Author name: Bhagya

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम् Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

HBSE 9th Class Sanskrit वाडमनःप्राणस्वरूपम् Textbook Questions and

Class 9 Sanskrit Chapter 12 HBSE

I. अधोलिखितानां सूक्तिानां भावं हिन्दीभाषायां लिखत
(निम्नलिखित सूक्तियों के भाव हिन्दी भाषा में लिखिए)
(क) मनः अन्नमयं, प्राणः आपोमयः वाक् च तेजोमयी भवति।
(ख) “भवता घृतोत्पत्तिरहस्यम् व्याख्यातम्।”
(ग) “यादृशमन्नादिकं गृहाति मानवस्तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवति।”
उत्तराणि:
(क) भावार्थ प्रस्तुत सूक्ति संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘वाङ्मनःप्राणस्वरूपम्’ में से उद्धृत है। मन, प्राण एवं वाणी उपनिषद् के गूढ़ तत्त्व हैं। इन तीनों तत्त्वों के विषय में कहा गया है कि मन अन्नमय है, प्राण जलमय है तथा वाणी तेजोमयी है। जो खाया जाता है, वह अन्न है। अन्न ही निश्चित रूप से मन है। न्याय और सत्य से अर्जित किया हुआ अन्न सात्विक होता है। उसे खाने से मन भी सात्विक होता है। दूषित भावना एवं अन्याय से अर्जित अन्न तामस होता है। इस संसार में जल ही जीवन है और प्राण जलमय होता है। तैल, घृत आदि के भक्षण से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, इससे वाणी विशद् होती है और भाषणादि कार्यों में सामर्थ्य की वृद्धि होती है। अतः वाणी को तेजोमयी माना गया है।

(ख) भावार्थ-प्रस्तुत सूक्ति संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘वाङ्मनःप्राणस्वरूपम्’ में से उद्धृत है। आरुणि श्वेतकेतु को मन, प्राण एवं वाणी को स्पष्ट करने के प्रसंग में बताते हैं कि जैसे मथे जाते हुए दही की अणिमा (मलाई) ऊपर तैरने लगती है। उसी अणिमा (मलाई) से घृत का निर्माण होता है। उसी प्रकार खाया जाता हुआ अन्न भी मल, मांस एवं मन तीनों भागों में बँट जाता है। ‘मन’ अन्न का सबसे सूक्ष्म रूप (अणिमा) है। इसी प्रकार पिया जाता हुआ जल भी मूत्र, रक्त एवं प्राण तीन भागों में विभक्त हो जाता है। इसमें प्राण जल का सबसे सूक्ष्म रूप है। इसी प्रकार शरीर द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा का सबसे सूक्ष्म रूप वाणी है। इस प्रकार मन, प्राण एवं वाणी शरीर द्वारा ग्रहण किए गए अन्न, जल एवं ऊर्जा के सूक्ष्मतम रूप हैं।

(ग) भावार्थ-प्रस्तुत सूक्ति संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘वाङ्मनःप्राणस्वरूपम्’ में से उद्धृत है। मनुष्य के द्वारा जो खाया जाता है, वह अन्न है। ‘अन्न’ ही निश्चित रूप से मन है। कहा भी गया है कि ‘जैसा खाओ अन्न, वैसा रहे मन’ । न्याय और सत्य से अर्जित किया हुआ अन्न सात्विक होता है। उसे खाने से मन भी सात्विक होता है। दूषित भावना और अन्याय से अर्जित अन्न तामसिक होता है। कहने का अभिप्राय यह है कि सात्विक भोजन से मन सात्विक होता है, राजसी भोजन से राजस होता है और तामसी भोजन से मन की प्रवृत्ति भी तामसी हो जाती है। इसीलिए कहा गया है कि मनुष्य जैसा अन्न ग्रहण करता है, उसका चित्त वैसा ही बन जाता है।

वाडमनःप्राणस्वरूपम् In Sanskrit HBSE 9th Class

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

II. अधोलिखितान संवादान/गद्यांशान पठित्वा प्रदत्त प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतपूर्णवाक्येन लिखत
(निम्नलिखित संवादों/गद्यांशों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर संस्कृत के पूर्ण वाक्यों में लिखिए)
(1) श्वेतकेतुः – भगवन् ! भवता घृतोत्पत्तिरहस्यम् व्याख्यातम्। भूयोऽपि श्रोतुमिच्छामि।
आरुणिः – एवमेव सौम्य! अश्यमानस्य अन्नस्य योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति। तन्मनो भवति। अवगतं न वा?
श्वेतकेतुः – सम्यगवगतं भगवन् !
आरुणिः – वत्स! पीयमानानाम् अपां योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति स एव प्राणो भवति।
श्वेतकेतुः – भगवन्! वाचमपि विज्ञापयतु।
(क) मनः कीदृशं भवति?
(ख) आरुणिः किं व्याख्यातम् ?
(ग) अत्र ‘पुत्र’ इति पदस्य किं पर्यायपदं प्रयुक्तम्?
(घ) ‘भगवन् ! वाचमपि विज्ञापयतु’ इति कः कथयति?
(ङ) प्राणः कीदृशं भवति?
उत्तराणि:
(क) अश्यमानस्य अन्नस्य योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति तत् मनः भवति।
(ख) आरुणिः घृतोत्पत्तिरहस्यम् व्याख्यातम्।
(ग) अत्र ‘पुत्र’ इति पदस्य पर्यायपदं ‘वत्स’ अस्ति।
(घ) ‘भगवन! वाचमपि विज्ञापयतु’ इति श्वेतकेतुः कथयति।
(ङ) पीयमानानाम् अपां योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति स एव प्राणः भवति।

(2) आरुणिः – सौम्य! अश्यमानस्य तेजसो योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति। सा खलु वाग्भवति। वत्स! उपदेशान्ते भूयोऽपि त्वां विज्ञापयितुमिच्छामि यत्, अन्नमयं भवति मनः, आपोमयो भवति प्राणाः तेजोमयी च भवति वागिति। किञ्च यादृशमन्नादिकं गृह्णाति मानवस्तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवतीति मदुपदेशसारः। वत्स! एतत्सर्वं हृदयेन अवधारय।
(क) का खलु वाग्भवति?
(ख) उपदेशान्ते आरुणिः श्वेतकेतुं किं विज्ञापितुम् इच्छति?
(ग) अत्र ‘पुनरपि’ इति पदस्य किं पर्यायपदं प्रयुक्तम् ?
(घ) वत्स! एतत्सर्वं केन अवधारय?
(ङ) आरुणेः उपदेश सारः किम् अस्ति?
उत्तराणि:
(क) अश्यमान तेजसो योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति सा खलु वाग्भवति।
(ख) उपदेशान्ते आरुणिः श्वेतकेतुं विज्ञापितुम् इच्छति यत् अन्नमयं भवति मनः आपोमयो भवति प्राणः तेजोमयी च वागिति।
(ग) अत्र ‘पुनरपि’ इति पदस्य पर्यायपदं ‘भूयोऽपि’ प्रयुक्तम्।
(घ) वत्स! एतत्सर्वं हृदयेन अवधारय।
(ङ) आरुणेः उपदेश सारः अस्ति यत् यादृशमन्नादिकं गृह्णाति मानवस्तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवति।

Sanskrit Class 9 Chapter 12 HBSE

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III. स्थूल पदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(स्थूल पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) सौम्य! मनः अन्नमयः भवति।।
(ख) पीतानाम् अपां योऽणिष्ठः स प्राणः भवति।
(ग) एतत् सर्वं हृदयेन अवधारय।
(घ) भगवन्! वाचम् अपि विज्ञापय।
(ङ) अशितस्य अन्नस्य योऽणिष्ठः तन्मनः।
उत्तराणि:
(क) सौम्य! कः अन्नमयः भवति?
(ख) पीतानाम् अपां योऽणिष्ठः स कः भवति?
(ग) एतत् सर्वं केन अवधारय?
(घ) भगवन् ! कम् अपि विज्ञापय?
(ङ) अशितस्य तस्य योऽणिष्ठः तन्मनः?

वाडमनःप्राणस्वरूपम् HBSE 9th Class Sanskrit

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IV. अव्ययपदैः रिक्तस्थानानां पूर्तिः कुरुत
(निम्नलिखित अव्ययों की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए)
अपि, एव, इति, खलु, अध
(क) वत्स! किम् …………. त्वया प्रष्टव्यमस्ति?
(ख) भगवन्! भूयः ……………. मां विज्ञापयतु।।
(ग) भवता घृतोत्पत्तिरहस्यं व्याख्यातं। भूयः …………. श्रोतुमिच्छामि।
(घ) स ऊर्ध्वः समुदीषति सा …………….. वाग्भवति।
(ङ) तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवति ……………. मद् उपदेशसारः।
उत्तराणि:
(क) अद्य,
(ख) एव,
(ग) अपि,
(घ) खलु,
(ङ) इति।

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V. अधोलिखित प्रश्नानाम् चतुषु वैकल्पिक उत्तरेषु उचितमुत्तरं चित्वा लिखत
(निम्नलिखित प्रश्नों के दिए गए चार विकल्पों में से उचित उत्तर का चयन कीजिए)
1. श्वेतकेतुः सर्वप्रथमं कस्य स्वरूपस्य विषये पृच्छति?
(i) मानवस्य
(ii) जीवनस्य
(iii) मनसः
(iv) प्राणस्य
उत्तरम्:
(iii) मनसः

2. पीतानाम् अपां योऽणिष्ठः सः कः अस्ति?
(i) मनः
(ii) वायुः
(iii) जीवः
(iv) प्राणः
उत्तरम्:
(iv) प्राणः

3. अन्नमयं कः अस्ति?
(i) प्राणः
(ii) मनः
(iii) वायुः
(iv) तेजः
उत्तरम्:
(i) मनः

4. आरुणेः मतानुसारं वाक् कीदृशी भवति?
(i) प्राणमयी
(ii) तेजोमयी
(iii) अन्नमयी
(iv) आपोमयी
उत्तरम्:
(ii) तेजोमयी

5. मानवः यादृशम् अन्नादिकं गृहाति तादृकं एव तस्य किं भवति?
(i) मनादिकं
(ii) प्राणादिकं
(ii) चित्तादिकं
(iv) तेजादिकं
उत्तरम्:
(iii) चित्तादिकं

6. ‘कः + च’ अत्र सन्धियुक्तपदम् अस्ति
(i) कश्च
(ii) कःच
(iii) कस्य
(iv) कञ्च
उत्तरम्:
(i) कश्च

7. ‘तन्मनो’ इति पदस्य सन्धिविच्छेदः अस्ति
(i) तन् + मनो
(ii) तत् + मनो
(iii) तत + मनो
(iv) तन्न + मनो
उत्तरम्:
(ii) तत् + मनो

8. ‘श्रोतुम्’ इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति?
(i) तुम्
(ii) ठक्
(iii) तुमुन्
(iv) मतुप्
उत्तरम्:
(iii) तुमुन्

9. ‘घृतः’ इति पदस्य किं पर्यायपदम्?
(i) दनः
(ii) अशिष्ठः
(iii) अणिमाः
(iv) सर्पिः
उत्तरम्:
(iv) सर्पिः

10. ‘वत्स! किं अद्य त्वया प्रष्टव्यम् अस्ति।’ इति वाक्ये अव्ययपदम् अस्ति
(i) त्वया
(ii) अद्य
(iii) अस्ति
(iv) किम्
उत्तरम्:
(ii) अद्य

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योग्यताविस्तारः

यह पाठ छान्दोग्योपनिषद् के छठे अध्याय के पञ्चम खण्ड पर आधारित है। इसमें मन, प्राण तथा वाक् (वाणी) के संदर्भ में रोचक विवरण प्रस्तुत किया गया है। उपनिषद् के गूढ़ प्रसंग को बोधगम्य बनाने के उद्देश्य से इसे आरुणि एवं श्वेतकेतु के संवादरूप में प्रस्तुत किया गया है। आर्ष-परंपरा में ज्ञान-प्राप्ति के तीन उपाय बताए गए हैं जिनमें परिप्रश्न भी एक है। यहाँ गुरुसेवापरायण शिष्य वाणी, मन तथा प्राण के विषय में प्रश्न पूछता है और आचार्य उन प्रश्नों के उत्तर देते हैं।

ग्रन्थ परिचय छान्दोग्योपनिषद् उपनिषत्साहित्य का प्राचीन एवं प्रसिद्ध ग्रन्थ है। यह सामवेद के उपनिषद् ब्राह्मण का मुख्य भाग है। इसकी वर्णन पद्धति अत्यधिक वैज्ञानिक और युक्तिसंगत है। इसमें आत्मज्ञान के साथ-साथ उपयोगी कार्यों और उपासनाओं का सम्यक् वर्णन हुआ है। छान्दोग्योपनिषद् आठ अध्यायों में विभक्त है। इसके छठे अध्याय में ‘तत्त्वमसि’ का विस्तार से विवेचन प्राप्त होता है।

भावविस्तारः

आरुणि अपने पुत्र श्वेतकेतु को उपदेश देते हैं कि खाया हुआ अन्न तीन प्रकार का होता है। उसका स्थिरतम भाग मल होता है, मध्यम मांस होता है और सबसे लघुतम मन होता है। पिया हुआ जल भी तीन प्रकार का होता है उसका स्थविष्ठ भाग मूत्र होता है, मध्यभाग लोहित (रक्त) होता है और अणिष्ठ भाग प्राण होता है। भोजन से प्राप्त तेज भी तीन तरह का होता है उसका स्थविष्ठ भाग अस्थि होता है, मध्यम भाग मज्जा (चर्बी) होती है और जो लघुतम भाग है वह वाणी होती है।

जो खाया जाता है वह अन्न है। अन्न ही निश्चित रूप से मन है। न्याय और सत्य से अर्जित किया हुआ अन्न सात्विक होता है। उसे खाने से मन भी सात्विक होता है। दूषित भावना और अन्याय से अर्जित अन्न तामस होता है। कथ्य का सारांश यह है कि सात्विक भोजन से मन सात्विक होता है। राजसी भोजन से मन राजस होता है और तामस भोजन से मन की प्रवृत्ति भी तामसी हो जाती है।

इस संसार में जल ही जीवन है और प्राण जलमय होता है। तैल (तेल), घृत आदि के भक्षण से वाणी विशद् होती है और भाषणादि कार्यों में सामर्थ्य की वृद्धि करती है। इसलिए वाणी को तेजोमयी कहा जाता है। छान्दोग्योपनिषद् के अनुसार मन अन्नमय है, प्राण जलमय है और वाणी तेजोमयी है।

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भाषिकविस्तारः
1. मयट् प्रत्यय प्राचुर्य के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
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2. मयट् प्रत्यय का प्रयोग विकार अर्थ में भी किया जाता है।
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3. जल को जीवन कहा गया है। ‘जीवयति लोकान् जलम्’ यह पञ्चभूतों के अन्तर्गत भूतविशेष है। इसके पर्यायवाची शब्द हैं
वारिपानीयम्, उदकम्, उदम्, सलिलम्, तोयम्, नीरम्, अम्बु, अम्भस्, पयस् आदि। जल की उपयोगिता के विषय में निम्नलिखित श्लोक द्रष्टव्य है

पानीयं प्राणिनां प्राणस्तदायत्वं हि जीवनम्।
तोयाभावे पिपासातः क्षणात् प्राणैः विमुच्यते ॥

श्लोक का अर्थ-अर्थात् पानी प्राणियों के जीवन का आधार है। वह जीवन धारण करने वाला है। जल के अभाव में प्यास से व्याकुल मनुष्य क्षण में ही प्राण त्याग देता है।

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HBSE 9th Class Sanskrit 11 वामनःप्राणस्वरूपम् Important Questions and Answers

वामनःप्राणस्वरूपम् नाट्यांशों के सप्रसंग हिन्दी सरलार्थ एवं भावार्थ

1. श्वेतकेतुः – भगवन् ! श्वेतकेतुरहं वन्दे।
आरुणिः – वत्स! चिरञ्जीव।
श्वेतकेतुः – भगवन् ! किञ्चित्प्रष्टुमिच्छामि।
आरुणिः – वत्स! किमद्य त्वया प्रष्टव्यमस्ति?
श्वेतकेतुः – भगवन् ! ज्ञातुम् इच्छामि यत् किमिदं मनः?
आरुणिः – वत्स! अशितस्यान्नस्य योऽणिष्ठः तन्मनः?
श्वेतकेतुः – कश्च प्राणः?
आरुणिः – पीतानाम् अपां योऽणिष्ठः स प्राणः।
श्वेतकेतुः भगवन्! का इयं वाक्?
आरुणिः – वत्स! अशितस्य तेजसा योऽणिष्ठः सा वाक् । सौम्य! मनः अन्नमयं, प्राणः आपोमयः वाक् च तेजोमयी भवति इत्यप्यवधार्यम्।
श्वेतकेतुः – भगवन् ! भूय एव मां विज्ञापयतु।
आरुणिः – सौम्य! सावधानं शृणु। मथ्यमानस्य दध्नः योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति, अर्धविरामः। तत्सर्पिः भवति।
श्वेतकेतुः – भगवन् ! भवता घृतोत्पत्तिरहस्यम् व्याख्यातम्। भूयोऽपि श्रोतुमिच्छामि।

शब्दार्थ-वन्दे = प्रणाम करता हूँ। चिरञ्जीव = तुम दीर्घायु हो। प्रष्टव्यमस्ति = पूछने योग्य। प्रष्टुम् = पूछने के लिए। अशितस्य = खाए हुए का। अन्नस्य = भोजन के। योऽणिष्ठः = अत्यन्त लघु। पीतानाम् = पिए हुए के। अपां = जलों का। वाक् = वाणी। अन्नमयं = अन्न से निर्मित। आपोमयः = जल में परिणत। तेजोमयी = तेजस्वी, प्रभावशाली। अवधार्यम् = समझने योग्य। भूय = पुनः। विज्ञापयतु = समझाइए। दध्नः = दही के। समुदीषति = ऊपर उठता है। तत्सर्पिः (तत् + सर्पिः) = वह घी।

प्रसंग प्रस्तुत संवाद संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘वाङ्मनःप्राणस्वरूपम्’ में से उद्धृत है। इस पाठ का संकलन ‘छान्दोग्योपनिषद्’ के छठे अध्याय से किया गया है।

सन्दर्भ-निर्देश इस संवाद में आरुणि अपने शिष्य श्वेतकेतु को मन, वाणी एवं प्राण के विषय बताते हुए कहते हैं कि

सरलार्थ
श्वेतकेतु – हे भगवन् ! मैं श्वेतकेतु प्रणाम करता हूँ।
आरुाण – हे पुत्र! दीर्घायु हो।
श्वेतकेतु – भगवन् ! कुछ पूछना चाहता हूँ।
आरुणि – हे पुत्र! तुम्हें आज क्या पूछना है?
श्वेतकेतु – हे भगवन्! मैं पूछना चाहता हूँ कि यह मन क्या है?
आरुणि – हे पुत्र! पूर्णतः खाए हुए अन्न का सबसे छोटा भाग मन होता है।
श्वेतकेतु – और प्राण क्या है?
आरुणि – पिए गए तरल द्रव्यों का सबसे छोटा भाग प्राण कहलाता है।
श्वेतकेतु – हे भगवन् ! वाणी क्या है?
आरुणि – हे पुत्र! ग्रहण की गई ऊर्जा का जो सबसे छोटा भाग है, वह वाणी है। हे सौम्य! मन अन्नमय, प्राण जलमय तथा वाणी तेजोमय है यह भी समझ लेना चाहिए।
श्वेतकेतु – हे भगवन् ! आप मुझे पुनः समझाइए।
आरुणि – हे सौम्य! ध्यानपूर्वक सुनो! मथे जाते हुए दही की अणिमा (मलाई) ऊपर तैरने लगती है। उसका घी बन जाता है।
श्वेतकेतु – हे भगवन्! आपने तो घी की उत्पत्ति का रहस्य समझा दिया, मैं और भी सुनना चाहता हूँ।

भावार्थ खाए हुए अन्न का सबसे छोटा भाग मन है, पिए गए तरल पदार्थों का सबसे छोटा भाग प्राण है तथा ग्रहण की गई ऊर्जा का सबसे छोटा भाग वाणी है।

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

2. आरुणिः – एवमेव सौम्य! अश्यमानस्य अन्नस्य योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति। तन्मनो भवति। अवगतं न वा?
श्वेतकेतुः – सम्यगवगतं भगवन्! आरुणिः वत्स! पीयमानानाम् अपां योऽणिमा स ऊर्ध्वः समुदीषति स एव प्राणो भवति।
श्वेतकेतुः – भगवन् ! वाचमपि विज्ञापयतु।
आरुणिः – सौम्य! अश्यमानस्य तेजसो योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति। सा खलु वाग्भवति। वत्स! उपदेशान्ते भूयोऽपि त्वां विज्ञापयितुमिच्छामि यत्, अन्नमयं भवति मनः, आपोमयो भवति प्राणाः तेजोमयी च भवति वागिति। किञ्च यादृशमन्नादिकं गृह्णाति मानवस्तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवतीति मदुपदेशसारः। वत्स! एतत्सर्वं हृदयेन अवधारय।
श्वेतकेतुः – यदाज्ञापयति भगवन् । एष प्रणमामि।
आरुणिः – वत्स! चिरञ्जीव । तेजस्वि नौ अधीतम् अस्तु।
(आवयोः अधीतम् तेजस्वि अस्तु)।

शब्दार्थ-अश्यमानस्य = खाए जाते हुए। अवगतं = समझ गए। सम्यक् = अच्छी प्रकार से। पीयमानानाम् = पिए जाते हुए। किञ्च = इसके अतिरिक्त। चित्तादिकं = मन, बुद्धि और अहंकार आदि। मदुपदेशसारः = मेरे उपदेश का सार। हृदयेन = हृदय

में, चेतना में। अवधारय = धारण कर लो। यदाज्ञापयति = आज्ञा देते हैं। तेजस्वि = तेजस्विता से युक्त । अधीतम् = पढ़ा हुआ। अस्तु = हो।

प्रसंग-प्रस्तुत संवाद संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘वाङ्मनःप्राणस्वरूपम्’ में से उद्धृत है। इस पाठ का संकलन ‘छान्दोग्योपनिषद्’ के छठे अध्याय से किया गया है।

सन्दर्भ निर्देश-प्रस्तुत संवाद में बताया गया है कि खाए, पिए एवं शरीर में एकत्रित किए गए ऊर्जा का सूक्ष्म भाग ही क्रमशः मन, प्राण एवं वाणी हैं।
सरलार्थ
आरुणि – हे सौम्य! खाए जाते हुए अन्न की अणिमा मन बन जाती है। समझ गए या नहीं?
श्वेतकेतु – हे भगवन्! भली-भाँति समझ गया हूँ!
आरुणि – हे पुत्र! पिए जाते हुए जल की अणिमा प्राण बन जाती है।
श्वेतकेतु – हे भगवन् ! वाणी के विषय में भी समझाइए।
आरुणि – हे सौम्य! शरीर द्वारा ग्रहण किए गए तेज (ऊर्जा) की अणिमा वाणी बन जाती है। हे पुत्र! उपदेश के अन्त में मैं तुम्हें फिर से वही समझाना चाहता हूँ कि अन्न का सार तत्त्व मन, जल का प्राण तथा तेज का वाणी है। इसके अतिरिक्त मेरे उपदेश का सार यही है कि मनुष्य जैसा अन्न ग्रहण करता है, उसका मन, बुद्धि और चित्त (अहंकार) वैसा ही बन जाता है। हे पुत्र! इसको हृदय से धारण कर लो।
श्वेतकेतु – जैसी आपकी आज्ञा भगवन्! मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
आरुणि – हे पुत्र! दीर्घायु हो, तुम्हारा अध्ययन (पढ़ाई) तेजस्विता से युक्त हो।

भावार्थ-मनुष्य जिस प्रकार का अन्न खाता है, उसका मन, बुद्धि एवं विचार वैसा ही बनता है। यदि वह सात्विक अन्न खाता है तो उसका मन, बुद्धि एवं विचार सात्विक होगा। यदि वह तामसिक अन्न खाता है तो उसका मन, बुद्धि एवं विचार तामसिक होगा।

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अभ्यासः
1. एकपदेन उत्तरं लिखत
(एक पद में उत्तर लिखिए)
(क) अन्नस्य कीदृशः भागः मनः?
(ख) मथ्यमानय दध्नः अणिष्ठः भागः किं भवति?
(ग) मनः कीदृशं भवति?
(घ) तेजोमयी का भवति?
(ङ) पाठेऽस्मिन् आरुणिः कम् उपदिशति?
(च) “वत्स! चिरञ्जीव” इति कः वदति?
(छ) अयं पाठः कस्मात् उपनिषदः संगृहीतः?
उत्तराणि:
(क) अशितस्यान्नस्य,
(ख) योऽणिष्ठः,
(ग) सर्पिः,
(घ) अन्नमयः,
(ङ) वाणी इति,
(च) आरुणिः,
(छ) छान्दोग्योपनिषद्।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानामुत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए)
(क) श्वेतकेतुः सर्वप्रथमम् आरुणिं कस्य स्वरूपस्य विषये पृच्छति?
(ख) आरुणिः प्राणस्वरूपं कथं निरूपयति?
(ग) मानवानां चेतांसि कीदृशानि भवन्ति?
(घ) सर्पिः किं भवति?
(ङ) आरुणेः मतानुसारं मनः कीदृशं भवति?
उत्तराणि:
(क) श्वेतकेतुः सर्वप्रथमम् आरुणिं मनसः स्वरूपस्य विषये पृच्छति।
(ख) आरुणिः प्राणस्वरूपविषये कथयति ‘पीतानाम् अपां योऽणिष्ठः स प्राणः’ इति।
(ग) यादृशमन्नादिकं गृह्णाति मानवस्तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवतीति।
(घ) मथ्यमानस्य दध्नः योऽणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति, तत्सर्पिः भवति।
(ङ) आरुणेः मतानुसारं मनः अन्नमयं भवति।

3. (क) ‘अ’ स्तम्भस्य पदानि ‘ब’ स्तम्भेन दत्तैः पदैः सह यथायोग्यं योजयत
(स्तम्भ ‘अ’ के शब्दों का ‘ब’ स्तम्भ में दिए गए शब्दों के साथ मिलान कीजिए)
‘अ’ – ‘ब’
मनः – अन्नमयम्
प्राणः – तेजोमयी
वाक् – आपोमयः
उत्तराणि:
(क) मनः (1) अन्नमयम्
(ख) प्राणः (3) आपोमयः
(ग) वाक् (2) तेजोमयी

(ख) अधोलिखितानां पदानां विलोमपदं पाठात् चित्वा लिखत
(निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द पाठ से चुनकर लिखिए)
(i) गरिष्ठः
(ii) अधः
(ii) एकवारम्
(iv) अनवधीतम्
(v) किञ्चित्
उत्तराणि:
(i) गरिष्ठः – अणिष्ठः
(ii) अधः – ऊर्ध्वम्
(iii) एकवारम् – भूयः
(iv) अनवधीतम् – अवधीतम्
(v) किञ्चित् – सर्वम्

4. उदाहरणमनुसृत्य निम्नलिखितेषु क्रियापदेषु ‘तुमुन्’ प्रत्ययं योजयित्वा पदनिर्माणं कुरुत
(उदाहरण अनुसार निम्नलिखित क्रिया शब्दों में ‘तुमुन्’ प्रत्यय जोड़कर शब्द निर्माण कीजिए)
प्रच्छ + तुमुन् = प्रष्टुम्
(क) श्रु + तुमुन् = …………………….
(ख) वन्द् + तुमुन् = …………………….
(ग) पठ् + तुमुन् = …………………….
(घ) कृ + तुमुन् = …………………….
(ङ) वि + ज्ञा + तुमुन् = …………………….
(च) वि + आ + ख्या + तुमुन् = …………………….
उत्तराणि:
(क) श्रु +तुमुन् = श्रोतुम्।
(ख) वन्द् +तुमुन् = वन्दितुम्
(ग) पठ् + तुमुन् = पठितुम्।
(घ) कृ + तुमुन् = कर्तुम्।
(ङ) वि + ज्ञा + तुमुन् = विज्ञातुम्।
(च) वि + आ + ख्या + तुमुन् = व्याख्यातुम् ।

5. निर्देशानुसार रिक्तस्थानानि पूरयत
(निर्देश के अनुसार रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए)
(क) अहं किञ्चित् प्रष्टुम् ……………. । (इच्छ् – लट्लकारे)
(ख) मनः अन्नमयं ……………। (भू – लट्लकारे) ।
(ग) सावधानं ………………। (श्रु – लोट्लकारे)
(घ) तेजस्वि नौ अधीतम् …………….। (अस् – लोट्लकारे)
(ङ) श्वेतकेतुः आरुणेः शिष्यः …………………। (अस् – लङ्लकारे)
उत्तराणि:
(क) अहं किञ्चित् प्रष्टुम् इच्छामि।
(ख) मनः अन्नमयं भवति।
(ग) सावधानं श्रृणु।
(घ) तेजस्वि नौ अधीतम् अस्तु।
(ङ) श्वेतकेतुः आरुणेः शिष्यः आसीत्।

(अ) उदाहरणमनुसृत्य वाक्यानि रचयत
(उदाहरण के अनुसार वाक्य की रचना कीजिए)
यथा-अहं स्वदेशं सेवितुम् इच्छामि।।
(क) …………………. उपदिशामि।
(ख) …………………. प्रणमामि।
(ग) …………………. आज्ञापयामि।
(घ) …………………. पृच्छामि।
(ङ) …………………. अवगच्छामि।
उत्तराणि:
(क) अहं शिष्यं उपदिशामि।
(ख) अहं जनकं प्रणमामि।
(ग) अहं सेवकं फलम् आनेतुम् आज्ञापयामि।।
(घ) अहं गुरुं प्रश्नं पृच्छामि।
(ङ) अहं भवतः अभिप्रायम् अवगच्छामि।

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

6. (क) सन्धिं कुरुत
(सन्धि कीजिए)
(क) अशितस्य + अन्नस्य = …………………
(ख) इति + अपि + अवधार्यम् = …………………
(ग) का + इयम् = …………………
(घ) नौ + अधीतम् = …………………
(ङ) भवति + इति = …………………
उत्तराणि:
(क) अशितस्य + अन्नस्य = अशितस्यान्नस्य
(ख) इति + अपि + अवधार्यम् = इत्यप्यवधार्यम्
(ग) का + इयम् = केयम्
(घ) नौ + अधीतम् = नावधीतम्
(ङ) भवति + इति = भवतीति

(ख) स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(स्थूल पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(i) मध्यमानस्य दध्नः अणिमा ऊर्ध्वं समुदीषति।
(ii) भवता घृतोत्पत्तिरहस्यं व्याख्यातम्।
(iii) आरुणिम् उपगम्य श्वेतकेतुः अभिवादयति।
(iv) श्वेतकेतुः वाग्विषये पृच्छति।
उत्तराणि:
(i) कस्य दध्नः अणिमा ऊर्ध्वं समुदीषति?
(ii) केन घृतोत्पत्तिरहस्यं व्याख्यातम्?
(iii) आरुणिम् उपगम्य कः अभिवादयति?
(iv) श्वेतकेतुः कस्यविषये पृच्छति?

7. पाठस्य सारांशं पञ्चवाक्यैः लिखत।
(पाठ के सारांश को पाँच वाक्यों में लिखिए)
उत्तराणि:
(1) मनः अन्नमयं, प्राणः आपोमयः वाक् च तेजोमयी भवति।
(2) जलम् एव जीवनं भवति।
(3) अश्यमानस्य तेजसः यः अणिमा, स ऊर्ध्वः समुदीषति।
(4) सा खलु वाग्भवति।
(5) यादृशमन्नादिकं मानवः गृह्णाति तादृशमेव तस्य चित्तादिकं भवति।

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 12 वाडमनःप्राणस्वरूपम्

वामनःप्राणस्वरूपम् (वाणी, मन तथा प्राण का स्वरूप) Summary in Hindi

वामनःप्राणस्वरूपम् पाठ-परिचय

प्रस्तुत पाठ छान्दोग्योपनिषद के छठे अध्याय के पञ्चम खण्ड पर आधारित है। उपनिषत्साहित्य के प्रमुख ग्रन्थों में छान्दोग्य उपनिषद् का प्रमुख स्थान है। यह उपनिषद् सामवेद पर आधारित है। इसकी वर्णन-शैली अत्यधिक वैज्ञानिक और युक्तिसंगत है। इसमें आत्मज्ञान के साथ-साथ उपयोगी कार्यों और उपासनाओं का सम्यक् वर्णन हुआ है। यह उपनिषद् आठ अध्यायों में विभक्त है। उपनिषदों का महावाक्य ‘तत्त्वमसि’ इसी उपनिषद् के षष्ठ अध्याय पर आधारित है।

प्रस्तुत पाठ में वाणी, मन तथा प्राण के सन्दर्भ में रोचक विवरण प्रस्तुत किया गया है। वस्तुतः ये तीनों उपनिषद् के गूढ़ तत्त्व हैं। इन तत्त्वों को बोधगम्य बनाने के उद्देश्य से इसे आरुणि एवं श्वेतकेतु के संवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आर्ष परम्परा में ज्ञान-प्राप्ति के तीन उपाय बताए गए हैं, जिनमें परिप्रश्न भी एक है। यहाँ गुरु-सेवा-परायण शिष्य वाणी, मन तथा प्राण के विषय में प्रश्न पूछता है और आचार्य उन प्रश्नों के उत्तर देते हैं।

आरुणि श्वेतकेतु को बताते हैं कि खाया हुआ अन्न तीन रूपों में बँट जाता है। उसका स्थिरतम भाग मल, मध्यम भाग माँस और सबसे लघुतम मन होता है। पिया हुआ जल भी तीन रूपों में विभक्त होता है-मूत्र, रक्त और प्राण। इसी प्रकार भोजन से प्राप्त तेज भी अस्थि, मज्जा (चर्बी) और वाणी तीन प्रकार का होता है। अन्त में बताया गया है कि सात्विक भोजन से मन सात्विक होता है। इस संसार में जल ही जीवन है और प्राण जलमय होता है। इस पाठ का सारांश -यह है कि वाणी तेजोमयी है, मन अन्नमय है और प्राण जलमय है।

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HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System

Haryana State Board HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System

HBSE 8th Class Civics Understanding Our Criminal Justice System Textbook Questions and Answers

Class 8 Civics Chapter 6 HBSE Question 1.
In a town called Peace Land, the supporters of the Fiesta football team learn that the supporters of the Jubilee football team in the nearby city about 40 km away have damaged the ground on which the final between both teams is to be held the following day. A crowd of Fiesta fans armed with deadly weapons attacks the homes of the supporters of the Jubilee football team in the town. In the attack, 10 men are killed, 5 women are gravely hurt, many homes are destroyed and over 50 people injured. Imagine that you and your classmates are now part of the criminal justice system.
First divide the class into the following four groups of person:
1. Police.
2. Public Prosecutor.
3. Defence Lawyer.
4. Judge.
The column on the right provides a list of functions. Match these with the roles that are listed on the left. Have each group pick the functions it needs to perform to bring justice.

RolesFunction
Policehear the witnesses record the statements of witnesses
Public Prosecutorcross examine the witnesses take photographs of burnt homes
Defence Lawyerrecord the evidence arrest the Fiesta Fans write the judgement argue the case for the victims
Judgedecide for how many years the accused will be put in jail examine the witness in court pass the judgement get the assaulted women medically examined conduct a fair trial meet the accused person.

Match the above columns correctly.
Answer:

RolesFunctions
Policetake photographs of burnt houses.
Policeget the assaulted women medically examined
Policerecord the evidence
Policemeet the accused persons.
Policearrest the Fiesta fans
Judgehear the witnesses
Judgerecord the statement of witness.
Defence LawyerCross examine the witness
Public Prosecutorargue the case for victims
Judgewrites the judgement
Judgedecide for how many years the accused will be put in jail.
Judgepass the judgement.
Judgeconduct a fair trial.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System

Understanding Our Criminal Justice System Class 8 HBSE Question 2.
Now take the same situation but ask one student who is a supporter of the Fiesta club to perform all the functions listed above.
Answer:
Self-activity.

Understanding Our Criminal Justice System HBSE Question 3.
Do you think the victims can get justice if only one person performed all the functions of the criminal justice system? Why not?
Answer:
The victims cannot get justice if one person performed all of the functions of the criminal justice system. Every function requires special skill to perform the task and also if one person performs all the functions, there is least possibility of cross-check. The police receives a complaint, the defence lawyer tries to defind the accused, the judge gives decision in the court and decides the punishment for the culprit. If only one person performed all the functions of the criminal justice system, that will lead to end of democracy.

Understanding Our Criminal Justice System Class 8 Notes HBSE Question 4.
State two reasons why do you believe that different persons need to play different roles as part of the criminal justice system.
Answer:
The two reasons to support the view that different persons need to play different roles as part of the criminal justice system are:
(i) The police and the judges are on one side and the Public Prosecutor and the Defence Lawyers on the other. This keeps a balance between two sides of the judicial edifice and ensures an impartial and fair justice.

(ii) If the duty of charging a person and punishing him is given to a single person, it would be the end of a democracy. In such a situation, the Fundamental Rights will have no meaning.

HBSE 8th Class Civics Understanding Our Criminal Justice System Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Understanding Our Criminal Justice System Class 8 Questions And Answers Question 1.
Who are the four key players in the criminal justice system?
Answer:
(i) The Police
(ii) the Public Prosecutor
(iii) the Defence lawyer
(iv) the Judge.

Class 8 Civics Chapter 6 Solutions HBSE Question 2.
What is done by police under investigation?
Answer:
A police records statements of witnesses and collects different kinds of evidence under investigation.

Class 8 Civics Ch 6 HBSE Question 3.
Who decides whether a person is guilty or innocent?
Answer:
The judge decides whether a person is guilty or innocent.

Understanding Our Criminal Justice System Notes HBSE 8th Class Question 4.
What does Article 21 of the Constitution state?
Answer:
Article 21 of the Constitution that guarantees the Right to Life that a person’s life or liberty can be taken away only be following a just and reasonable legal procedure.

Class 8 Civics Understanding Our Criminal Justice System HBSE Question 5.
When does the role of the public prosecutor begin?
Answer:
The role of the public prosecutor begins once the police has conducted the investigation and filed the charge sheet in the court.

Civics Class 8 Chapter 6 HBSE Question 6.
What is an FIR (First Information Report)?
Answer:
The First Information Report is the information that a police officer receives about the commission of a crime.

Haryana Board Class 8 Chapter 6 Question 7.
Who is a Public Prosecutor?
Answer:
Public Prosecutor is a gazetted officer who is appointed by the state to help in the prosecution of offenders to keep the society free from crimes.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System

Short Answer Type Questions

Class 8 Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System HBSE Question 1.
Write three functions of the judge.
Answer:
The functions of the judge are:
(а) The judge hears all the witnesses and any other evidence presented by the prosecution and defence.
(B) The judge decides whether the person is guilty or innocent on the basis of the evidence presented and in accordance with the law.
(c) The judge pronounces the sentence for the accused. He may sei die person to jail or impose a fine or both, depending on what the law prescribes. .

Understanding Our Criminal Justice System Question Answer HBSE 8th Class Question 2.
What are the functions of the defence lawyer?
Answer:
The functions of the defence lawyer are:
(a) He gets a copy of the chargesheet and statements of the witnesses and he questions and cross examines the witnesses of the prosecution.
(B) He confirms that a fair trial is conducted.
(c) He presents witnesses in the defence of the accused.
(d) He collects and produces strong evidences to defend his client and to set him free.

Class 8th Civics Chapter 6 HBSE Question 3.
Write three salient features of an FIR.
Answer:
(a) An FIR must be in writing, duly signed, and the copy must be handed over to the informant.
(b) An FIR must contain the place, date, time and an elaborate description of the incident.
(c) There is no fixed time for filing an FIR but is best if it is filed at the earliest, soon after the incident as the delay may prove fatal for the victim.

Long Answer Type Questions

Chapter 6 Civics Class 8 HBSE Question 1.
What are the Fundamental Rights guaranteed to every arrested person under Article 22 of the constitution?
Answer:
Article 22 of the constitution and criminal law guarantee to every arrested person the following Fundamental Rights:
(i) The right to be informed at the time of arrest of the offence for which the person is being arrested.
(ii) The right to be presented before a magistrate with in 24 hours of arrest.
(iii) The right not to be ill-treated or tortured during arrest or in custody.
(iv) Confessions made in police custody can not be used as evidence against the accused.
(v) A boy under 15 years of age and women cannot be called to the police station only for questioning.

Criminal Justice System Class 8 HBSE Question 2.
What are the various preconditions of a fair trial?
Answer:
The following are the preconditions of a fair trial:
(i) The FIR (First Information Report) of the complainant should be registered at the Police Station and its copy should be given to every accused person.
(ii) A person can be arrested only with the permission of the court and on some valid ground.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 6 Understanding Our Criminal Justice System

Understanding Our Criminal Justice System Class 8  HBSE Notes

  • Accused: This refers to the person who is tried by a court for a crime.
  • Cognizable: This refers to an offence for which the police may arrest a person without the permission of the court.
  • Cross-examine: This refers to the questioning of a witness who has already been examined by the opposing side in order to determine the veracity of his/her testimony.
  • Detention: This refers to the act of being kept in illegal custody of the police.
  • Impartial: The act of being fair or just and not favouring one side over another.
  • Offence: Any act that the law defines as a crime.
  • To be charged of a crime: This refers to the trial judge informing the accused, in writing, of the offence for which he/she will face trial.
  • Witness: This refers to the person who is called upon in court to provide a first-hand account of what he/she has seen, heard or knows.

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HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation

Haryana State Board HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation

HBSE 8th Class Civics Confronting Marginalisation Textbook Questions and Answers

Confronting Marginalisation Class 8 HBSE Question 1.
List two fundamental rights in the Constitution that Dalits can draw upon to insist that they are treated with dignity and equals. Re-read the Fundamental Rights listed on page 14 to help you answer this question.
Answer:
(a) Right to Equality and
(b) Right to Freedom.

Confronting Marginalisation Class 8 Notes HBSE Question 2.
Re-read the story on Rathnam as well as the provisions of the 1989 scheduled caste and scheduled tribes prevention of Atrocities Act. Now list one reason why you think he used this law to file a complaint.
Answer:
Rathnam sought the support of law, filing his complaint under the Atrocities Act to protest against the domination and violence of
the powerful castes in his village. He used this as it was framed in response to demands made by Dalits and others so that the government may take seriously.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation

Confronting Marginalisation Class 8 Questions And Answers HBSE Question 3.
Why do Adivasi activists including C.K. Janu believe that Adivasis can also use this 1989 Act to fight against dispossession? Is there anything specific in the provisions of the Act that allows her to believe this?
Answer:
Being an Adivasi Activist, C.K. Janu is right in believing that they can use the 1989 Act to fight against dispossession. This is because it lists actions that dispossess Dalits and Adivasis of their meagre resources or which force them into performing labour of slavery.
Thus, they can use this Act since it seems to punish anyone who wrongfully occupies or cultivates any land owned by, or alloted to, a member of a scheduled caste or a scheduled tribe or gets the land alloted to him transferred.

Confronting Marginalisation HBSE Class 8 Question 4.
The poems and the song in this unit allow you to see the range of ways in which individuals and communities express their opinion, their anger and their sorrow. In class do the following two exercises:
(a) Bring to class a poem that discurses a social issue. Share this with your classmates. Work in small groups with two or more poems to discuss their meaning as well as what the poet is trying to communicate.

(b) Identify a marginalised community. Write a poem, or song, or draw a poster etc., to express your feelings as a member of this community.
Answer:

(c) For example:
A poem by Soyrabai: (Refer Pg. 96 of your Social Science and Political Life-III text book). (Read the poem and then the summarised view below.)

Soyrabai who herself belongs to the Mahar caste through her esteemed poem questions about the idea or the criterion behind being called a pure person. She argues that every human being is born in the same way and is equal. She cannot understand what makes one body less or more pure than the other. Pollution, a basic idea of casteism should not be the tool for discrimination or to separate or deny people any access to spaces, work, knowledge or dignity. According to her, it does not occur through nature of work but through one’s clear ethnicity and beliefs.

HBSE 8th Class Civics Confronting Marginalisation Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Class 8 Civics Chapter 8 Questions And Answers HBSE  Question 1.
Which Article states abolishment of untouchability?
Answer:
Article 17.

Class 8 Confronting Marginalisation HBSE Question 2.
What is the literal meaning of Dalit?
Answer:
The term ‘Dalit’ literally means broken.

Question 3.
Which Article states “no discrimination”?
Answer:
Article 15.

Question 4.
Name a policy that promotes justice?
Answer:
Reservation.

Question 5.
When was the Arocities Act passed?
Answer:
1989.

Question 6.
Name a bhakti saint who criticized casteism.
Answer:
Kabir.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation

Question 7.
In your opinion does the force put on Rathnam to perform this ritual violate his fundamental right?
Answer:
Yes, in our opinion being forced to carry out such a task in which the person has no belief is a violation of fundamental right. Right to freedom and right to equality are rights that are violated.

Short Answer Type Questions

Question 1.
What does Article 15 of the Constitution state?
Answer:
The Article 15 of the Constitution states^ that no person can be discriminated against on the basis of religion, race, caste, sex or a place of birth.

Question 2.
State one reason why you think reservations play an important role in providing social justice to Dalits and Adivasis.
Answer:
The law of reservation to Dalits and Adivasis is based on a simple argument that in a society like ours, where for centuries, sections of population have been denied opportunities to learn and to work in order to develop new skills or vocation, a democratic government thus needed to step in and assist, these socially or economically backward sections.

Question 3.
Why do you think the Dalit families were afraid of angering the powerful castes?
Answer:
The situation of fear and tension might have taken place because of the fear of undergoing starvation due to unemployment on the powerful caste’s anger. They also declared the wrath of the locality would strike them if they refused to give in.

Long Answer Type Questions

Question 1.
Article 17 of the Constitution states that untouchability has been abolished. What does this mean?
Answer:
Untouchability hps been abolished. It means that on one can prevent Dalits from educating themselves, entering temples, using public facilities, etc. It also means that it is wrong to practise untouchability and that this practice will not be tolerated by a democratic government. Untouchability is a punishable crime now.

Question 2.
Apart from making law how does government work for the marginalised in our country?
Answer:
Government makes specific laws and policies for the marginalised in our country. There are policies or schemes that emerge through other means like setting up a committee or by undertaking a survey, etc. The government then makes an effort to promote such policies in order to give opportunities to specific groups.

Question 3.
The government operates through laws to ensure that concrete steps are taken to end inequality in the society. Mention one such law.
Answer:
One such law is the reservation policy. This law reserved seats in education and government employment for Dalits and Adivasis people. It is based on an important argument that in a society like ours where for centuries sections of the population have been denied equal opportunities to learn and work, a democratic government needs to step in and assist these section.

Question 4.
How does the reservation policy work?
Answer:
Governments across India have their own list of Scheduled Castes (or Dalits) Tribes and Backward and the more Backward castes. The Central Government too has its list. Students applying to educational institutions and those applying for posts of government are expected to furnish proof of their caste or tribal status. If a particular Dalit caste or a certain tribe is on the government list, then a candidate from that caste or tribe can avail the benefit of reservation.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation

Picture-Based Questions

(A) Look at the picture below and complete the sentences:
HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 8 Confronting Marginalisation-1
The (a) ……………… government passed the Scheduled Tribe and other (b) ………….. Forest Dwellers Act in (c) ……… , The introduction states that it shall undo (d) ………… injustices. The Act also points out that the right to forest dwellers include conservation of (e) …………. and (f) …………. .
Answer:
The (a) Central government passed the Scheduled Tribe and other (b) Traditiona Forest Dwellers Act in (c) 2006. The introduction states that it shall undo (d) historical injustices. The Act also points out that the right to forest dwellers include conservation of (e) Forests and (f) biodiversity.

Confronting Marginalisation Class 8  HBSE Notes

  • Assertive: Groups of people that can express their views strongly.
  • Confront: To come face-to-face or to challenge someone or something. For example: The groups challenging marginalisation.
  • Delusion: A false impression.
  • Dispossessed: To have to give up ownership or to give up authority.
  • Invoking: Imploring, appealing by authority.
  • Morally reprehensible: An act that violates all norms of decency and dignity that a society believes in. It usually refers to a hideous and repugnant act that goes against all values that a society has accepted.
  • Policy: A stated course of action that provides direction for future, sets goals to be achieved or lays out
  • principles or guidelines to be followed and acted upon.

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HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation

Haryana State Board HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation

HBSE 8th Class Civics Understanding Marginalisation Textbook Questions and Answers

Understanding Marginalisation Class 8 Questions And Answers HBSE Question 1.
Write in your own words two or more sentences of what you, understand by the word ‘marginalisation’.
Answer:
‘Marginalisation’ is a social process by which certain sections of the society are confined to lower social standing. It results, to certain minority (such as Muslims) or Dalits (particularly among the Hindus) in having a low social status and not having equal access to education and other resources.

Understanding Marginalisation Class 8 HBSE Question 2.
List two reasons why Adivasis are becoming increasingly marginalised.
Answer:
Adivasis are becoming increasingly marginalised because:
(i) They are radically different from communities organised around the principle of jati-vama (castes).
(ii) Their way of life is quite different from the majority of people. They wear colourful costumes, strange type of head gears and have different cultures. They like to live in seclusion.

Class 8 Civics Chapter 7 HBSE Question 3.
Write one reason why you think the constitution’s safeguards to protect minority communities is very important.
Answer:
The Constitution safeguards to protect minority communities to protect India’s cultural diversity and promote equality as well as justice.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation

Class 8 Civics Chapter 7 Question Answer HBSE Question 4.
Reread the section on Minorities and Marginalisation. What do you understand by the term minority?
Answer:
The term minority is most commonly used to refer to communities that are numerically small in relation to the rest of the population.

Class 8th Civics Chapter 7 HBSE Question 5.
You are participating in a debate where you have to provide reasons to support the following statement: ‘Muslims are a marginalised community’ using the data provided in this chapter list two reasons that you would give.
Answer:
Muslims are marginalised community because:
(i) They do not have equal access to basic amenities such as pucca house, electricity, piped water, etc.
(ii) Muslims have lowest literacy rates as compared to other religious groups of India.

Class 8 Understanding Marginalisation HBSE Question 6.
Imagine that you are watching the Republic Day parade on TV with a friend and she remarks, “Look at these tribals. They look so exotic. And they seem to be dancing all the time.”
List three things that you would tell her about the lives of Adivasis in India.
Answer:
(i) Adivasis led excluded life in different hilly and forests areas of India till the middle of the nineteenth century or the dawn of British imperialism in India.

(ii) Adivasis are not a homogeneous population. There are over 500 different Adivasi groups ‘n our country. They are particularly numerous, in states like Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh, Orissa, Gujarat, Maharashtra, Rajasthan, and in the north¬eastern states of Andhra Pradesh, Assam, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland and Tripura.

(iii) Adivasis practise ancestor worship and believes in all types of supernatural spirits like the primitive men.

Class 8 Civics Chapter 7 Solutions HBSE Question 7.
In the story board, you read about how Helen hope to make a movie on the Adivasi story. Can you help her by developing a short story on Adivasis?
Answer:
The story runs like this:
A foreign company has planned to establish a metal company in area of Adivasis. They are forced to move in very large number to various areas of India. A man and his girl friend decide to make an association. They approach to district authority, state Govt, and lastly to central government.

Under their leadership, the Adiyasis demand three things forest, water and livelihood. After a long struggle, Human Right Commission comes forward and their demands are accepted. They are handed over fairly large forest-lands, supply of water and they are given employment in companies and some newly started small scale industries etc.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation

Class 8 Chapter 7 Civics HBSE Question 8.
Would you agree with the statement that economic and social marginalisation are interlinked? Why?
Answer:
The different reports about the marginalisation point out that economic and social marginalisation are interlinked.
(i) In terms of occupation, houses, piped water, Muslims lag behind many other religious groups.

(ii) Most of the Muslims work in unorganised sector and have lower living standards than Hindus as a whole. Because of lack of education, they find it difficult to get both public as well as private sector jobs.

(iii) Since they are economically backward, they fail to attain a higher status in Indian society. Thus, economic and social marginalisation are interdependent.

HBSE 8th Class Civics Understanding Marginalisation Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Class 8 Civics Understanding Marginalisation HBSE Question 1.
Who are Adivasis?
Answer:
Adivasis literally means ‘original inhabitants’ who lived and often continue to live, in close association with forests.

Chapter 7 Civics Class 8 HBSE Question 2.
How much percent of India’s population is Adivasi?
Answer:
Around 8 percent.

Civics Chapter 7 Class 8 HBSE Question 3.
Name the important mining ana industrial centres where Adivasis are located.
Answer:
Jamshedpur, Rourkela, Bokaro and Bhilai.

Understanding Marginalisation Question Answer HBSE Question 4.
About how many Adivasi groups are there in India?
Answer:
About 500 different Adivasi groups are there in India.

Short Answer Type Questions

Class 8 Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation Question Answer HBSE Question 1.
How have Adivasis been treated by the state and private industrialists for the past 200 years.
Answer:
Adivasis have been increasingly forced through economic chagnes, forest policies and political force applied by the state and private industry. They migrated to live as worker in plantations, as construction sites, in industries and households.

Understanding Marginalisation Class 8 Notes Questions And Answers HBSE Question 2.
Why are safeguards required for minorities?
Answer:
(i) To protect minority communities against the possibility of being culturally dominated by the majority.
(ii) To protect minorities against any discrimination and disadvantage that they may face.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation

Long Answer Type Questions

Question 1.
How have the forests been important for life and development of Adivasis?
Answer:
Forests have been very important for life and development of Adivasis.
(i) Metal ores like iron and copper, gold and silver, coal and diamonds, invaluable timber, most medicinal herbs and animal products and animal themselves all come from forests.
(ii) The continuation of life depended heavily on forests, that help recharge many of India’s rivers.
(iii) Forests covered the major part of our country till the nineteenth century.

Question 2.
By whom were the following demands being made on forest land?
(a) Timber for construction of houses and railways.
(b) Forest land for mining.
(c) Reserved by government and wild life parks.
In what ways would this effect tribal people?
Answer:
(a) Timber for construction of houses demanded by companies enaged in construction, work Or by individual rich people or by joint groups or companies. Timber for railways is demanded by Central Government or by Railway Contractors.
(b) By mining companies, by industrialists or industrial companies.
(c) Ministry of Forest and Environment on behalf of government.

Question 3.
In what ways would this affect tribal people?
Answer:
These would affect life of tribal people in following ways:
(i) Tribal people will loose their land and forests.
(ii) Their lives will be disturbed as the continuation of life depends heavily on forests, that help recharge many of our country’s rivers.
(iii) The tribal people will face shortage in the availability and quality of air and water.
(iv) More than 50 percent of tribal persons have been displaced.

Picture-Based Questions

(A) Look at the pictures and answer the following questions.
HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation-1
HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation-2
Question 1.
What do the two pictures reflect?
Answer:
The two pictures reflect the traditional dresses and life-style of Adivasis.

Question 2.
What image do we get about Adivasis from the pictures?
Answer:
We come to know that Adivasis were ‘exotic’ and ‘backward’.

(B) Look at the adjoining picture of Niyamgiri Hill and answer the following questions:
HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 7 Understanding Marginalisation-3
Question 1.
Where is Niyamgiri Hill located?
Answer:
Niyamgiri Hill is located in Kalahandi district of Orissa.

Question 2.
Name the Adivasi community which inhabits this area.
Answer:
Dongarria Konds.

Question 3.
Why is Adivasi Community endangered to be displaced from here?
Answer:
Adivasi Community is endangered to be displaced from here because a major aluminium company is planing to set-up a mine and a refinery here.

Question 4.
What action has been taken by Adivasi Community against it?
Answer:
Adivasi people have strongly resisted this proposed development and have been joined by environmentalists as well. A case against the company is also pending in Supreme Court.

Understanding Marginalisation Class 8  HBSE Notes

  • Hierarchy: A graded system or arrangement of persons or things. Usually persons at the bottom of the hierarchy are those who have the least power.
  • Ghettoisation: A ghetto is an area or locality that is populated largely by members of a particular community. Ghettoisation refers to the process that leads to such a situation.
  • Mainstream: Literally this refers to the main current of a river or stream. In this chapter it is used to refer to a cultural context in which the customs and practices that are followed are those of the dominant community. Mainstream is also used to refer to those people or communities that are considered to be at the centre of a society.
  • Displaced: This, here, refers to people who are forced or compelled to move from their homes for big development projects including dams, mining etc.
  • Militarised: An area where the presence of the armed forces is considerable.
  • Malnourished: A person who does not get adequate nutrition or food.
  • Adivasis: The term adivasis, literally means ‘original in habitants’.
  • Socially Marginalised: To be forced to occupy the sides or fringes and thus not be at the centre of things or set-up.
  • Santhali: A language mainly spoken by Santhal adivasis.
  • Republic Day: It is the day (26th January) when the constitution of our country was adopted.
  • Scheduled Castes: Those dalits or damits who have been officially enlisted for special reservation and facilities so that their development may take place quickly in the society and grouped as scheduled caste.
  • Sachar Committee: The government set-up a high-level committee in 2005, that was chaired by justice Rajinder Sachar to examine status of the Muslims.
  • Tribals: Tribals are also referred as Adivasis.

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HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary

Haryana State Board HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary

HBSE 8th Class Civics Judiciary Textbook Questions and Answers

Class 8 Civics Chapter 5 HBSE Question 1.
You read that one of the main functions of the Judiciary is holding the Law and Enforcing Fundamental Rights. Why do you think an independent Judiciaiy is necessary to carryout this important function?
Answer:
An independent judiciary is necessary to carry the function of ‘upholding the law and enforcing Fundamental Rights’ so that every citizen of India can approach the Supreme Court if they believe that their Fundamental Rights have been violated.

Class 8 Civics Chapter 5 Solution HBSE Question 2.
Read the list of Fundamental Rights provided in chapter I. How do you think the Right of Constitutional Remedies connects to the idea of Judicial review?
Answer:
The Right to Constitutional Remedies and the idea of judicial review in both the cases, judiciary has the power to make amendments or corrections in the law if it believes that they are in violation of the basic structure of the constitutions. Judiciary acts as the guardian of our constitution.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary

Judiciary Class 8 Questions And Answers HBSE Question 3.
In the following illustration, fill in each tier with the judgements given by the various courts in the Sudha Goel case. Check your responses with others in class.
HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary-1
Answer:
Judgments given by various courts in the Sudha Goel case are:
(i) Lower Court: Laxman, his mother Shakuntala and his brother-in-law Subhash Chandra all the three were sentenced to death.
(ii) High Court: Laxman, Shakuntala and S ubhash Chandra were acquitted.
(iii) Supreme Court: Laxman and Shakuntala were sent to prison for life. Brother- in-law Subhash was acquitted due to lack of evidence against him.

Class 8 Civics Chapter 5 Question Answer HBSE Question 4.
Keeping the Sudha Goel case in mind, tick the sen tences that are true and correct the ones that are false.
(a) The accused took the case to the High Court because they were unhappy with the decision of the trial court.
(b) They went to the high court after Supreme Court had given its decision.
(c) If they don’t like the Supreme Court verdict, the accused can go back again to the trial court.
Answer:
(a) Correct
(b) False. They went to the High Court after the Trial Court had given its decision.
(c) False. They have to accept the Supreme Court verdict, since it is the highest court. The accused cannot go back to the Trial Court.

Class 8 Civics Chapter 5 Solutions HBSE Question 5.
Why do you think the introduction of Public Interest Litigation (PIL) in the 1980s is a significant step in ensuring access to justice for all?
Answer:
The introduction of Public Interest Litigation (PIL) in the 1980s is a significant step in ensuring access to justice for all because it allowed any individual or organisation to file a PIL in the High Court or the Supreme Court on behalf of those whose rights were being violated. The legal process was greatly simplified and even a letter or telegram addressed to the Supreme Court or the High Court could be treated as a PIL. ,

Chapter 5 Of Civics Class 8 HBSE Question 6.
Reread excerpts from the judge¬ment on the Olga Tellis vs Bombay Municipal Corporation case. Now write in your own words what the judges meant when they said that the Right to Livelihood as part of the Right to Life. .
Answer:
The Right to Livelihood is the part of the Right to Life because no person can live without the means of living. In the case of Olga Tellis vs. Bombay Municipal Corporation, the people live in slum. They have small jobs in the city and for them there is nowhere else to live. The eviction of their slum will lead to deprivation of their livelihood and consequently to the deprivation of life. Thus, it can be said that Right to Life means the need of basic requirements of livelihood, i.e., food, shelter and cloth.

Chapter 5 Civics Class 8 HBSE Question 7.
Write a story around the theme, “Justice delayed is justice denied.”
Answer:
The delay in giving justice amounts to a negation of the principle of justice.
A story around the theme runs like this, Gopal took a loan of 1,00,000 from a money-lender for the marriage of his daughter. As he was coming back, a thief snatched the bag of money from him. He screamed and luckily, the people in the locality helped him to take his bag from the thief. However, the bag first went to the police custody and the case took a long time in the court so that Gopal could not get the money on time and the marriage of his daughter was cancelled and he was also mentally harassed. Hence, it is true to say “Justice delayed is justice denied.”

Class 8 Civics Chapter 5 Questions And Answers HBSE Question 8.
Make sentences with each of the glossary words given below:
(a) Acquit
(b) To appeal
(c) Compensation
(d) Eviction
(e) Violation
Answer:
(a) Acquit: He was honorably acquitted of blame by a court martial.
(b) To appeal: Our school made efforts for fund raising for the tsunami appeal.
(c) Compensation: The court granted huge compensation to the young lady after the divorce.
(d) Eviction: Unlawful eviction and harassment is a criminal offence in the United Kingdom.
(e) Violation: Violation of traffic rules can lead to huge losses.

Class 8 Chapter 5 Civics HBSE Question 9.
The following is a poster made by the Right to Food campaign.
HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary-2
Read this poster and list the duties of the government to uphold the Right to Food. How does the phrase “Hungry stomachs, overflowing godowns! We will not accept it!” used in the poster relate to the photo essay on the Right to Food on page 61?
Answer:
The constitution of India grants the citizens the Right to live. Right to live is closely associated with the Right to Food.
The duties of the government to uphold the right to food are:
(a) to provide at least minimum food item to the people either totally free or charging very nominal cost.
(b) to check the hoarding of wheat, rice, sugar.
(c) to check unnecessary inflation in price of food items.
(d) to provide mid-day meals to the poor- children in the school.
‘Hungry stomachs, overflowing godowns’ is not at all acceptable in a civilized society. Instead, the need of the hour is Guru Nanak’s saying; “HINDI” If the hoarding of food is not discouraged, the people with hungry stomachs will attempt to commit crimes.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary

HBSE 8th Class Civics Judiciary Important Questions and Answers

Very Short Answer Type Questions

Judiciary Class 8th HBSE Question 1.
In what ways can the work of judiciary be divided?
Answer:
(a) Dispute Resolution
(b) Judicial Review
(c) Upholding the Law and Enforcing Fundamental Rights.

Class 8 Civics Chapter 5 Judiciary HBSE Question 2.
When was the Supreme Court of India established? .
Answer:
26 January, 1950.

Judiciary Chapter Class 8 HBSE Question 3.
Where is the Supreme Court of India located?
Answer:
New Delhi.

Chapter 5 Judiciary Class 8 HBSE Question 4.
Who presides over the Supreme Court?
Answer:
Chief Justice.

Class 8 Chapter 5 Civics Question Answer HBSE Question 5.
In which three Presidencies were the High Courts first established?
Answer:
(a) Calcutta (now Kolkata)
(b) Bombay (now Mumbai)
(c) Madras (now Chennai).

Short Answer Type Questions

Question 1.
What are the eligibility conditions for appointment as a judge of the High Court?
Answer:
To qualify for appointment as a judge of the High Court, the person:
• must be a citizen of India.
• should have 10 years of experience as an advocate of a High Court or two or more such courts in succession.

Question 2.
What are the functions of High Court?
Answer:
(i) The High Court issues writs for the enforcement of Fundamental Rights.
(ii) It passes rules on election petitions and other election-related disputes.
(iii) It hears appeals in both civil and criminal cases against the decisions of the subordinate courts and reviews the judgements.
(iv) It controls and superwises the working of the subordinate courts.

HBSE 8th Class Social Science Solutions Civics Chapter 5 Judiciary

Question 3.
Distinguish between Criminal Law and Civil Law.
Answer:

Criminal LawCivil Law
1. Deals with conduct or acts that the law defines as offences. For example, theft, harassing a woman to bring more dowry, murder.1. Deals with any harm or injury to rights of individuals. For example : dispute relating to sale of land, purchase of goods, rent matters, divorce cases.
2. It usually begins with the lodging of an FIR (First Information Report) with the police who investigates the crime after which a case is filed in court.2. A petition has to be filed before the relevant court by the affected party only.
3. If found guilty, the accused can be sent to jail and also fined.3. The court gives the specific relief asked for.

Question 4.
What are the qualifications for the appointment as a judge of the Supreme Court?
Answer:
To qualify for appointment as a judge of the Supreme Court, the person must:
(a) be a citizen of India.
(b) have experience of at least five years as a judge of a High Court, or at least 10 years as an advocate of a High Court, or be a distinguished jurist in the President’s opinion.

Long Answer Type Questions

Question 1.
In India, we have an integrated judicial system. What does it mean?
Answer:
It means that the decisions made by higher courts are binding on the lower courts. This integration can also be understood through the appellate system that exists in India. It means that a person can appeal to a higher court if he believes that the judgement passed by the lower court is not just.

Question 2.
Why was the Public Interest Litigation (PIL) introduced by the Supreme Court?
Answer:
In our courty the courts are available for all. But in reality, access to courts has always been difficult for a vast majority of the poor in India. Legal procedures involve a lot of money and paper work as well as take-up a lot of time. For a poor person who cannot read and write and whose family depends on a daily wage, the idea to going to court to get justice often seems remote. Therefore, the Supreme Court devised a mechanism of Public Interest Litigation.

Judiciary Class 8  HBSE Notes

  • Acquit: This refers to the court declaring that a person is not guilty of the crime which he/ she was tried for by the court.
  • Compensation: This refers to the money given to make amends for an injury or a loss.
  • Eviction: This refers to the removal of persons from land/homes that they are currently living in.
  • Violation: This refers both to the act of breaking a law as well as to the breach or infringement of Fundamental Rights.
  • Tenure: The period for which an official remains in his office.
  • Civil Cases: Cases relating to property, taxes, contracts etc.
  • Criminal Cases: Cases involving violation of penal laws such as murder, theft, assault etc.
  • Jurisdiction: It refers to the territorial limits within which the courts authority can be exercised. Area of authority is called jurisdiction.
  • Appellate Jurisdiction: It refers to the power of superior courts to hear and decide appeals against judgement of lower courts.
  • Original Jurisdiction: Types of cases which come directly before the Supreme Court and it has the sole right to give judgement.
  • Court of Record: The Supreme Court and High Courts are called the court of record because all the decisions and proceeding of these courts are kept as records and a similar circumstances are quoted as precedents in the courts.
  • Lok Adalat: Lok Adalat means people’s court set-up for speedy and economical justice to the poor and downtrodden and to prevent delay in justice.

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HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions रचना Chitra Adharit Vaakya Lekhanam चित्राधारित वाक्य-लेखनम् Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

Chitra Adharit Vakya Rachna In Sanskrit HBSE 9th Class

(ग) चित्राधारित वाक्य-लेखनम्
(क) चित्राणि दृष्ट्वा मञ्जूषातः पदानि अवचित्य रिक्तस्थानानि पूरयित्वा लिखत
1.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-1

(क) अस्मिन् चित्रे त्रयः जनाः (i) ……… ।
(ख) अहं मन्ये एते तु (ii) …………… सीता च।
(ग) भरतः उपविष्टः यस्य हस्ते (iii) …………….. स्तः।
(घ) भरतः रामस्य (iv) ……………. करोति।
(ङ) अस्मिन् चित्रे भरतस्य (v) ……………. चरित्रं चित्रितम्।
मञ्जूषा
चरणवन्दना, पादुके, रामः लक्ष्मणः, श्लाघनीयं, स्थिताः
उत्तराणि:
(क) अस्मिन् चित्रे त्रयः जनाः (i) स्थिताः।
(ख) अहं मन्ये एते तु (ii) रामः लक्ष्मणः सीता च।
(ग) भरतः उपविष्टः यस्य हस्ते (iii) पादुके स्तः।
(घ) भरतः रामस्य (iv) चरणवन्दना करोति।
(ङ) अस्मिन् चित्रे भरतस्य (v) श्लाघनीयं चरित्रं चित्रितम्।

HBSE 9th Class चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

2.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-2
(क) इदं चित्रं ………… (i) ……… अस्ति।
(ख) वने एकः ……….. (ii) ……… शोभते।
(ग) जलाशये … …. (iii) ……… विकसितानि सन्ति।
(घ) जलाशये ………… (iv) ……… अपि तरन्ति।
(ङ) तटे एकः ………. (v) …….. तिष्ठति।
मञ्जूषा
वर्तकाः, जलाशयः, वनस्य, मृगः, कमलानि
उत्तराणि:
(क) इदं चित्रं (i) वनस्य अस्ति।
(ख) वने एकः (ii) जलाशयः शोभते।
(ग) जलाशये (iii) कमलानि विकसितानि सन्ति।
(घ) जलाशये (iv) वर्तकाः अपि तरन्ति।
(ङ) तटे एकः (१) मृगः तिष्ठति ।

HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

3.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-3
(क) इदं चित्रं (i) ………….. वर्तते।
(ख) तटे विविधाः (ii) ……………. सन्ति।
(ग), वृक्षेषु खगाः (iii) ……………. तिष्ठन्ति।
(घ) नद्याः (iv) ……………. निर्मलम् वर्तते।
(ङ) खगा: रात्रौ (v) ……………. निवसन्ति।
मञ्जूषाः
नीडेषु, जलम्, नदीतटस्य, वृक्षाः, इतस्ततः
उत्तराणि:
(क) इदं चित्रं (1) नदीतटस्य वर्तते।
(ख) तटे विविधाः (ii) वृक्षाः सन्ति।
(ग) वृक्षेषु खगाः (it) इतस्ततः तिष्ठन्ति।
(घ) नद्याः (iv) जलम् निर्मलम् वर्तते।
(ङ) खगाः रात्रौ (v) नीडेषु निवसन्ति।

HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

4.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-4
(क) जन्तुशालायाम् अनेके (i) ……………..
(ख) कच्छपः (ii) …………… चलति।
(ग) मृगाः (iii) ……………. धावन्ति।
(घ) सिंहः (iv) …………….. जीवः अस्ति।
(ङ) कोकिलः (v) ………….. कूजति।।
मञ्जूषा
हिंसकः, पशवः, मधुरं, शनैःशनैः, वेगेन
उत्तराणि
(क) जन्तुशालायाम् अनेके (i) पशवः सन्ति।
(ख) कच्छपः (ii) शनैःशनैः चलति।
(ग) मृगाः (iii) वेगेन धावन्ति।
(घ) सिंहः (iv) हिंसकः जीवः अस्ति।
(ङ) कोकिलः (v) मधुरं कूजति।

5.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-5
(क) चित्रमिदं आदर्शगृहस्य ……… (i) ……..।
(ख) चित्रे पुत्रः …….. (ii) …….. प्रणमति।
(ग) पिता ………. (iii) ……. आशीर्वादं ददाति।
(घ) भित्तौ ………. (iv) …….. लम्बते।
(ङ) गृहे बालिका ……… (v) ……. तिष्ठति।
मञ्जूषा
पितरं, अस्ति, अपि, वृक्षचित्रं, पुत्राय
उत्तराणि:
(क) चित्रमिदं आदर्शगृहस्य (i) अस्ति।
(ख) चित्रे पुत्रः (ii) पितरं प्रणमति।
(ग) पिता (ii) पुत्राय आशीर्वादं ददाति।
(घ) भित्तौ (iv) वृक्षचित्रं लम्बते।
(ङ) गृहे बालिका (v) अपि तिष्ठति।

HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

(ख) चित्राणि दृष्ट्वा मञ्जूषातः प्रदत्तशब्दैः पञ्चवाक्यानि लिखत
1.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-6
मञ्जूषा
चत्वारः, उद्यानस्य, कन्या, पुष्पभाजनम्, मित्रैः
उत्तराणि:
(क) इदं चित्रम् उद्यानस्य वर्तते।
(ख) बालकः मित्रैः सह क्रीडति।
(ग) एका कन्या रज्वा क्रीडति।
(घ) अत्र पुष्पभाजनम् स्तः।
(ङ) चत्वारः बालकाः वेगेन धावन्ति।

HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

2.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-7
मञ्जूषा
मात्रा, द्रुमः, कारयानम्, काष्ठकारैः, संरक्षणेन
(क) अस्मिन् चित्रे एकः द्रुमः एव अवशिष्टः ।
(ख) अन्ये वृक्षाः तु काष्ठकारैः छिन्नाः।
(ग) अत्र एकः बालकः मात्रा सह आगतः, भयभीतः च।
(घ) राजमार्गे धूम्र क्षिपन् एकं कारयानम् अपि गच्छति।
(ङ) वृक्षाणां संरक्षणेन हि पर्यावरणं रक्षणीयम्।

अभ्यासार्थ प्रश्नाः
1.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-8
(क) एतत् (i) …………” दृश्यं अस्ति।
(ख) अत्र विविधाः शाकाः (ii) ……….. आलुकम् च वर्तते।
(ग) अत्र (iii) …………… अस्ति।
(घ) (iv) …………… विविधानां शाकानां मूल्यं पृच्छन्ति।
(ङ) (v) ………….. जनाः उच्चैः आह्वयन्ति।
मञ्जूषा
गृञ्जनम्-पलाण्डुः-करण्डकम्-भिण्डिः, शाक-आपणस्य, जनसम्मदः, क्रेतारः, विक्रेतारः

HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम्

2.
HBSE 9th Class Sanskrit रचना चित्राधारित वाक्य-लेखनम् img-9
(क) चित्रे (i) ………….. विशालः वृक्षः वर्तते।
(ख) (ii) …………… नृत्यति।
(ग) (iii) …………..” वृक्षस्य उपरि तिष्ठति।
(घ) एकः (iv) …………… जले स्नानं करोति।
(ङ) अनेके (v) …………… वृक्षे तिष्ठन्ति।
मञ्जूषा
मयूरः, पक्षिणः, एकः, नरः काकः

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HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions रचना Patra Lekhan पत्र-लेखनम् Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

Sanskrit Patra Lekhan Class 9 HBSE

रचनात्मक कार्यम्

मानव-मन के भावों की अभिव्यक्ति एवं विचारों के आदान-प्रदान का सरल साधन भाषा है। अतः जीवन की सफलता के लिए ज्ञान प्राप्त करना और ज्ञान-प्राप्ति के लिए भाषा को सीखना परम आवश्यक है। भाषा-शिक्षण में रचनात्मक कार्य का विशेष योगदान है, क्योंकि इसका प्रमुख उद्देश्य ही छात्रों की सृजनात्मक शक्ति का विकास करना है। इसके अन्तर्गत पत्र-लेखन, चित्र देखकर वाक्यांश-लेखन तथा लघु निबन्ध-लेखन को समाहित किया गया है।

(क) पत्र-लेखनम्

पत्रों का मानव-जीवन में अधिक महत्त्व है। संस्कृत भाषा में पत्र को लिखने के कुछ विशेष नियम हैं। इन नियमों को ध्यान में रखकर छात्र पत्र-लेखन में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। प्रार्थना-पत्र को ‘सेवायाम्’ पद से प्रारम्भ किया जाता है। पुनः, ‘श्रीमन्तः’ पद के साथ कथ्य का शुभारम्भ किया जाता है। अन्त में ‘भवदीयः’ अथवा ‘भवतः आज्ञाकारी शिष्यः’ लिखकर अपना नाम, पता लिखा जाता है।

पारिवारिक तथा व्यक्तिगत पत्रों में प्रारम्भ में ‘परीक्षाभवनम् अथवा स्थान’ के बाद ‘पूज्याः/आदरणीयाः/सम्माननीयाः’ पद से पत्र का प्रारम्भ किया जाता है। मित्र के लिए ‘प्रिय मित्र’ लिखा जाता है। बड़े व्यक्ति के लिए ‘सादरं प्रणतिः’ तथा मित्र के लिए ‘नमस्ते’ लिखा जाता है। अन्त में ‘भवदीयः पुत्र/भ्राता/मित्रम्/सुहृद्’ जैसे सम्बन्धसूचक शब्दों के साथ अपना नाम एवं पता लिखना चाहिए। प्रार्थना-पत्र में दिनाङ्क पत्र के अन्त में और व्यावहारिक पत्र में प्रारम्भ में होता है।
HBSE 9th Class Sanskrit rachana Patra Lekhan img-1
1. प्रधानाचार्य प्रति शुल्कक्षमापनार्थं पत्रम्
प्रतिष्ठायां
प्रधानाचार्यमहोदय,
रोजरी विद्यालयः,
बड़ोदरा।
विषयः शुल्कक्षमापनार्थं निवेदनम्
श्रीमन्,
सविनयं निवेदनम् अस्ति यत् अहं भवतः विद्यालये नवमकक्षायाः छात्रः अस्मि। मम पिता एकः लिपिकः अस्ति। तस्य मासिक वेतनम् पञ्चसहस्ररूप्यकाणि मात्रमेव अस्ति। मम एकः भ्राता अष्टमकक्षायां भगिनी च पञ्चमकक्षायां पठति। अस्माकं कुटुम्बस्य निर्वाहः अतीव काठिन्येन भवति। अहं कक्षायां प्रतिवर्षं प्रथम स्थान प्राप्नोमि। अतः शुल्कक्षमापनार्थं प्रार्थये। आशासे अत्रभवान् मम एतां प्रार्थनां स्वीकृत्य अनुग्रहीष्यति।
सधन्यवादाः,
विनीतः शिष्यः,
क, ख, ग नवमकक्षास्थः,
अनुक्रमांकः षोडशः
दिनाङ्कः 5.04.20….

संस्कृत में पत्र लेखन Class 9 HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

2. दिनत्रयस्य अवकाशप्राप्त्यर्थं प्रधानाचार्यां प्रति प्रार्थनापत्रम्
श्रीमन्तः प्रधानाचार्या महोदयाः,
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयः,
करनाल नगरम्।
विषयः अवकाशप्राप्त्यर्थं प्रार्थनापत्रम्।
श्रीमती,
अहमद्य दिन त्रिभ्यः अतीव रूग्णोऽस्मि । विद्यालयमागन्तुम् न शक्नोमि। अतः दिवस त्रयस्यावकाशम् स्वीकृत्य मामनुग्रहीष्यन्ति।
भवतामाज्ञाकारी शिष्या,
सुनीता।
कक्षा नवम्, अनुक्रमांक अष्टादश
दिनाङ्क : 15.06.20……

3. स्वविद्यालयस्य वर्णनं कुर्वन् मित्रं प्रति पत्रम्
रामाकृष्णपुरम् सैक्टर-2
89/5, सोमविहारः
नव दिल्ली।
दिनाङ्क : 9.7.20…..
प्रिय वयस्य श्रीनिवास,
नमस्ते!
पितुः स्थानान्तरणवशात् वयं सकुटुम्बाः सकुशलं दिल्ली प्राप्ताः। मया अत्र एकस्मिन् प्रख्याते विविधशैक्षिक उपकरणसम्पन्ने ‘नवजीवन’ इति नाम्नि विद्यालये प्रवेशः लब्धः। प्रवेशं प्राप्य च भृशं प्रसन्नः अस्मि।

यद्यपि आंग्लभाषामाध्यमेन शिक्षा प्रदीयते तथापि संस्कृतपठनपाठनस्य विशिष्टा व्यवस्था वर्तते। 27 एकड़ भूमौ निर्मिते अस्मिन् विद्यालयभवने त्रयः विभागाः सन्ति – प्राथमिकः, माध्यमिकः, वरिष्ठमाध्यमिकः च।

अस्य विद्यालयस्य प्रमुखानि आकर्षणानि सन्ति — विशालानि क्रीडाक्षेत्राणि, निर्मलजलोपेतं तरणतालम्, विविधकलाकौशलप्रशिक्षणार्थं कार्यशालाः विज्ञानप्रयोगशालाः समृद्धाः संगणकप्रयोगशालाः, व्यायामशाला, बृहत्पुस्तकालयः इत्यादयः ।

एषः सहशिक्षाविद्यालयः। प्रधानाचार्यः अतीव विनम्रः परिश्रमी, कर्मठः सद्व्यवहारशीलः च अस्ति । शिक्षकः शिक्षिकाः च अतीव सुयोग्याः शिक्षणप्रवीणाः च सन्ति। विद्यार्थिनः सुसभ्याः अनुशासनप्रियाः परिश्रमिणः च वर्तन्ते। प्रतिवर्षं दशम-द्वादशकक्षयोः परीक्षापरिणामः शतप्रतिशतं भवति। नान्यः विशेषः। स्वाध्यायविषये विस्तरेण पत्रं लिखतु । स्वगृहे सर्वेभ्यः मम वन्दनं निवेदयतु।
तव अभिन्नं मित्रम्,
क, ख, ग
सेवायाम् …………….
द्वारा श्रीनिवासः
डॉ० राघवेन्द्रः
56, त्यागराजनगरम्
चेन्नई HBSE 9th Class Sanskrit rachana Patra Lekhan img-10

Patra Lekhan In Sanskrit HBSE Class 9

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

4. विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवं वर्णयन् सखी प्रति पत्रं लिखत।
छात्रावासः
डी०ए०वी० वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयः,
अम्बाला नगरम्।
दिनाङ्क : 15 जून, 20…..
प्रिय सखि वनिते,
सप्रेम नमोनमः।
अत्र कुशलं तत्रास्तु। अहं निज विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवं वर्णयम तव प्रसादाय लिखामि। तस्मिन् अवसरे अस्माकम् विद्यालयः वधूरिव अलंकृतः। मार्गम् उभयतः ध्वजाः दोधूयन्ते स्म। निर्धारिते समये अध्यक्ष महोदयः आगतः। सर्वप्रथम बालैः स्वागतगीतिका गीता। शारीरिक कार्यक्रमस्य अनन्तरम् सांस्कृतिक कार्यक्रमः सम्पन्नः। प्रधानाचार्येण विद्यालयस्य विवरणम् अपि प्रस्तुतम् । पुरस्कार वितरणस्य पश्चात् प्रधानाचार्येण अध्यक्ष महोदयस्य धन्यवादम् कृतम्। समुचित जलपानोर्ध्वं सर्वं कार्यक्रमं सुसम्पन्नम्।
गृहे सर्वेभ्यो प्रणामाः।
तव प्रिया सखी
रमा

5. पर्वतीय स्थलस्य भ्रमणार्थं गतायाः सुतायाः मातरं प्रति पत्रम्
77 बादामी-उद्यानम्
श्रीनगरम्,
जम्मू-काश्मीर-राज्यम्।
दिनाङ्क : 7-9-20…..
श्रद्धेये मातृचरणे,
सादरं प्रणामाः।
भवत्याः आशीर्वादैः परह्यः सर्वे वयं जम्मूतः बसयानेन सकुशलं समागताः। यथाश्रुतं श्रीनगरं नूनं वसुन्धरायां नन्दनवनमिव विभाति।

जम्मूतः श्रीनगरस्य सम्पूर्णः मार्गः अतीव रमणीयः। ऊधमपुरतः ऊर्ध्वम् आरोहणं प्रारभते। मार्गे ‘कुद्द’ इति नामकं स्थानं अतीव रम्यं वर्तते। तत्रत्यम् च जलं पातुं दूरादपि जनाः आगच्छन्ति, स्वस्थाः च भवन्ति। ततः किंचिद्रे एकं “पत्नीटाप” नामकम् उच्चतमं शिखरस्थं पर्यटनस्थलं यात्रिजनान् आकर्षयतीव।।

श्रीनगरे अस्माकं वासः लालचौकस्य समीपे एकस्मिन् यात्रिनिवासे अस्ति।

अत्र शालीमार-चश्माशाही-निशातबाग-हारवन-नामधेयानि कृत्रिमनिर्झरसंवलितानि नाना-कुसुम-शबलानि च चत्वारि उद्यानानि काश्मीरम् अपरं देवलोकं कुर्वन्ति। काश्मीरस्य मध्ये “डललेक” विद्यते यत्र जलपोतसमानाः सर्वसुविधापूर्णाः गृहनौकाः (“हाउस-बोट”) पर्यटकेम्यः गृहनिवासानन्दं यच्छन्ति।

नवनववस्त्रैः सुसज्जिताः ‘शिकारा’ इति नाम्न्यः लघुनौकाः नववधू-समानाः सन्ति यत्र यात्रिणः जलविहारस्य आमोदम् अनुभवन्ति। डललेकम् उभयतः विशालानि विपणनकेन्द्राणि विद्यन्ते। “चारचिनार” नामकम् एकं कृत्रिमं पिकनिकस्थलं डललेकस्य मध्ये वर्तते। समीपे एव नेहरू-उद्यानमपि पर्यटकानां महत् आकर्षणकेन्द्रम् । दुर्गानाग-नामकात् निर्झरात् आरम्य 350 फुट-उपरि शंकराचार्यमन्दिरं काश्मीरं स्वयं गत्वा एव दर्शनीयम् । शेषं भ्रमणानन्तरं विस्तरेण लेखिष्ये।
पितृचरणयोः मे. प्रणामाः कथनीयाः
भवत्याः स्नेहमयी पुत्री
क, ख, ग।

Class 9 Sanskrit Patra Lekhan HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

6. पितरं प्रति पत्रं लिखत। यस्मिन् ग्रामस्य/नगरस्य/पर्वतीयस्थलस्य यात्रायाः वर्णनम् भवेत्।
छात्रावासः
एस.डी.वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयः
जीन्द नगरम्।
दिनाङ्क : 12-05-20……
आदरणीय पितृमहोदय,
सादरं नमोनमः,
अत्र कुशलं तत्रास्तु। सेवायाम् इदं निवेदनम् यत् भवतः आशीवदिन अहम् स्वमित्रैः सह विद्यालयपक्षतः आयोजिते शिमलानगरं प्रति पर्यटनकार्यक्रमे भागः गृहीतः। इयं मम प्रथम यात्रा आसीत्। तेषु दिनेषु हिमपातः अपिगातः। अस्माकम् वरिष्ठ-अध्यापकाः अस्माभिः सह गतः आसन्। पर्वतीय स्थलस्य इदम् यात्रा आनन्ददायकः आसीत्।
भवदीयः प्रिय सुतः
सुरेन्द्रः

7. पुस्तकप्रेषणविषये प्रकाशकं प्रति पत्रम्
सेवायाम् प्रतिष्ठायाम्
श्रीमतां प्रबन्धकमहोदयनाम्
श्री अक्षर-प्रकाशन-संस्था
रेलवे-मार्गः
रोहतक नगरम्
मान्याः,
अहं नवमकक्षायाः छात्रः अस्मि। भवद्भिः सद्यः प्रकाशितानि नवमकक्षायाः पाठ्यपुस्तकानि मया पुस्तकालये दृष्टानि । तेषु अहं कानिचित् क्रेतुम् इच्छामि। अधोलिखितानि. पाठ्यपुस्तकानि वी.पी.पी. द्वारा शीघ्रं प्रेषणीयानि
1. सरलसंस्कृतव्याकरणम्-रचनापद्धतिः
2. निबन्ध-प्रकाशः
3. संस्कृत-अभ्यास-पुस्तिका
एभिः पुस्तकैः सह अन्यसन्दर्भग्रन्थसूची अपि यदि प्रेष्यते तर्हि आत्मानम् अनुगृहीतं मन्ये।
सधन्यवादम्
भवतां विश्वासपात्रम्,
श्रीनाथघोषः
173 नीलिगिरीः अलकनन्दा
दिल्ली

Sanskrit Patra Lekhan HBSE 9th Class

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

8. दूरभाषयन्त्रस्य निष्क्रियतां दूरीकर्तुं दूरभाषकेन्द्रस्य कर्मकराणां उदासीनताम् अधिकृत्य दैनिकसमाचारपत्रस्य सम्पादक – प्रति पत्रम् लिखत।
सकाशात्
सुरेन्द्र कुमार अग्रवालः
आर०एन० 8 महेशनगरम्
अम्बाला छावनी
दिनाङ्क : 22.06.20…..
सेवायाम्
सम्पादकः
पंजाब केसरी
अम्बाला छावनी।
विषयः दूरभाषकेन्द्रस्य कर्मकराणाम् उदासीनताम् ।
मान्यवर,
अस्माकं नगरे दूरभाषकेन्द्रस्य कर्मकराः जनानां प्रार्थना पत्राणाम् सर्वथा उपेक्षां कुर्वन्ति । वारम् वारम् कथनोपरान्तम् अपि ते दूरभाषस्य निष्क्रियतां दूरीकर्तुं न आगताः। अधिकारिणः अपि समुचितं अवधानम् न ददति । त्रयोः मासयोः अस्माकम् दूरभाषम् निष्क्रियम् अस्ति। भवदीये समाचारपत्रे अस्माकं निवेदनं यथोचितस्थाने प्रकाश्य अनुगृह्यताम् अयं जनः ।
सधन्यवादम्।
भवदीयः
सुरेन्द्र कुमार अग्रवालः
आर०एन० 8 महेश नगरम्
अम्बाला छावनी।

Patra Lekhan In Sanskrit Class 9 HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

अभिनन्दनपत्रम्/वर्धापनपत्रम्/निमन्त्रणपत्रम्

अद्यत्वे प्रायः नूतनवर्षस्य शुभारम्भे, दीपावलि-होलिकादि-उत्सवार्थम्, मित्राणां जन्मदिवसे शुभाकाङ्क्षापत्राणि अभिनन्दनपत्राणि च प्रेष्यन्ते। अन्तःपृष्ठे च शुभकामनासन्देशाः लिख्यन्ते। एतेषां निर्माणे पर्याप्तः अवसरः मौलिक-प्रतिभायाः प्रदर्शनार्थं लभ्यते। उपरिपृष्ठस्य सज्जायां कलाप्रदर्शनार्थं भवति। अन्तःपृष्ठे स्वकीय-मनोभावनानुसारम् अथवा काश्चन सूक्तयः अपि लिख्यन्ते। प्रायः तत्र विशिष्टाः औपचारिकताः न सन्ति । अधः प्रेषकस्य नाम एवं लिख्यते
यथा
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Sanskrit Class 9 Patra Lekhan HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

अतिरिक्त पत्राणि

1. प्रधानाचार्य प्रति लिखित शुल्क क्षमाप्रार्थनापत्रस्य रिक्तस्थानानि मंजूषापदैः पूरयत-
सेवायाम्
प्रधानाचार्य महोदयः
रा० व० मा० विद्यालयः,
सिरसानगरम्।
श्रीमान्!
सविनयं निवेदनम् ………. (i) ……….। मम जनकः जनस्वास्थ्यविभागे चतुर्थश्रेणी कर्मचारी अस्ति। तस्य मासिक (ii) ………. दशसहस्रमितानि रूप्यकाणि सन्ति। अस्माकं परिवारे पंच सदस्याः ………. (iii) ………. । गृहस्य निर्वाहः कठिनतया भवति। ……… (iv) ……… शुल्कं क्षमित्वा माम् अनुगृह्णन्तु भवन्तरू।
सधन्यवादम्
…….. (v) ……… आज्ञाकारी शिष्यः,
रामदेवः
अनु० – एकः
कक्षा – नवमी
मञ्जूषा
भवतः, कृपया, अस्ति, सन्ति, वेतनम्।
उत्तराणि
सेवायाम्
प्रधानाचार्य महोदयः
रा० व० मा० विद्यालयः,
सिरसानगरम्।
श्रीमान्!
सविनयं निवेदनम् (i) अस्ति। मम जनकः जनस्वास्थ्यविभागे चतुर्थश्रेणी कर्मचारी अस्ति। तस्य मासिकं (ii) वेतनम् दशसहस्रमितानि रूप्यकाणि सन्ति। अस्माकं परिवारे पंच सदस्याः (iii) सन्ति। गृहस्य निर्वाहः कठिनतया भवति। (iv) कृपया शुल्क क्षमित्वा माम् अनुगृह्णन्तु भवन्तः।
सधन्यवादम्
(v) भवतः आज्ञाकारी शिष्यः,
रामदेवः
अनु० – एकः
कक्षा – नवमी

2. विद्यालये प्रवेशार्थं निवेदनपत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तैः पदैः सह पूरयत।
श्रीमन्तः प्रधानाध्यापक महोदयाः!
दयानन्द उच्य विद्यालयः,
अम्बालानगरम्।
महाभागाः!
(i) …………. इदं निवेदनं यत् अहम् अस्मिन् वर्षे पानीपतस्थः डी. ए. वी. विद्यालयतः माध्यमिक परीक्षायां (ii) ………… सफलता प्राप्तवान् अस्मि। मम पितुः अत्र आगमनम् जातम् । इदानीं भवतः लब्धप्रतिष्ठ-विद्यालये (iii)” ..” इच्छामि। अहं जानामि यत् भवतः विद्यालयः हरियाणा प्रान्ते अति प्रतिष्ठितः विद्यालयः अस्ति। अहम् अस्य विद्यालयस्य गुरुजनानां (iv) …………….. उपविश्य शिक्षा ग्रहीतुमिच्छामि।
आशासे भवान् मम प्रार्थनां स्वीकृत्य अकिञ्चनं मामनुग्रहीष्यति।
(v) ………………..,
शैलेन्द्रः।
दिनाङ्क : 12.08.20……
मञ्जूषा
चरणेषु, भवदीयः, प्रथम श्रेण्यां, पठितुम्, सविनयं
उत्तराणि
श्रीमन्तः प्रधानाध्यापक महोदयाः!
दयानन्द उच्च विद्यालयः,
अम्बालानगरम्।
महाभागाः!
(i) सविनयं इदं निवेदनं यत् अहम् अस्मिन् वर्षे पानीपतस्थः डी. ए. वी. विद्यालयतः माध्यमिक परीक्षायां (1) प्रथम श्रेण्यां सफलता प्राप्तवान् अस्मि । मम पितुः अत्र आगमनम् जातम् । इदानीं भवतः लब्धप्रतिष्ठ-विद्यालये (iii) पठितुम् इच्छामि। अहं जानामि यत् भवतः विद्यालयः हरियाणा प्रान्ते अति प्रतिष्ठितः विद्यालयः अस्ति। अहम् अस्य विद्यालयस्य गुरुजनानां (iv) चरणेषु उपविश्य शिक्षा ग्रहीतुमिच्छामि।
आशासे भवान् मम प्रार्थनां स्वीकृत्य अकिञ्चनं मामनुग्रहीष्यति।
(v) भवदीयः,
शैलेन्द्रः।
दिनाङ्क : 12.08.20…..

Patra Lekhan Sanskrit Class 9 HBSE

3. विद्यायाः महत्तां वर्णयन् अनुजं प्रति लिखिते पत्रे रिक्तस्थानानि उचित मंजूषापदैः पूरयत-
शिशुशिक्षानिकेतन
छात्रावासतः,
क, ख, ग।
प्रिंय अनुज ……… (i) …….. ! चिरंजीव।
अत्र कुशलं तत्रास्तु। तवपत्रं ……… (ii) ……. ! विद्यायाः महत्त्वं वर्णयन् पत्रं लिखामि। ……… (iii) …….. अनुभवामि“विद्याधनमेव सर्वधनं प्रधानमस्ति। अहंविश्वसिमि-” विद्वान् सर्वत्र पूज्यते । अतः ध्यानेन ……….. (iv) ……… पठित्वा जीवने सफलो भव। इति मम शुभाशीषः। मातृपितृचरणेषु प्रणामाः।
………. (v) …….. भ्राता, रामकेशः ।
मञ्जूषा
तव, भूषण!, प्राप्तम्, अहम्, विद्यां
उत्तराणि
शिशुशिक्षानिकेतन
छात्रावासतः,
क, ख, ग।
प्रिय अनुज (i) भूषण! चिरंजीव।
अत्र कुशलं तत्रास्तु। तवपत्रं (it) प्राप्तम्! विद्यायाः महत्त्वं वर्णयन् पत्रं लिखामि । (iii) अहम् अनुभवामि-“विद्याधनमेव सर्वधनं प्रधानमस्ति । अहंविश्वसिमि-” विद्वान् सर्वत्र पूज्यते। अतः ध्यानेन (iv) विद्यां पठित्वा जीवने सफलो भव। इति मम शुभाशीषः। मातृपितृचरणेषु प्रणामाः।
(v) तव भ्राता, रामकेशः ।

Patra Lekhan Sanskrit HBSE 9th Class

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

4. प्रधानाचार्य प्रति अवकाशार्थप्रार्थनापत्रस्य रिक्तस्थानानि मञ्जूषापदैः पूरयत-
सेवायाम्,
प्रधानाचार्यः महोदयः,
रा० व० मा० विद्यालयः,
जयपुरनगरम्।
सविनयं निवेदनम् अस्ति । मम (i) ……. विवाह : मार्चमासस्य सप्तम्यां तिथौ भविष्यति। अहमपि (ii)…… गमिष्यामि। वरयात्रा (iii) ……. गमिष्यति। कृपया (iv) ……… अवकाशं दत्त्वा अनुग्रह्णातु भवान्। भवताम् महती अनुकम्पा भविष्यति।
भवदीयः शिष्यः
(v)………..।
अनुक्रमाङ्कः एकः
कक्षा नवमी
मञ्जूषा
दिवाकरः, दिनद्वयस्य, दिल्लीनगरम्, अग्रजस्य, तत्र
उत्तराणि
सेवायाम,
प्रधानाचार्यः महोदयः,
रा० व० मा० विद्यालयः,
जयपुरनगरम्।
सविनयं निवेदनम् अस्ति । मम (1) अग्रजस्य विवाहः मार्चमासस्य सप्तम्यां तिथौ भविष्यति। अहमपि (ii) तत्र गमिष्यामि। वरयात्रा (it) दिल्ली नगरम् गमिष्यति। कृपया (iv) दिनद्वयस्य अवकाशं दत्त्वा अनुग्रह्णातु भवान्। भवताम् महती अनुकम्पा भविष्यति।
भवदीयः शिष्यः
(v) दिवाकरः।
अनुक्रमाङ्कः एकः
कक्षा नवमी

5. भवान् नरेशः। विद्यालयस्य वार्षिकोत्सवः इति विषये मित्रं रमेशं प्रतिलिखितं पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तैः पदैः पूरयित्वा
परीक्षाभवनम्
प्रिय मित्र रमेश,
सप्रेम (i)…… अत्र कुशलं तत्रास्तु। अहं निजविद्यालयस्य (ii) ……………. वर्णनं करोमि। सप्ताहपूर्वम् एव विद्यालये सर्वे अध्यापकाः (iii) …………… च वार्षिकोत्सवस्य कार्येषु व्यस्ताः आसन्। हरियाणा-राज्यस्य शिक्षा-निदेशकः कार्यक्रमस्य (iv) ……………….. आसीत्। सः कार्यक्रमम् अतीव प्राशंसत्, योग्येभ्यः छात्रेभ्यः च (v)……………….. अयच्छत् ।
भवतः प्रियः,
नरेशः।
मञ्जूषा
पारितोषिकान्, नमस्ते, अध्यक्षः, छात्राः, वार्षिकोत्सवस्य
उत्तराणि
परीक्षाभवनम्
प्रिय मित्र रमेश,
सप्रेम (1) नमस्ते।
अत्र कुशलं तत्रास्तु। अहं निजविद्यालयस्य (ii) वार्षिकोत्सवस्य वर्णनं करोमि। सप्ताहपूर्वम् एव विद्यालये सर्वे अध्यापकाः (iii) छात्राः च वार्षिकोत्सवस्य कार्येषु व्यस्ताः आसन्। हरियाणा-राज्यस्य शिक्षा-निदेशकः कार्यक्रमस्य (iv) अध्यक्षः आसीत् । सः कार्यक्रमम् अतीव प्राशंसत्, योग्येभ्यः छात्रेभ्यः च (v) पारितोषिकान् अयच्छत् ।
भवतः प्रियः,
नरेशः।

6. भ्रमणाय गन्तुम् राशिम् प्राप्त्यार्थं जनकम् प्रति लिखितं पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तैः शब्दैः सह पूरयत।
छात्रावासः,
राजकीय विद्यालयः,
कोलकातः।
तिथि : 20.08.20………
(i) …पितृवर्याः,
भवतः पत्रं प्राप्तम्। मम प्रथमसत्रीया (ii) ………. समाप्ता। परीक्षापत्राणि अतिशोभनानि जातानि (iii) …. .. विद्यालयस्य अध्यापिकाः शैक्षिकभ्रमणाय (iv) ………….” नेष्यन्ति। अतः यदि अनुमतिः (v) ………….” अहम् अपि गच्छेयम्। पञ्चशतम् रुप्यकाणि दातव्यानि सन्ति। अतः कृपया राशिं प्रेषयित्वा माम् अनुगृहीतां कुर्वन्तु।
भवतां प्रिया पुत्री,
गीता।
मञ्जूषा
स्यात्, भुवनेश्वरं, मम, परीक्षा, माननीयाः
उत्तराणि-
छात्रावासः,
राजकीय विद्यालयः।
कोलकातः।
तिथि : 20.08.20…..
(i) माननीयाः पितृवर्याः,
भवतः पत्रं प्राप्तम्। मम प्रथमसत्रीया (ii) परीक्षा समाप्ता। परीक्षापत्राणि अतिशोभनानि जातानि (ii) मम विद्यालयस्य अध्यापिकाः शैक्षिकभ्रमणाय (iv) भुवनेश्वरं नेष्यन्ति। अतः यदि अनुमतिः (१) स्यात् अहम् अपि गच्छेयम्। पञ्चशतम् रुप्यकाणिं दातव्यानि सन्ति। अतः कृपया राशिं प्रेषयित्वा माम् अनुगृहीतां कुर्वन्तु।
भवतां प्रिया पुत्री,
गीता।

Patra Lekhan Class 9 Sanskrit HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

अभ्यासार्थ प्रश्नाः

1. रमा करनालनगरे वसति। तस्याः सखी श्यामा गुरुग्रामनगरे निवसति। रमायाः विद्यालये पर्यावरणविषये एका गोष्ठी जाता। गोष्ठी वर्णयन्ति रमा श्यामायै पत्रम् एकं लिखति। मञ्जूषातः समुचित पदानि चित्वा पत्रं पूरयन्तु।
20, प्रेमनगरः,
करनालतः।
दिनाङ्क : 20.08. ……
स्नेहस्निग्धे श्यामा,
नमस्ते।
ह्यः अस्माकं विद्यालये (i) …. ..एका गोष्ठी अभवत्। तत्र नगरेषु वर्धमानं प्रदूषणं दृष्ट्वा पर्यावरणस्य रक्षणाय उपायानां विषये परिचर्चा अभवत्। गोष्ठ्यां वक्तृणां विचारः आसीत् यत् गृहात् बहिः, (ii) …………….” रथ्यासु च अवकरः न क्षेपणीयः। जलप्रदूषण-निवारणाय समये समये जलशुद्धिः करणीया। मार्गेषु, उपवनेषु, विद्यालयेषु च अधिकाधिकं (iii) ………. आरोपणीयाः । जनचेतनार्थ “वृक्षो रक्षति रक्षितः”, “जलम् एव जीवनम्” एतादृशानि महावाक्यानि पट्टिकासु लिखित्वा यत्र तत्र टङ्कनीयानि
ध्वनिप्रदूषणं निवारयितुं ध्वनिप्रसारकयन्त्राणां (iv) ……….” प्रयोगः करणीयः । अस्मिन् विषये भवत्याः विद्यालये किं किं भवति इति मां सविस्तारेण लिखतु।
पितरौ वन्दनीयौ। भवत्याः सखी,
(v) ” ………|
मञ्जूषा
न्यूनतमः, रमा, नदी जलेषु, वृक्षाः, पर्यावरणविषये |

2. मार्गेषु दूषित-वस्तूनां समूहैः वातावरणं प्रदूषितम् इति विषयम् अवलम्ब्य नगरपालिकाध्यक्ष प्रति लिखित पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तैः शब्दैः सह पूरयत।
सेवायाम्,
नगरपालिकाध्यक्ष महानुभावः!
अम्बालानगरम्।
महोदयः!
अहं सादरं (1) ….. यत् मम गृहस्य समीपे मार्गेषु वीथिषु च दूषित-वस्तूनां समूहः अहर्निशं (ii) ………. दूषयति। अनेन कीटानां वृद्धया रोगाणं वृद्धिः जायते। अस्मिन् विषये अहं अनेकं बारं सम्बद्धाधिकारिणां ध्यानम् आकृष्टम्, परम् अद्यावधि तत् दूषणं दूरीकर्तुं कापि (iii)…. नाभवत् । अतः प्रार्थये यत् कृपया श्रीमन्तः (iv) …… … समुचितं व्यवस्थां कुर्वन्तु। अहं आशासे यत् मम (v) …………… विफलं न भविष्यति।
सधन्यवादः।
भवदीयः,
महेशः,
डी. ए. वी. महाविद्यालयः।
मञ्जूषा
व्यवस्था, वातावरणम्, निवेदये, निवेदनं, मार्गेषु

HBSE 9th Class Sanskrit रचना पत्र-लेखनम्

3. मित्रं प्रति दीपमालाविषये लिखितं पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तैः शब्दैः पूरयत।
अम्बालानगरम्।
दिनाङ्क : 10.11.20……
प्रिय मित्र महेशः,
(i) ………….. नमोनमः।
अहम् अद्य दीपमालाविषये लिखामि। मित्र! कुटुम्बमध्ये स्थित्वा (ii) .. सहर्षदीपमाला मानिता। अस्माकं गृहस्य अन्तः बहिश्च प्रकाशस्य पुञ्ज एव उद्गतः आसीत्। वीथीमध्ये बहुविधानां (iii) ….. .. विस्फोटनं महत् कुतूहलम् अजनयत् । विविधानि मिष्टान्नानि स्वयमपि अस्माभिः खादितानि वत्सलानां मित्राणं (iv) .. . च परिवेषितानि। मन्ये भवताऽपि समारोह (५) … परिजनैः सह मानिता भवेत् । पत्रोत्तरं देयम्।
भवन्तः मित्रम्,
रमेश कुमारः।
मञ्जूषा
दीपमाला, सप्रेम, मया, स्फोटानाम्, गृहेषु |

4. आवश्यक कार्य हेतु प्रधानाचार्य प्रति लिखितं पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तैः शब्दैः पूरयत।
सेवायाम्
प्रधानाचार्यः महोदय!
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयः,
करनालनगरम्।
महोदयः।
सविनयं निवेदनम् अस्ति यत् अद्यः (i) ………. अत्यावश्यक कार्यम् अस्ति। एतस्मात् कारणात् (ii) ……… आगन्तुं न शक्नोमि। अतः (iii) ……………. अवकाशं स्वीकृत्य माम् (iv) …………… भवदीयः शिष्यः
(v) ………………. कक्षा नवमी।
मञ्जूषाः
अङ्कुरः, एक दिवसस्य, मम गृहे, अनुगृहीष्यति, अद्य विद्यालयेः।

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HBSE 9th Class Sanskrit व्याकरणम् संख्या एवं अव्यय

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions व्याकरणम् Sankhya Evam Avyay संख्या एवं अव्यय Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit व्याकरणम् संख्या एवं अव्यय

एवं अव्यय Class 9 HBSE

(ख) संख्या
1. संख्यावाचक शब्द विशेषण होते हैं।
2. संख्यावाचक शब्दों में एक से लेकर चार संख्या तक (1-4) रूप तीनों लिङ्गों में पृथक्-पृथक् चलते हैं परन्तु पाँच से लेकर सभी संख्यावाचक शब्दों के रूप तीनों लिङ्गों में समान रूप से चलते हैं;
जैसे एक-शब्द का रूप (पु० एकः/स्त्री०-एका, नपुं-एकम्) एकवचन में होता है। द्वि-शब्द का रूप (द्वौ, द्वे, द्वे) द्विवचन में होता है। त्रि-शब्द का रूप (त्रयः, तिस्रः, त्रीणि) बहुवचन में होता है। पञ्चन्-आदि शब्दों के तीनों लिङ्गों में भिन्न-भिन्न रूप नहीं होते हैं।)

पुंल्लिडून्गस्रीलिडून्ग एकान्ुंंकलिडून
एक:द्वेएकम्
है।तिस्नद्वे
त्रयःचतस्तःत्रीणि
चत्वारःस्रीलिडून्ग एकाचत्वारि
संख्या (अंक)संख्यावाचक शब्द
1एक:
2द्वै
3त्रयः
4चत्वारः
5पर्च
6षट् (षड़)
7सप्त
8अष्ट
9नव
10दश
11एकादश
12द्वादश
13त्रयोदश
14चतुर्दश
15पञ्चदश
16षोडश
17सप्तदश
18अष्टादश
19नवदश (एकोनविंशति)
20विंशतिः
21एकविशतिः
22द्वाविंशतिः
23त्रयोविंशतिः
24चतुरविशशतः
25प््चविंशतिः
26षड्-विंशति:
27सप्तविंशतिः
28अष्टविंशतिः
29नवविंशतिः (एकोनत्रिशतु)
30त्रिंशत्
31एकत्रिशत्
32द्वात्रिशत्
33त्रयत्रिंशत्
34चतुस्त्रिंशत्
35पङ्चत्रिशत्
36षट्त्रिंशत्
37सप्तत्रिंशत्
38अष्टत्रिशत्
39नवत्रिशत् (एकोनचत्वारिशत्)
40चत्वारिंशत्
41एकचत्वारिंशत्
42द्विचत्वारिंशत्
43त्रिचत्वारिंशत्
44चतुश्चत्वारिंशत्
45पज्चचत्वारिशत्
46षट्चत्वारिंशत्
47सप्तचत्वारिशत्
48अष्टचत्वारिंशत्
49नवचत्वारिंशत् (एकोनपञ्चाशत्)
50पज्चाशत्
51एकपज्चाशत्
52द्विपञ्चाशत्
53त्रिपञ्चाशत्
54चतुष्पञ्चाशत्
55पञ्चपञ्चाशत्
56षट्पञ्चाशत्
57सप्तपज्चाशत्
58अष्टपज्चाशत्
59नवपञ्चाशत् (एकोनषष्टि:)
60षष्टि:
61एकषष्टि:
62द्विषष्टि:
63त्रिषष्टि:
64चतुष्पष्टि:
65पज्चषष्टि:
66षट्षष्टि:
67सप्तषष्टि:
68अष्टषष्टिः
69नवषष्टिः (एकोनसप्ततिः)
70सप्ततिः
71एकसप्ततिः
72द्विसप्ततिः
73त्रिसप्ततिः
74चतुष्सप्ततिः
75प््चसप्ततिः
76षट्सप्तति:
77सप्तसप्ततिः
78अष्टसप्ततिः
79नवसप्ततिः (एकोनाशीतिः)
80अशीतिः
81एकाशीतिः
82द्वयशीतिः
83त्रयशीतिः
84चतुरशीतिः
85पञ्चाशीतिः
86षडशीतिः
87सप्ताशीतिः
88अष्टाशीतिः
89नवाशीतिः (एकोननवतिः)
90नवतिः
91एकनवतिः
92द्विनवतिः
93त्रिणवतिः
94चतुर्णवतिः
95प््चनवतिः
96षण्णवतिः
97सप्तनवति:
98अष्टनवतिः
99नवनवतिः (एकोनशतम्)
100शतम्

Class 9 HBSE एवं अव्यय

HBSE 9th Class Sanskrit व्याकरणम् संख्या एवं अव्यय

(ग) अव्यय
संस्कृत भाषा में दो प्रकार के शब्द होते हैं
(क) विकारी शब्द; जैसे रामः रामौ रामाः इत्यादि और
(ख) अविकारी शब्द; जैसेशनैः इत्यादि। अविकारी शब्द को ही अव्यय कहते हैं। जो शब्द तीनों लिङ्गों में तथा सभी विभक्तियों में एवं सब वचनों में एक समान रहते हैं तथा जिनमें कोई परिवर्तन नहीं होता, वे शब्द अव्यय कहलाते हैं। कुछ प्रमुख अव्यय निम्नलिखित हैं-

अव्ययअर्थवाक्य-प्रयोग
पुराप्राचीन काल मेंपुरा रामः राजा आसीत्।
नूनम्निश्चय हीनूनम् सः अद्य आगमिष्यति।
अद्यआजअद्य अहं विद्यालयं न गमिष्याभि।
ह्यःबीता हुआ कलह्य: सोमवारः आसीत्।
श्वःआने वाला कलश्वः रविवारः भविष्यति।
एकदाएक बारएकदा रामः लक्ष्मणं कथयत्।
यदाजबयदा स आगमिष्यति तदाहं पठिष्यामि।
कदाकबसः कदा गमिष्यति?
तदातबतदा सः गृहमगच्छत् ।
सर्वदासदासः सर्वदा कार्यं करोति।
अधुनाअबअधुना वयं पत्रं लिखामि।
शीघ्रम्जल्दीदेवः शीघ्र कार्यं कुरु।
पुनःफिरसः पुनः पुनः अत्र आगच्छति।
औरत्वमेव माता च पिता त्वमेव।
अपिभीमया सह मोहनः अपि पठिष्यति।
सर्वत्रसब जगहईश्वरः सर्वत्र अस्ति।
अतिअधिकताजलम् अति शीतलं वर्तते ।
सम्प्रतिअबअहं सम्प्रति गृहं गमिष्यामि।
धिकधिक्कारधिकू दुष्टम्।
खलुनिश्चयोधकअत्र खलु बहवः वृक्षा: सन्ति।
यथा-तथाजैसा-वैसायथा राजा तथा प्रजा।
दिवदिन मेंदिवा निद्रा मा कुरुत।
अहर्निशम्दिन-रातसः अहर्निशम् पठति।
वृथाव्यर्थवृथा न गन्तव्यम्।
नक्तम्रात मेंसः नक्तम् चिरं पठति।
नानाबिना, अनेकविद्यालये नाना छात्राः पठन्ति।
विनाबिना, रहितविद्या विना मानवः पशुः अस्ति।
मृषाझूठमृषा न वक्तव्यम् ।
अथइसके बाद, अबअथ सः कथां करोति।
मामत, नहींकदापि असत्यं मा वद।
कुतःकहाँ सेभवान् इदानीम् कुतः आगच्छति ?
शनैःधीरे-धीरेसः शनैः लिखति।
उच्चै:ऊँचेवायुयानं उच्चैः गच्छति।
नीचैःनीचेसः वृक्षात् नीचैः अपतत्।

HBSE 9th Class Sanskrit व्याकरणम् संख्या एवं अव्यय

अभ्यासार्थ प्रश्नाः
I. कोष्ठकगतेषु पदेषु उचित विभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) विष्णुः ……… अधिशेते। (पर्यङ्क)
(ख) अलं ………….. । (चिन्ता)
(ग) गङ्गा ……….. निर्गच्छति। (हिमालय)
(घ) …………. यावत् गृहम् उपैति। (सन्ध्या)
(ङ) सः ………….. खञ्जः अस्ति। (पाद)

II. शुद्ध उत्तरं चित्वा लिखत
(क) ‘धिक्’ इति उपपद योगे का विभक्तिः ?
(i) प्रथमा
(ii) द्वितीया
(iii) चतुर्थी
(iv) तृतीया

(ख) ‘नमः’ इति उपपद योगे का विभक्तिः ?
(i) चतुर्थी
(ii) पञ्चमी
(iii) तृतीया
(iv) षष्ठी

(ग) ‘विना’ इति उपपद योगे का विभक्तिः?
(i) प्रथमा
(ii) सप्तमी
(iii) तृतीया
(iv) चतुर्थी

(घ) ’40’ इति अंके किं संख्यावाचीपदम् ?
(i) चत्वारिंशत्
(ii) चत्वारिशत्
(iii) चतुरशत्
(iv) चतुर्दश

(ङ) ‘षष्टिः’ इति पदे का संख्या ?
(i) 16
(ii) 26
(iii) 60
(iv) 36

(च) ’35’ अङ्क स्थाने किं संख्यावाचीपदम् ?
(i) सप्तत्रिंशत्
(ii) अष्टत्रिंशत्
(iii) पञ्चत्रिंशत्
(iv) द्वात्रिंशत्

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HBSE 9th Class Sanskrit अपठित अवबोधनम्

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Apathit Avbodhnam अपठित अवबोधनम् Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit अपठित अवबोधनम्

Apathit Avbodhnam In Sanskrit Class 9 HBSE

‘अपठित’ शब्द का अर्थ है न पठित अर्थात् ऐसी विषयवस्तु, जो पाठ्यपुस्तक से भिन्न हो। अपठित गद्यांश में निपुणता प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक है
(1) अपठित गद्यांश के प्रश्नों का उत्तर देने से पूर्व उसे दो-तीन बार अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए।
(2) गद्यांश में प्रयुक्त कठिन शब्दों के अर्थ यदि स्पष्ट न हो रहे हों तो कठिन शब्दों वाले सम्पूर्ण वाक्य को ध्यान से पढ़कर भाव ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए।
(3) गद्यांश में प्रयुक्त अव्ययों तथा विभक्तियों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। ऐसा न करने पर उत्तर प्रायः गलत हो सकते हैं।

अधोलिखितान् गद्यांशान् पठित्वा प्रश्नानां उत्तराणि लिखत

1. भारतदेशस्य उत्तरदिशि पर्वतराजः हिमालयः तिष्ठति। पुरा अत्र मुनयः तपन्ति स्म। एकस्मिन् आश्रमे एकः मुनिः अनेके शिष्याः च अवसन्। आश्रमे बहूनि पुष्पाणि फलानि च भवन्ति स्म। गुरुः शिष्यान् पाठयति स्म। शिष्याः गुरोः आश्रमस्य च सेवाम् अकुर्वन्।
(i) गद्यांशात् द्वे ‘अव्यय’ पदे चित्वा लिखत?
(ii) शिष्यान् कः पाठयति स्म?
(iii) गुरोः सेवां के अकुर्वन् ?
(iv) ‘सेवाम’ अत्र का विभक्तिः किं वचनं च?
(v) ‘तिष्ठति’ इति पदे कः धातुः कः लकारः च?
उत्तराणि:
(i) अत्र, च।
(ii) शिष्यान् गुरुः पाठयति स्म।
(iii) गुरोः सेवां शिष्याः अकुर्वन् ।
(iv) अत्र द्वितीया विभक्ति, एकवचनम् च।
(v) स्था धातु, लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचनम्।

HBSE 9th Class Sanskrit अपठित अवबोधनम्

2. संस्कृत पुरा भारतीयानां लोकप्रिया जनभाषा आसीत्। रामायण-महाभारत काले संस्कृतम् एव जनभाषा-रूपेण प्रचलिता आसीत् । वाल्मीकिः रामायणे इमां भाषां ‘मानुषी’ इति नाम्ना निर्दिशति। संस्कृतम् एव आधुनिक प्रान्तीय भाषाणां जननी अस्ति। सर्वासु प्रान्तीय भाषासु प्रतिशतकं षष्टिः शब्दाः संस्कृतभाषायाः एव सन्ति। संस्कृतस्य ज्ञानादेव प्रान्तीय भाषाणां सम्यग् ज्ञानं भवति।।
(i) संस्कृत कदा भारतीयानां लोकप्रिया जनभाषा आसीत्?
(ii) संस्कृत केषां जननी अस्ति?
(iii) कस्मिन् ग्रन्थे संस्कृतभाषां ‘मानुषी’ इति कथितम्?
(iv) संस्कृतस्य ज्ञानात् केषां ज्ञानं भवति?
(v) भाषाणां’ इति पदे का विभक्तिः अस्ति ?
उत्तराणि:
(i) संस्कृत पुरा भारतीयानां लोकप्रिया जनभाषा आसीत्।
(ii) संस्कृतम् आधुनिक-प्रान्तीय भाषाणां जननी अस्ति।
(iii) वाल्मीकिः रामायणे संस्कृतभाषां ‘मानुषी’ इति कथितम्।
(iv) संस्कृतस्य ज्ञानात् प्रान्तीय भाषाणां ज्ञानं भवति।
(v) ‘भाषाणां’ इति पदे सप्तमी विभक्तिः अस्ति ।

3. कस्मिंश्चित् वने एकः महाचतुरकः नामकः शृगालः वसति स्म। सः कदाचित् वने एकं मृतं महागजम् अपश्यत्। सः तस्य कठिनां त्वचं भेतुम् अयतत् परं सफलो न अभवत्। अत्रान्तरे एकः सिंहः तत्रैव आगच्छत् । सिंहं दृष्ट्वा शृगालः अवदत्-स्वामिन्! अहं तव सेवकः । तवैव भोजनार्थं गजमिमं रक्षामि। सिंहः तम् एवं प्रणतं दृष्ट्वा अवदत्-अन्येन हतं जीवं नाहं खादामि। अहः इमं गजम् अहं तुभ्यमेव यच्छामि।
(i) शृगालः कुत्र वसति स्म?
(ii) शृगालः वने किम् अपश्यत् ?
(iii) सिंहः किम् अवदत् ?
(iv) सिंहं दृष्ट्वा शृगालः किम् अवदत्?
(v) कस्मिंश्चित् वने कः वसति स्म?
उत्तराणि:
(i) शृगालः कस्मिंश्चित् वने वसति स्म।
(ii) शृगालः वने एकं मृतं महागजम् अपश्यत्।
(iii) सिंहः अवदत्-यत् अन्येन हतं जीवं नाहं खादामि।
(iv) सिंहं दृष्ट्वा शृगालः अवदत्-स्वामिन् ! अहं तव सेवकः। तवैव भोजनार्थं गजमिमं रक्षामि।
(v) कस्मिंश्चित् वने एकः महाचतुरकः नामकः शृगालः वसति स्म।

अपठित अवबोधनम् संस्कृत Class 9 HBSE

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4. देशाटनस्य बहवः लाभाः सन्ति। एतेन वयं सर्वेषां देशानां राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिकं च रूपं ज्ञातुं समर्थाः स्यामः, अद्यतनीयो व्यापारः अपि प्रायशः अन्तर्राष्ट्रिय-व्यापारः सञ्जातः। कस्मिन् देशे कदा किं च सुलभम् एतस्य ज्ञानं सर्वथा अनिवार्यम् । बहवः एतादृशः अपरिपक्वाः पदार्थाः सन्ति येषां प्राप्तिः पदार्थानां निर्माणाय अनिवार्य अस्ति। अतः तान् पदार्थान् प्राप्तुं देशाटनं कर्तव्यमेव।
(i) देशाटनेन वयं किं ज्ञातुं समर्थाः स्यामः?
(ii) पदार्थानां निर्माणाय किं अनिवार्यः अस्ति?
(iii) कान् प्राप्तुं देशाटनं कर्तव्यम् ?
(iv) देशाटनस्य कति लाभाः सन्ति?
(v) ‘प्राप्तुम्’ इति पदे कः प्रत्ययः प्रयुक्तः?
उत्तराणि:
(i) देशाटनेन वयं सर्वेषां देशानां राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिकं च रूपं ज्ञातुं समर्थाः स्यामः।
(ii) बहवः एतादृशः अपरिपक्वाः पदार्थाः सन्ति येषां प्राप्तिः पदार्थानां निर्माणाय अनिवार्य अस्ति।
(iii) पदार्थान प्राप्तुं देशाटनं कर्तव्यम्।
(iv) देशाटनस्य बहवः लाभाः सन्ति।
(v) ‘प्राप्तुम्’ इति पदे ‘तुमुन्’ प्रत्ययः अस्ति।

5. कदाचिद् वर्षास्वपि वृष्टेरभावात् तृषार्तो गजयूथो यूथपतिमाह “राजन, नास्त्यस्माकं जीविताशा। अस्मिन दारुणे जलाभावे निमज्जनाभावादार्ता वयं क्व यामः किं वा कुर्मः?” एवमुक्तो यूथपति तिदूरं गत्वा तानेकं प्रभूतसलिलं सरो दर्शितवान्। तत्र गच्छतां गजानां युगपद् अतिस्भसपादपाताहतिभिस्तस्य सरसस्तीरे शयानाः शशकाः लूनानां धान्यानां प्रकरा गोगणैरिव अवमर्दिता।
(i) तृषार्तो गजयूथो यूथपतिं किम् आह?
(ii) किं दर्शितवान्?
(iii) कीदृक् जलाभावः आसीत्?
(iv) के अवमर्दिता?
(v) ‘प्रभूतसलिलं’ इति पदयोः विशेषणपदम् किं अस्ति?
उत्तराणि:
(i) राजन्, नास्त्यस्माकं जीविताशा। अस्मिन् दारुणे जलाभावे निमज्जनाभावादार्ता वयं क्व यामः किं वा कुर्मः?
(ii) तान् एकं प्रभूतसलिलं सरो दर्शितवान्।
(iii) दारुणः जलाभावः आसीत्।
(iv) शयानाः शशकाः अवमर्दिताः।
(v) ‘प्रभूतः’ इति विशेषण पदम् अस्ति।

Apathit Avbodhnam HBSE 9th Class Sanskrit

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6. विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् इति सत्यमेव विद्याधनस्य इदं वैशिष्टयं, यत् अन्यत् धनं व्ययात् क्षयमाप्नोति परं विद्याधनं व्ययात् वृद्धिम् आप्नोति। कस्यचिदपि पदार्थस्य सम्यक् ज्ञानं विद्या इति कथ्यते। विद्यया वयं विनम्राः भवामः, विनयात् वयं पात्रतां प्राप्नुमः, पात्रत्वात् धनं प्राप्यते, धनात् धर्मकार्याणि निष्पद्यन्ते यैः अस्माभिः सुखं लभ्यते। विद्यया एव मानवः सर्वत्र प्रतिष्ठां लभते।
(i) विद्याधनं कीदृशं धनम् अस्ति?
(ii) विद्यया कथं कानि निष्पद्यन्ते?
(iii) विद्याधनं व्ययात् किम् आप्नोति?
(iv) पदार्थस्य सम्यक ज्ञानं किं कथ्यते?
(v) ‘सर्वत्र प्रतिष्ठां लभते’ अत्र किं अव्ययपदं?
उत्तराणि:
(i) विद्याधनं सर्वधनप्रधानं धनम् अस्ति।
(ii) विद्यया वयं विनम्राः भवामः, विनयात् वयं पात्रतां प्राप्नुमः, पात्रत्वात् धनं प्राप्यते, धनात् धर्मकार्याणि निष्पद्यन्ते।
(iii) विद्याधनं व्ययात् वृद्धिम् आप्नोति।
(iv) पदार्थस्य सम्यक् ज्ञानं विद्या इति कथ्यते।
(v) अत्र ‘सर्वत्र’ इति अव्यय पदम् अस्ति।

7. किम् अस्ति गीता ? ‘गीता’ उपनिषदां सारः अस्ति। श्रीकृष्णः कुरुक्षेत्रज्योतिसरस्तटे युद्धभूमौ विषादग्रस्ताय श्री वीर अर्जुनाय यदुपदिष्टं सा-एव गीता। गीतायाः अष्टादशअध्यायेषु 700 श्लोकाः सन्ति। एते मानवकल्याणाय सन्ति। अत्र सर्वासांसमस्यानां समाधानम् अस्ति।गतवर्षे गीता-मनीषी-स्वामी ज्ञानानन्द महाराजस्य प्रेरणया हरियाणा सर्वकारेण अन्तर्राष्ट्रीयः गीता-महोत्सवः आयोजितः। एतच्छधानीयमस्ति। अस्माभिः गीता नैव पठनीया अपितु आचरणीया।
(i) गीतायां कति अध्यायाः सन्ति?
(ii) कस्यां सन्ति 700 श्लोकाः?
(iii) श्रीकृष्णः गीतोपदेशं कस्मै अयच्छत्?
(iv) अस्माभिः किं करणीयम्?
(v) कस्य प्रेरणया गीता-महोत्सवः आयोजितः?
उत्तराणि:
(i) गीतायां अष्टादश अध्यायाः सन्ति ।
(ii) गीतायाम् 700 श्लोकाः सन्ति।
(iii) श्रीकृष्णः गीतोपदेशं अर्जुनाय अयच्छत्।
(iv) अस्माभिः गीता नैव पठनीया अपितु आचरणीया।
(v) गीता-मनीषी-स्वामी ज्ञानानन्द महाराजस्य प्रेरणया गीता-महोत्सवः आयोजितः।

अपठित अवबोधनम् HBSE 9th Class Sanskrit

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8. कस्मिंश्चिन्नगरे चत्वारो ब्राह्मण पुत्राः वसन्ति स्म। तेषां त्रयः शास्त्रपारङ्गताः परं व्यावहारिक-बुद्धिहीना आसन्, एकस्तु व्यवहारकुशलः शास्त्र-ज्ञान-विमुखः आसीत् । एकदा वने विचरन्तः ते कतिचिद् अस्थीनि अवलोकितवन्तः। तेषु एकः विज्ञानबलेन अस्थि-सञ्चयमकरोत् । द्वितीयाः तस्मिन् चर्म-मांस रुधिरं संयोजितवान् । तृतीयो यावत् तस्मिन् प्राण-सञ्चारं कर्तुमुद्यतः तावत् सुबुद्धि ते निषेधयन् अवदत्-भोः, तिष्ठतु भवान्। एष सिंहः क्रियते यदि एष जीविष्यति तर्हि सर्वानपि भक्षयिष्यति।
(i) ब्राह्मण पुत्राः कुत्र वसन्ति स्म?
(ii) एकदा ते कुत्र कानि अवलोकितवन्तः?
(iii) तेषु एकः केन बलेन अस्थि सञ्चयम् अकरोत् ?
(iv) तृतीयः किं कर्तुम् उद्यतः?
(v) ‘भविष्यति’ इति पदे को लकारः अस्ति?
उत्तराणि:
(i) ब्राह्मण पुत्राः कस्मिंश्चिन्नगरे वसन्ति स्म।
(ii) एकदा ते वने विचरन्तः कतिचिद् अस्थीनि अवलोकितवन्तः।
(iii) तेषु एकः विज्ञानबलेन अस्थिसञ्चमकरोत् ।
(iv) तृतीयः प्राणसञ्चारः कर्तुम् उद्यतः।
(v) ‘भविष्यति’ इति पदे ‘लृट् लकारः अस्ति।

9. यदस्माभिः स्वामिना विना नावस्थातव्यम् । भवांश्च सर्वैरपि स्वामिगुणैः सम्पन्नः। अतः एतस्य वनस्य राज्येऽभिषेक्तुं भवानेव योग्यः। ततो यथाभिषेकवेला नात्येति तथा सत्वरमायातु देवः। हस्ती प्रत्यवदत्-‘न खलु चिन्तयन्नपि निपुणं तमात्मनो गुणमवलोकयामि यस्यायमनुरूपोऽनुग्रहातिरेकः। तथाप्युदारजनादरो बहुमानमारोपयत्यवश्यम्, तद् अनुगृहीतोऽस्म्यहमनया वनवासिनां सम्भावनया। यथाजोषं क्रियताम् । सज्जोऽस्म्यभिषेकाय। तद् यदि नातिखेदकरं तर्हि अभिषेकमण्डलमार्गमादेशय।
(i) अस्माभिः केन विना नावस्थातव्यम् ?
(ii) तद् कि आदेशय?
(iii) गजः केषां सम्भावनया अनुगृहीतः अस्ति?
(iv) कस्य वेला न अत्येति?
(v) ‘योग्यः’ इति पदस्य विलोमपदं लिखत।
उत्तराणि:
(i) अस्माभिः स्वामिना विना नावस्थातव्यम्।
(ii) तद् नातिखेदकरं तर्हि अभिषेकमण्डलमार्गम आदेशय।
(iii) गजः वनवासिनां सम्भावनया अनुगृहीतः अस्ति।
(iv) अभिषेकस्य वेला न अत्येति।
(v) ‘योग्यः’ इति पदस्य विलोमपदम् ‘अयोग्यः’ अस्ति।

Pathit Avbodhnam In Sanskrit HBSE 9th Class

HBSE 9th Class Sanskrit अपठित अवबोधनम्

10. पुरा भारते भरतः नाम प्रतापी नृपः आसीत् । तस्य राज्यं विस्तृतमासीत् । राज्यप्रबन्धे भरतः अतीव कुशलः आसीत्। सर्वे जनाः तस्य राज्ये सुखिनः आसन्। इदं कथ्यते यत् भरतस्य नाम्ना एव अस्य देशस्य नाम भारतम् अभवत्।
(i) भरतः कीदृशः नृपः आसीत् ?
(ii) भरतः कस्मिन् कुशलः आसीत् ?
(iii) के भरतस्य राज्ये सुखिनः आसन् ?
(iv) कस्य नाम्ना अस्य देशस्य नाम भारतम् अभवत्?
(v) अस्य गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।
उत्तराणि:
(i) भरतः प्रतापी नृपः आसीत्।
(ii) भरतः राज्यप्रबन्धे कुशलः आसीत्।
(iii) भरतस्य राज्ये सर्वेजनाः सुखिनः आसन्।
(iv) भरतस्य नाम्ना अस्य देशस्य नाम भारतम् अभवत्।
(v) प्रतापी नृपः भरतः।

Apathit Avbodhnam In Sanskrit HBSE 9th Class

अभ्यासार्थ गद्यांश:

1. प्रकृतिः मनुष्यस्य उपकारिणी। मनुष्यैः सह तस्याः शाश्वतः सम्बन्धः। सा विविधरूपेषु अस्मिन् जगति आत्मानं प्रकटयति। पशवः, पक्षिणः, वनस्पतयः, च तस्याः एव अङ्गानि। निराशाः असहायाः जनाः तस्याः एव आश्रयं प्राप्नुवन्ति। सा स्वमनोहरेण सौन्दर्येण नीरसं हृदयम् अपि सरसं करोति । सूर्यः चन्द्रः च तस्याः नेत्रे । शस्य-श्यामला एषा भूमिः। विविधाः औषधयः सकलानि खनिजानि च प्रकृतेः एव शोभा। सा तु नित्यम् एव एतैः साधनैः सर्वेषाम् उपकारं करोति, परम् अधन्यः अयं जनः कृतज्ञतां विहाय असाधुसेवितं पथं गच्छति, विविधानि कष्टानि च अनुभवति। नरः शाश्वतं सुखं वाञ्छति चेत् तर्हि प्रकृतेः प्रतिकूलं कदापि न आचरेत् इति।
(i) प्रकृतेः शोभा का?
(ii) अस्य गद्यांशस्य शीर्षकं लिखत।
(iii) मनुष्यस्य उपकारिणी का?
(iv) मनुष्यैः सह कस्याः शाश्वतः सम्बन्ध?
(v) ‘नीरसं’ इत्यस्य विलोम पदं लिखत।

Sanskrit Apathit Avbodhnam HBSE 9th Class

HBSE 9th Class Sanskrit अपठित अवबोधनम्

2. एकदा एकः कर्तव्यपरायणः नगररक्षकः इतस्ततः भ्रमन् एकम् अशीतिवर्षीयं महापुरुषम् अपश्यत्। सः आम्रवृक्षस्य आरोपणे तल्लीनः आसीत्। इदं दृष्ट्वा नगररक्षकः तं महापुरुषम् अवदत्-अवलोकनेन प्रतीयते यत् यदा एषः वृक्षः फलिष्यति तदा भवान् जीवितः न भविष्यति। अतः किमर्थं वृथा परिश्रमं कुर्वन्ति भवन्तः? महापुरुषः हसित्वा अवदत्पश्यन्तु एतान् फलयुक्तान् वृक्षान् । एतेषाम् आरोपणं मया न कृतं परं फलानि अहं खादित्वा सन्तुष्टः भवामि । अतः यदा मम आरोपितस्य वृक्षस्य फलानि अन्ये खादिष्यन्ति, अहं पुनः प्रसन्नः भविष्यामि । महापुरुषस्य वचनं श्रुत्वा तं च नमस्कृत्य नगररक्षकः उक्तवान अनुकरणीया एव सज्जनानां सज्जनता।
(i) नगररक्षकः अशीतिवर्षीयं महापुरुषम् कुत्र अपश्यत् ?
(ii) अस्य गद्यांशस्य शीर्षकं लिखत।
(iii) नगररक्षकः कीदृशः महापुरुषः आसीत्?
(iv) सज्जनानां सज्जनता कीदृशी भवति?
(v) ‘श्रुत्वा’ इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति?

3. कश्चित् वानरः भूतले समागतं मकरं पृच्छति-भवान् किमर्थं भूतले समागतः? मकरः कथयति धन्याः भवादृशाः प्रियवादिनः ये स्थलोत्पन्नाः सन्ति। तच्छ्रुत्वा वानरः अतिथये पक्वफलानि अर्पयति। मकरेण फलानि निजदयितायै अर्पितानि। तानि भक्षयित्वा सा चिन्तयति-नित्यं मधुर फलानां सेवनेन वानरहृदयस्य मांसं अमृतोपमस्यात् । सा पतिं कथितवती-यदि त्वं मां जीवितां दृष्टुमिच्छसि, तदा वानरहृदय मांस भक्षणस्य कामना पूरय। मकरः समुद्रतटं गत्वा वानराय निवेदयति तव भातृजाया त्वामाकारयति। वानरः प्रार्थनां स्वीकरोति। वानरं समुद्रमध्ये नीत्वा मकरः यथावृत्तं तस्मै सूचयति। चतुरः वानरः वदति-‘मम हृदयं तु वृक्षे वर्तते । तत्र नीत्वा मुञ्च माम् येन स्वहृदयं गृहीत्वा पुनः आगमिष्यामि।’ तत्र नीतः वानरः तत्पृष्ठतः समुत्तीर्य शाखिनम् आरुह्य वदति-‘जल मार्गानुसारिणां स्थलजैः सङ्गतिः न भवति।’
(i) कस्मात् कारणात् वानरस्य हृदयं अमृतोपमंस्यात् ?
(ii) शाखिनम् आरुह्य वानरः किम् अवदत् ?
(iii) वानरः अतिथयेः किम् अर्पयति?
(iv) किं भक्षणाय मकरी पतिं कथितवती?
(v) ‘आगमिष्यामि’ इति पदे कः लकारः अस्ति?

HBSE 9th Class Sanskrit अपठित अवबोधनम्

4. एकदा कौरव-पाण्डवानां शस्त्रपरीक्षा अभवत् । आचार्यः द्रोणः एक कृत्रिमं खगं वृक्षशाखायां स्थापितवान् । अयं कृत्रिमः खगः सर्वेषां लक्ष्यम् आसीत्। आचार्य द्रोणः तस्मिन् खगे बाणचालनात् पूर्वं युधिष्ठिरम् अपृच्छत्-त्वं किं किं पश्यसि? युधिष्ठिरः अब्रवीत्-अहं खगं, वृक्ष, भवन्तं, सर्वान् सहचरान् च पश्यामि । आचार्य द्रोणः तम् अपसारितवान्। पश्चात् सर्वे राजपुत्राः क्रमशः आहूताः पृष्टाश्च। सर्वेः तदेव कथितं यत् युधिष्ठिरेण कथितम् आसीत्। अन्ते अर्जुनः पृष्टः। सः अवदत् अहं केवलं खगं एव पश्यामि। आचार्यः प्रसन्नः भूत्वा लक्ष्यवेधाय तम् आदिशत्। अर्जुनः सफलः जातः।
(i) आचार्यः द्रोणः कं कुत्र स्थापितवान् ?
(ii) अस्य गद्यांशस्य शीर्षकं लिखत।
(iii) खगः कीदृशः आसीत्?
(iv) शस्त्र परीक्षायां कः सफलः जातः?
(v), ‘कृत्रिमः’ इति विशेषणस्यविशेष्यं किम् ?

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HBSE 9th Class Sanskrit रचना लघु निबंध-लेखनम्

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions रचना Laghu Nibandh Lekhanam लघु निबंध-लेखनम् Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit रचना लघु निबंध-लेखनम्

निबंध-लेखनम् Class 9 HBSE

(ख) लघु निबन्ध लेखनम्
1. परोपकारः
1. परेषां हित साधनम् एव परोपकारः कथ्यते।
2. संसारे परोपकारस्य भावना सर्वत्र दृश्यते।
3. संसारस्य प्रत्येक पदार्थः परोपकारे संलग्नः अस्ति।
4. वृक्षाः परोपकाराय एव फलन्ति।
5. नद्यः परोपकाराय एव प्रवहन्ति।
6. भारतवर्षे अनेकाः परोपकारिणः पुरुषाः अभवन्।
7. स्वामी दयानन्दः स्वजीवनम् परोपकाराय त्यक्तवान्।
8. सत्यं कथितम् परोपकाराय सतां विभूतयः।

2. दीपावली
1. दीपावली भारतवर्षस्य प्राचीनतमं पर्वः अस्ति।
2. दीपानाम् अवलिः इति दीपावली कथ्यते।
3. अस्मिन् दिने सर्वत्र पवित्रता विराजते।
4. जनाः स्वगृहाणि विद्युत प्रकाशैः। दीपानां प्रकाशैः सुसज्जयन्ति।
5. अस्य पर्वस्य ऐतिहासिक महत्त्वम् अपि अस्ति।
6. अस्मिन् एवं दिने श्रीरामचन्द्रः रावणं हत्या अयोध्यायाम् आगतवान् ।
7. अतः वयम् आनन्देन दीपावलीम् मानयेन।

Class 9 HBSE निबंध-लेखनम्

HBSE 9th Class Sanskrit रचना लघु निबंध-लेखनम्

3. सदाचारः
1. सज्जनानाम् आचारः सदाचारः कथ्यते।
2. जीवने सदाचारस्य स्थानं महत्त्वपूर्णम् अस्ति।
3. आचारवान् पुरुषः सर्वत्र पूज्यते।
4. सदाचारात् एव मनुष्यः दीर्घमायुः वैभवं च प्राप्नोति।
5. आचारहीनाः जनाः अपवित्राः भवन्ति।
6. उक्तं च-“आचारहीनं न पुनन्ति वेदाः।”
7. . अतः एव सदाचरणं सर्वेषां कृते अत्यावश्यकम् अस्ति।

4. अनुशासनम्
1. नियम-पालनं आज्ञापालनं वा अनुशासनं भवति।
2. अनुशासनं जीवने परमम् आवश्यकम् अस्ति।
3. परिवारे, विद्यालये, समाजे, राष्ट्रे सर्वत्र अस्य आवश्यकता वर्तते।
4. अनुशासनस्य पालनेन उन्नतिः भवति।
5. नियम पालनस्य अभावे जीवनं दुष्करं भवेत्।
6. अद्य छात्रेषु अनुशासनस्य अभावः अस्ति।
7. छात्राः गुरोः आज्ञां न पालयन्ति न च पित्रोः आदेशं स्वीकुर्वन्ति।

HBSE 9th Class Sanskrit रचना लघु निबंध-लेखनम्

5. विद्यायाः महत्त्वम्
1. विद्या धनं सर्व धनेषु प्रधानम् अस्ति।
2. अस्याः कोशः अनुपमः अस्ति।
3. विद्या मानवानां विनयं ददाति।
4. अस्याः प्रभावेण नरः उन्नतिं प्राप्नोति।
5. विद्यया एव नरः ज्ञान-विज्ञानादीनां सम्यक् ज्ञानम् आप्नोति।
6. विद्याभ्यासः ज्ञाने उन्नतिं करोति।
7. विद्याविहीनः नरः पशुतुल्यः अस्ति।

अभ्यासार्थ प्रश्नाः

1. अधोलिखित-विषयेषु लघु-निबन्धं लिखत.
संस्कृतस्य महत्त्वम्, मम विद्यालयः, सत्संगति।

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HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला

Haryana State Board HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला

HBSE 9th Class Sanskrit लौहतुला Textbook Questions and

लौहतुला पाठ का सारांश HBSE 9th Class

I. अधोलिखितानां सूक्तिानां भावं हिन्दी भाषायां लिखत
(निम्नलिखित सूक्तियों के भाव हिन्दी भाषा में लिखिए)
(क) विभवहीनो यो वसेत् स पुरुषाधमः।
(ख) त्वदीया तुला मूषकैक्षिता।
(ग) नदीतटात्स श्येनेन हृतः।
उत्तराणि:
(क) भावार्थ-प्रस्तुत सूक्ति महाकवि विष्णुशर्मा विरचित ‘पञ्चतन्त्र’ नामक कथा ग्रन्थ से संकलित पाठ ‘लौहतुला’ में से उद्धृत है। इस संसार में धनहीन मनुष्य सबसे निम्न कोटि का मनुष्य माना जाता है, क्योंकि धन-ऐश्वर्य से हीन रहने वाला मनुष्य नीच पुरुष होता है। निर्धनता मनुष्य को बुरे-से-बुरा कर्म करने के लिए मजबूर कर देती है। विशेषकर उस व्यक्ति की स्थिति और भी चिन्तनीय हो जाती है जो अमीर होकर समय के चलते कुछ दिन बाद निर्धन हो जाता है। इस प्रकार के निर्धन व्यक्ति का यही प्रयास होता है कि वह किसी-न-किसी प्रकार से धन संग्रह करे। यही सोचकर जीर्णधन धन कमाने की इच्छा से किसी दूसरे देश में जाना चाहता है।

(ख) भावार्थ प्रस्तुत सूक्ति महाकवि विष्णुशर्मा विरचित ‘पञ्चतन्त्र’ नामक कथा ग्रन्थ से संकलित पाठ ‘लौहतुला’ में से उद्धृत है। जीर्णधन नामक वणिक् पुत्र अपनी लोहे की तराजू किसी सेठ के घर रख देता है। जब विदेश से धन संग्रह के बाद वापस आकर जीर्णधन सेठ से अपनी तराजू माँगता है तो सेठ कहता है कि तुम्हारी तराजू को चूहे खा गए। सेठ की बातों से ही उसका झूठ पकड़ा जा रहा है, क्योंकि लोहे की वस्तु को चूहे खा ही नहीं सकते। वस्तुतः सेठ निर्धन को तराजू वापस देना ही नहीं। चाहता। इसलिए चूहों द्वारा तराजू के खाने की बात करता है।

(ग) भावार्थ प्रस्तुत सूक्ति महाकवि विष्णुशर्मा विरचित ‘पञ्चतन्त्र’ नामक कथा ग्रन्थ से संकलित पाठ ‘लौहतला’ में से उद्धृत है। जीर्णधन ने सेठ से बदला लेने के लिए उसके पुत्र को पर्वत की गुफा में छिपाकर गुफा के द्वार को एक बड़े पत्थर से बन्द कर दिया। जब सेठ ने अपने पुत्र के विषय में जीर्णधन से पूछा तो उसने कहा कि नदी के तट से उसे बाज उठाकर ले गया। जिस प्रकार लोहे की तराजू को चूहे नहीं खा सकते, उसी प्रकार शिशु को बाज उठाकर नहीं ले जा सकता। परन्तु यहाँ ‘जैसे को तैसा’ वाली कहावत सही प्रतीत होती है। जैसा जवाब जीर्णधन को सेठ ने दिया था, वैसा ही जवाब जीर्णधन ने सेठ को दिया।

लौहतुला HBSE 9th Class

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला

II. अधोलिखितान गद्यांशान पठित्वा प्रदत्त प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतपूर्णवाक्येन लिखत
(निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर संस्कृत के पूर्ण वाक्यों में लिखिए)
(1) तस्य च गृहे लौहघटिता पूर्वपुरुषोपार्जिता तुला आसीत्। तां च कस्यचित् श्रेष्ठिनो गृहे निक्षेपभूतां कृत्वा देशान्तरं प्रस्थितः। ततः सुचिरं कालं देशान्तरं यथेच्छया भ्रान्त्वा पुनः स्वपुरम् आगत्य तं श्रेष्ठिनम् अवदत्-“भोः श्रेष्ठिन् ! दीयतां मे सा निक्षेपतुला।” सोऽवदत्-“भोः! नास्ति सा, त्वदीया तुला मूषकैः भक्षिता” इति।
लौहतुला
(क) तस्य गृहे लौहघटिता का आसीत् ?
(ख) किम् कृत्वा सः देशान्तरं प्रस्थितः?
(ग) ‘खादिता’ इति क्रियापदस्य अत्र किं पर्यायपदं प्रयुक्तम्?
(घ) श्रेष्ठी जीर्णधन किम् उवाच?
(ङ) स्वपुरम् आगत्य कः श्रेष्ठिनम् उवाच?
उत्तराणि:
(क) तस्य गृहे लौहघटिता पूर्वपुरुषोपार्जिता तुलासीत्।
(ख) सः लौहतुलां कस्यचित् श्रेष्ठिनः गृहेनिक्षेपभूतां कृत्वा देशान्तरं प्रस्थितः।
(ग) ‘खादिता’ इति क्रियापदस्य पर्यायपदं अत्र ‘भक्षिता’ इति प्रयुक्तम्।
(ङ) स्वपुरम् आगत्य जीर्णधनः श्रेष्ठिनम् उवाच।
(घ) श्रेष्ठी जीर्णधन उवाच ‘भोः श्रेष्ठिन्! दीयतां मे सा निक्षेपतुला।

(2) जीर्णधनः अवदत्-“भोः श्रेष्ठिन्! नास्ति दोषस्ते, यदि मूषकैः भक्षितता। ईदृशः एव अयं संसारः।
न किञ्चिदत्र शाश्वतमस्ति। परमहं नद्यां स्नानार्थं गमिष्यामि। तत् त्वम् आत्मीयं एनं शिशुं धनदेवनामानं मया सह स्नानोपकरणहस्तं प्रेषय” इति।
(क) नास्ति ते दोषः इति कः आह?
(ख) नद्यां स्नानार्थं कः गमिष्यति?
(ग) ‘गुणः’ इति पदस्य अत्र किं विलोमपदं प्रयुक्तम्?
(घ) मया सह कं प्रेषय?
(ङ) धनदेवः कस्य पुत्रः अस्ति?
उत्तराणि:
(क) नास्ति ते दोषः इति जीर्णधनः आह।
(ख) नद्यां स्नानार्थं जीर्णधनः गमिष्यति।
(ग) ‘गुणः’ इति पदस्य अत्र ‘दोषः’ विलोमपदं प्रयुक्तम्।
(घ) मया सह शिशुं प्रेषय।
(ङ) धनदेवः श्रेष्ठिनः पुत्रः अस्ति।

(3) “भोः सत्यवादिन् ! यथा श्येनो बालं न नयति, तथा मूषका अपि लौहघटितां तुलां न भक्षयन्ति। तदर्पय मे तुलाम्, यदि दारकेण प्रयोजनम्।” इति।
एवं विवदमानौ तौ द्वावपि राजकुलं गतौ । तत्र श्रेष्ठी तारस्वरेण प्रोवाच-“भोः! वञ्चितोऽहम् ! वञ्चितोऽहम् ! अब्रह्मण्यम् ! अनेन चौरेण मम शिशः अपहृतः” इति।
(क) श्येनः कं न नयति?
(ख) लौहघटितां तुलां के न भक्षयन्ति?
(ग) ‘पुत्रेण’ इति पदस्य अत्र किं पर्यायपदं प्रयुक्तम् ?
(घ) श्रेष्ठी तारस्वरेण किं प्रोवाच?
(ङ) तौ द्वावपि कुत्र गतौ?
उत्तराणि:
(क) श्येनः बालं न नयति।
(ख) लौहघटितां तुलां मूषकाः न भक्षयन्ति।
(ग) ‘पुत्रेण’ इति पदस्य अत्र ‘दारकेण’ प्रयुक्तम्।
(घ) श्रेष्ठी तारस्वरेण प्रोवाच-‘भोः! अब्रह्मण्यम्! अब्रह्मण्यम्! मम शिशुरनेन चौरेणापहृतः’ ।
(ङ) तौ द्वावपि राजकुलं गतौ।

Shemushi Sanskrit Class 9 Chapter 8 Solutions HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला

III. स्थूलपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(स्थूल पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) जीर्णधनस्य गृहे लौहघटिता तुलासीत्।
(ख) त्वदीया तुला मूषकैर्भक्षिता।
(ग) इदृक् एव अयं संसारः।
(घ) वणिक् पुत्रः अभ्यागतेन सह प्रस्थितः ।
(ङ) श्येनः बालं न नयति।
उत्तराणि:
(क) कस्य गृहे लौहघटिता तुलासीत् ?
(ख) त्वदीया का मूषकै क्षिता?
(ग) इदृक् एव अयं कः?
(घ) वणिक् पुत्रः केन सह प्रस्थितः?
(ङ) श्येनः कं न नयति?

9th Class Sanskrit Chapter 8 Question Answer HBSE

IV. अधोलिखितानि वाक्यानि घटनाक्रमानुसारं पुनः लिखत
(निम्नलिखित वाक्यों को घटनाक्रम के अनुसार दोबारा लिखिए)
(अ) (क) ईदृशः एव अयं संसारः। न किञ्चिदत्र शाश्वतमस्ति।
(ख) ततः सुचिरं कालं देशान्तरं यथेच्छया भ्रान्त्वा पुनः स्वपुरम् आगत्य।
(ग) आसीत् कस्मिंश्चिद् अधिष्ठाने जीर्णधनो नाम वणिक्पुत्रः।
(घ) श्रेष्ठिनो आह–“भोः श्रेष्ठिन्! नास्ति दोषस्ते, यदि मूषकैर्भक्षितेति।”
(ङ) ‘जीर्णधनो गृहे लौहघटिता पूर्वपुरुषोपार्जिता तुलासीत् ।
उत्तराणि:
(ग) आसीत् कस्मिंश्चिद् अधिष्ठाने जीर्णधनो नाम वणिक्पुत्रः।
(ङ) जीर्णधनो गृहे लौहघटिता पूर्वपुरुषोपार्जिता तुलासीत्।
(ख) ततः सुचिरं कालं देशान्तरं यथेच्छया भ्रान्त्वा पुनः स्वपुरम् आगत्य।
(घ) श्रेष्ठिनो आह–“भोः श्रेष्ठिन् ! नास्ति दोषस्ते, यदि मूषकैक्षितेति।”
(क) ईदृशः एव अयं संसारः। न किञ्चिदत्र शाश्वतमस्ति।

(ब)
(क). अथ धर्माधिकारिणः तम् अवदन्-“भोः! समर्प्यतां श्रेष्ठिसुतः” ।
(ख) एवं विवदमानौ तौ द्वावपि राजकुलं गतौ।
(ग) तेन वणिजा पृष्ट–“भोः! अभ्यागत! कथ्यतां कुत्र मे शिशुः यः त्वया सह नदीं गतः” ?
(घ) तत्र श्रेष्ठी तारस्वरेण प्रोवाच-“भोः! अब्रह्मण्यम्! अब्रह्मण्यम् ! मम शिशुरनेन चौरेणापहृतः” इति।
(ङ) यथा श्येनो बालं न नयति, तथा मूषका अपि लौहघटितां तुलां न भक्षयन्ति।
उत्तराणि:
(ग) तेन वणिजा पृष्ट-“भोः! अभ्यागत! कथ्यतां कुत्र मे शिशुः यः त्वया सह नदीं गतः” ?
(ङ) यथा श्येनो बालं न नयति, तथा मूषका अपि लौहघटितां तुलां न भक्षयन्ति।
(ख) एवं विवदमानौ तौ द्वावपि राजकुलं गतौ।
(घ) तत्र श्रेष्ठी तारस्वरेण प्रोवाच-“भोः! अब्रह्मण्यम्! अब्रह्मण्यम्! मम शिशुरनेन चौरेणापहृतः” इति।
(क) अथ धर्माधिकारिणः तम् अवदन् – “भोः! समर्म्यतां श्रेष्ठिसुतः”।

Class 9th Sanskrit Chapter 8 HBSE

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला

v. अधोलिखित प्रश्नानाम् चतुषु वैकल्पिक-उत्तरेषु उचितमुत्तरं चित्वा लिखत- ।
(निम्नलिखित प्रश्नों के दिए गए चार विकल्पों में से उचित उत्तर का चयन कीजिए)
1. वणिक् पुत्रस्य नाम किम् आसीत् ?
(i) जीर्णधनः
(ii) धनदेवः
(iii) अजीर्णधनः
(iv) अधनदेव
उत्तरम्:
(i) जीर्णधनः

2. मूषकैः का भक्षिता?
(i) अन्नैः
(ii) तुला
(iii) फलानि
(iv) आम्राणि
उत्तरम्:
(ii) तुला

3. वणिक शिशुः केन सह प्रस्थितः?
(i) बालकेन
(ii) अभ्यागतेन
(iii) पितृणा
(iv) जनन
उत्तरम्:
(ii) अभ्यागतेन

4. विवदमानौ तौ कुत्र गतौ?
(i) देवालयं
(ii) न्यायालयं
(iii) राजकुलं
(iv) धर्मालय
उत्तरम्:
(iii) राजकुलं

5. जीर्णधनः गिरिगुहा द्वारं कया आच्छाद्य गृहमागतः?
(i) बृहच्छिलया
(ii) लौहतुलया
(iii) श्येनेन
(iv) वृक्षकाष्ठेन
उत्तरम्:
(i) बृहच्छिलया

6. ‘द्वौ + अपि’ अत्र सन्धियुक्तपदम् अस्ति
(i) द्वौऽपि
(ii) द्वयोपि
(iii) द्वावपि
(iv) द्वयोऽपि
उत्तरम्:
(iii) द्वावपि

7. ‘तुलासीत्’ इति पदस्य सन्धिविच्छेदम् अस्ति
(i) तुलां + आसीत्
(ii) तुला + ऽसीत्
(iii) तुलाः + आसीत्
(iv) तुला + आसीत्
उत्तरम्:
(iv) तुला + आसीत्

8. ‘भ्रान्त्वा’ इति पदे कः प्रत्ययः अस्ति?
(i) क्त्वा
(ii) तुमुन्
(iii) शत
(iv) क्तवतु
उत्तरम्:
(i) क्त्वा

9. ‘शिशुः’ इति पदस्य किं पर्यायपदम् ?
(i) बालिका
(ii) जनकः
(iii) बालकः
(iv) पितरः
उत्तरम्:
(iii) बालकः.

10. “पृष्ट च तेन वणिजा” इति वाक्ये अव्ययपदम् अस्ति
(i) तेन
(ii) पृष्टः
(iii) च
(iv) वणिजा
उत्तरम्:
(ii) च

Class 9 Sanskrit Chapter 8 HBSE

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योग्यताविस्तारः

यह पाठ विष्णुशर्मा द्वारा रचित ‘पञ्चतन्त्रम्’ नामक कथाग्रन्थ से ‘मित्रभेद’ नामक तन्त्र से सङ्कलित है। इसमें विदेश से लौटकर जीर्णधन नामक व्यापारी अपनी धरोहर (तराजू) को सेठ से माँगता है। ‘तराजू चूहे खा गये हैं ऐसा सुनकर जीर्णधन उसके पुत्र को स्नान के बहाने नदी तट पर ले जाकर गुफा में छिपा देता है। सेठ द्वारा अपने पुत्र के विषय में पूछने पर जीर्णधन कहता है कि ‘पुत्र को बाज उठा ले गया है। इस प्रकार विवाद करते हुए दोनों न्यायालय पहुँचते हैं जहाँ धर्माधिकारी उन्हें समुचित न्याय प्रदान करते हैं।

ग्रन्थ परिचय-महाकवि विष्णुशर्मा (200 ई० से 600 ई० के मध्य) ने राजा अमरसिंह के पुत्रों को राजनीति में पारंगत करने के उद्देश्य से ‘पञ्चतन्त्रम्’ नामक सुप्रसिद्ध कथाग्रन्थ की रचना की थी। यह ग्रन्थ पाँच भागों में विभाजित है। इन्हीं भागों को ‘तन्त्र’ कहा गया है। पञ्चतन्त्र के पाँच तन्त्र हैं-मित्रभेदः, मित्रसंप्राप्तिः, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाशः और अपरीक्षितकारकम्। इस ग्रन्थ में अत्यन्त सरल शब्दों में लघुकथाएँ दी गई हैं। इनके माध्यम से ही लेखक ने नीति के गूढ़ तत्त्वों का प्रतिपादन किया है।

भावविस्तारः

‘लौहतुला’ नामक कथा में दी गई शिक्षा के सन्दर्भ में इन सूक्तियों को भी देखा जाना चाहिए।
1. न कश्चित् कस्यचिन्मित्रं न कश्चित् कस्यचिद् रिपुः।
व्यवहारेण जायन्ते. मित्राणि रिपवस्तथा ॥
उत्तराणि:
अर्थात् न तो कोई किसी का मित्र होता है और न ही कोई किसी का शत्रु होता है। शत्रु अथवा मित्र तो व्यवहार से ही उत्पन्न होते हैं।

2. आत्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्।
उत्तराणि:
अपनी आत्मा के प्रतिकूल दूसरों के साथ आचरण नहीं करना चाहिए।

भाषिकविस्तारः

1. तसिल प्रत्यय-पञ्चमी विभक्ति के अर्थ में तसिल प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
यथा- ग्रामात् ~ ग्रामतः (ग्राम + तसिल्)
आदेः – आदितः (आदि + तसिल)
यथा – छात्रः विद्यालयात् आगच्छति।
छात्रः विद्यालयतः आगच्छति।

इसी प्रकार – गृह + तसिल – गृहतः – गृहात्।
तन्त्र + तसिल् – तन्त्रतः – तन्त्रात्।
प्रथम + तसिल् – प्रथमतः – प्रथमात्।
आरम्भ + तसिल् – आरम्भतः – आरम्भात् ।

2. अभितः, परितः, उभयतः, सर्वतः, समया, निकषा, हा और प्रति के योग में द्वितीया विभक्ति का प्रयोग होता है।
यथा- 1. गृहम् अभितः वृक्षाः सन्ति।
2. विद्यालयम् परितः द्रुमाः सन्ति।
3. ग्रामम् उभयतः नद्यौ प्रवहतः।
4. हा दुराचारिणम्।
5. क्रीडाक्षेत्रम् निकषा तरणतालम् अस्ति।
6. बालकः विद्यालयम् प्रति गच्छति।
7. नगरम् समया औषधालयः विद्यते।
8. ग्रामम् सर्वतः गोचारणभूमिः अस्ति।

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HBSE 9th Class Sanskrit लौहतुला Important Questions and Answers

लौहतुला गद्यांशों के सप्रसंग हिन्दी सरलार्थ एवं भावार्थ

1. आसीत् कस्मिंश्चिद् अधिष्ठाने जीर्णधनो नाम वणिक्पुत्रः। स च विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत्
यत्र देशेऽथवा स्थाने भोगा भुक्ताः स्ववीर्यतः।
तस्मिन विभवहीनो यो वसेत् स पुरुषाधमः ॥
तस्य च गृहे लौहघटिता पूर्वपुरुषोपार्जिता तुला आसीत्। तां च कस्यचित् श्रेष्ठिनो गृहे निक्षेपभूतां कृत्वा देशान्तरं प्रस्थितः। ततः सुचिरं कालं देशान्तरं यथेच्छया भ्रान्त्वा पुनः स्वपुरम् आगत्य तं श्रेष्ठिनम् अवदत्-“भोः श्रेष्ठिन् ! दीयतां मे सा निक्षेपतुला।” सोऽवदत्-“भोः! नास्ति सा, त्वदीया तुला मूषकैः भक्षिता” इति।

जीर्णधनः अवदत्-“भोः श्रेष्ठिन् ! नास्ति दोषस्ते, यदि मूषकैः भक्षिता। ईदृशः एव अयं संसारः। न किञ्चिदत्र शाश्वतमस्ति। परमहं नद्यां स्नानार्थं गमिष्यामि। तत् त्वम् आत्मीयं एनं शिशुं धनदेवनामानं मया सह स्नानोपकरणहस्तं प्रेषय” इति। स श्रेष्ठी स्वपुत्रम् अवदत्-“वत्स! पितृव्योऽयं तव, स्नानार्थं यास्यति, तद् अनेन साकं गच्छ” इति। अथासौ श्रेष्ठिपुत्रः धनदेवः स्नानोपकरणमादाय प्रहृष्टमनाः तेन अभ्यागतेन सह प्रस्थितः। तथानुष्ठिते स वणिक् स्नात्वा तं शिशुं गिरिगुहायां प्रक्षिप्य, तद्द्वारं बृहत् शिलया आच्छाद्य सत्त्वरं गृहमागतः।

अन्वय-यत्र देशे अथवा स्थाने स्ववीर्यतः भोगाः भुक्ताः तस्मिन् विभवहीनः यः वसेत् सः अधमः पुरुषः।

शब्दार्थ-अधिष्ठाने = स्थान पर नगर में। वणिक्पुत्रः = बनिए का पुत्र। विभवक्षयात् = धन की कमी के कारण। गन्तुमिच्छन् (गन्तुम् + इच्छन्) = जाने की इच्छा से। व्यचिन्तयत् (वि + अचिन्तयत्) = सोचने लगा। स्ववीर्यतः = अपने पराक्रम के द्वारा। विभवहीनो = धन-ऐश्वर्य से हीन। पुरुषाधमः = नीच पुरुष । लौहघटिता = लोहे से बनी हुई। पूर्वपुरुषोपार्जिता = पूर्वजों के द्वारा खरीदी गई। तुला आसीत् = तराजू थी। श्रेष्ठिनो = सेठ। निक्षेपभूतां = जमा-राशि/धरोहर के रूप में। सूचिरं कालं = बहुत समय तक। भ्रान्त्वा = घूमकर। शाश्वतम् = सदा रहने वाला। स्नानोपकरणहस्तं = नहाने का सामान हाथ में लिए हुए। प्रेषय = भेज दो। पितृव्योऽयं = चाचा, ताऊ। यास्यति = वह जाएगा। अनेन साकं = उसके साथ। प्रहृष्टमनाः = प्रसन्न मन वाला। अभ्यागतेन = अतिथि। गिरिगुहायां = पर्वत की गुफा में। बृहत् शिलया = विशाल शिला से। आच्छाद्य = ढककर। सत्त्वरं = शीघ्र। गृहमागतः (गृहम् + आगतः) = घर आ गया।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘लौहतुला’ में से उद्धृत है। इस पाठ का संकलन महाकवि विष्णुशर्मा द्वारा रचित ‘पञ्चतन्त्र’ के ‘मित्रभेद’ नामक तन्त्र से किया गया है।

सन्दर्भ-निर्देश-इस गद्यांश में बताया गया है कि सेठ के पास धरोहर के रूप में रखी गई अपनी लोहे की तुला के न मिलने पर जीर्णधन ने नदी में स्नान कराने के बहाने सेठ के पुत्र को गुफा में छुपा दिया।

सरलार्थ-किसी स्थान पर जीर्णधन नामक बनिए का पुत्र रहता था। धन की कमी के कारण विदेश जाने की इच्छा से उसने सोचा-जिस देश अथवा स्थान पर अपने पराक्रम के द्वारा भोगों का भोग किया, वहाँ धन-ऐश्वर्य से हीन होकर जो निवास करता है, वह मनुष्य सबसे नीच होता है।

भाव यह है कि जिस स्थान पर मनुष्य अपने पराक्रम से एकत्रित सम्पत्ति ऐश्वर्य से आराम करता है, वहीं यदि वह निर्धन हो जाता है तो उसे नीच पुरुष माना जाता है।

उसके घर पर उसके पूर्वजों द्वारा खरीदी गई लोहे से बनी एक तराजू थी। उसे किसी सेठ के घर धरोहर के रूप में रखकर वह दूसरे देश को चला गया। इसके बाद दीर्घकाल तक इच्छानुसार दूसरे देश में घूमकर पुनः अपने नगर को वापस आकर उसने सेठ से कहा-“हे सेठ! धरोहर के रूप में रखी मेरी वह तराजू दे दो।” उसने कहा-“अरे! वह तो नहीं है, तुम्हारी तराजू को चूहे खा गए।”

जीर्णधन ने कहा-“हे सेठ! यदि चूहे खा गए तो इसमें तुम्हारा दोष नहीं है। यह संसार ही ऐसा है। यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं है। परंतु मैं नदी पर स्नान के लिए जा रहा हूँ। इसलिए तुम अपने धनदेव नामक इस पुत्र को स्नान की वस्तुएँ हाथ में देकर मेरे साथ भेज दो।” . वह सेठ अपने पुत्र से बोला-“बेटा! ये तुम्हारे चाचा हैं, स्नान के लिए जा रहे हैं, तुम इनके साथ जाओ।”

इस प्रकार वह बनिए का पुत्र स्नान की वस्तुएँ हाथ में लेकर प्रसन्न मन से उस अतिथि के साथ चला गया। तब वह बनिया-पुत्र वहाँ पहुँचकर और स्नान करके उस शिशु को पर्वत की गुफा में रखकर द्वार को एक बड़े पत्थर से ढक कर शीघ्र घर आ गया।।

भावार्थ-संस्कृत में एक कहावत है-“शठे शाढ्यं समाचरेत्।” अर्थात् धूर्त के साथ धूर्त ही बनना चाहिए। सेठ ने जीर्णधन के · साथ धूर्तता का आचरण किया। उसका जवाब देने के लिए उसने सेठ के पुत्र को पर्वत की गुफा में छुपा दिया।

HBSE 9th Class Sanskrit Solutions Shemushi Chapter 8 लौहतुला

2. सः श्रेष्ठी पृष्टवान्–“भोः! अभ्यागत! कथ्यतां कुत्र मे शिशुः यः त्वया सह नदीं गतः”? इति।
स अवदत्-“तव पुत्रः नदीतटात् श्येनेन हृतः” इति। श्रेष्ठी अवदत्-“मिथ्यावादिन! किं क्वचित् श्येनो बालं
हर्तुं शक्नोति? तत् समर्पय मे सुतम् अन्यथा राजकुले निवेदयिष्यामि।” इति।
सोऽकथयत्-“भोः सत्यवादिन् ! यथा श्येनो बालं न नयति, तथा मूषका अपि लौहघटितां तुलां न भक्षयन्ति।
तदर्पय मे तुलाम्, यदि दारकेण प्रयोजनम्।” इति।
एवं विवदमानौ तौ द्वावपि राजकुलं गतौ। तत्र श्रेष्ठी तारस्वरेण प्रोवाच“भोः! वञ्चितोऽहम् ! वञ्चितोऽहम् !
अब्रह्मण्यम् ! अनेन चौरेण मम शिशुः अपहृतः” इति।
अथ धर्माधिकारिणः तम् अवदन्-“भोः! समर्म्यतां श्रेष्ठिसुतः”।

शब्दार्थ-पृष्ठवान् = और पूछा। कप्यतां = बताओ। कुत्र = कहाँ। श्येनेन = बाज के द्वारा। हृतः = ले जाया गया। मिथ्यावादिन = झूठ बोलने वाले। समर्पय = लौटा दो। अन्यथा = नहीं तो। विवदमानौ = झगड़ा करते हुए। तारस्वरेण = जोर से। अब्रह्मण्यम् = घोर अन्याय, अनुचित । अपहृतः = चुरा लिया गया है।

प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘लौहतुला’ में से उद्धृत है। इस पाठ का संकलन महाकवि विष्णुशर्मा द्वारा रचित ‘पञ्चतन्त्र’ के ‘मित्रभेद’ नामक तन्त्र से किया गया है।

सन्दर्भ-निर्देश-इस गद्यांश में बताया गया है कि सेठ तथा जीर्णधन दोनों आपस में झगड़ते हुए राजकुल में जाते हैं।

सरलार्थ-उस व्यापारी (सेठ) द्वारा पूछा गया-“हे अतिथि! बताइए मेरा पुत्र कहाँ है जो तुम्हारे साथ नदी पर गया था?” उसने (जीर्णधन) कहा-“नदी के तट से उसे बाज उठाकर ले गया।” सेठ ने कहा-“हे झूठे! क्या कहीं बाज बालक को ले जा सकता है? तो मेरा पुत्र लौटा दो अन्यथा मैं राजकुल में शिकायत करूँगा।”

उसने कहा-“अरे सच बोलने वाले! जैसे बाज बालक को नहीं ले जाता, वैसे ही चूहे भी लोहे से निर्मित तराजू नहीं खाते। यदि पुत्र को वापस चाहते हो तो मेरी तराजू लौटा दो।”

इस प्रकार झगड़ते हुए वे दोनों राजकुल चले गए। वहाँ सेठ ने जोर से कहा-“अरे! अनुचित हो गया! अनुचित! मेरे पुत्र को इस चोर ने चुरा लिया है।” तब न्यायकर्ताओं ने उससे (जीर्णधन) कहा-“अरे! सेठ का पुत्र लौटा दो।” ।

भावार्थ-जिस प्रकार जीर्णधन को पता था कि तराजू सेठ के पास है, उसी प्रकार सेठ को भी पता था कि उसका पुत्र जीर्णधन के पास ही है। आपस में फैसला न होने के कारण वे न्यायाधीश के पास जाते हैं।

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3. सोऽवदत्-“किं करोमि? पश्यतो मे नदीतटात् श्येनेन शिशुः अपहृतः” । इति।
तच्छ्रुत्वा ते अवदन्-भोः! भवता सत्यं नाभिहितम्-किं श्येनः शिशुं हर्तुं समर्थो भवति?
सोऽवदत्-भोः भोः! श्रूयतां मद्वचः
तुलां लौहसहस्रस्य यत्र खादन्ति मूषकाः।
राजन्तत्र हरेच्छ्येनो नात्र संशयः॥
ते अपृच्छन्-“कथमेतत्”।
ततः स श्रेष्ठी सभ्यानामग्रे आदितः सर्वं वृत्तान्तं न्यवेदयत्। ततः न्यायाधिकारिणः विहस्य, तौ द्वावपि सम्बोध्य
तुला-शिशुप्रदानेन तोषितवन्तः।

अन्वय-राजन्! यत्र लौहसहस्रस्य मूषकाः खादन्ति तत्र श्येनः बालकं हरेत, अत्र संशयः न।

शब्दार्थ-पश्यतो मे = मेरे देखते हुए। नदीतटात् = नदी के तट से। नाभिहितम् = कहा गया है। हरेत् = चुरा सकता है। ले जा सकता है। संशयः = सन्देह । सभ्यानामग्रे = सभासदों के सम्मुख। आदितः = आरम्भ से। सर्वं वृत्तान्तं = सारी घटना। विहस्य = हँसकर। सम्बोध्य = समझा-बुझाकर। तोषितवन्तः = सन्तुष्ट किए गए।
प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत विषय की पाठ्य-पुस्तक ‘शेमुषी प्रथमो भागः’ में संकलित पाठ ‘लौहतुला’ में से उद्धृत है। इस पाठ का संकलन महाकवि विष्णुशर्मा द्वारा रचित ‘पञ्चतन्त्र’ के ‘मित्रभेद’ नामक तन्त्र से किया गया है।

सन्दर्भ-निर्देश-इस गद्यांश में बताया गया है कि सेठ तथा जीर्णधन फैसले के लिए राजकुल में गए, जहाँ पर न्यायाधीश ने फैसला सुनाया।

सरलार्थ-उसने (जीर्णधन) कहा–“क्या करूँ? मेरे देखते-देखते बालक को बाज नदी के तट से ले गया।” यह सुनकर वे सब बोले-अरे! आपने सच नहीं कहा-क्या बाज बालक को उठा ले जाने में समर्थ होता है? उसने (जीर्णधन) कहा-अरे-अरे! मेरी बात सुनिए

हे राजन्! जहाँ लोहे से निर्मित तराजू को चूहे खा सकते हैं, वहाँ बाज बालक को उठा ले जा सकता है, इसमें कोई सन्देह नहीं।

उन्होंने कहा-“यह कैसे हो सकता है?”
इससे उस सेठ ने सभासदों के सामने आरम्भ से सारा वृत्तान्त कह सुनाया। तब हँसकर उन्होंने उन दोनों को समझा-बुझाकर तराजू और बालक का आदान-प्रदान करके उन दोनों को सन्तुष्ट किया।

भावार्थ-इस गद्यांश में न्याय के महत्त्व को बताया गया है। वादी-प्रतिवादी दोनों को पता होता है कि दोषी कौन है, परन्तु दोष निर्धारण के लिए न्यायाधीश का फैसला सर्वमान्य होता है। सेठ तथा जीर्णधन को न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले को मानना पड़ा।

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अभ्यासः

1. एकपदेन उत्तरं लिखत
(एक पद में उत्तर लिखिए)
(क) वणिक्पुत्रस्य किं नाम आसीत्?
(ख) तुला कैः भक्षिता आसीत् ?
(ग) तुला कीदृशी आसीत्?
(घ) पुत्रः केन हृतः इति जीर्णधनः वदति?
(ङ) विवदमानौ तौ द्वावपि कुत्र गतौ?
उत्तराणि:
(क) जीर्णधनः,
(ख) मूषकैः,
(ग) लौहघटिता,
(घ) श्येनेन,
(ङ) राजकुलं ।

2. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संस्कृत भाषा में लिखिए)
(क) देशान्तरं गन्तुमिच्छन् वणिक्पुत्रः किं व्यचिन्तयत् ?
(ख) स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी किम् अकथयत् ?
(ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं कया आच्छाद्य गृहमागतः?
(घ) स्नानानन्तरं पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं किम् अवदत् ?
(ङ) धर्माधिकारिणिः जीर्णधनश्रेष्ठिनौ कथं तोषितवन्तः?
उत्तराणि:
(क) देशान्तरं गन्तुम् इच्छन् वणिक्पुत्रः व्यचिन्तयत्-यत्र स्ववीर्यतः भोगाः भुक्ताः तस्मिन् स्थाने यः विभवहीनः वसेत् सः पुरुषाधमः।
(ख) स्वतुलां याचमानं जीर्णधनं श्रेष्ठी अकथयत्-भोः! त्वदीया तुला मूषकैः भक्षिता।
(ग) जीर्णधनः गिरिगुहाद्वारं बृहच्छिलया आच्छाद्य गृहमागतः।
(घ) स्नानानन्तरं पुत्रविषये पृष्टः वणिक्पुत्रः श्रेष्ठिनं अवदत्-“नदी तटात् सः बालः श्येनेन हृतः” इति।
(ङ) धर्माधिकारिणिः जीर्णधनश्रेष्ठिनौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन तोषितवन्तः।

3. स्थूलपदान्यधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(स्थूल पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण कीजिए)
(क) जीर्णधनः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत्।
(ख) श्रेष्ठिनः शिशुः स्नानोपकरणमादाय अभ्यागतेन सह प्रस्थितः ।
(ग) वणिक् गिरिगुहां बृहच्छिलया आच्छादितवान्।
(घ) सभ्यैः तौ परस्परं संबोध्य तुला-शिशु-प्रदानेन सन्तोषितौ।
उत्तराणि:
(क) कः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुमिच्छन् व्यचिन्तयत् ?
(ख) श्रेष्ठिनः शिशुः स्नानोपकरणमादाय केन सह प्रस्थितः?
(ग) वणिक् गिरिगुहां कस्मात् आच्छादितवान्?
(घ) सभ्यैः तौ परस्परं संबोध्य केन सन्तोषितौ?

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4. अधोलिखितानां श्लोकानाम् अपूर्णोऽन्वयः प्रदत्तः पाठमाधृत्य तं पूरयत
(निम्नलिखित श्लोकों का अपूर्ण अन्वय दिया गया है। पाठ के आधार पर उसे पूर्ण कीजिए)
(क) यत्र देशे अथवा स्थाने ……… भोगाः भुक्ता …….. विभवहीनः यः ……… स पुरुषाधमः।
(ख) राजन् ! यत्र लौहसहस्रस्य ……… मूषकाः ……… तत्र श्येनः ……… हरेत् अत्र संशयः न।
उत्तराणि
(क) यत्र देशे अथवा स्थाने स्ववीर्यतः भोगाः भुक्ता तस्मिन् विभवहीनः यः वसेत् स पुरुषाधमः।
(ख) राजन्! यत्र लौहसहस्रस्य तुलाम् मूषकाः खादन्ति तत्र श्येनः बालकम् हरेत् अत्र संशयः न।

5. तत्पदं रेखाङ्कित कुरुत यत्र
(उस शब्द को रेखांकित कीजिए, यहाँ)
(क) ल्यप् प्रत्ययः नास्ति
विहस्य, लौहसहस्रस्य, संबोध्य, आदाय।
(ख) यत्र द्वितीया विभक्तिः नास्ति
श्रेष्ठिनम्, स्नानोपकरणम्, सत्त्वरम्, कार्यकारणम्।
(ग) यत्र षष्ठी विभक्तिः नास्ति
पश्यतः, स्ववीर्यतः, श्रेष्ठिनः, सभ्यानाम् ।
उत्तराणि:
(क) लौहसहस्रस्य,
(ख) सत्त्वरम्,
(ग) स्ववीर्यतः

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6. सन्धिना सन्धिविच्छेदेन वा रिक्तस्थानानि पूरयत
(सन्धि अथवा सन्धिविच्छेद के द्वारा रिक्त स्थान पूरे कीजिए)
(क) श्रेष्ठ्याह = …….. + आह
(ख) …………….. = द्वौ + अपि
(ग) पुरुषोपार्जिता = पुरुष + …………….
(घ) …………….. = यथा + इच्छया
(ङ) स्नानोपकरणम् = ……………. + उपकरणम्
(च) ……………. = स्नान + अर्थम्
उत्तराणि:
(क) श्रेष्ठ्याह = श्रेष्ठी + आह
(ख) द्वावपि = द्वौ + अपि
(ग) पुरुषोपार्जिता = पुरुष + उपार्जिता
(घ) यथेच्छया = यथा + इच्छया
(ङ) स्नानोपकरणम् = स्नान + उपकरणम्
(च) स्नानार्थम् = स्नान + अर्थम्

7. समस्तपदं विग्रहं वा लिखत
(समस्तपद अथवा विग्रह लिखिए)
विग्रहः – समस्तपदम्
(क) स्नानस्य उपकरणम् = ………………….
(ख) …………………., …………………. = गिरिगुहायाम्
(ग) धर्मस्य अधिकारी = ………………….
(घ) …………………., …………………. = विभवहीनाः
उत्तराणि:
विग्रहः – समस्तपदम्
(क) स्नानस्य उपकरणम् – स्नानोपकरणम्
(ख) गिरेः गुहायाम् – गिरिगुहायाम्
(ग) धर्मस्य अधिकारी – धर्माधिकारी
(घ) विभवेन हीनाः – विभवहीनाः

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(अ) यथापेक्षम् अधोलिखितानां शब्दानां सहायता “लौहतुला” इति कथायाः सारांश संस्कृतभाषया लिखत
(निम्नलिखित शब्दों की सहायता से ‘लौहतुला’ कथा का सारांश संस्कृत भाषा में लिखिए)

वणिक्पुत्रःस्नानार्थम्लौहतुलाअयाचत्वृत्तान्तं
ज्ञात्वाश्रेष्ठिनंप्रत्यागतःगतःप्रदानम्

उत्तराणि-संस्कृत भाषा-एकदा जीर्णधन नाम वणिक् पुत्रः विभवक्षयात् देशान्तरं गन्तुम् अचिन्तयत्। तस्य गृहे एका लौहतुला आसीत् । तां कस्यचित् श्रेष्ठिनः गृहे निक्षेपभूतां कृत्वा सः देशान्तरं प्रस्थितः। सुचिरं कालं देशान्तरं भ्रान्त्वा स्वनगरम् प्रत्यागत्य सः तुलाम् अयाचत्। सः श्रेष्ठी प्रत्युवाच-“तुलां तु मूषकैः भक्षिता।” ।

ततः जीर्णधनः श्रेष्ठिनः पुत्रेण सह स्नानार्थं गतः। स्नात्वा सः श्रेष्ठिपुत्रं गिरिगुहायां प्रक्षिप्य, तद्द्वारं बृहच्छिलयाच्छाद्य गृहम् आगतः। ततः सः वणिक् श्रेष्ठिनं स्वपुत्रविषये अपृच्छत् । वणिक् उवाच-‘नदी तटात् सः श्येनेन हृतः।” इति। सः शीघ्रमाह-‘श्येनः बालं हर्तुं न शक्नोति। अतः समर्पय मे सुतम्।’ एवं विवदमानौ तौ राजकुलं गतौ । सर्वं वृत्तान्तं ज्ञात्वा धर्माधिकारिभिः तुला-शिशु-प्रदानेन तौ द्वौ सन्तोषितौ।

लौहतुला (लोहे की तराजू) Summary in Hindi

लौहतुला पाठ-परिचय

प्रस्तुत पाठ संस्कृत साहित्य के सर्वप्रमुख कथाग्रन्थ ‘पञ्चतन्त्र’ के ‘मित्रभेद’ नामक तन्त्र (अध्याय) से सङ्कलित है। ‘पञ्चतन्त्र’ महाकवि विष्णुशर्मा द्वारा रचित एक विशाल ग्रन्थ है। 200 ई० से 600 ई० के मध्य विद्वानों के समाज में विशेष रूप से प्रसिद्ध महाकवि पण्डित विष्णुशर्मा ने राजा अमरसिंह के पुत्रों को राजनीति में पारङ्गत करने के उद्देश्य से ‘पञ्चतन्त्र’ नामक सुप्रसिद्ध कथाग्रन्थ की रचना की थी। यह ग्रन्थ पाँच भागों में विभक्त है। इन्हीं भागों को ‘तन्त्र’ के नाम से जाना जाता है। इन पाँच तन्त्रों के नाम क्रमशः-मित्रभेदः, मित्रसंप्राप्तिः, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाशः और अपरीक्षितकारकम् हैं। इन्हीं पाँचों के संग्रह को ‘पञ्चतन्त्र’ के नाम से जाना जाता है। इस ग्रन्थ में अत्यन्त सरल शब्दों में लघुकथाएँ दी गई हैं। उन कथाओं के माध्यम से लेखक ने नीति के गूढ तत्त्वों का प्रतिपादन किया है।

पाठ में वर्णित कथा के अनुसार जीर्णधन नामक व्यापारी अपने धन के समाप्त हो जाने पर पुनः धन कमाने की इच्छा से किसी देश में जाने के विषय में सोचने लगा। उसके घर में एक लोहे की तराजू थी। जीर्णधन अपनी उस लोहे की तराजू को किसी सेठ के घर में ‘धरोहर’ के रूप में रखकर विदेश चला गया। विदेश से लौटकर वह अपनी धरोहर (तराजू) को सेठ से माँगता है। सेठ ने कहा कि “तराजू चूहे खा गए”। ऐसा सुनकर जीर्णधन उसके पुत्र को स्नान के बहाने नदी तट पर ले जाकर गुफा में छिपा देता है। जब सेठ अपने पुत्र के विषय में जीर्णधन से पूछता है तो वह कहता है कि पुत्र को बाज उठाकर ले गया है। जीर्णधन के जवाब को सुनकर सेठ कहता है कि बाज बच्चे का हरण नहीं कर सकता। अतः मेरे पुत्र को मुझे दे दो। इस प्रकार विवाद करते हुए दोनों न्यायालय पहुँचते हैं जहाँ धर्माधिकारी उन्हें समुचित न्याय प्रदान करते हैं।

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