सैन सैल्वाडोर रखा। कोलंबस की इस महत्त्वपूर्ण सफलता से प्रभावित होकर फर्जीनेंड ने उसे एडमिरल ऑफ़ दी ओशन सी की उपाधि से सम्मानित किया। उसे सैन सैल्वाडोर का वाइसराय नियुक्त किया गया। उसने अपने शासनकाल के दौरान यहाँ के लोगों पर घोर अत्याचार किए। 1506 ई० में क्रिस्टोफर कोलंबस की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 5.
हरनेंडो कोर्टेस कौन था ?
उत्तर:
हरनेंडो कोर्टेस स्पेन का एक प्रसिद्ध विजेता (कोंक्विस्टोडोर) था। उसका जन्म 1485 ई० में स्पेन के शहर मेडिलन में हुआ था। 1504 ई० में वह क्यूबा के गवर्नर की सेना में भर्ती हो गया था। उसने अनेक सैनिक अभियानों में भाग लिया एवं महत्त्वपूर्ण सफलताएँ अर्जित की। उसकी बहादुरी एवं योग्यता से प्रभावित होकर क्यूबा के गवर्नर ने हरनेंडो कोर्टेस को 1519 ई० में मैक्सिको पर आक्रमण करने की ज़िम्मेदारी सौंपी। हरनेडो कोर्टेस 1519 ई० में 600 स्पेनी सैनिकों के साथ मैक्सिको के लिए रवाना हुआ। उसे डोना मैरीना का बहुमूल्य सहयोग मिला।

उसके सहयोग के बिना हरनेडो कोर्टेस के लिए वहाँ के लोगों की भाषा समझना अत्यंत कठिन था। उस समय मैक्सिको में एजटेक शासक मोंटेजमा द्वितीय का शासन था। लोग उसके अत्याचारों से बहत दःखी थे। अतः हरनेंडो कोर्टेस बिना किसी विरोध के एज़टेक साम्राज्य की राजधानी टेनोक्टिटलान में 8 नवंबर, 1519 ई० को पहुँच गया था।

उसने धोखे से मोंटेजुमा द्वितीय को बंदी बना लिया। 1521 ई० तक हरनेंडो कोर्टेस ने संपूर्ण एज़टेक साम्राज्य को अपने अधीन कर लिया था। 1522 ई० में उसने मैक्सिको का नाम परिवर्तित करके न्यू स्पेन रख दिया। हरनेंडो कोर्टेस ने 1522 ई० से लेकर 1541 ई० तक न्यू स्पेन के गवर्नर के रूप में शासन किया। अपने शासनकाल के दौरान उसने वहाँ के लोगों पर घोर अत्याचार किए। 1547 ई० में उसकी मृत्यु हो गयी।

प्रश्न 6.
फ्राँसिस्को पिज़ारो के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
फ्रांसिस्को पिज़ारो स्पेन का एक प्रसिद्ध विजेता था। उसका जन्म 1478 ई० में स्पेन के में हुआ था। 1502 ई० में वह सेना में भर्ती हो गया था। वह 1521 ई० में हरनेंडो कोर्टेस की मैक्सिको विजय से बहुत प्रभावित हुआ। वह 1528 ई० में अपना भाग्य आजमाने पेरू चला गया। अगले वर्ष वह वहाँ से स्पेन वापसी यात्रा के समय इंका कारीगरों द्वारा बनाए गए कुछ सोने के बर्तन साथ ले आया था। उसने उन्हें स्पेन के शासक चार्ल्स पँचम को भेंट किया तथा पेरू में उपलब्ध अपार दौलत के बारे में जानकारी दी।

अतः उसने पिज़ारो को पेरू पर आक्रमण करने एवं वहाँ शासन करने की अनुमति दे दी। 1532 ई० में पेरू में सिंहासन प्राप्त करने के लिए दो भाइयों में गृहयुद्ध आरंभ हो गया था। इसके अतिरिक्त वहाँ चेचक के भयंकर रूप में फैलने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हो गयी थी। यह स्वर्ण अवसर देखकर फ्रांसिस्को पिज़ारो ने 15 नवंबर, 1532 ई० को पेरू पर आक्रमण कर दिया था। उसने धोखे से पेरू के नव-नियुक्त शासक अताहुआल्पा को बंदी बना लिया था। अताहुआल्पा द्वारा भारी फिरौती देने के बावजूद भी उसका वध कर दिया गया।

इसके पश्चात् पिज़ारो ने सुगमता से संपूर्ण इंका साम्राज्य पर अधिकार कर लिया। 1535 ई० में उसने लिमा को पेरू साम्राज्य की राजधानी घोषित किया। अपने शासनकाल के दौरान पिज़ारो ने वहाँ के लोगों पर घोर अत्याचार किए। परिणामस्वरूप 26 जून, 1541 ई० को पिज़ारो का लिमा में वध कर दिया गया।

प्रश्न 7.
अरावाकी सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
(1) अरावाकी लोग बहुत शाँतिप्रिय थे। वे लड़ने की अपेक्षा बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे।

(2) अरावाकी लोग अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे। उनका न तो कोई राजा था तथा न ही कोई सेना। चर्च का भी उनके जीवन पर कोई नियंत्रण न था। इस प्रकार वे एक स्वतंत्र जीवन व्यतीत करते थे।

(3) वे कुशल नौका निर्माता थे। वे नौकाओं में बैठकर खुले समुद्र की यात्रा करते थे एवं मछलियाँ पकड़ते थे। उनके प्रमुख शस्त्र तीर एवं कमान थे। इनके द्वारा वे पशुओं का शिकार करते थे।

(4) अरावाकी गाँवों में रहते थे। उनके घर साधारण प्रकार के थे। यद्यपि वे सोने के गहने पहनते थे। किंतु वे यूरोपियों की तरह सोने को उतना महत्त्व नहीं देते थे।

(5) वे बुनाई की कला में बहुत निपुण थे। उनके हैमक नामक झूले को देखकर यूरोपीय भी दंग रह गए थे।

(6) अरावाकियों का धर्म के अटूट विश्वास था। वे जीववादी थे। उनका विश्वास था कि निर्जीव वस्तुओं पत्थर एवं पेड़ आदि में भी जीवन होता है। वे जादू-टोनों में भी विश्वास रखते थे।

प्रश्न 8.
एजटेक सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ लिखो।
उत्तर:
(1) एजटेक समाज में सम्राट् का स्थान सर्वोच्च था। उसे पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि समझा जाता था।

(2) एज़टेक शासक महान् कला प्रेमी थे। एजटेक सम्राट् मोंटेजुमा प्रथम ने 1325 ई० में टेनोक्टिटलान नामक राजधानी का निर्माण करवाया।

(3) एज़टेक समाज श्रेणीबद्ध था। इसमें अभिजात वर्ग को सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त था। समाज में सबसे निम्न स्थान दासों का था। उनकी स्थिति अत्यंत शोचनीय थी।

(4) एजटेक लोग विभिन्न प्रकार के व्यवसाय करते थे। उनका मुख्य व्यवसाय कृषि था।

(5) एजटेक लोग शिक्षा पर विशेष बल देते थे। अभिजात वर्ग के बच्चे जिन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते थे। उनको कालमेकाक कहा जाता था।

(6) एज़टेक समाज में स्त्रियों की दशा अच्छी थी। उन्हें शिक्षा का अधिकार प्राप्त था। कुछ स्त्रियाँ पुरोहित का कार्य करती थीं।

(7) धर्म एज़टेक लोगों का जीवन का मुख्य आधार था। सूर्य देवता उनका सबसे प्रमुख देवता था। युद्ध देवता और अन्न देवी उनके प्रमुख देवी-देवता थे।

प्रश्न 9.
एजटेक और मेसोपोटामयी सभ्यताओं की तुलना कीजिए।
उत्तर:

  • एज़टेक एवं मेसोपोटामयी दोनों ही सभ्यताएँ एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई थीं।
  • दोनों ही सभ्यताओं के समाज में सम्राट् को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।
  • दोनों ही सभ्यताओं का समाज श्रेणीबद्ध था। समाज में सबसे निम्न स्थान दासों को दिया गया था। उनकी स्थिति अत्यंत शोचनीय थी।
  • दोनों ही सभ्यताओं के लोगों के जीवन में धर्म की प्रमुख भूमिका थी। लोग अपने देवी-देवताओं की स्मृति में भव्य मंदिरों का निर्माण करते थे।
  • दोनों ही सभ्यताओं के समाज में स्त्रियों की दशा अच्छी थी। उन्हें अनेक अधिकार प्राप्त थे।
  • एजटेक समाज में शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता था। मेसोपोटामयी सभ्यता के लोग कम शिक्षित थे।

प्रश्न 10.
इंका लोगों की संस्कृति की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या थी ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • इंका साम्राज्य में सम्राट की स्थिति सर्वोच्च थी। उसे सूर्य देवता का पुत्र समझा जाता था।
  • इंका सभ्यता के लोग महान् भवन निर्माता थे। कुजको एवं माचू-पिच्चू नामक शहर उनकी उच्च कोटि की कला के प्रतीक हैं।
  • इंका समाज अनेक श्रेणियों में विभाजित था। समाज में सबसे निम्न स्थान दासों को प्राप्त था। उनका जीवन नरक समान था।
  • इंका समाज में स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी। उनका परिवार में काफ़ी सम्मान किया जाता था। उन्हें अनेक अधिकार भी प्राप्त थे।
  • इंका समाज में शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया जाता था। सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूल भेजा जाता था।
  • इंका समाज में नैतिकता पर विशेष बल दिया जाता था। लोग सादा एवं पवित्र जीवन व्यतीत करते थे।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 11.
इंका सभ्यता के लोग महान् भवन निर्माता थे। क्या आप इस कथन से सहमत हैं ?
उत्तर:
इंका सभ्यता के लोग महान् भवन निर्माता थे। कुजको एवं माचू-पिच्चू नामक शहरों में बने उनके भव्य महल, किले, मंदिर एवं अन्य भवन उनकी उच्च कोटि की भवन-निर्माण कला को दर्शाते हैं। इन भवनों की दीवारों को बनाते समय वे विशाल पत्थरों का प्रयोग करते थे। इनमें से कुछ पत्थरों का वज़न 100 टन से भी अधिक तक होता था। इन पत्थरों को वे मजदूरों एवं रस्सियों के सहयोग से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते थे।

इन पत्थरों को जो कि वास्तव में बड़ी चट्टानें होती थीं बहुत बारीकी से तराशा जाता था। इन पत्थरों को आपस में जोड़ने के लिए इंका मिस्त्री किसी गारे अथवा सीमेंट का प्रयोग नहीं करते थे। इसके बावजूद उनके द्वारा बनवाए गए भवन इतने मज़बूत होते थे कि सैंकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद एवं कुछ विनाशकारी भूकंपों के बावजूद वे नष्ट नहीं हुए। इन भवनों को शल्क पद्धति द्वारा सुंदर बनाया जाता था। भवनों के अतिरिक्त इंका लोगों ने पहाड़ों के मध्य संपूर्ण साम्राज्य में सड़कें, पुल एवं सुरंगें बनाईं। इनसे उनके इंजीनियरिंग कौशल का पता चलता है।

प्रश्न 12.
माया लोगों की अति महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ क्या थी ?
उत्तर:
(1) माया समाज अनेक श्रेणियों में विभाजित था। समाज में सर्वोच्च स्थान पुरोहितों को प्राप्त था। राजा उनके परामर्श के बिना कोई कार्य नहीं करता था।

(2) माया लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था। उनके कृषि करने के ढंग उन्नत एवं कुशलतापूर्वक थे। अतः उस समय फ़सलों की भरपूर पैदावार होती थी।

(3) माया लोगों का धर्म में अटूट विश्वास था। वे अनेक देवी-देवताओं की उपासना करते थे। उनके दो प्रमुख देवता सूर्य देवता एवं मक्का देवता थे।

(4) माया लोग कला के महान् प्रेमी थे। उन्होंने यूनानी एवं रोमनों की तरह भवन निर्माण कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका आठवीं शताब्दी ग्वातेमाला में निर्मित टिक्ल मंदिर सर्वाधिक प्रसिद्ध था।

(5) माया सभ्यता की पंचांग के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण देन थी। उन्होंने दो प्रकार के पंचांग तैयार किए। प्रथम पंचांग धर्म-निरपेक्ष था। दूसरा पंचांग धार्मिक था।

(6) माया सभ्यता अमरीका की प्रथम सभ्यता थी जिसने सर्वप्रथम लिपि का विकास किया।

प्रश्न 13.
माया सभ्यता की कला के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
माया लोग कला के महान् प्रेमी थे। उन्होंने यूनानी एवं रोमनों की तरह भवन निर्माण कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने अनेक भव्य नगरों, महलों, पिरामिडों, मंदिरों एवं वेधशालाओं का निर्माण करवाया। माया लोगों ने जिन नगरों का निर्माण किया उनमें टिक्ल, कोपान, पालेंक, कोबा, युकाटान, बोनामपाक तथा उक्समल आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

इन नगरों को अनेक भव्य भवनों, उद्यानों एवं फव्वारों से सुसज्जित किया गया था। माया कलाकारों द्वारा बनाए गए महलों को देखकर व्यक्ति चकित रह जाता है। ये महल बहुत विशाल एवं सुंदर थे। इनमें शाही परिवार के अतिरिक्त अनेक अन्य व्यक्तियों के लिए निवास स्थान बनाए जाते थे। इन महलों की छतों एवं दीवारों को अनेक प्रकार के चित्रों से सुसज्जित किया जाता था।

इन चित्रों में चटकीले रंग भरे गए हैं। माया लोगों ने बहुत विशाल पिरामिड बनवाए। इन पिरामिडों के ऊपर मंदिरों का निर्माण किया जाता था। इन मंदिरों में अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित की जाती थीं। ये मूर्तियाँ देखने में बिल्कुल सजीव लगती थीं।

प्रश्न 14.
माया सभ्यता का पतन क्यों हुआ ?
उत्तर:
माया सभ्यता का पतन क्यों हुआ इस संबंध में इतिहासकारों में मतभेद हैं। कुछ इतिहासकारों का विचार है कि माया सभ्यता का अंत वहाँ आने वाले भयंकर भूकंपों एवं समुद्री तूफानों के कारण हुआ। कुछ अन्य के विचारों के अनुसार माया सभ्यता का विनाश वहाँ फैलने वाली भयंकर बीमारियों के कारण हुआ। इस कारण बड़ी संख्या में लोग मृत्यु का शिकार हो गए थे।

कुछ इतिहासकारों का विचार है कि माया सभ्यता का अंत वहाँ आए जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ। वहाँ काफ़ी लंबे समय तक सूखा पड़ा। इस कारण फ़सलें नष्ट हो गई एवं लोग भूखे मर गए। कुछ इतिहासकारों का कथन है कि माया सभ्यता के पतन में वहाँ होने वाले किसान विद्रोहों ने प्रमुख भूमिका निभाई।

अधिकाँश इतिहासकारों का माना है कि माया सभ्यता का अंत 1519 ई० में हरनेंडो कोर्टेस के आक्रमण के कारण हुआ। उसने 1521 ई० में मैक्सिको को अपने अधीन कर लिया था।

प्रश्न 15.
ओलाउदाह एक्वियानो कौन था ?
उत्तर:
ओलाउदाह एक्वियानो नाईजीरिया का रहने वाला था। 11 वर्ष की उम्र में उसे गुलाम बना लिया गया था। उसे गुलाम के रूप में दक्षिण अमरीका में बेच दिया गया। वहाँ से उसे इंग्लैंड के एक कप्तान ने खरीद लिया। 1766 ई० में उसने अपने स्वामी से मुक्ति प्राप्त कर ली। इसके पश्चात् उसने विभिन्न देशों में दास्ता के विरुद्ध प्रचार किया। 1789 ई० में उसकी आत्मकथा दि इनटरेस्टिंग नैरैटिव ऑफ़ दि लाइफ ऑफ़ ओलाउदाह एक्वियानो प्रकाशित हुई।

यह पुस्तक शीघ्र ही संपूर्ण विश्व में बहुत लोकप्रिय हुई तथा इसका विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद किया गया। इस पुस्तक में ओलाउदाह एक्वियानो ने एक गुलाम के रूप में अपनी यात्रा तथा गुलामों के जीवन के बारे में विस्तृत प्रकाश डाला है। गुलाम प्रथा का अंत करने में इस पुस्तक ने प्रमुख भूमिका निभाई।

प्रश्न 16.
दासों के जीवन पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
दक्षिण अमरीका में दासों का जीवन नरक समान था। उनसे अधिकांशतः खेती का कार्य करवाया जाता था। कुछ गुलाम खानों में भी काम करते थे। इन्हें अत्यंत भयावह स्थितियों में कार्य करना पड़ता था। कार्य के दौरान उन्हें जंजीरों से जकड़ कर रखा जाता था ताकि वे भागने न पाएँ। उन पर अनेक प्रकार के अन्य अमानवीय अत्याचार किए जाते थे। इन अत्याचारों के कारण अनेक गुलामों की मृत्यु हो जाती थी।

इसके बावजूद गोरे लोगों पर किसी प्रकार का न तो कोई मुकद्दमा चलता था तथा न ही उन्हें कोई सज़ा दी जाती थी। कठोर श्रम करने के बावजूद इन गलामों को दो समय भर पेट खाना भी नसीब नहीं होता था। वे गंदी झोंपडियों में रहते थे। वे अर्द्धनग्न घमते रहते थे। घरों में कार्य करने वाले दासों की स्थिति यद्यपि कुछ अच्छी थी, किंतु उन्हें भी अपने मालिकों के घोर अत्याचारों को सहन करना पड़ता था।

प्रश्न 17.
दास व्यापार के क्या परिणाम निकले ?
उत्तर:
दास व्यापार के अनेक दूरगामी परिणाम निकले। प्रथम, यह व्यापार विशेष रूप से अफ्रीका के लिए हानिकारक सिद्ध हुआ। दास व्यापार 15वीं शताब्दी में बहुत छोटे पैमाने पर आरंभ हुआ था। इस व्यापार ने 17वीं एवं 18वीं शताब्दियों में बहुत विकास कर लिया था। इस व्यापार के चलते अफ्रीका के दो तिहाई पुरुषों को दास बना कर यूरोप की मंडियों में बेच दिया गया था।

अतः अफ्रीका में लिंग अनुपात गड़बड़ा गया। अफ्रीका में स्त्रियों की संख्या बहुत बढ़ गई। उन्हें अनेक प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ा। वे खेतों में काम करने के लिए बाध्य हुईं। यह कार्य पहले पुरुष किया करते थे। दूसरा, इस प्रथा के चलते दासों को घोर अत्याचारों का सामना करना पड़ा। उनका जीवन नरक समान था।

बाध्य होकर अनेक बार दास या तो भाग जाते थे या फिर विद्रोह कर देते थे। दास व्यापार यूरोपियों के दृष्टिकोण से बहुत लाभकारी प्रमाणित हुआ। दासों की मेहनत के परिणामस्वरूप यूरोपीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति की।

प्रश्न 18.
दास प्रथा का उन्मूलन किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
दासों के साथ किए जाने वाले अमानुषिक व्यवहार के कारण अनेक देशों में इस क्रूर प्रथा के विरुद्ध आवाज़ बुलंद होने लगी। बहत-से नेताओं ने इस प्रथा का अंत करने के लिए अपनी सरकारों को प्रेरित किया। इसके लिए उन्हें एक लंबा संघर्ष करना पड़ा। अंत में उनकी प्रेरणा रंग लाई। इसके चलते सर्वप्रथम डेनमार्क ने 1803 ई० में दासों के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया।

यह निस्संदेह दास प्रथा का उन्मूलन करने की दिशा में उठाया गया प्रथम महत्त्वपूर्ण पग था। डेनमार्क का अनुसरण करते हुए ब्रिटेन ने 1807 ई० में, फ्राँस ने 1814 ई० में, नीदरलैंड ने 1817 ई० में तथा स्पेन ने 1845 ई० में गुलामों के व्यापार पर पूर्णतः निषेध लगा दिया। 1833 ई० में सर्वप्रथम ब्रिटेन ने दास प्रथा का अंत करने की घोषणा की।

इसके पश्चात् फ्राँस ने 1848 ई० में, संयुक्त राज्य अमरीका ने 1865 ई० में, क्यूबा ने 1886 ई० में तथा ब्राज़ील ने 1888 ई० में दास प्रथा का अंत कर दिया। दास प्रथा का उन्मूलन निस्संदेह एक नए युग का संकेत था।

अति संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
कोई ऐसे दो कारण बताएँ जिनसे 15वीं शताब्दी में सबसे पहले यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली ?
उत्तर:

  • 14वीं एवं 15वीं शताब्दियों में जहाजरानी से संबंधित नए आविष्कारों ने नाविकों की समुद्री यात्राओं को सुगम बना दिया।
  • पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी ने यूरोपीय नौचालन को यथासंभव सहायता प्रदान की।

प्रश्न 2.
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पंद्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया ?
उत्तर:

  • उस समय स्पेन और पुर्तगाल की अर्थव्यवस्था अच्छी थी। इस कारण वे अटलांटिक महासागर के पार जाने का खर्चा उठा सकने में सक्षम थे।
  • स्पेन एवं पुर्तगाल के शासकों ने अटलांटिक महासागर के पार जाने वाले नाविकों की प्रत्येक संभव सहायता की।
  • ईसाई प्रचारक वहाँ ईसाई धर्म का प्रचार करना चाहते थे।

प्रश्न 3.
कुतबनुमा का आविष्कार कब हुआ ? इसने नौचालन को कैसे प्रेरित किया ?
उत्तर:

  • कुतबनुमा का आविष्कार 1380 ई० में हुआ।
  • इसने नाविकों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी प्रदान की। इससे सुदूर समुद्री यात्राएं करना संभव हआ।

प्रश्न 4.
टॉलेमी कहाँ का निवासी था ? उसकी प्रसिद्ध रचना का नाम क्या था ? इसका प्रकाशन कब हुआ था ?
उत्तर:

  • टॉलेमी मित्र का निवासी था।
  • उसकी प्रसिद्ध रचना का नाम ज्योग्राफी था।
  • इसका प्रकाशन 1477 ई० में हुआ था।

प्रश्न 5.
मार्को पोलो कौन था ?
उत्तर:

  • मार्को पोलो इटली के शहर वेनिस का एक महान् यात्री था।
  • वह 1275 ई० में मंगोलों के महान् नेता कुबलई खाँ के दरबार में पीकिंग पहुंचा।
  • उसने मार्को पोलो की यात्राएँ नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की।

प्रश्न 6.
रीकांक्वेस्टा (Reconquista) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
रीकांक्वेस्टा से अभिप्राय है पुनर्विजय। ईसाई राजाओं ने 1492 ई० में आईबेरियन प्रायद्वीप को अरबों के कब्जे से छडा लिया था। इस सैनिक विजय को रीकांक्वेस्टा कहा जाता है।

प्रश्न 7.
कैपिटुलैसियोन (Capitulaciones) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
कैपिटुलैसियोन से अभिप्राय स्पेन के शासक द्वारा दिए गए इकरारनामों से है। इन इकरारनामों द्वारा स्पेन के शासक ने नए जीते गए प्रदेशों पर उन्हें जीतने वाले अभियानों के नेताओं को पुरस्कार के रूप में उनका शासनाधिकार दिया।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 8.
कौन-सी नयी खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमरीका से बाकी दुनिया को भेजी जाती है ?
उत्तर:
दक्षिणी अमरीका से तंबाकू, आलू, गन्ने की चीनी, ककाओ, रबड़, लाल मिर्च, मक्का, कसावा एवं कुमाला नामक नयी खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया को भेजी जाती थीं।

प्रश्न 9.
कार्डिनल पिएर डिऐली (Cardinal Pierre di Ailly) कौन था ?
उत्तर:

  • वह एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक था।
  • उसने खगोलशास्त्र एवं भूगोल पर ‘इमगो मुंडी’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की।

प्रश्न 10.
क्रिस्टोफर कोलंबस कहाँ का निवासी था ? वह बहामा द्वीप समूह में कब पहुँचा ?
उत्तर:

  • क्रिस्टोफर कोलंबस इटली का निवासी था।
  • वह बहामा द्वीप समूह में 12 अक्तूबर, 1492 ई० को पहुँचा।

प्रश्न 11.
कोलंबस गुआनाहानि कब पहुँचा ? उसने इस द्वीप का क्या नाम रखा ?
उत्तर:

  • कोलंबस गुआनाहानि 12 अक्तूबर, 1492 ई० को पहुंचा।
  • उसने इस द्वीप का नाम सैन सैल्वाडोर रखा।

प्रश्न 12.
कोलंबस का नाम क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर:

  • उसने नयी दुनिया की खोज की।
  • उसने उपनिवेशों के युग का आरंभ किया।
  • उसने यूरोप को कच्चे माल एवं खनिज पदार्थों के नए स्रोत दिए।

प्रश्न 13.
नयी दुनिया को अमरीका का नाम किसने, कब तथा किसकी स्मृति में दिया ?
उत्तर:
नयी दुनिया को अमरीका का नाम एक जर्मन प्रकाशक ने 1507 ई० में अमेरिगो वेस्पुसी की स्मृति में दिया।

प्रश्न 14.
कोक्विस्टोडोर (Conquistadores) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
कोक्विस्टोडोर से अभिप्राय स्पेनी विजेताओं एवं उनके सैनिकों से है जिन्होंने नयी दुनिया में अपने साम्राज्य स्थापित किए।

प्रश्न 15.
हरनेंडो कोर्टेस ने मैक्सिको पर कब आक्रमण किया था ? उस समय वहाँ का शासक कौन
उत्तर:

  • हरनेंडो कोर्टेस ने मैक्सिको पर 1519 ई० में आक्रमण किया था।
  • उस समय वहाँ का शासक मोंटेजुमा द्वितीय था।

प्रश्न 16.
डोना मैरीना (Dona Marina) कौन थी ?
उत्तर:
वह मैक्सिको की एक राजकुमारी थी। उसकी माँ ने उसे टैबैस्को लोगों को एक दासी के रूप में बेच दिया था। वह स्पेनिश एवं मैक्सिकन भाषाओं में बहुत प्रवीण थी। उसने हरनेंडो कोर्टेस के लिए दुभाषिये का काम किया था। उसके सहयोग के बिना हरनेंडो कोर्टेस के लिए मैक्सिको पर विजय पाना अत्यंत कठिन था।

प्रश्न 17.
मोंटेजुमा द्वितीय कौन था ?
उत्तर:
मोटेजुमा द्वितीय मैक्सिको का शासक था। वह इस पद पर 1502 ई० से 1520 ई० तक रहा। वह अपने अत्याचारों के कारण प्रजा में बहुत बदनाम था। हरनेंडो कोर्टेस ने 1519 ई० में उसकी राजधानी टेनोक्टिटलान पर आक्रमण कर धोखे से बंदी बना लिया था। 29 जून, 1520 ई० को मोंटेजुमा द्वितीय को मौत के घाट उतार दिया गया।

प्रश्न 18.
हरनेंडो कोर्टस क्यों प्रसिद्ध था ?
उत्तर:
हरनेंडो कोर्टेस स्पेन का एक प्रसिद्ध कोक्विस्टोडोर था। उसने 1519 ई० में मैक्सिको पर आक्रमण कर इसके शासक मोंटेजुमा द्वितीय को बंदी बना लिया था। उसने 1521 ई० में मैक्सिको पर कब्जा कर एज़टेक साम्राज्य का अंत कर दिया था। उसे स्पेन के शासक चार्ल्स पँचम ने न्यू स्पेन (मैक्सिको) का गवर्नर एवं कैप्टन-जनरल नियुक्त किया था। वह इस पद पर 1541 ई० तक रहा।

प्रश्न 19.
फ्रांसिस्को पिज़ारो कौन था ?
उत्तर:
फ्रांसिस्को पिज़ारो स्पेन का एक प्रसिद्ध विजेता था। उसने 1532 ई० में पेरू में स्थापित इंका साम्राज्य पर आक्रमण कर दिया था। उसने धोखे से इसके शासक अताहुआल्पा को बंदी बना लिया। उसने अताहुआल्पा से भारी फिरौती लेने के बावजूद उसका 1533 ई० में वध कर दिया। उसने इंका साम्राज्य में भयंकर लूटमार की। उसने 1535 ई० में लिमा को पेरू की नई राजधानी बनाया। 26 जून, 1541 ई० को पिज़ारो का लिमा में उसके विरोधियों ने वध कर दिया।

प्रश्न 20.
पेड्रो अल्वारिस कैब्राल का नाम क्यों प्रसिद्ध था ?
उत्तर:
पेड्रो अल्वारिस कैब्राल पुर्तगाल का एक प्रसिद्ध नाविक था। उसने 22 अप्रैल, 1500 ई० को ब्राज़ील की खोज की। पुर्तगालियों ने यहाँ से मिलने वाली ब्राज़ीलवुड का भरपूर लाभ उठाया। इससे लाल रंजक (red dye) तैयार की जाती थी।

प्रश्न 21.
आरंभ में पुर्तगालियों ने ब्राज़ील की ओर कम ध्यान क्यों दिया ?
उत्तर:
आरंभ में पुर्तगालियों ने ब्राजील की ओर कम ध्यान इसलिए दिया क्योंकि वहाँ सोना अथवा चाँदी मिलने की संभावना बहुत कम थी। दूसरा, पुर्तगाली उस समय पश्चिमी भारत के साथ अपना व्यवसाय करने के लिए अधिक उत्सुक थे।

प्रश्न 22.
यूरोपीय जेसुइट पादरियों के विरुद्ध क्यों थे ?
उत्तर:

  • वे सभी लोगों की स्वतंत्रता के पक्ष में थे।
  • उन्होंने दास प्रथा की कड़े शब्दों में आलोचना की।
  • उन्होंने यूरोपियों को मूल निवासियों के साथ अच्छा बर्ताव करने का परामर्श दिया।

प्रश्न 23.
पोटोसी (Potosi) को नरक का मुख किसने कहा और क्यों ?
उत्तर:
पोटोसी को नरक का मुख एक संन्यासी डोमिनिगो डि सैंटो टॉमस (Dominigo de Santo Tomas) ने कहा। इसका कारण यह था कि प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में इंडियन लोग जो यहाँ की खानों में काम करते थे मृत्यु का ग्रास बन जाते थे। इन खानों के मालिक इन लोगों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार करते थे।

प्रश्न 24.
दक्षिणी अमरीका को लैटिन अमरीका क्यों कहा जाता है ?
उत्तर
दक्षिणी अमरीका को लैटिन अमरीका इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ स्पेनी एवं पुर्तगाली दोनों ही भाषाएँ बोली जाती थीं। ये दोनों ही भाषाएँ लैटिन भाषा परिवार से संबंधित हैं। अतः दक्षिणी अमरीका को लैटिन अमरीका कहा जाने लगा।

प्रश्न 25.
अरावाकी लुकायो कौन थे?
उत्तर:

  • वे बहुत शांतिप्रिय लोग थे।
  • वे लड़ने की अपेक्षा बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसंद करते थे।

प्रश्न 26.
अरावाकी सभ्यता की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • वे अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित रहते थे।
  • उनमें बहु-विवाह प्रथा प्रचलित थी।

प्रश्न 27.
अरावाकी लोगों का आरंभ में स्पेनियों के प्रति कैसा व्यवहार था ? बाद में इस व्यवहार में परिवर्तन क्यों आया ?
उत्तर:

  • अरावाकी लोगों का आरंभ में स्पेनियों के प्रति व्यवहार मैत्रीपूर्ण था।
  • बाद में इस व्यवहार में परिवर्तन का कारण स्पेनियों द्वारा मूल निवासियों के प्रति अपनाई गई क्रूर नीति थी।

प्रश्न 28.
तुपिनांबा लोग कहाँ रहते थे ? वे खेती के लिए घने जंगलों का सफ़ाया क्यों न कर सके ?
उत्तर:

  • तुपिनांबा लोग दक्षिणी अमरीका के पूर्वी तट पर रहते थे।
  • वे खेती के लिए घने जंगलों का सफाया इसलिए नहीं कर सके क्योंकि उनके पास पेड़ काटने के लिए लोहे का कुल्हाड़ा नहीं था।

प्रश्न 29.
स्पेनियों के संपर्क में आने के बाद 25 वर्ष के अंदर ही अरावाकी सभ्यता लुप्त क्यों हो गई ? कोई दो कारण बताएँ।
उत्तर:

  • स्पेनियों ने अरावाकियों का क्रूरता से दमन किया।
  • स्पेनियों के आगमन से अरावाकियों में अनेक भयंकर बीमारियाँ फैल गईं। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में अरावाकियों की मृत्यु हो गई।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 30.
एजटेक साम्राज्य की राजधानी का नाम क्या था ? इसका निर्माण कब किया गया था ?
उत्तर:

  • एज़टेक साम्राज्य की राजधानी का नाम टेनोक्टिटलान (Tenochtitlan) था।
  • इसका निर्माण 1325 ई० में किया गया।

प्रश्न 31.
एज़टेक की राजधानी टेनोक्टिटलान का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • इसका निर्माण 1325 ई० में किया गया था।
  • इसे भव्य महलों, मंदिरों एवं उपवनों से सुसज्जित किया गया था।

प्रश्न 32.
एज़टेक सभ्यता की कोई दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  • एजटेक समाज में सम्राट को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।
  • एज़टेक समाज श्रेणीबद्ध था। अभिजात वर्ग को विशेष अधिकार प्राप्त थे।

प्रश्न 33.
एजटेक समाज में सम्राट् की स्थिति क्या थी ?
उत्तर:

  • एज़टेक समाज में सम्राट को सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।
  • उसे निरंकुश शक्तियाँ प्राप्त थीं।
  • उसे पृथ्वी पर सूर्य देवता का प्रतिनिधि समझा जाता था।

प्रश्न 34.
चिनाम्पा. (Chinampas) से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
चिनाम्पा मैक्सिको झील में बने कृत्रिम टापू थे। इन्हें सरकंडे की बहुत बड़ी चटाइयाँ बुनकर इन्हें मिट्टी तथा पत्तों से ढककर बनाया जाता था। ये अत्यंत उपजाऊ थे।

प्रश्न 35.
कालमेकाक (Calmecac) तथा तेपोकल्ली (Telpochcally) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:

  • कालमेकाक एजटेक लोगों के वे स्कल थे जिनमें अभिजात वर्ग के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते थे।
  • तेपोकल्ली वे स्कल थे जिनमें साधारण वर्ग के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते थे।

प्रश्न 36.
एज़टेक समाज में लड़कों एवं लड़कियों को किस प्रकार की शिक्षा दी जाती थी ?
उत्तर:

  • एज़टेक समाज में लड़कों को पुरोहित एवं सैनिक बनने की शिक्षा दी जाती थी।
  • एजटेक समाज में लड़कियों को घरेलू कार्यों की शिक्षा दी जाती थी।

प्रश्न 37.
एज़टेक समाज में स्त्रियों की स्थिति कैसी थी ?
उत्तर:
एजटेक समाज में स्त्रियों की स्थिति बहुत अच्छी थी। वे शिक्षा प्राप्त करती थीं। वे सामान्यतः घरेलू कार्य करती थीं। कुछ स्त्रियाँ खेती का एवं कुछ पुरोहित का कार्य भी करती थीं। उनका विवाह प्रायः 16 वर्ष की आयु में किया जाता था।

प्रश्न 38.
एजटेक लोगों के धार्मिक जीवन की मुख्य विशेषताएँ क्या थी ?
उत्तर:

  • वे अनेक देवी-देवताओं की उपासना करते थे।
  • सूर्य देवता एवं युद्ध देवता उनके दो प्रमुख देवते थे।
  • वे अपने देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए मनुष्यों की बलियाँ देते थे।

प्रश्न 39.
एजटेक सभ्यता के पतन के कोई दो प्रमुख कारण बताएँ।
उत्तर:

  • एज़टेक शासकों ने गैर-एज़टेक लोगों पर घोर अत्याचार किए। इस कारण उनमें भारी असंतोष था।
  • एज़टेक साम्राज्य में रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की बलि दी जाती थी। अत: वे ऐसे शासन का अंत करना चाहते थे।

प्रश्न 40.
एजटेक और मेसोपोटामई सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:

  • एज़टेक और मेसोपोटामई सभ्यताएँ एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई थीं।
  • दोनों सभ्यताओं के समाजों में दासों को सबसे निम्न स्थान प्राप्त था।
  • दोनों सभ्यताओं में स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी।

प्रश्न 41.
इंका सभ्यता का संस्थापक कौन था ? उसकी राजधानी का नाम क्या था ?
उत्तर:

  • इंका सभ्यता का संस्थापक मैंको कपाक था।
  • उसकी राजधानी का नाम कुजको था।

प्रश्न 42.
इंका सभ्यता का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था ? वह सिंहासन पर कब बैठा था ?
उत्तर:

  • इंका सभ्यता का सबसे शक्तिशाली शासक पचकुटी इंका था।
  • वह 1438 ई० में सिंहासन पर बैठा था।

प्रश्न 43.
इंका साम्राज्य की राजधानी एवं प्रशासनिक भाषा का नाम बताएँ।
उत्तर:

  • इंका साम्राज्य की राजधानी का नाम कुजको (Cuzco) था।
  • इंका साम्राज्य की प्रशासनिक भाषा कवेचुआ (Quechua) थी।

प्रश्न 44.
इंका सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
अथवा
इंका समाज की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:

  • इंका साम्राज्य में सम्राट की स्थिति सर्वोच्च थी।
  • इंका समाज विभिन्न श्रेणियों में विभाजित था।
  • इंका सभ्यता का आधार कृषि था।

प्रश्न 45.
इंका लोग उच्चकोटि के भवन निर्माता थे। कैसे ?
उत्तर:

  • उन्होंने कुजको एवं माचू-पिच्चू में भव्य महलों, किलों एवं मंदिरों का निर्माण किया।
  • उन्होंने पहाड़ों के बीच इक्वेडोर से चिली तक अनेक सड़कें बनाईं।

प्रश्न 46.
इंका भवनों की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • वे अपने भवनों में विशाल पत्थरों का प्रयोग करते थे।
  • वे अपने भवनों को शल्क पद्धति (flaking) द्वारा सुंदर बनाते थे।

प्रश्न 47.
“इंका समाज में स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी।” कोई दो तर्क दें।
उत्तर:

  • उनका परिवार में पूर्ण सम्मान किया जाता था।
  • उन्हें शिक्षा का अधिकार प्राप्त था।

प्रश्न 48.
क्विपु (quipu) से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
क्विपु इंका लोगों की एक प्रणाली थी। इससे चीजों को स्मरण रखने में सहायता मिलती थी। इसमें एक डंडा होता था जिसमें विभिन्न रंगों की रस्सियों से गाँठ बाँधी जाती थी। प्रत्येक गाँठ एक किस्म का संकेत देती थी जिससे उस वस्तु का अनुमान लगाया जाता था।

प्रश्न 49.
इंका कृषि की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • वे कृषि के लिए पहाड़ों में सीढ़ीदार खेत (terraces) बनाते थे।
  • उनकी दो प्रमुख फ़सलें मक्का एवं आलू थीं।

प्रश्न 50.
इंका लोग लामा (Ilama) का पालन क्यों करते थे ?
उत्तर:

  • वे इससे भार ढोने का कार्य लेते थे।
  • वे इससे ऊन प्राप्त करते थे।
  • वे इसका माँस खाते थे।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 51.
इंका लोगों के धार्मिक जीवन की मुख्य विशेषताएँ क्या थी ?
उत्तर:

  • उनका प्रमुख देवता सूर्य था।
  • वे अपने देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए जानवरों एवं कभी-कभी मनुष्यों की बलियाँ देते थे।
  • वे मृत्यु के बाद जीवन में विश्वास रखते थे।

प्रश्न 52.
इंका सभ्यता के पतन के कोई दो कारण लिखें।
उत्तर:

  • इंका शासक अताहुआल्पा एक योग्य शासक प्रमाणित न हुआ।
  • इंका स्पेनी आक्रमणकारी फ्रांसिस्को पिज़ारो का सामना न कर सके।

प्रश्न 53.
माया काल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  • माया सभ्यता का आरंभ 1500 ई० पू० में हुआ था।
  • यह सभ्यता 300 ई० से 900 ई० के दौरान बहुत प्रफुल्लित हुई।
  • इस सभ्यता का अंत 1519 ई० में हुआ।

प्रश्न 54.
माया सभ्यता की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • उनकी सभ्यता का मुख्य आधार मक्के की खेती थी।
  • माया समाज में पुरोहितों को मुख्य स्थान प्राप्त था।

प्रश्न 55.
मक्के की खेती माया सभ्यता का मुख्य आधार क्यों थी ?
उत्तर:
मक्के की खेती माया सभ्यता का मख्य आधार इसलिए थी क्योंकि उनके अनेक धार्मिक क्रियाकलाप एवं उत्सव मक्का बोने, उगाने एवं काटने से जुड़े थे।

प्रश्न 56.
माया लोगों के धार्मिक जीवन की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • वे अनेक देवी-देवताओं की उपासना करते थे। उनके दो प्रमुख देवता सूर्य देवता एवं मक्का देवता थे।
  • वे मृत्यु के पश्चात् जीवन में विश्वास रखते थे।

प्रश्न 57.
माया मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन-सा था ? इसकी स्थापना कब और कहाँ की गई थी ?
उत्तर:

  • माया मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध मंदिर टिक्ल था।
  • इसकी स्थापना 8वीं शताब्दी में ग्वातेमाला में की गई थी।

प्रश्न 58.
माया पंचांग कितनी प्रकार के थे ? इनमें वर्ष में कितने दिन होते थे ?
उत्तर:

  • माया पंचांग दो प्रकार के थे।
  • इनमें एक वर्ष में 365 दिन एवं दूसरे में 260 दिन होते थे।

प्रश्न 59. माया लिपि की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • माया लिपि चित्रात्मक थी।
  • इस लिपि को अभी तक पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है।

प्रश्न 60.
माया सभ्यता के पतन के कोई दो कारण बताएँ।
उत्तर:

  • इस सभ्यता के पतन में किसानों के विद्रोह मुख्य रूप से उत्तरदायी थे।
  • 1519 ई० में हरनेंडो कोर्टेस के आक्रमण ने माया सभ्यता के पतन का डंका बजा दिया।

प्रश्न 61.
ओलाउदाह एक्वियानो (Olaudah Equiano) कहाँ का निवासी था ? जब उसे गुलाम बनाया गया तो उसकी आयु क्या थी ?
उत्तर:

  • ओलाउदाह एक्वियानो नाईजीरिया का निवासी था।
  • जब उसे गुलाम बनाया गया तो उसकी आयु 11 वर्ष थी।

प्रश्न 62.
ओलाउदाह एक्वियानो ने अपनी आत्मकथा कब लिखी ? इसका नाम क्या था ?
उत्तर:

  • ओलाउदाह एक्वियानो ने अपनी आत्मकथा 1789 ई० में लिखी।
  • इसका नाम दि इनटरेस्टिंग नैरैटिव ऑफ़ दि लाइफ ऑफ़ ओलाउदाह एक्वियानो था।

प्रश्न 63.
आधुनिक इतिहासकार एरिक विलियम्स ने कब तथा किस पुस्तक की रचना की ? इसका विषय क्या था ?
उत्तर:

  • आधुनिक इतिहासकार एरिक विलियम्स ने 1940 के दशक में कैपिटलिज्म एंड स्लेवरी’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की।
  • इसका मुख्य विषय अफ्रीकी दासों के कष्टों का वर्णन करना था।

प्रश्न 64.
दासों पर लगे कोई दो प्रतिबंध बताएँ।
उत्तर:

  • वे अपने मालिकों से अनुमति पत्र लिए बिना अपने कार्य को नहीं छोड़ सकते थे।
  • वे अपने पास किसी किस्म का कोई हथियार नहीं रख सकते थे।।

प्रश्न 65.
किन्हीं दो देशों के नाम बताएँ जिन्होंने दास प्रथा का उन्मूलन किया। ऐसा कब किया गया ?
उत्तर:

  • ब्रिटेन एवं संयुक्त राज्य अमरीका ने दास प्रथा का उन्मूलन किया।
  • ऐसा क्रमवार 1833 ई० एवं 1865 ई० में किया गया।

प्रश्न 66.
दास प्रथा के कोई दो प्रभाव लिखें।
उत्तर:

  • अफ्रीका के अधिकांश पुरुषों को दास बना कर यूरोप में बेच दिया गया। इससे अफ्रीका में लिंग अनुपात गड़बड़ा गया।
  • दासों की मेहनत के कारण यूरोपीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिली।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न 

प्रश्न 1.
यूरोपवासियों ने खोज यात्राओं का श्रीगणेश किस शताब्दी में किया ?
उत्तर:
15वीं शताब्दी में।

प्रश्न 2.
15वीं शताब्दी में किन दो देशों ने समुद्री यात्राओं को प्रोत्साहित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया ?
उत्तर:
पुर्तगाल एवं स्पेन।

प्रश्न 3.
तुर्कों ने कुंस्तुनतुनिया पर कब अधिकार किया ?
उत्तर:
1453 ई० में।

प्रश्न 4.
कुतबनुमा का आविष्कार कब हुआ था ?
उत्तर:
1380 ई० में।

प्रश्न 5.
विश्व का ठीक मानचित्र किसने बनाया था ?
उत्तर:
बतिस्ता ने।

प्रश्न 6.
टॉलेमी की ज्योग्राफ़ी किस वर्ष प्रकाशित हुई ?
उत्तर:
1477 ई० में।

प्रश्न 7.
मार्को पोलो कुबलई खाँ के दरबार में कब पहुँचा था ?
उत्तर:
1275 ई० में।

प्रश्न 8.
समुद्री खोज यात्राओं को प्रोत्साहित करने वाला राजकुमार हेनरी किस देश से संबंधित था ?
उत्तर:
पुर्तगाल।

प्रश्न 9.
क्रिस्टोफर कोलंबस किस देश का निवासी था ?
उत्तर:
इटली का।

प्रश्न 10.
इमगो मुंडी का लेखक कौन था ?
उत्तर:
कार्डिनल पिएर डिऐली।

प्रश्न 11.
क्रिस्टोफर कोलंबस गुआनाहानि कब पहुँचा ?
उत्तर:
1492 ई० में।

प्रश्न 12.
गुआनाहानि में कौन लोग रहते थे ?
उत्तर:
अरावाक।

प्रश्न 13.
कोलंबस ने गुआनाहानि में रहने वाले लोगों को किस नाम से पुकारा ?
उत्तर:
रेड इंडियन्स।

प्रश्न 14.
कोलंबस ने गुआनाहानि का नाम क्या रखा ?
उत्तर:
सैन सैल्वाडोर।

प्रश्न 15.
कोलंबस की मृत्यु कब हुई ?
उत्तर:
1506 ई० में।

प्रश्न 16.
हरनेंडो कोर्टेस ने मैक्सिको पर कब आक्रमण किया ?
उत्तर:
1519 ई० में।

प्रश्न 17.
हरनेंडो कोर्टस के मैक्सिको आक्रमण के दौरान किसने उसे बहुमूल्य सहयोग दिया ?
उत्तर:
डोना मैरीना ने।

प्रश्न 18.
टु हिस्ट्री ऑफ़ मैक्सिको का लेखक कौन था ?
उत्तर:
बर्नाल डियाज़ डेल कैस्टिलो।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

प्रश्न 19.
हरनेंडो कोर्टेस के आक्रमण के समय वहाँ किस एजटेक शासक का शासन था ?
उत्तर:
मोंटेजुमा द्वितीय का।

प्रश्न 20.
एजटेक साम्राज्य की राजधानी का नाम क्या था।
उत्तर:
टेनोक्टिटलान।

प्रश्न 21.
आँसू भरी रात की घटना कब हुई ?
उत्तर:
30 जून, 1520 ई०।

प्रश्न 22.
हरनेंडो कोर्टेस ने एज़टेक साम्राज्य का अंत कब किया ?
उत्तर:
1521 ई० में।

प्रश्न 23.
हरनेंडो कोर्टेस ने मैक्सिको का क्या नाम रखा ?
उत्तर:
न्यू स्पेन।

प्रश्न 24.
पेरू पर किसने अधिकार किया ?
उत्तर:
फ्राँसिस्को पिज़ारो ने।

प्रश्न 25.
फ्राँसिस्को पिज़ारो ने किसे पेरू की राजधानी घोषित किया ?
उत्तर:
लिमा को।

प्रश्न 26.
ब्राजील की खोज किसने की ?
उत्तर:
पेड्रो अल्वारिस कैब्राल ने।

प्रश्न 27.
ब्राज़ील किस वृक्ष के लिए जाना जाता था ?
उत्तर:
ब्राज़ीलवुड के लिए।

प्रश्न 28.
पुर्तगाल ने ब्राज़ील का शासन कब सीधा अपने हाथों में ले लिया ?
उत्तर:
1549 ई० में।

प्रश्न 29.
पुर्तगाल ने किसे ब्राज़ील की राजधानी घोषित किया?
उत्तर:
सैल्वाडोर को।

प्रश्न 30.
अरावाकी लुकायो नामक कबीला कहाँ रहता था ?
उत्तर:
बहामा एवं वृहत्तर एंटिलीज में।

प्रश्न 31.
हैमक क्या थे ?
उत्तर:
एक प्रकार का झूला।

प्रश्न 32.
एजटेक साम्राज्य कहाँ फैला हुआ था ?
उत्तर:
मैक्सिको में।

प्रश्न 33.
एजटेक साम्राज्य की राजधानी टेनोक्टिटलान का निर्माण कब किया गया था ?
उत्तर:
1325 ई० में।

प्रश्न 34.
एजटेक समाज में सबसे निम्न स्थान किसे प्राप्त था ?
उत्तर:
दासों को।

प्रश्न 35.
मैक्सिको झील में जो कृत्रिम टापू बनाए गए थे वे क्या कहलाते थे ?
उत्तर:
चिनाम्पा।

प्रश्न 36.
एजटेक साम्राज्य में अभिजात वर्ग के बच्चे जिन स्कूलों में पढ़ते थे वे क्या कहलाते थे ?
उत्तर:
कालमेकाक।

प्रश्न 37.
एज़टेकों का प्रमुख देवता कौन था ?
उत्तर:
सूर्य देवता।

प्रश्न 38.
दक्षिण अमरीका की सबसे प्रसिद्ध एवं शक्तिशाली सभ्यता कौन-सी थी ?
उत्तर:
इंका सभ्यता।

प्रश्न 39.
इंका साम्राज्य का संस्थापक किसे माना जाता है ?
उत्तर:
मैंको कपाक को।।

प्रश्न 40.
इंका साम्राज्य की राजधानी का क्या नाम था ?
उत्तर:
कुजको।

प्रश्न 41.
इंका साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली शासक कौन था ?
उत्तर:
पचकुटी इंका।

प्रश्न 42.
माचू-पिच्चू नामक प्रसिद्ध शहर का निर्माण किस सभ्यता ने किया था ?
उत्तर:
इंका सभ्यता ने।

प्रश्न 43.
इंका साम्राज्य में किसे सर्वोच्च स्थान प्राप्त था ?
उत्तर:
सम्राट् को।

प्रश्न 44.
इंका साम्राज्य में विद्यार्थियों को शिक्षा किस प्रकार दी जाती थी ?
उत्तर:
मौखिक।

प्रश्न 45.
इंका साम्राज्य के लोगों की प्रशासनिक भाषा कौन-सी थी ?
उत्तर:
क्वेचुआ।

प्रश्न 46.
माया सभ्यता कहाँ फैली थी ?
उत्तर:
मैक्सिको में।

प्रश्न 47.
माया सभ्यता के लोग किस फ़सल का सर्वाधिक उत्पादन करते थे ?
उत्तर:
मक्का का।

प्रश्न 48.
माया लोगों का प्रमुख देवता कौन था ?
उत्तर:
सूर्य देवता।

प्रश्न 49.
माया लोगों ने टिक्ल मंदिर का निर्माण कहाँ करवाया था ?
उत्तर:
ग्वातेमाला में।

प्रश्न 50.
माया लोगों ने कितने प्रकार के पंचांग तैयार किए थे ?
उत्तर:
दो।

प्रश्न 51.
माया लोगों की लिपि कैसी थी ?
उत्तर:
चित्रात्मक।

प्रश्न 52.
ओलाउदाह एक्वियानो कहाँ का निवासी था ?
उत्तर:
नाईजीरिया का।

प्रश्न 53.
दि इनटरेस्टिंग नैरेटिव ऑफ दि लाइफ ऑफ़ ओलाउदाह एक्वियानो का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था ?
उत्तर:
1789 ई० में

प्रश्न 54.
17वीं-18वीं शताब्दियों में यूरोपीय देश अधिकाँश दास कहाँ से प्राप्त करते थे ?
उत्तर:
अफ्रीका से।

प्रश्न 55.
कैपिटलिज्म एंड स्लेवरी का लेखक कौन था ?
उत्तर:
एरिक विलियम्स।

प्रश्न 56.
संयुक्त राज्य अमरीका ने दास प्रथा पर कब प्रतिबंध लगाया ?
उत्तर:
1865 ई० में।

रिक्त स्थान भरिए

1. यूरोपवासियों ने खोज यात्राओं का सर्वप्रथम आरंभ ……………… सदी में किया।
उत्तर:
15वीं

2. स्पेन के हरनेंडो कोर्टेस ने ……………….. में मैक्सिको पर आक्रमण कर दिया था।
उत्तर:
1519 ई०

3. एज़टेक की राजधानी का नाम ……………….. था।
उत्तर:
टेनोक्टिटलान

4. माया संस्कृति का संबंध ………………. देश से था।
उत्तर:
मैक्सिको

5. माया संस्कृति के लोगों के द्वारा टिक्ल मंदिर का निर्माण ……………….. में करवाया गया था।
उत्तर:
ग्वातेमाला

6. इंका साम्राज्य की स्थापना ……………….. द्वारा की गई थी।
उत्तर:
मैंको कपाक

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7. टॉलेमी ने ……………….. नामक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की।
उत्तर:
ज्योग्रफ़ी

8. तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया पर विजय ……………….. ई० में प्राप्त की।
उत्तर:
1453

9. क्रिस्टोफर ……………….. का निवासी था।
उत्तर:
इटली

10. स्पेनिश भाषा के अनुसार ‘बाओ’ शब्द का अर्थ है …………. ।
उत्तर:
भारी जहाज़

11. वास्कोडिगामा ……………….. ई० में कालीकट पहुँचा।
उत्तर:
1498

12. अमेरिका नाम का सर्वप्रथम प्रयोग एक जर्मन के प्रकाशक द्वारा ………………. ई० में किया गया।
उत्तर:
1507

13. ‘टू हिस्ट्री ऑफ मैक्सिको’ नामक पुस्तक की रचना …………. द्वारा की गई।
उत्तर:
बर्नार्ड

14. फ्रांसीसको पिज़ारो ने ……………….. को पेरु की राजधानी घोषित किया।
उत्तर:
लिमा को

15. स्पेन के फिलिप द्वितीय द्वारा बेगार की प्रथा पर ……………….. ई० में रोक लगा दी गई थी।
उत्तर:
1601

16. एरिक विलियम्स की सुप्रसिद्ध रचना का नाम ……………….. था।
उत्तर:
कैपिटलिज्म एंड स्लेवरी

17. संयुक्त राज्य अमेरिका ने ……………….. ई० में दास प्रथा पर रोक लगा दी थी।
उत्तर:
1865

बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. 15वीं से 17वीं शताब्दियों के दौरान यूरोपवासियों और उत्तरी एवं दक्षिणी अमरीका के मूल निवासियों के बीच हुए संघर्ष की जानकारी का प्रमुख स्रोत क्या है ?
(क) भवन
(ख) यात्रियों की डायरियाँ
(ग) जेसुइट धर्म प्रचारकों के विवरण
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

2. दूरबीन की खोज कब हुई ?
(क) 1409 ई० में
(ख) 1469 ई० में
(ग) 1609 ई० में
(घ) 1709 ई० में।
उत्तर:
(ग) 1609 ई० में

3. दिशासूचक यंत्र का आविष्कार कब हुआ था ?
(क) 1280 ई० में
(ख) 1320 ई० में
(ग) 1380 ई० में
(घ) 1420 ई० में।
उत्तर:
(ग) 1380 ई० में

4. टॉलेमी की ज्योग्राफ़ी किस वर्ष प्रकाशित हुई थी ?
(क) 1475 ई० में
(ख) 1477 ई० में
(ग) 1478 ई० में
(घ) 1479 ई० में।
उत्तर:
(ख) 1477 ई० में

5. तुर्कों ने कुंस्तुनतुनिया पर कब अधिकार कर लिया था ?
(क) 1433 ई० में
(ख) 1443 ई० में
(ग) 1453 ई० में
(घ) 1463 ई० में।
उत्तर:
(ग) 1453 ई० में

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6. मार्कोपोलो किस देश का निवासी था ?
(क) फ्राँस का
(ख) इटली का
(ग) रूस का
(घ) अमेरिका का।
उत्तर:
(ख) इटली का

7. कोलंबस का जन्म स्थान कहाँ था ?
(क) जेनेवा
(ख) पुर्तगाल
(ग) फ्राँस
(घ) स्पेन।
उत्तर:
(ख) पुर्तगाल

8. कोलंबस गुआनाहानि कब पहुँचा ?
(क) 1410 ई० में
(ख) 1451 ई० में
(ग) 1482 ई० में
(घ) 1492 ई० में।
उत्तर:
(घ) 1492 ई० में।

9. कोलंबस ने गुआनाहानि के लोगों को किस नाम से संबोधित किया ?
(क) रेड इंडियन्स
(ख) ब्लैक इंडियनस
(ग) अरावाक
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(क) रेड इंडियन्स

10. कोलंबस ने गुआनाहानि में किस देश का झंडा गाड़ा था ?
(क) पुर्तगाल का
(ख) इटली का
(ग) स्पेन का
(घ) मैक्सिको का।
उत्तर:
(ग) स्पेन का

11. निम्नलिखित में से किसने दक्षिण अमरीका को नयी दुनिया का नाम दिया ?
(क) कोलंबस ने
(ख) अमेरिगो वेस्पुसी ने
(ग) हरनेंडो कोर्टेस ने
(घ) डोना मैरीना ने।
उत्तर:
(ख) अमेरिगो वेस्पुसी ने

12. हरनेडो कोर्टेस और उसके सैनिकों जिन्होंने मैक्सिको पर आक्रमण किया था इतिहास में किस नाम से जाना जाता है ?
(क) कोंक्विस्टोडोर
(ख) मालिंचिस्टा
(ग) लैक्सकलान
(घ) कैरिब।
उत्तर:
(क) कोंक्विस्टोडोर

13. बर्नाल डियाज़ डेल कैस्टिलो ने किस प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की ?
(क) इमगो मुंडी
(ख) ट्र हिस्ट्री ऑफ़ मैक्सिको ।
(ग) ट्र हिस्ट्री ऑफ़ अमरीका
(घ) दि प्रिंस।
उत्तर:
(ख) ट्र हिस्ट्री ऑफ़ मैक्सिको ।

14. हरनेंडो कोर्टस ने मैक्सिको पर कब आक्रमण किया था ? ।
(क) 1509 ई० में
(ख) 1511 ई० में
(ग) 1519 ई० में
(घ) 1521 ई० में।
उत्तर:
(ग) 1519 ई० में

15. हरनेंडो कोटेंस ने जब मैक्सिको पर आक्रमण किया तो वहाँ किसका शासन था ?
(क) मोंटेजुमा प्रथम का
(ख) मोंटेजुमा द्वितीय का
(ग) अताहुआल्पा का
(घ) हुआस्कर का।
उत्तर:
(ख) मोंटेजुमा द्वितीय का

16. आँसू भरी रात की घटना किस दिन हुई ?
(क) 19 जन. 1520 ई० को
(ख) 29 जन 1500 ई० को
(ग) 30 जून, 1520 ई० को
(घ) 29 जुलाई, 1520 ई० को।
उत्तर:
(ग) 30 जून, 1520 ई० को

17. हरनेंडो कोर्टेस ने एजटेक साम्राज्य का अंत कब किया ?
(क) 1519 ई० में
(ख) 1520 ई० में
(ग) 1521 ई० में
(घ) 1522 ई० में।
उत्तर:
(ग) 1521 ई० में

18. हरनेंडो कोर्टेस को मैक्सिको विजय के लिए किसने बहुमूल्य सहयोग दिया था ?
(क) मोंटेजुमा द्वितीय ने
(ख) डोना मैरीना ने
(ग) अमेरिगो वेस्पुसी ने
(घ) काजामारका ने।
उत्तर:
(ख) डोना मैरीना ने

19. अताहुआल्पा इंका साम्राज्य का शासक कब बना ?
(क) 1529 ई० में
(ख) 1530 ई० में
(ग) 1531 ई० में
(घ) 1532 ई० में।
उत्तर:
(घ) 1532 ई० में।

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20. इंका साम्राज्य की राजधानी का नाम क्या था ?
(क) पेरू
(ख) लिमा
(ग) कुजको
(घ) टेनोक्टिटलान।
उत्तर:
(ग) कुजको

21. निम्नलिखित में से किसने इंका साम्राज्य पर अधिकार कर लिया था ?
(क) कोलंबस ने
(ख) फ्राँसिस्को पिज़ारो ने
(ग) हरनेंडो कोर्टेस ने
(घ) डोना मैरीना ने।
उत्तर:
(ख) फ्राँसिस्को पिज़ारो ने

22. 1533 ई० में पुर्तगाल के राजा ने ब्राजील को कितने आनुवंशिक कप्तानियों में बाँट दिया था?
(क) 13
(ख) 14
(ग) 15
(घ) 16
उत्तर:
(ग) 15

23. पुर्तगाल के शासक ने किसे ब्राज़ील की राजधानी घोषित किया ?
(क) कुजको को
(ख) सैल्वाडोर को
(ग) क्यूबा को
(घ) सैन सैल्वाडोर को।
उत्तर:
(ख) सैल्वाडोर को

24. एंटोनियो वीइरा कौन था ?
(क) जेसुइट
(ख) कैथोलिक पादरी
(ग) फ्रांसीसी व्यापारी
(घ) पुर्तगाली नाविक।
उत्तर:
(क) जेसुइट

25. अरावाकी लोगों की प्रमुख फ़सल कौन-सी थी ?
(क) मक्का
(ख) कसावा
(ग) मीठे आलू
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

26. अरावाकी जो झूले बनाते थे वे किस नाम से जाने जाते थे ?
(क) कुजको
(ख) कसावा
(ग) हैमक
(घ) डोनाटेरियस।
उत्तर:
(ग) हैमक

27. एजटेकों ने अपने विशाल साम्राज्य की स्थापना कहाँ की थी ?
(क) मैक्सिको में
(ख) ब्राज़ील में
(ग) स्पेन में
(घ) इटली में।
उत्तर:
(क) मैक्सिको में

28. एज़टेकों ने मैक्सिको नाम अपने किस प्रमुख देवता के नाम पर रखा था ?
(क) युद्ध देवता
(ख) कुजको
(ग) मैक्सिली
(घ) कालमेकाक।
उत्तर:
(ग) मैक्सिली

29. एजटेकों ने मैक्सिको झील में जो कृत्रिम टापू बनवाए वे क्या कहलाते थे ?
(क) चिनाम्पा
(ख) हैमक
(ग) माचू-पिच्चू
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) चिनाम्पा

30. एजटेकों की राजधानी का नाम क्या था ?
(क) कुजको
(ख) टेनोक्टिटलान
(ग) सैल्वाडोर
(घ) लिमा।
उत्तर:
(ख) टेनोक्टिटलान

31. एज़टेक समाज में सर्वोच्च स्थान किसे प्राप्त था ?
(क) अभिजात वर्ग को
(ख) पुरोहितों को
(ग) सैनिकों को
(घ) दासों को।
उत्तर:
(क) अभिजात वर्ग को

32. एनटेक साम्राज्य में अभिजात वर्ग के बच्चे जिन स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करते थे वे क्या कहलाते थे ?
(क) तेपोकल्ली
(ख) कालमेकाक
(ग) हैमक
(घ) डोनाटेरियस।
उत्तर:
(ख) कालमेकाक

33. एजटेक साम्राज्य के लोग किस देवी की प्रमुख रूप से उपासना करते थे ?
(क) मातृदेवी
(ख) अन्न देवी
(ग) मिनर्वा
(घ) डायना।
उत्तर:
(ख) अन्न देवी

34. इंका साम्राज्य की स्थापना कब की गई थी ?
(क) 10वीं शताब्दी में
(ख) 12वीं शताब्दी में
(ग) 13वीं शताब्दी में
(घ) 15वीं शताब्दी में।
उत्तर:
(ख) 12वीं शताब्दी में

35. इंका साम्राज्य की स्थापना कहाँ की गई थी ?
(क) बहामा में
(ख) ब्राज़ील में
(ग) पेरू में
(घ) मैक्सिको में।
उत्तर:
(ग) पेरू में

36. इंका साम्राज्य का सबसे महान् शासक कौन था ?
(क) मैंको कपाक
(ख) पचकुटी इंका
(ग) अताहुआल्पा
(घ) हुआस्कर।
उत्तर:
(ख) पचकुटी इंका

37. निम्नलिखित में से किस शहर का निर्माण इंका साम्राज्य के लोगों ने किया था ?
(क) उर
(ख) मारी
(ग) माचू-पिच्चू
(घ) लिमा।
उत्तर:
(ग) माचू-पिच्चू

38. इंका साम्राज्य के लोगों की प्रशासनिक भाषा क्या थी ?
(क) अंग्रेज़ी
(ख) फ्राँसीसी
(ग) क्विपु
(घ) क्वेचुआ।
उत्तर:
(घ) क्वेचुआ।

39. निम्नलिखित में से किस का साम्राज्य के लोग पालते थे ?
(क) भेड़
(ख) गाय
(ग) लामा
(घ) बाइसन।
उत्तर:
(ग) लामा

40. इंका साम्राज्य का अंत कब हुआ ?
(क) 1530 ई० में
(ख) 1532 ई० में
(ग) 1632 ई० में
(घ) 1638 ई० में।
उत्तर:
(ख) 1532 ई० में

41. माया समाज में सबसे निम्न स्थान किसे प्राप्त था ?
(क) पुरोहितों को
(ख) दासों को
(ग) व्यापारियों को
(घ) किसानों को।
उत्तर:
(ख) दासों को

42. माया सभ्यता के लोग निम्न में से किस फ़सल का सर्वाधिक उत्पादन करते थे ?
(क) आलू
(ख) कपास
(ग) सेम
(घ) मक्का
उत्तर:
(घ) मक्का

43. माया सभ्यता द्वारा निर्मित टिक्ल मंदिर का निर्माण किस शताब्दी में किया गया था ?
(क) 7वीं शताब्दी में
(ख) 8वीं शताब्दी में
(ग) 9वीं शताब्दी में
(घ) 10वीं शताब्दी में।
उत्तर:
(ख) 8वीं शताब्दी में

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

44. माया सभ्यता के लोगों ने कितने प्रकार के पंचांग बनाए थे ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार।
उत्तर:
(ख) दो

45. ओलाउदाह एक्वियानो कौन था ?
(क) दास
(ख) दार्शनिक
(ग) चिकित्सक
(घ) अध्यापक।
उत्तर:
(क) दास

46. ओलाउदाह एक्वियानो कहाँ का निवासी था ?
(क) साइबेरिया का
(ख) नाइजीरिया का
(ग) तंजानिया का
(घ) केन्या का।
उत्तर:
(ख) नाइजीरिया का

47. कैपिटलिज्म एंड स्लेवरी का लेखक कौन था ?
(क) जॉन विलियम्स
(ख) एरिक विलियम्स
(ग) कार्डिनल पिएर डिऐली
(घ) मार्को पोलो।
उत्तर:
(ख) एरिक विलियम्स

48. निम्नलिखित में से किस देश ने 1865 ई० में दास प्रथा पर प्रतिबंध लगाया था ?
(क) डेनमार्क
(ख) ब्रिटेन
(ग) संयुक्त राज्य अमरीका
(घ) फ्राँस।
उत्तर:
(ग) संयुक्त राज्य अमरीका

संस्कृतियों का टकराव HBSE 11th Class History Notes

→ 15वीं शताब्दी में यूरोपवासियों द्वारा की गई भौगोलिक खोजों ने एक नए युग का सूत्रपात किया। इन भौगोलिक खोजों को नए आविष्कारों, टॉलेमी की ज्योग्राफी, मार्को पोलो की यात्राओं, आर्थिक एवं धार्मिक उद्देश्यों एवं पुर्तगाल के राजकुमार हेनरी के बहुमूल्य योगदान ने प्रेरित किया। इन खोजों के अनेक दूरगामी परिणाम निकले।

→ 1492 ई० में क्रिस्टोफर कोलंबस ने बहामा द्वीप समूह के गुआनाहानि नामक स्थान पर स्पेन का झंडा गाड़ा। उसने इस द्वीप का नाम सैन-सैल्वाडोर रखा। यहाँ के अरावाकी लोगों ने जिस गर्मजोशी से कोलंबस का स्वागत किया उससे वह चकित रह गया। 1499 ई० में इटली के अमेरिगो वेस्पुसी ने दक्षिण अमरीका की यात्रा की।

→ उसने इसे नई दुनिया के नाम से संबोधित किया। 1507 ई० में एक जर्मन प्रकाशक ने अमेरिगो वेस्पुसी की स्मृति में नयी दुनिया को अमरीका का नाम दिया। स्पेन के हरनेडो कोर्टेस ने 1519 ई० में मैक्सिको पर आक्रमण कर दिया था। इस आक्रमण के दौरान उसे डोना मैरीना ने बहुमूल्य योगदान दिया।

→ कोर्टेस ने मैक्सिको के शासक मोंटेजुमा द्वितीय को धोखे से बंदी बना लिया। 1521 ई० में कोर्टेस ने एज़टेकों को पराजित कर उनके साम्राज्य का अंत कर दिया। हरनेंडो कोर्टेस 1522 ई० से लेकर 1547 ई० तक मैक्सिको जिसे अब न्यू स्पेन का नाम दिया गया था का गवर्नर एवं कैप्टन-जनरल रहा।

→ अपने शासनकाल के दौरान उसने वहाँ के मूल निवासियों पर घोर अत्याचार किए। स्पेन के एक अन्य प्रसिद्ध विजेता फ्रांसिस्को पिज़ारो ने पेरू में स्थापित इंका साम्राज्य पर 1532 ई० में आक्रमण कर दिया। उसने धोखे से वहाँ के शासक अताहुआल्पा को बंदी बना लिया।

→ इस कारण उसने सुगमता से 1533 ई० में इंका साम्राज्य की राजधानी कुज़को पर अधिकार कर लिया। इसके पश्चात् उसने वहाँ भयंकर लूटमार की। पिज़ारो ने 1541 ई० तक पेरू में शासन किया। उसने लिमा को पेरू की नई राजधानी बनाया। 1500 ई० में पुर्तगाल का नाविक पेड्रो अल्वारिस कैबाल संयोगवश ब्राज़ील पहुँच गया था।

→ आरंभ में पुर्तगालियों ने ब्राज़ील की ओर कम ध्यान दिया। इसका प्रमुख कारण यह था कि वहाँ सोना अथवा चाँदी मिलने की संभावना बहुत कम थी। ब्राज़ील में केवल ब्राज़ीलवुड नामक इमारती लकड़ी मिलती थी। 1549 ई० में पुर्तगाल के शासक ने ब्राज़ील का शासन सीधे अपने हाथों में ले लिया था। यहाँ आए जेसुइट पादरियों ने दास प्रथा की कटु आलोचना की।

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HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भाग-I : सही विकल्प का चयन करें

1. विश्व में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान कौन-सा है?
(A) मॉसिनराम
(B) चेरापूँजी
(C) तुरा
(D) सिल्वर
उत्तर:
(A) मॉसिनराम

2. भारत की जलवायु है-
(A) शीतोष्ण कटिबंधीय
(B) उष्ण कटिबंधीय
(C) ध्रुवीय
(D) उपोष्ण कटिबंधीय
उत्तर:
(B) उष्ण कटिबंधीय

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

3. भारत के उत्तरी मैदान में ग्रीष्म ऋतु में दिन में बहने वाली पवन का क्या नाम है?
(A) काल बैसाखी
(B) सन्मार्गी पवनें
(C) लू
(D) शिनूक
उत्तर:
(C) लू

4. भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में सर्दियों में होने वाली वर्षा किस कारण से होती है?
(A) चक्रवातीय अवदाब
(B) पश्चिमी विक्षोभ
(C) लौटती मानसून
(D) दक्षिण-पश्चिमी मानसून
उत्तर:
(B) पश्चिमी विक्षोभ

5. निम्नलिखित में से किसके सहारे पर्वतीय वर्षा नहीं होती?
(A) पश्चिमी घाट
(B) अरावली
(C) शिवालिक
(D) गारो, खासी और जयंतिया
उत्तर:
(B) अरावली

6. निम्नलिखित में से वर्षा की सर्वाधिक परिवर्तनीयता कहाँ पाई जाती है?
(A) राजस्थान
(B) केरल
(C) कर्नाटक
(D) मेघालय
उत्तर:
(A) राजस्थान

7. कौन-सी विशेषता मानसूनी वर्षा की नहीं है?
(A) मौसमी वर्षा
(B) वर्षा वाले दिनों की निरंतरता
(C) वषां का असमान वितरण
(D) अनिश्चित और अनियमित वर्षा
उत्तर:
(B) वर्षा वाले दिनों की निरंतरता

8. ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा सबसे पहले भारत के किस राज्य में आती है?
(A) केरल
(B) पंजाब
(C) पश्चिमी बंगाल
(D) कर्नाटक
उत्तर:
(A) केरल

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

9. सर्वाधिक वार्षिक तापांतर निम्नलिखित में से किस महानगर में पाया जाता है?
(A) कोलकाता
(B) फरीदाबाद
(C) मुंबई
(D) चेन्नई
उत्तर:
(B) फरीदाबाद

10. निम्नलिखित में से सबसे कम वार्षिक तापांतर पाया जाता है-
(A) शिलांग
(B) तिरुवनंतपुरम
(C) जोधपुर
(D) जींद
उत्तर:
(B) तिरुवनंतपुरम

11. भारतीय मौसम मानचित्र नहीं दर्शाता है-
(A) मेघाच्छादन
(B) समदाब रेखाएँ
(C) समताप रेखाएँ
(D) वायु की दिशा
उत्तर:
(C) समताप रेखाएँ

12. दिल्ली का वार्षिक तापांतर अधिक है, क्योंकि
(A) यह कर्क रेखा के निकटतम है
(B) यहाँ अल्प वर्षा होती है
(C) यह समुद्र से दूर स्थित है
(D) यह मरुस्थल के निकट है
उत्तर:
(C) यह समुद्र से दूर स्थित है

13. निम्नलिखित में से कौन-से राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा नहीं होती?
(A) पंजाब
(B) कर्नाटक
(C) तमिलनाडु
(D) राजस्थान
उत्तर:
(C) तमिलनाडु

14. तमिलनाडु में वर्षा होने का कारण है-
(A) दक्षिण-पश्चिमी मानसून
(B) उत्तर:पूर्वी मानसून
(C) पूर्वी अवदाब
(D) पश्चिमी विक्षोभ
उत्तर:
(B) उत्तर:पूर्वी मानसून

15. दक्षिण-पश्चिमी मानसून भारत के दक्षिण में केरल तट पर कब पहुँचती है?
(A) 1 जून
(B) 10 जून
(C) 13 जून
(D) 18 जून
उत्तर:
(A) 1 जून

16. कोपेन ने अपने जलवायु वर्गीकरण में मानसूनी जलवायु को किस संकेताक्षर से प्रस्तुत किया है?
(A) Am
(B) Aw
(C) Af
(D) Cw
उत्तर:
(A) Am

17. भारत में प्रवेश करने वाले शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति कहाँ होती है?
(A) अरब सागर में
(B) भूमध्य सागर में
(C) हिंद महासागर में
(D) अटलांटिक महासागर में
उत्तर:
(B) भूमध्य सागर में

18. कौन-सा पर्वतीय क्षेत्र अधिकतम वर्षा प्राप्त करता है?
(A) पश्चिमी घाट
(B) नीलगिरि
(C) सतपुड़ा
(D) खासी पहाड़ियाँ
उत्तर:
(D) खासी पहाड़ियाँ

19. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है?
(A) आन वर्षा : ओडिशा
(B) आंधी : उत्तर प्रदेश
(C) काल बैसाखी : पं० बंगाल
(D) लू : उत्तर पश्चिमी भारत
उत्तर:
(A) आन वर्षा : ओडिशा

20. भारत के कोरोमंडल तट पर वर्षा होती है-
(A) मार्च-मई में
(B) जनवरी-फरवरी में
(C) अक्तूबर-नवम्बर में
(D) जून-सितम्बर में
उत्तर:
(C) अक्तूबर-नवम्बर में

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

21. निम्नलिखित में से किस स्थान पर सूर्य सिर के ऊपर कभी लंबवत् नहीं चमकता?
(A) चेन्नई
(B) दिल्ली
(C) भोपाल
(D) मुम्बई
उत्तर:
(B) दिल्ली

22. वर्षा की सर्वाधिक विरलता निम्नलिखित में से कहाँ पाई जाती है?
(A) जैसलमेर
(B) जोधपुर
(C) बीकानेर
(D) लेह
उत्तर:
(D) लेह

23. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण में ‘As’ संकेताक्षर भारत के किस क्षेत्र के लिए प्रयुक्त किया गया है?
(A) पूर्वी हिमालय
(B) केरल तट
(C) तमिलनाडु तट
(D) पश्चिमी राजस्थान
उत्तर:
(C) तमिलनाडु तट

24. दिसंबर मास में भारत में सबसे कम तापमान कहाँ पाया जाता है?
(A) गंगानगर
(B) द्रास/कारगिल
(C) पंजाब
(D) केरल
उत्तर:
(B) द्रास/कारगिल

25. भारत में उच्चतम तापमान कहाँ पाया जाता है?
(A) गंगानगर
(B) द्रास/कारगिल
(C) पंजाब
(D) केरल
उत्तर:
(A) गंगानगर

26. वर्षा ऋतु में वायुमंडल में सर्वाधिक आर्द्रता विद्यमान रहती है-
(A) मध्यान्ह के समय
(B) प्रातःकाल के समय
(C) सायंकाल के समय
(D) मध्यरात्रि के समय
उत्तर:
(B) प्रातःकाल के समय

27. निम्नलिखित में से कौन भारतीय मानसून को प्रभावित नहीं करता?
(A) जेट स्ट्रीम
(B) एल-निनो
(C) गल्फ स्ट्रीम
(D) तिब्बत का पठार
उत्तर:
(C) गल्फ स्ट्रीम

28. पश्चिमी घाट के पूर्व में स्थित वृष्टि-छाया प्रदेश के होने का प्रमुख कारण कौन-सा है?
(A) मंद ढाल
(B) आर्द्रता में वृद्धि
(C) तापमान में वृद्धि
(D) विरल वनस्पति
उत्तर:
(C) तापमान में वृद्धि

29. ग्रीष्म ऋतु में आने वाला कौन-सा तूफान चाय, पटसन व चावल के लिए उपयोगी माना जाता है?
(A) काल बैसाखी
(B) आम्र वर्षा
(C) फूलों वाली बौछार
(D) वज्र तूफान
उत्तर:
(A) काल बैसाखी

30. मानसून की गतिक विचारधारा का प्रतिपादन किस विद्वान ने किया था?
(A) एम०टी० यीन
(B) पी० कोटेश्वरम्
(C) रामारत्ना
(D) एच० फ्लोन
उत्तर:
(D) एच० फ्लोन

31. एल-निनो के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
(A) यह पेरु के तट के सहारे बहने वाली समुद्री धारा है
(B) एल-निनो का अर्थ है ‘बालक ईसा’
(C) यह उष्ण वायु की धारा है जो जल में वाष्पिक अनियमितताएँ उत्पन्न कर देती है
(D) यह धारा क्रिसमस के आस-पास पैदा होती है
उत्तर:
(C) यह उष्ण वायु की धारा है जो जल में वाष्पिक अनियमितताएँ उत्पन्न कर देती है

32. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय स्थान सबसे ठण्डा है?
(A) श्रीनगर
(B) गुलमर्ग
(C) द्रास
(D) नन्दा देवी
उत्तर:
(C) द्रास

भाग-II : एक शब्द या वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
भारत कौन-सी जलवायु वाला देश है?
उत्तर:
भारत उष्ण कटिबन्धीय मानसूनी जलवायु वाला देश है।

प्रश्न 2.
‘मानसून’ शब्द कौन-सी भाषा के किस शब्द से बना है?
उत्तर:
मानसून शब्द अरबी भाषा के मौसिम’ शब्द से बना है।

प्रश्न 3.
विश्व में सर्वाधिक वर्षा कहाँ होती है?
उत्तर:
विश्व में सबसे अधिक वर्षा मेघालय में चेरापूंजी के निकट मॉसिनराम स्थान पर होती है।

प्रश्न 4.
‘ल’ भारत में कब और किस क्षेत्र में चलती है?
उत्तर:
भारत में ‘लू’ ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में तथा उत्तरी भारत में चलती है।

प्रश्न 5.
जेट-प्रवाह की कौन सी शाखा सर्दियों में उत्तरी भारत में चक्रवात लाने में सहायक होती है?
उत्तर:
जेट-प्रवाह की पश्चिमी शाखा।

प्रश्न 6.
भारत में किस क्षेत्र से मानसून सबसे पहले लौटता है?
उत्तर:
पश्चिमी राजस्थान से।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 7.
भारत के किन भागों में लौटती हुई मानसून पवनें शीतऋतु में वर्षा करती हैं?
उत्तर:
तमिलनाडु में।

प्रश्न 8.
थार्नवेट तथा कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के क्या आधार हैं?
उत्तर:
थार्नवेट : जल-सन्तुलन, कोपेन तापमान एवं वृष्टि के मासिक मान।

प्रश्न 9.
भारत में उच्चतम तापमान कहाँ और कितना पाया जाता है?
उत्तर:
भारत में उच्चतम तापमान राजस्थान के गंगानगर शहर में 52° सेल्सियस पाया जाता है।

प्रश्न 10.
भारत के किस राज्य में वार्षिक तापान्तर सबसे कम होता है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 11.
भारत के दक्षिणी-पूर्वी तट पर अथवा कोरोमण्डल तट पर सर्दियों में वर्षा क्यों होती है?
उत्तर:
उत्तर-पूर्वी मानसून पवनों के कारण।

प्रश्न 12.
मानसून पवनें कौन-सी पवनें होती हैं?
उत्तर:
मानसून पवनें मौसमी पवनों को कहते हैं।

प्रश्न 13.
गर्मियों में मानसून पवनों की दिशा बताएँ।
उत्तर:
दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर।

प्रश्न 14.
ग्रीष्मकालीन मानसूनी वर्षा सबसे पहले भारत के किस राज्य में आती है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 15.
काल बैसाखी नामक भयंकर तूफानी पवनें क्यों चलती हैं?
उत्तर:
शुष्क व गर्म पवनों के समुद्री आर्द्र पवनों से मिलने के कारण।

प्रश्न 16.
भारत में वर्षा ऋतु के महीने कौन-से माने जाते हैं?
उत्तर:
जून से सितम्बर तक के महीने।

प्रश्न 17.
मानसून प्रस्फोट क्या होता है?
उत्तर:
वर्षा का अचानक आरम्भ होना।

प्रश्न 18.
भारत का कौन-सा तट दक्षिण-पश्चिमी मानसून पवनों से वर्षा प्राप्त करता है?
उत्तर:
पश्चिमी तट।

प्रश्न 19.
भारत के किस राज्य में आम्र वर्षा होती है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 20.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार भारत की चार ऋतुएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:

  1. शीत ऋतु
  2. ग्रीष्म ऋतु
  3. वर्षा ऋतु
  4. मानसून के निवर्तन की ऋतु।

प्रश्न 21.
पश्चिमी विक्षोभ या शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात सर्दियों में कहाँ कहाँ वर्षा करते हैं?
उत्तर:
हिमालय की श्रेणियों, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में।

प्रश्न 22.
दक्षिणी भारत में उत्तर भारत जैसी प्रखर ग्रीष्म ऋतु क्यों नहीं होती?
उत्तर:
प्रायद्वीपीय स्थिति (तीन ओर से समुद्र) के कारण।

प्रश्न 23.
काल बैसाखी तूफान या नॉरवेस्टर कहाँ चलते हैं?
उत्तर:
असम और पश्चिमी बंगाल में।

प्रश्न 24.
आम्र वर्षा कहाँ होती है?
उत्तर:
पूर्वी महाराष्ट्र तथा पश्चिमी तटीय प्रदेश में।

प्रश्न 25.
200 सें०मी० से अधिक वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्र कौन से हैं?
उत्तर:
पश्चिमी घाट के पश्चिमी भाग तथा उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 26.
भारत की जलवायु की क्या विशेषता है?
अथवा
उष्ण कटिबन्धीय मानसनी जलवाय की क्या विशेषता है?
उत्तर:
उष्ण-आर्द्र गर्मियाँ व शुष्क एवं ठण्डी सर्दियाँ।

प्रश्न 27.
भारत में जून सबसे गर्म महीना होता हैं, जुलाई नहीं। क्यों?
उत्तर:
जुलाई में वर्षा हो जाने के कारण तापमान 10°C सेल्सियस गिर जाता है।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनवरी में जेट-प्रवाह की क्या स्थिति होती है?
उत्तर:
जनवरी में जेट-प्रवाह हिमालय के दक्षिण की ओर पश्चिम से पूर्व दिशा में होती है।

प्रश्न 2.
मानसून द्रोणी किसे कहते हैं?
उत्तर:
अंतउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र को मानसून द्रोणी कहते हैं।

प्रश्न 3.
मानसून विच्छेद क्या होता है?
उत्तर:
एक बार कुछ दिनों तक वर्षा होने के बाद यदि एक-दो या कई हफ्तों तक वर्षा न हो तो वह मानसून विच्छेद कहलाता है।

प्रश्न 4.
फूलों वाली बौछार कहाँ होती है और किस फसल के लिए उपयोगी मानी जाती है?
उत्तर:
फूलों वाली बौछार केरल में होती है तथा यह कहवा फसल के लिए उपयोगी मानी जाती है।

प्रश्न 5.
‘अक्तूबर हीट’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
अत्यधिक आर्द्रता तथा गर्मी वाला अक्तूबर का घुटन भरा चिपचिपा मौसम।

प्रश्न 6.
‘लू’ किस प्रकार की पवनें होती हैं?
उत्तर:
गर्मियों में उत्तरी भारत में चलने वाली गर्म एवं धूल भरी पवनें।

प्रश्न 7.
वृष्टि-छाया क्षेत्र कौन-से होते हैं?
उत्तर:
पर्वतों के पवनाविमुखी ढाल वाले क्षेत्र वृष्टि-छाया क्षेत्र होते हैं।

प्रश्न 8.
‘मानसून’ शब्द से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
मानसून शब्द अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से लिया गया है। इस शब्द का अर्थ है ऋतु अर्थात् मानसून का अर्थ एक ऐसी ऋतु से है जिसमें पवनों की दिशा में पूरी तरह से परिवर्तन हो जाता है। ये मौसमी पवनें हैं जो मौसम के अनुसार अपनी दिशा बदल लेती हैं। ये पवनें ग्रीष्मकाल में छह मास सागर से स्थल की ओर तथा शीतकाल में छह मास तक स्थल से सागर की ओर चलती हैं।

प्रश्न 9.
अंतःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र (I.T.C.z.) क्या है?
उत्तर:
अंतःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र निम्न वायुदाब क्षेत्र होता है जो सभी दिशाओं से पवनों के अन्तर्वहन को प्रोत्साहित करता है। यह भूमध्य-रेखीय क्षेत्र में स्थित होता है। इसकी स्थिति सूर्य की स्थिति के अनुसार उष्ण कटिबन्ध के मध्य बदलती रहती है। ग्रीष्मकाल में यह उत्तर की ओर तथा शीतकाल में यह दक्षिण की ओर सरक जाता है। इसे भूमध्यरेखीय द्रोणी भी कहते हैं।

प्रश्न 10.
लू से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
लू, वे स्थानीय पवनें हैं जो ग्रीष्मकाल में उत्तर तथा उत्तर:पश्चिमी भारत में दिन के समय तेज गति से चलती हैं। ये अत्यधिक गर्म हवाएँ होती हैं। लू के कारण तापमान 40° सेल्सियस से अधिक रहता है तथा धूल-भरी आँधियाँ चलती हैं। लू की गर्मी सहन नहीं होती और लोग प्रायः बीमार हो जाते हैं।

प्रश्न 11.
‘मानसून’ प्रस्फोट किसे कहते हैं? और भारत में सबसे अधिक वर्षा कहाँ होती है?
उत्तर:
भारत में ग्रीष्म ऋतु के पश्चात् वर्षा ऋतु आरम्भ होती है। इस समय भारत में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पवनें प्रवेश करती हैं तथा भारत की 80% वर्षा इन्हीं पवनों से होती है। मानसून पवनों की वर्षा के
अकस्मात् आरम्भ होने को ‘मानसून प्रस्फोट’ कहते हैं। इसमें वर्षा की तेज बौछारें पडती हैं। भारत में सबसे अधिक वर्षा मॉसिनराम (चेरापंजी) में होती है।

प्रश्न 12.
वर्षा की परिवर्तनीयता से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वर्षा की सामान्य मात्रा से अधिक या कम वर्षा होने की घटना को वर्षा की परिवर्तनीयता या विचरणशीलता कहते हैं। परिवर्तनीयता का मूल्य एक ऐसे सूत्र से निकाला जाता है जिसे विचरणशीलता का गुणांक या संक्षेप में C.V. कहा जाता है।
HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु 1

प्रश्न 13.
संसार में सर्वाधिक वर्षा मॉसिनराम में होती है। क्यों?
उत्तर:
मॉसिनराम मेघालय राज्य में स्थित है। यह स्थान 1221 सें०मी० से अधिक वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है, जो विश्व में किसी भी स्थान की वर्षा की अपेक्षा अधिक है। यह स्थान खासी-गारो-ज्यन्तिया पहाड़ियों से घिरा हुआ है जिनकी स्थिति कुप्पी जैसी है। यहाँ बंगाल की खाड़ी में मानसून पवनें घुस जाती हैं जिससे यहाँ भारी वर्षा होती है।

प्रश्न 14.
तमिलनाडु के तटीय प्रदेशों में अधिकतर वर्षा जाड़ों में होती है, क्यों?
उत्तर:
दक्षिण-पश्चिमी मानसून के दिनों में वृष्टि-छाया क्षेत्र में होने के कारण ये क्षेत्र सूखे रह जाते हैं, परन्तु लौटती हुई मानसून (Retreating Monsoon) या उत्तर:पूर्वी मानसून के दिनों में यहाँ काफी वर्षा होती है क्योंकि ये पवनें जब खाड़ी बंगाल के ऊपर से गुज़रती हैं तो वाष्प लेकर सीधे तमिलनाडु के तट से टकराकर यहाँ खूब वर्षा करती हैं।

प्रश्न 15.
भारत के उत्तर:पश्चिम के मैदान में शीत ऋतु में वर्षा होती है, क्यों?
उत्तर:
भूमध्य सागर तथा फारस की खाड़ी से आर्द्रता ग्रहण करके पवनें, जेट-प्रवाह की सहायता से शीत ऋतु में उत्तर:पश्चिम भारत में प्रवेश करके और पश्चिमी हिमालय की पहाड़ियों से टकराकर यहाँ वर्षा करती हैं, जो इस मैदान की कृषि के लिए बहुत लाभदायक है।

प्रश्न 16.
वर्षा का वितरण सारे भारत में एक-समान नहीं है। क्यों?
उत्तर:
भारत में वर्षा का वितरण एक-समान नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि जैसे-जैसे हम समुद्र से दूर जाते हैं, वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। समुद्र के निकट और पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा अधिक होती है। इसी प्रकार वृष्टिछाया क्षेत्र में वर्षा की मात्रा बहुत कम होती है क्योंकि पर्वतों से नीचे उतरती वायु में वाष्पकण ग्रहण करने की शक्ति बढ़ती जाती है। भारत एक विशाल देश है। यहाँ राजस्थान जैसे प्रदेश समुद्र से इतने दूर हैं कि खाड़ी बंगाल की पवनें यहाँ आते-आते शुष्क हो जाती हैं।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 17.
भारत की वार्षिक वर्षा के वितरण की दो मुख्य प्रवृत्तियाँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
भारत की वार्षिक वर्षा के वितरण की दो मुख्य प्रवृत्तियां निम्नलिखित हैं (1) वर्षा की मात्रा पश्चिमी बंगाल और ओडिशा के तट से पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की ओर कम होती जाती है। (2) पश्चिमी एवं पूर्वी तटों से पठार के आन्तरिक क्षेत्रों की ओर वर्षा की मात्रा कम होती जाती है।

प्रश्न 18.
जैसलमेर में वर्षा शायद ही कभी 12 सें०मी० से अधिक होती है। क्यों?
उत्तर:
जैसलमेर राजस्थान में अरावली पर्वत के पश्चिम में स्थित है। अरावली पर्वत अरब सागर की मानसून पवनों के समानान्तर स्थित है। इसलिए ये मानसून पवनें बिना-रोक-टोक आगे निकल जाती हैं तथा वर्षा नहीं करतीं। इसलिए यहाँ औसत वार्षिक वर्षा 12 सें०मी० से भी कम है।

प्रश्न 19.
उत्तर-पश्चिम भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को किस प्रकार के चक्रवातों से वर्षा प्राप्त होती है? ये चक्रवात कहाँ उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
उत्तर-पश्चिम भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को अत्यन्त लाभदायक शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात प्राप्त होते हैं, जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ भी कहा जाता है। ये चक्रवात पूर्वी भूमध्य सागर पर उत्पन्न होते हैं और पूर्व की ओर यात्रा करते हुए भारत पहुँचते हैं।

प्रश्न 20.
भारत के तटीय प्रदेशों में गर्मी और जाड़े की ऋतुओं के मध्य तापमानों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। क्यों?
उत्तर:
भारत के तटीय प्रदेश उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र में स्थित हैं। यहाँ ग्रीष्म ऋतु और शीत ऋतु में तापमान में कोई विशेष अन्तर नहीं होता क्योंकि सागरों के समकारी प्रभाव के कारण तापमान समान रहता है। यहाँ जल समीर तथा स्थल समीर चलती हैं। इनके प्रभाव के कारण तापमान अधिक नहीं बढ़ता तथा शीत ऋतु में सागरों के जल के गर्म रहने के कारण तापमान अधिक कम नहीं होता।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के अत्यधिक गर्म तथा अत्यधिक ठण्डे स्थानों का उल्लेख करें।
उत्तर:
भारत में अत्यधिक ठण्डे प्रदेश उत्तर:पश्चिमी हिमालय में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा अन्य पर्वतीय क्षेत्र हैं। जम्मू-कश्मीर के कारगिल नामक स्थान पर न्यूनतम तापमान-40° सेल्सियस पाया जाता है। इन प्रदेशों के अत्यधिक ठण्डे होने का मुख्य कारण समुद्र-तल से ऊँचाई है। इन प्रदेशों में शीत ऋतु में हिमपात होता है तथा तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है।

भारत में सबसे अधिक गर्म स्थान राजस्थान का बाड़मेर क्षेत्र है। यहाँ ग्रीष्मकाल में दिन का तापमान 50° सेल्सियस तक पहुँच जाता है। यहाँ अधिक तापमान का मुख्य कारण समुद्र तल से दूरी है। गर्मियों में यहाँ लू चलती है जो यहाँ के तापमान को बढ़ा देती है। अन्य कारण यहाँ की रेतीली मिट्टी तथा वायु में आर्द्रता की कमी है।

प्रश्न 2.
भारत के सर्वाधिक वर्षा वाले तथा सर्वाधिक शुष्क स्थानों का उल्लेख करें।
उत्तर:
भारत में सर्वाधिक वर्षा मॉसिनराम (मेघालय राज्य में चेरापूँजी के निकट स्थित) में 1140 सें०मी० तथा 200 सें०मी० से अधिक गारो तथा खासी की पहाड़ियों, पश्चिमी तटीय मैदान तथा पश्चिमी घाट पर होती है क्योंकि ये प्रदेश पर्वतीय क्षेत्र हैं तथा पवनों की दिशा में स्थित हैं। गारो तथा खासी की पहाड़ियों में खाड़ी बंगाल की मानसून पवनें तथा पश्चिमी घाट की पश्चिमी ढलान पर अरब सागर की मानसून पवनें खूब वर्षा करती हैं।

भारत में निम्नतम वर्षा (20 सें०मी० से कम) वाले क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान में बाड़मेर क्षेत्र, कश्मीर में लद्दाख क्षेत्र तथा दक्षिणी पठार क्षेत्र हैं क्योंकि राजस्थान में अरावली पर्वत अरब मानसूनी पवनों के समानान्तर स्थित है। प्रायद्वीप पठार तथा लद्दाख क्षेत्र वृष्टिछाया में स्थित होने के कारण बहुत कम वर्षा प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 3.
‘जेट-प्रवाह’ क्या है? इसका क्या प्रभाव है?
उत्तर:
पृथ्वी के तल से लगभग तीन किलोमीटर की ऊँचाई पर तेज गति की धाराएँ चलती हैं, जिन्हें जेट-प्रवाह कहते हैं। एक मान्यता के अनुसार ये ‘जेट-प्रवाह’ मानसून पवनों की उत्पत्ति का एक कारण है। ये जेट-प्रवाह 40° उत्तर से 20° दक्षिण अक्षांशों में नियमित रूप से चलते हैं। हिमालय पर्वत तथा तिब्बत का पठार इसके मार्ग में अवरोध पैदा करते हैं, जिससे यह जेट-प्रवाह दो शाखाओं में बँट जाता है। एक भाग हिमालय के उत्तर में तथा दूसरा भाग दक्षिण में पश्चिमी-पूर्वी दिशा में बहता है। दक्षिणी को प्रभावित करता है। शीत काल में भारत के उत्तर:पश्चिमी भाग में आने वाले चक्रवात इस जेट-प्रवाह का ही परिणाम है।

प्रश्न 4.
पश्चिमी जेट-प्रवाह जाड़े के दिनों में किस प्रकार पश्चिमी विक्षोभों को भारतीय उप-महाद्वीप में लाने में मदद करते हैं?
उत्तर:
जेट-प्रवाह की दूसरी शाखा हिमालय के दक्षिण में पश्चिम से पूर्व को बहती है। यह शाखा 25° उत्तर अक्षांश पर स्थित होती है। इसका दाब स्तर 200 मिलीबार से 300 मिलीबार होता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जेट-प्रवाह की यह दक्षिणी शाखा भारत में शीत ऋतु को प्रभावित करती है तथा यहाँ पश्चिमी विक्षोभ लाने में सहायक है। ये विक्षोभ पश्चिमी एशिया तथा भूमध्य सागर के निकट निम्न वायु-दाब क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं तथा जेट-प्रवाह के साथ-साथ ईरान और पाकिस्तान को पार करके भारत में प्रवेश करते हैं। इनके प्रभाव से शीतकाल में उत्तर:पश्चिमी भारत में वर्षा होती है।

प्रश्न 5.
भारतीय मानसून की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
भारतीय मानसून की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • मानसून पवनों का अनियमित तथा अनिश्चित होना।
  • ऋतु अनुसार पवनों की दिशा में परिवर्तन होना।
  • मानसून पवनों का प्रादेशिक स्वरूप भिन्न-भिन्न होते हुए भी जलवायविक एकता का होना।

प्रश्न 6.
भारत में कितनी ऋतुएँ होती हैं? क्या उनकी अवधि में दक्षिण से उत्तर में कोई अन्तर मिलता है? यदि हाँ, तो क्यों?
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। यहाँ तापमान दबाव, पवनों तथा वर्षा की परिस्थितियाँ सारा वर्ष समान नहीं रहतीं बल्कि इनमें नियमित रूप से परिवर्तन आते हैं। भारत की जलवायु की अवस्था तथा उसके रचना-तन्त्र के अनुसार निम्नलिखित चार ऋतुएँ पाई जाती हैं

  • शीत ऋतु-दिसम्बर से फरवरी।
  • ग्रीष्म ऋतु-मार्च से मध्य जून।
  • वर्षा ऋतु-मध्य जून से मध्य सितम्बर।
  • मानसून प्रत्यावर्तन ऋतु-दक्षिण से उत्तर की ओर जाते हुए विभिन्न प्रदेशों की इस ऋतु की अवधि में अन्तर मिलता है।

दक्षिणी भारत में कोई विशेष ऋतु नहीं होती। यहाँ सामान्यतः ग्रीष्म ऋतु पाई जाती है। तटीय क्षेत्रों में ऋतु परिवर्तन नहीं होता क्योंकि भारत का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबन्ध में स्थित है। उत्तरी भारत में स्पष्ट रूप से ग्रीष्म ऋतु तथा शीत ऋतु पाई जाती है क्योंकि यह भाग शीत उष्णकटिबन्ध में स्थित है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 7.
पश्चिमी विक्षोभ क्या है? भारत में किस भाग में शीत ऋतु में वर्षा होती है?
अथवा
पश्चिमी विक्षोभ क्या है? भारत के किन भागों में ये शीतकालीन वर्षा लाते हैं?
उत्तर:
पश्चिमी विक्षोभ वे चक्रवात हैं जो पश्चिमी एशिया तथा भूमध्य सागर के निकट के प्रदेशों में उत्पन्न होते हैं। पश्चिमी जेट-प्रवाह के कारण ये चक्रवात पूर्व की तरफ से ईरान तथा पाकिस्तान को पार करके भारत में प्रवेश करते हैं। शीत ऋतु में ये चक्रवात पश्चिमी भारत के क्षेत्रों में क्रियाशील होते हैं तथा इनके कारण जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भारी वर्षा होती है। यह वर्षा गेहूँ की फसल के लिए विशेष रूप से लाभदायक होती है।

प्रश्न 8.
कौन-कौन-से कारक भारतीय उप-महाद्वीप में तापमान वितरण को नियन्त्रित करते हैं?
उत्तर:
भारतीय उप-महाद्वीप के तापमान के वितरण में बहुत अन्तर पाया जाता है। मानसून प्रदेश में स्थित होने के कारण यह एक उष्ण देश है। यहाँ के विभिन्न क्षेत्रों के तापमान में पाई जाने वाली विविधता के निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-

  • अक्षांश अथवा भूमध्य रेखा से दूरी
  • पर्वतों की स्थिति
  • समुद्र तल से दूरी
  • प्रचलित पवनें
  • चक्रवातीय प्रभाव
  • समुद्र तल से ऊँचाई।

प्रश्न 9.
भारत में वार्षिक वर्षा के विचरण गुणांक के वितरण की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
भारत में वार्षिक वर्षा के विचरण गुणांक में सामान्य रूप से 15 से 30 प्रतिशत के बीच विचलन पाया जाता है। विचरण गुणांक अधिक वर्षा वाले भागों में कम और कम वर्षा वाले भागों में अधिक पाया जाता है। पश्चिमी तट पर मंगलौर, मेघालय, असम, अरुणाचल प्रदेश, उप-हिमालयी पेटी, मणिपुर, मिज़ोरम व नगालैण्ड जैसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में विचरण गुणांक 15 प्रतिशत से कम है। इसके विपरीत पठारी प्रदेशों में विचरण गुणांक 30 प्रतिशत से अधिक है। ये साधारण वर्षा वाले क्षेत्र हैं। हरियाणा व पंजाब में विचरण गुणांक 40 प्रतिशत तथा पश्चिमी राजस्थान, कच्छ व गुजरात के न्यून वर्षा वाले क्षेत्रों में वर्षा की परिवर्तनीयता सर्वाधिक अर्थात् 50 से 80 प्रतिशत के बीच है।

प्रश्न 10.
जलवायु प्रदेश क्या होता है? जलवायु प्रदेश किन आधारों पर पहचाने जाते हैं?
उत्तर:
जलवायु प्रदेश जलवायु प्रदेश एक ऐसा क्षेत्र होता है जिसमें विभिन्न जलवायविक तत्त्व अपने संयुक्त प्रभाव से एकरूपी जलवायविक दशाओं का निर्माण करते हैं। स्थानीय तौर पर मौसम के तत्त्व; जैसे तापमान, वर्षा इत्यादि मिलकर जलवायु में अनेक क्षेत्रीय विभिन्नताएँ उत्पन्न कर देते हैं। इन विभिन्नताओं को हम जलवायु के उप-प्रकार मानते हैं। इसी आधार पर जलवायु प्रदेश पहचाने जाते हैं।

प्रश्न 11.
भारत में ग्रीष्म ऋतु में आने वाले कुछ प्रसिद्ध तूफानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गर्मियों में भारत में निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण तूफान आते हैं-

  • आम्र वर्षा यह पूर्वी महाराष्ट्र तथा पश्चिमी तटीय प्रदेशों में चलती है। आम के वृक्षों के लिए यह तूफानी वर्षा फायदेमन्द होती है।
  • फूलों वाली बौछार-इस वर्षा से केरल. तथा निकटवर्ती कहवा उत्पादन वाले क्षेत्रों में फूल खिलने लगते हैं।
  • काल बैसाखी-असम और पश्चिम बंगाल में बैसाख के महीने में चलने वाली ये भयंकर व विनाशकारी वर्षायुक्त पवनें हैं, जिन्हें नॉरवेस्टर भी कहा जाता है। चाय, पटसन व चावल के लिए ये पवनें अच्छी हैं।
  • लू–उत्तरी मैदान में चलने वाली गर्म, शुष्क व भीषण पवनें।

प्रश्न 12.
मानसूनी वर्षा की विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानसूनी वर्षा की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • यह मौसमी वर्षा है जो प्रतिवर्ष जून से सितम्बर के दौरान होती है। देश की कुल वर्षा का 75 प्रतिशत ग्रीष्मकालीन मानसून द्वारा प्राप्त होता है।
  • मानसूनी वर्षा अनिश्चित है। कभी निर्धारित समय से पहले व कभी देर से शुरू होती है। कभी तो कुछ समय होकर जल्दी रुक जाती है व कभी वर्षा काल की अवधि बढ़ जाती है।
  • मानसूनी वर्षा का भारत में वितरण असमान है। कुछ भागों में वर्षा 250 सेंटीमीटर से भी अधिक होती है व कुछ भागों में 12 सेंटीमीटर से भी कम होती है।
  • मानसनी वर्षा पर्वतीय है अथवा उच्चावच से प्रभावित होती है।
  • अधिकांश मानसूनी वर्षा मूसलाधार होती है।
  • यह वर्षा अनियमित भी है। एक ही क्षेत्र में कभी अकाल और कभी बाढ़ की दशाएँ उत्पन्न होती हैं।
  • कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में मानसून की भूमिका महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है।

प्रश्न 13.
दक्षिणी-पश्चिमी मानसून का क्रम अन्तराल पर सामान्यतः शुष्क मौसम की छोटी अवधि द्वारा भंग होता रहता है, क्यों?
उत्तर:
भारत में मुख्य रूप से वर्षा ग्रीष्मकालीन मानसून पवनें करती हैं। इन पवनों द्वारा वर्षा लगातार नहीं होती अपितु कुछ दिनों अथवा कुछ सप्ताहों के अन्तराल पर होती है। इन दिनों एक दीर्घ शुष्क मौसम आ जाता है तथा वर्षा का क्रम भंग हो जाता है क्योंकि इसका कारण खाड़ी बंगाल अथवा अरब सागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवात हैं। ये चक्रवात वर्षा की मात्रा को बढ़ाते हैं परन्तु ये चक्रवात अनियमित रूप से चलते हैं। इसलिए सामान्यतः शुष्क मौसम की छोटी अवधि द्वारा मानसून का क्रम भंग होता रहता है।

प्रश्न 14.
लगभग सम्पूर्ण उत्तरी भारत में सितम्बर तथा अक्तूबर के महीने में औसत अधिकतम तापमान काफी ऊँचा रहता है। क्यों?
उत्तर:
भारत में जून मास सबसे अधिक गर्म मास है। इसके पश्चात् मानसून पवनों की वर्षा के कारण तापमान में गिरावट आ जाती है परन्तु वर्षा ऋतु समाप्त होने के पश्चात् तापमान में फिर वृद्धि हो जाती है क्योंकि सितम्बर तथा अक्तूबर में मानसून पवनें वापस लौटने लगती हैं। ये पवनें शुष्क होती हैं तथा तापमान अधिक ऊँचे होते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली में इन मासों में औसत तापमान अधिकतम 33° सेल्सियस से अधिक रहता है। सितम्बर मास में सूर्य भूमध्य रेखा पर लम्बवत् चमकता है इसलिए दक्षिण भारत में तापमान अधिक पाया जाता है।

प्रश्न 15.
उत्तर-पश्चिमी भारत में मानसून की अवधि बहुत कम है, क्यों?
उत्तर:
जिस प्रकार भारत के भिन्न-भिन्न स्थानों पर मानसून के आने का समय भिन्न-भिन्न है, इसी प्रकार उसके लौटने का समय भी भिन्न-भिन्न होता है। इस प्रकार हर स्थान पर इसकी अवधि भी अलग-अलग होती है। उत्तर:पश्चिमी भारत में यह समय बहुत कम होता है क्योंकि गर्मियों की मानसून पवनें यहाँ बहुत देर से अर्थात् 15 जुलाई के आसपास पहुँचती हैं। यह 15 सितम्बर के आसपास लौटना शुरू कर देती हैं। अतः केवल 2 मास ही इस क्षेत्र में मानसून की अवधि होती है जो भारत के किसी भी क्षेत्र से कम है। वास्तव में यह अवधि भारत में दक्षिण-पूर्व से उत्तर:पश्चिम की ओर कम होती जाती है।

प्रश्न 16.
भारतीय मानसून की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानसून शब्द अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से लिया गया है। इस शब्द का अर्थ है-ऋतु, अर्थात् मानसून का अर्थ एक ऐसी ऋतु से है जिसमें पवनों की दिशा में पूरी तरह से परिवर्तन हो जाता है। ये मौसमी पवनें हैं जो मौसम के अनुसार अपनी दिशा बदल लेती हैं। ये पवनें ग्रीष्मकाल में छः मास सागर से स्थल की ओर तथा शीतकाल में छः मास तक स्थल से सागर की ओर चलती हैं।

मानसून की प्रकृति-मानसून पर लगभग तीन शताब्दियों से प्रेक्षण हो रहे हैं। इसके बावजूद आज भी यह वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली ही है। अब मानसून का अध्ययन क्षेत्रीय स्तर की बजाय भूमंडलीय स्तर पर किया गया है। दक्षिणी एशियाई क्षेत्र में वर्षा के कारणों का व्यवस्थित अध्ययन मानसन के कारणों को समझने में सहायता करता है। इसके कछ विशेष पक्ष अग्रलिखित हैं

  • मानसून का आरम्भ और उसका स्थल की ओर बढ़ना।
  • वर्षा लाने वाले तंत्र तथा मानसूनी वर्षा की आवृत्ति और वितरण के बीच संबंध।
  • मानसून में विच्छेद।
  • मानसून का निवर्तन।

प्रश्न 17.
दक्षिण-पश्चिमी मानसून तथा उत्तर-पूर्वी मानसून में अन्तर बताइए।
उत्तर:
दक्षिण-पश्चिमी मानसून तथा उत्तर-पूर्वी मानसून में निम्नलिखित अन्तर हैं-

दक्षिण-पश्चिमी मानसूनउत्तर-पूर्वी मानसून
1. जून से सितम्बर तक की अवधि दक्षिण-पशिचमी मानसून की होती है।1. दिसम्बर से फरवरी तक की अवंधि उत्तर-पूर्वी मानसून की होती है।
2. इन महीनों में उत्तर भारत में निम्न दाब-क्षेत्र बन जाता है।2. इन महीनों में उत्तर भारत में उच्च दाब-क्षेत्र बन जाता है।
3. इस निम्न दाब-क्षेत्र की ओर पवनें अग्रसर होने लगती हैं और उनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व होती है।3. इस उच्च दाब से पवनें चारों ओर फैलने लगती हैं। पवनों की दिशा गंगा की घाटी में पश्चिम में, बंगाल में उत्तर में और बंगाल की खाड़ी में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम हो जाती है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 18.
भारत में पाई जाने वाली शीत ऋतु का वर्णन करें।
उत्तर:
शीतकाल भारत में सामान्यतः नवम्बर मध्य से मार्च तक होता है। इस ऋतु में अधिकांश भागों में महाद्वीपीय पवनें चलती हैं। इस ऋतु में उत्तरी भारत में तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है। यहाँ के अधिकांश भागों में तापमान 20° सेल्सियस से नीचे रहता है और कई क्षेत्रों में हिमांक बिन्दु से भी नीचे गिर जाता है। उत्तरी भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान तथा उत्तरी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शीत लहरें’ (Cold Waves) चलती हैं। दक्षिणी भारत में तापमान 22° सेल्सियस से नीचे नहीं आता।

शीतकाल में पवनें स्थलीय भागों से सागर की ओर चलती हैं, इसलिए ये हवाएँ शुष्क होती हैं। जो बंगाल की खाड़ी को पार करके नमी ग्रहण करती हैं तथा पूर्वी घाट से टकराकर आन्ध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के तटीय भागों में वर्षा करती हैं।

इस मौसम में उत्तर:पश्चिम से आने वाले चक्रवातों एवं दक्षिण में लौटती हुई मानसून पवनों से वर्षा होती है, लेकिन पश्चिम से पूर्व की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। इसे रबी की फसल के लिए वरदान माना जाता है। उत्तरी-पूर्वी भारत में इस मौसम में थोड़ी वर्षा होती है।

वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर पश्चिमी पवनों का प्रभाव होता है अर्थात् 3 किलोमीटर की ऊँचाई पर जेट प्रवाह सक्रिय होता है। हिमालय तथा तिब्बत की उच्च भूमि इन जेट प्रवाहों को अवरुद्ध करती है, जिससे जेट प्रवाह दो शाखाओं में बँट जाता है। इसकी एक शाखा हिमालय के उत्तर में तथा दूसरी दक्षिण में पश्चिमी-पूर्वी दिशा में 25° उत्तरी अक्षांश के सहारे चलने लगती है। इस जेट प्रवाह की दक्षिणी शाखा में शीत ऋतु में उत्तरी भारत में वर्षा होती है अर्थात् जेट प्रवाह उत्तर:पश्चिमी चक्रवातों को लाने में मदद करते हैं।

प्रश्न 19.
एल निनो क्या है? इसका भारतीय मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
एल निनो एक जटिल मौसम तन्त्र है जो हर पाँच या दस साल बाद प्रकट होता रहता है। इसके कारण संसार के अनेक भागों में सूखा, बाढ़ और मौसम की चरम अवस्थाएँ आती हैं। एल निनो पूर्वी प्रशान्त महासागर में पेरु के तट के निकट उष्ण समुद्री धारा के रूप में प्रकट होता है। इससे भारत का मानसून अत्यधिक प्रभावित होता है। यह धारा पेरु के तट के जल का तापमान 10°C तक बढ़ा देती है जिसके परिणामस्वरूप भूमध्य-रेखीय वायुमण्डलीय परिसंचरण में विकृति उत्पन्न हो जाती है जिससे भारतीय मानसून प्रभावित होता है।

प्रश्न 20.
मानसून की उत्पत्ति पर एक नोट लिखिए।
अथवा
मानसून की उत्पत्ति सम्बन्धित आधुनिक विचारधारा का संक्षिप्त वर्णन करो।
उत्तर:
आधुनिक मौसम-विशेषज्ञों का विचार है कि मानसून पवनों की उत्पत्ति का सम्बन्ध क्षोभ सीमा पर पाई जाने वाली जेट प्रवाह से है। सन् 1973 में भारतीय तथा सोवियत मौसम विशेषज्ञों ने ‘मानसून अभियान संगठन’ का गठन किया। यह संगठन इस जलवायु निष्कर्ष पर पहुँचा कि मानसून की उत्पत्ति तिब्बत के ऊँचे पठार से होती है। इस धारणा के अनुसार शीत ऋतु में एशिया में तीन कि०मी० की ऊँचाई पर क्षोभमण्डल में अपनी तरह का एक वायु-परिसंचरण दिखाई देता है। इसमें धरातलीय विषमताओं का कोई योगदान नहीं होता। इस समय समस्त एशिया के मध्य एवं पश्चिमी भाग के क्षोभमण्डल पर पश्चिमी पवनों का प्रभाव होता है, जिन्हें ‘जेट-स्ट्रीम’ कहते हैं।

तिब्बत का पठार तथा हिमालय इस जेट-प्रवाह के मार्ग में अवरोधक का काम करते हैं। इस रुकावट से जेट-प्रवाह दो भागों में विभाजित हो जाता है। एक भाग हिमालय के उत्तर में तथा दूसरा भाग दक्षिण तथा पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हैं। इस जेट-प्रवाह से नीचे की ओर उतरती हुई वायु हिन्द महासागर की ओर चलती है। गर्मियों में भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब उत्तर भारत की ओर खिसकने के साथ पश्चिमी जेट-स्ट्रीम भारत से चला जाता है।

उसकी जगह भारत पर एक पूर्वी जेट-स्ट्रीम बहने लगता है, जो उष्ण कटिबन्धीय गों के भारतीय उप-महाद्वीप की ओर आकर्षित कर लेता है। इस पूर्वी जेट की उत्पत्ति गर्मियों में हिमालय पर्वत तथा तिब्बत के पठार के अत्यधिक गर्म होने से होती है। इन ऊँचे भागों से विकिरण के कारण क्षोभमण्डल में दक्षिणवर्ती (Clockwise) परिसंचरण आरम्भ होता है। इन उच्च स्थलों से भूमध्य रेखा की ओर बहने वाला प्रवाह भारत में ‘पूर्वी जेट-प्रवाह’ कहलाता है। अतः गर्मियों में मानसून की उत्पत्ति भूमध्य रेखीय निम्न दाब के उत्तर की ओर स्थानान्तरण तथा हिमालय एवं मध्य एशिया के ऊँचे स्थलों के गर्म होने के संयुक्त प्रयास से होती है।

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की ऋतु या वर्षा ऋतु का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
केरल तथा तमिलनाडु के तटीय भागों में जून के प्रथम सप्ताह से मानसूनी वर्षा शुरू हो जाती है, लेकिन उत्तरी भारत में मानसून जुलाई के मध्य तक पहुँच जाता है। देश की 80 प्रतिशत वर्षा इसी ऋतु में होती है। जब अकस्मात् मानसून का आरम्भ होता है तो उसे ‘मानसून का विस्फोट’ (Burst of Monsoon) कहते हैं। अगस्त में तापमान 35° से 40° के मध्य रहता है। वर्षा के कारण तापमान में कमी आ जाती है।

दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पवनों की निम्नलिखित दो शाखाएँ हैं-

  • बंगाल की खाड़ी का मानसून
  • अरब सागर का मानसून।

(1) बंगाल की खाड़ी का मानसून (Monsoon of Bay of Bengal)-जब बंगाल की खाड़ी से दक्षिणी-पश्चिमी हवाएँ गुज़रती हैं, तो पर्याप्त नमी ग्रहण करती हैं। ये पवनें दो शाखाओं में बँट जाती हैं। एक शाखा पूर्व की ओर मेघालय में गारो, खासी एवं जयन्तिया की पहाड़ियों से टकराती है तथा वर्षा करती है। इन पहाड़ियों की आकृति कीप (Funnel) की तरह होने के कारण यहाँ अत्यधिक वर्षा होती है इसलिए मॉसिनराम (मेघालय राज्य में चेरापूँजी के निकट स्थित) में विश्व की सर्वाधिक वार्षिक वर्षा 1,140 सें०मी० होती है।

बंगाल की खाड़ी को मानसून की दूसरी शाखा सीधे गंगा घाटी में प्रवेश करके हिमालय से टकराकर बंगाल, बिहार तथा उत्तर प्रदेश से होती हुई हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू कश्मीर आदि में वर्षा करती है, लेकिन पश्चिम की ओर जाने पर इन मानसून पवनों की नमी में कमी आती जाती है। कोलकाता में 120 सें०मी०, पटना में 105 सें०मी०, इलाहाबाद में 75 सें०मी० और दिल्ली में 56 सें०मी० वर्षा होती है।

(2) अरब सागरीय मानसून (Monsoon of Arabian Sea) मानसून पवनों की दूसरी शाखा अरब सागरीय मानसून है जो पश्चिमी घाट से टकराकर पश्चिमी भारत में वर्षा करती है, लेकिन जब ये वाष्प भरी हवाएँ पश्चिमी घाट को पार करती हैं तो इनकी आर्द्रता में कमी आ जाती है और पश्चिमी घाट का पूर्वी भाग ‘वृष्टिछाया प्रदेश’ (Rain Shadow Area) में पड़ जाता है, जिसके कारण मंगलौर में जहाँ 280 सें०मी० वर्षा होती है, वहीं बंगलूरू में केवल 60 सें०मी० वर्षा होती है। अरब सागरीय मानसून की दूसरी शाखा उत्तर की ओर गुजरात एवं राजस्थान में अरावली पहाड़ियों के समानान्तर आगे हिमालय तक चली जाती है, लेकिन राजस्थान में वर्षा नहीं करती, वरन् हिमालय से टकराकर वर्षा करती है।

प्रश्न 2.
कोपेन द्वारा प्रस्तुत भारत को जलवायु विभागों में वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
यह बताया जा चुका है कि सारे भारत में मानसूनी जलवायु पाई जाती है, फिर भी यहाँ जलवायु में विभिन्न प्रादेशिक स्वरूप पाए जाते हैं। इसका कारण यह है कि भारत एक विशाल देश है तथा यहाँ पर विभिन्न भौतिक स्वरूप मिलते हैं, जिनके कारण भारत में विभिन्न भागों में तथा विभिन्न समयों में जलवायु की कुछ अलग-अलग विशेषताएँ मिलती हैं। कई जलवायु-वेत्ताओं ने भारतीय जलवायु को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत करने की चेष्टा की है। कोपेन द्वारा प्रस्तुत भारत का जलवायु विभागों में वर्गीकरण अधिक मान्य है।
HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु 2

कोपेन द्वारा प्रस्तुत जलवायु प्रदेश: कोपेन की प्रणाली के अनुसार जलवायु प्रवेश कोपेन द्वारा प्रस्तुत जलवायु प्रदेश कोपेन द्वारा जलवायु के वर्गीकरण की पद्धति तापमान तथा वृष्टि के मासिक मान पर आधारित है। उसने भारतीय जलवाय को आठ जलवाय प्रदेशों में बाँटा है। वैसे कोपेन के जलवाय प्रदेश पाँच प्रकार के हैं, जिनको अंग्रेजी के पहले पाँच बड़े अक्षरों से सम्बोधित किया है; जैसे
(1) उष्ण कटिबन्धीय जलवायु (Tropical Climate) = A
(2) शुष्क जलवायु (Dry Climate) = B
(3) गर्म जलवायु (Warm Climate) = C
(4) हिम जलवायु (Snow Climate) = D
(5) बर्फीली जलवायु (Ice Climate) = E
वृहत रूप के उपर्युक्त पाँच जलवायु प्रदेशों को तापमान तथा वर्षा ऋतु के अनुसार वितरण के आधार पर उप-प्रदेशों में विभाजित किया गया है, जिनके लिए अंग्रेजी के छोटे अक्षरों का प्रयोग किया गया है, जिनका अर्थ इस प्रकार है
a = गर्म ग्रीष्म तथा सबसे अधिक गर्म माह का औसत तापमान 22° सेल्सियस से अधिक।
c = शीतल ग्रीष्म सबसे गर्म माह का औसत तापमान 22° सेल्सियस से कम।
i = कोई भी मौसम शुष्क नहीं।
s = ग्रीष्म ऋतु में शुष्क मौसम।
g = ग्रीष्म ऋतु में वर्षा तथा गंगा तुल्य तापमान का वार्षिक परिसर।
h = वार्षिक औसत तापमान 18° सेल्सियस से नीचे।
m = मानसून, शुष्क मौसम की अल्प अवधि।
भारत के आठ जलवायु प्रदेशों का वितरण इस प्रकार है-

  • लघु शुष्क ऋतु वाला मानसून प्रकार इस प्रकर की जलवायु भारत के पश्चिमी तटों पर गोवा के दक्षिण में पाई जाती है।
  • अधिक गर्मी की अवधि में शुष्क ऋतु का प्रदेश इस प्रकार की जलवायु भारत के कोरोमण्डल तट पर पाई जाती है।
  • उष्ण कटिबन्धीय सवाना प्रकार की जलवायु इस प्रकार की जलवायु दक्षिणी भारत के अधिकांश भाग पर पाई जाती है। कोरोमण्डल तथा मालाबार के तट इसके अपवाद हैं।
  • अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु–यह जलवायु दक्षिणी पठार के वृष्टि छाया क्षेत्रों, गुजरात, राजस्थान तथा हरियाणा के दक्षिण-पश्चिमी भाग में पाई जाती है।
  • उष्ण मरुस्थलीय जलवायु-यह जलवायु भारत के पश्चिमी भागों में पाई जाती है।
  • शुष्क ऋतु वाला मानसून जलवायु-यह जलवायु भारत के उत्तरी विशाल मैदान में पाई जाती है।
  • लघु ग्रीष्म के साथ शीतल व अर्ध-शीत वाली जलवायु इस प्रकार की जलवायु भारत के उत्तर:पूर्वी भाग में पाई जाती है।
  • ध्रुवीय प्रकार इस प्रकार की जलवायु कश्मीर तथा निकटवर्ती पर्वतमालाओं में पाई जाती है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 4 जलवायु

प्रश्न 3.
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत की जलवायु को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं-
1. उत्तर में स्थित हिमालय पर्वत-भारत की उत्तरी सीमा पर पूर्व-पश्चिम दिशा में फैले हिमालय पर्वत के कारण उत्तर भारत में ऊँचा तापमान तथा शुष्क ऋतु पाई जाती है। यहाँ उष्ण कटिबन्धीय लक्षण पाए जाते हैं, यद्यपि उत्तर भारत शीतोष्ण कटिबन्ध में स्थित है।

2. हिन्द महासागर-भारतीय जलवायु पर हिन्द महासागर का गहरा प्रभाव पड़ता है। यह मानसून पवनों को आर्द्रता प्रदान करता है तथा सम्पूर्ण भारत में वर्षा होती है।

3. भारत का विस्तार तथा विभिन्न प्रकार की स्थलाकृतियाँ देश के बड़े आकार के कारण तथा पृथक्-पृथक् स्थलाकृतियों के मिलने के कारण भारत में विविध प्रकार की जलवायु पाई जाती है।

4. शीत ऋतु में विक्षोभ-भूमध्य सागर में उत्पन्न विक्षोभ चक्रवातों के रूप में भारत में पहुँचकर उत्तरी भारत के पश्चिमी हिमालय से टकराकर वर्षा करते हैं।

5. भूमध्य रेखा की समीपता भारत 8°4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर के मध्य स्थित है। इसलिए भारत का दक्षिणी क्षेत्र भूमध्य रेखा के निकट स्थित है तथा सारा वर्ष गर्मी पड़ती है। कर्क रेखा देश के मध्य से गुजरती है इसलिए यहाँ उष्ण कटिबन्धीय जलवायु पाई जाती है।

6. समुद्र तट से दूरी-भारतीय तटीय प्रदेशों में समकारी प्रभाव के कारण सम प्रकार की जलवायु पाई जाती है। उदाहरण के लिए मुम्बई का ग्रीष्मकालीन तापमान लगभग 27° सेल्सियस तथा शीतकालीन तापमान लगभग 24° सेल्सियस रहता है। जो स्थान समुद्र तट से अधिक दूर है, वहाँ विषम प्रकार का जलवायु मिलता है। उदाहरण के लिए इलाहाबाद समुद्र तट से दूर है। इसलिए यहाँ ग्रीष्मकालीन तापमान लगभग 30° सेल्सियस तथा शीतकालीन तापमान लगभग 16° सेल्सियस रहता है। दक्षिणी भारत तीनों ओर से सागरों तथा महासागर से घिरा है। इसलिए यहाँ गर्मियों में कम गर्मी तथा सर्दियों में कम सर्दी पड़ती है।

7. धरातल का प्रभाव पश्चिमी घाट तथा मेघालय पर्वतीय क्षेत्र मानसून पवनों के सम्मुख ढाल पर स्थित हैं। इसलिए यहाँ वर्षा अधिक होती है। परन्तु दक्षिणी पठार पवन-विमुख ढाल के कारण वृष्टिछाया क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहाँ वर्षा बहुत कम होती है। राजस्थान में स्थित अरावली पर्वत मानसून पवनों की दिशा के समानान्तर स्थित होने के कारण शुष्क रह जाता है।

पर्वतीय प्रदेशों में तापमान कम तथा मैदानों में तापमान अधिक होता है। उदाहरण के लिए आगरा तथा दार्जिलिंग एक ही आक्षांश पर स्थित हैं, परन्तु आगरा में जनवरी का तापमान 16° सेल्सियस दार्जिलिंग में 4° सेल्सियस होता है, क्योंकि आगरा मैदानी क्षेत्र है तथा दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र है।

प्रश्न 4.
अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी की मानसूनी पवनों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1. अरब सागर की मानसून पवनें ये पवनें अरब सागर में उत्पन्न होकर भारत की ओर अग्रसर होती हैं, परन्तु भारत के पश्चिमी तट पर पहुँचकर ये तीन शाखाओं में बँट जाती हैं, जो निम्नलिखित प्रकार से हैं-
(1) पहली शाखा, पश्चिमी घाटों से टकराकर भारत के पश्चिमी तटीय मैदानों पर लगभग 250 सें०मी० वर्षा करती है। पश्चिमी घाट के पूर्व की ओर घाटों से नीचे उतरने के कारण इन पवनों के तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है तथा पूर्व की ओर ये वर्षा नहीं करती हैं, अतः पश्चिमी घाट के पूर्व का क्षेत्र ‘वृष्टि छाया’ (Rain Shadow) क्षेत्र कहलाता है।

(2) दूसरी शाखा, नर्मदा तथा ताप्ती नदियों की घाटियों में से होकर भारत के मध्यवर्ती क्षेत्र में प्रवेश करती है। यहाँ इनके रास्ते में ऐसी रुकावट नहीं है जो इन्हें रोककर वर्षा हो सके, अतः ये दूर तक मध्य भारतीय क्षेत्र से में निकल जाती हैं और वर्षा करती हैं। नागपुर के पास इन पवनों द्वारा लगभग 60 सें०मी० वर्षा होती है।

(3) तीसरी शाखा, उत्तर:पूर्व की ओर अरावली पर्वतों के समानान्तर चलती है तथा रुकावट न होने के कारण ये राजस्थान से बिना वर्षा किए निकल जाती है। आगे चलकर हिमालय की पश्चिमी पहाड़ियों से टकराकर काफी वर्षा करती है।

2. बंगाल की खाड़ी की मानसून पवनें-ये पवनें दो शाखाओं में विभक्त होकर चलती हैं-
(1) एक शाखा, गंगा के डेल्टे को पार करके असम में खासी तथा गारो की पहाड़ियों से टकराकर असम में खूब वर्षा करती है। यहाँ मॉसिनराम (मेघालय राज्य में चेरापूंजी के निकट स्थित) नामक स्थान पर विश्व की सर्वाधिक वर्षा (1140 सें०मी०) होती है।

(2) दूसरी शाखा हिमालय पर्वत के समानान्तर पश्चिम की ओर बहती है क्योंकि यह हिमालय को पार नहीं कर पाती इसलिए पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा करती जाती है तथा वर्षा की मात्रा में कमी आती जाती है।

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बहुविकल्पीय प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करें-

1. जाड़े के आरंभ में तमिलनाडु के तटीय प्रदेशों में वर्षा किस कारण होती है?
(A) दक्षिणी-पश्चिमी मानसून
(B) उत्तर:पूर्वी मानसून
(C) शीतोष्ण-कटिबंधीय चक्रवात
(D) स्थानीय वायु परिसंचरण
उत्तर:
(B) उत्तर-पूर्वी मानसून

2. भारत के कितने भू-भाग पर 75 सेंटीमीटर से कम औसत वार्षिक वर्षा होती है?
(A) आधा
(B) दो-तिहाई
(C) एक-तिहाई
(D) तीन-चौथाई
उत्तर:
(C) एक-तिहाई

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 4 जलवायु

3. दक्षिण भारत के संदर्भ में कौन-सा तथ्य ठीक नहीं है?
(A) यहाँ दैनिक तापांतर कम होता है
(B) यहाँ वार्षिक तापांतर कम होता है
(C) यहाँ तापमान सारा वर्ष ऊँचा रहता है
(D) यहाँ जलवायु विषम पाई जाती है
उत्तर:
(D) यहाँ जलवायु विषम पाई जाती है

4. जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर सीधा चमकता है, तब निम्नलिखित में से क्या होता है?
(A) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान कम होने के कारण उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है
(B) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान बढ़ने के कारण निम्न वायुदाब विकसित हो जाता है
(C) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान और वायुदाब में कोई परिवर्तन नहीं आता
(D) उत्तरी-पश्चिमी भारत में झुलसा देने वाली तेज लू चलती है
उत्तर:
(A) उत्तरी-पश्चिमी भारत में तापमान कम होने के कारण उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है

5. कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में ‘As’ प्रकार की जलवायु कहाँ पाई जाती है?
(A) केरल और तटीय कर्नाटक में
(B) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में
(C) कोरोमंडल तट पर
(D) असम व अरुणाचल प्रदेश में B-60
उत्तर:
(C) कोरोमंडल तट पर

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
भारतीय मौसम तंत्र को प्रभावित करने वाले तीन महत्त्वपूर्ण कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
भारतीय मौसम तंत्र को निम्नलिखित तीन महत्त्वपूर्ण कारक प्रभावित करते हैं-

  • वायुदाब तथा पवनों के धरातलीय वितरण इसके महत्त्वपूर्ण कारक मानसून पवनें, कम वा क्षेत्र हैं।
  • ऊपरी वायु परिसंचरण-इसमें महत्त्वपूर्ण तत्त्व विभिन्न वायुराशियाँ और जेट स्ट्रीम का अंतर्वाह है।
  • विभिन्न वायु विक्षोभ-इसमें उष्ण कटिबन्धीय और पश्चिमी चक्रवातों के प्रभाव से वर्षा होती है।

प्रश्न 2.
अंतःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र क्या है?
उत्तर:
अंतःउष्ण कटिबन्धीय अभिसरण क्षेत्र निम्न वायुदाब क्षेत्र होता है जो सभी दिशाओं से पवनों के अन्तर्वहन को प्रोत्साहित करता है। यह भूमध्य-रेखीय क्षेत्र में स्थित होता है। इसकी स्थिति सूर्य की स्थिति के अनुसार उष्ण कटिबन्ध के मध्य बदलती रहती है। ग्रीष्मकाल में यह उत्तर की ओर तथा शीतकाल में यह दक्षिण की ओर सरक जाता है। इसे भूमध्यरेखीय द्रोणी भी कहते हैं।

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प्रश्न 3.
मानसून प्रस्फोट से आपका क्या अभिप्राय है? भारत में सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाले स्थान का नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत में ग्रीष्म ऋतु के पश्चात् वर्षा ऋतु आरम्भ होती है। इस समय भारत में दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पवनें प्रवेश करती हैं तथा भारत की 80% वर्षा इन्हीं पवनों से होती है। मानसून पवनों की वर्षा के अकस्मात आरम्भ होने को ‘मानसून प्रस्फोट’ कहते हैं। इसमें वर्षा की तेज बौछारें पड़ती हैं। भारत में सबसे अधिक वर्षा मॉसिनराम में होती है।

प्रश्न 4.
जलवायु प्रदेश क्या होता है? कोपोन की पद्धति के प्रमुख आधार कौन-से हैं?
उत्तर:
जलवायु प्रदेश-जलवायु प्रदेश एक ऐसा क्षेत्र होता है जिसमें विभिन्न जलवायविक तत्त्व अपने संयुक्त प्रभाव से एकरूपी जलवायविक दशाओं का निर्माण करते हैं। स्थानीय तौर पर मौसम के तत्त्व; जैसे तापमान, वर्षा इत्यादि मिलकर जलवायु में अनेक क्षेत्रीय विभिन्नताएँ उत्पन्न कर देते हैं। इन विभिन्नताओं को हम जलवायु के उप-प्रकार मानते हैं। इसी आधार पर जलवायु प्रदेश पहचाने जाते हैं। कोपेन ने अपने जलवायु वर्गीकरण का आधार तापमान तथा वर्षण के मासिक मानों को रखा है।

प्रश्न 5.
उत्तर-पश्चिम भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को किस प्रकार के चक्रवातों से वर्षा प्राप्त होती है? वे चक्रवात कहाँ उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
उत्तर-पश्चिम भारत में रबी की फसलें बोने वाले किसानों को अत्यन्त लाभदायक शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात प्राप्त होते हैं, जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ भी कहा जाता है। ये चक्रवात पूर्वी भूमध्य सागर पर उत्पन्न होते हैं और पूर्व की ओर यात्रा करते हुए भारत पहुँचते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जलवायु में एक प्रकार का ऐक्य होते हुए भी, भारत की जलवायु में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। उपयुक्त उदाहरण देकर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत की जलवायु मानसूनी है जो कदाचित् देश की एकता का प्रतीक है, लेकिन जलवायु में प्रादेशिक विभिन्नता दृष्टिगोचर होती है। ये प्रादेशिक विभिन्नताएँ देश के तापक्रम, वर्षा, आर्द्रता, समुद्र तल से ऊँचाई, पर्वतों की दिशा तथा उच्चावच में देखने को मिलती हैं। इन विभिन्नताओं के निम्नलिखित कारण हैं-
1. अक्षांशीय विस्तार-भारत का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर है जो लगभग 30° है। इतने अधिक विस्तार के कारण उत्तरी भारत तथा दक्षिणी भारत की जलवायु में अन्तर पाया जाना स्वाभाविक ही है। दक्षिणी भाग (प्रायद्वीपीय भाग) में भूमध्य रेखा तथा हिन्द महासागर के निकट होने के कारण वर्ष भर तापक्रम ऊँचा रहता है। कोंकण तटीय मैदान में तथा गोवा में रहने वाले लोगों को तापमान की विषमता एवं ऋतु परिवर्तनों का अहसास कम ही होता है।

दिसम्बर, जनवरी में कारगिल में तापक्रम जहाँ -40°C तक गिर जाता है, वहीं गोवा एवं चेन्नई में तापमान 20°-25°C के मध्य रहता है। राजस्थान में गंगानगर का जून का तापक्रम 50°C तक पहुँच जाता है, जबकि गुलमर्ग में 20°C के आसपास रहता है। भूमध्य रेखा से दूर होने के कारण तापक्रम की विभिन्नताएँ दृष्टिगोचर होती हैं।

2. उत्तर में विशाल हिमालय की स्थिति देश की उत्तरी सीमा पर हिमालय पर्वत श्रृंखलाएँ पूर्व से पश्चिम में दीवार की भाँति फैली हुई हैं जो देश की जलवायु को अत्यधिक प्रभावित करती हैं। हिमालय पर्वत अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से आने वाली वाष्प भरी हवाओं को रोकने का कार्य करता है, जिससे सम्पूर्ण भारत में वर्षा होती है, दूसरी ओर हिमालय उत्तर से आने वाली शीत लहरों को भारत में आने से रोकता है, जिससे शीत ऋतु का तापमान अधिक नीचे नहीं गिर पाता। यदि उत्तर में हिमालय न होता तो सम्भवतः भारत एक मरुस्थली देश होता।

3. जल व स्थल का वितरण-भारत के उत्तर में विशाल स्थलीय भाग एशिया महाद्वीप तथा दक्षिण में हिन्द महासागर स्थित है। स्थल तथा जल में तापमान ग्रहण करने की क्षमता अलग-अलग होती है। स्थलीय भाग शीघ्र गर्म तथा शीघ्र ठण्डे होते हैं। इसके विपरीत जलीय भाग देर से गर्म तथा देर से ठण्डे होते हैं, इसलिए ग्रीष्म ऋतु में जलीय भाग में वायुदाब अधिक तथा उत्तर:पश्चिम भारत में वायुदाब कम होता है और पवनें सागरीय भागों से स्थलीय भाग की ओर चलती हैं। हवाएँ वाष्प-युक्त होती हैं, इसलिए उत्तरी भारत में वर्षा करती हैं।

भारत की जलवायु मानसूनी है। मानसून शब्द अरब भाषा के शब्द ‘मौसिम’ से बना है अर्थात् देश की जलवायु में मानसूनी पवनों का विशेष योगदान है, जो मौसमानुसार देश में चलती हैं। मानसूनी पवनें छह महीने सागर से स्थल की ओर तथा छह महीने स्थल से सागर की ओर चलती हैं, लेकिन देश में पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की जलवायु दशाओं में अत्यधिक अन्तर या विभिन्नता देखने को मिलती है। इस विभिन्नता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-
(1) तापमान की विभिन्नता राजस्थान में बाड़मेर में जहाँ ग्रीष्मकालीन तापमान 50°C तक पहुँच जाता है, वहीं दूसरी ओर पहलगाम में तापमान 22°C के आसपास रहता है। शीतकाल में कारगिल में
तापमान –40°C तथा त्रिवेन्द्रम में तापमान 20°C के आसपास रहता है।

(2) वर्षा की विभिन्नता भारत के उत्तर:पूर्व में मॉसिनराम (मेघालय राज्य में चेरापूँजी के निकट स्थित) में औसत वार्षिक वर्षा 1140 सें०मी० है, जबकि जैसलमेर (राजस्थान) में केवल 12 सें०मी० है। गारो की पहाड़ियों तुरा (Tura) में एक ही दिन में इतनी वर्षा होती है, जितनी जैसलमेर में 10 वर्षों में भी नहीं होती।

(3) ऋतओं में विभिन्नता-

  • दिसम्बर-जनवरी के महीनों में उत्तरी भारत विशेषकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब एवं हरियाणा में जहाँ शीत लहर चल रही होती है, वहीं दक्षिण भारत में केरल तथा तमिलनाडु में 22°C के आसपास तापमान रहता है।
  • मुम्बई तथा कोंकण तटीय प्रदेश के लोगों को ऋतु परिवर्तन का अनुभव नहीं होता। ये सारे वर्ष एक ही तरह के वस्त्र पहनते हैं।
  • केरल में वर्षा मई के माह में आरम्भ हो जाती है, जबकि चण्डीगढ़ एवं जम्मू-कश्मीर में जुलाई के महीने में मानसून का आगमन होता है।

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प्रश्न 2.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार भारत में कितने स्पष्ट मौसम पाए जाते हैं? किसी एक मौसम की दशाओं की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारतीय जलवायु में प्रादेशिक विभिन्नता के साथ-साथ मौसमी विभिन्नताएँ भी देखने को मिलती हैं। भारत में प्रायः निम्नलिखित चार ऋतुएँ मानी जाती हैं-

  • शीत ऋतु (Winter Season)
  • ग्रीष्म ऋतु (Summer Season)
  • वर्षा ऋतु (Rainy Season)
  • मानसून के प्रत्यावर्तन या लौटने की ऋतु (Season of Retreating Monsoon)।

इनमें से ग्रीष्म ऋतु का वर्णन इस प्रकार है-
ग्रीष्म ऋतु-मार्च के महीने के बाद सूर्य उत्तर की ओर स्थानान्तरित होने लगता है और उत्तरी भारत, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में तापक्रम बढ़ने लगता है और धरातलीय एवं उच्च-स्तरीय वायु का परिसंचरण (Circulation) विपरीत दिशा में होने लगता है अर्थात् समुद्री भागों से हवाएँ स्थलीय भाग की ओर चलने लगती हैं। जून का तापक्रम उत्तरी-पश्चिमी भारत में 40° सेल्सियस से अधिक तापमान के कारण न्यून वायुदाब का केन्द्र बन जाता है, जिससे भूमध्य रेखीय द्रोणी वायु को विभिन्न दिशाओं से अपनी ओर आकर्षित करती है। दक्षिण से आने वाली वायु की दिशा भूमध्य रेखा को पार करने के बाद दक्षिण-पश्चिम हो जाती है, जिसे दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहते हैं। इन दक्षिण-पश्चिमी वाष्प भरी पवनों की दो शाखाएँ अग्रलिखित हैं

  • अरब सागर का मानसून
  • बंगाल की खाड़ी का मानसून।

वायुदाब-शीत ऋतु में उत्तरी भारत में तापक्रम कम होने के कारण हवाएँ ठण्डी एवं भारी होती हैं, इसलिए वायुदाब अधिक होता है, जबकि दक्षिणी भाग में अपेक्षाकृत कम वायुदाब होता है। उत्तरी-पश्चिमी भाग में वायुदाब 1018 से 1020 मिलीबार की समदाब रेखाएँ देखी जाती हैं, जबकि दक्षिणी भारत विशेषकर बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के आसपास 1012 से 1014 मिलीबार वायुदाब अंकित किया जाता है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के कारण पवनों की दिशा में भी विक्षोभ आ जाता है। ये विक्षोभ भूमध्य सागर से उत्पन्न होकर ईरान, इराक, अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान से होता हुआ उत्तरी-पश्चिमी भारत में प्रवेश करता है। इन विक्षोभों को भारत में लाने में जेट-प्रवाह (Jet-flow) का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इस प्रकार का प्रवाह उत्तरी भारत में दिसम्बर से फरवरी तक सक्रिय रहता है।

तापमान कर्क रेखा भारत के बीचो-बीच गुजरती है और जून में सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत् चमकता है, जिससे तापमान उत्तरी-पश्चिमी भारत में कई स्थानों पर 45° सेल्सियस तक पहुँच जाता है। मई-जून में अधिक तापमान के कारण गर्म हवाएँ, जिन्हें ‘लू’ कहते हैं, उत्तरी भारत में चलती हैं। दक्षिणी भारत में तापक्रम 30°-35° सेल्सियस के बीच रहता है तथा तटीय भागों में कहीं-कहीं इससे भी कम रहता है अर्थात् समुद्र का प्रभाव रहता है।

वर्षा उत्तरी भारत में इस ऋतु में धूल-भरी आँधियों के साथ कभी-कभी छुट-पुट वर्षा होती है। दिल्ली, राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा में 1 सें०मी० से 3 सें०मी० तक वर्षा होती है, जबकि हिमालय एवं प्रायद्वीपीय भारत में 10 सें०मी० से 15 सें०मी० तक वर्षा होती है।

वायुदाब-ग्रीष्म ऋतु में तापक्रम की अधिकता के कारण उत्तरी भारत में वायुदाब कम होता है। वायुदाब वितरण मानचित्र को देखने से स्पष्ट होता है कि उत्तरी-पश्चिमी भारत में 997 मिलीबार रेखा राजस्थान तथा पाकिस्तान की सीमा के पास होती है, जबकि दक्षिणी भारत में अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी में वायुदाब अपेक्षाकृत अधिक 1008 से 1010 मिलीबार के मध्य अंकित किया गया है।

जलवायु HBSE 11th Class Geography Notes

→ एल-निनो (AI-Nino)-यह एक जटिल मौसम तंत्र है, जो हर पाँच या दस साल बाद प्रकट होता रहता है। इसके कारण संसार के विभिन्न भागों में सूखा, बाढ़ और मौसम की चरम अवस्थाएँ आती है।

→ लू (Loo)-उत्तरी मैदान में पंजाब से बिहार तक चलने वाली ये शुष्क, गर्म व पीड़ादायक पवनें हैं।

→ काल बैसाखी (Norwesters)-असम और पश्चिम बंगाल में बैसाख के महीने में शाम को चलने वाली ये भयंकर व विनाशकारी वर्षायुक्त पवनें हैं।

→ मानसून प्रस्फोट (Monsoon Boost)-मानसून पवनों द्वारा अकस्मात मूसलाधार वर्षा करना।

→ भूमध्यरेखीय द्रोणी (Equatorial Trough) यह अंतउष्ण कटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र का दूसरा नाम है।

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HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 16 जैव-विविधता एवं संरक्षण

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 16 जैव-विविधता एवं संरक्षण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Solutions Chapter 16 जैव-विविधता एवं संरक्षण

HBSE 11th Class Geography जैव-विविधता एवं संरक्षण Textbook Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. जैव-विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए महत्त्वपूर्ण है?
(A) जंतु
(B) पौधे
(C) पौधे और प्राणी
(D) सभी जीवधारी
उत्तर:
(D) सभी जीवधारी

2. निम्नलिखित में से असुरक्षित प्रजातियाँ कौन सी हैं?
(A) जो दूसरों को असुरक्षा दें
(B) बाघ व शेर
(C) जिनकी संख्या अत्यधिक हों अधिक हों
(D) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है
उत्तर:
(D) जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है

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3. नेशनल पार्क (National parks) और पशुविहार (Sanctuaries) निम्न में से किस उद्देश्य के लिए बनाए गए है?
(A) मनोरंजन
(B) पालतू जीवों के लिए
(C) शिकार के लिए
(D) संरक्षण के लिए
उत्तर:
(D) संरक्षण के लिए

4. जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र हैं-
(A) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र
(B) शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र
(C) ध्रुवीय क्षेत्र
(D) महासागरीय क्षेत्र
उत्तर:
(A) उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

5. निम्न में से किस देश में पृथ्वी सम्मेलन (Earth summit) हुआ था?
(A) यू०के० (U.K.)
(B) ब्राजील
(C) मैक्सिको
(D) चीन
उत्तर:
(B) ब्राजील

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जैव-विविधता क्या है?
उत्तर:
जैव-विविधता (Bio-diversity)-किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में पाए जाने वाले जीवों की संख्या और उनकी विविधता को जैव-विविधता कहा जाता है। यह विकास के लाखों वर्षों के इतिहास का परिणाम है।

प्रश्न 2.
जैव-विविधता के विभिन्न स्तर क्या हैं?
उत्तर:
जैव-विविधता को निम्नलिखित तीन स्तरों पर समझा जाता है-

  • आनुवांशिक जैव-विविधता
  • प्रजातीय जैव-विविधता
  • पारितन्त्रीय जैव-विविधता।

प्रश्न 3.
हॉट स्पॉट (Hot Spot) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
हॉट स्पॉट (Hot Spot)-जिन क्षेत्रों में जैव-विविधता अति समृद्ध एवं संवेदनशील हो और मानवीय गतिविधियों के कारण खतरे में हो ऐसे क्षेत्रों को जैव-विविधता के हॉट स्पॉट कहा जाता है।

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प्रश्न 4.
मानव जाति के लिए जन्तुओं के महत्त्व का वर्णन संक्षेप में कीजिए।
उत्तर:
मानव अपनी मूलभूत आवश्यताएँ; जैसे रोटी, कपड़ा और मकान तथा विकसित सुखी जीवन की अन्य सुविधाएँ भिन्न-भिन्न तरीकों से जैविक विविधता से ही प्राप्त करता है। जीवों की अनेक प्रजातियाँ हमें बहुत-से पदार्थ प्रदान करती हैं जिससे हमारी भौतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक सन्तुष्टि होती है, जो कल्याणकारी जीवन के लिए अति आवश्यक है।

प्रश्न 5.
विदेशज प्रजातियों (Exotic Species) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विदेशज प्रजातियाँ (Exotic Species)-वे प्रजातियाँ जो स्थानीय आवास की मूल जैव प्रजाति नहीं हैं लेकिन उस तन्त्र में स्थापित की गई हैं, उन्हें विदेशज प्रजातियाँ कहते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
प्रकृति को बनाए रखने में जैव-विविधता की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर:
जैव-विविधता ने मानव संस्कृति के विकास में बहुत योगदान दिया है, इसी प्रकार, मानव समुदायों ने भी आनुवंशिक, प्रजातीय व पारिस्थितिक स्तरों पर प्राकृतिक विविधता को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है।

दूसरे शब्दों में जिस पारितंत्र में जितनी प्रकार की प्रजातियाँ होंगी, वह पारितंत्र उतना ही अधिक स्थायी होगा।
1. जैव-विविधता की आर्थिक भूमिका-

  • सभी मनुष्यों के लिए दैनिक जीवन में जैव-विविधता एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है, जैव-विविधता का एक महत्त्वपूर्ण भाग ‘फसलों की विविधता’ है, जिसे कृषि जैव विविधता कहा जाता है।
  • जैव-विविधता को संसाधनों के उन भंडारों के रूप में भी समझा जा सकता है, जिनकी उपयोगिता भोज्य-पदार्थ, औषधियाँ और सौंदर्य प्रसाधन आदि बनाने में है।

2. जैव-विविधता की पारिस्थितिकीय भूमिका-

  • जीव व प्रजातियाँ ऊर्जा ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं। प्रत्येक जीव अपनी जरूरत पूरी करने के साथ-साथ दूसरे जीवों के पनपने में भी सहायक होता है।
  • प्रजातियाँ जलवायु को नियंत्रित करने में सहायक होती है। ये पारितंत्री क्रियाएँ मानव जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण क्रियाएँ हैं।
  • पारितंत्र में जितनी अधिक विविधता होगी, प्रजातियों के प्रतिकूल स्थितियों में भी रहने की संभावना और उनकी उत्पादकता भी उतनी ही अधिक होगी।

3. जैव-विविधता की वैज्ञानिक भूमिका-

  • जैव-विविधता इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक प्रजाति हमें यह संकेत देती है, कि जीवन का आरंभ कैसे हुआ और भविष्य में कैसे विकसित होगा।
  • पारितंत्र में हम भी एक प्रजाति हैं, तथा मानव प्रजाति की क्या भूमिका है, इसे हम जैव-विविधता से समझ सकते हैं।
  • यह समझना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हमारे साथ सभी प्रजातियों को जीवित रहने का अधिकार हैं। अतः कई प्रजातियों को स्वेच्छा से विलुप्त करना नैतिक रूप से गलत है।

प्रश्न 2.
जैव-विविधता के हास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वर्णन करें। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ।
उत्तर:
जैव-विविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी कारक निम्नलिखित हैं
1. जनसंख्या में वृद्धि जनसंख्या वृद्धि के कारण लोगों को रहने के लिए एवं कृषि के लिए अधिक भूमि की आवश्यकता होती है जिसकी पूर्ति वनों को काटकर की जाती है। इस प्रकार विभिन्न प्रजातियों के आवास स्थल नष्ट हो जाते हैं और बहुत-सी प्रजातियाँ लुप्त हो जाती हैं। इसलिए बढ़ती जनसंख्या जैव-विविधता के लिए बड़ा खतरा है।

2. वन्य जीवों का अवैध शिकार वन्य प्राणियों से बहुमूल्य पदार्थ प्राप्त करने के लिए उनका अवैध शिकार किया जाता है जिससे बहुत-सी प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं जो जैव-विविधता के लिए एक खतरा हैं।

3. प्रदूषण-पर्यावरण प्रदूषण, विशेषकर जलीय पारितन्त्र को खराब कर देता है, इससे जलीय जीवों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है।

4. विदेशज प्रजातियों का आगमन किसी भी क्षेत्र में विदेशी प्रजातियों के आगमन से स्थानीय प्रजातियों के आवास एवं भोजन आदि के लिए उनके साथ संघर्ष करना पड़ता है। इस संघर्ष में स्थानीय कमजोर प्रजातियाँ नष्ट हो जाती हैं।

जैव-विविधता हास को रोकने के उपाय-जैव-विविधता ह्रास को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय हैं-

  • संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रयास किए जाने चाहिएँ।।
  • प्रजातियों को लुप्त होने से बचाने के लिए उचित योजनाएँ व प्रबन्धन किया जाना चाहिए।
  • वन्य जीवों के आवास के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय पार्क बनाए जाने चाहिएँ।
  • वनस्पति एवं प्राणी प्रजातियों की किस्मों को संरक्षित करना चाहिए।

जैव-विविधता एवं संरक्षण HBSE 11th Class Geography Notes

→ जैव-विविधता (Biodiversity)-पृथ्वी अथवा किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्रों के पौधों, प्राणियों व सूक्ष्म जीवों की विविधता को जैव-विविधता कहते हैं।

→ टैक्सोनोमी (Taxonomy)-जीवों के वर्गीकरण के विज्ञान को टैक्सोनोमी कहते हैं।

→ तप्त स्थल (Hot Spots)-संसार के जिन क्षेत्रों में प्रजातीय विविधता पाई जाती है, उन्हें विविधता के ‘तप्त स्थल’ कहा जाता है।

→ आनुवंशिकी (Genetics)-आनुवंशिक लक्षणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरण की विधियों और कारणों के अध्ययन को आनुवंशिकी कहते हैं।

→ आनुवंशिकता (Heredity)-जीवधारियों की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में विभिन्न लक्षणों के प्रेक्षण या संचरण को आनुवंशिकता कहते हैं।

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HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Important Questions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भाग-I : सही विकल्प का चयन करें

1. पृथ्वी पर कितने परिमंडल हैं?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(C) 4

2. तटीय मरुस्थलों में प्रायः तापमान रहता है
(A) 21° – 38°C
(B) 2° – 25°C
(C) 15° – 35°C
(D) 29° – 37°C
उत्तर:
(C) 15° – 35°C

3. निम्नलिखित में से उच्च प्रदेशीय जीवोम कहाँ पाया जाता है?
(A) एंडीज
(B) स्टैपी
(C) प्रवालभित्ति
(D) रूब-एल-खाली
उत्तर:
(A) एंडीज

4. वायुमंडल में जीवमंडल का विस्तार कितनी ऊँचाई तक है?
(A) 2000 मी०
(B) 3000 मी०
(C) 4000 मी०
(D) 5000 मी०
उत्तर:
(D) 5000 मी०

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन

5. वनस्पति जगत और प्राणी जगत किसके वर्ग हैं?
(A) स्थलमंडल
(B) वायुमंडल
(C) जलमंडल
(D) जैवमंडल
उत्तर:
(D) जैवमंडल

6. कौन-सी गैस ‘हरित गृह प्रभाव’ उत्पन्न करती है?
(A) कार्बन-डाइऑक्साइड
(B) ओजोन
(C) हाइड्रोजन
(D) क्लोरो-फ्लोरो कार्बन
उत्तर:
(A) कार्बन-डाइऑक्साइड

7. Ecology’ शब्द यूनानी शब्दों Oikos तथा logos से मिलकर बना है। इनमें ‘आइकोस’ शब्द का क्या अर्थ है?
(A) जीव के प्रजनन का स्थान
(B) वनस्पति
(C) पर्यावरण
(D) रहने का स्थान
उत्तर:
(D) रहने का स्थान

8. ‘Ecology’ शब्द जर्मनी भाषा के किस शब्द से बना है?
(A) Oekology
(B) Oekologie
(C) Ekology
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) Oekologie

9. Ecosystem’ (पारिस्थितिक तंत्र) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किस विद्वान ने किया था?
(A) ए०जी०टांसली
(B) लिंडमैन
(C) मोंकहाऊस
(D) सेंट हिलेयर आइसोडॉट ज्योफ्री
उत्तर:
(A) ए०जी०टांसली

10. जैवमंडल की सर्वप्रथम संकल्पना किसने प्रस्तुत की?
(A) ए०जी०टांसली
(B) लिंडमैन
(C) मोंकहाऊस
(D) एडवर्ड सुवेस
उत्तर:
(D) एडवर्ड सुवेस

11. निम्नलिखित में से अपघटक वर्ग में किसको रखा जा सकता है?
(A) पेड़-पौधे
(B) बकरी
(C) बैक्टीरिया
(D) सौर विकिरण
उत्तर:
(C) बैक्टीरिया

12. निम्नलिखित में से जैवमंडल का सदस्य नहीं है-
(A) शैवाल
(B) कवक
(C) जल
(D) पादप
उत्तर:
(C) जल

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन

13. निम्नलिखित में से कौन-सा उदाहरण स्वपोषित घटक का है?
(A) घास
(B) मनुष्य
(C) हिरण
(D) गिद्ध
उत्तर:
(A) घास

14. पारिस्थितिक तंत्र में उपभोक्ता उन्हें कहा जाता है जो-
(A) अपना आहार स्वयं बनाते हैं।
(B) स्वपोषित प्राथमिक उत्पादक (पौधों) से भोजन प्राप्त करते हैं
(C) मृत जंतुओं और पौधों को गलाते-सड़ाते हैं
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) स्वपोषित प्राथमिक उत्पादक (पौधों) से भोजन प्राप्त करते हैं

15. निम्नलिखित में से किसको सर्वाहारी वर्ग में रखा जा सकता है?
(A) कीट, चूहे
(B) गाय, भैंस
(C) मनुष्य
(D) उल्लू, शेर, चीता
उत्तर:
(C) मनुष्य

16. जमीन पर कोई भी शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी नहीं बचेगा, यदि-
(A) सारे पौधे हटा दिए जाएँ
(B) सारे खरगोश और हिरण हटा दिए जाएँ
(C) सारे शेर हटा दिए जाएँ
(D) सारे सूक्ष्म जीव व जीवाणु हटा दिए जाएँ
उत्तर:
(A) सारे पौधे हटा दिए जाएँ

17. निम्नलिखित में से मानव निर्मित पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा नहीं है-
(A) जनजातीय पारिस्थितिक तंत्र
(B) वनीय पारिस्थितिक तंत्र
(C) कृषि पारिस्थितिक तंत्र
(D) ग्रामीण पारिस्थितिक तंत्र
उत्तर:
(B) वनीय पारिस्थितिक तंत्र

18. खाद्य शृंखला के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?
(A) आद्य श्रृंखला में एक प्राणी दूसरे को खाकर ऊर्जा का स्थानान्तरण करता है
(B) इसमें केवल 50% ऊर्जा अगले पोषण तल को प्राप्त होती है
(C) इसके तीसरे स्तर पर मांसाहारी जानवर आ जाते हैं
(D) अधिकतर खाद्य शृंखलाएँ चार या पाँच स्तरों तक ही सीमित हो जाती हैं
उत्तर:
(B) इसमें केवल 50% ऊर्जा अगले पोषण तल को प्राप्त होती है

19. गिद्ध इसलिए समाप्त हो चुके हैं क्योंकि-
(A) वर्तमान जलवायु उनके अनुकूल नहीं रही
(B) भोजन व पानी की कमी ने उनका सफाया कर दिया
(C) पोषण तल के उच्चतम स्तर पर होने के कारण उनमें घातक रसायन एकत्रित हो गए
(D) गिद्ध को अन्य मांसाहारी जीव खा गए
उत्तर:
(C) पोषण तल के उच्चतम स्तर पर होने के कारण उनमें घातक रसायन एकत्रित हो गए

भाग-II : एक शब्द या वाक्य में उत्तर दें-

प्रश्न 1.
खाद्य श्रृंखला का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
घास।

प्रश्न 2.
उष्ण कटिबंधीय घास के मैदानों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
सवाना।

प्रश्न 3.
शैलों में उपस्थित लोहांश से ऑक्सीजन की रासायनिक प्रतिक्रिया होने पर क्या बनता है?
उत्तर:
आयरन ऑक्साइड।

प्रश्न 4.
वनस्पति जगत और प्राणी जगत किसके वर्ग हैं?
उत्तर:
जैवमंडल के।

प्रश्न 5.
कौन-सी गैस ‘हरित गृह प्रभाव उत्पन्न करती है?
उत्तर:
कार्बन-डाइऑक्साइड।

प्रश्न 6.
‘Ecosystem’ (पारिस्थितिक तंत्र) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किस विद्वान ने किया था?
उत्तर:
ए०जी० टांसली ने।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 15 पृथ्वी पर जीवन

प्रश्न 7.
जैवमंडल की सर्वप्रथम संकल्पना किसने प्रस्तुत की?
उत्तर:
एडवर्ड सुवेस ने।

प्रश्न 8.
जैवमण्डल के दो वर्ग कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. वनस्पति जगत और
  2. प्राणी जगत।

प्रश्न 9.
होमोसेपियन्स (Homo Sapiens) क्या है?
उत्तर:
एक प्रजाति के रूप में आधुनिक मानव।

प्रश्न 10.
पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा का प्रमुख स्रोत क्या है?
उत्तर:
सूर्यातप।

प्रश्न 11.
पारिस्थितिक तन्त्र (Ecosystem) के घटकों के दो वर्ग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. जैव
  2. अजैव।

प्रश्न 12.
सभी प्राकृतिक चक्रों को ऊर्जा प्रदान करने वाला प्रमुख स्रोत कौन-सा है?
उत्तर:
सौर विकिरण।

प्रश्न 13.
एक प्रमुख पारितंत्र का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
वन एक प्रमुख पारितंत्र है।

अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पृथ्वी के परिमण्डलों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. स्थलमण्डल
  2. वायुमण्डल
  3. जलमण्डल और
  4. जैवमण्डल।

प्रश्न 2.
उपभोक्ताओं के तीन मुख्य वर्ग बताइए। अथवा जीवों के मुख्य वर्ग कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. शाकाहारी (Herbivores)
  2. मांसाहारी (Carnivores)
  3. सर्वाहारी (Omnivores)।

प्रश्न 3.
अपघटक (Decomposers) क्या होते हैं?
उत्तर:
अपघटक वे सूक्ष्म जीव व जीवाणु होते हैं जो खाद्य श्रृंखला के सभी स्तरों से गले-सड़े जैव पदार्थ को अपना भोजन बनाते हैं।

प्रश्न 4.
पारिस्थितिक तन्त्र से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
किसी भी क्षेत्र या प्रदेश के भौतिक वातावरण तथा जीवों के पारस्परिक सम्बन्धों के व्यवस्थित अध्ययन को पारिस्थितिक तन्त्र कहते हैं। यह एक जटिल तन्त्र है, जिसमें दोनों के आपसी सम्बन्धों का वैज्ञानिक अध्ययन सम्मिलित है। पारिस्थितिक तन्त्र में जैविक तथा अजैविक जगत की पारस्परिक प्रक्रियाओं तथा सम्बन्धों का विश्लेषण किया जाता है।

प्रश्न 5.
पारितन्त्र क्या है?
उत्तर:
पारितन्त्र पर्यावरण के सभी जैव तथा अजैव घटकों के एकीकरण का परिणाम है। दूसरे शब्दों में, जीव तथा उसके पर्यावरण के बीच की स्वतन्त्र इकाई को पारितन्त्र (Ecosystem) कहा जाता है।

प्रश्न 6.
जैवमण्डल किसे कहते हैं?
उत्तर:
जैवमण्डल से अभिप्राय पृथ्वी के उस अंग से है, जहाँ जीवन सम्भव है। सभी जीवित प्राणी जीव-जन्तु तथा पेड़-पौधे इसी मण्डल में पनपते हैं।

प्रश्न 7.
पारितंत्रीय विविधता क्या है?
उत्तर:
पारितंत्रीय विविधता पारितंत्र के प्रकारों की व्यापक भिन्नता, पर्यावासों की विविधता और प्रत्येक पारितंत्र में घटित हो. रही पारिस्थितिकीय प्रक्रियाओं से नजर आती है। पारितंत्रीय सीमाओं का निर्धारण न केवल जटिल है, बल्कि कठिन भी है।

प्रश्न 8.
शाकाहारी और माँसाहारी में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
शाकाहारी और माँसाहारी में निम्नलिखित अन्तर हैं-

शाकाहारीमाँसाहारी
1. शाकाहारी जीव अपने भोजन के लिए पौधों पर निर्भर करते हैं।1. माँसाहारी जीव अपना भोजन शाकाहारी जीवों के माँस से प्राप्त करते हैं।
2. ये पहले स्तर पर प्राथमिक उपभोक्ता कहलाते हैं।2. ये गौण उपभोक्ता कहलाते हैं।
3. कीट, चूहे, बकरियाँ, गाय, भैंस आदि इनके प्रमुख उदाहरण हैं।3. शेर, चीता, उल्लू, गिद्ध आदि इनके प्रमुख उदाहरण हैं।

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प्रश्न 9.
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में क्या अन्तर है?
उत्तर:
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल में निम्नलिखित अन्तर हैं-

खाद्य शृंखलाखाद्य जाल
1. किसी पारिस्थितिक तन्त्र में एक स्रोत से दूसरे स्रोत में ऊर्जा स्थानान्तरण की प्रक्रिया को खाद्य शृंखला कहते हैं।1. जब बहुत-सी खाद्य शृंखलाएँ एक-दूसरे से घुल-मिलकर एक जटिल स्प धारण करती हैं, तो उसे खाद्य जाल कहते हैं।
2. खाद्य शृंखला ऊर्जा का प्रवाह चक्र है।2. खाद्य जाल अनेक स्रोतों से ऊर्जा के अन्तरण की एक जटिल प्रक्रिया है।

लातुरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जैवमण्डल का पर्यावरण में क्या स्थान है?
उत्तर:
जैवमण्डल प्राकृतिक पर्यावरण का एक विशिष्ट अंग है। इस मण्डल में सभी जीवित प्राणियों, मानव तथा जीव जन्तुओं की क्रियाएँ सम्मिलित हैं। जैवमण्डल के कारण भू-तल पर जीवन है। पर्यावरण के अन्य सभी अंग जैवमण्डल के प्राणियों को उत्पन्न करने तथा उनके क्रियाशील रहने में सहायक हैं। जैवमण्डल वायुमण्डल की ऊपरी परतों से महासागरों की गहराइयों तक विस्तृत रूप से फैला हुआ है। मनुष्य इस जैवमण्डल में पर्यावरण की समग्रता लाने में क्रियाशील है। मनुष्य भू-तल की सम्पदाओं का बुद्धिमत्ता से उपयोग करके इसका संरक्षण कर सकता है, इसलिए जैवमण्डल को प्राकृतिक पर्यावरण का सबसे महत्त्वपूर्ण तथा विशिष्ट मण्डल कहा जाता है।

प्रश्न 2.
उत्पादक तथा उपभोक्ता में क्या अन्तर है?
उत्तर:
उत्पादक तथा उपभोक्ता में निम्नलिखित अन्तर हैं-

उत्पादकउपभोक्ता
1. उत्पादक सौर ऊर्जा का प्रयोग करके अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं।1. उपभोक्ता अपना भोजन स्वयं उत्पन्न करने में असमर्थ होते हैं। ये अन्य जीवों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं।
2. ये प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा कार्बोहाइड्रेट उत्पन्न करते हैं तथा खाद्य शृंखला के दूसरे उपभोक्ताओं को भोजन प्रदान करते हैं।2. उपभोक्ता प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन बनाने में अमसर्थ हैं, इन्हें शाकाहारी, माँसाहारी तथा सर्वाहारी इन वर्गों में बाँटा जाता है ।
3. पेड़-पौधे, नीली-हरी शैवाल तथा कुछ जीवाणु इनके प्रमुख उदाहरण हैं।3. भेड़, बकरियाँ, उल्लू, मनुष्य आदि इनके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 3.
जैवमण्डल हमारे लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैवमण्डल से अभिप्राय पृथ्वी के उस अंग से है, जहाँ सभी प्रकार का जीवन पाया जाता है। स्थलमण्डल, जलमण्डल तथा वायुमण्डल जहाँ मिलते हैं, वहीं जैवमण्डल स्थित है। इस मण्डल में सभी प्रकार का जीवन सम्भव है। सभी जीवित प्राणी जीव-जन्तु तथा पेड़-पौधे इसी मण्डल में पनपते हैं, इसलिए जैवमण्डल हमारे लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 4.
जैवमण्डल का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जैवमण्डल क्षैतिज रूप से सारे भूमण्डल पर और लम्बवत् रूप से सागरों की गहराई से वायुमण्डल की ऊँचाई तक, जहाँ-जहाँ जीवन सम्भव है, तक फैला हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जैवमण्डल का विस्तार महासागरों में 9,000 मीटर की गहराई तक, स्थल के नीचे 300 मीटर की गहराई तक तथा वायुमण्डल में 5,000 मीटर की ऊँचाई तक है। जैवमण्डल की परत पतली किन्तु अत्यन्त जटिल है और किसी भी प्रकार का जीवन इसी परत में सम्भव है।

प्रश्न 5.
ऊर्जा प्रवाह में 10 प्रतिशत ऊर्जा स्थानान्तरण के नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जीवविज्ञानी किन्डलमान (Kindlemann) ने सन् 1942 में एक सामान्यीकरण (Generalisation) प्रस्तुत किया जिसके अनुसार खाद्य श्रृंखला में एक पोषण तल के निकटतम उच्च पोषण तल (Trophic Level) में जब ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है तो ऊर्जा का अधिकांश भाग (90%) विभिन्न शारीरिक क्रियाओं में ताप के रूप में नष्ट हो जाता है। केवल 10 प्रतिशत ऊर्जा अगले पोषण तल को प्राप्त होती है। स्पष्ट है कि जैसे-जैसे हम खाद्य के प्राथमिक स्रोत से दूर होते जाते हैं वैसे-वैसे जन्तुओं द्वारा प्राप्त ऊर्जा की मात्रा न्यून होती चली जाती है। इसका अभिप्राय यह हुआ कि ज्यों-ज्यों हम खाद्य श्रृंखला में ऊपर की ओर जाते हैं तो जन्तुओं की संख्या और उनकी विविधता कम होती जाती है। उदाहरणतः एक जंगल में हज़ारों पेड़-पौधे हो सकते हैं जिनमें सौ हिरण हो सकते हैं, दो चार लक्कड़बग्घे परन्तु शेर एक ही रह सकता है।

प्रश्न 6.
पारिस्थितिक सन्तुलन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
किसी भी पारिस्थितिक तन्त्र की प्राकृतिक अवस्था में विविध चक्रों और ऊर्जा प्रवाहों में पूरा सामंजस्य होता है, जिससे एक गतिशील सन्तुलन स्थापित हो जाता है। इसे पारिस्थितिक सन्तुलन कहते हैं। सन्तुलन की इस दशा में विभिन्न प्रकार के उपभोक्ताओं (जीव-जन्तुओं) की सापेक्षिक संख्या इस प्रकार निश्चित होती है कि किसी भी जीव के लिए खाद्य पदार्थ की कमी नहीं है।

छोटे और कमज़ोर जीवों अर्थात् प्राथमिक उपभोक्ताओं की कम जरूरत के कारण उनकी संख्या अधिक तथा उनकी प्रजनन दर भी तीव्र होती है। बड़े अर्थात् द्वितीय तथा तृतीय स्तर के उपभोक्ता संख्या में कम होते हैं और उनकी प्रजनन दर भी कम होती है। जब कभी किसी पारिस्थितिक तन्त्र में विभिन्न प्रकार के प्राणियों की सापेक्ष संख्या में अन्तर आ जाता है तो विविध चक्रों और ऊर्जा प्रवाहों का सामंजस्य भंग हो जाता है, परिणामस्वरूप पारिस्थितिक सन्तुलन बिगड़ जाता है।

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पारिस्थितिक तन्त्र पर मनुष्य के प्रभाव की विवेचना करें।
उत्तर:
पारिस्थितिक तन्त्र एक स्वचालित प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य अथवा किसी भी प्राणी की भूमिका गड़बड़ाने पर इस जटिल किन्तु संवेदनशील तन्त्र की प्रक्रिया में बाधा आ जाती है जिसके कुप्रभाव और दुष्परिणाम समस्त जीव-जगत् को भुगतने पड़ते हैं। इस जैवमण्डल के असंख्य जीवों में से एक होते हुए भी अपनी बुद्धि विज्ञान तथा तकनीकी विकास के सहारे मनुष्य पारिस्थितिक तन्त्र को अधिकाधिक प्रभावित करने की क्षमता धारण करता जा रहा है। मनुष्य द्वारा किए गए जानवरों के वर्णात्मक (Selective) शिकार से वह खाद्य शृंखला भंग हो गई है जिसमें वे जानवर प्रतियोगिता करते थे। एक खाद्य श्रृंखला भंग होने पर खाद्य जाल में कार्यरत अनेक खाद्य शृंखलाएँ बाधित होती हैं।

मनुष्य ने अपने आर्थिक लाभ और उपयोग के लिए अनेक पौधों और पशुओं को पालतू बना लिया है। इस प्रक्रिया में प्राकृतिक चयन का स्थान मानवीय चयन ने ले लिया है। हमारी फसलें और गाय, भैंस, भेड़-बकरी तथा मुर्गी जैसे पालतू पशु-पक्षी इसी पर्यावरणीय नियन्त्रण का परिणाम हैं। इस प्रक्रिया में मानव ने पौधों और प्राणियों की आनुवंशिकी (Genetics) में भी परिवर्तन कर दिए हैं ताकि नई वांछनीय विशेषताएँ आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाई जा सकें। कई बार मनुष्य द्वारा जानबूझ कर अथवा आकस्मिक ढंग से अनेक पौधों और प्राणियों को उनके मूल स्थान से हटा कर नए क्षेत्रों में बसाया गया है। इस पराए वातावरण में कई बार पौधों और प्राणियों को प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ता। परिणामस्वरूप उनकी संख्या अन्य जीवों से अधिक हो जाती है और वे पारिस्थितिक तन्त्र को भंग कर देते हैं।

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प्रश्न 2.
पारिस्थितिक तन्त्र की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसके विभिन्न अंगों में पदार्थ चक्रण और ऊर्जा प्रवाह को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पारिस्थितिक तन्त्र की अवधारणा-किसी क्षेत्र के भौतिक पर्यावरण तथा उसमें रहने वाले जीवों के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं की जटिल व्यवस्था को पारिस्थितिक तन्त्र (Ecosystem) कहते हैं। पारिस्थितिक तन्त्र छोटा या बड़ा किसी भी आकार का हो सकता है। उदाहरणतः गाँव का छोटा-सा तालाब, अमेज़न का वर्षा-वन (Rain forest) जो कई देशों पर विस्तृत है, एक महासागर अथवा सारा संसार एक पारिस्थितिक तन्त्र हो सकता है। पारिस्थितिक तन्त्र के निर्माण, पुनरुत्थान और उसके जीवन-निर्वाह के लिए ऊर्जा का प्रवाह तथा पदार्थ का चक्रण अनिवार्य है।

पारिस्थितिक तन्त्र छोटा हो या बड़ा, उसकी मुख्य विशेषता होती है उसके विभिन्न अंगों में ऊर्जा का प्रवाह और पदार्थ का चक्रण (Circulation)। ऊर्जा तथा पदार्थ का उपयोग पारिस्थितिक तन्त्र के निर्माण, पुनरुत्थान और उसके जीवन निर्वाह के लिए किया जाता है।
1. पदार्थ चक्रण-सभी जीवों का निर्माण मुख्यतः तीन तत्त्वों से मिलकर हुआ है। ये तत्त्व हैं-(1) कार्बन, (2) हाइड्रोजन तथा (3) ऑक्सीजन। थोड़ी मात्रा में अन्य तत्त्वों; जैसे नाइट्रोजन, लोहा, फॉस्फोरस और मैंगनीज़ की भी आवश्यकता पड़ती है। इन सभी तत्त्वों को पोषक कहते हैं। जैवमण्डल में ये तत्त्व पौधों के द्वारा पहुँचते हैं।

पारिस्थितिक तन्त्र के विभिन्न अंगों के बीच पदार्थ चक्रीय ढंग से घूमते हैं। इन पदार्थों में तत्त्व (Elements) और यौ (Compounds) दोनों होते हैं। पदार्थ चक्रण के मार्ग स्पष्ट एवं सुसंगत होते हैं। उदाहरणतः कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और जल वायुमण्डल, स्थलमण्डल, जलमण्डल और जैवमण्डल के बीच एक प्राकृतिक व्यवस्था के तहत स्थानान्तरित होते रहते हैं। कुछ पदार्थों का चक्रण थोड़े समय में ही पूरा हो जाता है जबकि अन्य कुछ पदार्थ किसी एक रूप में लम्बे समय तक संचित पड़े रहते हैं और उनका चक्रण हज़ारों, लाखों अथवा करोड़ों वर्षों में पूरा होता है। परन्तु ये पदार्थ कभी भी पृथ्वी के बाहर नहीं जा पाते।

2. ऊर्जा प्रवाह जैसे किसी भी कार्य के लिए ऊर्जा (Energy) की आवश्यकता होती है वैसे ही पारिस्थितिक तन्त्र के विभिन्न अंग ऊर्जा के संचरण द्वारा ही कार्य करते हैं।

पारिस्थितिक तन्त्र में ऊर्जा का प्रवाह क्रमबद्ध स्तरों की एक श्रृंखला में होता है जिसे खाद्य शृंखला (Food Chain) कहते हैं। खाद्य शृंखला वास्तव में एक समुदाय में जीवित प्राणियों का ऐसा अनुक्रम (Sequence) होता है जिसमें एक प्राणी दूसरे प्राणी को खाकर खाद्य ऊर्जा का स्थानान्तरण करता है। सरल शब्दों में, खाद्य श्रृंखला “कौन किसको खाता है” (Who eats whom) की एंक सूची होती है। आइए! निम्नलिखित खाद्य शृंखला के माध्यम से ऊर्जा प्रवाह को क्रमिक ढंग से समझें-

(1) खाद्य श्रृंखला में पहले स्तर पर हरे पौधे आते हैं जिन्हें उत्पादक कहते हैं। ये पौधे प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन-डाइऑक्साइड तथा जल को रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं जो पौधों में कार्बोहाइड्रेट के रूप में संचित हो जाती है। ऊर्जा रूपान्तरण की यह प्रक्रिया प्रकाश-संश्लेषण (Photo-synthesis) कहलाती है जिसके अन्तर्गत जीवनदायक जैव रासायनिक अणुओं की उत्पत्ति होती है। ऐसे पौधे जो प्रकाश-संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं अकार्बनिक पदार्थों से तैयार करते हैं, स्वपोषित (Autotroph) कहलाते हैं।

(2) इन पौधों अथवा उत्पादकों को शाकाहारी (Herbivores) प्राणी खा जाते हैं। ये प्राथमिक उपभोक्ता कहलाते हैं। कीट, चूहे, भेड़, बकरियाँ, गाय-भैंस आदि प्राथमिक उपभोक्ताओं के उदाहरण हैं।

(3) खाद्य शृंखला के तीसरे स्तर पर माँसाहारी (Carnivores) जानवर आते हैं जो प्राथमिक उपभोक्ताओं अर्थात् शाकाहारी जानवरों को खाकर जीवित रहते हैं। इन्हें गौण अथवा द्वितीयक उपभोक्ता कहते हैं। उल्ल, शेर, चीता आदि इसके उदाहरण हैं।

(4) कुछ जातियों को सर्वाहारी (Omnivores) कहते हैं क्योंकि वे शाकाहारी और माँसाहारी दोनों होते हैं। मनुष्य सर्वाहारी श्रेणी में आता है।

(5) कुछ सूक्ष्म जीव तथा जीवाणु जिन्हें अपघटक (Decomposers) कहते हैं, खाद्य श्रृंखला के सभी स्तरों से प्राप्त अवशेष या गले-सड़े जैव पदार्थ को अपना भोजना बना कर जीवित रहते हैं। ये अपघटक पारिस्थितिक तन्त्र में खनिज पोषकों के पुनर्चक्रण में सहायता करके खाद्य-शृंखला को पूरा करते हैं।

प्रश्न 3.
पारिस्थितिकी तथा पारिस्थितिक तन्त्र के बारे में विस्तृत वर्णन करें।
उत्तर:
पारिस्थितिकी (Ecology)-पारिस्थितिकी का सीधा सम्बन्ध जैविक तथा अजैविक तत्त्वों के पारस्परिक सम्बन्धों से है अर्थात् जैव समूहों एवं जीवों तथा भौतिक वातावरण के बीच जो सम्बन्ध होते हैं, उनका अध्ययन पारिस्थितिकी में किया जाता है। प्रसिद्ध जर्मन वैज्ञानिक एरंट हैकल के अनुसार, “पारिस्थितिकी ज्ञान, जिसमें जैविक तत्त्वों का अपने चारों ओर के संसार के साथ सम्बन्धों के योगफल का अध्ययन किया जाता है।”

सन् 1860 में Ernt Haeckel ने सर्वप्रथम (Ecology) पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग किया था, लेकिन 20वीं शताब्दी में इसका व्यापक प्रयोग पर्यावरण के सन्दर्भ में किया जाने लगा। किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण का प्रभाव वहाँ की वनस्पति तथा जीव-जन्तओं पर पड़ता है, ये आपस में एक-दूसरे से प्रभावित होते हैं तथा प्रभावित करते हैं। इसलिए Kerbs ने सन 1972 में लिखा है, “पारिस्थितिकी वातावरण की उन पारस्परिक प्रतिक्रियाओं के अध्ययन का वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो जीव-समूहों के कल्याण, उनके वितरण को विनियमित करने, प्रचुरता पुनरुत्यति तथा विकास को नियन्त्रित करते हैं।”

पारिस्थितिक तन्त्र (Eco-System)-किसी भी क्षेत्र या प्रदेश के भौतिक वातावरण एवं जीवों के पारस्परिक सम्बन्धों का व्यवस्थित अध्ययन पारिस्थितिकी तन्त्र कहलाता है। यह एक जटिल व्यवस्था (तन्त्र) है, जिसमें दोनों के आपसी सम्बन्धों का वैज्ञानिक अध्ययन सम्मिलित है।

उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि पारिस्थितिकी तन्त्र में जैविक जगत् तथा अजैविक जगत् (Biotic and Abiotic World) की पारस्परिक प्रक्रियाओं एवं सम्बन्धों का विश्लेषण किया जाता है। जैव जगत् (Biotic World) में पशु-पक्षी, मानव, पेड़-पौधों आदि तथा अजैविक जगत् (Abiotic World) में भूमि, मिट्टी, जलवायु आदि तत्त्व सम्मिलित हैं। पारिस्थितिकी तन्त्र के विभिन्न अंग होते हैं जो एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। उदाहरणार्थ किसी वन प्रदेश में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे, घास, झाड़ी, लताएँ, फफूंदी, जीवाणु, पशु-पक्षी तथा बड़े-बड़े जंगली जीव होते हैं। इन सभी का आपसी सम्बन्ध होता है। पेड़-पौधे तथा घास अपने लिए मिट्टी से पोषक तत्त्व पानी, हवा आदि ग्रहण करते हैं। कुछ पौधे परजीवी होते हैं।

जंगल में रहने वाले जीव-जन्तु कुछ तो वनस्पति से भोजन प्राप्त करते हैं तथा जो माँसाहारी होते हैं, वे छोटे जीवों का शिकार करके अपना भोजन जुटाते हैं। जीव-जन्तुओं के मरने के बाद उसके अवशेषों से मिट्टी का निर्माण अथवा मिट्टी में पोषक तत्त्वों की वृद्धि होती है। यही पोषक तत्त्व वनस्पति के विकास में सहायक होते हैं और फिर जीवों का भोजन बनाते हैं अर्थात् भौतिक वातावरण तथा जैविक वातावरण का पारस्परिक घनिष्ठ सम्बन्ध है और इन सम्बन्धों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित अध्ययन पारिस्थितिकी तन्त्र है। यह महत्त्वपूर्ण तथ्य है कि इन्हीं दोनों तत्त्वों में पोषक चक्र (Nutrient Cycle) गतिज ऊर्जा (Energy Flow) के माध्यम से विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा जीवन-संचार करते हैं।

प्रश्न 4.
जैव भू-रासायनिक चक्र के सम्पन्न होने के क्रमों को समझाइए।
उत्तर:
जैव भू-रासायनिक चक्र के सम्पन्न होने के क्रम-जैव भू-रासायनिक चक्र निम्नलिखित क्रम में सम्पन्न होता है-
1. पौधों के उगने-बढ़ने के लिए कुछ अजैव तत्त्व आवश्यक होते हैं। वे अजैव तत्त्व हैं कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन। थोड़ी मात्रा में अन्य तत्त्वों यथा-नाइट्रोजन, लोहा, गंधक, फॉस्फोरस और मैंगनीज की भी आवश्यकता होती है। इन सभी तत्त्वों को पोषक (Nutrients) कहा जाता है।

2. चट्टानों के अपघटन से प्राप्त अवसादों से मिट्टी बनती है जिसमें लोहा, तांबा, सोडियम और फॉस्फोरस जैसे खनिज (पोषक) तत्त्व स्वतः उपलब्ध होते हैं। वर्षा जल के साथ कुछ रासायनिक पोषक-कार्बन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन वायुमण्डल से निकलकर मिट्टी में मिल जाते हैं।

3. मृदा और वायु से प्राप्त इन पोषक तत्त्वों को पौधे अपनी जड़ों के द्वारा घोल के रूप में प्राप्त करते हैं। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति से हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा कार्बन डाईऑक्साइड को ऑक्सीजन और कार्बनिक यौगिक (जैव पदार्थ) में परिवर्तित कर देते हैं।

4. पृथ्वी पर पहुँचने वाले सूर्यातप का मात्र 0.1 प्रतिशत भाग ही प्रकाश संश्लेषण में काम आता है। इसका आधे से अधिक भाग पौधों की श्वसन क्रिया में व्यय होता है और शेष ऊर्जा अस्थायी रूप से पौधों के अन्य भागों में संचित हो जाती है।

5. चट्टानों से मिट्टियों में आए कुछ रासायनिक तत्त्वों को वर्षा के जल के माध्यम से नदियाँ समुद्रों में पहुँचा देती हैं और .. वे अजैव तत्त्व जलमण्डल का अंग बन जाते हैं।

6. पौधे जिन पोषक तत्त्वों को मिट्टी से ग्रहण करते हैं वे आहार-शृंखला के माध्यम से विभिन्न पोषक तत्त्वों में स्थानांतरित होते रहते हैं। उदाहरणतः पौधों को शाकाहारी प्राणी खाते हैं। शाकाहारी प्राणियों को माँसाहारी प्राणी खाते हैं और इन दोनों को सर्वाहारी खाते हैं।

7. पौधों के सूखने और प्राणियों के मर जाने के बाद अपघटक जीव इन्हें फिर से अजैव रासायनिक तत्त्वों में बदल देते हैं अर्थात् इनका कुछ भाग गैसों के रूप में वायुमण्डल में जा मिलता है और अधिकांश भाग ह्यूमस तथा रसायनों के रूप में मिट्टी में मिल जाता है।

8. यही तत्त्व पौधों में पुनः उपयोग में आते हैं और यह जैव भू-रसायनिक चक्र अनवरत चलता रहता है। पिछले 100 करोड़ वर्षों में वायुमण्डल और जलवाष्प की संरचना में रासायनिक घटकों का सन्तुलन बिगड़ा नहीं है। रासायनिक तत्त्वों का यह सन्तुलन पौधों व प्राणी ऊतकों में होने वाले चक्रीय प्रवाह से बना हुआ है।

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HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भाग-I : सही विकल्प का चयन करें

1. कौन-सा देश भारतीय उपमहाद्वीप में शामिल नहीं है?
(A) पाकिस्तान
(B) अफगानिस्तान
(C) भूटान
(D) बांग्लादेश
उत्तर:
(B) अफगानिस्तान

2. सर्वप्रथम ‘इंडिया’ शब्द का प्रयोग भारत के लिए किस भाषा में किया गया था?
(A) उर्दू
(B) यूनानी
(C) अरबी
(D) फारसी
उत्तर:
(B) यूनानी

3. भारत का पूर्वी देशांतर है
(A) 97° 25’E
(B) 68° 7’E
(C) 77° 9’E
(D) 82° 32’E
उत्तर:
(B) 68° 7’E

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

4. उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल व सिक्किम राज्यों की सीमाएँ किस एक देश के साथ मिलती हैं?
(A) चीन
(B) भूटान
(C) नेपाल
(D) म्यांमार
उत्तर:
(C) नेपाल

5. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन-सा है?
(A) मध्य प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) आंध्र प्रदेश
(D) राजस्थान
उत्तर:
(D) राजस्थान

6. गर्मियों की छुट्टियों में यदि आप सिलवासा आए हुए हैं तो आप कहाँ पर अवस्थित हैं?
(A) बंगाल की खाड़ी के किसी द्वीप पर
(B) अरब सागर के किसी द्वीप पर
(C) गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर
(D) तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की सीमा पर
उत्तर:
(C) गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा पर

7. कर्क रेखा किस एक राज्य से नहीं गुज़रती?
(A) गुजरात
(B) राजस्थान
(C) ओडिशा
(D) त्रिपुरा
उत्तर:
(C) ओडिशा

8. निम्नांकित में से कौन-सा भारतीय राज्य म्यांमार देश की सीमा पर स्थित नहीं है?
(A) त्रिपुरा
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) नागालैंड
(D) मणिपुर
उत्तर:
(A) त्रिपुरा

9. रेटक्लिफ रेखा भारत के साथ किस देश की सीमा निर्धारित करती है?
(A) चीन
(B) पाकिस्तान
(C) भूटान
(D) बांग्लादेश
उत्तर:
(B) पाकिस्तान

10. कर्क रेखा भारत के कितने राज्यों से होकर गुज़रती है?
(A) 5
(B) 6
(C) 8
(D) 7
उत्तर:
(C) 8

11. भारत की स्थलीय सीमा कितनी लंबी है?
(A) 15,200 कि०मी०
(B) 20,015 कि०मी०
(C) 17,500 कि०मी०
(D) 7,516 कि०मी०
उत्तर:
(A) 15,200 कि०मी०

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

12. किस देश की भारत के साथ सबसे लंबी स्थल सीमा है?
(A) चीन
(B) म्यांमार
(C) पाकिस्तान
(D) बांग्लादेश
उत्तर:
(D) बांग्लादेश

13. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 82°30’E के संबंध में सही नहीं है?
(A) यह भारत की मानक देशांतर रेखा है
(B) इस रेखा का स्थानीय समय ग्रीनविच समय से 5.30 घंटे आगे है
(C) यह रेखा मिर्जापुर से गुज़रती है
(D) यह रेखा देश को दो बराबर भागों में बाँटती है
उत्तर:
(D) यह रेखा देश को दो बराबर भागों में बाँटती है

14. भारत के किस राज्य की तटरेखा सबसे लंबी है?
(A) गुजरात
(B) आंध्र प्रदेश
(C) तमिलनाडु
(D) कर्नाटक
उत्तर:
(A) गुजरात

15. संपूर्ण विश्व के क्षेत्रफल में भारत का हिस्सा है-
(A) 16%
(B) 2.4%
(C) 4.2%
(D) 1.6%
उत्तर:
(B) 2.4%

16. भारतीय तटरेखा की कुल लंबाई है
(A) 3,500 कि०मी०
(B) 7,516.6 कि०मी०
(C) 6,000 कि०मी०
(D) 9,500 कि०मी०
उत्तर:
(B) 7,516.6 कि०मी०

17. निम्नलिखित में से कौन-सा द्वीप मन्नार की खाड़ी में स्थित है?
(A) न्यूमूर
(B) एलिफेंटा
(C) लक्षद्वीप
(D) पांबन
उत्तर:
(D) पांबन

18. भारत का 30° का देशांतरीय विस्तार पृथ्वी की परिधि का कौन-सा भाग है?
(A) छठा
(B) बारहवाँ
(C) चौथा
(D) आठवाँ
उत्तर:
(B) बारहवाँ

भाग-II : एक शब्द या वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
सर्वप्रथम ‘इंडिया’ शब्द का प्रयोग भारत के लिए किस भाषा में किया गया था?
उत्तर:
यूनानी।

प्रश्न 2.
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
राजस्थान।

प्रश्न 3.
रेटक्लिफ रेखा भारत के साथ किस देश की सीमा निर्धारित करती है?
उत्तर:
पाकिस्तान की।

प्रश्न 4.
कर्क रेखा भारत के कितने राज्यों से होकर गुज़रती है?
उत्तर:
आठ।

प्रश्न 5.
भारत के किस राज्य की तटरेखा सबसे लंबी है?
उत्तर:
गुजरात की।

प्रश्न 6.
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का संसार के देशों में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
सातवाँ।

प्रश्न 7.
भारत के लगभग बीचों-बीच कौन-सी अक्षांश रेखा गुज़रती है?
उत्तर:
कर्क रेखा।

प्रश्न 8.
भारत के किस स्थान पर बंगाल की खाड़ी, अरब सागर तथा हिन्द महासागर मिलते हैं?
अथवा
भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिन्दु कौन-सा है?
उत्तर:
कन्याकुमारी।

प्रश्न 9.
‘संसार की छत’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
पामीर की गाँठ।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

प्रश्न 10.
भारत और श्रीलंका को कौन-सी जल-सन्धि अलग करती है?
उत्तर:
पाक जल-सन्धि।

प्रश्न 11.
मिज़ोरम राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
आइज़ोल।

प्रश्न 12.
मणिपुर राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
इम्फाल।

प्रश्न 13.
नागालैण्ड राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
कोहिमा।

प्रश्न 14.
कर्नाटक राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
बंगलुरु।

प्रश्न 15.
भारतीय यात्री कैलाश और मानसरोवर किन दरों से होकर जाते हैं?
उत्तर:
माना तथा नीति दरों से।

प्रश्न 16.
सिक्किम राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
गंगटोक।

प्रश्न 17.
त्रिपुरा राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
अगरतला।

प्रश्न 18.
मेघालय राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
शिलांग।

प्रश्न 19.
कर्क रेखा भारत को किन दो जलवायु प्रदेशों में बाँटती है?
उत्तर:

  1. उष्ण कटिबन्धीय
  2. उपोष्ण कटिबन्धीय।

प्रश्न 20.
भारत का प्रामाणिक समय किस देशान्तर से लिया जाता है? कौन-सी देशान्तर रेखा भारत के लगभग बीच से गुज़रती है?
अथवा
उत्तर:
82\(\frac { 1 }{ 2 }\)° पूर्वी देशान्तर।

प्रश्न 21.
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
इटानगर।

प्रश्न 22.
भारत का सबसे छोटा केन्द्र-शासित प्रदेश कौन-सा है?
उत्तर:
लक्षद्वीप।

प्रश्न 23.
गुजरात राज्य की राजधानी का नाम लिखें।
उत्तर:
गाँधीनगर।

प्रश्न 24.
भारत में कुल कितने राज्य व केन्द्र-शासित प्रदेश हैं?
उत्तर:
28 राज्य व 8 केन्द्र-शासित प्रदेश।

प्रश्न 25.
भारत का क्षेत्रफल बताइए।
उत्तर:
32,87,263 वर्ग कि०मी०।

प्रश्न 26.
भारत का क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल/स्थलीय धरातल का कितना प्रतिशत है?
उत्तर:
2.4 प्रतिशत।

प्रश्न 27.
भारत के किस राज्य में कर्क रेखा सर्वाधिक दूरी तय करती है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश से।

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प्रश्न 28.
कर्क रेखा पर स्थित दो भारतीय नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. गाँधीनगर
  2. जबलपुर।

प्रश्न 29.
82° पूर्वी देशान्तर पर स्थित प्रमुख नगर का नाम लिखें।
उत्तर:
इलाहाबाद।

प्रश्न 30.
तट पर स्थित भारत के केन्द्र-शासित प्रदेशों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. दमन
  2. पुदुच्चेरी।

प्रश्न 31.
भारत के दक्षिण में स्थित दो पड़ोसी देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. श्रीलंका
  2. मालदीव।

प्रश्न 32.
कौन-सा चैनल निकोबार द्वीप को अण्डमान द्वीप से अलग करता है?
उत्तर:
10° चैनल।

प्रश्न 33.
अण्डमान व निकोबार द्वीपों का निर्माण कैसे हुआ?
उत्तर:
जलमग्न पहाड़ियों के शिखरों के कारण।

प्रश्न 34.
प्रायद्वीप भारत का दक्षिणतम बिंदु कौन-सा है?
उत्तर:
कन्याकुमारी।

प्रश्न 35.
भारत का मानक समय ग्रीनविच मानक समय से कितना आगे है?
उत्तर:
5 : 30 मिनट आगे।

प्रश्न 36.
भारत की मुख्य भूमि की तटरेखा कितनी है?
उत्तर:
6,100 कि०मी०।

प्रश्न 37.
भारत का सबसे बड़ा पठारी राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश।

प्रश्न 38.
भारत की प्रामाणिक मध्याह रेखा क्या कहलाती है?
उत्तर:
80°30′ पूर्वी देशांतर।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय तथा देशान्तरीय विस्तार बताइए।
उत्तर:
भारत की मुख्य भूमि 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तथा 68°7′ पूर्वी देशान्तर से 97°25′ पूर्वी देशान्तर तक है।

प्रश्न 2.
भारत के दक्षिणतम बिन्दु का नाम और अक्षांश बताइए।
उत्तर:
इन्दिरा प्वाइंट, 6°45′ उत्तरी अक्षांश (ग्रेट निकोबार द्वीप)।

प्रश्न 3.
भारत के उत्तरी छोर से दक्षिण छोर तक तथा पूर्वी छोर से पश्चिमी छोर तक कितनी दूरी है?
अथवा
भारत की पूर्व से पश्चिम छोर के बीच की दूरी कितनी है?
उत्तर:
भारत उत्तर से दक्षिण तक 3,214 कि०मी० तथा पूर्व से पश्चिम तक 2,933 कि०मी० स्थित है। प्रश्न 4. भारत का कौन-सा स्थान व भाग इण्डोनेशिया के निकटतम है? उत्तर:स्थान-इन्दिरा प्वाइंट व भाग-ग्रेट निकोबार द्वीप।

प्रश्न 5.
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कौन-कौन से भारतीय द्वीप स्थित है?
उत्तर:
क्रमशः लक्षद्वीप तथा अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह।

प्रश्न 6.
बांग्लादेश की सीमा से लगने वाले पाँच भारतीय राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. पश्चिम बंगाल
  2. असम
  3. मेघालय
  4. त्रिपुरा
  5. मिज़ोरम।

प्रश्न 7.
इन्दिरा कॉल कहाँ हैं? यहाँ कौन-कौन से देश मिलते हैं?
उत्तर:
भारत के उत्तर में पामीर की गाँठ के पास, भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान तथा चीन।

प्रश्न 8.
भारत के उन चार राज्यों के नाम बताओ जो न तो समुद्र को छूते हैं और न ही अन्तर्राष्ट्रीय सीमा को।
उत्तर:

  1. हरियाणा
  2. मध्य प्रदेश
  3. छत्तीसगढ़
  4. झारखण्ड।

प्रश्न 9.
पाकिस्तान की सीमा से लगने वाले भारतीय राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. गुजरात
  2. राजस्थान
  3. पंजाब
  4. जम्मू और कश्मीर (अब जम्मू और कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश बन गया है)।

प्रश्न 10.
भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित सात राज्यों के नाम बताएँ।
अथवा
भारत के किन राज्यों को ‘सेवन सिस्टर्स’ कहा जाता है?
उत्तर:

  1. अरुणाचल प्रदेश
  2. असम
  3. नागालैण्ड
  4. मणिपुर
  5. मिज़ोरम
  6. त्रिपुरा
  7. मेघालय।

प्रश्न 11.
रेटक्लिफ व मैकमोहन रेखाएँ भारत की किन देशों के साथ सीमाएँ निर्धारित करती हैं?
उत्तर:
रेटक्लिफ रेखा-एक कत्रिम रेखा है जो भारत और पाकिस्तान के मध्य सीमा रेखा बनाती है। मैकमोहन रेखा-भारत व चीन के बीच प्राकृतिक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा का कार्य करती है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

प्रश्न 12.
भारत के पूर्व तथा पश्चिम में स्थित तीन-तीन देशों के नाम बताइए।
उत्तर:
पश्चिम में पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा ईरान। पूर्व में बांग्लादेश, म्याँमार तथा थाइलैण्ड।

प्रश्न 13.
नेपाल की सीमा के साथ लगने वाले भारतीय राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. उत्तर प्रदेश
  2. उत्तराखंड
  3. बिहार
  4. पश्चिम बंगाल
  5. सिक्किम।

प्रश्न 14.
भूटान की सीमा के साथ लगने वाले भारतीय राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. सिक्किम
  2. पश्चिम बंगाल
  3. असम
  4. अरुणाचल प्रदेश।

प्रश्न 15.
म्यांमार की सीमा के साथ लगने वाले भारतीय राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. अरुणाचल प्रदेश
  2. नागालैण्ड
  3. मणिपुर
  4. मिज़ोरम।

प्रश्न 16.
मैकमोहन रेखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
भूटान से पूर्व में भारत और चीन के बीच हिमालय की शिखर रेखा जो भारत-चीन-म्यांमार की त्रि-सन्धि तक विस्तृत है।

प्रश्न 17.
कर्क रेखा भारत के किन-किन राज्यों से होकर गुजरती है?
उत्तर:
कर्क रेखा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरती है।

प्रश्न 18.
भारत का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा और सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
सबसे बड़ा राज्य-उत्तर प्रदेश। सबसे छोटा राज्य-सिक्किम।

प्रश्न 19.
भारत का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा और सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
सबसे बड़ा राज्य-राजस्थान। सबसे छोटा राज्य-गोवा।

प्रश्न 20.
ग्रीनविच तथा भारतीय मानक समय के बीच 5% घंटों के अंतर का कारण बताइए।
उत्तर:
इलाहाबाद के निकट 82°30′ पू० देशांतर के स्थानीय समय को संपूर्ण भारत का मानक समय माना गया है। एक से दूसरे देशांतर के बीच 4 मिनट का अंतर होता है। इस प्रकार 82°30′ x 4 = 51/2 घंटे 30 मिनट का अंतर आएगा। यही कारण है कि भारत का मानक समय ग्रीनविच मानक समय से 5 घंटे आगे है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
“भारत भूगोल और इतिहास दोनों के सन्दर्भ में महान् है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत की सभ्यता और संस्कृति 5,000 वर्षों से भी अधिक पुरानी है। अपनी बहु-आयामी विशिष्टता के कारण भारत आदि काल से ही विश्व के लिए आकर्षण का केन्द्र बना रहा है। भौगोलिक रूप से भी यह एक विस्तृत और विशाल देश है जो उत्तर में हिमालय की गगनचुम्बी श्रेणियों व दक्षिण में हिन्द महासागर के बीच फैला हुआ है। यह विश्व के सबसे बड़े महाद्वीप एशिया के दक्षिण मध्य में स्थित है।

प्रश्न 2.
भारत की धरातलीय विविधता का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत-भूमि विविध प्रकार की है। इसके उत्तर में काँप की मिट्टी से बना विशाल उपजाऊ मैदान है व जीवनदायिनी नदियों के स्रोत, हिमाच्छादित लम्बी पर्वतीय शृंखलाएँ हैं। भारत के उत्तर:पश्चिम में थार का विशाल मरुस्थल है व दक्षिण में प्रायद्वीपीय भाग है, जो ऊबड़-खाबड़ पठारों से बना है। भारत के पूर्व में पूर्वी घाट व पूर्वी तटीय मैदान हैं तथा पश्चिम में पश्चिमी घाट व पश्चिमी तटीय मैदान हैं। ये तटीय मैदान नारियल व लैगून झीलों के लिए प्रसिद्ध हैं। मुख्य भूमि का लगभग 6,100 कि०मी० लम्बा समुद्री तट भारत की स्थिति को व्यापकता प्रदान करता है।

प्रश्न 3.
कर्क रेखा भारत के मध्य से गुज़रती है, इसके क्या प्रभाव हैं?
उत्तर:
कर्क रेखा भारत के मध्य से गुज़रती है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं-
1. दो विभिन्न जलवायु कटिबंध-कर्क रेखा के भारत के मध्य से गुज़रने के कारण देश दो जलवायु कटिबंधों में बँटा हुआ है। इसका उत्तरी भाग समशीतोष्ण कटिबंध में और दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में स्थित है। यही कारण है कि इसका दक्षिणी भाग . उत्तरी भागों की अपेक्षा अधिक गर्म है।

2. दक्षिणी भारत में सूर्य की लंबवत् किरणें-उत्तरी भारत में किसी भी स्थान पर सूर्य की किरणें लंबवत् नहीं पड़तीं, जबकि दक्षिणी भारत के सभी स्थानों पर वर्ष में दो बार सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं।
भारत-स्थिति

प्रश्न 4.
क्या कारण है कि कन्याकुमारी में दिन और रात के समय में अंतर पता नहीं चलता, परंतु कश्मीर में ऐसा – नहीं है?
उत्तर:
कन्याकुमारी भारत के दक्षिण में स्थित होने के कारण भूमध्य रेखा के बहुत निकट है और कश्मीर भारत के उत्तर में के कारण भूमध्य रेखा से बहुत दूर पड़ता है। क्योंकि भूमध्य रेखा पर दिन और रात लगभग बराबर होते हैं, इसलिए, जो स्थान भूमध्य रेखा के निकट होंगे जैसे कि कन्याकुमारी है, वहाँ दिन और रात के समय का इतना अंतर नहीं होगा। जैसे-जैसे हम भूमध्य रेखा से दूर चलते जाएँगे, वैसे-वैसे दिन और रात के समय में भी अंतर बढ़ता जाएगा। इसी कारण कश्मीर में, जो भूमध्य रेखा से अपेक्षाकृत काफी दूर है, दिन और रात के समय में काफी अंतर पड़ जाएगा।

प्रश्न 5.
भारतीय उप-महाद्वीप से क्या अभिप्राय है? यह किन देशों से मिलकर बना है?
उत्तर:
भारतीय उप-महाद्वीप एशिया में स्थित होते हुए भी एक अलग भौगोलिक इकाई दिखाई देता है। इस उप-महाद्वीप में कई देश सम्मिलित हैं। इसके उत्तर:पश्चिम में पाकिस्तान, केंद्र में भारत, उत्तर में नेपाल, उत्तर:पूर्व में भूटान तथा पूर्व में बांग्लादेश हैं। भारत के दक्षिण में श्रीलंका और मालदीव हिंद महासागर में स्थित हैं। ये दोनों द्वीपीय राष्ट्र हैं। नेपाल में प्रजातंत्र तथा भूटान में राजतंत्र शासन है। शेष सभी देश गणतंत्र हैं।

प्रश्न 6.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग की दृष्टि से भारत की स्थिति बहुत ही महत्त्वपूर्ण है-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत की स्थिति अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग के संदर्भ में बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। अपनी विशेष भौगोलिक स्थिति के कारण भारत एक ओर से स्वेज़ नहर द्वारा यूरोप के देशों से जुड़ा हुआ है और दूसरी ओर से जापान आदि पूर्वी देशों व ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त भारत की स्थिति खाड़ी तथा अरब देशों के संदर्भ में भी बड़ी महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 7.
“भारत न तो भीमकाय है और न ही बौना।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। क्षेत्रफल के आधार पर विश्व के देशों में भारत की स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत का क्षेत्रफल विश्व के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में सातवें स्थान पर है। क्षेत्रफल में भारत से बड़े छः देश क्रमशः रूस, चीन, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राज़ील तथा ऑस्ट्रेलिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से पौने तीन गुना व रूस भारत से साढ़े पाँच गुना बड़ा है। भारत पाकिस्तान से चार गुना, फ्रांस से छह गुना, जर्मनी से नौ गुना व बांग्लादेश से 23 गुना बड़ा है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि “भारत का आकार न तो भीमकाय है और न ही बौना।”

प्रश्न 8.
उन दो भौतिक लक्षणों के नाम बताइए जिन्होंने भारत के एक विशिष्ट भौगोलिक स्वरूप के विकास में सहयोग दिया है।
उत्तर:
निम्नलिखित दो भौतिक लक्षणों ने भारत के विशिष्ट भौगोलिक स्वरूप के विकास में काफी सफल भूमिका निभाई है।
1. उत्तर में हिमालय पर्वत एक अटूट श्रृंखला के रूप में हज़ारों कि०मी० तक फैला हुआ है। विश्व का यह उच्चतम पर्वत भारत को मध्य एशिया से अलग किए हुए है। अपारगम्यता के कारण हिमालय को पार करना कठिन है। इस विशिष्टता ने भारत के जन समूह के एकीकरण की भूमिका निभाई।

2. हिन्द महासागर ने जहाँ देश को एक तरफ विलगता प्रदान की वहाँ उसने पूर्व व पश्चिम के सुदूर स्थित देशों को भारत के साथ जोड़ने का प्रयास किया। इस प्रकार जलीय विस्तार ने अलगाव को भी बढ़ावा दिया तथा सम्पर्कों द्वारा सभ्यता को भी उन्नत किया। इससे भारतीय सभ्यता में एक विशिष्ट एकरूपता विकसित हुई।

प्रश्न 9.
भारत का अक्षांशीय विस्तार बताइए। इसके प्रभाव को समझाइए।
उत्तर:
भारत लगभग 8°4′ उत्तरी अक्षांश तथा 37°6′ उत्तरी अक्षांश के मध्य स्थित है। भारत विषुवत् वृत्त के उत्तर में स्थित होने के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में आता है। प्रधान मध्याह्न रेखा के पूर्व में स्थित होने के कारण भारत की गणना पूर्वी गोलार्द्ध में होती है। वास्तव में भारत का विस्तार एशिया महाद्वीप के दक्षिणी मध्य प्रायद्वीप में है। अपनी इस स्थिति के कारण प्राचीनकाल में भारत ने पश्चिम में अरब देशों से तथा दक्षिण-पूर्व एशिया एवं सुदूर-पूर्व के साथ सांस्कृतिक तथा अन्य प्रकार के संबंध स्थापित कर रखे थे।

प्रश्न 10.
मैकमोहन रेखा किसे कहते हैं? इसका क्या महत्त्व है? इसका निर्धारण कैसे हुआ है?
उत्तर:
भारत और चीन के मध्य सीमा-मान्य रेखा को मैकमोहन रेखा कहते हैं। यह हिमालय के साथ-साथ कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक मान्य है। इस रेखा के उत्तर में चीन के सिक्यांग और तिब्बत के पठार स्थित हैं। इसके उत्तर:पूर्व में म्यांमार, भारत तथा चीन आपस में मिलते हैं। यह सीमा-रेखा मुख्यतः प्राकृतिक है और ऐतिहासिक रूप से निर्धारित की हुई है। हिमालय पर्वत भारतीय उत्तरी सीमा पर एक प्रहरी के रूप में स्थित है। उच्च हिमालय के शिखर जल विभाजक के रूप में फैले हुए हैं जो भारत और चीन को अलग करते हुए सीमारेखा को प्राकृतिक रूप प्रदान करते हैं।

प्रश्न 11.
भारत के अधिक देशान्तरीय विस्तार की भौगोलिक विशेषता का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है इसलिए पृथ्वी के पूर्वी भाग पश्चिमी भागों की अपेक्षा सूर्य के समक्ष पहले आते हैं। अरुणाचल प्रदेश सौराष्ट्र के पूर्व में है, इसलिए वहाँ सूर्योदय पहले होगा। सौराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में 30 देशान्तरों का अन्तर होने के कारण इनके स्थानीय समय में दो घण्टे का अन्तर होता है क्योंकि सूर्य के समक्ष पृथ्वी एक देशान्तर को 4 मिनट में पार करती है (30 x 4 = 120 मिनट)। अतः जब अरुणाचल प्रदेश में सूर्योदय हो चुका होता है तो सौराष्ट्र में रात बाकी होती है। समय के इस भ्रम को 82°30′ पूर्वी देशान्तर के स्थानीय समय को प्रामाणिक समय घोषित करके दूर किया जाता है।

प्रश्न 12.
भारत के कौन-से राज्य किस देश के साथ लगते हैं?
उत्तर:

देशसीमा पर अवस्थित भारतीय राज्य
1. पाकिस्तान1. गुजरात, 2. राजस्थान, 3. पंजाब।
2. चीन1. हिमाचल प्रदेश, 2. सिक्किम, 3. अरुणाचल प्रदेश, 4 उत्तराखंड।
3. नेपाल1. उत्तर प्रदेश, 2. उत्तराखंड, 3. बिहार, 4. पश्चिम बंगाल, 5. सिक्किम।
4. भूटान1. सिक्किम, 2. पश्चिम बंगाल, 3. असम, 4. अरुणाचल प्रदेश।
5. बांग्लादेश1. पश्चिम बंगाल, 2. असम, 3. मेघालय, 4. त्रिपुरा।
6. म्यांमार1. अरुणाचल प्रदेश, 2. नागालैण्ड, 3. मणिपुर, 4. मिज़ोरम।
नोट-वर्तमान में जम्मू कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश बन गया है।

प्रश्न 13.
“हिन्द महासागर वास्तव में हिन्द का सागर है।” व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत के तट को स्पर्श करने वाले समुद्रों के विस्तार ने भारत के साथ निकटस्थ प्रदेशों के परस्पर सम्बन्ध की प्रकृति निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिन्द महासागर के शीर्ष पर स्थित होने के कारण, भारत यूरोप, अफ्रीका तथा पूर्वी एशिया के व्यापारिक मार्गों से जुड़ा है। प्राचीनकाल में इसी सागर की लहरों पर बेबीलोन, मिस्र तथा फोनेशिया की नौकाएँ यात्रा करती थीं।

अरबों का समुद्री व्यापार भी इसी सागर के माध्यम से होता था। भारतीय नौकाएँ लगभग 4,000 वर्षों तक दजला, फरात एवं नील नदी की घाटियों को अपना माल पहुँचाया करती थीं। स्वेज नहर के खुलने से भूमध्य सागर को हिन्द महासागर से जोड़ दिया गया है और इस प्रकार दक्षिणी यूरोप एवं उत्तरी अफ्रीका भी हिन्द महासागर के प्रभाव क्षेत्र में आ गए हैं।

हिन्द महासागर में भारत की स्थिति बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। हमारे देश के अतिरिक्त संसार के किसी भी अन्य देश की इतनी लम्बी तट-रेखा इस समुद्र के साथ नहीं है। भारत का दक्कन प्रायद्वीप हिन्द महासागर की ओर इस प्रकार प्रक्षेपित है कि इस देश के लिए अपने पश्चिमी तट से पश्चिमी एशिया, अफ्रीका तथा यूरोप तथा पूर्वी तट से दक्षिणी-पूर्वी एशिया तथा सुदूर पूर्व की ओर एक साथ देखना सम्भव है।

प्रश्न 14.
सूर्योदय अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में गुजरात के पश्चिमी भाग की अपेक्षा 2 घंटे पहले क्यों होता है, जबकि दोनों राज्यों में घड़ी एक ही समय दर्शाती है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अरुणाचल प्रदेश 97° 25′ पूर्वी देशांतर पर स्थित है, जबकि भारत के सबसे पश्चिमी छोर जोकि गुजरात में है। वह 68° 7′ पूर्वी देशांतर पर स्थित है। अतः अरुणाचल प्रदेश और गुजरात के देशांतरों में (97° 25′- 68°7′ = 29° 18′) लगभग 30° का अंतर है और देशांतर में 1° का अंतर होने से 4 मिनट के समय का अंतर आ जाता है। इसलिए गुजरात और अरुणाचल प्रदेश में भी सूर्योदय के समय में 30 x 4 = 120 मिनट अर्थात 2 घंटे का अंतर है। लेकिन पूरे भारत वर्ष में एक ही भारतीय मानक समय स्वीकार किया गया है।

प्रश्न 15.
“भारत को हिन्द महासागर में सर्वाधिक केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है।” यह कथन कहाँ तक उचित है?
उत्तर:
हिन्द महासागर का विस्तार 40° पूर्व से 120° पूर्व देशान्तर तक है। भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम सिरा (केरल और तमिलनाडु) लगभग 76° से 80° पूर्वी देशान्तर के बीच स्थित है। इस प्रकार भारत को हिन्द महासागर में केन्द्रीय स्थिति प्राप्त है। भारतीय प्रायद्वीप अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बीच स्थित है। हिन्द महासागर में किसी भी देश की तट-रेखा भारतीय तट-रेखा जितनी लम्बी नहीं है। भारत पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में स्थित देशों के मध्य में स्थित है। इसी केन्द्रीय स्थिति के कारण ही हिन्द महासागर वास्तव में ‘हिन्द का महासागर’ है।

प्रश्न 16.
भारत के पड़ोसी देशों के बीच सीमा विस्तार को सूचीबद्ध करें।
उत्तर:

  • भारत-बांग्लादेश सीमा – 4,096 कि०मी०
  • भारत-चीन सीमा – 3,439 कि०मी०
  • भारत-नेपाल सीमा – 1,761 कि०मी०
  • भारत-पाक सीमा – 3,310 कि०मी०
  • भारत-म्यांमार सीमा – 1,643 कि०मी०
  • भारत-भूटान सीमा – 587 कि०मी०
  • भारत-अफगानिस्तान सीमा – 106 कि०मी०

प्रश्न 17.
भारत के लिए हमें एक मानक मध्याहून रेखा की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
विशाल देशांतरीय विस्तार के कारण भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी सुदूर बिंदुओं के स्थानीय समय में दो घंटों का अंतर है। उदाहरण के लिए जब अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में सूर्योदय होता है, तो उस समय गुजरात के पश्चिमी भाग में रात रहती है। इसका तात्पर्य यह है कि हर स्थान का अपना अलग-अलग स्थानीय समय होता है। किंतु हम इस स्थानीय समय को, जो भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है, स्वीकार नहीं कर सकते, क्योंकि ऐसा करने से परेशानी पैदा होगी तथा चारों ओर अव्यवस्था फैल जाएगी और दुर्घटनाएँ होंगी। इन सभी परिस्थितियों से बचने के लिए सारे देश के लिए एक सामान्य समय स्वीकार कर लिया जाता है, जो उस देश का मानक समय (Standard Time) कहलाता है।

हमारे देश में 82°30′ पूर्वी देशांतर को मानक रेखा स्वीकार किया गया है। इलाहाबाद के निकट से गजरने वाली इस मध्याहन रेखा का समय ही भारत का मानक समय (I.S.T.) है, जो ग्रीनविच समय से 5 1/2 घंटे आगे है। हमने 82°30′ पूर्वी देशांतर को भारत की प्रधान मध्याहून रेखा इसलिए स्वीकार किया है, क्योंकि यह रेखा भारत के लगभग बीचो-बीच से होकर गुज़रती है। भारतीय मानक समय के कारण सारे देश में समय की एकरूपता प्राप्त की जा सकी है।

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के आकार, स्थिति तथा विस्तार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आकार और स्थिति क्षेत्रफल की दृष्टि से यह विश्व का सातवाँ तथा जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद दूसरा बड़ा देश है। भारत की मुख्य भूमि 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक तथा 68°7′ पूर्वी देशान्तर से 97°25′ पूर्वी देशान्तर तक विस्तृत है। बंगाल की खाड़ी में स्थित मुख्य भूमि से दूर अण्डमान व निकोबार द्वीप-समूह का दक्षिणतम बिन्दु इन्दिरा प्वाइण्ट (Indira Point), जिसे पहले पिग्मेलियन प्वाइण्ट कहा जाता था, 6°45′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित है।

उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में कन्याकुमारी तक भारत की लम्बाई 3,214 कि०मी० है। भारत का अक्षांशीय विस्तार लगभग 30° है जो भू-मध्य रेखा और उत्तरी ध्रुव के बीच कोणीय दूरी का एक तिहाई है। कच्छ के रन से अरुणाचल प्रदेश तक पूर्व-पश्चिम दिशा में भारत की चौड़ाई 2,933 कि०मी० है। भारत का देशान्तरीय विस्तार लगभग 30° है जो पृथ्वी की परिधि का बारहवाँ भाग है। यह देशान्तरीय विस्तार स्पेन, फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैण्ड्स, जर्मनी व पोलैण्ड के सम्मिलित देशान्तरीय विस्तार के समान है। कर्क रेखा (Tropic of Cancer) हमारे देश के लगभग मध्य से गुजरती है।

विस्तार-भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि० मी० है जो विश्व के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में सातवें स्थान पर है। क्षेत्रफल में भारत से बड़े छः देश क्रमशः रूस (170.75 लाख वर्ग कि०मी०), चीन (95.97 लाख वर्ग कि० मी०), कनाडा (92.15 लाख वर्ग कि० मी०), संयुक्त राज्य अमेरिका (90.72 लाख वर्ग कि०मी०), ब्राजील (85.12 लाख वर्ग कि० मी०) तथा ऑस्ट्रेलिया (76.82 लाख वर्ग कि०मी०) है। संयुक्त राज्य अमेरिका भारत से पौने तीन गुना व रूस भारत से साढ़े पाँच गुना बड़ा है। भारत पाकिस्तान से चार गुना, फ्रांस से छः गुना, जर्मनी से नौ गुना व बांग्लादेश से 23 गुना बड़ा है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि “भारत का आकार न तो भीमकाय है और न ही बौना।”

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 1 भारत-स्थिति

प्रश्न 2.
भारत की भौगोलिक स्थिति की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। अथवा भारत की भौगोलिक स्थिति का क्या महत्त्व है? वर्णन करें।
उत्तर:
भारत की भौगोलिक स्थिति की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. केन्द्रीय स्थिति-भारत की मुख्य भूमि 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक तथा 68°7′ पूर्वी देशान्तर से 97°25′ पूर्वी देशान्तर तक विस्तृत है। इस प्रकार भारत उत्तरी गोलार्द्ध में होने के साथ-साथ पूर्वी गोलार्द्ध के बीचो-बीच स्थित है। परिणामस्वरूप भारत एक ओर यूरोप से व दूसरी ओर उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट से लगभग बराबर दूरी पर स्थित है।

2. अन्तर्राष्ट्रीय महामार्गों पर स्थित अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से भी भारत की स्थिति अत्यन्त लाभदायक है। अनेक समुद्री व्यापारिक महामार्ग एवं वायुमार्ग भारत से होकर जाते हैं।

3. कर्क रेखा का देश के बीच से गुज़रना-देश के दक्षिणी सिरे से भूमध्य रेखा की निकटता तथा कर्क रेखा (23%° उ०) का देश के बीच से गुज़रना भारत के लिए सारा साल उष्ण व उपोष्ण प्रकार की जलवायुवी दशाएँ पैदा करते हैं। इन दशाओं में पूरे वर्ष खेती की जा सकती है। अपनी इसी स्थिति के कारण ही भारत आज एक कृषि प्रधान देश बना हुआ है।

4. लम्बी तट रेखा भारत की मुख्य भूमि की तट-रेखा 6,100 कि०मी० तथा द्वीपों सहित देश की तट-रेखा 7,516 कि०मी० लम्बी है। समुद्र के इस लम्बे विस्तार ने निकटस्थ प्रदेशों के परस्पर सम्बन्धों की प्रकृति निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लम्बी तट-रेखा के कारण भारत को अनेक बन्दरगाहों की सुविधा उपलब्ध है जिससे हमारे अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को बल मिलता है।

5. देश की सुरक्षा-उत्तर में हिमालय पर्वत तथा दक्षिण में हिन्द महासागर ने प्राकृतिक सीमा बनकर युगों से देश की बाहरी तत्त्वों से सुरक्षा की है।

6. मानसूनी जलवायु-हिन्द महासागर के सिरे पर भारत की स्थिति के कारण ही भारत को ग्रीष्म ऋतु में मानसूनी वर्षा प्राप्त होती है जो इस देश के करोड़ों लोगों की आजीविका के साधन-कृषि का आधार है।

इस प्रकार भारत की भौगोलिक स्थिति ने भारत में आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक विकास में अनेक प्रकार से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रश्न 3.
भारत को किन आधारों पर एक उप-महाद्वीप का दर्जा दिया गया है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एक उप-महाद्वीप विशाल भौगोलिक इकाई होती है जो शेष महाद्वीप से भिन्न पहचान रखती है। यूरोपीय विद्वान् डॉ० क्रेसी ने भारत के विस्तार इसकी भौतिक, मानवीय व सांस्कृतिक विभिन्नताओं, विशाल जनसंख्या, हिमालय की लम्बी एवं बर्फीली श्रेणियों द्वारा स्थापित किया गया पृथक्, अस्तित्व, अनेक प्रकार की जलवायु के कारण इसे उप-महाद्वीप की संज्ञा दी है। .. इन आधारों की व्याख्या इस प्रकार है-
1. बड़ा क्षेत्रफल-भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि०मी० है जो विश्व के क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है। क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व में सातवें स्थान पर है। रूस भारत में साढ़े पाँच गुना बड़ा है जबकि भारत पाकिस्तान से चार गुना, फ्रांस से छः गुना, जर्मनी से नौ गुना व बांग्लादेश से 23 गुना बड़ा है।

2. धरातलीय विभिन्नता-भारत-भूमि विविध प्रकार की है। इसके उत्तर में विशाल उपजाऊ मैदान व जीवनदायिनी नदियों के स्रोत हिमाच्छादित लम्बी पर्वत शृंखलाएँ हैं। भारत के उत्तर-पश्चिम में थार का मरुस्थल तथा दक्षिण में ऊबड़-खाबड़ पठारों से बना विशाल प्रायद्वीपीय भाग है। भारत के लम्बे और विस्तृत तट एवं घाट तथा नदियाँ और झीलें इसकी भौगोलिक विविधता को और अधिक प्रखर करती हैं।

3. विशाल जनसंख्या और उसकी विविधता-लगभग 121.01 करोड़ जनसंख्या (2011) के साथ भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की जनसंख्या की नृ-जातीय तथा सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताओं में भी पर्याप्त विविधता पाई जाती है। अनेक जाति-वर्ग, भाषायी व धार्मिक समूह इस देश की विशालता और विविधता को उजागर करते हैं।

4. जलवायु की विविधता-भारत में दुनिया की हर प्रकार की जलवायु पाई जाती है। जलवायु की यह विविधता प्रादेशिक स्तर पर तापमान, वायुदाब, वर्षा की मात्रा, शुष्कता और आर्द्रता में भिन्नता के रूप में देखी जा सकती है। ब्लैंफोर्ड ने सत्य कहा था कि “हम भारत की जलवायुओं के बारे में कह सकते हैं, जलवायु के विषय में नहीं क्योंकि स्वयं विश्व में जलवायु की इतनी विषमताएँ नहीं मिलती जितनी अकेले भारत में।”

5. प्राकृतिक सीमाएँ-भारत उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में हिन्द महासागर के बीच फैला हुआ है। हिमालय भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल व भूटान को भी शेष एशिया से अलग करके उन्हें एक अनूठी भौगोलिक विशिष्टता प्रदान करता है। समुद्री मार्गों के कारण भारत ने अन्य देशों के सामाजिक-सांस्कृतिक गुणों को आत्मसात् किया। इन समुद्रों से अलगाव ही बनाए रखा जिससे भारत अपनी भौगोलिक विशिष्टता को बचाए रख सका।

6. परिबद्ध चरित्र-भारत चारों ओर से विशाल तथा कई मध्यम पर्वतों द्वारा घिरा हुआ है। इन पर्वतों ने हज़ारों कि०मी० की दूरी तक अखण्ड रूप से घेर कर भारत को परिबद्ध (Enclosed) चरित्र प्रदान किया है। इस पर्वतीय धेरे ने भारत को एशिया के अन्य भागों से व्यावहारिक रूप से अलग कर दिया है।

7. प्रचुर एवं विविध प्राकृतिक संसाधन-भू-गर्भिक, धरातलीय एवं जलवायविक विविधता ने भारत को नाना प्रकार के प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न किया है। यहाँ के खनिजों, मृदा, जल, वनस्पति, जीव-जन्तुओं की विविधता के साथ-साथ मानवीय संसाधनों ने देश के आर्थिक विकास के आधार को मज़बूत किया है। संसाधनों की इतनी अधिक विविधता एवं सम्पन्नता अन्यत्र कहीं देखने को नहीं मिलती।

उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर प्रमाणित होता है कि भारत सही अर्थों में एक उप-महाद्वीप की हैसियत रखता है। इस उप-महाद्वीप में भारत के अतिरिक्त पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश तथा श्रीलंका देश भी शामिल हैं।

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HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

Haryana State Board HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class History Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

निबंधात्मक उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव प्राणियों की उत्पत्ति के संबंध में आप क्या जानते हैं?
अथवा
मानव प्राणियों की उत्पत्ति के संबंध में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
उत्तर:
मानव प्राणियों की उत्पत्ति कब और कैसे हुई यह एक लंबी एवं जटिल कहानी है। इस संबंध में अनेक उत्तर अभी भी खोजे जाने वाले बाकी हैं। नवीनतम खोजों के आधार पर मानव विकास के अनेक घटनाक्रमों को परिवर्तित करना पड़ा है। मानव विकास अनेक चरणों में हुआ है। निम्नलिखित चरण मानव के विकास पर महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं

1. प्राइमेट:
प्राइमेट स्तनपायी (mammals) प्राणियों के एक विशाल समूह के अधीन एक उपसमूह (subgroup) है। इस उपसमूह में बंदर (monkeys), पूँछहीन बंदर (apes) एवं मानव (humans) सम्मिलित थे। उनके जिस्म पर बाल होते थे। उनका बच्चा जन्म लेने से पहले अपेक्षाकृत काफी समय तक माता के गर्भ में पलता था। उनकी माताओं के बच्चों को दूध पिलाने के लिए स्तन होते थे। इन प्राइमेट प्राणियों के दाँत विभिन्न प्रकार के होते थे। ऐसे प्राणी 360 से 240 लाख वर्ष पूर्व अफ्रीका एवं एशिया में पाए जाते थे।

2. होमिनॉइड:
होमिनॉइड समूह 240 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया था। यह प्राइमेट श्रेणी का एक उपसमूह था। इसमें पूँछहीन बंदर सम्मिलित थे। इनका मस्तिष्क छोटा होता था। अतः उनमें सोचने की शक्ति कम थी। उनके चार पैर थे। वे चलते समय चारों पैरों का प्रयोग करते थे। उनके शरीर का अगला हिस्सा और दोनों पैर लचकदार होते थे। वे सीधे खड़े होकर चल नहीं सकते थे। होमिनॉइड बंदरों से कई प्रकार से भिन्न होते थे। उनका शरीर बंदरों से बड़ा होता था। उनकी पूँछ भी नहीं होती थी। उनके बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता था।

3. होमिनिड:
होमिनिड 56 लाख वर्ष पूर्व होमिनॉइड उपसमूह से विकसित हुए। इनके प्राचीनतम जीवाश्म हमें लेतोली (Laetoli) तंजानिया से एवं हादार (Hadar) इथियोपिया से प्राप्त हुए हैं। दो प्रकार के साक्ष्यों से पता चलता है कि होमिनिडों का उद्भव अफ्रीका में हुआ था। प्रथम, अफ्रीकी वानरों के समूह का होमिनिडों के साथ बहुत गहरा संबंध है। दूसरा, होमिनिडों के सबसे प्राचीन जीवाश्म (fossils) पूर्वी अफ्रीका में पाए गए हैं।

ये 56 लाख वर्ष पुराने हैं। अफ्रीका से बाहर जो जीवाश्म पाए गए हैं वे 18 लाख वर्ष से पुराने नहीं हैं। होमिनिड, होमिनिडेइ (Hominidae) नामक परिवार के साथ संबंधित हैं। इस परिवार में सभी रूपों के मानव प्राणी (human beings) सम्मिलित हैं। इस समूह की प्रमुख विशेषताएँ ये हैं-

    • इनके मस्तिष्क का आकार बड़ा होता था।
    • वे सीधे खड़े हो सकते थे।
    • वे दो पैरों के बल चल सकते थे।
    • उनके हाथ विशेष प्रकार के होते थे।

वे इन हाथों की सहायता से औज़ार (tools) बना सकते थे और उनका प्रयोग कर सकते थे। होमिनिड आगे अनेक शाखाओं में विभाजित थे। इन्हें जीनस (genus) कहा जाता है। इन शाखाओं में आस्ट्रेलोपिथिकस और होमो सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। इनका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है …

(क) आस्ट्रेलोपिथिकस:
आस्ट्रेलोपिथिकस के जीवाश्म 56 लाख वर्ष पुराने थे। जीवाश्म हमें तंजानिया के ओल्डवई गोर्ज (Olduvai Gorge) से प्राप्त हए हैं। होमो की तुलना में उनके मस्तिष्क का आकार छोटा था। उनके जबड़े अधिक भारी थे एवं दाँत भी ज्यादा. बड़े होते थे। आस्ट्रेलोपिथिकस बंदरों की अपेक्षा अधिक समझदार थे। वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे।

उनमें सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता अधिक नहीं थी। इसका कारण यह था कि वे अभी अपना काफ़ी समय पेड़ों पर गुजारते थे। वे अपनी सुरक्षा के लिए औज़ारों का निर्माण करने लगे थे।

(ख) होमो :
होमो 25 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। होमो लातीनी भाषा का एक शब्द है। इसका भाव है आदमी। इसमें पुरुष एवं स्त्रियाँ दोनों सम्मिलित थे। आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क बड़ा था, जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए थे एवं दाँत छोटे थे। वैज्ञानिकों ने होमो को निम्नलिखित तीन प्रमुख प्रजातियों में उनकी विशेषताओं के आधार पर बाँटा है–

1) होमो हैबिलिस :
होमो हैबिलिस औजार बनाने वाले के नाम से जाने जाते हैं । उनका मस्तिष्क बड़ा था। वे आस्ट्रेलोपिथिकस की अपेक्षा अधिक समझदार थे। वे अपने हाथों का दक्षतापूर्वक प्रयोग कर सकते थे। वे प्रथम होमिनिड थे जिन्होंने पत्थर के औजार बनाए।

2) होमो एरेक्टस :
होमो एरेक्टस वे मानव थे जो सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलना जानते थे। वे दौड़ सकते थे। वे अपने हाथों का स्वतंत्रतापूर्वक उपयोग कर सकते थे। उन्होंने होमो हैबिलिस की अपेक्षा अधिक विकसित औजारों का निर्माण किया। उन्होंने भाषा का भी अधिक विकास कर लिया था। उन्होंने आग के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर ली थी। इससे उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

3) होमो सैपियंस :
होमो सैपियंस से अभिप्राय है समझदार मानव। उसे आधुनिक मानव के नाम से भी जाना जाता है। इस मानव का प्रादुर्भाव 1.95 लाख वर्ष पूर्व से 1.60 लाख वर्ष के दौरान हुआ। आधुनिक मानव की अनेक ऐसी विशेषताएँ थीं, जो उसे पहले के मानव से अलग करती हैं। उस मानव का मस्तिष्क अब तक के सभी मानवों में सबसे बड़ा था।

अत: वह सबसे समझदार था। इस कारण उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हए उसने गुफ़ाओं के अतिरिक्त अपने निवास के लिए झोपड़ियों का निर्माण आरंभ कर दिया था। वह अब एक स्थायी रूप से निवास करने लगा था। उसने अब कृषि करनी आरंभ कर दी थी।
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 iMG 1

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 2.
होमो से आपका क्या अभिप्राय है? होमो हैबिलिस, होमो एरेक्टस तथा होमो सैपियंस के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
होमो से अभिप्राय (Meaning of Homo) होमो 25 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। होमो लातीनी (Latin) भाषा का एक शब्द है। इसका भाव है आदमी। इसमें पुरुष एवं स्त्रियाँ दोनों सम्मिलित थे। आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क बड़ा था, जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए थे एवं दाँत छोटे थे। वैज्ञानिकों ने होमो को अनेक प्रजातियों (species) में उनकी विशेषताओं के आधार पर बाँटा है। इनमें से प्रमुख प्रजातियों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार है

1. होमो हैबिलिस :
होमो हैबिलिस औज़ार बनाने वाले (the tool makers) के नाम से जाने जाते हैं। उनके प्राचीनतम जीवाश्म 22 लाख वर्ष पूर्व से 18 लाख वर्ष पूर्व तक हैं। ये जीवाश्म हमें इथियोपिया में ओमो (Omo) एवं तंज़ानिया में ओल्डुवई गोर्ज (Olduvai Gorge) से प्राप्त हुए हैं। उनका मस्तिष्क बड़ा था। वे आस्ट्रेलोपिथिकस की अपेक्षा अधिक समझदार थे। वे अपने हाथों का दक्षता पूर्वक प्रयोग कर सकते थे।

वे प्रथम होमिनिड थे जिन्होंने पत्थर के औज़ार बनाए। ये औज़ार उनके लिए शिकार के लिए बहुत उपयोगी प्रमाणित हुए। शिकार करते समय उन्हें आपसी सहयोग की आवश्यकता होती थी। इससे भाषा का विकास संभव हुआ। प्रसिद्ध इतिहासकार एडवर्ड मैक्नल बर्नस के अनुसार, “होमो हैबिलिस को स्पष्ट रूप से मानव जाति का मुखिया कहना उचित है।”

2. होमो एरेक्टस:
होमो एरेक्टस वे मानव थे जो सीधे खडे होकर पैरों के बल चलना जानते थे। वे दौड़ सकते थे। वे अपने हाथों का स्वतंत्रतापूर्वक उपयोग कर सकते थे। होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म 18 लाख वर्ष पूर्व के हैं। ये जीवाश्म हमें अफ्रीका एवं एशिया दोनों महाद्वीपों से प्राप्त हुए हैं। इसके प्रसिद्ध केंद्र कूबी फ़ोरा (Koobi Fora), पश्चिमी तुर्काना (West Turkana), केन्या (Kenya), मोड़ जोकर्तो (Mod Jokerto), संगीरन (Sangiran) एवं जावा (Java) थे। अफ्रीका में पाए गए जीवाश्म एशिया में पाए गए जीवाश्मों की तुलना में अधिक प्राचीनकाल के हैं।

अत: संभव है कि होमो एरेक्टस पूर्वी अफ्रीका से चल कर दक्षिणी एवं उत्तरी अफ्रीका, दक्षिणी एवं पूर्वोत्तर एशिया एवं संभवतः यूरोप में गए। होमो एरेक्टस का मस्तिष्क होमो हैबिलिस की अपेक्षा अधिक बड़ा था। अत: वे अधिक समझदार थे। उन्होंने होमो हैबिलिस की अपेक्षा अधिक विकसित औज़ारों का निर्माण किया। उन्होंने भाषा का भी अधिक विकास कर लिया था।

उन्होंने आग के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर ली थी। इससे उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। आग के संबंध में हमें प्रथम साक्ष्य केन्या के चेसोवांजा (Chesowanja) से प्राप्त हुआ है। निस्संदेह होमो एरेक्टस मानव विकास की कड़ी में एक मील पत्थर सिद्ध हुए। उनका लोप 2 लाख वर्ष पूर्व हुआ।

3. होमो सैपियंस :
होमो सैपियंस से अभिप्राय है समझदार मानव (the wise man)। मानव (modern humans) के नाम से भी जाना जाता है। इस मानव का प्रादुर्भाव 1.95 लाख वर्ष से 1.60 लाख वर्ष पूर्व के दौरान हुआ। इस मानव के प्राचीनतम साक्ष्य हमें अफ्रीका के विभिन्न भागों में मिले हैं। इनमें इथियोपिया का ओमो किबिश (Omo Kibish), दक्षिण अफ्रीका के बॉर्डर गुफ़ा (Border Cave), डाई केल्डर्स (Die Kelders) एवं कलासीज नदी का मुहाना (Klasies River Mouth) एवं मोरक्को का दार-एस सोल्तन (Dar-es-Solton) बहुत प्रसिद्ध हैं। इससे प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि आधुनिक मानव का उद्भव कहाँ हुआ? इस प्रश्न पर विद्वानों में दो मत प्रचलित हैं। कुछ विद्वान् प्रतिस्थापन मॉडल (replacement model) का समर्थन करते हैं।

उनके अनुसार आधुनिक मानव का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ। अपने पक्ष में वे यह तर्क देते हैं कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक (anatomical) एवं जननिक (genetic) समरूपता पाई जाती है उसका कारण यह था कि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। यहाँ से वे अन्य स्थानों को गए।

दूसरी ओर कुछ अन्य विद्वान् क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल (regional continuity model) का समर्थन करते हैं। उनके विचारानुसार आधुनिक मानव की उत्पत्ति अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप के विभिन्न भागों में हुई। अपने पक्ष में वे यह तर्क देते हैं कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं वे इस कारण हैं कि उसका उद्भव विभिन्न भागों में हुआ। इस अंतर को स्पष्टतः आज भी देखा जा सकता है।
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 iMG 2
आधुनिक मानव की अनेक ऐसी विशेषताएँ थीं जो उसे पहले के मानव से अलग करती हैं। इस मानव का मस्तिष्क अब तक के सभी मानवों में सबसे बड़ा था। अतः वह सबसे समझदार था। इस कारण उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। उसने गुफ़ाओं के अतिरिक्त अपने निवास के लिए झोंपड़ियों का निर्माण आरंभ कर दिया था। वह अब एक स्थायी रूप से निवास करने लगा था। उसने अब कृषि करनी आरंभ कर दी थी। इससे उसे भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ा। उसने अब खाना पकाने की विधि की जानकारी प्राप्त कर ली थी।

उसने अब किसी प्राकृतिक संकट के समय भोजन का भंडारण (store) करना सीख लिया था। उसके हथियार बहुत उत्तम थे। उसने अनेक नए हथियारों का निर्माण भी कर लिया था। इससे वह जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा अधिक अच्छे ढंग से कर सका। उसने सूई का आविष्कार कर लिया था। अतः उसने सिले हुए वस्त्र पहनने आरंभ कर दिए थे। उसने कला एवं भाषा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर ली थी। निस्संदेह आधुनिक मानव की उपलब्धियाँ महान् थीं। प्रसिद्ध इतिहासकार पी० एस० फ्राई का यह कहना ठीक है कि, “नए मानव की ये उपलब्धियाँ स्पष्ट करती हैं कि वह अपने पूर्वजों में सर्वश्रेष्ठ था।”

(क) होमो हाइडलवर्गेसिस :
उन्हें हाइडलबर्ग मानव के नाम से भी जाना जाता है। उनका यह नाम इसलिए रखा गया क्योंकि उनके प्राचीनतम जीवाश्म जर्मनी के शहर हाइडलबर्ग से प्राप्त हुए हैं। ये जीवाश्म यूरोप, एशिया एवं अफ्रीका में पाए गए हैं। हाइडलबर्ग मानव का मस्तिष्क काफ़ी बड़ा था। उसके अंग तथा हाथ बहुत भारी भरकम थे। उसके जबड़े बहुत भारी थे। उसके शरीर पर काफी बाल थे। वह संभवतः बोल सकता था किंतु भाषा का विकास नहीं कर पाया था। वे गुफ़ाओं में निवास करते थे।
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 iMG 3

(ख) होमो निअंडरथलैंसिस:
उन्हें निअंडरथल मानव के नाम से भी जाना जाता है। उनका यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि उनके प्राचीनतम जीवाश्म जर्मनी की निअंडर घाटी से प्राप्त हुए हैं। उनके जीवाश्म हमें यूरोप एवं पश्चिमी तथा मध्य एशिया के अनेक देशों से प्राप्त हुए हैं। यह मानव कद में छोटा था। उसका सिर बड़ा था। उसकी नाक चौड़ी थी। उसके कंधे चौड़े थे।

उसका मस्तिष्क कोष काफी बड़ा किंतु निम्नकोटि का था। वह गुफ़ाओं में रहता था। उसे अग्नि की जानकारी थी। उसके प्रमुख भोजन जंगली फल एवं शिकार थे। वे अपने शवों को बहत सम्मान के साथ दफनाते थे।

प्रश्न 3.
प्रारंभिक समाज में मानव के भोजन प्राप्त करने के तरीके क्या थे?
अथवा
आदिकालीन मानव के भोजन प्राप्त करने के तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन मानव अनेक तरीकों से अपना भोजन जुटाते थे। इनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण तरीके निम्नलिखित थे

1. संग्रहण :
आदिकालीन मानव पूर्ण रूप से प्रकृति जीवी थे। वे कृषि से अपरिचित थे। इसके अतिरिक्त वे पशुपालन भी नहीं करते थे। अतः आरंभ में आदिकालीन मानव अपना भोजन संग्रहण द्वारा जुटाता था। वे पेड-पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों जैसे-बीज, गुठलियाँ (nuts), फल एवं कंदमूल (tubers) एकत्र करते थे। संग्रहण के बारे में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।

इस संबंध में हमें प्रत्यक्ष प्रमाण बहुत कम मिले हैं। इसका कारण यह है कि हमें हड्डियों के जीवाश्म (fossil bones) तो काफी संख्या में प्राप्त हुए हैं जबकि पौधों के जीवाश्म (fossilised plant remains) बहुत कम प्राप्त हुए हैं। संग्रहण द्वारा भोजन जुटाने का मुख्य कार्य स्त्रियों एवं बच्चों द्वारा किया जाता था। पुरुष मुख्य रूप से शिकार के लिए बाहर जाते थे।

2. अपमार्जन:
 (आदिकालीन मानव अपमार्जन द्वारा अथवा रसदखोरी द्वारा भी अपना भोजन जुटाता था। अपमार्जन (scavenging) से अभिप्राय त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है। रसदखोरी (foraging) से अभिप्राय भोजन की तलाश करना है। आदिकालीन मानव उन जानवरों से जो अपने आप मर जाते थे अथवा किसी अन्य हिंसक जानवर द्वारा मार दिए जाते थे, की लाशों से माँस (meat) एवं मज्जा (marrow) प्राप्त करते थे। इनके अतिरिक्त वे छोटे-छोटे पक्षियों एवं उनके अंडों, सरीसृपों (reptiles), चूहों एवं अनेक प्रकार के कीड़े-मकोड़ों (insects) को खाते थे।

3. शिकार:
शिकार द्वारा भोजन प्राप्त करना आदिकालीन मानव का एक प्रमुख स्रोत रहा है। शिकार प्रमुख तौर पर पुरुषों द्वारा किया जाता था। वे शिकार का पीछा करते हुए अपने निवास स्थान से काफी दूर तक निकल जाते थे। वे छोटे-मोटे पशुओं का शिकार स्वयं कर लेते थे। वे बड़े पशुओं का शिकार सम्मिलित रूप से करते थे। इसका कारण यह था कि बड़े पशुओं का अकेले शिकार करने में उनके स्वयं के मारे जाने की संभावना अधिक रहती थी।

वे जंगली घोड़ों, जंगली भैंसों जिन्हें बाइसन कहा जाता था, गैंडों, रीछों एवं विशालकाय जानवरों जिन्हें मैमथ कहा जाता था का शिकार करते थे। वे शिकार के लिए भालों एवं पत्थरों का प्रयोग करते थे। बाद में आदिमानव ने शिकार के लिए कुत्तों का सहयोग लेना आरंभ कर दिया था।

योजनाबद्ध ढंग से स्तनपायी जानवरों का शिकार एवं उनका वध करने की सबसे पुरानी उदाहरण हमें दो स्थलों है। दूसरी उदाहरण 4 लाख वर्ष पूर्व की है। यह जर्मनी में शोनिंजन (Schoningen) से संबंधित है। लगभग 35 हजार वर्ष पूर्व आदिमानव द्वारा योजनाबद्ध ढंग से शिकार करने के कुछ साक्ष्य हमें कुछ यूरोपीय खोज स्थलों से प्राप्त हुए हैं। ऐसा ही एक स्थल चेक गणराज्य में नदी के पास स्थित दोलनी वेस्तोनाइस (Dolni Vestonice) था।

इस स्थान को बहुत सोच-समझकर चुना गया था। यहाँ अनेक जानवर पानी पीने के लिए आते थे। इसके अतिरिक्त घोड़े एवं रेडियर आदि जानवरों के झुंड पतझड़ एवं वसंत के मौसम में नदी के उस पार जाते थे। इस अवसर पर इन जानवरों का बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि उस समय के लोगों को जानवरों की आवाजाही की पूर्ण जानकारी होती थी।

आदिमानव द्वारा जिन जानवरों का शिकार करना होता था उन्हें घेरे में ले लेते थे। जब कोई विशालकाय पशु बीमार अथवा घायल अवस्था में मिल जाता था तो उसे पानी अथवा बर्फ में फंसा कर सुगमता से मार डालते थे। यदि जिस जानवर का शिकार किया गया हो वह छोटा हो तो उसे गुफ़ा में लाकर खाया जाता था। दूसरी ओर यदि वह जानवर विशालकाय हो तो उसके धड़ को वहीं खा लिया जाता था जबकि शेष भाग को काट कर गुफ़ा में लाया जाता था।

इसका अनुमान इस बात से लगाया जाता है कि हमें मृत पशुओं के लघु अंगों की हड्डियाँ गुफ़ाओं से प्रचुर मात्रा में मिली हैं जबकि उनकी रीढ़ की हड्डियाँ एवं पसलियाँ कम प्राप्त हुई हैं। आदिकालीन मानव मारे गए पशुओं की खाल को साफ करके धूप में सुखा लेता था तथा उससे पहनने एवं बिछाने का काम लेता था।

4. मछली पकड़ना (Fishing) मछली पकड़ना भी आदिकालीन मानव का भोजन जुटाने का एक महत्त्वपूर्ण ढंग था। वे नदियों एवं तालाबों से हाथ द्वारा ही मछली पकड़ लिया करते थे। इसके अतिरिक्त वे छोटी मछली पकड़ने के लिए काँटे का एवं बड़ी मछली पकड़ने के लिए हार्पून का प्रयोग भी करते थे।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 4.
आदिमानव के निवास स्थान का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदिमानव कहाँ निवास करता था? वह पेड़ों से गुफ़ाओं तक तथा फिर खुले स्थलों पर कैसे पहुँचा? इस संबंध में हम साक्ष्यों के आधार पर पुनर्निर्माण करने का प्रयास करेंगे। इसका एक ढंग यह है कि उनके द्वारा निर्मित शिल्पकृतियों के फैलाव की जाँच करना (plotting the distribution of artefacts)। शिल्पकृतियाँ मानव निर्मित वस्तुएँ होती हैं।

इसमें अनेक प्रकार की वस्तुएँ सम्मिलित हैं जैसे-औजार, चित्रकारियाँ, मूर्तियाँ, उत्कीर्ण चित्र आदि। उदाहरण के तौर पर हमें केन्या में किलोंबे (Kilombe) तथा ओलोर्जेसाइली (Olorgesailie) नामक स्थलों से बड़ी संख्या में शल्क उपकरण (flake tools) एवं हस्त कुठार (hand axes) मिले हैं।

ये वस्तुएँ 7 लाख वर्ष पूर्व से 5 लाख वर्ष पूर्व पुरानी हैं। इतने सारे औज़ार एक स्थान पर किस प्रकार इकट्ठे हुए। यह अनुमान लगाया जाता है कि जिन स्थानों पर खाद्य प्राप्ति के संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे वहाँ लोग बार-बार आते रहे होंगे। ऐसे क्षेत्रों में वे अपनी शिल्पकृतियाँ छोड़ जाते रहे होंगे। जिन स्थानों में उनका आवागमन कम था वहाँ ऐसी शिल्पकृतियाँ हमें बहुत कम प्राप्त हुई हैं।

1. पेड़:
प्रारंभ में आदि मानव पेड़ों पर रहते थे। वे अपना अधिकाँश समय पेड़ों पर ही बिताते थे। इसका कारण यह था कि पेड़ों पर वे अपना भोजन सुगमता से जटा सकते थे। यहाँ उसे फल, कंदमल, पक्षी एवं उनके अंडे बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते थे। अतः उसे भोजन की तलाश में स्थान-स्थान भटकने की आवश्यकता नहीं थी।

उस समय पेड़ों पर ही बंदर, लंगूर एवं तेंदुए (leopards) आदि निवास करते थे। इन जानवरों से अपनी सुरक्षा करना आदिमानव के लिए एक भारी समस्या थी। इसके अतिरिक्त भयंकर तूफ़ान एवं भयंकर शीत से बचाव करना एक अन्य समस्या थी।

2. गुफ़ाएँ :
आज से 4 लाख वर्ष पूर्व आदिमानव ने गुफ़ाओं को अपना निवास स्थान बना लिया था। गुफ़ाओं में रहने के उसे अनेक लाभ हुए। प्रथम, वे भयंकर जानवरों से अपने को सुरक्षित रख सके। दूसरा, गुफ़ाओं में रहने के कारण उन्हें भयंकर तूफ़ानों के समय अथवा शीत के समय किसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता था।

तीसरा, गुफ़ाओं की दीवारों से पानी रिसता रहता था। अतः उन्हें पानी पीने के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाना पड़ता था। हमें आदिमानव के गुफ़ाओं में निवास करने के जो साक्ष्य प्राप्त हुए हैं उनमें सर्वाधिक प्रसिद्ध दक्षिण फ्राँस में स्थित लेज़रेट गुफ़ा (Lazaret cave) है। इस गुफ़ा का आकार 12 x 4 मीटर है।

इस गुफा के अंदर से हमें दो चूल्हों (hearths), अनेक प्रकार के फलों, सब्जियों, बीजों, काष्ठफलों (nuts), पक्षियों के अंडों एवं मछलियों जैसे ट्राउट (trout), पर्च (perch) एवं कार्प (carp) आदि के साक्ष्य (evidence) मिले हैं।

3. झोंपड़ियाँ :
आदिमानव ने 1.25 लाख वर्ष पूर्व झोंपड़ियों का निर्माण आरंभ कर दिया था। यह आदिमानव द्वारा प्रगति की दिशा में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पग था। उसने अब कृषि आरंभ कर दी थी। इसलिए उसे स्थायी निवास की आवश्यकता हुई।

अतः उसने झोंपड़ियों का निर्माण आरंभ किया। आदिमानव के झोंपड़ियों के निर्माण संबंधी हमें जो साक्ष्य मिले हैं उनमें दक्षिणी फ्रांस में स्थित टेरा अमाटा (TerraAmata) नामक झं बहुत प्रसिद्ध है। यह झोंपड़ी घास-फूस से बनाई गई थी। इसकी छत लकड़ी की थी। इस झोंपड़ी के किनारों को सहारा देने के लिए बड़े पत्थरों का प्रयोग किया गया था।

फ़र्श पर जो पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े बिखरे हुए हैं वे उन स्थानों को दर्शाते हैं जहाँ बैठ कर लोग पत्थर के औजार बनाते थे। यहाँ से हमें चूल्हे को दर्शाने के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं।

4. अग्नि (Fire)-अग्नि के आविष्कार के कारण आदिमानव के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आए। इसका आविष्कार कब हुआ इस संबंध में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। इसके प्रथम साक्ष्य हमें केन्या में चेसोवांजा (Chesowanja) एवं दक्षिणी अफ्रीका में स्वार्टक्रांस (Swartkrans) से प्राप्त हुए हैं। यहाँ से पत्थर के औज़ारों के साथ-साथ आग में पकाई गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के अंश प्राप्त हुए हैं। ये 14 लाख वर्ष पूर्व के हैं। इन वस्तुओं को किस प्रकार आग लगी इस संबंध में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

अग्नि का आविष्कार मानव के लिए अनेक पक्षों से लाभकारी प्रमाणित हुआ। प्रथम, आग से जंगली जानवरों को डर लगता था। अतः आदिमानव अग्नि से गुफ़ाओं को प्रज्वलित रखने लगा। इस कारण उसे जंगली जानवरों से सुरक्षा प्राप्त हुई। दूसरा, अग्नि की सहायता से आदिमानव के लिए भयंकर शीत से बचाव सुगम हो गया। तीसरा, इस कारण गुफ़ाओं के अंदर जहाँ अंधेरा रहता था प्रकाश करना संभव हुआ।

चौथा, अग्नि की सहायता से भोजन को पकाना संभव हुआ। यह कच्चे भोजन की अपेक्षा अधिक स्वाद होता था। चूल्हों के प्रयोग के बारे में हमें सबसे प्रथम साक्ष्य 1.25 लाख वर्ष पूर्व का मिला है। पाँचवां, अग्नि औज़ारों के निर्माण में काफी उपयोगी सिद्ध हुई।

प्रश्न 5.
आदिमानव ने औज़ारों का निर्माण किस प्रकार किया ?
उत्तर:
आदिमानव के जीवन में औज़ारों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। वह इनका प्रयोग जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा एवं अपने लिए भोजन जुटाने के लिए करता था। इसमें कोई संदेह नहीं कि कुछ पक्षी एवं वानर आदि भी औज़ारों का निर्माण करते हैं एवं उनका प्रयोग करते हैं। किंतु आदिमानव द्वारा बनाए गए औजार अधिक कौशल एवं स्मरण शक्ति को दर्शाते हैं।

आदिमानव के औज़ार पत्थर से निर्मित थे। संभवत: वे लकड़ी के औजार भी बनाते थे। किंतु लकड़ी के औजार समय के साथ नष्ट हो गए। पत्थर के बने औज़ारों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है। प्रथम श्रेणी में आने वाले औज़ारों को हस्त कुठार (hand axes) कहा जाता है। हस्त कुठारों को मुट्ठी (fist) में पकड़ा जाता था। ये अनेक प्रकार के होते थे। इनका प्रयोग किसी वस्तु को काटने अथवा किसी वस्तु को कुचलने के लिए किया जाता था। इस प्रकार के औज़ार हमें बड़ी संख्या में तंजानिया के ओल्डुवई गोर्ज (Olduvai Gorge) से प्राप्त हुए हैं।

दूसरी श्रेणी में गंडासे (choppers) सम्मिलित थे। उन्हें भारी पत्थरों से तैयार किया जाता था। इसमें शल्कों (flakes) को निकाल कर धारदार बनाया जाता था। इनका प्रयोग संभवत: माँस काटने के लिए किया जाता था। इस प्रकार के हथियार हमें बड़ी संख्या में एशिया, अफ्रीका एवं यूरोप के अनेक स्थानों से प्राप्त हुए हैं। तीसरी श्रेणी में शल्क औज़ार (flake tools) सम्मिलित थे। ये हस्त कुठारों एवं गंडासों की अपेक्षा छोटे एवं पतले होते थे। इनके किनारे अधिक पैने होते थे। ये औज़ार अधिक उपयोगी तथा दूर तक प्रहार करने में सक्षम होते थे।

पत्थर के औजार बनाने एवं इनका प्रयोग किए जाने के सबसे प्राचीन साक्ष्य हमें इथियोपिया (Ethiopia) एवं केन्या (Kenya) से प्राप्त हुए हैं। विद्वानों (scholars) के विचारानुसार आस्ट्रेलोपिथिकस ने सबसे पहले पत्थर के औज़ार बनाए थे। लगभग 35,000 वर्ष पूर्व जानवरों के शिकार करने के तरीकों में सुधार हुआ। इसका साक्ष्य यह है कि इस काल में नए प्रकार के भालों का निर्माण किया गया। इसके अतिरिक्त तीर-कमान भी बनाए गए। 21,000 वर्ष पूर्व सिलाई वाली सूई का आविष्कार हुआ।

निस्संदेह यह एक महत्त्वपूर्ण आविष्कार था। अब आदिमानव ने सिले हुए वस्त्र पहनने आरंभ कर दिए थे। अब हड्डी एवं हाथी दाँत से भी औज़ार बनाए जाने लगे। इनके अतिरिक्त अब छेनी (punch blade) जैसे छोटे-छोटे औजार भी बनाए जाने लगे। इनकी सहायता से हड्डी, सींग (antler), हाथी दाँत एवं लकड़ी पर नक्काशी (engravings) की जाने लगी।

हम निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकते कि औज़ारों का निर्माण पुरुषों अथवा स्त्रियों अथवा दोनों द्वारा मिल कर किया जाता था। यह संभव है कि स्त्रियाँ अपने और अपने बच्चों के लिए भोजन जुटाने के लिए कुछ विशेष प्रकार के औजारों का निर्माण एवं प्रयोग करती रही होंगी।

प्रश्न 6.
भाषा के प्रयोग से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी सुविधा मिली होगी? इस पर चर्चा कीजिए। इन क्रियाकलापों के लिए विचार संप्रेषण के अन्य किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता था ?
अथवा
आदिमानव ने भाषा का विकास किस प्रकार किया ? इसका उनके जीवन में क्या महत्त्व था?
उत्तर:
भाषा का विकास आदिमानव की प्रगति की राह में एक मील पत्थर सिद्ध हआ। इनका संक्षिप्त वर्णन
निम्नलिखित अनुसार है
1. भाषा :
प्रारंभिक चरणों में जब भाषा का विकास नहीं हुआ था तो आदिमानव के लिए अपने विचारों की अभिव्यक्ति करना संभव न था। इस कारण उसकी प्रगति करने की रफ्तार बहुत धीमी रही। भाषा के विकास ने उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किए। प्रसिद्ध इतिहासकार जे० ई० स्वैन के अनुसार, “भाषा की श्रेष्ठता ने मानव को अन्य प्राइमेट के मुकाबले सांस्कृतिक तौर पर अधिक विकसित किया।” भाषा का विकास किस प्रकार हुआ इस संबंध में अनेक मत प्रचलित हैं।

  • होमिनिड भाषा में हाव-भाव (gestures) अथवा हाथों का संचालन (hand movements) सम्मिलित था।
  • उच्चरित (spoken) भाषा से पूर्व प्रचलन हुआ।
  • मानव भाषा का आरंभ संभवत: बुलावों (calls) की क्रिया से हआ था जैसा कि अन्य प्राइमेटों द्वारा किया जाता था।

समय के साथ-साथ इन ध्वनियों ने भाषा का रूप धारण कर लिया। बोलने वाली भाषा का आरंभ कब हुआ इस संबंध में विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार भाषा का सबसे पहले विकास 20 लाख वर्ष पूर्व हुआ था। कुछ अन्य विद्वानों के अनुसार इसका विकास 2 लाख वर्ष पूर्व हुआ था जब स्वरतंत्र (vocal tract) का विकास हुआ था।

इसका संबंध विशेष तौर पर आधुनिक मानव से है। कुछ अन्य विद्वानों के विचारानुसार भाषा का विकास 40,000 से 35,000 वर्ष पूर्व तब हुआ जब कला का विकास आरंभ हुआ। इसका कारण यह है कि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं। भाषा के प्रयोग से शिकार करने में तथा आश्रय बनाने में अनेक लाभ हुए।

(क) शिकार करने में (In Hunting)-भाषा का प्रयोग शिकार करने में निम्नलिखित पक्षों से लाभकारी प्रमाणित हुआ-

  • लोग शिकार करने की योजना बना सकते थे।
  • वे जानवरों के क्षेत्रों के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे जानवरों की प्रकृति पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे शिकार के लिए आवश्यक औज़ारों पर विचार कर सकते थे।
  • वे मारे गए जानवरों के उपयोग के संबंध में चर्चा कर सकते थे।

(ख) आश्रय बनाने में (In Constructing Shelters)-भाषा का प्रयोग आश्रय बनाने में निम्नलिखित पक्षों से लाभकारी प्रमाणित हुआ-

  • लोग आश्रय बनाने के लिए सुरक्षित क्षेत्रों पर चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के लिए उपलब्ध सामग्री की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के तरीकों के संबंध में चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल के निकट उपलब्ध सुविधाओं पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल को जंगली जानवरों एवं भयंकर तूफ़ानों से सुरक्षित रखने के उपायों के बारे में सोच सकते थे।

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प्रश्न 7.
आदिमानव की कला पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
आदिकालीन मानव को प्रारंभ से ही कला में विशेष दिलचस्पी थी। अतः उसने चित्रकला एवं मूर्तिकला के क्षेत्रों में अपना हाथ आजमाया।

(क) चित्रकला :
प्रारंभ में आदिमानव अपने दैनिक जीवन में जिनसे प्रभावित होता था उन्हें वह पूर्ण भाव के साथ व्यक्त करने का प्रयास करता था। उसने जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों, सूर्य, चंद्रमा, तारों, नदियों आदि के चित्र बनाए। क्योंकि उनके जीवन में शिकार का विशेष महत्त्व था अतः उन्होंने इससे संबंधित सर्वाधिक चित्र बनाए। ये चित्र गुफ़ाओं की दीवारों एवं छतों पर बनाए गए थे।

इनमें से स्पेन में स्थित आल्टामीरा (Altamira) तथा फ्रांस में स्थित लैसकॉक्स (Lascaux) तथा चाउवेट (Chauvet) नामक गुफाएं विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। आल्टामीरा गुफ़ा की खोज 1879 ई० में मार्सिलीनो सैंज दि सउतुओला (Marcelino Sanz de Sautuola) एवं उसकी पुत्री मारिया (Maria) ने की।

इस गुफ़ा से हमें जो अनेक चित्र प्राप्त हुए हैं उनमें सर्वाधिक प्रसिद्ध एक जंगली भैंसे का चित्र है। 1994 ई० में लैसकॉक्स एवं चाउवेट नामक गुफ़ाओं की खोज हुई। इनमें भी बड़ी संख्या में सुंदर चित्र प्राप्त हुए हैं। इनमें जंगली बैलों (bison), घोड़ों, पहाड़ी बकरों (ibex), हिरणों, मैमथों (mammoths), गैंडों (rhinos), शेरों, भालुओं, चीतों, लकड़बग्धों एवं उल्लुओं आदि के चित्र विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन चित्रों में विशेष रूप से चार रंगों-काला, लाल, पीला एवं सफ़ेद का प्रयोग किया गया है। इन चित्रों को 30,000 से 12,000 वर्ष पूर्व बनाया गया था।

उपरोक्त चित्रों के संबंध में अनेक प्रश्न उठाए गए हैं। उदाहरणस्वरूप इन चित्रों में अधिकाँश शिकार के चित्र क्यों बनाए गए हैं ? इन्हें गुफ़ाओं के उन स्थानों पर क्यों बनाया गया था जहाँ अंधकार होता था? इन चित्रों में कुछ विशेष चित्रों को ही चित्रित क्यों किया गया है? केवल पुरुषों को ही जानवरों के साथ चित्रित किया गया है स्त्रियों को क्यों नहीं? इन प्रश्नों के संबंध में विद्वानों ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए हैं। इन चित्रों के उद्देश्यों के संबंध में विद्वानों में मतभेद पाए जाते हैं। कुछ विद्वानों का विचार है कि ये चित्र गुफ़ाओं को सुंदर बनाने के उद्देश्य से बनाए गए थे।

कुछ अन्य का विचार है कि इन चित्रों को इसलिए चित्रित किया गया था ताकि वे भावी पीढ़ियों को शिकार के संबंध में अपनी जानकारी दे सकें। अधिकांश विद्वानों का विचार है कि इन चित्रों का वास्तविक उद्देश्य धार्मिक था। प्रसिद्ध इतिहासकारों जे० एच० बेंटली एवं एच० एफ० जाईगलर का यह कहना ठीक है कि, “इन चित्रों की सादगी एवं उन्हें दर्शाने की शक्ति ने प्रारंभिक 20वीं शताब्दी से आधुनिक आलोचकों पर गहन प्रभाव छोड़ा। प्रागैतिहासिक काल के कलाकारों के कौशल ने मानव प्रजातियों की अद्भुत दिमागी शक्ति को दर्शाया है।

2. मूर्तिकला (Sculpture)-आदिकालीन मानव ने कुछ छोटे आकार की मूर्तियों का निर्माण आरंभ कर दिया था। उन्होंने मानवों एवं जानवरों की अनेक मूर्तियाँ बनाईं। इनमें से अधिकाँश मूर्तियाँ स्त्रियों से संबंधित थीं। इसका कारण यह था कि वे स्त्रियों को जनन (fertility) शक्ति का स्रोत समझते थे। इनमें प्रायः स्त्रियों के मुख को नहीं दर्शाया जाता था। इस प्रकार की अनेक मूर्तियाँ हमें यूरोप के विभिन्न स्थानों से प्राप्त हुई हैं। इन मूर्तियों को वीनस (Venus) देवी के नाम से जाना जाता था।

प्रश्न 8.
हादज़ा जनसमूह का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्रसिद्ध मानव विज्ञानी (anthropologist) जेम्स वुडबर्न (James Woodburn) द्वारा 1960 ई० में अफ्रीका के हादज़ा जनसमूह के बारे में महत्त्वपूर्ण प्रकाश डाला गया। इसका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित अनुसार हादज़ा एक लघु समूह है जो एक खारे पानी की झील ‘लेक इयासी’ (Lake Eyasi) के इर्द-गिर्द रहते हैं। वे शिकारी तथा खाद्य संग्राहक हैं। पूर्वी हादज़ा का क्षेत्र सूखा एवं चट्टानी है। यहाँ सवाना घास, काँटेदार झाड़ियाँ तथा एकासिया (accacia) नामक पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इनके अतिरिक्त यहाँ जंगली खाद्य पदार्थ भी काफी मात्रा में मिलते हैं।

20वीं शताब्दी के आरंभ में हादज़ा प्रदेश में बड़ी मात्रा में जानवर पाए जाते थे। यहाँ पाए जाने वाले बड़े जानवरों में हाथी, शेर, तेंदुए, लकड़बग्घे, गैंडे, भैंसे, चिंकारा, हिरण, बबून बंदर, जेब्रा, जिराफ़, वाटरबक एवं मस्सेदार सूअर (warthog) आदि थे। इनके अतिरिक्त यहाँ अनेक प्रकार के छोटे जानवर भी पाए जाते थे। इनमें खरगोश एवं कछुए आदि थे। हादज़ा लोग केवल हाथी को छोड़ कर अन्य सभी प्रकार के जानवरों का शिकार करते हैं एवं उनका माँस खाते हैं। यहाँ यह बात स्मरण रखने योग्य है कि हादज़ा लोग विश्व में सबसे अधिक माँस खाते हैं। इसके बावजूद वे इस बात का ख्याल रखते हैं कि शिकार को भविष्य में कोई ख़तरा न हो।

साधारण दर्शकों को हादज़ा क्षेत्र में पाए जाने वाले कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल सुगमता से दिखाई नहीं देते। इसके बावजूद ये अत्यंत सूखे मौसम में भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। वहाँ वर्षा ऋतु के 6 महीनों में मिलने वाले खाद्य पदार्थ सूखे के मौसम में मिलने वाले खाद्य पदार्थ से भिन्न होते हैं। किंतु वहाँ कभी भी खाद्य पदार्थ की कोई कमी नहीं रहती। यहाँ पाई जाने वाली सात प्रकार की मधुमक्खियाँ, शहद एवं सूंडियों को विशेष चाव के साथ खाया जाता है। इनकी आपूर्ति (supplies) मौसम के अनुसार बदलती रहती है।

वर्षा ऋतु में संपूर्ण देश में जल स्रोतों की कोई कमी नहीं रहती। ये बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। किंतु सूखे के मौसम में इनमें से अधिकाँश सूख जाते हैं। इसलिए वे प्रायः अपने शिविर जल स्रोतों से एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थापित नहीं करते हैं। हादज़ा लोगों के कुछ क्षेत्रों में घास के विशाल मैदान हैं। इसके बावजूद वे कभी भी वहाँ अपना शिविर स्थापित नहीं करते। वे अपने शिविर पेड़ों अथवा चट्टानों के मध्य अथवा उन स्थानों पर लगाते हैं जहाँ ये दोनों सुविधाएँ उपलब्ध हों।

हादज़ा लोग ज़मीन और उसके संसाधनों पर अपना दावा नहीं करते। कोई भी व्यक्ति जहाँ चाहे वहाँ रह सकता है। वह वहाँ से कंदमूल, फल एवं शहद एकत्र कर सकता है तथा पानी ले सकता है। वास्तव में इस संबंध में हादज़ा प्रदेश में कोई प्रतिबंध नहीं है। यद्यपि हादज़ा प्रदेश में बड़ी मात्रा में जानवर शिकार के लिए उपलब्ध हैं फिर भी हादज़ा लोग अपने भोजन का 80 प्रतिशत जंगली साग-सब्जियों से प्राप्त करते हैं। वे अपने भोजन का शेष 20 प्रतिशत माँस एवं शहद से प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 9.
क्या आज के शिकारी संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त सूचनाओं को अतीत के मानव जीवन के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रयोग किया जा.सकता है?
अथवा
क्या वर्तमान शिकारी संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त जानकारी के सुदूर अतीत के मानव के जीवन को पुनर्निर्मित करने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है?
उत्तर:
मानव विज्ञानियों (anthropologists) के अध्ययनों के आधार पर वर्तमान समय के शिकारी संग्राहक समाजों के बारे में जैसे-जैसे हमारे ज्ञान में वद्धि हई वैसे-वैसे हमारे सामने यह प्रश्न आता है कि क्या आज के शिकारी संग्राहक समाजों के बारे में प्राप्त सूचनाओं को अतीत के मानव जीवन के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इस संबंध में इतिहासकारों में निम्नलिखित दो मत प्रचलित हैं

(क) कुछ इतिहासकारों के विचारानुसार वर्तमान समय के शिकारी संग्राहक समाजों से प्राप्त तथ्यों को प्राचीनकालीन प्राप्त अवशेषों के अध्ययन के लिए प्रयोग किया गया है। उदाहरण के लिए कुछ पुरातत्त्वविदों (archaeologists) का विचार है कि 20 लाख वर्ष पूर्व के होमिनिड स्थल जो तुर्काना झील (Lake Turkana) के किनारे स्थित हैं वास्तव में आदिकालीन मानवों के निवास स्थान थे। यहाँ वे सूखे के मौसम में जब स्रोतों में कमी आ जाती थी, आकर निवास करते थे। वर्तमान समय में हादज़ा (Hadza) एवं कुंग सैन (Kung San) समाज भी इसी ढंग से रहते हैं।

(ख) दूसरी ओर कुछ अन्य इतिहासकारों का विचार है कि संजातिवृत्त (ethnography) संबंधी तथ्यों का उपयोग अतीत के समाजों को समझने के लिए नहीं किया जा सका क्योंकि दोनों समाज एक-दूसरे से अलग हैं। संजातिवृत्त में समकालीन नृजातीय समूहों (ethnic groups) का विश्लेषणात्मक अध्ययन होता है। इसमें उनके रहन-सहन, खान-पान, आजीविका के साधन, रीति-रिवाजों, सामाजिक रूढ़ियों एवं राजनीतिक संस्थाओं का अध्ययन किया जाता है।

आज के शिकारी संग्राहक समाज शिकार एवं संग्रहण के अतिरिक्त कई अन्य आर्थिक गतिविधियों में भी लगे रहते हैं। उदाहरण के तौर पर वे जंगलों में पाए जाने वाले छोटे-छोटे उत्पादों का आपस में विनिमय (exchange) करते हैं तथा इनका व्यापार भी करते हैं। वे पड़ोसी किसानों के खेतों में मजदूरी का काम भी करते हैं। सबसे बढ़कर वे जिन हालातों में रहते हैं वे आदिकालीन मानवों से पूर्णतः भिन्न हैं।

वर्तमान काल के शिकारी संग्राहक समाजों में आपस में भी बहुत भिन्नता है। उनकी गतिविधियों में बहुत अंतर है। वे शिकार एवं संग्रहण को अलग-अलग महत्त्व देते हैं। उनका आकार भी छोटा-बड़ा होता है। भोजन प्राप्त करने के संबंध में श्रम विभाजन (division of labour) को लेकर भी मतभेद पाए जाते हैं।

यद्यपि आज भी अधिकाँश स्त्रियाँ खाद्य-पदार्थों को एकत्र करने का कार्य करती हैं एवं पुरुष शिकार करते हैं किंतु फिर भी अनेक ऐसे समाजों के उदाहरण मिलेंगे जहाँ स्त्रियाँ एवं पुरुष दोनों ही शिकार करते हैं, संग्रहण का कार्य करते हैं तथा औजार बनाते हैं। निस्संदेह इससे ऐसे समाजों में स्त्रियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका की जानकारी प्राप्त होती है। अतः अतीत के संबंध में कोई अनुमान लगाना कठिन है।

प्रश्न 10.
अध्याय के अंत में दिए गए प्रत्येक कालानुक्रम में से किन्हीं दो घटनाओं को चुनिए और यह बताइए कि इनका क्या महत्त्व है?
उत्तर:
कालानुक्रम-1

1. होमिनॉइड और होमिनिड की शाखाओं में विभाजन : नोट-इस भाग के उत्तर के लिए विद्यार्थी कृपया प्रश्न नं० 1 के भाग 2 एवं 3 का उत्तर देखें।
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 iMG 4

2. होमो एरेक्टस : नोट-इस भाग के उत्तर के लिए विद्यार्थी कृपया प्रश्न नं० 2 के भाग 2 का उत्तर देखें।

कालानुक्रम-2
1. आधुनिक मानव का प्रादुर्भाव : नोट- इस भाग के उत्तर के लिए विद्यार्थी कृपया प्रश्न नं० 2 के भाग 3 का उत्तर देखें।
2. निअंडरथल मानव का प्रादुर्भाव : नोट-इस भाग के उत्तर के लिए विद्यार्थी कृपया प्रश्न नं० 2 के भाग 3 का (ख) भाग देखें।

क्रम संख्यावर्षघटना
1 .-240 लाख वर्ष पूर्वप्राइमेट प्राणियों का अफ्रीका एवं एशिया में उत्थान।
2 .240 लाख वर्ष पूर्वहोमिनॉइड का उत्थान।
3 .56 लाख वर्ष पूर्वआस्ट्रेलोपिथिकस अस्तित्व में आए।
4 .25 लाख वर्ष पूर्वहिम युग का आरंभ, होमो अस्तित्व में आए।
5 .22 लाख वर्ष पूर्वहोमो हैबिलिस का उत्थान।
6 .20 लाख वर्ष पूर्वहोमिनिड का तुर्काना झील पर स्थल।
7 .18 लाख वर्ष पूर्वहोमो एरेक्टस का अस्तित्व में आना।
8 .13 लाख वर्ष पूर्वआस्ट्रेलोपिथिकस का विलुप्त होना।
9 .8 लाख वर्ष पूर्वहोमो हाइडलबर्गेसिस का अस्तित्व में आना।
10 .5 लाख वर्ष पूर्वबॉक्सग्रोव, इंग्लैंड से स्तनपायी जानवरों का योजनाबद्ध ढंग से शिकार का साक्ष्य।
11 .4 लाख वर्ष पूर्वशोनिंजन, जर्मनी से स्तनपायी जानवरों का योजनाबद्ध ढंग से शिकार का साक्ष्य, गुफ़ाओं में निवास।
12.2 लाख वर्ष पूर्वहोमो एरेक्टस का लोप होना।
13.1.95 लाख वर्ष पूर्वआधुनिक मानव का अस्तित्व में आना।
14.1.30 लाख वर्ष पूर्वहोमो निअंडरथलैंसिस का अस्तित्व में आना।
15.1.25 लाख वर्ष पूर्वझोंपड़ियों का निर्माण।
16.35 हज़ार वर्ष पूर्वनिअंडरथल मानवों का लोप, शिकार के तरीकों में सुधार।
17.21 हज़ार वर्ष पूर्वसिलाई वाली सूई का आविष्कार।
18.1879 ई०आल्टामीरा गुफ़ा की खोज हुई।
19.1959 ई०ओल्डुवई गोर्ज की खोज हुई।
20.1960 ईमानव विज्ञानी जेम्स वुडबर्न द्वारा हादज़ा जनसमूह का वर्णन।

संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न
(Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
होमिनॉइड और होमिनिड से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
1) होमिनॉइड-होमिनॉइड समूह 240 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया था। यह प्राइमेट श्रेणी का एक उपसमूह था। इसमें पूँछहीन बंदर सम्मिलित थे। इनका मस्तिष्क छोटा होता था। अत: उनमें सोचने की शक्ति कम थी। उनके चार पैर थे। वे चलते समय चारों पैरों का प्रयोग करते थे। उनके शरीर का अगला हिस्सा और दोनों पैर लचकदार होते थे। वे सीधे खड़े होकर चल नहीं सकते थे। होमिनॉइड बंदरों से कई प्रकार से भिन्न होते थे। उनका शरीर बंदरों से बड़ा होता था। उनकी पूँछ भी नहीं होती थी। उनके बच्चों का विकास धीरे-धीरे होता था।

2) होमिनिड-होमिनिड 56 लाख वर्ष पूर्व होमिनॉइड उपसमूह से विकसित हुए। इनके प्राचीनतम जीवाश्म हमें लेतोली तंजानिया से एवं हादार इथियोपिया से प्राप्त हुए हैं। दो प्रकार के साक्ष्यों से पता चलता है कि होमिनिडों का उद्भव अफ्रीका में हुआ था। ये 56 लाख वर्ष पुराने हैं। अफ्रीका से बाहर जो जीवाश्म पाए गए हैं वे 18 लाख वर्ष से पुराने नहीं हैं। होमिनिड, होमिनिडेइ नामक परिवार के साथ संबंधित हैं। इस परिवार में सभी रूपों के मानव प्राणी सम्मिलित हैं। इस समूह की प्रमुख विशेषताएँ ये हैं-

  • इनके मस्तिष्क का आकार बड़ा होता था।
  • वे सीधे खड़े हो सकते थे।
  • वे दो पैरों के बल चल सकते थे।
  • उनके हाथ विशेष प्रकार के होते थे। वे इन हाथों की सहायता से औजार बना सकते थे और उनका प्रयोग कर सकते थे।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 2.
दिए गए सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था को दर्शाने वाले आरेख को देखिए। क्या आप उन निवेशों की सूची दे सकते हैं जो औज़ारों के निर्माण में सहायक हुए ? औज़ारों के निर्माण से किन-किन प्रक्रियाओं को बल मिला ?
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 iMG 5
उत्तर:
औज़ारों के निर्माण में सहायक निवेश

  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि।
  • औज़ारों के इस्तेमाल के लिए बच्चों व चीज़ों को ले जाने के लिए हाथों का मुक्त होना।
  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।

प्रक्रियाएँ जिनको औज़ारों के निर्माण से बल मिला

  • सीधे खड़े होकर चलना।
  • आँखों से निगरानी, भोजन और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तक चलना।
  • मस्तिष्क के आकार और उसकी क्षमता में वृद्धि।

प्रश्न 3.
मानव और लंगूर तथा वानरों जैसे स्तनपायियों के व्यवहार तथा शरीर रचना में कुछ समानताएँ पाई जाती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि संभवतः मानव का क्रमिक विकास वानरों से हुआ।
(क) व्यवहार और
(ख)शरीर रचना शीर्षकों के अंतर्गतः दो अलग-अलग स्तंभ बनाइए और उन समानताओं की सूची दीजिए। दोनों के बीच पाए जाने वाले उन अंतरों का भी उल्लेख कीजिए जिन्हें आप महत्त्वपूर्ण समझते हैं।
उत्तर:
(क) समानताएँ-व्यवहार एवं शरीर रचना

मानववानर तथा लंगूर
1. मानव पेड़ों पर चढ़ सकता है।1. वानर भी पेड़ों पर चढ़ सकते हैं।
2. माताएँ अपने बच्चों को दूध पिलाती हैं।2. मादा वानर भी अपने बच्चों को दूध पिलाती है।
3. मानव लंबी दूरी तक चल सकता है।3. वानर भी लंबी दूरी तक चल सकते हैं।
4. मानव प्रजनन द्वारा अपने जैसी संतान उत्पन्न करते हैं।4. वानर भी ऐसा ही करते हैं।
5. मानव रीढ़धारी हैं।5. वानर भी रीढ़धारी होते हैं।

(ख) असमानताएँ-व्यवहार एवं शरीर रचना

मानववानर तथा लंगूर
1. मानव दो पैरों पर चलता है।1. वानर चार पैरों पर चलता है।
2. मानव खेती करके अपने भोजन के लिए अनाज उगाता है।2. वानर ऐसा नहीं कर सकते।
3. मानव सीधे खड़ा होकर चल सकता है।3. वानर ऐसा नहीं कर सकते।
4. मानव की पूँछ नहीं होती।4. वानरों की पूँछ होती है।
5. मानव का शरीर बड़ा होता है।5. वानरों का शरीर अपेक्षाकृत छोटा होता है।

प्रश्न 4.
मानव उद्भव के क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के पक्ष में दिए गए तर्कों पर चर्चा करिए। क्या आपके विचार से यह मॉडल पुरातात्विक साक्ष्य का युक्तियुक्त स्पष्टीकरण देता है ?
उत्तर:
आधुनिक मानव का उद्भव कहाँ हुआ इस संबंध में इतिहासकार एक मत नहीं है। कुछ विद्वान् क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल का समर्थन करते हैं। उनके विचारानुसार आधुनिक मानव की उत्पत्ति किसी एक विशेष क्षेत्र में नहीं अपितु अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप के विभिन्न भागों में हुई है। उनका मानना है कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं वे इस कारण हैं कि उसका उद्भव विभिन्न भागों में हुआ।

इस अंतर को स्पष्टतः आज भी देखा जा सकता है। कुछ अन्य विद्वान् प्रतिस्थापन मॉडल का समर्थन करते हैं। उनका कथन है कि आधुनिक मानव का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ। अपने पक्ष में वे तर्क देते हैं कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक एवं जननिक समरूपता पाई जाती है उसका कारण यह था कि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। यहाँ से वे विश्व के विभिन्न भागों में फैले।

प्रश्न 5.
आस्ट्रेलोपिथिकस मानव के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस शब्द लातीनी भाषा के शब्द ‘आस्ट्रल’ भाव दक्षिणी एवं यूनानी भाषा के शब्द ‘पिथिकस’ भाव बंदर से मिल कर बना है। इसका कारण यह था कि मानव के इस रूप में बंदर के अनेक लक्षण बरकरार रहे। आस्ट्रेलोपिथिकस के सबसे प्राचीन जीवाश्म हमें तंज़ानिया के ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं। इसकी खोज 17 जुलाई, 1959 ई० को मेरी एवं लुईस लीकी ने की थी। उनके जीवाश्म 56 लाख वर्ष पुराने थे। होमो की तुलना में उनके मस्तिष्क का आकार छोटा था। उनके जबड़े अधिक भारी थे एवं दाँत भी ज़्यादा बड़े होते थे।

आस्ट्रेलोपिथिकस बंदरों की अपेक्षा अधिक समझदार थे। वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे। उनमें सीधे खड़े होकर चलने की क्षमता अधिक नहीं थी। इसका कारण यह था कि वे अभी भी अपना काफी समय पेड़ों पर गुजारते थे। वे अपनी सरक्षा के लिए औज़ारों का निर्माण करने लगे थे। लगभग 25 लाख वर्ष पूर्व ध्रुवीय हिमाच्छादन अथवा हिम युग के प्रारंभ से पृथ्वी के बड़े-बड़े भाग बर्फ से ढक गए। इस कारण जलवायु एवं वनस्पति की स्थिति में बहुत परिवर्तन हुए। तापमान एवं वर्षा में कमी के कारण पृथ्वी पर वन कम हो गए। इसके चलते 13 लाख वर्ष पूर्व आस्ट्रेलोपिथिकस लुप्त हो गए।

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प्रश्न 6.
‘होमो’ शब्द से आप क्या समझते हैं ? इन्हें किन-किन प्रजातियों में बाँटा गया है ?
उत्तर:
होमो 25 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। होमो लातीनी भाषा का एक शब्द है। इसका भाव है में पुरुष एवं स्त्रियाँ दोनों सम्मिलित थे। आस्ट्रेलोपिथिकस की तुलना में होमो का मस्तिष्क बड़ा था, जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए थे एवं दाँत छोटे थे। वैज्ञानिकों द्वारा होमो को निम्नलिखित तीन प्रमुख प्रजातियों में बाँटा गया है

1) होमो हैबिलिस-होमो हैबिलिस औज़ार बनाने वाले के नाम से जाने जाते हैं। उनका मस्तिष्क बड़ा था। वे आस्ट्रेलोपिथिकस की अपेक्षा अधिक समझदार थे। वे अपने हाथों का दक्षतापूर्वक प्रयोग कर सकते थे। वे प्रथम होमिनिड थे जिन्होंने पत्थर के औजार बनाए।

2) होमो एरेक्टस-होमो एरेक्टस वे मानव थे जो सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलना जानते थे। वे दौड़ सकते थे। वे अपने हाथों का स्वतंत्रतापूर्वक उपयोग कर सकते थे। उन्होंने होमो हैबिलिस की अपेक्षा अधिक विकसित औज़ारों का निर्माण किया। उन्होंने भाषा का भी अधिक विकास कर लिया था। उन्होंने आग के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर ली थी। इससे उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

3) होमो सैपियंस-होमो सैपियंस से अभिप्राय है समझदार मानव। उसे आधुनिक मानव के नाम से भी जाना जाता है। इस मानव का प्रादुर्भाव 1.95 लाख वर्ष पूर्व से 1.60 लाख वर्ष के दौरान हुआ। आधुनिक मानव की अनेक ऐसी विशेषताएँ थीं जो उसे पहले के मानव से अलग करती हैं। उस मानव का मस्तिष्क अब तक के सभी मानवों में सबसे बड़ा था। अतः वह सबसे समझदार था। इस कारण उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। उसने गुफ़ाओं के अतिरिक्त अपने निवास के लिए झोंपड़ियों का निर्माण आरंभ कर दिया था। वह अब एक स्थायी रूप से निवास करने लगा था। उसने अब कृषि करनी आरंभ कर दी थी।

प्रश्न 7.
होमो एरेक्टस से आपका क्या अभिप्राय है ? उनकी क्या विशेषताएँ थीं ?
अथवा
‘होमो एरेक्टस’ मानव के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
उन मानवों को जो सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलना जानते थे होमो एरेक्टस कहा जाता था। वे दौड़ सकते थे। वे अपने हाथों का स्वतंत्रतापूर्वक उपयोग कर सकते थे। होमो एरेक्टस के प्राचीनतम जीवाश्म 18 लाख वर्ष पूर्व के हैं। ये जीवाश्म हमें अफ्रीका एवं एशिया दोनों महाद्वीपों से प्राप्त हुए हैं। होमो एरेक्टस का मस्तिष्क होमो हैबिलिस की अपेक्षा अधिक बड़ा था। अत: वे अधिक समझदार थे।

उन्होंने होमो हैबिलिस की अपेक्षा अधिक विकसित औज़ारों का निर्माण किया। उन्होंने भाषा का भी अधिक विकास कर लिया था। उन्होंने आग के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर ली थी। इससे उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आया। आग के संबंध में हमें प्रथम साक्ष्य केन्या के चेसोवांजा से प्राप्त हुआ है। निस्संदेह होमो एरेक्टस मानव विकास की कड़ी में एक मील पत्थर सिद्ध हुए।

प्रश्न 8.
प्रतिस्थापन मॉडल एवं क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
1) प्रतिस्थापन मॉडल-आधुनिक मानव के उद्भव के बारे में कुछ विद्वान् प्रतिस्थापन मॉडल का समर्थन करते हैं। उनके अनुसार आधुनिक मानव का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका में हुआ। अपने पक्ष में वे यह तर्क देते हैं कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक एवं जननिक समरूपता पाई जाती है उसका कारण यह था कि उनके पूर्वज एक ही क्षेत्र अर्थात् अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। यहाँ से वे विभिन्न स्थानों में गए।

2) क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल-दूसरी ओर कुछ अन्य विद्वान् क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल का समर्थन करते हैं। उनके विचारानुसार आधुनिक मानव की उत्पत्ति अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप के विभिन्न भागों में हुई। अपने पक्ष में वे यह तर्क देते हैं कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं वे इस कारण हैं कि उसका उद्भव विभिन्न भागों में हुआ। इस अंतर को स्पष्टतः आज भी देखा जा सकता है।
HBSE 11th Class History Important Questions Chapter 1 iMG 6

प्रश्न 9.
होमो सैपियंस मानव की प्रमुख विशेषताएँ क्या थी ?
उत्तर:
होमो सैपियंस से अभिप्राय है समझदार मानव। उसे आधुनिक मानव के नाम से भी जाना जाता है। इस मानव का प्रादुर्भाव 1.95 लाख वर्ष पूर्व से 1.60 लाख वर्ष पूर्व के दौरान हुआ। आधुनिक मानव की अनेक ऐसी विशेषताएँ थीं जो उसे पहले के मानव से अलग करती हैं। इस मानव का मस्तिष्क अब तक के सभी मानवों में सबसे बड़ा था। अतः वह सबसे समझदार था। इस कारण उसके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए। उसने गुफ़ाओं के अतिरिक्त अपने निवास के लिए झोंपड़ियों का निर्माण आरंभ कर दिया था।

वह अब एक स्थायी रूप से निवास करने लगा था। उसने अब कृषि करनी आरंभ कर दी थी। इससे उसे भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ा। उसने अब खाना पकाने की विधि की जानकारी प्राप्त कर ली थी। उसके हथियार बहुत उत्तम थे। उसने अनेक नए हथियारों का निर्माण भी कर लिया था। इससे वह जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा अधिक अच्छे ढंग से कर सका। उसने सूई का आविष्कार कर लिया था। अतः उसने सिले हुए वस्त्र पहनने आरंभ कर दिए थे। एवं भाषा के क्षेत्रों में काफ़ी विकास कर लिया था।

प्रश्न 10.
आदि मानव के भोजन प्राप्त करने के तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदिकालीन मानव निम्नलिखित तरीकों से अपना भोजन प्राप्त करते थे
1) संग्रहण-आदिकालीन मानव पूर्ण रूप से प्रकृति जीवी थे। उन्हें कृषि की जानकारी नहीं थी। वे पशुपालन भी नहीं करते थे। अत: आरंभ में आदिकालीन मानव अपना भोजन संग्रहण द्वारा जुटाता था। वे पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों जैसे-बीज, गुठलियाँ, फल एवं कंदमूल एकत्र करते थे। संग्रहण के बारे में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है। इस संबंध में हमें प्रत्यक्ष प्रमाण बहत कम मिले हैं। संग्रहण द्वारा भोजन जुटाने का मुख्य कार्य स्त्रियों एवं बच्चों द्वारा किया जाता था। पुरुष मुख्य रूप से शिकार के लिए बाहर जाते थे।

2) अपमार्जन-आदिकालीन मानव अपमार्जन द्वारा अथवा रसदखोरी द्वारा भी अपना भोजन प्राप्त करता था। अपमार्जन से अभिप्राय त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है। रसदखोरी से अभिप्राय भोजन की तलाश करना है। आदिकालीन मानव उन जानवरों से जो अपने आप मर जाते थे अथवा किसी अन्य हिंसक जानवर द्वारा मार दिए जाते थे, की लाशों से माँस एवं मज्जा प्राप्त करते थे।

3) शिकार-शिकार द्वारा भोजन प्राप्त करना आदिकालीन मानव का महत्त्वपूर्ण स्रोत रहा है। शिकार मुख्यतः पुरुषों द्वारा किया जाता था। वे शिकार का पीछा करते हुए अपने निवास स्थान से काफ़ी दूर तक निकल जाते थे। वे छोटे-मोटे पशुओं का शिकार स्वयं कर लेते थे। वे बड़े पशुओं का शिकार सम्मिलित रूप से करते थे। इसका कारण यह था कि बड़े पशुओं का अकेले शिकार करने में उनके स्वयं के मारे जाने का खतरा अधिक रहता था।

वे जंगली घोड़ों, जंगली भैंसों जिन्हें बाइसन कहा जाता था, गैंडों, रीछों एवं विशालकाय जानवरों जिन्हें मैमथ कहा जाता था, का शिकार करते थे। वे शिकार के लिए भालों एवं पत्थरों का प्रयोग करते थे। बाद में कुत्तों ने आदिमानव को शिकार के लिए बहुमूल्य योगदान दिया।

4) मछली पकड़ना-मछली पकड़ना भी आदिकालीन मानव का भोजन प्राप्त करने की एक महत्त्वपूर्ण विधि थी। वे नदियों एवं तालाबों से हाथ द्वारा ही मछली पकड़ लिया करते थे। इसके अतिरिक्त वे छोटी मछली पकड़ने के लिए काँटे का एवं बड़ी मछली पकड़ने के लिए हार्पून का प्रयोग भी करते थे।

प्रश्न 11.
संग्रहण और अपमार्जन से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
1) संग्रहण-आदिकालीन मानव पूर्ण रूप से प्रकृति जीवी थे। उन्हें कृषि की जानकरी नहीं थी। इसके अतिरिक्त वे पशुपालन भी नहीं करते थे। अतः आरंभ में आदिकालीन मानव अपना भोजन संग्रहण द्वारा जुटाता था। वे पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों जैसे-बीज, गुठलियाँ, फल एवं कंदमूल एकत्र करते थे। संग्रहण के बारे में तो केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है।

इस संबंध में हमें प्रत्यक्ष प्रमाण बहुत कम मिले हैं। इसका कारण यह है कि हमें हड्डियों के जीवाश्म तो काफ़ी संख्या में प्राप्त हुए हैं जबकि पौधों के जीवाश्म बहुत कम प्राप्त हुए हैं। संग्रहण द्वारा भोजन जुटाने का मुख्य कार्य स्त्रियों एवं बच्चों द्वारा किया जाता था। पुरुष मुख्य रूप से शिकार के लिए बाहर जाते थे।

2) अपमार्जन-आदिकालीन मानव अपमार्जन द्वारा अथवा रसदखोरी द्वारा भी अपना भोजन प्राप्त करता था। अपमार्जन से अभिप्राय त्यागी हुई वस्तुओं की सफाई करने से है। रसदखोरी से अभिप्राय भोजन की तलाश करना है। आदिकालीन मानव उन जानवरों से जो अपने आप मर जाते थे अथवा किसी अन्य हिंसक जानवर द्वारा मार दिए जाते थे, की लाशों से माँस एवं मज्जा प्राप्त करते थे। इनके अतिरिक्त वे छोटे-छोटे पक्षियों एवं उनके अंडों, गों चूहों एवं अनेक प्रकार के कीड़े-मकोड़ों को खाते थे।

प्रश्न 12.
आदिमानव शिकार द्वारा भोजन किस प्रकार प्राप्त करता था ?
उत्तर:
शिकार द्वारा भोजन प्राप्त करना आदिकालीन मानव का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत रहा है। शिकार प्रमुख तौर पर पुरुषों द्वारा किया जाता था। वे शिकार का पीछा करते हुए अपने निवास स्थान से काफ़ी दूर तक निकल जाते थे। वे छोटे-मोटे पशुओं का शिकार स्वयं कर लेते थे। वे बड़े पशुओं का शिकार सम्मिलित रूप से करते थे।

इसका कारण यह था कि बड़े पशुओं का अकेले शिकार करने में उनके स्वयं के मारे जाने की संभावना अधिक रहती थी। वे जंगली घोड़ों, जंगली भैंसों जिन्हें बाइसन कहा जाता था, गैंडों, रीछों एवं विशालकाय जानवरों जिन्हें मैमथ कहा जाता था, का शिकार करते थे। वे शिकार के लिए भालों एवं पत्थरों का प्रयोग करते थे। बाद में आदिमानव ने शिकार के लिए कुत्तों का सहयोग लेना आरंभ कर दिया था।

योजनाबद्ध ढंग से स्तनपायी जानवरों का। उनका वध करने की सबसे परानी उदाहरण हमें दो स्थलों से मिलती है। प्रथम उदाहरण 5 लाख वर्ष पर्व की है। यह दक्षिणी इंग्लैंड में बॉक्सग्रोव से संबंधित है। दूसरी उदाहरण 4 लाख वर्ष पूर्व की है। यह जर्मनी में शोनिंजन से संबंधित है।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 13.
अग्नि का आविष्कार किस प्रकार आदिमानव के लिए क्रांतिकारी सिद्ध हुआ ?
उत्तर:
अग्नि का आविष्कार आदिमानव के जीवन में क्रांतिकारी प्रमाणित हुआ। इसका आविष्कार कब हुआ इस संबंध में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। इसके प्रथम साक्ष्य हमें केन्या में चेसोवांजा एवं दक्षिणी अफ्रीका में स्वार्टक्रांस से प्राप्त हुए हैं। यहाँ से पत्थर के औजारों के साथ-साथ आग में पकाई गई चिकनी मिट्टी और जली हुई हड्डियों के अंश प्राप्त हुए हैं। ये 14 लाख वर्ष पूर्व के हैं। इन वस्तुओं को किस प्रकार आग लगी, इस संबंध में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। अग्नि का आविष्कार मानव के लिए अनेक पक्षों से बहुमूल्य प्रमाणित हुआ।

प्रथम, आग से जंगली जावरों को डर लगता था। अत: आदिमानव अग्नि से गुफ़ाओं को प्रज्वलित रखने लगा। इस कारण उसे जंगली जानवरों, से सुरक्षा प्राप्त हुई। दूसरा, अग्नि की सहायता से आदिमानव के लिए भयंकर शीत से बचाव सुगम हो गया। तीसरा, इस कारण गुफ़ाओं के अंदर जहाँ अंधेरा रहता था प्रकाश करना संभव हुआ। चौथा, अग्नि की सहायता से भोजन को पकाना संभव हुआ। यह कच्चे भोजन की अपेक्षा अधिक स्वाद होता था।

प्रश्न 14.
आदिमानव के औज़ारों के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
आदिमानव के औजार पत्थर से निर्मित थे। संभवतः वे लकड़ी के औजार भी बनाते थे। किंतु लकड़ी के औज़ार समय के साथ नष्ट हो गए। पत्थर के बने औज़ारों को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है। प्रथम श्रेणी में आने वाले औज़ारों को हस्त कुठार कहा जाता है। हस्त कुठारों को मुट्ठी में पकड़ा जाता था। ये अनेक प्रकार के होते थे। इनका प्रयोग किसी वस्तु को काटने अथवा किसी वस्तु को कुचलने के लिए किया जाता था। इस प्रकार के औज़ार हमें बड़ी संख्या में तंजानिया के ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं।

दूसरी श्रेणी में गंडासे सम्मिलित थे। उन्हें भारी पत्थरों से तैयार किया जाता था। इसमें शल्कों को निकाल कर धारदार बनाया जाता था। इनका प्रयोग संभवतः माँस काटने के लिए किया जाता था। इस प्रकार के हथियार हमें बड़ी संख्या में एशिया, अफ्रीका एवं यूरोप के अनेक स्थानों से प्राप्त हुए हैं। तीसरी श्रेणी में शल्क औज़ार सम्मिलित थे। ये हस्त कुठारों एवं गंडासों की अपेक्षा छोटे एवं पतले होते थे। इनके किनारे अधिक पैने होते थे। ये औज़ार अधिक उपयोगी तथा दूर तक प्रहार करने में सक्षम होते थे।

प्रश्न 15.
मानव ने बोलना कैसे सीखा ?
अथवा
भाषा का विकास किस प्रकार हुआ ?
उत्तर:
भाषा का विकास किस प्रकार हुआ इस संबंध में अनेक मत प्रचलित हैं।

  • होमिनिड भाषा में हाव-भाव अथवा हाथों का संचालन सम्मिलित था।
  • उच्चरित भाषा से पूर्व गुनगुनाने का प्रचलन हुआ।
  • मानव भाषा का आरंभ संभवत: बुलावों की क्रिया से हुआ था जैसा कि अन्य प्राइमेटों द्वारा किया जाता था। समय के साथ-साथ इन ध्वनियों ने भाषा का रूप धारण कर लिया।

बोलने वाली भाषा का आरंभ कब हुआ इस संबंध में विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार भाषा का सबसे पहले विकास 20 लाख वर्ष पूर्व हुआ था। कुछ अन्य विद्वानों के अनुसार इसका विकास 2 लाख वर्ष पूर्व हुआ था जब स्वरतंत्र का विकास हुआ था। इसका संबंध विशेष तौर पर आधुनिक मानव से है। कुछ अन्य विद्वानों के विचारानुसार भाषा का विकास 40,000 से 35,000 वर्ष पूर्व तब हुआ जब कला का विकास आरंभ हुआ। इसका कारण यह है कि ये दोनों ही विचार अभिव्यक्ति के माध्यम हैं। भाषा के प्रयोग से शिकार करने में तथा आश्रय बनाने में अनेक लाभ हुए।।

प्रश्न 16.
भाषा के प्रयोग से (क) शिकार करने और (ख) आश्रय बनाने के काम में कितनी मदद मिली होगी ? उस पर चर्चा करिए।
उत्तर:
1) शिकार करने में-भाषा का प्रयोग शिकार करने में निम्नलिखित पक्षों से बहुमूल्य प्रमाणित हुआ

  • लोग शिकार करने की योजना बना सकते थे।
  • वे जानवरों के क्षेत्रों के संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे जानवरों की प्रकृति पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे शिकार के लिए आवश्यक औज़ारों पर विचार कर सकते थे।
  • वे मारे गए जानवरों के उपयोग के संबंध में चर्चा कर सकते थे।

2) आश्रय बनाने में-भाषा का प्रयोग आश्रय बनाने में निम्नलिखित पक्षों से बहुमूल्य प्रमाणित हुआ

  • लोग आश्रय बनाने के लिए सुरक्षित क्षेत्रों पर चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के लिए उपलब्ध सामग्री की जानकारी प्राप्त कर सकते थे।
  • वे आश्रय बनाने के तरीकों के संबंध में चर्चा कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल के निकट उपलब्ध सुविधाओं पर विचार-विमर्श कर सकते थे।
  • वे आश्रय स्थल को जंगली जानवरों एवं भयंकर तूफ़ानों से सुरक्षित रखने के उपायों के बारे में सोच सकते थे।

प्रश्न 17.
हादज़ा जन समूह के विषय में आपके क्या जानते हो ?
उत्तर:
हादज़ा एक लघु समूह है जो एक खारे पानी की झील ‘लेक इयासी’ के आस-पास रहते हैं। वे शिकारी तथा खाद्य संग्राहक हैं। हादज़ा लोग केवल हाथी को छोड़ कर अन्य सभी प्रकार के जानवरों का शिकार करते हैं .एवं उनका माँस खाते हैं। यहाँ यह बात स्मरण रखने योग्य है कि हादज़ा लोग विश्व में सबसे अधिक माँस खाते हैं।

इसके बावजूद वे इस बात का ख्याल रखते हैं कि शिकार को भविष्य में कोई ख़तरा न हो। वर्षा ऋतु में संपूर्ण देश में जल स्रोतों की कोई कमी नहीं रहती। ये बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। किंतु सूखे के मौसम में इनमें से अधिकाँश सूख जाते हैं। इसलिए वे प्रायः अपने शिविर जल स्रोतों से एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थापित नहीं करते हैं। हादज़ा लोग ज़मीन और उसके संसाधनों पर अपना दावा नहीं करते।

कोई भी व्यक्ति जहाँ चाहे वहाँ रह सकता है। वह वहाँ से कंदमूल, फल एवं शहद एकत्र कर सकता है तथा पानी ले सकता है। वास्तव में इस संबंध में हादज़ा प्रदेश में कोई प्रतिबंध नहीं है। यद्यपि हादज़ा प्रदेश में बड़ी मात्रा में जानवर शिकार के लिए उपलब्ध हैं फिर भी हादज़ा लोग अपने भोजन का 80 प्रतिशत जंगली साग-सब्जियों से प्राप्त करते हैं। वे अपने भोजन का शेष 20 प्रतिशत माँस एवं शहद से प्राप्त करते हैं।

अति संक्षिप्त उत्तरों वाले प्रश्न

प्रश्न 1.
जीवाश्म से आपका क्या अभिप्राय है ?
अथवा
जीवाश्म से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
जीवाश्म अत्यंत प्राचीन पौधे, जानवर अथवा मानव के वे अवशेष होते हैं जो अब पत्थर का रूप धारण करके किसी चट्टान में समा गए हैं। ये लाखों वर्ष तक सुरक्षित रहते हैं।

प्रश्न 2.
प्रजाति अथवा स्पीशीज़ से आपका क्या भाव है ?
उत्तर:
प्रजाति अथवा स्पीशीज़ जीवों का एक ऐसा समूह होता है जिसके नर एवं मादा मिल कर संतान उत्पन्न कर सकते हैं। किसी एक प्रजाति के जीव किसी दूसरी प्रजाति के जीव के साथ संभोग करके संतान उत्पन्न नहीं कर सकते।

प्रश्न 3.
चार्ल्स डार्विन कौन था ? उसने कौन-सा सिद्धांत पेश किया ?
अथवा
चार्ल्स डार्विन क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:
चार्ल्स डार्विन (1809-1882 ई०) ब्रिटेन का एक प्रसिद्ध विद्वान् था। उसने 1859 ई० में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक जिसका नाम ‘ऑन दि ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़’ प्रकाशित की। इसमें उसने मानव उत्पत्ति के संबंध में विस्तृत प्रकाश डाला है।

प्रश्न 4.
मानव विज्ञान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
मानव विज्ञान एक ऐसा विषय है जिसमें मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के उद्विकासीय पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 5.
प्राइमेट से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
प्राइमेट स्तनधारियों के विशाल समूह में एक छोटा समूह है। इस उपसमूह में बंदर, पूंछहीन बंदर एवं मानव सम्मिलित हैं। प्राइमेट 360 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए।

प्रश्न 6.
प्राइमेट की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • इनके शरीर पर बाल होते थे।
  • इनका गर्भकाल अपेक्षाकृत लंबा होता था।

प्रश्न 7.
होमिनॉइड कब अस्तित्व में आए ? उनकी कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
अथवा
होमिनॉइड कौन थे ?
उत्तर:

  • होमिनॉइड 240 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए।
  • इनका मस्तिष्क छोटा होता था।
  • होमिनॉइड सीधे खड़े होकर नहीं चल सकते थे।

प्रश्न 8.
होमिनॉइड एवं बंदरों में कोई दो अंतर बताएँ।
उत्तर:

  • होमिनॉइड का शरीर बंदरों से बड़ा होता था।
  • उनकी पूँछ नहीं होती थी।

प्रश्न 9.
होमिनिड की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • इनके मस्तिष्क का आकार बड़ा होता था।
  • वे सीधे खड़े हो सकते थे।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 10.
होमिनिड तथा होमिनॉइड के मध्य कोई दो अंतर बताएँ।
उत्तर:

  • होमिनिड सीधे खड़े होकर चल सकते थे। होमिनॉइड ऐसा नहीं कर सकते थे।
  • होमिनिड का मस्तिष्क होमिनॉइड की अपेक्षा बड़ा था।

प्रश्न 11.
आस्ट्रेलोपिथिकस के सबसे प्राचीन जीवाश्म किसने, कब तथा कहाँ से प्राप्त किए ?
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस के सबसे प्राचीन जीवाश्म मेरी एवं लुईस लीकी ने, 17 जुलाई, 1959 ई० को ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त किए।

प्रश्न 12.
आस्ट्रेलोपिथिकस की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • इनके जबड़े अधिक भारी थे।
  • इनके दाँत बहुत बड़े थे।

प्रश्न 13.
आस्ट्रेलोपिथिकस एवं होमो में कोई दो अंतर लिखें।
उत्तर:

  • आस्ट्रेलोपिथिकस का मस्तिष्क होमो की तुलना में छोटा था।
  • आस्ट्रेलोपिथिकस के जबड़े होमो की तुलना में भारी थे।

प्रश्न 14.
‘होमो’ शब्द से आप क्या समझते हैं ? ‘होमो’ की तीन प्रजातियाँ बताएँ।।
उत्तर:
होमो लातीनी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है आदमी। वे 25 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। वैज्ञानिकों ने उन्हें उनकी विशेषताओं के आधार पर तीन प्रजातियों-होमो हैबिलिस, होमो एरेक्टस तथा होमो सैपियंस में बाँटा है।

प्रश्न 15.
होमो की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • होमो का मस्तिष्क बड़ा था।
  • उनके जबड़े बाहर की ओर कम निकले हुए थे।

प्रश्न 16.
होमो हैबिलिस कौन थे ?
उत्तर:
होमो हैबिलिस औजार बनाने वाले थे। वे 22 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। उनका मस्तिष्क बड़ा था। वे हाथों का दक्षतापूर्वक प्रयोग कर सकते थे। उन्होंने भाषा का प्रयोग आरंभ किया। उनके प्राचीनतम जीवाश्म हमें इथियोपिया में ओमो तथा तंज़ानिया में ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 17.
होमो एरेक्टस से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
होमो एरेक्टस वे मानव थे जो सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलना जानते थे। उनके प्राचीनतम जीवाश्म हमें अफ्रीका एवं एशिया से प्राप्त हुए हैं। वे बहुत समझदार थे। उन्होंने भाषा का अधिक विकास कर लिया था। उन्होंने अग्नि के संबंध में जानकारी प्राप्त कर ली थी।

प्रश्न 18.
होमो सैपियंस से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
होमो सैपियंस से अभिप्राय है समझदार मानव। उसे आधुनिक मानव के नाम से भी जाना जाता है। यह मानव 1.95 से 1.60 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया। इस मानव के प्राचीनतम जीवाश्म हमें अफ्रीका से प्राप्त हुए हैं।

प्रश्न 19.
आधुनिक मानव की कोई दो सफलताएँ लिखें।
उत्तर:

  • उसने कृषि आरंभ कर दी थी।
  • उसने सिले हुए वस्त्र पहनने आरंभ कर दिए थे।

प्रश्न 20.
प्रतिस्थापन मॉडल से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
प्रतिस्थापन मॉडल इस बात का समर्थन करता है कि आधुनिक मानव का उद्भव एक ही स्थान अफ्रीका अपने पक्ष में वे तर्क देते हैं कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक एवं जननिक समरूपता पाई जाती है उसका कारण यह था कि उसके पूर्वज एक ही क्षेत्र भाव अफ्रीका में उत्पन्न हुए थे। यहाँ से वे अन्य स्थानों को गए।

प्रश्न 21.
क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल इस बात का समर्थन करता है कि आधुनिक मानव की उत्पत्ति अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप के विभिन्न भागों में हुई। अपने पक्ष में तर्क देते हुए उनका कथन है कि आधुनिक मानव में जो शारीरिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं वे इस कारण हैं कि उसका उद्भव विभिन्न भागों में हुआ।

प्रश्न 22.
हाइडलबर्ग मानव की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  • उसका मस्तिष्क काफी बड़ा था।
  • उसके अंग एवं हाथ काफी भारी थे।

प्रश्न 23.
निअंडरथल मानव की कोई दो विशेषताएँ क्या थी ?
उत्तर:

  • यह मानव कद में छोटा था।
  • उसका सिर काफी बड़ा था।

प्रश्न 24.
क्रोमैगनन मानव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
क्रोमैगनन मानव के जीवाश्म हमें फ्राँस से प्राप्त हुए हैं। यह मानव आज से 35 हज़ार वर्ष पहले रहा करता था। वह काफी लंबा होता था। उसका चेहरा काफी चौड़ा होता था। वह आधुनिक मानव से काफी मिलता जुलता था।

प्रश्न 25.
जावा मानव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जावा मानव के जीवाश्म 1894 ई० में डॉक्टर यूजन दुबोरस ने जावा से प्राप्त किए थे। यह मानव लगभग 5 लाख वर्ष पहले रहा करता था। इसका मस्तिष्क आधुनिक मानव से छोटा था। वह खड़ा होकर चलता था।

प्रश्न 26.
आदिकालीन मानव किन-किन तरीकों से अपना भोजन प्राप्त करता था ?
उत्तर:
आदिकालीन मानव संग्रहण द्वारा, अपमार्जन द्वारा, शिकार करके एवं मछलियाँ पकड़ कर अपना भोजन प्राप्त करता था।

प्रश्न 27.
अपमार्जन और संग्रहण से आप क्या समझते हैं ?
अथवा
संग्रहण से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
1) अपमार्जन-अपमार्जन से अभिप्राय त्यागी हुई वस्तुओं की सफ़ाई करने से है। आदिकालीन मानव उन जानवरों से जो अपने आप मर जाते थे अथवा किसी अन्य हिंसक जानवर द्वारा मार दिए जाते थे, की लाशों से माँस एवं मज्जा प्राप्त करते थे।

2) संग्रहण-संग्रहण से अभिप्राय है जुटाना। आदिकालीन मानव अपना भोजन संग्रहण द्वारा जुटाता था। वह पेड़-पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों को एकत्र करता था। यह कार्य मुख्य तौर पर स्त्रियों एवं बच्चों द्वारा किया जाता था।

प्रश्न 28.
खाद्य संग्राहक और खाद्य उत्पादक शब्दों का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:

  • खाद्य संग्राहक-इससे अभिप्राय उस मानव से था जो जंगली पौधे खाकर एवं शिकार करके अपना गुजारा करता था।
  • खाद्य उत्पादक-इससे अभिप्राय उस मानव से था जो खेती करता था एवं पशु पालता था।

प्रश्न 29.
योजनाबद्ध ढंग से स्तनपायी जानवरों के शिकार करने की सबसे प्रथम उदाहरण कब और कहाँ से प्राप्त हुई है ?
उत्तर:
योजनाबद्ध ढंग से शिकार करने की सबसे प्रथम उदाहरण 5 लाख वर्ष पूर्व इंग्लैंड में बॉक्सग्रोव से प्राप्त हुई है।

प्रश्न 30.
दोलनी वेस्तोनाइस कहाँ स्थित है ? यह क्यों प्रसिद्ध था ?
उत्तर:

  • दोलनी वेस्तोनाइस चेक गणराज्य में स्थित है।
  • यह शिकार के स्थल के लिए प्रसिद्ध था।

प्रश्न 31.
आदिमानव के गुफ़ाओं में निवास के कोई दो लाभ बताएँ।
उत्तर:

  • इससे जंगली जानवरों से आदिमानव को सुरक्षा प्राप्त हुई।
  • इससे आदिमानव भयंकर शीत का सामना सुगमता से कर सका।

प्रश्न 32.
लेज़रेट गुफ़ा कहाँ स्थित है ? इसका आकार क्या है ?
उत्तर:

  • लेज़रेट गुफा दक्षिण फ्रांस में स्थित है।
  • इसका आकार 12×4 मीटर है।

प्रश्न 33. टेरा अमाटा कहाँ स्थित है ? इसकी कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  • टेरा अमाटा दक्षिण फ्राँस में स्थित है।
  • इसकी छत घास-फस एवं लकडी से बनायी गयी थी।
  • इस झोंपड़ी को सहारा देने के लिए बड़े-बड़े पत्थरों का प्रयोग किया गया था।

प्रश्न 34.
चेसोवांजा कहाँ स्थित है ? वहाँ से हमें किस बात का प्रमाण मिला है ?
उत्तर:

  • चेसोवांजा केन्या में स्थित है।
  • वहाँ से हमें पत्थर के औज़ारों के साथ-साथ आग में पकाई गई चिकनी मिट्टी एवं जली हुई हड्डियों के प्रमाण मिले हैं।

प्रश्न 35.
आग की खोज ने आदिमानव के जीवन को कैसे प्रभावित किया ?
अथवा
आग की खोज का महत्त्व लिखिए।
उत्तर:

  • अग्नि के कारण आदिमानव अपने भोजन को पका सका।
  • अग्नि के कारण आदिमानव भयंकर शीत से अपना बचाव कर सका।
  • अग्नि के कारण आदिमानव जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा कर सका।

प्रश्न 36.
पहिए की खोज का महत्त्व लिखिए।
अथवा
पहिए के आविष्कार ने मानव जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन लाए ?
उत्तर:

  • चाक की सहायता से अब पहले की अपेक्षा कहीं सुंदर बर्तन बनाए जाने लगे।
  • चरखे के कारण अब कपास कातना सरल हो गया।
  • पहिए का उपयोग गाड़ी खींचने के लिए भी किया जाने लगा। इससे मनुष्य एवं सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सुगम हो गया।

प्रश्न 37.
आदिमानव के प्राचीन औज़ार किस वस्तु के बने थे ? किन्हीं दो प्रकार के औज़ारों के नाम लिखें।
उत्तर:

  • आदिमानव के प्राचीन औज़ार पत्थर के बने थे।
  • उस समय हस्त कुठारों एवं गंडासों का प्रयोग होता था।

प्रश्न 38.
मानव ने बोलना कैसे सीखा?
उत्तर:
मानव ने भाषा के विकास के साथ-साथ बोलना सीखा। इसका आरंभ बोलने वाली क्रिया से हुआ। बाद में इसने ध्वनियों का रूप धारण कर लिया।

प्रश्न 39.
भाषा का विकास शिकार करने में किस प्रकार सहायक सिद्ध हुआ ?
उत्तर:

  • इस कारण लोग शिकार संबंधी योजना बना सके।
  • इस कारण वे शिकार के लिए आवश्यक औज़ारों पर विचार कर सके।
  • इस कारण वे मारे गए जानवरों के उपयोग के संबंध में चर्चा कर सके।

प्रश्न 40.
भाषा का विकास किस प्रकार आश्रय बनाने में सहायक सिद्ध हुआ ?
उत्तर

  • इस कारण लोग आश्रय बनाने के लिए सुरक्षित क्षेत्रों की चर्चा कर सके।
  • वे आश्रय बनाने के लिए आवश्यक सामग्री पर चर्चा कर सके।
  • वे आश्रय स्थल की जंगली जानवरों से सुरक्षा के बारे में विचार कर सके।

प्रश्न 41.
आल्टामीरा गुफ़ा कहाँ स्थित है ? इसकी खोज किसने तथा कब की ? यह क्यों प्रसिद्ध है ?
उत्तर:

  • आल्टामीरा गुफ़ा स्पेन में स्थित है।
  • इसकी खोज मार्सिलोना सैंज दि सउतुओला एवं उसकी पुत्री मारिया ने की।
  • यह चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 42.
आल्टामीरा एवं चाउवेट गुफ़ाओं से हमें किन जानवरों के चित्र प्राप्त हुए हैं ?
उत्तर:
आल्टामीरा एवं चाउवेट गुफ़ाओं से हमें बड़ी संख्या में जंगली भैंसों, बैलों, घोड़ों, पहाड़ी बकरों, हिरणों, मैमथों, गैंडों, शेरों, भालुओं, चीतों, लकड़बग्घों एवं उल्लुओं के चित्र प्राप्त हुए हैं।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 43.
मानव विज्ञान से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
मानव विज्ञान से अभिप्राय एक ऐसे विज्ञान से है जिसमें मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के उद्विकासीय पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 44.
हादज़ा जनसमूह के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:

  • हादजा एक लघु समूह है जो लेक इयासी के आस-पास के क्षेत्रों में रहते हैं।
  • वे शिकारी एवं खाद्य-संग्राहक थे।
  • वे भूमि एवं उसके संसाधनों पर कभी अधिकार नहीं जमाते।

प्रश्न 45.
हादज़ा जनसमूह के भोजन के बारे में बताएँ।
उत्तर:

  • उनका 80% भोजन जंगली साग-सब्जियाँ हैं।
  • उनका 20% भोजन माँस एवं शहद द्वारा पूरा किया जाता है।
  • वे हाथी को छोड़कर अन्य सभी जानवरों का माँस खाते हैं।

प्रश्न 46.
हादज़ा लोग ज़मीन एवं उसके संसाधनों पर अपना दावा क्यों नहीं करते ?
उत्तर:

  • वे जहाँ चाहें वहाँ रह सकते हैं।
  • उन्हें कहीं भी पशुओं का शिकार करने की पूर्ण स्वतंत्रता है।
  • वे कहीं से भी कंदमूल एवं शहद एकत्र कर सकते हैं।

प्रश्न 47.
हादज़ा लोगों के पास सूखा पड़ने पर भी भोजन की कमी क्यों नहीं होती ?
उत्तर:
हादज़ा लोगों के पास सूखे के मौसम में भी कंदमूल, बेर, बाओबाब पेड़ के फल बड़ी मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इसलिए उनके पास भोजन की कमी नहीं होती।

प्रश्न 48.
हादज़ा लोगों के शिविरों के आकार और स्थिति में मौसम के अनुसार परिवर्तन क्यों होता रहता है?
उत्तर:
नमी के मौसम में हादज़ा लोगों के शिविर आमतौर पर छोटे एवं दूर-दूर तक फैले होते हैं किंतु सूखे के मौसम में जब पानी की कमी होती है तो उनके शिविर पानी के स्रोतों के आसपास एवं घने बसे होते हैं।

प्रश्न 49.
आज के शिकारी समाजों में पाई जाने वाली कोई दो भिन्नताएँ बताओ।
उत्तर:

  • आज के शिकारी समाज शिकार एवं संग्रहण को अलग-अलग महत्त्व देते हैं।
  • उनके आकार भी छोटे-बड़े होते हैं।

प्रश्न 50.
इनमें से कौन-सी क्रिया के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं : (क) संग्रह ) औज़ार बनाना, (ग) आग का प्रयोग।
उत्तर:
इन बनाने के साक्ष्य व प्रमाण पुरातात्विक अभिलेख में सर्वाधिक मिलते हैं।

प्रश्न 51.
ट से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
फ़ट से अभिप्राय उर्वर अर्धचंद्राकार क्षेत्र से है। यह क्षेत्र मध्य सागर तट से लेकर ईरान में जागरोस पर्वतमालागीक फला हुआ था।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
आधुनिक मानव लगभग वर्ष पूर्व पैदा हुए थे ?
उत्तर:
1,60,000.

प्रश्न 2.
‘ऑन दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़’ नामक पुस्तक की रचना किसके द्वारा की गई थी ?
उत्तर:
चार्ल्स डार्विन।

प्रश्न 3.
चार्ल्स डार्विन द्वारा अपनी पुस्तक ‘ऑन दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़’ की रचना कब की गई थी?
उत्तर:
1859 ई०।

प्रश्न 4.
प्राइमेट स्तनपायी कब अस्तित्व में आए ?
उत्तर:
360 से 240 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 5.
लेतोली कहाँ स्थित है ?
उत्तर:
तंजानिया में।

प्रश्न 6.
पूर्वी अफ्रीका में आस्ट्रेलोपिथिकस वंश कब पाया गया था ?
उत्तर:
लगभग 56 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 7.
होमिनॉइड समूह कितने वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया था ?
उत्तर:
240 लाख।

प्रश्न 8.
होमिनिड कितने वर्ष पूर्व होमिनॉइड से विकसित हुए थे ?
उत्तर:
56 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 9.
‘होमो’ शब्द किस भाषा का शब्द है ?
उत्तर:
लातिनी।

प्रश्न 10.
लातिनी भाषा के शब्द ‘होमो’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
आदमी।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

प्रश्न 11.
ओल्डुवई गोर्ज की खोज कब हुई ?
उत्तर:
1959 ई० में।

प्रश्न 12.
औज़ार बनाने वाले क्या कहलाते थे ?
उत्तर:
होमो हैबिलिस।

प्रश्न 13.
वे कौन-से मानव थे जो सीधे खड़े होकर पैरों के बल चलना जानते थे ?
उत्तर:
होमो एरेक्टस।

प्रश्न 14.
आग के संबंध में हमें प्रथम साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुआ है ?
उत्तर:
चेसोवांजा से।

प्रश्न 15.
आधुनिक मानव की खोज कब की गई थी ?
उत्तर:
1.95 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 16.
आधुनिक मानव सर्वप्रथम कहाँ पाए गए थे ?
उत्तर:
आस्ट्रेलिया।

प्रश्न 17.
आधुनिक मानव किन वस्तुओं से औजारों का निर्माण करते थे ?
उत्तर:
पत्थरों व हड्डियों से।

प्रश्न 18.
दार-एस-सोल्तन कहाँ स्थित है ?
उत्तर:
मोरक्को में।

प्रश्न 19.
जर्मनी के किस नगर से हमें योजनाबद्ध ढंग से स्तनपायी जानवरों के शिकार एवं उनके वध का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
उत्तर:
शोनिंजन से।

प्रश्न 20.
दक्षिणी फ्राँस में स्थित टेरा अमाटा क्या है ?
उत्तर:
एक प्रसिद्ध झोंपड़ी।

प्रश्न 21.
स्वार्टक्रान्स कहाँ स्थित है ?
उत्तर:
दक्षिण अफ्रीका में।

प्रश्न 22.
सिलाई वाली सूई का आविष्कार कब हुआ ?
उत्तर:
21,000 वर्ष पूर्व।

प्रश्न 23.
स्पेन का कौन-सा स्थान आदिमानव की चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है ?
उत्तर:
आल्टामीरा।

प्रश्न 24.
हादज़ा जनसमूह के बारे में किस विद्वान् ने प्रकाश डाला ?
उत्तर:
जेम्स वुडबर्न ने।

प्रश्न 25.
वर्तमान समय के दो शिकारी संग्राहक समाज कौन-से हैं ?
उत्तर:
हादज़ा एवं कुंग सैन।

प्रश्न 26.
आधुनिक मानव कब अस्तित्व में आया था ?
उत्तर:
1.95 लाख वर्ष पूर्व।

प्रश्न 27.
आदिकालीन मानव किन ढंगों से अपना भोजन एकत्रित करते थे ?
उत्तर:
संग्रहण तथा अपमार्जन।

प्रश्न 28.
होमिनिडों द्वारा संचार के लिए प्रयोग की जाने वाले अंगविक्षेप पद्धति से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
हाव-भाव अथवा हाथों को हिला कर अपनी बात समझाना।।

प्रश्न 29.
अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान में रहने वाले शिकारी संग्राहक का नाम क्या था ?
उत्तर:
कुंग सैन।

प्रश्न 30.
मानव विज्ञान से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर:
इसमें मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 31.
संजातिवृत क्या होता है ?
उत्तर:
इसमें नृजातीय समूहों का विश्लेषण किया जाता है।

प्रश्न 32.
शिकारियों व संग्राहकों के जनसमूह को क्या कहा जाता था ?
उत्तर:
हादजा जनसमूह।

प्रश्न 33.
पूर्ण मानव कहाँ निवास करते थे ?
उत्तर:
गुफ़ाओं व कच्ची झोपड़ियों में।

रिक्त स्थान भरिए

1. आधुनिक मानव लगभग …………….. वर्ष पूर्व पैदा हुए थे।
उत्तर:
1,60,000

2. ‘ऑन दि ओरिजिन ऑफ स्पीशीज़’ नामक पुस्तक की रचना …………….. ने की थी।
उत्तर:
चार्ल्स डार्विन

3. 240 लाख वर्ष पूर्व ‘प्राइमेट’ श्रेणी में एक उपसमूह उत्पन्न हुआ जिसे …………….. कहते हैं।
उत्तर:
होमिनॉइड

4. होमिनिड प्राणियों का साक्ष्य …………….. लाख वर्ष पूर्व प्राप्त हुए हैं।
उत्तर:
56

5. होमिनिड जीवाश्म …………….. वंश से संबंधित है।
उत्तर:
आस्ट्रेलोपिथिकस

6. सर्वप्रथम होमिनिड जीवाश्म …………….. से पाए गए थे।
उत्तर:
पूर्वी अफ्रीका

7. ओल्डुवई गोर्ज की खोज …………….. में हुई थी।
उत्तर:
17 जुलाई, 1959 ई०

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

8. लातिनी भाषा के शब्द ‘होमो’ का अर्थ है ……………. ।
उत्तर:
आदमी

9. जर्मनी के शहर हाइडलवर्ग में पाए गए जीवाश्मों को ……….. कहा गया है।
उत्तर:
होमोहाइडल बर्गेसिस

10. होमो निअंडरथलैंसिस जीवाश्म …………….. से प्राप्त हुए हैं।
उत्तर:
निअंडर घाटी

11. एशिया व यूरोप से प्राप्त जीवाश्मों को ……………. कहा जाता था।
उत्तर:
हाइडवर्ग मानव

12. आधुनिक मानव की खोज …………….. में हुई थी।
उत्तर:
1.95 लाख वर्ष पूर्व

13. आधुनिक मानव सर्वप्रथम …………….. में पाए गए थे।
उत्तर:
आस्ट्रेलिया

14. …………….. तथा …………….. आदिकालीन मानवों के भोजन एकत्रित करने के मुख्य साधन थे।
उत्तर:
संग्रहण, शिकार

15. …………….. से तात्पर्य त्यागी हुई वस्तुओं की सफ़ाई करने से है।
उत्तर:
अपमार्जन

16. ……………. से अभिप्राय भोजन की तलाश करने से है।
उत्तर:
रसदखोरी

17. पूर्व मानव द्वारा …………. नामक स्थान को शिकार के लिए चुना गया था।
उत्तर:
दोलनी वेस्तोनाइस

18. मानव निर्मित वस्तुओं को ……………. कहा जाता था।
उत्तर:
शिल्पकृतियाँ

19. पूर्व मानव द्वारा …………….. तथा …………….. वस्तुओं का निर्माण किया गया।
उत्तर:
औज़ार, चित्रकारियाँ

20. पूर्व मानव …………….. तथा …………….. में निवास करते थे।
उत्तर:
गुफ़ाओं, कच्ची झोपड़ियों

21. पूर्व मानव ने औज़ारों का निर्माण …………….. के लिए किया।
उत्तर:
शिकार

22. पूर्व मानव …………….. तथा …………….. से औज़ारों का निर्माण करते थे।
उत्तर:
हड्डियों, सींगों

23. पूर्व मानव द्वारा औज़ार बनाने व प्रयोग किए जाने का सबसे प्राचीन साक्ष्य ……………. तथा से प्राप्त हुआ है।
उत्तर:
इथियोपिया, केन्या

24. ह्यूमेनिटिज शब्द लातीनी शब्द …………… से बना है।
उत्तर:
ह्यूमिनिटास

25. होमिनिड …………….. विधि द्वारा आपस में संप्रेषण व संचार करते थे।
उत्तर:
अंगविक्षेप

26. होमिनिडों द्वारा संचार के लिए प्रयोग की जाने वाली अंगविक्षेप विधि से अभिप्राय ……………. से था।
उत्तर:
हाथों को हिला कर बात करने

27. भाषा का विकास …………….. वर्ष पूर्व आरंभ हुआ।
उत्तर:
20

28. स्पेन में पूर्व मानव द्वारा निर्मित चित्र ……………. गुफ़ा से प्राप्त हुए हैं।
उत्तर:
आल्टामीरा

29. फ्रांस में पूर्व मानव द्वारा निर्मित चित्र …………….. तथा …………….. की गुफ़ाओं से प्राप्त हुए हैं।
उत्तर:
लैसकॉक्स, शोवे

30. अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान में रहने वाले शिकारी संग्राहक का नाम …………….. था।
उत्तर:
कुंग सैन

31. मानव संस्कृति और मानव जीव विज्ञान के बारे में जानने वाले विषय को ………… कहा जाता है।
उत्तर:
मानव विज्ञान

32. ‘शिकारियों व संग्राहकों के जन समूह को …………… कहा जाता था।
उत्तर:
हादज़ा जनसमूह

33. …………. में समकालीन नृजातीय समूहों का विश्लेषणात्मक अध्ययन होता है।
उत्तर:
संजातिवृत

बहु-विकल्पीय प्रश्न

1. आधुनिक मानव कब अस्तित्व में आए?
(क) 2.95 से 1.60 लाख वर्ष पहले
(ख) 1.95 से 1.60 लाख वर्ष पहले
(ग) 2.95 से 1.95 लाख वर्ष पहल
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) 1.95 से 1.60 लाख वर्ष पहले

2. जीवाश्म से आपका क्या अभिप्राय है?
(क) बहुत पुराने पौधों, पशुओं एवं जानवरों के अवशेष जो पत्थर का रूप धारण करके चट्टानों में समा जाते हैं
(ख) जीवों का एक समूह जिसके नर तथा मादा मिल कर बच्चे उत्पन्न कर सकते हैं
(ग) आस्ट्रेलोपिथिकस का प्रारंभिक रूप
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(क) बहुत पुराने पौधों, पशुओं एवं जानवरों के अवशेष जो पत्थर का रूप धारण करके चट्टानों में समा जाते हैं

3. ऑन दि ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़ का लेखक कौन है?
(क) न्यूटन
(ख) आइंसटीन
(ग) गैलिलियो
(घ) चार्ल्स डार्विन।
उत्तर:
(घ) चार्ल्स डार्विन।

4. प्राइमेट कौन थे?
(क) स्तनपायी प्राणियों का समूह
(ख) एशिया के निवासी
(ग) अफ्रीका के निवासी
(घ) आदिमानव।
उत्तर:
(क) स्तनपायी प्राणियों का समूह

5. होमिनॉइड कब अस्तित्व में आए?
(क) 360 लाख वर्ष पहले
(ख) 240 लाख वर्ष पहले
(ग) 56 लाख वर्ष पहले
(घ) 160 लाख वर्ष पहले।
उत्तर:
(ख) 240 लाख वर्ष पहले

6. होमिनिडों का उद्भव कहाँ हुआ?
(क) एशिया में
(ख) अफ्रीका में
(ग) यूरोप में
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(ख) अफ्रीका में

7. होमिनिड समूह की प्रमुख विशेषता क्या है?
(क) मस्तिष्क का बड़ा आकार
(ख) हाथ की विशेष क्षमता
(ग) पैरों के बल सीधे खड़े होना
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

8. आस्टूलोपिथिकस किन दो शब्दों के मेल से बना है ?
(क) लैटिन और अंग्रेज़ी
(ख) ग्रीक और संस्कृत
(ग) फ्रेंच और जर्मन
(घ) लैटिन और ग्रीक।
उत्तर:
(घ) लैटिन और ग्रीक।

9. आस्ट्रेलोपिथिकस कब विलुप्त हो गए?
(क) 360 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 240 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 25 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 13 लाख वर्ष पूर्व।
उत्तर:
(घ) 13 लाख वर्ष पूर्व।

10. निम्नलिखित में से कौन-सी होमो की प्रजाति है?
(क) होमो हैबिलिस
(ख) होमो एरेक्टस
(ग) होमो सैपियंस
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

11. निम्नलिखित में से कौन विकसित औज़ार बनाने वाले थे?
(क) होमो सैपियंस
(ख) होमो एरेक्टस
(ग) होमो हैबिलिस
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) होमो हैबिलिस

12. ओल्डुवई गोर्ज कहाँ स्थित है?
(क) इथियोपिया में
(ख) तंजानिया में
(ग) केन्या में
(घ) सूडान में।
उत्तर:
(ख) तंजानिया में

13. होमो एरेक्टस कब अस्तित्व में आए?
(क) 25 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 20 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 18 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 10 लाख वर्ष पूर्व।
उत्तर:
(ग) 18 लाख वर्ष पूर्व

14. होमीनिड के सबसे प्राचीन जीवाश्म हमें किस स्थान से प्राप्त हुए हैं?
(क) पूर्वी अफ्रीका
(ख) दक्षिणी अफ्रीका
(ग) उत्तरी अफ्रीका
(घ) दक्षिणी एशिया।
उत्तर:
(क) पूर्वी अफ्रीका

15. हाइडलबर्ग मानव कब अस्तित्व में आए?
(क) 25 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 18 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 8 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 1 लाख वर्ष पूर्व।
उत्तर:
(ग) 8 लाख वर्ष पूर्व

16. निअंडरथल मानव के जीवाश्म सर्वप्रथम कहाँ मिले हैं ?
(क) एशिया में
(ख) यूरोप में
(ग) अमरीका में
(घ) ऑस्ट्रेलिया में।
उत्तर:
(ख) यूरोप में

17. आधुनिक मानव का वैज्ञानिक नाम क्या है ?
(क) होमो सैपियंस
(ख) होमो एरेक्टस
(ग) नियंडरथल
(घ) होमो हैबिलिस।
उत्तर:
(क) होमो सैपियंस

18. प्रतिस्थापन सिद्धांत के अनुसार मनुष्य का उद्भव कहाँ हुआ?
(क) एशिया में
(ख) अफ्रीका में
(ग) यूरोप में
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(ख) अफ्रीका में

19. आदिकालीन मानव निम्नलिखित में से किस तरीके से अपना भोजन जुटाता था?
(क) संग्रहण
(ख) शिकार
(ग) अपमार्जन
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

20. मानव ने शिकार करना कब आरंभ किया?
(क) 15 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 10 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 5 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 1 लाख वर्ष पूर्व।
उत्तर:
(ग) 5 लाख वर्ष पूर्व

21. शोनिंजन कहाँ स्थित है?
(क) इंग्लैंड में
(ख) पूर्वी अफ्रीका में
(ग) फ्राँस में
(घ) जर्मनी में।
उत्तर:
(घ) जर्मनी में।

22. चेक गणराज्य के किस स्थान से हमें योजनाबद्ध तरीके से शिकार करने का साक्ष्य प्राप्त हुआ है?
(क) दोलनी वेस्तोनाइस
(ख) बॉक्सग्रोव
(ग) शोनिंजन
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(क) दोलनी वेस्तोनाइस

23. लज़ारेट गुफ़ा कहाँ स्थित है?
(क) उत्तरी फ्रांस में
(ख) दक्षिणी फ्राँस में
(ग) पूर्वी अफ्रीका में
(घ) दक्षिणी अफ्रीका में।
उत्तर:
(ख) दक्षिणी फ्राँस में

24. आदिकालीन मानव के लिए आग का प्रमुख लाभ क्या था?
(क) वह आग द्वारा गुफ़ाओं के अंदर प्रकाश करता था
(ख) वह आग द्वारा जानवरों को डराने का काम लेता था
(ग) वह आग द्वारा भोजन को पकाता था
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

HBSE 11th Class history Important Questions Chapter 1 समय की शुरुआत से

25. निम्न में से किसने सर्वप्रथम पत्थर के औज़ार बनाए?
(क) आस्ट्रेलोपिथिकस
(ख) होमो एरेक्टस
(ग) होमो हाइडलबर्गसिस
(घ) निअंडरथलैंसिस।
उत्तर:
(क) आस्ट्रेलोपिथिकस

26. सर्वप्रथम भाषा का उपयोग कब आरंभ हुआ?
(क) 35 लाख वर्ष पूर्व
(ख) 30 लाख वर्ष पूर्व
(ग) 25 लाख वर्ष पूर्व
(घ) 20 लाख वर्ष पूर्व।
उत्तर:
(घ) 20 लाख वर्ष पूर्व।

27. स्पेन की किस गुफ़ा से हमें चित्रकला के प्राचीन साक्ष्य प्राप्त हुए हैं ?
(क) आल्टामीरा
(ख) बॉर्डर गुफ़ा
(ग) नियाह गुफ़ा
(घ) चाउवेट गुफ़ा।
उत्तर:
(क) आल्टामीरा

28. आल्टामीरा की खोज कब हुई ?
(क) 1869 ई० में
(ख) 1879 ई० में
(ग) 1885 ई० में
(घ) 1889 ई० में।
उत्तर:
(ख) 1879 ई० में

29. हादज़ा जनसमूह कहाँ के रहने वाले हैं ?
(क) एशिया
(ख) अफ्रीका
(ग) यूरोप
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(ख) अफ्रीका

30. हादजा लोग निम्नलिखित में से किस जानवर का माँस नहीं खाते हैं ?
(क) हाथी
(ख) शेर
(ग) गैंडा
(घ) जिराफ़।
उत्तर:
(क) हाथी

31. हादज़ा लोग ज़मीन और उसके संसाधनों पर अपना दावा क्यों नहीं करते?
(क) वे जहाँ चाहें रह सकते हैं
(ख) वे कहीं भी पशुओं का शिकार कर सकते हैं
(ग) वे कहीं से भी कंदमूल एवं शहद इकट्ठा कर सकते हैं
(घ) उपरोक्त सभी।
उत्तर:
(घ) उपरोक्त सभी।

समय की शुरुआत से HBSE 11th Class History Notes

→ मानव प्राणियों की उत्पत्ति कब हुई, इस संबंध में इतिहासकारों में मतभेद हैं। प्राइमेट स्तनपायी 360 से 240 लाख वर्ष पूर्व अफ्रीका एवं एशिया में अस्तित्व में आए। इस समूह में बंदर, पूँछहीन बंदर एवं मानव सम्मिलित थे। होमिनॉइड 240 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया। यह प्राइमेट श्रेणी का एक उपसमूह है।

→ इसमें पूँछहीन बंदर सम्मिलित थे। इनमें सोचने की शक्ति कम थी एवं वे सीधे खड़े होकर चल नहीं सकते थे। 56 लाख वर्ष पूर्व होमिनिड समूह का विकास हुआ। इनके सबसे प्राचीन जीवाश्म हमें अफ्रीका में लेतोली (तंजानिया) एवं हादार (इथियोपिया) से प्राप्त हुए हैं।

→ इनके मस्तिष्क का आकार बड़ा था तथा वे सीधे खड़े होकर चल सकते थे। आस्ट्रेलोपिथिकस के सबसे प्राचीन जीवाश्म हमें 1959 ई० में ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं। इनकी खोज मेरी एवं लुइस लीकी ने की थी। होमो की तुलना में उनके मस्तिष्क का आकार छोटा था एवं जबक भारी थे।

→ 13 लाख वर्ष पूर्व आस्ट्रेलोपिथिकस लुप्त हो गए। होमो 25 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। उन्हें उनकी विशेषताओं के आधार पर अनेक प्रजातियों में बाँटा जाता है। होमो हैबिलिस 22 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। इनके प्राचीनतम जीवाश्म हमें ओमो एवं ओल्डुवई गोर्ज से प्राप्त हुए हैं।

→ वे औज़ार बनाने वाले के नाम से जाने जाते थे। उन्होंने पत्थर के औज़ार बनाए। उन्होंने शिकार के लिए भाषा का प्रयोग आरंभ किया। होमो एरेक्टस वे मानव थे जो सीधे खड़े होकर चलना जानते थे। वे 18 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आए। वे अफ्रीका से एशिया एवं फिर यूरोप में गए। उन्होंने आग का आविष्कार किया एवं भाषा का अधिक विकास किया। इससे उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आए। आधुनिक मानव को होमो सैपियंस के नाम से जाना जाता है। यह मानव 1.95 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया।

→ प्रतिस्थापन मॉडल के अनुसार उनका उद्भव अफ्रीका में हुआ। दूसरी ओर क्षेत्रीय निरंतरता मॉडल के अनुसार आधुनिक मानव की उत्पत्ति अफ्रीका, एशिया एवं यूरोप के विभिन्न भागों में हुई। यह मानव सबसे समझदार था। उसने खेती सीख ली थी तथा स्थायी निवास आरंभ कर दिया था। उसके औज़ार बहुत उत्तम थे। उसने सूई का आविष्कार कर लिया था। अत: उसने सिले हुए कपड़े पहनने आरंभ कर दिए थे। आदिकालीन मानव संग्रहण द्वारा, अपमार्जन द्वारा, शिकार द्वारा तथा मछली पकड़ कर अपना भोजन जुटाता था।

→ आदिमानव द्वारा योजनाबद्ध ढंग से स्तनपायी जानवरों के शिकार एवं उनके वध करने के सबसे प्राचीन साक्ष्य हमें लाख वर्ष पूर्व इंग्लैंड के बॉक्सग्रोव नामक स्थल से एवं 4 लाख वर्ष पूर्व जर्मनी के शोनिंजन नामक स्थान से प्राप्त हुए हैं। 35 हज़ार वर्ष पूर्व शिकार के तरीकों का सुधार हुआ। इस संबंध में हमें चेक गणराज्य में स्थित दोलनी वेस्तोनाइस नामक स्थल से जानकारी प्राप्त होती है।

→ आदिकालीन मानव का प्रारंभिक निवास पेड़ों पर था। 4 लाख वर्ष पर्व उसने गफ़ाओं में अपना निवास आरंभ कर दिया। इससे उसे भयंकर शीत एवं जंगली जानवरों से सरक्षा मिली। 1.25 लाख वर्ष पर्व उसने झोंपडियों का निर्माण आरंभ कर दिया था। दक्षिणी फ्राँस से प्राप्त टेरा अमाटा नामक झोंपड़ी इसकी प्रसिद्ध उदाहरण है।

→ अग्नि का आविष्कार आदिकालीन मानव के लिए बहुत क्रांतिकारी प्रमाणित हुआ। इसके प्रथम साक्ष्य हमें केन्या में चेसोवांजा तथा दक्षिणी अफ्रीका में स्वार्टक्रांस से प्राप्त हुए हैं। आदिकालीन मानव के जीवन में औज़ारों का विशेष महत्त्व रहा है। प्रारंभिक औजार पत्थर के थे। इनमें हस्त कुठार, गंडासे एवं शल्क औज़ार सम्मिलित थे। इनका प्रयोग आदिमानव जंगली जानवरों से अपनी सुरक्षा एवं उनके शिकार के लिए करता था।

→ भाषा एवं कला के विकास ने आदिमानव के जीवन को एक नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्पेन में स्थित आल्टामीरा तथा फ्राँस में स्थित लैसकॉक्स एवं चाउवेट नामक गुफ़ाओं में की गई चित्रकारी को देख कर व्यक्ति चकित रह जाता है। उनकी अधिकाँश मूर्तियाँ स्त्रियों से संबंधित थीं क्योंकि वे उन्हें जनन शक्ति का स्रोत समझते थे।

→ 1960 ई० में प्रसिद्ध मानव विज्ञानी जेम्स वुडबर्न ने अफ्रीका के हादज़ा जनसमूह के बारे में महत्त्वपूर्ण प्रकाश डाला है। उनके अनुसार हादज़ा एक छोटा समूह है जो लेक इयासी के आस-पास रहता है। वे केवल हाथी को छोड़कर अन्य सभी जानवरों का शिकार करते हैं। वे विश्व में सबसे अधिक माँस खाते हैं। वे अपने भोजन का 80% भाग जंगली साग-सब्जियों से प्राप्त करते हैं।

→ उनके प्रदेश में सूखे में भी भोजन की कोई कमी नहीं होती। वे ज़मीन एवं उसके संसाधनों पर अपना दावा नहीं करते क्योंकि वे इनका स्वतंत्रतापूर्वक प्रयोग करते हैं। आज का शिकारी संग्राहक समाज प्राचीन शिकारी समाज से अनेक बातों से भिन्न है। इससे अतीत के संबंध में कोई अनुमान लगाना कठिन है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध विद्वान् चार्ल्स डार्विन ने 24 नवंबर, 1859 ई० को एक विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ऑन दि ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़ का प्रकाशन करवाया। इसमें मानव के क्रमिक विकास का विस्तृत वर्णन किया गया।

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HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

HBSE 11th Class Geography भारत-स्थिति Textbook Questions and Answers

बहुविकल्पीय प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करें-

1. निम्नलिखित में से कौन-सा अक्षांशीय विस्तार भारत की संपूर्ण भूमि के विस्तार के संदर्भ में प्रासंगिक है?
(A) 8°41′ उ० से 35°17′ उ०
(B) 8°4′ उ० से 35°6′ उ०
(C) 8°4′ उ० से 37°6′ उ०
(D) 6°45′ उ० से 37°6′ उ०
उत्तर:
(C) 8°4′ उ० से 37°6′ उ०

2. निम्नलिखित में से किस देश की भारत के साथ सबसे लंबी स्थलीय सीमा है?
(A) बांग्लादेश
(B) पाकिस्तान
(C) चीन
(D) म्यांमार
उत्तर:
(A) बांग्लादेश

3. निम्नलिखित में से कौन-सा देश क्षेत्रफल में भारत से बड़ा है?
(A) चीन
(B) फ्रांस
(C) मिस्र
(D) ईरान
उत्तर:
(A) चीन

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

4. निम्नलिखित याम्योत्तर में से कौन-सा भारत का मानक याम्योत्तर है?
(A) 69°30′ पूर्व
(B) 75°30′ पूर्व
(C) 82°30′ पूर्व
(D) 90°30′ पूर्व
उत्तर:
(C) 82°30′ पूर्व

5. अगर आप एक सीधी रेखा में राजस्थान से नागालैंड की यात्रा करें तो निम्नलिखित नदियों में से किस एक को आप पार नहीं करेंगे?
(A) यमुना
(B) सिंधु
(C) ब्रह्मपुत्र
(D) गंगा
उत्तर:
(B) सिंधु

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
क्या भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है? यदि हाँ, तो आप ऐसा क्यों सोचते हैं?
उत्तर:
हाँ, भारत को एक से अधिक मानक समय की आवश्यकता है, क्योंकि देशांतर रेखाओं के मानों से स्पष्ट होता है कि इनमें लगभग 30 डिग्री का अंतर होता है। हमारे देश के सबसे पूर्वी और सबसे पश्चिमी भागों के समय में लगभग 2 घंटे का अंतर है। विश्व में अनेक देश ऐसे हैं जिनमें अधिक पूर्व-पश्चिम विस्तार के कारण एक से अधिक मानक देशांतर रेखाएँ हैं; जैसे अमेरिका में लगभग 7 समय मानक या कटिबंध पाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
भारत की लंबी तटरेखा के क्या प्रभाव हैं?
उत्तर:
भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है। भारत की तटीय रेखा द्वीपों सहित 7516.6 कि०मी० है। इतनी लंबी तटीय रेखा के कारण भारत विश्व में मछली उत्पादन में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके अतिरिक्त समुद्री संसाधनों से खनिज तेल, नमक, मोती आदि की भी प्राप्ति होती है।

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के रूप में देश की तटरेखा समुद्री यातायात और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभदायक है। तटीय रेखाओं पर स्थित समुद्री मार्गों या बंदरगाहों के माध्यम से भारत विदेशों से वस्तुओं का आयात-निर्यात करता है। इनके कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अधिक होता है।

प्रश्न 3.
भारत का देशांतरीय फैलाव इसके लिए किस प्रकार लाभप्रद है?
उत्तर:
भारत 68°07′ पूर्वी देशांतर से 97°5′ पूर्वी देशांतर के बीच फैला हुआ है। इसका देशांतरीय विस्तार या फैलाव 28°55′ है। इतने कम देशांतरीय फैलाव के कारण ही भारत की एक ही मानक समय रेखा अर्थात् 80°30′ पूर्व है। यह रेखा देश के बीचो-बीच से गुजरती है, इसी कारण इसको देश का मानक समय माना जाता है। आधुनिक संदर्भ में वर्तमान देशांतरीय फैलाव मानक समय की दृष्टि से लाभप्रद है।

प्रश्न 4.
जबकि पूर्व में, उदाहरणतः नागालैंड में, सूर्य पहले उदय होता है और पहले ही अस्त होता है, फिर कोहिमा और नई दिल्ली में घड़ियाँ एक ही समय क्यों दिखाती हैं?
उत्तर:
यह बात सत्य है कि देश के पूर्वी भाग में सूर्य पहले उदय होता है और पहले ही अस्त होता है, लेकिन देश के अन्य भागों में सूर्योदय और सूर्यास्त बाद में होता है। परन्तु दोनों स्थान पर समय एक ही होता है अर्थात् घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं। इसका मुख्य कारण 80°30′ पूर्व याम्योत्तर को देश की मानक याम्योत्तर चुना गया है जो देश के बीचो-बीच से गुजरती है। देश में घड़ियों के समय का निर्धारण इसी के द्वारा होता है। इसलिए देश के विभिन्न भागों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के बावजूद घड़ी के समय में अंतर नहीं होता। यही कारण है कि कोहिमा और नई दिल्ली में घड़ियाँ एक ही समय दिखाती हैं।

परिशिष्ट-I पर आधारित क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
एक ग्राफ पेपर पर मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, गोवा, केरल तथा हरियाणा के जिलों की संख्या को आलेखित कीजिए। क्या ज़िलों की संख्या का राज्यों के क्षेत्रफल में कोई संबंध है?
उत्तर:

राज्यज़िलों की संख्याराज्यों का क्षेत्रफल (वर्ग कि०मी०)
मध्य प्रदेश553,08,000
कर्नाटक311,91,791
मेघालय1122,429
गोवा023,702
केरल1438,863
हरियाणा2244,212

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति 3
हाँ, ज़िलों की संख्या का राज्यों के क्षेत्रफल से संबंध है; जैसाकि रेखाचित्र या ग्राफ से दर्शाया गया है। ग्राफ़ से पता चल रहा है कि जिस राज्य का क्षेत्रफल अधिक है उसमें जिलों की संख्या अधिक है और जिस राज्य का क्षेत्रफल कम है उसमें जिलों की संख्या भी कम है। गोवा और मध्य प्रदेश इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 2.
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा, राजस्थान तथा जम्मू और कश्मीर में से कौन-सा राज्य सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला और कौन-सा एक न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है?
उत्तर:

2001 की जनगणना के अनुसार2011 की जनगणना के अनुसार
राज्यजनसंख्या घनत्व (वर्ग कि०मी०)राज्यजनसंख्या घनत्व (वर्ग कि०मी०)
उत्तर प्रदेश690उत्तर प्रदेश829
पशिचम बंगाल903पशिचम बंगाल1,029
गुजरात258गुजरात308
अरुणाचल प्रदेश13अरुणाचल प्रदेश17
तमिलनाडु480तमिलनाडु555
त्रिपुरा305त्रिपुरा350
राजस्थान165राजस्थान201
जम्मू और कशमीर99जम्मू और कश्मीर124

2001 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य पश्चिम बंगाल (903 वर्ग कि०मी०) और न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश (13 वर्ग कि०मी०) है। 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य पश्चिम बंगाल (1029 वर्ग कि०मी०) और न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश. (17 वर्ग कि०मी०) है।

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

प्रश्न 3.
राज्य के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या के बीच संबंध को ढूंढिए।
उत्तर:
राज्य के क्षेत्रफल व जिलों की संख्या के बीच धनात्मक संबंध पाया जाता है। यदि किसी राज्य का क्षेत्रफल अधिक है, तो उस राज्य के जिलों की संख्या भी अधिक होती है और यदि किसी राज्य का क्षेत्रफल कम है तो उसके जिलों की संख्या भी कम होती है।

प्रश्न 4.
तटीय सीमाओं से संलग्न राज्यों की पहचान कीजिए।
उत्तर:
भारत की तटीय सीमा की कुल लंबाई 7,516.6 कि०मी० है। इतनी लंबी तटीय सीमा को देश के 9 राज्यों की सीमाएँ स्पर्श करती हैं। सबसे लम्बी सीमा गुजरात की और सबसे छोटी सीमा गोवा की है। भारत के तटीय सीमा से लगने वाले राज्य निम्नलिखित हैं

तटीय सीमाओं से संलग्न राज्य अरब सागर की ओर से-

  • गुजरात
  • महाराष्ट्र
  • गोवा
  • कर्नाटक
  • केरल।

बंगाल की खाड़ी की ओर से-

  • तमिलनाडु
  • आंध्र प्रदेश
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 5.
पश्चिम से पूर्व की ओर स्थलीय सीमा वाले राज्यों का क्रम तैयार कीजिए।
उत्तर:
पश्चिम से पूर्व की ओर स्थलीय सीमा वाले राज्य निम्नलिखित हैं-

  • जम्मू और कश्मीर (अब जम्मू और कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेश बन गया है। इसको जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख दो भागों में ट दिया गया है।)
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पश्चिम बंगाल और
  • अरुणाचल प्रदेश।

परिशिष्ट-II पर आधारित क्रियाकलाप

प्रश्न 1.
उन केंद्र-शासित क्षेत्रों की सूची बनाइए जिनकी स्थिति तटवर्ती है।
उत्तर:

  1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
  2. पदुच्चेरी
  3. लक्षद्वीप
  4. दमन व दीव
  5. दादर व नगर हवेली।

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रफल और जनसंख्या में अंतर की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के क्षेत्रफल और जनसंख्या में अंतर है-

वर्गराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्लीअंडमान व निकोबार द्वीप समूह
क्षेत्रफल (वर्ग कि०मी०)1,4838,249
जनसंख्या1,67,53,2353,79,944
जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग कि०मी०)11,29746

(i) 2011 की जनगणना के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की जनसंख्या अंडमान व निकोबार द्वीप समूह से अधिक है।

(ii) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का क्षेत्रफल अंडमान व निकोबार द्वीप समूह से कम है।

प्रश्न 3.
एक ग्राफ पेपर पर दंड आरेख द्वारा केंद्र शासित क्षेत्रों के क्षेत्रफल व जनसंख्या को आलेखित कीजिए।
उत्तर:
2011 की जनगणना के अनुसार-

केंद्र शासित प्रदेशक्षेत्रफल (वर्ग कि०मी०)जनसंख्या
1. दिल्ली1,4831,67,53,235
2. चण्डीगढ़11410,54,686
3. लक्षद्वीप3264,429
4. पुद्दुच्चेरी49012,44,464
5. दमन व दीव1112,42,911
6. दादर व नगर हवेली4913,42,853
7. अंडमान व निकोबार द्वीप समूह8,2493,79,944

Note-विद्यार्थी अध्यापक की सहायता से ग्राफ स्वयं बनाने का प्रयास करें।

भारत-स्थिति HBSE 11th Class Geography Notes

→ अंतःक्रिया (Interaction)-दो या अधिक तत्त्वों का एक-दूसरे पर पड़ने वाला आपसी प्रभाव।

→ स्थानीय समय (Local Time)-किसी स्थान पर सूर्य की अधिकतम ऊंचाई का समय।

→ प्रामाणिक समय (Standard Time) किसी देशांतर विशेष पर सूर्य की अधिकतम ऊंचाई का समय जो उस संपूर्ण क्षेत्र में लागू किया जाए।

→ प्रायद्वीप (Peninsula)-ऐसा स्थलखंड जो तीन ओर से समुद्रों से घिरा हो।

→ सापेक्षिक स्थिति (Relative Position)निकटवर्ती स्थानों के संदर्भ में किसी क्षेत्र की स्थिति।

→ जलडमरुमध्य (Strait)-दो स्थलखंडों को अलग करता पानी का हिस्सा।

→ खाड़ी (Gulf)-विस्तृत घुमाव वाले सागरीय तट से घिरा हुआ समुद्र का एक भाग जिसका नाम निकटवर्ती क्षेत्र के आधार पर होता है; जैसे बंगाल की खाड़ी, मैक्सिको की खाड़ी इत्यादि।

→ भारत की स्थिति (Location of India)-भारत एशिया महाद्वीप का एक ऐसा देश है जो एशिया के दक्षिणी भाग में हिन्द महासागर के शीर्ष पर तीन ओर समुद्र से घिरा हुआ है। संपूर्ण भारत उत्तरी गोलार्द्ध में है।

→ राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश (States and Union Territories)-वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित। प्रदेश हैं।

→ विस्तार (Expansion)-भारत का अक्षांशीय विस्तार 8°4′ उत्तरी अक्षांश से 37°6′ उत्तरी अक्षांश तक और देशांतर विस्तार 68°7′ पूर्वी देशांतर से 97°25′ पूर्वी देशांतर तक है।

→ आकार (Size) भारत त्रिकोणीय आकार का देश है। इसकी उत्तर से दक्षिण तक लम्बाई 3214 कि०मी० और पूर्व से पश्चिम तक लम्बाई 2933 कि०मी० है।

→ क्षेत्रफल एवं जनसंख्या (Area and Population)-क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में भारत का सातवाँ स्थान है। भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि०मी० है। जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में भारत का दूसरा स्थान है। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या लगभग 121.2 करोड़ है।

  • क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य – राजस्थान
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे छोटा राज्य – गोवा
  • जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य – उत्तर प्रदेश
  • जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे छोटा राज्य – सिक्किम

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति

अन्तिम सीमा बिन्दु (Last Boundary Points)-भारत के अन्तिम सीमा बिंदु हैं-

  • उत्तरी बिंदु – इंदिरा कॉल (जम्मू-कश्मीर)
  • दक्षिणी बिंदु – इंदिरा प्वाइंट (ग्रेट निकोबार द्वीप)
  • पूर्वी बिंदु – किबिथू (अरुणाचल प्रदेश)
  • पश्चिमी बिंदु – राजहर कीक (गुजरात)
  • मुख्य भूमि की दक्षिणी सीमा – कन्याकुमारी (तमिलनाडु)

भारत: राज्य, राजधानी, क्षेत्रफल, जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व-2011
HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति 1
भारत : केंद्र-शासित प्रदेश, राजधानियाँ, क्षेत्रफल और 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या एवं जनसंख्या घनत्व

राज्यराजधानीक्षेत्रफलजनसंख्याजनसंख्या घनत्व
1. अंडमान व निकोबार द्वीप-समूहपोर्ट ब्लेयर8,2493,79,94446
2. चण्डीगढ़चण्डीगढ़11410,54,6869,252
3. दादर व नगर हवेलीसिलवासा4913,42,853698
4. दमन व दीवदमन1112,42,9112,169
5. लक्षद्वीपकवरत्ती3264,4292,013
6. पुद्दुच्चेरीपुद्धु्चेरी49012,44,4642,598
7. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्लीनई दिल्ली1,4831,67,53,23511,297

HBSE 11th Class Geography Solutions Chapter 1 भारत-स्थिति 2
नोट – जून, 2014 में तेलगांना भारत का नवगठित राज्य बना। इसकी राजधानी हैदराबाद को बनाया गया।

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HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

Haryana State Board HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

भाग-I : सही विकल्प का चयन करें

1. प्राकृतिक आपदाएँ प्रतिवर्ष भारत के कितने लोगों को प्रभावित करती हैं?
(A) 2 करोड़
(B) 6 करोड़
(C) 10 करोड़
(D) 12 करोड़
उत्तर:
(B) 6 करोड़

2. विश्व के सर्वाधिक आपदा संभावित देशों में भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) दूसरा
(B) तीसरा
(C) चौथा
(D) पाँचवां
उत्तर:
(A) दूसरा

3. सामान्यतः भारत का कितने प्रतिशत क्षेत्र सूखे से ग्रस्त रहता है?
(A) 5%
(B) 10%
(C) 14%
(D) 16%
उत्तर:
(D) 16%

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक इलाका भूकंप की दृष्टि से अति जोखिम क्षेत्र के अंतर्गत आता है?
(A) दक्कन पठार
(B) पूर्वी हरियाणा
(C) पश्चिमी उत्तर प्रदेश
(D) कश्मीर घाटी
उत्तर:
(D) कश्मीर घाटी

5. भूकंप किस प्रकार की आपदा है?
(A) वायुमण्डलीय
(B) भौमिकी
(C) जलीय
(D) जीवमण्डलीय
उत्तर:
(B) भौमिकी

6. आपदा प्रबंधन नियम किस वर्ष बनाया गया?
(A) वर्ष 2003 में
(B) वर्ष 2005 में
(C) वर्ष 2007 में
(D) वर्ष 1999 में
उत्तर:
(B) वर्ष 2005 में

7. भारत में सूखे का प्रभाव लगभग कितने क्षेत्र पर होता है?
(A) 5 लाख वर्ग कि०मी०
(B) 7 लाख वर्ग कि०मी०
(C) 10 लाख वर्ग कि०मी०
(D) 15 लाख वर्ग कि०मी०
उत्तर:
(C) 10 लाख वर्ग कि०मी०

8. भुज में विनाशकारी भूकंप कब आया था?
(A) 26 जनवरी, 1999
(B) 26 जनवरी, 2000
(C) 26 जनवरी, 2001
(D) 26 जनवरी, 2002
उत्तर:
(C) 26 जनवरी, 2001

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

9. भुज में 2001 को आए भूकंप की रिक्टर स्केल पर तीव्रता क्या थी?
(A) 2.5
(B) 3.5
(C) 5.2
(D) 7.9
उत्तर:
(D) 7.9

10. आपदाओं के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
(A) समय के साथ प्राकृतिक आपदाओं के प्रारूप में परिवर्तन आया है
(B) सभी संकट आपदाएँ होती हैं
(C) समय के साथ आपदाओं द्वारा किए गए नुकसान में वृद्धि हो रही है
(D) आपदाओं के भय ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है
उत्तर:
(B) सभी संकट आपदाएँ होती हैं

11. उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
(A) सर्वाधिक चक्रवात अक्तूबर और नवम्बर में आते हैं
(B) ये पूर्वी प्रशांत महासागर, मैक्सिको तथा मध्य अमेरिकी तट पर भी पैदा होते हैं
(C) इनकी उत्पत्ति भूमध्यरेखा के पास 0° से 5° अक्षांशों के बीच होती है।
(D) इन चक्रवातों में समदाब रेखाएँ एक-दूसरे के नजदीक होती हैं
उत्तर:
(C) इनकी उत्पत्ति भूमध्यरेखा के पास 0° से 5° अक्षांशों के बीच होती है।

12. उष्ण कटिबंधीय चक्रवात सामान्यतः निम्नलिखित अक्षांश में आते हैं-
(A) 0° – 5° अक्षांशों के बीच
(B) 5° – 15° अक्षांशों के बीच
(C) 15° – 20° अक्षांशों के बीच
(D) 5° – 20° अक्षांशों के बीच
उत्तर:
(D) 5° – 20° अक्षांशों के बीच

13. आपदाओं के संबंध में जो कथन सही नहीं है, उसे चिहनित कीजिए-
(A) देश में 4 करोड़ हैक्टेयर भूमि को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है
(B) देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 30 प्रतिशत भाग पर सूखे का प्रभाव रहता है
(C) सूखे का अधिक प्रभाव वहाँ पड़ता है जहाँ वर्षा की परिवर्तिता का गुणांक 20 प्रतिशत से अधिक होता है
(D) भूस्खलन की दृष्टि से हरियाणा अधिक सुभेद्यता क्षेत्र में आता है
उत्तर:
(D) भूस्खलन की दृष्टि से हरियाणा अधिक सुभेद्यता क्षेत्र में आता है

भाग-II : एक शब्द या वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदाएँ प्रतिवर्ष भारत के कितने लोगों को प्रभावित करती हैं?
उत्तर:
लगभग 6 करोड़।

प्रश्न 2.
विश्व के सर्वाधिक आपदा सम्भावित देशों में भारत का कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा।

प्रश्न 3.
भारत के किस राज्य में सर्दी के महीनों में बाढ़ आती है?
उत्तर:
तमिलनाडु में।

प्रश्न 4.
भूकम्पों के आने का क्या कारण है?
उत्तर:
विवर्तनिक हलचलें।

प्रश्न 5.
भारतीय प्लेट किस दिशा में खिसक रही है?
उत्तर:
उत्तर दिशा।

प्रश्न 6.
सामान्यतः भारत का कितना प्रतिशत क्षेत्र सूखे से ग्रस्त रहता है?
उत्तर:
16 प्रतिशत।

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प्रश्न 7.
चक्रवात में समदाब रेखाओं की आकृति लगभग कैसी होती है?
उत्तर:
लगभग गोल।

प्रश्न 8.
धरातल के उस बिन्दु का नाम बताएँ जहाँ सबसे पहले भूकम्पीय तरंगें पहुँचती हैं।
उत्तर:
अधिकेन्द्र।

प्रश्न 9.
भूकम्प की तीव्रता को किस स्केल पर मापा जाता है?
उत्तर:
रिक्टर स्केल पर।

प्रश्न 10.
रिक्टर स्केल पर कितनी इकाइयाँ होती हैं?
उत्तर:
1 से 9 तक।

प्रश्न 11.
भुज में 26 जनवरी, 2001 को आए भूकम्प की रिक्टर स्केल पर तीव्रता क्या थी?
उत्तर:
7.9।

प्रश्न 12.
भारत में अत्याधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र के एक जिले का नाम लिखें।
उत्तर:
बीकानेर (राजस्थान)।

प्रश्न 13.
उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात सामान्यतः किन अक्षांशों में आते हैं?
उत्तर:
5° से 20° अक्षांशों के बीच।

प्रश्न 14.
भारत में बाढ़ों का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
भारी मानसून तथा चक्रवात।

प्रश्न 15.
प्रायद्वीपीय भारत में बातें कम क्यों आती हैं?
उत्तर:
नदियाँ मौसमी होने के कारण।

प्रश्न 16.
उत्तराखण्ड में भयंकर प्राकृतिक आपदा कब आई?
उत्तर:
16 जून, 2013 में।

प्रश्न 17.
पृथ्वी के अन्दर भूकम्प कितनी गहराई तक उत्पन्न होते हैं?
उत्तर:
75 कि०मी० की गहराई तक।

प्रश्न 18.
पृथ्वी के अन्दर भूकम्प उत्पत्ति वाले स्थान का नाम बताओ।
उत्तर:
उद्गम केन्द्र या भूकम्प मूल।

प्रश्न 19.
रिक्टर स्केल का आविष्कारक कौन था?
उत्तर:
चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर।

प्रश्न 20.
महाराष्ट्र के लाटूर में आए भूकम्प का क्या कारण था?
उत्तर:
भारतीय प्लेट का उत्तर दिशा में खिसकना।

प्रश्न 21.
भूकम्प और ज्वालामुखी की सर्वोत्तम व्याख्या कौन-सा सिद्धान्त करता है?
उत्तर:
प्लेट टेक्टोनिक्स सिद्धान्त।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सूखा क्यों पड़ता है?
उत्तर:
वर्षा की परिवर्तनीयता के कारण सूखा पड़ता है।

प्रश्न 2.
भारत में आने वाली प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. बाढ़
  2. सूखा
  3. चक्रवात
  4. भू-स्खलन
  5. भूकम्प
  6. ज्वारीय तरंगें इत्यादि।

प्रश्न 3.
कोयना भूकम्प क्यों आया था?
उत्तर:
कोयना जलाशय में पानी के भारी दबाव के कारण यहाँ भूकम्प आया था।

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प्रश्न 4.
चक्रवातों से प्रभावित भारत के तीन राज्यों के नाम लिखो।
उत्तर:

  1. ओडिशा
  2. आन्ध्र प्रदेश तथा
  3. तमिलनाडु।

प्रश्न 5.
प्राकृतिक आपदा से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जल, स्थल अथवा वायुमण्डल में उत्पन्न होने वाली ऐसी घटना या बदलाव जिसके कुप्रभाव से विस्तृत क्षेत्र में जान-माल की हानि और पर्यावरण का अवक्रमण होता हो, प्राकृतिक आपदा कहलाती है।

प्रश्न 6.
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं?
उत्तर:
राष्ट्रीय बाढ़ आयोग ने देश में 4 करोड़ हैक्टेयर भूमि को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। असम, पश्चिम बंगाल और बिहार राज्य सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में से हैं। इसके अतिरिक्त उत्तर भारत की ज्यादातर नदियाँ, विशेषकर पंजाब और उत्तर प्रदेश में बाढ़ लाती रहती हैं।

प्रश्न 7.
सुनामी लहरें क्या हैं?
उत्तर:
भूकम्प और ज्वालामुखी से उठी समुद्री लहरों को सुनामी लहरें तरंगें कहा जाता है। महासागरों की तली पर आने वाले भूकम्प से महासागरीय जल विस्थापित होता है जिससे ऊर्ध्वाधर ऊँची तरंगें पैदा होती हैं जिन्हें ‘सुनामी’ कहा जाता है। महासागरों के तटीय क्षेत्रों में ये तरंगें ज्यादा प्रभावी होती हैं। कई बार तो इनकी ऊँचाई 15 मीटर या इससे भी अधिक होती है।

प्रश्न 8.
सूखा किसे कहते हैं?
उत्तर:
सूखा एक घातक पर्यावरणीय आपदा है। यह मनुष्य, जीव-जंतुओं, वनस्पति तथा कृषि को प्रभावित करता है। किसी क्षेत्र विशेष अथवा प्रदेश या देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। किसी क्षेत्र में लंबी अवधि तक वर्षा की कमी, कम वर्षा होना, अत्यधिक वाष्पीकरण तथा जलाशयों तथा भूमिगत जल के अत्यधिक प्रयोग से भूतल पर जल की कमी हो जाती है, जिसे सूखा कहते हैं। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जब किसी क्षेत्र में सामान्य वर्षा से 75 प्रतिशत से कम वर्षा होती है तब सूखा उत्पन्न होता है।

प्रश्न 9.
बाढ़ से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
नदी की क्षमता से अधिक जल का बहाव, जिसमें नदी तट के निकट की निम्न व समतल भूमि डूब जाए, बाढ़ कहलाती है। नदी में जल का उसकी क्षमता से अधिक विसर्जन भारी वर्षा, अत्यधिक हिम के पिघलने, प्राकृतिक अवरोध के खण्डित हो जाने तथा बाँध टूटने के परिणामस्वरूप होता है।

प्रश्न 10.
महाराष्ट्र के कोयना क्षेत्र में आए भूकंप के पीछे कौन-सा कारण माना जाता है ?
उत्तर:
कोयना बाँध महाराष्ट्र में दक्षिणी पठार पर बनाया गया है। इस क्षेत्र को स्थिर और भूकंप-रहित समझा जाता था, परन्तु यहाँ 11 दिसम्बर, 1967 में कोयना बाँध पर आए भूकंप ने सभी को अचम्भित कर दिया। यह भूकंप कोयना बाँध के जलाशय में अधिक जल के भर जाने के कारण आया। इस जल के अधिक भार के कारण स्थानीय भू-सन्तुलन बिगड़ गया तथा चट्टानों में दरारें पड़ गईं। इस भूकंप को मानवकृत भूकंप कहा जा सकता है।

प्रश्न 11.
प्राकृतिक आपदा और अकाल में क्या अन्तर होता है?
उत्तर:
जहाँ आपदाएँ और संकट प्राकृतिक परिघटनाएँ हैं, वहाँ अकाल एक मानव-जनित (Man made) स्थिति है। अकाल तब पड़ता है जब भोजन, दवाइयों व राहत-सामग्री की कमी तथा यातायात और संचार की अपर्याप्त सुविधा के कारण लोग भूख, बीमारी और बेबसी से त्रस्त होकर मरने लगते हैं।

प्रश्न 12.
भू-स्खलन को रोकने के दो उपाय बताइए।
उत्तर:

  1. पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाए तथा किसी नीतिगत ढंग से पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाया जाए।
  2. पर्वतों में गैर जरूरी खनन पर रोक लगाई जाए।

प्रश्न 13.
भू-स्खलन क्या होता है?
उत्तर:
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभावाधीन पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी शिलाओं से लेकर काफी बड़े भू-भाग के ढलान के नीचे की ओर सरकने या खिसकने की क्रिया को भूस्खलन कहा जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
बाढ़ से आपका क्या अभिप्राय है? बाढ़ आने के किन्हीं चार कारणों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नदी की क्षमता से अधिक जल का बहाव, जिसमें नदी तट के निकट की निम्न व समतल भूमि डूब जाए, बाढ़ कहलाती है। नदी में जल का उसकी क्षमता से अधिक विसर्जन भारी वर्षा, अत्यधिक हिम के पिघलने, प्राकृतिक अवरोध के खण्डित हो जाने तथा बाँध टूटने के परिणामस्वरूप होता है।

बाढ़ आने के कारण-बाढ़ आने के कारण निम्नलिखित हैं-
(1) भारी वर्षा-दक्षिण-पश्चिम मानसून पवनें सीमित अवधि में भारी वर्षा करती हैं। इस वर्षा का तीन-चौथाई भाग मानसून पवनों द्वारा जून से सितम्बर तक प्राप्त किया जाता है। इस कारण गंगा व उसकी अनेक सहायक नदियों में वर्षा ऋतु में बाढ़ आ जाती है। इसी प्रकार पश्चिमी घाट की पश्चिमी ढलानों व पश्चिमी तटीय मैदान तथा असम में हिमालय में भारी तथा निरन्तर वर्षा के कारण ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ आ जाती है।

(2) उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात-भारत के पूर्वी तट पर आन्ध्र प्रदेश व उड़ीसा में तथा पश्चिमी तट पर गुजरात में बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर से उठने वाले उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात भयंकर बाढ़ लाते हैं।

(3) विस्तृत जल-ग्रहण क्षेत्र भारत की अधिकांश नदियों के जलग्रहण क्षेत्र बहुत विस्तृत हैं। परिणामस्वरूप इन नदी घाटियों के मध्य व निम्न भागों में भारी मात्रा में जल भर जाता है जो बाढ़ का कारण बनता है।

(4) नदी के प्रवाह में अवरोध नदी के तली में मिट्टी व अन्य अवसादों के जमाव, भूस्खलन तथा नदी विसर्जन (Meandering) आदि से नदी के जल का प्रवाह अवरुद्ध होने लगता है। अवरोध के अचानक टूटने के बाद नदी का जल अत्यन्त तेजी के साथ बहकर निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ ला देता है।

प्रश्न 2.
सूखे के चार प्रकारों के नाम लिखिए व किसी एक प्रकार का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सूखा निम्नलिखित प्रकार का होता है-

  • मौसम विज्ञान सम्बन्धी सूखा
  • जल विज्ञान सम्बन्धी सूखा
  • भौमिक जल सम्बन्धी सूखा
  • कृषि अथवा मृदा जल सम्बन्धी सूखा।

मौसम विज्ञान सम्बन्धी सूखा-यह सूखा सामान्य से कम वर्षा होने की स्थिति में पैदा होता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Dept.) के अनुसार, यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून पवनों से औसत वार्षिक वर्षा के 75 प्रतिशत से कम हो तो सूखा पड़ता है और यदि यह वर्षा सामान्य से 50 प्रतिशत से भी कम हो तो भीषण सूखा पड़ता है।

प्रश्न 3.
भूकम्प के परिणाम बताते हुए इसके प्रभाव को कम करने के सुझाव दीजिए।
उत्तर:
भूकम्प में बड़े पैमाने पर भू-तल और जनसंख्या प्रभावित होती है। इससे जान और माल की भारी क्षति होती है तथा भूकम्प बुनियादी ढाँचे, परिवहन व संचार व्यवस्था, उद्योग और अन्य विकासशील क्रियाओं को ध्वस्त कर देता है। इससे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट पहुँचती है।

भूकम्प के प्रभाव से होने वाले नुकसान को कम करने के निम्नलिखित तरीके हैं-

  • भूकम्प-नियन्त्रण केन्द्रों की स्थापना की जाए ताकि भूकम्प सम्भावित क्षेत्रों में लोगों को सूचित किया जा सके। GPS प्रणाली की सहायता से प्लेट हलचल का पता लगाया जा सकता है।
  • भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में घरों के प्रकार और भवन डिजाइन में सुधार करना।
  • भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में भूकम्प प्रतिरोधी भवन बनाना और हल्की निर्माण सामग्री का प्रयोग करना।

प्रश्न 4.
भूकम्प आने के किन्हीं दो कारणों की व्याख्या करें।
उत्तर:
1. भू-प्लेटों का खिसकना-जब अधिकांश वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि भूकम्प भू-प्लेटों के खिसकने से आते हैं। पृथ्वी का कठोर स्थलमंडल भू-प्लेटों से बना है, जिनकी औसत मोटाई 100 कि०मी० है। इन प्लेटों के नीचे दुर्बलता मंडल स्थित हैं। ये प्लेटें एक साथ गतिशील रहती हैं। इन प्लेटों के आपस में टकराने से भूकम्प पैदा होते हैं। अधिकांश भूकम्प इन प्लेटों के किनारों पर आते हैं।

2. ज्वालामुखी क्रिया-प्रचण्ड वेग से मैग्मा व गैसें जब भूपटल पर आने का प्रयास करती हैं तो कड़ी शैलों के अवशेष के कारण चट्टानों में कम्पन पैदा होता है। इसके अतिरिक्त भूपटल के कमज़ोर भागों को तोड़कर मैग्मा जब भारी विस्फोट के साथ बाहर निकलता है तो इससे चट्टानों में कम्पन आता है। लेकिन इस तरह के झटके छोटे क्षेत्र तक सीमित रहते हैं।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

प्रश्न 5.
भारत में भूकंपीय क्षेत्रों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में कोई भी क्षेत्र भूकम्पों के प्रभाव से अछूता नहीं हैं। भारत मध्य महाद्वीपीय भूकम्प पेटी में आता है। सबसे अधिक भूकम्प भारत के हिमालयी क्षेत्र में आते हैं। इसका कारण यह है कि ये नवीन मोड़दार पर्वत आज भी ऊपर उठ रहे हैं। इससे इस क्षेत्र का सन्तुलन बिगड़ता है और भूकम्प आते हैं। अरावली से पूर्व में असम तक फैले उत्तरी भारत के मैदान में जलोढ़ के भारी जमाव द्वारा उत्पन्न भू-असन्तुलन के कारण भूकम्प आते हैं। मैदानी भाग के भूकम्प कम विनाशकारी होते हैं।

दक्कन पठार अब तक भूकम्पों से इसलिए मुक्त समझा जाता था क्योंकि यह विश्व के सबसे कठोर स्थल खण्डों में से एक है। लेकिन सन् 1967 में कोयना तथा सन् 1993 में लाटूर में आए भूकम्पों ने इस भ्रम को भी तोड़ दिया। फिर भी यह माना जा सकता है कि दक्षिणी पठार पर बहुत कम भूकम्प आते हैं। भारत में अब तक का सबसे बड़ा भूकम्प सन् 2001 में गुजरात के भुज में आया था। इसमें 50,000 से अधिक लोग मारे गए थे। सन् 2005 में कश्मीर में आए भूकम्प में भी 15,000 से अधिक लोग मारे गए थे।

प्रश्न 6.
भूकम्प क्या है? उसके परिणाम लिखिए।
अथवा
भूकम्प के किन्हीं चार दुष्परिणामों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी के आंतरिक भाग में संचित दबाव तथा हलचलों के कारण तरंगों का संचरण चट्टानों में कंपन पैदा करता है, इसे भूकंप कहते हैं। भूकंप पृथ्वी की ऊपरी सतह में होने वाली विवर्तनिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न ऊर्जा से पैदा होते हैं। भूकम्प के दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं-

  • भूकम्पों से न केवल हजारों-लाखों लोग मारे जाते हैं, बल्कि भारी संख्या में मकान और खेत इत्यादि भी नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं।
  • भूकम्प के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन होता है जिनसे नदियों के मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। इससे बातें आती हैं जो जन और धन की हानि करती हैं।
  • भूकम्प के आने पर समुद्र में ऊँची-ऊँची लहरें उठती हैं। इन भूकम्पीय समुद्री लहरों को जापान में सुनामी तरंगें (Tsunamis) कहा जाता है। ये तरंगें तटीय भागों का विनाश करती हैं।
  • भूकम्प से भूपटल पर पड़ी दरारों के कारण न केवल यातायात अवरुद्ध हो जाता है बल्कि अनेक इम पशु इनमें समा जाते हैं।

प्रश्न 7.
भू-स्खलन निवारण के मुख्य उपायों का वर्णन करें।
उत्तर:
भू-स्खलन निवारण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग उपाय होने चाहिएँ, जो निम्नलिखित हैं-

  • अधिक भू-स्खलन वाले क्षेत्रों में सड़क और बाँध निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध होना चाहिए।
  • स्थानान्तरी कृषि वाले क्षेत्रों में (उत्तर:पूर्वी भाग) सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि की जानी चाहिए।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में वनीकरण को बढ़ावा देना चाहिए।
  • जल-बहाव को कम करने के लिए बाँधों का निर्माण किया जाना चाहिए।

प्रश्न 8.
भूकम्पों से होने वाले प्रमुख लाभों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
उत्तर:

  1. भूकम्पों के माध्यम से हमें पृथ्वी की आन्तरिक संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।
  2. भूकम्पीय बल से उत्पन्न भ्रंश और वलन अनेक प्रकार के भू-आकारों को जन्म देते हैं; जैसे पर्वत, पठार, मैदान और घाटियाँ आदि। भूमि के धंसने से झरनों और झीलों जैसे नए जलीय स्रोतों की रचना होती है।
  3. समुद्र तटीय भागों में आए भूकम्पों के कारण कम गहरी खाड़ियों का निर्माण होता है जहाँ सुरक्षित पोताश्रय बनाए जा सकते हैं।

प्रश्न 9.
भू-स्खलन के दुष्परिणामों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:

  1. बेशकीमती जान और माल की हानि होती है।
  2. नदी मार्ग अवरुद्ध हो जाने से बाढ़ें आती हैं। उदाहरणतः अगस्त, 1998 में पिथौरागढ़ का लामारी गाँव भूस्खलन से अवरुद्ध हुई काली नदी के जल में डूबकर नष्ट हो गया था।
  3. भू-स्खलनों से न केवल पर्यावरण नष्ट हो रहा है, बल्कि उपजाऊ मिट्टी के रूप में प्राकृतिक संसाधनों का भी विनाश हो रहा है।
  4. हरित आवरण विहीन ढलानों पर बहते जल का अवशोषण न हो पाने की स्थिति में जलीय स्रोत सूख रहे हैं।

प्रश्न 10.
“उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात केवल प्रायद्वीपीय भारत में ही अधिक प्रभावशाली होते हैं।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
चक्रवातों की उत्पत्ति के निम्नलिखित कारण हैं-
(1) चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए पर्याप्त कॉरियालिस बल चाहिए ताकि पवन चक्राकार घूम सके। भूमध्य रेखा व इसके दोनों ओर 5° उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों के बीच कॉरियालिस बल क्षीण होता है। इसीलिए चक्रवात 5° से 20° अक्षांशों के बीच उत्पन्न होते हैं।

(2) विस्तृत समुद्री क्षेत्र जिसके तल का तापमान 27° सेल्सियस से अधिक हो ताकि चक्रवात को भारी मात्रा में आर्द्रता मिल सके। आर्द्र वायु के संघनित होने पर जो गुप्त ऊष्मा मुक्त होती है, वही चक्रवात की अपार ऊर्जा का स्रोत होती है।

(3) शान्त वायु क्षेत्र का होना भी आवश्यक है।

(4) चक्रवात के ऊपर 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रतिचक्रवात अर्थात् उच्च वायुदाब होना चाहिए ताकि धरातल से ऊपर उठने वाली वायु को बाहर निकलने का मौका मिलता रहें और धरातल में स्थित केन्द्र में निम्न वायुदाब बना रहे। दी गई दशाएँ बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में उपलब्ध होती हैं। यही कारण है कि चक्रवात इन जलराशियों में उत्पन्न होकर निकटवर्ती भारतीय प्रायद्वीय पर अत्यधिक प्रभावशाली होते हैं।

प्रश्न 11.
चक्रवातों की उत्पत्ति के मुख्य कारणों का वर्णन करें।
उत्तर:
चक्रवातों की उत्पत्ति के निम्नलिखित कारण हैं-
(1) चक्रवातों की उत्पत्ति के लिए पर्याप्त कॉरियालिस बल चाहिए ताकि पवन चक्राकार घूम सके। भूमध्य रेखा व इसके दोनों ओर 5° उत्तरी व दक्षिणी अक्षांशों के बीच कॉरियालिस बल क्षीण होता है। इसीलिए चक्रवात 5° से 20° अक्षांशों के बीच उत्पन्न होते हैं।

(2) विस्तृत समुद्री क्षेत्र जिसके तल का तापमान 27° सेल्सियस से अधिक हो ताकि चक्रवात को भारी मात्रा में आर्द्रता मिल सके। आर्द्र वायु के संघनित होने पर जो गुप्त ऊष्मा मुक्त होती है, वही चक्रवात की अपार ऊर्जा का स्रोत होती है।

(3) शान्त वायु क्षेत्र का होना भी आवश्यक है।

(4) चक्रवात के ऊपर 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रतिचक्रवात अर्थात उच्च वायुदाब होना चाहिए ताकि धरातल से ऊपर उठने वाली वायु को बाहर निकलने का मौका मिलता रहे और धरातल में स्थित केन्द्र में निम्न वायुदाब बना रहे। यही कारण है कि चक्रवात इन जलराशियों में उत्पन्न होकर निकटवर्ती भारतीय प्रायद्वीय पर अत्यधिक प्रभावशाली होते हैं।

प्रश्न 12.
भूकम्प की आपदा से कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर:
भूकम्प कुदरत का एक ऐसा कहर है जिसे रोकना तो सम्भव नहीं किन्तु संगठित प्रयासों से उसके विनाश को कम किया जा सकता है। भूकम्प सैंकड़ों वर्षों के विकास को क्षण-भर में मिटा सकता है। भूकम्प का प्रतिकार करना किसी अत्यन्त शक्तिशाली शत्रु से युद्ध करने जैसा है। अतः भूकम्प के विरुद्ध एक नीतिगत रक्षा कवच बनाया जाना जरूरी है। इसके तहत न केवल भूकम्पमापी केन्द्रों की संख्या बढ़ाई जाए बल्कि भूकम्प की सूचना को कारगर तरीके से आखिरी आदमी तक फैलाया जाए। संवदेनशील भूकम्प क्षेत्रों में लोगों को भूकम्प से पहले, उसके दौरान व बाद में उठाए जाने वाले कदमों का अभ्यास करवाते रहना चाहिए। वहाँ तरंगरोधी मकानों की योजना लागू करना जरूरी है।

भूकम्प के विरुद्ध उपाय और इच्छाशक्ति जन-धन की अपार हानि को कम कर सकती है।

प्रश्न 13.
भारतीय अर्थव्यवस्था पर सूखे के पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था पर सूखे के निम्नलिखित प्रभाव पड़े हैं
(1) कृषि उपज में कमी-वर्ष 1987 के सूखे के कारण II 25 अरब से अधिक कृषि उपज का नुकसान हुआ। केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों ने सूखे पर लगभग II 75 अरब व्यय किए। खाद्यान्नों के उत्पादन में लगभग 165 लाख टन की गिरावट आई। खाद्य समस्या के कारण जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया।

(2) प्रति व्यक्ति आय में कमी-सूखे के परिणामस्वरूप कम कृषि उपज के कारण भारत की प्रति व्यक्ति आय कम हो जाती है, जिसको बढ़ाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इससे अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

(3) कृषि मजदूरों की दुर्दशा-सूखे का सबसे बुरा प्रभाव कृषि मजदूरों पर पड़ता है। मज़दूर बेरोज़गार हो जाते हैं, क्योंकि वर्षा न होने के कारण खेतों में कोई काम नहीं रहता और धन के अभाव के कारण मजदूरों का भूख से मरना शुरु हो जाता है।

(4) बीमारियों की बढ़ोत्तरी-सूखे में जल के अभाव के कारण अनेक बीमारियाँ पनपने लगती हैं। पौष्टिक भोजन में कमी होने के कारण बच्चों तथा स्त्रियों में बीमारियाँ बहुत फैल जाती हैं। सरकार के राहत कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च हो जाते हैं, जिससे राजस्व पूँजी में कमी आ जाती है।

(5) पशुधन में कमी-चारे के अभाव के कारण लाखों पशु मर जाते हैं, जिसका खाद्य आपूर्ति पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक आपदाएँ क्या हैं? भारत के संदर्भ में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का वर्णन कीजिए। अथवा भारत में प्राकृतिक आपदाओं के क्षेत्रों का वर्णन करें।
उत्तर:
प्राकृतिक आपदा का अर्थ (Meaning of Natural Disaster)-जल, थल अथवा वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली एक असामान्य घटना जिसके कुप्रभाव से एक विस्तृत क्षेत्र में जान-माल की हानि तथा पर्यावरण का ह्रास होता है, प्राकृतिक आपदा कहलाती है। यह प्राकृतिक घटना जो सीमित अवधि के लिए आती है उस देश की सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था को बुरी तरह छिन्न-भिन्न कर देती है। आपदा केवल प्राकृतिक नहीं होती, यह मानव-जनित भी हो सकती है। आपदाओं के विभिन्न स्वरूपों के आधार पर उन्हें निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है

  • प्राकृतिक अथवा भौगोलिक आपदा
  • मानवकृत अथवा कृत्रिम आपदा
  • जैविक आपदा।

विभिन्न प्राकृतिक आपदाएँ (Various Natural Disasters)-प्राकृतिक प्रकोप अथवा कारणों से उत्पन्न आपदाएँ प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती हैं। ये धरातल के ऊपर अथवा नीचे कार्यरत शक्तियों की क्रिया का परिणाम होती हैं। विश्व जलवायु संगठन के अनुसार प्राकृतिक घटनाओं का प्रलयकारी परिणाम या इन घटनाओं की संगठित क्रिया जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि तथा मानव क्रियाकलापों का उच्छेदन हो, प्राकृतिक आपदा कहलाती है। इनका वर्गीकरण अनेक निम्नलिखित दृष्टियों से किया जा सकता है

  • विवर्तनिक (Tectonic) आपदाएँ भूकंप (Earthquake) तथा ज्वालामुखी उदगार (Volcanic Eruption)।
  • भौमिक अथवा भू-तलीय आपदाएँ-भूस्खलन (Landslide), हिमस्खलन या हिमघाव (Avalanche) तथा भू-क्षरण।
  • वायुमंडलीय आपदाएँ-चक्रवात (Cyclone), तड़ित (Lightning), तड़ितझंझा (Thunder Storm), टारनैडो (Tomado), बादल फटना (Cloud Brust), सूखा (Drought), पाला (Frost), लू (Loo)।
  • जलीय आपदाएँ-बाढ़ (Flood), ज्वार (Tide), महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents), सुनामी (Tsunami)।

इनमें से प्रमुख आपदाओं का विवरण इस प्रकार है–
1. भूकंप-पृथ्वी के आंतरिक भाग में संचित दबाव तथा हलचलों के कारण तरंगों का संचरण चट्टानों में कंपन पैदा करता है, इसे भूकंप कहते हैं। भूकंप पृथ्वी की ऊपरी सतह में होने वाली विवर्तनिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न ऊर्जा से पैदा होते हैं।
देश को निम्नलिखित पांच भूकंपीय क्षेत्रों में बांटा गया है-
(1) सर्वाधिक तीव्रता का क्षेत्र इस क्षेत्र में उत्तर:पूर्वी राज्य, नेपाल, बिहार सीमावर्ती क्षेत्र, उत्तराखंड, हिमालय पर्वत श्रेणी, पश्चिमी हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला क्षेत्र, कश्मीर घाटी के कुछ क्षेत्र, कच्छ प्रायद्वीप तथा अण्डमान निकोबार द्वीप समूह सम्मिलित हैं।

(2) अधिक तीव्रता का क्षेत्र-इसके अंतर्गत कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के बचे भाग, उत्तरी पंजाब, पूर्वी हरियाणा, बिहार के उत्तरी मैदानी भाग एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश आते हैं।

(3) मध्यम तीव्रता का क्षेत्र-इसके अंतर्गत उत्तरी प्रायद्वीपीय पठार सम्मिलित हैं।

(4) निम्न तीव्रता का क्षेत्र देश के शेष बचे हुए भागों में से तमिलनाडु, उत्तर:पश्चिम तथा पूर्वी राजस्थान, ओडिशा का प्रायद्वीपीय भाग, उत्तरी मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ आते हैं।

(5) अति निम्न तीव्रता का क्षेत्र इस क्षेत्र में जोन-II के क्षेत्रों के भीतरी भाग शामिल हैं।

2. भूस्खलन-पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में चट्टानों के टुकड़ों का पर्वतीय ढलानों पर अचानक नीचे की ओर सरकना तथा लुढ़कना भूस्खलन कहलाता है। यह प्राकृतिक आपदा मुख्यतया पर्याप्त वर्षा वाले पर्वतीय क्षेत्रों में आती है। भूस्खलन एक त्वरित घटने वाली प्राकृतिक घटना है जिससे जन-धन की हानि होती है। नदियों के मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं तथा यातायात प्रभावित होता है। भूस्खलन अनेक प्रकार के होते हैं, जिनमें-

  • अवपात
  • सर्पण
  • अवसर्पण
  • प्रवाह तथा
  • विसर्पण मुख्य होते हैं।

भारत के प्रमुख भूस्खलन क्षेत्र इस प्रकार है।

  • अति उच्च भूस्खलन क्षेत्र-इसमें हिमालय के राज्य; जैसे हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड आते हैं। इन क्षेत्रों में अत्यधिक हानि होती है।
  • उच्च भूस्खलन क्षेत्र इसमें समस्त पूर्वोत्तर राज्य; जैसे अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर, असम आदि आते हैं। यहाँ वर्षाकाल में जानमाल की हानि अधिक होती है।
  • मध्यम भूस्खलन क्षेत्र इसके अंतर्गत पश्चिमी घाट, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु राज्यों के नीलगिरी पहाड़ियों के क्षेत्र आते हैं।
  • निम्न भूस्खलन क्षेत्र-इस क्षेत्र में पूर्वीघाट के राज्यों के सागर तटीय क्षेत्र आते हैं। यहाँ वर्षाकाल में हानि अधिक है। सामान्य भूस्खलन की घटनाएँ होती रहती हैं।
  • अतिनिम्न भूस्खलन क्षेत्र इस क्षेत्र में विंध्याचल की पहाड़ियाँ तथा पठारों के भाग शामिल हैं। यहाँ कभी-कभी भूस्खलन की घटनाएँ होती हैं।

3. चक्रवात उष्ण कटिबंधीय चक्रवात 30° उत्तर से 30° दक्षिण अक्षांशों के मध्य पाए जाते हैं। साधारणतया इनका व्यास 500 से 1000 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ होता है। इनकी ऊर्ध्वाधर ऊँचाई 12-14 किलोमीटर तक होती है। प्राकृतिक आपदाओं में उष्ण कटिबंधीय चक्रवात सर्वाधिक शक्तिशाली, विध्वंसक, प्राणघातक तथा खतरनाक होते हैं। चक्रवातों को उनके था मौसम के आधार पर चार प्रकारों में बाँटा जा सकता है-

  • विक्षोभ
  • अवदाब
  • तूफान तथा
  • हरिकेन या टाइफून।

भारत में चक्रवातों का वितरण-भारत के प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। भारत में आने वाले चक्रवात इन्हीं दोनों जलीय क्षेत्रों से उत्पन्न होते हैं। बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवात अधिकतर अक्तूबर व नवम्बर में 16° से. 21° उत्तरी अक्षांश तथा 92° पूर्व देशांतर के पश्चिम में पैदा होते हैं। ये चक्रवात जुलाई के महीने में सुंदरवन डेल्टा के पास 18° उत्तर अक्षांश तथा 90° पूर्व देशांतर के पश्चिम से उत्पन्न होते हैं।

4. सूखा-सूखा एक घातक पर्यावरणीय आपदा है। यह मनुष्य, जीव-जंतुओं, वनस्पति तथा कृषि को प्रभावित करता है। किसी क्षेत्र विशेष अथवा प्रदेश या देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। किसी क्षेत्र में लंबी अवधि तक वर्षा की कमी, कम वर्षा होना, अत्यधिक वाष्पीकरण तथा जलाशयों तथा भूमिगत जल के अत्यधिक प्रयोग से भूतल पर जल की कमी हो जाती है, जिसे सूखा कहते हैं। विभाग ने सूखे को दो वर्गों में बांटा है

  • प्रचंड सूखा-जब वास्तविक वर्षा सामान्य वर्षा से 50 प्रतिशत अथवा इससे भी कम होती है तो इसे प्रचंड सूखा कहते हैं
  • सामान्य सूखा जब वास्तविक वर्षा सामान्य वर्षा से 50 से 75 प्रतिशत के मध्य होती है तो इसे सामान्य सूखा कहते हैं।

भारत में सूखाग्रस्त क्षेत्र भारत में सूखे से प्रभावित होने वाले संभावित क्षेत्र बिहार, झारखंड का पठारी भाग, गुजरात, पश्चिमी राजस्थान, मराठवाड़ा, तेलंगाना, ओडिशा के कालाहाण्डी तथा समीपवर्ती क्षेत्र आदि मुख्य हैं। सूखे की तीव्रता के आधार पर भारत को निम्नलिखित तीन क्षेत्रों में बांटा गया है
(i) अत्यधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-राजस्थान, विशेषकर पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थल जिसमें राजस्थान के जैसलमेर तथा बाड़मेर जिले शामिल हैं। यहाँ औसत वर्षा 90 मि०मी० से भी कम होती है तथा गुजरात का रन व कच्छ क्षेत्र आता है।

(ii) अधिक सूखा प्रभावित क्षेत्र-इस क्षेत्र के अंतर्गत राजस्थान के पूर्वी भाग, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के पूर्वी भाग, कर्नाटक का पठारी भाग, आंध्र प्रदेश के भीतरी भाग, तमिलनाडु का उत्तरी भाग, दक्षिणी झारखंड तथा ओडिशा के भीतरी भाग सम्मिलित हैं।

(iii) मध्यम सूखा प्रभावित क्षेत्र-इसमें उत्तरी राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी जिले, पूर्वी गुजरात, झारखंड, तमिलनाडु से कोयम्बटूर पठार तक तथा आंतरिक कर्नाटक शामिल हैं।

5. बाढ बाढ का संबंध अतिवष्टि से है। प्राकतिक आपदाओं में बाढ भी एक अत्यंत तबाही मचाने वाली आपदा है। नदियों में जल-स्तर इतना बढ़ जाता है कि जल की विशाल राशि उन क्षेत्रों में प्रविष्ट कर जाती है जहाँ सामान्यतया उसकी उपेक्षा नहीं की जाती। इस प्रकार जल के अनियंत्रित तथा असीमित फैलाव को बाढ़ कहा जाता है। सामान्य शब्दों में वर्षा जल की अधिकता के कारण जल अपने प्रवाह मार्ग में न बहकर तटबंधों से बाहर आकर मानव अधिवासों तथा समीपवर्ती भूभाग को जलमग्न कर देता है तो उसे बाढ़ कहते हैं। सामान्यतया बाढ़ विशेष ऋतु में तथा विशेष क्षेत्र में ही आती है।

बाढ़ मूलतः प्राकृतिक कारकों का प्रतिफल है, परंतु मानवीय कारक भी इसमें सक्रिय योगदान देते हैं। मानवीय क्रियाकलाप; जैसे नदियों के मार्ग में परिवर्तन, नगरीकरण, बांध का निर्माण, अंधाधुंध वन कटाव, अवैज्ञानिक कृषि, भूमि उपयोग में परिवर्तन, बाढ़ के मैदानों में मानव अधिवास के कारण बाढ़ की तीव्रता, परिमाण तथा विध्वंसता में वृद्धि होती है

6. सुनामी-भूकम्प और ज्वालामुखी से उठी समुद्री लहरों को सुनामी तरंगें कहा जाता है। महासागरों की तली पर आने वाले भूकम्प से महासागरीय जल विस्थापित होता है जिससे ऊर्ध्वाधर ऊँची तरंगें पैदा होती हैं जिन्हें ‘सुनामी’ कहा जाता है। महासागरों के तटीय क्षेत्रों में ये तरंगें ज्यादा प्रभावी होती हैं कई बार तो इनकी ऊँचाई 15 मीटर या इससे भी अधिक होती है।

सुनामी लहरों के क्षेत्र-सुनामी लहरें आमतौर पर प्रशान्त महासागरीय तट जिसमें अलास्का, जापान, फिलीपाइन, दक्षिण-पूर्वी एशिया के दूसरे द्वीप, इण्डोनेशिया और मलेशिया तथा हिन्द महासागर में म्यांमार, श्रीलंका और भारत के तटीय भागों में आती हैं।

सुनामी लहरों के प्रभाव तट पर पहुँचने पर सुनामी लहरें अत्यधिक ऊर्जा निर्मुक्त करती हैं और समुद्र का जल तेजी से तटीय क्षेत्रों में घुस जाता है और तट के निकटवर्ती क्षेत्रों में तबाही फैलाता है। अतः तटीय क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक होने के कारण दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की अपेक्षा सुनामी अधिक जान-माल का नुकसान पहुँचाती है।

HBSE 11th Class Geography Important Questions Chapter 7 प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ

प्रश्न 2.
भारत में बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का वर्णन कीजिए तथा बाढ़ों से होने वाली क्षति का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
नदी में जब पानी की मात्रा उसकी जलमार्ग क्षमता से अधिक हो जाती है तब उसे बाढ़ के रूप में जाना जाता है। बाढ़ की मात्रा घर्षण की मात्रा और तीव्रता, तापमान, तथा ढाल पर निर्भर करती है। लम्बी अवधि तक होने वाली वर्षा से मिट्टी अपनी सम्पूर्ण क्षमता तक पानी से परिपूर्ण हो जाती है और वहाँ का अनुपात बढ़ता जाता है। बजरी, जिसके नीचे अप्रवेश्य पदार्थ न हो, इसका अपवाद है। जहाँ पर झंझावातों द्वारा भारी वर्षा होती है, वहाँ बाढ़ का खतरा अधिक होता है। बाढ़ निम्नलिखित दो प्रकार की होती है

आकस्मिक बाढ़-इनकी अवधि बहुत छोटी होती है, इस प्रकार की बाढ़ गरज के साथ होने वाली प्रबल बौछारों से आती है। दीर्घ अवधि बाद-लम्बे समय तक वर्षा होने के कारण जल की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, जिससे सम्पूर्ण जल विभाजक क्षेत्र में बाढ़ आ जाती है।।

भारत में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र बाढ़ से जन-जीवन अव्यवस्थित हो जाता है। जन-धन की अपार हानि होती है। शहरी क्षेत्र में पेय जल की समस्या के कारण अनेक बीमारियाँ पनपने लगती हैं। भारत का अधिकांश भाग बाढ़ सम्भावित क्षेत्र है। अधिकांश बाढ़ भारत के उत्तरी भाग में आती है। गंगा तथ ब्रह्मपुत्र नदियों के अप्रवाह क्षेत्र में भारत का 60% बाढ़ग्रस्त क्षेत्र आता है। हर वर्ष गंगा, यमुना, सतलुज, रावी, व्यास, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा, कावेरी, महानदी आदि नदियों में बाढ़ आती है।

असम, बिहार, आन्ध्र प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश आदि में बाढ़ का प्रकोप बना रहता है। कोसी, तिस्ता और टोर्सा नदियाँ हिमाचल से उतरकर अवसादों के निक्षेपण से अपने रास्ते बदल लेती हैं। कोसी नदी को ‘शोक की नदी’ कहा जाता है, क्योंकि इससे काफी मात्रा में फसल नष्ट होती है। ब्रह्मपुत्र नदी असम में बाढ़ लाती है। हुगली नदी पश्चिमी बंगाल में बाढ़ लाती है। महानदी से ओडिशा के कई भाग प्रभावित होते हैं। हरियाणा में जल निकास की अव्यवस्था के कारण बाढ़ आ जाती है।

बाढ़ से होने वाली क्षति या प्रभाव-बाढ़ों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ा है-

  • बाढ़ों से फसलें समाप्त हो जाती हैं। कृषि उपज में गिरावट आ जाती है।
  • प्रति व्यक्ति आय कम हो जाती है।
  • बिजली आपूर्ति ठप्प होने से करोड़ों रुपए की हानि होती है।
  • कृषि भूमि अनुपजाऊ बन जाती है।
  • परिवहन तन्त्र गड़बड़ा जाता है।
  • उत्पादन प्रक्रिया ठप्प होने से काफी नुकसान होता है।
  • विकास कार्य रुक जाते हैं।
  • राहत कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च हो जाते हैं।
  • पीने का पानी, खाद्य सामग्री की व्यवस्था बिगड़ जाती है।

इस प्रकार प्रत्येक वर्ष भारत में सूखा तथा बाढ़ के प्रकोप से करोड़ों रुपए का नुकसान होता है। हमारी अर्थव्यवस्था में गिरावट का यह मुख्य कारण है। अतः हमें सूखा तथा बाढ़ को रोकने के लिए समय-समय पर उचित कदम उठाने चाहिएँ। हमें योजना बनाकर इस समस्या से निपटना चाहिए। हमारे द्वारा किया गया सही नियोजन करोड़ों रुपयों की पूँजी बचा सकता है।

प्रश्न 3.
एक प्राकृतिक आपदा के रूप में भूकम्प क्या है? इसके कारणों तथा परिणामों की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर:
पृथ्वी की भीतरी हलचलों के कारण जब धरातल का कोई भाग अकस्मात् काँप उठता है तो उसे भूकम्प कहते हैं। चट्टानों की तीव्र गति के कारण हुआ यह कम्पन अस्थायी होता है। भूकम्प आने के कारण भूकम्प आने का मुख्य कारण पृथ्वी की सन्तुलित अवस्था में व्यवधान का पड़ना है। सन्तुलन की अवस्था में अस्थिरता निम्नलिखित कारणों से आती है-
1. भू-प्लेटों का खिसकना-पृथ्वी का कठोर स्थलमंडल भू-प्लेटों से बना है। इन प्लेटों के नीचे दुर्बलता मंडल स्थित हैं। ये प्लेटें एक साथ गतिशील रहती हैं तथा इन प्लेटों के आपस में टकराने से भूकम्प पैदा होते हैं। अधिकांश भूकम्प इन प्लेटों के किनारे पर आते हैं।

2. ज्वालामुखी क्रिया प्रचण्ड वेग से मैग्मा व गैसें जब भूपटल पर आने का प्रयास करती हैं तो कड़ी शैलों के अवरोध के कारण चट्टानों में कम्पन पैदा होती है। इसके अतिरिक्त भूपटल के कमजोर भागों को तोड़कर मैग्मा जब भारी विस्फोट के साथ बाहर निकलता है तो इससे चट्टानों में कम्पन आती है।

3. भूपटल का संकुचन पृथ्वी के भीतर का भाग धीरे-धीरे ठण्डा होकर सिकुड़ रहा है। ऊपर की चट्टानें जब नीचे की सिकुड़ती हुई चट्टानों से समायोजन करती हैं तो शैलों में आई अव्यवस्था के कारण भूकम्प आते हैं।

4. भूसन्तुलन भूपटल की ऊपरी चट्टानों ने ऊपर-नीचे समायोजित होकर सन्तुलन बना लिया है। कालान्त भू-भागों के अपरदन से उत्पन्न तलछट धीरे-धीरे समुद्री तली में निक्षेपित होने लगता है। इससे पृथ्वी का सन्तुलन भंग हो जाता है। अतः पुनः सन्तुलन प्राप्त करने की प्रक्रिया भूकम्प को जन्म देती है।

5. इलास्टिक रिबाऊन्ड सिद्धान्त-चट्टानें रबड़ की तरह प्रत्यास्थ होती हैं, इनमें पैदा होने वाले सम्पीड़न और तनाव की एक सीमा होती है। उस सीमा के बाद शैल और अधिक तनाव सहन नहीं कर सकती और वह टूट जाती है; ठीक उसी प्रकार जैसे रबड़ अत्यधिक खिंचाव के बाद टूट जाती है। शैल खण्डों का अकस्मात् टूटना और पुनः अपना स्थान ग्रहण करना भूकम्प पैदा करता है।

6. जलीय भार जब कभी मानव-निर्मित बड़े-बड़े जलाशयों में जल एकत्रित कर लिया जाता है तो जल भार से नीचे की चट्टानों पर दबाव बढ़ता है। इससे भूसन्तुलन अस्थिर हो जाता है। अतः उस क्षेत्र में जब भूसन्तुलन पुनः स्थापित होता है तब भूकम्प आते हैं।

7. गैसों का फैलाव-भूगर्भ में ऊँचे ताप के कारण चट्टानों के पिघलने और रिसे हुए समुद्री जल के उबलने से गैसों की उत्पत्ति होती है। चट्टानों पर सतत् बढ़ता हुआ दबाव उनमें कम्पन पैदा करता है।

8. अन्य कारण भस्खलन (Landslide), भारी हिमखण्डों (Avalanches) का ढलानों से नीचे गिरना, चना प्रदेशों (Karst Regions) में बड़ी गुफाओं की छतों का गिरना, खानों (Mines) की छतों का नीचे बैठना, पोखरण जै परीक्षण तथा भारी मशीनों और रेलों का चलना आदि ऐसे कारण हैं जो स्थानीय स्तर पर भूकम्प लाते हैं।

भूकम्पों से होने वाली हानियाँ (परिणाम)-
(1) भूकम्पों से न केवल हजारों-लाखों लोग मारे जाते हैं, बल्कि भारी संख्या में मकान और खेत इत्यादि भी नष्ट-भ्रष्ट हो जाते हैं। बीसवीं शताब्दी में लाखों भूकम्प आए किन्तु इनमें से केवल 34 भूकम्प ऐसे थे जिनके कारण लगभग 67 लाख लोगों की असामयिक मृत्यु हुई।

(2) भूकम्प के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन होता है जिनसे नदियों के मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। इससे बातें आती हैं जो जन और धन की हानि करती हैं।

(3) भूकम्प के आने पर समुद्र में ऊँची-ऊँची लहरें उठती हैं। इन भूकम्पीय समुद्री लहरों को जापान में सुनामी तरंगें (Tsunamis) कहा जाता है। ये तरंगें तटीय भागों का विनाश करती हैं। सन् 1960 में चिली में आए भूकम्प से उत्पन्न सुनामी तरंगों ने काफी कहर बरसाया था।

(4) भूकम्प से भूपटल पर पड़ी दरारों के कारण न केवल यातायात अवरुद्ध हो जाता है बल्कि अनेक इमारतें, मनुष्य और पुश इनमें समा जाते हैं। सन् 1897 में असम में आए भूकम्प के कारण वहाँ 12 मील लम्बी व 35 फुट चौड़ी दरार पड़ गई थी।

(5) भूकम्प से पड़ी दरारों में से गैस, जल व कीचड़ आदि बाहर निकलते रहते हैं। गैसें वायु के सम्पर्क में आकर प्रज्ज्वलित हो उठती हैं जिससे भीषण आग लग जाती है। जल और कीचड़ में आसपास के क्षेत्र डूब जाते हैं।

प्रश्न 4.
भूस्खलन के कारणों और प्रभावों पर टिप्पणी कीजिए।
अथवा
भूस्खलन के कारण और इससे होने वाले दुष्परिणामों या संकटों का वर्णन करें।
उत्तर:
भूस्खलन के कारण यद्यपि भूस्खलन प्रकृति-जनित दुर्घटना है, लेकिन इस आपदा की आवृत्ति व उसके प्रभाव को बढ़ाने में मनुष्य की भूमिका को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। भूस्खलन के जिम्मेदार प्रमुख कारण निम्नलिखित हो सकते हैं-
1. वनों का विनाश-वक्षों की जड़ें मिट्टी को जकड़े रहती हैं। इससे वर्षा का बहता जल मिट्टी में कटाव नहीं कर पाता । वनों के विनाश से जल ढाल पर निर्बाध गति से बहता है और वृहत् स्तर पर मिट्टी और मलबे को बहा ले जाता है। वनों का विनाश मुख्यतः निम्नलिखित कारणों से होता है

  • पहाड़ों पर बढ़ती जनसंख्या खेती के लिए वनों को साफ करती है और ईंधन के लिए वृक्षों को काटती है।
  • जनसंख्या के साथ पशुओं-गाय, भेड़-बकरी आदि की संख्या भी बढ़ रही है। पशुओं से होने वाले अति चारण से वनस्पति का आवरण तेजी से हट रहा है।
  • वन विभागों व ठेकेदारों की मिली-भगत से ‘वुड माफ़िया’ पनप जाता है जो भ्रष्ट तरीकों के नियत संख्या से ज्यादा पेड़ काट लेते हैं।

2. भकम्प हिमालयी क्षेत्र में प्रायः आने वाले भूकम्प के झटके शिलाखण्डों को हिला देते हैं जिससे वे टकर नीचे की ओर खिसक जाते हैं।

3. सड़क निर्माण-पहाड़ों में सड़क निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है। वहाँ एक किलोमीटर लम्बी सड़क बनाने के लिए लगभग 6 हजार घन मीटर मलबा हटाना पड़ता है। इतनी बड़ी मात्रा में ढीला मलबा जहाँ भी पड़ता है, वर्षा के जल का अवशोषण कर ढलान के साथ नीचे की ओर सरक कर विनाश का कार्य करता है।

4. भवन निर्माण-पहाड़ों में बढ़ती जनसंख्या के लिए मकान व पर्यटन के विकास के लिए भवन एवं स्थल विकसित किए . जा रहे हैं। इन क्रियाओं से भी भूस्खलन में वृद्धि होती है।

5. स्थनान्तरी कृषि-उत्तर:पूर्वी राज्यों के पर्वतीय क्षेत्रों में आज भी प्रचलित स्थानान्तरी अथवा झूम कृषि वनों को साफ करके की जा रही है। इससे भी भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ती हैं।

भूस्खलन से होने वाले संकट (दुष्परिणाम) अथवा प्रभाव भूस्खलन से होने वाले दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं-

  • बेशकीमती जान और माल की हानि होती है।
  • नदी मार्ग अवरुद्ध हो जाने से बाढ़ें आती हैं। उदाहरणतः अगस्त, 1998 में पिथौरागढ़ का लामारी गाँव भूस्खलन से अवरुद्ध हुई काली नदी के जल में डूबकर नष्ट हो गया था।
  • भूस्खलनों से न केवल पर्यावरण नष्ट हो रहा है, बल्कि उपजाऊ मिट्टी के रूप में प्राकृतिक संसाधनों का भी विनाश हो रहा है।
  • हरित आवरण विहीन ढलानों पर बहते जल का अवशोषण न हो पाने की स्थिति में जलीय स्रोत सूख रहे हैं।

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