HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Important Questions Economics Chapter 5 उपभोक्ता अधिकार

प्रश्न-1.
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर-
नई दिल्ली में।

प्रश्न-2.
सबसे अधिक प्रभावशाली उपभोक्ता न्यायालय का क्या नाम हैं?
उत्तरः
जिला मंचा

प्रश्न-3
उपभोक्ता सुरक्षा कानून कब अस्तित्व में आया। इसमें कब-कब सुधार किये गये? ।
उत्तर-
उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 में अस्तित्व में आया। इसमें 1991 और 1993 में सुधार किए गये।

प्रश्न-4.
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण करने वाली संस्था कौन-सी है। इसका मुख्यालय कहाँ हैं?
उत्तर-
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण करने वाली संस्था I.S.0 हैं। इसका मुख्यालय जेनेवा में हैं

प्रश्न 5.
विभिन्न वसतुओं और सेवाओं की माँग पर किसका असर प्रमुख रूप से पड़ता है?
उत्तर
विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की माँग पर सबसे अधिक असर विज्ञापनों का पड़ता है।

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प्रश्न 6.
सीमित आपूर्ति से आपका क्या आशय हैं?
उत्तर-
सीमित आपूर्ति का आशय है कि मांग की तुलना में किसी वस्तु का उत्पादन कम होना।

प्रश्न 7.
भारत में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आंदोलनों का आरंभ कब हुआ?
उत्तर-
भारत में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आंदोलनों का आरंभ 1980 के उत्तरार्ध और 1990 के पूर्वार्ध में हुआ।

प्रश्न 8.
उपभोक्ता अधिकारों के विषय में सबसे पहली घोषणा कब और कहाँ की गई?
उत्तर-
उपभोक्ता अधिकारों के विषय मे सबसे पहली घोषणा 1962 में संयुक्त राज्य अमेरिका में की गई।

प्रश्न 9.
बी.एस.आई.का मुख्यालय कहाँ हैं?
उत्तर-
नई दिल्ली में।

प्रश्न 10.
किस संस्था के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सामग्रियों के लिए मानक निर्धारित किये जाते हैं?
उत्तर-
कोडेक्स एलिमेंटेरियस कमीशन -(Codex Alimentarius Commission) द्वारा।

प्रश्न- 11.
हम उत्पादक तथा उपभोक्ता दोनों रूपों में भागीदारी कैसे करते हैं?
उत्तर-
(क) बाजार में हमारी भागीदारी उत्पादक एवं उपभोक्ता दोंनों रूपों में होती है।
(ख) सेवाओं तथा वस्तुओं के उत्पादक के रूप में हम कृषि, उद्योग या सेवा जैसे विभागों में कार्यरत हो सकते हैं। जब हम अपनी आवश्यकतानुसार बाजार से वस्तुओं या सेवाओं को खरीदते हैं तो हमारी भागीदारी उपभोक्ता के रूप में होती हैं।

प्रश्न- 12.
बाजार में लोगों के शोषण के लिये क्या तरीके अपनाये जाते हैं? उदारहण दीजिये।
उत्तर-
बाजार में लोगों का शोषण कई तरीकों से हो सकता
(क) महाजन कर्जदार पर बंधन लगाने के लिए कई दाँव पेच अपनाते हैं। सामयिक ऋण के कारण वे उत्पादक को अपना उत्पाद निम्न दरों पर उन्हें बेचने के लिए मजबूर कर सकते हैं।
(ख) वे लोगों को ऋण चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचने के लिए विवश कर सकते हैं।
(ग) असंगठित क्षेत्र में काम करनेवाले बहुत से कार्मिकों को कम वेतन पर कार्य करना पड़ता है।
(घ) साथ ही, उन्हें उन हालातों को झेलना पड़ता है, जो न्यायोजित नहीं होते और उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक – भी होते हैं।

प्रश्न-13.
उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत के क्या कारण थे?
उत्तर-
(क) उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत उपभोक्ताओं के असंतोष के कारण हुई, क्योंकि विक्रेता कई अनुचित व्यवसायों में शामिल होते थे।
(ख) बाजार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
(ग) जब कोई उपभोक्ता लम्बे समय तक एक विशेष ब्राण्ड उत्पाद या दुकान से संतुष्ट नहीं होता था तो वह या तो उस उत्पाद को खरीदना बंद कर देता था या उस दुकान से खरीददारी करना बंद कर देता था। यह माना जाता था कि किसी वस्तु अथवा सेवा को खरीदेते समय सावधानी बरतने की जिम्मेदारी उपभोक्ता की है।
(घ) इन्हीं कारणों से उपभोक्ता संस्थाओं का गठन किया गया और उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत हुई। परिणामस्वरूप वस्तुओं व सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विक्रेताओं पर भी डाला गया।

प्रश्न-14.
भारत में 1970 के दशक में उपभोक्ता आंदोलन के विकास में उपभोक्ता संस्थाओं ने क्या योगदान दिया?
उत्तर-
(क) 1960 के दशक में भारत में व्यवस्थित रूप से उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ।
(ख) 1970 के दशक तक उपभोकता संस्थाओं ने वृहत् स्तर पर उपभोक्ता अधिकार से संबंधित आलेखों के लेखन तथा प्रदर्शनी का आयोजन शुरू किया।
(ग) उन्होंने सड़क यात्री परिवहन में अत्यधिक भीड़-भाड़ और राशन दुकानों में होने वाले अनुचित कार्यों पर नजर रखने के लिए उपभोक्ता दलों का निर्माण किया।
(घ) इन सभी प्रयासों के कारण यह आंदोलन वृहत् स्तर पर उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ और अनुचित व्यवसाय शैली को सुधारने के लिए व्यावसायिक कंपनियों और सरकार दोनों पर दबाव डालने में सफल हुआ।

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प्रश्न-15.
उपभोक्ता इंटरनेशनल पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर-
(क) संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1985 ई. में उपभोक्ता सुरक्षा हेतु कई महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देशों को अपनाया।
(ख) यह विभिन्न देशों के उपभोक्ता वकालत दलों के लिए एक हथियार था जिसके माध्यम से वे उपभोक्ता सुरक्षा के लिये उपयुक्त तरीके अपनाने के लिए अपनी सरकारों को मजबूर कर सकते थे।
(ग) यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आंदोलन का आधार बना।
(घ) आज उपभोक्ता इंटरनेशनल 100 से भी अधिक देशों की 240 संस्थाओं का एक संरक्षक संस्था बन गया है।

प्रश्न-16.
सुरक्षा कानूनों के बावजूद बाजार से बुरे उत्पाद क्यों प्राप्त होते हैं?
उत्तर-
(क) सुरक्षा नियमों व अधिनियमों के बावजूद हमें बाजार से बुरे उत्पाद प्राप्त होते हैं क्योंकि इन नियमों व कानूनों के पालन पर उचित निगाह नहीं रखी जाती हैं और;
(ख) उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं है। जिस कारण उपभोक्ता संगठित होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई नहीं लड़ सकते।।

प्रश्न-17.
वस्तुओ के पैकेट पर किन जानकारियों का होना जरूरी है?
उत्तर-
(क) वस्तुओं के पैकेट पर वस्तु के अवयवों, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख, खराब होने की अंतिम तिथि तथा वस्तु निर्माता का पता होना जरूरी है।
(ख) उदाहरण के तौर पर जब हम कोई दवा खरीदते हैं तो उस दवा के ‘उचित प्रयोग के बारे में निर्देश’ तथा उस दवा के प्रयोग के अन्य प्रभावों तथा खतरों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ठीक इसी तरह वस्त्र खरीदने पर ‘धुलाई संबंधी निर्देश’ प्राप्त किया जा सकता है।

प्रश्न-18.
राइट टू इनफारमेशन एक्ट के महत्त्व को उदाहरण देकर स्पष्ट करें।
उत्तर-
(क) भारत सरकार ने अक्टूबर 2005 ई. में ‘राइट टू इनफारमेशन’ या सूचना पाने का अधिकार कानून पारित किया।
(ख) यह कानून नागरिकों को सरकारी विभागों के क्रियाकलापों की सीभी सूचनाएँ पाने का अधिकार सुनिश्चित करता है।
(ग) अमृता नाम की एक इंजीनियरिंग स्नातक ने नौकरी के लिए साक्षात्कार दिया एवं अपने सभी प्रमाण पत्र भी जमा किये परंतु उसे परिणाम प्राप्त नहीं हुआ। कर्मचारियों ने भी उसके प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार कर दिया। तब उसने आर. टी. आई. एक्ट का प्रयोग करते हुए एक प्रार्थना पत्र दिया कि एक उचित समय सीमा के भीतर परिणाम की जानकारी उसका अधिकार था, जिससे वह भविष्य की योजना बना सके।
(घ) उसके प्रयासों का नतीजा यह हुआ कि यथाशीघ्र उसे नियुक्ति पत्र प्राप्त हो गया।

प्रश्न-19.
“जब हम वस्तुएँ खरीदते हैं तो पाते हैं कि कभी-कभी पैकेट पर छपे मूल्य से अधिक या कम मूल्य लिया जाता है।” इसके कारणों का पता लगाइए।
उत्तर-
वस्तुएँ खरीदते वक्त कभी-कभी पैकेट पर छपे मूल्य से अधिक या कम मूल्य लिया जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते है
(क) उपभोक्ता अधिकारों के ज्ञान का अभाव (ख) मुनाफाखोरी (ग) अचानक मूल्य वृद्धि (घ) करो में वृद्धि (ङ) विक्रेता द्वारा शोषण का तरीका।

प्रश्न-20.
चुनने के अधिकार का उल्लंघन कैसे होता है? उदाहरण दीजिये।
उत्तर-
(क) कई बार हमें उन वस्तुओं को खरदीने के लिए भी दबाव डाला जाता है, जिनको खरीदने की हमारी बिल्कुल इच्छा नहीं होती। परंतु चुनाव के लिए हमारे पास कोई विकल्प नहीं होता है।
(ख) उदाहरण के लिए, कभी-कभी जब हम नया गैस कनेक्शन लेते हैं तो डीलर गैस के साथ-साथ चूल्हा भी लेने के लिए हम पर दबाव डालता है। वेसे ही यदि हम एक दंतमंजन खरीदना चाहते हैं और दुकानदार कहता है कि वह हमें दंजमंजन तभी बेच सकता है जब हम दंतमजन के साथ-साथ ब्रश भी खरीदेंगे।

प्रश्न-21.
एक आसान और प्रभावी जन-प्रणाली बनाने की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर-
(क) उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाजी और शोषण के विरुद्ध क्षतिपूर्ति माँगने का अधिकार है।
(ख) यदि किसी उपभोक्ता को कोई क्षति पहुंचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधि कार होता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए एक आसान व प्रभावी जन-प्रणाली बनाने की आवश्यकता है।

प्रश्न-22.
उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता सुरक्षा परिषद् किसे कहते हैं? इनके कार्यों का वर्णन कीजिये।
उत्तर-
भारत में उपभोक्ता आंदोलन ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न संगठनों के निर्माण को प्रेरित • किया है; इन्हें सामान्यतः उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता सुरक्षा परिषद् कहा जाता है।
(ख) ये उपभोक्ताओं को उपभोक्ता अदालत में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देती हैं।
(ग) कई अवसरों पर ये उपभोक्ता अदालत में उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व भी करती हैं।
(घ) ये स्वयंसेवी संगठन है जिन्हें जनजागरण पैदा करने के लिए सरकार से वित्तीय सहायता भी प्राप्त होता है।

प्रश्न-23.
विभिन्न वस्तुएँ खरीदते समय आई.एस.आई. लोगों एगमार्क या हॉलमार्क के लोगों क्यों देखना चाहिए?
उत्तर-
(क) विभिन्न वस्तुएँ खरीदते समय हमें आवरण पर लिखे अक्षरों-आई.एस.आई. एगमार्क या हॉलमार्क के लोगों अवश्य देखना चाहिए।
(ख) ये लोगो या प्रमाण चिन्ह हमें अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मद्द करते हैं।
(ग) उपभोक्ता संगठनों द्वारा नियंत्रित एवं जारी किए जाने वाले इन प्रमाण चिन्हों के प्रयोग की अनुमति उत्पादकों को तब दी जाती है, जब वे निश्चित गुणवत्ता मानकों का पालन करते हैं।

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प्रश्न-24.
क्या सभी उत्पादों के लिए मानदण्डों का पालन करना आवश्यक है?
उत्तर-
(क) यद्यपि उपभोक्ता संगठन बहुत से उत्पादों के लिए गुणवत्ता का मानदण्ड विकसित करते हैं, किंतु सभी ‘उत्पादों के लिए इन मानदण्डों का पालन करना जरूरी नहीं होता है।
(ख) तथापि कुछ उत्पादों जो उपभोक्ता की सुरक्षा ओर स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं तथा जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। इनके उत्पादन के लिए उत्पादकों को इन संगठनों से प्रमाण-पत्र लेना आवश्यक है। जैसे-एल.पी.जी. सिलिंडर्स, खाद्य रंग एवं उसमें प्रयुक्त सामग्री, सीमेंट, बोतल बंद पेयजल आदि।

प्रश्न-25.
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
उत्तर-
(क) प्रतिवर्ष 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।
(ख) क्योंकि 1986 ई. में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम पारित किया था।

प्रश्न-26.
उपभोक्ता आंदोलन कैसे सफल हो सकता है?
उत्तर-
(क) उपभोक्ता आंदोलन की सफलता के लिए उपभोक्ताओं को अपनी भूमिका तथा महत्त्व जानने की जरूरत
(ख) उपभोक्ताओं की सक्रिया भागीदारी से उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वयंसेवी प्रयास _और सबकी साझेदारी से संघर्ष करना जरूरी है।

प्रश्न-27.
उपभोक्ता अदालतों में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया क्या है?
उत्तर-
उपभोक्ता अदालतों में शिकायत दर्ज कराने हेतु किसी विधि विशेषज्ञ या कानूनी सलाहकार की सहायता लेना आवश्यक नहीं है। इन अदालतों में उपभोक्ता स्वयं अपने मामलों की पैरवी कर सकता है। यह प्रक्रिया इतनी सहज व सरल है कि उपभोक्ता सादे कागज पर अपनी शिकायत लिखकर भी दे सकता है। शिकायत के साथ वस्तु की रसीद अवश्य संलग्न करना चाहिए। यही कारण है कि यह कहा जाता है कि कोई भी वस्तु क्यों न खरीदें, रसीद अवश्य प्राप्त करें।

प्रश्न-28.
‘उपभोक्ता सुरक्षा कानून’ 1986 क्यों बनाया गया?
उत्तर-
‘उपभोक्ता सुरक्षा कानून’ 1986 बनाये जाने का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर, उनके हितों का सरंक्षण प्रदान करना है। इसके साथ ही उपभोक्ता हित से जुड़े मामलों से सम्बन्धित झगड़ों के निपटारे हेतु समितियों का गठन करना भी इस कानून का उद्देश्य है।

प्रश्न-29.
उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 में दिये गए उपभोक्ताओं के अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
उपभोक्ता सुरक्षा कानून 1986 दवारा उपभोक्ता को निम्नलिखित अधिकार दिये गये हैं

  • सुरक्षा का अधिकार-उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया गया है कि वे उन वस्तुओं की बिक्री से अपना बचाव कर सकें, जो उनके जीवन और सम्पत्ति के लिए खतरना हैं।
  • सूचना का अधिकार-इसके अंतर्गत गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता स्तर और मूल्य आदि के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त करना शामिल है।
  • चुनाव का अधिकार-उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे अपनी आवश्यकताओं की वस्तुओं को चुन सकें, जिससे कि वे संतोषजनक गुणवत्ता की वस्तु सही मूल्य में – प्राप्त कर सकें।
  • सुनवाई का अधिकार-उपभोक्ताओं का यह विशेष अधिकार है कि उपभोक्ताओं से जुड़ी संस्थाओं तथा संगठनों पर अपनी समस्याओं की सुनवाई की माँग कर सकें।
  • शिकायतें निपटारे का अधिकार-उपभोक्ताओं को यह अधिकार मिला हुआ है कि शोषण व अनुचित व्यापारिक क्रियाओं के विरुद्ध निदान और शिकायतों का सही प्रकार से निपटारा हो।
  • उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार-उपभोक्ता को यह विशेष अधिकार है कि वह अपने हित से जुड़े मामलों तथा वस्तु विशेष से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सके।

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