Author name: Bhagya

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran तत्सम तद्भव शब्द

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Tatsam Tadbhav Shabd तत्सम तद्भव शब्द Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran तत्सम तद्भव शब्द

तत्सम तद्भव शब्द

तत्सम तद्भव शब्द HBSE 9th Class Hindi प्रश्न 1.
तत्सम शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
तत्सम शब्द दो शब्दों के मेल से बना है-तत् + सम। इसका अर्थ है-उसके समान। हिंदी भाषा के शब्द-भंडार का मूल स्रोत संस्कृत भाषा है। संस्कृत के काफी शब्द हिंदी में ज्यों-के-त्यों ले लिए गए हैं। अतः संस्कृत के वे शब्द जो हिंदी में बिना किसी परिवर्तन के ले लिए गए हैं, तत्सम शब्द कहलाते हैं।

उदाहरण-
शिक्षा, पुत्र, प्रकाश, पुस्तक, दंत, मुख, दुग्ध, रात्रि, पुत्र, कर्पूर, कृषक, अग्नि आदि।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran तत्सम तद्भव शब्द

HBSE 9th Class Hindi तत्सम तद्भव शब्द प्रश्न 2.
तद्भव शब्द किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
उत्तर:
‘तद्भव’ का अर्थ है-उससे उत्पन्न। हिंदी भाषा में अनेक शब्द ऐसे हैं जो संस्कृत से परिवर्तित रूप में आए हैं। अतः संस्कृत के ऐसे शब्द जो रूप परिवर्तन के साथ हिंदी में प्रचलित हुए, तद्भव शब्द कहलाते हैं।
उदाहरण-
अग्नि – आग
दधि – दही
रात्रि – रात

यहाँ कुछ तत्सम और उनके तद्भव रूप दिए जा रहे हैं-
तत्सम – तद्भव
अग्नि – आग
अग्र – आगे
अश्रु – आँसू
अद्य – आज
अक्षि – आँख
उष्ट्र – ऊँट
उज्जवल – उजला
उष्ण – गर्म
उलूक – उल्लू
कर्ण – कान
कुंभकार – कुम्हार
काष्ठ – काठ
कर्म – काम

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran तत्सम तद्भव शब्द

क्षीर – खीर
कोकिल – कोयल
घृत – घी
ग्राम – गाँव
जिह्वा – जीभ
ज्येष्ठ – जेठ
दश – दस
छन – क्षण
दधि -दही
दग्ध – दूध
दंड – डंडा
निद्रा – नींद
नग्न – नंगा
नव – नया
पंच – पाँच
नृत्य – नाच
पाद – पाँव
पत्र – पत्ता
पुष्प – फूल
पक्षी – पंछी
भक्त – भगत
पर्यंक – पलंग
भ्राता – भाई
पुरस्कार – इनाम
भूमि – पृथ्वी

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Paryayvachi Shabd पर्यायवाची शब्द Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

पर्यायवाची

पर्यायवाची शब्द Class 9 HBSE प्रश्न 1.
समानार्थक या पर्यायवाची शब्दों से क्या अभिप्राय है? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
ऐसे शब्द जिनके अर्थ एक-से अथवा मिलते-जुलते हों; जैसे असुर-राक्षस, दैत्य-दानव आदि। पर्यायवाची शब्दों के विषय में लोगों की धारणा है कि उनके अर्थ एक-जैसे होते हैं, किन्तु यह सत्य पूर्ण सत्य नहीं है। क्योंकि एक समान दिखाई देने वाले शब्दों के अर्थ में थोड़ा बहुत अंतर अवश्य होता है। अतः हर पयार्यवाची शब्द का अपना स्वतंत्र अर्थ होता है।

जहाँ समानार्थक शब्दों से विद्यार्थी के ज्ञान में वृद्धि होती है वहाँ उसका व्यक्तिगत शब्द-कोश भी समृद्ध होता है। हिंदी पर्यायवाची शब्द संस्कृत, उर्दू, देशी या स्थानीय बोलियों और अंग्रेज़ी से भी लिए जाते हैं। कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण निम्नलिखित हैं
अंक – गोद, संख्या, चिहन, अध्याय।
अंग – भाग, उपाय, देह, अवयव।
अंधकार – अंधेरा, तम, तिमिर, तिमिस्त्र।
अमृत – पीयूष, सुधा, अमिय, सोम।
अरण्य – वन, जंगल, कानन, विपिन, अटवी।
अभिमान – घमंड, अहंकार, गर्व, दर्प।
अनुचर – दास, सेवक, भृत्य, नौकर, परिचारक।
अज – शिव, दशरथ के पिता, कामदेव, ब्रह्मा।
अजित – अजेय, अदम्य, अपराजिता, दुर्दात।
अग्नि – आग, पावक, अनल, वह्नि, कृशानु।
अतिथि – अभ्यागत, पाहुन, आगंतुक।
अधम – नीच, पतित, निकृष्ट।
अधर – होंठ, धरती, आसमान के बीच का भाग।
अनार – दाडिम, शुकप्रिय, रामबीज।
अनी – सेना, दल, कटक, नोक, चमू।
अनुपम – अपूर्व, अनोखा, अनूठा, अद्भुत।
अंतर – आकाश, अवधि, मध्य, अवकाश।
अंध – नेत्रहीन, सूरदास, अंधा।

Paryayvachi Shabd Class 9th HBSE

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

अन्न – अनाज, शस्य, धान्य।
अन्य – अपर, दूसरा, पृथक्, भिन्न।
अपमान – तिरस्कार, अनादर, अवमान, बेइज्जती।
अपवाद – कलंक, निन्दा, नियम से बाहर।
अर्थ – हेतु, धन, कारण, प्रयोजन।
अंबर – आकाश, कपड़ा।
अंबुज – कमल, नीरज, जलज, पंकज।
अलि – पंक्ति, सखी।
असंगत – अनर्गल, अनुपयुक्त, असंबद्ध।
असुर – राक्षस, दानव, निशाचर, रजनीचर।
आकाश – नभ, गगन, व्योम, द्यौ, अंबर, शून्य।
आनंद – हर्ष, मोद, प्रसन्नता, उल्लास, आह्लाद।
आभूषण – अलंकार, गहना, आभरण, मंडन।
आम – आम्र, सहकार, रसाल।
आज्ञा – आदेश, हुक्म।
आँख नेत्र, नयन, लोचन, चक्षु, दृक्, अक्षि।
इच्छा – अभिलाषा, चाह, लालसा, कामना, आकांक्षा।
इंद्र – देवराज, शक्र, सुरपति, मघवा।
इश्वर – प्रभु, परमात्मा, ईश, अनंत, भगवान्, जगदीश्वर ।
उपवन – उद्यान, आराम वाटिका, फुलवारी।
कमल – पंकज, नीरज, सरसिज, सरोज, पद्म, इंदीवर।
कृषक – किसान, खेतीहर, हलवाहा, कृषिजीवी।
कल्पवृक्ष – कल्पतरु, कल्पद्रुम, सुरतरु।
कर – हाथ, हस्त, किरण, प्राणी।
किरण – कर, रश्मि, अंशु, मयूख, मरीचि।

Paryayvachi Shabd Class 9 HBSE

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

कामदेव – अनंग, कंदर्प, मनोज, मनसिज, मदन, मन्मथ।
कारागार – जेल, बंदीगृह, कैदखाना।
किनारा – तट, कूल, तीर, कगार।
कान – श्रवण, कर्ण, क्षोत्र।
कपड़ा – वस्त्र, चीर।
कृष्ण – केशव, माधव, गोपाल, गिरिधर, वासुदेव।
कोप – क्रोध, रोष, गुस्सा, अमर्ष ।
केश – कच, कुंतल, अलक, बाल।
कृपा – दया, अनुकम्पा, अनुग्रह।
कोयल – पिक, कोकिल, श्यामा।
कोमल – मृदु, सुकुमार, नरम, मसृण, नाजुक ।
खड्ग – असि, तलवार, कृपाण, चंद्रहास, करवाल।
खर – गधा, बगुला, कौआ, तिनका, तीक्षण, खट्टा।
खल – दृष्ट, धूर्त, शठ, दुर्जन, कुटिल।
गंगा – मंदाकिनी, जाह्नवी, देवनदी, सुरसरिता, भागीरथी।
गणेश – एकदंत, गजबदन, गजानन, गणपति, गौरी पुत्र।
गदहा/गधा – खर, गदर्भ, वैशाख नन्दन, लम्ब कर्ण।
गृह – घर, आगार, आयतन, आवास, ओक, धाम, गेह।
गाय – गो, धेनु, सुरभि।
घट – घड़ा, कुम्भ, कलश, कुट, निप।
घन – बादल, हथौड़ा, भारी, घना।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

घर – मकान, आवास, कुल, बैठने का स्थान, कार्यालय।
घी – घृत, आज्य, सर्पिस्, हव्य।।
घोड़ा – सैंधव, तुरंग, अश्व, घोटक, हय।
चाँद – शशि, चंद्रमा, सुधाकर, विधु, सोम, शशांक, इंदु, रजनीश, निशिपति, हिमांशु।
चाँदनी – ज्योत्स्ना, चँद्रिका, कौमुदी।
छाता – छत्र, आतपत्र, छतरी।
जगत् – संसार, संसृति, जग, लोक, भव, दुनिया।
जल – पानी, पानीय, वारि, पय, उदक, नीर, सलिल, अंबु।
झूठ – असत्य, मिथ्या, मुधा, मृथा।
ठठोली – हास, परिहास, हँसी, मज़ाक।
तलवार – असि, खड़ग, कृपाण, करवाल, चंद्रहास।
तारा – उडु, नक्षत्र, तारक।
तालाब – सर, तड़ाग, सरोवर, ताल, जलाशय, पुष्कर, ह्रद।
तीर – शर, इषु, वाण, शिलीमुख, नाराच, विशिख।
दाँत – दंत, रद, दशन।
दास – किंकर, भृत्य, अनुचर, सेवक, परिचारक, नौकर।
दिन – दिवस, अहः, वासर, वार।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

दीन – गरीब, निर्धन, बेचारा, हीन।
दुःख – कष्ट, वेदना, क्लेश, व्यथा, विषाद, संताप।
दुर्गा – चंडी, चामुंडा, चर्ममुंडा, चण्डिका, भवानी, शाम्भवी।
देवता – देव, सुर, निर्जर, त्रिदश, विबुध, अमर।
देह – शरीर, काय, वपु, तनु, तन, घट, काया।
दूध – दुग्ध, पय, क्षीर।
धन – द्रव्य, संपत्ति, संपदा, संपत, वित्त, अर्थ, दौलत।
धनुष – चाप, शरासन, कार्मुक, कोदंड।
नौका – तरणी, तरी, जलयान, नाव, जलपात्र।
पुत्र – आत्मज, बेटा, सुत, पूत, नंदन, लड़का, तनय ।
पुत्री – तनया, तनुजा, दुहिता, लड़की, आत्मजा, सुता, बेटी, नंदिनी।
पत्ता – किसलय, पल्लव, पर्ण, पत्र।
पर्वत – नग, अचल, गिरि, धराधर, अद्रि, पहाड़, शैल, भूधर।
पक्षी – शकुन्त, अंडज, शकुनि, खग, विहग, विहंगम, पखेरू, खेचर, द्विज।
पति – स्वामी, नाथ, भर्ता, कांत, वर, वल्लभ।
पत्नी – वधू, भार्या, दारा, वल्लभा, गृहिणी, अर्धांगिनी, बहू, तिय।
पर्वत – भूधर, शैल, अचल, गिरि, महाधर, नग, पहाड़।
पंडित – सुधी, कोविद्, विद्वान्, बुध, मनीषी।
पत्थर – प्रस्तर, पाषाण, अश्म, पाहन, उपल।
पवन – हवा, वात, मारुत, अनिल, जगत्प्राण, प्रभंजन।
पार्वती – उमा, गौरी, शिव, भवानी, रुद्राणी, गिरिजा, शैलसुता, सर्वमंगला।
पृथ्वी – धरा, भू, भूमि, अचला, धरती, धरणी, वसुधा, अवनि, मेदिनी, क्षिति, धरित्री, जगती।
प्रकाश – प्रभा, ज्योति, चमक, छवि, विभा, आभा, आलोक, धुति।
पुष्प – फूल, प्रसून, कुसुम, पुहुप, सुमन।
परोक्ष – अदृश्य, अप्रत्यक्ष, अगोचर।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

वाण – तौरी, सर, विशिख, शिलीमुख, नाराच, ईषु।
सिंह – पंचमुख, वनराज, केसरी, मृगराज, मृगेन्द्र, शेर, शार्दूल।
स्त्री – नारी, वनिता, अबला, ललना, कान्ता, अंगना, रमणी, कामिनी।
स्व – देवलोक, परलोक, नाक, दिव, बैकुण्ठ।
सिर – शीश, मुण्ड, शीर्ष ।
सर्व – सब, सकल।
सुंदर – चारु, मनोहर, रमणीक, ललित, कलित, मंजुल।
भौंरा – मधुकर, अलि, भ्रमर, मधुप, मिलिंद, द्विरेफ, षट्पद।
मछली – मीन, झख, झष, मकर, मत्स्य।
मदिरा – मधु, हाला, सुरा, शराब, मद्य, वारुणी।
महादेव – शिव, हर, पशुपति, शंकर, चन्द्रशेखर, कैलाशनाथ, गिरिजापति, गिरीश, भूतेश, वामदेव।
माता – जननी, अंबा, अंबिका, प्रसविनी।
मित्र – सुहृद, दोस्त, स्नेही, हितु।
मोर – केकी, शिखी, नीलकण्ठ, मयूर।
मृत्यु – मौत, निधन, देहावसान, काल, देहान्त, मरण।
मोक्ष – निर्वाण, मुक्ति, अपवर्ग, परमपद, कैवल्य, सद्गति।
युद्ध – रण, संग्राम, लड़ाई, समर।
रात्रि – यामिनी, विभावरी, निशि, रात, रजनी, निशा।
राक्षस – दनुज, निशाचर, दैत्य, दानव, असुर ।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran पर्यायवाची शब्द

राजा – नरेश, भूपाल, नरेन्द्र, महीपाल, नृप, नृपति।
लहू – रक्त, खून, शोणित, रुधिर।।
वायु – अनिल, वात, हवा, पवन, समीर, समीरण।
वृक्ष – रुख, विटप, द्रुम, पादप, तरु, पेड़।
शत्रु – अरि, रिपु, दुश्मन, आराति।
सेना – अनि, दल, चयू, कटक, फौज।
सोना – हेम, हिरण्य, कंचन, स्वर्ण ।
सूरज – भानु, भास्कर, रवि, दिवाकर, दिनेश।

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Visheshan विशेषण Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

विशेषण

Visheshan Class 9 HBSE प्रश्न 1.
विशेषण किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
विशेषण वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है; जैसे काली गाय, मोटा लड़का, ऊँचा मकान, लाल किताब आदि। इन वाक्यों में प्रयुक्त काली, मोटा, ऊँचा एवं लाल शब्द गाय, लड़का, मकान एवं किताब की विशेषता बताते हैं।

विशेषण Class 9 HBSE प्रश्न 2.
विशेष्य किसे कहते हैं? सोदाहरण समझाइए।
उत्तर:
विशेषण जिस संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करते हैं, उसे विशेष्य कहते हैं; जैसे
(क) मेरे पास एक नीला पैन है।
(ख) राम के पास लाल कुत्ता है।
(ग) बालक चंचल है। उपर्युक्त वाक्यों में पैन, कुत्ता एवं बालक विशेष्य हैं क्योंकि विशेषण इनकी विशेषता प्रकट कर रहे हैं।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

विशेषण के भेद

Visheshan Class 9 HBSE  प्रश्न 3.
विशेषण के कितने भेद हैं? प्रत्येक का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिंदी में विशेषण के सामान्यतः चार भेद हैं-
(1) गुणवाचक विशेषण,
(2) संख्यावाचक विशेषण,
(3) परिमाणवाचक विशेषण तथा
(4) सार्वनामिक विशेषण।

1. गुणवाचक विशेषण: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम के गुण-दोष, रूप-रंग, आकार, स्थान, काल, दशा, स्थिति, शील-स्वभाव आदि की विशेषता प्रकट करे, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं; यथा-
गुण – सरल, योग्य, उदार, ईमानदार, बुद्धिमान, परिश्रमी, वीर।
दोष – अयोग्य, कुटिल, दुष्ट, क्रोधी, पापी, कपटी, नीच।
आकार-प्रकार – गोल, चौरस, चौड़ा, खुरदरा, लंबा, मुलायम।
रंग-रूप – गीरा, काला, गेहुँआ, गुलाबी, सुंदर, आकर्षक, लाल।
अवस्था – बलवान, कमज़ोर, रोगी, दरिद्र, अमीर, गरीब, छोटा।
स्वाद – खट्टा, कड़वा, मीठा, फीका।
गंध – सुगंधित, गंधहीन, दुर्गंधपूर्ण।
स्थिति – अगला, पिछला, बाहरी, ऊपरी, निचला।
देश-काल – पंजाबी, बनारसी, प्राचीन, नवीन, भारी।

2. संख्यावाचक विशेषण:
जिन विशेषण शब्दों से संख्या का बोध हो, उन्हे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं; जैसे एक, चार, दूसरा, चौथा, सातवाँ आदि।
संख्यावाचक विशेषण के भेद-संख्यावाचक विशेषण के भेद निम्नलिखित हैं-

(क) निश्चित संख्यावाचक विशेषण
(i) गणनासूचकं: जो वस्तुओं या प्राणियों की गणना का ज्ञान कराएँ; जैसे दो पुस्तकें, चार केले, दस लड़कियाँ, चार कुर्सियाँ आदि।
(ii) क्रमसूचक: जो क्रम का ज्ञान कराएँ; जैसे पहला लड़का, दूसरा आदमी, पहली मंजिल, प्रथम पंक्ति आदि।
(i) आवृत्तिसूचक: जो गुना का बोध कराते हैं; जैसे दुगुना, चौगुना, तिगुना आदि।
(iv) समुदायसूचक: जो समूह का ज्ञान कराएँ; जैसे एक दर्जन केले, चारों लड़के, सैकड़ों लोग आदि।
(v) प्रत्येकसूचक: जो शब्दों में से प्रत्येक का बोध कराएँ; जैसे हर घड़ी, प्रतिवर्ष, प्रत्येक लड़का आदि।

नोट- निश्चित संख्यावाचक विशेषणों में ‘ओं’ लगाकर उन्हें अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण भी बनाया जा सकता है; यथा दर्जनों, सैकड़ों आदि।

(ख) अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण:
जिन विशेषणों से वस्तु, प्राणी या पदार्थ की संख्या का निश्चित बोध नहीं होता, उन्हें अनिश्चित संख्यावाची विशेषण कहते हैं; जैसे कुछ विद्यार्थी, कुछ पशु, थोड़े घर, बहुत आम आदि।

3. परिमाणवाचक विशेषण:
संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की माप-तोल की विशेषता को प्रकट करने वाले विशेषणों को परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। इसके भी दो भेद हैं
(क) निश्चित परिमाणवाचक विशेषण-जो परिमाणवाचक विशेषण संज्ञा या सर्वनाम का निश्चित परिमाण बताएँ जैसे एक लीटर पानी, दो किलो चीनी, दो मीटर कपड़ा आदि।
(ख) अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण-जो परिमाणवाचक विशेषण संज्ञा या सर्वनाम का निश्चित परिमाण न बताएँ; जैसे कुछ पानी, कुछ चीनी, कम अनाज, बहुत-सा कपड़ा आदि।

नोट- कभी-कभी परिमाणवाचक विशेषण शब्दों में ‘ओं’ प्रत्यय लगाकर भी अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण बन जाते हैं; यथा मनों गेहूँ, सेरों दूध।

4. सार्वनामिक विशेषण: जो सर्वनाम अपने सार्वनामिक रूप में ही संज्ञा की विशेषता प्रकट करें या संज्ञा के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहा जाता है; जैसे यह घर हमारा है। यह बालक अच्छा है। उस श्रेणी में अध्यापक नहीं है। तुम किस गली में रहते हो। इन वाक्यों में प्रयुक्त शब्द यह, उस, किस आदि सर्वनाम संज्ञा के विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं, अतः ये सार्वनामिक विशेषण हैं।

विशेषण अभ्यास प्रश्न उत्तर Class 9 HBSE

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

सार्वनामिक विशेषण के भेद-

सार्वनामिक विशेषण चार प्रकार के होते हैं-
(i) निश्चयवाचक/सकेतवाचक सार्वनामिक विशेषण: ये विशेषण संज्ञा की ओर निश्चयार्थ में संकेत करने वाले होते हैं; जैसे-
यह पुस्तक वहाँ से नहीं मिली।

(ii) अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण: जिन विशेषणों से संज्ञा की ओर निश्चित संकेत नहीं मिलता, उन्हें अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण कहते हैं; जैसे-
कोई सज्जन आए हैं।

(iii) प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण: ये विशेषण संज्ञा की प्रश्नात्मक विशेषता की ओर संकेत करते हैं; यथा-
(क) कौन व्यक्ति आया है?
(ख) किस लड़के ने तुम्हें यहाँ भेजा है?
(ग) इनमें से क्या चीज तुम लोगे?
(घ) कौन-सी गेंद चाहिए तुम्हें?

(iv) संबंधवाचक सार्वनामिक विशेषण
(क) जो आदमी कल आया था वह बाहर खड़ा है।
(ख) वह विद्यार्थी सामने आ रहा है जिसको आपने पुरस्कार दिया था।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

विशेषण का रूप परिवर्तन

Hindi Vyakaran Visheshan HBSE 9th Class प्रश्न 4.
विशेषण के रूप परिवर्तन को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
विशेषण शब्दों के लिंग और वचन उनके साथ जुड़े हुए संज्ञा के लिंग और वचन के अनुसार बदलते रहते हैं। हिन्दी में यह परिवर्तन ‘आ’ अकारान्त पुंल्लिंग शब्दों (विशेषणों) में होता है; जैसे
(1) अच्छा लड़का-अच्छे लड़के। (वचन)
(2) अच्छा पुरुष-अच्छी नारी। (लिंग)
(3) लम्बा घोड़ा-लम्बे घोड़े। (वचन)

विशेषण के उद्देश्य और विधेय स्थिति

प्रश्न 5.
उद्देश्य-विशेषण और विधेय-विशेषण की सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
उद्देश्य-विशेषण-जो विशेषण विशेष्य से पूर्व लगकर उसकी विशेषता व्यक्त करते हैं, उन्हें उद्देश्य-विशेषण कहते हैं; यथा-
(क) गोरा लड़का गीत गा रहा है।
(ख) काली बिल्ली दूध पी गई।
इन दोनों वाक्यों में प्रयुक्त ‘गोरा’ एवं ‘काली’ उद्देश्य-विशेषण हैं।

विधेय-विशेषण: जब विशेषण विशेष्य के पश्चात आता है तो उसे विधेय-विशेषण कहते हैं; जैसे
(क) वह गाय सफेद है।
(ख) घोड़ा लाल है।
(ग) राम की कार नीली है।
यहाँ सफेद’, ‘लाल’ एवं ‘नीली’ विधेय-विशेषण हैं।

विशेषणों का तुलना में प्रयोग

प्रश्न 6.
विशेषणों की तुलना से क्या अभिप्राय है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
विशेषण विशेष्य की विशेषता बताते हैं तथा यह विशेषता गुण, परिमाण अथवा संख्या की दृष्टि से होती है। दो या दो से अधिक प्राणियों, वस्तुओं या पदार्थों में प्रायः एक जैसे गुण नहीं होते। तुलना के द्वारा ही इस अंतर को स्पष्ट किया जा सकता है।
तुलना व्यक्तियों, वस्तुओं आदि के गुणों के मिलान को तुलना कहते हैं।

प्रश्न 7.
तुलना के आधार पर विशेषणों की कितनी अवस्थाएँ होती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
तुलना के आधार पर विशेषणों की तीन अवस्थाएँ होती हैं
(1) मूलावस्था,
(2) उत्तरावस्था तथा
(3) उत्तमावस्था।
1. मूलावस्था: इस अवस्था में किसी प्रकार की तुलना नहीं होती, विशेषतः सामान्य रूप होता है; जैसे वह बालिका चंचल है। आम मीठां है।

2. उत्तरावस्था: इसमें दो व्यक्तियों या वस्तुओं की तुलना द्वारा एक को दूसरे से अधिक या न्यून दिखाया जाता है; जैसे
(क) राम श्याम से अधिक मोटा है।
(ख) मेरी पुस्तक आपकी पुस्तक से अच्छी है।

3. उत्तमावस्था-इसमें दो या अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं की तुलना की जाती है तथा उनमें से किसी एक को सबसे अधिक या सबसे कम श्रेष्ठ दिखाया जाता है; यथा
(क) मेरी कलम सबसे सुंदर है।।
(ख) मोहन कक्षा के सभी विद्यार्थियों से बहादुर है।

विशेषण की तुलना के कुछ महत्त्वपूर्ण उदाहरण
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 1

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

प्रविशेषण

प्रश्न 8.
प्रविशेषण किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जो शब्द विशेषण की विशेषता व्यक्त करें, उन्हें प्रविशेषण कहते हैं। उदाहरणार्थ निम्नलिखित वाक्य देखिए
(क) मोहन बहुत चतुर है।
(ख) राम बहुत अधिक चालाक है।
(ग) सुरेश अत्यधिक चतुर है।
(घ) कृपाराम बहुत परिश्रमी व्यक्ति है।
(ङ) वहाँ लगभग बीस आदमी थे।
हिंदी के प्रमुख प्रविशेषण निम्नांकित हैं-
बहुत, बहुत अधिक, अधिक, अत्यधिक, अत्यंत, बड़ा, कम, खूब, थोड़ा, ठीक, पूर्ण, लगभग आदि।

विशेषण की रचना

प्रश्न 11.
विशेषणों की रचना किस प्रकार की होती है?
उत्तर:
कुछ शब्द मूलतः विशेषण होते हैं; जैसे अच्छा, बुरा, मीठा आदि किंतु कुछ विशेषणों की रचना प्रत्यय या उपसर्ग आदि के योग से होती है; जैसे-
प्रत्यय से- चाय वाला, सुखद, बलशाली, ईमानदार, नश्वर आदि।
उपसर्ग से- दुर्बल, लापता, बेहोशी, निडर आदि।
उपसर्ग एवं प्रत्यय दोनों से- दोनाली, निकम्मा आदि। विशेषण कई प्रकार के शब्दों से भी बनते हैं, जैसे-
संज्ञा से-
नागपुर – नागपुरी
आदर – आदरणीय
धन – धनी

सर्वनाम से-
मैं – मुझसा
वह – वैसा
आप – आपसी
यह – ऐसा

क्रिया से-
चलना – चालू
भूलना – भुलक्कड़
भागना – भगोड़ा
हँसना – हँसोड़

अव्यय से-
नीचे – निचला
बाहर – बाहरी
ऊपर – ऊपरी

विद्यार्थियों के अभ्यासार्थ कुछ महत्त्वपूर्ण विशेषण दिए जा रहे हैं-
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 2
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 3
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 4
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 5
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 6
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 7
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण 8

विशेषण संबंधी महत्त्वपूर्ण बातें
(1) हिंदी में विशेषण का लिंग एवं वचन विशेष्य के अनुसार ही होता है; जैसे काला कुत्ता, काली गाय, काले बैल।
(2) कारक-चिह्नों का प्रयोग केवल विशेष्य के साथ होता है; जैसे बुरे आदमी के साथ मत जा। नए कमरे का द्वार खुला नहीं था।
(3) कभी-कभी विशेषण का प्रयोग संज्ञा की भाँति होता है; जैसे
(क) वीरों ने देश की सुरक्षा की।
(ख) विद्वानों का आदर करो।

यहाँ वीर एवं विद्वान विशेषण होते हुए भी संज्ञा के रूप में प्रयुक्त हुए हैं।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

परीक्षोपयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
विशेषण क्या है? विशेषण के तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जो शब्द संज्ञा तथा सर्वनाम की विशेषता बताएँ, उन्हें विशेषण कहते हैं; जैसे
(क) सफेद गाय (सफेद विशेषण)
(ख) मीठा आम (मीठा विशेषण)
(ग) छह विद्यार्थी (छह विशेषण)
(घ) विद्वान व्यक्ति (विद्वान विशेषण)

प्रश्न 2.
विशेषण के कौन-कौन से चार भेद हैं? प्रत्येक भेद का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
(क) गुणवाचक विशेषण-नीली कमीज।
(ख) परिमाणवाचक विशेषण-दो मीटर कपड़ा।
(ग) संख्यावाचक विशेषण-चार कलमें।
(घ) सार्वनामिक विशेषण-यह मकान।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए वाक्यों में से निश्चित और अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषणों को अलग-अलग पहचानिए-
(क) वह कक्षा में प्रथम आया।
(ख) कुछ फल लाओ।
(ग) मेरी कमीज में दो मीटर कपड़ा लगेगा।
(घ) थोड़ी मिठाई ले आओ।
(ङ) एक लीटर दूध पचास रुपए का मिलता है।
उत्तर:
निश्चित परिमाणवाचक
(क) वह कक्षा में प्रथम आया।
(ख) मेरी कमीज में दो मीटर कपड़ा लगेगा।
(ग) एक लीटर दूध पचास रुपए का मिलता है।

अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण
(क) कुछ फल लाओ।
(ख) थोड़ी मिठाई ले आओ।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

प्रश्न 4.
सर्वनाम और सार्वनामिक विशेषणों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब सर्वनाम (यह, वह, मैं, तुम आदि) संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, तब वे सर्वनाम कहलाते हैं लेकिन जब वही सर्वनाम संज्ञा शब्द के साथ अर्थात् संज्ञा से पहले प्रयुक्त होता है तो वह सार्वनामिक विशेषण बन जाता है; जैसे-
यह पुस्तक मेरी है। (यह – विशेषण)
यह मेरे साथ है। (यह – सर्वनाम)
यह आम कच्चा है और यह पक्का – इस वाक्य में पहला ‘यह’ आम संज्ञा के साथ आया है। अतः यह विशेषण है। दूसरा ‘यह’ बिना संज्ञा के अकेले संज्ञा के स्थान पर आया है। अतः सर्वनाम है।

प्रश्न 5.
नीचे दिए गए वाक्यों में से सर्वनाम के प्रयोग और सार्वनामिक विशेषण के प्रयोग को पहचानिए-
(1) घर में कोई है।
(2) कोई सज्जन आए हुए हैं।
(3) वह घोड़ा दौड़ रहा है।
(4) वह विद्यालय गया।
(5) यह मेरा घर है।
(6) क्या यह किताब तुम्हारी है?
उत्तर:
(1) घर में कोई है। (सर्वनाम प्रयोग)
(2) कोई सज्जन आए हैं। (सार्वनामिक प्रयोग)
(3) वह घोड़ा दौड़ रहा है। (सार्वनामिक प्रयोग)
(4) वह विद्यालय गया। (सर्वनाम प्रयोग)
(5) यह मेरा घर है। (सार्वनामिक प्रयोग)
(6) क्या यह किताब तुम्हारी है? (सार्वनामिक प्रयोग)

प्रश्न 6.
विशेषण की तुलना के तीनों प्रकारों के नाम लिखिए और दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
(1) मूलावस्था-
(क) मोहन अच्छा बालक है।
(ख) राजेश सुंदर बालक है।

(2) उत्तरावस्था-
(क) मोहन राम से भला लड़का है।
(ख) महेश राजकुमार से सुंदर है।

(3) उत्तमावस्था-
(क) सोहन कक्षा में सबसे बहादुर विद्यार्थी है।
(ख) मुनीश अपने परिवार में सबसे परिश्रमी बालक है।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

प्रश्न 7.
नीचे दिए गए विशेषणों को उनके सामने दी गई अवस्थाओं से मिलाकर उचित स्थान पर लिखिए-
उच्चतर, गुरुतम, कठोर, लघु, तीव्रतर, अधिकतर, कुटिलतर, उत्कृष्ट, न्यूनतम, निकटतम
मूलावस्था – …………….
उत्तरावस्था – …………….
उत्तमावस्था – …………….
उत्तर:
मूलावस्था – कठोर, लघु, उत्कृष्ट।
उत्तरावस्था – उच्चतर, तीव्रतर, अधिकतर, कुटिलतर।
उत्तमावस्था – गुरुतम, न्यूनतम, निकटतम।

प्रश्न 8.
प्रविशेषण किसे कहते हैं? कुछ उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
जो शब्द विशेषणों की विशेषता बताएँ, उन्हें प्रविशेषण कहते हैं; जैसे
(i) राम बहुत सुंदर बालक है।
(ii) वह बहुत अच्छा गीत गाती है।
(iii) वह महा कंजूस व्यक्ति है।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित वाक्यों से विशेषण छाँटकर उनके भेद का निर्देश कीजिए
(क) साधारण इक्के के घोड़े भारतीय दरिद्रता के अलबम हैं।
(ख) यह पैसा मेरी खून-पसीने की कमाई का फल है।
(ग) थोड़ी मिठाई और कुछ फल ले आओ, आज त्योहार का दिन है।
(घ) यह मेरी पुस्तक है, आपकी नहीं।
(ङ) पचास रुपए ले लो और बाज़ार से एक किलो दही ले आओ।
उत्तर:
(क) साधारण इक्के के – गुणवाचक विशेषण।
भारतीय – गुणवाचक विशेषण।

(ख) यह – सर्वनाम विशेषण।
खून-पसीने की – गुणवाचक विशेषण।
मेरी – प्रविशेषण (खून-पसीने का विशेषण)।

(ग) थोड़ी – अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण।
कुछ – अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण ।

(घ) यह – सार्वनामिक विशेषण।

(ङ) पचास – निश्चित संख्यात्मक विशेषण।
एक किलो – निश्चित परिमाणवाचक विशेषण।

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प्रश्न 10.
निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त सार्वनामिक विशेषणों और सर्वनामों को छाँटकर लिखिए
(1) वह विद्यालय जाएगा।
(2) वह विद्यार्थी विद्यालय जाएगा।
(3) इस घर में कौन रहता है?
(4) बच्चा रो रहा है, इसे गोद में उठा लो।
(5) वे तुम्हारी पुस्तकें हैं और ये मेरी।
उत्तर:
(1) वह – सर्वनाम
(2) वह विद्यार्थी – सार्वनामिक विशेषण
(3) इस घर – सार्वनामिक विशेषण
(4) इसे – सर्वनाम
(5) वे पुस्तकें – सार्वनामिक विशेषण
(6) ये – सर्वनाम।

प्रश्न 11.
प्रविशेषण एवं विधेय-विशेषण का सोदाहरण अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रविशेषण शब्द विशेषण की विशेषता बताते हैं किंतु विधेय-विशेषण वह विशेषण है जो संज्ञा के बाद में प्रयुक्त होते हैं; जैसे
(क) मोहन अत्यंत सुंदर है इस वाक्य में अत्यंत सुंदर विशेषण की विशेषता बता रहा है। अतः यह प्रविशेषण है।
(ख) मोहन सुंदर है। वाक्य में सुंदर मोहन के बाद प्रयुक्त हुआ है। अतः यह विधेय-विशेषण है।

प्रश्न 12.
चार ऐसे वाक्य लिखिए जिनमें विशेषण संज्ञा के रूप में प्रयोग किए गए हों।
उत्तर:
(1) वीरों ने देश की रक्षा की।
(2) बहादुरों का सदा सम्मान होता है।
(3) गुणी की सर्वत्र पूजा होती है।
(4) बड़ों का आदर करो।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran विशेषण

प्रश्न 13.
निम्नलिखित वाक्यों में से संज्ञा शब्दों एवं विशेषणों को चुनिए-
(1) अकबर महान सम्राट था।
(2) विद्वान जन सदा पूजे जाते हैं।
(3) कहानी सुनते-सुनते रात बीत गई।
उत्तर:
संज्ञा – अकबर, सम्राट, जन, कहानी, रात।
विशेषण – महान, विद्वान, सुनते-सुनते।

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Avikari Shabd अविकारी शब्द Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

अविकारी शब्द

जिन शब्दों जैसे क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक तथा विस्मयादिबोधक आदि के स्वरूप में किसी भी कारण से परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं। अविकारी शब्दों को अव्यय भी कहा जाता है।

अव्यय

अविकारी शब्द HBSE 9th Class प्रश्न 1.
अव्यय किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अव्यय वे शब्द हैं जिनमें लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि की दृष्टि से कोई परिवर्तन नहीं होता; जैसे यहाँ, कब और आदि। अव्यय शब्द पाँच प्रकार के होते हैं
(1) क्रियाविशेषण – धीरे-धीरे, बहुत।
(2) संबंधबोधक – के साथ, तक।
(3) समुच्चयबोधक – तथा, एवं, और।।
(4) विस्मयादिबोधक – अरे, हे।
(5) निपात – ही, भी।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

(1) क्रियाविशेषण

Avikari Shabd HBSE 9th Class प्रश्न 2.
क्रियाविशेषण अव्यय की परिभाषा देते हुए उसके भेदों का सोदाहरण वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जो अविकारी या अव्यय शब्द क्रिया के साथ जुड़कर उसकी विशेषता प्रकट करते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे-
(क) राम धीरे-धीरे चलता है।
(ख) मैं बहुत थक गया हूँ।

इन दोनों में धीरे-धीरे’ तथा ‘बहुत’ दोनों अव्यय शब्द क्रिया की विशेषता बताने के कारण क्रियाविशेषण हैं। क्रियाविशेषण चार प्रकार के होते हैं (1) कालवाचक, (2) स्थानवाचक, (3) परिमाणवाचक तथा (4) रीतिवाचक।
1. कालवाचक क्रियाविशेषण:
जिस क्रियाविशेषण के द्वारा क्रिया के होने या करने के समय का ज्ञान हो, उसे कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; यथा कल, आज, परसों, जब, तब, सायं आदि। जैसे
उदाहरण-
(क) कृष्ण कल जाएगा।
(ख) मैं अभी-अभी आया हूँ।
(ग) वह प्रतिदिन नृत्य करती है।
(घ) वह कभी देर से नहीं आता।

2. स्थानवाचक क्रियाविशेषण:
जो क्रियाविशेषण क्रिया के होने या न होने के स्थान का बोध कराएँ, स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहलाते हैं; जैसे
(क) राम कहाँ गया?
(ख) ऊषा ऊपर खड़ी है।
(ग) मोहन और सोहन एक-दूसरे के समीप खड़े हैं।
(घ) उधर मत जाओ।
इसी प्रकार, यहाँ, इधर, उधर, बाहर, भीतर, आगे, पीछे, किधर, आमने, सामने, दाएँ, बाएँ, निकट आदि शब्द स्थानवाची क्रियाविशेषण हैं।

3. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण :
जो क्रियाविशेषण क्रिया की मात्रा या उसके परिमाण का बोध कराए, उसे परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे
(क) कम खाओ।
(ख) बहुत मत हँसो।
(ग) राम दूध खूब पीता है।
(घ) उतना पढ़ो जितना ज़रूरी है।
इनके अतिरिक्त, थोड़ा, सर्वथा, कुछ, लगभग, अधिक, कितना, केवल आदि शब्द परिमाणवाचक क्रियाविशेषण हैं।

4. रीतिवाचक क्रियाविशेषण:
जिन शब्दों से क्रिया के होने की रीति अथवा प्रकार का ज्ञान होता है, उन्हें रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे
(क) वह वहाँ भली-भाँति रह रहा है।
(ख) आप कहते जाइए मैं ध्यानपूर्वक सुन रहा हूँ।
(ग) वह पैदल चलता है।
इनके अतिरिक्त, कैसे, ऐसे, वैसे, ज्यों, त्यों, सहसा, सुखपूर्वक, सच, झूठ, तेज़, अवश्य, नहीं, अतएव, वृक्ष, शीघ्र इत्यादि शब्द – रीतिवाचक क्रियाविशेषण हैं।

नोट – जो क्रियाविशेषण काल, स्थान अथवा परिमाणवाचक नहीं हैं, उन सबकी गणना रीतिवाचक में कर ली जाती है। अतः रीतिवाचक क्रियाविशेषण के भी अनेक भेद हैं

1. निश्चयात्मक – अवश्य, सचमुच, वस्तुतः आदि।
2. अनिश्चयात्मक – शायद, प्रायः, अक्सर, कदाचित आदि।
3. कारणात्मक क्योंकि, अतएव आदि।
4. स्वीकारात्मक – सच, हाँ, ठीक आदि।
5. आकस्मिकतात्मक – अचानक, सहसा, एकाएक आदि।
6. निषेधात्मक – न, नहीं, मत, बिल्कुल नहीं आदि।
7. आवृत्त्यात्मक – धड़ाधड़, फटाफट, गटागट, खुल्लमखुल्ला आदि।
8. अवधारक – ही, तो, भर, तक आदि।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

क्रियाविशेषण की रचना

आविकारी शब्द HBSE 9th Class प्रश्न 3.
क्रियाविशेषण की रचना-विधि का उल्लेख उदाहरण सहित कीजिए।
उत्तर:
रचना की दृष्टि से क्रियाविशेषण दो प्रकार के होते हैं
(1) मूल क्रियाविशेषण तथा
(2) यौगिक क्रियाविशेषण।

1. मूल क्रियाविशेषण: जो शब्द अपने मूल रूप में अर्थात प्रत्यय के योग के बिना क्रियाविशेषण हैं, उन्हें मूल क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे आज, ठीक, निकट, सच आदि।
2. यौगिक क्रियाविशेषण: जो शब्द दूसरे शब्दों में प्रत्यय लगाने से या समास के कारण क्रियाविशेषण बनते हैं, उन्हें यौगिक क्रियाविशेषण कहते हैं, जैसे एकाएक, धीरे-धीरे, गटागट आदि।

क्रिया-प्रविशेषण

विकारी शब्द HBSE 9th Class प्रश्न 4.
क्रिया-प्रविशेषण किसे कहते हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जो शब्द क्रियाविशेषण की विशेषता प्रकट करते हैं, उन्हें क्रिया-प्रविशेषण कहते हैं। ये शब्द क्रियाविशेषण से पूर्व प्रयुक्त होते हैं; जैसे
(क) पी०टी० ऊषा बहुत तेज़ दौड़ती है।
(ख) आपने बहुत ही मधुर गीत गाया।
(ग) वे बहुत बीमार हैं, इसलिए आप इससे भी धीरे चलिए।
अतः स्पष्ट है कि इन वाक्यों में बहुत, बहुत ही, इससे भी आदि क्रियाविशेषण-तेज़, मधुर एवं धीरे की विशेषता प्रकट कर रहे हैं। इसलिए इन्हें क्रिया-प्रविशेषण कहा गया है।

(2) संबंधबोधक

Avikari Shabd In Hindi HBSE 9th Class प्रश्न 5.
संबंधबोधक अव्यय किसे कहते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
जो अविकारी शब्द संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों के साथ जुड़कर दूसरे शब्दों से उनका संबंध बताते हैं, वे संबंधबोधक अव्यय कहलाते हैं; जैसे धन के बिना मनुष्य का जीवन नरक है। इस वाक्य में ‘के बिना’ संबंधबोधक है। इसी प्रकार से ओर, पास, सिवाय, की खातिर, के बाहर आदि भी संबंधबोधक हैं; यथा
(क) दोनों कक्षाएँ आमने-सामने हैं।
(ख) चलते हुए दाएं-बाएँ मत देखो।
(ग) विद्या के बिना मनुष्य पशु है।
(घ) राजमहल के ऊपर तोपें लगी हुई हैं।

अन्य संबंधबोधक अव्यय हैं-
1. के कारण, की वजह से, के द्वारा द्वारा, के मारे, के हाथ (से-)।
2. के लिए, के वास्ते, की खातिर, के हेतु, के निमित्त।
3. से लेकर/तक, पर्यंत।
4. के साथ, के संग।
5. के बिना, के बगैर, के अतिरिक्त, के अलावा।
6. की अपेक्षा, की तुलना में, के समान/सदृश, के जैसे।
7. के बदले, की जगह में पर।
8. के विपरीत, के विरुद्ध, के प्रतिकूल, के अनुसार, के अनुकूल।
9. के बाबत, के विषय में।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

(3) समुच्चयबोधक

Avikari HBSE 9th Class प्रश्न 6.
समुच्चयबोधक की सोदाहरण परिभाषा दीजिए तथा उसके भेदों का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने वाले शब्दों को समुच्चयबोधक अव्यय या अविकारी कहते हैं; जैसे मोहन पढ़ता है और सोहन लिखता है। इस वाक्य में ‘और’ शब्द समुच्चबोधक अव्यय है। इसे योजक अव्यय भी कहते हैं।

समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद हैं-
(1) समानाधिकरण समुच्चयबोधक,
(2) व्यधिकरण समुच्चयबोधक।
1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय:
जो अव्यय दो समान स्तर के वाक्यों, वाक्यांशों या दो स्वतंत्र शब्दों को मिलाते हैं, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं; जैसे मोहन पढ़ता है और सोहन लिखता है। इस वाक्य में ‘और’ समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय है। इसके भी आगे चार भेद हैं
(i) संयोजक; यथा-और, तथा, एवं आदि।
(ii) विभाजक; यथा-या, वा, चाहे, नहीं, तो आदि।
(iii) विरोधदर्शक; यथा-लेकिन, परंतु, किंतु आदि।
(iv) परिणामदर्शक; यथा-अतएव, अतः, सो, इस कारण आदि।

2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय:
जो अव्यय शब्द एक या एक से अधिक वाक्यों को प्रधान वाक्यों से जोड़ते हैं, वे व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं; यथा-
राम बुद्धिमान तो है परंतु अनुभवी नहीं है।
उपर्युक्त वाक्य में ‘परंतु’ व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय है। इसके भी आगे चार प्रकार हैं
(i) कारणवाचक; जैसे वह दुखी है क्योंकि वह गरीब है। क्योंकि, जो कि, इसलिए, कि, चूँकि इत्यादि कारणवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय हैं।
(ii) स्वरूपवाचक; जैसे राम ने कहा कि वह घर नहीं जाएगा। मानो, अर्थात, कि, माने, जो कि आदि स्वरूपवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय हैं।
(iii) उद्देश्यवाचक; जैसे वह परिश्रम करता है ताकि अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। कि, जो, ताकि, जिससे, जिसमें आदि उद्देश्यवाचक समुच्चयबोधक अव्यय हैं।
(iv) संकेतवाचक; जैसे अगर तुम आओगे तो मैं अवश्य चलूँगा। जो….… तो, यदि……तो, अगर……. तो, यद्यपि……. तथापि, चाहे…..परंतु आदि संकेतवाचक समुच्चयबोधक अव्यय हैं।

(4) विस्मयादिबोधक

प्रश्न 7.
विस्मयादिबोधक अविकारी किसे कहते हैं? सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
जो अविकारी शब्द हमारे मन के हर्ष, शोक, घृणा, प्रशंसा, विस्मय आदि भावों को व्यक्त करते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अविकारी शब्द कहते हैं; जैसे अरे, ओह, हाय, ओफ, हे आदि। इसके अन्य भेद अग्रलिखित हैं-
1. विस्मय – ओह! ओहो! हैं! क्या! ऐं!
2. शोक – आह!, उफ!, हाय!, अह!, त्राहि!, हे राम!
3. हर्ष – वाह!, अहा!, धन्य!, शाबाश!
4. प्रशंसा – शाबाश!, खूब!, बहुत खूब!
5. भय – बाप रे!, हाय!
6. क्रोध – धत!, चुप!, अबे!
7. घृणा और तिरस्कार – छिः, धत!
8. अनुमोदन – ठीक-ठीक, हाँ-हाँ!
9. आशीर्वाद – जय हो!, जियो!
नोट – कभी-कभी संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, अव्यय आदि शब्द भी विस्मयादिबोधक अव्यय के रूप में प्रयुक्त होते हैं; जैसे-
संज्ञा- हे राम! मैं तो उजड़ गई।
हाय राम! यह क्या हो गया।

विशेषण- अच्छा! तो यह बात है।

सर्वनाम- क्या! वह फेल हो गया।
कौन! तुम्हारा भाई आया है।

क्रिया- हट! पागल कहीं का।
जा-जा! तेरे जैसे बहुत देखे हैं।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

(5) निपात

प्रश्न 8.
‘निपात’ किसे कहते हैं? हिंदी के प्रमुख निपातों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जो अविकारी शब्द किसी शब्द या पद के बाद जुड़कर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल भर देते हैं, उन्हें निपात कहते हैं। हिंदी में प्रचलित ‘निपात’ निम्नलिखित हैं
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द 1

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

परीक्षोपयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1.
अव्यय शब्द की क्या विशेषता है? पाँच अव्यय शब्द लिखिए।
उत्तर:
अव्यय शब्द की विशेषता यह है कि लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि की दृष्टि से उसके रूप में परिवर्तन नहीं होता। पाँच अव्यय, शब्द-
(1) बहुत
(2) धीरे
(3) कल
(4) तेज़
(5) और।

प्रश्न 2.
अव्यय के पाँच भेदों का नाम लिखिए और उनके दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
अव्यय के पाँच भेद उदाहरण सहित अग्रलिखित हैं

1. क्रियाविशेषण-धीरे-धीरे चलो। – श्याम कल आएगा।
2. संबंधबोधक-वह घर के बाहर है। – झंडा भवन के ऊपर लगा है।
3. समुच्चयबोधक-राम और श्याम आ रहे हैं। – उसने पाठ पढ़ा या नहीं।
4. विस्मयादिबोधक-शाबाश! कमाल कर दिया। – हाय! वह मर गया।
5. निपात-मोहन ही जा रहा है। – राम भी जा रहा है।

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प्रश्न 3.
कालवाचक, स्थानवाचक, रीतिवाचक और परिमाणवाचक क्रियाविशेषणों का प्रयोग करते हुए दो-दो वाक्य लिखिए।
उत्तर:
कालवाचक क्रियाविशेषण-
(क) वह कल नहीं आया।
(ख) वह अभी चला गया।

स्थानवाचक क्रियाविशेषण-
(क) मोहन नीचे आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।
(ख) दोनों सेनाएँ आमने-सामने खड़ी हैं।

रीतिवाचक क्रियाविशेषण-
(क) मेरी बात को ध्यानपूर्वक सुनो।
(ख) धीरे-धीरे मत चलो।

परिमाणवाचक-क्रियाविशेषण-
(क) थोड़ा बोलो।
(ख) कम खाओ।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित वाक्यों के रिक्त स्थान में उचित अव्यय शब्दों का प्रयोग कीजिए और यह भी बताइए कि ये अव्यय किस भेद में आते हैं
(1) मैं …………. आगरा जाऊँगा।
(2) हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति …………… गर्व है।
(3) मुझे रेडियो ………… घड़ी चाहिए।
(4) यदि तुम परीक्षा में सफल होना चाहते हो …………. श्रम करो।
(5) बाहर जाने …………. पहले मुझसे मिलना।
(6) ……….. आप मिल गए।
(7) वह जल्दी चला गया …………… ट्रेन पकड़ सके।
(8) ………… तो यह तुम्हारी शरारत है।
(9) तुम बकवास बंद करो …………… मुझे कुछ करना पड़ेगा।
(10) ………… तुमने यह क्या कर डाला?
उत्तर:
(1) मैं कल आगरा जाऊँगा। – (कालवाचक)
(2) हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति पर गर्व है। – (समानाधिकरण समुच्चयबोधक)
(3) मुझे रेडियो और घड़ी चाहिए। – (समानाधिकरण समुच्चयबोधक)
(4) यदि तुम परीक्षा में सफल होना चाहते हो तो श्रम करो। – (व्यधिकरण समुच्चयबोधक)
(5) बाहर जाने से पहले मुझसे मिलना। – (संबंधबोधक)
(6) बहुत अच्छा! आप मिल गए। – (हर्षबोधक)
(7) वह जल्दी चला गया ताकि ट्रेन पकड़ सके। – (व्यधिकरण समुच्चयबोधक)
(8) वाह! तो यह तुम्हारी शरारत है। – (प्रशंसाबोधक)
(9) तुम बकवास बंद करो अन्यथा मुझे कुछ करना पड़ेगा। – (समानाधिकरण समुच्चयबोधक)
(10) हाय! तुमने यह क्या कर डाला। – (शोकबोधक)

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प्रश्न 5.
नीचे दिए वाक्यों से कौन-सा भाव प्रकट होता है? वाक्यों के सामने लिखिए।
(1) शाबाश! तुमने बहुत अच्छा काम किया।
(2) बाप रे! मैं तो बर्बाद हो गया।
(3) छिः छिः! तुम तो बड़े नीच आदमी हो।
(4) हाय! अब मैं क्या करूँ?
(5) अजी! ले भी लो।
(6) अबे हट! नहीं तो मारूँगा।
(7) बचो! सामने से ट्रक आ रहा है।
(8) वाह! फिल्म देखकर मज़ा आ गया।
उत्तर:
(1) प्रशंसा
(2) शोक
(3) घृणा
(4) शोक/पीड़ा
(5) संबोधन/आग्रह
(6) क्रोध
(7) चेतावनी तथा
(8) हर्ष।

प्रश्न 6.
निपात किसे कहते हैं? ही, भी, तो, तक, मात्र, भर का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
उत्तर:
जो अव्यय शब्द वाक्य के शब्दों व पदों के बाद लगकर उनके अर्थ में एक विशेष प्रकार का बल उत्पन्न कर देते हैं, उन्हें ‘निपात’ कहते हैं।
निपातों का वाक्यों में प्रयोग-
ही – मोहन ही जा रहा है।
तक – उसने तो देखा तक नहीं।
भी – राम भी लिख रहा है।
मात्र – कहने मात्र से काम नहीं चलेगा।
तो – वह तो कब का चला गया।
भर – वह दिनभर आपकी प्रतीक्षा करती रही।

प्रश्न 7.
चार ऐसे शब्द लिखिए जो विशेषण और क्रियाविशेषण दोनों रूपों में प्रयुक्त हो सकते हैं। इनमें वाक्य-प्रयोग द्वारा विशेषण और क्रियाविशेषण का अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
1. अच्छा :
मोहन एक अच्छा विद्यार्थी है। (विशेषण)
मोहन अच्छा लिखता है। (क्रियाविशेषण)

2. मधुर :
तुम्हारी मधुर बातें बहुत प्रिय हैं। (विशेषण)
वह बहुत मधुर गाता है। (क्रियाविशेषण)

3. गंदा :
मोहन गंदा लड़का है। (विशेषण)
मोहन गंदा रहता है। (क्रियाविशेषण)

4. तेज़ :
उसकी चाल बहुत तेज़ है। (विशेषण)
वह तेज़ लिखता है। (क्रियाविशेषण)

उपर्युक्त वाक्यों से यह स्पष्ट है कि विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता को प्रकट करते हैं लेकिन क्रियाविशेषण क्रिया की विशेषता बताते हैं।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द

प्रश्न 8.
निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त समुच्चयबोधक अव्ययों को छाँटिए और बताइए कि वे समानाधिकरण हैं या व्यधिकरण?
(क) बाग में बालक और बालिकाएँ खेल रही हैं।
(ख) राम गरीब है किंतु ईमानदार है।
(ग) मैंने उससे कुछ लिया नहीं बल्कि कुछ दिया है।
(घ) मैं परीक्षा में नहीं बैठी क्योंकि बीमार थी।
(ङ) जीवन में तुम सुख चाहते हो तो परिश्रम करो।
उत्तर:
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अविकारी शब्द 2

प्रश्न 9.
क्रियाविशेषण और संबंधबोधक में क्या अंतर है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कुछ कालवाचक एवं स्थानवाचक क्रियाविशेषणों का भी संबंधबोधक के रूप में प्रयोग होता है। यदि उनका प्रयोग क्रिया के साथ शुरु हुआ हो तो उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं तथा यदि वे संज्ञा या सर्वनाम के साथ विभक्ति रूप में प्रयुक्त हों तो उन्हें संबंधबोधक स्वीकार करना चाहिए; यथा-
(क) तुम पहले उठो। (क्रियाविशेषण)
परीक्षा से पहले खूब पढ़ो। (संबंधबोधक)

(ख) पुजारी जी यहाँ आए थे। (क्रियाविशेषण)
मोहन तुम्हारे यहाँ गया था। (संबंधबोधक)

(ग) उसके सामने बैठो।। (क्रियाविशेषण)
उसका घर तुम्हारे स्कूल के सामने है। (संबंधबोधक)

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Kriya क्रिया Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

क्रिया

क्रिया Class 9 HBSE प्रश्न 1.
‘क्रिया’ से क्या अभिप्राय है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
‘क्रिया’ शब्द की उत्पत्ति ‘कृ’ धातु से हुई है जिसका अर्थ है-कुछ करना या कुछ किया जाना। व्याकरण की दृष्टि से ‘क्रिया’ वह शब्द है जिससे किसी काम के करने या होने का ज्ञान होता है; जैसे हँसना, खेलना, लिखना, दौड़ना, सोना आदि।

किसी भी कार्य के दो रूप होते हैं कार्य या तो होता है या फिर किया जाता है; यथा ‘वृक्ष गिर गया।’ इस वाक्य में कार्य स्वयं हुआ है, किन्तु जब हम ऐसा कहते हैं कि ‘वृक्ष गिरा दिया गया है तो इसका अर्थ यह हुआ कि वृक्ष को गिराने का कार्य किसी के.द्वारा किया गया है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि, “कार्य के होने या किए जाने को क्रिया कहते हैं।”

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

धातु

Hindi Vyakaran Kriya HBSE 9th Class प्रश्न 2.
‘धातु’ की परिभाषा एवं उसके भेदों के दो-दो उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं, जैसे लिखना, पढ़ना, खेलना आदि क्रियाओं में लिख, पढ़, खेल आदि क्रिया के मूल रूप होने के कारण धातु हैं। धातु के पाँच भेद होते हैं
(1) सामान्य धातु-पढ़, लिख, सो, गा आदि।
(2) व्युत्पन्न धातु-मूल धातु में प्रत्यय लगाकर बनाई गई; जैसे करवाना, सुनवाना आदि।
(3) नाम धातु-बतियाना, हथियाना आदि।
(4) सम्मिश्रण धातु-दर्शन करना, प्यार करना आदि।
(5) अनुकरणात्मक धातु-खटखटाना, हिनहिनाना, झनझनाना आदि।

क्रिया के भेद

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया प्रश्न 3.
क्रिया के कितने भेद होते हैं? प्रत्येक का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हिन्दी में क्रिया के मुख्य दो भेद होते हैं-
(1) अकर्मक क्रिया-अकर्मक क्रिया में कर्म नहीं होता। अतः क्रिया का व्यापार और फल कर्ता में ही पाए जाते हैं; जैसे(क) मोहन पढ़ता है। (ख) सोहन सोया है। उपर्युक्त दोनों वाक्यों में पढ़ता है’ और ‘सोया है’ अकर्मक क्रियाएँ हैं।
(2) सकर्मक क्रिया-जिन क्रियाओं का फल कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रियाएँ कहते हैं; यथा-
(क) मोहन पुस्तक पढ़ता है।
(ख) सीता पत्र लिखती है।
इन दोनों वाक्यों में पढ़ने का प्रभाव पुस्तक पर और लिखने का प्रभाव पत्र पर पड़ता है, अतः ये दोनों सकर्मक क्रियाएँ हैं।

प्रश्न 4.
अकर्मक एवं सकर्मक क्रिया की पहचान क्या है? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
क्रिया एवं कर्ता वाक्य के अनिवार्य अंग हैं। इसलिए क्रिया शब्द से पूर्व क्या या किसको शब्द लगाकर प्रश्न पूछे। यदि इसका उत्तर मिल जाए तो वह उत्तर कर्म होगा और क्रिया सकर्मक होगी। यदि उत्तर न मिले तो क्रिया अकर्मक होगी; जैसे-
(1) सोहन पुस्तक पढ़ता है। इस प्रश्न से पहले क्या प्रश्न लगाएँ तो लिखा जाएगा, क्या पढ़ता है ?
उत्तर होगा-‘पुस्तक’। अतः ‘पढ़ता है’ सकर्मक क्रिया है।

इसी प्रकार ‘सोहन पढ़ रहा है। तो प्रश्न होगा क्या पढ़ रहा है। इसका कुछ उत्तर नहीं मिला तो क्रिया अकर्मक होगी।

प्रश्न 5.
सकर्मक क्रिया के कितने उपभेद होते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
सकर्मक क्रिया तीन प्रकार की होती है-
(1) एककर्मक क्रिया
(2) द्विकर्मक क्रिया, तथा
(3) अपूर्ण सकर्मक क्रिया।

1. एककर्मक क्रिया: जिस क्रिया में एक ही कर्म हो, उसे एककर्मक क्रिया कहते हैं; जैसे-राम पुस्तक पढ़ता है। यहाँ ‘पुस्तक’ एक ही कर्म है।

2. द्विकर्मक क्रिया:
जिस क्रिया में दो कर्म हों, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं; यथा-राम श्याम को पत्र भेजता है। इस वाक्य में श्याम और पत्र दोनों कर्म हैं। अतः ‘भेजता है’ द्विकर्मक क्रिया है। द्विकर्मक क्रिया में जिस कर्म के साथ ‘को’ परसर्ग लगा होता है वह गौण कर्म होता है, लेकिन जिसके साथ ‘को’ परसर्ग नहीं होता वह मुख्य कर्म होता है। उपर्युक्त वाक्य में ‘श्याम’ गौण कर्म है और ‘पत्र’ मुख्य कर्म है।

3. अपूर्ण सकर्मक:
क्रिया ये वे क्रियाएँ हैं जिनमें कर्म रहते हुए भी कर्म को किसी पूरक शब्द की आवश्यकता होती है, वरना अर्थ अपूर्ण रहता है; जैसे-
(क) सोहन मोहन को समझता है।
सोहन मोहन को मूर्ख समझता है।

(ख) वह तुम्हें मानता है।
वह तुम्हें मित्र मानता है।
उपर्युक्त दोनों वाक्यों में ‘मूर्ख’ एवं ‘मित्र’ पूरक शब्द हैं।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

क्रिया के कुछ अन्य भेद

1. संयुक्त क्रिया

प्रश्न 1.
संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?
उत्तर:
संयुक्त क्रिया-दो या दो से अधिक धातुओं के योग से मिलकर बनी क्रिया को संयुक्त क्रिया कहते हैं। इन धातुओं में मूल धातु को प्रधान क्रिया कहते हैं तथा दूसरी धातुओं को सहायक धातु या क्रिया कहते हैं। यह मूल क्रिया के अर्थ का विस्तार करती है। इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार से हैं-
(i) मोहन तुरंत बोल उठा। (‘बोल’ मूल धातु, उठा सहायक क्रिया)
(ii) बादल गर्जने लगा है। (‘गर्ज’ मूल धातु, लगना सहायक क्रिया)
(iii) मैं उसे समझा दूंगा। (‘समझा’ मूल धातु, देना सहायक क्रिया)
(iv) पानी बरस चुका था। (‘बरस’ मूल धातु, चुकना सहायक क्रिया)
(v) अब तो मैं हस्ताक्षर कर बैठा हूँ। (‘कर’ मूल धातु, बैठना सहायक क्रिया)
(vi) कृष्ण को जाने दो। (‘जा’ मूल धातु, देना सहायक क्रिया)
(vii) वे सैर करने जाया करते हैं। (‘जा’ मूल धातु, करना सहायक क्रिया)
(viii) क्या वे गाना चाहते हैं? । (‘गा’ मूल धातु, चाहना सहायक क्रिया)

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

2. अपूर्ण क्रिया

प्रश्न 1.
अपूर्ण क्रिया किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब क्रिया को सार्थक या पूर्ण बनाने के लिए उससे पहले कोई संज्ञा या सर्वनाम या विशेषण शब्द लगाया जाता है, तो उस क्रिया को अपूर्ण क्रिया कहते हैं; जैसे
(1) विद्यार्थी योग्य है।
(2) उसने राकेश को नेता चुना।
(3) यह बालिका तो बहुत चालाक है।
(4) क्षमा करना, मैंने आपको पराया समझा।
इन वाक्यों में रेखांकित शब्द-योग्य, नेता, चालाक, पराया आदि न हों तो ये क्रियाएँ अपूर्ण ही रह जाती हैं। इन्हें पूरा करने के लिए इन शब्दों का प्रयोग किया गया है। इन क्रियाओं को पूरा करने वाले शब्दों को पूरक कहते हैं।

3. नामधातु क्रिया

प्रश्न 1.
किन क्रियाओं को नामधातु क्रियाएँ कहते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण शब्दों से मूल धातुओं को जोड़कर जो क्रियाएँ बनती हैं, उन्हें नामधातु क्रियाएँ कहते हैं। नामधातु क्रियाओं के अग्रलिखित उदाहरण देखिए
(क) संज्ञा शब्दों से-

संज्ञाधातुक्रिया
शर्मशर्माशर्माना
बातबतियाबतियाना
लातलतियालतियाना
झूठझुठलाझुठलाना

(ख) सर्वनाम से-

सर्वनामधातुक्रिया
अपनाअपनाअपनाना
मैंमिमियामिमियाना

(ग) विशेषण से-

विशेषणधातुक्रिया
मोटागर्मागर्माना
गर्ममोटामोटापा

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4. पूर्वकालिक क्रिया

प्रश्न 1.
पूर्वकालिक क्रिया किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जब मूल क्रिया से पहले ऐसी क्रिया आ जाए जिससे काम के पहले हो चुकने का बोध हो, तो उसे पूर्वकालिक क्रिया कहते हैं। इस क्रिया के मूल धातु के साथ ‘कर’ या ‘करके’ शब्द आते हैं आदि; जैसे-
(1) वह तो लिखकर आया है।
(2) मैं उससे भोजन करके बात करूँगा।
(3) वह देख-देखकर लिखती है।
(4) मोहन ने स्कूल पहुँचकर अध्यापक को प्रणाम किया।
(5) कृष्ण दौड़कर स्टेशन पहुंचा।

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5. प्रेरणार्थक क्रिया

प्रश्न 1.
प्रेरणार्थक क्रिया किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जिस क्रिया से किसी अन्य से काम करवाने का बोध हो, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं; जैसेलिखना से लिखवाना-मोहन ने राम से पत्र लिखवाया। भेजना से भिजवाना-मैंने विद्यार्थी द्वारा संदेश भिजवाया था। खोलना से खुलवाना-मालिक ने नौकर से दुकान खुलवाई। धोना से धुलवाना-शीला धोबी से कपड़े धुलवाती है।

6. समापिका अथवा प्रधान क्रिया

प्रश्न 1.
समापिका अथवा प्रधान क्रिया की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
जो क्रिया वाक्य के अन्त में लगे उसे समापिका या प्रधान क्रिया कहते हैं; जैसे-
(1) नीता खाना खा रही है।
(2) चिड़िया आकाश में उड़ती है।
(3) घोड़ा सड़क पर दौड़ता है।
(4) मैंने उसे जाते हुए देखा था।

वृत्ति या क्रियार्थ (Mood)

प्रश्न 1.
वृत्ति या क्रियार्थ से क्या अभिप्राय है? उदाहरण देते हुए समझाइए। उसके भेदों का भी उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि क्रिया किस प्रयोजन के लिए की गई है, उसे वृत्ति या क्रियार्थ (Mood) कहते हैं। हिन्दी भाषा में मुख्य रूप से पाँच वृत्तियाँ हैं
1. निश्चयार्थ वृत्ति:
सूचना-प्रधान क्रिया को निश्चयार्थ वृत्ति कहते हैं; जैसे–
(क) खिलाड़ी नहीं खेल रहे हैं।
(ख) तुम अभी बाजार जाओ।

2. विध्यर्थ वृत्ति:
इच्छा-प्रधान क्रिया को विध्यर्थ वृत्ति कहते हैं; जैसे-
(क) कृपया मेरी मदद कीजिए।
(ख) भगवान आपका भला करे।
(ग) तेरा सर्वनाश हो।

3. सम्भावनार्थ:
क्रिया के जिस रूप से सम्भावना या अनुमान का बोध हो, उसे सम्भावनार्थ क्रिया कहते हैं; जैसे
(क) शायद आज वर्षा हो। (अनुमान)
(ख) सम्भव है आज प्राचार्य जी आएँ। (सम्भावना)

4. सन्देहार्थ:
जिस क्रिया से कार्य होने का लगभग पूरा निश्चय होता है, किन्तु थोड़ा-सा सन्देह भी रहता है, उसे सन्देहार्थ क्रिया कहते हैं; जैसे
(क) कृष्ण उपवन में आ गया होगा।
(ख) परीक्षा समाप्त हो गई होगी।

5. संकेतार्थ:
जिस वाक्य क्रिया में दो क्रियाएँ होती हैं और दोनों में कार्य-करण का सम्बन्ध हो, उन्हें संकेतार्थ क्रियाएं कहते हैं; जैसे
(क) पानी बरसता तो फसल अवश्य होती।
(ख) मेहनत करता तो सफल अवश्य हो जाता।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

क्रिया के विकारी तत्त्व

प्रश्न 1.
क्रिया के प्रमुख विकारी तत्त्व कौन-कौन से हैं? अथवा क्रिया-परिवर्तन से क्या अभिप्राय है? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
क्रिया में भी विकार उत्पन्न होता है। इसलिए इसकी गिनती हिन्दी के विकारी शब्दों में की जाती है। क्रिया के विकार के प्रमुख कारण या तत्त्व लिंग, वचन, पुरुष, काल और वाच्य हैं। इन सबके कारण ही क्रिया के रूप में परिवर्तन होता है। क्रिया परिवर्तन के कुछ उदाहरण देखिए
1. वचन के आधार पर
(क) मैं पढ़ता हूँ। – हम पढ़ते हैं।
(ख) मैंने पुस्तक पढ़ी। – हमने पुस्तक पढ़ी।
(ग) वह पुस्तक पढ़ता है। – वे पुस्तक पढ़ते हैं।

2. लिंग के आधार पर-
(क) मैं पुस्तक पढ़ता हूँ। – मैं पुस्तक पढ़ती हूँ।
(ख) लड़का पुस्तक पढ़ता है। – लड़की पुस्तक पढ़ती है।
(ग) छात्र गीत गाता है। – छात्रा गीत गाती है।

3. वाच्य के अनुसार
(क) मैंने पुस्तक पढ़ी। – मेरे द्वारा पुस्तक पढ़ी गई।
(ख) रमेश ने पत्र लिखा। – रमेश द्वारा पत्र लिखा गया।
(ग) उसने गीत गाया। – उसके द्वारा गीता गाया गया।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

अभ्यासार्थ लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रिया की परिभाषा दीजिए। अकर्मक और सकर्मक क्रियाओं के दो-दो उदाहरण देते हुए इनका अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जिन शब्दों से किसी काम के करने या होने का ज्ञान हो, उन्हें क्रिया कहते हैं; जैसे-
(क) राम पुस्तक पढ़ता है।
(ख) विद्यार्थी खेल रहे हैं।
इन वाक्यों में ‘पढ़ता’ और ‘खेल’ दोनों क्रिया पद हैं।

अकर्मक क्रिया:
जिन क्रियाओं में कर्म नहीं होता वे अकर्मक क्रियाएँ कहलाती हैं; जैसे-
(क) सुधीर रो रहा है।
(ख) सीता हँसती है।
इन दोनों वाक्यों से क्रियाओं का फल कर्म पर नहीं, बल्कि कर्ता पर पड़ रहा है।

सकर्मक क्रिया:
इन क्रियाओं में क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है; जैसे
(क) अनुराग ने पत्र लिखा।
(ख) शोभा ने खाना खाया।

प्रश्न 2.
स्थित्यर्थक/अवस्थाबोधक अकर्मक धातुओं का दो-दो वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
1. मोहन इस समय रो रहा है। (रोने की अवस्था)
2. रीटा इस समय सो रही है। (सोने की अवस्था)

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

प्रश्न 3.
निम्नलिखित धातुओं से क्रिया शब्द निर्मित कीजिएपढ़, लिख, शर्म, गर्म, दोहरा, टक्कर, अपना, लाज।
उत्तर:
पढ़ – पढ़ना
दोहरा – दोहराना
लिख – लिखना
टक्कर – टकराना
शर्म – शर्माना
अपना – अपनापन
गर्म – गर्माना
लाज – लजाना

प्रश्न 4.
क्रिया अर्थ कितने प्रकार का होता है? प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
क्रिया अर्थ या वृत्ति पाँच प्रकार का होता है
1. विध्यर्थ – राजेश! घर जल्दी जाओ।
2. निश्चयार्थ – शोभा पत्र पढ़ रही है।
3. सम्भावनार्थ – आज शायद वर्षा हो।
4. सदेहार्थ – इस समय तक कृष्ण कुमार आ चुका होगा।
5. संकेतार्थ – यदि वर्षा हो जाती तो फसल उग जाती।

प्रश्न 5.
संरचना की दृष्टि से निम्नलिखित क्रियाओं को वर्गीकृत कीजिएलजाना, मुटाना, हँसाना, चलवाना, लड़ाना, जागना, लिटाना, सुनना, कटाना, रखवाना।
उत्तर:
संरचना की दृष्टि से क्रिया चार प्रकार की होती हैं-
1. प्रेरणार्थक क्रिया-हँसाना, चलवाना, लड़ाना, लिटाना, कटाना, रखवाना।
2. संयुक्त क्रिया-कोई नहीं है।
3. नाम धातु क्रिया-लजाना, मुटाना।
4. कृदन्त क्रिया-सुनना, जागना।।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

प्रश्न 6.
धातु एवं नामधातु में क्या अन्तर है? एक-एक उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं; जैसे पढ़, लिख, हँस, गा आदि। परन्तु जो क्रिया संज्ञा, सर्वनाम में प्रत्यय लगाकर बनाई जाती है, उसे नामधातु क्रिया कहते हैं; जैसे हाथ से हथियाना (संज्ञा से), अपना से अपनाना (सर्वनाम से), गर्म से गर्माना (विशेषण से)।

प्रश्न 7.
समापिका और असमापिका क्रिया में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
समापिका उस क्रिया को कहते हैं जो वाक्य के अन्त में आती है; जैसे मोहन पुस्तक पढ़ता है। ‘पढ़ता है’ वाक्य के अन्त में प्रयुक्त हुई है, इसलिए यह समापिका क्रिया है जबकि असमापिका क्रिया वाक्य की समाप्ति पर नहीं, अपितु अन्यत्र प्रयुक्त होती है; जैसे मोहन ने खाना खाकर हाथ धोए।

प्रश्न 8.
संरचना की दृष्टि से क्रिया के भेदों के नाम और उनके दो-दो उदाहरण भी लिखो।
उत्तर:
संरचना की दृष्टि से क्रिया तीन प्रकार की होती है

1. प्रेरणार्थक क्रिया:
(1) मोहन ने मुझसे पत्र लिखवाया।
(2) अध्यापक ने मुझसे पाठ पढ़वाया।

2. संयुक्त क्रिया:
(1) राम रूठकर चला गया।
(2) मोहन पत्र पढ़ सकता है।

3. नामधातु क्रियाएँ:
(1) कृपाल बतिया रहा था।
(2) हमने इस नाटक को नहीं फिल्माया।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran क्रिया

प्रश्न 9.
रंजक क्रिया किसे कहते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जो क्रिया मुख्य क्रियाओं में जुड़कर अपना अर्थ खोकर मुख्य क्रिया में नवीनता और विशेषता उत्पन्न कर देती है। संयुक्त क्रिया में पहली क्रिया को मुख्य तथा बाद में जुड़ने वाली क्रिया को रंजक क्रिया कहते हैं; जैसे
(1) किसान ने साँप को मार डाला।
(2) मोहन गीत गा सका।
(3) वह उठकर खड़ा हो गया आदि।

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Upasarg Va Prathyay उपसर्ग व प्रत्यय Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

उपसर्ग

उपसर्ग व प्रत्यय HBSE 9th Class प्रश्न 1.
उपसर्ग किसे कहते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर;
जो शब्दांश शब्दों के आरंभ में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं; जैसे ‘कर्म’ शब्द जिसका अर्थ है, काम करना। ‘कु’ उपसर्ग जोड़ने से ‘कुकर्म’ शब्द बन जाता है जिसका अर्थ है बुरा काम। उपसर्ग के प्रयोग से अर्थ विपरीत भी हो जाता है; जैसे ‘देखा’ शब्द ‘अन्’ उपसर्ग लगाने से ‘अनदेखा’ बन जाता है जिसका अर्थ है ‘न देखा।’

हिंदी भाषा में संस्कृत और उर्दू भाषा के शब्दों का भी प्रयोग होता है। इसलिए हिंदी में संस्कृत एवं उर्दू भाषा के उपसर्गों का भी प्रयोग होता है। इसलिए इनका अध्ययन भी हमारे लिए उपयोगी होगा।

Upsarg Pratyay Class 9 HBSE

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

(क) संस्कृत के उपसर्ग-संस्कृत के बाइस उपसर्ग हैं। इनसे बने हिंदी में बहु-प्रचलित शब्दों के उदाहरण यहाँ दिए जा रहे हैं-

उपसर्गअर्थउपसर्ग
अतिअधिक, उस पार, ऊपरअनुक्रम, अनुशीलन, अनुचार, अनुगामी, अनुसार, अनुकरण, अनुवाद, अनुरूप, अनुचित आदि।
अधिसमीपता, प्रधानता, ऊँचाई, श्रेष्ठअपवाद, अपव्यय, अपकर्ष, अपहरण, अपशब्द, अपयश, अपमान आदि।
अनुक्रम, पश्चात्, समानताअभियान, अभिभावक, अभिशाप, अभिप्राय, अभियोग, अभिनव, अभ्युदय (अभि + उदय), अभिमान, अभिलाषा आदि।
अपअभाव, अधूरा, हीनता, बुराआरक्त, आकाश, आजन्म, आरंभ, आकर्षण, आक्रमण, आदान, आचरण, आजीवन, आरोहण, आमुख, आमरण आदि।
अभिसमीपता, अधिकता और इच्छा प्रकट करनाउत्साह, उत्कर्ष, उत्तम, उत्पन्न, उत्पल, उत्पत्ति, उद्देश्य, उन्नति, उत्कंठा।
सीमा, समेत, कमी, विपरीतउदार, उद्रम, उद्धत, उद्यम, उद्घाटन, उद्गम आदि।
उत्उच्चता, उत्कर्ष, श्रेष्ठता आदिअवगत, अवनत, अवलोकन, अवतार, अवशेष, अवगुण, अवज्ञा, अवरोहण आदि।
उद्ऊपर, उत्कर्ष, श्रेष्ठउपदेश, उपकार, उपमंत्री, उपनिवेश, उपनाम, उपवन, उपस्थित, उपभेद आदि।
अवहीनता, अनादर, अवस्था, पतनदुरवस्था, दुर्दशा, दुर्लभ, दुर्जन, दुराचार (दु + आचार), दुष्कर्म, दुस्साध्य, दुस्साहस, आदि।
उप्सहाय, सुदृढ़, गौण, हीनताउपसर्ग
दुः, दुर्दुर्दुस् बुरा, कठिन, दृष्ट-हीनअनुक्रम, अनुशीलन, अनुचार, अनुगामी, अनुसार, अनुकरण, अनुवाद, अनुरूप, अनुचित आदि।
निभीतर, नीचे, बाहरनिकृष्ट, निपात, नियुक्त, निवास, निमग्न, निवारण, निषेध, निर्मल, निर्विकार आदि।
निस्बाहर, निषेधनिस्तेज, निःशंक, निस्सन्देह, निष्कलंक आदि।
परअनादर, नाश, विपरीत, पीछे, उलटापराजय, परिवर्तन, पराधीन, पराभव आदि।
परिअतिशय, चारों ओरपरिपूर्ण, परिच्छेद, परिवर्तन, परिक्रम आदि।
प्रयज्ञ, गति, उत्कर्ष, अतिशय, आगेप्रताप, प्रयत्न, प्रबल, प्रसिद्ध, प्रसन्न, प्रमाण, प्रयोग, प्रचार, प्रस्थान, प्रगति आदि।
प्रतिविरोध, हर एक, सामनेप्रतिपल, प्रत्येक, प्रतिदिन, प्रतिशोध, प्रतिकूल आदि।
विहीनता, भिन्नता, विशेषताविशेष, विज्ञ, वियोग, विमुख, विदेश, विभाग, विज्ञान आदि।
सम्पूर्णता, संयोग, अच्छासंकल्प, संग्रह, संयोग, संग्रह, सम्पत्ति, संहार आदि।
सुसुन्दर, सहन, अच्छा, सरलसुयश, सुकर्म, सुगम, सुकन्या, सुपुत्र आदि।

संस्कृत के कुछ अव्यय जो उपसर्ग की भाँति प्रयुक्त होते हैं; जैसे-

अव्ययअर्थउदाहरण
अधःनीचेअधःपतन, अधोगति, अधोलिखित।
अलम्बहुत, बसअलंकार, अलंकृत, अलंकरण।
अंतःभीतरअंतर्मन, अंतःकाल, अंतरात्मा, अंतर्धान।
चिर्बहुत देरचिरायु, चिरकाल, चिरपरिचित, चिरस्थायी।
तिरःनिषेधतिरोभाव, तिरोहित, तिरस्कार।
पुरापुराना, पहलेपुरातन, पुरातत्व।
पुनःफिरपुनरामगमन, पुनर्जन्म, पुनर्मिलन।
प्राक्पहलेप्रागैतिहासिक, प्राक्कथन।
बहिःबाहरबहिर्मुख, बहिर्गमन, बहिष्कार, बहिरंग।
सहसाथसहानुभूति, सहपाठी, सहकारी, सहयोग, सहोदर।

Hindi Vyakaran Pratyay HBSE

HBSE 10th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग

(ख) हिंदी के उपसर्ग: हिंदी के सामान्य उपसर्ग निम्नलिखित हैं-
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग 1

Upsarg Aur Pratyay HBSE 9th Class

(ग) उर्दू (अरबी-फारसी) के उपसर्ग-
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग 2

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग

Upsarg Aur Pratyay Class 9th HBSE

(घ) अंग्रेज़ी के उपसर्ग-

उपसर्गअर्थउदाहरण
सबअधीन, नीचेसबजज, सब कमेटी।
डिप्टीसहायकडिप्टी मिनिस्टर, डिप्टी रजिस्ट्रार
चीफमुख्यचीफमिनिस्टर, चीफ ऑफ स्टाफ।
वाइसउपवाइस चांसलर, वाइस प्रिंसिपल।
जनरलमुख्यजनरल मैनेजर,जनरल सैक्रेटरी।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

प्रत्यय

Upsarg Pratyay Class 9th HBSE प्रश्न 1.
प्रत्यय किसे कहते हैं ? प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं ? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
अर्थवान शब्द के अंत में जोड़े जाने वाले वर्ण अथवा वर्ण-समूह को प्रत्यय कहते हैं अर्थात् प्रत्यय वह ध्वनि, अक्षर या शब्दांश है, जिसे धातु अथवा शब्द के अंत में लगाकर कोई रूप या शब्द बनाते हैं; जैसे मूर्ख + ता = मूर्खता; धीर + ता = धीरता; यहाँ ‘ता’ प्रत्यय है। घबरा + आहट = घबराहट; यहाँ आहट प्रत्यय है।
हिंदी भाषा में प्रयुक्त लगभग सभी प्रत्यय अपने हिंदी के ही हैं। प्रत्यय दो प्रकार के हैं-
(1) कृत प्रत्यय
(2) तद्धित प्रत्यय।

1. कृत प्रत्यय अथवा कृदंत प्रत्यय:
धातु (क्रिया के मूल रूप) के अंत में लगकर जो शब्दांश अनेक प्रकार के शब्द (क्रिया-रूप) बनाते हैं, उन्हें कृत अथवा कृदंत प्रत्यय कहा जाता है।
कृत प्रत्यय चार प्रकार के होते हैं-
(क) कर्तृवाचक कृत प्रत्यय,
(ख) कर्मवाचक कृत प्रत्यय,
(ग) भाववाचक कृत प्रत्यय तथा
(घ) क्रियावाचक (क्रियार्थक) कृत प्रत्यय।

Hindi Upsarg Class 9 HBSE

1. कृत प्रत्यय

(क) कर्तृवाचक कृत प्रत्यय जो कृत प्रत्यय धातु कर्ता अर्थात् क्रिया के करने वाले की ओर संकेत करते हैं उन्हें कर्तवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं। कुछ उदाहरण देखिए-
प्रत्यय – उदाहरण
दार – देनदार, लेनदार, धारदार।
हार – होनहार, पालनहार, उतारनहार, खेवनहार।
वाला – बचानेवाला, खानेवाला, रखवाला।
आलू – झगड़ालू, कृपालू, लज्जालू।
ऐया – बजैया, खवैया, बचैया।
आऊ – बिकाऊ, टिकाऊ, टकराऊ, कमाऊ।
अक्कड़ – भुलक्कड़, घुमक्कड़, पियक्कड़।
अक – धावक, चालक, पालक, धारक, मारक।
आक – तैराक, चालाक।

(ख) कर्मवाचक कृत प्रत्यय जो कृत प्रत्यय कर्मवाचक शब्दों की रचना में सहायक होते हैं, उन्हें कर्मवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैसे-
प्रत्यय – उदाहरण
ना – पालना, ओढ़ना, नाना, पढ़ना, तैरना, बुलाना।
नी – ओढ़नी, बिछौनी, सुंघनी, कहानी।
औना – बिछौना, खिलौना।
न – झाड़न, बेलन, कतरन।

(ग) भाववाचक कृत प्रत्यय वे कृत प्रत्यय जो भाववाचक संज्ञाओं की रचना करते हैं, भाववाचक कृत प्रत्यय कहलाते हैं; जैसे-
प्रत्यय – उदाहरण
आई – लिखाई, सिखलाई, सिलाई, कढ़ाई, पढ़ाई, लड़ाई आदि।
आहट – घबराहट, चिल्लाहट, जगमगाहट, गर्माहट आदि।
आव – चढ़ाव, उतराव, बनाव, बचाव आदि।
आवा – बुलावा, चढ़ावा, पहनावा आदि।
आन – थकान, उड़ान, उठान आदि।
आस – विश्वास, प्यास, हास आदि।

(घ) क्रियावाचक कृत प्रत्यय-जो प्रत्यय क्रिया शब्द बनाते हैं, उन्हें क्रियावाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैसे-
ता, ते, ती – आता, जाता, जाते, आते, खाती।
आ, ए, या – उठा, चला, गया, आया, गए आदि।
ई – गायी, खाई, पी, गई आदि।

Class 9th Upsarg Pratyay HBSE

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

2. तद्धित प्रत्यय

प्रश्न 2.
तद्धित प्रत्यय की परिभाषा देते हुए उसके भेदों का उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जो क्रिया के अतिरिक्त शेष सभी प्रकार के शब्दों-संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया-विशेषण आदि के अंत में लगकर अनेक प्रकार के शब्द बनाते हैं, उन्हें तद्धित प्रत्यय कहते हैं।
तद्धित प्रत्यय सात प्रकार के होते हैं-
(1) भाववाचक तद्धित प्रत्यय
(2) कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय
(3) स्त्रीलिंगवाचक तद्धित प्रत्यय
(4) बहुवचनवाचक तद्धित प्रत्यय
(5) गुणवाचक तद्धित प्रत्यय
(6) लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय
(7) क्रमवाचक तद्धित प्रत्यय।

(1) भाववाचक तद्धित प्रत्यय-जिन प्रत्ययों से भाववाचक संज्ञा शब्दों का निर्माण होता है, उन्हें भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-
प्रत्यय – उदाहरण
ता – मनुष्यता, मूर्खता, सरलता, लघुता, प्रभुता आदि।
त्व – गुरुत्व, महत्व, पुरुषत्व, अपनत्व आदि।
पन – बचपन, लड़कपन, पतलापन, पीलापन, बड़प्पन आदि।
आहट – चिकनाहट, चिल्लाहट, गर्माहट आदि।

(2) कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय-जिन प्रत्ययों के सहयोग से कर्ता की ओर संकेत करने वाले शब्द का निर्माण हो, उन्हें कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-
दार – ईमानदार, कर्जदार, समझदार आदि।
आर – सुनार, लुहार, चमार आदि।
आरी – भिखारी, पुजारी, जुआरी, पंसारी आदि।
वाहा – चरवाहा, हलवाहा आदि।
ई – संयमी, ज्ञानी, तेली, कामी आदि।
कार – नाटककार, स्वर्णकार, साहित्यकार, पत्रकार, कहानीकार आदि।
अक – अध्यापक, शिक्षक, पाठक, लेखक।

(3) स्त्रीलिंगवाचक तद्धित प्रत्यय-जिन प्रत्ययों के प्रयोग से स्त्रीलिंग शब्दों की रचना की जाती है, उन्हें स्त्रीलिंगवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-
आ – छात्रा, शिष्या, दुहिता, अध्यापिका, बाला आदि।
ई – देवी, नारी, चाची, नानी, बेटी।
आनी – देवरानी, नौकरानी, जेठानी, इन्द्राणी आदि।
नी – पत्नी, शेरनी, मोरनी, सिंहनी, राजपूतनी आदि।
षी – विदुषी, महिषी।
मती – श्रीमती, बुद्धिमती, धीमती आदि।
इन – धोबिन, लुहारिन, सुहागिन आदि ।

(4). गुणवाचक तद्धित प्रत्यय-जिन तद्धित प्रत्ययों के योग से गुणवाचक विशेषण शब्दों की रचना की जाती है, उन्हें गुणवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

ई – धनी, मानी, ज्ञानी, सुखी, दुःखी, पंजाबी, हिमाचली, गुलाबी।
ईन – गमगीन, शौकीन, रंगीन, नमकीन।
मंद – अक्लमंद, फायदेमंद।
दार – दुकानदार, हवलदार, ज़मींदार, सरदार।
इया – अमृतसरिया, लाहौरिया, जालंधरिया।
ईला – रंगीला, सजीला, रसीला, ज़हरीला।
ऊ – पेटू, बाज़ारू, बाबू, गंवारू।
आना – ज़माना, मर्दाना, सालाना, फुसलाना, बहलाना।
ऐरा – सपेरा, बहुतेरा, ममेरा, चचेरा, फुफेरा, लुटेरा।
अवी – हरियाणवी, देहलवी, लखनवी।
आलु – दयालु, कृपालु।
इक – राजनीतिक, शारीरिक, साहित्यिक, वैदिक।
इय – राष्ट्रीय, स्थानीय, देशीय, पर्वतीय।
वान् – धनवान्, गुणवान्, विद्वान्।
मान् – बुद्धिमान्, शक्तिमान्।
आ – भूखा, प्यासा।
हला – रूपहला, सुनहला।
इमा – नीलिमा, हरितिमा।

(5) बहुवचनवाचक तद्धित प्रत्यय-जिन प्रत्ययों के प्रयोग से एकवचन शब्द बहुवचन में बदल जाता है, उसे बहुवचन तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

ए – लड़के, रुपए, कमरे, उठे, घोड़े, मोटे आदि।
एँ – कन्याएँ, बहुएँ, सड़कें, भाषाएँ आदि।

(6) लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय-जिन तद्धित प्रत्ययों के प्रयोग से शब्द में लघुता का बोध होने लगे, उन्हें लघुतावाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

ई – पहाड़ी, बछड़ी, टुकड़ी आदि।
ड़ी – संदुकड़ी, टुकड़ी, गठड़ी, पंखुड़ी आदि।

(7) क्रमवाचक तद्धित प्रत्यय-जिन तद्धित प्रत्ययों के प्रयोग से शब्दों में क्रम का ज्ञान हो, उन्हें क्रम बोध तद्धित प्रत्यय कहते हैं; जैसे-

गुना – चारगुना, छहगुना, दुगुना आदि।
वाँ – बीसवाँ, पाँचवाँ, आठवाँ आदि।
सरा – दूसरा, तीसरा आदि।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

परीक्षोपयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
कोई पाँच ऐसे शब्द लिखो जिनमें दो-दो उपसर्गों का प्रयोग किया गया हो।
उत्तर:
(1) सु + प्रति = सुप्रतिष्ठित।
(2) सु + सम् = सुसंगठित।
(3) अन् + अव = अनवधान।
(4) अ + सु = असुरक्षित।
(5) अ + स = असफल।

प्रश्न 2.
दस ऐसे शब्द लिखिए जिनका निर्माण उपसर्ग और प्रत्यय दोनों की सहायता से किया गया हो।
उत्तर:
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय 3

प्रश्न 3.
भाववाचक कृत प्रत्यय और भाववाचक तद्धित प्रत्यय में क्या अंतर है ? उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर:
जो कृत प्रत्यय क्रियाओं के साथ जुड़कर भाववाचक संज्ञा का निर्माण करते हैं, उन्हें भाववाचक कृत प्रत्यय कहते हैं; जैसे लिख से लिखाई, पढ़ से पढ़ाई जबकि भाववाचक तद्धित प्रत्यय संज्ञा विशेषण आदि शब्दों के साथ जुड़कर भाववाचक संज्ञा शब्दों का निर्माण करते हैं; जैसे मनुष्य से मनुष्यता, बच्चा से बचपन, पीला से पीलापन आदि।

प्रश्न 4.
तद्धित प्रत्यय और कृत प्रत्यय का अंतर स्पष्ट करते हुए दोनों के चार-चार उदाहरण लिखो।
उत्तर:
कृत प्रत्यय क्रियाओं के साथ जुड़कर शब्दों का निर्माण करते हैं, जबकि तद्धित प्रत्यय क्रियाओं के अतिरिक्त अन्य सभी शब्दों या शब्दांशों के साथ जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। अग्रलिखित उदाहरणों से दोनों का अंतर और भी स्पष्ट हो जाएगा-
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय 4

प्रश्न 5.
कर्मवाचक और कर्तवाचक प्रत्यय में क्या अंतर है ? उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जो प्रत्यय धातुओं के अंत में जुड़कर कर्म के अर्थ को प्रकट करे; कर्मवाच्य प्रत्यय कहलाता है। जैसे ओना से बिछौना। किन्तु कर्तृवाचक प्रत्यय धातु के पहले जुड़कर क्रिया के कर्ता का अर्थ प्रकट करता है; जैसे अक से पाठक, ता से वक्ता आदि।

प्रश्न 6.
‘कृदंत’ किसे कहते हैं ?
उत्तर:
धातुओं के आगे कृत प्रत्यय लगने से जो शब्द बनते हैं, उन्हें कृदंत शब्द कहते हैं; जैसे भूत धातु में ‘अक्कड़’ प्रत्यय लगाकर भुलक्कड़ शब्द बनता है। ‘तैर’ से तैरना बनता है। ये शब्द कृदंत कहलाते हैं।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran उपसर्ग व प्रत्यय

प्रश्न 7.
निम्नलिखित शब्दों में प्रयुक्त प्रत्यय बताओपाठक, कलाकार, धनवान्, घरवाला, कामगार, रसोइया, ममेरा, धार्मिक, खटास, लघुता।
उत्तर:
पाठक = पाठ + अक
धनवान् = धन + वान
कलाकार = कला + कार
घरवाला = घर + वाला
कामगार = काम + गा
रसोइया = रसोइ + या
ममेरा = मम + एरा
धार्मिक = धर्म + इक
खटास = खटा + आस
लघुता = लघु + ता

प्रश्न 8.
कोई पाँच ऐसे शब्द लिखो जो उर्दू उपसर्गों के योग से बने हों।
उत्तर:
कम + जोर = कमजोर
दर + असल = दरअसल
बद + तमीज = बद्तमीज
ला + जवाब = लाजवाब
हम + शक्ल = हमशक्ल

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Samas-Prakaran समास-प्रकरण Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

समास-प्रकरण

वर्गों के मेल से जहाँ संधि होती है, वहाँ शब्दों के मेल से समास बनता है। अन्य शब्दों में, दो या दो से अधिक शब्दों के मिलने से जो एक नया स्वतंत्र पद बनता है, उसे समास कहते हैं।

परिभाषा:
आपस में संबंध रखने वाले दो शब्दों के मेल को समास कहते हैं; जैसे राजा का महल = राजमहल । विधि के अनुसार = यथाविधि। समास करते समय परस्पर संबंध दिखाने वाले विभक्ति चिह्नों का लोप हो जाता है; जैसे ‘गंगा का जल’ = गंगाजल में का विभक्ति का लोप हो गया।

Samas In Hindi Class 9 HBSE प्रश्न 1.
‘समास-विग्रह’, किसे कहते हैं?
उत्तर:
समस्त पद या सामासिक शब्दों के बीच के संबंध को स्पष्ट करना समास-विग्रह कहलाता है। यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार। तुलसीकृत = तुलसी के द्वारा कृत।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

समास Class 9 HBSE प्रश्न 2.
समास के कितने भेद होते हैं? प्रत्येक का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
समास के निम्नलिखित चार भेद होते हैं-
(1) अव्ययीभाव समास
(2) तत्पुरुष समास
(3) द्वंद्व समास
(4) बहुब्रीहि समास।

1. अव्ययीभाव समास

Samas Class 9 HBSE प्रश्न 1.
अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जिस समास में पहला पद अव्यय हो तथा दूसरे शब्द से मिलकर पूरे समस्त पद को ही अव्यय बना दे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं; जैसे-
यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
रातों-रात – रात ही रात में
यथाविधि – विधि के अनुसार
घर-घर – घर ही घर
यथामति – मति के अनुसार
द्वार-द्वार – द्वार ही द्वार
हरसाल – साल-साल
मन-मन – मन ही मन
हररोज – रोज-रोज
बीचों-बीच – बीच ही बीच
बेकाम – काम के बिना
दिनों-दिन – दिन ही दिन
बेशक – शक के बिना
धीरे-धीरे – धीरे ही धीरे
बेमतलब – मतलब के बिना
आजन्म – जन्म-पर्यन्त
निडर – बिना डर के
आजीवन – जीवन पर्यन्त

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

2. तत्पुरुष समास

Class 9 Hindi Vyakaran Samas HBSE प्रश्न 1.
तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? इसके कितने भेद होते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जिस समास में दूसरा पद प्रधान हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इस समास में कर्ता और संबोधन कारकों को छोड़कर शेष सभी कारकों के विभक्ति चिह्न लुप्त हो जाते हैं। जिस कारक की विभक्ति प्रयुक्त होती है, उसी के नाम पर तत्पुरुष समास का नामकरण होता है। विभक्तियों के अनुसार तत्पुरुष के छह उपभेद होते हैं; जैसे-
(i) कर्म तत्पुरुष
(ii) करण तत्पुरुष
(iii) संप्रदान तत्पुरुष
(iv) अपादान तत्पुरुष
(v) संबंध तत्पुरुष
(vi) अधिकरण तत्पुरुष।

(i) कर्म तत्पुरुष:
जिस समास में दो शब्दों के मध्य से कर्म-विभक्ति के चिह्नों का लोप होता है, उसे कर्म तत्पुरुष समास कहते हैं; जैसे परलोकगमन-परलोक को गमन, ग्रामगत ग्राम को (गमन) गत, शरणागत-शरण को आगत (आया हुआ) आदि।

(ii) करण तत्पुरुष-जिस समास में करण कारक का लोप हो, उसे ‘करण तत्पुरुष’ समास कहते हैं; जैसे-
रेखांकित – रेखा से अंकित
दईमारा – देव से मारा
तुलसीकृत – तुलसी द्वारा कृत
मुंहमांगा – मुँह से माँगा
हस्तलिखित – हाथ से लिखित
हृदयहीन – हृदय से हीन
रेलयात्रा – रेल द्वारा यात्रा
गुणयुक्त – गुणों से युक्त
मदांध – मद से अंध
मनमानी – मन से मानी

(iii) संप्रदान तत्पुरुष-जब समास करते समय संप्रदान कारक चिह्न ‘के लिए’ का लोप हो तो वह ‘संप्रदान तत्पुरुष’ कहलाता है; जैसे-
हथकड़ी – हाथों के लिए कड़ी
राज्यलिप्सा – राज्य के लिए लिप्सा
क्रीडाक्षेत्र – क्रीड़ा के लिए क्षेत्र
पाठशाला – पाठ के लिए शाला
रसोईघर – रसोई के लिए घर
मालगोदाम – माल के लिए गोदाम
सत्याग्रह – सत्य के लिए आग्रह
राहखर्च – राह के लिए खर्च
देशार्पण – देश के लिए अर्पण
युद्धभूमि – युद्ध के लिए भूमि

(iv) अपादान तत्पुरुष-जिस समास में अपादान कारक चिह्नों ‘से’ (जुदाई) का लोप हो तो उसे ‘अपादान तत्पुरुष समास’ कहते हैं; जैसे-
ऋणमुक्त – ऋण से मुक्त
देशनिकाला – देश से निकाला
भयभीत – भय से भीत
गुणहीन – गुण से हीन
पथभ्रष्ट – पथ से भ्रष्ट
धनहीन – धन से हीन
धर्मविमुख – धर्म से विमुख
जन्मांध – जन्म से अंधा

(v) संबंध तत्पुरुष-समास करते समय जब संबंध कारक चिह्नों (का, के, की आदि) का लोप हो तो वहाँ ‘संबंध तत्पुरुष समास’ होता है; जैसे-
विश्वासपात्र – विश्वास का पात्र
राष्ट्रपति – राष्ट्र का पति
घुड़दौड़ – घोड़ों की दौड़
जन्मभूमि – जन्म की भूमि
माखनचोर – माखन का चोर
राजपुत्र – राजा का पुत्र
रामकहानी – राम की कहानी
राजसभा – राजा की सभा
राजकन्या – राजा की कन्या
रामदरबार – राम का दरबार
बैलगाड़ी – बैलों की गाड़ी
शासनपद्धति – शासन की पद्धति
सेनापति – सेना का पति
पनचक्की – पानी की चक्की

(vi) अधिकरण तत्पुरुष-जिस समास में अधिकरण कारक के विभक्ति चिह्नों का लोप किया जाता है, उसे अधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं; जैसे-
आपबीती – अपने पर बीती
घुड़सवार – घोड़े पर सवार
सिरदर्द – सिर में दर्द
रसमग्न – रस में मग्न
शरणागत – शरण में आगत
धर्मवीर – धर्म में वीर
दानवीर – दान में वीर
व्यवहारकुशल – व्यवहार में कुशल

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

तत्पुरुष समास के कुछ अन्य उपभेद

Hindi Samas Class 9 HBSE प्रश्न 1.
तत्पुरुष समास के कुछ अन्य उपभेद कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
तत्पुरुष समास के कुछ अन्य उपभेद निम्नलिखित हैं-
(1) नञ् तत्पुरुष
(2) अलुक् तत्पुरुष
(3) उपपद तत्पुरुष
(4) कर्मधारय तत्पुरुष
(5) द्विगु तत्पुरुष ।

(क) नञ् तत्पुरुष

Class 9 Vyakaran Samas HBSE प्रश्न 2.
नञ् तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जब अभाव अथवा निषेध अर्थ को व्यक्त करने के लिए व्यंजन से पूर्व ‘अ’ तथा स्वर से पूर्व ‘अन्’ लगाकर समास बनाया जाता है तो उसे नञ् तत्पुरुष समास का नाम दिया जाता है; जैसे-
अहित – न हित
अस्थिर – न स्थिर
अपूर्ण – न पूर्ण
अनादि – न आदि
अनागत – न आगत
अज्ञान – न ज्ञान
अभाव – न भाव
अन्याय – न न्याय
असंभव – न संभव
अधर्म – न धर्म
अनंत – न अंत
अकर्मण्य – न कर्मण्य

(ख) अलुक् तत्पुरुष

Samas Prakaran HBSE प्रश्न 3.
अलुक् तत्पुरुष समास की सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
अलुक् का अर्थ है लोप न होना। संस्कृत में कुछ विशेष नियमों के अनुसार कुछ ऐसे शब्द हैं जिनमें तत्पुरुष समास होते हुए भी दोनों शब्दों के मध्य की विभक्ति का लोप नहीं होता, ऐसे शब्दों को अलुक् समास माना जाता है। ये सभी शब्द संस्कृत के हैं और हिंदी भाषा में ज्यों के त्यों प्रयुक्त होते हैं; जैसे-
मनसिज (काम-भावना) – मन में उत्पन्न
मृत्युंजय (शिव) – मृत्यु को जीतने वाला
वाचस्पति (विद्वान) – वाच (वाणी) का पति
खेचर (पक्षी) – आकाश में विचरने वाला
युधिष्ठिर – युद्ध में स्थिर

(ग) उपपद तत्पुरुष

समास प्रकरण HBSE प्रश्न 4.
उपपद समास किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जिस समस्त पद के दोनों शब्दों अथवा पदों के मध्य में से कोई पद लुप्त हो, उसे उपपद समास कहते हैं; जैसे-
रेलगाड़ी – रेल पर चलने वाली गाड़ी
बैलगाड़ी – बैलों से खींची जाने वाली गाड़ी
पनचक्की – पानी से चलने वाली चक्की
गोबर-गणेश – गोबर से बना गणेश
दही बड़ा – दही में डूबा हुआ बड़ा
पर्ण-कुटीर – पर्ण से बना कुटीर

(घ) कर्मधारय तत्पुरुष

Samas Class 9th HBSE प्रश्न 5.
कर्मधारय तत्पुरुष समास की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
कर्मधारय तत्पुरुष, तत्पुरुष समास का ही एक भेद है। जिस समास में उत्तर पद प्रधान हो किंतु पूर्व पद एवं उत्तर पद में उपमान-उपमेय या विशेषण-विशेष्य का संबंध हो, उसे कर्मधारय तत्पुरुष समास कहते हैं; जैसे-
उपमान-उपमेय संबंध वाले उदाहरण-
चंद्रमुख – चंद्रमा के समान मुख
चरण कमल – कमल के समान चरण
मुखचंद्र – मुख रूपी चंद्र
कर कमल – कमल के समान कर
देहलता – देह रूपी लता
नरसिंह – सिंह के समान है जो नर
कनकलता – कनक की-सी लता
कमल नयन – कमल के समान नयन

विशेषण-विशेष्य संबंध के उदाहरण-
नीलगाय – नीली है जो गाय
पीतांबर – पीत (पीला) अंबर
नीलगगन – नीला है जो गगन
काली मिर्च – काली है जो मिर्च
नीलकमल – नीला है जो कमल
नरोत्तम – नर में (जो) उत्तम

(ङ) द्विगु

Class 9th Hindi Samas HBSE प्रश्न 6.
द्विगु समास की सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
द्विगु समास वस्तुतः कर्मधारय समास का ही एक भेद है। इसमें पूर्व पद संख्यावाची होता है और दोनों में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। यह समास समूहवाची भी होता है; जैसे-
त्रिलोकी – तीनों लोकों का स्वामी
चौराहा – चार राहों का समाहार
दोपहर – दो पहरों का समाहार
नवरत्न – नौ रत्नों का समूह
चौमासा – चार मासों का समाहार
सप्तर्षि – सात ऋषियों का समूह
नवरात्र – नौ रात्रियों का समाहार
अठन्नी – आठ आनों का समूह
शताब्दी – शत् (सौ) अब्दों (वर्षों) का समाहार
त्रिभुवन – तीन भवनों का समूह
पंचवटी – पाँच वटों का समाहार
पंचमढ़ी – पाँच मढ़ियों का समूह

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

3. द्वंद्व समास

प्रश्न 7.
द्वंद्व समास किसे कहते हैं? सोदाहरण उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान हो, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। समास बनाते समय ‘तथा’ या ‘और’ समुच्चयबोधक शब्दों का लोप हो जाता है; जैसे
गंगा-यमुना – गंगा और यमुना
रात-दिन – रात और दिन
जल-थल – जल और थल
गुण-दोष – गुण और दोष
माता-पिता – माता और पिता
नर-नारी – नर और नारी
धनी-मानी – धनी और मानी
दाल-रोटी – दाल और रोटी
तीन-चार – तीन और चार
घी-शक्कर – घी और शक्कर
छात्र-छात्राएँ – छात्र और छात्राएँ
राजा-रंक – राजा और रंक
पृथ्वी-आकाश – पृथ्वी और आकाश
बच्चे-बूढ़े – बच्चे और बूढ़े

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

4. बहुब्रीहि समास

प्रश्न 8.
बहुब्रीहि समास की सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
जब समस्त पद के दोनों पदों में से कोई भी पद प्रधान न हो तथा कोई बाहर का पद प्रधान हो तो उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। बहुब्रीहि समास का समस्त पद अन्य पद के लिए विशेषण का कार्य करता है; जैसे-
बारहसिंगा – बारह सींगों वाला
चतुर्भुज – चार भुजाओं वाला
महात्मा – महान आत्मा वाला
पतझड़ – जिसमें पत्ते झड़ जाते हैं
गिरिधर – गिरि को धारण करने वाला
पतिव्रता – एक पति का व्रत लेने वाली
दशानन – दस हैं आनन जिसके (रावण)
विशाल हृदय – विशाल है हृदय जिसका
जितेंद्रिय – इंद्रियों को जीतने वाला
कनफटा – फटे कानों वाला
चंद्रमुखी – चंद्र जैसे मुख वाली
पीतांबर – पीले हैं अंबर जिसके (श्रीकृष्ण)
नीलकंठ – नीला है कंठ जिसका (शिव)
सुलोचना – सुंदर हैं लोचन जिसके (स्त्री विशेष)
चक्रपाणि – चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके (विष्णु)
लंबोदर – लंबे उदर वाला (गणेश जी)
दुरात्मा – दुष्ट (बुरी) आत्मा वाला
धर्मात्मा – धर्म में आत्मा लीन है जिसकी

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण

परीक्षोपयोगी कुछ महत्त्वपूर्ण समास

निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह करके समास का नाम लिखें-
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण 1
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण 2
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran समास-प्रकरण 3

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sarvanam सर्वनाम Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

सर्वनाम

Pronoun Class 9 HBSE प्रश्न 1.
सर्वनाम की परिभाषा देते हुए उसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सर्वनाम का शाब्दिक अर्थ है-सब का नाम। व्याकरण में सर्वनाम ऐसे शब्दों को कहते हैं, जिनका प्रयोग सबके लिए (नामों) किया जाए। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं; जैसेमैं, हम, तू, तुम, वह, वे आदि।

सर्वनाम का भाषा में बहुत महत्त्व है। सर्वनाम के प्रयोग के द्वारा भाषा की सरलता एवं सुंदरता में वृद्धि होती है। भाषा में पुनरावृत्ति के दोष को सर्वनाम के प्रयोग द्वारा दूर किया जा सकता है; यथा-
राम सुबह शीघ्र उठता है। राम स्कूल समय पर जाता है। राम कल रोहतक गया था।

उपर्युक्त वाक्यों में ‘राम’ शब्द का प्रयोग तीन बार हुआ है जो उपयुक्त नहीं है। अतः ‘राम’ के स्थान पर उसके सर्वनाम का प्रयोग करने पर भाषा में सरलता एवं शुद्धता की अभिवृद्धि होगी; यथा-
राम सुबह शीघ्र उठता है। वह स्कूल समय पर जाता है। वह आज रोहतक गया है।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

Types Of Pronoun Class 9 HBSE प्रश्न 2.
सर्वनाम के कितने भेद होते हैं? प्रत्येक की सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
सर्वनाम के छह भेद माने जाते हैं। जो इस प्रकार हैं
(1) पुरुषवाचक सर्वनाम,
(2) निश्चयवाचक सर्वनाम,
(3) अनिश्चयवाचक सर्वनाम,
(4) संबंधवाचक सर्वनाम,
(5) प्रश्नवाचक सर्वनाम,
(6) निजवाचक सर्वनाम।
1. पुरुषवाचक सर्वनाम:
बोलने वाले, सुनने वाले तथा जिनके विषय में कुछ कहा जाए, वे सर्वनाम पुरुषवाचक होते हैं; जैसे मैं, तुम, वह आदि। ये सर्वनाम (नर एवं नारी) पुरुष के लिए प्रयुक्त होते हैं। इसलिए इन्हें पुरुषवाचक सर्वमान कहा जाता है। पुरुषवाचक सर्वनाम के तीन उपभेद होते हैं
(i) उत्तम पुरुषवाचक-लेखक या वक्ता अपने लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग करता है, उन्हें उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे मैं, हम, मुझको, मेरा, हमारा आदि।
(ii) मध्यम पुरुषवाचक-पाठक या श्रोता के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग किया जाए, उन्हें मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे तुम, तुम्हारा, आप, आपका, तू आदि।
(iii) अन्य पुरुषवाचक-अपने तथा श्रोता के अतिरिक्त अन्य व्यक्तियों के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग होता है, उन्हें अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं; यथा वह, वे, यह, ये, उनको, आदि।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम:
जिन सर्वनामों से किसी समीप या दूर के प्राणी अथवा पदार्थ का निश्चयात्मक संकेत मिलता है, उन्हें निश्चयवाचक सर्वमान कहते हैं; यथा यह, ये, वह, वे, इस, इन, इन्हें, इन्होंने आदि।
(क) निकटवर्ती यह, ये, इस, इन।
(ख) दूरवर्ती वह, वे।
उदाहरणार्थ-
(क) यह यहाँ खेल रहा है।
(ख) वह वहाँ चला गया।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम:
जिन सर्वनामों से किसी निश्चित पदार्थ या व्यक्ति का बोध न हो, उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वमान कहते हैं; यथा कोई, कुछ, किसी, किन्हीं, कुछ भी, सब कुछ, कुछ-न-कुछ, हर कोई, कोई-न-कोई आदि। जैसे
(क) कल कोई आया था।
(ख) खाने के लिए कुछ दीजिए।

4. संबंधवाचक सर्वनाम:
जिन सर्वनामों से संज्ञा के संबंधों का बोध हो, उन्हें संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे जो, सो, जिसे, उसे आदि। उदाहरणार्थ निम्नांकित वाक्य देखिए
(क) जो परिश्रम करेगा सो फल भी पाएगा।
(ख) आप जो कहें ठीक है।
(ग) जिसकी लाठी उसकी भैंस।
(घ) यह वही है जिसने तुम्हारा पैन चुराया था।

5. प्रश्नवाचक सर्वनाम-जिन सर्वनामों से प्रश्नों का बोध हो, उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं; जैसे कौन, क्या, किन, किनसे, किन्हें आदि। उदाहरणार्थ ये वाक्य देखिए
(क) दरवाजे पर कौन है?
(ख) आप ने क्या माँगा है?
(ग) आपको किससे मिलना है?
(घ) ये पुस्तकें किन्हें चाहिएँ?

6. निजवाचक सर्वनाम जो सर्वनाम कर्ता के स्वयं के लिए प्रयुक्त हो, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं, जैसे अपना, अपने, अपनी आदि। उदाहरणार्थ ये वाक्य देखिए
(क) अपनी पुस्तक ले जा रहा हूँ।
(ख) हमें अपने देश के लिए कुछ करना चाहिए।
(ग) हमें अपना कर्तव्य कभी नहीं भूलना चाहिए।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

सर्वनाम की रूप-रचना

Sarvanam Exercise HBSE HBSE 9th Class प्रश्न 3.
सर्वनाम की रूप-रचना कितने प्रकार से होती है?
उत्तर:
सर्वनाम की रूप-रचना को चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है
(1) पुरुषवाचक-मैं, तुम।
(2) निश्चयवाचक, प्रश्नवाचक एवं संबंधवाचक।
(3) अनिश्चयवाचक।
(4) निजवाचक।

रूपावली वर्ग-1

(क) मैं (उत्तम पुरुष)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तामैं, मैंनेहम, हमने
करणमुझे, मुझकोहमें, हमको
संप्रदानमुझसेहमसे
अपादानमुझे, मेरे लिएहमें, हमारे लिए।
संबंधमुझसेहमसे
अधिकरणमेरा, मेरे, मेरीहमारा, हमारे, हमारी

(ख) तू (मध्यम पुरुष)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तातू, तूनेतुम, तुमने
करणतुझको, तुझेतुमको, तुम्हें
संप्रदानतुझको, तेरे द्वारातुमसे, तुम्हारे द्वारा
अपादानतुझको, तेरे लिए, तुझेतुझको, तुम्हारे लिए
संबंधतुझसेतुमसे, तुम्हें
अधिकरणतेरा, तेरी, तेरेतुम्हारा, तुम्हारी, तुम्हारे

(ग) वह (अन्य पुरुष)

कारकएकवचनबहुवचन
कर्तावह, उससेवे, उन्होंने
करणउसे, उसकोउन्हें, उनको
संप्रदानउससे, उसके द्वाराउनसे, उनके द्वारा
अपादानउसको, उसे, उसके लिएउनको, उन्हें, उनके लिए
संबंधउससेउनसे
अधिकरणउसका, उसकी, उसकेउनका, उनकी, उनके

रूपावली वर्ग-2

निश्चयवाचक, प्रश्नवाचक तथा संबंधवाचक
HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम 1

रूपावली वर्ग-3

अनिश्चयवाचक

विभक्तिएकवचनबहुवचन
मूलकोईकोई
तिर्यक/संबंधवाचीकिसीकिन्हीं

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

रूपावली वर्ग-4

निजवाचक

विभक्तिएकवचनबहुवचन
मूल/तिर्यक/संबंधवाची(अपने) आप(अपने) आप

(नोट-कुछ का रूप वही रहता है।)

टिप्पणी:
(1) सर्वनाम में लिंग के अनुसार रूप में परिवर्तन नहीं होते। उदाहरणार्थ निम्नलिखित वाक्य देखिए(क) गाय भीतर आ गई, वह पौधे तोड़ देगी। (ख) गधा भीतर आ गया, वह पौधे तोड़ देगा। यहाँ दोनों वाक्यों में ‘वह’ सर्वनाम का प्रयोग हुआ है। लिंग का बोध क्रिया से होता है न कि सर्वनाम से।

(2) रूपावली के अनुसार उत्तम पुरुष एकवचन ‘मैं’ है किंतु कुछ स्थितियों में उत्तम पुरुष एकवचन अपने लिए ‘हम’ सर्वनाम का भी प्रयोग करता है। जैसे
(क) हम कल विद्यालय जाएँगे।
(ख) मैं कल विद्यालय जाऊँगा।

(3) रूपावली के अनुसार मध्यम पुरुष एकवचन ‘तू’ है किंतु कभी-कभी इसका विशेष प्रयोग प्यार-दुलार, अति आत्मीयता तथा कभी-कभी हीनता दिखाने के लिए भी किया जाता है।

(4) एकवचन ‘कुछ’ परिमाणबोधक है किंतु बहुवचन ‘कुछ’ संख्याबोधक है।

(5) मुझ, हम, तुझ, तुम, इस, इन, उस, उन, किस, किन में निश्चयार्थी ‘ई’ (ही) के योग से निश्चयार्थक रूप बन जाते हैं।
जैसे-
(क) मुझ को चार रुपए चाहिएँ।
(ख) उसी से मैं यह पुस्तक लाया हूँ।
(ग) रमेश उन्हीं का बेटा है।
(घ) मुझे तुम्हीं से मिलना है।

Hindi Vyakaran Sarvanam HBSE 9th Class

सर्वनामों के पुनरुक्ति रूप

कुछ सर्वनाम पुनरुक्ति के साथ प्रयोग में आते हैं। ऐसी स्थिति में उनके अर्थ में कुछ विशिष्टता उत्पन्न हो जाती है। कुछ सर्वनाम संयुक्त रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। जैसे-जो, कोई आदि। सर्वनामों की पुनरुक्ति प्रयोगों के कुछ उदाहरण निम्नांकित हैं-
जो-जो-जो-जो – आए, उसे खिलाओ।
कोई-कोई-कोई-कोई – तो बिना बात ही बहस करते हैं।
क्या-क्या-आपने – वहाँ क्या-क्या देखा ?
कौन-कौन-कौन-कौन – आ रहा है?
किस-किस-किस-किस – कमरे में छात्र बीमार हैं?
कुछ-कुछ-अब कुछ-कुछ – याद आ रहा है।
कोई-न-कोई-जाओ, वहाँ कोई-न-कोई तो मिल ही जाएगा।
कुछ-न-कुछ-कुछ-न-कुछ – करते ही रहना चाहिए।
जो कोई-जो कोई आए, उसे रोक लो।
जो कुछ जो कुछ – मिले, रख लो।
अपना-अपना-अपना-अपना – बस्ता उठाओ और घर जाओ।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

Sarvanam In Hindi For Class 9 HBSE

परीक्षोपयोगी महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
सर्वनामों की रचना कितने प्रकार से होती है ?
उत्तर:
सर्वनामों की रचना चार प्रकार से होती है
(1) पुरुषवाचक,
(2) निश्चयवाचक, प्रश्नवाचक एवं सम्बन्धवाचक।
(3) अनिश्चयवाचक,
(4) निजवाचक।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश में से पुरुषवाचक सर्वनाम छाँटिए और उन्हें पुरुषवाचक के भेदों के अनुसार लिखिए
“मेरा बेटा अभी दिल्ली में है। उसका मकान बहुत बड़ा है। तुम दिल्ली जाना तो उससे जरूर मिलना। वह तुमसे मिलकर बहुत खुश होगा। मैं दिल्ली जाकर मोहन से मिला। उसने मुझे अपना घर दिखाया। उसकी पत्नी ने मुझसे पूछा, “नमस्ते, आप कैसे हैं ?” मोहन ने पूछा, “आप कौन-से कमरे में रहेंगे। घर में कुछ कमरे ही हवादार हैं।” मैंने कहा, “हमारा शहर छोटा है। हमारे घर में तो कोई भी कमरा हवादार नहीं है।”
उत्तर:

उत्तम पुरुषमध्यम पुरुषअन्य पुरुष
मैंतुमउससे
मुझेतुमसेवह
मुझसेआपउसने
मैंने।

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए वाक्यों में क्रिया रूप को शुद्ध मानते हुए सही सर्वनामों का प्रयोग कीजिए
1. क्या तुम पत्र लिख चुके हैं ?
2. तू आज मेरे साथ फिल्म देखने चलो।
3. आप सब कुछ भूल चुका हूँ।
4. तू परीक्षा दे चुके हैं।
5. क्या आप दूध लाए हो ?
उत्तर:
1. क्या आप पत्र लिख चुके हैं ? अथवा क्या वे पत्र लिख चुके हैं ?
2. तुम आज मेरे साथ फिल्म देखने चलो।
3. मैं सब कुछ भूल चुका हूँ।
4. वे परीक्षा दे चुके हैं।
5. क्या तुम दूध लाए हो ?

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

प्रश्न 4.
‘आप’ शब्द का प्रयोग आदरार्थ मध्यम पुरुष और निजवाचक सर्वनाम में कीजिए।
उत्तर:
(1) आदरार्थ मध्यम पुरुष के रूप में
(क) भाई साहब, आप कुर्सी पर बैठिए।
(ख) आपने खाना नहीं खाया ?

(2) निजवाचक सर्वनाम के रूप में
(क) मैं अपना सामान आप उठा सकता हूँ।
(ख) वह अपना काम आप कर लेगा।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित रिक्त स्थानों में उचित सर्वनाम शब्दों का प्रयोग कीजिए
श्रीमान जी, …………. बड़ी दूर से ……….. पास पढ़ने आया हूँ। ………… भी …………. का शिष्य बनना चाहता हूँ। ………….. मेरे मित्र ने आपके पास भेजा है। ………….. दस वर्ष तक …………… से शिक्षा ग्रहण की है। …………… आपकी बहुत प्रशंसा करता है। कृपया …….. शरण में ले लें।
उत्तर:
श्रीमान जी, मैं बड़ी दूर से आपके पास पढ़ने आया हूँ। मैं भी आप का शिष्य बनना चाहता हूँ। मुझे मेरे मित्र ने आपके पास भेजा है। उसने दस वर्ष तक आप से शिक्षा ग्रहण की है। वह आपकी बहुत प्रशंसा करता है। कृपया मुझे शरण में ले लें।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त सर्वनामों को छाँटकर लिखिए-
1. बाज़ार से कुछ लाओ।
2. रास्ते में महात्मा जी मिल गए थे; उनसे बातचीत होती रही।
3. किताब खुली पड़ी है; इसे उठाओ।
4. जिसकी लाठी उसकी भैंस।
5. हमारे विद्यालय में पचास अध्यापक हैं।
6. जिसने बच्चे को डूबने से बचाया है उसे इनाम मिलेगा।
7. इस कमरे में किसका सामान पड़ा है।
8. आज राम की माता जी आई हैं, मैंने उन्हें प्रणाम किया।
9. पानी में क्या पड़ गया?
10. तुम्हारे पास कितनी पुस्तकें हैं?
उत्तर:
1. कुछ
2. उनसे
3. इसे
4. जिसकी, उसकी
5. हमारे
6. जिसने, उसे
7. किसका
8. मैंने
9. क्या
10. तुम्हारे, कितनी।

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran वाक्य प्रकरण

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vakya Prakaran वाक्य प्रकरण Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran वाक्य प्रकरण

वाक्य प्रकरण

Vakya Prakaran HBSE 9th Class प्रश्न 1.
वाक्य किसे कहते हैं?
उत्तर:
शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं अर्थात् एक विचार को पूर्ण रूप से प्रकट करने वाले शब्द-समूह को वाक्य कहते हैं; जैसे-दशरथ पुत्र राम ने रावण को मारा।

वाक्य प्रकरण HBSE 9th Class प्रश्न 2.
वाक्य के अंग अथवा घटक किन्हें कहा जाता है? ये कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
जिन अवयवों को मिलाकर वाक्य की रचना होती है, उन्हें वाक्य के अंग. कहा जाता है। वाक्य के प्रमुख रूप से दो ही अंग होते हैं कर्ता तथा क्रिया। इन दोनों के बिना वाक्य की रचना संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त वाक्य के अन्य अंग विशेषण, क्रियाविशेषण, कारक आदि होते हैं, परंतु इन्हें इच्छानुसार प्रयोग किया जाता है।

कर्ता और क्रिया के अनुसार वाक्य को दो भागों में बाँटा जा सकता है-
(क) उद्देश्य (कता)
(ख) विधेय (क्रिया)।
(क) उद्देश्य: वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा या बताया जाए, उसे उद्देश्य कहते हैं; जैसे सुमन अध्यापिका है। इस वाक्य में ‘सुमन’ उद्देश्य है।

(ख) विधेय: वाक्य में उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाए, उसे विधेय कहते हैं; जैसे-काले-काले बादल गरजते हैं। इस वाक्य में ‘गरजते हैं विधेय है। वाक्य में कर्ता को अलग करके जो कुछ शेष रह जाता है, वह विधेय कहलाता है।

Vakya Rachna Class 9 HBSE प्रश्न 3.
रचना की दृष्टि से वाक्य के कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर:
रचना की दृष्टि से वाक्य के तीन प्रकार होते हैं-
(i) सरल वाक्य,
(ii) संयुक्त वाक्य,
(iii) मिश्र वाक्य।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran वाक्य प्रकरण

प्रश्न 4.
सरल वाक्य किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
जिस वाक्य में एक उद्देश्य तथा एक विधेय हो, उसे सरल या साधारण वाक्य कहते हैं। इस प्रकार के वाक्य में एक मुख्य क्रिया होती है; जैसे-
पानी बरस रहा है।
मीरा पत्र लिख रही है।
मैं कल दिल्ली गया था।
परिश्रम करने वाले छात्र सदा सफल रहते हैं।
लड़के कक्षा में पढ़ रहे हैं।

प्रश्न 5.
संयुक्त वाक्य किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
जिस वाक्य में दो या दो से अधिक उपवाक्य स्वतंत्र होते हुए भी किसी योजक के द्वारा जुड़े हों, उन्हें संयुक्त वाक्य कहा जाता है; जैसे-
मैं पढ़ रहा हूँ और तुम खेल रहे हो।
आप चाय लेंगे अथवा आपके लिए ठंडा मँगवाऊँ।
वर्षा हो रही है और धूप निकली हुई है।
मैं बीमार हूँ इसलिए स्कूल नहीं जा सकता।
सत्य बोलो परंतु कटु सत्य मत बोलो।

प्रश्न 6.
मिश्र वाक्य किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, उसे मिश्र वाक्य कहा जाता है; जैसे-
मीनू ने कहा कि वह दिल्ली जा रही है।
जैसे ही मैं स्टेशन पहुँचा, गाड़ी आ गई।
जो मेहनत नहीं करता, वह असफल रहता है।
रुचि ने कहा कि वह जा रही है।
विकास फेल हो गया क्योंकि वह बीमार हो गया था।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर प्रकार का नाम लिखें।
1. जो व्यक्ति परिश्रम करता है, उसे सफलता मिलती है। (मिश्र वाक्य)
2. तुम बाज़ार गए और वह घर आ गया। (संयुक्त वाक्य)
3. जो जैसा करेगा, वह वैसा भरेगा। (मिश्र वाक्य)
4. जब वर्षा होती है, तो मोर नाचते हैं। (मिश्र वाक्य)
5. शिक्षक कक्षा में आए और उन्होंने छात्र को पीटा। (संयुक्त वाक्य)
6. जो जागता है, वह पाता है। (मिश्र वाक्य)
7. बुढ़िया चीख रही थी क्योंकि वह गिर गई थी। (संयुक्त वाक्य)
8. अनिल चिल्ला रहा था और रो रहा था। (संयुक्त वाक्य)
9. जो व्यक्ति पढ़ाई और खेलकूद में अच्छा होता है, वह जीवन में सफल रहता है। (मिश्र वाक्य)
10. मैं जानता हूँ कि तम क्या चाहते हो? (मिश्र वाक्य)
11. जैसा बोओगे, वैसा काटोगे। (मिश्र वाक्य)
12. मैं बीमार हूँ अतः स्कूल आने में असमर्थ हूँ। (संयुक्त वाक्य)
13. बादल आए और बरस कर चले गए। (संयुक्त वाक्य)
14. जहाँ कहीं पहले खेत थे, वहाँ अब भवन बन गए हैं। (मिश्र वाक्य)
15. वह मेरे सामने नहीं आता क्योंकि उसने मेरे पैसे वापस लौटाने हैं। (मिश्र वाक्य)
16. सोमवार को परीक्षा है अतः स्कूल जल्दी जाना होगा। (संयुक्त वाक्य)
17. मैंने उसे बहुत समझाया, पर वह फिर भी नहीं माना। (मिश्र वाक्य)
18. जो तोता पिंजरे में है, वह दाल खा रहा है। (मिश्र वाक्य)
19. वह बूढ़ा उठा और लाठी उठाकर चला गया। (संयुक्त वाक्य)
20. ज्यों ही घंटी बजी, छात्र कक्षाओं से बाहर आ गए। (मिश्र वाक्य)
21. आज नकद ले जाइए और कल उधार ले जाइए। (संयुक्त वाक्य)
22. जल्दी चलो अन्यथा गाड़ी निकल जाएगी। (संयुक्त वाक्य)
23. मैं स्कूल जाऊँगा परंतु पैदल नहीं जाऊँगा। (संयुक्त वाक्य)
24. जहाँ तक दृष्टि जाती है, वहाँ पेड़-ही-पेड़ दिखाई देते हैं। (मिश्र वाक्य)
25. अभी मैं स्कूल जाऊँगा और वहीं से बाज़ार चला जाऊँगा। (संयुक्त वाक्य)
26. जब मेरा गीत समाप्त हुआ, ज़ोर-ज़ोर से तालियाँ बज उठीं। (मिश्र वाक्य)
27. दिन-भर मेहनत करने वालों को सोच-समझकर खर्च करना चाहिए। (मिश्र वाक्य)
28. मैंने एक व्यक्ति देखा, जो बहुत गरीब था। (मिश्र वाक्य)
29. चोर कमरे में चोरी करता रहा और मालिक सोता रहा। (संयुक्त वाक्य)
30. वह घर आया था परंतु उसने कुछ नहीं कहा। (संयुक्त वाक्य)

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran वाक्य प्रकरण

प्रश्न 8.
निर्देशानुसार वाक्यों में उचित परिवर्तन करें

1. वह स्कूल जाते ही पढ़ने लग गया। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जैसे ही वह स्कूल गया, पढ़ने लग गया।

2. परिश्रमी छात्र सबको अच्छे लगते हैं। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जो छात्र परिश्रमी होते हैं, वे सबको अच्छे लगते हैं।

3. राष्ट्रगान के शुरू होते ही सब लोग खड़े हो गए। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
राष्ट्रगान शुरू हुआ और सब लोग खड़े हो गए।

4. सुषमा बीमार होने के कारण आज स्कूल नहीं आई। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
सुषमा बीमार है अतः वह आज स्कूल नहीं आई।

5. मेरे बोलने पर भी उसका व्यवहार पूर्ववत् रहा। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
यद्यपि मैं बोलता रहा परंतु उसका व्यवहार पूर्ववत् रहा।

6. रमेश के आते ही मोहन चल दिया। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जैसे ही रमेश आया, मोहन चल दिया।

7. मैं तुम्हारे नए मित्र को जानता हूँ। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जो तुम्हारा नया मित्र है, उसे मैं जानता हूँ।

8. कंडक्टर के सीटी बजाते ही बस चल पड़ी। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
कंडक्टर ने सीटी बजाई और बस चल पड़ी।

9. सबह वाली बस पकड़कर शाम तक घर लौट आओ। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
सुबह वाली बस पकड़ो और शाम तक घर लौट आओ।

10. गाँव जाने पर वह बीमार हो गया। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जब वह गाँव गया, तब वह बीमार हो गया।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran वाक्य प्रकरण

11. सड़क पार कर रहा एक व्यक्ति बस से टकराकर मर गया। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
एक व्यक्ति, जो सड़क पार कर रहा था, बस से टकराकर मर गया।

12. आप खाना खाकर आराम करें। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
आप खाना खाएँ और आराम करें।

13. अस्वस्थ होने के कारण वह आ नहीं सका। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
वह आ नहीं सका क्योंकि वह अस्वस्थ था।

14. अपराधी होने के कारण उसे सज़ा हुई। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
वह अपराधी है इसलिए उसे सज़ा हुई।

15. संन्यासी आशीर्वाद देकर लापता हो गया। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
संन्यासी ने आशीर्वाद दिया और लापता हो गया।

16. परिश्रम करने वाले सफल होंगे। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जो परिश्रम करेंगे, वे सफल होंगे।

17. घर जाने पर वह स्वस्थ हो गया। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जैसे ही वह घर पहुँचा, स्वस्थ हो गया।

18. दिन-रात परिश्रम करने पर वह अपना स्वास्थ्य खो बैठा। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
उसने दिन-रात परिश्रम किया और अपना स्वास्थ्य खो बैठा।

19. अपने पिताजी के स्वास्थ्य के बारे में मुझे बताओ। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
मुझे बताओ कि तुम्हारे पिताजी का स्वास्थ्य कैसा है?

20. मुझे बस में एक दुबला-पतला व्यक्ति दिखाई दिया। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
मैंने बस में एक व्यक्ति देखा, जो दुबला-पतला था।

21. वह नहाकर स्कूल चला गया। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
वह नहाया और स्कूल चला गया।

22. मैं अधिक पके फल नहीं खाता हूँ। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
मैं उन फलों को नहीं खाता, जो अधिक पके होते हैं।

23. वर्षा के बंद होते ही हम बाज़ार चले गए। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
वर्षा बंद हुई और हम बाज़ार चले गए।

24. मैं चाहते हुए भी न आ सका। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
मैं आना चाहता था, लेकिन न आ सका।

25. पुत्र को देखते ही माता गद्गद् हो गई। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
ज्यों ही माता ने पुत्र को देखा, वह गद्गद् हो गई।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran वाक्य प्रकरण

26. मेरा काला घोड़ा तेज़ भागता है। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
मेरा जो घोड़ा काला है, वह तेज़ भागता है।

27. कठोर बनकर भी सहृदय रहो। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
कठोर बनो परंतु सहृदय रहो।

28. मोहित या सोहित में से कोई एक नौकरी करेगा। (संयुक्त वाक्य)
उत्तर:
मोहित नौकरी करेगा अथवा सोहित नौकरी करेगा।

29. पिताजी ने माँ से मंदिर चलने के लिए कहा। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
पिताजी ने माँ से कहा कि वे मंदिर चलें।

30. मेरे स्टेशन पहुंचने से पहले ही गाड़ी निकल चुकी थी। (मिश्र वाक्य)
उत्तर:
जब मैं स्टेशन पहुँचा, गाड़ी निकल चुकी थी।

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अलंकार

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Alankar अलंकार Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran अलंकार

अलंकार

अलंकार Class 9 HBSE  प्रश्न 1.
अलंकार किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अलंकार शब्द का अर्थ है-आभूषण या गहना। जिस प्रकार स्त्री की सौंदर्य-वृद्धि में आभूषण सहायक होते हैं, उसी प्रकार काव्य में प्रयुक्त होने वाले अलंकार शब्दों एवं अर्थों में चमत्कार उत्पन्न करके काव्य-सौंदर्य में वृद्धि करते हैं; जैसे
“खग-कुल कुल-कुल-सा बोल रहा।
किसलय का आँचल डोल रहा।”
साहित्य में अलंकारों का विशेष महत्त्व है। अलंकार प्रयोग से कविता सज-धजकर सुंदर लगती है। अलंकारों का प्रयोग गद्य और पद्य दोनों में होता है। अलंकारों का प्रयोग सहज एवं स्वाभाविक रूप में होना चाहिए। अलंकारों को जान-बूझकर लादना नहीं चाहिए।

Alankar Class 9 HBSE प्रश्न 2.
अलंकार के कितने भेद होते हैं ? सबका एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
साहित्य में शब्द और अर्थ दोनों का महत्त्व होता है। कहीं शब्द-प्रयोग से तो कहीं अर्थ-प्रयोग के चमत्कार से और कहीं-कहीं दोनों के एक साथ प्रयोग से काव्य-सौंदर्य में वृद्धि होती है। इस आधार पर अलंकार के तीन भेद माने जाते हैं
1. शब्दालंकार।
2. अर्थालंकार।
3. उभयालंकार।

1. शब्दालंकार:
जहाँ शब्दों के प्रयोग से काव्य-सौंदर्य में वृद्धि होती है, वहाँ शब्दालंकार होता है; जैसे
“चारु चंद्र की चंचल किरणें,
खेल रही हैं जल-थल में।”

2. अर्थालंकार:
जहाँ शब्दों के अर्थों के कारण काव्य में चमत्कार एवं सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ अर्थालंकार होता है; जैसे-
“चरण-कमल बंदौं हरि राई।”

3. उभयालंकार:
जिन अलंकारों का चमत्कार शब्द और अर्थ दोनों पर आश्रित होता है, उन्हें उभयालंकार कहते हैं; जैसे-
“नर की अरु नल-नीर की, गति एकै कर जोइ।
जेतौ नीचौ है चले, तेतौ ऊँचौ होइ ॥”

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अलंकार

प्रमुख अलंकार

1. अनुप्रास

Class 9th Alankar HBSE प्रश्न 3.
अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जहाँ व्यंजनों की बार-बार आवृत्ति के कारण चमत्कार उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है; यथा-
(1) मुदित महीपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत बुलाए।
यहाँ ‘मुदित’, ‘महीपति’ तथा ‘मंदिर’ शब्दों में ‘म’ व्यंजन की और ‘सेवक’, ‘सचिव’ तथा ‘सुमंत’ शब्दों में ‘स’ व्यंजन की आवृत्ति है। अतः यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

(2) भगवान भक्तों की भूरि भीति भगाइए।
यहाँ ‘भगवान’, ‘भक्तों’, ‘भूरि’, ‘भीति’ तथा ‘भगाइए’ में ‘भ’ व्यंजन की आवृत्ति के कारण चमत्कार उत्पन्न हुआ है।

(3) कल कानन कुंडल मोरपखा उर पै बिराजति है।

(4) जौं खग हौं तो बसेरो करौं मिलिकालिंदी कूल कदंब की डारनि।
यहाँ दोनों उदाहरणों में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति होने के कारण शब्द-सौंदर्य में वृद्धि हुई, अतः यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

(5) “कंकन किंकन नूपुर धुनि सुनि।
कहत लखन सन राम हृदय गुनि ॥” यहाँ ‘क’ तथा ‘न’ वर्गों की आवृत्ति के कारण शब्द-सौंदर्य में वृद्धि हुई है, अतः अनुप्रास अलंकार है।

(6) तरनि-तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
इसमें ‘त’ वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है।

(7) बंदऊँ गुरुपद पदुम परागा।
सुरुचि सुवास सरस अनुरागा ॥
(‘प’ तथा ‘स’ की आवृत्ति है।)

(8) मैया मैं नहिं माखन खायो।
(‘म’ की आवृत्ति है।)

(9) सत्य सनेह सील सागर।
(‘स’ की आवृत्ति)। ”

(10) रघुपति राघव राजा राम।”
(‘र’ की आवृत्ति)।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अलंकार

2. यमक

Alankar In Hindi Class 9 HBSE  प्रश्न 4.
यमक अलंकार किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
जहाँ किसी शब्द या शब्दांश का एक से अधिक बार भिन्न-भिन्न अर्थों में प्रयोग हो, वहाँ यमक अलंकार होता है; जैसे-
(1) कनक कनक तैं सौ गुनी, मादकता अधिकाइ।
उहिं खायें बौरातु है, इहिं पाएँ बौराई ॥
इस दोहे में ‘कनक’ शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है। एक ‘कनक’ का अर्थ है-सोना और दूसरे ‘कनक’ का अर्थ है-धतूरा। एक ही शब्द का भिन्न-भिन्न अर्थों में प्रयोग होने के कारण यहाँ यमक अलंकार है।

(2) माला फेरत युग गया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर ॥
इस दोहे में ‘फेर’ और ‘मनका’ शब्दों का भिन्न-भिन्न अर्थों में प्रयोग हुआ है। ‘फेर’ का पहला अर्थ है-माला फेरना और दूसरा अर्थ है-भ्रम। इसी प्रकार से ‘मनका’ का अर्थ है-हृदय और माला का दाना। अतः यमक अलंकार का सुंदर प्रयोग है।

(3) काली घटा का घमंड घटा।
यहाँ ‘घटा’ शब्द की आवृत्ति भिन्न-भिन्न अर्थ में हुई है।
घटा = वर्षा काल में आकाश में उमड़ने वाली मेघमाला
घटा = कम हुआ।

(4) कहैं कवि बेनी बेनी व्याल की चुराई लीनी।
इस पंक्ति में ‘बेनी’ शब्द का भिन्न-भिन्न अर्थों में आवृत्तिपूर्वक प्रयोग हुआ है। प्रथम ‘बेनी’ शब्द कवि का नाम है और दूसरा ‘बेनी’ (बेणी) चोटी के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।

(5) गुनी गुनी सबके कहे, निगुनी गुनी न होतु।
सुन्यो कहुँ तरु अरक तें, अरक समानु उदोतु ॥ ‘अरक’ शब्द यहाँ भिन्न-भिन्न अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। एक बार अरक के पौधे के रूप में तथा दूसरी बार सूर्य के अर्थ के रूप में प्रयुक्त हुआ है, अतः यहाँ यमक अलंकार सिद्ध होता है।

(6) ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी,
ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहाती है।
यहाँ ‘मंदर’ शब्द के दो अर्थ हैं। पहला अर्थ है- भवन तथा दूसरा अर्थ है पर्वत, इसलिए यहाँ यमक अलंकार है।

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran अलंकार

3. श्लेष

Class 9 Alankar HBSE प्रश्न 5.
श्लेष अलंकार का लक्षण लिखकर उसके उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
जहाँ एक शब्द के एक ही बार प्रयुक्त होने पर दो अर्थ निकलें, उसे श्लेष अलंकार कहते हैं; जैसे-
(1) नर की अरु नल-नीर की, गति एकै कर जोय।
जेते नीचो है चले, तेतो ऊँचो होय ॥

मनुष्य और नल के पानी की समान ही स्थिति है, जितने नीचे होकर चलेंगे, उतने ही ऊँचे होंगे। अंतिम पंक्ति में बताया गया सिद्धांत नर और नल-नीर दोनों पर समान रूप से लागू होता है, अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।

(2) मधुवन की छाती को देखो,
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।
यहाँ ‘कलियाँ’ शब्द का प्रयोग एक बार हुआ है किंतु इसमें अर्थ की भिन्नता है।

(क) खिलने से पूर्व फूल की दशा।
(ख) यौवन पूर्व की अवस्था।

(3) रहिमन जो गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
बारे उजियारो लगे, बढे अँधेरो होय ॥ इस दोहे में ‘बारे’ और ‘बढ़े’ शब्दों में श्लेष अलंकार है।

(4) गाधिसूनु कह हृदय हँसि, मुनिहिं हरेरिय सूझ।
अयमय खाँड न ऊखमय, अजहुँ न बूझ अबूझ ॥

(5) मेरी भव-बाधा हरो, राधा नागरि सोइ।
जा तन की झाँईं परै, स्यामु हरित-दुति होइ ॥

(6) बड़े न हूजे गुननु बिनु, बिरद बड़ाई पाइ।।
कहत धतूरे सौं कनकु, गहनौ, गढ्यौ न जाइ ॥
कनकु शब्द के यहाँ दो अर्थ हैं सोना और धतूरा।

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4. उपमा

Alankar Class 9th HBSE प्रश्न 6.
उपमा अलंकार की परिभाषा देते हुए उसके उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
जहाँ किसी वस्तु, पदार्थ या व्यक्ति के गुण, रूप, दशा आदि का उत्कर्ष बताने के लिए किसी. लोक-प्रचलित या लोक-प्रसिद्ध व्यक्ति से तुलना की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
(1) ‘उसका हृदय नवनीत सा कोमल है।’
इस वाक्य में ‘हृदय’ उपमेय ‘नवनीत’ उपमान, ‘कोमल’ साधारण धर्म तथा ‘सा’ उपमावाचक शब्द है।

(2) लघु तरण हंसिनी-सी सुंदर,
तिर रही खोल पालों के पर ॥
यहाँ छोटी नौका की तुलना हंसिनी के साथ की गई है। अतः ‘तरण’ उपमेय, ‘हंसिनी’ उपमान, ‘सुंदर’ गुण और ‘सी’ उपमावाचक शब्द चारों अंग हैं।

(3) हाय फूल-सी कोमल बच्ची।
हुई राख की थी ढेरी ॥
यहाँ ‘फूल’ उपमान, ‘बच्ची’ उपमेय और ‘कोमल’ साधारण धर्म है। ‘सी’ उपमावाचक शब्द है, अतः यहाँ पूर्णोपमा अलंकार है।

(4) यह देखिए, अरविंद से शिशुवृंद कैसे सो रहे।
इस पंक्ति में ‘अरविंद से शिशुवृंद’ में साधारण धर्म नहीं है, इसलिए यहाँ लुप्तोपमा अलंकार है।

(5) नदियाँ जिनकी यशधारा-सी
बहती हैं अब भी निशि-वासर ॥
यहाँ ‘नदियाँ’ उपमेय, ‘यशधारा’ उपमान, ‘बहना’ साधारण धर्म और ‘सी’ उपमावाचक शब्द है, अतः यहाँ उपमा अलंकार है।

(6) मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला।
यहाँ हाथी और टीला में उपमान, उपमेय का संबंध है, दोनों में ऊँचाई सामान्य धर्म है। ‘सा’ उपमावाचक शब्द है, अतः यहाँ उपमा अलंकार है।

(7) वेदना बोझ वाली-सी

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5.रूपक

9th Class Alankar HBSE प्रश्न 7.
रूपक अलंकार किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जहाँ अत्यंत समानता दिखाने के लिए उपमेय और उपमान में अभेद बताया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है; जैसे-
(1) चरण कमल बंदौं हरि राई। उपर्युक्त पंक्ति में ‘चरण’ और ‘कमल’ में अभेद बताया गया है, अतः यहाँ रूपक अलंकार का प्रयोग है।

(2) मैया मैं तो चंद-खिलौना लैहों।
यहाँ भी ‘चंद’ और ‘खिलौना’ में अभेद की स्थापना की गई है।

(3) बीती विभावरी जाग री।
अंबर पनघट में डुबो रही।
तारा-घट ऊषा नागरी।
इन पंक्तियों में नागरी में ऊषा का, अंबर में पनघट का और तारों में घट का आरोप हुआ है, अतः रूपक अलंकार है।

(4) मेखलाकार पर्वत अपार;
अपने सहस्र दृग सुमन फाड़,
अवलोक रहा था बार-बार,
नीचे जल में निज महाकार।
यहाँ दृग (आँखों) उपमेय पर फूल उपमान का आरोप है, अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

(5) बढ़त बढ़त संपति-सलिलु, मन-सरोजु बढ़ि जाइ।
घटत घटत सु न फिरि घटै, बरु समूल कुम्हिलाइ ॥
इस दोहे में संपत्ति में सलिल का एवं मन में सरोज का आरोप किया गया है, अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

Alankar 9th Class HBSE प्रश्न 8.
उपमा और रूपक अलंकार का अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उपमा अलंकार में उपमेय और उपमान में समानता दिखाई जाती है, जबकि ‘रूपक’ में उपमेय में उपमान का आरोप करके दोनों में अभेद स्थापित किया जाता है।
उदाहरण-
पीपर पात सरिस मन डोला (उपमा)
यहाँ ‘मन’ उपमेय तथा ‘पीपर पात’ उपमान में समानता बताई गई है। अतः उपमा अलंकार है।
उदाहरण-
‘चरण कमल बंदी हरि राई।” (रूपक)
यहाँ उपमेय ‘चरण’ में उपमान ‘कमल’ का आरोप है। अतः यहाँ रूपक अलंकार है।

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6. अतिशयोक्ति

Hindi Vyakaran Alankar HBSE 9th Class प्रश्न 9.
अतिशयोक्ति अलंकार किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब किसी वस्तु अथवा घटना का इतना अधिक बढ़ा-चढ़ा कर वर्णन किया जाता है कि वह लोक-सीमा को लांघ जाए, तो उसे अतिशयोक्ति अलंकार कहते हैं; अतिशय + उक्ति अर्थात् बढ़ा-चढ़ा कर कहना (कथन)। अर्थात् किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना। जैसे-
राघव की चतुरंग-चमू चय को गने केसव राज समाजनि।
सूर-तुरंगनि के उलझे पग तुंग पताकनि की पटसाजनि।।
यहाँ रामचन्द्र जी की सेना के झण्डों को इतना अधिक ऊँचा बताया गया है कि वे सूर्य के रथ के घोड़ों से उलझ गए हैं। इस प्रकार लोक सीमा को लांघ जाने के कारण यहाँ अतिशयोक्ति अलंकार है।

अतिशयोक्ति अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण-
(1) यह शर इधर गांडीव गुण से भिन्न जैसे ही हुआ।
धड़ से जयद्रथ का उधर सिर छिन्न वैसे ही हुआ।।

(2) प्राण छूटे प्रथम रिपु के रघुनायक सायक छूटि न पाये।

(3) केकई के कहत ही राम-गमन की बात।
नृप दशरथ के ताहि छिन सूखि गये सब गात।

(4) हनुमान की पूंछ को लगन न पाई आग।
लंका सिगरी जल गई, गये निशाचर भाग।।।

(5) बांधा था विधु को किसने, इन काली जंजीरों से,
मणि वाले फणियों का मुख, क्यों भरा हुआ हीरों से।

(6) तब सिव तीसरे नैन उघारा ।
चितवत काम भयेहु जरि छारा ।।

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7. अन्योक्ति

प्रश्न 10.
अन्योक्ति अलंकार किसे कहते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। .
उत्तर:
जहाँ अप्रस्तुत वर्णन (उपमान) के माध्यम से प्रस्तुत (उपमेय) अर्थ की प्रतीति कराई जाए, वहाँ अन्योक्ति अलंकार होता है। इस अलंकार की विशेषता यह है कि इसमें किसी के नाम पर बाण चलाकर किसी दूसरे को घायल किया जाता है। इस अलंकार में अप्रस्तुत का वर्णन किया जाता है अतः इसे अप्रस्तुत प्रशंसा अलंकार भी कहते हैं; जैसे
“स्वारथ सुकृत न श्रम वृथा, देखि विहंग विचारि।
बाज पराये पानि पर, तू पच्छीनु न मारि।”

ऊपर के दोहे में प्रस्तुत में बाज का वर्णन किया जा रहा है लेकिन अप्रस्तुत में यह उक्ति राजा जयसिंह के प्रति है जो औरंगजेब की तरफ से शिवाजी को पकड़ने के लिए जा रहे थे। इस प्रकार यहाँ बाज के बहाने से राजा जयसिंह पर निशाना किया गया है अतः यहाँ अन्योक्ति अलंकार है।

अन्योक्ति अलंकार के अन्य उदाहरण-
(1) नहिं पराग नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहि काल।
अली कली ही सों विंध्यौ, आनें कौन हवाल।।

(2) जिन दिन देखे वे सुमन गई सुबीति बहार।
अब तो अली गुलाब में, अपत कंटीली डार ।।

(3) अरे हंस ! या नगर में जइयो आप विचारि।
कागन सों जिन प्रीति करो, कोयल दीन्हीं विडारि ।।

(4) को छूट्यो यह जाल पड़ी, कत कुरंग अकुलाय।।
ज्यों-ज्यों सुरझि भज्यौ चहै, त्यों-त्यों उरझत जाय।।

8. उत्प्रेक्षा

प्रश्न 11.
उत्प्रेक्षा अलंकार किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जहाँ समानता के कारण उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाती है; जैसे
(1) सोहत ओ पीतु पटु, स्याम सलौनै गात।
मनौ नीलमणि सैल पर, आतपु पर्यो प्रभात ॥
यहाँ श्रीकृष्ण के साँवले रूप तथा उनके पीले वस्त्रों में प्रातःकालीन सूर्य की धूप से सुशोभित नीलमणि पर्वत की संभावना होने के कारण उत्प्रेक्षा अलंकार है।

(2) उस काल मारे क्रोध के, तनु काँपने उनका लगा।
मानो हवा के जोर से, सोता हुआ सागर जगा ॥
यहाँ क्रोध से काँपता हुआ अर्जुन का शरीर उपमेय है तथा इसमें सोए हुए सागर को जगाने की संभावना की गई है।

(3) लंबा होता ताड़ का वृक्ष जाता।
मानो नभ छूना चाहता वह तुरंत ही ॥
यहाँ ताड़ का वृक्ष उपमेय है जिसमें आकाश को छूने की संभावना की गई है।

(4) कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिम के कणों से पूर्ण मानो, हो गए पंकज नए ॥
यहाँ आँसुओं से पूर्ण उत्तरा के नेत्र उपमेय है जिनमें कमल की पंखड़ियों पर पड़े हुए ओस के कणों की कल्पना की गई है, अतः यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

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9. मानवीकरण

प्रश्न 12.
मानवीकरण अलंकार की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
उत्तर:
जहाँ जड़ प्रकृति पर मानवीय भावनाओं तथा क्रियाओं का आरोप हो, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है; जैसे-
लो यह लतिका भी भर लाई
मधु मुकुल नवल रस गागरी।

यहाँ लतिका में मानवीय क्रियाओं का आरोप है, अतः लतिका में मानवीय अलंकार सिद्ध है। मानवीकरण अलंकार के कुछ अन्य उदाहरण हैं
(1) दिवावसान का समय
मेघमय आसमान से उतर रही
संध्या सुंदरी परी-सी धीरे-धीरे,

(2) मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।

(3) आए महंत बसंत

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HBSE 9th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

Haryana State Board HBSE 9th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sangya संज्ञा Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

विकारी

जिन शब्दों में लिंग, वचन, कारक, काल, वाच्य आदि के कारण परिवर्तन होता है, उन्हें विकारी शब्द कहते हैं। संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया आदि विकारी शब्द हैं क्योंकि इनके मूल रूप में लिंग, वचन और कारक के कारण परिवर्तन आ जाता है।

संज्ञा

संज्ञा के विकार Class 9 HBSE Hindi प्रश्न 1.
संज्ञा की परिभाषा देते हुए उसके भेदों के नाम लिखिए।
उत्तर:
संज्ञा का शाब्दिक अर्थ है-नाम। यह नाम किसी भी वस्तु, व्यक्ति, प्राणी या भाव का हो सकता है। अतः संज्ञा की परिभाषा इस प्रकार से दी जा सकती है-किसी वस्त, स्थान, प्राणी या भाव के नाम का बोध कराने वाले शब्दों को ‘संज्ञा’ कहते हैं; जैसे राम, मोहन, हिमालय, गुलाब, लड़का, मनुष्य, गाय, प्रेम, ऊँचा आदि।

संज्ञा के तीन भेद हैं-
(1) जातिवाचक
(2) व्यक्तिवाचक
(3) भाववाचक।

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Sangya Exercise HBSE 9th Class Hindi प्रश्न 2.
जातिवाचक संज्ञा की परिभाषा देते हुए उसके कुछ उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर:
जिन शब्दों से किसी जाति के सभी पदार्थों या प्राणियों का बोध हो, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे पुस्तक, नदी, पर्वत, गाँव, प्रदेश, सेना आदि जातिवाचक संज्ञाएँ हैं।
(i) घोड़ा, गाय, शेर, कोयल, मोर, बैल आदि पशु-पक्षियों के नाम हैं।
(ii) आम, केला, कमल, गुलाब आदि फल-फूलों के नाम हैं।
(iii) पर्वत, नदी, पुस्तक, पैन, घड़ी आदि वस्तुओं के नाम हैं।
(iv) शिक्षक, लेखक, चित्रकार, लोहार आदि व्यावसायिक नाम हैं।
(v) नगर, गाँव, चौराहा आदि स्थानवाचक नाम हैं।
(vi) लड़का, लड़की, नर, नारी आदि मनुष्य जाति के नाम हैं।

Sangya In Hindi HBSE 9th Class प्रश्न 3.
व्यक्तिवाचक संज्ञा किसे कहते हैं? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
जिन शब्दों से किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु आदि के नाम का ज्ञान हो, उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे राम, मोहन, भारत, करनाल, हिमालय, यमुना आदि।
(i) रमेश, सीता, मोहन, सुमन आदि व्यक्तियों के नाम हैं।
(ii) भारत, श्रीलंका, करनाल आदि स्थानों के नाम हैं।
(iii) हिमालय, कैलाश आदि पर्वतों के नाम हैं।
(iv) गंगा, यमुना, सरस्वती, हिंद महासागर आदि नदियों और समुद्रों के नाम हैं।
(v) पद्मावत, रामचरितमानस, साकेत, कामायनी आदि पुस्तकों के नाम हैं।

प्रश्न 4.
भाववाचक संज्ञा की सोदाहरण परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
जिन शब्दों से व्यक्ति, वस्तु आदि के धर्म, गुण, भाव, दशा आदि का बोध होता हो, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहा जाता है; जैसे मधुरता, वीरता, बचपन आदि।
(i) मित्रता, सज्जनता, शत्रुता आदि गुण-दोष हैं।
(ii) आनंद, क्रोध, श्रद्धा, भक्ति आदि भाव हैं।
(iii) बचपन, यौवन, बुढ़ापा आदि दशाएँ हैं।

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संज्ञा के अन्य दो भेद

प्रश्न 5.
संज्ञा के द्रव्यवाचक एवं समूहवाचक अन्य दो भेदों की उदाहरण सहित परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
1. द्रव्यवाचक: जिन शब्दों से किसी धातु अथवा द्रव्य का बोध हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे सोना, चाँदी, लोहा, दूध, तेल पानी आदि।
2. समूहवाचक: जिन शब्दों से व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि के समूह अथवा समुदाय का ज्ञान हो, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं; जैसे कक्षा, संघ, गाँव आदि। लेकिन अगर हम गहराई के साथ विचार करें तो पता चलता है कि ये जातिवाचक संज्ञा में ही समाहित हो जाते हैं।

व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

प्रश्न 6.
व्यक्तिवाचक संज्ञा जातिवाचक संज्ञा के रूप में कब और कैसे प्रयुक्त होती है?
उसर-जब अपने विशेष गुणों या अवगुणों के कारण व्यक्तिवाचक संज्ञा अधिक का बोध कराने लगे तब वह जातिवाचक संज्ञा बन जाती है; जैसे-
देश में आज भी जयचंदों और विभीषणों की कमी नहीं है।
इस वाक्य में जयचंद और विभीषण शब्द व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ नहीं हैं। यहाँ जयचंद का अर्थ है ‘देशद्रोही लोग’ और ‘विभीषण’ का अर्थ है ‘घर के भेदी’। अतः ये शब्द जातिवाचक हो गए हैं। कुछ अन्य उदाहरण देखिए-
(क) उसकी बात विश्वास करने योग्य है, वह बिल्कुल भीष्म पितामह है।
(ख) कलियुग में हरिश्चंद्र कहाँ मिलते हैं?

जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग

प्रश्न 7.
जातिवाचक संज्ञा व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में कैसे प्रयोग होती है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
जब कोई जातिवाचक संज्ञा व्यक्ति विशेष के लिए प्रयुक्त हो, तब वह जातिवाचक संज्ञा होती हुई भी व्यक्तिवाचक संज्ञा बन जाती है; जैसे
(i) भारत गांधी का देश है।
(ii) नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे।
उपर्युक्त वाक्यों में प्रयुक्त जातिवाचक संज्ञाएँ ‘गांधी’ और ‘नेहरू’, व्यक्ति विशेष की ओर संकेत कर रही हैं। इसलिए ये जातिवाचक होती हुई भी व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ हैं।

टिप्पणियाँ:
1. जब कभी द्रव्यवाचक संज्ञा शब्द बहुवचन के रूप में द्रव्यों का बोध कराता है, तब वह जातिवाचक संज्ञा बन जाता है; जैसे यह फर्नीचर कई प्रकार की लकड़ियों से बना है।
इसी प्रकार, समूहवाचक संज्ञा जब बहुत-सी समूह इकाइयों का बोध कराती है, तब वे बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं; जैसे
(i) दोनों सेनाएँ आपस में बड़े जोरों से लड़ीं।
(ii) इस गाँव में हरिजनों के घर-परिवार रहते हैं।

2. जब कभी भाववाचक संज्ञा शब्द बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं, तब वे जातिवाचक संज्ञा बन जाते हैं; जैसे-
(i) बुराइयों से सदा बचो।
(ii) आपस में उनकी दूरियाँ बढ़ती गईं।

3. कुछ भाववाचक शब्द मूल शब्द होते हैं; जैसे प्रेम, घृणा आदि। अधिकांश भाववाचक शब्द यौगिक होते हैं; जैसे अच्छाई, बुढ़ापा आदि।

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भाववाचक संज्ञाओं की रचना

प्रश्न 8.
भाववाचक संज्ञाएँ किस प्रकार के शब्दों से और कैसे बनती हैं?
उत्तर:
भाववाचक संज्ञाएँ अमूर्त एवं मानसिक संकल्पनाएँ होती हैं। भाववाचक संज्ञाएँ नीचे दिए गए शब्दों से बनती हैं
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भाववाचक संज्ञाओं की रचना
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संज्ञा के विकारी तत्त्व

प्रश्न 1.
‘विकारी तत्त्व’ से क्या अभिप्राय है? संज्ञा के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए।
अथवा
संज्ञा में विकार के प्रमुख तत्त्व कौन-कौन से हैं? उनका सोदाहरण विस्तृत उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
विकारी तत्त्व’ से अभिप्राय है-बदलने वाला अर्थात् जिसमें परिवर्तन के कारण विकार उत्पन्न हो, उसे विकारी कहते हैं; जैसे लड़का संज्ञा शब्द है। यह एकवचन एवं पुंल्लिंग है। विकार के कारण इसके अग्रलिखित रूप बनते हैं

लड़का से लड़की (लिंग के कारण)
लड़का से लड़के (वचन के कारण)
इसी प्रकार-
लड़की से लड़कियाँ (वचन के कारण)
लड़की से लड़का (लिंग के कारण)

वाक्य में स्थिति के अनुसार ही किसी शब्द में परिवर्तन होता है। यही परिवर्तन ही ‘रूपान्तर’ या ‘विकारी तत्त्व’ कहलाता है। अतः स्पष्ट है कि संज्ञा शब्दों में यह विकार लिंग, वचन तथा कारक के कारण होता है। यहाँ हम संज्ञा के विकारी तत्त्वों का अध्ययन करेंगे।

लिंग

प्रश्न 1.
लिंग किसे कहते हैं? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
जिस संज्ञा शब्द से किसी पुरुष जाति या स्त्री जाति का पता चले, उसे लिंग कहते हैं अर्थात् जिन चिह्नों से शब्दों का स्त्रीवाचक या पुरुषवाचक होने का पता चले, उन्हें लिंग कहते हैं; जैसे ‘छात्र’ पुल्लिंग तथा ‘छात्रा’ स्त्रीलिंग है।

प्रश्न 2.
हिंदी में लिंग कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
हिंदी में मुख्यतः दो प्रकार के लिंग माने जाते हैं-
1. पुल्लिंग
2. स्त्रीलिंग।

1. पुल्लिंग: जिन संज्ञा शब्दों से पुरुष जाति का बोध हो, उन्हें पुल्लिंग कहते हैं; जैसे बेटा, हाथी, कुत्ता आदि।
2. स्त्रीलिंग: जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का बोध हो, उन्हें स्त्रीलिंग कहते हैं; जैसे लड़की, रानी, कुतिया, बकरी आदि।

टिप्पणी:
हिंदी में जड़ वस्तुओं के लिंग के लिए समस्या है; जैसे पर्वत, नदी, हवा, दही, घी आदि में स्त्रीलिंग या स्त्री जाति तथा पुल्लिंग या पुरुष जाति जैसी कोई चीज़ नहीं होती किंतु व्याकरणिक दृष्टि से संज्ञा शब्द का स्त्रीलिंग या पुल्लिंग . होना ज़रूरी है। सजीव प्राणियों में नर या मादा लगाकर भी लिंग निर्धारित कर लिया जाता है; यथा नर भेड़िया या मादा भेड़िया आदि।

हिंदी में कुछ ऐसे भी शब्द हैं जिनमें लिंग-परिवर्तन नहीं होता; यथा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, डॉक्टर, प्रिंसिपल, मैनेजर आदि। इन पदों पर पुरुष भी हो सकते हैं तथा नारी भी। ऐसे पदवाची शब्द उभयलिंगी शब्द कहलाते हैं।

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लिंग की पहचान की महत्वपूर्ण बातें

(क) पुंल्लिंग की पहचान
(1) जिन शब्दों के अन्त में ‘अ’ हो वे प्रायः पुंल्लिंग होते हैं; जैसे खेल, संसार, मिलाप, नाच आदि।
(2) जिन शब्दों के अन्त में ‘आ’ हो वे शब्द पुंल्लिंग होते हैं; जैसे लड़का, मोटा, छोटा, कपड़ा आदि।
(3) जिन शब्दों के अंत में पा, पन, न आदि हो, वे शब्द पुंल्लिंग होते हैं; जैसे बुढ़ापा, बचपन, अध्ययन, दमन आदि।
(4) पहाड़ों, समुद्रों, देशों के नाम पुंल्लिंग होते हैं; जैसे भारतवर्ष, पाकिस्तान, अमेरिका, सतपुड़ा, हिमालय, हिन्द महासागर आदि।
(5) ग्रहों के नाम (पृथ्वी को छोड़कर) पुंल्लिंग होते हैं; जैसे सूर्य, शनि, मंगल, चन्द्र आदि।
(6) पेड़ों के नाम पुल्लिंग होते हैं; जैसे पीपल, वट, साल, आम आदि।
(7) शरीर के कुछ अंगों के नाम भी पुंल्लिंग होते हैं; जैसे सिर, गला, कान, नाक, हाथ, पैर आदि।
(8) कुछ भारी और मोटी वस्तुएँ पुंल्लिंग होती हैं; जैसे पत्थर, टीला, खेत, रस्सा, लक्कड़ आदि।
(9) दिनों और महीनों के नाम पुंल्लिंग होते हैं; जैसे रविवार, सोमवार, मंगलवार आदि । चैत्र, बैशाख, श्रावन, भादो, आश्विन, कार्तिक, माघ, फाल्गुन आदि।

(ख) स्त्रीलिंग की पहचान-
(1) हिन्दी की ईकारान्त सभी संज्ञाएँ स्त्रीलिंग होती हैं, जैसे नाली, खेती, रोटी, मोटी, टोपी, नदी, (अपवाद-पानी एवं घी) आदि।
(2) भाषाओं के नाम प्रायः स्त्रीलिंग में गिने जाते हैं; जैसे जापानी, हिन्दी, गुजराती, बांग्ला, अंग्रेज़ी आदि।
(3) तिथियों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं; जैसे एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या आदि।
(4) नक्षत्रों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं; जैसे भरणी, कृतिका, रोहिणी आदि।
(5) शरीर के कुछ अंगों के नाम स्त्रीलिंग होते हैं; जैसे गर्दन, जिह्वा, आँख, छाती, अँगुली, टाँग, नाक आदि।
(6) आहारों के नाम अधिकतर स्त्रीलिंग होते हैं; जैसे रोटी, दाल, कचौड़ी, खिचड़ी, खीर, कढ़ी, सब्जी, चटनी आदि।
(7) जिन शब्दों के अंत में ट, वट, हट, इया, ता आदि का प्रयोग हो वे सभी स्त्रीलिंग में गिने जाते हैं; जैसे लिखावट, आहट, सजावट, चिड़िया, डिबिया, बछिया, मिठास आदि।

(ग) उभयलिंगी शब्द-
जिन संज्ञा शब्दों का प्रयोग पुंल्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों के लिए किया जाता है, उन्हें उभयलिंग कहते हैं। इनमें अधिकांश शब्द पदवाची हैं। इनमें लिंग परिवर्तन नहीं होता। जैसे डॉक्टर, प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति, मन्त्री, प्रिंसिपल, मैनेजर आदि।

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प्रश्न 2.
हिन्दी के प्रमुख स्त्रीलिंग प्रत्ययों के नाम उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर:
निम्नलिखित प्रत्ययों के प्रयोग से संज्ञा शब्द स्त्रीलिंग में परिवर्तित हो जाता है। यथा-
‘आ’ प्रत्यय के प्रयोग से-लता, विद्या, ममता, कृपा, दया आदि शब्द बनते हैं जो स्त्रीलिंग हैं।
‘इ’ प्रत्यय के प्रयोग से-रीति, तिथि, हानि, भक्ति, शक्ति आदि।
(रवि, कवि, व्यक्ति आदि अपवाद हैं।)
‘ई’ प्रत्यय के प्रयोग से ताई, नानी, नदी, टोपी आदि।
‘आई’ प्रत्यय के प्रयोग से लड़ाई, चढ़ाई, मिठाई आदि।
‘इया’ प्रत्यय के प्रयोग से-बुढ़िया, खटिया, बछिया आदि।
‘आवट’ प्रत्यय के प्रयोग से-लिखावट, सजावट, बनावट आदि।
‘आहट’ प्रत्यय के प्रयोग से-चिल्लाहट, घबराहट आदि।
‘ता’ प्रत्यय के प्रयोग से-सुन्दरता, मूर्खता, दुर्बलता आदि।

प्रश्न 3.
पुंल्लिंग से स्त्रीलिंग बनाने में प्रमुख नियमों का उदाहरण सहित उल्लेख करें।
(क) अकारान्त तत्सम शब्दों के ‘अ’ को ‘आ’ कर देने से-

पुल्लिंग – स्त्रीलिंग
सुत – सुता
प्रिय – प्रिया
छात्र – छात्रा
शिष्य – शिष्या
पूज्य – पूज्या
बाल – बाला
तनुज – तनुजा
कांत – कांता
आचार्य – आचार्या
मूर्ख – मूर्खा

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(ख) अकारांत शब्दों के अंतिम ‘अ’ या ‘आ’ को ‘ई’ कर देने से-

देव – देवी
मृग – मृगी
पहाड़ – पहाड़ी
कबूतर – कबूतरी
दास – दासी
सुअर – सुअरी
पुत्र – पुत्री
चाचा – चाची
साला – साली
लड़का – लड़की
घोड़ा – घोड़ी
मामा – मामी
बेटा – बेटी
गधा – गधी
भतीजा – भतीजी
बंदर – बंदरी
बकरा – बकरी
भाँजा – भाँजी

(ग) परिवर्तन के बिना शब्दों के अंत में ‘नी’ प्रत्यय लगाकर

सिंह – सिंहनी
भील – भीलनी
ऊँट – ऊँटनी
मज़दूर – मज़दूरनी
जाट – जाटनी
सियार – सियारनी
शेर – शेरनी
मोर – मोरनी
राजपूत – राजपूतनी

(घ) परिवर्तन के बिना शब्दों के अंत में ‘आनी’ प्रत्यय जोड़ने से

देवर – देवरानी
भव – भवानी
नौकर – नौकरानी
सेठ – सेठानी
मेहतर – मेहतरानी
चौधरी – चौधरानी
रुद्र – रुद्राणी
क्षत्रिय – क्षत्राणी
इन्द्र – इन्द्राणी
जेठ – जेठानी

(ङ) अंतिम स्वर में कुछ परिवर्तन करके ‘इन’ प्रत्यय लगाने से

नाइ – नाइन
कुम्हार – कुम्हारिन
तेलि – तेलिन
पड़ोसी – पड़ोसिन
ठठेरा – ठठेरिन
धोबी – धोबिन
दर्जी – दर्जिन
माली – मालिन
भक्त – भक्तिन
जुलाहा – जुलाहिन
ग्वाला – ग्वालिन
कहार – कहारिन
चमार – चमारिन
भंगी – भंगिन
नाती – नातिन
दूल्हा – दूल्हिन
पापी – पापिन

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

(च) अंतिम स्वर के स्थान पर ‘आइन’ प्रत्यय लगाकर तथा अन्य स्वरों में कुछ परिवर्तन करके-

लाला – ललाइन
ठाकुर – ठकुराइन
चौबे – चौबाइन
गुरु – गुरुआइन
मिसिर – मिसराइन
बाबू – बबुआइन
चौधरी – चौधराइन

(छ) अंतिम ‘अ’ या ‘आ’ को ‘इया’ बनाकर-

बंदर – बंदरिया
बूढ़ा – बुढ़िया
कुत्ता – कुतिया
डिब्बा – डिबिया

(ज) शब्दों के अंतिम ‘अक’ को ‘इका’ बनाकर-

पाठक – पाठिका
लेखक – लेखिका
गायक – गायिका
बालक – बालिका
अध्यापक – अध्यापिका
उपदेशक – उपदेशिका
सेवक – सेविका
पाचक – पाचिका
निरीक्षक – निरीक्षिका
नायक – नायिका

HBSE 9th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

(झ) अंतिम ‘वान’ और ‘मान’ के स्थान पर ‘अती’ लगाकर-

गुणवान – गुणवती
श्रीमान – श्रीमती
बुद्धिमान – बुद्धिमती
भाग्यवान – भाग्यवती
भगवान – भगवती
पुत्रवान – पुत्रवती
बलवान – बलवती
ज्ञानवान – ज्ञानवती

(ञ) कुछ पुल्लिंग शब्दों के स्त्रीलिंग में विशेष रूप बन जाते हैं

पुरुष – स्त्री
पति – माता
पिता – पत्नी
बैल – गाय
युवक – युवती
राजा – रानी
वर – वधू
विद्वान – विदुषी
सम्राट – साम्राज्ञी
भाई – बहिन
कवि – कवयित्री
अभिनेता – अभिनेत्री
ससुर – सास
साधु – साध्वी
कर्ता – कत्री
विधाता – विधात्री
वीर – वीरांगना
नर – मादा

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वचन

प्रश्न 11.
वचन किसे कहते हैं? हिंदी में वचन कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:
संज्ञा अथवा अन्य विकारी शब्दों के जिस रूप से संख्या का बोध हो, उसे वचन कहते हैं, जैसे लड़का, पुस्तकें आदि। हिंदी में वचन दो प्रकार के माने गए हैं-
1. एकवचन
2. बहुवचन।
1. एकवचन: शब्द के जिस रूप से एक वस्तु या एक व्यक्ति का बोध हो, उसे एकवचन कहते हैं; जैसे लड़का, घोड़ा, नदी, वृक्ष, पक्षी आदि।
2. बहुवचन: शब्द के जिस रूप से एक से अधिक वस्तुओं या व्यक्तियों का बोध हो, उसे बहुवचन कहते हैं; जैसे लड़के, घोड़े, नदियाँ, स्त्रियाँ आदि।

प्रश्न 2.
हिंदी भाषा में वचन-प्रयोग संबंधी सामान्य नियमों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हिंदी भाषा में एक वस्तु या व्यक्ति के लिए एकवचन तथा एक से अधिक वस्तुओं और व्यक्तियों के लिए बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। हिंदी में इनके अतिरिक्त कुछ और भी नियम हैं जो वचन प्रयोग में प्रयुक्त होते हैं; यथा
(क) सम्मान व्यक्त करने के लिए एकवचन को बहुवचन में प्रयुक्त किया जाता है जैसे
(i) पिता जी दिल्ली गए हैं।
(ii) गुरु जी कक्षा में हैं।
(iii) मंत्री जी मंच पर पधार चुके हैं।
(iv) श्रीकृष्ण हिंदुओं के अवतार हैं। यहाँ एकवचन का प्रयोग बहुवचन में हुआ है। इसे आदरार्थक बहुवचन कहते हैं।

(ख) हिंदी में हस्ताक्षर, प्राण, दर्शन, होश आदि का बहुवचन में प्रयोग होता है; जैसे
(i) तुम्हारे हस्ताक्षर बहुत सुंदर हैं।
(ii) तुम्हारे प्राण बच गए, यही गनीमत है।
(iii) आपके तो दर्शन भी दुर्लभ हो गए हैं।
(iv) आज का समाचार सुनकर उसके होश उड़ गए।

(ग) कुछ एकवचन शब्द गण, लोग, जन, समूह, वृंद आदि हिंदी शब्दों के साथ जुड़कर बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं; यथा-
(i) आज मज़दूर लोग हड़ताल पर हैं।
(ii) अध्यापक-वृंद परीक्षाओं में व्यस्त हैं।
(iii) अपार जन-समूह दिखाई दे रहे हैं।
(iv) कृषक-वृंद हल चला रहे हैं।
(v) छात्रगण आजकल अनुशासनहीनता पर उतर आए हैं।

(घ) जाति, सेना, दल शब्दों के साथ प्रयुक्त होने से एकवचन का बहुवचन में प्रयोग-
(i) नारी जाति प्रगति-पथ पर अग्रसर है।
(ii) छात्र-सेना हड़ताल पर है।
(iii) सेवा-दल रोगियों की सेवा कर रहा है।

(ङ) व्यक्तिवाचक एवं भाववाचक संज्ञाएँ सदा एकवचन में रहती हैं; जैसे
(i) राम खेल रहा है।
(ii) सत्य की सदा जीत होती है।
(iii) उसने झूठ नहीं बोला।
(iv) प्रेम सदा अमर रहता है।

(च) कुछ शब्द सदा एकवचन में ही रहते हैं। जैसे-जनता, वर्षा, आग; जैसे
(i) आग कितनी तेज़ जल रही है।
(ii) जनता सदा पिसती रहती है।
(iii) कितनी अच्छी वर्षा हो रही है।

(छ) बहुवचन के स्थान पर एकवचन का प्रयोग-कभी-कभी जातिवाचक संज्ञा अपनी सारी जाति या समूह की बोधक होती हुई भी अधिक संख्या, परिमाण या गुण को सूचित करने के लिए एकवचन में प्रयुक्त होती है; जैसे
(i) आज का मानव स्वार्थी हो गया है।
(ii) कुत्ता स्वामिभक्त होता है।
(iii) मथुरा का पेड़ा विश्व भर में प्रसिद्ध है।
(iv) उसने जुए में बहुत रुपया लुटाया है।
(v) बाज़ार में अंगूर सस्ता बिक रहा है।

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वचन बदलने के नियम

1. अकारांत शब्दों के अंतिम ‘आ’ को ए कर देने से बहुवचन-
एकवचन – बहुवचन
कपड़ा – कपड़े
बेटा – बेटे
बच्चा – बच्चे
लोटा – लोटे
घोड़ा – घोड़े
पंखा – पंखे
लड़का – लड़के
घड़ा – घड़े

अपवाद: नेता, राजा, पिता, योद्धा, मामा, नाना, चाचा, सूरमा आदि शब्द इस नियम के अपवाद हैं।

2. आकारांत तथा अकारांत शब्दों के अंतिम ‘अ’, ‘आ’ को ‘एं’ कर देने से बहुवचन-
अकारांत शब्द-
पुस्तक – पुस्तकें
नहर – नहरें
बहिन – बहिनें
आँख – आँखें
रात – रातें
दीवार – दीवारें
गाय – गायें
कलम – कलमें
सड़क – सड़कें
बोतल – बोतलें
किताब – किताबें

आकारांत शब्द-
कथा – कथाएँ
माला – मालाएँ
अध्यापिका – अध्यापिकाएँ
गाथा – गाथाएँ
विद्या – विद्याएँ
भावना – भावनाएँ
माता – माताएँ
आत्मा – आत्माएँ
लता – लताएँ
कन्या – कन्याएँ
झील – झीलें

3. इकारांत तथा ईकारांत शब्दों के अंत में ‘याँ’ जोड़ने से बहुवचन। इस अवस्था में ई का इ भी हो जाता है।

घोड़ी – घोड़ियाँ
शक्ति – शक्तियाँ
समिति – समितियाँ
रोटी – रोटियाँ
निधि – निधियाँ
लड़की – लड़कियाँ
राशि – राशियाँ
बेटी – बेटियाँ
पंक्ति – पंक्तियाँ
नदी – नदियाँ
रात्रि – रात्रियाँ
लिपि – लिपियाँ
रीति – रीतियाँ
स्त्री – स्त्रियाँ

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4. उकारांत, ऊकारांत, एकारांत, ओकारांत शब्दों में एँ जोड़कर बहुवचन। ‘ऊ’ का ‘उ’ भी हो जाता है।

धेनु – धेनुएँ
गौ – गौएँ
धातु – धातुएँ
वधू – वधुएँ
बहु – बहुएँ
वस्तु – वस्तुएँ
ऋतु – ऋतुएँ

5. ‘या’ अथवा ‘इया’ से समाप्त होने वाले शब्दों में केवल अनुस्वार जोड़कर बहुवचन बनाना-

बिटिया – बिटियाँ
चिड़िया – चिड़ियाँ
चुहिया – चुहियाँ
बुढ़िया – बुढ़ियाँ
गुड़िया – गुड़ियाँ
कुतिया – कुतियाँ
बछिया – बछियाँ
डिबिया – डिबियाँ

6. ‘अ’ तथा ‘आ’ से समाप्त होने वाले शब्दों में अंतिम ‘अ’ या ‘आ’ के स्थान पर ओं लगाकर बहुवचन बनाना-

घर से – घरों से
झील पर – झीलों पर
घोड़े पर – घोड़ों पर
माता की – माताओं की
बंदर का – बंदरों का
खरबूजा – खरबूजों

7. उकारांत या ऊकारांत शब्दों के अंत में ‘ओं’ प्रत्यय लगाकर बहुवचन बनाना। ऐसे शब्दों में अंतिम ‘ऊ’ को ‘उ’ हो जाता है।

ऋतु – ऋतुओं
बहू – बहुओं
धातु – धातुओं
वधू – वधुओं
वस्तु – वस्तुओं
चाकू – चाकुओं
धेनू – धेनुओं
डाकू – डाकुओं

8. इकारांत तथा ईकारांत शब्दों के संबोधन बहुवचन में ‘यो’ प्रत्यय लगाकर बहुवचन बनाना। प्रत्यय पूर्व स्वर दीर्घ का हस्व हो जाता है।

लड़की! – लड़कियो!
मुनि! – मुनियो!
भाई! – भाइयो!
सिपाही! – सिपाहियो!

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(ग) कारक

प्रश्न 1.
‘कारक’ का अर्थ बताते हुए उसकी सोदाहरण परिभाषा भी लिखिए।
उत्तर:
“कारक’ शब्द का अर्थ है-क्रिया को करने वाला अर्थात क्रिया को पूरी करने में किसी-न-किसी भूमिका को निभाने वाला।

परिभाषा:
संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसके संबंध का वाक्य के दूसरे शब्दों से पता चले, उसको कारक कहते हैं। यह संबंध-ज्ञान कभी तो पृथक शब्द के रूप में या चिहनों के रूप में होता है तथा कभी यह मूल शब्द में घुला-मिला रहता है। कभी मूल शब्द में केवल कुछ विकार हो जाता है तथा परसर्ग के रूप में भी जुड़ा रहता है।

कारकों का रूप प्रकट करने के लिए उनके साथ जो शब्द-चिह्न लगे रहते हैं, उन्हें विभक्ति कहते हैं। इन कारक-चिह्नों को परसर्ग भी कहते हैं।
राम ने पत्र लिखा।
रमेश ने कलम से पत्र लिखा।
मोहन ने पुस्तक को पढ़ा।
इन सब वाक्यों में ‘ने’ कर्त्ता कारक चिह्न है, ‘से’ करण कारक है और ‘को’ कर्म कारक है।

प्रश्न 2.
हिंदी कारकों के कितने भेद होते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
हिंदी में कारकों के आठ भेद माने जाते हैं
(i) कर्ता – क्रिया को करने वाला।
(ii) कर्म – जिस पर क्रिया का प्रभाव या फल पड़े।
(iii) करण – जिस साधन से क्रिया संपन्न हो।
(iv) संप्रदान – जिसके लिए क्रिया की जाए।
(v) अपादन – जिससे अलगाव हो।
(vi) अधिकरण – क्रिया के संचालन का आधार।
(vii) संबंध – क्रिया का अन्य पदों से संबंध सूचित करने वाला।
(viii) संबोधन – जिससे संज्ञा को पुकारा जाए।

प्रश्न 3.
हिंदी में प्रयुक्त होने वाले कारकों के चिह्नों या विभक्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
हिंदी में आठ कारक हैं। इनके नाम और चिह्न निम्नलिखित प्रकार से हैं
कारक – विभक्ति चिहन या परसर्ग
1. कर्ता – ने अथवा कुछ नहीं
2. कर्म – को अथवा कुछ नहीं
3. करण – से, के द्वारा, के साथ (साधन)
4. संप्रदान – को, के लिए
5. अपादान – से पार्थक्य
6. संबंध – का, के, की (रा, रे, री या ना, ने, नी)
7. अधिकरण – में, पर
8. संबोधन – हे, रे, अरे, री, अरी, ओ (संबोधन शब्द से पूर्व जुड़ता है)

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प्रश्न 4.
हिंदी के सभी कारकों का सोदाहरण परिचय दीजिए।
उत्तर:
1. कर्ता कारक:
क्रिया करने वाले को कर्ता कारक कहते हैं। इसका परसर्ग ‘ने’ है। इसका विभक्ति चिह्न ‘ने’ होता है। इस विभक्ति चिह्न का प्रयोग केषल सकर्मक क्रिया में भूतकाल में होता है; जैसे-
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2. कर्म कारक:
क्रिया का फल जिस शब्द पर पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। कर्म कारक की विभक्ति ‘को’ होती है। कभी-कभी विभक्ति का प्रयोग नहीं होता।
इन पुस्तकों को उठा लो।
राम को कहो।
रवि पुस्तक पढ़ता है।
इन वाक्यों में ‘पुस्तकों को’ ‘राम को’ तथा ‘पुस्तक’ कर्म कारक के प्रयोग हैं। द्विकर्मक वाक्यों में मुख्य और गौण दो कर्म होते हैं। मुख्य कर्म क्रिया के समीप रहता है। उसमें विभक्ति नहीं लगती; यथा-शिक्षक ने विद्यार्थी को पाठ पढ़ाया।
यहाँ पाठ मुख्य कर्म है और विद्यार्थी गौण कर्म।

3. करण कारक:
जिस शब्द रूप की सहायता से क्रिया का व्यापार होता है, उसे करण कारक कहते हैं। इसके विभक्ति चिह्न हैं-‘से’, ‘द्वारा’, ‘के द्वारा’, ‘के साथ’; यथा-
राम ने रावण को बाण से मारा।
मुझे पत्र द्वारा सूचित करना।
मज़दूर ने गुड़ के साथ रोटी खाई।
बच्चों ने पैंसिल से चित्र बनाया।
शिकारी ने बंदूक से शेर को मारा।

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4. संप्रदान कारक:
जिसके लिए क्रिया की जाती है, संज्ञा या सर्वनाम के उस रूप को संप्रदान कारक कहा जाता है; जैसे राजा भिखारी को दान देता है। यहाँ भिखारी के लिए दान दिया जाता है, इसलिए यहाँ ‘भिखारी’ संप्रदान कारक है। इसके विभक्ति चिह्न हैं-‘के लिए’, ‘को’ या ‘के वास्ते’ आदि। अन्य उदाहरण-
मैंने आप के लिए भोजन छोड़ा।
पिता ने पुत्र को पुस्तक दी।
वह अपने भाई के लिए दवाई साया।
सैनिक देश की रक्षा के वास्ते सीमा पर डटे हुए हैं।

5. अपादान कारक:
संज्ञा के जिस रूप से एक वस्तु तथा व्यक्ति के दूसरी वस्तु तथा व्यक्ति से पृथक होने, डरने, सीखने, लजाने अथवा तलना करने का भाव हो, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसमें ‘से’ विभक्ति चिहन का प्रयोग होता है, यथा
वृक्षों से पत्ते गिरते हैं।
में घर से आया हूँ।
गंगा हिमालय से निकलती है।

6. संबंध कारक:
शब्द के जिस रूप से किसी व्यक्ति या पदार्थ का दूसरे व्यक्ति या पदार्थ से संबंध प्रकट होता है, उसे संबंध कारक कहते हैं। ‘का’, ‘के’, ‘की’ इसके विभक्ति चिहून हैं। संज्ञा सर्वनाम पुल्लिंग के साथ ‘का’, स्त्रीलिंग के साथ ‘की’ तथा बहुवचन के साथ ‘के’ परसर्ग का प्रयोग होता है; यथा
शीला सीता की बहिन है।
राम के दो भाई हैं।
आपकी पुस्तक मेरे पास है।

7. अधिकरण कारक:
संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से किसी के आधार का बोध होता है, उसे अधिकरण कारक कहते है। जैसे रुपया मेरे हाथ में है। बच्चा छत पर है। यहाँ हाथ में और छत पर’ अधिकरण कारक हैं। अतः ‘में’, ‘पर’ तथा ‘के ऊपर’ इसकी विभक्तियों हैं; यथा
पानी में मगरमच्छ रहता है।
पुस्तक मेज़ पर रखी है।
छत के ऊपर गेंद पड़ी है।
अनेक बार ‘के मध्य’, ‘के बीच’, ‘के भीतर’ आदि का भी प्रयोग होता है; जैसे-
घर के भीतर चलो।।
इस डिबिया के अंदर कितनी गोलियों हैं?

कभी-कभी विभक्ति रहित अधिकरण का भी प्रयोग होता है; जैसे-
तुम्हारे घर क्या होगा?
इस जगह पूर्ण शांति है।

8. संबोधन कारक: संज्ञा के जिस रूप से किसी को पुकारा जाए, उसे संबोधन कारक कहते हैं। इसमें शब्द से पूर्व है, अरे, ओ, अजी आदि का प्रयोग होता है; जैसे-
हे राम! अब क्या करूँ।
अरे पुत्र! यह तुमने क्या कर दिया?
अजी! सुनते हो।

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प्रश्न 5.
कौन-कौन-से कारक बिना चिह्न के प्रयुक्त होते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
हिन्दी में कर्ता, कर्म और अधिकरण ऐसे कारक हैं जो विभक्ति चिह्नों के बिना भी प्रयुक्त हो सकते हैं; जैसेकृष्ण खेलता है। कर्ता कारक मोहन पत्र लिखता है। कर्म कारक इस जगह महात्मा जी रहते थे।

उपर्युक्त वाक्यों में कारक चिह्नों (ने, को तथा पर) का प्रयोग नहीं हुआ है और ये वाक्य व्याकरण की दृष्टि से ठीक हैं।

प्रश्न 6.
अपादान कारक का प्रयोग किन-किन स्थितियों में होता है ?
उत्तर:
अपादान कारक का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है
1. अलग होने के अर्थ में – गंगा हिमालय से निकलती है।
2. डरने के अर्थ में – बकरी शेर से डरती है।
3. सीखने के अर्थ में – छात्र अध्यापक से पढ़ते हैं।
4. लजाने के अर्थ में – विद्यार्थी अध्यापक से शरमा रहा था।
5. तुलना के अर्थ में – राम श्याम से चालाक है।
6. दूरी के अर्थ में – मेरा स्कूल नगर से दूर है।
7. आरम्भ करने के अर्थ में – मैं पिछले मास से काम पर आ रहा हूँ।
8. बचाने के अर्थ में – रोहित ने बालक को डूबने से बचाया।
9. मांगने के अर्थ में – भिखारी ने राजा से भिक्षा माँगी।

प्रश्न 7.
कर्म और सम्प्रदान कारक में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
जिस वाक्य में क्रिया का फल कर्म पर पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं, इसका विभक्ति चिहन ‘को’ होता है; जैसे राम ने रावण को मारा था, किन्तु कभी-कभी कारक चिह्न नहीं भी लगता; जैसे मोहन पुस्तक पढ़ता है, जबकि सम्प्रदान कारक में भी ‘को’ विभक्ति चिह्न होता है; जैसे राजा ने भिखारी को दान दिया। सम्प्रदान में ‘को’ विभक्ति का प्रयोग केवल दान देने की क्रिया में होता है, अन्यथा वह कर्म कारक ही होगा; जैसे
(1) भिखारी को भोजन दे दो।
(2) भिखारी को हटा दो। पहले वाक्य में दान देने का भाव है, जबकि दूसरे वाक्य में दान देने का भाव नहीं है। इसलिए कर्म कारक है।

प्रश्न 8.
करण और अपादान कारक में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
करण और अपादान दोनों कारकों में ‘से’ परसर्ग का प्रयोग होता है। इसीलिए दोनों के अन्तर का प्रश्न उत्पन्न होता है। जहाँ ‘से’ परसर्ग अलग होने का भाव प्रकट करे वहाँ अपादान कारक होगा और जहाँ ‘से’ परसर्ग साधन के अर्थ में आता है, वहाँ करण कारक होगा; जैसे-
अपादान-
वृक्षों से पत्ते गिरते हैं।
लड़के स्कूल से आए हैं।

करण कारक-
मोहन रिक्शा से आया है।
पेड़ों से हमें लकड़ी मिलती है।

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प्रश्न 9.
अधिकरण कारक का लक्षण बताते हुए इसमें प्रयुक्त होने वाली विभक्तियों का प्रयोग उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर:
संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से क्रिया के आधार (स्थान, समय) का बोध होता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं; जैसे रुपया मेरे हाथ में है। बच्चा छत पर है। यहाँ ‘हाथ में’ और ‘छत पर’ अधिकरण कारक हैं। अतः ‘में’, ‘पर’, तथा ‘के ऊपर’ इसकी विभक्तियाँ हैं; जैसे-
पानी में मगरमच्छ रहता है।
पुस्तक मेज पर रखी है।
छत के ऊपर गेंद पड़ी है।

अनेक बार ‘के मध्य’, ‘के बीच’, ‘के भीतर’ आदि का भी प्रयोग होता है; जैसे-
घर के भीतर चलो।
इस डिबिया के अन्दर कितनी गोलियाँ हैं।

कभी-कभी विभक्ति रहित अधिकरण का भी प्रयोग होता है; जैसे-
तुम्हारे घर क्या होगा ?
इस जगह पूर्ण शान्ति है।

प्रश्न 10.
निम्नलिखित वाक्यों में से कारक की पहचान करके उनका नाम लिखें-
(क) कपड़े अलमारी के अन्दर रखे हैं।
(ख) मोहन! यार बात तो सुन।
(ग) राम ने बाण से रावण को मारा।
(घ) राम ने रोटी खाई।
(ङ) आज उसे घर जाने दो
(च) हाँ, पिता जी घर पर ही हैं।
(छ) मैं उसे अपने हाथों से सजा दूंगा।
(ज) भिखारी को आटा दे दो।
(झ) बच्चे को भगा दो।
(ञ) मैंने आप से कल ही कह दिया था।
उत्तर:
(क) के अन्दर अधिकरण कारक है।
(ख) मोहन! सम्बोधन कारक है।
(ग) बाण से करण कारक है।
(घ) राम ने कर्ता कारक है।
(ङ) घर (को) कर्म कारक है।
(च) घर पर अधिकरण कारक है।
(छ) हाथों से करण कारक है।
(ज) भिखारी को सम्प्रदान कारक है।
(झ) बच्चे को कर्म कारक है।
(ञ) आप से अपादान कारक है।

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प्रश्न 11.
निम्नलिखित वाक्यों में से कारकों को छाँटकर उनके नाम लिखिए-
(क) मोहन चाकू से फल काट कर खा रहा है।
(ख) मोहन ने सोहन को अपनी पुस्तक दे दी है।
(ग) रमेश को स्कूल जाना है।
(घ) वह इलाज के लिए दिल्ली आ रहा है।
(ङ) गंगा हिमालय से निकलती है।
(च) मैं कलम से पत्र लिखूगा।
(छ) वह दुकान पर नहीं है।
(ज) वह कल घर पर था।
(झ) परीक्षा मार्च में होगी।
(ञ) मैं शाम को आऊँगा।
उत्तर:
(क) मोहन (कर्ता), फल (कम) चाकू से (करण)।
(ख) मोहन ने (कर्ता) सोहन को (कर्म) पुस्तक (कर्म)।
(ग) रमेश को (कर्ता) स्कूल (अधिकरण)।
(घ) वह (कत्ता) इलाज के लिए (सम्प्रदान) दिल्ली (अधिकरण)।
(ङ) गंगा (कर्ता) हिमालय से (अपादान)।
(च) मैं (कत्ता) कलम से (करण) पत्र (कम)।
(छ) वह (कर्ता) दुकान पर (अधिकरण)।
(ज) वह (कर्ता) घर पर (अधिकरण)
(झ) परीक्षा (कम) मार्च में (अधिकरण)।
(ञ) मैं (कत्ता) शाम को (अधिकरण)।

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