HBSE 7th Class Social Science Solutions History Chapter 9 क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण

Haryana State Board HBSE 7th Class Social Science Solutions History Chapter 9 क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Social Science Solutions History Chapter 9 क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण

HBSE 7th Class History क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण Textbook Questions and Answers

फिर से याद करें

क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण प्रश्न उत्तर HBSE Class 7 प्रश्न 1.
निम्नलिखित में मेल बैठाएँ :

अनंतवर्मन केरल
जगन्नाथ बंगाल
महोदयपुरम उड़ीसा
लीला तिलकम् कांगड़ा
मंगलकाव्यम् पुरी
लघु चित्र केरल

उत्तर:

अनंतवर्मन उड़ीसा
जगन्नाथ पुरी
महोदयपुरम केरल
लीला तिलकम् केरल
मंगलकाव्यम् कांगड़ा
लघु चित्र उड़ीसा

Class 7 History Chapter 9 Question Answer In Hindi HBSE प्रश्न 2.
मणिप्रवालम् क्या है? इस भाषा में लिखी पुस्तक का नाम बताएँ।
उत्तर:
मणि-प्रवालम् दो भाषाओं अर्थात् संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा की ओर संकेत करता है। चौदहवीं शताब्दी का एक ग्रंथ, लीला तिलकम, जो व्याकरण तथा काव्यशास्त्र विषयक है, ‘मणिप्रवालम’ शैली में लिखा गया था। ‘मणिप्रवालम’ का शाब्दिक अर्थ है हीरा और मूंगा, जो यहाँ दो भाषाओं – संस्कृत तथा क्षेत्रीय भाषा – के साथ-साथ प्रयोग की ओर संकेत करता है।

क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण HBSE Question Answer In Hindi Class 7 प्रश्न 3.
कत्थक के उद्भव व विकास का वर्णन करें।
उत्तर:
(i) कत्थक नृत्य शैली उत्तर भारत के अनेक भागों से जुड़ी है। कत्थक’ शब्द ‘कथा’ शब्द से निकला है, जिसका प्रयोग संस्कृत तथा अन्य भाषाओं में कहानी के लिए किया जाता है। कत्थक मूल रूप से उत्तर भारत के मंदिरों में कथा यानी कहानी सुनाने वालों की एक जाति थी। ये कथाकार अपने हाव-भाव तथा संगीत से अपने कथावाचन को अलंकृत किया करते थे।

(ii) पंद्रहवी तथा सोलहवीं शताब्दियों में भक्ति आंदोलन के प्रसार के साथ, कत्थक एक विशिष्ट नृत्य शैली का रूप धारण करने लगा। राधा-कृष्ण के पौराणिक आख्यान (कहानियाँ) लोक नाट्य के रूप में प्रस्तुत किए जाते थे जिन्हें ‘रासलीला’ कहा जाता था। रासलीला में लोक नृत्य के साथ कत्थक कथाकार के मूल हाव-भाव भी जुड़े होते थे।

(iii) मुगल बादशाहों और उनके अभिजातों के शासन काल में कत्थक नृत्य राजदरवार में प्रस्तुत किया जाता था जहाँ इस नृत्य ने अपने वर्तमान अभिलक्षण अर्जित किए और वह एक विशिष्ट नृत्य शैली के रूप में विकसित हो गया।

(iv) कालांतर में यह दो परंपराओं अर्थात् ‘घरानों’ में फूला-फला : राजस्थान (जयपुर) के राजदरबारों में और लखनऊ में। अवध के अंतिम नवाब वाजिदअली शाह के संरक्षण में यह एक प्रमुख कला रूप में उभरा।।

(v) 1850-1875 के दौरान यह नृत्य शैली के रूप में इन दो क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि आज के पंजाब, हरियाणा, जम्मू और काश्मीर, बिहार तथा मध्य प्रदेश के निकटवर्ती इलाकों में भी पक्के तौर पर संस्थापित हो गया। इसकी प्रस्तुति में क्लिष्ट तथा द्रुत पद संचालन, उत्तम वेशभूषा तथा कहानियों के प्रस्तुतिकरण एवं अभिनय पर जोर दिया जाता है।

(vi) ब्रिटिश प्रशासकों ने इसे पसंद नहीं किया व इसके विकास में कोई सहयोग नहीं दिया। वह केवल गणिकाओं द्वारा पेश किया जाता रहा।

(vii) आजादी के बाद इसे छह शास्त्रीय नृत्यों के रूप में मान्यता मिली।’

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HBSE 7th Class Social Science Chapter 9 क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण प्रश्न 4.
कत्थक के मुख्य संरक्षक कौन थे?
उत्तर:
कत्थक के मुख्य संरक्षक मुगल बादशाह राजस्थान व लखनऊ के राज दरबार थे। अवध के अंतिम नबाव बाजिद अली शाह के संरक्षण में, यह एक मुख्य कला रूप में उभरा।

प्रश्न 5.
बंगाल के मंदिरों की स्थापत्यकला के महत्त्वपूर्ण लक्षण क्या हैं?
उत्तर:
(i) बंगाल, में पंद्रहवी शताब्दी के बाद वाले वर्षों में, मंदिर बनाने का दौर जोरों पर रहा जो उन्नीसवीं शताब्दी में आका समाप्त हो गया।

(ii) मंदिर और अन्य धार्मिक भवन अक्सर उन व्यक्तियों या समूहों द्वारा बनाए जाते थे जो शक्तिशाली बन रहे थे, वे इनके माध्यम से अपनी शक्ति तथा भक्ति भाव का प्रदर्शन करना चाहते थे।

(iii) बंगाल में साधारण ईंटों और मिट्टी-गारे से अनेक मंदिर ‘निम्न’ सामाजिक समूहों जैसे कालू (तेली) केसरी (घंटा धातु के कारीगर) आदि के समर्थन से बने थे।

(iv) यूरोप की व्यापारी कंपनियों के आ जाने से नए आर्थिक अवसर पैदा हुए. इन सामाजिक समूहों से संबंधित अनेक परिवारों ने इन अवसरों का लाभ उठाया। जैसे-जैसे लोगों की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति सुधरती गई. उन्होंने इन स्मारकों के निर्माण के माध्यम से अपनी परिस्थिति या प्रतिष्ठा की घोषणा कर दी। जब स्थानीय देवी-देवता, जो पहले गाँवों में छान-छप्पर वाली झोपड़ियों में पूजे जाते थे, को ब्राह्मणों द्वारा मान्यता प्रदान कर दी गई तो उनकी प्रतिमाएं मंदिरों में स्थापित की जाने लगीं।

(v) इन मंदिरों की शक्ल या आकृति बंगाल की छप्परदार झोपड़ियों की तरह ‘दोचाला’ (दो छतों वाली) या ‘चौचाला’ (चार छतों वाली) होती थी। इसके कारण मंदिरों की स्थापत्य कला में विशिष्ट बंगाली शैली का उद्भव हुआ।

(vi) मंदिर आमतौर पर एक वर्गाकार चबूतरे पर बनाए जाते थे। उनके भीतरी भाग में कोई सजावट नहीं होती थी, लेकिन अनेक मंदिरों की बाहरी दीवारें चित्रकारियों, सजावटी टाइलों अथवा मिट्टी की पट्टियों से सजी होती
थीं।

आइए चर्चा करें

प्रश्न 6.
चारण-भाटों ने शूरवीरों की उपलब्धियों की उद्घोषणा क्यों की?
उत्तर:
चारण-भाटों द्वारा शूरवीरों की उपलब्धियों की उद्घोषणा के कारण :

  • चारण-भाटों से यह आशा की जाती थी कि वे अन्य जनों को भी उन शूरवीरों का अनुकरण करने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करेंगे।
  • चारण-भाटों द्वारा गाए गए काव्य एवं गीत ऐसे शूरवीरों की स्मृति की सुरक्षित रखते थे।

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प्रश्न 7.
हम जन-साधारण की तुलना में, शासकों के सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के बारे में बहुत अधिक क्यों जानते हैं?
उत्तर:
शासकों के सांस्कृतिक रीति-रिवाजों की अधिक जानकारी के कारण :

  • शासकों द्वारा निर्मित कराए गए धार्मिक स्मारकों में हमें उनके सांस्कृतिक रीति-रिवाजों की जानकारी मिलती है।
  • सांस्कृतिक परंपराएँ कई क्षेत्रों के शासकों के आदर्शों तथा अभिलाषओं के साथ घनिष्ठता से जुड़ी थीं।
  • शासकों के सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में यात्रा-वृत्तांतों तथा कई रचनाकारों द्वारा भी वर्णन किया गया है।

प्रश्न 8.
विजेताओं ने पुरी स्थित जगन्नाथ के मंदिर पर नियंत्रण प्राप्त करने के प्रयत्न क्यों किए?
उत्तर:
ज्यों-ज्यों जगन्नाथ मंदिर को तीर्थस्थल यानी तीर्थयात्रा के केंद्र के रूप में महत्त्व प्राप्त होता गया, सामाजिक और राजनीतिक मामलों में भी उसकी सत्ता बढ़ती गई। उसकी जिन्होंने भी उड़ीसा को जीता, जैसे-मुगल, मराठे और ईस्ट इंडिया कम्पनी, सबने इस मंदिर पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयत्न किया। वे सब महसूस करते थे कि मंदिर पर नियंत्रण प्राप्त करने से स्थानीय जनता में उनका शासन स्वीकार्य हो जाएगा।

प्रश्न 9.
बंगाल में मंदिर क्यों बनाए गए?
उत्तर:
बंगाल में पंद्रहवीं शताब्दी के बाद वाले वर्षों में मंदिर बानाने का दौर जोरों पर रहा, जो उन्नीसवीं सदी तक रहा। मंदिर निर्माण के निम्न कई कारण थे:
(i) मंदिर और अन्य धार्मिक भवन अक्सर उन व्यक्तियों या समूहों द्वारा बनाए जाते थे, जो शक्तिशाली बन रहे थे। वे इनके माध्यम से अपनी शक्ति तथा भक्तिभाव का प्रदर्शन करना चाहते थे।

(ii) बंगाल में जैसे-जैसे लोगों की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति सुधरती गई, उन्होंने इन मंदिर स्मारकों के निर्माण के माध्यम से अपनी प्रस्थिति या प्रतिष्ठता की घोषणा कर दी। आइए करके देखें

प्रश्न 10.
भवनों, प्रदर्शन कलाओं, चित्रकला के विशेष संदर्भ में अपने क्षेत्र की संस्कृति के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लक्षणों/विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
मैं, दिल्ली में रहता हूँ। यह भारत की राजधानी है। यहाँ की संस्कृति मिली-जुली है। इसके महत्त्वपूर्ण लक्षणों या विशेषताओं का वर्णन निम्न शीर्षकों में किया जा सकता है:
I. इमारतें : दिल्ली में अनेक धार्मिक, ऐतिहासिक, सरकारी और वाणिज्यिक गतिविधियों से जुड़ी हुई इमारतों के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों से जुड़ी हुई विभिन्न प्रकार की आवासीय इमारतें हैं। यहाँ एक ओर विशाल राष्ट्रपति भवन है जिसमें देश के राष्ट्रपति अपने परिवारजनों आदि के साथ रहते हैं तो दूसरी ओर संसद भवन है जिसमें हमारे संसद के दोनों सदन-राज्य सभा और लोक सभा प्रायः कार्यरत रहते हैं। उसी के नजदीक एक युद्ध स्मारक इंडिया गेट है जहाँ हर समय वीर जवान ज्योति जलती रहती है। 26 जनवरी के दिन प्रधानमंत्री इस ज्योति को प्रज्वलित करते हैं और देश के राष्ट्रपति इस अवसर पर तीनों सेनाओं के प्रमुखों की सलामी लेने के साथ-साथ ध्वजारोहण और झाकियों का अवलोकन करते हैं।

इंडिया गेट के पास ही एक विशाल राष्ट्रीय संग्रहालय है। यहाँ हम अपने अतीत के बारे में पढ़ सकते हैं, अनेक वस्तुएँ और उपकरण देख सकते हैं। अपने ज्ञान और अनुभव को बढ़ा सकते हैं। दिल्ली में कुतब मीनार, लाल किला, जामा मस्जिद, बिरला मंदिर, अनेक चर्च, अनेक ऐतिहासिक गुरुद्वारे, जैन मंदिर, सुंदर उपवन और बाग देख सकते हैं। इन सभी इमारतों में प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक और समकालीन भारत की स्थापत्य कला, चित्रकला, मूर्तिकला, नृत्यकला से संबंधित दृश्य, विभिन्न भाषाओं और लिपियों में लिखे विवरण पढ़ सकते है, देख सकते हैं।

II. प्रदर्शन कलाएँ : दिल्ली में समय-समय पर विभिन्न विशाल कला केंद्रों में नृत्य, चित्र प्रदर्शनियाँ, संगीत आयोजन आदि के कार्यक्रमों का आनंद उठा सकते है, देख सकते हैं। पुरानी इमारतों की दीवारों, धार्मिक इमारतों की छतों और दीवारों की चित्रकला के साथ-साथ रफी मार्ग पर स्थित चित्रकला प्रर्दशनी के आयोजनों को भी देख सकते हैं। दिल्ली में उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय, पूर्वी भारतीय, राजस्थान शैली, कांगड़ा शैली से संबंधित चित्रों को देखकर आनंद उठाया जा सकता है।

प्रश्न 11.
क्या आप (क) बोलने (ख) पढ़ने (ग) लिखने के लिए भिन्न-भिन्न भाषाओं का प्रयोग करते हैं? इनमें से किसी एक भाषा की किसी प्रमुख रचना के बारे में पता लगाएँ और चर्चा करें कि आप इसे रोचक क्यों पाते हैं?
उत्तर:

  • मैं. बोलने के लिए पंजाबी भाषा का प्रयोग करती हूँ/करता हूँ लेकिन यह भाषा न तो मैं पढ़ सकती हूँ और न लिख सकती हूँ।
  • मैं, उर्दू बोल लेती/लेता हूँ और मुझे थोड़ा बहुत लिखना और पढ़ना भी आता है।
  • हिंदी में पूरी तरह समझ सकती हूँ, योल सकती हूँ. पढ़ सकती हूँ और लिख सकती हूँ।
  • अंग्रेजी भाषा को मैं थोड़ा-थोड़ा समझ सकती हूँ, थोड़ा-थोड़ा बोल सकती हूँ और थोड़ा-बहुत पढ़-लिख सकती हूँ।

प्रमुख रचना : मैंने ‘रामचरितमानस’ को हिंदी भाषा की एक प्रमुख रचना के रूप में कई बार पढ़ा, सुना और रंगमंच पर रामलीला के दिनों में किसी न किसी पात्र की भूमिका भी मैंने अदा की है। मुझे यह रचना कई कारणों से पसंद है। मैं मूलत: उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल का निवासी हूँ। मेरी माता अवधी बोलती हैं। मुझे ‘रामचरितमानस’ में वर्णित किए गए अनेक पात्र और चरित्र अच्छे लगते हैं। एक पिता और राजा के रूप में दशरथ अच्छे लगते हैं। श्रवण कुमार एक अभिभावक भक्तिभाव रखने वाला पात्र है। वह अपने दृष्टिहीन अभिभावकों को सभी तीर्थ-स्थानों पर यात्रा कराने ले जाता है। यह दुर्भाग्य है कि दशरथ जैसे दयालु राजा के द्वारा गलती से शिकार की अवस्था में उसकी मृत्यु हो जाती है। राम वनवास के समय जब दशरथ-श्रवण के नेत्रहीन अभिभावकों के श्राप के बारे में बताते हैं तो वह विवरण सहज ही हृदय को छू जाता है।

पुस्तक के केंद्रीय पात्र राम दया, प्रेम, त्याग और वात्सल्य की प्रतिमा हैं। वे पिता के कहने पर सहर्ष राजगद्दी त्यागकर चौदह वर्षों के लिए वन को चले जाते हैं। वे भीलनी के जूठे बेर खाते हैं। हमें समानतापूर्वक समाज की रचना और छुआछूत तथा ऊँच-नीच की भावना को त्यागने और हिंदू समाज की एकता का संदेश देते हैं। वह अपनी तीनों माताओं और तीनों भाइयों के साथ-साथ हनुमान और सुग्रीव के परम मित्र, आराध्यदेव और सखा हैं।

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प्रश्न 12.
उत्तरी-पश्चिमी, दक्षिणी, पूर्वी और मध्य भारत से एक-एक राज्य चुनें। इनमें से प्रत्येक के बारे में उन भोजनों की सूची बनाएँ जो आमतौर पर सभी के द्वारा खाए जाते हैं, आप उनमें कोई अंतर या समानताएँ पाएँ तो उन पर प्रकाश डालें।
उत्तर:

  • उत्तर भारत से एक राज्य – पंजाब
  • पश्चिम से एक राज्य – राजस्थान
  • दक्षिण से एक राज्य – तमिलनाडु
  • पूर्व से एक राज्य – बिहार
  • मध्य से एक राज्य – मध्य प्रदेश

भोजनों की सूची : हम सभी लोग गेहूँ या चावल, विभिन्न प्रकार के फल और सब्जियाँ, दालें, दूध, घी, मक्खन, दही और पनीर आदि खाते हैं। हम सभी को चपातियाँ या चावल और दाल, अचार, पापड़, सलाद अच्छा लगता है। जैसे-हमारे खाने की कुछ अलग-अलग आदतें हैं।
→ पंजाब के लोगों को गर्मियों में दही की लस्सी ज्यादा अच्छी लगती है तो सदियों में उन्हें सरसों का साग और मक्के की रोटी अच्छी लगती है।

→ राजस्थान के लोगों को गर्मी में ठंडाई, शर्यत, छाज या लस्सी ज्यादा अच्छी लगती है तो सर्दी में बाजरे की रोटी भी खा लेते हैं।

→ तमिलनाडु के लोगों को हर रोज सुबह इडली, प्लेन डोसा या मसाला डोसा या उत्पम का नाश्ता चाहिए। वे चाय की बजाय कॉफी पीना ज्यादा पसंद करते हैं।

→ बिहार के लोग गर्मी में सत्तू पीना या अन्य ठंडा पेय पदार्थ लेना पसंद करते हैं तो हर रोज उन्हें चावल और दाल या चावल और सब्जी अथवा चावल और मछली अच्छे लगते हैं।

→ मध्य प्रदेश के लोगों को हर रोज प्रात:काल सब्जी-रोटी या चावल-दाल या विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ, दूध, घी, मक्खन और माँसाहारी होने पर बकरे का गोश्त, मछली, अंडे और मुर्ग ज्यादा अच्छे लगते हैं। वह कभी-कभी फल और सब्जियाँ, हलवा-पूरी, खीर आदि भी खाना पसंद करते है।

प्रश्न 13.
इनमें से प्रत्येक क्षेत्र से पाँच-पाँच राज्यों की एक-एक अन्य सूची बनाएँ और यह बताएं कि प्रत्येक राज्य में महिलाओं तथा पुरुषों द्वारा आमतौर पर कौन-से वस्त्र पहने जाते हैं, अपने निष्कर्षों पर चर्चा करें।
उत्तर:
पाँच राज्यों के पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों की सूची:

  • पैंट
  • जीन्स
  • धोती
  • कुर्ता
  • कमीज
  • निकर
  • खुशर्ट
  • कोट
  • जैकेट
  • शाल
  • स्वेटर
  • मफलर
  • पगड़ी
  • टोपी
  • तहमद या लुंगी।

पांच राज्यों की महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों की सूची:

  • साड़ी
  • पेटीकोट
  • ब्लाउज
  • अंगिया
  • सलवार
  • कमीज
  • चोली
  • दुपट्टा
  • शाल
  • स्वेटर
  • जीन्स
  • पैंट
  • घाघरा
  • लहंगा।

बहुविकल्पी प्रश्न

प्रश्न 1.
सही विकल्प चुनें:
(i) मणि प्रवालम शैली में लिखा गया एक ग्रंथ है :
(क) राजतरंगिनी
(ख) लीला तिलकम्
(ग) काव्य मंजरी
उत्तर:
(ख) लीला तिलकम्।।

(ii) तमिलनाडु का प्रमुख शास्त्रीय संगीत है:
(क) कथाकलि
(ख) कुचिपुड़ि
(ग) भरतनाट्यम
उत्तर:
(ग) भरतनाट्यम।

(ii) किस शासक के संरक्षण में कत्थक एक प्रमुख कला रूप में उभरा?
(क) शाहजहाँ
(ख) वाजिदअली शाह
(ग) अकबर
उत्तर:
(ख) वाजिदअली शाह।

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(iv) भानुदत्त की रसमंजरी किस शैली में रचित पुस्तक है।
(क) कांगड़ा शैली
(ख) राजस्थानी शैली
(ग) बसोहली शैली
उत्तर:
(ग) बसोहली शैली।

(v) ग्रंथ लीला तिलकम का विषय है :
(क) व्याकरण व काव्य शास्त्र
(ख) साहित्य
(ग) कथा-कहानी
उत्तर:
(क) व्याकरण व काव्य शास्त्र।

प्रश्न 2.
रिक्त स्थान भरो:
(i) आधुनिक राजस्थान का इलाका ब्रिटिश काल में …………………. कहलाता था।
(ii) पृथ्वीराज चौहान एक …………………. शासक थे।
(iii) 15वीं और 16वीं शताब्दियों में भक्ति आंदोलन के प्रसार के साथ ………………. एक विशिष्ट नृत्य शैली के रूप में विकसित हुआ।
(iv) 1739 ई. में …………………. ने भारत पर आक्रमण किया।
(v) …………………. परंपराएँ कांगड़ा शैली को प्रमुख प्रेरणा स्रोत थीं।
उत्तर:
(i) राजपूताना.
(ii) राजपूत
(ii) कत्थक
(iv) नादिरशाह
(v) वैष्णवा

प्रश्न 3.
सही गलत छाँटो:
(i) कथक शैली उत्तर भारत के अनेक भागों से जुड़ी है।
(ii) राजदरबारों में सावधानीपूर्वक रखे जाने के कारण लघुचित्र सदियों तक सुरक्षित रहें।
(iii) धर्म ठाकुर एक क्षेत्रीय लोकप्रिय देव हैं।
(iv) कांगड़ा शैली की प्रमुख विशेषता गहन लाल रंगों का प्रयोग है।
(v) चेर राज्य में मलयालम भाषा बोली जाती थी।
उत्तर:
(i) √
(ii) √
(iii) √
(iv) X
(v) √

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अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लोगों के विषय में वर्णन करने का सामान्य तरीका क्या है?
उत्तर:
लोगों के विषय में वर्णन करने का एक सबसे सामान्य तरीका उनकी बोल-चाल की भाषा से उन्हें परिभाषित करना है। जब हम किसी व्यक्ति को तमिल या उड़िया कहते हैं तो आमतौर पर इसका अर्थ होता है कि वह तमिल अथवा उड़िया भाषा बोलता है और तमिलनाडु या उड़ीसा में रहता है।

प्रश्न 2.
क्षेत्रीय संस्कृति का अर्थ सरल शब्दों में समझाइए।
उत्तर:
सामान्यत: हम लोग प्रत्येक क्षेत्र को कुछ खास किस्म के भोजन, वस्त्र, काव्य, नृत्य, संगीत और चित्रकला से जोड़ा करते हैं। कभी-कभी हम इन अस्मिताओं को मान कर चलते हैं और सोचते हैं कि ये युग-युगांतरों से अस्तित्व में हैं। किंतु, भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के बीच विभाजक सीमाओं के बनने में समय की भूमिका रही है जिन्हें हम आज क्षेत्रीय संस्कृतियाँ समझते हैं।

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प्रश्न 3.
क्षेत्रीय संस्कृति की कुछ विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
क्षेत्रीय संस्कृति की विशेषताएँ:
(i) क्षेत्रीय संस्कृति समय के साथ-साथ बदली है।

(ii) ये क्षेत्रीय संस्कृतियाँ जटिल प्रक्रिया से विकसित हुई हैं। इस प्रक्रिया के तहत स्थानीय परंपराओं और उपमहाद्वीप के अन्य भागों के विचारों के आदान-प्रदान। ने एक-दूसरे को संपन्न बनाया है।

(iii) कुछ परंपराएँ तो कुछ विशेष क्षेत्रों की अपनी हैं जबकि कुछ अन्य भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में एकसमान प्रतीत होती हैं, और कुछ अन्य परम्पराएँ तो एक खास इलाके के पुराने रीति-रिवाजों से निकली हैं पर अन्य क्षेत्रों में जाकर उन्होंने एक नया रूप ले लिया है।

प्रश्न 4,
पिछले कुछ वर्षों में गठित नए तीन राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) उत्तराखंड
(ii) झारखंड
(iii) छत्तीसगढ़।

प्रश्न 5.
चेर राज्य का बहुत संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर:
महोदयपुरम का चेर राज्य प्रायद्वीप के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में जो आज के केरल राज्य का एक हिस्सा था, नौवीं शताब्दी में स्थापित किया गया।

प्रश्न 6.
कत्थक की ओर ब्रिटिश दृष्टिकोण कैसा था? समझाइए।
उत्तर:
अनेक अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों की तरह कत्थक को भी, उन्नीसवीं तथा बीसवीं शताब्दियों में अधिकांश ब्रिटिश प्रशासकों ने नापसंद किया। फिर भी यह ‘जीवित’ बचा रहा और गणिकाओं द्वारा पेश किया जाता रहा। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद तो देश में इसे छह ‘शास्त्रीय नृत्य रूपों में मान्यता मिल गई।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भलयालम भाषा का चेर संस्कृति पर प्रभाव लिखिए।
उत्तर:
आधुनिक केरल में संभवतः मलयालम भाषा बोली जाती थी। चेर शासकों ने मलयालम भाषा एवं लिपि का प्रयोग अपने अभिलेखों में किया। वस्तुत: उपमहाद्वीप के सरकारी अभिलेखों में किसी क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग के सबसे पहले उदाहरणों में से एक है। इसके साथ-साथ चेर लोगों ने संस्कृत की परंपराओं से भी बहुत कुछ ग्रहण किया। केरल का मंदिर-रगंमच, जिसकी परंपरा, इस युग। तक खोजी जा सकती है, संस्कृत के महाकाव्यों पर आधारित था। मलयालम भाषा की पहली साहित्यिक कृतियों, जो लगभग बारहवीं शताब्दी की बताई जाती हैं प्रत्यक्ष रूप से संस्कृत की ऋणी हैं। यह भी एक काफी रोचक तथ्य है कि चौदहवीं शताब्दी का एक ग्रंथ लीला तिलकम, जो व्याकरण तथा काव्यशास्त्र विषयक है, ‘मणिप्रवालम’ शैली में लिखा गया था। ‘मणिप्रवालम’ का शाब्दिक अर्थ है हीरा और मूंगा, जो यहाँ दो भाषाओं-संस्कृत तथा क्षेत्रीय भाषा-के साथ-साथ प्रयोग की ओर संकेत करता है।

प्रश्न 2.
जगन्नाथी सम्प्रदाय की संस्कृति कैसे धार्मिक परम्पराओं और गंग शासकों के सहयोग से विकसित हुई?
उत्तर:
उड़ीसा जैसे कुछ भारतीय क्षेत्रों में क्षेत्रीय संस्कृतियाँ क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं से विकसित हुई। इस प्रक्रिया का सर्वोत्तम उदाहरण है पुरी, उड़ीसा में जगन्नाथ का संप्रदाय। जगन्नाथ का शाब्दिक अर्थ है दुनिया का मालिक जो विष्णु का पर्यायवाची है। आज भी, जगन्नाथ की काष्ठ प्रतिमा स्थानीय जनजातीय लोगों द्वारा बनाई जाती है जिससे यह तात्पर्य निकलता है कि जगन्नाथ मूलतः एक स्थानीय देवता थे जिन्हें आगे चलकर विष्णु का रूप मान लिया गया।

बारहवीं शताब्दी में, गंग वंश के एक अत्यंत प्रतापी राजा अनंतवर्मन ने पुरी में पुरुषोत्तम जगन्नाथ के लिए एक मंदिर बनवाने का निश्चय किया। उसके बाद 1230 में राजा अनंगभीम तृतीय ने अपना राज्य पुरुषोत्तम जगन्नाथ को अर्पित कर दिया और स्वयं को जगन्नाथ का ‘प्रतिनियुक्ति’ घोषित किया।

प्रश्न 3.
बंगाली के प्रारंभिक साहित्य को किन दो श्रेणियों में बाँटा जाता है? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
बंगाली के प्रारंभिक साहित्य को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-एक श्रेणी संस्कृत की ऋणी है और दूसरी उससे स्वतंत्र है। पहली श्रेणी में संस्कृत महाकाव्यों के अनुवाद, ‘मंगलकाव्य’ (शाब्दिक अर्थों में शुभ यानी मांगलिक काव्य, जो स्थानीय देवी-देवताओं से संबंधित है), और भक्ति साहित्य जैसे – गौडीय वैष्णव आंदोलन के नेता श्री चैतन्य देव की जीवनियाँ आदि शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में नाथ-साहित्य शामिल है, जैसे : मैनामती-गोपीचंद्र के गीत और धर्म ठाकुर की पूजा से संबंधित कहानियाँ और परिकथाएँ, लोककथाएँ और गाथागीत।

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प्रश्न 4.
क्या राजपूताना को केवल राजपूतों की भूमि कहना पूर्णतया ठीक है? संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश लोग उस क्षेत्र को जहाँ आज का अधिकांश राजस्थान स्थित है. राजपूताना कहते थे। इससे यह समझा जा सकता है कि वह एक ऐसा प्रदेश था जहाँ केवल अथवा प्रमुख रूप से राजपूत ही रहा करते थे, लेकिन यह बात आंशिक रूप से ही सत्य है। ऐसे अनेक समूह थे (और आज भी है) जो उत्तरी तथा मध्यवर्ती भारत के अनेक क्षेत्रों में अपने आपको राजपूत कहते हैं और यह भी सच है कि राजस्थान में भी राजपूतों के अलावा अन्य लोग भी रहते हैं। तथापि अक्सर यह माना जाता है कि राजपूतों ने राजस्थान को एक विशिष्ट संस्कति पटान की।

दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मुगल साम्राज्य के पतन का चित्रकारों और चित्रकला पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
(i) मुगल साम्राज्य के पतन के साथ अनेक चित्रकार मुगल दरबार छोड़कर नए उभरने वाले क्षेत्रीय राज्यों के दरबारों में चले गए। परिणामस्वरूप मुगलों की कलात्मक रुचियों ने दक्षिण के क्षेत्रीय दरबारों और राजस्थान के राजपूती राजदरवारों को प्रभावित किया लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपनी विशिष्ट विशेषताओं को सुरक्षित रखा और उनका विकास भी किया।

(ii) कुछ चित्रकार हिमालय की तलहटी में जा बसे जहाँ लघुचित्रकला की एक साहसपूर्ण एवं भावप्रवण शैली का विकास हो गया जिसे बसोहली शैली कहा जाता है। यहाँ जो सबसे लोकप्रिय पुस्तक चित्रित की गई वह थी: भानुदत्त की रसमंजरी।

(iii) 1739 में नादिरशाह के आक्रमण और दिल्ली विजय के परिणामस्वरूप मुगल कलाकार मैदानी इलाकों की अनिश्चितताओं से बचने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों को पलायन कर गए। उन्हें वहाँ जाते ही आश्रयदाता तैयार मिले जिसके फलस्वरूप चित्रकारी की कांगड़ा शैली की स्थापना हुई। ठंडे नीले और हरे रंगों सहित कोमल रंगों का प्रयोग और विषयों का काव्यात्मक निरूपण इस कांगड़ा शैली की विशेषता थी।

प्रश्न 2.
बंगाल में मछली भोजन के मुख्य अंग के रूप में विषय पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
(i) बंगाल में परंपरागत भोजन संबंधी आदतें. आमतौर पर स्थानीय रूप से उपलब्ध खाद्य पदाथों पर निर्भर करती हैं। बंगाल एक नदीय मैदान है जहाँ मछली और धान की उपज बहुतायत से होती है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि इन दोनों वस्तुओं को गरीब बंगालियों की भोजन-सूची में भी प्रमुख स्थान प्राप्त है।

(ii) मछली पकड़ना वहाँ का प्रमुख धंधा रहा है और बंगाली साहित्य में मछली का स्थान-स्थान पर उल्लेख मिलता है। इससे ज्यादा और क्या होगा कि मंदिरों और बौद्ध विहारों की दीवारों पर जो मिट्टी की पट्टियाँ लगी हैं उनमें भी मछलियों को साफ करते हुए और टोकरियों में भरकर बाजार ले जाते हुए दर्शाया गया है।

(ii) ब्राह्मणों को सामिष भोजन करने की अनुमति नहीं थी लेकिन स्थानीय आहार में मछली की लोकप्रियता को देखते हुए ब्राह्मण धर्म के विशेषज्ञों ने बंगाली ब्राह्मणों के लिए इस निषेध में ढील दे दी। बृहद्धर्म पुराण, जो कि बंगाल में रचित तेरहवीं शताब्दी का संस्कृत ग्रंथ है, ने स्थानीय ब्राह्मणों को कुछ खास किस्मों की मछली खाने की अनुमति दे दी।

क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण Class 7 HBSE Notes in Hindi

1, मणिप्रवालम : इसका शाब्दिक अर्थ है हीरा और मूंगा जो यहाँ दो भाषाओं-संस्कृत तथा क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ प्रयोग की ओर संकेत करता है।

2. जगन्नाथ : इसका शाब्दिक अर्थ है दुनिया का मालिक जो विष्णु का पर्यायवाची है।

3. गंग वंश : उड़ीसा प्रदेश का एक राजवंश जो 12वीं एवं 13वीं शताब्दी में सत्ता में रहा।

4. चारण-भाट : राजपूत राजाओं की स्तुति गाने वाले लोग।

5. राजपूताना : 19वीं सदी में ब्रिटिश लोग, उस क्षेत्र को जहाँ आज का ज्यादातर राजस्थान (प्रान्त) स्थित है, राजपूताना कहते थे।

6. राजपूत : एक सामाजिक समूह या जाति जो राजपूताना के साथ-साथ उत्तरी तथा मध्यवर्ती भारत में रहते थे। चाहमान (चौहान), तोमर आदि राजपूत थे।

HBSE 7th Class Social Science Solutions History Chapter 9 क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण

7. सती प्रथा : विधवाओं द्वारा अपने मृतक पति की चिता पर जिंदा जल जाने की प्रथा।

8. कत्थक : नृत्य का एक रूप। यह शब्द ‘कथा’ शब्द से निकला है जिसका प्रयोग संस्कृत तथा अन्य भाषाओं में कहानी (कथा) के लिए किया जाता है।

9. रासलीला : राधा-कृष्ण की पौराणिक कहानियों को लोकनाट्य के रूप में प्रस्तुत करना।

10. घराना : नृत्य या संगीत की परम्परा।

11. शास्त्रीय : वह नृत्य या संगीतकला जो प्रायः पुराने नियमों, परम्पराओं आदि से बंधी हुई शैली के अनुरूप होती है।

12. लोकनृत्य : जनसाधारण में विशेष रूप से लोकप्रिय तथा सामान्य ढंग या शैली में नृत्य या गायन किया जाता है।

13. लघुचित्र : छोटे चित्र।

14. भित्ति चित्र : दीवारों पर बनाये जाने वाले चित्र।

15. बसोहली शैली : हिमाचल प्रदेश की तलहटी में सत्रहवीं शताब्दी के बाद विकसित लघु चित्रकला की एक साहसपूर्ण एवं भावप्रवण शैली को बसोहली शैली कहा जाता है।

16. नादिरशाह का दिल्ली पर आक्रमण : 1739 ई.।

17. अकबर ने बंगाल पर विजय प्राप्त की थी : 1586 में।

18. मंगलकाव्य : शाब्दिक अर्थ शुभ अर्थात् मांगलिक काव्य।

19. नाथ साहित्य : मैनामती, गोपीचंद के गीत तथा धर्म ठाकुर की पूजा सम्बन्धी कहानियाँ।

20. पीर : फारसी भाषा का एक शब्द है जिसका अर्थ है आध्यात्मिक मार्गदर्शक।

21. जीववाद : यह मानना कि पेड़-पौधों, जड़-वस्तुओं और प्राकृतिक घटनाओं में भी जीव-आत्मा है।

22. पटिया : पट्ट या बोर्ड।

23. दोचाला : दो छतों वाली।

24. चौचाला : चार छतों वाली।

25. सामिष भोजन : मांसाहारी भोजन।

26. फ्रेंच : फ्रांसीसियों की भाषा।

27. जर्मन : जर्मन वासियों की भाषा।

28. ग्रीक : यूनानियों की भाषा।

29. रोमानियन : रोमानिया के लोगों की भाषा।

30. हंगेरियन : हंगरी के लोगों की भाषा।

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