Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Maths Solutions Chapter 10 सदिश बीजगणित विविध प्रश्नावली

Haryana State Board HBSE 12th Class Maths Solutions Chapter 10 सदिश बीजगणित विविध प्रश्नावली Textbook Exercise Questions and Answers.

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HBSE 12th Class Maths Solutions Chapter 9 अवकल समीकरण विविध प्रश्नावली

Haryana State Board HBSE 12th Class Maths Solutions Chapter 9 अवकल समीकरण विविध प्रश्नावली Textbook Exercise Questions and Answers.

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

मुद्रा और साख Important Questions Economics HBSE 10th Class प्रश्न-1.
आवश्यकताओं का दोहरा संयोग किसे कहते
उत्तर-
(क) जब क्रेता और विक्रेता दोनों एक दूसरे से चीजें खरीदने तथा बेचने पर सहमति रखतें हों तो इसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहा जाता है।
(ख) वस्तु विनितय प्रणाली में मांगों का दोहरा संयोग होना लाजिमी विशिष्टता हैं।

HBSE 10th Class मुद्रा और साख Important Questions Economics प्रश्न-2.
मुद्रा माँगों के दोहर संयोग को कैसे खत्म करती
उत्तर-
ऐसी अर्थव्यवस्था जहाँ मुद्रा का प्रयोग होता है, विनिमय प्रक्रिया में मुद्रा बीच का महत्त्वपूर्ण चरण प्रदान करके माँगों के दोहरे संयोग की जरूरत को खत्म कर देते हैं।

Chapter 3 मुद्रा और साख Important Questions HBSE 10th Class प्रश्न-3.
माँग जमा किसे कहते हैं?
उत्तर-
चूंकि बैंक खातों में जमा धन को माँग के जरिये निकाला जा सकता हैं इसीलिए इस जमा धन को मांग जमा कहा जाता है।

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प्रश्न-4.
चेक क्या है?
उत्तर-
चेक एक ऐसा कागज है जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चेक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक खास रकम का भुगतन करने कजा आदेश देता है।

प्रश्न-5.
माँग जमा को मुद्रा क्यों माना जाता हैं?
उत्तर-
चूंकि मांग जमा व्यापक स्तर पर भुगतान का जरिया स्वीकार किये जाते हैं, इसलिये आधुनिक अर्थव्यवस्था मे करेंसी के साथ-साथ इसे भी मुद्रा समझा जाता है।

प्रश्न-6.
ऋण से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
ऋण से हमारा तात्पर्य एक सहमति से है जहाँ उध परदाता कर्जदार को धन, वस्तुएं या सेवाएँ प्रदान करता है। और बदले में भविष्य में कर्जदार से भुगतान करने का वादा लेता है।

प्रश्न-7.
ऋण की शर्ते क्या हैं?
उत्तर-
ब्याज-दर, संपत्ति एवं कागजात की माँग और भुगतान के तरीके, इन सबको मिलकार ऋण की शर्ते कहा जाता है। ऋण की शर्तो में एक ऋण व्यवस्था से दूसरी ऋण व्यवस्था में काफी फर्क आता हैं। ऋण की शर्ते उधारदाता और कर्जदार की प्रकृति पर भी निर्भर करती हैं।

प्रश्न-8.
सहकारी समितियाँ किन कार्यो के लिए ऋण उपलब्ध कराती हैं?
उत्तर-
सहकारी समितियाँ कृषि उपकरण खरीदने, खेती तथा कृषि व्यापार करने, मछली पकड़ने, घर बननाने और तमाम अन्य खर्चा के लिए ऋण उपलब्ध कराती है।

प्रश्न-9.
ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण के विभिन्न स्रोतों की सूची बनाइए।
उत्तर-
भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में निम्नलिखित स्रोतों से ऋण उपलब्ध है
(क) महाजन (ख) साहूकार (ग) कृषि-व्यापारी (घ) सहाकारी समितियाँ (ङ) भूपति मालिक एवं (च) बैंक

प्रश्न-10.
किन स्रोतों से प्राप्त ऋण ज्यादा महँगा होता
उत्तर-
औपचारिक स्तर पर ऋण देनेवालों की तुलना में अनौपचारिक खण्ड के ज्यादात ऋणदाता कहीं ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। इसलिए, अनौपचारिक स्तर पर लिया गया ऋण कर्जदाता को अधिक महँगा पड़ता है।

प्रश्न-11.
भारत में औपचारिक क्षेत्र के ऋणदाताओं की गतिविधियों पर कौन नजर रखता है?
उत्तर-
भारत में भारतीर रिजर्व बैंक कर्जा के औपचारिक स्रोतों की गतिविधियों पर नजर रखता है।

प्रश्न-12.
औपचरिक खण्ड के ऋण का लोगों तक पहुँचना क्यों जरूरी हैं?
उत्तर-
(क) औपचारिक खण्ड के ऋण का विस्तार होने के साथ-साथ इसका लोगों तक पहुँवना जरूरी है। क्योंकि वर्तमान समय में अमीर परिवारों की पहुँच औपचारिक स्रोतों तक हैं परंतु गरीब परिवारों को ज्यादातर अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।
(ख) औपचारिक खण्ड से ऋण का वितरण बराबरी के स्तर पर होना चाहिए। जिससे गरीब लोगों को भी सस्ते ऋण का लाभ प्राप्त हो सके।

प्रश्न-13.
कार्यशील पूँजी के कुछ उदाहरण दीजिये।
उत्तर-
कच्चा माल, नकदी, धन, बीज, खाद, बाँस खरीदना आदि कार्यशील पूँजी के उदहरण हैं।

प्रश्न-14.
बैंक आत्मनिर्भर गुटों से जुडः महिलाओं को कर्ज देने के लिए क्यों तैयार होते हैं?
उत्तर-
(क) जब महिलाएं स्वयं को आत्मनिर्भर गुटों में आयोजित कर लेती हैं तो बैकि उन्हें ऋण देने के लिए तैयार हो जाते हैं हालांकि उनके पास कोई ऋणाधार नहीं होता है।
(ख) इसका कारण यह है कि बचत और ऋण गतिविधि यों से जुड़े ज्यादातर महत्त्वपूर्ण निर्णय गुट के सदस्य खुद करते हैं गुट फैसला करता है कि कितना कर्ज दिया जागण, उसका लक्ष्य, उसकी रकम. ब्याज दर, वापस लौटाने की अवधि क्या होगी आदि।
(ग) ऋण उतारने की जिम्मेदारी भी गुट की होती है एक भी सदस्य यदि ऋण नहीं लौटाता तो गुट के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से उठाते हैं।

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प्रश्न-15.
आधुनिक करेंसी (मुद्रा) का उत्पाद के रूप में अपने आप में कोई मूल्य नहीं हैं फिर इसे मुद्रा के जेसे क्यों स्वीकार किया गया?
उत्तर-
(क) मुद्रा के आधुनिक रूपों में करेंसी कागज के नोट और सिक्के शामिल हैं। आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है।
(ख) इसे मुद्रा के रूप में विनिमय को माध्यम इसलिए स्वीकार किया जाता है। क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है।

प्रश्न-16.
आधुनिक मुद्रा को विनिमय के साधन के रूप में क्यों स्वीकार किया जाता है? उदारहण दीजिये।
उत्तर-
(क) मुद्रा के आधुनिक रूपों में करेंसी कागज के नोट और सिक्के शामिल हैं। आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है फिर भी इसे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है इसका कारण यह है कि देश की सरकार इसे प्राधिककृत करती है।
(ख) उदाहरण के लिए, भारत में भारतीय रिजर्व बैंक केंद्रीय सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करने के लिए प्राधिकृत हैं।
(ग) कानून रुपयों को विनिमय का माध्यम जैसे उपयोग की वैधता प्रदान करता है।
(घ) भारत में कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता। इसलिए रूपया व्यापक स्तर पर विनिमय का माध्यम स्वीकार किया गया है।

प्रश्न-17.
बैंकों की कर्ज संबंधी गतिविधियों पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
बैंकों में लोग मुद्रा निक्षेप के रूप में रखते हैं। बैंक उसके पास जमा रकम का 15 प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं। इस धन को किसी एक दिन में जमाकर्ताओं द्वारा धन निकालने की संभावना को देखते हुए संभार के रूप में रखा जाता है।
बैंक उनके पास जमा राशि के प्रमुख भाग को कर्ज देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए कर्ज की बहुत मांग रहती है इस प्रकार बैंक दो गुटों-जमाकर्ता और कर्जदार के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं। जमाकर्ताओं को दिये गये ब्याज और कर्जदारों से लिये गये बयाज का बंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत होता है।

प्रश्न-18.
ऋण-फंदा से आपका क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर-
लोग ग्रामीण गतिविधियों के लिए ऋण लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की मुख्य मांग फसल उगाने के लिए होती है।
मान लीजिये एक छोटा किसान अपने छोटे जमीन के टुकड़े पर फसल उगाने के लिये महाजन से ऋण लेता है। वह उम्मीद करता है कि अच्छी फसल होने पर वह कर्ज वापस कर देगा।
परंतु मौसम के बीच में फसल पर नाशक कीओं के हमले से फसल बर्बाद हो जाने के कारण वह कर्ज लौटाने में असफल हो जाता है और साल के भीतर ही यह कर्ज बड़ी रकम बन जाता है। अलगे वर्ष वह पुनः उधार लेता है। इस बार फसल सामान्य होती हैं लेकिन इतनी कमाई नहीं होती कि वह पिछला कर्ज उतार सके। उसे कर्ज लौटाने के लिए अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ता है। इस प्रकार वह ऋण फंदे में फंस जाता है। ऐसी परिस्थिति में कर्जदार का ऋण फंदे से निकलना अति कष्टदायक होता है।

प्रश्न-19.
ऋण की शर्ते क्या होती हैं?
उत्तर-
(क) ब्याज दर, संपत्ति, कागजात की मांग और भुगतान के तरीके इन सबको मिलाकर ऋण की शर्ते कहा जाता है। ऋण की शतों में एक ऋण व्यवस्था से दूसरी ऋण व्यवस्था में काफी फर्क होता है। ऋण की शर्ते ऋणदाता और कदार की प्रकृति पर भी निर्भर करती हैं।
(ख) हरेक ऋण समझौते में ब्याज-दर साफ तरीके से दी जाती है। जिसे कर्जदार महाजन को मूल रकम के साथ वापस करता है।
(ग) ऋणदाता ऋण के खिलाफ कोई समर्थक ऋणाधार की मांग कर सकता है। समर्थक ऋणाधार ऐसी संपत्ति है जिसका मालिक कर्जदार होता है। जैसे, भूमि, मकान, गाड़ी, पशु, बैंक में जमा पूंजी आदि। इसका इस्तेमाल ऋणदाता को गारंटी के रूप में किया जाता है, जब तक कि ऋण का भुगतान नहीं हो जाता है!
(घ) यदि कर्जदार ऋण वापस नहीं कर पाता है तो ऋणदाता को भुगतान प्राप्ति के लिए समर्थक ऋणाधार को बेचने का अधिकार होता है।

प्रश्न-20.
ऋणों को कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर-
(क) विभिन्न प्रकार के ऋणों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है : औपचारिक तथा अनौपचारिक खण्ड।
(ख) औपचारिक वर्ग में बैंकों व सहकारी समितियों से लिये कर्ज आते हैं।
(ग) अनौपचारिक वर्ग में महाजन, व्यापारी, साहूकार, मालिक, दोस्त, रिश्तेदार आदि आते हैं।

प्रश्न-21.
गरीबों में आत्मनिर्भर गुट के संगठन का क्या लाभ होता है?
उत्तर-
(क) आत्मनिर्भर गुट कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या का समाधान करते हैं।
(ख) विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए उन्हें सस्ती ब्याज-दर पर ऋण उपलब्ध हो जाता है।
(ग) आत्मनिर्भर गुट ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को संघबद्ध करने में मदद करते हैं।
(घ) इससे महिलाएं स्वावलंबी बनती हैं। गुट की नियमित बैंठकों में तरह-तरह के सामाजिक विषयों जैसे, स्वास्थ्य, पोषण, हिंसा आदि पर विचार-विमर्श करने का मौका मिलता है।

प्रश्न-22.
बांग्लादेश ग्रामीण बैंक पर एक नोट लिखें।
उत्तर-
बांग्लोदश ग्रामीण बैंक की शुरुआत 1970 में हुई। इसकी सफलता सस्ती ब्याज दरों पर गरीबों को ऋण देने में रही है। इसके 60 लाख कर्जदार हैं जो बांग्लादेश के 40, 000 गांवों में फैले हुए हैं। इससे ऋण लेने वाली ज्यादातर गरीब महिलाएँ हैं।

प्रश्न-23.
सोनपुर के छोटे किसान, मध्य किसान और भूमिहीन कृषि मजदूर के लिए ऋण की शर्तों की तुलना कीजिए।
उत्तर-
1. छोटा किसान-सोनपुर के एक छोटे किसान श्यामल के पास 1.5 एकड़ जमीन है, जिसे जोतने के लिए उसे हर मोसम में ऋण की जरूरत होती है। पहले वह गांव के एक महाजन से ऋण लेता था जिस पर उसे पाँ प्रतिशत मासिक ब्याज देना पड़ता । बाद में वह एक कृषि व्यापारी से तीन प्रतिशत ब्याज पर ऋण लेने लगा। जुताई के मौसम की शुरुआत होने पर व्यापारी उसे कृषि संबंधी उपकरण और माल ऋण पर मुहैया कराता हैं, फसल तैयार होने पर ये उपकरण उसे व्यापारी को वापस करने पड़ते हैं।
ऋण पर ब्याज के अलावा व्यापारी किसानों से यह वादा लेता हैं कि वे अपनी फसल उसे ही बेचेंगे। इससे उसकी ऋण की अदायगी तेजी से हो जाती है। फिर वह सस्ते दाम पर फसल खरीदकर बाद में उसे बढ़े दामों पर बेचता है।

2. मध्यम किसान-अरुण एक मध्यम वर्गीय किसान है; उसके पास 7 एकड़ जमीन हैं वह कृषि कार्य के लिए बैंक से 8.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर !ण लेता है। इस ऋण को वह अगले तीन सालों में कभी भी लौटा सकता है। पिछला ऋण अदायगी के बाद बचे फसलों के खिलाफ वह और भी ऋण ले सकता है। बैंक उन किसानों को ऐसी सुविधा देने को तैयार रहता है जो पहले भी खेती के लिए उससे ऋण ले चुके

3. भूमिहीन कृषि मजदूर-रमा एक कृषि मजदूर हैं साल के कई महीनों में उसके पास कोई काम नहीं होता और रोजमर्रा के खर्चों के लिए उसे ऋण लेना पड़ता है बीमारी की स्थिति में या पारिवारिक समारोहों पर खर्च करने के लिए भी उसे ऋण लेना पड़ता है।
वह ऋण के लिए सोनपुर के एक मध्यम वरीय भूपति पर निर्भर है जो उसका मालिक भी है। भूपति उसे 5 प्रतिशत मासिक ब्याज दर पर ऋण देता है। इस कर्ज को वापस करने के लिए रमा को उसके घर पर काम करना पड़ता है। वह पुराना ऋण वापस नहीं कर पाती है। परंतु अगली खर्चों के लिए उसे नया ऋण लेना पड़ता है। उसका मालिक उसके साथ अच्छा व्यवहार नही करता लेकिन वह उसके यहाँ काम करना जारी रखती है क्योंकि उसे उससे नये ऋण मिलने की उम्मीद रहती है।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न-24.
सहकारी समितियाँ किस प्रकार अपने सदस्यों को ऋण उपलब्ध कराती हैं?
उत्तर-
(क) ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते ऋण का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत सहकारी समितियां हैं। सहकारी समिति के सदस्य कुछ विशेष क्षेत्रों में सहयोग के लिए अपने संसाधनों के जोड़ लेते
(ख) सहकारी समितियां कई प्रकार की हो सकती हैं, जैसे, किसानों, बुनकरों, औद्योगिक मजदूरों आदि की सहकारी समितियां।
(ग) ये अपने सदस्यों से जमा कबूल करती हैं इस जमा पूंजी के आधार पर बैंकों से इन्हें बड़ा ऋण भी मिलता है। ___ (घ) सहकारी समितियाँ इस रकम का इस्तेमाल सदस्यों को ऋण देने के लिए करती हैं।
(ङ) पुराना ऋण लौटाने के बाद नया ऋण लिया जा सकता है।
(च) सहकारी समितियाँ अपने सदस्यों को कृषि उपकरण खरीदने खेती तथा कृषि-व्यापार करने, मछली पकड़ने, घर बनाने आदि के लिए ऋण देती हैं।

प्रश्न-25.
ऋण की औपचारिक स्रोतों के विस्तार की जरूरत क्यों हैं? इससे क्या लाभ प्राप्त हो सकता हैं?
उत्तर-
(क) औपचारिक स्तर पर ऋण देनेवालों की तुलना में अनौपचारिक वर्ग के ऋणदाता ज्यादा ब्याज लेते हैं। अतः अनौपचारिक ऋण कर्जदाता को अधिक महंगा पड़ता है।
(ख) ऋण पर ऊँचीब्याज दरों के कारण कर्जदारों की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण अदायगी में खर्च हो जाता हैं इस तरह, उनके पास निजी खर्चे के लिए कम आय बच जाती
(ग) कुछ मामलों ऋण की ऊँ ब्याज दरों के कारण कर्ज वापसी की रकम कर्जदार की आय से भी अधिक हो जाती हैं जिस कारण वह ऋण-फंदे में फंस सकता हैं ।
(घ) कई बार ऊँची ब्याज दरों के डर से लोग नया काम शुरू ही नहीं कर पाते हैं।
उपरोक्त कारणों से ऋण के औपचारिक स्रोतों यथा, बैंक और सहकारी समितियों को अधिक से अधिक कर्ज उपलब्ध कराना चाहिए।

मुख्य लाभ-
(क) सस्ते ऋण से लोगों की आय बढ़ सकती है। (ख) गाँवों में लोग सफल उगाने के लिय या छोटा-मोटा कारोबार करने के लिए ऋण ले सकते हैं। शहरोंम में लोग नया उद्योग लगा सकते हैं या व्यापार कर सकते हैं। सस्ता ऋण देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।,

प्रश्न-26.
शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में मिलने वाली ओपचारिक व अनौपचारिक ऋणों की तुलना करें।
उत्तर-
(क) शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों की कर्जा की 85% जरूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पुरी होती हैं। इसकी तुलना में शहरी-इलाकों में अमीर परिवार 90% औपचारिक स्रोतों से ऋण लेते हैं सिफ 10% लोग अनौपचारिक स्रोतों से अपनी ऋण की जरूरतें पूरी करते हैं।
(ख) ग्रामीण इलाकों में भी अमीर लोग औपचारिक स्रोतों से अधिक ऋण लेते हैं जबकि गरीब परिवार अपनी ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं।
(ग) औपचारिक वर्ग ग्रामीण परिवारों के ऋण की जरूरतों का मात्र 50% ही पूरा कर पाता हैं
(घ) अनौपचारिक वर्ग के ऋणदाताओं का ब्याज दर • काफी ऊँची होती हैं जिससे कर्जदारों की समस्या साधारणतया बढ़ती ही हैं।
(ङ) वतमान समय में अमीर परिवारों की पहुँच औपचारिक स्रोतों तक हैं, परंतु गरीब परविरों को अधिकतर अनौपचारिक ऋणों पर निर्भर रहना पड़ता हैं।

प्रश्न-27.
भारत में गरीब परिवार अब भी ऋण के लिए अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर क्यों हैं।
उत्तर-
भारत में अधिकांश गरीब परिवार ऋण संबंधी जरूरतों के लिए अब भी अनौपचारिक स्त्रोतों पर निर्भर हैं, इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
(क) भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद नहीं हैं।
(ख) बैंकों से कर्ज लेना महाजनों से कर्ज लेने की अपेक्षा ज्यादा मुश्किल हैं
(ग) बैंक से कर्ज लेने के लिए संपत्ति और तमाम किस्म के कागजातों की जरूरत होती हैं।
(घ) ऋणाधार नहीं होने पर कज्र नहीं मिल पाता है।
(ङ) अनौपचारिक ऋणदाता इन कर्जदारों को निजी स्तर पर जानते हैं, इस कारण वे बना ऋणाधार के ही ऋण देने को तैयार हो जाते हैं।
(च) कर्जदार जरूरत पड़ने पर पुराना बकाया चुकाये बिना, साहूकार से नया ऋण ले सकते हैं।

प्रश्न-28.
गरीबों में आत्मनिर्भर गुट पर एक टिप्पणी लिखिये।
उत्तर-
(क) पिछले कुछ सालों में, लोंगों ने गरीबों को उधार देने के लिए कई नये तरीकों को ईजाद किया हैं, इनमें एक विचार ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों, खासकर महिलाओं को छोटे-छोटे आत्मनिर्भर गुटों में जोड़कर उनकी बचत पूंजी को एकचित्र करना है।
(ख) आमतौर पर एक गुट में 15-20 सदस्य होते हैं जो नियमित रूप से मिलते है। और बचत करते हैं परिवारों की बचत क्षमता के आधार पर प्रतिव्यक्ति 5 रुपये से 100 रुपये तक बचत की जा सकती है।
(ग) आत्मनिर्भर गुट के सदस्य अपनी जरूरतों के हिसाब से गुट से ही कर्ज ले सकते हैं जिस पर उन्हें ब्याज देना पड़ता है परंतु यह ब्याज साहूकारों की अपेक्षा बहुत कम होता
(घ) एक या दो वर्षों बाद यह गुट बैंक से ऋण ले सकता है। इसका उद्देश्य सदस्यों को अपनी गिरवी जमीन छुड़वाने के लिए तथा कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण उपलब्ध कराना है।
(ङ) बचत और ऋण गतिविधियों से जुड़े ज्यादातर महत्त्वपूर्ण निणय गुट के सदस्य खुद करते है।। गुट ही फैसला करता है कि किमना कर्ज दिया जाएगा, उसका लक्ष्य, उसकी रकम, ब्याज दर, वापस लौटाने की अवधि आदि।
(च) इस ऋण को वापस करने की जिम्मेदारी भी गुट की होती हैं यदि गुट का कोई सदस्य ऋण वापस नहीं करता तो गुट के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से उठाते हैं।
(छ) आत्मनिर्भर गुट कर्जदारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं।
(ज) उन्हें समायनुसार विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के लिए एक यथोचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है।
(झ) यह गुट ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों को संघबद्ध करने में मदद करते हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प का चयन करें।

प्रश्न 1.
जब क्रेता और विक्रेता दोनों एक-दूसरे से चीजें खरीदने और बेचने पर सहमति रखते हों, तो इसे कहते हैं-
(क) आवश्यकताओं का दोहरा संयोग
(ख) माँग तथा उत्पादन का दोहरा संयोग
(ग) उत्पादन का तिहरा संयोग
(घ) इनमें कोई नहीं।
उत्तर-
(क) आवश्यकताओं का दोहरा संयोग

प्रश्न 2.
प्रारंभिक काल मे भारत में मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होते थे-
(क) सिक्के
(ख) करेंसी
(ग) अनाज और पुश
(घ) रुपये
उत्तर-
(ग) अनाज और पुश

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 3.
मुद्रा के आधुनिक रूपों में शामिल हैं
(क) सोना और चाँदी के सिक्के
(ख) करैसी कागज के नोट और सिक्के
(ग) अनाज तथा पशु
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख) करैसी कागज के नोट और सिक्के

प्रश्न 4.
केंद्र सरकार की ओर से नोट जारी करता हैं–
(क) भारतीय रटेट बैंक
(ख) सहकारी बैंक
(ग) कारपोरेशन बैंक
(घ) भारतीय रिजर्व बैंक
उत्तर-
(घ) भारतीय रिजर्व बैंक

प्रश्न 5.
भारत की मुद्रा हैं-
(क) रुपया
(ख) डॉलर
(ग) पौंड
(घ) दिनार
उत्तर-
(क) रुपया

प्रश्न 6.
चूंकि बैंक खातों में जमा धन को मांग के जरिये निकाला जा सकता है, इसलएि इसे कहते हैं-
(क) धन जमा
(ख) माँग जमा
(ग) चेक जमा
(घ) इनमें कोई नहीं।
उत्तर-
(ख) माँग जमा

प्रश्न 7.
आजकल भारत में बैंक जमा का कितना प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में रखते हैं?
(क) 5
(ख) 10
(ग) 15
(घ) 20
उत्तर-
(ग) 15

प्रश्न 8.
ऐसी संपत्ति जिसका मालिक कर्जदार है औश्र इसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गांरटी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान नहीं हो जाता है, कहते हैं-
(क) समर्थक ऋणाधार
(ख) ऋण
(ग) पूंजी
(घ) समर्थक धन
उत्तर-
(क) समर्थक ऋणाधार

प्रश्न 9.
ब्याज दर, संपत्ति और कागजात की मांग और भुगतान के तरीके, इन सबकों मिलाकर क्या कहा जाता हैं?
(क) समर्थक ऋणाधार
(ख) ऋण की शर्ते
(ग) उत्पादन के साधन
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख) ऋण की शर्ते

प्रश्न 10.
औपचारिक स्रोतों के ऋणदाता हैं–
(क) बैंक
(ख) सहकारी समितियाँ
(ग) a और b दोंनो
(घ) साहूकार
उत्तर-
(ग) a और b दोंनो

प्रश्न 11.
अनौपचारिक ऋण स्रोतों के उदाहरण हैं–
(क) बैंक
(ख) सहकारी समितियाँ
(ग) साहूकार
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ग) साहूकार

प्रश्न 12.
सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का स्रोत
(क) बैंक
(ख) गुर्ट
(ग) व्यापारी
(घ) भूपति मालिक
उत्तर-
(घ) भूपति मालिक

प्रश्न 13.
भारत में कों के औपचारिक स्रोतों पर नजर रखता हैं.
(क) भारतीय स्टेट बैंक
(ख) सहकारी समितियाँ
(ग) भारतीय रिजर्व बैंक
(घ) वित्त मंत्रालय
उत्तर-
(ग) भारतीय रिजर्व बैंक

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 14.
शहरी इलाकों के गरीब परिवारों के कर्ज की कितनी प्रतिशत जरूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं-
(क) 70
(ख) 75
(ग) 80
(घ) 85
उत्तर-
(घ) 85

प्रश्न 15.
शहरी इलाकों में अमीर परिवारों के कर्ज का कितना प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से पूरा होता
(क) 5
(ख) 10
(ग) 15
(घ) 20
उत्तर-
(ख) 10

प्रश्न 16.
शहरी इलाकों में अमीर परिवारो के कर्ज का कितना प्रतिश औपचारिक स्रोतों से पूरा होता हैं?
(क) 70
(ख) 85
(ग) 90
(घ) 95
उत्तर-
(ग) 90

प्रश्न 17.
ग्रामीण परिवारों की ऋण की जरूरतों का कितना प्रतिशत औपचारिक खण्ड से पूरा होता हैं?
(क) 30
(ख) 40
(ग) 50
(घ) 80
उत्तर-
(ग) 50

प्रश्न 18.
साधारणतया आत्मनिर्भर गुट में कितने सदस्य होते है-
(क) 15-20
(ख) 20-25
(ग) 25-30
(घ) 30-50
उत्तर-
(क) 15-20

प्रश्न 19.
बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के आज कितने कर्जदार
(क) 1952
(ख) 1965
(ग) 1970
(घ) 1972
उत्तर-
(ग) 1970

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 3 मुद्रा और साख

प्रश्न 20.
बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के आज कितने कर्जदार
(क) 50 लाख
(ख) 60 लाख
(ग) 70 लाख ।
(घ) 75 लाख
उत्तर-
(ख) 60 लाख

प्रश्न 21.
बांग्लादेश ग्रामीण बैंक से ऋण लेने वाले ज्यादातर
(क) विद्यार्थी
(ख) व्यापारी
(ग) किसान
(घ) महिलायें
उत्तर-
(घ) महिलायें

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

उपभोक्ता अधिकार प्रश्न उत्तर HBSE 10th Class प्रश्न-1.
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर-
नई दिल्ली में।

HBSE 10th Class उपभोक्ता अधिकार Important Questions Economics प्रश्न-2.
सबसे अधिक प्रभावशाली उपभोक्ता न्यायालय का क्या नाम हैं?
उत्तरः
जिला मंचा

Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार Important Questions HBSE 10th Class प्रश्न-3
उपभोक्ता सुरक्षा कानून कब अस्तित्व में आया। इसमें कब-कब सुधार किये गये? ।
उत्तर-
उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 में अस्तित्व में आया। इसमें 1991 और 1993 में सुधार किए गये।

प्रश्न-4.
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण करने वाली संस्था कौन-सी है। इसका मुख्यालय कहाँ हैं?
उत्तर-
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण करने वाली संस्था I.S.0 हैं। इसका मुख्यालय जेनेवा में हैं

प्रश्न 5.
विभिन्न वसतुओं और सेवाओं की माँग पर किसका असर प्रमुख रूप से पड़ता है?
उत्तर
विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की माँग पर सबसे अधिक असर विज्ञापनों का पड़ता है।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

प्रश्न 6.
सीमित आपूर्ति से आपका क्या आशय हैं?
उत्तर-
सीमित आपूर्ति का आशय है कि मांग की तुलना में किसी वस्तु का उत्पादन कम होना।

प्रश्न 7.
भारत में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आंदोलनों का आरंभ कब हुआ?
उत्तर-
भारत में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आंदोलनों का आरंभ 1980 के उत्तरार्ध और 1990 के पूर्वार्ध में हुआ।

प्रश्न 8.
उपभोक्ता अधिकारों के विषय में सबसे पहली घोषणा कब और कहाँ की गई?
उत्तर-
उपभोक्ता अधिकारों के विषय मे सबसे पहली घोषणा 1962 में संयुक्त राज्य अमेरिका में की गई।

प्रश्न 9.
बी.एस.आई.का मुख्यालय कहाँ हैं?
उत्तर-
नई दिल्ली में।

प्रश्न 10.
किस संस्था के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सामग्रियों के लिए मानक निर्धारित किये जाते हैं?
उत्तर-
कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन -(Codex Alimentarius Commission) द्वारा।

प्रश्न- 11.
हम उत्पादक तथा उपभोक्ता दोनों रूपों में भागीदारी कैसे करते हैं?
उत्तर-
(क) बाजार में हमारी भागीदारी उत्पादक एवं उपभोक्ता दोंनों रूपों में होती है।
(ख) सेवाओं तथा वस्तुओं के उत्पादक के रूप में हम कृषि, उद्योग या सेवा जैसे विभागों में कार्यरत हो सकते हैं। जब हम अपनी आवश्यकतानुसार बाजार से वस्तुओं या सेवाओं को खरीदते हैं तो हमारी भागीदारी उपभोक्ता के रूप में होती हैं।

प्रश्न- 12.
बाजार में लोगों के शोषण के लिये क्या तरीके अपनाये जाते हैं? उदारहण दीजिये।
उत्तर-
बाजार में लोगों का शोषण कई तरीकों से हो सकता
(क) महाजन कर्जदार पर बंधन लगाने के लिए कई दाँव पेच अपनाते हैं। सामयिक ऋण के कारण वे उत्पादक को अपना उत्पाद निम्न दरों पर उन्हें बेचने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
(ख) वे लोगों को ऋण चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचने के लिए विवश कर सकते हैं।
(ग) असंगठित क्षेत्र में काम करनेवाले बहुत से कार्मिकों को कम वेतन पर कार्य करना पड़ता है।
(घ) साथ ही, उन्हें उन हालातों को झेलना पड़ता है, जो न्यायोजित नहीं होते और उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक – भी होते हैं।

प्रश्न-13.
उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत के क्या कारण थे?
उत्तर-
(क) उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत उपभोक्ताओं के असंतोष के कारण हुई, क्योंकि विक्रेता कई अनुचित व्यवसायों में शामिल होते थे।
(ख) बाजार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
(ग) जब कोई उपभोक्ता लम्बे समय तक एक विशेष ब्राण्ड उत्पाद या दुकान से संतुष्ट नहीं होता था तो वह या तो उस उत्पाद को खरीदना बंद कर देता था या उस दुकान से खरीददारी करना बंद कर देता था। यह माना जाता था कि किसी वस्तु अथवा सेवा को खरीदेते समय सावधानी बरतने की जिम्मेदारी उपभोक्ता की है।
(घ) इन्हीं कारणों से उपभोक्ता संस्थाओं का गठन किया गया और उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत हुई। परिणामस्वरूप वस्तुओं व सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विक्रेताओं पर भी डाला गया।

प्रश्न-14.
भारत में 1970 के दशक में उपभोक्ता आंदोलन के विकास में उपभोक्ता संस्थाओं ने क्या योगदान दिया?
उत्तर-
(क) 1960 के दशक में भारत में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ।
(ख) 1970 के दशक तक उपभोकता संस्थाओं ने वृहत् स्तर पर उपभोक्ता अधिकार से संबंधित आलेखों के लेखन तथा प्रदर्शनी का आयोजन शुरू किया।
(ग) उन्होंने सड़क यात्री परिवहन में अत्यधिक भीड़-भाड़ और राशन दुकानों में होने वाले अनुचित कार्यों पर नजर रखने के लिए उपभोक्ता दलों का निर्माण किया।
(घ) इन सभी प्रयासों के कारण यह आंदोलन वृहत् स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ और अनुचित व्यवसाय शैली को सुधारने के लिए व्यावसायिक कंपनियों और सरकार दोनों पर दबाव डालने में सफल हुआ।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

प्रश्न-15.
उपभोक्ता इंटरनेशनल पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर-
(क) संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1985 ई. में उपभोक्ता सुरक्षा हेतु कई महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देशों को अपनाया।
(ख) यह विभिन्न देशों के उपभोक्ता वकालत दलों के लिए एक हथियार था जिसके माध्यम से वे उपभोक्ता सुरक्षा के लिये उपयुक्त तरीके अपनाने के लिए अपनी सरकारों को मजबूर कर सकते थे।
(ग) यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आंदोलन का आधार बना।
(घ) आज उपभोक्ता इंटरनेशनल 100 से भी अधिक देशों की 240 संस्थाओं का एक संरक्षक संस्था बन गया है।

प्रश्न-16.
सुरक्षा कानूनों के बावजूद बाजार से बुरे उत्पाद क्यों प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
(क) सुरक्षा नियमों व अधिनियमों के बावजूद हमें बाजार से बुरे उत्पाद प्राप्त होते हैं क्योंकि इन नियमों व कानूनों के पालन पर उचित निगाह नहीं रखी जाती हैं और;
(ख) उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं है। जिस कारण उपभोक्ता संगठित होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई नहीं लड़ सकते।।

प्रश्न-17.
वस्तुओ के पैकेट पर किन जानकारियों का होना जरूरी है?
उत्तर-
(क) वस्तुओं के पैकेट पर वस्तु के अवयवों, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख, खराब होने की अंतिम तिथि तथा वस्तु निर्माता का पता होना जरूरी है।
(ख) उदाहरण के तौर पर जब हम कोई दवा खरीदते हैं तो उस दवा के ‘उचित प्रयोग के बारे में निर्देश’ तथा उस दवा के प्रयोग के अन्य प्रभावों तथा खतरों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ठीक इसी तरह वस्त्र खरीदने पर ‘धुलाई संबंधी निर्देश’ प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न-18.
राइट टू इनफारमेशन एक्ट के महत्त्व को उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) भारत सरकार ने अक्टूबर 2005 ई. में ‘राइट टू इनफारमेशन’ या सूचना पाने का अधिकार कानून पारित किया।
(ख) यह कानून नागरिकों को सरकारी विभागों के क्रियाकलापों की सीभी सूचनाएँ पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है।
(ग) अमृता नाम की एक इंजीनियरिंग स्नातक ने नौकरी के लिए साक्षात्कार दिया एवं अपने सभी प्रमाण पत्र भी जमा किये परंतु उसे परिणाम प्राप्त नहीं हुआ। कर्मचारियों ने भी उसके प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार कर दिया। तब उसने आर. टी. आई. एक्ट का प्रयोग करते हुए एक प्रार्थना पत्र दिया कि एक उचित समय सीमा के भीतर परिणाम की जानकारी उसका अधिकार था, जिससे वह भविष्य की योजना बना सके।
(घ) उसके प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि यथाशीघ्र उसे नियुक्ति पत्र प्राप्त हो गया।

प्रश्न-19.
“जब हम वस्तुएँ खरीदते हैं तो पाते हैं कि कभी-कभी पैकेट पर छपे मूल्य से अधिक या कम मूल्य लिया जाता है।” इसके कारणों का पता लगाइए।
उत्तर-
वस्तुएँ खरीदते वक्त कभी-कभी पैकेट पर छपे मूल्य से अधिक या कम मूल्य लिया जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते है
(क) उपभोक्ता अधिकारों के ज्ञान का अभाव (ख) मुनाफाखोरी (ग) अचानक मूल्य वृद्धि (घ) करो में वृद्धि (ङ) विक्रेता द्वारा शोषण का तरीका।

प्रश्न-20.
चुनने के अधिकार का उल्लंघन कैसे होता है? उदाहरण दीजिये।
उत्तर-
(क) कई बार हमें उन वस्तुओं को खरदीने के लिए भी दबाव डाला जाता है, जिनको खरीदने की हमारी बिल्कुल इच्छा नहीं होती। परंतु चुनाव के लिए हमारे पास कोई विकल्प नहीं होता है।
(ख) उदाहरण के लिए, कभी-कभी जब हम नया गैस कनेक्शन लेते हैं तो डीलर गैस के साथ-साथ चूल्हा भी लेने के लिए हम पर दबाव डालता है। वेसे ही यदि हम एक दंतमंजन खरीदना चाहते हैं और दुकानदार कहता है कि वह हमें दंजमंजन तभी बेच सकता है जब हम दंतमजन के साथ-साथ ब्रश भी खरीदेंगे।

प्रश्न-21.
एक आसान और प्रभावी जन-प्रणाली बनाने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर-
(क) उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाजी और शोषण के विरुद्ध क्षतिपूर्ति माँगने का अधिकार है।
(ख) यदि किसी उपभोक्ता को कोई क्षति पहुंचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधि कार होता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए एक आसान व प्रभावी जन-प्रणाली बनाने की आवश्यकता है।

प्रश्न-22.
उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता सुरक्षा परिषद् किसे कहते हैं? इनके कार्यों का वर्णन कीजिये।
उत्तर-
भारत में उपभोक्ता आंदोलन ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न संगठनों के निर्माण को प्रेरित • किया है; इन्हें सामान्यतः उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता सुरक्षा परिषद् कहा जाता है।
(ख) ये उपभोक्ताओं को उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देती हैं।
(ग) कई अवसरों पर ये उपभोक्ता अदालत में उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व भी करती हैं।
(घ) ये स्वयंसेवी संगठन है जिन्हें जनजागरण पैदा करने के लिए सरकार से वित्तीय सहायता भी प्राप्त होता है।

प्रश्न-23.
विभिन्न वस्तुएँ खरीदते समय आई.एस.आई. लोगों एगमार्क या हॉलमार्क के लोगों क्यों देखना चाहिए?
उत्तर-
(क) विभिन्न वस्तुएँ खरीदते समय हमें आवरण पर लिखे अक्षरों-आई.एस.आई. एगमार्क या हॉलमार्क के लोगों अवश्य देखना चाहिए।
(ख) ये लोगो या प्रमाण चिन्ह हमें अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मद्द करते हैं।
(ग) उपभोक्ता संगठनों द्वारा नियंत्रित एवं जारी किए जाने वाले इन प्रमाण चिन्हों के प्रयोग की अनुमति उत्पादकों को तब दी जाती है, जब वे निश्चित गुणवत्ता मानकों का पालन करते हैं।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

प्रश्न-24.
क्या सभी उत्पादों के लिए मानदण्डों का पालन करना आवश्यक है?
उत्तर-
(क) यद्यपि उपभोक्ता संगठन बहुत से उत्पादों के लिए गुणवत्ता का मानदण्ड विकसित करते हैं, किंतु सभी ‘उत्पादों के लिए इन मानदण्डों का पालन करना जरूरी नहीं होता है।
(ख) तथापि कुछ उत्पादों जो उपभोक्ता की सुरक्षा ओर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं तथा जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। इनके उत्पादन के लिए उत्पादकों को इन संगठनों से प्रमाण-पत्र लेना आवश्यक है। जैसे-एल.पी.जी. सिलिंडर्स, खाद्य रंग एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री, सीमेंट, बोतल बंद पेयजल आदि।

प्रश्न-25.
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
उत्तर-
(क) प्रतिवर्ष 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।
(ख) क्योंकि 1986 ई. में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम पारित किया था।

प्रश्न-26.
उपभोक्ता आंदोलन कैसे सफल हो सकता है?
उत्तर-
(क) उपभोक्ता आंदोलन की सफलता के लिए उपभोक्ताओं को अपनी भूमिका तथा महत्त्व जानने की जरूरत
(ख) उपभोक्ताओं की सक्रिया भागीदारी से उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वयंसेवी प्रयास _और सबकी साझेदारी से संघर्ष करना जरूरी है।

प्रश्न-27.
उपभोक्ता अदालतों में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर-
उपभोक्ता अदालतों में शिकायत दर्ज कराने हेतु किसी विधि विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार की सहायता लेना आवश्यक नहीं है। इन अदालतों में उपभोक्ता स्वयं अपने मामलों की पैरवी कर सकता है। यह प्रक्रिया इतनी सहज व सरल है कि उपभोक्ता सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखकर भी दे सकता है। शिकायत के साथ वस्तु की रसीद अवश्य संलग्न करना चाहिए। यही कारण है कि यह कहा जाता है कि कोई भी वस्तु क्यों न खरीदें, रसीद अवश्य प्राप्त करें।

प्रश्न-28.
‘उपभोक्ता सुरक्षा कानून’ 1986 क्यों बनाया गया?
उत्तर-
‘उपभोक्ता सुरक्षा कानून’ 1986 बनाये जाने का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर, उनके हितों का सरंक्षण प्रदान करना है। इसके साथ ही उपभोक्ता हित से जुड़े मामलों से सम्बन्धित झगड़ों के निपटारे हेतु समितियों का गठन करना भी इस कानून का उद्देश्य है।

प्रश्न-29.
उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 में दिये गए उपभोक्ताओं के अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 दवारा उपभोक्ता को निम्नलिखित अधिकार दिये गये हैं

  • सुरक्षा का अधिकार-उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे उन वस्तुओं की बिक्री से अपना बचाव कर सकें, जो उनके जीवन और सम्पत्ति के लिए खतरना हैं।
  • सूचना का अधिकार-इसके अंतर्गत गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता स्तर और मूल्य आदि के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त करना शामिल है।
  • चुनाव का अधिकार-उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे अपनी आवश्यकताओं की वस्तुओं को चुन सकें, जिससे कि वे संतोषजनक गुणवत्ता की वस्तु सही मूल्य में – प्राप्त कर सकें।
  • सुनवाई का अधिकार-उपभोक्ताओं का यह विशेष अधिकार है कि उपभोक्ताओं से जुड़ी संस्थाओं तथा संगठनों पर अपनी समस्याओं की सुनवाई की माँग कर सकें।
  • शिकायतें निपटारे का अधिकार-उपभोक्ताओं को यह अधिकार मिला हुआ है कि शोषण व अनुचित व्यापारिक क्रियाओं के विरुद्ध निदान और शिकायतों का सही प्रकार से निपटारा हो।
  • उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार-उपभोक्ता को यह विशेष अधिकार है कि वह अपने हित से जुड़े मामलों तथा वस्तु विशेष से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सके।

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HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रश्न उत्तर HBSE 10th Class प्रश्न 1.
विश्व व्यापार संगठन कागठन कब हुआ था?
उत्तर-
सन् 1995 ई. में।
HBSE 10th Class वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Important Questions Economics प्रश्न 2.
विश्व संगठन की स्थापना किसके द्वारा की गई थी?
उत्तर-
संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों द्वारा।
(अ) मोटर गाड़ियों
(ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल सामान, व्यापार नियमत के लिए किया जाता है।
(स) कॉल सेंटर
(द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी
(य) व्यापार अवरोधक
Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था Important Questions HBSE 10th Class प्रश्न 3.
विश्व व्यापार संगठन का मुख्य कार्यालय कहाँ
उत्तर-
जेनेवा में।
प्रश्न 4.
1991 ई. के आद भारत में अपनाई गई नई आर्थिक नीति का क्या उद्देश्य था?
उत्तर-
सन् 1991 ई. के बाद अपनाई गई नई आर्थिक नीति का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को तेजी से आर्थिक विकास के मार्ग पर लाना था।
प्रश्न 5.
उदारीकरण प्रक्रिया के मुख्य कितने भाग होते
उत्तर-
उदारीकरण प्रक्रिया के मुख्यतः दो भाग होते हैं
(क) निजी क्षेत्र की उन औद्योगिक क्रियाओं को चलाने की अनुमति दी जाती है। जो पहले सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र में चलाई जाती थीं।
(ख) उन नियमों और प्रतिबंधों में छूअ देना जिनसे पहले निजी क्षेत्र के विकास में रुकावट आती थी।
प्रश्न 6.
भारत सरकार द्वारा वैश्वीकरण की नीति अपनाये जाने का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर-
भारत सरकार ने वैश्वीकरण की नीति को प्रमुखतः इसलिए अपनाया ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा जा सके। जिससे तकनीकी ज्ञान, अनुभव, पूँजी आदि का अबाध रूप से आदान-प्रदान हो सके।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

प्रश्न 7.
उदारीकरण तथा वैश्वीकरण का भारत के संचार क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर-
उदारीकरण एवं वैश्वीकरण की नीतियों के कारण भारत में कम कीमत पर उत्तम संचार साधन उपलब्ध होने लगा।
प्रश्न 8.
वैश्वीकरण के लिए जिम्मेदार तीन कारक बताइये।
उत्तर-
(क) प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति (ख) व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण (ग) डब्ल्यू. टी. ओ. जैसे अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का दबाव।
प्रश्न 9.
बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं?
उत्तर-
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथावा स्वामित्व रखती है।
प्रश्न 10.
निवेश से आपका क्या तात्यर्प हैं?
उत्तर-
(क) परिसंपत्तियों जैसे, भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की खरीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते हैं।
(ख) कोई भी निवेश इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ अर्जित करेंगी।
प्रश्न 11.
संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनियों को क्या लाभ होता हैं?
उत्तर-
संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनियों को दुगना लाभ होता है। एहला, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ तीव्र उत्पादन के लिए अतिरिक्त निवेश जैसे, नयी मशीन के लिए धन प्रदान कर सकती हैं।
(ख) दूसरा, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उतपादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी अपने साथ लाती हैं।
प्रश्न 12.
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किस प्रकार दूररथ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं।
उत्तर-
स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी द्वारा, आपूर्ति के लिए स्थानीय कंपनियों का इस्तेमाल करके और स्थानीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करके अथवा उन्हें खरीदकर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं।
प्रश्न 13.
विदेशी व्यापार का क्या लाभ होता है?
उत्तर-
(क) विदेश व्यापार घरेलू बाजारों से बाहर के बाजारों में पहुँचने के लिए उतपादकों को एक अवसर प्रदान करता है।
(ख) दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं के आयात से खरीददारों के समक्ष वस्तुओं के विकल्पों का विस्तार होता है।
प्रश्न 14.
अतीन में देशों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम क्या था?
उत्तर-
प्रायः लोग बेहतर आय, बेहतर रोजगार एवं शिक्षा की तलाश में एक देश से दूसरे देश में आवागम करते हैं।
प्रश्न 15.
विगत वर्षों में विभिन्न देशों के बीच अधि काधिक व्यापार व निवेश में योगदान करने वाला मुख्य कारक क्या है?
उत्तर-
हाल के वर्षों में अनेक देशों के बीच अधिकाधिक व्यापार और निवेश में योगदान करने वाला मुख्य कारक हैं-अनेक प्रकार के व्यापार और निवेश अवरोधकों या प्रतिबंध में में कटौती होना।
प्रश्न 16.
कोटा से आपका कया अभिप्राय हैं?
उत्तर-
सरकार व्यार अवरोधक के रूप में, आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित कर सकती हैं, इसे कोटा कहते हैं।
प्रश्न 17.
कुछ प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का विदेश व्यापार और विदेशी निवेश के बारे में क्या विचार हैं?
उत्तर-
कुछ प्रभावशली अंतराष्ट्रीय संगठनों का मानना है कि विदेश व्यापार तथा विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं। अत: कोई अवरोधक नहीं होना चाहिए। विभिन्न देशों के बीच मुक्त व्यापार होना चाहिए। तथा विश्व के सभी देशों को अपनी नीतियाँ उदार बनानी चाहिए।

HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 4 वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

प्रश्न 18.
गत वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में किन क्षेत्रों में निवेश किया हैं?
उत्तर-
भारत में विगत पंद्रह वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उपभोक्ता वस्तुओं एवं सेवाओं जैसे, सेलफोन, मोअर गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ठंडे पेय पदार्थो, जंक खाद्या पदार्थो जैसी वस्तुओं एवं बैंकिंग जैसी संवाओं में निवेश किया है।
प्रश्न 19.
विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
विश्व व्यापार संगठन के कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्नवत्-
  • विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य है कि सदस्य देश आयात और निर्यात दोनों पर से प्रतिबंध हटा दें।
  • विश्व व्यापार संगठन आशा करता है। कि सभी सदस्य देश द्विपक्षीय व्यापारिक समझौतों के स्थान पर बहुपक्षीय व्यापारिक समझौते करें।
  • सभी सदस्य देशों के मध्य व्यापारिक समझौतों का विकास हो।
  • विश्व के सभी देशों के मध्य व्यापार का संचालन इस प्रकार हो कि समानता तथा खुलापन बरकार रहें।
  • सदस्य देशों में व्यापारिक गतिविधियों में किसी प्रकार का भेदभाव न हों।
प्रश्न 20.
उन प्रमुख प्रभावों का उल्लेख करें जो उदारीकरण नीति के तहत निजी क्षेत्र पर पड़े हैं
उत्तर-
  • अधिक-से-अधिक उद्योगों का निजी क्षेत्र के लिए खोला जाना।
  • निजी क्षेत्र को इस्पात, बिजली, वायु परिवहन, भारी मशीनरी निर्माण तथा रक्षा उपकरणों के निर्माण की अनुमति।
  • लाइसेंस के प्रतिबंधों से मुक्ति।
  • कच्चे माल के आयात की अनुमति।
  • मूल्य निर्धारण तथा वितरण पर नियंत्रण से मुक्ति।
  • बड़ी कम्पनियों के प्रवेश पर प्रतिबन्ध से मुक्ति।
प्रश्न 21.
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किन स्थानों पर उतपादन कार्य संचलित करती हैं?
उत्तर-
(क) सामान्यत: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उसी स्थान पर उत्पादन कार्य संचालित करनी हैं जहाँ बाजार की निकटता हो, जहाँ सस्ते दर पर श्रमिक उपलब्ध हों और जहाँ उत्पादन के अन्य कारकों की उपलबधता सुनिश्चित हों। .
(ख) साी ही, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सरकारी नीतियों पर भी विचार कर सकती हैं, जो उनके हितों की देखभाल करती
(ग) इन परिस्थितियों से सुनिश्चित होकर ही बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उतपादन के लिए कार्यालयों और कारखानों की स्थापना करती हैं।
प्रश्न 22.
सरकारें व्यापार अवरोधक का प्रयोग क्यों करती
उत्तर-
(क) देश में आयात पर कर लगाना व्यापार अवरोधक का उदाहरण है। इसे अवरोधक इसलिए कहा गया है। क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है।
(ख) सरकारें व्यपार अवरोधक का प्रयोग विदेश व्यापार में वृद्धि या कटौती करने तथा देश में आयात होनेवाली वस्तुओं की मात्रा निश्चित करने के लिए कर सकती है।
(ग) उपभोक्ताओं के लिए उचित मूल्ख सुनिश्चित करने __ की जरूरत भी इसका एक कारण हो सकता है।
(घ) सरकारें घरेलू उत्पादकों को संरक्षण प्रदान करने के लिए भी ऐसा करती हैं।
प्रश्न 23.
प्रतिस्पर्धा से भारत के लोगों को कैसे लाभ हुआ हैं?
उत्तर-
(क) वैश्वीकरण एवं राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण उपभोक्ताओं, विशेषकर, धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को काफी लाभ हुआ हैं इन उपभोक्ताओं के पास पहले से अधिक विकल्प मौजूद हैं।
(ख) अब उनको उत्पादों की उत्कृष्टता, गुणवत्ता और कम कीमत का लाभ मिल रहा हैं।
(ग) लोग आज पहले की तुलना में अपेक्षाकृत उच्चतर जीवन स्तर का उपभोग कर रहे हैं।
प्रश्न 24.
वैश्वीकरण को अधिकाधिक न्यायसंगत कैसे बनाया जा सकता हैं?
उत्तर-
(क) न्यायसंगत वैश्वीकरण से सभी के लिए नये अवसरों का सृजन होगा तथा वैश्वीकरण के लाभों में सबकी हिरेदारी सुनिश्चित की जा सकेगी।
(ख) इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सरकार की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। सरकारी नीतियों से देश के सभीलोगों के हितों को संरक्षण मिलना चाहिये। जैसे, श्रम कानूनों का उचित कार्यान्वयन एवं श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा का दायित्व सरकार पर है।
(ग) सरकार छोटे उत्पादकों को मदद देकर उन्हें प्रतिस्पध के लिये सक्षम बना सकती है। .
(घ) आवश्यकता होने पर सरकार व्यापार तथा निवेश अवरोधकों का उपयोग कर सकती हैं तथा न्यायसंगत नियमों के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौते भी कर सकती है।
(ङ) पिछले कुछ वर्षों, में बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है। इससे सिद्ध होता है कि जनता भी न्याय संगत वैश्वीकरण के संघर्ष में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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प्रश्न 25.
उदारीकरण और वेश्वीकरण की नीति अपनाने के फलस्वरूप भारत में आए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
उदारीकरण तथा वैश्वीकरण की नीति अपनाने के कारण भारत में मुख्यतः निम्नलिखित परिवर्तन आये हैं-
  1. संचार के क्षेत्र में कम कीमत पर दूरभाषा के अच्छे उपकरण मिलने लगे।
  2. कम कीमत पर रंगीन टेलीविजन के अच्छे सेट उपलब्ध होने लगे।
  3. अनेक खाद्य पदार्थ उत्पादन करने वाली कम्पनियों द्वारा खाद्य तथा पेय पदार्थ उपलब्ध कराये जाने के कारण खाद्य पदार्थो के क्षेत्र ने बाजार में ऊँचा स्थान बना लिया।
  4. विश्व बाजार में भारतीय माल तथा सेवाओं की भागीदारी काफी बढ़ी है तथा अभी और बढ़ने की प्रचुर सम्भावना है।
  5. विदेशी कम्पनियों द्वारा भारत में किया जाने वाला निवेश बढ़ने लगा है। सन् 1991 में विदेशी निवेश जहाँ मात्र 174 करोड़ रुपये था वहीं यह सन् 2000 में 9, 338करोड़ रुपये हो गया।
  6. उदारीकरण तथा वैश्वीकरण के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भण्डार में प्रचुर वृद्धि हुई है। यह भण्डार सन् 1991 में मात्र 4, 622 करोड़ था सन् 2000 तक यह बढ़कर 1, 52, 924 करोड़ रुपये हो गया।
  7. उदारीकरण तथा वैश्वीकरण के अपनाये जाने से मूल्य वृद्धि की दर में कमी आयी हैं। सन् 1990-93 में यह दर 12% थी जबकि 90 के दशक के ही अन्तिम भाग में यह मात्र 8% रह गई
  8. अर्थव्यवस्था के इस नये रूप के कारण रोजगार के नये अवसरों का सृजन हो रहा है हालांकि जनसंख्या वृद्धि के तेज रफ्तार के चलते रोजगार अवसरों की प्रगति और वृद्धि नाकाफी ही नजर आ रही है।
  9. 1991-2000 के दशक में उदारीकरण तथा वैश्वीकरण की नीति के कारण वर्याप्त औद्योगि विकास हुआ परन्तु अभी इस ओर प्रगति किये जाने की आवश्यकता है।
प्रश्न 26.
वैश्वीकरण क्या हैं?
उत्तर-
वैश्वीकरण का तात्पर्य किसी देश द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था तथा किवश्व अर्थव्यवस्था के मध्य सामंजस्य स्थापित करने से है। इस प्रक्रिया के माध्यम से कोई देश आर्थिक रूप से वैश्विक यानि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पारस्परिक रूप से निर्भर होता है। यह प्रक्रिया कई स्तरों पर सम्पन्न होती-
(क) आज जहाँ भारत वैश्वीकरण को अपना चुका है तो विदेशी उतपादक अपना माल और सेवाएँ भारत में बेच सकते हैं, साथ ही भारत भी अपना निर्मित माल और सेवाएँ दूसरे देशों को बेच सकता है।
(ख) वैश्वीकरण उन लोगों के लिए भी लाभदायक है जिनके पास भारत में उद्योग लगाने के लिए धन उपलब्ध है। वैश्वीकरण के माध्यम से उत्पादन को देश में विक्रय के लिए भीप्रस्तुत किया जा सकता है और नर्यात के लिए भी।
(ग) वैश्वीकरण ने आज भारत के उद्यमियों को यह अवसर प्रदान कर दिया है। कि वे दूसरे देशों में जाकर पूंजी निवेश कर सकते हैं।
(घ) वैश्वीकरण में मात्र पूंजी का ही नहीं वरन् देशों के मध्य श्रमिकों का भी आदन-प्रदान होता है।
(ङ) इस प्रकार वैश्वीकरण का तात्पर्य उस आर्थिक प्रक्रिया से है जिसके माध्यम से विश्व के देश आपस में सहयोग बढ़ाकर अधिक-से-अधिक उन्नति कर सकत हैं।
प्रश्न 27.
“सीमाओं के पार बहुराष्ट्रीय उत्पादन प्रक्रिया के प्रसार से असीमित लाभ हो सकता हैं।” व्याख्या कीजिये।
उत्तर-
(क)बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विश्व स्तर पर अपना तैयार उतपाद बेचने के साथ-साथ वस्तुओं व सेवाओं का उत्पादन भी करती हैं।
(ख) उदाहरण के लिए, औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक बहुराष्ट्रीय कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने उत्पादों का डिजाइन तैयार करती है। उसके पुर्जे का निर्माण चीन में होता है पुिर इन सामानों का मेक्सिकों और पूर्वी यूरोप के देशों में ले जाते हैं। जहाँ इन्हें जोड़ा जाता है। और तैयार उतपाद को पूरे विश्व में बेचा जाता है!
(ग) इस बीच भारत स्थित कॉल सेंटरों के माध्यम से ग्राहक सेवा का संचालन किया जाता है।
(घ) इस प्रकार स्पष्ट है कि उतपादन प्रक्रिया क्रमशः जटिल ढंग से संगठित हुई है। उत्पादन प्रक्रिया दो छोटे भागों में विभाजित है और विश्व भर में फैली हुई है।
(ङ) उपरोक्त उदाहरण में चीन से एक ससता विनिर्माण केंद्र होने का फायदा मिलता है। मेक्सिकों एवं पूर्वी यूरोप बाजार की निकटता का लाभ देते हैं। भारत में उतपादन के तकनीकी पक्षों को समझने वाले दक्ष इंजीनियर मौजूद हैं और अंग्रेजी बोलने वाले शिक्षित युवक भी हैं जो उत्तम ग्राह देखभाल सेवायें उपलब्ध कराते हैं।
(च) इस कारण बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत का लगभग 50-60 प्रतिशत बचत हो सकता है जिससे लाभ प्रतिशत बढ़ता
प्रश्न 28.
बहराष्ट्रीय कंपनियाँ किस प्रकार उत्पादन पर नियंत्रण करती हैं?
उत्तर-
(क) बहुराष्टीय कंपनियों के निवेश का सामान्य तरीका हैं, स्थानीय कंपनियों को खरीदना, उसके बाद उतपादन का प्रसार करना।
(ख) उदारहण के तौर पर, एक बहुत बड़ी अमेरिकी कंपनी कारगिल फूड्स ने एक छोटी भारतीय कंपनी परख फूड्स को खरीद लिया। परख फूड्स का भारत में बहुत बड़ा विपणन तंत्र था तथा उसका ब्रांड भी प्रसिद्ध था। परख फूड्स के चार तेल शोधक केंद्र भी थे।
(ग) अब इन सभी पर कारगिल फूड्स का नियंत्रण है और अब करगिल फूड्स 50 लाख पैकेट प्रतिदिन निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबस बड़ी उत्पादक कंपनी है।
(घ) इसके अलावा बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों को उतपादन का आदेश देती है।
(ङ) विशेषकर वस्त्र, जूते-चप्पल व खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं जिनका उत्पादन संपूर्ण विश्व में छोटे उत्पादकों द्वारा किया जाता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इन उत्पादों की आपूर्ति कर दी जाती है। जो अपने ब्रांड नाम से ग्राहों को बेचती
(च) इन बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में दूर स्थित उत्पादकों के मूल्य गुणवत्ता, आपूर्ति तथा श्रम शर्तो का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता होती है।
प्रश्न 29.
विदेश व्यापार के प्रभाव को उदाहरण देकर समझाइये। .
उत्तर-
(क) विदेश व्यापार उत्पादकों को घरेलू बाजारों से निकलकर बाहर के बाजारों में पहुँचने का अवसर प्रदान करता
(ख) इस कारण, खरीददारों के समक्ष विकल्पों का विस्तार होता है।
(ग) उदाहरण के लिए, चीन के खिलौना उत्पादक भारत को खिलौनों का निर्यात करते हैं। इससे भारतीय ग्राहकों को भारतीय अथवा चीनी खिलौना खरीदने का विकल्प उपलब्ध है।
(घ) नये डिजाइनों एवं कम दाम के कारण चीनी खिलौने भारत में काफी लोकप्रिय हैं। परिणामतः एक वर्ष में ही 70-80 प्रतिशत भारतीय दुकानें चीनी खिलौनों से भर गई और खिलौनों का दाम भी कम हुआ है।
(ङ) इस प्रकार स्पष्ट है कि व्यापार के कारण ही चीनी खिलौन भारतीय बाजार में आए। चीनी खिलौने भारतीय खिलौनों की तुलना में बेहतर साबित हुए। अब भारतीय खरीददारों के पास कम कीमत पर खिलौनों के अपेक्षाकृत अधिक विकल्प हैं।
(च) साथ ही, चीनी खिलौना उतपटकों को अपना व्यवास फैलाने का अवसर मिलता है। इसके विपरीत भारतीय खिलौन निर्माताओं को हानि होती है, क्योंकि उनके खिलौनों की बिक्री कम हो गई हैं।

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प्रश्न 30.
वैश्वीकरण की प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की क्या भूमिका है?
उत्तर-
(क) पिछले दो-तीन दशकों से ज्यादातर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उन स्थानों की खोज कर रही है। जहाँ उनका उत्पादन सस्ता हों। ये कंपनियाँ ऐसे देशों में ज्यादा निवेश कर रही हैं, साथ ही विभिन्न देशों के बीच व्यापार भी बढ़ रहा है।
(ख) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विदेश व्यापार का एक बड़ा भाग नियंत्रित करती है। जैसे, भारत में फोर्ड मोटर्स के कार संयंत्र में भारत के लिए कारों का निर्माण तो होता ही है साथ ही अन्य विकाशशील देशों के लिए कारें एवं अन्य जगहों में अपने कारखाने के लिए पुर्जी का निर्माण भी होता है।
(ग) इसी प्रकार अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बहुत बड़े पैमाने पर वस्तुओं व सेवाओं के व्यापार में शामिल हैं।
(घ) अधिक विदेशी निवेश एवं अधिक विदेशी व्यापार के कारण विभिन्न देशों के बाजारों एवं उतपादनों में एकीकरण हो रहा है।
(ङ) विभिन्न देशों के बीच अधिकाधिक वस्तुओं तथा संवाओं, निवेश और प्रौद्योगिक का आदान-प्रदान हो रहा है। वैश्वीकरण के कारण विश्व के अधिकांश देश एक-दूसरे के अपेक्षाकृत अधिक संपर्क में आए हैं।
(च) वैश्वीकरण के कारण बेहतर, शिक्षा,, बेहतर आय एवं बेहतर रोजगार की तलाश में विभिन्न देशों के लोगों में आवगमन भी होता है।
प्रश्न 31.
प्रौद्योगिकी की उन्नति से वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने में किस प्रकार मदद मिला हैं?
उत्तर-
(क) प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति ने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया है। जैसे, पिछले लगभग पाँच दशकों में परिवहन प्रौद्योगिकी में विकास के कारण लंबी दूरियां तक कम समय तथा कम लागत में वस्तुओं की आपूर्ति संभव हुई
(ख) सूचना एवं सचार प्रौद्योगिकी में विकास के कारण दूरसंचार, कंप्यूटर, इंटरनेट के क्षेत्र में तीव्र गति से प्रगति हो · रही है।
(ग) संचार उपग्रहों के विकास से दूरसंचार सेवाओं जैसे, टेलीग्राम, टेलीफोन, मोबाईल फोन एवं फैक्स के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हआ है।
(घ) हमारे जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में कंप्यूटरों का प्रवेश हो गया है। इंटरनेट से हम तत्काल ई-मेल भेज सकते हैं। और अत्यन्त कम मूल्य पर पूरे विश्व में बात (वॉयस मेल) कर सकते हैं।
(ङ)सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने विभिन्न देशों के बीच सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में मुख्य भूमिका निभाई है। जैसे, लंदन के पाठकों के लिए प्रकाशित एक समाचार पत्र की डिजाइनिंग और छपाई दिल्ली में होती है। पत्रिका छपाई के बाद वायुमार्ग से लंदन भेजी जाती है डिजाइन और छपाई का भुगतान ई-बैंकिंग के द्वारा लंदन के एक बैंक से दिल्ली के एक बैंक तत्काल हो जाता है।
प्रश्न 32.
विश्व व्यापार संगठन पर एक नोट लिखिये।
उत्तर-
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों द्वारा सन् 1995 ई. में की गई थीं। इसका मुख्य कार्यालय जेनेवा में हैं। वर्तमान में इसके 149 सदस्य हैं।
इस संगठन का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के स्थान पर बहुपक्षीय समझौतों का विस्तार करना है। इस संगठन का ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। विश्व व्यापार संगठन चाहता है कि सदस्य देश आयात और निर्यात दोनों पर से प्रतिबंध हटा दें। विकसित देशों की पहल पर शुरू विवर व्यापार संगठन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियम लागू करता है। और इन नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।
यद्यपि विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार की सुविधा देता है परंतु अनुभव किया गया है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है। दूसरी ओर, विश्व व्यापार संगठन के नियमों के कारण विकासशील देश व्यापार अवरोधकों को हटाने के लिए विवश हुए हैं। कृषि उत्पादों के व्यापार पर वर्तमान बहस इसका एक ज्वलत उदाहरण है।
प्रश्न 33.
भारत में विदेशी निवेश आकर्षिक करने के लिए क्या कदम उड़ाए गए हैं?
उत्तर-
(क) पिछले कुछ वर्षों में भारत की केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना। विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विश्व स्तरीय सुविधाएँ जैसे, बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, मनोरंजन, शिक्षा सुविधाएँ आदि उपलब्ध है।
(ख) विशेष आर्थिक क्षेत्र में उत्पादन इकाइयाँ शुरू करने वाली कंपनियों को प्रारंभिक पाँ चा वर्षों तक कर देने से छूट दी गई हैं।
(ग) विदेशी निवेश आकर्षित करने हेतु सरकार ने श्रम कानूनों में लचीलापन अपनाने की अनुमति दे दी हैं।
(घ) पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने कपनिया का अनक नियमों से छूट लेने की अनुमति दी हैं। श्रम लागत में कटौती करने के लिए कंपनियाँ अब नियमित आधार पर श्रमिकों को रोजगार देने के बजाय, छोटी अवधि, जब काम का अधिक दबाव होता है, के लिए श्रमिकों को रोजगार पर रख सकती हैं।
प्रश्न 34.
वैश्वीकरण का भारतीय कंपनियों को क्या लाभ हुआ हैं?
उत्तर-
(क) वैश्वीकरण के कारण बढ़ती प्रतिस्पर्धा से अनेक बड़ी भारतीय कंपनियों को लाभ हुआ है। इन कंपनियों ने नयी प्रौद्योगिकी एवं उत्पादन प्रणाली में निवेश किया और अपने उत्पादन मानकों को ऊँचा उठाया।
(ख) कुछ कंपनियों ने विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन कार्य किया और उनको इसका लाभ भी मिला।
(ग) कुछ बड़ी कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरने का मौका मिला। ___ (घ) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी, एशियन पेंट्स, सुन्दरम फास्टनर्स आदि कंपनियाँ अब विश्व स्तर पर अपने क्रियाकलापों का प्रसार कर रही है।
(ङ) वैश्वीकरण से सेवा प्रदाता कंपनियों, सूचना व संचार प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों के लिए नये अवसरों का सृजन हुआ है। भारतीय कंपनी द्वारा लंदन स्थित कंपनी की पत्रिका का प्रकाशन और गुड़गाँव तथा बैंगलोर स्थित कॉल सेंटर इसके उदाहरण हैं।
(च) इसके अलावा डाटा एन्ट्री, लेखाकरण-प्रशासनिक कार्य, इंजीनियरिंग आदि कई सेवायें भारत जैसे देशों में अब ससते मे उपलब्ध हैं और कई विकतिस देशों को निर्यात की जाती है।
प्रश्न 35.
वैश्वीकरण के कारण श्रमिकों का जीवन किस प्रकार प्रभावित हुआ हैं?
अथवा
वस्त्र उद्योग के श्रमिकों, भारतीय निर्यातकों और विदेशी कंपनियों को प्रतिस्पर्धा किस प्रकार प्रभावित कर रही हैं?
उत्तर-
(क) बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश नियोक्ता आजकल श्रमिकों को कम समय एवं काम का अधिक दबाव होने पर ही रोजगार देना पंसद करते हैं।
(ख) उदाहरण के मौर पर, अमेरिका और यूरोप की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों भारतीय निर्यातकों को वस्तुओं की आपूर्ति का आदेश देती हैं। ये बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अधिक लाभ कमाने के लिए सबसे सस्ती वस्तुओं की माँग करती हैं।
(ग) भारतीय निर्यातक बड़ा आदेश प्राप्त करने के उद्देश्य से अपनी लागत कम करने की कोशिश करते हैं।
(घ) चूंकि कच्चेमाल पर लागत में कमी नहीं हो सकती, अत: नियोक्ता श्रम-लागत में कटौती करते हैं।
(ङ) इस कारण श्रमिकों का अस्थायी रोजगार दिया जाता है श्रमिकों को वेतन कम मिलता हैं, परंतु उनके कार्य की अवधि अपेक्षाकृत लंबी होती है। काम का दबाव ज्यादा होने पर श्रमिकों को अतिरिक्त समय में भी काम करने के लिए विवश किया जाता है।
(च) वस्त्र निर्यातकों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ होता है लेकिन वैश्वीकरण के कारण हुए लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया जाता है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न 
निम्नलिखित प्रश्नों के दिए गए विकल्पों से सही विकल्प का चयन करें
प्रश्न 1.
वैश्वीकरण की प्रक्रिया में किसकी मुख्य भूमिका
(क) स्थानीय कंपनियाँ
(ख) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
(ग) सरकार
(घ) व्यक्ति एवं समाज
उत्तर-
(ख) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
प्रश्न 2.
हमारे बाजारों में वस्तुओं के बहुव्यापी विकल्प अपेक्षाकृत ………. परिघटना है :
(क) नवीन
(ख) प्राचीन
(ग) मिश्रित
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(क) नवीन

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प्रश्न 3.
विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया को कहते हैं:
(क) स्थानीयकरण
(ख) राष्ट्रीकरण
(ग) सामाजीकरण
(घ) वैश्वीकरण
उत्तर-
(घ) वैश्वीकरण
प्रश्न 4.
विदेशी निवेश और निवेशी व्यापार के माध्यम से देशों को जोड़ने से हुए वैश्वीकरण सेः
(क) उत्पादकों के बीच कम प्रतिस्पर्धा होगी
(ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी
(ग) प्रतिस्पर्धा में कोई परिवर्तन नहीं होगा
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी
प्रश्न 5.
किस क्षेत्र में तीव्र उन्नति के कारण वैश्वीकरण की प्रक्रिया उत्प्रेरित हुई?
(क) प्रौद्योगिकी
(ख) परिवहन
(ग) व्यापार
(घ) औद्योगीकरण
उत्तर-
(क) प्रौद्योगिकी
प्रश्न 6.
विभिन्न देशों के बीच सेवाओं के उत्पादन के विस्तार में किस क्षेत्र ने मुख्य भूमिका निभाई हैं:
(क) विदेशी व्यापार
(ख) सूचना एंव संचार प्रौद्योगिकी
(ग) विदेशी निवेश
(घ) सरकार
उत्तर-
(ख) सूचना एंव संचार प्रौद्योगिकी
प्रश्न 7.
व्यापार अवरोधक का अर्थ हैं :
(क) प्रतिबंध लगाना
(ख) प्रतिबंध हटाना
(ग) व्यापार का विस्तार
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(क) प्रतिबंध लगाना
प्रश्न 8.
भारत में नई आर्थिक नीति लागू की गई :
(क) सन् 1989 ई.
(ख) सन् 1990 ई.
(ग) सन् 1991 ई.
(घ) सन् 1992 ई.
उत्तर-
(ग) सन् 1991 ई.
प्रश्न 9.
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना कब हुई?
(क) 1993 ई.
(ख) 1995 ई.
(ग) 2000 ई.
(घ) 2003 ई.
उत्तर-
(ख) 1995 ई.
प्रश्न 10.
वर्तमान में विश्व व्यापार संगठन के कितने सदस्य
(क) 147
(ख) 148
(ग) 149
(घ) 150
उत्तर-
(ग) 149

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प्रश्न 11.
विशेष आर्थिक क्षेत्र में उत्पादन इकाइयाँ स्थपित करने वाली कंपनियों को शुरुआत में कितने वर्षों तक कर नहीं देना पड़ेगा?
(क) तीन वर्ष
(ख) चार वर्ष
(ग) छः वर्ष
(घ) पाँच वर्ष
उत्तर-
(घ) पाँच वर्ष
प्रश्न 12.
भारत में लघु उद्योगों में कितने लोग नियोजित हैं?
(क) 50 लाख
(ख) 1 करोड़
(ग) 2 करोड़
(घ) 4 करोड़
उत्तर-
(ग) 2 करोड़
प्रश्न 13.
एक कपंनी जो दो या उससे अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती हैं, उसे कहते हैं:
(क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
(ख) स्थानीय कंपनियाँ
(ग) प्राइवेट कंपनी
(घ) सार्वजनिक कंपनी
उत्तर-
(क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
प्रश्न 14.
बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को क्या कहते हैं?
(क) देशी निवेश
(ख) स्थानीय निवेश
(ग) विदेशी निवेश
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ग) विदेशी निवेश
प्रश्न 15.
विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के ……….में सहायक सिद्ध हुआ हैं:
(क) विखंडन
(ख) एकीकरण
(ग) स्थानीयकरण
(घ) इनमें कोई नहीं
उत्तर-
(ख) एकीकरण
प्रश्न 16.
आयात पर कर उदाहरण हैं :
(क) व्यापार विस्तार
(ख) वैश्वीकरण
(ग) राष्ट्रीकरण
(घ) व्यापार अवरोधक
उत्तर-
(घ) व्यापार अवरोधक
प्रश्न 17.
सरकार द्वारा अवरोधकों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(क) उदारीकरण
(ख) अनुदारीकरण
(ग) वैश्वीकरण
(घ) कोटा
उत्तर-
(क) उदारीकरण
प्रश्न 18.
अमेरिकी के जी. डी. पी. में कृषि का हिस्सा कितना हैं?
(क) 1%
(ख) 5%
(ग) 8%
(घ) 12%
उत्तर-
(क) 1%
प्रश्न 19.
वैश्वीकरण और उत्पादकों-स्थानीय एवं विदेशी दोनों के बीच बेहतर प्रतिस्पर्धा से किस वर्ग के उपभोक्ताओं को अधिक लाभ हुआ हैं?
(क) गरीब वर्ग
(ख) धनी वर्ग
(ग) मध्यम वर्ग
(घ) शहरी निवासी
उत्तर-
(ख) धनी वर्ग
प्रश्न 20.
शीर्ष भारतीय कंपनियों के पास क्या है जिसने उन्हें आधुनिकीकरण करने एवं प्रतिस्पर्धा में बने रहने में सहायता की?
(क) श्रमिक
(ख) मुद्रा
(ग) कारखाना
(घ) प्रौद्योगिकी
उत्तर-

(ख) मुद्रा

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